1
00:00:03,680 --> 00:00:07,840
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:07,840 --> 00:00:12,000
होंगे। और अलंकार समाजियों का

3
00:00:12,000 --> 00:00:16,080
स्वरूपभूत लक्षण क्या है? जिसके बिना उनका अस्तित्व संभव

4
00:00:16,080 --> 00:00:20,960
नहीं है। अभद्रता, नीचता, बौखलाहट,

5
00:00:20,960 --> 00:00:24,240
धोखेबाजी

6
00:00:24,240 --> 00:00:30,240
या कहें कि दोगलापन

7
00:00:30,560 --> 00:00:35,280
तो इन इन सबको मिलाकर के जो

8
00:00:35,280 --> 00:00:38,160
लक्षण बनेगा

9
00:00:38,160 --> 00:00:43,280
वो आर अलंकार समाज का लक्षण है या नहीं

10
00:00:43,280 --> 00:00:47,760
यह आज आपको इस लाइव चर्चा में पता चलने वाला है

11
00:00:47,760 --> 00:00:51,760
और चर्चा से कुछ लोग और भी

12
00:00:51,760 --> 00:00:56,080
जुड़ेंगे सनातन शंकर जी भी जुड़ेंगे उनका एक बात मैं बता दूं कि बहुत

13
00:00:56,080 --> 00:01:00,800
अच्छा एक वीडियो उन्होंने बताया सार गर्भवित एक वीडियो बनाया है।

14
00:01:00,800 --> 00:01:04,880
बहुत सारगर्भित वीडियो है वह। आप उनके चैनल पर जाकर अवश्य देखें। 12 मिनट

15
00:01:04,880 --> 00:01:10,480
में उन्होंने जो बातें कही हैं बिल्कुल टू द पॉइंट और

16
00:01:10,480 --> 00:01:14,720
जो कहते हैं कि जगुरु

17
00:01:14,720 --> 00:01:20,000
शंकराचार्य जी आपका स्वागत है सनातन शंकर जी हमारे चैनल पर।

18
00:01:20,000 --> 00:01:24,080
जय श्री राम जी। जय श्री राम। जय श्री राम। तो

19
00:01:24,080 --> 00:01:28,480
मैं बता रहा था जनता जनार्दन को कि जगुरु

20
00:01:28,480 --> 00:01:32,480
शंकराचार्य जी कहते हैं कि जो शंकराचार्य के

21
00:01:32,480 --> 00:01:36,480
मुख्य कार्य होते हैं उसमें से एक उनका कार्य होता है विषद ज्ञान

22
00:01:36,480 --> 00:01:40,560
विज्ञान को सूत्रात्मक शैली में सुलभ कराना। तो

23
00:01:40,560 --> 00:01:44,640
कई बार ऐसा होता है कुछ बहुत बड़े-बड़े चैप्टर्स होते हैं। उनमें बहुत गहरी गहरी

24
00:01:44,640 --> 00:01:48,800
बातें होती है। मगर कभी-कभी कोई कोई आचार्य इस

25
00:01:48,800 --> 00:01:53,440
प्रकार के हमें प्राप्त होते हैं जो उन बड़ी विषद व्याख्या को

26
00:01:53,440 --> 00:01:57,680
इस प्रकार से सूत्रात्मक शैली में कहते हैं कि वो सिद्धांत

27
00:01:57,680 --> 00:02:02,640
बनके और हर व्यक्ति को रटाया जा सकता है। इस प्रकार से तो

28
00:02:02,640 --> 00:02:06,640
सनातन शंकर जी ने अभी जो रिसेंटली वीडियो बनाया है

29
00:02:06,640 --> 00:02:10,720
वो 12 मिनट का वो वीडियो अभी तक मुझे इनके द्वारा बनाए

30
00:02:10,720 --> 00:02:15,040
गए सभी वीडियो में सर्वश्रेष्ठ लगा अभी तक मैं उसकी प्रशंसा

31
00:02:15,040 --> 00:02:19,200
करता हूं बहुत हृदय से और बहुत सारगर्भित जी बहुत

32
00:02:19,200 --> 00:02:23,200
सारगर्भित और बहुत टू द पॉइंट सूत्रात्मक शैली में इन्होंने व्याख्या की

33
00:02:23,200 --> 00:02:27,200
है सभी को देखना चाहिए जो इन्होंने

34
00:02:27,200 --> 00:02:31,200
जो एक निर्भय के साथ जो हमारी

35
00:02:31,200 --> 00:02:36,080
बातचीत हुई है उसको लेकर के इन्होंने एक सारगर्भित

36
00:02:36,080 --> 00:02:40,320
अपना पक्ष रखा है वहां पर कि किस प्रकार से जहां

37
00:02:40,320 --> 00:02:44,960
पर एक मिसिंग पॉइंट आता है जहां पर निर्भय जो है

38
00:02:44,960 --> 00:02:49,200
चर्चा के समय जब मैं उससे पूछता हूं कि भाई ईश्वर ने इच्छा

39
00:02:49,200 --> 00:02:53,200
की और यह है जड़ पदार्थ तो वह इच्छा जड़ पदार्थ

40
00:02:53,200 --> 00:02:57,440
को किस रूप में प्राप्त हुई क्योंकि इच्छा का अधिष्ठान चेतन है और ऐसा

41
00:02:57,440 --> 00:03:02,400
वैसा चेतन नहीं है ऐसा वैसा चेतन नहीं है। वो

42
00:03:02,400 --> 00:03:06,880
सुप्रीम कॉन्शियसनेस है। तो इच्छा का अधिष्ठान है ईश्वर

43
00:03:06,880 --> 00:03:10,880
चेतन। चलो मान लो कि ईश्वर नहीं भी है तो चेतन तो है मगर

44
00:03:10,880 --> 00:03:15,120
जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है वो इच्छा? अच्छा दूसरी बात इच्छा

45
00:03:15,120 --> 00:03:19,360
अगर प्राप्त हो भी जाएगी तो जड़ को एनर्जी चाहिए होगी मूवमेंट

46
00:03:19,360 --> 00:03:23,520
के लिए। तो यह जो एक कनेक्शन है ना इस बीच में ईश्वर

47
00:03:23,520 --> 00:03:27,760
की इच्छा और जड़ पदार्थ इसके बीच में एक कनेक्शन

48
00:03:27,760 --> 00:03:31,920
बनता है। उस कनेक्शन को आर्य समाजी अलंकार समाजी और

49
00:03:31,920 --> 00:03:36,000
फिलहाल जो स्वयं को बताता फिर रहा

50
00:03:36,000 --> 00:03:40,240
है जो व्यक्ति तो वो इस पॉइंट पर मिस कर

51
00:03:40,240 --> 00:03:44,400
मिस करना चाहते हैं कि इस पॉइंट को मैं कुछ ऐसा उलझाऊं कि यह मुख्य बात

52
00:03:44,400 --> 00:03:48,400
मुझसे पूछी ही ना जाए कि इक्षा जो है प्राप्त किस रूप में

53
00:03:48,400 --> 00:03:51,120
हो रही है। जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है? हालांकि

54
00:03:51,120 --> 00:03:55,200
वहां पर भी सगुण अवतार की आवश्यकता हो जाएगी। जहां पर जो ईश्वर है

55
00:03:55,200 --> 00:03:59,200
वो अंतःकरण में जो है प्रकट होकर के उनके अंतःकरण का विषय बन

56
00:03:59,200 --> 00:04:03,600
जाता है। वहां पर भी ईश्वर के सगुण होने की आवश्यकता बन जाएगी।

57
00:04:03,600 --> 00:04:07,680
मगर जहां पर भी यह जो आध्यात्मिक

58
00:04:07,680 --> 00:04:11,760
जो पारमार्थिक स्वरूप है ईश्वर का जहां पर भी वो

59
00:04:11,760 --> 00:04:16,080
भले ही जड़ पदार्थों के लिए व्यवहारिक होगा या फिर

60
00:04:16,080 --> 00:04:20,240
जो चेतन पदार्थ है जीव उनके लिए वो होगा

61
00:04:20,240 --> 00:04:24,480
व्यवहारिक कहीं जहां पर भी व्यवहारिक होगा वहां पर यह कनेक्शन बताना

62
00:04:24,480 --> 00:04:28,560
आवश्यक पड़ जाएगा कि जो व्यवहारिक है ही नहीं जो व्यवहार में

63
00:04:28,560 --> 00:04:32,640
ना आ सकने वाला अध्यात्म जगत का है तो वो किस रूप में

64
00:04:32,640 --> 00:04:36,640
यहां पर व्यवहारिक हो रहा है। तो वहां यह जो कनेक्शन स्थापित करता है ना

65
00:04:36,640 --> 00:04:41,440
इसी कनेक्शन का नाम होता है अवतार। अवतार कि भगवान

66
00:04:41,440 --> 00:04:45,680
भगवान ऐसा रूप धारण करते हैं जो वो इनके व्यवहार का विषय

67
00:04:45,680 --> 00:04:49,680
बन सके। तो हालांकि

68
00:04:49,680 --> 00:04:54,000
जो चेतन जीव है उसके भी व्यवहार का विषय बनने के लिए अवतार की आवश्यकता

69
00:04:54,000 --> 00:04:58,000
हो जाएगी वहां पर। मगर फिलहाल जड़ पदार्थ को कैसे सिद्ध करोगे? चलो

70
00:04:58,000 --> 00:05:02,160
चेतन के पास तो थोड़ा बहुत चेतन है भी। है ना? शास्त्रवाद

71
00:05:02,160 --> 00:05:06,320
जी भी आ गए। तो इन्होंने सनातन शंकर जी ने इस पॉइंट को

72
00:05:06,320 --> 00:05:10,800
वो जो मिस कर रहा है वो जो बोलना नहीं चाहता उस पर बात ही नहीं करने देना चाहता है।

73
00:05:10,800 --> 00:05:14,880
जितनी बार उस चीज पर बात आती है निर्भय के साथ बात करने पर उतनी बार

74
00:05:14,880 --> 00:05:18,880
निर्भय कोई ना कोई ऐसी बात करता है जिससे कि वो

75
00:05:18,880 --> 00:05:22,960
विषय जो है भटक सके। दूसरे विषयों पर बात हो सके। मगर वहां

76
00:05:22,960 --> 00:05:27,200
वो स्किप कर रहा है। उस कनेक्शन को बताने से वह मना कर रहा है कि

77
00:05:27,200 --> 00:05:31,360
उसने इच्छा की और जो है पदार्थ हिल गया।

78
00:05:31,360 --> 00:05:35,840
अरे भैया इच्छा का अधिष्ठान तो चेतन है ना। चेतन है।

79
00:05:35,840 --> 00:05:39,920
तो क्या जड़ को भी आप चेतन मान रहे हो? और अगर यह

80
00:05:39,920 --> 00:05:44,400
कहोगे कि ईश्वर उसमें भी व्याप्त है इसलिए वो हिला तो फिर इसका मतलब

81
00:05:44,400 --> 00:05:48,400
कि वो वहां पर उतना हिस्सा हिला भगवान का

82
00:05:48,400 --> 00:05:52,480
जो जड़ के अंदर है। दूसरी बात अद्वैत की स्थिति भी वहां पर सिद्ध

83
00:05:52,480 --> 00:05:56,480
होती है। है ना? जी। तो

84
00:05:56,480 --> 00:06:00,560
इस बात को वो स्किप कर रहा और ये मैंने उस वीडियो में कहा भी है एक आध

85
00:06:00,560 --> 00:06:05,040
बार कि तुम इस इसको मिस कर रहे हो। तुम यहां से जंप मार जाते हो

86
00:06:05,040 --> 00:06:09,040
कि जो वो इच्छा करता है तो वो जो मूव करता है तो उस मूवमेंट को हम

87
00:06:09,040 --> 00:06:13,040
वो करते हैं। कहते हैं बल पर वो बल होता नहीं है। अच्छा इसमें एक बात और

88
00:06:13,040 --> 00:06:17,120
आ जाती है वो बल होता नहीं है। ठीक है? पर हम

89
00:06:17,120 --> 00:06:21,280
उसे बल कह देते हैं। यानी कि प्रातिभाषिक जो आभास

90
00:06:21,280 --> 00:06:21,780
होता

91
00:06:21,440 --> 00:06:25,440
है हमें है ना प्रतीति जो हम कहते

92
00:06:25,440 --> 00:06:29,440
हैं ना कि व्यवहार जगत के अनुसार जितना मेरी माताजी सत्य हैं जितना

93
00:06:29,440 --> 00:06:33,680
मेरे पिताजी सत्य हैं जितना मैं सत्य हूं व्यवहार जगत में उतना ही भगवान

94
00:06:33,680 --> 00:06:38,080
का अवतार भी सत्य मानना पड़ेगा। है ना? और ब्रह्म की दृष्टि से तो प्रतीति

95
00:06:38,080 --> 00:06:42,480
मात्र भी कह सकते हैं। ठीक है? हम तो

96
00:06:42,480 --> 00:06:46,560
इस जगह पर आकर के यदि एक अगला पॉइंट यह

97
00:06:46,560 --> 00:06:50,640
आता है कि आप जो है बल का बल के रूप में अवतार की

98
00:06:50,640 --> 00:06:54,720
प्रतीति मान रहे हो ना ईश्वर के चलो ठीक है आपने कहा कि भाई वहां

99
00:06:54,720 --> 00:06:59,280
पर कुछ हुआ नहीं हालांकि कुछ हुए बिना कुछ हो नहीं सकता इस पर आप जो है

100
00:06:59,280 --> 00:07:03,440
मौन है चुप है मगर एक कदम अगर हम आगे भी बढ़ जाएंगे

101
00:07:03,440 --> 00:07:07,600
तो क्या होगा एक कदम हम आगे बढ़ेंगे तो

102
00:07:07,600 --> 00:07:11,760
आपने कहा था जैसे हम आकाश के लिए एक शब्द यूज़ कर रहे थे। जब

103
00:07:11,760 --> 00:07:16,080
उसके साथ लाइव चर्चा थी तो उससे शब्द यूज़ कर रहे थे कि आकाश

104
00:07:16,080 --> 00:07:20,160
हमें दिखता है तो वो दिखता नहीं है। यह कहो मत। तो मैंने कहा था कि तुम्हारे

105
00:07:20,160 --> 00:07:24,320
यहां भी ऐसी कई चीजें हैं जिनके तात्विक व्याख्या पे जाएंगे तो कुछ और होगा।

106
00:07:24,320 --> 00:07:28,320
मगर व्यवहार में हम कहते हैं कि ऐसा है वैसा है तो व्यवहार में तुम क्यों कह

107
00:07:28,320 --> 00:07:32,640
रहे हो कि बल है केवल यही कहो केवल इच्छा करता है ना शक्तिमान है

108
00:07:32,640 --> 00:07:36,720
ना ईश्वर शक्तिमान है ना ईश्वर बलवान है वो केवल इच्छा करता

109
00:07:36,720 --> 00:07:40,720
है हां अगर यहां पर हमें प्रतीति हो रही है शक्ति होने

110
00:07:40,720 --> 00:07:45,040
की कि कोई ठोस धक्का लगा जड़ पदार्थ को कोई ठोस धक्का

111
00:07:45,040 --> 00:07:49,360
लगा ये हमें प्रतीति हो रही है इसलिए हम उसको शक्ति और बल कह रहे हैं

112
00:07:49,360 --> 00:07:53,440
तो फिर यहां पर हमारा अवतार भी मान लो मगर नहीं

113
00:07:53,440 --> 00:07:57,920
अपने बल और शक्ति की प्रतीति पर उसको कहेंगे कि यह बल बल है, बलवान

114
00:07:57,920 --> 00:08:02,240
है, ईश्वर बलवान है। प्रतीति मात्र पर कहेंगे। ईश्वर शक्तिमान

115
00:08:02,240 --> 00:08:06,320
है। प्रतीति मात्र पर कहेंगे। पर प्रतीति मात्र पर अवतार ईश्वर लेता

116
00:08:06,320 --> 00:08:11,840
है ये नहीं मान सकते। क्यों? क्योंकि स्वरूप भूत लक्षण है विरोध।

117
00:08:11,840 --> 00:08:16,000
विरोध ही स्वरूप भूत लक्षण है। इसलिए ठीक है? तो जितनी

118
00:08:16,000 --> 00:08:20,800
बार भी निर्भय के साथ वो जो चर्चा हुई है उसमें जब मेन पॉइंट आया

119
00:08:20,800 --> 00:08:24,800
कि भाई जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हुआ यद्यपि वो तो माया

120
00:08:24,800 --> 00:08:28,960
मानते नहीं है संसार को वो तो प्रपंच रूपी संसार वो तो सीधे फ्लैट तरीके

121
00:08:28,960 --> 00:08:33,040
से व्याख्या करते हैं अलग-अलग नहीं मानते व्यवहार परमार्थ को वो तो ये चीज कहना ही

122
00:08:33,040 --> 00:08:37,120
नहीं चाहिए कि वो लौकिक दृष्टि से कह दिया जाता है। ठीक है? दूसरी

123
00:08:37,120 --> 00:08:41,200
बात एक और है कि जितनी बार यह शब्द आया उतनी बार उसने कुछ ऐसी बात कही है

124
00:08:41,200 --> 00:08:45,280
जहां पर वो जो एक लोगों के अंदर उसने एक हवा बनाया हुआ है

125
00:08:45,280 --> 00:08:49,360
अपना अपने लोगों के अंदर कि बहुत बड़ा लॉजिक हूं पहली बार जब

126
00:08:49,360 --> 00:08:51,840
बात हुई थी तो उसने अंत में क्या कहा जब मैंने सब

127
00:08:51,840 --> 00:08:56,000
सिद्ध कर दिया उसने कहा इससे आगे हम लोग यही मानते हैं इससे आगे नहीं मानते ये कहा इतना

128
00:08:56,000 --> 00:09:00,000
ही मानते हैं हम बोला इतना ही मानते हैं इतना ही मानते इतना ही मानते हैं का मतलब क्या

129
00:09:00,000 --> 00:09:04,000
है वो ये कह रहा है कि भाई हम इससे ज्यादा बात नहीं करनी है इस मामले में इतना

130
00:09:04,000 --> 00:09:08,080
ही मानते हैं अच्छा तो तो मैं थोड़ा सा सॉफ्ट लेकर के चल रहा था

131
00:09:08,080 --> 00:09:12,160
उसको उसके साथ तो मैंने उस पर ये व्याख्या दी भाई यहीं के

132
00:09:12,160 --> 00:09:16,240
आगे आचार्य शंकर ने बात कर दी जहां पर तुम स्टॉप हो

133
00:09:16,240 --> 00:09:20,240
रहे हो उसके आगे उन्होंने बात की है जब मैंने ये पक्ष बताया तो उसने ये नहीं कहा

134
00:09:20,240 --> 00:09:24,960
कि ये किस-किस प्रकार से गलत है बस वो ये कहने लगा इसका शास्त्र में दिया है कि नहीं दिया है

135
00:09:24,960 --> 00:09:28,960
ना शास्त्र को ले आया तो यानी कि यहां पर उनके लॉजिक पहली बार में

136
00:09:28,960 --> 00:09:33,200
यहां समाप्त होते दिखाई दिए दूसरी तीसरी बार जब मैंने बात करने की कोशिश

137
00:09:33,200 --> 00:09:37,520
की दूसरी बार में उसने एक जगह ये कह दिया कि

138
00:09:37,520 --> 00:09:41,680
जब ईश्वर तो ईश्वर की तो इच्छा ही प्राप्त

139
00:09:41,680 --> 00:09:45,680
हो रही है। जड़ को इच्छा प्राप्त हो रही है ईश्वर की। पहली बात और जड़

140
00:09:45,680 --> 00:09:49,840
के पास जड़ के पास अपनी पावर है मूव करने की। अरे भैया कुछ

141
00:09:49,840 --> 00:09:53,840
बताओ तो वहां पर वो अचिंत शक्ति है जिसको डिफाइन नहीं किया जा सकता।

142
00:09:53,840 --> 00:09:57,840
वो है कुछ वहां पे। मगर हम ये नहीं बताएंगे कि क्या

143
00:09:57,840 --> 00:10:02,160
है। मगर बस इच्छा की वहां हो गया। हम बीच का गैप नहीं भरेंगे हम क्योंकि

144
00:10:02,160 --> 00:10:06,160
भरने में वो अवतार की सिद्धि हो जाएगी और ना भरना पड़े

145
00:10:06,160 --> 00:10:06,880
इसलिए लोगों

146
00:10:06,880 --> 00:10:11,040
को दूसरे दूसरे विषयंतर करके ले जाएंगे। ठीक? तो दूसरी बार इसने

147
00:10:11,040 --> 00:10:15,440
क्या कहा? यह मुझे ग्रंथों में पढ़ना पड़ेगा। देखना पड़ेगा

148
00:10:15,440 --> 00:10:19,440
कि मनुष्य जो कार्य करता है वो शक्ति किस प्रकार से काम करती है वहां

149
00:10:19,440 --> 00:10:23,840
पर। क्या अंतर है दोनों शक्तियों में? ठीक है?

150
00:10:23,840 --> 00:10:28,000
ये हो गया। और तीसरा जब मोटी मोटी बात हुई उसके साथ तो जब

151
00:10:28,000 --> 00:10:32,000
शुरुआत मैंने की कि भैया उसने कहा फिर वो सिद्धांत पर बात करनी है। अच्छा

152
00:10:32,000 --> 00:10:36,160
एक बात और देखो अभी अभी इसको पूरा कर लूं फिर वो नया

153
00:10:36,160 --> 00:10:40,880
टॉपिक खुल जाएगा। एक बात और देखिए किस

154
00:10:40,880 --> 00:10:44,880
तीसरी वाली जब चर्चा हुई मोटी मोटी तो इसने कहा सिद्धांत पर चर्चा करनी। मैंने कहा हो

155
00:10:44,880 --> 00:10:49,120
तो गई तुम वहां पर ठीक-ठाक जवाब देते नहीं हो। अब मैं तुमको

156
00:10:49,120 --> 00:10:53,120
क्योंकि वह तुम मेरे उस सॉफ्ट वाले उसमें आ गए हो रेंज में

157
00:10:53,120 --> 00:10:57,280
तो अब मैं तुमको वहां पर ऐसे अटक नहीं सकता हूं तुमसे कि

158
00:10:57,280 --> 00:11:01,600
नहीं दो ठीक है तुम नहीं दे रहे हो मैं शांत हूं बस अपना काम करो

159
00:11:01,600 --> 00:11:05,840
तो फिर वो बोलता है कि नहीं मैंने जब वो बोला कि कहां

160
00:11:05,840 --> 00:11:09,920
किया तो मैंने उसको फिर बताया तो तीसरी वाली में भी आप देखो तो वो फिर

161
00:11:09,920 --> 00:11:13,920
जो है जब मैंने उसको कहा कि भाई बताओ ना जड़ को किस रूप

162
00:11:13,920 --> 00:11:18,080
में प्राप्त हुई ईश्वर की इच्छा कनेक्शन क्या है उसी कनेक्शन का नाम अवतार

163
00:11:18,080 --> 00:11:22,880
है। उस कनेक्शन का नाम ही अवतार है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

164
00:11:22,880 --> 00:11:26,960
भौतिक जो प्रकृति के पद है उनके

165
00:11:26,960 --> 00:11:31,200
लिए जब वो व्यवहारिक हो रहा है तो वो अपना एक दूसरा स्वरूप

166
00:11:31,200 --> 00:11:35,200
बना के अवतरित हो रहा है। ठीक है? इसी कनेक्शन का

167
00:11:35,200 --> 00:11:39,920
नाम अवतार है जो उनके बीच में मध्यस्थता करता है। आपकी आवाज नहीं आ रही।

168
00:11:39,920 --> 00:11:44,000
आपका म्यूट जी हां। या तो फिर यह मानना पड़ेगा कि फोर्स जो है

169
00:11:44,000 --> 00:11:48,080
वो अपने आप में स्वतंत्र रूप से एक अलग सत्ता है। फिर प्रकृति के

170
00:11:48,080 --> 00:11:53,360
अलावा आपको एक अलग फोर्स भी माननी पड़ेगी। अलग सत्ता जो कि बस

171
00:11:53,360 --> 00:11:57,440
क्योंकि क्योंकि इनका एक और आता है कि नियम बना दिए। अब नियमों को

172
00:11:57,440 --> 00:12:01,840
क्रियान्वित करने के लिए भी आपको एक अलग से सत्ता माननी पड़ेगी।

173
00:12:01,840 --> 00:12:05,920
आप उसको मिस नहीं कर सकते कि नहीं एक नियम बना दिए लेकिन क्रियान्वयन जो है वो स्वतः ही

174
00:12:05,920 --> 00:12:11,040
हो रहा है। तो यहां पर ये इनके मत में बहुत बड़ी कमी है।

175
00:12:11,040 --> 00:12:15,280
जी जी जी अच्छा मैं ये जो था मामला मैं ये

176
00:12:15,280 --> 00:12:19,520
लाया क्यों? निर्गुण सगुण लाया क्यों? हमारी ईश्वर की अवतार की सिद्धि वैसे

177
00:12:19,520 --> 00:12:24,320
ही है जो पैराडॉक्स लाओगे पैराडॉक्स का जवाब है। ठीक है?

178
00:12:24,320 --> 00:12:28,560
ईश्वर का अवतार का वो क्या कहते हैं? तुम हेतु हेतु कर रहे हो। हेतु का जवाब

179
00:12:28,560 --> 00:12:32,560
है। भैया हमने पूछा सर्वशक्तिमान ईश्वर है। अब तुमने

180
00:12:32,560 --> 00:12:36,800
कहा उसका हेतु क्या है? सर्वशक्तिमान का। अब मैं तुमसे कह दूं हेतु का हेतु

181
00:12:36,800 --> 00:12:38,000
क्या है भाई?

182
00:12:38,000 --> 00:12:42,000
अच्छा। हेतु का हेतु क्या है? सर्वशक्तिमान का हेतु क्या है? अच्छा

183
00:12:42,000 --> 00:12:46,000
एक बात और है जब ये सर्वशक्तिमान का हेतु कहेंगे

184
00:12:46,000 --> 00:12:50,000
तो इसका मतलब है इनको सर्वशक्तिमान से आपत्ति है। तो यही

185
00:12:50,000 --> 00:12:54,000
तो हम कह रहे हैं कि घोषित करो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। दुनिया

186
00:12:54,000 --> 00:12:58,160
को बताओ तो सही कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। तुम

187
00:12:58,160 --> 00:13:02,400
उन शब्दों का अर्थ अपने अनुसार लेकर के अपना जो ढिंढोरा पीटा

188
00:13:02,400 --> 00:13:06,480
हुआ है कि हम आपको ईश्वर दे रहे हैं। वो लोगों को पता चले ना वो कैसा

189
00:13:06,480 --> 00:13:10,480
ईश्वर है। किस प्रकार का घटिया ईश्वर है। लोग उसको तय करें

190
00:13:10,480 --> 00:13:14,800
ना जज करें कि वो घटिया है कि वह प्राप्तव्य है कि वह मोक्षदायक

191
00:13:14,800 --> 00:13:18,960
है या वो किस क्वालिटी का ईश्वर है जो आप दे रहे हो उसमें

192
00:13:18,960 --> 00:13:23,120
वो क्वालिटी घटित होती भी है कि नहीं ये वो लोगों को तय करने दो

193
00:13:23,120 --> 00:13:27,600
निर्णय करने दो कि वो सर्वोच्च पद है सर्वोच्च

194
00:13:27,600 --> 00:13:31,920
पद पर प्रतिष्ठित वो शक्ति है सार्वभौम सत्ता या फिर बहुत घटिया

195
00:13:31,920 --> 00:13:36,000
स्तर की शक्ति ये उनको तय करने दो तो बताओ उनको कि हमें सर्वशक्तिमान

196
00:13:36,000 --> 00:13:40,160
पर आपत्ति है। अच्छा तो कुल मिलाकर के

197
00:13:40,160 --> 00:13:44,160
पूरी चर्चा जब आप देखेंगे मैंने एक उसका समराइज वीडियो बना दिया है और

198
00:13:44,160 --> 00:13:48,400
वह सर्वशक्तिमान चैनल पर आएगा तो

199
00:13:48,400 --> 00:13:52,640
उसको समराइज करके बनाया तो उसमें आप जब देखेंगे ना मैंने खुद सुना तब मैंने अनुभव

200
00:13:52,640 --> 00:13:53,200
किया कि इसने

201
00:13:53,200 --> 00:13:57,280
कितना ज्यादा बातों को बदला जब मैं उसमें इन्वॉल्व था तब मैं नहीं देख पा रहा हूं तब तो

202
00:13:57,280 --> 00:14:01,360
मैं देख रहा हूं कि भाई मेरा छोटा भाई मुझसे बात कर रहा है ना इस पर भी हम बात

203
00:14:01,360 --> 00:14:05,520
करेंगे तो मैं उसकी उस चीज को नहीं देख पा रहा हूं मगर जितनी बार वो अटक रहा है फंस

204
00:14:05,520 --> 00:14:09,920
रहा है तो उतनी बार वो क्या कर रहा है चैप्टर बदलने का प्रयास प्रयास

205
00:14:09,920 --> 00:14:13,920
अच्छा हम तो अब वो चैप्टर बदलते बदलते मगर फिर

206
00:14:13,920 --> 00:14:17,920
भी लास्ट वाला जो आप देखेंगे पार्ट उसमें मैंने पकड़ लिया उसे और

207
00:14:17,920 --> 00:14:22,240
जब पकड़ लिया तो लास्ट में जब मैंने उससे फिर आखिर में पूछा कि ये

208
00:14:22,240 --> 00:14:26,480
जड़ पदार्थ को कैसे प्राप्त हो रही है अगर तुम मान रहे हो कि मेरी जो मसल्स

209
00:14:26,480 --> 00:14:30,960
हैं मेरी जो हड्डियां हैं इन पर चिपकी हुई मसल्स है। ठीक है?

210
00:14:30,960 --> 00:14:34,960
अब जब मैं चाहता हूं कि ये मेरा हाथ मुड़े।

211
00:14:34,960 --> 00:14:38,960
मुड़ने का मतलब क्या कहते हैं? सिकुड़े। ठीक है? मेरी जो

212
00:14:38,960 --> 00:14:43,040
मसल्स हैं फैली हुई है। ये अभी फैली हुई है। फिर ये

213
00:14:43,040 --> 00:14:47,120
सिकुड़े। जब मेरी मसल्स सिकुड़ना शुरू होंगी तो मेरी जो ये

214
00:14:47,120 --> 00:14:51,200
बाह मुड़ती हुई दिखाई देगी। अब ये जो सिकुड़ना है इस सिकुड़ने

215
00:14:51,200 --> 00:14:55,360
के लिए मेरी मसल्स को एक एनर्जी चाहिए। वो एनर्जी कहां से आ रही है? जो मैं भोजन

216
00:14:55,360 --> 00:14:59,440
प्राप्त करता हूं मूल रूप से कार्बोहाइड्रेट वहां से एनर्जी आ रही

217
00:14:59,440 --> 00:15:03,520
है। तो वो जो एनर्जी तत्व है जो कि

218
00:15:03,520 --> 00:15:07,680
मेरे कहने पर जिसने काम किया वो और मैं एक भी नहीं है। ये भी ध्यान

219
00:15:07,680 --> 00:15:08,320
रखिए

220
00:15:08,320 --> 00:15:12,400
मेरे को मेरे पर्सपेक्टिव में व्यवहारिक जगत में वो और मैं एक नहीं है।

221
00:15:12,400 --> 00:15:16,400
तो उस एनर्जी ने उस एनर्जी ने यह बल दिया

222
00:15:16,400 --> 00:15:20,480
इसको मेरी जो फ्लैक्स हो

223
00:15:20,480 --> 00:15:24,480
चुकी मसल्स हैं उनको वो बल दिया कि वो सिकुड़े और जब वो सिकुड़ी तो

224
00:15:24,480 --> 00:15:28,640
उनके साथ जो हड्डी चिपकी हुई है वो उठ के ऊपर आ गई तो इस तरह से मेरा हाथ मुड़ा।

225
00:15:28,640 --> 00:15:33,280
अब यहां पर निर्भय ने मान लिया कि यहां पर एक

226
00:15:33,280 --> 00:15:37,360
शक्ति है जिसने कि मेरे हाथ को मोड़ने में सहायता दी। तो

227
00:15:37,360 --> 00:15:41,360
फिर मैंने कहा कि वो जो शक्ति है जो उसको पुश एंड पुल कर रही है

228
00:15:41,360 --> 00:15:45,440
जड़ पदार्थों को तो वहां पर वो शक्ति क्या है? नहीं वहां

229
00:15:45,440 --> 00:15:49,520
तो फिर इच्छा है। इच्छा है। अब वो जड़ पदार्थों के ऊपर ऐसे ही

230
00:15:49,520 --> 00:15:53,520
नाच रही है। इच्छा है ना? इच्छा का अधिष्ठान

231
00:15:53,520 --> 00:15:58,000
चेतन है। और जड़ पदार्थ तो चेतन है। तो कैसे प्राप्त हो गई उनको?

232
00:15:58,000 --> 00:16:02,480
और प्राप्त हो भी गई तब भी जड़ पदार्थ को मूव करने के लिए तो शक्ति चाहिए।

233
00:16:02,480 --> 00:16:06,480
एट द नय से मान भी लिया जाए तो प्रतीति तो तुम भी मान

234
00:16:06,480 --> 00:16:10,480
रहे हो बल के रूप बल के अवतार की प्रतीति शक्ति के अवतार की प्रतीति मान

235
00:16:10,480 --> 00:16:14,640
रहे हो तो फिर अवतारवादियों से क्या दिक्कत है तो स्वरूप भूत लक्षण पहला

236
00:16:14,640 --> 00:16:18,640
क्या आया विरोधी विरोधी है ना स्वरूप भूत

237
00:16:18,640 --> 00:16:22,800
लक्षण हमारा विरोध है हम अपने लिए वही सब नियमों के अनुसार जो

238
00:16:22,800 --> 00:16:23,840
है तरह-तरह

239
00:16:23,840 --> 00:16:27,920
की चीजें जो हम नहीं मानते कि उनका वास्तविकता में अवतार हुआ पर उनके अवतार को मान रहे

240
00:16:27,920 --> 00:16:32,160
हैं। बल को कह रहे हैं कि वहां पर बल है। जबकि वो बल की प्रतीति मात्र

241
00:16:32,160 --> 00:16:36,240
बल नहीं है। आपके अनुसार हमारे अनुसार तो है। व्यवहारिक जगत में बल है।

242
00:16:36,240 --> 00:16:40,400
ठीक है? और आपके अनुसार व्यवहार व्यवहार और परमार्थ अलग-अलग है नहीं।

243
00:16:40,400 --> 00:16:44,560
ये आपने कहा ठीक है। खैर अब

244
00:16:44,560 --> 00:16:48,560
ये इस चीज से इस पे आ गए। अब क्या है कि ये चीज क्लियर हो

245
00:16:48,560 --> 00:16:50,800
गई।

246
00:16:50,800 --> 00:16:55,280
इसके बाद अब वो व्यक्ति ऐसा बौखलाया हुआ है

247
00:16:55,280 --> 00:16:59,600
कि जगह-जगह फोन कर रहा है। आज एक रिकॉर्डिंग

248
00:16:59,600 --> 00:17:04,400
भी डाली है उसने। है ना? जगह-जगह फोन कर रहा है और

249
00:17:04,400 --> 00:17:09,120
आपसे भी इस बीच कुछ चर्चाएं हुई है किसी की तो वो भी हम अभी इस पर बात करेंगे।

250
00:17:09,120 --> 00:17:13,200
तो वो जो फोन कर रहा है उस फोन करने

251
00:17:13,200 --> 00:17:17,200
में भी उसकी बौखलाहट आपको साफ दिखाई देगी। जैसे उसने

252
00:17:17,200 --> 00:17:21,440
किसी जो हमारे एक हमें शंकराचार्य

253
00:17:21,440 --> 00:17:25,840
को मानने वाले ही हैं आशुतोष धर द्विवेदी जी उनको फोन मिलाया

254
00:17:25,840 --> 00:17:29,920
उसने ज्योतिषचार्य हां

255
00:17:29,920 --> 00:17:34,000
उनको फोन मिलाया अब वो अब उनका कहना है कि उनका उसी रिकॉर्डिंग में कहना

256
00:17:34,000 --> 00:17:38,000
है कि भाई मैं कहां क्या हूं अचानक से तुमने फोन किया अब उसने

257
00:17:38,000 --> 00:17:39,040
कहा मैंने तुम 510

258
00:17:39,040 --> 00:17:43,200
मिनट चाहिए तो उनको लगा कि ज्योतिष के बारे में कुछ बात करनी होगी है ना

259
00:17:43,200 --> 00:17:47,440
तो उन्होंने कहा ठीक है बोलो तो बोला कि भाई कि मैं तो जो ज्योतिष से ईश्वर पे आऊंगा

260
00:17:47,440 --> 00:17:52,320
तुरंत चर्चा करने लगो वहां पर पक्ष विपक्ष करने लगो तो

261
00:17:52,320 --> 00:17:56,640
उसमें बौखलाहट जो इस व्यक्ति की है वो इतनी साफ दिखाई दे रही है

262
00:17:56,640 --> 00:18:00,880
अच्छा बौखलाहट कैसे और दिख रही है स्वयं के बोले हुए

263
00:18:00,880 --> 00:18:04,880
वचनों के विमुख जाता हुआ व्यक्ति स्वयं कुछ का

264
00:18:04,880 --> 00:18:08,960
कुछ बोल रहा है अपने ही सिद्धांतों को तोड़ रहा है मुझसे चर्चा में

265
00:18:08,960 --> 00:18:13,280
कहा गौरी शंकर का पीछे कोई गुरु हमें नहीं पता

266
00:18:13,280 --> 00:18:17,440
नहीं है अज्ञात है उस चर्चा में क्या कह रहा है कि ये

267
00:18:17,440 --> 00:18:22,240
इसके यह गुरु, इसके वो गुरु, इसके वो गुरु और और देखो बौखलाहट

268
00:18:22,240 --> 00:18:25,520
कि भैया

269
00:18:25,520 --> 00:18:29,600
और किसी व्यक्ति में जैसे मान लीजिए मुझ में और सनातन शंकर जी में एक चर्चा

270
00:18:29,600 --> 00:18:33,760
हुई उस उन्होंने वहां पे कहा कि भाई तुम्हारी तुम चर्चा उनसे करो। तो इसने वहां

271
00:18:33,760 --> 00:18:37,840
दावा किया कि मैं चर्चा जीत चुका हूं। उन्होंने पूछा कैसे तय हुआ जीत चुके कि जनता

272
00:18:37,840 --> 00:18:41,840
ने तय किया। अच्छा जनता ने किस प्रकार से तय किया? तो जैसे ही

273
00:18:41,840 --> 00:18:45,920
वह यहां पर फंसने वाला था उसने फिर कह दिया कि ऐसे तय कर लो कैसे

274
00:18:45,920 --> 00:18:50,000
कि अभी तुम बता दो जवाब तो यह तय हो जाएगा उस चर्चा में कौन

275
00:18:50,000 --> 00:18:54,240
जीता भाई कोई व्यक्ति का सिद्धांत कमजोर भी हो ना वो भी कभी-कभी

276
00:18:54,240 --> 00:18:58,400
चर्चा जीत जाता है तो तुम कहीं पर अपने सिद्धांत की पुष्टि करते

277
00:18:58,400 --> 00:19:02,640
हुए तय नहीं कर सकते कि उस उस चर्चा में कौन जीता था कौन नहीं जीता था ये तुम्हारा

278
00:19:02,640 --> 00:19:06,640
खोखला सिद्धांत नंबर वन दूसरा तो तुमने अपना वो खुद ही कह ही

279
00:19:06,640 --> 00:19:10,880
दिया 12 वो जो गिना रहे हो अपने भूत प्रेत

280
00:19:10,880 --> 00:19:15,440
टाइप के जो क्या कहते हैं कौन से गुरु है हमारे काल्पनिक

281
00:19:15,440 --> 00:19:19,520
काल्पनिक काल्पनिक काल्पनिक गुरु अच्छा इसमें दिक्कत ये आती

282
00:19:19,520 --> 00:19:23,680
है ना ऐसे धूर्त व्यक्ति से चर्चा करेंगे

283
00:19:23,680 --> 00:19:27,920
तो क्या करें जो अपने ही सिद्धांत पर खड़ा हुआ नहीं है जैसे

284
00:19:27,920 --> 00:19:31,920
उसमें उन्होंने किसी की बात कही कि तुम्हारे फलाने तो ये कहते हैं कि

285
00:19:31,920 --> 00:19:35,920
अभी बात तो मुझसे हो रही है हम ये कहा ना बात तो

286
00:19:35,920 --> 00:19:40,320
मुझसे हो रही है यानी कि तुमको क्या मान के बात करें अच्छा तुम दयानंद

287
00:19:40,320 --> 00:19:40,820
ंदी

288
00:19:40,560 --> 00:19:44,560
हो यह मान के बात करें कि नहीं करें तो दयानंद के पक्ष से जो जो बातें आएंगी

289
00:19:44,560 --> 00:19:48,560
दयानंद जी के पक्ष से वो वो बातें तुमसे पूछी जाएंगी पूछी जा

290
00:19:48,560 --> 00:19:52,560
सकती है उन उन बातों पे तुमसे बात की जा सकती है अगर जिस टॉपिक पर

291
00:19:52,560 --> 00:19:56,560
तुम बात कर रहे हो उससे रिलेटेड चीजें हैं तो फिर तुम वहां अपने आप को अलग कर लोगे

292
00:19:56,560 --> 00:20:00,880
नहीं दयानंद जी यहां कहां है तो फिर तुम हो कौन फिर तुमसे बात की जाए तो

293
00:20:00,880 --> 00:20:03,280
हम

294
00:20:03,280 --> 00:20:07,440
ये वाली बात आ गई तो वो जो है

295
00:20:07,440 --> 00:20:11,680
आप लोग सबसे पहले तो वो चर्चा सुन लीजिए जो इनकी की अच्छा वो

296
00:20:11,680 --> 00:20:15,920
एक-एक करके चर्चा सब सुनेंगे और एक-एक बात की समीक्षा भी करेंगे। अब एट

297
00:20:15,920 --> 00:20:20,720
दी एंड जब हमने देखा कि भाई यह बहुत थोड़ा सा मेंटली

298
00:20:20,720 --> 00:20:25,120
टॉर्चर शायद हो गया है वह अपनी रिकॉर्डिंग सुनकर के तो हमने

299
00:20:25,120 --> 00:20:29,280
फाइनली कहा कि हम जटा बाबा के पास जाना है हमें बनारस

300
00:20:29,280 --> 00:20:33,280
में एक दो दिन में जटा बाबा यानी कि जो वहां पर करपात्र धाम

301
00:20:33,280 --> 00:20:37,920
है ना वहीं पर जाना था तो

302
00:20:37,920 --> 00:20:42,640
क्या कहते हैं उनके साथ थोड़ा सा रामायण मीमांसा और उसके विषयों में थोड़ा सा उनका

303
00:20:42,640 --> 00:20:46,720
प्राप्त करना था यदि वो समय देंगे तो हम जाएंगे एक दो दिनों में तो हुआ क्या

304
00:20:46,720 --> 00:20:50,880
कि हमने कहा कि बनारस में इसने ही बताया था कि हम यह भी बनारस में है। तो

305
00:20:50,880 --> 00:20:55,440
हमने कहा भाई आ जाओ बनारस में। तो फिर इसका

306
00:20:55,440 --> 00:20:55,940
पक्ष

307
00:20:55,760 --> 00:20:59,760
क्या आ रहा है वो आप अभी सुन लेते हैं और हम जवाब भी देंगे। उसके बाद आशुतोष जी की भी

308
00:20:59,760 --> 00:21:04,560
रिकॉर्डिंग सुनेंगे और उसके बाद एक बहुत बड़ा सरप्राइज भी है।

309
00:21:04,560 --> 00:21:08,640
जी वो लास्ट में आप लोग सुन लीजिएगा। सबसे पहले आप वह वाली रिकॉर्डिंग आप

310
00:21:08,640 --> 00:21:12,800
सुना दीजिए जो इस व्यक्ति का क्या पक्ष है जो यह बना घूमता

311
00:21:12,800 --> 00:21:16,880
है कि हम बहुत बड़े तुर्रम खान हैं और कहता है कि जो

312
00:21:16,880 --> 00:21:21,520
है हम चर्चा जीत गए हैं हम चर्चा कर लो ये वो जबकि हां

313
00:21:21,520 --> 00:21:25,600
एक बात और बता दूं वो जो रिकॉर्डिंग आप सुनोगे लास्ट वाला आप देखिए वहां पे

314
00:21:25,600 --> 00:21:29,680
इसने क्या बोला है लास्ट में इसने निर्भय ने

315
00:21:29,680 --> 00:21:33,680
क्या बोला है कि मैंने चार तरीके की बातें बताई थी और वो

316
00:21:33,680 --> 00:21:37,680
जो है ईश्वर कहता है ईश्वर ही करवाता है वहां जीव कुछ नहीं करता। यह भी बोला

317
00:21:37,680 --> 00:21:41,760
है। जब जीव इच्छा करता है ना कोई चीज उठाने की तो ईश्वर

318
00:21:41,760 --> 00:21:45,840
करवाता है। अब ऐसे व्यक्ति से क्या चर्चा करें जो अपने ही सिद्धांत पर

319
00:21:45,840 --> 00:21:49,920
नहीं टिक रहा है। उसका उद्देश्य ये नहीं है सत्य को स्थापित करना।

320
00:21:49,920 --> 00:21:54,320
उसका उद्देश्य तो ये है कि सामने वाले को कुछ भी बोल के किसी तरीके से निरुत्तर

321
00:21:54,320 --> 00:21:56,720
करना।

322
00:21:56,720 --> 00:22:01,120
तो दूसरा दूसरा दूसरा स्वरूप भूत लक्षण क्या आया?

