1
00:00:01,760 --> 00:00:05,920
तो सभी को जय श्री राम। आप सब ने हमारी कल

2
00:00:05,920 --> 00:00:10,000
चर्चा देखी होगी। वही अभी कंटिन्यू होने वाली है

3
00:00:10,000 --> 00:00:16,000
और रिजवान जी आ चुके हैं। हम उनको ले रहे हैं।

4
00:00:20,480 --> 00:00:24,560
जी रिजवान जी। तो हम

5
00:00:24,560 --> 00:00:28,640
लोग वहीं से शुरू करते हैं जहां पे कल थे। और आपका फोन शायद गम हो

6
00:00:28,640 --> 00:00:33,920
गया था तो जिस कारण से वो चले गए।

7
00:00:33,920 --> 00:00:39,920
कुछ इनका कुछ टेक्निकल इश्यूज है शायद इनके यहां पर।

8
00:00:57,680 --> 00:01:02,240
कहां गए रिजवान जी आइए हां जी

9
00:01:02,240 --> 00:01:06,240
कोई टेक्निकल फॉल्ट है क्या अपने आप आप क्विट हो क्विट कर जाते हो

10
00:01:06,240 --> 00:01:10,480
क्या चक्कर है नहीं नहीं वो क्या है ना कि मैंने अभी मैसेज

11
00:01:10,480 --> 00:01:15,280
में गया था मैसेज में जाने के बाद फिर कट हो गया

12
00:01:15,280 --> 00:01:19,280
ओ अच्छा अच्छा तो मैं वो कह रहा था हम

13
00:01:19,280 --> 00:01:23,280
लोग वही से शुरू करते हैं। जैसे प्रश्न यह था कि ईश्वर

14
00:01:23,280 --> 00:01:27,360
सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो सर्वशक्तिमान के विषय में आपने यह तो

15
00:01:27,360 --> 00:01:31,360
नहीं बताया कि भाई अगर वो किसी भी कारण से अगर रुक रहा है

16
00:01:31,360 --> 00:01:35,600
बात मतलब कोई ऐसी चीज है जो वो नहीं कर रहा है और नहीं

17
00:01:35,600 --> 00:01:39,680
कर सकता है तो आप सत्यता वाली बात बोल नहीं रहे। मगर आपकी बातों से वही लगा कि

18
00:01:39,680 --> 00:01:43,680
वो नहीं कर सकता है। फिर उसके बाद जो है आपने कुछ रीज़ंस दिए थे कि वो

19
00:01:43,680 --> 00:01:47,680
इन कारणों से ऐसे वाजिब कारण है जिनकी वजह से उसका ना करना

20
00:01:47,680 --> 00:01:51,840
ही उचित है। और सवाल ये था कि वो कर सकता है कि नहीं। मतलब सवाल

21
00:01:51,840 --> 00:01:56,160
इस बारे में था कि एक होता है कि मैंने

22
00:01:56,160 --> 00:02:00,560
इस बात का चुनाव किया कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना है। ठीक है?

23
00:02:00,560 --> 00:02:05,520
और एक हुआ कि मेरा चुनाव नहीं है। मेरे ऊपर वह लदा हुआ है।

24
00:02:05,520 --> 00:02:09,600
तो यह क्लियर नहीं हो पाया। यह क्लियर आपने नहीं किया कि वो लदा हुआ

25
00:02:09,600 --> 00:02:12,880
है या चुनाव किया है। आपने इस विषय में स्ट्रेट एक जो

26
00:02:12,880 --> 00:02:16,880
साफ सुथरी बात है वो नहीं बोली। उसके बाद हम आगे बढ़े कि भाई जो आप कारण बता रहे हो

27
00:02:16,880 --> 00:02:20,960
ना करने का कि वो जो है गलत चीजें नहीं करता है। तो फिर यह हुआ

28
00:02:20,960 --> 00:02:25,120
कि दुनिया में जो बुराई हो रही है तो वो उसकी सत्ता से बाहर हो रही है कि नहीं हो रही। आपने

29
00:02:25,120 --> 00:02:29,280
बताया कि भाई उसको उनको टेस्ट के लिए भेजा गया है। वो एक इंपॉर्टेंट टेस्ट है। इसलिए

30
00:02:29,280 --> 00:02:33,440
वो नहीं बीच में दखल अंदाजी नहीं करता है। उसने बता दिया है क्या सही है और क्या गलत

31
00:02:33,440 --> 00:02:37,520
है। मगर वो बीच में दखलअंदाजी नहीं करेगा बताने के बाद। तो उसके

32
00:02:37,520 --> 00:02:41,600
बाद अ उसके बाद फिर ये हुआ कि आपने जब

33
00:02:41,600 --> 00:02:45,600
ये पूछा गया कि वो टेस्ट इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? जिसकी वजह से स्ट्रोमा से निकलना पड़ रहा

34
00:02:45,600 --> 00:02:49,680
है। गुजरना पड़ रहा है लोगों को। तो आपने फिर बताया कि अ

35
00:02:49,680 --> 00:02:54,320
वहां पर जब उन्होंने इंसानों को बनाया था तो इंसानों

36
00:02:54,320 --> 00:02:58,400
को उन्होंने जो है जन्नत में जन्नत जैसी कोई जगह

37
00:02:58,400 --> 00:03:02,560
थी वहां पर छोड़ा था और जो विरोधी हो गए थे जिसको इब्लिश

38
00:03:02,560 --> 00:03:06,960
भी कहा गया है ना तो वो जो विरोधी हो गए थे उसने उनको बहकाया बहकाने

39
00:03:06,960 --> 00:03:11,280
की वजह से उन्होंने कुछ गलती की गलती के कारण फिर जो है इस्लाम

40
00:03:11,280 --> 00:03:15,520
के अनुसार जिसे ईश्वर माना जाता है अल्लाह कहा जाता है उसने उनको

41
00:03:15,520 --> 00:03:19,680
जमीन पर भेज दीजिए भेज दिया इस टेस्ट के लिए कि अब तुम में से जो सही व्यक्ति होगा

42
00:03:19,680 --> 00:03:23,840
वह वापस आएगा अन्यथा जो दूसरे होंगे उनको जो है दोजक इत्यादि या जो भी सजाएं

43
00:03:23,840 --> 00:03:27,840
उनकी होंगी वो दी जाएंगी। तो बात ये आ जाती है कि यह

44
00:03:27,840 --> 00:03:28,340
जो

45
00:03:28,000 --> 00:03:32,000
अच्छाई और बुराई है वो जमीनी नहीं है।

46
00:03:32,000 --> 00:03:36,000
वहां पर भी अच्छाई और बुराई है। ये तो पहला पॉइंट है। वहां पर भी मतलब

47
00:03:36,000 --> 00:03:40,640
आपने कहा ना कि उसने मौत और मृत्यु और जन्म को उसने इवॉल्व किया।

48
00:03:40,640 --> 00:03:44,880
है ना? तो इवॉल्व से पहले भी अगर मृत्यु और जन्म को अच्छाई और बुराई

49
00:03:44,880 --> 00:03:49,360
के रूप में देखें तो वहां पर भी अच्छाई और बुराई एक्सिस्ट कर रही है। मतलब टेस्ट

50
00:03:49,360 --> 00:03:53,600
यहां पर है कि अच्छाई और बुराई दोनों चीजें दे दी और अब आपका टेस्ट हो रहा है। मगर

51
00:03:53,600 --> 00:03:57,600
अच्छाई और बुराई वहां पर भी है। तो क्या वहां पर भी टेस्ट चल रहा था? और

52
00:03:57,600 --> 00:04:01,680
दूसरी बात फिर वही वहां पर भी लागू हो जाती है कि जब उसे

53
00:04:01,680 --> 00:04:05,680
मालूम था कि जो इब्लिश है वो बहकाएगा तो उसने इब्लिस को

54
00:04:05,680 --> 00:04:09,680
बनाया ही क्यों था? क्या वहां भी कोई टेस्ट चल रहा था? अगर चल

55
00:04:09,680 --> 00:04:14,320
रहा था तो उस टेस्ट के पीछे की वजह क्या है? ये

56
00:04:14,320 --> 00:04:18,320
एक मिनट रुकिए क्योंकि बहुत सारा सवाल हो गए हैं आपकी बातों में।

57
00:04:18,320 --> 00:04:22,400
जी एक से ज्यादा सवाल हो गए हैं तो एक एक को लेने

58
00:04:22,400 --> 00:04:26,400
में फिर काफी टाइम लग जाएगा। और मैं फिर अपनी बात पूरी नहीं कर

59
00:04:26,400 --> 00:04:30,480
पाऊंगा। आप दूसरी बात कर देंगे। तो मैं चाह रहा हूं कि आज की जो हमारी बातचीत

60
00:04:30,480 --> 00:04:34,560
हो ना वो ऐसी हो कि जब मैं बोलूं तो आप जो है सुने

61
00:04:34,560 --> 00:04:38,640
और फिर जब आप बोलना चाहेंगे तो मैं खामोश हो जाऊंगा ताकि बात बस ये कह

62
00:04:38,640 --> 00:04:43,200
रहा हूं कि मैं जो पूछ मैं बस आपसे इतना निवेदन है मेरा कि मैं जो पूछूं

63
00:04:43,200 --> 00:04:47,440
आप जो भी बोलेंगे आप उसमें मैं जो पूछा है

64
00:04:47,440 --> 00:04:51,680
उसका जवाब इंक्लूड होना चाहिए। ठीक है? बस मेरा इतना निवेदन

65
00:04:51,680 --> 00:04:55,840
है। ऐसा ना हो कि मैंने पूछा कुछ है और आप बहुत सारी चर्चा तो की मगर मैंने

66
00:04:55,840 --> 00:04:59,840
जो पूछा उसका आंसर नहीं दिया। पहली बात। दूसरी बात मैंने इसीलिए

67
00:04:59,840 --> 00:05:04,000
एक बार में अपनी मैंने इसीलिए एक बार में अपनी बात रखी

68
00:05:04,000 --> 00:05:08,320
कि भाई जिससे कि जो इससे रिलेटेड के जुल्म जो

69
00:05:08,320 --> 00:05:12,720
वहां पर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं इससे रिलेटेड जो क्वेश्चन है वैसे तो बहुत सारे हैं

70
00:05:12,720 --> 00:05:16,960
वैसे बहुत सारे हैं मगर इससे रिलेटेड ईश्वर की सत्ता है कि नहीं जहां जुर्म

71
00:05:16,960 --> 00:05:21,040
हो रहा है तो आपने कहा कि यहां पे ईश्वर की सत्ता

72
00:05:21,040 --> 00:05:25,040
है मगर वो नहीं बोलता है क्योंकि टेस्ट है तो वहां पर

73
00:05:25,040 --> 00:05:29,200
भी ईश्वर की सत्ता है जहां पर इब्लीस ने उन्हें बहकाया तो वहां भी वो को नहीं बोला तो वहां भी टेस्ट

74
00:05:29,200 --> 00:05:34,240
था तो फिर जाना पड़ेगा कि उस टेस्ट की वजह क्या थी ये चीज बताइए

75
00:05:34,240 --> 00:05:38,240
मैं पहली चीज ये बताऊंगा अभी जो आपने बात बोली कि ईश्वर ने यहां पर

76
00:05:38,240 --> 00:05:42,320
टेस्ट लिया है तो वो दखल नहीं देगा यहां पे तो ये बातें मैंने कल भी नहीं

77
00:05:42,320 --> 00:05:46,400
बोली थी आप पूरा वीडियो देख लेना कि ईश्वर ने ये दुनिया में भेजा है तो

78
00:05:46,400 --> 00:05:50,560
वो टेस्ट के लिए भेजा है तो वो लेकिन मैं ये कह रहा हूं

79
00:05:50,560 --> 00:05:54,720
आप ना आप जो सवाल पूछा उसको क्लियर करिए अगर मैंने नहीं बोला आपने

80
00:05:54,720 --> 00:05:58,400
नहीं बोला होगा आपके भाव वो नहीं रहे होंगे आपके शब्द वो नहीं रहे होंगे

81
00:05:58,400 --> 00:06:02,480
तो वो देख लेगा। आप जो अपनी है वो बता दीजिए।

82
00:06:02,480 --> 00:06:06,800
आपने क्या नहीं बोला इसकी वजह आप ये बताइए कि आपको बोलना क्या है? हां

83
00:06:06,800 --> 00:06:10,800
वही मैं बता रहा हूं। जैसे आपने कहा कि इब्लीस जो है

84
00:06:10,800 --> 00:06:15,520
वहां पे भी जैसे नाफरमानी है। इब्लीस में

85
00:06:15,520 --> 00:06:20,080
तो ईश्वर चाहता तो वो नाफरमानी नहीं करता।

86
00:06:20,080 --> 00:06:24,080
ये बात कल भी आई थी कि ईश्वर अगर चाहता तो वो नाफरमानी नहीं

87
00:06:24,080 --> 00:06:28,160
करता। तो वो कोई रोबोट तो हां मैं वही

88
00:06:28,160 --> 00:06:32,320
कह रहा हूं ईश्वर ने कोई रोबोट नहीं बनाया है कि उसने प्रोग्राम फिट कर दिया।

89
00:06:32,320 --> 00:06:36,400
अब वो उस प्रोग्राम के मुताबिक ही चलेगा। यानी डिसीजन लेने का

90
00:06:36,400 --> 00:06:40,560
हक हर एक को है। अब वो बात वहां पर भी

91
00:06:40,560 --> 00:06:45,440
वहां पर भी टेस्ट चल रहा है क्या? ना वहां कोई टेस्ट

92
00:06:45,440 --> 00:06:49,600
नहीं वहां टेस्ट नहीं वो हमें याद कराया जा रही है। ये बात वहां की हमें याद

93
00:06:49,600 --> 00:06:53,600
की जा रही कराई जा रही है कि ऐसा हुआ क्या था कि किस कारण से

94
00:06:53,600 --> 00:06:57,680
तुम अपनी उस उपलब्धि से नीचे नीचे उतर गए। उस

95
00:06:57,680 --> 00:07:01,680
उपलब्धि से आप नीचे उतर गए। ये आपको याद दिलाया जा रहा है ताकि आप वापस

96
00:07:01,680 --> 00:07:05,760
उस उपलब्धि को पाकर और इस जमीन से निकल

97
00:07:05,760 --> 00:07:09,760
कर और उन उसी उपलब्धि पर पहुंच गए। मैं कह रहा हूं हमारा सवाल ये था

98
00:07:09,760 --> 00:07:13,600
कि वो बुराई को बनाता है कि नहीं? तो आपने कहा बुराई को वो बनाने वाले

99
00:07:13,600 --> 00:07:17,760
बनाते हुए भी उस पर दोष इसलिए नहीं लगेगा क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। तो

100
00:07:17,760 --> 00:07:22,080
यहां पे तो चलिए टेस्ट हो रहा है इसलिए उस बुराई का दोष नहीं लग रहा है। मगर वहां पे उसने बुराई को बनाया

101
00:07:22,080 --> 00:07:26,080
है तो वो दोष उस पर लगेगा कि नहीं लगेगा को बनाने का?

102
00:07:26,080 --> 00:07:30,160
सुनिए मेरी बात। सुनिए मेरी बात। उसने जो बुराई है उसको

103
00:07:30,160 --> 00:07:34,640
भी इवोल्व किया है ना। तो अब वो बताएगा कि तूने करना क्या है। जैसे

104
00:07:34,640 --> 00:07:38,720
मिसाल के तौर पर सूअर भी ईश्वर ने ही बनाया है। वो गंदगी खाता

105
00:07:38,720 --> 00:07:42,960
है। है ना? वो गंदगी खाता है। सूअर बनाया तो उसे भी सूअर

106
00:07:42,960 --> 00:07:47,200
नहीं है हर एक को लेकिन उसकी बॉडी जो है उसकी रिक्वायरमेंट

107
00:07:47,200 --> 00:07:51,840
गंदगी खाने की है। तो वो गंदगी ही खाएगा।

108
00:07:51,840 --> 00:07:56,320
यानी कि ईश्वर ने ये सोच कर बनाया था ना इब्लीस को कि

109
00:07:56,320 --> 00:08:01,200
बहकाएगा। इससे तो ये सिद्ध हो रहा है। ये किसने कहा

110
00:08:01,200 --> 00:08:05,200
कि ईश्वर ने ये सोच के बनाया कि इब्लीस जो है ना ऐसा करेगा।

111
00:08:05,200 --> 00:08:09,280
मतलब उसको नहीं पता था इब्लीस क्या करेगा? भाई

112
00:08:09,280 --> 00:08:14,000
उसको तो सब पता था उसको सब पता था और

113
00:08:14,000 --> 00:08:18,000
मैं वही कह रहा हूं जब उसको पता था उसने यहां पे यहां पे बुराई

114
00:08:18,000 --> 00:08:22,240
में यहां उसने बुराई बनाई है और वो रोक भी नहीं रहा है

115
00:08:22,240 --> 00:08:26,320
क्योंकि यहां वो टेस्ट ले रहा है वहां पे उसने बुराई बनाई है रोक

116
00:08:26,320 --> 00:08:28,720
नहीं रहा है वहां क्या है वहां भी टेस्ट ले रहा है क्या चक्कर

117
00:08:28,720 --> 00:08:32,800
है इसमें बुराई क्या थी कि ईश्वर ने ये कहा कि

118
00:08:32,800 --> 00:08:37,040
समा मलाइका से देवताओं से कि तुम अरे भैया

119
00:08:37,040 --> 00:08:41,280
जब जब उसने बहकाया वो बहकाना तो बुराई है ना वहां

120
00:08:41,280 --> 00:08:45,280
ईश्वर की सत्ता है कि नहीं किसने बहकाया जब

121
00:08:45,280 --> 00:08:49,520
उसने बहकाया इब्लिशस ने जिसकी वजह से लोगों को सजा मिली

122
00:08:49,520 --> 00:08:53,680
वो नीचे आए फिर ट्रॉमा उनको झेलना पड़ रहा है उनको वो परीक्षा से गुजरना

123
00:08:53,680 --> 00:08:57,680
पड़ रहा है अगर वो बहकाता नहीं तो वो नीचे नहीं आते अगर

124
00:08:57,680 --> 00:09:02,000
वो बहकाता नहीं तो उनको सजा नहीं मिलती तो जब वो बहका जब वो बहका

125
00:09:02,000 --> 00:09:06,720
रहा है जब वो बहका रहा है तो वहां रोक सकते हैं ना उसको ईश्वर मत नहीं बहकाने

126
00:09:06,720 --> 00:09:10,720
बल्कि इब्लीस को बनाएंगे ही नहीं। बल्कि बहकाने वाले को बनाएंगे ही

127
00:09:10,720 --> 00:09:14,880
नहीं। बात ही खत्म। हां जी। सुनिए। वहां इब्लीस

128
00:09:14,880 --> 00:09:19,200
ने नहीं बहकाया है। शैतान ने बहकाया है। किसने बहकाया?

129
00:09:19,200 --> 00:09:23,600
शैतान को शैतान को किसने बनाया? चलिए ईश्वर की

130
00:09:23,600 --> 00:09:27,600
ईश्वर की सत्ता के बाहर है क्या शैतान? शैतान पहले मैं

131
00:09:27,600 --> 00:09:31,760
आपसे कहूंगा आपको समझने के आपको इस्लाम के बारे में बिल्कुल नॉलेज

132
00:09:31,760 --> 00:09:35,760
नहीं है इसलिए मुझे समझाना पड़ेगा और आप अगर समझना नहीं चाहते हैं तो

133
00:09:35,760 --> 00:09:39,760
वो एक अलग बात है। अब शैतान में एक लफ्ज है इसको समझना तो पड़ेगा

134
00:09:39,760 --> 00:09:43,760
ना कि इस लफ्ज से आखिर कहना क्या चाह रहे हैं? बात क्या हो रही है?

135
00:09:43,760 --> 00:09:47,840
जो है ये मत बताइए शैतान क्या है? बस ये बता दीजिए वो ईश्वर की

136
00:09:47,840 --> 00:09:52,000
सत्ता से बाहर है या अंदर है? बस ये बता दीजिए। वो

137
00:09:52,000 --> 00:09:56,320
शैतान जो है ईश्वर ने उसको नकार दिया है। उसको

138
00:09:56,320 --> 00:10:00,320
अपने से दूर कर दिया है शैतान को। मैं कह रहा हूं ईश्वर की सत्ता से बाहर

139
00:10:00,320 --> 00:10:04,880
है कि अंदर है। ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं शैतान पर?

140
00:10:04,880 --> 00:10:09,520
शैतान पर। हां। है ना ईश्वर का कंट्रोल?

141
00:10:09,520 --> 00:10:13,680
तो फिर वो जब जानता है कि शैतान ऐसा कर सकता है, ऐसा करेगा

142
00:10:13,680 --> 00:10:18,080
तो क्यों बना रहा है शैतान को? अरे यार शैतान कोई शख्सियत

143
00:10:18,080 --> 00:10:22,400
नहीं है। अब यही तो आप है ना। शैतान क्या मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं विचार

144
00:10:22,400 --> 00:10:27,760
है चेतना है सोच है तत्व है कुछ तो है

145
00:10:27,760 --> 00:10:31,840
अब मैं समझा देता हूं ना जब आपको पता नहीं है तो पूछ लो ना अरे मैं

146
00:10:31,840 --> 00:10:37,280
कह रहा हूं भाई साहब वो जो भी है कुछ कुछ एलिमेंट है मगर

147
00:10:37,280 --> 00:10:41,920
मगर उसको बनाया तो ईश्वर ने है ना

148
00:10:41,920 --> 00:10:46,160
नहीं आप बताइए वो क्या है मैं क्यों बताऊं भाई साहब

149
00:10:46,160 --> 00:10:50,720
आप आप इसमें देर लगाओगे कि वो ये ये है जबकि मैं पूछ रहा हूं।

150
00:10:50,720 --> 00:10:54,880
मैं पूछ रहा हूं क्या ईश्वर क्या ईश्वर उसको बनाने से

151
00:10:54,880 --> 00:10:59,600
रुक सकता था कि नहीं? ना बनाता। यानी

152
00:10:59,600 --> 00:11:03,760
एक मिनट मुझे वो जो मैं मुझे जो पिक्चर है वो थोड़ी क्लियर कर लेती।

153
00:11:03,760 --> 00:11:07,760
यानी कि आपके अनुसार यहां पर बुराई का

154
00:11:07,760 --> 00:11:11,920
दोष जुर्म को रोकने वाला होते हुए

155
00:11:11,920 --> 00:11:16,000
भी ना रोकने की स्थिति में भी बल्कि उसको जन्म देने की स्थिति

156
00:11:16,000 --> 00:11:20,240
में भी उस बुराई का दोष उस पर नहीं जा रहा है कुरान के ईश्वर पर

157
00:11:20,240 --> 00:11:24,400
क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। अब टेस्ट क्यों ले रहा है? क्योंकि ये लोग जो

158
00:11:24,400 --> 00:11:28,480
थे वो ऊपर थे वो अच्छी अच्छे जीवन में थे। अब वो अच्छे जीवन से गिरे

159
00:11:28,480 --> 00:11:32,720
कैसे कि उनको बहकाया गया कि किसके द्वारा बहकाया गया कि शैतान के द्वारा। शैतान को बनाया

160
00:11:32,720 --> 00:11:36,800
किसने? शैतान को बनाया किसने? उसको इवॉल्व किसने किया

161
00:11:36,800 --> 00:11:41,040
भैया? वो भी ईश्वर ने किया। तो ईश्वर ही बुराई को बना रहा है

162
00:11:41,040 --> 00:11:45,040
जिसके कारण लोग बहक रहे हैं और फिर वो जब नीचे आ रहे हैं तो फिर

163
00:11:45,040 --> 00:11:49,040
ईश्वर उनको ट्रॉमा दे रहा है। वहां ट्रॉमा होने दे रहा है। कह रहा परीक्षा है। परीक्षा है

164
00:11:49,040 --> 00:11:53,360
तो फिर ऊपर क्या चल रहा था? वो भी परीक्षा थी। ऊपर क्यों बनाया?

165
00:11:53,360 --> 00:11:57,520
बुराई को ऊपर क्यों बनाया? हम मेरी बात सुनिए।

166
00:11:57,520 --> 00:12:02,640
आपको ही अगर बोलना है तो आप बोलते रहिए।

167
00:12:02,640 --> 00:12:06,800
भाई साहब आप मुझे ये बताने में लग रहे हो। आप मुझे ये बताने में जा रहे हो। मैं क्या

168
00:12:06,800 --> 00:12:11,440
है आप आप थोड़ा सा कुछ आप ये बता

169
00:12:11,440 --> 00:12:15,520
आप आप शैतान आप शैतान पे बात करिए बोलिए क्या बोलना है? शैतान

170
00:12:15,520 --> 00:12:20,160
पे हां तो जैसे आपको नहीं पता ना शैतान अरबी वर्ड है। शैतान का मतलब होता है

171
00:12:20,160 --> 00:12:24,240
ये शैतान क्या है? नहीं पता है। इससे क्या मैं प्रश्न ये है शैतान

172
00:12:24,240 --> 00:12:28,320
को उसने बनाया है कि नहीं? अरे तो पहले

173
00:12:28,320 --> 00:12:32,480
शैतान है क्या? ये तो जान लो। उससे मतलब अगर

174
00:12:32,480 --> 00:12:36,560
शैतान अगर शैतान कुछ ऐसा है जिसको जिसको ईश्वर ने नहीं

175
00:12:36,560 --> 00:12:40,560
बनाया ये बता दो शैतान कुछ ऐसा है जिसका जिस पर उसका कंट्रोल

176
00:12:40,560 --> 00:12:44,560
नहीं है ईश्वर का ये बता दो ये तो क्लियर करो

177
00:12:44,560 --> 00:12:49,200
जब उसका जो चलो बताओ बताओ शैतान क्या है

178
00:12:49,200 --> 00:12:53,280
बताओ शैतान ही कौन है आपको पता ही नहीं है शैतान अरबी वर्ड है उसके शब्द के

179
00:12:53,280 --> 00:12:57,360
अर्थ से ही तो पता चलेगा बताओ बताओ यह मत बोलो आपको

180
00:12:57,360 --> 00:13:03,360
नहीं पता आपको नहीं पता इसमें देर मत करो आप वो बताओ है क्या

181
00:13:04,400 --> 00:13:08,480
आपको इसमें ज्यादा इंटरेस्ट है कि आप मुझे क्या-क्या नहीं पता इसमें इंटरेस्ट

182
00:13:08,480 --> 00:13:12,800
नहीं है शैतान क्या है बताइए भाई साहब मैं वही कोशिश

183
00:13:12,800 --> 00:13:17,120
कर रहा हूं आप बीच में ठोक रहा आप बताने दीजिए ठीक है शैतान

184
00:13:17,120 --> 00:13:21,280
है इसका मतलब होता है दूर कर देने वाला दूर हो जाने वाला

185
00:13:21,280 --> 00:13:25,360
दूर कर देने ईश्वर से दूर करने वाला अब शैतान बोलते

186
00:13:25,360 --> 00:13:29,600
वो चाहते जो भी चाहते हम करते हैं या कोई भी करता है वो

187
00:13:29,600 --> 00:13:34,000
चाहत जो ईश्वर से दूर कर दे वो होती है शैतान।

188
00:13:34,000 --> 00:13:38,240
वो चाहत है। अब मैं अगर कोई चाहत करता हूं और वो चाहत मेरी

189
00:13:38,240 --> 00:13:42,400
अगर मुझे ईश्वर से दूर करती है तो वो मेरी चाहत शैतान होती

190
00:13:42,400 --> 00:13:46,400
है। और ये शैतान इंसानों में से भी होते हैं और जिनों में से

191
00:13:46,400 --> 00:13:50,640
भी होते हैं। दोनों में से होते हैं कि जो ईश्वर से दूर होने वाली चाहते

192
00:13:50,640 --> 00:13:54,800
करते हैं कि वो चाहते उन्हें ईश्वर से के करीब नहीं करती है बल्कि

193
00:13:54,800 --> 00:13:59,280
ईश्वर से दूर करती है। और फिर भी वो ये चाहते करते हैं।

194
00:13:59,280 --> 00:14:03,280
ये चाहते करते हैं। तो शैतान जो है हमारे अंदर की जो चाहत है

195
00:14:03,280 --> 00:14:07,520
हमें पता है कि भाई ये चाहत करने से मैं ईश्वर से दूर हो जाऊंगा

196
00:14:07,520 --> 00:14:11,600
लेकिन फिर भी मैं वो चाहत करके ईश्वर से दूर हो जाता हूं तो ईश्वर

197
00:14:11,600 --> 00:14:15,760
ने मुझे शैतान की पैरवी करने से मना किया है शैतान

198
00:14:15,760 --> 00:14:19,600
की इबा पीछे चलने से मना किया यानी उन चाहो वो एक

199
00:14:19,600 --> 00:14:24,000
विचार है ये बात मैंने पहले बोली थी वो एक विचार है चाहत

200
00:14:24,000 --> 00:14:28,000
विचार है चाहत रूपी विचार मैंने ये बात बोली थी कि वो विचार

201
00:14:28,000 --> 00:14:32,720
हो सकता है मानसिकता हो सकती है मैंने सब बात बोली थी। खैर अब मैं आ रहा हूं। क्या

202
00:14:32,720 --> 00:14:36,720
क्या चाहत पे मैं मैं आ रहा हूं पॉइंट पे। क्या उस चाहत पे

203
00:14:36,720 --> 00:14:41,280
ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं? है ना?

204
00:14:41,280 --> 00:14:45,280
तो फिर उसने उसको क्यों रिवॉल्व होने दिया? तो

205
00:14:45,280 --> 00:14:50,000
उसने रूह डाल के एक लिबास पहना दिया ना तकवे का। तकवा

206
00:14:50,000 --> 00:14:54,000
पहना दिया। हिफाजत करना। उन चाहतों से कैसे हिफाजत करें अपनी कि हम

207
00:14:54,000 --> 00:14:58,480
ईश्वर से दूर ना हो। अरे मैं कह रहा हूं जो चाहत जो चाहत

208
00:14:58,480 --> 00:15:02,720
किसी को बहका सकती है, नीचे जाने का कारण बन सकती है, उसको

209
00:15:02,720 --> 00:15:06,720
ट्रॉमा दिलवाने का कारण बन सकती है, उसको ईश्वर क्यों बना

210
00:15:06,720 --> 00:15:10,800
रहा है? आपने कहा था कि नीचे सुनिए, मेरी बात

211
00:15:10,800 --> 00:15:14,960
ध्यान से सुनिए। प्रश्न यह था कि बुराई को बनाने

212
00:15:14,960 --> 00:15:19,200
की स्थिति में दोष तब नहीं लगेगा जब बुराई को बनाने

213
00:15:19,200 --> 00:15:23,280
वाला किसी एक विशेष उद्देश्य से टेस्ट के

214
00:15:23,280 --> 00:15:27,440
उद्देश्य से उसको बना रहा है। ठीक है? ये बात हमारी हुई है।

215
00:15:27,440 --> 00:15:31,920
अब मैं वहां पर सिद्ध कर रहा हूं कि उसने बुराई ऊपर भी बनने दी। बनाई

216
00:15:31,920 --> 00:15:34,720
ऊपर भी उसने बुराई बनाई। तो फिर दोष तो

217
00:15:34,720 --> 00:15:38,800
वहां लग गया। यहां नहीं लगेगा। यहां टेस्ट है तो वहां क्या था? वहां क्यों बनाई?

218
00:15:38,800 --> 00:15:42,800
वहां चाह क्यों बनाई? तो ये किसने कहा? आप

219
00:15:42,800 --> 00:15:46,800
भाई साहब आप बताइए वहां चाहत क्यों बनाई दूर ले जाने वाली? उस पर

220
00:15:46,800 --> 00:15:52,000
हक था कि नहीं ईश्वर का? चाहत तो ऑलरेडी थी ना।

221
00:15:52,000 --> 00:15:57,680
भाई जो इब्लीस जो मायूस वो ईश्वर की सत्ता के बाहर थी।

222
00:15:57,680 --> 00:16:01,680
सत्ता के बाहर कैसे हो सकती है? ईश्वर के कंट्रोल के बाहर थी

223
00:16:01,680 --> 00:16:05,920
क्या वो चाहत? ईश्वर के कंट्रोल के बाहर तो कोई

224
00:16:05,920 --> 00:16:09,920
चीज नहीं है। तो फिर क्यों कह रहे हो? वो तो थी। ईश्वर उसको रोक सकता

225
00:16:09,920 --> 00:16:14,080
था ना उस चाहत को रोक सकता था ना तो रोबोट

226
00:16:14,080 --> 00:16:18,400
नहीं बनाया ना तो यानी कि वो रोक सकता यानी

227
00:16:18,400 --> 00:16:22,480
कि वो रोक सकता था मगर नहीं रोका तो रोबोट हो जाता

228
00:16:22,480 --> 00:16:26,560
ना फिर तो रोबोट से क्या मतलब है आपको उसको

229
00:16:26,560 --> 00:16:30,720
उसको क्या करना एक आदमी सुनिए मेरी बात सुनिए दो मिनट दो मिनट दो मिनट

230
00:16:30,720 --> 00:16:34,960
दो मिनट दो मिनट दो मिनट दो मिनट एक आदमी सलाम पीना चाह रहा है

231
00:16:34,960 --> 00:16:38,960
ना अब ईश्वर ने उसकी प्रोग्रामिंग ऐसी कर दी वो शराब पी ही ना

232
00:16:38,960 --> 00:16:43,280
सके। तो ये रोबोट ही हुआ ना। तो भाई साहब उसने तो रोबोट

233
00:16:43,280 --> 00:16:47,360
ही बनाए थे ना जो मेरी इबादत करे मेरे अनुसार चले। क्या बनाए

234
00:16:47,360 --> 00:16:49,840
थे उसने? कौन सा आदेश गलत बताया इंसान को?

