1
00:00:01,520 --> 00:00:06,480
जय श्री राम सभी को आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:06,480 --> 00:00:10,240
और

3
00:00:10,240 --> 00:00:14,320
आज चर्चा में आने का विशेष कारण यही है कि जो

4
00:00:14,320 --> 00:00:18,320
हमारे आज आने वाले

5
00:00:18,320 --> 00:00:22,480
हैं इस चर्चा से जुड़ने वाले हैं वो थोड़ा सा उनको

6
00:00:22,480 --> 00:00:26,800
भी विलंब हो रहा था और हमें भी [गला साफ़ करने की आवाज़]

7
00:00:26,800 --> 00:00:30,880
ठीक है हम सबसे पहले उनको ले लेते हैं

8
00:00:30,880 --> 00:00:36,880
जय श्री राम।

9
00:00:36,880 --> 00:00:41,280
जय श्री राम। आपको आवाज आ रही है मेरी? जय श्री राम।

10
00:00:41,280 --> 00:00:46,400
मुझे मुझे बोल रहे हो? जी आप ही को बोलो।

11
00:00:46,400 --> 00:00:51,120
हां। अच्छा जय श्री राम। ओम शांति।

12
00:00:51,120 --> 00:00:55,120
जी महेंद्र जी। महेंद्र जी थोड़ा सा अपने बारे

13
00:00:55,120 --> 00:00:59,200
में एक छोटा सा एक संक्षिप्त परिचय दे दीजिए। ब्रह्मा कुमारी से कब से जुड़े

14
00:00:59,200 --> 00:01:04,480
हैं? कहां से जुड़े हैं? और राइट नाउ आपकी वर्तमान स्थिति क्या है?

15
00:01:04,480 --> 00:01:10,480
हां जी मैं ब्रह्मा कुमारी से 2015 से जुड़ा हूं।

16
00:01:11,520 --> 00:01:17,440
10 साल से ज्ञान

17
00:01:17,440 --> 00:01:22,880
अच्छा कहां कौन से वाले ब्रह्माकुमारी?

18
00:01:22,880 --> 00:01:27,040
वही मुंबई वाले मुंबई मुंबई

19
00:01:27,040 --> 00:01:31,200
में कहां मुंबई में भांडूप है

20
00:01:31,200 --> 00:01:36,240
भांडूप सेंटर भांडूप भांडूप सेंटर अच्छा हां

21
00:01:36,240 --> 00:01:40,640
ठीक है तो आपने हमारी जैसे कि बहुत सारी चर्चाएं

22
00:01:40,640 --> 00:01:45,360
देखी है तो मैं सीधे पॉइंट पर अगर आता हूं कि

23
00:01:45,360 --> 00:01:50,080
चलेगा

24
00:01:50,080 --> 00:01:53,920
कोई भी व्यक्ति स्पिरिचुअल से

25
00:01:53,920 --> 00:01:58,320
इसलिए जुड़ता है कि

26
00:01:58,320 --> 00:02:01,440
बल्कि

27
00:02:01,440 --> 00:02:07,360
ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार धर्म क्या है? ये थोड़ा सा बता दीजिए।

28
00:02:07,360 --> 00:02:11,360
अच्छा

29
00:02:11,360 --> 00:02:16,000
जब मैं इस संस्था में जुड़ा तो वैसे तो मैं

30
00:02:16,000 --> 00:02:20,080
थोड़ा थोड़ा बहुत जानता था कि जैसे कि

31
00:02:20,080 --> 00:02:23,120
सत्संग में आपके साथ क्या हुआ वो मत बताइए।

32
00:02:23,120 --> 00:02:27,920
ब्रह्मा कुमारीज का कंक्लूजन क्या है? धर्म क्या है? वो बता दीजिए।

33
00:02:27,920 --> 00:02:32,240
ठीक डायरेक्ट पॉइंट की बात करेंगे। चलो ठीक है।

34
00:02:32,240 --> 00:02:36,480
तो ब्रह्मा कुमारी के संस्था से धर्म का

35
00:02:36,480 --> 00:02:40,480
मतलब यह है कि हमारा स्वधर्म ही धर्म

36
00:02:40,480 --> 00:02:42,640
है।

37
00:02:42,640 --> 00:02:47,120
मैं लक्षण नहीं रूप नहीं मैं मैं पूछ रहा हूं

38
00:02:47,120 --> 00:02:52,000
कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार धर्म की आवश्यकता क्यों है

39
00:02:52,000 --> 00:02:56,400
किसी को? वही तो मैं धर्म धर्म के ब्रह्मा कुमारी के

40
00:02:56,400 --> 00:03:00,400
ज्ञान के मुझे जो मुझे जितना ज्ञान समझ में आया है उसी अनुसार आपसे बात कह रहा

41
00:03:00,400 --> 00:03:05,360
हूं कि मुझे धर्म की व्याख्या यही समझ में आई है कि

42
00:03:05,360 --> 00:03:11,360
आत्मा का जो स्वधर्म है वही हमारा सत्य धर्म है।

43
00:03:12,640 --> 00:03:17,120
आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं एक व्यक्ति सामने आपके खड़ा हुआ है।

44
00:03:17,120 --> 00:03:21,200
अभी तक तो वो यह भी नहीं जानता है कि मैं आत्मा हूं या क्या हूं।

45
00:03:21,200 --> 00:03:25,520
आप वो आपकी बातों को या आपके द्वारा आत्मा

46
00:03:25,520 --> 00:03:29,600
के अनुसार बताई जाने वाली बातों को क्यों सुने और क्यों माने? उसको

47
00:03:29,600 --> 00:03:33,600
क्या फायदा है उससे? वो फायदा क्या है? क्यों?

48
00:03:33,600 --> 00:03:37,760
क्या आवश्यक फायदा यही है? हां जी जैसे गीता में जैसे

49
00:03:37,760 --> 00:03:43,760
कहा है कि स्वधर्म सुख देता है पर धर्म दुख देता है।

50
00:03:44,320 --> 00:03:50,000
यानी कि धर्म को पालन करने हमारे

51
00:03:50,000 --> 00:03:54,080
हां तो हमारे निजी स्वरूप में हम जब टिकते हैं तो हम अपने

52
00:03:54,080 --> 00:03:58,160
स्वधर् में टिकते हैं। तो हमारा जो जो

53
00:03:58,160 --> 00:04:02,400
बाकी जो मनुष्य ने जो बनाए धर्म है वो तो अपने धर्म

54
00:04:02,400 --> 00:04:06,800
है। लेकिन धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने

55
00:04:06,800 --> 00:04:10,880
धर्म का पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है। ठीक

56
00:04:10,880 --> 00:04:14,880
है जी जी जी सत्य धर्म से वो सत्य

57
00:04:14,880 --> 00:04:18,880
का है कि आत्मा का निज गुण में हमें समझ गया मुझे दूसरी

58
00:04:18,880 --> 00:04:22,880
बात पूछनी है ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो सत्य धर्म

59
00:04:22,880 --> 00:04:26,960
है उसके उसका पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है तो प्रश्न यहां पर

60
00:04:26,960 --> 00:04:27,760
ये आता है कि सुख

61
00:04:27,760 --> 00:04:32,160
की प्राप्ति फिल्म देखकर के भी होती है सुख की प्राप्ति स्वादिष्ट

62
00:04:32,160 --> 00:04:36,400
भोजन करने से भी होती है तो फिर कौन सा अंतर आ रहा है जिस

63
00:04:36,400 --> 00:04:40,480
सुख की प्राप्ति होती है ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म का पालन करने से होती

64
00:04:40,480 --> 00:04:44,640
है। जी स्वधर्म

65
00:04:44,640 --> 00:04:49,440
यानी मैं तो बोल रहा हूं कि जो आत्मा का निजी गुण है उसी के आधार पे हम जो

66
00:04:49,440 --> 00:04:53,440
स्थित होंगे उसी के हमें सुख अनुभव होता है। वो भौतिक सुख की बात अलग

67
00:04:53,440 --> 00:04:57,600
है कि खाने पीने की बात अलग है। तो अंतर बताइए ना दोनों में

68
00:04:57,600 --> 00:05:00,240
अंतर है।

69
00:05:00,240 --> 00:05:05,120
जैसे कि जी हमारा सत्य सनातन धर्म जो है

70
00:05:05,120 --> 00:05:09,280
वो आत्मा से निजी गुणों के आधारित धर्म है।

71
00:05:09,280 --> 00:05:13,440
जो सनातन धर्म है। आप आप यहां से आप यहां से शुरू

72
00:05:13,440 --> 00:05:17,520
करिए कि मैं ब्रह्मा कुमारीज आकर के स्पिरिचुअल सेशन

73
00:05:17,520 --> 00:05:21,760
क्यों लूं और उसके बाद उसको फॉलो क्यों करूं जबकि

74
00:05:21,760 --> 00:05:25,920
मुझे पहले से ही अमुक अमुक जगह पर सुख की प्राप्ति हो

75
00:05:25,920 --> 00:05:30,080
रही है। और ब्रह्मा कुमारी भी यही कह रहा है कि हमारे पास भी आओगे तो सुख मिलेगा।

76
00:05:30,080 --> 00:05:34,080
तो दोनों सुख में अंतर क्या है? वो बताइए। आत्मा की

77
00:05:34,080 --> 00:05:38,240
बात जब आप करने लगते हैं। आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं वो तो तब की

78
00:05:38,240 --> 00:05:42,320
बात है। जब आप उसको सेशन दे दें और यह सिद्ध

79
00:05:42,320 --> 00:05:43,440
कर दें उसको

80
00:05:43,440 --> 00:05:47,600
बता दें कि आत्मा हो तुम्हारी यह चीजें हैं वो तो

81
00:05:47,600 --> 00:05:51,680
सेशन की बात है मगर प्रायोरिटी में हम उसको क्या बताएंगे आने के लिए कि वो

82
00:05:51,680 --> 00:05:57,360
आत्मा की वो जो डेफिनेशन है वो सुने जी जी

83
00:05:57,360 --> 00:06:01,360
तो मैं यही इसीलिए बता रहा हूं कि ब्रह्मा कुमार से जुड़ा तब तक तो मुझे

84
00:06:01,360 --> 00:06:05,360
धर्म के आयु तो मुझे जैसे भौतिक धर्म है हम जानते हैं कि हिंदू मुस्लिम ये सब इनको

85
00:06:05,360 --> 00:06:09,360
हम धर्म ही कहते थे पहले मैं एक आप मेरी आप

86
00:06:09,360 --> 00:06:13,680
मेरी बात समझिए तो थोड़ा सा क्या है ना बहुत चर्चा

87
00:06:13,680 --> 00:06:17,760
हो भी चुकी है। मैं ये पूछ रहा हूं कि एक सामान्य व्यक्ति है अभी वो ब्रह्मा कुमारी

88
00:06:17,760 --> 00:06:22,400
आया नहीं है। ठीक है? उसको मालूम है कि मैं रसगुल्ला खाऊंगा तो मुझे मिठास

89
00:06:22,400 --> 00:06:26,480
जो मीठा सुख है मीठे का स्वाद मिलेगा सुखी होऊंगा। उसको मालूम है

90
00:06:26,480 --> 00:06:31,040
मैं फिल्म देखने जाऊंगा धुरंधर पार्ट टू मैं उसको देख के सुखी हो जाऊंगा।

91
00:06:31,040 --> 00:06:35,040
ठीक है? तो उसको सुख मिल रहा है तो कुमारी

92
00:06:35,040 --> 00:06:39,200
क्यों आए? वहां वहां मिलने वाले सुख में और यहां मिलने वाले सुख

93
00:06:39,200 --> 00:06:42,400
में अंतर क्या होगा?

94
00:06:42,400 --> 00:06:46,560
हां जी। तो मैं इसीलिए कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारी में आके जब हमें सत्य

95
00:06:46,560 --> 00:06:50,560
ज्ञान का परिचय मिलता है। सत्य ज्ञान अर्थात

96
00:06:50,560 --> 00:06:54,880
हमें स्वयं का परिचय मिलता है। स्वयं के आधार से हमें ईश्वर का परिचय

97
00:06:54,880 --> 00:06:58,480
मिलता है। ईश्वर के पूरा ड्रामा का

98
00:06:58,480 --> 00:07:02,800
मिलता है। समझ में आता है कि कैसे क्या होता है।

99
00:07:02,800 --> 00:07:07,120
अरे भैया सुख सुख में अंतर क्या आया वो तो बताओ।

100
00:07:07,120 --> 00:07:10,480
सुख में क्या अंतर आया?

101
00:07:10,480 --> 00:07:14,480
यहां मिलने वाले सुख में होता है। आप मेरी बात समझिए जो

102
00:07:14,480 --> 00:07:18,720
परमेश्वर का परिचय है, जो अपना परिचय है, इस सबका पर्यावसान

103
00:07:18,720 --> 00:07:22,880
इसमें है ना कि मुझे सुख प्राप्त होगा तो सुख तो बाहर

104
00:07:22,880 --> 00:07:26,880
भी प्राप्त हो रहा है इन परिचय के बिना तो अंतर क्या

105
00:07:26,880 --> 00:07:31,120
है दोनों प्रकार के सुख में? हां जी।

106
00:07:31,120 --> 00:07:35,440
तो मैं इसीलिए वही बात कह रहा हूं कि जब हमें स्वयं

107
00:07:35,440 --> 00:07:39,440
का परिचय पता होता है तो हमें सुख का अनुभव समझ में आता है

108
00:07:39,440 --> 00:07:43,600
और जो हम खुद को देह समझने लगते हैं तो वो भौतिक सुख का अनुभव

109
00:07:43,600 --> 00:07:48,240
होता है। तो भौतिक सुख का अलग बात है। देह का सुख अलग है।

110
00:07:48,240 --> 00:07:53,280
अलग आत्मा का सुख अलग है। वो अलग है। निर्भय

111
00:07:53,280 --> 00:07:57,440
हमारे हमारे में अंदर वही निर्भयता पैदा होती है कि आत्मा

112
00:07:57,440 --> 00:08:01,440
अगर अविनाशी है। तो दुख की चिंता तो अलग होती है। हर

113
00:08:01,440 --> 00:08:05,520
इंसान को सुख की अपेक्षा होती है। तो सुख कैसे प्राप्त किया जाता

114
00:08:05,520 --> 00:08:09,680
है? सच्चा सुख आज हम कोई भी इस दुनिया में मुझे लगता है

115
00:08:09,680 --> 00:08:13,680
मुझे लगता है आप मुझे लगता है आप ये कहना चाहते हैं। मैं अभी

116
00:08:13,680 --> 00:08:17,920
आपकी मदद कर देता हूं। शायद आपको वो शब्द एग्जैक्ट नहीं मिल रहा है।

117
00:08:17,920 --> 00:08:22,160
कि ये जितने भी सुख है ना भौतिक संसार वाले ये

118
00:08:22,160 --> 00:08:26,640
इन सभी सुखों का हम अरे भाई साहब बोलने तो दो।

119
00:08:26,640 --> 00:08:30,900
बोलने दो। मैं आपकी मदद कर रहा हूं फिलहाल

120
00:08:30,900 --> 00:08:35,840
[गला साफ़ करने की आवाज़] कि यह जितने भी भौतिक सुख हैं भौतिक संसार वाले

121
00:08:35,840 --> 00:08:40,080
ये सभी सुख बाधित हैं। इनका अंत हो जाता है। जी

122
00:08:40,080 --> 00:08:44,560
अगर हमने फिल्म अगर हमने फिल्म देखी तो फिल्म खत्म हो जाती है। रसगुल्ला

123
00:08:44,560 --> 00:08:49,040
खाया तो एक खाया दो खाया तीसरे रसगुल्ले में खराब लगने लगता है।

124
00:08:49,040 --> 00:08:53,200
यहां भौतिक संसार से जितने भी सुख हमें मिल रहे हैं उनका अंत होता

125
00:08:53,200 --> 00:08:57,200
है। तो हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय यानी कि आपके

126
00:08:57,200 --> 00:09:01,360
आपके अनुसार जो ब्रह्मा कुमारी है वहां इसलिए जाते हैं कि वहां का

127
00:09:01,360 --> 00:09:05,040
सुख अनंत सुख होता है।

128
00:09:05,040 --> 00:09:10,320
ऐसा है अनंत सुख अनंत सुख होता है। ऐसा है

129
00:09:10,320 --> 00:09:14,400
कभी ना खत्म होने वाला हम अनुभव करने हम

130
00:09:14,400 --> 00:09:19,360
अनुभव करने लगते हैं। हम ज्ञान के आधार पर

131
00:09:19,360 --> 00:09:25,360
मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर अनंत सुख मिलेगा ना

132
00:09:25,760 --> 00:09:29,760
जी अनुभव होने लगता है। अनंत सुख

133
00:09:29,760 --> 00:09:34,240
मिलेगा ना। मैं प्रैक्टिसिंग में अनुभव की बात ही नहीं कर रहा हूं।

134
00:09:34,240 --> 00:09:38,640
हां जी मैं जो मैं जो दूसरा डायमेंशन है

135
00:09:38,640 --> 00:09:42,640
जो दूसरा डायमेंशन है पारलौकिक मैं कह रहा हूं

136
00:09:42,640 --> 00:09:46,880
ब्रह्मा कुमारी जाने पर वहां की चीजों को फॉलो करने पर उसमें स्थित

137
00:09:46,880 --> 00:09:50,880
होने पर अंततवा वहां पर अनंत सुख की प्राप्ति

138
00:09:50,880 --> 00:09:53,680
होती है।

139
00:09:53,680 --> 00:09:58,400
हां जी जी ठीक है तो यह बताइए

140
00:09:58,400 --> 00:10:04,240
अनंत सुख की प्राप्ति होती है और जो

141
00:10:04,240 --> 00:10:08,320
इसलिए ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और अविनाशी

142
00:10:08,320 --> 00:10:12,320
सुख अब यहां पहली बात आ जाती है कि ब्रह्मा कुमारीज के यहां

143
00:10:12,320 --> 00:10:16,400
जो जो नियम और सिद्धांत है ठीक है ब्रह्मा

144
00:10:16,400 --> 00:10:20,640
कुमारीज के यहां पे जो भी नियम और सिद्धांत है यानी

145
00:10:20,640 --> 00:10:24,960
कि वो धर्म जी है ना क्योंकि ब्रह्मा

146
00:10:24,960 --> 00:10:27,920
कुमारी अविनाशी

147
00:10:27,920 --> 00:10:32,400
अरे भाई आप मेरी बात समझने का प्रयास तो करो

148
00:10:32,400 --> 00:10:36,800
हां क्योंकि ब्रह्मा कुमारी मैं बाद मेंता हूं

149
00:10:36,800 --> 00:10:40,880
क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज अनंत सुख प्रोवाइड करवा रहा है। इसलिए

150
00:10:40,880 --> 00:10:45,120
ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बचा बताए जाने वाले जो आचरण है

151
00:10:45,120 --> 00:10:49,440
वह धर्म है। वह नियम है। क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख

152
00:10:49,440 --> 00:10:53,520
दिलवा रहा है। ठीक है? ठीक है

153
00:10:53,520 --> 00:10:58,480
जी अब ये बताइए कि ब्रह्मा कुमारीज

154
00:10:58,480 --> 00:11:02,560
इस्लाम को बाइबल को कुरान को इनको धर्म

155
00:11:02,560 --> 00:11:06,640
क्यों कहता है क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज का जो

156
00:11:06,640 --> 00:11:10,960
आचरण है वो तो अलग है और कुरान का जो आचरण

157
00:11:10,960 --> 00:11:14,960
है वो अलग है। बाइबल का जो आचरण है वो अलग है। तो फिर इनको धर्म क्यों

158
00:11:14,960 --> 00:11:17,920
कहता है?