323
00:22:01,120 --> 00:22:05,200
स्वरूप भूत लक्षण। स्वरूप भूत लक्षण वो लक्षण जिससे वो अपने आप को अलग नहीं कर सकते।

324
00:22:05,200 --> 00:22:09,360
अलग कर लेंगे तो उनकी जो उनका अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा। ठीक है?

325
00:22:09,360 --> 00:22:10,800
वो होता है स्वरूप भूत लक्षण। तो

326
00:22:10,800 --> 00:22:14,880
दूसरा स्वरूप भूत लक्षण क्या आया? द्वेष कि भाई

327
00:22:14,880 --> 00:22:18,960
आप क्या-क्या बोल गए अपनी चीज के लिए? आप वहां मौन हो

328
00:22:18,960 --> 00:22:22,960
जाओ। आप कह दो कि मैं इस पर अध्ययन करके आऊंगा। पहले भी आपने कहा

329
00:22:22,960 --> 00:22:27,360
मगर फिर वहां पर आपने क्या बोला अंत में? अंत में आपने बोला

330
00:22:27,360 --> 00:22:31,680
ईश्वर करवाता है। ईश्वर की ही ताकत लगती है। और कोई स्पष्ट बात ही नहीं बोली।

331
00:22:31,680 --> 00:22:35,840
लास्ट वाले उसमें इतनी बातें बोल दी वहां पे तो कि

332
00:22:35,840 --> 00:22:40,160
अलग से कोई शक्ति होती नहीं है। शक्ति नहीं होती है तो भैया फिर

333
00:22:40,160 --> 00:22:44,240
हम लोग खाना क्यों खाते हैं? व्यवहार जगत में खाना खा के शक्ति प्राप्त

334
00:22:44,240 --> 00:22:48,480
होती है ना। तभी तो खैर वहां पर वो जो है ये तक

335
00:22:48,480 --> 00:22:52,480
बोल गया कि जब जब मैं इच्छा कर रहा हूं तो मेरे

336
00:22:52,480 --> 00:22:56,560
पास तो शक्ति है नहीं। ईश्वर मेरी मदद करते हैं कोई सामान उठाने में।

337
00:22:56,560 --> 00:23:00,800
तो इनका वो वाला जो तर्क है ना हम तो ये मानते हैं अद्वैत है भाई। ठीक है।

338
00:23:00,800 --> 00:23:05,120
हां तो वो चल भी जाएगा। मगर इनका वाला तर्क जो है

339
00:23:05,120 --> 00:23:09,120
काम करने में काम करने में स्वतंत्र है। ये है वो है।

340
00:23:09,120 --> 00:23:13,280
वहां कैसे चलेगा? खैर अब वो वो सबसे पहले तो

341
00:23:13,280 --> 00:23:17,600
इसका क्या जवाब आ रहा है वो वो रिकॉर्डिंग जरा जनता को सुनाइए।

342
00:23:17,600 --> 00:23:21,600
आप जब हमने ये कहा कि हम एकद दिन में बनारस आ रहे हैं। तो

343
00:23:21,600 --> 00:23:25,920
आप जो है हमने पहले भी कहा था इनको WhatsApp दिखा दो। एक मैंने एक

344
00:23:25,920 --> 00:23:29,920
स्क्रीनशॉट डाला था जिसमें मैंने लास्ट में इनसे 3

345
00:23:29,920 --> 00:23:35,920
फरवरी को क्या बातें हुई थी वो एक बार दिखा दूं।

346
00:23:36,480 --> 00:23:40,480
मेरी और इनकी जब फोन पर वार्ता हो गई थी फरवरी में बहुत पर्याप्त और

347
00:23:40,480 --> 00:23:45,200
ये बार-बार उस चीज को मिस कर रहे हैं कि जड़ पदार्थ पर

348
00:23:45,200 --> 00:23:49,280
ये ईश्वर की इच्छा प्राप्त कैसे हो गई है? तो इस विषय

349
00:23:49,280 --> 00:23:53,360
पर बहुत विषद अच्छे से हो चुकी है। मौन है, निरुत्तर है। स्किप कर रहे हैं

350
00:23:53,360 --> 00:23:57,600
चीजों को। अब यह यह विषय आया क्यों है? यह विषय आया

351
00:23:57,600 --> 00:24:01,680
इसलिए है कि जब हम कहते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान है इसलिए वह अवतार ले सकता है।

352
00:24:01,680 --> 00:24:05,760
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। हम आज भी अपने इस स्टेटमेंट में बिल्कुल खड़े हुए हैं।

353
00:24:05,760 --> 00:24:09,840
कोई आ जाए माई का लाल और हमसे टकरा ले इस मामले में। ठीक? तो

354
00:24:09,840 --> 00:24:14,000
कोई अब जो है उनको समझ में आ गया निर्गुण सगुण में फंस रहे हैं तो अब खैर आना मुश्किल

355
00:24:14,000 --> 00:24:17,680
है।

356
00:24:17,680 --> 00:24:21,760
तो मैंने ये बात की क्यों? निर्गुण सगुण की। निर्गुण

357
00:24:21,760 --> 00:24:25,760
सगुण की बात इसलिए की कि जब हम कहते

358
00:24:25,760 --> 00:24:29,760
हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो तरह-तरह की चीजें आती है। सर्व्यापक एक देसी

359
00:24:29,760 --> 00:24:33,920
कैसे हो सकता है? तो हमने बताया भैया वह ज्ञान देने तो आ रहा है। उसका ज्ञान एक देसी प्रकट

360
00:24:33,920 --> 00:24:38,080
हो रहा है। मंत्र के अच्छा उसको आवश्यकता क्या है? हमने बताया अलंकार की आवश्यकता क्या है? मंत्र की आवश्यकता

361
00:24:38,080 --> 00:24:42,080
क्या है? हमने ये भी कहा है। ठीक है? तो दो चीजें हो गई। इसके बाद

362
00:24:42,080 --> 00:24:46,160
जो है और भी जो नाना प्रकार के कुतर्क होते हैं हमने सबके उत्तर दे दिए।

363
00:24:46,160 --> 00:24:50,240
फिर ये ले आए पैराडॉक्स नास्तिकों का पैराडॉक्स कि ईश्वर अगर सब कुछ कर

364
00:24:50,240 --> 00:24:54,320
सकता है तो क्या वो ऐसा पत्थर बना सकता तो हमने उसका भी अविद्या के अविद्या के द्वारा

365
00:24:54,320 --> 00:24:58,320
उत्तर दे दिया। ये लो लेके जाओ अपना कुतर्क का उत्तर कुतर्क

366
00:24:58,320 --> 00:25:02,720
है ना कुतर्क कुतर्क करोगे तो कुतर्क ले लो। ठीक है? तुम्हारे

367
00:25:02,720 --> 00:25:06,800
हम वो लोग हैं ना जो घर में घुस के बात करते हैं। ऐसे बिल में दुबक करके और

368
00:25:06,800 --> 00:25:10,800
ऑनलाइन आके ऑनलाइन ऑनलाइन हमने बहुत बड़े झंडे गाड़ दिए। ये सब हम नहीं करते। घर

369
00:25:10,800 --> 00:25:14,880
में घुस के घर में घुस के सामने वाले के। ठीक है? जब

370
00:25:14,880 --> 00:25:19,040
बात आ जाती है कि घर में घुसने की जरूरत है तो जाते हैं। अच्छा

371
00:25:19,040 --> 00:25:21,440
तो

372
00:25:21,440 --> 00:25:25,440
यह बात आ गई पैराडॉक्स में भी हार गए अब ये। अब पैराडॉक्स के बाद ये क्या

373
00:25:25,440 --> 00:25:30,000
लेके आए? अंत में एक चीज आती है कि जो चीज अवतार

374
00:25:30,000 --> 00:25:32,800
ले रही है वो नित्य है कि नहीं? नित्य है तो

375
00:25:32,800 --> 00:25:36,800
वो व्यवहार के अनुसार तो नित्य ही माना मानना पड़ेगा कि वो प्रकट

376
00:25:36,800 --> 00:25:41,440
और अप्रकट हो रही है और परमार्थ के अनुसार भगवान जो है अपना एक अवतार

377
00:25:41,440 --> 00:25:45,840
लेते हैं परमार्थ की दृष्टि से और हमें जब वो परमार्थ

378
00:25:45,840 --> 00:25:50,000
की दृष्टि से ऐसी है तो वहां पर ये कह रहे हैं कि नहीं नहीं वो तो नित्य नहीं

379
00:25:50,000 --> 00:25:54,000
है तो फिर उसको कैसे माने ईश्वर तो फिर वहां पर हमने ये बताया कि भैया

380
00:25:54,000 --> 00:25:58,400
जब तक वो अवतार नहीं लेंगे दूसरा रूप धारण नहीं करेंगे

381
00:25:58,400 --> 00:26:02,720
धारण जब कर रहे हैं दूसरा रूप तो आपका कहना है कि वो नित्य ता उसकी खत्म हो रही है।

382
00:26:02,720 --> 00:26:06,960
ठीक? तो यदि वो अवतार धारण नहीं करेंगे, दूसरा रूप धारण नहीं करेंगे,

383
00:26:06,960 --> 00:26:10,960
जो जो आपके सिद्धांतों के अनुसार नित्य नहीं है, तो सृष्टि की रचना

384
00:26:10,960 --> 00:26:14,960
ही संभव नहीं है। तब हमने उनको बताया क्योंकि उसका स्वरूप

385
00:26:14,960 --> 00:26:19,200
भूत लक्षण है सच्चिदानंद। नित्य सर्वत्र

386
00:26:19,200 --> 00:26:23,360
एक रस। तो पहली बार जब वो जब कोई

387
00:26:23,360 --> 00:26:27,440
पृथ्वी हिलती है कोई भी प्राकृतिक पदार्थ जो है

388
00:26:27,440 --> 00:26:31,520
उसको शक्ति प्राप्त होती है भौतिक जगत में और वो भौतिक रूप

389
00:26:31,520 --> 00:26:35,600
से कोई क्रिया होती है तो उसमें भौतिक जगत के व्यवहार

390
00:26:35,600 --> 00:26:39,920
भौतिक जगत के अनुसार व्यवहार में आ सकने वाली एक फोर्स होती है।

391
00:26:39,920 --> 00:26:43,920
अब वो फोर्स भगवान से अलग नहीं है। इसीलिए

392
00:26:43,920 --> 00:26:48,160
उस फोर्स को भगवान का अवतार मानना पड़ेगा। अच्छा

393
00:26:48,160 --> 00:26:52,400
यह बताने के लिए केवल सगुण निर्गुण है। बाकी हम अपने पक्ष की जो चीजें हैं वह

394
00:26:52,400 --> 00:26:56,400
वैसे ही सिद्ध करे हुए हैं। उस उस जो चर्चा हुई थी जब

395
00:26:56,400 --> 00:27:00,480
धारणा पूछी गई थी तो हमने हर तरह के प्रश्न का उत्तर दिया था। उसने कहा लक्षण

396
00:27:00,480 --> 00:27:04,560
पहचानेंगे कैसे? तो हमने पूछा था गायत्री मंत्र को कैसे पहचान रहे हो? तो चर्चा में

397
00:27:04,560 --> 00:27:08,560
क्या बोल रहा है कि गायत्री मंत्र जपो पूरे दिन पूरे जीवन भर और देख लेना मुक्ति मिल जाएगी। मैंने भी

398
00:27:08,560 --> 00:27:12,720
कहा भाई राम की भक्ति करो मुक्ति मिल जाएगी। फिर क्या दिक्कत है? एक जगह पर

399
00:27:12,720 --> 00:27:17,120
आया कि भैया भगवान को ऐसे पहचाना कि उन्होंने वेद का ज्ञान दिया।

400
00:27:17,120 --> 00:27:21,200
तो अगर भगवान की पहचान यह है कि उन्होंने वेद का ज्ञान दिया तो इसका

401
00:27:21,200 --> 00:27:25,200
मतलब हमें पहले से पता हो वेद का ज्ञान क्या है तभी हम पहचान सकते हैं। तो

402
00:27:25,200 --> 00:27:30,800
वहां पे शब्द ही प्रमाण है। वहां पे शब्द ही प्रमाण है। ये हो गया।

403
00:27:30,800 --> 00:27:34,800
तो इसलिए यह जो सगुण और निर्गुण वाली बात

404
00:27:34,800 --> 00:27:39,200
है इसलिए आई है हमारा अपना सर्वशक्तिमान का जो पक्का खंभा है वो अभी भी है

405
00:27:39,200 --> 00:27:43,760
और आगे और भी दृश्य देखने को मिलेंगे अच्छे बड़े-बड़े

406
00:27:43,760 --> 00:27:47,760
हम ऐसे नहीं है ऑनलाइन ऑनलाइन खेल लो किसी को Facebook पे

407
00:27:47,760 --> 00:27:51,920
मैसेज मात्र कर दो ना सीधे दनधनाते हुए दुश्मन के इलाके

408
00:27:51,920 --> 00:27:56,000
में धड़धड़ाते हुए घुस जाने की आदत है हमारी ठीक है

409
00:27:56,000 --> 00:28:00,480
तो तो क्या कहते हैं फिर भी तुमने

410
00:28:00,480 --> 00:28:03,360
जो यह प्रश्न किया कि जिस स्वरूप से वह बना रहे हैं

411
00:28:03,360 --> 00:28:07,520
वह स्वरूप ईश्वर का स्वरूप नहीं है क्योंकि वह नित्य नहीं है। तो हमने बताया कि

412
00:28:07,520 --> 00:28:11,520
भाई सृष्टि रचना के लिए ही ईश्वर पहली बार रूप लेते हैं। अब क्योंकि वही ले रहे

413
00:28:11,520 --> 00:28:15,760
हैं इसलिए उन्हें भी ईश्वर ही माना जाएगा। उस रूप को भी ईश्वर ही कहा जाएगा।

414
00:28:15,760 --> 00:28:19,840
अब इसमें मैंने एक उदाहरण भी दिया कि मैं जैसे अपने गिलास अपने हाथ

415
00:28:19,840 --> 00:28:23,920
से कोई गिलास उठाऊं तो ये थोड़ी ना कहा जाएगा मेरे हाथ ने उठाया। मैंने ही उठाया

416
00:28:23,920 --> 00:28:28,000
ना भाई गिलास। हम हम है ना? वो कह नहीं तुम्हारी चार

417
00:28:28,000 --> 00:28:32,320
तुम्हारी चार उंगलियों ने उठाया वो ये कह चार उंगलियों ने उठाया

418
00:28:32,320 --> 00:28:35,680
ठीक है तो

419
00:28:35,680 --> 00:28:40,080
तो ये सारी चीजें हो गई अब क्या है कि

420
00:28:40,080 --> 00:28:44,240
अ जब ये बौखलाते हुए हमने देखा इनको

421
00:28:44,240 --> 00:28:48,480
और मेरा जाना भी इधर हुआ तो हमने कहा भाई ठीक है हम आ रहे हैं तुम

422
00:28:48,480 --> 00:28:52,800
आ जाओ बनारस मुझे लगा था बनारस में ही मुझे भी नहीं पता था बनारस के आसपास

423
00:28:52,800 --> 00:28:56,800
कहीं है मुझे ऐसा ध्यान में था कि बनारस में है तो चर्चा हो जाएगी

424
00:28:56,800 --> 00:29:00,880
क्योंकि मैंने इनसे कभी भी जब पहली बार बात बंद

425
00:29:00,880 --> 00:29:05,040
हुई थी उस कारण से जब यह जो इनके चैनल से अभद्र चीजें होना चालू हुई

426
00:29:05,040 --> 00:29:09,040
थी तब भी मैंने इनसे सैद्धांतिक चर्चा के लिए मना नहीं किया था।

427
00:29:09,040 --> 00:29:15,040
आप वो स्क्रीनशॉट दिखाइए जरा।

428
00:29:17,120 --> 00:29:23,120
यह मेरा इनको आखिरी मैसेज है 3 फरवरी को। ठीक है?

429
00:29:23,680 --> 00:29:27,840
इसमें देखिए लास्ट लाइन क्या लिखी है कि सैद्धांतिक

430
00:29:27,840 --> 00:29:32,560
विषय में यदि तुम कभी आमनेसामने करना चाहते हो चर्चा

431
00:29:32,560 --> 00:29:37,200
तो अवश्य हो जाएगी। ठीक फिलहाल

432
00:29:37,200 --> 00:29:41,520
मैं तुम्हारे निर्गुण सगुण वाले वीडियो तथा संदीपन जी के वो संदीपन

433
00:29:41,520 --> 00:29:45,520
जी की बात छोड़ दो। प्रतीक्षा कर रहा हूं। ठीक है?

434
00:29:45,520 --> 00:29:49,520
तो अब पहली बात तो यह है कि यदि हमारी सैद्धांतिक चर्चा

435
00:29:49,520 --> 00:29:53,760
बाकी थी और यह जो

436
00:29:53,760 --> 00:29:58,160
है इन्होंने इसके बाद हमसे तो नहीं कहा कि सैद्धांतिक चर्चा होनी है।

437
00:29:58,160 --> 00:30:02,400
है ना? क्यों नहीं कहा? क्योंकि यह 10 बार निरुत्तर हो चुके थे फोन में।

438
00:30:02,400 --> 00:30:06,640
अच्छा अब एक बात और है। इनका इनका कहना यह है

439
00:30:06,640 --> 00:30:10,640
ये अभी रिकॉर्डिंग चलेगी तो मैं जवाब दूंगा। इनका कहना यह है

440
00:30:10,640 --> 00:30:14,640
क्योंकि अब हमने इनसे संपर्क किया है सैद्धांतिक चर्चा के लिए।

441
00:30:14,640 --> 00:30:18,720
तो इसका मतलब है कि इन्होंने कुछ ऐसा किया है मतलब इन्होंने

442
00:30:18,720 --> 00:30:22,880
अपने ऐसे झंडे गाड़े हैं कि हमें इनसे सिद्धांतिक चर्चा करनी पड़ रही है। ठीक इनका

443
00:30:22,880 --> 00:30:27,120
पक्ष भारी है इस समय इनका ये कहना है। तो जब

444
00:30:27,120 --> 00:30:31,120
ये हमको फोन कर करके सैद्धांतिक चर्चा करने को कह रहे हैं। उस

445
00:30:31,120 --> 00:30:32,320
चर्चा के बाद

446
00:30:32,320 --> 00:30:36,320
जिसके कारण ये लोग मामा आ गए मामा आ गए करते

447
00:30:36,320 --> 00:30:40,400
फिर रहे हैं। वही दयानंद जी वाला काम काशी के शास्त्रार्थ में हार गए

448
00:30:40,400 --> 00:30:44,480
तो पर्चे छपवाओ पर्च छपवाओ जिस हां जिस चर्चा के

449
00:30:44,480 --> 00:30:48,560
पर्चे ये लोग छपवा रहे हैं उसके बाद तुम्हारा निर्भय आकर

450
00:30:48,560 --> 00:30:52,640
के मुझसे क्यों कह रहा है भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं क्यों

451
00:30:52,640 --> 00:30:56,640
क्योंकि निर्भय के ही अनुसार जो व्यक्ति हारा हुआ है वही जाकर के कहता है

452
00:30:56,640 --> 00:31:00,800
सिद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं। हालांकि मैं सिद्धांत नहीं मान रहा हूं। मगर

453
00:31:00,800 --> 00:31:04,960
वह तो मान रहा है कि सिद्धांतिक चर्चा करने प्राथमिकता से वह

454
00:31:04,960 --> 00:31:09,600
व्यक्ति पहुंचेगा उसके पास जिसका पल्ला भारी होगा।

455
00:31:09,600 --> 00:31:13,760
ठीक? तो इसका मतलब ये जो हमसे आ रहे थे फोन पर चर्चा करने बार-बार तो

456
00:31:13,760 --> 00:31:17,760
इनका पल्ला कमजोर था। तो उस चर्चा के आधार पर तो निर्भय

457
00:31:17,760 --> 00:31:21,760
के अनुसार ही ये सिद्ध हो जाता है कि ये हारे थे उस चर्चा में। तभी

458
00:31:21,760 --> 00:31:25,760
तो बार-बार आकर कह रहे थे और फिर जब वहां आए हैं तो वहां भी आ रहे हैं।

459
00:31:25,760 --> 00:31:29,760
इसीलिए जब मैंने इनको लास्ट में कहा कि सैद्धांतिक चर्चा के निमित्त

460
00:31:29,760 --> 00:31:34,000
तुम कभी भी चर्चा करना चाहते हो तो हो जाएगी आमने सामने से। अब आमने सामने

461
00:31:34,000 --> 00:31:38,240
क्यों कहा? फोन पे ये भाग रहे हैं तो जहां पे ये भाग रहे हैं ना

462
00:31:38,240 --> 00:31:42,480
मिसिंग पार्ट वाला तो वहां पे जब सामने से सबके भागेंगे

463
00:31:42,480 --> 00:31:46,560
तो दिक्कत होगी। एक तो ये है कि जनता को समझ में आ जाएगा जो वो

464
00:31:46,560 --> 00:31:47,520
स्किप कर रहे हैं। इच्छा

465
00:31:47,520 --> 00:31:51,760
कैसे प्राप्त हुई जड़ को। हम दूसरा यह है कि या तो यह चर्चा करेंगे

466
00:31:51,760 --> 00:31:55,920
नहीं। तो इन्होंने कभी भी नाम नहीं लिया। फोन पर चर्चा कर रहे थे। इन्होंने कभी

467
00:31:55,920 --> 00:32:00,000
भी नाम नहीं लिया चर्चा करने का। वीडियो बनाने को कहा था। इन्होंने कहा मैं वीडियो बना

468
00:32:00,000 --> 00:32:04,080
चुका हूं। वीडियो बनाने को कहा था। ठीक है? इन्होंने अपने लाइव

469
00:32:04,080 --> 00:32:08,720
में कहा कि इन्होंने अपने लाइव में कहा कि मैं वीडियो बना चुका हूं।

470
00:32:08,720 --> 00:32:12,800
तो वो मैं बताता हूं आपको। मैं एक स्क्रीनशॉट और भेज रहा

471
00:32:12,800 --> 00:32:16,160
हूं।

472
00:32:16,160 --> 00:32:20,240
मैंने इनको वीडियो बनाने को भी कहा था ना तो जब मैंने इनसे

473
00:32:20,240 --> 00:32:24,720
पूछा कई दिनों के बाद कि भाई वह क्या हुआ तुम्हारा वीडियो क्यों नहीं आया

474
00:32:24,720 --> 00:32:27,280
हम

475
00:32:27,280 --> 00:32:30,000
तो

476
00:32:30,000 --> 00:32:33,200
इन्होंने मुझे एक

477
00:32:33,200 --> 00:32:38,560
इन्होंने मुझे एक

478
00:32:38,560 --> 00:32:41,600
पेज का

479
00:32:41,600 --> 00:32:44,640
चित्र भेजा

480
00:32:44,640 --> 00:32:48,880
ऑपरेटर से निवेदन है कि वह मैंने अभी अभी भेजा है WhatsApp पर उन्हें

481
00:32:48,880 --> 00:32:52,960
तो वह दिखाएं स्क्रीनशॉट तो मैंने इनसे

482
00:32:52,960 --> 00:32:57,200
लगभग एक महीने के बाद ये पूछा कुछ

483
00:32:57,200 --> 00:33:01,600
दिनों के बाद ये पूछा कि क्या हुआ ना तो तुम्हारा वो निर्गुण सगुण पर वीडियो आया

484
00:33:01,600 --> 00:33:05,840
क्योंकि मैं चाहता था कि वहां पे स्किप करेंगे तो जनता देखे स्किप कर रहे हैं।

485
00:33:05,840 --> 00:33:10,240
जड़ को इच्छा कैसे प्राप्त हुई? तो

486
00:33:10,240 --> 00:33:14,240
इन्होंने निर्गुण सगुण के वीडियो में इनका कहना मैं पहले ही बना चुका हूं।

487
00:33:14,240 --> 00:33:18,720
तो भाई तुमने वहां WhatsApp पर मुझे उसका लिंक क्यों नहीं भेजा? क्यों तुम सत्यार्थ

488
00:33:18,720 --> 00:33:23,200
प्रकाश का पष् संख्या भेज रहे हो? कौन सा प्रश्न था?

489
00:33:23,200 --> 00:33:27,200
प्रश्न संख्या वही जहां उन्होंने निर्गुण सगुण की बात की है दयानंद जी ने।

490
00:33:27,200 --> 00:33:31,280
तो अगर तुम बना चुके हो तो वहां पे वो भेजो ना भाई। तुम सत्यार्थ

491
00:33:31,280 --> 00:33:35,600
प्रकाश के पीछे क्यों छुप रहे हो? सत्यार्थ प्रकाश के ऊपर ही तो बात हो रही है कि वो गलत है। सिद्धांत

492
00:33:35,600 --> 00:33:39,600
उसमें गलत है। कुतर्क किए गए हैं। तो नहीं तुमने वहां पर सत्यार्थ प्रकाश को

493
00:33:39,600 --> 00:33:43,520
आगे कर दिया। ये देखिए

494
00:33:43,520 --> 00:33:48,800
जब मैंने काफी दिनों बाद पूछा

495
00:33:48,800 --> 00:33:53,040
तो तो इन्होंने ये सत्यार्थ प्रकाश का मुझको फोटो भेज

496
00:33:53,040 --> 00:33:57,040
दिया। जो अभी ब्लर है वो ऊपर कर दीजिए। तो मैंने इनको कहा

497
00:33:57,040 --> 00:34:01,200
यह पढ़ा है मैंने वीडियो बना दो इस पर। यह प्रश्न मैंने वीडियो में कई बार बोला है। फिर मैं

498
00:34:01,200 --> 00:34:05,520
देख लूंगा तुम्हारा पक्ष क्या है। ठीक है? तो इन्ह

499
00:34:05,520 --> 00:34:09,920
अगर इनका कहना है कि यह निर्गुण सगुण पे बात कर चुके हैं तो इन्होंने

500
00:34:09,920 --> 00:34:14,000
वो वीडियो मुझे यहां नहीं भेजा तो मैं क्या मानूं? मैं तो यही मानूंगा ना

501
00:34:14,000 --> 00:34:18,160
कि वीडियो नहीं बनाया। तुम जब वीडियो मांगे जाने

502
00:34:18,160 --> 00:34:22,160
पर कोई प्रश्न संख्या भेजोगे मुझे सत्यार्थ प्रकाश की तो मैं तो यही मानूंगा कि वीडियो

503
00:34:22,160 --> 00:34:26,240
नहीं बनाया। अच्छा तो ना तो इन्होंने वीडियो बनाया इस बीच ना इन्होंने

504
00:34:26,240 --> 00:34:30,240
सैद्धांतिक चर्चा की बात कही। कुल मिलाकर

505
00:34:30,240 --> 00:34:32,720
के

506
00:34:32,720 --> 00:34:36,880
अभी अगर यह माना जाए कि भैया जो अपनी ओर से कहेगा चर्चा करने

507
00:34:36,880 --> 00:34:41,040
के लिए उसका पक्ष कमजोर है। जिससे कहा जाएगा उसका पक्ष भारी है तो आप उस चर्चा में सुन

508
00:34:41,040 --> 00:34:45,040
सकते हैं। फोन कर करके जो हमें कहा गया कि भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लें

509
00:34:45,040 --> 00:34:49,040
कर लें कर लें। कई बार कहा गया तो फिर समझ लो कि किसके अंदर

510
00:34:49,040 --> 00:34:53,120
हारा हुआ पहलवान जो होता है वो दोबारा भिड़ने के उसमें रहता है। अब मैं हार

511
00:34:53,120 --> 00:34:57,280
गया हूं। कैसे इस पे लीपापोती कर सकूं। तो वो घूमता है दोबारा भिड़ने के लिए।

512
00:34:57,280 --> 00:34:58,640
तो अब आप इस रिकॉर्डिंग

513
00:34:58,640 --> 00:35:02,640
सुनाएं जो इन्होंने जो प्रतिक्रिया दी है जब हमने यह कहा

514
00:35:02,640 --> 00:35:06,800
है कि मैं बनारस आ रहा हूं तो आप आकर के जो

515
00:35:06,800 --> 00:35:10,800
है चर्चा कर सकते हो बनारस में सुनिश्चित कर लेते हैं कहां पर होगा

516
00:35:10,800 --> 00:35:16,800
कहां नहीं होगा तो उसमें इनका पक्ष क्या है सुनिए

517
00:35:23,200 --> 00:35:29,200
हेलो जय श्री राम बताओ नमस्ते नमस्ते नमस्ते

518
00:35:29,280 --> 00:35:33,520
तुम बनारस में हो अभी वैसे बनारस में तो एक्सक्टली

519
00:35:33,520 --> 00:35:37,600
नहीं हूं हूं थोड़ा सा बगल में ही हां तो आ जाना मैं एक दो दिन में आऊंगा

520
00:35:37,600 --> 00:35:42,080
कॉल कर दूंगा तुम्हें आपको अगर याद हो तो मैंने कुछ मैसेज किया था

521
00:35:42,080 --> 00:35:46,160
हमारी इस विषय में बात हुई थी किस विषय में बनारस आने

522
00:35:46,160 --> 00:35:50,400
में आने के विषय में बता दो क्या किया था क्या मुझे याद नहीं हुई

523
00:35:50,400 --> 00:35:54,560
हुआ ये था कि आपने कहा था मैं दिल्ली जा रहा हूं हम तो

524
00:35:54,560 --> 00:35:58,640
हम कर लेते हैं अगर वही कहीं हूं तो मैंने कहा नहीं फिलहाल तो मैं बनारस में हूं। आगे एक काम

525
00:35:58,640 --> 00:36:02,880
करिए अगर आप आ रहे हैं तो कल या परसों आ जाइए। मैंने दो दिन का समय दिया था या तो कल आ जाइए या तो परसों

526
00:36:02,880 --> 00:36:07,520
आ जाइए। तो आपने कहा था कि नहीं मैं अपने अभी समय नहीं अपने यथासमय

527
00:36:07,520 --> 00:36:11,920
बुलाऊंगा। तो उसमें मैंने आपको बताया था कि ऐसा है कि एक तारीख से मेरे यहां कंस्ट्रक्शन

528
00:36:11,920 --> 00:36:13,680
का काम लगने वाला है। अगर

529
00:36:13,680 --> 00:36:17,680
आप WhatsApp मैसेज में चेक करेंगे आपको ये लिखा हुआ मिल जाएगा। मैंने बोला था कि उसके बाद से मैं

530
00:36:17,680 --> 00:36:22,160
हो जाऊंगा व्यस्त। तो अगर आपको आना है तो उसके पहले पहले आ जाइए। कंस्ट्रक्शन

531
00:36:22,160 --> 00:36:27,200
का काम कब खत्म होगा? देखिए अब जब हो तब हो नहीं बता सकते

532
00:36:27,200 --> 00:36:31,200
मतलब कुछ निश्चित नहीं बता सकते कि हम लोग चर्चा कब कर सकते हैं।

533
00:36:31,200 --> 00:36:35,280
देखिए एक तो इसमें दो तीन बातें हैं। मैं थोड़ा सा और स्पष्ट कर देता हूं। यहां पॉज पॉज करिए।

534
00:36:35,280 --> 00:36:39,280
एक तो पहली बात तो ये हो गई कि बनारस आने वाली यहां पे ये तो क्या

535
00:36:39,280 --> 00:36:43,520
था कि ये तो मैंने पहले ही हां अब देखिए

536
00:36:43,520 --> 00:36:47,920
हम क्या है ना झूठे की हद तक और चोर के घर तक वाली बात करते

537
00:36:47,920 --> 00:36:51,920
है ना सनातन जी जब उसने ये बताया कि कंस्ट्रक्शन का

538
00:36:51,920 --> 00:36:55,920
काम चल रहा है पहला जो एक्सक्यूज है चर्चा से पलायन का तो

539
00:36:55,920 --> 00:36:59,920
उसने जब ये बताया कि भाई क्या कहते हैं

540
00:36:59,920 --> 00:37:03,920
कि मेरे घर में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है और ये मैं पहले ही बता चुका हूं। ठीक? तो मैंने

541
00:37:03,920 --> 00:37:08,320
सीधे क्या बात कही कब तक चलेगा कब तक चलेगा भाई अंदाजा

542
00:37:08,320 --> 00:37:12,320
बता दो तो उस हिसाब से हम अपनी यात्रा कोई देख लेंगे ऐसी जिसमें दोनों

543
00:37:12,320 --> 00:37:16,320
का समन्वय हो जाए तो व्यक्ति अब क्या कर रहा है अब वो आया अपनी

544
00:37:16,320 --> 00:37:22,160
दूसरी बात पे दूसरा बहाना अब दूसरा बहाना सुनिए चलिए

545
00:37:22,160 --> 00:37:26,400
जैसा कि आपको बता दिया था WhatsApp मैसेज में एक तारीख से मैं हो जाऊंगा व्यस्त

546
00:37:26,400 --> 00:37:30,640
ठीक है तो उसके बाद अगर आप तीन चार पांच छ 10 15 दिन अगर कुछ भी बोलते हैं तो वो तो वैसे

547
00:37:30,640 --> 00:37:35,920
भी नल एंड वॉइड है हम उसके अलावा अलावा इसमें एक और बात थी

548
00:37:35,920 --> 00:37:40,160
कि अब जैसे एक ये बात आ जाती है कि अगर मान लीजिए आप कहीं भी जाते हैं।

549
00:37:40,160 --> 00:37:44,400
ठीक आप कहते हैं भैया मैं यहां आ रहा हूं आ जाओ जिसको चर्चा करनी हो आ जाओ

550
00:37:44,400 --> 00:37:48,640
उसमें फिर हमारे ऊपर स्थिति आ जाती है ना कि फिर हम जाना चाहते हैं करना

551
00:37:48,640 --> 00:37:52,640
चाहते हैं किसी और स्थान पे परेशान होना चाहते हैं दो घंटे तीन घंटे ट्रेवल करना चाहते हैं या

552
00:37:52,640 --> 00:37:57,040
नहीं एक ये भी बात आ जाती है है ना तो एक ये बात है

553
00:37:57,040 --> 00:38:02,400
पॉज कर तुम्हारी ये तो फिर तुम्हारी वो है स्वच्छ

554
00:38:02,400 --> 00:38:06,640
अब देखो यहां पे बात क्या आ रही है कि ये बंदा ये कह रहा है कि

555
00:38:06,640 --> 00:38:11,120
हम दो घंटे तीन घंटे परेशान होना चाहते हैं कि नहीं चाहते सबसे पहली बात क्या है

556
00:38:11,120 --> 00:38:15,120
कि हमने अभी तक यह तो डिसाइड किया ही नहीं है चर्चा कहां पे होगी

557
00:38:15,120 --> 00:38:19,200
हमने तो ये कहा नहीं हां दूसरी बात कि हम भी तो

558
00:38:19,200 --> 00:38:23,200
आ रहे हैं ना 400 किलोमीटर 400 किलोमीटर हम भी आ

559
00:38:23,200 --> 00:38:27,360
रहे हैं और इस चीज का ध्यान देते हुए आ रहे हैं कि चर्चा तुमसे भी हो जाए अगर

560
00:38:27,360 --> 00:38:31,520
हम किसी और कार्य से भी वहां जा रहे हैं फिर भी हम अपने ठिए पे तुमको नहीं बुला रहे

561
00:38:31,520 --> 00:38:35,520
हैं हमने तो नहीं कहा कि तुम लखनऊ आ जाओ ठीक है तो हम अपने

562
00:38:35,520 --> 00:38:37,360
घर से निकल के 400 किलोमीटर दूर

563
00:38:37,360 --> 00:38:41,600
आ रहे हैं और इस तरह से आना चाहते कि तुम्हारा भी उसमें समन्वय हो जाए।

564
00:38:41,600 --> 00:38:45,760
दूसरी बात हमने यह नहीं कहा कि तुम भी आ वो कि अमुक जगह

565
00:38:45,760 --> 00:38:49,840
पर ही होगी। भाई हो सकता है वो तुम्हारा ही स्थान हो। तुम पूछो तो कि

566
00:38:49,840 --> 00:38:54,000
कहां पे बुलाओगे? हमने ये नहीं पूछा। अच्छा तुम तुम तुमने

567
00:38:54,000 --> 00:38:58,400
ये तक नहीं कहा कि मैं इस गांव में रहता हूं। यहां आ जाओ। चलो।

568
00:38:58,400 --> 00:39:02,400
इसको कहते हैं सीने पर जो घाव है वो फूलों के गुच्छे हैं। हमें पागल ही

569
00:39:02,400 --> 00:39:06,560
रहने दो। हम पागल ही अच्छे हैं। भगत सिंह जी ने कहा था। ठीक है।

570
00:39:06,560 --> 00:39:10,720
इसको कहते हैं झूठे की हद तक और चोर के घर तक। भाई मैं तो तुमसे सीना

571
00:39:10,720 --> 00:39:15,040
तान के कह रहा हूं। आ जाओ लखनऊ। लखनऊ आके फोन करो। मैं तुम्हें बुलाऊंगा

572
00:39:15,040 --> 00:39:19,120
अपने पास बैठ के चर्चा करना। तुमने क्यों नहीं कहा कि भाई मैं और भैया मुझे

573
00:39:19,120 --> 00:39:23,360
जो है वहां आने में दिक्कत है। मैं नहीं आना चाहता। आप यहां आ जाओ। या भैया मत कहो।

574
00:39:23,360 --> 00:39:27,440
तुमने जो भी कहा हो तुम्हारे हिसाब से जो भी हो। तुम वो बात बोलो ना कि मुझे

575
00:39:27,440 --> 00:39:31,440
आने में दिक्कत है। तुम यहां आ जाना। मेरे को आने में दिक्कत होगी दो-ती घंटे।

576
00:39:31,440 --> 00:39:35,440
तो क्या कह रहे हैं कि हम दो तीन दो तीन घंटे का सफर करके मैंने तो नहीं

577
00:39:35,440 --> 00:39:39,520
कहा कि यहीं पर आना है और बीच की स्थिति से ज्यादा मेरा ज्यादा आना हुआ

578
00:39:39,520 --> 00:39:43,600
तुम बनारस के पास में हो तो तुम्हारा कम आना हुआ उस हिसाब से बीच की स्थिति नहीं

579
00:39:43,600 --> 00:39:47,680
है ये तुम्हारे पक्ष की स्थिति है और उसमें भी अभी मैंने ये डिक्लेअ

580
00:39:47,680 --> 00:39:51,680
नहीं किया नहीं यहीं पे चर्चा होगी भाई जब मैं बनारस आऊंगा

581
00:39:51,680 --> 00:39:52,800
तो 500 किलोमीटर

582
00:39:52,800 --> 00:39:57,120
और भी आ सकता हूं इधर-उधर मैंने कब मना किया

583
00:39:57,120 --> 00:40:01,120
मगर अब आपकी स्थिति क्या हो गई है कि आपका तो पलायन ही है

584
00:40:01,120 --> 00:40:05,280
स्पष्ट तो आप यह कहोगे नहीं कि भैया मेरा घर इधर है यहां आ जाओ वहां

585
00:40:05,280 --> 00:40:09,600
आ जाओ वो तो जो गुर्दा लेकर जन्म

586
00:40:09,600 --> 00:40:14,160
लेते हैं ना मां की कोख से वो ऐसी बातें कर पाते हैं

587
00:40:14,160 --> 00:40:18,240
ठीक है तो ये सब बातें जो है

588
00:40:18,240 --> 00:40:22,240
वो बाजार में बिकने वाली चीज नहीं बच्चों का खेलने खिलौना नहीं है ये

589
00:40:22,240 --> 00:40:26,240
मर्द लेकर के ये सीना जन्म लेते हैं कि आ जाओ यहां पे

590
00:40:26,240 --> 00:40:30,400
हूं है ना तो वो भी नहीं तुमसे हुआ तुमने तो इस चर्चा को

591
00:40:30,400 --> 00:40:34,400
टालने के लिए वो बात बोली सीधे कि भाई मैं भी जो है दो-ती

592
00:40:34,400 --> 00:40:38,800
घंटे ट्रेवल करके क्यों आऊंगा। यह एक्सक्यूसेस बहाने जो

593
00:40:38,800 --> 00:40:42,800
अच्छा दूसरी बात इन्होंने कहा कि आगे चला दो आगे

594
00:40:42,800 --> 00:40:46,880
चला दो। अब ये बोलेंगे कि क्यों इनको ये अपना अपनी ओर से वो

595
00:40:46,880 --> 00:40:51,040
नहीं प्रयास करना चाहते हैं। चलाइए आगे। अच्छा कि आना

596
00:40:51,040 --> 00:40:55,040
है तो आ सकते हो। हां हां वही वही मैं बात बता रहा था। अगर कोई मजबूरी है तो

597
00:40:55,040 --> 00:40:59,120
वो तो बात एक अलग है। फिर हम देखें कि भाई क्या कहते हैं तुम्हारा

598
00:40:59,120 --> 00:41:03,520
कंस्ट्रक्शन कब खत्म होगा? उसके बाद मेरी ट्रिप कब लगती है? तुम कहां पर हो उस समय?