235
00:16:49,840 --> 00:16:53,920
ये बताओ कि ये आदेश उसका गलत है? कौन सा आदेश गलत है स्वर्ग में? मैं

236
00:16:53,920 --> 00:16:58,720
आदेश गलत की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं। उसका उदेश उसका उद्देश्य

237
00:16:58,720 --> 00:17:03,360
उसका उद्देश्य क्या था बनाने का? उसमें

238
00:17:03,360 --> 00:17:07,520
उसमें उसने जो उसमें उसने जो

239
00:17:07,520 --> 00:17:12,560
उसको चाहत दी है ना बुरी चाहत उसको देने का उद्देश्य क्या था

240
00:17:12,560 --> 00:17:16,640
चाहत तो नब्स कर रहा है ना यार फिर आप कहां चले जाते हो का की बात हो

241
00:17:16,640 --> 00:17:21,360
दी किसने चाहत उसे उसका निमित्त कारण क्या है किस

242
00:17:21,360 --> 00:17:26,000
चाहत है तो इंसान जब करेगा ना जब इंद्रियों का इस्तेमाल करेगा

243
00:17:26,000 --> 00:17:30,960
चाहते कब करेगा है वहां पे इंद्रियां है कहां

244
00:17:30,960 --> 00:17:35,120
वहां जहां आता मैं जन्नत है वहां पर उन्होंने चार

245
00:17:35,120 --> 00:17:39,200
तो पहले वहां की बात कर लो। अरे वही की तो बात कर रहा हूं। वही की बात कर

246
00:17:39,200 --> 00:17:43,360
रहा हूं। शैतान ने बहकाया अच्छा ये बताओ एक मिनट शैतान

247
00:17:43,360 --> 00:17:47,600
ने बहकाने की बात कहां पे कही थी? हां। तो शैतान ने जो बहकाया

248
00:17:47,600 --> 00:17:51,600
फिसलाया उन चाहतों ने तो उससे पहले भी कुछ हुआ होगा ना। वो

249
00:17:51,600 --> 00:17:55,840
वो बता दीजिए। पहले क्या हुआ था? उससे पहले भी कुछ हुआ। जब अल्लाह

250
00:17:55,840 --> 00:18:00,720
ने कहा कि तुम दोनों क्या हुआ? भाई साहब वो क्या हुआ था वो बता दीजिए।

251
00:18:00,720 --> 00:18:05,120
क्या हुआ? हां जब कहा कि तुम दोनों जन्नत में ठहरो

252
00:18:05,120 --> 00:18:09,120
और जहां से जी चाहे खाओ और पियो लेकिन इस दरख्त के

253
00:18:09,120 --> 00:18:13,200
करीब ना जाना। तो फिर शैतान ने उन दोनों

254
00:18:13,200 --> 00:18:17,760
को फिसला दिया उससे। उससे फिसलाया।

255
00:18:17,760 --> 00:18:21,760
वो शैतान वो चाहत वो बुराई ईश्वर की सत्ता के अंदर है या

256
00:18:21,760 --> 00:18:25,920
बाहर है। मैं ये पूछ रहा हूं। तो पहले बात सुनोगे फिर बाद

257
00:18:25,920 --> 00:18:30,080
में डिसाइड करना आप कि सत्ता से बाहर है या अंदर है पहले पूरी बात तो सुनोगे

258
00:18:30,080 --> 00:18:34,400
ना ठीक है भैया बोलिए बोलिए जब आदम को जन्नत में ठहराया

259
00:18:34,400 --> 00:18:39,120
तो एक कंडीशन रख दी कि ये एक सजरा है एक दरख्त है इसके करीब ना जाना

260
00:18:39,120 --> 00:18:43,200
तो शैतान जो है यानी शैतान कौन है वो चाहते इंसान जो करता है

261
00:18:43,200 --> 00:18:47,680
जो उसे दूर ले जाती है ईश्वर से वो चाहते ख्याल डालने लगी जो ईश्वर

262
00:18:47,680 --> 00:18:51,920
जो शैतान है वो चाहते उन्होंने वसवसा किया और

263
00:18:51,920 --> 00:18:56,000
हमारा जो एक पहलू सही होता है, एक पहलू गलत होता है।

264
00:18:56,000 --> 00:19:00,080
उनके बीच में मतभेद हुआ। ये उनके

265
00:19:00,080 --> 00:19:04,800
बीच में मतभेद हुआ। उस सजरे के करीब ईश्वर का वहां पर

266
00:19:04,800 --> 00:19:09,440
उद्देश्य क्या था बनाने का? यही

267
00:19:09,440 --> 00:19:13,760
ईश्वर ने तो जमीन में खाली उत्तराधिकारी बनाना था। लेकिन

268
00:19:13,760 --> 00:19:18,880
उसने इब्लीस ने पहले ही नाफरमानी करके और अपनी

269
00:19:18,880 --> 00:19:20,160
पूछ रहा हूं आदम को

270
00:19:20,160 --> 00:19:24,400
बनाने का उद्देश्य क्या था? आदम को इंसान

271
00:19:24,400 --> 00:19:28,720
को बताया था कल कि ईश्वर की ताबेदारी करें। ईश्वर के आदेशों की पालना

272
00:19:28,720 --> 00:19:32,960
करके जीवन व्यतीत करें। तो जब उसका उद्देश्य ये था तो उसमें

273
00:19:32,960 --> 00:19:37,280
उसने बुराई को क्यों डाल दिया कि ये चार्ज कर सके। दूसरी केवल इबादत

274
00:19:37,280 --> 00:19:41,920
की थी उसके ना किसने डाल दिया बुराई?

275
00:19:41,920 --> 00:19:45,920
ईश्वर ने। दोनों नहीं ईश्वर ने उसको दोनों रास्ते बताए

276
00:19:45,920 --> 00:19:49,920
कि ये रास्ता तुझे मुझसे दूर ले जाएगा। ये रास्ता मेरे करीब कर देगा।

277
00:19:49,920 --> 00:19:53,920
आपने दोनों मैं पूछ रहा हूं दोनों मैं पूछ रहा हूं दोनों

278
00:19:53,920 --> 00:19:58,000
रास्ते क्यों बताएं क्यों बताएं ताकि इंसान सही

279
00:19:58,000 --> 00:20:02,080
रास्ता चुने और गलत चुनेगा तो उसे भुगत इससे

280
00:20:02,080 --> 00:20:06,800
उसका क्या उसका उद्देश्य था कि मेरी इबादत करे उसका उद्देश्य क्या है ये बताओ

281
00:20:06,800 --> 00:20:10,880
उद्देश्य हां तो उद्देश्य जो है उसकी इबादत करना

282
00:20:10,880 --> 00:20:14,880
यानी उसकी बात के ताबे हो जाना तो जब वो बताएगा ना कि

283
00:20:14,880 --> 00:20:19,440
जब ये है उद्देश्य जब यह है तो दूसरा रास्ता बताने की जरूरत क्या है

284
00:20:19,440 --> 00:20:23,840
दूसरा रास्ता बताने की जरूरत है ना?

285
00:20:23,840 --> 00:20:28,400
दूसरा रास्ता बताने की जरूरत है कि शायद वो मनोरंजन

286
00:20:28,400 --> 00:20:31,520
करना चाहता हो अपना।

287
00:20:31,520 --> 00:20:35,280
ये आप कह रहे हैं। तो आप बता दो। फिर उद्देश्य बता दो

288
00:20:35,280 --> 00:20:39,840
दूसरा। उसने ये बताया है कुरान में के

289
00:20:39,840 --> 00:20:43,920
अगर अल्लाह अपने पास अगर कोई खेल करना चाहता तो वो अपने

290
00:20:43,920 --> 00:20:48,240
पास से कर लेता। तुम्हें बनाने की जरूरत नहीं पड़ती उसे। तो

291
00:20:48,240 --> 00:20:52,800
भाई साहब दूसरा रास्ता क्यों बताया? दूसरा रास्ता क्यों बताया?

292
00:20:52,800 --> 00:20:56,800
दूसरा रास्ता क्यों बताया? ये बताइए। उसने

293
00:20:56,800 --> 00:21:00,880
एक ये जो दुनिया है ये खेल तमाशा है। लेकिन उसने ये खेल तमाशे

294
00:21:00,880 --> 00:21:05,040
के लिए नहीं बनाई है। यहां पे सीरियसली कोई बात है जो समझने की जरूरत

295
00:21:05,040 --> 00:21:09,680
है वो ये है कि हम हम सबको ईश्वर के करीब होना है। वापस

296
00:21:09,680 --> 00:21:13,680
भाई साहब आप ट्रैक बदल रहे हैं। मैं कह रहा हूं दूसरा दूसरा दूसरी चीज

297
00:21:13,680 --> 00:21:17,920
को डालने का। जब उसका उदेश उसका उसका उदेश

298
00:21:17,920 --> 00:21:21,920
इबादत था तो दूसरी चीज को डालने का वो क्या था? मेरी बात

299
00:21:21,920 --> 00:21:26,000
सुनिए ईश्वर सर्वशक्तिमान है। इस पर हम बहस कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं।

300
00:21:26,000 --> 00:21:30,160
है ना? तो ईश्वर के सर्वशक्तिमान होने पर मैंने आपको कल भी बताया

301
00:21:30,160 --> 00:21:34,320
था के तीन बातें बताई थी कि उसके जैसा कोई नहीं है

302
00:21:34,320 --> 00:21:38,400
और एक बताया था आपको के ये सब

303
00:21:38,400 --> 00:21:42,400
बातें हम कर चुके हैं उसके डीप में आए हैं वो चीज क्लियर हुई नहीं

304
00:21:42,400 --> 00:21:46,400
कि उस चुनाव है या दबाव है एक मिनट उसप चुनाव है

305
00:21:46,400 --> 00:21:50,320
या दबाव है वो तो क्लियर हुआ नहीं एक मिनट भाई साहब एक मिनट उसप चुनाव है

306
00:21:50,320 --> 00:21:54,400
या दबाव है वो तो क्लियर हुआ नहीं अब उसके बाद आगे जब हम बढ़े हैं चलिए

307
00:21:54,400 --> 00:21:58,560
आपके वाजिब कारण को टटोलते तो उसमें यह बात आई है कि क्या

308
00:21:58,560 --> 00:22:02,560
वो बुराई को बनाने वाला है? तो आपने कहा कि भाई वो यहां पर बुराई में

309
00:22:02,560 --> 00:22:06,640
बुराई जो वो बना रहा है जो एक्सिस्ट कर रही है मगर वो परीक्षा लेने के कारण

310
00:22:06,640 --> 00:22:10,640
नहीं बोलता। उसने कानून तो बताया है। उसने कानून बता दिया है कि

311
00:22:10,640 --> 00:22:14,800
कानून लागू हो। उसने सब किया है। मगर वो तब भी उसके बाद अगर लागू

312
00:22:14,800 --> 00:22:18,960
नहीं हो रहा है तो बोल सकता है पर वो नहीं बोलता क्योंकि उसको टेस्ट लेना है। अगर वो बोल देगा

313
00:22:18,960 --> 00:22:23,040
टेस्ट खत्म हो जाएगा। तो उसको टेस्ट क्यों लेना है? क्योंकि ये लोग भटक के ऊपर से नीचे

314
00:22:23,040 --> 00:22:27,360
आए हैं। इनको सजा मिली है। उसने बोला

315
00:22:27,360 --> 00:22:31,760
एक मिनट अब ऊपर से ऊपर अब वो ऊपर से नीचे जो आए हैं

316
00:22:31,760 --> 00:22:35,920
वो इसलिए आए हैं क्योंकि ईश्वर ने जब अपनी इबादत करने के

317
00:22:35,920 --> 00:22:39,920
लिए आदम को बनाया तो उसने साथ में एक बुराई रूपी चाहत को

318
00:22:39,920 --> 00:22:44,000
भी बनाया जो आदम को दे दी तो उसको जब अपनी इबादत करवानी थी

319
00:22:44,000 --> 00:22:48,000
तो उसको जब एक मिनट रुकना एक मिनट रुकना आप जो भी बात कह रहे हो

320
00:22:48,000 --> 00:22:52,160
ना ये वो देनी लिखी है कहीं नहीं लिखी

321
00:22:52,160 --> 00:22:56,240
हुई है जो आप बोल रहे हो जो आप बोल रहे हो वही बोल रहा हूं। जो आप

322
00:22:56,240 --> 00:23:01,120
बोल रहे हो वही बोल रहा हूं। अब ठीक है। इस वाले इस

323
00:23:01,120 --> 00:23:05,200
चुके इंसान के अंदर बुराई ईश्वर ने

324
00:23:05,200 --> 00:23:05,700
रखी

325
00:23:05,520 --> 00:23:09,680
और अच्छाई भी ईश्वर ने रखी। यही बोल रहा हूं ना और ईश्वर चाहता तो रोक सकता

326
00:23:09,680 --> 00:23:13,760
था। नहीं रखता। मतलब इंसान भी जो है बिल्कुल गलतियां करने से

327
00:23:13,760 --> 00:23:18,240
ही पाक हो जाता कि उससे कोई गलती हो ही ना। ऐसा बना

328
00:23:18,240 --> 00:23:22,320
तो उसने अपने उसने उसका उद्देश्य था कि मेरी इबादत करे। उद्देश्य ये

329
00:23:22,320 --> 00:23:26,640
नहीं था कि वो उसकी जांच करे कि अच्छाई चुनता है कि बुराई चुनता है।

330
00:23:26,640 --> 00:23:31,280
आदम को बनाने का उद्देश्य था। आदम को बनाने का उद्देश्य क्या था?

331
00:23:31,280 --> 00:23:35,520
आदम को बनाने का उद्देश्य क्या था? आदम को बनाने का उद्देश्य

332
00:23:35,520 --> 00:23:39,760
क्या था भाई साहब? इंसान को बनाने का उद्देश्य कल बताया

333
00:23:39,760 --> 00:23:43,840
था कि ईश्वर के आदेशों के ताबे हो। बस

334
00:23:43,840 --> 00:23:48,000
तो ये अगर ये उद्देश्य है तो अगर यह उद्देश्य

335
00:23:48,000 --> 00:23:52,320
है तो भटकाने वाली चीज डालने का कोई मतलब नहीं था जो भटका सके

336
00:23:52,320 --> 00:23:55,920
ऐसी चीज का क्रिएशन कोई

337
00:23:55,920 --> 00:24:00,080
भटकाने वाली चीज कौन डाल रहा है ये बताइए क्या ईश्वर डाल रहा है ईश्वर भटका

338
00:24:00,080 --> 00:24:04,080
रहा है तो ईश्वर के बिना आ रही है वो ईश्वर के बिना आ रही

339
00:24:04,080 --> 00:24:09,280
है शैतान अभी समझाया तो सही आपको

340
00:24:09,280 --> 00:24:14,320
चाहत वो जो चाहत का तत्व है वो वो ईश्वर ने बताया है कि नहीं?

341
00:24:14,320 --> 00:24:18,560
एक मिनट सुनिए आप। अब दो मिनट सुनोगे। बात पूरी होने नहीं देता।

342
00:24:18,560 --> 00:24:20,640
सुनिए मेरी बात। चाहत जैसे अभी मैं

343
00:24:20,640 --> 00:24:24,720
चाहत करूं कि मुझे सच बोलना है लेकिन मुझे कहीं

344
00:24:24,720 --> 00:24:29,040
पर झूठ बोलने में फायदा नजर आ रहा है। तो मैंने चाहत क्या की?

345
00:24:29,040 --> 00:24:33,120
उस वक्त झूठ बोलने की क्योंकि मुझे मेरा फायदा नजर आ रहा है। लेकिन मुझे ये भी

346
00:24:33,120 --> 00:24:37,200
पता है कि झूठ बोलना गलत है। ईश्वर ने झूठ बोलने से मना किया है।

347
00:24:37,200 --> 00:24:41,360
लेकिन मैं ये चाहत कर रहा हूं कि झूठ बोलूंगा तो फायदा होगा। तो यह चाहत

348
00:24:41,360 --> 00:24:45,520
मैं कर रहा हूं ना। भाई मैं कर रहा हूं। ईश्वर थोड़ी कह रहा

349
00:24:45,520 --> 00:24:50,160
भाई क्या चाहत पे ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं बताइए।

350
00:24:50,160 --> 00:24:54,160
तभी तो रोकने के लिए उसने आदेश दिया है कि तुम झूठ मत बोलो। मतलब

351
00:24:54,160 --> 00:24:58,160
ये वो ये कंट्रोल है कि वो जो है शिक्षा देगा। मगर ये कंट्रोल नहीं

352
00:24:58,160 --> 00:25:03,200
है कि आपके माइंड में वो चाहत आए ही ना। ये कंट्रोल नहीं है।

353
00:25:03,200 --> 00:25:07,280
वो आप जब उस मकाम पे पहुंचोगे ना तब वो जहाज भी आना

354
00:25:07,280 --> 00:25:12,400
बंद। कंट्रोल है कि नहीं कि वो चाहत ना

355
00:25:12,400 --> 00:25:16,880
हां वो है ना ऐसे ऐसे ऐसी भी स्थिति है कित है

356
00:25:16,880 --> 00:25:20,880
उसके पास कंट्रोल है कि चाहत आए ना फिर भी वो चांद को आने दे रहा

357
00:25:20,880 --> 00:25:26,000
है ना हम वहां तक नहीं जा पा रहे ठीक है ठीक है

358
00:25:26,000 --> 00:25:30,000
ये वाली बात हम लोग बहुत कर चुके इसी से संबंधित एक अगली चीज है वो

359
00:25:30,000 --> 00:25:34,240
ये है कि जो ईश्वर के जो कंट्रोल है

360
00:25:34,240 --> 00:25:35,760
सत्ता

361
00:25:35,760 --> 00:25:39,760
ठीक है वो सब जगह एक बराबर है या

362
00:25:39,760 --> 00:25:43,760
फिर ऐसा है कि जहां पर ईश्वर है वहां ज्यादा है और जहां पर ईश्वर नहीं है

363
00:25:43,760 --> 00:25:48,400
वहां पर कम है।

364
00:25:48,400 --> 00:25:54,080
हेलो हम

365
00:25:54,080 --> 00:25:58,160
मैं ये पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि ईश्वर

366
00:25:58,160 --> 00:26:02,800
का जो कंट्रोल है हेलो चले गए

367
00:26:02,800 --> 00:26:06,960
आवाज आ रही है? हेलो हां बोलिए

368
00:26:06,960 --> 00:26:11,440
हां बोलिए बोलिए मैं पूछ रहा हूं ईश्वर का जो है

369
00:26:11,440 --> 00:26:15,600
ईश्वर का जो कंट्रोल है वो ऐसा है कि जहां पर

370
00:26:15,600 --> 00:26:21,280
ईश्वर है वहां ज्यादा है या फिर सब जगह एक बराबर है

371
00:26:21,280 --> 00:26:25,520
पूरा कंट्रोल ईश्वर का कंट्रोल जो है ना हर चीज

372
00:26:25,520 --> 00:26:29,520
है हां पूरा मुकम्मल कंट्रोल है पूरा एक बराबर ऐसा

373
00:26:29,520 --> 00:26:33,680
नहीं है जहां वो बैठा है वहां ज्यादा है ऐसा नहीं है जहां वो बैठा है वहां ज्यादा

374
00:26:33,680 --> 00:26:38,320
है और जहां पर वो नहीं है जहां पर भी वो है

375
00:26:38,320 --> 00:26:41,680
नहीं नहीं बेटा कहां है वो

376
00:26:41,680 --> 00:26:47,120
भाई है कहीं पर वो है ना

377
00:26:47,120 --> 00:26:52,480
हां कहीं भी है चलो ठीक है हां हां ठीक है उसकी ज्ञान

378
00:26:52,480 --> 00:26:56,480
मैं मेरा सवाल ये है कि कहीं एक जगह पर जहां पर वो है

379
00:26:56,480 --> 00:27:00,480
वहां ज्यादा है और पूरी पूरी दुनिया जहां पर वो नहीं

380
00:27:00,480 --> 00:27:05,440
है वहां पर कम है ऐसा तो नहीं है सब जगह के बराबर कंट्रोल है ना?

381
00:27:05,440 --> 00:27:09,760
हां, उसका कंट्रोल है सब जगह। ठीक है। बराबर

382
00:27:09,760 --> 00:27:13,760
कम ज्यादा तो नहीं है ना? बराबर बोले

383
00:27:13,760 --> 00:27:18,080
तो बराबर मतलब एक समान जितना जहां पर वो है

384
00:27:18,080 --> 00:27:22,240
जितना वहां कंट्रोल है, जहां पर वो नहीं है, वहां पर भी उतना ही कंट्रोल है।

385
00:27:22,240 --> 00:27:26,480
सब जगह बराबर कंट्रोल है उसका। एक

386
00:27:26,480 --> 00:27:28,960
समान।

387
00:27:28,960 --> 00:27:33,120
एक समान। अरे जितना यहां है उतना

388
00:27:33,120 --> 00:27:37,360
ही यहां भी है। कहीं कम ज्यादा नहीं है।

389
00:27:37,360 --> 00:27:41,360
बात सुनिए। बराबर कंट्रोल का मतलब जैसे मैं मेरी बात सुनिए।

390
00:27:41,360 --> 00:27:45,360
जैसे कोई अभी कल आपने कहा था ना कि उसने नियम बनाए

391
00:27:45,360 --> 00:27:49,360
तो उस नियम के आधार पे सारी चीज कंट्रोल में है। सूरज अपनी जगह पे कंट्रोल

392
00:27:49,360 --> 00:27:53,680
में है। चांद अपनी जगह कंट्रोल में है। हर चीज कंट्रोल में है।

393
00:27:53,680 --> 00:27:57,760
मेरा ये दो की बात मेरा प्रश्न दूसरा है

394
00:27:57,760 --> 00:28:01,840
भाई साहब। मेरा प्रश्न दूसरा है। मैं यह कह रहा हूं कि जहां पर वो बैठा

395
00:28:01,840 --> 00:28:05,920
जहां पर वो है एक्सिस्ट करता है जहां पर वहां पर ऐसा तो नहीं है। वहां

396
00:28:05,920 --> 00:28:07,600
ज्यादा कंट्रोल हो जहां पर वो

397
00:28:07,600 --> 00:28:13,520
नहीं है वहां पर कम कंट्रोल हो। ऐसा तो नहीं है।

398
00:28:13,520 --> 00:28:17,520
जहां पर वो है और जहां पर ये सृष्टि

399
00:28:17,520 --> 00:28:22,800
है जो भी रचना है उसकी तो उन रचनाओं पे ही तो कंट्रोल होगा ना।

400
00:28:22,800 --> 00:28:26,960
रचनाओं पे ही तो कंट्रोल होगा जो भी उसने रचना की मैं ये कह रहा हूं जहां

401
00:28:26,960 --> 00:28:30,960
वो स्वयं है मैं कह रहा हूं जहां वो स्वयं है

402
00:28:30,960 --> 00:28:35,200
वहां का जो एरिया है जहां वो स्वयं है ठीक है वहां पर ऐसा

403
00:28:35,200 --> 00:28:39,360
तो नहीं ज्यादा कंट्रोल हो और जहां पर वो नहीं है सृष्टि उसमें थोड़ा कम

404
00:28:39,360 --> 00:28:43,680
कंट्रोल हो ऐसा तो है नहीं बराबर कंट्रोल है ना सब जगह मुकम्मल

405
00:28:43,680 --> 00:28:48,240
कंट्रोल है मुकम्मल मुकम्मल में तमाम चीजें आ गई तमाम कंट्रोल पूरा

406
00:28:48,240 --> 00:28:52,720
कंट्रोल है उसका पूरा पूरा अच्छा अब ये बता दीजिए

407
00:28:52,720 --> 00:28:55,120
कि

408
00:28:55,120 --> 00:28:59,280
जहां पर वो नहीं है वहां पर उसका कंट्रोल किस माध्यम

409
00:28:59,280 --> 00:29:04,640
से हो रहा है? कहां पर नहीं है?

410
00:29:04,640 --> 00:29:09,040
जैसे जहां आप हो वहां तो नहीं है ना वो सर्वव्यापी नहीं है ना ईश्वर आपका।

411
00:29:09,040 --> 00:29:13,200
सर्व्यापी है कि नहीं? मुझे देख नहीं रहा है। अभी मैं बैठा हूं। मुझे देख नहीं रहा है।

412
00:29:13,200 --> 00:29:17,440
मैं वही कह रहा हूं। किस माध्यम से देख रहा है भाई साहब? मैं वही कह रहा हूं। किस माध्यम

413
00:29:17,440 --> 00:29:21,440
से देख रहा है। एक गुण बताता हूं। वो बसीर है।

414
00:29:21,440 --> 00:29:23,040
बसीर बसीर

415
00:29:23,040 --> 00:29:29,040
का क्या मतलब देखने वाला है। बसीर का मतलब यही है कि वो

416
00:29:29,440 --> 00:29:33,440
भाई साहब मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं वो सब जगह है कि नहीं

417
00:29:33,440 --> 00:29:37,440
ये बताओ। हां बिल्कुल सब

418
00:29:37,440 --> 00:29:41,520
जगह है। सर्वव्यापी है। हां लेकिन जात

419
00:29:41,520 --> 00:29:45,520
के ऐतबार से नहीं। जात समझ रहे हो जातो

420
00:29:45,520 --> 00:29:49,760
जात के ऐतबार से नहीं है। हां जात वो अपनी

421
00:29:49,760 --> 00:29:54,160
अपने कंट्रोल के रूप अपने कंट्रोल के ऐतबार से है।

422
00:29:54,160 --> 00:29:58,400
हां कंट्रोल के ऐतबार से हर जगह है। उसके इल्म के ऐतबार

423
00:29:58,400 --> 00:30:02,720
से हर जगह है। और उसकी रूह जो उसने हर एक चीज को अस्तित्व

424
00:30:02,720 --> 00:30:06,800
देने के लिए उसके रूह की वजह से वो हर जगह है।

425
00:30:06,800 --> 00:30:10,960
अच्छा तो ये इसमें से मेन चीज कौन सी है? जिसकी वजह से वो हर जगह है।

426
00:30:10,960 --> 00:30:15,040
एक मान ले कि वो अपनी शक्ति के कारण हर जगह है। ये मान सकते हैं।

427
00:30:15,040 --> 00:30:20,880
अगर एक एक बात एक शब्द से कहे तो अपनी शक्ति के कारण हर जगह है।

428
00:30:20,880 --> 00:30:24,960
हां उसकी शक्ति के कारण हर जगह है। ठीक है? ये समझ

429
00:30:24,960 --> 00:30:29,120
लो। तो जैसे वो यहां पर है और अपनी शक्ति के कारण उसका

430
00:30:29,120 --> 00:30:33,120
कंट्रोल सब जगह है। इसलिए कहा जाता है कि वो सब जगह है। वस्तुत

431
00:30:33,120 --> 00:30:36,480
वो एक जगह है।

432
00:30:36,480 --> 00:30:40,560
अब वो देख रहा है और वो सुन रहा है।

433
00:30:40,560 --> 00:30:44,640
ठीक है? तो यानी कि उसमें और उसकी यानी कि उसमें

434
00:30:44,640 --> 00:30:50,080
वो और उसकी शक्ति ये दो अलग-अलग तत्व है।

435
00:30:50,080 --> 00:30:54,560
शक्ति और वो भाई आप देखिए आप आप

436
00:30:54,560 --> 00:30:59,120
जो बोल रहे हैं जुबान से ये दोनों अलग हो सकते हैं क्या

437
00:30:59,120 --> 00:31:03,200
ये आपके गुण है ना बोलना आपका गुण है देखना आपका गुण है

438
00:31:03,200 --> 00:31:07,280
सुनना आपका गुण है तो ये आपके अंदर ही है ना ये आपसे बाहर

439
00:31:07,280 --> 00:31:11,440
क्योंकि ये मुझसे जुड़ा हुआ है इस कारण से जो मेरी आवाज है मेरे जो

440
00:31:11,440 --> 00:31:16,080
दृष्टि है वो सब जगह नहीं है जितनी मेरी सीमा है वहां तक है

441
00:31:16,080 --> 00:31:20,240
अभी मैं पूछ रहा हूं उसकी सीमा तो नहीं आपकी तो वो

442
00:31:20,240 --> 00:31:24,640
एकद नहीं है। उसकी कोई हद नहीं है।

443
00:31:24,640 --> 00:31:28,720
मैं कह रहा हूं जब वो मैं ये कह रहा हूं जब वो यहां पर है

444
00:31:28,720 --> 00:31:32,720
तो उसकी शक्ति के कारण वो सब जगह उसका कंट्रोल है और

445
00:31:32,720 --> 00:31:37,120
कंट्रोल होने के रूप में आप ये कह रहे हैं वो सब जगह है। वस्तुत वो यहां पर है।

446
00:31:37,120 --> 00:31:41,520
तो अगर वो यहां पर है तो इसका मतलब ये मानना पड़ेगा

447
00:31:41,520 --> 00:31:45,840
कि उसकी शक्ति एक अलग तत्व है। है उसी की मगर वो तत्व

448
00:31:45,840 --> 00:31:49,840
एक अलग है। क्योंकि वो क्योंकि अगर शक्ति और उसको एक मान

449
00:31:49,840 --> 00:31:51,600
लोगे अगर शक्ति और उसको

450
00:31:51,600 --> 00:31:56,000
एक मान लोगे तो यह कहना पड़ेगा कि वो स्वयं सब जगह है। तो वो तो दोनों

451
00:31:56,000 --> 00:32:02,000
वो तो एक मानते नहीं हो आप क्योंकि वो आप ये नहीं मानते कि सब जगह है।

452
00:32:02,240 --> 00:32:06,720
तो आप तो जैसे आपका मानना है कि वो

453
00:32:06,720 --> 00:32:10,720
शरीर धारण करके हर जगह है। हमारा ये मानना नहीं है। मेरा ये मानना

454
00:32:10,720 --> 00:32:15,600
नहीं है। शरीर धारण करके हर जगह है। मेरा मानना ये है कि ईश्वर सर्वव्यापी

455
00:32:15,600 --> 00:32:19,600
है। ईश्वर के तीन स्वरूप है। तीन स्तर हैं। निर्गुण

456
00:32:19,600 --> 00:32:23,680
निराकार के रूप में वो सब जगह है। फिर सगुण साकार के रूप में वो क्रियाशील है।

457
00:32:23,680 --> 00:32:28,000
कहीं पर है, कहीं पे नहीं है। फिर वो सगुण सगुण साकार सगुण निराकार

458
00:32:28,000 --> 00:32:32,000
के रूप में वो सगुण हो जाता है। फिर सगुण साकार के रूप में वो जो है शरीर धारण करता

459
00:32:32,000 --> 00:32:36,240
है। अब ये तो ये तो एक अलग बात रही। अभी अभी भाई साहब पूछ

460
00:32:36,240 --> 00:32:41,040
रहा हूं। अभी देखो भाई साहब भाई साहब टॉपिक भाई साहब टॉपिक

461
00:32:41,040 --> 00:32:45,280
टॉपिक चेंज हो जाएगा। अभी आप

462
00:32:45,280 --> 00:32:51,280
अभी आप

463
00:32:51,760 --> 00:32:55,920
अभी आप अरे क्वेश्चन आप भाई साहब आपका अभी

464
00:32:55,920 --> 00:33:00,880
टॉपिक खत्म नहीं हुआ ना जो चल रहा है अभी आप ये समझिए कि मैं

465
00:33:00,880 --> 00:33:05,200
क्वेश्चन कर रहा हूं।

466
00:33:05,200 --> 00:33:09,280
यानी कि यानी कि इस्लाम के पास किसी की बातों का उत्तर तब

467
00:33:09,280 --> 00:33:13,360
है जब सामने वाला किसी प्रकार से गलत सिद्ध हो रहा हो अपनी

468
00:33:13,360 --> 00:33:19,360
मान्यता में

469
00:33:19,360 --> 00:33:23,840
आपकी मान्यता पहले मुझे जाननी पड़ेगी। ठीक है। फिर मैं उसको चेक

470
00:33:23,840 --> 00:33:28,160
जब मेरी मान्यता में खोट है तभी इस्लाम सही सिद्ध हो सकता है। अन्यथा इस्लाम

471
00:33:28,160 --> 00:33:32,160
सही सिद्ध नहीं होगा। वो खोट तो सत्य के तथ्य के

472
00:33:32,160 --> 00:33:36,800
आधार पर देखा जाएगा ना। खोट है या सत्य है? भाई सत्य है या

473
00:33:36,800 --> 00:33:41,040
अभी आपसे एक न्यूट्रल व्यक्ति क्वेश्चन कर रहा है। आप ये मान के चलो

474
00:33:41,040 --> 00:33:45,200
उसका कोई मान्यता है ही नहीं। अभी वो इस्लाम के द्वारा एक

475
00:33:45,200 --> 00:33:49,440
मिनट भाई साहब अभी वो इस्लाम के द्वारा क्लेम अभी जो इस्लाम

476
00:33:49,440 --> 00:33:53,440
के द्वारा क्लेम किए जा रहे हैं उस पर क्वेश्चन कर रहे हैं। आप मुझे बता

477
00:33:53,440 --> 00:33:56,160
दो

478
00:33:56,160 --> 00:34:00,640
एक मिनट बोलिए। एक मिनट मैं बोल दूंगा। ठीक है? ताकि बात सही होती रहेगी।

479
00:34:00,640 --> 00:34:04,800
आप विषय को चेंज मत करिएगा। आपसे सवाल किया गया उसका आंसर दीजिएगा।

480
00:34:04,800 --> 00:34:10,320
मुझे तो सिर्फ ये बताना ईश्वर सर्वशक्तिमान है। बस

481
00:34:10,320 --> 00:34:14,400
मैंने क्या मेरा क्वेश्चन क्या है? मेरा क्वेश्चन ये है कि

482
00:34:14,400 --> 00:34:18,720
वो शक्ति एक अलग तत्व है ना। क्योंकि अगर शक्ति को पूरा का पूरा वही मान

483
00:34:18,720 --> 00:34:22,720
लोगे तो फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि ईश्वर सर्व्यापी मगर आप सर्व्यापी तो

484
00:34:22,720 --> 00:34:27,520
मानते नहीं है। एक देश मानते हैं आप उसकी कंट्रोल के रूप में

485
00:34:27,520 --> 00:34:31,680
मानते हैं। सर्वव्यापी अभी बोला ना सर्वव्यापी जो है

486
00:34:31,680 --> 00:34:35,680
वो उसके गुणों के गुणों के आधार पर है। अरे तो मैं

487
00:34:35,680 --> 00:34:39,920
वही तो कह रहा हूं। शक्ति के कारण उसकी शक्ति जो पूरे में फैली हुई है जिसके

488
00:34:39,920 --> 00:34:43,920
कारण कंट्रोल है उसके कारण उसको आप सर्व्यापी कहते हैं

489
00:34:43,920 --> 00:34:48,880
मगर वो स्वयं से तात्विक रूप से वो सब जगह नहीं है

490
00:34:48,880 --> 00:34:52,960
तत्व से वो सब जगह नहीं है ना वो उसकी जात

491
00:34:52,960 --> 00:34:57,200
के ऐतबार से हर जगह नहीं है उसकी सिफात के ऐतबार से हर जगह वो जिसे

492
00:34:57,200 --> 00:35:01,360
आप जात कहते हो उसी को शायद मैं तत्व कह रहा हूं जात की जात

493
00:35:01,360 --> 00:35:05,440
के अनुसार वो एक जगह है ठीक तो यानी कि शक्ति की जात और

494
00:35:05,440 --> 00:35:10,160
जो उसकी जात है दोनों में अंतर है जात में

495
00:35:10,160 --> 00:35:16,160
अंतर कैसे है भाई ये मानना पड़ेगा देख पा रहे हो

496
00:35:18,320 --> 00:35:22,480
जात अगर भाई साहब जात में अंतर नहीं है तो ये कहना पड़ेगा जात

497
00:35:22,480 --> 00:35:26,720
के अनुसार भी वो सब जगह है क्योंकि उसकी शक्ति सब जगह है उसमें

498
00:35:26,720 --> 00:35:30,880
आप मुझे बता दो शक्ति और मैं पूछ रहा हूं मैं ये पूछ रहा हूं शक्ति

499
00:35:30,880 --> 00:35:34,960
और उसमें अंतर क्या है? क्या अंतर है? ये बताओ वही

500
00:35:34,960 --> 00:35:39,120
बिलकुल एक मिनट जैसे आप मुझे वीडियो कॉल पे देख भी रहे हो लेकिन मेरे पास

501
00:35:39,120 --> 00:35:43,200
मौजूद नहीं हो है ना लेकिन देख रहे हो अपनी जगह पे होते हुए भी

502
00:35:43,200 --> 00:35:47,600
मुझे देख रहे हो है ईश्वर जो है जहां भी वो है

503
00:35:47,600 --> 00:35:52,480
वो वहीं से हर एक चीज को उसकी ज्ञान परिधि में लिए हुए है

504
00:35:52,480 --> 00:35:56,480
उसको इंटरनेट के मैं आपको इंटरनेट और मोबाइल उपकरण के माध्यम

505
00:35:56,480 --> 00:36:00,480
से देख रहा हूं इस तात्विक रूप से मैं और इंटरनेट और मैं

506
00:36:00,480 --> 00:36:04,720
और मोबाइल अलग-अलग है अलग-अलग मानना पड़ेगा।

507
00:36:04,720 --> 00:36:08,800
अगर अगर सुनिए अगर मैं जात के अगर

508
00:36:08,800 --> 00:36:12,800
मैं जात के अनुसार आपके समक्ष नहीं हूं फिर भी आपको देख रहा हूं तो एक

509
00:36:12,800 --> 00:36:16,800
माध्यम है मेरे पास जिसके अनुसार मैं देख रहा हूं। अगर ये माध्यम और मुझ में अंतर

510
00:36:16,800 --> 00:36:20,880
है तो ये कहना पड़ेगा कि मैं वहां पर नहीं हूं आपके समक्ष और

511
00:36:20,880 --> 00:36:24,960
अगर इसमें और मुझ में कोई अंतर नहीं होगा माध्यम में और मुझ में तो फिर ये कहना

512
00:36:24,960 --> 00:36:25,460
पड़ेगा

513
00:36:25,280 --> 00:36:29,760
कि मैं इस माध्यम के रूप में मैं भी वहां पर हूं। समझ गए आप?

