1
00:00:02,080 --> 00:00:06,960
तो जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:06,960 --> 00:00:11,040
और आज का जो टॉपिक है बहुत ही गंभीर है। आपने थंबनेल

3
00:00:11,040 --> 00:00:15,280
देख ही लिया होगा। कुछ बातों को लेकर के हम विवेचना

4
00:00:15,280 --> 00:00:19,680
करने वाले हैं। एक चैनल है स्टेप अप जे करके। शायद

5
00:00:19,680 --> 00:00:24,080
Facebook पेज भी इसी नाम से है और मुझे जहां तक मुझे

6
00:00:24,080 --> 00:00:28,240
इनका जो है पेज का हैंडल का ही नाम सीधे तौर पर पता है स्टेप

7
00:00:28,240 --> 00:00:32,400
अप जे और इनका जो व्यक्तिगत

8
00:00:32,400 --> 00:00:36,480
नाम है इनका वो शायद जगदीप या जगदीश है तो इसमें मैं कंफ्यूज हूं

9
00:00:36,480 --> 00:00:40,480
थोड़ा इनकी चीजों को लेकर के आज की विवेचना है और

10
00:00:40,480 --> 00:00:44,560
इसमें रामपाल का एक महत्वपूर्ण जो रामपाल

11
00:00:44,560 --> 00:00:49,120
की एक महत्वपूर्ण भूमिका है किस प्रकार से

12
00:00:49,120 --> 00:00:53,440
स्टेप अप जे पहले रामपाल की चीजों का विरोध करते करते

13
00:00:53,440 --> 00:00:57,680
हैं और फिर उसके बाद जो है अभी इस समय कुछ

14
00:00:57,680 --> 00:01:01,840
अलग तरह की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं जो कि रामपाल का समर्थन

15
00:01:01,840 --> 00:01:05,920
कर रही हैं और किस तरीके से रामपाल की चीजों पर वह लीपापोती करते

16
00:01:05,920 --> 00:01:10,000
हुए भी दिखाई दे रहे हैं तो यह सब बातों पर हम लोग बात करने

17
00:01:10,000 --> 00:01:14,080
वाले हैं और फिर इसमें एक निर्णय है कि स्टेप

18
00:01:14,080 --> 00:01:17,200
अप जे वाले यदि अनजाने में ऐसा

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,200
कर रहे तो वह स्वयं और जो दर्शक हैं जो उन्हें देख

20
00:01:21,200 --> 00:01:25,440
रहे हैं वह स्वयं निर्णय करें कि यह उनकी

21
00:01:25,440 --> 00:01:30,320
पत्रकारिता है या चाटुकारिता है। ठीक है?

22
00:01:30,320 --> 00:01:34,320
तो अब इसमें सबसे पहले हम लोग

23
00:01:34,320 --> 00:01:38,400
जो बात करेंगे कहां से स्टार्ट हुई है स्टेप

24
00:01:38,400 --> 00:01:42,800
अप जे वालों से कुछ दिन पहले

25
00:01:42,800 --> 00:01:46,800
मेरी बात हुई थी जिस समय एकदम से हरियाणा में

26
00:01:46,800 --> 00:01:51,200
धर्मेंद्र हुड्डा के द्वारा वीडियो निर्गत और फिर रामपाल

27
00:01:51,200 --> 00:01:55,760
द्वारा धर्मेंद्र हुड्डा को प्रतिकार स्वरूप कुछ अनरगल

28
00:01:55,760 --> 00:02:00,080
टिप्पण टिप्पणियां कर देने के बाद यह मामला गर्म हो हो गया था

29
00:02:00,080 --> 00:02:04,320
और विरोध शुरू हुआ था। तो उसी समय यह जो स्टेप अप जे वालों

30
00:02:04,320 --> 00:02:08,720
का विरोध भी मुझे दिखाई दिया था Facebook पर और मैंने इनसे संपर्क भी किया था।

31
00:02:08,720 --> 00:02:12,880
फिर मैंने इनको रामपाल के विरुद्ध जो प्रशासनिक

32
00:02:12,880 --> 00:02:16,960
न्यायिक और लिखित कारवया चल रही है उनसे भी

33
00:02:16,960 --> 00:02:21,200
अवगत कराया था। इन्होंने तुरंत मुझसे कहा कि आप

34
00:02:21,200 --> 00:02:25,360
जो है यहां आ जाइए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लीजिए। चीजों को समझने

35
00:02:25,360 --> 00:02:30,080
की बजाय इन्होंने सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस इत्यादि की बात कही। मतलब जैसे एक

36
00:02:30,080 --> 00:02:32,240
अ एक व्यवसायिक

37
00:02:32,240 --> 00:02:36,240
प्रेस रिपोर्टर का दृष्टव्य होता है ना कि चीजों की

38
00:02:36,240 --> 00:02:40,320
गंभीरता से पहले यह देखना कि कंटेंट हमारा हमसे रिलेटेड

39
00:02:40,320 --> 00:02:44,400
चीजें जिस जिन चीजों में इस समय हमारी रुचि है उससे रिलेटेड चीजें हमें

40
00:02:44,400 --> 00:02:48,480
कैसे मिलेंगी तो मुझे कुछ ऐसा दिखाई दिया हालांकि मैं

41
00:02:48,480 --> 00:02:52,560
कई लोगों ने मुझे कहा कि आप यहां आ जाइए तो मैंने वहां जाने से जाने

42
00:02:52,560 --> 00:02:56,560
में कोई रुचि नहीं दिखाई क्योंकि पहले उस प्रकार का एक मंच यदि वहां पर

43
00:02:56,560 --> 00:03:00,800
प्राप्त हो तो हम है। अच्छा इसमें धर्मेंद्र हुड्डा को

44
00:03:00,800 --> 00:03:05,040
लेकर के भी कुछ बातें हैं। पहले हम यह वाली बात कर लें स्टेप

45
00:03:05,040 --> 00:03:09,200
अप जे वाली। इसके बाद जब इनका मुझे विरोध दिखाई दिया था। ठीक है। अभी

46
00:03:09,200 --> 00:03:13,200
रिसेंटली स्टेप अप जी का एक इंटरव्यू सामने

47
00:03:13,200 --> 00:03:18,080
आया जिसमें यह तथाकथित जगतगुरु तत्वदर्शी

48
00:03:18,080 --> 00:03:22,320
बाबा रामपाल का इंटरव्यू ले रहे हैं और बड़े ही मीठे-मीठे सवाल कर रहे हैं।

49
00:03:22,320 --> 00:03:26,480
बड़े ही मीठे-मीठे तरीके से उनको उत्तर प्राप्त हो रहे हैं और यह

50
00:03:26,480 --> 00:03:30,640
उन उत्तरों को समेट करके रख के चले आ रहे हैं वहां से। यह सब चीजें आपको देखने

51
00:03:30,640 --> 00:03:34,640
को मिल रही होंगी इन दिनों। उसके बाद कहानी [गला साफ़ करने की आवाज़] यही नहीं

52
00:03:34,640 --> 00:03:39,280
रुकती। जब जब बाबा रामपाल के विरोध में कोई चीज आ रही है जैसे कि

53
00:03:39,280 --> 00:03:43,760
अ सुक्राईनाथ ने सुक्राईनाथ जी ने

54
00:03:43,760 --> 00:03:47,440
उन्होंने जब बाबा रामपाल की बहुत जड़े खोद

55
00:03:47,440 --> 00:03:51,920
दी और तरीके से खंडन किया रामपाल

56
00:03:51,920 --> 00:03:56,240
की चीजों का लगभग उनके सामने जो जो टॉपिक उन्हें याद रहे होंगे स्मरण

57
00:03:56,240 --> 00:04:00,960
में वो सब उन्होंने खदेड़ा अच्छे से ठीक है

58
00:04:00,960 --> 00:04:05,040
उस के बाद भी यह जो स्टेप PUBG वाले

59
00:04:05,040 --> 00:04:09,120
हैं। इनका जो तरीका है जो पहले जो

60
00:04:09,120 --> 00:04:13,120
चल रहा था विरोध में रामपाल के विरोध में वो तरीका या

61
00:04:13,120 --> 00:04:17,600
वो एटीट्यूड रामपाल के प्रति व्यवहारिक

62
00:04:17,600 --> 00:04:21,760
जो व्यवहार है वो इनके व्यवहार में कहीं भी बदलाव या कोई

63
00:04:21,760 --> 00:04:25,920
गंभीरता या आश्चर्यचकित होना

64
00:04:25,920 --> 00:04:30,080
कुछ नहीं। बस इन्होंने वहां पर सुक्राईनाथ जी का इंटरव्यू ले लिया और डाल दिया।

65
00:04:30,080 --> 00:04:34,320
उसको लेकर के आगे कोई काउंटर क्वेश्चंस रामपाल

66
00:04:34,320 --> 00:04:38,720
को लेकर के कुछ नहीं बल्कि जगह-जगह पर वह

67
00:04:38,720 --> 00:04:44,160
रामपाल को डिफेंड करते ही नजर आ रहे हैं। है ना?

68
00:04:44,160 --> 00:04:48,160
फिर इसके बाद अभी एक मैंने ऑडियो क्लिप सुनी जो इन्होंने सुनाई

69
00:04:48,160 --> 00:04:52,240
है। स्टेप अप जे से मेरी जो बातचीत हुई है वो भी रिकॉर्डेड है। अगर यह

70
00:04:52,240 --> 00:04:56,240
कहेंगे कि भाई आप वो रिकॉर्डिंग पब्लिक कर दीजिए। हालांकि उसमें ऐसा कुछ खास नहीं

71
00:04:56,240 --> 00:05:00,400
है पर जो मैं कह रहा हूं वह सत्य है इस बात के लिए। तो यदि वह कहेंगे

72
00:05:00,400 --> 00:05:03,600
तो मैं उस रिकॉर्डिंग को निर्गत कर दूंगा।

73
00:05:03,600 --> 00:05:07,840
खैर वह ऐसी कोई आवश्यक बात नहीं है। फिर भी अब इसमें

74
00:05:07,840 --> 00:05:11,840
हुड्डा जो धर्मेंद्र हुड्डा हैं धर्मेंद्र जी का मामला क्या आता है कि

75
00:05:11,840 --> 00:05:15,840
वो बात कर रहे हैं स्टेप अप जी वालों से कि भाई वो कुछ

76
00:05:15,840 --> 00:05:20,000
जो मैं यहां पे आज जो भाव प्रस्तुत कर रहा हूं लगभग लगभग उसी के इर्द-गिर्द धर्मेंद्र

77
00:05:20,000 --> 00:05:24,000
जी भी वहां पर भाव प्रस्तुत कर रहे हैं। भाषा का अंतर है और शब्दों

78
00:05:24,000 --> 00:05:28,160
का अभाव है उनके पास। उनकी गति उतनी नहीं है शास्त्रों में या

79
00:05:28,160 --> 00:05:32,320
भाषा में तो उनके पास शब्दों का अभाव है तो वह अपनी बात

80
00:05:32,320 --> 00:05:36,480
को ठीक से स्टेप अप जी के सामने रख नहीं पा रहे मगर बात उनकी भी

81
00:05:36,480 --> 00:05:40,560
यही है कि भाई कुल मिलाकर के तुम इस फर्जी बाबा का साथ क्यों दे रहे

82
00:05:40,560 --> 00:05:44,560
हो पाखंडी बाबा का साथ क्यों दे रहे हो तो स्टेप अप जी वहां पर यह कह रहे

83
00:05:44,560 --> 00:05:48,800
हैं अच्छा एक चीज इन्होंने ऐसी

84
00:05:48,800 --> 00:05:53,440
कही है वहां पर यह इनका कहना यह है कि भाई शुक्राईनाथ जैसे लोग शुक्राईनाथ

85
00:05:53,440 --> 00:05:57,440
जी जैसे लोग अगर विरोध करें तब तो समझ में भी आता है तुम क्यों कर रहे

86
00:05:57,440 --> 00:06:02,480
हो? मतलब कि अगर शंकराचार्य

87
00:06:02,480 --> 00:06:06,800
या कोई आचार्य जो कि शास्त्रों को पढ़े हैं

88
00:06:06,800 --> 00:06:11,120
और वह बता रहे हैं कि व्यक्ति गलत है तो उनके कहने

89
00:06:11,120 --> 00:06:15,120
के अनुसार यदि सामान्य वर्ग उस उस पर उसका अनुकरण

90
00:06:15,120 --> 00:06:18,640
करते हुए उस गलत का विरोध करता है तो उसको नहीं करना चाहिए।

91
00:06:18,640 --> 00:06:22,640
यह इनका कहने का अर्थ है वहां पर। तो सुक्राईनाथ जी के लिए

92
00:06:22,640 --> 00:06:26,720
वह कह रहे हैं कि वह अगर करें तो ठीक भी है। भाई तुम किस अधिकार से कर रहे हो? भाई

93
00:06:26,720 --> 00:06:31,040
जब जब व्यक्ति को अधर्म की ब आएगी ना पाखंड की ब आएगी

94
00:06:31,040 --> 00:06:35,120
तबतब वो अपनेप स्तर पर विरोध करेगा। वो बात अलग है कि धर्मेंद्र

95
00:06:35,120 --> 00:06:39,280
हुड्डा की उसमें गति नहीं है तो वो तुमको जवाब नहीं दे पा रहा है। तुम जो सवाल पूछ

96
00:06:39,280 --> 00:06:43,360
रहे हो पाखंड क्या होता है? हां और बाबा रामपाल

97
00:06:43,360 --> 00:06:48,000
किस-किस प्रकार से धर्म को क्षति पहुंचा रहा है। यह सब बातें

98
00:06:48,000 --> 00:06:52,240
वह तुमको उतना उपयुक्त तरीके से उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। तो तुम खेल रहे हो रिकॉर्डिंग चालू

99
00:06:52,240 --> 00:06:56,320
करके। अच्छा एक बात और है जब ये करके आ गए हो शुक्राईनाथ जी

100
00:06:56,320 --> 00:07:00,400
का जिस दिन इंटरव्यू ले रहे हैं स्टेप अप जे वाले। उस दिन भी मेरी इनसे बात हुई

101
00:07:00,400 --> 00:07:04,640
है तो यह उस समय शायद इंटरव्यू लेने से जस्ट 5 मिनट पहले की बात होगी।

102
00:07:04,640 --> 00:07:08,640
मेरा फोन गया होगा। इन्होंने कहा मैं अभी बात करता हूं आपसे

103
00:07:08,640 --> 00:07:12,720
और इनके पास मेरा नंबर सेव था। यह बात भी रिकॉर्डेड है। तो इन्होंने कहा

104
00:07:12,720 --> 00:07:17,200
मैं अभी बात करता हूं आपसे और मैं इस समय शुक्राईनाथ जी के पास बैठा हुआ हूं और ऐसा-सा

105
00:07:17,200 --> 00:07:21,520
शुक्राईनाथ जी से भी मैंने शायद बात की फोन पर उस दिन तो उन्होंने

106
00:07:21,520 --> 00:07:25,600
कहा शुक्राईनाथ जी से आप बात कर लो। तो मैंने उनसे बात की तो उन्होंने कहा हां आपकी

107
00:07:25,600 --> 00:07:29,600
मतलब वो जो एक औपचारिक अभिवादन होता

108
00:07:29,600 --> 00:07:34,400
है वो हुआ और उसके बाद वो फोन कट हो गया। उसके बाद से अब तक मैंने कई बार

109
00:07:34,400 --> 00:07:38,720
अह यह स्टेप अप जी को फोन में लाया पर यह फोन से गायब

110
00:07:38,720 --> 00:07:42,720
हैं। अब कारण कुछ भी दे सकते हैं भाई कि बिजी हैं, व्यस्त हैं जो भी हैं। परंतु

111
00:07:42,720 --> 00:07:47,200
हम तो अपना कर्म करेंगे ना यथावत जो हम कर सकते हैं। कर्मन्यवादी

112
00:07:47,200 --> 00:07:51,200
कारस्ते मा फले सुदा है ना आप वहां धर्मेंद्र

113
00:07:51,200 --> 00:07:55,200
की धर्मेंद्र जी का आप मजाक उड़ा रहे हो बैठकर के क्योंकि वह आपको पाखंड का

114
00:07:55,200 --> 00:07:59,840
अर्थ नहीं बता पा रहे। वह आपको स्पष्ट रूप से यह नहीं बता पा रहे कि बाबा रामपाल

115
00:07:59,840 --> 00:08:04,000
बाबा रामपाल की ढोल में पोल क्या-क्या है। है ना? उनके

116
00:08:04,000 --> 00:08:08,080
पास शब्द नहीं है। तो

117
00:08:08,080 --> 00:08:12,080
अब सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रश्न क्यों आया पत्रकारिता

118
00:08:12,080 --> 00:08:17,200
या चाटुकारिता? इसका एक बहुत आधारभूत सवाल तो यह है।

119
00:08:17,200 --> 00:08:21,680
यह जो धर्मेंद्र जी की बात है ना जो मैं कहना चाहता था वह यही बात है

120
00:08:21,680 --> 00:08:25,680
कि जब सही तरीके से स्ट्रक्चरल वे में चीजों को

121
00:08:25,680 --> 00:08:30,000
ले नहीं चला जाता है तो यह दृश्य देखने पड़ जाते हैं। धर्मेंद्र

122
00:08:30,000 --> 00:08:34,080
हुड्डा जी को पहले मैंने एक वीडियो बना करके या इस चीज से अवगत कराया था। आप आर्य समाज की बातों

123
00:08:34,080 --> 00:08:38,400
को लेकर के आगे मत चलो। और कुछ-कुछ आर्य समाज की भावनाओं से प्रेरित

124
00:08:38,400 --> 00:08:42,720
बात भी एक दो बातें आज जब मैंने वो रिकॉर्डिंग सुनी तो उसमें अपना

125
00:08:42,720 --> 00:08:46,960
पक्ष रखते समय धर्मेंद्र हुड्डा जो है वो आर्य समाज की भावनाओं को परोस

126
00:08:46,960 --> 00:08:49,520
रहे हैं और परोसते हुए यह कह रहे हैं कि

127
00:08:49,520 --> 00:08:53,520
भाई देखो कुछ कमियां है मगर हमें ऐसे कहना नहीं चाहिए यह कहने

128
00:08:53,520 --> 00:08:57,840
का प्रयास कर रहे हैं। है ना? देखो सर्वप्रथम तो

129
00:08:57,840 --> 00:09:01,840
सम्मान पूर्वक तरीके से धर्मेंद्र जी को मैं एक बात कहूंगा जो धर्म

130
00:09:01,840 --> 00:09:06,400
होता है ना वह मैथमेटिक्स की तरह होता है। मैथ का सवाल

131
00:09:06,400 --> 00:09:10,960
उसमें पॉइंट समथिंग समथिंग का भी इधर-उधर

132
00:09:10,960 --> 00:09:15,040
नहीं होता है। उसको सनातन कहते हैं। सनातन का अर्थ पहले आप

133
00:09:15,040 --> 00:09:19,120
समझो क्योंकि आप धर्म की रक्षा करने के लिए निकले हो। तो इसलिए आपको

134
00:09:19,120 --> 00:09:23,280
यह जानकारी होनी चाहिए। सनातन का अर्थ है जो किसी भी देश

135
00:09:23,280 --> 00:09:27,520
काल परिस्थिति में ना बदले जिसका ना आदि है ना अंत जिसकी

136
00:09:27,520 --> 00:09:31,760
कभी शुरुआत नहीं हुई उसको सनातन कहते हैं। अगर उसके स्वरूप में बदलाव

137
00:09:31,760 --> 00:09:35,840
आ रहा है परिवर्तन आ रहा है वो सनातन नहीं है।

138
00:09:35,840 --> 00:09:39,840
और आप सनातन धर्म की रक्षा करने निकले हो तो आप यह मत कहो कि यहां पर यह कमी है,

139
00:09:39,840 --> 00:09:44,000
वहां पर वो कमी है। आप गुरुओं के पास जाओ, आचार्यों के पास जाओ

140
00:09:44,000 --> 00:09:48,000
और उनका समाधान प्राप्त करो, अध्ययन करो और उतनी ही बात

141
00:09:48,000 --> 00:09:52,240
बारे में बात करो जितनी जानकारी। यह मेरी यह मेरा आपसे निवेदन है

142
00:09:52,240 --> 00:09:56,240
धर्मेंद्र हुड्डा जी ठीक है तो यह कह देना कि नहीं नहीं कमियां तो

