1
00:00:02,560 --> 00:00:08,560
तो सभी को जय श्री राम। आशा करता हूं आप कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:08,560 --> 00:00:13,920
और आज का बहुत ही विशेष

3
00:00:13,920 --> 00:00:18,240
टॉपिक है। बहुत विशेष विषय है। हमारे

4
00:00:18,240 --> 00:00:22,240
साथ यहां पर शास्त्रवाद जी, सनातन शंकर जी और संभता एक दो लोग

5
00:00:22,240 --> 00:00:26,800
और भी जुड़ने वाले हैं। फिलहाल आपको मैं

6
00:00:26,800 --> 00:00:30,800
मुख्य विषय बता दूं कि अभी कुछ दिन पहले हमारी चर्चा हुई

7
00:00:30,800 --> 00:00:35,280
थी। हमारी एक बहन है मातृशक्ति जो इस समय विदेश

8
00:00:35,280 --> 00:00:40,080
में रह रही हैं और वहां से उन्होंने

9
00:00:40,080 --> 00:00:44,320
अज्ञानता वश उनको चीजें नहीं पता है क्या होते हैं शंकराचार्य कौन

10
00:00:44,320 --> 00:00:48,800
होते हैं शंकराचार्य तो उन्होंने वो

11
00:00:48,800 --> 00:00:54,320
सनातन धर्म की रक्षार्थ चीजें करती हैं।

12
00:00:54,320 --> 00:00:58,720
जो विधर्मी होते हैं उनसे जो है सीधे-सीधे वह उनका प्रतिकार

13
00:00:58,720 --> 00:01:02,800
करती हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] यह दिख नहीं

14
00:01:02,800 --> 00:01:05,520
रहे।

15
00:01:05,520 --> 00:01:10,880
हम शास्त्रवाद जी आपका स्वागत है। तो

16
00:01:10,880 --> 00:01:16,800
मैं मुख्य विषय बता रहा था। जी शास्त्रवाद जी

17
00:01:16,800 --> 00:01:21,360
जय श्री राम। जय श्री राम।

18
00:01:21,360 --> 00:01:24,880
अब हां

19
00:01:24,880 --> 00:01:29,840
सनातन

20
00:01:29,840 --> 00:01:35,040
जय श्री राम सनातन जी जी जय श्री राम

21
00:01:35,040 --> 00:01:41,040
आप शायद कार में सुन रहे हैं मुझे इसलिए शोर आ रहा है जी जी जी

22
00:01:41,760 --> 00:01:46,000
ठीक है तो म्यूट कर लेते जब आपको बोलना होगा तभी खोलिएगा

23
00:01:46,000 --> 00:01:50,040
शोर आ रहा है जी [खांसने की आवाज़] जी जी

24
00:01:50,040 --> 00:01:54,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो अब मैं मुख्य विषय बता दूं आप लोगों को

25
00:01:54,080 --> 00:01:58,160
कि अभी कुछ दिन पहले हमारी जो चर्चा हुई थी जो विदेश में रहने वाली हमारी एक

26
00:01:58,160 --> 00:02:02,240
बहन है मातृशक्ति हैं सोनाली

27
00:02:02,240 --> 00:02:06,400
करके उनका नाम है अवेकनिंग नाम से उनकी आईडी है और

28
00:02:06,400 --> 00:02:10,720
यहां पर विदेश गमन निषेध है कि नहीं प्रामाणिक परंपराओं के अनुसार इस संबंध

29
00:02:10,720 --> 00:02:15,520
में हमारी चर्चा होनी थी परंतु क्योंकि वह इतना

30
00:02:15,520 --> 00:02:19,600
स्वयं को प्रस्तुत कर चुकी थी प्रामाणिक परंपराओं के

31
00:02:19,600 --> 00:02:23,680
विरोध में तो यह जानना आवश्यक हो जाता है कि फिर आपके शास्त्रों

32
00:02:23,680 --> 00:02:27,920
का जो ओरिजिनेशन पॉइंट है वह क्या मान रहे हैं आप। ऐसे

33
00:02:27,920 --> 00:02:31,920
ही हवाबाजी में कोई बातें नहीं

34
00:02:31,920 --> 00:02:35,920
हो पाती हैं। अच्छा जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हमने उस चर्चा

35
00:02:35,920 --> 00:02:40,080
में अभी बता दिया था। रामानुजाचार्य परंपरा, शंकराचार्य परंपरा, मधवाचार्य परंपरा

36
00:02:40,080 --> 00:02:44,720
ये सभी परंपराएं विदेश गमन को निषेध मानती है। हां किसी

37
00:02:44,720 --> 00:02:48,720
समष्टि के हित से कर लिया तो उसमें प्रायश्चित है। उसको कभी भी

38
00:02:48,720 --> 00:02:53,440
स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल नहीं माना गया हमारे यहां पर विदेश भवन को।

39
00:02:53,440 --> 00:02:56,960
तो ये चर्चा हो गई। उसमें वो जवाब नहीं दे पाई। ठीक है भाई। दो

40
00:02:56,960 --> 00:03:01,200
सनातनियों ने आपस में एक दूसरे की चीजों को समझने का प्रयास किया और

41
00:03:01,200 --> 00:03:06,480
बातें हुई। अब कहानी यहां से टर्न ले लेती है कि

42
00:03:06,480 --> 00:03:10,480
ये विरोध करती हैं जो विधर्मियों का है ना प्रखर होकर के

43
00:03:10,480 --> 00:03:14,640
विरोध करती हैं। हालांकि इनकी जो शैली है उस शैली से मैं कभी

44
00:03:14,640 --> 00:03:17,680
भी अ

45
00:03:17,680 --> 00:03:21,680
क्या कहते हैं सहमत नहीं हूं। इनकी जो शैली है उसमें वह

46
00:03:21,680 --> 00:03:25,760
डुअल वर्ड्स में और दोहरे अर्थों वाले ऐसे ऐसे शब्द

47
00:03:25,760 --> 00:03:29,840
बोलना ऐसी पंक्तियां बोलना जिसके कि अश्लील अर्थ भी निकलते हैं।

48
00:03:29,840 --> 00:03:34,000
तो यह वहां भी करती उन लोगों के साथ और जब हमसे इनका हुआ

49
00:03:34,000 --> 00:03:38,160
विवाद चालू तो इन्होंने हमारे साथ भी किया और हमारे

50
00:03:38,160 --> 00:03:42,720
साथ तो खैर चलती उसमें ही कर दिया। वो मक्कार इत्यादि सब बोलने लगी।

51
00:03:42,720 --> 00:03:46,800
तो यह प्रखर होकर के इसी तरीके की ड्यूल लैंग्वेज में वहां

52
00:03:46,800 --> 00:03:50,960
भी करती हैं और वहां के लोग भी करते हैं। दोनों तरफ

53
00:03:50,960 --> 00:03:55,040
से होता है। तो अब क्या हुआ जब हमारी

54
00:03:55,040 --> 00:03:59,040
ये जो चर्चा है यह पहुंची उन लोगों के पास। अब यह कौन सी टीम

55
00:03:59,040 --> 00:04:03,600
है? यह वही टीम है जिससे काफी समय पहले सर्वशक्तिमान

56
00:04:03,600 --> 00:04:07,760
विषय और परंपरा के विषय में जिस टीम से हमारी एक बातचीत हो चुकी है। हालांकि

57
00:04:07,760 --> 00:04:12,400
बहुत निष्कर्षपूर्ण भी नहीं कहा जाएगा उसमें क्योंकि

58
00:04:12,400 --> 00:04:16,640
निष्पक्षीय वार्तालाप था ही नहीं वो निष्पक्ष नहीं था वो प्लेटफार्म निष्पक्ष नहीं

59
00:04:16,640 --> 00:04:20,720
था मगर उसमें हमारे मतलब की काफी चीजें हमें प्राप्त हो

60
00:04:20,720 --> 00:04:25,760
जाती हैं। ठीक है फिर भी हम

61
00:04:25,760 --> 00:04:29,920
अब क्या है कि उस वो जो टीम है उनको ये

62
00:04:29,920 --> 00:04:34,000
हमारी और इनकी वार्ता मिल गई। अब जब

63
00:04:34,000 --> 00:04:38,400
मिल गई तो उन्होंने देखा भाई यह जो है हमें बहुत उल्टा सीधा बोलती है

64
00:04:38,400 --> 00:04:42,640
और बहुत गलतसलत कहती है। अब हम इसकी जो है खिंचाई करते हैं। तो एल

65
00:04:42,640 --> 00:04:46,880
एलईना एलईना नाम है शायद उनका एलाइना नाम की एक

66
00:04:46,880 --> 00:04:50,880
जो है उन्होंने मोमिना है वो मोमिना

67
00:04:50,880 --> 00:04:55,200
ही कहते हैं ना जो मुस्लिम मातृ शक्तियां होती है उनको

68
00:04:55,200 --> 00:04:59,760
जी जी हां नाम हां एलईना

69
00:04:59,760 --> 00:05:03,840
नाम एलईना बड़ा एलईना है कि एलना है ठीक

70
00:05:03,840 --> 00:05:07,840
है तो जो ये ये मोमिना है इन्होंने अपने

71
00:05:07,840 --> 00:05:11,840
चैनल पर जो है उसको लिया हमारे वीडियो को

72
00:05:11,840 --> 00:05:16,080
और तरह-तरह की अश्लील दोहरा दोहरे अर्थों वाली फतियां कसते

73
00:05:16,080 --> 00:05:20,320
हुए और बीच-बीच में काफी हिंदू विरोधी चीजें बोलना

74
00:05:20,320 --> 00:05:24,640
खैर ठीक है वो मुस्लिम है तो हिंदू विरोधी चीजें बोलेंगी और

75
00:05:24,640 --> 00:05:27,440
अपमानजनक बातें उनके लिए व्यक्तिगत रूप

76
00:05:27,440 --> 00:05:31,760
से उनके लिए सोनाली है जो और बीच में फिर हमारे सनातन

77
00:05:31,760 --> 00:05:35,760
धर्म के लिए हमारी जो कुछ मौलिक चीजें हैं

78
00:05:35,760 --> 00:05:39,760
उनके लिए भी और मैंने देखा कि उस लाइव में उन्होंने एक गाना भी लगाया

79
00:05:39,760 --> 00:05:44,000
था बड़ा भद्दा गाना आना था। अब क्या है कि

80
00:05:44,000 --> 00:05:48,080
उस लाइव में ही उन्होंने इतना पर्याप्त मटेरियल हमको दे दिया है

81
00:05:48,080 --> 00:05:53,760
कि हमें और कहीं जाने की जरूरत ही नहीं है उनको उनका आईना दिखाने के लिए।

82
00:05:53,760 --> 00:05:58,080
है ना? तो अब लाइव में पर्याप्त मैटर क्या दिया है कि उन्होंने

83
00:05:58,080 --> 00:06:02,240
प्रस्तुत किया है कि वो कितने बड़े जो है क्या

84
00:06:02,240 --> 00:06:06,320
कहते हैं? दोगलेपन का व्यवहार करने वाले लोग हैं। दोगलेपन का तो वो

85
00:06:06,320 --> 00:06:10,560
मैं दिखाऊंगा अभी। यहीं पर आपको सिद्ध होगा और कई ऐसे

86
00:06:10,560 --> 00:06:14,640
आरोप हैं जो उन्होंने सोनाली जी पर लगाए हैं। वही आरोप सीधे

87
00:06:14,640 --> 00:06:18,720
तौर पर वही आरोप सीधे तौर पर

88
00:06:18,720 --> 00:06:22,880
मुफ्ती पर भी लगते हैं। वही आरोप सीधे तौर पर वो जो आवाजें हक करके

89
00:06:22,880 --> 00:06:26,880
है कोई जो अपना चेहरा नीचे दिखाता है उस पर लगते हैं।

90
00:06:26,880 --> 00:06:31,040
और वहां पर निर्णायक यह होती हैं क्योंकि इन्होंने यहां पर समीक्षा की है ना

91
00:06:31,040 --> 00:06:35,440
हमारी चर्चा की और उसमें कई बातों को लेकर के सोनाक्षी सोनाली जी को क्रिटिसाइज

92
00:06:35,440 --> 00:06:39,440
किया है। तो जो कुछ आरोप इन्होंने सोनाली जी पर लगाए हैं

93
00:06:39,440 --> 00:06:42,640
वही आरोप इनके उसी सिद्धांत के अनुसार मुफ्ती पर लगते

94
00:06:42,640 --> 00:06:46,640
हैं। तो एक हिसाब से उस वीडियो में

95
00:06:46,640 --> 00:06:50,720
सोनाली का विरोध करने के चक्कर में ये मुफ्ती और आमिर हक के विरोध में चली गई

96
00:06:50,720 --> 00:06:55,120
हैं। है ना? तो पहले इनको ना दूसरों की समीक्षा

97
00:06:55,120 --> 00:06:59,280
करने से पहले अपनी समीक्षा कर लेनी चाहिए थी। जैसा कि इन्होंने उस वीडियो में कहा भी

98
00:06:59,280 --> 00:07:03,440
है कि भाई तुम्हारा तो अपना ही धर्म सिद्ध नहीं हो रहा है और तुम यहां आती

99
00:07:03,440 --> 00:07:07,920
हो और मुसलमानों के बारे में बात करती हो। तो इन्होंने यह बात भी इनसे कही है। तो समीक्षा

100
00:07:07,920 --> 00:07:11,920
करते समय जब इन्होंने यह बात इनसे कही है तो भाई आप जिन बातों

101
00:07:11,920 --> 00:07:16,000
को लेकर के यहां सोनाली को गलत ठहरा रही हो उन्हीं बातों को लेकर के तुम्हारे

102
00:07:16,000 --> 00:07:20,000
मुफ्ती और आवाज हक का आवाज अकबर के मुंह पर ताला लगा हुआ है।

103
00:07:20,000 --> 00:07:24,880
मैं दिखाऊंगा कैसे? तो

104
00:07:24,880 --> 00:07:29,200
फिर यह बात आप पर भी लागू हो जाती है कि तुम कैसे समीक्षा कर रही हो सोनाली

105
00:07:29,200 --> 00:07:33,520
जी की? तुम कैसे समीक्षा कर रही हो सनातन धर्म की? तुम्हारे अपने जो मुफ्ती और आवाज

106
00:07:33,520 --> 00:07:37,840
हक है वो वो तो यह किए बैठे हैं। उन्हीं सिद्धांतों का विरोध

107
00:07:37,840 --> 00:07:42,000
उन्हीं नियमों का विरोध जिन नियमों के आधार पर इस इस

108
00:07:42,000 --> 00:07:46,320
चर्चा में तुमने सोनाली जी को गलत ठहराया है। खैर

109
00:07:46,320 --> 00:07:50,560
तो यह थोड़ा सा आपके लिए काफी रोचक यात्रा होने वाली है। कुर्सी

110
00:07:50,560 --> 00:07:55,680
की पेटियां आप लोग बांध लें। अच्छा सबसे पहले कुछ उसमें जो शास्त्रोक्त

111
00:07:55,680 --> 00:07:58,000
आक्षेप लगाए गए हैं कि सनातन

112
00:07:58,000 --> 00:08:02,400
धर्म की मौलिक प्रामाणिक मान्यता क्या है? उस संबंध में

113
00:08:02,400 --> 00:08:06,640
तो उस पूरी डिबेट में मतलब उन्होंने जो लाइव किया

114
00:08:06,640 --> 00:08:11,440
है उसमें जो अ

115
00:08:11,440 --> 00:08:15,440
आर्य समाज है उसको ये रखा गया कि हां ये नॉन सर्टिफाइड है

116
00:08:15,440 --> 00:08:19,440
अप्रामाणिक जो कि हम भी क्लेम करते हैं आर्य समाज के लिए यह मान के चला

117
00:08:19,440 --> 00:08:23,520
गया है। ठीक है कि आर्य समाज अप्रामाणिक है और

118
00:08:23,520 --> 00:08:27,520
हमें वहां पर प्रामाणिक मानते हुए हमारे द्वारा सोनाली जी के खंडन के

119
00:08:27,520 --> 00:08:31,680
मजे लिए गए हैं। ठीक है? तो आर्य समाज को एक

120
00:08:31,680 --> 00:08:35,840
साइड में अप्रामाणिक चीज के तौर पर रखना यह भी उनके ऊपर ही

121
00:08:35,840 --> 00:08:40,080
टारगेट करता है कि वह किस प्रकार से अपने मुफ्ती अपने अपनी

122
00:08:40,080 --> 00:08:44,160
ही चीजों के विरोध में जा रही हैं। हमारी चीजों पर आप चटकारा लेने के

123
00:08:44,160 --> 00:08:48,240
लिए जो आप जो निर्णायक हो रही हैं, समीक्षा कर रही हैं, उसके कारण वो सारी

124
00:08:48,240 --> 00:08:52,400
चीजें आप पर ही लागू हो जाती हैं। और एक तरीके से आप अपने

125
00:08:52,400 --> 00:08:56,640
मुफ्ती और आवाज हक का निर्णय करने वाली सिद्ध होती हैं कि

126
00:08:56,640 --> 00:09:00,880
वो हमारे सामने मुंह बंद हो गया था। चर्चा में हार गए थे।

127
00:09:00,880 --> 00:09:04,960
मतलब हमने वह निर्णय आधिकारिक रूप से अगर हम कहें कि हमने मुफ्ती

128
00:09:04,960 --> 00:09:08,960
को हरा दिया तो कौन मानेगा? मगर जिस हिसाब से आप सोनाली जी का मुंह बंद

129
00:09:08,960 --> 00:09:13,120
मान रही हैं और सोनाली जी को गलत मान रही हैं कि अमुक अमुक जगह

130
00:09:13,120 --> 00:09:17,520
बेकार या फिर इनका इनकी चीजें अनुचित सिद्ध हुई तो उन्हीं

131
00:09:17,520 --> 00:09:21,520
आधारों पर आपके जो मुफ्ती इत्यादि हैं वह सब आपने ही

132
00:09:21,520 --> 00:09:25,760
उन्हें हारा हुआ सिद्ध कर दिया। तो इसलिए इसका टाइटल भी है कि आपने ही बे उनको

133
00:09:25,760 --> 00:09:30,080
कर दिया बेनकाब अपने मुफ्ती और आवाज हक को। वह कैसे किया उसके कुछ ग्लिं्स

134
00:09:30,080 --> 00:09:34,400
मैं आपको दिखाऊंगा। तो सबसे पहले शास्त्रोक्त निर्णय

135
00:09:34,400 --> 00:09:38,560
कुछ बता दूं मैं। विदेश यात्रा को लेकर के इनके उस लाइव में एक

136
00:09:38,560 --> 00:09:42,880
बात चली है कि जो विदेश यात्री हो जाएगा वो सनातनी

137
00:09:42,880 --> 00:09:47,120
नहीं रहा। अधर्मी हो गया। ऐसा नहीं है। सनातनी वो रहेगा

138
00:09:47,120 --> 00:09:51,440
मगर पतित रहेगा। कई ऐसे कार्य होंगे ऑफिशियल कार्य हिंदू

139
00:09:51,440 --> 00:09:55,440
धर्म से जुड़े हुए अनुष्ठान से मुख्य रूप से जुड़े हुए जिनमें उसका

140
00:09:55,440 --> 00:09:59,600
अधिकार नहीं रहेगा जिनको करने में और उसमें भी बहुत सारी चीजें

141
00:09:59,600 --> 00:10:03,600
हैं कि अगर आपका व्यष्टि का नहीं था समष्टि के हित से यात्रा थी तो प्रायश्चित

142
00:10:03,600 --> 00:10:07,680
कर सकते हैं। उसके बावजूद भी आप समष्टि के अधिकार को प्राप्त नहीं

143
00:10:07,680 --> 00:10:11,760
कर पाएंगे। अपने स्वांततः अपने मोक्ष अपने कल्याण के लिए आप उस पर

144
00:10:11,760 --> 00:10:15,840
आगे पथ पर बढ़ पाएंगे। ऐसा नहीं है कि तुम विदेश चले गए तो हिंदू ही नहीं

145
00:10:15,840 --> 00:10:20,000
रहे। तो सबसे पहली भ्रांति आप अपनी यह दूर कर लो। अब इसमें जो टेक्स्ट

146
00:10:20,000 --> 00:10:24,560
है ना शास्त्रोक्त वाला तो जो आपके वीडियो में जो शास्त्रीय

147
00:10:24,560 --> 00:10:28,560
आक्षेप लगाए गए हैं सनातन धर्म पर तो वो

148
00:10:28,560 --> 00:10:33,280
जो स्ट्रक्चरल क्या कहते हैं? शास्त्रोक्त जो

149
00:10:33,280 --> 00:10:37,840
क्या कहते प्रमाण उसके लिए मैं अलग से एक वीडियो बनाऊंगा।

150
00:10:37,840 --> 00:10:42,160
ठीक है? उसके लिए अलग से वीडियो बनेगा। अभी फिलहाल

151
00:10:42,160 --> 00:10:46,160
अभी फिलहाल मैं निर्णय बता रहा हूं आपको कि विदेश यात्रा

152
00:10:46,160 --> 00:10:50,160
कर लेने वाला कोई हमारा भाई अधर्मी नहीं हो गया।

153
00:10:50,160 --> 00:10:54,320
यह कान खोल के सुन लो मुसलमानों और मुख्य रूप से वह मोमिना

154
00:10:54,320 --> 00:10:58,640
सुन ले और उसके वह साथी सुन लें जो वहां पर बैठे हुए

155
00:10:58,640 --> 00:11:03,200
ये हंसी ठाका ये सब कर रहे हैं। अच्छा मैंने एक चीज देखी

156
00:11:03,200 --> 00:11:07,200
कि जो सोनाली जी हैं वह करती हैं अभद्र मजाक मगर वही बात है

157
00:11:07,200 --> 00:11:11,440
मैं उनसे कहता भी उनके उसमें भी कहा था कि भाई आप ठीक कार्य आपकी भावना

158
00:11:11,440 --> 00:11:15,600
अच्छी है पर आपका जो रास्ता है वो ठीक नहीं है उसमें आप चेंजेस लाइए

159
00:11:15,600 --> 00:11:19,680
आप ये ऐसे मत करिए कि ये जो डुअल वर्ड्स होते हैं ना तो

160
00:11:19,680 --> 00:11:23,840
वो मेरी बात को उन्होंने नजरअंदाज किया बल्कि वही डुअल वर्ड्स वही डुअल

161
00:11:23,840 --> 00:11:27,920
दोहरे दोरार्थक वाली जो पंक्तियां मुझ पर ही लागू कर दी मैंने उनसे

162
00:11:27,920 --> 00:11:31,920
पहले कहा था जब यहां मतलब उनके साथ लाइव चर्चा होने से पहले ये सब कहा था

163
00:11:31,920 --> 00:11:35,920
कि आप इस तरह से बात मत किया करिए। कीचड़ में पत्थर डालोगे तो कीचड़ के छींटे तो

164
00:11:35,920 --> 00:11:40,480
आएंगे ही। तुम दो करोगे वो चार करेंगे। इतनी अश्लीलता

165
00:11:40,480 --> 00:11:43,680
उनके वीडियो में यह जो मोमिना ने

166
00:11:43,680 --> 00:11:47,680
बनाया वीडियो इतनी अश्लीलता है कि किसी भी

167
00:11:47,680 --> 00:11:51,840
सभ्य व्यक्ति के जो है सुनकर जो है मतलब वो सुन

168
00:11:51,840 --> 00:11:56,000
नहीं पाएगा। असहनीय पीड़ा होगी। इतनी अश्लीलता है उसमें। [गला साफ़ करने की आवाज़] कहीं

169
00:11:56,000 --> 00:12:00,240
कहीं पर किसी से किसी को जोड़ दिया। हमको किसी से जोड़ दिया। उनको

170
00:12:00,240 --> 00:12:04,480
हमसे जोड़ दिया। मतलब ऐसे ऐसे फक्तियां कसी जा रही है। कोई मर्यादा है ही नहीं।

171
00:12:04,480 --> 00:12:08,880
अब कहने को भाई उनके हिसाब से तो उनका बहुत पवित्र

172
00:12:08,880 --> 00:12:13,040
दीन है। तो ये जो चीजें निकल के आ रही है कहां सिखाई जा रही हैं?

173
00:12:13,040 --> 00:12:17,120
क्या ये माना जाए दीन अच्छा वो दीन को रिप्रेजेंटेटिव दीन के रक्षक

174
00:12:17,120 --> 00:12:21,200
हैं। तो क्या ये चीजें वहां दीन से सिखाई जा रही है? है ना? अच्छा

175
00:12:21,200 --> 00:12:25,600
हमारे यहां जो कर रहा है उसको तो हम कह रहे हैं कि तुम गलत कर रहे हो। ये देख लो।

176
00:12:25,600 --> 00:12:29,680
तो आप अगर यह लोगे कि तुम्हारे यहां भी तो हो रहा है तो इन्होंने कई बार अपनी लाइव में

177
00:12:29,680 --> 00:12:33,680
यह भी कहा है कि उसके गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है।

178
00:12:33,680 --> 00:12:37,760
इस इस बात का समर्थन किया है। तो अगर ये ये कहते कि तुम्हारी सोनाली

179
00:12:37,760 --> 00:12:41,920
कहां से सीख रही है तो पहली बात तो हम उसको कह भी रहे हैं। दूसरी बात अगर वो गलत है तो तुमने

180
00:12:41,920 --> 00:12:45,920
मान लिया कि तुम भी गलत हो। तुम्हारा ही सिद्धांत है। आपने ही अपनी लाइफ

181
00:12:45,920 --> 00:12:49,920
में बोला ये बात। चार पांच बार बोला है कि भाई तुम दूसरों का नाम क्यों ले रही

182
00:12:49,920 --> 00:12:54,080
हो? वो गलत है तो तुम मान लो कि तुम गलत है। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] आप

183
00:12:54,080 --> 00:12:58,160
यह बताओ कि ये क्या दीन में सिखाया जा रहा है? इतनी अश्लीलता से किसी

184
00:12:58,160 --> 00:12:59,040
का सैद्धांतिक

185
00:12:59,040 --> 00:13:03,200
विरोध करो। इतनी अश्लीलता से अच्छा सामने वाला

186
00:13:03,200 --> 00:13:07,200
करेगा तो तुम्हें करने का हक मिल गया। मतलब सामने

187
00:13:07,200 --> 00:13:11,280
वाला जानवर बनेगा तो तुम भी जानवर बनोगे। भाई ऐसा होता है

188
00:13:11,280 --> 00:13:15,360
कि जैसे कोई गाली दे रहा है हमारे आत्मसम्मान

189
00:13:15,360 --> 00:13:19,760
को ठेस पहुंच रही है तो हम उसको गाली नहीं देते हैं। फिर हम उसका शारीरिक रूप से निग्रह

190
00:13:19,760 --> 00:13:23,760
करते हैं। वो कर सकते हैं। कोई व्यक्ति अपनी हदों को

191
00:13:23,760 --> 00:13:27,920
पार कर रहा है तो हम थोड़ी ना अपनी हदों को पार करने लगेंगे। मर्यादा को भंग करने लगेंगे। हम उसका

192
00:13:27,920 --> 00:13:32,240
नियंत्रण करेंगे। कैसे? उसका मुंह बंद करेंगे हाथ से। शारीरिक

193
00:13:32,240 --> 00:13:36,480
बल का प्रयोग करते हुए उसकी वो अश्लीलता को बंद करेंगे। यह नहीं कि खुद भी अश्लीलता

194
00:13:36,480 --> 00:13:40,480
को धारण कर ले। अब आपके यहां सिखाया गया तो फिर वह बात एक अलग

195
00:13:40,480 --> 00:13:44,720
है। फिर वह तो है ही है वैचारिक अंतर। ठीक है। चलिए बताइए

196
00:13:44,720 --> 00:13:49,890
कुछ कहना हो सनातन शंकर जी या शास्त्रवाद जी

197
00:13:49,890 --> 00:13:52,960
[गला साफ़ करने की आवाज़]

198
00:13:52,960 --> 00:13:57,040
कुछ कहना है इसमें? हां नहीं

199
00:13:57,040 --> 00:14:02,160
बिल्कुल। क्या है ना जब जैसा मतलब आप

200
00:14:02,160 --> 00:14:06,320
दूसरे से अपने लिए जो व्यवहार एक्सपेक्ट करते

201
00:14:06,320 --> 00:14:10,560
हो आपको भी वैसा ही करना चाहिए दूसरे के साथ क्योंकि कभी