514
00:36:29,760 --> 00:36:34,640
तो अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे कि देखना

515
00:36:34,640 --> 00:36:40,640
एक मिनट हां हां

516
00:36:43,520 --> 00:36:49,520
हेलो हम बोलिए हेलो बोलिए

517
00:36:50,560 --> 00:36:54,640
आप बोल रहे है जात के हिसाब से कोई माध्यम आप जो मुझसे बात कर रहे हो किसी

518
00:36:54,640 --> 00:36:58,720
माध्यम के जरिए कर रहे हो तो ईश्वर का ऐसा क्या माध्यम है कि उस माध्यम से

519
00:36:58,720 --> 00:37:02,880
जो है वो हमें देख भी रहा है सुन भी रहा तो यही तो उसकी शक्तियां

520
00:37:02,880 --> 00:37:07,360
है उसने जो है

521
00:37:07,360 --> 00:37:11,440
उसका माध्यम है उसकी शक्ति उसकी जो शक्ति है जो शक्ति को जानना

522
00:37:11,440 --> 00:37:16,800
पड़ेगा ना तो वो शक्ति और उसमें अंतर क्या है ये बताइए

523
00:37:16,800 --> 00:37:20,800
सर्वक्तिमान है ये उसी का एक अंग

524
00:37:20,800 --> 00:37:25,040
है ना मैं वो सर्वशक्ति मत्ता उसकी खंडित कर रहा हूं उसकी

525
00:37:25,040 --> 00:37:29,120
सर्वशक्ति मत्ता सिद्ध नहीं हो रही क्योंकि अगर हम ये कह

526
00:37:29,120 --> 00:37:33,120
रहे हैं ईश्वर सब जगह नहीं उसकी शक्ति है। एक मिनट मैं

527
00:37:33,120 --> 00:37:37,200
बता रहा हूं। आपको मैं बता रहा हूं मेरा मेरा क्या है? अगर हम ये कह रहे हैं

528
00:37:37,200 --> 00:37:42,160
ईश्वर सब जगह नहीं है। उसकी शक्ति सब जगह ईश्वर तो एक जगह है जात के अनुसार।

529
00:37:42,160 --> 00:37:46,240
तो इसका मतलब जात के अनुसार उसकी शक्ति में और

530
00:37:46,240 --> 00:37:50,320
उसमें अंतर है। क्यों? क्योंकि शक्ति सब जगह है और वो एक

531
00:37:50,320 --> 00:37:54,560
जगह है। तो जात के अनुसार क्योंकि वो एक जगह है इसलिए जात के अनुसार शक्ति

532
00:37:54,560 --> 00:37:58,880
और उसमें अंतर है। अब अगर शक्ति और उसमें अंतर है तो जाहिर

533
00:37:58,880 --> 00:38:02,880
सी बात है कि शक्ति किसी ना किसी परिपेक्ष से कम होगी। नहीं तो अब

534
00:38:02,880 --> 00:38:07,040
उसके बराबर हो जाएगी हर तरीके से तो फिर शक्ति भी ईश्वर हो जाएगी।

535
00:38:07,040 --> 00:38:11,120
दूसरा ईश्वर मिल जाएगा। दूसरा तत्व मिल जाएगा। ठीक है?

536
00:38:11,120 --> 00:38:15,760
वो तो हो नहीं सकता। तब होगी। एक मिनट लेट मी फिनिश। भाई साहब

537
00:38:15,760 --> 00:38:20,080
एक मिनट अगर शक्ति कम अगर शक्ति एक मिनट भाई साहब

538
00:38:20,080 --> 00:38:22,400
शक्ति अगर कम होगी तो फिर हमें

539
00:38:22,400 --> 00:38:26,480
ये मानना पड़ेगा कि जितना कंट्रोल पुराण के अनुसार जो ईश्वर

540
00:38:26,480 --> 00:38:30,480
है उसका वहां पर है जहां वो है उतना कंट्रोल उसका सब जगह नहीं

541
00:38:30,480 --> 00:38:35,360
है तो उसका जो है शाश्वत सत्ता उसकी सिद्ध नहीं होगी

542
00:38:35,360 --> 00:38:40,560
वो वो देश जो है

543
00:38:40,560 --> 00:38:45,440
आप जो वही आप कह रहे है ना कि बाधा उसके बीच में तो कोई बाधा है नहीं

544
00:38:45,440 --> 00:38:49,760
ये तो आप कह रहे हैं कि बाधा है। मैं तो कह रहा हूं कोई बाधा नहीं है। ज्ञान

545
00:38:49,760 --> 00:38:54,080
भी बस मैं ये पूछ रहा हूं भाई साहब शक्ति

546
00:38:54,080 --> 00:38:58,080
शक्ति और उसमें अंतर क्या है? शक्ति और उसमें

547
00:38:58,080 --> 00:39:02,080
अंतर क्या है? जैसे आप ईश्वर को अलग कर रहे हैं और उसकी शक्ति

548
00:39:02,080 --> 00:39:07,440
को अलग कर रहे हैं। वाह वाह बहुत बढ़िया बात। की दो नहीं है।

549
00:39:07,440 --> 00:39:11,680
आप अलग कर रहे हैं। आपके लिए

550
00:39:11,680 --> 00:39:15,680
शक्ति है। आप अलग कर रहे हैं। आप अलग कर रहे हैं। मैं नहीं कर

551
00:39:15,680 --> 00:39:19,760
रहा। मैं कह रहा हूं कि वो होना चाहिए वही शक्ति के रूप में। भाई मैं तो कह

552
00:39:19,760 --> 00:39:23,920
रहा हूं इसके हिसाब से वो वहां नहीं जा

553
00:39:23,920 --> 00:39:28,480
सकती है तो आप अलग कर रहे हैं। भाई साहब भाई साहब एक मुझे आप मुझे

554
00:39:28,480 --> 00:39:32,880
आप मुझे इतना रिजवान जी रिजवान जी रिजवान जी आप मुझे रिजवान

555
00:39:32,880 --> 00:39:36,960
जी आप आप मुझे इतना बता दीजिए कि किस मामले में

556
00:39:36,960 --> 00:39:37,600
शक्ति और

557
00:39:37,600 --> 00:39:41,840
ओश में अंतर है बस इतना बता दीजिए किस मामले में अंतर है अंतर मैंने बताया

558
00:39:41,840 --> 00:39:45,920
क्या है मैंने बताया आप बता दो ना भाई साहब

559
00:39:45,920 --> 00:39:50,000
क्यों फिजूल का बोल रहे हो आप बीच में आप बीच

560
00:39:50,000 --> 00:39:54,400
में बोल जाते हो आप सुनिए मेरी बात अब नहीं बोल रहा आप अपनी बात बोले

561
00:39:54,400 --> 00:39:58,480
अब नहीं बोल रहा अपनी बात बोले तो ईश्वर और उसकी सारी

562
00:39:58,480 --> 00:40:02,560
पावर जो है वो उसी से जुड़ी हुई है। अलग नहीं है। अलग

563
00:40:02,560 --> 00:40:06,640
नहीं है। ईश्वर और उसकी और उनहीं पावर से वो हर चीज पर

564
00:40:06,640 --> 00:40:10,800
कंट्रोल किए हुए है। हर चीज पर कंट्रोल किए हुए है।

565
00:40:10,800 --> 00:40:15,040
और कुछ को उसने दिक्कत है

566
00:40:15,040 --> 00:40:19,200
देखिए जी समझने का प्रयास करिए। मेरा क्वेश्चन कुछ और

567
00:40:19,200 --> 00:40:23,440
है। मेरा क्वेश्चन कुछ और है। क्वेश्चन ये है

568
00:40:23,440 --> 00:40:27,600
अगर आप ये कह रहे हैं कि क्वेश्चन मेरा ये

569
00:40:27,600 --> 00:40:31,680
है कि अगर आप ये कह रहे हैं कि ईश्वर सब जगह नहीं है

570
00:40:31,680 --> 00:40:35,760
तो फिर और फिर आप कह रहे हैं उसका कंट्रोल सब जगह है क्योंकि उसकी शक्ति सब जगह

571
00:40:35,760 --> 00:40:39,760
है तो हमें ये मानना पड़ेगा ना कि उसकी शक्ति में और उसमें कुछ अंतर है

572
00:40:39,760 --> 00:40:43,840
तभी तो शक्ति के हर जगह होते हुए भी हम लोग ये कह रहे हैं कि ईश्वर

573
00:40:43,840 --> 00:40:47,920
सब जगह नहीं है। समझ रहे हैं? मैं समझने का प्रयास

574
00:40:47,920 --> 00:40:53,920
करिए। इसको आप को जात को

575
00:40:55,520 --> 00:40:59,680
जात को ऐड कीजिए कि जात के ऐतबार से वो जात

576
00:40:59,680 --> 00:41:03,840
के ऐतबार से हर जगह नहीं है। जात केतबार से

577
00:41:03,840 --> 00:41:08,480
शक्ति और उसमें अंतर है ना कहां हुआ अंतर

578
00:41:08,480 --> 00:41:12,560
कहां हुआ? तो नहीं है। नहीं है। कहां हुआ? अंतर कहां हुआ?

579
00:41:12,560 --> 00:41:16,640
पहले अंतर इस तो फिर शक्ति जान के तो फिर

580
00:41:16,640 --> 00:41:20,960
अंतर क्या है? पहले तो ये बता दो। कोई नहीं उसकी अगर सुनिए

581
00:41:20,960 --> 00:41:24,960
सुनिए उसकी दिव्य दृष्टि अगर असीमित है अगर उसकी

582
00:41:24,960 --> 00:41:28,960
दिव्य दृष्टि असीमित है तो वो उससे दूर होगी

583
00:41:28,960 --> 00:41:33,040
ही नहीं उसकी दिव्य दृष्टि उससे दूर होगी नहीं वो जहां चाहे देख सकता है जितना

584
00:41:33,040 --> 00:41:37,040
दूर चाहे देख सकता है भविष्य भूतकाल सब देख सकता है बिल्कुल देख

585
00:41:37,040 --> 00:41:41,120
सकता है बिल्कुल देख सकता है मगर वो जो दिव्य दृष्टि है वो

586
00:41:41,120 --> 00:41:45,440
जो दिव्य दृष्टि है वो कंट्रोल नहीं कर पाएगी उसको दिखाएगी तो

587
00:41:45,440 --> 00:41:49,440
वो वो सारे काम नहीं कर पाएगी तो देख वो वो वो सारे काम नहीं कर

588
00:41:49,440 --> 00:41:53,520
पा एक मिनट वो वो सारे काम नहीं कर पाएगी जो देखने वाला है

589
00:41:53,520 --> 00:41:57,760
कर पाएगा वो दिव्य दृष्टि उसको सूचना तो वो एक मिनट

590
00:41:57,760 --> 00:42:01,840
भाई साहब वो दिव्य दृष्टि वो दिव्य दृष्टि उसको सूचना तो देगी वहां

591
00:42:01,840 --> 00:42:05,840
क्या हो रहा है मगर वहां कंट्रोल कि ये होना चाहिए या नहीं

592
00:42:05,840 --> 00:42:09,920
होना चाहिए ये उसको नहीं दे पाएगी उसके लिए उसका हाथ भी उतना ही लंबा होना

593
00:42:09,920 --> 00:42:10,800
चाहिए अगर

594
00:42:10,800 --> 00:42:14,800
वो अगर वो किसी शरीर में है तो जो भी है जिस तरह से भी कंट्रोल करता

595
00:42:14,800 --> 00:42:19,120
है उसका सब कुछ उतना ही लंबा होना चाहिए असीमित असीमित सीमित अगर असीमित

596
00:42:19,120 --> 00:42:23,760
है अगर उसका सब कुछ उतना ही असीमित है तो हो गया सर्व्यापी

597
00:42:23,760 --> 00:42:28,080
अच्छा मैंने कल एक बात भाई आप कंट्रोल की बात कर रहे हो ना

598
00:42:28,080 --> 00:42:34,080
तो जितने भी रोशनी से बनाए हुए देवता है वो सब कंट्रोल में है

599
00:42:34,640 --> 00:42:38,720
सब कंट्रोल में है अब देवता

600
00:42:38,720 --> 00:42:42,800
फैले हुए देवता फैले हुए है देवता तो

601
00:42:42,800 --> 00:42:46,800
फैले हुए अब जो इंसान की बात हो रही है तो इसको आजादी भी दी

602
00:42:46,800 --> 00:42:51,200
है आजादी भी दी है। समझ रहे हो? उसका एक

603
00:42:51,200 --> 00:42:55,520
पूछ रहा हूं। मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं कि अगर उसकी शक्ति सब जगह

604
00:42:55,520 --> 00:42:59,520
है, सर्वव्यापी है तो जात के हिसाब से क्योंकि वो

605
00:42:59,520 --> 00:43:03,520
सर्व्यापी नहीं है तो जात के हिसाब से जो है शक्ति और उसमें अंतर आ

606
00:43:03,520 --> 00:43:07,280
गया ना जात का? क्योंकि

607
00:43:07,280 --> 00:43:12,320
मैं बता तो रहा हूं। जात के हिसाब से ईश्वर है वो एक जगह है

608
00:43:12,320 --> 00:43:15,920
और उसकी शक्ति सब जगह है।

609
00:43:15,920 --> 00:43:20,800
शक्ति सब जगह है तो आ तो गया अंतर तो

610
00:43:20,800 --> 00:43:26,800
कैसे आया अंतर अरे

611
00:43:27,440 --> 00:43:31,840
शक्ति सब जगह है ना उसने नियम बनाए ना

612
00:43:31,840 --> 00:43:37,520
उसने नियम बनाए आप खुद मान रहे हो उसने नियम बना हर नियम से

613
00:43:37,520 --> 00:43:43,120
बात मैं कह रहा हूं भाई साहब नियम से बात

614
00:43:43,120 --> 00:43:47,600
से एक जगह एक मिनट एक मिनट

615
00:43:47,600 --> 00:43:53,600
आप मुझे बताइए से ईश्वर एक जगह है जात से ईश्वर एक जगह

616
00:43:55,040 --> 00:43:59,280
जात से ईश्वर एक जगह है हां वो समय से परे

617
00:43:59,280 --> 00:44:04,480
है समय से परे है ईश्वर एक जगह है कि नहीं भाई साहब मैं पूछ रहा हूं स्थान

618
00:44:04,480 --> 00:44:08,960
देश की बाधा से बाधित है ना आप कैसे कर सकते हो उसका

619
00:44:08,960 --> 00:44:12,960
आप ये कह दो हमें नहीं पता इस बारे में ये कह दो

620
00:44:12,960 --> 00:44:17,440
हम नहीं कह सकते ये कह दो घुमा क्यों रहे हो तो जब

621
00:44:17,440 --> 00:44:21,440
तो ये जब कहेंगे जब वो बताएगा अब उसने जो बताया वो तो

622
00:44:21,440 --> 00:44:24,320
आप बता नहीं रहे हो

623
00:44:24,320 --> 00:44:28,400
उसने जो बताया है इसका मतलब आपको नहीं पता है वो जांच

624
00:44:28,400 --> 00:44:32,560
के हिसाब से एक जगह है कि नहीं है कि क्या है मामला मेरे को मुझे

625
00:44:32,560 --> 00:44:36,720
बताने दीजिए आप मुझे बताने दीजिए बताइए

626
00:44:36,720 --> 00:44:40,800
आप यही जानना चाह रहे हो ना कि इस्लाम के हिसाब से ईश्वर सर्वशक्तिमान है

627
00:44:40,800 --> 00:44:42,720
या नहीं यही जानना चाह रहे हो

628
00:44:42,720 --> 00:44:46,800
अभी उसके हम इंड में आ गए भाई साहब वो वो क्वेश्चन के इंडेक्स में

629
00:44:46,800 --> 00:44:51,200
आ गए जात के हिसाब से ईश्वर एक है ना

630
00:44:51,200 --> 00:44:55,680
आप पैरामीटर लगा रहे हो कि ये होगा तो सर्वशक्तिमान मानूंगा

631
00:44:55,680 --> 00:45:00,320
फिर वही बात पैरामीटर लगा रहे हो अभी सवाल क्या चल रहा है भाई साहब

632
00:45:00,320 --> 00:45:04,400
अभी सवाल क्या चल रहा था भाई साहब सवाल सर्वशक्तिमान होने का है तो

633
00:45:04,400 --> 00:45:10,080
वो उसके गुणों से हम समझेंगे तो एक गुण जैसे दिव्य दृष्टि

634
00:45:10,080 --> 00:45:14,240
आपने जो बताया था वो समझ गए पूरी तरीके से

635
00:45:14,240 --> 00:45:18,240
एक समान वो है शक्तिमान मगर अभी जो है अगर आप

636
00:45:18,240 --> 00:45:22,240
उसकी शक्ति को उससे अलग करेंगे अगर यह कहेंगे

637
00:45:22,240 --> 00:45:26,720
कि उसकी शक्ति तो सब जगह है मगर वो नहीं है तो फिर वो समान

638
00:45:26,720 --> 00:45:30,960
रूप से सर्वव्यापी शाश्वत शाश्वत रूप से सर्वशक्तिमान

639
00:45:30,960 --> 00:45:35,040
सिद्ध नहीं होगा। अच्छा आप कौन सी शक्ति उससे

640
00:45:35,040 --> 00:45:40,880
अलग करना चाह रहे हैं? कोई एक शक्ति बताइए जिसे उससे अलग कर

641
00:45:40,880 --> 00:45:45,120
आप कर रहे हैं कि ईश्वर सब जगह नहीं है उसकी शक्ति सब जगह

642
00:45:45,120 --> 00:45:50,000
है। अगर ईश्वर नहीं है उसकी मैंने

643
00:45:50,000 --> 00:45:54,240
जात के ऐतबार से कहा ईश्वर एक है ना तो भाई साहब भाई साहब वही तो जात

644
00:45:54,240 --> 00:45:58,400
के जात के ऐतबार से उसकी शक्ति और उसमें अंतर आ गया ना

645
00:45:58,400 --> 00:46:02,400
जात के ऐतबार से ईश्वर एक जगह है उसकी शक्ति सब जगह है तो

646
00:46:02,400 --> 00:46:06,480
अंतर आ गया ना आप एक जगह तो आप ठहरा

647
00:46:06,480 --> 00:46:10,560
रहे हो तो आप क्या कह रहे हो एक जगह नहीं कह रहे हो आप एक जगह नहीं कह रहे

648
00:46:10,560 --> 00:46:14,800
हो मैं कह रहा हूं तो क्या कह रहे हो एक जगह आपके समय

649
00:46:14,800 --> 00:46:19,840
ये कह रहा ईश्वर आप क्या कह रहे हो? आप क्या कह रहे हो?

650
00:46:19,840 --> 00:46:23,920
ईश्वर जो है वही मैं आपको बताता हूं कि कुरान में

651
00:46:23,920 --> 00:46:28,080
ये आया है कि वही अव्वल है, वही आखिर है, वही

652
00:46:28,080 --> 00:46:32,880
जाहिर है, वही बातिन है। यानी जो कुछ भी हमें नजर आ रहा है हमारे

653
00:46:32,880 --> 00:46:37,120
आपको मैं भाई साहब आपका वीडियो दिखा दू। आपने कहा है जांच के हिसाब से एक जगह

654
00:46:37,120 --> 00:46:42,480
है। क्या चीज? हां तो वो जगह हम नियंत्रण

655
00:46:42,480 --> 00:46:46,720
वो जगह हम जो नहीं डिसाइड कर सकते ना मैं जगह मैं

656
00:46:46,720 --> 00:46:50,960
डिसाइड कर रहा हूं वो मैंने डिसाइड किया कि वो जम्मू कश्मीर में है कि ताजमल

657
00:46:50,960 --> 00:46:54,960
में से मैंने कहा मैं कह रहा हूं जहां

658
00:46:54,960 --> 00:46:59,040
भी है एक जगह है सब जगह नहीं है जहां भी है वो समय

659
00:46:59,040 --> 00:47:05,040
से परे है वो जगह कितनी बड़ी है कितनी छोटी है उस बात ही नहीं

660
00:47:05,760 --> 00:47:10,400
वो अनंत रूप से नहीं है और लोग अनंत

661
00:47:10,400 --> 00:47:14,640
रूप से नहीं है ऑल लोग वो बहुत बड़ी जगह है मगर अनंत जगह

662
00:47:14,640 --> 00:47:19,360
नहीं है जहां अनंत रूप

663
00:47:19,360 --> 00:47:23,600
अनंत रूप अनंत रूप मतलब कह रहे हैं

664
00:47:23,600 --> 00:47:27,840
नहीं मैं कह रहा हूं कि वो जहां भी है

665
00:47:27,840 --> 00:47:31,840
जो उसका वो जहां भी है वो एक देसी है वो सब जगह नहीं

666
00:47:31,840 --> 00:47:36,080
फैला हुआ असीमित रूप से नहीं फैला हुआ सर्वव्यापी नहीं है वो

667
00:47:36,080 --> 00:47:40,720
या है तो वो तो है कंट्रोल

668
00:47:40,720 --> 00:47:44,880
कंट्रोल जब हर जगह है उसका तो उसकी शक्तियों से है ना कंट्रोल

669
00:47:44,880 --> 00:47:48,880
तो वो हर जगह हुआ ना क्या मैं भाई साहब प्रश्न क्या चल रहा है आपको समझ में

670
00:47:48,880 --> 00:47:52,880
नहीं आ रहा जो मैं बोल रहा हूं मैं क्या पूछ रहा हूं मैंने

671
00:47:52,880 --> 00:47:56,880
पूछा ये है मैंने मैं बता देता हूं मैं कंट्रोल की अभी बात नहीं

672
00:47:56,880 --> 00:48:02,000
हो रही उससे आगे आ गए शक्ति पे आ गए अब आप पीछे जा रहे हैं

673
00:48:02,000 --> 00:48:06,240
हम आगे आ चुके हैं तो क्या है मैंने पूछा ये है मैंने पूछा

674
00:48:06,240 --> 00:48:10,320
ये है सुनिए मैंने पूछा ये है कि जहां पर वो है।

675
00:48:10,320 --> 00:48:14,400
ठीक है? अब आप कह रहे हो कि जात के आधार पर वो

676
00:48:14,400 --> 00:48:18,480
एक जगह है। अब वो वो बहुत अच्छी जगह है। बहुत दिव्य

677
00:48:18,480 --> 00:48:20,880
जगह है। बहुत अच्छी जगह है। ठीक है? और वो

678
00:48:20,880 --> 00:48:25,360
समय से भी परे है। ठीक है। बढ़िया बात है। वो जगह असीमित

679
00:48:25,360 --> 00:48:29,760
है। असीमित है। मतलब वो जगह सब जगह फैली हुई है।

680
00:48:29,760 --> 00:48:33,840
वो जगह सब जगह फैली हुई है। ना असीमित मतलब वो इस समय

681
00:48:33,840 --> 00:48:37,840
से परे है और वो जगह का हम जो है ना इहता नहीं कर सकते। हमें अपने

682
00:48:37,840 --> 00:48:42,480
दायरे में नहीं ला सकते। बस ये समझ लीजिए कि वो असीमित जगह है।

683
00:48:42,480 --> 00:48:46,640
लाम मक्का जिसे बोलते हैं। असीमित जगह है तो फिर यहां पर भी

684
00:48:46,640 --> 00:48:51,600
हो गई ना वो वो परे वाली जो सीमा है ना

685
00:48:51,600 --> 00:48:55,680
एक मिनट एक मिनट एक मिनट वो जो परे वाली सीमा है ना वो क्रॉस कर गई

686
00:48:55,680 --> 00:48:59,680
अगर असीमित है तो। वो क्योंकि यहां पे भी होना चाहिए

687
00:48:59,680 --> 00:49:04,880
फिर। हां तो हां तो वो समय से परे है।

688
00:49:04,880 --> 00:49:09,200
समय की बात कर रहा हूं। मैं समय की बात कर रहा हूं क्या भाई साहब

689
00:49:09,200 --> 00:49:13,200
समय से तो मैंने समय मैंने समय का कोई सवाल ही नहीं

690
00:49:13,200 --> 00:49:17,280
किया है तो जो भी तो मैं ये कह रहा हूं जो क्रिएशन उसने

691
00:49:17,280 --> 00:49:22,320
की है ना क्रिएटर ने वो उस क्रिएशन के अंदर नहीं है

692
00:49:22,320 --> 00:49:26,320
केबार से उसके अंदर नहीं है अंदर मगर उसकी शक्ति है

693
00:49:26,320 --> 00:49:28,480
ना

694
00:49:28,480 --> 00:49:32,560
हां उसके पावर्स उसके अंदर है उसके पावर है ठीक

695
00:49:32,560 --> 00:49:35,920
तो अब जाट के ऐतबार से उसके पावर में और उसमें में अंतर आ

696
00:49:35,920 --> 00:49:40,160
गया ना कैसे आया? अरे

697
00:49:40,160 --> 00:49:45,280
भैया वो नहीं है क्रिएशन के अंदर। उसकी पावर है क्रिएशन के अंदर।

698
00:49:45,280 --> 00:49:49,280
पावर है ना? तो उस पावर से ही तो वो हिदायत करेगा क्रिएशन को।

699
00:49:49,280 --> 00:49:53,520
अच्छा मैंने क्या करेगा? अगर जांच के हिसाब से जांच

700
00:49:53,520 --> 00:49:57,760
के हिसाब से वो यहां नहीं है। मगर उसकी शक्ति यहां है। तो जांच के हिसाब से अंतर

701
00:49:57,760 --> 00:50:03,040
आ गया ना उसकी शक्ति और उसमें कैसे आ गया अंतर?

702
00:50:03,040 --> 00:50:08,160
भाई रूह जो आत्मा जो है वो उसके उसके आदेश से ही तो है

703
00:50:08,160 --> 00:50:12,160
अपनी मर्जी से मैं बता रहा हूं कैसे आ गया अंतर

704
00:50:12,160 --> 00:50:16,160
क्या ईश्वर जो है वो जात के हिसाब से अपनी क्रिएशन में

705
00:50:16,160 --> 00:50:18,880
है

706
00:50:18,880 --> 00:50:23,280
जात के ऐतबार से नहीं है अब देखिए दूसरा क्या

707
00:50:23,280 --> 00:50:29,120
जो उसकी शक्ति है वो जात के ऐतबार से क्रिएशन में है

708
00:50:29,120 --> 00:50:33,280
मैं क्या पूछ रहा हूं भाई साहब देखिए आप जितना विषय

709
00:50:33,280 --> 00:50:37,280
करने का प्रयास करेंगे मैं आपको फिर खींचूंगा। मैं आपको फिर पॉइंट में ले आप

710
00:50:37,280 --> 00:50:41,440
भी तो जवाब दो कुछ मैं क्या पूछ रहा हूं? आप भी जवाब दो। क्या आपके

711
00:50:41,440 --> 00:50:45,680
अंदर ईश्वर जात के ऐतबार से है?

712
00:50:45,680 --> 00:50:49,760
ईश्वर हमारे अनुसार सर्वव्यापी है। तो जांच के ऐतबार से वो हमारे अंदर

713
00:50:49,760 --> 00:50:53,200
भी है। ठीक है?