143
00:09:56,240 --> 00:10:00,640
हैं पर उनको ऐसे बोलना नहीं चाहिए तो पवन दास वाली भाषा हो गई

144
00:10:00,640 --> 00:10:04,720
आर्य समाज वाली भाषा हो गई मूर्ति पूजा का विरोधी आर्य समाज ही भी है और आप

145
00:10:04,720 --> 00:10:08,720
आज नहीं तो कल ठीक से जरा एक बात अच्छे से अवलोकन

146
00:10:08,720 --> 00:10:12,720
कर लेना ये रामपाल जो भाषा बोल रहा है ना उसके मूल में आर्य

147
00:10:12,720 --> 00:10:16,720
समाज बैठा है ये आर्य समाज से ही निकल के आ

148
00:10:16,720 --> 00:10:21,040
रही है चीजें जिसको यह और सरगर्मी के साथ बना रहा है। मगर

149
00:10:21,040 --> 00:10:25,120
साथ की साथ यहां पर मैं आर्य समाज का पक्ष भी लेता हुआ दिखाई दूंगा

150
00:10:25,120 --> 00:10:29,120
आप लोगों को। किस मामले में? आर्य समाज और रामपाल में अंतर क्या

151
00:10:29,120 --> 00:10:33,360
है? अंतर यह है आर्य समाज और रामपाल में कि आर्य

152
00:10:33,360 --> 00:10:38,480
समाज जो पुराणों को लेकर के बात करता है वो यह कहता है पुराण नकली हैं।

153
00:10:38,480 --> 00:10:42,480
क्योंकि इस इस तरह की बातें कृष्ण पर लागू नहीं हो सकती। इस इस तरह की बातें राम

154
00:10:42,480 --> 00:10:46,560
पर लागू नहीं हो सकती। पुराणों से निकल के जो बातें

155
00:10:46,560 --> 00:10:50,560
आ रही हैं या अन्य स्मृति ग्रंथों से निकल के जो बातें आ रही जो आर्य समाज को समझ में

156
00:10:50,560 --> 00:10:54,720
नहीं आ रही क्योंकि समर्थवान गुरुओं की शरण में जाकर उन्होंने अध्ययन नहीं किया।

157
00:10:54,720 --> 00:10:58,880
अपने मनमुखी व्याख्यान देने लगे। ठीक है? मगर उसके बाद यदि उसको

158
00:10:58,880 --> 00:11:02,960
कुछ कमी लग रही है तो उन कमियों को वह यथार्थ के रूप में जोड़ नहीं रहा

159
00:11:02,960 --> 00:11:06,960
है। सनातन धर्म के मान जो प्रतीक चिन्ह है उनसे ना

160
00:11:06,960 --> 00:11:11,040
वो अलग कर रहा है। वो पुराणों पे अविश्वास जताते हुए

161
00:11:11,040 --> 00:11:15,040
ये कहानियां बता रहा है क्योंकि पुराणों में ये कहानियां है या स्मृति ग्रंथों में

162
00:11:15,040 --> 00:11:19,520
ये कहानियां है या और ऐसे धर्म शास्त्रों में ये कहानियां तो वो सब प्रक्षिप्त है।

163
00:11:19,520 --> 00:11:20,020
वह

164
00:11:19,840 --> 00:11:24,480
यह कहता है और रामपाल क्या कहता है कि रामपाल

165
00:11:24,480 --> 00:11:28,480
हमारे मन में कृष्ण और राम के प्रति बुरी भावना को जन्म देने के लिए

166
00:11:28,480 --> 00:11:32,640
शिव के मन शिव के लिए बुरी भावना को जन्म देने के लिए पुराणों के उसी

167
00:11:32,640 --> 00:11:36,960
गलत अर्थ को लेता है जिस गलत अर्थ को आर्य समाज ने लिया आर्य समाज ने पुराण

168
00:11:36,960 --> 00:11:40,960
को अलग हटा दिया क्योंकि उसको अर्थ समझ में नहीं आया और इसने जिस जो

169
00:11:40,960 --> 00:11:45,200
अर्थ आर्य समाज ने लिया इसने उस अर्थ को लेते हुए पुराणों के आधार पर

170
00:11:45,200 --> 00:11:49,520
श्री कृष्ण और शिव जी और राम जी इत्यादि जो हमारे सनातन मान बिंदु

171
00:11:49,520 --> 00:11:53,520
है उनका दुश्मन बना दिया सनातन समाज को दुश्मन बना रहा

172
00:11:53,520 --> 00:11:57,520
है बना दिया तो बना बना तो क्या ही पाएगा तो यह अंतर आप

173
00:11:57,520 --> 00:12:02,640
लोग आर्य समाज में और रामपाल में सदैव ध्यान रखो

174
00:12:02,640 --> 00:12:06,800
आर्य समाज रामपाल जैसा नहीं है उसको जहां पर सनातन धर्म की क्षति

175
00:12:06,800 --> 00:12:10,800
होती हुई दिखाई दी उसकी अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार उसने उस उस

176
00:12:10,800 --> 00:12:14,800
हिस्से को काट दिया कि भाई पुराण को मैं मानता ही नहीं

177
00:12:14,800 --> 00:12:19,120
हूं और इसने जहां पर जिस हिस्से के द्वारा क्षति होता दिखाई किया

178
00:12:19,120 --> 00:12:23,280
उसको और पुष्ट तरीके से लेकर के उस पर विश्वास जताया। देखो देखो

179
00:12:23,280 --> 00:12:27,360
यहां तो यह हो रहा है इसलिए कृष्ण को मत मानो। यहां तो यह हो रहा है इसलिए शिव को मत मानो। यह

180
00:12:27,360 --> 00:12:31,440
अंतर है आर्य समाज और रामपाल में। आर्य

181
00:12:31,440 --> 00:12:34,960
समाज ने कभी यह नहीं कहा कि वेद पर विश्वास मत करो। वेद के अलावा

182
00:12:34,960 --> 00:12:38,960
कोई और ग्रंथ है। अंतिम प्रमाण आर्य समाज का वेद है।

183
00:12:38,960 --> 00:12:43,040
वो बात अलग है कि उसको जब कोई अर्थ समझ में नहीं आया या कुछ ऐसी चीज

184
00:12:43,040 --> 00:12:47,520
आई तो उसने उस हिस्से को वेद का अंग माना ही नहीं। यह बात है।

185
00:12:47,520 --> 00:12:51,840
पर इसने सनातन धर्म के प्रति घृणा फैलाने के लिए रामपाल ने

186
00:12:51,840 --> 00:12:55,920
वेदों के प्रति वैदिक धर्म के प्रति घृणा फैलाने के लिए इसने

187
00:12:55,920 --> 00:13:00,720
वेद को मानने का दिखावा तो किया मगर वेद वेद के

188
00:13:00,720 --> 00:13:05,280
ऐसे पार्ट जो कि उनके लिए संदिग्ध थे। इसने उनको कहा कि ये देखो

189
00:13:05,280 --> 00:13:09,840
ये बिल्कुल सच्चे पार्ट है और इससे अर्थ निकलता है कि सनातन धर्म को छोड़ दो।

190
00:13:09,840 --> 00:13:14,240
सनातन धर्म को छोड़ने का अर्थ है कि मैं बनाऊंगा आदि सनातन। मतलब जिसका

191
00:13:14,240 --> 00:13:18,240
कोई शुरुआत नहीं होती मैं उसकी शुरुआत लिखूंगा। आदि सनातन

192
00:13:18,240 --> 00:13:22,240
बनाऊंगा ढम डम ढोल है ना और उसके

193
00:13:22,240 --> 00:13:26,400
बाद क्या है कि जिसकी कोई शुरुआत नहीं होती

194
00:13:26,400 --> 00:13:30,800
मैं उसकी मैं उसकी शुरुआत लिखूंगा और वेदों को छोड़ दो।

195
00:13:30,800 --> 00:13:34,880
कबीर पे आ जाओ। यह है आदि सनातन। यह है हिंदुत्व।

196
00:13:34,880 --> 00:13:39,040
वेदों को छोड़ दो। कबीर पे आ जाओ। कबीर के साथ-साथ अल्लाह को ले लो और जीसस

197
00:13:39,040 --> 00:13:43,040
को ले लो। और ऐसे पाखंडी को

198
00:13:43,040 --> 00:13:48,240
जब कोई पाखंडी कह रहा है या तुम्हारा विरोध कर रहा है उसका पक्ष उसके पक्षपक्ष

199
00:13:48,240 --> 00:13:50,000
उसके पक्ष पक्षकार बने घूम

200
00:13:50,000 --> 00:13:54,080
रहे हो तुम एक बिकाऊ पत्रकार जैसे दिख रहे हो

201
00:13:54,080 --> 00:13:58,320
उस भूमिका में और जब कोई इस तुम्हारी इस गतिविधि का विरोध

202
00:13:58,320 --> 00:14:02,400
कर रहा है तो तुम वहां पे पूछ रहे हो पाखंड होता क्या

203
00:14:02,400 --> 00:14:06,960
है जैसे तुम तो दो साल के बबुआ हो तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं है

204
00:14:06,960 --> 00:14:11,120
ना तुम्हें तो कुछ ढोल में पोल पता ही नहीं है फिर तो ऐसा

205
00:14:11,120 --> 00:14:15,760
क्यों ना माना जाए कि जो अन्य जो रामपालियों को प्रसाद मिलता है वो तुम्हें भी मिला।

206
00:14:15,760 --> 00:14:19,840
हां। और क्या माना जाए इसमें? जब तुम अपने

207
00:14:19,840 --> 00:14:24,160
कर्तव्य को भूल ही जाओगे जो तुमने बीड़ा उठाया है कि मैं पत्रकारिता

208
00:14:24,160 --> 00:14:28,240
करूंगा। मैं समाज को सच्चाई दिखाऊंगा तो ये सब प्रश्न तुमसे पूछे जाएंगे

209
00:14:28,240 --> 00:14:32,240
ना। तुम प्रश्न पूछो या ना पूछो जिनकी तुम चाटुकारिता करने का प्रयास करते

210
00:14:32,240 --> 00:14:36,240
दिख रहे हो। प्रतीत तो ऐसा ही हो रहा है। तुम

211
00:14:36,240 --> 00:14:40,720
प्रश्न पूछो या ना पूछो। मगर हम तो तुमसे प्रश्न पूछेंगे ना। अब देना जवाब।

212
00:14:40,720 --> 00:14:44,800
कोई सनातनी मिला नहीं ना तुम्हें मनुवादी कोई मिला नहीं ठीकठाक जो

213
00:14:44,800 --> 00:14:48,800
सुक्राईनाथ जी उन्होंने भी थोड़ा सामंजस्य तरीके से जो है थोड़ा

214
00:14:48,800 --> 00:14:52,160
एक उसमें

215
00:14:52,160 --> 00:14:56,480
जो एक सहजता होते सहज भाव में उन्होंने अपनी बातें रख दी तुमको

216
00:14:56,480 --> 00:15:00,480
कोई मिला ही नहीं कट्टर व्यक्ति जिसके कारण तुम ये सब ढोल ढपली बनाए

217
00:15:00,480 --> 00:15:04,480
घूम रहे हो उधर से उधर अब नहीं घूमोगे तो सबसे

218
00:15:04,480 --> 00:15:07,280
पहली बात है

219
00:15:07,280 --> 00:15:12,080
यह धर्मेंद्र जी का हो गया ना थोड़ा सा आप ध्यान रखिए

220
00:15:12,080 --> 00:15:16,400
कि आर्य समाज की बातों को लेकर के आप

221
00:15:16,400 --> 00:15:20,400
सनातन धर्म की रक्षा नहीं कर पाएंगे। खासतौर पर रामपाल के विरुद्ध तो खड़े नहीं हो

222
00:15:20,400 --> 00:15:24,560
पाएंगे। ठीक है? इसलिए समर्थवान गुरुओं से सुनिए

223
00:15:24,560 --> 00:15:28,800
कि पुराणों जो पुराणों स्मृति ग्रंथों के आधार पर जो ये बोल रहा है

224
00:15:28,800 --> 00:15:32,880
वो उसका क्या खंडन है? एक खंडन मैंने

225
00:15:32,880 --> 00:15:36,960
पिछले यह धर्मेंद्र हुड्डा जी के लिए जो मैंने

226
00:15:36,960 --> 00:15:41,200
पिछली लाइव की थी उसमें मैंने एक खंडन बताया था अश्लील बात

227
00:15:41,200 --> 00:15:46,960
अश्लील आक्षेप जो ये लगाता है रामपाल उसको देखना

228
00:15:46,960 --> 00:15:51,520
ठीक है तो अब आ जाते हैं ये स्टेप स्टेप अप जेप

229
00:15:51,520 --> 00:15:55,600
तो यह व्यक्ति क्या कर रहा है यह व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं वहां

230
00:15:55,600 --> 00:15:59,600
रामपाल के खेमे में जाकर के बढ़िया बहुत बढ़िया तरीके से इंटरव्यू ले

231
00:15:59,600 --> 00:16:03,600
रहे हैं फिर बाहर आकर करके कोई अगर टोक दे रहा है तो उससे पूछ रहे हैं भाई पाखंड होता क्या

232
00:16:03,600 --> 00:16:07,840
है? क्यों कह रहे हो पाखंडी उसको? और शुक्राईनाथ जी जैसे व्यक्ति

233
00:16:07,840 --> 00:16:11,840
ने उनको गंभीर प्रमाण उपलब्ध करा दिए। उसके बाद भी

234
00:16:11,840 --> 00:16:15,920
उसकी कोई चिंतन मनन विवेचन इत्यादि कुछ नहीं दिख रहा है। और ले दे के

235
00:16:15,920 --> 00:16:20,080
अपने हर नेक्स्ट वीडियो में उसका घी खरीद रहे हैं। उसके घी का प्रचार

236
00:16:20,080 --> 00:16:24,160
कर रहे हैं। उसके तेल का प्रचार कर रहे हैं। उसके सामग्री का प्रचार कर रहे हैं। है

237
00:16:24,160 --> 00:16:28,560
ना? तो यह फिर यहां जब ऐसा होता है ना तो इसको दिखाई

238
00:16:28,560 --> 00:16:32,640
देता है जनता को कि तुम पत्रकार दिख रहे हो यहां पर कि चाटुकार दिख

239
00:16:32,640 --> 00:16:35,680
रहे हो ये फिर प्रश्न उठ जाता है अब

240
00:16:35,680 --> 00:16:39,680
यह बताओ सबसे पहली बात कि तुमको एन केन

241
00:16:39,680 --> 00:16:43,760
प्रकारन जब यह पता है कि रामपाल के

242
00:16:43,760 --> 00:16:48,160
विरुद्ध हाई कोर्ट में केस लगा हुआ है उत्तर प्रदेश में तुमने रामपाल से प्रश्न किया

243
00:16:48,160 --> 00:16:52,320
कि तुम्हारे जो लोग हैं शासन

244
00:16:52,320 --> 00:16:56,400
है शासन ने वहां पर एफआईआर दर्ज कराई है तुम्हारे नामदान सेंटर

245
00:16:56,400 --> 00:17:00,560
के ऊपर। शासन के आदेश से उसमें एसीपी की रिपोर्ट लगी

246
00:17:00,560 --> 00:17:04,720
है कि हम किताबों को ढूंढ रहे हैं। नामदान सेंटर पर किताबें नहीं मिली हैं। यह

247
00:17:04,720 --> 00:17:08,720
एसीपी की रिपोर्ट मेरे पास हैं। मैंने तुमको ये सारी चीजें बताई है। हाई

248
00:17:08,720 --> 00:17:12,720
कोर्ट का आर्डर बताया है। एफआईआर के बारे में बताया है। नामद

249
00:17:12,720 --> 00:17:16,960
सेंटर बंद होने के बारे में बताया है। किताबों के जलने के बारे में बताया है। WhatsApp

250
00:17:16,960 --> 00:17:20,960
के जरिए और भी बहुत सी चार चीजें भेजी हैं। इंटरनेट पर

251
00:17:20,960 --> 00:17:24,960
जो यह लाइव लॉ करके

252
00:17:24,960 --> 00:17:29,120
वेबसाइट होती है। जहां पर जो कानूनी ऑर्डर्स वगैरह निकलते हैं। वहां

253
00:17:29,120 --> 00:17:33,120
पर हिंदुस्तान टाइम्स पर जाने कितनी तरीके की चीजें वहां पर खबरें

254
00:17:33,120 --> 00:17:37,120
पड़ी हुई हैं। जो हाई जो रामपाल

255
00:17:37,120 --> 00:17:41,360
के ऊपर जो हत्या के केस हैं यह है वो है वो सब एक तरफ।

256
00:17:41,360 --> 00:17:45,440
मगर रामपाल को लेकर के जो हमारा जो हिंदुओं

257
00:17:45,440 --> 00:17:49,600
का जब मुख्य विरोध है एक खूनी के रूप में नहीं है

258
00:17:49,600 --> 00:17:50,800
पाखंडी के रूप में

259
00:17:50,800 --> 00:17:54,800
वेद विरोधी के रूप में है अधर्मी के रूप में है उस अधर्म

260
00:17:54,800 --> 00:17:58,880
का उस अधर्म के विरुद्ध हाई कोर्ट में

261
00:17:58,880 --> 00:18:02,880
ठीक है उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका लगी हुई है

262
00:18:02,880 --> 00:18:06,960
जिस पर कोर्ट ने आड़े हाथों लिया शासन को और जिस

263
00:18:06,960 --> 00:18:10,960
पर शासन ने एफआईआर करवाई है तुम्हारी लखनऊ में राम पाल की

264
00:18:10,960 --> 00:18:15,040
किताबें नहीं बेच पा रही हैं। तुमने पूछा कि तुम्हारा सेंटर वहां

265
00:18:15,040 --> 00:18:19,120
क्यों बंद हो गया है? तुमने पूछा कि वहां पर दोबारा किताबें कब बिकने वाली है

266
00:18:19,120 --> 00:18:23,360
तुम्हारी? तुमने पूछा कि तुम्हारा कोई पैरोकार हाई कोर्ट में तुम्हारी उनकी पैरवी

267
00:18:23,360 --> 00:18:27,440
करने क्यों नहीं जा रहा है? तुमने पूछा कि ऑफिशियली रामपाल की ओर से कौन

268
00:18:27,440 --> 00:18:31,600
खड़ा हुआ है जो एफआईआर हुई है उस संबंध में? तुमने पूछा

269
00:18:31,600 --> 00:18:35,600
तुमने पूछा कि जेलर को तलब कर लिया

270
00:18:35,600 --> 00:18:39,680
हाई कोर्ट ने कि भाई तुम्हारे यहां पर जिस समय रामपाल जेल में था उस समय

271
00:18:39,680 --> 00:18:43,680
जेल में बंद व्यक्ति के नाम से बाहर इतना बड़ा कारोबार चल रहा है तो जेलर क्या

272
00:18:43,680 --> 00:18:47,680
कर रहा है उस संबंध में जेलर को तलब कर लिया गया जेलर

273
00:18:47,680 --> 00:18:52,240
आज के टाइम में पार्टी है उस केस में उस रिट में और जैसे अन्य

274
00:18:52,240 --> 00:18:56,560
YouTube मेटा इत्यादि ये सब पार्टी है शासन उसमें एक पार्टी है

275
00:18:56,560 --> 00:19:00,720
कि भाई उसके अंडरटेिंग में यह सब कैसे हो रहा तो शासन को रामपाल

276
00:19:00,720 --> 00:19:04,800
क्यों नहीं बता रहा है अपनी चीजें जिससे कि शासन वो

277
00:19:04,800 --> 00:19:06,080
जवाब लगाए

278
00:19:06,080 --> 00:19:10,160
कि हम हम लोग तो ठीक है। रामपाल तो फरार है। रामपाल

279
00:19:10,160 --> 00:19:14,160
को पता ही नहीं है कि उसकी चीजों पर केस चल रहा है। रामपाल को पता ही नहीं है कि उसके लोग

280
00:19:14,160 --> 00:19:18,000
यहां पर नाम ददान सेंटर उनका बंद हो चुका है।

281
00:19:18,000 --> 00:19:22,560
यह सब सवाल तुमने किए रामपाल से। इसको पत्रकारिता नहीं पत्रकारिता

282
00:19:22,560 --> 00:19:28,560
ना कहकर चाटुकारिता ना कहे तो क्या कहें बताओ?