159
00:11:17,920 --> 00:11:21,920
अगर अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा कुमारी अगर ब्रह्मा

160
00:11:21,920 --> 00:11:26,240
कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो व्यवहारिक

161
00:11:26,240 --> 00:11:30,240
आचरण है वो धर्म है तो उसके ठीक विपरीत कुरान

162
00:11:30,240 --> 00:11:34,400
के द्वारा बताया जाने वाला या बाइबल के द्वारा बताया जाने वाला

163
00:11:34,400 --> 00:11:40,240
वो फिर आचरण धर्म कैसे है उसको धर्म क्यों कहता है ब्रह्मा कुमारी

164
00:11:40,240 --> 00:11:43,200
जी बताता हूं

165
00:11:43,200 --> 00:11:47,440
ब्रह्मा कुमारी में जो हम धर्म स्थापित करने की

166
00:11:47,440 --> 00:11:51,680
प्रयत्न में है। समझ में आ रहा है कि हमारे अंदर

167
00:11:51,680 --> 00:11:56,240
पहले वो धर्म स्थापित करने का वो प्रयास है। हम प्रयासरत है।

168
00:11:56,240 --> 00:12:00,480
तो हम प्रयासरत में जो हमें नियम कुछ धारणाएं

169
00:12:00,480 --> 00:12:04,720
उस पर चलने का प्रयत्न करते हैं। तब जाके हमारे अंदर वो धर्म स्थापित

170
00:12:04,720 --> 00:12:08,800
होगा। क्योंकि हम बहुत काल का अभ्यास करेंगे। तब आत्मा में

171
00:12:08,800 --> 00:12:12,880
वो एक मिनट भाई साहब। भाई साहब मैंने पूछा क्या है? आप मुझे

172
00:12:12,880 --> 00:12:16,960
बता रहे हो कि हम ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। मेरा प्रश्न क्या है

173
00:12:16,960 --> 00:12:20,000
कि ब्रह्मा कुमारी

174
00:12:20,000 --> 00:12:24,000
एक मिनट भाई साहब आप गलत चीजें बोलते हो ना एक्स्ट्रा तो उसमें भी टाइम लगता है थोड़ा

175
00:12:24,000 --> 00:12:28,320
ज्यादा मैंने प्रश्न ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारीज की जो नियमावली

176
00:12:28,320 --> 00:12:32,320
है डस एंड डोंट्स वो बिल्कुल ठीक विपरीत है कुरान

177
00:12:32,320 --> 00:12:33,040
के डज

178
00:12:33,040 --> 00:12:37,040
एंड डोंट से तो फिर ब्रह्मा कुमारी कुरान को धर्म क्यों कह रहा है

179
00:12:37,040 --> 00:12:41,120
इस्लाम को धर्म क्यों कह रहा है ये पूछा है क्या करने से क्या

180
00:12:41,120 --> 00:12:45,600
मिलेगा ये मेरा प्रश्न नहीं है ब्रह्मा कुमारी

181
00:12:45,600 --> 00:12:49,680
जो भी है जो भी है अगर वो धर्म है तो

182
00:12:49,680 --> 00:12:53,760
कुरान के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है या बाइबल के द्वारा मिलने वाला जो

183
00:12:53,760 --> 00:12:57,840
आचरण है वो धर्म कैसे क्योंकि दोनों चीजें अलग है ब्रह्मा कुमारी की डस

184
00:12:57,840 --> 00:13:02,160
एंड डोंट्स अलग है अलग है हां अलग है

185
00:13:02,160 --> 00:13:06,160
अब बताइए तो अलग इसीलिए है अलग इसीलिए है

186
00:13:06,160 --> 00:13:10,560
कि ब्रह्मा कुमारी अलग अलग अलग

187
00:13:10,560 --> 00:13:14,640
अलग इसलिए नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं यदि ब्रह्मा कुमारी का डूज एंड

188
00:13:14,640 --> 00:13:19,520
डोंट है धर्म तो फिर कुरान का जो

189
00:13:19,520 --> 00:13:23,520
एंड डोंट्स है वो धर्म क्यों उसको धर्म क्यों कह रहा है ब्रह्मा कुमारी

190
00:13:23,520 --> 00:13:27,680
वही जब मुझसे कुछ सुनेंगे मुझे बात करने दोगे तो आपको

191
00:13:27,680 --> 00:13:31,680
पता चलेगा ना आपने बताया है आप आप देखिए

192
00:13:31,680 --> 00:13:35,680
आपने अभी क्या बोला आपने बोला कि वो अलग इसलिए है मैं नहीं पूछ रहा

193
00:13:35,680 --> 00:13:39,760
हूं कि वो अलग क्यों है? मुस्लिम जो कुरान है वह

194
00:13:39,760 --> 00:13:43,760
अलग क्यों मैंने नहीं पूछा। मैं पूछ रहा हूं वो अलग है तो फिर उसको आप

195
00:13:43,760 --> 00:13:49,760
धर्म क्यों कह रहे हो? यह पूछ रहा हूं। जैसे कि मान लो

196
00:13:51,040 --> 00:13:55,600
मैं एक एग्जांपल मैं एक एग्जांपल दे दे रहा हूं। जो सिविलाइज्ड है

197
00:13:55,600 --> 00:13:59,760
जो जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है।

198
00:13:59,760 --> 00:14:04,080
ठीक है? और जिसके पास मर्यादा नहीं है वो पशु है।

199
00:14:04,080 --> 00:14:08,400
यानी कि मान लो कुत्ता बिल्ली इन सबके पास मर्यादा

200
00:14:08,400 --> 00:14:12,720
नहीं है। ये ये जानवर है और जिसके पास मर्यादा है

201
00:14:12,720 --> 00:14:16,880
वो मनुष्य है। ठीक है? तो अब मैं ये पूछ रहा हूं कि जब उस

202
00:14:16,880 --> 00:14:21,040
फलाने किसी के पास मर्यादा नहीं भी है। यहां पे मैं इस्लाम

203
00:14:21,040 --> 00:14:25,040
की बात नहीं कर रहा हूं। नहीं बाइबल की बात। अब मैं क्योंकि यहां मैंने उदाहरण दिया तो

204
00:14:25,040 --> 00:14:29,120
मैं एक एग्जांपल दे रहा हूं कि जिसके पास मान लीजिए धर्म नहीं भी है।

205
00:14:29,120 --> 00:14:34,320
जिसके पास नियम नहीं भी है उसको हम क्यों कह रहे हैं कि वो मनुष्य है।

206
00:14:34,320 --> 00:14:38,320
समझ में आया आपको? जिसके पास नियम है

207
00:14:38,320 --> 00:14:42,640
वो मनुष्य है। तो जिसके पास नियम नहीं है उसको हम मनुष्य [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्यों कह रहे हैं?

208
00:14:42,640 --> 00:14:46,640
हां अब अब आप समझ गए। अब मैं आपकी बात और मेरे ख्याल से

209
00:14:46,640 --> 00:14:50,640
मैं 14 बज के 14 मिनट की लाइव हो चुकी है। मैं

210
00:14:50,640 --> 00:14:54,640
लगभग दो मिनट तक सिर्फ सुनूंगा। आप मेरे मेरे सवाल का आप आंसर जी

211
00:14:54,640 --> 00:14:57,280
जय श्री राम।

212
00:14:57,280 --> 00:15:01,280
कि बाकी जो धर्म है वो देह के आधार आधारित

213
00:15:01,280 --> 00:15:05,360
धर्म है। देह के गुणों के आधारित धर्म

214
00:15:05,360 --> 00:15:06,160
है और

215
00:15:06,160 --> 00:15:10,480
हमारा सत्य धर्म जो है वो आत्मा के निजी गुणों के स्थापित

216
00:15:10,480 --> 00:15:14,640
किया हुआ धर्म है। यानी अपना स्वरूप में स्थापित है।

217
00:15:14,640 --> 00:15:18,720
तो वो बाकी भी धर्म है। लेकिन देह के आधार पर धर्म है। इसलिए हम उनको धर्म नहीं

218
00:15:18,720 --> 00:15:22,960
कहते हैं। लेकिन उनका स्वरूप अलग है। उनका भस

219
00:15:22,960 --> 00:15:26,960
अलग है। हमारा भस अलग है क्योंकि ईश्वर ने जब ज्ञान देकर

220
00:15:26,960 --> 00:15:30,960
जो स्वधर्म आत्मा के निजी धर्म पर जो सनातन

221
00:15:30,960 --> 00:15:35,040
धर्म स्थापित किया है वो आत्मा के ज्ञान के आधार स्थापित किया हुआ है

222
00:15:35,040 --> 00:15:39,280
और उनका जो धर्म है देह में आने के बाद यानी

223
00:15:39,280 --> 00:15:43,760
जब त्रेता युग के बाद जो बाकी धर्म स्थापित हुए हैं

224
00:15:43,760 --> 00:15:48,000
यानी द्वापर से द्वापर युग से तो

225
00:15:48,000 --> 00:15:52,160
पिछले अा हजार साल में हम मनुष्य देहिक बन गए

226
00:15:52,160 --> 00:15:56,400
हैं तो उसके के आधार पर उनके धर्म जो स्थापित हुए हैं उनके में तो

227
00:15:56,400 --> 00:16:01,600
त्रुटि आएंगी जो स्वधर्म में और उनमें तो अंतर होगा ही जरूर

228
00:16:01,600 --> 00:16:05,760
यानी आत्मा के आधार पे जो हमारे में अंदर जो पांच विकारों

229
00:16:05,760 --> 00:16:09,840
ने प्रवेश किया उसी के आधार पर उनके धर्म है। हमारा

230
00:16:09,840 --> 00:16:14,320
जो धर्म है वो संपूर्ण निर्विकारी धर्म था। यानी हमारे

231
00:16:14,320 --> 00:16:18,400
सत्य धर्म में यानी सनातन धर्म में कोई भी विकार नाम की

232
00:16:18,400 --> 00:16:21,440
अंश मात्र चीज नहीं थी। यही फर्क

233
00:16:21,440 --> 00:16:25,440
है कि वो देह के आधार पर स्थापित धर्म

234
00:16:25,440 --> 00:16:29,760
है और हमारे निज गुणों के आधार पर स्थापित धर्म यानी आत्मा स्वधर्म

235
00:16:29,760 --> 00:16:33,760
में वही सच्चा स्वधर्म सुख देता है और पर धर्म

236
00:16:33,760 --> 00:16:37,920
दुख देता है यानी बाकी में हमारे अंदर जब ये काम क्रोध ये

237
00:16:37,920 --> 00:16:41,920
सब पैदा होते हैं वो तो दुखी दायक दुखी संसार हो जाता

238
00:16:41,920 --> 00:16:45,440
है

239
00:16:45,440 --> 00:16:49,440
यही फर्क है दोनों धर्म में सनातन धर्म में और इस्लाम और

240
00:16:49,440 --> 00:16:54,160
बाकी धर्मों में निर्विवाद रूप से मैंने आपको दो मिनट तक सुना।

241
00:16:54,160 --> 00:16:58,880
आपने मुझे मोटी मोटी बातें जो बताई है मैं उनको बताऊं कि

242
00:16:58,880 --> 00:17:02,880
जी जो ब्रह्मा कुमारी जो धर्म बता रहा है वो

243
00:17:02,880 --> 00:17:06,880
देह देह का नहीं आत्मा का धर्म है। ठीक है और धर्म क्या

244
00:17:06,880 --> 00:17:11,200
था भाई साहब बीच में मत बोलिए अब

245
00:17:11,200 --> 00:17:15,280
ठीक अब बीच में मत बोलिए मैंने आपको सुना अब मैं बोल

246
00:17:15,280 --> 00:17:20,320
रहा हूं समझिए अच्छा तो

247
00:17:20,320 --> 00:17:24,400
हां ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म

248
00:17:24,400 --> 00:17:28,640
है वह आत्मा का धर्म है और बाकी यह सब जो धर्म है यह देह के ऊपर आधारित

249
00:17:28,640 --> 00:17:32,800
धर्म है। ठीक है? और मेरे ख्याल से आपने यह भी कहा ये भी आपने

250
00:17:32,800 --> 00:17:36,560
यह भी कहा है कि देह के ऊपर आधारित धर्म से सुख

251
00:17:36,560 --> 00:17:40,560
की प्राप्ति नहीं होती है। पर आत्मा के ऊपर आधारित धर्म से ही

252
00:17:40,560 --> 00:17:44,800
सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है? ये दो बातें मोटी मोटी आ गई। ठीक?

253
00:17:44,800 --> 00:17:48,960
अब पहली बात क्या है? जब हम शुरू से चले थे तो हमने यह देखा था कि धर्म उसे

254
00:17:48,960 --> 00:17:54,400
कहते हैं जिसमें कि अनंत सुख प्राप्त हो।

255
00:17:54,400 --> 00:17:58,480
तो यह वाली बात तो खारिज ही हो गई। या तो आप यह कहो कि उसको भी धर्म

256
00:17:58,480 --> 00:18:02,560
कहते हैं जिसमें अनंत सुख प्राप्त ना हो। फिर तो फिल्म जाना भी धर्म है।

257
00:18:02,560 --> 00:18:06,640
फिर तो मीठा रसगुल्ला खाना भी धर्म है। क्योंकि अनंत सुख नहीं मगर सुख तो प्राप्त

258
00:18:06,640 --> 00:18:10,800
हो ही रहा है। अनंत सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है।

259
00:18:10,800 --> 00:18:14,960
उसको हम धर्म नहीं मान रहे थे शुरू में। अब आपने कहा मान रहे हैं। हां उसको दहिक

260
00:18:14,960 --> 00:18:19,200
धर्म कह रहे हैं। तो यानी कि फिल्म जाना भी धर्म है।

261
00:18:19,200 --> 00:18:23,360
तो दुख तो उसके है नहीं। इसलिए तो मैं बता रहा हूं क्यों पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं

262
00:18:23,360 --> 00:18:28,320
कि मैं अभी एक चार पांच चीजें लिख दूंगा। शिवश नारायण द्विवेदी

263
00:18:28,320 --> 00:18:32,320
ने ये कहा है और फिल्म जाना है और मीठा खाना है,

264
00:18:32,320 --> 00:18:36,400
रसगुल्ला खाना है, छोले भटूरे खाने है, नान खानी है,

265
00:18:36,400 --> 00:18:40,560
कुलचा खाना है और यह धर्म है। मैंने कह दिया। तो आप इसको धर्म

266
00:18:40,560 --> 00:18:43,920
कहने लगोगे क्या?

267
00:18:43,920 --> 00:18:47,920
सुख इसीलिए कहेंगे कि हम नहीं हम

268
00:18:47,920 --> 00:18:53,200
बोलचाल व्यवहारिक प्रयोग करने के लिए हम धर्म तो कहेंगे जरूर

269
00:18:53,200 --> 00:18:58,720
है नहीं वो ये कहूंगा सीधे है नहीं है नहीं वो

270
00:18:58,720 --> 00:19:02,800
जब नहीं नहीं नहीं हमें हो या ना हो वो उसका आधार

271
00:19:02,800 --> 00:19:07,200
अलग है जैसे कि पार्टी का गुणधर्म भाई साहब आप

272
00:19:07,200 --> 00:19:11,200
भाई साहब आप सत्य बोलने आए ना सत्य बोलने आए ना ये मत बताओ कि हो

273
00:19:11,200 --> 00:19:16,320
या ना मैंने पूछा वो अधर्म है कि नहीं कुरान और बाइबल

274
00:19:16,320 --> 00:19:20,560
फिर मैं दो थोड़ा सा तो समझा दो समझाने दो थोड़ा सा कि जैसे

275
00:19:20,560 --> 00:19:24,880
पानी का गुणधर्म है वो तो पानी का भी कुछ धर्म है ठंडक देना अग्नि

276
00:19:24,880 --> 00:19:29,120
का धर्म है ऊर्जा देना गर्मी देना तो

277
00:19:29,120 --> 00:19:33,680
हर अपना अपना हर कुछ धर्म ही होता है

278
00:19:33,680 --> 00:19:37,920
जैसे ही पर्सनली उसका गुण होता है जैसे अभी

279
00:19:37,920 --> 00:19:43,600
हर कुछ धर्म है हर एक का गुण गुण धर्म है।

280
00:19:43,600 --> 00:19:47,680
गुणों के आधारित वो धर्म है। सुनो किसी का स्वभाव क्या है?

281
00:19:47,680 --> 00:19:52,240
मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। आपके हिसाब से धर्म के सुनो

282
00:19:52,240 --> 00:19:56,320
भैया भैया सुन लो सुन लो। यानी कि स्वभाव के आधार पर

283
00:19:56,320 --> 00:19:59,760
धर्म बदल जाता है। ये बात है।

284
00:19:59,760 --> 00:20:03,840
जी। यानी कि उनका स्वभाव के आधार पर उनका धर्म

285
00:20:03,840 --> 00:20:08,400
है और हमारे स्वभाव के आधार पर हमारा धर्म है। जी।

286
00:20:08,400 --> 00:20:12,720
उनका धर्म हिंसा सिखाता है। हमारा धर्म हिंसा नहीं सिखाता है।

287
00:20:12,720 --> 00:20:16,720
भाई साहब मैं प्रश्न क्या कर रहा हूं? आप मैं प्रश्न कुछ और कर रहा हूं।

288
00:20:16,720 --> 00:20:19,760
भाई साहब मुझे करने दो।

289
00:20:19,760 --> 00:20:23,760
धर्म की डेफिनेशन यह है कि धर्म का पालन करने से

290
00:20:23,760 --> 00:20:27,840
अनंत सुख मिलेगा या धर्म की डेफिनेशन यह है कि जिसके

291
00:20:27,840 --> 00:20:31,920
स्वभाव के अनुसार उसने जिन बातों को मान लिया कि मुझे यह करना है, यह नहीं करना है,

292
00:20:31,920 --> 00:20:37,920
वह वो धर्म कही जाएंगे। इसमें से धर्म की डेफिनेशन कौन सी है?