714
00:50:53,200 --> 00:50:56,800
अंदर है। ठीक है। आपने कहा

715
00:50:56,800 --> 00:51:00,960
अब होगा क्या? अब सुनिए सुनिए भाई साहब। अब होगा क्या? क्वेश्चन

716
00:51:00,960 --> 00:51:05,120
एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट अब इसमें क्या होगा

717
00:51:05,120 --> 00:51:09,280
भाई साहब भाई साहब इसीलिए इसी आपके

718
00:51:09,280 --> 00:51:13,520
क्वेश्चन का जवाब नहीं दे रहा था एक मिनट भाई साहब भाई साहब

719
00:51:13,520 --> 00:51:17,600
भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब एक मिनट मैं

720
00:51:17,600 --> 00:51:21,840
इसीलिए आपके सवाल को बात के लिए रख रहा हूं जिससे

721
00:51:21,840 --> 00:51:26,480
कि हमारा विषय ना हो विषयांतर टॉपिक छूट जाए

722
00:51:26,480 --> 00:51:30,880
क्यों क्योंकि जब मैं कोई जवाब दूंगा रिजवान

723
00:51:30,880 --> 00:51:34,000
जीवान जी जब मैं सुनिए जब मैं कोई

724
00:51:34,000 --> 00:51:38,320
जवाब दूंगा रिजवान जी रिजवान जी रिजवान जी

725
00:51:38,320 --> 00:51:42,640
रिजवान जी जब मैं कोई जवाब दूंगा तो होगा क्या उससे

726
00:51:42,640 --> 00:51:46,640
आपको बहुत सारे क्वेश्चन निकलेंगे ठीक है अब वो जो क्वेश्चन निकलेंगे

727
00:51:46,640 --> 00:51:52,640
वो क्वेश्चन पे क्वेश्चन उधर चलते चले जाएंगे ये जो टॉपिक होगा अपना वो रह जाएगा

728
00:51:53,760 --> 00:51:57,920
तो अरे तो कोई आप ये नहीं चाहते कोई

729
00:51:57,920 --> 00:52:01,680
चैप्टर खत्म निष्कर्ष पर पहुंचे

730
00:52:01,680 --> 00:52:06,080
तो खत्म करने के लिए दो शब्द में भी हो सकता है कि ईश्वर सर्वगुण संपन्न

731
00:52:06,080 --> 00:52:10,160
है। सर्वशक्तिमान है। उस ईश्वर को मैं मानता हूं। जिसको मान

732
00:52:10,160 --> 00:52:14,160
ठीक है तो चर्चा बंद करें हो गया। दो शब्द में हो गया। आपने कह दिया सर्व

733
00:52:14,160 --> 00:52:18,800
शक्तिमान है। मान ले कोई क्वेश्चन नहीं। दो शब्द में हो गया। मैं जिस सर्वशक्तिमान

734
00:52:18,800 --> 00:52:23,280
को मानता हूं ना। अब आप मुझे बताइए आप भाई साहब देखिए

735
00:52:23,280 --> 00:52:27,440
आप जो है ना चर्चा से पलायन कर रहे हैं फिलहाल फिलहाल

736
00:52:27,440 --> 00:52:31,680
आप चर्चा से पलायन नहीं करूंगा दो घंटे ये नेता नगरी

737
00:52:31,680 --> 00:52:35,680
के लोग होते हैं सुनो नेता नगरी की लड़ाई कैसे होती है अच्छा तुमने

738
00:52:35,680 --> 00:52:39,760
ये क्यों किया अरे फलाने सन में तुमने भी तो किया था भाई आप अगर

739
00:52:39,760 --> 00:52:44,000
आप आपका अगर सिद्धांत मजबूत है आपका धर्म और ब्रह्म का ज्ञान

740
00:52:44,000 --> 00:52:48,080
मजबूत है तो उसको सिद्ध करने के लिए आपको सामने वाले को गलत

741
00:52:48,080 --> 00:52:49,120
सिद्ध करने की जरूरत

742
00:52:49,120 --> 00:52:53,200
क्या है दूसरे के गलत होने से आप एक

743
00:52:53,200 --> 00:52:57,760
मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट भाई साहब

744
00:52:57,760 --> 00:53:01,840
जी मेरी बात पूरी तो होना चाहिए मैं कुछ मिसाल दे रहा हूं मैं कुछ उदाहरण

745
00:53:01,840 --> 00:53:06,000
दे रहा हूं दूसरे के गलत होने से आपका सही होना सिद्ध

746
00:53:06,000 --> 00:53:10,080
नहीं होता आपको अपने आप को सही सिद्ध करना ही होगा ना तो अगर वो आप मुझे

747
00:53:10,080 --> 00:53:14,320
अभी गलत सिद्ध कर भी देंगे आपका ईश्वर सर्वव्यापी है तो ये कर लो वो कर लो तो

748
00:53:14,320 --> 00:53:18,480
उसमें आपका पक्ष सिद्ध नहीं होगा आपको अपना पक्ष सही सिद्ध करना होगा एक एक बात

749
00:53:18,480 --> 00:53:22,560
मैं उदाहरण दे रहा हूं। मैं उदाहरण दे रहा हूं। भाई साहब उदाहरण दे रहा हूं। उदाहरण दे रहा

750
00:53:22,560 --> 00:53:26,800
हूं। बिना टिकट के कोई व्यक्ति ट्रेन में पकड़ा गया।

751
00:53:26,800 --> 00:53:30,800
अब उससे हम कह रहे हैं अरे अभी तो इतने सारे ट्रेन में बिना टिकट के हैं। तुम भी

752
00:53:30,800 --> 00:53:34,800
तो बिना टिकट ये भी तो बिना टिकट है। तो इस कारण से क्योंकि दूसरे लोग

753
00:53:34,800 --> 00:53:38,960
बिना टिकट के हैं। अगर थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि मेरा सिद्धांत गलत है।

754
00:53:38,960 --> 00:53:43,280
तो उससे सिद्ध हो गया आपका टिकट बिना लिए चलना सही है।

755
00:53:43,280 --> 00:53:47,440
तो आप अपना सिद्धांत पहले बताओगे तो सही ना। मेरे को तो

756
00:53:47,440 --> 00:53:51,520
आप तो इसका मतलब ये मान लूं मैं अपना सिद्धांत बता रहा हूं। आपके पास जवाब नहीं

757
00:53:51,520 --> 00:53:57,360
है। मेरी इन बातों का आगे बढ़े

758
00:53:57,360 --> 00:54:01,520
मैंने जो आपके जवाब दिए आपने सहमति जताई आप मेरे

759
00:54:01,520 --> 00:54:05,520
सिद्धांत को गलत सिद्ध किए बिना आप मेरे

760
00:54:05,520 --> 00:54:09,680
सिद्धांत को गलत सिद्ध किए बिना अपने इस्लाम को मजबूती के साथ

761
00:54:09,680 --> 00:54:13,920
सिद्ध कर सकते हैं या नहीं? है उतनी उतना हो नहीं सकता

762
00:54:13,920 --> 00:54:18,000
इस्लाम में। आपने अभी तक सिद्धांत बताए नहीं और

763
00:54:18,000 --> 00:54:21,040
मैंने सर्वक्तिमान

764
00:54:21,040 --> 00:54:26,000
कह रहा हूं क्या है? रिजवान जी रिजवान जीवान

765
00:54:26,000 --> 00:54:30,080
मेरा प्रश्न क्या है? मेरा प्रश्न क्या है? आप मेरे सिद्धांत को

766
00:54:30,080 --> 00:54:35,680
गलत सिद्ध किए बिना अपने सिद्धांत की पुष्टि कर सकते या नहीं?

767
00:54:35,680 --> 00:54:39,920
मैं आपके सिद्धांत को क्यों गलत कर? मैं सत्य बताऊंगा। अब

768
00:54:39,920 --> 00:54:43,920
आप मानो या ना मानो या आपके ऊपर आप अपना सत्य बताइए। ये

769
00:54:43,920 --> 00:54:47,920
फिर मेरे को क्यों पूछ रहे हैं कि आपका क्या आपने बताया नहीं ये सब क्यों पूछ रहे हैं आप सत्य बताइए इस्लाम

770
00:54:47,920 --> 00:54:52,000
का आंसर दे रहा हूं आप क्वेश्चन कर रहे हैं मैं उसका आंसर

771
00:54:52,000 --> 00:54:56,000
दे रहा हूं आप क्वेश्चन आ रहे है ना

772
00:54:56,000 --> 00:55:00,640
अब आपका ईश्वर आपके अंदर है तो ये कैसे वो कैसे वो कैसे वो कैसे वो तो छूट जाएगा

773
00:55:00,640 --> 00:55:04,640
कि ईश्वर यदि सर्व्यामी नहीं है एक मिनट ईश्वर

774
00:55:04,640 --> 00:55:08,720
यदि ईश्वर यदि ईश्वर यदि भाई साहब भाई साहब देखिए

775
00:55:08,720 --> 00:55:13,120
देखिए भाई साहब मैं थक चुकी मैं

776
00:55:13,120 --> 00:55:17,360
हां सिर्फ एकिए मैं भी जानने का हक रखता

777
00:55:17,360 --> 00:55:23,360
हूं कि मैं जिस व्यक्ति से अरे भैया तो जो चीज चल रही है उसको छोड़ देने

778
00:55:23,760 --> 00:55:28,720
का बोलिए एक मिनट बोलिए बोलिए

779
00:55:28,720 --> 00:55:31,920
थोड़ा संयम रखिए

780
00:55:31,920 --> 00:55:36,400
मैं जानने का हक नहीं रखता कि मैं जिस व्यक्ति से बात कर रहा हूं

781
00:55:36,400 --> 00:55:40,480
ईश्वर को लेकर उसका क्या कांसेप्ट है फिर मैं जो

782
00:55:40,480 --> 00:55:44,560
है अपना कांसेप्ट ईश्वर को लेकर जो है वो मैं उसके सामने जब

783
00:55:44,560 --> 00:55:48,560
रखूंगा तो वो चाहे सहमति जताए या असहमति जताए

784
00:55:48,560 --> 00:55:52,720
मुझे उससे कोई मतलब नहीं क्योंकि ना तो मुझे उसको मनवाना है और ना

785
00:55:52,720 --> 00:55:56,720
ही मुझे बस बात अपनी रखनी है और आपको अपनी बात रखनी

786
00:55:56,720 --> 00:56:01,040
है हमें एक दूसरे को मनवाना तो है नहीं

787
00:56:01,040 --> 00:56:05,520
आप मेरी बात मान लीजिए और या मैं आपकी बात मान लू बात हमने

788
00:56:05,520 --> 00:56:09,600
मैं अपनी रखूंगा आप अपनी रखेंगे तो मुझे इतना हक तो है कि मैं जानू कि

789
00:56:09,600 --> 00:56:14,080
आपके ईश्वर के बारे में क्या कासेप्ट है इतना तो हक है।

790
00:56:14,080 --> 00:56:18,080
बोलिए। हक है। हक है। हक है। बिल्कुल। अब मैं आपकी बात का

791
00:56:18,080 --> 00:56:22,240
जवाब देता हूं। आपको वो हक है। मगर वो हक तब है

792
00:56:22,240 --> 00:56:26,320
जब हमारा कोई विषय अधूरा ना हो। समझ रहे हैं? आप ये

793
00:56:26,320 --> 00:56:28,400
चुनाव नहीं करेंगे कि मैं कब अचानक

794
00:56:28,400 --> 00:56:32,480
से मैंने आपसे पूछा आपका नाम क्या है? या मैंने आपसे पूछा मान

795
00:56:32,480 --> 00:56:36,640
लीजिए कि मैंने किसी चोर से पूछा। मान लीजिए किसी चोर से पूछा

796
00:56:36,640 --> 00:56:40,800
कि भाई ये चोरी का चोरी की घड़ी तुम्हारे पास कैसे मिल रही है? तो

797
00:56:40,800 --> 00:56:44,880
उसी समय चोर कहने लगे मैं इसके बात का जवाब तो बाद में दूंगा। पहले तुम

798
00:56:44,880 --> 00:56:49,120
ये बताओ फलानी जगह पे जो जमीन है वो कब्जे की है कि नहीं?

799
00:56:49,120 --> 00:56:53,120
तो ये सही है क्या? उसकी जांच में लग जाए। वो

800
00:56:53,120 --> 00:56:57,600
जो वो जो चोरी की घड़ी उसके पास थी उसकी बात ही ना करें।

801
00:56:57,600 --> 00:57:03,600
तो तो सुनिए तो आर्गुममेंट सही है ही नहीं। क्या

802
00:57:04,160 --> 00:57:08,800
ये आर्गुममेंट जो आपने दिया है ये आर्गुममेंट सही है ही नहीं।

803
00:57:08,800 --> 00:57:12,880
भाई अगर कोई आदमी गलत कर रहा है तो उसके बेस पर मैं भी गलत करके कहूं कि इतने

804
00:57:12,880 --> 00:57:16,960
लोग गलत कर रहे हैं तो मैंने भी अगर गलत किया तो क्या गलत हुआ? मैं

805
00:57:16,960 --> 00:57:21,120
नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैंने गलत नहीं कहा।

806
00:57:21,120 --> 00:57:25,280
मैंने कहा जांच हो। जब आपकी जांच हो रही है उसी समय आप जांच को

807
00:57:25,280 --> 00:57:29,520
रुकवाने के लिए। दूसरी चीज कह रहे हैं। इसकी जांच करो पहले।

808
00:57:29,520 --> 00:57:33,840
दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात

809
00:57:33,840 --> 00:57:38,080
आप मुझे आप मुझे आपने जो तीन चार बातें

810
00:57:38,080 --> 00:57:42,160
बोली थी उन तीन चार बातों का जवाब देने दीजिए पहली बात अब उसमें जो दूसरी

811
00:57:42,160 --> 00:57:46,400
बात है कि आपको जानने का हक है तो मैं बता दूं

812
00:57:46,400 --> 00:57:50,560
हमारे यहां पर जो परम तत्व है मैंने अपने कई वीडियो में बताया

813
00:57:50,560 --> 00:57:54,720
है और आप जाकर के देख लीजिएगा एक ही परम तत्व जीव

814
00:57:54,720 --> 00:57:58,720
जगत और जगदीश्वर के रूप में अपने आप को उभाषित करता है। ठीक

815
00:57:58,720 --> 00:58:02,880
है? जीव, जगत और जगदीश्वर तीनों रूपों में प्रकृति भी वही है

816
00:58:02,880 --> 00:58:07,040
और जीव जो है जो एक मिनट भाई साहब मुझे बोलने दीजिए

817
00:58:07,040 --> 00:58:11,360
ना प्रकृति भी वही है और

818
00:58:11,360 --> 00:58:15,360
प्रकृति भी वही है और जो जीव जो इंसान के रूप में

819
00:58:15,360 --> 00:58:19,360
जन्म लेगा वो भी वही है। ठीक है? और उसमें जो ईश्वर

820
00:58:19,360 --> 00:58:23,760
बनके जिसकी पूजा होगी वो भी वही है। इस कांसेप्ट से

821
00:58:23,760 --> 00:58:27,840
जो पूरी दुनिया है, प्रकृति है उसमें सर्वव्यापी है ईश्वर। क्यों?

822
00:58:27,840 --> 00:58:32,000
क्योंकि वो प्रकृति भी है। ठीक? और क्योंकि जो जीव जो

823
00:58:32,000 --> 00:58:36,240
जन्म ले रहा है जो जीव जो जन्म ले रहा है ईश्वर के रूप में

824
00:58:36,240 --> 00:58:40,240
उसके अंदर भी ईश्वर है। क्यों है? क्योंकि वो वही तत्व उसके रूप में

825
00:58:40,240 --> 00:58:44,320
स्पित हुआ है और जो ईश्वर बन के आ रहा है वो

826
00:58:44,320 --> 00:58:48,320
भी वही है क्योंकि वही ईश्वर बना है। एक ही तत्व जीव

827
00:58:48,320 --> 00:58:52,560
जगत जिग्नेश्वर बना। अब इस कांसेप्ट से कोई भी चीज उसके

828
00:58:52,560 --> 00:58:56,880
कंट्रोल के बाहर नहीं है। यहां तक कि उसको तत्व बनाने

829
00:58:56,880 --> 00:59:00,960
के लिए अलग से कोई सहायता नहीं चाहिए। अभी मैंने ये प्रश्न तो पूछा ही नहीं

830
00:59:00,960 --> 00:59:05,520
आपसे कि उसने आत्मा को बनाया कहां से? पूछना

831
00:59:05,520 --> 00:59:09,600
तो पूछ रहे पूछ लेना। अभी मैंने ये वाले प्रश्न पूछे नहीं कि

832
00:59:09,600 --> 00:59:15,600
वो तत्व कहां से आया? वो जो इंसान बनाया वो तत्व कहां से आया? ठीक है।

833
00:59:15,760 --> 00:59:20,160
अब ये तो हो गई। अब ये तो हो गई मेरी व्याख्या। मेरी व्याख्या हो गई। जब

834
00:59:20,160 --> 00:59:24,400
जब ईश्वर भाई साहब मुझे उत्तर देने दीजिए। आपने सवाल

835
00:59:24,400 --> 00:59:28,560
किए मुझे उत्तर देने दीजिए। हां। तो अब जो है जब

836
00:59:28,560 --> 00:59:32,720
वो जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है तो क्या होता

837
00:59:32,720 --> 00:59:34,400
है कि जब वो

838
00:59:34,400 --> 00:59:38,480
हर जगह है और ईश्वर के रूप में भी

839
00:59:38,480 --> 00:59:42,800
प्रकट हो रहा है तो फिर वो अवतार भी धारण करता है। जैसे वो जीव जगत जगदीश्वर

840
00:59:42,800 --> 00:59:46,880
के रूप में अपने आप को अलग-अलग रूपों में एक क्या

841
00:59:46,880 --> 00:59:51,200
कहते हैं? सर्वव्यापी होते हुए भी वो एक देश अपने आप को प्रकट करता है।

842
00:59:51,200 --> 00:59:55,200
ठीक है? सर्वव्यापी होते हुए भी अब क्या है कि वो एक देश हो गया। इससे उसका

843
00:59:55,200 --> 00:59:59,200
सर्वव्यापी खत्म नहीं हो गया। वो सर्वव्यापी है। उसने एक और रूप

844
00:59:59,200 --> 01:00:03,520
धारण किया है। ठीक है? तो ये सारा कांसेप्ट है। थोड़ा लंबा

845
01:00:03,520 --> 01:00:07,680
है। आपके बहुत सारे क्वेश्चन होंगे। सबके जवाब है मगर अभी क्या है ये

846
01:00:07,680 --> 01:00:12,080
जो इस्लाम पे जो प्रश्न उठ रहे हैं छूट जाएंगे एक एक बात ये हो गई

847
01:00:12,080 --> 01:00:16,080
मेरे गलत एक अभी मेरा अभी मेरा खत्म नहीं हुआ भाई भाई साहब

848
01:00:16,080 --> 01:00:20,560
खत्म नहीं हुआ अभी मेरा खत्म नहीं हुआ भाई साहब खत्म नहीं हुआ

849
01:00:20,560 --> 01:00:24,560
तो एक बात ये हो गई कि मेरे अगर मैं गलत सिद्ध भी हो भी जाऊंगा ये जो मान्यता

850
01:00:24,560 --> 01:00:28,640
है वैसे मैं सिद्ध नहीं हूं मैं सिद्ध कर दूंगा अगर मैं गलत हो भी जाऊंगा तो आपका

851
01:00:28,640 --> 01:00:32,720
सही होना सिद्ध नहीं होता पहली बात ठीक दूसरी बात ये कि मैं आपका

852
01:00:32,720 --> 01:00:36,800
मेरा जानने का हक था एक मिनट मिनट भाई साहब दूसरी बात ये हुई कि

853
01:00:36,800 --> 01:00:40,960
आपने कहा कि भाई मेरा जानने का हक है तो मैंने अपनी मान्यता भी बता दी। अब तीसरी बात और

854
01:00:40,960 --> 01:00:45,120
करते हैं कि हम यहां आए क्यों है? हम यहां अपनी मान्यता को केवल

855
01:00:45,120 --> 01:00:49,760
रखने नहीं आए। हम उसकी पुष्टि के लिए आए हैं। अब मैं बता दूं कैसे?

856
01:00:49,760 --> 01:00:53,920
आपने मेरे इंस्टग्राम अकाउंट पे जब ईश्वर सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न मैंने

857
01:00:53,920 --> 01:00:58,080
किया था एक मातृशक्ति से यानी महिला से तो वहां पर

858
01:00:58,080 --> 01:01:02,240
आपने लिखा था हमसे करो कितने सवाल करने हैं। हम जवाब देंगे

859
01:01:02,240 --> 01:01:06,400
तुम्हें। ठीक है? आज मैं सवाल का जवाब आज मैं सवाल

860
01:01:06,400 --> 01:01:10,480
कर रहा हूं तो आप कह रहे हैं आप अपनी मान्यता बताओ

861
01:01:10,480 --> 01:01:14,720
या तो एक मिनट या तो वो आपको लिखने

862
01:01:14,720 --> 01:01:19,120
से पहले लिखने से पहले

863
01:01:19,120 --> 01:01:23,280
आप सवालों के घेरों में आओगे तब आप बिल्कुल भी जवाब नहीं दे पाओगे जो आपने

864
01:01:23,280 --> 01:01:27,600
अपनी विचारधारा बताई है ना वो आपको देने पड़ेंगे जवाब देने पड़ेंगे जवाब

865
01:01:27,600 --> 01:01:31,760
मैं मैं दे दूंगा मैं दे दूंगा जवाब मैं दे दूंगा अभी मैं पूछ रहा हूं

866
01:01:31,760 --> 01:01:35,760
अब आप दोबारा से टॉपिक पर आ आप दोबारा टॉपिक पर

867
01:01:35,760 --> 01:01:39,840
आ जाए जवाब देते हो या ये पूरी डिबेट

868
01:01:39,840 --> 01:01:43,920
मैं दूंगा मैं दूंगा मैं दूंगा जवाब टॉपिक पर आ जाए मौका देते हो कि नहीं

869
01:01:43,920 --> 01:01:48,480
देते हो सवाल का ठीक है हां अभी अभी फिलहाल आप बताइए

870
01:01:48,480 --> 01:01:52,800
अभी फिलहाल आप बता दीजिए कि ईश्वर जो है उसमें

871
01:01:52,800 --> 01:01:56,880
और उसकी जो शक्ति है जो सर्वव्यापी है जो उसकी क्रिएशन में भी

872
01:01:56,880 --> 01:02:00,960
है वो नहीं है क्रिएशन में तो अब जांच के आधार पे क्योंकि ईश्वर

873
01:02:00,960 --> 01:02:04,960
नहीं है और क्या कहते हैं शक्ति है तो जात के आधार

874
01:02:04,960 --> 01:02:10,960
पर दोनों में अंतर आ गया ना

875
01:02:16,240 --> 01:02:20,240
हेलो पूछ रहा हूं जांच के आधार पे अंतर आ

876
01:02:20,240 --> 01:02:22,960
गया ना

877
01:02:22,960 --> 01:02:27,200
हां तो अंतर कैसे आया वो आप स्टेप स्पष्ट कीजिए ना अभी

878
01:02:27,200 --> 01:02:31,360
आप स्पष्ट कीजिए अंतर कैसे आ गया तो अंतर नहीं

879
01:02:31,360 --> 01:02:34,480
है

880
01:02:34,480 --> 01:02:38,720
मेरी बात सुनिए। जैसे मैं आपसे बोल रहा हूं। है ना? अब ये जो मैं शब्दों

881
01:02:38,720 --> 01:02:42,880
का इस्तेमाल कर रहा हूं। अपनी बॉडी से मैंने क्या पूछा

882
01:02:42,880 --> 01:02:47,040
अंतर है कि नहीं? आप ही बता दीजिए।

883
01:02:47,040 --> 01:02:50,880
तो मुझे जवाब बोलने दो

884
01:02:50,880 --> 01:02:54,880
जवाब दूं। आपको सुनना तो चाहिए ना। जवाब

885
01:02:54,880 --> 01:02:58,880
शाम तक मेरे थोड़ी ना है। शाम तक बैठा रहूं। आपका जवाब

886
01:02:58,880 --> 01:03:03,040
सुनता रहूं। उल्टा सीधा बोलने दे रहे। बोलने दोगे आप

887
01:03:03,040 --> 01:03:07,360
दो मिनट आप टू द पॉइंट बोलिए ना

888
01:03:07,360 --> 01:03:11,440
आप पॉइंट से फालतू की बातें जो मैं बोलना चाह

889
01:03:11,440 --> 01:03:15,440
रहा हूं या मैं वो बोलूं जो आप बोलवाना चाह रहे हो भैया अगर मेरे

890
01:03:15,440 --> 01:03:19,440
प्रश्न का आप जवाब नहीं बोलेंगे तो मुझे नहीं सुनना है अगर मेरे प्रश्न का जवाब नहीं बोलेंगे

891
01:03:19,440 --> 01:03:23,600
तो नहीं सुनना है मुझे आप जो प्रश्न कर रहे हैं उसका ही तो जवाब

892
01:03:23,600 --> 01:03:27,680
दे रहा हूं नहीं बोल रहे हैं जवाब आप मैंने पूछा उसमें उत्तर है कि नहीं

893
01:03:27,680 --> 01:03:31,760
है आपने सुना ही नहीं आपने फैसला भी कर लिया आपने हां मैंने सुना

894
01:03:31,760 --> 01:03:36,320
नहीं और आपका जवाब होना चाहिए। हां अंतर अंतर नहीं है।

895
01:03:36,320 --> 01:03:40,720
भाई आप क्या इतने बड़े अंतर्यामी हो? क्या आपने जवाब सुना नहीं और

896
01:03:40,720 --> 01:03:44,800
आप देखो पर्सनल व्यक्तिगत उसप मत जाओ टीका टिप्पणियों पे

897
01:03:44,800 --> 01:03:48,800
आप अपना जवाब बताओ। आप जवाब नहीं दे रहे हो तो मेरे को जवाब देने दो। भाई साहब

898
01:03:48,800 --> 01:03:53,040
मैं देखो मैं चर्चा को अब ऑफ कर दूंगा। या तो आप अपना जवाब

899
01:03:53,040 --> 01:03:57,680
बताओ। प्लीज निवेदन है। चैनल है चाहे तो चाहे तो

900
01:03:57,680 --> 01:04:01,760
क्या करें? तो आप जो अब इस पर आ गए आप अंतर्यामी अभी और कटाक्ष हो मैं

901
01:04:01,760 --> 01:04:02,260
कटाक्ष

902
01:04:02,160 --> 01:04:06,240
करूंगा आपके ऊपर आप भाई भाई आप जो है मेरे

903
01:04:06,240 --> 01:04:10,320
बारे में क्यों बोल रहे हो कि आप जो है जवाब नहीं दे रहे हो

904
01:04:10,320 --> 01:04:14,320
जबकि मैं दो शब्द बोला था अभी अभी सिर्फ दो शब्द बोला था और आपने बीच

905
01:04:14,320 --> 01:04:18,400
में टोक दिया पूरी बात तो सुन लो फिर उसके बाद बोलना कि

906
01:04:18,400 --> 01:04:20,720
आपने

907
01:04:20,720 --> 01:04:24,720
सुनिए सुनिए जब आपने मेरी विचारधारा पूछी तो मैंने टू

908
01:04:24,720 --> 01:04:30,720
द पॉइंट जवाब दिया जो मेरी जो मेरी विचारधारा

909
01:04:31,440 --> 01:04:35,440
मैंने सुनने की हिम्मत रखी कि आपकी पूरी बात सुनी आपकी तरह अगर

910
01:04:35,440 --> 01:04:39,920
मैं भी बीच में कूद जाता तो आपकी बात मुकम्मल नहीं होने बात बोलेंगे दोबारा

911
01:04:39,920 --> 01:04:44,000
मैं पूछ रहा हूं आप बात बोलनी है आपको हां अब जो आपने

912
01:04:44,000 --> 01:04:48,880
सवाल किया उसका जवाब लोगे हां बोलो आपने

913
01:04:48,880 --> 01:04:52,880
जो सवाल किया कि ईश्वर की शक्ति सवाल बता दोबारा

914
01:04:52,880 --> 01:04:57,040
ईश्वर की ईश्वर और मैं सवाल बता दूं दोबारा ईश्वर और

915
01:04:57,040 --> 01:05:01,040
उसकी शक्ति में अंतर है या नहीं? अगर है तो क्या है? बस

916
01:05:01,040 --> 01:05:05,040
बताओ। हां। ठीक है। अब आपका यह सवाल हो गया। मेरा

917
01:05:05,040 --> 01:05:09,040
ये जवाब है ईश्वर और उसकी शक्ति में अंतर नहीं है। वो उसके

918
01:05:09,040 --> 01:05:13,120
साथ ही है। उसी के साथ रहती है उसकी शक्तियां और वो उन

919
01:05:13,120 --> 01:05:17,280
शक्तियों का इस्तेमाल करके कार्य करता भी है। वो फाइल

920
01:05:17,280 --> 01:05:21,360
है। वो करने वाला है। उनहीं शक्तियों के साथ

921
01:05:21,360 --> 01:05:26,000
जरा सा कोई भी अंतर नहीं है। उसकी

922
01:05:26,000 --> 01:05:30,560
सर्व वो उसकी सारी शक्ति जो है वो लामहदूद

923
01:05:30,560 --> 01:05:34,880
है। जिसकी कोई सीमा नहीं है। ये जवाब दे रहा हूं मैं कि उसकी जो जितनी भी शक्तियां

924
01:05:34,880 --> 01:05:38,960
है वो असीमित है। उसकी उसको हम

925
01:05:38,960 --> 01:05:43,440
अपनी ज्ञान परिधि में नहीं ले सकते। असीमित है।

926
01:05:43,440 --> 01:05:47,680
मैंने पूछा भाई साहब जरा सा भी किसी बात का कोई अंतर नहीं

927
01:05:47,680 --> 01:05:52,160
है। उसकी शक्तियों के अंदर जैसे अलग-अलग

928
01:05:52,160 --> 01:05:56,160
शक्तियां है ना तो अलग-अलग शक्तियों के अंदर वो अपनी शक्तियों

929
01:05:56,160 --> 01:06:01,440
के अंदर असीमित है। अब आप किस शक्ति के बारे में अंतर पूछ रहे हैं?

930
01:06:01,440 --> 01:06:05,200
सभी पूछ रहे हो

931
01:06:05,200 --> 01:06:09,840
समस्त उसकी समस्त शक्ति जो है वो असीमित

932
01:06:09,840 --> 01:06:14,000
है मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा नहीं मिला

933
01:06:14,000 --> 01:06:17,840
जवाब नहीं मिला मैंने पूछा है

934
01:06:17,840 --> 01:06:21,920
अंतर है आपने अभी मुझसे पूछा ना कि आपको जवाब मिला अब मैं आपको जवाब दे रहा हूं

935
01:06:21,920 --> 01:06:26,000
मिला कि नहीं मिला तो आप मुझे बोलने नहीं दे रहे फिर कहेंगे कि मैं मैं आपको जवाब देता

936
01:06:26,000 --> 01:06:29,680
हूं आप मुझे बोलने नहीं दे रहे

937
01:06:29,680 --> 01:06:34,320
उसकी जो समस्त शक्ति है उनमें और

938
01:06:34,320 --> 01:06:38,480
ईश्वर में अंतर है जरा सा भी किसी भी बात का की नहीं

939
01:06:38,480 --> 01:06:42,400
है बस ये पूछ रहा हूं

940
01:06:42,400 --> 01:06:46,480
बताया ना उसकी शक्तियों में अंतर नहीं है हर

941
01:06:46,480 --> 01:06:50,720
शक्ति उसकी असीमित है ये बोला मैंने के हर शक्ति

942
01:06:50,720 --> 01:06:54,720
उसकी असीमित है अंतर है बच रहे हैं आप भाई साहब फिर

943
01:06:54,720 --> 01:06:58,880
बच रहे हैं मैं शक्तियों के आपस में अंतर की बात

944
01:06:58,880 --> 01:07:03,040
नहीं कर रहा हूं मैं शक्ति और ईश्वर के बीच में अंतर है या नहीं

945
01:07:03,040 --> 01:07:08,080
यह पूछ रहा हूं। जरा सा भी जरा सा भी अंतर किसी भी बात को लेकर

946
01:07:08,080 --> 01:07:12,480
हां नहीं है। वो सारी शक्तियां उसी के साथ है उसी के भीतर है।

947
01:07:12,480 --> 01:07:16,560
जात को लेकर के भी अंतर नहीं है। उसी के साथ मैंने कहा

948
01:07:16,560 --> 01:07:20,720
जात को लेकर के भी अंतर नहीं है।

949
01:07:20,720 --> 01:07:24,880
जात तो एक है ना। जात एक है। एक

950
01:07:24,880 --> 01:07:29,440
है। एक है। एक है।

951
01:07:29,440 --> 01:07:33,440
जात एक है जात एक है ना हां जात एक

952
01:07:33,440 --> 01:07:37,680
है तो ईश्वर की जात है कि वो एक देसी है तो उसकी

953
01:07:37,680 --> 01:07:41,360
शक्तियां भी एक देश है

954
01:07:41,360 --> 01:07:45,680
या फिर अगर शक्तियों की या फिर या फिर शक्तियों

955
01:07:45,680 --> 01:07:49,840
की जात सर्वव्यापी है तो क्या ईश्वर भी सर्वव्यापी है अगर जात

956
01:07:49,840 --> 01:07:54,400
एक है दोनों की तो हां जात एक है सर्वव्यापी

957
01:07:54,400 --> 01:07:58,080
है सर्वज्ञानी है और उसकी

958
01:07:58,080 --> 01:08:01,440
असीमित है पहला महदूद

959
01:08:01,440 --> 01:08:04,960
ईश्वर सर्व्यापी है

960
01:08:04,960 --> 01:08:08,960
सर्व मतलब असीमित ज्ञानी है सब चीज में ऐसी

961
01:08:08,960 --> 01:08:14,240
लगा दो जात के हिसाब से भी ईश्वर सर्वव्यापी है

962
01:08:14,240 --> 01:08:18,320
जात के ऐतबार से हां ईश्वर सर्वव्यापी है

963
01:08:18,320 --> 01:08:22,480
वो अपनी क्रिएशन में भी है हर नहीं जात

964
01:08:22,480 --> 01:08:26,480
के ऐतबार से तो आप मानते हो मैं नहीं मानता अरे तो आप बताओ

965
01:08:26,480 --> 01:08:30,480
मैं नहीं मानता कि फिर उसकी शक्ति में अंतर आ गया

966
01:08:30,480 --> 01:08:34,800
ना क्योंकि शक्ति क्रिएशन के अंदर भी है नहीं मानता

967
01:08:34,800 --> 01:08:40,560
मैं वही कह रहा हूं कि मैं जात के ऐतबार से उसे हर चीज में नहीं मानता

968
01:08:40,560 --> 01:08:44,720
मानता हूं कि हर चीज के अंदर आप ये कह रहे हैं कि उसकी शक्ति और उसकी जात

969
01:08:44,720 --> 01:08:48,800
एक है। अब जात यदि एक है तो ईश्वर क्योंकि अपनी एक

970
01:08:48,800 --> 01:08:53,360
मिनट जात यदि एक है तो ईश्वर अपनी क्रिएशन के अंदर नहीं है। जबकि

971
01:08:53,360 --> 01:08:57,600
उसकी शक्ति है तो जात एक कैसे है फिर?

