1
00:00:02,960 --> 00:00:07,040
तो जय श्री राम सभी को। आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:07,040 --> 00:00:11,200
होंगे। मेरी आवाज आप सभी को साफ आ रही होगी

3
00:00:11,200 --> 00:00:15,360
और एक महानुभाव ने हमें यह भिजवा दिया है। हमने

4
00:00:15,360 --> 00:00:20,800
अपनी एक लाइव स्ट्रीम में कहा था कि इसकी आवश्यकता है। तो

5
00:00:20,800 --> 00:00:26,800
ये हमें प्राप्त हो गया है। उनको बहुत-बहुत आभार।

6
00:00:28,640 --> 00:00:33,200
आज का विषय थोड़ा थोड़ा आप समझ ही रहे होंगे।

7
00:00:33,200 --> 00:00:37,360
कुछ दिनों पूर्व हमारी एक चर्चा हुई थी अलंकार समाज

8
00:00:37,360 --> 00:00:42,080
के एक फॉलोअर हैं निर्भय करके उनके साथ।

9
00:00:42,080 --> 00:00:46,320
उस चर्चा का बहुत ठोस अगर देखा जाए तो

10
00:00:46,320 --> 00:00:50,800
अगर निष्पक्षता के साथ देखेंगे तो बहुत ठोस मुझे नहीं लगता कि कोई निष्कर्ष प्राप्त हुआ।

11
00:00:50,800 --> 00:00:54,800
परंतु अपनीपनी रोटियां दोनों पक्ष सीख सकते हैं। जैसे वह यह दावा

12
00:00:54,800 --> 00:00:58,960
कर सकते हैं कि भाई पंचाव वाला वाली बात

13
00:00:58,960 --> 00:01:03,200
जब आई तो हमने वहां पर पंचाव से अनभिज्ञ होना अपना

14
00:01:03,200 --> 00:01:07,200
स्वीकार किया कि हमें पंचाव्य नहीं पता। हां पंचाव शब्द से हमें नहीं

15
00:01:07,200 --> 00:01:11,200
मालूम अगर उसमें जो दी गई सामग्री थी यदि वो ओपन हो जाती उस पर बात

16
00:01:11,200 --> 00:01:15,280
होती तो बात कुछ अलग हो सकती थी। इसी इसके दूसरी

17
00:01:15,280 --> 00:01:18,480
तरफ जो 90% जो चर्चा हुई उसमें

18
00:01:18,480 --> 00:01:22,720
वह हमारे पक्ष में रही क्योंकि वह जो जो प्रश्न पूछते

19
00:01:22,720 --> 00:01:26,880
गए तार्किक कि भाई वो कैसे बनता है कैसे अवतार होता है तो हमने

20
00:01:26,880 --> 00:01:30,880
उन्हें जवाब दिए और वो उससे उन्होंने कहा कि अच्छा चलिए ठीक है फिर

21
00:01:30,880 --> 00:01:35,120
आगे बढ़ते हैं तो 90% चर्चा में हमने जवाब दिए जिनको जितना वो काट

22
00:01:35,120 --> 00:01:39,200
सकते थे काटा उसके बाद वो आगे बढ़े तो उनके आगे बढ़ने के पीछे उनका यह

23
00:01:39,200 --> 00:01:43,200
औचित हो सकता है कि उनको पंचावे पे जाना है परंतु एक

24
00:01:43,200 --> 00:01:47,440
औचित परंतु यह भी एक अर्थ निकल रहा है उस बात का कि

25
00:01:47,440 --> 00:01:51,520
भाई हमारी चीजों को जब तक काट रहे थे काट सके तब तक उन्होंने काटा और

26
00:01:51,520 --> 00:01:55,520
उसके बाद वो जब नहीं काट सके तो वह आगे बढ़े अपने पंचाव की ओर

27
00:01:55,520 --> 00:01:59,680
बीच में एक अविद्या वाला प्रश्न भी आया था तो उसका भी हमने जवाब दिया

28
00:01:59,680 --> 00:02:03,920
यह तो रही यह बात अब जिस प्रकार से वह हमारा एक अर्थ निकालते हैं कि

29
00:02:03,920 --> 00:02:08,080
उन्हें इसलिए हटा दिया जिस प्रकार से दूसरा पक्ष

30
00:02:08,080 --> 00:02:12,080
यह अर्थ निकाल लेता है कि हमने उन्हें इसलिए हटा दिया क्योंकि

31
00:02:12,080 --> 00:02:16,320
हमें पंचा में मांगी गई सामग्री नहीं ज्ञात थी। हम दे नहीं सकते थे पंचाब

32
00:02:16,320 --> 00:02:20,800
में मांगी गई सामग्री। तो यह दो अलग-अलग पक्ष हो गए। एक पक्ष हो गया कि

33
00:02:20,800 --> 00:02:24,960
हमें पंचाब के बारे में ज्ञात है कि नहीं ज्ञात है? क्या होता है?

34
00:02:24,960 --> 00:02:29,280
इस शब्द का क्या अर्थ है? इसमें क्या-क्या मांगा जा रहा है? एक तो यह बात हो गई। दूसरी

35
00:02:29,280 --> 00:02:33,440
एक बात यह हो गई कि जो पंचाय

36
00:02:33,440 --> 00:02:33,940
में

37
00:02:33,600 --> 00:02:37,840
मांगी गई सामग्री है वो हमारे पास अवेलेबल है कि नहीं अवतारवाद

38
00:02:37,840 --> 00:02:41,920
की सिद्धि के समर्थन में। तो कंपटीशन इस बात

39
00:02:41,920 --> 00:02:46,720
नहीं था कि किसकी वोकैब जो शब्दकोश है किसका वह कैसा है

40
00:02:46,720 --> 00:02:51,280
या किसकी किसका भाषिक अध्ययन कैसा है इस बात को लेकर नहीं है

41
00:02:51,280 --> 00:02:55,360
तो पंचांग शब्द के बारे में यदि हमको नहीं ज्ञात है तो सामने

42
00:02:55,360 --> 00:02:59,520
वाले को बताना चाहिए कि भाई पंचांग के अर्थ में मैं यह मांग रहा हूं आप ये मुझे दो

43
00:02:59,520 --> 00:03:03,600
अब वो बताने की स्थिति ऐसी उलझना उलझन भरी हो गई कि वो

44
00:03:03,600 --> 00:03:07,760
आगे बढ़ नहीं पाए वहां मगर इसका ये अर्थ निकालना कि हमारे पास पंचाव नहीं

45
00:03:07,760 --> 00:03:11,840
है देने का मतलब उस पंचाव में जो भी सामग्री मांगी जा रही है वह

46
00:03:11,840 --> 00:03:15,840
नहीं है। यह अर्थ निकाल निकालना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अच्छा

47
00:03:15,840 --> 00:03:19,920
तो अगर यह अर्थ निकल सकता है तो यह अर्थ भी निकल सकता है कि निर्भय जब तक

48
00:03:19,920 --> 00:03:23,920
हमारी बातों को काट पा रहे थे काटा। उन्होंने खूब भरसक प्रयास किया कि भाई वो

49
00:03:23,920 --> 00:03:28,080
तत्व क्या होता है जो अवतार अवतरित होता है जो एक जगह दिखाई देता है। हर

50
00:03:28,080 --> 00:03:32,080
तरह से प्रयास करने के बाद जब उनके पास कुछ और नहीं था तो उन्होंने अपने पंचाव की

51
00:03:32,080 --> 00:03:36,080
ओर आगे बढ़े। मेरे ख्याल से वो पंचाव की ही तैयारी करके आए थे

52
00:03:36,080 --> 00:03:40,160
इस चर्चा के लिए। खैर यह तो हो गई सारी बातें। तो मेरे हिसाब से

53
00:03:40,160 --> 00:03:44,160
उसका बहुत अच्छा कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मगर 90% अगर आप देखेंगे तो

54
00:03:44,160 --> 00:03:48,320
वहां पर हमने अपने पक्ष को प्रस्तुत किया और उसको कोई काट नहीं पाया। पंचाब

55
00:03:48,320 --> 00:03:48,820
की जब

56
00:03:48,640 --> 00:03:52,720
बात आई तो वो खोला ही नहीं गया कि उस पंचाब में मांगा क्या जा रहा है। तो वो जब

57
00:03:52,720 --> 00:03:56,720
खुल ही नहीं पाया तो उसका जवाब देना और ना देना एक बराबर हो गया और वो चर्चा

58
00:03:56,720 --> 00:04:00,720
पोस्टपोंड सी हो गई। तो यह तो रही वो चर्चा में क्या

59
00:04:00,720 --> 00:04:04,720
हुआ था। अब होता क्या है कि उस चर्चा के बाद अह कुछ

60
00:04:04,720 --> 00:04:09,040
ऐसा होता है कि निर्भय और मेरे बीच में थोड़े से व्यक्तिगत

61
00:04:09,040 --> 00:04:13,120
संबंध ठीक होते हैं। उस चर्चा के बाद ऐसा नहीं है कि निर्भय

62
00:04:13,120 --> 00:04:17,120
ने हार मान ली थी या मैंने हार मान ली थी। मगर कुछ वो

63
00:04:17,120 --> 00:04:22,080
चर्चा कुछ इस तरह से स्थगित हुई थी जिसको बाद में निर्भय ने ये भी माना कि

64
00:04:22,080 --> 00:04:26,160
उसका बिहेवियर उसको ठीक नहीं लगा। उसने माना इस चीज को कि उसको

65
00:04:26,160 --> 00:04:30,720
अपना बिहेवियर ठीक नहीं लगा और उसने कारण भी बताया कि वह अनेकानेक

66
00:04:30,720 --> 00:04:34,880
धर्मियों के मंच पर जाता रहता है जिसके कारण वहां की उसे हैबिट लगी

67
00:04:34,880 --> 00:04:39,040
हुई है और यह वो इस बात के लिए तैयार रहता है

68
00:04:39,040 --> 00:04:43,120
कि उसके प्रति ऐसा बिहेव किया जाएगा व्यवहार किया जाएगा

69
00:04:43,120 --> 00:04:47,120
इसलिए वो अपने आप को वैसा ही आवरण बना करके चलता है। गलती यहां पर उससे

70
00:04:47,120 --> 00:04:51,200
ये हो गई कि यहां पर मैं उसको लेकर के न्यूट्रल था। मैं सच्चाई के साथ था

71
00:04:51,200 --> 00:04:55,360
ना कि उसको डोमिनेट करने के लिए। तो जब उसने स्वतंत्र रूप से उस चर्चा

72
00:04:55,360 --> 00:04:59,440
को देखा एक तृतीय पक्ष के रूप में दर्शक के रूप में तो उसने

73
00:04:59,440 --> 00:05:03,440
इस बात को ग्लानी महसूस की और उसने इस खेद को प्रकट किया और

74
00:05:03,440 --> 00:05:03,940
जब उसने

75
00:05:03,920 --> 00:05:08,400
ऐसा प्रकट किया तो मेरे को एक ग्लानी ये हो रही थी कि भाई भले ही उसने जो भी बिहेवियर

76
00:05:08,400 --> 00:05:12,400
किया हो मगर जिस समय मैंने उसको पंचाव्य वाली बात पर हटाया था

77
00:05:12,400 --> 00:05:16,560
उस समय वो पंचाव्य को लेकर के हमें नीचा नहीं दिखाना चाहता था बल्कि

78
00:05:16,560 --> 00:05:20,720
उस समय वो यह कह रहा था कि अभी 5 मिनट पहले जब मैं पंचाव्य बता रहा था तब तो आपने रोक

79
00:05:20,720 --> 00:05:24,800
दिया तो अब दोबारा आप पंचाव्य क्यों पूछ रहे यह बिल्कुल अक्षरस जो बातें हैं वो

80
00:05:24,800 --> 00:05:28,800
साफ-साफ है। तो अब इसमें एक ये बात हो सकती है कि भाई मेरी भी

81
00:05:28,800 --> 00:05:32,960
तो गलती मगर मेरी गलती जो है उसका जनक कौन है? मुझे जो

82
00:05:32,960 --> 00:05:37,120
इस तरह की भावनाएं आ रही हैं कि भाई यह नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहा है या

83
00:05:37,120 --> 00:05:41,200
फिर वह जो जो हमारा विषय है उस पर बात ना करके विषय अंतर

84
00:05:41,200 --> 00:05:45,440
करने का प्रयास कर रहा है कि तुम्हें पंचाव क्यों नहीं पता है। अवतारवाद की सिद्धि नहीं

85
00:05:45,440 --> 00:05:49,600
बल्कि ऐसा लग रहा था उस समय कि अब वो इस पर आ रहा है कि पंचाव क्यों नहीं पता है।

86
00:05:49,600 --> 00:05:53,760
तो जब मैंने बाद में उस चर्चा को देखा तो मुझे लगा कि भाई अभी थोड़ी देर पहले जब

87
00:05:53,760 --> 00:05:57,840
पंचा बताने वाला था तब हमने कहा था भाई इसको आप मत खोलो। वो उसमें भी रीजनिंग

88
00:05:57,840 --> 00:06:01,920
दूसरी थी। उसकी बात को समझ ना पाने की। रीजनिंग दूसरी थी। मगर हमने उसे

89
00:06:01,920 --> 00:06:06,400
रोका था। तो बाद में जब वो जब हम जब हमसे उसने पुनः पंचाव

90
00:06:06,400 --> 00:06:10,560
मांगा तो हमने कहा कि पंचाव क्या होता है? तो उसने

91
00:06:10,560 --> 00:06:14,560
कहा कि भाई पंचाव क्या होता है? आप क्यों पूछ रहे हो? तो जैसे ही उसने ये बात कही तो

92
00:06:14,560 --> 00:06:19,600
मुझे लगा कि यह इस बात पर आ रहा है निर्भय कि

93
00:06:19,600 --> 00:06:23,600
जो है वो यह दिखाना चाहता है कि तुमको पंचाव नहीं पता है। भैया मुझे बहुत कुछ नहीं

94
00:06:23,600 --> 00:06:27,760
पता है शास्त्र में और आपको भी नहीं पता है। ये बात सत्य है। तो इसी आधार पर

95
00:06:27,760 --> 00:06:31,840
मैंने और यह जो कंपटीशन है इस बात पे नहीं है कि शास्त्र में लिखे हुए प्रत्येक

96
00:06:31,840 --> 00:06:35,840
शब्द का अर्थ का बोध किसको है। तो इसी बात को आधार

97
00:06:35,840 --> 00:06:40,080
बनाते हुए मैंने उस चर्चा को स्थगित किया कि भाई अब विषयंतर कर और ऑलमोस्ट

98
00:06:40,080 --> 00:06:44,240
तीन सा 3 घंटे हो चुके थे हम लोगों को शायद तो और उसमें

99
00:06:44,240 --> 00:06:48,560
इतनी झगझिक वो गरमा गर्मी वो सब भी हो चुकी थी तो मेरे अंदर ये जो ग्लानी

100
00:06:48,560 --> 00:06:52,960
थी कि भले ही निर्भय उस वातावरण

101
00:06:52,960 --> 00:06:57,200
का जनक था उस चर्चा में मूल रूप से निर्भय की वजह से वो वातावरण उत्पन्न

102
00:06:57,200 --> 00:07:02,000
हुआ था कि सामने वाले की बात को नहीं समझ पाना और

103
00:07:02,000 --> 00:07:06,160
फिर भी मेरे अंदर यह ग्लानी आई कि जब इसने ने सामने से ऐसा किया तो मैं भी उसको

104
00:07:06,160 --> 00:07:10,160
थोड़ा सा उदारवाधिता उसके प्रति दिखाऊं और फिर मैंने कहा कि भाई यह गलती

105
00:07:10,160 --> 00:07:14,240
तो मेरी भी है कि जब जिस समय तुम गलत थे उस समय तो थे मगर जिस समय गलत

106
00:07:14,240 --> 00:07:18,320
नहीं थे उस समय तुम्हारे पूर्व के गलत होने के कारण मैंने तुम्हें वहां गलत समझ लिया तो

107
00:07:18,320 --> 00:07:22,560
यह कहते हुए मैंने भी उसको एक तरीके से आत्मसात

108
00:07:22,560 --> 00:07:27,760
किया आलिंगन किया भावनात्मक आलिंगन किया निर्भय के साथ और

109
00:07:27,760 --> 00:07:31,840
क्या कहते हैं उसमें एक ये भाव भी था कि अगर यह क्षमा मांग रहा है कोई क्षमा मांगता है तो

110
00:07:31,840 --> 00:07:34,720
उसको अकेलापन ना फील हो और इसलिए हमें भी

111
00:07:34,720 --> 00:07:38,800
उदार हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं हां अच्छा अब आ गए देखा अच्छा हुआ

112
00:07:38,800 --> 00:07:42,880
ना देखा पता चल गया हां मांग ली क्षमा ऐसे नहीं करते

113
00:07:42,880 --> 00:07:47,040
हैं जब कोई क्षमा मांग रहा है अपनी ओर से वो बेंड हो रहा है तो फिर आपको भी वहां

114
00:07:47,040 --> 00:07:51,040
पर थोड़ा सा हंबल होना चाहिए ऐसा मुझे लगता है और मैंने वही

115
00:07:51,040 --> 00:07:55,040
किया उसको अकेला नहीं छोड़ा कि माफी मांगने वाली स्थिति में केवल तुम ही नहीं हो

116
00:07:55,040 --> 00:07:59,040
मैं भी हूं तो मैंने इस तरह से अपने आप को उसके साथ वहां पर प्रस्तुत किया

117
00:07:59,040 --> 00:08:03,200
कि तुम अकेले मत समझो भाई तुमसे ही गलती नहीं हुई मुझसे भी ये सारी

118
00:08:03,200 --> 00:08:07,200
तो यह बातें हैं तो अब इसके बाद हम लोगों में व्यक्तिगत

119
00:08:07,200 --> 00:08:11,360
वार्ताएं भी शुरू हो गई और कुछ थोड़ी सी व्यक्तिगत जानकारियां

120
00:08:11,360 --> 00:08:15,600
भी साझा हुई एक दूसरे को और सैद्धांतिक चर्चाएं भी हुई।

121
00:08:15,600 --> 00:08:19,760
तो इस ये सैद्धांतिक चर्चाएं जो हुई है उसके बारे में हम बाद में बात करेंगे।

122
00:08:19,760 --> 00:08:23,920
अब होता यह है कि बातें चल रही, बातें

123
00:08:23,920 --> 00:08:28,000
चल रही। फिर कुछ दिनों बाद मुझे यह दिखाई देता है कि निर्भय जिस चैनल से

124
00:08:28,000 --> 00:08:32,080
जुड़ा हुआ है उस चैनल पर मेरी बातों को गलत तरीके

125
00:08:32,080 --> 00:08:36,480
से प्रस्तुत किया जा रहा है। जैसे मान लीजिए कि मैंने वाकई में कोई गलती की है कि पंचाय

126
00:08:36,480 --> 00:08:40,560
में मैंने आपको हटा दिया तब आप उस क्लिप को निकाल दो कि हां भाई मैंने

127
00:08:40,560 --> 00:08:44,560
हटाया ठीक है। पंचा मैंने हटाया। हालांकि उसका भी अर्थ मेरा दूसरा

128
00:08:44,560 --> 00:08:48,720
है। पंचाव से मैं डरता नहीं हूं। हां अगर भाषिक कुछ

129
00:08:48,720 --> 00:08:49,920
वो हो रही है अल्पज्ञता

130
00:08:49,920 --> 00:08:54,000
हो तो उसको आप बताइए भाषिक। ठीक है? क्योंकि भाषा को लेकर के

131
00:08:54,000 --> 00:08:58,000
शास्त्रार्थ नहीं था हमारा। तो एक तो यह बात हो गई। तो मैंने

132
00:08:58,000 --> 00:09:03,360
देखा कि निर्भय के निर्भय जिस चैनल से जुड़ा हुआ है उसी चैनल पर

133
00:09:03,360 --> 00:09:07,600
चीजों को काट छांट करके और जैसे मान लीजिए कि मैंने मुझसे

134
00:09:07,600 --> 00:09:12,080
कहा गया कि यह बताओ और फिर मैंने कहीं दूसरी जगह कहा हो कि क्यों बताएं।

135
00:09:12,080 --> 00:09:16,160
तो यहां पर मैंने कहा मुझसे कहा गया यह बताओ और मेरा दूसरी जगह का कट

136
00:09:16,160 --> 00:09:20,720
लगा के यहां रख दिया गया कि क्यों बताएं। तो इससे क्या हुआ कि मैंने कहा कि क्यों बताएं।

137
00:09:20,720 --> 00:09:25,200
तो यह इस तरीके से उसके चैनल पर बहुत सारे शॉर्ट वीडियोस बनाए जाने लगे। हालांकि

138
00:09:25,200 --> 00:09:29,200
मुझे प्रभाव नहीं पड़ता है उन वीडियोस से क्योंकि हमारी ट्रेनिंग ही

139
00:09:29,200 --> 00:09:33,200
ऐसे हुई है। ठीक है? हम लोगों की ट्रेनिंग ऐसे ही हुई है कि

140
00:09:33,200 --> 00:09:37,760
हमें हर विपरीत परिस्थिति ये कुछ भी विपरीत परिस्थितियां नहीं है। भाई

141
00:09:37,760 --> 00:09:42,160
जितने भी इस समय युवा जुड़े हुए हैं उस चैनल से और निर्भय भी स्वयं भी हैं।

142
00:09:42,160 --> 00:09:46,320
इससे 100 गुना हजार गुना ज्यादा विपरीत परिस्थितियों में आग

143
00:09:46,320 --> 00:09:50,480
में जल के तप के बाहर आने के बाद यहां पर बैठे हुए हैं। तो यह

144
00:09:50,480 --> 00:09:54,560
सोचना बेकार है कि उससे मुझे कोई प्रभाव पड़ता है। हां, सिद्धांत यह है कि

145
00:09:54,560 --> 00:09:58,640
अगर आप मुझे बड़े भाई की तरीके से देख रहे हैं। है ना? और हमारे बीच में एक

146
00:09:58,640 --> 00:10:02,640
विश्वास का संबंध है यदि तो फिर

147
00:10:02,640 --> 00:10:04,960
आपको वहां पर ऑब्जेक्शन होना चाहिए कि भाई

148
00:10:04,960 --> 00:10:09,360
तुम शिवश जी की बातों को तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत मत करो। उन्होंने जहां जो

149
00:10:09,360 --> 00:10:13,440
वाकई में गलतियां की गई हो उसको आप प्रस्तुत करो। कहीं मैं व्यवहार

150
00:10:13,440 --> 00:10:17,440
की बात कर रहा हूं राम जी के विषय में कहीं राम जी के विषय में परमार्थ की बात कर रहा हूं तो उन

151
00:10:17,440 --> 00:10:21,680
दोनों को जोड़ करके आप दिखा रहे हो। जबकि आप व्यवहार परमार्थ अच्छे से मुझसे समझ चुके हो।

152
00:10:21,680 --> 00:10:25,760
तो मैंने इस चीज को ऑब्जेक्शन किया निर्भय को। तो जब निर्भय

153
00:10:25,760 --> 00:10:30,080
को मैंने ऑब्जेक्शन किया तो निर्भय ने कहा मैं उनके बीच में नहीं बोल सकता। यह नहीं है वो नहीं है। जबकि

154
00:10:30,080 --> 00:10:34,400
महाभारत गीता हमें क्या सिखाती है? गीता रामायण इन ये जो ग्रंथ

155
00:10:34,400 --> 00:10:38,400
है मैंने देखा ज्यादातर जो ये जो युवा है ये

156
00:10:38,400 --> 00:10:42,560
इसका उनके मतानुसार जो अर्थ किया गया है उसके प्रचार पर तो जोर

157
00:10:42,560 --> 00:10:46,800
देते हैं। मैंने देखा मगर अपने जीवन में नहीं उतारते। ये बड़ी समस्या

158
00:10:46,800 --> 00:10:50,800
वाली बात है। अपने जीवन में नहीं उतारना है कि हमसे

159
00:10:50,800 --> 00:10:54,800
हमारे ऊपर जब यदि वो चीज लागू होगी तो हम अलग हट जाएंगे। अरे भाई बोलो ना

160
00:10:54,800 --> 00:10:58,880
जाकर के अगर आप जिस चैनल से जुड़े हुए हो वहां से ये सब हो रहा है जिसको

161
00:10:58,880 --> 00:11:03,360
आप बड़ा भाई कह रहे हो उसकी रिस्पेक्ट कर रहे हो हां

162
00:11:03,360 --> 00:11:07,360
तो वहां जाकर के जब उसके साथ ऐसा हो रहा है उसकी बातों को गलत तरीके से प्रस्तुत

163
00:11:07,360 --> 00:11:11,440
करके उसका अपमान किया जा रहा है तो आप कैसे चुप हो और अपमान ही नहीं उसमें जोक

164
00:11:11,440 --> 00:11:15,520
टाइप से भी बनाया जा रहा है वहां पर ये सब हमने किया क्या किसके साथ किया हमने अभी तक

165
00:11:15,520 --> 00:11:19,760
बताइए हम नहीं करते ये सब हां हमने किया

166
00:11:19,760 --> 00:11:20,320
फड़ों

167
00:11:20,320 --> 00:11:24,320
के साथ किया रामपालियों के साथ किया जो ऐसा डिर्व करते हैं। उसमें भी

168
00:11:24,320 --> 00:11:28,400
कहीं मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। एक मर्यादा के अंदर

169
00:11:28,400 --> 00:11:32,640
रहते हुए ही हमने विनोद किया। खैर और निर्भय

170
00:11:32,640 --> 00:11:36,800
के साथ या आर्य समाजियों के साथ इस तरीके का हमने कोई ऐसा कोई

171
00:11:36,800 --> 00:11:40,960
मजाक नहीं किया कि उसकी फोटो बिगाड़ दी। उसको जोकर टाइप का बना दिया। ज्यादातर इनके यहां देखो

172
00:11:40,960 --> 00:11:46,000
तो वही जो अभी इस समय वो कर रही है अवेकनिंग भारत वाली वही

173
00:11:46,000 --> 00:11:50,000
इनके चैनल पर होने लगा। तो मैंने ऑब्जेक्शन किया तो ये दूर हट गए। यह उसी

174
00:11:50,000 --> 00:11:54,080
तरह से दूर हट गए जैसे सीता माता का अपहरण होने पर यदि कोई

175
00:11:54,080 --> 00:11:58,240
जाए कि भैया कुंभकरण के पास जाए और कहे कि भैया तुम्हारे भाई ऐसा कर रहे हैं

176
00:11:58,240 --> 00:12:02,240
तो कुंभकरण कहे भैया तुम्हारा मैटर है हम तो अपने भाई की साइड है ये किया

177
00:12:02,240 --> 00:12:06,560
इन्होंने तो फिर न्याय और अन्याय

178
00:12:06,560 --> 00:12:10,560
के बीच में संबंध नहीं देखे जाते यही सिखाया था भगवान ने गीता में कि

179
00:12:10,560 --> 00:12:15,040
आपके गुरु वहां खड़े हुए हैं। आपके पिता मां वहां खड़े हुए हैं सामने

180
00:12:15,040 --> 00:12:19,040
और आप जो है धर्म के पक्ष में हो। द्रोपदी का चिर हरण

181
00:12:19,040 --> 00:12:23,040
हुआ है तो आपको बाण चलाना है कि नहीं चलाना है तो संबंधों

182
00:12:23,040 --> 00:12:27,200
का निर्वाह करो मगर सिद्धांत का त्याग मत करो अच्छा ये दिक्कत

183
00:12:27,200 --> 00:12:31,200
भी है कि एक जो गुरु का अभाव है जीवन में

184
00:12:31,200 --> 00:12:35,360
कि भैया किसको केंद्रित हो के हम चले तो गुरु है ही नहीं आर्य समाज में

185
00:12:35,360 --> 00:12:39,360
आधा तीर आधा बटे इसकी इसकी उसका अरोड़ा भानी

186
00:12:39,360 --> 00:12:44,000
मोती का कुबा जोड़ा टाइप से व्यक्ति चलता है तो कोई एक जो एक होता है ना मेंटर

187
00:12:44,000 --> 00:12:48,240
मेंटोर कहते हैं क्या कहते हैं उसको वो नहीं होता इनके पास तो कहीं ना कहीं

188
00:12:48,240 --> 00:12:52,240
अपनी मनमर्जी चलाते हैं। हमारे पास आपके

189
00:12:52,240 --> 00:12:56,480
अनुसार अप्रामाणिक है क्या है वह बाद की बात है। मगर हमारे पास एक केंद्र में रहने

190
00:12:56,480 --> 00:13:00,560
के लिए एक गुरु तो है। आफ्टर ऑल वो हमें जज कर सकता है। वो

191
00:13:00,560 --> 00:13:04,640
हमें बता सकता है। सुधार कर सकता है और हम सुधरेंगे। अगर उन्होंने कह दिया ऐसे तो

192
00:13:04,640 --> 00:13:08,800
ऐसे वैसे ही चलेंगे। तो ये वाली बात है। इनके यहां वो गुरु का अभाव

193
00:13:08,800 --> 00:13:12,800
है जो बस ग्रंथि है जिस जो जैसा उसको पढ़ ले उसका जो हिस्सा जो समझ

194
00:13:12,800 --> 00:13:17,280
ले बस वही है। खैर कम टू द पॉइंट। तो यह सारी चीजें हुई

195
00:13:17,280 --> 00:13:21,920
और इसके बाद जब मैंने ऐसा ऑब्जेक्शन किया

196
00:13:21,920 --> 00:13:25,920
और ऑब्जेक्शन करने के बाद जब इसने निर्भय ने यह

197
00:13:25,920 --> 00:13:30,240
वाली भाषा क्या कहते हैं बताई कि भाई मैं क्या करूं वो तो आप लोगों का मैटर

198
00:13:30,240 --> 00:13:34,320
है आप लोग जानो मैं तो चला नहीं रहा हूं मैं तो कर नहीं रहा हूं दूर हट गए

199
00:13:34,320 --> 00:13:38,320
तो मैंने कहा भाई ठीक है तो फिर हमारे बीच में इस तरह

200
00:13:38,320 --> 00:13:42,560
से बात करना मतलब हमारे बीच में जो जो ये व्यक्तिगत

201
00:13:42,560 --> 00:13:46,560
जो संबंध एक जैसा स्थापित होने लगा का वो उसने जन्म लिया था।

202
00:13:46,560 --> 00:13:50,640
एक शिशु रूप में ही था वो नवजात शिशु के रूप में। तो वो मैं आगे नहीं बढ़ा

203
00:13:50,640 --> 00:13:54,720
सकता क्योंकि भाई मेरे सिद्धांत अलग हैं। तुम्हारा ब्रह्म अलग है। मेरा ब्रह्म

204
00:13:54,720 --> 00:13:59,200
अलग है। चल जाएगा। तुम्हारा धर्म ही अलग है। और धर्म तो धर्म

205
00:13:59,200 --> 00:14:03,360
यह जो नैतिकता है यह वाली भाई जो नैतिकता है कि

206
00:14:03,360 --> 00:14:07,360
भाई यहां पर इसको अनावश्यक इसका जोक बनाया जा रहा है। उसमें भी तुम

207
00:14:07,360 --> 00:14:11,360
कह रहे हो कि मैं दूर हूं। और अभी कल भी ऐसा ही हुआ। वह बताता हूं फिर

208
00:14:11,360 --> 00:14:15,360
क्या हुआ। तो खैर

209
00:14:15,360 --> 00:14:19,440
ये जो बातें हुई निर्भय के साथ फिर मैंने कहा एक काम करते हैं तुम

210
00:14:19,440 --> 00:14:23,520
तुमको तुम्हारा जो धर्म युद्ध है उसके लिए मेरा आशीर्वाद शुभकामनाएं

211
00:14:23,520 --> 00:14:27,680
और तुम लड़ो और हम लोग इस तरीके से

212
00:14:27,680 --> 00:14:31,680
मैं जो है आपके साथ कनेक्ट नहीं रह सकता। मैंने ये बताया। हालांकि मैंने

213
00:14:31,680 --> 00:14:35,760
ये नहीं कहा कि जीवन में कभी तुमसे बात नहीं करूंगा। ठीक है? मैंने ये

214
00:14:35,760 --> 00:14:40,160
भी नहीं कहा। तो वो WhatsApp पे मेरे मैसेजेस

215
00:14:40,160 --> 00:14:45,120
हैं अभी भी। तो हम

216
00:14:45,120 --> 00:14:51,120
जब ये हुआ तो मैंने कहा कि

217
00:14:51,840 --> 00:14:56,000
आप मतलब तुम अपना कार्य करते रहो। मैं अपना कार्य करता रह रहा हूं। हमारा इस तरीके

218
00:14:56,000 --> 00:15:00,000
से बात करना पॉसिबल नहीं है क्योंकि तुम्हारे सिद्धांत अलग हैं। अब वो सिद्धांत

219
00:15:00,000 --> 00:15:04,160
मुझे नहीं लगता कि जो इनके यहां की विशुद्ध रामायण इत्यादि है उसमें भी हो

220
00:15:04,160 --> 00:15:08,880
कि भैया संबंध का निर्वाह करने के लिए सिद्धांत का त्याग कर दो। मुझे नहीं लगता कि हो

221
00:15:08,880 --> 00:15:13,040
वही वाली बात है कि जो तुमने खुद रामायण स्वीकार कर रखी है जो गीता तुमने

222
00:15:13,040 --> 00:15:17,200
खुद स्वीकार कर रखी है हमारी वाली नहीं जो तुमने स्वीकार कर रखी तुमने उसको

223
00:15:17,200 --> 00:15:21,200
भी अपने जीवन में नहीं उतारा तो क्या किया तुमने तुम धर्म के लिए लड़ने

224
00:15:21,200 --> 00:15:25,200
चले हो मगर तुम अपने ऊपर नहीं उतार पा रहे तो क्या फायदा है कौन सा धर्म है

225
00:15:25,200 --> 00:15:29,200
केवल लोगों को दबाना चाहते हो अपने नाम के आगे तो खैर

226
00:15:29,200 --> 00:15:33,200
मेरे को दुख हुआ कि भाई अगर ये मुझे बड़ा भाई मानता है तो जब मेरे साथ

227
00:15:33,200 --> 00:15:37,520
अन्याय हो रहा है और ये वहां पर दर्शक है ये वहां पर जुड़ा हुआ है।

228
00:15:37,520 --> 00:15:41,520
सामर्थ्यवान होते हुए भी यदि व्यक्ति उसमें

229
00:15:41,520 --> 00:15:45,600
अपना क्या कहते हैं? न्याय का पक्ष नहीं लेता है ना तब भी वह जो

230
00:15:45,600 --> 00:15:49,760
है अन्यायकारी कहलाता है। तो वहां पर आप विवेकी हैं। आप सामर्थ्यवान

231
00:15:49,760 --> 00:15:53,920
है। आप वहां पर नहीं बोले इसलिए हमने इनसे किनारा किया। हालांकि यह

232
00:15:53,920 --> 00:15:58,720
कहते हुए किया कि हमारे बीच में इस तरह से व्यक्तिगत चर्चा नहीं और

233
00:15:58,720 --> 00:16:02,720
शुभकामनाएं दी कि तुम तुम्हारा जो भी तुम सोच रहे हो कि धर्म है तो उसके

234
00:16:02,720 --> 00:16:06,800
लिए जो है तुम्हें शुभकामनाएं और इस तरह से मैंने म्यूट कर लिया और ऐसा भी नहीं कि ब्लॉक

235
00:16:06,800 --> 00:16:07,300
कर

236
00:16:06,960 --> 00:16:11,040
दिया। इसके बाद क्या होता है काफी दिनों के बाद

237
00:16:11,040 --> 00:16:15,120
जब अभी ये सोनाली जी सोनाली से जब बातचीत शुरू

238
00:16:15,120 --> 00:16:19,360
हुई अवेकनिंग भारत वाली है जो उनसे जब बात ये सब शुरू हुआ

239
00:16:19,360 --> 00:16:23,360
तो मैंने देखा कि जो वो जो जो

240
00:16:23,360 --> 00:16:27,440
निर्भय के साथ जो चर्चा हुई थी उसको गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा

241
00:16:27,440 --> 00:16:31,520
है। अच्छा निर्भय के साथ मेरी बहुत सारी सैद्धांतिक चर्चा ऑन कॉल हो चुकी

242
00:16:31,520 --> 00:16:35,520
है। जिसके बारे में अभी हम बात करेंगे

243
00:16:35,520 --> 00:16:40,320
तो यह क्या कहते हैं? चर्चा

244
00:16:40,320 --> 00:16:44,480
का कट वगैरह निकाल करके सोनाली को वो दिया जा रहा है सहारा

245
00:16:44,480 --> 00:16:48,640
कि ये देखो ये निर्भय से ऐसा हुआ था वैसा हुआ था। सोनाली उसको प्रस्तुत कर रही है

246
00:16:48,640 --> 00:16:53,120
कि ये जो है न्याय दर्शन के चक्कर में भाग गए। न्याय दर्शन पे नहीं भागा था।

247
00:16:53,120 --> 00:16:57,360
फिर वही बात। मैं सिद्धांत के वजह से मैंने तुम्हें नहीं हटाया

248
00:16:57,360 --> 00:17:01,360
वहां से। पहली बात तो टाइम हो चुका था। बहुत सारा। गरमा गर्मी

249
00:17:01,360 --> 00:17:05,600
हो चुकी थी। उसके बाद तुम वो अर्थ नहीं बता रहे थे उस शब्द का जो पर्टिकुलर

250
00:17:05,600 --> 00:17:09,600
तुम्हें मालूम था तो मैंने तुमको हटाया था। मैंने ये थोड़ी ना कहा था कि

251
00:17:09,600 --> 00:17:13,680
पंचा के अंदर जो चीजें हैं वो तुम जब मुझे बताओगे तो बताने के

252
00:17:13,680 --> 00:17:18,000
बाद मैं तुम्हें दूंगा नहीं। या तो ये कहो कि भाई भाषिक शास्त्रार्थ

253
00:17:18,000 --> 00:17:22,000
है ये साथ साथ में कि किसकी क्या भाषा पर पकड़ है वो भी है तो

254
00:17:22,000 --> 00:17:26,400
हम भी फिर कुछ ऐसे तुम्हें शब्द देंगे जो तुम्हें ना मालूम हो। भाई सर्वज्ञ

255
00:17:26,400 --> 00:17:30,400
तो कोई नहीं है ना। शास्त्र में ऐसे बहुत से शब्द मिल जाएंगे जो सामने वाले को ना मालूम हो।

256
00:17:30,400 --> 00:17:34,400
तो वहां पर बात थी अवतार की सिद्धि की हो रही है कि नहीं हो रही इस बात की नहीं थी

257
00:17:34,400 --> 00:17:38,400
कि शिवश नारायण द्विवेदी को अमुक शब्द का अर्थ पता है या नहीं पता है

258
00:17:38,400 --> 00:17:40,720
तो

259
00:17:40,720 --> 00:17:44,880
अब जो है बात आगे बढ़ती है तो जब मैंने देखा

260
00:17:44,880 --> 00:17:50,000
कि सोनाली गलत तरीके से वहां पर पोट्रे किया जा रहा है तो फिर मैंने

261
00:17:50,000 --> 00:17:54,960
बहुत प्यारे शब्दों में मैंने इसको निर्भय को एक मैसेज भेजा मैंने कहा

262
00:17:54,960 --> 00:17:58,960
अच्छा मुझे लोग ट्रोल कर रहे थे निर्भय से क्यों भाग गए निर्भय से क्यों भाग गए निर्भय से

263
00:17:58,960 --> 00:18:02,960
क्यों भाग गए इस तरह से मुझसे उससे कह रहे थे। मैंने कहा भाई भागा कौन है? निर्भय से

264
00:18:02,960 --> 00:18:07,120
तो मेरी बहुत सारी चर्चा हुई है। फोन कॉल पे भी उस चर्चा के बाद भी

265
00:18:07,120 --> 00:18:11,120
निर्भय से मेरी बहुत सारी चर्चा हुई है। अगर भागना होता तो वो चर्चा क्यों करता? भाई

266
00:18:11,120 --> 00:18:15,680
ठीक है माफी आप माफीनामा हो गया। उसके बाद जो है टाटा बाय-ब

267
00:18:15,680 --> 00:18:19,680
भाई जिसको गिल्ट है उसने गिल्ट कर लिया। मान लिया मगर हमारी सैद्धांतिक चर्चा हुई।

268
00:18:19,680 --> 00:18:24,000
कम से कम मुझे लगता है फोन पे हमारी दो तीन चार घंटे की तो चर्चा है।

269
00:18:24,000 --> 00:18:28,160
अच्छा तो ये सब इनको नहीं पता था। तो जब यह

270
00:18:28,160 --> 00:18:32,160
लोग इस तरह से प्रस्तुत कर रहे थे कि न्याय दर्शन की वजह से मैंने उसको

271
00:18:32,160 --> 00:18:36,480
हटाया तो मैंने निर्भय के द्वारा जो लिखित में मुझे एक मैसेज

272
00:18:36,480 --> 00:18:37,040
भेजा गया

273
00:18:37,040 --> 00:18:41,120
था यह कहने के लिए कि नहीं मेरा व्यवहार गलत था। उसने उसमें

274
00:18:41,120 --> 00:18:45,200
स्वीकार किया था कि मेरा व्यवहारिक त्रुटि मुझे दिखाई दे रही है। मुझे उसका खेद है। तो

275
00:18:45,200 --> 00:18:49,280
जब मुझे यह पता लगा कि वहां से हटाए जाने

276
00:18:49,280 --> 00:18:53,440
के पीछे कारण क्या है? निर्भय का भी व्यवहार और फल स्वरूप मेरा भी व्यवहार

277
00:18:53,440 --> 00:18:57,520
बिगड़ना और वह कारण है। न्याय दर्शन कारण नहीं है। मगर न्याय दर्शन करके

278
00:18:57,520 --> 00:19:01,520
जब दिखाया जा रहा है तो मैंने उनको शोधित करने के लिए उनको ध्यान दिलाया कि निर्भय

279
00:19:01,520 --> 00:19:06,320
ने लिखित में माफी मंगवाई थी और ये जो क्या नाम है इनका?