599
00:41:03,520 --> 00:41:07,840
क्योंकि तुम दिल्ली होते तो दिल्ली भी मुझे जाना ही था। दिल्ली वाला अभी कैंसिल हुआ है।

600
00:41:07,840 --> 00:41:12,000
मुझे वहां जटा बाबा के यहां आना ही है। अच्छा अच्छा। हां। तो

601
00:41:12,000 --> 00:41:16,000
वहां मैं आ रहा था। कुछ और संस्थागत कार्य भी थे। तो

602
00:41:16,000 --> 00:41:20,240
मैंने कहा कि वहां पे तुम वो बनारस में वाराणसी में तुमने अपने मैसेज में बताया था।

603
00:41:20,240 --> 00:41:24,240
जी जी मैंने साथ में ये भी बताया था कि एक तारीख से व्यस्त हो जाऊंगा मैं। नहीं तो उसमें तो

604
00:41:24,240 --> 00:41:28,240
यह हो सकता है कि अगर हमारे लिए कुछ विशेष ही है तो हम

605
00:41:28,240 --> 00:41:32,240
फिर उसके लिए समय निकालते हैं। वैसे तो

606
00:41:32,240 --> 00:41:36,480
ये बात फिर तुम अगर सुनिश्चित करोगे तो फिर बाद में देख लिया जाएगा।

607
00:41:36,480 --> 00:41:40,560
बाद में भी देख सकते हैं और फिलहाल मैंने जैसे बताया ना मैंने पहले ही ऐसा नहीं

608
00:41:40,560 --> 00:41:44,560
कि मैं अभी बोल रहा हूं कि मैं व्यस्त हूं। यह जिस समय हमारी चर्चा हुई थी उसी समय मैंने लिख दिया

609
00:41:44,560 --> 00:41:48,640
था और ध्यान नहीं है तो मैं देता हूं स्क्रीनशॉट

610
00:41:48,640 --> 00:41:52,720
वैसे तो कुल मिलाकर के मैंने एक बात कही कि

611
00:41:52,720 --> 00:41:57,280
बाद के लिए बाद की सुनिश्चितता दे दो इस व्यक्ति ने सुनिश्चितता

612
00:41:57,280 --> 00:42:01,280
के मामले में मौन धारण किया सुनिश्चितता

613
00:42:01,280 --> 00:42:07,280
नहीं देंगे है ना जी चलाइए

614
00:42:12,960 --> 00:42:17,040
ठीक है मुझे मुझे ध्यान ब्लॉक नहीं हूं आज अनलॉक किया था अच्छा

615
00:42:17,040 --> 00:42:21,760
अच्छा ठीक है तो और एक और बात है कि

616
00:42:21,760 --> 00:42:25,760
ज्यादा अच्छा ये रहे कि अगर आप लाइव पे आ जाए मेरे साथ चर्चा में तो लाइव पे

617
00:42:25,760 --> 00:42:29,760
तो तुमने ऐसी बात बोल दी ना मैं तो आना चाहता था पर तुम पहले से पहले प्रेडिक्ट

618
00:42:29,760 --> 00:42:33,840
करके और कुछ का कुछ बोल देते हो इसलिए वो चीजें मैंने तो आपको आप देखिए लाइव

619
00:42:33,840 --> 00:42:37,840
देखिए मैंने तो आपको बोला कि मैं हाथ जोड़ के बड़े विनम्र भाव से विनय भाव से आपको आग्रह कर रहा हूं

620
00:42:37,840 --> 00:42:42,000
ये वो बोला ना वो बोला मगर तुमने जो पहला वीडियो जो बनाया था उसमें तुमने

621
00:42:42,000 --> 00:42:46,080
यह बोला कि भाई वो आपको जो है मैंने हिला दिया

622
00:42:46,080 --> 00:42:50,080
है। तुमने WhatsApp में भी बोला कि मैंने हिला दिया है और अब

623
00:42:50,080 --> 00:42:54,160
आपको लोग ट्रोल कर रहे हैं तो इसलिए आप मुझसे संपर्क कर रहे हो। ये तुमने अपने लाइव

624
00:42:54,160 --> 00:42:58,160
में बोला। देखिए इसमें इसमें एक बात मैं कभी भी प्रेडिक्टबल बातों पे नहीं बात

625
00:42:58,160 --> 00:43:03,120
करता हूं कि मैं मैं तुमको यह महसूस करा हूं कि तुम

626
00:43:03,120 --> 00:43:07,360
अब देखिए बात क्या है कि यहां पर

627
00:43:07,360 --> 00:43:11,360
यह वाली जो बात है कि आप मेरे से इसलिए संपर्क कर रहे

628
00:43:11,360 --> 00:43:16,080
हो चर्चा करने का क्योंकि मेरा पलड़ा भारी है। ठीक है?

629
00:43:16,080 --> 00:43:20,240
तो भाई पहली बात तो तुम्हारे सिद्धांत के अनुसार तुमने मुझसे बार-बार फोन

630
00:43:20,240 --> 00:43:24,320
कर करके कहा सिद्धांत विषय बात करनी है तो तुम्हारा पलला कमजोर

631
00:43:24,320 --> 00:43:28,000
है। उस चर्चा में तुम हारे सिद्ध होते हो। ये हमारी नजरों

632
00:43:28,000 --> 00:43:32,560
में स्वतंत्र रूप से सिद्ध होते हो। बाकी तुम्हारे सिद्धांत के अनुसार भी तुम सिद्ध होते हो।

633
00:43:32,560 --> 00:43:37,200
दूसरी बात ये आती है कि अगर

634
00:43:37,200 --> 00:43:41,600
अब मैं बोलना नहीं चाहूंगा। यहां उदाहरण तो ऐसा कड़क वाला है ही है कि पुलिस

635
00:43:41,600 --> 00:43:45,680
किसी जगह छापा मारने जाती है तो वहां पुलिस की गरज

636
00:43:45,680 --> 00:43:49,840
होती है क्या अगर किसी चोर चक्कर को पकड़ने जाएगी कुछ करने जाएगी

637
00:43:49,840 --> 00:43:53,920
तो आवश्यक नहीं है कि उसका पल्ला भारी ही हो जब वो

638
00:43:53,920 --> 00:43:58,080
ऐसा हो है ना और तीसरी बात ये है कि

639
00:43:58,080 --> 00:44:02,160
तुम कोई विशेष व्यक्ति नहीं हो जो तुम्हारे जो

640
00:44:02,160 --> 00:44:06,480
तुम सोच रहे हो कि मैंने कुछ ऐसा कर दिया है तुमने क्या किया वो तुम्हारे लोग सुनेंगे

641
00:44:06,480 --> 00:44:10,560
और वो जवाब दें आकर के जड़ को कैसे प्राप्त हुई ईश्वर की इच्छा? हालांकि

642
00:44:10,560 --> 00:44:14,880
सर्वशक्तिमान की व्याख्या अलग है। ये तो केवल इस विषय में है कि ईश्वर

643
00:44:14,880 --> 00:44:19,120
अपने नित्य स्वरूप जो एक स्वरूप धारण करके ईश्वर की सृष्टि

644
00:44:19,120 --> 00:44:23,120
की रचना करता है कि नहीं। केवल इस विषय में क्योंकि वो स्वभाव के विरुद्ध जाता है कि

645
00:44:23,120 --> 00:44:27,120
नहीं ये बात आ जाती है ना। उसका तो स्वभाव है कि वो एक रस है। तो

646
00:44:27,120 --> 00:44:31,120
कैसे फिर वो एक जगह धक्के का विषय बन बन जाएगा। यही तो हार है इनकी

647
00:44:31,120 --> 00:44:35,120
आर्य समाजियों की पूरी। यही मौन है। पूरा आर्य समाज मौन है। सब जगह बातें

648
00:44:35,120 --> 00:44:39,280
कर लेंगे। फिर वो इधर-उधर की बातें करने लगेंगे। खैर कुल मिलाकर

649
00:44:39,280 --> 00:44:44,160
के क्या है कि एक

650
00:44:44,160 --> 00:44:48,160
जो वैश्या भी होती है उसके यहां पर भी अगर कुछ

651
00:44:48,160 --> 00:44:52,480
आपत्ति प्रकट करने कोई जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि उस वैश्या का पलड़ा बहुत भारी

652
00:44:52,480 --> 00:44:56,640
है और यह किसी व्यक्ति व्यक्ति निष्ठ हो के बात नहीं कही है मैंने

653
00:44:56,640 --> 00:45:00,640
किसी व्यक्ति को केंद्र में करके एक सिद्धांत स्वतंत्र रूप से एक सिद्धांत बताया

654
00:45:00,640 --> 00:45:05,120
तो इसका मतलब यह नहीं कि वैश्या का पल्ला भारी है हम अगर आपत्ति

655
00:45:05,120 --> 00:45:09,280
करने जा ही रहे हैं ठीक ठीक है? ये सब तुम्हारी अपनी व्याख्याएं हैं कि

656
00:45:09,280 --> 00:45:13,440
किसी का पल्ला भारी था तो हम गए, नहीं गए। हां, ये

657
00:45:13,440 --> 00:45:17,760
बात हो सकती है कि हम ये कह सकते हैं कि भैया अगर वो

658
00:45:17,760 --> 00:45:21,840
चोर भी है और अपनी चोरी के क्षेत्र में बहुत बड़ा मुकाम

659
00:45:21,840 --> 00:45:26,080
हासिल कर लिया है। जैसे दाऊद है ना? अगर

660
00:45:26,080 --> 00:45:30,240
कोई दाऊद है या और कोई है कोई गलत व्यक्ति भी है और उस गलत

661
00:45:30,240 --> 00:45:34,560
के क्षेत्र में उसने बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। जैसे रामपाल

662
00:45:34,560 --> 00:45:38,720
रामपाल क्या है? रामपाल की बातें दो कौड़ी की है।

663
00:45:38,720 --> 00:45:42,960
उसका कोई पल्लावल्ला भारी नहीं है किसी जगह विषय में। मगर

664
00:45:42,960 --> 00:45:47,200
उसने प्रचार अपना ऐसा करके अपने आप को ख्यापित कर लिया है कि उसका

665
00:45:47,200 --> 00:45:51,760
वो जो तथाकथित जो ताना-बाना है उसको ब्रेक करना आवश्यक है।

666
00:45:51,760 --> 00:45:56,160
है ना? हम अब तुम ये कहो क्योंकि रामपाल का सैद्धांतिक

667
00:45:56,160 --> 00:45:59,360
पल्ला भारी हो गया था। उन्होंने शंकराचार्य को बुलाया था।

668
00:45:59,360 --> 00:46:03,360
पत्र लिखा था और वो गए नहीं थे। आज जो उसका पल्ला भारी है तो आप जो

669
00:46:03,360 --> 00:46:09,120
आप उनसे चर्चा करने जा रहे हो तो क्या यह बात उचित मानी जा सकती है?

670
00:46:09,120 --> 00:46:13,200
बिल्कुल भी नहीं। तो ये आवश्यक नहीं है

671
00:46:13,200 --> 00:46:17,280
कि यदि हम किसी का विरोध करने जा रहे हैं तो उसका सैद्धांतिक पल्ला भारी हो

672
00:46:17,280 --> 00:46:21,360
गया। हां उसने मामा आ गए मामा आ गए कर करके कर करके अपने आप को ऐसा जरूर

673
00:46:21,360 --> 00:46:25,360
बना लिया। पब्लिसिटी ऐसी जरूर कर ली है जो आवश्यक लगा तो गए। तो यह

674
00:46:25,360 --> 00:46:29,360
बात भी तुम पर लागू हो सकती है कि तुमने तुम्हारे और तुमने लोगों ने मामा आ गए। मामा अगर

675
00:46:29,360 --> 00:46:33,440
कर रहे हो तो हम भैया तुम्हें आईना दिखाने आ रहे हैं। ठीक है? हमने ये कभी नहीं कहा

676
00:46:33,440 --> 00:46:37,520
है। हमने ये कभी नहीं कहा है कि यही एक आधार हो सकता है किसी

677
00:46:37,520 --> 00:46:42,160
के पास चर्चा करने जाने का। हां। मगर तुम्हारे

678
00:46:42,160 --> 00:46:46,320
क्या कहते हैं? तुम्हारे क्षेत्र में हमारे अनुसार यदि तुम गलत हो और उस गलत में तुमने

679
00:46:46,320 --> 00:46:50,400
मामा आ गए मामा आ गए करके कुछ पिक्चर एक बना ली। उसको ब्रेक करने भी

680
00:46:50,400 --> 00:46:54,400
हम आ सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हारा सैद्धांतिक पल्ला भारी हो गया था। इसका मतलब

681
00:46:54,400 --> 00:46:58,640
ये है कि तुमने अपनी जो पीआरओ टीम है पीआर टीम है उसका सदुपयोग किया। जैसे

682
00:46:58,640 --> 00:47:02,800
स्पॉन कर रहा है और भी बहुत जगह किया जाता है। ठीक है?

683
00:47:02,800 --> 00:47:06,800
और तुम्हारे विषय की अगर बात करें स्वतंत्र रूप से तो तुम्हारे विषय में तो

684
00:47:06,800 --> 00:47:10,880
हमारा यह मानना था कि हमने आमने सामने की चर्चा के

685
00:47:10,880 --> 00:47:14,480
लिए बात रखी हुई थी बीच की कि भाई जब तुमने अपने चैनल के बारे

686
00:47:14,480 --> 00:47:18,480
में तो ऐसी बातें कर दी है। तो आमने सामने चर्चा के लिए ऐसी बात की हुई

687
00:47:18,480 --> 00:47:22,480
थी तो हम वहां आ रहे हैं तो तुम्हारा भी समन्व में बिठा लेंगे। इस तरह से आ जाएंगे कि

688
00:47:22,480 --> 00:47:26,480
तुम्हारा समन्वय बैठ जाए। है ना? उसमें कोई ऐसा नहीं था कि हम

689
00:47:26,480 --> 00:47:30,640
100 किलोमीटर और दूर नहीं जा सकते। मगर इनका इसका इसकी बौखलाहट देखो

690
00:47:30,640 --> 00:47:34,720
एक स्तर से किस तरह से गिर रहा है यह व्यक्ति। इसकी बौखलाहट देखना अभी आप

691
00:47:34,720 --> 00:47:40,720
अभी और भी रिकॉर्डिंग्स है। जी चलाइए।

692
00:47:42,000 --> 00:47:46,160
तुम अपने आप को हारा हुआ समझते हो ना। देखिए हां मैं मैं तुम्हें हारा

693
00:47:46,160 --> 00:47:50,480
हुआ समझता हूं। ये मैं मान सकता हूं। ये मैं कह सकता हूं। इसमें एक बात ये आती है।

694
00:47:50,480 --> 00:47:54,560
ठीक है? बात ये आती है कि एक होता है सामाजिक प्रभाव का। ठीक है? पहले जिस

695
00:47:54,560 --> 00:47:58,560
समय आपका सामाजिक प्रभाव मुझे लगा कि था तो मुझे आवश्यकता लगी तो मैं आपके यहां भी

696
00:47:58,560 --> 00:48:02,560
गया है ना फिलहाल जो स्थिति मेरे दृष्टिकोण में है वो आपका सामाजिक प्रभाव नगण्य

697
00:48:02,560 --> 00:48:06,640
है तो फिर मैं ऐसा कुछ जरूरत महसूस नहीं करता कि मैं आपके पास जाऊं ये एक

698
00:48:06,640 --> 00:48:10,800
बात है ये मैं अपना दृष्टिकोण बता रहा हूं आप व्यक्तिगत रूप से आपका क्या मानते क्या

699
00:48:10,800 --> 00:48:15,360
पहले मेरा सामाजिक प्रभाव अलग लगता था अब नहीं लगता हां परिव

700
00:48:15,360 --> 00:48:19,520
आप भी जानते हैं स्थिति परिवर्तित होती है कोई बड़ी बात नहीं ठीक है ठीक पॉज कर लीजिए

701
00:48:19,520 --> 00:48:23,520
अब देखिए सामाजिक प्रभाव की बात है तो हमारी

702
00:48:23,520 --> 00:48:28,480
जो चर्चा है कॉल वाली वो चर्चा सबने तो सुनी नहीं थी।

703
00:48:28,480 --> 00:48:29,520
ठीक है? अभी

704
00:48:29,520 --> 00:48:33,680
जब तक जब तक वो लोगों ने सुनी नहीं है उससे पहले तक तो लोगों ने सुनी

705
00:48:33,680 --> 00:48:37,680
नहीं थी। तो सामाजिक प्रभाव इसका

706
00:48:37,680 --> 00:48:41,680
इसके हिसाब से मेरा जो सामाजिक प्रभाव जो कम हुआ है वो उस चर्चा की वजह से खत्म

707
00:48:41,680 --> 00:48:45,840
हुआ है। किस चर्चा की वजह से? वो जो मेरी और इसकी आमने सामने हुई है।

708
00:48:45,840 --> 00:48:49,840
उसी चर्चा की वजह से कम हुआ है। ठीक है? तो फिर जब कम हो गया तो

709
00:48:49,840 --> 00:48:53,920
ये फोन पे क्यों कह रहा है भैया सैद्धांतिक चर्चा कर लेते हैं बार-ब क्यों

710
00:48:53,920 --> 00:48:57,040
कह रहा है हम

711
00:48:57,040 --> 00:49:01,040
हम कह रहा है ना अगर इसको कहते हैं चाल इसको कहते

712
00:49:01,040 --> 00:49:05,200
हैं टेक्निक बदलना हम हम मैं दिखा देता हूं लोगों को सुना

713
00:49:05,200 --> 00:49:09,200
देता हूं भैया वो जरा वो वाला मेरा वीडियो लगाइए लास्ट वाला पार्ट है

714
00:49:09,200 --> 00:49:13,200
जो लास्ट वाला पार्ट है जो बड़ा वाला वीडियो दो ढाई घंटे

715
00:49:13,200 --> 00:49:19,200
का

716
00:49:22,480 --> 00:49:26,480
ठीक है तब तक हम दूसरी बातें कर लेते हैं। आप तब

717
00:49:26,480 --> 00:49:32,480
तक खोल लीजिए। जी जी शास्त्रवाद जी कुछ बोलेंगे।

718
00:49:45,440 --> 00:49:49,440
आप बोले जी जी नहीं अभी ये

719
00:49:49,440 --> 00:49:53,600
जो रिकॉर्डिंग है इसमें तो यही लग रहा है कि ये चर्चा से जो भाग रहा है क्योंकि

720
00:49:53,600 --> 00:49:57,680
जब आप दिल्ली आए थे आपको याद होगा हमने चर्चा कहां पर बैठ के की थी अगर

721
00:49:57,680 --> 00:50:02,000
कंस्ट्रक्शन का भी काम हो रहा है तो चर्चा जरूरी नहीं कि कंस्ट्रक्शन

722
00:50:02,000 --> 00:50:06,160
वाली जगह पर ही हो उसके आसपास भी हो सकती है 1/2 किलोमीटर के दायरे में भी हो सकती

723
00:50:06,160 --> 00:50:10,160
है कहीं पेड़ के नीचे भी हो सकती है कहीं खुले में बैठकर भी हो सकती

724
00:50:10,160 --> 00:50:14,160
है ना तो वो सब बहाने होते हैं और आपके पास तो ट्राईपॉड है

725
00:50:14,160 --> 00:50:18,160
माइक है वो तो सारा पोर्टेबल सामान है ऐसा तो है नहीं कोई पूरा

726
00:50:18,160 --> 00:50:22,320
आपको कोई स्टूडियो बनाना है जिसको चर्चा करनी है वो कहीं खुले

727
00:50:22,320 --> 00:50:26,400
पे भी कर सकता है ये सब जो

728
00:50:26,400 --> 00:50:32,400
बहाने है जय श्री राम जी शास्त्र जी

729
00:50:35,280 --> 00:50:39,440
जी भैया मेरे यहां पे थोड़ा नेटवर्क खराब है तो हो सकता है मेरा आवाज

730
00:50:39,440 --> 00:50:43,600
फसे बीचबीच में हां जी हां

731
00:50:43,600 --> 00:50:48,000
अपना पक्ष यहां पे आवाज आ रही है हेलो

732
00:50:48,000 --> 00:50:52,000
हम इसमें वो एक घंटे की चर्चा निकाल दीजिए

733
00:50:52,000 --> 00:50:58,000
आप

734
00:51:00,000 --> 00:51:04,000
लगभग लास्ट की जब ये दो घंटे की निकाल लीजिए लास्ट की

735
00:51:04,000 --> 00:51:08,400
50 55 मिनट की रह जाएगी चर्चा वो सेकंड पार्ट चालू होगा

736
00:51:08,400 --> 00:51:11,040
प्ले करिए

737
00:51:11,040 --> 00:51:11,540
आज

738
00:51:11,280 --> 00:51:15,440
तक क्या आप ये मानते हैं? बिल्कुल हां तो मेरे पास इसका विरुद्ध मैं प्रमाण में दे देता हूं।

739
00:51:15,440 --> 00:51:19,600
बता दूं इसका आप खोलिए। निरुक्त एक 20

740
00:51:19,600 --> 00:51:23,840
और आगे बढ़ाइए। निरुक्त एक लगभग

741
00:51:23,840 --> 00:51:27,840
आधा घंटा वहां पर जो बात हो रही है वो इस केस में हो रही है कि स्मृति क्षीण हो रही है।

742
00:51:27,840 --> 00:51:32,000
इसलिए ये वाला सहारा भी रख लो। है ना? मगर सहारा

743
00:51:32,000 --> 00:51:36,160
थोड़ी है। सुनो तो मेरी बात सुनो। मगर यह नहीं है कि अगर किसी

744
00:51:36,160 --> 00:51:41,040
को याद है तो उसका विरोध विरोध ही करो।

745
00:51:41,040 --> 00:51:45,120
हुई है। निरुक्त में ही मैंने खुद निरुक्त में जो भी परंपरा की बात हुई वेदार्थ की परंपरा की बात

746
00:51:45,120 --> 00:51:49,920
हुई है। और और आगे

747
00:51:49,920 --> 00:51:55,920
मैं कह रहा हूं निरुक्त में जो और एक मिनट एक मिनट

748
00:51:56,160 --> 00:52:00,320
भाषा में लोग भाषा में निषेध अर्थ वाला यहां नहीं है वो वाली बात बहुत लंबा हो रहा है।

749
00:52:00,320 --> 00:52:04,800
10 15 मिनट आगे ना तो ये जो

750
00:52:04,800 --> 00:52:08,800
लिख रहे हैं क्योंकि वेदांत की परंपरा आ रही है ना अद्वैत वेदांत की तो उन्होंने उसके आधार पे तो

751
00:52:08,800 --> 00:52:12,560
वेदांत को वेदांत को

752
00:52:12,560 --> 00:52:13,200
वेदांत को

753
00:52:13,200 --> 00:52:17,200
वेदांत है कोई बीच में

754
00:52:17,200 --> 00:52:21,440
मत कोई बीच में विश्वास पात्र है ना जो ये बोल रहा है उनका मनुस्क्रिप्ट

755
00:52:21,440 --> 00:52:26,240
है और 15 मिनट आगे

756
00:52:26,240 --> 00:52:30,160
उस वो निकल गया मुंह से मगर ऐसा कुछ नहीं कि मैं सोच समझ के कर रहा हूं मैं ये कह

757
00:52:30,160 --> 00:52:34,320
रहा हूं कि जितनी बार निर्गुण सगुण की बात अभी तक हमारे बीच में आई आई है तुमने

758
00:52:34,320 --> 00:52:38,400
वहां से मतलब वहां पे और क्लियर कट तुम

759
00:52:38,400 --> 00:52:42,560
तुमने बोला क्या था छोड़ दो उसको हटाओ उसको डिलीट

760
00:52:42,560 --> 00:52:46,560
कर रहे हो मैं मैं उसको पीछे चलो सुनो मैं बता तुम क्यों पूछ रहे मैंने

761
00:52:46,560 --> 00:52:50,560
आपने जब वो बोला ना कि धक्का लगाता है आपने बोला ना कि धक्का लगाता है धक्का लगा मैंने उसी पे ही

762
00:52:50,560 --> 00:52:54,560
मैंने आपको धक्के वाले पे ही प्रश्न किया ना कि धक्का लगाने के लिए उसका सन देश होना

763
00:52:54,560 --> 00:52:58,960
जरूरी है तो क्या ईश्वर को तो क्या उनकी सही मानसिकता

764
00:52:58,960 --> 00:53:02,720
क्या थी अब उनकी उनकी परंपरा का व्यक्ति बता रहा है उनकी मानसिकता आप

765
00:53:02,720 --> 00:53:06,720
एक काम करिए तुम करिए गैप मत लीजिए फॉरवर्ड करिए

766
00:53:06,720 --> 00:53:10,720
वो जो करते हैं ना तीन की स्पीड पे चार की स्पीड पे वो प्ले कर

767
00:53:10,720 --> 00:53:14,480
दे वो करके फॉरवर्ड करिए

768
00:53:14,480 --> 00:53:20,480
मैं इसमें देखता हूं मोबाइल में

769
00:53:23,920 --> 00:53:29,920
एक मिनट मैं टाइमिंग निकालता हूं जरा

770
00:53:42,640 --> 00:53:46,720
अंतिम भाग में ही है वो सारा लास्ट हां अंत में ही है

771
00:53:46,720 --> 00:53:50,880
अंत में ही है

772
00:53:50,880 --> 00:53:56,880
एक मिनट

773
00:54:15,840 --> 00:54:19,920
संविधान से ही है आपको उन्हें झूठा सिद्ध करना झूठा मानना

774
00:54:19,920 --> 00:54:22,160
पड़ेगा

775
00:54:22,160 --> 00:54:26,240
और बात की शाखाएं भी लुप्त हो चुकी है ये भी लीजिए तो कहना पड़ेगा ईश्वर की शाखा

776
00:54:26,240 --> 00:54:30,320
दे तो तुम सिद्ध करो तुम्हारा वैदिक

777
00:54:30,320 --> 00:54:35,280
वेदांत के ईश्वर ने वेद के रूप में कर रखी थी इसीलिए किसी भी

778
00:54:35,280 --> 00:54:41,280
है तो उसमें हमारा झूठ अगर आप

779
00:54:41,760 --> 00:54:45,920
नहीं नहीं 247 नहीं रुकी पीछे उच्चारण करके अध्याय

780
00:54:45,920 --> 00:54:50,720
पाठ होने वाला कोई मानना पड़ेगा

781
00:54:50,720 --> 00:54:54,720
तो वो वेद भी दिखा देंगे बात ये है कि

782
00:54:54,720 --> 00:54:58,800
तुम जहां पे तुम्हारी बात आ रही है सबसे पहले मैं अभी

783
00:54:58,800 --> 00:55:02,880
जो वेदा दोबारा भगवान को आना पड़ेगा नहीं तो आप प्रज्ञा

784
00:55:02,880 --> 00:55:06,960
शक्ति ये आपने बोला ना की पॉइंट दूसरा पॉइंट ये की अगर मैं मानवी

785
00:55:06,960 --> 00:55:11,920
नेताओं के वेदार जो है वो किसी को याद नहीं

786
00:55:11,920 --> 00:55:14,480
हो

787
00:55:14,480 --> 00:55:19,840
रहा

788
00:55:19,840 --> 00:55:25,840
है और कुछ और

789
00:55:31,440 --> 00:55:37,040
क्या ठीक का मतलब

790
00:55:37,040 --> 00:55:41,520
बात

791
00:55:41,520 --> 00:55:45,760
भाई कोई कोई आप लोगों में से कोई मदद कर दे वहां

792
00:55:45,760 --> 00:55:49,840
पर देख ले हमारा जो वीडियो है दूसरा वाला उसको देख करके टाइमिंग

793
00:55:49,840 --> 00:55:53,040
बताए यहां पर वो जो

794
00:55:53,040 --> 00:55:56,080
है जो है नाम क्या है देवताओं

795
00:55:56,080 --> 00:56:00,240
के लिए प्रयुक्त होती थी देवता विषय दृष्टियों द्वारा वैदिक मंत्र इसी भाषा में निबद्ध है इन मंत्रों

796
00:56:00,240 --> 00:56:04,320
के अध्ययन के लिए आगे आचार्य मंत्रों का करता करता था। उनके पीछे पीछे अध का उच्चारण करते हुए

797
00:56:04,320 --> 00:56:08,480
अध्ययन करता था। उसके पीछे पीछे उच्चारण करके अध्ययन करने के कारण वेद मंत्रों को

798
00:56:08,480 --> 00:56:10,720
अनुप

799
00:56:10,720 --> 00:56:14,720
सुरक्षित रखते हुए सगुण अवतार लेता है और अब वो जो है क्रियाशील होता

800
00:56:14,720 --> 00:56:19,040
है। क्रिया करने के लिए ही उसे कहीं कम कहीं ज्यादा होना पड़ेगा। मेरे भाई

801
00:56:19,040 --> 00:56:23,120
क्रिया हो ही नहीं सकती जब वो सही सब जगह है। उस दृष्टि

802
00:56:23,120 --> 00:56:27,200
से तत्व की दृष्टि से केवल इच्छा मात्र कर रहा है। मगर हमारी से तो हमें

803
00:56:27,200 --> 00:56:31,360
कुछ ना कुछ उसका बल प्राप्त हुआ ना कि हम किसके नहीं तो हमें मानना पड़ेगा

804
00:56:31,360 --> 00:56:34,800
केवल वो सोचता है उसके बाद

805
00:56:34,800 --> 00:56:38,880
मैं ये कह रहा हूं जहां पर वो चैप्टर बदलता है ना लास्ट इस पार्ट

806
00:56:38,880 --> 00:56:43,200
में एक जगह आता है डेढ़ घंटे पौने दो घंटे बाद एक जगह चैप्टर बदलता है

807
00:56:43,200 --> 00:56:47,600
ना बल है ना कुछ है ना फोर्स है कुछ जी

808
00:56:47,600 --> 00:56:51,760
ठीक है अब देखिए तो चलिए आपने अपनी व्याख्या कर दी ना अब तो अब अब तुम इस

809
00:56:51,760 --> 00:56:56,080
पे और करो आपकी बात सुनी जब मैं बोलना चाहूंगा है

810
00:56:56,080 --> 00:57:00,800
भाई मैंने तुम्हें बताया कर लो मैंने सोचा 15 मिनट

811
00:57:00,800 --> 00:57:05,280
और पीछे हो तो अब तो इस और करो

812
00:57:05,280 --> 00:57:07,920
और पीछे

813
00:57:07,920 --> 00:57:11,920
अब देखो सबसे पहली बात तो क्या है मैं कह रहा हूं कि मुझे चर्चा

814
00:57:11,920 --> 00:57:16,880
नहीं करनी ये व्यक्ति कह रहा है कि चर्चा करनी है मेरा दीूंगा

815
00:57:16,880 --> 00:57:21,920
वो है सर्वव्यापक एक रस है

816
00:57:21,920 --> 00:57:25,920
ठीक है कुछ गुणों से सहित कुछ गुणों से रहित हल्का थोड़ा सा पीछे और करो।

817
00:57:25,920 --> 00:57:30,000
यहां पे ये कहेगा कि सैद्धांतिक चर्चा कर लो पहले। इसलिए

818
00:57:30,000 --> 00:57:34,000
उसको निर्गुणी से गुण बोला जाता है। पॉइंट आ जाता है। मतलब हमारा हर तरीके से एक रस नहीं है।

819
00:57:34,000 --> 00:57:38,000
पहली बात तो हम ये मान ले। कुछ गुणों में एक रस है। कुछ गुणों में जो है कम ज्यादा है।

820
00:57:38,000 --> 00:57:42,080
एक रस का मतलब क्या होता है? एक रस इसको ईश्वर को एक रस का मतलब समझा दो। एक रस की स्थिति हर

821
00:57:42,080 --> 00:57:46,080
तरह से नित्य बिल्कुल कहीं भी अभाव नहीं कि यहां इतना है यहां ज्यादा

822
00:57:46,080 --> 00:57:50,080
है यहां कम है ये नहीं बिल्कुल इक्वल हर तरह से एक रस

823
00:57:50,080 --> 00:57:51,440
35 ये

824
00:57:51,440 --> 00:57:55,680
जो मैं थोड़ा सा इसमें और ओवरव्यू इसमें उधर बात करना चाहता था

825
00:57:55,680 --> 00:57:59,840
ये तो बिना अल्टीमेटम के आप विषय में घुस गए हां बस बस बस बस बस बस

826
00:57:59,840 --> 00:58:03,920
इससे थोड़ा इसमें जो टॉपिक रह रहे हमारे सिद्धांतिक चर्चा के एक तो

827
00:58:03,920 --> 00:58:07,920
हम उस पर चर्चा कर रहे थे परंपरा पे इससे लगभग दो तीन मिनट परंपरा

828
00:58:07,920 --> 00:58:13,360
वाला टॉपिक

829
00:58:13,360 --> 00:58:17,360
जीव हिल के हाथों को उठाता है क्या? तो आप वहां पर बताओ ना वहां बल

830
00:58:17,360 --> 00:58:21,520
है कि क्या है पीछे? जैसे जैसे जैसे मेरे शरीर में जीव है। ठीक है।

831
00:58:21,520 --> 00:58:22,480
मैंने चाहा

832
00:58:22,480 --> 00:58:28,480
मैं हाथ उठा। तुम होते वही

833
00:58:33,520 --> 00:58:36,800
क्या हुआ?

834
00:58:36,800 --> 00:58:41,680
प्ले करिए भाई। आ तो गए बिल्कुल पास में आ गए

835
00:58:41,680 --> 00:58:46,400
कल की वाले मुझे से बड़े खिस आए हुए हैं बस बस बस

836
00:58:46,400 --> 00:58:50,640
इधर उधर चलने दो इसको चलने दो सुनो यहां से सुनो मैं कहीं

837
00:58:50,640 --> 00:58:54,640
जा रहा हूं अपनी पैकिंग हमारे भगवान आए थे 2006 में गोली मारकर हत्या कर

838
00:58:54,640 --> 00:58:58,160
दी गई उनकी बताओ

839
00:58:58,160 --> 00:59:02,400
इनके भगवान का हानि पड़ गए पता भी नहीं चला चेलों को प्रचार

840
00:59:02,400 --> 00:59:05,280
करना पड़ रहा है

841
00:59:05,280 --> 00:59:09,680
और बताओ और भैया वही तैयारी चल रही थी तो

842
00:59:09,680 --> 00:59:14,320
हम निकलना था बस थोड़ी बहुत देर में ही तुम्हारी भाभी अच्छा

843
00:59:14,320 --> 00:59:14,960
कर रही है

844
00:59:14,960 --> 00:59:19,360
वही थोड़ा सिद्धांत वगैरह सोच रहा था चर्चा करूं अगर आपके पास समय हो तो

845
00:59:19,360 --> 00:59:21,760
अरे हो तो गई अपने भी

846
00:59:21,760 --> 00:59:25,760
ये क्या बोल रहे हैं भाई साहब ये जब उस चर्चा में ये परास्त

847
00:59:25,760 --> 00:59:29,840
कर चुके हैं हमको तो इनके किस बात की यहां पर वो बाकी रह गई

848
00:59:29,840 --> 00:59:33,840
है जो ये बार-बार कह रहे हैं सिद्धांत पे चर्चा करो थोड़ा सिद्धांत

849
00:59:33,840 --> 00:59:37,840
वगैरह सोच रहा था चर्चा करूं अगर भाई इन्होंने उन्होंने कहा हमारा

850
00:59:37,840 --> 00:59:41,920
सामाजिक प्रभाव क्षीण हो गया। क्यों हो गया कि उस चर्चा में इन्होंने जो है वो

851
00:59:41,920 --> 00:59:46,080
झंडे गाड़ दिए अपने तो जब सामाजिक प्रभाव हमारा क्षीण हो गया है तो

852
00:59:46,080 --> 00:59:50,240
फिर ये क्यों परेशान है सिद्धांत पे चर्चा करने के लिए

853
00:59:50,240 --> 00:59:54,560
और मैं मना कर रहा हूं कि भाई हो गया तुम अध्ययन करो जाकर के। नहीं नहीं मैंने

854
00:59:54,560 --> 00:59:58,720
कर लिया है। परेशान तो तुम हो भाई। बात बस ऐसी

855
00:59:58,720 --> 01:00:02,720
है कि अब तुम्हारे पास और कोई जगह नहीं रह गई है बच के

856
01:00:02,720 --> 01:00:07,360
जाने की। हर जगह से तुम फंस रहे हो। तो अब तुमने एक बीड़ा उठा लिया।

857
01:00:07,360 --> 01:00:11,440
कहा गया आना है तो हमारे चैनल पर आओ। और उसके भी कारण होते हैं। भाई

858
01:00:11,440 --> 01:00:15,680
चैनल पर व्यक्ति अपना कंफर्ट जोन देखता है। हम भी अपने चैनल पर बुलाते हैं। मगर

859
01:00:15,680 --> 01:00:19,840
हम उसके पास जाते भी हैं जिससे हमें दिक्कत हो रही होती। हम और तुम्हारे

860
01:00:19,840 --> 01:00:23,840
पास आने की वजह बस एक थी कि तुमसे अपनत्व था।

861
01:00:23,840 --> 01:00:27,920
जो मैंने कहा था कि सैद्धांतिक चर्चा कर ले। तुमने फर्स्ट टाइम अगर ये सब ना किया

862
01:00:27,920 --> 01:00:32,400
होता जो तुमने वो वहां पर जहर उगला था तो हम तुम्हारे चैनल पर आते।

863
01:00:32,400 --> 01:00:36,480
क्यों नहीं आते? पर तुमने इस तरह की बातें कर दी कि भाई आप तुम्हें ट्रोल

864
01:00:36,480 --> 01:00:36,980
कर रहे हैं

865
01:00:36,960 --> 01:00:41,120
लोग इसलिए आ रहे हो आपके आपकी मैंने हिला दिया आपकी वो मैंने

866
01:00:41,120 --> 01:00:45,280
चट्टान हिला दी अरे भाई कहां हिला दी तुम तो आ रहे हो मुझसे बार-बार

867
01:00:45,280 --> 01:00:49,600
बार-बार यहां मिन्नतें कर रहे हो ना सिद्धांतिक चर्चा करने मैं मना कर रहा हूं नहीं करनी

868
01:00:49,600 --> 01:00:53,760
मैं संतुष्ट हूं भाई मैं संतुष्ट बैठा हूं देखो क्या कहूंगा मैं

869
01:00:53,760 --> 01:00:59,760
चलाना वो चलाना वहीं से जरा

870
01:01:03,200 --> 01:01:03,700
आपके पास

871
01:01:03,680 --> 01:01:08,000
समय हो तो अरे हो तो गई अपने बीच में चर्चा वही पॉइंट

872
01:01:08,000 --> 01:01:12,320
अटक जाता है वो सगुण निराकार में तुम इच्छा कर देते हो

873
01:01:12,320 --> 01:01:13,360
सगुण निराकार

874
01:01:13,360 --> 01:01:17,360
ये बताइए इच्छा हां ये बताइए जो

875
01:01:17,360 --> 01:01:21,440
व्यक्ति को डैमेज कंट्रोल करना होगा अपनी इमेज के लिए या जो भी चीज

876
01:01:21,440 --> 01:01:25,520
किसी भी चीज के लिए वो व्यक्ति ये क्यों कहेगा भाई ये

877
01:01:25,520 --> 01:01:29,520
क्यों कहेगा वो भाई मैं संतुष्ट हूं हम और यहां तक

878
01:01:29,520 --> 01:01:34,480
कि इसमें ये भी ये भी स्पष्ट हो रहा है ना कि मैं उस चर्चा से भी संतुष्ट हूं

879
01:01:34,480 --> 01:01:40,240
जिसके आधार पे ये कह रहा है कि मैं अपने आप को हारा हुआ समझ रहा हूं।

880
01:01:40,240 --> 01:01:42,480
बिल्कुल

881
01:01:42,480 --> 01:01:48,400
यही से स्पष्ट है पूरा देखो क्या कहूंगा मैं देखो

882
01:01:48,400 --> 01:01:48,900
हां

883
01:01:48,640 --> 01:01:52,720
तो वो तो सही पॉइंट है ना उसमें क्या उसके पास आर्गुमेंट क्या है आपके पास मतलब सही

884
01:01:52,720 --> 01:01:56,720
वहां पे वो संतुष्टिजनक नहीं है ना तुम्हारा ये कहना बल नहीं है वो इच्छा है

885
01:01:56,720 --> 01:02:00,720
तो उसमें तो सही पॉइंट है उसमें आपके पास फिर सर फिर उसको

886
01:02:00,720 --> 01:02:02,240
शक्तिमान क्यों कह रहे हो इच्छा मान

887
01:02:02,240 --> 01:02:06,240
कहो दो 24 दो 47 पे ले जाओ जरा इसको तो क्या होता है

888
01:02:06,240 --> 01:02:12,240
इनका बताएं इन्होंने क्या जवाब दिया लास्ट में 247 पे ले जाओ

889
01:02:22,160 --> 01:02:26,800
हूं वो जो कार्ब कार्ब इंटेक करता हूं एटीपी की बात कर रहे हैं।

890
01:02:26,800 --> 01:02:30,800
चलो एटीपी मान लो चलो एटीपी और को

891
01:02:30,800 --> 01:02:33,840
तो

892
01:02:33,840 --> 01:02:38,080
उसने इच्छा की उसने इच्छा की उस इच्छा के कारण जो मेरा सूक्ष्म

893
01:02:38,080 --> 01:02:42,320
शरीर है उसने एटीपी को यूज़ किया और मेरे स्थूल शरीर पे उसका जो है रिफ्लेक्शन

894
01:02:42,320 --> 01:02:46,320
दिखाई एटीपी एटीपी भी जो हो गया वो आपका स्थूल में ही आ गया ये होता है मैं

895
01:02:46,320 --> 01:02:50,640
इसको पूरा बोल देता हूं कि जैसे जीव ने चाहा और जीव का

896
01:02:50,640 --> 01:02:55,200
बहुत गरीब एटीपी भी स्थूल में ही आता है। अरे भाई आया

897
01:02:55,200 --> 01:02:59,360
मगर एटीपी का यूज़ किया ना जीव ने एटीपी का

898
01:02:59,360 --> 01:03:03,840
एक पावर का एक एनर्जी का जीव ने यूज़ किया ना

899
01:03:03,840 --> 01:03:08,080
अब इसी प्रकार से एक भौतिक शक्ति का यूज़ भगवान करेंगे

900
01:03:08,080 --> 01:03:12,160
ना तो उस भौतिक शक्ति का क्या वो भौतिक शक्ति

901
01:03:12,160 --> 01:03:16,400
को क्या कहोगे तुम जो ईश्वर यूज़ कर रहे हैं जड़ पदार्थों पे अगर

902
01:03:16,400 --> 01:03:21,040
तुम अलग कर दोगे तो जिहादी ईश्वर हो जाएगा और एक बात मैं कहना भूल गया

903
01:03:21,040 --> 01:03:25,440
यदि हम यह कहते हैं कि ईश्वर ने इच्छा की और यह मत पूछो कि वो इच्छा जड़ पदार्थों

904
01:03:25,440 --> 01:03:29,440
को प्राप्त कैसे हो रही है? तो फिर ईश्वर के सर्वव्यापक होने की

905
01:03:29,440 --> 01:03:33,440
आवश्यकता भी नहीं है। ब्रह्मा कुमारी और वो

906
01:03:33,440 --> 01:03:37,440
जो इस्लामियों का ईश्वर वो भी ले लो। उससे भी काम चल जाएगा। भाई वो नहीं है

907
01:03:37,440 --> 01:03:41,760
सर्वव्यापक मगर वो एक देश है। उसने इच्छा की सब जगह सब हो गया। लो

908
01:03:41,760 --> 01:03:45,920
क्या जरूरत है सर्वव्यापक होने की? सर्व्यापक होने

909
01:03:45,920 --> 01:03:51,280
की जरूरत क्या है? जब इच्छा से सब हो जाना है तो इच्छा से सब होना है हम

910
01:03:51,280 --> 01:03:55,280
ठीक है तो फिर तो वो ज्यादा अच्छा है जो नाली में नहीं है फिर तो नाली में नहीं है

911
01:03:55,280 --> 01:03:59,440
ये नहीं है वो नहीं उनकी व्याख्या है वो हम तो ज्यादा अच्छा हो गया फिर

912
01:03:59,440 --> 01:04:03,440
क्योंकि वो भैया साफ सुथरा बैठा है कहीं पे इच्छा करता है सब काम हो जाता है खैर

913
01:04:03,440 --> 01:04:05,680
इसको चलाइए जरा इनकी बातें देखिएगा कैसे

914
01:04:05,680 --> 01:04:09,680
बौखलाए लास्ट में देखो चलाओ जीव के चाहने से

915
01:04:09,680 --> 01:04:13,760
जो है ये वो सूक्ष्म शरीर है ठीक है इसमें मन बुद्धि चेत

916
01:04:13,760 --> 01:04:14,260
अंकार आ

917
01:04:14,240 --> 01:04:18,320
जाता है इसमें प्रतिक्रिया होती है जब इसमें प्रतिक्रिया होती है तो इसके प्रतिक्रिया

918
01:04:18,320 --> 01:04:22,320
के अनुकूल शरीर में क्रिया होती है। अरे मेरे भाई फिर भी एक

919
01:04:22,320 --> 01:04:26,320
एनर्जी का तत्व लिया ना क्रिया कराने के लिए तो वो जो

920
01:04:26,320 --> 01:04:30,480
वो जो सारा कुछ एनर्जी का बता रहे हो ये पूरे शरीर के वो स्थूल शरीर में होगा ना तो

921
01:04:30,480 --> 01:04:34,480
पृथ्वी स्थूल नहीं है एक लेना देना नहीं होता जो

922
01:04:34,480 --> 01:04:38,560
जीव यहां क्या कह रहा है कि पावर का

923
01:04:38,560 --> 01:04:42,720
यूज किया स्थूल शरीर में होता है उससे जीव का लेना देना ही नहीं होता है भाई अभी

924
01:04:42,720 --> 01:04:46,720
तुम ही तो कह रहे हो जीव कमांड दे रहा है अभी तुम

925
01:04:46,720 --> 01:04:51,120
ही ना गाना जीव कमांड दे रहा है। अब कह रहे हो जीव का लेना देना नहीं है

926
01:04:51,120 --> 01:04:55,200
उस उस शक्ति से। इसको कहते हैं झूठे की हद तक चोर के घर

927
01:04:55,200 --> 01:04:59,280
तक। अब ये क्या है? बस ये सोच ये सोचता है कि

928
01:04:59,280 --> 01:05:03,520
हम अपनी बातें चार तरह की बोल देंगे। भाई हां भाई एप्पल की स्पेलिंग क्या है?