283
00:19:29,760 --> 00:19:33,760
अब तुम उस व्यक्ति से पूछ रहे हो।

284
00:19:33,760 --> 00:19:38,560
उस व्यक्ति से तुम पूछ रहे हो कि पाखंड क्या होता है? धर्मेंद्र

285
00:19:38,560 --> 00:19:42,880
जी से तुमको पाखंड का अर्थ पता है? तुम खुद बताओ।

286
00:19:42,880 --> 00:19:46,960
अभी तक के टाइम पे इस समय तक मैं लिख के दे सकता हूं कि

287
00:19:46,960 --> 00:19:51,120
स्टेप अप जे को पाखंड का अर्थ ही नहीं पता है। पाखंड

288
00:19:51,120 --> 00:19:55,360
का अर्थ सुनो। पा का मतलब है वेद।

289
00:19:55,360 --> 00:19:59,360
खंड का मतलब है विरोध। वेद विरोधी जो

290
00:19:59,360 --> 00:20:03,360
होता है वह पाखंडी है। वेद का विरोधी पाखंड है। वेद

291
00:20:03,360 --> 00:20:08,960
का मतलब ही धर्म है। शिवराम आपटे की इनको दिखाओ।

292
00:20:08,960 --> 00:20:13,360
प्रमाण क्रमांक एक पाखंड का अर्थ क्या होता है? देखो पाखंडी

293
00:20:13,360 --> 00:20:17,600
कैसे सिद्ध होता है? शिवराम आपटे का दिखाओ इनको। ये

294
00:20:17,600 --> 00:20:21,120
देखो पढ़ो। त्रई धर्म

295
00:20:21,120 --> 00:20:25,600
है ना? उसका खंडन करने वाला उसको पाखंडी कहते हैं।

296
00:20:25,600 --> 00:20:29,840
नास्तिक कहते हैं। अधर्मी कहते हैं। वेदर विरोधी नास्तिक होता है। दूसरा

297
00:20:29,840 --> 00:20:34,000
प्रमाण दिखाओ मनुस्मृति का। ये पढ़ो थोड़ा बहुत। ठीक है?

298
00:20:34,000 --> 00:20:38,720
केवल फरलोबाजी वाली पत्रकारिता मत करो। पढ़ो थोड़ा बहुत।

299
00:20:38,720 --> 00:20:43,360
यह देखो मनुस्मृति में क्या लिखा है। दो 9

300
00:20:43,360 --> 00:20:47,440
मनुष्य वेद और स्मृतियों में कहे हुए धर्म को करता

301
00:20:47,440 --> 00:20:51,520
हुआ इस संसार में कीर्ति और मरकर निश्चय

302
00:20:51,520 --> 00:20:56,080
करके परम परमोत्तम सुख पाता है।

303
00:20:56,080 --> 00:21:00,080
ठीक है? वेद और स्मृति में कहा हुआ। बड़ा रखो अभी

304
00:21:00,080 --> 00:21:04,080
वेद को श्रुति और धर्म शास्त्र को स्मृति जानना चाहिए। धर्म शास्त्र सब

305
00:21:04,080 --> 00:21:08,800
हो गए। पुराण इतिहास पुराण स्मृति इत्यादि।

306
00:21:08,800 --> 00:21:12,960
ठीक है? और यह दोनों सब विषयों में आगे

307
00:21:12,960 --> 00:21:17,200
क्या कहा जा रहा है? जो द्विज नीचे 11वा 11वा

308
00:21:17,200 --> 00:21:21,520
श्लोक मुख्य है। जो द्विज उन दोनों धर्म के मूलों का तर्क

309
00:21:21,520 --> 00:21:25,840
शास्त्र के सहारे अपमान करता है। कुल मिलाकर के वेद की निंदा

310
00:21:25,840 --> 00:21:30,080
करता है। वह नास्तिक है। वह नास्तिक और वेद

311
00:21:30,080 --> 00:21:34,800
निंदक है। नास्तिक कौन है? वेद निंदक। यह है।

312
00:21:34,800 --> 00:21:36,240
पाखंडी का मतलब क्या है?

313
00:21:36,240 --> 00:21:40,320
नास्तिक। वेद विरोधी और वेद विरोधी कौन

314
00:21:40,320 --> 00:21:44,640
है? नास्तिक। और यह मनुस्मृति के प्रमाणिकता पर अगर मालूम

315
00:21:44,640 --> 00:21:48,800
ना हो तो पता कर लेना। वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है जब सुग्रीव

316
00:21:48,800 --> 00:21:52,960
को बाली को तीर मारा था ना प्रभु श्री राम ने। तुम तो कहते हो ना तुम तुम सबको

317
00:21:52,960 --> 00:21:57,040
मानते हो। राम जी को मानते तुम रामपाली तो नहीं हो ना। उसको थोड़ा ज्यादा प्रमाण

318
00:21:57,040 --> 00:22:01,040
देने पड़ेंगे। रामपाली होगा तो और देने पड़ेंगे प्रमाण। जो

319
00:22:01,040 --> 00:22:05,120
ग्रंथ वो मानता है उन्हीं से देने पड़ेंगे। मनुस्मृति को तुम्हें मानना

320
00:22:05,120 --> 00:22:09,680
पड़ेगा ना। वाल्मीकि रामायण में प्रभु श्री राम ने तीर मारा था बाली को।

321
00:22:09,680 --> 00:22:13,760
बाली ने आरोप लगाया कि तुमने मुझे गलत तरीके से मारा है। बाली

322
00:22:13,760 --> 00:22:18,080
ने भी वहां पर लगभग लगभग मनुस्मृति की बातें ही कही। तब जाकर

323
00:22:18,080 --> 00:22:22,560
प्रभु श्री राम ने एज इट इज वाल्मीकि रामायण में मनुस्मृति

324
00:22:22,560 --> 00:22:26,640
के दो से तीन श्लोक बोले हैं। उच्चारित किए हैं। एज इट इज

325
00:22:26,640 --> 00:22:30,720
उठा के वो पढ़ लेना। मनुस्मृति में जो श्लोक आठव अध्याय में दिए

326
00:22:30,720 --> 00:22:34,800
गए हैं वही श्लोक वहां किष्किंदा कांड में

327
00:22:34,800 --> 00:22:38,800
बाली की मृत्यु के समय बाली को उत्तर देते हुए प्रभु श्री राम ने बोले हैं

328
00:22:38,800 --> 00:22:43,280
वाल्मीकि रामायण का अध्ययन कर लेना। ठीक है? तो मनुस्मृति

329
00:22:43,280 --> 00:22:48,000
से हो गया वेद विरोधी। और अगला

330
00:22:48,000 --> 00:22:51,600
तीसरा प्रमाण भी दिखा दीजिए। तीसरा प्रमाण। इसके

331
00:22:51,600 --> 00:22:56,000
बाद क्या लिखा है? तीसरे में जो ब्राह्मण ब्राह्मण आदि वर्ण

332
00:22:56,000 --> 00:23:00,000
स्वधर्म को छोड़कर पर धर्मों में प्रवृत्त होते हैं अथवा हीन वृत्ति का

333
00:23:00,000 --> 00:23:04,000
आलंबन लेते हैं वह नग्न कहलाते हैं। नग्न कहलाते

334
00:23:04,000 --> 00:23:08,000
हैं। आगे पढ़िए। जिस स्थान में चारों वर्णों का अत्यंत मिश्रण हो उसमें रहने

335
00:23:08,000 --> 00:23:12,080
से पुरुष की साधु वृत्तियों का क्षय हो जाता है। जो पुरुष

336
00:23:12,080 --> 00:23:16,240
ऋषि अब ये देखो देख लो यहां। यह तुम्हारे बाबा

337
00:23:16,240 --> 00:23:20,240
जी का इस समय तुम्हारे हो गए ना बाबा जी। तभी तो उनका प्रचार करते घूम

338
00:23:20,240 --> 00:23:24,560
रहे हो माइक लेकर के। तो पढ़ो यहां पत्रकारिता या चाटुकारिता

339
00:23:24,560 --> 00:23:29,200
कर रहे हो निश्चय करो जो पुरुष ऋषि देव पितृ

340
00:23:29,200 --> 00:23:33,520
भूत और अतिथि गण का पूजन किए बिना भोजन करता है

341
00:23:33,520 --> 00:23:37,520
उससे संभाषण करने से भी लोग नरक में पड़ते हैं।

342
00:23:37,520 --> 00:23:41,840
और तुम्हारा जो रामपाली है वह क्या करता है? क्या कहता है? पितृ

343
00:23:41,840 --> 00:23:46,160
पूजा नहीं करनी चाहिए। पितृ पूजा का तो निषेध है।

344
00:23:46,160 --> 00:23:50,400
पितृ पूजा अगर हम यह मान करके चले कि यही सब कुछ

345
00:23:50,400 --> 00:23:54,560
है। स्वतंत्र सत्ता मान करके चले तब वहां पर गीता में उसके लिए कहा

346
00:23:54,560 --> 00:23:58,560
गया है ऐसा ना सोचे यह नहीं कहा गया कि पितृ पूजन करना ही नहीं

347
00:23:58,560 --> 00:24:02,560
है श्राद्ध कर्म करना ही नहीं है ठीक है इसके आगे क्या लिखा है

348
00:24:02,560 --> 00:24:06,720
अतः वेदत्रय के त्याग से यानी वेद विरुद्ध हो गया मामला वेदत्रय

349
00:24:06,720 --> 00:24:11,040
के त्याग से दूषित इन नग्नों के साथ वेद विरोधी कौन हो गए नास्तिक

350
00:24:11,040 --> 00:24:15,120
नास्तिक को यहां नंगा कहा जा रहा है नंगा शास्त्र में ये

351
00:24:15,120 --> 00:24:19,280
लोग बहुत यहां की बात वहां निकाल के उल्टे सीधे शब्दों का प्रयोग करते हैं ना हमारे लिए

352
00:24:19,280 --> 00:24:23,280
अगर मैं अपनी पे आ जाऊं तो ये लोग खून के आंसू रोने लगे।

353
00:24:23,280 --> 00:24:27,600
मगर मेरे को मुझे मेरे पास एक मर्यादा रूपी धर्म है ना। इसलिए

354
00:24:27,600 --> 00:24:31,760
ये लोग इतना नाच लेते हैं। जो नंगा नाच करते हैं ना ये सब ये युवराज

355
00:24:31,760 --> 00:24:35,920
और ये सचिन अभिषेक ये नंगा नाच जो दिखाते हैं इसी कारण से दिखाते

356
00:24:35,920 --> 00:24:39,920
हैं। ये देखो तुम्हारे बारे में क्या लिखा है। नंगे हो तुम लोग जो

357
00:24:39,920 --> 00:24:44,240
इन चीजों का विरोध करते हो। पितृ पूजन का श्राद्ध

358
00:24:44,240 --> 00:24:48,560
कर्म का श्राद्ध कर्म का विरोध करने वाला वेद विरोधी है

359
00:24:48,560 --> 00:24:54,480
वेदत्रय को त्याग देने वाला है और उसको नंगा कहा गया है नंगो

360
00:24:54,480 --> 00:24:58,400
आगे चलिए नीचे नीचे चलिए

361
00:24:58,400 --> 00:25:01,440
यदि इनकी दृष्टि

362
00:25:01,440 --> 00:25:05,520
इसके आगे नहीं है ना ठीक है इसके आगे वाला प्रमाण लाइए इसके आगे

363
00:25:05,520 --> 00:25:09,680
वाला यहां पर इनकी दृष्टि अगर पड़ जाए तो नहाने को कहा गया है इन

364
00:25:09,680 --> 00:25:11,440
नंगों की

365
00:25:11,440 --> 00:25:16,320
हां इसमें क्या कहा है? इस प्रकार मैंने तुमसे पाखंडी

366
00:25:16,320 --> 00:25:20,560
तो संभाषण तक करने से मना किया है। बात करने से

367
00:25:20,560 --> 00:25:24,640
और जिसे नंगा कहा गया है। जिसे नास्तिक कहा गया जिसे वेदई का विरोध

368
00:25:24,640 --> 00:25:28,880
करने वाला कहा गया है। विष्णु पुराण तीसरा अंश 18वां अध्याय

369
00:25:28,880 --> 00:25:33,680
48 से 51 अभी हमने पढ़ा है और अब हम पढ़ रहे हैं 96 से 102

370
00:25:33,680 --> 00:25:37,680
ठीक है? उसी क्रम में आगे मुख्य बातें क्या लिखा है? इस प्रकार

371
00:25:37,680 --> 00:25:41,680
मैंने तुमसे पाखंडी से संभाषण करने का दोष और

372
00:25:41,680 --> 00:25:45,920
फिर आगे अश्वमेध यज्ञ का महत्व दिखाया गया है। इसलिए पाखंडी

373
00:25:45,920 --> 00:25:49,920
और पापाचार पाखंडी कौन है? पापाचारी। पाखंडी और

374
00:25:49,920 --> 00:25:54,160
पापाचारी से कभी वार्तालाप और स्पर्श ना करें।

375
00:25:54,160 --> 00:25:58,560
इसको मानते हो ना तुम? वहीं जाकर आए हो ना स्पर्श कर करके पाखंडियों

376
00:25:58,560 --> 00:26:02,720
के यहां। देखो अपनी चाटुकारिता है कि नहीं?

377
00:26:02,720 --> 00:26:06,720
तो आगे क्या है? और तुम नंगो भी सुनो जो नंगे लोग हैं।

378
00:26:06,720 --> 00:26:10,720
जो नंगाई करते हैं अपने वीडियोस में आजकल खैर शांत

379
00:26:10,720 --> 00:26:15,120
है वो वो हो गई है ना पूजा उनकी

380
00:26:15,120 --> 00:26:19,680
चांटों से लातों से घूंसों से हो गई है पूजा तो आजकल शांत है थोड़े

381
00:26:19,680 --> 00:26:24,160
पर खैर तुम्हारा वो परमानेंट निवारण तो यहां से ही होगा ना परमानेंट

382
00:26:24,160 --> 00:26:26,560
निवारण तो हम ही करेंगे ये तो

383
00:26:26,560 --> 00:26:31,120
सतई स्तर की बातें हैं। अह तो वार्तालाप

384
00:26:31,120 --> 00:26:35,520
स्पर्श भी ना करें। ठीक है? जिसके घर में

385
00:26:35,520 --> 00:26:39,760
एक मास तक नित्य कर्मों का अनुष्ठान

386
00:26:39,760 --> 00:26:44,640
ना हुआ हो उसको देख लेने पर बुद्धिमान मनुष्य सूर्य का दर्शन करें।

387
00:26:44,640 --> 00:26:48,720
ये जिन जिनके घर में ऐसा नहीं होता उनको देख लेने से क्या दोष

388
00:26:48,720 --> 00:26:53,600
होता है? फिर जिन्होंने वेद त्रय का सर्वथा त्याग कर दिया है।

389
00:26:53,600 --> 00:26:57,840
तथा जो पाखंडियों का अन्न खाते हैं अन्न तो नहीं खाया वहां जाकर अरे प्रसाद

390
00:26:57,840 --> 00:27:01,840
तो नहीं लिया खीर इत्यादि का। यह मैं स्टेप अप जे वालों

391
00:27:01,840 --> 00:27:05,920
से पूछ रहा हूं। ऐसा तो नहीं इनका अन्न वन् तो नहीं खाया। देखो क्या लिखा है। अन्न खाया

392
00:27:05,920 --> 00:27:11,920
हो तो देख लेना। तो क्या होता है?

393
00:27:11,920 --> 00:27:16,720
अन्न खाते हैं। वैदिक मत का विरोध करते हैं। उन पापा

394
00:27:16,720 --> 00:27:20,880
पापात्माओं के दर्शन आदि करने पर तो कहना ही क्या है? इन

395
00:27:20,880 --> 00:27:24,880
दुराचारी पाखंडियों के साथ वार्तालाप करने संपर्क

396
00:27:24,880 --> 00:27:29,040
रखने उठने बैठने में महापाप होता है। इसलिए इन सब बातों का त्याग

397
00:27:29,040 --> 00:27:33,520
करें। पाखंडी है ना विकर्मी विडाल

398
00:27:33,520 --> 00:27:37,760
व्रत वाले दुष्ट स्वार्थी बगुला

399
00:27:37,760 --> 00:27:41,840
भगत [हंसी] बगुला भक्त लोगों का वाणी

400
00:27:41,840 --> 00:27:46,080
से भी आदर ना करे तुम वाणी से आदर करते फिर रहे हो अरे शर्म करो जो

401
00:27:46,080 --> 00:27:50,080
तुम्हारी मां के बारे में इतनी अश्लीलता परोस रहा है अपनी किताबों में उसके

402
00:27:50,080 --> 00:27:54,480
द्वारा इजाद किए हुए जो ये युवराज जैसे

403
00:27:54,480 --> 00:27:58,560
लोग हैं इतनी घृणित बातें कर रहे हैं तुम्हें शर्म नहीं आ

404
00:27:58,560 --> 00:28:03,360
रही है उसकी उसका प्रचार करते फिर रहे हो। कहते हो अपने आप को पत्रकार।

405
00:28:03,360 --> 00:28:07,600
लज्जा आनी चाहिए तुम्हें अपने आप पर। कह रहे हो कि मैं तो सबको मानता हूं।

406
00:28:07,600 --> 00:28:11,600
क्या खाक मानते हो तुम? अंडरवियर से लेकर के जाने

407
00:28:11,600 --> 00:28:15,680
क्या-क्या बातें लिखी हुई है इसकी किताबों में। पता भी है। जीने की राह

408
00:28:15,680 --> 00:28:20,560
में पढ़ के देख लेना। शिव पार्वती के प्रसंग में क्या-क्या लिखा है इसने।

409
00:28:20,560 --> 00:28:24,640
तुम्हारे फुअर बाबा ने और उनहीं का आलंबन

410
00:28:24,640 --> 00:28:27,920
लेकर के सचिन और युवराज जैसे लोग

411
00:28:27,920 --> 00:28:31,920
वीडियो बनाते हैं। ये मसलदी वो

412
00:28:31,920 --> 00:28:36,080
मसलदी कुछ मालूम ना तालुम ना संस्कृत का

413
00:28:36,080 --> 00:28:40,880
ज्ञान ना शास्त्र का ना शास्त्र का अवलोकन

414
00:28:40,880 --> 00:28:46,000
ना गुरु का सानिध्य खड़े हो गए

415
00:28:46,000 --> 00:28:50,160
और उसका उसका तुम ढिंढोरा पीट रहे हो। वाह बहुत अच्छा घी है। बहुत

416
00:28:50,160 --> 00:28:54,320
अच्छा घी है। बहुत अच्छा घी है। मुझको अक्सर लोग फोन करके कहते

417
00:28:54,320 --> 00:28:58,400
क्यों? रामपाल के पाइप नहीं दिखाई दिए तुम्हें एनाकोंडा जैसे। वैसे तो

418
00:28:58,400 --> 00:29:02,400
वो भी क्या है क्या नहीं है अलग बात है। मगर यदि रामपाल पाइप

419
00:29:02,400 --> 00:29:06,560
लगा रहा है लोगों के घर में तो उसके पास तुम लोग अपनी स्त्रियों को सोने भेज दोगे

420
00:29:06,560 --> 00:29:12,560
क्या? विरोध नहीं करोगे अगर वो मंगाएगा उनको तो?

421
00:29:12,880 --> 00:29:17,360
पाइप का विरोध हो रहा है क्या ये रामपाल के? रामपाल

422
00:29:17,360 --> 00:29:21,520
के द्वारा फैलाए गए वैचारिक जहर का विरोध हो रहा है। वैचारिक जहर

423
00:29:21,520 --> 00:29:25,680
रामपाल चाहे घी बेचे बहुत अच्छी क्वालिटी का सस्ते दामों में

424
00:29:25,680 --> 00:29:31,200
चाहे लोगों के घर में सिलेंडर लगा दे चाहे सिलेंडर खोल के आग लगा दे।

425
00:29:31,200 --> 00:29:36,320
बात यहां उसकी नहीं हो रही है। बात यहां हो रही है वैचारिक जहर की।

426
00:29:36,320 --> 00:29:40,320
उसका विरोध हो रहा है कि रामपाल ये बेच रहे हैं। वो बेच

427
00:29:40,320 --> 00:29:44,400
रहे हैं। उसके वहां जाकर के दिखा रहे हो। यहां का दृश्य क्यों नहीं दिखा रहे?