280
00:19:06,320 --> 00:19:10,400
अरे इनका क्या नाम है? अब वो उनको ये भी बुरा लग जाता

281
00:19:10,400 --> 00:19:14,400
है। संदीपन रॉय अब उनको पता है क्या क्या बुरा लग जाता है? वो मैं अभी आगे

282
00:19:14,400 --> 00:19:18,640
बताऊंगा। क्षेत्र विषयक टिप्पणी करते हैं। अरे भैया क्षेत्र विषयक टिप्पणी

283
00:19:18,640 --> 00:19:22,640
नहीं करते हैं। कई बार ऐसा होता है आपका नाम जब मुझे याद नहीं आ रहा है तो मैंने

284
00:19:22,640 --> 00:19:26,960
बंगाली कह दिया आपको। इसमें कौन सी टिप्पणी हो गई? आप मुझे नॉर्थ इंडियन

285
00:19:26,960 --> 00:19:31,120
कह दो। उत्तर प्रदेश का निवासी कह दो। जो शब्द

286
00:19:31,120 --> 00:19:35,200
आपको आ जाए क्षेत्र विषयक वो कह दो अगर नाम नहीं। नाम इनका थोड़ा सा मेरे लिए

287
00:19:35,200 --> 00:19:39,280
संदीप अलग नाम है। संदीपन थोड़ा मेरे लिए कहने के लिए वो

288
00:19:39,280 --> 00:19:43,440
यूजुअल नाम नहीं है। थोड़ा सा यूनिक है इसलिए जल्दी आता नहीं है। तो

289
00:19:43,440 --> 00:19:47,520
कई बार मैंने में ऐसे नाम होते हैं हमारे बोल

290
00:19:47,520 --> 00:19:52,000
देते हैं वहां पर संदीप ऐ

291
00:19:52,000 --> 00:19:52,500
कई

292
00:19:52,240 --> 00:19:56,240
बार हमें जैसे किसी का नाम नहीं लेना है और उसको मैसेज पहुंच जाए

293
00:19:56,240 --> 00:20:00,400
जैसे कि भागवतानंद का नाम नहीं लेना था तो भागवतानंद को मैसेज भी पहुंच

294
00:20:00,400 --> 00:20:04,400
जाए तो हमने क्या किया कि उसके बारे में इर्दगिर्द की चीजें तो बताई डायरेक्ट नाम नहीं

295
00:20:04,400 --> 00:20:08,640
लिया तो ऐसा भी हुआ है तो उसको भी ये लोग अच्छा अब

296
00:20:08,640 --> 00:20:12,720
ये सारी बातें तो हो गई एक तरफ अब जब मैंने इनको मैसेज भेजा कि भाई एक काम करते

297
00:20:12,720 --> 00:20:16,800
हैं निर्भय कैसे कैसे हो छोटे भाई? क्या लिखा मैंने? कैसे हो छोटे

298
00:20:16,800 --> 00:20:20,880
भाई? और हमारी वह चर्चा अधूरी रह गई

299
00:20:20,880 --> 00:20:24,880
है। तो ऐसा करते हैं कि किसी दिन चर्चा कर लेते हैं। वह पूरी कर लेते

300
00:20:24,880 --> 00:20:28,880
हैं। अब ये बताओ जो न्याय दर्शन की वजह से जो छोड़ के जा रहा है वो क्यों तो तुम्हारे

301
00:20:28,880 --> 00:20:32,960
साथ चार घंटे की चर्चा वहां करेगा फोन पे और क्यों तुम्हें मैसेज भेजेगा कि भैया

302
00:20:32,960 --> 00:20:37,040
आमने सामने की चर्चा कर लेते हैं। तो पहली बात तो इनके गाल पे तमाचा है

303
00:20:37,040 --> 00:20:41,200
ना जो इस तरह से बातें कर रहे हैं। जो इस तरह की बातें कर रहे हैं इनके गाल

304
00:20:41,200 --> 00:20:45,360
पे पहला तो तमाचा है। उसके बाद फिर मैंने कहा जब भी

305
00:20:45,360 --> 00:20:49,440
इन लोगों की कोई चीज स्पष्ट क्लियर कट सामने आ जाती है तो ये लोग आगे बढ़ जाते

306
00:20:49,440 --> 00:20:53,440
हैं। विषयंतर एक ही नुस्खा है विषयंतर कर डालो बस।

307
00:20:53,440 --> 00:20:57,440
तो अब मैंने कहा चर्चा कर लेते हैं। तो यहां पे

308
00:20:57,440 --> 00:21:01,680
क्या हुआ? मेरे मन में ये भाव था कि अब तो छोटे

309
00:21:01,680 --> 00:21:05,920
भाई की तरीके से मैंने कहा तो मैंने मेरे मन में यह भाव था हो सकता है

310
00:21:05,920 --> 00:21:07,280
कि इस बार यह कहे भैया

311
00:21:07,280 --> 00:21:11,520
आप इस बार हमारे चैनल पे आ जाइए। तो मैंने कहा अब की बार ऐसा कर लेंगे

312
00:21:11,520 --> 00:21:15,520
कि अगर यह बुलाएंगे तो इनके चैनल पर चले जाएंगे। मैंने इस भाव से

313
00:21:15,520 --> 00:21:19,760
मैं तो एक्सपेक्ट कर रहा था कि ऐसे ही कहेंगे कि भैया

314
00:21:19,760 --> 00:21:23,840
आपके यहां पे हो चुकी है एक बार चर्चा। अब हमारे यहां पर कर लेते हैं। तो मैंने कहा ठीक

315
00:21:23,840 --> 00:21:27,920
है भाई भाई को मैसेज कर रहे हैं छोटे भाई को तो चले जाएंगे। वो बात अलग है

316
00:21:27,920 --> 00:21:32,160
कि भैया एक महाभारत में दोनों दो पक्षों में खड़े हुए हैं। ठीक है?

317
00:21:32,160 --> 00:21:36,400
तो ये हुआ। अब अब जब इन्होंने

318
00:21:36,400 --> 00:21:41,920
वीडियो बनाया इस मैसेज के जवाब में आ हा हा

319
00:21:41,920 --> 00:21:46,160
तो मुझे बड़ा शौक लगा भाई बहुत बड़ा झटका लग गया वो वीडियो देख

320
00:21:46,160 --> 00:21:50,400
के अच्छा पहली नंबर बात तो ये है कि शुरू के 1520 मिनट का वीडियो तो

321
00:21:50,400 --> 00:21:54,720
मैंने उसको फॉरवर्ड किया मुझे लग रहा है अब ये बोल नहीं रहा है आगे जाके बोलेगा

322
00:21:54,720 --> 00:21:58,720
है ना ये मुझसे यह ना कह सका कि भैया वही जो मैंने एक्सपेक्ट किया था वो ना

323
00:21:58,720 --> 00:22:02,800
कह सका इसने वीडियो बनाया निर्भय ने और वीडियो बना करके इसने कहा कि

324
00:22:02,800 --> 00:22:06,960
अब तुम्हें ट्रोल कर रहे हैं इसलिए तुम आ रहे हो। मैंने तो अपना झंडा काहे का झंडा गाड़

325
00:22:06,960 --> 00:22:11,040
दिया भाई तुमने? काहे का झंडा गाड़ दिया? अरे उस

326
00:22:11,040 --> 00:22:15,120
वीडियो में अगर वो तीन घंटे का वीडियो है ना तो दो घंटे

327
00:22:15,120 --> 00:22:19,200
45 मिनट मेरा झंडा गड़ा है। तुम काटते काटते रह गए पर काट

328
00:22:19,200 --> 00:22:24,080
नहीं पाए ना। कौन सा तत्व होता है जो अवतरित होता है?

329
00:22:24,080 --> 00:22:28,560
ह झंडा गाड़ दिया तुमने। मतलब अपने एक स्वषित

330
00:22:28,560 --> 00:22:32,560
एक काल्पनिक दुनिया में स्वयं को खुश रखने का अच्छा तरीका है भाई। और फिर

331
00:22:32,560 --> 00:22:37,120
तुम सोच रहे हो कि मुझे तुमसे तुमने कहा कि

332
00:22:37,120 --> 00:22:41,360
क्या कहते हैं आपको जो है एक तरीके से ऐसा उसने शो किया कि मुझे अब गरज है उसके

333
00:22:41,360 --> 00:22:45,440
साथ चर्चा करने की उसने निर्भय ने ऐसा उसमें शो किया

334
00:22:45,440 --> 00:22:49,440
कि मुझे अब गर्ज हो रही है तो मैं मतलब मेरा जो एक तरीके से

335
00:22:49,440 --> 00:22:53,520
जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई कि ये इसको मैं इस दृष्टि से देख

336
00:22:53,520 --> 00:22:57,520
रहा हूं और ये कैसे मेरी तरफ मेरे लिए वो लेके चल रहा है भाव

337
00:22:57,520 --> 00:23:01,600
कि हां अब आया ना उसके मन में ये भाव थी कि अब अब जो

338
00:23:01,600 --> 00:23:06,000
है इनको अब आवश्यकता पड़ेगी। अब तुम्हें मेरे चैनल पे आना पड़ेगा। और अगर

339
00:23:06,000 --> 00:23:10,240
वो संदीपन जी से वो करना है ना तो संदीपन जी से करना है तो से क्षमा मांगनी

340
00:23:10,240 --> 00:23:14,320
पड़ेगी। संदीपन जी के अब अलग नुस्खे हैं चर्चा से बचने के। उनके

341
00:23:14,320 --> 00:23:18,720
अलग नुस्खे हैं। आज हर हर चीज पे बात होने वाली है बहुत डिटेलिंग के साथ। ठीक है?

342
00:23:18,720 --> 00:23:22,800
और लास्ट तक बने रहिए। बहुत बड़ा सरप्राइज भी है। बहुत बड़ा

343
00:23:22,800 --> 00:23:27,280
शॉकिंग सरप्राइज। ठीक है? तो वो आप लोगों को लास्ट में पता चलेगा।

344
00:23:27,280 --> 00:23:31,360
फिलहाल तो इसने जब ऐसा किया तो मैंने कहा कि

345
00:23:31,360 --> 00:23:35,360
मैंने कहा मैंने कहा कि भाई ये मैंने एक बहुत बड़ा सा जवाब इनको लिख के

346
00:23:35,360 --> 00:23:39,200
भी दे दिया और मुझे ये नहीं मालूम है कि शुरू में ये सब बोल रहा है मैं

347
00:23:39,200 --> 00:23:43,360
शंकर संप्रदाय का नाश कर दूंगा और चारों शंकराचार्य आ जाए और ये वो

348
00:23:43,360 --> 00:23:47,520
सब ये भी बोल रहा है उसमें वो हां ये भी बोल रहा है चारों शंकराचार्यों

349
00:23:47,520 --> 00:23:51,520
को वो चैलेंज दिया था उस वीडियो में ये ये बिना देखे ही

350
00:23:51,520 --> 00:23:55,600
ये बिना देखे ही मैं वहां से चालू कर रहा हूं जहां से ये सब बातें कर रहा है ना कि

351
00:23:55,600 --> 00:23:59,600
अब आपको गरज पड़ी है तो मैंने अपने हिसाब से रात में ही जब मैंने देखा तो रात में ही

352
00:23:59,600 --> 00:24:03,840
एक बहुत बड़ा सा लंबा सा मैसेज लिख करके भेज दिया।

353
00:24:03,840 --> 00:24:07,920
हर बात का जवाब मैंने जो मेरे देखा था बाद में मैं देख रहा हूं। दूसरे दिन

354
00:24:07,920 --> 00:24:12,080
लोग मुझे टैग कर रहे हैं रील में। इसने ये सब गंदा संा गंदा भी बोला है कि

355
00:24:12,080 --> 00:24:16,240
भैया वो चारों चारों शंकराचार्य राजा

356
00:24:16,240 --> 00:24:20,240
हैं और ये है और वो है मैं खत्म कर दूंगा। पुराण ही सबसे

357
00:24:20,240 --> 00:24:24,480
बड़ा अधर्म है। ये सब बोला। तो बाद

358
00:24:24,480 --> 00:24:28,560
में पता चला। तो फिर मैंने बाद में जब मुझे अच्छा जब मैंने वो मैसेज भेजा

359
00:24:28,560 --> 00:24:32,720
बिना इन इन अंशों के जवाब के तो उस मैसेज के बाद भी काफी सारी

360
00:24:32,720 --> 00:24:36,880
चर्चाएं चलती रही कुछ का कुछ बातें करते रहे और बाद

361
00:24:36,880 --> 00:24:41,120
में जब मैंने वो रील्स देखी वो भी भेजी मैंने ये क्या कह रहे हो कि आपने ऐसा कहा आपने वैसा

362
00:24:41,120 --> 00:24:45,120
कहा फिर आपका भी नाम लेने लगा उसने ये कहा है सनातन

363
00:24:45,120 --> 00:24:49,120
शंकर ने ये कहा मैंने आपकी वो देखी फोटो मैंने जब सनातन शंकर जी की फोटो

364
00:24:49,120 --> 00:24:53,200
देखी तो उसमें दयानंद जी को ग्रीन कपड़ों में दिखाया

365
00:24:53,200 --> 00:24:54,560
गया था ठीक है

366
00:24:54,560 --> 00:24:58,960
हम व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं करते। हमारा सिद्धांत ही इतना मजबूत है। हमें क्या जरूरत है व्यक्तिगत

367
00:24:58,960 --> 00:25:03,040
जाने की? तो उन्होंने उनको ग्रीन कपड़े में वो किया था। जैसे

368
00:25:03,040 --> 00:25:07,040
ही मैंने देखा कि हां ये चीज है बदलने लायक। तो मैंने इनको फोन भी किया और

369
00:25:07,040 --> 00:25:11,120
मैंने कहा कि वो ग्रीन वस्त्र जो है उनके वो आप देख लीजिए उसका। तो

370
00:25:11,120 --> 00:25:15,200
इन्होंने उसको बदला भी। यह होता है सिद्धांत की रक्षा। सिद्धांत है

371
00:25:15,200 --> 00:25:19,200
तो है। उसमें ये नहीं है कि सना सनातन शंकर जी हैं। अब इनके बारे में एक बात और आ

372
00:25:19,200 --> 00:25:23,360
रही है भाई कि भैया इन्होंने गाली दी। इनकी वो वॉइस जैसे आजकल

373
00:25:23,360 --> 00:25:28,000
एक वो निर्भय का एक ऑडियो जो है अ

374
00:25:28,000 --> 00:25:32,000
वायरल किया हो रहा है जिसमें कि निर्भय गालियां बक रहा है हमारे

375
00:25:32,000 --> 00:25:36,160
आराध्यों के लिए हमारे क्या कहते हैं हमारी राधा राधा मां के लिए

376
00:25:36,160 --> 00:25:40,160
और राधा राधा वाले विषय में इन सब में आचार्यों

377
00:25:40,160 --> 00:25:44,160
को वेदव्यास जी को वो गाली बकता हुआ सुनाई दे रहा है जो कौन

378
00:25:44,160 --> 00:25:48,160
ये जो अपना निर्भय तो अब ये बात ये बात इन्होंने

379
00:25:48,160 --> 00:25:52,160
उठाई कि भैया निर्भय के नाम से ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है।

380
00:25:52,160 --> 00:25:56,240
तो अभी अभी मुझे पता चला कि भाई इनके नाम से एक वीडियो बना दिया गया जिसमें यह

381
00:25:56,240 --> 00:26:00,320
गाली दे रहे हैं। तो भाई पहली बात तो यह है कि वो वीडियो कब

382
00:26:00,320 --> 00:26:04,560
का है। अगर इनके भूतपूर्व जीवन का है तो उसके बाद तो इन्होंने पश्चाताप पूर्वक

383
00:26:04,560 --> 00:26:08,640
बहुत सारी क्षमा याचना करते हुए अपने जीवन को सुधारा है और गीता में लिखा

384
00:26:08,640 --> 00:26:09,760
हुआ है 9:32 में

385
00:26:09,760 --> 00:26:14,000
कि यदि कोई भगवान की शरण में आ जाए तो उसको जो है साधु मानने योग्य है।

386
00:26:14,000 --> 00:26:18,000
दूसरी बात कि वो कब हुई है, कहां हुई है? भाई यह जो रिकॉर्डिंग

387
00:26:18,000 --> 00:26:22,080
चल रही है इसकी रिकॉर्डिंग बहुत सारे लोगों के पास है जो यह बताने को भी तैयार है कब और कहां

388
00:26:22,080 --> 00:26:26,800
हुई है तो यह सारी चीजें तो अलग हो गई मगर मैं

389
00:26:26,800 --> 00:26:31,360
ये ये जो ऑडियो निकला है ये कल की जो मैंने लाइव स्ट्रीम करी थी

390
00:26:31,360 --> 00:26:35,520
मैंने इस पे भी डाला था और आज भी मैंने करा था उसके बाद ही ये है और

391
00:26:35,520 --> 00:26:39,600
मैं बताऊं मैं इस पे एफआईआर करने वाला हूं और फॉरेंसिक इस

392
00:26:39,600 --> 00:26:43,760
पे रिपोर्ट करने वाला हूं और जो भी इसमें लिप्त पाए जाएंगे ना

393
00:26:43,760 --> 00:26:47,840
ये ध्यान रखना कि मैं छोडूंगा नहीं ठीक है क्योंकि

394
00:26:47,840 --> 00:26:51,920
मैं इनके जैसा इनके जैसा मैं छुपने वाला हूं नहीं क्योंकि जिस

395
00:26:51,920 --> 00:26:56,000
आईडी से मुझे जिस आईडी से मुझे भेजा गया वो आईडी मैं आपको

396
00:26:56,000 --> 00:27:00,320
दे दूंगा उस आईडी को तो प्रायोरिटी से करिए उसने Instagram पे अपलोड

397
00:27:00,320 --> 00:27:04,320
किया है। अब आते हैं सबसे अचंबे की बात है कि ये किसी टेलीग्राम चैनल

398
00:27:04,320 --> 00:27:08,480
पे है और मैं आज तक कभी भी किसी टेलीग्राम चैनल से जुड़ा ही नहीं हूं। हां WhatsApp

399
00:27:08,480 --> 00:27:12,560
के थ्रू जरूर आपके जैसे आपके भी कुछ ग्रुप्स हैं उनमें मैं जुड़ा

400
00:27:12,560 --> 00:27:16,640
हूं। लेकिन और इस किसी भी टेलीग्राम चैनल पर तो मेरा चैनल ही नहीं है।

401
00:27:16,640 --> 00:27:20,800
मेरे को कई लोग बताते हैं टेलीग्राम चैनल बना लो। तो भैया तुमने जो कार्य

402
00:27:20,800 --> 00:27:24,960
किया है अब इस पे पूरी कारवाई होगी और मैंने

403
00:27:24,960 --> 00:27:29,040
अभी-अभी पता किया है कि साइबर क्राइम सेल में इसका रिपोर्ट करूंगा

404
00:27:29,040 --> 00:27:33,520
मैं। फॉरेंसिक साइंस लैब में इसकी जांच की जाएगी और आपको विद प्रूफ दिखाऊंगा

405
00:27:33,520 --> 00:27:37,840
और वो दूसरे वाला भी। ठीक है? तो जो भी कर रहे हैं वो आप करिए।

406
00:27:37,840 --> 00:27:41,840
लेकिन आपको फिर इसके जो बाद में परिणाम है वो भी झेलने पड़ेंगे।

407
00:27:41,840 --> 00:27:45,920
यह याद रखना। अब जो है एक मैं वो बता

408
00:27:45,920 --> 00:27:49,920
दूं जरूरी बात मुख्य विषय चालू करने से

409
00:27:49,920 --> 00:27:53,920
पहले कि निर्भय ने एक बात बताई थी

410
00:27:53,920 --> 00:27:58,160
कि भैया वो क्योंकि विधर्मियों से लड़ता रहता है। इस कारण से उस हैबचुअल

411
00:27:58,160 --> 00:28:02,160
हो गया है कि सबको जो है वो एक सींग से निकले हुए रहते हैं। वो मारता हुआ चलता

412
00:28:02,160 --> 00:28:06,240
है। है ना? मतलब उस उसमें कह रहा हूं मैं एक शॉर्ट में वो बात

413
00:28:06,240 --> 00:28:10,400
आ जाए समझ में। तो बाद में जब उसने बताया भैया वो जो है मेरी हैबिट ऐसी

414
00:28:10,400 --> 00:28:14,400
हो गई है। इतने लोगों से मैं वो फेस करता हूं। ऐसा नहीं

415
00:28:14,400 --> 00:28:18,480
है। तुम अकेले नहीं फेस करते हो। तुमसे 10 गुना ज्यादा ही फेस

416
00:28:18,480 --> 00:28:22,720
करते होंगे। तुमसे 10 गुना ज्यादा कभी चेक कर लेना हिसाब

417
00:28:22,720 --> 00:28:26,800
किताब कितना है। ठीक है? केवल ऑनलाइन जाकर के और ये

418
00:28:26,800 --> 00:28:31,200
मुंह चोरी करना इसी को ही वो नहीं कहते हैं धर्म युद्ध। है ना? धरातल

419
00:28:31,200 --> 00:28:35,440
पर भी हम फेस करते हैं। सामने से स्त्री कह रही है कि तुमने मुझे छेड़ा

420
00:28:35,440 --> 00:28:39,440
है। रिपोर्ट लिखवा दूंगी। भाई 25-25 बार थानों के चक्कर लगा रहे

421
00:28:39,440 --> 00:28:40,080
हैं।

422
00:28:40,080 --> 00:28:44,240
हाई कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। जगह-जगह मिलने

423
00:28:44,240 --> 00:28:48,320
जा रहे हैं कि भैया हमारी मां को गाली दी जा रही है। तुमने ही

424
00:28:48,320 --> 00:28:52,320
नहीं झेला है संघर्ष। तो अगर तुम यह कहो कि संघर्ष के कारण मैं ऐसा हो गया हूं

425
00:28:52,320 --> 00:28:56,560
तो वो कोई एक सिद्धांत नहीं है कि ऐसा हो जाना।

426
00:28:56,560 --> 00:29:00,640
हां। मगर यह कह सकते हैं कि कमजोर प्रज्ञा शक्ति है। कमजोर

427
00:29:00,640 --> 00:29:04,640
सहनशक्ति है जिसके कारण हम सिद्धांत विहीन हो जाए ऐसा

428
00:29:04,640 --> 00:29:08,640
इन कारणों के चलते तो ठीक है एक बार को एक बार को स्वीकार कर किया

429
00:29:08,640 --> 00:29:12,720
जा सकता है उसको ऐसा नहीं है मगर उसको यही बना लेना कि भाई ऐसा है

430
00:29:12,720 --> 00:29:16,880
तो इसलिए मैं ऐसा कर सकता हूं अब मैं जो है कुछ भी कर सकता हूं तो यह भी बात नहीं

431
00:29:16,880 --> 00:29:20,880
है तो पहली बात तो यह है कि आपका इस तरीके से बदलाव आना मानसिक

432
00:29:20,880 --> 00:29:25,440
संतुलन खो देना वो ठीक नहीं है। दूसरी बात यह है कि अगर

433
00:29:25,440 --> 00:29:29,440
वहां पे खो रहा है तो आपका यहां भी खो रहा है। हो रहा है कि जब मैंने आपको

434
00:29:29,440 --> 00:29:33,520
यह भेजा कि भैया ये देखो क्या-क्या तुमने कहा यह सब क्या है कि अरे कम

435
00:29:33,520 --> 00:29:38,720
से कम मैं जो कहता हूं उसको स्वीकार तो करता हूं आप तो स्वीकार भी नहीं करते है ना

436
00:29:38,720 --> 00:29:42,800
इन्होंने जवाब दिया जब मैंने वो शंकराचार्यों पर इनका कटाक्ष देखा पुराण धर्म

437
00:29:42,800 --> 00:29:46,960
है और शंकराचार्य शंकर परंपरा का सबसे पहले मैं नाश करूंगा और

438
00:29:46,960 --> 00:29:51,680
ये करूंगा वो करूंगा अरे तुम्हरे जैसे बहुत आए भाई कितने और कितने चले गए

439
00:29:51,680 --> 00:29:55,120
हैं 100 150 साल पहले चले आए हो नाश करोगे तुम शंकर परंपरा

440
00:29:55,120 --> 00:29:59,120
का तो थोड़ा सोच समझ के बोलो। जहां से खत्म

441
00:29:59,120 --> 00:30:03,360
होता है तुम्हारा वहां से हमारा शुरू होता है। ठीक? अब आगे

442
00:30:03,360 --> 00:30:07,520
चलते हैं। खैर तो ये जब

443
00:30:07,520 --> 00:30:11,680
मैंने इनको कहा तो इन्होंने वहां पर ये नहीं कहा कि गुस्से में कुछ भी उसमें ऐसा

444
00:30:11,680 --> 00:30:15,920
नहीं हां किया है और आप आप देखो उनका साथ देते हो सनातन

445
00:30:15,920 --> 00:30:20,080
शंकर का तो उन्होंने मुझे इनकी फोटो भेज दी वही पोस्ट वाली। उसमें मैंने देखा ये गड़बड़

446
00:30:20,080 --> 00:30:24,080
है। मैंने सुधरवाई। अब देखो सुधारने के बाद देखो एक टांग पर खड़ा कर दिया

447
00:30:24,080 --> 00:30:28,160
दयानंद जी को। तो जब तक मैं इससे पहले कहूं कि भाई ये गलती भी तो हो सकती है।

448
00:30:28,160 --> 00:30:32,320
फोटो उठाते टाइम छोटी सी फोटो है। इतनी बड़ी फोटो में अगर हमारा इतना

449
00:30:32,320 --> 00:30:36,560
बड़ा स्क्रीन है लैपटॉप का और उसमें हमको इतने बड़े बॉक्स

450
00:30:36,560 --> 00:30:41,040
में एक फोटो दिख रही है तो

451
00:30:41,040 --> 00:30:45,120
तो वो जो है हम नहीं देख पा रहे कि वहां पर एक ही टांग है। मगर वहां पर वो

452
00:30:45,120 --> 00:30:49,200
हमको भेज रहे हैं कि यह देखो अब कलर चेंज हो गया

453
00:30:49,200 --> 00:30:53,200
तो अब एक टांग वाली फोटो लगा दी। तो इससे पहले कि मैं यह कह पाऊं

454
00:30:53,200 --> 00:30:57,760
कि भाई ठीक है इसको भी बदलवा देते हैं। दो टांग वाली लगा देते हैं और

455
00:30:57,760 --> 00:31:02,080
कलर तो चेंज कर सबसे बड़ी बात है कि मानना कि हां भाई ये गलत कलर गलत

456
00:31:02,080 --> 00:31:06,240
है। तो वो जब तक मैं टाइप कर पाऊं तब तक उसका एक मैसेज आया

457
00:31:06,240 --> 00:31:10,160
कि हम मुझे क्या समझ में नहीं आता है। यहां से कहानी बदल गई। मुझे क्या

458
00:31:10,160 --> 00:31:14,320
समझ में नहीं आता है। तो यह जो चीज कही

459
00:31:14,320 --> 00:31:19,120
ना उसने तब मैं समझ गया कि भाई बात करना ठीक नहीं है।

460
00:31:19,120 --> 00:31:23,360
अब क्यों समझा मैं ऐसा? जब इनकी यह रील वायरल हुई जिसमें

461
00:31:23,360 --> 00:31:27,520
गालियां दे रहे हैं बेधड़क और मेरी जो बुद्धि है

462
00:31:27,520 --> 00:31:31,520
वो मुझे लगातार कह रही है निर्भय ही है। एक बार निर्भय ने कहा

463
00:31:31,520 --> 00:31:35,680
कि भैया मेरे जो वो विरोधी हैं उन्होंने

464
00:31:35,680 --> 00:31:39,920
मेरी आवाज बना के निकाली है। एक बार कहा पर मेरा भ्रातत्व

465
00:31:39,920 --> 00:31:43,920
भाव है ना तुम्हारे प्रति जो मैंने विश्वास कर लिया। फिर तुम मुझसे किस

466
00:31:43,920 --> 00:31:48,080
से ये कह रहे हो कि मैं सब समझता नहीं हूं। क्या सामने वाले से विश्वास

467
00:31:48,080 --> 00:31:52,960
की अपेक्षा करते हो और स्वयं उस पर अविश्वास प्रकट करते हो।

468
00:31:52,960 --> 00:31:56,960
यह है अन्याय। दूसरों के साथ वही व्यवहार करो जो अपने लिए

469
00:31:56,960 --> 00:32:01,120
पसंद हो। तुमने एक बार कहा और सबसे

470
00:32:01,120 --> 00:32:05,120
बड़ी बात है कि अगर वो वॉइस तुम्हारी नहीं है। हम बोल देते हैं मान लेते हैं चलो तुम्हारी नहीं है।

471
00:32:05,120 --> 00:32:09,280
तुम एक बार वीडियो में आओ जैसे मैं बोल पा रहा हूं पब्लिक के सामने कि

472
00:32:09,280 --> 00:32:13,360
जो भी ये अभी आज नया-नया वीडियो बना है उसमें मेरी आवाज नहीं है। मैं उसकी फॉरेंसिक

473
00:32:13,360 --> 00:32:17,440
जांच कराऊंगा। तुम भी एबल हो कि भ हां भाई इसकी फॉेंसिक जांच करवाई जाए

474
00:32:17,440 --> 00:32:21,440
निष्पक्ष तरीके से और अगर मैं गिल्टी में पाया जाऊंगा तो मैं माफी मांगूंगा क्षमा

475
00:32:21,440 --> 00:32:25,200
मांगूंगा तो ये तुम बोल नहीं रहे हो ये भी नहीं इनको करना तो ये

476
00:32:25,200 --> 00:32:29,360
चाहिए कि ये आकर के खुद रिपोर्ट लिखाएं और दिखाएं ये देखो मैंने रिपोर्ट लिखाई है

477
00:32:29,360 --> 00:32:33,760
रिपोर्ट लिखवाई है बिल्कुल और ये तो मैटर खेल अलग हो गया

478
00:32:33,760 --> 00:32:38,000
आप मुझसे एक बार कह रहे हो कि भैया वो आवाज मेरी नहीं है। मेरी बुद्धि पूरा

479
00:32:38,000 --> 00:32:42,640
पूरा जोर दे रही है तुम्हारी आवाज है। फिर भी मैंने विश्वास किया। क्यों किया?

480
00:32:42,640 --> 00:32:46,800
क्योंकि मैंने तुम्हारे अंदर भाई देखा और तुमने क्या किया?

481
00:32:46,800 --> 00:32:50,960
मैं क्या समझता नहीं हूं क्या? यह जो अपना तुम पर्सेक्टिव लेकर के चलते हो ना पहले

482
00:32:50,960 --> 00:32:54,960
से कि सब मुसलमानों से मैं भिड़ रहा हूं इसलिए मैं यहां भी वैसा ही बिहेव करूंगा।

483
00:32:54,960 --> 00:32:59,120
वही हमारे संबंध में घातक सिद्ध हुआ। ठीक है? मैंने

484
00:32:59,120 --> 00:33:03,120
तुम्हारे साथ न्याय पूर्ण और न्याय क्या

485
00:33:03,120 --> 00:33:07,200
कहते हैं? न्याय के पक्ष से निष्पक्षता के साथ दृष्टि रखी। जहां पर मुझे

486
00:33:07,200 --> 00:33:11,280
लगा मैं इस बात को सिद्ध नहीं कर सकता। भाई इसी की आवाज है। मैंने तुरंत तुम्हारी बात मान

487
00:33:11,280 --> 00:33:15,440
ली। ठीक है। तुम्हारी आवाज नहीं है। मान ली ना?

488
00:33:15,440 --> 00:33:19,440
पर जब मैं कह रहा हूं, कुछ कहने वाला हूं तो मेरा पक्ष सुनने की जरूरत ही नहीं है।

489
00:33:19,440 --> 00:33:23,440
पहले ही निर्णय कर लिया, अपने मन से सोच लिया कि ये मैं

490
00:33:23,440 --> 00:33:27,520
जानबूझ के करवा रहा हूं। भाई मेरी जानकारी में जितना आएगा मैं उसका

491
00:33:27,520 --> 00:33:31,520
सामना करूंगा। कोई भी गलत चीज होगा आज के बाद भी दयानंद जी

492
00:33:31,520 --> 00:33:35,680
के विषय में कोई भी गलत बात कहता है आप मुझे बताइए। मुझे पता तो

493
00:33:35,680 --> 00:33:40,000
चले। आपने बताई इतनी छोटी सी फोटो की बात। मैंने उसको तुरंत चेंज करवाया।

494
00:33:40,000 --> 00:33:40,500
यहां तक

495
00:33:40,400 --> 00:33:44,720
कि जिनसे मैंने कहा उन्होंने क्षमा शब्द भी लिखा वहां पर क्षमा

496
00:33:44,720 --> 00:33:49,040
पूर्वक बदला उस बात को इसको कहते हैं सिद्धांत की रक्षा केवल धर्म

497
00:33:49,040 --> 00:33:54,640
धर्म चिल्लाने से कुछ नहीं होगा उसको धारण करो अपने अंदर

498
00:33:54,640 --> 00:33:59,840
बड़े अद्वैत का खात्मा करेंगे

499
00:33:59,840 --> 00:34:03,920
हम तो जब ये हुआ तो हमने

500
00:34:03,920 --> 00:34:08,000
मैंने कहा भाई अब यहां से आगे मैं तुमसे बात नहीं कर सकता क्योंकि क्या होता है मैं वहां पर ये

501
00:34:08,000 --> 00:34:12,320
चीजें रखता उसमें फिर और मुंहजोरी होती वहां पर वो वो अपना फिक्स

502
00:34:12,320 --> 00:34:16,400
किए बैठे हैं। जब उसने सोच ही लिया है कि मुझे क्या समझ में नहीं आता है। जब

503
00:34:16,400 --> 00:34:20,400
सामने वाले ने समझ लिया है कि मुझे क्या समझ में नहीं आता है। उसको मेरे ऊपर विश्वास नहीं

504
00:34:20,400 --> 00:34:24,560
है। और वो ये चाहता है कि मैं उस पर विश्वास रखूं। वो अगर कह दे

505
00:34:24,560 --> 00:34:28,560
आवाज मेरी नहीं है तो मैं मान लूं। अरे बड़े बड़ा भाई अगर कहा है तो

506
00:34:28,560 --> 00:34:32,640
विश्वास भी करो ना।

507
00:34:32,640 --> 00:34:35,520
बिल्कुल बिल्कुल

508
00:34:35,520 --> 00:34:39,520
विश्वास भी करना पड़ेगा और और बात वार्ता करने के भी बहुत सारे तरीके होते

509
00:34:39,520 --> 00:34:43,520
हैं। अगर आप किसी से सभ्य वार्ता कर रहे हो तो आपके उसकी बात का सम्मान भी करना

510
00:34:43,520 --> 00:34:47,760
चाहिए ना कि अपनी बात को उसके ऊपर थोपते रहो। शेर और बकरी को एक ही

511
00:34:47,760 --> 00:34:51,760
एक ही लकड़ी से आकोगे क्या? अरे तुमने कुछ

512
00:34:51,760 --> 00:34:56,720
तो धर्म आचरण देखा होगा ना। तभी तो तुमने माना कि बड़े भाई जैसे हैं कुछ है।

513
00:34:56,720 --> 00:35:00,880
फिर तुमने एक झटके में कह दिया कि मैं सब जानता हूं। मैं समझता नहीं हूं क्या?

514
00:35:00,880 --> 00:35:05,200
सैद्धांतिक विरोध तो रहेगा ही। वहां कटाक्ष करेंगे ही। तुम नहीं करते हो क्या?

515
00:35:05,200 --> 00:35:09,360
और देखा जाए तो शुरुआत किस पक्ष से हुई है कटाक्ष की?

516
00:35:09,360 --> 00:35:14,000
दयानंद जी को कोई जानता भी था शंकराचार्य के समय में कौन थे? कहां थे?

517
00:35:14,000 --> 00:35:18,800
किसने आकर के विरोध किया? गप्पों गपोड़े हैं, ये है वो हैं। किसने किया?

518
00:35:18,800 --> 00:35:23,680
दयानंद जी ने है ना? तो दयानंद जी के लिए कटाक्ष जाएंगे ना।

519
00:35:23,680 --> 00:35:27,840
हास्यपूर्ण बातें तो उन्होंने शुरू की ना। शंकराचार्य ने नहीं शुरू किया। दुनिया

520
00:35:27,840 --> 00:35:31,840
में जो भी कोई आया है शंकराचार्य के बाद ही आ रहा है जो इस

521
00:35:31,840 --> 00:35:36,160
तरह से कटाक्ष कर रहा है तो शुरुआत तो तुम ही लोगों ने की है

522
00:35:36,160 --> 00:35:41,920
भाई अपना सिद्धांत रखते तुमने किताबों में छापा है कपड़े कपड़ गप्पे

523
00:35:41,920 --> 00:35:46,240
ठीक तो थोड़ा सा धर्म को धारण भी करो निर्भय केवल चिल्लाने

524
00:35:46,240 --> 00:35:47,840
से नहीं होगा कि हम

525
00:35:47,840 --> 00:35:52,000
बहुत बड़े वो क्या कहते हैं वो वो कौन सी थी क्रिस

526
00:35:52,000 --> 00:35:56,480
थ्री के विलेन हो गए विवेक ओबराय चार्ल्स जेवियर

527
00:35:56,480 --> 00:36:01,280
और मैग सबका मिक्सचर ठीक है ऐसे नहीं चलेगा

528
00:36:01,280 --> 00:36:05,280
हां तो अब बात आती है कि इन्होंने अपने वीडियो में जो जो बातें कही

529
00:36:05,280 --> 00:36:09,520
हैं उसको हम सुनेंगे सारी बातों का एक-एक आंसर है मेरे पास

530
00:36:09,520 --> 00:36:14,160
वो सारे आंसर देंगे और लास्ट में आपको एक बंपर

531
00:36:14,160 --> 00:36:18,240
प्राइस देंगे बंपर इनाम तो सनातन जी इससे पहले आप थोड़ा सा

532
00:36:18,240 --> 00:36:23,200
अपना कुछ विचार प्रकट कर दें जिससे कि हम लोग क्वेश्चंस उठाना शुरू करें

533
00:36:23,200 --> 00:36:27,680
नहीं नहीं बिल्कुल और ये जो आपने आज की स्ट्रीम स्ट्रीम करिए। बहुत महत्वपूर्ण

534
00:36:27,680 --> 00:36:31,840
थी। मैं काफी दिनों से ये सोच रहा था कि क्योंकि उसके चैनल से भी आ

535
00:36:31,840 --> 00:36:36,080
रहा था कि वार्ता आपसे होने वाली है। आप भी यह कह रहे थे कि हमारा कुछ डिस्कशन

536
00:36:36,080 --> 00:36:40,160
होना है। तो ये क्लेरिफिकेशन आपने जो दिया बहुत बढ़िया किया क्योंकि मेरे मन

537
00:36:40,160 --> 00:36:44,240
में यह भ्रम फैल रहा था कि एक तरफ तो वो ऑडियो चल

538
00:36:44,240 --> 00:36:48,240
रहा है जिसको मैं उठा रहा हूं। मैं बोल रहा था शिवश भाई जो है

539
00:36:48,240 --> 00:36:52,400
उसका साथ दे रहे हैं और उसके साथ वार्ता कर रहे हैं। अब मेरा मन नहीं

540
00:36:52,400 --> 00:36:56,400
मान रहा था। उसने काफी चैलेंज भी किया कि मैं तुम्हें चैलेंज करता हूं। तो मैं कहता हूं किसी के साथ

541
00:36:56,400 --> 00:37:00,480
भी अगर मैं बात कर रहा हूं और वो अभी तक क्लियर नहीं हुआ है कि वो जो

542
00:37:00,480 --> 00:37:03,040
वॉइस है वो उसी की है। मेरे मन में तो सबसे

543
00:37:03,040 --> 00:37:07,120
पहले वो शब्द गूंज रहे हैं जो उस ऑडियो में है। चलो नकली है। आप कहते हो नकली है।

544
00:37:07,120 --> 00:37:11,200
फेक है। एक बार भी निर्भय नहीं आया वीडियो के माध्यम से और

545
00:37:11,200 --> 00:37:15,200
ये नहीं कहा। अगर वो ऐसा भी कह देता पब्लिकली भी कि ये जो वॉइस है ये

546
00:37:15,200 --> 00:37:19,520
नकली वॉइस है। एआई के थ्रू है। आजकल तो एआई से वीडियो भी बन जाते हैं। सबको

547
00:37:19,520 --> 00:37:23,600
पता है मेरा हूबहू एआई बन जाता है। लेकिन वो पता चल जाता है कि

548
00:37:23,600 --> 00:37:27,600
एआई है। तो अगर वो भी है तब भी आप पब्लिकली एक बार आकर

549
00:37:27,600 --> 00:37:31,760
बोलो कि हां भाई यह एआई है और यह मेरे नाम से ना माना जाए

550
00:37:31,760 --> 00:37:35,840
तो हम चलो मान लें। ठीक है। उसके बाद आपने उसके ऊपर

551
00:37:35,840 --> 00:37:39,840
रिपोर्ट करा कि नहीं करा? क्योंकि आपको रिपोर्ट करना चाहिए। आपके नाम से अगर कोई चीज चल

552
00:37:39,840 --> 00:37:43,840
रही है तो आपको एक बार रिपोर्ट तो करना चाहिए कहीं पर और आप बोलते हो मैं असमर्थ हूं जी

553
00:37:43,840 --> 00:37:47,920
रिमोट नहीं कर पाता तो पब्लिकली आकर वीडियो बनाकर बोल दो कि ये आवाज मेरी नहीं है

554
00:37:47,920 --> 00:37:51,920
मेरे नाम से नकली चल रहा है तब भी बात मान ली जाएगी लेकिन वो भी आपने नहीं

555
00:37:51,920 --> 00:37:56,000
किया ऊपर से आप क्या कर रहे हो मेरे चैनल से या शिवश

556
00:37:56,000 --> 00:38:00,080
जी के चैनल से वीडियो ले रहे हो उस पूरे शॉट में आपका कोई वैल्यू एडिशन नहीं

557
00:38:00,080 --> 00:38:04,240
है आपने वहां कमेंट्री भी नहीं की है बस आप हमारे ही वीडियो को कट पेस्ट कर रहे हो आधा

558
00:38:04,240 --> 00:38:08,240
पोर्शन मेरा उठा लिया आधा पोर्शन शिवश जी का उठा लिया और उन दोनों वीडियो को

559
00:38:08,240 --> 00:38:12,240
कट करके आपने शॉट चला रहे हो और फिर नीचे आपके जो

560
00:38:12,240 --> 00:38:16,240
जितने भी फॉलोअर हैं वो वहां पर अभद्र बातें बोल रहे हैं, मजाक उड़ा रहे हैं।

561
00:38:16,240 --> 00:38:18,320
तो भैया जब आप संदर्भ से काटकर

562
00:38:18,320 --> 00:38:22,960
उन वीडियोस को चला रहे हो क्या वो अधर्म नहीं है? अगर हम भी ऐसा ही करें

563
00:38:22,960 --> 00:38:26,960
तो फिर क्या आप उसको सही मानोगे? नहीं मानोगे। तो जब आप हमारे द्वारा की

564
00:38:26,960 --> 00:38:31,120
गई उस बात को सही नहीं मानोगे तो फिर तुम्हारे द्वारा की गई वो बात कैसे सही है? अच्छा

565
00:38:31,120 --> 00:38:35,120
ऊपर से इन्होंने क्या किया कि उन वीडियोस

566
00:38:35,120 --> 00:38:39,280
को चलाया मैंने उस पे YouTube को रिपोर्ट किया। YouTube से

567
00:38:39,280 --> 00:38:43,600
मेरे को आया कि भैया ऐसेसे इन्होंने काउंटर क्लेम कर दिया उसके ऊपर। अब मेरे पास 10

568
00:38:43,600 --> 00:38:47,760
दिन का टाइम था कि मैं उसके लीगल कारवाई करूंगा। लीगल कारवाई करता तो वीडियो तो हट जाते। इवन

569
00:38:47,760 --> 00:38:52,000
चैनल भी डिलीट हो सकता था। लेकिन मैंने वो नहीं किया। मैंने बोला चलो छोड़ दो। ये

570
00:38:52,000 --> 00:38:56,000
खाली वार्निंग रूप में इनको सबक होगा। अगर आगे

571
00:38:56,000 --> 00:39:00,240
के लिए ऐसा नहीं करेंगे। लेकिन फिर उनकी पोस्ट आती है। उस पर क्या करते हैं?