972
01:08:57,600 --> 01:09:01,680
तो वो उसके गुण वो उसके गुण से है ना जात

973
01:09:01,680 --> 01:09:05,760
से नहीं उसके गुण से है हमसे अटैच हमसे अटैच है

974
01:09:05,760 --> 01:09:09,760
उसके गुणों से यानी कि यानी कि गुण

975
01:09:09,760 --> 01:09:13,200
का अंतर है शक्ति और उसमें से

976
01:09:13,200 --> 01:09:17,920
वो हमसे अटैच है गुण का अंतर है शक्ति और उसमें

977
01:09:17,920 --> 01:09:21,920
कैसे हुआ अंतर कैसे हुआ अंतर अरे भैया जब

978
01:09:21,920 --> 01:09:26,000
कोई चीज अंतर नहीं हुआ ना उसके गुणों

979
01:09:26,000 --> 01:09:29,840
से

980
01:09:29,840 --> 01:09:32,160
बताइए

981
01:09:32,160 --> 01:09:36,320
बताइए। अच्छा मैं दो मिनट लू आपसे गुणों के अंतर को समझाने

982
01:09:36,320 --> 01:09:40,480
की। जैसे मेरे देखने की एक हद है कि मैं कहां

983
01:09:40,480 --> 01:09:44,480
तक देख सकता हूं। सुन लीजिए। सिर्फ एक मिनट सुन लीजिए ताकि बात

984
01:09:44,480 --> 01:09:49,200
अच्छे से हो जाए। कि मेरी देखने की एक सीमा है।

985
01:09:49,200 --> 01:09:53,360
है ना? देखता ईश्वर भी है, देखता मैं भी हूं। लेकिन मेरे

986
01:09:53,360 --> 01:09:57,680
देखने की एक सीमा है। लेकिन ईश्वर जो देखता है उसकी

987
01:09:57,680 --> 01:10:01,680
सीमा अपरंपार है। तो ये वो सर्वशक्तिमान है। उससे

988
01:10:01,680 --> 01:10:05,920
ज्यादा शक्ति वाला कोई है ही नहीं। कोई है ही नहीं। जो भी जिसका

989
01:10:05,920 --> 01:10:10,080
जिसके बारे में भी कहोगे वो उससे कमतर होगा।

990
01:10:10,080 --> 01:10:14,160
उसके बराबर भी नहीं हो सकता। उससे कमतर ही

991
01:10:14,160 --> 01:10:18,320
होगा। जिसको भी और वो जो भी शक्ति उसे मिली होगी वो उसी से मिली

992
01:10:18,320 --> 01:10:23,760
होगी। ईश्वर से ही मिली होगी।

993
01:10:23,760 --> 01:10:28,320
आपने इतनी बातें शायद समझ में आ जाना चाहिए हमारे

994
01:10:28,320 --> 01:10:32,320
क्या है भाई साहब मेरा उदाहरण आपने जैसे मेरा उदाहरण

995
01:10:32,320 --> 01:10:36,480
दिया देखिए बात क्या है जैसे मेरी

996
01:10:36,480 --> 01:10:40,720
जो दृष्टि बीच में थोड़ा सा ना बोले तो मैं आपको समझाने

997
01:10:40,720 --> 01:10:44,720
का प्रयास कर रहा हूं। जैसे मेरी जो दृष्टि है वो मैं कह रहा

998
01:10:44,720 --> 01:10:48,800
हूं सर्व्यापी नहीं मैं कह रहा हूं 5 किलोमीटर तक जा रही है। आसमान में अगर

999
01:10:48,800 --> 01:10:53,200
देखूं तो 5 किलोमीटर तक जा रही है। उसके बाद मुझे नहीं दिख रहा है क्या है। ठीक है?

1000
01:10:53,200 --> 01:10:57,760
अब ये जो 5 किलोमीटर में मेरी दृष्टि तो जा रही है। मगर

1001
01:10:57,760 --> 01:11:01,760
मैं उस 5 किलोमीटर में अगर कोई पंछी उड़ेगा

1002
01:11:01,760 --> 01:11:05,760
तो अगर उसके हाथ से मैं उसकी गर्दन मरोड़ना चाहूं तो नहीं मोड़

1003
01:11:05,760 --> 01:11:09,920
सकता। ठीक है? यानी कि मेरा वहां कंट्रोल नहीं है पांच मिनट।

1004
01:11:09,920 --> 01:11:14,880
एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट अगर मैं उस पंछी की

1005
01:11:14,880 --> 01:11:18,960
अह जो गंध है वो सूंघना चाहूं तो मैं नहीं सूंघ

1006
01:11:18,960 --> 01:11:22,960
सकता क्योंकि मेरी दृष्टि तो वहां पे है पर मेरी नाक वाली जो

1007
01:11:22,960 --> 01:11:27,680
पावर है वो वहां पे नहीं है। अगर मैं उस पंछी को अपनी

1008
01:11:27,680 --> 01:11:32,000
एक मिनट भाई साहब भाई साहब मुझे पूरा करने दीजिए रिजवान जी

1009
01:11:32,000 --> 01:11:36,160
अगर मैं अपने पैर से उसको छूना चाहूं तो मैं नहीं छू सकता।

1010
01:11:36,160 --> 01:11:38,880
क्यों? क्योंकि मेरा पैर वहां तक नहीं पहुंच

1011
01:11:38,880 --> 01:11:43,040
रहा है। और यदि मैं वो हर चीज जो यहां से

1012
01:11:43,040 --> 01:11:47,040
कर सकता हूं यदि मैं वो हर चीज जो मैं यहां से कर

1013
01:11:47,040 --> 01:11:51,120
सकता हूं वो मैं वहां भी कर सकता हूं तो इसका मतलब मानना पड़ेगा मेरा

1014
01:11:51,120 --> 01:11:55,120
पैर भी वहां है मेरी सूंघने की क्षमता भी वहां है मेरी ला

1015
01:11:55,120 --> 01:11:59,280
मेरा हाथ भी वहां है हर वो चीज जो मैं यहां पर रह के कर सकता हूं

1016
01:11:59,280 --> 01:12:03,440
वो चीज वहां पर भी है ये मुझे मानना पड़ेगा तभी मेरा तभी

1017
01:12:03,440 --> 01:12:07,680
मेरा वो 5 किलोमीटर के उसमें कंट्रोल सिद्ध होगा ठीक है अब

1018
01:12:07,680 --> 01:12:12,320
आपके यहां क्या है अब आपके यहां क्या है?

1019
01:12:12,320 --> 01:12:16,560
एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे फिनिश करने दीजिए। अब आपका

1020
01:12:16,560 --> 01:12:20,640
क्या है कि ईश्वर एक जगह है। वो अपनी क्रिएशन

1021
01:12:20,640 --> 01:12:24,800
में नहीं है। मगर उसकी शक्ति उसके क्रिएशन में है। उसकी शक्ति यदि

1022
01:12:24,800 --> 01:12:28,800
क्रिएशन में है तो कुछ ना कुछ अंतर आ रहा है। उसकी जो कंट्रोल

1023
01:12:28,800 --> 01:12:32,800
है जो जहां पर वो है वहां ज्यादा है। जहां वो नहीं है वहां कम है। क्योंकि

1024
01:12:32,800 --> 01:12:37,280
आप कह रहे हो वो नहीं है उसी शक्ति है। या तो ये मान लो शक्ति और वो एक है।

1025
01:12:37,280 --> 01:12:41,680
तो हमें ये कहना पड़ेगा ईश्वर अपनी शक्ति के रूप में हर जगह है।

1026
01:12:41,680 --> 01:12:45,920
हो गया। मतलब की एक मिनट। मतलब कि ईश्वर

1027
01:12:45,920 --> 01:12:50,640
और शक्ति दो अलग-अलग तत्व नहीं है। एक ही तत्व है।

1028
01:12:50,640 --> 01:12:54,160
हो गया। जात से भी जात से भी वो एक ही मानने

1029
01:12:54,160 --> 01:12:58,160
पड़ेंगे। फिर आपके कुरान का वो जो क्लेम है कि वो एक जगह है। तो

1030
01:12:58,160 --> 01:13:02,240
वो क्लेम खंडित होगा। अब इस पर बताएं। हो गया।

1031
01:13:02,240 --> 01:13:07,120
पहली चीज कुरान का ऐसा कोई क्लेम नहीं है कि वो एक जगह है।

1032
01:13:07,120 --> 01:13:11,280
आपने कुरान का नाम लिया तो बता दूं कि वो कुरान के वो अपनी क्रिएशन

1033
01:13:11,280 --> 01:13:15,840
में नहीं है ना भाई साहब। वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। आपने

1034
01:13:15,840 --> 01:13:20,080
कहा है वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। आपने ही कहा है आपने

1035
01:13:20,080 --> 01:13:24,080
कहा है वो अपनी क्रिएशन में नहीं है। यानी कि कोई दायरा है

1036
01:13:24,080 --> 01:13:28,080
जिसके अंदर वो नहीं है। आप मुझे एक मिनट बोलने

1037
01:13:28,080 --> 01:13:32,080
दीजिए। आपको जो भी अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखना है सवाल जो भी रखना है रख अपने टाइम

1038
01:13:32,080 --> 01:13:36,320
में रख लेना। ठीक है? मैं ये कह रहा हूं कि जैसा आपने कहा कि कुरान के हिसाब से

1039
01:13:36,320 --> 01:13:40,400
एक जगह तो कुरान में ऐसा कहीं नहीं लिखा है। वो आपको बताना पड़ेगा अगर आप ये क्लेम

1040
01:13:40,400 --> 01:13:44,480
कर रहे हैं तो। दूसरी चीज आपने कहा कि आपकी दृष्टि जो है वहां तक पहुंच रही

1041
01:13:44,480 --> 01:13:48,720
है 500 किलोमीटर तक लेकिन आप फिजिकली वहां 500

1042
01:13:48,720 --> 01:13:53,280
किलोमीटर तक मौजूद नहीं है। लेकिन आपकी दृष्टि के ऐतबार से आप वहां

1043
01:13:53,280 --> 01:13:57,360
तक देख पा रहे हैं और एक पंछी उड़ रहा है। आप उसकी गर्दन अगर

1044
01:13:57,360 --> 01:14:01,840
मरोड़ना चाहे तो आप फिजिकली अपनी बॉडी को वहां तक नहीं ले जा पा रहे।

1045
01:14:01,840 --> 01:14:05,840
फिजिकली बॉडी को नहीं ले जा पा रहे हैं तो आप फिजिकली जो है वहां मौजूद

1046
01:14:05,840 --> 01:14:09,200
नहीं है लेकिन आपकी दिव्य दृष्टि वहां तक जा रही है। देख पा

1047
01:14:09,200 --> 01:14:13,280
रही है कि 500 किलोमीटर दूर पर एक पंछी जो है उड़ रहा

1048
01:14:13,280 --> 01:14:17,520
है और आप सूंघना चाह रहे हैं तो आपने के सूंघने वाली जो शक्ति

1049
01:14:17,520 --> 01:14:21,760
है अगर वो भी एक्टिव हो जाए तो वो सूंघ भी सकती है और सुनने वाली

1050
01:14:21,760 --> 01:14:25,840
अगर आपकी जो शक्ति है वो भी अगर एक्टिव हो जाए तो वो भी 500 किलोमीटर

1051
01:14:25,840 --> 01:14:29,920
तक की सुन सकती है। सुन सकती है और अपनी आवाज पहुंचा भी सकती

1052
01:14:29,920 --> 01:14:34,000
है। अगर वो चीजें भी एक्टिव हो जाए तो अब ये हो गई हमारी एक हद के

1053
01:14:34,000 --> 01:14:38,080
500 किलोमीटर लेकिन ईश्वर के लिए जब हम कहेंगे कोई बात

1054
01:14:38,080 --> 01:14:42,560
तो ईश्वर के लिए ये चीजें हद नहीं होती है उसके लिए लामहदूद

1055
01:14:42,560 --> 01:14:46,560
होती है उसके लिए कोई बाधा नहीं आ सकती कि भाई ईश्वर इतनी देर इतनी

1056
01:14:46,560 --> 01:14:50,720
दूर तक ही देख सकता है नहीं वो तो लामहदूद है इतनी दूर

1057
01:14:50,720 --> 01:14:54,800
तक ही सुन सकता है नहीं उसके लिए ये चीजें नहीं होंगी वो तो लामहदूद

1058
01:14:54,800 --> 01:14:58,800
है ईश्वर तो उसके लिए ये चीजें नहीं होगी ये हमारे लिए है क्योंकि हम

1059
01:14:58,800 --> 01:15:02,800
क्रिएशन है और वो क्रिएटर है। तो क्रिएशन के लिए पाबंदियां होती

1060
01:15:02,800 --> 01:15:06,960
है। एक हद होती है। लेकिन जो क्रिएटर होता है वो तो इससे परे

1061
01:15:06,960 --> 01:15:09,520
होता है।

1062
01:15:09,520 --> 01:15:13,920
ठीक है। अब आप बोलिए। हम ठीक है। बोलता हूं।

1063
01:15:13,920 --> 01:15:18,800
बोलता हूं। देखिए बात ऐसी है कि

1064
01:15:18,800 --> 01:15:22,880
अगर मैं पहली बात तो ये है कि जो काम मैं

1065
01:15:22,880 --> 01:15:24,320
यहां बैठ के कर सकता हूं। मगर

1066
01:15:24,320 --> 01:15:28,480
वही काम में आप कह रहे हो ईश्वर असीमित है तो जो काम ईश्वर

1067
01:15:28,480 --> 01:15:32,720
एक जगह रहकर कर सकता है वही कार्य सारे

1068
01:15:32,720 --> 01:15:36,720
कार्य ईश्वर वहां रह के भी वहां पे भी कर सकता है जहां

1069
01:15:36,720 --> 01:15:41,120
वो नहीं है तो हमें ये मानना पड़ेगा हर तरह से उसकी

1070
01:15:41,120 --> 01:15:45,120
शक्ति जो वहां पर है उसके रूप में ईश्वर ही है नहीं तो अगर आप

1071
01:15:45,120 --> 01:15:49,280
ये कहेंगे कि ईश्वर नहीं है वहां पर वहां पर नहीं है और उसकी शक्ति है

1072
01:15:49,280 --> 01:15:53,360
तो शक्ति और ईश्वर दो अलग-अलग पदार्थ हो गए दो अलग-अलग

1073
01:15:53,360 --> 01:15:57,360
तत्व हो गए या फिर आप कह लो जात के हिसाब से अलग हो गए। ईश्वर

1074
01:15:57,360 --> 01:16:01,440
की जात क्या है कि वो एक जगह है और उसकी शक्ति की जात क्या है कि

1075
01:16:01,440 --> 01:16:05,600
वो सब जगह है। ठीक है? तो ये जात के आधार पर दो अलग-अलग

1076
01:16:05,600 --> 01:16:09,600
तत्व हो गए। जब तत्व हो गए दो अलग-अलग तो फिर दिक्कत ये आएगी जब

1077
01:16:09,600 --> 01:16:13,680
दो अलग-अलग तत्व हो गए तो कहीं ना कहीं किसी ना किसी कारण में

1078
01:16:13,680 --> 01:16:17,840
किसी ना किसी आधार में शक्ति को ईश्वर से अलग

1079
01:16:17,840 --> 01:16:21,840
मान कम मानना पड़ेगा। कम नहीं तो ईश्वर दो हो जाएंगे। एक

1080
01:16:21,840 --> 01:16:26,080
शक्ति ईश्वर है और एक जो है वो स्वयं ईश्वर है। दो ईश्वर

1081
01:16:26,080 --> 01:16:31,280
हो जाएंगे। तो अगर वो मानेंगे तब भी दिक्कत है। एक मिनट भाई

1082
01:16:31,280 --> 01:16:35,360
तो अगर वो सारे काम सब कुछ वहां कर सकता है जो वो यहां

1083
01:16:35,360 --> 01:16:39,440
कर सकता है जहां वो है। तो ये मानना पड़ेगा कि वो स्वयं वहां पर है।

1084
01:16:39,440 --> 01:16:43,440
तभी कर पाएगा। और यदि वो स्वयं नहीं है कोई दूसरा तत्व

1085
01:16:43,440 --> 01:16:47,440
है। है ना? कोई दूसरा तत्व है तो फिर अंतर आ जाएगा। फिर उसकी

1086
01:16:47,440 --> 01:16:51,680
सत्ता सर्वव्यापी और नित्य नहीं रह जाएगी। शाश्वतता भंग हो जाएगी।

1087
01:16:51,680 --> 01:16:54,000
जी

1088
01:16:54,000 --> 01:16:58,160
तो आप जो बता रहे हैं कि ईश्वर जो है

1089
01:16:58,160 --> 01:17:02,160
नहीं सर्व्यापी जैसे हमने अभी बात की थी कि

1090
01:17:02,160 --> 01:17:06,320
सर्वव्यापी गुणों के एतबार से है। जात के ऐतबार से वो

1091
01:17:06,320 --> 01:17:10,480
यानी कि जात के ऐतबार से जात के ऐतबार से उसकी शक्ति

1092
01:17:10,480 --> 01:17:14,720
और उसमें अंतर है ना? नहीं अंतर नहीं है। अरे

1093
01:17:14,720 --> 01:17:18,800
भाई जांच के हिसाब से ईश्वर एक जगह है। अब

1094
01:17:18,800 --> 01:17:22,880
आप मुझे बोलने देंगे। से अच्छी बात चल बिल्कुल अच्छी

1095
01:17:22,880 --> 01:17:27,600
बात चल बोलिए बोलिए। हां देखो गुण जो होता है ना गुण

1096
01:17:27,600 --> 01:17:32,720
ईश्वर के गुण वो उसके गुणों से हर जगह मौजूद है।

1097
01:17:32,720 --> 01:17:36,880
उसके गुणों से हर जगह मौजूद है। लेकिन उसकी जात के ऐतबार से वो हर जगह

1098
01:17:36,880 --> 01:17:40,880
नहीं है। मुझे बोलने दीजिएगा। अपने टाइम में बोलिएगा एक मिनट बाद आराम से ताकि अच्छे से बातचीत

1099
01:17:40,880 --> 01:17:45,520
चले। सुनने वाले को भी कुछ बात समझ में आए क्या आप क्या कहना चाह रहे हैं मैं क्या कहना चाह

1100
01:17:45,520 --> 01:17:49,600
तो वो अपने जैसे हम गुण गुण के एतबार से

1101
01:17:49,600 --> 01:17:53,760
वो हर जगह है और उसकी जात के एतबार से

1102
01:17:53,760 --> 01:17:54,800
वो ला मक्का

1103
01:17:54,800 --> 01:17:58,960
में है ला मक्का के अंदर वो है अपने जात के ऐतबार

1104
01:17:58,960 --> 01:18:03,040
से गुणों के बार बता चुके हैं आप रिपीट कर रहे हैं बहुत बार

1105
01:18:03,040 --> 01:18:07,120
बता रहा हूं आपने अभी सर्वव्यापी भाई साहब

1106
01:18:07,120 --> 01:18:11,280
उससे समय वेस्ट हो रहा है ना आप जो चीजें आप मुझे

1107
01:18:11,280 --> 01:18:17,120
बता चुके हो उस मैंने क्वेश्चन नया किया है। हां तो सर्व्यापी

1108
01:18:17,120 --> 01:18:21,120
सर्वव्यापी वाली जब बात आई तो मैंने गुणों के ऐतबार से सर्वव्यापी

1109
01:18:21,120 --> 01:18:25,600
कहा अरे भाई साहब आपने शुरू में ही बता दिया था कि वो गुणों के हिसाब से सर्वव्यापी

1110
01:18:25,600 --> 01:18:29,680
है कंट्रोल के हिसाब से सर्वव्यापी है शक्ति के एक मिनट

1111
01:18:29,680 --> 01:18:33,760
अभी आपने कहा कि ईश्वर जो है उसकी शक्ति जो है और वो जो

1112
01:18:33,760 --> 01:18:38,160
ईश्वर है वो दोनों अलग-अलग चीज हो गई

1113
01:18:38,160 --> 01:18:42,240
अंतर आ गया हां आपके हिसाब से ये अंतर आ गया। तो

1114
01:18:42,240 --> 01:18:46,400
आप तो मुझे पहले ये क्लियर करो कि अंतर है कि नहीं है? आप मानते क्या हो? अंतर

1115
01:18:46,400 --> 01:18:50,560
है कि नहीं है? शक्ति और जो भी गुणों जो भी गुण

1116
01:18:50,560 --> 01:18:54,560
है जिस गुण से उसने अपने आप को जाहिर किया है तो वो गुण

1117
01:18:54,560 --> 01:18:58,720
सारे के सारे उसी में है। उसी में है वो अलग नहीं है।

1118
01:18:58,720 --> 01:19:04,160
मैंने पूछा क्या है? शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं?

1119
01:19:04,160 --> 01:19:08,240
शक्ति जो है उसके गुणों से ही पता चलेगी ना। तो वो गुण जो है वो उसी के साथ

1120
01:19:08,240 --> 01:19:09,840
ही है। भाई साहब

1121
01:19:09,840 --> 01:19:13,920
शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं यही तो दिक्कत है। अरे

1122
01:19:13,920 --> 01:19:18,000
पता चले आप पता करके आओ फिर बता देना एक मिनट पता चलेगी

1123
01:19:18,000 --> 01:19:22,240
आप पता करके मुझे बता दो शक्ति और उसमें अंतर है कि नहीं

1124
01:19:22,240 --> 01:19:26,480
वो साथ में है साथ में समझ रहे हो जैसे

1125
01:19:26,480 --> 01:19:30,640
वही बात साथ में है मैं क्या पूछ रहा हूं शक्ति और उसमें अंतर

1126
01:19:30,640 --> 01:19:35,680
है कि नहीं

1127
01:19:35,680 --> 01:19:40,080
हां तो एक मिनट अब जवाब दे देता हूं मैं कि अंतर जब वो होगा

1128
01:19:40,080 --> 01:19:44,160
तो जब वो गुण उससे जुदा हो जाएंगे उसके साथ नहीं रहेंगे उससे

1129
01:19:44,160 --> 01:19:48,240
अलग हो जाएंगे तब वो अंतर आ जाएगा जब उससे

1130
01:19:48,240 --> 01:19:52,240
अलग हो जाएंगे ना उसके गुण तो अंतर आ जाएगा क्या वो गुण उसके साथ नहीं है

1131
01:19:52,240 --> 01:19:56,480
यानी कि अंतर नहीं है अंतर नहीं है नहीं

1132
01:19:56,480 --> 01:20:00,480
है उसी के गुण किसी भी मामले में किसी भी

1133
01:20:00,480 --> 01:20:06,400
पैरामीटर से किसी भी ऐतबार से अंतर नहीं है सारे

1134
01:20:06,400 --> 01:20:10,640
सारे हां सारे गुण उसी के हैं। मैंने क्या कहा

1135
01:20:10,640 --> 01:20:14,720
भाई साहब? दोबारा सुन लीजिए। दोबारा सुन लीजिए। ईश्वर

1136
01:20:14,720 --> 01:20:18,880
और उसकी शक्ति में ईश्वर और उसकी शक्ति में किसी भी

1137
01:20:18,880 --> 01:20:23,600
एतबार से कोई अंतर है या नहीं?

1138
01:20:23,600 --> 01:20:25,120
कोई अंतर नहीं है।

1139
01:20:25,120 --> 01:20:29,600
अब बोलिए आगे कोई अंतर नहीं है। किसी भी ऐतबार से नहीं है।

1140
01:20:29,600 --> 01:20:34,320
किसी भी ऐतबार से नहीं है। इसकी डेफिनेशन बता चुका हूं।

1141
01:20:34,320 --> 01:20:38,560
किसी भी एतबार से अंतर ईश्वर और उसकी शक्ति

1142
01:20:38,560 --> 01:20:42,640
में नहीं है। किसी भी एतबार से डेफिनेशन

1143
01:20:42,640 --> 01:20:46,640
बता चुका। ठीक है। ठीक है। तो ईश्वर की शक्ति तो

1144
01:20:46,640 --> 01:20:50,640
सब जगह है।

1145
01:20:50,640 --> 01:20:55,280
मैं बोलू मैं पूछ रहा हूं। हां कि ना?

1146
01:20:55,280 --> 01:20:59,520
वो अपने गुणों से हर जगह प्रकट है। ईश्वर की शक्ति

1147
01:20:59,520 --> 01:21:03,520
शक्ति हर जगह है। शक्ति भी गुणी है ना? शक्ति भी

1148
01:21:03,520 --> 01:21:07,600
उसका गुण है। ठीक है। वो अपने गुणों से हर जगह जगह

1149
01:21:07,600 --> 01:21:11,760
है। हर जगह प्रकट है। हां हां

1150
01:21:11,760 --> 01:21:15,200
ईश्वर हर जगह है।

1151
01:21:15,200 --> 01:21:19,280
गुणों के ऐतबार से भाई साहब भाई साहब जात के

1152
01:21:19,280 --> 01:21:23,920
ऐतबार से ईश्वर हर जगह है।

1153
01:21:23,920 --> 01:21:28,560
जात के ऐतबार से नहीं है। पहले भी बोला था नहीं है। नहीं

1154
01:21:28,560 --> 01:21:32,640
अब आप समझिए देखिए देखिए अब आप समझिए जात के ऐतबार से ईश्वर

1155
01:21:32,640 --> 01:21:36,800
हर जगह नहीं है जात के ऐतबार से शक्ति सब जगह है मगर आपने अभी

1156
01:21:36,800 --> 01:21:40,960
क्या कहा था किसी भी एतबार से ईश्वर की शक्ति

1157
01:21:40,960 --> 01:21:44,960
और उसमें अंतर नहीं है अभी आपने कहा हां दिखा भी

1158
01:21:44,960 --> 01:21:49,040
कह रहा हूं नहीं अभी भी कह रहा हूं ना तो ये बात ठीक है

1159
01:21:49,040 --> 01:21:53,520
अभी भी जनता ठीक है ठीक है समझ लीजिए

1160
01:21:53,520 --> 01:21:58,000
इसको ठीक है मैं समझ गया आपके पास जवाब है नहीं आप आप जो है

1161
01:21:58,000 --> 01:22:02,480
आप जवाब दोगे नहीं और आप कह भी दोगे अपनी बातों से पलट भी जाओगे

1162
01:22:02,480 --> 01:22:06,800
और फिर कह दोगे मैं अभी भी कह रहा हूं अरे भैया आपने कहा

1163
01:22:06,800 --> 01:22:11,200
किसी भी ऐतबार से आपने कहा किसी आपने कहा आपने

1164
01:22:11,200 --> 01:22:15,520
कहा किसी भी ऐतबार से आपने कहा किसी भी ऐतबार से शक्ति

1165
01:22:15,520 --> 01:22:19,520
और ईश्वर में अंतर नहीं है फिर आप कह रहे हो जात के ऐतबार से ईश्वर

1166
01:22:19,520 --> 01:22:23,520
एक जगह है जुदा हो जाएगी भाई उससे जुदा जब हो जाएगी तब

1167
01:22:23,520 --> 01:22:27,680
अंतर होगा ना भाई जब साथ ही में तो अंतर कहां है?

1168
01:22:27,680 --> 01:22:32,160
अंतर जब होगा जब उससे जुदा हो जाएगी। जैसे ईश्वर की बात माने

1169
01:22:32,160 --> 01:22:36,240
क्या हम ये माने कि शक्ति भी जांच के एतबार से वही में है जहां ईश्वर

1170
01:22:36,240 --> 01:22:40,880
है। वहां नहीं है जहां पर ईश्वर नहीं है।

1171
01:22:40,880 --> 01:22:44,960
ईश्वर तो हर जगह है ना उसके गुण केतबार से बोल रहा

1172
01:22:44,960 --> 01:22:49,920
हूं। भाई साहब जात के ऐतबार से नहीं

1173
01:22:49,920 --> 01:22:54,480
बताया कि ईश्वर जात के ऐतबार से हर जगह नहीं है। गुणों के ऐतबार से

1174
01:22:54,480 --> 01:22:58,480
यानी कि उसकी शक्ति भी यही माना जाए वो हर जगह नहीं है। जात के ऐतबार से वही है

1175
01:22:58,480 --> 01:23:02,560
जहां ईश्वर है। शक्ति हर जगह गुण उसके गुणों

1176
01:23:02,560 --> 01:23:07,040
गुण हर जगह है और उसी गुणों से वो अपने आप को प्रकट कराता है ताकि लोग ना जाने।

1177
01:23:07,040 --> 01:23:11,120
भाई साहब ये बताइए एक अंतर आ गया ना कि

1178
01:23:11,120 --> 01:23:15,440
वो ईश्वर हर जगह नहीं है जात के ऐतबार से।

1179
01:23:15,440 --> 01:23:19,600
शक्ति हर जगह है केबार सेबार से

1180
01:23:19,600 --> 01:23:23,600
है मैंने कहा ना केबार से आपने

1181
01:23:23,600 --> 01:23:27,680
क्या कहा था किसी भी ऐतबार से ईश्वर और शक्ति में अंतर नहीं है मगर

1182
01:23:27,680 --> 01:23:31,760
जात के ऐतबार से अंतर आ रहा है अंतर कैसे आ

1183
01:23:31,760 --> 01:23:35,840
गया आप कोई बीच में कोई दीवार बना रहे हैं कि उसके गुण जो है ना इस दीवार के

1184
01:23:35,840 --> 01:23:39,840
पार हो गए और ईश्वर इस दीवार के पार है आप ये क्या बीच में दीवार लगा रहे

1185
01:23:39,840 --> 01:23:45,200
इसको ऐसे समझते हैं इसको ऐसे समझते हैं जैसे की

1186
01:23:45,200 --> 01:23:49,440
मेरे अंदर देखने की क्षमता है। एक अब

1187
01:23:49,440 --> 01:23:53,520
ये जो क्षमता है मुझसे जुड़ी ये जो क्षमता है मुझसे जुड़ी हुई है। तो ये

1188
01:23:53,520 --> 01:23:56,080
जो देखने की दृष्टि है मेरी ये और मैं

1189
01:23:56,080 --> 01:24:00,160
एक ही है। ये और मैं एक ही है। नहीं वो वो

1190
01:24:00,160 --> 01:24:04,240
आपका गुण है। भाई दीवार तो है नहीं कोई बीच में। तो ये

1191
01:24:04,240 --> 01:24:08,320
दृष्टि और मैं एक ही है। यानी कि यानी कि यानी कि अगर मैं अंधा

1192
01:24:08,320 --> 01:24:12,320
हो गया। यानी कि अगर मैं अंधा हो गया तो मैं मर गया। क्योंकि मेरी दृष्टि

1193
01:24:12,320 --> 01:24:16,320
समाप्त हो गई। मर गया। मरे नहीं मरे कहां?

1194
01:24:16,320 --> 01:24:20,400
मरे कहां? आपका एक गुण नष्ट हो गया। इसका मतलब ये दोनों अलग-अलग

1195
01:24:20,400 --> 01:24:24,400
पदार्थ है। ये दोनों अलग-अलग पदार्थ

1196
01:24:24,400 --> 01:24:28,640
है। क्यों? ये पदार्थ भाई मेरी दृष्टि मेरी दृष्टि नष्ट

1197
01:24:28,640 --> 01:24:32,640
हो रही है। पर मेरा अस्तित्व भी है। तो अलग-अलग पदार्थ हो

1198
01:24:32,640 --> 01:24:36,880
गए। मेरी बात सुनिए। एक आप देखते हो अपनी फिजिकल

1199
01:24:36,880 --> 01:24:41,280
दृष्टि से एक आप देखते हो आपकी ज्ञान ज्ञान दृष्टि से। आपके

1200
01:24:41,280 --> 01:24:45,360
आंखें बंद भी होगी तो ज्ञान दृष्टि से आप देख रहे हो नहीं

1201
01:24:45,360 --> 01:24:49,680
देख दृष्टि तो है मैं नहीं देख पाऊंगा मैं जहां पर मेरी दृष्टि

1202
01:24:49,680 --> 01:24:55,120
समाप्त हो गई जिस कलर को मैंने नहीं देखा मैं उसे नहीं पहचान पहचान पाऊंगा ज्ञान से

1203
01:24:55,120 --> 01:24:59,840
तो कलर से नहीं पहचान पाऊंगा ना ये एक आपकी इंद्रिय है जो है नष्ट हो गई

1204
01:24:59,840 --> 01:25:03,920
कलर को आप देख नहीं सकते ठीक है ना ये एक इंद्री आपकी नष्ट हो गई

1205
01:25:03,920 --> 01:25:08,080
ठीक है ना देखिए ऐसा है काफी देर हम इस चीज पे वो कर लिए जनता

1206
01:25:08,080 --> 01:25:11,120
जो चर्चा देख रही है वो इसका अब आप

1207
01:25:11,120 --> 01:25:15,120
एक काम करिए भाई साहब अब आप सवाल अब आप मेरे

1208
01:25:15,120 --> 01:25:19,200
से अब आप मेरे से अब आप मेरे से सवाल करिए आपको हमारी मान्यता में क्या

1209
01:25:19,200 --> 01:25:23,200
दिक्कत है आपने कहा था जब मुझे समय देना मैं दे रहा हूं बोलिए

1210
01:25:23,200 --> 01:25:27,280
मेरा क्लेम है मेरा क्लेम है मेरा क्लेम है

1211
01:25:27,280 --> 01:25:31,440
कि ईश्वर सर्वत्र सर्वव्यापी होते हुए भी ईश्वर

1212
01:25:31,440 --> 01:25:35,440
जो है किसी देश काल परिस्थिति में अवतार लेता है जिसकी

1213
01:25:35,440 --> 01:25:39,520
मूर्ति बना के हम पूजा करते हैं और उसके अवतार लेने से ही यह सिद्ध

1214
01:25:39,520 --> 01:25:43,680
होता है कि वो सब कुछ कर सकता है। वो सर्वशक्तिमान है और

1215
01:25:43,680 --> 01:25:47,680
वो परम स्वतंत्र मोक्ष देने वाला है। अभी मोक्ष के विषय में मैंने सवाल नहीं किया

1216
01:25:47,680 --> 01:25:51,840
है। ईश्वर आपका सिद्ध कैसे होता है वो सवाल नहीं किया। पर अभी मैं आपको टर्न दे रहा हूं।

1217
01:25:51,840 --> 01:25:55,520
आप सवाल करिए। बोलिए।

1218
01:25:55,520 --> 01:26:00,560
सबसे पहला मेरा सवाल ये है कि ये जो भी बातें आपने कही है

1219
01:26:00,560 --> 01:26:04,560
इन बातों का ज्ञान आपको कहां से हुआ? सबसे पहला सवाल

1220
01:26:04,560 --> 01:26:08,720
इसका जवाब दीजिए। फिर आगे बढ़ते हैं आराम से।

1221
01:26:08,720 --> 01:26:13,360
इन बातों का ज्ञान हुआ कहां से? शास्त्रों से।

1222
01:26:13,360 --> 01:26:17,680
कहां से? शास्त्रों से। तो आपके नजदीक

1223
01:26:17,680 --> 01:26:21,840
हां शास्त्रों से हुआ। तो आपके नजदीक प्रमाणित जो शास्त्र

1224
01:26:21,840 --> 01:26:26,480
है आपके जो सबसे अहम शास्त्र है वो कौन-कौन से हैं?