202
00:14:10,560 --> 00:14:14,640
ना कभी ऐसा हो सकता है कि भाई जैसा आपने दूसरे के साथ किया वही आपके साथ होने

203
00:14:14,640 --> 00:14:18,720
लगेगा फिर आपको बुरा लगता है और यहां पर जब आप अपने

204
00:14:18,720 --> 00:14:22,800
ही उसमें बात कर रहे हो तो वहां पर आपको नीति चेंज करनी चाहिए

205
00:14:22,800 --> 00:14:26,880
थी इन्होंने क्या किया जैसा वो वहां पर उनके साथ व्यवहार कर रही थी वैसे ही आपके

206
00:14:26,880 --> 00:14:30,960
साथ किया है ना अब जैसे आपको जैसे ही

207
00:14:30,960 --> 00:14:35,520
ये पता चला कि भाई ऐसा कुछ हुआ है तो आपने अभी

208
00:14:35,520 --> 00:14:40,160
सोनाली जी के समर्थन में ये मतलब स्टीम की है ना तो

209
00:14:40,160 --> 00:14:44,480
जी वही है जो हमारा सिद्धांत वही है कि भ जब बाहर

210
00:14:44,480 --> 00:14:48,480
से कोई चीज है तो 105 हो जाओ है ना और जब बंदर की जब बात

211
00:14:48,480 --> 00:14:52,720
है तो फिर हम पांच और तुम 100 जी

212
00:14:52,720 --> 00:14:58,000
तो आपने बड़ा अच्छा इनिशिएटिव लिया है कि एटलीस्ट

213
00:14:58,000 --> 00:15:02,160
हमें ये इस विषय पर जरूर बोलना चाहिए। जब हमारे ही किसी

214
00:15:02,160 --> 00:15:06,320
सनातनी का या किसी का अपमान हो रहा है तो हमें बोलना चाहिए। बिल्कुल

215
00:15:06,320 --> 00:15:08,080
नहीं मैं मैं इस बात को मानता

216
00:15:08,080 --> 00:15:12,160
हूं कि वो भटकी हुई हैं। उनके पास अज्ञानता है,

217
00:15:12,160 --> 00:15:16,160
भटकाव है। मगर जो

218
00:15:16,160 --> 00:15:20,240
यहां पर जो लोग उनको इस विषय को लेकर के क्रिटिसाइज कर रहे हैं ना वो

219
00:15:20,240 --> 00:15:24,240
कहां पर स्टैंड करते हैं वो मैं अभी आपको बताने वाला हूं। और

220
00:15:24,240 --> 00:15:28,400
जो यह वाली बात है कि भाई वह हमें गाली देती तो हमने इतनी

221
00:15:28,400 --> 00:15:32,400
इन्होंने सनातन किसी को नहीं छोड़ा उसमें सनातन धर्म का अपमान किया अपने

222
00:15:32,400 --> 00:15:36,480
उस लाइव में करते ही होंगे सब में ही करते होंगे अच्छा अब इससे क्या

223
00:15:36,480 --> 00:15:40,560
है इनसे कनेक्टेड है वो मुफ्ती कौन मुफ्ती जो लल्लन टॉक की डिबेट

224
00:15:40,560 --> 00:15:44,560
में आए हैं वही यासिर नदीम नसीर अलवजदी

225
00:15:44,560 --> 00:15:48,800
क्या नाम है नदीम अलवजदी वो अब आप समझ लीजिए कि कनेक्शन

226
00:15:48,800 --> 00:15:52,960
कहां से कहां है कि ये कनेक्टेड है मुफ्ती से मुफ्ती आते

227
00:15:52,960 --> 00:15:57,280
हैं लल्लन टॉप में और वहां पर जो है इस्लाम को जो है प्रमोट

228
00:15:57,280 --> 00:16:01,440
किया जाता है। बहुत बढ़िया तरीके से हैं। एक

229
00:16:01,440 --> 00:16:05,440
बेकार टाइप के नास्तिक को बिठा दिया जाता है। उनके सामने मुफ्ती

230
00:16:05,440 --> 00:16:09,600
के सामने वहां खंडन हो जाता है नास्तिकता का। वाह वाह इस्लाम जीत गया।

231
00:16:09,600 --> 00:16:13,840
कोई इंटेलेक्चुअल नास्तिक बुला लोगे तो पता नहीं क्या दृश्य होगा फिर देखने

232
00:16:13,840 --> 00:16:18,000
में। वैसे मैंने देखा इनके यहां नास्तिक आया था। इनके पास जवाब नहीं था

233
00:16:18,000 --> 00:16:22,160
और मैं क्यू में था उस समय। वही उसी डिबेट की बात है। जब नास्तिक इनसे प्रश्न

234
00:16:22,160 --> 00:16:23,360
कर रहा था।

235
00:16:23,360 --> 00:16:28,000
तो वहां पर क्या हुआ नास्तिक इनसे बोला इन लोगों से आमेर

236
00:16:28,000 --> 00:16:32,080
आमेर था उसमें और क्या कहते हैं शायद एक और थे वो थोड़े

237
00:16:32,080 --> 00:16:36,400
सज्जन व्यक्ति हैं उनके बीच में वो

238
00:16:36,400 --> 00:16:40,720
ध्यान नहीं मुझे उनका नाम तो वो बोलता है कि भाई बताओ

239
00:16:40,720 --> 00:16:44,720
खुदा कैसे एक्सिस्ट करता है ऊपर वाला तो उन्होंने कहा कि भाई खुदा ऐसे एक्सिस्ट करता

240
00:16:44,720 --> 00:16:48,800
है कि आप जो है अपने रिश्तों की मर्यादा को तोड़ देंगे कि भाई बहन के

241
00:16:48,800 --> 00:16:52,800
रिश्तों की या तो वो नास्तिक सीधा ये कह देता है कि हां मैं को तोड़

242
00:16:52,800 --> 00:16:56,960
दूंगा। अब बताओ खत्म हो गया सिद्धांत। सिद्धांत

243
00:16:56,960 --> 00:17:01,120
खत्म हो गया ना? तो धर्म जो है ना मोरल्टी

244
00:17:01,120 --> 00:17:05,280
जिसके आधार पे ये जो मैंने अपने वीडियो में बताया मोरल्टी के आधार पर

245
00:17:05,280 --> 00:17:09,280
आप नास्तिकता का खंडन नहीं कर सकते। मोरल्टी एक निशानी है

246
00:17:09,280 --> 00:17:13,600
कि आप नास्तिक नहीं हो। मगर यदि सामने वाला

247
00:17:13,600 --> 00:17:17,680
मोरल्टी को छोड़ दे कि नहीं मोरल्टी नहीं तो आप उसको

248
00:17:17,680 --> 00:17:21,920
अकाट उत्तर नहीं दे सकते। यह बाय प्रोडक्ट है मोरल्टी का मिलना। आपको मूल

249
00:17:21,920 --> 00:17:26,160
पर वार करना होगा। मूल मूल पर वार करने वाली बात है नहीं उनके यहां सुतो सदगम

250
00:17:26,160 --> 00:17:30,160
तमसमया तो वहां यह निरुत्तर थे। तो कहने का मतलब यह

251
00:17:30,160 --> 00:17:34,320
है कि वास्तव में इंटेलेक्चुअल नास्तिक अगर आ जाए इनके सामने तो इनके

252
00:17:34,320 --> 00:17:38,320
पास कोई जवाब नहीं है। हम और वहां पर लल्लन टॉप में

253
00:17:38,320 --> 00:17:38,820
प्रमोट

254
00:17:38,720 --> 00:17:42,800
किया गया। और वहां आए कौन थे? ये मुफ्ती हैं। और ये

255
00:17:42,800 --> 00:17:47,120
मुफ्ती कौन है? जिनसे जुड़ी है ये क्या नाम है? एलईना।

256
00:17:47,120 --> 00:17:51,120
एलईना अली और ये आमिर हक। और ये लोग कौन है? इनके

257
00:17:51,120 --> 00:17:55,200
चैनलों पर इतनी भीषण गंदगी है हमारे सनातन धर्म के लिए

258
00:17:55,200 --> 00:17:59,200
कोई सीमा नहीं है। इतनी भीषण गंदगी। इवन आप जो ये

259
00:17:59,200 --> 00:18:03,280
ये वीडियो देख लेंगे ना इसी में आपको शर्म आ जाएगी।

260
00:18:03,280 --> 00:18:07,280
इतनी गंदगी भाई सनातन धर्म के लिए गंदगी होना

261
00:18:07,280 --> 00:18:11,520
एक अलग विषय है। गंदगी होना एक अलग विषय है। इतनी भीषण

262
00:18:11,520 --> 00:18:15,680
गंदगी। तो सनातन धर्म का विरोध में तो मुफ्ती भी है। ठीक है?

263
00:18:15,680 --> 00:18:19,680
और मैं कह रहा हूं चलो मान लिया लल्लन टॉप भी थे। लल्लन टॉप भी विरोध में था।

264
00:18:19,680 --> 00:18:24,960
मान लिया। मगर यह अश्लीलता को आप कैसे सह रहे हैं? मुफ्ती सर

265
00:18:24,960 --> 00:18:28,960
अपने चैनल पे, अपने से जुड़े हुए लोगों के चैनल पे आप यह

266
00:18:28,960 --> 00:18:33,040
अश्लीलता कैसे बर्दाश्त कर रहे हैं? सैद्धांतिक विरोध करवाइए

267
00:18:33,040 --> 00:18:37,120
ना। ये कैसे अश्लीलता है? उन्हीं चैनलों पर जो

268
00:18:37,120 --> 00:18:41,120
आपकी स्ट्रीम में ज्वाइन करते हैं मजे से। हमारी स्ट्रीम में जो

269
00:18:41,120 --> 00:18:45,520
लोग ज्वाइन करते हैं उनकी जिम्मेदारी लेते हैं हम। कि कैसे घटिया

270
00:18:45,520 --> 00:18:49,600
टाइप की लाइव स्ट्रीम वाली चीजों को आप प्रमोट कर रहे हैं अपने

271
00:18:49,600 --> 00:18:53,840
चैनल से अपने से जोड़कर के चल रहे हैं। बताइए उसमें क्या-क्या

272
00:18:53,840 --> 00:18:57,840
नहीं अनाब शनाब वो रैप सॉन्ग एक बना दिया उल्टा सीधा अपने मनगढ़ंत

273
00:18:57,840 --> 00:19:01,840
अपने ही सिद्धांतों के विरुद्ध वो मैं अभी बताऊंगा कैसे खैर तो इस पर ध्यान

274
00:19:01,840 --> 00:19:05,840
देना चाहिए कि यह किस तरीके से कुचक्र टाइप का चल रहा

275
00:19:05,840 --> 00:19:10,160
है और मैं थोड़ा सा इसकी सेटिंग

276
00:19:10,160 --> 00:19:16,160
ठीक कर दूं।

277
00:19:30,480 --> 00:19:32,800
तो

278
00:19:32,800 --> 00:19:37,040
ये तो जो एक इनका जो मेरा माइक म्यूट है अच्छा

279
00:19:37,040 --> 00:19:41,280
तो ये एक इनका जो सफेद पोश चेहरा है ना कि मुफ्ती

280
00:19:41,280 --> 00:19:45,360
और वो और वो बहुत सभ्रांत बन के चलते हैं। तो उस उस पर वो

281
00:19:45,360 --> 00:19:49,360
सफेदपश जो चेहरा बना रखा है वो छवि जो झूठी छवि बना

282
00:19:49,360 --> 00:19:53,520
रखी है वहां पर एक तमाचा है ये ये सच्चाई कैसे कनेक्टेड

283
00:19:53,520 --> 00:19:57,600
है कैसे अश्लीलता फैला रहे हैं किस तरह से बात कर रहे हैं ये

284
00:19:57,600 --> 00:20:02,080
होता है खंडन का तरीका ये होता है डिबेट का तरीका आप वहां पर नग्नता अश्लीलता

285
00:20:02,080 --> 00:20:06,320
परोस रहे हो अपने चैनलों पर और वह भी आपके यहां की मातृशक्तियां

286
00:20:06,320 --> 00:20:08,880
कहां से तैयार होती है भाई ये अच्छा

287
00:20:08,880 --> 00:20:13,280
फिर वही बात कि आपके यहां की भी तो कर रही तो हम उसको बोल रहे हैं वो गलत है

288
00:20:13,280 --> 00:20:17,440
और जहां पर हमें वह मिल रहा है तो हम बोल रहे हैं। आप कब बोलने वाले हो सार्वजनिक

289
00:20:17,440 --> 00:20:21,600
रूप से वह बता देना। ठीक है? तो अब आते हैं टू

290
00:20:21,600 --> 00:20:25,440
द पॉइंट कि

291
00:20:25,440 --> 00:20:29,760
इनकी ये जो शैली है विधर्मियों का विरोध करने की

292
00:20:29,760 --> 00:20:33,920
इससे कभी भी हम सहमत नहीं है। सदैव जहां भी बात आएगी वहां बोलेंगे

293
00:20:33,920 --> 00:20:38,080
कि भाई ये गलत कर रहे हो। आप इस तरह से खंडन मत करो किसी का। आप सैद्धांतिक विरोध

294
00:20:38,080 --> 00:20:42,320
करो। ठीक है? गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर कर भी अपनी सुंदरता

295
00:20:42,320 --> 00:20:46,320
खोने नहीं देता। यह बात दोनों साइड के लिए है। उधर के

296
00:20:46,320 --> 00:20:50,560
लिए भी उधर के लिए भी गिरो। मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता

297
00:20:50,560 --> 00:20:54,560
नहीं खोता। तभी तो तुम जीते तो जीते। वरना

298
00:20:54,560 --> 00:20:58,560
तुमने क्या जिताया? इंसानियत को जिताया। अगर इन इस्लाम वालों

299
00:20:58,560 --> 00:21:02,560
के अनुसार इंसानियत को लिए लड़ रहे हैं। क्योंकि इस्लाम

300
00:21:02,560 --> 00:21:06,560
जो है इंसानियत है। उनके हिसाब से। हालांकि वो हमारे

301
00:21:06,560 --> 00:21:10,560
जब उस पर लागू होगा ना आमने सामने की चर्चा वहां सब छिन्न भिन्न हो

302
00:21:10,560 --> 00:21:14,720
जाएगा मगर आपके हिसाब से तो है ना इंसानियत तो उसके

303
00:21:14,720 --> 00:21:19,680
लिए आप लड़ रहे हो और जानवर पन के साथ लड़ रहे हो

304
00:21:19,680 --> 00:21:23,920
तो अगर लास्ट में जीत भी गए तो इंसानियत जीतेगी या जानवर जीतेंगे कौन

305
00:21:23,920 --> 00:21:28,240
जीतेगा किसको जिता रहे हो तो ये सोचो

306
00:21:28,240 --> 00:21:32,320
थोड़ा सा तो कुल मिलाकर के अब बात आती है सबसे पहले

307
00:21:32,320 --> 00:21:36,320
हम इनके शास्त्रोक्त जवाब दे दे जो शास्त्री आक्षेप लगाएं उसमें जो प्रमाण इत्यादि

308
00:21:36,320 --> 00:21:40,400
उसके लिए अलग से वीडियो बनाएंगे। विदेश यात्रा निषेध

309
00:21:40,400 --> 00:21:44,400
है विशेष तौर पर द्विजों के लिए क्योंकि उसमें संध्या वंदन

310
00:21:44,400 --> 00:21:48,720
होता है और संध्या वंदन करने के लिए जो कई प्रकार की भूमि

311
00:21:48,720 --> 00:21:52,800
हैं वो वर्जित मानी गई है। इवन विदेश ही नहीं

312
00:21:52,800 --> 00:21:57,360
भारत में भी कई ऐसी धरती है जहां तीर्थ के बिना जाने पर वहां पर जो है

313
00:21:57,360 --> 00:22:02,000
उल्लंघन होता है। वहां से वापस आने पर प्रायश्चित करना पड़ता है।

314
00:22:02,000 --> 00:22:06,240
और समष्टि के हित से तीर्थ के उससे जा सकते हो। परंतु व्यक्तिगत कार्यों

315
00:22:06,240 --> 00:22:10,240
से इधर का व्यक्ति उधर जाएगा अमुक भूमि पे तो वहां पर भी पतित होता

316
00:22:10,240 --> 00:22:14,320
है। इसी दृष्टि से वहां जो विदेश समुद्र पार की

317
00:22:14,320 --> 00:22:18,320
जो भूमि है उसको भी माना गया है। अब समष्टिकेत से अगर चले गए

318
00:22:18,320 --> 00:22:22,880
तो प्रायश्चित करके शोधित कर सकते हो। उसमें भी और सारी चीजें हैं कि

319
00:22:22,880 --> 00:22:27,040
आपको कौन-कौन से अधिकार हैं। शंकराचार्य जैसे आगे चलकर

320
00:22:27,040 --> 00:22:31,120
के शंकराचार्य बन सकते हो कि नहीं? यहां शंकराचार्य थे तो प्रायश्चित तो कर लिया मगर

321
00:22:31,120 --> 00:22:35,360
पद का त्याग कर दिया क्योंकि अब हम हमारा जो व्यक्तित्व है वह आदर्श व्यक्तित्व

322
00:22:35,360 --> 00:22:39,280
नहीं रह गया तो कभी भी विदेश यात्रा को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल

323
00:22:39,280 --> 00:22:43,440
में नहीं डाला गया है विशेष अथवा विषम परिस्थितियों के निमित्त उसका आलंबन लिया

324
00:22:43,440 --> 00:22:47,440
गया है और यदि किसी ने कर लिया है अज्ञानता पूर्वक तो ऐसा नहीं

325
00:22:47,440 --> 00:22:51,440
है वो अधर्मी हो गया वो सनातनी नहीं रहा इस बात को दिमाग से निकाल लेना वो

326
00:22:51,440 --> 00:22:55,600
सनातनी है रहेगा हां उसका

327
00:22:55,600 --> 00:22:59,680
जो अपना जो पूजा पद्धति का क्राइटेरिया वह पतित हुआ है और जब वह

328
00:22:59,680 --> 00:23:03,920
पतित हुआ है तो उसको पतित होने के बाद जो दूसरा पूजा पूजा

329
00:23:03,920 --> 00:23:08,480
करने का क्राइटेरिया जो होता है कल्याण के पथ पर आगे बढ़ने वाले जो नियमावली

330
00:23:08,480 --> 00:23:12,560
है उनका आलंबन लेकर के वो अपने मोक्ष के हेतु के लिए साधना कर सकता है।

331
00:23:12,560 --> 00:23:16,560
जैसे कई लोगों का जनेऊ नहीं हुआ है। अब इस बात को आप जानते होंगे

332
00:23:16,560 --> 00:23:20,720
कि नहीं मुस्लिम जो हैं वो मुझे नहीं पता मगर सनातनी जानते जिनका

333
00:23:20,720 --> 00:23:24,960
जनेऊ नहीं हुआ है तो वो क्या भगवान की पूजा नहीं कर सकते

334
00:23:24,960 --> 00:23:29,360
हैं। कैसे कर सकते हैं कि भैया जो जो

335
00:23:29,360 --> 00:23:33,600
जनेऊ के द्वारा आप जो है वेदोक्त पूजा भजन शध्या

336
00:23:33,600 --> 00:23:37,920
करते हो तो वेदों का ही जो भाष्य इत्यादि

337
00:23:37,920 --> 00:23:42,000
के रूप में पुराण इत्यादि स्मृति ग्रंथ इत्यादि प्रकट हुए हैं उनके आधार

338
00:23:42,000 --> 00:23:46,000
पर जो उनमें जो नाम जप है, पूजा पद्धतियां हैं उनके

339
00:23:46,000 --> 00:23:50,240
द्वारा आप अपने कल्याण के हेतु पर कार्य कर सकते हो। ठीक है? विदेश

340
00:23:50,240 --> 00:23:54,720
यात्रा में यह निर्णय है समस्त प्रामाणिक परंपराओं का। ठीक है?

341
00:23:54,720 --> 00:23:58,720
तो यह आपके वहां पर भ्रांति थी ना नहीं इनके यहां विदेश चला गया कोई

342
00:23:58,720 --> 00:24:02,960
तो वो जो है अधर्मी हो गया ये सब थोड़ा थोड़ा लॉजिकल

343
00:24:02,960 --> 00:24:06,960
बातें करो इंटेलेक्चुअल बातें करो बचकानी चीजें बोली है आप लोगों

344
00:24:06,960 --> 00:24:11,680
ने अपनी वीडियो में वो जो बनाया ना 3 घंटे 36 मिनट का उसमें

345
00:24:11,680 --> 00:24:16,000
90% चीजें आपने जो बोली है बचकानी है बचपना

346
00:24:16,000 --> 00:24:20,000
है वो आपका और कुछ नहीं है जिस दिन किसी प्रबुद्ध व्यक्ति से सामना

347
00:24:20,000 --> 00:24:24,000
हो जाएगा सब यह बिल्कुल तितर-बितर हो जाएगा आपके यहां के

348
00:24:24,000 --> 00:24:28,240
जो मुफ्ती इत्यादि है वो समझदारी वाली बातें करते हैं। यह सब आपके

349
00:24:28,240 --> 00:24:32,320
बचकानेपन है। कुछ जाना न ताना जो बना है वो बोल

350
00:24:32,320 --> 00:24:36,480
लो। क्लेम वही करो जिसको सिद्ध कर पाओ। अकाट्य बातें हम

351
00:24:36,480 --> 00:24:41,280
बोलेंगे अकाट्य बातें। सीखो हमसे क्या है अकाट्य बातें। अच्छा दूसरी

352
00:24:41,280 --> 00:24:45,520
इस इसके यहां पर एक व्यक्ति और आया उसी लाइव में मोमिना के यहां

353
00:24:45,520 --> 00:24:49,680
तो वो व्यक्ति आकर के बोलता है उसका पता नहीं क्या नाम था राजपूत एक्स

354
00:24:49,680 --> 00:24:53,760
ये वो वो बोलता है कि वो इनके यहां तो ग्रंथ

355
00:24:53,760 --> 00:24:58,080
पढ़ने का अधिकार ही नहीं है अरे तुम पढ़ ही कैसे रही हो अरे तुम बता ही कैसे रही हो

356
00:24:58,080 --> 00:25:02,640
तो इस बात को भी समझो फिर वही कहूंगा कि बचकानापन

357
00:25:02,640 --> 00:25:06,720
है ये अर्ध ज्ञानी भयंकर हमारे यहां पर एक कहावत कही गई

358
00:25:06,720 --> 00:25:09,840
है अर्ध ज्ञानी जो होता है भयंकर होता है 100 मूर्ख

359
00:25:09,840 --> 00:25:13,840
दोस्तों से अच्छा एक बुद्धिमान दुश्मन होता है। तो आप अगर यह सोच रहे

360
00:25:13,840 --> 00:25:18,400
हैं कि इस्लाम की तरफ से खड़े होकर के मैं बोल रहा हूं इस्लाम के फायदे के लिए

361
00:25:18,400 --> 00:25:22,400
तो आप अगर ऐसे मूर्खता भरे स्टेटमेंट्स देंगे तो आप अपनी टीम वालों

362
00:25:22,400 --> 00:25:26,560
का नुकसान करेंगे। ठीक है? तो सोच समझ के बोलिए क्या

363
00:25:26,560 --> 00:25:30,720
बोल रहे हैं? यहां पर धर्म और अधर्म की बात हो रही है

364
00:25:30,720 --> 00:25:34,800
जो पूरे संसार के मूल में है। अब आप वहां पर आ चुके

365
00:25:34,800 --> 00:25:39,280
हैं। धर्म और अधर्म की बात हो रही है। सोच समझ के बोलो जो भी बोलो कांटे

366
00:25:39,280 --> 00:25:43,280
की नोक पर बोलो। ठीक है? अच्छा। तो क्या बोला

367
00:25:43,280 --> 00:25:47,840
इन्होंने कि भैया इनके यहां तो स्त्रियों को जो है अध्ययन कर करा ही नहीं जा सकता है।

368
00:25:47,840 --> 00:25:52,000
मतलब इनके हिसाब से दीन है। दीन का अध्ययन नहीं कराया जाता है। यह मूर्खता

369
00:25:52,000 --> 00:25:56,080
है तुम्हारी। समझ गए? एक्स वैक्स जो भी हो जब कभी

370
00:25:56,080 --> 00:26:00,800
सामना होगा तो व हो जाओगे ठीक है सामना होगा आपका

371
00:26:00,800 --> 00:26:06,800
तो एक्स व जेड सब हो जाएगा आपका ठीक है तो

372
00:26:07,280 --> 00:26:11,840
हां एक्स व जेड सब हो जाएगा अनिकेत जी आए थे फिर चले गए

373
00:26:11,840 --> 00:26:16,240
तो इसको समझो पहले कि पर्टिकुलरली

374
00:26:16,240 --> 00:26:20,320
जो वैदिक वांगमय है वैदिक सीधे-सीधे जिसमें वेद

375
00:26:20,320 --> 00:26:24,320
मंत्र हैं उसके लिए अनाधिकृत है कौन स्त्री नहीं

376
00:26:24,320 --> 00:26:28,480
पुरुष भी यदि जनेऊ नहीं हुआ है तो यानी कि वैदिक

377
00:26:28,480 --> 00:26:32,640
वेदों को सीधे पढ़ने के लिए सीधे से तौर पर मोटी बात

378
00:26:32,640 --> 00:26:36,640
समझ लो जो जिनको हमारे यहां परंपराओं में वेद माना गया है जिसमें

379
00:26:36,640 --> 00:26:41,040
ब्राह्मण ग्रंथ हैं उपनिषद भी है और सम्यता भाग भी है। तो इनको

380
00:26:41,040 --> 00:26:45,120
पढ़ने के लिए सीधे-सीधे वहां पर यज्ञपवित संस्कार की आवश्यकता है।

381
00:26:45,120 --> 00:26:49,360
अब यज्ञपवित संस्कार जो है वो सभी पुरुषों के लिए भी

382
00:26:49,360 --> 00:26:53,360
वो नहीं है अलऊ। उसमें भी अमुक कुल परंपरा में जो जो होंगे उनको

383
00:26:53,360 --> 00:26:57,520
उनको जो है यज्ञ पवित्र संस्कार हो सकता है और उसमें भी

384
00:26:57,520 --> 00:27:01,600
यदि आप यज्ञ पवित्र संस्कार कराने के बाद में भी यदि

385
00:27:01,600 --> 00:27:05,600
उसका निर्वाह नहीं कर रहे हो उसकी मर्यादाओं का तब भी आप पतित हो तब भी आपको नहीं

386
00:27:05,600 --> 00:27:09,600
पढ़ना है। ठीक है? तो यह पुरुष और स्त्री वाला भेद नहीं है।

387
00:27:09,600 --> 00:27:13,760
संस्कार का भेद है। अब संस्कार संस्कार को लेकर के

388
00:27:13,760 --> 00:27:17,840
तो पुरुष पुरुष में भी भेद है। वहां पर भी फिर पुरुष स्त्री खत्म हो जाता है। अब

389
00:27:17,840 --> 00:27:21,840
पुरुष पुरुष में जो भेद है उसके उसका भी कारण है व्यवस्था

390
00:27:21,840 --> 00:27:22,720
है ना व्यवस्था

391
00:27:22,720 --> 00:27:27,120
बना के चलना। वो घृणा मूलक नहीं है। घृणा मूलक होता

392
00:27:27,120 --> 00:27:31,120
तो किसी को भी पूजा में ही अधिकृत नहीं किया जा सकता। नहीं साहब

393
00:27:31,120 --> 00:27:35,360
तुम पूजा ही नहीं कर सकते। ना ऐसा नहीं है घृणा मूलक नहीं है व्यवस्था

394
00:27:35,360 --> 00:27:39,600
मूलक है कि सब लोग एक ही काम करेंगे तो लगान की लाखा बागा वाली टीम बन जाएगी

395
00:27:39,600 --> 00:27:44,080
और जब ऑफ साइड बॉल जाएगी तो पूरा सारी टीम उधर ही भागेगी

396
00:27:44,080 --> 00:27:48,160
तो ये होती है अव्यवस्था व्यवस्थ समाज को व्यवस्थित

397
00:27:48,160 --> 00:27:52,640
करने के लिए जिसकी दिशा में बॉल जाए वही भागे उसी की जिम्मेदारी

398
00:27:52,640 --> 00:27:56,640
हो तो वो जिम्मेदारी कैसे है कि भैया यह काम तुम्हारा ही है तो वो

399
00:27:56,640 --> 00:28:00,640
कार्य बांटने के लिए यह व्यवस्था है घृणा मूलक नहीं

400
00:28:00,640 --> 00:28:04,640
है कि नहीं नहीं विकेट कीपर से हमें घृणा है इसलिए वो जो है सामने बिंग

401
00:28:04,640 --> 00:28:08,640
डालने नहीं जा सकता। यह एक व्यवस्था है। ठीक है।

402
00:28:08,640 --> 00:28:13,120
अच्छा दूसरी [गला साफ़ करने की आवाज़] बात यह है कि अध्ययन मना नहीं है।

403
00:28:13,120 --> 00:28:17,520
हमारे यहां पर बहुत बड़ी-बड़ी विदुषी हुई है। उन्होंने सीधे

404
00:28:17,520 --> 00:28:22,080
तौर पर यज्ञपवित संस्कार नहीं किया। परंतु वो ऐसे घर में रही

405
00:28:22,080 --> 00:28:26,240
जहां पर वेदोक्त पाठ इत्यादि होने पर ज्ञान चर्चा

406
00:28:26,240 --> 00:28:30,400
होने पर उन्हें बहुत सारा ज्ञान विज्ञान प्राप्त हुआ। है ना?