572
00:39:00,240 --> 00:39:04,320
मेरा पर्सनल ईमेल आईडी। अच्छा मेरा नाम क्या किसी को पता नहीं है? शिवाश जी को क्या मेरा

573
00:39:04,320 --> 00:39:08,480
नाम नहीं पता है? वो मेरा पर्सनल ईमेल आईडी वहां पर पब्लिक में सबको दिखा रहे हैं।

574
00:39:08,480 --> 00:39:12,640
भाई मैं नहीं चाहता हूं कि वो जो पर्सनल ईमेल आईडी है वो पब्लिक में जाए। वो मेरा किसी दूसरी

575
00:39:12,640 --> 00:39:16,880
चीजों के लिए है। जो मेरा पब्लिक में जो मेल आईडी है वो सनातन शंकर के नाम से है।

576
00:39:16,880 --> 00:39:21,040
तुमने वहां पर वो दिखाया। मैंने फिर YouTube में रिपोर्ट किया। तो YouTube ने वो पोस्ट हटवाई

577
00:39:21,040 --> 00:39:25,120
आपकी। उसके बाद आपने फिर दोबारा वही काम किया। कल फिर इन्होंने मेरा नाम लिखकर

578
00:39:25,120 --> 00:39:29,120
स्पेशल वो सबको जो है लिख रहे हैं। भाई जब मैंने अपने चैनल के माध्यम से

579
00:39:29,120 --> 00:39:33,120
अपना पब्लिकली नाम नहीं अनाउंस किया है तो आपको क्या अधिकार बनता है मेरे पर्सनल

580
00:39:33,120 --> 00:39:33,620
नाम

581
00:39:33,440 --> 00:39:37,440
अच्छा मेरे पास इनका ना इनका इन्होंने जब YouTube में वो किया था क्योंकि जब भी

582
00:39:37,440 --> 00:39:41,440
आप काउंटर क्लेम करते हो तो आपको एड्रेस देना पड़ता है। अच्छा मेरे पास इनका एड्रेस

583
00:39:41,440 --> 00:39:45,680
है वेस्ट बंगाल वाला अब मैं क्या करूं वो पब्लिक में दिखा दूं सबको क्या यह सही

584
00:39:45,680 --> 00:39:49,920
बात होगी क्या यह धर्म माना जाएगा मैं ऐसा क्यों करूंगा मैं ऐसा नहीं कर सकता

585
00:39:49,920 --> 00:39:53,920
लेकिन आपने वो काम किया तो भैया जो काम आप कर रहे हो ना वो गलत

586
00:39:53,920 --> 00:39:57,920
कर रहे हो अगर आपको अपना मत सिद्ध करना है तो उसके सही

587
00:39:57,920 --> 00:40:01,920
तरीके से करो ना कि दूसरों के ऊपर लांछन लगाकर किसी के ऊपर

588
00:40:01,920 --> 00:40:05,920
जो उसकी पर्सनल लाइफ है उसके उसको सामने लाकर उसको पब्लिक में

589
00:40:05,920 --> 00:40:10,000
उछाल कर है ना जैसे शिवा जी के बारे

590
00:40:10,000 --> 00:40:14,320
में भी किया था। वो एक कोई इनका ही मातृशक्ति

591
00:40:14,320 --> 00:40:18,720
थी आर्य समाज से जुड़ी हुई। उन्होंने आपके भी पर्सनल फोटोग्राफ पब्लिक में वो दिखाए

592
00:40:18,720 --> 00:40:22,880
थे। तो इस तरह से थोड़ी जो है वो आप सिद्धांतिक रक्षा कर पाओगे अपने मत

593
00:40:22,880 --> 00:40:26,880
की। भव्य राधा कृष्ण भव्य राधा कृष्ण

594
00:40:26,880 --> 00:40:30,960
दास का आधार कार्ड मोबाइल नंबर सब कुछ मुझे एक

595
00:40:30,960 --> 00:40:35,280
साल पहले मिल गया था। अगर परेशान करने की भावना हो

596
00:40:35,280 --> 00:40:40,080
व्यक्तिगत तो उसको ऑनलाइन डालने में क्या देर लगती मुझे?

597
00:40:40,080 --> 00:40:44,160
पर सिद्धांतवादी है ना अगर लड़ेंगे तो लड़ाई के तरीके से लड़ेंगे।

598
00:40:44,160 --> 00:40:48,240
ये छिचोर पट्टी हमारे पास नहीं है कि उसकी फोटो निकाल ली। उसका वहां से

599
00:40:48,240 --> 00:40:48,740
आईडी

600
00:40:48,560 --> 00:40:52,800
निकाल ली। उसका ये कर लिया। उसका घर का एड्रेस सब कुछ है। और पूरे हिंदुस्तान

601
00:40:52,800 --> 00:40:56,880
में हमारे गुरु भाई बहन है। बिल्कुल बिल्कुल क्या दिक्कत

602
00:40:56,880 --> 00:41:00,880
है किसी की पर्सनल जानकारियां शेयर करने में वहां? मगर नहीं सिद्धांतवादी हैं।

603
00:41:00,880 --> 00:41:04,400
सिद्धांत से लड़ेंगे।

604
00:41:04,400 --> 00:41:08,400
गलत तरीके से आज तक कि जो वह व्यक्ति कहना नहीं चाह रहा

605
00:41:08,400 --> 00:41:12,960
है मगर हमने जो है दिखा दिया। शॉर्ट बनाते हैं। ऐसा नहीं है। छोटे-छोटे

606
00:41:12,960 --> 00:41:17,120
विषयों को छोटा कट करके दिखाते हैं। भाई यह हुआ मगर व्यक्ति जो

607
00:41:17,120 --> 00:41:21,520
कहना चाह रहा है वो हमने दिखा दिया कि वो नहीं कहा। हमने दिखाया

608
00:41:21,520 --> 00:41:25,520
कुछ कहना कुछ और चाह रहा था। ऐसा नहीं। ऐसा हमने कभी नहीं किया। दिखा

609
00:41:25,520 --> 00:41:29,600
दो एक भी शॉट हमने बनाया ऐसा। तो आप लोग वही कर रहे हो अपने चैनल से।

610
00:41:29,600 --> 00:41:33,680
मैं आपत्ति जता रहा हूं तो कह रहा हूं यह मेरा काम नहीं है। ऐसे ही कुंभकरण ने कहा था। ऐसे

611
00:41:33,680 --> 00:41:37,760
ही द्रोणाचार्य ने कहा था। ऐसे ही भीष्म पितामह ने कहा था मेरा काम नहीं मेरा काम नहीं।

612
00:41:37,760 --> 00:41:42,160
तो विवेकी में गिने गए क्या? अगर आप धर्म

613
00:41:42,160 --> 00:41:46,160
का अधर्म का धर्म का साथ ना देकर के अधर्म के पक्ष में खड़े भी

614
00:41:46,160 --> 00:41:50,960
हुए हो मौन तब भी आप दोषी कहलाओगे। मौन समर्थक

615
00:41:50,960 --> 00:41:54,560
अधर्म के

616
00:41:54,560 --> 00:41:58,640
चलो और ऊपर से वो धमकियां और दे रहे हैं कि तू

617
00:41:58,640 --> 00:42:02,640
चला जा कोर्ट में देखा जाएगा। अरे भाई वो बात मैंने इसलिए कही

618
00:42:02,640 --> 00:42:06,640
है कि भैया मैं वो कारवाई कर सकता था पर मैंने नहीं की। क्यों? क्योंकि मैं यह

619
00:42:06,640 --> 00:42:10,640
चाहता था कि आप उसमें सुधार करें। मैं वहां पर अपने उस पोस्ट में

620
00:42:10,640 --> 00:42:14,800
यह थोड़ी बोल रहा हूं कि मैं कोर्ट चला जाऊंगा। मैं कह रहा हूं मेरे पास वो ऑप्शन था। वो आज भी

621
00:42:14,800 --> 00:42:19,120
है मेरे पास विकल्प मौजूद। लेकिन मैं उसमें आपको धमकी नहीं दे रहा हूं। लेकिन आप तो उकसा

622
00:42:19,120 --> 00:42:23,280
रहे हो, प्रवोक कर रहे हो कि भाई तू यह कर तू करके दिखा दे। देखते

623
00:42:23,280 --> 00:42:27,280
हैं तेरे में कितना दम है। माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। भाई सबकी माता

624
00:42:27,280 --> 00:42:31,680
ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया होता है। और अगर तुम वाकई

625
00:42:31,680 --> 00:42:35,920
में उस बात को बार-बार अच्छा इनकी हर पोस्ट में यही बात लिखी होती है। माता ने निष्ठा

626
00:42:35,920 --> 00:42:40,560
पूर्वक दूध पिलाया। निष्ठा पूर्वक दूध पिलाने की बात यह होती है

627
00:42:40,560 --> 00:42:44,560
कि भैया अगर वहां पे साहस का वहां पर प्रतीकात्मक है

628
00:42:44,560 --> 00:42:49,120
वो दूध। हम भाई अब तुम यहां कमेंट में आकर के बातें कर रहे हो,

629
00:42:49,120 --> 00:42:53,280
परेशान कर रहे हो। हम हमारे पास दिन भर टाइम थोड़ी ना है कि कमेंट में आकर के तुमको

630
00:42:53,280 --> 00:42:57,520
जवाब देते रहे और यहां पे पूरा शास्त्रार्थ कर ले। तो तुम जब

631
00:42:57,520 --> 00:43:01,680
यहां पे आकर बोल रहे हो तो तुमसे कहा जाता है कि साहस का प्रदर्शन

632
00:43:01,680 --> 00:43:05,760
करो और सामने आके बात करो। उस साहस के लिए प्रतीकात्मक ये बात कही जाती है कि

633
00:43:05,760 --> 00:43:09,840
माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया तो ऐसा करो आप। सामने आके अगर

634
00:43:09,840 --> 00:43:14,000
नहीं करना है तो यहां भी मत करो। यहां क्यों कर रहे हो? जैसे यहां पर भी कई

635
00:43:14,000 --> 00:43:18,480
सारे लोग हैं कि भैया तुम निर्भय आर्यन खुला मैं भी तो दे रहा हूं।

636
00:43:18,480 --> 00:43:22,720
मैं भी तो दे रहा हूं। खुला चैलेंज दे तो रहा हूं। आ जाओ किस में दम है?

637
00:43:22,720 --> 00:43:26,880
बहुत दिनों से दे रहा हूं। निर्भय निर्भय जी ने जब मुझे फोन किया था

638
00:43:26,880 --> 00:43:30,960
जब बात तय हो गई थी उसके बाद चार महीने लगे थे मुझे वापस फोन करने के। अगर

639
00:43:30,960 --> 00:43:35,840
निर्भय के भरोसे हो तो हां और

640
00:43:35,840 --> 00:43:39,920
निर्भय से मेरी जो चर्चाएं हुई है फोन पर उसको लेकर के मैं अभी लास्ट में बात

641
00:43:39,920 --> 00:43:44,160
करने ही वाला हूं। क्या है क्या नहीं है? तो थोड़ा देख लो

642
00:43:44,160 --> 00:43:48,640
क्या है क्या नहीं है निष्पक्ष बात किया करो अपने से मैं हीरो नहीं बनता

643
00:43:48,640 --> 00:43:53,040
कि नहीं भैया पहले से ही पहले अपने जो है अपने आप को हम तोप है

644
00:43:53,040 --> 00:43:57,120
जब गोली दाग दी गोला दाग दिया तब बता तब लोगों ने कहा

645
00:43:57,120 --> 00:44:01,680
तुम तोप हो हम तब भी नहीं कहते ठीक है

646
00:44:01,680 --> 00:44:05,760
तो ठीक है अनिकेत जी आप कुछ बोलेंगे

647
00:44:05,760 --> 00:44:10,480
इस बारे में है अनिकेत जी कि नहीं

648
00:44:10,480 --> 00:44:14,560
अंधेरा है अनिकेत जी अच्छा ये तो यहां तक

649
00:44:14,560 --> 00:44:19,120
तो चलो ठीक है कि माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है लेकिन इनके

650
00:44:19,120 --> 00:44:23,280
ही चैनल पर जब मैंने कमेंट किया तो मेरे को पता है क्या लिखते हैं ये कहते हैं न्यूट्रल

651
00:44:23,280 --> 00:44:24,880
चैनल में आओ अगर तुम्हारे पिता ने

652
00:44:24,880 --> 00:44:28,960
निष्ठा पूर्वक गर्भाधान किया है अब ये क्या बात है भाई ये ये कौन

653
00:44:28,960 --> 00:44:33,040
सी बात तुमने वहां कर दी है तो इस तरह की बात ये नीच ये

654
00:44:33,040 --> 00:44:37,040
नीच लोग हैं ये नीच लोग हैं

655
00:44:37,040 --> 00:44:41,440
अश्लीलता हमने कहा दूध पिलाया तो दूध वाले में कोई अश्लीलता

656
00:44:41,440 --> 00:44:44,080
थोड़ी ना है।

657
00:44:44,080 --> 00:44:48,160
मगर ये ये नीचता है। इसमें अश्लीलता है। आप माता पिता के दृश्य को

658
00:44:48,160 --> 00:44:52,560
चित्रित कर रहे हो वहां पर किसी व्यक्ति के। ये तुम्हारे यहां से सिखाया

659
00:44:52,560 --> 00:44:56,880
गया है। ये जो दयानंद जी का सेट बना है ना ये अलंकार ये सीखते

660
00:44:56,880 --> 00:45:01,040
हैं ये अधर्म। भाई एट द एंड आउटपुट क्या है? ये

661
00:45:01,040 --> 00:45:05,040
लोग कहते पुराण अधर्म है। पुराण अधर्म है। हमारे यहां अगर जो चीजें तुम

662
00:45:05,040 --> 00:45:09,040
नहीं समझ पा रहे हो भैया उनकी जो तात्विक व्याख्या क्या है? आदि दैविक अर्थ

663
00:45:09,040 --> 00:45:13,120
क्या है? हमारे यहां नहीं कहां पर शिक्षा दे दी गई कि इस तरह का रास अर्चा बताओ हम

664
00:45:13,120 --> 00:45:17,440
तो उल्टा रोकते हैं अगर तुम यह कह रहे हो कि वो रास नहीं बताना चाहिए था

665
00:45:17,440 --> 00:45:21,440
उससे बड़ा अधर्म है तो कहां शिक्षा दे दी जा रही है उसका एग्जीक्यूशन कहां

666
00:45:21,440 --> 00:45:25,440
हो रहा है जो आप गलत अर्थ लेकर के बैठे हो उसका एक्सजीक्यूशन का समर्थन

667
00:45:25,440 --> 00:45:29,520
कहां पर हो रहा है हो अगर हो रहा है तो वहां पर

668
00:45:29,520 --> 00:45:34,000
जो हमारे सिद्धांत है उनके विरुद्ध जाकर के हो रहा है ना वो तो तुम्हारे यहां भी हो रहा है

669
00:45:34,000 --> 00:45:38,000
तो तुम कैसे उसको अधर्म का आधार बता रहे हो हां मगर

670
00:45:38,000 --> 00:45:40,000
तुम्हारे यहां आगे कुछ सिद्धांत ऐसे जरूर है

671
00:45:40,000 --> 00:45:44,080
जो सीधे सीधे अधर्म का साथ दे रहे हैं। हमारे हमारी

672
00:45:44,080 --> 00:45:48,080
दृष्टि में अभी मैंने तुम्हारी दृष्टि से जो अधर्म है उसके बारे में बताया। तुम्हारी दृष्टि

673
00:45:48,080 --> 00:45:52,880
से जो अधर्म है यानी तुमने कहा पुराणों की कथा अधर्म तो उसका इंप्लीमेंटेशन

674
00:45:52,880 --> 00:45:56,960
तो नहीं हो रहा ना आचरण में। अब हमारी दृष्टि से जो अधर्म है

675
00:45:56,960 --> 00:46:01,120
उसका तो इंप्लीमेंटेशन हो रहा है। एक्सजीक्यूशन भी हो रहा है। सिर्फ वो

676
00:46:01,120 --> 00:46:05,360
लिखा नहीं है। उसका एक्सजीक्यूशन भी हो रहा है। जैसे वर्णाश्रम जैसे

677
00:46:05,360 --> 00:46:09,600
मूर्ति पूजा विरोध इसका एक्सजीक्यूशन है। आपको रास

678
00:46:09,600 --> 00:46:14,400
लीला नहीं समझ में आ रही राधा मां का जो चरित्र है वह समझ में नहीं आ रहा है पात्र

679
00:46:14,400 --> 00:46:18,560
तो उसका एक्सजीक्यूशन हम कहां कह रहे हैं शंकराचार्य बैठ के नहीं जाओ तुम राधा ये

680
00:46:18,560 --> 00:46:22,800
जो लीला हुई ऐसे तुम भी करो कहां कह रहे हैं तुम कह रहे हो जो हमें अधर्म

681
00:46:22,800 --> 00:46:27,040
दिखाई दे रहा है वो तुम कर रहे हो जो तुम्हें अधर्म दिखाई दे रहा है वो हम कर भी नहीं रहे समझ

682
00:46:27,040 --> 00:46:31,280
में आ रहा है कुछ ये अंतर परंपरा की खाल उधेड़ देंगे ऐसा

683
00:46:31,280 --> 00:46:35,280
लिखते हैं ये लोग परंपरा की खाल उधेड़ देंगे क्योंकि अंगूर खट्टे

684
00:46:35,280 --> 00:46:41,280
हैं अंगूर खट्टे हैं पांच मिनट में परंपरा करेंगे।

685
00:46:41,680 --> 00:46:45,680
चलो एक शब्द और यूज़ करता है वो भैया मैं

686
00:46:45,680 --> 00:46:50,160
ठोक के आया गया था और ठोक के आया परंपरागत

687
00:46:50,160 --> 00:46:54,160
वाले लोग को इधर भी ठोक के आया उधर भी ठोक के आया। अब वो गुरुकुलम

688
00:46:54,160 --> 00:46:58,160
वाले को बोलता है कि वो वो जो है शब्द प्रमाण

689
00:46:58,160 --> 00:47:02,400
दे रहा था उसमें उसको मैंने ठोक दिया और उसको मैंने बोला अनुमान प्रमाण से बता।

690
00:47:02,400 --> 00:47:08,240
मतलब तुम शब्द प्रमाण को काट रहे हो। एक तरह से वेदों को खंडन कर रहे हो।

691
00:47:08,240 --> 00:47:12,400
नहीं ठीक है वो अभी सब आगे बातें होंगी अभीगी सब बातें

692
00:47:12,400 --> 00:47:16,400
सैद्धांतिक बातों पर क्या हुआ है क्या नहीं हुआ वो आगे बात होगी मगर एक

693
00:47:16,400 --> 00:47:20,480
बात कह रहा हूं कुल मिलाकर के आपको अगर केवल धर्म के रक्षक और

694
00:47:20,480 --> 00:47:24,560
प्रचारक मत बनो अपने अंदर उसको धारण भी तो करो भाई राम जैसे

695
00:47:24,560 --> 00:47:28,560
बनो भी तो बन रहे हो तुम राक्षस जैसे रावण जैसे

696
00:47:28,560 --> 00:47:34,320
और बात कर रहे हो कि मैं जो ताल ठोक रहा हूं

697
00:47:34,320 --> 00:47:38,480
हां शास्त्रवाद जी आप थोड़ा सा वो बताइए क्या है? कितना

698
00:47:38,480 --> 00:47:43,600
लंबा है? बहुत ज्यादा लंबा तो नहीं है।

699
00:47:43,600 --> 00:47:48,640
नहीं भैया जय श्री राम। ये जो हो रहा है आज

700
00:47:48,640 --> 00:47:52,720
आज जो ये हो रहा है लाइव बहुत बढ़िया है जो कि होना

701
00:47:52,720 --> 00:47:57,040
चाहिए था। बहुत दिन से इसके विषय में लगे हुए थे।

702
00:47:57,040 --> 00:48:01,120
और यह जो निर्भय है जो चाहता है कि आपसे डिबेट करना चाहता

703
00:48:01,120 --> 00:48:05,200
है वो चाहता है मेरे दृष्टिकोण से वो वही चाहता है उसे

704
00:48:05,200 --> 00:48:09,440
ही आना चाहिए और यदि वो आपको बुला रहा है

705
00:48:09,440 --> 00:48:14,000
तो यह आपका अपना है कि आप उसके पास जाए कि नहीं जाए लेकिन मेरे दृष्टिकोण

706
00:48:14,000 --> 00:48:18,000
में यह है कि प्यासा जो होता है वो कुएं के पास आता है ना कि कुआं

707
00:48:18,000 --> 00:48:22,320
प्यासे के पास जाता है। ठीक है? और वो जो है व्यक्ति

708
00:48:22,320 --> 00:48:26,320
वो ये दावा कर रहा है ईश्वर अवसर नहीं ले सकता। तो भाई तुम

709
00:48:26,320 --> 00:48:30,320
शास्त्र प्रमाण के विरुद्ध दावा कर रहे हो तो तुम्हें ही आकर

710
00:48:30,320 --> 00:48:34,480
के सिद्ध करना चाहिए ना कि उसे सिद्ध करना होगा कि शास्त्रों में लिखी

711
00:48:34,480 --> 00:48:38,800
बात सही है कि गलत गलत बात गलत बात ऐसे नहीं

712
00:48:38,800 --> 00:48:43,040
झूठे की हद तक चोर के घर तक इनका ये कहना है ना कि अवतार तुमने

713
00:48:43,040 --> 00:48:47,200
कहा है तो तुम सिद्ध करो उसके बाद हम भी तो ये कहेंगे कि सर्वशक्तिमान तुमने

714
00:48:47,200 --> 00:48:49,600
कहा है तो तुम सिद्ध करो भाई

715
00:48:49,600 --> 00:48:53,600
जैसे तुम ये बात पकड़ रहे हो कि अवतार तुमने कहा है तुम्हें सिद्ध करना है हम

716
00:48:53,600 --> 00:48:57,680
भी तो कहेंगे कि सर्वशक्तिमान तुमने भी कहा तुम सिद्ध करो सर्वशक्तिमान

717
00:48:57,680 --> 00:49:01,520
हम तो अवतार सिद्ध कर लेंगे

718
00:49:01,520 --> 00:49:05,520
पराक्रम से गूंजे त्रिभुवन धरती पाताल दुष्ट भंजन

719
00:49:05,520 --> 00:49:09,680
हम कर देंगे सिद्ध उस दिन हुआ क्या है

720
00:49:09,680 --> 00:49:13,680
क्या मैंने क्वेश्चन किया कोई ना और जो क्वेश्चन किया

721
00:49:13,680 --> 00:49:18,160
उससे विषयंतर हो गया हुआ क्या उस दिन पंचा

722
00:49:18,160 --> 00:49:22,320
वाली बात पे झगड़ा हो गया बात खत्म हो गई और ये

723
00:49:22,320 --> 00:49:26,400
खुद जानते हैं कि जो पंजाब लेके आए थे उस दिन अगर खुल जाते आज की तारीख

724
00:49:26,400 --> 00:49:30,480
में जानते होंगे हम मट्टी कु जाती हमारी जितने आर्य समाजी चिल्ला

725
00:49:30,480 --> 00:49:34,720
रहे हैं अगर उस दिन पंजाब में खुल जाता मट्टी कुड़ जाती बिल्कुल

726
00:49:34,720 --> 00:49:39,040
आज की तारीख में आज की तारीख में जानते हैं अच्छा मैंने जब इनको

727
00:49:39,040 --> 00:49:43,120
कहा कि भाई चर्चा कर लो इनको एक दिन लग गया यह

728
00:49:43,120 --> 00:49:47,360
बताने में कि चर्चा मेरे चैनल पर होगी मैसेज लिख देना था भैया चर्चा

729
00:49:47,360 --> 00:49:51,680
यहां होगी मगर नहीं एक दिन लग गया वैसे तो

730
00:49:51,680 --> 00:49:55,760
11000 का इनाम थोप चुके थे तो इसका मतलब तैयार थे ना

731
00:49:55,760 --> 00:49:59,840
पूरी तरीके से बता देते मेरे चैनल पर होगी। दूसरी

732
00:49:59,840 --> 00:50:03,840
बात यह है कि मैं इनके चैनल पर जाकर अब कर क्यों नहीं रहा हूं। मैं तो पहले तैयार था। मैंने

733
00:50:03,840 --> 00:50:05,200
इस बात का

734
00:50:05,200 --> 00:50:09,200
इस बात को एक्सेप्ट किया था कि भाई अगर उनके चैनल पर भी बुलाया जाएगा तो

735
00:50:09,200 --> 00:50:13,440
जाके कर लेंगे क्योंकि एक बार वो आ चुके हैं और मेरा

736
00:50:13,440 --> 00:50:17,440
उनके प्रति अच्छी अच्छा दृष्टिकोण है कि भाई अच्छा इंसान तो

737
00:50:17,440 --> 00:50:21,440
फिर जब उसने ऐसी बात की कि अब आपको ट्रोल किया जा रहा है इसलिए अब आप आए हो

738
00:50:21,440 --> 00:50:25,440
बात करने। इसका मतलब और मैंने तो उस दिन

739
00:50:25,440 --> 00:50:29,520
अपना झंडा गाड़ दिया था। इसका मतलब तुम्हारी निगाह में मैं यह सोचता हूं कि मैं उस दिन हार

740
00:50:29,520 --> 00:50:33,600
गया था। और मैं अगर इस इस कारण से तुम्हारे कहने के अनुसार तुम्हारे

741
00:50:33,600 --> 00:50:37,760
चैनल पे आ गया तो इस बात को मैंने स्वीकार कर लिया कि मैं अपने आप को हारा

742
00:50:37,760 --> 00:50:41,920
हुआ मानता हूं। नहीं हारा हुआ मानता। भाई कहां से मानू मैं? भाई तुमने

743
00:50:41,920 --> 00:50:46,080
जो जो तर्क जो भी विरोध किया तार्किक रूप से उसका मैंने उत्तर दिया।

744
00:50:46,080 --> 00:50:50,080
तुमने कहा अच्छा चलो ठीक है। आगे बढ़े। 95 पे आया। पंचा की बात

745
00:50:50,080 --> 00:50:54,160
हुई नहीं। खत्म हो गया। तो मेरा पक्ष कहां से असिद्ध हो गया? वहां

746
00:50:54,160 --> 00:50:58,320
पर अगर देखा जाए तो मेरा पक्ष ही सिद्ध हुआ। अगर मैच

747
00:50:58,320 --> 00:51:02,320
ड्र भी हुआ बिना किसी निष्कर्ष के ड्रा हुआ तो जितना पक्ष सिद्ध हुआ मेरा हुआ।

748
00:51:02,320 --> 00:51:06,320
तुमने अब उस पर प्रश्न उठाया क्या? वो पैराडॉक्स लेकर आए। उसका उत्तर दिया मैंने

749
00:51:06,320 --> 00:51:10,560
तुम्हें। तुमने कहा अच्छा चलो ठीक है मैं मान गया। अब आगे बढ़िए। मान गए ना?

750
00:51:10,560 --> 00:51:15,520
मान गए? कहां ले जाओगे इस शब्द को? मान गए।

751
00:51:15,520 --> 00:51:19,840
हम्म भाई आगे बढ़ने के लिए ही सही। तुमने माना ना हमारी बात को।

752
00:51:19,840 --> 00:51:20,480
हमने तुम्हारी

753
00:51:20,480 --> 00:51:24,560
कौन सी बात मान ली? बताओ कौन सी बात मान ली जो हमारे विरोध में तुमने

754
00:51:24,560 --> 00:51:29,680
कही हो तुम मान ली हमने इसको कहते हैं सिद्धांत की पुष्टि

755
00:51:29,680 --> 00:51:34,000
आपका वो अपना मंतव्य रहा होगा कि पंचा के लिए आप आगे बढ़ रहे हो

756
00:51:34,000 --> 00:51:38,320
मगर आपको मानना पड़ा आपने माना है उसमें अच्छा

757
00:51:38,320 --> 00:51:43,920
चलो ठीक है मान लिया ये क्या है ये मान लिया ना

758
00:51:43,920 --> 00:51:48,400
वो सब कुछ कर सकता है आना बताऊंगा

759
00:51:48,400 --> 00:51:52,480
जब कभी मिलोगे तब नष्ट करोगे अद्वैत

760
00:51:52,480 --> 00:51:56,560
परंपरा को। जी भैया। और एक और बात है कि

761
00:51:56,560 --> 00:52:00,640
वो जो चाहते हैं निर्भय लोग निर्भय जो है वो ये चाहता है कि

762
00:52:00,640 --> 00:52:04,800
वो ये वाला ये वाला ये वाला कुतर्क सिद्ध

763
00:52:04,800 --> 00:52:08,960
हो गया इनका। ये अगर ये बात कहते हैं ना कि तुमने कहा है कि अवतार

764
00:52:08,960 --> 00:52:13,040
ले सकता है। हम भी तो कहेंगे तुमने कहा है कि सर्वशक्तिमान

765
00:52:13,040 --> 00:52:17,040
है। सिद्ध करो सर्वशक्तिमान फिर पीछे पड़

766
00:52:17,040 --> 00:52:22,720
जाएंगे। बिल्कुल छुपने की जगह नहीं मिलेगी।

767
00:52:22,720 --> 00:52:26,800
हां चलो बोलो।

768
00:52:26,800 --> 00:52:30,960
हम ये बोल रहे हैं कि ये लोग जो कहते हैं कि पंचाव

769
00:52:30,960 --> 00:52:35,120
या फिर न्याय दर्शन। ठीक है? अरे न्याय दर्शन में

770
00:52:35,120 --> 00:52:39,360
तीन को स्वतंत्र प्रमाण दिए गए हैं जिसमें प्रत्यक्ष प्रमाण,

771
00:52:39,360 --> 00:52:43,360
अनुमान प्रमाण और फिर शब्द प्रमाण होते हैं। यदि अनुमान प्रमाण के आधार

772
00:52:43,360 --> 00:52:47,920
पे ही शब्द प्रमाण को अगर जज करना होता तो शब्द प्रमाण का अपना

773
00:52:47,920 --> 00:52:52,240
एक जो है स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जाता ना उसे उसे

774
00:52:52,240 --> 00:52:57,040
तो अनुमान प्रमाण के अंतर्गत आने वाले पंच के आधार पर माना जाता है।

775
00:52:57,040 --> 00:53:01,040
क्योंकि ये नहीं मानेंगे इस बात को।

776
00:53:01,040 --> 00:53:03,440
प्रमाण

777
00:53:03,440 --> 00:53:07,440
तो अब शब्द प्रमाण है हमारे पास अवतार तो फिर तुम कैसे इसका खंडन

778
00:53:07,440 --> 00:53:11,440
कर सकते हो पंचाव से वो भी पंचाव जो होते हैं अनुमान प्रमाण

779
00:53:11,440 --> 00:53:15,440
के अंतर्गत आने में जो है अव्यय के सहारे होते हैं इसको न्याय

780
00:53:15,440 --> 00:53:19,440
की उसको सिद्ध किया जाता है तो अब सीधा बात आता है कि

781
00:53:19,440 --> 00:53:23,600
भाई जो चीज अनुमानित पर टिकी हो उसको अनुमान प्रमाण से सिद्ध किया

782
00:53:23,600 --> 00:53:27,600
जाता है ना कि जो पहले से शब्द प्रमाण के आधार पर है उसको भी सिद्ध करने

783
00:53:27,600 --> 00:53:31,760
लगे ये कहां से सीख लिया आप मुझे न्याय दर्शन में यह चीज दिखा

784
00:53:31,760 --> 00:53:36,080
तो शब्द प्रमाण को भी अनुमान प्रमाण से जज करना चाहिए। तब

785
00:53:36,080 --> 00:53:40,720
मैं अपने त्व को मानू। दिखाओ मुझे कहां लिखा है?

786
00:53:40,720 --> 00:53:41,920
शब्द प्रमाण तो अपने

787
00:53:41,920 --> 00:53:46,400
आप में एक स्वतंत्र है। मगर ऐसा नहीं है कि हमारे पास अनुमान प्रमाण है नहीं।

788
00:53:46,400 --> 00:53:52,240
हम तुम्हारे ईश्वर से अपनी अवतार की सिद्धि करेंगे।

789
00:53:52,240 --> 00:53:56,560
ध्यान रखना। अभिमान जहां जहां सब कुछ खत्म होता है वहां से शंकर परंपरा

790
00:53:56,560 --> 00:54:00,640
शुरू होती है। आखरी आखरी किनारा है

791
00:54:00,640 --> 00:54:04,880
इस दुनिया में धर्म का शंकराचार्य ध्यान रखना

792
00:54:04,880 --> 00:54:08,880
आवे ना जावे चले अभी जुम्मा जुम्मा

793
00:54:08,880 --> 00:54:12,880
अभी युवा हुए हो और बोल रहे हो कि परंपरा को हम ये कर देंगे

794
00:54:12,880 --> 00:54:16,960
अद्वैत नष्ट कर देंगे अरे उन्ही की वजह से आज अस्तित्व

795
00:54:16,960 --> 00:54:21,280
है तुम्हारा तुम्हारे दयानंद जी लिखे बैठे हैं जाओ पढ़ लो थोड़ा सा अपनी सत्यार्थ

796
00:54:21,280 --> 00:54:23,760
प्रकाश

797
00:54:23,760 --> 00:54:29,760
हां बोलिए प्रश्न

798
00:54:30,320 --> 00:54:34,480
जी भैया यही सब था जो ये आते हैं

799
00:54:34,480 --> 00:54:39,520
हो गए सारे हो गए सारे हो गए

800
00:54:39,520 --> 00:54:43,600
नहीं हो गए मैं तो बहुत नहीं आप मुझे जाइए

801
00:54:43,600 --> 00:54:47,920
मैं मैं जो स्किप करना होगा तो मैं स्किप कर दूंगा आपने मैसेज भेजा था ना मुझे पॉइंट्स

802
00:54:47,920 --> 00:54:52,160
को लिख के बहुत सारे जी बहुत सारे भेजे मैंने

803
00:54:52,160 --> 00:54:56,880
वो वो बोलना पहला दूसरा तीसरा चौथा पांचवा ऐसे

804
00:54:56,880 --> 00:55:00,880
जी उनका तो पहला बात यही था कि जो शिवश है वो कुतर्की है उसका

805
00:55:00,880 --> 00:55:05,120
जो पहला बात था कि वो शिव जो है वो कुतर्की है

806
00:55:05,120 --> 00:55:10,320
क्योंकि इस बात को तो सिद्ध नहीं कर पाएगा

807
00:55:10,320 --> 00:55:14,720
कुतर्की तो फिर कुतर्की अगर इस तरह से देखा जाए तो कुतर्की तो तुम भी हो भाई

808
00:55:14,720 --> 00:55:18,800
अगर तुम्हारे कहने से ही निर्णय होना है तो लो हमने भी कह दिया तुम कुतर्की

809
00:55:18,800 --> 00:55:23,440
हो यह कोई बात है क्या आप चर्चा करें

810
00:55:23,440 --> 00:55:27,440
और चर्चा के माध्यम से ये निर्णय लोगों को लेने दे कौन कुतर्की है कौन

811
00:55:27,440 --> 00:55:31,440
नहीं ठीक है वो कुतर्क देखा है क्या-क्या कुतर्क है सत्यार्थ व प्रकाश

812
00:55:31,440 --> 00:55:35,520
में ऋग्वदा आद भाष्य भूमिका में क्या-क्या कुतर्क किए गए एक

813
00:55:35,520 --> 00:55:39,600
जगह कह रहे हैं कि भगवान की पूजा करने से कुछ नहीं मिलता

814
00:55:39,600 --> 00:55:43,600
कर्म से ही मिलेगा ठीक दूसरी जगह कह रहे हैं भगवान की

815
00:55:43,600 --> 00:55:46,000
पूजा करने से निराभिमानता आएगी

816
00:55:46,000 --> 00:55:50,160
निराभिमानता का मतलब क्या है कि तुम्हारे अंदर कर्म को करने से

817
00:55:50,160 --> 00:55:54,320
प्राप्त होने वाले फल में अभिमान ना आए कि मैंने किया है। यानी कि एक तरफ

818
00:55:54,320 --> 00:55:58,480
कह रहे हैं यह मत सोचो कि भगवान दे रहे हैं। दूसरी तरफ कह रहे हैं यह सोचो कि

819
00:55:58,480 --> 00:56:02,560
भगवान दे रहे हैं। बताइए या तो मान

820
00:56:02,560 --> 00:56:06,640
लो व्यवहार परमार्थ परमार्थ से भगवान नहीं दे रहे हैं। व्यवहार से भगवान दे

821
00:56:06,640 --> 00:56:10,960
रहे हैं। मगर तुम्हें तो काटना था ना हमारी बात को तो कुतर्क कर दिया।

822
00:56:10,960 --> 00:56:15,440
निराभिमानता लिख के फंस गए। दयानंद जी निरभिमानता

823
00:56:15,440 --> 00:56:19,680
लिखा है उसमें कि भैया पूजा करने से क्या आएगा? निराभिमानता। अच्छा भगवान

824
00:56:19,680 --> 00:56:23,680
कुछ देते हैं नहीं देते तो निराभिमानता शब्द इनको काट रहा है

825
00:56:23,680 --> 00:56:28,160
कि नहीं काट रहा है भाई मैं अगर मान लीजिए मैं कुछ पुरुषार्थ

826
00:56:28,160 --> 00:56:32,240
करके कुछ ले आ रहा हूं मगर पूजा करने से मेरे अंदर यह भाव आएगा

827
00:56:32,240 --> 00:56:36,400
कि मैं नहीं लाया ये भगवान की वजह से मुझे मिला भगवान ने दिया यही

828
00:56:36,400 --> 00:56:40,400
बात हम लोग कहते हैं तो ये लोग काटने आ जाते हैं भगवान कभी कुछ नहीं देता

829
00:56:40,400 --> 00:56:44,400
अपने पुरुषार्थ से मिलता है तो जब पुरुषार्थ से मिलना सोचना है तो काट

830
00:56:44,400 --> 00:56:48,480
क्यों रहे हो फिर उस बात को निराभिमानता इतने कुतर्कों से भरा पड़ा है ना सत्यार्थ

831
00:56:48,480 --> 00:56:53,040
प्रकाश हर दो चार पन्ने बाद एक कुतर्क

832
00:56:53,040 --> 00:56:57,120
कि वो लोहा कि भैया जिसने तलवार

833
00:56:57,120 --> 00:57:01,280
बनाई है उसको वो नहीं होगा जिसने तलवार

834
00:57:01,280 --> 00:57:05,520
बनाई है उसको दोष नहीं लगेगा तलवार से यदि हत्या होगी तो दोष

835
00:57:05,520 --> 00:57:09,600
उसको लगेगा जो तलवार से हत्या कर रहा है। अच्छा जिसको मालूम होगा इस

836
00:57:09,600 --> 00:57:14,240
तलवार से हत्या होगी उसको क्या होगा? क्या कुतर्क है ये?