428
00:29:44,400 --> 00:29:48,400
रामपाल का सेंटर क्यों बंद है? किताबों किताबों के बारे में बता नहीं पा रहे

429
00:29:48,400 --> 00:29:52,560
हैं। तुमने पूछा रामपाल से तुम्हारी किताबें कहां छपती है? पुलिस

430
00:29:52,560 --> 00:29:56,800
ढूंढ रही है रामपाल की किताबों को। पूछ

431
00:29:56,800 --> 00:30:00,960
पाओगे? दिखा पाओगे वो कारखाना रामपाल का?

432
00:30:00,960 --> 00:30:06,960
जैसे घी दिखाया, तेल दिखाया है। किताबें कहां छप रही? दिखाओ कारखाना।

433
00:30:07,360 --> 00:30:13,360
बात करते हैं पत्रकारिता की।

434
00:30:15,200 --> 00:30:19,200
हां विष्णु पुराण वो पूरा नहीं हुआ वो लगाइए

435
00:30:19,200 --> 00:30:23,200
जरा 3 18 96 से 102

436
00:30:23,200 --> 00:30:27,440
क्या लिखा है इन पाखंडी

437
00:30:27,440 --> 00:30:31,680
दुराचारी अति पापियों का संसर्ग दूर से ही त्यागने

438
00:30:31,680 --> 00:30:36,880
योग्य है इसलिए इनका सर्वदा त्याग करें और नीचे आइए

439
00:30:36,880 --> 00:30:37,380
यह

440
00:30:37,120 --> 00:30:41,760
तो मैं एक जगह से बता रहा हूं अरे

441
00:30:41,760 --> 00:30:45,760
जो हिंदू है ना मेरे समर्थक हैं। मैं तुम लोगों

442
00:30:45,760 --> 00:30:49,920
को कह रहा हूं कब तक मेरी बैसाखी पकड़ करके चलोगे। केवल चैट

443
00:30:49,920 --> 00:30:53,280
जीपीटी में बोलो

444
00:30:53,280 --> 00:30:57,360
कि वेद विरोधी को कहां-कहां क्या-क्या कहा गया है? पाखंडी कहां क्या कहा

445
00:30:57,360 --> 00:31:01,520
गया है? सब आ जाएगा तुम्हारे सामने। शिव जी को शिव पुराण में क्या-क्या कहा

446
00:31:01,520 --> 00:31:07,520
गया है। भगवान है कि नहीं कहा गया है। सब आ जाएगा तुम्हारे सामने।

447
00:31:08,560 --> 00:31:12,640
पर मेहनत कौन करे? बैसाखी के भरोसे

448
00:31:12,640 --> 00:31:18,640
चलना है ना। खुद कभी कुछ नहीं करना है।

449
00:31:19,120 --> 00:31:23,200
बगल वाले रामपाली के यहां पोस्टर लगा सकते हो। लगाए एक पोस्टर

450
00:31:23,200 --> 00:31:27,360
नहीं लगाया होगा। लगेगा। अभी गली-गली

451
00:31:27,360 --> 00:31:30,560
में लगेगा।

452
00:31:30,560 --> 00:31:35,120
रामपाल को नहीं। अब रामपालियों को पकड़ा जाएगा। तो

453
00:31:35,120 --> 00:31:38,560
विष्णु पुराण

454
00:31:38,560 --> 00:31:43,040
3 18 48 51 यहां तक आपने देख लिया पाखंडी

455
00:31:43,040 --> 00:31:47,040
का अर्थ है नास्तिक पाखंडी का अर्थ है वेद विरोधी नंगा

456
00:31:47,040 --> 00:31:51,040
पाखंडी का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसको देखना नहीं चाहिए बात नहीं करनी

457
00:31:51,040 --> 00:31:55,440
चाहिए स्पर्श नहीं करना चाहिए ठीक है ये सब पाखंडी

458
00:31:55,440 --> 00:32:00,640
के लिए कहा गया है और पाखंडी होने का एक प्रमाण हम लोग इसी

459
00:32:00,640 --> 00:32:04,880
जो हमने टेक्स्ट पढ़ा है अभी उसी में से दे दिया विष्णु पुराण कि वहां पर व्रत

460
00:32:04,880 --> 00:32:08,960
ना रखने वाले को व्रत को वेद का अंग माना गया है। आगे हम प्रमाण दे

461
00:32:08,960 --> 00:32:12,960
देंगे। व्रत को वेद का अंग माना गया है

462
00:32:12,960 --> 00:32:16,800
और वेद की निंदा हो रही है व्रत की निंदा करने में।

463
00:32:16,800 --> 00:32:20,880
इसने पत्रकारों से कहा था ना पत्रकारों के साथ शास्त्रार्थ हो गया। भाई

464
00:32:20,880 --> 00:32:24,960
पत्रकारों ने शास्त्रार्थ ले लिया। पता नहीं कहां से पत्रकारों ने कौन

465
00:32:24,960 --> 00:32:29,440
सा गुरुगम में ज्ञान लिया था। जिनके साथ इसने शास्त्रार्थ किया था जेलकट्टू

466
00:32:29,440 --> 00:32:31,840
ने।

467
00:32:31,840 --> 00:32:36,240
और बताते फिर रहे हो लोगों को कि अरे उनकी तो अगर वह बाहर कैसे आ गए

468
00:32:36,240 --> 00:32:40,640
कौन से उसमें उनको निर्दोष मान लिया गया है भाई

469
00:32:40,640 --> 00:32:44,880
हां बुढ़ापा देखते हुए 10 साल की जेल देखते

470
00:32:44,880 --> 00:32:48,880
हुए जो ये बाहर पाइप बांटे इनको देखते हुए यह कहते

471
00:32:48,880 --> 00:32:52,960
हुए कि सभा नहीं लगा सकते छोड़ा गया है इसको बाइज्जत बरी नहीं

472
00:32:52,960 --> 00:32:57,600
कहते जो डंका पीटते फिरते हो बरी हो गए बरी हो गए क्लीन चिट मिल गई

473
00:32:57,600 --> 00:33:01,600
इसको रहमो कर्म पे छोड़ना कहते हैं रहमो करम पे है तुम्हारा बाबा

474
00:33:01,600 --> 00:33:05,680
कोर्ट के उसको रहम आ गया तुम्हारे बाबा पे तो छोड़ा

475
00:33:05,680 --> 00:33:11,680
है उसी केस में 27 लोग बेल पे बाहर हैं इसलिए छोड़ा है

476
00:33:12,560 --> 00:33:13,440
समझे

477
00:33:13,440 --> 00:33:17,600
चलो अब आगे चलते हैं यह तो हमने दिखा दिया

478
00:33:17,600 --> 00:33:22,720
इसके साथ ही साथ लिंग पुराण खुद देख लेना 7821 और अग्नि पुराण 164

479
00:33:22,720 --> 00:33:26,800
इसमें भी आपको मिल जाएगा अब यहां तक हमने यह समझ

480
00:33:26,800 --> 00:33:30,960
लिया पाखंडी किसे कहते हैं और विष्णु

481
00:33:30,960 --> 00:33:35,040
पुराण में वेद विरोधी किसको कहा गया है? पाखंडी

482
00:33:35,040 --> 00:33:39,120
वेद विरोधी को कहते हैं, नास्तिक को कहते हैं। यह सब हमने समझ लिया। अब रामपाल

483
00:33:39,120 --> 00:33:43,120
पाखंडी कैसे है? रामपाल पाखंडी कैसे है? यानी रामपाल

484
00:33:43,120 --> 00:33:47,360
वेद विरोधी कैसे है? तो एक तो हमने यही जान लिया व्रत का विरोध करने वाला पाखंडी

485
00:33:47,360 --> 00:33:51,440
हो गया, वेद विरोधी हो गया, नास्तिक हो गया, नंगा हो गया शास्त्र के हिसाब

486
00:33:51,440 --> 00:33:55,840
से। आगे जो है वेद की घोषणा है नान्या पंतः

487
00:33:55,840 --> 00:34:01,120
विद्यते क्या है? नान्या पंथ विद्यते

488
00:34:01,120 --> 00:34:05,280
वेद घोषणा कर रहे हैं। जीवन मरण के चक्र से

489
00:34:05,280 --> 00:34:09,520
छूटने का जो वेद बता रहा है उससे भिन्न कोई और

490
00:34:09,520 --> 00:34:15,280
मार्ग नहीं है। 31 18 यजुर्वेद

491
00:34:15,280 --> 00:34:19,520
ये देख लो वेद की घोषणा। नान्या पंथा विद्यते

492
00:34:19,520 --> 00:34:23,520
ये वेद की घोषणा है। स्पष्ट क्या घोषणा कर रहे

493
00:34:23,520 --> 00:34:27,680
हैं? वेद से भिन्न जीवन मरण से मुक्ति दिलाने

494
00:34:27,680 --> 00:34:28,800
वाला और

495
00:34:28,800 --> 00:34:32,800
कोई मार्ग नहीं है। स्पष्ट घोषणा है वेद भगवान की

496
00:34:32,800 --> 00:34:36,880
और कहां पर है? यही घोषणा श्वेता शत्रुपनिषद तीन

497
00:34:36,880 --> 00:34:40,880
आठ में है। श्वेता शत्रुपनिषद दिखाइए इनको यह

498
00:34:40,880 --> 00:34:45,920
देखिए नान्या पंथा विद्यते

499
00:34:45,920 --> 00:34:50,000
और दिखाइए। इसके बाद वाला छ पांच श्वेता शत्रपनिषद

500
00:34:50,000 --> 00:34:54,320
नान्या पंथा विद्यते

501
00:34:54,320 --> 00:34:59,440
इससे भिन्न मोक्ष प्राप्ति का कोई और मार्ग नहीं है।

502
00:34:59,440 --> 00:35:03,600
यह वेद की घोषणा है। ठीक है? अब इनको जरा

503
00:35:03,600 --> 00:35:07,840
अच्छा एक घोषणा और दिखा बोल देता हूं। वो फोटो

504
00:35:07,840 --> 00:35:11,840
नहीं है। 11 5 16 ब्रह्मचारी ही आचार्य

505
00:35:11,840 --> 00:35:16,320
बनता है। कबीरचारी नहीं परम ब्रह्मचारी

506
00:35:16,320 --> 00:35:20,560
नहीं ब्रह्मचारी क्योंकि ब्रह्म ही हमारे यहां परम तत्व है।

507
00:35:20,560 --> 00:35:24,720
उसी को कहीं-कहीं जब उसके कई रूप होते हैं कार्य कारण भेद से तो

508
00:35:24,720 --> 00:35:28,800
उसी में परम और पूर्ण इत्यादि ये जो

509
00:35:28,800 --> 00:35:33,040
विशेषण है वो लगाने पड़ते हैं। कार्य कारण भेद से जब वो विभिन्न रूपों

510
00:35:33,040 --> 00:35:37,040
में प्रकट होता है। मगर परम तत्व के रूप में ब्रह्म की ही बात हुई

511
00:35:37,040 --> 00:35:42,400
है। अथा तो ब्रह्म जिज्ञासा है। अथा तो कबीर जिज्ञासा नहीं है।

512
00:35:42,400 --> 00:35:44,000
ब्रह्मसूत्र है हमारे यहां।

513
00:35:44,000 --> 00:35:48,160
तुम तो पढ़े लिखे हो ना। स्टेप जे वाले तुम तो इनकी

514
00:35:48,160 --> 00:35:52,160
तरह फुअर नहीं हो। हां? ब्रह्मसूत्र लिखा है

515
00:35:52,160 --> 00:35:56,400
हमारे यहां। कबीर सूत्र लिखा है। जिस पर जिस पर

516
00:35:56,400 --> 00:36:00,560
भाष हुआ है सभी आचार्यों का। कुछ मालूम

517
00:36:00,560 --> 00:36:04,720
ना तालूम चले हैं प्रचारक बनने बनने स्टार प्रचारक बनेंगे अब

518
00:36:04,720 --> 00:36:09,120
चैनल दौड़ रहा होगा शायद इसलिए इसीलिए हो रहा होगा

519
00:36:09,120 --> 00:36:13,360
भाई बढ़िया अभी एकदम से गेम टर्न कर दूंगा और नई पब्लिसिटी आएगी

520
00:36:13,360 --> 00:36:17,520
बिल्कुल ह मार जाएगा चैनल इत्यादि यही सब होगा माइंड में व्यवसायिक

521
00:36:17,520 --> 00:36:22,320
चीजें भले ही धर्म को कोई भी क्षति पहुंचे उससे कोई मतलब नहीं है

522
00:36:22,320 --> 00:36:26,400
सनातन धर्म है ना तब तक सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन

523
00:36:26,400 --> 00:36:30,400
और पत्नी में अंतर कर रहा है मनुष्य जैसे जैसे तुम

524
00:36:30,400 --> 00:36:34,720
क्षति पहुंचाओगे, जैसे जैसे लोग इसमें अनास्थावान होंगे, सनातन

525
00:36:34,720 --> 00:36:38,720
धर्म में, वैसे वैसे पाप को तुम न्योता दोगे। समझ

526
00:36:38,720 --> 00:36:42,800
रहे हो ना? आज तुम्हारे घर के बाहर आग नहीं लगी हुई है। तब तुम चैन से

527
00:36:42,800 --> 00:36:47,120
बैठे हुए हो और इंतजार कर रहे हो कि मेरे घर पर कब आग लगेगी?

528
00:36:47,120 --> 00:36:51,200
तब मैं बोलूंगा। बिजली में बिजली के झूले

529
00:36:51,200 --> 00:36:55,360
में बैठे बैठा हुआ वह व्यक्ति जो नीचे आते टाइम आंखें बंद

530
00:36:55,360 --> 00:36:59,600
करता है वह हो तुम जो सोच रहे हो कि सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

531
00:36:59,600 --> 00:37:04,720
करके और मैं अपना चैनल चला के अपना जीवन सुखी बना लूंगा कभी नहीं होगा

532
00:37:04,720 --> 00:37:10,720
विभिन्न प्रकार के श्राप लगेंगे तुमको विभिन्न प्रकार के

533
00:37:11,520 --> 00:37:15,600
आचार्यों से लेकर भटको तक के तुम्हें श्राप लगेंगे जो तुम्हें फैला रहे

534
00:37:15,600 --> 00:37:19,760
हो रायता यदि तुम्हारी जानकारी में है तो अभी

535
00:37:19,760 --> 00:37:24,800
के अभी इससे पथक हो जाओ। जीवन का भला चाहते हो तो

536
00:37:24,800 --> 00:37:28,960
और आत्मवलोकन करो। क्या कर रहा हूं मैं?

537
00:37:28,960 --> 00:37:32,960
बने पत्रकार फिर रहे हैं। लो भैया आ गए प्रमाण। तो वेद

538
00:37:32,960 --> 00:37:37,040
की घोषणा क्या है? वेद की घोषणा क्या

539
00:37:37,040 --> 00:37:41,120
है? नान्य पंथा विद्यते वेद

540
00:37:41,120 --> 00:37:45,360
के अलावा कोई भी और मार्ग नहीं है मुक्ति का। ठीक है?

541
00:37:45,360 --> 00:37:50,400
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। 11 पांच 16 अथर्ववेद

542
00:37:50,400 --> 00:37:55,600
अब इनको दिखाओ भैया इनके बाबा जी क्या कह रहे हैं वेद के बारे में?

543
00:37:55,600 --> 00:38:00,000
हम क्या कह रहे हैं वेद के बारे में? दिखाओ।

544
00:38:00,000 --> 00:38:04,080
वेदों व गीता में ज्ञान तो श्रेष्ठ है। परंतु भक्ति की

545
00:38:04,080 --> 00:38:08,160
साधना केवल काल ब्रह्म की प्राप्ति है। जिससे विकार

546
00:38:08,160 --> 00:38:12,800
रहित नहीं हो सकता। उस परमात्मा को प्राप्त करने योग्य

547
00:38:12,800 --> 00:38:14,800
मंत्र के जाप से ही हो सकता है।

548
00:38:14,800 --> 00:38:19,200
वह किसी शास्त्र में नहीं है। वेद में मार्ग नहीं है। इसको

549
00:38:19,200 --> 00:38:23,280
कहते हैं पाखंड। वेद की इस बात का खंडन हो रहा

550
00:38:23,280 --> 00:38:27,520
है। कि वेद के अलावा कोई मार्ग नहीं है। वेद

551
00:38:27,520 --> 00:38:31,520
से भिन्न कोई मार्ग नहीं है। इस बात का खंडन है तुम्हारे बाबा की

552
00:38:31,520 --> 00:38:35,760
प्रत्येक किताब में। यह है पाखंड। समझ लेना। पाखंड

553
00:38:35,760 --> 00:38:40,080
की बात हो रही थी ना पाखंड कहते किसे हैं? तुम पूछ रहे थे धर्मेंद्र जी से तुमको

554
00:38:40,080 --> 00:38:44,240
खुद मालूम नहीं है पाखंड कहते किसे हैं पाखंड कहते हैं वेद विरोध

555
00:38:44,240 --> 00:38:49,040
को वेद विरोधी होता है नास्तिक नास्तिक होता है नंगा

556
00:38:49,040 --> 00:38:53,120
तो यह देखो नंगपन क्या लिखा है

557
00:38:53,120 --> 00:38:57,600
कि वेद और गीता से मुक्ति नहीं होगी और दिखा दो इसमें नीचे क्या लिखा है

558
00:38:57,600 --> 00:39:01,760
दिखाओ वेद को बोलने वाला वेद को बोलने

559
00:39:01,760 --> 00:39:06,320
वाला अज्ञानी भी है इसी यही कहीं आपको मिल जाएगा ठीक है

560
00:39:06,320 --> 00:39:10,800
अच्छा यह ब्रह्म साधना की घटिया गति है

561
00:39:10,800 --> 00:39:14,880
जिसका प्रमाण स्वयं ब्रह्म भगवान देते हैं। यहां पर ब्रह्म जो है भगवान

562
00:39:14,880 --> 00:39:19,840
हो गया। दूसरे शास्त्र में ब्रह्म को लिख रहे हैं काल और शैतान

563
00:39:19,840 --> 00:39:25,120
राक्षस जो आत्माओं को खाता है।

564
00:39:25,120 --> 00:39:29,200
तो ब्रह्म साधना की घटिया गति ये तुम्हारी चीजों को

565
00:39:29,200 --> 00:39:33,360
जिनका तुम दिखा रहे हो ना कि मैं कलावा बांधता हूं। मैं तो सबको मानता हूं। यह

566
00:39:33,360 --> 00:39:37,520
घटिया कहा जा रहा है। वेदों को, वेदों के वक्ता को यहां घटिया कहा

567
00:39:37,520 --> 00:39:41,760
जा रहा है। आ रही है शर्म थोड़ी बहुत? आ रही है शर्म

568
00:39:41,760 --> 00:39:46,320
थोड़ी बहुत। चलो और नीचे दिखाओ इनको।

569
00:39:46,320 --> 00:39:50,720
और नीचे दिखाओ क्या कहा जा रहा है? वेदों को बोलने वाले के लिए। मेरी भक्ति

570
00:39:50,720 --> 00:39:54,960
वेदों व गीता में वर्णित विधि से करता है। वह मेरे भाव में भावित होता है

571
00:39:54,960 --> 00:39:59,440
तथा मेरे जैसे गुणों वाला अर्थात काल का दूसरा रूप हो जाता है। यह

572
00:39:59,440 --> 00:40:03,600
यानी काल की घटिया गति को प्राप्त करता है। जो घटिया गति पीछे हमने दिखा दी

573
00:40:03,600 --> 00:40:07,600
और अगला प्रमाण दिखाओ। वेद का विरोध देखो। पाखंड देखो

574
00:40:07,600 --> 00:40:11,920
रामपाल का। इसकी हेडलाइन पढ़ो चैप्टर की। क्या लिखा है?

