1
00:00:01,040 --> 00:00:05,200
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:05,200 --> 00:00:11,200
होंगे और आज हमारी एक बहुत प्रतीक्षित

3
00:00:12,000 --> 00:00:16,000
चर्चा होने वाली है। रिजवान खान जी हैं जो हमसे

4
00:00:16,000 --> 00:00:22,000
चर्चा करने हेतु यहां पर उपलब्ध हैं। उन्हें हम ले लेते हैं अभिलंब।

5
00:00:26,320 --> 00:00:30,320
रिजवान जी स्वागत है आपका। विषय पर आने से पहले एक छोटी

6
00:00:30,320 --> 00:00:34,400
सी बात मैं पूछूंगा बस एक जिज्ञासा के हिसाब

7
00:00:34,400 --> 00:00:38,240
से कि

8
00:00:38,240 --> 00:00:42,240
जैसे आपके यहां कहा जाता है कि पुनर्जन्म तो आपके यहां माना

9
00:00:42,240 --> 00:00:45,120
नहीं जाता ना।

10
00:00:45,120 --> 00:00:50,800
पुनर्जन्म आखिरत के में जो होगा ना वो माना जाता है।

11
00:00:50,800 --> 00:00:54,800
आखिरात में फैसला होगा जो आया है उसका दोबारा यहां यहां पे जन्म नहीं

12
00:00:54,800 --> 00:00:59,040
होना है। हां नहीं उनका नहीं होना है। तो

13
00:00:59,040 --> 00:01:03,120
जैसे इस विषय में इस्लाम द्वारा क्या बताया जाता है कि जो जैसे जिस दिन

14
00:01:03,120 --> 00:01:07,440
वो आखिरी रात होगी उससे जस्ट पहले कोई बच्चा जो जन्मा

15
00:01:07,440 --> 00:01:12,560
होगा और जो अभी कुरान को जान भी नहीं पाया होगा

16
00:01:12,560 --> 00:01:16,640
और जो है फिर कयामत आ जाएगी और उसके बाद आखिर रात में उसका फैसला

17
00:01:16,640 --> 00:01:21,360
किस आधार पर होगा? इस विषय में क्या बताया इस्लाम ने?

18
00:01:21,360 --> 00:01:26,000
इस्लाम ने इसके बारे में बताया है कि

19
00:01:26,000 --> 00:01:30,640
एक लफ्ज आया है कुरान में नसूर नश्र करना

20
00:01:30,640 --> 00:01:34,880
इसका मतलब होता है रिलीज करना यानी दोबारा रिलीज

21
00:01:34,880 --> 00:01:38,320
करना जैसे

22
00:01:38,320 --> 00:01:42,640
सेवन अर्थ और सेवन ही आसमान

23
00:01:42,640 --> 00:01:46,960
सेवन डायमेंशन ये बताया गया है और उनके

24
00:01:46,960 --> 00:01:51,200
अंदर मुख्तलिफ तरीके से इंसान का जीवन जो है

25
00:01:51,200 --> 00:01:54,480
वहां बीत रहा है।

26
00:01:54,480 --> 00:01:58,640
सूर फुरकान की आयत नंबर तीन पढ़ेंगे ना तो

27
00:01:58,640 --> 00:02:02,720
मैं यही कह रहा हूं कि उनका जो फैसला है ना जो कयामत से एक दो

28
00:02:02,720 --> 00:02:06,800
दिन पहले जन्मे होंगे या कोई एक पर्टिकुलर टाइम होगा जब जन्म

29
00:02:06,800 --> 00:02:11,120
होना बंद हो जाएगा बच्चों का है ना कुछ

30
00:02:11,120 --> 00:02:15,120
या फिर कयामत से जो एक दो दिन पहले जो जन्मे होंगे बच्चे

31
00:02:15,120 --> 00:02:19,120
तो उनका फैसला किस आधार पर होगा क्या होगा उनका हां

32
00:02:19,120 --> 00:02:23,360
तो कयामत से कोई एक दो दिन पहले वैसे जन्मेगा नहीं ये

33
00:02:23,360 --> 00:02:27,440
लिखा है आपके आपने एक दो दिन पहले कयामत

34
00:02:27,440 --> 00:02:32,400
से जो जन्मेंगे ये बहुत टाइम पीरियड पहले ही बंद हो जाएंगे बच्चे होना

35
00:02:32,400 --> 00:02:36,880
यानी जिनको

36
00:02:36,880 --> 00:02:40,880
क्या चीज ये लिखा है आपके यहां कि कयामत से इतने दिन पहले

37
00:02:40,880 --> 00:02:44,880
तक बंद हो जाएंगे बच्चे जन्म लेना पहले नहीं इसमें

38
00:02:44,880 --> 00:02:49,120
यूं लिखा है कि कयामत से पहले औलादें होना बच्चे

39
00:02:49,120 --> 00:02:53,200
होना जो है वो बंद हो जाएंगे कितने दिन

40
00:02:53,200 --> 00:02:57,360
पहले ये नहीं दिन पहले नहीं कोई दिन मुकरर नहीं किया

41
00:02:57,360 --> 00:03:01,520
है बल्कि ये जरूर बताया गया है कि कयामत से पहले

42
00:03:01,520 --> 00:03:05,680
तो ये एक निशानी हो जाएगी जब है ना बच्चे होना बंद होंगे

43
00:03:05,680 --> 00:03:09,680
तो वो घटनी जाएगी और इसमें एक चीज ये और आती है

44
00:03:09,680 --> 00:03:12,880
कि अ

45
00:03:12,880 --> 00:03:15,840
क्या कहते हैं ये

46
00:03:15,840 --> 00:03:21,440
जैसे जो जानवर इत्यादि है इनका फैसला कैसे होगा?

47
00:03:21,440 --> 00:03:25,600
तो जानवर इत्यादि जो है पहली चीज इनको

48
00:03:25,600 --> 00:03:29,680
अल्लाह ने यानी जो ईश्वर है उसने अपनी इबादत के

49
00:03:29,680 --> 00:03:33,680
लिए नहीं बनाया। ईश्वर ने जानवरों को अपनी इबादत

50
00:03:33,680 --> 00:03:37,760
के लिए नहीं बनाया। भक्ति के लिए नहीं बनाया। ठीक है? कुरान की एक

51
00:03:37,760 --> 00:03:41,600
आयत है फलक जिन्ना

52
00:03:41,600 --> 00:03:45,760
कि हमने इंसान और जिन्नात को अपनी ताबेदारी के

53
00:03:45,760 --> 00:03:50,160
लिए बनाया। यानी ईश्वर के जो एहकामात है जो ऑर्डर्स हैं

54
00:03:50,160 --> 00:03:52,000
उनको उनके ताबे होने

55
00:03:52,000 --> 00:03:56,240
के लिए बनाया है। तकलीक किया है। मतलब

56
00:03:56,240 --> 00:04:00,720
कहने का मतलब है कि इनकी टेस्टिंग नहीं चल रही है। हां जानवरों

57
00:04:00,720 --> 00:04:04,800
की टेस्टिंग नहीं है। तो जैसे कयामत

58
00:04:04,800 --> 00:04:09,040
आ जाएगी और ये मर जाएंगे तो ये भी दोबारा वहां जीवित होंगे।

59
00:04:09,040 --> 00:04:13,280
जहां आखिर रात है क्या है? है ना? वो तो फिर स्वर्ग

60
00:04:13,280 --> 00:04:17,840
नरक जैसे जन्नत जहन्नुम बोलते हैं ना तो जन्नत के अंदर तमाम

61
00:04:17,840 --> 00:04:23,280
तमाम खुशनुमा चीजेंगी।

62
00:04:23,280 --> 00:04:27,280
तमाम खुशनुमा चीजें जन्नत के अंदर होंगी। इंसान का

63
00:04:27,280 --> 00:04:32,160
नफ्स जो चाहेगा वहां उसे वो चीज मिलेगी। मान

64
00:04:32,160 --> 00:04:37,440
लीजिए कोई शख्स में नहीं जो ये जो जानवर है जानवर

65
00:04:37,440 --> 00:04:41,440
जानवर का यहां पे जानवर को कर्म

66
00:04:41,440 --> 00:04:45,440
के लिए नहीं बनाया कि वो यहां कर्म नहीं कर्म के लिए नहीं बनाया वो कोई बात

67
00:04:45,440 --> 00:04:49,520
नहीं मगर यहां जब डेथ हुई तो उसके बाद जानवर वहां पे जिंदा होगा क्या

68
00:04:49,520 --> 00:04:53,520
होगा कि नहीं होगा इसमें इस्लाम कहता क्या है अभी मैं काउंटर नहीं कर

69
00:04:53,520 --> 00:04:58,160
रहा हूं केवल मैं जिज्ञासा जानना चाहता हूं इस्लाम ने कहा क्या है

70
00:04:58,160 --> 00:05:02,160
कुरान जानवरों के बारे में यही कहता है कुल्लू कुल अल फान लेकिन

71
00:05:02,160 --> 00:05:06,160
जब हर श को फना होना है हर एक को कुल्लू मन अल फान

72
00:05:06,160 --> 00:05:07,120
हर एक जो चीज है

73
00:05:07,120 --> 00:05:11,200
उस पर फना होगा यानी वो खत्म होगा अब जानवर

74
00:05:11,200 --> 00:05:15,360
जो है कयामत का दिन होगा मोहम्मद रसूल्लाह की एक हदीस

75
00:05:15,360 --> 00:05:19,360
मिलती है जिसमें बताया गया है कि अल्लाह ताला कयामत के

76
00:05:19,360 --> 00:05:23,600
दिन सींग वाली बकरी को जिसने किसी बिना सींग

77
00:05:23,600 --> 00:05:27,840
वाली बकरी को मारा होगा तो उनको भी लाएगा

78
00:05:27,840 --> 00:05:31,920
और लाकर इंसाफ करवाएगा कि तेने इस सींग वाली बकरी ने

79
00:05:31,920 --> 00:05:36,240
बिना सींग वाली बकरी को जो मारा था उसका इंसाफ करवाएगा

80
00:05:36,240 --> 00:05:40,400
उसको सींग देगा और ताकि वो वापस उसका बदला ले ले कि उसको क्यों

81
00:05:40,400 --> 00:05:44,560
बिना गलती के मारा तो ये इंसाफ बताने के लिए कि अल्लाह

82
00:05:44,560 --> 00:05:48,960
जो है वो इंसाफ वाला है। ऐसा नहीं होगा यहां अगर किसी के साथ नाइंसा

83
00:05:48,960 --> 00:05:53,200
नाइंसाफी हो गई तो ऐसा नहीं है कि कयामत के दिन भी नाइंसाफी होगी।

84
00:05:53,200 --> 00:05:57,600
वहां नहीं होगी कि वहां फैसला करने वाला नहीं मैं वो नहीं पूछ रहा हूं।

85
00:05:57,600 --> 00:06:01,600
मैं अगर इंसाफ होगा तो उसका स्वरूप

86
00:06:01,600 --> 00:06:05,680
क्या होगा? किस सूरत में इंसाफ होगा? अगर इंसाफ जैसे अगर किसी को

87
00:06:05,680 --> 00:06:10,480
जैसे जानवर का कर्म तो चेक किया नहीं जा रहा है तो वहां पे जानवर होंगे

88
00:06:10,480 --> 00:06:14,640
नहीं होंगे या होंगे तो किस आधार पर कहां होंगे? ये मैं

89
00:06:14,640 --> 00:06:18,640
पूछ रहा हूं। नहीं वहां नफ्स होगा। नफ्स नफ्स समझते

90
00:06:18,640 --> 00:06:20,880
हैं आप?

91
00:06:20,880 --> 00:06:22,320
नस मतलब

92
00:06:22,320 --> 00:06:26,320
नस मतलब आपकी बॉडी के अंदर जो आपकी सकी है ना

93
00:06:26,320 --> 00:06:30,480
आपकी बॉडी आपकी है और आपकी सकी को जब मौत आएगी तो आपकी बॉडी

94
00:06:30,480 --> 00:06:34,880
जो है वो उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा तो आपका जो नफ्स है ना

95
00:06:34,880 --> 00:06:38,960
जिस नब्स से हम ऑर्डर लेते हैं यानी कोई भी ख्वाहिश हम

96
00:06:38,960 --> 00:06:42,160
करते हैं या कुछ भी करते हैं नसे

97
00:06:42,160 --> 00:06:46,240
हम आत्मा कहते हैं वो जिसे हम आत्मा कहते हैं

98
00:06:46,240 --> 00:06:50,400
नहीं आत्मा नहीं आत्मा नहीं आत्मा को तो हम रूह बोलते

99
00:06:50,400 --> 00:06:54,560
हैं। रूह न बॉडी ये

100
00:06:54,560 --> 00:06:58,640
तीन कांसेप्ट को समझने की जरूरत है। रूह, नफ्स, बॉडी। अब नफ्स जो

101
00:06:58,640 --> 00:06:59,680
है कुरान में आया

102
00:06:59,680 --> 00:07:03,760
कुल्लू न्स जा मौत। भाई साहब एक बात कहूंगा आप थोड़ा अपने यहां पर

103
00:07:03,760 --> 00:07:07,840
बोलिए। शोर बहुत आ रहा है। तो मतलब क्या हो रहा है ना ये हम लोग जो बातचीत कर

104
00:07:07,840 --> 00:07:13,760
रहे हैं वो शोर की वजह से डिस्टरबेंस आ रहा है।

105
00:07:13,760 --> 00:07:19,760
अच्छा ठीक है। ठीक है। बोलता हूं मैं। बंद कर दो।

106
00:07:20,320 --> 00:07:26,320
अभी बिल्कुल हुआ है।

107
00:07:38,160 --> 00:07:40,560
हां तो मैं ये कह रहा था कि नब्स के बारे

108
00:07:40,560 --> 00:07:44,720
में जैसे कुरान ने जो नफ्स के बारे में कहा है उसके बारे में

109
00:07:44,720 --> 00:07:48,800
मैं बताना चाहता हूं। का मतलब आप कहीं न का मतलब आप कहीं चेतना से तो नहीं

110
00:07:48,800 --> 00:07:53,840
कह रहे जो उसकी जो उसके अंदर जो कॉन्शियसनेस होती है हां कॉन्शियसनेस

111
00:07:53,840 --> 00:07:57,840
कॉन्शसनेस जो होती है ना हमारी सा की कॉन्शसनेस जो होती है उसी के बारे में बोल रहा

112
00:07:57,840 --> 00:08:02,080
हूं तो कुल न्स मौत अब ये जो कॉनशसनेस के बारे में इसको

113
00:08:02,080 --> 00:08:06,080
भी समझने की जरूरत है सिर्फ कॉन्शसनेस ही नहीं क्योंकि जानवरों के अंदर भी अकल

114
00:08:06,080 --> 00:08:10,960
तो होती है अकल तो होती है ना लेकिन उनके पास

115
00:08:10,960 --> 00:08:15,040
है तो कॉन्शियसनेस क्या है माम उनकी कॉनशियसनेस को क्या

116
00:08:15,040 --> 00:08:19,360
मिलेगा मतलब ऐसे वो जो एक वो है वो एक है ना कि कब्र

117
00:08:19,360 --> 00:08:23,360
में से उनके पास नफ्स नहीं है उनके

118
00:08:23,360 --> 00:08:27,520
पास नफ्स नहीं है तो क्या है

119
00:08:27,520 --> 00:08:31,040
वो जीव है

120
00:08:31,040 --> 00:08:35,280
जीव है मैं बस मैं मैं इसमें ये नहीं कह रहा हूं कि

121
00:08:35,280 --> 00:08:39,680
आप गलत है कि सही है मैं इसमें ये जानना चाह रहा हूं कि

122
00:08:39,680 --> 00:08:43,760
अगर वो मरा है तो यही रह जाएगा उसका वहां पर कोई काम नहीं

123
00:08:43,760 --> 00:08:47,760
है वो एक क्या कहते हैं? एक नकली प्रतिबिंब

124
00:08:47,760 --> 00:08:52,320
जैसा है वो यही मर के खत्म हो जाएगा। ऐसा है उसकी या फिर

125
00:08:52,320 --> 00:08:56,320
या फिर या फिर वो भी एक मिनट या फिर

126
00:08:56,320 --> 00:09:00,320
वो भी किसी लोक में परलोक में या आपके हिसाब से जो जन्नत हो

127
00:09:00,320 --> 00:09:04,560
या कुछ हो वहां पे वो भी दोबारा से वहां खड़ा होगा कुछ करेगा। ये

128
00:09:04,560 --> 00:09:09,040
मैं पूछ रहा हूं। हां तो वही मैं कह रहा हूं। जानवरों का कोई हिसाब

129
00:09:09,040 --> 00:09:13,200
किताब नहीं होगा। हिसाब किताब समझ रहे हैं। यानी जो

130
00:09:13,200 --> 00:09:17,680
भी आप और हम जो हमारी इंद्रियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ना

131
00:09:17,680 --> 00:09:21,680
मैं ये नहीं कह रहा। मैं ये नहीं कह रहा मतलब कि वहां वो

132
00:09:21,680 --> 00:09:26,320
होंगे ही नहीं। ये माना जाए वहां वो होंगे ही नहीं।

133
00:09:26,320 --> 00:09:30,640
नहीं वो होंगे। लेकिन जैसे मान लो आज मेरे

134
00:09:30,640 --> 00:09:34,800
जैसे जैसे यहां है वैसे ही वहां होंगे। ना वहां

135
00:09:34,800 --> 00:09:39,040
नहीं वहां ऐसे नहीं होंगे। कैसे होंगे? वहां ऐसे वहां

136
00:09:39,040 --> 00:09:43,040
ऐसे नहीं होंगे जैसे मान लो कोई जानवर है मेरे सामने अगर वो मर

137
00:09:43,040 --> 00:09:46,160
गया तो अब हम अगर ये सोचे कि जिस तरह से यहां जीवन

138
00:09:46,160 --> 00:09:50,240
व्यतीत कर रहा था ये जानवर तो स्वर्ग में भी ऐसे ही होगा या नर्क में भी ऐसे

139
00:09:50,240 --> 00:09:54,560
होता है तो स्वर्ग नर्क का कांसेप्ट उनके लिए नहीं है क्योंकि ये जितनी भी चीजें है ना ये इंसान

140
00:09:54,560 --> 00:09:58,560
के लिए ईश्वर ने मैं समझ गया जो मैं आप जो नहीं

141
00:09:58,560 --> 00:10:02,800
है वो मत बताइए आप जो वो बताइए जो है समझ रहे हैं जैसे मैंने

142
00:10:02,800 --> 00:10:06,960
पूछा किसी से कि स्वस्थ रहने के लिए क्या-क्या क्या

143
00:10:06,960 --> 00:10:10,960
खाना चाहिए? तो मैं उसको बता रहा हूं। देख तुझे मूंगली नहीं खानी है, तुझे

144
00:10:10,960 --> 00:10:14,960
आलू नहीं खाना है या तुझे पिज़्ज़ा नहीं खाना है, बर्गर नहीं खाना। मगर

145
00:10:14,960 --> 00:10:19,280
ये नहीं बता रहा हूं कि तुझे खाना क्या है? समझ रहे हैं? तो मैं

146
00:10:19,280 --> 00:10:23,440
मुझे थोड़ा सा वो बताइए। मुझे ये बता दीजिए।

147
00:10:23,440 --> 00:10:27,600
उनका होगा क्या? जी उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा।

148
00:10:27,600 --> 00:10:31,920
ये दो वर्ड में मैंने समझाया कि उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा। आप बता

149
00:10:31,920 --> 00:10:36,800
नहीं होगा। बता रहे हैं भाई। अगर वो वहां होंगे

150
00:10:36,800 --> 00:10:41,200
खत्म हो गया। अगर हम चाहेंगे जैसे मुझे घोड़े की सवारी

151
00:10:41,200 --> 00:10:45,200
करनी है। ठीक है? मुझे घोड़े की सवारी करनी है। मुझे उड़ने वाले

152
00:10:45,200 --> 00:10:50,720
घोड़े की सवारी करनी है। तो ईश्वर मेरे लिए वो अवेलेबल करेगा।

153
00:10:50,720 --> 00:10:54,720
अगर मुझे उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है या मुझे चलने वाले घोड़े

154
00:10:54,720 --> 00:10:58,960
की तेज स्पीड में लाइट की स्पीड में चलने वाले घोड़े की सवारी

155
00:10:58,960 --> 00:11:01,360
करनी है तो ईश्वर मेरे लिए अवेलेबल करेगा

156
00:11:01,360 --> 00:11:06,160
स्वर्ग में। अच्छा। तो

157
00:11:06,160 --> 00:11:10,560
उन चीजों के लिए वो वहां पर होंगे। हां

158
00:11:10,560 --> 00:11:15,120
हम चाहेंगे तो अच्छा जैसे

159
00:11:15,120 --> 00:11:19,120
मतलब जिन जिनके बारे में इंसानों को पता ही नहीं है।

160
00:11:19,120 --> 00:11:23,760
कुछ ऐसे प्रजातियां जीव हैं उनका क्या होगा?

161
00:11:23,760 --> 00:11:27,840
जैसे कई प्रजातियां जैसे कई प्रजातियां ऐसी है जिनके बारे में लोगों

162
00:11:27,840 --> 00:11:32,640
को पता ही नहीं है। उनका क्या होगा? नहीं उनको तो पता है।

163
00:11:32,640 --> 00:11:36,560
हां। ईश्वर को

164
00:11:36,560 --> 00:11:41,120
तो वहां ईश्वर हमें ऑप्शन देगा कि तुम्हें इनमें से कौन सी चीज चाहिए

165
00:11:41,120 --> 00:11:45,200
ना ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ये जितना

166
00:11:45,200 --> 00:11:49,280
ज्ञान होगा जितनी सोचने की बसीरत होगी जैसे आज साइंस ने मान

167
00:11:49,280 --> 00:11:53,360
लो डायनासोर अब्सॉर्ब किया कि डायनासोर भी किसी

168
00:11:53,360 --> 00:11:57,440
टाइम में रहते थे इस पृथ्वी के ऊपर फिर वो विलिप्त हो गई प्रजाति तो आज

169
00:11:57,440 --> 00:12:01,440
साइंस ने क्या किया जान तो साइंस ने किस

170
00:12:01,440 --> 00:12:05,520
तरीके से जाना उन्होंने जमीन की खुदाई की और उनको फसल्स मिले और फसल्स मिले

171
00:12:05,520 --> 00:12:09,680
तो उन्होंने उससे जाना कि इसकी आकार ये होगा और ये होगा। इस तरह से उन्होंने एक

172
00:12:09,680 --> 00:12:13,920
रूप दिया कि इस तरह से दिखता होगा डायनासोर। तो हमने भी जान लिया कि भाई डायनासोर

173
00:12:13,920 --> 00:12:16,400
ऐसा दिखता होगा। हमारे साइंटिस्टों ने काफी

174
00:12:16,400 --> 00:12:20,560
रिसर्च करके मालूमात की है। तो ऐसे ही हम भी मालूमात

175
00:12:20,560 --> 00:12:24,720
जब हासिल करते हैं ना तो मालूमात से हमें बहुत सारी चीजें पता चलती है। जैसे हमें

176
00:12:24,720 --> 00:12:29,040
फरिश्तों के बारे में पता चलता है कि उनके एक से ज्यादा पंख होते हैं।

177
00:12:29,040 --> 00:12:33,200
थोड़ा थोड़ा सा काफी है। थोड़ा सा काफी है। जैसे कि आपने कहा कि जैसे

178
00:12:33,200 --> 00:12:37,520
वहां पे वहां पे जाकर के जैसे हमारी इच्छा हुई कि

179
00:12:37,520 --> 00:12:41,520
वो जो है जो घोड़े हैं कुत्ता है, बिल्ली है।

180
00:12:41,520 --> 00:12:46,240
हमें जिस रूप में उसकी आवश्यकता होगी तो वह हमारे लिए अवेलेबल हो जाएगा।

181
00:12:46,240 --> 00:12:50,240
तो इसमें बहुत सारी चीजें हैं। फिर क्वेश्चन पर क्वेश्चन जैसे एक

182
00:12:50,240 --> 00:12:54,320
बात ये आती है कि वो अवेलेबल

183
00:12:54,320 --> 00:13:00,320
हो जाएगा तो वो जिस समय अवेलेबल होगा उससे पहले कहां पे रहेगा?

184
00:13:02,400 --> 00:13:06,480
उससे पहले यहां तो कयामत आ गई। यहां तो कयामत आ गई। फिर

185
00:13:06,480 --> 00:13:10,880
आपने बताया कि एक सेकंड कयामत

186
00:13:10,880 --> 00:13:14,080
को आपने क्या समझा है?

187
00:13:14,080 --> 00:13:18,160
कयामत के बाद दुनिया खत्म हो गई ना दुनिया खत्म हो

188
00:13:18,160 --> 00:13:22,240
गई ना दुनिया तो खत्म हो गई लेकिन दुनिया कोई एक

189
00:13:22,240 --> 00:13:26,240
ही दुनिया है अच्छा तो दूसरी दुनिया से

190
00:13:26,240 --> 00:13:30,240
वो आएंगे तो ये आपसे ये

191
00:13:30,240 --> 00:13:34,320
जानना चाह रहा हूं कि कयामत के बारे में आप क्या जानते हैं जैसे कयामत एक अरबी वर्ड

192
00:13:34,320 --> 00:13:38,640
है ना जिसका मतलब है ये बताइए अभी मैं आपको काउंटर

193
00:13:38,640 --> 00:13:42,640
नहीं कर रहा हूं अभी मैं जान रहा हूं केवल बिल्कुल हम मैं भी बताना

194
00:13:42,640 --> 00:13:47,440
ये चाह रहा हूं कयामत लफ्ज का मतलब होता है खड़ा कर देना।

195
00:13:47,440 --> 00:13:51,680
बिल्कुल सीधा खड़ा कर देना। जिस तरह से जैसे हम

196
00:13:51,680 --> 00:13:55,760
पहले भी जो मर चुके हैं जो भी मर रहे हैं जो आगे आएंगे वो मरेंगे सब मर

197
00:13:55,760 --> 00:14:00,080
गए। इस इस दुनिया से इस दुनिया से तो गए

198
00:14:00,080 --> 00:14:04,240
है ना। अब उन सबको जो है

199
00:14:04,240 --> 00:14:08,400
खड़ा कर देगा अल्लाह ताला वापस। तो उसको कयामत बोलते

200
00:14:08,400 --> 00:14:12,480
हैं। सबको खड़ा कर देगा मरे हुए को और जो भी उन्होंने कर्म किए होंगे अपनी बॉडी

201
00:14:12,480 --> 00:14:16,800
के साथ उन कर्म के आधार पर उनके फैसला होगा। तो कयामत ये है।

202
00:14:16,800 --> 00:14:17,600
बाकी सूर

203
00:14:17,600 --> 00:14:21,840
इब्राहिम जब हम पढ़ेंगे तो उसमें आया है कि और उस दिन इस जमीन को बदल

204
00:14:21,840 --> 00:14:26,080
दिया जाएगा दूसरी जमीन में। मतलब इसी जमीन को दूसरी

205
00:14:26,080 --> 00:14:29,520
जमीन में बदल दिया जाएगा।

206
00:14:29,520 --> 00:14:33,520
तो जमीन तो रहेगी ना। जन्नत भी अगर होगी तो किसी जमीन पर ही

207
00:14:33,520 --> 00:14:37,600
होगी ना। भाई उसके अंदर भी पांव रखने के लिए जमीन तो होगी। ऐसा तो

208
00:14:37,600 --> 00:14:41,840
नहीं होगा कि हवा में लटके होंगे। यानी यानी कि वो जो वो जो जानवर

209
00:14:41,840 --> 00:14:45,840
होंगे वो दूसरी जमीन पर पहुंच जाएंगे। दूसरे ग्रह दूसरी तो दुनिया उसमें पहुंच

210
00:14:45,840 --> 00:14:50,000
जाएंगे। जानवर की बात नहीं कर रहे हैं। जानवर तो देखो मैंने अभी आपको

211
00:14:50,000 --> 00:14:54,320
बताया था हमारे लिए अवेलेबल हो जाएंगे। जैसे अगर मेरी चाहत हो रही है।

212
00:14:54,320 --> 00:14:58,400
मैं वही कह रहा हूं कि यहां ये दुनिया खत्म हुई तो हम पहुंचे आखिर

213
00:14:58,400 --> 00:15:02,640
रात में तो आखिर रात में वो जानवर कहां से आए?

214
00:15:02,640 --> 00:15:07,120
दूसरी दुनिया से आए हैं या वहां पर कोई एक स्टोर है जहां पर जानवरों

215
00:15:07,120 --> 00:15:11,200
को रखा जाएगा वहां से अवेलेबल होंगे वो क्या है वो तो

216
00:15:11,200 --> 00:15:15,440
ये चल ही रहा है ना अल्लाह की जो कायनात है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है

217
00:15:15,440 --> 00:15:21,200
मुख्तलिफ डायमेंशन जो है उनके अंदर चल ही रहा है

218
00:15:21,200 --> 00:15:25,360
देखो भविष्य हमारे लिए तो भूतकाल भविष्य काल वर्तमान काल है

219
00:15:25,360 --> 00:15:29,520
ना डायनासोर जब थे अगर ईश्वर तो रिवाइंड कर [हंसी] सकता है

220
00:15:29,520 --> 00:15:33,600
वापस पीछे मतलब फॉरवर्ड कर सकता है, बैकवर्ड कर

221
00:15:33,600 --> 00:15:38,960
सकता है। ईश्वर के लिए तो कोई इमॉसिबल कोई चीज है नहीं।

222
00:15:38,960 --> 00:15:43,200
भाई साहब मैं बस भाई साहब मेरा सवाल दूसरा है। मैं बस ये कह रहा हूं

223
00:15:43,200 --> 00:15:47,440
कि जो ये जानवर हैं ये दूसरी दुनिया

224
00:15:47,440 --> 00:15:51,680
में जाएंगे। दूसरी डायमेंशन में जाएंगे और हमारे लिए आखिर

225
00:15:51,680 --> 00:15:55,840
रात इत्यादि में बोलने पर वहां उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

226
00:15:55,840 --> 00:15:59,840
ना ना आप शायद समझ नहीं पा रहे हैं या मैं समझा नहीं पा

227
00:15:59,840 --> 00:16:03,920
रहा हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। अभी मैंने बताया था कि

228
00:16:03,920 --> 00:16:07,920
डायनासोर मान लो छ करोड़ साल पहले थे। है ना?

229
00:16:07,920 --> 00:16:12,080
तो वो हमारे लिए तो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? [हंसी] अब

230
00:16:12,080 --> 00:16:16,080
ईश्वर के लिए तो नहीं कह सकते ना कि छ ईश्वर के लिए भी छ करोड़ साल पहले

231
00:16:16,080 --> 00:16:20,400
थे। ईश्वर की निगाह में तो भूतकाल, वर्तमान

232
00:16:20,400 --> 00:16:24,400
काल और भविष्य काल तीनों एक ही एक ही वक्त में एक्सिस्ट कर रहा

233
00:16:24,400 --> 00:16:28,880
है। भाई हमारे लिए हमारे क्योंकि हमारा ज्ञान महदूद

234
00:16:28,880 --> 00:16:32,880
है एक हद तक है तो हमारे लिए आने वाला कल

235
00:16:32,880 --> 00:16:36,240
जो होगा वो होगा मैं तो समझ गया उसको उसको

236
00:16:36,240 --> 00:16:40,400
आप उसको उसको मत बताइए। वो बताइए कि वो क्या करेगा कि

237
00:16:40,400 --> 00:16:44,720
जानवर जो मर गए हैं उनको पीछे से उठा के वापस ले आएगा हमारे सामने।

238
00:16:44,720 --> 00:16:48,800
ऐसे ना वो या ना ले आएगा वो तो वहां जब जाएंगे ना

239
00:16:48,800 --> 00:16:53,040
हम और जब हम खिश करेंगे तब देखो हम वो बात

240
00:16:53,040 --> 00:16:57,120
कर रहे हैं नहीं पता है अभी हमको अभी हमको नहीं पता जानवरों

241
00:16:57,120 --> 00:17:01,120
का क्या सिस्टम है कुल मिला के बात मैंने जो आयत बताई

242
00:17:01,120 --> 00:17:05,360
ना वहां नफ्स के लिए हर वो चीज होगी जो वो चाहेगा।

243
00:17:05,360 --> 00:17:09,760
अगर मान लो मेरा नफ्स चाहेगा कि मुझे किसी उड़ने वाले घोड़े की सवारी

244
00:17:09,760 --> 00:17:13,840
करनी है तो मेरे लिए ईश्वर उड़ने वाला घोड़ा अवेलेबल कर देगा। देखिए

245
00:17:13,840 --> 00:17:17,920
वो उड़ने वाला घोड़ा तो ईश्वर अपने आप से बना सकता है ना नया मैं पूछ

246
00:17:17,920 --> 00:17:23,600
रहा हूं यहां के जानवरों का क्या होगा कुछ नहीं होगा यहां के

247
00:17:23,600 --> 00:17:27,680
मतलब वो मर के यहीं रह जाएंगे खत्म हो जाएगा उनका शरीर जमीन

248
00:17:27,680 --> 00:17:31,840
बदल जाएगी दूसरे ग्रह पे जाएंगे क्या होगा बहुत सारी प्रजातियां

249
00:17:31,840 --> 00:17:36,000
विलुप्त हो गई अब तो नहीं है ना अब तो नहीं है जो सर्वाइव

250
00:17:36,000 --> 00:17:40,080
कर सकी जो प्रजाति सर्वाइव कर सकी वो भाई साहब तो ये ये

251
00:17:40,080 --> 00:17:44,240
आप शुरू में ही कह रहे थे कि वो यही खत्म हो जाएंगे उनकी आगे की कोई कहानी नहीं है।

252
00:17:44,240 --> 00:17:48,320
आप वही समझाना चाहता नफ्स इसीलिए समझा रहा था लेकिन आप नफ्स

253
00:17:48,320 --> 00:17:51,280
को समझे नहीं। नफ्स समझा रहा था मैं कि नफ्स उनके अंदर नफ्स

254
00:17:51,280 --> 00:17:55,280
नहीं है। नब्स नहीं नब्स

255
00:17:55,280 --> 00:18:00,320
का मतलब है कि उनके अंदर जो है कॉन्शियसनेस नहीं है।

256
00:18:00,320 --> 00:18:04,880
ना ये नब्स कॉन्शसनेस आप कह रहे हैं न्स मतलब वो

257
00:18:04,880 --> 00:18:08,880
वो दर्द सहन वो दर्द सहन कर रहे हैं। वो चिल्ला रहे हैं। वो बचना चाहते

258
00:18:08,880 --> 00:18:12,960
हैं। वो जीना चाहते हैं। वो खाना चाहते हैं। वो पीना चाहते हैं। तो कौन सी चीज

259
00:18:12,960 --> 00:18:17,280
नहीं है उनके अंदर? मतलब नफ्स की बात कर रहा हूं। नफ्स आप समझिएगा

260
00:18:17,280 --> 00:18:21,760
बात को। न्स जैसे आपकी बॉडी के अंदर आप हैं। है ना? और आप

261
00:18:21,760 --> 00:18:25,840
स्वाद में समझते हैं। जायके के अंदर समझते हैं। आपको अगर

262
00:18:25,840 --> 00:18:30,000
सब्जी दी जाए तो उसमें अच्छा मसाला वगैरह लगा के आप खाएंगे और जानवर

263
00:18:30,000 --> 00:18:34,080
के सामने जब रखी जाएगी तो वो सीधा उसको चारा समझ के खा जाएगा। उसका

264
00:18:34,080 --> 00:18:38,080
भोजन समझ के खा जाएगा। लेकिन हम मनुष्य हमारे पास नफ्स

265
00:18:38,080 --> 00:18:42,560
है तो हम उसको हमारे स्वाद अनुसार करते हैं।

266
00:18:42,560 --> 00:18:46,640
तो अब ये चीज उनमें नहीं है कि किसी जानवर कभी कोई शेर जब

267
00:18:46,640 --> 00:18:50,720
मांस खाता है तो आपने देखा कि नमक मिर्ची लगा के बढ़िया तलवल के खाए ना

268
00:18:50,720 --> 00:18:54,720
कोई शाकाहारी जानवर को देखा कभी कि वो अच्छे से तेलवेल में तल

269
00:18:54,720 --> 00:18:58,800
के खाए नहीं तो वो नफ्स जो ये हमारे से डिमांड ये भी इसको

270
00:18:58,800 --> 00:19:03,200
हम इसको हम इसको हम ये भी कह सकते हैं कि हमारे पास

271
00:19:03,200 --> 00:19:06,320
चीज है उनके पास हमारे पास चीज एक ही

272
00:19:06,320 --> 00:19:10,320
है। हमारे पास ज्यादा है। हमारे पास ज्यादा उनके

273
00:19:10,320 --> 00:19:14,480
पास कम है। मगर है ही नहीं। सुनिए तो है ही नहीं। अगर यह कह देंगे कि

274
00:19:14,480 --> 00:19:18,480
है ही नहीं तो फिर यह मानना पड़ेगा जैसे शेर है वो कोई प्रकार

275
00:19:18,480 --> 00:19:22,560
के मांस को ज्यादा प्रभ करता है। कुत्ता है वो कोई किसी प्रकार

276
00:19:22,560 --> 00:19:26,800
के भोजन को ज्यादा अच्छा लगता है उसे और कोई प्रकार का भोजन उसे कम

277
00:19:26,800 --> 00:19:31,520
मतलब वो स्वाद में सेलेक्टिव है। स्वाद में सिलेक्टिव है मगर उसको

278
00:19:31,520 --> 00:19:35,600
अपने और स्वादिष्ट कैसे बनाया जाए इतनी बुद्धिमता उसके अंदर नहीं

279
00:19:35,600 --> 00:19:39,680
है। अब अगर ऐसी बात की जाए तो सुनिए तो ऐसी

280
00:19:39,680 --> 00:19:43,920
बात की जाए तो कई इंसान ऐसे होते हैं जो

281
00:19:43,920 --> 00:19:48,080
आगे बुद्धि वाला व्यक्ति समझ पा रहा है, सीख पा रहा है, कर पा रहा है मगर

282
00:19:48,080 --> 00:19:52,400
वो इंसान नहीं कर पा रहा है। जैसे कि रिजल्ट आता है, क्लासेस

283
00:19:52,400 --> 00:19:56,400
होती है, फाइट होता है तो उसमें कई लोग कम नंबर लाते हैं, कई लोग ज्यादा

284
00:19:56,400 --> 00:20:00,640
नंबर लाते हैं। इसी में और पीछे चलते चले जाए और पीछे चलते चले जाए तो जानवर

285
00:20:00,640 --> 00:20:04,720
हो जाएगा व्यक्ति। मतलब मैं कह रहा हूं इससे

286
00:20:04,720 --> 00:20:08,800
इससे उसका स्वाद स्वादिष्ट ना बना पाना इससे ये

287
00:20:08,800 --> 00:20:12,800
तो सिद्ध होता है कि जो है उसके पास हमसे कम बुद्धि है मगर

288
00:20:12,800 --> 00:20:17,120
ये सिद्ध नहीं होता कि बुद्धि है ही नहीं क्योंकि वो बचने का प्रयास कर रहा है