837
00:57:14,240 --> 00:57:18,240
जिसको मालूम है कि मैं किसी को तलवार दे रहा हूं और उससे

838
00:57:18,240 --> 00:57:22,320
हत्या होनी है। जो जानता है यह मुझसे तलवार क्यों ले जा

839
00:57:22,320 --> 00:57:26,320
रहा है। जैसे अतीक अहमद हम वो

840
00:57:26,320 --> 00:57:30,560
जानता है कि मैं AK-47 किसी को दे रहा हूं तो उससे जाके हत्या होनी है।

841
00:57:30,560 --> 00:57:36,400
किसी की वो कोई मिलिट्री को दे रहा था क्या? AK-47

842
00:57:36,400 --> 00:57:41,600
चोरों को, लुटेरों को इनको दे रहा था।

843
00:57:41,600 --> 00:57:45,680
तो फिर वो दोषी नहीं है

844
00:57:45,680 --> 00:57:49,840
जो जानता इस्लाम इस्लाम वाले भी तो यही कहते हैं बुराई को बनाना बुराई

845
00:57:49,840 --> 00:57:53,920
नहीं है। ये भी तो यही कहते हैं। वो मुफ्ती भी यही कह रहे थे।

846
00:57:53,920 --> 00:57:57,920
बुराई को बनाना बुराई नहीं है। वाह कोई जानता है कि

847
00:57:57,920 --> 00:58:02,000
बम फटेगा जाकर के निर्दोष उससे मारे जाएंगे बम से। फिर भी बम बना

848
00:58:02,000 --> 00:58:04,320
रहा है।

849
00:58:04,320 --> 00:58:08,400
ईश्वर को अकर्ता सिद्ध करने के लिए अद्वैत की शरण में आना पड़ेगा। आ जाओ जितना जल्दी

850
00:58:08,400 --> 00:58:12,560
हो सके। ठीक है? समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता

851
00:58:12,560 --> 00:58:16,560
जान। क्यों? क्योंकि यह सब कुछ माया है। कुछ गलत

852
00:58:16,560 --> 00:58:20,560
हो ही नहीं रहा है। जब इस पर आओगे ना तब ईश्वर को निर्दोष सिद्ध कर

853
00:58:20,560 --> 00:58:24,560
पाओगे। जब इस पर आओगे कुछ गलत हो ही नहीं रहा है। ठीक

854
00:58:24,560 --> 00:58:28,640
है। हम हां जी

855
00:58:28,640 --> 00:58:32,800
बताइए। ये तो उसने अपने

856
00:58:32,800 --> 00:58:36,880
लाइव में ये कहा था कि जब उसे आपने हटा दिया था

857
00:58:36,880 --> 00:58:41,040
तो आपने ये बोल के हटाया था कि आपको उस चीज का ज्ञान नहीं था

858
00:58:41,040 --> 00:58:45,520
उस कुछ जो है ना मतलब कि

859
00:58:45,520 --> 00:58:49,760
आपने आपको वस्तुनिष्ठ जो जानकारी चाहिए थी जैसे कि

860
00:58:49,760 --> 00:58:53,840
पंचावधि का उसका जो ध्यान नहीं था इसलिए आपने उसको हटा दिया इसलिए नहीं

861
00:58:53,840 --> 00:58:57,920
हटाया कि आपने जो स्वीकार किया

862
00:58:57,920 --> 00:59:02,160
है ना कि आपको नॉलेज नहीं हां उसने अपने एक वीडियो में बोला था कि आपको जो नॉलेज

863
00:59:02,160 --> 00:59:06,240
नहीं है इसलिए उसको हटा दिया। उसका ये हां भाई तो ये तो मैं अभी

864
00:59:06,240 --> 00:59:10,400
भी बोल रहा हूं कि वो कंपटीशन इस बात का था ही नहीं कि मुझे किस शब्द का अर्थ आता है किसका

865
00:59:10,400 --> 00:59:14,480
नहीं आता है। कंपटीशन इस बात का है कि मेरा जो सिद्धांत है

866
00:59:14,480 --> 00:59:18,480
ईश्वर अवतार ले सकता है। उसको मैं सिद्ध कर पा रहा हूं कि नहीं। आप कोई

867
00:59:18,480 --> 00:59:22,480
एक ऐसा शब्द ले आए जो मुझे नहीं मालूम। मैंने अभी भी कह रहा हूं। मैंने बहुत से

868
00:59:22,480 --> 00:59:26,960
शास्त्र नहीं पढ़े अभी भी उसमें कुछ लिखा हुआ तुम फिर ले आओगे। मैं उसका

869
00:59:26,960 --> 00:59:30,960
तुमसे मतलब पूछूंगा। हम इसलिए यहां पर आमनेसामने हैं कि हमें अवतार

870
00:59:30,960 --> 00:59:31,760
को सिद्ध करना

871
00:59:31,760 --> 00:59:35,760
है। या तो वो सिद्ध होगा या असिद्ध होगा। अगर तुम कोई ऐसा शब्द ला रहे हो

872
00:59:35,760 --> 00:59:40,240
जो मुझे समझ में नहीं आ रहा है तो आपको समझाना होगा और समझाइए

873
00:59:40,240 --> 00:59:45,040
और फिर पूछिए कि मैं दे पाता हूं कि नहीं दे पाता हूं।

874
00:59:45,040 --> 00:59:49,120
हां उसने बोला था कि आपने जो है चर्चा से पहले उसे कहा था

875
00:59:49,120 --> 00:59:53,200
कि चर्चा होगी। लेकिन जब उसे आपने हटा दिया तो बाद में आपने कहा है कि

876
00:59:53,200 --> 00:59:57,600
यह डिबेट मैं जीत गया। आप अपने लिए शायद ऐसा बात बोले हैं कि मैं

877
00:59:57,600 --> 01:00:02,000
जीत गया डिबेट तो उसने ऐसा कहा था

878
01:00:02,000 --> 01:00:06,000
डिबेट जीत गया मैं यह जो शब्द है ये पंक्ति तो मैंने नहीं कही

879
01:00:06,000 --> 01:00:10,080
पर यह बताओ जितना पक्ष हमारा आया है उसमें से

880
01:00:10,080 --> 01:00:14,080
90% जो भाग है उसमें हमारी सिद्धि हो रही है तुम काटने का प्रयास भी

881
01:00:14,080 --> 01:00:18,080
किया ऐसा नहीं कि तुमने काटने का प्रयास नहीं किया जब तुमने धारणा पूछी

882
01:00:18,080 --> 01:00:22,560
थी तो तुमने या तो तुम सीधे कहते अच्छा ये धारणा है चलो इस पे आ जाते पंचावे

883
01:00:22,560 --> 01:00:26,640
पे आ जाते तुमने ऐसा तो नहीं किया तुमने तुमने उसको काटा ना जगह-जगह कि नहीं नहीं ऐसा

884
01:00:26,640 --> 01:00:30,640
नहीं होता ऐसा नहीं होता तो काटने के बाद जब तुम ये कहते हुए आगे बढ़ रहे हो

885
01:00:30,640 --> 01:00:34,720
अच्छा ठीक है ठीक है हम ये समझ गए इतना समझ गए काटने

886
01:00:34,720 --> 01:00:38,720
के बाद जब तुम आगे बढ़ रहे हो तो फिर ये मानना पड़ेगा ना कि अब तुम्हारे पास क्षमता

887
01:00:38,720 --> 01:00:42,720
नहीं है उसको काटने की और तुम अगर काटते निर्भय तो

888
01:00:42,720 --> 01:00:48,160
उस दिन तुम्हारा जो भ्रम है ना वो टूट जाता

889
01:00:48,160 --> 01:00:52,240
अपने आप को अंतिम व्यक्ति मत समझो ठीक है जहां और भी है सितारों

890
01:00:52,240 --> 01:00:56,320
के आगे उस दिन तुम्हारा भ्रम टूट जाता और

891
01:00:56,320 --> 01:01:00,640
जहां तुमने काटा अविद्या वाले में काटा फस गए

892
01:01:00,640 --> 01:01:04,640
बोला ना अच्छा ठीक है मान गए अब आगे चलिए आप बोला कि नहीं

893
01:01:04,640 --> 01:01:08,960
बोला इसका क्या करोगे और मैं तो अभी भी कह रहा हूं हां मैंने बोला था भैया मैंने

894
01:01:08,960 --> 01:01:13,360
सारे शास्त्र नहीं रट लिए हैं नहीं पढ़ लिए हैं सिद्धांत मेरे पक्के

895
01:01:13,360 --> 01:01:17,600
हैं सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म करो

896
01:01:17,600 --> 01:01:22,160
बात कोई शब्द ऐसा आएगा जो कठिन है जटिल है नहीं समझ में आ रहा है हम आपसे पूछेंगे

897
01:01:22,160 --> 01:01:26,400
आप हमें समझाइए ये क्या बता क्या पूछ रहे हो हम जब समझ के आपको उत्तर देंगे

898
01:01:26,400 --> 01:01:30,400
उसको क्या दिक्कत यहां इस बात का कंपटीशन है क्या

899
01:01:30,400 --> 01:01:34,400
कि किसने कितना क्या किसकी शब्दावली कितनी गहरी हो गई है किसने

900
01:01:34,400 --> 01:01:39,760
कितने शास्त्र कंठस्थ कर लिए हैं यदि ऐसा है तो ऐसा कह के आओ

901
01:01:39,760 --> 01:01:42,800
ऐसा कह के आओ

902
01:01:42,800 --> 01:01:46,800
अवतार की सिद्धि के लिए आए थे अवतार की असिद्धि हुई नहीं और

903
01:01:46,800 --> 01:01:51,040
जितनी मैंने सिद्धि करनी चाही आपके काटने के प्रयास पूर्वक भी

904
01:01:51,040 --> 01:01:55,040
आपके काटते हुए भी उतनी मैंने अवतार की सिद्धि करी और तुम काट

905
01:01:55,040 --> 01:02:01,040
नहीं पाए आगे। हां जी बोलिए।

906
01:02:01,200 --> 01:02:05,360
मैंने ये भी कहा कि आपने उस रेट है आपका उसका उस

907
01:02:05,360 --> 01:02:09,440
आपने क्लिप को काट छाट करके प्रस्तुत किया है जनता के समक्ष

908
01:02:09,440 --> 01:02:13,520
और फिर इस पे उसने आपत्ति जताई थी। आपको शायद कमेंट किया मतलब आपको शायद

909
01:02:13,520 --> 01:02:17,680
उसका मैसेज आया होगा। तो लेकिन आपने उसका कोई उत्तर नहीं दिया।

910
01:02:17,680 --> 01:02:22,080
इसलिए उसने आपके भी वीडियो को स्टार्ट करके अपने चैनल पे

911
01:02:22,080 --> 01:02:26,320
लगाने पहली बात एक बात बताओ जो जो विजेता

912
01:02:26,320 --> 01:02:30,400
घोषित करने की बात हो रही है इनके ही चैनल पर इनको

913
01:02:30,400 --> 01:02:34,480
विजेता घोषित करते हुए संदीपन रॉय का तुरंत वीडियो आया था कि नहीं आया

914
01:02:34,480 --> 01:02:38,800
था लाइव के तुरंत बाद आया था कि नहीं आया था वो क्यों हुआ भाई

915
01:02:38,800 --> 01:02:43,120
इसलिए आया था कि इससे पहले कि जनता कुछ और समझ ले मैं उनके दिमाग में प्रीफिक्स

916
01:02:43,120 --> 01:02:47,680
कर दूं पहले से इसको कहते हैं वो देना है

917
01:02:47,680 --> 01:02:52,240
माइंड मेकअप प्रोग्रामिंग करना अपने लोगों

918
01:02:52,240 --> 01:02:56,240
कि भाई पहले से उसको एक वो दे दो प्रीफिक्स जनता को वो

919
01:02:56,240 --> 01:03:00,640
इस इस तरीके से सोचना शुरू करे जैसे मैंने बताया ना कोई भी विदेशी आक्रमण

920
01:03:00,640 --> 01:03:04,720
हो रहा है मायावाद मायावाद जातिवाद जातिवाद ये लेके आएगा उसी

921
01:03:04,720 --> 01:03:08,880
तरीके से कि इससे पहले कि जनता अपना कुछ निर्णय ले उसमें ऐसा कुछ बोल

922
01:03:08,880 --> 01:03:13,040
दो जिससे कि वो हमारे अनुसार हमारी दृष्टि से उस चर्चा को देखने

923
01:03:13,040 --> 01:03:16,240
लगे तो ये संदीपन रॉय की पहल थी अगर यही बात है

924
01:03:16,240 --> 01:03:20,240
कि मैंने अपने आप को क्यों कहा अगर संदीपन रॉय नहीं करते तब

925
01:03:20,240 --> 01:03:24,320
तो तुम ये बात कहते कहने का अधिकारी थे कि भाई आपने क्यों कहा संदीपन रॉय

926
01:03:24,320 --> 01:03:28,320
तुम्हारे ही चैनल तुम भी उसी चैनल से हो वो कह रहा है ना कोई निष्पक्ष व्यक्ति

927
01:03:28,320 --> 01:03:33,600
थोड़ी ना कह रहा है तुम्हारा ही चैनल है और तुम ही कह रहे हो संदीपन रॉय के रूप में

928
01:03:33,600 --> 01:03:37,760
ठीक है तो यह बात कहने की है ही नहीं दूसरी बात क्लिप कटिंग क्लिप कटिंग क्या तुमने

929
01:03:37,760 --> 01:03:42,080
वहां पर अपने पक्ष के अनुसार नहीं डाला है क्या वीडियो बना के तुमने

930
01:03:42,080 --> 01:03:48,080
अपने चैनल पर दिखाया है ना हाईलाइट के हाईलाइट के नाम पर वीडियो

931
01:03:48,800 --> 01:03:53,440
और सैद्धांतिक जहां पर हमारी हमारी पुष्टि हो रही है वो हम जनता को बताएंगे ही

932
01:03:53,440 --> 01:03:57,520
भैया आपने कहा मान गए तो हमने दिखाया मान गए क्यों कहा

933
01:03:57,520 --> 01:04:00,960
मान गए मत कहते मान गए

934
01:04:00,960 --> 01:04:04,960
ना कहो ना मान गए क्यों कह रहे हो झूठ क्यों बोल रहे हो हमने कहां कह दिया हम

935
01:04:04,960 --> 01:04:08,960
मान गए तुम्हारी बात कहां कह दिया बताओ और जहां

936
01:04:08,960 --> 01:04:13,280
कहा होगा वहां अभी भी कहेंगे कि हां मान गए वहां पे हमारी वो हुई

937
01:04:13,280 --> 01:04:17,360
है कहा किस किस चीज में होगा कि भैया कोई मुंह से गलत बात निकल गई

938
01:04:17,360 --> 01:04:21,440
कुछ हो गया अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है मान गए ये गलत बात निकल गई। यह थोड़ी

939
01:04:21,440 --> 01:04:25,600
ना हमने सिद्धांत तुम्हारा स्वीकार कर लिया। हम जब पूछने बैठे तो हां ठीक है मान

940
01:04:25,600 --> 01:04:30,000
गए ना। माने नहीं कतई

941
01:04:30,000 --> 01:04:35,280
नहीं। तुम माने हमारी बात। चलो बोलो आगे।

942
01:04:35,280 --> 01:04:39,360
जी भैया एक समय ये भी रहा है कि करपात्री जी

943
01:04:39,360 --> 01:04:43,600
ने आर्य समाज के शास्त्रा किया था और

944
01:04:43,600 --> 01:04:48,000
जो हाल हुआ था ये उनके जो है ये सब ये सब

945
01:04:48,000 --> 01:04:52,240
सिर पैर की बातें ये सब इनहीं को करने दो जो चीजें हम सिद्ध

946
01:04:52,240 --> 01:04:56,400
नहीं कर सकते उसमें केवल शब्द ही प्रमाण है कौन जीता था कौन हारा था

947
01:04:56,400 --> 01:05:00,560
अब ये बकवास इनहीं को इनको करने दो हम लोग इसमें क्या जाए

948
01:05:00,560 --> 01:05:04,640
भाई शब्द ही प्रमाण है तब इतिहास में क्या घटना हुई थी कौन भागा भागा फिर रहा था सब

949
01:05:04,640 --> 01:05:09,120
जानते हैं किसने शास्त्रार्थ में हारने के बाद अपने शास्त्रार्थ में हुई पराजय

950
01:05:09,120 --> 01:05:14,480
को विजय में दिखाने के लिए रातोंरात पर्चे छपवाए थे बनारस में

951
01:05:14,480 --> 01:05:18,720
हार हो गई थी जबकि और वहीं रुक गए थे ऐसा होता है व्यक्ति स्वीकार

952
01:05:18,720 --> 01:05:22,720
नहीं कर पाता मैं तो बहुत बड़ा तार्किक व्यक्ति था कैसे हार जाओ तो क्या करता

953
01:05:22,720 --> 01:05:26,720
है अलग-अलग मुस्क निकालता है जीतने के वही किया था तो जग

954
01:05:26,720 --> 01:05:30,800
जाहिर है मगर हम उसको लेकर के लड़ते नहीं है उन बातों को लेकर

955
01:05:30,800 --> 01:05:34,800
क्योंकि वहां शब्द की बात आ जाएगी और फिर हम अपना शब्द प्रमाण

956
01:05:34,800 --> 01:05:40,080
प्रस्तुत करेंगे। तुम अपना करोगे। तो ऐसी चीजों पर लड़ो ना जो अकाट्य हो।

957
01:05:40,080 --> 01:05:44,560
अकाट्य चीजों पर लड़ो जो जिसमें ड्रॉ होने की संभावना उनप क्यों बात करें?

958
01:05:44,560 --> 01:05:48,960
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? फिनिश फिनिश।

959
01:05:48,960 --> 01:05:50,400
परंपरा वेयर इज योर

960
01:05:50,400 --> 01:05:55,200
परंपरा। शास्त्र कैसे आए? शास्त्र कैसे आए?

961
01:05:55,200 --> 01:05:59,600
काल्पनिक ही बता दो। है क्या? नहीं है

962
01:05:59,600 --> 01:06:04,240
हमसे है शास्त्र तो कैसे अविश्वास करोगे हम पर

963
01:06:04,240 --> 01:06:08,560
हां ये सब होंगी ना बातें ये सब जो ख्याली

964
01:06:08,560 --> 01:06:12,960
पुलाव पका रखे हैं सब निकल जाएंगे और उस दिन भी निकले ही होंगे जब धारणा

965
01:06:12,960 --> 01:06:17,040
धारणा पे बात हुई थी कि भैया क्या है क्या है तो ढाई तीन घंटे बात

966
01:06:17,040 --> 01:06:21,040
हुई है ना उस उस बारे में फिर लक्षण पे बात हुई इनका ये कहना है लक्षण में

967
01:06:21,040 --> 01:06:25,040
जीत गए कहां से जीत गए भैया अगर यही बात है कि शब्द प्रमाण

968
01:06:25,040 --> 01:06:29,040
को तुम्हें नहीं मानना है तो शब्द प्रमाण तो ये भी कह रहा है ना भूभ स्वास से जो है

969
01:06:29,040 --> 01:06:33,040
वो मिलेगा मोक्ष। कहा क्या लक्षण है इसमें? बताओ क्या लक्षण है?

970
01:06:33,040 --> 01:06:38,160
बहन भाई का विवाह नहीं करना। क्या लक्षण है इसमें?

971
01:06:38,160 --> 01:06:42,960
क्या बेवकूफी वाली बात? प्रणव से मोक्ष मिलेगा। इसका क्या लक्षण है? बताओ।

972
01:06:42,960 --> 01:06:47,200
शब्द पुराण से मान रहे हो उसको मान रहे हो ना? तो

973
01:06:47,200 --> 01:06:51,200
अवतार कौन है? कौन नहीं? शब्द पुराण से मानेंगे। और भी

974
01:06:51,200 --> 01:06:55,280
तमाम सारी चीजें जब होगी ना कभी आमने सामने वैसे हम तो आने नहीं वाले

975
01:06:55,280 --> 01:06:59,360
अब तुम्हारे पर क्योंकि हम आएंगे तो यह सिद्ध हो जाएगा कि भैया क्या कहते

976
01:06:59,360 --> 01:07:03,360
मैंने अपने वीडियो में कभी भी यह जाहिर करने की कोशिश नहीं की कि निर्भय अपने आप

977
01:07:03,360 --> 01:07:07,440
को हारा हुआ समझता है। मैंने अपने आप को जीता हुआ बताया। मेरे

978
01:07:07,440 --> 01:07:11,600
पास प्रॉपर उसके लिए ठोस वो है कि भैया जितना भी हुआ है उसमें मेरा पक्ष

979
01:07:11,600 --> 01:07:15,680
आ भी रहा है। ठीक है? और अगर इस बात

980
01:07:15,680 --> 01:07:20,160
को मान लिया जाए कि पंचाम के कारण मैंने इनको हटाया तब भी 90% और 10%

981
01:07:20,160 --> 01:07:24,960
का रेशियो आएगा। तब भी तो जीत हमारी होगी।

982
01:07:24,960 --> 01:07:28,960
आखरी बॉल पे तुम्हारा कुछ अच्छा शॉट लग गया। बात अलग है। मगर

983
01:07:28,960 --> 01:07:33,920
देखा तो ये जाएगा ना कि कौन जीता। किसके रन ज्यादा बने।

984
01:07:33,920 --> 01:07:38,000
ठीक है? अगर दुर्जन तोष न्याय से बोल रहा हूं। इस बात को तो ये तो

985
01:07:38,000 --> 01:07:42,160
ये बात रही। अब लक्षण की बात आ जाएगी। लक्षण में अपने आप को मैंने लक्षण पे अरे भैया

986
01:07:42,160 --> 01:07:46,320
तुम कर्मणा जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र बनाते हो उसमें क्या लक्षण है

987
01:07:46,320 --> 01:07:50,400
यहां तो हमारे पास अवतार के लिए शब्द प्रमाण भी है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य

988
01:07:50,400 --> 01:07:53,200
शूद्र में क्या लक्षण होता है जो तुम उसको मान लेते हो किसी को

989
01:07:53,200 --> 01:07:57,600
बताइए क्या जाकिर नायक नहीं ढोंग कर सकता है ब्राह्मण होने का

990
01:07:57,600 --> 01:08:01,840
वहां तुम मान लेते हो जहां पर शब्द प्रमाण नहीं है वहां तुम

991
01:08:01,840 --> 01:08:06,000
अनुमान से यूं ही अपने मन से किसी को भी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र मान

992
01:08:06,000 --> 01:08:10,720
लोगे और जहां पर शब्द प्रमाण है उसको को तुम लक्षण पूछोगे

993
01:08:10,720 --> 01:08:14,800
जब अवतार को सिद्ध करने के लिए लक्षण नहीं स्वीकार कर पा रहे हो शब्द

994
01:08:14,800 --> 01:08:18,800
प्रमाण नहीं स्वीकार पा कर पा रहे हो तो कौन ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र

995
01:08:18,800 --> 01:08:22,880
है कर्म के अनुसार इसमें कहां से तुम लाओगे इसका तो प्रमाण भी

996
01:08:22,880 --> 01:08:26,880
नहीं है शब्द प्रमाण तुम्हारे यहां की अपनी ही व्यवस्था पे वार करते हो

997
01:08:26,880 --> 01:08:30,960
तुम ये लक्षण वाली बात बोल के समझ में आ रहा है समझाऊंगा जब

998
01:08:30,960 --> 01:08:35,120
कभी आओगे बोलो आगे बोलो और उस दिन जो पंचाय वाली

999
01:08:35,120 --> 01:08:39,200
बात थी अगर उस पे भी ये आते मतलब आपकी तो जो आप

1000
01:08:39,200 --> 01:08:43,360
बात कर रहे थे तार की वो पंचाव्य वाली ही थी। बस यह है कि वहां

1001
01:08:43,360 --> 01:08:47,440
पर अगर उसको क्रमवार जो पांच अवयव बोला जाता है

1002
01:08:47,440 --> 01:08:51,520
उनमें यह बात अगर लगाई जाती तो पहले नंबर पर प्रतिज्ञा है तो

1003
01:08:51,520 --> 01:08:55,520
प्रतिज्ञा है कि ईश्वर अवतार ले सकता है। वो उस पर बात नहीं करनी वो अलग

1004
01:08:55,520 --> 01:08:59,520
है। वो चैप्टर अलग है। पंचा पंचा के अंदर की सामग्री क्या है? क्या नहीं

1005
01:08:59,520 --> 01:09:03,600
है? वो चैप्टर ही अलग है। और फिर जो बात आप कर रहे थे वो वो

1006
01:09:03,600 --> 01:09:07,600
कहीं ना कहीं पंचाव्य के दायरे में ही थी सारी बातें। वही आगे की बात तो

1007
01:09:07,600 --> 01:09:08,400
फिर वो न्याय

1008
01:09:08,400 --> 01:09:12,720
दर्शन में क्या ऐसा न्याय दर्शन में क्या ऐसा होगा कि न्याय ना हो

1009
01:09:12,720 --> 01:09:17,520
न्याय दर्शन है तो न्याय की बात करेगा ना हम न्याय देंगे तुम्हें न्याय

1010
01:09:17,520 --> 01:09:21,200
बिल्कुल

1011
01:09:21,200 --> 01:09:25,360
तो उसने आगे ये भी कहा था कि जो पाखंड है ना उसका मूल कारण

1012
01:09:25,360 --> 01:09:29,840
पुराण है और पौराणिक वाद है उसका मूल कारण

1013
01:09:29,840 --> 01:09:34,320
और पुराण के जो सिद्धांत है वो वेदों को ओवरटेक कर चुके हैं। ऐसा उसका

1014
01:09:34,320 --> 01:09:38,320
कथन था। इसका जवाब वैसे मैंने दे दिया है पर फिर भी

1015
01:09:38,320 --> 01:09:42,720
मैं बता रहा हूं कि जो मूल कारण है

1016
01:09:42,720 --> 01:09:46,800
ना पुराण है ना कुछ है मूल कारण है ईश्वर के नाम से

1017
01:09:46,800 --> 01:09:51,120
झूठ बोलना ईश्वर की वाणी को अपने मन मुताबिक

1018
01:09:51,120 --> 01:09:55,200
बताना ठीक है जो नियोग वाले चैप्टर में बहुत अच्छे से

1019
01:09:55,200 --> 01:09:59,280
किया है दयानंद जी ने और किसी ने पूर्व पक्ष में

1020
01:09:59,280 --> 01:10:03,680
क्या रखा है ये लोग क्या करते हैं जैसे मान लो कि शयनाचार्य

1021
01:10:03,680 --> 01:10:07,760
ने कहीं पे वो बलि में वो स्वीकार कर लिया कि यहां पे

1022
01:10:07,760 --> 01:10:12,640
अमुक की बलि हो जाए या इस बलि को स्वीकार कर लिया तो ये लोग अरे अरे देखो देखो

1023
01:10:12,640 --> 01:10:17,040
अरे देखो भैया ये लोग ये इसकी बलि की बात कर रहे हैं अरे अच्छी छी छी छ

1024
01:10:17,040 --> 01:10:21,200
अच्छा वहां पे ये बात नहीं करते भैया शास्त्र में लिखा है कि नहीं बस वो

1025
01:10:21,200 --> 01:10:23,680
तर्क तार्किक रूप से अच्छा लगेगा या नहीं लगेगा डजंट

1026
01:10:23,680 --> 01:10:27,760
मैटर ठीक अब जब किसी ने नियोग में बात की नियोग

1027
01:10:27,760 --> 01:10:31,840
विषय में बात की कि भैया ये बताइए तो मुझे अधर्म लग रहा है वैभचार लग

1028
01:10:31,840 --> 01:10:36,240
रहा है वैश्या भक्ति लग रही है अच्छा ये बताओ कि किसी दूसरे

1029
01:10:36,240 --> 01:10:40,400
की स्त्री को जब तुम घर ले आते हो तो वह तुम्हें जब तुम पत्नी

1030
01:10:40,400 --> 01:10:44,480
बना के लाते हो तो वह तुम्हें व्यभचार क्यों नहीं लगता? क्योंकि तुमने वहां पर

1031
01:10:44,480 --> 01:10:48,560
नियमों को माना है शास्त्र के। तो शास्त्र के नियमानुसार यदि तुम कार्य कर

1032
01:10:48,560 --> 01:10:52,720
रहे हो तो अधर्म नहीं दिखना चाहिए। क्योंकि किसी दूसरी स्त्री

1033
01:10:52,720 --> 01:10:57,440
को तुम अपने घर लाए तो नियमानुसार लाए तो वो भी धर्म हो गया। ठीक है?

1034
01:10:57,440 --> 01:11:01,440
क्योंकि शास्त्र में उसकी आज्ञा है। तो यानी कि तार्किक

1035
01:11:01,440 --> 01:11:05,520
दृष्टि से इधर उधर से जो बाहरी हमारी जो ये वाली दृष्टि होती

1036
01:11:05,520 --> 01:11:09,600
है व्यवहारिक दृष्टि इससे जज करना अती्द्रिय विषय धर्म अधर्म को

1037
01:11:09,600 --> 01:11:13,680
यह गलत है यहां पर ये कह रहे हैं मैं बता देता हूं क्या कह रहे हैं

1038
01:11:13,680 --> 01:11:19,680
त्याग प्रकाश

1039
01:11:34,960 --> 01:11:39,200
यह प्रश्न किया पूर्व पक्ष में प्रश्न संख्या

1040
01:11:39,200 --> 01:11:43,360
है 97 चतुर्थ समुल्लास और इसमें तीन

1041
01:11:43,360 --> 01:11:47,360
बातें मुख्य है जो मैं आपको बता दूं नियोग में जो दयानंद जी ने कही है।

1042
01:11:47,360 --> 01:11:52,480
एक बात कही है उन्होंने कि पति की मृत्यु होने के बाद

1043
01:11:52,480 --> 01:11:56,560
जो अगर विधवा है उसकी तो वह एक दो तीन

1044
01:11:56,560 --> 01:12:00,640
चार ऐसे करके 10 पतियों का वरण तक कर सकती है मतलब जैसे

1045
01:12:00,640 --> 01:12:04,880
दूसरे से किया वो खत्म हो गया फिर तीसरे से किया वो खत्म हो गया तो चौथे से किया

1046
01:12:04,880 --> 01:12:08,880
और उसमें प्राथमिकता जो पति के कुल के जो उसके भाई वगैरह उनको देनी है

1047
01:12:08,880 --> 01:12:12,960
देव इत्यादि को तो ऐसे करके 10 तक वो जा सकती है ये नियोग में उन्होंने

1048
01:12:12,960 --> 01:12:17,360
कहा ये पहला क्लेम अब इसमें हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य

1049
01:12:17,360 --> 01:12:21,600
का यह मत नहीं है। ठीक है? नियो का अर्थ दूसरे तरीके से स्वीकार

1050
01:12:21,600 --> 01:12:25,840
करते हैं। ये नहीं। एक जगह पर दयानंद जी ने कहा है 96 वे पष्ठ

1051
01:12:25,840 --> 01:12:30,160
पर कि यदि पति

1052
01:12:30,160 --> 01:12:34,320
की मृत्यु हो गई है और पति अभी मृत्यु सैया पर है तब भी

1053
01:12:34,320 --> 01:12:38,480
उस समय भी वो मृत्यु सैया पर है उस समय भी वो किसी

1054
01:12:38,480 --> 01:12:42,720
को मतलब किसी को जो है वरण

1055
01:12:42,720 --> 01:12:46,960
करके उसके साथ यह प्रक्रिया अपना सकती है भले ही पति उस समय मृत्यु

1056
01:12:46,960 --> 01:12:50,560
सैया पर और थोड़ा सा संस्कृत में उन्होंने साफ सफाचट

1057
01:12:50,560 --> 01:12:54,960
लिखा है और हिंदी में थोड़ा उन्होंने बाद में ठीक कर दिया है। वो थोड़ा सा

1058
01:12:54,960 --> 01:12:58,960
अप्रत्यक्ष रूप से लिख दिया है। मगर कुल मिलाकर पति की मृत्यु

1059
01:12:58,960 --> 01:13:03,680
अभी अभी हुई है। उस समय भी वरण कर सकती हूं दूसरे पति का।

1060
01:13:03,680 --> 01:13:07,920
और तीसरा एक क्लेम है जो सुनने में अशोभनीय लगता है। क्या क्लेम

1061
01:13:07,920 --> 01:13:12,240
है? कि पति जीवित है, विदेश गया हुआ है,

1062
01:13:12,240 --> 01:13:16,880
धर्म के लिए, कार्य के लिए, अर्थ कमाने के लिए। उस समय भी

1063
01:13:16,880 --> 01:13:20,880
यदि इतने इतने वर्ष बाद भी वो ना लौटे तो स्त्री को ऐसा ऐसा

1064
01:13:20,880 --> 01:13:25,040
कर लेना चाहिए। 10 तक की काउंटिंग है। उससे आगे नहीं। यह

1065
01:13:25,040 --> 01:13:29,200
दयानंद जी ने माना। इनहीं मंत्रों का दूसरा अर्थ हमारे परंपरा प्राप्त

1066
01:13:29,200 --> 01:13:33,440
आचार्य देते हैं जो सुनने में ऐसे नहीं लगते। अब क्या हुआ कि

1067
01:13:33,440 --> 01:13:39,440
इन्होंने आगे इनसे सवाल किया गया है पूर्व पक्ष में कि

1068
01:13:41,200 --> 01:13:45,760
कि यह सुनने में जो है व्यभचार लग रहा है। यह

1069
01:13:45,760 --> 01:13:49,840
नियोग की बात व्यभचार के समान दिखती है। तो उत्तर दे रहे हैं दयानंद

1070
01:13:49,840 --> 01:13:53,920
जी। जैसे बिना विवाहितों का व्यभचार होता है वैसे

1071
01:13:53,920 --> 01:13:58,160
बिना नियुक्तों का व्यभचार कहा था। अगर नियुक्त नहीं हुआ मतलब प्रक्रिया के अनुसार

1072
01:13:58,160 --> 01:14:02,240
नहीं आए तो व्यभचार होगा। इससे यह सिद्ध हुआ कि जैसे नियम से

1073
01:14:02,240 --> 01:14:06,240
विवाह होने पर व्यभचार नहीं कहा था तो नियम पूर्वक नियोग होने पर

1074
01:14:06,240 --> 01:14:10,240
भीचार नहीं कहावेगा। दूसरे की कन्या का दूसरे के कुमार के

1075
01:14:10,240 --> 01:14:14,320
साथ शास्त्रोक्त विधि पूर्वक विवाह होने पर समागम में व्यभचार व

1076
01:14:14,320 --> 01:14:18,800
पाप लज्जा नहीं होती। वैसे ही वेद शास्त्रोक्त नियोग में

1077
01:14:18,800 --> 01:14:22,960
वेद शास्त्रोक्त नियोग यानी कि क्योंकि शास्त्र का सिद्धांत है

1078
01:14:22,960 --> 01:14:27,040
तो वहां पर फिर अपनी तर्क बुद्धि से उसको पाप नहीं समझना चाहिए।

1079
01:14:27,040 --> 01:14:31,200
तो यदि आपको यह लग रहा है कि यहां बलि क्यों हो रही है? यहां ये क्यों हो रहा है? यह कहने

1080
01:14:31,200 --> 01:14:35,200
की बजाय अरे वो देखो बलि दे रहे हैं। ये कहने की बजाय ये देखो शास्त्र में लिखा

1081
01:14:35,200 --> 01:14:39,520
है कि नहीं? यह शास्त्र में लिखा है कि नहीं? क्योंकि आप यहां पर वही दृष्टि अपनाने

1082
01:14:39,520 --> 01:14:44,080
को कह रहे हो। अपनी बुद्धि से तर्क करने को मना कर रहे हो आप यहां पर।

1083
01:14:44,080 --> 01:14:48,240
ठीक है? शास्त्र के सिद्धांत के विरुद्ध और आगे

1084
01:14:48,240 --> 01:14:52,320
कह रहे हैं। परंतु यह वैश्या के सदस कर्म दिखता है। यह

1085
01:14:52,320 --> 01:14:56,480
प्रश्न पूर्व पक्ष नहीं। क्योंकि वैश्या के समागम में किसी निश्चित पुरुष

1086
01:14:56,480 --> 01:15:00,720
व कोई नियम नहीं है और नियोग में विवाह के समान

1087
01:15:00,720 --> 01:15:04,800
नियम है। जैसे दूसरे को लड़की देने दूसरे के साथ समागम करने में

1088
01:15:04,800 --> 01:15:09,040
विवाह पूर्वक लज्जा नहीं होती वैसे ही नियोग में भी नहीं होनी चाहिए।

1089
01:15:09,040 --> 01:15:13,280
क्या जो व्यभचारी पुरुष व स्त्री होते हैं वह विवाह होने पर भी कुकर्म

1090
01:15:13,280 --> 01:15:18,320
से बचते हैं। तो आगे आती है बात

1091
01:15:18,320 --> 01:15:22,400
प्रश्न हमको नियोग की बात में पाप मालूम पड़ता है। फिर से उसने कहा अभी

1092
01:15:22,400 --> 01:15:26,640
सहमत नहीं हुआ। तो जब पाप मालूम पड़ता है तो दयानंद जी कह रहे हैं जो नियोग

1093
01:15:26,640 --> 01:15:30,640
की बात में पाप मानते हो तो विवाह में पाप क्यों नहीं मानते? कुल मिला के

1094
01:15:30,640 --> 01:15:34,640
बात वही है क्योंकि शास्त्रज्ञा है तो पाप नहीं है। शास्त्रज्ञा नहीं है तो पाप है।

1095
01:15:34,640 --> 01:15:38,640
यहां मान लिया तो फिर ये सब चिल्लाते क्यों हो भाई मंच पे तुम? अरे वहां

1096
01:15:38,640 --> 01:15:42,720
पे ऐसा किया है। वहां साचार्य के यहां तो ऐसा लिखा हुआ

1097
01:15:42,720 --> 01:15:46,880
है। ऐसा कैसे लिख सकते? सिर्फ इतनी बात करो। शास्त्र में लिखा है कि

1098
01:15:46,880 --> 01:15:51,040
नहीं लिखा है? इतनी बात पूछो ना। नहीं

1099
01:15:51,040 --> 01:15:55,280
वहां पे अपनी तर्क शक्ति ले आएंगे। दूसरों की बात काटनी होगी। जैसे ईश्वर

1100
01:15:55,280 --> 01:15:59,360
सर्वशक्तिमान है। अरे जो सर्वत्र व्याप्त है वो एक जगह कैसे आ सकता है? क्यों पूछ

1101
01:15:59,360 --> 01:16:03,760
रहे हो? शास्त्र में लिखा है कि नहीं ये पूछो सीधे। तब

1102
01:16:03,760 --> 01:16:07,760
तो वहां अवतार को काटने के लिए तरह तरह की चीजें ले आओगे तुम। वहां क्यों नहीं कह

1103
01:16:07,760 --> 01:16:13,600
रहे हो? शास्त्र में लिखा है। खैर ठीक है चलो आगे बढ़ो आप।

1104
01:16:13,600 --> 01:16:17,680
जी भैया। उसने आगे यह भी कहा था कि जो

1105
01:16:17,680 --> 01:16:21,840
आज नियोग वाले विषय पर हमने अपनी जो Instagram

1106
01:16:21,840 --> 01:16:26,000
प्रोफाइल है सर्वशक्तिमान धर्म से इस समय एक्टिव है इंडिया में आहान कॉल

1107
01:16:26,000 --> 01:16:30,000
ऑफ धर्मा नाम से जो थी वो बैन हो गई है तो जो सर्वशक्तिमान धर्म नाम

1108
01:16:30,000 --> 01:16:34,080
से जो है वो वहां पर एक रील डाली है वहां जाकर आप लोग देख सकते

1109
01:16:34,080 --> 01:16:37,280
हैं। जी

1110
01:16:37,280 --> 01:16:41,280
जी तो उसमें कहा था कि सत्यनारायण भगवान की जो कथा है

1111
01:16:41,280 --> 01:16:45,360
उसमें क्या है कि एक जो राजा है जो भगवान का प्रसाद नहीं खाता

1112
01:16:45,360 --> 01:16:49,680
तो भगवान क्या करते हैं सब सब राजपाट लूट लेते हैं

1113
01:16:49,680 --> 01:16:53,920
ये सब कुछ तो ये जो भी कुछ किए हैं भगवान वो सब कुछ हिरण्यकश्यप

1114
01:16:53,920 --> 01:16:58,080
जैसा लगता है हिरण्यकश्यप राक्षस था क्योंकि हिरण्यकश्यप कहता

1115
01:16:58,080 --> 01:17:02,480
था कि मेरी पूजा करो नहीं तो मैं सब कुछ खत्म कर दूंगा। तो यहां पर भगवान सत्यनारायण

1116
01:17:02,480 --> 01:17:06,960
का तुलना हिरण्यकश्यप से कर रहा है।

1117
01:17:06,960 --> 01:17:11,280
तो यह पूजा ना करने से पूजा ना करने से तुम्हारे

1118
01:17:11,280 --> 01:17:15,600
अंदर ये निराभिमानता आएगी क्या? वो शक्तियां

1119
01:17:15,600 --> 01:17:19,920
आएंगी क्या? ये भूभ स्वाहा क्यों कर रहे हो फिर तुम? भाई भगवान

1120
01:17:19,920 --> 01:17:24,080
की पूजा करने से कुछ तो मान ही रहे हैं ना वो। वही पारमार्थिक रूप से

1121
01:17:24,080 --> 01:17:28,080
इस तरह से देखा जाता है कि भगवान की पूजा करोगे तो सत्य का चिंतन होगा। चिंतन होगा

1122
01:17:28,080 --> 01:17:28,640
तो चित्त की

1123
01:17:28,640 --> 01:17:32,720
शुद्धि होगी। चित्त की शुद्धि होगी तो अविद्या से मुक्ति होगी। यह हो

1124
01:17:32,720 --> 01:17:36,800
गया पारमार्थिक और व्यवहारिक ये हो गया कि भगवान की पूजा करोगे तो भगवान तुम्हें

1125
01:17:36,800 --> 01:17:41,040
धनधान से परिपूर्ण करेंगे। तुम्हारे जीवन में सुख देंगे। तुम्हारे

1126
01:17:41,040 --> 01:17:45,760
यहां भी मैंने वही बात की ना इनके यहां अपनी बातों को काटे बैठे हैं। किस चक्कर में?