575
00:40:11,920 --> 00:40:16,240
वेदों में वर्णित साधना से साधना विधि से विकार

576
00:40:16,240 --> 00:40:20,400
नहीं मरते। यानी वेदों में मोक्ष

577
00:40:20,400 --> 00:40:24,480
का मार्ग नहीं है। मुक्ति का मार्ग नहीं है। और

578
00:40:24,480 --> 00:40:28,720
भरभर के ना जाने कितनी बार ये लाइन चैप्टर की हेडलाइन

579
00:40:28,720 --> 00:40:33,200
है। रामपाल की ये भ्रष्ट किताबों में जो इललीगल

580
00:40:33,200 --> 00:40:37,360
रूप से छपती है छुप करके और तुम चले हो उसको बताने

581
00:40:37,360 --> 00:40:40,240
साधु। हां और दिखाओ भाई अगला

582
00:40:40,240 --> 00:40:44,400
प्रमाण। चारों वेदों 18 पुराणों गीता जी छह शास्त्रों

583
00:40:44,400 --> 00:40:48,640
में केवल ब्रह्म काल जो कि इसके अनुसार शैतान है की

584
00:40:48,640 --> 00:40:52,640
उपासना की जानकारी है यानी कि वेदों की

585
00:40:52,640 --> 00:40:57,520
इस बात का खंडन है इसके इसके यहां पर और तो और

586
00:40:57,520 --> 00:41:01,600
इसके रेफरेंस अलग से डालेंगे इस वीडियो में। यह जो वेदों

587
00:41:01,600 --> 00:41:05,760
को बोलने वाला है ना यह अपना उल्लू सीधा करने के लिए झूठ बोलता

588
00:41:05,760 --> 00:41:09,840
है। वेदों को बोलने वाला है ना जिसको भगवान कह रहा है

589
00:41:09,840 --> 00:41:14,000
वो जो है अज्ञानी है। वो कुछ जानता

590
00:41:14,000 --> 00:41:18,560
नहीं है। यह है तुम्हारे रामपाल का पाखंड। ठीक है?

591
00:41:18,560 --> 00:41:22,880
झूठ बोलता है और जो इसने यहां पर पिछले पेज पर भगवान कह दिया था ना भगवान

592
00:41:22,880 --> 00:41:26,960
की व्याख्या को भी मैं दे दूंगा। छठवे अध्याय में लिखी हुई है विष्णु

593
00:41:26,960 --> 00:41:31,120
पुराण के। जो पूर्ण होता है ना जिसको कोई अभाव नहीं होता

594
00:41:31,120 --> 00:41:35,440
वह भगवान होता है। यह दिखावे के लिए यहां पर भगवान कहता है। दूसरी जगह शैतान

595
00:41:35,440 --> 00:41:39,520
कहता है। प्राणियों को खाने वाला कहता है।

596
00:41:39,520 --> 00:41:43,680
हैं और तुम इसके इसकी पत्रकारिता

597
00:41:43,680 --> 00:41:47,840
कर रहे हो। हमें वो चाटुकारिता क्यों नहीं दिखाई देगी? ये देखो

598
00:41:47,840 --> 00:41:52,560
97 नंबर पष्ठ है क्या? इसके आगे 97 नंबर पष्ठ है। हां।

599
00:41:52,560 --> 00:41:55,440
वेदों व गीता में वेदों व गीता

600
00:41:55,440 --> 00:42:00,160
जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। इसको कहते हैं पाखंड।

601
00:42:00,160 --> 00:42:04,320
पाखंडी हर वो व्यक्ति है जो वेदों को वेदों के प्रति अनास्था

602
00:42:04,320 --> 00:42:08,320
कर रखता है। शास्त्र के हिसाब से यदि तुम हिंदू हो तो

603
00:42:08,320 --> 00:42:13,200
बाकी अगर हिंदू नहीं हो तो हम तुम्हें हिंदू बना देंगे। कभी मिलना।

604
00:42:13,200 --> 00:42:18,480
एक भी कमी हमारे सनातन धर्म में दिखा देना। एक भी

605
00:42:18,480 --> 00:42:23,120
अभी किसी ठीक-ठाक व्यक्ति से सामना नहीं हुआ है। ठीक है? इसीलिए

606
00:42:23,120 --> 00:42:27,200
ऐसा है। तो क्या है? वेदों व गीता

607
00:42:27,200 --> 00:42:31,440
जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। वेद क्या कह रहे हैं?

608
00:42:31,440 --> 00:42:35,760
और कोई मार्ग नहीं है। यह क्या कह रहा है?

609
00:42:35,760 --> 00:42:39,760
जेल कट्टू तुम्हारा क्या कह रहा है? वेदों और गीता में वर्णित

610
00:42:39,760 --> 00:42:45,280
साधना से पाप विनाश नहीं होते। मुक्ति नहीं होती है।

611
00:42:45,280 --> 00:42:50,000
ठीक है? वेदों और गीता का ज्ञान अधूरा है।

612
00:42:50,000 --> 00:42:54,480
क्या है? अधूरा। यह कहा है क्या वेद ने कहीं पे?

613
00:42:54,480 --> 00:42:59,440
अधूरा ज्ञान है। पूरा नहीं है। उससे मोक्ष नहीं मिलेगा।

614
00:42:59,440 --> 00:43:03,840
ठीक है? इसके बाद अगला अब

615
00:43:03,840 --> 00:43:08,880
ये सब आ गया। 11 5 16 से हमने बता दिया। वेद

616
00:43:08,880 --> 00:43:11,440
अभी ये हटा दीजिए। अभी हटा दीजिए।

617
00:43:11,440 --> 00:43:15,520
वेद बार-बार बात कर रहे हैं। अभी स्क्रीन बड़ी कर दीजिए। वेद बार-बार

618
00:43:15,520 --> 00:43:19,920
बात कर रहे हैं। ब्रह्मचारी के पास कैसे जाया जाए? ब्रह्मचारी

619
00:43:19,920 --> 00:43:24,160
बनना है। ब्रह्मचारी की पूरे उसमें बात हो रही है। गीता में भी ब्रह्मचारी

620
00:43:24,160 --> 00:43:28,560
को बताया जा रहा है। और यह कह रहा है ब्रह्म के पास मत जाओ। इसने

621
00:43:28,560 --> 00:43:32,720
ब्रह्म हर शब्द का एक गलत अर्थ निकाल रखा है। सनातन के आगे आदि

622
00:43:32,720 --> 00:43:37,600
लगा के दूसरा सनातन बनाएगा।

623
00:43:37,600 --> 00:43:42,800
और ब्रह्म के आगे परम पूर्ण इत्यादि लगाकर दूसरे ब्रह्म बनाएगा।

624
00:43:42,800 --> 00:43:46,880
तो वेद जो है ब्रह्मचर ब्रह्मचारी के पास जाने की बात करता है। यानी ब्रह्म

625
00:43:46,880 --> 00:43:51,120
के पास वेद का ब्रह्म वह राक्षस नहीं है जो रामपाल के अनुसार

626
00:43:51,120 --> 00:43:54,800
राक्षस और प्राणियों को खाता है।

627
00:43:54,800 --> 00:43:59,040
प्राणियों को खाने वाला गीता जी में जो दृश्य है वो भगवान

628
00:43:59,040 --> 00:44:03,040
का जो संहार वाला रूप है वो दिखाने के लिए वो रूप दिखाया गया

629
00:44:03,040 --> 00:44:07,040
है। संहार मतलब जब प्रलय होती है क्या प्रलय

630
00:44:07,040 --> 00:44:11,200
नहीं है। इसके टट्टू तो बोलते हैं कि प्रलय होगी 1000 साल के बाद तब

631
00:44:11,200 --> 00:44:15,280
तक का ठेका रामपाल ने ले रखा है। हैं

632
00:44:15,280 --> 00:44:19,520
प्रलय होती है कि नहीं होती है? तो प्रलय होगी तो उसमें

633
00:44:19,520 --> 00:44:24,000
लोग खत्म होंगे कि जीवित रहेंगे। कैसी प्रलय होगी? तो प्रलय

634
00:44:24,000 --> 00:44:26,640
करने की शक्ति को धारण करने वाले के रूप

635
00:44:26,640 --> 00:44:30,640
में वो व्याख्या है। जो रूप वो दिखाया गया

636
00:44:30,640 --> 00:44:34,720
विराट स्वरूप। खैर बैक टू द पॉइंट। कुल मिलाकर के

637
00:44:34,720 --> 00:44:38,800
जो भी लिखा हो बात यह है कि तुमको यह विश्वास नहीं है कि वेद से

638
00:44:38,800 --> 00:44:42,880
मुक्ति मिलेगी। रामपाल को यह विश्वास नहीं है। गीता से मुक्ति मिलेगी

639
00:44:42,880 --> 00:44:46,880
यह भी विश्वास नहीं। उसको छोड़कर के कबीर सागर पे जाना

640
00:44:46,880 --> 00:44:52,240
पड़ेगा तभी मुक्ति मिलेगी। यह है रामपाल का पाखंड।

641
00:44:52,240 --> 00:44:56,480
और सुनो रामपाल कबीर सागर को सूक्ष्म

642
00:44:56,480 --> 00:45:00,640
वेद कहता है। छमम छक्षम वेद। मैं छममछम कहता हूं और वो सूक्ष्म

643
00:45:00,640 --> 00:45:04,720
कहता है रामपाल वाला जो वाकई में कबीर सागर है कबीर विजय

644
00:45:04,720 --> 00:45:09,040
के उसका सम्मान है मगर रामपाल ने अपना तोड़ मरोड़ के जो प्रस्तुत किया दूसरे

645
00:45:09,040 --> 00:45:13,120
रूप में वो छममछम सागर है छममछम वेद तो ये जो सूक्ष्म

646
00:45:13,120 --> 00:45:17,120
वेद जो कहता है ये गवार व्यक्ति कहता

647
00:45:17,120 --> 00:45:21,760
है दूसरी ओर कि गीता वेदों का सार है इसने अपनी इंटरव्यू में क्या कहा

648
00:45:21,760 --> 00:45:26,000
कि हम पुराणों को नहीं मानते हैं हम पुराणों को नहीं मानते

649
00:45:26,000 --> 00:45:30,000
हम पुराणों को बाद में मानते पहले वेद और वेद का सार गीता

650
00:45:30,000 --> 00:45:34,000
और कई जगह लिखा हुआ है इसी की किताबों में कि गीता जो है वेद

651
00:45:34,000 --> 00:45:39,360
का सार है और इसके जो टट्टू है वो भी बोला करते हैं ये सब

652
00:45:39,360 --> 00:45:41,760
अब जब गीता वेद का वेद का सार

653
00:45:41,760 --> 00:45:45,760
है और इसका जो कबीर सागर है वो पंचम वेद है या सूक्ष्म

654
00:45:45,760 --> 00:45:50,000
वेद है छमछम वेद है वेद तो है ना तो उसका भी तो सार गीता

655
00:45:50,000 --> 00:45:54,000
होना चाहिए या तो उसको वेद मत कहे और या

656
00:45:54,000 --> 00:45:58,400
फिर गीता को सार मत कह मगर दोनों जगह टांगे फसानी है ना फूल फूल और कांटे का आ जाए

657
00:45:58,400 --> 00:46:02,480
बनके भले ही बीच में डंडा आ जाए है ना दोनों

658
00:46:02,480 --> 00:46:07,680
मोटरसाइकिलों पर सवारी करनी है ना भले ही बीच में बंबू आ जाए

659
00:46:07,680 --> 00:46:11,760
तो ऐसे व्यक्ति की चाटुकारिता करते हुए आप दिखाई दे रहे हैं मिस्टर स्टेप अप

660
00:46:11,760 --> 00:46:15,120
जे उर्फ जगदीप या जगदीश जो भी हैं आप और

661
00:46:15,120 --> 00:46:17,890
सुनिए

662
00:46:17,890 --> 00:46:22,080
[खांसने की आवाज़] अब [गला साफ़ करने की आवाज़] इसने अपने जो वो इंटरव्यू दिया ना पत्र तुमने

663
00:46:22,080 --> 00:46:26,240
तो क्या ही बातें पूछी तुम्हारी जो बातें बकवास के अलावा

664
00:46:26,240 --> 00:46:30,560
और तुमने कुछ कुछ नहीं पूछा है उसमें 18 प्रश्न मैंने पूछे थे मैंने

665
00:46:30,560 --> 00:46:34,880
मैं उसमें कोई कमी हो तो बताएं जब सामने वाला कमी बता रहा है तो उस पर लीपापोती

666
00:46:34,880 --> 00:46:39,440
कर रहे हो सुन तेरी लीपापोती क्या है भाई क्या है लीपापोती

667
00:46:39,440 --> 00:46:44,000
तुम्हारी कि जब धर्मेंद्र हुड्डा इनको कह रहा है

668
00:46:44,000 --> 00:46:48,000
कि भाई वो त्यौहारों का विरोध करता है रामपाल

669
00:46:48,000 --> 00:46:52,480
ठीक है। अभी मैं वो जो पत्रकारों के साथ वार्ता हुई है ना जिसको

670
00:46:52,480 --> 00:46:57,200
शास्त्रार्थ कहते हैं अपने पेड़ पत्रकारों के साथ उनके वो तथाकथित

671
00:46:57,200 --> 00:47:01,280
फर्जी बाबा का जो शास्त्रार्थ हुआ है इसमें उसने करवा चौथ इत्यादि

672
00:47:01,280 --> 00:47:05,360
व्रत रखने का खंडन किया है और मैं बताऊंगा कि कहां पे शास्त्रों में

673
00:47:05,360 --> 00:47:10,160
लिखा हुआ है उसी व्रत का नाम ठीक मगर अभी के लिए

674
00:47:10,160 --> 00:47:14,480
जब राम ये धर्मेंद्र जी ने तुमसे कहा कि भैया त्यौहार

675
00:47:14,480 --> 00:47:18,480
जो है बनाने के लिए मना करता है रक्षाबंधन एक एक त्यौहार का प्रमाण

676
00:47:18,480 --> 00:47:21,360
दूंगा मैं तुझे

677
00:47:21,360 --> 00:47:26,240
तो इसने क्या लीपापोती की कि मैं तो नहीं मानता

678
00:47:26,240 --> 00:47:30,160
जब धर्मेंद्र हुड्डा ने ये बात कही कि भाई त्यौहार मनाने के लिए

679
00:47:30,160 --> 00:47:34,160
मना करता है तो क्या कर तो क्या कहा इसने इस व्यक्ति ने वहां

680
00:47:34,160 --> 00:47:38,160
पर फोन पर कि वो कोई जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं कि

681
00:47:38,160 --> 00:47:42,240
आप भी यही चीज मानो हम भाई बात क्या

682
00:47:42,240 --> 00:47:46,320
हो रही है रामपाल पाखंडी है कि नहीं बात ये नहीं हो रही

683
00:47:46,320 --> 00:47:50,320
है कि उसको उसको रोका जाए या उसके उसको रोका ना जाए। बात हो रही

684
00:47:50,320 --> 00:47:54,320
है कि वो पाखंडी है कि नहीं? तो तुमने कैसे लीपापोती की कि

685
00:47:54,320 --> 00:47:58,480
वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं। इसीलिए कह रहा हूं ना

686
00:47:58,480 --> 00:48:02,480
कि कोई ठीक-ठाक व्यक्ति मिला नहीं। वहीं पकड़ लेता तुम्हारी जीभ को। उसी

687
00:48:02,480 --> 00:48:06,800
समय पकड़ लेता जीभ तुम्हारी। बात ये नहीं हो रही है

688
00:48:06,800 --> 00:48:10,800
कि रामपाल को रोकना है कि नहीं रोकना है। रामपाल जबरदस्ती कुछ

689
00:48:10,800 --> 00:48:15,200
कर रहा है। रामपाल ये कह रहा है कि मेरी शरण में नहीं आया तो तुमको राक्षस खाएगा।

690
00:48:15,200 --> 00:48:19,280
भय दिखा रहा है लोगों को झूठा। अगर तुम वेद को मानते हो तो रामपाल

691
00:48:19,280 --> 00:48:23,360
तुम्हारे हिसाब से नंगा है तुम्हारे हिसाब से और

692
00:48:23,360 --> 00:48:27,520
तुम उसकी लीपापोती कर रहे हो। जब तुमसे स्पष्ट सवाल किया धर्मेंद्र हुड्डा

693
00:48:27,520 --> 00:48:31,760
ने कि भाई वो कोई भी त्यौहार जो मनाते हैं हमारे भारतीय त्यौहार

694
00:48:31,760 --> 00:48:35,840
उनका विरोध करता है तो वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं। अरे आईएस आईएस

695
00:48:35,840 --> 00:48:41,200
वाला तुझसे जबरदस्ती कर रहा है क्या? कि बम लगा बम लगा।

696
00:48:41,200 --> 00:48:45,360
तो अगर तेरे आसपास वो होगा तो तू उसकी खबर नहीं देगा भारतीय सेना

697
00:48:45,360 --> 00:48:50,160
को या प्रशासन को है ना

698
00:48:50,160 --> 00:48:54,320
अच्छा तुम्हारे घर के बगल में अगर वैश्यालय खुल जाएगा तो तुम उसका

699
00:48:54,320 --> 00:48:59,360
विरोध नहीं करोगे क्योंकि वो तुमसे थोड़ी ना कह रहा है कि तुम भी यहां पार्टिसिपेट करवा कर

700
00:48:59,360 --> 00:49:03,680
भले ही वैश्यालय में आने जाने वाले ग्राहक तुम्हारे घर की स्त्रियों

701
00:49:03,680 --> 00:49:07,760
को भी वही समझने लगे जिस प्रकार की स्त्रियां वैश्यालय में मिलती है तुम विरोध

702
00:49:07,760 --> 00:49:11,440
नहीं करोगे

703
00:49:11,440 --> 00:49:15,520
या फिर उस दिन का इंतजार करोगे कि तुम्हारी बहन बेटी पत्नी मां को किसी

704
00:49:15,520 --> 00:49:19,520
दिन कोई वहां का ग्राहक हाथ ना पकड़ ले कि ₹50 में कि ₹100 में

705
00:49:19,520 --> 00:49:23,520
चल मेरे साथ उस दिन का इंतजार करोगे या वैश्व्यालय

706
00:49:23,520 --> 00:49:26,640
का विरोध करोगे

707
00:49:26,640 --> 00:49:29,520
बकवास।

708
00:49:29,520 --> 00:49:34,080
ये इनके कुतर्क थे। धर्मेंद्र हुड्डा से जब बात हो रही थी।

709
00:49:34,080 --> 00:49:38,320
जब उसने स्पष्ट क्लियर कट क्वेश्चन किए तो इनकी लीपापोती चालू हो गई

710
00:49:38,320 --> 00:49:43,920
कि मैं नहीं मानता। नहीं मानते तो बोलना पाखंडी है वो।

711
00:49:43,920 --> 00:49:48,720
अरे भाई नहीं मानता यानी रामपाल कुछ ऐसा कर कह रहा है जो गलत है।

712
00:49:48,720 --> 00:49:52,960
तुमको तब तक पाखंडी का अर्थ नहीं मालूम है कि वेद विरोधी होता है। तुमको यह भी नहीं मालूम

713
00:49:52,960 --> 00:49:57,120
वेद में क्या कहा गया है और रामपाल की किताबों में क्या कहा गया है। मगर तुम्हें

714
00:49:57,120 --> 00:50:01,200
यह तो मालूम पड़ गया कि रामपाल कुछ ऐसा बोल रहा है जो गलत है। तुमने कहा ना मैं

715
00:50:01,200 --> 00:50:05,840
नहीं मानता तो बहुत पाखंडी है वो। नहीं बोलोगे

716
00:50:05,840 --> 00:50:10,080
संभता प्रसाद मिल गया है। हां इसीलिए

717
00:50:10,080 --> 00:50:14,800
प्रश्न उठता है कि पत्रकारिता है कि चाटुकारिता है ये आत्मवलोकन

718
00:50:14,800 --> 00:50:17,200
करो आत्मवलोकन।

719
00:50:17,200 --> 00:50:21,360
अच्छा और देखो धर्मेंद्र धर्मेंद्र जी ने स्पष्ट एक सवाल

720
00:50:21,360 --> 00:50:25,360
किया ऑन कॉल इस व्यक्ति से। क्या सवाल था?