1225
01:26:26,480 --> 01:26:30,480
भाई साहब मैं आपको एक बात बताऊं जो आप प्रश्न करने जा रहे हैं। मैं समझ चुका

1226
01:26:30,480 --> 01:26:36,480
हूं। तो मैं आपको उत्तर दे रहा हूं। मैं समझ चुका हूं।

1227
01:26:37,040 --> 01:26:41,040
रहे हो जी मैं भागने का रास्ता

1228
01:26:41,040 --> 01:26:45,200
नहीं देख रहा हूं। मैं चर्चा को शॉर्ट कर रहा हूं। जिस पॉइंट पे आप आ

1229
01:26:45,200 --> 01:26:51,200
रहे हो मैं उसी पॉइंट पे आ रहा हूं। आपका जो है

1230
01:26:51,440 --> 01:26:55,760
मैं देखिए आप एक काम करिए। अब एक काम करिए आप दोबारा

1231
01:26:55,760 --> 01:26:59,760
टर्न में आइए। ठीक है? डेढ़ घंटे की चर्चा हो चुकी है। अब आपने सवाल लेके दोबारा

1232
01:26:59,760 --> 01:27:04,320
आइए। ठीक है? ठीक है?

1233
01:27:04,320 --> 01:27:08,640
ठीक है वापस वापस काट के आऊं।

1234
01:27:08,640 --> 01:27:12,800
अरे भाई मैं ये कह रहा हूं कि जो सवाल आप कर रहे हैं ना रिजवान जी मैं

1235
01:27:12,800 --> 01:27:16,880
जानता हूं आप क्या मेरी सुन लीजिए मैं अगर मेरी चीज से आप सहमत

1236
01:27:16,880 --> 01:27:20,880
ना हो तो आप बताइएगा कि मैं कहां गलत हूं। ठीक है। आपका सवाल

1237
01:27:20,880 --> 01:27:25,520
ये है कि अगर आपके लिए वेद सर्वोपरि है

1238
01:27:25,520 --> 01:27:29,760
तो क्या वेद ये कहता है क्या वेद ये कहता है कि

1239
01:27:29,760 --> 01:27:34,560
ईश्वर अवतार ले सकता है और अगर कहता है तो मुझे दिखाइए।

1240
01:27:34,560 --> 01:27:38,720
ठीक यही सवाल है। वो मैं मांगूंगा। वो प्रमाण मैं बाद

1241
01:27:38,720 --> 01:27:42,880
में मांगूंगा। पहले मैं जानना चाह रहा हूं कि आपके नजदीक प्रमाणित ग्रंथ कौन

1242
01:27:42,880 --> 01:27:47,280
से हैं। मैं ये पहले आप बता दे मुझे सिंपल सी बात है कि आपके नजदीक

1243
01:27:47,280 --> 01:27:51,520
यही है प्रमाणित ग्रंथ है। भाई भगवत गीता है चारों वेद है उपनिषद है जो भी है

1244
01:27:51,520 --> 01:27:55,600
टू द पॉइंट आपको टू द पॉइंट सवाल नहीं करने है हां

1245
01:27:55,600 --> 01:27:59,840
मेरे लिए वेद भगवत गीता वेद भगवत गीता उपनिषद स्मृति

1246
01:27:59,840 --> 01:28:03,840
ग्रंथ और क्या कहते हैं जो गीता महाभारत रामायण है ये सब मेरे लिए

1247
01:28:03,840 --> 01:28:07,920
प्रमाणिक ग्रंथ है अब बोलिए पुराण भी है उसमें अब बोलिए

1248
01:28:07,920 --> 01:28:12,080
और इन इन किताबों के अंदर कोई भी मतभेद

1249
01:28:12,080 --> 01:28:16,080
नहीं है इनकी बातों में। ये भी आप मानते होंगे। जैसे

1250
01:28:16,080 --> 01:28:20,240
हम मानते हैं कुरान के अंदर कोई बात नहीं है। किताबों में मतभेद किताबों

1251
01:28:20,240 --> 01:28:24,000
में मतभेद नहीं है। किताबों में मतभेद नहीं है। मगर मतभेद

1252
01:28:24,000 --> 01:28:28,320
होना या ना होना ये आज का हमारा वो नहीं है। टॉपिक

1253
01:28:28,320 --> 01:28:32,560
अभी आज का टॉपिक है क्या? अभी टॉपिक आज का क्या है?

1254
01:28:32,560 --> 01:28:38,560
टॉपिक आज का क्या है भाई साहब? टॉपिक है सर्वशक्तिमान।

1255
01:28:40,000 --> 01:28:44,640
आपने जाना है वो किस ग्रंथ से जाना है उस ग्रंथ के अंदर भी

1256
01:28:44,640 --> 01:28:48,960
सारे ग्रंथों से सारे ग्रंथों से

1257
01:28:48,960 --> 01:28:54,400
अब मैं सवाल कर आपसे हां बोलिए

1258
01:28:54,400 --> 01:28:58,720
हां ना तस प्रतिमा अस्ति ये जो श्लोक है ऋग्वेद

1259
01:28:58,720 --> 01:29:01,040
का

1260
01:29:01,040 --> 01:29:05,120
क्या ये ऋग्वेद का श्लोक जो है ये सही है हो

1261
01:29:05,120 --> 01:29:07,840
गया सवाल

1262
01:29:07,840 --> 01:29:12,160
पहले पूछ रहा हूं सही है क्या ये सही है

1263
01:29:12,160 --> 01:29:16,160
सही है तो इस श्लोक के अनुसार जो है उसका कोई रूप नहीं

1264
01:29:16,160 --> 01:29:21,520
है उसकी कोई प्रतिमा नहीं है अब जो कोई भी उसकी प्रतिमा

1265
01:29:21,520 --> 01:29:25,600
बोलने देंगे कि नहीं नातस प्रतिमा अस्ति का अर्थ मैं आपको बता रहा हूं

1266
01:29:25,600 --> 01:29:29,600
मैं आपको का बता रहा हूं आपको जवाब देना है जवाब

1267
01:29:29,600 --> 01:29:34,640
आपको मैं नहीं टोकूंगा आपको मैं आपको नहीं टोकूंगा मैं सिर्फ अपनी

1268
01:29:34,640 --> 01:29:39,600
पूरा डिटेल बता रहा जब कुछ बच जाए तो आप काउंटर करिएगा। मैं डिटेल बता रहा हूं।

1269
01:29:39,600 --> 01:29:43,600
पूरा सवाल और ऑब्जेक्शन होने दो ताकि आप आसानी से जवाब दे सके।

1270
01:29:43,600 --> 01:29:48,720
सवाल क्योंकि आप सवाल में आप अर्थ बता रहे हैं। अर्थ मत बताइए। सवाल करिए।

1271
01:29:48,720 --> 01:29:53,280
हां तो सवाल तो कर दिया। आपने बताया

1272
01:29:53,280 --> 01:29:57,440
वो जो आपने जो अर्थ बताया वो जो आपने

1273
01:29:57,440 --> 01:30:01,680
अर्थ बताया वो अर्थ गलत है। [संगीत] जो आपने अर्थ बताया

1274
01:30:01,680 --> 01:30:04,080
वो अर्थ गलत है। तो

1275
01:30:04,080 --> 01:30:08,160
बस मैं वही कह रहा हूं ना मुझे अर्थ बताने दीजिए। जब शैतान की बात आई

1276
01:30:08,160 --> 01:30:12,400
थी आपने शैतान का अर्थ बताया। जब मलाइका की बात आई थी तो आपने मलाइका

1277
01:30:12,400 --> 01:30:16,480
का अर्थ बताया। जब आदम की बात आई थी आपने आदम का अर्थ बताया। तो

1278
01:30:16,480 --> 01:30:20,640
जब आप मेरे ऊपर क्लेम कर रहे हैं मेरे ग्रंथों पर जब आप मेरे ऊपर क्लेम

1279
01:30:20,640 --> 01:30:24,880
कर रहे हैं मेरे ग्रंथों पर तो आप मुझे उसका अर्थ बताने देंगे

1280
01:30:24,880 --> 01:30:29,040
ना बताइए हां

1281
01:30:29,040 --> 01:30:33,440
बताइए अब पहले तो मैं अर्थ बताऊंगा उसके बाद मेरी एक और दलील

1282
01:30:33,440 --> 01:30:37,360
है उसको भी आप सुनिएगा

1283
01:30:37,360 --> 01:30:42,000
अर्थ सुनिए पहले आप अर्थ बताइए हां अर्थ बता नातस

1284
01:30:42,000 --> 01:30:46,240
प्रतिमा अस्ति का जो अर्थ है प्रतिमान से बना है प्रतिमा किससे

1285
01:30:46,240 --> 01:30:50,400
बना है? प्रतिमान। मान मतलब वैल्यू। मान

1286
01:30:50,400 --> 01:30:54,720
मतलब वैल्यू। तो यहां पर उसने ये नहीं कहा मेरे जैसी प्रतिमा

1287
01:30:54,720 --> 01:30:58,800
यानी मेरी मूर्ति नहीं है। कोई यानी मेरी मूर्ति नहीं है। कोई ये

1288
01:30:58,800 --> 01:31:03,200
बात नहीं हो रही। यहां कह रहे मेरे जैसा मान, मेरे जैसी वैल्यू

1289
01:31:03,200 --> 01:31:07,360
किसी की नहीं है। संसार में मेरे जैसी वैल्यू। ठीक है?

1290
01:31:07,360 --> 01:31:11,440
अब क्योंकि मूर्ति दिखने के मामले में किसी के जैसी

1291
01:31:11,440 --> 01:31:15,440
होती है। जैसे मान लीजिए मेरी किसी ने मूर्ति बनाई तो दिखने के

1292
01:31:15,440 --> 01:31:19,600
मामले में वो मेरी जैसी है। तो इसलिए मूर्ति को भी प्रतिमा

1293
01:31:19,600 --> 01:31:23,680
कहा जाने लगा। मगर प्रतिमा शब्द का वास्तविक अर्थ

1294
01:31:23,680 --> 01:31:27,680
है प्रतिमान। मेरे समान कोई नहीं है। वहां ये कहा जा रहा है।

1295
01:31:27,680 --> 01:31:31,680
पहली बात। दूसरी बात यह है कि मेरे ग्रंथों

1296
01:31:31,680 --> 01:31:35,760
के विषय में मैं आपको बताऊंगा और आपके

1297
01:31:35,760 --> 01:31:41,360
ग्रंथों के विषय में आप मुझे आप मुझे बताएंगे। क्यों? क्योंकि

1298
01:31:41,360 --> 01:31:45,520
यहां पर ये क्लेम नहीं हो रहा है कि वो क्यों? क्यों?

1299
01:31:45,520 --> 01:31:50,160
उसका कारण ये है एक शब्द होता है परंपरा।

1300
01:31:50,160 --> 01:31:54,320
भगवत गीता चार दो में तीन 16 में

1301
01:31:54,320 --> 01:31:58,320
और मांडकोपनिषद में मुंडकोपनिषद में सॉरी

1302
01:31:58,320 --> 01:32:02,560
एक से लेकर चार तक पहले ही अध्याय में शायद परंपरा

1303
01:32:02,560 --> 01:32:06,640
बताई जा रही है कि भैया ऋषियों ने वेद दिए उसको

1304
01:32:06,640 --> 01:32:10,800
फिर उसने दिए इस ऋषि को फिर उसने दिए इस ऋषि को ऐसे

1305
01:32:10,800 --> 01:32:15,120
करके करके ऋषियों से लेकर आज तक के जो हमारे आचार्य

1306
01:32:15,120 --> 01:32:19,360
है वहां तक की हमें परंपरा प्राप्त है। तो हमारे ग्रंथ

1307
01:32:19,360 --> 01:32:23,600
का अर्थ कौन बताएगा? जिसको अपनी परंपरा से वेद प्राप्त

1308
01:32:23,600 --> 01:32:27,680
हुआ होगा। हां मैं कुरान को लेकर के यह

1309
01:32:27,680 --> 01:32:31,920
नहीं कह सकता हूं नहीं आपकी कुरान में यह लिखा है। मैं सही बता रहा हूं।

1310
01:32:31,920 --> 01:32:36,080
ज्यादा से ज्यादा मैं यह कह सकता हूं। मुझे आप पर विश्वास नहीं है। मगर मैं ये क्लेम

1311
01:32:36,080 --> 01:32:41,280
नहीं कर सकता। नहीं आपकी किताब में ये लिखा है। क्यों नहीं कर सकता?

1312
01:32:41,280 --> 01:32:45,280
आपका फ़ लगता है गरम हो गया। आपका फ़ गरम हो गया।

1313
01:32:45,280 --> 01:32:48,880
लग रहा है। छू के देखिए।

1314
01:32:48,880 --> 01:32:54,880
आ जाइए। आ जाइए। बाहर निकल के आता हूं।

1315
01:33:08,880 --> 01:33:12,960
कैसे सहारा मिलता है इन लोगों को देखते हैं कि वेद से बताइए इनको इससे मतलब

1316
01:33:12,960 --> 01:33:17,040
नहीं है कि तर्क क्या है वो क्या है इनको वेदों पर भरोसा है तो वेदों से प्रश्न

1317
01:33:17,040 --> 01:33:22,930
करते हैं क्यों करते हैं क्यों करते हैं आप लोगों को मालूम है ना

1318
01:33:22,930 --> 01:33:28,930
[हंसी]

1319
01:33:33,360 --> 01:33:37,520
देखिए मैंने एक तो बताया आपको नातस प्रतिमा अस्ति

1320
01:33:37,520 --> 01:33:41,840
का अर्थ हालांकि आपका चित्र अभी भी रुक रुक के आ रहा है। मुझे लग रहा है आपका फोन गया फिलहाल

1321
01:33:41,840 --> 01:33:46,320
के लिए तो मैं अपनी बात को पूरा कर लेता हूं। पहली बात नात

1322
01:33:46,320 --> 01:33:50,400
प्रतिमा का सही अर्थ है कि उसके समान कोई नहीं है। प्रतिमान उसके

1323
01:33:50,400 --> 01:33:53,840
जैसा मान किसी का नहीं है। दूसरी बात यह है कि

1324
01:33:53,840 --> 01:33:58,080
मैंने अभी तक आपकी किताब को लेकर के क्लेम ये नहीं किया कि आपकी किताब

1325
01:33:58,080 --> 01:34:02,240
में ये लिखा है। आप ये कैसे बोल रहे हो? मैंने उसको एज इट इज माना जो आपने

1326
01:34:02,240 --> 01:34:06,720
अपनी किताब के अनुसार बोला। क्योंकि मैं क्लेम नहीं कर सकता हूं। आपकी किताब में क्या लिखा है मैं बताऊंगा।

1327
01:34:06,720 --> 01:34:10,800
क्यों? क्योंकि परंपरा से वो किताब आपको पाठ आई है। मेरे पास नहीं आई

1328
01:34:10,800 --> 01:34:14,880
है। मैंने उस चैन ऑफ नरेशन से उसका अध्ययन नहीं किया है

1329
01:34:14,880 --> 01:34:19,040
जिस जिससे आपने किया है। तो आपकी किताबों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है।

1330
01:34:19,040 --> 01:34:19,540
इस बात

1331
01:34:19,440 --> 01:34:23,520
को लेकर एक मिनट भाई साहब आपकी किताबों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा

1332
01:34:23,520 --> 01:34:27,600
है। इस बात को लेकर के मैं आपको चैलेंज नहीं कर रहा हूं। और वैसे भी आज

1333
01:34:27,600 --> 01:34:31,600
का विषय ये नहीं है कि किसकी किताब में क्या लिखा है वो सामने वाला बताएगा कि

1334
01:34:31,600 --> 01:34:35,680
मैं बताऊंगा। आज का विषय तो यह है कि आपकी जो मान्यता है जो

1335
01:34:35,680 --> 01:34:40,320
आप ले आए किताब से निकाल के बाहर ले आए क्या वह मान्यता लॉजिकली

1336
01:34:40,320 --> 01:34:44,400
सिद्ध हो रही है क्या हमारी तर्क बुद्धि और इत्यादि के साथ

1337
01:34:44,400 --> 01:34:48,480
उसका समर्थन हो रहा है आप जो मान्यता लेकर आए हैं और या फिर मेरी मान्यता

1338
01:34:48,480 --> 01:34:53,120
का समर्थन हो रहा है दूसरी बात तीसरी बात ये है

1339
01:34:53,120 --> 01:34:57,600
कि अगर यह मान भी लिया जाए कि वहां प्रतिमा की ही बात हो रही है

1340
01:34:57,600 --> 01:35:01,600
तो ईश्वर के तीन प्रकार के स्तर हैं। एक है निर्गुण

1341
01:35:01,600 --> 01:35:05,760
निराकार जो सर्वव्यापी है। समान

1342
01:35:05,760 --> 01:35:09,840
रूप से सब जगह पर है। ठीक है?

1343
01:35:09,840 --> 01:35:14,000
एक है सगुण निराकार जो कहीं पर उसमें

1344
01:35:14,000 --> 01:35:18,240
गुण आ जाते हैं तो कहीं पर वो क्रियाशील है, कहीं पर वो नहीं है तो इस कारण से वो

1345
01:35:18,240 --> 01:35:22,400
सगुण निराकार है। और फिर है सगुण साकार। ठीक है? तो

1346
01:35:22,400 --> 01:35:26,400
अगर इसको दुर्जन तोष न्याय होता है कि थोड़ी देर के लिए तुम्हारी बात को मान भी लेते

1347
01:35:26,400 --> 01:35:30,400
हैं। ऐसे होता है ना कि चलो थोड़ी देर मान लेते हैं। तो उस

1348
01:35:30,400 --> 01:35:34,400
थोड़ी देर अगर मान भी ले यहां प्रतिमा की बात हो रही है तो जो ईश्वर का ये जो

1349
01:35:34,400 --> 01:35:34,900
निर्गुण

1350
01:35:34,880 --> 01:35:38,960
निराकार स्वरूप है ना यहां उसकी बात हो रही है कि उसकी प्रतिमा

1351
01:35:38,960 --> 01:35:43,200
नहीं बनाई जा सकती। बिल्कुल सही बात है। ईश्वर के निर्गुण निराकार रूप की प्रतिमा

1352
01:35:43,200 --> 01:35:47,520
नहीं बनाई जा सकती। वो सही बात है। मगर वही ईश्वर

1353
01:35:47,520 --> 01:35:51,680
अपने अपना जो निर्गुण निराकार वाला जो स्वरूप है उसको

1354
01:35:51,680 --> 01:35:55,680
बिल्कुल बिना छेड़े हुए एक दूसरा स्वरूप तैयार करता है। वो होता है

1355
01:35:55,680 --> 01:36:00,000
सगुण निराकार। सगुण निराकार। अब क्या होता है कि जो

1356
01:36:00,000 --> 01:36:04,160
जैसे मैं आपको इसको ऐसे समझाता हूं। जैसे बिजली होती है बिजली।

1357
01:36:04,160 --> 01:36:08,640
बिजली बिजली जो है वो जमीन में भी व्याप्त है। सब जगह।

1358
01:36:08,640 --> 01:36:12,880
ठीक है? जल इत्यादि में व्याप्त है। सब जगह मौजूद

1359
01:36:12,880 --> 01:36:17,120
है। मगर वह झटका नहीं मार रही है। ठीक है?

1360
01:36:17,120 --> 01:36:21,200
फिर वही बिजली किसी माध्यम से हमने कुछ ऐसा किया कि वही

1361
01:36:21,200 --> 01:36:25,280
बिजली तारों में दौड़ने लगी। अब उसको छुओगे

1362
01:36:25,280 --> 01:36:29,360
तो अभी भी वो निराकार है। जो सर्वत्र व्याप्त है। झटका नहीं मार रही

1363
01:36:29,360 --> 01:36:33,360
वो क्या हो गई? निर्गुण निराकार। निर्गुण भी है। अभी गुण नहीं

1364
01:36:33,360 --> 01:36:37,360
है उसमें। और फिर वही बिजली जब तारों में दौड़ने लगी उद्योग

1365
01:36:37,360 --> 01:36:41,360
करने के कारण तो वही बिजली झटका मारने लगी। अब क्या हो गई वह सगुण

1366
01:36:41,360 --> 01:36:45,520
निराकार और फिर वही बिजली बल्ब के माध्यम से उस बिजली

1367
01:36:45,520 --> 01:36:49,840
ने ऐसा स्वरूप बनाया जो हमारी आंखों का विषय बन गया।

1368
01:36:49,840 --> 01:36:50,340
ठीक है?

1369
01:36:50,160 --> 01:36:54,480
व्यवहार का विषय बन गया। तो अब वो हो गई सगुण साकार।

1370
01:36:54,480 --> 01:36:58,480
तो इसी प्रकार से भगवान के तीन स्तर है। तो अगर आप थोड़ी देर के

1371
01:36:58,480 --> 01:37:02,800
लिए मान ले कि नातस प्रथमा अस्ति कहा गया है तो उसके

1372
01:37:02,800 --> 01:37:07,200
सगुण वो सगुण अथवा निर्गुण निराकार रूप के बारे में कहा गया है। सिंपल।

1373
01:37:07,200 --> 01:37:11,600
अब दूसरी बात यह है कि वेदों में ही 31 19 में

1374
01:37:11,600 --> 01:37:15,680
यजुर्वेद में यह कहा गया है कि वह नाना प्रकार के रूप

1375
01:37:15,680 --> 01:37:19,680
बनाता है। गर्भ में विचरण करता है। वो जो है

1376
01:37:19,680 --> 01:37:23,680
प्रकट होता है। विराट सूक्त सूक्त हमारे यहां वो तो कुछ

1377
01:37:23,680 --> 01:37:27,760
हमारे यहां आ के जो कुछ भटके हुए सनातनी है

1378
01:37:27,760 --> 01:37:31,840
जिनको हम घर वापस जो भटके हुए मार्ग पे है उनको वापस लाने

1379
01:37:31,840 --> 01:37:35,840
की कोशिश कर रहे हैं। जो वेदों का ऐसा अर्थ प्रस्तुत करते हैं कि ईश्वर अवतार नहीं

1380
01:37:35,840 --> 01:37:39,840
ले सकता। वो बात अलग बात है। अभी बात ये है जो मूल मान्यता है

1381
01:37:39,840 --> 01:37:43,920
वेदों की हमारी मेरी हम जो प्रॉपर सारी चीजें

1382
01:37:43,920 --> 01:37:47,920
ले चल रहे हैं उसके अनुसार ईश्वर अवतार ले सकता है। फिर भी अगर

1383
01:37:47,920 --> 01:37:51,920
ये टॉपिक अगर आप इस जोर देते हैं एक मिनट भाई भाई साहब

1384
01:37:51,920 --> 01:37:56,080
अगर आप इस पे जोर देते हैं कि ये वेदों

1385
01:37:56,080 --> 01:38:00,160
से मैच नहीं खा रहा वेदों में ये लिखा है वो लिखा है तो ये हमारा टॉपिक नहीं है। टॉपिक

1386
01:38:00,160 --> 01:38:04,320
यह है कि अगर मैं ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानता हूं तो वह किस किस प्रकार

1387
01:38:04,320 --> 01:38:05,600
से आप उसको काउंटर

1388
01:38:05,600 --> 01:38:09,760
करिए कि सर्वशक्तिमान नहीं हो रहा ये बताइए मेरी

1389
01:38:09,760 --> 01:38:15,760
मान्यता मैं करूंगा लेकिन आपके ज्ञान का आधार वेद है

1390
01:38:17,360 --> 01:38:21,520
आपके ज्ञान का आधार जो है वो वेद है और आपने वेद की जो मैंने

1391
01:38:21,520 --> 01:38:25,840
श्लोक बताया था उसको आपने उसे मूल्यवान कहा कि उसके जैसा मूल्यवान

1392
01:38:25,840 --> 01:38:30,080
मतलब कोई है नहीं है ना जैसे अरबी के अंदर इसी वर्ड को कहेंगे

1393
01:38:30,080 --> 01:38:34,080
तो वम कुत इसको अरबी में भी कहते हैं कि

1394
01:38:34,080 --> 01:38:38,080
उसके जैसा कोई नहीं है। ये आयत कुरान में भी है कि उसके जैसा कोई नहीं है। तो यहां

1395
01:38:38,080 --> 01:38:42,080
हमारे बीच में एक समानता पाई जा रही है कि आप भी उसी ईश्वर को मानते हैं

1396
01:38:42,080 --> 01:38:46,160
कि जिसके जैसा भाई साहब देखिए मैं दोबारा से आपको पास आ

1397
01:38:46,160 --> 01:38:50,240
रहा हूं। आपका ईश्वर अवतार धारण नहीं कर सकता है।

1398
01:38:50,240 --> 01:38:55,600
हम उस ईश्वर को मानते हैं जो सबको कर

1399
01:38:55,600 --> 01:38:59,680
जो ये जो आप जो ये सिद्ध करना चाह रहे हैं कि वेद में भी कुरान का ही ज्ञान है।

1400
01:38:59,680 --> 01:39:03,760
कुरान में भी वेद का ही ज्ञान है। ये हमारा विषय नहीं है। आप टू द

1401
01:39:03,760 --> 01:39:07,040
पॉइंट

1402
01:39:07,040 --> 01:39:11,200
जवाब क्या है? मैं आपसे वही कह रहा हूं। एक मिनट

1403
01:39:11,200 --> 01:39:15,440
रुकिए। मैं ये कह रहा हूं क्या ईश्वर के अवतार लेने से उसके सर्वशक्तिमान होना

1404
01:39:15,440 --> 01:39:19,440
साबित होता है क्या या अगर वो ईश्वर अगर अवतार

1405
01:39:19,440 --> 01:39:22,160
नहीं लेगा

1406
01:39:22,160 --> 01:39:26,320
हां मैं बता रहा हूं ना आपने क्या बोला ना लास्ट में आपके वाक्य के अंत

1407
01:39:26,320 --> 01:39:30,960
में क्या आया सुनिए आपने बोला आपने बोला क्या

1408
01:39:30,960 --> 01:39:34,960
आपने बोला क्या आपने बोला क्या भाई साहब भाई साहब सुन लीजिए

1409
01:39:34,960 --> 01:39:39,040
आपने क्या बोला ना आपने क्या बोला अभी आपने क्या शब्द

1410
01:39:39,040 --> 01:39:43,120
का उपयोग किया ना तो सुनाई नहीं दिया होगा इसलिए

1411
01:39:43,120 --> 01:39:47,280
सुनाई नहीं दिया होगा इसलिए क्या बोला होगा आपने बोला ऐसा होने

1412
01:39:47,280 --> 01:39:51,120
से ऐसा होता है क्या

1413
01:39:51,120 --> 01:39:55,200
वो मैं मैं ये कह रहा हूं कि आपके नजदीक मैंने बोला आपने

1414
01:39:55,200 --> 01:39:59,360
अभी एक आपने अभी एक सेंटेंस बोला है जिसमें कि प्रश्नवाचक शब्द आया

1415
01:39:59,360 --> 01:40:04,000
है प्रश्नवाचक शब्द आने का मतलब है आप मुझसे कुछ पूछ रहे है

1416
01:40:04,000 --> 01:40:08,160
हां लेकिन बात कंप्लीट नहीं होने दी ना आपने वो पूछ ही तो रहा हूं मैं आपसे मैं

1417
01:40:08,160 --> 01:40:12,560
सवाल कर रहा हूं आपसे तो पूछ ही रहा हूं तो मैं यह कह रहा था कि जैसे

1418
01:40:12,560 --> 01:40:16,800
ईश्वर अगर अवतार ले ले तो उसका सर्वशक्तिमान होना साबित

1419
01:40:16,800 --> 01:40:20,800
होता है। और अगर ईश्वर अवतार ना ले तो उसका

1420
01:40:20,800 --> 01:40:25,280
सर्वशक्तिमान होना साबित नहीं होता है। ये बताइए मुझे ये कैसे

1421
01:40:25,280 --> 01:40:29,280
अगर वो ईश्वर मैं जिस ईश्वर को मानता हूं अवतार नहीं लेता है। क्योंकि

1422
01:40:29,280 --> 01:40:33,280
ज्ञान के अंदर बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं।

1423
01:40:33,280 --> 01:40:37,280
मैं बता रहा हूं भाई साहब। मैं बता रहा हूं।

1424
01:40:37,280 --> 01:40:41,280
मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बताइए। इसके

1425
01:40:41,280 --> 01:40:46,160
लिए हमें पहले यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर

1426
01:40:46,160 --> 01:40:50,400
मनुष्यों का क्या कहते हैं जो

1427
01:40:50,400 --> 01:40:54,480
मनुष्यों द्वारा उपास्य मनुष्यों द्वारा प्राप्त

1428
01:40:54,480 --> 01:40:58,640
किया जाने योग्य मनुष्यों द्वारा धारण किया

1429
01:40:58,640 --> 01:41:02,640
जाने वाला उद्देश्य वो किस प्रकार से सिद्ध होता है यह

1430
01:41:02,640 --> 01:41:06,880
हम जान ले पहले तब हम यह जान पाएंगे कि ईश्वर का अवतार ले सकने

1431
01:41:06,880 --> 01:41:11,200
वाला लेने वाला आवश्यक नहीं है ले सकने वाला आवश्यक है ले सकता

1432
01:41:11,200 --> 01:41:15,200
हो क्षमता होनी चाहिए वो लेता है कि नहीं लेता बात अलग

1433
01:41:15,200 --> 01:41:19,280
है बाद की बात है वो मैंने सिद्ध कर

1434
01:41:19,280 --> 01:41:25,280
जो है ईश्वर की क्षमता सिद्ध हो रहा

1435
01:41:25,680 --> 01:41:31,520
मैं क्षमता सिद्ध मैं क्षमता सिद्ध कर

1436
01:41:31,520 --> 01:41:35,840
ये क्षमता नहीं रही फिर उसमें कि वो बिना रूप लिए भी कर सकता है बोला है

1437
01:41:35,840 --> 01:41:40,000
आपने कहा क्षमता नहीं रही वो क्षमता नहीं रही अच्छा आपकी आवाज

1438
01:41:40,000 --> 01:41:46,000
आ रही है।

1439
01:41:46,400 --> 01:41:50,480
बिना उतार के आगे पीछे हो रही है भाई साहब। हेलो हेलो

1440
01:41:50,480 --> 01:41:54,480
आपकी आवाज आगे पीछे हो रही है। जी मैं ये कह रहा हूं

1441
01:41:54,480 --> 01:41:58,800
के अगर आपका जो जिसका एक बार जाके दोबारा आइए।

1442
01:41:58,800 --> 01:42:04,800
एक बार जाके दोबारा आइए। आप आपकी आवाज लिप्सिंग बदल रही है आपकी।

1443
01:42:30,640 --> 01:42:36,640
जी आवाज आ रही है अभी अब आपने मुझसे ये पूछा है

1444
01:42:36,720 --> 01:42:40,720
रिपीट करने दो रिपीट रिपीट करने दो

1445
01:42:40,720 --> 01:42:45,520
आपको मैं वीडियो दिखा आपको मैं वीडियो

1446
01:42:45,520 --> 01:42:49,840
आपने कंप्लीट नहीं करने दिया मैं बिल्कुल चुप रहूंगा सुनूंगा किस में बोले

1447
01:42:49,840 --> 01:42:53,920
थे मैं बोल नहीं पाया था आपने कुछ पूछा था मैं बोल रहा था आप बीच में बोले

1448
01:42:53,920 --> 01:42:59,040
थे मैं बोला था और कंप्लेंट कर रहा था कि आपने बीच में

1449
01:42:59,040 --> 01:43:03,040
एक मिनट आपको मैं वीडियो दिखा देता हूं भैया इनको वीडियो दिखाओ एक मिनट

1450
01:43:03,040 --> 01:43:07,360
एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट आपकी अभी आवाज नहीं आ रही। मैंने आपको म्यूट

1451
01:43:07,360 --> 01:43:11,360
किया है। मैं आपको वीडियो दिखाता हूं। आपने एक प्रश्न किया था। आपने

1452
01:43:11,360 --> 01:43:15,360
एक प्रश्न किया था। मैं उसका उत्तर दे रहा था। उसके बीच में आप फिर प्रश्न

1453
01:43:15,360 --> 01:43:20,160
करने लगे थे। मैं आपको उसका उत्तर दे नहीं पाया था। आप फिर बोलने लगे थे।

1454
01:43:20,160 --> 01:43:24,320
10 सेकंड दीजिए। 10 सेकंड ओनली। बोलिए।

1455
01:43:24,320 --> 01:43:28,400
हां। तो मैं यह कह रहा हूं कि ईश्वर आप

1456
01:43:28,400 --> 01:43:32,880
जिस ईश्वर में अवतार मानते हैं तो वो बगैर अवतार

1457
01:43:32,880 --> 01:43:38,880
लिए इस बात पर सक्षम नहीं है कि बगैर अवतार लिए भी वो कुछ कर सके।

1458
01:43:39,120 --> 01:43:43,120
हो गया। अब मैं पूरा उत्तर दूं। आप दीजिए कि बगैर अवतार के

1459
01:43:43,120 --> 01:43:45,840
वो नहीं कर सकता क्या कुछ? मैं पूरा उत्तर

1460
01:43:45,840 --> 01:43:48,880
दू।

1461
01:43:48,880 --> 01:43:53,120
फिर काउंटर बीच में थोड़ा सा टाइम दे दीजिएगा। अवतार

1462
01:43:53,120 --> 01:43:57,200
के भी सब कुछ कर सकता है। मगर यह उसकी इच्छा पर है कि वो

1463
01:43:57,200 --> 01:44:01,280
अवतार ले कोई काम करे या बिना अवतार ले। मगर हम उस पर बाउंडेशन

1464
01:44:01,280 --> 01:44:05,280
नहीं लगाएंगे कि नहीं भैया अवतार ले नहीं कर सकता। पहली बात।

1465
01:44:05,280 --> 01:44:09,920
दूसरी बात उसका अवतार ले सकने वाला या किसी भी मर्यादा

1466
01:44:09,920 --> 01:44:14,000
से मरदित या किसी भी बाधा से बाधित ना होने वाला आवश्यक

1467
01:44:14,000 --> 01:44:18,160
क्यों है? वो मैं आपको बता रहा हूं। ईश्वर का ईश्वर होने

1468
01:44:18,160 --> 01:44:22,320
के लिए अबाध्य होना अनंत सामर्थ्यवान होना किसी

1469
01:44:22,320 --> 01:44:26,400
भी बाधा से बाधित ना होने वाला आवश्यक क्यों है वो मैं आपको बता रहा हूं। अब सुनिए

1470
01:44:26,400 --> 01:44:30,480
ध्यान से यह हम ध्यान देना पड़ेगा कि ईश्वर

1471
01:44:30,480 --> 01:44:34,720
है और ईश्वर किसी मनुष्य का

1472
01:44:34,720 --> 01:44:38,960
किसी जीव का या ईश्वर मनुष्य मात्र का प्राणी मात्र का जो

1473
01:44:38,960 --> 01:44:43,120
है प्राप्तव्य है। प्राप्तव्य का मतलब होता है जिसको जिस तक हमें

1474
01:44:43,120 --> 01:44:47,200
पहुंचना है जिसको जिस स्थिति को हमें प्राप्त करना है। इस रूप

1475
01:44:47,200 --> 01:44:51,360
में ईश्वर को सिद्ध करने के लिए हमें नास्तिकों का

1476
01:44:51,360 --> 01:44:56,000
जवाब देना पड़ेगा। वो जवाब क्या है? नास्तिक

1477
01:44:56,000 --> 01:45:00,320
का प्रश्न होता है। मैं कैसे मान लूं कि कोई ऐसे एंटिटी है दुनिया

1478
01:45:00,320 --> 01:45:01,040
में

1479
01:45:01,040 --> 01:45:05,040
जो कि इसकी पूजा करनी चाहिए जो सर्वशक्तिमान है।

1480
01:45:05,040 --> 01:45:09,040
ठीक? तो उसके सामने पूजा करने

1481
01:45:09,040 --> 01:45:13,360
योग्य, पहुंचने योग्य, प्राप्त किए जाने योग्य, जानने

1482
01:45:13,360 --> 01:45:17,760
योग्य ईश्वर को स्थापित करने के लिए जो हमारी आर्गुममेंट

1483
01:45:17,760 --> 01:45:22,320
है वो शुरू होती है ब्रहण्यक उपनिषद एक तीन 28 से

1484
01:45:22,320 --> 01:45:26,400
असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा

1485
01:45:26,400 --> 01:45:30,640
मृतम गमया ठीक इसका अर्थ है कि प्राणी मात्र

1486
01:45:30,640 --> 01:45:34,800
के अंदर कभी ना मरने की प्राणी मात्र

1487
01:45:34,800 --> 01:45:38,960
के अंदर अंदर कभी ना मरने की, अखंड ज्ञान को प्राप्त

1488
01:45:38,960 --> 01:45:43,280
करने की यानी कि मूर्ख ना बनने की और कभी भी दुखी

1489
01:45:43,280 --> 01:45:47,680
ना होने की चाहत विद्यमान है। ठीक है? इस चाहत

1490
01:45:47,680 --> 01:45:51,840
को ही कहा जाता है सत, चित आनंद यानी सत

1491
01:45:51,840 --> 01:45:56,080
यानी अमरता। चित यानी कि अखंड ज्ञान। ऑल नोइंग।

1492
01:45:56,080 --> 01:46:00,240
ठीक है? सर्वज्ञ और क्या कहते हैं?