407
00:28:30,400 --> 00:28:34,800
और ऐसा ज्ञान यह सब असतो असदम तमसुत्र ये सब उनहीं ग्रंथों

408
00:28:34,800 --> 00:28:38,640
में है जहां पर इन मातृ शक्तियों का वर्णन आ रहा है

409
00:28:38,640 --> 00:28:42,640
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] इसको और शायद वो कान में शीशा पिघला के डालने की भी

410
00:28:42,640 --> 00:28:46,880
बात इन्होंने की है अपनी वीडियो में पता नहीं मुझे ध्यान नहीं तो उसका भी मैं बता दूं

411
00:28:46,880 --> 00:28:51,600
कि कान में शीशा पिघलाकर डालने वाली बात तब है जब कोई व्यक्ति

412
00:28:51,600 --> 00:28:55,600
गलत मंतव्य से इन चीजों को चुराने की कोशिश

413
00:28:55,600 --> 00:28:59,920
करें क्योंकि आपके हिसाब से आपकी जो कुरान इत्यादि है वो उतनी प्रिशियस

414
00:28:59,920 --> 00:29:04,080
नहीं है शायद क्यों नहीं है? इन्होंने अपनी लाइव में एक बात कही

415
00:29:04,080 --> 00:29:08,080
कि सोनाली जी कहीं पर आती हैं जब हमारी और उनसे

416
00:29:08,080 --> 00:29:12,320
बातें चल रही तो ये वहां देख रही हैं जब समीक्षा करने बैठी हुई है तो सोनाली

417
00:29:12,320 --> 00:29:16,560
जी कहती है कि भैया तुम आपके गुरु ने जिस किताब पर ठप्पा लगा दिया तो बाकी किताबें कचरे

418
00:29:16,560 --> 00:29:20,800
में डाल दोगे। तो वहां ये जो कचरा शब्द आया तो इस पर बोली ये समीक्षा करते

419
00:29:20,800 --> 00:29:24,800
हुए कि अरे अपनी ग्रंथों के बारे में ऐसे कोई कैसे बोल सकता

420
00:29:24,800 --> 00:29:28,880
है? कचरे में डाल देंगे। बताइए छी छी छी छी छी। तो अभी मैं बता रहा हूं

421
00:29:28,880 --> 00:29:33,600
आपको कि आपका शायद आपके ग्रंथों को लेकर के उतनी प्रिशियस

422
00:29:33,600 --> 00:29:37,760
दृष्टिकोण नहीं है जिससे कि कोई भी उसको जो है पढ़े

423
00:29:37,760 --> 00:29:42,080
कोई भी किसी भी दृष्टि से उसको सुने हमारे यहां पर है। लागू नहीं होना

424
00:29:42,080 --> 00:29:46,240
वो अलग बात है। हमारे यहां पर है कि अगर कोई सही दृष्टि से

425
00:29:46,240 --> 00:29:50,240
सुनेगा तो ही उसको स्वीकार किया जाएगा। अगर कोई

426
00:29:50,240 --> 00:29:54,080
गलत दृष्टि से जैसे हमारे यहां जो मंत्र है ना उसको बहुत ताकतवर

427
00:29:54,080 --> 00:29:58,080
कहा गया है। आपके यहां कहा गया कि नहीं कहा गया ताकतवर आयतों को मुझे

428
00:29:58,080 --> 00:30:02,560
नहीं पता। मगर हमारे यहां के मंत्रों को ताकतवर कहा गया। उनमें शक्ति है।

429
00:30:02,560 --> 00:30:06,960
तो यह शक्ति कैसी शक्ति है? फौज में बातें हो रही है भैया

430
00:30:06,960 --> 00:30:11,360
कि सामने हमें हमला करना है, यह करना है, वह करना है। अगर उन बातों

431
00:30:11,360 --> 00:30:15,360
को जो इतनी प्रभावशाली बातें हैं उन बातों को कोई गुप्तचर करने

432
00:30:15,360 --> 00:30:19,520
के लिए सुन ले तो क्या किया जाए उस गुप्तचर के साथ? क्या

433
00:30:19,520 --> 00:30:23,840
किया जाएगा? बस उसी दृष्टिकोण से जो गलत मंतव्य से सुनने की कोशिश

434
00:30:23,840 --> 00:30:27,840
करता है, उसके ऊपर ऐसे नियम का कायदे कानून

435
00:30:27,840 --> 00:30:32,320
लागू होते हैं कि वह ऐसा ना करें। वरना हमारे यहां पर अश्वमेद

436
00:30:32,320 --> 00:30:36,560
यज्ञ होता है और वहां पर शूद्र भी होते हैं। सभी चारों वर्ण

437
00:30:36,560 --> 00:30:40,720
के लोग होते हैं। वहां वेद मंत्र उच्चारित हो रहे होते हैं और सब सुनते हैं। विवाह

438
00:30:40,720 --> 00:30:44,720
होता है। आज भी विवाह होता है। वहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सब होते हैं

439
00:30:44,720 --> 00:30:48,800
और वहां किसी के कान में रुई नहीं ठूसी ठूंसी जाती है कि वैदिक मंत्र कोई सुन

440
00:30:48,800 --> 00:30:52,800
ना ले। तो इस तरह से सुनना वो अलग विषय है कि वो किसी

441
00:30:52,800 --> 00:30:56,800
ने सुन लिया और प्रयत्न पूर्वक पढ़ना, सुनना वह

442
00:30:56,800 --> 00:31:00,800
भी गलत मंतव्य से तो वहां पर सजा है। तो यह

443
00:31:00,800 --> 00:31:04,800
सब चीजें क्लियर हो गई कि स्त्री वेद अध्ययन निषेध नहीं है।

444
00:31:04,800 --> 00:31:08,800
अध्ययन निषेध नहीं है। वेद अध्ययन निषेध और क्यों निषेध

445
00:31:08,800 --> 00:31:09,300
है? क्योंकि

446
00:31:09,120 --> 00:31:13,120
स्त्रियों का यज्ञ पवित संस्कार नहीं होता। स्त्रियों का यज्ञ पवित संस्कार क्यों नहीं होता

447
00:31:13,120 --> 00:31:17,360
है? जैसे पुरुषों में भी कुछ पुरुषों का नहीं होता। अमुक कुल परंपरा

448
00:31:17,360 --> 00:31:21,680
के हैं तो नहीं होगा। क्यों नहीं होगा? व्यवस्था बनी रहे। लाखा भागा वाली टीम ना बने।

449
00:31:21,680 --> 00:31:25,760
और इसी प्रकार से स्त्री के लिए भी है कि लाखा भागा वाली टीम ना बने। अगर सब

450
00:31:25,760 --> 00:31:30,000
लोग जनेऊ करा लेंगे तो उस जनेऊ को लेकर के बहुत सारे नियम है। इतने कुल्ले

451
00:31:30,000 --> 00:31:34,160
करने हैं, यह करना है, वह करना वो आगे की चीजें हैं कि नियम है कैसे फॉलो करते हैं।

452
00:31:34,160 --> 00:31:38,320
जैसे आपके यहां पर नियम है कई सारे कि यह करना है, वो करना है।

453
00:31:38,320 --> 00:31:42,400
अगर ठीक से फॉलो करने वाला हुआ इस्लाम को तो बहुत सारे नियम है आपके यहां।

454
00:31:42,400 --> 00:31:46,480
उसी तरीके से जनेऊ को लेकर के हमारे नियम है। तो वो जनेऊ के नियम

455
00:31:46,480 --> 00:31:50,800
सभी पर लागू नहीं हो सकते। इसलिए कई लोगों को जनेऊ के दायित्व

456
00:31:50,800 --> 00:31:54,800
से मुक्त किया गया है। अब मुक्त कर दिया गया तो उनका जो

457
00:31:54,800 --> 00:31:59,040
गायत्री मंत्र इन्होंने कहा गायत्री मंत्र सबसे मेन मंत्र है। ठीक है? तो

458
00:31:59,040 --> 00:32:03,280
आप भगवत गीता पढ़िएगा। भगवान कह रहे हैं कि छंदों में मैं गायत्री

459
00:32:03,280 --> 00:32:07,280
हूं। भगवान कृष्ण कह रहे हैं छंदों में मैं गायत्री हूं।

460
00:32:07,280 --> 00:32:11,280
और गायत्री के द्वारा किसका किसको प्राप्त किया जा रहा है? यह भागवत

461
00:32:11,280 --> 00:32:15,360
में पढ़ लीजिए। गायत्री के द्वारा शिव जी को शंकर जी को प्राप्त

462
00:32:15,360 --> 00:32:19,840
किया जा रहा है। तो जब यह हो गया कि गायत्री मंत्र आपने माना सबसे इंपॉर्टेंट

463
00:32:19,840 --> 00:32:23,840
है। और छंदों में मैं गायत्री हूं यानी कृष्ण भगवान भी इंपॉर्टेंट हो गए।

464
00:32:23,840 --> 00:32:24,480
गायत्री

465
00:32:24,480 --> 00:32:28,640
के द्वारा प्राप्त होने वाले शिव जी हैं। तो अगर शिव जी को ही प्राप्त

466
00:32:28,640 --> 00:32:32,720
कराने की कृष्ण को ही प्राप्त कराने की दूसरी विधियां दे दी गई है

467
00:32:32,720 --> 00:32:36,800
शास्त्रों में तो वो सब बेकार हो गई क्या? वो सब बेकार हो गई।

468
00:32:36,800 --> 00:32:41,040
अमान्य हो गई। तो हमारे यहां शास्त्रों में भरभर

469
00:32:41,040 --> 00:32:45,040
के ईश्वर को प्राप्त करने के और भी बहुत से मार्ग बताए गए हैं

470
00:32:45,040 --> 00:32:49,280
कि जब आप यज्ञ पवित धारण ना कर पाओ तो ऐसा इस पथ

471
00:32:49,280 --> 00:32:53,280
पर चलो। यज्ञ पवित का निर्वाह कर पाओ तो इस पथ पर चलो। इस तरीके से

472
00:32:53,280 --> 00:32:57,440
व्यवस्था और सुविधा दोनों चीजें दी

473
00:32:57,440 --> 00:33:01,440
गई और फल से किसी को भी वंचित नहीं किया गया है।

474
00:33:01,440 --> 00:33:05,520
ठीक है? आपके यहां भी स्त्रियों को शायद मस्जिद में जाना अलाउ नहीं है।

475
00:33:05,520 --> 00:33:09,680
हां तो ये क्या है? चिढ़ है क्या? इसको चिढ़ माना जाए।

476
00:33:09,680 --> 00:33:13,920
हालांकि मैं इन सब चीजों पर बात नहीं करता हूं। मैं बताऊंगा मैं किस पर बात करता हूं। तो

477
00:33:13,920 --> 00:33:18,240
क्या चिढ़ मानी जाए? इसको घृणा मानी जाए या फिर व्यवस्था

478
00:33:18,240 --> 00:33:22,800
मानी जाए तो हमारे यहां तो व्यवस्था मूलक है। आप आप देख के बताइएगा

479
00:33:22,800 --> 00:33:27,040
आपके यहां क्या है स्त्रियां जो मस्जिद में नहीं जाती है उसको हमारे यहां व्यवस्था मूलक

480
00:33:27,040 --> 00:33:31,200
है कि भाई घर में बच्चे भी हैं और उनको भी संभालना

481
00:33:31,200 --> 00:33:35,360
है। घर को भी संभालना है और वहां पर एक व्यक्ति को और सबको जनेऊ दे दिया

482
00:33:35,360 --> 00:33:40,080
गया। अब जनेऊ दे दिया गया तो सब कुल्ला और मिट्टी ले साथ में चलना

483
00:33:40,080 --> 00:33:44,320
यही सब सब लोग कर रहे हैं। तो घर कैसे संभलेगा? तो इसलिए लाखा बागा

484
00:33:44,320 --> 00:33:48,880
वाली टीम ना बने इसलिए अमुक अमुक दायित्व से अच्छा सारे दायित्व

485
00:33:48,880 --> 00:33:53,120
ऐसा नहीं है पुरुष को भी कई दायित्वों से मुक्त किया गया कि तुम इसमें अधिकृत

486
00:33:53,120 --> 00:33:57,440
नहीं हो तुम ये नहीं कर सकते कई चीजें पुरुष को भी प्राप्त नहीं हुई ठीक है

487
00:33:57,440 --> 00:34:01,760
तो यह व्यवस्था मूलक होता है घृणा मूलक नहीं होता है शब्द समझ में ना आ रहे हो मोमिना

488
00:34:01,760 --> 00:34:05,920
जी तो थोड़ा सा गूगल वूगल कर लीजिएगा व्यवस्था मूलक

489
00:34:05,920 --> 00:34:10,080
और घृणा मूलक में अंतर क्या हुआ अब आगे चलते हैं

490
00:34:10,080 --> 00:34:14,400
यह चीज क्लियर हो गई स्त्री का वेदा अध्ययन शूद्र का वेद अध्ययन वेद अध्ययन

491
00:34:14,400 --> 00:34:18,480
निषेध है मगर अपने धर्म को जानना निषेध नहीं है। ईश्वर

492
00:34:18,480 --> 00:34:22,560
को प्राप्त करना निषेध नहीं है। और धर्म क्या है? धर्म

493
00:34:22,560 --> 00:34:26,720
वो है जिससे कि ईश्वर की प्राप्ति हो। मोक्ष की प्राप्ति हो। वो धर्म है।

494
00:34:26,720 --> 00:34:30,880
तो इसमें किसी का निषेध नहीं है। हां पद्धतियां और मार्ग

495
00:34:30,880 --> 00:34:34,880
थोड़े से अलग-अलग किए हैं। व्यवस्था के निमित्त घृणा के निमित्त

496
00:34:34,880 --> 00:34:38,880
नहीं। जी कुछ बोलना चाहते हैं। तो आप

497
00:34:38,880 --> 00:34:44,880
लोग अपने अपने ओपिनियन रखें। फिर मैं आगे बात करूं।

498
00:34:47,120 --> 00:34:51,440
जय श्री राम भैया जी

499
00:34:51,440 --> 00:34:55,600
यही है कि कोई समझाने वाला नहीं है इसलिए थोड़ा सा बिखर

500
00:34:55,600 --> 00:34:59,600
जाती है चीजें समझाने वाले बहुत कम रह गए हैं

501
00:34:59,600 --> 00:35:03,760
प्रॉपर तरीके से समझाने वाला बहुत कम रह गए हैं और रटे रटाए लोग ज्यादा

502
00:35:03,760 --> 00:35:08,480
हो गए इसलिए लोग समझ नहीं पाते हैं मेरे

503
00:35:08,480 --> 00:35:12,480
ख्याल से जी अच्छा इसी

504
00:35:12,480 --> 00:35:16,560
क्रम में आगे इन्होंने ना आप म्यूट कर लीजिए। इसी क्रम

505
00:35:16,560 --> 00:35:19,840
में आगे इन्होंने

506
00:35:19,840 --> 00:35:24,000
अंतरजातीय विवाह को लेकर के भी कुछ टीका टिप्पणी की टीका टिप्पणी करने

507
00:35:24,000 --> 00:35:28,080
का प्रयास किया। तो हम जो

508
00:35:28,080 --> 00:35:32,560
प्रामाणिक परंपरा वाले लोग हैं, वह अंतरजातीय विवाह स्वीकार नहीं करते।

509
00:35:32,560 --> 00:35:37,280
उसका कारण होता है कि जब दो अलग-अलग

510
00:35:37,280 --> 00:35:41,520
रक्त वाले लोग मिलेंगे तो अगली जो संतति उत्पन्न होगी, संतान

511
00:35:41,520 --> 00:35:45,520
उत्पन्न होगी उसमें वो रक्त बदलता जाएगा और बदलते बदलते बदलते

512
00:35:45,520 --> 00:35:49,760
बदलते विकृति आएगी और हमारे स्कूल ऑफ थॉट्स के अनुसार

513
00:35:49,760 --> 00:35:53,760
मुस्लिम जो आज समाज है या आज जो नास्तिक बन के घूमने वाले लोग

514
00:35:53,760 --> 00:35:57,760
हैं वो वही लोग हैं। विकृति है

515
00:35:57,760 --> 00:36:01,760
ना तो वह विकृति कैसे है वह बहुत सारी चीजें वह

516
00:36:01,760 --> 00:36:05,760
विकृति दिखती हैं तो हमारे यहां पर शुद्धता कि जो जो

517
00:36:05,760 --> 00:36:10,000
है वह बना रहे उसकी प्रज्ञा शक्ति उसका शास्त्रों को

518
00:36:10,000 --> 00:36:14,000
ईश्वर को धर्म को समझने की जो चेतना शक्ति है वो उतनी ही रहे

519
00:36:14,000 --> 00:36:18,400
बिगड़े नहीं उसमें विकृति ना आए पतित ना होते जाए इस कारण से

520
00:36:18,400 --> 00:36:22,720
अंतरजातीय विवाह मना किया गया है जो जिस कुल परंपरा का हो

521
00:36:22,720 --> 00:36:26,880
उसका जो कुल परंपरा वर्ण हो उसी वर्ण वर्ण में वो विवाह करे।

522
00:36:26,880 --> 00:36:30,880
ठीक है? इसमें दिक्कत क्या है? और यह सारी चीजें व्यवस्था मूलक है।

523
00:36:30,880 --> 00:36:35,040
इसमें कहीं भी घृणा थोड़ी ना है। अगर ट्रेन में लिखा होता है थर्ड

524
00:36:35,040 --> 00:36:39,680
क्लास डब्बा, सेकंड क्लास डब्बा, फर्स्ट क्लास डब्बा तो ये घृणा मूलक है।

525
00:36:39,680 --> 00:36:44,880
चिढ़ते हैं क्या वो थर्ड वालों से? व्यवस्था मूलक।

526
00:36:44,880 --> 00:36:49,040
ठीक है? किसी से नफरत नहीं है कोई। अगर मेरे मैं किसी बिल्डिंग

527
00:36:49,040 --> 00:36:53,280
में रहता हूं और मैं जो है फर्स्ट फ्लोर पर हूं। मुझसे

528
00:36:53,280 --> 00:36:57,280
ऊपर कोई रहता है सेकंड फ्लोर पर तो वहां यह मेरे लिए कहा जा सकता है कि

529
00:36:57,280 --> 00:37:01,280
मैं नीचे रहता हूं तो नीचे रहने वाला कौन हुआ? नीच। अब

530
00:37:01,280 --> 00:37:06,320
यह जो नीच शब्द आया है यह घृणा मूलक है क्या?

531
00:37:06,320 --> 00:37:10,640
व्यवस्था मूलक है। तो यह समझने वाली जो चीजें होती हैं

532
00:37:10,640 --> 00:37:14,880
इनको ही या तो जानबूझ के ना समझ के या फिर पूरी तरीके से प्रयास

533
00:37:14,880 --> 00:37:18,960
ना करके जो विरोधी लोग होते हैं वो उंगली उठाते हैं और

534
00:37:18,960 --> 00:37:23,120
फिर हमारे ही यहां के कुछ लोग खड़े हो जाते हैं कि इन इन चीजों पर उंगली उठ रही है। तो

535
00:37:23,120 --> 00:37:27,120
ऐसा करो इन इन चीजों को काट दो। प्रक्षिप्त बता दो। तो आ जाता है

536
00:37:27,120 --> 00:37:31,120
आर्य समाज कि इन इन चीजों पर उंगली उठ रही है। इनके जवाब

537
00:37:31,120 --> 00:37:35,200
नहीं इनके समझ में नहीं आ रही बातें। लो भाई प्रक्षिप्त है। यह है ही नहीं हमारे

538
00:37:35,200 --> 00:37:39,200
यहां। वही नेता जी वाला काम कि भैया वो बाढ़ का पानी जो

539
00:37:39,200 --> 00:37:43,360
है खतरे के निशान तक आ गया है। तो नेता जी ने बोला कि 2 इंच और ऊपर बढ़ा

540
00:37:43,360 --> 00:37:46,400
दो खतरे का निशान।

541
00:37:46,400 --> 00:37:50,400
तो आप जो भी समझते हैं ना कि जो प्रामाणिक

542
00:37:50,400 --> 00:37:54,480
सनातन धर्म है परंपरा प्राप्त जैसा कि आपने माना कि प्रामाणिक सनातन धर्म

543
00:37:54,480 --> 00:37:58,560
तो परंपरा वाला ही है तो उस धर्म में

544
00:37:58,560 --> 00:38:03,200
अकाट्य सिद्धांत हैं। काट नहीं पाओगे कहीं से भी

545
00:38:03,200 --> 00:38:07,520
बहुत आया बहुत चले गए काट नहीं पाओगे। निरुत्तर

546
00:38:07,520 --> 00:38:11,520
हो जाओगे। के निरुत्तर अकाट्य सिद्धांत को ले बैठे

547
00:38:11,520 --> 00:38:15,680
हैं और आपके मुफ्ती जी के सामने

548
00:38:15,680 --> 00:38:20,160
उनका जो है मुंह छोटा सा हो गया तो देखिएगा अभी दिखाऊंगा।

549
00:38:20,160 --> 00:38:24,320
खैर यह चीजें हो गई। विदेश यात्रा क्लियर हो गई। स्त्री

550
00:38:24,320 --> 00:38:28,640
वेदाध्यन क्लियर हो गया। अंतरजातीय विवाह क्लियर हो गया। और

551
00:38:28,640 --> 00:38:32,640
स्त्रियों का यदि वेदाध्यन निषेध है तो भागवत पुराण में वचन आया है जिसको

552
00:38:32,640 --> 00:38:36,720
हम प्रामाणिक लोग मानते हैं कि वेदोक्त

553
00:38:36,720 --> 00:38:41,200
कार्यों में होने वाली भूल चूक के कारण स्त्री

554
00:38:41,200 --> 00:38:45,360
शूद्र और पतित के लिए पुराणों की व्यवस्था की

555
00:38:45,360 --> 00:38:49,360
गई है। पुराणोक्त मार्ग की व्यवस्था की गई है जो वेदों के ही भाष्य

556
00:38:49,360 --> 00:38:52,960
रूप में प्रकट है। अच्छा

557
00:38:52,960 --> 00:38:56,960
अब एक विषय और है हलाला वाला। इन्होंने जो है सनातनी हलाला

558
00:38:56,960 --> 00:39:01,520
का नाम दिया है। यह आमिर हक ने कोई वीडियो बनाया।

559
00:39:01,520 --> 00:39:05,600
उसमें जो है बताया कि वशिष्ठ धर्म सूत्र में 20वें अध्याय में और पांच

560
00:39:05,600 --> 00:39:09,680
से लेकर 10व श्लोक के बीच में यह कहा गया है कि भैया जो है अपनी

561
00:39:09,680 --> 00:39:13,840
स्त्री को अगर किसी छोटे भाई ने विवाह कर लिया

562
00:39:13,840 --> 00:39:18,080
बड़े भाई से पहले तो वो अपनी मतलब उसकी

563
00:39:18,080 --> 00:39:22,240
स्त्री का भोग पहले बड़ा भाई करेगा 12 दिन। यह सब उसने कहने का प्रयास किया।

564
00:39:22,240 --> 00:39:26,320
अच्छा ये लोगों को यही बातें मिलती है। बस मूल विषय पर बात करते हुए

565
00:39:26,320 --> 00:39:30,320
लोग मिलेंगे ही नहीं। दर्शन इत्यादि पे एक बार गया था तो सब हलचल मच गई थी। मैं जब

566
00:39:30,320 --> 00:39:34,400
गया था इनके यहां मूल विषय पर बात करने दर्शन पे तो

567
00:39:34,400 --> 00:39:38,880
इनके यहां हलचल मच गई थी सिवाय विषयंतर

568
00:39:38,880 --> 00:39:43,040
करने और बोलने ना देने, म्यूट इत्यादि करने के अलावा इनके

569
00:39:43,040 --> 00:39:47,200
पास कोई और तरीका नहीं था मुझसे बचने का। और वह भी तब जब

570
00:39:47,200 --> 00:39:51,280
मैं बिल्कुल यह समझ लीजिए कि अभी मैं लर्न करके पहली मैं मुझे तो पता ही

571
00:39:51,280 --> 00:39:55,600
नहीं था कि कभी मुझे ऐसे किसी के सामने जो है पक्ष विपक्ष में ऐसे वार्ताएं

572
00:39:55,600 --> 00:40:00,080
होंगी। उस समय मैं उस उस समय की बात है आज से मतलब

573
00:40:00,080 --> 00:40:04,160
चार साल पहले की बात है। तो तब मैं वहां पे भी ये मुफ्ती वगैरह निरुत्तर हो गए

574
00:40:04,160 --> 00:40:08,320
थे कई जगह। तो खैर तो जो इन्होंने

575
00:40:08,320 --> 00:40:12,560
वशिष्ठ धर्म सूत्र का वह दिया है रेफरेंस उसमें कहीं भी उसमें

576
00:40:12,560 --> 00:40:16,880
यह बात है कि हमारे यहां पर यह है नियम

577
00:40:16,880 --> 00:40:20,800
कि बड़े भाई के रहते हुए यदि छोटा भाई विवाह

578
00:40:20,800 --> 00:40:24,880
कर लेगा तो उसको उचित नहीं माना गया है। बड़ी बहन के रहते हुए यदि छोटी बहन

579
00:40:24,880 --> 00:40:28,960
विवाह कर लेगी उसको उचित नहीं माना गया है। अब उचित ना मानने का मतलब

580
00:40:28,960 --> 00:40:33,040
कि उस अगर वो विवाह कर रहा है तो विवाह पूर्ण नहीं है तो विवाह है

581
00:40:33,040 --> 00:40:37,200
ही नहीं। समझ गए? विवाह पूर्ण नहीं है तो विवाह है

582
00:40:37,200 --> 00:40:41,520
ही नहीं। मतलब अभी भी वह आपके लिए पराई स्त्री है। तो ऐसी

583
00:40:41,520 --> 00:40:45,840
सिचुएशन में कि वो जो पराई स्त्री ना रहे आपकी विवाहिता

584
00:40:45,840 --> 00:40:50,080
कहलाए तो आपको व्रत करना है। व्रत करना है वो कृच्छ व्रत बताया

585
00:40:50,080 --> 00:40:54,720
है उसमें 12 दिनों का। ठीक है? अब जो व्रत करना है तो व्रत

586
00:40:54,720 --> 00:40:59,120
जिस स्त्री को आप विवाह के नाम पर लेकर अभी मतलब आपका विवाह अधूरा है उसमें एक पद्धति

587
00:40:59,120 --> 00:41:03,280
बाकी है अनुष्ठान बाकी तो जिस स्त्री को आप लेकर आए हो

588
00:41:03,280 --> 00:41:07,520
उस स्त्री से दूर रहकर वो आपको व्रत धारण करना है 12 दिनों

589
00:41:07,520 --> 00:41:11,680
का तो अब जब आप स्त्री से दूर रहेंगे तो हमारे यहां पर मनुस्मृति

590
00:41:11,680 --> 00:41:15,920
का वचन है क्या वचन है कि स्त्री कभी

591
00:41:15,920 --> 00:41:19,920
भी वैसे ना रहे संरक्षण में रहनी

592
00:41:19,920 --> 00:41:24,240
चाहिए पिता के पुत्र के भाई के बेटे के संरक्षित होनी चाहिए।

593
00:41:24,240 --> 00:41:28,480
तो उस संरक्षण के नजरिए से कहा गया है कि तब तक अपनी जो