721
00:50:25,360 --> 00:50:29,360
कि भाई वह देवी देवताओं की बुराई करता है। फिर वहां

722
00:50:29,360 --> 00:50:33,360
पर इसने जो है वही चीज की लीपापोती कि मैं तो नहीं मानता। मैं

723
00:50:33,360 --> 00:50:37,360
तो सबको मानता हूं। फिर बात ये हो रही कि तुम क्या मानते हो? क्या नहीं मानते हो? बात ये हो रही

724
00:50:37,360 --> 00:50:41,360
रामपाल खरा सच बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है। रामपाल

725
00:50:41,360 --> 00:50:41,860
झूठ

726
00:50:41,680 --> 00:50:46,080
बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है। वो कह रहा है कि मैं जगतगुरु हूं। क्या वो जगतगुरु है।

727
00:50:46,080 --> 00:50:51,120
जब वो गलत बातें बोल रहा है। जब वो झूठ बोल रहा है तो वो जगतगुरु है। तो लिख

728
00:50:51,120 --> 00:50:55,440
लिख अपने थंबनेल में कि वो जगतगुरु नहीं है। रामपाल

729
00:50:55,440 --> 00:50:59,680
बनाओ उसके ऊपर वीडियो करो काउंटर क्वेश्चन उससे

730
00:50:59,680 --> 00:51:03,760
इस आधार पर नहीं करोगे अगर करोगे तो मुझे लगेगा कि

731
00:51:03,760 --> 00:51:07,920
तुमने अब तुम्हारी आत्मा जाग गई तुमने ध्यान से सोचा कि आज

732
00:51:07,920 --> 00:51:11,920
अगर मैंने इस वैश्यालय को अपने घर के बगल में खुलने दिया अगर अपने घर से 100 कदम

733
00:51:11,920 --> 00:51:17,920
दूरी पर खुलने दिया तो कल को एक वैश्यालय मेरे घर के बगल में आकर के खुल जाएगा

734
00:51:19,280 --> 00:51:25,120
वही हाल है ये जो वैशालय का उदाहरण है ऐसी ही स्थिति

735
00:51:25,120 --> 00:51:31,120
कि हम विरोध जो रामपाल है वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहा है।

736
00:51:34,640 --> 00:51:40,640
अच्छा उसके बाद क्या हो रहा है कि

737
00:51:43,760 --> 00:51:48,160
ये लीपापोती हो गई इनकी। तो जब देवी देवताओं

738
00:51:48,160 --> 00:51:52,480
की बुराई की बात आई तो भी कह दिया मैं नहीं मानता। अच्छा तुम्हारा

739
00:51:52,480 --> 00:51:56,560
जो बाबा है देवी देवताओं को ना मानने के बारे में क्या कहता है अपने उस पत्रकार वाले

740
00:51:56,560 --> 00:52:00,720
इंटरव्यू में कहता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो है

741
00:52:00,720 --> 00:52:05,040
अच्छा उसने पहली लाइन क्या कही पहली लाइन कही कि भैया जो

742
00:52:05,040 --> 00:52:09,840
वेद और गीता के से मेल नहीं खाएगा

743
00:52:09,840 --> 00:52:13,840
उसका हम जो है उसको नहीं रखते हैं या फिर उन्होंने कहा पुराण पुराण तू

744
00:52:13,840 --> 00:52:18,000
नहीं पुराण नहीं मेन मेरे तो गीता और वो है पुराण को उसने नगण्य

745
00:52:18,000 --> 00:52:22,000
कह दिया सबसे पहली बात तो पुराण से ही उसकी

746
00:52:22,000 --> 00:52:26,000
बात कट गई। क्यों? वेद में कहां लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश का जन्म होता

747
00:52:26,000 --> 00:52:30,080
है। मरण होता है। नहीं लिखा। गीता में कहां लिखा है? ब्रह्मा

748
00:52:30,080 --> 00:52:34,080
विष्णु महेश का जन्म मरण होता है। नहीं लिखा। दोनों

749
00:52:34,080 --> 00:52:34,580
से

750
00:52:34,320 --> 00:52:38,480
ये चीज मैच नहीं खाएगी देवी भागवत की। उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश ने

751
00:52:38,480 --> 00:52:42,560
अपने कार्य कारण भेद से जो कार्य करने वाला रूप है उसमें

752
00:52:42,560 --> 00:52:46,720
लीलात्मक प्रकट और अप्रकट होने वाली स्थिति के लिए कहा कि हे देवी हम

753
00:52:46,720 --> 00:52:51,040
तुमसे ही आविर्भाव भाव को प्राप्त होते हैं। प्रकट और अप्रकट

754
00:52:51,040 --> 00:52:55,120
होते हैं। लीलात्मक जो प्रकटीकरण है उसके लिए वो बात कही गई।

755
00:52:55,120 --> 00:52:59,360
उसको इसने जन्मत्व भी मान लिया। जबकि उसी देवी भागवत में ना जाने कितनी

756
00:52:59,360 --> 00:53:03,360
बार इनको अविनाशी कहा गया है। सच्चिदानंद स्वरूप कहा गया है। इसको वो

757
00:53:03,360 --> 00:53:08,480
नहीं पकड़ेगा। भर भर के प्रमाण है भर भर के

758
00:53:08,480 --> 00:53:12,640
और यह जो अश्लीलता भरे आरोप लगते हैं उनके बारे में भी मैंने जो धर्मेंद्र

759
00:53:12,640 --> 00:53:16,720
जी के लिए जो पिछली लाइव की थी बताने के लिए कि आर समाज को लेकर के भैया तुम

760
00:53:16,720 --> 00:53:21,360
रामपाली से मत भिड़ो नहीं यही अश्रो होगा आज जो

761
00:53:21,360 --> 00:53:25,440
इसने जो किया तो भैया हमारे पास स्पष्ट सटीक जवाब है

762
00:53:25,440 --> 00:53:29,840
ही नहीं लिंग का अर्थ पढ़ना जब आध्यात्मिक

763
00:53:29,840 --> 00:53:33,920
स्तर पर बात हो रही है तो लिंग का अर्थ शिव पुराण में लिखा हुआ है जिसके बारे में

764
00:53:33,920 --> 00:53:36,960
जानकारी दी है

765
00:53:36,960 --> 00:53:40,960
जो हुड्डा जी के लिए लाइफ की थी जो उनका जो कार्यक्रम इत्यादि हो रहा

766
00:53:40,960 --> 00:53:45,200
था वहां हरियाणा में उससे पहले और वहां पर भग यानी स्त्री इंद्री

767
00:53:45,200 --> 00:53:49,200
जो होती है उसके बारे में भी जो आध्यात्मिक अर्थ है दैविक अर्थ है वो

768
00:53:49,200 --> 00:53:49,700
लिखा

769
00:53:49,440 --> 00:53:53,840
हुआ है और वो भी शास्त्र में कहां लिखा है वो अर्थ वो उसके साथ बताया

770
00:53:53,840 --> 00:53:58,240
है पढ़ लेना प्रतीकात्मक सृष्टि रचना की

771
00:53:58,240 --> 00:54:02,400
व्याख्या है मनुष्य के आंड को तुमने

772
00:54:02,400 --> 00:54:05,440
ब्रह्म के आंड से जोड़

773
00:54:05,440 --> 00:54:09,600
फिर ब्रह्मांड क्यों बोलते हो? अमैथुनी सृष्टि

774
00:54:09,600 --> 00:54:13,600
इस बारे में भी बताया है कि जिस प्रकार के आक्षेप ये लगा

775
00:54:13,600 --> 00:54:18,640
रहा है जो अश्लील बातें ये लोग कर रहे हैं

776
00:54:18,640 --> 00:54:22,960
जो सनातन धर्म के द्वारा जो आराध्य हैं हिंदू

777
00:54:22,960 --> 00:54:27,040
देवी देवताओं उनके संबंध में वो अमैथुनी सृष्टि है। मैथुन वहां

778
00:54:27,040 --> 00:54:31,040
एक्सिस्ट ही नहीं करता है। जाने कितने प्रमाण दिए हैं भरभर के वही लाइव

779
00:54:31,040 --> 00:54:35,280
देख लेना। अमैथुनी सृष्टि

780
00:54:35,280 --> 00:54:39,600
मैथुन क्रिया वहां एक्सिस्ट ही नहीं करती है। तो जब वहां पर वो दैय शक्तियों

781
00:54:39,600 --> 00:54:43,680
के बीच में रमण, रति, क्रिया इत्यादि की बात आ रही है तो वहां ये जो

782
00:54:43,680 --> 00:54:47,920
रामपाल और बबिता जैसे लोगों के बीच में जो व्यवहारिक संबंध की खबरें

783
00:54:47,920 --> 00:54:52,080
आती है ना उस प्रकार के संबंध सिद्ध नहीं होते हैं। वो शक्तियों

784
00:54:52,080 --> 00:54:56,240
के मेल की बात हो रही है। वहां पर जो शक्तियां संचालन करती हैं संसार

785
00:54:56,240 --> 00:55:02,240
का जिसकी प्रतीकात्मक व्याख्या है वहां पर।

786
00:55:02,560 --> 00:55:06,640
खैर अब बैक टू द पॉइंट आ जाते हैं। तो भैया हमने यहां तक जान

787
00:55:06,640 --> 00:55:10,560
लिया कि

788
00:55:10,560 --> 00:55:14,560
जो पाखंडी है पाखंड का अर्थ क्या है? पाखंडी किसे कहा जाता है?

789
00:55:14,560 --> 00:55:18,960
वो वेद विरोधी होता है। वो नंगा होता है। व्रतों का विरोध करने वाला होता है। और

790
00:55:18,960 --> 00:55:23,120
रामपाल किस प्रकार से शास्त्रों के आधार पे नंगापन करते हुए

791
00:55:23,120 --> 00:55:27,200
दिखाई दे रहे हैं। वो कैसे? क्योंकि वह वेद घोषणा कर रहे हैं कि इसके अलावा और

792
00:55:27,200 --> 00:55:31,440
कोई मार्ग नहीं है। और रामपाली और रामपाल का पूरा तंत्र यह कहता है

793
00:55:31,440 --> 00:55:35,440
कि भैया वेद में मुक्ति का मार्ग नहीं है। उससे बाहर है। फिर वो कबीर

794
00:55:35,440 --> 00:55:39,520
सागर पे आता है। हालांकि कबीर सागर के लिए भी उसने लिख दिया है कि काल ने उसमें

795
00:55:39,520 --> 00:55:43,600
भी मिलावट की है। अंतिम प्रमाण रामपाल है। और रामपाल को भी यदि याद नहीं

796
00:55:43,600 --> 00:55:47,760
रहेगा कि पिछली बार मैंने क्या झूठ बोला था तो रामपाल की वही बात प्रमाण

797
00:55:47,760 --> 00:55:52,160
है जो उस समय वो बोल रहा है। क्योंकि पहले उसने बोल दिया हो, कुछ कर दिया हो। जैसे

798
00:55:52,160 --> 00:55:56,160
उसने अपने इंटरव्यू में बोला कि मैंने कभी खुद को भगवान नहीं कहा। जबकि

799
00:55:56,160 --> 00:56:00,160
उसने कई बार कह रखा है। अपने आप को भगवान अपनी किताब में ही

800
00:56:00,160 --> 00:56:04,160
कह रखा है कि मैं कबीर का अवतार हूं। ये सब कह रखा है उसने।

801
00:56:04,160 --> 00:56:08,160
वहां उसने झूठ बोल दिया। तो उसकी भी वही बात प्रमाण है। जिस समय

802
00:56:08,160 --> 00:56:12,560
उससे बात हो रही है। उस समय वो क्या बोल रहा है वो बात उसके लिए उसके द्वारा निर्गत

803
00:56:12,560 --> 00:56:16,560
मानी जानी चाहिए। और नहीं। पहले उसने बोल दिया उसको भूल जाओ। पहले उसने

804
00:56:16,560 --> 00:56:17,600
किताबों में लिख दिया उसको

805
00:56:17,600 --> 00:56:21,760
भूल जाओ। इसीलिए कहते हैं सनातन वह होता है जो किसी भी देश काल परिस्थिति

806
00:56:21,760 --> 00:56:25,760
में ना बदले। इस बात को ध्यान रखो। झूठ की एक

807
00:56:25,760 --> 00:56:29,840
आदत होती है। उसको याद रखना पड़ता है। रामपाल जैसे

808
00:56:29,840 --> 00:56:33,840
शास्त्र चोर झूठ को याद

809
00:56:33,840 --> 00:56:38,000
नहीं रख पाते हैं। इसीलिए उनसे बार-बार गलतियां हो रही है। रामपाल की किताबों से कमियां क्यों

810
00:56:38,000 --> 00:56:42,000
निकाल पा रहा हूं? इसीलिए क्योंकि उसको लिखने वाला एक मनुष्य है और

811
00:56:42,000 --> 00:56:46,000
उसने झूठ बोला है। तो जो झूठ बोलेगा वो गलतियां करेगा अपने शास्त्रों में। वो

812
00:56:46,000 --> 00:56:51,520
कर रहा है। रामपाल की किताबों से ही रामपाल की प्रत्येक बात को काट दूंगा।

813
00:56:51,520 --> 00:56:55,680
समझे? अच्छा अब इसने जब

814
00:56:55,680 --> 00:56:59,680
पुराणों की अवमानना की है। अच्छा पहली बात तो देखो

815
00:56:59,680 --> 00:57:03,680
पुराण को ये मानता नहीं है। वेद गीता में लिखा नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश का

816
00:57:03,680 --> 00:57:07,840
अनिश्वरत्व और पुराण को ये मानता नहीं है मगर वहां पर अपनी बात को फिट

817
00:57:07,840 --> 00:57:12,000
करने के लिए पुराणों के लिए कह देता है कि भैया पुराण जो है वो

818
00:57:12,000 --> 00:57:16,000
पुराण में लिखा हुआ है देवी भागवत में कि वो जो है आविर्भाव त्रभाव

819
00:57:16,000 --> 00:57:20,080
को प्राप्त होते हैं। तो पुराण को ना मानने के संबंध में हम सूक्ष्म

820
00:57:20,080 --> 00:57:24,160
वेद या पंचम पुराण किसे कहा गया वह मैं दिखा देता हूं। प्रमाण

821
00:57:24,160 --> 00:57:28,320
दिखाइए भैया इन्हें पंचम वेद छंदोग उपनिषद में कहा गया

822
00:57:28,320 --> 00:57:34,320
है पुराणों को सात एक दो

823
00:57:36,960 --> 00:57:42,160
इसके बाद वाला

824
00:57:42,160 --> 00:57:46,560
यह बड़ा करिए।

825
00:57:46,560 --> 00:57:50,560
यह देखिए इतिहास पुराण रूप पांचवा वेद वेदों

826
00:57:50,560 --> 00:57:54,560
का वेद ठीक है इतिहास पुराण

827
00:57:54,560 --> 00:57:58,800
रूप पांचवा वेद है पुराण को पांचवा वेद कहा गया है शास्त्रों में

828
00:57:58,800 --> 00:58:02,800
ये कहां लिखा है छंदोग उपनिषद सात एक दो इससे आगे वाला क्या है

829
00:58:02,800 --> 00:58:06,240
देखें

830
00:58:06,240 --> 00:58:11,760
नहीं नहीं अगला प्रमाण

831
00:58:11,760 --> 00:58:15,680
अच्छा अगला प्रमाण और कुछ है

832
00:58:15,680 --> 00:58:19,680
अच्छा व्रत के विषय में ठीक है छोड़ दीजिए और सुन लीजिए कहां-कहां पर

833
00:58:19,680 --> 00:58:23,840
कहा गया है पुराणों को पुराणों की प्रामाणिकता बता दूं

834
00:58:23,840 --> 00:58:28,480
7 एक चार छंदोग उपनिषद सात दो एक छंदोग उपनिषद बृहधारणिक

835
00:58:28,480 --> 00:58:32,880
उपनिषद दो चार 10 अथर्ववेद 11 7 24 इन सब में भरभर

836
00:58:32,880 --> 00:58:36,960
के पुराणों की प्रामाणिकता है जिसको यह पाखंडी कह रहा है कि जो है पुराण

837
00:58:36,960 --> 00:58:41,120
प्रामाणिक नहीं है ठीक है

838
00:58:41,120 --> 00:58:43,840
और

839
00:58:43,840 --> 00:58:48,240
जब यह हमारे देवी देवताओं के लिए इतने अश्लील शब्द पेशाब इंद्रिय

840
00:58:48,240 --> 00:58:52,560
हैं। रामपाल कहता है अपने किताबों में कि मूर्ति

841
00:58:52,560 --> 00:58:57,360
पूजा वो शिवलिंग की पूजा वो पेशाब इंद्रिय है। मूत्र इंद्रिय है। ये सब लिखा है।

842
00:58:57,360 --> 00:59:01,440
मैं सबको मानता हूं। मैं उनकी थोड़ी ना मानता हूं। तो नहीं मानता तो भैया ये सुन के आरती

843
00:59:01,440 --> 00:59:06,080
उतारेगा क्या उसकी? पूछना उससे कि किस आधार पर लिखा?

844
00:59:06,080 --> 00:59:10,160
शिव पुराण में लिखा है। शिवलिंग की पूजा करने से मोक्ष

845
00:59:10,160 --> 00:59:13,440
प्राप्त होता है।

846
00:59:13,440 --> 00:59:18,480
विदेश्वर समिता में दवा अध्याय 36 37 श्लोक के आसपास

847
00:59:18,480 --> 00:59:24,480
देख लेना खोल के

848
00:59:26,320 --> 00:59:30,320
अब इसने वहां अपने एक बात और कहता है क्या

849
00:59:30,320 --> 00:59:36,320
व्रत व्रत की बात करता है अच्छा

850
00:59:36,560 --> 00:59:41,440
यह जो

851
00:59:41,440 --> 00:59:45,680
ब्रह्मा विष्णु महेश के ईश्वरत्व के बारे में हमने प्रमाण दिए हैं पिछले

852
00:59:45,680 --> 00:59:49,920
लाइव में और इसमें भी साथ में बहुत सारे प्रमाण हम लगा देंगे जैसे कि भागवत

853
00:59:49,920 --> 00:59:54,000
में दिया गया है कि वेद किसके परायण हैं? वेद किसकी बात कर रहे हैं?

854
00:59:54,000 --> 00:59:58,240
तो विष्णु भगवान की बात कर रहे हैं। शिव जी ही परम ब्रह्म है। शिव के अलावा

855
00:59:58,240 --> 01:00:02,560
और कोई दूसरा उनसे किसी का कोई शिव से भिन्न किसी का ईश्वरत्व

856
01:00:02,560 --> 01:00:06,720
सिद्ध नहीं होता। और शिव जी जगतगुरु हैं।

857
01:00:06,720 --> 01:00:10,800
यह उनको अज्ञानी कहता है। और फिर भी तुम कहते हो कि पाखंडी नहीं है।

858
01:00:10,800 --> 01:00:13,920
शर्म आनी चाहिए आपको।

859
01:00:13,920 --> 01:00:18,080
शीशे में देख लेना सोने से पहले अपने आप को क्या कर रहे हो।

860
01:00:18,080 --> 01:00:24,080
छद्म प्रसिद्धि के लिए।

861
01:00:24,080 --> 01:00:28,560
इन सब का ईश्वरत्व सिद्ध है शास्त्रों से

862
01:00:28,560 --> 01:00:33,440
और जिस प्रकार के आरोप लगा रहा है तो उनका सैद्धांतिक

863
01:00:33,440 --> 01:00:37,520
आधार क्या है? सैद्धांतिक खंडन शास्त्रों में कल्प वेद से कहीं पर

864
01:00:37,520 --> 01:00:41,680
देवी स्वरूप में परम तत्व की व्याख्या हुई है। अन्यों को उनसे प्रकट दिखाया गया है।

865
01:00:41,680 --> 01:00:45,680
और कल्प वेद से कहीं पर विष्णु रूप में कहीं पर शिव रूप में इस तरीके से बात की गई

866
01:00:45,680 --> 01:00:50,000
है। क्योंकि सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है। कई बार हुई है। तो अलग-अलग कल्पों

867
01:00:50,000 --> 01:00:54,000
में कहीं पर किसी कल्प में दुर्गा रूप से सृष्टि के सृष्टि

868
01:00:54,000 --> 01:00:58,000
को उत्पन्न करने के बारे में करने वाले के बारे में बात हुई है और कहीं पर शिव रूप

869
01:00:58,000 --> 01:01:02,240
से और यह कल्प भेद भी शास्त्रों में भरा पड़ा है। कर लेना चैट जीपीटी और

870
01:01:02,240 --> 01:01:06,240
कार्य कारण भेद से ईश्वर अपने लीलात्मक प्रपंच में प्रकट प्रकट होते हैं। यह

871
01:01:06,240 --> 01:01:10,640
भी पढ़ लेना। वस्तुतः वो सच्चिदानंद स्वरूप है। ये भी पढ़ लेना।

872
01:01:10,640 --> 01:01:15,040
और ये एक बात और कहता है कि आदि शिव आदि गणेश

873
01:01:15,040 --> 01:01:19,120
आदि राम। अरे तो तू बोल ना कि आदि वेद हो।

874
01:01:19,120 --> 01:01:23,120
पहले तो तू ये बोलना शुरू कर। वेद में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है।

875
01:01:23,120 --> 01:01:27,760
ये बोलना शुरू कर। कबीर तो कहीं स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है

876
01:01:27,760 --> 01:01:32,880
मगर नहीं अपना जाल बिचाना है ना कबीर पंथ के नाम पर