929
01:05:03,520 --> 01:05:07,520
एप्पल की स्पेलिंग में पहला अक्षर क्या है? ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम

930
01:05:07,520 --> 01:05:11,920
ओ पी क्यू आर एस टी यू वी डब्ल्यू एक्स वाई जेड। लो अब इसमें घूम जाओ।

931
01:05:11,920 --> 01:05:16,080
तो स्थूल इसने अभी क्या कहा कि जीव जो

932
01:05:16,080 --> 01:05:20,160
है कमांड देता है। फिर वो जो क्या सूक्ष्म शरीर

933
01:05:20,160 --> 01:05:24,560
कमांड आगे स्थूल को देता है। स्थूल जो है स्थूल एनर्जी की

934
01:05:24,560 --> 01:05:28,560
चीजों को लेकर के और वो क्रिया क्रियान्वित करवा लेता है। तो यहां से

935
01:05:28,560 --> 01:05:32,640
मूल में कौन बैठा है? जीव ही तो बैठा है। और यदि ये मान लोगे और

936
01:05:32,640 --> 01:05:36,720
यदि ये मान लोगे कि जीव ने जीव ने आर्डर नहीं दिया है। जीव का कोई लेना

937
01:05:36,720 --> 01:05:40,720
देना नहीं है। तो क्रिया अपने आप हो रही है। फिर

938
01:05:40,720 --> 01:05:44,720
क्रिया अपने आप हो रही है। फिर तो मान लो वहां ईश्वर ने कुछ नहीं किया। सृष्टि अपने

939
01:05:44,720 --> 01:05:45,520
आप बन रही है। फिर

940
01:05:45,520 --> 01:05:49,680
हो जाओ नास्तिक। यही चेहरा सामने लाना है। हो जाओ

941
01:05:49,680 --> 01:05:54,080
नास्तिक। फिर ईश्वर नियंत्रण करने वाला भी सिद्ध नहीं होता। क्योंकि इच्छा खाली

942
01:05:54,080 --> 01:05:58,320
इच्छा नहीं होती। इच्छा के बाद शक्ति है, फोर्स है और उसके बाद फिर क्रिया है। तो

943
01:05:58,320 --> 01:06:02,320
तीन स्तर पर वो जाके क्रिया में बदलता है। इच्छा इच्छा जो कर रहा है

944
01:06:02,320 --> 01:06:06,720
ईश्वर हां जी प्ले प्ले करिए। देखिए यहां पे कितनी तरह की बातें अभी ये करेंगे। चलाइए

945
01:06:06,720 --> 01:06:08,800
ये बहुत बढ़िया समय है ये वाला। दो लेना

946
01:06:08,800 --> 01:06:13,120
देना नहीं होता। बिल्कुल सही कह रहे हो। बिल्कुल सही कह रहे हो। अब मुझे ये बता दो कि मेरी मसल्स

947
01:06:13,120 --> 01:06:17,360
चिपाक को सिकुड़ने अथवा इलास्टिसिटी होने के लिए एक

948
01:06:17,360 --> 01:06:21,360
तुमने एटीपी नामक वो मानी शक्ति। वो ऑर्डर्स कहीं से

949
01:06:21,360 --> 01:06:25,680
भी आए हो मगर उस शक्ति का उपयोग हुआ। हां। ठीक। हां।

950
01:06:25,680 --> 01:06:30,080
तो जो शक्ति का उपयोग हो रहा है पृथ्वी को खिसकाने

951
01:06:30,080 --> 01:06:34,080
इत्यादि में वो और ईश्वर अलग-अलग है क्या?

952
01:06:34,080 --> 01:06:38,080
अब देखो शक्ति का प्रयोग हो रहा है इच्छा तो

953
01:06:38,080 --> 01:06:40,400
उसका गुण है ना। मैंने

954
01:06:40,400 --> 01:06:44,560
यहां पर यह माना कि अगर तुम मेरे से उदाहरण ले रहे हो ईश्वर का कि जीव

955
01:06:44,560 --> 01:06:48,640
कैसे काम करता है तो जीव को एक शक्ति चाहिए जिसके लिए वो

956
01:06:48,640 --> 01:06:52,960
खाना खा रहा है जिसके लिए वो कार इंटेक कर रहा है जिसके

957
01:06:52,960 --> 01:06:56,960
लिए उसको एनर्जी मिल रही है ठीक है जिसके कारण तो जीव को एक शक्ति

958
01:06:56,960 --> 01:07:01,040
चाहिए अब क्या है मनुष्य और प्राणियों के विषय में ये जो

959
01:07:01,040 --> 01:07:05,040
शक्ति है ये उसको प्राप्त करनी पड़ती है कहीं और से जो सूर्य से हमें मिलती

960
01:07:05,040 --> 01:07:09,040
है एट द एंड है ना और फिर उसी शक्ति का हम हम लोग

961
01:07:09,040 --> 01:07:13,200
अपने चेतन के द्वारा ऑर्डर देते हैं। वही शक्ति यहां कमांड करती है। ठीक है?

962
01:07:13,200 --> 01:07:17,680
अब भगवान को तो कहीं से प्राप्त नहीं करनी पड़ती है वो शक्ति।

963
01:07:17,680 --> 01:07:21,680
तो भगवान के केस में क्या है कि भगवान ही उस शक्ति के रूप में

964
01:07:21,680 --> 01:07:26,560
वो जड़ पदार्थों को क्रियान्वित कर रहे हैं। तो मैं ये बात

965
01:07:26,560 --> 01:07:30,720
यहां पर मैंने यही बात इससे पूछी है। तो मेरे विषय में इसने मान लिया कि एक अलग

966
01:07:30,720 --> 01:07:34,960
से शक्ति है एटीपी नाम की। इसने मान ली मेरे विषय में। मगर

967
01:07:34,960 --> 01:07:39,520
जब ईश्वर के विषय में गए कि वह पृथ्वी को धक्का कैसे लगाया तो वहां पर फिर स्किप

968
01:07:39,520 --> 01:07:44,480
स्किप बटन दबा दो। चर्चा में जब जब यह बात आए कि जड़ पदार्थों को

969
01:07:44,480 --> 01:07:48,480
क्या कहते हैं? ईश्वर की वो इच्छा प्राप्त कैसे हुई? भाई इच्छा क्या

970
01:07:48,480 --> 01:07:52,640
है? इच्छा है विचार। उसका अधिष्ठान क्या है?

971
01:07:52,640 --> 01:07:55,600
चेतन। चेतन। जड़ पदार्थ। जड़ पदार्थ

972
01:07:55,600 --> 01:07:59,680
में चेतन मानते हो क्या तुम? या तो अद्वैती बन

973
01:07:59,680 --> 01:08:03,680
जाओ। अद्वैती बन जाओ। फिर कोई दिक्कत नहीं है अवतार लेने

974
01:08:03,680 --> 01:08:08,160
में खंबा फाड़ के नरसिम्हा भगवान आ जाएंगे

975
01:08:08,160 --> 01:08:12,320
तो फिर देखो अभी देखना क्या क्या किया है इसने लास्ट में यहां पे 247

976
01:08:12,320 --> 01:08:16,400
के बाद सब लोग ये चर्चा शुरू इसने क्या बोला है देखो

977
01:08:16,400 --> 01:08:20,640
देखा बस क्या अब तुम अब फिर बात करेंगे

978
01:08:20,640 --> 01:08:24,640
अब मैं थक गया अब फिर बात करेंगे मुझे निकलना भी है यहां पे

979
01:08:24,640 --> 01:08:28,640
तुम थोड़ा वैसा दे रहे हो धुंधला आंसर क्लियर नहीं कर रहे हो

980
01:08:28,640 --> 01:08:32,240
नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं समझ अब यहां तुम इच्छा पे क्यों ले आए तुमने माना मेरी

981
01:08:32,240 --> 01:08:37,680
मसल्स को एनर्जी नामक तत्व जिसको तुमने

982
01:08:37,680 --> 01:08:41,920
ही नहीं कर रहे तो मैं यहां पर थक चुका हूं। वही आंसर सुन सुन के ये स्किप

983
01:08:41,920 --> 01:08:45,920
करता है। अब मेरा सॉफ्ट कॉर्नर है इनको लेकर के तो मैं वहां पर इनको जो है

984
01:08:45,920 --> 01:08:49,920
धुन नहीं रहा हूं। बस इतनी बात है। जो धुनना है वो नहीं कर रहा

985
01:08:49,920 --> 01:08:54,000
हूं। मगर वो भी सॉफ्ट कॉर्नर होने की वजह से कि भाई मुझे ठीक

986
01:08:54,000 --> 01:08:58,080
है। अब ये नहीं बोलना चाहता। ठीक है। हम अन्यों के साथ चर्चा कर करके कर करके वो

987
01:08:58,080 --> 01:09:02,160
चीज हम समाज के समक्ष ले आएंगे। और मैंने कई लोगों से पूछा है ये वाला

988
01:09:02,160 --> 01:09:06,400
प्रश्न कि ये जो बल है ये अलग-अलग हो रहा है ना

989
01:09:06,400 --> 01:09:10,400
ये प्रश्न मैंने पूछा और सब निरत्तर है तो मैंने कहा कि इसको लेकर

990
01:09:10,400 --> 01:09:14,400
के मैं सॉफ्ट कॉर्नर था तो मैंने कुछ कहा नहीं और मैं थक चुका हूं तो मैं कितनी बार

991
01:09:14,400 --> 01:09:18,400
वही बात बोलू ये स्किप करते हैं अब मैं वहां बोलू यहां पे तुम स्किप कर रहे हो झूठ

992
01:09:18,400 --> 01:09:23,040
बोल रहे हो बचने की कोशिश कर रहे हो और जब मैं बोलता हूं तो बिगड़ जाएगा तो एक जो

993
01:09:23,040 --> 01:09:27,200
छोटे भाई की दृष्टि से भाई जो दुलार होता है चलो ठीक है तुम बिगड़ो मत नहीं करते

994
01:09:27,200 --> 01:09:31,440
चर्चा छोड़ो आगे बढ़ो है ना? तो देखो अभी क्या होगा।

995
01:09:31,440 --> 01:09:33,920
चलो

996
01:09:33,920 --> 01:09:37,440
टीपी नाम दिया। अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण दिया था

997
01:09:37,440 --> 01:09:41,520
वो क्या दिया था? मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो

998
01:09:41,520 --> 01:09:45,680
तीन पॉइंट इसीलिए रखे हुए थे। अब इसमें मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था। है ना?

999
01:09:45,680 --> 01:09:48,000
विचार अब इसमें ये होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर

1000
01:09:48,000 --> 01:09:52,160
जीव का डायरेक्ट नहीं होता है। इसकी और सुनने लायक है। पीछे करो। मैं भूल गया

1001
01:09:52,160 --> 01:09:56,560
एक कमेंट पढ़ने लगा था। जरा सा पीछे करो हल्का सा।

1002
01:09:56,560 --> 01:10:00,800
दिया नहीं अब अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण दिया था मैंने क्या दिया था मैंने उदाहरण

1003
01:10:00,800 --> 01:10:04,880
ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसीलिए रखे हुए

1004
01:10:04,880 --> 01:10:08,880
थे अब मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था है ना विचार अब इसमें ये

1005
01:10:08,880 --> 01:10:13,040
होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर जीव का डायरेक्ट पॉज करो मैंने

1006
01:10:13,040 --> 01:10:17,120
क्या उदाहरण दिया था मैंने क्या उदाहरण दिया था अब इसमें ये होता है कि विचार विचार करने के

1007
01:10:17,120 --> 01:10:21,600
लिए भी एक मिनट और जैसे वो सामाजिक विज्ञान का पेपर होता है ना

1008
01:10:21,600 --> 01:10:25,600
उसमें जब आपको कोई ऐसा प्रश्न आ जाए जिसको आपको कुछ नहीं मालूम

1009
01:10:25,600 --> 01:10:29,680
तो उसमें लाइनों को भरो नंबर प्राप्त करने

1010
01:10:29,680 --> 01:10:33,680
के लिए खामखा दोबारा

1011
01:10:33,680 --> 01:10:37,840
सुनाओ जरा ये दो मिनट हल्का सा इनका सुनाइए

1012
01:10:37,840 --> 01:10:42,080
जरा हल्का सा मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था इसीलिए

1013
01:10:42,080 --> 01:10:44,320
मैंने उस जो उदाहरण दिया था

1014
01:10:44,320 --> 01:10:48,320
नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं समझ यहां तुम इच्छा पे क्यों ले आए तुमने माना ना मेरी मसल्स

1015
01:10:48,320 --> 01:10:52,320
को हिलाने के लिए एक एनर्जी नामक तत्व है जिसको तुमने एटीपी नाम दिया अब अब

1016
01:10:52,320 --> 01:10:52,880
जैसे मैंने

1017
01:10:52,880 --> 01:10:57,520
मैंने जो उदाहरण दिया था क्या दिया था? मैंने उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार

1018
01:10:57,520 --> 01:11:01,520
इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसलिए रखे हुए थे। अब मैंने उसमें बोला था विचार

1019
01:11:01,520 --> 01:11:06,400
का भी बोला था। है ना? विचार होता है कि जैसे

1020
01:11:06,400 --> 01:11:10,560
मैंने उदाहरण दिया था कि जिस प्रकार अब उदाहरण नहीं बता

1021
01:11:10,560 --> 01:11:14,800
रहे हैं। विचार अब देखना आगे क्या बोलेंगे। अभी देखना क्या बोलेंगे

1022
01:11:14,800 --> 01:11:17,280
आगे। चलो

1023
01:11:17,280 --> 01:11:21,360
हाथ हिलाने पर तो जीव का डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। वो जैसा चाहता है उसके अकॉर्डिंग वो ईश्वर

1024
01:11:21,360 --> 01:11:27,120
ही उससे सहायक होता है हाथ हिलाने में। ठीक है? लो मैंने मोटे भाषा में बोला

1025
01:11:27,120 --> 01:11:32,240
हाथ उड़ाने में जीव का डायरेक्ट वो नहीं होता है। ईश्वर ही उसमें

1026
01:11:32,240 --> 01:11:36,320
वो सहायक होता है। सहायक होता है।

1027
01:11:36,320 --> 01:11:41,200
ठीक है। तो अब इनका वो भी खत्म हो गया कि भैया जो

1028
01:11:41,200 --> 01:11:45,200
तलवार को मार रहा है और उनका वो पुतर्क था दयानंद जी का। अब

1029
01:11:45,200 --> 01:11:49,600
ऐसे व्यक्ति से ऐसे धूर्त व्यक्ति से धूर्तता मुझे कहनी पड़ेगी। क्यों? क्योंकि

1030
01:11:49,600 --> 01:11:53,600
आप अपने ही सिद्धांत का विरोध कर जा रहे हैं। केवल बकबक कर

1031
01:11:53,600 --> 01:11:57,760
रहे हैं सामने वाले को किसी तरीके से गलत ठहराने के लिए और व्यक्ति आपको

1032
01:11:57,760 --> 01:12:01,840
इतना प्रिविलेज दे रहा है और तब भी आपका ये व्यवहार है उसके लिए कि

1033
01:12:01,840 --> 01:12:06,080
अब आपको ट्रोल किया जा रहा है तो आपकी गरज पड़ गई। सोचिए क्या

1034
01:12:06,080 --> 01:12:10,160
कह रहे हो तुम? जीव का उस पर डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। भगवान

1035
01:12:10,160 --> 01:12:14,240
ही उसमें ईश्वर ही उसमें सहायक होते हैं। यानी कि जब जीव ने चाकू

1036
01:12:14,240 --> 01:12:18,320
उठाया किसी को मारने के लिए तो ईश्वर ही उसमें सहायक हुए। बन

1037
01:12:18,320 --> 01:12:23,040
जाओ अद्वैति वेलकम टू अद्वैत क्या

1038
01:12:23,040 --> 01:12:29,040
कह रहे हैं ये यही आना पड़ेगा

1039
01:12:30,320 --> 01:12:34,400
तो थोड़ा सोचने वाली बात है कि अब अब मतलब जीव का

1040
01:12:34,400 --> 01:12:38,400
उस पर डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। ईश्वर ही उसमें सहायक होता है। तो मतलब ये कहना ये चाह

1041
01:12:38,400 --> 01:12:42,400
रहे हैं कि जब जीव इच्छा करता है तो ईश्वर इच्छा करता है कि चाकू

1042
01:12:42,400 --> 01:12:46,560
उठाओ और मारो सामने वाले को तो यहां पे हो जाता है। वहां कोई ना फोर्स होती

1043
01:12:46,560 --> 01:12:50,640
है ना सूर्य से प्राप्त होने वाली कोई एनर्जी होती है जिस पर जीव का

1044
01:12:50,640 --> 01:12:54,800
कंट्रोल होता है जीव आदेश देता है क्या कहना है इस आपका शास्त्र जी

1045
01:12:54,800 --> 01:12:58,880
सनातन जी सनातन शंकर जी बोले नहीं बिल्कुल इसका मतलब

1046
01:12:58,880 --> 01:13:02,880
जो जितना भी जीव कुछ कर रहा है वो सब ईश्वर की इच्छा से वो

1047
01:13:02,880 --> 01:13:06,960
सब हो रहा है। है ना? तो तो फिर आप जो कर्म

1048
01:13:06,960 --> 01:13:10,960
हां कर्म फल कर्म फल वाला कर्म फल वाला वो भी

1049
01:13:10,960 --> 01:13:15,040
यहां पर खारिज हो जाता है जो कहते है ना ईश्वर कर्मों का जो फल देता है तो जीव

1050
01:13:15,040 --> 01:13:19,200
यानी कि कर्म कुर कुछ नहीं कर रहा है बस ईश्वर के द्वारा कंट्रोल किया जा रहा है वो इच्छा के

1051
01:13:19,200 --> 01:13:23,360
द्वारा और इच्छा जो है एक एक बात और है

1052
01:13:23,360 --> 01:13:27,600
कि जीव ने जैसे ही इच्छा की मैंने इच्छा की तो अब

1053
01:13:27,600 --> 01:13:31,840
हमारे यहां तो अद्वैत है तो बात अलग है भाई है ना

1054
01:13:31,840 --> 01:13:34,480
एक मिनट

1055
01:13:34,480 --> 01:13:38,480
ये क्या हो गया? कौन सा पर्दा था

1056
01:13:38,480 --> 01:13:43,440
वो? कहां चला गया?

1057
01:13:43,440 --> 01:13:49,440
अरे

1058
01:13:50,000 --> 01:13:56,000
इसको कैसे?

1059
01:14:09,520 --> 01:14:13,760
आप लोग कुछ आप बोलिए सनातन शंकर जी मेरे को यहां कुछ टेक्निकल दिक्कत

1060
01:14:13,760 --> 01:14:17,760
अच्छा अच्छा अच्छा नहीं इसमें जो लास्ट वाला पार्ट

1061
01:14:17,760 --> 01:14:21,920
है वही सबसे ज्यादा सुनने वाला है उसमें सारी ही बातें

1062
01:14:21,920 --> 01:14:26,160
क्लियर हो जाती हैं और जो आपस में विरोधाभास वाली बातें भी इसने

1063
01:14:26,160 --> 01:14:30,320
की हैं निर्भय ने ईश्वर जो है केवल इच्छा

1064
01:14:30,320 --> 01:14:34,400
करता है और इच्छा ही बल है। यह भी माना।

1065
01:14:34,400 --> 01:14:38,480
अच्छा जो क्रिया हो रही है वो अलग हो रही

1066
01:14:38,480 --> 01:14:42,480
है। क्योंकि जब भी आप बोलोगे इच्छा जैसे कि मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि जब भी आप

1067
01:14:42,480 --> 01:14:46,880
बोलोगे ना इच्छा तो इच्छा जो है स्वतंत्र नहीं होती। इच्छा के बाद उसको शक्ति

1068
01:14:46,880 --> 01:14:50,960
रूप पे या फोर्स रूप में आना पड़ता है। उसके बाद वो क्रिया होती है। क्योंकि

1069
01:14:50,960 --> 01:14:55,360
सीधी बात है। सीधी सीधी बात है। जब भौतिक संसार

1070
01:14:55,360 --> 01:14:58,720
में कुछ होगा तो वहां पर एक भौतिकी एनर्जी

1071
01:14:58,720 --> 01:15:02,800
आएगी। ये जो भौतिकी एनर्जी है जो ईश्वर की इच्छा के कारण

1072
01:15:02,800 --> 01:15:07,760
आ रही है ये भौतिकी एनर्जी ईश्वर का अवतार है।

1073
01:15:07,760 --> 01:15:12,080
ये जो एनर्जी आ रही है। नहीं तो आप बता दो जड़ पदार्थों को कैसे प्राप्त हो रही है उसकी इच्छा?

1074
01:15:12,080 --> 01:15:16,080
पहली बात। हम दूसरी बात यह है कि इनका कहना यह है अब देखो

1075
01:15:16,080 --> 01:15:20,080
अद्वैत की तो बात अलग है। अद्वैत को मान ले तो बात अलग है। मगर अब इनके यहां तो

1076
01:15:20,080 --> 01:15:24,320
ऐसा है नहीं। मगर जीव ने जैसे इच्छा की ईश्वर आ गया सहायता

1077
01:15:24,320 --> 01:15:28,320
करने भैया मोबाइल उठाना है। हम हम इनका

1078
01:15:28,320 --> 01:15:32,880
ईश्वर ये है। है ना? हम और जिहादियों

1079
01:15:32,880 --> 01:15:36,880
से किस तरह से मेल खा रहा है कि सर्व्यापक नहीं तो भी काम चल जाएगा। तो इससे अच्छा

1080
01:15:36,880 --> 01:15:41,440
तो वही वाला है। हम इससे अच्छा तो फिर वही वाला है। फिर

1081
01:15:41,440 --> 01:15:45,680
सेम टू सेम है। क्योंकि वर्क कोई आप ऐसे ही मान लो ना कि वर्क

1082
01:15:45,680 --> 01:15:49,760
जब भी होता है तो हम वर्क किसको कहते हैं? वर्क में फोर्स मल्टीप्लाई बाय वो

1083
01:15:49,760 --> 01:15:53,840
डिस्प्लेसमेंट जो एक फार्मूला आता है। तो जो वर्क

1084
01:15:53,840 --> 01:15:58,000
मल्टीप्लाई बाय डिस्प्लेसमेंट है। यह एक ऐसा है जहां पर

1085
01:15:58,000 --> 01:16:02,000
बल और कार्य इन दोनों का इंटरलिंक्ड है। आप ऐसे नहीं

1086
01:16:02,000 --> 01:16:06,240
कह सकते कि भाई खाली इच्छा है तो उसके बाद वो काम नहीं होगा। तो पहले उसमें फोर्स

1087
01:16:06,240 --> 01:16:10,640
लगेगी फिर उसका डिस्प्लेसमेंट होगा तभी वस्तुएं हिलेंग। तो हजारों

1088
01:16:10,640 --> 01:16:13,760
टन अरबों टन बड़े जो ग्रह हिल रहे हैं

1089
01:16:13,760 --> 01:16:17,920
उसमें जो फोर्स लग रही है वो केवल इच्छा करने से नहीं लग रही है।

1090
01:16:17,920 --> 01:16:22,160
क्योंकि वो इच्छा करने से कार्य होते ही नहीं है। खाली इच्छा जो है

1091
01:16:22,160 --> 01:16:26,640
वो जब तक फोर्स और उसमें क्रिया में नहीं बदलेगी।

1092
01:16:26,640 --> 01:16:30,640
उसके बदलने उसी को तो अवतार हम कह रहे हैं कि भैया यह बदलना ही अवतार है। दूसरी बात

1093
01:16:30,640 --> 01:16:35,040
दुर्जन तोष न्याय से भाई मैं यह भी तो कह रहा हूं कि आप जो है

1094
01:16:35,040 --> 01:16:39,200
आभास के कारण वहां बल कह रहे हो ना जहां सिर्फ इच्छा है सत्य तो

1095
01:16:39,200 --> 01:16:43,280
ये है सिर्फ इच्छा है। फिर आप बल का अवतार मान रहे हो ना वहां आभास में

1096
01:16:43,280 --> 01:16:47,760
तो कह रहे हो तो फिर तुम्हें अपने हिंदू भाइयों से क्या दिक्कत है?

1097
01:16:47,760 --> 01:16:52,400
क्या दिक्कत है? क्या नफरत है? हम यहां भी मान लो।

1098
01:16:52,400 --> 01:16:56,560
मगर तुम वहां तो बल का अवतार मान रहे हो। वहां तो बल ना होने

1099
01:16:56,560 --> 01:17:01,280
पर भी बल कह रहे हो। फिर अगर दूसरा कह रहा है तो तुम्हें दिक्कत हो रही है।

1100
01:17:01,280 --> 01:17:05,920
यह है स्वरूप भूत लक्षण विरोध द्वेष विरोध के लिए विरोध करना।

1101
01:17:05,920 --> 01:17:10,480
और अभी बौखलाहट क्या है? बौखलाहट अभी आगे आएगी। अभी यहां पर देखिए पंचरंगी

1102
01:17:10,480 --> 01:17:14,640
इनका ड्रामा चल रहा है। मैंने उदाहरण दिया था। विचार था।

1103
01:17:14,640 --> 01:17:18,960
अब तीसरी बात कि ईश्वरी सहायक होता है। आगे क्या कहा है? देखें जरा। दिखाइए।

1104
01:17:18,960 --> 01:17:23,760
यह बहुत सुनने लायक है। इसने लास्ट में जो किया है वहां पर। यह है इनके स्पष्ट

1105
01:17:23,760 --> 01:17:25,360
जवाब।

1106
01:17:25,360 --> 01:17:29,360
लेकिन मैंने इसलिए मैंने जानबूझ के उसके साथ में ये शब्द भी बोला था कि इच्छा मतलब चाहता है विचार

1107
01:17:29,360 --> 01:17:33,360
करता है तो जीव के चाहने मात्र से मन में मतलब वो जो विचार होते

1108
01:17:33,360 --> 01:17:37,760
हैं ठीक है और वो उसके खुद के सामर्थ से होते हैं उसमें कोई ऐसा आप ये नहीं दिखा सकते कि अलग से कोई एनर्जी

1109
01:17:37,760 --> 01:17:41,760
कुछ ऐसा हो गया ये गलत बात है फिर तो खाना खाने की जरूरत ही नहीं है चाहने मात्र से

1110
01:17:41,760 --> 01:17:42,960
हो जाना चाहिए

1111
01:17:42,960 --> 01:17:47,120
अभी बोला ईश्वर सहायक होता है अब उसका खुद का सामर्थ्य होता

1112
01:17:47,120 --> 01:17:51,520
है खुद का सामर्थ्य होता है तो मैंने कहा भाई भोजन क्यों कर रहा है

1113
01:17:51,520 --> 01:17:56,320
सूर्य की एनर्जी प्राप्त कर रहा है ना व्यवहार जगत भोजन कर रहा है ना

1114
01:17:56,320 --> 01:18:00,320
यहां मानना पड़ेगा ना व्यवहार जगत के अनुसार मुझे एनर्जी मिल रही है

1115
01:18:00,320 --> 01:18:04,480
हम अब कह रहा है खुद का सामर्थ्य है पहले कह रहा है ईश्वर सहायक

1116
01:18:04,480 --> 01:18:08,960
है भाई तय कर ले यार समाज कहता क्या है फिर आजा

1117
01:18:08,960 --> 01:18:11,760
हम हम

1118
01:18:11,760 --> 01:18:16,800
चलिए

1119
01:18:16,800 --> 01:18:18,320
एनर्जी तत्व को हो

1120
01:18:18,320 --> 01:18:22,400
गया ना तो भाई पृथ्वी स्थूल है ना उसको एनर्जी चाहिए ना फिर हिलने

1121
01:18:22,400 --> 01:18:24,000
के लिए करो

1122
01:18:24,000 --> 01:18:28,080
पॉज करो पॉज करो पॉज करो इसने कहा स्थूल

1123
01:18:28,080 --> 01:18:32,080
शरीर का विषय हो गया ना अरे भाई स्थूल शरीर पे के द्वारा वर्क करा

1124
01:18:32,080 --> 01:18:37,360
जा रहा है जीव करवा रहा है तो जीव उपयोग में नहीं ला रहा है क्या

1125
01:18:37,360 --> 01:18:41,440
और अगर ऐसा है कि जीव उपयोग में नहीं ला रहा है एनर्जी को स्थूल शरीर अपने

1126
01:18:41,440 --> 01:18:46,480
आप ला रहा है तो वहां मान लो जड़ जड़ अपने आप वो बन गई सृष्टि बन जाओ नास्तिक

1127
01:18:46,480 --> 01:18:52,480
वही बात कह रहा है ना चलो चलो

1128
01:18:54,800 --> 01:18:59,200
तुम जीव के चाहने मात्र से स्थूल शरीर के ऊपर एक एनर्जी

1129
01:18:59,200 --> 01:19:03,200
का काम नहीं कह रहा सूक्ष्म कह रहा हूं इसीलिए तो कह रहा

1130
01:19:03,200 --> 01:19:07,200
हूं मेरी बात देखो मैं मैं स्थूल नहीं कह

1131
01:19:07,200 --> 01:19:11,600
रहा मैं सूक्ष्म कह रहा हूं अरे मेरे भाई जीव के चाहने से सूक्ष्म

1132
01:19:11,600 --> 01:19:15,680
और सूक्ष्म के द्वारा फिर स्थूल और स्थूल के द्वारा क्रिया उपयोग

1133
01:19:15,680 --> 01:19:19,680
में आई एनर्जी सिंपल मगर इनको बात को किसी

1134
01:19:19,680 --> 01:19:23,680
तरह ऐसा वहां पर घुमा घुमाना है कि वो जो पॉइंट फस रहा है

1135
01:19:23,680 --> 01:19:28,160
ना एनर्जी का उपयोग और एनर्जी के रूप में ईश्वर का अवतरण

1136
01:19:28,160 --> 01:19:33,760
उससे इनको बात करने से बच जाए तो कैसे कैसे बचेंगे व्याकरण

1137
01:19:33,760 --> 01:19:39,360
हेतु पंचाव्य हम

1138
01:19:39,360 --> 01:19:44,640
मेरे यहां आना पड़ेगा ये ऐसे बचेगी

1139
01:19:44,640 --> 01:19:48,640
कितना सरल बताया इधर उधर की बात करके ये सत्य के

1140
01:19:48,640 --> 01:19:52,960
पक्षधर नहीं है ये सत्य के पक्ष पक्षधर नहीं है। यह केवल अपने

1141
01:19:52,960 --> 01:19:57,120
वर्चस्व के पक्षधर हैं ऐसे लोग। हम ठीक है?

1142
01:19:57,120 --> 01:20:01,360
तो स्वरूपभूत लक्षण क्या-क्या प्राप्त हो गए अभी तक? पहला

1143
01:20:01,360 --> 01:20:06,640
विरोध विरोध इनका स्वरूपभूत लक्षण। दूसरा द्वेष।

1144
01:20:06,640 --> 01:20:10,800
ठीक है? और पक्षपाती क्योंकि जो अपने लिए स्वीकार

1145
01:20:10,800 --> 01:20:14,880
नहीं है वो दूसरों के साथ कर रहे हैं। ठीक? और चौथा

1146
01:20:14,880 --> 01:20:18,640
क्या आ गया यहां पे कि खुद ही संशय

1147
01:20:18,640 --> 01:20:22,720
में है। खुद ही अंधेरे में है। बोलना क्या

1148
01:20:22,720 --> 01:20:26,960
है? स्पष्ट नहीं मालूम है। कुछ भी बोल रहे हैं। ईश्वर करवाता

1149
01:20:26,960 --> 01:20:30,960
है। खुद का सामर्थ होता है। मगर वो स्थूल शरीर का विषय है। उसका जीव से कोई

1150
01:20:30,960 --> 01:20:35,040
लेना देना है ही नहीं। उसमें एनर्जी है ही नहीं। कुछ नहीं।

1151
01:20:35,040 --> 01:20:37,200
ठीक।

1152
01:20:37,200 --> 01:20:41,360
अब इसके बाद तो हो गया। चलिए इसको वीडियो को हटा दीजिए। अब इनकी रिकॉर्डिंग सुनाइए दोबारा

1153
01:20:41,360 --> 01:20:45,440
जहां पर रुकी थी। तो यह आपने यहां से

1154
01:20:45,440 --> 01:20:49,680
स्पष्ट यह यहां पर स्पष्ट हो चुका है अभी तक कि वह जो चर्चा

1155
01:20:49,680 --> 01:20:53,760
हुई है जिसमें आपने मुझे और निर्भय को आमने सामने देखा था उसके बाद

1156
01:20:53,760 --> 01:20:57,760
से कौन चर्चा के लिए तड़प रहा था। ठीक है? और कौन

1157
01:20:57,760 --> 01:21:01,760
जो है बार-बार जो है निरुत्तर हो रहा है इस तरीके के अपने ही सिद्धांतों का विरोध कर रहा

1158
01:21:01,760 --> 01:21:04,320
है।

1159
01:21:04,320 --> 01:21:08,720
और अब अब आप यह देखिए आगे की चर्चा जो इसने इससे जो कॉल पर बात हुई जो वाराणसी

1160
01:21:08,720 --> 01:21:12,720
जाने के संबंध में हमने जब एक अपनी सूचना पहुंचाई और ये बोल रहे हैं कि

1161
01:21:12,720 --> 01:21:17,040
आप अब जो है मेरा पल्ला भारी है। तो इस हिसाब से उस समय मेरा पल्ला

1162
01:21:17,040 --> 01:21:21,040
भारी था और है क्योंकि हमारी तो वही चर्चा है। आखरी

1163
01:21:21,040 --> 01:21:25,360
जो सार्वजनिक चर्चा तो वही है और तुम आके मुझसे चर्चा कर रहे हो फोन पे।

1164
01:21:25,360 --> 01:21:31,360
भाई तुम तो सुकून में होने चाहिए थे। मैंने हरा दिया शिवश को। सुकून में तो मैं था।

1165
01:21:31,520 --> 01:21:34,320
चलो

1166
01:21:34,320 --> 01:21:38,640
ठीक है। वो बात ठीक है। समझ में आ गई। मगर बात ये है ना कि जब मैं मैंने

1167
01:21:38,640 --> 01:21:42,720
जब मैंने अपनी लाइव में भी मैंने बोला था मैंने क्या बात समझी?

1168
01:21:42,720 --> 01:21:46,720
मैंने ये बात समझी कि भाई मैंने भी इसको यही बोला है कि तुम हमारे लिए नगन

1169
01:21:46,720 --> 01:21:50,800
हो। तो हमारा तुम्हारे लिए कहीं पे आना कोई हमारी बाध्यता नहीं है जो

1170
01:21:50,800 --> 01:21:54,880
हम आए। हां तुम छोटे भाई थे तो हम आ सकते थे। तो इसने जब यह

1171
01:21:54,880 --> 01:21:58,880
बात कही कि आपके लिए मैं कहीं पर आऊं उसके लिए मैं बा नहीं तो मैंने

1172
01:21:58,880 --> 01:22:03,440
इसको माना कि बदला उस चीज का इसने लिया तो मैंने उसको स्वीकार किया। हालांकि

1173
01:22:03,440 --> 01:22:07,520
ये आ नहीं रहा है। आ तो मैं रहा हूं बनारस। आ तो मैं ना हूं।

1174
01:22:07,520 --> 01:22:11,520
मैं रहा हूं बनारस। बनारस के पास में तो तुम हो ना भाई। तो आ तो सामने वाला

1175
01:22:11,520 --> 01:22:15,520
रहा है। तो यहां आने वाली बात ही नहीं है। जिसमें तुम कहोगे हम नगण्य व्यक्ति के लिए क्यों ना जाए

1176
01:22:15,520 --> 01:22:19,600
निकल कर। जब अच्छा दूसरी एक बात और है जब

1177
01:22:19,600 --> 01:22:24,480
तुम्हारा पैरामीटर क्या है किसी को नगण्य मानने अथवा ना मानने का

1178
01:22:24,480 --> 01:22:28,640
तुम अभी जो अभी जिनको महीने दो महीने हुए हैं चैनल चालू किए हुए उनको

1179
01:22:28,640 --> 01:22:33,120
तुम मैसेज क्यों कर रहे हो वो कैसे गणमान्य हो गए किस रूप से हो गए गणमान्य

1180
01:22:33,120 --> 01:22:37,120
अगर ऐसी बात है तो भाई तुम उनको अप्रोच कर रहे हो ना मुझे

1181
01:22:37,120 --> 01:22:41,280
चर्चा करनी है ठीक है और

1182
01:22:41,280 --> 01:22:45,280
वो लोग बुलाएंगे तुम्हें जाना उनके यहां पर हम तो गए

1183
01:22:45,280 --> 01:22:49,280
हैं तुम्हारे यहां आचार्य हो गया जो तथाकथित आचार्य बन के घूमते हैं

1184
01:22:49,280 --> 01:22:49,780
हम

1185
01:22:49,440 --> 01:22:53,600
तो गए हैं और आगे भी जाएंगे ये मत समझना कहानी

1186
01:22:53,600 --> 01:22:57,760
यहां खत्म नहीं होती है तुम उस तंत्र का उस सनातना तंत्र

1187
01:22:57,760 --> 01:23:01,760
का एक हिस्सा मात्र हो जिससे

1188
01:23:01,760 --> 01:23:06,320
हमारा आमनासामना हुआ हमने अपने पक्ष को दृढ़ता के साथ रखा

1189
01:23:06,320 --> 01:23:10,800
सिद्ध किया ठीक है चर्चा जो है स्थगित हुई स्थगित

1190
01:23:10,800 --> 01:23:14,960
होने के बाद तुम चर्चा के लिए भिड़े रहे जो भी भाईचारा है बातें

1191
01:23:14,960 --> 01:23:19,200
हुई सब ठीक ठीक है? मगर तुम सैद्धांतिक पक्ष को सिद्ध करने के लिए भिड़े रहे।

1192
01:23:19,200 --> 01:23:23,280
तुमने ये भी मैसेज किया कि यदि मैं क्या

1193
01:23:23,280 --> 01:23:27,280
कहते हैं? अगर सिद्ध कर दूंगा तो आप उसको अपना लेंगे दयानंद के मत

1194
01:23:27,280 --> 01:23:31,520
को। तुमने जब ये कहा कि मैं सिद्ध कर दूंगा। यानी सिद्ध

1195
01:23:31,520 --> 01:23:35,680
नहीं हुआ। तुम मुझसे चैट में बोल रहे हो। तुम मुझसे

1196
01:23:35,680 --> 01:23:39,680
चैट में बोल रहे हो। यानी अभी कुछ बाकी था। फिर तुम क्यों

1197
01:23:39,680 --> 01:23:43,680
कह रहे हो? उस चर्चा के आधार पर आपकी छवि डाउन हो गई। यह होता है अपने ही

1198
01:23:43,680 --> 01:23:48,000
बात का विरोध। तो अब इससे आगे ये तो रिकॉर्डिंग

1199
01:23:48,000 --> 01:23:52,000
खत्म होने वाली है। इसके बाद जो है स्वरूप भूत लक्षण में आएगी

1200
01:23:52,000 --> 01:23:56,080
धर्तता अभद्रता। अभद्रता का दूसरा एक वो होता

1201
01:23:56,080 --> 01:24:01,680
है नीचता है ना वो भी आएगी आगे की रिकॉर्डिंग में और बौखलाहट।

1202
01:24:01,680 --> 01:24:04,560
अभी इसको सुनिए आप कि जब मैंने तुम्हें

1203
01:24:04,560 --> 01:24:08,560
मैसेज किया था तो मैंने कहा कि कहेगा तो मैं उसके चैनल पे

1204
01:24:08,560 --> 01:24:13,360
भी जाऊंगा। चाहे वो संदीपन रॉय जी का चैनल हो, चाहे तुम्हारा चैनल हो। ये होता है विश्वास

1205
01:24:13,360 --> 01:24:17,440
कि मेरा भाई है छोटा तो मैं जाऊंगा कोई दिक्कत नहीं मगर हुआ क्या कि

1206
01:24:17,440 --> 01:24:21,840
तुमने तुमने जब वीडियो बनाया तो तुमने उसमें ऐसा कुराण दिखाया व्यवहार

1207
01:24:21,840 --> 01:24:26,000
अपना कि मैंने कहा दूसरी दूसरी एक बात है

1208
01:24:26,000 --> 01:24:30,080
आपके आपने Instagram पे स्टोरी डाल के एक नैरेटिव डालने का प्रयास किया तो मैंने उस विषय में लाइव

1209
01:24:30,080 --> 01:24:34,080
किया अरे भाई तो तुम्हारे लोग कह रहे हैं ना मुझसे तुम्हारा नाम लेकर के जबकि

1210
01:24:34,080 --> 01:24:38,160
हमारी चर्चाएं तो चल रही है तुम्हारे लोगों को तुम्हें रोकना चाहिए लोगों को निर्णय

1211
01:24:38,160 --> 01:24:42,320
करना चाहिए नहीं वो अधूरा निर्णय कर रहे हैं ना तो फिर

1212
01:24:42,320 --> 01:24:46,560
मैं क्या करूं फिर तो फिर मैं भी अपनी अपने अपने पक्ष को डाल रहा हूं फिर तुम्हें दिक्कत नहीं होनी चाहिए

1213
01:24:46,560 --> 01:24:50,560
रोका क्या आपने कॉल रिकॉर्डिंग डाली मैंने रोका तुम कह रहे हो कि मैंने

1214
01:24:50,560 --> 01:24:54,560
आपकी प्रतिक्रिया पर आपत्ति जताई आपने कॉल रिकॉर्डिंग डाली तो उससे कौन

1215
01:24:54,560 --> 01:24:58,800
सा बहुत तोप चल गया और कौन सा स्थिति पलट गई कुछ भी तो नहीं हुआ जैसे जैसे

1216
01:24:58,800 --> 01:25:02,960
ये मैं तुमसे कह रहा हूं क्या स्थिति पलट गई तो आप अभी तो बोल रहे हो कि मैं मैं अपने पक्ष

1217
01:25:02,960 --> 01:25:07,040
के लिए डालूंगा और मैंने आपको मैंने कॉल रिकॉर्डिंग नहीं जो तुमने स्टोरी लगाने की बात कही

1218
01:25:07,040 --> 01:25:11,040
तो मैंने कहा कि भाई वो लोग मुझे वो लोग उन लोगों ने मुझसे

1219
01:25:11,040 --> 01:25:15,200
सबसे बड़ी गलत बात यह है कि जो लड़की मेरे सर पे चप्पल

1220
01:25:15,200 --> 01:25:19,280
लगा मेरी फोटो को वो कर रही है और शौचालय के तो

1221
01:25:19,280 --> 01:25:19,780
मैं दिखा

1222
01:25:19,760 --> 01:25:24,800
रहा हूं ना उसके बाद तो मैं आवाज गड़बड़ मुझे सुनाई दे रही है क्या सबको

1223
01:25:24,800 --> 01:25:29,040
नहीं ठीक है ठीक ही ठीक है वो कहना चाहिए था अवॉयड करना

1224
01:25:29,040 --> 01:25:33,120
उसके बाद तुम उसका पक्ष ले ले रहे हो अपनी लाइव में कह रहे हो कि दीदी दीदी बहुत

1225
01:25:33,120 --> 01:25:37,520
अच्छे जवाब दे रही है बताइए देखिए मैंने एक आध रील ही देखी थी उसकी तो देखो ना बेटा

1226
01:25:37,520 --> 01:25:42,480
पहले देखो तो एक एक मिनट एक मिनट अब देखो यहां पे क्या हो रहा है