293
00:20:38,080 --> 00:20:42,400
अपने मूल स्वधर्म से आधारित धर्म को स्वधर्म कहेंगे।

294
00:20:42,400 --> 00:20:46,400
बाकी तो परधर्म कहेंगे।

295
00:20:46,400 --> 00:20:50,080
तो ये बताइए कि

296
00:20:50,080 --> 00:20:54,080
शरीर मैंने पूछा ना आपसे कि शरीर के आधार पर शरीर के

297
00:20:54,080 --> 00:20:58,080
आधार पर अनंत सुख तो नहीं मिल रहा है। और धर्म तो वो है जिससे

298
00:20:58,080 --> 00:21:02,160
अनंत सुख मिले। और यदि थोड़ा सा सुख मिलने वाला भी धर्म

299
00:21:02,160 --> 00:21:07,280
है तो फिर गोलगप्पा खाना भी धर्म है।

300
00:21:07,280 --> 00:21:11,280
वो सब धर्म इंसान के लिए

301
00:21:11,280 --> 00:21:14,000
वही धर्म है जो

302
00:21:14,000 --> 00:21:18,080
वही धर्म है ना वो ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब ब्रह्मा

303
00:21:18,080 --> 00:21:22,080
कुमारी का जो धर्म है उसके अलावा भी दुनिया में और भी धर्म

304
00:21:22,080 --> 00:21:26,080
हो सकते हैं उसको उससे मुक्ति मिल जाएगी गुणों के धर्म है

305
00:21:26,080 --> 00:21:30,240
हां उनके गुणों के उनको मुक्ति उसको मुक्ति अनंत

306
00:21:30,240 --> 00:21:34,640
सुख मिलेगा या नहीं मिलेगा उसको

307
00:21:34,640 --> 00:21:39,280
अभी अभी उनका धर्म बताएगा। मुझे थोड़ी मालूम है कि उनका तो वो मिलेगा कि नहीं।

308
00:21:39,280 --> 00:21:43,520
ठीक है। ठीक है। चलो ये भी ले लेते हैं। तो आपको यदि नहीं मालूम

309
00:21:43,520 --> 00:21:47,600
है तो ब्रह्मा आप कह क्यों रहे हो? आपको यदि नहीं मालूम है तो उसको धर्म कह

310
00:21:47,600 --> 00:21:51,600
क्यों रहे हो? धर्म तो वही है ना जहां अनंत सुख प्राप्त हो।

311
00:21:51,600 --> 00:21:55,760
मैंने क्या कहा? एक मिनट भाई साहब। धर्म वो है जहां अनंत सुख प्राप्त हो। तो क्यों

312
00:21:55,760 --> 00:22:00,160
कह रहे हो कि कुरान में भी धर्म है। क्यों कह रहे हो? वो आप कहते

313
00:22:00,160 --> 00:22:04,320
नहीं आप यही कह रहे हो कि अनंत सुख की बात अलग है वो

314
00:22:04,320 --> 00:22:08,320
तो हम अपने स्वी

315
00:22:08,320 --> 00:22:12,320
यानी कि धर्म की धर्म की परिभाषा ये नहीं है कि जिसको करने से अनंत सुख

316
00:22:12,320 --> 00:22:18,240
प्राप्त हो ये नहीं है ना धर्म की परिभाषा

317
00:22:18,240 --> 00:22:23,440
वो परिभाषा नहीं है तो क्या है धर्म के लिए वो व्याख्या नहीं है

318
00:22:23,440 --> 00:22:27,520
यानी परिभाषा वही हम यानी एक मिनट

319
00:22:27,520 --> 00:22:31,680
धर्म इसका मतलब मतलब यह हुआ कि आप कुछ भी करो

320
00:22:31,680 --> 00:22:37,120
उसको आप धर्म का नाम दे दो तो ब्रह्मा कुमारी कहने लगेगी यह भी धर्म है।

321
00:22:37,120 --> 00:22:41,120
यही हुआ ब्रह्मा कुमारी उनके लिए धर्म धर्म इसीलिए व्यवहार

322
00:22:41,120 --> 00:22:45,200
में समझने के लिए हम धर्म की बात करते हैं। उनको धर्म मानते हैं। अरे

323
00:22:45,200 --> 00:22:49,360
उसका आधार क्या है भाई? जब हम धर्म कह रहे है वो है जिससे अनंत

324
00:22:49,360 --> 00:22:54,080
सुख मिलेगा। अभी आपने शुरू में कहा था अनंत सुख मिलेगा वही धर्म है।

325
00:22:54,080 --> 00:22:58,080
अब आप कह रहे हो वो धर्म नहीं है। इसको कहते हैं झूठ बोलना। नहीं नहीं इसको इसको कहते

326
00:22:58,080 --> 00:23:02,320
है झूठ नहीं जी भाई साहब नहीं सुनिए सुनिए सुनिए हम उसका उनको धर्म

327
00:23:02,320 --> 00:23:06,320
कहते इसका मतलब ये नहीं कहते कि हम अपने स्वधर्म छोड़कर अपना धर्म

328
00:23:06,320 --> 00:23:10,320
छोड़कर उनके धर्म में जाओ मैंने ये कहा मैंने मैंने

329
00:23:10,320 --> 00:23:14,400
मेरा प्रश्न पूछा मैंने कहा उसको धर्म क्यों कह रहे हो जब वो धर्म

330
00:23:14,400 --> 00:23:18,480
नहीं है तो उसको धर्म क्यों कह रहे हो बोलचाल के लिए कहते

331
00:23:18,480 --> 00:23:22,560
हैं हम धर्म जब हमारे संविधान भी कहता है धर्म मतलब मतलब

332
00:23:22,560 --> 00:23:28,080
यूं ही कहते हो ना तो यूं ही कहते

333
00:23:28,080 --> 00:23:32,160
अच्छा संविधान का आपने नाम लिया संविधान संविधान वो सारे

334
00:23:32,160 --> 00:23:33,280
रूल्स एंड रेगुलेशन

335
00:23:33,280 --> 00:23:38,960
मानता है जो ब्रह्मा कुमारी मानता है

336
00:23:38,960 --> 00:23:42,960
नहीं नहीं मैं क्या बता रहा हूं कि वो मानते हैं नहीं मानते वो तो हर

337
00:23:42,960 --> 00:23:47,200
एक अपना तो संविधान तो संविधान को बीच में मत लाइए आप ब्रह्मा

338
00:23:47,200 --> 00:23:51,440
कुमारीज के अनुसार जो धर्म है एक मिनट भाई साहब ब्रह्मा कुमारीज

339
00:23:51,440 --> 00:23:55,440
के अनुसार जो धर्म है यदि वही धर्म है जो नियम और कानून ब्रह्मा

340
00:23:55,440 --> 00:23:59,440
कुमारी ने बनाए यदि वही धर्म है तो कुरान और बाइबल को धर्म कहना बंद करिए

341
00:23:59,440 --> 00:24:02,000
ना फिर आप

342
00:24:02,000 --> 00:24:06,800
हम धर्म को संवाद मुझसे संवाद करने के लिए धर्म का उच्चार करते हैं।

343
00:24:06,800 --> 00:24:11,200
हम उनका धर्म नहीं है ये बात नहीं कि उनका जैसे जैसे

344
00:24:11,200 --> 00:24:15,280
आप आप मैं पूछ रहा हूं आप किसी को भी

345
00:24:15,280 --> 00:24:19,440
धर्म क्यों कहोगे जब वो धर्म नहीं है तो आप सत्य बोलते

346
00:24:19,440 --> 00:24:24,560
हो कि झूठ बोलते हो और चलो कभी मुख से निकल जाए

347
00:24:24,560 --> 00:24:28,560
चलो कभी मुख से निकल जाए कभी इधर उधर हो जाए जीभ सिसल गई

348
00:24:28,560 --> 00:24:33,760
कुछ हो गया भैया बोलचाल में है इसलिए कहते हैं आप तो उसको सदैव

349
00:24:33,760 --> 00:24:37,840
आप तो उसको सदैव लगा के रखे हो हां

350
00:24:37,840 --> 00:24:41,840
तो यू और चलो ठीक है चलो ये वाली बात चलो ये वाली बात भी

351
00:24:41,840 --> 00:24:46,000
मान ली भैया दुनिया को एक

352
00:24:46,000 --> 00:24:48,400
मिनट एक एक मिनट चलो मान

353
00:24:48,400 --> 00:24:52,400
लिया कि यूं ही कहते हैं तो यूं ही कहने वाली बात आपकी किसी दीदी ने

354
00:24:52,400 --> 00:24:56,560
कही है सार्वजनिक मंच पर कि वो धर्म है नहीं हम यूं ही कहते हैं बोलचाल की

355
00:24:56,560 --> 00:25:00,640
भाषा में कही है बोलचाल में यूं ही नहीं कहते यूं ही नहीं

356
00:25:00,640 --> 00:25:04,800
कहते हैं हम उनको धर्म मानते हैं लेकिन धर्मों का अंतर बताते

357
00:25:04,800 --> 00:25:08,960
हैं अंतर बताते हैं कि उनका धर्म कैसे स्थापित हुआ

358
00:25:08,960 --> 00:25:13,040
है। उनके धर्म में कितना सुख मिलता है और हमारे स्वधर् में कितना सुख

359
00:25:13,040 --> 00:25:17,040
मिलता है। तो फिर आप ये तो फिर आप इस बात को छोड़ दो कि धर्म वो है जिससे

360
00:25:17,040 --> 00:25:21,280
अनंत सुख प्राप्त हो। इस बात को छोड़ दो। फिर आप यह बोलो कि किसी

361
00:25:21,280 --> 00:25:25,280
व्यक्ति ने अपने जीने के लिए कुछ सिद्धांत प्रचारित कर दिए तो

362
00:25:25,280 --> 00:25:31,280
हम उसको कहने लगते हैं यह भी धर्म है।

363
00:25:31,360 --> 00:25:35,440
भाई साहब हम इसीलिए उनको बात करते हैं कि जब हम हमसे उनको बात

364
00:25:35,440 --> 00:25:39,520
करना है तो धर्म के ही बात भाषा में ही बात करेंगे ना। आप सत्य

365
00:25:39,520 --> 00:25:45,520
बोल धर्म बोलने से हमको नहीं पूछ रहा हूं। सत्य

366
00:25:45,760 --> 00:25:49,760
धर्म बोलने से हमको तकलीफ क्यों होनी चाहिए? इसलिए

367
00:25:49,760 --> 00:25:54,720
क्योंकि वो धर्म नहीं है।

368
00:25:54,720 --> 00:25:59,040
जो मानता है जो मानता है तो है

369
00:25:59,040 --> 00:26:03,200
आप नहीं है वो भी नहीं मानता वो कहां अपने आप को धर्म कहता है वो तो मजहब कहता

370
00:26:03,200 --> 00:26:07,680
है अपने आप को दीन कहता है अपने आप को

371
00:26:07,680 --> 00:26:11,920
मैं जब गीता में लिखा है गीता में लिखा है कि मैं सत्य धर्म

372
00:26:11,920 --> 00:26:15,920
की स्थापना करता हूं बाकी धर्मों का विनाश करता हूं

373
00:26:15,920 --> 00:26:20,000
आप दूसरी बात धर्म का विनाश करता हूं बातें मत करिए। इस चीज

374
00:26:20,000 --> 00:26:24,400
को प्रश्न पूछिए। यदि ब्रह्मा दीदियों से

375
00:26:24,400 --> 00:26:28,720
आप आप दीदी से जाकर के पूछिए। यदि ब्रह्मा

376
00:26:28,720 --> 00:26:32,880
कुमारीज के द्वारा बताई गई नियमावली धर्म है तो फिर जो जो उस

377
00:26:32,880 --> 00:26:37,120
चीज को नहीं मान रहे हैं उसको धर्म कहना बंद करें। झूठ है ये।

378
00:26:37,120 --> 00:26:41,280
अब अब आ जाते हैं ब्रह्मा कुमारीज के धर्म पर। ठीक है। अब ब्रह्मा

379
00:26:41,280 --> 00:26:41,780
कुमारीज

380
00:26:41,680 --> 00:26:45,840
पर आ जाते। जी मेरे हिसाब

381
00:26:45,840 --> 00:26:51,760
से

382
00:26:51,760 --> 00:26:55,840
धर्म [गला साफ़ करने की आवाज़] है जो सच्चिदानंद सुख की प्राप्ति कराए। है

383
00:26:55,840 --> 00:26:59,920
ना? जी हां। ठीक है।

384
00:26:59,920 --> 00:27:04,240
तो सच्चिदानंद सुख की प्राप्त सच्चिदानंद को प्राप्त कराने वाला जो

385
00:27:04,240 --> 00:27:08,480
नियमावली है वो धर्म है। और आपके यहां पर

386
00:27:08,480 --> 00:27:12,720
सच्चिदानंद सुख को प्राप्त कराने वाला जो ज्ञान है वो देता

387
00:27:12,720 --> 00:27:16,880
है कोई ईश्वर। आपके किसी प्रकार से किसी माध्यम से ईश्वर आकर

388
00:27:16,880 --> 00:27:21,040
के वो देता है। तो मुझे आप यह बताइए ईश्वर है यह

389
00:27:21,040 --> 00:27:27,040
सिद्ध कैसे होता है?

390
00:27:27,840 --> 00:27:32,080
ईश्वर है जब वो सारा सृष्टि का ज्ञान समझाता है। हमें स्वयं

391
00:27:32,080 --> 00:27:36,160
का परिचय देता है और खुद को परिचय देता है। खुद का जब हमें

392
00:27:36,160 --> 00:27:40,240
ईश्वर का पता ही नहीं था। जब हमें सच्चा ज्ञान

393
00:27:40,240 --> 00:27:44,240
मिलता है, हमें ईश्वर के बारे में हमें पूरा निश्चय होता है कि यही ईश्वर

394
00:27:44,240 --> 00:27:48,320
है। मैं थोड़ा सा सीधा कर दूं। अपना परिचय जो आकर के

395
00:27:48,320 --> 00:27:52,480
दे देगा जिसका हमें परिचय नहीं मालूम होगा। हम ये मानेंगे ईश्वर

396
00:27:52,480 --> 00:27:56,480
है ये। अफ्रीका के जंगल में कोई रह रहा है।

397
00:27:56,480 --> 00:28:00,640
नीग्रो रह रहा है कोई कहीं पर उसको हम नहीं जानते। वो आकर के अपना परिचय दे देगा

398
00:28:00,640 --> 00:28:04,640
तो हम मान लेंगे ईश्वर है। और इससे सिद्ध हो जाएगा कि

399
00:28:04,640 --> 00:28:07,840
दुनिया में कोई ईश्वर है।

400
00:28:07,840 --> 00:28:11,840
ईश्वर का हमें पता था तो सिद्धांत बताइए

401
00:28:11,840 --> 00:28:15,840
भाई साहब कि ईश्वर है या सिद्ध कैसे होता है? हम क्यों ढूंढ रहे हैं ईश्वर

402
00:28:15,840 --> 00:28:20,880
को? क्यों ढूंढ रहे हैं? हां

403
00:28:20,880 --> 00:28:25,040
ईश्वर सुनिए आप आप ईश्वर की सिद्धि के विषय में बता

404
00:28:25,040 --> 00:28:29,200
रहे हो कि ब्रह्मा कुमारी जाने के बाद हमें ईश्वर अपना

405
00:28:29,200 --> 00:28:33,600
परिचय देता है जिससे सिद्ध होता है कि वो ईश्वर है?

406
00:28:33,600 --> 00:28:37,680
जी तो मैं अगर परिचय देने के आधार पर किसी

407
00:28:37,680 --> 00:28:41,840
को ईश्वर माना जाएगा तो मैंने प्रश्न किया क्या साउथ अफ्रीका में रहने वाला कोई

408
00:28:41,840 --> 00:28:46,320
व्यक्ति है जिसको आप नहीं जानते हो वो अपना परिचय दे दे मैं साउथ अफ्रीकन हूं

409
00:28:46,320 --> 00:28:50,480
तो आप कह देंगे आप मानेंगे कि ईश्वर है और इस प्रकार से ईश्वर

410
00:28:50,480 --> 00:28:54,640
की होती है वो जो परिचय देगा उसी आधार

411
00:28:54,640 --> 00:28:58,720
से मैं समझूंगा कि वो क्या चीज है ईश्वर है या नहीं है तो मैं आज से पहले

412
00:28:58,720 --> 00:29:03,200
आप मुझे जानते थे क्या नहीं

413
00:29:03,200 --> 00:29:07,200
मेरा परिचय जानते थे नहीं मैं ईश्वर हूं नहीं

414
00:29:07,200 --> 00:29:11,200
था मैंने अपना परिचय दे मैंने अपना परिचय दे दिया मैं ईश्वर हूं अब मेरी बात मानेंगे

415
00:29:11,200 --> 00:29:15,280
आप हां तो बताओ सिद्ध करो मुझे कि आप कैसे ईश्वर

416
00:29:15,280 --> 00:29:19,920
हो हां तो वो सिद्ध करने वाली बात क्या है वहां पर वो बताओ

417
00:29:19,920 --> 00:29:24,240
वो क्या है हां तो वही करने वाली बात वही तो पूछो

418
00:29:24,240 --> 00:29:28,320
वही पूछा मैंने सिद्ध कैसे हुआ ईश्वर तो

419
00:29:28,320 --> 00:29:32,560
हां तो वही तो मैं समझाने जा रहा हूं आपको कि वहां मुझे जब पता जब

420
00:29:32,560 --> 00:29:36,240
ज्ञान लिया मैंने ज्ञान लिया तो मुझे पूरा

421
00:29:36,240 --> 00:29:40,960
पूरा यकीन कैसे किस आधार से हुआ ये बता रहा हूं कि

422
00:29:40,960 --> 00:29:45,520
पहले वहां पे मुझे मुझे स्वयं का परिचय दिया उन्होंने

423
00:29:45,520 --> 00:29:49,520
ठीक है स्वयं परिचय दिया तो मुझे स्वयं का परिचय महसूस हुआ कि मुझे हां

424
00:29:49,520 --> 00:29:54,320
ये बात तो सही है कि यही बात सच है आत्मा के बारे में मुझे जो बताया

425
00:29:54,320 --> 00:29:58,320
तो आत्मा का पिता भी कोई होगा तो आत्मा का पिता

426
00:29:58,320 --> 00:30:02,320
कैसा होगा तो आत्मा ही जैसा होगा जैसे जैसे पंछी का पंछी जैसा

427
00:30:02,320 --> 00:30:06,480
होता है। यानी समझ गया। जैसे किसी ने बताया

428
00:30:06,480 --> 00:30:10,480
कि आप आत्मा हो। इससे ये सिद्ध होता है कि आत्मा को कोई पिता भी

429
00:30:10,480 --> 00:30:14,640
होगा। यानी कि आत्मा के अस्तित्व से ये पता चलता है कि आत्मा को कोई

430
00:30:14,640 --> 00:30:19,280
पिता भी होगा। हां जी।

431
00:30:19,280 --> 00:30:23,280
आत्मा के पिता होगा ना। मैं शरीर के

432
00:30:23,280 --> 00:30:27,360
अस्तित्व है। मैं आ रहा हूं। मैं आ रहा हूं भाई साहब। मैं मैं आ

433
00:30:27,360 --> 00:30:31,680
रहा हूं। मैं आ रहा हूं। आपका प्रश्न ले लिया मैंने। आत्मा है इसलिए

434
00:30:31,680 --> 00:30:36,480
यह सिद्ध होता है कि आत्मा को कोई पिता भी होगा। ठीक है?