877
01:01:32,880 --> 01:01:36,320
इसलिए खैर

878
01:01:36,320 --> 01:01:39,440
अब आगे क्या है व्रत के प्रमाण ले लो खोलो

879
01:01:39,440 --> 01:01:45,440
भैया ऋग्वेद एक एक 25 14

880
01:01:46,160 --> 01:01:50,480
व्रत का प्रमाण लो इसने कहा था ना वहां पे क्या कहा था कि नहीं व्रत

881
01:01:50,480 --> 01:01:54,640
करने को तो मना किया है शास्त्रों में कहां पे कहां कहां से उठाया

882
01:01:54,640 --> 01:01:58,640
इसने वो मैं बताऊंगा अभी कहां से उठाया गीता में यह देखिए व्रत की

883
01:01:58,640 --> 01:02:04,640
बात हो रही सीधे-सीधे क्या लिखा है

884
01:02:06,240 --> 01:02:08,720
हां

885
01:02:08,720 --> 01:02:14,720
सीधे-सीधे व्रत की बात हो रही है

886
01:02:18,080 --> 01:02:22,320
ये वेद की बात हो रही है ना वेद तो तुम्हारे लिए परम प्रमाण है

887
01:02:22,320 --> 01:02:26,320
तो व्रत को मानोगे कि नहीं मानोगे व्रत धारण करने की बात हो

888
01:02:26,320 --> 01:02:29,920
रही है।

889
01:02:29,920 --> 01:02:34,160
आपके व्रत में रहते हुए हम पाप रहित होवे। यह 29वा

890
01:02:34,160 --> 01:02:38,320
पढ़ रहा हूं मैं यजुर्वेद का। मैंने व्रतों का जो पालन किया

891
01:02:38,320 --> 01:02:42,400
उसको करने में मैं

892
01:02:42,400 --> 01:02:46,480
मेरा यह व्रत अनुष्ठान सिद्ध हो सका है। यह कर्म करने पर जो मैं था वह मन

893
01:02:46,480 --> 01:02:50,480
नहीं हूं। यह यज्ञ बात हो रही है व्रत की और

894
01:02:50,480 --> 01:02:54,480
देखो आगे ही पितरों की बात की की जा रही है। अगले में ही 29

895
01:02:54,480 --> 01:02:59,040
में 28वां था यह। 29 में क्या कहा जा रहा है? अध्याय दो है। यजुर्वेद

896
01:02:59,040 --> 01:03:03,040
अध्याय दो और मंत्र

897
01:03:03,040 --> 01:03:07,200
है 28वा। अभी हम लोग देख चुके हैं। 29वां पढ़ रहा हूं। पितरों को दिए हुए अन्न को

898
01:03:07,200 --> 01:03:11,440
ले जाने वाले अग्नि के लिए हुए यह आहुति

899
01:03:11,440 --> 01:03:15,520
समर्पित है। पितरों के साथ रहने वाले सोम के लिए यह समर्पित है। यज्ञ

900
01:03:15,520 --> 01:03:19,680
वेदी पर आए हुए असुरों और राक्षसों का नाश हुआ है। पितरों को दे

901
01:03:19,680 --> 01:03:23,760
दिया दिए जाने की बात हो रही है। और पितरों की आगे और भी बहुत सी बातें हुई है।

902
01:03:23,760 --> 01:03:27,920
खैर महाभारत का है 143वा अध्याय 40वां श्लोक

903
01:03:27,920 --> 01:03:32,000
क्या कह रहा है? सदा उपवास करें। एकादशी आदि के दिन उपवास

904
01:03:32,000 --> 01:03:33,280
करें और दूसरे

905
01:03:33,280 --> 01:03:37,920
दिन भी सदा दो ही समय भोजन करें। बीच में कुछ ना खाएं। नियम पूर्वक रह

906
01:03:37,920 --> 01:03:41,920
तो और ये कु की चटाई इत्यादि पर बैठने की मना करता है।

907
01:03:41,920 --> 01:03:45,920
वह भी कुकी की चटाई पर सोने इत्यादि के बारे में बात

908
01:03:45,920 --> 01:03:51,120
हो रही है। विरक्तता कैसे आए? और देखिए

909
01:03:51,120 --> 01:03:55,360
करवा चौथ के व्रत की बात हो रही है। करवा चौथ का व्रत इसने कहा था ना अपने उसमें

910
01:03:55,360 --> 01:04:00,240
इंटरव्यू में शास्त्रार्थ में करवा चौथ के व्रत की बात कहां हो रही है?

911
01:04:00,240 --> 01:04:02,560
हम

912
01:04:02,560 --> 01:04:06,560
करवा चौथ के व्रत की बात कहां हो रही है बता देता हूं। इसमें क्या लिखा है? एक पांच

913
01:04:06,560 --> 01:04:10,640
में यजुर्वेद पढ़ देते हैं। ऋग्वेद का हमने देख लिया एक 25 14

914
01:04:10,640 --> 01:04:14,880
अब यजुर्वेद पे आ जाते हैं। एक पांच इसमें क्या लिखा है?

915
01:04:14,880 --> 01:04:19,440
हे व्रत का पालन करने वाले अग्नि

916
01:04:19,440 --> 01:04:24,160
व्रत का मैं आचरण करूंगा। लो व्रत का आचरण करने की बात हो रही है।

917
01:04:24,160 --> 01:04:28,640
अब वेद को ना माने जेल कट्टू रामपाल को माने तुम्हारे

918
01:04:28,640 --> 01:04:32,640
अनुसार वह तो बहुत अच्छे हैं क्योंकि तेल दे रहे हैं सस्ता घी दे रहे

919
01:04:32,640 --> 01:04:36,800
हैं सस्ता बहुत अच्छी गुणवत्ता वाला तुम उनका प्रचार कर रहे हो

920
01:04:36,800 --> 01:04:41,200
इसीलिए वेदों को ना माने सनातन धर्म को ना माने

921
01:04:41,200 --> 01:04:45,280
स्टेट अप वो स्टेप अप जगदीश ने कह दिया है जगदीप ने कह

922
01:04:45,280 --> 01:04:48,320
दिया है कि भैया वो घी दे रहा है सस्ता पाइप बांट रहा है लोगों में

923
01:04:48,320 --> 01:04:52,400
जेल कट्टू इसलिए इन चीजों को ना मानो ब्रह्मा विष्णु महेश को गाली दो

924
01:04:52,400 --> 01:04:56,720
और उसके जो अनपढ़ पुअर चेले हैं उनकी तरह रोज वीडियो बनाओ। यह मसला

925
01:04:56,720 --> 01:05:00,960
वो मसला कल को वो दिन दूर नहीं जो आज इन राधा

926
01:05:00,960 --> 01:05:05,360
मां को और ये मां भगवती को पार्वती को शिव जी को गाली

927
01:05:05,360 --> 01:05:09,600
देने वालों के साथ तुम खड़े हुए। एक दिन तुम्हारे घर की स्त्रियों को जब ऐसा ही कुछ होगा

928
01:05:09,600 --> 01:05:13,680
तब तुम्हारी आत्मा में चित्कार होगी कि मैंने गलत लोगों का साथ दिया। उस दिन का

929
01:05:13,680 --> 01:05:17,680
श्राप है जो मुझे लगा है। ध्यान रखना यदि आज अब

930
01:05:17,680 --> 01:05:22,480
तुम आज आज तुमने आत्मा अवलोकन नहीं किया तो।

931
01:05:22,480 --> 01:05:26,560
ठीक है? और क्या कहा था इसने? इसने रामपाल ने

932
01:05:26,560 --> 01:05:30,800
अपने उसमें तथाकथित शास्त्रार्थ में क्या कहा था?

933
01:05:30,800 --> 01:05:35,200
इसने कहा था कि भैया वो करवा चौथ के व्रत की बात आई थी ना तो वहां पर ये लोग घट रामायण

934
01:05:35,200 --> 01:05:39,440
दिखा रहे हैं। घट रामायण हमारा शास्त्र है। वाल्मीकि हमारा शास्त्र

935
01:05:39,440 --> 01:05:43,760
नहीं है। घट रामायण अभी पिछले 500 सालों में कोई एक व्यक्ति

936
01:05:43,760 --> 01:05:48,240
आकर के पता नहीं क्या-क्या उसमें लिख गया। वो हमारा शास्त्र हो गया। घट रामायण

937
01:05:48,240 --> 01:05:52,320
इसके जो गवार और पुअर चेले वो ले मेरे पास आए थे। घट

938
01:05:52,320 --> 01:05:57,040
रामायण लाए हैं। यह पूरा एक अध्याय है

939
01:05:57,040 --> 01:06:01,280
चतुर्थी व्रत के बारे में। गणेश चतुर्थी

940
01:06:01,280 --> 01:06:03,760
और करवा चौथ इत्यादि जितने भी चतुर्थी

941
01:06:03,760 --> 01:06:07,920
के दिन व्रत आते हैं उसका पूरा अध्याय है। कौन सा अध्याय है? यह

942
01:06:07,920 --> 01:06:11,760
अध्याय 113

943
01:06:11,760 --> 01:06:15,840
नारद पुराण का 113वा अध्याय है और इसमें 43

944
01:06:15,840 --> 01:06:18,720
वे श्लोक में

945
01:06:18,720 --> 01:06:22,960
43 वे श्लोक में स्पष्ट लिखा हुआ है। जो कार्तिक कृष्ण

946
01:06:22,960 --> 01:06:27,040
चतुर्थी होती है उसके व्रत के बारे में क्या लिखा है? कार्तिक कृष्ण

947
01:06:27,040 --> 01:06:31,280
चतुर्थी को करके व्रत केवल नारी गण ही करें। उसका

948
01:06:31,280 --> 01:06:35,600
विधान यह है स्त्री स्नानोपरांत अलंकृत होकर गणाधीश

949
01:06:35,600 --> 01:06:39,760
की पूजा करें। उनके समक्ष व्रती रहकर पूरी तरह से

950
01:06:39,760 --> 01:06:44,400
पकवान तथा दस कमंडलु

951
01:06:44,400 --> 01:06:48,400
करवा यहां करवा आ गया। करवा चौथ रखकर देवग को

952
01:06:48,400 --> 01:06:53,440
प्रियताम प्रसन्न हो कहकर अर्पित करें। तत्पश्चात सभी वस्तु

953
01:06:53,440 --> 01:06:57,520
सौभाग्यशाली स्त्री तथा ब्राह्मण गण को प्रदान करें। जब

954
01:06:57,520 --> 01:07:01,520
रात में चंद्रोदय परिलक्षित हो तब सविधि अर्घ प्रदान करके

955
01:07:01,520 --> 01:07:05,760
व्रत पूर्ति करने के अनंतर मिष्ठान भोजन करें अथवा दुग्ध

956
01:07:05,760 --> 01:07:09,920
जल पूर्ण कमंडलु सुपाड़ी अक्षत रत्न ब्राह्मण को प्रदान करें।

957
01:07:09,920 --> 01:07:14,080
यह व्रत द्वादश किवा सोडस वर्ष करें। अंत

958
01:07:14,080 --> 01:07:18,320
में उद्यापनोपरांत व्रत विसर्जन करें। यह

959
01:07:18,320 --> 01:07:19,680
हो गया तुम्हारा।

960
01:07:19,680 --> 01:07:23,840
यह है बाबा जी का ज्ञान। वेद विरोधी ज्ञान, पाखंडी ज्ञान। और बाबा

961
01:07:23,840 --> 01:07:28,160
जी क्या कहते हैं कि भैया वो जो शिव

962
01:07:28,160 --> 01:07:33,280
पार्वती का जब विवाह हुआ था तो ऐसे थोड़ी ना हुआ था या वो जो

963
01:07:33,280 --> 01:07:37,360
दैय स्तर की जो चीजें हैं वो ऐसे थोड़ी ना हुई थी। तो इसलिए अपने

964
01:07:37,360 --> 01:07:41,760
यहां पर भी वैसे ही विवाह कराता है। तो इस प्रकार से सबसे पहले तो रामपाल

965
01:07:41,760 --> 01:07:45,760
और रामपाल के तमाम सारे लोग जो यह कहते हैं कि जो हमारा जो वेदों के

966
01:07:45,760 --> 01:07:50,000
अनुसार जो विवाह होता है वो विवाह विवाह नहीं है और उसको यदि तुम समर्थन

967
01:07:50,000 --> 01:07:54,000
करते हो तो तुम्हारे लिए भी यह बात लागू होगी कि रामपाल यदि यह बात सच

968
01:07:54,000 --> 01:07:58,000
बोल रहा है कि वो विवाह विवाह नहीं है जो हमारे मां-बाप ने किया है। तो इसका

969
01:07:58,000 --> 01:08:02,240
अर्थ है कि ये लोग जिन माता-पिता से उत्पन्न

970
01:08:02,240 --> 01:08:06,320
हुए हैं वो सारे अवैध संबंध थे। क्योंकि विवाह तो वहां

971
01:08:06,320 --> 01:08:10,560
हुआ ही नहीं रामपाल के अनुसार रामपाल की विधि तो अभी रामपाल बता रहा है 17 मिनट

972
01:08:10,560 --> 01:08:14,560
वाली है ना और उसके बाद अगर यहां

973
01:08:14,560 --> 01:08:18,560
से यह मान लिया जाए क्योंकि वो जो दैय चीजें होती है वो बिल्कुल स्पष्ट

974
01:08:18,560 --> 01:08:22,560
रूप से यहां पर लागू हो जाती हैं। जैसा वहां पर हो रहा है वैसा ही यहां होता है मनुष्यों

975
01:08:22,560 --> 01:08:26,560
में। तो फिर उस हिसाब से रामपाल ने एक विवाह बताया

976
01:08:26,560 --> 01:08:30,640
है अपनी सृष्टि रचना में कि भैया वो जो स्त्री

977
01:08:30,640 --> 01:08:34,720
थी उसके पहले इंद्री नहीं थी। यानी कि रामपाल के अनुसार रामपाल के यहां की

978
01:08:34,720 --> 01:08:38,800
जो स्त्रियां होती हैं उनके जो स्त्री अंग होता है मुख्य वो होता ही

979
01:08:38,800 --> 01:08:42,880
नहीं है और वो किस ब्या ब्याह के समय जो वर

980
01:08:42,880 --> 01:08:46,960
होता है वो नाखूनों के द्वारा चिपकाया जाता है। अब उसमें फेवी का उपयोग

981
01:08:46,960 --> 01:08:50,960
होगा कि किसका होगा ये तुम देख लेना। मगर यदि वहां की चीजें एज इट

982
01:08:50,960 --> 01:08:55,120
इज यहां लागू करोगे तो ये सब तो पूछा जाएगा ना। या ये भी होता है क्या

983
01:08:55,120 --> 01:08:59,440
तुम्हारे यहां? क्योंकि तुम्हारी जो फर्जी कथाएं तुमने

984
01:08:59,440 --> 01:09:03,840
बना रखी है उन्हीं कथाओं में यह है कि भैया वो उसकी पत्नी इसलिए है

985
01:09:03,840 --> 01:09:07,920
क्योंकि उनका इस प्रकार से विवाह हुआ था कि विवाह से पहले

986
01:09:07,920 --> 01:09:12,000
वर की वधू पे यानी जिससे विवाह होने वाला है उस पर दृष्टि खराब हो

987
01:09:12,000 --> 01:09:16,160
गई थी और फिर दृष्टि खराब होने के बाद उसके पास स्त्री अंग

988
01:09:16,160 --> 01:09:20,640
था नहीं जो भग जिसे स्त्री अंग भग कहते हैं ना स्त्री इंद्री

989
01:09:20,640 --> 01:09:24,720
वो था नहीं स्त्री के पास वो फ्लैट था मामला और उसको

990
01:09:24,720 --> 01:09:28,800
जो है राक्ष राक्षस ने पहले चिपकाया नाखूनों से और उसके बाद उसके

991
01:09:28,800 --> 01:09:32,880
साथ जो है आगे की चीजें हुई। तो इनके यहां पर जो ब्याह होते हैं 17 मिनट

992
01:09:32,880 --> 01:09:37,040
वाले क्योंकि इनके यहां देवताओं के यहां पर होने वाली चीजें ऐसी ही होती हैं।

993
01:09:37,040 --> 01:09:41,120
तो एज इट इज इनके यहां पर क्योंकि ये लागू हो गया क्योंकि देवताओं में ऐसा

994
01:09:41,120 --> 01:09:45,280
हुआ था तो हमारे यहां भी ऐसा होना चाहिए। तो भैया इन्हीं के अनुसार जो दैय

995
01:09:45,280 --> 01:09:49,520
घटनाएं हुई हैं वहां पर ऐसा हुआ था कि विवाह के विवाह से पहले जो

996
01:09:49,520 --> 01:09:50,020
वर की

997
01:09:49,760 --> 01:09:53,760
दृष्टि खराब हो गई थी। उस पर स्त्री पर जो कि स्त्री थी नहीं

998
01:09:53,760 --> 01:09:57,920
क्योंकि उसके स्त्री अंग था नहीं तो जिस पर भी यानी कि एक तरीके से यह भी माना

999
01:09:57,920 --> 01:10:02,000
जा सकता है कि दृष्टि किसी पर भी खराब हो सकती है पुरुष पर

1000
01:10:02,000 --> 01:10:06,000
भी खराब हो सकती है रामपाल के अनुसार क्योंकि वो दैय चीजों को यहां ला रहा

1001
01:10:06,000 --> 01:10:10,000
है तो किसी पुरुष पर भी खराब हो सकती है और फिर उसके बाद जो आजकल वो

1002
01:10:10,000 --> 01:10:14,960
चल रहा है ना धर्म को ना मानने वाले लोगों के द्वारा

1003
01:10:14,960 --> 01:10:19,040
सेक्स चेंज ऑपरेशन लिंग परिवर्तन वाला जो शल्य

1004
01:10:19,040 --> 01:10:23,280
क्रिया होती है तो वो इनके यहां पर होती है और वह किसी पर भी दृष्टि

1005
01:10:23,280 --> 01:10:27,360
आपकी आ जाए उसको चिपका दिया जाएगा उसके बाद उससे विवाह हो जाएगा बजाओ ताली

1006
01:10:27,360 --> 01:10:31,040
और करो इसका प्रचार

1007
01:10:31,040 --> 01:10:33,440
तो

1008
01:10:33,440 --> 01:10:37,840
पाखंड को जान लो कि पाखंड क्या है उसके बाद बोलो

1009
01:10:37,840 --> 01:10:41,840
अब 100 की सीधी एक बात और बता देते हैं ये रामपाल अपनी

1010
01:10:41,840 --> 01:10:47,840
किताब में कह रहा है गरिमा गीता की में कि

1011
01:10:49,040 --> 01:10:53,200
गरमा गीता की में 75 नंबर पेज 75

1012
01:10:53,200 --> 01:10:57,840
नंबर जो पष्ठ है वह निकालिए भैया क्या है

1013
01:10:57,840 --> 01:11:03,840
गरिमा गीता की पृष्ठ क्रमांक 75 क्या कह रहा है रामपाल

1014
01:11:03,840 --> 01:11:08,000
कह रहा है कि नाम देने का अधिकारी वही है जिसको

1015
01:11:08,000 --> 01:11:11,760
गुरु ने आदेश दे रखा हो

1016
01:11:11,760 --> 01:11:16,160
कबीर को किसने आदेश दिया था भाई नाम देने का

1017
01:11:16,160 --> 01:11:20,240
हम और कुछ तुम्हारे भी हालचाल वैसे ही है उसमें अभी ढोल

1018
01:11:20,240 --> 01:11:24,400
में पोल है जो तुमने जिसको अपना गुरु बना रखा है उसने तुमको आदेश

1019
01:11:24,400 --> 01:11:29,600
दिया है कि नहीं वो छोड़ दो कबीर को किसने आदेश दे दिया था

1020
01:11:29,600 --> 01:11:33,600
ये पढ़ लो ये गरमा गीता की में ही लिखा है

1021
01:11:33,600 --> 01:11:37,600
और कबीर कबीर तुमको वेद पढ़ा कहां से

1022
01:11:37,600 --> 01:11:42,000
देंगे क्या कबीर ने वेदों पर भाष्य किया है

1023
01:11:42,000 --> 01:11:46,080
ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से परंपरा से ज्ञान प्राप्त

1024
01:11:46,080 --> 01:11:51,920
होता है चार दो भगवत गीता तीन 16 भगवत गीता मांडकोपनिषद

1025
01:11:51,920 --> 01:11:57,520
एक एक से चार

1026
01:11:57,520 --> 01:12:01,600
भरभर के प्रमाण है। महाभारत में लिखा है ज्ञान परंपरा से

1027
01:12:01,600 --> 01:12:06,400
प्राप्त होना चाहिए। तुम्हारी वेद की परंपरा क्या है? वो दिखाओ इनको।

1028
01:12:06,400 --> 01:12:10,480
इसमें सबसे नीचे वाला दिखाओ। सबसे नीचे इसमें

1029
01:12:10,480 --> 01:12:15,600
सबसे नीचे वाला दिखाओ।

1030
01:12:15,600 --> 01:12:20,880
यहां लिखा है। 75 है ना?