594
00:41:28,480 --> 00:41:32,800
आपकी जो विवाहिता है जिसको आप विवाहिता कह रहे हो अभी है नहीं उसको कहां रखें

595
00:41:32,800 --> 00:41:35,920
आप ले तो आए हो तो कहां रखें तो वहां पर एक प्रोटोकॉल

596
00:41:35,920 --> 00:41:40,320
है कि आप भाई के संरक्षण में रखें। वहां पर कहीं भी रमण का

597
00:41:40,320 --> 00:41:44,480
शब्द का उपयोग नहीं हुआ है। हालांकि मैं इन चीजों पर बात नहीं करता हूं कि

598
00:41:44,480 --> 00:41:48,640
हलाला में क्या कहा गया है? आपके यहां क्या नहीं कहा गया है।

599
00:41:48,640 --> 00:41:52,960
मगर जिस बात को आप हलाला से कंपेयर कर रहे हो और आपके यहां हलाला

600
00:41:52,960 --> 00:41:57,120
में अगर मजा चखने इत्यादि जैसी बातें कही गई हैं। अब उसका अर्थ आप

601
00:41:57,120 --> 00:42:01,280
वही लेते हैं कि नहीं लेते वो मुझे नहीं पता। अगर आप कह देंगे कि नहीं उसका अर्थ वो नहीं है तो

602
00:42:01,280 --> 00:42:05,360
मैं आपको मानूंगा। मैं आपकी उन चीजों को काउंटर करूंगा

603
00:42:05,360 --> 00:42:09,520
जिन चीजों को आप यह कहेंगे कि हां हमारे शास्त्र का यह अर्थ

604
00:42:09,520 --> 00:42:13,680
है। मैं उस पर काउंटर करूंगा। उसको कहते हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर

605
00:42:13,680 --> 00:42:17,840
परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म। मैं उस पर बात करता हूं। मैं

606
00:42:17,840 --> 00:42:21,840
यह नहीं कहूंगा कुरान तुमसे ज्यादा मुझे मालूम। ठीक है? तो यही

607
00:42:21,840 --> 00:42:25,920
अपेक्षा मैं भी आपसे करता हूं कि आपको हमारे शास्त्रों

608
00:42:25,920 --> 00:42:30,000
का अर्थ हमसे लेना चाहिए। अपने मन मुताबिक व्याख्या

609
00:42:30,000 --> 00:42:34,160
नहीं करनी चाहिए। तो वहां पर जो वशिष्ठ धर्म सूत्र है वहां

610
00:42:34,160 --> 00:42:38,160
ऐसी कोई बात नहीं है कि रमण करे कि 12 दिन तक वो तो करेगा व्रत और

611
00:42:38,160 --> 00:42:42,160
उसकी जो विवाहिता आई है जो अभी पूरी तरीके से विवाहिता नहीं है। वह जो

612
00:42:42,160 --> 00:42:46,800
है उसके बड़े भाई के साथ रह के रमण करेगी। यह सरासर आपका

613
00:42:46,800 --> 00:42:50,960
क्या कहेंगे? इसको घटिया सोच वाली बात कहेंगे। यह आपकी घटिया

614
00:42:50,960 --> 00:42:54,960
सोच वाली केवल एक आपकी जैसी मनोवृत्ति बन चुकी है। शायद हो सकता

615
00:42:54,960 --> 00:42:59,120
है आप पर भूतकाल में इतने प्रहार किए गए हो जिसकी वजह से आपका

616
00:42:59,120 --> 00:43:03,200
मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और हर जगह आपको रमण ही रमण दिखाई देता है।

617
00:43:03,200 --> 00:43:07,760
भोग ही भोग दिखाई देता है। तो

618
00:43:07,760 --> 00:43:11,760
आमिर हक और जो उनको सपोर्ट कर रहे हैं इस लाइव में वह यह

619
00:43:11,760 --> 00:43:16,000
जान लें कि यह जो वशिष्ठ धर्म सूत्र है परंपरा प्राप्त अर्थ उसका यह है

620
00:43:16,000 --> 00:43:20,080
कि वो वहां पर संरक्षण के दृष्टिकोण से उसको 12 दिन तक रहना

621
00:43:20,080 --> 00:43:24,240
है। वहां कोई रमण भोग विलास इत्यादि वाली बात नहीं

622
00:43:24,240 --> 00:43:28,400
लिखी है। ठीक है? [गला साफ़ करने की आवाज़] यह बातें क्लियर

623
00:43:28,400 --> 00:43:33,200
हो गई शास्त्रों निर्णय। अब एक बात और है

624
00:43:33,200 --> 00:43:37,200
कि जैसा कि इन्होंने वो जो लाइव स्ट्रीम चली

625
00:43:37,200 --> 00:43:42,240
है उस लाइव स्ट्रीम में यह जो मोमिना है इसने

626
00:43:42,240 --> 00:43:46,240
वहां पर जब हमने ये वाले श्लोक उद्रत किए कि भैया धर्मणी ना

627
00:43:46,240 --> 00:43:50,320
पशु भी समाना जिसका गुरु नहीं वो पशु है। तो ये बोलने लगी लो तुम

628
00:43:50,320 --> 00:43:54,640
तो पशु हो। तुम्हारे धर्म के हिसाब से तुम तो पशु हो। तो यह जो तुम नग्नता

629
00:43:54,640 --> 00:43:58,880
कर रही हो और जो दोगलापन कर रही जो कि मैं आगे दिखाने

630
00:43:58,880 --> 00:44:03,520
वाला हूं तो उसके हिसाब से तुमने अपने आप को काफिर मान लिया है

631
00:44:03,520 --> 00:44:06,000
और काफिर का अर्थ क्या होगा कि ईश्वर

632
00:44:06,000 --> 00:44:10,400
को ना मानने वाला और फिर तुम्हारे लोग ईश्वर को ना मानने वालों से पूछते हैं

633
00:44:10,400 --> 00:44:14,720
कि क्या आप जो है अगर ईश्वर को नहीं मानते हैं तो

634
00:44:14,720 --> 00:44:18,800
पत्नी के प्रति जो दृष्टि रखते हैं वही दृष्टि बहन के प्रति रखेंगे। वहां

635
00:44:18,800 --> 00:44:22,880
पर वही चीजें वह लाते हैं आपके लोग जिनका आप सपोर्ट करती हैं नास्तिकता

636
00:44:22,880 --> 00:44:27,120
के खंडन में। उस हिसाब से आप भी वही पशुत्व की ओर ही तो जा रही हैं।

637
00:44:27,120 --> 00:44:30,320
तो क्या माना जाए?

638
00:44:30,320 --> 00:44:34,320
क्या माना जाए? जब आपने अश्लीलता, दोगलापन, नग्नता

639
00:44:34,320 --> 00:44:38,320
अपनी ही सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर के कर दिया। ठीक है? ये तो आप

640
00:44:38,320 --> 00:44:42,400
मानेंगे ना। ये सब चीजें वहां से नहीं सिखाई गई। क्या मानेंगे? ये सिखाई गई है। कुरान

641
00:44:42,400 --> 00:44:46,480
से सिखाई गई है ये सब चीजें। यह मानते हैं यह जो आपने गंदगी कर

642
00:44:46,480 --> 00:44:50,560
रखी है दोगलापन जो आगे सिद्ध होने वाला है यह सब चीजें आपको कुरान से मिली

643
00:44:50,560 --> 00:44:54,720
है तो उसके हिसाब से क्या माना जाए जब कुरान को ना मानने वाला

644
00:44:54,720 --> 00:44:58,720
आपके हिसाब से तो नास्तिक हो गया नास्तिक हो गया तो माता बहन पत्नी में

645
00:44:58,720 --> 00:45:02,800
अंतर कहां से कर रहा है और जो अंतर नहीं करता वही पशु है

646
00:45:02,800 --> 00:45:06,880
वही पशु है तो अब इन वचनों का पर्यावसान किस में

647
00:45:06,880 --> 00:45:10,960
लिया जा सकता है ये वचन इस वजह से उद्ध्रत किए गए हैं कि आप गलत

648
00:45:10,960 --> 00:45:14,960
कर रहे हो ऐसा मत करो आपके शास्त्रों में ये लिखा सही हो जाओ ना

649
00:45:14,960 --> 00:45:20,160
कि पशु कह दिया गया। पशु घोषित नहीं कर दिया गया।

650
00:45:20,160 --> 00:45:21,280
इस वजह से है कि

651
00:45:21,280 --> 00:45:26,080
शास्त्र के इस वचन को देख के आप वापस आओ जो आप बिगड़ रहे हो।

652
00:45:26,080 --> 00:45:30,560
तो थोड़ा कॉमन सेंस थोड़ा इंटेलेक्चुअल थोड़ा मैच्योरिटी हां

653
00:45:30,560 --> 00:45:34,720
कोई है ही नहीं वहां पे। सब बकवास बातें करे जा रहे हैं। अपनी मनगढ़ंत बातें। अरे

654
00:45:34,720 --> 00:45:38,880
भैया तितर-बितर हो जाओगे। यह जितने लोग चौपाल

655
00:45:38,880 --> 00:45:43,200
लगाए हो ना मूर्खों की तितर-बितर तुमने अभी देखा है ना

656
00:45:43,200 --> 00:45:48,160
कि वो अरे वाह पंडित जी सोनाली जी को आपने मुंह बंद करा दिया

657
00:45:48,160 --> 00:45:52,480
मुंह बस टेप लग जाएगा आप लोगों के जिस दिन सामना होगा कभी

658
00:45:52,480 --> 00:45:56,880
अब सामने आने वाली बात भी अंत तक बने रहिए बताता हूं कैसे होगा

659
00:45:56,880 --> 00:46:01,520
तो यहां तक हो गई है। अब इसके बाद अगला चैप्टर है इनका दोगलापन

660
00:46:01,520 --> 00:46:06,560
दिखाएंगे। अब आप लोगों को जो अपना ओपिनियन रखना हो आप लोग करके

661
00:46:06,560 --> 00:46:11,200
नहीं यह जो जितने भी आपने बातें बताई ना जो आक्षेप जो लगे

662
00:46:11,200 --> 00:46:15,200
तो इन्होंने आक्षेप की तरह बताए और आपने उसका जो भी

663
00:46:15,200 --> 00:46:19,360
क्लेरिफिकेशन जो दिया अच्छा यही प्रश्न जब इनसे जो समाजियों

664
00:46:19,360 --> 00:46:24,000
से और रामपालियों से जब इनके समक्ष यह प्रश्न आते हैं तो यह वहां पर

665
00:46:24,000 --> 00:46:28,080
प्रक्षिप्त का सहारा लेते हैं। यह उसका इतनी

666
00:46:28,080 --> 00:46:33,040
अच्छे से एक्सप्लेनेशन नहीं दे पाते शिव जी जैसे आपने दिया। तो

667
00:46:33,040 --> 00:46:36,560
यह तभी सारे जवाबों मतलब जवाब

668
00:46:36,560 --> 00:46:40,640
दे पा दे पाते हैं। हम जैसे आप जैसे परंपरा

669
00:46:40,640 --> 00:46:44,880
से जो दीक्षित शिक्षित हैं जब उनका

670
00:46:44,880 --> 00:46:49,200
जो व्याख्या है वो हमें हमारे आचार्यों से प्राप्त हो। है ना?

671
00:46:49,200 --> 00:46:53,360
तो आचार्यों से जब आपको सही व्याख्या प्राप्त होगी तभी तो आप बता पाओगे कि विदेश

672
00:46:53,360 --> 00:46:57,840
गमन का क्या अर्थ है। है ना? और शिक्षा

673
00:46:57,840 --> 00:47:02,000
वेदाधिकार का क्या अर्थ है? यह तभी आप बता पाओगे जब आपको वह अर्थ

674
00:47:02,000 --> 00:47:06,640
मिला है परंपरा प्राप्त आचार्यों से। अदरवाइज क्या होगा? वह आक्षेप

675
00:47:06,640 --> 00:47:10,720
वही है सारे जो ये मैंने सुने हैं इनके चैनल पे भी रामपालियों के और

676
00:47:10,720 --> 00:47:14,720
इन पे ये सारे वही आक्षेप है। तो ये वहां पर फिर

677
00:47:14,720 --> 00:47:18,800
जो हमारे आर्य समाज जी हैं। वो क्या करते हैं। बोलते है ये तो जी प्रक्षिप्त

678
00:47:18,800 --> 00:47:22,960
है। हम इसको मानते नहीं है। वहां पर फिर आप शास्त्रों को नकारना शुरू कर देते हो या

679
00:47:22,960 --> 00:47:27,040
फिर उसका अर्थ अपने अनुसार करना शुरू कर देते हो जो कि

680
00:47:27,040 --> 00:47:31,120
उसका सही अर्थ नहीं है। तो अच्छा

681
00:47:31,120 --> 00:47:35,120
मटेरियल कहां से जा रहा है इनके पास इनके सब इनके पास जो सारा मटेरियल

682
00:47:35,120 --> 00:47:39,360
जा रहा है वो कहीं ना कहीं कर्मणा वालों से तो जा रहा है जो शास्त्रों

683
00:47:39,360 --> 00:47:43,440
को नकारते हैं उन्हीं से तो सारा मटेरियल वहां पर जा रहा है ये भी

684
00:47:43,440 --> 00:47:47,600
बात है तो आपने तो सारे पॉइंट क्लियर कर दिए

685
00:47:47,600 --> 00:47:53,440
बहुत बढ़िया तरीके से आपने बताया और मुझे लगता है और

686
00:47:53,440 --> 00:47:57,600
एक चीज और उठाई गई थी गोमेद यज्ञ

687
00:47:57,600 --> 00:48:01,600
और ये तो ये आर्य समाजियों से सीखती हो ना

688
00:48:01,600 --> 00:48:06,080
आप अवेकिनिंग भारत जी सोनाली जी उसी का नतीजा है।

689
00:48:06,080 --> 00:48:10,080
हम इसीलिए लड़ते हैं। हम इसीलिए विरोध करते हैं। थाली में परोस कर देते

690
00:48:10,080 --> 00:48:14,400
हैं ना हमारी चीजों को। परंपरा से पढ़ना समझना है नहीं।

691
00:48:14,400 --> 00:48:18,400
अब गोमेद यज्ञ भी बोल रहे हैं वो। अरे ये तो गाय भी खाते हैं।

692
00:48:18,400 --> 00:48:22,720
और गाय खाने वाली बात उठाई किसने? कि दयानंद जी को शयणाचार्य

693
00:48:22,720 --> 00:48:26,880
का विरोध करना है। तो जहां साहब उन्होंने जो है गाय की बलि मांगी। करपात्री

694
00:48:26,880 --> 00:48:31,520
जी ने गाय की बलि मानी। सुन लो। करपात्री जी ने अपने

695
00:48:31,520 --> 00:48:35,600
ग्रंथ में बहुत तार्किक और प्रामाणिक व्याख्या की है। कोई गाय

696
00:48:35,600 --> 00:48:39,760
की बलि कहीं नहीं दी गई है यज्ञ में। ठीक है? अब ये जो गोमेद शब्द

697
00:48:39,760 --> 00:48:43,920
आता है उसको मेद से जोड़ के कि अश्वमेद में अश्व का वो है और

698
00:48:43,920 --> 00:48:47,920
उसमें भी तार्किक और प्रामाणिक व्याख्या है और कहां तक कहां तक के लोग उसके

699
00:48:47,920 --> 00:48:52,000
अधिकारी हैं अश्वमेद इत्यादि में पशु यज्ञ में वो एक

700
00:48:52,000 --> 00:48:56,000
अलग विषय है मगर गोमेद मेध शब्द

701
00:48:56,000 --> 00:49:00,000
आ जाने से गोमेद लिखा होने से मान लेते हैं लोग कि अरे ये तो जो

702
00:49:00,000 --> 00:49:04,480
है गाय को भी नहीं छोड़ा तो करपात्री जी ने इस विषय में प्रॉपर एक्सप्लेनेशन

703
00:49:04,480 --> 00:49:08,720
दिया तार्किक और प्रामाणिक मैंने कहा जितने भी ये जो शास्त्रीय निर्णय

704
00:49:08,720 --> 00:49:12,880
वाले जो विषय हैं इन पर मैं अलग से एक वीडियो बनाने

705
00:49:12,880 --> 00:49:17,040
वाला हूं अलग से वो इसी मैटर को लेकर ही होगा उसमें ये सारे पॉइंट्स

706
00:49:17,040 --> 00:49:21,120
जो विदेश यात्रा स्त्री शूद्र वेद अध्ययन पे तो हमने बनाया हुआ है अंतरजातीय

707
00:49:21,120 --> 00:49:25,120
विवाह पे बनाया हुआ है गोमेद गोमेद पे और ये जो हलाला

708
00:49:25,120 --> 00:49:29,120
वाला है हलाला वाला भी क्लियर है तो जो मोटे-मोटे पॉइंट है उनको लेकर के हम अलग

709
00:49:29,120 --> 00:49:33,280
से बनाएंगे उसमें तार्किक और प्रमाणिक व्याख्या होगी लॉजिकली क्यों सही है

710
00:49:33,280 --> 00:49:37,440
और हमारे जो शास्त्र है उसमें प्रमाण कहांहां मिलते

711
00:49:37,440 --> 00:49:41,840
वह भी हम देंगे। परंतु अभी के लिए जान लीजिए हमारे यहां पर गोमेद

712
00:49:41,840 --> 00:49:46,160
यज्ञ नहीं है। तो फिर गोमेद का मतलब क्या है? गोमेद का मतलब मेद

713
00:49:46,160 --> 00:49:50,160
से यह नहीं निकाला जा सकता कि वहां पर गाय की बलि ही है। ठीक है?

714
00:49:50,160 --> 00:49:54,720
क्योंकि हमारे यहां तो सर्वमेद यज्ञ भी है। सर्वमेद सबको

715
00:49:54,720 --> 00:49:59,120
बलि चढ़ा दो। यह समझे क्या उसका अर्थ? सर्वमेद

716
00:49:59,120 --> 00:50:03,280
यज्ञ नाम भी है। तो गोमेद से केवल यही अर्थ लेना कि वहां पर गौ की बलि

717
00:50:03,280 --> 00:50:07,360
है। गौ का उपयोग है यज्ञ में। वह गलत है। वहां पर किस-किस

718
00:50:07,360 --> 00:50:11,440
प्रकार से उसका क्या अर्थ लिया गया है शास्त्रों में शयनाचार्य का और

719
00:50:11,440 --> 00:50:15,520
फिर करपात्री जी का परंपरा प्राप्त आचार्यों का। इस पर हम एक वीडियो लाने वाले हैं।

720
00:50:15,520 --> 00:50:19,680
सुन लिया सोनाली जी भी सुन लें। आर्य समा जी भी सुन लें और

721
00:50:19,680 --> 00:50:23,680
इनके आधार पर यह जो लोग बोल रहे हैं ना मोमिना एंड कंपनी यह भी सुन

722
00:50:23,680 --> 00:50:24,180
लें।

723
00:50:24,080 --> 00:50:29,040
चलिए अब आ जाते हैं। हां

724
00:50:29,040 --> 00:50:35,040
शास्त्रवाद जी आपको कुछ कहना हो तो बताएं।

725
00:50:35,440 --> 00:50:39,440
मुझे भी आप ही मुझे बहुत अच्छा है। सब क्लेराफाई कर दे

726
00:50:39,440 --> 00:50:44,160
रहे हैं सब चीज को। लोग समझे इस चीज को।

727
00:50:44,160 --> 00:50:46,440
जी

728
00:50:46,440 --> 00:50:50,800
[गला साफ़ करने की आवाज़] चलिए ठीक है। अब आते हैं इनके दोगलेपन।

729
00:50:50,800 --> 00:50:54,800
ठीक है? तो दोगलापन इन्होंने शुरू किया है।

730
00:50:54,800 --> 00:50:59,520
उसमें एक क्लिप मैं इनकी नहीं दिखाऊंगा। मुफ्ती जी की क्लिप दिखाऊंगा।

731
00:50:59,520 --> 00:51:03,600
इन्होंने एक जगह पर सोनाली जी जहां पर मुझे उत्तर देते

732
00:51:03,600 --> 00:51:07,600
टाइम अटक रही हैं कुछ हल्का सा ऐसे कर रही तो वहां पर यह मजाक उड़ा रही हैं

733
00:51:07,600 --> 00:51:11,840
सोनाली जी का तो ऑपरेटर जी जरा मुफ्ती जी का वो वन नंबर

734
00:51:11,840 --> 00:51:17,280
का वीडियो दिखाइए जरा इनको

735
00:51:17,280 --> 00:51:21,360
यह क्या कर रही हैं बहुत सूक्ष्मता से सोनाली जी का वहां पे मजाक

736
00:51:21,360 --> 00:51:25,520
बनाने के लिए एक-एक फेस का एक्सप्रेशन ले ले के अरे यह बड़ा करके

737
00:51:25,520 --> 00:51:29,600
उसको बात कर रही है उस पर तो अब हम दिखाते हैं कि आपके मुफ्ती जी कैसे अटके

738
00:51:29,600 --> 00:51:35,600
थे हमसे बात करते समय देखिए भैया चलाइए

739
00:51:35,840 --> 00:51:39,840
ऑपरेटर जी सुन रहे हैं मुझे

740
00:51:39,840 --> 00:51:43,280
हम

741
00:51:43,280 --> 00:51:47,280
12 सेकंड वाला मैं फिक्स मान लेता हूं कि खुदा में ऐब नहीं हो

742
00:51:47,280 --> 00:51:51,280
सकते जो ऐब पॉज पॉज करो ये देखो पॉज करो

743
00:51:51,280 --> 00:51:55,440
इनके हाथ पैर देखो कैसे चल रहे हैं इस समय ये फंस चुके हैं यहां मुफ्ती जी ये समझ लीजिए

744
00:51:55,440 --> 00:51:59,680
ये जो चर्चा है ना कि ईश्वर की कही हुई बात को

745
00:51:59,680 --> 00:52:04,240
आपने प्रमाण कैसे माना है ना हमारे यहां जो वेद को अपुषय

746
00:52:04,240 --> 00:52:08,320
कहा गया है वो क्यों कहा गया है और यहां मुफ्ती जी के चेहरे के एक्सप्रेशन आप

747
00:52:08,320 --> 00:52:12,400
देखिए कैसे वो फड़फड़ कर रहे हैं ये सब ये ऊपर नीचे जो हो

748
00:52:12,400 --> 00:52:16,640
रहा है आप समझिए यहां फंस चुके हैं और अभी देखिएगा मेरी एक

749
00:52:16,640 --> 00:52:20,720
एक लॉजिकल बात का क्या इलॉजिकल जवाब होगा नहीं बनाया

750
00:52:20,720 --> 00:52:24,720
हां ऐप का क्रिएट करना [हंसी] ऐडदार नहीं बना रहे इंसान ऐप का

751
00:52:24,720 --> 00:52:28,880
क्रिएट करना ऐपदार नहीं बना रही अब अब ये क्या हो रहा है मुफ्ती

752
00:52:28,880 --> 00:52:32,880
जी को? ये क्या हो गया? यहां क्या

753
00:52:32,880 --> 00:52:36,880
करेंगी आप? मोमिना जी मुफ्ती जी का तो

754
00:52:36,880 --> 00:52:40,880
आपने पर्दाफाश कर दिया। बेनकाब कर दिया आपने मुफ्ती जी को। ऐसे ही ऐसे ही हंसी उड़ाई

755
00:52:40,880 --> 00:52:45,040
थी ना हमारी बहन की। ऐसे ही हंसी उड़ाई थी ना उनकी सोनाली

756
00:52:45,040 --> 00:52:49,520
जी की। अब बाबा हां तो

757
00:52:49,520 --> 00:52:51,040
देखो ऐसा है हमारे अंदर

758
00:52:51,040 --> 00:52:55,280
का आपस का मामला है तब तक हम पांच वो 100 हो सकता

759
00:52:55,280 --> 00:52:59,360
है कोई बाहर का आ जाएगा तो हमें 105 समझना अकेला

760
00:52:59,360 --> 00:53:02,480
मत समझना किसी को ठीक है ये

761
00:53:02,480 --> 00:53:06,640
अपने मुफ्ती जी को देख लो एक बार एक बार और दिखा दो

762
00:53:06,640 --> 00:53:10,720
भैया मुफ्ती जी कादार नहीं बनाता दिखा

763
00:53:10,720 --> 00:53:16,720
दो ना जी आप कैमरा बंद कर लीजिए

764
00:53:16,880 --> 00:53:21,680
दिखाओ ऑपरेटर जी एक बार और

765
00:53:21,680 --> 00:53:27,680
[गला साफ़ करने की आवाज़]

766
00:53:28,000 --> 00:53:32,160
बात फिक्स कर लेता हूं कि खुदा ने ऐब नहीं सकते जो ऐब वाले

767
00:53:32,160 --> 00:53:36,480
लोग हैं इनको खुदा ने बनाया कि नहीं बनाया ऐब का क्रिएट करना

768
00:53:36,480 --> 00:53:41,440
ऐबदार नहीं बनाते इंसान को ऐब का क्रिएट करना बनाया कि नहीं बनाया

769
00:53:41,440 --> 00:53:44,640
ऐब क्या क्रिएट

770
00:53:44,640 --> 00:53:48,640
कॉन्फिडेंस लेवल देख रहे हो बोलते समय। हालांकि वह इलॉजिकल बात बोल

771
00:53:48,640 --> 00:53:52,880
रहे हैं। ऐप को क्रिएट करना, बुराई को क्रिएट करना बुराई

772
00:53:52,880 --> 00:53:56,880
ही है। इससे आप सनातन सिद्धांतों के द्वारा ही

773
00:53:56,880 --> 00:54:02,880
ईश्वर को मुक्त कर सकते हो। नहीं कर पाओगे। आए थे अभी आपके

774
00:54:02,880 --> 00:54:06,880
कौन? कोई मुल्ला जी थे। आए थे। घंटों लगे

775
00:54:06,880 --> 00:54:12,000
रहे। छुड़ा ही नहीं पाए अपने आप को। और एक मोहतरमा और आई वो

776
00:54:12,000 --> 00:54:16,640
वो तो छोड़ के ही चली गई भैया मुझसे मुझे सब सवालों जवाब मुझसे मत पूछो

777
00:54:16,640 --> 00:54:20,640
पूरा 9 दो 11 छुड़ा ही नहीं पाओगे ईश्वर को ऐब

778
00:54:20,640 --> 00:54:22,080
से ऐब

779
00:54:22,080 --> 00:54:26,080
को क्रिएट करना भी ऐब है। ठीक है? कोई व्यक्ति

780
00:54:26,080 --> 00:54:30,160
बम बना रहा है तो वो खासतौर पर तब जब उसे पता है कि ओबरॉय

781
00:54:30,160 --> 00:54:34,160
होटल में लगना है। ताज होटल में लगना है। तो तब वह इस मंशा से बम बम

782
00:54:34,160 --> 00:54:38,240
बना रहा है ना तो वह ऐब है। या तो यह

783
00:54:38,240 --> 00:54:42,240
मान लो कि बम फटा ही नहीं। प्रपंच रूपी संसार वह

784
00:54:42,240 --> 00:54:47,520
फिर हमारी हो जाएगी। समस्त कार्यों को करते हुए भी तू मुझे करता समय।

785
00:54:47,520 --> 00:54:51,840
ठीक है? तो आपके मुफ्ती जी का भी मजाक उड़ाइए। अगर आप न्यायप्रिय

786
00:54:51,840 --> 00:54:56,080
हैं। अगर आप दोगली नहीं है तो मैंने कहा था ना आप आगे दोगली सिद्धोंगी।

787
00:54:56,080 --> 00:55:00,560
दोगलापन आएगा आपके में। तो अगर आप न्यायप्रिय हैं।

788
00:55:00,560 --> 00:55:04,640
दोगली नहीं है तो आप जो है मुफ्ती जी का समीक्षा

789
00:55:04,640 --> 00:55:08,400
करिए। ये ये जो वो कर रहे हैं ना ये फड़फड़ा रहे हैं

790
00:55:08,400 --> 00:55:12,560
ऐसे ही पकड़ लिया था जैसे सोनाली जी का आपने हंसी उड़ाई ना ऐसे

791
00:55:12,560 --> 00:55:17,360
ही पकड़ ली थी शमसी से जुबान लो बताओ

792
00:55:17,360 --> 00:55:21,440
केवल विषयंतर कुछ नहीं था उसमें एक आदमी फंस रहा है दूसरा

793
00:55:21,440 --> 00:55:25,520
आकर दूसरा चैप्टर खोल रहा है यही हुआ था और अभी देखना आपका दोगलापन