289
00:20:17,120 --> 00:20:21,200
वो सारी चीजें कर रहा है वो जीना चाहता है आहार निद्रा भय

290
00:20:21,200 --> 00:20:21,700
मिथुन

291
00:20:21,600 --> 00:20:26,400
वो सब है उसमें बस उसके शरीर के

292
00:20:26,400 --> 00:20:30,560
उसको जो शरीर प्राप्त है उसका हमारी हमारी जानकारी में उसके शरीर

293
00:20:30,560 --> 00:20:34,560
का परम परम कल्याण उसको जो शरीर मिला है उससे सद्गति कैसे

294
00:20:34,560 --> 00:20:39,040
प्राप्त करनी है जो मोक्ष है वो कैसे प्राप्त करनी है वो

295
00:20:39,040 --> 00:20:43,120
क्या कहते हैं वो इतनी बुद्धि नहीं है कि वो धर्म

296
00:20:43,120 --> 00:20:47,120
को समझ पाए कि मोक्ष कैसे प्राप्त करना है ये हमारी मगर आप अगर कह रहे

297
00:20:47,120 --> 00:20:51,360
हैं कि वो जो है क्योंकि वो खाने को स्वादिष्ट नहीं बना सकता इसलिए

298
00:20:51,360 --> 00:20:56,080
हम उसमें किसी चीज की कमी मान रहे हैं जिस चीज को आप नब्स कह रहे हैं

299
00:20:56,080 --> 00:21:00,080
मैं ये नहीं कह रहा हूं आप मैं वही कह रहा हूं आप जो बोले चले जा रहे हैं मैं ये

300
00:21:00,080 --> 00:21:04,080
कह रहा हूं के नब्स और बुद्धि बुद्धि और नफ्ज़ इनको

301
00:21:04,080 --> 00:21:08,960
आप एक साथ मिला दे बुद्धि को और उसको एक साथ

302
00:21:08,960 --> 00:21:12,320
नब्ज़ या तो आप

303
00:21:12,320 --> 00:21:16,560
नब्ज़ या तो आप जो है ना वो आप वो

304
00:21:16,560 --> 00:21:20,720
कर दो आप डिफाइन कर दो नब्स आप क्या किसे कह रहे हो जो इंसान में नहीं है। फिर मैं

305
00:21:20,720 --> 00:21:24,720
देखूंगा कि जो चीज आप कह रहे हो वो इंसान में है कि नहीं।

306
00:21:24,720 --> 00:21:28,800
ठीक है मैं नब्स को डिफाइन डिफाइन करता हूं। लफ्ज एक अरबी लफ्ज है और

307
00:21:28,800 --> 00:21:32,960
इस लफ्ज का मतलब होता है एक ऐसी हवा एक ऐसी हवा जो

308
00:21:32,960 --> 00:21:36,960
हमारी बॉडी को लगती है। है ना? जो हमारी बॉडी में है।

309
00:21:36,960 --> 00:21:42,000
है ना? तो हमारी बॉडी के जिस भी ऑर्गन्स को लगती है,

310
00:21:42,000 --> 00:21:46,080
इंद्रियों को लगती है। तो वो इंद्रियां एक्टिव होती है

311
00:21:46,080 --> 00:21:50,800
और वो इंद्रियां बॉडी के अनुकूल ख्वाहिश करती है।

312
00:21:50,800 --> 00:21:54,800
है ना? और बुद्धि क्या करती है कि ये जो नफ्स ने यानी

313
00:21:54,800 --> 00:21:59,120
जो ये हवा हमारे ऑर्गन्स को लगी है और जो डिमांड हमसे

314
00:21:59,120 --> 00:22:03,440
ये करवा रही है ये बॉडी से जो डिमांड करवा रही है इसको असल

315
00:22:03,440 --> 00:22:07,600
में जब देखा जाएगा क्या इस डिमांड का आदेश ईश्वर ने दिया है या

316
00:22:07,600 --> 00:22:12,080
ना दिया है ये चीज चेक चेक करेगा माइंड और नफ्स

317
00:22:12,080 --> 00:22:16,160
यानी वो हवा जो हमारी बॉडी को अंदर लगी है हमारे ऑर्गन्स के टच हुई है हमारे

318
00:22:16,160 --> 00:22:20,720
ऑर्गन्स में जो है लग रही है और हमसे ख्वाहिश करवा रही

319
00:22:20,720 --> 00:22:24,800
चाहत करवा रही है तो वो हवा जो होती है ना

320
00:22:24,800 --> 00:22:28,800
हवा हवा समझ लो हमारी बॉडी में ऑक्सीजन है ना पानी है

321
00:22:28,800 --> 00:22:32,880
सब कुछ है तो वो जो हवा के स्वरूप जो हमारे अंदर नफ््स

322
00:22:32,880 --> 00:22:37,040
है न्स हवा के स्वरूप तो

323
00:22:37,040 --> 00:22:41,120
हमारे बॉडी के अनुकूल ही और जैसे आपने मिसाल दी

324
00:22:41,120 --> 00:22:45,200
एक ऐसे व्यक्ति की जिसका माइंड थोड़ा ज्यादा ग्रोथ किया हुआ है

325
00:22:45,200 --> 00:22:49,200
और एक का कम किया हुआ है तो जिसका कम किया हुआ है वो भी स्वाद

326
00:22:49,200 --> 00:22:52,000
स्वाद में तो समझता है। ऐसा नहीं है कि वो स्वाद में

327
00:22:52,000 --> 00:22:56,640
नहीं समझता है। स्वाद में वो भी समझता है। जानवर भी समझ रहा है ना।

328
00:22:56,640 --> 00:23:01,520
जानवर समझता है तो आप एक काम कीजिए। हम तो

329
00:23:01,520 --> 00:23:05,520
बंदर क्या जान अदरक का स्वाद और ये सारी चीजें हम बोलते हैं। लेकिन आप एक

330
00:23:05,520 --> 00:23:09,680
काम कीजिए। किसी भी जानवर को आप इतना इवॉल्व करके बताइए। इवॉल्व करके

331
00:23:09,680 --> 00:23:14,000
बताइए। उसके मेंटालिटी से इवॉल्व करके बताइए कि वो भी इंसानों की तरह। जैसे

332
00:23:14,000 --> 00:23:18,080
इंसान भी एक टाइम था इंसानों के बराबर की बात नहीं

333
00:23:18,080 --> 00:23:22,160
कर रहा हूं। मगर बाद में वो सेलेक्टिव होता है। मेरे मैं नहीं देखा था मेरे मित्र के

334
00:23:22,160 --> 00:23:26,560
यहां पर एक स्वान था जिसे कुत्ता कहते हैं। सुनिए

335
00:23:26,560 --> 00:23:30,720
उसको आप अगर फलाना वाला भोजन देता था वो तो वो अरुचि से खाता

336
00:23:30,720 --> 00:23:34,880
था नहीं खाता था मगर कुछ भोजन ऐसे थे जिनको वो तुरंत चाप जाता

337
00:23:34,880 --> 00:23:37,520
था पूरा

338
00:23:37,520 --> 00:23:41,680
बॉडी शेर जो है ना शेर नहीं खाता

339
00:23:41,680 --> 00:23:45,680
है। बॉडी का जो ठीक है।

340
00:23:45,680 --> 00:23:49,680
ठीक है। दूसरा इसमें एक दूसरी जानकारी वो है

341
00:23:49,680 --> 00:23:53,840
कि जैसे जो कुत्ता है उसके

342
00:23:53,840 --> 00:23:57,840
मन में भी ये है कि मैं मरू नहीं मुझे चोट ना लगे मैं मरू नहीं

343
00:23:57,840 --> 00:24:02,720
वो उसके मन में भी ये भाव है ये तो मानते हैं ना आप

344
00:24:02,720 --> 00:24:06,720
चाहता है जीना चाहता है किसी कुत्ते

345
00:24:06,720 --> 00:24:07,220
से ये

346
00:24:07,040 --> 00:24:10,960
कहते हुए सुना होगा ना आपने

347
00:24:10,960 --> 00:24:15,760
जब आप उसे मारने का प्रयास करते हैं तो वो भागता है ना

348
00:24:15,760 --> 00:24:21,200
अब भागेगा वो तो क्योंकि उसको दर्द होगा भाई कोई भी चीज हो

349
00:24:21,200 --> 00:24:25,600
काटने को भी यही सिद्ध यही सिद्ध करता है

350
00:24:25,600 --> 00:24:30,080
कि उसके अंदर सर्वाइवल वो है डिजायर कि वो सर्वाइव

351
00:24:30,080 --> 00:24:34,560
करना चाहता है बचना चाहता हैना चाहता है सही है

352
00:24:34,560 --> 00:24:39,360
हां उसी को मैं कह रहा हूं जीना चाहता है अब क्या है कि

353
00:24:39,360 --> 00:24:43,360
उसने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको वो

354
00:24:43,360 --> 00:24:47,440
जो मांग रहा है वो ना दिया जाए तो ये उसके साथ अन्याय

355
00:24:47,440 --> 00:24:52,160
जैसा नहीं होगा। फिर तो वो क्या मांग रहा है? आप बताओ।

356
00:24:52,160 --> 00:24:56,160
वो हमेशा जीना जीना चाहता है ना हमेशा मगर उसको मार दिया गया।

357
00:24:56,160 --> 00:25:00,160
जबकि उसने कुछ लिया नहीं था। अब हमेशा जीना तो इंसान

358
00:25:00,160 --> 00:25:04,240
भी चाहता है लेकिन मौत एक अटल सत्य है वो आनी है। हां।

359
00:25:04,240 --> 00:25:08,240
मौत मौत एक अटल मगर उसके लिए इंतजाम है ना। उसके लिए इंतजाम

360
00:25:08,240 --> 00:25:12,720
किया है ना ऊपर वाले ने कि तुम यहां पे पहुंच के अपना सेटलमेंट कर सकते हो।

361
00:25:12,720 --> 00:25:15,600
मार कौन रहा है?

362
00:25:15,600 --> 00:25:19,600
अरे कोई नहीं मार रहा हूं। अपनी मौत मर रहा हूं। मैं कह रहा हूं इंसान के लिए तो

363
00:25:19,600 --> 00:25:22,240
इंतजाम किया है ना। यही

364
00:25:22,240 --> 00:25:26,560
तो उसूल है। यही तो उसूल है कि हमें ईश्वर ने कौन सी चीजें

365
00:25:26,560 --> 00:25:30,720
बताई है जो हमारे लिए लाभदायक है और कौन सी चीजें हैं जो हमारे

366
00:25:30,720 --> 00:25:35,040
लिए हानिकारक है। कौन सी चीजें खाने योग्य है और कौन सी चीजें खाने

367
00:25:35,040 --> 00:25:39,040
योग्य नहीं है। तो ये ज्ञान के आधार पे ही तो हमें पता चलेगा ना।

368
00:25:39,040 --> 00:25:43,360
मान लीजिए एक व्यक्ति मैं वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो कुत्ते

369
00:25:43,360 --> 00:25:47,440
की जो आशा है कि मैं जिंदा रहना चाहता हूं मगर उसको

370
00:25:47,440 --> 00:25:51,600
बिना बात के मार दिया मर गया वो प्राकृतिक आपदा से मर गया कैसे भी मर गया मर

371
00:25:51,600 --> 00:25:55,760
गया वो उसकी जो ख्वाहिश है वो उसके उसके बारे में कोई विचार

372
00:25:55,760 --> 00:25:59,840
कोई चिंतन नहीं तो उसके साथ एक अन्याय नहीं हुआ कि वो पूरे जीवन चाहता

373
00:25:59,840 --> 00:26:03,920
था कि उसको भी अमरता प्राप्त हो जाए वो सर्वाइव करे

374
00:26:03,920 --> 00:26:08,160
पर वो मर गया तो ये आपको बताया होता भी मोक्ष

375
00:26:08,160 --> 00:26:12,720
पाना चाहता है हां हां हां ये बिल्कुल

376
00:26:12,720 --> 00:26:17,120
कुत्ता जो है मोक्ष पाना चाहता है। ये आपको किसने बताया?

377
00:26:17,120 --> 00:26:21,280
अरे भैया अभी आपने माना ना कि वो जो है बचना चाहता है। मैं मोक्ष

378
00:26:21,280 --> 00:26:25,280
अभी मोक्ष का वो मत लाइए बीच में। उसके अंदर एक इंस्ट है कि वो

379
00:26:25,280 --> 00:26:29,520
सर्वाइव करना चाहता है। हर हाल में बचना चाहता है। भागता है मुझे मारते

380
00:26:29,520 --> 00:26:33,840
तो। अंत

381
00:26:33,840 --> 00:26:38,320
अंतते तो उसे भी मरना ही है। चाहे वो है मगर

382
00:26:38,320 --> 00:26:42,480
मगर उसके मरने के विषय में उसके मरने के विषय में

383
00:26:42,480 --> 00:26:46,480
जैसे इंसानों के लिए उन्होंने चिंतन मनन किया। आपके

384
00:26:46,480 --> 00:26:50,880
अनुसार जो ईश्वर है उन्होंने चिंतन मनन किया। वैसा चिंतन मनन जानवरों

385
00:26:50,880 --> 00:26:54,960
के लिए नहीं किया। जबकि दर्द उन्हें भी हो रहा है। मौत से वो भी डर रहे हैं।

386
00:26:54,960 --> 00:26:58,960
सुख वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। आनंद वो भी प्राप्त करना चाहते हैं।

387
00:26:58,960 --> 00:27:03,280
मगर उनके लिए नहीं किया कुछ भी।

388
00:27:03,280 --> 00:27:07,360
किसने? ईश्वर ने नहीं किया। कहना चाह रहा हूं। पूछ रहा

389
00:27:07,360 --> 00:27:11,360
हूं। मैं पूछ रहा हूं। हम जहां रह रहे हैं ना जहां

390
00:27:11,360 --> 00:27:15,520
रह रहे हैं। भूलोक में जो रह रहे हैं। हम जमीन पर जो रह रहे हैं। जमीन से

391
00:27:15,520 --> 00:27:19,840
ऊपर आसमान है। है ना? तो आसमानों की जिंदगी अलग

392
00:27:19,840 --> 00:27:24,000
है और जमीन की जिंदगी अलग है। और एक जिंदगी मरने के बाद जिसको

393
00:27:24,000 --> 00:27:28,000
हम बोलते हैं आलम बरजक। आलम बरजक बोलते

394
00:27:28,000 --> 00:27:33,600
हैं जिंदगी को उस वो जिंदगी अलग है।

395
00:27:33,600 --> 00:27:37,840
बच्चों को बच्चों को आप शांत कराइए। वो हर लगातार उनकी आवाजें

396
00:27:37,840 --> 00:27:41,840
आ रही है। थोड़ा आप शांत करके आइए। किसी शांत जगह से बात करिए। बड़ा

397
00:27:41,840 --> 00:27:47,280
अच्छा डिस्कशन चल रहा है।

398
00:27:47,280 --> 00:27:53,280
देखता हूं।

399
00:27:53,840 --> 00:27:57,920
मतलब हम टॉपिक पे अभी तक आए नहीं। हां

400
00:27:57,920 --> 00:28:02,560
तो बस इसको इसको यहां पे मतलब फुल स्टॉप मान ले कि

401
00:28:02,560 --> 00:28:06,720
नहीं ईश्वर ने जो है उनकी ये जो चीज है कि वो जीना चाहते हैं।

402
00:28:06,720 --> 00:28:11,280
वो सुखी होना चाहते हैं। इससे ईश्वर को कोई मतलब नहीं है।

403
00:28:11,280 --> 00:28:15,280
इस्लाम के अनुसार क्योंकि उसने उसको मनाया ही ऐसे। मतलब कैसे

404
00:28:15,280 --> 00:28:19,360
नहीं देखो हम इंसानों को जो ईश्वर ने बनाया ना तो

405
00:28:19,360 --> 00:28:23,440
हम ही उनकी देखरेख करेंगे। जैसे मान लो एक कुत्ता मेरे मोहल्ले में

406
00:28:23,440 --> 00:28:27,600
रहता है। है ना? और वो जीना भी चाहता है। है ना? और

407
00:28:27,600 --> 00:28:32,240
मैं देख रहा हूं के उसके पास जो है भोजन की कमी है।

408
00:28:32,240 --> 00:28:36,480
तो ये मेरी जिम्मेवारी बनती है कि उस कुत्ते तक भोजन मैं पहुंचाऊं।

409
00:28:36,480 --> 00:28:40,560
क्योंकि मैं उसका ख्याल रखूं। ये मेरी जिम्मेदारी बनती है। ईश्वर

410
00:28:40,560 --> 00:28:44,720
ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं अल्लाह की ईश्वर की बनाई हुई

411
00:28:44,720 --> 00:28:49,360
हर एक चीज के ऊपर मैं क्या करूं? ध्यान दूं।

412
00:28:49,360 --> 00:28:54,160
इसलिए मैं भाई साहब आप आप मेरा शायद मैं सवाल

413
00:28:54,160 --> 00:28:57,120
मैं

414
00:28:57,120 --> 00:29:01,280
मेरे से शायद कोई गलती हो रही है। मैं आपको शायद अपना सवाल

415
00:29:01,280 --> 00:29:05,280
समझा नहीं पा रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि एक दिन

416
00:29:05,280 --> 00:29:09,760
कुत्ते को मरना है। एक दिन इंसान को भी मरना है।

417
00:29:09,760 --> 00:29:14,000
इंसान के लिए मौत के आगे की चीजें इंसान को सर्वदा

418
00:29:14,000 --> 00:29:18,240
सुखी रखने के लिए यदि वो इस्लाम के अनुसार चलता है तो

419
00:29:18,240 --> 00:29:22,640
उसके लिए इंतजाम ईश्वर ने किया है। मगर कुत्ते

420
00:29:22,640 --> 00:29:26,640
इत्यादि जो हैं है ना? उनके लिए कोई इंतजाम

421
00:29:26,640 --> 00:29:31,600
नहीं किया। जबकि उनके अंदर भी ख्वाहिश है कि मैं जीूं, मैं सुखी रहूं।

422
00:29:31,600 --> 00:29:35,760
तो वो वो जो अंतिम सुख है इंसान उसे दे सकता है। पल भर

423
00:29:35,760 --> 00:29:39,760
के लिए राग दे सकता है। एक दिन का भोजन दे सकता है। मरते दम तक का

424
00:29:39,760 --> 00:29:43,840
भोजन दे सकता है। परंतु उसे वो जो अनंत सुख उसको चाहिए कुत्ते

425
00:29:43,840 --> 00:29:49,120
को मैं कभी दुखी ही ना हूं। वो जो अनंत सुख चाहिए

426
00:29:49,120 --> 00:29:53,360
कहना चाह रहे हो कि कुत्ता ये चाहे कि मैं भी इंसानों जैसे जिंदगी गुजारू।

427
00:29:53,360 --> 00:29:57,600
यही कहना चाह रहे हो। कुत्ता ये नहीं चाहता है। कुत्ता सुखी रहना चाहता है। वो इंसानों

428
00:29:57,600 --> 00:30:01,600
को नहीं वो ये नहीं जानता इंसानों का जीवन सुखी है कि नहीं है। वो अपनी

429
00:30:01,600 --> 00:30:07,120
जानता है कि भैया मैं मरू नहीं मुझे कोई दुख नहीं होना चाहिए।

430
00:30:07,120 --> 00:30:11,200
उसप उसप इस्लाम के अनुसार जो

431
00:30:11,200 --> 00:30:12,480
ईश्वर है उसने

432
00:30:12,480 --> 00:30:16,480
कोई बात की है उन लोगों की कि नहीं की? बस इतना बता दीजिए हम लोग

433
00:30:16,480 --> 00:30:20,960
विषय पर आ जाए। की है बात कि नहीं की है? इस्लाम ने जानवरों

434
00:30:20,960 --> 00:30:25,200
के प्रति जो कुछ उनके लिए जमीन में रखा है वह सब वो खा रहे हैं और सुखी

435
00:30:25,200 --> 00:30:29,440
है। नहीं जैसे देखिए जो आप

436
00:30:29,440 --> 00:30:33,520
कुरान से हमें मिलता कुरान से कुरान से हमें मिलता क्या है? जैसे

437
00:30:33,520 --> 00:30:37,520
जो हमारे अंदर मौत का खौफ है वो मौत का खौफ दूर होगा।

438
00:30:37,520 --> 00:30:41,600
भाई जब अगर तुम कुरान को फॉलो करोगे तो तुम्हारे लिए मौत के

439
00:30:41,600 --> 00:30:45,760
बाद भी एक बहुत वैसी जीवन आपके लिए सुरक्षित है। अगर कुरान

440
00:30:45,760 --> 00:30:50,160
को फॉलो करोगे। जो अभी के लिए मान लेते हैं अनंत

441
00:30:50,160 --> 00:30:54,160
आनंदमय है। है ना? यहां पर मतलब आपको आपके लिए हर

442
00:30:54,160 --> 00:30:58,480
चीज सकारात्मक है। कोई भी चीज ऐसी नहीं जो आपको बुरी लग सके। ठीक है? तो

443
00:30:58,480 --> 00:31:03,440
आपकी जो इच्छाएं हैं उनकी पूर्ति करने के लिए

444
00:31:03,440 --> 00:31:07,760
इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने इंतजाम किया है। पर ये जो जानवर इत्यादि

445
00:31:07,760 --> 00:31:11,760
है इनकी इच्छाओं की कोई मतलब कोई

446
00:31:11,760 --> 00:31:16,160
इंतजाम नहीं है। जिस कारण से जो कुत्ते का जो वो है एंड

447
00:31:16,160 --> 00:31:20,160
वो उसके साथ ही अधूरा है। अतृप्त मतलब कि वो जो सदा सुखी

448
00:31:20,160 --> 00:31:25,440
रहना चाहता था सदा आनंदमय रहना चाहता था वो उसका नहीं सुना गया।

449
00:31:25,440 --> 00:31:27,840
इंसान का सुना गया। इंसान

450
00:31:27,840 --> 00:31:31,920
का सुना गया और कुत्ते का नहीं सुना गया। कुत्ता भी मांग रहा है कि मुझे

451
00:31:31,920 --> 00:31:36,000
सुख चाहिए, मुझे आनंद चाहिए, मुझे अमरता चाहिए। वो मैं कह रहा हूं। नहीं

452
00:31:36,000 --> 00:31:40,160
आपको बताया किस कुत्ते ने आपको बताया कि मुझे आनंद चाहिए, मुझे सुख चाहिए

453
00:31:40,160 --> 00:31:44,640
और मुझे भी स्वर्ग चाहिए। मुझे भी नरक चाहिए और मुझे भी जो भाई साहब अभी

454
00:31:44,640 --> 00:31:48,880
मैंने अभी मैंने नरक इत्यादि नहीं बोला है। मैंने बोला है कि वो कभी मरना

455
00:31:48,880 --> 00:31:53,520
नहीं चाहता है। वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो ऐसी वो

456
00:31:53,520 --> 00:31:58,080
वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता है जो उसे ठीक ना लग रही हो।

457
00:31:58,080 --> 00:32:02,160
वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता। देखिए आप आप ख्वाहिश करवा रहे

458
00:32:02,160 --> 00:32:06,720
हैं कुत्ते से। कुत्ते से आप ख्वाहिश करवा रहे हैं। अभी आप अभी

459
00:32:06,720 --> 00:32:10,800
मैं ख्वाहिश नहीं करवा रहा। मैं अभी मैं अभी आप आपने खुद बोला

460
00:32:10,800 --> 00:32:14,800
ना वो भी जीना चाहता है कुत्ता है तो कुत्ता अगर कुछ सोचता

461
00:32:14,800 --> 00:32:18,960
है तो ये बात नहीं भाई साहब अभी

462
00:32:18,960 --> 00:32:23,040
आपने माना कि वो जीना चाहता है अभी आपने माना हर

463
00:32:23,040 --> 00:32:27,680
कोई जीना चाहता है हर कोई जीना चाहता है तो वही तो मैं कह रहा हूं कि इंसानों

464
00:32:27,680 --> 00:32:32,000
के लिए जीवन के बाद भी एक सुखी संसार की व्यवस्था

465
00:32:32,000 --> 00:32:36,560
है। जानवरों के लिए क्या है? तो आप यह या तो यह कह दीजिए कि हां पार्शियलिटी

466
00:32:36,560 --> 00:32:40,560
है कि जानवरों के लिए कुछ नहीं है। बता रहा हूं कि जानवरों के

467
00:32:40,560 --> 00:32:42,960
लिए क्योंकि जानवर के अंदर वो रूह

468
00:32:42,960 --> 00:32:47,040
मैं अब रूह की बात आएगी। जानवरों के अंदर वो रूह नहीं है

469
00:32:47,040 --> 00:32:51,680
कि जिस रूह की वजह से इंसान को बसीरत मिली,

470
00:32:51,680 --> 00:32:56,000
फवाद मिला और तीसरी चीज समात मिली। समात

471
00:32:56,000 --> 00:33:00,000
समझ रहे हैं? तीनों चीजें इसका कुत्ता इस दुख

472
00:33:00,000 --> 00:33:04,320
के यानी कि कुत्ता इस दुख के साथ ही उसका अंत हो जाएगा कि भैया

473
00:33:04,320 --> 00:33:08,640
मैं जो है जो चाहता था मुझे नहीं मिला। मैं वही तो कह रहा हूं उसको नहीं है।

474
00:33:08,640 --> 00:33:12,640
वो कह रहा हूं के बारे में आप बता रहे हैं तो ये कुत्ते ने

475
00:33:12,640 --> 00:33:16,960
आपको बताया क्या? देखो हमारी इस गुफ्तगू से कोई मतलब नहीं निकलेगा।

476
00:33:16,960 --> 00:33:20,960
हम टॉपिक पे आएंगे ठीक रहेगा क्योंकि कुत्ते के बारे में विषय में हम बात करने नहीं बैठे।

477
00:33:20,960 --> 00:33:24,960
हम ईश्वर के बारे में ईश्वर मैं आता हूं

478
00:33:24,960 --> 00:33:29,040
ईश्वर पर। ईश्वर पर आता हूं। काफी चर्चा हो गई है। ठीक है। मैं अभी

479
00:33:29,040 --> 00:33:33,440
विषय पर आता हूं कि क्या इस्लाम

480
00:33:33,440 --> 00:33:38,160
के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान

481
00:33:38,160 --> 00:33:42,400
है या नहीं? अब प्रतिपादित लब्ज का मतलब आप बताइए।

482
00:33:42,400 --> 00:33:46,640
क्योंकि जो मुझे अनुसार इस्लाम के अनुसार जो

483
00:33:46,640 --> 00:33:50,720
ईश्वर है जिसे आप खुदा कहते हैं ऊपर वाला कहते हैं अल्लाह भी कहते

484
00:33:50,720 --> 00:33:54,880
हैं। इस्लाम के अनुसार जो अल्लाह है क्या वो सर्वशक्तिमान

485
00:33:54,880 --> 00:33:59,200
है? जी अला कुल्ली शहीन कदीर है। अब ये अरबी

486
00:33:59,200 --> 00:34:03,200
वर्ड मैंने बोले इनकी व्याख्या जब आप बोलोगे तो कर दूंगा। मतलब

487
00:34:03,200 --> 00:34:08,080
सर्वशक्तिमान है। इतना काफी है। आपने माना सर्वशक्तिमान है।

488
00:34:08,080 --> 00:34:12,160
सर्वशक्तिमान का मतलब है ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं

489
00:34:12,160 --> 00:34:16,240
है। वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। सारे नियम उसने बनाए तो

490
00:34:16,240 --> 00:34:20,720
वो किसी नियम के नीचे नहीं है। हां नियम का बनाने वाला।

491
00:34:20,720 --> 00:34:24,720
है ना? हां हां। यानी कि वो अबाद

492
00:34:24,720 --> 00:34:28,800
है। ज्ञानी अभा मतलब अनस्टोपेबल मतलब कोई ऐसी चीज

493
00:34:28,800 --> 00:34:33,840
नहीं है। कोई ऐसा नियम नहीं है जो रो जिसको जो उसे रोक दे।

494
00:34:33,840 --> 00:34:36,640
हां इससे रोक तो नहीं सकता लेकिन

495
00:34:36,640 --> 00:34:40,800
लेकिन वह अपने वादे के खिलाफ नहीं करता है। यानी जो वादा उसने कर दिया

496
00:34:40,800 --> 00:34:44,800
जो ज्ञान उसने बता दिया ना उस ज्ञान के खिलाफ वो करता

497
00:34:44,800 --> 00:34:48,960
नहीं है। ये भी उसने बताया है। ठीक है। मतलब उसको कोई रोक

498
00:34:48,960 --> 00:34:53,680
नहीं सकता है मगर वो वादे के खिलाफ करता नहीं है। वो एक बात है। ठीक है।

499
00:34:53,680 --> 00:34:58,160
अच्छा तो अभी मैं पूछ रहा हूं क्या वो हमारे बीच में अवतार

500
00:34:58,160 --> 00:35:02,160
ले सकता है? क्या इस्लाम का जो ईश्वर है वो मनुष्यों के बीच में

501
00:35:02,160 --> 00:35:06,160
आ सकता है? अवतार के रूप में मनुष्यों जैसा कोई रूप धारण करके या कोई भी रूप धारण

502
00:35:06,160 --> 00:35:10,480
करके ना वो रूप धारण नहीं करता है।

503
00:35:10,480 --> 00:35:14,960
रूप धारण नहीं करता है वो वो जिस तरह से मनुष्य से वार्ता

504
00:35:14,960 --> 00:35:18,960
वार्ता यानी कलाम करता है ना वो उसने बताया है। जैसे

505
00:35:18,960 --> 00:35:23,120
सूर अ सूर की हम जब 51 नंबर आयत पढ़ेंगे तो

506
00:35:23,120 --> 00:35:27,200
उसमें लिखा है कि किसी बशर के लिए यानी किसी भी इंसान

507
00:35:27,200 --> 00:35:33,200
के लिए नहीं है कि अल्लाह उससे

508
00:35:33,280 --> 00:35:37,280
चले गए भाई साहब क्या हुआ? अरे अभी अभी

509
00:35:37,280 --> 00:35:43,280
तो मेन टॉपिक आया था।

510
00:36:00,080 --> 00:36:06,080
कहां गए भाई साहब रिजवान जी

511
00:36:19,120 --> 00:36:23,360
रिजवान जी कहां गए? वापस आए। अभी-अभी तो मुख्य टॉपिक

512
00:36:23,360 --> 00:36:27,440
आया हमारा। क्या इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है वो

513
00:36:27,440 --> 00:36:33,440
सर्वशक्तिमान है या नहीं?

514
00:36:41,680 --> 00:36:47,680
मैं पता करता हूं। आ गया आ गया आ गया। बहुत बढ़िया।

515
00:36:49,120 --> 00:36:53,520
जी शिवश जी कट कैसे गया है? पता नहीं कैसे गया। चलिए

516
00:36:53,520 --> 00:36:57,760
ठीक है। बहुत बढ़िया। तो मैंने पूछा है कि वो आ सकता

517
00:36:57,760 --> 00:37:01,760
है कि नहीं? कैपेबिलिटी है कि नहीं? क्षमता है कि नहीं उसके अंदर। नहीं वही

518
00:37:01,760 --> 00:37:05,920
मैं बता रहा हूं। बात क्षमता की नहीं आ रही। समता की अगर बोलेंगे तो फिर वो सर्वशक्तिमान

519
00:37:05,920 --> 00:37:09,920
ना रहा। समता की बात नहीं। हां वही तो वही तो मैं कह रहा हूं।

520
00:37:09,920 --> 00:37:14,080
बात उसूल की होगी कि ईश्वर जो है इंसानों से किस तरह से बात करता

521
00:37:14,080 --> 00:37:18,400
है। मैं वो नहीं कह रहा। हम लोग उस पे आएंगे कि वो करता है कि नहीं इस पर भी डिस्कशन

522
00:37:18,400 --> 00:37:22,480
करेंगे। अभी मैं पूछ रहा हूं कि वो हमारे बीच में आ सकता है कि नहीं। उसके अंदर

523
00:37:22,480 --> 00:37:26,560
कैपेबिलिटी है कि नहीं? नहीं तो कैपेबिलिटी वाली बात आएगी

524
00:37:26,560 --> 00:37:30,640
तो फिर तो बहुत सी बातें आ जाएंगी ना। बात कैपेबिलिटी की नहीं है। बात यह है क्या

525
00:37:30,640 --> 00:37:34,160
वो कैपेबिलिटी की है। देखिए देखिए मैं बताऊं जैसे कि

526
00:37:34,160 --> 00:37:39,040
मान लीजिए कि मदिरा शराब शराब मैं पीता नहीं हूं।

527
00:37:39,040 --> 00:37:44,320
मगर अभी पूछा ये जा रहा है कि पी सकता हूं कि नहीं?

528
00:37:44,320 --> 00:37:48,400
ठीक है? उसको मैं अपने शरीर में अंदर

529
00:37:48,400 --> 00:37:52,640
ले सकता हूं कि नहीं? उस पदार्थ को मदिरा रूपी पदार्थ को या

530
00:37:52,640 --> 00:37:57,280
शराब आप जो भी कहते हो तो उसको मैं इंटेक उसका कर सकता हूं।

531
00:37:57,280 --> 00:38:01,360
मैं पीता नहीं हूं वो एक अलग बात है। वो मेरा नियम है। नहीं पीता हूं। वो

532
00:38:01,360 --> 00:38:05,440
आपकी कैपेबिलिटी बताई आपने कि आपकी ये कैपेबिलिटी है। आपकी

533
00:38:05,440 --> 00:38:09,520
है ना? अब आप हम बात कर रहे हैं ईश्वर पे। आप इंसान

534
00:38:09,520 --> 00:38:15,280
पे बात कर रहे हैं कि इंसान की क्या कैपेबिलिटी है? हम बात कर रहे हैं

535
00:38:15,280 --> 00:38:19,360
ईश्वर जो है वो इंसानी रूप धारण करने की कैपेबिलिटी रखता

536
00:38:19,360 --> 00:38:23,760
है कि नहीं रखता है। तो अगर वो इंसानी रूप धारण करेगा तो वो ईश्वर नहीं रहेगा।

537
00:38:23,760 --> 00:38:27,760
पहली चीज वो ईश्वर नहीं रहेगा। वो मनुष्य कहलाएगा। देखिए

538
00:38:27,760 --> 00:38:31,920
भाई साहब इसमें पहली ये बात आती है कि जब हम कहते हैं वो किसी

539
00:38:31,920 --> 00:38:36,080
भी नियम से बाध्य नहीं है। ठीक है? वो ईश्वर अगर नहीं रहेगा

540
00:38:36,080 --> 00:38:40,320
ये दूसरा चैप्टर है कि ईश्वर नहीं रहेगा उसके ईश्वरत्व की रक्षा

541
00:38:40,320 --> 00:38:44,400
मैं आपको सिद्ध करूंगा कि इंसानी रूप धारण करने के बाद भी वो

542
00:38:44,400 --> 00:38:48,480
ईश्वर रहेगा। मैं आपको ये सिद्ध करूंगा ये बाद की बात है। अभी एक नियम

543
00:38:48,480 --> 00:38:49,280
आ रहा है। आपने

544
00:38:49,280 --> 00:38:53,600
कहा उसके ऊपर कोई नियम नहीं है। अभी नियम आ रहा है। क्या नियम

545
00:38:53,600 --> 00:38:57,920
समझ रहे है? नियम यह आ रहा है कि वो नहीं आएगा नीचे। वो जो है अवतार

546
00:38:57,920 --> 00:39:02,720
नहीं ले सकता। यह नियम ईश्वर नहीं लेता। तो इसमें नियम कहां हुआ?