1227
01:25:42,480 --> 01:25:46,800
कि हुआ क्या है वो जो आई थी वो

1228
01:25:46,800 --> 01:25:50,880
जो क्या नाम है इंटरनेट परंपरा वाली वो जब आई थी

1229
01:25:50,880 --> 01:25:55,360
उसके बाद इन्होंने उन्हें प्रश्रय दिया क्यों दुश्मन का दुश्मन दोस्त ठीक है

1230
01:25:55,360 --> 01:25:59,360
इन्होंने उसे प्रश्रय दिया उसने हमारे लिए एक रील बनाई

1231
01:25:59,360 --> 01:26:03,520
इंस्टग्राम पर उसमें दिखाया कि चप्पल मेरे सर पर रखी हुई है

1232
01:26:03,520 --> 01:26:07,600
तरह-तरह के व्यंग चित्र बनाए शौचालय इत्यादि से जोड़ के मुझे

1233
01:26:07,600 --> 01:26:11,600
वहां उसमें चित्रण किया वो रील उसने डाली उसके बाद मैंने

1234
01:26:11,600 --> 01:26:15,600
जब उसने उसके बाद भी यह कहा कि मां का दूध पिया है तो आ जाना तो मैंने

1235
01:26:15,600 --> 01:26:19,680
यह कहा कि तुम्हारे चैनल पे तुम्हारे मंच पे वैश्यालय

1236
01:26:19,680 --> 01:26:23,760
के समान दूषित वातावरण है। मैंने ये नहीं कहा तुम वैश्या

1237
01:26:23,760 --> 01:26:28,160
हो। मैंने नहीं कहा। मैंने किसी महिला को अभी तक नहीं कहा कि फलानी

1238
01:26:28,160 --> 01:26:32,320
वैश्य है। तो मैंने यह कहा वहां पर जो वातावरण है

1239
01:26:32,320 --> 01:26:35,120
वो वातावरण उसी वातावरण के समान दूषित

1240
01:26:35,120 --> 01:26:39,200
है जैसा कि वहां पर होता है। मैंने ये नहीं कहा कि तुम तुम ही कारण

1241
01:26:39,200 --> 01:26:43,760
हो वहां पर उस क्या कहते हैं उस वातावरण का।

1242
01:26:43,760 --> 01:26:47,760
उस वातावरण का कारण भी तुम हो। मैंने नहीं कहा। मगर वो वातावरण दूषित है तुम्हारे

1243
01:26:47,760 --> 01:26:51,920
मंच का। उसको पहले साफ करो। क्षमा मांगो। तुम मक्कार कह रही हो अपने यहां किसी

1244
01:26:51,920 --> 01:26:56,080
को बुला के तो तुम चैलेंज करोगी। तुम वहां पर चैलेंज करके और कोई आएगा उसको मक्कार

1245
01:26:56,080 --> 01:27:00,080
कहोगी तो कोई क्यों आएगा भाई तुमसे चर्चा करने तो मैंने तो यह कहते हुए

1246
01:27:00,080 --> 01:27:04,080
मैंने कहीं से भी उसको व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की उसके मंच को मैंने

1247
01:27:04,080 --> 01:27:08,240
वैश्यालय के समान कहा और क्यों कहा क्योंकि तुम्हारे उस चैनल

1248
01:27:08,240 --> 01:27:12,320
पर गंदगी है गंदगी क्या है कोई शौचालय किसी का

1249
01:27:12,320 --> 01:27:16,320
डायरिया बोल रही हो किसी स्थान विशेष की सफाई करवा रही हो ये सब बोल रही हो

1250
01:27:16,320 --> 01:27:20,560
तुम तो वहां का वातावरण दूषित है ऐसे दूषित वातावरण पर कोई भी सभ्य

1251
01:27:20,560 --> 01:27:25,200
व्यक्ति नहीं जाएगा मैंने यह बात कही अब यह बात

1252
01:27:25,200 --> 01:27:29,200
इनको मैंने भेजी भी है चैट में। इनको यह बात नहीं मालूम है। ऐसी

1253
01:27:29,200 --> 01:27:33,200
महिला को यह अपने यहां पर बिठा रहे हैं। बिाने के बाद उसकी वाहवाही

1254
01:27:33,200 --> 01:27:37,200
कर रहे हैं। वाहवाही करने के बाद जो इनके

1255
01:27:37,200 --> 01:27:41,280
लोग हैं उस महिला के द्वारा ऐसी स्टोरीज लगवा रहे हैं कि उस चर्चा में

1256
01:27:41,280 --> 01:27:45,360
हमारी हार हुई थी। जबकि सत्य तो इनको पता है। यह तो अभी तक सिद्धांत

1257
01:27:45,360 --> 01:27:49,520
अपना सिद्ध कर रहे हैं। तो मैंने उन लोगों को जवाब देने के लिए जब वह इनकी

1258
01:27:49,520 --> 01:27:50,240
स्टोरी मुझे

1259
01:27:50,240 --> 01:27:54,320
दिखा रहे हैं। मैंने उन लोगों को जवाब देने के लिए स्टोरी लगाई। या तो

1260
01:27:54,320 --> 01:27:58,560
तुम सही मैसेज भेजो कि अभी हमारी अब हमारी कटिंग वटिंग करके ना दिखाई

1261
01:27:58,560 --> 01:28:02,800
जाए। प्रश्रय मत दो। गलत लोगों को प्रशय मत दो। सीधी बात। आपने

1262
01:28:02,800 --> 01:28:06,800
प्रश्न दिया उस महिला को जो सिद्धांत विरोधी है। ना वो दयानंद

1263
01:28:06,800 --> 01:28:11,600
जी की है ना वो अद्वैती है ना वो रामानुज है। किसी की नहीं है वो।

1264
01:28:11,600 --> 01:28:15,600
हम ठीक है? तुम उसको प्रश दे रहे हो। क्यों? क्योंकि भाई चलो एक दो लाख

1265
01:28:15,600 --> 01:28:19,600
फॉलोअ वाली लड़की का हमें साथ मिलेगा और जो है आान को आान की टांग

1266
01:28:19,600 --> 01:28:23,760
खिंचाई करने में मजा आ जाएगा। तो भाई जब तुम उसको अपने चीजें दे रहे हो

1267
01:28:23,760 --> 01:28:27,760
हमारे विरोध में जो चीजें अभी असिद्ध है तो हम वहां पर उनको

1268
01:28:27,760 --> 01:28:31,920
स्टोरी में उन रीलों का जवाब दे रहे हैं। तो तुम्हें इस पर आपत्ति नहीं होनी

1269
01:28:31,920 --> 01:28:36,080
चाहिए थी। पर तुमने क्या किया? तुमने जो है वीडियो बनाया। वीडियो में अपना

1270
01:28:36,080 --> 01:28:40,160
जो तहस थी, जहर था वो दिखाया। यह कहने की बजाय भैया

1271
01:28:40,160 --> 01:28:44,400
अब आप हमारे चैनल पर आ जाओ। तुमने कहा कि अब आपको जो है ट्रोल हो रहा है तो आपकी गर्ज

1272
01:28:44,400 --> 01:28:48,960
पड़ रही है आने की। ठीक है? तो इसके साथ ही साथ तुमने ये भी कहा

1273
01:28:48,960 --> 01:28:52,960
कि वो बहुत अच्छे-अच्छे जवाब दे रही हैं दीदी। हम

1274
01:28:52,960 --> 01:28:57,120
दीदी बहुत अच्छे-अच्छे जवाब तो अब यहां पर ये क्या कहेंगे कि दीदी

1275
01:28:57,120 --> 01:29:03,120
बहुत अच्छे-अच्छे जवाब दे रही है। इस बारे में देखना क्या कहेंगे। देखो हम

1276
01:29:03,120 --> 01:29:07,120
तो बोलने से पहले तुम कह रहे हो बहुत अच्छे जवाब दे रही है। तो मैं तो यही मानूंगा। भेज देते ना

1277
01:29:07,120 --> 01:29:11,200
मैं मैंने भेजा वहां पे तुम्हें वो तुम्हें उसमें चैट में मैंने भेजा हुआ है

1278
01:29:11,200 --> 01:29:15,440
WhatsApp में देखो देखो ये इनकी तमीज है

1279
01:29:15,440 --> 01:29:20,160
अपने से बड़ों से बात करने की यही है अलंकार

1280
01:29:20,160 --> 01:29:26,160
समाजियों का स्वरूपभूत लक्षण है असभ्यता अभद्रता

1281
01:29:26,560 --> 01:29:30,640
भाई एक तरफ तुम भाई करके बात कर रहे हो फिर वन ऑन वन जब बात हो रही

1282
01:29:30,640 --> 01:29:34,640
तो तुम क्या मैंने ठेका नहीं ले रखा ठेका नहीं ले रखा तो उसको अपने आप बुला क्यों रहे हो

1283
01:29:34,640 --> 01:29:38,640
जिसका ठेका नहीं ले रखा ठीक है। अभी देखना हमने किसका ठेका ले

1284
01:29:38,640 --> 01:29:43,520
रखा है। तुम्हें सबूत देंगे। ये जो अभद्रता करते हो ना तुम

1285
01:29:43,520 --> 01:29:47,520
इससे पूरी इस बात में माना जा सकता है कि तुमने अपने जीवन काल में वो

1286
01:29:47,520 --> 01:29:51,600
गालियां दी होंगी जो तुम्हारे नाम से दौड़ रही है। वो बातें अलग है।

1287
01:29:51,600 --> 01:29:55,600
ठीक है? मगर अभी फिलहाल तुम्हारी अभद्रता, धूतता, नीचता तुम्हारी दिखा रहा हूं।

1288
01:29:55,600 --> 01:29:59,600
तुमने ठेका नहीं ले रखा तो बुला क्यों रहे हो उसके अपने यहां? उसको प्रश

1289
01:29:59,600 --> 01:30:05,600
क्यों दे रहे हो? जब तुमने ठेका नहीं दे रखा है तो?

1290
01:30:05,760 --> 01:30:09,760
अच्छा इन्होंने देखा नहीं था। इन्होंने देखा नहीं था। तो

1291
01:30:09,760 --> 01:30:13,760
देखा नहीं है। अधूरी जानकारी पर राम जी क्या कहते हैं? राम

1292
01:30:13,760 --> 01:30:17,920
जी दो प्रकार की बातें नहीं करते। जो भी बोलते हैं सोच समझ के बोलते

1293
01:30:17,920 --> 01:30:22,080
हैं। ठीक है? राम जी का तो ये अब चलो हम मनुष्य

1294
01:30:22,080 --> 01:30:26,240
हैं। हमारे पौरुष दोष हो सकता है कि हमसे गलती हो जाए। तो जब

1295
01:30:26,240 --> 01:30:31,440
मालूम पड़ रहा है तो माफी मांगो। जब मालूम पड़ रहा है तो उसका त्याग करो।

1296
01:30:31,440 --> 01:30:35,440
तुमको जब मैंने चैट में बता दिया कि यह रील भेजी है तुमने देखी

1297
01:30:35,440 --> 01:30:39,520
क्यों नहीं खोल के तुमने मुझे जब दयानंद जी की फोटो भेजी

1298
01:30:39,520 --> 01:30:43,600
तो मैंने उसमें जो भी कमी देखी तो सनातन शंकर जी को फोन करके कहा उन्होंने बदलाव

1299
01:30:43,600 --> 01:30:47,680
किया तुरंत क्योंकि हम राम जी की तरह

1300
01:30:47,680 --> 01:30:51,760
वो नहीं है दोष रहित पौरुष शिव का दोष है भाई हो गई गलती तो

1301
01:30:51,760 --> 01:30:55,760
उसको हमने स्वीकार किया ठीक है और तुम क्या कर रहे हो

1302
01:30:55,760 --> 01:30:59,840
तुम तो हमारे रील भेजने के बाद भी डटे हुए हो तुम वहां अपनी रील

1303
01:30:59,840 --> 01:31:05,120
में कह रहे हो दीदी अच्छे अच्छे जवाब दे रही है। देखना क्या कहेंगे चले आइए प्ले करिए

1304
01:31:05,120 --> 01:31:09,360
जिसमें मैंने इस पक्ष में आपसे चैट में भी कहा था कि आप उनको

1305
01:31:09,360 --> 01:31:13,680
ये वैश्या को उठा पता नहीं क्या-क्या बनाइए और वो आपको चप्पल और क्या-क्या बनाए उसमें मेरा कोई

1306
01:31:13,680 --> 01:31:17,680
वैश्या वाली बात चप्पल से बाद में कही है और मैंने उनको वैश्या नहीं कहा है आज

1307
01:31:17,680 --> 01:31:21,120
भी बता रहा हूं। मैंने जो भी आपने बोला हो और सूअर

1308
01:31:21,120 --> 01:31:25,280
कुत्ता पता नहीं जो भी आपने अंड बोला हो कुछ नहीं बोला है कुछ नहीं बोला मैंने उनको

1309
01:31:25,280 --> 01:31:29,360
ऐसे आप मुकर जाइए ऐसे वो मुकर जाए मैं क्या करूं फिर मेरे से क्या लेन देन है तुम समझ रहे हो सारी

1310
01:31:29,360 --> 01:31:33,360
चीजें और इस पर भी कुत्ते वाली बात बता दूं कुत्ते

1311
01:31:33,360 --> 01:31:37,520
वाली बात सुन लो पहली बात तो यह है कि इससे

1312
01:31:37,520 --> 01:31:41,680
पहले वो इतना अपना विष उगल चुकी है वो जो

1313
01:31:41,680 --> 01:31:45,680
मातृशक्ति है अपने पागलपन कि अपनी छवि बचानी है मैं बहुत

1314
01:31:45,680 --> 01:31:50,080
बड़ी तुर्रम खाऊं 30 मरण खाऊं तो वो इतना इतना जहर उगल चुकी है कि पर्याप्त

1315
01:31:50,080 --> 01:31:54,080
है। फिर भी अब मैं बताऊं जिस जगह पर वो स्ान का

1316
01:31:54,080 --> 01:31:58,240
स्ान ध्वनित हो रहा है। मैंने मुंह से बोला नहीं। मैंने कहा वो जो ऐसा ऐसा

1317
01:31:58,240 --> 01:32:02,240
होता है ना वो तुम हो। ठीक है? उस जगह पे मैं कौन हूं? मैंने अपने लिए

1318
01:32:02,240 --> 01:32:06,240
क्या कहा? वो जो बड़ा सा जानवर होता है। तो मैंने जहां पर उनको कुछ

1319
01:32:06,240 --> 01:32:10,240
कहा है वहां पर अपने आप को भी पशु योनि में ही बताया। पशु योनि

1320
01:32:10,240 --> 01:32:14,320
की ही उपमा दी। हाथी। जहां पर ये बात आ रही ना कि कुत्ता

1321
01:32:14,320 --> 01:32:18,320
बोला। कुत्ता शब्द तो यूज़ नहीं किया। अपने लिए हाथी शब्द यूज़ किया।

1322
01:32:18,320 --> 01:32:22,320
यानी जहां पर मैं स्वयं को भी स्वयं के लिए भी पशु योनि की ही बात कर रहा हूं।

1323
01:32:22,320 --> 01:32:26,480
उपमा दे रहा हूं। अब उपमा क्या होती है? उपमा ये होती है कि वहां

1324
01:32:26,480 --> 01:32:30,640
पर हमने ओवरऑल नहीं ले लिया। कुत्ते के सारी चीजें हो गई। वहां पे केवल हाथी

1325
01:32:30,640 --> 01:32:34,720
के बल और कुत्ते के बल की बात घनित हो रही है। जैसे हम किसी

1326
01:32:34,720 --> 01:32:36,400
को कहे कि भाई वो तो शेर

1327
01:32:36,400 --> 01:32:40,640
है। शेर तो इसका मतलब क्या ये हो गया कि मैंने उनको जानवर कहा

1328
01:32:40,640 --> 01:32:44,960
या शेर जैसी ताकत वाला कहां?

1329
01:32:44,960 --> 01:32:49,200
हम किसी से कहते हैं चंद्रमुखी तो वो चंद्रमा ही है क्या चंद्रमा

1330
01:32:49,200 --> 01:32:53,360
चंद्रमा जैसा मुख है उसका तो यहां पे बल की बल के बल के

1331
01:32:53,360 --> 01:32:57,520
विषय में हाथी और शान का उदाहरण दिया है उनको कुत्ता नहीं कह दिया

1332
01:32:57,520 --> 01:33:01,920
है मगर तुम्हें तार्किकता से वही सोचना है जहां तुम्हें द्वेष पालना है

1333
01:33:01,920 --> 01:33:05,920
जहां विरोध करना है और वहां पे जाकर के अपनी तर्क को खत्म कर देना है

1334
01:33:05,920 --> 01:33:10,160
लॉजिक को खत्म कर देना है बुद्धि को बेच खाना है जहां पर अपने पक्ष

1335
01:33:10,160 --> 01:33:14,160
की बातें आ जाए अपने पक्ष पे जहां काउंटर हो जाए वहां मैंने मैंने विचार किया

1336
01:33:14,160 --> 01:33:18,320
ईश्वर सहायक था और जीव का कोई संबंध नहीं होता। जीव का ही सामर्थ्य होता है। लो हो

1337
01:33:18,320 --> 01:33:22,400
गया ए बी सी डी अपने पक्ष की बात आ जाए तो

1338
01:33:22,400 --> 01:33:26,560
भैया तुमने इसलिए कहा उनसे ऐसा वो

1339
01:33:26,560 --> 01:33:30,560
संदीपन रॉय जी से ऐसा इसलिए कहा इसलिए अब वो चर्चा नहीं करेंगे। उनका ऐसा कहना

1340
01:33:30,560 --> 01:33:34,640
उचित है। हम तो जहां पर

1341
01:33:34,640 --> 01:33:38,640
मैं उनको उनके लिए स्ान ध्वनित हो रहा है जहां पर वहां पर मैं अपने

1342
01:33:38,640 --> 01:33:42,640
आप को भी हाथी में रख रहा हूं। इसका मतलब क्या है कि मैं उनको स्वान नहीं कह

1343
01:33:42,640 --> 01:33:46,640
रहा हूं। वहां पर बल के विषय में एक उपमा दी जा रही है कि एक के

1344
01:33:46,640 --> 01:33:52,160
अंदर हाथी जैसा बल है। उस समय पे एक के अंदर स्वान जैसा बल है। ठीक?

1345
01:33:52,160 --> 01:33:56,160
अब आगे चलिए क्या कहते हैं देखिए। नहीं इस पर तुम

1346
01:33:56,160 --> 01:34:00,240
सामने से बात कर लो फिर इसी बात पे कि उसने पहले बोला है कि नहीं गलत? तो इसमें

1347
01:34:00,240 --> 01:34:04,400
मैं क्यों वकील बनूं? अरे तो तुम तुम वकील बन रहे हो ना। तुम कह रहे हो अच्छे जवाब

1348
01:34:04,400 --> 01:34:08,640
दे रही है। वो उन उनकी बात किसने छेड़ी? तुमने छेड़ी

1349
01:34:08,640 --> 01:34:12,720
ना कि दीदी आई है वो अच्छे जवाब दे रही है अभी कॉल पे अपनी

1350
01:34:12,720 --> 01:34:16,800
लाइव में ये बताओ तुमने अपनी लाइव में चला दो चला

1351
01:34:16,800 --> 01:34:20,800
दो चला दो छेड़ी की नहीं छेड़ी सही सुनिए तो फस गए बस इसीलिए यही

1352
01:34:20,800 --> 01:34:24,960
करते हो तुम अगर मैं बोल दूं आप फस गए तो अब पॉज करो अब पॉज करो

1353
01:34:24,960 --> 01:34:29,280
अब देखो क्या हुआ जब मैं जब इसने बोला कि आपने स्टोरी

1354
01:34:29,280 --> 01:34:33,520
लगाई है ना स्टोरी से बात शुरू हुई तो मैंने कहा स्टोरी इसलिए

1355
01:34:33,520 --> 01:34:37,520
लगाई तुमने उसको प्रशय दिया और वो तुम्हारी चीजों का यूज़ यूज़ करके वहां पर

1356
01:34:37,520 --> 01:34:41,920
मेरे लिए उल्टा सीधा बोल रही है। ठीक है? तो तुम्हें उसको प्रशय नहीं देना चाहिए।

1357
01:34:41,920 --> 01:34:45,920
तो इसका कहना है कि आपने उसे गलत कहा। ठीक? पहली बात तो अगर

1358
01:34:45,920 --> 01:34:49,920
यह बीच में नहीं है, ठेका नहीं ले रखा तो उसका ठेका क्यों ले रहा है? देखिए इसके ही

1359
01:34:49,920 --> 01:34:54,080
सिद्धांत से इसकी कटौती होती है। जब तुम ठेका नहीं लेते हो तो उसका

1360
01:34:54,080 --> 01:34:58,240
ठेका क्यों ले रहे हो? अच्छा। अब ये कहेगा आगे कि मैं मैं

1361
01:34:58,240 --> 01:35:02,480
किसी का वकील थोड़ी ना हूं। तो देखना कैसे फसेंगे। देखो हम

1362
01:35:02,480 --> 01:35:06,480
बम फट जाएगा। अरे तो मैं बोल तो रहा हूं। तो तुमने छेड़ी ना तुम अपनी लाइव में दीदी

1363
01:35:06,480 --> 01:35:07,520
की बात बोले ना

1364
01:35:07,520 --> 01:35:11,600
बोलने से बचा कीजिए ठीक है फस गए आप आप फंस रहे हो तो विषयांतर

1365
01:35:11,600 --> 01:35:15,680
करते हो मैंने अभी अभी क्या बोला अभी आपको बताया आपने अपनी लाइव

1366
01:35:15,680 --> 01:35:21,040
में बोला कि दीदी दीदी अच्छे जवाब दे रही तो वकील तो तुम बने ना उनके

1367
01:35:21,040 --> 01:35:25,040
इसने सवाल क्या किया इसने सवाल क्या किया वकील

1368
01:35:25,040 --> 01:35:29,280
बनने से यहां पर इनका क्या तात्पर्य है कि मैं उनका वकील थोड़ी ना हूं ये कहा मतलब

1369
01:35:29,280 --> 01:35:33,920
मैं उनका पक्ष क्यों लूं आ के आमने सामने की चर्चा में ये कहा ना

1370
01:35:33,920 --> 01:35:38,080
तो इसका मतलब पक्ष लेने वाला वकील होता है। तो मैंने बताया कि तुमने कहां पर उनका

1371
01:35:38,080 --> 01:35:42,080
पक्ष लिया है। तुम वकील बने। तुमने अपने वीडियो में

1372
01:35:42,080 --> 01:35:46,640
सही ठहराया उस मातृशक्ति को। दिखावा बंद करो।

1373
01:35:46,640 --> 01:35:50,640
भाई भाई भाई भाई बहुत हो गया। ठीक है? भाई के नाम

1374
01:35:50,640 --> 01:35:54,720
पर तुम कलंक हो। सुन लो मेरी बात। और मेरे अंदर मेरे को बहुत

1375
01:35:54,720 --> 01:35:59,040
बड़ा ये इस बात का दुख है कि मैंने कभी तुमको जो है वो

1376
01:35:59,040 --> 01:36:03,040
भाव अंदर से आए थे। स्वाभाविक रूप से आए थे। मगर मैंने उन भावों को सत्य

1377
01:36:03,040 --> 01:36:07,760
मान लिया तुम्हारे विषय में वो मेरी बहुत बड़ी गलती है।

1378
01:36:07,760 --> 01:36:12,080
ठीक है? तुम कलंक हो भाई के मामले में। क्यों कलंक हो?

1379
01:36:12,080 --> 01:36:16,160
क्योंकि तुम्हारे भाई के सर पर कोई चप्पल लगा के फोटो दे रहा है। उसको तुम अपने

1380
01:36:16,160 --> 01:36:20,240
यहां बिठा रहे हो। उसको जो है तुम प्रशय दे रहे हो। वो तुम्हारी चीजों का उपयोग

1381
01:36:20,240 --> 01:36:22,800
करके आगे चल रही है। और फिर जो

1382
01:36:22,800 --> 01:36:27,120
है तुम वहां पर जाकर के जो उसको ना तो उसको काउंटर कर रहे हो।

1383
01:36:27,120 --> 01:36:31,200
अच्छा चलो तुम्हें पता नहीं था उसने क्या-क्या बनाया। उसके बाद भी जब पता

1384
01:36:31,200 --> 01:36:35,520
चल गया तो तुमने क्या कर दिया? तुम्हारे भाई ने तुमको फोटो भाई हमारा सैद्धांतिक

1385
01:36:35,520 --> 01:36:38,800
मतभेद अलग था। निर्भय

1386
01:36:38,800 --> 01:36:43,200
मगर तुमने मुझे सम्मान तो दिया ही था ना भाई वाला और तुम्हारी बौखलाहट

1387
01:36:43,200 --> 01:36:47,200
अभी मैं बताऊंगा क्या-क्या तुमने अपने लिए कुआं खोदा है वो भी बताऊंगा।

1388
01:36:47,200 --> 01:36:51,200
तो खैर जब तुम किसी को सम्मान दे रहे हो उसके साथ कोई

1389
01:36:51,200 --> 01:36:55,360
ये कर रहा है और तुम्हारे ही जरिए कर रहा है। तुम तो अपने आप को वहां से अलग हटाओ।

1390
01:36:55,360 --> 01:37:00,000
तुम अलग हटाना तो दूर की बात है। तुम तो उसको और सहारा दे रहे हो। और फिर

1391
01:37:00,000 --> 01:37:04,960
तुम्हारा अगर यह कहना मुझे पता नहीं था उसने क्या-क्या किया तो पहली बात तो पता करके बुलाओ।

1392
01:37:04,960 --> 01:37:09,200
यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। और जब पता चल जाए तो उस बात के लिए क्षमा

1393
01:37:09,200 --> 01:37:13,280
मांगो और तब उसका त्याग करो। कुछ नहीं किया।

1394
01:37:13,280 --> 01:37:17,520
चलाइए।

1395
01:37:17,520 --> 01:37:21,680
अब जो मैंने वीडियो देखे जो लगा उसमें मैंने बोला तो तुम अधूरी जानकारी पे क्यों

1396
01:37:21,680 --> 01:37:25,760
बोल रहे हो सार्वजनिक? भाई मेरे को जो जानकारी मिलेगी उसी आधार पे बोलूंगा ना। तो अधूरी जानकारी

1397
01:37:25,760 --> 01:37:29,920
पे बोलोगे। अगर बोल रहे हो तो अगर बोल रहे हो तो सामने

1398
01:37:29,920 --> 01:37:33,920
वाला उस आपत्ति भी ना जताए तो आप जताओ मैं कहां मना कर रहा हूं तो जब

1399
01:37:33,920 --> 01:37:38,000
जता रहा हूं तुमको तुम्हारी चीजें तुम्हारी चीजें जब तुमसे तुमको पता चल

1400
01:37:38,000 --> 01:37:42,000
रही है तुमने गलत किया है आपत्ति तुम्हारी चीजें तुम्हारी

1401
01:37:42,000 --> 01:37:46,000
चीजें जब तुमको पता चल रही है कि तुमको पता नहीं था तुमने उनका पक्ष गलत किया

1402
01:37:46,000 --> 01:37:50,160
लाइव के अंदर आपने अपने लाइव ठीक है तुम मुझे बता दो तुमको आना है कि नहीं आना

1403
01:37:50,160 --> 01:37:54,240
है आना हो बता देना जब तुम्हारे पास समय मेरे पास समय नहीं है पहले WhatsApp

1404
01:37:54,240 --> 01:37:58,240
नहीं है ठीक है ठीक है कोई बात नहीं ठीक है आपके पास पता था पहले भी पहले भी पहले ही पता था

1405
01:37:58,240 --> 01:38:02,240
तुम्हारे पास तुम्हारे पास निर्गुण त्रिकुण वाले विषय पर उत्तर है तो

1406
01:38:02,240 --> 01:38:06,000
तुम बचोगे जय श्री राम

1407
01:38:06,000 --> 01:38:10,000
तो यहां पर मैंने अंत में यही बात कही कि जब

1408
01:38:10,000 --> 01:38:14,160
तुम्हें नहीं पता तुम तुमने कुछ कर दिया वैसे ये भी दोष है

1409
01:38:14,160 --> 01:38:18,240
नहीं करना चाहिए तो जब पता चले तब तो उसके लिए क्षमा पूर्वक आगे

1410
01:38:18,240 --> 01:38:22,640
की चीज करो आगे की कारवाई करो मगर ये ऐसे उदंडी

1411
01:38:22,640 --> 01:38:27,040
है ऐसे धूर्त लोग हैं तो इनका ये जो स्वरूप भूत लक्षण आया पांचवा

1412
01:38:27,040 --> 01:38:31,120
क्या आया धूर्तता अब आगे आएगा बौखलाहट

1413
01:38:31,120 --> 01:38:35,280
और नीचता ठीक है अब थोड़ा सा आप लोग कुछ बोलना

1414
01:38:35,280 --> 01:38:39,360
है तो बोलिए नहीं तो फिर इनकी वो रिकॉर्डिंग सुने जो आशुतोष जी के यहां इन्होंने

1415
01:38:39,360 --> 01:38:43,680
फोन किया है। जी जी जी जी नहीं इस पे तो पूरा स्पष्ट

1416
01:38:43,680 --> 01:38:47,920
है के देखो जैसे आपने बोला कि मैंने छोटा भाई बोला था और

1417
01:38:47,920 --> 01:38:52,160
आपने मुझे भी कई बार बताया कि भाई निर्भय से ऐसी मेरी बात हुई है और मैं उसे छोटे

1418
01:38:52,160 --> 01:38:56,240
भाई की तरह देखता हूं लेकिन इनका जो व्यवहार है वो ऐसा नहीं है कि

1419
01:38:56,240 --> 01:39:00,240
यह आपको बड़ा भाई समझते हैं। इनका व्यवहार तो ऐसे है जैसे इनको तो

1420
01:39:00,240 --> 01:39:04,400
सब कुछ जो है वह ध्वस्त कर देना है। है ना? और

1421
01:39:04,400 --> 01:39:08,400
जो सैद्धांतिक मतभेद एक अलग चीज होती है। लेकिन अगर आपने भाई बोला है

1422
01:39:08,400 --> 01:39:12,480
जैसे मान लो मैं आपको बोलता हूं कि भाई है। अब मैं क्या करूं? आपके विरुद्ध

1423
01:39:12,480 --> 01:39:17,360
कुछ करता रहूं। आपके जो विरोधी हैं उनसे मैं जाकर वहां पर जाकर

1424
01:39:17,360 --> 01:39:21,120
सहयोग करूं और आपको नीचा दिखाने का प्रयत्न करूं तो फिर वो भाई वाला भाव जो

1425
01:39:21,120 --> 01:39:25,360
है वो वहां पर नगन्य नहीं है बिल्कुल शून्य है मतलब है ही नहीं वो

1426
01:39:25,360 --> 01:39:29,360
चलो अभी अभी ठेका वाली बात को पहले क्लियर करें और लास्ट में इनकी बौखलाहट हो वो

1427
01:39:29,360 --> 01:39:33,360
दिखाएंगे अभी मैं दिखा रहा हूं ठेका मेरी आपसे और एक सज्जन

1428
01:39:33,360 --> 01:39:37,440
और है उनसे बात हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में ठीक है

1429
01:39:37,440 --> 01:39:42,160
जी निर्भय को किसी व्यक्ति ने कॉल किया है ठीक

1430
01:39:42,160 --> 01:39:46,160
उस व्यक्ति ने निर्भय ने कुछ क्लेम किए थे अपने वीडियो में

1431
01:39:46,160 --> 01:39:50,400
शायद अचिल्स नाम है। ठीक है। निर्भय ने कुछ कॉल

1432
01:39:50,400 --> 01:39:54,560
किए थे। कुछ क्लेम किए थे अपनी वीडियो में कि अचिल्स को मैंने

1433
01:39:54,560 --> 01:39:58,960
ये पीटा वो पीटा। और इस क्लेम से वो क्लेम

1434
01:39:58,960 --> 01:40:03,120
झूठे हैं। ऐसा कहना है अचिल्स का। ठीक है? हम अब उसका

1435
01:40:03,120 --> 01:40:07,280
रियल नेम क्या है वो मुझे नहीं पता। पर वो अचिल्स

1436
01:40:07,280 --> 01:40:11,520
क्या कहते अचिल्स नाम से जाना जाता है। तो अचिल्स के लिए

1437
01:40:11,520 --> 01:40:15,680
निर्भय ने यह क्लेम किए कि मैंने पुलिस में पकड़ाया, वो जेल गया, वह पीटा गया, यह हुआ, वह

1438
01:40:15,680 --> 01:40:19,680
हुआ। अचिल्स को जब ये मालूम पड़ा तो अचिल्स ने निर्भय का कहीं से नंबर प्राप्त

1439
01:40:19,680 --> 01:40:23,760
इत्यादि करके उसको फोन किया। फोन में मैं देख रहा हूं मेरे पास

1440
01:40:23,760 --> 01:40:27,920
वो रिकॉर्डिंग आ गई तो उसमें क्या हो रहा है कि अचिल्स बहुत ज्यादा

1441
01:40:27,920 --> 01:40:31,920
अभद्र गालियां दे रहे हैं। ठीक है? और बिल्कुल मर्यादा

1442
01:40:31,920 --> 01:40:36,000
के बाहर जाकर के बातें कर रहे हैं। फिर यह सब जब मैंने सुन लिया तो बाद में

1443
01:40:36,000 --> 01:40:36,500
वो

1444
01:40:36,160 --> 01:40:40,160
अचिल्स सनातन शंकर जी को बोला बाद में इनके

1445
01:40:40,160 --> 01:40:44,160
पास फोन ऑन आया होगा इन्होंने भी सुन ली थी तो वो इस विषय

1446
01:40:44,160 --> 01:40:48,400
में बात हो रही थी कि अचिल्स इनके चैनल पर आकर के इस विषय में

1447
01:40:48,400 --> 01:40:52,480
वो क्या कहते हैं एक्सपोज करना

1448
01:40:52,480 --> 01:40:56,800
चाहता है निर्भय की बातों को कि निर्भय ने क्या-क्या झंडे क्लेम किए हैं। वो मैसेज

1449
01:40:56,800 --> 01:41:00,960
मैसेज आया था मेरे पास मैसेज आया था और मैसेज जब आया तो

1450
01:41:00,960 --> 01:41:05,040
उन्होंने वो कॉल भी किया था उसके बाद फिर मैं तो पहले

1451
01:41:05,040 --> 01:41:09,120
तो यह सोच रहा था कि भाई इसके पास मेरा नंबर कैसे चला गया क्योंकि मेरा नंबर तो है ही नहीं उनके

1452
01:41:09,120 --> 01:41:13,200
पास आपके सिवा या और एक दो लोग हैं उनके सिवा नहीं एक बार

1453
01:41:13,200 --> 01:41:17,200
बहुत पहले एक बार बहुत पहले मेरे पास उनका उसका फोन

1454
01:41:17,200 --> 01:41:21,440
आया था अचिल्स का और मुझसे उसने कहा था कि कुछ हम लोगों ने कुछ

1455
01:41:21,440 --> 01:41:25,520
लाइव की थी ना जब अचिल्स ने अपनी कुछ चीजें दिखाई थी शायद लाइव में 11

1456
01:41:25,520 --> 01:41:29,520
महीने महीने पहले की बात है। हां हां हां शायद ऐसा है। तो तब तब से आपका

1457
01:41:29,520 --> 01:41:33,520
नंबर उसके पास है। और कहीं-कहीं पर अचिल ने अच्छी

1458
01:41:33,520 --> 01:41:37,600
चीजें भी की है मेरी जानकारी में। परंतु क्या है कि वो मुझे

1459
01:41:37,600 --> 01:41:41,600
उस विषय में ठीक नहीं लगता है वो व्यक्ति जब वो मर्यादा का उल्लंघन करने

1460
01:41:41,600 --> 01:41:45,600
लगता है। किसी को कुछ भी कहने लग जाओ। ठीक है? तो अब ये

1461
01:41:45,600 --> 01:41:49,760
जो कह रहा है ना मैंने ठेका नहीं ले रखा है। है ना? तो जब मुझे

1462
01:41:49,760 --> 01:41:51,200
ये पता चला ना कि निर्भय को

1463
01:41:51,200 --> 01:41:55,280
इतनी गालियां दी है और हम तीनों में वो बात हो रही थी वो जो तीसरे व्यक्ति

1464
01:41:55,280 --> 01:41:59,440
और हैं कन्हैया जी जब ये बात हो रही थी अचिल्स को इनके चैनल पे आना है। मेरा क्या

1465
01:41:59,440 --> 01:42:03,440
कहना था आपसे सबसे पहले क्या कहा था मैंने इस बारे में?

1466
01:42:03,440 --> 01:42:07,520
बस कल ही कल की बात है। कल कल दोपहर की बात है जब

1467
01:42:07,520 --> 01:42:11,680
ये हुआ तो आपने मेरे को यही कहा कि भाई क्योंकि निर्भय को

1468
01:42:11,680 --> 01:42:15,680
बहुत अभद्र गालियां दी हैं तो ऐसे व्यक्ति के साथ तो बिल्कुल कोई

1469
01:42:15,680 --> 01:42:19,760
भी मंच साझा नहीं करना चाहिए। है ना? क्योंकि अर्चलीज के मैसेज

1470
01:42:19,760 --> 01:42:23,760
मेरे को आए कि आपके साथ लाइव करनी है। आपको कोई आपत्ति तो नहीं है। और यह भी कल ही

1471
01:42:23,760 --> 01:42:28,640
हुआ है। ऐसा नहीं कि अच्छा 11 महीने पहले नंबर उसको मिला होगा आपके

1472
01:42:28,640 --> 01:42:32,720
जरिए। जब लेकिन उस वक्त उस वक्त से ले अब तक जो

1473
01:42:32,720 --> 01:42:36,960
है अर्चलीज ने मेरे को ना कभी संपर्क किया। अच्छा मेरे पास तो उसका नंबर है ही नहीं।

1474
01:42:36,960 --> 01:42:40,960
तो मेरा संपर्क करना तो मतलब ही नहीं बनता। लेकिन उसने भी मुझे इन इस

1475
01:42:40,960 --> 01:42:45,040
दौरान कभी संपर्क नहीं किया। कमेंट के माध्यम से मे भी वो मेरे उसमें करता होगा

1476
01:42:45,040 --> 01:42:49,360
कमेंट। लेकिन कल पहली बार उसने मैसेज किया कि उसे लाइव करनी है और कुछ चीजें स्पष्ट

1477
01:42:49,360 --> 01:42:53,360
करनी है। तो उसने यह भी लिखा कि आपको कोई आपत्ति तो नहीं है। तो

1478
01:42:53,360 --> 01:42:57,360
फिर वो मैसेज भेजा फिर उसके बाद हमारा हमारी तीनों की

1479
01:42:57,360 --> 01:43:01,760
बात हुई थी। हां वो बताइए मैंने क्या कहा? मैंने क्या कहा? हां

1480
01:43:01,760 --> 01:43:05,760
आपने कहा आपने यही कहा क्योंकि उसके वो किसी की माता को चाहे

1481
01:43:05,760 --> 01:43:06,320
किसी की माता

1482
01:43:06,320 --> 01:43:10,400
है चाहे वो निर्भय की मां है किसी की भी है वो हमारी मां है और हम

1483
01:43:10,400 --> 01:43:14,560
जिन सिद्धांतों के लिए लड़ रहे हैं हम सनातनियों के लिए लड़ रहे हैं अगर वहां

1484
01:43:14,560 --> 01:43:18,640
पर अगर आप किसी की माता को गालियां देते हो तो कहीं ना कहीं हम अपने सनातन

1485
01:43:18,640 --> 01:43:22,800
सिद्धांतों से नीचे गिर रहे हैं क्योंकि चाहे कोई भी है ऐसा तो है नहीं

1486
01:43:22,800 --> 01:43:26,800
आर्य समाज वाले हमारे जानी दुश्मन है ये आपने कहा था कि जानी दुश्मन तो नहीं है

1487
01:43:26,800 --> 01:43:30,960
और एक बात मैंने कहा हां बिल्कुल ठीक है जानी दुश्मन नहीं है सिद्धांतों की जो आप हमारी वो है लड़ाई

1488
01:43:30,960 --> 01:43:35,040
है वो तो एक अलग तरीके से चल रही है लेकिन ऐसा तो है नहीं है तो हमारे ही भाई

1489
01:43:35,040 --> 01:43:39,120
है ना तो वो हमारी बात हुई थी तो वहां पर

1490
01:43:39,120 --> 01:43:43,360
यही फिर मैंने भी कहा कि भैया हां वो क्योंकि फोर्स कर रहा है कि मुझे

1491
01:43:43,360 --> 01:43:47,520
लाइव करनी है तो मैंने कहा मैं भी अब देखो एक चीज का अंतर एक चीज

1492
01:43:47,520 --> 01:43:51,520
का अंतर यहां पे देख लो निर्भय कि तुम कहते हो मैंने ठेका नहीं ले

1493
01:43:51,520 --> 01:43:55,840
रखा जिसको तुम भाई कहते हो उसके सर पर वो चप्पल लगाती है उसको शौचालय

1494
01:43:55,840 --> 01:44:00,000
से जोड़ के चित्रित करती है उसके चेहरे को बदल बदल के तरह-तरह से वो वहां

1495
01:44:00,000 --> 01:44:04,080
प्रदर्शित करती है। क्यों? क्योंकि वो मुकी खाई और तुम उसके

1496
01:44:04,080 --> 01:44:08,160
लिए तालियां पीटते हो। बहुत बढ़िया जवाब दे रही। क्योंकि नीच मानसिकता पहले

1497
01:44:08,160 --> 01:44:12,240
से ही तुम्हारे मन में दौड़ रही है ना। इसलिए उसकी

1498
01:44:12,240 --> 01:44:16,400
नीचता तुम्हें दिखाई नहीं दे रही। वो क्या नीचता करेगी? उससे बड़ी-बड़ी नीचताएं

1499
01:44:16,400 --> 01:44:20,400
करके बैठे होगे तुम। इसीलिए वो नीचताएं सामान्य है तुम्हारे लिए।

1500
01:44:20,400 --> 01:44:21,520
हमारे लिए तो सामान्य

1501
01:44:21,520 --> 01:44:25,600
नहीं थी। हमें पता चला कि अचल ने ऐसा ऐसा किया है। हमने सीधे

1502
01:44:25,600 --> 01:44:29,680
कहा कन्हैया जी भी लाइन पे थे। मेरा पक्ष यही था भाई ऐसे व्यक्ति का साथ हम

1503
01:44:29,680 --> 01:44:33,680
नहीं ले सकते जो इस तरह से बातें करें और

1504
01:44:33,680 --> 01:44:37,680
मां मेरी जब जब आपने कॉल किया था जब आपने कॉल किया था

1505
01:44:37,680 --> 01:44:41,680
बीच में क्योंकि तब मैं कन्हैया जी से और वो हम दोनों यही बात कर रहे थे कन्हैया जी

1506
01:44:41,680 --> 01:44:45,680
कह रहे थे कि बस उसका बस यही है अर्शलीज का क्योंकि वो थोड़ा अभद्र गालियां देता है

1507
01:44:45,680 --> 01:44:49,840
कह मैंने भी उसे बहुत बार समझाया था और मैं भी ये बात कर रहा था कि भैया अगर

1508
01:44:49,840 --> 01:44:54,000
इतनी अभद्र किसी की मां बहन को गालियां तो भैया हम खुद ही नहीं सुन सकते हैं। इसी वक्त आपका

1509
01:44:54,000 --> 01:44:58,000
भी फोन आ गया तो मैंने फिर आपको भी कॉन्फ्रेंस में ले लिया था। तो यह सारी हमारी बात हुई

1510
01:44:58,000 --> 01:45:02,080
थी। जी। अब देखिए ठेका ना ले लेने की बात जब तुमने

1511
01:45:02,080 --> 01:45:06,160
बताया कि दयानंद जी का चित्र गलत चित्रित किया गया उसको बदलवाया।

1512
01:45:06,160 --> 01:45:10,160
ठेका तो नहीं लिया था मैंने। क्यों बदलवाया? क्योंकि हम धर्म का धारण हम

1513
01:45:10,160 --> 01:45:14,240
धर्म को धारण करते हैं। हम राम का राम की मर्यादा का पालन करने

1514
01:45:14,240 --> 01:45:19,200
की कोशिश करते। तुम जैसी नीच मानसिकता को अपने मन में लेकर के नहीं घूमते हैं।

1515
01:45:19,200 --> 01:45:23,760
कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त है। भले ही वह कितना भी नीच व्यक्ति हो।

1516
01:45:23,760 --> 01:45:27,920
उसको प्रशय देना है। आप वो रिकॉर्डिंग

1517
01:45:27,920 --> 01:45:33,920
सुनाइए जो आपने अचिल्स अचिल्स के साथ आपकी जो बातचीत हुई है।

1518
01:45:34,800 --> 01:45:38,880
मैंने एक मिनट नवीन जी चलाएंगे क्या? हां

1519
01:45:38,880 --> 01:45:43,040
नवीन जी चला देंगे। आप WhatsApp करिए मुझे। मैं नवीन जी को WhatsApp कर दीजिए आप। कर दिया।

1520
01:45:43,040 --> 01:45:46,720
कर दिया मैंने कर दिया।

1521
01:45:46,720 --> 01:45:51,440
किसको किया? पहले वो पहले वो वो मैसेज दिखाना जो

1522
01:45:51,440 --> 01:45:57,440
कॉल से पहले मैसेज किया था मेरे को अर्चली जी ने।

1523
01:45:59,120 --> 01:46:03,520
इसको कहते हैं धर्म के पक्षधर तुम्हारी तरह नहीं

1524
01:46:03,520 --> 01:46:07,840
मैंने ठेका थोड़ी ना ले रखा है ये तो इनकी बात ये तो इनकी भाषा है

1525
01:46:07,840 --> 01:46:13,680
ठेका

1526
01:46:13,680 --> 01:46:17,760
उधर से दीदी भी बहुत अच्छे जवाब दे रही है वो दीदी हो गई भैया

1527
01:46:17,760 --> 01:46:21,760
अच्छे जवाब देने वाली फिर कह रहे हैं मैं वकील थोड़ी ना हूं

1528
01:46:21,760 --> 01:46:25,760
देख रहे हो और जहां फंसता है वहां विषयांतर करने लगता है व्यक्ति

1529
01:46:25,760 --> 01:46:28,400
यह देखो

1530
01:46:28,400 --> 01:46:32,480
यह यह मैसेज आया था मेरे को तो इनका मैसेज आया कि

1531
01:46:32,480 --> 01:46:37,040
आज की लाइव से पहले आज लाइव करो कुछ टाइम निकाल कर

1532
01:46:37,040 --> 01:46:41,040
तो ये कुछ लाइव कराना चाहते थे मेरे से उन्होंने अपना फिर वो परिचय भी

1533
01:46:41,040 --> 01:46:45,360
दिया कि आनंद अक्का अर्चली क्योंकि मेरे पास इनका संपर्क सूत्र नहीं था

1534
01:46:45,360 --> 01:46:51,360
ठीक है हम उसके बाद मैं आपको रिकॉर्डिंग सुनवाता हूं

1535
01:46:54,160 --> 01:47:00,160
इसको हटा दीजिए। रिकॉर्डिंग चलाइए।

1536
01:47:25,440 --> 01:47:29,440
यह कोई देवाशी करके हैं। लगातार विरोधी कमेंट करते जा रहे हैं।

1537
01:47:29,440 --> 01:47:34,640
देवाशी जी

1538
01:47:34,640 --> 01:47:38,720
ऐसा है सीधी बात है। यदि आपको लगता है कि आप पक्ष

1539
01:47:38,720 --> 01:47:43,280
सत्य के पक्षधर हैं तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करें।

1540
01:47:43,280 --> 01:47:47,280
अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए स्वतंत्र हैं। आप

1541
01:47:47,280 --> 01:47:51,680
प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा। ठीक है? तो आप अपनी

1542
01:47:51,680 --> 01:47:56,080
अगर कायरता को ऐसे ही प्रदर्शित करना चाहते हैं कमेंट के माध्यम से तो कर सकते हैं।

1543
01:47:56,080 --> 01:48:00,080
अन्यथा साहस है तो हमारा नंबर दिया गया है। वहां

1544
01:48:00,080 --> 01:48:04,640
आइए और चर्चा सुनिश्चित करिए और चर्चा में आकर के अपनी बातें रखिए।

1545
01:48:04,640 --> 01:48:08,960
केवल क्लेम मत करिए। उसको सिद्ध भी करिए। ठीक है? क्लेम

1546
01:48:08,960 --> 01:48:13,600
तो मैं भी कुछ भी कर सकता हूं। अभी देखो बहुत सारी चीजों पर बातें हो ही रही है आपके सामने।

1547
01:48:13,600 --> 01:48:17,840
यहां पर आधी से ज्यादा भीड़ तो वो रहती है जो बड़े आवान से

1548
01:48:17,840 --> 01:48:22,400
तुम्हें क्या बताएं। किस कदर चोट खाए

1549
01:48:22,400 --> 01:48:26,400
हुए हैं। तो वो सारे चोट खाए हुए सब आ

1550
01:48:26,400 --> 01:48:30,480
जाते हैं। कहीं कोई रामपालिया आ जाएगा। कहीं कोई आजकल बीके

1551
01:48:30,480 --> 01:48:34,560
वाले चल रहे हैं। कहीं कोई बेचारा भागवतानंद के भी समर्थक आ जाएंगे।

1552
01:48:34,560 --> 01:48:40,560
हमारे गुरु से भी तुमने पूछा था शास्त्र कहां है? शास्त्र कहां है?