794
00:55:25,520 --> 00:55:29,600
कैसे निकलेगा अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़]

795
00:55:29,600 --> 00:55:33,760
अब क्या है कि

796
00:55:33,760 --> 00:55:34,320
इसके

797
00:55:34,320 --> 00:55:38,560
बाद अब इनकी एक क्लिप आप चला दीजिए जहां

798
00:55:38,560 --> 00:55:42,560
पर यह खुद इस बात को स्वीकार कर रही हैं

799
00:55:42,560 --> 00:55:44,720
कि

800
00:55:44,720 --> 00:55:45,920
आर्य समाजी जो

801
00:55:45,920 --> 00:55:50,000
हैं वो अप्रामाणिक हैं। हम जो पर यह बात बिल्कुल सही है। आर्य

802
00:55:50,000 --> 00:55:54,080
समाजी अप्रामाणिक हैं। और मैं आर्य समाजियों के की

803
00:55:54,080 --> 00:55:58,720
परंपरा इसीलिए पूछता हूं उनसे कि उनका आधार लेकर के

804
00:55:58,720 --> 00:56:02,720
कोई मुस्लिम कोई क्रिश्चियन हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों का

805
00:56:02,720 --> 00:56:06,800
मनमाना अर्थ ना कर दे क्योंकि करेगा तो फिर ये कैसे

806
00:56:06,800 --> 00:56:11,040
तय करेंगे कि तुम्हारा अर्थ मान्य नहीं हमारा अर्थ मान्य तो यही वो तरीका है

807
00:56:11,040 --> 00:56:15,040
परंपरा जिसके आधार पर आप प्रसन्न हो रही हैं सोनाली

808
00:56:15,040 --> 00:56:20,080
जी को चुप होता हुआ देख के कि वाह पंडित जी बहुत अच्छा किया आपने

809
00:56:20,080 --> 00:56:24,320
जिसके आधार पर आप खुश हो रही हैं। उसी आधार पर ही आपके

810
00:56:24,320 --> 00:56:28,640
लोगों का खंडन होता है सारा का सारा क्योंकि वह हमारे

811
00:56:28,640 --> 00:56:32,960
किए हुए अर्थ के विपरीत अर्थ प्रस्तुत करते हैं। हमारे शास्त्रों का

812
00:56:32,960 --> 00:56:36,960
परंपरा के विरुद्ध जाकर के तो यहां देखिए

813
00:56:36,960 --> 00:56:41,280
इनका पहले आर्य समाजियों को ये मूल

814
00:56:41,280 --> 00:56:45,360
सनातन धर्म नहीं मानती हैं। ये देख लीजिए। अब इनका दोगलापन देखिएगा यहां

815
00:56:45,360 --> 00:56:49,360
से। बहुत ही कोई घटिया औरत है। यह तो अब मेरे पैरों में गिरकर

816
00:56:49,360 --> 00:56:53,680
माफी मांगकर भी डिबेट करने की बात करेगी। मैं तब भी ना करूं। पॉज

817
00:56:53,680 --> 00:56:57,840
करिए। एक बात बता दूं मैं आपको इसमें इतनी अश्लीलता

818
00:56:57,840 --> 00:57:01,840
है इस वीडियो में। कई जगह मुझे अलग से भी कट लगाने पड़े

819
00:57:01,840 --> 00:57:05,840
कि वो गंदे शब्द यहां ना आ जाए। बहुत अश्लीलता है।

820
00:57:05,840 --> 00:57:09,920
मतलब कोई उसके पैरामीटर नहीं। इतना अश्लीलता इन्होंने परोसी है वहां।

821
00:57:09,920 --> 00:57:13,120
चलिए

822
00:57:13,120 --> 00:57:15,040
इससे टोटल

823
00:57:15,040 --> 00:57:19,200
लो आईक्यू और इसकी इसकी सपोर्ट में कौन गया है? आर्या

824
00:57:19,200 --> 00:57:23,760
समाजी इसके पीछे आर्या समाजी इसकी सपोर्ट में गया था। दोनों एक जैसे

825
00:57:23,760 --> 00:57:27,920
दोनों ही खुद भी आर्य समाजी ये खुद भी आर्य समाजी है। अच्छा

826
00:57:27,920 --> 00:57:32,080
खुद भी है। तो बोल नहीं रही हो। आगे से क्या आगे से बकवास करती है। मैं फलानी

827
00:57:32,080 --> 00:57:36,240
उसको परंपरा को मानती हूं। मैं फलानी को मानती हूं। कोई परंपरा समाजों का

828
00:57:36,240 --> 00:57:40,400
उनका सिर्फ दयालत होता है ना। उनका गुरु होता है। उसके गुरु होता है। इसीलिए वो फंस रहे हैं। जब

829
00:57:40,400 --> 00:57:44,640
उनसे पूछा जा रहा है परंपरा क्या है? तो वो बता नहीं पा रही है क्योंकि आर्य समाज की परंपरा नहीं है।

830
00:57:44,640 --> 00:57:48,880
समाज में ये कहा जाता है कि दयानंद जो है ना 18वीं सदी या 19वीं सदी में वो

831
00:57:48,880 --> 00:57:49,680
बहुत इनफीरियर

832
00:57:49,680 --> 00:57:53,840
मतलब कर रहा था। ये देख रहा था कि मुसलमानों में क्रिश्चियन में आइडल वरशिप नहीं था। और उनमें

833
00:57:53,840 --> 00:57:58,480
थोड़ा इक्वालिटी है कंपेयर टू सनातन धर्म। तो उसने अपने धर्म को थोड़ा इंप्रोवाइज कर लिया।

834
00:57:58,480 --> 00:58:02,640
और थोड़ा अपडेटेड कर लिया। जैसे कि वो आर्य समाज का इसलिए पक्ष ले रहे हैं क्योंकि

835
00:58:02,640 --> 00:58:06,880
वहां पे मतलब गंदगी है लेकिन कंपेयर टू नॉर्मल सनातन धर्म कम गंदगी होगी।

836
00:58:06,880 --> 00:58:10,960
जैसे मूर्ति पूजा मतलब बकारा शूट करेंगे तो वो कह लेंगे ना मूर्ति पूजा में नहीं मानते

837
00:58:10,960 --> 00:58:15,120
तो बहुत चीजें हैं आर्य समाजों में जो गंदगी है लेकिन कॉमन

838
00:58:15,120 --> 00:58:19,280
क्योंकि वो पुराण में नहीं मानते ना आर्य समाज तो यहां पे जब मुसलमान डिबेट करेगा तो पुराणों

839
00:58:19,280 --> 00:58:23,520
का हवाला नहीं दे पाएगा क्योंकि उन्होंने पहले ही पुराणों को रिजेक्ट कर ली तो आर्गुममेंट्स

840
00:58:23,520 --> 00:58:28,400
थोड़े कम हो जाते हैं फिर आर्य समाजों के लिए जब डिबेट करते हैं फिर सही

841
00:58:28,400 --> 00:58:32,640
सही ठीक है और इसमें इन्होंने फिर आगे ये तो उदाहरणार्थ

842
00:58:32,640 --> 00:58:36,880
मात्र था इन्होंने आगे कई बार इस चीज को माना है कि हां हां

843
00:58:36,880 --> 00:58:41,120
भाई जो परंपरा से बात आ रही है वह मानी जाएगी और ये आर्य समाजी जैसे

844
00:58:41,120 --> 00:58:44,720
लोगों की नहीं मानी जाएगी। इस पर इन्होंने समर्थन प्रकट कर दिया।

845
00:58:44,720 --> 00:58:48,800
अच्छा इसमें जो एक बात आ रही है कि पुराणों का जवाब नहीं दे पाएंगे तो

846
00:58:48,800 --> 00:58:53,040
उसका हमने बता दिया परंपरा प्राप्त जो लोग हैं वो आपको हर

847
00:58:53,040 --> 00:58:57,040
चीज का सही अर्थ बताएंगे और तब आप उस सिद्धांत को काट भी नहीं पाएंगे।

848
00:58:57,040 --> 00:59:01,520
तो यह वाली जो बात है ना कि वह मूल सनातन धर्म में बहुत गंदगी है। कंपेरेटिवली

849
00:59:01,520 --> 00:59:05,600
टू आर्य समाज से ज्यादा गंदगी है। तो पहली बात तो यह गंदगी

850
00:59:05,600 --> 00:59:10,000
के वह जो अर्थ है ना जो आप लोग लेते हो आज उसके अर्थ को बताने

851
00:59:10,000 --> 00:59:14,080
वाले आपको क्या कहते हैं अनर्थ के रूप में आपको अर्थ प्रस्तुत करने

852
00:59:14,080 --> 00:59:18,240
वाले आर्य समाजी टाइप के ही लोग हैं जिन्होंने अपने फायदे के लिए जो

853
00:59:18,240 --> 00:59:22,560
आदि दैविक आदि भौतिक आध्यात्मिक घटनाएं हैं उनका गलत चित्रण प्रस्तुत

854
00:59:22,560 --> 00:59:26,640
करके अपना प्रचार तंत्र खड़ा किया उसी प्रचार तंत्र

855
00:59:26,640 --> 00:59:30,640
का बाद में आकर के आप जैसे मोमिनों ने सहारा लेना शुरू कर दिया मगर जिस दिन किसी

856
00:59:30,640 --> 00:59:34,960
पक्के सनातनी से सामना होगा तो अब बबा हो जाएगा

857
00:59:34,960 --> 00:59:39,040
जैसे अभी मुफ् जी का आपने देखा था। अभी आगे देखिएगा आपका दोगलापन और

858
00:59:39,040 --> 00:59:43,040
सिद्ध होगा। कैसे होगा बताता हूं। तो यह तो बात क्लियर हो गई

859
00:59:43,040 --> 00:59:47,040
कि कोई गंदगी नहीं है। हमारे पास सभी बातों का उत्तर है। जैसे अभी आपका उत्तर दिया ना

860
00:59:47,040 --> 00:59:53,040
आप सनातनी अलाला नाम से वीडियो बना रहे हो। ठीक है? दूसरी बात

861
00:59:53,040 --> 00:59:57,440
कि अब इन्होंने इसमें ये मान लिया है कि मूल सनातन धर्म क्या है?

862
00:59:57,440 --> 00:59:58,640
परंपरा।

863
00:59:58,640 --> 01:00:03,440
मूल सनातन धर्म जो परंपरा प्राप्त जो हमारे प्रमाणिक

864
01:00:03,440 --> 01:00:07,440
हैं आचार्य गण वह सनातन धर्म है। तार्किक व्याख्या भी ये हो गई

865
01:00:07,440 --> 01:00:11,440
कि भैया कैसे आए वेद हम तक तो मानना पड़ेगा कि हमसे आए प्रमाणिक आचार्यों

866
01:00:11,440 --> 01:00:15,600
से आए। तो मूल सनातन धर्म इन्होंने मान लिया मोमिना ने कि वही है और आहार समाजी

867
01:00:15,600 --> 01:00:19,680
जो है अप्रामाणिक है। अब जरा इनके मुफ्ती जी का

868
01:00:19,680 --> 01:00:23,760
सेकंड नंबर वाला वीडियो चलाइए आप।

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01:00:23,760 --> 01:00:26,960
देखिए आपने कैसे बेनकाब किया है अपने मुफ्ती जी को

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01:00:26,960 --> 01:00:31,200
जो आज से चार साल पहले जब हम गए थे तो वहां पर

871
01:00:31,200 --> 01:00:35,280
हमारी लॉजिकल चीजों को आप जिसको लॉजिकल मान रही हैं उसको आपके

872
01:00:35,280 --> 01:00:41,280
मुफ्ती जी क्या कर रहे हैं देखिए 12 सेकंड बाद चलाइए

873
01:00:42,960 --> 01:00:44,880
नहीं बना भाई स्वामी दयानंद

874
01:00:44,880 --> 01:00:49,040
सरस्वती साहब ने उस भूमिका के अंदर वो कहते हैं कि ईश्वर कभी भी जिस्म ले नहीं

875
01:00:49,040 --> 01:00:55,040
सकता चीज पूछना चाहूंगा आपसे कि जैसे कुरान के

876
01:00:55,680 --> 01:00:59,760
यहां पर हिंदू लोग देख ले सनातनी लोग देख ले कि

877
01:00:59,760 --> 01:01:04,080
मुस्लिमों को जब हम जैसे सनातनियों से परंपरा प्राप्त सनातनियों से बचना

878
01:01:04,080 --> 01:01:08,800
होता है ना तो वो कहां पहुंचते हैं आर्य समाजियों की शरण में सैद्धांतिक

879
01:01:08,800 --> 01:01:12,800
विरोधी ये सब नहीं तुम्हारे यहां हलाला होता है हमारे यहां ये होता है तुम्हारे यहां भी तो ये होता है ये सब कुछ

880
01:01:12,800 --> 01:01:16,800
नहीं सीधे मूल प्रश्न ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि

881
01:01:16,800 --> 01:01:20,800
नहीं मूल प्रश्न वो किसी को पुश कर

882
01:01:20,800 --> 01:01:25,200
सकता है पुल कर सकता है कि नहीं? मूल प्रश्न धक्के

883
01:01:25,200 --> 01:01:29,440
का विषय बन सकता है कि नहीं? 1 लाख वर्ष की आयु वाला व्यक्ति बना

884
01:01:29,440 --> 01:01:33,440
सकता है कि नहीं? जड़ पदार्थों में प्राण डाल

885
01:01:33,440 --> 01:01:37,440
सकता है कि नहीं? मूल प्रश्न। ठीक

886
01:01:37,440 --> 01:01:41,680
है? तो जब इनसे जब इनसे बचना होता है ना ये आर्य

887
01:01:41,680 --> 01:01:46,080
समाजियों की शरण में जाते हैं। आर्य समाजियों का साथ दे साथ लेते हैं। और

888
01:01:46,080 --> 01:01:50,400
यही कारण है कि आर्य समाजियों का मैं विरोध करता हूं। उनके इन सिद्धांतों

889
01:01:50,400 --> 01:01:54,480
हां भाई तो अब बात यह आ जाती है कि यहां

890
01:01:54,480 --> 01:01:58,480
पर यह उनहीं अप्रामाणिक लोगों को लेकर आ रहे हैं जिनको आपने रिजेक्ट किया हुआ है

891
01:01:58,480 --> 01:02:02,560
मोमिना जी आपके मुफ्ती और आवाज अकबाई जो आपके लिए बहुत बड़े तुर्रम

892
01:02:02,560 --> 01:02:06,560
खान है तोप के गोले हैं तोप के गोले हैं ना आपकी लाइफ में आपने इस तरह

893
01:02:06,560 --> 01:02:10,720
की बातें की है ये आप इनको बहुत बड़ा धुरंधर मानती हैं है

894
01:02:10,720 --> 01:02:14,800
ना तो धुरंधर है तो देखिए क्या इलॉजिकल बातें कर रहे

895
01:02:14,800 --> 01:02:18,880
हैं जो 100 साल पहले जो इंप्रोवाइज करके मूल सनात से

896
01:02:18,880 --> 01:02:23,040
हटके जो बनाई बनाया गया बनाया गया सेट है उसको आधार लेकर के

897
01:02:23,040 --> 01:02:27,040
कह रहे हैं नहीं तुम्हारे सनातन धर्म में तो अवतार को माना ही नहीं गया जब हम कह रहे हैं कि

898
01:02:27,040 --> 01:02:31,200
तुम्हारा ईश्वर अवतार क्यों नहीं ले सकता समझे तो

899
01:02:31,200 --> 01:02:35,440
किसका सहारा ले रहे हैं अप्रामाणिकता का तो यहां लॉजिकल भी खत्म और

900
01:02:35,440 --> 01:02:39,440
आपका भी विरोध लॉजिक भी खत्म हो गया और आपने उस लॉजिक को

901
01:02:39,440 --> 01:02:43,760
स्वीकार किया तो आपका भी विरोध हो गया जिस लॉजिक के कारण आप सोनाली

902
01:02:43,760 --> 01:02:48,080
को हारा हुआ मान रही हैं उसको क्रिटिसाइज कर रही है उसी लॉजिक

903
01:02:48,080 --> 01:02:52,080
के आधार पर आपके मुफ्ती और ये आवाज हक जो आपके तोप के गोले

904
01:02:52,080 --> 01:02:56,240
हैं यह धाराशाही हो रहे हैं। उसी लॉजिक के आधार पर कब करोगे

905
01:02:56,240 --> 01:03:00,880
इनकी समीक्षा? न्यायप्रिय हो ना तो करना इनकी समीक्षा

906
01:03:00,880 --> 01:03:05,040
इस चर्चा की कि भाई आवाज हक या तुमने 100 साल पहले आए हुए को

907
01:03:05,040 --> 01:03:09,120
सनातन धर्म क्यों मान लिया? जब मूल सनातन धर्म वाले तो कह रहे हैं मूर्ति पूजा है।

908
01:03:09,120 --> 01:03:09,760
अवतार

909
01:03:09,760 --> 01:03:13,760
है। क्यों मान रहे हो? आवाज हक भाई। क्यों बचने का रास्ता ढूंढ रहे हो? जवाब दो

910
01:03:13,760 --> 01:03:17,920
ना। खुदा अवतार क्यों नहीं ले सकता? यह जवाब दो।

911
01:03:17,920 --> 01:03:21,920
यह मत बताओ कि दयानंद जी ने तुम्हारा अवतार नहीं ले सकता। सुनाओ इनको

912
01:03:21,920 --> 01:03:24,320
दोबारा।

913
01:03:24,320 --> 01:03:30,320
12 से सुनाओ। 12 से

914
01:03:30,880 --> 01:03:35,040
सरस्वती साहब ने उस भूमिका के अंदर वो कहते हैं कि ईश्वर कभी भी जिस्म ले नहीं

915
01:03:35,040 --> 01:03:39,120
सकता। चीज पूछना चाहूंगा आपसे कि जैसे कुरान के बारे में ये

916
01:03:39,120 --> 01:03:43,120
भी कहा जाता है कि उसमें शैतान ने ये कर दिया था वो कर दिया। सलमान बोलता

917
01:03:43,120 --> 01:03:47,200
है। मैं आपकी हेल्प कर दूं। आती है। मेरा सवाल ये है कि आप ही की

918
01:03:47,200 --> 01:03:51,200
बात को क्यों माना जाए? उनकी बात एक मिनट आमिर भाई

919
01:03:51,200 --> 01:03:55,920
आप समझते हैं कि स्वामी दयानंद सरस्वती

920
01:03:55,920 --> 01:04:00,310
और सलमान गुरुदी दोनों इक्वली स्टेटस के हैं। बिल्कुल

921
01:04:00,310 --> 01:04:04,400
[हंसी] दयानंद सरस्वती जो है वो प्रमाणिक गुरु नहीं है। सर्ट सर्टिफाइड नहीं

922
01:04:04,400 --> 01:04:06,560
है।

923
01:04:06,560 --> 01:04:10,560
सुन लिया? तो यही बात जो तुम अभी मान

924
01:04:10,560 --> 01:04:15,360
रही हो कि वह सर्टिफाइड नहीं है। वह मूल सनातनी नहीं है। इंप्रोवाइज

925
01:04:15,360 --> 01:04:19,360
करके हैं। चेंज किए हुए हैं। वो सर्टिफाइड नहीं है। नकली है

926
01:04:19,360 --> 01:04:23,520
हिंदू के नाम पे। सनातना भाष है। जो तुम मान रही हो। वो तुम्हारे

927
01:04:23,520 --> 01:04:24,800
मुफ्ती नहीं

928
01:04:24,800 --> 01:04:28,880
मान रहे हैं और उसी आधार पर हमारा काउंटर कर रहे हैं। अब या तो तुम सही

929
01:04:28,880 --> 01:04:32,960
हो या यह सही है। मेरी दृष्टि में मेरी जानकारी में तो तुम ही सही

930
01:04:32,960 --> 01:04:36,960
हो। तुमने सही होकर के तुमने मेरी चीजों को समर्थन देकर

931
01:04:36,960 --> 01:04:41,280
के सोनाली से द्वेष निकालने के चक्कर में अपने आकाओं को धाराशाही

932
01:04:41,280 --> 01:04:45,280
सिद्ध कर दिया। बेनकाब कर दिया। अभी तक जो

933
01:04:45,280 --> 01:04:49,280
वो चोला ओढ़े थे ना कि हम उस चर्चा में हमारी विजय हुई थी। तुमने उस चर्चा

934
01:04:49,280 --> 01:04:53,280
में उनकी जो पराजय है उसको घोषित कर

935
01:04:53,280 --> 01:04:57,360
दिया। हमारे लॉजिकल और प्रामाणिक

936
01:04:57,360 --> 01:05:01,600
आर्गुममेंट को समर्थन करके। थैंक यू। आई

937
01:05:01,600 --> 01:05:05,680
थी ना? हमारी हमारे बीच की आपसी वाद विवाद

938
01:05:05,680 --> 01:05:09,760
का फायदा उठाने आई थी ना जाओ करो जाके इन मुफ्तियों

939
01:05:09,760 --> 01:05:15,680
का आवाज हक का समीक्षा करो इनकी कैसा आदमी है

940
01:05:15,680 --> 01:05:19,920
तुझसे लॉजिकल बात पूछी गई है तुझसे वो पूछ रहा है भैया

941
01:05:19,920 --> 01:05:24,160
उसका क्यों माना जाए उसका क्यों नहीं माना जाए ऐसे बोलो वहां जाके तू तड़ाक

942
01:05:24,160 --> 01:05:30,160
में निष्पक्ष बनो ना मोमिना जी क्या हो गया

943
01:05:30,400 --> 01:05:34,800
शायद किसी ठीक ठीक-ठाक व्यक्ति से पाला नहीं पड़ा है। इसलिए

944
01:05:34,800 --> 01:05:39,120
सब खोल खाल के बैठे हो आप लोग।

945
01:05:39,120 --> 01:05:43,120
चलो आगे अब इनका ये दोगलापन

946
01:05:43,120 --> 01:05:47,120
देख लिया। खुद आर्य समाज जी को गलत समझती हैं और

947
01:05:47,120 --> 01:05:51,360
इनके आका लोग आर्य समाज जी को प्रमाणिक मानते हुए हम हमसे बचने का प्रयास

948
01:05:51,360 --> 01:05:55,440
करते हैं। वो तो हमारे पास परंपरा है। हम वहां पर भी दे रहे हैं। जैसे हमने सोनाली

949
01:05:55,440 --> 01:05:59,440
से पूछा तुम कौन होते हो बताने वाले? ये लिखा है। ऐसे ही

950
01:05:59,440 --> 01:06:03,440
हमने तुम्हारे मुफ्तियों से पूछा था। तो अगर सोनाली से पूछने में तुम हमारा समर्थन कर

951
01:06:03,440 --> 01:06:07,920
रही तो यहां भी समर्थन कर देना। वीडियो कब बना रही हो ये जरूर बताना।

952
01:06:07,920 --> 01:06:12,160
तुम्हारे दीन में यह तो बताया होगा ना कि भैया ये वो वो मत करना। न्याय

953
01:06:12,160 --> 01:06:16,720
करना। न्यायप्रिय है कि नहीं दीन कि दोगलापन सिखा रहा है। क्या है?

954
01:06:16,720 --> 01:06:20,800
क्या मानू? मैं वही मानूंगा जो तुम दिखाओगी। तो या तो तुम

955
01:06:20,800 --> 01:06:25,040
निष्पक्ष उसकी समीक्षा करो बैठकर के कि भैया तुम दयानंद को

956
01:06:25,040 --> 01:06:29,200
लाए क्यों? पहले तो ये बताओ। तुम ये जवाब दो ना कि अवतार क्यों नहीं ले सकता? इस पर रहो ना।

957
01:06:29,200 --> 01:06:33,280
तुम दयानंद को ला क्यों रहे हो? ला रहे हो तो वह लॉजिकल आर्गुममेंट दे रहा है

958
01:06:33,280 --> 01:06:37,360
कि दयानंद जी परंपरा से नहीं है प्रामाणिक नहीं है तो उसका आर्गुममेंट

959
01:06:37,360 --> 01:06:41,440
स्वीकार करो। फिर तुम परंपरा को भी खंडित करने में जा रहे हो। इन्होंने परंपरा के

960
01:06:41,440 --> 01:06:46,640
लिए क्या कहा कि विष्णु पुराण में कहा गया है कि

961
01:06:46,640 --> 01:06:50,720
जब शुरुआत होती है सृष्टि की तो इतने

962
01:06:50,720 --> 01:06:54,400
लाख जो है श्लोक होते हैं और कलयुग आते-आते

963
01:06:54,400 --> 01:06:58,480
आज श्लोक बहुत कम है। मंत्र बहुत कम है। इतने मंत्र होते हैं मंत्र बहुत कम। तो

964
01:06:58,480 --> 01:07:02,560
मैंने वहां पर संक्षिप्त उत्तर यही है कि जो

965
01:07:02,560 --> 01:07:06,720
मंत्र पहली बात तो हमारे यहां देवी देवलोक इत्यादि माना गया है। तो

966
01:07:06,720 --> 01:07:11,040
कई मंत्र तो उस उन लोकों के लिए हैं। मनुष्यों के लिए है ही नहीं।

967
01:07:11,040 --> 01:07:15,280
दूसरी बात मंत्रों का लोप हो जाना और मंत्रों का बदलना अंतर है।

968
01:07:15,280 --> 01:07:19,440
मेरे घर पर डांका पड़ गया और वो जो पैसे किसी के रखे

969
01:07:19,440 --> 01:07:23,520
हुए थे मेरे घर पर वह चोरी हो गए। ये अलग बात है। मगर

970
01:07:23,520 --> 01:07:27,600
मैंने खुद उनको कहीं पर छुपा दिया लालच में आकर

971
01:07:27,600 --> 01:07:31,840
के या किसी के कहने पर यह अलग बात है। ठीक है? तो

972
01:07:31,840 --> 01:07:36,000
जो मंत्र ष्टि के प्रारंभ से मिले हैं उनका लुप्त हो जाना अलग बात

973
01:07:36,000 --> 01:07:40,640
है और उनका जानबूझकर गलत अर्थ करना।

974
01:07:40,640 --> 01:07:43,360
ठीक है? ये अलग बात है। समझ

975
01:07:43,360 --> 01:07:47,440
में आया? ये तो उनके जो उन्होंने वहां पर मुझे फंसाने का प्रयास हालांकि

976
01:07:47,440 --> 01:07:51,440
म्यूट कर दिया है। चार चार लोग बोल रहे हो यार। कैसी निष्पक्ष चर्चा

977
01:07:51,440 --> 01:07:55,600
है यह बोलने ही नहीं दे रहे हो चार चार लोग एक एक व्यक्ति फसता है दूसरा आदमी

978
01:07:55,600 --> 01:07:59,600
बोलने लगता है यह इस तरह से तुम लोग डिबेट करते हो तुम लोग सोनाली जी सोनाली

979
01:07:59,600 --> 01:08:03,760
जी के लिए बोल रहे हो एक ये है वो मैं नहीं करूंगी ये चार चार लोग मिलकर

980
01:08:03,760 --> 01:08:08,720
के तुम एक व्यक्ति को झेल नहीं पा रहे हो म्यूट करना पड़ रहा है तुम्हें

981
01:08:08,720 --> 01:08:12,960
ये स्तर है आप लोगों का उर्दू में क्या कहा जाता है औकात

982
01:08:12,960 --> 01:08:16,960
क्या कहते हैं सनातन शंकर जी उर्दू में औकात कहते हैं

983
01:08:16,960 --> 01:08:21,280
क्या औकात तो होती है आपकी

984
01:08:21,280 --> 01:08:25,200
मतलब सामर्थ

985
01:08:25,200 --> 01:08:29,520
हां तो भैया उर्दू के अनुसार तो अच्छा वर्ड है हमारे अनुसार तो घणित

986
01:08:29,520 --> 01:08:33,600
वर्ड है औकात तो उर्दू के अनुसार अच्छा होगा तो ये ये औकात

987
01:08:33,600 --> 01:08:38,400
है आप लोगों की हा

988
01:08:38,400 --> 01:08:42,480
ठीक है। अब आगे बात आती है कि अब यहां से तो

989
01:08:42,480 --> 01:08:46,880
ये मुफ्ती जी नॉक आउट हो गए। ठीक है? इन्होंने मान लिया कि

990
01:08:46,880 --> 01:08:50,960
पहली बात तो विषयांतर करना उसमें मुफ्ती जी नॉक आउट हो रहे हैं।