547
00:39:02,720 --> 00:39:06,960
नियम हो गया ना ही कांट डू इट। वो अवतार नहीं ले सकता।

548
00:39:06,960 --> 00:39:11,360
ईश्वर तो झूठ भी नहीं बोलता। तो आप कहोगे कि ईश्वर सर्वशक्तिमान

549
00:39:11,360 --> 00:39:16,240
नहीं रहा। ईश्वर झूठ बोलने वालों को बनाता है ना।

550
00:39:16,240 --> 00:39:21,200
आप ये बताइए आप जिस ईश्वर को मानते हैं क्या वो कहते? भाई साहब

551
00:39:21,200 --> 00:39:25,280
एक एक करके हम करेंगे बात। एक एक देखिए कोई लड़ाई नहीं है। कोई

552
00:39:25,280 --> 00:39:29,360
लड़ाई नहीं है। एक-ए करके हम बात करेंगे। अभी अगर मैंने आपसे पूछा

553
00:39:29,360 --> 00:39:33,440
तो आप अपनी चीज बता दीजिए। आप जो जो पूछेंगे मैं सब सवालों का जवाब

554
00:39:33,440 --> 00:39:37,440
देता जाऊंगा। कोई सवाल जब आप कर रहे हो ना तो मैंने कहा

555
00:39:37,440 --> 00:39:41,600
बात यहां कैपेबिलिटी की अगर मैं अभी के लिए मान लेता हूं मेरा ईश्वर

556
00:39:41,600 --> 00:39:45,760
गलत है। कोई ईश्वर सिद्ध नहीं होता। मैंने मान लिया। अब आप बताइए आपका ईश्वर

557
00:39:45,760 --> 00:39:50,000
ईश्वर कैसे है? मैं ये मानता हूं कि आपका और मेरा ईश्वर अलग नहीं है।

558
00:39:50,000 --> 00:39:54,000
मैं ये मानता हूं। जो मैं मैं बता रहा हूं जो परिभाषा मेरे पास है

559
00:39:54,000 --> 00:39:58,160
ईश्वर की वो गलत अभी मैंने मान लिया अब आप मुझे अभी जो

560
00:39:58,160 --> 00:40:02,400
टॉपिक चल रहा है अभी जो टॉपिक चल रहा है मैं इस बात को बाद में करूंगा कि

561
00:40:02,400 --> 00:40:04,320
भाई मैं जो है कैसे सिद्ध करूंगा

562
00:40:04,320 --> 00:40:08,320
अपने ईश्वर को वो बाद की बात है अभी जो टॉपिक चल रहा है ना वो छूट जाएगा बात

563
00:40:08,320 --> 00:40:12,480
ये है वो नए चैप्टर खुलते जाएंगे अभी टॉपिक देखिए अभी तीन

564
00:40:12,480 --> 00:40:16,560
अभी मैं मैं आपको तीन चीजें बता रहा हूं एक आपने कहा वो किसी

565
00:40:16,560 --> 00:40:20,640
नियम के नीचे नहीं है मगर वो नीचे नहीं आएगा क्योंकि उसका ईश्वरत्व भंग हो

566
00:40:20,640 --> 00:40:25,280
जाएगा। इसका मतलब अपने ईश्वरत्व की स्थापना के लिए

567
00:40:25,280 --> 00:40:29,840
ईश्वर इस नियम के नीचे है कि वो नीचे नहीं आएगा। ये

568
00:40:29,840 --> 00:40:33,840
नियम आ गया। ये एक रूल आ गया जिसके नीचे वो है।

569
00:40:33,840 --> 00:40:37,920
ये किसने बनाया? एक मिनट। आप ही तो बता रहे हो।

570
00:40:37,920 --> 00:40:42,000
नहीं तो ये तो आप बता रहे हो ना। मैं तो उस रूल को बताऊंगा जब आप

571
00:40:42,000 --> 00:40:46,000
मुझसे पूछोगे। मैं अल्लाह के रूल को बताऊंगा कुरान से। भाई

572
00:40:46,000 --> 00:40:50,080
कुरान हमारे पास पूछ रहा हूं कि अगर वो अच्छा दूसरा एक

573
00:40:50,080 --> 00:40:54,160
शब्द था पहला तो हो गया किसी नियम के नीचे नहीं है दूसरा शब्द था

574
00:40:54,160 --> 00:40:58,240
सर्वशक्तिमान सर्व का मतलब सर्व सब कुछ भी कर

575
00:40:58,240 --> 00:41:02,480
सकने वाला एक मिनट मैं जब बोल रहा हूं आप जब बोलेंगे

576
00:41:02,480 --> 00:41:06,800
तो आप ही को बोलने दूंगा आप मुझे बीच में इंटरप्ट ना करें मैं आपको नहीं करूंगा

577
00:41:06,800 --> 00:41:10,880
ठीक है तो सर्वशक्तिमान अब सर्व का मतलब होता है सब

578
00:41:10,880 --> 00:41:14,960
कुछ अब जब हम ये कहते हैं कि वो इस वजह से

579
00:41:14,960 --> 00:41:19,040
नीचे नहीं आ सकता। ठीक है? वो बाद की बात है कि वो इस इस कारण से

580
00:41:19,040 --> 00:41:19,540
नीचे नहीं

581
00:41:19,360 --> 00:41:23,680
आ सकता। मगर अगर हम कहें कोई भी कारण है

582
00:41:23,680 --> 00:41:27,680
तो हम ये नहीं कह सकते कि वो अबाध्य है। कोई भी कारण है वो

583
00:41:27,680 --> 00:41:31,680
अबाध्य नहीं है। बाधित है। अगर कोई भी कारण

584
00:41:31,680 --> 00:41:35,680
है तो हम ये नहीं कह सकते वो सर्वशक्तिमान है। कोई कारण है

585
00:41:35,680 --> 00:41:40,000
वो वो रीजनिंग सही है गलत है। बाद की बात है। मगर वो सर्वशक्तिमान

586
00:41:40,000 --> 00:41:44,000
नहीं है। फिर सर्व शब्द हटाना पड़ेगा। अनलिमिटेड पावर वाला शब्द

587
00:41:44,000 --> 00:41:48,400
हटाना पड़ेगा। ओमनीपोटेंट शब्द हटाना पड़ेगा। मतलब

588
00:41:48,400 --> 00:41:52,720
वो एक बात अलग है कि उसके पास रीजनिंग है कि मैं इसलिए ऐसा नहीं जैसे कि

589
00:41:52,720 --> 00:41:56,720
वही मदिरा वाली बात कि भाई मैं जो है मदिरा मैं

590
00:41:56,720 --> 00:42:00,800
जो है मदिरा इस इस वजह से नहीं पी सकता हूं। ठीक है? तो

591
00:42:00,800 --> 00:42:05,360
ठीक है नहीं पी सकते। मगर ये मानना पड़ेगा कि इतने में मैं बाधित हूं।

592
00:42:05,360 --> 00:42:09,520
मैं फिर सर्वशक्तिमान नहीं हूं। ये मानना पड़ेगा। फिर हम आगे बढ़ेंगे

593
00:42:09,520 --> 00:42:13,600
कि भैया क्या यह जो बाध्यता आ रही है जिसकी वजह से वो सर्व

594
00:42:13,600 --> 00:42:17,600
शब्द हट रहा है अब शब्द हट रहा है क्या इसके बिना हम

595
00:42:17,600 --> 00:42:21,600
ईश्वर को ईश्वर मान सकते हैं कि नहीं और आप जब मेरे से पूछेंगे मैं जो

596
00:42:21,600 --> 00:42:25,760
परिभाषा ग्रहण करता हूं ईश्वर की वहां मैं आपको हर चीज का जवाब देता जाऊंगा

597
00:42:25,760 --> 00:42:29,760
ईश्वर को सर्वशक्तिमान भी सिद्ध करूंगा सब कुछ सिद्ध करूंगा मैं

598
00:42:29,760 --> 00:42:34,160
अब मैं बोलूं जब हां बोलिए है ना

599
00:42:34,160 --> 00:42:35,360
आपने

600
00:42:35,360 --> 00:42:39,600
आपने अपनी कैपेबिलिटी पर आपने अपनी

601
00:42:39,600 --> 00:42:43,680
क्षमता पर ईश्वर की यह चीज नापने

602
00:42:43,680 --> 00:42:47,760
की कोशिश की कि मैं शराब पी सकता हूं पूंगा नहीं

603
00:42:47,760 --> 00:42:51,760
एक अलग बात है लेकिन कैपेबिलिटी है आपके अंदर कि आप शराब पी

604
00:42:51,760 --> 00:42:56,000
सकते हैं। है ना पी सकते लेकिन तो पीने से पहले आपको

605
00:42:56,000 --> 00:43:00,160
ये भी तो पता होगा ना कि ये शराब जो है आपकी बॉडी के ऑर्गन्स पर

606
00:43:00,160 --> 00:43:04,160
क्या किस तरह से असर अंदाज होगी। है ना? क्योंकि आपकी बॉडी

607
00:43:04,160 --> 00:43:08,160
के अंदर तो कैपेबिलिटी है ही नहीं। पीने की तो है, चाहत तो है। लेकिन क्या

608
00:43:08,160 --> 00:43:12,720
आपकी बॉडी भी इस कैपेबिलिटी को बर्दाश्त कर पाएगी कि वो

609
00:43:12,720 --> 00:43:16,720
निरंतर निरंतर उस शराब को पीते पीते जब ऑर्गन

610
00:43:16,720 --> 00:43:21,520
नष्ट हो जाएंगे तो कैपेबिलिटी कहां रही? इंसान की कैपेबिलिटी

611
00:43:21,520 --> 00:43:25,520
की एक हद है। उस हद तक ही मैं वही कह

612
00:43:25,520 --> 00:43:29,520
रहा हूं। मैं वही कह रहा हूं। कैपेबिलिटी नहीं रही ना। मैं सर्वशक्तिमान नहीं

613
00:43:29,520 --> 00:43:33,520
कह रहा हूं खुद को। मैं वही कह रहा हूं। आप और हम जो बात कर रहे हैं ना ईश्वर के

614
00:43:33,520 --> 00:43:37,600
सर्वशक्तिमान होने की ईश्वर के सर्वशक्तिमान होने

615
00:43:37,600 --> 00:43:42,240
का मतलब कतई यह नहीं है कि ईश्वर से हम झूठ बुलवाए।

616
00:43:42,240 --> 00:43:46,400
क्या ईश्वर में इतनी कैपेबिलिटी नहीं है कि वो झूठ नहीं बोल सकता। तो ये ये

617
00:43:46,400 --> 00:43:50,400
पैमाने हम रख रहे हैं ईश्वर के लिए जो सरासर गलत है। दो मिनट रुकिएगा मुझे

618
00:43:50,400 --> 00:43:54,480
बात मुकम्मल होने दीजिएगा। हम जिस तरह से ईश्वर को जानते हैं या अल्लाह को

619
00:43:54,480 --> 00:43:58,560
जानते हैं ना तो हम कुरान के ज्ञान के आधार पर जानते हैं अल्लाह को।

620
00:43:58,560 --> 00:44:03,440
है ना? और इससे पहले भी ऐसा नहीं है कि कुरान का ज्ञान ही जो है ना

621
00:44:03,440 --> 00:44:07,440
वो है। इससे पहले भी ईश्वर ने अपना ज्ञान नाजिल किया है

622
00:44:07,440 --> 00:44:11,680
और पहले भी लोगों के पास आया है ज्ञान। अब ये लोगों की है कि

623
00:44:11,680 --> 00:44:16,000
उन्होंने क्या मिलावट कर दी है। उन के पास अभी सत्य ज्ञान मौजूद है। तो हम कुरान

624
00:44:16,000 --> 00:44:20,240
को मानते हैं तस्दीक करने वाला। यानी किसी भी किताब में जिन

625
00:44:20,240 --> 00:44:24,400
लोगों ने अपने आप को धर्मों में बांट लिया। भैया भैया भैया भैया देखिए विषय बदल

626
00:44:24,400 --> 00:44:28,480
रहा है विषय बदल रहा है आप इसी पे रहिए आप अभी ये मिलावट

627
00:44:28,480 --> 00:44:32,560
का मैं कह ही नहीं रहा हूं कि इसको मान लो उसको मान लो मैं तो नहीं कह रहा हूं देखिए आप

628
00:44:32,560 --> 00:44:36,560
अपने टाइम में बोलिएगा मैं अपनी बात क्यों नहीं है

629
00:44:36,560 --> 00:44:40,720
विषयंतर हो रहा है ना टॉपिक चेंज हो रहा है भाई वो हमारा टॉपिक

630
00:44:40,720 --> 00:44:44,800
है ही नहीं कि मैं मैं तो इस किताब को मानूंगा आप इस किताब को मानते हो आपने

631
00:44:44,800 --> 00:44:49,040
कहा कि आप कुरान के अनुसार मानते हो सुनिए आपने कहा कि आप कुरान

632
00:44:49,040 --> 00:44:53,440
के अनुसार मानते हो तो मैं कुरान की कही हुई चीजों को चैलेंज कर रहा हूं कि

633
00:44:53,440 --> 00:44:57,600
ये चीजें कैसे सही मानी जाती है। मेरे सामने कोई आयत

634
00:44:57,600 --> 00:45:01,840
रखिए कि इस आयत में ये कहा गया है तो मैं आपको उस आयत

635
00:45:01,840 --> 00:45:05,520
के रेफरेंस से बताऊंगा कि उस आयत में कहा क्या जा रहा है। मैंने किया

636
00:45:05,520 --> 00:45:09,680
तो आप आपके अनुसार जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है मगर

637
00:45:09,680 --> 00:45:13,680
वो अवतार नहीं ले सकता है। उसके लिए अमुक अमुक कारण है मगर फिर सर्व

638
00:45:13,680 --> 00:45:17,920
शब्द नहीं आएगा। अगर हमने कारण दे दिया कि हम कोई भी

639
00:45:17,920 --> 00:45:22,000
फलाने कारण है जिससे हम नहीं कर सकते तो वो सर्व शब्द नहीं आएगा। या तो

640
00:45:22,000 --> 00:45:26,160
आप एक्सेप्ट करो या तो आप ये एक्सेप्ट करो कि इतने इस तरह

641
00:45:26,160 --> 00:45:30,240
के कार्य ना करने पर भी किसी को कुछ एक कार्य ना करने पर भी किसी को

642
00:45:30,240 --> 00:45:35,120
सर्वशक्तिमान कहा जा सकता है। अनंत सामर्थवान कहा जा सकता है।

643
00:45:35,120 --> 00:45:39,200
अब मुझे भी बोलने दीजिए। सर्वशक्तिमान होने का कतई वो मतलब नहीं

644
00:45:39,200 --> 00:45:44,240
है कि ईश्वर जो है ना ईश्वर ईश्वर ना रहे।

645
00:45:44,240 --> 00:45:48,400
ईश्वर ईश्वर ना रहे तो ये भी कोई कैपेबिलिटी

646
00:45:48,400 --> 00:45:52,400
है कि ईश्वर से हम कहे कि अगर तेरे ईश्वर में कैपेबिलिटी है तो ईश्वर ना

647
00:45:52,400 --> 00:45:56,720
रह के दिखा। ईश्वर ना रह के दिखाए। तो ये भी कहेंगे

648
00:45:56,720 --> 00:46:00,960
भाई कैपेबिलिटी नहीं है ईश्वर में ईश्वर ना रहने की। तो एक तो कोई बात हुई नहीं।

649
00:46:00,960 --> 00:46:05,200
ये तो कोई लॉजिकल बात नहीं हुई। नहीं लॉजिकल बात यह हुई कि

650
00:46:05,200 --> 00:46:09,440
इसका मतलब उसको अपने मान सम्मान के लिए जिस रूप में वह जाना

651
00:46:09,440 --> 00:46:13,520
जाना चाहता है इस कारण से वो नहीं बन सकता मगर वो

652
00:46:13,520 --> 00:46:17,520
बन सकता है या तो ये कहिए कि वो वो

653
00:46:17,520 --> 00:46:20,560
बन मैं पूछ रहा हूं कारण भाई साहब मेरा

654
00:46:20,560 --> 00:46:24,560
प्रश्न क्या है मेरा प्रश्न समझिए मैं कह रहा हूं उसके अंदर क्षमता है

655
00:46:24,560 --> 00:46:28,880
कि नहीं ये तो एक वो हो गई उसकी विल कि भैया अगर मैं ऐसा बनूंगा

656
00:46:28,880 --> 00:46:32,960
तो लोग ये कहने लगेंगे तुम ईश्वर नहीं हो इसलिए मैं नहीं बनता

657
00:46:32,960 --> 00:46:37,120
हूं। मगर वो बन सकता है कि नहीं? मैं ये पूछ रहा हूं। तो मैं

658
00:46:37,120 --> 00:46:41,280
उसी है कि नहीं? वही मैं कह रहा हूं। कुरान में उसके गुण उसके

659
00:46:41,280 --> 00:46:45,520
गुणों से ही तो हम जानेंगे ना ईश्वर को। तो हम वही बात कर रहे हैं। अल्लाह एक शब्द

660
00:46:45,520 --> 00:46:50,400
है। जैसे अल्लाह एक शब्द है। इसका जो मतलब है वो उसके गुण को प्रकट करेगा।

661
00:46:50,400 --> 00:46:54,480
चलिए मतलब ये माना जाए वो नहीं बन सकता। उसमें नई कैपेबिलिटी नहीं है। फिर भी आप

662
00:46:54,480 --> 00:46:59,200
उसे सर्वक्तिमान कहते हैं। सर्व शक्तिमान की बात आ रही है ना तो सर्वशक्तिमान

663
00:46:59,200 --> 00:47:04,400
किसी को जानने के लिए उसके गुणों से ही जानेंगे ना। नहीं उसके गुण से ही जानेंगे।

664
00:47:04,400 --> 00:47:08,400
गुण से जानेंगे ना बताइए कि भाई ईश्वर के गुणों से हम उसे जानेंगे

665
00:47:08,400 --> 00:47:12,800
कि वो सर्वशक्तिमान है या नहीं है। बराबर है

666
00:47:12,800 --> 00:47:16,880
ठीक है। अब उसके गुण क्या है? गुण देखेंगे हम क्या है कि उसको

667
00:47:16,880 --> 00:47:20,880
हम अल्लाह नाम से जानते हैं। अरबी भाषा में। ठीक है? अरबी भाषा में

668
00:47:20,880 --> 00:47:24,960
हम उसे अल्लाह कहते हैं। हम उसे रहमान कहते हैं। हम उसे रहीम कहते हैं।

669
00:47:24,960 --> 00:47:29,040
हम उसे मुख्तलिफ नाम है जिन भाई साहब ये बताने का आप मुझे

670
00:47:29,040 --> 00:47:33,040
एक बात बताइए। यह बताने का हमारे टॉपिक से क्या कनेक्शन है कि आप

671
00:47:33,040 --> 00:47:36,880
उसे किस-किस नाम से बुलाते हैं बताइए।

672
00:47:36,880 --> 00:47:41,120
ये क्या होता है ना ये व्यर्थ की टाइमिंग आप ले रहे हैं। टॉपिक भटक

673
00:47:41,120 --> 00:47:45,360
जाएगा भाई साहब मुकम्मल थोड़ा टॉपिक भटक जाएगा विषय

674
00:47:45,360 --> 00:47:49,440
में रहिए आप ये नाम है। मैंने नाम तो पूछे नहीं है।

675
00:47:49,440 --> 00:47:53,440
मैं नाम को तो चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप नाम क्यों बता रहे है? इसीलिए मैं कह

676
00:47:53,440 --> 00:47:59,200
रहा हूं टॉपिक पॉइंट थोड़ा मेरा निवेदन हैदन

677
00:47:59,200 --> 00:48:03,280
मिनट मैं आपको नाम से नाम इसलिए बता रहा हूं क्योंकि

678
00:48:03,280 --> 00:48:08,320
नाम के शब्दों के अर्थ से ही गुण प्रकट होते हैं।

679
00:48:08,320 --> 00:48:12,480
समझ रहे है ना? है ना? ये तो जैसे अगर मैं विष्णु

680
00:48:12,480 --> 00:48:16,560
आप सीधे गुण बता दीजिए ना उसमें ये गुण है। बस अल्लाह शब्द

681
00:48:16,560 --> 00:48:20,560
का मतलब समझाना पड़ेगा ना आपको। इसीलिए नाम बताना जरूरी है। अब मैं

682
00:48:20,560 --> 00:48:24,800
आपको अल्लाह शब्द का अर्थ बताता हूं। अल्लाह शब्द का अर्थ

683
00:48:24,800 --> 00:48:28,800
बताता हूं। अब अरबी जैसे आपको नहीं आती है। मुझे आती है तो मैं आपको बता रहा

684
00:48:28,800 --> 00:48:33,680
हूं। अल्लाह शब्द का अर्थ होता है कि हमें ऑर्डर देने वाला। इला

685
00:48:33,680 --> 00:48:37,840
इला बोलते हैं अरबी के अंदर ऑर्डर को। अब जैसे नफ्स भी हमारा इला है।

686
00:48:37,840 --> 00:48:42,160
हमें ऑर्डर देता है। हमें आंखों का इस्तेमाल करने का जो

687
00:48:42,160 --> 00:48:46,320
चाहत है वो हमारे अंदर होती है। अगर आप सुन रहे हैं मेरी बात तो अल्लाह शब्द

688
00:48:46,320 --> 00:48:50,480
को मैं समझा रहा हूं। क्योंकि अल्लाह कोई ऐसा नहीं है कि अल्लाह मुसलमानों का है। मैं अल्लाह

689
00:48:50,480 --> 00:48:51,920
शब्द के अर्थ से उसके गुण

690
00:48:51,920 --> 00:48:56,400
को प्रकट कर रहा हूं कि अल्लाह वो इला है। हर चीज को ऑर्डर देने वाला है।

691
00:48:56,400 --> 00:49:00,400
हर चीज को आर्डर देने वाला है। वो अला कुल श कदीर है। यानी हर

692
00:49:00,400 --> 00:49:04,560
श के ऊपर वो एक पैमाना रखने वाला है। पैमाना समझ

693
00:49:04,560 --> 00:49:07,920
रहे हैं आप?

694
00:49:07,920 --> 00:49:12,000
है जी। पैरामीटर पैरामीटर पैरामीटर पैरामीटर

695
00:49:12,000 --> 00:49:16,160
पैरामीटर उसने रखा हुआ है। है ना? हर चीज के ऊपर एक पैरामीटर

696
00:49:16,160 --> 00:49:20,480
रखा हुआ है उसने। तो ये सर्वशक्तिमान होने के लिए ये लफ्ज

697
00:49:20,480 --> 00:49:24,880
ही काफी है। अल्लाह अला कुल्ली शहीद कदी ये तीन लफ्जों

698
00:49:24,880 --> 00:49:28,960
में ही उसकी सर्वशक्तिमान होना साबित हो जाता है। अब ये जो हमारे सवाल

699
00:49:28,960 --> 00:49:32,960
है कि ईश्वर अवतार लेगा या नहीं लेगा। तो ये कांसेप्ट बनाए हुए जो है

700
00:49:32,960 --> 00:49:37,120
ना हमारे अगर मैं आपसे कहूं कि वेदों से क्या आप साबित कर पाएंगे ये चीजें? भाई

701
00:49:37,120 --> 00:49:41,280
साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मुझे वेद से साबित करना है कि नहीं। मैं बस

702
00:49:41,280 --> 00:49:45,360
आपसे पूछ रहा हूं आपका ओपिनियन क्या है? अगर नहीं है तो मेरी जो जिज्ञासा उठ

703
00:49:45,360 --> 00:49:49,440
रही है कि जब वो सब कुछ नहीं कर सकता। एक मिनट जब वो सब कुछ

704
00:49:49,440 --> 00:49:53,440
नहीं कर सकता है उसके बावजूद भी जब वो

705
00:49:53,440 --> 00:49:58,240
सब कुछ नहीं कर सकता है उसके बावजूद भी

706
00:49:58,240 --> 00:50:02,240
वो क्या कहते हैं उसको सर्वशक्तिमान क्यों कहा जा रहा है? उसको ये कहना चाहिए वो शक्तिमान

707
00:50:02,240 --> 00:50:06,480
है। वो शक्तिमान है पर एक मिनट भाई साहब एक एक

708
00:50:06,480 --> 00:50:07,040
मिनट भाई

709
00:50:07,040 --> 00:50:11,040
साहब भाई साहब एक मिनट अगर हम कह रहे हैं कि वो सर्वशक्तिमान है तो उसमें

710
00:50:11,040 --> 00:50:15,040
बाधा आ रही है। दूसरी बात हम कह रहे हैं कि वो अबाध्य है मतलब उसमें बाधित नहीं

711
00:50:15,040 --> 00:50:19,280
है। तो जब वो बाधित नहीं है तो उसको अबाध्य क्यों कह रहे हैं?

712
00:50:19,280 --> 00:50:23,360
जब वो अनंत सामर्थ्यवान नहीं है तो उसको अनंत सामर्थ्यवान क्यों कह

713
00:50:23,360 --> 00:50:27,440
रहे हैं? ये हमने अभी तक पूछा जिसमें कि आप ये स्वीकार

714
00:50:27,440 --> 00:50:31,520
नहीं कर रहे हो कि भाई क्या कहते हां अगर चलो ठीक है।

715
00:50:31,520 --> 00:50:35,520
ठीक है। कुछ कारण ऐसे हैं जो लॉजिक आपने दिए वो लॉजिक पे हम बाद में

716
00:50:35,520 --> 00:50:39,760
आगे जाएंगे कि लॉजिक वो कैसे कट रहे हैं वो मैं आगे जाऊंगा। अभी

717
00:50:39,760 --> 00:50:44,080
के लिए मान लेते हैं आपने जो लॉजिक दिया वह सही है। तो आपने जो लॉजिक दिए

718
00:50:44,080 --> 00:50:48,560
उसके बाद अगर कोई लॉजिकली चीजें हैं और

719
00:50:48,560 --> 00:50:52,640
वो काम हम अगर नहीं कर सकते हैं उसके बावजूद भी हम फलाने

720
00:50:52,640 --> 00:50:57,120
एंटिटी को सर्वशक्तिमान कह सकते हैं। अगर उसके पास सही

721
00:50:57,120 --> 00:51:01,360
रीज़ंस हैं कुछ काम ना करने के तो तो भी उसे हम सर्वशक्तिमान कह

722
00:51:01,360 --> 00:51:06,080
सकते हैं। और ऐसे को हम इस प्रकार से बने सर्वशक्तिमान

723
00:51:06,080 --> 00:51:10,240
को हम ईश्वर भी कह सकते हैं। ये एक आगे की बात है कि फिर मैं वो लॉजिक

724
00:51:10,240 --> 00:51:14,880
भी काउंटर करूंगा। ठीक है? अब दूसरी बात ये है कि

725
00:51:14,880 --> 00:51:18,960
अगर हम ये कहें कि फलानी फलानी रीजनिंग के कारण

726
00:51:18,960 --> 00:51:22,320
यदि कोई व्यक्ति रुक रहा है कुछ करने से

727
00:51:22,320 --> 00:51:26,320
तो इसका मतलब कि वो उसको भी हम सर्वशक्तिमान कह सकते हैं। तो

728
00:51:26,320 --> 00:51:30,320
फिर दिक्कत ये आएगी कि अगर उसको हम सर्वशक्तिमान कह सकते हैं तो फिर

729
00:51:30,320 --> 00:51:34,320
उसको क्या कहेंगे जो किसी भी कारण से रुके नहीं उसको क्या कहेंगे? उसके

730
00:51:34,320 --> 00:51:38,800
लिए क्या शब्द होगा? जो किसी भी कारण से ना रुके। आप

731
00:51:38,800 --> 00:51:42,880
जो मैं अब मैं आपका जवाब देता हूं। आपने जितनी

732
00:51:42,880 --> 00:51:47,120
भी डेफिनेशन उस सर्वशक्तिमान के लिए कही ना तो आपने

733
00:51:47,120 --> 00:51:51,200
खुद के अपने पैमाने रखे। अपने पैमाने मैं भाई मैं

734
00:51:51,200 --> 00:51:55,440
भाई साहब मैं सर्वशक्तिमान की डेफिनेशन आपकी स्वीकार कर रहा हूं। मैं

735
00:51:55,440 --> 00:51:59,600
मैंने आपकी स्वीकार कर ली। मैंने अब की डेफिनेशन कि

736
00:51:59,600 --> 00:52:04,080
वो फलाने फलाने कार्यों में गुड रीज़ंस के कारण अगर बाधित हो जाए तब भी वो

737
00:52:04,080 --> 00:52:08,080
है। वो फलाने फलाने कार्यों में गुड गुड रीज़ की वजह

738
00:52:08,080 --> 00:52:12,880
से मैं आपने मैं भाई साहब मैं आपकी डेफिनेशन मान गया।

739
00:52:12,880 --> 00:52:17,040
अब मुझे बस ये बता दीजिए जो कहीं नहीं रुक सकता उसको क्या

740
00:52:17,040 --> 00:52:21,040
कहेंगे? उसके लिए क्या शब्द है? जो

741
00:52:21,040 --> 00:52:25,600
कहीं नहीं रुक सकता मतलब झूठ भी बोल सकता है कुछ भी कर सकता है।

742
00:52:25,600 --> 00:52:29,600
हां उसको क्या कहेंगे? जो झूठ भी नहीं बोल देखो झूठ

743
00:52:29,600 --> 00:52:34,320
भी असीमित असीमित असीमित असीमित जिसकी कोई सीमा नहीं है।

744
00:52:34,320 --> 00:52:37,600
जिसकी कोई सीमा नहीं है। झूठा कहेंगे। सुनिए मेरी बात। झूठ बोलेगा

745
00:52:37,600 --> 00:52:41,680
तो मैंने क्या कहा भाई साहब? मुझे बस मैंने बता दिया वो झूठ भी बोल सकता है।

746
00:52:41,680 --> 00:52:45,840
कुछ भी कुछ भी का मतलब कुछ भी उसको क्या कहोगे आप?

747
00:52:45,840 --> 00:52:50,000
तो वो उसके जो भी कार्य वो करेगा ना उस कार्य के हिसाब

748
00:52:50,000 --> 00:52:54,080
से उसके लिए शब्दों का इस्तेमाल होगा। जैसे अगर कोई जुल्म करता है तो हम उसे

749
00:52:54,080 --> 00:52:58,080
जालिम कहते हैं। तो अगर ईश्वर नहीं ये तो पर्टिकुलर

750
00:52:58,080 --> 00:53:02,160
ये तो पर्टिकुलर उसके एक विभाग को आप नाम दे रहे हैं। मैं कह रहा हूं कोई

751
00:53:02,160 --> 00:53:06,240
ऐसी एंटिटी अगर है जो जिसका जिसकी

752
00:53:06,240 --> 00:53:10,400
कोई सीमा नहीं है किसी भी क्षेत्र में वो कुछ भी उसके लिए नामुमकिन

753
00:53:10,400 --> 00:53:14,640
शब्द है ही नहीं तो वो नामुमकिन शब्द नामुमकिन

754
00:53:14,640 --> 00:53:19,360
शब्द जब उसके लिए कुछ है ही नहीं तो उसको आप क्या कहेंगे

755
00:53:19,360 --> 00:53:23,440
अरबी में अल्लाह कहेंगे अरबी में अल्लाह के लिए अरे अल्लाह के लिए

756
00:53:23,440 --> 00:53:29,280
तो नामुमकिन शब्द है ना कि वो औकात नहीं ले सकता क्या

757
00:53:29,280 --> 00:53:33,360
अल्लाह के लिए अल्लाह के लिए नामुमकिन शब्द है वो कुछ

758
00:53:33,360 --> 00:53:37,360
अच्छे रीज्स है जिसके कारण वो कुछ कार्यों में रुका हुआ है। वो

759
00:53:37,360 --> 00:53:42,000
नहीं कर सकता। आप बताइए कौन से कार्य नहीं कर सकता?

760
00:53:42,000 --> 00:53:46,080
अरे अवतार नहीं ले सकता। झूठ नहीं बोल सकता। अभी के लिए

761
00:53:46,080 --> 00:53:50,720
मान लेते हैं। ये चीज आपको किसी ने बताई होगी ना।

762
00:53:50,720 --> 00:53:52,720
भाई ये आपको बताया होगा। उसने ईश्वर ने

763
00:53:52,720 --> 00:53:56,880
आपके ईश्वर ने आप जिसे ईश्वर मानते हैं उसने बताया। आप मुझे बता दो

764
00:53:56,880 --> 00:54:00,880
ना। आपकी कुरान क्या कहती है इस बारे में? मैं मान लूंगा। आप बता दो क्या कहती

765
00:54:00,880 --> 00:54:04,880
है इस बारे में। मैं बता रहा हूं लली श

766
00:54:04,880 --> 00:54:09,120
के उसके जैसा कोई चीज है ही नहीं।

767
00:54:09,120 --> 00:54:13,120
उसके जैसी कोई चीज नहीं है। अब इतनी सी आयत में आप समझ

768
00:54:13,120 --> 00:54:17,360
लीजिए वो जिसके भी जैसा बनेगा तो वो उसके मिसल

769
00:54:17,360 --> 00:54:21,520
हो जाएगा। तो इस आयत ने क्लियर कर दिया कि उसके जैसा

770
00:54:21,520 --> 00:54:25,600
कोई है ही नहीं। यानी कि भाई साहब वो रुका है ना कि वो किसी

771
00:54:25,600 --> 00:54:30,720
के जैसा नहीं है। किसी के जैसा नहीं हो सकता।

772
00:54:30,720 --> 00:54:35,120
नामुमकिन शब्द है नामुमकिन शब्द एक्सिस्ट कर रहा है ना

773
00:54:35,120 --> 00:54:39,440
उसके लिए बताइए कहां कर रहा है अरे

774
00:54:39,440 --> 00:54:42,320
आप ही ने तो कहा

775
00:54:42,320 --> 00:54:46,320
उसके जैसा कोई नहीं है इसलिए वो अवतार नहीं ले सकता

776
00:54:46,320 --> 00:54:50,320
नहीं हर एक जो है ना वो उससे कमतर है और वो उन सबसे

777
00:54:50,320 --> 00:54:54,400
बलातर है तो जब वो मैं मैं

778
00:54:54,400 --> 00:54:58,480
देखिए आपको ऐसा लग रहा है आपको ऐसा लग रहा है कि शायद

779
00:54:58,480 --> 00:55:02,480
मैं आपसे झगड़ने बैठा हूं। मगर हम लोगों की जो चर्चा है

780
00:55:02,480 --> 00:55:06,480
सुनिए तो हम लोगों की जो चर्चा है वो आगे बहुत ही सुंदर रूप

781
00:55:06,480 --> 00:55:11,840
से आगे बढ़ सकती है। बहुत सुंदर रूप से आप दो मिनट

782
00:55:11,840 --> 00:55:15,840
आप एक एक मिनट आप जो है ना बात का टू द पॉइंट आंसर देने

783
00:55:15,840 --> 00:55:20,720
से बच रहे हैं। ये दिखाई दे रहा है क्योंकि मैंने आपके सामने

784
00:55:20,720 --> 00:55:24,720
एक मिनट एक मिनट सुनिए तो भाई साहब सुनिए तो मैंने आपके सामने

785
00:55:24,720 --> 00:55:28,720
हर तरह का विकल्प रखा है। देखिए पहला विकल्प मैंने क्या रखा

786
00:55:28,720 --> 00:55:33,280
कि आप यह मान लीजिए कि कुछ कार्यों से कुछ सही

787
00:55:33,280 --> 00:55:37,280
रीजनिंग है तो उनके लिए अगर उन कार्यों को ना

788
00:55:37,280 --> 00:55:41,280
कर नहीं कर पा रहा है यदि अल्लाह तब भी उसे सर्वशक्तिमान

789
00:55:41,280 --> 00:55:45,360
कहा जा सकता है। ये मान लीजिए कुछ कार्यों को यदि वो नहीं कर पा रहा उसके सही

790
00:55:45,360 --> 00:55:45,860
रीज़

791
00:55:45,760 --> 00:55:50,000
है इस कारण से अगर वो नहीं कर पा रहा शब्द

792
00:55:50,000 --> 00:55:54,400
हटाएंगे ना करिए

793
00:55:54,400 --> 00:55:58,400
कि वो कर तो सकता है पर वो इस इस कारण से करेगा नहीं बस सिंपल

794
00:55:58,400 --> 00:56:02,400
वो कर सकता है यू बोलिए कि उसकी शान के लायक

795
00:56:02,400 --> 00:56:06,960
नहीं है उसकी शान जैसे कोई मगर है ना

796
00:56:06,960 --> 00:56:11,040
कर सकता है ना बात मैं भी कोई शान के लायक नहीं है मगर

797
00:56:11,040 --> 00:56:15,040
कर सकता है है ना? तान के लायक नहीं है ना?

798
00:56:15,040 --> 00:56:19,120
अरे तो उसके अंदर पावर है ना करने की। भाई साहब

799
00:56:19,120 --> 00:56:23,280
पावर है कि नहीं? पावर आप एक काम करिए आप अपना व्यू

800
00:56:23,280 --> 00:56:27,440
रखिए। यही यही पे आपको कर रहे हैं। आप जो है ना इस इस सवाल से

801
00:56:27,440 --> 00:56:31,440
बच रहे हैं। आप जो कहना चाह रहे हैं ना

802
00:56:31,440 --> 00:56:35,600
कि कर सकता है। कर सकता है। कर सकता है। तो मैंने जब

803
00:56:35,600 --> 00:56:39,680
एक आयत पढ़ी कि अला कुल श कदीर है हर श पर बे पैमाना रखने

804
00:56:39,680 --> 00:56:44,160
वाला है वो पैरामीटर जो बताया सही और गलत का पैरामीटर उसने रखा

805
00:56:44,160 --> 00:56:50,160
है ना सही और गलत का है ना अब आप ये को

806
00:56:50,240 --> 00:56:54,560
ईश्वर यानी कि हम कुरान को कहने वाले को ईश्वर

807
00:56:54,560 --> 00:56:59,200
मानने की बजाय कुरान को पहले अपना वो मान ले

808
00:56:59,200 --> 00:57:00,960
कुरान पर विश्वास कर ले भले

809
00:57:00,960 --> 00:57:05,120
ही कुरान की ही बातों से वो ईश्वरता उसकी भंग हो रही है

810
00:57:05,120 --> 00:57:11,120
कुरान की बातों से कोई मैंने कहा ना

811
00:57:11,680 --> 00:57:15,920
सिद्ध नहीं हो रहा ना मगर आप ये कह रहे हो क्योंकि कुरान ने सुनिए कुरान

812
00:57:15,920 --> 00:57:20,160
ने क्योंकि कुरान ने रोका कुरान एक मिनट भाई साहब भाई साहब भाई साहब कुरान

813
00:57:20,160 --> 00:57:24,240
ने क्योंकि रोका हुआ है कि इससे पैरामीटर आप नहीं लगा सकते इसलिए हम

814
00:57:24,240 --> 00:57:28,320
रुक जाए मतलब कोई हमसे आके कहे मैं भगवान हूं एक मिनट कोई हमसे

815
00:57:28,320 --> 00:57:32,480
आके कहे मैं भगवान हूं ये मेरी किताब है इसको पढ़ तो मैं कहूं

816
00:57:32,480 --> 00:57:36,480
भाई इसमें तो तुम्हारे बारे में ऐसा ऐसा-सा लिखा तुम भगवान कैसे हो? उसी में लिखा है कि

817
00:57:36,480 --> 00:57:40,560
पैरामीटर कौन सेट करेगा? कुरान सेट करेगी। उसी में लिखा है पैरामीटर कौन

818
00:57:40,560 --> 00:57:45,920
सेट करेगा? कुरान सेट करेगी। तो फिर अब तू मेरे भगवान होने पे डाउट नहीं कर सकता।

819
00:57:45,920 --> 00:57:50,400
कुरान नहीं सेट करेगी अल्लाह सेट करेगा। ये मैंने कहा कुरान

820
00:57:50,400 --> 00:57:55,200
अरे भाई कुरान अल्लाह अपना जो सेट किया वो कुरान में देगा ना।

821
00:57:55,200 --> 00:57:59,440
हां वो ज्ञान जो उसने बताया ना वो ज्ञान है। मेरा सुनिए

822
00:57:59,440 --> 00:58:03,520
मैं मैं मैं आके आपसे कहूं मैं भगवान हूं। मैं आपसे आगे कहूं मैं भगवान

823
00:58:03,520 --> 00:58:07,680
हूं और मुझे कैसे चेक करेगा कि मैंने बता दिया पैरामीटर इससे तू

824
00:58:07,680 --> 00:58:11,840
चेक कर अगर आप और कुछ पूछेंगे उससे दाएं बाएं तो वो नहीं वो पैरामीटर मैंने

825
00:58:11,840 --> 00:58:15,920
सेट नहीं किया वो तू नहीं कर सकता सवाल ऐसा है ना तो फिर ऐसे तो

826
00:58:15,920 --> 00:58:16,420
इस

827
00:58:16,160 --> 00:58:20,240
हिसाब से किसी को भी भगवान मान लिया जाएगा शिवम जी शिवम जी

828
00:58:20,240 --> 00:58:24,320
एक मिनट मैं आपसे ये पूछूंगा जब आप कहेंगे कि मैं भगवान हूं तो मैं

829
00:58:24,320 --> 00:58:29,440
आपसे कहूंगा भगवान शब्द का अर्थ बताएं आप बताएंगे

830
00:58:29,440 --> 00:58:33,680
अरे भैया देखिए आप टॉपिक को दूसरी तरफ ले जा रहे हैं। तो दो मुख्य

831
00:58:33,680 --> 00:58:37,760
विषय है ना मैं कह रहा हूं सर्वशक्तिमान ईश्वर मैं कह

832
00:58:37,760 --> 00:58:41,840
रहा हूं अनंत मैं कह रहा हूं मैं मैं आपको बता रहा हूं

833
00:58:41,840 --> 00:58:46,400
अर्थ मैं आपको अर्थ बता रहा हूं सच्चिदानंद स्वरूप सर्वशक्तिमान

834
00:58:46,400 --> 00:58:50,640
परमेश्वर ठीक है अब बताइए भगवान का भगवान शब्द

835
00:58:50,640 --> 00:58:54,720
का हां हां भगवान शब्द पे देखिए भाई साहब यही

836
00:58:54,720 --> 00:58:58,720
तो मैं कह रहा हूं आप मेरा यहां पे आप मैं बता रहा हूं देखिए मैं

837
00:58:58,720 --> 00:59:02,800
भगवान शब्द का अर्थ आपको बता सकता हूं और स्क्रिप्ट बता सकता

838
00:59:02,800 --> 00:59:06,960
हूं। मैं टॉपिक को बचाना चाहता हूं। टॉपिक बदलते चले जाएंगे।

839
00:59:06,960 --> 00:59:11,120
आप मेरा यहां पर आप मेरा यहां पर आप मेरी योग्यता मत चेक करिए

840
00:59:11,120 --> 00:59:15,200
कि मुझे भगवान शब्द का हिंदी अर्थ आता है कि नहीं। मेरी बात सुनिए। आप

841
00:59:15,200 --> 00:59:19,200
मुझे ये बताइए। आपने अभी एक तर्क दिया। आपने अभी एक तर्क

842
00:59:19,200 --> 00:59:23,280
दिया है कि भाई अल्लाह के विषय में जो पैरामीटर

843
00:59:23,280 --> 00:59:27,440
होंगे वो अल्लाह ही बताएगा। और उससे कोई भी दाएं बाएं शब्द

844
00:59:27,440 --> 00:59:31,280
नहीं पूछा जाएगा। तो अब बात यही है इस प्रकार से तो कोई भी व्यक्ति अपने

845
00:59:31,280 --> 00:59:35,520
आप को भगवान क्लेम कर लेगा और पैरा भी खुद ही देगा आप करके

846
00:59:35,520 --> 00:59:39,600
देखो आप करके देखो मैं आपके क्लेम को रद्द करूंगा आपकी ही बातों

847
00:59:39,600 --> 00:59:43,760
से करूंगा अरे तो यही तो मैं भी कर रहा हूं यही तो मैं भी कर रहा हूं अल्लाह

848
00:59:43,760 --> 00:59:48,000
की बातों को रद्द आपको अपने जब मैंने कहा

849
00:59:48,000 --> 00:59:52,080
जब मैंने कहा कि वो ले सकता है कि नहीं तो आप पैरामीटर ले आए पैरामीटर कुरान

850
00:59:52,080 --> 00:59:56,320
में दे दिया है मना किया पैरामीटर में सीमित किया ना

851
00:59:56,320 --> 01:00:00,480
अच्छा मैं मैं आप मुझे मुझे रद्द करिए। मुझे रद्द करिए। मैं मैं

852
01:00:00,480 --> 01:00:04,960
अभी अपने आप को भगवान सिद्ध कर रहा हूं। आप मुझे रद्द करिए। ठीक है।

853
01:00:04,960 --> 01:00:09,280
मैं भगवान हूं। मैं मैं ईश्वर हूं। जो

854
01:00:09,280 --> 01:00:13,280
जीव की चाह का वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर उसी का

855
01:00:13,280 --> 01:00:17,360
मैं रूप हूं। यहां बैठा हूं। बताओ क्या? आपसे पूछा है भगवान शब्द

856
01:00:17,360 --> 01:00:21,440
का अर्थ बताइए। फिर उस अर्थ से आपके अंदर भाई साहब आप वही पूछ सकते हो जो

857
01:00:21,440 --> 01:00:25,680
मैं आपको लिख के दूंगा। आप और कुछ नहीं पूछ सकते हो। मैं पैरामीटर सेट करूंगा।

858
01:00:25,680 --> 01:00:29,840
आपने कहा कि आप भगवान है। ठीक है? कहा ना? आप

859
01:00:29,840 --> 01:00:34,080
ये भी आप मेरी मर्जी के बाहर ये भी नहीं पूछ सकते भगवान शब्द का अर्थ बताओ।

860
01:00:34,080 --> 01:00:38,560
मैं वो हूं मैं वो हूं। मैं मैं वो सुनो मैं वो हूं

861
01:00:38,560 --> 01:00:43,040
सबको सबको आर्डर देने वाला। आपने अल्लाह शब्द की जो व्याख्या की थी ना मैं वो हूं।

862
01:00:43,040 --> 01:00:46,480
अल्लाह शब्द की व्याख्या की थी। अल्लाह शब्द की व्याख्या की

863
01:00:46,480 --> 01:00:50,800
थी आपने? मैं वो हूं। ठीक है। अभी आप मुझे काउंट करो।

864
01:00:50,800 --> 01:00:55,200
मैं हूं आपको ऑर्डर देने वाला। मैं हूं सबका शासनकर्ता। मैं हूं

865
01:00:55,200 --> 01:00:59,360
सर्वशक्तिमान। अब आप मुझे काउंटर करो। मैं अपने को भगवान मैं अपने आप को भगवान

866
01:00:59,360 --> 01:01:03,360
नहीं कह रहा हूं। मैं अपने आप को भगवान नहीं कह रहा हूं। मैं अब अपने आप

867
01:01:03,360 --> 01:01:07,360
को सर्वशक्तिमान सबको आर्डर देने वाला। अभी तो

868
01:01:07,360 --> 01:01:11,520
आप अपने को कह रहे क्योंकि मुझे टॉपिक बचाना है।

869
01:01:11,520 --> 01:01:15,600
विषयंतर से बचाना है मुझे। इसलिए मैं शब्द को छोड़

870
01:01:15,600 --> 01:01:18,240
रहा हूं। जिस

871
01:01:18,240 --> 01:01:22,400
मेरी जिसज बात से जिसज बात से आप नया टॉपिक खोलने

872
01:01:22,400 --> 01:01:26,640
का प्रयास करेंगे मैं उस बात को छोड़ दूंगा। आपको नया

873
01:01:26,640 --> 01:01:30,800
टॉपिक नहीं खोलने दूंगा। टॉपिक ये चल रहा है मैं अपने आप को वो

874
01:01:30,800 --> 01:01:34,880
कह रहा हूं। मैं मैं अपने आप को वो कह रहा हूं जो अल्लाह शब्द का अर्थ

875
01:01:34,880 --> 01:01:38,960
आपने बताया मैं वही हूं। ठीक है? अच्छा जो अर्थ आपने बताया

876
01:01:38,960 --> 01:01:42,960
है। आप ही रहमान है। ठीक है। आप ये है ना?