1127
01:17:45,760 --> 01:17:49,760
क्योंकि भैया हमको जो है परंपरा प्राप्त आचार्यों के सिद्धांत का किसी तरीके

1128
01:17:49,760 --> 01:17:54,160
से बुराई करनी है। अपमान करना है। और खुद वही मान लेना है।

1129
01:17:54,160 --> 01:17:58,480
खुद वही मान लेना है। खुद वही मान लेना है। हां। दूसरे

1130
01:17:58,480 --> 01:18:02,560
शब्दों से खुद मान लेना है। भैया निराभिमानता का मतलब बता दो।

1131
01:18:02,560 --> 01:18:06,960
क्या है? भगवान की पूजा करने से निराभिमानता

1132
01:18:06,960 --> 01:18:11,120
आएगी। यानी कि यह भाव आएगा कि मैंने ये कर्म किया है। उसके फल

1133
01:18:11,120 --> 01:18:15,120
स्वरूप मुझे प्राप्त नहीं हुआ है। बल्कि भगवान के फल स्वरूप ही मुझे प्राप्त हुआ है। यही तो हमारे

1134
01:18:15,120 --> 01:18:20,880
आचार्य कह रहे हैं। यही तो हमारे आचार्य कह रहे हैं।

1135
01:18:20,880 --> 01:18:26,640
चलिए बिल्कुल।

1136
01:18:26,640 --> 01:18:30,880
उसमें यह कहा है कि जो मूर्ति पूजा होते हैं, अवतारवाद

1137
01:18:30,880 --> 01:18:35,040
होता है ये सब का जो है ये पुराण इसका कारण

1138
01:18:35,040 --> 01:18:39,280
है और अगर हम लोग पौराणिक सिद्धांत का खंडन कर देंगे तो ये सब

1139
01:18:39,280 --> 01:18:43,360
ऑटोमेटिकली सब इसका खंडन हो गया अवतारवाद मूर्ति पूजा आदि का

1140
01:18:43,360 --> 01:18:47,440
बना दो सबको जिहादी आखरी युद्ध तो मूर्ति पूजों से

1141
01:18:47,440 --> 01:18:52,160
होना है ना बना दो यही तो है शक्ल बदल के

1142
01:18:52,160 --> 01:18:56,160
आर्य समाज के रूप में इस्लाम ही आया है ना बुत परस्ती खत्म

1143
01:18:56,160 --> 01:19:00,240
करना है और दिखावा करना है फिर वहां जाकर के

1144
01:19:00,240 --> 01:19:04,320
हम जो है वो क्या कहते हैं राम मंदिर के बहुत बड़े समर्थक हैं हमने हैदराबाद

1145
01:19:04,320 --> 01:19:09,360
में इतनी मूर्तियां बचाई थी जितने अंश में कोई आर्य समाजी

1146
01:19:09,360 --> 01:19:13,760
मूर्तियों के लिए लड़ रहा है ना उतने अंश में वो आर्य समाजी नहीं है। ठीक उसी प्रकार

1147
01:19:13,760 --> 01:19:18,080
जिस प्रकार से जितने अंश में जो मुस्लिम है वो गीता और रामायण

1148
01:19:18,080 --> 01:19:24,080
के लिए लड़ रहा है यदि तो उतने अंश में मुस्लिम ही नहीं है।

1149
01:19:24,320 --> 01:19:28,720
तो ये टाल ठोकना बंद करो कि हमने वहां ये किया था वो किया था। सिद्धांत

1150
01:19:28,720 --> 01:19:32,880
क्या है तुम्हारे? मूर्ति पूजा का विरोध जो तुम्हारे सच्चे आर्य समाजी

1151
01:19:32,880 --> 01:19:36,960
के चेहरे से टपक रहा है। ये है सच्चा आर्य समाजी।

1152
01:19:36,960 --> 01:19:40,960
हर कोई सच्चा आर्य समाजी नहीं है। दोगले हैं ज्यादातर। तुम कम से

1153
01:19:40,960 --> 01:19:45,760
कम इस मामले में तुम सच्चे आर समाज कहलाने लायक तो हो। जिहाद

1154
01:19:45,760 --> 01:19:49,760
जिहाद फैलाओगे ना मूर्ति पूजा खत्म करके जिहाद के लिए

1155
01:19:49,760 --> 01:19:53,920
आए बस मुखौटा पहन लिया है वैदिक का वैदिक का मुखौटा पहन

1156
01:19:53,920 --> 01:19:59,920
करके जिहाद हां जी बोलिए

1157
01:20:00,800 --> 01:20:04,880
जी इसी पर है मूर्ति पूजा के लेकर के एक और बात है कि आप एक

1158
01:20:04,880 --> 01:20:08,960
बार छत्तीसगढ़ गए थे वहां पे कोई आर्य समर्थ का मंदिर था जहां पर मूर्ति पूजा

1159
01:20:08,960 --> 01:20:13,440
हो रही थी ठीक है आपने अपने वीडियो पे वो दिखाया था तो

1160
01:20:13,440 --> 01:20:17,600
उसमें कहा है कि जहां मूर्ति पूजा होती है वहां भी आपको समस्या है। जहां मूर्ति

1161
01:20:17,600 --> 01:20:21,840
पूजा नहीं होती है वहां भी आपको समस्या है। और बाद

1162
01:20:21,840 --> 01:20:25,920
में जब उसने पता किया इस विषय में तो ये जो था ये मंदिर वास्तविकता में आर्य

1163
01:20:25,920 --> 01:20:29,920
समाज का शायद नहीं है। वो ऐसे ही बैनर ये सब लग

1164
01:20:29,920 --> 01:20:34,080
गया था आर्य समाज का। उसने अपने केस करो ना भाई उस पर। केस

1165
01:20:34,080 --> 01:20:38,160
क्यों नहीं कर रहे हो? जाओ केस करो उनके ऊपर।

1166
01:20:38,160 --> 01:20:43,520
तुम्हारे नाम से कैसे चल रहा है मूर्ति पूजा वाला मंदिर? हां।

1167
01:20:43,520 --> 01:20:47,840
क्यों नहीं केस कर रहे? हम कैसे मान ले कि वह नहीं है आर्य समाज का? बताइए।

1168
01:20:47,840 --> 01:20:52,960
कैसे मान ले? क्योंकि हमारे यहां परंपरा नहीं है।

1169
01:20:52,960 --> 01:20:56,960
परंपरा के विरोधी हो ना? हम केस कर सकते हैं।

1170
01:20:56,960 --> 01:21:00,960
गोवर्धन मट का वो बन के कोई घूमेगा अगर तो हम केस कर सकते हो।

1171
01:21:00,960 --> 01:21:04,960
किया है। तुम कर दो केस जाकर के। कोई व्यक्ति आर आर्य समाज के नाम

1172
01:21:04,960 --> 01:21:09,120
से रजिस्टर्ड खुद को करा रहा है। लो घोषित कर दो। समाज नहीं है। इसको

1173
01:21:09,120 --> 01:21:13,280
कहते हैं परंपरा का पावर जो तुम्हें कभी समझ में नहीं आएगा और कभी

1174
01:21:13,280 --> 01:21:15,840
परंपरा पर बात हो गई ना तब बिल्कुल तुम्हारा बिल्कुल

1175
01:21:15,840 --> 01:21:19,920
यह जो नशा है पूरा परंपरा को छील देंगे ये कर देंगे सारा

1176
01:21:19,920 --> 01:21:23,920
हिरण हो जाएगा नशा पूरा उतर जाएगा अभी तुम दूसरे तरीके

1177
01:21:23,920 --> 01:21:27,920
के रूप को सामना किया था तुमने भैया

1178
01:21:27,920 --> 01:21:32,080
के माफ कर दो क्षमा कर दो इसलिए

1179
01:21:32,080 --> 01:21:36,240
मुझे अलग तरीके से मैं तुम्हारे को लेकर के हो गया था मगर ऐसा

1180
01:21:36,240 --> 01:21:38,560
विश्वासघात

1181
01:21:38,560 --> 01:21:42,880
मेरी सहष्णता का मेरी उदारता का यह तुमने ना

1182
01:21:42,880 --> 01:21:46,960
दिया मुझे फल वहां लाइव में आकर के कह रहे हो कि मैं

1183
01:21:46,960 --> 01:21:51,360
खत्म कर दूंगा शंकर परंपरा को मैंने जब जब कहा ना आर्य समाजियों

1184
01:21:51,360 --> 01:21:56,080
के लिए ये होगा मैं कहता हूं शोधन तुम्हारी तरह नहीं हूं मैं

1185
01:21:56,080 --> 01:22:00,720
समझे दर्शन विज्ञान और व्यवहार सीखा मैंने अपने गुरु से

1186
01:22:00,720 --> 01:22:06,560
हमेशा शोधन कहा लय कहा नष्ट करना कभी नहीं कहा

1187
01:22:06,560 --> 01:22:11,920
शोधन होना चाहिए थोड़े संस्कार भी ले आओ मेरे भाई।

1188
01:22:11,920 --> 01:22:15,920
माने फौजी घूम रहे हो। सत्य से साक्षात्कार नहीं हुआ। कोई

1189
01:22:15,920 --> 01:22:19,600
मिला नहीं है। इसका मतलब

1190
01:22:19,600 --> 01:22:23,600
हम अच्छा कमेंट बॉक्स में एक व्यक्ति लिख रहा है के मूर्ति

1191
01:22:23,600 --> 01:22:27,760
पूजा का खंडन अवश्य होना चाहिए। मूर्ति क्योंकि आर्य समाज जो है मूर्ति का खंडन

1192
01:22:27,760 --> 01:22:32,000
नहीं करता। मूर्ति पूजा का खंडन करता है। ये बताओ इनकी ये

1193
01:22:32,000 --> 01:22:37,840
बातें हैं। ऐसी बात ये सब बातें फालतू की इनको क्या ही

1194
01:22:37,840 --> 01:22:41,920
जब हां क्योंकि आपकी तो उसमें साफ लिखा हुआ है ना कि

1195
01:22:41,920 --> 01:22:46,000
जो मूर्ति पूजा करता है वो हजारों के बराबर पाप है। ऐसा लिखा हुआ

1196
01:22:46,000 --> 01:22:50,320
है। तो भैया शास्त्रों में जब आप प्रतीकात्मक उपासना

1197
01:22:50,320 --> 01:22:54,400
करते हैं तो वहां पर आपको अपने इष्ट की वहां पर मूर्त बनानी

1198
01:22:54,400 --> 01:22:58,560
पड़ती है। वेद मैं तो यह कह रहा हूं। मैंने तो यह तक कहा मैंने मैंने

1199
01:22:58,560 --> 01:23:02,560
तो यह तक कहा अपनी लाइफ में कि आपको

1200
01:23:02,560 --> 01:23:06,560
अगर यह लगता है कि मूर्ति पूजा गलत है मगर वेदों में आपके अनुसार अलंकार

1201
01:23:06,560 --> 01:23:11,120
के रूप में अवतार की बात हुई है ना हुई तो है

1202
01:23:11,120 --> 01:23:15,200
तो तुम्हें दुश्मनी क्यों हो रही है उससे दुश्मनी इसलिए है क्योंकि जो जड़

1203
01:23:15,200 --> 01:23:19,520
है उसमें जिहादी भावना है फिर यह कहना पड़ेगा मुझे

1204
01:23:19,520 --> 01:23:21,600
मूर्ति से दुश्मनी नहीं होनी चाहिए ना आपकी

1205
01:23:21,600 --> 01:23:25,680
निष्ठा नहीं है मूर्ति में आप अपनी पद्धति से चलो हमने तो सबको स्वीकार किया

1206
01:23:25,680 --> 01:23:31,680
है मगर नहीं मूर्ति से दुश्मनी है।

1207
01:23:31,760 --> 01:23:35,920
वो हार आदि तो डला होता है ना दयानंद जी की मूर्ति के ऊपर भी जब भी इनके आर्य समाज

1208
01:23:35,920 --> 01:23:40,080
के मंदिर में जाते हैं वहां हार लगाया होता है दयानंद जी की मूर्ति के ऊपर वो

1209
01:23:40,080 --> 01:23:44,080
सब चलता है। मैंने एक दिन पूछ लिया था कि दयानंद जी की फोटो लगी

1210
01:23:44,080 --> 01:23:48,080
हुई है। दयानंद जी तो है नहीं। उनको फाड़ के जो है इसको पैरों के

1211
01:23:48,080 --> 01:23:52,240
नीचे अगर कोई करे कुचले या उस पर थूके या

1212
01:23:52,240 --> 01:23:56,320
और अपमान करे क्या लगेगा? कैसा लगेगा?

1213
01:23:56,320 --> 01:24:00,800
तो अभी अगर मैं इनकी जो सत्यार्थ प्रकाश है वह कोई दयानंद

1214
01:24:00,800 --> 01:24:05,040
जी तो है नहीं सत्यार्थ प्रकाश पर इनकी वो छपी हुई है चीजें उसके साथ कोई अपमान

1215
01:24:05,040 --> 01:24:09,600
पूर्वक व्यवहार करने लगे कोई तो कैसा लगेगा क्यों लगेगा

1216
01:24:09,600 --> 01:24:13,600
वहां तो प्राण प्रतिष्ठा पूर्वक हमारे पास मंत्र है जिसके द्वारा हम ये मान

1217
01:24:13,600 --> 01:24:17,760
रहे हैं कि इसमें भगवान देवत्व की प्राप्ति हो गई आपके यहां आपने

1218
01:24:17,760 --> 01:24:22,000
तो ऐसा कुछ नहीं किया फिर क्यों मान रहे हो क्यों भावना जुड़ी हुई है आपकी उससे और जब आपकी

1219
01:24:22,000 --> 01:24:28,000
भावनाएं बिना मंत्र के जुड़ रही है तो हमारी मंत्र के द्वारा जुड़ रही तो तुम उसका अपमान करोगे।

1220
01:24:29,120 --> 01:24:34,000
चलो बिल्कुल।

1221
01:24:34,000 --> 01:24:38,480
नहीं भैया उसने एक जगह बोला था मेरी लाइव में कि जब नकली

1222
01:24:38,480 --> 01:24:42,640
शंकराचार्य आदि कोई कुछ बन जाता है तो उसके लिए आप शब्द कोर्ट जाते हैं।

1223
01:24:42,640 --> 01:24:47,120
वहां पे आपको कोर्ट की मोहर पर आप लोग डिपेंड हो जाते हैं प्रत्यापित

1224
01:24:47,120 --> 01:24:51,120
करने के लिए कि कौन नकली है, कौन नकली है। ठीक है? तो फिर यहां पर आपका

1225
01:24:51,120 --> 01:24:55,440
शब्द प्रमाण कहां चल जाता है। ठीक है?

1226
01:24:55,440 --> 01:24:59,760
आप सब बेवकूफी भरे बेवकूफ

1227
01:24:59,760 --> 01:25:03,760
तो हम लड़ रहे हैं ना उस व्यवस्था को चेंज करने के लिए हमने उस व्यवस्था को

1228
01:25:03,760 --> 01:25:07,760
स्वीकार थोड़ी ना कर रखा है हां तुम्हारे यहां तुमने जो लोकतांत्रिक

1229
01:25:07,760 --> 01:25:11,920
व्यवस्था अपने यहां बनाई अपना देखो जाकर के भाई हमें जो भी हथियार मिलेगा

1230
01:25:11,920 --> 01:25:15,920
हम उससे लड़ रहे हैं ना जिस समय जो हथियार मिलेगा उस उससे उस समय

1231
01:25:15,920 --> 01:25:20,720
लड़ेंगे ना ये सस्ती अविद्या है अविद्या का क्यों उपयोग कर रहे हो

1232
01:25:20,720 --> 01:25:24,720
ये YouTube YouTube जो चला रहा है वो कितना भ्रष्ट व्यक्ति होगा।

1233
01:25:24,720 --> 01:25:28,800
क्यों उपयोग कर रहे हो भैया उसका? तुम तो उस पर डिपेंड हो अपनी चीजों को करने के

1234
01:25:28,800 --> 01:25:32,800
लिए। तो धरती पर गिरा हुआ व्यक्ति धरती का ही सहारा

1235
01:25:32,800 --> 01:25:37,200
लेकर के उठ खड़ा होता है। ठीक है? जमीन

1236
01:25:37,200 --> 01:25:41,280
पे जमीन पर दौड़ता है वायुयान पहले। तब जाकर के

1237
01:25:41,280 --> 01:25:44,160
वो धरती से अलग हो पाता है। उसी

1238
01:25:44,160 --> 01:25:48,160
प्रकार प्रपंच रूपी संसार में फंसा हुआ व्यक्ति प्रपंच रूपी संसार का

1239
01:25:48,160 --> 01:25:53,600
ही ऐसा सहारा लेता है कि प्रपंच रूपी संसार से मुक्त हो जाए।

1240
01:25:53,600 --> 01:25:57,680
जिस प्रकार से पानी में चलने वाली नाव पानी

1241
01:25:57,680 --> 01:26:01,760
का ही सहारा लेती है। चप्पू चलाया जाता है। उसके कारण वो आगे

1242
01:26:01,760 --> 01:26:05,760
बढ़ता है। गंतव्य तक पहुंचता है। ठीक है? और तुम नहीं ले रहे

1243
01:26:05,760 --> 01:26:11,200
हो क्या सहारा? तुम्हारा सहारा नहीं है क्या?

1244
01:26:11,200 --> 01:26:15,600
भाई तुम्हारी भी तो तुम भी तो रामराज को मानते हो। कोई

1245
01:26:15,600 --> 01:26:19,600
व्यक्ति रजिस्टर्ड करके पहुंच जा रहा है। तुम उस पर कुछ कह भी नहीं पा रहे हो। अरे हम कम

1246
01:26:19,600 --> 01:26:23,760
से कम कह तो रहे हैं। घोषित तो कर रहे हैं। तुम्हारे यहां तो घोषित भी कौन

1247
01:26:23,760 --> 01:26:27,840
करेगा? यह नियम नहीं है। अच्छा नियम कैसे पता चलेगा? कौन घोषित करेगा?

1248
01:26:27,840 --> 01:26:32,480
कि वो दयानंद जी के सिद्धांतों को जानता मानता है कि नहीं।

1249
01:26:32,480 --> 01:26:36,880
अब भैया जनता को यदि आर्य समाज से कुछ सीखने जाना है

1250
01:26:36,880 --> 01:26:40,880
तो कौन सा आर्य समाज प्रमाणिक है? यह जानने के लिए पहले

1251
01:26:40,880 --> 01:26:44,880
उसको सब कुछ सीखना है। आर्य समाज में यदि हमें

1252
01:26:44,880 --> 01:26:49,120
पढ़ने जाना है तो कौन सा आर्य समाज प्रमाणिक है? उसके लिए

1253
01:26:49,120 --> 01:26:53,200
पहले हमें आर्य समाज की पढ़ाई पढ़ाई बाहर कर लेनी है। फिर हम यह तय करेंगे कौन

1254
01:26:53,200 --> 01:26:57,280
सा प्रमाणिक है क्योंकि हम जान गए आर्य समाज के सिद्धांत क्या है और फिर हम

1255
01:26:57,280 --> 01:26:59,520
जाएंगे वहां पर पढ़ने क्यों जाए भाई पढ़ने

1256
01:26:59,520 --> 01:27:04,640
जब हम पढ़ चुके हैं बाहर

1257
01:27:04,640 --> 01:27:08,720
जी सनातन जी जी बिल्कुल बिल्कुल

1258
01:27:08,720 --> 01:27:12,880
तो जब सिद्धांतों पे आप नहीं टिक

1259
01:27:12,880 --> 01:27:17,120
पाते हो तभी पर्सनल आघात वहां पर करने के प्रयत्न

1260
01:27:17,120 --> 01:27:21,280
करते हो और इन्होंने पहले भी करे हैं। इवन जब

1261
01:27:21,280 --> 01:27:25,680
मैं इनके साथ काम कर रहा था तो काफी इनके टेलीग्राम

1262
01:27:25,680 --> 01:27:30,080
टेलीग्राम तो नहीं हां WhatsApp के बहुत सारे ग्रुप्स थे तो उन

1263
01:27:30,080 --> 01:27:34,320
उन ग्रुप्स में ऐसी ऐसी बातें मतलब शेयर की जाती थी संदीपन रॉय

1264
01:27:34,320 --> 01:27:38,320
भी वहां पर होते थे और इनको मैं कई बार कहता था कि आप यह जो राधा मां का अपमान

1265
01:27:38,320 --> 01:27:42,320
यहां पर हो रहा है क्योंकि हम तो बचपन से राधे-राधे बोलते आए हैं। हमारे घर में

1266
01:27:42,320 --> 01:27:46,400
सभी हमारे जो माता-पिता हैं, सभी भाई बंधु हैं, सब राधे-राधे बोलते हैं हमारे

1267
01:27:46,400 --> 01:27:50,960
घर में। बचपन से हमारी राधा के प्रति आस्था रही है। और वहां पर

1268
01:27:50,960 --> 01:27:54,960
अगर कोई राधा मां का अपमान करता हुआ अगर मिलता है तो बड़ा हृदय

1269
01:27:54,960 --> 01:27:58,960
को ठेस पहुंचती है। तो मैंने कई बार उनको कहा कि यह मत कीजिए मत कीजिए। अच्छा इनके होते

1270
01:27:58,960 --> 01:28:02,960
हुए वो चीजें हो रही थी। मैंने वो ग्रुप छोड़े थे तो इनका

1271
01:28:02,960 --> 01:28:06,960
फिर फोन आ जाता था कि आपने वो क्यों छोड़ दिया। अच्छा इनको इतना भी नहीं समझ में आ रहा है जब मैं

1272
01:28:06,960 --> 01:28:10,960
एक दो बार बोल रहा हूं कि भैया यहां पर राधा का अपमान हो रहा है। यहां पर शिवलिंग के बारे

1273
01:28:10,960 --> 01:28:15,280
में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। अभद्र बातें फैलाई जा रही हैं।

1274
01:28:15,280 --> 01:28:19,280
तो मैंने इनसे हाथ जोड़कर विनतियां की हैं। उसमें एक थर नाम का भी

1275
01:28:19,280 --> 01:28:23,520
व्यक्ति था जो अभी आर्य समाज छोड़ चुका था। छोड़ चुका है अभी तो। तो वो व्यक्ति

1276
01:28:23,520 --> 01:28:28,320
भी वहां पर था और बहुत सारे इनके अभी भी हैं जो एक

1277
01:28:28,320 --> 01:28:33,200
आईडी से आते हैं। उनका आईडी मेरे को याद नहीं आ रही अभी।

1278
01:28:33,200 --> 01:28:37,440
तो वह अभी भी उन्होंने वह बना रखे हैं। वहां पर पुराण प्रवचन

1279
01:28:37,440 --> 01:28:41,440
नाम का कोई एक चैनल इन्होंने बना रखा है जो कन्हैया चौधरी जी मेरे को बताते रहते हैं

1280
01:28:41,440 --> 01:28:45,520
कि उनका कोई ऐसा चैनल है जहां पर ऐसा दुष्प्रचार

1281
01:28:45,520 --> 01:28:49,600
ये करते रहते हैं। तो आप पर्सनल अटैक

1282
01:28:49,600 --> 01:28:53,600
अगर कर रहे हो यानी कि आपके सिद्धांत कमजोर हैं। यही

1283
01:28:53,600 --> 01:28:58,480
बात बौद्ध कर रहे हैं। यही बात जो है यह तथाकथित जो

1284
01:28:58,480 --> 01:29:02,720
नव बौद्ध हैं और इस्लाम वाले हैं यह सब यही बात करते हैं पर्सनल अटैक

1285
01:29:02,720 --> 01:29:06,800
वहां पर किया जाता है क्योंकि आपके सिद्धांतों में दम नहीं है तो पहले सिद्धांतों

1286
01:29:06,800 --> 01:29:10,800
को मजबूत कीजिए तब आप जो है वह हमसे बात करने के

1287
01:29:10,800 --> 01:29:14,960
लिए आइए किसी व्यक्ति को

1288
01:29:14,960 --> 01:29:20,160
गलत साबित करके अपने सिद्धांत को पुष्ट नहीं किया जाता है।

1289
01:29:20,160 --> 01:29:26,160
ठीक है जी अनिकेत जी कुछ बोलना है?

1290
01:29:29,920 --> 01:29:35,920
है नहीं जी शास्त्रवाद जी आपने क्या अगली बात बोल

1291
01:29:36,080 --> 01:29:40,320
भैया उसने अपने लाइव में ये कहा है जी भैया महाराज

1292
01:29:40,320 --> 01:29:46,320
जो है एक मिनट हां अंकित जी बोले

1293
01:29:50,560 --> 01:29:54,880
मैं ये कह रहा था भैया कि ये अभी इससे तो इतना पता चल चल गया है कि ये सैद्धांतिक

1294
01:29:54,880 --> 01:29:59,200
खंड खंडन तो नहीं कर पाएंगे। इनके पास कुछ बचा नहीं है।

1295
01:29:59,200 --> 01:30:03,200
ये यही नहीं ऐसे बहुत से लोग तो अब ये केवल कुतर्क कुतर्क यही

1296
01:30:03,200 --> 01:30:09,200
खेलते रहेंगे। तो क्या अब हम इसी को खेलते रहेंगे क्या? हम

1297
01:30:10,240 --> 01:30:12,640
जी

1298
01:30:12,640 --> 01:30:17,040
सैद्धांतिक खंडन कहां से करेंगे? ये सिद्धांतिक

1299
01:30:17,040 --> 01:30:21,040
खंडन जब होगा तब तो अभी तो भैया केवल

1300
01:30:21,040 --> 01:30:25,040
क्या कहते हैं? तुमने बॉल डाली है और हमने बैटिंग की है। ये हमारी बारी

1301
01:30:25,040 --> 01:30:29,120
है ना बॉल डालने की। हां। कहां तुम अंधेरे में

1302
01:30:29,120 --> 01:30:34,000
हो? और हमने बैटिंग की हम आउट नहीं हुए बैटिंग में

1303
01:30:34,000 --> 01:30:40,000
और अभी जो करनी हो बिंग वो कर लेना। उसके बाद हम बॉल डालेंगे।

1304
01:30:40,720 --> 01:30:44,880
कहां गलतफहमियों में पड़े हैं लोग। मतलब उसको यह

1305
01:30:44,880 --> 01:30:49,040
लगने लगा निर्भय को निर्भय को यह लगने लगा कि इन्होंने

1306
01:30:49,040 --> 01:30:53,040
मुझसे चर्चा के लिए कहा है इसका मतलब इनको दिक्कत हो दिक्कत नहीं हो रही भाई

1307
01:30:53,040 --> 01:30:57,040
मैंने तो सोचा ही था मैं तुम्हारे चैनल पे आऊंगा तुमने इतनी अकड़ में

1308
01:30:57,040 --> 01:31:01,120
वीडियो बना दिया ये सब करके कर दिया अपने वही पर्सेक्टिव की वजह से कि भाई मैं

1309
01:31:01,120 --> 01:31:05,120
हैबचुअल हूं तो हर बार थोड़ी ना तुम्हारा ये नादानीपन स्वीकार कर

1310
01:31:05,120 --> 01:31:09,280
लिया जाएगा ठीक है एक बार हो गया था तो ठीक है हो गया अब हर बार तुम वही

1311
01:31:09,280 --> 01:31:13,520
चीज करोगे कि मुझे हैबिट हो गई इसलिए मैं सबको उसी लकड़ी से आकता हूं ऐसे नहीं चलेगा

1312
01:31:13,520 --> 01:31:17,520
ना तूफान ही फैसला करेगा रोशनी का दिया वो चलेगा जिसमें दम

1313
01:31:17,520 --> 01:31:20,480
हो

1314
01:31:20,480 --> 01:31:24,560
वीडियो भी तो डिलीट किया था इन्होंने जो आपकी चर्चा के बाद बनाया था उसमें तो बहुत

1315
01:31:24,560 --> 01:31:28,560
अभद्र बातें कही थी वो तो मैं तो रिकॉर्ड करने वाला

1316
01:31:28,560 --> 01:31:32,800
था लेकिन उतने में वो कि उसका

1317
01:31:32,800 --> 01:31:36,880
कहना था कि उसकी आत्मा ने उसे मतलब जो वो किया ना कचोटा

1318
01:31:36,880 --> 01:31:40,960
वो तब कचोटा जब वो एडिटिंग करने बैठा समराइज करने

1319
01:31:40,960 --> 01:31:45,600
वो उसका यह कहना था कि उससे उससे पहले तक तो मेरी बबासी भरी हुई थी वही वाली

1320
01:31:45,600 --> 01:31:49,600
हम मगर उसका यह कहना था कि जब मैंने वीडियो को देखा कटिंग करने

1321
01:31:49,600 --> 01:31:53,600
के लिए तो मैं देख पाया कि वहां पर जो है मेरी ओर से ऐसा शुरू हुआ जिसके कारण

1322
01:31:53,600 --> 01:31:57,600
वो सब वातावरण वैसा गर्म हुआ जिसके कारण आखिर अंतत गतवा वो

1323
01:31:57,600 --> 01:32:01,840
एक निष्कर्षपूर्ण बात नहीं हो पाई। मैं सच बता

1324
01:32:01,840 --> 01:32:06,480
दूं तो निर्भय को लेकर के उस अंदाज में था ही नहीं

1325
01:32:06,480 --> 01:32:10,640
कि मुझे इसका तिया पाचा करना है तुरंत। ठीक है? हम मैं

1326
01:32:10,640 --> 01:32:14,800
तो था कि आज जो है दो इंटेलेक्चुअल पर्सन के बीच में तात्विक तरीके

1327
01:32:14,800 --> 01:32:18,880
से बात हो जाए तो लोगों को बहुत कुछ जानने को मिले क्योंकि वही मैं हमेशा

1328
01:32:18,880 --> 01:32:22,880
बोलता रहता हूं सर्वशक्तिमान है कि नहीं परंपरा क्या है तो वो सुन चुके

1329
01:32:22,880 --> 01:32:26,960
लोग ना कुछ नॉलेजेबल चीजें मिले और क्या होता है कि जब सामने

1330
01:32:26,960 --> 01:32:31,360
वाला प्रतिद्वंदी स्ट्रांग नहीं मिलता तो हम ये चीजें दे नहीं पाते तो प्रतिद्वंदी

1331
01:32:31,360 --> 01:32:35,360
स्टंग मिला था मैं उस बिहेव से बैठा था कि भाई ये एक ठीकठाक व्यक्ति है इससे अगर

1332
01:32:35,360 --> 01:32:36,160
हम

1333
01:32:36,160 --> 01:32:40,560
इत्मीनान से चर्चा करेंगे तो बहुत कुछ लोगों को जानने सुनने को मिलेगा

1334
01:32:40,560 --> 01:32:44,640
और वो इस बात का फायदा उठा रहे हैं कि भाई मैं जो है आज जो है क्या

1335
01:32:44,640 --> 01:32:48,640
कहते थोड़ा सा मैं लाइट सा बिहेव मुझे मेरा आपको दिखा होगा उस

1336
01:32:48,640 --> 01:32:53,280
सीधे टू द पॉइंट ये नहीं हराना है और जब हराने की भावना से आएंगे

1337
01:32:53,280 --> 01:32:57,280
हराना ही या खत्म करना है तो फिर देखना फिर अब बाबा होने लगेगा फिर थोड़ी

1338
01:32:57,280 --> 01:33:00,240
देर में

1339
01:33:00,240 --> 01:33:05,840
बिल्कुल चलो जी शास्त्री जी जी

1340
01:33:05,840 --> 01:33:10,640
नहीं भैया उसमें सरपत्री जी महाराज के लिए यह बोला था कितनी

1341
01:33:10,640 --> 01:33:14,640
जी महाराज को भी आर्य समाज का सहायता लेना

1342
01:33:14,640 --> 01:33:18,720
पड़ गया था गौ आंदोलन में क्योंकि वो जानते थे कि आर्य समाज के बिना

1343
01:33:18,720 --> 01:33:23,120
वो कुछ नहीं कर पाएंगे ऐसा उनका वक्तव्य था

1344
01:33:23,120 --> 01:33:27,360
अच्छा तो ये बताओ प्रॉपर केवल आर्य समाज कुछ कर लेगा आज की तारीख

1345
01:33:27,360 --> 01:33:32,160
में केवल आर्य समाज है क्या हु आर यू

1346
01:33:32,160 --> 01:33:36,320
दिखता है कोई आर्य समाजी सड़क पे जाओ क्या कर लोगे

1347
01:33:36,320 --> 01:33:40,720
तुम जब तक झूठ बोल के धोखा देकर के

1348
01:33:40,720 --> 01:33:44,960
अमुक अमुक तरीके से तुम हम हम लोगों के बीच में अगर घुसोगे नहीं तुम्हारी

1349
01:33:44,960 --> 01:33:50,960
बात सुनने वाला कोई नहीं खाली पड़े हैं सन्नाटा ढला हुआ है तुम्हारे मंदिरों में

1350
01:33:51,920 --> 01:33:56,000
निराकार भगवान को लेकर कुछ नहीं कर पाओगे तो वही साकार

1351
01:33:56,000 --> 01:34:00,080
भगवान को मानने वालों के बीच में जाते हो उनको जो है क्या

1352
01:34:00,080 --> 01:34:04,400
कहते हैं थोड़ा बहला फुसला करके धीरे धीरे धीरे उनको कन्वर्ट करते हो

1353
01:34:04,400 --> 01:34:08,640
क्या किस किस उसमें हो तुम्हारा स्वरूप है क्या आर्य समाज क्या स्वरूप

1354
01:34:08,640 --> 01:34:12,880
है? कोनेकोने में कहीं ढला हुआ कोई सुनसान सन्नाटे वाला

1355
01:34:12,880 --> 01:34:17,120
आर्य समाज मंदिर बस क्या कर लोगे तुम उससे क्रांति

1356
01:34:17,120 --> 01:34:23,120
बताओ और कितनी कर डाली है तुमने आज तक क्रांति

1357
01:34:24,000 --> 01:34:28,000
क्रांतिकारियों को जन्म दिया। क्रांतिकारियों को जन्म दिया। जितने नाम गिनाओगे ना उससे

1358
01:34:28,000 --> 01:34:32,640
100 गुना 100 गुना ज्यादा क्रांतिकारी मूर्ति पूजक थे।

1359
01:34:32,640 --> 01:34:36,640
शिवाजी कौन थे? मूर्ति पूजक। हरिहर मुका कौन थे? मूर्ति

1360
01:34:36,640 --> 01:34:40,720
पूजक महाराणा प्रताप कौन थे मूर्ति पूजक मूर्ति पूजक

1361
01:34:40,720 --> 01:34:44,800
सारे हमारे गौरवशाली इतिहास मूर्ति पूजक था कौन

1362
01:34:44,800 --> 01:34:48,880
था इनमें से निराकार को मानने वाला कोई काली मां की भक्ति कर

1363
01:34:48,880 --> 01:34:52,960
रहा है कोई विष्णु भगवान की भक्ति कर रहा है सब मूर्ति पूजक

1364
01:34:52,960 --> 01:34:55,840
थे

1365
01:34:55,840 --> 01:34:59,840
और क्रांतिकारियों में भी जब टटोलने जाएंगे ना तो वही निकलेगा वो काशी का

1366
01:34:59,840 --> 01:35:02,960
शास्त्रार्थ

1367
01:35:02,960 --> 01:35:07,840
गप्पे गपोड़ों की गप्पे सबका

1368
01:35:07,840 --> 01:35:13,840
नाम लिख लो अपने साथ। एक आध कोई आ गया सबका नाम लिख लो अपने साथ।

1369
01:35:17,040 --> 01:35:21,600
रामसेतु आंदोलन में तुम चले गए थे।

1370
01:35:21,600 --> 01:35:25,600
जितनी बड़ी-बड़ी लड़ाईयां हुई है ना विधर्मियों से देख लो

1371
01:35:25,600 --> 01:35:29,520
इतिहास उठा करके किसने लड़ी?

1372
01:35:29,520 --> 01:35:34,720
सबसे बड़ी लड़ाई इस देश की कौन सी रही? राम मंदिर किसने लड़ा?

1373
01:35:34,720 --> 01:35:38,000
जीता

1374
01:35:38,000 --> 01:35:42,480
और तुम जिनका पक्ष लेते हो सत्ता में बने रहने के लिए दूसरों को कांग्रेसी

1375
01:35:42,480 --> 01:35:46,720
कहते हो राजनीति करते हो धर्म के नाम पर वो मूर्ति पूजक नहीं है क्या तुम्हारे

1376
01:35:46,720 --> 01:35:50,800
यहां जाते हैं ना तो तुम उनका अभिवादन करते हो तुम्हारा हुआ था अभी प्रतिनिधि

1377
01:35:50,800 --> 01:35:54,160
सभा में हुआ था ना

1378
01:35:54,160 --> 01:35:58,320
हुआ था प्रतिनिधि सभा हुई थी क्या हुई थी 150वा वर्ष

1379
01:35:58,320 --> 01:36:02,560
तो वहां जब भाजपा वाले आ रहे तो प्रणाम है भैया

1380
01:36:02,560 --> 01:36:06,880
प्रणाम है ये हो हो रहा था वहां और इनके ही यहां के एक व्यक्ति ने प्रह्लाद

1381
01:36:06,880 --> 01:36:10,880
बनके उस चीज का विरोध किया था। कौन? आचार्य प्रशांत है जो इनके साथ मुरैना

1382
01:36:10,880 --> 01:36:15,120
में एमपी में रहते हैं। विरोध किया था कि नहीं? कईयों ने विरोध किया

1383
01:36:15,120 --> 01:36:19,200
कि भैया क्यों हो रहा है? तुम्हारे यहां जब वो लोग जाते हैं ना तो तुम ये

1384
01:36:19,200 --> 01:36:23,200
करते हुए दिखाई देते हो। और जब वही लोग हमारे यहां आते हैं तो वो पैर

1385
01:36:23,200 --> 01:36:27,360
छूते हुए दिखाई देते हैं। चरणों में ये सच्चाई है।

1386
01:36:27,360 --> 01:36:31,360
क्या कर लोगे तुम उनके बिना? जो तुम्हारे लिए

1387
01:36:31,360 --> 01:36:37,360
प्रणम्य में है उनके लिए जो प्रणम्य है वो हम है

1388
01:36:38,720 --> 01:36:43,040
जिसको तुम बाबे बोल रहे हो बाबा बोल रहे हो क्या बोल रहा था ये निर्भय

1389
01:36:43,040 --> 01:36:47,040
क्या बोल रहा था अंबानी की शादी में जब गए थे तो पैर क्यों छू रहे

1390
01:36:47,040 --> 01:36:51,280
थे क्यों छू रहे थे पैर वही तुम्हारे

1391
01:36:51,280 --> 01:36:55,200
यहां के मुख्य अतिथि होते हैं

1392
01:36:55,200 --> 01:37:00,480
समझे जाओ जाके उनका शोधन करो पहले जाके

1393
01:37:00,480 --> 01:37:05,600
जो उनकी उसमें लगे हुए हैं खुशामद करने में

1394
01:37:05,600 --> 01:37:11,440
फिर कहना बाबा है यह है तू तड़ाक

1395
01:37:11,440 --> 01:37:15,760
अब इनकी परंपरा भी आपको बताऊं परंपरा क्या है निर्भय आर्य

1396
01:37:15,760 --> 01:37:19,840
संदीपन रॉय एक मिनट किसी की उदारता को कायरता

1397
01:37:19,840 --> 01:37:24,240
नहीं समझना चाहिए निर्भय हमने तुम्हारे प्रति जो व्यवहार किया तुमसे

1398
01:37:24,240 --> 01:37:28,400
तुम्हारा कोई भय है क्या अरे होगे तुम निर्भय

1399
01:37:28,400 --> 01:37:32,160
हम भी शिवश है।

1400
01:37:32,160 --> 01:37:35,920
कोई भय नहीं है।

1401
01:37:35,920 --> 01:37:40,720
अब ज्यादा नहीं बोल सकता। क्या करूं? बिल्कुल बिल्कुल।

1402
01:37:40,720 --> 01:37:45,120
तो किसी की उदारता को कायरता मत समझो। हमने तुम्हारे प्रति भ्रातत्व

1403
01:37:45,120 --> 01:37:49,200
भाव से जो एक प्रेम पूर्वक व्यवहार प्रकट किया उसका तुमने ये सिला

1404
01:37:49,200 --> 01:37:53,520
दिया। तुम ये दिखा रहे हो कि तुम बहुत बड़े फन्ने खाओ। तुमने

1405
01:37:53,520 --> 01:37:57,600
पता नहीं क्या कर लिया उस डिबेट में। हमें तो कुछ नहीं

1406
01:37:57,600 --> 01:38:01,920
दिखा। हम तो संतुष्ट बैठे हुए हैं। अच्छा सिद्धांत

1407
01:38:01,920 --> 01:38:05,920
पर चर्चा तुमने चालू की भैया सिद्धांत पर चर्चा कर ले। क्यों? जो

1408
01:38:05,920 --> 01:38:10,560
जीतता है वो संतुष्ट होता है मेरे भाई।

1409
01:38:10,560 --> 01:38:14,560
चर्चा किसने शुरू की? फोन पर पहले सिद्धांतिक बताओ। तुम

1410
01:38:14,560 --> 01:38:18,960
तुमने तुम तो जीते थे ना। हम जीते

1411
01:38:18,960 --> 01:38:22,960
थे। आज भी संतुष्ट है और तुम्हारे इस समय हो रहा होगा। मैं इसी समय लाइव

1412
01:38:22,960 --> 01:38:26,480
ज्वाइन कर लूं। इसी समय हो रहा होगा कि मैं अभी अभी अगर जब तुम यह

1413
01:38:26,480 --> 01:38:30,880
देखोगे या तो अभी अगर देख रहे हो तो अभी लग रहा होगा बटन दबा दूं मैं दबा दूं दबा दूं

1414
01:38:30,880 --> 01:38:35,040
लग रहा होगा तुम्हें जो हारता है जिसका

1415
01:38:35,040 --> 01:38:39,200
पक्ष सिद्ध नहीं हुआ होता है वो दोबारा उसमें

1416
01:38:39,200 --> 01:38:43,440
रहता है हारा हुआ पहलवान हमेशा तुरंत दूसरे उसकी उसमें

1417
01:38:43,440 --> 01:38:47,520
रहता है वो वाली कहावत है ना हम

1418
01:38:47,520 --> 01:38:51,760
फ़ पर सिद्धांतिक चर्चा किसने शुरू की थी भाई माफी अभी मांगने की बात हो गई

1419
01:38:51,760 --> 01:38:56,000
भ्रात भाव एक दूसरे को प्रकट कर दिया। ठीक है हो गया। किसने सिद्धांत

1420
01:38:56,000 --> 01:39:00,000
की बात छेड़ी थी? तुमने यानी तुम्हारे अंदर था

1421
01:39:00,000 --> 01:39:04,080
कुछ बाकी। मैं संतुष्ट हूं। दुनिया का

1422
01:39:04,080 --> 01:39:08,320
कोई माय का लाल नहीं काट सकता हमारे सिद्धांत को। सर्वशक्तिमान

1423
01:39:08,320 --> 01:39:12,320
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म आ जाए दुनिया का कोई भी माय

1424
01:39:12,320 --> 01:39:16,400
का लाल जो आ सकता है और इनहीं तीन सिद्धांतों के आधार पर

1425
01:39:16,400 --> 01:39:20,560
दुनिया में धर्म है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता

1426
01:39:20,560 --> 01:39:24,560
है कौन पत्नी कौन बहन है ये व्यक्ति समझ पाता है इनहीं तीन सिद्धांतों के

1427
01:39:24,560 --> 01:39:29,440
आधार पर तुम्हारा खोखला ईश्वर वो तो सिद्ध ही नहीं हो पाएगा

1428
01:39:29,440 --> 01:39:33,520
मनुष्य की चाह का वास्तविक विषय ही नहीं है वो सिद्ध तक नहीं कर पाओगे

1429
01:39:33,520 --> 01:39:36,720
उसे

1430
01:39:36,720 --> 01:39:40,960
भाई सच्चिदानंद की चाह है ना तुम क्या दे रहे हो मोक्ष में उसे बाित

1431
01:39:40,960 --> 01:39:46,720
आनंद सच्चिदानंद नहीं है तुम्हारा बाित आनंद है मोक्ष में

1432
01:39:46,720 --> 01:39:50,720
तो मनुष्य की चाह का विषय ही नहीं है वास्तविक वो और बने फने का घूम

1433
01:39:50,720 --> 01:39:54,800
रहे हो जी और अभी तो एक ही विषय पे वो बात हुई

1434
01:39:54,800 --> 01:39:59,600
है अभी तो बाकी के विषय तो और खुलना बाकी है

1435
01:39:59,600 --> 01:40:03,760
अच्छा इन्होंने अपनी परंपरा बताई है देखो हमारे जैसे हमारी

1436
01:40:03,760 --> 01:40:07,920
जो गुरु शिष्य परंपरा है तो हमारे गुरुदेव पूरी शंकराचार्य जी उनकी पूरी अखंड परंपरा है।

1437
01:40:07,920 --> 01:40:11,920
इनकी परंपरा क्या है? निर्भय ऊपर संदीपन रॉय महेंद्र

1438
01:40:11,920 --> 01:40:15,920
पाल आर्य ठाकुर अमर सिंह महात्मा हंसराज स्वामी दयानंद जी

1439
01:40:15,920 --> 01:40:19,920
और स्वामी विजानंद स्वामी पूर्णानंद और स्वामी ओमानंद ओमानंद के

1440
01:40:19,920 --> 01:40:24,080
ऊपर फिर खत्म हो जाती है तो यानी कि ये 150 वर्ष से थोड़ा सा और पीछे चले जाओ

1441
01:40:24,080 --> 01:40:28,400
तो सात 50 साल और पीछे चले जाओ बस 200 अच्छा

1442
01:40:28,400 --> 01:40:32,800
ये भी परंपरा मानी जाएगी कि नहीं मानी जाएगी ये ये सबसे बड़ा प्रश्न

1443
01:40:32,800 --> 01:40:36,880
ओमानंद इत्यादि का भी अगर हम छानबीन करेंगे ठीक

1444
01:40:36,880 --> 01:40:40,960
है अगर उसकी भी हम छानबीन करेंगे करेंगे उसमें भी कुछ और ही

1445
01:40:40,960 --> 01:40:44,960
चीजें निकल आएंगी कि वो मूर्ति पूजक तो नहीं थे

1446
01:40:44,960 --> 01:40:48,400
कहीं

1447
01:40:48,400 --> 01:40:52,560
परंपरा की बात मैं आपको बताऊं सैद्धांतिक चर्चा जो

1448
01:40:52,560 --> 01:40:56,720
हुई है हमारी फोन पर ठीक है उसमें अवतारवाद

1449
01:40:56,720 --> 01:41:00,960
की सिद्धि हमारी हो चुकी है

1450
01:41:00,960 --> 01:41:06,640
बिल्कुल क्लियर कट निर्गुण सगुण का

1451
01:41:06,640 --> 01:41:11,520
निर्गुण सगुण का निर्गुण और सगुण का

1452
01:41:11,520 --> 01:41:16,640
सिद्धि कर ही नहीं पाए। सिद्धांतिक चर्चा हो चुकी है।

1453
01:41:16,640 --> 01:41:20,640
ठीक है? अभी मैं आपको बताऊंगा कुछ चीजें। परंपरा

1454
01:41:20,640 --> 01:41:24,720
पे बात आई। निर्भय ने स्वयं स्वीकार किया है। यजुर्वेद

1455
01:41:24,720 --> 01:41:30,720
का वास इनको दयानंद जी को उनकी कुल परंपरा से मिला है। यजुर्वेद

1456
01:41:30,960 --> 01:41:35,680
खुद माना। और इनकी कुल परंपरा तो शिवलिंग की पूजा कर रही थी।

1457
01:41:35,680 --> 01:41:39,760
हम खत्म हो गई परंपरा इनकी यही खत्म हो

1458
01:41:39,760 --> 01:41:43,840
गई हम ये परंपरा

1459
01:41:43,840 --> 01:41:48,880
पे चर्चा हुई है हमारी और निर्भय क्या होता है कि जब

1460
01:41:48,880 --> 01:41:52,880
ऐसे चीजें क्लियर कट होने थोड़ा सा उसके अंदर टरामेंट उसका वैसा

1461
01:41:52,880 --> 01:41:55,680
हो जाता है गरम

1462
01:41:55,680 --> 01:41:59,920
ठीक है वो वो उसमें कोई आपत्ति नहीं है ये

1463
01:41:59,920 --> 01:42:03,440
पूरा हो जाने देते उसके बाद हम लोग करते कुछ करते

1464
01:42:03,440 --> 01:42:07,840
ये पूरा हो जाने दीजिए रह जाएंगे।

1465
01:42:07,840 --> 01:42:12,160
ठीक है? तो क्या है? निर्भय आर्य से दो विषयों पर

1466
01:42:12,160 --> 01:42:16,160
अच्छी खासी चर्चा हुई है। परंपरा पर और

1467
01:42:16,160 --> 01:42:20,400
अवतार पर। दोनों ही चर्चाओं में फोन फोन की बात कर रहा हूं। दोनों बातों

1468
01:42:20,400 --> 01:42:24,400
में हमारे सिद्धांत की सिद्धि हो गई। वही निरुत्तर

1469
01:42:24,400 --> 01:42:28,400
थे। निर्भय अरे निरुत्तर थे।

1470
01:42:28,400 --> 01:42:32,480
जब फोन पर चर्चाएं हुई है। सुन लीजिए सब लोग कान खोल के। फोन पर

1471
01:42:32,480 --> 01:42:36,480
जो चर्चाएं हुई है मेरी और निर्भय आर्य की निरत्तर

1472
01:42:36,480 --> 01:42:40,720
अवतारवाद की सिद्धि हुई है उसमें और निर्भय

1473
01:42:40,720 --> 01:42:44,880
आर्य ने अपनी परंपरा बताते हुए दयानंद जी के लिए बताया मुझे खुद कि उनको

1474
01:42:44,880 --> 01:42:50,880
तो यजुर्वेद जो है वहां से मिला था उनकी कुल परंपरा से लो

1475
01:42:50,880 --> 01:42:55,200
कुल परंपरा के विरुद्ध कैसे जा रहे हो फिर भाई जिससे वेद

1476
01:42:55,200 --> 01:42:59,200
मंत्र मिले अगर उस पर विश्वास नहीं है तो उसके वेद मंत्र पर भी विश्वास

1477
01:42:59,200 --> 01:43:03,440
मत करो ना बात खत्म हो गई यही परंपरा ढेर ये पांच मिनट में परंपरा खत्म करेंगे

1478
01:43:03,440 --> 01:43:09,440
आ जाना भाई कर देना हम बोलिए

1479
01:43:13,120 --> 01:43:17,360
बिल्कुल शास्त्रवाल जी आपका कोई पॉइंट है अभी जी जी

1480
01:43:17,360 --> 01:43:22,080
जी बिल्कुल है कितना बाकी है कितना बाकी है अभी

1481
01:43:22,080 --> 01:43:26,320
नहीं नहीं हो गया लगभग खत्म हो गया नहीं नहीं हो गया खत्म हो गया बस

1482
01:43:26,320 --> 01:43:30,320
और दो पॉइंट और है बस पहला पॉइंट ये

1483
01:43:30,320 --> 01:43:34,320
है कि जब आप कहते हैं कि उनके आचार्यों को स्वषित ठीक

1484
01:43:34,320 --> 01:43:38,960
है तो उसने कहा था कि तब हम भी कह देंगे कि स्वोषित भगवान

1485
01:43:38,960 --> 01:43:43,040
तीन आंख वाला बाबा या ऐसे करके कुछ था उसने सब

1486
01:43:43,040 --> 01:43:47,120
कुछ कहा था स्वषित नहीं नहीं तुम तो मलेच्छों को गुरु

1487
01:43:47,120 --> 01:43:51,120
बनाओ अपना ये जो परंपरा प्राप्त आचार्य

1488
01:43:51,120 --> 01:43:55,280
तुम्हें दिखाई नहीं देंगे तुम तो मलेच्छों को बुलाओ आर्य समाज में सर्टिफिकेट

1489
01:43:55,280 --> 01:43:59,280
दे दो भैया या तो उनको अपनी बेटियां दे दो ब्या दो और या फिर उनको अपना आचार्य

1490
01:43:59,280 --> 01:44:03,360
बना के बिठा लो ये हो गए हमारे आचार। मिलेच्छों को आचार्य बना

1491
01:44:03,360 --> 01:44:06,880
के बिठाओ तुम।

1492
01:44:06,880 --> 01:44:11,040
मतलब कि जिस चीज के लिए हम बाहरी दिखावा करके लड़ रहे हैं हम उनको

1493
01:44:11,040 --> 01:44:15,120
अंदर नहीं आने देंगे। वही अगर हमसे सर्टिफिकेट लेके आएगा तो हम उनको अपना

1494
01:44:15,120 --> 01:44:19,120
जो है माई बाप बना देंगे। आचार्य बना के बिठाएंगे। और जो हमें

1495
01:44:19,120 --> 01:44:23,360
प्राप्त है हमारे अपनी कुल परंपरा से शुद्ध आचार्य

1496
01:44:23,360 --> 01:44:28,080
उनके प्रति ये सब फैलाएंगे। तीसरी आंख और ये और वो

1497
01:44:28,080 --> 01:44:32,080
बनाओ। एक दो को तो बना के बिठा लाई है तुम्हारी अभी परंपरा जो

1498
01:44:32,080 --> 01:44:36,080
बताई शायद उसमें भी कोई है हां इसमें भी है यह मौलाना थे

1499
01:44:36,080 --> 01:44:40,160
30 वर्ष पहले एक मस्जिद वो तो खुद कहते हैं कल उन्होंने शायद एक लाइव स्ट्रीम

1500
01:44:40,160 --> 01:44:44,160
भी करी है किसी ने मेरे को वो भेजा था उनका वीडियो का कुछ अंश तो वो खुद बता

1501
01:44:44,160 --> 01:44:48,560
रहे हैं कि मैं 30 वर्ष पहले एक मस्जिद का मौलाना था और फिर मैं आर्य

1502
01:44:48,560 --> 01:44:52,560
समाज से जुड़ा और आज मैं वेद मेरे पास वेद है ऐसा कुछ वो कह

1503
01:44:52,560 --> 01:44:56,560
रहे हैं उसमें तो कह रहे हैं वेद मिल जाएंगे तुम्हें भी मिल जाएंगे कह

1504
01:44:56,560 --> 01:45:00,880
रहे हैं ये देखो इंटरनेट पर पड़े हैं वैदिक स्क्रिप्ट इन पर वही इंटरनेट

1505
01:45:00,880 --> 01:45:06,880
परंपरा हां जी

1506
01:45:08,240 --> 01:45:12,240
जी शास्त्रवाद जी आगे एक मिनट जी

1507
01:45:12,240 --> 01:45:16,480
एक मिनट एक मिनट एक एक मिनट रुक जाइए एक मिनट रुक जाइए राजा राजा

1508
01:45:16,480 --> 01:45:20,560
राय जी जय श्री राम बताइए जय श्री राम अरे भैया

1509
01:45:20,560 --> 01:45:24,800
मैं एक बात कहना चाहता था युधिष्ठिर मीमांसक जी इनके बड़े प्रमाणिक

1510
01:45:24,800 --> 01:45:28,800
आचार्य हैं आर्य समाजियों में तो उन्होंने एक ग्रंथ

1511
01:45:28,800 --> 01:45:32,880
में लिखा है मेरे पास पेज है उसमें उन्होंने लिखा है कि जो आप लोग बात

1512
01:45:32,880 --> 01:45:36,960
कर रहे थे परंपरा के बारे में अभी तो सरस्वती से केवल

1513
01:45:36,960 --> 01:45:41,040
उन्होंने व्याकरण शास्त्र पढ़े हैं स्वामी जी ने उनसे शास्त्र वेद नहीं पढ़े

1514
01:45:41,040 --> 01:45:45,120
वो लिखा है उन्होंने व्याकरण का ज्ञान लिया है

1515
01:45:45,120 --> 01:45:49,840
शास्त्रों वेदों का नहीं तो उस हिसाब से परंपरा से भी नहीं सिद्ध होगी

1516
01:45:49,840 --> 01:45:54,000
वैदिक परंपरा कहां है वैदिक परंपरा उनकी से सिद्ध

1517
01:45:54,000 --> 01:45:58,000
नहीं होती है ऐसा इनके परम प्रमाणिक आचार्य

1518
01:45:58,000 --> 01:46:02,160
उन्होंने लिखा है। मैं आपको पेज भी भेज सकता हूं कि उन्होंने विजानंद सरस्वती से

1519
01:46:02,160 --> 01:46:06,160
केवल और केवल केवल और केवल व्याकरण का

1520
01:46:06,160 --> 01:46:10,160
ज्ञान लिया है। शास्त्रों वेदों का नहीं वेद शास्त्रों का ज्ञान नहीं

1521
01:46:10,160 --> 01:46:14,080
लिया है। आप बोलोगे तो मैं भेज भी दूंगा।

1522
01:46:14,080 --> 01:46:18,320
तो फिर गुरु परंपरा कैसे सिद्ध हो जाएगी? बताइए। हालांकि अगर व्याकरण

1523
01:46:18,320 --> 01:46:22,320
की भी बात करेंगे तो व्याकरण के लिए भी हमें प्रामाणिक परंपरा

1524
01:46:22,320 --> 01:46:23,760
चाहिए।

1525
01:46:23,760 --> 01:46:29,280
व्याकरण के लिए भी तो चाहिए। ठीक है। मान लो कोई

1526
01:46:29,280 --> 01:46:33,440
व्याकरण चलो मान लो कोई किसी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकता है लेकिन वेद तो बहुत

1527
01:46:33,440 --> 01:46:37,840
ही संवेदनशील विषय है ना वैदिक ज्ञान नहीं नहीं भाई व्याकरण

1528
01:46:37,840 --> 01:46:42,000
के आधार पर कौन सा नियम कहां लागू हो सकता है नहीं हो सकता है उसके

1529
01:46:42,000 --> 01:46:48,000
लिए भी तो आपको पीछे से परंपरा तो क्या

1530
01:46:48,000 --> 01:46:52,160
व्याकरण के नियम तो व्याकरण के अनुसार क्या नियम माना जाएगा परंपरा मानी

1531
01:46:52,160 --> 01:46:56,720
जाएगी व्याकरण के अनुसार परंपरा मानी जाएगी

1532
01:46:56,720 --> 01:47:00,800
नहीं भाषा का ज्ञान है वो मैं ये कह रहा हूं कि अगर वहां

1533
01:47:00,800 --> 01:47:04,880
से वो अपनी व्याकरण को भी प्रमाणिक करने की कोशिश करेंगे तो वो भी नहीं होगी

1534
01:47:04,880 --> 01:47:09,360
क्योंकि उनकी वो परंपरा भी खंडित है बिजानंद जी वाली परंपरा भी

1535
01:47:09,360 --> 01:47:13,440
खंडित है या तो उसमें नाम बता पीछे के आचार्य ये

1536
01:47:13,440 --> 01:47:18,000
बात तो ये तो गड़ा हुआ नाम है ओमानंद जी एकांत तो आज तक

1537
01:47:18,000 --> 01:47:22,160
बड़े-बड़े स्कॉलर समाजियों की किताबें पढ़े कहीं ओमानंद नहीं कहा गया

1538
01:47:22,160 --> 01:47:26,320
चलो ठीक है देखा जाएगा आपकी बात आपके आगे अपनी बात टिकाने के लिए

1539
01:47:26,320 --> 01:47:30,320
थोड़ा सा बोल दिया ओमानंद जींद जी तो वैदिक परंपरा में होंगे ही

1540
01:47:30,320 --> 01:47:34,800
नहीं व्याकरण का ज्ञान लिया है उन्होंने लिखा स्वामी जी का

1541
01:47:34,800 --> 01:47:38,800
ज्ञान स्वतंत्र था चलिए ठीक है इतना ही कहना

1542
01:47:38,800 --> 01:47:43,760
था मुझे बाकी उनका आपको पता ही है बिजली का तार कमेटी बनाना ये वैदिक अर्थ है उनके

1543
01:47:43,760 --> 01:47:47,760
उनके परंपरा प्राप्त अर्थ यही है बिजली के तार रेल का इंजन नियोग

1544
01:47:47,760 --> 01:47:53,600
ये वैदिक अर्थ है उनके ये वही परंपरा उनकी अपनी पर्सनल रही होगी

1545
01:47:53,600 --> 01:47:57,920
नहीं स्वतंत्र स्वतंत्र एक तरफ तरफ कहेंगे एक

1546
01:47:57,920 --> 01:48:02,480
तरफ कहेंगे कि भगवान के समझाए बिना हमें समझ में नहीं आएगा धर्म और ब्रह

1547
01:48:02,480 --> 01:48:06,480
दूसरी तरफ स्वतंत्र हो काम करेंगे और मोक्ष में लोग

1548
01:48:06,480 --> 01:48:10,640
मोक्ष में मन थक जाता है ऊब जाएंगे वहां भीड़ बढ़ जाएगी तो वापस भी आना है

1549
01:48:10,640 --> 01:48:14,640
ये तर्क है कि लगातार स्वादिष्ट खाना खाने से भी व्यक्ति उब जाता

1550
01:48:14,640 --> 01:48:18,880
है वाह ये तर्क है और एक एक महाकल्प कम

1551
01:48:18,880 --> 01:48:23,120
टाइम थोड़ी होता है बहुत टाइम हो गया इसके बाद फिर वापस आना भी पड़ेगा वरना फिर व्यवस्था बिगड़

1552
01:48:23,120 --> 01:48:27,120
जाएगी प्रमाणिक आचार्य के तर्क जाने की

1553
01:48:27,120 --> 01:48:31,200
क्या जरूरत है? यही रहो। एक एक व्यक्ति कह रहा है कि वाई

1554
01:48:31,200 --> 01:48:35,360
वाई म्लेच शुड नॉट नो द नॉलेज ऑफ वेदा। नहीं ये बात गलत

1555
01:48:35,360 --> 01:48:39,520
है। नॉलेज वो ले सकते हैं डायरेक्टली पढ़ना पढ़ाना

1556
01:48:39,520 --> 01:48:43,680
नहीं है। ठीक है? नहीं तो ऐसे ही अनाधिकारी उत्पन्न होंगे दुनिया में।

1557
01:48:43,680 --> 01:48:47,840
कैसे? जिनका प्रतिकार आज हम कर रहे हैं।

1558
01:48:47,840 --> 01:48:51,920
नॉलेज लेने से कोई दिक्कत नहीं है। नॉलेज उनके इतने सारे भाष्य है, प्रवचन

1559
01:48:51,920 --> 01:48:54,400
है, टीकाएं सुनिए, सुनाइए।

1560
01:48:54,400 --> 01:48:58,960
खूब नॉलेज ग्रहण करिए। हां जी शास्त्र जी अगला पॉइंट

1561
01:48:58,960 --> 01:49:02,960
अर्थ भिन्न नहीं होना चाहिए बस परंपरा से होना चाहिए। जी जी जय श्री

1562
01:49:02,960 --> 01:49:06,400
राम जय श्री राम

1563
01:49:06,400 --> 01:49:10,560
जी भैया उसने ये कहा था कि आपने तो उसे जो डिबेट में आपने

1564
01:49:10,560 --> 01:49:14,640
उसे इक्वल राइट्स दिए नहीं थे और बार-बार उसे म्यूट कर

1565
01:49:14,640 --> 01:49:19,280
रहे हैं या फिर नीचे स्पेस कर दे रहे थे इस और फिर भी

1566
01:49:19,280 --> 01:49:23,440
उसने आपको हरा के चल गया। एक तरह का उसके बात थी बात अलग है कि वो कुछ कर नहीं

1567
01:49:23,440 --> 01:49:27,760
पाया था सर उसने ऐसा बोला था और देखो हराना

1568
01:49:27,760 --> 01:49:31,760
ना हराना तुम चिल्लाते रहो वो वो जनता डिसाइड करेगी उसमें कौन हारा

1569
01:49:31,760 --> 01:49:35,920
कौन जीता ठीक है पहली बात दूसरी बात ये है कि बैक स्टेज के हम आपको

1570
01:49:35,920 --> 01:49:39,920
क्यों दें भाई जो हमें हमारे लेवल का लगेगा जो

1571
01:49:39,920 --> 01:49:44,000
व्यक्ति कि जिसके साथ हमें बराबरी से चर्चा करनी है उसके साथ हम बराबरी

1572
01:49:44,000 --> 01:49:48,080
से भी चर्चा करेंगे और इन्होंने जो एक आध बात कही जो अभी तक आपने पूछी नहीं है इन्होंने

1573
01:49:48,080 --> 01:49:52,080
कहा कि हम तो घर में हम तो उनके यहां जाकर के भी करते हैं। हम फिर अपने ईगो को

1574
01:49:52,080 --> 01:49:56,080
साइड में कर देते हैं। हम भी करते हैं। हम अपने ईगो को ही नहीं अपनी

1575
01:49:56,080 --> 01:50:00,080
सेफ्टी को भी साइड में करके जाते हैं। निर्भय तुम अपनी सेफ्टी को

1576
01:50:00,080 --> 01:50:04,080
साइड में नहीं करते हो। केवल ईगो को साइड में करते हो। ये ऑनलाइन दुनिया के लोगों

1577
01:50:04,080 --> 01:50:08,320
से जुड़ना है। ये सब ये सब केवल ईगो को साइड में करके जा रहे हो ना।

1578
01:50:08,320 --> 01:50:09,600
हम तो अपनी सेफ्टी को

1579
01:50:09,600 --> 01:50:13,760
दाब पर लगा के जा रहे हैं दूसरे के कैंप में और ईगो को भी कि

1580
01:50:13,760 --> 01:50:17,840
नीचे बैठ के बात कर रहे हैं। सेफ्टी को दाब पे लगा के

1581
01:50:17,840 --> 01:50:22,560
जा रहे हैं। जब हम रामपाल के यहां गेट खटखटाते हैं। समझे? हमको

1582
01:50:22,560 --> 01:50:27,200
तुम तोप बन के दिखा रहे हो। कि मैं अपने ईगो को साइड में रख के जाता हूं।

1583
01:50:27,200 --> 01:50:31,280
मैं सिद्धांत की रक्षा के लिए कर लेता हूं। करते हैं हम

1584
01:50:31,280 --> 01:50:35,360
भी मगर हम ये देखते हैं कि हम ये एनर्जी अपनी का कहां पे

1585
01:50:35,360 --> 01:50:39,600
लगाए। किसी हर छुटैया के कहने पर उसको जो है अपने वो राइट्स

1586
01:50:39,600 --> 01:50:43,680
दे दिए यह दे दिया यह हम नहीं करते हमारे लिए तुम और तुम्हारा

1587
01:50:43,680 --> 01:50:47,840
चैनल नगण्य थे आर्य समाज की ओर से प्रातत्व

1588
01:50:47,840 --> 01:50:52,000
भाव एक अलग बात है मगर एक वैल्यूलेस

1589
01:50:52,000 --> 01:50:56,080
व्यक्ति थे तुम्हारे लिए तो हम क्यों

1590
01:50:56,080 --> 01:51:00,320
तुम इतने सारे अब समझौते करें कि हम तुम्हें ये दे वो दें जैसे हर साधारण

1591
01:51:00,320 --> 01:51:04,560
व्यक्ति आकर के जुड़ता है वैसे जुड़ो और हमें जो लगेगा कि हां भाई इसके

1592
01:51:04,560 --> 01:51:09,600
लिए हम ये कर सकते हैं उसके उसके द्वारे पे जाएंगे। जैसे तुम्हारे यहां के वो आचार्य रहे

1593
01:51:09,600 --> 01:51:13,760
कौन है? परिवराजक जी उनके यहां बात की। उन्होंने कहा जब इधर से निकले तो हो

1594
01:51:13,760 --> 01:51:18,080
लीजिए। मैंने जाऊंगा। कभी ना कभी उनके गेट पे जाऊंगा। उनके यहां जाकर के उनसे बात करूंगा।

1595
01:51:18,080 --> 01:51:22,320
वो है हमारे लिए इंपॉर्टेंट। तुम नहीं हो। तुम्हारी जो

1596
01:51:22,320 --> 01:51:24,720
ये जो क्या कहेंगे किशोरों

1597
01:51:24,720 --> 01:51:29,120
की फौज है युवाओं की फौज संदीप आर्य आप लोग नगण्य

1598
01:51:29,120 --> 01:51:33,360
हैं हमारे लिए। हां हम आपके लिए हो सकते हैं ऐसे। तो आप अप्रोच

1599
01:51:33,360 --> 01:51:38,240
करो। जैसे वो हमारे लिए इंपॉर्टेंट है

1600
01:51:38,240 --> 01:51:41,600
तो हम जाएंगे उनके पास।

1601
01:51:41,600 --> 01:51:45,600
ठीक है? योगेश भारद्वाज जी कह देंगे हम जाएंगे उनके पास।

1602
01:51:45,600 --> 01:51:50,400
जाएंगे। अभी तो उन्होंने मना ही कर दिया

1603
01:51:50,400 --> 01:51:54,400
कि नहीं करनी बात। योगेश भारद्वाज जी अपनी एक उसमें कह

1604
01:51:54,400 --> 01:51:57,920
रहे हैं कि

1605
01:51:57,920 --> 01:52:02,080
कि यह जितने भी कोर्ट से प्रमाणित होते हैं ये परंपरा प्राप्त

1606
01:52:02,080 --> 01:52:06,560
नहीं ये तो कोर्ट प्राप्त आचार्य है और तुम क्या हो

1607
01:52:06,560 --> 01:52:11,040
तुम क्या हो तुम तो कोर्ट रजिस्टर्ड हो

1608
01:52:11,040 --> 01:52:15,280
यहां तो परंपरा प्राप्त तब भी है स्वतंत्र रूप से वहां तो जो शासन

1609
01:52:15,280 --> 01:52:19,360
लागू है उस शासन के अनुसार सिद्ध करने जा रहे हैं जो शासन

1610
01:52:19,360 --> 01:52:23,680
लागू है उस शासन के अनुसार हम सिद्ध करने जा रहे हैं। मगर तुम्हारा तो नियम

1611
01:52:23,680 --> 01:52:28,240
ही वही है। स्वतंत्र नियम है ही नहीं। रजिस्टर्ड कराओ

1612
01:52:28,240 --> 01:52:32,320
रजिस्टर्ड। वहां मरई माता का मंदिर भी रजिस्टर्ड है। आर्य समाज के नाम

1613
01:52:32,320 --> 01:52:36,080
से हम

1614
01:52:36,080 --> 01:52:39,760
तो सोच समझ के बात किया करो। जेब में नहीं है। टल्ला टिल्ला मांग रहे

1615
01:52:39,760 --> 01:52:44,320
हो लाल किल्ला। योगेश भारद्वाज जी आपसे बात कर रहा हूं।

1616
01:52:44,320 --> 01:52:48,400
तो हमारे लिए जो इंपॉर्टेंट पर्सन होगा हम देखेंगे कि उसके जगह पर हमको जाना

1617
01:52:48,400 --> 01:52:52,400
है कि नहीं जाना। बीच में जाना है। आप हमारे लिए ऐसे

1618
01:52:52,400 --> 01:52:57,280
व्यक्ति नहीं थे जिसके लिए हम कुछ एक्स्ट्रा एफर्ट्स लगाए।

1619
01:52:57,280 --> 01:53:01,520
हम आपके लिए थे तो आपने लगाए। ठीक है? हर दूसरा व्यक्ति

1620
01:53:01,520 --> 01:53:05,680
हर दूसरा कोई स्मैकिया आ जाए। आपकी बात नहीं कर रहा हूं। हर गली चलता

1621
01:53:05,680 --> 01:53:09,920
व्यक्ति साइकिल चोर स्मैक किया हमसे कहने लगा। आ जाओ आ जाओ आ जाओ। चैलेंज है चैलेंज है। चैलेंज

1622
01:53:09,920 --> 01:53:14,240
है। और राइट्स दे दो अपने वो एक्सेस

1623
01:53:14,240 --> 01:53:18,320
दे दो वो अपना एक्सेस दे दो अपने उसमें स्ट्रीमर्ड वगैरह में। तो हम

1624
01:53:18,320 --> 01:53:23,520
यह करते घूमे बस दिन भर।

1625
01:53:23,520 --> 01:53:27,520
सोच समझ के बात करो। बिल्कुल ऐसेसे लोग शास्त्रार्थ के लिए

1626
01:53:27,520 --> 01:53:31,600
बुलाते हैं कमेंट बॉक्स में माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो

1627
01:53:31,600 --> 01:53:35,760
वहां पर आ जाओ। भैया तुम मतलब ये चाह रहे हो कि अगर

1628
01:53:35,760 --> 01:53:39,840
कोई तुम्हें ऐसे ललकारे इस ये शब्द बोलकर अगर तुम्हें

1629
01:53:39,840 --> 01:53:43,840
ललकारे हो बोले कीचड़ में मल युद्ध करना है।

1630
01:53:43,840 --> 01:53:47,920
फिर फिर कहेंगे कि नहीं वो आया नहीं। हमने बुलाया हमने आया नहीं हार

1631
01:53:47,920 --> 01:53:52,000
गया मतलब हार मान ली। पहले तुम खुद को ऐसा बनाओ

1632
01:53:52,000 --> 01:53:56,080
कि हमसे सोचे कि हमें अपने घर से बाहर निकलना है

1633
01:53:56,080 --> 01:54:00,160
तुम्हारे लिए तब हम आएंगे। बनाओ अपने आप को ऐसा हमने

1634
01:54:00,160 --> 01:54:04,240
बनाया है ना ऐसा हमने बनाया तुम्हें आना पड़ा हमारे

1635
01:54:04,240 --> 01:54:08,400
द्वारे। ठीक है? तो अपने आप को ऐसा बनाओ कि हमें

1636
01:54:08,400 --> 01:54:12,400
दिखे जनता तुमसे प्रभावित हो रही है। तब तुम्हारे तंबू में आएंगे और

1637
01:54:12,400 --> 01:54:17,200
फिर तुम्हारे पर कच्चे उड़ाएंगे। नीचे बैठ के भी उड़ाएंगे।

1638
01:54:17,200 --> 01:54:21,200
बनाओ अपने आप को ऐसा। अभी तुम जीरो हो

1639
01:54:21,200 --> 01:54:25,440
जीरो कुछ नहीं नथिंग तो क्यों करें हम तुम्हारे

1640
01:54:25,440 --> 01:54:29,440
लिए एफर्ट्स हां तुम भाई के नाते हम ये एफर्ट करने वाले थे जिसमें

1641
01:54:29,440 --> 01:54:33,440
तुमने आग लगा दी ऐसा वीडियो बना करके भाई

1642
01:54:33,440 --> 01:54:37,440
के नाते हमने सोचा था चलो इस बार हम उसके यहां चले जाएंगे और इसमें वो

1643
01:54:37,440 --> 01:54:38,640
कुतर्क तो आपने बोले ही

1644
01:54:38,640 --> 01:54:42,800
नहीं ये संदीपन रॉय जी संदीपन रॉय जी के लिए मैंने कहा

1645
01:54:42,800 --> 01:54:46,880
कि भाई एक काम करो तुमसे जो है खटापटा

1646
01:54:46,880 --> 01:54:50,880
अब नहीं चाहिए तो ऐसा करो तुम ना चर्चा करो। संदीपन रॉय जी को भेज दो। हम लोग

1647
01:54:50,880 --> 01:54:54,880
एक चर्चा करते हैं जिसमें पहले मैं मुस्लिम पक्ष बनूंगा। संदीपन रॉय जी मेरे मत का खंडन

1648
01:54:54,880 --> 01:54:59,360
कर दें। मुस्लिम होते हुए मैं आर्य समाजी होते हुए मुस्लिम का खंडन कर दें। फिर मैं अद्वैती

1649
01:54:59,360 --> 01:55:03,440
होते हुए उनका खंडन करूंगा। तो वो क्या कह रहे हैं? वो कह रहे हैं कि

1650
01:55:03,440 --> 01:55:07,680
नहीं नहीं उन्होंने इतना अपमान किया है। ये किया है वो किया है।

1651
01:55:07,680 --> 01:55:11,680
वो हमारे दयानंद जी को की किताब के सिद्धांत को कुतर्क

1652
01:55:11,680 --> 01:55:15,760
कहते हैं। अरे भैया तुम्हारे दयानंद जी ने गप्पे कहा उसका क्या? शुरुआत तो तुमने

1653
01:55:15,760 --> 01:55:20,400
की ना। और तुम्हारे एक अकेले शंकराचार्यों

1654
01:55:20,400 --> 01:55:24,480
को सम्मान कर देने के कारण क्या वो जो सैद्धांतिक विरोध है वो खत्म हो

1655
01:55:24,480 --> 01:55:30,480
गया। सिद्धांत को तो हम कहेंगे ना कटाक्ष कि यहां पर एक कुतर्क है

1656
01:55:31,760 --> 01:55:35,840
और अगर इस तरीके से कुतर्क कह देने के कारण अगर चर्चा

1657
01:55:35,840 --> 01:55:40,000
नहीं होनी है तो दुनिया में फिर कोई चर्चा ही नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सबके हिसाब से दूसरे सामने

1658
01:55:40,000 --> 01:55:44,000
वाले का कुतर्क है। तो क्यों चर्चा कर रहा है फिर निर्भय? या तो

1659
01:55:44,000 --> 01:55:48,160
तुम सही हो, निर्भय सही है। यह सब चर्चा से बचने के बहाने हैं।

1660
01:55:48,160 --> 01:55:52,240
तुमको मालूम है कि निर्भय तो थोड़ा बहुत टिक भी जाएगा। हम

1661
01:55:52,240 --> 01:55:55,280
नहीं टिक पाएंगे।

1662
01:55:55,280 --> 01:55:59,280
समझे? इसलिए निर्भय के कंधे पर बंदूक रख के गोली चलाओ। चलो ये

1663
01:55:59,280 --> 01:56:03,280
चल जाए शायद हमारा आखरी मोहरा। हालांकि टिके जीतेगा

1664
01:56:03,280 --> 01:56:07,280
वो भी नहीं। मगर तुम्हारी अपेक्षाकृत तो वो स्ट्रांग पर्सन है भाई।

1665
01:56:07,280 --> 01:56:11,360
तो उसी के सहारे चल रहे हो बैसाखी लेकर के। अपनी बातों में तुमने कह

1666
01:56:11,360 --> 01:56:15,760
दिया हमारे को यह कहा वह कहा हमने कब व्यक्तिगत कटाक्ष किया तुमने

1667
01:56:15,760 --> 01:56:19,760
करते हो तुम करते हो व्यक्तिगत कटाक्ष तुम्हारे चैनल से ऐसे शॉट बनाए जा रहे हैं जो हम नहीं

1668
01:56:19,760 --> 01:56:24,000
कहना चाह रहे वो तुम दिखा रहे हो कि हमने कहा तुम्हारे चैनल से अजीब

1669
01:56:24,000 --> 01:56:28,320
अजीब तरीके के उसमें फेस भी होते हैं हम बिल्कुल

1670
01:56:28,320 --> 01:56:32,320
बिल्कुल ये बहाने हैं इनके मैंने कहा मैंने ये

1671
01:56:32,320 --> 01:56:36,320
बात कही थी मैं आपको बताता हूं मैंने क्या लिखा था जब

1672
01:56:36,320 --> 01:56:40,320
ये कह रहा है कि आपको जो है सनातन शंकर जी की चीजें नहीं दिख रही मैंने कहा तुम वैसे बड़े

1673
01:56:40,320 --> 01:56:44,560
तार्किक बनते हो। बड़े तुम्हारे अंदर बौद्धिक है। बड़े तुम

1674
01:56:44,560 --> 01:56:46,800
स्मार्ट गए। मगर अपने लोगों का बात आते ही

1675
01:56:46,800 --> 01:56:51,040
तुम वहां पर भोले बन जाते हो। बेवकूफ बन जाते हो। ये कहा मैंने उसको

1676
01:56:51,040 --> 01:56:55,680
ध्यान देना भूल जाते हो तुम। कि ये ये क्या कर रहा है?

1677
01:56:55,680 --> 01:57:00,000
चर्चा से भागने का प्रयास है। ये

1678
01:57:00,000 --> 01:57:04,160
हमने कभी कोई व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया है। दयानंद जी पर। ठीक है?

1679
01:57:04,160 --> 01:57:08,160
और जो सैद्धांतिक कटाक्ष है वो वो किए हैं वो होते रहेंगे।

1680
01:57:08,160 --> 01:57:12,160
तुम पौराणिक कहते आए हो तुम नहीं कहोगे कोई और कह रहा है अलंकारी हम कहते

1681
01:57:12,160 --> 01:57:16,320
रहेंगे हो तुम अलंकारी जहां पर भगवान की चमत्कारिक व्याख्या आई वहां

1682
01:57:16,320 --> 01:57:20,480
वहां पर तुमने अलंकार ठूस दिया और उसके नाम पे अपना नया स्वतंत्र

1683
01:57:20,480 --> 01:57:24,480
एक वो बना लिया समाज और उसी के कारण ये सब लोग जन्मे हैं

1684
01:57:24,480 --> 01:57:28,800
रामपाल इसन ये सब तुम्हारी देन है

1685
01:57:28,800 --> 01:57:32,960
ब्रह्मा कुमारी बिल्कुल बिल्कुल इन्हीं

1686
01:57:32,960 --> 01:57:36,960
के किए हुए अनुवादों पे तो रामपाल ने पूरा रेफरेंस लिया है उसने

1687
01:57:36,960 --> 01:57:41,280
लिखा भी कि यह सारे जो जितने अभी मैं रेफरेंस दे रहा हूं वेद वैदिक

1688
01:57:41,280 --> 01:57:45,440
वांगमय के वो सारे दयानंद जी के वेद भाष्य से

1689
01:57:45,440 --> 01:57:50,000
लिए हुए हैं। वो तो बड़ा स्पष्ट उन्होंने कहा है और

1690
01:57:50,000 --> 01:57:54,000
स्वषित मत जो इतने बन गए हैं

1691
01:57:54,000 --> 01:58:00,000
ये इन्हीं के इन्हीं की देन है।

1692
01:58:01,040 --> 01:58:05,200
गुरुकुल गोविंद जी ने पत्थर उठा सकता है वाला इनके यहां पर वो

1693
01:58:05,200 --> 01:58:09,360
दे दिया था उत्तर फिर भी ये लोग कहते हैं कि हम जीत गए फिर भी ये

1694
01:58:09,360 --> 01:58:13,760
लोग कहते हैं कि हम जीत गए क्यों कहते हैं क्योंकि

1695
01:58:13,760 --> 01:58:17,840
जो है वो जो है आपको शास्त्र का रेफरेंस नहीं दिया तो भैया

1696
01:58:17,840 --> 01:58:21,840
शास्त्र का रेफरेंस ना देने में जब वो हारे हैं तो पत्थर का जवाब देने

1697
01:58:21,840 --> 01:58:27,840
में तुम भी तो हारे हो वहां क्यों मौन हो

1698
01:58:28,080 --> 01:58:32,240
बिल्कुल। अच्छा एक चीज और है। यह लोग क्या पूछते हैं? देखो कि तुम्हारे

1699
01:58:32,240 --> 01:58:36,320
आचार्य ने कहां पर माना है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि वो सब कुछ कर

1700
01:58:36,320 --> 01:58:41,200
सकता है। ठीक है? अब ये बताओ जब आचार्य ये लिख देंगे

1701
01:58:41,200 --> 01:58:45,200
सब कुछ कर सकता है। तो हम ये कहेंगे फिर ये ये नहीं कह सकते कि ये

1702
01:58:45,200 --> 01:58:50,720
कुछ का मतलब कहां लिखा है? तुम्हारे आचार्यों ने कुछ का मतलब कहां लिखा है?

1703
01:58:50,720 --> 01:58:54,800
नहीं समझे मेरी बात? जैसे ये लोग कह रहे हैं कि तुम्हारे आचार्यों ने कहा लिखा है कि

1704
01:58:54,800 --> 01:58:59,040
सर्वशक्तिमान का अर्थ है। वो सब कुछ कर सकता है। हम उनसे पूछेंगे तुम्हारे आचार्य

1705
01:58:59,040 --> 01:59:05,040
ने कहां लिखा है कि अर्थ का अर्थ होता है। बताओ

1706
01:59:06,480 --> 01:59:10,480
बिल्कुल अभी आर्य समाजियों के रेफरेंस से ही तुम मुझसे

1707
01:59:10,480 --> 01:59:14,720
बात नहीं कर पाओगे। अव्यवहारिक था ईश्वर।

1708
01:59:14,720 --> 01:59:18,800
व्यवहार में कैसे आया? मुक्ति के विषय में लिखा हुआ है तुम्हारे

1709
01:59:18,800 --> 01:59:22,880
यहां। जब वो मूल रूप से अव्यवहारिक है तो व्यवहार में

1710
01:59:22,880 --> 01:59:27,120
कैसे आ गया? व्यवहार में कैसे आ गया? हो गया

1711
01:59:27,120 --> 01:59:31,440
स्वरूप का विरोध हो गया। स्वरूप स्वरूप चिल्लाते हो। स्वरूप

1712
01:59:31,440 --> 01:59:35,520
का विरोध हो गया ना? नित्यता खत्म हो गई। व्यवहार में नहीं था। व्यवहार में आ गया।

1713
01:59:35,520 --> 01:59:39,600
हो गई नित्यता खत्म। शाश्वत खत्म स्वरूप का वो हो गया खंडन। और सगुण

1714
01:59:39,600 --> 01:59:43,760
निराकार से पहले क्या था? वो भी है प्रश्न। वो अभी आएगा।

1715
01:59:43,760 --> 01:59:49,520
जी शास्त्रवाद जी बोले।

1716
01:59:49,520 --> 01:59:54,480
भाई अब तो लगभग हो ही गया है प्रश्न। आखरी प्रश्न है। साथ में यह भी है कि

1717
01:59:54,480 --> 01:59:58,480
आपने जो इतनी भारत को आर्य समाज घोषित कर

1718
01:59:58,480 --> 02:00:04,400
दिया है। ऐसा उसका दावा है कि आपने उसे आर्य समाज घोषित कर दिया है।

1719
02:00:04,400 --> 02:00:08,560
अरे भैया तो आर्य समाजी किसको कहा जाएगा? किसको नहीं कहा जाएगा? इसमें तुम सिद्धांत

1720
02:00:08,560 --> 02:00:12,560
तो दो। वो दयानंद जी के भाष्य को दिखा रही है। परंपरा

1721
02:00:12,560 --> 02:00:16,560
प्राप्त आचार्यों का विरोध कर रही है। तुम्हारे चैनल पर उसको पनाह मिल रही है। तो क्या

1722
02:00:16,560 --> 02:00:19,600
करें? क्या कहे उसे?