991
01:08:50,960 --> 01:08:55,040
इन्होंने अपनी लाइफ में सोनाली जी के विषयंतर को भी क्रिटिसाइज किया है। तो

992
01:08:55,040 --> 01:08:59,120
मुफ्ती और आवाज हक इनके द्वारा विषयांतर करना

993
01:08:59,120 --> 01:09:03,200
करने के कारण यह भी नॉक आउट हो गए। दूसरी बात आबा

994
01:09:03,200 --> 01:09:07,520
बाबा क्रिटिसाइज किया है। तो यहां मुफ्ती जी का ये सब और बुराई

995
01:09:07,520 --> 01:09:11,920
को बनाना इलॉजिकल बात। बुराई को बनाना बुराई नहीं है। अ बाबा

996
01:09:11,920 --> 01:09:16,000
यहां पे उन्होंने भी इन सब चीजों में मुफ्ती जी को आपने नॉक आउट कर दिया। इसकी समीक्षा

997
01:09:16,000 --> 01:09:20,000
कर देना। मैं देखूंगा कि दीन ने क्या सिखाया है आपको। दोगलापन या

998
01:09:20,000 --> 01:09:24,400
सच्चाई पर रहना। हम दूसरी बात। [गला साफ़ करने की आवाज़]

999
01:09:24,400 --> 01:09:29,360
अच्छा अब आगे की बात क्या आती है कि

1000
01:09:29,360 --> 01:09:33,520
यह दोगलापन इससे भी एक क्रम एक और स्तर इनका लेवल

1001
01:09:33,520 --> 01:09:37,680
बढ़ता है। अब यह मान रही हैं कि आर्य समाजी जो है

1002
01:09:37,680 --> 01:09:40,320
वो अप्रामाणिक है सनातन धर्म की

1003
01:09:40,320 --> 01:09:44,480
ओर से क्लेम करने वाला गलत है। मगर जब गाना बना रही हैं सनातन

1004
01:09:44,480 --> 01:09:48,720
धर्मियों के लिए विरोध में रैप सॉन्ग और क्रिटिसाइज

1005
01:09:48,720 --> 01:09:53,440
कर रही हैं और तुम्हारे आवाज हक इत्यादि भी करते हैं जो वो

1006
01:09:53,440 --> 01:09:57,440
आर्य समाजियों के द्वारा स्वीकार किया गया जो नियोग है

1007
01:09:57,440 --> 01:10:01,440
उसको क्यों ले रहे हो? तुम अपने गाने में क्यों ले रहे हो? क्यों विरोध कर

1008
01:10:01,440 --> 01:10:05,680
रहे हो? भाई वो तो है ही नहीं ना सनातन का हिस्सा। तो सनातनियों

1009
01:10:05,680 --> 01:10:09,920
पर आक्षेप करते टाइम आप नियोग की बात क्यों ले रहे हो? और अगर नियोग

1010
01:10:09,920 --> 01:10:13,920
की बात ले रहे हो तो उस हिसाब से जो यह मूर्ति पूजा है जैसा कि आमिर

1011
01:10:13,920 --> 01:10:17,920
हक ने अभी कहा कि नहीं नहीं मूर्ति पूजा सनातन का मूल

1012
01:10:17,920 --> 01:10:21,920
सिद्धांत नहीं है। हालांकि आपके हिसाब से वो गलत है मगर आवाजें के हिसाब से

1013
01:10:21,920 --> 01:10:26,000
तो सही है। तो मूर्ति पूजा जब है ही नहीं सनातन में तो फिर

1014
01:10:26,000 --> 01:10:30,000
तुम लोग मूर्ति पूजा के आधार पर अपमान क्यों कर रहे हो? वो गाना इन्होंने बहुत

1015
01:10:30,000 --> 01:10:34,000
भद्दा सा बनाया है। बताइए ऐसे लोगों से कौन डिबेट करेगा? यह कह रही

1016
01:10:34,000 --> 01:10:38,080
है कि तुमसे डिबेट नहीं। अरे तुम किसी लायक नहीं हो। घृणित लोग हो

1017
01:10:38,080 --> 01:10:42,160
तुमसे घिन आती है ऐसे लोग हो तुम लोग पहले सफाई करो अपनी जाकर

1018
01:10:42,160 --> 01:10:46,240
के ऐसे होती है डिबेट नग्नता

1019
01:10:46,240 --> 01:10:51,120
अश्लीलता नंगा नाच करके

1020
01:10:51,120 --> 01:10:55,440
तो अगर तुम नियोग को मूल मान रहे हो प्रामाणिक

1021
01:10:55,440 --> 01:10:59,520
मान रहे हो तो मूर्ति पूजा का मजाक क्यों उड़ा रहे हो फिर अपने गांड में उसको मान लोगे ये तो है

1022
01:10:59,520 --> 01:11:03,520
ही नहीं सनातन में और अगर मूर्ति पूजा को तुम मूल मान रहे हो तो तुम

1023
01:11:03,520 --> 01:11:07,600
नियोग को मान लोगे वो है ही नहीं सनातन में मगर नहीं

1024
01:11:07,600 --> 01:11:11,840
दोगलापन कैसे प्रस्तुत करेंगे? नहीं तो हमसे

1025
01:11:11,840 --> 01:11:15,840
प्रश्न कैसे किया जाएगा? यह दोगलापन कहां पर सिखाया गया है? कौन सी

1026
01:11:15,840 --> 01:11:21,440
मोरल्टी में है ये दोगलापन? हां मोमिना

1027
01:11:21,440 --> 01:11:27,440
कैसे करोगी इसको डिफेंड? बताना मुझे करके

1028
01:11:27,440 --> 01:11:31,440
बताओ। तुम्हारी दृष्टि में ही ऑन कॉल

1029
01:11:31,440 --> 01:11:35,760
उसी लाइव में तुम मान रही हो कि आर्य समाझ गलत है तो नियो पर आक्षेप

1030
01:11:35,760 --> 01:11:40,080
करने वाला गाना क्यों बजा दिया तुमने अंधी थी क्या

1031
01:11:40,080 --> 01:11:45,120
भूसा भर गया था क्या भेजे में हम

1032
01:11:45,120 --> 01:11:49,360
चलो ये हो गया

1033
01:11:49,360 --> 01:11:50,320
अब बात आती

1034
01:11:50,320 --> 01:11:54,560
है कि एक फाइनल शॉट है बहुत तगड़ा

1035
01:11:54,560 --> 01:11:58,560
बहुत बढ़िया वाला फाइनल शॉट तो मोमिना जी का जो सेकंड वीडियो है वो

1036
01:11:58,560 --> 01:12:00,960
दिखा दो इनको।

1037
01:12:00,960 --> 01:12:05,040
फाइनल शॉट दे देते हैं। 100 सुनार की एक लोहार की और

1038
01:12:05,040 --> 01:12:09,120
सुनो सुनो फाइनल शॉट देखने से पहले ये सुन लो हमारा जो

1039
01:12:09,120 --> 01:12:13,360
अंतिम डायलॉग होता है ना सभी के लिए वो क्या है मालूम है? मत पड़ो

1040
01:12:13,360 --> 01:12:19,360
चक्कर में। कोई है नहीं टक्कर में। देख लो फाइनल शॉट।

1041
01:12:19,440 --> 01:12:23,520
मैटर पे हम डिस्कस करने आए हैं। आप जिन अपने गुरु भाई बहनों के बचाव

1042
01:12:23,520 --> 01:12:28,000
में आए हैं। उनके साथ मेरा इस बात को लेकर कोई घबराह नहीं था।

1043
01:12:28,000 --> 01:12:32,000
परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में नहीं है तो आप स्वयं को वैदिक सिद्ध

1044
01:12:32,000 --> 01:12:38,000
नहीं कर सकती सनातनी सिद्ध नहीं कर सकती धार्मिक सिद्ध नहीं कर सकती

1045
01:12:39,200 --> 01:12:40,480
मुझे नहीं मानो सनातन

1046
01:12:40,480 --> 01:12:44,640
मुझे नहीं मानो वैदिक नहीं मानो सनातन मुझे नहीं मानो वैदिक लो

1047
01:12:44,640 --> 01:12:48,640
जी चीख चीख कर बोल रही है नहीं

1048
01:12:48,640 --> 01:12:52,800
मानो मुझे सनातनी नहीं मानो मुझे वैदिक

1049
01:12:52,800 --> 01:12:56,960
दुम पे पैर आई है कि नहीं आई है पंडित जी जियो

1050
01:12:56,960 --> 01:13:01,040
कम से कम इस कतूरी के मुंह से जो है वह सच तो निकला। यानी अब

1051
01:13:01,040 --> 01:13:05,040
जो तुम ना सनातनी हो ना वैदिक हो तो तुम्हारा अब किसी और धर्म पर

1052
01:13:05,040 --> 01:13:09,120
भी बात करना बनता नहीं है। संप्रदाय विहीन होने पर ही तो बात हो रही

1053
01:13:09,120 --> 01:13:13,280
है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए हिंदू सिद्ध नहीं होती है ना। वैदिक सिद्ध

1054
01:13:13,280 --> 01:13:17,680
ओह हो उसने कहा तुम हिंदू सिद्ध ही नहीं होती। तुम हिंदू हो ही नहीं। लो जी पंडित

1055
01:13:17,680 --> 01:13:21,760
ने 15 मिनट में सोनाली लिंग तोड़ को नॉन

1056
01:13:21,760 --> 01:13:25,920
हिंदू यानी एक्स हिंदू साबित कर दिया। वेल डन वेल डन।

1057
01:13:25,920 --> 01:13:29,920
मेरे हिंदू होने से आप मुझे हिंदू नहीं मानिए। मैं यह कह रही हूं। आप

1058
01:13:29,920 --> 01:13:34,000
मुझे मुसलमान मानिए। आप मुझे हिंदू नहीं मानिए। मैं यह कह रही हूं। आप

1059
01:13:34,000 --> 01:13:38,000
मुझे मुसलमान मानिए। आप मुझे हिंदू नहीं मानिए। मैं ये कह रही हूं।

1060
01:13:38,000 --> 01:13:44,000
आप मुझे अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह।

1061
01:13:45,280 --> 01:13:49,760
कैसा मजा आया मुसलमानों? कैसा मजा आया मुसलमानों?

1062
01:13:49,760 --> 01:13:54,240
बताओ दिल पे हाथ रख के। यहां पर जब इनको कंफ्रेंट

1063
01:13:54,240 --> 01:13:58,480
किया जाता है तो इनकी दो टके की भी औकात नहीं है। हमारी किसी मुसलमान

1064
01:13:58,480 --> 01:14:02,640
बहन को कोई यह कह दे ना कि तुम अब तुम अपने को मुसलमान साबित करो। तो

1065
01:14:02,640 --> 01:14:06,880
वो कभी ये नहीं कहेगी कि नहीं मुझे मुसलमान नहीं समझो। वो लड़ेगी। वो आखरी

1066
01:14:06,880 --> 01:14:10,960
दम तक बोलेगी कि नहीं मैं अपने रब को मानती हूं। मैं अपने अल्लाह को मानती हूं। मैं अपने कुरान पे यकीन

1067
01:14:10,960 --> 01:14:15,680
करती हूं। वो कभी ये नहीं कहेगी। क्यों?

1068
01:14:15,680 --> 01:14:16,880
ठीक है।

1069
01:14:16,880 --> 01:14:21,120
हटा दीजिए अब इसको। इसमें दो बातें आई। चिल्ला चिल्ला करके

1070
01:14:21,120 --> 01:14:25,360
मानना पड़ गया किसको? सामने जो बैठा अपोनेंट है उसकी बात को।

1071
01:14:25,360 --> 01:14:29,440
ठीक है? और दूसरी बात आई 15 मिनट। तीसरी बात आई मान लिया।

1072
01:14:29,440 --> 01:14:33,600
घुमा फिरा के मान लिया। 15 मिनट दो बातें। अब जरा इनका मुफ्ती का दिखा दो

1073
01:14:33,600 --> 01:14:38,480
भैया। लास्ट वीडियो जो है तीसरा वाला।

1074
01:14:38,480 --> 01:14:42,720
इसीलिए तो कहते हैं झूठे की हद तक चोर के घर तक। दिखाओ

1075
01:14:42,720 --> 01:14:48,720
भैया। तीसरा वीडियो।

1076
01:14:55,680 --> 01:14:56,180
ये

1077
01:14:55,920 --> 01:15:00,080
तो फिक्स ही हो गया कि वो जन्म नहीं ले सकता। ये भी क्लियर है ना?

1078
01:15:00,080 --> 01:15:01,680
बिल्कुल।

1079
01:15:01,680 --> 01:15:07,680
ठीक है। वो किसी भी नियम के नीचे नियमों के ऊपर है।

1080
01:15:07,760 --> 01:15:12,240
ये मोमिना यहां बैठी हुई है। चर्चा में मोमिना

1081
01:15:12,240 --> 01:15:16,400
भी है एक जगह पर चर्चा में जहां आमिर हकीक क्लेम कर रहा है

1082
01:15:16,400 --> 01:15:20,640
कि भैया ये नियम ईश्वर पर लागू नहीं होते।

1083
01:15:20,640 --> 01:15:24,720
वो बाधित नहीं है। क्लेम कर रहा है। ठीक है। तो वो किसी भी नियम के नीचे

1084
01:15:24,720 --> 01:15:28,800
नहीं है। वो नियमों के ऊपर है। नियम उसने बनाए हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि नियम उस पे बनाए। चलिए

1085
01:15:28,800 --> 01:15:32,880
हमारा मेहनत थोड़ी देर के लिए मान ले गलत है। [हंसी] पॉज करो

1086
01:15:32,880 --> 01:15:36,960
इसको पॉज़ करो। इसको रिपीट करो चार पांच बार। हमने मान लिया कि हम

1087
01:15:36,960 --> 01:15:41,120
गलत है। दिखाओ नियम उस पे अप्लाई नहीं है। चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के लिए मान ले गलत है।

1088
01:15:41,120 --> 01:15:45,440
फिर दिखाओ। चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के लिए मान ले गलत है। फिर

1089
01:15:45,440 --> 01:15:50,160
दिखाओ। नियम उस प्लान नहीं है। चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के लिए मान ले गलत है।

1090
01:15:50,160 --> 01:15:55,120
ले मोमना है। चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के ये मान ले गलत है। मोमिना जी

1091
01:15:55,120 --> 01:15:58,320
यहां क्या करेंगे अब आप?

1092
01:15:58,320 --> 01:16:02,320
आपका तो जो वो था वो सिद्धांत सिद्धांत सब मान लिया मुफ्ती

1093
01:16:02,320 --> 01:16:06,400
जी ने गलत है वही सिचुएशन चाहे मान लो मैं मुस्लिम हूं मान लो मैं वैदिक

1094
01:16:06,400 --> 01:16:10,480
नहीं हूं अब क्या करो अल्हम्दुलिल्लाह क्या था मैं बोल नहीं

1095
01:16:10,480 --> 01:16:16,080
पाता हूं कोई जानता है क्या वो उर्दू क्या बोला जाता है कोई जानता है उर्दू अल्हम्दुलिल्लाह

1096
01:16:16,080 --> 01:16:22,080
हां क्या करेगी अब यहां ये मोमिना

1097
01:16:22,080 --> 01:16:26,720
इसको कहते हैं टक्कर नहीं हुई ना अभी तक कहीं मुझे लगता है कि

1098
01:16:26,720 --> 01:16:30,960
यह सोनाली जी से हमारा जो वो हुआ है वह इसी कारण से हुआ है। इन लोगों को जवाब

1099
01:16:30,960 --> 01:16:35,120
मिलना था। बहुत अच्छा हुआ यह जो हुआ मैं थैंक्सफुल

1100
01:16:35,120 --> 01:16:37,440
हूं।

1101
01:16:37,440 --> 01:16:41,600
ये देखो मुफ्ती जी क्या हो गया? मान लिया ना दो मिनट में।

1102
01:16:41,600 --> 01:16:45,600
चलिए ऐसे ही होता है। जिस दिन कोई कांटे का व्यक्ति सामने

1103
01:16:45,600 --> 01:16:49,760
आ जाता है। यह हालत होती आप लोगों की। मान लिया ना? और क्या कह रही थी

1104
01:16:49,760 --> 01:16:53,920
कि अगर वो मुस्लिम होती, कोई होती तो मानती नहीं लड़ती। क्या

1105
01:16:53,920 --> 01:16:55,280
हो रहा है मुफ्ती को?

1106
01:16:55,280 --> 01:16:59,760
आप देखना जो आपके ग्रंथ जो क्यों माने जाने चाहिए

1107
01:16:59,760 --> 01:17:03,920
इस संबंध में जो वीडियो है ना वो अलग से बनाकर

1108
01:17:03,920 --> 01:17:08,080
मैं आपको दे दूंगा डाल दूंगा जवाब नहीं था आपके मुफ्ती और

1109
01:17:08,080 --> 01:17:12,160
आवाज आवाज हक के पास जो आपके यहां की तोप है ये

1110
01:17:12,160 --> 01:17:13,920
देख लो मान

1111
01:17:13,920 --> 01:17:19,920
लिया उन्होंने फिर दिखाओ उनको चार पांच बार जिससे अलम्दुलिल्लाह कर ले दिखाओ

1112
01:17:20,960 --> 01:17:25,360
घंटा के नियम उस प्लान नहीं चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के लिए मान ले हम

1113
01:17:25,360 --> 01:17:31,040
बनाए हैं कैसा कैसे संता के नियम उस प्लान नियम चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के मान ले गलत

1114
01:17:31,040 --> 01:17:35,200
के नियम उस पे प्लान नियम चलिए हमारा मेरार थोड़ी देर के मान ले गलत करो

1115
01:17:35,200 --> 01:17:39,440
उस थोड़ी देर के लिए मान ले ये तो फिक्स ही हो गया कि

1116
01:17:39,440 --> 01:17:45,200
एक मिनट अब मैं हिंदुओं से कहता हूं देख रहे हो ना हिंदुओं

1117
01:17:45,200 --> 01:17:50,640
कैसा लग रहा है यह सुन के आनंद आ गया ना

1118
01:17:50,640 --> 01:17:54,880
जो हमारे धर्म पर उंगली उठाते हैं 15 मिनट

1119
01:17:54,880 --> 01:17:58,960
15 मिनट में मैंने इनको भी जैसे सोनाली जी पर कटाक्ष कर रही ना

1120
01:17:58,960 --> 01:18:03,520
15 मिनट में सोनाली जी की ये कर तुम्हारे मुफ्ती बैठे हैं

1121
01:18:03,520 --> 01:18:08,240
15 मिनट में आया ये सीन चलिए मान लिया कि हम गलत

1122
01:18:08,240 --> 01:18:12,880
ये होता है अभी पाला नहीं पड़ा है सनातनी से

1123
01:18:12,880 --> 01:18:16,880
ठीक है अभी वो सनातना भाषियों से तुम जूझ रहे हो उसी में कुछ ठीक कर देते

1124
01:18:16,880 --> 01:18:20,960
हो फस जाओगे व्यक्तिगत सलाह यही है आना

1125
01:18:20,960 --> 01:18:25,360
मत फस जाओगे नहीं तो ठीक है?

1126
01:18:25,360 --> 01:18:29,360
तो सर्वशक्तिमान का परम उत्तर नहीं है। परम स्वतंत्र

1127
01:18:29,360 --> 01:18:33,600
मोक्ष का उत्तर नहीं है। शाश्वत धर्म का उत्तर नहीं है। और आपका

1128
01:18:33,600 --> 01:18:37,680
दोगलापन सिद्ध हो गया। आपके द्वारा ये जो आपने कहा वलम्दुलिल्लाह

1129
01:18:37,680 --> 01:18:42,000
वो भी सिद्ध हो गया मुफ्ती जी पर। अब मुफ्ती जी को कहना कि भैया उनका मियाद

1130
01:18:42,000 --> 01:18:46,240
गलत है। यानी कुरान गलत है। कुरान गलत है। यानी कि मुसलमान धर्म गलत है। मुसलमान

1131
01:18:46,240 --> 01:18:50,400
धर्म गलत है। तो मुफ्ती जी कौन हो गए? नास्तिक। नास्तिक

1132
01:18:50,400 --> 01:18:54,400
हो गए। तुम्हारे अनुसार मुफ्ती जी। अलम्दुलिल्लाह करो अब हो

1133
01:18:54,400 --> 01:18:58,560
गए ना बताओ क्या क्या हुए यहां पर मुफ्ती

1134
01:18:58,560 --> 01:19:01,440
जी

1135
01:19:01,440 --> 01:19:05,920
तो आज के बाद इस वीडियो को जब तुम देख लोगी

1136
01:19:05,920 --> 01:19:09,920
उसके बाद तुम अपना इलाज ढूंढोगी सब जगह-जगह जाकर के इलाज

1137
01:19:09,920 --> 01:19:14,000
तुम्हें मिलेगा नहीं और जब ना मिले तो हमारे दरवाजे पर

1138
01:19:14,000 --> 01:19:18,000
आ जाना अगर रहम आ गया तो हम आपका इलाज भी

1139
01:19:18,000 --> 01:19:22,160
आपको दे देंगे ठीक है हमारे

1140
01:19:22,160 --> 01:19:26,160
सनातनी भाई बहनों को बैठा के और अपने वह तीन टप्पर लोगों को

1141
01:19:26,160 --> 01:19:30,480
बिठा के आप जो है बहुत अकेले में कुछ भी बड़बड़ा लो

1142
01:19:30,480 --> 01:19:34,480
ये सब कर रही हो ना हम ऐसे नहीं है सीधे सीधी बात और सीधी बात

1143
01:19:34,480 --> 01:19:38,640
क्या है मूल विषय तुम्हारे यहां ये होता है हमारे यहां

1144
01:19:38,640 --> 01:19:42,720
कुछ नहीं ईश्वर सर्वशक्तिमान है तुम्हारा तुम्हारे दीन को

1145
01:19:42,720 --> 01:19:46,960
दीन माना क्यों जाए ईश्वर सर्वशक्तिमान है ईश्वर

1146
01:19:46,960 --> 01:19:51,040
ईश्वर है यदि है तो सिद्ध कर दो आ के परम

1147
01:19:51,040 --> 01:19:54,080
स्वतंत्र मोक्ष है।

1148
01:19:54,080 --> 01:19:58,160
क्या ऐसा आपके यहां पर इबादत है या जो भी आप पूजा

1149
01:19:58,160 --> 01:20:02,160
पाठ जो भी शब्द आप उसको देते हो क्या मुसलमान में वो

1150
01:20:02,160 --> 01:20:06,240
है जो जिससे वह चीजें प्राप्त हो सके वो

1151
01:20:06,240 --> 01:20:10,320
मिल सके जिसके लिए वास्तविकता में मनुष्य

1152
01:20:10,320 --> 01:20:13,520
तड़प रहा है।

1153
01:20:13,520 --> 01:20:18,320
जिसके आधार पर हम नास्तिकता का खंडन कर सकते हैं।

1154
01:20:18,320 --> 01:20:22,400
धर्म को सिद्ध कर सकते हैं। ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हैं। क्या वह है?

1155
01:20:22,400 --> 01:20:26,400
क्या वह मिल रहा है इस्लाम के द्वारा? एक इस्लाम को फॉलो करने वाले

1156
01:20:26,400 --> 01:20:30,560
को या उन चीजों के नाम पर कुछ और ही मिल

1157
01:20:30,560 --> 01:20:31,680
रहा है?

1158
01:20:31,680 --> 01:20:35,680
तो तीन चीजें हैं। सर्वशक्तिमान ईश्वर

1159
01:20:35,680 --> 01:20:39,760
सिद्ध करो अपने खुदा को। परम स्वतंत्र मोक्ष सिद्ध

1160
01:20:39,760 --> 01:20:44,080
करो। मिलने वाली वह तुम्हारी आखिरी रात वाली चीजें हैं। वो मोक्ष हैं।

1161
01:20:44,080 --> 01:20:48,320
परम स्वतंत्र शाश्वत सुख। सिद्ध करो कि तुम्हारा

1162
01:20:48,320 --> 01:20:52,480
जो धर्म है वो शाश्वत है। यानी तुम्हारा जो दीन है वो बदलता

1163
01:20:52,480 --> 01:20:54,800
नहीं है। शाश्वत है। तुम्हारे यहां

1164
01:20:54,800 --> 01:20:58,800
तो खुद ही कह दिया गया दो 187 में। आज से पहले तक रोजों की रात में

1165
01:20:58,800 --> 01:21:02,960
फलाना कार्य करने की इजाजत नहीं थी। आज हो गई। लो वही बदल

1166
01:21:02,960 --> 01:21:07,600
रहा है। हमारे यहां पर जो कहा मुफ्ती

1167
01:21:07,600 --> 01:21:12,400
जी ने क्या कहा था? मैं सुन नहीं पाया। आवाज थोड़ी सी नहीं आ रही थी।

1168
01:21:12,400 --> 01:21:16,560
मुफ्ती जी ने ये कहा था कि चलिए मान लिया कि हमारा जो सिद्धांत

1169
01:21:16,560 --> 01:21:20,720
है वो गलत है। अच्छा [हंसी] जो

1170
01:21:20,720 --> 01:21:24,720
सोनाली जी कह रही है मुझे मान लो कि मैं

1171
01:21:24,720 --> 01:21:28,800
वैदिक हूं। मान लो कि मुसलमान हूं। अच्छा यही जबरदस्त पॉइंट

1172
01:21:28,800 --> 01:21:34,800
वही था। सबसे जबरदस्त पॉइंट वही था। [हंसी]

1173
01:21:35,840 --> 01:21:40,000
इसीलिए तो इसीलिए अच्छे लोग टिक नहीं पाते

1174
01:21:40,000 --> 01:21:44,160
हैं। और मैं आपको बता दूं आज सुबह मैंने Instagram पे एक रील डाली है।

1175
01:21:44,160 --> 01:21:48,160
उस रील में मैंने कहा है कि एक वीडियो मैंने आज देखा तो उसमें है तो

1176
01:21:48,160 --> 01:21:52,160
सनातन धर्म का अपमान मगर हमारे पास सिद्धांत इतने तगड़े हैं कि अब

1177
01:21:52,160 --> 01:21:56,240
जो है उनको देख के मन विचलित नहीं होता है। विचलित किसका होता था? आज से

1178
01:21:56,240 --> 01:22:00,240
छ साल पहले वाले शिवश का जिसके पास सिद्धांत नहीं थे गुरु गोविंदो

1179
01:22:00,240 --> 01:22:04,400
ग्रंथ के ना होने की वजह से तो आज मैं विचलित नहीं हुआ इस विषय पे मैंने Instagram

1180
01:22:04,400 --> 01:22:08,800
पर रील डाली है वो जबरदस्त

1181
01:22:08,800 --> 01:22:12,880
वो वीडियो यही वीडियो था वो जो मैंने आज सुबह

1182
01:22:12,880 --> 01:22:17,360
देखा था जिसप वो रील बनाई है वो यही वीडियो था जो मैंने देखा था मोमिना

1183
01:22:17,360 --> 01:22:19,920
का हमारे भाई

1184
01:22:19,920 --> 01:22:24,000
बहनों को तुम क्रिटिसाइज करोगे सनातन धर्म का अपमान करोगे

1185
01:22:24,000 --> 01:22:28,240
और वो भी ऐसे दोगलेपन के साथ ऐसे कमजोर सिद्धांतों के साथ

1186
01:22:28,240 --> 01:22:32,240
तुम कह रहे हो वहां उसने मान लिया सोनाली का यह मान लेना कि मैं वैदिक

1187
01:22:32,240 --> 01:22:36,400
नहीं हूं यह उतनी बड़ी बात नहीं है जब तुम्हारे दीन

1188
01:22:36,400 --> 01:22:41,040
को ना मानने वाले व्यक्ति के समक्ष तुम्हारे मुफ्ती का मान लेना

1189
01:22:41,040 --> 01:22:45,120
तुम्हारे मुफ्ती का मान लेना कि हमारा गलत है और उसके बाद वो

1190
01:22:45,120 --> 01:22:49,280
सही सिद्ध हुआ नहीं है उस डिबेट में जब उन्होंने गलत माना है उसके बाद वो सही

1191
01:22:49,280 --> 01:22:53,440
सिद्ध नहीं हुआ है सिर्फ वो इस पर तुले कि तुम तुम गलत हो

1192
01:22:53,440 --> 01:22:57,520
अपने आप को सही सिद्ध नहीं किया और तुम गलत हो में भी सिद्ध कुछ नहीं हुआ। तुम्हारे

1193
01:22:57,520 --> 01:23:01,840
अनुसार आगे जाकर के वो वही गलत सिद्ध हुए हैं। ठीक है? तुम्हारे

1194
01:23:01,840 --> 01:23:06,080
यहां के मुफ्ती और तुम्हारे दीन के बाहर के व्यक्ति

1195
01:23:06,080 --> 01:23:10,160
के सामने वो कह रहे हैं चलिए मान लिया मेरा मियाद गलत

1196
01:23:10,160 --> 01:23:14,400
है। और यहां तो एक जो भटकी हुई हमारी

1197
01:23:14,400 --> 01:23:18,560
जो बहन है दिशाहीन है भगवान से प्रार्थना करते कहीं ना कभी ना कभी

1198
01:23:18,560 --> 01:23:22,720
आ जाएगी वापस। यहां तो वो कह रही है दुर्जन तोष न्याय से

1199
01:23:22,720 --> 01:23:28,400
तो आप मजाक उड़ाए पड़े हो। तो कब मजाक उड़ाओगे मुफ्ती का? वलम्दुलिल्लाह।

1200
01:23:28,400 --> 01:23:32,480
तो मूल सिद्धांत क्या है? पत्तों पर बात नहीं करते।

1201
01:23:32,480 --> 01:23:35,040
तुम्हारे यहां ये हुआ है। जो तुम्हारे यहां होता है वो तुम

1202
01:23:35,040 --> 01:23:39,360
लेके आओ। जो हमारे यहां होता है वो हम लेके आ रहे हैं। सीधी बात है। जिसके

1203
01:23:39,360 --> 01:23:43,520
पास गुर्दा है उसी को जीने का हक है। जिसका ईश्वर

1204
01:23:43,520 --> 01:23:48,080
सर्वशक्तिमान है उसी का धर्म धर्म है। ठीक है?