1553
01:48:41,200 --> 01:48:45,760
हम

1554
01:48:45,760 --> 01:48:49,760
चलाइए पता है ना कि अब आप आपका जो एक मेरे

1555
01:48:49,760 --> 01:48:53,920
को ऑडियो मिला था ना उसमें आपने निर्भय की जो माता बहन को बहुत गालियां दी थी।

1556
01:48:53,920 --> 01:48:58,000
मेरी एक बात सुन लेना। ठीक है। अगर लाइव में मेरे को लेते हो तो मेरी तरफ तरफ से

1557
01:48:58,000 --> 01:49:02,160
कोई भी शब्द या कोई भी मतलब एटीट्यूड इको वाली

1558
01:49:02,160 --> 01:49:06,240
वाली बात होगी बिल्कुल भी। हां नहीं वो तो इतना

1559
01:49:06,240 --> 01:49:10,400
समझदार हूं यार मैं इतनी टेंशन मत लिया करो नहीं वो तो ठीक है पर मैसेज

1560
01:49:10,400 --> 01:49:14,400
ये जाएगा वो ये कहेगा कि आपने जो पहले दी है गालियां तो उसके लिए आपने

1561
01:49:14,400 --> 01:49:18,560
कोई सार्वजनिक तो क्षमा मांगी नहीं है अब मेरे चैनल से अगर मैं ऐसा प्रमोट करता हूं मांगू

1562
01:49:18,560 --> 01:49:22,640
ये बताओ ना मेरी गलती क्या है नहीं आपने आपने जो इतनी अभद्र

1563
01:49:22,640 --> 01:49:28,160
गालियां दी है ना निर्भय को तो वो गलत है ना अगर उसकी तरफ से

1564
01:49:28,160 --> 01:49:32,240
नहीं फिर ऐसे ऐसे क्या होगा ना ऐसे क्या होगा कि देख लूंगा

1565
01:49:32,240 --> 01:49:36,400
एक दिन ठीक है याद रखना ये नहीं नहीं वो उसने गली

1566
01:49:36,400 --> 01:49:40,480
अब उसने फोन काट दी अब ये बताओ निर्भय क्या हमने

1567
01:49:40,480 --> 01:49:44,480
ठेका ले रखा है हमने ठेका ले रखा है तुमने

1568
01:49:44,480 --> 01:49:48,480
नहीं ले रखा है तो हम धर्म के पक्षतर है भाई

1569
01:49:48,480 --> 01:49:52,560
केवल धर्म रक्षक चिल्लाते नहीं है ठीक है धर्म को धारण भी

1570
01:49:52,560 --> 01:49:56,960
करते हैं वो चाहे मां तुम्हारी हो या हमारी हो

1571
01:49:56,960 --> 01:50:02,080
उनके ऊपर बात आएगी तो हम लड़ेंगे

1572
01:50:02,080 --> 01:50:06,240
वो मेरे को बोल के क्या गए हैं तुम्हें देख लूंगा याद रखना इस बात देख लूंगा और उन्होंने

1573
01:50:06,240 --> 01:50:10,320
फोन काट दिया बीच में ही और ये सबको देखा करते कुछ दिन पहले निर्भय की वो

1574
01:50:10,320 --> 01:50:14,320
जो निर्भय के नाम से वो निकल रही है ना रिकॉर्डिंग जिसमें अभी हम लोग

1575
01:50:14,320 --> 01:50:19,120
रिपोर्ट वगैरह करा रहे हैं तो वो जो रिकॉर्डिंग्स हैं

1576
01:50:19,120 --> 01:50:23,200
वो मेरे पास भेजी और मुझे बोला इस पर कारवाई करो अब

1577
01:50:23,200 --> 01:50:27,280
भाई उसमें बहुत सारी चीजें चाहिए होती है सबूत चाहिए होते हैं किसी की

1578
01:50:27,280 --> 01:50:31,440
कोई रिकॉर्डिंग है तो तुमने कैसे देखी अच्छा जिसने देखी है क्या वो गवाही देने

1579
01:50:31,440 --> 01:50:35,600
आ रहा है जिसने जिसने जिसकी आंखों के सामने वो है जो निकाल के लाया

1580
01:50:35,600 --> 01:50:40,240
है वो इसमें गवाह बनेगा कि नहीं बनेगा? नहीं तो मेरे पास उसका सोर्स क्या है

1581
01:50:40,240 --> 01:50:44,400
उस रिकॉर्डिंग का। ठीक है? तो वो वाली बात हो जाएगी।

1582
01:50:44,400 --> 01:50:48,640
दूसरी बात मैं अपने कामों में बहुत सारा बिजी हूं। और यह गालियां

1583
01:50:48,640 --> 01:50:52,720
केवल अगर निर्भय दे भी रहा है तो केवल निर्भय नहीं दे रहा है। बहुत सारे

1584
01:50:52,720 --> 01:50:56,960
लोग हैं जो डेली उठकर के सनातन धर्म को,

1585
01:50:56,960 --> 01:51:01,600
सनातन धर्म के आराध्यों को, सनातन धर्माचार्यों को और सनातनियों

1586
01:51:01,600 --> 01:51:05,600
को बहुत सारी गालियां देते हैं। अभी नव बौद्धों के वीडियोस देख लो।

1587
01:51:05,600 --> 01:51:10,560
उसमें श्री राम जी को लातों से मारता हुआ दिख जाएगा कोई कार्टून।

1588
01:51:10,560 --> 01:51:12,080
भीमरा भीम

1589
01:51:12,080 --> 01:51:16,720
भीमराव अंबेडकर के कार्टून के द्वारा श्री राम जी के कार्टून को मारा जा रहा होगा।

1590
01:51:16,720 --> 01:51:20,880
तो यह रोज हो रहा है तो मैं सारा कामधाम छोड़ के इसी पर नहीं दौड़

1591
01:51:20,880 --> 01:51:24,960
सकता कि निर्भय ने किया तो इसलिए मैं पीछे पड़ जाऊं। हमें चुनना होता है कि

1592
01:51:24,960 --> 01:51:29,120
हमें कहां पे अपनी एनर्जी के लगाना है। तो

1593
01:51:29,120 --> 01:51:33,280
मेरी तो वो वाली भावना थी। अब वो बोला अरे तुम ये हो वो हो। मैंने कहा ऐसा है भाई गलत

1594
01:51:33,280 --> 01:51:37,680
तरीके से बात करोगे बात नहीं। उसको लगता है कि हम सबको एक ही लकड़ी से आकेंगे। अचिल्स

1595
01:51:37,680 --> 01:51:41,680
को उसको मालूम ही नहीं किस से बात कर रहा है। किससे नहीं कर रहा है। अभी पूछ लेंगे किसकी

1596
01:51:41,680 --> 01:51:46,720
रक्षा कर रहे हो। धर्म क्या है? तो सारी चीजें होंगी गायब।

1597
01:51:46,720 --> 01:51:50,880
धर्म क्या है? ईश्वर का स्वरूप क्या है? भाई धर्म की

1598
01:51:50,880 --> 01:51:55,200
रक्षा कर रहे हो तो धर्म कौन क्या है धर्म? वो अभी पूछ लेंगे गायब हो जाओ

1599
01:51:55,200 --> 01:51:59,360
भाई जो आई थी अभी मातृ शक्ति रामानुज

1600
01:51:59,360 --> 01:52:03,920
दया दयानंद जी को क्यों नहीं मानते? तो यह है

1601
01:52:03,920 --> 01:52:07,920
जो धर्म की जो रामो विग्रहवान धर्मा को अपने हृदय

1602
01:52:07,920 --> 01:52:12,080
में धारण करके चलते हैं। कुछ सीखो केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। सीख

1603
01:52:12,080 --> 01:52:16,320
भी लो कुछ। तुम कहते हो हमने ठेका नहीं ले रखा है। तुम्हारे

1604
01:52:16,320 --> 01:52:20,400
हिसाब से हमको यह नहीं करना चाहिए था। हमने ये गलत किया है। और तुम

1605
01:52:20,400 --> 01:52:25,520
इतने नीच मानसिकता वाले व्यक्ति हो कि हो सकता है अपने चैनल में बोल भी दो।

1606
01:52:25,520 --> 01:52:27,200
हां हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। तुमने

1607
01:52:27,200 --> 01:52:31,920
किया तो कुछ अच्छा नहीं कर दिया। हो सकता है। यही बोलेंगे। यही बोलेंगे।

1608
01:52:31,920 --> 01:52:35,920
ठीक है। नहीं वो तो है। अच्छा यह जो रिकॉर्डिंग है निर्भय की जो रिकॉर्डिंग है

1609
01:52:35,920 --> 01:52:40,080
28 सेकंड वाली तो आप हम और आप अगर उस

1610
01:52:40,080 --> 01:52:44,240
पर कारवाई करते हैं तो हमें सबूत चाहिए। अच्छा जिसने वो प्रत्यक्ष

1611
01:52:44,240 --> 01:52:48,240
देखा है वो भी चाहिए। बहुत कुछ चाहिए। लेकिन जिसकी ये रिकॉर्डिंग है

1612
01:52:48,240 --> 01:52:52,320
चाहे फेक है उसे भी कारवाई करनी चाहिए थी। उसने तो कारवाई नहीं कर सकता है।

1613
01:52:52,320 --> 01:52:56,480
वो कर सकता है बिल्कुल कर सकता। उस पे हम कारवाई करेंगे ना। वो कारवाई नहीं करेगा तो

1614
01:52:56,480 --> 01:53:00,560
हम करेंगे कारवाई। बिल्कुल उसको हम जाएंगे। ठीक

1615
01:53:00,560 --> 01:53:04,880
है। तो अब जो है आशुतोष जी को जी सनातन

1616
01:53:04,880 --> 01:53:10,880
शंकर वो शास्त्रवाद जी आप कुछ बोलेंगे?

1617
01:53:12,560 --> 01:53:16,640
जी भैया यही बात जो

1618
01:53:16,640 --> 01:53:20,960
है ना ये लोग बिना जाने किसी का भी पक्ष ले लिए। जैसे उस दीदी

1619
01:53:20,960 --> 01:53:24,960
का ले लिए इंटरनेट परंपरा वाली और बाद में बोलते हैं कि

1620
01:53:24,960 --> 01:53:29,200
हम उनके वकील तो नहीं है। ये बात बहुत

1621
01:53:29,200 --> 01:53:33,280
ही हास्यास्पद है कि आप एक तरफ से बता रहे हैं और फिर बोल रहे कि हम

1622
01:53:33,280 --> 01:53:38,000
उसके पक्षधर भी नहीं है। ये दोहर मापदंड हुआ उनका।

1623
01:53:38,000 --> 01:53:42,240
दूसरा और जब जब फंस गए मैंने सिद्ध किया कि तुम वकील हो

1624
01:53:42,240 --> 01:53:46,240
तुमने बोला कि दीदी अच्छे जवाब दे रही है। ये वकालत है। ये तो जब वकील

1625
01:53:46,240 --> 01:53:50,400
हो सिद्ध किया तो दूसरा टॉपिक लाने लगा। अच्छा फिर बोल रहा है दीदी

1626
01:53:50,400 --> 01:53:54,800
को लेके कौन आया? भाई तुम जब ये बोल रहे हो कि तुमने Instagram

1627
01:53:54,800 --> 01:53:58,880
पे स्टोरी लगाई। तो वो स्टोरी क्यों लगानी पड़ी? क्योंकि तुम्हारी दीदी

1628
01:53:58,880 --> 01:54:02,880
को तुम्हारी दीदी स्टोरी लगा रही है और उनको स्टोरी उनको सपोर्ट दे रहे

1629
01:54:02,880 --> 01:54:06,880
हैं तुम्हारे लोग तो तुम वो एडिटिंग करके बनाया हुआ आधा

1630
01:54:06,880 --> 01:54:10,880
अधूरा दिखा दिखा के प्रस्तुत किया जाने वाली चीजें रोको तुम तो

1631
01:54:10,880 --> 01:54:14,960
यहां आकर के मुझसे कह रहे हो सिद्धांतिक चर्चा करनी है और अपने ईश्वर के विषय में कह

1632
01:54:14,960 --> 01:54:19,360
रहे हो जो जीव ने जब कोई चीज की तो उसमें जो है विचार था उदाहरण

1633
01:54:19,360 --> 01:54:23,680
था और ईश्वर सहायक था जीव का खुद का सामर्थ था जीव का कोई कनेक्शन

1634
01:54:23,680 --> 01:54:27,840
नहीं था कौन सी बात है अजीब पंचरंगी ड्रामा है भाई

1635
01:54:27,840 --> 01:54:31,920
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल एक और एक और बात है भैया

1636
01:54:31,920 --> 01:54:36,000
कि ये लोग क्या कहते हैं कि ईश्वर जो है वो तो क्या बोलते

1637
01:54:36,000 --> 01:54:40,080
हैं सभी में सभी जड़ पदार्थों में भी व्याप्त है। सब जगह

1638
01:54:40,080 --> 01:54:44,480
व्याप्त है तो सर्वव्यापी यदि है तो वो इच्छा

1639
01:54:44,480 --> 01:54:48,480
करता है तो सब कुछ अपने आप हो जाता है। ठीक है उसका मतलब यह है कि

1640
01:54:48,480 --> 01:54:52,480
चेतना सब जगह है तो वह जब सोचा तो वह हो गया। ठीक है?

1641
01:54:52,480 --> 01:54:57,040
तो मेरा मत यह है कि हमारे शरीर में भी चेतना है।

1642
01:54:57,040 --> 01:55:01,040
ठीक है? अब हम उंगली से कोई चीज को टच करते हैं तो हमारा

1643
01:55:01,040 --> 01:55:05,360
उंगली उसको फील करता है ना। हमारे पूरे शरीर में चेतना व्याप्त है ना?

1644
01:55:05,360 --> 01:55:09,440
लेकिन फिर भी फिर भी जब हमें अपने हाथ को हिलाना होता है तो

1645
01:55:09,440 --> 01:55:13,600
उसके लिए हम अपने हाथ में बल लगाते हैं कि नहीं लगाते हैं? तो यहां पे बल

1646
01:55:13,600 --> 01:55:19,360
का आया ना कांसेप्ट। बिल्कुल। तो वही बात है

1647
01:55:19,360 --> 01:55:23,360
अंतर है लेकिन बल का बस इतना अंतर है वो जो

1648
01:55:23,360 --> 01:55:27,520
बस इतना अंतर है कि बल हमारा सीमित है

1649
01:55:27,520 --> 01:55:31,520
ईश्वर का अनंत है बल हमसे अलग है और ईश्वर

1650
01:55:31,520 --> 01:55:36,400
से अलग नहीं है। इतना अंतर है। ठीक है?

1651
01:55:36,400 --> 01:55:40,480
तो और वैसे भी एक एक पॉइंट आपने भी बोला था उस रिकॉर्डिंग में मुझे याद

1652
01:55:40,480 --> 01:55:42,960
आ रहा है। आपने कहा था जब इच्छा कभी करेगा और

1653
01:55:42,960 --> 01:55:46,960
कभी इच्छा नहीं करेगा। ऐसा भी तो होगा क्योंकि कभी फोर्स लगानी पड़ेगी और कभी फोर्स

1654
01:55:46,960 --> 01:55:50,960
नहीं लगानी पड़ेगी। तो जब उसमें भी बदलाव हो रहा है यानी कि ईश्वर में भी

1655
01:55:50,960 --> 01:55:56,160
चेंज आ रहा है। है ना? तो फिर वो शाश्वता भंग हो गई उसकी। बस

1656
01:55:56,160 --> 01:56:00,240
अरे वो तो अभी बहुत सारी बातें हैं कि जो गुण है वो प्रकृति से आ

1657
01:56:00,240 --> 01:56:04,400
रहे हैं यदि तो ईश्वर न्यायकारी न्यायकारी दया

1658
01:56:04,400 --> 01:56:08,880
दयालु ये सब अगर ईश्वर के स्वरूप के गुण माने जाएंगे स्वरूप भूत

1659
01:56:08,880 --> 01:56:13,120
तो फिर ईश्वर ये तो क्रिया पर डिपेंड है किसी द्वितीय सत्ता

1660
01:56:13,120 --> 01:56:17,600
भी होनी चाहिए भाई जब कोई न्याय का पात्र है तब तो तुम न्यायकारी हो

1661
01:56:17,600 --> 01:56:21,680
जब कोई दया का पात्र है तब तो तुम दयालु हो तुम अपने आप में क्या हो

1662
01:56:21,680 --> 01:56:25,760
जब कोई क्रिया नहीं है दुनिया में तो अपने आप में क्या तो अगर उसको

1663
01:56:25,760 --> 01:56:29,920
आप स्वरूप भूत लक्षण मान लोगे तो ईश्वर का नित्यता

1664
01:56:29,920 --> 01:56:34,000
सिद्ध नहीं होगी क्योंकि वो आयातित है। वो जो गुण है जिनकी आप बात कर

1665
01:56:34,000 --> 01:56:38,240
रहे हो वो आयातित है। उनका एक्सपोर्ट हो रहा है। इंपोर्ट हो रहा है। उनमें

1666
01:56:38,240 --> 01:56:42,880
है ना? वो देश काल परिस्थिति पर आधारित है। ठीक है? तो

1667
01:56:42,880 --> 01:56:46,880
यह बात समझने की है। दोबारा से इस पर आते हैं कि

1668
01:56:46,880 --> 01:56:50,960
वह व्यक्ति ऐसी ऐसी धूतता कर रहा है कि हम उसको बता

1669
01:56:50,960 --> 01:56:55,040
भी रहे हैं कि ये चीज हो रही है भाई और तुम उसको प्रशय दे रहे हो। मगर वो उसमें

1670
01:56:55,040 --> 01:56:58,160
कह रहा है कि दीदी अच्छी बातें कर रही है। अच्छे जवाब दे रही है और

1671
01:56:58,160 --> 01:57:02,320
हम उनको हम उनके बाद में कह रहा है हम उनके वकील भी नहीं है। वकील भी नहीं है। और

1672
01:57:02,320 --> 01:57:06,640
इसने इसने पहले भी यही किया था जो इससे मेरा बिगाड़ हुआ। जब अच्छे से बातचीत

1673
01:57:06,640 --> 01:57:10,640
हो रही थी तो इसके लोगों ने जब शॉर्ट बनाने शुरू किए गलत तरीके से मेरी चीजों

1674
01:57:10,640 --> 01:57:15,680
को मैनपुलेटिव तरीके से प्रस्तुत करना शुरू किया तो मैंने कहा भाई मैं अपने भाई को बताऊं

1675
01:57:15,680 --> 01:57:19,760
मगर भाई तो न्याय का पक्षधर नहीं है वो तो ये देखता है

1676
01:57:19,760 --> 01:57:23,840
कौन कौन मेरा सगा है कौन पराया है वो तो यह देख रहा है वो न्याय

1677
01:57:23,840 --> 01:57:27,840
का पक्षधर नहीं है जो मुझे लगा था कि है वो मेरी वो मेरी गलती

1678
01:57:27,840 --> 01:57:33,840
थी कि मैंने ऐसा सोचा ठीक चलो

1679
01:57:34,720 --> 01:57:39,360
जी जी भैया एक और एक और बात है भैया जी

1680
01:57:39,360 --> 01:57:42,080
जी

1681
01:57:42,080 --> 01:57:46,400
जी धन्यवाद

1682
01:57:46,400 --> 01:57:52,080
अनुराग सिंह जी धन्यवाद आपका

1683
01:57:52,080 --> 01:57:58,080
अच्छा भैया एक और बात है कि जी जी जी

1684
01:57:58,080 --> 01:58:00,800
मैं बोलूं

1685
01:58:00,800 --> 01:58:04,880
बोलो बोलो नहीं भैया एक और बात है कि इसने इसने क्या किया था। जब

1686
01:58:04,880 --> 01:58:08,880
आपसे जब चर्चा कर रहा था तो ये क्या कह रहा था कि इच्छा जो है ना

1687
01:58:08,880 --> 01:58:12,960
वो बल नहीं है। पहली बात ठीक है? इच्छा फिर बाद में बोलता है इच्छा

1688
01:58:12,960 --> 01:58:16,960
ही बल है। ठीक है? वो बल का अस्तित्व स्वीकार

1689
01:58:16,960 --> 01:58:21,040
नहीं कर रहा था। इच्छा का अस्तित्व स्वीकार कर रहा था। बाद में आते-आते बात

1690
01:58:21,040 --> 01:58:25,040
करते आपके कॉल रिकॉर्डिंग में बोलता है कि इच्छा ही बल है। ठीक है? आप

1691
01:58:25,040 --> 01:58:29,440
बोल रहे थे बल लगेगा पृथ्वी को घुमाने के लिए कोई भी जड़ पदार्थ को

1692
01:58:29,440 --> 01:58:33,680
मूवमेंट देने के लिए कुछ भी तो उसमें बल लगेगा। तो वो बोल रहा नहीं इच्छा ईश्वर लगाता

1693
01:58:33,680 --> 01:58:37,840
है बल नहीं लगाता लेकिन एट द एंड आतेआते बोल देता है कि हां इच्छा ही बल

1694
01:58:37,840 --> 01:58:42,000
है तो फिर यहां पे तो आपका ही बात सिद्ध हो गया ना यदि इच्छा को ही बल मान लिया जाए अगर

1695
01:58:42,000 --> 01:58:46,160
उसके उसके पर्सपेक्टिव से ही तो भी आपकी ही बात सिद्ध हो गई

1696
01:58:46,160 --> 01:58:49,760
इच्छा बल ठीक है और पर वो

1697
01:58:49,760 --> 01:58:53,840
वो क्या सत्ता का जो हम वो वहां

1698
01:58:53,840 --> 01:58:58,320
पर क्या कह रहा है कि जो जो बल ने प्रेशर दिया ना पुश किया उसे

1699
01:58:58,320 --> 01:59:02,640
अगर हम ये कहेंगे पुश किया तो वहां पे ऐसा कुछ है नहीं बस बस वो हो रहा है।

1700
01:59:02,640 --> 01:59:06,640
अब वो है नहीं में वो कनेक्शन तो है नहीं। अच्छा अब बल मान रहे हैं

1701
01:59:06,640 --> 01:59:10,880
तो बल वो इच्छा ही है। अब क्योंकि वो अमुक अमुक तरीके से एक्सजीक्यूशन होना

1702
01:59:10,880 --> 01:59:15,280
है। इसलिए वो ये नहीं कहा जा सकता कि ईश्वर जो है बल के रूप में अवतरित

1703
01:59:15,280 --> 01:59:19,520
हुआ। ये नहीं कहा जा सकता। मगर फिर इच्छा को धारण कैसे किया चेतन

1704
01:59:19,520 --> 01:59:23,600
पदार्थ ने? तो वहां पर वो कह रहा है अब हमसे मत पूछो। तो मैंने कहा तुम हमसे

1705
01:59:23,600 --> 01:59:27,760
क्यों पूछ रहे हो? स्वरूप वो स्वरूप के विरुद्ध क्यों जाता है? बात तो यही से शुरू हुई।

1706
01:59:27,760 --> 01:59:31,760
स्वरूप के विरुद्ध ईश्वर जाता है। यहां तुम चुप हो। हमने यहां से आगे की व्याख्या

1707
01:59:31,760 --> 01:59:35,840
तुम्हें दे दी। ईश्वर अवतरित होता है। ठोस बनके पुश और

1708
01:59:35,840 --> 01:59:40,080
पुल जैसी क्रियाएं वो क्रियान्वित करता है। यहां तुम मौन हो।

1709
01:59:40,080 --> 01:59:44,720
जहां तुम मौन हो गए वहां खत्म। हो गया। हेलो

1710
01:59:44,720 --> 01:59:48,800
टाटा बाय बाय। खत्म फिनिश हो गया। देख लेना वो

1711
01:59:48,800 --> 01:59:53,280
वो है ना मीम है जो एक तो सब

1712
01:59:53,280 --> 01:59:57,760
तो झुके हैं शंकर के सामने। इसीलिए शंकराचार्य अंतिम है।

1713
01:59:57,760 --> 02:00:01,760
यही खत्म हो जाता है। बताओ नहीं तो क्या है वहां पर कनेक्शन

1714
02:00:01,760 --> 02:00:04,880
कैसे हुआ जड़ पदार्थों से? तुम तो अद्वैती नहीं हो। अद्वैती

1715
02:00:04,880 --> 02:00:08,080
बन जाओ हो जाएगा कनेक्शन।

1716
02:00:08,080 --> 02:00:12,240
हां बिल्कुल बिल्कुल भैया। ये जो

1717
02:00:12,240 --> 02:00:16,560
आज आज का जो एक वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग जो निर्भय

1718
02:00:16,560 --> 02:00:20,720
ने अपने चैनल पे डाला था कृषि मंतव्य पे शायद डाला है

1719
02:00:20,720 --> 02:00:24,960
जिस पे जो कॉल रिकॉर्डिंग है तो उस पे चला रहे हैं। उसकी सबसे

1720
02:00:24,960 --> 02:00:28,960
अच्छा हां उसप जो उसकी मूर्खता पूर्ण वाली जो बात की

1721
02:00:28,960 --> 02:00:33,920
ना सबसे पहला ही बात उसमें हेतु पूछा किसका सर्वशक्तिमान का

1722
02:00:33,920 --> 02:00:37,920
हां जी जी बिल्कुल सही अब सर्वशक्तिमान का हेतु पूछ रहा

1723
02:00:37,920 --> 02:00:42,000
है इसका मतलब तुम नहीं मानते वो सर्वशक्तिमान है बोलो ना पहले यार

1724
02:00:42,000 --> 02:00:46,080
घोषित तो करो अपने आप को ठीक है

1725
02:00:46,080 --> 02:00:50,080
अच्छा ठीक है अरे भैया उसका हेतु कार्य का होता है

1726
02:00:50,080 --> 02:00:54,080
ना स्वभाव का थोड़ी होता है हेतु हम

1727
02:00:54,080 --> 02:01:00,080
परिणाम का परिणाम

1728
02:01:08,800 --> 02:01:13,040
अभी एक मिनट एक मिनट इस

1729
02:01:13,040 --> 02:01:17,280
विषय पर अभी बहुत सारी वृहद व्याख्याएं आनी है। आप देखते जाइए

1730
02:01:17,280 --> 02:01:21,520
है ना अभी तो अंगड़ाई है। अभी तो बहुत सारे आचार्य बैठे

1731
02:01:21,520 --> 02:01:25,680
हुए हैं इनके तथाकथित जो अपने तथाकथित

1732
02:01:25,680 --> 02:01:30,320
मंदिरों में जो है जिहादियों के साथ विवाह भी करवा देते हैं।

1733
02:01:30,320 --> 02:01:34,400
सर्टिफिकेट हमें मिले हैं ऐसे। इनका चैप्टर

1734
02:01:34,400 --> 02:01:39,040
आज क्लोज है। आज क्लोजिंग चैप्टर है इनका। ठीक है।

1735
02:01:39,040 --> 02:01:43,280
जी अब कोई जगह नहीं रह गई।

1736
02:01:43,280 --> 02:01:47,360
अरे भैया खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाला बात क्यों शुरू से शुरू

1737
02:01:47,360 --> 02:01:51,360
से लगाइए। खंबा शुरू से लगाओगे लेकिन प्रश्न का

1738
02:01:51,360 --> 02:01:55,600
उत्तर नहीं दे रहा था शुरू से लगाओ ना

1739
02:01:55,600 --> 02:01:59,840
ये शुरू से नहीं है शुरू से नहीं है ये आपके

1740
02:01:59,840 --> 02:02:03,520
पास नहीं है क्या शुरू से

1741
02:02:03,520 --> 02:02:08,160
मैंने वहां पे दिया है शुरू से

1742
02:02:08,160 --> 02:02:14,160
मैंने दिया है वर्किंग वाले में वह चलाइए

1743
02:02:25,200 --> 02:02:31,200
अब यहां तक के स्वरूप भूत लक्षण दिख गए।

1744
02:02:31,520 --> 02:02:35,840
हां तो सारे लक्षण क्लियर हो गए भैया। हम अब स्वरूप भूत लक्षण

1745
02:02:35,840 --> 02:02:41,840
दो हैं। बौखलाहट और नीचता। यह स्वरूप भूत लक्षण देखिए।

1746
02:02:56,720 --> 02:03:02,720
ये है मैंने आपको कर दिया सेंड देखिए

1747
02:03:28,800 --> 02:03:33,120
हेलो हां मेरे जय श्री राम शिवश

1748
02:03:33,120 --> 02:03:39,120
जी निर हो चुका है ये तय किसने किया शिवश जी ने

1749
02:03:40,240 --> 02:03:42,720
यह है

1750
02:03:42,720 --> 02:03:48,720
मिला आपको

1751
02:03:52,240 --> 02:03:56,240
ये भेजा आपको मैंने पर्सनल वाले में

1752
02:03:56,240 --> 02:04:02,240
जी सनातन जी आप कुछ बोल रहे थे शास्त्रवाद जी

1753
02:04:03,680 --> 02:04:08,000
जी भैया अच्छा वही बात है जो एक

1754
02:04:08,000 --> 02:04:12,000
बात यह है जैसे यह वाली एक बात देखिए जो कमेंट आ रहा है सर्वशक्तिमान सर्व

1755
02:04:12,000 --> 02:04:16,000
इच्छावान मैंने यही कहा था कि वह इच्छावान है फिर उसको शक्तिमान मत

1756
02:04:16,000 --> 02:04:20,000
कहो और यदि इच्छावान को शक्तिमान कह सकते हो तो हमें आभास को अवतार क्यों

1757
02:04:20,000 --> 02:04:24,160
नहीं कहने दे रहे हो व्यवहार में प्रतीति को

1758
02:04:24,160 --> 02:04:28,240
जैसे हम सबकी सब चीजों की प्रतीति है तो फिर हमें उसे अवतार क्यों नहीं कहने दे रहे हो

1759
02:04:28,240 --> 02:04:32,560
क्योंकि ईश्वर के द्वारा हो रही इसलिए हम उसको कह रहे हैं ईश्वर का अवतार है

1760
02:04:32,560 --> 02:04:36,640
तो व्यवहार और परमार्थ में ये अपने लिए तो सब कुछ

1761
02:04:36,640 --> 02:04:40,960
अलऊ कर कर लेंगे और यहां मैं इनके हिसाब से बात कर रहा हूं। इनकी

1762
02:04:40,960 --> 02:04:44,960
ही बात के हिसाब से मैं बात कर रहा हूं। ठीक है? तब भी यह नहीं तब भी

1763
02:04:44,960 --> 02:04:48,960
इन्हें दिक्कत है। तो इन्हें दिक्कत किस बात से है? इन्हें दिक्कत इस

1764
02:04:48,960 --> 02:04:53,200
बात से है कि इनको विरोध करना है, द्वेष करना है, पक्षपात करना है,

1765
02:04:53,200 --> 02:04:57,280
अभद्रता करनी है। है ना? नीच मानसिकता

1766
02:04:57,280 --> 02:05:01,760
को प्रश्रय देना है। और अब अब यहां पर देखिएगा और वो पंचरंगी

1767
02:05:01,760 --> 02:05:05,760
ड्रामा विचार उदाहरण ईश्वर

1768
02:05:05,760 --> 02:05:10,000
सहायक फिर जीव का सामर्थ्य और फिर जीव का कोई कनेक्शन नहीं। यह

1769
02:05:10,000 --> 02:05:16,000
अंत में इन्होंने वहां बकलोली की है। हम

1770
02:05:16,720 --> 02:05:20,720
और ये सब होने के बाद में हम जीत गए। हम जीत गए।

1771
02:05:20,720 --> 02:05:25,040
मामा आ गए। पर मामा आ गए। परंपरा की धज्जियां

1772
02:05:25,040 --> 02:05:29,360
उड़ गई। अपने अपने चैनल पर लाइव में ये बस यही शब्द बोलेंगे। अगर कोई पूछे भाई कैसे

1773
02:05:29,360 --> 02:05:33,600
तो कैसे का जवाब नहीं है इनके पास। इससे एक बात और याद आई मुझे।

1774
02:05:33,600 --> 02:05:37,760
इसमें मैंने देखा था यह अपने लाइव में बोल रहा था बड़ा

1775
02:05:37,760 --> 02:05:41,760
दांतों को पीसते हुए बोल रहा था कि आपने जो नरेटिव फैलाया है ना मैं

1776
02:05:41,760 --> 02:05:45,760
उसको नाश कर दूंगा तो भाई मुझे तो बहुत अच्छा लगा मुझे

1777
02:05:45,760 --> 02:05:49,840
पता चला कि मैंने कुछ किया जिससे लोगों मैं

1778
02:05:49,840 --> 02:05:53,920
कहता नहीं हूं तुमने तो मेरी उस चीज पर ठप्पा लगा दिया ये कह करके जो

1779
02:05:53,920 --> 02:05:58,000
मैं कहता हूं कि वो वो जो बंटी और बबली का वो नहीं रात

1780
02:05:58,000 --> 02:06:02,000
को उसकी नींद नींद जो है उड़ गई थी रात में खटिया से उठ के खड़ा

1781
02:06:02,000 --> 02:06:06,160
हो जाता है तो वो बात मैं कहता था ना ये हुआ है तो वो

1782
02:06:06,160 --> 02:06:10,160
नरेटिव अपना काम कर रहा है। ईश्वर वही है जो

1783
02:06:10,160 --> 02:06:14,320
कुछ भी कर सकता है। ईश्वर सर्वशक्तिमान है

1784
02:06:14,320 --> 02:06:18,320
और जिस किसी माई के लाल में दम हो वो आ जाए अपना हेतु पेतु

1785
02:06:18,320 --> 02:06:22,320
सब लेकर के उसको उसको हम व्यवहार से परमार्थ का सेतु

1786
02:06:22,320 --> 02:06:28,000
बना देंगे। ठीक है? शिवश

1787
02:06:28,000 --> 02:06:32,640
हां जी प्ले करिए। शिवश जी निरुत्तर हो चुके हैं। ये तय किसने किया है?