1723
02:00:19,600 --> 02:00:23,840
भाई कोई भी आर्य समाजी उसी को माना जाएगा ना जो दयानंद के सिद्धांतों के प्रति निष्ठावान

1724
02:00:23,840 --> 02:00:27,920
हो। उसकी निष्ठा है। नहीं तो स्वतंत्र रूप से उसकी वैदिक

1725
02:00:27,920 --> 02:00:32,080
व्याख्या क्या है? बताएं वो और तुम कोई होते नहीं हो तय करने वाले। तुम्हारे

1726
02:00:32,080 --> 02:00:36,240
यहां परंपरा है नहीं। तुम ही को निर्धारित कर दिया हो। इन्होंने कहा था राहुल आर्य

1727
02:00:36,240 --> 02:00:40,720
जी ने मुझे जो है नियुक्त किया है इसके लिए।

1728
02:00:40,720 --> 02:00:44,960
हैं? कौन है वो? कौन है भाई राहुल आर्य? हम तो तुम्हें

1729
02:00:44,960 --> 02:00:49,120
बहुत उससे ज्यादा वो मानते हैं। श्रेष्ठ मुझे नहीं मुझे नहीं पता राहुल

1730
02:00:49,120 --> 02:00:53,840
आर्य कौन है। होंगे तुम्हारे कोई

1731
02:00:53,840 --> 02:00:58,000
मैंने तो ये देखा था। मैंने तो ये देखा था संस्कृत

1732
02:00:58,000 --> 02:01:02,000
में शास्त्रार्थ की बात आई थी तो राहुल लाल पीछे भाग गए थे। जब इस वालों ने कह दिया

1733
02:01:02,000 --> 02:01:07,120
था संस्कृत में होगा। भाग गए थे वहां से।

1734
02:01:07,120 --> 02:01:11,120
जय श्री राम का विरोध किया। विरोध किया था महेंद्र पाल आर्य जी ने

1735
02:01:11,120 --> 02:01:15,200
तो तब राहुल आर्य ने उनका विरोध किया था कि आप जय श्री राम का विरोध नहीं कर

1736
02:01:15,200 --> 02:01:19,280
सकते और इनकी जो रामायण लिखी है जगदीशानंद

1737
02:01:19,280 --> 02:01:23,360
सरस्वती जी की उसको राहुल आर्य नहीं मानते हैं वो मूल वाक वाल्मीकि रामायण को

1738
02:01:23,360 --> 02:01:27,440
ही रामायण मानते हैं ये भी बात है और राहुल आर्य और

1739
02:01:27,440 --> 02:01:31,600
इनकी कोई बनती नहीं है। हां राहुल आर्य जो है वीडियो बनाते थे वो जय श्री राम

1740
02:01:31,600 --> 02:01:35,680
का विरोध किया तो उन्होंने कहा यम महेंद्र पाल आर्य ने कि आप जय श्री राम मत बोलो जय श्री राम

1741
02:01:35,680 --> 02:01:39,760
नहीं बोलना चाहिए तो उन्होंने बोला नहीं नहीं क्यों नहीं बोलना चाहिए जय श्री राम राम हमारे लिए

1742
02:01:39,760 --> 02:01:44,800
आराध्य है वो छुपा बैठा है ना अंदर

1743
02:01:44,800 --> 02:01:48,880
हर हर तथाकथित सनातना भाष के अंदर भी एक हिंदू छुपा बैठा है

1744
02:01:48,880 --> 02:01:52,960
ना भाई दिक्कत है मैं एक बात कह रहा था कि

1745
02:01:52,960 --> 02:01:55,840
वो जो गोविंद गुरुकुल वाली जो चर्चा हुई थी उसमें

1746
02:01:55,840 --> 02:01:59,920
गोविंद गुरुकुल जी शास्त्र का प्रमाण नहीं दे पाए तो वह

1747
02:01:59,920 --> 02:02:04,000
हारे हुए माने गए और निर्भय से उन्होंने शास्त्र का प्रमाण मांगा था

1748
02:02:04,000 --> 02:02:08,000
कि क्या कहते हैं शास्त्र का

1749
02:02:08,000 --> 02:02:12,080
प्रमाण ये माना था कि जो है ईश्वर अपने आप को नष्ट कर सकता है

1750
02:02:12,080 --> 02:02:16,160
क्या? तो तो इसने निर्भय ने बोला था कि मैं जो है

1751
02:02:16,160 --> 02:02:20,640
पोस्ट में डाल दूंगा। ऐसा कुछ उन्होंने प्रमाण मांगा था। निर्भय ने बोला पोस्ट कर दूंगा।

1752
02:02:20,640 --> 02:02:24,720
तो भैया जब पोस्ट कर दोगे उस समय तुम नहीं दे पा रहे हो तो तुम भी हारे।

1753
02:02:24,720 --> 02:02:28,880
तुम भी हारे हम उन्होंने

1754
02:02:28,880 --> 02:02:32,960
यह भी कहा था कि मैं बाद में दे दूंगा गुरु गोविंद वाल जी ने के मैं

1755
02:02:32,960 --> 02:02:36,960
प्रमाण अवतार के संबंध में उन्होंने गीता के वो दिए तो हम नहीं मानेंगे तो नहीं

1756
02:02:36,960 --> 02:02:41,600
मानोगे तो हम क्या करें भाई परंपरा पे आ जाओ बताओ

1757
02:02:41,600 --> 02:02:46,160
परंपरा तुम्हारी जहां तक दिखाओ तो वो हम नहीं मानेंगे

1758
02:02:46,160 --> 02:02:50,240
है ना शास्त्र प्रमाण की बात तो ऐसी है जब तुमने न्याय वो कहा था ना न्याय

1759
02:02:50,240 --> 02:02:54,240
दर्शन पंचाव तो मैं चाहता तो वही तुम्हें टू स्टॉप द ट्रेन

1760
02:02:54,240 --> 02:02:58,480
पुल द चैन करता समझे तुम्हारी परंपरा पूछ के

1761
02:02:58,480 --> 02:03:02,480
तोते उड़ जाते पूरे आर्य समाज के उसी दिन

1762
02:03:02,480 --> 02:03:06,560
वो तो मैं थोड़ा सा उसको एक उस वे में ले जाना चाहता था जहां

1763
02:03:06,560 --> 02:03:11,200
चीजें एक्सप्लोर हो ये नहीं बस क्योंकि हमारे जो

1764
02:03:11,200 --> 02:03:16,240
हमारे जो तीन सिद्धांत है वो शुरू होते ही खत्म कर देते हैं चर्चा को खत्म

1765
02:03:16,240 --> 02:03:20,240
टाटा बाय बाय हो गया ये है उसी

1766
02:03:20,240 --> 02:03:24,400
में फंस के रह जाता है व्यक्ति इसीलिए मैंने कहा वो मुंह नहीं खोलते थोड़ा बढ़ाते

1767
02:03:24,400 --> 02:03:29,360
इसको इसको जो है वो वो कौन सा शब्द है वो एबोरेट

1768
02:03:29,360 --> 02:03:34,080
एबोरेट करो हम एबोरेट वो

1769
02:03:34,080 --> 02:03:40,080
तो ये बात है और हो गए सारे प्रश्न

1770
02:03:40,400 --> 02:03:44,560
भैया बस यही था आखरी ये है कि आप जो अवतारवाद

1771
02:03:44,560 --> 02:03:48,640
का जो वो पूछ रहा था उसप आप ये उसका कहना है कि आप फंस गए थे

1772
02:03:48,640 --> 02:03:52,720
कि जहां पे अवतार के लक्षण की बात उसने आपसे पूछी थी वो

1773
02:03:52,720 --> 02:03:56,960
तो उत्तर दे दिया यदि शब्द प्रमाण हां वही

1774
02:03:56,960 --> 02:04:00,960
बात है। शब्द प्रमाण वाली बात है। वही वाली बात है। आखिर उसे उसने

1775
02:04:00,960 --> 02:04:04,960
आपको ये मैंने मैंने जब उससे पूछा था गायत्री का मैंने जब

1776
02:04:04,960 --> 02:04:09,040
उससे पूछा था गायत्री का लक्षण क्या है? तो क्या जवाब दिया था उसने?

1777
02:04:09,040 --> 02:04:13,680
मौन क्या लक्षण है गायत्री का? अच्छा

1778
02:04:13,680 --> 02:04:17,760
भगवान की पूजा करने से वो आएगा। ये तुम्हें वो

1779
02:04:17,760 --> 02:04:22,160
मिलेगी। इसमें क्या लक्षण क्या है इसमें? तुम

1780
02:04:22,160 --> 02:04:27,360
में भगवान के गुण आएंगे। इसके लक्षण क्या है? बताओ

1781
02:04:27,360 --> 02:04:33,360
कोई लक्षण नहीं शब्द प्रमाण है।

1782
02:04:34,080 --> 02:04:38,240
और इसने एक बात और कही थी इंटरव्यू लेने के बहाने जाता हूं।

1783
02:04:38,240 --> 02:04:42,240
है ना? हम इंटरव्यू लेने के बहाने जाता हूं। ये कहा था

1784
02:04:42,240 --> 02:04:46,400
इसने कि मैं इंटरव्यू लेने के बहाने। अच्छा ये जब हमारे

1785
02:04:46,400 --> 02:04:50,400
यहां आए थे तो इंटरव्यू लेने के बहाने का आए थे? क्या काहे के बहाने आए थे?

1786
02:04:50,400 --> 02:04:54,560
मैं जब इंटरव्यू लेने जाता हूं तो मैं अपनी पहचान नहीं

1787
02:04:54,560 --> 02:04:58,800
छुपाता हूं। कोई मुझसे पूछेगा तो मैं यही बताऊंगा शिवश नारायण द्विवेदी आवान

1788
02:04:58,800 --> 02:05:03,200
शंकराचार्य जाके पूछ लेना किसी से भी पहचान नहीं छुपाता।

1789
02:05:03,200 --> 02:05:07,440
तुम तो पहचान छुपा के आ चुके हो मेरे पास। क्यों

1790
02:05:07,440 --> 02:05:10,480
आए थे भाई?

1791
02:05:10,480 --> 02:05:15,040
तुम करो तो वह न्याय है। हम करें तो जो अन्याय है

1792
02:05:15,040 --> 02:05:19,760
यही होता है। जहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होता है ना वहां अधर्म होता है। प्रतिष्ठित

1793
02:05:19,760 --> 02:05:23,760
अधर्म

1794
02:05:23,760 --> 02:05:28,000
इंटरव्यू लेने के बहाने जाते। इंटरव्यू लेने के बहाने हम इसलिए जाते हैं

1795
02:05:28,000 --> 02:05:32,080
इंटरव्यू लेने क्या चर्चा करने के बहाने हम इसलिए जाते हैं क्योंकि अगर हम

1796
02:05:32,080 --> 02:05:36,160
उनको शास्त्रार्थ बोलेंगे तो वह लोग सबसे पहली बात तो

1797
02:05:36,160 --> 02:05:40,400
उसको टालेंगे ज्यादातर लोग। टालते हैं करना

1798
02:05:40,400 --> 02:05:45,360
ही नहीं है। अच्छा दूसरी बात क्या करते हैं?

1799
02:05:45,360 --> 02:05:49,840
अखबार में छपवाओ, होर्डिंग लगवाओ, टीवी चैनल बुलाओ।

1800
02:05:49,840 --> 02:05:53,840
बहुत बड़े स्तर का शास्त्रार्थ होगा। जिसको करते करते 100

1801
02:05:53,840 --> 02:05:59,840
शास्त्रार्थ हो जाए। जिसको करते करते 100 शास्त्रार्थ हो जाए।

1802
02:06:00,720 --> 02:06:05,040
इसलिए करना पड़ता है और गुरुकुल के आचार्य से पूछते हैं। आचार्य

1803
02:06:05,040 --> 02:06:09,600
जो गुरुकुल में पढ़ा रहे हैं उनके पास जाते हैं। आचार्य

1804
02:06:09,600 --> 02:06:15,600
जो उस गुरुकुल के हेड होते हैं।

1805
02:06:18,800 --> 02:06:23,200
यही बात है भैया। उसने तो यह तक कह दिया था कि आपने स्ट्राइक मरवाया

1806
02:06:23,200 --> 02:06:27,360
है उनके चैनल पर। जबकि यह कहीं से भी सत्य नहीं है।

1807
02:06:27,360 --> 02:06:31,920
अरे ये तो मना कर रहे थे। मैंने मना किया था।

1808
02:06:31,920 --> 02:06:35,920
इन्हने मना किया। इस मामले में इस मामले में स्ट्राइक मारने

1809
02:06:35,920 --> 02:06:40,160
के विषय में पूर्ण रूप से अधिकारी हैं। क्योंकि उन्होंने इनसे कोई परमिशन

1810
02:06:40,160 --> 02:06:45,920
तो ली नहीं है। मजाक वो बना ही रहे हैं इनका। ठीक है?

1811
02:06:45,920 --> 02:06:49,920
दूसरी बात यह है कि इसमें न्याय अन्याय का फैसला कैसे होगा? तुमने कैसे मान

1812
02:06:49,920 --> 02:06:54,320
लिया कि तुम्हारा इनके वीडियो को यूज़ करना न्याय नहीं है या अन्याय

1813
02:06:54,320 --> 02:06:58,640
है। कैसे माना? अन्याय या अन्याय का निर्धारण आपने

1814
02:06:58,640 --> 02:07:03,040
कर लिया अपने आप ना। इस मामले में वो स्वतंत्र है या तो मुझे सिद्धांत

1815
02:07:03,040 --> 02:07:07,280
दो कि नहीं करना चाहिए था इन्हें। हम

1816
02:07:07,280 --> 02:07:11,760
बिल्कुल कोई भी गलत तरीके से और इवन

1817
02:07:11,760 --> 02:07:15,840
शिवश जी ने भी कई बार कहा है कि हमारे संदर्भ से काटकर अगर कोई वीडियो

1818
02:07:15,840 --> 02:07:19,920
प्रस्तुत करेगा तो भैया वो सही नहीं माना जाएगा। अगर आप हमारे वीडियोस को यूज

1819
02:07:19,920 --> 02:07:23,920
करोगे जब मैं शुरू में इनसे इनसे जुड़ा था तो मैंने भी इनसे परमिशन

1820
02:07:23,920 --> 02:07:27,920
मांगी जी मैंने ईमेल भी करा है इनको आहान ईमेल आईडी पे तो

1821
02:07:27,920 --> 02:07:32,000
मैंने उनको यही लिखा था तो इन्होंने कहा था मेरे वीडियो को आप यूज करिए लेकिन संदर्भ

1822
02:07:32,000 --> 02:07:36,000
जो वहां पर बात कही गई है उससे भिन्न बात नहीं होनी चाहिए तो वही मैंने वहां पर

1823
02:07:36,000 --> 02:07:40,160
किया लेकिन आपने क्या वो चीज की अच्छा परमिशन तो लेने की बात तो दूर

1824
02:07:40,160 --> 02:07:44,480
की बात है जो बात मैंने कही नहीं उसको काट काट कर तुम वहां पर दिखाओगे

1825
02:07:44,480 --> 02:07:48,640
तो भैया फिर हम तो विरोध करेंगे और विरोध करने के लिए आपको हम गिड़गिड़ाएंगे

1826
02:07:48,640 --> 02:07:52,640
तो नहीं के भैया मेरा वीडियो आपने दिखाया अगर मैं ऐसा बोलूंगा हटा दो तो आप बोलोगे अरे

1827
02:07:52,640 --> 02:07:56,800
ये तो मेरे से वो वो आ गया देखो आ गया अपनी औकात पे तो हमारे पास जो लीगल

1828
02:07:56,800 --> 02:08:01,040
तरीका है भैया वही है और वो हम अपनाएंगे बिल्कुल अच्छा

1829
02:08:01,040 --> 02:08:05,840
संदीपन जी ने जो ये कहा कि हम बहुत अच्छे से बात करते हैं वो भी सुन ले

1830
02:08:05,840 --> 02:08:10,000
कि भैया अलंकारी जो शब्द है वो केवल आपके बिहेवियर पर निर्भर

1831
02:08:10,000 --> 02:08:14,240
नहीं है। आपका जो मूल स्त्रोत है ये सत्यार्थ प्रकाश

1832
02:08:14,240 --> 02:08:18,320
इस पर निर्भर है। ठीक है? और इसके अलावा आपके

1833
02:08:18,320 --> 02:08:22,400
बहुत सगे वाले इन शब्दों का उपयोग कर रहे हैं। तो केवल एक आप अगर नहीं कर

1834
02:08:22,400 --> 02:08:26,400
रहे हो उसके आधार पर हम अलंकारी ना कहें तो ये हम नहीं स्वीकार करेंगे।

1835
02:08:26,400 --> 02:08:30,800
हां हम जो है नमाजी नहीं कहते आपको कभी भी।

1836
02:08:30,800 --> 02:08:31,360
नमाजी

1837
02:08:31,360 --> 02:08:36,560
इत्यादि हमने कभी पसंद नहीं किया। ठीक है।

1838
02:08:36,560 --> 02:08:41,360
यह भी देखो कि धर्म चरितार्थ किस-किस के अंदर हो रहा है।

1839
02:08:41,360 --> 02:08:47,360
अच्छा मैं एक बात अब बता दूं कुल मिलाकर के। जी

1840
02:09:07,120 --> 02:09:13,120
जी आप तब तक बोले कुछ मैं बता रहा हूं।

1841
02:09:13,920 --> 02:09:18,000
सनातन जी शंकर जी जी जी जी

1842
02:09:18,000 --> 02:09:22,080
तो यही सारी बातें हैं। इसको

1843
02:09:22,080 --> 02:09:26,480
क्लेरिफाई करना बहुत ज्यादा जरूरी था। यह विषय जो आज आपने रखा इन्होंने इन्होंने

1844
02:09:26,480 --> 02:09:30,720
संदीपन जी ने एक चीज बोली थी कि मैंने दयानंद जी के लिए तू तड़ाक कहा है।

1845
02:09:30,720 --> 02:09:34,800
ठीक है? मैं चैलेंज दे रहा हूं। संदीपन जी आप मुझे बताइए मैंने कहां तू तड़ाक

1846
02:09:34,800 --> 02:09:38,880
कहा है। दयानंद जी के लिए। दयानंद के बाद जी ना

1847
02:09:38,880 --> 02:09:43,200
लगा हो यह बात एक अलग है। मगर दयानंद ऐसे करता है।

1848
02:09:43,200 --> 02:09:47,360
आपने जो वहां पंक्ति यूज़ की वह बात एक अलग है। कई बार होता है स्लिप ऑफ टंग के कारण

1849
02:09:47,360 --> 02:09:51,680
हो जाता है। कई बार होता है। हां उनको यह भी आपत्ति है कि वो स्वामी क्यों नहीं लगाते दयानंद

1850
02:09:51,680 --> 02:09:55,680
जी के आगे? स्वामी दयानंद क्यों नहीं बोलते? तो कुल

1851
02:09:55,680 --> 02:10:00,000
मिलाकर के अगर उनसे हमें चर्चा करनी है तो हम एक काम करते हैं। पहले आर्य समाजी बन जाते हैं।

1852
02:10:00,000 --> 02:10:04,080
उसके बाद हम उनसे चर्चा करेंगे विरोधी। ये कोई बात है क्या?

1853
02:10:04,080 --> 02:10:09,360
फिर यह तो महर्षि भी बोलते हैं तो फिर यानी कि बोलेंगे महर्षि नहीं बोला अब इस पर भी क्षमा मांग

1854
02:10:09,360 --> 02:10:13,360
हां ये मतलब कितने अकाट तरीके हैं चर्चा से

1855
02:10:13,360 --> 02:10:19,360
दूर रहने के संदीपन जी के मानना पड़ेगा हम

1856
02:10:19,440 --> 02:10:23,440
मैंने कहा निर्भय से ये पंक्ति भेजो मुझे तू तड़ा कहां किया है मैंने तो

1857
02:10:23,440 --> 02:10:28,480
तुरंत बात बदल गई तुरंत बात बदल गई वहां पे

1858
02:10:28,480 --> 02:10:32,960
नहीं वो है नहीं ना होगा तभी तो भेजेंगे और वैसे भी हम कभी अभद्रता

1859
02:10:32,960 --> 02:10:37,200
नहीं करते हालांकि एक पोस्ट में पुराने उसमें मैंने लिख दिया था।

1860
02:10:37,200 --> 02:10:41,360
वहां पर भी जी नहीं लगाया गया था। तो उसके ऊपर मैंने ऑलरेडी

1861
02:10:41,360 --> 02:10:45,600
पोस्ट कर दी है। अब जो तुम हमारे आचार्यों को जो

1862
02:10:45,600 --> 02:10:49,680
संबोधित करते हो मेरे पास तो बहुत सारे प्रमाण है जहां पर तुमने भी जी नहीं लगाया

1863
02:10:49,680 --> 02:10:54,160
है। तुम्हारी पोस्टों में भी वैसे लिखा होता है शंकराचार्य को चैलेंज है। चारों शंकराचार्यों

1864
02:10:54,160 --> 02:10:58,160
को चैलेंज करते हैं हम। तो भैया वहां पर भी आपने जी नहीं लगाया था तो उस पर कब आप

1865
02:10:58,160 --> 02:11:02,320
क्षमा मांगोगे यह भी बता दो। पर चलो उतना हम

1866
02:11:02,320 --> 02:11:06,400
नहीं जाएंगे क्योंकि हमारा तो मेन सिद्धांत है। यह बात पर तो कभी बात होती नहीं है

1867
02:11:06,400 --> 02:11:10,640
कि कोई जी लगा रहा है नहीं लगा रहा है। लेकिन जहां तक हम

1868
02:11:10,640 --> 02:11:14,960
प्रयास करते हैं कि सभ्यता के साथ ही

1869
02:11:14,960 --> 02:11:19,040
किसी का नाम लिया जाए। बढ़िया तरीके से ही लिया जाए। किसी का अपमान ना किया जाए।

1870
02:11:19,040 --> 02:11:23,040
व्यक्तिगत व्यक्तिगत गलती से गलती से यदि कोई स्लिप

1871
02:11:23,040 --> 02:11:27,040
ऑफ टंग की वजह से हो गया हो, कभी जी ना लगा हो, बातें दयानंद ऐसे करता

1872
02:11:27,040 --> 02:11:31,440
है। मैंने कभी नहीं कहा। अब मेरी जानकारी में नहीं कहा। मुझे पता चलेगा मैं

1873
02:11:31,440 --> 02:11:34,480
माफी मांगूंगा। अच्छा मैं ऑपरेटर

1874
02:11:34,480 --> 02:11:40,480
को कुछ अपने स्क्रीनशॉट भेज रहा हूं।

1875
02:11:41,040 --> 02:11:47,040
ऑपरेटर कृपया करके

1876
02:11:47,600 --> 02:11:53,600
वो स्क्रीनशॉट यहां प्रदर्शित करें आप जरा। मैंने आपको भेज दिए हैं।

1877
02:12:07,120 --> 02:12:11,440
तो मैं आपको एक थोड़ा सा इसके संदर्भ दे देता हूं। जब तक ये प्रदर्शित कर रहे हैं। ऑपरेटर

1878
02:12:11,440 --> 02:12:17,440
मेरी बात सुन पा रहे हैं?

1879
02:12:18,240 --> 02:12:22,560
तो हमारी जो मूल बातें हुई हैं जो पूरी फोन

1880
02:12:22,560 --> 02:12:26,800
कॉल पर जो बातें हुई है पूरी दो चार पांच घंटे की बातें हैं सैद्धांतिक

1881
02:12:26,800 --> 02:12:30,880
उसमें व्यक्तिगत भी है पर सैद्धांतिक बात हो जाएंगी करीबन तीन

1882
02:12:30,880 --> 02:12:34,880
चार घंटे की बातें होंगी हमारी मेरी और निर्भय की उसमें निर्गुण

1883
02:12:34,880 --> 02:12:39,120
और सगुण वाला मैटर फंसा हुआ था इसके इसके बारे में निर्भय

1884
02:12:39,120 --> 02:12:43,520
का निर्भय निरत्तर थे जब मैंने पूछा कि

1885
02:12:43,520 --> 02:12:47,920
भाई ईश्वर सब जगह एक रस रूप से सर्वत्र व्याप्त है।

1886
02:12:47,920 --> 02:12:52,000
ठीक है? तो अब उसको पृथ्वी का एक मिट्टी का

1887
02:12:52,000 --> 02:12:56,240
यह कण हिलाना है। ठीक? तो यहां पर एक ऐसी शक्ति

1888
02:12:56,240 --> 02:13:00,320
बन के वो उत्पन्न हो रहा है। केवल यही कण हिलेगा बाकी के नहीं हिलेंगे।

1889
02:13:00,320 --> 02:13:04,720
क्योंकि ईश्वर सर्वत्र सदा एक रस है। सर्वत्र व्याप्त वाला।

1890
02:13:04,720 --> 02:13:08,960
तो अगर वो पूरा हिला तो सब कुछ हिलेगा। सब कुछ हिलेगा।

1891
02:13:08,960 --> 02:13:13,120
तो धक्का जब लगेगा सब में लगेगा। सब कुछ हिलेगा। अगर वो

1892
02:13:13,120 --> 02:13:17,280
ईश्वर हिला एक रस वाला ईश्वर हिला जो सब जगह समान है तो

1893
02:13:17,280 --> 02:13:21,280
यदि उसने मूवमेंट किया हालांकि यह भी बात है मूवमेंट करेगा कहां

1894
02:13:21,280 --> 02:13:25,680
भाई मूवमेंट करने के लिए उससे अतिरिक्त कोई जगह चाहिए ना तब वो मूवमेंट करेगा

1895
02:13:25,680 --> 02:13:30,320
तो फिर भी मान लीजिए कि वो हिला तो सब कुछ हिलेगा तो फिर मैंने कहा

1896
02:13:30,320 --> 02:13:33,520
निर्भय से कि भाई अब यह बताओ

1897
02:13:33,520 --> 02:13:37,920
कि वो तो वो हिलेगा तो हिल नहीं सकता क्योंकि उसके बाहर कोई जगह ही नहीं तो हिलेगा कहां

1898
02:13:37,920 --> 02:13:41,920
दूसरी बात कि अगर वो मान लो हिल भी रहा है तो दुनिया का प्रत्येक

1899
02:13:41,920 --> 02:13:46,560
कण प्रत्येक एटम सब कुछ हिलेगा तो क्रिया कैसे होगी?

1900
02:13:46,560 --> 02:13:50,720
रचना कैसे होगी सृष्टि की? ठीक है? तो इसके

1901
02:13:50,720 --> 02:13:55,120
लिए उसको ऐसा करना पड़ेगा कि वो एक जगह तो हिले।

1902
02:13:55,120 --> 02:13:59,280
ठीक है? बाकी सब जगह ना हिले। एक जगह हिले

1903
02:13:59,280 --> 02:14:03,760
और बाकी सब जगह ना हिले। तो ये उसका रूप परिवर्तनशील हो जाएगा। सनातन

1904
02:14:03,760 --> 02:14:07,840
नहीं रहा। यह उसका रूप अगर वो एक जगह हिला बाकी सब जगह नहीं

1905
02:14:07,840 --> 02:14:11,840
रहा नहीं हिला तो यह उसका रूप परिवर्तनशील हो जाएगा कि जो वो है उसमें

1906
02:14:11,840 --> 02:14:15,920
बदलाव आ रहा है। इसलिए हमारी जानकारी में सबसे

1907
02:14:15,920 --> 02:14:20,000
पहले वो एक अवतार लेता है। ऐसा अवतार जो

1908
02:14:20,000 --> 02:14:24,160
कहीं भी कम ज्यादा हो सके। तो जो पहली स्टेज है उसको कहते

1909
02:14:24,160 --> 02:14:28,480
हैं निर्गुण निराकार। और जो दूसरी स्टेज है उसको कहते हैं सगुण निराकार

1910
02:14:28,480 --> 02:14:32,720
हम लोग। ठीक है? तो वो जो अवतार लेता है तो ईश्वर का अवतार

1911
02:14:32,720 --> 02:14:36,800
उसके मौलिक स्वरूप के विरुद्ध वही सिद्ध हो गया। ईश्वर का

1912
02:14:36,800 --> 02:14:40,880
अवतार उसके मौलिक स्वरूप अगर तुम्हारा कहना स्वरूप के विरुद्ध कैसे कर सकता

1913
02:14:40,880 --> 02:14:44,960
है? तो अब हम बता रहे हैं ईश्वर का अवतार उसके मौलिक स्वरूप के विरुद्ध

1914
02:14:44,960 --> 02:14:49,040
वहीं पर सिद्ध हो गया कि ईश्वर सब जगह होते हुए भी उसने एक डायमेंशन

1915
02:14:49,040 --> 02:14:53,040
और लेते हुए उसमें ऐसा रूप में अवतरित हुआ

1916
02:14:53,040 --> 02:14:57,680
जहां पर वो कहीं भी कम ज्यादा हो सकता है कहीं भी हो सकता है कहीं भी नहीं भी हो सकता है।

1917
02:14:57,680 --> 02:15:01,680
कहीं भी काम करने वाला हो सकता है जो उसकी शक्ति के रूप में मान लो जो शक्ति

1918
02:15:01,680 --> 02:15:06,080
काम कर रही है कि पृथ्वी को धक्का लग रहा है पर जुपिटर को नहीं लग रहा है। जुपिटर

1919
02:15:06,080 --> 02:15:10,080
को धक्का लग रहा है पर पृथ्वी को नहीं लग रहा है। ठीक है? और अगर वो एक

1920
02:15:10,080 --> 02:15:14,160
रस वाला ईश्वर हिलेगा एक रस वाला ईश्वर हिलेगा तो जुपिटर पृथ्वी

1921
02:15:14,160 --> 02:15:18,160
सब कुछ एक साथ हिलेगा फिर तो पृथ्वी बन ही नहीं पाएगी पृथ्वी

1922
02:15:18,160 --> 02:15:22,400
बन ही नहीं पाएगी फिर तो तो इसलिए सर्वत्र व्याप्त ईश्वर भी

1923
02:15:22,400 --> 02:15:26,400
एक ऐसा सगुण निराकार रूप लेता है जो कहीं पर कम ज्यादा हो जब मैंने

1924
02:15:26,400 --> 02:15:30,720
ये प्रश्न किया तो निर्भय जी निरुत्तर

1925
02:15:30,720 --> 02:15:34,720
थे उन्होंने पहले कहा कि अरे आर्य समाज

1926
02:15:34,720 --> 02:15:39,040
इससे ज्यादा नहीं बताता है ये कहा था फर्स्ट टाइम निर्भय का उत्तर ये

1927
02:15:39,040 --> 02:15:43,280
आपका आपके यहां का जो वो बॉस है सारे तर्कों का

1928
02:15:43,280 --> 02:15:47,600
ये उत्तर था निर्भय का ठीक है और उसके

1929
02:15:47,600 --> 02:15:51,760
बाद उसके बाद उसने जब अगली बार हमारी जब बहुत लंबी

1930
02:15:51,760 --> 02:15:55,840
बातचीत हुई है निर्भय और मेरी उसमें वो इस पर आया कि भगवान तो इच्छा

1931
02:15:55,840 --> 02:15:59,840
करता है उससे हो जाता है। मैंने कहा इच्छा आ के इन मिट्टी के कणों को

1932
02:15:59,840 --> 02:16:03,840
प्राप्त कैसे होती है? इच्छा आ के मिट्टी

1933
02:16:03,840 --> 02:16:04,340
के जड़

1934
02:16:04,320 --> 02:16:08,400
तत्व को प्राप्त कैसे होती है उसकी इच्छा? अच्छा पहली बात तो ये

1935
02:16:08,400 --> 02:16:13,680
मानना पड़ेगा कि ईश्वर केवल इच्छावान है। शक्तिमान नहीं है।

1936
02:16:13,680 --> 02:16:17,840
शक्तिमान मानना पड़ेगा। यानी कोई फोर्स कोई बल काम कर रहा है ना बल

1937
02:16:17,840 --> 02:16:21,920
के रूप में ईश्वर ही काम कर रहा है ना तो बल के रूप में ईश्वर काम कर रहा है तो

1938
02:16:21,920 --> 02:16:26,800
बल तो कहीं पर लग रहा है। कहीं पर नहीं लग रहा है। तभी सृष्टि हो पाएगी।

1939
02:16:26,800 --> 02:16:30,800
है ना? तो जब तो इसका मतलब ईश्वर या तो यह मान लो

1940
02:16:30,800 --> 02:16:35,120
कि तुम्हारा ईश्वर जो है परिवर्तनशील है। परिवर्तनशील है तो शाश्वत सत्य नहीं है।

1941
02:16:35,120 --> 02:16:39,360
और या फिर ये मान लो कि वो सत्य रहते हुए भी एक और अवतार लेता है।

1942
02:16:39,360 --> 02:16:43,520
यहां पे फिर वो माया वाला डायमेंशन आपको मानना पड़ जाएगा। कहां लेता है? वो

1943
02:16:43,520 --> 02:16:47,520
आपको डायमेंशन क्रिएट कर वो बात एक अलग है। मानो या ना मानो। मगर

1944
02:16:47,520 --> 02:16:51,760
अवतार यहां पर घोषित हो गया। पहला ठीक। व्यवहार

1945
02:16:51,760 --> 02:16:56,080
में ना आ सकने वाला ईश्वर सर्वत्र व्याप्त था। किसी के व्यवहार का विषय नहीं था। जब क्रिएशन

1946
02:16:56,080 --> 02:17:00,560
करनी थी व्यवहारिक हो गया मौलिक स्वरूप के विरुद्ध आ गया

1947
02:17:00,560 --> 02:17:04,960
ठीक तो ये जब प्रश्न आया तो निर्भय आर्य

1948
02:17:04,960 --> 02:17:09,200
प्रथम दृष्ट्या में निरत्तर पहली बार हो गए उन्होंने कहा इसके आगे तो आर्य

1949
02:17:09,200 --> 02:17:13,680
समाज जानता ही नहीं उसने कभी बात ही नहीं की दूसरी बार में उसने कहा

1950
02:17:13,680 --> 02:17:17,680
दूसरी बार में उसने कहा कि क्या

1951
02:17:17,680 --> 02:17:19,520
कहते हैं ईश्वर केवल इच्छा करता है बहुत देर

1952
02:17:19,520 --> 02:17:23,520
तक मैं अटका रहा वो इच्छा प्राप्त कैसे होती है भाई कोई नर्वस सिस्टम है क्या मिट्टी

1953
02:17:23,520 --> 02:17:27,600
के कणों में जो वह समझ जाए ईश्वर ने आर्डर दिया है तो मुझे वैसा ही करना

1954
02:17:27,600 --> 02:17:33,280
है और फिर भी वैसा ही करने वाले के लिए बल तो चाहिए ही फिर उसको बल भी दे दो

1955
02:17:33,280 --> 02:17:37,280
शून्य बना दो ईश्वर को अवतारवाद का विरोध

1956
02:17:37,280 --> 02:17:41,280
करने के चक्कर में तो जैसे ही आप यहां अवतार मानते हैं कि ईश्वर व्यवहारिक

1957
02:17:41,280 --> 02:17:46,000
हो गया और मिट्टी के कणों के लिए बाधा बना ठीक है

1958
02:17:46,000 --> 02:17:50,080
प्रकृति प्राकृतिक तत्वों के लिए बाधा बना वैसे ही उसका एक अवतार और होता

1959
02:17:50,080 --> 02:17:54,320
है अब वो प्रकाश का भी बाधा बन गया पहले प्रकृति के अन्य तत्वों का बाधक

1960
02:17:54,320 --> 02:17:58,400
था। अब वो प्रकाश का भी वादक हो गया। जब वो प्रकाश का वादक बन जाता

1961
02:17:58,400 --> 02:18:02,400
है तब उसे सगुण अवतार कहते हैं। ठीक

1962
02:18:02,400 --> 02:18:07,200
है? प्रकाश में जब बाधा डाल दी उसने कि भैया यहां का विषय

1963
02:18:07,200 --> 02:18:11,840
और ये प्रकाश टकरा के वापस गया तो वो सगुण साकार हो जाता है। इस विषय में

1964
02:18:11,840 --> 02:18:15,840
निर्भय आर्य का पक्ष बिल्कुल ढीला जो हमारी

1965
02:18:15,840 --> 02:18:19,920
फोन पर चर्चाएं हुई है। अब इसका मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं। क्या प्रमाण

1966
02:18:19,920 --> 02:18:24,000
है? भैया दिखाओ जरा WhatsApp यह चीथड़े उड़ाएंगे

1967
02:18:24,000 --> 02:18:28,000
यह परंपरा को खत्म करेंगे इससे इससे पीछे जाओ जरा इससे

1968
02:18:28,000 --> 02:18:34,000
पीछे वाला ये मैंने आपको दिया है

1969
02:18:39,200 --> 02:18:44,320
मैंने आपको दिया है यह पढ़ा है मैंने इसे पहले

1970
02:18:44,320 --> 02:18:48,800
हां यह 3 फरवरी वाला दिखाइए इसमें 3 फरवरी

1971
02:18:48,800 --> 02:18:53,840
2026 लिखा हुआ यह बड़ा करिए इसको।

1972
02:18:53,840 --> 02:18:59,520
बड़ा करिए।

1973
02:18:59,520 --> 02:19:02,720
ऊपर कर दीजिए।

1974
02:19:02,720 --> 02:19:08,720
थोड़ा ऊपर सरकाइए इसको। 3 फरवरी के नीचे से दिखाइए।

1975
02:19:09,200 --> 02:19:13,200
और नीचे। यह देखिए यहां पर मैं वो वाली बात कह रहा हूं।

1976
02:19:13,200 --> 02:19:17,200
जब मैंने ऑब्जेक्शन किया था कि आपके यहां ऐसे शॉर्ट बनाए जा रहे हैं तो मैंने कहा था इन

1977
02:19:17,200 --> 02:19:22,320
विषयों में मुझे तुम्हारा व्यवहार उचित नहीं लगता है। ठीक है? अब और नीचे जाइए।

1978
02:19:22,320 --> 02:19:26,480
मुझे लगता है कि हम नीचे लाओ नीचे लाओ वापस लाओ वापस लाओ

1979
02:19:26,480 --> 02:19:30,480
वापस लाओ ऊपर जाओ। हां बस बस बस मुझे लगता है कि हम दूर ही

1980
02:19:30,480 --> 02:19:34,480
ठीक है। निर्भय दोनों का धर्म अलग होने के कारण हमारे सिद्धांत हमारे भारतत भाव

1981
02:19:34,480 --> 02:19:38,640
को चोट पहुंचाएंगे। ऐसे में जो भी है जितना भी वैसा ही बना रहे वही पर्याप्त है।

1982
02:19:38,640 --> 02:19:42,640
तुम छोटे भाई सदैव रहोगे। ये मेरी भाषा है और ये मेरा दृष्टिकोण था

1983
02:19:42,640 --> 02:19:46,880
इनके प्रति। ऊपर ले जाओ।

1984
02:19:46,880 --> 02:19:47,920
हां

1985
02:19:47,920 --> 02:19:51,920
सैद्धांतिक विषय में यदि तुम कभी आमने सामने चर्चा करने चाहते हो

1986
02:19:51,920 --> 02:19:52,960
तो अवश्य हो जाएगी।

1987
02:19:52,960 --> 02:19:56,960
ये कब कहा है मैंने? 3 फरवरी को कहा है। मैंने तो नहीं कहा कि सैद्धांतिक विषय

1988
02:19:56,960 --> 02:20:01,120
में चर्चा नहीं होगी। ठीक है। अच्छा फिलहाल मैं तुम्हारे

1989
02:20:01,120 --> 02:20:05,200
निर्गुण सगुण वाले वीडियो तथा संदीपन जी के साथ वाली चर्चा सुनिश्चित होने की

1990
02:20:05,200 --> 02:20:09,440
प्रतीक्षा कर रहा हूं। हुआ क्या था कि जब यह निर्गुण सगुण पर अटक जाते

1991
02:20:09,440 --> 02:20:14,000
थे तो यह बहुत देर तक वही एक ही बात रिपीट करते थे। इच्छा इच्छा इच्छा

1992
02:20:14,000 --> 02:20:18,080
तो मैं कहता था अब मैं इतनी देर तो हो गई मैं क्या मुंह चोरी करूं। मैं कह मैंने

1993
02:20:18,080 --> 02:20:22,080
इनसे कहा एक काम करना तुम निर्गुण और सगुण पे एक वीडियो बनाओ।

1994
02:20:22,080 --> 02:20:26,160
मैंने इनसे कहा तीन फरवरी को कहा सोचिए। इन्होंने डन

1995
02:20:26,160 --> 02:20:30,240
भी किया। मैंने कहा निर्गुण और सगुण पे तुम वीडियो बना दो जिससे कि जनता

1996
02:20:30,240 --> 02:20:34,400
देख ले तुम्हारा पक्ष क्या है? कि निर्गुण आखिरकार सगुण हुआ कैसे?