877
01:01:42,960 --> 01:01:48,000
ये ये मैं नहीं कह रहा। आपने जो अर्थ बताया मैं वो हूं। अब इसे आप काउंटर करिए।

878
01:01:48,000 --> 01:01:52,480
क्या काउंटर करिए? अब आप मुझे सिद्ध करिए। मैं नहीं हूं वो।

879
01:01:52,480 --> 01:01:57,200
हां नहीं हो ना आप? क्योंकि कुरान की जो आयत है

880
01:01:57,200 --> 01:02:01,360
उसके मिसल कोई शय नहीं है। अब आपके मिसल तो कितने सारे

881
01:02:01,360 --> 01:02:01,860
मैं

882
01:02:01,520 --> 01:02:05,680
आपके मिसल हूं। मैं आपके मिसल हूं। ये आप थोड़ी सी हिंदी बोलिए।

883
01:02:05,680 --> 01:02:09,920
हिंदी बोलिए। थोड़ी हिंदी बोलिए भाई साहब। थोड़ी

884
01:02:09,920 --> 01:02:14,000
भाई साहब हिंदी बोलिए। हम मैं कह रहा हूं मांस और हड्डी

885
01:02:14,000 --> 01:02:18,640
से बना हुआ शरीर मेरा भी है और आपका भी है। तो मैं तो आपके लिए हो गया।

886
01:02:18,640 --> 01:02:22,640
अल्लाह ने जो कहा है देखिए जो प्रश्न आप कर रहे हैं

887
01:02:22,640 --> 01:02:26,800
वो प्रश्न सही प्रश्न नहीं है। मैं आपको लिख के दूंगा। आप केवल उसकी

888
01:02:26,800 --> 01:02:30,560
सीमा में रहकर प्रश्न कर सकते हैं।

889
01:02:30,560 --> 01:02:34,720
तो आप जो प्रश्न कर रहे हैं ना तो वो भी आप किसी आयत से करिए

890
01:02:34,720 --> 01:02:39,040
तो सही रहेगा। आप अपना पैरामीटर जो है ईश्वर पर लगा रहे हैं। मैं

891
01:02:39,040 --> 01:02:43,280
मैं वही तो कह रहा हूं। अगर कुरान से ही प्रश्न करना है तो मेरी

892
01:02:43,280 --> 01:02:47,280
भी मैं लिखी हुई चीज आपको दे रहा हूं। आप उससे प्रश्न कर सकते हैं। आप उसके बाहर

893
01:02:47,280 --> 01:02:51,280
से प्रश्न नहीं कर सकते। मैं आपसे पूछूंगा ना कि भ आपका सोर्स

894
01:02:51,280 --> 01:02:55,360
ऑफ नॉलेज कौन सी किताब का मैं भी आपसे पूछ रहा हूं ना। मैं भी आपसे

895
01:02:55,360 --> 01:02:59,520
पूछ रहा हूं ना कि आपको भगवान कैसे माने? जबकि आपने आपने जो लिख के

896
01:02:59,520 --> 01:03:03,520
दिया है उसमें ये बातें आपकी कट रही है आपकी बात से। बस वही

897
01:03:03,520 --> 01:03:07,680
मैं कह रहा हूं। ये बताइए खुद को भगवान कहने वाला पैरामीटर

898
01:03:07,680 --> 01:03:11,680
सेट कर देगा कि ये मेरा पैरामीटर है। यही तुम पूछोगे। इसके बारे में तुम कुछ नहीं

899
01:03:11,680 --> 01:03:15,760
सकते हो। इस तरह के आधार पर तो हर कोई व्यक्ति भगवान बन के घूमेगा। ईश्वर

900
01:03:15,760 --> 01:03:16,640
बन के घूमेगा।

901
01:03:16,640 --> 01:03:20,640
वही कह रहा हूं शिवम जी कि आपने अभी तक कुरान की एक भी आयत नहीं बताई

902
01:03:20,640 --> 01:03:25,840
और आप कह रहे हो उसी पैरामीटर से आप बता रहे हो। तो मुझे कोई आयत तो बताओगे इस

903
01:03:25,840 --> 01:03:30,000
बता रहा हूं भाई। मैंने आपसे कहा कुरान आपने पढ़ी है। कुरान

904
01:03:30,000 --> 01:03:34,000
आपने पढ़ी है। ठीक है। आप मुझे बताइए क्या कुरान

905
01:03:34,000 --> 01:03:38,080
के अनुसार जो ईश्वर है वो अवतार ले सकता है या नहीं? मैं उसमें

906
01:03:38,080 --> 01:03:42,160
चैलेंज कहां कर रहा हूं कि नहीं कुरान में ये नहीं लिखा है आप गलत बता रहे हो मैंने चैलेंज

907
01:03:42,160 --> 01:03:46,320
किया तो शिवम जी ये बात तो मैंने शुरू में ही बता दी थी कि

908
01:03:46,320 --> 01:03:50,560
ईश्वर जो है अवतार नहीं ले सकता ना लेगा नहीं ले सकता नहीं

909
01:03:50,560 --> 01:03:54,720
ले सकता तो यहां बाकी हुआ ना

910
01:03:54,720 --> 01:03:58,800
पूरी बात सुनिए ना उसकी शान के लायक नहीं है शान के लायक

911
01:03:58,800 --> 01:04:02,800
नहीं के लायक नहीं है इसका मतलब ये हुआ मैं आपको ऑप्शन

912
01:04:02,800 --> 01:04:06,880
क्या दे रहा था कि अगर किसी भी शान के लायक

913
01:04:06,880 --> 01:04:10,960
ना हो इस कारण से वो कोई काम ना कर पा रहा हो शान

914
01:04:10,960 --> 01:04:15,040
के कारण तो भी उसे सर्वशक्तिमान ही कहा जाएगा। मैं ये

915
01:04:15,040 --> 01:04:19,120
कह रहा हूं नहीं मैं ये कह रहा हूं कि आपने जो कहा ना कर पा रहा है इस

916
01:04:19,120 --> 01:04:23,200
शब्द को हटा दीजिए इस शब्द को हटा दीजिए कि ना कर पा रहा

917
01:04:23,200 --> 01:04:27,040
जब शान के लायक भी कह रहे हैं

918
01:04:27,040 --> 01:04:31,040
इसका मतलब वो कर सकता है पर इसका मतलब वो कर सकता है मगर शान के

919
01:04:31,040 --> 01:04:31,680
खिलाफ है इसलिए

920
01:04:31,680 --> 01:04:35,920
करता नहीं ये कहिए आप कर सकता है शान के लायक नहीं है बस

921
01:04:35,920 --> 01:04:40,960
शान के मैं पूछ रहा हूं सर मैं पूछ रहा हूं कर सकता है पर शान के लायक नहीं है

922
01:04:40,960 --> 01:04:44,960
मैं पूछ रहा हूं कह रहा हूं जो कुछ भी जो कुछ भी वो कर सकता है है जो कुछ भी

923
01:04:44,960 --> 01:04:49,120
वो कर सकता है वो अपना सर्वशक्तिमान होना जो बताता है ना वो अपने ज्ञान के थ्रू

924
01:04:49,120 --> 01:04:53,200
बताता है और आपसे क्या सवाल किया है आपने एक बात

925
01:04:53,200 --> 01:04:57,200
की उसकी शान के लायक नहीं मैंने उसे एक्सेप्ट कर लिया तो फिर आप सोचिए कि

926
01:04:57,200 --> 01:05:01,360
वो कर तो सकता है पर उसकी शान के लायक नहीं है इसलिए नहीं करता बस बात

927
01:05:01,360 --> 01:05:05,600
खत्म हो गई बात खत्म हो गई बात खत्म क्यों कर रहे हैं भाई साहब मेरे मेरे अंदर जिज्ञासा

928
01:05:05,600 --> 01:05:09,680
मैं पूछूंगा ना सवाल बात खत्म क्यों भाई जब आपने भी

929
01:05:09,680 --> 01:05:13,760
मान लिया कि उसके शान के लायक नहीं होगी जो चीज है

930
01:05:13,760 --> 01:05:18,000
मैं अभी आपकी बात को अभी आपकी बात को यह माना कि उसकी

931
01:05:18,000 --> 01:05:22,000
शान के लायक नहीं है इसलिए वो नहीं लेता। मगर अब आपसे पूछ रहा हूं इसका मतलब

932
01:05:22,000 --> 01:05:26,000
ये तो माने ना कि वो कर सकता है। ले सकता है जन्म अवतार के रूप

933
01:05:26,000 --> 01:05:28,160
में

934
01:05:28,160 --> 01:05:33,600
ले लेगा तो फिर वो ईश्वर नहीं रहेगा। ये भी मैंने पहले बताया था क्योंकि ले सकता

935
01:05:33,600 --> 01:05:37,680
आप मुझे ये बताओ वो ले सकता है कि नहीं वो नहीं लेगा लेगा वो बाद

936
01:05:37,680 --> 01:05:42,160
की बात है। शिवम जी मैंने आयत से बताया आपको ले सकता

937
01:05:42,160 --> 01:05:46,640
है। मैं मैं इसको यहीं पे रोकता हूं। अब मैं आगे चलता हूं थोड़ा सा इसको छोड़ते।

938
01:05:46,640 --> 01:05:47,140
अब

939
01:05:46,960 --> 01:05:51,120
मुझे एक बात बताइए आप समझ नहीं पा रहे हैं। नहीं वो वो

940
01:05:51,120 --> 01:05:55,200
वो देखने वाले समझ लेंगे। यहां तक जो हुआ है उससे वो समझ लेंगे। मैंने हर

941
01:05:55,200 --> 01:05:59,280
बात कह दी है। मैं मेरे हिसाब से ये है कि आप उस प्रश्न का जवाब देने से

942
01:05:59,280 --> 01:06:04,080
बच रहे हो कि वो ले सकता है कि नहीं। अब आ रही है।

943
01:06:04,080 --> 01:06:08,240
वो आप बोल ही नहीं रहे हो। आपने कहा शान के लायक नहीं है तो ये हम लोग

944
01:06:08,240 --> 01:06:12,400
हम लोग इस विषय में क्या माने कि वो ले सकता है पर शान के लायक नहीं है इसलिए नहीं

945
01:06:12,400 --> 01:06:16,400
लेगा ये बोलो ये प्रश्न देखिए ये प्रश्न आपने किया ना कि वो

946
01:06:16,400 --> 01:06:20,640
अवतार ले सकता है नहीं ले सकता ठीक है ना मैंने कहा ये उसकी शान के लायक नहीं अब शान

947
01:06:20,640 --> 01:06:24,800
के लायक क्यों नहीं है वो मैंने आयत बताई लली शहीन के उसके मिसल

948
01:06:24,800 --> 01:06:28,800
कोई शय नहीं है अब अब मेरे को इसकी व्याख्या तो करने दो कि अगर

949
01:06:28,800 --> 01:06:32,880
वो मान लेते हैं मानव रूप लेता है मान लेते हैं मानव रूप

950
01:06:32,880 --> 01:06:37,360
लेता है उसके बाद भी क्या वो ईश्वर रहता है क्योंकि उसके मिस्रल के मानव

951
01:06:37,360 --> 01:06:41,360
रूप में बहुत सारे मानव घूम रहे हैं तो कुरान की ये आयत गलत हो जाएगी

952
01:06:41,360 --> 01:06:45,440
जो ज्ञान उसने बताया है ईश्वर ने तो ईश्वर ने भाई साहब हम तो यही कह रहे

953
01:06:45,440 --> 01:06:49,440
हैं ना कि कुरान में कुछ कुछ ऐसी चीजें हैं जो कि सिद्ध नहीं हो रही है

954
01:06:49,440 --> 01:06:53,760
हम तो यही कह रहे हैं ना ये तो आप कह रहे हो ना तो वो

955
01:06:53,760 --> 01:06:57,920
वो गलत हो रही है ना वो कह रही है कि सर्वशक्तिमान है फिर वो कह रही है वो

956
01:06:57,920 --> 01:07:02,160
कह रही है कि वो छ 150 में कह रही है कि भैया जो है ईश्वर

957
01:07:02,160 --> 01:07:07,200
की कोई संतान नहीं हो सकती क्योंकि क्योंकि उसकी कोई पत्नी नहीं है।

958
01:07:07,200 --> 01:07:11,440
ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है? उसकी तो कोई पत्नी ही नहीं है।

959
01:07:11,440 --> 01:07:15,600
यानी कि कुछ काम ऐसे हैं वो नहीं कर सकता। चलिए ठीक है। ठीक है।

960
01:07:15,600 --> 01:07:20,240
अब आपने कुछ क्लेम इसमें किए हैं। झूठ बोलना।

961
01:07:20,240 --> 01:07:24,480
हां। झूठ बोलने वाली बात आपने बताई है।

962
01:07:24,480 --> 01:07:28,640
तो सबसे पहले तो यह बता दीजिए कि यह

963
01:07:28,640 --> 01:07:32,720
झूठ बोलने से मतलब है कि जो ईश्वर है वो

964
01:07:32,720 --> 01:07:36,720
बुराई नहीं करता कर सकता है। इस्लाम का जो ईश्वर है वो इस सीमा में

965
01:07:36,720 --> 01:07:41,760
है कि वो बुरे कार्य नहीं कर सकता है।

966
01:07:41,760 --> 01:07:46,080
है ना? बुराई और अच्छाई इन दोनों के ऊपर उसने पैमाना

967
01:07:46,080 --> 01:07:50,080
रखा है। मैंने बताया था पैरामीटर बुराई का और अच्छाई का यह भी बताया वो

968
01:07:50,080 --> 01:07:54,400
मतलब वो मतलब वो गिरे हुए कार्य नहीं कर सकता। वो सत्यवादी है। वो सत्य

969
01:07:54,400 --> 01:07:58,160
बोलेगा वो झूठ नहीं बोल सकता।

970
01:07:58,160 --> 01:08:02,880
अब ये बताइए क्या बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं?

971
01:08:02,880 --> 01:08:06,880
बुराई को बनाना। बुराई को

972
01:08:06,880 --> 01:08:09,520
बनाना।

973
01:08:09,520 --> 01:08:14,400
बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं या बुराई को करना बुराई है या नहीं?

974
01:08:14,400 --> 01:08:18,640
जैसे कि बम बनाना बुराई है कि नहीं या किसी इंसान के

975
01:08:18,640 --> 01:08:22,720
अंदर ही भरना कि भैया जो है तुम बड़े होकर के ये

976
01:08:22,720 --> 01:08:27,040
करना वो करना ये सब वो है कि नहीं? बुराई

977
01:08:27,040 --> 01:08:31,680
है कि नहीं ऐसा करना? बिल्कुल गलत शिक्षा देना गलत है।

978
01:08:31,680 --> 01:08:35,760
गलत शिक्षा देना, गलत ज्ञान से भ्रमित करना, गलत चीजें

979
01:08:35,760 --> 01:08:39,840
बताना ये सब गलत है। या गलत जिनसे गलत हो सकता है उन चीजों

980
01:08:39,840 --> 01:08:44,640
का निर्माण करना वो भी गलत है ना? निर्माण तो इस्तेमाल

981
01:08:44,640 --> 01:08:48,880
उसका इस्तेमाल गलत होगा। इस्तेमाल गलत होगा।

982
01:08:48,880 --> 01:08:52,880
अच्छा तो मतलब जैसे किसी ने तलवार बनाई और उस तलवार

983
01:08:52,880 --> 01:08:58,880
से कोई मर्डर किया गया तो अगर वो मर्डर

984
01:08:59,280 --> 01:09:03,680
एक्टिविटी गलत करी उसने। उसने गलत किया तो तलवार बनाने

985
01:09:03,680 --> 01:09:08,480
वाले पर दोष नहीं आएगा। तलवार चलाने वाले पे दोष आएगा।

986
01:09:08,480 --> 01:09:12,640
बिल्कुल। क्योंकि वो उसका माइंड के अंदर ये विचार कैसे आया कि किसी को तलवार

987
01:09:12,640 --> 01:09:17,280
मार दूं या तो गुस्से में आया होगा या नफरत होगी। कोई ना कोई वजह बनी होगी।

988
01:09:17,280 --> 01:09:22,400
मगर तलवार बनाने तलवार बना के उसे देने वाले को दोष नहीं आएगा।

989
01:09:22,400 --> 01:09:26,400
हम नहीं उसे क्यों दोष आएगा? तलवार उसे प्रोवाइड कराने

990
01:09:26,400 --> 01:09:30,560
वाले को दोष नहीं आएगा। बनाने वाले ने यह कहकर उसे नहीं दिया

991
01:09:30,560 --> 01:09:34,560
कि मेरी तलवार से तुम निर्दोष को मारना या गुस्से में आ जाओ तो

992
01:09:34,560 --> 01:09:39,120
किसी के मार देना। उसने कतई ये नहीं कहा। उसने बस एक तलवार बनाई

993
01:09:39,120 --> 01:09:44,320
ताकि उससे दो पैसे कमा के वो अपना गुजर बसर करे। ठीक है?

994
01:09:44,320 --> 01:09:48,640
अब मैं ये पूछ रहा हूं। मैं मैं अपना सवाल आगे बढ़ा रहा हूं।

995
01:09:48,640 --> 01:09:52,720
कि यदि तलवार वाले को यह मालूम है यह तलवार

996
01:09:52,720 --> 01:09:56,720
से क्या करने वाला है। अगर उसको यह मालूम है

997
01:09:56,720 --> 01:10:02,720
और वो उसे रोक भी सकता है तब भी उस पर दोष नहीं आएगा।

998
01:10:03,040 --> 01:10:06,560
तलवार देगा ही नहीं वो

999
01:10:06,560 --> 01:10:10,560
भाई तलवार देगा। तलवार देगा ही नहीं। यानी वो बुरी चीज को बनाएगा

1000
01:10:10,560 --> 01:10:14,320
ही नहीं। नहीं बनाने की बात नहीं है। बात देने की होती है देने की।

1001
01:10:14,320 --> 01:10:18,400
बनाएगा नहीं। ये क्या बात हुई? भाई दूसरा आदमी उसको अपनी सेफ्टी

1002
01:10:18,400 --> 01:10:22,400
के लिए जानवरों से हिफाजत करने के लिए रखना चाह रहा है। कभी कोई शेर आ जाए,

1003
01:10:22,400 --> 01:10:26,560
कोई जंगल में रह रहा है, कोई खेत में रह रहा है तो उससे अपनी हिफाजत के लिए रख रहा है। बनाना

1004
01:10:26,560 --> 01:10:30,560
तो सही है। इस्तेमाल गलत हो गया ना? तो मैं वही कह

1005
01:10:30,560 --> 01:10:34,560
रहा हूं ना अगर जैसे मुझे ये मालूम है कि ये जिसको मैं दे रहा हूं

1006
01:10:34,560 --> 01:10:38,720
जिसको मैं तलवार दे रहा हूं वो देगा ही नहीं। वो

1007
01:10:38,720 --> 01:10:42,720
देगा ही नहीं। अगर जैसे जैसे मुझे ये मालूम है कि मैं जो तलवार बना रहा हूं

1008
01:10:42,720 --> 01:10:46,800
मुझे पक्का पता है इस तलवार के द्वारा कल एक निर्दोष व्यक्ति

1009
01:10:46,800 --> 01:10:50,800
की हत्या होगी तो मेरे द्वारा इस तलवार को बनाना ये जानते

1010
01:10:50,800 --> 01:10:54,800
हुए कि इसके द्वारा एक पाप होगा तो मुझ पर पाप चढ़ा कि

1011
01:10:54,800 --> 01:10:58,800
नहीं उस पाप का आदेश किसने दिया करने का क्या

1012
01:10:58,800 --> 01:11:02,800
किसी किसी ने भाई साहब जैसे जैसे कि मैं

1013
01:11:02,800 --> 01:11:06,880
बम बना रहा हूं ठीक है बम बना रहा हूं मुझे मालूम है ये बम

1014
01:11:06,880 --> 01:11:11,120
जो है जाकर के किसी होटल वगैरह में लगाया जाएगा। निर्दोषों की जान ली जाएगी।

1015
01:11:11,120 --> 01:11:15,200
अब ये मेरा बम बनाना गलत है या सही है। तो आपके ऊपर

1016
01:11:15,200 --> 01:11:19,280
पहले यह निर्भर करेगा कि आप जो बम बना रहे हैं क्या आप अपने अपनी

1017
01:11:19,280 --> 01:11:23,600
मर्जी से अपनी मर्जी से अपनी मर्जी से अपनी मर्जी

1018
01:11:23,600 --> 01:11:27,600
से बना रहे हैं ना तो कानून व्यवस्था भी है देश के अंदर। यानी मुझे

1019
01:11:27,600 --> 01:11:29,520
दोष लगेगा। यानी

1020
01:11:29,520 --> 01:11:33,760
मुझे दोष लगेगा। अगर आप चोरी छुपे बना रहे हैं और कानून को

1021
01:11:33,760 --> 01:11:37,920
देश की जो सरकार है उसे गुलाम की नजरों में दोष लगेगा कि

1022
01:11:37,920 --> 01:11:42,320
नहीं लगेगा? आपकी नजरों में तर्क आपके अनुसार क्या है वो बताइए।

1023
01:11:42,320 --> 01:11:46,320
कोई भी गलत करेगा ना तो उसका दोष लगेगा। जो भी गलत यानी

1024
01:11:46,320 --> 01:11:50,800
कि यानी कि ये जानते हुए कि बम से निर्दोषों

1025
01:11:50,800 --> 01:11:55,200
को मारा जाएगा। ये जानते हुए बम बनाना

1026
01:11:55,200 --> 01:11:59,280
गलत है। पाप है। पाप

1027
01:11:59,280 --> 01:12:03,360
है। है ना? बम बनाना पाप

1028
01:12:03,360 --> 01:12:07,920
है। पाप है ना? नहीं। अरे भैया आपसे

1029
01:12:07,920 --> 01:12:13,200
पूछ रहा हूं। आप क्लियर जवाब दे ही नहीं रहे हो। कोई बात का बम बनाने के

1030
01:12:13,200 --> 01:12:17,520
पूछ रहे हो ना तो मैं बम के अंदर जो भी सामग्री लग रही है

1031
01:12:17,520 --> 01:12:22,480
उनके अंदर ऐसी कौन सी चीज है जो सामग्री लगा के उस चीज को बनाकर

1032
01:12:22,480 --> 01:12:28,320
जब तक इस्तेमाल ना की जाए तब तक कोई पाप आ जाएगा। बताइए मुझे

1033
01:12:28,320 --> 01:12:32,320
मुझे ये मालूम है ना कि मैं ये जो बना रहा हूं ये कहां जाकर फटना है?

1034
01:12:32,320 --> 01:12:36,720
गलत जगह पे फटना है। मुझे मालूम है। अब बताओ पाप है कि नहीं?

1035
01:12:36,720 --> 01:12:41,360
मुझे सब मालूम है। मैं मैं जानता हूं ये कहां जाके फटने वाला है।

1036
01:12:41,360 --> 01:12:44,800
आपको मालूम है ये कहां जाके फटने वाला है? हां।

1037
01:12:44,800 --> 01:12:49,280
अब बताओ मैं पापी हूं कि नहीं? कहां जाके फटेगा? तो फिर

1038
01:12:49,280 --> 01:12:53,680
आप ही दोषी हो। भाई दो

1039
01:12:53,680 --> 01:12:57,920
अगर मैं अगर मैं बुराई को बना रहा हूं और मुझे पता है कि

1040
01:12:57,920 --> 01:13:02,080
अगर मैं किसी चीज को बना रहा हूं और अगर मुझे पता है कि ये इसके

1041
01:13:02,080 --> 01:13:07,440
द्वारा बुराई होने वाली है तो बुराई का दोष मुझ पर भी आएगा।

1042
01:13:07,440 --> 01:13:12,160
बुराई का दोष जो है ना सिर्फ करने वाले पे आएगा।

1043
01:13:12,160 --> 01:13:16,960
अरे भैया आप ही तो कह रहे थे कि बम बनाने वाले पे दोष आएगा।

1044
01:13:16,960 --> 01:13:20,960
क्या तो बम का अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा है सुनिए

1045
01:13:20,960 --> 01:13:25,120
मैं बताऊं अगर कोई सुनिए तो अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा

1046
01:13:25,120 --> 01:13:29,280
है एक मिनट अगर कोई अगर कोई व्यक्ति बम बना रहा है

1047
01:13:29,280 --> 01:13:33,280
उसको ये पता है कि इस बम का उपयोग भारतीय संसद में करना है

1048
01:13:33,280 --> 01:13:37,360
या फलाने ताज होटल में करना है या

1049
01:13:37,360 --> 01:13:41,360
मतलब कहीं कुछ उस उसको ऐसी घटनाएं करनी है जो गलत है

1050
01:13:41,360 --> 01:13:45,680
जो निर्दोषों को मारना है। उसको मालूम है कि मैं जो बम बना रहा हूं।

1051
01:13:45,680 --> 01:13:49,680
देखो हर चीज़ के दो पहलू होते हैं। शिवम जी आप मुझे इसका सही पहलू

1052
01:13:49,680 --> 01:13:53,680
भी बताओगे के जैसे हमारे देश ने कुछ बम बना के रख रखे

1053
01:13:53,680 --> 01:13:57,760
हैं और दूसरे देशों ने भी बम बना के रख रखे हैं। मैं कह रहा हूं

1054
01:13:57,760 --> 01:14:00,080
जिसके बारे में मुझे पता है कि इससे

1055
01:14:00,080 --> 01:14:04,480
गलत ही होगा। वो बम बनाना बनाने का दोष मुझे

1056
01:14:04,480 --> 01:14:08,720
लगेगा कि नहीं लगेगा? मैं वो कह रहा हूं ना वो इस्तेमाल बताएगा ना।

1057
01:14:08,720 --> 01:14:12,800
इस्तेमाल बताएगा। भाई साहब वो इस्तेमाल मुझे मालूम है ना

1058
01:14:12,800 --> 01:14:17,440
वो इस्तेमाल मुझे मालूम है उसका क्या इस्तेमाल होना है अच्छा मेरी बात सुनिए

1059
01:14:17,440 --> 01:14:21,520
अगर वो बम सुनिए मेरी बात अगर वो बम

1060
01:14:21,520 --> 01:14:25,520
ऐसे दुराचारियों पर जो अत्याचार कर रहे

1061
01:14:25,520 --> 01:14:29,600
हैं जो अत्याचार कर रहे हैं पाप कर रहे

1062
01:14:29,600 --> 01:14:33,680
हैं मजलूम की हत्या कर रहे जैसे मान लो तीर चलाई है ना ब्रह्मास्त्र

1063
01:14:33,680 --> 01:14:37,920
चलाया है ना पांडव ने कौरव पे मिसाल के तौर पर बता रहा हूं

1064
01:14:37,920 --> 01:14:42,080
तो ये तीर जिसने बनाया आपके हिसाब से तो ये

1065
01:14:42,080 --> 01:14:46,320
तीर उन्हें पता था मेरा प्रश्न दूसरा है मेरे भाई

1066
01:14:46,320 --> 01:14:50,320
मेरा प्रश्न दूसरा मैं ये कह रहा हूं कि मुझे

1067
01:14:50,320 --> 01:14:54,320
ये मालूम है कि उसका मैं ये कह रहा हूं कि मुझे मालूम

1068
01:14:54,320 --> 01:14:58,320
है आप जो है आप जो है सवाल का जवाब देने नहीं आए हैं

1069
01:14:58,320 --> 01:15:02,400
आप मैं समझ गया आप जो है टॉपिक से भाग रहे हैं कह रहा हूं

1070
01:15:02,400 --> 01:15:07,120
जब ईश्वर जब जब किसी व्यक्ति को ये मालूम है कि इसका उपयोग

1071
01:15:07,120 --> 01:15:11,440
पांडवों की तरह कौरवों पे नहीं होना जब इसका उपयोग देश के प्रति जो दुराचार

1072
01:15:11,440 --> 01:15:15,280
करते हैं उनप नहीं होना है बल्कि निर्दोषों पे होना है। जब मुझे

1073
01:15:15,280 --> 01:15:19,440
मालूम है जब किसी व्यक्ति को मालूम है उस स्थिति में उसके द्वारा वो जो

1074
01:15:19,440 --> 01:15:23,680
बम वो जो बम बनाया जाना उसके द्वारा बम

1075
01:15:23,680 --> 01:15:27,760
बनाया जाना गलत है कि नहीं है? मैं ये पूछ रहा हूं। मैं वही जवाब

1076
01:15:27,760 --> 01:15:31,760
अभी हम अभी हम दूसरा दूसरा जो पहलू है कि उसका उपयोग और भी कहीं

1077
01:15:31,760 --> 01:15:36,000
हो सकता है। वो उसका उसका जो दूसरा पहलू

1078
01:15:36,000 --> 01:15:40,480
है उससे हमारा अभी संबंध नहीं क्योंकि हमने डिक्लेअ कर दिया कि हमें मालूम है

1079
01:15:40,480 --> 01:15:44,800
हमें मालूम है कि उसके साथ गलत ही होना है। अब बताइए [हंसी]

1080
01:15:44,800 --> 01:15:48,800
जो बम बनाने वाला है वो गलत है कि नहीं? अब आपकी बात सही समझ

1081
01:15:48,800 --> 01:15:52,880
में आई। आपने एक शब्द और ऐड किया कि निर्दोष मारे जाएंगे। आपने ये

1082
01:15:52,880 --> 01:15:56,960
शब्द ऐड किया कि निर्दोष मारे जाएंगे। मैं आपको भाई साहब मैं आपको क्लिप

1083
01:15:56,960 --> 01:16:01,440
दिखा देता हूं। मैंने निर्दोष पहले भी कहा था। अच्छा मैंने

1084
01:16:01,440 --> 01:16:05,760
चलो ठीक है। मैंने नहीं सुना होगा। है ना? तो आपने एक बार निर्दोष सुनिए

1085
01:16:05,760 --> 01:16:10,160
एक बार नहीं मैंने कम से कम तीन चार बार निर्दोष शब्द का उपयोग किया है।

1086
01:16:10,160 --> 01:16:14,240
चलो ठीक है। मैंने नहीं सुना होगा। लेकिन आपने कहा निर्दोष मारे जाएंगे। है ना?