435
00:30:36,480 --> 00:30:40,640
ठीक है ना? जी। ठीक है। तो फिर

436
00:30:40,640 --> 00:30:46,640
ईश्वर है तो इसका मतलब ये भी होता है फिर ईश्वर का कोई पिता भी होगा।

437
00:30:47,200 --> 00:30:53,120
ईश्वर का वही ईश्वर होगा जिसका कोई पिता नहीं होगा।

438
00:30:53,120 --> 00:30:57,120
तो भाई साहब इसका मतलब किसी के होने से उसके उसके पिता की

439
00:30:57,120 --> 00:31:01,120
सिद्धि नहीं होती है। इस किसी के होने से उसके पिता की

440
00:31:01,120 --> 00:31:04,080
सिद्धि नहीं हो रही है।

441
00:31:04,080 --> 00:31:08,080
किसी के होने से उसका पिता है। ये सिद्ध बात

442
00:31:08,080 --> 00:31:12,240
नहीं है। हम वो कारण बताइए कि किसी के होने

443
00:31:12,240 --> 00:31:16,480
से वो कारण बताइए कि किसी के होने से किस प्रकार उसके

444
00:31:16,480 --> 00:31:20,880
पिता की सिद्धि होती है। वो कारण बताइए सिद्धांत। जी

445
00:31:20,880 --> 00:31:25,120
सिद्धांत यह है हम कि जब हम हमारे पिता

446
00:31:25,120 --> 00:31:29,120
के पास होते हैं तो जैसे कि अपना बच्चा

447
00:31:29,120 --> 00:31:33,680
अपने आप को सेफ महसूस करता है हम

448
00:31:33,680 --> 00:31:38,080
और जब जब हम पिता से दूर जाते हैं

449
00:31:38,080 --> 00:31:43,600
हम कोई छोटा बच्चा तो वो

450
00:31:43,600 --> 00:31:48,000
डर महसूस करता है कि कहीं मैं या दुख भी महसूस कर सकता है क्योंकि

451
00:31:48,000 --> 00:31:52,000
आज हम भगवान भगवान का हाथ छोड़कर भगवान को भूलने से

452
00:31:52,000 --> 00:31:56,080
हमारे जीवन यानी कि आपका वहां पर जाने के बाद भय

453
00:31:56,080 --> 00:32:00,960
मिट गया इसलिए आप ये मानते हो कि वो ईश्वर है।

454
00:32:00,960 --> 00:32:02,240
हां तो वो समझ में तो

455
00:32:02,240 --> 00:32:06,320
आया। हां ठीक है। अगर कोई ये कहे अगर

456
00:32:06,320 --> 00:32:10,320
कोई ये कहे कि मैं जो है आईएस आईएस के किसी आतंकवादी के

457
00:32:10,320 --> 00:32:16,320
पास गया और वहां पर मुझे मेरा भय मिट गया तो उसको ईश्वर मान लें।

458
00:32:17,120 --> 00:32:21,280
वो उस बच्चे के लिए तो उसका भय खत्म ही होगा। आईएसआई

459
00:32:21,280 --> 00:32:27,280
वाले अरे ईश्वर ईश्वर माने कि ना माने ये बताइए।

460
00:32:27,920 --> 00:32:32,000
आप क्या बता रहे हैं आईएसआई वाले के बारे में? आपने सिद्धांत

461
00:32:32,000 --> 00:32:36,640
बताया है कि भैया उसके पास जाने से मेरा भय मिट गया।

462
00:32:36,640 --> 00:32:40,880
इसलिए मुझे लगा कि वो ईश्वर है। यानी कि यानी कि मेरा भय खत्म

463
00:32:40,880 --> 00:32:45,120
होने से पता चलता है कि ईश्वर है। तो मेरा भय तो भैया मेरी माताजी

464
00:32:45,120 --> 00:32:49,120
के पास भी खत्म हो रहा है। पिताजी के पास भी खत्म हो रहा है जाने से। अच्छा किसी

465
00:32:49,120 --> 00:32:53,120
का आतंकवादी के पास जाकर के भय खत्म हो रहा है। इससे सिद्ध हो गया कि

466
00:32:53,120 --> 00:32:57,280
दुनिया में ईश्वर है और वो भी वो ईश्वर वही है जिसके पास जाने से हमारा भय

467
00:32:57,280 --> 00:33:01,520
खत्म हुआ है। हां तो मेरा सिद्धांत ये है कि भगवान ने मुझे जब स्वयं

468
00:33:01,520 --> 00:33:05,600
का परिचय आत्मा अजर अमर अविनाशी है। हां। थोड़ा

469
00:33:05,600 --> 00:33:09,680
सा ऐसी बात करिए मेरी बात सुनिए मेरी बात मेरी बात

470
00:33:09,680 --> 00:33:13,680
समझिए आपको कई लोग देख रहे हैं और आगे देखेंगे भी ठीक है

471
00:33:13,680 --> 00:33:17,280
आप ब्रह्मा कुमारीज में आठ साल से जुड़े हुए हैं 2015 से

472
00:33:17,280 --> 00:33:21,440
आपने बताया शायद 10 साल हो गए 10 11 साल ठीक है उस बात

473
00:33:21,440 --> 00:33:25,440
आप उस बात को लेकर चलिए बार-बार एक तो आपको अपने जो क्लेम्स है उसको

474
00:33:25,440 --> 00:33:29,520
बदलना ना पड़े पहली बात दूसरी बात ये है ऐसी बात बोलिए जो सॉलिड

475
00:33:29,520 --> 00:33:33,600
हो कुछ समझ में यहां पर उसको स्वीकार किया

476
00:33:33,600 --> 00:33:37,680
जा सके आपने कहा सुनिए जो अपना परिचय

477
00:33:37,680 --> 00:33:42,160
बता रहा है इसलिए मां सिद्ध हुआ कि दुनिया में कोई ईश्वर है। यानी

478
00:33:42,160 --> 00:33:47,040
किसी के द्वारा उसका परिचय बताने से सिद्ध हो रहा है कि दुनिया में ईश्वर है। वाह

479
00:33:47,040 --> 00:33:51,200
उसके बाद जो परिचय बता रहा है वो ईश्वर है। ऐसा नहीं है।

480
00:33:51,200 --> 00:33:54,720
मैंने उदाहरण दिया।

481
00:33:54,720 --> 00:34:00,640
उसके बाद आगे आगे आगे उसके बाद उसके बाद आगे चले। जब हम

482
00:34:00,640 --> 00:34:04,960
उसके बाद जब हम जब हम आगे चले आगे मैं बता रहा हूं।

483
00:34:04,960 --> 00:34:08,960
अरे मैं मैं बता रहा हूं। आपने आगे चलके क्या किया? मैं बता रहा हूं। उसके बाद जब

484
00:34:08,960 --> 00:34:13,440
हम आगे चले तो आपने कहा कि

485
00:34:13,440 --> 00:34:17,840
उसके पास उसके पास जाने से मेरा भय समाप्त हुआ। तो इसका

486
00:34:17,840 --> 00:34:22,080
मतलब कि दुनिया में कोई समाप्त नहीं हुआ।

487
00:34:22,080 --> 00:34:26,880
समाप्त की बात नहीं है कि मुझे समझ आई।

488
00:34:26,880 --> 00:34:31,520
क्या? क्या समझ आई? ज्ञान जब मिलता है

489
00:34:31,520 --> 00:34:35,520
हां जब ये ज्ञान समझ में ज्ञान समझ में आने की बात नहीं कर रहा

490
00:34:35,520 --> 00:34:39,760
हूं जो समझ में आने के बाद आपको पता चला ईश्वर है ये ऐसे सिद्ध

491
00:34:39,760 --> 00:34:44,240
होता है वो सिद्ध होने की प्रक्रिया बताइए मुझे

492
00:34:44,240 --> 00:34:48,400
जी जी जी जी जी जी जब मैं ज्ञान लिया जब

493
00:34:48,400 --> 00:34:52,480
मुझे यह समझ में आया कि मेरा परिचय क्या है? मेरा पिता कौन

494
00:34:52,480 --> 00:34:56,640
है? और वो मेरे लिए क्या करता है? और मेरा कैसे वह

495
00:34:56,640 --> 00:35:00,640
मुझे मेरी रक्षा करता है? कैसे मुझे दुख से छुड़ाता

496
00:35:00,640 --> 00:35:04,960
है। यह सारा ज्ञान जब मुझे सृष्टि चक्र का मिला। मैं क्या था और

497
00:35:04,960 --> 00:35:08,960
आज मैं क्या हो चुका हूं। यह जब मुझे समझ में आता है। यानी

498
00:35:08,960 --> 00:35:10,320
कि हमें जब ये

499
00:35:10,320 --> 00:35:14,640
यानी कि हमें अगर यह जानना है ईश्वर दुनिया में है। ये कैसे सिद्ध

500
00:35:14,640 --> 00:35:18,960
होता है तो पहले हमें वहां जाना पड़ेगा। सारा ज्ञान लेना पड़ेगा। तब हमें महसूस

501
00:35:18,960 --> 00:35:23,200
होगा कि ईश्वर है ये सिद्ध होता है। यानी

502
00:35:23,200 --> 00:35:27,360
कि यहां पे आप मेरे समक्ष वो सिद्धांत नहीं रख सकते कि

503
00:35:27,360 --> 00:35:31,680
ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है।

504
00:35:31,680 --> 00:35:35,760
सिद्धांत नहीं रख सकते। सिद्धांत की बात वही है। सिद्धांत कहने का मतलब

505
00:35:35,760 --> 00:35:39,760
ये है। मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं। मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं।

506
00:35:39,760 --> 00:35:44,480
मैं आपको एक मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं। मैं आपको अगर कहूं

507
00:35:44,480 --> 00:35:50,480
इस दुनिया में टीवी है। यह कैसे सिद्ध होता है? जी

508
00:35:50,560 --> 00:35:54,720
टीवी है। हां। इस दुनिया में टीवी

509
00:35:54,720 --> 00:35:59,520
है। कैसे सिद्ध होता है? क्या बताएंगे? जब

510
00:35:59,520 --> 00:36:04,560
उसमें कोई फिल्म दिखेगी, चित्र दिखेगा तब वो टीवी है।

511
00:36:04,560 --> 00:36:08,640
हम टीवी इसका मतलब चित्र होगा। इससे पहले

512
00:36:08,640 --> 00:36:14,080
हां हमें ये चेक करना होगा कि टीवी है क्या? अगर टीवी

513
00:36:14,080 --> 00:36:18,240
क्या कहते हैं? टीवी वो है जो एक काले कलर का एक पतला सा आजकल

514
00:36:18,240 --> 00:36:22,400
एलईडी टीवी चल रहे हैं। वो है तो और उसमें फिल्म आती है और मैं

515
00:36:22,400 --> 00:36:25,360
जानता हूं कि वो LG का है या वो है

516
00:36:25,360 --> 00:36:29,440
या वो Samsung उस पे लिखा होता है। उसके उसके अंदर कई सारी वायर्स जा रही

517
00:36:29,440 --> 00:36:33,440
होती है। ये सब टीवी के लक्षण हो गए। टीवी का रूप

518
00:36:33,440 --> 00:36:37,520
हो गया। ठीक है? दिखाई नहीं दे सकने वाला। तो फिर मैंने कहा

519
00:36:37,520 --> 00:36:42,400
कि एक मिनट भाई साहब। एक मिनट 1 मिनट

520
00:36:42,400 --> 00:36:46,480
फिर मैंने कहा कि भैया टीवी है भी कोई जो चल

521
00:36:46,480 --> 00:36:50,720
सकता है जो चल सकता है ऐसा है आपके पास तो आप

522
00:36:50,720 --> 00:36:54,960
आप कहोगे कि हां देखो आपकी आंखों को दिखाई दे रहा होगा मेरे पीछे टीवी है

523
00:36:54,960 --> 00:36:58,960
ठीक है यानी कि मेरी आंखों का विषय वो

524
00:36:58,960 --> 00:37:03,360
बन पा रहा है और उसमें वो अमुक अमुक लक्षण भी है जिसके अनुसार

525
00:37:03,360 --> 00:37:07,760
टीबी होना टीवी का अस्तित्व होना सिद्ध हो गया आपने सिद्धांत

526
00:37:07,760 --> 00:37:12,080
बताया तो इसी प्रकार से ब्रह्मा कुमारी

527
00:37:12,080 --> 00:37:16,400
का ज्ञान लेने कोई क्यों जाए उसको कैसे बताओगे

528
00:37:16,400 --> 00:37:20,720
कि ईश्वर है चल मेरे साथ फिर मैं तुझे ज्ञान दिलवाऊंगा वो ज्ञान

529
00:37:20,720 --> 00:37:24,720
जैसे आपने टीवी के विषय में कहा जैसे टीवी के विषय में कहा कि भैया

530
00:37:24,720 --> 00:37:28,720
वो देखो दिखाई दे रहा है ना मेरे पीछे टीवी है है ना अगर

531
00:37:28,720 --> 00:37:32,880
टीवी को मैं जानता हूं आपने मुझे जनवा दिया ये टीवी है उसके बाद फिर कोई

532
00:37:32,880 --> 00:37:36,960
आपने सिद्धांत बताया इस सिद्धांत के आधार पर ये सिद्ध होता है कि इस

533
00:37:36,960 --> 00:37:40,480
दुनिया में टीवी का अस्तित्व है और आपने पीछे पीछे अपने दिखा दिया टीवी का

534
00:37:40,480 --> 00:37:44,640
अस्तित्व। तो ऐसे ही मुझे ईश्वर के विषय में सिद्धांत बताइए।

535
00:37:44,640 --> 00:37:48,640
अच्छा अगर हम ये कहे कि पहले ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान लो आप 10 साल हो गए

536
00:37:48,640 --> 00:37:52,640
आपको लेते लेते। तब आपको ये पता चलेगा कि ईश्वर है इस दुनिया

537
00:37:52,640 --> 00:37:56,800
में। ठीक? तो अगर मैं ऐसा करूंगा तो हर दूसरा व्यक्ति

538
00:37:56,800 --> 00:38:00,800
भले ही वो ब्रह्मा कुमारी हो। [गला साफ़ करने की आवाज़] आर्य समाज होन

539
00:38:00,800 --> 00:38:05,280
हो ऐसे बहुत फिर कुरान बाइबल सब है। फिर आगे लाइन।

540
00:38:05,280 --> 00:38:09,280
ऐसे बहुत से लोग हैं जो भगवान को प्राप्त कराने का मोक्ष

541
00:38:09,280 --> 00:38:14,480
को प्राप्त कराने का दावा करते हैं। तो यदि

542
00:38:14,480 --> 00:38:18,480
वो ये कहे कि भैया मैं कहूं कि भैया ईश्वर है ही नहीं मैं तो

543
00:38:18,480 --> 00:38:22,720
मानता ही नहीं तो वो कहे कि नहीं तुम जब हमारे यहां 10 साल प्रैक्टिस कर लोगे तो तुम्हें अनुभव

544
00:38:22,720 --> 00:38:26,720
हो जाएगा ईश्वर का। तो मैं ऐसे सबके यहां

545
00:38:26,720 --> 00:38:30,800
1010 साल जाके चेक करता रहूं। नहीं जरूरत नहीं है। 10

546
00:38:30,800 --> 00:38:34,800
साल की जरूरत नहीं है। तो मुझे अकाट्य सिद्धांत अभी यहां पर

547
00:38:34,800 --> 00:38:40,800
दो ना राइट नाउ। अकाट्य सिद्धांत यहां पर दो कि ईश्वर है वो बताओ।

548
00:38:40,960 --> 00:38:46,000
जो मेरा अपना एक्सपीरियंस वही बताऊंगा। सिद्धांत

549
00:38:46,000 --> 00:38:50,160
एक्सपीरियंस लेने के बाद सिद्धांत क्या प्राप्त हुआ कि

550
00:38:50,160 --> 00:38:54,320
ऐसे सिद्ध होता है दुनिया में ईश्वर है। जैसे मैं आपको देख सकता हूं।

551
00:38:54,320 --> 00:38:55,600
इसलिए यह सिद्ध है।

552
00:38:55,600 --> 00:38:59,760
यह सिद्ध हुआ कि आप हो। मैं टीवी को देख सकता हूं। इसलिए

553
00:38:59,760 --> 00:39:04,000
सिद्ध हुआ कि टीवी है। अच्छा मैं आपकी आवाज सुन सकता हूं।

554
00:39:04,000 --> 00:39:08,000
इसलिए यह सिद्ध हुआ कि आवाज है आपकी। और किस प्रकार से सिद्ध

555
00:39:08,000 --> 00:39:12,080
हो रहा है। किन किस तरीके से किन विषयों से सिद्ध हो रहा है कि इस दुनिया में

556
00:39:12,080 --> 00:39:16,240
कोई ईश्वर भी है जिसके पास हमें जाना चाहिए और ज्ञान लेना चाहिए कि

557
00:39:16,240 --> 00:39:20,720
भैया वो मुक्ति दिलाएगा। हम्म। जी।

558
00:39:20,720 --> 00:39:24,720
तो हमें वहां पे जाने के बाद जो ज्ञान मिला तो उस

559
00:39:24,720 --> 00:39:29,920
ज्ञान में हमारे सारे सवाल खत्म। भाई साहब मैं वहां गया क्यों?

560
00:39:29,920 --> 00:39:34,000
मुझे अभी आप कह रहे हो वहां सवाल आपके खत्म हो गए

561
00:39:34,000 --> 00:39:36,400
ना?

562
00:39:36,400 --> 00:39:40,480
प्रश्न खत्म हो गए। ठीक है। ठीक है। तो बताइए ईश्वर है। कैसे सिद्ध हुआ? इस

563
00:39:40,480 --> 00:39:43,920
प्रश्न का उत्तर दीजिए।

564
00:39:43,920 --> 00:39:48,000
वही तो भगवान ने मुझे सारे प्रश्नों के उत्तर दिए कि ये सारा सृष्टि चक्र कैसे

565
00:39:48,000 --> 00:39:52,000
चलता है? भाई साहब अच्छा कोई अगर हमारे मन के

566
00:39:52,000 --> 00:39:56,800
प्रश्नों का उत्तर दे दे तो इससे सिद्ध होता है कि ईश्वर है। हां

567
00:39:56,800 --> 00:40:00,880
तो वही तो ज्ञानी है ना वही तो सबको बता सकता है। मैं मैं

568
00:40:00,880 --> 00:40:05,120
कह रहा हूं कोई अगर हमारे प्रश्नों का उत्तर दे दे तो उससे सिद्ध

569
00:40:05,120 --> 00:40:08,400
होता है कि वो ईश्वर है।

570
00:40:08,400 --> 00:40:12,400
मेरे मन को समाधान कर कर सकता है जो कि मेरे मन के कोई

571
00:40:12,400 --> 00:40:16,720
भी प्रश्नित समाप्त हो जाए मेरा मन तभी

572
00:40:16,720 --> 00:40:22,160
मुझे वो सुख अनुभव कर सकूंगा तो मैं आपको एक प्रश्न

573
00:40:22,160 --> 00:40:26,160
मैं आपको एक प्रश्न दे रहा हूं इस दुनिया में कोई ईश्वरीय सत्ता है ये कैसे

574
00:40:26,160 --> 00:40:30,320
सिद्ध होता है इस प्रश्न का उत्तर दीजिए ना फिर जब आपको उत्तर मिल गए

575
00:40:30,320 --> 00:40:34,320
सारे तो जी जी तो उसके

576
00:40:34,320 --> 00:40:38,320
लिए हमें पूरी हिस्ट्री जग्राफी सुननी पड़ेगी ठीक है? अनुभव करनी

577
00:40:38,320 --> 00:40:43,600
पड़ेगी। तभी तो उसकी सत्ता काम करती है नहीं करती है महसूस होगा।

578
00:40:43,600 --> 00:40:47,760
अरे भाई सत्ता काम करती है। पहले सत्ता है कि नहीं ये बताओ ना। कैसे

579
00:40:47,760 --> 00:40:51,840
पता चलता है सत्ता है। यानी अभी आपके पास सिद्धांत नहीं है। आप सीधे उसको

580
00:40:51,840 --> 00:40:57,840
मोक्ष दिला के मुक्ति कराओगे उसकी। सिद्धांत नहीं है बताने वाला।

581
00:41:00,640 --> 00:41:05,360
बताया

582
00:41:05,360 --> 00:41:09,360
ठीक ठीक है ठीक है मैं मैं इसको क्लियर कर देता हूं बहुत देर खींचेगा एक तो

583
00:41:09,360 --> 00:41:13,360
पहले सिद्धांत को क्लियर कर लेते हैं आपने कहा कि जो हमारे प्रश्नों

584
00:41:13,360 --> 00:41:17,360
का उत्तर दे देगा वो ईश्वर है उससे सिद्ध होगा कि वो ईश्वर है। अच्छा तो

585
00:41:17,360 --> 00:41:22,400
एक बच्चा बच्चा पूछता है कि

586
00:41:22,400 --> 00:41:26,480
एप्पल की स्पेलिंग क्या है और उसको बता दिया किसी ने एप्पल की स्पेलिंग क्या

587
00:41:26,480 --> 00:41:30,560
है? तो सिद्ध हो गया कि दुनिया में ईश्वर है। वो ईश्वर वही है जो एप्पल की स्पेलिंग बता

588
00:41:30,560 --> 00:41:35,120
रहा है।

589
00:41:35,120 --> 00:41:39,920
वाला प्रश्न भाई साहब का प्रश्न है।

590
00:41:39,920 --> 00:41:44,240
हमारा का प्रश्न है।

591
00:41:44,240 --> 00:41:50,240
क्या हो गया भाई?