1031
01:12:20,880 --> 01:12:24,880
इसमें लास्ट की दो लाइन अंडरलाइन करिए। नाम देने का अधिकारी

1032
01:12:24,880 --> 01:12:28,960
वही है जिसको गुरु जी ने आदेश दिया हो। कबीर

1033
01:12:28,960 --> 01:12:32,960
को किसने आदेश दिया है? कौन सा मंत्र दिया था उनके

1034
01:12:32,960 --> 01:12:38,960
गुरु ने उनको? क्या वही मंत्र आगे बढ़ाया है?

1035
01:12:40,080 --> 01:12:42,480
और

1036
01:12:42,480 --> 01:12:46,640
इनका वो वाला प्रमाण दिखा दो। गुरु के बिना जो वेद पढ़ता है। गुरु बिन वेद

1037
01:12:46,640 --> 01:12:51,680
पढ़े जो प्राणी मना कर रहे हैं। समझे ना सार रहे अज्ञानी।

1038
01:12:51,680 --> 01:12:55,760
ठीक है? अब यह बता दो रामपाल ने वेद किससे पढ़े हैं?

1039
01:12:55,760 --> 01:12:59,840
क्या कबीर ने वेद भाष्य किया है? किसने वेद भाष्य किया है जो

1040
01:12:59,840 --> 01:13:05,840
रामपाल ने पढ़ लिए। वेद लेने तो तुम जाते हो छपे हुए दयानंद जी के।

1041
01:13:06,000 --> 01:13:10,160
कौन से वेद भाष्य पढ़े हैं रामपाल ने? उनके फड़ों ने

1042
01:13:10,160 --> 01:13:15,520
छछूंदरों ने जो सनातन धर्म के देवी देवताओं का अपमान करते घूमते हैं।

1043
01:13:15,520 --> 01:13:19,520
तूतड़ी सी बंद हो जाएगी जिस दिन सामने आओगे रामपाल आएगा

1044
01:13:19,520 --> 01:13:23,840
ना 10 मिनट के अंदर रामपाल की लिख के दे रहा हूं लिख के

1045
01:13:23,840 --> 01:13:27,840
10 मिनट के अंदर खींचे निकल आएंगी अपना समूह ले चलते

1046
01:13:27,840 --> 01:13:32,560
हुए पवेलियन वापस लौटते आओगे

1047
01:13:32,560 --> 01:13:36,800
दर्द भी कहेगा कि उठे तो कहां से उठे वो मार लगेगी

1048
01:13:36,800 --> 01:13:40,960
ज्ञान वाली मार ज्ञान वाली आ तो सही निकल तो सही बाहर अपने बिल

1049
01:13:40,960 --> 01:13:43,600
से

1050
01:13:43,600 --> 01:13:48,080
और स्टेप अप जे जगदीप जी आप आत्मवलोकन

1051
01:13:48,080 --> 01:13:53,440
करें कि आप पत्रकारिता कर रहे हैं कि चाटुकारिता कर रहे हैं।

1052
01:13:53,440 --> 01:13:57,840
सनातन धर्म के बारे में वो व्यक्ति फवरता प्रस्तुत करता जा रहा है। वो और उसके चेले

1053
01:13:57,840 --> 01:14:02,160
और आप उसके घी और पाइप का प्रचार करते घूम रहे हैं। पाखंड

1054
01:14:02,160 --> 01:14:07,520
का अर्थ खुद नहीं मालूम है और धर्मेंद्र जी से पाखंड का अर्थ पूछ रहे हैं।

1055
01:14:07,520 --> 01:14:11,840
आज पता चल गया ना पाखंड का अर्थ? कल वीडियो बना देना

1056
01:14:11,840 --> 01:14:15,920
पाखंडी और नंगा नाम से।

1057
01:14:15,920 --> 01:14:20,320
उससे पूछो कहां छप रही तुम्हारी गैर कानानूनी किताबें। उससे

1058
01:14:20,320 --> 01:14:24,320
पूछो यह कौन-कौन सी ट्रस्ट फर्जी के नाम पर तुम्हारा

1059
01:14:24,320 --> 01:14:28,640
तुम्हारा भंडारा होता है फर्जी ट्रस्ट के नाम पे। तुम्हारा आश्रम चलता है फर्जी

1060
01:14:28,640 --> 01:14:34,560
ट्रस्ट के नाम पे। तुम्हारी किताबें चलती है फर्जी फर्जी एड्रेस के नाम पे।

1061
01:14:34,560 --> 01:14:39,280
तुम्हारे कार्यक्रम होते हैं फर्जी एड्रेस के नाम पे।

1062
01:14:39,280 --> 01:14:43,360
सब कुछ फर्जी कागज पत्र के नाम पर तुम्हारी चीजें होती हैं

1063
01:14:43,360 --> 01:14:47,440
और तुम बनते हो सत्यवादी जगत

1064
01:14:47,440 --> 01:14:53,360
गुरु तत्वदर्शी

1065
01:14:53,360 --> 01:14:57,440
अपना अपना चेहरा जो है ना रात में सोने से पहले देखो क्या

1066
01:14:57,440 --> 01:15:01,520
कर रहे हो किस तरीके से तुम सनातन का नुकसान कर रहे हो ये घी और तेल का

1067
01:15:01,520 --> 01:15:04,080
प्रचार करके

1068
01:15:04,080 --> 01:15:08,080
शर्म नहीं आई कहते हुए वो व्यक्ति करवा चौथ का खंडन कर

1069
01:15:08,080 --> 01:15:12,160
रहा है। हर त्यहार का खंडन कर रहा है। कुछ मालूम ना तालूम चले भैया

1070
01:15:12,160 --> 01:15:16,480
हम पत्रकारिता करेंगे। जो सटीक प्रश्न आ रहे हैं तो उस पर लीला लीपापोती

1071
01:15:16,480 --> 01:15:20,640
कर रहे हैं। जब वो धर्मेंद्र जी कह रहे हैं कि भैया वो खंडन

1072
01:15:20,640 --> 01:15:24,640
करता है त्यहारों का तो कह रहे हैं। मैं थोड़ी ना मानता हूं उनको।

1073
01:15:24,640 --> 01:15:28,640
अरे ये बात बोलो ना कि हां रामपाल गलत है। झूठ बोल

1074
01:15:28,640 --> 01:15:32,960
रहा है रामपाल त्यहारों के बारे में।

1075
01:15:32,960 --> 01:15:37,040
सनातन धर्मियों को बेवकूफ बना रहा है। अरे घोषित कर दे हम सनातनी

1076
01:15:37,040 --> 01:15:41,200
नहीं है। हिंदू नहीं है। हमारा वेदों से कोई मतलब नहीं है। अपना जो लिखे

1077
01:15:41,200 --> 01:15:47,200
सड़ा हुआ ज्ञान और खूब सड़े हुए लोगों को फैलाए। हमें क्या मतलब?

1078
01:15:48,240 --> 01:15:52,240
वेदों के नाम पर, गीता के नाम पर, पुराणों के नाम पर, वेदों

1079
01:15:52,240 --> 01:15:57,040
से दूर, गीता से दूर पुराणों से दूर करना उसका काम है।

1080
01:15:57,040 --> 01:16:01,200
वेद क्या कह रहे हैं? वेद यह कह रहे हैं कि वेदों का ज्ञान

1081
01:16:01,200 --> 01:16:05,280
देने वाला मूर्ख है। घटिया है उसकी भक्ति। गीता क्या

1082
01:16:05,280 --> 01:16:09,760
कह रही है कि गीता को कहने वाला राक्षस है। घटिया है उसकी भक्ति।

1083
01:16:09,760 --> 01:16:15,760
पुराण क्या कह रहे हैं कि पुराणों में जिनको भगवान के कहा गया उनको भगवान नहीं मानना है।

1084
01:16:15,760 --> 01:16:19,760
अच्छा जिनको पुराणों में भगवान नहीं मानना है। पुराणों के अनुसार उनको भगवान माना क्यों

1085
01:16:19,760 --> 01:16:23,200
गया वो हमें नहीं मालूम है।

1086
01:16:23,200 --> 01:16:27,360
हमने खुद की खीर खुद ही खा ली थी। इसलिए हम उसके उसमें

1087
01:16:27,360 --> 01:16:31,520
आकर के प्रभाव में आकर के भूल चुके हैं। उससे ऐसा विस्मृति भंग

1088
01:16:31,520 --> 01:16:35,520
हुई है खुद की खीर खुद खा के कि वो जो है भूल गया हूं

1089
01:16:35,520 --> 01:16:39,840
मैं।

1090
01:16:39,840 --> 01:16:44,240
पूछो उससे कि अगर ब्रह्मा विष्णु महेश को ना मानने

1091
01:16:44,240 --> 01:16:48,320
की बात यह शास्त्र कर रहे हैं। सनातन धर्म शास्त्र तो

1092
01:16:48,320 --> 01:16:52,720
उन्हें मानने की बात कहां लिखी है जिसके कारण लोगों ने उन्हें माना?

1093
01:16:52,720 --> 01:16:56,880
बहुत साधारण सा प्रश्न है। क्योंकि उसके अनुसार

1094
01:16:56,880 --> 01:17:01,120
पुराणों में जो बातें हैं वह तो ना मानने के संबंध में है। गीता में अगर व्रत

1095
01:17:01,120 --> 01:17:05,120
को ना मानने के विषय में कहा गया है। हां छठव अध्याय में ये कहा

1096
01:17:05,120 --> 01:17:09,200
गया है एक विशेष प्रकार का योग बताया जा रहा है। कि एक

1097
01:17:09,200 --> 01:17:13,360
आसन पर बैठकर के और जो है आप योग करें। उस योग को ना

1098
01:17:13,360 --> 01:17:17,440
करने की बात यह पगला पहले कहता है। मूर्ख यह फड़

1099
01:17:17,440 --> 01:17:21,520
व्यक्ति जो गीता में जो योग बताया गया है उसको ना करने

1100
01:17:21,520 --> 01:17:25,520
की बात ये पहले कहता है। फिर उस योग को करने के संबंध में ये बताया

1101
01:17:25,520 --> 01:17:29,600
जा रहा है कि बहुत ज्यादा खाने वाला या बहुत कम या ना खाने

1102
01:17:29,600 --> 01:17:33,680
वाला दोनों ही प्रकार के लोगों से यह योग नहीं होगा। मतलब वहां पर एक

1103
01:17:33,680 --> 01:17:37,680
सामंजस्य और वहां सामान्य स्थिति की बात हो रही है कि अपने रूटीन लाइफ में

1104
01:17:37,680 --> 01:17:41,840
व्यक्ति किस प्रकार का आहार विहार करता है। जो विशेष व्रत इत्यादि

1105
01:17:41,840 --> 01:17:46,000
हो रहे हैं उनकी बात थोड़ी ना हो रही है कि उनका खंडन हो गया और यही व्यक्ति अपनी गीता

1106
01:17:46,000 --> 01:17:50,000
में गीता के उसमें किताब में लिखता है। जो व्यक्ति जो बातें वेद के बाहर की

1107
01:17:50,000 --> 01:17:54,160
हो वेद से मैच नहीं खाए गीता की भी हो ना मानो। तो फिर क्यों

1108
01:17:54,160 --> 01:17:54,880
मान ली बात?

1109
01:17:54,880 --> 01:17:59,040
वेद तो कह रहे हैं व्रत करो। तमाम सारे शास्त्रों में व्रत भरे पड़े

1110
01:17:59,040 --> 01:18:03,120
हैं। हमारे अनुसार वहां पर सामान्य रूटीन लाइफ की बात हो रही है कि

1111
01:18:03,120 --> 01:18:07,440
भाई जो और सबसे बड़ी बात वो जो बात कही गई है कि ज्यादा

1112
01:18:07,440 --> 01:18:11,440
खाने वाला और ना खाने वाला दोनों ही इस प्रकार के योग को नहीं कर सकते।

1113
01:18:11,440 --> 01:18:16,080
उस योग को ना करने की यह बात कह रहा है।

1114
01:18:16,080 --> 01:18:20,240
मतलब कि जो काम करना ही नहीं है उसको करने के लिए जो विधि

1115
01:18:20,240 --> 01:18:24,320
बताई जा रही है उस विधि का उपयोग यह हम जिसमें आस्था

1116
01:18:24,320 --> 01:18:28,400
रखते हैं उसको ना मानने के लिए कह रहा है कि व्रत को ना मानने की बात हो रही

1117
01:18:28,400 --> 01:18:32,640
है। भाई वहां वो बात कही जा रही है कि योग करना है तो कैसे करना है।

1118
01:18:32,640 --> 01:18:36,800
रामपाल के अनुसार वो योग करना ही नहीं है। तो इसका

1119
01:18:36,800 --> 01:18:41,040
मतलब रामपाल के अनुसार उस विधि को मानना ही नहीं है। कम

1120
01:18:41,040 --> 01:18:45,120
कम खाने वाली ना खाने वाली वह तो बेकार की चीज़ हो गई क्योंकि वह किस बात के

1121
01:18:45,120 --> 01:18:49,200
लिए कही जा रही है जो बात हमें करनी ही नहीं है वह तो वैल्यूलेस बात

1122
01:18:49,200 --> 01:18:51,680
हो गई

1123
01:18:51,680 --> 01:18:56,080
ठीक ऐसे कि जैसे कि आपको जाना है लखनऊ से कानपुर

1124
01:18:56,080 --> 01:19:00,240
फिर बताया जा रहा है कि आपको वहां से बस मिलेगी तो

1125
01:19:00,240 --> 01:19:04,240
यह व्यक्ति कह रहा है कि देखो देखो यह व्यक्ति ये कह रहा है कि कानपुर

1126
01:19:04,240 --> 01:19:09,680
कहीं कहीं जाना ही नहीं है फिर यह व्यक्ति कह रहा है देखो देखो बस वहां से मिलेगी

1127
01:19:09,680 --> 01:19:10,180
पहले

1128
01:19:10,080 --> 01:19:14,080
कह कह रहा है कि आपको कहीं जाना ही नहीं है। फिर कह रहा है देखो बस वहां से मिलेगी।

1129
01:19:14,080 --> 01:19:18,720
अरे भैया तू बस मिलने की बात क्यों कर रहा है? जब तूने जाने का ही खंडन कर दिया तो

1130
01:19:18,720 --> 01:19:22,800
ये है इसकी मूर्खता। ये इसका ढोंग ये इसका फड़ ज्ञान। ये इसका

1131
01:19:22,800 --> 01:19:26,800
पाखंड तो इसका घी तेल मत बेचो। और अपनी

1132
01:19:26,800 --> 01:19:31,680
पत्रकारिता वास्तविक धर्मोचित धार्मिक

1133
01:19:31,680 --> 01:19:36,800
समझे? धर्म परायण पत्रकारिता दिखाओ। क्रांतिकारी बनो। क्रांतिकारी

1134
01:19:36,800 --> 01:19:42,800
चाटुकार मत बनो।

1135
01:19:44,560 --> 01:19:48,560
लिंक दे दीजिए। किसी को जुड़ना हो, कोई आज के संबंध में कुछ प्रश्न इत्यादि हो तो वह कर

1136
01:19:48,560 --> 01:19:52,720
सकता है। वैचारिक मतभेद के निमित्त किसी को अगर चर्चा करनी

1137
01:19:52,720 --> 01:19:57,120
हो तो वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर WhatsApp करके चर्चा सुनिश्चित

1138
01:19:57,120 --> 01:20:03,120
कर सकता है।

1139
01:20:07,280 --> 01:20:13,280
जो भी आए वह अपने फेस के साथ आए।

1140
01:20:32,800 --> 01:20:37,040
अपने बिल में घुसा बैठा रहता है। अरे निकल उससे पूछो ना कि

1141
01:20:37,040 --> 01:20:41,280
भाई जबलपुर कब जाओगे? इंदौर कब जाओगे? आगरा कब जाओगे? वहां जाकर के सभा लगाओ।

1142
01:20:41,280 --> 01:20:46,320
सामान्य लोगों को प्रश्न करने का मौका दो। क्यों बैठे हो अपने उसमें?

1143
01:20:46,320 --> 01:20:52,000
वो जो जहां पर तुम्हारा वो बना हुआ है

1144
01:20:52,000 --> 01:20:58,000
छिप कर रहने का मामला। क्यों बैठे हो वहां?

1145
01:21:11,200 --> 01:21:17,200
वैचारिक मतभेद के निमित्त किसी को यदि चर्चा करनी है।

1146
01:21:17,760 --> 01:21:22,720
यह किसकी बात हो रही है?

1147
01:21:22,720 --> 01:21:28,720
खीर से संबंधित बात हो रही है क्या? यह

1148
01:21:38,080 --> 01:21:42,160
ठीक है। चलिए मुझे लगता है कि कोई है नहीं

1149
01:21:42,160 --> 01:21:46,160
ऐसा जो अभी उपलब्ध हो पाए और जो लोग

1150
01:21:46,160 --> 01:21:50,320
यहां पर आए हैं इनकी मां ने इनको निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया है तो वह

1151
01:21:50,320 --> 01:21:56,320
जो है फेस के साथ नहीं आए।

1152
01:21:56,490 --> 01:22:00,880
[नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है। अभी

1153
01:22:00,880 --> 01:22:06,000
के लिए इतना पर्याप्त है और

1154
01:22:06,000 --> 01:22:10,240
ये देखो इनकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया। इसलिए कमेंट में केवल इतना

1155
01:22:10,240 --> 01:22:14,320
लिख सकते हैं सामने आकर के एक बात एक ऐसी

1156
01:22:14,320 --> 01:22:18,480
बात जो रामपाल की सनातन जो परंपरा प्राप्त सनातन

1157
01:22:18,480 --> 01:22:22,560
धर्म है उसके विरुद्ध है रामपाल की बात एक ऐसी बात इनके जो

1158
01:22:22,560 --> 01:22:26,720
गधे चेले हैं फूहड़ चेले हैं वो सिद्ध नहीं कर सकते एक

1159
01:22:26,720 --> 01:22:31,200
बात और बस कमेंट वीर बनवा लो

1160
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क्योंकि माता ने ऐसा दूध ही नहीं पिलाया जो जो पी है वो खीर पी है

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बाबा जी से उसके कारण यह तो होगा

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चलिए ठीक है जय श्री राम सभी को समय देने के लिए धन्यवाद

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और स्टेप अप जे को मैं फिर से बोल रहा हूं एक बार दोबारा से

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आत्मवलोकन करो और देखो कि तुम कहां से कहां आ गए हो

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क्या कर रहे हो किसकी ओर खड़े हो धर्म की ओर या अधर्म की

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ओर तुमको यही नहीं दिखाई दे रहा है अगर तुम एक तरफ

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कह रहे हो कि मैं मानता हूं और उनका इतना अपमान हो रहा बलात्कार

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हो रहा है। बलात्कार करते समय जो

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कबीर सागर का सरलार्थ पढ़ लेना 512 पष्ठ संख्या

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पे लिखा है रामपाल ने कि जब

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राक्षस दुर्गा माता का बलात्कार कर रहा था। शर्म

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आनी चाहिए यार।

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या तो बीच से हट जाओ और या खामखा यह

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फ्री का युद्ध निमंत्रण मत लो। है ना?

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फ्री के युद्ध को बिना खामखा व्यर्थ में युद्ध को न्योता मत दो।

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या तो बीच से हट ही जाओ तुमको नहीं करना रामपाल का विरोध। कोई जरूरत

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नहीं। खामखा इस युद्ध में मत पड़ो। ठीक है?

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वो हम देख लेंगे हमारा उसका।

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और बाकी यदि यही चाहिए तो फिर ठीक है। यही सही।

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तुम भी आ जाना। और जो व्यक्तिगत

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परामर्श है वह क्या है कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं

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टक्कर में। ठीक है?

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जय श्री राम सभी को।

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[संगीत]