1788
02:06:32,640 --> 02:06:36,640
ये तो जनता ने तय किया है जी। कौन सी जनता ने नारा है? आपको

1789
02:06:36,640 --> 02:06:41,200
कौन सी जनता से चाहिए सर्टिफिकेट? जनता मतलब कोई आपका पैरामीटर

1790
02:06:41,200 --> 02:06:46,080
होगा जनता ने किया है। पॉज करिए पॉज करिए।

1791
02:06:46,080 --> 02:06:50,240
देखिए इसका एक स्किल तो मानेंगे जहां ये व्यक्ति फंसता है तो वहां सामने

1792
02:06:50,240 --> 02:06:54,320
वाले पे सवाल डालता है। ठीक है? इसने इन्होंने क्या पूछा? कौन सी जनता ने

1793
02:06:54,320 --> 02:06:58,720
तय किया है? तो आपको कौन सी जनता यहां पे? क्योंकि सवाल होगा नहीं जवाब।

1794
02:06:58,720 --> 02:07:02,880
तो क्या जैसे इसी प्रकार से जब जब मैंने यह कहा कि

1795
02:07:02,880 --> 02:07:06,880
भैया वहां पर वो क्या आया जड़ पदार्थ पर क्या आकर

1796
02:07:06,880 --> 02:07:10,880
के लगा जो वो क्रिया हुई तो उसने क्या कहा

1797
02:07:10,880 --> 02:07:14,960
शास्त्र में दिया है कि नहीं आपके वाले या फिर जो है परंपरा ले आए

1798
02:07:14,960 --> 02:07:19,120
दूसरा विषय खोद दिया आप देखिएगा लास्ट वाला चैप्टर यही वाला जो अभी सुनाया

1799
02:07:19,120 --> 02:07:23,440
था वहां पे ऐसे जब मैं इसको बता दूंगा कि भैया ऐसे ऐसे तुम बार-बार

1800
02:07:23,440 --> 02:07:27,600
निरुत्तर हो रहे हो तो वहां पर जवाब देने चलेगा मैं इसको समझा देता हूं फिर दूसरा विषय

1801
02:07:27,600 --> 02:07:31,680
ले आएगा और अगर सामने वाले के मुख से शक्तिमान निकल गया तो फिर

1802
02:07:31,680 --> 02:07:35,760
यह बोलेगा शक्तिमान से आप कैसे समझते हो क्या समझते हो मतलब वो चर्चा ही छोड़ दो

1803
02:07:35,760 --> 02:07:39,760
जो हो रही थी तो कौन सी जनता आपको चाहिए भाई

1804
02:07:39,760 --> 02:07:43,360
तुमने क्लेम किया है ना तुम अपना दावा बताओ स्वतंत्र रूप से

1805
02:07:43,360 --> 02:07:47,440
कि कैसे तुमने तुम्हारी क्या विधि है जनता को सेलेक्ट करने की अच्छा

1806
02:07:47,440 --> 02:07:51,840
इसी इसी रिकॉर्डिंग में आगे ये क्या कहेगा यह तो आत्मश्रय

1807
02:07:51,840 --> 02:07:55,920
हो गया आत्मश्रय का दोष आ गया कि मैंने अगर कोई

1808
02:07:55,920 --> 02:07:59,920
क्लेम किया तो उसको उसको क्यों माना जाए? क्योंकि मैं कह

1809
02:07:59,920 --> 02:08:04,080
रहा हूं इसलिए तो यहां पर यह जनता ने डिसाइड कर लिया है

1810
02:08:04,080 --> 02:08:08,160
कि शिवश जो है उस चर्चा में हालांकि खुद ही पीछे पड़े सिद्धांतिक चर्चा के वो

1811
02:08:08,160 --> 02:08:12,320
सब बातें हम बता रहे मगर मगर जब इनसे

1812
02:08:12,320 --> 02:08:16,480
पूछा गया कौन सी जनता ने तय किया है तो इस पर इनका जवाब नहीं है। तो यहां भी तो आत्माश्रय

1813
02:08:16,480 --> 02:08:20,720
का दोष है। जनता ने डिसाइड किया है तो यहां पर तुम

1814
02:08:20,720 --> 02:08:24,960
इस विषय में तुम्हारे पास प्रमाण क्या है? जनता ने डिसाइड किया है।

1815
02:08:24,960 --> 02:08:29,600
क्या प्रमाण है? आत्माश्रय मैं कह रहा हूं इसलिए मान लो

1816
02:08:29,600 --> 02:08:34,080
ठीक से तुमको पाला नहीं पड़ा ना तुमको थोड़ा लाइटली ले लिया हमने

1817
02:08:34,080 --> 02:08:38,320
डोमिनेटिंग तरीके से तुमसे बात नहीं की खाल खींचना

1818
02:08:38,320 --> 02:08:43,120
किसे कहते हैं पता चलता है तुमको चलो

1819
02:08:43,120 --> 02:08:47,200
शिवश जी निरुत्तर हो चुके हैं ये तय किसने किया है ये

1820
02:08:47,200 --> 02:08:51,280
तो जनता ने तय किया है जी कौन सी जनता ने आगे बढ़ाओ आपको कौन सी

1821
02:08:51,280 --> 02:08:55,520
जनता से चाहिए सर्टिफिकेट जनता मतलब कोई आपका पैरामीटर

1822
02:08:55,520 --> 02:08:58,400
होगा ना कि कहां की जनता ने किया है। किस जनता ने किया

1823
02:08:58,400 --> 02:09:02,480
है। जहां पे जैसे वो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे रहते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे ही जनता

1824
02:09:02,480 --> 02:09:06,720
उन्हें आईना दिखा रही है। जी तो आपको मेरा नंबर कहां से मिल गया? पॉज करो पॉज

1825
02:09:06,720 --> 02:09:11,200
करो। पॉज करो। हमने दिया था। पॉज करो। एक बात बताओ

1826
02:09:11,200 --> 02:09:15,280
संख्या की ही अगर बात कर ले। ठीक? तो संख्या

1827
02:09:15,280 --> 02:09:19,280
के हिसाब से तो इनको जनता आईना दिखा रही है। क्योंकि हमारे पास

1828
02:09:19,280 --> 02:09:23,280
ज्यादा संख्या है भाई। अगर संख्या से निर्णय होना है तो इनका

1829
02:09:23,280 --> 02:09:27,280
सिद्धांत वो तो हमारे पास ज्यादा है तो उस हिसाब

1830
02:09:27,280 --> 02:09:31,280
से तो हमने तुम्हें पुनरुत्तर किया अगर तुम्हारा ये सिद्धांत ले लिया जाए और

1831
02:09:31,280 --> 02:09:35,280
दूसरी बात हां दूसरी बात वो पूछ रहा है स्पष्ट पैरामीटर कि

1832
02:09:35,280 --> 02:09:39,280
जनता डिसाइड कैसे कर रहे हो तो इनके पास स्पष्ट पैरामीटर है नहीं

1833
02:09:39,280 --> 02:09:43,280
हम इनके पास स्पष्ट पैरामीटर है ही नहीं वहां पर भी ये नहीं है कि

1834
02:09:43,280 --> 02:09:49,280
इतने लोगों ने वोट दिया हमने वोटिंग कराई है ये है वो है ना चलो

1835
02:09:50,000 --> 02:09:54,000
जी जी आपने Instagram पर दिया था। आपने Instagram पर अपना नंबर दिया था।

1836
02:09:54,000 --> 02:09:58,080
कब दिया था? कितने महीने पहले या कब दिया था? मैं आपको स्क्रीनशॉट भेज

1837
02:09:58,080 --> 02:10:02,160
दूंगा। आपने अपना एक वीडियो उसके अंदर डाल रखा है जिसमें आपने नीले रंग की हाईलाइट

1838
02:10:02,160 --> 02:10:07,600
है। पूरा नंबर लिख रखा है। अच्छा आपकी इंस्टा आईडी है। जी।

1839
02:10:07,600 --> 02:10:11,840
मैं वही बता तो रहा हूं। मैं आपकी वो वीडियो ही देख रहा था। और

1840
02:10:11,840 --> 02:10:15,840
फिर एक काम करिए ना। मुझे पूरी उम्मीद है पॉज

1841
02:10:15,840 --> 02:10:19,840
करो। पूरी उम्मीद है कि इन्होंने अपना नंबर नंबर नहीं दिया है निर्भय को

1842
02:10:19,840 --> 02:10:24,160
कभी भी। ठीक है? जहां तक है इन्होंने इनके

1843
02:10:24,160 --> 02:10:28,480
किसी उस पर कमेंट किया है Facebook पर और Facebook पर कमेंट

1844
02:10:28,480 --> 02:10:32,480
करने के बाद अ जो है निर्भय

1845
02:10:32,480 --> 02:10:36,720
ने इनकी प्रोफाइल चेक की। प्रोफाइल में इनका नंबर मिल गया तो इन्होंने इनको निर्भय

1846
02:10:36,720 --> 02:10:40,800
ने नंबर लगा लिया। अब निर्भय का यह कहना कि आपने नंबर दिया है। यह अपने

1847
02:10:40,800 --> 02:10:45,520
आप में एक झूठ हो सकता है। पूरी संभावना है कि निर्भय को क्योंकि बहुत पहले

1848
02:10:45,520 --> 02:10:49,680
यह कार्य नहीं कर रहे थे कि वो जो है किसी को फोन करें। अभी

1849
02:10:49,680 --> 02:10:53,920
इन्होंने चालू किया। तो अच्छा बहुत पहले क्यों दिया होगा

1850
02:10:53,920 --> 02:10:57,920
इन्होंने क्यों मांगा होगा यह भी बात है। तो जब इन्होंने कहा स्क्रीनशॉट भेज

1851
02:10:57,920 --> 02:11:02,000
दो तो इन्होंने स्क्रीनशॉट ना भेजकर यह कहा अभी तो यह बता दीजिए। समझ रहे

1852
02:11:02,000 --> 02:11:05,360
हो? तो इस विषय में भी वहां पर वहां से क्विट किया

1853
02:11:05,360 --> 02:11:09,520
तुरंत और सोचते हैं कि मैंने बहुत बड़ा तीर तीर मार लिया और

1854
02:11:09,520 --> 02:11:13,760
अभी इसी लाइव में अपने ही बोले हुए वचनों

1855
02:11:13,760 --> 02:11:17,840
से तुम विमुख जाओगे और फिर उसी ऐसी रिकॉर्डिंग को तुम

1856
02:11:17,840 --> 02:11:22,000
अपने चैनल पर डालोगे और तुम्हारे लोग कहेंगे वाह वाह वाह वाह कैसी नीच

1857
02:11:22,000 --> 02:11:26,240
मानसिकता है भाई ये तुमने अपनी ही बातों को यहां पर भंग

1858
02:11:26,240 --> 02:11:30,320
किया है विरोध किया तुमने अपनी बातों का तुमने मुझे

1859
02:11:30,320 --> 02:11:34,400
बोला था गौरी शंकर के बाद कौन गुरु नहीं अज्ञात है। यहां तुम अपनी

1860
02:11:34,400 --> 02:11:38,400
वंश परंपरा गिनाने लगे हो गुरुओं में और उनको चेक किया जाएगा तो हो सकता

1861
02:11:38,400 --> 02:11:42,720
है मूर्ति पूजक निकल आए। ये कैसी नीच मानसिकता

1862
02:11:42,720 --> 02:11:46,880
है भाई? तो ये है स्वरूप भूत लक्षण। दूरता तक तो आ गए

1863
02:11:46,880 --> 02:11:51,040
थे। पंचरंगी ड्रामे तक आ गए थे। अब बौखलाहट और नीचता यहां से आएगी। स्वरूप भूत

1864
02:11:51,040 --> 02:11:54,480
लक्षण। हां भाई चलाओ।

1865
02:11:54,480 --> 02:11:58,640
जी जी बताइए। आपको एक नंबर दे देता हूं। आप लाइव आ जाइए। लाइव जनता के सामने

1866
02:11:58,640 --> 02:12:02,640
बैठ के और इस विषय पर निराकरण निकाल लेंगे तो आपसे चर्चा

1867
02:12:02,640 --> 02:12:07,200
होगी लाइव में आपकी थोड़ी सुंदर आपका कॉन्फिडेंस अच्छा लग रहा है

1868
02:12:07,200 --> 02:12:12,400
तो आप लाइव आइए आवाहन कॉल ऑफ ध चैनल है मैं बोल रहा हूं नंबर

1869
02:12:12,400 --> 02:12:16,480
अच्छा लाइव पे हो चुकी है लाइव पे ही हो चुकी है आचार्य जी क्या नाम

1870
02:12:16,480 --> 02:12:20,480
है आपका मेरा नाम निर्भय आर्य है तो ये तय अच्छा निर्भय

1871
02:12:20,480 --> 02:12:24,640
आर्य है आपका नाम तो ये तय आपने खुद कर लिया क्या कि वो निरुत्तर हो चुके हैं

1872
02:12:24,640 --> 02:12:28,640
मैं कह तो रहा हूं मैंने तो तय नहीं करा मैं तो जनता का नाम लिया तो जनता आपसे फोन

1873
02:12:28,640 --> 02:12:32,640
करके कह रही है क्या और एक मिनट इन्होंने जनता का नाम लिया

1874
02:12:32,640 --> 02:12:36,720
और इन्होंने जनता का नाम लिया और जनता

1875
02:12:36,720 --> 02:12:41,600
ने क्या तय किया ये ये कैसे तय हुआ कि यह मैंने कहा ये आत्मश्रय

1876
02:12:41,600 --> 02:12:47,280
हैं ये आत्मश्रय ना अभी देखना आगे कहेंगे आत्मश्रय

1877
02:12:47,280 --> 02:12:52,000
तो उस जनता में मान लीजिए अगर कोई दो व्यक्ति हैं

1878
02:12:52,000 --> 02:12:56,240
अगर एक कहता है कि आप विजय है और एक कहता है आप पराजित है तो किसका मानेंगे आप

1879
02:12:56,240 --> 02:13:00,240
मैं इसका सोलशन दे देता हूं। कैसे मानना है। देखो आप बताओ जिस सिद्धांत को

1880
02:13:00,240 --> 02:13:04,240
आप मानते हो वो ठीक है कि गलत है? नारायण हम

1881
02:13:04,240 --> 02:13:08,320
तो परंपरा से मानते हैं तो हमारे परंपरा से परंपरा से सही मानते हो ना तो उत्तर दे

1882
02:13:08,320 --> 02:13:12,560
दो हो जाएगा सिद्ध हम आपसे बात करना थोड़ी चाहते फोन किए हैं

1883
02:13:12,560 --> 02:13:17,280
अब देखो यदि कोई व्यक्ति पॉज करो

1884
02:13:17,280 --> 02:13:21,280
यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि मैंने एक मैच देखा मान लो और

1885
02:13:21,280 --> 02:13:25,360
मैंने देखा कि फलाना व्यक्ति उस मैच में जीत गया वो शास्त्रार्थ का मैच था

1886
02:13:25,360 --> 02:13:29,600
डिबेट थी तो इसका मतलब यह हो गया कि उस डिबेट

1887
02:13:29,600 --> 02:13:33,760
में कौन सा पक्ष जीता है। अगर उसका समर्थन करने वाला

1888
02:13:33,760 --> 02:13:35,600
जो व्यक्ति है, वह उसी

1889
02:13:35,600 --> 02:13:39,680
पक्ष को यथावत रख दे उसी व्यक्ति के साथ जिस सामने जिस जिसके साथ

1890
02:13:39,680 --> 02:13:43,680
वो डिबेट हुई है। यह सिद्धांत है यह निर्णय का कि उस मैच में कौन

1891
02:13:43,680 --> 02:13:47,840
जीता था। भाई मैच में तो मुस्लिम पक्ष नास्तिक पक्ष

1892
02:13:47,840 --> 02:13:51,840
पर जीत गया। हावी हो हावी रहा। तो इसका मतलब

1893
02:13:51,840 --> 02:13:56,320
यह मान लिया जाए कि नास्तिकता को हराने में जो

1894
02:13:56,320 --> 02:14:00,320
मुस्लिम पक्ष है वो समर्थवान है। नहीं है। नहीं हरा

1895
02:14:00,320 --> 02:14:04,400
पाएगा। नास्तिकता को नास्तिक कोई प्रबुद्ध व्यक्ति तुम ही खड़े हो जाओगे

1896
02:14:04,400 --> 02:14:09,280
मुसलमानों के सामने नहीं हरा पाएंगे नास्तिकता को क्यों

1897
02:14:09,280 --> 02:14:13,360
तो कहने का मतलब यह है कि उस मैच में पर्टिकुलरली कौन जीता

1898
02:14:13,360 --> 02:14:17,760
भले ही हारने वाले का जो सिद्धांत था वो

1899
02:14:17,760 --> 02:14:21,840
वाकई में वो सिद्धांत बलवान है मगर उससे यह सिद्ध नहीं होगा कि उस

1900
02:14:21,840 --> 02:14:25,920
मैच में पर्टिकुलरली कौन जीता तो यह तुमने जो यहां पर तरीका दिया कि

1901
02:14:25,920 --> 02:14:29,920
मैच में अभी पता लगा लेते हैं यह कहां से आया बड़बोले

1902
02:14:29,920 --> 02:14:33,920
बौख बौखलाहट जो बौखलाहट भरी हुई है जो तुम्हारा वो पगलप्पन दिखा है

1903
02:14:33,920 --> 02:14:38,000
ना दो घंटे 47 मिनट के बाद जो पगलप्पन दिख रहा है जो

1904
02:14:38,000 --> 02:14:42,000
तुम्हारी बकवास वहां पर सुनने में मिल रही है उस बौखलाहट को तुम यहां निकाल रहे

1905
02:14:42,000 --> 02:14:46,080
हो ये कुतर्क करके कि तुम मुझे सिद्ध कर दो तो मान

1906
02:14:46,080 --> 02:14:50,320
लिया जाएगा उसमें शिवश जीते अरे भैया अगर यहां पे तुम भी जीत जाते हो

1907
02:14:50,320 --> 02:14:50,820
तब

1908
02:14:50,640 --> 02:14:55,040
भी यह सिद्ध नहीं होता कि वहां पर जो है तुम जीते या शिवश जीते

1909
02:14:55,040 --> 02:14:59,120
यहां पर शिवश जी का पक्ष गलत हो जाता है तब भी वहां पर यह सिद्ध नहीं होगा कि

1910
02:14:59,120 --> 02:15:03,120
निर्भय जीता और यहां पर निर्भय का पक्ष गलत सिद्ध हो जाएगा तब भी यह सिद्ध नहीं होगा

1911
02:15:03,120 --> 02:15:07,200
कि वहां पर शिवांग जीता क्योंकि पर्टिकुलर उस मैच में

1912
02:15:07,200 --> 02:15:11,280
किसका परफॉर्मेंस कैसा था वहां पर हारजीत इस बात पर निर्भर करती है

1913
02:15:11,280 --> 02:15:15,360
बाद में कौन सा सिद्धांत सही है कौन सा गलत है वो बात अलग है

1914
02:15:15,360 --> 02:15:19,520
उस मैच की बात अलग है ठीक है तो ये तुमने कुतर्क किया चला

1915
02:15:19,520 --> 02:15:23,600
आओ आगे भैया दिखवाना है मैंने तो बोला नहीं मैंने मैंने ये शब्द

1916
02:15:23,600 --> 02:15:27,600
बोले ही नहीं कि मुझे कुंडली दिखाना है मैंने तो ये पूछे कि ईश्वर से संबंधित है ये बता दीजिए ईश्वर कुछ

1917
02:15:27,600 --> 02:15:31,600
भी कर सकता है तो इसका हेतु क्या है दे दीजिए देख लेते हैं परंपरा कितना ज्ञान ले रखा है आपने अभी दूध

1918
02:15:31,600 --> 02:15:35,680
का दूध तो हमने तो कहा नहीं कि हम आपसे डिबेट करेंगे आप शिवश जी से डिबेट

1919
02:15:35,680 --> 02:15:40,320
तो मैं कर ही नहीं रहा हूं आचार्य जी डिबेट की तो योग्यता परंपरा में है ही नहीं मैं तो बोल रहा हूं केवल प्रश्न

1920
02:15:40,320 --> 02:15:44,400
नहीं तो आप ऐसे करो मैंने बीच में है

1921
02:15:44,400 --> 02:15:48,480
कोई कोई कहीं पर भी हो उसने तुरंत फोन लगाया कि आप

1922
02:15:48,480 --> 02:15:52,560
जो है मुझे प्रश्नों का उत्तर दो ठीक है और मैं डिबेट नहीं कर रहा हूं

1923
02:15:52,560 --> 02:15:56,560
मैं तो प्रश्न कर रहा हूं ठीक है मैं डिबेट नहीं कर

1924
02:15:56,560 --> 02:16:00,640
रहा हूं मैं प्रश्न कर रहा हूं और डिबेट किसे कहते प्रश्न किसे कहते हैं? चर्चा किसे कहते

1925
02:16:00,640 --> 02:16:04,640
हैं? वह सब सोचने वाली बातें हैं। मगर व्यक्ति पर किस प्रकार

1926
02:16:04,640 --> 02:16:05,760
से हावी हो रहा है कि यह

1927
02:16:05,760 --> 02:16:09,920
तरीका है। अच्छा उनका जो उनकी जो प्रोफाइल है ना

1928
02:16:09,920 --> 02:16:14,160
Facebook की प्रोफाइल वो प्रोफाइल है ज्योतिष के रूप में। ठीक है?

1929
02:16:14,160 --> 02:16:18,400
तो उनको जब कोई अनजान नंबर आता है तो उनको लगता है कि किसी ने ज्योतिष विषय

1930
02:16:18,400 --> 02:16:22,800
में हमसे परामर्श के लिए फोन किया होगा। तो उनके पास आया।

1931
02:16:22,800 --> 02:16:26,880
उन्होंने उनसे किसी ने कहा 510 मिनट का टाइम है तो उन्होंने कहा हां है

1932
02:16:26,880 --> 02:16:30,880
भाई जिस विषय में वो रेडी है उस विषय के लिए है अगर और कोई विषय

1933
02:16:30,880 --> 02:16:35,040
है तो हमें समय लगेगा मगर वो कह रहा है नहीं यही दो अभी दो समय भी नहीं

1934
02:16:35,040 --> 02:16:39,600
है ठीक है समय भी नहीं है देखना अभी आगे ठीक है

1935
02:16:39,600 --> 02:16:43,680
कोई वीडियो बनाने दिया है आपने नंबर दिया है ना आप स्क्रीनशॉट भेज दीजिए मैं

1936
02:16:43,680 --> 02:16:48,320
देख लेता हूं मैं भेज दूंगा आपने कमेंट पॉज करो पॉज करो पॉज करो स्क्रीनशॉट

1937
02:16:48,320 --> 02:16:52,400
मांग रहे हैं भेजने को कह रहे हैं पर झूठा व्यक्ति यह स्वरूप स्वरूप

1938
02:16:52,400 --> 02:16:56,800
भूत लक्षण है दोगलापन और झूठा यह

1939
02:16:56,800 --> 02:17:00,800
स्वरूपभूत लक्षण है इन लोगों का धोखाधड़ी झूठ नीचता

1940
02:17:00,800 --> 02:17:06,560
द्वेष पक्षपात पक्षपाती विरोधी

1941
02:17:06,560 --> 02:17:10,560
और अन्याय सहष्णुता ये सब इनके स्वरूपभूत

1942
02:17:10,560 --> 02:17:15,520
लक्षण है। झूठ पर आधारित चीजें झूठ पर लड़ेंगे।

1943
02:17:15,520 --> 02:17:19,680
वो कह रहे तुम्हारी परंपरा क्या है? तो झूठी परंपरा बता रहे हैं जिसका ना सर

1944
02:17:19,680 --> 02:17:21,360
है ना पैर है

1945
02:17:21,360 --> 02:17:25,840
और ऐसे व्यक्ति से जाकर के चर्चा की जाए उसके लाइफ में जिस जो अपने सिद्धांतों

1946
02:17:25,840 --> 02:17:31,840
को बदल रहा है बार-बार अब इसमें और भव्य राधा कृष्ण दास में क्या अंतर रह गया बताइए

1947
02:17:32,960 --> 02:17:38,400
चलिए प्ले करिए भेज दूंगा आप प्रश्न का उत्तर दे दो पहले

1948
02:17:38,400 --> 02:17:43,200
सुंदर विषय मैं कहां हूं कैसे हूं इसकी कोई

1949
02:17:43,200 --> 02:17:47,280
प्रश्न का उत्तर पहले भेज दो क्यों दे दे भाई ये तय कौन कौन कर रहा है कि

1950
02:17:47,280 --> 02:17:51,680
पहले किसकी बात मानी जाएगी? सबसे बड़ी बात है फोन तो तुमने किया है।

1951
02:17:51,680 --> 02:17:57,040
चाहिए तो तुम्हें तो निवेदन तो तुम्हारा है तो निर्णायक तो सामने वाला हो गया।

1952
02:17:57,040 --> 02:18:01,200
तो पहले और बाद में तो निर्णय वो लेगा फिर जिसके पास तुमने फोन किया है। नहीं

1953
02:18:01,200 --> 02:18:04,240
तो रख दो फोन।

1954
02:18:04,240 --> 02:18:09,200
भाई तुम आए हो ना हमारे द्वारे।

1955
02:18:09,200 --> 02:18:13,200
चलो व्यवस्था कोई जानकारी आपको है नहीं। आप

1956
02:18:13,200 --> 02:18:17,280
एक समय तय कर लीजिए आपने लाइव पे आ जाइए। आपसे मैंने 510 मिनट इसीलिए मांगे

1957
02:18:17,280 --> 02:18:21,360
ना मैंने जी आपने दिए आप आप किस परंपरा

1958
02:18:21,360 --> 02:18:25,520
से हैं? मैं किस परंपरा से हूं? मैं तो वही ऋषियों की परंपरा से हूं।

1959
02:18:25,520 --> 02:18:29,600
कौन सी परंपरा है? आप बताते हैं कौन-कौन सी परंपरा जानते हैं आप? नहीं मैं

1960
02:18:29,600 --> 02:18:33,600
तो कुछ नहीं जानता। पॉज करो पॉज करो। पॉज करो। पॉज करो। देखो

1961
02:18:33,600 --> 02:18:37,760
इसने क्या कहा? आप बताइए आप। देखो जहां पे अपना पक्ष कमजोर है वहां तुरंत सामने वाले

1962
02:18:37,760 --> 02:18:42,000
पे क्वेश्चन। सामने वाले पे काउंटर। हां हां यही चाल है। काउंटर नहीं

1963
02:18:42,000 --> 02:18:46,400
काउंटर नहीं क्वेश्चन। काउंटर नहीं क्वेश्चन। आप बताइए आप बताइए

1964
02:18:46,400 --> 02:18:50,480
भाई तुमसे सवाल किया गया तुम्हारी परंपरा अब्बा डब्बा डब्बा हो गया मैं तो ऋषियों

1965
02:18:50,480 --> 02:18:54,480
की परंपरा सामने वाले पे क्वेश्चन चिपका दिया

1966
02:18:54,480 --> 02:18:58,640
कि नहीं जहां ढीला होते हैं वहां सामने वाले पे क्वेश्चन करते हैं ये क्वेश्चन करते

1967
02:18:58,640 --> 02:19:02,640
हैं प्रश्न क्यों कर रहे हैं फोन तो आप किया ना नहीं तो

1968
02:19:02,640 --> 02:19:07,040
आप जब जिस विषय में आपको जानकारी नहीं उस विषय में कैसे प्रश्न कर रहे हैं आप फोन तो आपने किया

1969
02:19:07,040 --> 02:19:11,040
फोन मैंने किया तो मैं प्रश्न पॉज करो परंपरा के विषय

1970
02:19:11,040 --> 02:19:15,040
में यह ना मालूम होना कि मेरी और कौन सी परंपरा उन्होंने यह कहा

1971
02:19:15,040 --> 02:19:19,200
इसको दुर्जंतोषनाय कहते हैं। मेरी तो कोई नहीं है। अब बताओ। ठीक। मगर इसका

1972
02:19:19,200 --> 02:19:24,320
मतलब परंपरा के विषय में ही जानकारी नहीं है। कहां से सिद्ध हुआ?

1973
02:19:24,320 --> 02:19:24,820
भाई

1974
02:19:24,480 --> 02:19:28,480
परंपरा का मतलब है कि तुम किस चैन से वेदों को प्राप्त कर रहे

1975
02:19:28,480 --> 02:19:32,480
हो? वो चैन क्या है तुम्हारी? अगर मुझको मेरी चैन

1976
02:19:32,480 --> 02:19:36,800
नहीं पता है तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि मुझे सिद्धांत ही नहीं पता। चैन का

1977
02:19:36,800 --> 02:19:40,880
चैन का सिद्धांत चैन का सिद्धांत मालूम होना यह

1978
02:19:40,880 --> 02:19:44,880
और मुझे मेरी पर्टिकुलर परंपरा का नाम ना मालूम होने में अंतर है।

1979
02:19:44,880 --> 02:19:48,960
ठीक है? तो तुम्हारा जो प्रश्न है वहां पर कि तुमको जब ये तुमको जिस विषय में

1980
02:19:48,960 --> 02:19:52,960
जानकारी नहीं है उस विषय में प्रश्न क्यों कर रहे हो? तो इस तरीके से तो वो भी कह

1981
02:19:52,960 --> 02:19:57,040
देंगे। तुमको जिस विषय में जानकारी नहीं तुम क्यों प्रश्न कर रहे हो? वो भी कह

1982
02:19:57,040 --> 02:19:59,280
देंगे।

1983
02:19:59,280 --> 02:20:02,080
ठीक है?

1984
02:20:02,080 --> 02:20:06,720
तो पहली बात क्या है कि जब जब कठोर प्रश्न आया तो तुरंत

1985
02:20:06,720 --> 02:20:10,880
जब कठोर प्रश्न आया तो तुरंत कौन सी कौन-कौन सी परंपरा को आप जानते हैं?

1986
02:20:10,880 --> 02:20:16,880
ठीक है? चलाइए थोड़ा स्पीड बढ़ा दीजिए। डेढ़ की स्पीड में चलाइए आप।

1987
02:20:28,080 --> 02:20:32,080
सुंदर हो ना कबूतर। नहीं तो मैं कह रहा हूं ना आप अपनी परंपरा बताइए अपना परिचय बताइए मैंने बताया

1988
02:20:32,080 --> 02:20:36,160
तो मेरा नाम निर्भय आर्य है परंपरा इन लोगों से हम लोग डिबेट नहीं करते हैं अरे भैया

1989
02:20:36,160 --> 02:20:40,160
आपके बस का ही नहीं है डिबेट बस का ही नहीं है डिबेट किसी के बस का नहीं मुझे खाली प्रश्न का उत्तर दे दो आप अच्छा डिबेट किसी के

1990
02:20:40,160 --> 02:20:44,320
बस का नहीं है बस आप झूठ में क्यों परेशान हो रहे हैं फिर ये देखो

1991
02:20:44,320 --> 02:20:48,320
देख रहे हो बौखलाहट बौखलाहट देख रहे हो ये बौखलाया इसीलिए इसकी वो

1992
02:20:48,320 --> 02:20:52,560
रिकॉर्डिंग डाल दी गई ना इसकी चीजें डाल दी गई उसमें

1993
02:20:52,560 --> 02:20:56,560
इसका वो पगलप्पन दिख रहा है लास्ट में अरे लोग कह रहे होंगे अरे निर्भय

1994
02:20:56,560 --> 02:21:00,640
भाई तुम क्या करके चले आए हो वहां लास्ट में तो तुमने बिल्कुल मट्टी

1995
02:21:00,640 --> 02:21:04,880
कुटवा दी हमारी विचार है और जीव है वो

1996
02:21:04,880 --> 02:21:08,880
ये करता है जीव अपने सामर्थ्य से करता है ईश्वर ही

1997
02:21:08,880 --> 02:21:12,960
सहायक है और जीव का कोई लेना देना भी नहीं है पांच छह बातें कह दी

1998
02:21:12,960 --> 02:21:18,960
एक दूसरे परस्पर विरोधी हम

1999
02:21:19,520 --> 02:21:23,520
भले ही हो जाएगा क्या यहीं से मुझसे फिर आप जवाब दे दो प्रश्न का उत्तर मैं नहीं देना

2000
02:21:23,520 --> 02:21:27,600
चाह रहा हूं मैं आपसे बात नहीं करना चाह रहा हूं जब तक आप अपने प्रश्न नहीं बताएंगे इतनी बहस करोगे लेकिन प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहा था

2001
02:21:27,600 --> 02:21:31,600
अरे भैया सानी बिल्ली खंबा नोचे वाला बात क्यों हो रहे हो खंबा सर क्यों नच हो रहे हो खंबा खंबा मत नचो

2002
02:21:31,600 --> 02:21:35,760
कौन आपने किया है आप अपना परिचय बता नहीं रहा है किस परंपरा से आ रहे है बोल रहा हूं व्याकरण की परंपरा

2003
02:21:35,760 --> 02:21:39,840
हो तो किस परंपरा से हो भाई व्याकरण की परंपरा सुनाई नहीं दे रही क्या व्याकरण की परंपरा है तो आपके गुरु का क्या नाम है बताइए अपने

2004
02:21:39,840 --> 02:21:43,840
गुरु का मेरे गुरु का नाम है महर्षि दयानंद सरस्वती जी उनके गुरु जी का नाम बताइए उनके गुरु का नाम

2005
02:21:43,840 --> 02:21:48,240
है दंड पॉज पॉज पॉज इनके गुरु का नाम

2006
02:21:48,240 --> 02:21:52,640
इनके गुरु का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती है समझ लो डायरेक्ट डायरेक्ट

2007
02:21:52,640 --> 02:21:56,880
तो यहां पे इन्होंने क्या मान लिया कि जैसे ऋषि वशिष्ठ

2008
02:21:56,880 --> 02:22:01,120
जो है वो एक लाख वर्ष तक जीवित रहते थे। ऋषि वशिष्ठ

2009
02:22:01,120 --> 02:22:05,280
इत्यादि। ऐसे ही दयानंद जी भी अभी वो परलोक गमन

2010
02:22:05,280 --> 02:22:09,280
उनका हुआ नहीं है। जहां भी वो गए हो वो हुआ नहीं है अभी और

2011
02:22:09,280 --> 02:22:13,280
जो है वो वो जो है इनके डायरेक्ट इनके गुरु हैं। है ना?

2012
02:22:13,280 --> 02:22:17,440
अच्छा बातें भी बदल रहे हैं। ये बातें बदल रहे हैं बहुत बहुत। हां हां देखो देखो देखो

2013
02:22:17,440 --> 02:22:21,680
देखो इसकी बौखलाहट देखो। गुरु जी का नाम बताइए। उनका नाम है ओमानंद सरस्वती

2014
02:22:21,680 --> 02:22:25,680
जी। उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बताइए। उनका नाम है महर्षि पारायण जी। अच्छा

2015
02:22:25,680 --> 02:22:29,760
हां जी। उनके गुरु जी का नाम बता दीजिए। उनके गुरु का नाम है यज्ञदेव जी। ये परंपरा कहां है?

2016
02:22:29,760 --> 02:22:34,400
किस शास्त्र में है? ये परंपरा हमारे दादा जी के बताई थी। दादा जी ने हमें बता दी। और उनको कहां से ज्ञान मिला?

2017
02:22:34,400 --> 02:22:34,900
अब

2018
02:22:34,560 --> 02:22:37,200
देखो

2019
02:22:37,200 --> 02:22:41,280
अब पॉज करो। पहली बात तो ये अपने अपने

2020
02:22:41,280 --> 02:22:45,360
घर पे ले गए परंपरा के लिए। ठीक है? दूसरी बात ये है ये परम उनका

2021
02:22:45,360 --> 02:22:49,840
कहने का मतलब है कि इसका विवरण हमें किस प्रकार से प्राप्त हो सकता है।

2022
02:22:49,840 --> 02:22:54,000
इस परंपरा का विवरण किस प्रकार फिर हम उसको देखेंगे। तो अभी बात वो आएगी

2023
02:22:54,000 --> 02:22:58,000
कि भाई वो तुम्हारी परंपरा शास्त्रों में है क्या? भैया शास्त्रों में देने की

2024
02:22:58,000 --> 02:23:02,080
बात आ जाएगी तो हम शास्त्रों में दिखा भी देंगे। ठीक है? बात

2025
02:23:02,080 --> 02:23:06,080
यह है कि हमारे विरुद्ध जाते हुए अगर हम जो शास्त्र दिखाएंगे तुम कहोगे नहीं ये तो

2026
02:23:06,080 --> 02:23:10,080
अभी 19वीं सदी में लिखा गया 18वीं सदी बात ये है कि हमारे विरुद्ध जाते

2027
02:23:10,080 --> 02:23:14,080
हुए तुम्हारा स्वतंत्र रूप से वैदिक होना सिद्ध नहीं होगा। ये बात है

2028
02:23:14,080 --> 02:23:18,240
और हमारा हम तुम्हारे इतिहास है। ये तुमने माना हुआ है। दिक्कत

2029
02:23:18,240 --> 02:23:22,320
वाली बात ये भी है। चलो दयानंद जी ने अपनी किताब में लिखा ना होता।

2030
02:23:22,320 --> 02:23:26,640
वेदों के मामले में हम तुम्हारा इतिहास हैं। समझ

2031
02:23:26,640 --> 02:23:31,200
लो इस बात को। समझे? तो इस विषय में वो जो

2032
02:23:31,200 --> 02:23:35,280
बड़ा वाला होता है ना वो हम है। और वो

2033
02:23:35,280 --> 02:23:39,920
जो वो होता है ना समझ लो वो अलंकार है।

2034
02:23:39,920 --> 02:23:43,920
ठीक है? तो हम तुम्हारा इतिहास है। ठीक है?

2035
02:23:43,920 --> 02:23:48,080
तो अब ये बात आएगी ना जैसे इसमें आगे बोलेगा कि परंपरा कहां

2036
02:23:48,080 --> 02:23:49,760
लिखी है? शास्त्रों में दिखा देंगे।

2037
02:23:49,760 --> 02:23:54,080
लिखी है शास्त्रों में परंपरा। शंकराचार्य जी के बाद की बाद की परंपरा

2038
02:23:54,080 --> 02:23:58,400
भी लिखी है। मतलब पूरी यहां तक नहीं मगर शंकराचार्य जी के बाद के कुछ

2039
02:23:58,400 --> 02:24:02,560
आचार्यों के नाम मेंशन है हमारे शास्त्रों में। मगर हम उनको ऐसे

2040
02:24:02,560 --> 02:24:07,520
प्रमाण इन लोगों के समक्ष नहीं रखते। हम रखते ही नहीं वो वाले।

2041
02:24:07,520 --> 02:24:11,520
क्योंकि वो सीधे कहेंगे भैया ये तो वो वो प्रमाण नहीं है। तो हम सीधे उस पर खेलेंगे।

2042
02:24:11,520 --> 02:24:15,600
तुम्हारा प्रमाण है क्या? गुरु कौन है तुम्हारा? तो अब इन्होंने जो ये

2043
02:24:15,600 --> 02:24:19,600
सब बताया है ना ओमानंद जी वगैरह ये अपने अपने घर परिवार पे ले गए। अभी इनहीं

2044
02:24:19,600 --> 02:24:23,680
के यहां जाएंगे तो एक दो हो सकता है इस पीढ़ी में या इनके एक दो पीढ़ी पहले में

2045
02:24:23,680 --> 02:24:27,840
ही इनके यहां मूर्ति पूजा हो रही होगी हम और

2046
02:24:27,840 --> 02:24:31,840
अगर देख लेंगे तो पूरी तरीके से हो सकता है वर्तमान की पीढ़ी इनकी आर समाधि ना

2047
02:24:31,840 --> 02:24:35,840
हो वर्तमान के माता पिता इनके कोई मूर्ति पूजक हो ये भी ये भी होता

2048
02:24:35,840 --> 02:24:40,240
है पीछे से हां हां

2049
02:24:40,240 --> 02:24:44,640
बोला सबसे लास्ट में नाम उनको कहां से ज्ञान मिला है उनको उनके गुरु से ज्ञान मिला उनका नाम बताएंगे

2050
02:24:44,640 --> 02:24:48,720
महर्षि वेद पारायण जी उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बताएंगे यजदत्त पारायण जी उनके पूज्य गुरुदेव

2051
02:24:48,720 --> 02:24:52,720
नाम बताएंगे इंद्रदेव शर्मा जी उनके पूज्य गुरुदेव का नाम बृहस्पति अच्छा तो ये किसी

2052
02:24:52,720 --> 02:24:56,880
शास्त्र में होगा ना शास्त्र में लिखा होता है गुरु के नाम और क्या मुंडोपनिषद में ऋषियों ने अपनी परंपरा बताई

2053
02:24:56,880 --> 02:25:00,960
है भैया अच्छा तो ये बताइए कि ये जो आपके पूरी शंकराचार्य प्रश्न का नाम दीजिए

2054
02:25:00,960 --> 02:25:06,160
ना प्रश्न का जवाब है अरे मेरे इसी बात के अंदर

2055
02:25:06,160 --> 02:25:10,800
हां अब देखो इन्होंने इतने गुरु बता दिए अब आप मेरी रिकॉर्डिंग सुन लीजिएगा

2056
02:25:10,800 --> 02:25:15,200
उसमें इन्होंने वो क्या कहते हैं कोई ओमकारानंद

2057
02:25:15,200 --> 02:25:19,360
जी है उनके बाद अज्ञात गुरु घोषित किए हैं वो बात और है कि दयानंद

2058
02:25:19,360 --> 02:25:23,440
जी की जीवनी हमारे पास आ रही है। आ चुकी पीडीएफ में हार्ड कॉपी में आ

2059
02:25:23,440 --> 02:25:27,440
रही है। उसमें दयानंद जी ने अपनी परंपरा के विषय में क्या-क्या बोला है वो

2060
02:25:27,440 --> 02:25:31,440
इनहीं के ये बात है भाई धूर्तता है ये। आप दयानंद

2061
02:25:31,440 --> 02:25:35,520
जी का नाम लेकर के कि मैं उनका फॉलोअर हूं। उनकी कही हुई बातों के

2062
02:25:35,520 --> 02:25:39,760
विरुद्ध जा रहे हो। अपनी कही हुई बातों को बदल रहे हो। तो तुमसे चर्चा

2063
02:25:39,760 --> 02:25:43,920
की किस बात पे जाए। पहले अपना कोई सिद्धांत तो पकड़ लो कि मैं ये मानता

2064
02:25:43,920 --> 02:25:47,920
हूं। तुम तो कुछ मान ही नहीं रहे हो। बहुत तगड़े तरीके से बातें बदल रही है।

2065
02:25:47,920 --> 02:25:52,000
बहुत तगड़े तरीके से। तुम जब तुम कुछ मान ही नहीं रहे हो तो तुम हो

2066
02:25:52,000 --> 02:25:55,760
कौन? तुम्हारा अस्तित्व क्या है? अब ये नीच मानसिकता कैसे आएगी?

2067
02:25:55,760 --> 02:26:00,640
तो बौखलाहट है। देखो क्या खिसिया नहीं कौन खिसिया रहा है? देखो

2068
02:26:00,640 --> 02:26:04,720
उल्टा सीधा कुछ भी बोलो। कुछ भी बोलो। ये सिद्धांतवादी

2069
02:26:04,720 --> 02:26:08,720
है। ये धर्मरक्षक है। कुछ भी बोलो। ये धर्म रक्षक है। ठीक

2070
02:26:08,720 --> 02:26:12,880
है? हम कहीं भी गए चर्चा में। हमने कभी भी अपने सिद्धांतों का विरोध

2071
02:26:12,880 --> 02:26:17,040
थोड़ी ना किया। वहां पर यथावत उसी को रखा जो है जो

2072
02:26:17,040 --> 02:26:21,040
है कभी भी कोई बात आती है ऐसा थोड़ी ना काम चलाने के लिए थोड़ी देर के लिए कुछ और बोल दिया भव्य

2073
02:26:21,040 --> 02:26:25,200
राधा कृष्ण दास वो अपने ही गुरुओं के विरुद्ध जा रहा है वो जाकर

2074
02:26:25,200 --> 02:26:29,840
के जाकिर नायक का भी सहायता ले रहा है चलो इसी

2075
02:26:29,840 --> 02:26:34,000
का उत्तर है सुनिए अगर जैसे आपने बोला ना कि परंपरा शास्त्र के अंदर होना चाहिए वरना परंपरा परंपरा नहीं मानी जाएगी

2076
02:26:34,000 --> 02:26:38,080
है ना आप ये जो 2500 साल पुरानी जो पूरी शंकराचार्य की परंपरा इस पूरी एक लिस्ट मेरे को दिखा दो

2077
02:26:38,080 --> 02:26:43,440
परंपरा की लिस्ट तो है ना आपके पास तो वो कहां है वो तो वेबसाइट पे डली हुई है ना देख लीजिए

2078
02:26:43,440 --> 02:26:47,440
है 2500 साल पुरानी परंपरा की लिस्ट है 2500 में

2079
02:26:47,440 --> 02:26:53,120
आप क्यों ले रहे हो इधर 2500 में आप क्यों मेरे से ले रहे हो आपके भी धर्म से ले रहे हो तो फिर आप बता दीजिए ना आपकी पुरानी परंपरा

2080
02:26:53,120 --> 02:26:57,680
अगर आपको 25 साल के अंदर अंदर की लिस्ट की नहीं चाहिए मेरे से मांग पूरा लिस्ट भेज देता हूं ना जैसे आप स्क्रीनशॉट

2081
02:26:57,680 --> 02:27:01,680
कहां से भेजोगे वेबसाइट से उठा के भेजोगे भेज दूंगा जो शास्त्र वहां से भेज देते

2082
02:27:01,680 --> 02:27:05,680
हैं आपके 25 साल के मुंड में आप जो नाम बोल देंगे वो सही हो

2083
02:27:05,680 --> 02:27:10,320
जाएगा नहीं आप जो बोलेंगे वो भी सही हो जाएगा हमारे पास उनका कहने का मतलब यह है

2084
02:27:10,320 --> 02:27:11,680
देखो वो

2085
02:27:11,680 --> 02:27:15,760
सामान्य व्यक्ति तो है। यह तो ठीक है। इस विषय में वो तैयार भी नहीं

2086
02:27:15,760 --> 02:27:19,760
थे। मगर बात यह है कि व्यक्ति की बौखलाहट देखो कि कुछ भी बोल

2087
02:27:19,760 --> 02:27:23,840
के सामने वाले को फंसा रहा है। कुछ भी बोल के भाई अपने सिद्धांतों

2088
02:27:23,840 --> 02:27:27,840
को बोलना तू तब सामने वाले को फंसा।

2089
02:27:27,840 --> 02:27:31,920
तब तो बात भी है। तू अपना अपनी चीजों को छोड़ के और सामने

2090
02:27:31,920 --> 02:27:36,240
वाले को कह रहा है कि देखो देखो हमने ये मामा आ गए। मामा आ गए।

2091
02:27:36,240 --> 02:27:40,240
ऐसे थोड़ी ना होता है। कौन जीता है यहां पे? बताओ। दयानंद दयानंद जी तो जीते नहीं।

2092
02:27:40,240 --> 02:27:44,480
आर्य समाजी तो जीते नहीं। अगर मान लो कि वह यहां पर निरुत्तर हो गए तो आर्य

2093
02:27:44,480 --> 02:27:48,960
समाजी जीते क्या? क्योंकि तुमने जो परंपरा बताई वह मेल नहीं खा रही। अच्छा

2094
02:27:48,960 --> 02:27:53,120
यहां ये मान ले निर्भय आर्य जीता क्या? नहीं निर्भय आर्य तो दूसरी जगह

2095
02:27:53,120 --> 02:27:57,200
कह रहा है ये परंपरा ओमकार इनके पीछे कौन जीता भाई? इसको

2096
02:27:57,200 --> 02:28:02,800
कहते हैं फड़ता। और कुछ नहीं है। ये चीजें

2097
02:28:02,800 --> 02:28:06,800
हां आधार हो गया ना। आत्मश्रय दोष लग गया। मैंने बोल दिया मैं बढ़िया हूं

2098
02:28:06,800 --> 02:28:10,560
बस हो गया। नहीं तो

2099
02:28:10,560 --> 02:28:14,640
हां देखो इन्होंने कहा डिबेट में शिवाजी हार गए। यह भी तो आत्मश्रय दोष है।

2100
02:28:14,640 --> 02:28:18,800
अब ये यहां क्या कहेगा कि मैंने तो जनता का नाम लिया। अच्छा जनता ने ये तय

2101
02:28:18,800 --> 02:28:22,800
किया है ये कैसे ये कैसे सिद्ध हुआ? तो वहां पे मैंने तय किया। जनता ने

2102
02:28:22,800 --> 02:28:28,800
ये तय किया है। वहां आत्मश्रय दोष हमसे

2103
02:28:29,040 --> 02:28:35,040
डिबेट कर रहे हैं। मैंने जनता का नाम लिया। फिर कौन सी जनता मैं कह रहा हूं दो

2104
02:28:35,520 --> 02:28:39,760
व्यक्ति बैठे हैं कह रहा है जब वह पूछ रहे हैं कौन सी जनता तो कह रहा है कि

2105
02:28:39,760 --> 02:28:43,920
आप बता दो कौन सी जनता प्रश्न का जवाब प्रश्न क्योंकि वहां पे इनके पास उत्तर नहीं

2106
02:28:43,920 --> 02:28:48,240
है कौन सी जनता तो आत्मश्रय जब उन्होंने कहा

2107
02:28:48,240 --> 02:28:52,320
कि भैया आपने भी तो कह दिया कि शिवश नारायण द्विवेदी से मैं जीत गया हूं तो

2108
02:28:52,320 --> 02:28:56,480
उसने कहा कि मैंने खुद से नहीं कहा मैंने तो जनता का नाम लिया उन्होंने

2109
02:28:56,480 --> 02:29:00,480
कहा कौन सी जनता तो अब यहां पर उत्तर नहीं है आप बता दो कौन सी जनता तो

2110
02:29:00,480 --> 02:29:06,480
यहां तू तू मान ना कि यहां आत्माश्रय दोष है मुझ पर भी कुतर्की

2111
02:29:07,040 --> 02:29:11,520
जी मुझे लज्जा आती है कि मैंने तुझे कभी अपना छोटा भाई समझा

2112
02:29:11,520 --> 02:29:16,240
बहुत बड़ी गलती की मैंने

2113
02:29:16,240 --> 02:29:20,640
क्या बौखलाहट है क्या नीचता है क्या कुतरकी है

2114
02:29:20,640 --> 02:29:23,840
क्या अभद्रता है

2115
02:29:23,840 --> 02:29:26,400
पक्षपाती

2116
02:29:26,400 --> 02:29:30,400
धर्म विहीन लोग हो तुम लोग कुछ नहीं है तुम्हारे पास सिवाय मामा

2117
02:29:30,400 --> 02:29:34,560
आ गए। सुनिए दो व्यक्ति बैठे हैं। एक विजय है एक पराजित

2118
02:29:34,560 --> 02:29:38,640
है। कौन से की बात मानेंगे आप? आपको तो आप मैं देखो मैं बता देता हूं। जिसने प्रश्न का उत्तर दे

2119
02:29:38,640 --> 02:29:43,280
दिया। ठीक है? वो विजय जो नहीं दे पाया प्रश्न का उत्तर प्रश्न सुनिए सुनिए। झूठ

2120
02:29:43,280 --> 02:29:47,440
वही वाली बात मैच में कौन जीता था यह तय कैसे

2121
02:29:47,440 --> 02:29:51,600
होगा कि सामने जो उसका समर्थन कर रहा है कि यह जीता था।

2122
02:29:51,600 --> 02:29:55,680
हैं? वो सिद्ध कर दे उसका पक्ष। नहीं भाई यह कहां

2123
02:29:55,680 --> 02:29:59,200
का शास्त्र का सिद्धांत है?