592
00:41:59,520 --> 00:42:03,840
चले गए। ट्रक के पीछे एक शायरी लिखी होती है। जिन्हें जल्दी

593
00:42:03,840 --> 00:42:07,840
थी वो चले गए। देखी है क्या किसी ने? पढ़ी है? कौन-कौन

594
00:42:07,840 --> 00:42:13,840
सी शायरियां होती है ट्रक के पीछे? ऐसी होती है। जिन्हें जल्दी थी वो चले गए।

595
00:42:16,880 --> 00:42:22,640
ठीक है।

596
00:42:22,640 --> 00:42:26,800
तो आप देख रहे होंगे 10 साल से जुड़े हुए हैं और ब्रह्मा कुमारीज

597
00:42:26,800 --> 00:42:31,920
की ओर से ब्रह्मा कुमारी का पक्ष रटने आए थे। मैं एक बात क्लियर कर दूं।

598
00:42:31,920 --> 00:42:36,800
आपने अपने इस बेफिजूल तर्क का आंसर ले लिए। ब्रह्मा

599
00:42:36,800 --> 00:42:41,120
की भाई अस्ति को बुलाओ। मासूम भाई से छल पूर्वक बात करने से क्या होगा?

600
00:42:41,120 --> 00:42:45,120
आपके अंदर जो प्रश्न कीड़ा है। अरे भाई तो तुम क्यों

601
00:42:45,120 --> 00:42:50,400
नहीं आते हो? और यदि तुम्हारे पास और कोई अ

602
00:42:50,400 --> 00:42:56,400
वो है विद्वान तो उससे मिलवा दो

603
00:42:56,400 --> 00:43:00,480
और यदि तुम्हारे अंदर सामर्थ नहीं है तो विरोध यहां क्यों कर रहे हो जाओ उसको

604
00:43:00,480 --> 00:43:04,560
भेजो विरोध करने के लिए जो सामर्थ हो जिसके अंदर हमने तो अपना नंबर दे

605
00:43:04,560 --> 00:43:08,640
रखा है ये देखो 7408301869

606
00:43:08,640 --> 00:43:12,800
उस व्यक्ति को हमने सुना उसके पास उसको हमारे सवाल

607
00:43:12,800 --> 00:43:16,800
ही समझ में नहीं आ रहे हैं आप आ सकते हो यदि चेहरा दिखाने

608
00:43:16,800 --> 00:43:20,880
में इंटरेस्टेड हो वैसे आज नहीं करते आप जो है अशोक जी हैं

609
00:43:20,880 --> 00:43:25,360
या आने को कह रहे हैं तो अशोक जी आप जो है

610
00:43:25,360 --> 00:43:29,920
कल आइए फॉर्म भर दीजिए यहां यहां पर WhatsApp करिए

611
00:43:29,920 --> 00:43:33,280
थोड़ा इंटेलेक्चुअल

612
00:43:33,280 --> 00:43:39,280
चर्चा हो जाए

613
00:43:39,600 --> 00:43:42,320
ठीक है।

614
00:43:42,320 --> 00:43:46,320
बातों में फंसाती तो आप लोग हो। सीधी जवाब देना ही नहीं

615
00:43:46,320 --> 00:43:50,720
है। उसने अपना परिचय दिया, यह हुआ, वह हुआ।

616
00:43:50,720 --> 00:43:54,720
अरे भैया जब परिचय दे दिया, ज्ञान मिल गया, उसके बाद की तो बात बताओ।

617
00:43:54,720 --> 00:43:58,880
अब तो बता दो ईश्वर है। सिद्ध कैसे होता है? अच्छा महसूस करना यानी कि आपके

618
00:43:58,880 --> 00:44:03,280
पास हमें दिया जा सकने वाला कोई थ्योरिकल ज्ञान नहीं है।

619
00:44:03,280 --> 00:44:07,680
आप सिर्फ वो कर सकते हो। महसूस करवाओगे

620
00:44:07,680 --> 00:44:11,920
सीधे व्यक्ति को और महसूस करने जाने के लिए अपना द

621
00:44:11,920 --> 00:44:15,920
साल इन्वेस्ट करने के लिए पहले व्यक्ति आप पर विश्वास करे भले

622
00:44:15,920 --> 00:44:20,480
ही आप उसको दो बातों का जवाब ना दे सको

623
00:44:20,480 --> 00:44:26,480
है ना

624
00:44:27,280 --> 00:44:31,680
हां जी महेंद्र जी हां जी जी

625
00:44:31,680 --> 00:44:35,760
क्या हुआ जी उसका उस सवाल का आंसर मुझे आप बता बता

626
00:44:35,760 --> 00:44:40,000
रहा हूं कि भगवान है या इसका आंसर क्या

627
00:44:40,000 --> 00:44:44,240
ये कैसे सिद्ध होता है हां जी जब हमारे

628
00:44:44,240 --> 00:44:49,120
मन में दुख से छूटने की तड़प है

629
00:44:49,120 --> 00:44:54,050
किससे उसको दुख से छुड़ाने वाला कोई तो होगा

630
00:44:54,050 --> 00:44:58,080
[हंसी] सुना है सुना है किसी

631
00:44:58,080 --> 00:45:02,560
से किससे सुन के आए बताओ नहीं नहीं नहीं भाई नहीं भाई साहब

632
00:45:02,560 --> 00:45:06,560
भगवान की कसम मैं किसी से नहीं सुना जब आपसे बात करने लगता हो ना

633
00:45:06,560 --> 00:45:10,560
तो कोई प्रश्न मन में उत्तर नहीं आता है। कभी-कभी

634
00:45:10,560 --> 00:45:14,880
अपना मन कंफ्यूज हो जाता है प्रश्न जवाब होकर भी लेकिन हम स्वयं

635
00:45:14,880 --> 00:45:19,120
अगर शांत खड़े होते तो सारे जवाब आने लगते हैं। ठीक है। ठीक है। ठीक है।

636
00:45:19,120 --> 00:45:23,200
मन की भी एक अवस्था होती है कि हम डिस्टर्ब हो जाए

637
00:45:23,200 --> 00:45:27,360
तो आपकी बात मैं समझ गया। आपकी बात मैं समझ गया। मैं आपकी

638
00:45:27,360 --> 00:45:31,680
बात को सरल शब्दों में दोहरा देता हूं। कि हमारे अंदर

639
00:45:31,680 --> 00:45:35,760
सतचित आनंद होने से ही यह सिद्ध होता है।

640
00:45:35,760 --> 00:45:41,280
कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है।

641
00:45:41,280 --> 00:45:42,560
है ना?

642
00:45:42,560 --> 00:45:47,840
हां। बहुत बढ़िया। सही बात। यानी यानी कि

643
00:45:47,840 --> 00:45:52,320
इस दुनिया में सच्चिद। अच्छा हमारे अंदर ये सतचित आनंद की चाह है।

644
00:45:52,320 --> 00:45:57,040
ये कैसे सिद्ध होता है? जी जी।

645
00:45:57,040 --> 00:46:01,280
जैसे कि हम परेशान होते हैं दुख में या अशांत मन

646
00:46:01,280 --> 00:46:05,520
होता है तो मन ऐसा तो कुछ लगता है कि कहीं तो शांति

647
00:46:05,520 --> 00:46:09,520
शांति शांति अनुभव हो ऐसा मन हो कि जहां पे हमें

648
00:46:09,520 --> 00:46:13,680
दुख ना टच करे हां मैं एक मैं इसको

649
00:46:13,680 --> 00:46:17,760
क्लियर कर देता हूं जैसे कि मान लीजिए चाहते हैं मैं जब जैसे कि

650
00:46:17,760 --> 00:46:21,760
मान लीजिए कि मैं अपनी छत पर बैठा

651
00:46:21,760 --> 00:46:25,840
हूं और मैंने अपनी सोने की अंगूठी निकाल के

652
00:46:25,840 --> 00:46:29,920
साइड में छत की बाउंड्री पर रख दी। अब उसको कोई कौवा आया

653
00:46:29,920 --> 00:46:34,640
और लेके उड़ गया। उस समय मैं उसका पीछा नहीं कर सकता।

654
00:46:34,640 --> 00:46:38,640
बराबर है। क्यों नहीं कर सकता? क्यों नहीं कर सकता? क्योंकि मैं उड़

655
00:46:38,640 --> 00:46:42,640
नहीं सकता। है ना? है ना? उड़ नहीं

656
00:46:42,640 --> 00:46:46,880
सकता। हां। तो इसका मतलब

657
00:46:46,880 --> 00:46:50,960
ये है कि मेरे अंदर ना उड़ पाने की जो उड़

658
00:46:50,960 --> 00:46:54,960
सकने की जो भावना आ रही है। है ना? इसका मतलब

659
00:46:54,960 --> 00:46:58,000
इस दुनिया में कोई है जो उड़ सकता है।

660
00:46:58,000 --> 00:47:02,480
है ना? इस दुनिया में कोई है जो

661
00:47:02,480 --> 00:47:06,560
उड़ सकता है। इसी प्रकार से हमारे जीवन में तरह-तरह से

662
00:47:06,560 --> 00:47:10,640
जो प्राकृतिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं। कहीं ना कहीं इनके

663
00:47:10,640 --> 00:47:14,800
प्रकार प्राकृतिक बाधाओं के पार जाने की इच्छा

664
00:47:14,800 --> 00:47:19,040
उत्पन्न होती है। होती है ना? होती है ना?

665
00:47:19,040 --> 00:47:23,760
कहीं-क

666
00:47:23,760 --> 00:47:28,480
एक मिनट भाई साहब एक मिनट आगे मत बढ़िए आगे मैं कुछ यहां पर क्लियर कर रहा हूं

667
00:47:28,480 --> 00:47:32,560
तो इसका मतलब यह है कि हमारे अंदर प्रकृति की सभी बाधाओं को तोड़ने

668
00:47:32,560 --> 00:47:36,640
की कामना आ रही है जो जिसका जिसके अंदर गहराई में हमारी

669
00:47:36,640 --> 00:47:40,720
सच्चिदानंद की कामना है इस तो सच्चिदानंद से जब ये पता

670
00:47:40,720 --> 00:47:44,720
चलता है कि इस दुनिया में कोई है जो सच्चिदानंद है उसी

671
00:47:44,720 --> 00:47:48,800
प्रकार से जो प्रकृति प्राकृतिक बाधाओं पर नियंत्रण कर लेने की जो

672
00:47:48,800 --> 00:47:52,800
चाह हमारे अंदर आ रही है तो इसका मतलब इससे पता चलता है

673
00:47:52,800 --> 00:47:56,800
कि इस दुनिया में कोई है जो प्रकृति को नियंत्रित कर सकता है। प्रकृति

674
00:47:56,800 --> 00:48:02,800
की सीमाओं के परे जा सकता है। है ना?

675
00:48:02,880 --> 00:48:08,000
ठीक है। यानी कि हमारे अंदर हमारे अंदर सर्वशक्तिमान

676
00:48:08,000 --> 00:48:12,080
प्रकृति के सभी बंधनों को के परे जाने की जो भावना आ रही है।

677
00:48:12,080 --> 00:48:16,320
उसी से सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान प्रकृति के परे

678
00:48:16,320 --> 00:48:20,400
जा सकने वाला ईश्वर विद्यमान है। बहुत बड़ी बात।

679
00:48:20,400 --> 00:48:24,640
जी सर है। अब आगे बात ये आती है यानी कि कुल

680
00:48:24,640 --> 00:48:28,720
मिलाकर के हम अबाध्य अबाध्य बन जाना

681
00:48:28,720 --> 00:48:32,880
चाहते हैं कि हमें कोई रोक ना पाए। तो इसका मतलब है इस दुनिया में कोई है

682
00:48:32,880 --> 00:48:37,440
ऐसा जिसे कोई जिसे कोई रोक ना पाए। ठीक है?

683
00:48:37,440 --> 00:48:41,440
जी इसका मतलब ये है कि हम सभी नियमों से

684
00:48:41,440 --> 00:48:45,600
मुक्त हो जाना। हम सभी प्रकार के नियमों से मुक्त हो जाना चाहते हैं।

685
00:48:45,600 --> 00:48:49,680
इसका मतलब इस संसार में कोई है सभी ऐसा ऐसा

686
00:48:49,680 --> 00:48:53,760
भी एक मिनट ऐसा भी जीवन चाहते हैं वहां पे कोई

687
00:48:53,760 --> 00:48:57,760
दुख ना हो। वो वो जो जीवन चाहते

688
00:48:57,760 --> 00:49:02,000
हैं उसका जो वो है ना प्रमाण वो यही है कि हम सभी

689
00:49:02,000 --> 00:49:06,080
नियमों से मुक्त हो जाना चाहते हैं। प्रकृति के सभी प्रकार के नियमों

690
00:49:06,080 --> 00:49:08,960
से मुक्त हो जाना।

691
00:49:08,960 --> 00:49:14,480
मुक्त हो जाना। नहीं जीवन भी चाहते हैं ना कि ऐसा भी जीवन हो। अरे भैया

692
00:49:14,480 --> 00:49:18,000
मैं कहां कह रहा हूं कि मुक्ति का मतलब मौत ही है। मैंने ये कहा

693
00:49:18,000 --> 00:49:22,160
क्या? मैंने ये कहा क्या? मैं कह रहा हूं

694
00:49:22,160 --> 00:49:26,880
कि हम सभी प्रकार के प्राकृतिक नियमों नियमों

695
00:49:26,880 --> 00:49:31,040
के नियमों के पार चले जाना चाहते हैं। तो इसका मतलब है इस दुनिया

696
00:49:31,040 --> 00:49:37,040
में कोई है ऐसा जो सभी प्रकार के नियमों के पार जा सकता है।

697
00:49:39,280 --> 00:49:43,600
यानी कि ईश्वर वही है जो किसी प्रकार के नियम के

698
00:49:43,600 --> 00:49:47,680
एक मिनट एक मिनट भाई साहब ईश्वर वही है जो

699
00:49:47,680 --> 00:49:51,920
किसी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है।

700
00:49:51,920 --> 00:49:55,920
वही हुआ ना ईश्वर ईश्वर वही है

701
00:49:55,920 --> 00:50:00,160
जो हर नियम का सम्मान करे। तो फिर

702
00:50:00,160 --> 00:50:04,240
तो फिर वो सच्चिदानंद से सिद्ध नहीं होगा।

703
00:50:04,240 --> 00:50:08,880
भाई मौत एक नियम है। मैं बता रहा हूं। मौत एक नियम है।

704
00:50:08,880 --> 00:50:13,040
हम हम ये चाहते हैं कि हम हम कभी ना मरने वाली स्थिति में पहुंच जाए।

705
00:50:13,040 --> 00:50:17,040
हम यही चाहते हैं ना। अब ईश्वर है वो कहे नहीं तू

706
00:50:17,040 --> 00:50:21,360
तो मरेगा ही। हां इसीलिए हम हम इसीलिए

707
00:50:21,360 --> 00:50:25,360
चाहते हैं बहुत सिर्फ इसीलिए हम जब

708
00:50:25,360 --> 00:50:29,520
हमारा शरीर हमें इसीलिए चाहते हैं।

709
00:50:29,520 --> 00:50:33,200
हम इसीलिए चाहते हैं। बोल रहा हूं मैं। सुनो तो पहले

710
00:50:33,200 --> 00:50:38,000
सुनो। हम मौत इसीलिए चाहते हैं।

711
00:50:38,000 --> 00:50:44,000
है

712
00:50:51,440 --> 00:50:57,440
इनकी आवाज नहीं आ रही है।

713
00:51:05,600 --> 00:51:09,600
आपकी आवाज अटक रही कुछ समझ में नहीं हमारा शरीर पुराना

714
00:51:09,600 --> 00:51:15,600
हो आपकी आवाज अटक रही है भाई साहब आवाज अटक रही है आपकी

715
00:51:22,240 --> 00:51:26,640
हो गया

716
00:51:26,640 --> 00:51:30,800
ठीक है चलिए ऐसा करते हैं उनकी आवाज अटक रही है मुझे लगता है नेटवर्क

717
00:51:30,800 --> 00:51:35,120
प्रॉब्लम है नेट चेहरा नहीं आ रहा आपका आपका

718
00:51:35,120 --> 00:51:39,120
भाई साहब आप जो है अगर हो सका तो एकद

719
00:51:39,120 --> 00:51:43,200
दिन में आपके साथ जो है कंटिन्यू करेंगे। ठीक है आप तब तक और थोड़ा अध्ययन

720
00:51:43,200 --> 00:51:46,880
बढ़ाइए।

721
00:51:46,880 --> 00:51:51,200
अच्छा राम मनोहर जी आपको

722
00:51:51,200 --> 00:51:55,840
मैं लिंक दे देता हूं।

723
00:51:55,840 --> 00:51:59,200
यहां लिंक सबको मत दीजिएगा।

724
00:51:59,200 --> 00:52:05,200
ज्यादा टाइम नहीं है। राम मनोहर जी को ले लेते हैं और

725
00:52:19,840 --> 00:52:24,320
हर्ष जी को ले लेते हैं

726
00:52:24,320 --> 00:52:30,320
और अनिकेत जी को ले लेते हैं।

727
00:52:35,200 --> 00:52:39,200
महेंद्र जी अब आपसे कल बात मतलब फिर कभी बात करेंगे काफी बात हो

728
00:52:39,200 --> 00:52:45,200
गई आपसे आपका वो बार-बार अटक रहा है

729
00:52:45,520 --> 00:52:49,680
हां जी देखिए देखिए थोड़ा करेंगे बात

730
00:52:49,680 --> 00:52:54,080
थोड़ा ओपन करना सर कर ओपन कर कर ओपन हां

731
00:52:54,080 --> 00:52:58,160
हां अब तो आपकी पिक्चर पहले से ज्यादा क्लियर आ रही है मोबाइल बदल

732
00:52:58,160 --> 00:53:02,960
लिया दरवाजा खिड़की बंद किया था तो इसलिए थोड़ा प्रॉब्लम आ रहा था।

733
00:53:02,960 --> 00:53:07,040
अच्छा तो मैं यह कह रहा हूं

734
00:53:07,040 --> 00:53:11,040
कि हम क्योंकि सभी नियमों से मुक्ति चाहते हैं। मैं उड़

735
00:53:11,040 --> 00:53:15,040
नहीं पा रहा हूं तो उड़ सकूं। गायब नहीं हो पा रहा हूं तो गायब हो सकूं। कुल मिलाकर के

736
00:53:15,040 --> 00:53:19,120
हम जो है प्राकृतिक बाधाओं के परे जाना चाहते हैं। इस क्योंकि

737
00:53:19,120 --> 00:53:23,280
इससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई प्राकृतिक बाधाओं के परे जाने वाला ईश्वर

738
00:53:23,280 --> 00:53:26,640
है। जी

739
00:53:26,640 --> 00:53:30,720
हां बंधन मुक्त जीवन तो यदि ऐसा है तो ईश्वर

740
00:53:30,720 --> 00:53:35,120
वही है जो किसी प्रकार के नियम के नीचे दबा हुआ नहीं है। बंधन में नहीं है।

741
00:53:35,120 --> 00:53:39,280
ठीक है? नहीं तो अगर ऐसा नहीं है वो बंधन में है

742
00:53:39,280 --> 00:53:43,520
तो आप उस ईश्वर को फिर सिद्ध करें अलग से। मतलब कहने

743
00:53:43,520 --> 00:53:48,480
का यह है कि हमारे अंदर बंधन मुक्त

744
00:53:48,480 --> 00:53:53,120
है। जी कोई तो बंधन मुक्त है। बहुत बढ़िया

745
00:53:53,120 --> 00:53:57,280
वो बंधन मुक्त है। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। ईश्वर वो है जो बंधन मुक्त

746
00:53:57,280 --> 00:54:02,320
है। किसी प्रकार के बंधन में नहीं है। ठीक है। जी। ठीक है ना?