1087
01:16:14,240 --> 01:16:18,240
निर्दोष तो जो बना रहा है उसको और उसके पीछे उसका

1088
01:16:18,240 --> 01:16:22,640
इरादा भी ये है कि भाई इसको बनाऊंगा तो निर्दोष जो है ना मारे जाएंगे।

1089
01:16:22,640 --> 01:16:27,200
है ना? सिर्फ यही इरादा है। दूसरा कोई इरादा ही नहीं है।

1090
01:16:27,200 --> 01:16:30,480
यानी उसको इस्तेमाल करने का दूसरा कोई विकल्प ही नहीं

1091
01:16:30,480 --> 01:16:34,640
है। तब तो गलत हो जाएगा। और अगर दूसरा दूसरा

1092
01:16:34,640 --> 01:16:39,280
विकल्प और क्या हो सकता है? जब उसको ये मालूम है इससे छोटा बच्चा मारा जाएगा।

1093
01:16:39,280 --> 01:16:43,520
थोड़ा ऑप्शन उदाहरण दे दीजिए और क्या-क्या हो सकता है। मैंने आपको तलवार

1094
01:16:43,520 --> 01:16:47,520
की मिसाल दी थी कि तलवार जिसने बनाई उसको ये भी पता है कि इस तलवार

1095
01:16:47,520 --> 01:16:51,680
के इस्तेमाल से कोई किसी को क्या कत्ल कर सकता है। लेकिन इसी तलवार के इस्तेमाल

1096
01:16:51,680 --> 01:16:55,760
से वो अपना डिफेंस भी कर सकता है। डिफेंस मैं उसकी

1097
01:16:55,760 --> 01:16:59,920
बात कर रहा हूं जिसको मालूम है तलवार से क्या होगा। आप क्यों बदल रहे हैं बात

1098
01:16:59,920 --> 01:17:04,000
को? आप यार एक पहलू ही बता रहे हो ना तो मैं एक पहलू मान रहा हूं। अरे मैं ये

1099
01:17:04,000 --> 01:17:08,000
नहीं कह रहा हूं कि वो एक न्यूट्रल व्यक्ति है। उसको कुछ पता नहीं है कि वो तलवार जिसको

1100
01:17:08,000 --> 01:17:12,160
दे रहा है तलवार से क्या होने वाला है। मैं ये कह रहा हूं उसको पता है कि वो तलवार जिसको

1101
01:17:12,160 --> 01:17:16,320
मैं ये कह रहा हूं वो तलवार जिसको दे रहा है उससे क्या होने वाला है उसको पता

1102
01:17:16,320 --> 01:17:20,400
है। उसकी बात पूछ रहा हूं मैं। मैं नूतन व्यक्ति की बात

1103
01:17:20,400 --> 01:17:24,480
नहीं पूछ रहा हूं। आप बार-बार ना आप बार-बार टॉपिक चेंज कर रहे हो।

1104
01:17:24,480 --> 01:17:28,560
खामखा जो है हाई हो गई। सुनिए मेरी बात ये अभी जो

1105
01:17:28,560 --> 01:17:32,560
दो पॉइंट बोले ना उसका जवाब सुनिए कि जिसको ये मालूम है कि ये तलवार

1106
01:17:32,560 --> 01:17:36,720
मैं दूंगा और ये जाके इसका गलत इस्तेमाल करेगा तो उस तलवार बनाने वाले को

1107
01:17:36,720 --> 01:17:40,800
उस शख्स को तलवार नहीं देनी चाहिए। यानी उसने गलत किया

1108
01:17:40,800 --> 01:17:44,800
देख के ना। अरे यार अब वही तो बात है ना। अब दूसरा शख्स आया

1109
01:17:44,800 --> 01:17:45,520
उसने आके कहा

1110
01:17:45,520 --> 01:17:49,520
कि भाई मुझे भी तलवार चाहिए लेकिन मैं खेत के अंदर रहता हूं और मुझे जानवरों

1111
01:17:49,520 --> 01:17:54,000
का डर है। तो अगर दूसरा शख्स आया अगर दूसरा शख्स आया। अगर

1112
01:17:54,000 --> 01:17:58,160
अगर दूसरा भाई साहब मैं समझ गया आपकी बात समझ गया। अगर दूसरा

1113
01:17:58,160 --> 01:18:02,240
शख्स आया और वो उसको बेवकूफ बना करके ले गया या वो

1114
01:18:02,240 --> 01:18:06,400
सही काम के लिए ले गया उसने उसका यूज गलत कर दिया। ठीक है? दूसरा शख्स आया

1115
01:18:06,400 --> 01:18:10,720
तो हमें ये मानना पड़ेगा। हमें ये मानना पड़ेगा कि जिसने तलवार

1116
01:18:10,720 --> 01:18:15,360
दी है वो नहीं जानता था कि ये इसका क्या करेगा।

1117
01:18:15,360 --> 01:18:19,360
हां बिल्कुल। ठीक है। मगर जो आपका कुरान का

1118
01:18:19,360 --> 01:18:23,360
जो ईश्वर है वो जानता है कि कौन व्यक्ति क्या करेगा जिसको मैं बना रहा

1119
01:18:23,360 --> 01:18:28,240
हूं। जानता है ना? हां तो उसने कानून बनाया ना

1120
01:18:28,240 --> 01:18:32,400
जैसे नहीं कानून नहीं कानून नहीं वो जानता है कि यह व्यक्ति

1121
01:18:32,400 --> 01:18:36,560
जो है बलात्कार करेगा। मैं उसको बना रहा हूं। तो फिर

1122
01:18:36,560 --> 01:18:40,640
यहां पर उसको मालूम है कि यह ऐसा करने वाला है। अगर

1123
01:18:40,640 --> 01:18:44,640
मालूम है तो फिर उसको दोष लगेगा कि नहीं लगेगा? नहीं लगेगा तो क्यों

1124
01:18:44,640 --> 01:18:48,640
नहीं लगेगा? और कोई ऐसी अगर उसको नहीं मालूम है। अगर

1125
01:18:48,640 --> 01:18:52,720
उसको नहीं मालूम है तो वो सर्वज्ञ कैसे ये बताइए। हां मैं

1126
01:18:52,720 --> 01:18:56,880
वही कह रहा हूं कि आप जैसे ईश्वर के लिए इस बात को ले जा रहे हो ना बहुत लेट लाए

1127
01:18:56,880 --> 01:19:00,560
आप शुरू में ही अगर ये बात कर लेते ना तो वो बातें तो पहले भी हम सुन चुके हैं कर

1128
01:19:00,560 --> 01:19:04,560
चुके हैं। ठीक है तो कोई बात नहीं लेट आ गया।

1129
01:19:04,560 --> 01:19:08,560
ठीक है आप बताइए। ईश्वर जो है सर्व ज्ञानी है उसे

1130
01:19:08,560 --> 01:19:12,560
सब कुछ पता है पहले से है ना पहले से ही पता है तो उसने

1131
01:19:12,560 --> 01:19:16,800
जो हमें यहां डाला है ना इस धरती पे जो भेजा है कुरान के अनुसार

1132
01:19:16,800 --> 01:19:21,120
अलजी खतम

1133
01:19:21,120 --> 01:19:25,280
के हमने मौत को और जिंदगी को तकलीक किया ताकि हम देखे तुम में से कौन

1134
01:19:25,280 --> 01:19:29,520
है अच्छे कर्म करने वाला अच्छे कर्म करने वाला कौन है

1135
01:19:29,520 --> 01:19:33,520
तो अब दो चीजें हो गई अच्छे कर्म करने वाले को वो देखना चाहता है कि तुम

1136
01:19:33,520 --> 01:19:37,600
में इतनी बुराइयों के बीच बीच रहता हुआ भी अपने आप को अच्छाई पर कायम कौन

1137
01:19:37,600 --> 01:19:41,760
रख सकता है? है ना? तो वो ये देखना चाहता है। अब बुराई

1138
01:19:41,760 --> 01:19:45,920
के ऊपर उसने प्रतिबंध लगा दिया कि तुम्हें बुरा नहीं करना है और बता दिए अपने कानून

1139
01:19:45,920 --> 01:19:50,080
के तहत। अब पूरी बात सुनिएगा। उसने बता दिया कि बुराई तुम्हें नहीं करनी

1140
01:19:50,080 --> 01:19:54,080
है। अब फिर भी कोई व्यक्ति बुराई करता है तो उस बुराई का जो

1141
01:19:54,080 --> 01:19:58,480
दंड है ना वो उसको मिलेगा। यहां अगर कानून व्यवस्था अगर ईश्वर के अनुसार

1142
01:19:58,480 --> 01:20:02,480
है तो जिनों के हाथ में कानून व्यवस्था है वो दंड देंगे।

1143
01:20:02,480 --> 01:20:06,480
और अगर कानून व्यवस्था वैसी नहीं है तो मरने के पश्चात तो

1144
01:20:06,480 --> 01:20:10,720
कर्मों का हिसाब होना ही है। जैसे मिसाल के तौर पर किसी एक व्यक्ति

1145
01:20:10,720 --> 01:20:14,880
ने 100 व्यक्ति का कत्ल किया और उस व्यक्ति

1146
01:20:14,880 --> 01:20:15,600
को तो एक ही

1147
01:20:15,600 --> 01:20:19,680
बार कत्ल किया जा सकता है। लेकिन ईश्वर जो है वो

1148
01:20:19,680 --> 01:20:24,960
तो सर्वशक्तिमान है। उसे मौत भी नहीं देगा लेकिन सजा देगा।

1149
01:20:24,960 --> 01:20:29,120
ईश्वर जो है उसे बराबर सजा देगा उन 100 कत्ल की जो

1150
01:20:29,120 --> 01:20:33,120
उसने किए। अब दुनिया में तो हम उसे एक ही बार मार सकते हैं। लेकिन

1151
01:20:33,120 --> 01:20:37,280
ईश्वर उसे बराबर सजा देगा उस 100 कत्ल करने की। और

1152
01:20:37,280 --> 01:20:42,400
अगर वो इस मतलब मतलब कि अगर मैं

1153
01:20:42,400 --> 01:20:46,400
जैसे अब इसमें एक बात समझ में आई कि ईश्वर ने हमारा टेस्ट लेने के लिए हमें यहां

1154
01:20:46,400 --> 01:20:50,560
भेजा। ठीक है? टेस्ट परीक्षा लेने के लिए।

1155
01:20:50,560 --> 01:20:54,640
मौत और जिंदगी को इवॉल्व किया ताकि देखे तुम में से कौन

1156
01:20:54,640 --> 01:20:58,800
है जो अच्छे कर्म करने वाला है। मौत और टेस्ट हो गया ना भाई साहब। उसको क्यों

1157
01:20:58,800 --> 01:21:03,280
खींच रहे हैं? जब शॉर्ट में बात नहीं पड़ रही है तो मौत और जिंदगी

1158
01:21:03,280 --> 01:21:07,360
अरे भाई भाई साहब जब छोटी पंक्ति में बात हो सकती है तो क्यों

1159
01:21:07,360 --> 01:21:11,680
खींच रहे हैं? मैं बोल रहा हूं उसने टेस्ट लेने भेजा। उसमें

1160
01:21:11,680 --> 01:21:16,320
हो गई वो बात। परखा जा सके, जांचा जा सके सब हो गया उसमें।

1161
01:21:16,320 --> 01:21:20,560
तो कह रहा हूं मैंने जो आयत पढ़ी ना उसके अंदर दो लफ्ज भाई साहब एक

1162
01:21:20,560 --> 01:21:24,880
आप एक बार आपने आयत पढ़ दी। बार-बार पूरी-पूरी चीजें बताने की आवश्यकता

1163
01:21:24,880 --> 01:21:28,960
कहां रह गई? मैंने कहा टेस्ट में भेजा। हां ठीक है। आप कट

1164
01:21:28,960 --> 01:21:30,720
करके बता रहे हैं ना इसलिए

1165
01:21:30,720 --> 01:21:34,800
मुझे बोलना पड़ रहा है। जैसे मैंने कहा कि मौत और जिंदगी

1166
01:21:34,800 --> 01:21:39,440
को तकलीक किया ताकि तुम्हें आजमाए

1167
01:21:39,440 --> 01:21:43,600
मौत और जिंदगी को तकलीक किया

1168
01:21:43,600 --> 01:21:48,560
जो दुनिया बनाई है वो आजमाने के लिए बनाई है। हां

1169
01:21:48,560 --> 01:21:52,880
ठीक है। ठीक है। आजमाने के लिए बनाई है। और आजमाने के लिए बनाने

1170
01:21:52,880 --> 01:21:56,880
के कारण जब यहां आते हैं तो फिर वो जो है बाधा नहीं डालता है। उसके

1171
01:21:56,880 --> 01:22:00,880
कर्मों में कि वो बुराई चुन रहा है, अच्छाई चुन रहा है। उसके बाधा नहीं डालता। वो

1172
01:22:00,880 --> 01:22:04,880
उसको करने देता है। बाद में वो देता है। ठीक है? करने नहीं देता है। यहां

1173
01:22:04,880 --> 01:22:09,440
भी एक मिनट के लिए रोकूंगा आपको। करने नहीं देता है वो। उसने नफ्स के अंदर

1174
01:22:09,440 --> 01:22:14,000
ये ख्याल डाला हुआ है कि ये गलत है। इससे बचो।

1175
01:22:14,000 --> 01:22:18,160
और ये भी डाला हुआ है कि ना ये चीज गलत है। ये दोनों ख्याल उसने नफ्स

1176
01:22:18,160 --> 01:22:21,680
के अंदर डाल रखे हैं ऑलरेडी।

1177
01:22:21,680 --> 01:22:26,080
भाई साहब करने देने से मेरा मतलब है कि जैसे मेरी

1178
01:22:26,080 --> 01:22:30,320
मान लीजिए आपकी बिटिया है। ठीक है? हां। और

1179
01:22:30,320 --> 01:22:34,560
छोटी बिटिया है मान लीजिए और उसको कोई मार रहा है आप वहां खड़े

1180
01:22:34,560 --> 01:22:38,800
हैं। और आप उसे रोक सकते हैं। अब अगर आप उसको

1181
01:22:38,800 --> 01:22:42,880
करने दे रहे हैं तो हम ये कहेंगे कि आप करने दे रहे हैं कि आप चेक करना चाहते हैं

1182
01:22:42,880 --> 01:22:47,840
बिटिया अपने बचने के लिए क्या कर रही है। ठीक है? और

1183
01:22:47,840 --> 01:22:52,000
आपने आपने बिटिया के आपने जो जो उसे मार रहा है ना उसको दोनों

1184
01:22:52,000 --> 01:22:56,160
बातें सिखाई है। देख अपनी छोटी बहन को मत मारना। मान लीजिए बड़ा

1185
01:22:56,160 --> 01:23:00,640
भाई मार रहा है। सपोज देख अपनी छोटी बहन को मत मारना

1186
01:23:00,640 --> 01:23:04,720
और जो है छोटी बहन को मारना गलत होता है। ठीक है? दोनों बातें आपने

1187
01:23:04,720 --> 01:23:08,960
उसके मन में सिखाई। मगर फिर भी ये तो कहना पड़ेगा ना कि आप अगर वहां खड़े

1188
01:23:08,960 --> 01:23:13,200
हैं आप उसको रोक सकते हैं मारने से। मगर आप वहां पे करने

1189
01:23:13,200 --> 01:23:17,360
दे रहे हैं उसको। क्योंकि आप रोकने में सामर्थ रखते हैं।

1190
01:23:17,360 --> 01:23:21,360
तो कहना पड़ेगा ना। ये कहना तो पड़ेगा लेकिन उसको यह भी कहना

1191
01:23:21,360 --> 01:23:25,600
पड़ेगा साथ में कि मारने वाला व्यक्ति आपको मार

1192
01:23:25,600 --> 01:23:29,600
किस वजह से रहा है। उस वजह से आपको या तो डिफेंस करना है या सामने वाला

1193
01:23:29,600 --> 01:23:33,600
जो देख रहा है ना वो जाके जैसे अगर मेरे सामने टीचर अगर मेरे

1194
01:23:33,600 --> 01:23:36,720
बच्चे को मारेगा मेरे बच्चे को मारेगा तो मैं

1195
01:23:36,720 --> 01:23:41,600
टीचर से ये पूछूंगा आपने किस गलती पर इसको मारा। तो वो मुझे गलती बताएगा।

1196
01:23:41,600 --> 01:23:45,680
आप भाई साहब ना या तो आप मेरी बातों को जानबूझ के

1197
01:23:45,680 --> 01:23:49,680
नहीं समझ रहे हैं और या फिर ना समझने का नाटक कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं

1198
01:23:49,680 --> 01:23:53,760
वो निर्दोष बहन को मार रहा है। मैं कह रहा हूं वो निर्दोष बहन को मार

1199
01:23:53,760 --> 01:23:57,920
रहा है। दैट्स इट। उसका मन है मारने का। वो पाप कर रहा है। अभी आप

1200
01:23:57,920 --> 01:24:02,080
बगल में खड़े हैं। अभी आप वहां बगल में खड़े हैं। अगर आप उसको मारने दे रहे हैं

1201
01:24:02,080 --> 01:24:06,400
तो फिर ये कहा जाएगा कि नहीं कि आप मारने दे रहे हैं। भले ही आपने उसको बताया

1202
01:24:06,400 --> 01:24:10,560
हो। भले आपने उसको बता दिया गलत है। अरे मैं रोकूंगा उसको

1203
01:24:10,560 --> 01:24:15,520
मेरे सामने हो रहा है। अत्याचार हो रहा है। यह निर्दोष को मार रहा है। अगर आप रोकेंगे

1204
01:24:15,520 --> 01:24:19,600
रोकेंगे नहीं तो ये कहा जाएगा ना कि आप उसको करने दे रहे थे। आप जांच रहे थे बेटी

1205
01:24:19,600 --> 01:24:24,560
अपनी सुरक्षा में क्या करती है या मेरे बताने के बाद बेटा क्या करता है।

1206
01:24:24,560 --> 01:24:28,640
आप आप ये कहेंगे ना मैं जांचने के लिए मैं करने दे

1207
01:24:28,640 --> 01:24:32,960
रहा था। तो उसके अंदर सामने वाले व्यक्ति को देखूंगा ना मैं

1208
01:24:32,960 --> 01:24:38,320
कि क्या वो क्या हक रखता है मारने का? मैंने उसको ट्रेन करने के लिए थोड़ी भेजा है।

1209
01:24:38,320 --> 01:24:42,320
मैंने ट्रेन करने के लिए थोड़ी भेजा है उसको कि जा बेटा तुझे कोई मारे ना तो

1210
01:24:42,320 --> 01:24:46,640
मैं ये देखूंगा कि भाई तेरे अंदर कितनी क्षमता है। क्योंकि

1211
01:24:46,640 --> 01:24:51,040
बच्ची हमें पता है ये बच्ची ये मुकाबला नहीं कर सकती। ये उसका मुकाबला

1212
01:24:51,040 --> 01:24:52,080
नहीं कर सकती।

1213
01:24:52,080 --> 01:24:56,080
लेकिन हम भाई साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं आप क्या करेंगे? मैं ये कह रहा हूं अगर

1214
01:24:56,080 --> 01:25:00,320
आप नहीं रोकते हैं तो उसको कहा जाएगा ना कि आप करने दे

1215
01:25:00,320 --> 01:25:05,760
रहे हैं क्योंकि वो आपकी सामर्थ्य के अंदर की बात है।

1216
01:25:05,760 --> 01:25:09,840
उसको रोकना आपके सामर्थ के अंदर की बात है।

1217
01:25:09,840 --> 01:25:13,840
कि निर्दोष को मारा जा रहा है। आप यू कहिए कि एक ऐसी बच्ची को

1218
01:25:13,840 --> 01:25:18,160
मारा जा रहा है जिसको सिखाया गया है कि तुझे जो है सहन सहन

1219
01:25:18,160 --> 01:25:22,640
करना है। आप यू मत कीजिए निर्दोष को मारा जा रहा है।

1220
01:25:22,640 --> 01:25:26,720
टीचर मार भी मुख्तलिफ होती है। मार बहुत

1221
01:25:26,720 --> 01:25:30,800
तरीके की होती है। अब आप कह रहे हो निर्दोष को कोई मार रहा है तो जुल्म अगर कोई कर

1222
01:25:30,800 --> 01:25:35,280
रहा है तो उस जुल्म के खिलाफ हाथ से अल्लाह के रसूल मोहम्मद रसूल्लाह

1223
01:25:35,280 --> 01:25:39,280
ने कहा है के जालिम का को जुल्म करने से रोक दो। तो

1224
01:25:39,280 --> 01:25:43,360
हम तो रोकेंगे। उसको जुल्म करने से। किसी निर्दोष को अगर कोई मार

1225
01:25:43,360 --> 01:25:46,480
रहा है तो।

1226
01:25:46,480 --> 01:25:50,640
मेरा सवाल आप बार-बार बदलते हैं। आप यहां पर कुछ नहीं

1227
01:25:50,640 --> 01:25:54,880
कर रहे। केवल टॉपिक चेंज कर रहे हैं। मैं ये कह रहा हूं। मैंने परिस्थिति आपको

1228
01:25:54,880 --> 01:25:59,200
ये नहीं बताई। मैंने सुनिए सुनिए। मैंने आपसे ये नहीं पूछा कि आप

1229
01:25:59,200 --> 01:26:03,280
क्या करेंगे? मैंने आपसे ये नहीं पूछा आप क्यों करेंगे। मैंने आपसे एक

1230
01:26:03,280 --> 01:26:07,520
अर्थ पूछा है कि आप एक जगह खड़े हैं। आपके पास

1231
01:26:07,520 --> 01:26:11,600
कोई कारण है वहां पर छोटा मोटा कोई पाप हो रहा है। कोई

1232
01:26:11,600 --> 01:26:15,680
गलत बात हो रही है। मगर आप टेस्टिंग करने के लिए किसी कारण

1233
01:26:15,680 --> 01:26:19,760
से उसमें बीच में नहीं बोल रहे हैं। ठीक है? अब बीच में नहीं

1234
01:26:19,760 --> 01:26:24,320
बोल रहे हैं तो यह कहा जाएगा ना कि आपने यह कार्य होने दिया क्योंकि

1235
01:26:24,320 --> 01:26:29,200
क्योंकि आपके अंदर वह क्षमता थी कि आप उसे रोक सकते थे। बस

1236
01:26:29,200 --> 01:26:33,360
मेरा सवाल ये नहीं है आप क्या करोगे? मेरा सवाल ये नहीं है

1237
01:26:33,360 --> 01:26:37,360
कि आप क्यों क्या करोगे? मेरा सवाल ये है कि अगर आप वहां खड़े

1238
01:26:37,360 --> 01:26:42,240
हैं और आप उसे रोक नहीं रहे हैं तो ये कहा जाएगा ना कि आपने उसको करने दिया।

1239
01:26:42,240 --> 01:26:46,400
हां तो मेरी एक्टिविटी जो होगी परिस्थिति के मुताबिक होगी। आपने तो मेरे विचार

1240
01:26:46,400 --> 01:26:50,720
भी कह दिए कि मैं वही बात आपकी

1241
01:26:50,720 --> 01:26:54,720
मैं आपकी एक्टिविटी नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं। अगर आपने ऐसा किया

1242
01:26:54,720 --> 01:26:58,880
तो उसको क्या कहेंगे? तो आप ही ने दे दिया ना जवाब। अगर

1243
01:26:58,880 --> 01:27:01,600
मैं अगर इसलिए बच्ची को कोई मार रहा है तो मैं अगर

1244
01:27:01,600 --> 01:27:05,680
ये देख रहा हूं कि भाई मैं देखूं बच्ची कितना सहनशीलता है उसके अंदर तो जवाब

1245
01:27:05,680 --> 01:27:09,920
तो आपने ही दे दिया। मैं क्या कर सकता हूं? मैं तो देख रहा हूं बस खड़ा खड़ा।

1246
01:27:09,920 --> 01:27:14,080
तो ये कहा जाता है कि आपने करने दिया। नहीं

1247
01:27:14,080 --> 01:27:18,080
तो आपने कह तो दिया। मुझे देखना है खाली। भाई साहब मैं पूछ क्या रहा

1248
01:27:18,080 --> 01:27:22,160
हूं आपने करने दिया कि नहीं दिया ये बताइए

1249
01:27:22,160 --> 01:27:26,320
आपके हिसाब से तो करने देना पड़ेगा आपके हिसाब से क्या

1250
01:27:26,320 --> 01:27:30,400
है भाई मेरे हिसाब से क्या है मेरे

1251
01:27:30,400 --> 01:27:34,640
हिसाब से यही है अगर किसी निर्दोष को मारा जा रहा है तो मैं देखूंगा अपनी

1252
01:27:34,640 --> 01:27:38,800
ताकत के अनुसार के उसकी हिफाजत कैसे मैं ये नहीं पूछ रहा हूं मैं

1253
01:27:38,800 --> 01:27:42,960
ये नहीं पूछ रहा हूं कि आप क्या करोगे मैं भाई साहब मैं मैं

1254
01:27:42,960 --> 01:27:47,360
भाई साहब मैं भाई साहब ये पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं हूं कि

1255
01:27:47,360 --> 01:27:52,000
अगर आपने नहीं रोका तो उसको क्या कहा जाएगा? बस

1256
01:27:52,000 --> 01:27:56,400
आप कह रहे अगर मैंने नहीं रोका तो है ना तो अब आप बीच में फिर

1257
01:27:56,400 --> 01:28:00,400
अब आप बीच में फिर ये मत बोलना कि आप टेस्ट कर रहे हो उसको

1258
01:28:00,400 --> 01:28:04,400
ये मत बोलना बीच में आपने जो मैं तो आपके भले के लिए बोल

1259
01:28:04,400 --> 01:28:08,560
रहा हूं। चलो ठीक है हटा दो हटा दो नहीं रोका बताओ क्या कहोगे

1260
01:28:08,560 --> 01:28:13,120
आपने जो कहा कि आपके सामने एक निर्दोष बच्ची को मारा जा रहा है

1261
01:28:13,120 --> 01:28:17,280
ना आप क्या करोगे ठीक है ना नहीं निर्दोष नहीं

1262
01:28:17,280 --> 01:28:21,440
क्या करोगे नहीं कह रहा हूं अगर आपने नहीं रोका तो ये कहा जाएगा कि आपने

1263
01:28:21,440 --> 01:28:25,600
होने दिया हां तो देखने वाले यही कहेंगे कि तेरी

1264
01:28:25,600 --> 01:28:30,000
बच्ची को कोई मार रहा था और तूने जो है रोका नहीं अब जो है मेरा आर्गुमेंट

1265
01:28:30,000 --> 01:28:34,240
जो होगा वो उसके ऊपर निर्भर करेगा कि मैंने क्यों नहीं रोका?

1266
01:28:34,240 --> 01:28:38,400
नहीं, नहीं, मैं ये पूछ रहा हूं कि ये तो मानना पड़ेगा ना कि आपकी

1267
01:28:38,400 --> 01:28:42,400
क्षमता थी, आपने नहीं रोका। वो आपके पास रीजन है कि क्यों नहीं रोका? यही तो मैं कह

1268
01:28:42,400 --> 01:28:46,400
रहा हूं इतनी देर से। वो एक गलत बात है वो तो कोई पूछेगा तो बताऊंगा।

1269
01:28:46,400 --> 01:28:50,560
तो मैं पूछ रहा हूं ना क्या पूछ रहे हो? क्यों नहीं रोक? क्यों नहीं

1270
01:28:50,560 --> 01:28:54,560
किया? [हंसी] आप ये पूछ रहे हो ना कभी क्यों नहीं रोका?

1271
01:28:54,560 --> 01:28:58,560
आप यही क्यों नहीं रोका? चलो चलो आगे बढ़ते हैं। आगे

1272
01:28:58,560 --> 01:29:02,880
बढ़ते हैं। समझ गया मैं समझ गया। शब्दों के बहुत ज्यादा है।

1273
01:29:02,880 --> 01:29:06,880
शब्दों में नहीं उलझा रहा हूं। शब्दों में हां उलझा रहे हैं आप। आप आप टू द पॉइंट बात नहीं

1274
01:29:06,880 --> 01:29:10,880
कर रहे हैं। खैर चलिए पॉइंट जो चाह रहे हैं वो बोल लो

1275
01:29:10,880 --> 01:29:15,040
जो आप चाह रहे हैं। नहीं आप आप वो बातें बताएंगे ही नहीं जहां

1276
01:29:15,040 --> 01:29:19,120
पे फंसने वाली बात है। क्लियर नहीं है आप। अरे ना आप क्लियर

1277
01:29:19,120 --> 01:29:23,200
नहीं है। जहां फंसने वाली बात है आप क्लियर नहीं करेंगे। आप सुनिए आप एक

1278
01:29:23,200 --> 01:29:27,280
बात बताइए। ये बात हम कर क्यों रहे हैं? मैं एक बार याद दिला दूं। एक

1279
01:29:27,280 --> 01:29:31,280
मिनट ये बात हम कर क्यों रहे हैं? मैं याद दिला दूं? ये बात हम कर क्यों रहे

1280
01:29:31,280 --> 01:29:32,320
हैं? मैं याद दिला दूं?

1281
01:29:32,320 --> 01:29:36,400
यह बात हम कर इसलिए रहे हैं क्योंकि जब हमने कहा था कि ईश्वर अवतार

1282
01:29:36,400 --> 01:29:40,480
ले सकता है कि नहीं तो आपने कहा था भाई ईश्वर अब तो आप कहोगे बुरे कार्य

1283
01:29:40,480 --> 01:29:44,640
कर सकता है क्या तो बुरे कार्य ईश्वर नहीं करता है तो फिर आप वो भी कह दोगे वहां भी बातें तो

1284
01:29:44,640 --> 01:29:48,720
मैं इसलिए अब ये सिद्ध कर रहा हूं कि ईश्वर के द्वारा बुराई बुरे

1285
01:29:48,720 --> 01:29:52,720
कार्य हो रहे हैं कि नहीं हो रहे हैं ईश्वर झूठ बोलने वालों को

1286
01:29:52,720 --> 01:29:56,800
बना रहा है एक मिनट एक मिनट ईश्वर ये जानता है ये व्यक्ति झूठ बोल रहा

1287
01:29:56,800 --> 01:30:01,120
है इस्लाम का ईश्वर ये जानता है ये व्यक्ति झूठ बोलेगा

1288
01:30:01,120 --> 01:30:05,360
फिर भी उसको बना रहा है। अब उसके पास रीजनिंग कोई भी हो। उसके बाद रीजनिंग

1289
01:30:05,360 --> 01:30:09,600
है। मगर वो जो बुरा करने वाला व्यक्ति है जैसे मान

1290
01:30:09,600 --> 01:30:13,920
लीजिए कि कोई बहुत

1291
01:30:13,920 --> 01:30:18,240
सारे एंकर से भयंकर गुनाह होते हैं दुनिया में

1292
01:30:18,240 --> 01:30:22,560
और जो गुनाह होते हैं वो क्या कहते हैं?

1293
01:30:22,560 --> 01:30:26,560
उस समय जो तकलीफ हो रही है। आपने कहा कि बाद में जो हंटर से मारेगा ये मारेगा। मगर

1294
01:30:26,560 --> 01:30:30,640
उस समय तो तकलीफ हुई ना। तो अगर किसी व्यक्ति

1295
01:30:30,640 --> 01:30:34,880
को मालूम पड़ेगा कि भैया यह जो है

1296
01:30:34,880 --> 01:30:38,880
ये इसने हमें टेस्टिंग के लिए भेजा है और ये चाहता तो इसको

1297
01:30:38,880 --> 01:30:42,960
रोक सकता था मगर मेरे इतने इतने तकलीफ हुई मुझे मगर क्योंकि इसका वो

1298
01:30:42,960 --> 01:30:47,200
टेस्टिंग चल रहा था इसलिए वो बीच में नहीं बोला एक मिनट इसकी वो टेस्टिंग

1299
01:30:47,200 --> 01:30:47,700
चल

1300
01:30:47,360 --> 01:30:51,920
रही थी इसलिए वो बीच में नहीं बोला एक मिनट भाई साहब इसने जो है टेस्टिंग

1301
01:30:51,920 --> 01:30:55,920
एक एक मिनट भाई साहब मैं ऐसा ही कर देता हूं इसने टेस्टिंग करने के लिए जिंदगी

1302
01:30:55,920 --> 01:31:00,000
और मौत को टाइप की चीजों को इवॉल्व किया और फिर हमने उससे जुड़ा

1303
01:31:00,000 --> 01:31:04,160
कनेक्ट किया भेजा जो भी है और फिर उसके बाद मेरे साथ

1304
01:31:04,160 --> 01:31:08,320
ये ये हो रहा था मगर ये उसमें नहीं बोला क्योंकि इसका अपना वो एक

1305
01:31:08,320 --> 01:31:12,560
टेस्टिंग चल रही थी उसकी उसे जरूरत क्या थी क्या आवश्यकता थी जिसके

1306
01:31:12,560 --> 01:31:16,640
कारण मुझे इतना यहां तकलीफ झेलनी पड़ गई और मैं नहीं रोक पाई और

1307
01:31:16,640 --> 01:31:20,800
मेरे साथ ये हुआ तो उसका दोष उसे नहीं लगेगा क्योंकि उसने

1308
01:31:20,800 --> 01:31:24,960
चुना है कि मैं टेस्ट लूं। उसने चुना है और उस टेस्ट का

1309
01:31:24,960 --> 01:31:28,960
रीजन क्या है वो भी अभी हम उस टॉपिक पर बात करेंगे। अभी तक ये

1310
01:31:28,960 --> 01:31:33,440
क्लियर है हो गई बात? हां बोलिए। आपने

1311
01:31:33,440 --> 01:31:37,680
जो बात की जावेद अख्तर साहब वाली कि वो चाहता तो रोक

1312
01:31:37,680 --> 01:31:41,840
सकता था। आपने एक बात कही कि वो चाहता तो रोक सकता था।

1313
01:31:41,840 --> 01:31:46,560
तो उसने रोका क्यों नहीं? उसने होने दिया कि भाई मैं टेस्ट ले रहा हूं।

1314
01:31:46,560 --> 01:31:50,800
है ना? वो टेस्ट ले रहा। आपने ये कह के बात को हटा

1315
01:31:50,800 --> 01:31:54,800
के वो चाहता तो रोक सकता था। तो मैं यह कहना चाहूंगा कि

1316
01:31:54,800 --> 01:31:58,880
ईश्वर ने जो इंसान बनाया है जो कानून व्यवस्था दी है जिस कानून व्यवस्था

1317
01:31:58,880 --> 01:32:02,480
को इंसानों को इंसानों

1318
01:32:02,480 --> 01:32:06,640
को सामने लाना था कि चोर के हाथ काट दिए जाए। हाथ काटने का मतलब

1319
01:32:06,640 --> 01:32:10,720
ये नहीं है कि कोई रोटी चुरा ले तो उसके हाथ काटना। पूरी बात मुकम्मल होने देना। वरना

1320
01:32:10,720 --> 01:32:14,960
फिर आप कहोगे टॉपिक से हट रहे हैं। टॉपिक से नहीं हट रहे। कुछ बातें समझाने के लिए मिसाले

1321
01:32:14,960 --> 01:32:19,120
दी जाती है। तो खाद काटने का मतलब है उसके लिए वो

1322
01:32:19,120 --> 01:32:23,280
चीजें खत्म कर दो कि उसे चोरी करनी ही ना पड़े। तो ईश्वर ने जो कानून दिया

1323
01:32:23,280 --> 01:32:27,680
है ना तो कुछ शक्तियां है जैसे किसी ने किसी की जान

1324
01:32:27,680 --> 01:32:31,680
को कत्ल किया तो उसके एवज में ये बताया कि उसको भी कत्ल

1325
01:32:31,680 --> 01:32:35,760
किया जाएगा या फिर फिया देकर छोड़ दिया जाएगा। ये

1326
01:32:35,760 --> 01:32:39,920
दो ऑप्शन बता दिए। अब ये जो पीड़ित है वो पीड़ित डिसाइड करेगा

1327
01:32:39,920 --> 01:32:44,080
कि इसको क्या सजा मिलनी है। और दूसरी चीज कि पीड़ित

1328
01:32:44,080 --> 01:32:48,240
ये डिसाइड करेगा कि इसको इससे कुछ पैसा लेके इसे छोड़ दिया जाए या

1329
01:32:48,240 --> 01:32:52,560
फिर इसने ये कत्ल किया तो इसके बदले में इसको भी कत्ल किया जाए। ये कानून

1330
01:32:52,560 --> 01:32:57,200
ईश्वर ने दिया है। और इसी कानून को नाफिज यानी

1331
01:32:57,200 --> 01:33:01,600
सामने लाने के लिए इंसानों को ये आदेश दिया है कि तुम ईश्वर के कानून

1332
01:33:01,600 --> 01:33:05,600
के अधीन होकर भी ईश्वर का कानून चलाओ। लेकिन

1333
01:33:05,600 --> 01:33:09,600
हम देखते हैं कि जमीन पर ईश्वर का कानून जो है वो बहुत

1334
01:33:09,600 --> 01:33:13,600
कम जगहों पर है लागू। तो हम देख रहे हैं ऐसे अत्याचार हो रहे हैं

1335
01:33:13,600 --> 01:33:18,000
कि रेपिस्ट जो होते हैं रेप करने वाले कुरान कहता है उसके 100 कोड़े मारो

1336
01:33:18,000 --> 01:33:22,560
और जो ईश्वर को मानने वाले हैं जो ईश्वरीय ज्ञान से मुतमई है

1337
01:33:22,560 --> 01:33:26,560
मुतमई है उनको भी सामने लाओ ताकि वो ऐसी गलती करने से

1338
01:33:26,560 --> 01:33:31,440
डरे और रुके ऐसी गलतियां करने से उसको डरे बाजार

1339
01:33:31,440 --> 01:33:35,520
मारो 100 को उसको तो ये सजा का प्रावधान ईश्वर ने इसीलिए

1340
01:33:35,520 --> 01:33:39,520
बताया है ताकि क्राइम रुके और ईश्वर के यहां तो सजा होनी है कि जो

1341
01:33:39,520 --> 01:33:45,520
कर्म हम यहां कर रहे हैं वो तो कौन?

1342
01:34:14,480 --> 01:34:20,480
कहां चले गए भाई साहब रिजवान जी

1343
01:34:23,280 --> 01:34:29,280
रोकी जी कहां है आप?

1344
01:34:31,760 --> 01:34:36,720
जय श्री राम। हम तो

1345
01:34:36,720 --> 01:34:40,240
सुन रहे हैं। [हंसी]

1346
01:34:40,240 --> 01:34:44,240
उनको ले लीजिए। उनको ले लीजिए। चलिए बाद में चर्चा करते हैं। चलिए चलिए

1347
01:34:44,240 --> 01:34:48,240
ठीक है।

1348
01:34:48,240 --> 01:34:52,320
हां जी। क्या हुआ ये कट कैसे गया? ये

1349
01:34:52,320 --> 01:34:56,560
तो आप ही जानो हमारी ओर से कुछ नहीं। हां

1350
01:34:56,560 --> 01:35:00,560
तो मैं वही बता रहा था कि ईश्वर ऐसा होने क्यों दे? ईश्वर कहां होने

1351
01:35:00,560 --> 01:35:04,880
दे रहा है? ईश्वर ने इंसानों को आदेश दिया है कि जो भी बुराई जमीन पर हो रही है उस जमीन

1352
01:35:04,880 --> 01:35:09,040
पर उस बुराई को रोको। तो ईश्वर ने तो आदेश दिया है। अब

1353
01:35:09,040 --> 01:35:13,200
जैसे सूर निसा की आयत नंबर 75 में कहा गया कि तुम्हें क्या हो गया

1354
01:35:13,200 --> 01:35:17,840
है कि तुम उन लोगों से झगड़ते नहीं। सुनिए पूरी आयत सुनिएगा।

1355
01:35:17,840 --> 01:35:21,920
उन लोगों से हो गई। अब कितनी देर सुनता रहा हूं। एक घंटे सुनता रहा हूं

1356
01:35:21,920 --> 01:35:24,400
क्या?