1493
01:46:00,240 --> 01:46:06,240
आनंद का मतलब अनंत एंडलेस जॉय।

1494
01:46:06,480 --> 01:46:10,720
हमेशा का आनंद की बात कर रहे थे। आनंद का आनंद तो ये

1495
01:46:10,720 --> 01:46:15,280
सच्चिदानंद की चाह एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी होती है।

1496
01:46:15,280 --> 01:46:19,360
तो अगर हम उदाहरण के रूप में देखें तो एक नास्तिक व्यक्ति भी

1497
01:46:19,360 --> 01:46:23,360
कभी-कभी ये चाहता है कि बारिश ज्यादा हो रही तो

1498
01:46:23,360 --> 01:46:27,360
कम हो जाए। एक नास्तिक व्यक्ति भी यह चाहता है कि

1499
01:46:27,360 --> 01:46:31,440
कल अगर जो है इंडिया पाकिस्तान का मैच हो रहा है तो मैं यह जान

1500
01:46:31,440 --> 01:46:35,920
सकूं कि उसमें कौन जीतेगा या फिर मैं कंट्रोल कर सकूं

1501
01:46:35,920 --> 01:46:40,000
कि कल जो है भारत जीत जाए ऐसा कुछ हो जाए वो भारत जीत जाए या

1502
01:46:40,000 --> 01:46:44,480
पाकिस्तान जीत जाए जो भी है भविष्य को भी देखने वाला

1503
01:46:44,480 --> 01:46:48,720
या फिर भविष्य को भी कंट्रोल कर सकने की भावना नास्तिक व्यक्ति

1504
01:46:48,720 --> 01:46:52,800
के अंदर भी है। यानी कि नास्तिक व्यक्ति

1505
01:46:52,800 --> 01:46:57,040
के अंदर भी एक भावना व्याप्त है कि वो तीन

1506
01:46:57,040 --> 01:47:01,840
प्रकार की बाधाओं से बाधित ना हो। पहली बाधा देश करत,

1507
01:47:01,840 --> 01:47:06,160
काल कृत या फिर परिस्थिति कृत। ऐसा

1508
01:47:06,160 --> 01:47:10,240
दुनिया में कुछ ना हो जिससे मैं रुक जाऊं। ठीक है? अब

1509
01:47:10,240 --> 01:47:14,240
क्या है? एक सिद्धांत है कि हमारे अंदर

1510
01:47:14,240 --> 01:47:18,320
जिसज चीज की चाह है उस चाह के होने से ही यह सिद्ध

1511
01:47:18,320 --> 01:47:21,840
होता है कि दुनिया में उस चाह का निवारण

1512
01:47:21,840 --> 01:47:26,480
निराकरण करने वाला जो सब्जेक्ट है वो मौजूद है। जैसे

1513
01:47:26,480 --> 01:47:31,200
हमारे अंदर भूख से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में भोजन है।

1514
01:47:31,200 --> 01:47:35,280
हमारे अंदर प्यास से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी है।

1515
01:47:35,280 --> 01:47:39,360
हमारे अंदर सुनने की क्षमता से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में आवाज

1516
01:47:39,360 --> 01:47:43,920
है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर

1517
01:47:43,920 --> 01:47:48,160
देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है। भोजन की चाह

1518
01:47:48,160 --> 01:47:50,320
से भूख से भोजन सिद्ध

1519
01:47:50,320 --> 01:47:54,640
होता है। प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार

1520
01:47:54,640 --> 01:47:58,720
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त यह जो सतचित

1521
01:47:58,720 --> 01:47:59,920
आनंद की चाह

1522
01:47:59,920 --> 01:48:04,000
है उससे यह सिद्ध होता है कि कोई सच्चिदानंद

1523
01:48:04,000 --> 01:48:08,160
स्वरूप परमेश्वर है जो उसकी चाह का विषय है।

1524
01:48:08,160 --> 01:48:12,480
जो हम मांग रहे हैं वह वही है। ठीक है? यहां तक पहुंच गए।

1525
01:48:12,480 --> 01:48:16,640
अब इसमें क्या है? हमने क्या देखा था कि उस चाह को जब हमने खोला

1526
01:48:16,640 --> 01:48:20,880
था तो हमने देखा था कि वो देश कृत कालकृत परिस्थिति

1527
01:48:20,880 --> 01:48:25,040
कृत किसी भी बाधा से बाधित ना हो। ठीक? तो

1528
01:48:25,040 --> 01:48:29,040
इसके लिए आवश्यक है अगर उसकी चाह का विषय वो सच्चिदानंद स्वरूप

1529
01:48:29,040 --> 01:48:33,040
परमेश्वर है। है ना? तो वो ना तो देश बाधा से

1530
01:48:33,040 --> 01:48:37,440
बाधित हो। यानी कि क्या ईश्वर यहां हो सकता है कि नहीं हो सकता? बाधित हो गया।

1531
01:48:37,440 --> 01:48:41,520
यानी कि यह जो ईश्वर है जो यहां नहीं हो सकता वो उसकी चाह का

1532
01:48:41,520 --> 01:48:45,520
विषय नहीं है। नास्तिकता का उत्तर नहीं है वो ईश्वर। उसी प्रकार

1533
01:48:45,520 --> 01:48:49,600
अगर हम कहे कि वो तब था अब नहीं है। कालकृत बाधा वो तब

1534
01:48:49,600 --> 01:48:53,600
था तब नहीं है। अब नहीं है। तो काल कृत बाधा से बाधित हो गया

1535
01:48:53,600 --> 01:48:57,600
तो फिर वो नास्तिक की चाह का विषय नहीं हो सकता। क्योंकि वो हर प्रकार की

1536
01:48:57,600 --> 01:49:02,080
बाधा से मुक्त होना चाहता था। देशत कालकृत और परिस्थिति कृत

1537
01:49:02,080 --> 01:49:06,080
तो वो भी नहीं है तो इस्लाम का जो ईश्वर है वो कालकृत बाधा से तो

1538
01:49:06,080 --> 01:49:10,160
मुक्त है वो था है और रहेगा ये तो है मगर यहां पहली नंबर बात

1539
01:49:10,160 --> 01:49:14,320
उपदेश कृत बाधा से बाधित है कि वो वहां है यहां नहीं हो सकता बाधित

1540
01:49:14,320 --> 01:49:15,520
है तो

1541
01:49:15,520 --> 01:49:19,520
हमारा क्या है भाई साहब लेट मी फिनिश लेट

1542
01:49:19,520 --> 01:49:23,680
मी फिनिश भाई साहब लेट मी फिनिश अब क्या है हां पूरा

1543
01:49:23,680 --> 01:49:27,680
करता हूं अब क्या है देश कृत से बाधित नहीं होना चाहिए तभी

1544
01:49:27,680 --> 01:49:31,760
वो उसका उपास सिद्ध होगा। काल कृत से बाधित नहीं होना चाहिए। तभी वह

1545
01:49:31,760 --> 01:49:35,760
उसका उपास सिद्ध होगा। अब उसके बाद है परिस्थिति।

1546
01:49:35,760 --> 01:49:39,760
इस कारण से वो ऐसा नहीं कर सकता। इस कारण से

1547
01:49:39,760 --> 01:49:43,840
वो ऐसा नहीं हो सकता। यह परिस्थिति है। है ना? ऐसा

1548
01:49:43,840 --> 01:49:47,840
है। यह वाला लॉजिक है इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकता। तो ये परिस्थिति है।

1549
01:49:47,840 --> 01:49:51,920
तो परिस्थिति कृत बाधा से भी वो बाधित नहीं होना चाहिए। तब जाकर

1550
01:49:51,920 --> 01:49:56,080
के वो ईश्वर जो होगा जो देश कृत कालकृत परिस्थिति

1551
01:49:56,080 --> 01:50:00,560
कृत किसी भी बाधा से बाध्य नहीं होगा। अगर कोई ऐसा है वही ईश्वर

1552
01:50:00,560 --> 01:50:04,560
नास्तिकों का उत्तर है। वरना नास्तिकों

1553
01:50:04,560 --> 01:50:08,800
का उत्तर नहीं सिद्ध होगा। यानी कि वो जीव की चाह

1554
01:50:08,800 --> 01:50:13,120
का वास्तविक जो विषय है जो जीव की वास्तविक चाह है अनंत

1555
01:50:13,120 --> 01:50:17,280
सच्चिदानंद की चाह वो प्राप्त कराने वाला वो सिद्ध ही

1556
01:50:17,280 --> 01:50:21,680
नहीं होगा। अगर वो परिस्थिति बाधा से बाध्य होगा तो जब हम कहते हैं

1557
01:50:21,680 --> 01:50:25,760
कि अमुक एक मिनट तो जब हम कहते हैं कि अमुक अमुक कारणों से ईश्वर

1558
01:50:25,760 --> 01:50:29,840
अवतार नहीं ले सकता तो क्या हुआ परिस्थिति कृत बाधा

1559
01:50:29,840 --> 01:50:31,120
से बाध्य है

1560
01:50:31,120 --> 01:50:35,200
अभी वो देश कृत बाधा है ना उसको छोड़ दीजिए अभी वो देश कृत बाधा उसको

1561
01:50:35,200 --> 01:50:39,440
छोड़ दीजिए वो हमने काफी देर उस पर बहस कर ली वो सर्वशक्तिमान की शक्ति

1562
01:50:39,440 --> 01:50:43,680
और वो शक्ति और उसमें शक्तिमान में अंतर है कि नहीं मगर

1563
01:50:43,680 --> 01:50:47,760
मगर यहां पे क्या है जब हम कहते हैं कि अगर वो ऐसा करेगा तो ऐसा हो जाएगा ऐसा

1564
01:50:47,760 --> 01:50:51,840
करे तो ऐसा हो जाएगा। यानी कि वो परिस्थिति जन्य

1565
01:50:51,840 --> 01:50:56,240
जो बाधा है उससे बाधित हो रहा है। और अगर वो हो रहा है तो वो उसका उपास

1566
01:50:56,240 --> 01:51:00,320
सिद्ध नहीं हो सकता। अगर हो सकता है तो आप सिद्ध करके बता दो। मैं हर चीज को

1567
01:51:00,320 --> 01:51:04,400
काउंटर कर सकता हूं कि अल्लाह जो कुरान का ईश्वर है वो इस इस

1568
01:51:04,400 --> 01:51:09,360
कारण से जीव मात्र की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध होता है।

1569
01:51:09,360 --> 01:51:13,360
सिद्ध करके दिखा दो। हां जी। तो मैंने आपको ये बता

1570
01:51:13,360 --> 01:51:17,440
दिया कि उसका उसका परिस्थिति से बाधित ना होना आवश्यक

1571
01:51:17,440 --> 01:51:21,520
क्यों है? ये मैंने आपको बता दिया। हां बताइए। तो

1572
01:51:21,520 --> 01:51:25,520
देखिए सबसे पहली चीज तो आपने ये बताया कि मनुष्य

1573
01:51:25,520 --> 01:51:29,600
रूप में वो जो आता है ईश्वर मनुष्य रूप में अवतार लेता

1574
01:51:29,600 --> 01:51:33,600
है। तो मनुष्य रूप में आता है तो मनुष्य की बॉडी

1575
01:51:33,600 --> 01:51:38,160
जो है उसी रूप में आएगा और उसके पास नाक होगी

1576
01:51:38,160 --> 01:51:42,320
सूंघने के लिए। कान होंगे सुनने के लिए। और आंखों

1577
01:51:42,320 --> 01:51:46,480
की देखने के लिए बॉडी के जितने भी आजा होंगे वह उनका यूज़

1578
01:51:46,480 --> 01:51:50,560
लेगा। उनका यूज़ करेगा। जैसे इंसान

1579
01:51:50,560 --> 01:51:54,720
करते हैं। यूज़ करने का नाटक करेगा। यूज़ करने का

1580
01:51:54,720 --> 01:51:58,800
नाटक करेगा। यूज़ ही नहीं करेगा। वो वहां पर

1581
01:51:58,800 --> 01:52:02,960
उस रूप में होते हुए भी, वो वहां पर उस रूप में होते हुए भी

1582
01:52:02,960 --> 01:52:06,960
सब जगह है। ठीक है? ना मैं आपने कहा कि

1583
01:52:06,960 --> 01:52:12,560
वो नाटक करेगा। आप सत्य से हटके नाटक करने लग जाएगा।

1584
01:52:12,560 --> 01:52:16,960
तो ये दुनिया ही सत्य नहीं है। ये दुनिया ही सत्य नहीं है ना हमारे

1585
01:52:16,960 --> 01:52:22,400
यहां तो वही तो मैंने कहा ये दुनिया ही आने वाली है।

1586
01:52:22,400 --> 01:52:26,560
जिसको मान रहे हो जिसने इस दुनिया को बनाया है। इसको इसको

1587
01:52:26,560 --> 01:52:30,560
ही लीला कहते हैं। ये सुनिए। अब जैसे जो वो वाला सवाल

1588
01:52:30,560 --> 01:52:34,560
का जवाब है वो दे देता हूं मैं आपको कि अगर ईश्वर की

1589
01:52:34,560 --> 01:52:38,560
सत्ता कहीं पर है। मैं उसका जवाब दे दूं आप समझ जाओगे। अगर ईश्वर

1590
01:52:38,560 --> 01:52:42,720
की सत्ता कहीं पर है

1591
01:52:42,720 --> 01:52:48,720
नहीं नहीं आप आप बीच आप बीच में आ गए

1592
01:52:54,800 --> 01:53:00,800
आपकी फोटो चिपक रही है

1593
01:53:06,240 --> 01:53:10,640
आपका फोन लग रहा है गरम हो गया फिर से

1594
01:53:10,640 --> 01:53:14,800
गरम नहीं हुआ है मेरे कॉल आ गया था कॉल आ गया था तो इस वजह से

1595
01:53:14,800 --> 01:53:20,800
बाहर आ गया मैं तो अभी वापस आ रहा हूं आइए

1596
01:53:48,640 --> 01:53:53,920
हेलो हम

1597
01:53:53,920 --> 01:53:57,920
फोटो नहीं आ रही आपका चित्र हां चित्र नहीं

1598
01:53:57,920 --> 01:54:02,080
आ रहा है क्यों अब पता

1599
01:54:02,080 --> 01:54:08,080
नहीं क्यों आप देखिए क्यों नहीं आ रहा है

1600
01:54:14,320 --> 01:54:18,400
चलिए ठीक है ऐसा करते हैं आज इनका मुझे लग रहा है फोन वो गरम हो गया टेक्निकल

1601
01:54:18,400 --> 01:54:22,400
इश्यूज आ रहे हैं हम लोग फिर किसी दिन ये चर्चा अगर उनको

1602
01:54:22,400 --> 01:54:26,400
उनके लिए सहज होगा तो रख लेंगे है

1603
01:54:26,400 --> 01:54:30,480
ना और

1604
01:54:30,480 --> 01:54:35,280
क्या कहते हैं हमने इनसे पूछा कि सर्वशक्तिमान है

1605
01:54:35,280 --> 01:54:39,280
यदि है तो वह किसी भी बाधा से बाधित है कि नहीं तो वो एक तो देश कृत बाधा से

1606
01:54:39,280 --> 01:54:43,920
बाधित है वो हर जगह नहीं है जात से

1607
01:54:43,920 --> 01:54:48,000
और दूसरी बात परिस्थित परिस्थिति कृत बाधा

1608
01:54:48,000 --> 01:54:52,160
से तो बाधित है ही है अच्छा एक बात और बता दूं मैंने क्वेश्चन

1609
01:54:52,160 --> 01:54:56,560
ये वाले किए नहीं इनका कहना है कि वह झूठ

1610
01:54:56,560 --> 01:55:00,720
नहीं बोल सकता मगर उसने खुद कहा है सातवें उनका

1611
01:55:00,720 --> 01:55:03,920
जो सातवें नंबर की जो सुरा है उसमें खुद कहा है कि मैं लोगों को भटकाता

1612
01:55:03,920 --> 01:55:08,000
हूं तो भटकाने के विषय में क्या है? कौन किसको कौन भटका रहा है? ईश्वर

1613
01:55:08,000 --> 01:55:12,240
ही भटका रहा है। तो भटकाने वाला ईश्वर सिद्ध हो रहा है। झूठ वो बोल सकता है। मगर

1614
01:55:12,240 --> 01:55:16,560
वो अपनी बारी पर बोलता है। और एक जगह

1615
01:55:16,560 --> 01:55:22,560
दो 106 में कुरान के ईश्वर ने कहा है

1616
01:55:25,360 --> 01:55:29,360
दो6 में कुरान के ईश्वर ने कहा है कि हम अपनी कोई आयत

1617
01:55:29,360 --> 01:55:34,640
बदल देते हैं तो उससे बेहतर आयत देते हैं।

1618
01:55:34,640 --> 01:55:40,640
है ना

1619
01:55:40,880 --> 01:55:45,200
रिजवान जी मैं अब इस चर्चा को दो घंटे ऑलमोस्ट हो गए हैं

1620
01:55:45,200 --> 01:55:50,160
और आपका टेक्निकल इशू भी आ रहा है। आपकी फोटो भी चिपक रही है। लिप्सिंग हो रही थी आगे पीछे

1621
01:55:50,160 --> 01:55:54,240
तो दोबारा किसी दिन जिस दिन आपको सहज लगेगा उस दिन कर लेंगे

1622
01:55:54,240 --> 01:55:58,240
और क्या कहते हैं मैं एक एंडिंग दे रहा

1623
01:55:58,240 --> 01:56:03,760
हूं।

1624
01:56:03,760 --> 01:56:07,840
आ रही है आपको? हां आवाज आ रही है। ठीक है।

1625
01:56:07,840 --> 01:56:11,840
वो क्या मुझे कॉल आ रहा था इस वजह से डिस्टर्बिंग हो गई थी। अच्छा

1626
01:56:11,840 --> 01:56:16,000
मैं अभी सुन रहा था। मैंने देखा आपको आप कुछ सात नंबर की सूरत

1627
01:56:16,000 --> 01:56:21,120
की बात कर रहे थे कि उसमें ईश्वर जो है भटका रहा है। तो मुझे

1628
01:56:21,120 --> 01:56:25,120
हां हां हां हां कर रहा था बताइए। ईश्वर ने भटकाने की बात

1629
01:56:25,120 --> 01:56:29,280
कही है ना? नहीं नहीं कही। अच्छा

1630
01:56:29,280 --> 01:56:33,280
मैं अभी बता मैं अभी बता ये कहीं

1631
01:56:33,280 --> 01:56:37,760
पे कहा गया दो 106 में कि हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो

1632
01:56:37,760 --> 01:56:42,880
जो है उससे बेहतर आयत देते तुम नहीं जानते ईश्वर जो चाहे वो कर सकता है

1633
01:56:42,880 --> 01:56:47,440
नहीं आयत नहीं बदलते हैं आयत से आयत

1634
01:56:47,440 --> 01:56:51,520
से है ना ये आयत है सूर बकरा

1635
01:56:51,520 --> 01:56:55,520
दूसरी सूरत की 106 नंबर की आयत है के जो

1636
01:56:55,520 --> 01:56:56,320
हम बदलते

1637
01:56:56,320 --> 01:57:00,480
हैं आयत से या भुला देते हैं तो उससे

1638
01:57:00,480 --> 01:57:04,560
बेहतर के अच्छे के साथ आते हैं या उसी के जैसे के साथ तो कोई

1639
01:57:04,560 --> 01:57:09,680
भी चीज आयत से बदलता है। आयत को नहीं बदलता है।

1640
01:57:09,680 --> 01:57:14,000
आयत से बदलता है। आयत को नहीं बदलता है। मिसाल

1641
01:57:14,000 --> 01:57:18,080
दे दीजिए। मिसाल मिसाल दे दीजिए। समझ पाऊं मैं आपकी बात को। हां। नहीं

1642
01:57:18,080 --> 01:57:22,080
समझ पा रहे ना आप? तो जैसे जैसे कोई

1643
01:57:22,080 --> 01:57:26,080
ज्ञान मैं गलत समझा हुआ हूं। मिसाल के तौर पर

1644
01:57:26,080 --> 01:57:30,240
तो वो आयत से क्या करेगा? बदल देगा मेरे उस ज्ञान को। यानी आयत

1645
01:57:30,240 --> 01:57:34,320
का ज्ञान दे देगा मुझे। और जो मैं ज्ञान पहले

1646
01:57:34,320 --> 01:57:38,480
समझा हुआ था उस आयत के ज्ञान से सही ज्ञान पे आ जाऊंगा। है

1647
01:57:38,480 --> 01:57:42,480
ना? तो आयत से मेरे ज्ञान को बदल देगा और उससे बेहतर ज्ञान

1648
01:57:42,480 --> 01:57:46,800
दे देगा जो इससे पहले मैं समझा हुआ था। अपनी मर्जी से

1649
01:57:46,800 --> 01:57:51,680
या उसके जैसा ही बेहतर दे देगा। समझ रहे हैं?

1650
01:57:51,680 --> 01:57:55,840
तो ये वहां आयत में है। अरबी है अभी

1651
01:57:55,840 --> 01:58:00,800
टाइम लग जाएगा और दूसरा आप भटकाने की कह रहे थे एक मिनट एक

1652
01:58:00,800 --> 01:58:04,800
मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट आपने जो आयत पे बोला है

1653
01:58:04,800 --> 01:58:10,400
वो मैं समझ रहा हूं जैसे मैंने किसी आयत को पढ़ के गलत समझ लिया

1654
01:58:10,400 --> 01:58:13,120
है ना

1655
01:58:13,120 --> 01:58:17,200
जैसे मैंने किसी आयत को पढ़ के गलत समझा तो ईश्वर क्या

1656
01:58:17,200 --> 01:58:21,280
करता है ऐसे शब्दों में वही आयत दोबारा देता है जिससे

1657
01:58:21,280 --> 01:58:27,280
मैं सही समझ जाऊं। ये बात है क्या

1658
01:58:28,400 --> 01:58:33,440
चिपक गया आपने मैंने चिपक रहा है आपका बार-बार

1659
01:58:33,440 --> 01:58:37,440
मुझे कॉल आ रहा है ना बार बार कॉल आ जा रहा है इस वजह से आप डीएनडी लगाइए

1660
01:58:37,440 --> 01:58:42,160
ना वहां

1661
01:58:42,160 --> 01:58:47,280
आप डीएनडी लगा लीजिए भाई साहब

1662
01:58:47,280 --> 01:58:51,360
चलिए ठीक है अब हम जो है फिर दूसरे किसी दिन रखेंगे अभी मैं बता

1663
01:58:51,360 --> 01:58:55,360
दूं इन्होंने जो क्लेम किया है वह क्लेम इनकी कुरान से ही खंडित होता

1664
01:58:55,360 --> 01:58:59,600
है। 5 101 में कहा जा रहा है कि ज्यादा सवाल

1665
01:58:59,600 --> 01:59:03,600
मत करो अन्यथा जो है तुम्हारे लिए वो आयतें खोल

1666
01:59:03,600 --> 01:59:05,760
दी जाएंगी जिन आयतों के कारण

1667
01:59:05,760 --> 01:59:09,760
पहले के लोग बागी हो गए थे। मतलब इनका जो है आयत बंद भी होती रहती। रिजवान

1668
01:59:09,760 --> 01:59:14,640
जी आपके साथ फिर किसी दिन कंटिन्यू कर लेंगे। दो घंटे हो चुके हैं।

1669
01:59:14,640 --> 01:59:20,640
दो घंटे हो चुके हैं और जो है आपका प्रॉब्लम भी आ रही है।

1670
01:59:22,480 --> 01:59:26,560
तो 5 101 में क्या कहा गया कि तुम्हारे लिए वह आयत खोल दींगी

1671
01:59:26,560 --> 01:59:30,720
जिनको पढ़कर कुछ लोग भागी हो गए यानी कि पहले जो नियम था वो

1672
01:59:30,720 --> 01:59:35,120
अब हटा दिया गया तो शाश्वत सिद्धांत नहीं है। मतलब बदलना

1673
01:59:35,120 --> 01:59:39,120
वहां पर सिद्धांत जो पहले उसके द्वारा अभी कल्याण होना था मगर अभी कल्याण नहीं हो रहा

1674
01:59:39,120 --> 01:59:43,120
है तो बदलना सिद्ध हो रहा है। और एक आयत और है

1675
01:59:43,120 --> 01:59:47,120
दो 187 उसमें क्या है कि अब तुम्हारे

1676
01:59:47,120 --> 01:59:51,360
लिए रोजों की रात में स्त्री संग करना भी अलऊ कर दिया गया है।

1677
01:59:51,360 --> 01:59:55,520
कर दिया गया अलऊ। तो यानी कि पहले नहीं था अलऊ। अब है अलऊ।

1678
01:59:55,520 --> 01:59:59,840
यानी नियम बदल रहा है। यानी आयतों से मिलने वाला जो नियम इत्यादि

1679
01:59:59,840 --> 02:00:03,920
है वो चालू बंद बदलते रहते हैं। और जो इनकी ये

1680
02:00:03,920 --> 02:00:08,000
वाली बात है तो फिर ये वाली फिट हो जाती है। कौन सी कि हम अपनी

1681
02:00:08,000 --> 02:00:12,080
कोई आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर देते हैं। हम

1682
02:00:12,080 --> 02:00:17,440
और एक बात और है कि

1683
02:00:17,440 --> 02:00:21,680
आयत दी किसको जा रही है? दी जा रही है आयत मोहम्मद

1684
02:00:21,680 --> 02:00:25,760
जी को। तो अगर ना समझने वाली बात आएगी वो समझ नहीं पाए थे शब्दों को

1685
02:00:25,760 --> 02:00:29,760
तो फिर मोहम्मद जी पर भी प्रश्न उठ जाएंगे। ये सारी कई बातें

1686
02:00:29,760 --> 02:00:34,000
हैं और मैं थोड़ा समराइज कर दूं। ईश्वर अवतार नहीं

1687
02:00:34,000 --> 02:00:38,160
ले सकता। परिस्थिति कृत बाधा से बाधित है। सब जगह नहीं हो सकता। देश कृत

1688
02:00:38,160 --> 02:00:43,520
परिस्थिति से बाधित है। अगर ये कहते हैं कि ये सब जगह ऑल

1689
02:00:43,520 --> 02:00:47,520
क्या ओमनीपोटेंट है। तो फिर इसको इनको मानना पड़ेगा कि हर जगह शक्ति

1690
02:00:47,520 --> 02:00:51,600
के रूप में वो है पर ये मानते तो है नहीं। तो ये वाली एक बात रह गई।

1691
02:00:51,600 --> 02:00:55,760
दूसरी बात इन्होंने कहा कि भाई वो गलत काम नहीं कर सकता मगर वो शैतान

1692
02:00:55,760 --> 02:01:00,160
को बनाने के रूप में गलत काम कर रहा है जो आगे चलके एडमम वो आदम

1693
02:01:00,160 --> 02:01:04,160
को भटका रहा है इंसान को भटका रहा है इंसान नीचे आ रहा है तो

1694
02:01:04,160 --> 02:01:08,320
वो भटका रहा है भटकाने वालों को जन्म दे रहा है हां

1695
02:01:08,320 --> 02:01:12,400
वो चाहत को जन्म दे रहा है नहीं उसको ही पकड़ ले शैतान रूपी चाहत है जो उसको

1696
02:01:12,400 --> 02:01:16,560
बना रहा है कुल मिलाकर के वो ऐसी चीजें कर रहा है जो दूसरों के लिए कष्टदायक

1697
02:01:16,560 --> 02:01:21,040
है अच्छा और क्या पूछे और क्या पूछा था हमने इनसे

1698
02:01:21,040 --> 02:01:25,040
जुल्म वाली बात में फिर वो वो सिद्ध नहीं होती। अच्छा

1699
02:01:25,040 --> 02:01:29,040
टेस्ट की बात है कि यहां पर उसने बुराई और अच्छाई दोनों को बनाया क्योंकि टेस्ट

1700
02:01:29,040 --> 02:01:32,640
लेना था तो वहां पर क्यों बनाया? वहां तो टेस्ट नहीं था। टेस्ट तो यहां है तो

1701
02:01:32,640 --> 02:01:36,800
क्यों बनाया? रोबोट चाहिए था। तो मतलब रोबोट नहीं चाहिए था ये

1702
02:01:36,800 --> 02:01:41,040
उद्देश्य है या क्या चाहिए था वो उद्देश्य क्लियर नहीं हुआ। अच्छा अब कुछ

1703
02:01:41,040 --> 02:01:45,040
तात्विक चीजें हैं। इन्होंने अपनी चर्चा में यह भी माना कि जो

1704
02:01:45,040 --> 02:01:49,120
सृष्टि है वह कई बार बनती है और यह भी माना कि जो लोग

1705
02:01:49,120 --> 02:01:53,200
क्या कहते हैं वहां जाते हैं तो वो जो है हमेशा के

1706
02:01:53,200 --> 02:01:57,200
लिए रहते हैं। तो यानी कि ये धरती वाली जो सृष्टि है वो कई बार बनती है। मगर वो वाली जो

1707
02:01:57,200 --> 02:02:01,600
सृष्टि है वो कई बार नहीं बनती।

1708
02:02:01,600 --> 02:02:05,760
तो फिर जो धरती वाली सृष्टि है उनके लिए दोबारा जन्म दोबारा इंसान

1709
02:02:05,760 --> 02:02:09,760
बनाए जाते हैं। दोबारा आदम की कहानी शुरू होती है। आदम और जो

1710
02:02:09,760 --> 02:02:13,760
भी है या फिर नए तत्व बनाए जाते हैं और जो

1711
02:02:13,760 --> 02:02:17,760
नरक में चले गए वो नरक ही भोगते रहते हैं। वो क्या है वो भी विवेचना इन्होंने

1712
02:02:17,760 --> 02:02:22,640
नहीं की। और

1713
02:02:22,640 --> 02:02:26,640
हां हमने अभी इनसे ये पूछा ही नहीं है कि

1714
02:02:26,640 --> 02:02:30,880
जो है इनके अनुसार उपास्य प्राप्तव्य एकमात्र

1715
02:02:30,880 --> 02:02:35,040
गंतव्य स्थल क्योंकि जो कॉनंटेंजेंट वाली थ्योरी है ना कंटेंजेंट वाली