747
00:54:02,320 --> 00:54:08,320
अब ये बताइए क्या वो अवतार ले सकता है?

748
00:54:08,320 --> 00:54:14,320
जी अवतार वो नहीं लेता। बंधन में है मतलब

749
00:54:15,600 --> 00:54:19,920
अवतार इसीलिए लेता है उसको अवतार देने की जरूरत ही नहीं है।

750
00:54:19,920 --> 00:54:24,160
वो अवतरित होता है। अवतरित होता है। उसको ज्ञान प्रवेश करके

751
00:54:24,160 --> 00:54:28,240
उसको ज्ञान देने की जरूरत क्या है?

752
00:54:28,240 --> 00:54:32,960
हमारे ऊपर रहम की भावना है उसके मन में। तो रहम की भावना के लिए

753
00:54:32,960 --> 00:54:37,520
ये रहम की भावना के लिए भाई साहब भाई साहब सुन लीजिए।

754
00:54:37,520 --> 00:54:41,680
जानता हूं आप क्या मैं जान गया रहम दिल है इसलिए परकाया प्रवेश

755
00:54:41,680 --> 00:54:45,680
करके ज्ञान देता है तो रहम दिल है इसलिए अवतार लेकर के ज्ञान देता है

756
00:54:45,680 --> 00:54:49,120
लो अवतार

757
00:54:49,120 --> 00:54:54,080
हां तो तो तो अवतार लेकर के देता है लो

758
00:54:54,080 --> 00:54:58,240
तो जन्म लेने की जरूरत नहीं उसको ज्ञान ज्ञान ही देना है ना उसको अरे भैया

759
00:54:58,240 --> 00:55:02,640
भैया पर परकाया प्रवेश की भी जरूरत नहीं है

760
00:55:02,640 --> 00:55:03,680
क्या वो मन में आ

761
00:55:03,680 --> 00:55:07,840
के दे सकता है सीधे मैं बता रहा हूं सीधे मन हां जी मन में

762
00:55:07,840 --> 00:55:11,840
क्या ईश्वर सीधा घुस सकता है? हां

763
00:55:11,840 --> 00:55:16,400
मन में घुसने के लिए पहली बात कि किस हर एक के मन में घुसेगा

764
00:55:16,400 --> 00:55:20,800
कैसे घुसेगा क्योंकि हमारा मन ही उसके संकल्प करने के लिए

765
00:55:20,800 --> 00:55:24,800
यानी कि यानी कि ईश्वर एक साथ सबके मन में नहीं घुस

766
00:55:24,800 --> 00:55:27,600
सकता

767
00:55:27,600 --> 00:55:31,680
क्योंकि वो घुसने का बात अलग है कि वो हमेशा हम उसके

768
00:55:31,680 --> 00:55:36,160
संकल्प तो कैच कर हमारी क्षमता होनी चाहिए। मैं मैं पूछ रहा हूं

769
00:55:36,160 --> 00:55:40,320
क्या वो ऐसा कोई इंतजाम कर सकता है जो दुनिया

770
00:55:40,320 --> 00:55:44,400
में सबके साथ सबके मन में एक साथ घुस जाए और ये ईश्वरीय अज्ञान प्रदान

771
00:55:44,400 --> 00:55:48,720
करे क्यों परकाया में प्रवेश करेगा कि जो उसको

772
00:55:48,720 --> 00:55:52,800
सुनने आए एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट कि जो

773
00:55:52,800 --> 00:55:57,040
उसको एक मिनट जो उसको सुनने आए बस वही ज्ञान ले पाए अरे भैया ईश्वर

774
00:55:57,040 --> 00:56:01,120
तो सर्वशक्तिमान है वो एक साथ पूरी दुनिया में समस्त जितने भी लोग

775
00:56:01,120 --> 00:56:05,680
हैं फंसे हुए उन सबके मन में घुसेगा देगा

776
00:56:05,680 --> 00:56:09,760
नहीं इसीलिए फर्क नहीं

777
00:56:09,760 --> 00:56:15,760
पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं घुस सकता है कि नहीं

778
00:56:16,240 --> 00:56:20,880
वो घुसता नहीं है घुस सकता है पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं

779
00:56:20,880 --> 00:56:24,960
घुस सकता है ना घुस सकता है ना हां घुस सकता है हां ठीक

780
00:56:24,960 --> 00:56:29,280
है घुस सकता है तो इसका मतलब बहुत आवश्यक नहीं है कि वो परकाया प्रवेश

781
00:56:29,280 --> 00:56:33,280
ही करे पर वो करता है क्योंकि उसका मन है आवश्यक है

782
00:56:33,280 --> 00:56:37,360
कि परकाया प्रवेश करता है। इसलिए आवश्यक

783
00:56:37,360 --> 00:56:41,440
क्यों है? बताओ बताओ। हां जी जी जब हमें

784
00:56:41,440 --> 00:56:46,720
कानों से सुनने का आदत हुआ है ज्ञान का समझने का

785
00:56:46,720 --> 00:56:52,000
तो हमें समझाने के लिए उसको मुख की जरूरत होगी।

786
00:56:52,000 --> 00:56:56,560
तो कोई का आधार एक मिनट

787
00:56:56,560 --> 00:57:01,040
एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट इसका मतलब यह है कि ब्रह्मा कुमारी

788
00:57:01,040 --> 00:57:05,280
के लिए उसके ब्रह्मा कुमारी के पास उसका कोई इंतजाम नहीं है जो

789
00:57:05,280 --> 00:57:08,640
कि व्यक्ति बह रहा हो।

790
00:57:08,640 --> 00:57:12,640
जो व्यक्ति बह रहा हो क्या है? उसका उसका भी इलाज है।

791
00:57:12,640 --> 00:57:16,800
क्या क्या है? उसको लिखवा के तो पढ़ा सकता है।

792
00:57:16,800 --> 00:57:21,040
यानी कि ये यानी कि ये मैटर नहीं करता है कि किसी के मुख से निकली

793
00:57:21,040 --> 00:57:25,200
हुई आवाज को सुनकर ही ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। ये

794
00:57:25,200 --> 00:57:29,360
मैटर नहीं करता। हां अवश्य मैटर कर किसी

795
00:57:29,360 --> 00:57:31,520
भी किसी भी प्रकार से

796
00:57:31,520 --> 00:57:35,680
वो ज्ञान उसके मन में आ जाना चाहिए। जब वो ज्ञान आ जाएगा तो

797
00:57:35,680 --> 00:57:39,840
उसका ये वाला जो ये वाली जो मूर्खता है कि मैंने मैं सुन के मेरी आदत

798
00:57:39,840 --> 00:57:43,840
है सुनने की तो मैं सुन के ही ज्ञान लूंगा। वो इससे भी तो मुक्ति

799
00:57:43,840 --> 00:57:48,080
पा लेगा भाई। जब ज्ञान आ जाएगा तो सीधे ज्ञान दे दो ना।

800
00:57:48,080 --> 00:57:52,080
पर काया प्रवेश की भी क्या जरूरत है? सीधा ज्ञान

801
00:57:52,080 --> 00:57:58,080
कैसे देगा भाई साहब? सीधा

802
00:57:59,840 --> 00:58:05,040
लेकिन हम तो सर्वमान नहीं है ना समझने के लिए हमारी तो क्षमता होनी चाहिए

803
00:58:05,040 --> 00:58:09,120
यानी कि वो वो जो है इस तरीके से ज्ञान नहीं दे सकता जिसको हम समझ

804
00:58:09,120 --> 00:58:12,240
सके।

805
00:58:12,240 --> 00:58:16,480
हमारे मन में घुसकर इस एक मिनट हमारे मन में घुसकर

806
00:58:16,480 --> 00:58:21,120
वो इस तरह से ज्ञान नहीं दे सकता जिसको हम समझ सके

807
00:58:21,120 --> 00:58:25,200
और वही पे नहीं दे सकता

808
00:58:25,200 --> 00:58:29,360
बाधित हो गया बाधित हो गया कैसे कैसे बाधित हुआ

809
00:58:29,360 --> 00:58:33,600
आपने कहा ना फलाना काम नहीं कर सकता वो वो

810
00:58:33,600 --> 00:58:37,600
तो सर्वशक्तिमान है करेगा जरूर कर सकता

811
00:58:37,600 --> 00:58:42,720
है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं कर सकता है कि नहीं

812
00:58:42,720 --> 00:58:47,120
वो उसका विधि अपनी विधि से ही कार्य करेगा ना वो

813
00:58:47,120 --> 00:58:51,360
मैंने पूछा कर सकता है कि नहीं अपनी विधि से यानी यानी कि आवश्यक

814
00:58:51,360 --> 00:58:55,760
नहीं कि परकाया प्रवेश में ही करना है। आवश्यक नहीं है।

815
00:58:55,760 --> 00:58:59,840
अच्छा सुनने की बात मैं बता रहा हूं। परकाया प्रवेश की क्या आवश्यकता है? आकाशवाणी

816
00:58:59,840 --> 00:59:03,920
नहीं कर सकता भाई। पर काया प्रवेश की भी क्या आवश्यकता है?

817
00:59:03,920 --> 00:59:08,160
सीधे आकाशवाणी कर दे। जी जी पर काया

818
00:59:08,160 --> 00:59:12,160
आकाशवाणी करेंगे। आकाशवाणी करेगा। तो उसके लिए उसको

819
00:59:12,160 --> 00:59:16,880
मुख भी चाहिए। क्या चाहिए? वो तो एक आत्मा है ना।

820
00:59:16,880 --> 00:59:20,960
भगवान के लिए मुख तो चाहिए। यानी कि आकाशवाणी नहीं कर

821
00:59:20,960 --> 00:59:24,960
सकता वो बिना मुख के बिना मुख आकाशवाणी क्यों करेगा

822
00:59:24,960 --> 00:59:27,440
कैसे करेगा कैसे कौन समझेगा उसको कैसे

823
00:59:27,440 --> 00:59:31,440
निकली वाणी तो काहे के लिए उसको सर्वशक्तिमान कह रहे

824
00:59:31,440 --> 00:59:35,600
हो बोल दो ना कि नहीं हां

825
00:59:35,600 --> 00:59:39,760
जी जी जी इसी सवाल का जवाब दे रहा हूं मैं सर्वशक्तिमान

826
00:59:39,760 --> 00:59:43,760
की व्याख्या इसका मतलब सर्वशक्तिमान की व्याख्या नहीं बोल रहा

827
00:59:43,760 --> 00:59:48,320
हूं सभी बंधनों से मुक्त है कि नहीं यह आप बंधन लगा रहे हो

828
00:59:48,320 --> 00:59:52,560
तो बंधन से मुक्त भी है। हां हां बताओ कैसे? वो

829
00:59:52,560 --> 00:59:56,240
शरीर के बंधन से मुक्त है।

830
00:59:56,240 --> 01:00:00,560
शरीर के बंधनों से मुक्त है। मतलब वो ऐसा है सबको

831
01:00:00,560 --> 01:00:04,640
जो है एक मिनट जैसे हमने हमने जो ये

832
01:00:04,640 --> 01:00:08,800
सिद्ध किया था कि हम क्योंकि प्रकृति

833
01:00:08,800 --> 01:00:13,120
के सभी बंधनों से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। और मुक्त होने की चाह

834
01:00:13,120 --> 01:00:17,280
है। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त है। तो इसका

835
01:00:17,280 --> 01:00:21,360
मतलब सिद्ध हुआ कि कोई भगवान है, कोई भगवान है जो प्रकृति के सभी

836
01:00:21,360 --> 01:00:25,360
बंधनों से मुक्त है। यानी कि अगर इसको हम ऐसे देखें अगर हम उड़ नहीं पा

837
01:00:25,360 --> 01:00:29,440
रहे हैं तो कोई है जो उड़ सकता है। अगर हम गायब नहीं हो पा रहे हैं कोई है जो गायब

838
01:00:29,440 --> 01:00:33,520
हो सकता है। अगर हम कहीं पर भी हम प्रकृति के कारण बाधित हो रहे हैं तो कोई

839
01:00:33,520 --> 01:00:37,600
है जो वहां पर बाधित ना हो। मगर अभी आप कह रहे हो कि

840
01:00:37,600 --> 01:00:41,680
जो ईश्वर है वो प्रकृति के कई कई ऐसे कारण है जिनसे वह

841
01:00:41,680 --> 01:00:44,080
बाधित है।

842
01:00:44,080 --> 01:00:48,080
हां जी इसका जवाब यह है। हम कि वो इस खेल

843
01:00:48,080 --> 01:00:52,720
में ही आता नहीं है। तो खेल के बाहर है ताकि यहां पर

844
01:00:52,720 --> 01:00:56,880
मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं प्रकृति के सभी बंधनों

845
01:00:56,880 --> 01:01:00,880
से मुक्त है कि नहीं? जैसे मैं उड़ नहीं सकता

846
01:01:00,880 --> 01:01:04,880
तो क्या वो उड़ सकता मैं पूछ रहा हूं जैसे मैं उड़ नहीं सकता तो क्या वो उड़ सकता

847
01:01:04,880 --> 01:01:08,960
है? मैं गायब नहीं हो सकता तो क्या वो गायब हो सकता है? मैं पहाड़ नहीं उठा

848
01:01:08,960 --> 01:01:13,200
सकता तो क्या वो पहाड़ उठा सकता है? यह जो मेरे ऊपर प्रकृति के दबाव है

849
01:01:13,200 --> 01:01:18,080
इनहीं से पता चलता है कि मेरे अंदर सच्चिदानंद की चाह है।

850
01:01:18,080 --> 01:01:22,640
ठीक है? हमारे अंदर हम हम

851
01:01:22,640 --> 01:01:26,960
हमारे अंदर चाह है कि हम हम असली स्वरूप को भूलने के बाद

852
01:01:26,960 --> 01:01:31,360
हम खुद का स्वरूप भूलने के बाद आपको दे समझने से हम दुखी

853
01:01:31,360 --> 01:01:35,520
है। लेकिन हम तो है आत्मा तो हमारी चाह तो वही दुखों से छूने

854
01:01:35,520 --> 01:01:39,520
की। आप एक काम करिए दोबारा से ईश्वर को सिद्ध कर दीजिए। बताइए

855
01:01:39,520 --> 01:01:43,520
ईश्वर है आपका ये सिद्ध कैसे होता है? हां सिद्ध

856
01:01:43,520 --> 01:01:47,600
यही है कि हमारे अंदर दुखों से छूटने की भावना है।

857
01:01:47,600 --> 01:01:52,880
हां तो हमारे अंदर तो हमारे अंदर

858
01:01:52,880 --> 01:01:56,880
यानी कि हमारे यानी कि हमारे अंदर जो भावना है जिससे जिसके

859
01:01:56,880 --> 01:02:01,040
बिना हम नहीं रह पा रहे हैं उसके होने से सिद्ध होता है कि कोई

860
01:02:01,040 --> 01:02:05,040
है जो उन भावनाओं का पूर्ति करने वाला है उसके पास उन सभी चीजों

861
01:02:05,040 --> 01:02:09,200
का निवारण है। यही ना यही ना? हां जी। हां तो

862
01:02:09,200 --> 01:02:13,680
ये जो दुख की भावनाएं हैं ये जो दुख की भावनाएं हैं यह प्रकृति

863
01:02:13,680 --> 01:02:17,760
के बंधन से मुक्त हो जाने से ही निकल के आ रही हैं। यानी कि हमारे अंदर

864
01:02:17,760 --> 01:02:21,840
प्रकृति के बंधन से मुक्त हो जाने की भावना है। इसका मतलब कोई है जो प्रकृति

865
01:02:21,840 --> 01:02:25,920
के बंधनों से मुक्त है। यानी कि हमारे अंदर जो उड़ ना सकने जो

866
01:02:25,920 --> 01:02:30,000
उड़ पाने की भावना है। गायब हो पाने की भावना है। सर्वशक्तिमान बन

867
01:02:30,000 --> 01:02:34,480
जाने की भावना है। इसका मतलब है कि कोई इन सब कार्यों को करने वाला सर्वशक्तिमान

868
01:02:34,480 --> 01:02:37,760
इस दुनिया में है। मगर आप कह रहे हो कि नहीं वह सब कुछ नहीं कर सकता

869
01:02:37,760 --> 01:02:41,840
तो फिर हमारी भावनाओं के आधार पर उसकी सिद्धि नहीं होती।

870
01:02:41,840 --> 01:02:46,160
हमारी भावनाओं के आधार पर ईश्वर की सिद्धि फिर नहीं होती। क्योंकि

871
01:02:46,160 --> 01:02:50,240
हमारे अंदर इन प्रकृति के सभी नियमों के पार जाने की भावना है।

872
01:02:50,240 --> 01:02:54,480
आप कह रहे हो वो ऐसा ईश्वर वो नहीं है जो प्रकृति के सभी नियमों के पार चल

873
01:02:54,480 --> 01:02:58,640
जाकर दिखा दे। इसका मतलब हमारी भावनाओं से ईश्वर का होना सिद्ध नहीं होता।

874
01:02:58,640 --> 01:03:02,800
अब कोई दूसरा तरीका लाइए ईश्वर को सिद्ध करने के लिए। जी

875
01:03:02,800 --> 01:03:06,800
बहुत प्रकृति को अधीन करके पर काया प्रवेश करके

876
01:03:06,800 --> 01:03:10,800
हमें जो ज्ञान सुनाता है कि फिर भाई साहब मैंने ये नहीं पूछा वो

877
01:03:10,800 --> 01:03:15,120
करता क्या है? मैंने पूछा ईश्वर सिद्ध कैसे होता है? यह बताइए। हमारे

878
01:03:15,120 --> 01:03:19,120
अंदर भावना होने से ईश्वर सिद्ध नहीं होता क्योंकि आप ये कह रहे हैं कि हमारे

879
01:03:19,120 --> 01:03:23,200
अंदर प्रकृति के बंधनों से मुक्त प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण कर देने

880
01:03:23,200 --> 01:03:27,280
की जो भावना है उससे यह सिद्ध नहीं होता कि प्रकृति पर

881
01:03:27,280 --> 01:03:31,440
कोई ऐसा है दुनिया में जिसका प्रकृति पर नियंत्रण हो। ठीक है? तो हमारे अंदर

882
01:03:31,440 --> 01:03:35,520
भावना होने से ईश्वर की सिद्धि आप नहीं मान रहे। ठीक है? अभी फिलहाल

883
01:03:35,520 --> 01:03:39,680
हटा देते हैं। अंदर भावना हमारे अंदर भावना होने से ही तो

884
01:03:39,680 --> 01:03:43,920
भगवान ईश्वर है। सिद्ध होता है। लेकिन आप इस तरह से समझाते हैं तो फिर

885
01:03:43,920 --> 01:03:48,000
तो फिर प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण करने की जो भावना है हमारी

886
01:03:48,000 --> 01:03:54,000
उससे भगवान का प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण करने वाला क्यों नहीं सिद्ध होगा?