1357
01:35:24,400 --> 01:35:28,560
दो मिनट आप बोलिए। दो मिनट मैं बोल लूंगा। आपको जो आपका जो पॉइंट ऑफ व्यू है

1358
01:35:28,560 --> 01:35:32,640
इस मिनट बोल भाई साहब। पांच मिनट बोलिए। फिर मैं बोलूंगा। मैं आपको पांच

1359
01:35:32,640 --> 01:35:36,640
मिनट दे रहा हूं। बोलिए सवाल क्या है? मैं बता दूं। सवाल क्या है? मैं

1360
01:35:36,640 --> 01:35:38,400
बता दूं कि हां

1361
01:35:38,400 --> 01:35:43,680
बताओ कि भाई किसी व्यक्ति ने

1362
01:35:43,680 --> 01:35:47,760
कुछ टेस्ट लेने के लिए कोई चीज तैयार की। उससे

1363
01:35:47,760 --> 01:35:51,920
कुछ लोगों को जोड़ा है ना? और वो व्यक्ति वहां

1364
01:35:51,920 --> 01:35:55,920
पर वहां पर जो वो लोग जो जुड़े हैं वो आपस में

1365
01:35:55,920 --> 01:35:59,920
एक दूसरे के साथ कोई पाप कर रहे हैं निर्दोषों के साथ। गलत हो रहा है।

1366
01:35:59,920 --> 01:36:04,000
मगर क्योंकि वो टेस्ट ले रहा है। टेस्ट का कारण क्या है? वो तो एक अलग बात है कि

1367
01:36:04,000 --> 01:36:08,160
उसका कारण क्या था भाई? वो इतना इंपॉर्टेंट टेस्ट था। वो एक अलग बात है। मगर चलो

1368
01:36:08,160 --> 01:36:12,400
वो वो ये व्यक्ति कह रहा है भाई मैं तुम्हारा टेस्ट ले रहा हूं इसलिए तुम्हारा जो बलात्कार हो रहा है अभी

1369
01:36:12,400 --> 01:36:16,720
वो मैं नहीं रोकूंगा। दूसरी बात इसमें यह भी है कि अगर आपने

1370
01:36:16,720 --> 01:36:20,800
सजा दी है। इसमें आपने सजा अगर मुकरर की है कि भाई अगर जो

1371
01:36:20,800 --> 01:36:25,040
बलात्कार होगा उसको 100 को पड़ेंगे तो क्या वो कोड़े पड़

1372
01:36:25,040 --> 01:36:29,040
जाने से उसको जो कष्ट हुआ था वो नदारद मान लिया जाएगा। हुआ

1373
01:36:29,040 --> 01:36:33,040
ही नहीं है मान लिया जाएगा या क्या होगा? उसको जो उस समयकार

1374
01:36:33,040 --> 01:36:37,440
हुई उसकी आत्मा में उसका उसके साथ सामूहिक

1375
01:36:37,440 --> 01:36:41,520
बलात्कार हुआ किसी महिला के साथ इतनी सारी चीजें हुई तो

1376
01:36:41,520 --> 01:36:45,600
क्या बाद में सजा दे देने से वो उनका ना होना मान लिया जाएगा

1377
01:36:45,600 --> 01:36:49,680
क्या ये सब चीजें हैं और क्या ऐसी बात कह के मैंने

1378
01:36:49,680 --> 01:36:53,760
तुम्हें टेस्ट के लिए भेजा ऐसी बात कहते हुए जो सामर्थ्यवान है उसको

1379
01:36:53,760 --> 01:36:57,840
नहीं रोक रहा है वो वहां खड़ा हुआ है वो रोक सकता है अवेलेबल है

1380
01:36:57,840 --> 01:37:02,000
नहीं रोक रहा है फिर भी उसको जो है यह कहा जाए कि तुम दोष से मुक्त हो।

1381
01:37:02,000 --> 01:37:06,160
तुम रोक सकते थे पर तुम दोष से मुक्त हो। क्योंकि वो ये कह रहा है कि मैंने तुम्हारा टेस्ट

1382
01:37:06,160 --> 01:37:10,160
लिया। वो टेस्ट इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? ये भी एक जानने वाला विषय

1383
01:37:10,160 --> 01:37:14,240
है। अब आप बताइए बोलिए। मैं ये कहूंगा आप ये कह रहे हो कि

1384
01:37:14,240 --> 01:37:18,320
कोई व्यक्ति खड़ा है और वो उसके सामने रेप हो रहा है और वो कह रहा है कि नहीं

1385
01:37:18,320 --> 01:37:22,320
मैं रेप होने दूंगा क्योंकि मैं तो टेस्ट लेना चाह रहा हूं।

1386
01:37:22,320 --> 01:37:26,400
तो उस बात व्यक्ति की आ रही है ना तो व्यक्ति अगर वहां खड़ा है उसकी आंखों

1387
01:37:26,400 --> 01:37:30,480
के सामने अगर वो रेप हो रहा है तो वो सारे काम छोड़कर सबसे पहले उस

1388
01:37:30,480 --> 01:37:34,480
रेप करने वालों को रोके उस व्यक्ति

1389
01:37:34,480 --> 01:37:38,480
गलत है यानी वो व्यक्ति गलत है जो नहीं रोक रहा है

1390
01:37:38,480 --> 01:37:42,560
वो व्यक्ति गलत है अब व्यक्ति को व्यक्ति नहीं रोक रहा है

1391
01:37:42,560 --> 01:37:48,240
भाई व्यक्ति को होगा ही गलत क्योंकि व्यक्ति को आदेश अल्लाह ने दिया है कि रोक

1392
01:37:48,240 --> 01:37:52,560
अल्लाह थोड़ी कहेगा हर काम के लिए आपको रोटी खानी है अल्लाह थोड़ी आके तुम्हारे मुंह में रोटी

1393
01:37:52,560 --> 01:37:56,560
डालेगा। हाथ दिए हैं आपको। अरे जिसको अल्लाह का आदेश नहीं पता है।

1394
01:37:56,560 --> 01:38:00,640
जिसको अल्लाह का आदेश नहीं पता है। उसको जिन लोगों को

1395
01:38:00,640 --> 01:38:04,880
ये नहीं पता कि अल्लाह ने क्या कहा है। उसको ये नहीं पता कि अल्लाह ने क्या कहा है। मगर

1396
01:38:04,880 --> 01:38:09,120
फिर भी वो वहां पे रोक सकता है। एक इंसान जो है चीतकार कर रहा है

1397
01:38:09,120 --> 01:38:13,200
और उसको ये नहीं पता अल्लाह ने क्या कहा है। उसके लिए क्या है। वो दोषी है कि नहीं। वो

1398
01:38:13,200 --> 01:38:17,360
रोक सकता। उसके लिए उसके लिए उसकी नियत के अनुसार फैसला

1399
01:38:17,360 --> 01:38:21,440
होगा कि वो उन लोगों से डर के इस झमेले में नहीं

1400
01:38:21,440 --> 01:38:26,080
पड़ना चाह रहा था। मैं डरने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं कह रहा हूं वो बहुत पावरफुल

1401
01:38:26,080 --> 01:38:28,640
है।

1402
01:38:28,640 --> 01:38:32,880
वहां पे अगर सात लोग कर रहे हैं तो वो 200 लोगों से निपट सकता है। इतना पावरफुल

1403
01:38:32,880 --> 01:38:36,880
है। अब बताइए दोषी है कि नहीं? वो

1404
01:38:36,880 --> 01:38:40,960
दोषी है। बिल्कुल। अल्लाह ताला उसको कयामत के दिन पूछेगा हिसाब

1405
01:38:40,960 --> 01:38:44,960
लेगा। अब मैंने दो तीन प्रश्न किए हैं। मैंने दो तीन प्रश्न किए हैं। तीनों का

1406
01:38:44,960 --> 01:38:49,120
जवाब आप दे दीजिए तब मैं बोलूंगा। बोलिए। हां। तो अल्लाह ताला अगर उसके पास पावर

1407
01:38:49,120 --> 01:38:53,120
है रोकने की और वो नहीं रोकता बुराई को उसके सामने हो रही तो अल्लाह

1408
01:38:53,120 --> 01:38:57,120
कयामत के दिन उससे हिसाब लेगा इस चीज का कि तेरे सामने ये बुराई हो रही थी।

1409
01:38:57,120 --> 01:39:01,200
तूने क्यों नहीं क्यों नहीं रोकी? अब वो जो भी है जिसके पास

1410
01:39:01,200 --> 01:39:05,200
पावर है वो इम्तिहान का नाम ले के अगर वो नहीं रोक रहा

1411
01:39:05,200 --> 01:39:09,440
है। जिसके पास पावर है वो दोषी है। ये माना

1412
01:39:09,440 --> 01:39:13,440
आपने। इम्तहान की बात कहां से ऐड कर दी अब?

1413
01:39:13,440 --> 01:39:18,240
अरे मैंने बोला ना मैंने बोला रिवाइंड करके सुना दूं आपको इम्तहान बोला है कि नहीं?

1414
01:39:18,240 --> 01:39:22,240
इम्तहान बोला है कि नहीं सुना दूं आपको? मैं पूछ रहा हूं। मैं

1415
01:39:22,240 --> 01:39:24,160
पूछ रहा हूं इम्तिहान सुना दूं आपको। मैंने

1416
01:39:24,160 --> 01:39:28,400
बोला है कि नहीं बोला? सुनिए। अब आपने बोला कि एक शख्स जिसके

1417
01:39:28,400 --> 01:39:32,640
पास पावर है। है ना? और उसके सामने रेप हो रहा है। है ना? रेप

1418
01:39:32,640 --> 01:39:37,040
और वो 200 आदमी को रोकने की ताकत रखता है। लेकिन वो नहीं रोक रहा है। वो कह रहा है कि मैं तो इम्तिहान

1419
01:39:37,040 --> 01:39:41,040
टेस्ट ले रहा हूं। है ना? वो कह रहा है कि मैं टेस्ट ले रहा

1420
01:39:41,040 --> 01:39:45,040
हूं। मैं रोक तो सकता हूं। लेकिन मैं ये कौन सा टेस्ट है भाई? ये कौन

1421
01:39:45,040 --> 01:39:49,520
सा टेस्ट? हां ये कौन सा टेस्ट है? ये कौन सा टेस्ट है? चलो ठीक। बहुत बढ़िया।

1422
01:39:49,520 --> 01:39:53,600
बहुत बढ़िया। ईश्वर ने तो सही नहीं कहा कि मैं तुम्हारा टेस्ट इस तरह लूंगा। ईश्वर ने

1423
01:39:53,600 --> 01:39:57,840
जो बताया है वो मैं आपको बता देता हूं कि हम तुम्हें आजमाएंगे भूख

1424
01:39:57,840 --> 01:40:02,240
से, भूख से, खौफ से, माल

1425
01:40:02,240 --> 01:40:06,960
की कमी से, नफ्स के नुकसान से। और

1426
01:40:06,960 --> 01:40:11,360
इनहीं चार चीजों के बारे में कुरान में आया है कि शैतान

1427
01:40:11,360 --> 01:40:15,360
वहां पर टेस्ट नहीं है। जहां पर बलात्कार हो रहा है वहां टेस्ट नहीं चल रहा है। ईश्वर जो है वहां

1428
01:40:15,360 --> 01:40:19,760
टेस्ट नहीं ले रहा है। गलत हो रहा है और जो भी सही

1429
01:40:19,760 --> 01:40:24,160
लोग दुनिया में है उनको ये आदेश है कि तुम उस गलत के खिलाफ उसे रोकने

1430
01:40:24,160 --> 01:40:28,400
के लिए एक्टिविटी करो। ये आदेश

1431
01:40:28,400 --> 01:40:32,480
ईश्वर की सत्ता भी है ना वहां पे। उसने ईश्वर

1432
01:40:32,480 --> 01:40:36,640
ने तो एक आपको मार्ग दिखा दिया कि इस मार्ग

1433
01:40:36,640 --> 01:40:39,360
पर चलना है, इस मार्ग पर नहीं चलना है। अब इंसान

1434
01:40:39,360 --> 01:40:43,360
गलत मार्ग पर जा रहा है तो सही मार्ग पे जो लोग हैं वो अगर

1435
01:40:43,360 --> 01:40:47,440
पावरफुल है तो उस गलत मार्ग पर चलना इतना कठिन

1436
01:40:47,440 --> 01:40:51,600
कर दे इंसानों के लिए कि वो गलत मार्ग पर जाने से पहले 10 बार सोचे

1437
01:40:51,600 --> 01:40:55,920
कि कानून सजा देगा। जैसे मिसाल के तौर पे अब सुनिएगा सुनिएगा

1438
01:40:55,920 --> 01:41:00,000
सुनिएगा। मिसाल के तौर पर जैसे हमें पता है कि भाई शराब पीने से

1439
01:41:00,000 --> 01:41:04,000
अक्सर लोगों को कैंसर हो रहा है तो हम कैंसर के

1440
01:41:04,000 --> 01:41:08,400
हॉस्पिटल ना बनवा के सबसे पहले इस शराब को ही बंद कर दें

1441
01:41:08,400 --> 01:41:12,640
क्योंकि ये नुकसान पहुंचा रही है तो ये गवर्नमेंट के अंदर पावर है ना करने

1442
01:41:12,640 --> 01:41:16,960
का तो जो करने का उनके अंदर पावर है अगर वो ना करके बल्कि

1443
01:41:16,960 --> 01:41:21,040
शराब भी बिकने दे और कैंसर के अस्पताल भी खुला दे तो ये चीजें

1444
01:41:21,040 --> 01:41:25,040
गलत है। बोलिए अब आप क्या कहना चाह रहे

1445
01:41:25,040 --> 01:41:29,040
हैं? मेरे बाकी के दो प्रश्न और हैं। वो भी आप आप जवाब दे

1446
01:41:29,040 --> 01:41:34,080
दीजिए उनका। एक बार और एक बार और दोहरा दीजिए। दूसरे

1447
01:41:34,080 --> 01:41:38,480
एक है कि क्या बाद में सजा मुकर मिल जाने से क्या उसके

1448
01:41:38,480 --> 01:41:42,640
उसको जो कष्ट हुआ था उसको जो दिक्कत हुई थी क्या उसका ना

1449
01:41:42,640 --> 01:41:46,720
होना मान लिया जाएगा? कि हुई नहीं ना वो

1450
01:41:46,720 --> 01:41:50,800
नहीं होगा। वो तो देखो किसी की भी पीड़ा जो है ना पीड़ा बहुत बड़ी होती

1451
01:41:50,800 --> 01:41:54,480
है लेकिन टरेरी इंसाफ हर एक को चाहिए कि

1452
01:41:54,480 --> 01:41:58,560
अगर किसी ने मुझे 10 थप्पड़ मारे हैं तो मैं यह उम्मीद रखूंगा कि इसने

1453
01:41:58,560 --> 01:42:02,640
इसको जो इसने मुझे 10 थप्पड़ मारे हैं कष्ट मिला है निर्दोष को

1454
01:42:02,640 --> 01:42:06,720
उसका वो कुछ वापस नहीं आ सकता उसका कोई निवारण वो तो मिला

1455
01:42:06,720 --> 01:42:10,880
वो तो मिला ही है उसका निवारण उसका निवारण सजा से नहीं

1456
01:42:10,880 --> 01:42:14,960
हो सकता पूरा उसकी पूर्ति नहीं हो सकती सजा से तो वो उसके पास जिंदगी

1457
01:42:14,960 --> 01:42:20,400
है ना बाकी की वो वो दर्द दर्द कितनी देर तक रहेगा आप बताइए?

1458
01:42:20,400 --> 01:42:25,360
अरे भैया जिस महिला की इज्जत लूट ली गई है वो आजीवन रहेगा दर्द

1459
01:42:25,360 --> 01:42:29,360
इज्जत लूट जाने का नहीं उसे किसने कहा कि आजीवन

1460
01:42:29,360 --> 01:42:33,360
दर्द लेके बैठी रहे किसने कहा किसने कहा मतलब वो वो

1461
01:42:33,360 --> 01:42:37,440
पवित्र मानी जाएगी उसके बाद भी भाई चार महीने 10 दिन

1462
01:42:37,440 --> 01:42:41,520
में पवित्र वैसे भी हो जाएगी इसकी गरिमा भंग कर दी गई

1463
01:42:41,520 --> 01:42:45,600
जिसका सामूहिक इस तरह से जिसके साथ अत्याचार हो गया आप ये

1464
01:42:45,600 --> 01:42:49,680
कह रहे हो आप ये कह रहे हो जिसके साथ अत्याचार हो हो गया। आप ये कह

1465
01:42:49,680 --> 01:42:53,840
रहे हो कि वो जो क्या कहते हैं चार महीने बाद जो उसको जो एक आत्मा

1466
01:42:53,840 --> 01:42:57,840
में चोट पहुंची है ना कि मेरे साथ ऐसा किया वो चार महीने के

1467
01:42:57,840 --> 01:43:01,840
बाद वो चार महीने के बाद वो उसकी आत्मा की चोट खत्म हो जाएगी।

1468
01:43:01,840 --> 01:43:06,400
जब तक उसे इंसाफ नहीं मिलेगा वो चोट रहेगी उसके साथ जब तक

1469
01:43:06,400 --> 01:43:09,600
हो जाएगी। इंसाफ मिलने पे खत्म हो जाएगी। होगी। चलो

1470
01:43:09,600 --> 01:43:14,160
चलो ठीक ठीक। यहां पे मैं आपका ये लॉजिक

1471
01:43:14,160 --> 01:43:18,240
ये आपका जो लॉजिक है यहां पे बिल्कुल भी एक्सेप्टेबल नहीं है। अब आप कह रहे हैं तो हम

1472
01:43:18,240 --> 01:43:22,240
आगे बढ़ाते हैं चर्चा वो बिल्कुल भी एक्सेप्टेबल नहीं है कि कोई व्यक्ति

1473
01:43:22,240 --> 01:43:26,400
को हमने अगर अगर किसी का किसी महिला के साथ इतनी

1474
01:43:26,400 --> 01:43:30,400
बुरी चीजें हुई है और उसके बाद जो है उसके जो विक्टिम

1475
01:43:30,400 --> 01:43:34,480
है और जो एक्यूज़्ड है उसको हमने सजा दिलवा दी तो उसके साथ जो

1476
01:43:34,480 --> 01:43:38,800
हुआ था वो ट्रॉमा वो ट्रॉमा खत्म हो जाएगा। वो मानसिक पीड़ा जो

1477
01:43:38,800 --> 01:43:44,800
झेल रही है वो मानसिक पीड़ा उसे मानसिक

1478
01:43:46,080 --> 01:43:50,320
ना पूरी बात सुनिए अधूरी बात नहीं पूरी बात सुनिए उस मानसिक

1479
01:43:50,320 --> 01:43:54,560
पीड़ा से उसे ही दोबारा उठना पड़ेगा लड़ना पड़ेगा और ऐसी

1480
01:43:54,560 --> 01:43:58,720
बहुत सी वो लड़ेगी मगर वो जो एक चीज है वो बदल नहीं

1481
01:43:58,720 --> 01:44:03,120
जाएगी ना उसके साथ ऐसा हुआ था वो क्या सोचे

1482
01:44:03,120 --> 01:44:07,840
उस पीड़ा के बारे में उस पीड़ा के बारे में वो क्या सोचे

1483
01:44:07,840 --> 01:44:12,400
जिसने भी दोष किया ना है उसको मान लो सजा मौत दे दी गई

1484
01:44:12,400 --> 01:44:18,400
सजा मौत सजा मौत से आप ये मान रहे हो ना उसका ट्रॉमा खत्म हो जाएगा

1485
01:44:18,720 --> 01:44:22,720
नहीं ईश्वर का इंसाफ तो बाकी है ना ये तो दुनिया का इंसाफ है

1486
01:44:22,720 --> 01:44:26,960
तो ईश्वर के इंसाफ से वो ट्रोमा खत्म हो जाएगा मतलब अगर जो दोषी

1487
01:44:26,960 --> 01:44:31,280
है जो दोषी है उसको बाद में सजा दे दी जाए

1488
01:44:31,280 --> 01:44:35,360
सुनिए किसी के साथ कोई अत्याचार हुआ उसके बाद में उसको सजा दे

1489
01:44:35,360 --> 01:44:39,440
दी जाए जिसने अत्याचार किया है ईश्वर के द्वारा भी दे दी जाए

1490
01:44:39,440 --> 01:44:43,600
तो उसका वो ट्रोमा खत्म हो जाता है। यह बात है। ना ईश्वर पूछेगा

1491
01:44:43,600 --> 01:44:47,680
ना उससे कि तुझे क्या चाहिए? वो जिसको भाई जिस चीज से

1492
01:44:47,680 --> 01:44:51,760
भी उसका ट्रोमा खत्म होगा। चीजें ऐसी होती है जो वापस प्राप्ति नहीं की जा

1493
01:44:51,760 --> 01:44:56,480
सकती वो क्या मांग लेगा उसके बदले? किसी के मां-बाप का मर्डर हो गया। सुनिए

1494
01:44:56,480 --> 01:45:00,560
किसी के माता-पिता का मर्डर हो गया। अब हम कह रहे हैं उसके तेरे मां-बाप का वो

1495
01:45:00,560 --> 01:45:01,200
जो दोषी

1496
01:45:01,200 --> 01:45:05,440
है ना मारने वाले अब उनको जो सजा दिलवा रहे हैं। उससे उसके मां-बाप वापस आ जाएंगे क्या?

1497
01:45:05,440 --> 01:45:10,000
बिल्कुल नहीं आएंगे। उसे हिम्मत रखनी पड़ेगी। अब आप मुझसे कह रहे तुझे क्या चाहिए?

1498
01:45:10,000 --> 01:45:14,160
अब भैया मजबूरी में कोई मांग ले अगर वो मजबूरी में मांग

1499
01:45:14,160 --> 01:45:18,560
ले मुझे उड़ने वाला सुनिए में मांग ले चलो

1500
01:45:18,560 --> 01:45:22,640
सुनो मां-बाप का प्यार तो मिलना नहीं है उड़ने वाला घोड़ा दे दो मुझे तो

1501
01:45:22,640 --> 01:45:26,640
इससे उसका मां बाप का जो ना ये यहां नहीं मांग

1502
01:45:26,640 --> 01:45:30,720
सकता वहां तो इंसाफ मांगेगा ना वहां तो उसके मां-बाप भी होंगे मां-बाप भी होंगे

1503
01:45:30,720 --> 01:45:34,960
और जिन्होंने मारा होगा वो भी होगा दोनों होंगे कयामत के दिन

1504
01:45:34,960 --> 01:45:39,200
जो होगा ना वो मां-बाप भी होंगे उसके और जिन्होंने मारा है वो भी होंगे

1505
01:45:39,200 --> 01:45:43,200
सब होंगे कुल मिला के आपने इस बात का जवाब नहीं दिया कि वो जो उसको कष्ट

1506
01:45:43,200 --> 01:45:47,280
हुआ है उसका क्या निवारण दिया कष्ट का निवारण

1507
01:45:47,280 --> 01:45:51,600
नहीं दिया मेरे हिसाब से आपकी जानकारी में दिया आपकी जानकारी

1508
01:45:51,600 --> 01:45:57,600
में दिया बताइए आप दे तो

1509
01:45:59,120 --> 01:46:03,120
आपने किसी को कष्ट हुआ है किसी के साथ कष्ट हुआ है ठीक है

1510
01:46:03,120 --> 01:46:07,360
किसी को कष्ट हुआ आपने कहा हम उसको सजा दे देंगे बाद में

1511
01:46:07,360 --> 01:46:11,520
जबकि आप में आप उसको रोक सकते

1512
01:46:11,520 --> 01:46:15,600
थे मगर आपने नहीं रोका नहीं रोका तो मैं बता रहा हूं ना

1513
01:46:15,600 --> 01:46:19,680
उस व्यक्ति को तो ईश्वर ने आदेश दिया था कि रोकना चाहिए उस

1514
01:46:19,680 --> 01:46:23,680
व्यक्ति को ईश्वर ने ही आदेश दिया कि रोकना चाहिए मैं इसी पे आ रहा हूं मैं इसी पे

1515
01:46:23,680 --> 01:46:28,480
आ रहा हूं भाई साहब मैं इसी पे आ रहा हूं ट्रोमा खत्म कैसे होगा ये हमें नहीं पता

1516
01:46:28,480 --> 01:46:32,640
अब आगे उसी पे आ रहा हूं उसने आदेश दिया था ट्रोमा से

1517
01:46:32,640 --> 01:46:36,800
गुजरता है हर इंसान गुजरता है कोई ना कोई साइकोलजिकल चोट पड़ती

1518
01:46:36,800 --> 01:46:40,800
है लेकिन ईश्वर के लिए के गुजरने से और ट्रॉमा का ना होना

1519
01:46:40,800 --> 01:46:45,120
सिद्ध नहीं होता है।

1520
01:46:45,120 --> 01:46:49,120
क्योंकि दुनिया में सब दुखी है इसलिए हम ले क्योंकि दुनिया

1521
01:46:49,120 --> 01:46:53,120
में सब दुखी है। इसलिए हम ये मान ले कि कोई व्यक्ति है जो हमारा टेस्ट ले रहा

1522
01:46:53,120 --> 01:46:57,360
है। वो वहां पे खड़ा था। उसने हमारे साथ ऐसा ऐसा होने दिया। अब हमें

1523
01:46:57,360 --> 01:47:01,520
क्योंकि ट्रॉमा हो रहा है। एक तो दुनिया में सबको होता है। इसलिए हम उस व्यक्ति को दोषी ना माने जो

1524
01:47:01,520 --> 01:47:05,680
हमारा टेस्ट ले रहा था। पहले तो दुनिया में सब कैसे दुखी

1525
01:47:05,680 --> 01:47:10,400
है? मुख्तलिफ हालतों में है सब

1526
01:47:10,400 --> 01:47:14,560
हालत में अभी मैं अपना अभी मैं अपना प्रश्न कर रहा हूं। आपने माना

1527
01:47:14,560 --> 01:47:18,560
आपने आपने माना अभी मैं अपना प्रश्न कर

1528
01:47:18,560 --> 01:47:23,520
रहा हूं। आपने माना आपने ये माना सुनो आपने ये माना

1529
01:47:23,520 --> 01:47:27,840
कि क्या कहते हैं ये आपने माना

1530
01:47:27,840 --> 01:47:31,280
ये

1531
01:47:31,280 --> 01:47:35,280
बता रहा हूं। आपने ये माना कि अगर सामर्थ्य है और

1532
01:47:35,280 --> 01:47:39,280
वह रोक सकता है और अगर उसने किसी टेस्ट का बहाना लेकर के नहीं

1533
01:47:39,280 --> 01:47:43,280
रोका तब भी उसको जो है फिर उसको जो

1534
01:47:43,280 --> 01:47:47,520
है दोषी माना जाएगा। अब यहां पे आपने दो बात बोली

1535
01:47:47,520 --> 01:47:53,040
एक भाई साहब प्रश्न पूरा होने प्रश्न पूरा होने दीजिए। अब

1536
01:47:53,040 --> 01:47:57,200
नहीं तो मेरा प्रश्न पूरा कहां हुआ? एक तो उसको दोषी माना

1537
01:47:57,200 --> 01:48:01,280
जाएगा। उससे पूछा जाएगा भाई ऐसा कौन सा टेस्ट था जो तू ले रहा है? तो अब

1538
01:48:01,280 --> 01:48:05,360
ये मुझे बता दीजिए टेस्ट की क्या आवश्यकता है जिसके लिए

1539
01:48:05,360 --> 01:48:09,600
लोगों को ट्रोमा से होकर भी गुजरना पड़े तो गुजरने दिया जाए। क्या टेस्ट है? ये

1540
01:48:09,600 --> 01:48:13,600
आपके किसने कहा कि वो ट्रोमा में जो है ना इस तरह से जो आप

1541
01:48:13,600 --> 01:48:17,680
बता रहे हो पहली चीज तो आप जो बता रहे हो कि ट्रोमा

1542
01:48:17,680 --> 01:48:21,680
के अंदर मान लो किसी का रेप हो गया, बलात्कार हो गया और वो ट्रोमा में

1543
01:48:21,680 --> 01:48:26,320
चले गए तो ईश्वर कह रहा है कि नहीं मैं टेस्ट ले रहा हूं। ये आपको किसने बताया?

1544
01:48:26,320 --> 01:48:30,320
भाई किसी मुसलमान ने ये कहा के भाई ऐसे औरत

1545
01:48:30,320 --> 01:48:34,400
आप बता दीजिए भाई साहब। आप बता दीजिए क्या मामला है? मैं वही कह रहा

1546
01:48:34,400 --> 01:48:38,560
हूं कि जहां भी जुल्म और अत्याचार हो रहे हैं तो तमाम

1547
01:48:38,560 --> 01:48:42,800
इंसानियत जो अपने आप को सही समझती है,

1548
01:48:42,800 --> 01:48:46,480
इंसानियत में समझती है उन्हीं इंसानों को तो हिदायत की जा रही है ईश्वर

1549
01:48:46,480 --> 01:48:51,520
की तरफ से। ईश्वर हिदायत दे सकता है। ये माना जाए, बचा नहीं सकता।

1550
01:48:51,520 --> 01:48:56,240
इस्लाम का ईश्वर हिदायत दे सकता है, बचा नहीं सकता। ये माना जाए।

1551
01:48:56,240 --> 01:49:00,560
डाय से ही तो बचाया जा रहा है। भाई हिदायत नहीं होगी तो

1552
01:49:00,560 --> 01:49:04,720
बिना हिदायत के बिना किसी और को निमित्त बनाए

1553
01:49:04,720 --> 01:49:08,800
स्वयं से बिना ले सकता है कि नहीं पहले आप डिफाइन

1554
01:49:08,800 --> 01:49:13,280
करो कि बिना हिदायत के बचोगे कैसे बिना हिदायत के कैसे

1555
01:49:13,280 --> 01:49:17,360
जब वो सुनो जब वो पृथ्वी सूर्य चंद्रमा इत्यादि को रोकने की ताकत

1556
01:49:17,360 --> 01:49:21,520
रखता है तो वो जो गलत लोग गलत कर रहे हैं ना उनको आराम से रोक सकता है

1557
01:49:21,520 --> 01:49:25,600
हमारे पास एक वाजिब कारण है कि उसको दोष क्यों नहीं लगेगा पर वो

1558
01:49:25,600 --> 01:49:30,480
कारण आप पे लागू नहीं होता इस्लाम के ऊपर

1559
01:49:30,480 --> 01:49:34,640
सही है। है ना? अब जो कानून व्यवस्था है उससे सवाल किया

1560
01:49:34,640 --> 01:49:38,640
जाएगा कि ये कानून व्यवस्था इंसानों ने जो बना रखी है वो ईश्वर

1561
01:49:38,640 --> 01:49:42,640
के अनुरूप अभी मैं पूछ रहा हूं। मैं आपकी चीजें समझ गया। दर्शक देख रहे हैं वो समझ

1562
01:49:42,640 --> 01:49:48,400
जाएंगे किसने क्या बोला? अभी मैं आपसे ये पूछ रहा हूं। वो टेस्ट की क्या आवश्यकता है?

1563
01:49:48,400 --> 01:49:52,400
वो टेस्ट की क्या आवश्यकता है? किस टेस्ट की? जो ईश्वर

1564
01:49:52,400 --> 01:49:56,480
ले रहा है। हां। ईश्वर ले रहा है तो ईश्वर किस

1565
01:49:56,480 --> 01:50:00,480
चीज का टेस्ट लेता है? आपको यह भी पता होना चाहिए कि ईश्वर किन-किन

1566
01:50:00,480 --> 01:50:04,240
चीजों से टेस्ट लेता है?

1567
01:50:04,240 --> 01:50:08,320
भाई साहब फिर गायब हो गए। इनको केवल आप पूरी वो

1568
01:50:08,320 --> 01:50:12,560
चर्चा देख लो। इनको केवल सवाल से बचना है। इन्होंने ये ये

1569
01:50:12,560 --> 01:50:18,000
सीखा है कि सवाल से किस तरीके से बचा जाए। वो सीधा उत्तर नहीं देंगे।

1570
01:50:18,000 --> 01:50:22,240
ठीक है? यही सीखा है आपको टू द पॉइंट बात किस

1571
01:50:22,240 --> 01:50:26,400
किस किस तरीके से टेस्ट लेता है यह कौन सी बात है भाई

1572
01:50:26,400 --> 01:50:31,360
हमने पूछा टेस्ट ले क्यों रहा है

1573
01:50:31,360 --> 01:50:35,360
हमने पूछा कि टेस्ट ले क्यों रहा है अब वो कहेंगे किस-किस तरीके से ले मैं कह रहा

1574
01:50:35,360 --> 01:50:39,360
हूं किसी भी तरीके से किस ले रहा हो टेस्ट जो है

1575
01:50:39,360 --> 01:50:43,520
किसी भी तरीके से ले रहा हो आप तो यह बताओ वो ले क्यों रहा है टेस्ट जिसकी वजह

1576
01:50:43,520 --> 01:50:48,000
से किसी को बलात्कार के ट्रॉमा में जाना पड़ रहा है किसी

1577
01:50:48,000 --> 01:50:52,160
को माता-पिता की हत्या देखने के ट्रॉमा में जाना पड़ रहा है। ना जाने

1578
01:50:52,160 --> 01:50:56,240
कितने प्रकार के दुख को देखने के ट्रॉमा से गुजरना पड़ रहा है।

1579
01:50:56,240 --> 01:51:02,240
तो वो ऐसा टेस्ट ले क्यों रहा है? उसकी आवश्यकता क्या है?

1580
01:51:04,320 --> 01:51:07,760
आपकी आवाज नहीं आ रही।

1581
01:51:07,760 --> 01:51:12,080
हेलो हां जी बोलिए। आपने

1582
01:51:12,080 --> 01:51:16,960
ही तो म्यूट कर रखा है। यहां लिखा हुआ है द होस्ट म्यूटेड। हां बोलिए।

1583
01:51:16,960 --> 01:51:21,040
हां तो मैं यह कह रहा हूं उसको जरूरत क्या है? आप यह कह रहे हो जरूरत क्या

1584
01:51:21,040 --> 01:51:25,840
है? तो भाई उसको तो कोई जरूरत नहीं थी कि तुम्हारा टेस्ट

1585
01:51:25,840 --> 01:51:29,920
टेस्ट की उस टेस्ट कीेंस क्या है? क्याेंस यही

1586
01:51:29,920 --> 01:51:34,080
है कि हम वापस उस जगह पहुंच जाए जहां शांति अमन

1587
01:51:34,080 --> 01:51:38,240
कोई दुराचार ना हो। लेकिन उसके लिए हम आए

1588
01:51:38,240 --> 01:51:42,400
इसलिए कि टेस्ट हो रहा है। मेरी बात सुनिए। हम आए इसलिए टेस्ट हो रहा है।

1589
01:51:42,400 --> 01:51:46,400
अगर टेस्ट ना होता तो हम आते क्यों? आते क्यों? तो वही

1590
01:51:46,400 --> 01:51:50,720
तो मैं बताना चाह रहा हूं आपको। हम आए कैसे? जैसे हम कुरान पढ़ेंगे तो पता चलेगा

1591
01:51:50,720 --> 01:51:54,720
ईश्वर ने कहा कि उतरो जमीन पर। है ना? वही

1592
01:51:54,720 --> 01:52:00,080
तुम्हें मरना है तो जमीन पर जब उतारा गया तो जमीन से पहले भी कहीं होंगे।

1593
01:52:00,080 --> 01:52:04,080
कहीं होंगे। जमीन से पहले भी कहां से वो

1594
01:52:04,080 --> 01:52:08,080
मैं आपको बताऊंगा। यहां जमीन पे तो जमीन से तो हमारी जो क्रिएशन हुई है वो

1595
01:52:08,080 --> 01:52:12,160
बॉडी की हुई है ना। फिर नब्स पे बात आ जाएगी। आपको पीछे आप

1596
01:52:12,160 --> 01:52:16,160
थोड़ा सा पीछे से शुरू कर लीजिए। शुरू से वो जमीन पे कैसे आए वो वहां से शुरू

1597
01:52:16,160 --> 01:52:20,160
करिए। हां वहां से शुरू करते हैं ना तो सबसे पहले कुरान की

1598
01:52:20,160 --> 01:52:24,480
मैं कुछ आयत आपको बताता हूं केवल केवल नंबर बोलिएगा

1599
01:52:24,480 --> 01:52:29,120
आयत को पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। उससे समय बचेगा केवल नंबर बोल दीजिए बस

1600
01:52:29,120 --> 01:52:33,120
देखो नंबर तो मैं बोल दूंगा लेकिन मैं जो समझाना चाह रहा हूं वो क्या

1601
01:52:33,120 --> 01:52:37,120
आप समझ पढ़ने की आवश्यकता तब है सुनिए पढ़ने की आवश्यकता तब है जब मैं

1602
01:52:37,120 --> 01:52:41,120
आपको काउंटर करूं नहीं कुरान के फला नंबर में ये नहीं लिखा है आप नंबर

1603
01:52:41,120 --> 01:52:45,120
बोलिए समय बचाइए मैं वही कह रहा हूं कि जैसे कुरान अरबी

1604
01:52:45,120 --> 01:52:49,360
में व्याख्या जरूरी है। व्याख्या अरे भाई साहब तो व्याख्या बोलिए ना नंबर

1605
01:52:49,360 --> 01:52:54,000
के बाद उसमें जो अर्थ है वो बोलिए क्योंकि वो उर्दू में बोलना वेस्ट हो जाता है।

1606
01:52:54,000 --> 01:52:58,080
हां चलो ठीक है अरबी नहीं बोलता हूं आपको सीधा व्याख्या हिंदी में ही बोलता हूं

1607
01:52:58,080 --> 01:53:01,600
ठीक है। ईश्वर ने कहा कि याद करो जब हमने मलाइका

1608
01:53:01,600 --> 01:53:06,160
से कहा ये हमें याद कराया जा रहा है कि याद करिए जब हमने मलाइका से कहा

1609
01:53:06,160 --> 01:53:10,960
वो सुरा सुरा और वो सूर आयत का नंबर बोल दीजिए।

1610
01:53:10,960 --> 01:53:16,960
एक सेकंड फिर आयत नहींहा

1611
01:53:19,280 --> 01:53:23,920
चलो ठीक है मैं जो बोल रहा हूं उसका वो रेफरेंस जो भी मांगेगा उसको दे दूंगा मैं

1612
01:53:23,920 --> 01:53:28,240
जो बता रहा हूं वो कुरान की मुख्तलिफ सूरतों में आया है ये वाकया

1613
01:53:28,240 --> 01:53:32,240
के याद करो जब हमने मलाइका मलाइका मलाइका से कहा

1614
01:53:32,240 --> 01:53:36,560
कि मैं मिट्टी के सलाल से बसर

1615
01:53:36,560 --> 01:53:40,640
तकलीक करने वाला हूं बनाने वाला हूं तो जब उसको मैं

1616
01:53:40,640 --> 01:53:44,640
दुरुस्त कर दूं और उसमें रूह डाल दूं, रूह फूंक

1617
01:53:44,640 --> 01:53:49,600
दूं तो तुम उसके लिए सजदा करना।

1618
01:53:49,600 --> 01:53:53,680
तो ये एक पूरा प्रोसेस है जमीन पर चला है। आपने मुझे बोलने

1619
01:53:53,680 --> 01:53:57,760
दे दीजिएगा क्योंकि आपने बोला है कि पूरा पीछे से चलिए पीछे से चलिए तो मैं

1620
01:53:57,760 --> 01:54:01,920
बता रहा हूं के ईश्वर ने कहा याद करिए जब हमने मलाइका से कहा कि

1621
01:54:01,920 --> 01:54:06,480
मैं मिट्टी से बस तकलीक करने वाला हूं। जब उसको दुरुस्त कर दूं ठीक-ठाक कर दूं

1622
01:54:06,480 --> 01:54:10,640
और उसमें रूह दूं। यानी ठीक-ठाक करने के बाद उसमें रूह डाल दूं।

1623
01:54:10,640 --> 01:54:14,880
रूह डाल दूं। यानी उसकी क्रिएशन की नॉलेज डाल दूं। मकसद को डाल दूं कि किस मकसद

1624
01:54:14,880 --> 01:54:16,800
के तहत तू क्रिएट किया गया है। उस

1625
01:54:16,800 --> 01:54:20,800
मकसद को जब उसके अंदर मैं डाल दूं, उसको बता दूं

1626
01:54:20,800 --> 01:54:24,800
तो फिर फरिश्तों से मलाइका से कहा जा रहा है उसके लिए सजदा

1627
01:54:24,800 --> 01:54:28,800
करना। अब आ जाइए आप कुरान की दूसरी सूर बकरा की

1628
01:54:28,800 --> 01:54:33,040
आयत नंबर 29 एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसको मैं थोड़ा क्लिटी

1629
01:54:33,040 --> 01:54:37,600
से समझ लूं कि हम लोग किसी

1630
01:54:37,600 --> 01:54:41,680
रूप में है सारे इंसान वहां पर उनको

1631
01:54:41,680 --> 01:54:44,960
क्रिएट किया

1632
01:54:44,960 --> 01:54:49,040
उसने ईश्वर ने क्या किया मैं समझ नहीं पाया इसमें आपने क्या कहा नहीं

1633
01:54:49,040 --> 01:54:53,440
समझा ना तो इसके लिए मैं फिर हां तो मैं कह रहा हूं ये याद दिलाया

1634
01:54:53,440 --> 01:54:58,160
जा रहा है मैं बताऊं आप जो वो रेफरेंसेस है

1635
01:54:58,160 --> 01:55:02,240
रेफरेंसेस देते हुए और कुरान की आयत का अर्थ पढ़ते

1636
01:55:02,240 --> 01:55:06,240
हुए वो जो चीज है ना रेफरेंसेस आप अलग से दे दीजिएगा मैं डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगा

1637
01:55:06,240 --> 01:55:10,320
कि इसमें कौन-कौन सी आयतों की बात की है। आप सीधे ऐसे ऐसे बताइए