1997
02:20:34,400 --> 02:20:38,880
यह कब कहा मैंने? 3 फरवरी को। आज तक इनके यहां आया क्या? वीडियो आया

1998
02:20:38,880 --> 02:20:43,040
निर्गुण निर्गुण अवतार निर्गुण सगुण कैसे हुआ? इस विषय पर वीडियो

1999
02:20:43,040 --> 02:20:49,040
आया नहीं आया। ठीक है। अब इसके बाद

2000
02:20:49,600 --> 02:20:55,600
मैंने कई दिनों बाद इनसे संपर्क किया है। और

2001
02:20:57,920 --> 02:21:03,760
मैंने इनसे पूछा कि क्या हुआ? निर्गुण सगुण वाला वीडियो नहीं बनाया।

2002
02:21:03,760 --> 02:21:08,240
अच्छा आपने पूछा इनसे हां बहुत दिनों के बाद पूछा

2003
02:21:08,240 --> 02:21:12,400
क्योंकि यह जिस तरीके से मुझे इच्छा इच्छा में अटका रहे हैं जब ये वीडियो

2004
02:21:12,400 --> 02:21:16,560
बनाएंगे तो इनको लोग सुनने वाले होंगे तो इन्हें वहां पे ऐसी बात कहनी होगी जिससे

2005
02:21:16,560 --> 02:21:20,640
कुछ निष्कर्ष निकले मैंने कहा तुम अपनी जनता को निर्गुण शगुण

2006
02:21:20,640 --> 02:21:24,720
पे वीडियो बना के दिखा दो 3 फरवरी को इन्होंने कोई वीडियो नहीं बनाया

2007
02:21:24,720 --> 02:21:28,880
उसके बाद फिर जो अगला वो वाला स्लाइड लगाइए जिसमें ऊपर लिखा है ये पढ़ा

2008
02:21:28,880 --> 02:21:34,880
है मैंने यह पढ़ा है मैंने वाला चैट दिखा जरा इनको

2009
02:21:41,360 --> 02:21:45,520
हम ये पढ़ा है मैंने तो ये क्या है कई दिनों के बाद जब मैंने दोबारा

2010
02:21:45,520 --> 02:21:49,920
इनसे संपर्क किया निर्गुण सगुण वाले वीडियो का क्या हुआ

2011
02:21:49,920 --> 02:21:54,000
तो इन्होंने मुझे फोटो भेजी जो सत्यार्थ प्रकाश में जो पेज है जहां

2012
02:21:54,000 --> 02:21:58,080
पर निर्गुण सगुण की बात दयानंद जी ने कही है जो कि मेरे हिसाब से

2013
02:21:58,080 --> 02:22:02,080
कुतर्क है और कुछ नहीं वो फोटो इन्होंने मुझे भेज दी तो मैंने क्या कहा ये पढ़ा पढ़ा है

2014
02:22:02,080 --> 02:22:06,160
मैंने। मैं उसको पढ़ने के बाद तुमसे कह रहा हूं। तुम ये बात अपने लोगों को बताओ

2015
02:22:06,160 --> 02:22:10,160
जिससे तुम जब बनाओगे तब तुम्हें खुद दिक्कत होगी कि मैं क्या बताऊं इस बारे में।

2016
02:22:10,160 --> 02:22:14,240
समझ रहे हो आप? भाई मेरे से तो तुम भाई हूं तुम्हारा बड़ा

2017
02:22:14,240 --> 02:22:18,320
तो तुमने यहां पे मुंह चलाया। ये सब कह दिया इच्छा है। इच्छा है इच्छा है। तो

2018
02:22:18,320 --> 02:22:22,480
मैंने क्या कहा? ये पढ़ा है मैंने। आप वीडियो बना दो इस पर।

2019
02:22:22,480 --> 02:22:26,560
यह प्रश्न मैंने वीडियो और मैंने यह भी बताया कि यह प्रश्न मैंने वीडियो में भी कई

2020
02:22:26,560 --> 02:22:30,720
बार बोला है। फिर मैं देख लूंगा जो फाइनली आपका पक्ष क्या

2021
02:22:30,720 --> 02:22:34,800
है। जब भी समय मिले तब बना देना कोई जल्दी नहीं है। बस बस

2022
02:22:34,800 --> 02:22:40,000
करो बस करो। ठीक है। हां।

2023
02:22:40,000 --> 02:22:44,000
ठीक है। तो ये देखिए कि आज तक क्या निर्भय

2024
02:22:44,000 --> 02:22:48,080
आर्य के फॉलोअ और आर्य समाजियों के फॉलोअर को या संदीपन आर्य

2025
02:22:48,080 --> 02:22:52,320
संदीपन रॉय के फॉलोअर को आज तक निर्गुण सगुण का वीडियो मिला है। निर्गुण सगुण

2026
02:22:52,320 --> 02:22:56,320
पर बात की है क्या निर्भय ने कभी क्यों नहीं कर रहा है क्योंकि उसको मालूम वहां

2027
02:22:56,320 --> 02:22:56,880
धाराशाही

2028
02:22:56,880 --> 02:23:00,880
है उसका पक्ष ठीक दूसरी बात अब आ

2029
02:23:00,880 --> 02:23:05,040
जाती है जो हमने जो बात कही इनसे कि भैया अभी

2030
02:23:05,040 --> 02:23:09,040
जब लास्ट टाइम जब हमने वो किया इनको अप्रोच किया कि चर्चा करते

2031
02:23:09,040 --> 02:23:13,040
फिर उन्होंने इस तरीके का घमंड पूर्वक वीडियो बनाया जो बिल्कुल

2032
02:23:13,040 --> 02:23:17,200
भी अच्छा नहीं लगा उसके बाद जब मैंने उसको देखा उसमें वो वो पक्ष अभी

2033
02:23:17,200 --> 02:23:21,200
देखा ही नहीं था कि इन्होंने परंपरा के लिए क्या कहा है पुराण के लिए क्या कहा

2034
02:23:21,200 --> 02:23:25,280
है? करपात्री जी महाराज के लिए क्या कहा है? मुक्तेश्वर जी के लिए

2035
02:23:25,280 --> 02:23:29,760
क्या कहा है? कुछ जानते नहीं हो तो चुप रहो ना भाई। ज्यादा

2036
02:23:29,760 --> 02:23:34,640
पॉलिटिक्स में कूदने की जरूरत है क्या? नहीं जानते हो मौन रहो।

2037
02:23:34,640 --> 02:23:38,800
ठीक है? तो फिर मैंने जब इनका ये रुख देखा तो मैंने

2038
02:23:38,800 --> 02:23:43,040
इनको भेजा। एक लंबा सा इनके सारे उत्तर भेज दिए। जो सब अभी संदीप नार इत्यादि

2039
02:23:43,040 --> 02:23:47,120
के बारे में बोला है। सब कुछ बोल दिया। उसके बाद लास्ट में मैंने क्या कहा? मैंने कहा मैं एक

2040
02:23:47,120 --> 02:23:51,200
काम करता हूं। तुम्हारे मेरे बीच जो सैद्धांतिक चर्चा हुई है, रिकॉर्डिंग हुई है, उसको

2041
02:23:51,200 --> 02:23:55,440
मैं रिलीज कर देता हूं। ठीक है? उसको रिलीज कर देता

2042
02:23:55,440 --> 02:23:59,440
हूं। और उसमें से जो हमारी जो व्यक्तिगत बातें हुई है, परिवार

2043
02:23:59,440 --> 02:24:03,680
में कौन-कौन है, क्या है, कैसे रहते हैं? यह सब बातें हम काट देंगे। सैद्धांतिक

2044
02:24:03,680 --> 02:24:08,000
बात नहीं काटेंगे। मैं उसको रिलीज कर देता हूं। वो रिकॉर्डिंग मेरे पास सेफ है। दिखाओ

2045
02:24:08,000 --> 02:24:14,000
भैया वो मैसेज दिखाओ।

2046
02:24:24,240 --> 02:24:27,360
हम

2047
02:24:27,360 --> 02:24:31,360
ये देखो लास्ट लाइन में क्या कह रहा हूं कॉल ये बात इससे

2048
02:24:31,360 --> 02:24:35,360
नहीं इससे ऊपर का ऊपर लाओ हां इससे ऊपर जो मैसेज

2049
02:24:35,360 --> 02:24:40,320
है यह मैसेज जो है

2050
02:24:40,320 --> 02:24:44,400
क्या कहते हैं मैंने जो है यह

2051
02:24:44,400 --> 02:24:48,720
मैसेज वही वाला है जो अभी सारी बातें आप लोगों को मैंने बताई है। वही मैसेज

2052
02:24:48,720 --> 02:24:52,800
है। इसी में उसका अंत है यह। तो लास्ट में मैंने लिखा है कॉल पर हमारी जो

2053
02:24:52,800 --> 02:24:57,360
सैद्धांतिक चर्चा हुई है उसको मैं डाल देता हूं। बाकी आगे बाकी आगे देखा जाएगा।

2054
02:24:57,360 --> 02:25:03,360
ठीक है? अब इन्होंने क्या उत्तर दिया है इसके बारे में? नीचे लाओ।

2055
02:25:04,320 --> 02:25:08,480
और नीचे और नीचे वो वो वाला लाओ। और नीचे।

2056
02:25:08,480 --> 02:25:12,480
नहीं नहीं नहीं। हां। नीचे चलो। हां। यह कॉल

2057
02:25:12,480 --> 02:25:16,480
रिकॉर्डिंग कॉल रिकॉर्डिंग अपलोड वाले में मुझे आपत्ति है वह यह कि

2058
02:25:16,480 --> 02:25:20,800
आप अपने हिसाब से काट छाट कर प्रस्तुत कर सकते हैं। अतः मेरी इसमें सहमति

2059
02:25:20,800 --> 02:25:24,880
नहीं है। चर्चा करना हो तो जनता के सामने होना ही ठीक है। ठीक है। अब पहली

2060
02:25:24,880 --> 02:25:29,120
बात है कि यही बात दोबारा आ गई। काट छांट कर प्रस्तुत कर सकते हैं। तो भाई तुमने

2061
02:25:29,120 --> 02:25:33,200
चर्चा की क्यों थी? अच्छा रिकॉर्डिंग हो रही है। यह बात भी इनको मालूम

2062
02:25:33,200 --> 02:25:37,280
है। रिकॉर्डिंग हो रही है। यह बात भी इनको मालूम है। उस रिकॉर्डिंग में ये बात

2063
02:25:37,280 --> 02:25:41,360
आएगी। रिकॉर्डिंग हो रही है। दूसरी बात यह है इन्होंने एक तर्क और

2064
02:25:41,360 --> 02:25:45,520
दिया है। मैं अभी स्क्रीनशॉट नहीं लिया है। उसमें इन्होंने यह भी किया है कि

2065
02:25:45,520 --> 02:25:49,680
मैं अपने सारे तर्क नहीं दे पाया था। कॉल रिकॉर्डिंग में मैं अपने

2066
02:25:49,680 --> 02:25:53,760
सारे तर्क नहीं दे पाया था। तो इसका मतलब तुम ये मान रहे हो कि कॉल रिकॉर्डिंग में

2067
02:25:53,760 --> 02:25:57,760
तुम्हारा पक्ष परास्त हो गया। तर्क ना दे पाने के

2068
02:25:57,760 --> 02:26:01,760
कारण। पहली बात। दूसरी बात कि तुम्हें जहां पर तुम तर्क

2069
02:26:01,760 --> 02:26:05,840
नहीं दे पा रहे हो। तुम कहो कि मैं तर्क और लेकर के आऊंगा। वहां अड़ो मत। वहां तुमने बोला भैया

2070
02:26:05,840 --> 02:26:10,160
मैं तर्क और लेकर के आऊंगा। नहीं बोला वहां तो तुम इच्छावान है। इच्छावान

2071
02:26:10,160 --> 02:26:14,400
है। इच्छावान है। करके अड़े रहे। दूसरी बात तीसरी

2072
02:26:14,400 --> 02:26:18,400
बात क्या है कि इस तरीके से तो हर व्यक्ति कह सकता है चर्चा में हार

2073
02:26:18,400 --> 02:26:19,360
जाने के बाद कि

2074
02:26:19,360 --> 02:26:23,360
मैं उस समय अपने सारे तर्क नहीं रख पाया था। लो भाई तुम सोचते हो कि मैं पंचा की वजह

2075
02:26:23,360 --> 02:26:27,360
से आ रहा हूं तो अपने ही सिद्धांत को वहां लगा लो। अगर तुम ये सोचते हो मैं तो

2076
02:26:27,360 --> 02:26:31,600
हारा ही नहीं हूं। तुम अगर ये सोचते हो तो अपने सिद्धांत को लगा लो। हां।

2077
02:26:31,600 --> 02:26:35,600
ये क्या बात हुई? मैं तर्क नहीं रख पाया था। आर्य समाज की ओर से थे

2078
02:26:35,600 --> 02:26:40,720
अगर तुम तो वहां तुम्हारा सिद्धांत वीक पड़ा था निर्भय ना ऑन कॉल

2079
02:26:40,720 --> 02:26:44,880
तर्क ना रख पाने की वजह से तुम जो है चर्चा को ना दिखाने का प्रयास कर रहे हो

2080
02:26:44,880 --> 02:26:49,120
और कॉल रिकॉर्डिंग मैं काट छाट के करूंगा तो तुम तुमने भी तो की

2081
02:26:49,120 --> 02:26:53,200
है इन्होंने ये भी कहा है कि मेरे पास भी है मैं भी कर रहा हूं ये भी

2082
02:26:53,200 --> 02:26:57,360
उसमें आ जाएगा रिकॉर्डिंग कॉल रिकॉर्डिंग तो तुम्हारे

2083
02:26:57,360 --> 02:27:01,360
पास भी तो है अगर हम काट छाट के दिखाएंगे तो तुम दिखा देना असली वाला तो अब

2084
02:27:01,360 --> 02:27:05,600
जितने भी फॉलोअर्स हैं निर्भय आर्य के वो पूछे

2085
02:27:05,600 --> 02:27:09,760
निर्भय से कि भैया ऐसा क्या हो गया है जो आप कॉल रिकॉर्डिंग सुनाने

2086
02:27:09,760 --> 02:27:13,760
से मना कर रहे हो सुनाने दो ना क्या छिपाना है

2087
02:27:13,760 --> 02:27:18,000
क्या दिक्कत है कॉल रिकॉर्डिंग से भाई भाई जब मैं तुमसे पूछ रहा हूं

2088
02:27:18,000 --> 02:27:22,160
कि भैया निर्गुण सगुण कैसे हुआ तो जनता को सुनने दो ना तुम्हारा क्या जवाब है

2089
02:27:22,160 --> 02:27:26,160
उसमें काहे की काट छाट जनता को सुनने दो ना तुम्हारा

2090
02:27:26,160 --> 02:27:31,840
क्या जवाब है तो जितने लोग ये घूम रहे हैं चक्कर में

2091
02:27:31,840 --> 02:27:34,480
निर्भय निर्भय निर्भय जितने लोग घूम रहे

2092
02:27:34,480 --> 02:27:38,800
हैं वो निर्भय से जाके कहे कॉल रिकॉर्डिंग जारी करने की अनुमति प्रदान

2093
02:27:38,800 --> 02:27:42,880
करो। छोड़ दो दे दो मेरी कॉल रिकॉर्डिंग जारी

2094
02:27:42,880 --> 02:27:46,880
कर दो। और उसने उसने भी की थी कॉल रिकॉर्डिंग तो

2095
02:27:46,880 --> 02:27:50,880
उसको क्या दिक्कत है? कैसे काट दूं? मैं सिर्फ इतना काटूंगा जो मुझे लगेगा कि

2096
02:27:50,880 --> 02:27:54,880
यहां पर्सनल हो रहे हैं हम लोग। तो पर्सनल चीजों को हम काट

2097
02:27:54,880 --> 02:27:59,040
देंगे पर्सनल जानकारियों को। और भाई तुम सैद्धांतिक चर्चा

2098
02:27:59,040 --> 02:28:03,120
कर क्यों रहे हो? जब तुम्हें विश्वास नहीं है ऑन कॉल क्यों कर रहे हो

2099
02:28:03,120 --> 02:28:07,200
फिर या तो इतना विश्वास करो कि जिससे कर रहा हूं वो ऐसा ऐसा धोखा

2100
02:28:07,200 --> 02:28:11,200
नहीं करेगा ये क्या बात हुई या तो तुम धोखेबाज समझ

2101
02:28:11,200 --> 02:28:15,200
लो या फिर विश्वास पात्र समझ लो विश्वास पात्र है तो फिर धोखे की अपेक्षा

2102
02:28:15,200 --> 02:28:19,440
मत करो और धोखेबाज है तो विश्वास पात्र मत समझो ठीक है तो जितनी

2103
02:28:19,440 --> 02:28:23,440
जनता घूम रही है कि निर्भय ने निर्भय जीत गए निर्भय जीत गए वो जाके पूछे निर्भय

2104
02:28:23,440 --> 02:28:27,520
से कॉल रिकॉर्डिंग के लिए मना क्यों किया है छिपाता वो है जो

2105
02:28:27,520 --> 02:28:31,920
हारा होता है छिपाता वो नहीं जो जीता होता है।

2106
02:28:31,920 --> 02:28:36,400
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो किसी निर्भय के चक्कर में। मत पड़ो किसी संदीपन

2107
02:28:36,400 --> 02:28:40,480
रॉय के चक्कर में। मत पड़ो ऋषि मंतव्य इत्यादि के चक्कर में कोई

2108
02:28:40,480 --> 02:28:44,560
नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं। ठीक है। हां जी आप लोग अब

2109
02:28:44,560 --> 02:28:48,800
अपनी बात बता दे कुछ। बिल्कुल बिल्कुल आपने तो पूरा क्लियर कर दिया। काफी जो आपकी

2110
02:28:48,800 --> 02:28:49,680
जो वन

2111
02:28:49,680 --> 02:28:53,760
टू वन बात हुई है। उसको मतलब बताना जरूरी था

2112
02:28:53,760 --> 02:28:58,400
क्योंकि जो भी पीछे बातें हुई थी ये जनता को तो नहीं पता उनको तो वही पता है जो

2113
02:28:58,400 --> 02:29:02,480
सबके सामने जो लाइव में डिस्कशन हुआ है और इसको जो तीर तीस मार खान

2114
02:29:02,480 --> 02:29:06,560
समझ रहे हैं तो इतना कोई तीस मार खान है नहीं जितना आप समझ रहे

2115
02:29:06,560 --> 02:29:10,640
हो क्योंकि जब ऑलरेडी इस पर काफी बातें हो ही

2116
02:29:10,640 --> 02:29:15,440
चुकी है इस लाइव स्ट्रीम में भी इसमें भी हो चुकी है और उसमें भी हो चुकी है

2117
02:29:15,440 --> 02:29:19,520
जिसको भी भ्रम है जो अभी भी भ्रम में जीना चाहता है भैया वो स्वतंत्र

2118
02:29:19,520 --> 02:29:23,680
है उसको तो कुछ कर ही नहीं सकते जितने लोगों को

2119
02:29:23,680 --> 02:29:27,840
है पहली बात तो यह है कि अब चर्चा उसके यहां जाकर के तो होगी नहीं। हां,

2120
02:29:27,840 --> 02:29:31,920
यह जरूर हो सकता है कि मैं कभी ऐसी जगह से निकलूू जहां निर्भय हो। वैसे मुझे अब मन

2121
02:29:31,920 --> 02:29:36,000
नहीं है उससे चर्चा करने का। जो मैंने उसके वो वाली बातें सुन ली ना जो शुरू में उसने कही

2122
02:29:36,000 --> 02:29:40,160
है। परंपरा को छील दूंगा, ये कर दूंगा, वो कर दूंगा। सबसे पहले अद्वैत को नष्ट

2123
02:29:40,160 --> 02:29:44,400
करूंगा। तू कर लेना भाई तेरे में जितना दम हो। ठीक है? अब एक अद्वैती

2124
02:29:44,400 --> 02:29:48,640
बात कर रहा है तुझसे। शंकर परंपरा का सैनिक बात कर रहा है। कर ले। और

2125
02:29:48,640 --> 02:29:52,720
तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो कि हम तुम्हारे चैनल पे आए। तुम भाई होते तो हम तुम्हारे चैनल पे

2126
02:29:52,720 --> 02:29:57,120
जरूर आ जाते। पर वो वो चीजें तुमने खत्म कर दी अपना घमंड दिखा करके

2127
02:29:57,120 --> 02:30:01,280
अपना जो है झूठा अहंकार खोखले हो तुम निरत्तर हो रहे हो कॉल

2128
02:30:01,280 --> 02:30:05,600
की चर्चा में वहां जाकर के डंका पीट रहे हो मैं बहुत बड़ी गन मशीन हूं

2129
02:30:05,600 --> 02:30:09,680
बताइए दूसरे की उदारता का ये

2130
02:30:09,680 --> 02:30:13,680
परिणाम मिलता है उसे बड़े भाई की तरीके से तुम्हारी केयर कर रहा हूं

2131
02:30:13,680 --> 02:30:17,920
शब्दों की मर्यादा रख रहा हूं तो तुम ये करोगे जा कर के कि मेरी

2132
02:30:17,920 --> 02:30:22,320
मेरी गरज हो गई तुम्हारे यहां आने की आना है तो मेरे चैनल पे आओ और उनसे संदीपन

2133
02:30:22,320 --> 02:30:26,400
जी से माफी मांगो ये है वो है ढिमका। वाह ये

2134
02:30:26,400 --> 02:30:30,400
मुझे उम्मीद नहीं थी निर्भय तुमसे।

2135
02:30:30,400 --> 02:30:34,400
हम नहीं नहीं नहीं ये तो है धोखा है। फरेब है धोखा है। फरेब है।

2136
02:30:34,400 --> 02:30:38,400
अच्छा इन्होंने ये मैं देखता हूं हमेशा ये लोग फरेब और ये

2137
02:30:38,400 --> 02:30:42,560
सब पता नहीं कहां से सीखते हैं कि कुछ जो चीज है उसको वैसे ना दिखाकर। हमारे

2138
02:30:42,560 --> 02:30:46,720
अंदर यह नहीं है। हम वही दिखाएंगे जो हमने बोला होगा। जो हमारी बात हुई होगी

2139
02:30:46,720 --> 02:30:50,720
हम वही बताएंगे। इनके में पता नहीं कहां से यह चीज आती है कि

2140
02:30:50,720 --> 02:30:55,120
निर्भय अपनी लाइन में कहता है कि मैं तो

2141
02:30:55,120 --> 02:30:59,520
आप आप भाई भाई कहते हो आप भाई का वो दिखाओ ना भाई तुम्हारे

2142
02:30:59,520 --> 02:31:03,840
बारे में जब भी बातें हुई है ना लाइव में तो होता क्या है कि सैद्धांतिक विरोध

2143
02:31:03,840 --> 02:31:08,080
है सैद्धांतिक विरोध होते हुए मैं बात को रख रहा हूं और उसमें तुम्हारी बात है तो

2144
02:31:08,080 --> 02:31:12,640
पहले क्या है कि तुम छोटे भाई हो ना तुम्हारे लिए तू तड़ाग निकला

2145
02:31:12,640 --> 02:31:16,640
ठीक है अब छोटा भाई है तो तू तड़ाग सैद्धांतिक विरोध के साथ तू तड़ाक निकल

2146
02:31:16,640 --> 02:31:20,720
गया तो इक्वल टू क्या है अपमान समझ रहे हो आप

2147
02:31:20,720 --> 02:31:24,720
इस वजह से ऐसा लगा इस वजह से ऐसा लग सकता है कि भैया

2148
02:31:24,720 --> 02:31:28,800
अपमान हो गया। मगर फिर मैं कोशिश करता हूं उसको सही करने की कि कहीं

2149
02:31:28,800 --> 02:31:32,960
इसको अपमानित ना लगे। मैं करता हूं अपनत्व से। तू तड़ाक क्यों आया?

2150
02:31:32,960 --> 02:31:36,960
क्योंकि छोटा है। तो तू तड़ाक आ गया। और सिद्धांतिक विरोध

2151
02:31:36,960 --> 02:31:40,960
है तो सिद्धांतिक विरोध के साथ जब वो छोटे भाई होने के कारण

2152
02:31:40,960 --> 02:31:46,960
तू तड़ाक आया तो वो ऐसा लग सकता है कि अपमानजनक।

2153
02:31:46,960 --> 02:31:51,040
तो उसको समझो ना अपने भाई से। अगर तुम भाई कहते हो, भैया कहते हो, बड़े भैया कहते

2154
02:31:51,040 --> 02:31:55,200
हो, समझो ना। बड़े भैया को उसका उनका पक्ष रखने का समय तो दो।

2155
02:31:55,200 --> 02:31:59,200
तुमने अपने आप ही डिसाइड कर लिया कि मैं समझता नहीं हूं क्या? तो

2156
02:31:59,200 --> 02:32:03,360
फिर मैं भी कह सकता हूं मैं समझता नहीं हूं क्या? वो तुम्हारी जो ऑडियो रिकॉर्डिंग है वो तुम्हारी है।

2157
02:32:03,360 --> 02:32:06,800
ये क्या बात हुई भाई?

2158
02:32:06,800 --> 02:32:10,800
विश्वास कहां है? विश्वास जो रिश्ते होते हैं ना वो विश्वास

2159
02:32:10,800 --> 02:32:15,120
की मिट्टी से बनते हैं। जो घर होता है विश्वास की मिट्टी

2160
02:32:15,120 --> 02:32:19,920
से बनता है। जहां विश्वास नहीं है वो रिश्ते नहीं है वो घर नहीं है।

2161
02:32:19,920 --> 02:32:24,000
हम हम बिल्कुल बिल्कुल हां जी आपसे तो आपसे

2162
02:32:24,000 --> 02:32:28,400
तो बातचीत अच्छे तरीके से हो रही थी। ऐसा तो था नहीं कि भाई कोई

2163
02:32:28,400 --> 02:32:33,120
उसमें ऐसी कोई बात हो रही थी। वहां पर भी यह लोग वो

2164
02:32:33,120 --> 02:32:35,840
जो था ना पहले से सोच लेना किसी चीज को प्रीजज

2165
02:32:35,840 --> 02:32:40,160
कर लेना। हम तो अच्छे तरीके से वार्ता

2166
02:32:40,160 --> 02:32:44,240
तभी हो पाती है जब आप ऐसी चीजें नहीं करते हो प्रीजज नहीं करते हो चीजों को है

2167
02:32:44,240 --> 02:32:48,400
ना आपने कहा मैंने इमीडिएटली वो पोस्ट डाल दी थी हालांकि मैं वहां कहीं किसी

2168
02:32:48,400 --> 02:32:52,400
कार्य में व्यस्त था तो मैंने उसको लिखा पूरा मैंने कहा ये ये पॉइंट

2169
02:32:52,400 --> 02:32:56,480
जरूर लिखने हैं उसमें सारी चीजें लिखी हमने क्षमा मांगी भैया जहां दयानंद जी ने लिखा

2170
02:32:56,480 --> 02:33:00,640
था दयानंद जी का अपमान हो गया ऐसा आपको लगा

2171
02:33:00,640 --> 02:33:04,880
तो अच्छा मैंने वो पोस्ट भी डिलीट कर दी ऐसा नहीं कि वो पोस्ट अभी भी मेरे

2172
02:33:04,880 --> 02:33:08,960
उस पे है मैंने वो पोस्ट भी डिलीट कर दी क्योंकि हमें वह करना ही नहीं है भाई ऐसी

2173
02:33:08,960 --> 02:33:13,040
चीज शुरुआत ही थी वह शुरुआत जब थी तब तब की पोस्ट थी अब

2174
02:33:13,040 --> 02:33:18,000
तो मैं ऐसी पोस्ट अच्छा ऐसे हम जब भी अच्छा अभी भी आप देखोगे जो

2175
02:33:18,000 --> 02:33:22,080
जो भी मैं पोस्ट कर रहा हूं इनके ये जब कुछ बोलते हैं ऐसी चीज हमारे

2176
02:33:22,080 --> 02:33:26,080
आचार्यों के विरुद्ध में तब वहां पर भाषा की मर्यादा का मैं बड़ा ध्यान

2177
02:33:26,080 --> 02:33:30,720
रखता हूं कि भैया ऐसी तो कोई बात तो नहीं लिख दी है लेकिन इनकी पोस्ट देखो

2178
02:33:30,720 --> 02:33:35,280
तू कर ले क्या करना है देखते हैं धम जैसे किसी को उकसाते हैं ना

2179
02:33:35,280 --> 02:33:39,680
किसी को प्रोवोक करते हैं। ज्यादातर फड़ होते हैं।

2180
02:33:39,680 --> 02:33:44,800
ज्यादातर फड़ टाइप के होते हैं। इनके यहां धर्म है नहीं।

2181
02:33:44,800 --> 02:33:49,120
दर्शन विज्ञान व्यवहार का सामंजस्य है नहीं। फड़ टाइप के होते हैं। सोचते हैं हमने बहुत

2182
02:33:49,120 --> 02:33:50,880
ये रट लिया है कुछ तो बहुत बड़ी

2183
02:33:50,880 --> 02:33:53,840
तोप हो गए।

2184
02:33:53,840 --> 02:33:58,000
मैं तो यही कह रहा हूं कि भैया हमारे जो अगर कंटेंट को यूज़ करना है तो उसको

2185
02:33:58,000 --> 02:34:02,240
सही तरीके से ये मैं वहां कह रहा हूं। यह कह रहा है नहीं तुझे पुलिस पुलिस में जा तू

2186
02:34:02,240 --> 02:34:06,560
वो कर देखते हैं मैं आपको दिखाऊं अगर इसका इनके

2187
02:34:06,560 --> 02:34:10,560
चैनल पे जो अभी भी पोस्ट रखी हुई है उसमें कैसी भाषा की यूज की

2188
02:34:10,560 --> 02:34:14,880
हुई है तो करते हैं ना कानूनी कवाई तुम्हें किसने

2189
02:34:14,880 --> 02:34:19,040
रोका था संजीव शर्मा अवतारियों रियल नाम

2190
02:34:19,040 --> 02:34:21,360
से आओ

2191
02:34:21,360 --> 02:34:25,360
अब अच्छा लीगल लीगल खेलना है तो लीगल नाम

2192
02:34:25,360 --> 02:34:29,520
से आओ बताओ तुम्हारा अच्छा तुम लोग क्या लीगल नाम

2193
02:34:29,520 --> 02:34:33,520
से बैठे हो वहां पर ऋषि मंतव्य क्या है बताओ मेरे को और तुमने

2194
02:34:33,520 --> 02:34:37,520
अपने नाम के पीछे जो आर्य लगाया है क्या यही आर्य नाम तुम्हें तुम्हारे जो

2195
02:34:37,520 --> 02:34:41,760
माता-पिता थे उन्होंने दिया था बचपन में अपना जो आधार

2196
02:34:41,760 --> 02:34:46,000
कार्ड दिखा देना कभी मैं भी दिखा दूंगा तो वहां पर पता चल जाएगा कि कौन रियल

2197
02:34:46,000 --> 02:34:50,080
नाम से है और कौन रियल नाम से नहीं है तो इन इस तरह की बातें नहीं करनी

2198
02:34:50,080 --> 02:34:54,160
है वहां पर आप सीधा लिखते हैं कि ठीक है जी आपने हमारी वीडियो पे

2199
02:34:54,160 --> 02:34:58,960
अगर स्ट्राइक लगाई है अगर आप यह बोलते हो कि ठीक है आपने गलत लगाई है आप मत लगाइए

2200
02:34:58,960 --> 02:35:02,960
हम आपके वीडियो को सही तरीके से पेश करेंगे तो मैं क्यों उस

2201
02:35:02,960 --> 02:35:05,920
पर करता जब आपने गलत तरीके

2202
02:35:05,920 --> 02:35:10,160
से पेश किया तभी तो जी इसमें इसमें मुझे

2203
02:35:10,160 --> 02:35:14,240
इसमें मुझे दो तीन बातें इसने मैसेज करके कही कि भैया लाइव में आपने मुझे

2204
02:35:14,240 --> 02:35:18,320
हटाने के बाद ये खुद कहा था कि जो है मैं तैयारी

2205
02:35:18,320 --> 02:35:22,480
करके आ जाऊं। तो भाई जो शब्द तुम रट के आए हो उस शब्द की तैयारी करके आऊं।

2206
02:35:22,480 --> 02:35:27,520
अवतार की तैयारी तो अभी है ना। तुम उस शब्द को खोलो।

2207
02:35:27,520 --> 02:35:31,520
उस शब्द को खोलो। मेरे पास पंचाव के अंदर जो सामग्री मांगी जा

2208
02:35:31,520 --> 02:35:35,520
रही है वह नहीं है। ऐसा नहीं है। पंचाव क्या है? यह तो बताना पड़ेगा ना तुम्हें

2209
02:35:35,520 --> 02:35:39,520
अगर मुझे नहीं मालूम है तो। मैं तुम्हें कोई ऐसा शब्द दे दूंगा जो

2210
02:35:39,520 --> 02:35:43,520
तुम्हें नहीं मालूम होगा। तुमने सारी किताबें रट ली है क्या? दे दूंगा तुम्हें कोई

2211
02:35:43,520 --> 02:35:48,800
ना कोई ऐसा शब्द। बिना गूगल किए और तुम नहीं कर पाओगे उसका।

2212
02:35:48,800 --> 02:35:52,880
बिल्कुल बिल्कुल बहुत सारी चीजें हैं। न्याय शास्त्र में बहुत सारे ऐसे भाई कहां

2213
02:35:52,880 --> 02:35:56,880
पर भाई देखो पंचाव का मतलब शाब्दिक क्या है? जिस

2214
02:35:56,880 --> 02:36:01,600
पंच अवयव यही तो हुआ पंचाव का जिसमें

2215
02:36:01,600 --> 02:36:05,680
मतलब पांच प्रकार की सामग्री हो तो ये तो शाब्दिक अर्थ हो गया। अब कहां पे वो किस लिए

2216
02:36:05,680 --> 02:36:11,440
यूज़ हो रहा है ये तो तुम सामने वाले को बताओ ना। अच्छा

2217
02:36:11,440 --> 02:36:15,520
फिर इन्होंने एक बात कही उदारता की कि उदारता को कायरता समझने के

2218
02:36:15,520 --> 02:36:20,560
लिए समझने की तो आप भी इसमें पीछे नहीं रिप्लाई देने का समय क्यों लग रहा है?

2219
02:36:20,560 --> 02:36:21,200
समय

2220
02:36:21,200 --> 02:36:25,600
मांगने समय करने की बात इसलिए कही थी क्योंकि तुमने फर्स्ट ऑफ ऑल तुमने

2221
02:36:25,600 --> 02:36:29,600
किया था ₹1000 का ऐलान तुमने किया था और

2222
02:36:29,600 --> 02:36:33,600
जिस पक्ष के लिए तुम कर रहे थे उसमें मैं भी था और तुमने अपने ऐलान

2223
02:36:33,600 --> 02:36:38,080
में यह भी कहा था कि जो है वो कांग्रेसी वो ये

2224
02:36:38,080 --> 02:36:42,160
राजनीतिक बातें कहीं अखिलेश इसलिए मुझे कटाक्ष करना था क्यों किया

2225
02:36:42,160 --> 02:36:48,160
था केवल धार्मिक रहते ना राजनीतिक तो तुम हुए

2226
02:36:48,320 --> 02:36:53,760
हम अच्छा

2227
02:36:53,760 --> 02:36:57,920
इनको अगर वाकई में चैलेंज देना था तो ऐसा सीधा लिखते ना शंकराचार्यों

2228
02:36:57,920 --> 02:37:02,080
के शिष्यों को चैलेंज है ये कांग्रेस और अखिलेश की

2229
02:37:02,080 --> 02:37:06,160
परंपरा वाले बताओ और खुद को इन्होंने बीजेपी

2230
02:37:06,160 --> 02:37:11,040
वाला सिद्ध कर दिया तो यहां कोई पार्टी का वो चल रहा है क्या हम

2231
02:37:11,040 --> 02:37:15,200
यहां कोई राजनीतिक पार्टी की आपस की वार्ता चल रही थी क्या अगर आपको सही

2232
02:37:15,200 --> 02:37:19,920
तरीके और ऐसे इस भाषा में कभी भी किसी को

2233
02:37:19,920 --> 02:37:24,000
चुनौती नहीं दी जाती है। जिस भाषा में तुम चुनौती देते हो। चुनौती

2234
02:37:24,000 --> 02:37:28,160
देने की जो भाषा है वह सभ्य होनी चाहिए। अगर आप चाहते हो कि वहां पर सभ्य

2235
02:37:28,160 --> 02:37:32,240
वार्ता हो। अपनी जीत का दावा आपने वार्ता से पहले ही कर रखा

2236
02:37:32,240 --> 02:37:38,240
है तो वो तुम्हारा बहुत बड़ा भ्रम है। हम

2237
02:37:38,960 --> 02:37:42,960
मेरे को तो शिवश जी रोकते हैं। ये तो शिवश जी कहते हैं कि मत मत जाओ नहीं तो

2238
02:37:42,960 --> 02:37:46,960
मैं तो एक दो बार इनके चैनल पे भी गया था। एक बार गया भी था। अच्छा उस

2239
02:37:46,960 --> 02:37:50,960
वक्त एक व्यक्ति बैठ के बात कर रहा था। जैसे मैं वहां पर इनकी लाइव में जुड़ा

2240
02:37:50,960 --> 02:37:56,080
कम से कम चार पांच लोग इकट्ठे आ गए। इकट्ठे हो गए।

2241
02:37:56,080 --> 02:38:00,240
अच्छा फिर अभद्रता भी करने लगे। मेरा मेरा ऑडियो कुछ वहां पर वो

2242
02:38:00,240 --> 02:38:04,640
हो गया डिस्कनेक्ट तो वहां पर अभद्रता करने लगे तो

2243
02:38:04,640 --> 02:38:08,800
एक एक बात और है। मैं जिनके पास जाता हूं जिनके पास जाता

2244
02:38:08,800 --> 02:38:12,800
हूं यदि वो बिल्कुल ही गंगू तेली हैं। उनको कुछ नहीं मालूम। जैसे वो

2245
02:38:12,800 --> 02:38:17,840
इंटरव्यू वाली बात है ना तो भाई वो यह सब चिल्लाते क्यों हैं?

2246
02:38:17,840 --> 02:38:23,120
रटा रटाया ज्ञान क्यों चिल्लाते हो? उनसे कहो चिल्लाना बंद करें।

2247
02:38:23,120 --> 02:38:29,120
या तो जो वो कह रहे हैं उसको साबित करें।

2248
02:38:32,160 --> 02:38:38,160
बिल्कुल ठीक है तो सारे हो गए हैं।

2249
02:38:38,640 --> 02:38:42,720
संदीपन रॉय खुद महेंद्र पाल आर्य के साथ वो जो मौलाना है कन्व्टेड

2250
02:38:42,720 --> 02:38:46,960
हिंदू जिसको ये लोग गुरु बनाकर बिठाए उनके साथ बैठकर बहुत अपमान

2251
02:38:46,960 --> 02:38:51,200
करते हैं। कर वो व्यक्ति करता है। महेंद्रपाल आर्य बहुत अपमान

2252
02:38:51,200 --> 02:38:55,200
किया। कल भी किया है। कल भी किया है उन्होंने। शायद कल एक लाइव किया है कि राम

2253
02:38:55,200 --> 02:38:59,440
जो है ईश्वर के अवतार नहीं है। राम महापुरुष हैं। कल भी उन्होंने इन्हीं सब बातों

2254
02:38:59,440 --> 02:39:03,520
को लेकर कुछ बातें करी हैं। ये करते ही रहते हैं अपने चैनल पर

2255
02:39:03,520 --> 02:39:08,000
और कहते हैं दावा क्या करते हैं? मैंने शंकराचार्यों को हराया हुआ है शास्त्रार्थ

2256
02:39:08,000 --> 02:39:12,000
में। मेरे सामने टिक नहीं पाएंगे।

2257
02:39:12,000 --> 02:39:18,000
पता नहीं कहां पर हराया हुआ है। कौन सी उसमें इन्होंने बातें करी हैं।

2258
02:39:18,400 --> 02:39:22,480
हमारे आचार्य इन लोगों ने इन लोगों

2259
02:39:22,480 --> 02:39:26,480
ने जो है खूब खूब अच्छे से अपमान किया है। आज इनको

2260
02:39:26,480 --> 02:39:30,480
कोई मिल गया है ऐसा जिसकी वजह से इनको सुधरना पड़ रहा है। तो ये निग्रह हो रहा

2261
02:39:30,480 --> 02:39:36,480
है इनका।

2262
02:39:36,720 --> 02:39:42,720
चलिए ठीक है। बहुत बढ़िया रहा। शास्त्रवाल जी आप कुछ कहना चाहेंगे?

2263
02:39:44,960 --> 02:39:48,960
बहुत बढ़िया आपने लिखाया भैया बहुत सारे संशय लोगों को दूर हो गए

2264
02:39:48,960 --> 02:39:53,280
होंगे इस विषय को लेकर के और निर्भय को अपना उत्तर

2265
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मिल गया होगा।

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सबको ही मिल गया होगा जो भी ये इनके समर्थक हैं उनको भी जवाब जरूर मिल गया होगा

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इस बात पर। ठीक है। तो किरण जी आप बोले किरण जी कहां

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चले गए? चले गए क्या? चले गए। ठीक है। फिर

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सभी को समय देने के लिए बहुत-बहुत आभार कि

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अरे भाई मैं ना कांग्रेसी हूं ना बीजेपी वाला हूं ना सपा वाला हूं। मैं केवल शंकराचार्य

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का शिष्य हूं। अपने धर्म का धार्मिक हूं मैं। राम का भक्त हूं। बस

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और कुछ नहीं। भाड़ में जाए बीजेपी, भाड़ में जाए कांग्रेस और

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भाड़ में जाए क्या कहते हैं? सपा। जब तक वो धार्मिक

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धर्म का संरक्षक है कोई यह नाम इनमें से कोई भी नाम जब तक धर्म

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संगत है तब तक हम उनके अपने हैं जब जब धर्म संगत नहीं है तो मेरे

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लिए इनमें से कोई भी नाम कोई भी वैल्यू नहीं रखता है। ठीक है

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बिल्कुल बिल्कुल

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चलिए ठीक है फिर सभी को जय श्री राम जय श्री राम जी

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ओम