887
01:03:54,400 --> 01:03:58,800
वो प्रकृति के बंधन में आता ही नहीं है। अरे तो

888
01:03:58,800 --> 01:04:03,840
कारण कुछ भी हो वो प्रकृति के बंधनों को तोड़ सकता है कि नहीं?

889
01:04:03,840 --> 01:04:08,320
यह पूछ रहा हूं मैं वो आता है कि नहीं आता डज मैटर कैपेबिलिटी

890
01:04:08,320 --> 01:04:10,960
है कि नहीं

891
01:04:10,960 --> 01:04:15,040
उसकी कैपेबिलिटी है लेकिन उसी ये बात है कि वो

892
01:04:15,040 --> 01:04:18,640
हमें छुड़ाने के लिए आता है

893
01:04:18,640 --> 01:04:22,640
वो जन्म लेने के लिए नहीं आता है उसकी हमारे जैसे जन्म लेने की इच्छा होती

894
01:04:22,640 --> 01:04:26,800
है वैसे उसकी जन्म लेने के लिए नहीं है वो वो हमारे लिए रुका हुआ है बाहर

895
01:04:26,800 --> 01:04:32,800
कि हमारे बच्चे जब वो दुखी होंगे तो उनको छुड़ाने के लिए वो रुका है

896
01:04:33,840 --> 01:04:37,840
कोई बाहर हो तो ही तो खेल से दुखियों दुखियों को छुड़ा सकता

897
01:04:37,840 --> 01:04:41,840
है। जैसे एग्जांपल कोई क्रिकेट चल रहा है। क्रिकेट की मैच

898
01:04:41,840 --> 01:04:46,080
चल रही है। मैच खेलतेखेलते बच्चे लोग आपस में झगड़ा करने लगेंगे।

899
01:04:46,080 --> 01:04:50,080
तो खेल के जो बाहर के लोग हैं वही तो उनका अगर झगड़ा छुड़ा सकते

900
01:04:50,080 --> 01:04:55,200
हैं। फिर से उनका खेल शुरू कर सकते हैं।

901
01:04:55,200 --> 01:04:59,280
वो अगर वही खेल खेल का हिस्सा होंगे। समझ गए कोई

902
01:04:59,280 --> 01:05:03,360
अगर खेलता है हां जी ठीक है समझ गए तो आपका

903
01:05:03,360 --> 01:05:08,080
कहने का मतलब है कि जो क्रिकेट खेल रहे हैं जो क्रिकेट खेल रहे हैं

904
01:05:08,080 --> 01:05:12,240
वो जो है खेल के अंदर नहीं आते हैं इसलिए वो सब कुछ नहीं करते हैं ठीक है

905
01:05:12,240 --> 01:05:16,240
हां खेल के बाहर है वो पहली बात तो ये है पहली बात

906
01:05:16,240 --> 01:05:20,480
तो ये है कि जो खेल के बाहर

907
01:05:20,480 --> 01:05:24,720
है वो बाधित है उस पर एक नियम लागू है कि तुम किसी से बिना पूछे

908
01:05:24,720 --> 01:05:28,800
अंदर नहीं जा सकते हो पहली बात दूसरी बात आप कह रहे एक

909
01:05:28,800 --> 01:05:33,040
भाई साहब पूरा सुन लो पूरा सुन लो पूरा सुन लो

910
01:05:33,040 --> 01:05:37,040
दूसरी बात कि वो अंदर चला जाएगा तो खेल कैसा रह जाएगा

911
01:05:37,040 --> 01:05:41,040
अरे भैया तो फिर आपका आप उसको जो है पर आया प्रवेश करने वाला

912
01:05:41,040 --> 01:05:45,120
क्यों मान रहे हो वो भी तो खेल के अंदर ही आ रहा है बस खुद नहीं खुद का शरीर नहीं धारण

913
01:05:45,120 --> 01:05:50,000
कर रहा है दूसरे के शरीर के द्वारा खेल तो वही रहा है खेलने तो आया ना

914
01:05:50,000 --> 01:05:54,160
खेलने नहीं आ रहा है खेल के नियम समझाने के लिए आ रहा है तो

915
01:05:54,160 --> 01:05:58,240
खेल के नियम सुनो फिर क्रिकेट मैच जो क्रिकेट मैच के जो नियम होते हैं

916
01:05:58,240 --> 01:06:03,040
वह खेल के बाहर समझाए जाते हैं। तो फिर क्रिकेट मैच से उसका वो मत करो।

917
01:06:03,040 --> 01:06:08,240
क्रिकेट मैच से उसका तुलना मत करो। तुलना नहीं

918
01:06:08,240 --> 01:06:12,320
तुलना है कि क्रिकेट के बाहर वाले

919
01:06:12,320 --> 01:06:16,720
वो खिलाड़ी उनके संपर्क में आएंगे तभी तो उनको संवाद करेंगे।

920
01:06:16,720 --> 01:06:20,880
भाई साहब मैं अब आपको थोड़ा सा मेन जगह पे दोबारा से ले आता हूं। मुझे

921
01:06:20,880 --> 01:06:25,040
बता दो प्रकृति अपने हिसाब से नहीं आप अपने हिसाब से आप अपनी

922
01:06:25,040 --> 01:06:29,440
बात सिद्ध करते हैं लेकिन हमारे भी हिसाब से हमको बात सिद्ध करने नहीं देते हैं।

923
01:06:29,440 --> 01:06:33,600
आपने जो बात बोली है क्रिकेट से उसका मैच इसलिए नहीं हो रहा है कि

924
01:06:33,600 --> 01:06:37,600
आप यह कह रहे हो कि क्रिकेट के अंदर आकर के वो खेलेगा थोड़ी ना। वो तो ज्ञान देने

925
01:06:37,600 --> 01:06:41,680
आएगा। तो हम ये कह रहे हैं ठीक है वो परकाया प्रवेश करने आता है ज्ञान देने। तो

926
01:06:41,680 --> 01:06:45,680
फिर जब वो अवतार लेगा तो क्यों कह रहे हो? जब वो अवतार लेगा तो क्यों कह रहे हो कि

927
01:06:45,680 --> 01:06:49,680
वो जो है खेल का हिस्सा हो जाएगा। उसको खेलना नहीं है। हो गया

928
01:06:49,680 --> 01:06:53,680
हो गया अरे तो मैं कहां कह रहा हूं कि खेलना है ज्ञान देने आएगा

929
01:06:53,680 --> 01:06:57,760
वो और अगर अगर अवतार से उसका ज्ञान देना नहीं सिद्ध हो करके उसका

930
01:06:57,760 --> 01:07:01,760
खेलना सिद्ध होता है तो पर काया प्रवेश करके भी तो उसका ज्ञान देना ना

931
01:07:01,760 --> 01:07:05,600
सिद्ध हो करके खेलना सिद्ध होगा फिर नहीं

932
01:07:05,600 --> 01:07:09,760
खेलने के लिए आता ही नहीं आता है इसीलिए इसीलिए

933
01:07:09,760 --> 01:07:14,480
मैं सीधे मूल पॉइंट पे आ रहा है

934
01:07:14,480 --> 01:07:18,480
तो भाई साहब वो अवतार धारण करके भी तो दे सकता है

935
01:07:18,480 --> 01:07:23,600
अच्छा एक बात बताइए यह जो जैसे जैसे

936
01:07:23,600 --> 01:07:28,000
कोई भी प्राकृतिक चीज है जैसे पेड़ के पत्ते ग्रीन होते हैं

937
01:07:28,000 --> 01:07:32,080
ये क्यों होते हैं ग्रीन क्यों होते हैं पेड़ के पत्ते ईश्वर मतलब इनको

938
01:07:32,080 --> 01:07:36,160
कलर कलर वगैरह ईश्वर ही देता है अपने आप ग्रीन होते हैं मतलब

939
01:07:36,160 --> 01:07:41,760
ईश्वर चाहता है कि ग्रीन हो तब ग्रीन होते हैं कि ऐसे ही हो जाते हैं अपनी मर्जी से

940
01:07:41,760 --> 01:07:45,760
वो प्रकृति का नियम है मतलब उस पर कोई नियंत्रण

941
01:07:45,760 --> 01:07:49,840
नहीं है ईश्वर के उससे नहीं हो रहा है ये नहीं नहीं वो प्रकृति

942
01:07:49,840 --> 01:07:54,000
का काम है वो प्रकृति कर रही है ठीक है ठीक है खेल खेल

943
01:07:54,000 --> 01:07:58,000
कैसे चल रहे है वो समझिए पहले मैं भाई साहब मुझे

944
01:07:58,000 --> 01:08:04,000
मुझे इधर उधर की बातें नहीं मुझे मूल प्रश्न पे आने दीजिए प्लीज मूल प्रश्न

945
01:08:04,160 --> 01:08:08,400
मूल प्रश्न ये है कि हमारे अंदर इच्छा होने से ईश्वर की सिद्धि

946
01:08:08,400 --> 01:08:12,560
नहीं हो रही है क्योंकि आपने कहा था कि हमारे अंदर दुख से मुक्त

947
01:08:12,560 --> 01:08:16,640
हो जाने की इच्छा है इसका मतलब है कोई दुख है तो हमारे अंदर प्रकृति के नियमों

948
01:08:16,640 --> 01:08:20,800
के परे जाने करने की इच्छा है। इसका मतलब होना चाहिए कि जो जो दुख

949
01:08:20,800 --> 01:08:24,880
से मुक्त है वह प्रकृति के परे भी जा सकता हो। परंतु आप यह कह रहे हैं

950
01:08:24,880 --> 01:08:29,200
कि वह प्रकृति के परे नहीं जा सकता।

951
01:08:29,200 --> 01:08:33,440
प्रकृति के परे जाने की इच्छा तब होती है जब हमें प्रकृति दुख

952
01:08:33,440 --> 01:08:37,760
देने लगती है। अरे भैया तो हमारे दुख दुख का प्रमाण

953
01:08:37,760 --> 01:08:41,840
यही है ना कि हम प्रकृति के परे जाना चाह रहे हैं। कैसे पता कि

954
01:08:41,840 --> 01:08:45,840
हमारे अंदर दुख है। कैसे पता? मैं बता रहा हूं। कैसे पता? कैसे

955
01:08:45,840 --> 01:08:49,920
पता कि दुख है? क्योंकि हम कूदना चाहते हैं क्योंकि हम गायब होना

956
01:08:49,920 --> 01:08:53,920
चाहते हैं, उड़ना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि हमें दुख है। क्योंकि

957
01:08:53,920 --> 01:08:59,920
हम नहीं उड़ पा रहे हैं। इससे पता चल रहा है कि हम दुख हैं।

958
01:09:01,360 --> 01:09:05,600
दुख इसीलिए है। प्रकृति

959
01:09:05,600 --> 01:09:09,680
मैं ये नहीं भाई साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं। आप मेरी बात को समझिए। मैं क्या कह

960
01:09:09,680 --> 01:09:13,920
रहा हूं। थोड़ा सा कोशिश करिए सुनने की कि कुल मिलाकर

961
01:09:13,920 --> 01:09:17,920
के हमारे अंदर सच्चिदानंद की प्यास है जिससे सिद्ध होता है कि

962
01:09:17,920 --> 01:09:21,920
दुनिया में कोई सच्चिदानंद ईश्वर है। तो हमारे अंदर

963
01:09:21,920 --> 01:09:26,080
वो सच्चिदानंद की प्यास सिद्ध कैसे होती है? प्रकृति पर नियंत्रण

964
01:09:26,080 --> 01:09:30,320
कर लेने के प्रयास से। तो जब हमारी सच्चिदानंद से सच्चिदानंद

965
01:09:30,320 --> 01:09:34,480
की सिद्धि हो रही है तो हमारे प्रकृति पर नियंत्रण कर देने के

966
01:09:34,480 --> 01:09:38,880
कर लेने के प्रयास से प्रकृति पर नियंत्रण कर एक मिनट

967
01:09:38,880 --> 01:09:43,040
प्रकृति पर कर लेने वाले कर लेने वाले का अस्तित्व सिद्ध होना

968
01:09:43,040 --> 01:09:47,360
चाहिए। परंतु आप सच्चिदानंद से सच्चिदानंद की सिद्धि तो मान रहे हैं। परंतु

969
01:09:47,360 --> 01:09:51,520
प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने वाले प्रकृति पर कर लेने की

970
01:09:51,520 --> 01:09:55,760
चाह से आप प्रकृति पर नियंत्रण करने वाले की सिद्धि

971
01:09:55,760 --> 01:10:01,760
नहीं मान रहे हैं। ये बात है। ठीक है?

972
01:10:01,920 --> 01:10:06,000
यानी सर्वशक्तिमान नहीं है। कुल मिलाकर के ईश्वर सर्वशक्तिमान

973
01:10:06,000 --> 01:10:10,400
है। इसलिए सर्वशक्तिमान है कि उसी में वो क्षमता है

974
01:10:10,400 --> 01:10:14,480
कि बिगड़े हुए वो बहुत से कार्य है जो वो नहीं

975
01:10:14,480 --> 01:10:18,640
कर पा रहा है। ठीक है? बहुत से कार्य नहीं। नहीं नहीं सुनो

976
01:10:18,640 --> 01:10:22,640
पहले सुनो। हम सर्वशक्तिमान इसीलिए कहते हैं। आप जिसके जिस आधार पे उसको

977
01:10:22,640 --> 01:10:27,120
सर्वशक्तिमान कहते हैं उस आधार पे हम सर्वशक्तिमान नहीं कहते हैं। हम सर्वशक्तिमान

978
01:10:27,120 --> 01:10:31,200
इसीलिए कहते हैं सर्वशक्तिमान का संधि विच्छेद करते

979
01:10:31,200 --> 01:10:35,440
हुए आप उसका अर्थ बता दीजिए हिंदी में। जी

980
01:10:35,440 --> 01:10:39,760
कि सर्वशक्तिमान यही इसीलिए है कि किसी भी में

981
01:10:39,760 --> 01:10:43,840
भाई साहब मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं सर्वशक्तिमान का

982
01:10:43,840 --> 01:10:47,920
दो शब्द है। तोड़ते हुए आप जो है उसका अर्थ बता दीजिए।

983
01:10:47,920 --> 01:10:52,480
आप जोड़तोड़ करिए। हम कर्तव्यवाचक शब्द कहते हैं उसको।

984
01:10:52,480 --> 01:10:56,640
क्या कर्तव्यवाचक शब्द? हां उनका ये कर्तव्यवाचक

985
01:10:56,640 --> 01:11:00,720
शब्द उनका ये टाइटल है सर्वशक्तिमान। वो कुछ भी कर

986
01:11:00,720 --> 01:11:04,720
सकते हैं। इसीलिए टाइटल नहीं है उनका। हां। उनमें

987
01:11:04,720 --> 01:11:08,880
वो क्षमता है कि मनुष्य दुखी जीवन करना। सर्व का मतलब क्या

988
01:11:08,880 --> 01:11:12,880
होता है? सर्व का मतलब सर्व का मतलब सर्व का मतलब सर्व

989
01:11:12,880 --> 01:11:17,520
आत्माओं में। उसके जैसा कोई नहीं है।

990
01:11:17,520 --> 01:11:21,680
में सर्व का मतलब सर्वात में जी टीवी का मतलब

991
01:11:21,680 --> 01:11:26,080
क्या होता है? टीवी का मतलब टीवी होता है।

992
01:11:26,080 --> 01:11:31,520
टेलीविजन होता है। टीवी का मतलब सर्व आत्माओं में क्यों नहीं होता?

993
01:11:31,520 --> 01:11:35,600
मैं इसीलिए बता रहा हूं कि मैं कह रहा हूं मैंने आपसे मैंने

994
01:11:35,600 --> 01:11:39,680
आपसे अभी एक प्रश्न किया है। मैंने आपसे प्रश्न किया है। टीवी का मतलब सर्व आत्माओं में

995
01:11:39,680 --> 01:11:45,360
क्यों नहीं होता? बताइए। टीवी में आत्मा कहां है भाई साहब?

996
01:11:45,360 --> 01:11:49,360
तो सर्व में आत्मा कहां है भाई साहब?

997
01:11:49,360 --> 01:11:53,520
हां जी। तो मनुष्य जितने धरती पर है मैंने क्या पूछा है

998
01:11:53,520 --> 01:11:57,520
भाई साहब? भाई साहब मैंने क्या पूछा है? सर्व मैंने पूछा है सर्व का अर्थ क्या

999
01:11:57,520 --> 01:12:01,680
है? समझिए मेरी बात को। मेरी बात को समझिए। मैंने कहा अभी आप

1000
01:12:01,680 --> 01:12:05,680
अभी आप अभी आप स्पिरिचुअलिटी से बाहर आ जाइए। मैं पूछ रहा हूं सर्व

1001
01:12:05,680 --> 01:12:09,840
का अर्थ क्या है? ये पूछा मैंने। सर्व का अर्थ है

1002
01:12:09,840 --> 01:12:14,080
सब। सब सब जी सब

1003
01:12:14,080 --> 01:12:18,240
ना सब अच्छा क्या ऐसा सब है जिसके बाहर

1004
01:12:18,240 --> 01:12:22,480
भी कुछ हो

1005
01:12:22,480 --> 01:12:26,560
सब मतलब सब आत्माओं के प्रति भाई साहब मैंने

1006
01:12:26,560 --> 01:12:30,400
आत्मा की बात ही नहीं की फिर मैं टीवी पूछूंगा

1007
01:12:30,400 --> 01:12:35,040
मैंने आत्मा की बात नहीं की मैं सर्व का मतलब पूछ रहा हूं

1008
01:12:35,040 --> 01:12:39,200
सर्व का मतलब सर्व सब हो गया सब सर्व का मतलब

1009
01:12:39,200 --> 01:12:43,360
सब क्या सब का मतलब ऐसा कुछ कह रहे हो कि उसके बाहर कुछ ना हो

1010
01:12:43,360 --> 01:12:47,520
उसके बाहर हो कुछ हां सब सब आया

1011
01:12:47,520 --> 01:12:51,840
सब कुछ आया सब कुछ आया कोई उसके बाहर नहीं कुछ

1012
01:12:51,840 --> 01:12:56,880
रह तो नहीं गया नहीं नहीं रह गया कुछ तो नहीं गया पक्का

1013
01:12:56,880 --> 01:13:01,040
लॉक कर दिया जाए यानी कि सर्व का मतलब है सर्व का

1014
01:13:01,040 --> 01:13:05,840
मतलब है कि कुछ भी उससे बाहर ना रह जाए उसके अंदर आ जाए सब कुछ

1015
01:13:05,840 --> 01:13:09,840
हम ठीक है सर्व का मतलब तो अब अब इस

1016
01:13:09,840 --> 01:13:14,640
सब कुछ वाले सर्व को आप सर्व शक्तिमान के साथ लगा दीजिए।

1017
01:13:14,640 --> 01:13:19,120
जी कि सर्वशक्तिमान इसीलिए है

1018
01:13:19,120 --> 01:13:23,280
कि ऐसी कोई चीज नहीं है ऐसा कोई धरती

1019
01:13:23,280 --> 01:13:27,520
पर अवेलेबल नहीं है। उसी के सिवा कि

1020
01:13:27,520 --> 01:13:32,000
हमें वापिस दुखों से छुड़ाकर सुख में ले जाए।

1021
01:13:32,000 --> 01:13:36,160
ना कोई व्यक्ति है ना वस्तु है। भाई साहब वो

1022
01:13:36,160 --> 01:13:37,680
तो अद्वितीय होगा ना।

1023
01:13:37,680 --> 01:13:41,840
एक मिनट एक मिनट भाई साहब वो अद्वितीय का अर्थ है कि उसके जैसा कोई ना हो ये