1638
01:55:10,320 --> 01:55:15,040
कि भैया अल्लाह ने कुरान के ईश्वर ने

1639
01:55:15,040 --> 01:55:19,040
जो है सबसे पहले इंसानों को बनाया फलाने उसमें ये कहा

1640
01:55:19,040 --> 01:55:23,040
कि मैं तुझे इसलिए बना रहा हूं। उसके बाद फिर वो ऐसे ऐसे करके धरती पे चले

1641
01:55:23,040 --> 01:55:27,200
गए। आप जो है रेफरेंसेस दे के अभी बात मत करिए। अगर मैं पूछूं कि

1642
01:55:27,200 --> 01:55:31,440
रेफरेंस इसका दो तो आप दे दीजिएगा। इससे क्या होगा? समय बचेगा और मैं

1643
01:55:31,440 --> 01:55:31,940
चीजों को

1644
01:55:31,840 --> 01:55:35,840
सीधे समझूंगा। अभी आप पहले उर्दू अभी तो आप उर्दू में नहीं पढ़ रहे हैं मगर

1645
01:55:35,840 --> 01:55:40,080
पहले आप उर्दू में पढ़ेंगे। फिर उसकी एग्जैक्ट हिंदी पढ़ेंगे। अब हिंदी

1646
01:55:40,080 --> 01:55:44,080
पढ़ने से भी समझ में नहीं आया। आप सीधे वो व्याख्या बताइए। वो

1647
01:55:44,080 --> 01:55:48,080
व्याख्या क्या है? कि क्या हुआ था जो जो है यहां इम्तहान में आ गए।

1648
01:55:48,080 --> 01:55:52,240
जी हां तो व्याख्या ही बता रहा हूं मैं जैसे ये बात अभी आपके

1649
01:55:52,240 --> 01:55:56,800
नहीं समझ में आई है ना जो मैंने आयत को कोट किया हिंदी के अंदर आपके सामने

1650
01:55:56,800 --> 01:56:00,800
वो नहीं आई आप दोबारा से मुझे मुझे आप एक जैसे कहानी सुनाते ना

1651
01:56:00,800 --> 01:56:05,120
एक बार ऐसा था ऐसा हुआ था फिर ऐसा ऐसे बता दो कि कैसे

1652
01:56:05,120 --> 01:56:09,680
बनाई कैसे बनाई इम्तिहान में कैसे पता अच्छा

1653
01:56:09,680 --> 01:56:14,240
कहानी के तौर पे बता दूं आपको हां ठीक

1654
01:56:14,240 --> 01:56:18,240
है कहानी के तौर पे बताता हूं लेकिन शब्दों के आधार पे बताऊंगा ताकि कि आप बीच में

1655
01:56:18,240 --> 01:56:22,240
सवाल भी कर लो कि भाई कहां लिखता शब्दों का आधार मत बताइए आप तो आपकी

1656
01:56:22,240 --> 01:56:26,320
जो कहानी है वो बया कर दीजिए बस कहानी नहीं है ना क्योंकि वो

1657
01:56:26,320 --> 01:56:30,400
शब्दों का व्याख्या मैंने बोला ना व्याख्या करूंगा तो मैं मुझे करने दीजिए

1658
01:56:30,400 --> 01:56:35,120
मैंने सबूत मांगू तो आप सब शब्द शब्द दीजिए ना आयत का

1659
01:56:35,120 --> 01:56:39,520
तो नहीं मांग रहे है सबूत लेकिन मैं भी जो बोलूंगा मैं भी तो ईश्वर को का वो हूं ना

1660
01:56:39,520 --> 01:56:43,520
के मैं बोल रहा हूं जो वाकई में उसी ज्ञान को बता रहा हूं या अपनी मर्जी से बता रहा हूं तो

1661
01:56:43,520 --> 01:56:47,200
मैं भी तो अभी आप अभी आप अपने मुस्लिम

1662
01:56:47,200 --> 01:56:51,360
और मुस्लिमों को इस्लाम को मानने वालों को यहां वो क्या

1663
01:56:51,360 --> 01:56:55,600
कहते हैं ये सिद्ध करने नहीं आए कि मैं इस्लाम को मानने वाला हूं। अभी तो आप ये करने

1664
01:56:55,600 --> 01:56:59,840
आए हैं कि आप इस्लाम के पक्ष से इस्लाम का जो कहा गया ज्ञान है

1665
01:56:59,840 --> 01:57:04,320
उसको आप सिद्ध करने आए वो सही ज्ञान है। ठीक है? अब मैं आपसे

1666
01:57:04,320 --> 01:57:08,320
मैं उस पर काउंटर करने बैठा हुआ हूं। ठीक है? तो मैं आपसे ये पूछ रहा

1667
01:57:08,320 --> 01:57:12,320
हूं कि भाई ये कैसे आके फंसे? तो आप अपनी सीधे धारा प्रवाह जो

1668
01:57:12,320 --> 01:57:16,480
उसका वो है व्याख्यान वो बता दीजिए कि कैसे आगे बस हां

1669
01:57:16,480 --> 01:57:20,640
तो बस आप थोड़ी देर खामोश रहिएगा मैं बता रहा हूं ठीक है

1670
01:57:20,640 --> 01:57:24,800
मैंने जैसा कि आयत में बताया कि मलाइका मलाइका वर्ड में समझते

1671
01:57:24,800 --> 01:57:28,320
हैं आप

1672
01:57:28,320 --> 01:57:32,480
देखो मुझे आप आपको ही तो समझाना है कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं भाई साहब

1673
01:57:32,480 --> 01:57:36,800
मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं हमें ऑब्जेक्ट्स के नाम क्या

1674
01:57:36,800 --> 01:57:41,840
थे क्या नहीं थे इससे मतलब नहीं आप मुझे

1675
01:57:41,840 --> 01:57:45,920
ना नाम नहीं है कोई बात आपके अगर समझ में नहीं आएगी तो फिर बात करने का क्या फायदा

1676
01:57:45,920 --> 01:57:49,920
आप बताइए आपको जो बोलना है बोलिए मैं सुन रहा हूं बोलिए अब वही जब मैं

1677
01:57:49,920 --> 01:57:54,000
आपसे पूछ रहा हूं मलाइका जो है ना जैसे आप लोग देवता बोलते हैं मुझसे मुझसे

1678
01:57:54,000 --> 01:57:58,000
कुछ मत पूछिए आप अपनी जो बात कहनी है वो बता दीजिए सीधे अगर मुझे कोई

1679
01:57:58,000 --> 01:58:02,080
शब्द समझ में नहीं आएगा अगर मुझे कोई शब्द समझ में नहीं आएगा तो मैं उसको

1680
01:58:02,080 --> 01:58:06,080
पूछ लूंगा कि ये नहीं समझ में आया मलाइका शब्द समझ

1681
01:58:06,080 --> 01:58:10,160
में आ गया ना मलाइका नहीं नहीं तो मैं वही बोल रहा हूं

1682
01:58:10,160 --> 01:58:14,640
कि आप पूछ नहीं रहे हो। मैं बता देता हूं। मलाइका जैसे आप लोग देवता बोलते हैं ना

1683
01:58:14,640 --> 01:58:19,040
जैसे आप लोग देवता बोलते हैं हम मलाइका बोलते हैं। अरबी वर्ड मलाइका

1684
01:58:19,040 --> 01:58:23,360
का मतलब जिनको ईश्वर ने कुछ इख्तियारात दे रखे हैं। कुछ पावर्स दे रखी है।

1685
01:58:23,360 --> 01:58:28,080
है ना ईश्वर ने तो उन्हें हम मलाइका बोलते हैं। तो ये मलाइका से कहा

1686
01:58:28,080 --> 01:58:32,480
गया कि मैं मिट्टी से तीन से तीन से

1687
01:58:32,480 --> 01:58:36,560
एक बसर एक नहीं मतलब बसर बनाने वाला हूं। तो जब उसको मैं

1688
01:58:36,560 --> 01:58:40,640
दुरुस्त कर दूं यानी उसकी मुख्तलिफ जो बॉडी लैंग्वेज है उसकी

1689
01:58:40,640 --> 01:58:43,440
क्रिएशन उसकी दुरुस्त हो जाए तो

1690
01:58:43,440 --> 01:58:47,600
और फिर उसके अंदर मैं रूह दूं रूह दूं यानी उसे

1691
01:58:47,600 --> 01:58:52,480
मैं अपना ज्ञान भी डाल दूं उसके अंदर तो तुम सब उसके लिए क्या करना

1692
01:58:52,480 --> 01:58:56,640
सजदा करना इतनी बात समझ में आई एक एक मिनट एक

1693
01:58:56,640 --> 01:59:01,120
देवता है एक देवता है कई देवता है कई देवता है

1694
01:59:01,120 --> 01:59:05,440
कई देवता है कई देवता है मैं उसको मिट्टी से दुरुस्त

1695
01:59:05,440 --> 01:59:10,080
कर दूं रिपेयर नाट से नहीं

1696
01:59:10,080 --> 01:59:14,080
उनसे देवताओं से ये बात कही कि मैं मिट्टी

1697
01:59:14,080 --> 01:59:19,600
से बनाने वाला हूं मट्टी से मट्टी तो समझ रहे हैं आप कि मिट्टी से

1698
01:59:19,600 --> 01:59:23,680
हमारी क्रिएशन जो हुई है इंसान की इंसान की जो क्रिएशन हुई है मट्टी

1699
01:59:23,680 --> 01:59:27,760
से मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं हां मिट्टी से

1700
01:59:27,760 --> 01:59:31,840
इंसान बनाने वाला हूं। अब ये ऐसे बोलो ना यार सीधे सीधे कि मैं मिट्टी से

1701
01:59:31,840 --> 01:59:35,840
इंसान बनाने वाला हूं। पूरा ही तो मैं वही शब्द बोल

1702
01:59:35,840 --> 01:59:39,840
ही नहीं रहे। तो मैं अरबी में जो लिखा है वो बोल रहा हूं। इंसान नहीं लिखा है।

1703
01:59:39,840 --> 01:59:43,840
बस लिखा है। तो कह रहा हूं जो है आप अरबी में जो लिखा है वो मत

1704
01:59:43,840 --> 01:59:48,080
बताइए। आप जो उसका निचोड़ निकलता है हिंदी में वो बताइए। क्यों आप

1705
01:59:48,080 --> 01:59:51,440
निचोड़

1706
01:59:51,440 --> 01:59:55,520
बताइए? बोलते हैं उसको जो आगाह होने वाला

1707
01:59:55,520 --> 01:59:59,760
है। आघा आघा समझ रहे हैं? किसी भी चीज को अभी तक मैं ये समझाऊं

1708
01:59:59,760 --> 02:00:03,920
कि ऊपर वाले ने यह कहा कि मैं मट्टी से इंसान

1709
02:00:03,920 --> 02:00:08,400
बनाने वाला हूं। जब मैं उसमें रूह डाल दूंगा, अपनी नॉलेज डाल दूंगा

1710
02:00:08,400 --> 02:00:13,040
तब तुम उसको सजदा करना। ये उसने कहा देवताओं से।

1711
02:00:13,040 --> 02:00:17,440
लेकिन एक चीज मिस कर दी आपने कि उसको पहले दुरुस्त कर दूं। यानी इंसानी जो क्रिएशन

1712
02:00:17,440 --> 02:00:22,000
है पहले उसे वो तो दुरुस्त हो जाए। फिर उसके बाद उसमें रूह डाली जाएगी।

1713
02:00:22,000 --> 02:00:28,000
पहले इंसानी को प्रॉपर जब मैं इंसान को प्रॉपर बना दूं

1714
02:00:28,640 --> 02:00:32,880
प्रॉपर बना दू या

1715
02:00:32,880 --> 02:00:36,960
क्रिएट कर दूं यानी इसकी एवोलेशन करके और इसको सद्बुद्धि

1716
02:00:36,960 --> 02:00:41,040
तक पहुंचा दूं सद्बुद्धि तक पहुंचा दूं तो फिर जब इसके अंदर

1717
02:00:41,040 --> 02:00:45,040
मैं अपना ज्ञान यानी रूह डाल दूं रूह डाल दूं तो

1718
02:00:45,040 --> 02:00:49,120
तुम फिर उसके लिए सजदा करना कुछ अब कुछ

1719
02:00:49,120 --> 02:00:52,400
क्लियर हुआ

1720
02:00:52,400 --> 02:00:56,400
यानी कि एक तरीके से मुझे ऐसा लग रहा है कि इंसान बनाने के बाद जो उसको को

1721
02:00:56,400 --> 02:01:00,880
बुद्धि का स्तर तक पहुंचाने के लिए यहां टेस्ट के लिए भेजा गया। ऐसा है क्या?

1722
02:01:00,880 --> 02:01:05,360
ना अभी वहां नहीं जाइए। अभी हम वहां जा रहे हैं। अभी वो टेस्ट की बात ही नहीं है।

1723
02:01:05,360 --> 02:01:09,360
अभी भाई साहब मैं फिर कह रहा हूं। आप उन शब्दों से

1724
02:01:09,360 --> 02:01:14,560
बचिए जिन्हें आपको लगता हो कि मैं समझ नहीं पाऊंगा। आप सीधे हिंदी बोलिए कि

1725
02:01:14,560 --> 02:01:18,560
ऊपर वाले ने इंसान बनाए मिट्टी से और देवताओं

1726
02:01:18,560 --> 02:01:23,040
को बताया कि जब मैं उन्हें उच्च स्तर की बुद्धि तक पहुंचा दूंगा, रूह डाल दूंगा।

1727
02:01:23,040 --> 02:01:27,280
मतलब उन्हें दुरुस्त कर दूंगा, रूह डाल दूंगा। उसके बाद तुम उन्हें सजदा करना।

1728
02:01:27,280 --> 02:01:31,520
ठीक है? अब आगे क्या हुआ? फिर बताइए। हां। तो अब फिर आप पूछ

1729
02:01:31,520 --> 02:01:35,600
नहीं रहे हो। क्या आपको समझ में आ गई बात? हां। अभी तक

1730
02:01:35,600 --> 02:01:39,920
आप मैंने जो बोला गलत बोला उसमें कुछ अगर गलत बोला सही करिए।

1731
02:01:39,920 --> 02:01:44,000
आपने अभी आखिर में कहा कि उसको सजदा करना। तो आपको

1732
02:01:44,000 --> 02:01:48,000
सजदा लफ्ज पता है। होगा पता तभी। का

1733
02:01:48,000 --> 02:01:54,000
मतलब सजदा का मतलब इतना तो कह ही सकते हैं कि उसका सम्मान करना।

1734
02:01:56,400 --> 02:02:00,240
उसका नहीं सम्मान नहीं कहेंगे

1735
02:02:00,240 --> 02:02:04,880
सजदा लफ्ज सजदा जो लफ्ज होता है ना उसका अर्थ होता है

1736
02:02:04,880 --> 02:02:09,680
के किसी के आगे अपने आजज

1737
02:02:09,680 --> 02:02:14,240
आजिज आ जाना यानी अब मैं आपको इसको कैसे हिंदी में ट्रांसलेट

1738
02:02:14,240 --> 02:02:18,240
आजज में समझते हैं आजज में आजज

1739
02:02:18,240 --> 02:02:23,280
में भी नहीं समझ नहीं जैसे मान लीजिए

1740
02:02:23,280 --> 02:02:27,440
आपके ज्ञान के आगे मान लीजिए आपके पास ज्यादा ज्ञान है। है ना?

1741
02:02:27,440 --> 02:02:31,440
और मेरे पास कम भाई मैं आपसे एक रिक्वेस्ट कर रहा हूं। केवल

1742
02:02:31,440 --> 02:02:35,440
हिंदी बोले आप हिंदी बोले। हिंदी हिंदी

1743
02:02:35,440 --> 02:02:39,520
बता रहा हूं। मुझे अर्थ तो समझना पड़ेगा ना वरना बात का कोई वो

1744
02:02:39,520 --> 02:02:43,760
नहीं रहेगा। जैसे मान लीजिए आपके पास ज्यादा ज्ञान है। मेरे पास कम ज्ञान है। अब आपके

1745
02:02:43,760 --> 02:02:48,000
ज्यादा ज्ञान जो है मेरी ज्ञान परिधि में नहीं आ रहा है। है ना?

1746
02:02:48,000 --> 02:02:52,080
तो मैं आपके ज्ञान के आगे आज ही जा। अब इसको क्या बोलेंगे हिंदी में वो आप बता

1747
02:02:52,080 --> 02:02:56,160
दो झुकना नहीं रुकना

1748
02:02:56,160 --> 02:02:59,440
नहीं यार झुकना कह रहा हूं झुकना

1749
02:02:59,440 --> 02:03:03,680
ना झुकना नहीं झुकना नहीं आज ही यानी मेरा जो माइंड है ना इस बात

1750
02:03:03,680 --> 02:03:07,680
से हार गया कि मैं इस ज्ञान को समझने के लायक नहीं हूं। अरे भाई

1751
02:03:07,680 --> 02:03:11,760
साहब वो सम्मान प्रकट करने का ही एक प्रतीक है। जो आप सजदा कह

1752
02:03:11,760 --> 02:03:15,840
रहे हैं ना वो सम्मान प्रकट करने का ही एक प्रतीक है। ये स्वीकार

1753
02:03:15,840 --> 02:03:19,280
करना कि मैं इनसे छोटा हूं।

1754
02:03:19,280 --> 02:03:23,600
ज्ञान में किसी भी चीज में हूं छोटा फलानी

1755
02:03:23,600 --> 02:03:27,680
चीज में मैं छोटा हूं। किसी में नहीं सिर्फ ज्ञान में अभी हम जो बात

1756
02:03:27,680 --> 02:03:31,680
कर रहे हैं खाली ज्ञान की कर रहे हैं ना क्योंकि अभी आगे वाली जो मैं बताऊंगा ना आयत उसमें

1757
02:03:31,680 --> 02:03:35,920
मैं बताऊंगा आयत मत बताना भाई साहब मैं दो घंटे

1758
02:03:35,920 --> 02:03:40,000
हो चुके हैं बहुत ज्यादा समय नहीं है आप हमें संक्षिप्त में

1759
02:03:40,000 --> 02:03:44,080
अगर स्टोरी बता सके कि व्यक्ति कैसे फसा हिंदी में बिना आयतों

1760
02:03:44,080 --> 02:03:48,160
के बिना उर्दू के आपको संस्कृत में

1761
02:03:48,160 --> 02:03:52,320
बताता हूं जब ईश्वर ने कहा कि मैं जमीन पे जमीन पर

1762
02:03:52,320 --> 02:03:56,320
एक उत्तराधिकारी बनाने वाला हूं जमीन ये मलाइका

1763
02:03:56,320 --> 02:04:00,800
से कहा देवताओं से कि मैं जमीन पर एक उत्तराधिकारी खलीफा

1764
02:04:00,800 --> 02:04:04,800
यानी जो एक के बाद पीछे पीछे आता रहेगा और मेरे कहे अनुसार चलता

1765
02:04:04,800 --> 02:04:08,880
रहेगा ऐसे इसको बनाने वाला हूं तो फिर देवताओं ने

1766
02:04:08,880 --> 02:04:12,880
कहा कि ये तो जो है फसाद करेगा यानी

1767
02:04:12,880 --> 02:04:15,600
बिगाड़ कर देगा धरती में

1768
02:04:15,600 --> 02:04:20,000
तो ईश्वर ने कहा कि जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानते

1769
02:04:20,000 --> 02:04:24,160
फिर ईश्वर ने आदम को कहा जो मैं जानता

1770
02:04:24,160 --> 02:04:28,240
हूं तुम नहीं जानते। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब यह है कि वो

1771
02:04:28,240 --> 02:04:32,240
उन्होंने ये प्रकट किया था कि यह फसाद करेगा यानी बिगाड़

1772
02:04:32,240 --> 02:04:36,480
कर देगा जमीन पे। तो उनको आगे का पता नहीं था। उनको

1773
02:04:36,480 --> 02:04:40,480
ये बात पता नहीं थी। तो ईश्वर ने कहा तुम नहीं जानते जो मैं जानता हूं

1774
02:04:40,480 --> 02:04:44,480
क्योंकि वो अपने का ये कहना था कि उनका ये कहना था फसाद

1775
02:04:44,480 --> 02:04:48,720
नहीं करेगा। टेंशन मत लो। मैं जानता हूं। ना

1776
02:04:48,720 --> 02:04:52,720
ये बात तो उनको समझानी थी ना मलाइका को फरिश्तों को देवता को समझानी थी ये

1777
02:04:52,720 --> 02:04:56,800
बात। तो फरिश्तों ने जब ये कहा तो कहा जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानता आगे सुनिए तो

1778
02:04:56,800 --> 02:05:00,800
फिर ईश्वर ने ज्ञान दिया ज्ञान दिया अस्मा का यानी

1779
02:05:00,800 --> 02:05:04,960
बुलंदियों का बुलंदियों का ज्ञान दिया किसको आदम को और फिर वो

1780
02:05:04,960 --> 02:05:09,360
ज्ञान देकर उन देवताओं से कहा कि अगर तुम सच कह रहे हो

1781
02:05:09,360 --> 02:05:13,520
तो मुझे इन नामों की खबर दो यानी इनकी पहचान बताओ इन बुलंदियों

1782
02:05:13,520 --> 02:05:17,600
की तो उन देवताओं ने कहा कि ईश्वर हमें तो बस उतना ही ज्ञान

1783
02:05:17,600 --> 02:05:21,600
है जो तूने हमें सिखाया है और इससे ज्यादा

1784
02:05:21,600 --> 02:05:25,600
हम नहीं जानते तो एक मिनट थोड़ा पीछे थोड़ा पीछे से थोड़ा पीछे

1785
02:05:25,600 --> 02:05:31,040
से पीछे से थोड़ा जाइए वहां से बताइए दोबारा से जब

1786
02:05:31,040 --> 02:05:35,200
ईश्वर ने ये कह दिया कि मैं जानता हूं तुम नहीं जानते इसके बाद से दोबारा बता दीजिए जब ईश्वर

1787
02:05:35,200 --> 02:05:39,680
ने कहा जो मैं जानता हूं तुम नहीं जानते फिर इसके बाद ईश्वर ने आदम को

1788
02:05:39,680 --> 02:05:43,840
आदम को नाम सिखाए बुलंदियों के है ना

1789
02:05:43,840 --> 02:05:48,000
पहचान करा दी उसको उसके अस्तित्व की किस तरह से वो ऊंचाई पर चढ़

1790
02:05:48,000 --> 02:05:52,240
सकता है यह पहचान उसको करा दी कराने के बाद उन

1791
02:05:52,240 --> 02:05:56,320
पहचान के बारे में देवताओं से पूछा कि मुझे खबर

1792
02:05:56,320 --> 02:06:00,640
करो इस पहचान के बारे में। क्या तुम्हें भी इतना ज्ञान है? तो

1793
02:06:00,640 --> 02:06:04,640
उन देवताओं ने कहा कि हमें तो इतना हमारे लिए नहीं है ये

1794
02:06:04,640 --> 02:06:08,800
ज्ञान जो तूने हमें तो सिर्फ उतना ही है जितना तूने हमें ज्ञान दिया

1795
02:06:08,800 --> 02:06:12,960
है। तो फिर आदम से कहा कि आदम तू

1796
02:06:12,960 --> 02:06:17,280
इनको खबर दे। उस बुलंदी के साथ उन नामों के साथ

1797
02:06:17,280 --> 02:06:21,360
खबर कर इनको। तो जब आदम ने उनके सामने वो पूरा ज्ञान

1798
02:06:21,360 --> 02:06:25,360
बता दिया तो फिर कहा अल्लाह ने क्या मैं नहीं कहता

1799
02:06:25,360 --> 02:06:29,360
था के मैं जानता हूं जो आसमान और जमीन

1800
02:06:29,360 --> 02:06:33,440
में छुपी हुई चीजें हैं उनको भी मैं जानता हूं और जो सामने प्रकट है

1801
02:06:33,440 --> 02:06:37,520
उसे भी मैं जानता हूं और मैं जानता हूं जो कुछ

1802
02:06:37,520 --> 02:06:41,760
तुम जाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा के रखते हो अपने मन के भीतर उन सबको

1803
02:06:41,760 --> 02:06:45,760
मैं जानता हूं। तो ये बात क्लेरिफाई होने के बाद जो

1804
02:06:45,760 --> 02:06:46,260
है

1805
02:06:46,080 --> 02:06:50,320
ईश्वर ने फिर कहा कि अब आदम के लिए सजदे की सजदा

1806
02:06:50,320 --> 02:06:54,400
करो आदम के लिए। यानी अब ईश्वर के आगे उन्हें झुकना था यानी इस

1807
02:06:54,400 --> 02:06:58,400
बात को मानना था कि हां हमारे पास कम ज्ञान है। आदम के पास ज्यादा है।

1808
02:06:58,400 --> 02:07:02,640
तो उनमें से जो एक था वो मायूस हो गया इस बात से कि

1809
02:07:02,640 --> 02:07:06,640
ईश्वर ने हमसे ऊपर किसी को रख दिया। हमसे ज्यादा किसी को ज्ञान दे

1810
02:07:06,640 --> 02:07:10,720
दिया तो वो हुआ इब्लीस। वो हो गया इब्लीस। इब्लीस

1811
02:07:10,720 --> 02:07:15,120
मतलब मायूस हो गया वो तो ईश्वर ने कहा कि

1812
02:07:15,120 --> 02:07:19,280
तूने क्यों नहीं तू क्यों नहीं इस पर सजदा किया

1813
02:07:19,280 --> 02:07:23,600
तो उसने कहा कि मैं तो इससे अच्छा हूं बेहतर हूं

1814
02:07:23,600 --> 02:07:28,400
तो क्योंकि तूने इसको मिट्टी से बनाया और मुझे आग से बनाया

1815
02:07:28,400 --> 02:07:32,400
मुझे आग से बनाया इसको मिट्टी से बनाया तो उसने जो पैमाना रखा

1816
02:07:32,400 --> 02:07:36,480
आग मिट्टी का जबकि पैमाना था उस ज्ञान का कि ज्ञान उसको जो दिया है

1817
02:07:36,480 --> 02:07:40,800
उस ज्ञान के आधार पर वो बुलंदी पर गया लेकिन उसने अपना आर्गुममेंट दिया

1818
02:07:40,800 --> 02:07:44,960
तो ईश्वर के आदेश को उसने नहीं माना। तो फिर ईश्वर ने आदम

1819
02:07:44,960 --> 02:07:49,280
को कहा कि आदम तुम और तुम्हारे जो साथ है जो तुम्हारा जोड़ा

1820
02:07:49,280 --> 02:07:53,440
है तुम दोनों तुम दोनों जाओ जन्नत में ठहरो थोड़ी देर ठहरो। यानी

1821
02:07:53,440 --> 02:07:57,440
जन्नत का भी अनुभव कर लो और वहां ठहरो। यानी हमेशा के लिए

1822
02:07:57,440 --> 02:08:01,280
नहीं भेजा। ठहरने के लिए कहा क्योंकि अभी पहले बताया था कि जमीन पर भेजना

1823
02:08:01,280 --> 02:08:05,680
था खलीफा बना के। यानी ईश्वर के आदेश को लागू करें। उसी परिस्थिति में रखे।

1824
02:08:05,680 --> 02:08:09,760
तो जब जन्नत के अंदर दोनों को रखा गया और कहा कह दिया

1825
02:08:09,760 --> 02:08:13,760
कि शैतान जो है तुम्हारा दुश्मन है। शैतान तुम्हारा दुश्मन

1826
02:08:13,760 --> 02:08:18,000
है। और ये जो एक सजरा है दरख्त है। दरख्त मतलब

1827
02:08:18,000 --> 02:08:22,080
ये वैसा कोई लकड़ी का दरख्त नहीं है। यानी एक कोई विचारधारा होती

1828
02:08:22,080 --> 02:08:26,160
है। उस विचारधारा के करीब मत जाना। मना कर दिया कि इसके करीब

1829
02:08:26,160 --> 02:08:30,240
मत जाना। वरना तुम भी जालिम बन जाओगे। यह

1830
02:08:30,240 --> 02:08:35,280
बात जब कह दी तो फिर शैतान ने उनको उस चीज से फिसलाया

1831
02:08:35,280 --> 02:08:39,360
यानी धोखे से उनको फिसला दिया और उनको बांट दिया

1832
02:08:39,360 --> 02:08:43,360
तकसीम कर दिया। अलग-अलग कर दिया। जैसे अलग-अलग विचारधाराएं हो जाती

1833
02:08:43,360 --> 02:08:47,360
है ना फिर हम मतभेद करने लगते हैं। ऐसा ही उसने स्वर्ग के अंदर

1834
02:08:47,360 --> 02:08:51,600
कर दिया। स्वर्ग के अंदर मतभेद करने लगे तो ईश्वर ने फिर उन्हें सबको

1835
02:08:51,600 --> 02:08:55,600
जमीन पर भेजा कि अब तुम वहां जाओ सब उतरो। क्योंकि

1836
02:08:55,600 --> 02:08:59,840
जन्नत के अंदर इस तरह से नहीं रहा जाता क्योंकि वो हमेजगी की जन्नत नहीं

1837
02:08:59,840 --> 02:09:03,840
थी। ठहराया था सिर्फ अनुभव करने के लिए कि स्वर्ग है और वो अनुभव

1838
02:09:03,840 --> 02:09:08,000
करने के बाद जो है इंसान को अनुभव तो है ही। अब इसके बाद

1839
02:09:08,000 --> 02:09:12,080
जमीन पर भेजा कि तुम सब उतर जाओ जमीन पर। वहीं तुम्हें ठहरना

1840
02:09:12,080 --> 02:09:16,160
है और वही तुम्हारे लिए सारी चीजें मैंने व्यवस्था कर दी है।

1841
02:09:16,160 --> 02:09:16,660
अब

1842
02:09:16,320 --> 02:09:20,400
तुम्हें वही जीना है, वही मरना है। फिर वहीं से दोबारा तुम उभारे

1843
02:09:20,400 --> 02:09:24,400
जाओगे। यानी वापस तुम्हारे अंदर इवुलेशन होगी। दोबारा

1844
02:09:24,400 --> 02:09:28,880
इवोल्व किए जाओगे उठाए जाओगे फिर उसने दुनिया बना दी

1845
02:09:28,880 --> 02:09:33,760
दुनिया तो पहले ही बनी हुई थी ना भाई जीव जंतु रह रहे थे ना इंसान से पहले

1846
02:09:33,760 --> 02:09:37,840
इंसान से पहले जीव जंतु पहले जीव

1847
02:09:37,840 --> 02:09:41,920
जंतु रह रहे थे बहुत सारे जीव रह रहे थे जीव जंतु अब

1848
02:09:41,920 --> 02:09:46,000
मैं समझ गया हम टेस्ट लेने इसलिए भेजा है क्योंकि

1849
02:09:46,000 --> 02:09:50,160
उन्होंने वहां वो गलती की थी वो वो शैतान के बहकावे में आ गए

1850
02:09:50,160 --> 02:09:54,320
थे नहीं ये कहीं नहीं कहा कि हमने ने तुम्हें टेस्ट

1851
02:09:54,320 --> 02:09:58,320
लेने के लिए भेजा बल्कि कुछ चीजें बताई है कि ये इस तरह से हम तुम्हें

1852
02:09:58,320 --> 02:10:02,400
आजमाएंगे कि यानी हमने को ही तो टेस्ट

1853
02:10:02,400 --> 02:10:06,720
कहते हैं ना वो बिल्कुल ठीक कह रहे हो पहले बात सुन लीजिए ताकि कांसेप्ट

1854
02:10:06,720 --> 02:10:10,800
समझ में आ जाए वरना ये होगा कि मैं कुछ कांसेप्ट समझा रहा हूं आपके कुछ और

1855
02:10:10,800 --> 02:10:15,200
समझ में आ जाएगा मैं ये कह रहा हूं जब जमीन पे जब उतारा

1856
02:10:15,200 --> 02:10:19,200
ना क्योंकि वहां मतभेद हो गया है ना तो जमीन पर उतार दिया और कहा तुम्हें

1857
02:10:19,200 --> 02:10:23,440
यही जीना यही मरना है यहां तमाम व्यवस्थाएं कर दी गई है तो

1858
02:10:23,440 --> 02:10:27,440
और फिर यहीं से तुम उठाए जाओगे। फिर अभी जो है तमाम

1859
02:10:27,440 --> 02:10:31,440
इंसान जो थे तमाम इंसान जो थे वो तो एक ही समुदाय

1860
02:10:31,440 --> 02:10:35,440
थे। कोई भी बटा हुआ नहीं था। है ना? फिर ईश्वर की तरफ

1861
02:10:35,440 --> 02:10:39,760
से कहा कि मेरी तरफ से जब हिदायत आएगी तो उस हिदायत

1862
02:10:39,760 --> 02:10:44,240
वो तो केवल आदम आए थे ना। आदम और वो हव्वा ना

1863
02:10:44,240 --> 02:10:48,480
ना हव्वा हवा ये ऐसा कुछ कुरान में हव्वा लिखा हुआ ही नहीं है। हव्वा शब्द ही नहीं है कुरान

1864
02:10:48,480 --> 02:10:52,480
में। अरे भाई ठीक है आप सही कर दो। आप इस पे क्यों जा रहे हो?

1865
02:10:52,480 --> 02:10:56,640
शब्द ही नहीं। आप ठीक कर दो। आगे बढ़ो। मुख्य विषय पे आओ। हां बिल्कुल।

1866
02:10:56,640 --> 02:11:00,720
कुरान के अंदर ये कोई एक आदम की बात नहीं हो रही है। एक

1867
02:11:00,720 --> 02:11:04,880
आदम की बात मतलब उसने बहुत सारे आदम बनाए थे। बहुत सारे आदम

1868
02:11:04,880 --> 02:11:08,960
जो है उनको ज्ञान दिया था और बहुत सारे आदमों को उसने जो

1869
02:11:08,960 --> 02:11:13,520
है जन्नत में छोड़ा था। बहुत सारे आदमों ने वो गलती की थी।

1870
02:11:13,520 --> 02:11:17,680
शैतान के बहकावे में आकर। आदम से पहले भी जमीन

1871
02:11:17,680 --> 02:11:22,800
पर इंसान मौजूद थे। ये भी आपको

1872
02:11:22,800 --> 02:11:26,960
इंसान वो क्यों थे क्यों थे? क्योंकि मैंने अभी

1873
02:11:26,960 --> 02:11:31,280
बताया तो थाने शायद सुना नहीं के मैं मिट्टी से इंसान बनाने

1874
02:11:31,280 --> 02:11:35,280
वाला हूं। फिर जब उसको ठीक-ठाक कर दूं तो वो प्रोसेस तो चल ही रहा

1875
02:11:35,280 --> 02:11:39,280
था ना जमीन पर। जमीन पर वो तो

1876
02:11:39,280 --> 02:11:43,360
यानी कि उसने जो इंसान बनाए थे उनमें से कुछ आदम थे जो

1877
02:11:43,360 --> 02:11:46,560
जन्नत में गए थे एक्सपीरियंस करने के लिए। एक

1878
02:11:46,560 --> 02:11:50,560
सेकंड रुकिएगा। मैं आपको आदम शब्द को समझा दूं ताकि बात थोड़ी क्लियर समझ में आ

1879
02:11:50,560 --> 02:11:54,720
जाए। आदम भी एक शब्द देखो शब्द के मतलब से ही समझा जाएगा। अब

1880
02:11:54,720 --> 02:11:58,960
शब्द समझा आदम का मतलब होता है जिसको बिल्कुल मिक्सचर जैसे

1881
02:11:58,960 --> 02:12:03,040
मिक्स करके बनाया गया है। यानी जिसके अंदर तमाम बिहेवियर को रख दिया

1882
02:12:03,040 --> 02:12:07,280
गया। जैसे देवताओं का बिहेवियर भी इसके अंदर है।

1883
02:12:07,280 --> 02:12:11,360
राक्षसों का बिहेवियर भी इसके अंदर है। जानवरों का बिहेवियर भी इसके अंदर है।

1884
02:12:11,360 --> 02:12:15,440
तमाम अच्छाइयां भी इसके अंदर है और तमाम बुराइयां भी इसके अंदर है। दोनों

1885
02:12:15,440 --> 02:12:20,400
है। अब ये जिस चीज को भी एक्टिवेट करेगा इसका वो रूप सामने आ जाएगा।

1886
02:12:20,400 --> 02:12:24,400
यानी राक्षसों का बिहेवियर नहीं होता। देवता अलग

1887
02:12:24,400 --> 02:12:28,480
होते हैं, राक्षस अलग होते हैं। जो देवता रोशनी से बनाए गए हैं। उन

1888
02:12:28,480 --> 02:12:32,560
देवता में राक्षसों का बिहेवियर नहीं होता। जो रोशनी से बनाए गए हैं और जो आग से

1889
02:12:32,560 --> 02:12:36,720
बनाए गए हैं लेकिन आग से बनने के बाद वो अपने क्रियाओं

1890
02:12:36,720 --> 02:12:40,960
से अपने कर्मों से देवता बन गए वो वापस देवता

1891
02:12:40,960 --> 02:12:46,240
देवता के पद से हट सकते हैं। ठीक है

1892
02:12:46,240 --> 02:12:51,280
हम हो गया आप पूछिए और दूसरी बात

1893
02:12:51,280 --> 02:12:55,360
आप बोलेंगे जैसे जैसे बताता जाऊंगा क्योंकि ये कोई कहानी तो

1894
02:12:55,360 --> 02:12:59,920
बहुत लंबी है तो बात तो जो

1895
02:12:59,920 --> 02:13:02,480
जो आदम था

1896
02:13:02,480 --> 02:13:06,560
इंसान भी आदम ही थे। इंसान को आदम नहीं कहा जाएगा।

1897
02:13:06,560 --> 02:13:11,120
जो नीचे इंसान जो है ना हमारा

1898
02:13:11,120 --> 02:13:15,360
वो इंसान हमारा इंसान जो है ना वो हमारा एक बिहेवियर का नाम है वो

1899
02:13:15,360 --> 02:13:19,680
वो बिहेव जब हमारे अंदर आता है ना तो मैं ये कह रहा हूं भाई साहब कि जो जन्नत

1900
02:13:19,680 --> 02:13:23,760
में जो भेजा था आदम को वो और जो धरती पे पहले से ही

1901
02:13:23,760 --> 02:13:28,000
थे जो क्रिएशन चल रही थी वो वो एक ही थे या

1902
02:13:28,000 --> 02:13:32,240
उनमें भी अंतर था जिसको जन्नत भेजा वो अलग था अलग क्वालिटी थी और जो इंसान

1903
02:13:32,240 --> 02:13:37,600
पृथ्वी पे थे वो अलग क्वालिटी थी हेलो

1904
02:13:37,600 --> 02:13:42,800
हां जी हेलो हां जी हां जी आवाज बिल्कुल धीरे आ रही है आपकी

1905
02:13:42,800 --> 02:13:47,440
मैं अब आ रही है आवाज हेलो जय श्री राम हेलो हेलो

1906
02:13:47,440 --> 02:13:51,680
मेरी आ रही है एक बार आवाज हां आ रही है बहुत अच्छी आ रही है

1907
02:13:51,680 --> 02:13:55,280
आपकी बिल्कुल धीमी हो गई

1908
02:13:55,280 --> 02:13:59,520
भाई कोई कमेंट कर दो आवाज सही आ रही है कि नहीं ये मुझे कॉल आ रहा है बीच-बीच

1909
02:13:59,520 --> 02:14:03,920
में इस वजह से हो रहा होगा आप डीएनडी लगा दीजिए डीएनडी

1910
02:14:03,920 --> 02:14:08,960
डू नॉट डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में क्या लगा दूं?