2124
02:29:59,200 --> 02:30:03,360
मैच में तो कोई भी जीत सकता है कि वहां पर एक कह दिया जाता है

2125
02:30:03,360 --> 02:30:07,760
भाई मेरा मत नहीं हारा है। मेरी मति हारी है। मेरा मत नहीं हारा।

2126
02:30:07,760 --> 02:30:11,920
मैं मेरी मति ही हारी है वहां। ठीक है? तो ये तुम्हारा कुतर्क है कि

2127
02:30:11,920 --> 02:30:17,920
अभी बता दो अभी सिद्ध कर दो वही वही जीता माना जाएगा।

2128
02:30:18,400 --> 02:30:22,400
हम करोगे कुछ कौन सा? समाज ये बताते हैं कि

2129
02:30:22,400 --> 02:30:26,480
गुरु का नाम पूर्ण दूसरा ही कुछ नाम बता रहे हैं। अरे भैया वो क्या बता रहे क्या नहीं बता रहे? मेरे से चर्चा

2130
02:30:26,480 --> 02:30:30,720
करोगे मेरे से बात करोगे। नहीं तो मैं कर रहा हूं ना आप फ़ करे अभी से बातें

2131
02:30:30,720 --> 02:30:34,720
देखो अभी तो आपने किया अब देखो अब देखो अब उन्होंने

2132
02:30:34,720 --> 02:30:38,880
एक सही बात कही कि सब लोग बताते हैं दयानंद जी के गुरु का नाम विजानंद है

2133
02:30:38,880 --> 02:30:43,200
ठीक है विजानंद और सन्यास उनका पूर्णानंद जी से हुआ था पूर्णानंद सांकर मटके

2134
02:30:43,200 --> 02:30:47,200
थे इनको सरस्वती टाइटल मिला वो भी वहां पर भी वही कुछ ऐसा है। मगर

2135
02:30:47,200 --> 02:30:51,280
बात यह है जब उन्होंने ये बात कही कि उनकी बात क्यों कर रहे हो? तो भाई तुम भी तो उन्हीं की

2136
02:30:51,280 --> 02:30:55,360
बात कर रहे हो। मैं दयानंदी हूं। तू खुद बोल रहा है ना मैं आर्य समाज हूं तो बात

2137
02:30:55,360 --> 02:30:59,360
क्यों ना की जाए आर्य समाज क्या कहता है मूर्ख हो क्या यह है

2138
02:30:59,360 --> 02:31:03,600
दोगलापन

2139
02:31:03,600 --> 02:31:07,600
ये दोगलापन देखो खुद को आर्य समाज ही बता रहा है फिर आर्य समाज

2140
02:31:07,600 --> 02:31:11,920
की बात ना की जाए कि वो क्या कहते हैं तू अपने तू अपने आप में आर्य समाज

2141
02:31:11,920 --> 02:31:16,320
है क्या आर्य समाज की किताबें क्या कहती है आर्य समाज के जो

2142
02:31:16,320 --> 02:31:20,320
प्रतिष्ठित लोग हैं जो जो वहां की अगुवाई कर रहे हैं

2143
02:31:20,320 --> 02:31:24,320
वो वो बताएंगे हमारे हिसाब से तो उसमें में भी गुरु शिष्य परंपरा नहीं है तो वहां पर

2144
02:31:24,320 --> 02:31:28,960
वो भी फेल हो जाएंगे। मगर फिर भी तुम्हारे कंपैरेटिवली

2145
02:31:28,960 --> 02:31:33,600
तो उनको ही प्रमाण माना जाएगा ना आर्य समाज के विषय में

2146
02:31:33,600 --> 02:31:37,840
क्या क्या मूर्खता पूर्ण बातें हैं ये बौखलाहट है मैं कह रहा हूं बौखलाया है अभी

2147
02:31:37,840 --> 02:31:43,840
नीचता देखना आगे क्या नीचता की है

2148
02:31:44,960 --> 02:31:50,480
दो मिनट और बचे हैं हमको चर्चा ही नहीं करनी है आप अगर

2149
02:31:50,480 --> 02:31:55,200
अरे रगड़ लिए लोग रगड़ करके आ गया

2150
02:31:55,200 --> 02:31:59,360
फिर बोल रहा हूं आपने अगर आपके गुरु शंकराचार्य में सामर्थ हो गुरु में सामर्थ हो मेरे को हेतु बता दो डिस्कस करने का बताओ

2151
02:31:59,360 --> 02:32:03,360
भैया गुरु नारायण नारायण बस ठीक है ठीक है

2152
02:32:03,360 --> 02:32:07,520
ठीक है सुन महोदय महोदय यही होता है यही होता है कि तरीके से वार्तालाप

2153
02:32:07,520 --> 02:32:11,520
आप लोग उगरे हो जाते हो तो देखो खिसिया कैसे रहा है

2154
02:32:11,520 --> 02:32:15,520
पूरी शंकराचार्य से बता दो सब कुछ कर सकने का हेतु बता दो हेतु

2155
02:32:15,520 --> 02:32:19,520
बता दो ठीक है हेतु बता रहा हूं जा ईश्वर सर्वशक्तिमान है

2156
02:32:19,520 --> 02:32:23,600
यही हेतु है ले यही हेतु है और जिसमें भी जिसने भी

2157
02:32:23,600 --> 02:32:27,760
अपनी माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध दूध पी जाओ वो आ जाना। ठीक है?

2158
02:32:27,760 --> 02:32:32,240
खुला निमंत्रण है। और अब वो वाली बात नहीं होगी।

2159
02:32:32,240 --> 02:32:36,640
अब सीधे हमला होगा। सर्जिकल स्ट्राइक।

2160
02:32:36,640 --> 02:32:40,640
अब वो हो गया बस। सॉफ्ट कॉर्नर वाली बात हो गई खत्म। तुमने सब खत्म

2161
02:32:40,640 --> 02:32:44,800
कर दिया। अब ठीक है। तुम्हारे अंदर सुनो। तुम्हारे

2162
02:32:44,800 --> 02:32:48,080
अंदर क्षमता नहीं।

2163
02:32:48,080 --> 02:32:52,080
तरीके से तुम वार्तालाप कर पाओ। गाड़ी से कहीं जा रहा है। तुम जब मन करेगा फ़ करके डिबेट करने। आपने

2164
02:32:52,080 --> 02:32:56,080
क्यों बोला किस में? ठीक है। आपने ओके क्यों किया? मैंने किया नहीं तुमने कहा ज्योतिष के मामले

2165
02:32:56,080 --> 02:33:02,080
में जानकारी चाहिए भाई मैंने ईश्वर का नाम लिया कि नहीं लिया तुमने ये कहा है ना सुनो तुमने कहा है

2166
02:33:02,480 --> 02:33:06,720
इसने उन्होंने समझा ज्योतिष वाली बात है ठीक है

2167
02:33:06,720 --> 02:33:10,800
तो उन्होंने टाइम दिया उनको क्या मालूम भाई ये व्यक्ति खौर खाया हुआ

2168
02:33:10,800 --> 02:33:16,800
है खौर खाया हुआ है दिल जले

2169
02:33:16,880 --> 02:33:20,880
खौर खाया हुआ है वो जो है कहीं मैं तो अपनी वो

2170
02:33:20,880 --> 02:33:24,800
गर्मी निकालूं

2171
02:33:24,800 --> 02:33:29,200
खैर चलो आगे चलते हैं। हां जी ये

2172
02:33:29,200 --> 02:33:35,200
इसको मैं भी प्ले कर सकता हूं शायद

2173
02:33:37,200 --> 02:33:41,280
कि मुझको आप ज्योतिषी बोल रहे हैं। मैंने कहा हां बोल रहा हूं। तुमने कहा आपसे ज्योतिष के बारे में बात करना

2174
02:33:41,280 --> 02:33:45,280
चाह रहा हूं। मैंने उसके बारे में क्या बोला ईश्वर से

2175
02:33:45,280 --> 02:33:49,920
आप कहां से बात कहां खींच रहे मैं आपको देख रहे हो तर्क देख रहे हो

2176
02:33:49,920 --> 02:33:54,160
वो ज्योतिषी होने के नाते बात करना अलऊ कर रहे हैं तो ये बोल रहा है ज्योतिषी का संबंध

2177
02:33:54,160 --> 02:33:58,160
ईश्वर से है इसलिए हर बात को ईश्वर तक ले जाएगा अच्छा ये बताओ अब

2178
02:33:58,160 --> 02:34:02,320
ये कल को अंडे वाले के पास जाके कहेगा कि मुझे अंडे

2179
02:34:02,320 --> 02:34:06,480
की बात करनी है तो वो कहेगा करो तो ये कहेगा क्योंकि अंडे

2180
02:34:06,480 --> 02:34:10,720
का संबंध ईश्वर से है तो ईश्वर से ईश्वर की बात करनी है बता

2181
02:34:10,720 --> 02:34:14,720
बता ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे है ये है अंडे वाले

2182
02:34:14,720 --> 02:34:18,800
से पूछेगा है ना? फिर ये कोई कोई

2183
02:34:18,800 --> 02:34:22,800
स्मैक किया जा रहा होगा उसको पकड़ लेगा। ये बता दुनिया में हर चीज तो ईश्वर

2184
02:34:22,800 --> 02:34:26,800
ने बनाई है। उसका संबंध ईश्वर से है ना? तो भाई तू बता मुझे

2185
02:34:26,800 --> 02:34:31,200
ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे ये देखो पागलपन देखो इस व्यक्ति का

2186
02:34:31,200 --> 02:34:35,280
कि जो वो कह रहे हैं कि ज्योतिष के लिए अलव किया तो ज्योतिष का संबंध ईश्वर से तो ईश्वर

2187
02:34:35,280 --> 02:34:40,800
सशक्तिमान कैसे सब कुछ कर सकता है कैसे? हम

2188
02:34:40,800 --> 02:34:45,040
नंबर दिया मैंने बात बोला क्या? मैंने कई बार तुमने कहा मैं स्क्रीनशॉट भेजूंगा। हां तो भेज दूंगा। कॉल कटिंग भेजोगे

2189
02:34:45,040 --> 02:34:49,120
भैया बोल रहा हूं आप भेज दो ना अभी भेज दो क्यों कॉल कट अभी आप उत्तर दे दो मेरे को मेरे प्रश्न मुझको आपसे डिबेट

2190
02:34:49,120 --> 02:34:53,360
ही नहीं करना आप उत्तर क्यों ले रहे हो ये तय कौन कर रहा है जबरदस्ती

2191
02:34:53,360 --> 02:34:57,600
ये तय कौन कर रहा है कि पहले मैं स्क्रीनशॉट बाद में भेजूंगा पहले उत्तर दे दो पहले

2192
02:34:57,600 --> 02:35:01,680
है कौन भाई तू है कौन उनके लिए जो तुझे

2193
02:35:01,680 --> 02:35:05,840
पहले उत्तर दे जब वो कह रहे हैं मुझे पहले स्क्रीनशॉट दिखाओ तब मैं देखूंगा तो पहले उत्तर

2194
02:35:05,840 --> 02:35:10,240
क्यों कौन तय कर रहा है यहां पे क्योंकि तुम अपने आप को

2195
02:35:10,240 --> 02:35:14,400
स्वयंभू मानते हो स्वयंभू हम

2196
02:35:14,400 --> 02:35:18,800
ठीक है अभी वो आगे पता चलेगा चीजें स्वयंभू जो है प्रश्न

2197
02:35:18,800 --> 02:35:22,800
डिबेट में मैं क्यों तुमको उत्तर दूं यार तुम होगा तब तो दोगे तुम्हारी क्षमता है तुम लाइव

2198
02:35:22,800 --> 02:35:26,880
आके करो लाइव आके कर चुका हूं मेरे को चुके हो तुम तय कर ले रहे हो क्या तुम विजय हो मैं विजय

2199
02:35:26,880 --> 02:35:30,880
हार छोड़ दो मेरे को उत्तर दे तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी तभी हो जाएगा तुम अरे यार तुम जाके वहां डिबेट करो ना तुम किसी से भी डिबेट कर

2200
02:35:30,880 --> 02:35:34,880
चुका हूं तुम दोनों तुम नहीं तुम नहीं हम कमेंट सेक्शन में क्यों चल रहे है फिर भाई क्या

2201
02:35:34,880 --> 02:35:39,280
हो गया सत्यम जाना अनंत ब्रहम ईश्वर कुछ भी कर सकता लिखा था ना आपने कमेंट में लिखा था हां तो दो फिर

2202
02:35:39,280 --> 02:35:43,520
बताओ सत्यम जान अनंत मेरे को हाथ तो बताओ सत्यम जान अनंत में से किसकी व्याख्या शंकराचार्य ने कुछ भी कर

2203
02:35:43,520 --> 02:35:47,520
लिखा है बताओ क्या हो गया सत्यम जानम अनंतम जो शब्द है जिसकी व्याख्या आदि शंकराचार्य जी ने

2204
02:35:47,520 --> 02:35:51,600
कर रखा है उपनिषद भाष्य में इन्हारी परंपरा क्या है परंपरा तुम अरे मेरे भाई बात सुन लो मेरी

2205
02:35:51,600 --> 02:35:55,840
पहले मैं बता देता हूं कर ले मैं बता देता हूं

2206
02:35:55,840 --> 02:35:59,920
ऋग्वदा आद भाष भूमिका में देख ले अनंत सामर्थवान लिखा है ना वही

2207
02:35:59,920 --> 02:36:04,640
है ईश्वर सब कुछ कर सकता है अनंत सामर्थ्यवान अनंत है उसकी

2208
02:36:04,640 --> 02:36:08,640
अनंत अनंत सामर्थ्यवान है ना वो तो तुम भी

2209
02:36:08,640 --> 02:36:12,640
तो बिना तुम भी तो इच्छा में केवल इच्छा मात्र से हिलाए दे रहे हो

2210
02:36:12,640 --> 02:36:16,880
तब तुम नहीं देख रहे हो बीच का कनेक्शन भी नहीं बता रहे हो तुम्हारा जिहादियों से भी तगड़ा

2211
02:36:16,880 --> 02:36:20,960
वो तगड़ी वाली स्टेज में जा रहा है ईश्वर कैसे

2212
02:36:20,960 --> 02:36:25,040
बौखलाया हुआ है आदमी देखो अभी मैं नाम बताने लग गया हूं हवा

2213
02:36:25,040 --> 02:36:29,680
खराब हो गई थी तुम प्रूफ तो करोगे भाई नहीं आप प्रूफ कर दो फिर तो ठीक है मैं लाइव पे आओ मैं प्रूफ करवा रहा हूं

2214
02:36:29,680 --> 02:36:33,760
समय तक मैं गाड़ी में घुस रहा हूं यार कैसे प्रूफ करोगे रेशन स्टार नाम से चैनल है आज

2215
02:36:33,760 --> 02:36:38,880
ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोलूं आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं आप

2216
02:36:38,880 --> 02:36:43,920
माता उसी माता जी ने भी उसी ने उसी माता को रखा बताओ अरे भाई

2217
02:36:43,920 --> 02:36:48,560
थोड़ा सा पीछे करो पीछे करो थोड़ा पीछे करो देखो

2218
02:36:48,560 --> 02:36:52,560
अभी ये बोल रहा है जब उन्होंने कहा सारे नाम

2219
02:36:52,560 --> 02:36:56,560
से चैनल है आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोल आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे रहा हूं आप कौन

2220
02:36:56,560 --> 02:37:01,120
अगर तुम निष्ठा पूर्वक उसी माता जी ने उसी माता जी को बताओ

2221
02:37:01,120 --> 02:37:05,680
अरे भाई देखो यह नीचता देखो

2222
02:37:05,680 --> 02:37:09,760
अगर तुम पहली बात तो यह है कि तुम तुम्हारी जो नीचता है वो

2223
02:37:09,760 --> 02:37:11,120
यहां प्रदर्शित हो गई

2224
02:37:11,120 --> 02:37:15,600
ठीक है कि तुमने भैया शिवश की मां का दूध भी पिया है।

2225
02:37:15,600 --> 02:37:19,760
पहले तुमने कह दिया कि पिया उसके बाद तुमने उसमें प्लस्टर किया मेरा भाई है वह। पहली

2226
02:37:19,760 --> 02:37:23,760
बात तो तुम भाई के नाम पर कलंक हो। तो ये छोड़ना ये बोलना छोड़ो कि मेरा

2227
02:37:23,760 --> 02:37:27,840
भाई है वो। दूसरी बात यह है कि अगर भाई हो भी तब भी

2228
02:37:27,840 --> 02:37:32,480
शिवश की मां का दूध पीना तुमने बहुत ही ऑफेंसिव चीज बोली है।

2229
02:37:32,480 --> 02:37:36,480
ठीक है? और बहुत ही नीच बात बोली है तुमने। ठीक है? क्योंकि

2230
02:37:36,480 --> 02:37:40,640
उसमें उनकी उसमें उनकी स्वीकृति होनी चाहिए। वो तो तुम्हें जानती तक नहीं है।

2231
02:37:40,640 --> 02:37:44,640
है ना? और इसमें आगे एक बात और कहेगा नीच बात यह नीच व्यक्ति एक

2232
02:37:44,640 --> 02:37:48,640
बात और कहेगा इसमें आगे देखिए क्या कहेगा ठीक है वो आपका

2233
02:37:48,640 --> 02:37:52,720
आचरण दिख गया चलिए नारायण ठीक है थोड़ा पीछे कर दो थोड़ा पीछे कर

2234
02:37:52,720 --> 02:37:57,120
दो थोड़ा पीछे कर दो यहां से

2235
02:37:57,120 --> 02:38:01,120
हां आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे बोलूं आ जाओ तुम जो मैं नंबर दे

2236
02:38:01,120 --> 02:38:05,120
रहा हूं कॉल कर अगर तुमने अपनी माता से निष्ठा पूर्वक माता की उसकी माता ने उसी

2237
02:38:05,120 --> 02:38:09,120
माता की बताओ मेरे भाई अरे भाई ठीक है वो आपका आचरण दिख गया चलिए नारायण

2238
02:38:09,120 --> 02:38:11,760
ठीक है

2239
02:38:11,760 --> 02:38:14,960
का नहीं है तुम्हारे।

2240
02:38:14,960 --> 02:38:18,960
अब एक बात बताओ इसने मुझसे कहा कि मैं तो नगन्य

2241
02:38:18,960 --> 02:38:23,360
हूं। मेरी सामाजिक छवि ऐसी नहीं है कि मुझे उत्तर दिया जाए। तो इनकी सामाजिक

2242
02:38:23,360 --> 02:38:27,520
छवि कैसी है जो इनके पास पहुंच रहे हैं? ये हम

2243
02:38:27,520 --> 02:38:29,760
क्यों?

2244
02:38:29,760 --> 02:38:34,000
इनकी सामाजिक छवि कैसी है जो इनके पास पहुंच रहे हैं। और जो अपने फोटोोटो

2245
02:38:34,000 --> 02:38:38,000
डाल रहे हैं। देखो निर्भय अभी तुम बच्चे हो थोड़ा अध्ययन

2246
02:38:38,000 --> 02:38:42,000
कर लो। थोड़ी और तैयारी करो। शुरू तुम करोगे। खत्म हम

2247
02:38:42,000 --> 02:38:46,080
करेंगे। अभी तक बहुतों को बहुतों को पवेलियन वापस लौटा

2248
02:38:46,080 --> 02:38:50,080
चुके हैं। ठीक है। लोग कहने लगे कि मैं जो है शनि शनिचर हूं।

2249
02:38:50,080 --> 02:38:54,160
जिसको लग जाता है उसकी ग्रह दशा बिगड़ जाती है। गृह दशा बिगड़ भगवतानंद को लगे

2250
02:38:54,160 --> 02:38:58,640
अभी तक उठ नहीं पा रहा बेचारा। भागवतानंद गए अज्ञातवास। रामपाल

2251
02:38:58,640 --> 02:39:02,640
के सुर बदल गए और इस वाले यही अपनी करताल

2252
02:39:02,640 --> 02:39:06,720
बजा रहे हैं। और आर्य समाज ने तो देखा ही था ना। पर्चा निकाला

2253
02:39:06,720 --> 02:39:10,800
था हमारे नाम का। निकाला था निकाला था ये खतरनाक आदमी से बच के रहना

2254
02:39:10,800 --> 02:39:14,800
कृपा

2255
02:39:14,800 --> 02:39:18,800
देख लेना जा के तो अभी तुम बच्चे हो ठीक है जो तुम शुरू

2256
02:39:18,800 --> 02:39:22,800
तुम करोगे तो फिर हम आखिरी चाल हमारी होगी सदैव ये तुम्हें हम बता रहे

2257
02:39:22,800 --> 02:39:27,040
हैं जाके पढ़ाई करो और थोड़ा अध्ययन और बढ़ाओ जड़ पदार्थ

2258
02:39:27,040 --> 02:39:31,040
को कैसे प्राप्त हुआ ईश्वर की इच्छा फिर

2259
02:39:31,040 --> 02:39:35,120
और खैर तुम्हारा तो चैप्टर हमारे साथ चर्चा करने का क्लोज हो गया है सुनकर

2260
02:39:35,120 --> 02:39:39,520
के और हां इसको

2261
02:39:39,520 --> 02:39:45,520
हां प्ले करो

2262
02:39:48,000 --> 02:39:51,680
ये वाला तो पूरा हो गया ना

2263
02:39:51,680 --> 02:39:55,760
नहीं पूरा हो गया वो लास्ट वाला जरा सुना दो क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है उसने कहा

2264
02:39:55,760 --> 02:40:00,240
था कि मैंने सबकी मां का पिया ऐसा कुछ बोला उसने ये भी बोला शायद

2265
02:40:00,240 --> 02:40:05,440
देखो जरा 9:40 के बाद

2266
02:40:05,440 --> 02:40:09,440
आज ही लाइव कर रहा हूं बताओ कितने बजे करूं? आ जाओ। तुम जो मैं नंबर दे

2267
02:40:09,440 --> 02:40:13,520
रहा हूं आवाहन कॉल ऑफ धर्मा अगर तुमने अपनी माता जी का निष्ठा पूर्वक

2268
02:40:13,520 --> 02:40:17,680
माता जी उसकी माता जी ने भी उसकी मैंने तो उसकी माता जी का पी रखा और बताओ मेरा तो भाई

2269
02:40:17,680 --> 02:40:21,840
अरे भाई ठीक है वो आपका आचरण दिख गया। चलिए नारायण ठीक है नारायण

2270
02:40:21,840 --> 02:40:26,880
आपसे बात नहीं होती ठीक है ठीक है नहीं है तुम्हारी

2271
02:40:26,880 --> 02:40:32,720
पता नहीं शायद आशुतोष जी है क्या अभी आशुतोष जी

2272
02:40:32,720 --> 02:40:36,880
आशुतोष जी अगर हो लाइव आ सकते हो तो आ जाए कुछ एक बात

2273
02:40:36,880 --> 02:40:42,880
पूछनी थी मुझे।

2274
02:40:44,800 --> 02:40:50,000
तो ये आपने इसकी नीचता देख ली। तो स्वरूप भूत लक्षण क्या-क्या रहे इनके?

2275
02:40:50,000 --> 02:40:53,440
धूर्तता, अभद्रता।

2276
02:40:53,440 --> 02:40:56,800
ठीक है? और

2277
02:40:56,800 --> 02:41:02,080
पक्षपाती पंचंगी ड्रामा वाले

2278
02:41:02,080 --> 02:41:06,320
खुद ही के सिद्धांतों को लेकर संशय में स्थित और

2279
02:41:06,320 --> 02:41:10,720
अंत तक आते-आते बौखलाहट, पागलपन और अंत में

2280
02:41:10,720 --> 02:41:13,920
नीचता

2281
02:41:13,920 --> 02:41:18,080
नीचता इसको नीचता कहते हैं। और जो तुमने ठेके की बात कही

2282
02:41:18,080 --> 02:41:22,400
थी ना वो हमने दिखाया कि हम यह सब हम पीठ पीछे

2283
02:41:22,400 --> 02:41:26,640
कर रहे हैं। तुमको पता भी नहीं है। ऐसी कितनी सारी चीजें की है हमने। जहां

2284
02:41:26,640 --> 02:41:30,640
पर हमने कोई हमें क्रेडिट देने वाला नहीं है। मगर हमने

2285
02:41:30,640 --> 02:41:35,440
किया है वह कार्य। लोगों को नहीं पता हमने क्या किया है।

2286
02:41:35,440 --> 02:41:39,520
ठीक है और हम ग्राउंड लेवल बहुत सारी चीजें बहुत सारी

2287
02:41:39,520 --> 02:41:44,080
ग्राउंड ग्राउंड लेवल की नहीं मैं इस तरह की बातें कर रहा हूं जो ये जो जो

2288
02:41:44,080 --> 02:41:48,320
निर्भय की मां के लिए कुछ बोला गया और हमने वहां पे स्टैंड लिया हां स्टैंड

2289
02:41:48,320 --> 02:41:52,560
लिया है ऐसी ना जाने कितनी चीजें हम लोग करते हैं आए दिन

2290
02:41:52,560 --> 02:41:56,960
करते हैं और उसको हम तमाशा बना के प्रस्तुत नहीं करते

2291
02:41:56,960 --> 02:42:01,040
तुमने कहा कि मैंने ठेका नहीं ले रखा तो हमने बताया भैया यह देखो

2292
02:42:01,040 --> 02:42:05,040
यह तुम्हारे पीठ पीछे की बातें हैं निर्भय

2293
02:42:05,040 --> 02:42:09,200
आत्मा में झांक लो अपने शीशे में देख लो खुद को शर्म आ जाएगी

2294
02:42:09,200 --> 02:42:13,680
अपनी मां से जाकर पूछो इन विषयों में कौन सही है मैं शिवश

2295
02:42:13,680 --> 02:42:17,840
पूछो जाके कि जब उसके सर पर चप्पल रखी गई शिवश भैया

2296
02:42:17,840 --> 02:42:22,160
ने मुझे भेजा वो रील भेजा मैंने घमंड में

2297
02:42:22,160 --> 02:42:26,240
पता नहीं कौन से नशे में उनकी उस रील को नहीं देखा और उनके

2298
02:42:26,240 --> 02:42:28,960
लिए बोल रहा हूं दीदी बहुत अच्छे जवाब दे रही है और

2299
02:42:28,960 --> 02:42:32,960
शिवाश भैया को के बारे में मैं देख भी नहीं रहा हूं वो क्या कर रहे हैं क्या नहीं

2300
02:42:32,960 --> 02:42:36,960
कर रहे हम लोग अकेले में जो बातें कर रहे हैं वहां पर हम तुम्हारी मां की इज्जत के लिए

2301
02:42:36,960 --> 02:42:41,920
लड़ रहे हैं। बिल्कुल और इसलिए नहीं कि तुम हमारे भाई हो।

2302
02:42:41,920 --> 02:42:47,920
क्योंकि इसलिए राम ने सिखाया है। धर्म ने सिखाया है।

2303
02:42:48,640 --> 02:42:51,200
बिल्कुल

2304
02:42:51,200 --> 02:42:55,280
पूछो अपने माता-पिता से जाके। कौन है इसमें सही? बात

2305
02:42:55,280 --> 02:42:59,440
करते हैं धर्म रक्षक होने की। केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होता है। धारण

2306
02:42:59,440 --> 02:43:03,760
करो उसको मर्यादा को। ठेका नहीं लिया है। यह

2307
02:43:03,760 --> 02:43:07,760
नीचता कर रहे हो तुम। प्रातत्व भाव से भी किसी की

2308
02:43:07,760 --> 02:43:12,320
मां के लिए बोलना कि मैंने उसकी भी मां का पिया है।

2309
02:43:12,320 --> 02:43:16,960
ऑफेंसिव चीज है ये। ऑफेंसिव चीज है। बिल्कुल। ठीक है।

2310
02:43:16,960 --> 02:43:21,920
आज नहीं तो कल एक चीज इसकी सजा भुगतोगे। तुमने जो ये बोला है। नीच व्यक्ति

2311
02:43:21,920 --> 02:43:26,640
शर्म आती है मुझे कभी। मैंने तुमको अपना भाई समझा। खत्म हो गया आज से सब।

2312
02:43:26,640 --> 02:43:30,800
वही भाईचारा है। और तुम्हारा चैप्टर भी क्लोज है। तुम कहीं एकिस्ट ही नहीं करते हो।

2313
02:43:30,800 --> 02:43:34,960
तुम करते रहना यही ढूंढते रहना अपने पागलपन को एग्जीक्यूशन

2314
02:43:34,960 --> 02:43:39,120
के लिए ढूंढते रहना आज आशुतोष दर्जी को कल किसी और को क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी

2315
02:43:39,120 --> 02:43:43,280
से सामना करने का तो था नहीं उससे तो कहा नहीं कि अभी कर लेते चलो फोन पे

2316
02:43:43,280 --> 02:43:44,720
क्यों नहीं कहा

2317
02:43:44,720 --> 02:43:48,800
शिवश से जब फोन पे बात हो रही थी अभी अभी फैसला कर लेते चलो फिर

2318
02:43:48,800 --> 02:43:51,760
क्यों नहीं कहा

2319
02:43:51,760 --> 02:43:55,760
क्योंकि तूफान ही फैसला करेगा रोशनी का दिया

2320
02:43:55,760 --> 02:43:59,920
वो जलेगा जिसमें दम हो बिल्कुल नहीं बहुत

2321
02:43:59,920 --> 02:44:04,000
सारी चीजें क्लियर हो गई आज तो मतलब पूरा चैप्टर क्लोज खत्म

2322
02:44:04,000 --> 02:44:08,160
और इनका एक जो एक और बंदा है जो 17 18 साल का होने का दावा

2323
02:44:08,160 --> 02:44:12,320
कर रहा है वो व्यक्ति इतनी अभद्र गालियां देता है मुझे पहले पता नहीं था ये तो

2324
02:44:12,320 --> 02:44:16,400
बृजदर्शन जी ने इन्होंने कन्हैया जी ने वीडियो मेरे को भेजे मैंने कहा अरे भाई ये

2325
02:44:16,400 --> 02:44:20,560
क्या करता है जब इसके पास उत्तर नहीं होता है तो ये भी ऐसे ही गालियां देने लग

2326
02:44:20,560 --> 02:44:25,040
पड़ता है भद्र गालियां अभी एक दो वीडियो और भेजे हैं उनके अच्छा ये उनके

2327
02:44:25,040 --> 02:44:29,120
पब्लिक में जो वीडियो है ना अगर वो मैंने उसमें डाले तो पता है क्या कह रहे थे कि

2328
02:44:29,120 --> 02:44:33,200
हमारी ना गोपनीय भंग हो रही है। मतलब गालियों की गोपनीयता भंग हो रही है

2329
02:44:33,200 --> 02:44:37,440
इनकी। अगर इनके जो पब्लिक में वीडियो हैं वह अनलिस्टेड में डाले हुए हैं कई

2330
02:44:37,440 --> 02:44:41,440
लोगों ने वह पब्लिक में नहीं है। अच्छा उसके लिंक शेयर किए किसी ने तो वह मैंने

2331
02:44:41,440 --> 02:44:45,600
लगाए तो कहते हैं जी वो

2332
02:44:45,600 --> 02:44:49,680
हां तो उसमें भी इनकी गोपनीयता भंग हो रही है भैया हद हो गई

2333
02:44:49,680 --> 02:44:53,680
भाई जो पब्लिक प्लेटफार्म पे चीजें हैं उसमें भी गोपनीयता भंग हो रही है और गोपनीयता भी

2334
02:44:53,680 --> 02:44:58,160
कोई ऐसी कोई आपकी शालीन वो चीज नहीं है। वहां पर भी

2335
02:44:58,160 --> 02:45:02,240
अब हदर गालियां दी जा रही है। बहुत ही नीच व्यक्ति है

2336
02:45:02,240 --> 02:45:06,320
ये। बहुत ही नीच व्यक्ति है। आज इसने बहुत नीचता

2337
02:45:06,320 --> 02:45:10,480
कर दी और इसकी नीचता में इसकी बौखलाहट समझ में आ रही है। जो इसकी जो

2338
02:45:10,480 --> 02:45:14,480
चर्चा सुन ली ना जो लास्ट में इसने किया है

2339
02:45:14,480 --> 02:45:18,560
हालांकि किया तो हर रिकॉर्डिंग में है मगर वहां पर बिल्कुल ही ढेर हुआ और फिर मैं

2340
02:45:18,560 --> 02:45:22,800
कब तक एक बात एक व्यक्ति से वही बात बार-बार पूछता रहूं। हम

2341
02:45:22,800 --> 02:45:26,800
भाई तुम वहां पर स्पष्ट नहीं। अपने लोगों को बताओ जाकर के जड़ पदार्थों पर कैसे इच्छा ने

2342
02:45:26,800 --> 02:45:30,800
काम किया। हम ठीक है शास्त्रवाद

2343
02:45:30,800 --> 02:45:35,360
जी आपको कुछ बोलना है?

2344
02:45:35,360 --> 02:45:39,840
जी भैया यह जो अभी आपने जो सुनाया पूरा रिकॉर्डिंग

2345
02:45:39,840 --> 02:45:44,000
इसमें यही समझ आता है कि उसको ये जो सर्वशक्तिमान वाला जो है ना

2346
02:45:44,000 --> 02:45:48,000
बात इसका उसको उत्तर चाहिए एनी हाउ ठीक है और

2347
02:45:48,000 --> 02:45:52,160
वो जैसे तैसे कुछ भी करके कुछ भी उटपटंग भी बोल देगा

2348
02:45:52,160 --> 02:45:56,320
उसको कोई उसका वो नहीं है लाज नहीं है उसको उस चीज का

2349
02:45:56,320 --> 02:46:00,640
कि मैं क्या बोल रहा हूं बस कुछ भी बोल दूंगा सत्य है धर्म

2350
02:46:00,640 --> 02:46:04,640
है अधर्म है कुछ नहीं देखना सीधा केवल अगर मुझे वो प्रश्न

2351
02:46:04,640 --> 02:46:08,960
का उत्तर चाहिए तो कुछ भी बोल दूंगा। उसको उसको गलतफहमी

2352
02:46:08,960 --> 02:46:12,960
हो गई है। दूंगा उसका वैसे ही है बस। इसको इसको गलतफहमी हो

2353
02:46:12,960 --> 02:46:16,960
गई है कि ये बहुत बड़ा 30 मार्क का है और कुछ नहीं है। इसकी गलतफहमी बात नहीं

2354
02:46:16,960 --> 02:46:21,040
है। बात ये नहीं बात ये नहीं है। बात ये नहीं है। बात ये है इसको गलतफहमी थी

2355
02:46:21,040 --> 02:46:25,200
कि ये 30 मार्क कहां है। अब वो चीजें टूट गई। टूट

2356
02:46:25,200 --> 02:46:29,200
गई। यहां सब खत्म हो गया। यहां तो भैया अकाट्य सिद्धांत वाले हैं ना। अब वो

2357
02:46:29,200 --> 02:46:34,400
खत्म हो गई। अब वो उसको किसी तरीके से प्लस्तर कर रहा है तो

2358
02:46:34,400 --> 02:46:38,720
ये बिल्कुल सही कैसे करेंगे प्लस्तर कैसे करेंगे शिवश नारायण द्विवेदी

2359
02:46:38,720 --> 02:46:42,800
से दूर रहने का बहाने बना के और अन्यों को पकड़ पकड़ के किसी

2360
02:46:42,800 --> 02:46:47,600
तरीके से अपना पोषण करने का और अगर अभी ये ज्यादा अगर बोलेंगे

2361
02:46:47,600 --> 02:46:50,400
तो मैं ये बताऊंगा फिर लोगों को कि

2362
02:46:50,400 --> 02:46:54,640
भैया मेरे मन में इनके लिए इतना ज्यादा भ्रातत्व भाव क्यों आया मैं जहांजहां

2363
02:46:54,640 --> 02:46:58,960
अटके मैंने क्यों वहीं पे इनकी खाल नहीं उधेड़ी मैंने क्यों एक सॉफ्ट कॉर्नर

2364
02:46:58,960 --> 02:47:03,040
बना के रखा फिर आगे की चीजें अलग है। ठीक है? तो मैं

2365
02:47:03,040 --> 02:47:07,040
उम्मीद करूंगा इस विषय को ज्यादा ना खींचे। नहीं तो और आपकी

2366
02:47:07,040 --> 02:47:12,000
ही वो होगी। मैंने पहले ही कह दिया शुरू तुम करोगे खत्म हम करेंगे। बाकी

2367
02:47:12,000 --> 02:47:16,320
ये ये सब बताना वीडियो बना के कि भैया वो आचार्य जी

2368
02:47:16,320 --> 02:47:20,560
की छवि ऐसी कैसे है या आशुतोष धर जी की छवि ऐसे कैसे

2369
02:47:20,560 --> 02:47:25,040
जो तुम तुरंत जो है चर्चा के लिए तैयार हो जा रहे हो।

2370
02:47:25,040 --> 02:47:29,040
और या फिर तुम ये कैसे सोच रहे हो कि जिसको भी तुम बुलाओगे अपनी लाइफ पे ही आएगा। वो

2371
02:47:29,040 --> 02:47:33,440
तुम्हारी लाइव पे क्यों आए भाई? वो अपने चैनल पर बुलाएगा। कौन

2372
02:47:33,440 --> 02:47:37,440
से आधार पर तुम किसी को फोन करके कह रहे हो कि मैं लाइव रख रहा हूं और तुम मेरी लाइव पे

2373
02:47:37,440 --> 02:47:42,880
आ जाओ। क्यों? कौन तय करेगा ये?

2374
02:47:42,880 --> 02:47:47,120
हम तो तुम्हारे गुरुकुलों में गए हैं भैया। गुरुकुलों में वहां

2375
02:47:47,120 --> 02:47:51,600
बैठ के कोई मारधार नहीं की। केवल वैचारिक लड़ाई

2376
02:47:51,600 --> 02:47:55,360
समाप्त करके आए। जाओ

2377
02:47:55,360 --> 02:47:59,360
जाओ गुरुकुलों में तब पता चलेगा गुर्दा चाहिए होता है इन सब

2378
02:47:59,360 --> 02:48:03,520
चीजों के लिए भैया ऑनलाइन ऑनलाइन खेला बच्चों की बातें हैं ये सब ऑनलाइन ऑनलाइन

2379
02:48:03,520 --> 02:48:07,600
गुर्दा चाहिए ठीक है और वो गुर्दा मैंने बताया ना

2380
02:48:07,600 --> 02:48:11,760
एक जो पुरुष होता है वो अपनी मां की कोख से लेकर जन्म लेता है

2381
02:48:11,760 --> 02:48:17,520
गुर्दा बाजार में नहीं बिकता वो गुर्दा बिल्कुल

2382
02:48:17,520 --> 02:48:21,600
हां जी शास्त्रवाद वो सनातन जी जी जी

2383
02:48:21,600 --> 02:48:25,840
बिल्कुल बिलकुल और इनकी एक और जो इनका

2384
02:48:25,840 --> 02:48:30,160
भ्रम है ना ये क्या कर रहे हैं जैसे अभी आशुतोष जी को और एक और आचार्य

2385
02:48:30,160 --> 02:48:34,320
हैं उनका भी इन्होंने वीडियो बनाया है उनकी भी लाइव में ऐसे घुस गए थे उन्होंने

2386
02:48:34,320 --> 02:48:38,640
कहा था कि भैया हमारा जो विषय है वो धर्म का प्रचार करना है हम ये डिबेटवेट

2387
02:48:38,640 --> 02:48:42,640
में नहीं पढ़ते हैं तो उसने भी जबरदस्ती यही किया था उस लड़ उसमें भी उन्होंने

2388
02:48:42,640 --> 02:48:46,800
ये कहा कि भाई अभी पहले ऑलरेडी ढाई तीन घंटे हो चुके हैं हां वो बंद करने

2389
02:48:46,800 --> 02:48:50,800
वाले थे लास्ट और जो विषय तुम जो विषय तुम लेकर आए हो वो एक वृहद

2390
02:48:50,800 --> 02:48:54,800
विषय हो सकता है तो भाई फिर तो उसको अपने मन से कुछ

2391
02:48:54,800 --> 02:48:58,080
भी बस वहां से ये कंटेंट वो चेरी पिकिंग वाली बात चेरी

2392
02:48:58,080 --> 02:49:02,080
पिकिंग चेरी पिक कर रहे हैं और इससे सोच रहे हैं मामा आ गए

2393
02:49:02,080 --> 02:49:06,080
मामा आ गए इससे सोच रहे हैं छवि डाउन कर ली और इस पीआरओ

2394
02:49:06,080 --> 02:49:10,320
तरह की जो नकल है उसके आधार पर सोच रहे हैं कि मेरा पल्ला भारी है क्योंकि तुम्हारे

2395
02:49:10,320 --> 02:49:14,560
सिद्धांतों के अनुसार तुम्हारा पल्ला हल्का है। ठीक है? सभी ने इतना

2396
02:49:14,560 --> 02:49:18,720
समय दिया आने के लिए सबको आभार और इनके स्वरूप भूत

2397
02:49:18,720 --> 02:49:23,680
लक्षण सबको सबको प्राप्त हो गए हैं। सनातन शंकर जी आपका बहुत-बहुत आभार।

2398
02:49:23,680 --> 02:49:29,360
जी बहुत-बहुत धन्यवाद जी आपका। आज सारे विषय क्लियर कर दिए आपने।

2399
02:49:29,360 --> 02:49:34,400
जी धन्यवाद। ठीक है। ठीक है शास्त्रवाल जी।

2400
02:49:34,400 --> 02:49:38,640
जय श्री राम। जय जी भैया। जय श्री राम। जय

2401
02:49:38,640 --> 02:49:42,640
श्री राम