1024
01:13:41,840 --> 01:13:45,840
समझिए आप अभी हम बात कर रहे हैं सर्वशक्तिमान मैंने क्या

1025
01:13:45,840 --> 01:13:49,920
कहा वो अद्वितीय का अर्थ है कि उसके जैसा कोई और ना

1026
01:13:49,920 --> 01:13:54,160
हो अतुल्य अद्वितीय जिसके जैसा कोई दूसरा ना हो

1027
01:13:54,160 --> 01:13:58,400
आप आप सर्वशक्ति आप सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए जिसमें

1028
01:13:58,400 --> 01:14:04,400
सर्व का अर्थ है सब कुछ ये सब कुछ के साथ सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए

1029
01:14:06,080 --> 01:14:10,240
सर्व में वो शक्ति है सर्व में कि

1030
01:14:10,240 --> 01:14:14,800
हमारा खेल को वो फिर से सुधार मुझे मुझे सर्वशक्तिमान

1031
01:14:14,800 --> 01:14:18,960
का ऐसा अर्थ बताइए जिसमें सब कुछ का उपयोग हो ठीक है

1032
01:14:18,960 --> 01:14:22,960
ये सब कुछ जो है ना अभी आपने कहा सर्व का मतलब सब कुछ तो इसका उपयोग

1033
01:14:22,960 --> 01:14:27,120
होना चाहिए बताइए नहीं नहीं जी आप आप जिस

1034
01:14:27,120 --> 01:14:31,200
हिसाब से भाई साहब आप आप

1035
01:14:31,200 --> 01:14:35,280
जी भाई साहब सुनिए पहले सुनिए अब आप जा सकते जा सकते हैं आप आप

1036
01:14:35,280 --> 01:14:39,360
जा सकते मैं समझ गया अब आप थोड़ा थोड़ा बिगड़ने वाले हैं। मैं समझ रहा हूं। अब आप बिगड़ने

1037
01:14:39,360 --> 01:14:44,000
वाले हैं। मैं व्यक्ति का देख के समझ जाता हूं।

1038
01:14:44,000 --> 01:14:48,160
ठीक है। हो गया। आपके साथ काफी मगजमारी कर ली। आपने काफी देर तक जो है

1039
01:14:48,160 --> 01:14:52,240
हमें हमने आपने हमें झेला आप तो कहा ही

1040
01:14:52,240 --> 01:14:52,740
ठीक है। आप

1041
01:14:52,720 --> 01:14:56,640
जा सकते हैं।

1042
01:14:56,640 --> 01:15:01,600
इतना ज्यादा सर में दर्द हो होता है। बिल्कुल ही

1043
01:15:01,600 --> 01:15:05,680
आईक्यू लेवल समाप्त हो चुका है। जय

1044
01:15:05,680 --> 01:15:11,680
श्री राम। सुश भैया जय श्री राम

1045
01:15:12,720 --> 01:15:15,440
ठीक है

1046
01:15:15,440 --> 01:15:19,440
जय [गला साफ़ करने की आवाज़] श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम समझ में

1047
01:15:19,440 --> 01:15:23,600
आया कुछ एक से बढ़कर [हंसी] एक से बढ़कर एक

1048
01:15:23,600 --> 01:15:27,600
आते एक [गला साफ़ करने की आवाज़] से बढ़कर एक आते शिवश

1049
01:15:27,600 --> 01:15:31,600
भैया आप जो फॉर्म अब एक काम करिए अब जो फॉर्म आप जो डलवा रहे

1050
01:15:31,600 --> 01:15:35,760
हैं ना इनको डिबेट के लिए आने के लिए उनमें पांच सवाल आप पहले

1051
01:15:35,760 --> 01:15:40,000
से डाल करके रखिए कि सर्वशक्तिमान से आप समझते क्या है? सबसे

1052
01:15:40,000 --> 01:15:44,240
पहला प्रश्न आप समझे नहीं बात यह है कि अगर हम

1053
01:15:44,240 --> 01:15:48,560
चाहे तो जो इस तरह के आते हैं जो बिल्कुल ही मतलब जिनका

1054
01:15:48,560 --> 01:15:52,640
आईक्यू लेवल बहुत लो होता है हम चाहे तो इनसे

1055
01:15:52,640 --> 01:15:56,720
बात हम चाहे तो इनसे बात ना करें यहां पर

1056
01:15:56,720 --> 01:16:00,720
और जो है फोन पर ही हमारी हमारी टीम में से कोई बात कर ले

1057
01:16:00,720 --> 01:16:04,720
और वहीं की व फैसला हो जाए भैया इनसे बात करके टाइम वेस्ट मगर बात ये है कि

1058
01:16:04,720 --> 01:16:08,000
इस तरह से जब इनका जब जनता

1059
01:16:08,000 --> 01:16:12,000
देखती है उसको उसको सूचनाएं जाती है। जैसे रामपाल रामपाल

1060
01:16:12,000 --> 01:16:16,000
वालों से हमारे को भिड़ने की क्या जरूरत है भाई? कोई एक से

1061
01:16:16,000 --> 01:16:20,000
बढ़के कोई जरूरत नहीं है। मगर जब हम ऐसा करते हैं तो

1062
01:16:20,000 --> 01:16:24,080
जनता को पता चलता है कि ये ये इनका आईक्यू लेवल है। जैसे उस दिन

1063
01:16:24,080 --> 01:16:30,080
बाबू आए बाबू बोल रहे सच्चिदानंद का कुछ अर्थ नहीं होता। उसका नाम है।

1064
01:16:30,400 --> 01:16:34,640
ना इनको संधि का पता है ना समास का पता है ना सूार्थक

1065
01:16:34,640 --> 01:16:38,880
शब्द का पता है। कुछ भी पता नहीं है इन लोगों को।

1066
01:16:38,880 --> 01:16:43,120
कर्ता कर्ता कारक का भी पता नहीं है इन लोगों को।

1067
01:16:43,120 --> 01:16:47,120
हिंदी के सामान्य व्याकरण से भी ये लोग बहुत

1068
01:16:47,120 --> 01:16:51,200
दूर है और बात करते हैं धर्म की। इनको तो धर्म का अर्थ भी नहीं

1069
01:16:51,200 --> 01:16:56,720
पता। मुझे पता नहीं है। हो जाने पर भी

1070
01:16:56,720 --> 01:17:00,800
जब हम ऐसे किसी को हटाते हैं तो लोग कहते हैं कि भाई पीछे हट गए। पीछे

1071
01:17:00,800 --> 01:17:05,200
हटने का मतलब सुबह 4:00 बजे तक इनको सुनते रहो, झेलते रहो। अब

1072
01:17:05,200 --> 01:17:09,440
मतलब जिस बात का कोई निष्कर्ष ना निकले जो

1073
01:17:09,440 --> 01:17:14,080
जिसको यही पता नहीं है कि एक साधारण सा शब्द सर्वशक्तिमान

1074
01:17:14,080 --> 01:17:18,800
का क्या अर्थ है उनको क्या क्या उनसे बात की जाएगी बताइए जरा

1075
01:17:18,800 --> 01:17:23,040
मैंने लोगों को बताया मैंने अच्छा इसके बाद अगला

1076
01:17:23,040 --> 01:17:27,040
प्रश्न और तैयार था मगर ये कुछ क्या है कि भड़कते हुए मुझे नजर

1077
01:17:27,040 --> 01:17:31,040
आया मैंने देखा कि इनको सवा घंटा दे चुका हूं ऑलरेडी तो मैं क्या करता

1078
01:17:31,040 --> 01:17:35,120
हूं भड़कने वाली स्थिति देख लेता हूं

1079
01:17:35,120 --> 01:17:39,120
तो मैं क्या करता हूं उनको हटा देता व्यक्ति को क्योंकि भड़केगा

1080
01:17:39,120 --> 01:17:41,840
अगर कुछ

1081
01:17:41,840 --> 01:17:45,920
हां भड़कने की ही भड़कने की ही स्थिति थी अब

1082
01:17:45,920 --> 01:17:50,160
सिर्फ दो मिनट की बात थी दो मिनट के बाद फिर एकदम से ना आग बबूला

1083
01:17:50,160 --> 01:17:54,240
हो के और फिर बस वही वाली राम कहानी करके और फिर

1084
01:17:54,240 --> 01:17:58,320
हो जाते यहां से ये जो परिभाषा है ना ये परिभाषा

1085
01:17:58,320 --> 01:18:02,400
ये परिभाषा इनके ईश्वर पर सेट ही नहीं होती है क्यों नहीं

1086
01:18:02,400 --> 01:18:06,640
होती है? क्योंकि अगर सच्चिदानंद से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की सिद्धि

1087
01:18:06,640 --> 01:18:11,040
करोगे तो सच्चिदानंद की सिद्धि होगी आपकी उससे प्रकृति

1088
01:18:11,040 --> 01:18:15,040
पर नियंत्रण कर लेने की चाह से तो अगर सच्चिदानंद से सच्चिदानंद की

1089
01:18:15,040 --> 01:18:19,040
सिद्धि होगी तो प्रकृति के नियंत्रण से प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने वाले

1090
01:18:19,040 --> 01:18:23,120
की सिद्धि होगी और नहीं हो रही है तो फिर यहां से भी उसकी सिद्धि [गला साफ़ करने की आवाज़]

1091
01:18:23,120 --> 01:18:27,600
मत है ना तो नास्तिकों

1092
01:18:27,600 --> 01:18:33,600
का रूपांतरण जी अनिकेत जी आप

1093
01:18:34,800 --> 01:18:39,600
पहली बात तो ये लोग कुछ समझ ही नहीं पाते हैं कि आप कहना क्या चाहते हो।

1094
01:18:39,600 --> 01:18:43,680
मुझे लगता है खाली ये लोग इसीलिए लाइव आ जाते हैं कि एक्चुअली क्या है मेरे

1095
01:18:43,680 --> 01:18:47,840
को लगता है ना जितने भी ऐसे लोग है ना सब लीडर बन लीडर बनना चाहते हैं और ऐसे

1096
01:18:47,840 --> 01:18:52,000
सब ब्रह्मकुमारी और इत्यादि जो है ना ये देखिए हमेशा

1097
01:18:52,000 --> 01:18:56,080
ना लीडर बना रहा है दास और भक्त कोई नहीं बनना चाहते लीडर बनना चाहता

1098
01:18:56,080 --> 01:19:00,290
है इसलिए ज्यादा आकर्षित होकर चला जाता है

1099
01:19:00,290 --> 01:19:04,560
[गला साफ़ करने की आवाज़] इसलिए कोई भी आता है कोई भी आकर कुछ भी मतलब कोई

1100
01:19:04,560 --> 01:19:08,560
रिप्रेजेंट करने के लिए आता है ना तो हर संस्था में से कोई भी आ

1101
01:19:08,560 --> 01:19:12,560
जाता है। [हंसी] नहीं आने

1102
01:19:12,560 --> 01:19:16,560
फिर दोबारा ज्ञान देके चला जाता है। दिक्कत क्या है कि व्यक्ति जो

1103
01:19:16,560 --> 01:19:20,720
है अगर पॉइंट टू पॉइंट बात करे इधरउधर की

1104
01:19:20,720 --> 01:19:24,800
खामखा की बातें ना करे इधरउधर वो ना करे तो हम लोग भी बहुत अच्छे से

1105
01:19:24,800 --> 01:19:28,800
बात करते हैं। अब व्यक्ति क्या उससे पूछा जा रहा है खेत वो बात कर रहा है कल्याण

1106
01:19:28,800 --> 01:19:31,070
की।

1107
01:19:31,070 --> 01:19:35,200
[हंसी] क्रिकेट मैच और सब

1108
01:19:35,200 --> 01:19:39,280
क्रिकेट मैच और सब लेकर आ गया था। वही होता है ना अभी आपने

1109
01:19:39,280 --> 01:19:42,400
बाबू का नाम लिया था।

1110
01:19:42,400 --> 01:19:46,400
नहीं नहीं भैया आपने बाबू का नाम आपने बाबू का नाम लिया था। वो पिछली

1111
01:19:46,400 --> 01:19:50,240
बार क्या किया उसने? वो पूछता है तुम्हारा नाम क्या है? तो आप बोले शिवश

1112
01:19:50,240 --> 01:19:54,240
बोले शिवांश का अंश क्या होता है? आप बोले शिव का अंश बोलता है इससे क्या सिद्ध

1113
01:19:54,240 --> 01:20:00,240
होता है? [हंसी]

1114
01:20:00,400 --> 01:20:04,400
एक से बढ़कर एक है। ये लोग ये लोग

1115
01:20:04,400 --> 01:20:08,480
बिल्कुल जो है ना ये समय और बुद्धि से

1116
01:20:08,480 --> 01:20:13,200
परे जाकर के बात करने की चेष्टा कर रहे हैं। मुझे लग रहा है

1117
01:20:13,200 --> 01:20:17,680
इनको मतलब बेसिक मुझे लग रहा है कि

1118
01:20:17,680 --> 01:20:21,760
ये स्वयं प्रकृति से परे जा चुके हैं। वो लोग हैं। प्रकृति

1119
01:20:21,760 --> 01:20:27,760
के अंदर सीमित [हंसी] प्रकृति से परे जा चुके हैं।

1120
01:20:28,480 --> 01:20:32,480
लेकिन लेकिन आज शिवश भैया ने गुस्सा नहीं किया। कंट्रोल दिख

1121
01:20:32,480 --> 01:20:36,960
रहा था। [हंसी] नहीं अब

1122
01:20:36,960 --> 01:20:41,360
एक खुशी की बात है। एक दो डिबेट थे शिवश भैया परशुराम

1123
01:20:41,360 --> 01:20:45,600
अवतार ग्रहण नहीं कर रहे हैं। जो है ना वो परशुराम अवतार

1124
01:20:45,600 --> 01:20:49,600
ग्रहण नहीं कर रहे हैं। एक दो डिबेट थे। ये एक बहुत सराहनीय बात

1125
01:20:49,600 --> 01:20:53,840
है। कंट्रोल कंट्रोल कर कंट्रोल [हंसी] वरना इतने

1126
01:20:53,840 --> 01:20:58,190
में तो इतने में तो इतने में तो क्या से क्या हो जाता था

1127
01:20:58,190 --> 01:21:00,800
[हंसी]

1128
01:21:00,800 --> 01:21:05,200
वो वो बजरंगबली कहते है ना माता जानकी से कि मात

1129
01:21:05,200 --> 01:21:09,760
दिवस जननी धर धीरा कपिन सहित यही रघुवीरा

1130
01:21:09,760 --> 01:21:14,570
तो अबांश भैया बिल्कुल फॉलो करता है

1131
01:21:14,570 --> 01:21:18,800
[हंसी] सर्व का मतलब सर्व का मतलब माना सब कुछ

1132
01:21:18,800 --> 01:21:22,800
उसके बाद सर्वशक्तिमान का मतलब ए बी सी डी एफ जी

1133
01:21:22,800 --> 01:21:28,480
एच आई जे के एल एम ओ पी क्यू आर [हंसी] एस डब्लू सब

1134
01:21:28,480 --> 01:21:32,720
ये दिक्कत है इन लोगों के साथ में ये सबका उत्तर एक ही जैसा

1135
01:21:32,720 --> 01:21:36,720
रहता है इन सबका उत्तर देखो एक ही जैसा रहता है ए टू जेड बोल देंगे मैंने

1136
01:21:36,720 --> 01:21:40,720
ये बोला तो था जो भी अल्फाबेट बोलो तो उसमें था ना ए टू जेड में

1137
01:21:40,720 --> 01:21:44,800
अच्छा अच्छा धर्म में भी मैंने इनको कुछ खींचा है धर्म में भी इनके पास

1138
01:21:44,800 --> 01:21:49,040
कुछ था नहीं बोलने को झूठ बोलते हैं ये लोग कि मैं जो

1139
01:21:49,040 --> 01:21:53,920
हम जो है धन नहीं मानते

1140
01:21:53,920 --> 01:21:57,920
यू ही कह देते यूं ही के चक्कर में हमारी जो

1141
01:21:57,920 --> 01:22:01,920
है समाज जो है विप्लव हो गया यूं ही के चक्कर में यूं ही

1142
01:22:01,920 --> 01:22:06,080
कहते हैं हम वाह यूं ही नहीं

1143
01:22:06,080 --> 01:22:10,160
वही बात है झूठ है लेकिन गलत नहीं गलत है लेकिन झूठ

1144
01:22:10,160 --> 01:22:14,240
नहीं गलत है लेकिन झूठ नहीं अच्छा मैं अभी ये प्रश्न करने

1145
01:22:14,240 --> 01:22:18,560
वाला था इनसे कि ठीक है वो सब कुछ नहीं कर सकता

1146
01:22:18,560 --> 01:22:22,720
फिर भी सर्वशक्तिमान है। अब तुम ये बता दो जो सब कुछ कर सकेगा

1147
01:22:22,720 --> 01:22:26,880
वो कौन होगा? उसको क्या कहेंगे? वो कौन होगा? [हंसी]

1148
01:22:26,880 --> 01:22:31,920
हम सोच रहे थे कि अभी अब बोलेंगे अब बोलेंगे। अब बोलेंगे

1149
01:22:31,920 --> 01:22:36,240
लेकिन तब तक की स्थिति में आ गए। भाई साहब

1150
01:22:36,240 --> 01:22:40,320
उनको कहा भाई तुम चले जाओ। चलो ये सर्वशक्तिमान वाली

1151
01:22:40,320 --> 01:22:44,400
बात तो हमारे लोगों को अब बिल्कुल फिक्स हो गई होगी

1152
01:22:44,400 --> 01:22:48,640
और बिल्कुल फिक्स है। जो वो

1153
01:22:48,640 --> 01:22:52,240
है ना

1154
01:22:52,240 --> 01:22:58,160
अलंकारी भाई है हमारा एक निर्भय उसने अभी

1155
01:22:58,160 --> 01:23:02,720
कुछ डाला था कुछ चीजें उसकी

1156
01:23:02,720 --> 01:23:06,800
उसकी शुरू में मैंने स्किप कर दी थी मुझे लग रहा था अभी इसने बोलना चालू नहीं किया है तो

1157
01:23:06,800 --> 01:23:11,280
मैंने उनके काफी देर तक उन्होंने बोलना चालू कर दिया उसके बाद से उसे सुना

1158
01:23:11,280 --> 01:23:15,440
बाद में मुझे जो है रील्स वगैरह किसी ने वो टैग किया Instagram तब मुझे पता चला

1159
01:23:15,440 --> 01:23:19,440
बहुत गंदा बोला और फिलहाल जो हमारे बीच में जो

1160
01:23:19,440 --> 01:23:23,680
व्यक्तिगत संपर्क स्थापित था वो अब बंद हो गया है।

1161
01:23:23,680 --> 01:23:28,400
मैंने जब वो सुना तो और उस पर एक प्रतिक्रियात्मक वीडियो मुझे देना है।

1162
01:23:28,400 --> 01:23:32,320
मैं बना दूंगा और

1163
01:23:32,320 --> 01:23:36,800
अच्छा नहीं लगा वो सुन के जो उसने बोला था। ठीक है।

1164
01:23:36,800 --> 01:23:41,200
चलिए फिर बहुत-बहुत अच्छा लगा। सबका समय देने के लिए आभार।

1165
01:23:41,200 --> 01:23:45,200
सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री

1166
01:23:45,200 --> 01:23:51,200
राम। यस

1167
01:23:56,400 --> 01:24:00,400
ओम