1205
01:23:48,080 --> 01:23:52,240
तो अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो। मुझको मुसलमान बना

1206
01:23:52,240 --> 01:23:56,560
लो। तुरंत कलमा पढूंगा। ठीक। नमाज

1207
01:23:56,560 --> 01:23:58,960
पढूंगा।

1208
01:23:58,960 --> 01:24:03,280
और वो खतना खतना वतना वाली बातें भी। चलो

1209
01:24:03,280 --> 01:24:07,520
ठीक है। तो आओ ईश्वर को सर्वशक्तिमान

1210
01:24:07,520 --> 01:24:11,680
सिद्ध करो। धर्म को शाश्वत सिद्ध करो। मोक्ष को परम

1211
01:24:11,680 --> 01:24:14,800
स्वतंत्र सिद्ध करो। आ जाओ कब आ रहे हो? अब

1212
01:24:14,800 --> 01:24:18,880
बात आती है आने की। आने पर बात करते हैं कि कौन आएगा?

1213
01:24:18,880 --> 01:24:24,320
किससे चर्चा होगी? तो

1214
01:24:24,320 --> 01:24:28,320
जो तुम्हारा जो तुमने इसमें एक वो जो व्यक्ति नहीं है

1215
01:24:28,320 --> 01:24:32,640
जो राज वो बोल रहा था कि एक आदमी की आवाज आ रही थी ना उस चर्चा में

1216
01:24:32,640 --> 01:24:36,640
उसने ये भी कहा कि भाई हम हमसे आकर बात करिए आप जो है नास्तिक कैसे बोल रहे

1217
01:24:36,640 --> 01:24:40,800
हैं जो मुसलमान है नास्तिक नास्तिक से जहां ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं वहां

1218
01:24:40,800 --> 01:24:44,880
ईश्वर ईश्वर नहीं और जहां ईश्वर नहीं नास्तिक और फिर इसके आगे आप

1219
01:24:44,880 --> 01:24:48,880
समझ लो क्या हो सकता है वो आप अपने ही भाई बहनों से पूछ लो खैर यह तो रही

1220
01:24:48,880 --> 01:24:54,560
यह वाली बात दूसरी बात क्या है कि

1221
01:24:54,560 --> 01:24:58,640
तुम्हारे मंच पर जहां इतनी गंदगी फैली हुई है

1222
01:24:58,640 --> 01:25:02,640
उस मंच पे जहां तुमने जिस प्रकार से सोनाली जी

1223
01:25:02,640 --> 01:25:06,800
ने मक्कार कह दिया वहां से मेरा जाना तुमने समर्थन किया कि ठीक बात है

1224
01:25:06,800 --> 01:25:11,200
तो फिर भाई तुमने अपने मंच को कैसा बना रखा है अश्लील

1225
01:25:11,200 --> 01:25:16,560
नग्न सैद्धांतिक विरोध नहीं है ये

1226
01:25:16,560 --> 01:25:20,640
अश्लीलता है बस और कुछ नहीं है इसमें तो पहली

1227
01:25:20,640 --> 01:25:25,120
पहली बात तो मंच ऐसा होना चाहिए जो योग्य भी हो। योग्य मतलब

1228
01:25:25,120 --> 01:25:29,200
कि ऐसा प्रभाव रखता हो समाज में जहां पर हमारा जाना

1229
01:25:29,200 --> 01:25:33,280
सार्थक हो सके। और दूसरी बात मैं सोनाली सोनाली जी

1230
01:25:33,280 --> 01:25:37,440
की एक बात तो मानूंगा भाई वह अज्ञानी सही भटकी हुई सही दिशाहीन सही

1231
01:25:37,440 --> 01:25:41,840
डंके की चोट पर वो जो धर्म मानती है धर्म का जो स्वरूप मानती

1232
01:25:41,840 --> 01:25:46,000
है कुछ उसमें इधर उधर भटकाव है मगर अपने धर्म के लिए डंके

1233
01:25:46,000 --> 01:25:50,160
की चोट पे कैमरे के सामने बोलती है अपना चेहरा लेकर के

1234
01:25:50,160 --> 01:25:54,320
तुम्हारी तरह कायर नहीं है वह या आवाज हक इत्यादि

1235
01:25:54,320 --> 01:26:00,320
की तरह नपुंसकता नहीं प्रस्तुत करती है कायरों वाली

1236
01:26:01,920 --> 01:26:06,240
समझे चेहरा छुपा के घूम रहे हैं

1237
01:26:06,240 --> 01:26:10,240
तो चर्चा होगी किससे जिसकी अपनी आइडेंटिटी

1238
01:26:10,240 --> 01:26:14,640
हो और फिर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंच किसका होगा

1239
01:26:14,640 --> 01:26:18,800
वो देखा जाएगा बीच का होगा कैसा होगा वो बात बाद

1240
01:26:18,800 --> 01:26:22,800
की बात है चर्चा होगी किससे जो जिसने गंदगी ना मचाई

1241
01:26:22,800 --> 01:26:26,960
हो मुफ्ती बुलाओ करेंगे

1242
01:26:26,960 --> 01:26:30,960
चुप दोबारा या या कोई उनसे एसोसिएटेड हो उनको लाओ करेंगे चुप

1243
01:26:30,960 --> 01:26:35,120
दोबारा गंदा व्यक्ति ना हो तुम्हारी तरह ये नीचता भरी

1244
01:26:35,120 --> 01:26:39,440
बातें परोसने वाला गंदा मंच ना हो तुम्हारी

1245
01:26:39,440 --> 01:26:44,000
तरह ये नीचता भरी चीजें करने वाला ठीक है करेंगे

1246
01:26:44,000 --> 01:26:48,960
और पटकेंगे सैद्धांतिक रूप से पटक देंगे

1247
01:26:48,960 --> 01:26:53,200
ये अभी बता दे रहे हैं इसलिए व्यक्तिगत परामर्श

1248
01:26:53,200 --> 01:26:57,200
यही है कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

1249
01:26:57,200 --> 01:27:01,200
जी सब लोग अपना अपना ओपिनियन रखें फिर इसको और हां जो

1250
01:27:01,200 --> 01:27:05,200
शास्त्रीय विषय मैंने शुरू में क्लियर किए उनके विषय में एक अलग से प्रमाण और

1251
01:27:05,200 --> 01:27:09,200
तर्क सहित कि उसमें लॉजिक क्या है? विदेश यात्रा मना करने

1252
01:27:09,200 --> 01:27:13,280
में गोमेद का सही अर्थ क्या है? उसमें लॉजिक क्या है? तो ये प्रमाण और तर्क के साथ

1253
01:27:13,280 --> 01:27:19,280
एक अलग से वीडियो बन जाएगा। जी अब आप लोग अपना अपना वो ओपिनियन रख।

1254
01:27:22,400 --> 01:27:26,720
जी जी नहीं काफी पॉइंट आपने क्लियर कर दिए और

1255
01:27:26,720 --> 01:27:31,200
क्योंकि जितने भी आक्षेप ही अपने चैनल पर लगाते हैं उसमें ज्यादातर

1256
01:27:31,200 --> 01:27:35,600
मैंने देखा है कि अभद्रता ही करते हैं और शास्त्रों

1257
01:27:35,600 --> 01:27:39,760
की गलत व्याख्या ही करते हैं और ये सारी गलत व्याख्याएं जो हैं वो इन्होंने

1258
01:27:39,760 --> 01:27:43,760
कहीं ना कहीं हमारे ही जो सनातन के अंदर

1259
01:27:43,760 --> 01:27:48,720
तंत्र हैं जो ये कर्मणा वाले हैं इनके इनसे ही ली हुई है

1260
01:27:48,720 --> 01:27:52,720
और वहीं पर यह लोग हमारे ही शास्त्रों का मजाक उड़ाते हैं। और

1261
01:27:52,720 --> 01:27:56,720
मुझे अब लगता है कि जो यह अवेकनिंग इंडिया वाली जो है भारत वाली

1262
01:27:56,720 --> 01:28:00,720
जो है यह मातृशक्ति इनको भी यह चीज जरूर समझ में

1263
01:28:00,720 --> 01:28:04,880
आ रही होगी कि जहां पर सिद्धांत मजबूत हो

1264
01:28:04,880 --> 01:28:08,960
तो किस तरह से परंपरा वहां पर

1265
01:28:08,960 --> 01:28:12,960
आपकी मदद करेगी। आपकी हेल्प करेगी सनातन

1266
01:28:12,960 --> 01:28:17,200
सिद्धांत को वहां पर रखने के लिए। अब इसीलिए शिवांग जी ने उस दिन परंपरा पूछी

1267
01:28:17,200 --> 01:28:21,440
थी आपसे और आप उसका जो है बुरा मानकर अपने ही

1268
01:28:21,440 --> 01:28:25,600
जो है भाई का खंडन करने लग गई। जबकि आपको क्या करना चाहिए था वहां

1269
01:28:25,600 --> 01:28:29,600
पर समझना चाहिए था। लड़ाई नहीं करनी चाहिए थी। आपको समझना चाहिए था कि भाई

1270
01:28:29,600 --> 01:28:34,000
क्योंकि शिवश जी ने आपको कोई अभद्र बात नहीं बोली थी। यह बात थी। तो आज देखिए

1271
01:28:34,000 --> 01:28:38,080
आपका ही आपके ही भाई आपके काम आएंगे।

1272
01:28:38,080 --> 01:28:42,400
आने वाले टाइम में जो आपको बिल्कुल इस बात में पता चलेगा कि भाई

1273
01:28:42,400 --> 01:28:46,400
जब आप उनसे लड़ रही हैं उनमें आपको अंतिम

1274
01:28:46,400 --> 01:28:52,400
सहारा जो है वह परंपरा का ही अवलंबन लेना पड़ेगा

1275
01:28:52,560 --> 01:28:56,640
और यह तो जो दिखाया आपने वीडियो इनका यह तो बहुत

1276
01:28:56,640 --> 01:29:01,120
गलत वलत बोलते हैं चेहरा छुपाकर यह बोलते हैं कहीं

1277
01:29:01,120 --> 01:29:05,120
से कोई बात पकड़ी कहीं से कोई बात पकड़ी और यह सब पीडीएफ वाले हैं

1278
01:29:05,120 --> 01:29:09,280
यह यह वही हैं आर्काई वाले यारकाइव से ले लेके जो है चीजों को वहां

1279
01:29:09,280 --> 01:29:13,520
पर वो आवाज ह विडम लाइब्रेरी के उत

1280
01:29:13,520 --> 01:29:17,920
कर रहा है हमने सीधे आचार्य जी से आज वो मंगवाया ये वशिष्ठ

1281
01:29:17,920 --> 01:29:21,920
धर्म सूत्र वाली चीजें जी जी हालांकि हमारे पास था हमने कहा एक बार कंफर्म

1282
01:29:21,920 --> 01:29:26,400
वो कर लूं परंपरा से तो इसमें एक चीज मैं और बोलूं

1283
01:29:26,400 --> 01:29:30,560
कि ये ये आप देखो कि जिस चर्चा

1284
01:29:30,560 --> 01:29:34,640
के आधार पर आज इनका खंडन करने वाली इसका मोमिना

1285
01:29:34,640 --> 01:29:38,800
का खंडन हुआ है उसी उसी चर्चा का आधार लेकर के ये इतनी बुद्धू

1286
01:29:38,800 --> 01:29:42,800
है कि अपने वहां डाल रही है कि मुफ्ती के यहां गया था और जो हार

1287
01:29:42,800 --> 01:29:46,960
के आ गया ये सब इन्होंने कचरा किया है वहां इसी चर्चा के आधार पे जिस चर्चा

1288
01:29:46,960 --> 01:29:51,280
के आधार पे आज इनकी जीत हो रही है देख लो जी जी जी

1289
01:29:51,280 --> 01:29:53,680
उसी चर्चा का हम

1290
01:29:53,680 --> 01:29:57,840
भाई ये समझ क्या है ना धीरे-धीरे चीजें आती है समझ उस वक्त नहीं समझ में आई

1291
01:29:57,840 --> 01:30:02,000
थी शायद अब इनको पता चले कि यहां पर आपको

1292
01:30:02,000 --> 01:30:06,160
जो है वो अपना जो मूल है उसको नहीं छोड़ना है यह मूल है हमारा ये

1293
01:30:06,160 --> 01:30:10,400
परंपरा जो है हमारा मूल है और ये बात भी

1294
01:30:10,400 --> 01:30:14,640
मैं कह चुका हूं परंपरा से जुड़े ना होना आपके हिंदू होने में बाधक नहीं है मगर

1295
01:30:14,640 --> 01:30:18,720
समस्त प्रमाणिक परंपराओं का विरोधी होना हिंदू होने में बाधक है फिर आपकी वैदिकता

1296
01:30:18,720 --> 01:30:23,200
सिद्ध नहीं होगी विरोधी मत बनो विरोधी मत बनो हम

1297
01:30:23,200 --> 01:30:27,200
और हां एक बात और ये जो आई थी परंपरा पे

1298
01:30:27,200 --> 01:30:31,280
जो बातचीत हुई ये तब हुई जब इन्होंने ही तो शुरू किया शंकराचार्यों पे बोलना

1299
01:30:31,280 --> 01:30:35,440
भाई देखो राजनीतिक विषयों में बोल ही क्यों रहे हो अगर आप धर्म का रक्षा करने वाले हो और

1300
01:30:35,440 --> 01:30:39,520
वो वो क्या कहते हैं प्रमाण और तर्क पर बात कर रहे तो शास्त्रोक्त विषय

1301
01:30:39,520 --> 01:30:43,520
में प्रमाण और तर्क पर बात करो फिर आप ये राजनीति में कूद रहे हो फिर राजनीतिक

1302
01:30:43,520 --> 01:30:47,600
चीजें बोल रहे हो आप अपने मंच से हम तो राजनीतिक चीजें नहीं बोलते

1303
01:30:47,600 --> 01:30:51,600
अधिकांशता प्रयास यही होता है कि ना बोले बोलते भी तो एक मर्यादा में बोलते हैं

1304
01:30:51,600 --> 01:30:56,080
फिर आप आप जो है आप ही तो अपने हिंदू भाइयों का विरोध करना शुरू कर रही हो शंकराचार्य

1305
01:30:56,080 --> 01:31:00,800
का आज वही शंकराचार्य आपकी वो बना है छत्रछाया

1306
01:31:00,800 --> 01:31:06,240
बना है कि नहीं बना वही बना जिसका आपने विरोध किया

1307
01:31:06,240 --> 01:31:08,960
बिल्कुल और वही

1308
01:31:08,960 --> 01:31:13,120
बनेगा भी अंतिम विकल्प वही है। उसी छत के नीचे ही आप

1309
01:31:13,120 --> 01:31:17,520
सुरक्षित हो। ये ध्यान रखो। चाहे जितना भ्रमण कर लो इस चले जाओ।

1310
01:31:17,520 --> 01:31:21,520
अंतिम जो आश्रय मिलना है आपको वो परमाश्रय

1311
01:31:21,520 --> 01:31:25,520
आपको प्रमाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य के छत्रछाया के नीचे

1312
01:31:25,520 --> 01:31:29,520
ही मिलेगा। जी बिल्कुल बिल्कुल नहीं तो फिर जैसे

1313
01:31:29,520 --> 01:31:33,760
आपने शॉट डाला था उसमें वो कभी कह रही है कि मैं रामानुजा संप्रदाय

1314
01:31:33,760 --> 01:31:37,920
से हूं। कभी वो कह रही हैं कि मैं दयानंद जी को मानती हूं। कभी

1315
01:31:37,920 --> 01:31:41,920
वो कह रही हैं कि जो वैदिक स्क्रिप्चर में जो ऋषि हैं उनको

1316
01:31:41,920 --> 01:31:46,320
मानती हूं। कभी वो कह रही है कि भाई मैं हिंदू ही नहीं हूं। तुम मुझे हिंदू मत मानो।

1317
01:31:46,320 --> 01:31:50,320
मतलब मिक्स मिक्स इतनी सारी बातें उन्होंने वहां पर बोल दी फ्लो फ्लो

1318
01:31:50,320 --> 01:31:54,320
में ये सिद्धांत विहीन जब कोई होता

1319
01:31:54,320 --> 01:31:58,320
है तब ये सारी बातें होती हैं। और फिर आप लड़ किन से रही हैं। सामने कौन

1320
01:31:58,320 --> 01:32:02,320
है? आपको पता है सामने कौन है। ठीक है? वह आपको घेर

1321
01:32:02,320 --> 01:32:06,320
सकता है। वहां पर आपको जो अगर आपके सिद्धांत मजबूत नहीं है तो फिर

1322
01:32:06,320 --> 01:32:10,480
आप वहां टिक नहीं पाओगे। लेकिन सिद्धांत अगर मजबूत हैं तो आप

1323
01:32:10,480 --> 01:32:14,480
उनका आराम से खंडन कर दोगे। आपको पता है सामने वाला पूछेगा

1324
01:32:14,480 --> 01:32:18,560
कि भैया तुम्हारे शास्त्रों में यह बात लिखी है तो आप बोलोगे नहीं भाई यह

1325
01:32:18,560 --> 01:32:22,560
जो आप बोल रहे हो ये गलत बोल रहे हो। किस आधार पर बोल रहे हो? जी हमारे जो परंपरा प्राप्त आचार्य

1326
01:32:22,560 --> 01:32:24,000
हैं वो तो यह कह रहे

1327
01:32:24,000 --> 01:32:28,160
हैं और उनका एक्सप्लेनेशन आप जब उनको बताओगे तो वो उसके आगे

1328
01:32:28,160 --> 01:32:32,400
वो बोल ही नहीं पाएंगे। क्यों? क्योंकि जो उनकी कुरान है उसकी व्याख्या वह करेंगे

1329
01:32:32,400 --> 01:32:36,640
तो फिर हमारे शास्त्र है उनकी व्याख्या हमारे आचार्य करेंगे। वहां पर वो

1330
01:32:36,640 --> 01:32:41,520
आक्षेप वाली बातें खत्म हो जाएंगी। अब कहां पर बात आ जाएगी? वही सर्वशक्तिमान

1331
01:32:41,520 --> 01:32:46,160
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म। शाश्वत धर्म

1332
01:32:46,160 --> 01:32:50,560
यहां पर हमारे और हमारे आचार्यों के पास शास्त्र

1333
01:32:50,560 --> 01:32:54,560
में लिखी हुई स्वीकारी गई एक एक बात का तार्किक उत्तर है।

1334
01:32:54,560 --> 01:32:58,640
ऐसा नहीं है कहीं आप उनको इलॉजिकल बना दो। लॉजिक लॉजिकल

1335
01:32:58,640 --> 01:33:02,960
लॉजिक की पराकाष्ठा पर भी हम खड़े हैं। देखो खत्म हो गए। जिनकी

1336
01:33:02,960 --> 01:33:07,040
शरण में गई थी वह बेचारे लीपापोती करते घूम रहे हैं कि भैया मत

1337
01:33:07,040 --> 01:33:11,040
पूछो मत पूछो ये धक्का कैसे लगा? सृष्टि का निर्माण हुआ कैसे

1338
01:33:11,040 --> 01:33:15,040
पूछो मत। आर्य समाज ढेर हो चुके हैं। देख लो मना कर रहे हैं प्रश्न करने से। जो पांच

1339
01:33:15,040 --> 01:33:19,040
101 कुरान में कहा गया ज्यादा सवाल मत करो। वही निर्भय आर्य तोप का गोला था

1340
01:33:19,040 --> 01:33:23,200
जो वो कर रहा है। जी आज उसने

1341
01:33:23,200 --> 01:33:27,200
एक एक मतलब कोई साधारण सा मतलब है वह परंपरा

1342
01:33:27,200 --> 01:33:31,360
को नहीं मानता है लेकिन वह मतलब ऐसा ज्ञानी हिंदू नहीं कह सकते उसको उससे उसके

1343
01:33:31,360 --> 01:33:35,520
साथ अवतार पे कोई चर्चा करी है वो वो जो

1344
01:33:35,520 --> 01:33:39,680
हिंदू है वो मुझे फोन कर करके वर्णाश्रम पे

1345
01:33:39,680 --> 01:33:44,080
और मेरा बहुत कट्टर विरोधी है जो वहां गया है वो जो है

1346
01:33:44,080 --> 01:33:48,160
हां रोहित गुप्ता नाम है मेरे पास कई कॉल रिकॉर्डिंग है उसकी

1347
01:33:48,160 --> 01:33:52,160
वो मुझे फोन किया करता है परेशान करता अरे

1348
01:33:52,160 --> 01:33:56,160
मतलब वो सामने आएगा नहीं और फोन पर कुतर्क करता रहेगा। उसके कमेंट

1349
01:33:56,160 --> 01:34:00,400
भी देखना हमारे रिसेंट वीडियोस में कमेंट भी है विरोध में बहुत सारे ये वही हिंदू

1350
01:34:00,400 --> 01:34:04,480
है और ये भटके हुए हिंदू है। यही फंसते हैं पहले आर्य समाजियों के यहां फिर वहां से

1351
01:34:04,480 --> 01:34:08,720
जाकर फसेंगे यहां। ये भटके हुए हिंदुओं हिंदुओं का क्या हुंडा है हिंदुओं

1352
01:34:08,720 --> 01:34:12,960
का आर्य समाज इस से होते हुए यहां पे जाकर के फंस जाएंगे। क्योंकि

1353
01:34:12,960 --> 01:34:17,120
भैया उन्होंने आश्रय लिया था आर्य समाजियों का इस का फंस जाएंगे यहां

1354
01:34:17,120 --> 01:34:21,680
मोमिना के मंच पर जाकर के। तो वो जो रोहित गुप्ता है

1355
01:34:21,680 --> 01:34:25,920
वो मुझसे बड़ा परेशान है। हर दो-ती महीने में एक बार फोन करेगा जैसे

1356
01:34:25,920 --> 01:34:30,080
उसको मेरा वीडियो कोई बहुत बुरा वो इस बात [गला साफ़ करने की आवाज़] से दुखी है कि तुम

1357
01:34:30,080 --> 01:34:34,240
जो है आर्य समाज के सिद्धांतों का विरोध इसलिए कर रहे हैं रोहित देख लो इसलिए

1358
01:34:34,240 --> 01:34:38,240
कर रहे हैं मुफ्ती को चुप कराना है यह मुफ्ती सहारा

1359
01:34:38,240 --> 01:34:42,640
लेकर लेते हैं तुम्हारे आर्य समाजियों का इस वालों का समझ गए इसलिए

1360
01:34:42,640 --> 01:34:47,520
करते हैं उनका विरोध इनको आश्रय मिलता है उनसे

1361
01:34:47,520 --> 01:34:51,600
इसलिए करते हैं रोहित को रोहित को बोल रहा हूं वो इस बात से दुखी अरे तुम

1362
01:34:51,600 --> 01:34:54,880
सबको गलत भाई हमको हमको हमको इनको चुप कराना

1363
01:34:54,880 --> 01:34:59,040
है ना मुफ्ती को इनको चुप कराना है तो

1364
01:34:59,040 --> 01:35:03,040
हमें हमारी ओर से गलत बोलने वाले लोग होंगे उनको भी बताना पड़ेगा गलत मत बोलो

1365
01:35:03,040 --> 01:35:07,200
परंपरा से बोलो हां बिकॉज़ क्योंकि क्या है ना जो ये इस्लामी है

1366
01:35:07,200 --> 01:35:11,280
जो ये मानते हैं इनको ये क्या करते हैं वेदों से बोलेंगे देखो जी

1367
01:35:11,280 --> 01:35:15,760
तुम्हारे वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है अच्छा हिंदू को वहां से क्योंकि तुम्हारे दयानंद सरस्वती

1368
01:35:15,760 --> 01:35:19,920
जी जो है वो नहीं मानते हैं आर्य समाज नहीं मानता अब वहां पर हिंदू जो है वो एकदम

1369
01:35:19,920 --> 01:35:24,000
भ्रमित हो जाएगा और डाउट में आ जाएगा कि अच्छा ऐसा ऐसा है। हमारे वेदों में भी

1370
01:35:24,000 --> 01:35:28,160
जो है वो निराकार ईश्वर ही है। जैसा कुरान के द्वारा परिभाषित ईश्वर है।

1371
01:35:28,160 --> 01:35:32,160
अब जब यह चीज मान ली अब आगे इनका जो अटैक होगा वो यही होगा

1372
01:35:32,160 --> 01:35:36,400
कि देखो तुम्हारे जो हिंदुओं में देखो कितना वो जो गंदगी

1373
01:35:36,400 --> 01:35:40,480
की बात इन्होंने करी कि भ आर्य समाज में तो कम गंदगी है और जो मूल है उसमें तो ज्यादा

1374
01:35:40,480 --> 01:35:44,720
गंदगी है। है ना? तो बोलेंगे दोनों तरफ गंदगी अभी अच्छा कहां है? बोला अच्छा भैया

1375
01:35:44,720 --> 01:35:48,800
यह कुरान में है आ जाओ कलमा पढ़ लो और क्योंकि तुम्हारा जो वेद

1376
01:35:48,800 --> 01:35:52,800
है वो भी वही कह रहा है और हमारी कुरान भी वही कह रही है। ये उनकी जो चाल है इसमें

1377
01:35:52,800 --> 01:35:57,040
जाकिर नायक ने बहुत हिंदुओं को फंसाया और ये भी वही उसी उस

1378
01:35:57,040 --> 01:36:01,120
पे काम कर रहे हैं। सेम टेक्निक को एड्स हो गया था। एड्स

1379
01:36:01,120 --> 01:36:05,840
हो गया था। ऐसा सुनने में आया था। उसको पता नहीं भाग गया था बाहर।

1380
01:36:05,840 --> 01:36:10,160
नहीं नहीं एड्स वेड्स की अफवाह आई थी ना जाके। हां आई थी वो हां आई थी। अफवाह

1381
01:36:10,160 --> 01:36:14,480
थी। अफवाह होगी। खैर ठीक है आप लोगों का अच्छा मनोरंजन हुआ होगा।

1382
01:36:14,480 --> 01:36:18,720
जी जी शंकर जी बोले हां अच्छा

1383
01:36:18,720 --> 01:36:22,800
ये आज ना अनिकेत जी ने एक वीडियो बनाया है मन खुश कर दिया इन्होंने

1384
01:36:22,800 --> 01:36:26,800
इतना बढ़िया इन्होंने जो अमोग लीला प्रभु जी हैं

1385
01:36:26,800 --> 01:36:30,880
उनके जो क्लिप्स और पूज्य प्रेमंद महाराज जी

1386
01:36:30,880 --> 01:36:35,040
के जो क्लिप्स वहां पर चलाए मतलब मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए उस पूरी

1387
01:36:35,040 --> 01:36:39,200
आपकी चार चार मिनट की जो वीडियो थी

1388
01:36:39,200 --> 01:36:43,200
मैं फिर मैं फिर सबको एक बार बता दूं सनातन शंकर जी ने