1911
02:14:08,960 --> 02:14:13,600
फोन में होगा। वो जो सेटिंग्स होती है ना उसमें डीएनडी होती है। एक डीएनडी

1912
02:14:13,600 --> 02:14:17,600
डू नॉट डिस्टर्ब। आपकी आवाज नहीं आ रही है। अरे डू

1913
02:14:17,600 --> 02:14:21,680
नॉट डिस्टर्ब लगा दीजिए भाई साहब। मैं एक मिनट मैं एक मिनट कमेंट कर दीजिए भाई साहब।

1914
02:14:21,680 --> 02:14:25,680
डू नॉट डिस्टर्ब लगाने के लिए। एक कमेंट कर दीजिए। मैं उसको यहां विज़िबल

1915
02:14:25,680 --> 02:14:31,600
कर दूंगा।

1916
02:14:31,600 --> 02:14:37,600
एक कमेंट कर दो कोई। कोई अगर देख रहा हो तो

1917
02:14:42,480 --> 02:14:47,520
अरे ये कमेंट कर दो कि डू नॉट डिस्टर्ब लगा लीजिए। हां

1918
02:14:47,520 --> 02:14:53,520
डू नॉट डिस्टर्ब को यहां विज़िबल कर दो।

1919
02:15:01,920 --> 02:15:05,920
अभी तक इन्होंने जो कहानी सुनाई है इसमें

1920
02:15:05,920 --> 02:15:10,000
कहीं भी वो संतुष्टि जनक उत्तर प्राप्त नहीं

1921
02:15:10,000 --> 02:15:14,720
हुआ है कि

1922
02:15:14,720 --> 02:15:18,720
अब बात आएगी कि देवता को क्यों बनाया? किसने बनाया? दूसरी

1923
02:15:18,720 --> 02:15:23,760
बात कि भाई वो ये चाहते थे कि

1924
02:15:23,760 --> 02:15:27,840
अ जो शैतान है वो सजदा करे। मतलब शैतान

1925
02:15:27,840 --> 02:15:31,920
नहीं शैतान से पहले अग्नि वाला वो आग वाला जो

1926
02:15:31,920 --> 02:15:36,000
देवता है उसमें से एक इब्लिश ने जो है सजदा नहीं

1927
02:15:36,000 --> 02:15:41,920
किया। अब सजदा नहीं किया तो

1928
02:15:41,920 --> 02:15:46,560
क्या ईश्वर को ये नहीं पता था कि सजदा नहीं करेगा।

1929
02:15:46,560 --> 02:15:50,000
फिर उसने इब्लिश को क्यों बनाया?

1930
02:15:50,000 --> 02:15:54,000
यहां कौन सी टेस्टिंग चल रही है? नीचे के लिए तो टेस्ट शब्द

1931
02:15:54,000 --> 02:15:58,000
भी था। अब कौन सी टेस्टिंग है यहां पे? ये

1932
02:15:58,000 --> 02:16:04,000
इसको जरा डू नॉट डिस्टर्ब वाले निर्देश को आप स्क्रीन पे कर दीजिए।

1933
02:16:11,120 --> 02:16:15,360
आवाज की प्रॉब्लम हो रही है बस। हेलो हां जी।

1934
02:16:15,360 --> 02:16:19,600
जी शिवम हां अभी आ रही है आवाज शिवम जी

1935
02:16:19,600 --> 02:16:23,760
17 मिनट हो चुके हैं। हां अपने फोन में आप जो

1936
02:16:23,760 --> 02:16:27,840
है अपने फोन में डू नॉट स्टॉप लगा लीजिए। अच्छा इसमें मैं ये कह रहा

1937
02:16:27,840 --> 02:16:31,840
हूं कि बात घूम फिर के वही आ गई कि चलिए

1938
02:16:31,840 --> 02:16:36,000
वो बाद में पूछ लेंगे कि वो जो क्या कहते हैं वो था ना जो इंसान

1939
02:16:36,000 --> 02:16:40,560
और आदम वो एक ही क्वालिटी के थे कि अलग-अलग थे जिसको जन्नत भेजा

1940
02:16:40,560 --> 02:16:44,560
वो बाद में पूछ लेंगे। तो वो जो

1941
02:16:44,560 --> 02:16:48,800
है रिपेयर कर रहे हैं। रिपेयर करने के बाद वो

1942
02:16:48,800 --> 02:16:53,280
जो है सजदा करने को कहा सजदा। अच्छा ये बताइए

1943
02:16:53,280 --> 02:16:56,960
जैसे वो ये चाहता था कि भाई वो सजदा करे तो क्या

1944
02:16:56,960 --> 02:17:01,360
ईश्वर को ये नहीं मालूम था कि वो सजदा नहीं करेगा बाद में इनको बहकाएगा।

1945
02:17:01,360 --> 02:17:05,520
किसको? ईश्वर को। हां। ईश्वर

1946
02:17:05,520 --> 02:17:10,320
को नहीं मालूम था। यू कहना चाह रहा है। पूछ रहा हूं। आपसे पूछ रहा हूं।

1947
02:17:10,320 --> 02:17:14,560
ईश्वर तो सर्व ज्ञानी है ना? मालूम था। तो उसने

1948
02:17:14,560 --> 02:17:19,280
वहां पर बहकाने से रोका क्यों नहीं जिसके कारण उनको यहां डाल दिया गया जमीन पे

1949
02:17:19,280 --> 02:17:23,680
ना तो उसका डिसीजन उसको लेने दिया अगर वो रोक देता

1950
02:17:23,680 --> 02:17:28,320
अगर वहां भी टेस्ट चल रहा है वहां भी टेस्ट चल रहा है

1951
02:17:28,320 --> 02:17:32,560
वहां क्या टेस्ट है तो बताइए क्यों नहीं रोका बताइए बताइए

1952
02:17:32,560 --> 02:17:36,640
बताइए क्यों नहीं रोका मैंने आपको क्या कहा कि इंसान को और

1953
02:17:36,640 --> 02:17:40,720
जिन को अपनी इबादत के लिए बनाया तो टेस्ट भी तो इंसान और

1954
02:17:40,720 --> 02:17:44,960
जिन का ही होगा ना देवता का थोड़ी हो रहा है टेस्ट देवता

1955
02:17:44,960 --> 02:17:48,960
का टेस्ट थोड़ी हो रहा है। जो लोग इंसानों से या जिनों में से

1956
02:17:48,960 --> 02:17:54,000
देवता बन गए लेकिन असली उनकी रोशनी से

1957
02:17:54,000 --> 02:17:58,160
रोशनी से नहीं बनाए गए वो तो वो तो उस मूल

1958
02:17:58,160 --> 02:18:02,160
कारण है अब आया मूल कारण आया है कि उसने अपनी

1959
02:18:02,160 --> 02:18:06,400
इबादत के लिए इंसानों को बनाया और जिन

1960
02:18:06,400 --> 02:18:10,400
को जिन जिन समझते हो जिन जिन को जिन्न को

1961
02:18:10,400 --> 02:18:12,320
और इंसानों को उसने अपनी इबादत

1962
02:18:12,320 --> 02:18:16,800
करवाने के लिए बनाया इबादत का मतलब समझ में आता

1963
02:18:16,800 --> 02:18:20,960
इबादत का मतलब वो पूजा करें

1964
02:18:20,960 --> 02:18:24,960
उसकी हम तो पूजा कहते हैं अपने आप क्या कहते हो इबादत का अर्थ बताइए

1965
02:18:24,960 --> 02:18:29,040
पूजा नहीं उसके आदेशों के मुताबिक चले जैसे आंखों

1966
02:18:29,040 --> 02:18:33,200
का इस्तेमाल उसके आदेश के मुताबिक करें और जुबान का इस्तेमाल उसके

1967
02:18:33,200 --> 02:18:37,280
आदेश के मुताबिक करें कान का इस्तेमाल उसके आदेश के मुताबिक करें पूरी बॉडी का

1968
02:18:37,280 --> 02:18:41,440
स्ट्रक्चर उसी के मार्गदर्शना मतलब उसको क्या करवाना

1969
02:18:41,440 --> 02:18:45,680
था उनसे जो वो आदेशों के मुताबिक चलना था उन्हें मतलब जैसे होता है ना मुझे

1970
02:18:45,680 --> 02:18:50,480
जो है बनवानी है तो मुझे वो

1971
02:18:50,480 --> 02:18:54,480
आवश्यकता ये थी ना कि उसने एक क्रिएशन की है ना बेहतरीन तो वो बेहतरीन

1972
02:18:54,480 --> 02:18:58,640
कब दिखेगी जब वो उसके कमाल को पहुंचेगी जैसे मैं आपको बताता

1973
02:18:58,640 --> 02:19:02,800
हूं के हम जो ज्ञान दिया है उस ज्ञान के

1974
02:19:02,800 --> 02:19:07,200
क्रिएशन क्रिएशन ये जो पृथ्वी इत्यादि यही क्रिएशन

1975
02:19:07,200 --> 02:19:11,280
है सब सब है क्रिएशन इंसान भी क्रिएशन

1976
02:19:11,280 --> 02:19:15,520
है इंसान भी क्रिएशन समझ गया मैं समझ गया मैं समझ गया मैं श समझने

1977
02:19:15,520 --> 02:19:19,760
की मैं शॉर्ट में आपको बताता हूं। आप गलत हो तो बताना कि

1978
02:19:19,760 --> 02:19:24,720
ईश्वर ने इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने देवता भी बनाए।

1979
02:19:24,720 --> 02:19:27,600
उसने इंसान भी बनाए, जिन्न

1980
02:19:27,600 --> 02:19:31,600
भी बनाए और उसने एक कायनात पूरी बनाई। जन्नत भी है

1981
02:19:31,600 --> 02:19:35,680
उसमें। उसमें जो है वो भी है, पृथ्वी इत्यादि भी है। अब उसने जो

1982
02:19:35,680 --> 02:19:40,080
इंसान बनाए वह इसलिए बनाए हैं कि यह मेरे अनुसार जो है यह जो क्रिएशन

1983
02:19:40,080 --> 02:19:45,600
है इसमें कार्य करने में मेरी मेरी मदद करें।

1984
02:19:45,600 --> 02:19:49,920
जो

1985
02:19:49,920 --> 02:19:54,080
जैसे जैसे मिसाल के तौर पर मैं आपको बता दूं ईश्वर ने जो क्रिएशन

1986
02:19:54,080 --> 02:19:58,480
की ना तो क्रिएशन करता है ना तो क्रिएशन को बताता

1987
02:19:58,480 --> 02:20:02,720
है कि तू अगर इस तरह चलेगा ना तो तू और आगे बढ़ जाएगा। कमाल

1988
02:20:02,720 --> 02:20:06,800
पर पहुंच जाएगा। कमाल पर पहुंच जाएगा। और अगर ऐसे नहीं

1989
02:20:06,800 --> 02:20:11,120
चलेगा ना तो तू गिर नीचे गिर जाएगा। तू उस कमाल तक नहीं पहुंच पाएगा।

1990
02:20:11,120 --> 02:20:15,200
तो ईश्वर ने मार्ग दिखाया अच्छा सबको अच्छा बनाया लेकिन

1991
02:20:15,200 --> 02:20:21,200
भाई साहब मैं ये कह रहा हूं कि उसको क्या जरूरत थी लोगों को बनाने की

1992
02:20:22,400 --> 02:20:26,640
अरे तो वो ब्रह्मा है यदि वो खाली

1993
02:20:26,640 --> 02:20:30,880
है ना उसका एक गुण खाली के यानी वो रचना करता रहता है

1994
02:20:30,880 --> 02:20:34,960
अब उसे रचना वो रचना करता

1995
02:20:34,960 --> 02:20:39,520
है मतलब मतलब मूल कारण ये है कि वो रचना करता है उसका वो गुण है

1996
02:20:39,520 --> 02:20:43,600
ठीक है ये आपने रचना करने यहां पे आना चाह रहा हूं

1997
02:20:43,600 --> 02:20:47,680
उतनी देर से वो रचना करता है उसका एक गुण है मैं यही आना चाह रहा हूं

1998
02:20:47,680 --> 02:20:51,680
तो वो गुण जो है ना वो रचना करने के बाद वैसे ही रचना को छोड़

1999
02:20:51,680 --> 02:20:55,840
नहीं देता है बल्कि अब वो रचना में वो रचना में

2000
02:20:55,840 --> 02:21:00,000
उसका मन है कि वो जो है कोई काम जो है इंसानों के द्वारा करवाए वो

2001
02:21:00,000 --> 02:21:04,000
कोई काम इंसानों के द्वारा करवाए और उसका उसका वो है कि वो कोई

2002
02:21:04,000 --> 02:21:08,080
काम चाहे तो देवताओं के द्वारा करवाए देवता भी इबादत के लिए है कि नहीं है वो काहे

2003
02:21:08,080 --> 02:21:12,560
के लिए है देवता तो उसके वो नाफरमानी नहीं करते

2004
02:21:12,560 --> 02:21:17,120
वो ईश्वर के लिए उल्लंघन नहीं करते किस लिए देवता किस लिए

2005
02:21:17,120 --> 02:21:21,120
देवता उसी के कार्य को करते हैं लेकिन उसके आदेश से करते हैं अपनी मर्जी से

2006
02:21:21,120 --> 02:21:25,120
नहीं कर सकते अपनी मर्जी से नहीं कर सकते मतलब इबादत दोनों

2007
02:21:25,120 --> 02:21:29,680
को करनी है ना उसके उसके अनुसार उन्हें भी चलना है इनको भी चलना है

2008
02:21:29,680 --> 02:21:33,680
वो ऑलरेडी है वो ऑलरेडी ताबे है उसके उनको कहने की जरूरत

2009
02:21:33,680 --> 02:21:37,600
नहीं है लेकिन हमें शिक्षा की जरूरत है वो तो जो

2010
02:21:37,600 --> 02:21:40,160
ईश्वर बोलेंगे

2011
02:21:40,160 --> 02:21:46,000
अच्छा शिक्षा की जरूरत है तो इसका मतलब वो

2012
02:21:46,000 --> 02:21:50,000
टू द पॉइंट उनको पहले से ही मालूम है कि हमें क्या मतलब हमें बस बोलना है हमें करना

2013
02:21:50,000 --> 02:21:54,160
है क्यों करना है ये उन्हें नहीं मालूम है क्यों क्यों करना है ये उनको

2014
02:21:54,160 --> 02:21:58,640
पता है इंसानों को उनके पास आदेश आना है ईश्वर का देवताओं

2015
02:21:58,640 --> 02:22:02,880
के पास और उन्हें वो करना है बस है ना वो ये नहीं

2016
02:22:02,880 --> 02:22:07,040
हम कर रहे तो ऐसा नहीं ये वाले लोग हैं ये क्यों और जो

2017
02:22:07,040 --> 02:22:11,360
ये वाले लोग हैं ये क्यों बनाए जो अग्नि से बनाए जो थोड़े से बदल सकते हैं मतलब

2018
02:22:11,360 --> 02:22:15,440
राक्षस भी बन सकते हैं। हां तो ये जो है इनको आग से

2019
02:22:15,440 --> 02:22:19,600
बनाया। आग समझ रहे हो? आग जैसे हमारे अंदर गुस्से की आग है।

2020
02:22:19,600 --> 02:22:23,600
बहुत सारी आग है यानी जिनके अंदर क्रोध है। है ना? तो ये ऐसी वाली

2021
02:22:23,600 --> 02:22:27,680
आग अच्छा जी। वो आग दो

2022
02:22:27,680 --> 02:22:31,920
तरह की है। मैं आपको बताना चाहूंगा। दो तरह की एक आग है नारे समूह। नारे

2023
02:22:31,920 --> 02:22:36,080
समूह यानी ऐसी आग विषैली आग। है ना? और

2024
02:22:36,080 --> 02:22:40,160
एक है जो मिलीजुली आग है। मिलीजुली आग यानी

2025
02:22:40,160 --> 02:22:44,320
मुख्तल तरीके की आग है। जैसे हमारे अंदर भी है ना बिहेवियर आग

2026
02:22:44,320 --> 02:22:48,720
का कि कभी हमारा कुछ खाने से पेट में आग लग जाती है। कभी गुस्से में आग बबूले

2027
02:22:48,720 --> 02:22:52,640
हो जाते हैं। तो वो जो अंदर की जो गर्मी है ना गर्मी और मुख्तलिफ

2028
02:22:52,640 --> 02:22:56,800
जो गर्मी हम देख रहे हैं वो उन उन बिहेवियर से उनकी क्रिएशन हुई

2029
02:22:56,800 --> 02:23:01,200
है। उन बिहेवियर से और हमारी जो क्रिएशन

2030
02:23:01,200 --> 02:23:05,280
हुई है वो तीन से हुई है। अरबी में जिसे मैंने मिट्टी कहा था ना मिट्टी तो वो

2031
02:23:05,280 --> 02:23:10,080
तीन जो है ना तीन बोलते हैं जो किसी भी माहौल में अपने आप को ढाल ले

2032
02:23:10,080 --> 02:23:14,240
किसी भी माहौल में हम लोग हम लोग थोड़ा सा टू द पॉइंट आ जाए मैं समझ गया

2033
02:23:14,240 --> 02:23:18,480
मैं समझ गया कुछ होगा तो मैं पूछूंगा जी

2034
02:23:18,480 --> 02:23:22,560
ईश्वर क्योंकि सृष्टि रचना करता है इसलिए उसने रचना

2035
02:23:22,560 --> 02:23:26,640
की ठीक है क्योंकि वो रचना करता

2036
02:23:26,640 --> 02:23:31,920
है इसलिए उसने रचना की ठीक ये मैं आपको

2037
02:23:31,920 --> 02:23:36,080
ठीक तो रचना की। अब रचना के बाद उसने कुछ बनाए आग

2038
02:23:36,080 --> 02:23:40,240
से कुछ बनाए। मतलब कुल मिलाकर के कुछ ऐसे तत्व बनाए जो गलत भी जा

2039
02:23:40,240 --> 02:23:44,320
सकते हैं। कुछ ऐसे तत्व बनाए जो गलत नहीं जा सकते। कुछ ऐसे तत्व बनाए जो दोनों

2040
02:23:44,320 --> 02:23:50,320
है। गलत भी जा सकते हैं सही भी जा सकते हैं। है ना? हम

2041
02:23:51,440 --> 02:23:57,440
अब इसके बाद क्या है? इसके बाद क्या है कि

2042
02:23:57,440 --> 02:24:01,120
अब इसके बाद क्या है कि

2043
02:24:01,120 --> 02:24:05,280
जो उसने इंसान बनाए थे उनको उसने वो ज्ञान दिया कि मेरे बारे

2044
02:24:05,280 --> 02:24:09,360
में क्रिएशन के बारे में ज्ञान दिया ज्ञान के मामले में उसने कहा कि सजदा करो मगर

2045
02:24:09,360 --> 02:24:13,360
जो गलत जा सकता था राक्षस जैसे काम कर सकता था उसमें से एक ने

2046
02:24:13,360 --> 02:24:17,920
वो जो है सजदा करने से मना कर दिया उसका नाम पड़ा एिस ठीक है

2047
02:24:17,920 --> 02:24:21,040
अब इसमें एक तो

2048
02:24:21,040 --> 02:24:25,120
नाम नहीं नाम नहीं पढ़ा ये गुण पढ़ा ठीक

2049
02:24:25,120 --> 02:24:29,600
ठीक ठीक कोई बात नहीं अब इसमें ये बात है कि

2050
02:24:29,600 --> 02:24:33,600
क्या ईश्वर हर बार बिल्कुल सेम पैटर्न होता

2051
02:24:33,600 --> 02:24:37,600
है यहां ये धरती बनने का या नहीं

2052
02:24:37,600 --> 02:24:41,680
मतलब वो रचना करता रहता है तो एक बार करता है दो बार करता है या एक ही बार

2053
02:24:41,680 --> 02:24:45,840
की है दोबारा नहीं होगी क्या है वो करता रहता

2054
02:24:45,840 --> 02:24:49,920
है करता रहता है इसे अरबी में बोलेंगे खल्ला यानी कि एक

2055
02:24:49,920 --> 02:24:54,080
बार आधी रात आएगी उसके बाद दोबारा आ सकती है क्या

2056
02:24:54,080 --> 02:24:58,240
चीज आख आखिरात के बाद दोबारा क्रिएशन

2057
02:24:58,240 --> 02:25:02,320
होगी दोबारा आखिरात फिर होगी हां उस क्रिएशन के बारे

2058
02:25:02,320 --> 02:25:06,480
में भी बताया है कुरान में ये जो तुम्हारी पहली क्रिएशन है कुरान

2059
02:25:06,480 --> 02:25:10,480
में आया है मैं बता मैं ये नहीं कह रहा भाई साहब मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं

2060
02:25:10,480 --> 02:25:14,560
बार-बार चलता रहेगा ना सृष्टि का चक्र वही

2061
02:25:14,560 --> 02:25:19,040
मैं आपको बताना चाह रहा हूं अगर आप बोलने दो तो

2062
02:25:19,040 --> 02:25:23,120
बोलने दो तो जैसे सूर इब्राहिम में कहा गया और क्यों बताना चाह

2063
02:25:23,120 --> 02:25:27,120
रहे हो मैं जब आपको सीधे टू द पॉइंट पूछ रहा हूं ये बार-बार सृष्टि बनती

2064
02:25:27,120 --> 02:25:31,200
है कि नहीं बता दो बनती है मैं आपसे प्रूफ थोड़ी ना पूछ रहा हूं कि कुरान में कहां कहा

2065
02:25:31,200 --> 02:25:35,280
गया है ये बात तो मैं तो कुरान को ही रेफर करूंगा ना

2066
02:25:35,280 --> 02:25:39,280
मैंने जब मैं आपसे प्रूफ मांगू जब मैं आपसे प्रूफ मांगू

2067
02:25:39,280 --> 02:25:43,360
कि भैया मुझे कुरान का प्रूफ दो तो आप दो ना मैं

2068
02:25:43,360 --> 02:25:47,440
प्रूफ नहीं दे रहा हूं मैं ये बताना चाह रहा हूं कि कुरान जो है ये ज्ञान दे

2069
02:25:47,440 --> 02:25:51,680
रहा है बस मैं प्रूफ नहीं दे रहा हूं कि कुरान ये बता रहा है मैं

2070
02:25:51,680 --> 02:25:55,680
मैं मानता हूं कुरान ने माना है कि वो एक बार नहीं बनाता दोबारा बनाता रहेगा

2071
02:25:55,680 --> 02:25:59,680
बार-बार बनती रहेगी। अरे माना नहीं है। वही तो लफ्ज से इस्तेमाल

2072
02:25:59,680 --> 02:26:04,160
माना नहीं बता रहा है कुरान। कुरान बता रहा है के

2073
02:26:04,160 --> 02:26:08,800
ये इस जमीन के को बदल कर दूसरी जमीन ले आएगा वो।

2074
02:26:08,800 --> 02:26:12,880
यानी अभी जिस जमीन पर हम है ना इस जमीन को बदल देगा। दूसरी जमीन

2075
02:26:12,880 --> 02:26:18,880
आ गई फिर हिसाबो किताब होगा। फिर उसके बाद दोबारा

2076
02:26:19,280 --> 02:26:22,800
यानी क्रिएशन बदलने

2077
02:26:22,800 --> 02:26:28,400
यानी कि क्रिएशन बदलने के बाद बार-बार क्रिएशन बनती रहेगी।

2078
02:26:28,400 --> 02:26:32,800
एक बार बनेगी जो लोग चले जाएंगे उनको मौत नहीं आएगी।

2079
02:26:32,800 --> 02:26:36,880
सुनिए जो लोग जन्नत में चले जाएंगे उनको मौत नहीं आएगी।

2080
02:26:36,880 --> 02:26:41,040
वो जीवन मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाएंगे। समझ

2081
02:26:41,040 --> 02:26:45,040
रहे हो? भाई साहब मैं पूछ क्या रहा हूं? मैंने क्या पूछा? मैं यह पूछ रहा हूं

2082
02:26:45,040 --> 02:26:50,880
कि सृष्टि दोबारा बनेगी कि नहीं? मैंने पूछा है कि उनको मोक्ष मिलेगा कि नहीं?

2083
02:26:50,880 --> 02:26:54,960
आपकी आवाज कट रही है। शिवा शिवम साहब आपकी आवाज

2084
02:26:54,960 --> 02:26:59,200
कट रही है। आपका नेट पैक शायद खत्म हो गया है। आपका नेट

2085
02:26:59,200 --> 02:27:02,400
पैक खत्म हो गया है।

2086
02:27:02,400 --> 02:27:06,560
नहीं मेरा तो नेट पैक अनलिमिटेड है। तो फिर

2087
02:27:06,560 --> 02:27:10,640
अभी आपका रुक रुक के आ रहा हूं। तो आपका फोन आपका फोन गरम

2088
02:27:10,640 --> 02:27:14,640
हो रहा होगा। हां हो सकता है। नहीं फोन भी गरम नहीं हो

2089
02:27:14,640 --> 02:27:19,360
रहा। हाथ में ही है। अच्छा मैं ये कह रहा था जैसे मैं

2090
02:27:19,360 --> 02:27:23,680
भाई साहब मैं मैं पूछ रहा था बस मुझे इतना बता दीजिए। सृष्टि बनती

2091
02:27:23,680 --> 02:27:28,080
है फिर नष्ट होती है। फिर बनती है फिर नष्ट होती है।

2092
02:27:28,080 --> 02:27:31,600
यही है ना?

2093
02:27:31,600 --> 02:27:35,760
आप क्या कहना चाह रहे हैं वो आप बोल दीजिए पहले फिर मैं बता दूंगा। ठीक है।

2094
02:27:35,760 --> 02:27:39,840
अरे भाई मैं अभी मैं ये आपसे पूछ ही तो रहा

2095
02:27:39,840 --> 02:27:43,840
हूं। जो कहना चाह रहा हूं वही तो कह रहा हूं कि आपके यहां सृष्टि बनती

2096
02:27:43,840 --> 02:27:47,840
है फिर नष्ट होती है। बताने दीजिए ना मुझे बताने

2097
02:27:47,840 --> 02:27:51,840
दीजिए। मुझे बताने दीजिए। आप क्या कहना चाह रहे हैं? आप कह दीजिए। फिर मैं

2098
02:27:51,840 --> 02:27:56,560
जब पूछ रहा हूं कि मैं ये कहना चाह रहा हूं तो फिर कह रहा हूं मुझे बताने दीजिए।

2099
02:27:56,560 --> 02:28:01,040
मैं वही तो बता रहा हूं। जब इस इस जमीन को बदल कर दूसरी जमीन

2100
02:28:01,040 --> 02:28:05,120
आएगी तभी तो हिसाब किताब होगा। वो दिन ही तो होगा हिसाब

2101
02:28:05,120 --> 02:28:09,280
किताब का लोगों को हिसाब किताब होगा। मेरा प्रश्न है सृष्टि

2102
02:28:09,280 --> 02:28:13,520
बनती है। सृष्टि बनती है फिर नष्ट होती है। फिर बनती है फिर नष्ट

2103
02:28:13,520 --> 02:28:19,520
होती है। यही है।

2104
02:28:19,680 --> 02:28:22,960
क्या हिसाब से

2105
02:28:22,960 --> 02:28:28,400
आपसे हिसाब के हिसाब से कितनी बारि बनती है।

2106
02:28:28,400 --> 02:28:32,400
मैं ये नहीं कह रहा हूं मेरे भाई कि कितनी बार बनती है। मैं कह रहा हूं

2107
02:28:32,400 --> 02:28:38,400
क्या? मैं कह रहा हूं मतलब बनती है और ना टूटी रहती है बार-बार।

2108
02:28:38,560 --> 02:28:42,720
आवाज कट रही है आपकी? यू आर इन द शो।

2109
02:28:42,720 --> 02:28:48,720
एवरीवन कैन सी एंड द

2110
02:28:49,200 --> 02:28:53,360
आपका फोन गरम हो गया होगा जिस कारण से शायद आपका वो रुक रहा है। रुक

2111
02:28:53,360 --> 02:28:57,520
रुक के दिखाई दे रहा है। अरे क्या आवाज आ रही है? आपके

2112
02:28:57,520 --> 02:29:01,600
पीछे टन टन की आवाज आ रही है। हां अभी दिख रहा

2113
02:29:01,600 --> 02:29:04,560
है इंटरफेस

2114
02:29:04,560 --> 02:29:10,080
नहीं शायद कुछ मोबाइल में ही आ रही है आवाज टन टन टन ऐसे

2115
02:29:10,080 --> 02:29:15,280
आप एक काम करिए जाके वापस आ जाइए हेलो आवाज

2116
02:29:15,280 --> 02:29:19,520
लेकिन मैं कह रहा था शिवम जी ढाई घंटा हो चुका है

2117
02:29:19,520 --> 02:29:24,000
हां हां ढाई घंटा हो चलिए ठीक है मैं एक क्रिएशन वाली बात में ये कह देता हूं

2118
02:29:24,000 --> 02:29:26,240
कि

2119
02:29:26,240 --> 02:29:30,240
हमको जो है उसने टेस्ट लेने के लिए भेजा कि कौन सही करता है कौन नहीं करता।

2120
02:29:30,240 --> 02:29:36,240
हालांकि उसको मालूम है कि कौन क्या करेगा। उसको मालूम है ना?

2121
02:29:38,800 --> 02:29:42,800
आप बोल लीजिए पहले फिर मैं बोलूंगा। ठीक है। उसको मालूम है

2122
02:29:42,800 --> 02:29:46,960
देखिए उसको मालूम है कि शैतान उनको बहकाएगा जन्नत वालों को।

2123
02:29:46,960 --> 02:29:51,040
फिर भी उसने शैतान को बनाया। उसको मालूम है कि कौन क्या करेगा?

2124
02:29:51,040 --> 02:29:55,120
फिर काहे का टेस्ट? उसको मालूम है कि क्यों कौन क्या करेगा?

2125
02:29:55,120 --> 02:29:59,360
फिर भी फिर भी टेस्ट लेने के लिए भेजा है। है ना? तो उसको

2126
02:29:59,360 --> 02:30:03,520
मालूम था कि कौन उसमें पास होगा, कौन उसमें फेल होगा। फिर भी उसने टेस्ट लेने के लिए भेजा

2127
02:30:03,520 --> 02:30:07,680
है। उसको मालूम था और वो यह चाहता था कि मैं अपनी क्रिएशन

2128
02:30:07,680 --> 02:30:11,360
में इनकी मदद लूं।

2129
02:30:11,360 --> 02:30:15,440
वो ये चाहता था कि मैं अपनी क्रिएशन में इनसे मैं

2130
02:30:15,440 --> 02:30:19,680
अपनी क्रिएशन में इनसे काम करवाऊं। परंतु वह

2131
02:30:19,680 --> 02:30:23,680
यह जानते हुए भी उसने एक राक्षस को बनाया हुआ था कि वो जिनको

2132
02:30:23,680 --> 02:30:27,920
मैं काम करवाने के लिए अपना जो भी करवाने के लिए बना रहा हूं वो

2133
02:30:27,920 --> 02:30:30,640
उनको बहकाएगा। फिर भी उसने उनको बनाया।

2134
02:30:30,640 --> 02:30:35,520
यानी कि उसने एक बुराई को बनाया जिसकी वजह से वो बहके

2135
02:30:35,520 --> 02:30:39,680
और वो बहके और वो जमीन पे आए और जमीन पे आके फिर से उनका

2136
02:30:39,680 --> 02:30:44,160
टेस्ट हो रहा है। जबकि उसको मालूम है कि कौन अच्छा करेगा कौन गलत करेगा।

2137
02:30:44,160 --> 02:30:49,200
यह सब बातें हैं।

2138
02:30:49,200 --> 02:30:53,440
तो आप ये समझे हैं कि बात में

2139
02:30:53,440 --> 02:30:58,000
आपका जो है ना वो रुक रुक के आ रहा है।

2140
02:30:58,000 --> 02:31:02,160
ठीक है आज के लिए यही स्टॉप करते हैं। 9:42 हो गया है और

2141
02:31:02,160 --> 02:31:08,160
कई चीजें थी जो

2142
02:31:08,560 --> 02:31:12,720
कई चीजें थी जो आपने देखा कि वो जो टॉपिक

2143
02:31:12,720 --> 02:31:16,880
है उससे मुड़ के जा रहे हैं। और जो टेस्ट वाली बात है उसको

2144
02:31:16,880 --> 02:31:22,080
मैं बता दूं कि अह

2145
02:31:22,080 --> 02:31:26,880
जब तक हम यह जो संसार में हो रहा है

2146
02:31:26,880 --> 02:31:31,200
इसको जब तक हम माया का नाम नहीं देंगे

2147
02:31:31,200 --> 02:31:35,360
अविद्या का नाम नहीं देंगे मतलब ये हो ही नहीं रहा है ये नाम नहीं देंगे तब

2148
02:31:35,360 --> 02:31:39,680
तक उस जो पॉइंट है ना कि ईश्वर ने रोका क्यों नहीं

2149
02:31:39,680 --> 02:31:43,680
उसका जो है निराकरण व्यक्ति को नहीं मिल पाएगा जब तक हम उसको

2150
02:31:43,680 --> 02:31:47,760
माया अविद्या इत्यादि के रूप में नहीं देखेंगे।

2151
02:31:47,760 --> 02:31:53,760
अब निराकरण क्यों नहीं मिल पाएगा? जब जैसे कोई

2152
02:31:55,520 --> 02:32:00,000
जी शिवम जी [हंसी] आवाज आपकी आवाज कट रही है। आप

2153
02:32:00,000 --> 02:32:04,080
आपकी आवाज कट रही है और आपका वो जो है ना जो चेहरा है वो रुक रुक के आ रहा है। आप

2154
02:32:04,080 --> 02:32:08,320
अब हम लोग फिर किसी दिन रख लेंगे। हो सकता है कल भी रखें तो कल से कंटिन्यू

2155
02:32:08,320 --> 02:32:14,320
कर लेंगे। ठीक है?

2156
02:32:18,880 --> 02:32:23,360
तो मैं ये कह रहा था कि भाई

2157
02:32:23,360 --> 02:32:27,360
जैसे कोई बच्चा है जो ये नहीं जानता है कि मेरे इंजेक्शन लग रहा है वो क्यों लग

2158
02:32:27,360 --> 02:32:31,440
रहा है या फिर बच्चा है वो किसी ऐसी चीज के लिए अपनी

2159
02:32:31,440 --> 02:32:35,440
अल्प बुद्धि के कारण किसी ऐसी चीज के लिए चाह रहा है जो

2160
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उसके लिए ठीक नहीं है तो वो रो रहा है वो रो रहा है मगर वास्तविकता

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क्या है कि वो जानता नहीं है इसलिए रो रहा है। उसकी बुद्धि कम है

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इसलिए रो रहा है। तो जब हम उसे बताते हैं कि तू जिस चीज के लिए रो रहा

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है वो वो नहीं थी जिसके लिए रोया जाए। तो यही उसका एक निराकरण हो

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सकता है। तो निराकरण क्या है? यह सारी चीजें जो हैं यह माया

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है। यह संसार प्रपंच रूपी संसार जो है माया है। इसलिए

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यहां पर होने वाला जो कार्य है उससे तुझे जो है होने की आवश्यकता नहीं है।

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और जब तुझको ही होने की आवश्यकता नहीं है तो ईश्वर

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को उससे प्रभावित जब मनुष्य

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को ही उससे प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है तो ईश्वर को उससे प्रभावित होने की कोई आवश्यकता

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शेष नहीं रह जाती।

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दूसरी बात। दूसरी बात यह है कि

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इन्होंने कहा कि वो जो यह मैं इसलिए कह रहा हूं

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कि भाई क्या कहते हैं ये मैं इसलिए कह रहा

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हूं क्योंकि इन्होंने ये सब पॉइंट उठाए ना बीच-बीच

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में कि आप बताओ। अच्छा दूसरी बात इन्होंने एक बात बीच में कही थी

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कि भाई वेद से ईश्वर का अवतार सिद्ध करो। तो हम लोग कई बार उस पर वीडियो बना चुके हैं। 31

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19 में नाना रूपों में प्रकट होता है। ये किसका सहारा ले रहे हैं यहां पर? वो

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आप समझ सकते हैं। ठीक है? और

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एक बात और थी कि जो है

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तो जब जो ये जानता है कि ये खेल है ये अविद्या

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है। है ना ये माया है। वो अगर उससे प्रभावित नहीं हो रहा है कि वहां

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जो हो रही है चीजें वो ना हो। तो जो यह जानता है कि अविद्या है उसको

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कोई फर्क उसको प्रभावित ना होना उस चीजों

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से वो जरूरी नहीं कि हो और बाकी

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इन्होंने जो कहानी सुनाई मैंने पूछा कि टेस्ट लेने क्यों भेजा तो टेस्ट लेने इसलिए

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सबसे पहली बात तो टेस्ट लेने भेजा है तो ईश्वर को मालूम था कि नहीं मालूम था कि

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टेस्ट टेस्ट में कौन पास होगा कौन फेल होगा पहली बात दूसरी बात ये है कि

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उसको जन्नत में भेजा था उसको अपना काम करवाना था उसको मालूम था ना भैया रोड़ा

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बनेगा तो उसको बनाना ही नहीं चाहिए काम खत्म। अच्छा

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खैर ये सब चीजें हो गई। इन्होंने वो लॉजिक वाली बात है। सर्वशक्तिमान पे

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तो इधर-उधर से बच के निकलने का प्रयास होता रहा कि भाई मैं ये नहीं

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कहूंगा कर नहीं सकता। मैं तो ये कहूंगा उसके लिए वो नहीं। वो कर नहीं सकता वाली चीज आएगी नहीं।

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और अभी हम लोग धर्म पे, ईश्वर के अस्तित्व पे और मोक्ष पे

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उस पे गए नहीं है। वो हम आगे अगर इनसे चर्चा हुई तो जाएंगे।

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और बुराई हां बुराई को बनाना बुराई है

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कि नहीं बुराई को बनाना बुराई है अगर वह व्यक्ति जानता है कि

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क्या हो रहा है क्यों हो रहा है जब तक उस बुराई के अस्तित्व को ही आप नहीं नकारोगे बुराई

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है ही नहीं इसका अस्तित्व ही नहीं है तब तक उसका दोष उसको लगेगा जो सामर्थ्यवान

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होते हुए भी उसको नहीं रोक रहा है ये सारी चीजें थी जो समझ रहे अभी बात हो नहीं पाई

2200
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उनका फोन गरम हो गया था फोन गरम होता है तो ऐसा होने लगता है

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मेरा भी कुछ समय पहले तक हुआ था मेरे साथ चलिए

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चलिए फिर पंडित जी अगर हैं तो उनको ले लिया जाए क्या?

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नहीं है। चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम। दो घंटे 36 मिनट की एक

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काफी लंबी चर्चा हुई। जय श्री राम सभी को।