1716
02:02:35,040 --> 02:02:39,120
थ्योरी कंटेंजेंट वाली थ्योरी में भी वो सर्वशक्तिमान की कारण

1717
02:02:39,120 --> 02:02:43,200
वो वो सिद्ध नहीं होगा। इस्लाम का ईश्वर जो

1718
02:02:43,200 --> 02:02:47,280
है सब कुछ हर चीज का मूल कारण सिद्ध नहीं होता क्योंकि वह सब जगह नहीं

1719
02:02:47,280 --> 02:02:51,920
है। सिंपल सीधी सी बात हर चीज का मूल कारण सर्वव्यापी नित्य

1720
02:02:51,920 --> 02:02:56,080
सिद्ध नहीं होता। तो कॉन्टेंजेंट वाली जो थ्योरी है वो

1721
02:02:56,080 --> 02:03:00,160
लागू नहीं होती। फिर भी अगर मान लेते हैं कि कंटेंजेंट के द्वारा अल्लाह जो है वो

1722
02:03:00,160 --> 02:03:04,480
सिद्ध हो जाता है। उसका अस्तित्व मगर फिर भी वो मनुष्य का उपास्य मनुष्य

1723
02:03:04,480 --> 02:03:08,720
का प्राप्तव्य सिद्ध नहीं होता। क्योंकि इनके यहां पर तो सच्चिदानंद है ही नहीं।

1724
02:03:08,720 --> 02:03:12,720
सच्चिदानंद है ही नहीं तो फिर उस ईश्वर या उस

1725
02:03:12,720 --> 02:03:17,360
किताब के द्वारा दी जाने वाली मान्यता कोई क्यों माने जहां पर उसको उसकी वास्तविक

1726
02:03:17,360 --> 02:03:21,360
जो इच्छा है जिसके कारण वो किसी भी किताब को मानता है वो इच्छा पूरी

1727
02:03:21,360 --> 02:03:25,680
नहीं हो रही क्योंकि अंत में घोड़े की कहेंगे तो घोड़ा आ जाएगा इन्होंने कहा

1728
02:03:25,680 --> 02:03:29,680
तो घोड़े की कहेंगे घोड़ा आ जाएगा यानी बाधित हो रहा है अनंत आनंद नहीं

1729
02:03:29,680 --> 02:03:33,920
है बीच में आनंद बाधित हो रहा है घोड़ा आएगा तब आनंद मिलेगा घोड़ा नहीं है तो बाधित

1730
02:03:33,920 --> 02:03:38,240
नहीं तो मोक्ष भी नहीं है तो क्या हो गया सर्वशक्तिमान ईश्वर

1731
02:03:38,240 --> 02:03:42,240
परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म तीनों चीजें हमने निकाल ली जो

1732
02:03:42,240 --> 02:03:46,400
हम क्लेम करते हैं। तीनों चीजें निकाल ली। ना सर्वशक्तिमान ईश्वर

1733
02:03:46,400 --> 02:03:50,640
है ना परम स्वतंत्र मोक्ष है ना शाश्वत धर्म है। धर्म बदल

1734
02:03:50,640 --> 02:03:54,960
रहा है। आयतें बदल रही है। चीजें बदल रही है और

1735
02:03:54,960 --> 02:03:59,200
मोक्ष बाधित है। परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है और सर्वशक्तिमान ईश्वर

1736
02:03:59,200 --> 02:04:03,440
भी। अब ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के विषय में हम बता चुके

1737
02:04:03,440 --> 02:04:08,160
हैं कि अगर ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो यह मानना पड़ेगा

1738
02:04:08,160 --> 02:04:12,240
ये संसार जो है माया से बना हुआ है क्योंकि अगर वो सर्वत्र एक रस

1739
02:04:12,240 --> 02:04:18,240
है तो माया से बना हुआ हमें मानना पड़ेगा और

1740
02:04:19,920 --> 02:04:24,000
माया से बना हुआ मानना पड़ेगा। जब हम इसको माया से बना हुआ मानेंगे तो वो जो जुल्म

1741
02:04:24,000 --> 02:04:28,000
हो रहा है ना वो वाली बात भी करेक्ट हो जाएगी कि अगर किसी को चोट पहुंची है तो उसको यह

1742
02:04:28,000 --> 02:04:32,080
बताना है कि तुम अभी छोटे हो तुम समझ नहीं पा रहे हो ये सब एक खेल है मतलब अविद्या है ये

1743
02:04:32,080 --> 02:04:36,400
तुम्हारी माया का भ्रम है वस्तुत तुम कौन हो नैन चिनती शस्त्राण

1744
02:04:36,400 --> 02:04:40,800
नैन धति पावका न चैन क्ले न सोति मारता

1745
02:04:40,800 --> 02:04:44,880
वस्तुत तुम ही हो तुम आत्मा हो तत्व से तो तुम खा ही

1746
02:04:44,880 --> 02:04:50,880
जो है

1747
02:04:52,720 --> 02:04:56,720
आपको खामखा ही मतलब ऐसा लग रहा है कि आपके साथ जैसे बच्चा रोता है

1748
02:04:56,720 --> 02:05:00,720
ना व्यर्थ की बातों में ऐसे ही वो व्यर्थ की बातों में और इससे

1749
02:05:00,720 --> 02:05:04,960
ही ईश्वर का इंटरप्ट ना करना भी सिद्ध हो जाएगा। क्यों? क्योंकि जिसको यह नहीं मालूम

1750
02:05:04,960 --> 02:05:09,120
है कि अविद्या है उसका मान इंटरप्ट होना प्रभावित होना

1751
02:05:09,120 --> 02:05:13,360
तो उचित है। मगर जिसको मालूम है कि अविद्या

1752
02:05:13,360 --> 02:05:17,440
अविद्या ही है। उसका वो इंटरप्ट नहीं हो उससे प्रभावित नहीं हो वो भी उचित

1753
02:05:17,440 --> 02:05:21,680
है। तो वो चीज हो जाएगी। अब क्या है कि ईश्वर क्योंकि नित्य है

1754
02:05:21,680 --> 02:05:25,680
तो इसलिए उसने जब माया बनाई तो उस माया कर में वो कितने भी अवतार ले सकता

1755
02:05:25,680 --> 02:05:29,920
है। सगुण निराकार में आता है। उसके बाद सगुण साकार में। ये सारी

1756
02:05:29,920 --> 02:05:34,000
पूरी अपनी कांसेप्ट हो गई जो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र

1757
02:05:34,000 --> 02:05:35,280
मोक्ष और शाश्वत

1758
02:05:35,280 --> 02:05:39,280
धर्म के संबंध में हम व्याख्या देते हैं। अब वो बात वो वाली बातें कई बार हो चुकी है।

1759
02:05:39,280 --> 02:05:43,600
शास्त्रों में कहां-कहां लिखा है इसके लिए आप हमारे दूसरे सनातन सिद्धांत वाली

1760
02:05:43,600 --> 02:05:47,680
सीरीज बनाई हुई है क्या कहते हैं प्लिस्ट उसमें जाकर के आप चेक

1761
02:05:47,680 --> 02:05:51,680
करें और जो रिजवान जी और रिजवान जी के समर्थक भी

1762
02:05:51,680 --> 02:05:55,840
हैं जो आगे चर्चा में आना चाहे वह भी हमारी मान्यताओं को देखने

1763
02:05:55,840 --> 02:05:59,920
के लिए उन वीडियोस को देख ले पहले। हालांकि यह चर्चा

1764
02:05:59,920 --> 02:06:03,920
इस बारे में है ही नहीं। चर्चा कहां से शुरू हुई? हमने किसी मातृ

1765
02:06:03,920 --> 02:06:08,160
शक्ति से पूछा था आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? तो Instagram पे इन्होंने कहा था

1766
02:06:08,160 --> 02:06:12,240
वो जवाब नहीं दे पाई थी तो उन्होंने कहा था मैं जवाब दूंगा। मगर इन्होंने जवाब नहीं दिए।

1767
02:06:12,240 --> 02:06:16,320
जवाब इन्होंने नहीं भी दिए मगर हमको चीजें प्राप्त हो गई। ठीक है।

1768
02:06:16,320 --> 02:06:20,320
अब ये अपूर्व कुमार करके कोई आ रहे हैं मगर अपनी फोटो नहीं दिखा

1769
02:06:20,320 --> 02:06:24,400
रहे हैं। तो इनको ले पाना मुश्किल होगा। चलिए

1770
02:06:24,400 --> 02:06:28,880
ठीक है। सभी को जय श्री राम। शास्त्रवाद जी बताइए।

1771
02:06:28,880 --> 02:06:32,880
सुन लेते हैं आपका रिजवान जी चर्चा काफी लंबी

1772
02:06:32,880 --> 02:06:37,120
हो गई है दो घंटे की तो हम किसी और दिन आगे बढ़ाएंगे

1773
02:06:37,120 --> 02:06:41,200
बात को है ना आपने कई बातों

1774
02:06:41,200 --> 02:06:45,360
का उत्तर भी नहीं दिया है आप वहां पर मौन हो गए और आप जो विषयंतर

1775
02:06:45,360 --> 02:06:49,440
करते हुए इस पर आ गए कि भैया अब आप जवाब दो हमने जवाब दिया भी है और फिर किसी

1776
02:06:49,440 --> 02:06:51,040
दिन देख लेंगे

1777
02:06:51,040 --> 02:06:54,880
हां बताइए शास्त्रवाद जी

1778
02:06:54,880 --> 02:06:59,920
जय श्री राम भैया जय श्री राम क्या सीखने को मिला कुछ कि नहीं

1779
02:06:59,920 --> 02:07:04,480
खामखाई मेहनत अच्छा चर्चा हुआ कल भी बहुत अच्छा चर्चा हो रहा था

1780
02:07:04,480 --> 02:07:08,720
चलिए भैया यहां पे आवाज

1781
02:07:08,720 --> 02:07:13,520
आ रही है हेलो जी जी आ रही है जी

1782
02:07:13,520 --> 02:07:17,520
ऐसा तो बहुत अच्छा हुआ आज लेकिन आज जो आपने उनको सिद्ध किया

1783
02:07:17,520 --> 02:07:21,680
है ना कि जो गुणों के आधार पे और जात के आधार पे जो ईश्वर

1784
02:07:21,680 --> 02:07:25,920
इनका है वो सर्वव्यापी सिद्ध नहीं हो रहा है ना जात के आधार पे

1785
02:07:25,920 --> 02:07:30,080
लेकिन गुण के आधार पर गुण के आधार पर सर्व्यापी बता रहा है।

1786
02:07:30,080 --> 02:07:34,320
अरे जब गुणी होगा तो गुण होगा ना। गुणी

1787
02:07:34,320 --> 02:07:38,480
होगा तो गुण भी होगा। उधर गुणी ही गुण वहां पे

1788
02:07:38,480 --> 02:07:42,560
उसका प्रयोजन क्या हुआ? वो जानते ही नहीं ना गुण गुण

1789
02:07:42,560 --> 02:07:46,640
और उसमें इसीलिए मैं देखो ऐसा होता है अगर

1790
02:07:46,640 --> 02:07:51,360
हम उनकी बात को बार-बार करेक्ट करने लग जाए ना तो उसमें

1791
02:07:51,360 --> 02:07:55,520
क्या होता है ये हम लोगों को जानना होगा कि

1792
02:07:55,520 --> 02:07:59,920
अ विषय को बचाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

1793
02:07:59,920 --> 02:08:04,000
फटफट पलटता जाएगा। बहुत चुटकियों में विषय बदलता जाएगा।

1794
02:08:04,000 --> 02:08:06,080
अब मैं गुणों को समझाने जाऊंगा। वो कुछ क्लेम

1795
02:08:06,080 --> 02:08:10,320
करने लगेंगे। वो एक नई व्याख्या शुरू हो गई। तो क्या है जो वो बोल रहे हैं

1796
02:08:10,320 --> 02:08:14,640
उसी में से कुछ ऐसा खोजो जिससे कि अपना काउंटर कर पाओ। जो बोल रहे

1797
02:08:14,640 --> 02:08:18,640
और जैसे उन्होंने बोला कि भैया जात के आधार

1798
02:08:18,640 --> 02:08:22,880
पर नहीं है तो यह हमारे लिए पर्याप्त है कि एक अंतर है क्योंकि जात

1799
02:08:22,880 --> 02:08:26,960
के आधार पर ईश्वर एक जगह है इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि जात के आधार

1800
02:08:26,960 --> 02:08:31,040
पर ईश्वर और उसकी शक्ति एक है और वही जात जो

1801
02:08:31,040 --> 02:08:36,400
है वो हमारा हमारी दृष्टि उसको तत्व कहते हैं शायद है ना

1802
02:08:36,400 --> 02:08:40,480
बिल्कुल तत्व की दृष्टि से सर्वत्र है हमारे में तो वहां पे ये दो

1803
02:08:40,480 --> 02:08:45,120
अलग-अलग बता रहे हैं यही तो फसता है

1804
02:08:45,120 --> 02:08:49,200
बिना सर्वव्यापी होते हुए उसकी

1805
02:08:49,200 --> 02:08:53,360
सत्ता को नित्य नहीं मान सकते कम ज्यादा करना पड़ेगा शाश्वतता

1806
02:08:53,360 --> 02:08:57,520
भंग हो जाएगी और देश कृत परिस्थिति से बाधित होते हुए

1807
02:08:57,520 --> 02:09:01,040
वो सिद्ध हो जाएगा बाधित

1808
02:09:01,040 --> 02:09:05,760
मतलब हां ईश्वर ओमनीपोटेंट

1809
02:09:05,760 --> 02:09:09,440
नहीं रह जाएगा फिर

1810
02:09:09,440 --> 02:09:15,440
ओमनी प्रेजेंट तो है ही नहीं ओमनी पोर्टेंट भी नहीं रह जाएगा।

1811
02:09:16,000 --> 02:09:20,800
बिल्कुल यहां पे इनका जो ईश्वर सर्वव्यापी अगर

1812
02:09:20,800 --> 02:09:24,960
उनका जो ईश्वर है गुण के आधार पे यदि सर्वव्यापी है और जात के आधार पे एक देश है

1813
02:09:24,960 --> 02:09:29,040
तो एक देश होते हुए सर्वव्यापी सत्ता को वो कंट्रोल कर पा रहा है। इसका मतलब

1814
02:09:29,040 --> 02:09:33,280
सर्वव्यापी सत्ता ज्यादा पावरफुल हुआ ना। सर्व्या एक

1815
02:09:33,280 --> 02:09:38,880
आ रहा है। एक ये आ रहा है। देखिए क्यों ऑन स्टेज?

1816
02:09:38,880 --> 02:09:43,040
ये अच्छा एक कमेंट आया। इसका जवाब देना मैं आवश्यक समझता हूं। मनीष

1817
02:09:43,040 --> 02:09:47,040
जी मैं इस धारणा के साथ जीता हूं कि मेरे पास

1818
02:09:47,040 --> 02:09:51,120
क्या है? अगर सामने वाले के सिद्धांत को

1819
02:09:51,120 --> 02:09:55,280
पढ़ के और फिर मैं उसे तोड़ सकता हूं। यानी कि मुझे अपने

1820
02:09:55,280 --> 02:09:59,520
सिद्धांत पर कम वो है, डाउट है। भाई

1821
02:09:59,520 --> 02:10:04,400
तुम अपनी मान्यता का जो भी अर्थ लेकर के आ रहे हो, यदि वो वेद विरुद्ध है,

1822
02:10:04,400 --> 02:10:09,120
शंकराचार्य के विरुद्ध है, हम उसको काट सकते हैं। कुछ भी ले आओ।

1823
02:10:09,120 --> 02:10:13,280
कुछ भी निकालो। हां। फिर जब हम ऐसे काट देंगे फिर

1824
02:10:13,280 --> 02:10:17,360
सेकेंडरी हो सकता है कि हम ये कह सकते हैं भाई कुरान में जो तुम क्लेम कर रहे हो कुरान की

1825
02:10:17,360 --> 02:10:21,840
ओर से आपकी बात अच्छी है फिर वो सेकेंडरी हो सकता है मगर पहले आपको

1826
02:10:21,840 --> 02:10:24,640
स्वतंत्र रूप से अपने मत को स्थापित करने वाला होना

1827
02:10:24,640 --> 02:10:28,720
चाहिए स्वतंत्र हमें जरूरत नहीं है सामने वाले का सिद्धांत

1828
02:10:28,720 --> 02:10:32,720
जब गलत सिद्ध होगा तभी हम जैसे वो कर रहे थे वो क्यों कर रहे थे क्योंकि उन्होंने

1829
02:10:32,720 --> 02:10:36,880
वेदों के बारे में थोड़ा बहुत जाकिर नायक को जाकिर नायक को कहां से पता लगा

1830
02:10:36,880 --> 02:10:41,120
है वो तो आप जानते ही हैं कौन देता है ऐसे विचारों को शरण

1831
02:10:41,120 --> 02:10:45,200
नास प्रतिमा को उसमें मैं क्या कहूं इसीलिए मैं कहता

1832
02:10:45,200 --> 02:10:49,280
हूं ना लोगों को कि भाई देखो इन इन चीजों से हमें दिक्कत आती है क्या दिक्कत

1833
02:10:49,280 --> 02:10:53,760
आती है जिसको ये परंपरा मालूम होगा ये मालूम होगा वो तो वहां टिक पाएगा

1834
02:10:53,760 --> 02:10:57,840
वरना वो जिसको बता दिया नात अस्ति देखो तुम्हारा भी तो ईश्वर अवतार नहीं ले सकता

1835
02:10:57,840 --> 02:11:02,560
है तो जो अनबिटेबल क्वेश्चन है वो हमारा आएगा ही नहीं बच्चे के पास

1836
02:11:02,560 --> 02:11:06,560
अनबीटेबल क्वेश्चन क्या तुम्हारा

1837
02:11:06,560 --> 02:11:10,720
ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या वो वो जीव मात्र

1838
02:11:10,720 --> 02:11:14,800
की चाह का वास्तविक विषय है और फिर क्या जो उसके द्वारा

1839
02:11:14,800 --> 02:11:18,880
मिलने वाला जो मजहब है, दीन है या जो

1840
02:11:18,880 --> 02:11:22,880
नियमावली है क्या वो शाश्वत है जिस पर तुम

1841
02:11:22,880 --> 02:11:26,880
भरोसा कर सको भाई आज जैसे एक चीज

1842
02:11:26,880 --> 02:11:30,800
बदली है कि पहले जो है स्त्री शंकर

1843
02:11:30,800 --> 02:11:34,800
नहीं था अब कर सकते हैं तो कल को और भी चीजें बदल सकती है

1844
02:11:34,800 --> 02:11:38,880
कोई और आयत आ सकती है पहले मूर्ति पूजा गलत थी आज मूर्ति

1845
02:11:38,880 --> 02:11:39,680
पूजा सही

1846
02:11:39,680 --> 02:11:44,000
तो लो हम तो मर गए लड़ लड़ के

1847
02:11:44,000 --> 02:11:48,160
वो तो बुत परस्ती मत करो बुत परस्ती मत करो मगर यहां तो यार बदल

1848
02:11:48,160 --> 02:11:52,160
दिया है ना शाश्वतता होनी चाहिए तो

1849
02:11:52,160 --> 02:11:56,560
इसलिए आपकी बात अच्छी है पर वो सेकेंडरी हो सकती है कि हम उनकी उनकी बुक से

1850
02:11:56,560 --> 02:12:00,640
उनकी बुक का जो पर्याप्त जो अध्ययन होना चाहिए हम इस पर ध्यान कम देते हैं

1851
02:12:00,640 --> 02:12:05,120
कि वहां पर वो हलाला क्या है वो ये वो चीजें नहीं जो

1852
02:12:05,120 --> 02:12:09,440
तात्विक विचना है ना जिससे अकाट सिद्धांत वो है

1853
02:12:09,440 --> 02:12:13,520
उस पर ध्यान दिया है। उनकी तात्विक विवेचना क्या है? अभी यह

1854
02:12:13,520 --> 02:12:19,520
सब तो पूछा ही नहीं गया। अभी यह सब तो पूछा ही नहीं गया।

1855
02:12:26,160 --> 02:12:30,320
अभी ये सब तो पूछा ही नहीं गया कि जो इंसान बनाया था वो तत्व कहां से

1856
02:12:30,320 --> 02:12:34,400
लिया? हम अब वो तत्व

1857
02:12:34,400 --> 02:12:39,440
अगर केवल अपनी इच्छा शक्ति से बना दिया। हां

1858
02:12:39,440 --> 02:12:43,680
तो इच्छा शक्ति से बना तो यानी वो तत्व वही से आया इच्छा

1859
02:12:43,680 --> 02:12:46,560
शक्ति के रूप में

1860
02:12:46,560 --> 02:12:49,760
तो अंश हो गया

1861
02:12:49,760 --> 02:12:54,080
अभी ये सब तो पूछा ही नहीं गया है कि नहीं

1862
02:12:54,080 --> 02:12:58,080
वही तो ये लोग बिल्कुल बिल्कुल ये लोग अलग-अलग कहांहां से अभी फसेंगे अभी

1863
02:12:58,080 --> 02:13:02,880
तो आगे चर्चा बाकी है अगर आएंगे फिर अगली बार जो आएंगे हम

1864
02:13:02,880 --> 02:13:06,880
कल वाला जो चर्चा था भैया वो बहुत बढ़िया था आप और हम

1865
02:13:06,880 --> 02:13:12,800
मिलकर कर दोनों धर्म की रक्षा करेंगे। अनुस्त

1866
02:13:12,800 --> 02:13:17,600
है ना मिलकर करेंगे। सर्वशक्तिमान

1867
02:13:17,600 --> 02:13:22,160
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म इसको कोई काट नहीं सकता।

1868
02:13:22,160 --> 02:13:26,320
कोई भी आ जाए दुनिया का। इसीलिए कहता हूं मत पड़ो

1869
02:13:26,320 --> 02:13:30,480
चक्कर में। कोई नहीं है। कोई नहीं चक्कर में कोई

1870
02:13:30,480 --> 02:13:33,920
नहीं चक्कर में।

1871
02:13:33,920 --> 02:13:37,920
बिल्कुल भैया। पहले जो आपने उनको जो तर्क दिया था ना एक तो

1872
02:13:37,920 --> 02:13:42,000
कि हम जो बता रहे हैं मेरे ही पैरामीटर से

1873
02:13:42,000 --> 02:13:46,080
तुम मेरे को ईश्वर से ईश्वर मत मानो वो वाला पैरामीटर वाला जो बात

1874
02:13:46,080 --> 02:13:50,240
था ना वो बहुत बढ़िया था हां

1875
02:13:50,240 --> 02:13:53,600
जी

1876
02:13:53,600 --> 02:13:57,680
अपने हिसाब से बता रहे थे ना कि कुरान में ये लिखा है तो कुरान में लिखने से हम इसको

1877
02:13:57,680 --> 02:14:01,760
ऐसे ही मानेंगे तो तुम अपने बाहर से तर्क क्यों ला रहे

1878
02:14:01,760 --> 02:14:05,920
हो और यहां पे आप बोल रहे थे अगर हम अपना तर्क नहीं लगाएंगे तो फिर आपके

1879
02:14:05,920 --> 02:14:10,400
दिए हुए तर्कों से ही अगर हम ईश्वर को सिद्ध करेंगे तब तो वही हो गया ना कि हम ही जो पैरामीटर

1880
02:14:10,400 --> 02:14:14,560
सेट कर रहे हैं उसके आधार पे तुम मानो देखो एक बहुत बड़ा

1881
02:14:14,560 --> 02:14:18,960
अंतर है पांच 101 में 101 में प्रश्न करने को मना कर दिया गया

1882
02:14:18,960 --> 02:14:23,200
और हमारे यहां क्या कहा गया है हमारे यहां प्रश्न से ही सभी शास्त्र शुरू

1883
02:14:23,200 --> 02:14:28,800
होते हैं भगवत गीता अर्जुन के प्रश्न

1884
02:14:28,800 --> 02:14:33,040
सारे पुराण आप पढ़ लो सब में नैमिसारंड में 80000 88000 ऋषि

1885
02:14:33,040 --> 02:14:38,240
मुनि बैठे थे वहां जो है प्रश्न प्रश्न किया

1886
02:14:38,240 --> 02:14:42,240
तो हमारी चीजें प्रश्न से ही शुरू होती है सारी

1887
02:14:42,240 --> 02:14:46,240
और पराकाष्ठा देखिए अथ तो ब्रह्म जिज्ञासा अर्थात तो धर्म

1888
02:14:46,240 --> 02:14:50,320
जिज्ञासा गुरु वही जो संशय दूर कर दे अज्ञानता रूपी अंधकार दूर

1889
02:14:50,320 --> 02:14:55,280
कर दे प्रश्न करते जाओ आपको उत्तर मिलते जाएंगे

1890
02:14:55,280 --> 02:14:59,600
इधर से इधर से शुरू करो जरूर कभी भी आप उसको

1891
02:14:59,600 --> 02:15:03,760
बताओ ना तो इधर से शुरू करो इधर से

1892
02:15:03,760 --> 02:15:07,840
कि ईश्वर लोगों के लिए प्राप्तव्य सिद्ध कैसे

1893
02:15:07,840 --> 02:15:11,920
होता है? बस यहां से शुरू करो। यहां से जब सिद्ध करोगे तो

1894
02:15:11,920 --> 02:15:16,320
वो काउंटर करेगा। सर्वशक्तिमत्ता आ जाएगी।

1895
02:15:16,320 --> 02:15:20,560
तो उधर से जब शुरू करोगे ना तो यहां तक लाने में कई बार आपको देर भी लग जाएगा।

1896
02:15:20,560 --> 02:15:24,640
देर भी लग जाएगी। यहां से शुरू करो। उधर ले जाओ। कि अगर

1897
02:15:24,640 --> 02:15:28,800
ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो हमें क्या-क्या मानना पड़ेगा।

1898
02:15:28,800 --> 02:15:32,800
बस मानना पड़ेगा तो माया आ जाएगी। विद्या आ जाएगी सब

1899
02:15:32,800 --> 02:15:36,240
आ जाएंगे। ठीक है?

1900
02:15:36,240 --> 02:15:40,720
बिल्कुल भैया बहुत बढ़िया रहा चर्चा। हां

1901
02:15:40,720 --> 02:15:44,800
ये वाला क्वेश्चन रह गया है। वो ठीक है। बहुत सारी चीजें रह

1902
02:15:44,800 --> 02:15:48,960
गई है। अभी तो बहुत सारी चीजें रह गई। मैं आपको बताऊं अगर सार में कुछ

1903
02:15:48,960 --> 02:15:53,280
कई सारे क्वेश्चंस हैं। जैसे इन्होंने वो मैंने बताया सृष्टि का इन्होंने दोबारा बनना

1904
02:15:53,280 --> 02:15:57,600
स्वीकार कर लिया। तो फिर वो वाले लोग जो अमर हो गए हैं

1905
02:15:57,600 --> 02:16:01,600
वो भी दोबारा मिटेंगे और मरेंगे। क्या होगा? तो कौन सी

1906
02:16:01,600 --> 02:16:06,160
सृष्टि दोबारा बनती है? यानी कि वो जो वो है क्या कहते हैं?

1907
02:16:06,160 --> 02:16:10,800
वो आदम वो भी दोबारा बनता है। बहुत सारे झोल है।

1908
02:16:10,800 --> 02:16:14,960
सबसे पहली बात तो यही है तत्व कहां से आए? दूसरी बात जो नरक में जाएंगे उनको

1909
02:16:14,960 --> 02:16:19,360
अनंत सजा मिलती रहेगी कि उसके बाद उनका कुछ होगा। अगर उनका दर्द

1910
02:16:19,360 --> 02:16:23,360
बंद हो गया। अगर उनका जो दर्द है वो बंद हो गया तो इसका

1911
02:16:23,360 --> 02:16:27,520
मतलब उनकी सजा पूरी हुई। अब वो खाली बैठे। अब खाली बैठे हैं तो क्या

1912
02:16:27,520 --> 02:16:32,080
वो जन्नत में रहेंगे? कहां रहेंगे? नरक में तो रहेंगे नहीं तो या तो उनका पुनर्जन्म

1913
02:16:32,080 --> 02:16:36,160
देना पड़ेगा कि भैया अब तुम अब तुम्हें चेक करते हैं सही करते हो कि नहीं तो

1914
02:16:36,160 --> 02:16:40,240
पुनर्जन्म का कांसेप्ट आ जाएगा और अगर जन्म नहीं दिया

1915
02:16:40,240 --> 02:16:44,320
तो उनको यूं ही आपने मुक्ति दे दी किस कारण मुक्ति दे दी ये भी दिक्कत

1916
02:16:44,320 --> 02:16:48,400
आ जाएगी बहुत सारी दिक्कतें ठीक है और टेस्ट

1917
02:16:48,400 --> 02:16:54,400
वाली बात तो सिद्ध हुई नहीं

1918
02:16:54,480 --> 02:17:00,240
के लिए सभी को अ

1919
02:17:00,240 --> 02:17:06,240
आभार

1920
02:17:17,120 --> 02:17:22,080
तो आप जो है वो कमजोर वाले हिंदू ना बने

1921
02:17:22,080 --> 02:17:26,160
मतलब एक्स मुस्लिम इत्यादि कई कई सारे ऐसे कार्य कर रहे हैं आप वो ना बने

1922
02:17:26,160 --> 02:17:30,160
कि हलाला है ये है वो है मोहम्मद जी ने ये किया

1923
02:17:30,160 --> 02:17:34,880
वो किया ये सब नहीं आप क्या वो कौन से हिंदू बने

1924
02:17:34,880 --> 02:17:39,040
जिसको अपने ऊपर विश्वास हो अपने ऊपर हमारे पास क्या

1925
02:17:39,040 --> 02:17:43,120
है जो हम ले चलते हैं स्वतंत्र मेले में मिले

1926
02:17:43,120 --> 02:17:47,520
थे मुझे रामपाल वाले कोई क्या तैयारी करके गया था

1927
02:17:47,520 --> 02:17:51,520
बिना तैयारी के वहां पर उनको मैंने खदेड़ा था क्यों

1928
02:17:51,520 --> 02:17:55,920
क्योंकि परंपरा प्राप्त ज्ञान और वो भी उसका भी परंपरा

1929
02:17:55,920 --> 02:18:00,880
प्राप्त ज्ञान का बिल्कुल तिनके मात्र कुछ नहीं ना के बराबर अल्पज्ञ

1930
02:18:00,880 --> 02:18:04,960
है ना कोई क्या हम लोग हमेशा तैयारी करके चले बाहर

1931
02:18:04,960 --> 02:18:09,040
निकले तो अब जैसे कि अपने घर की स्त्री

1932
02:18:09,040 --> 02:18:09,680
को लेकर के

1933
02:18:09,680 --> 02:18:13,680
बाहर जा रहे हैं तो जब कोई अटैक होगा तो हम उससे ये कहेंगे रुक

1934
02:18:13,680 --> 02:18:17,760
जाओ हम हथौड़ा ले आए छेनी ले आए लड़ने के लिए बेसबॉल

1935
02:18:17,760 --> 02:18:21,920
का डंडा ले आए ये सब करेंगे क्या आपके पास क्या

1936
02:18:21,920 --> 02:18:26,240
है आप क्या कर सकते तो उसी से लड़ोगे ना तो अपने आप को ऐसा बनाओ

1937
02:18:26,240 --> 02:18:30,240
कि ऑन द स्पॉट वहां पर आप अपने धर्म की रक्षा कर पाओ।

1938
02:18:30,240 --> 02:18:34,240
ये दूसरे की किताबों को पढ़ के आप जो है और अपने धर्म की

1939
02:18:34,240 --> 02:18:39,040
रक्षा कर पा रहे हो तो इसका मतलब आपने आपके पास अपने सिद्धांत कमजोर है।

1940
02:18:39,040 --> 02:18:43,120
है ना? ऐसे हिंदू बनिए। मैंने अपना उनके

1941
02:18:43,120 --> 02:18:47,280
सिद्धांत को काउंटर भी किया और अपना सिद्धांत सिद्ध भी किया। उसको तोड़

1942
02:18:47,280 --> 02:18:51,280
नहीं सकता कोई। यहीं से चालू करो। जीव की चाह का

1943
02:18:51,280 --> 02:18:55,440
वास्तविक विषय सिद्ध कर दो तुम ईश्वर को बिना उसके तीन प्रकार

1944
02:18:55,440 --> 02:18:59,680
की बाधाओं से मुक्त हुए देश कृत कालकृत परिस्थिति

1945
02:18:59,680 --> 02:19:04,240
कृत किसी बाधा से बाधित ना हो तो मानना पड़ेगा

1946
02:19:04,240 --> 02:19:06,640
कि

1947
02:19:06,640 --> 02:19:10,720
वो निर्गुण निराकार सगुण निराकार सगुण निराकार कैसे

1948
02:19:10,720 --> 02:19:15,040
आया माया से बस जैसे ही माया आएगी माया तो भगवान की परम शक्ति

1949
02:19:15,040 --> 02:19:19,440
है जैसे ही माया आती है तो अगर

1950
02:19:19,440 --> 02:19:23,680
और धर्म को ना मानने वाले ना जानने वाले सब लोग किनारे

1951
02:19:23,680 --> 02:19:24,960
होने लगते हैं। अब

1952
02:19:24,960 --> 02:19:28,960
देखा था ना अविद्या का अविद्या का जैसे ही अविद्या आई

1953
02:19:28,960 --> 02:19:33,200
थी तो क्या हुआ था? हां

1954
02:19:33,200 --> 02:19:39,200
चलिए ठीक है। जय श्री राम सभी को।

1955
02:19:39,200 --> 02:19:45,200
जय श्री राम।

1956
02:19:58,510 --> 02:20:02,510
[संगीत]