1389
01:36:43,200 --> 01:36:47,200
12 मिनट का इच्छा वाले विषय पर बहुत धाराप्रभा वीडियो बनाया वो

1390
01:36:47,200 --> 01:36:51,360
आप लोग जरूर देखें और इनका चैनल है अनिकेत

1391
01:36:51,360 --> 01:36:55,680
जी का म्यूजिक क्या नाम है अनिकेत जी चैनल का राधा माधव

1392
01:36:55,680 --> 01:36:59,920
म्यूजिक एंड फैक्ट हां राधा माधव म्यूजिक एंड फैक्ट तो

1393
01:36:59,920 --> 01:37:04,080
ये जो है इस चैनल पर जो है आपको

1394
01:37:04,080 --> 01:37:08,640
जो इस के विषय में जो इस के छुपे हुए गुंडे हैं ना जो

1395
01:37:08,640 --> 01:37:12,720
जो काम करते हैं तो उसका उनका ये लोग यह प्रतिकार कर रहे हैं तो आप

1396
01:37:12,720 --> 01:37:17,040
जो है इनके चैनल को जरूर देखें। राधा बहुत

1397
01:37:17,040 --> 01:37:21,040
बढ़िया वीडियो बनाया। हां। अरे मैं सही मेरे

1398
01:37:21,040 --> 01:37:25,120
मेरे रोंगटे तो खड़े हुए अनिकेत जी साथ में मेरी आंखों में ना आंसू भी भरा आए।

1399
01:37:25,120 --> 01:37:25,620
पता

1400
01:37:25,200 --> 01:37:29,200
है उस क्लिप को देख के जब मैं प्रेमानंद महाराज जी का जो सुना और जब वो लास्ट वाला

1401
01:37:29,200 --> 01:37:33,200
मतलब बहुत बढ़िया वीडियो बनाया आपने क्लिप जोड़ के। बहुत-बहुत साधुवाद।

1402
01:37:33,200 --> 01:37:39,200
बहुत अच्छे। जी शास्त्र जी। प्रेरणा स्त्रोत्र है। आप लोग से

1403
01:37:39,280 --> 01:37:43,440
हां अंकित जी बोले अंकित जी जय श्री राम। हां

1404
01:37:43,440 --> 01:37:47,520
आप लोग की प्रेरणा है। आप लोग से प्रेरणा मिला है। अब क्या है कि वही

1405
01:37:47,520 --> 01:37:51,520
छुपे छुपाए हैं। एक निर्गुण निराकार है जो

1406
01:37:51,520 --> 01:37:55,600
द्वत बन के वीडियो बनाता है। आपने बताया था मुझे

1407
01:37:55,600 --> 01:37:59,760
किंग स्पिरिट वो तो निर्गुण

1408
01:37:59,760 --> 01:38:04,000
निराकार कोई सिद्ध कर रहा है। प्रत्यक्ष एकदम पीछे पीछे

1409
01:38:04,000 --> 01:38:08,320
से क्या है वो अभद्र बहुत चीजें करता है। हालांकि

1410
01:38:08,320 --> 01:38:12,960
आपने इग्नोर करने के लिए कहा था लेकिन इग्नोर करने जैसा नहीं है वो व्यक्ति

1411
01:38:12,960 --> 01:38:17,280
बनाएंगे बहुत बोलता है ना कि अद्वैतियों ने बहुत बोल दिया

1412
01:38:17,280 --> 01:38:21,280
और जो शंकराचार्य थे वो सही थे और

1413
01:38:21,280 --> 01:38:25,440
उनके जो नस्ले आई है ना शब्द यूज़ करता है। नस्लें आई है ना

1414
01:38:25,440 --> 01:38:29,600
उन्होंने पूरा बर्बाद किया है। तो ये सब शब्द जो यूज़ करता है ना उसको

1415
01:38:29,600 --> 01:38:33,600
उत्तर देना जरूरी है। उनहीं के लोगों से उन लोगों का पोपट कर

1416
01:38:33,600 --> 01:38:38,160
देते हम और कुछ नहीं। [हंसी] अच्छा

1417
01:38:38,160 --> 01:38:40,320
उसके पास केवल एडिटिंग है। कभी भी ये नहीं

1418
01:38:40,320 --> 01:38:44,880
बताया ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं। ये सब कुछ नहीं। एडिट करता है। बस

1419
01:38:44,880 --> 01:38:49,200
कोई कोई आपकी बुक कोट कर देगा। कुछ अपने हिसाब से वहां कोट कर देगा।

1420
01:38:49,200 --> 01:38:53,360
अपने हिसाब से वहां निर्णय दे देगा। ये सब है। इसीलिए मैंने कहा कि सामने आके बात कर

1421
01:38:53,360 --> 01:38:57,520
ले। तो बोलता है कि संस्कृत में होगी बात। हिंदी बोलना आवे नहीं है। संस्कृत

1422
01:38:57,520 --> 01:39:01,680
की बात करते हैं। बरसात बरसात से बचने

1423
01:39:01,680 --> 01:39:07,680
की हैसियत नहीं तुम्हारी और गोलीबारी की बात करते हो आप लोग। [हंसी]

1424
01:39:09,520 --> 01:39:14,400
उसको एक ने एडिटिंग सोल बोला [हंसी] था कमेंट में पिंग एडिटिंग सोल

1425
01:39:14,400 --> 01:39:20,400
बींग एडिटिंग सोलवा जी

1426
01:39:21,440 --> 01:39:27,440
जी शास्त्रवाद जी

1427
01:39:28,160 --> 01:39:32,160
जय श्री राम भैया जय आज का वीडियो इतना जबरदस्त

1428
01:39:32,160 --> 01:39:38,160
बनाया आज जो लाइव हुआ जी

1429
01:39:40,880 --> 01:39:45,040
100 सोनार की एक लोहार की बहुत जबरदस्त ताप था हम

1430
01:39:45,040 --> 01:39:49,200
से मार दिया [हंसी] चारों खाने

1431
01:39:49,200 --> 01:39:53,200
अब मुझे ये पूछना था भैया मान लो उसने प्रति उत्तर के तौर पर उसने नहीं

1432
01:39:53,200 --> 01:39:57,200
बनाया वीडियो तो उसको क्या माने हम मान लीजिए उसने बोला कि इग्नोर

1433
01:39:57,200 --> 01:39:59,840
करो हटाओ हटाओ

1434
01:39:59,840 --> 01:40:04,000
तो ठीक है हमारी बात से सहमत हो गई और क्या स्वीकृति मोनम वो मौनम

1435
01:40:04,000 --> 01:40:06,480
स्वीकृति

1436
01:40:06,480 --> 01:40:12,480
सही है। आवाज आ रही है? हेलो आवाज आ रही है?

1437
01:40:12,800 --> 01:40:16,960
जी भैया वही कह रहा था कि आपने जो वीडियो बनाया आज का लाइव

1438
01:40:16,960 --> 01:40:20,960
में जिस वीडियो से वो चले थे उनका खंडन करने के लिए

1439
01:40:20,960 --> 01:40:25,520
क्या नाम है उनका? अवेकनिंग। अवेकनिंग दीदी का। ठीक है?

1440
01:40:25,520 --> 01:40:29,600
और उसी वीडियो का आधार लेकर के आपने उन्हीं के जो

1441
01:40:29,600 --> 01:40:33,600
है मुफ्ती का खंडन कर दिया। [हंसी] वो जबरदस्त

1442
01:40:33,600 --> 01:40:38,510
था वो भी देखेंगे तो शॉक हो जाएंगे किसे पाला पड़ गया।

1443
01:40:38,510 --> 01:40:40,800
[हंसी]

1444
01:40:40,800 --> 01:40:44,960
जबरदस्त है। और जो जो मुस्कान अभी आप लोगों के

1445
01:40:44,960 --> 01:40:49,040
चेहरे आ रही जब मैंने वीडियो देखा था इसका मोमिना का

1446
01:40:49,040 --> 01:40:53,200
उसी समय मेरे अंदर यही भाव उत्पन्न हुए थे। क्या बच्चों बच्चों के तरीके से अभी

1447
01:40:53,200 --> 01:40:57,360
देखो इसको ऐसे एक वो फिल्म आई थी ना

1448
01:40:57,360 --> 01:41:01,360
तकदीर वाला उसमें यमराज जी नीचे वो बुक ढूंढने आते

1449
01:41:01,360 --> 01:41:05,360
हैं

1450
01:41:05,360 --> 01:41:09,360
हां हां तो उसमें वो लोगने

1451
01:41:09,360 --> 01:41:13,360
तो उसमें वो लोग जब पुलिस वाला उनको थाने ले जाता है वो तो जानता

1452
01:41:13,360 --> 01:41:17,680
नहीं था यमराज है ना तो पुलिस वाला उनको थाने

1453
01:41:17,680 --> 01:41:21,680
ले जाता है तो काफी देर बाद जब वो परेशान हो जाते हैं तो फिर वो दिखाते

1454
01:41:21,680 --> 01:41:25,680
हैं अपनी ताकत। तो ताकत दिखाने के लिए वहां जो गोलियां रखी थी

1455
01:41:25,680 --> 01:41:29,840
उसको चबा जाते हैं। बम रखे थे उसको चबा जाते हैं।

1456
01:41:29,840 --> 01:41:33,920
पिस्तौलस्त रखी थी उसको भी चबा जाते हैं। यह सब सीन वहां दिखाया गया।

1457
01:41:33,920 --> 01:41:37,920
वैसे ही जब मैंने तुम्हारा वीडियो देखा था मोमिना तो यही भाव

1458
01:41:37,920 --> 01:41:42,080
था। ये ऐसे चबा जाऊंगा तुम्हारे सब वीडियो। ठीक है? और

1459
01:41:42,080 --> 01:41:46,240
तुम्हारे मुफ्ती और आवा के गोले हैं। सब चबा लिए जाएंगे। सब

1460
01:41:46,240 --> 01:41:50,960
सब नष्ट हो जाएंगे। कुछ नहीं बचेगा। इसलिए जहां हो

1461
01:41:50,960 --> 01:41:55,440
अपने उसमें रह के अपना मर्यादा में रहने का प्रयास करो।

1462
01:41:55,440 --> 01:41:59,600
जो भी प्रश्न करो सबसे पहले तो मर्यादा में रह के करो और

1463
01:41:59,600 --> 01:42:03,920
मर्यादा को लांग के करोगी और किसी दिन किसी ऐसे ठीक-ठाक

1464
01:42:03,920 --> 01:42:08,320
व्यक्ति से हो जाएगा तो वहां पर वो ये उनके लिए सोनाली

1465
01:42:08,320 --> 01:42:12,880
जी के लिए कर रही थी। वा ऐसे कर रही थी।

1466
01:42:12,880 --> 01:42:17,040
ठीक है? तो अभी ठीक-ठाक व्यक्ति से आपका सामना नहीं हुआ है। इसलिए आप

1467
01:42:17,040 --> 01:42:20,480
ऐसा सोच रही हो कि आप अकाट्य हो। अभी अकाटेट

1468
01:42:20,480 --> 01:42:24,480
से सामना होना बाकी है। आपके मुफ्ती जी का हो चुका है। मान के बैठे हुए

1469
01:42:24,480 --> 01:42:28,720
हैं। ठीक है हमारा याद हमने मान लिया थोड़ी देर। गलत गलत।

1470
01:42:28,720 --> 01:42:32,960
ठीक है। चलिए जय श्री राम। जी भैया

1471
01:42:32,960 --> 01:42:37,040
भैया जबरदस्त है। आपने जो जी जी

1472
01:42:37,040 --> 01:42:41,360
बोलिए बोलिए। जी मैं ये कह रहा था कि अभी उनका जब खंडन

1473
01:42:41,360 --> 01:42:45,360
हो रहा था अवेकनिंग दीदी का जब वो खंडन कर रहे थे

1474
01:42:45,360 --> 01:42:49,360
तो उनको आश्रय कहां से मिला? आश्रय आश्रय जो

1475
01:42:49,360 --> 01:42:53,680
है आपने दिया यहां पे इस मंच पर उनका समर्थन करके

1476
01:42:53,680 --> 01:42:57,840
ठीक है जब समर्थन किया उनका उनका खंडन किया

1477
01:42:57,840 --> 01:43:01,840
अपन ने क्या किया एक परंपरा जो है वो वृक्ष की तरह उनको छाव

1478
01:43:01,840 --> 01:43:06,400
दे रही है अब ठीक है परंपरा जो है वो एक वृक्ष की तरह उनको छाव दे रही है

1479
01:43:06,400 --> 01:43:10,480
और कुछ लोग क्या करते हैं उसी वृक्ष की एक डाल को काट के ले जाएंगे

1480
01:43:10,480 --> 01:43:14,800
और बोलेंगे कि ये अब पेड़ है और ये छांव देगी

1481
01:43:14,800 --> 01:43:18,880
जिनका वो समर्थन कर रही थी अवे दीदी वाली तो

1482
01:43:18,880 --> 01:43:22,880
समझना चाहिए झड़ जिस पेड़ का होता है ना जो विराट विशाल वृक्ष

1483
01:43:22,880 --> 01:43:26,960
होता है वही छाव दे सकता है वही आपको धूप वही

1484
01:43:26,960 --> 01:43:31,040
आपको हर बाधाओं से बचाएगा लेकिन

1485
01:43:31,040 --> 01:43:35,520
डाल नहीं बचा पाएगा तो परंपरा विशाल

1486
01:43:35,520 --> 01:43:39,840
वृक्ष बिल्कुल बिल्कुल

1487
01:43:39,840 --> 01:43:44,160
यही बात तो मैं बताना चाहता हूं भाई परंपरा की आप समझिए वैल्यू

1488
01:43:44,160 --> 01:43:48,400
क्या है अब लॉ सोनाली जी का

1489
01:43:48,400 --> 01:43:53,280
विरोध करने के चक्कर में ही अब ये बात तो स्वीकार कर ली कि परंपरा से

1490
01:43:53,280 --> 01:43:58,560
शास्त्रों का अर्थ होगा तो अपने सारे वीडियो डिलीट करो तो तुमने परंपरा से

1491
01:43:58,560 --> 01:44:02,880
वेरीफाई किए बिना बनाए भाई ये अर्थ हम ले रहे हैं कि अलाला

1492
01:44:02,880 --> 01:44:06,960
पलाला वाला वीडियो डिलीट करवा हमें रग से उसने अपने मन से किया परंपरा

1493
01:44:06,960 --> 01:44:11,120
प्राप्त अर्थ नहीं है वो जो बोल रहा है उसको कहां से मिला वो वही

1494
01:44:11,120 --> 01:44:15,440
सवाल पूछूं कहां से मिला वशिष्ठ धर्म सूत्र

1495
01:44:15,440 --> 01:44:20,720
बस बस पका जाएंगे अभी। ठीक है जी।

1496
01:44:20,720 --> 01:44:26,640
और और कोई कुछ बोले सनातन शंकर जी नहीं तो ऑफ करें फिर आगे बढ़ाएं।

1497
01:44:26,640 --> 01:44:30,800
नहीं नहीं बिल्कुल बहुत सारे लोग ये बोलते हैं कि जी परंपरा का सवाल सिर्फ

1498
01:44:30,800 --> 01:44:34,800
हिंदुओं से क्यों पूछा जाता है? अब जब बाहर का कोई व्यक्ति हमारे

1499
01:44:34,800 --> 01:44:38,800
जो धर्म शास्त्रों की गलत व्याख्या करेगा तो उससे भी यही पूछा जाएगा कि तुम्हें यह शास्त्र

1500
01:44:38,800 --> 01:44:42,880
कहां से मिले? तुमने यह व्याख्या कहां से ली? है ना?

1501
01:44:42,880 --> 01:44:47,040
हम यह नहीं बोलेंगे कि तुम तुम्हारी परंपरा क्या है? हम यह बोलेंगे तुमने यह शास्त्र

1502
01:44:47,040 --> 01:44:50,640
कहां से लिए और वहां पर वह फंस जाएगा। अंतिम

1503
01:44:50,640 --> 01:44:54,640
में उसे यह मानना पड़ेगा कि व्याख्या जो है वो आपकी ही मानी जानी चाहिए। क्योंकि

1504
01:44:54,640 --> 01:44:58,640
अगर वो यह नहीं मानेगा कि भाई हमारी व्याख्या नहीं मानेगा तो फिर बोलेंगे तुम्हारी कुरान की

1505
01:44:58,640 --> 01:45:02,640
व्याख्या फिर हम करेंगे। वहां पर वो बोलेगा नहीं नहीं व्याख्या जो है

1506
01:45:02,640 --> 01:45:06,720
मुफ्ती ही करेंगे मौलाना ही करेंगे। तो भैया फिर उसे ये मानना पड़ेगा

1507
01:45:06,720 --> 01:45:11,120
कि अगर हमारी व्याख्या हमारे मौलाना करेंगे। जी

1508
01:45:11,120 --> 01:45:15,360
जबकि यह जो परंपरा का सिद्धांत है, इसका खंडन है कुरान

1509
01:45:15,360 --> 01:45:19,520
में। समझे? अगर हम फिर वही

1510
01:45:19,520 --> 01:45:23,520
वाली बात कि हम आपकी कुरान की व्याख्या करने के अधिकारी हैं। आप हमारे शास्त्रों की

1511
01:45:23,520 --> 01:45:27,520
व्याख्या करने के अधिकारी नहीं हो। क्योंकि आपने परंपरा

1512
01:45:27,520 --> 01:45:31,600
के सिद्धांत का खंडन किया है। और हमारे यहां परंपरा के सिद्धांत को माना गया

1513
01:45:31,600 --> 01:45:35,760
है। आप अधिकारी नहीं हो। हम अधिकारी हैं। हम कर सकते हैं। हम अधिकारी

1514
01:45:35,760 --> 01:45:40,160
हैं। हां। फिर भी हमारी उदारता है। एक एहसान है

1515
01:45:40,160 --> 01:45:44,640
कि हम न्याय पूर्वक व्यवहार कर रहे हैं कि तुम्हारी कुरान की व्याख्या तुम ही करो। यह एहसान

1516
01:45:44,640 --> 01:45:48,640
है हमारा। बिल्कुल बिल्कुल हां

1517
01:45:48,640 --> 01:45:52,720
बिल्कुल यही बात आती है। और [गला साफ़ करने की आवाज़] वहां पर वो लोग फसेंगे।

1518
01:45:52,720 --> 01:45:57,120
और जब वो फसेंगे तो जो अंतिम में

1519
01:45:57,120 --> 01:46:01,360
जो है वो उनके जो सिद्धांत है वो कमजोर सिद्ध होंगे कि बुराई

1520
01:46:01,360 --> 01:46:06,160
को बनाने वाले वाला जो है वो उसमें भी बुराई है।

1521
01:46:06,160 --> 01:46:10,320
है ना? जब भी आर्य समाज के धर्म और ब्रह्म पर बात की जाती

1522
01:46:10,320 --> 01:46:14,400
है, एक लेकर के तटपुजिया टाइप का आप तर्क लॉजिक लेकर

1523
01:46:14,400 --> 01:46:18,480
के आते हैं। समस्त लोग मुझे नहीं पता आपसे पहली बार बात हो रही है। बहुत

1524
01:46:18,480 --> 01:46:22,640
ही निचले स्तर का है। बात हो रही है धर्म ब्रह्म की और

1525
01:46:22,640 --> 01:46:26,720
आप ला रहे हैं लॉजिक यह वाला कि हमने क्रांतिकारी इंस्पायर किए

1526
01:46:26,720 --> 01:46:31,440
हैं। इसका मतलब यह है कि क्रांतिकारी तो मुस्लिम भी थे।

1527
01:46:31,440 --> 01:46:36,160
मुस्लिम भी क्रांतिकारी हुए हैं। तो इसलिए कुरान को एक्सेप्ट करना चाहिए।

1528
01:46:36,160 --> 01:46:40,160
और तुम यह जो नाम ले रहे हो तुम्हें वो नाम नहीं पता है जो मूर्ति

1529
01:46:40,160 --> 01:46:44,720
पूजा थे मूर्ति पूजा करते थे मूर्ति पूजक थे वो नाम नहीं पता तुम्हें

1530
01:46:44,720 --> 01:46:48,880
हम छत्रपति शिवाजी कौन थे मूर्ति पूजक नहीं

1531
01:46:48,880 --> 01:46:52,880
थे उनके गुरु समर्थ रामदास कौन थे मूर्ति पूजक नहीं थे हरिहर बुक्का कौन

1532
01:46:52,880 --> 01:46:58,720
थे मूर्ति पूजक नहीं थे महाराणा प्रताप कौन थे मूर्ति पूजक नहीं थे

1533
01:46:58,720 --> 01:47:04,080
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई मूर्ति पूजक नहीं थी मंगल पांडे मूर्ति पूजक नहीं थे

1534
01:47:04,080 --> 01:47:08,080
और तुम ये जो पांच 10 नाम लेकर के घूमा करते हो।

1535
01:47:08,080 --> 01:47:12,400
क्या केवल इतने ही क्रांतिकारी थे स्वतंत्रता संग्राम में?

1536
01:47:12,400 --> 01:47:16,720
इनका भी अभी वो वेरीफाई करना है। चंद्रशेखर, आशा, आजाद

1537
01:47:16,720 --> 01:47:20,880
इत्यादि ये सब जो नाम सब घुसेड़ लिए हैं। मगर मैं कह रहा हूं अगर तुम 50 बोल

1538
01:47:20,880 --> 01:47:21,380
दो, 100

1539
01:47:21,280 --> 01:47:25,680
बोल दो तो 100 ही संत सेनानी थे क्या? रेवोल्यूशन

1540
01:47:25,680 --> 01:47:29,680
में तो जितने लोग आर्य समाजी थे, जितने जितने लोग

1541
01:47:29,680 --> 01:47:33,680
आर्य समाजी थे उनको छोड़कर जितने लोग बचे वो आर्य समाजी नहीं

1542
01:47:33,680 --> 01:47:38,400
थे। वो कौन थे? वो मूर्ति पूजक थे। हम

1543
01:47:38,400 --> 01:47:42,560
या तो मुस्लिम वैदिक भी बोलो। वैदिक भी थे क्योंकि क्योंकि ये लोग ना ये भ्रम

1544
01:47:42,560 --> 01:47:46,640
फैला देते हैं कि अच्छा मूर्ति पूजक अलग है और वैदिक अलग है। अरे भाई जो मूर्ति पूजक

1545
01:47:46,640 --> 01:47:51,440
है वो कहीं ना कहीं वैदिक है। है ना? वैदिक भी थे। वैदिक

1546
01:47:51,440 --> 01:47:55,440
हिंदू थे। बेवकूफी भरी बात होती है ये कि वो

1547
01:47:55,440 --> 01:47:59,520
वो जो है इंस्पायर हैं। अरे भैया जाके देखो बौद्धों

1548
01:47:59,520 --> 01:48:03,600
से किसने लड़ा? नास्तिकता खत्म हो पाई है ना शंकराचार्य की वजह

1549
01:48:03,600 --> 01:48:08,240
से खत्म हो पाई है और अंत में भी जब आखरी चोट मानवता पर आएगी

1550
01:48:08,240 --> 01:48:12,240
तो आपको शरण मिलेगी शंकराचार्य के पास आकर के कहीं पर शरण नहीं

1551
01:48:12,240 --> 01:48:16,240
मिल पाएगी यह सब तब तक है जब तक व्यक्ति आस्तिक है तब तक मान लो

1552
01:48:16,240 --> 01:48:22,240
उसका निराकार ईश्वर आर्य समाजियों का ईश्वर इस का ईश्वर तब तक मान लो

1553
01:48:23,120 --> 01:48:27,680
जब व्यक्ति आस्तिक ही नहीं है सब खत्म हो जाएगा तितर बितर

1554
01:48:27,680 --> 01:48:33,520
ठीक है हां जी बिल्कुल

1555
01:48:33,520 --> 01:48:38,320
भैया आपने जो अभी बात बोला चंद्र चंद्रशेखर आजाद

1556
01:48:38,320 --> 01:48:42,400
जी को आपने मतलब आपने जो बोला अभी कि ये लोग उन्हें भी घुसेड़

1557
01:48:42,400 --> 01:48:46,480
दिए इस तरह की जो आपने बात बोली इसको वो लोग गलत वे में ले ले जाएंगे इसलिए

1558
01:48:46,480 --> 01:48:50,720
इसका आप स्पष्टीकरण दे दीजिए

1559
01:48:50,720 --> 01:48:55,120
आपने कहा ना घुसेड़ दिए वाले शब्द शब्द पकड़ते ना भैया

1560
01:48:55,120 --> 01:49:01,120
लिस्ट में डाल दिए लिस्ट में घुसेड़ दिया भाई

1561
01:49:01,840 --> 01:49:05,920
का मतलब बात नहीं कुछ मिलता नहीं इनको तो ये

1562
01:49:05,920 --> 01:49:10,080
लोग यही पकड़ते मैंने भी देखा आपने सही कहा इसको हटा

1563
01:49:10,080 --> 01:49:14,160
दीजिए हो गया दिख गया हटा दीजिए इसको स्क्रीन से ठीक

1564
01:49:14,160 --> 01:49:20,160
है फिर

1565
01:49:22,160 --> 01:49:26,400
सारे मूर्ति पूजक थे आजाद जनेऊ पहनते थे सब यह भी मूर्ति पूजक

1566
01:49:26,400 --> 01:49:30,480
ही थे यह भी अभी क्लेरिफिकेशन होना बाकी कि वो जिनका

1567
01:49:30,480 --> 01:49:34,560
ये नाम लेते हैं दम भरते हैं वो लोग थे भी कि नहीं थे वो अपने मन से ही सब कर

1568
01:49:34,560 --> 01:49:38,720
लिया है। खैर चलिए ठीक है समय देने के लिए सबका आभार मूर्ति

1569
01:49:38,720 --> 01:49:42,720
पूजक और मूर्ति पूजक में ना भैया मतलब

1570
01:49:42,720 --> 01:49:46,800
वो लोगों ने मूर्ति पूजक ना होने के जो लिस्ट

1571
01:49:46,800 --> 01:49:50,800
है उनमें उन्होंने चंद्रशेखर आजाद जी को ले आया। ये आप कहना चाह

1572
01:49:50,800 --> 01:49:54,960
रहे हैं ना? नहीं उन्होंने मैं यह

1573
01:49:54,960 --> 01:49:59,440
कह रहा हूं कि क्रांतिकारियों की जो लिस्ट वो है ना क्रांतिकारियों

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की लिस्ट आर्य समाजियों की आर्य समाजियों की लिस्ट आर समाजियों

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की जो लिस्ट है कई क्रांतिकारी जो अभी वेरिफिकेशन

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के अधीन है जो सत्यापन के अधीन है जो जानकारी उसको अपनी मनगढ़ंत बातों से

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अरे भाई ये भी प्रभावित है ये भी प्रभावित थे आर्य समाज से ऐसे करते

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हुए आर्य

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समाज की लिस्ट में क्रांतिकारियों को वेल नोन क्रांतिकारियों को डाल दिया

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है ये बात ठीक है जी जी अब जी अब स्पष्टीकरण

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है तो इसलिए सब दर्शक इसका वो वो कोई गलत अर्थ ना निकाले।

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ठीक है। एक आध एक आध एक आध अर्थ जो है गलत

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रह जाने दो जिससे व्यक्ति थोड़ा परेशान होता रहे। कुछ मेहनत करे और

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मेहनत करके परेशान हो। थोड़ा सा छोड़ दो।

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एक ही आदमी है पकड़ता है। वो बींग एडिटिंग सोल। बस वही पकड़ता

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है और कोई पकड़ता नहीं है। कुछ तो मिले उसको

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भी। भाई ने तो चैनल ही बंद हो जाएगा उसका। ये लोग उन

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लोगों में से है। इनके यहां पर जब कोई विधर्मी

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या कोई मच या कुछ भी जो किसी दिन

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कोई आक्रमण करेगा ना है ना तो ये उस समय भी वीडियो बनाएंगे

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क्या वीडियो बना लेता हूं अभी जब इनके घर की मातृ शक्तियों पर आक्रमण हो रहा होगा

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तो ये वीडियो बनाएंगे और फिर कहेंगे कि मैं जो है वीडियो बना लेता हूं फिर इसकी एडिटिंग

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करके बढ़िया इसका खंडन करूंगा ये वो लोग

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करेक्ट करेक्ट 100%

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ठीक है पूरा सभी को सभी का आभार

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जी जी जय श्री राम सभी जय श्री राम जी जय

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जय

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[संगीत]
