1
00:00:01,200 --> 00:00:05,680
तो सभी को जय श्री राम।

2
00:00:05,680 --> 00:00:11,600
आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और अभी अभी

3
00:00:11,600 --> 00:00:17,600
दयानंद जी के सिद्धांतों को मानने वाले एक काफी

4
00:00:18,000 --> 00:00:22,640
डडीिकेटेड व्यक्ति के साथ जो बहुत समर्पित है शायद

5
00:00:22,640 --> 00:00:26,720
भावनाओं से दयानंद जी के प्रति उसके साथ एक अच्छी वार्ता

6
00:00:26,720 --> 00:00:30,960
हुई है नॉलेजफुल मतलब काफी इनफेटिव चीजें आपको उससे

7
00:00:30,960 --> 00:00:35,200
मिलेंग आप उसे अवश्य देखें और

8
00:00:35,200 --> 00:00:39,200
उस वार्ता में वार्ता में अंत में

9
00:00:39,200 --> 00:00:43,280
उसमें मतलब वह सहजता के साथ में उस वार्ता अपने गंतव्य तक

10
00:00:43,280 --> 00:00:47,760
नहीं पहुंची है। तो प्रतिक्रियात्मक

11
00:00:47,760 --> 00:00:51,760
उस व्यक्ति ने जो यहां पर निरुत्तर हुआ हमारी

12
00:00:51,760 --> 00:00:56,240
जानकारी में उसकी जानकारी में जो भी हो हमारे किसी भी सिद्धांत

13
00:00:56,240 --> 00:01:00,400
को वो काट नहीं पाया। उसने काउंटर क्वेश्चन किए पर एक समय

14
00:01:00,400 --> 00:01:04,800
पर जाकर चुप भी हुआ और ऐसा उसने कुछ नहीं किया जिससे अवतार सिद्ध

15
00:01:04,800 --> 00:01:09,040
नहीं होता और इस पर हम लोग एक विस्तृत

16
00:01:09,040 --> 00:01:13,200
चर्चा संभवत करेंगे पर हमारे चैनल पर नहीं

17
00:01:13,200 --> 00:01:16,400
सनातन शंकर जी के चैनल पर एक विस्तृत चर्चा होगी इस बारे

18
00:01:16,400 --> 00:01:21,120
में तो वहां पर एक विस्तृत चर्चा आपको देखने को मिलेगी तो

19
00:01:21,120 --> 00:01:25,360
आप लोग अपडेटेड रह और अभी जो है हम जब दिल्ली पालम गए

20
00:01:25,360 --> 00:01:29,360
थे तो पालम में ब्रह्मा कुमार ारी से उत्पन्न

21
00:01:29,360 --> 00:01:31,840
एक

22
00:01:31,840 --> 00:01:36,160
संस्था जिसका नाम था आध्यात्मिक विश्वविद्यालय उनके

23
00:01:36,160 --> 00:01:40,320
किसी सज्जन के साथ सज्जन कैसे कहें मतलब प्रतिनिधि के साथ

24
00:01:40,320 --> 00:01:44,480
तो हमारी चर्चा हुई थी वो आप लोगों ने देखी होगी तो

25
00:01:44,480 --> 00:01:48,640
अभी उसी संबंध में मुझे मतलब अभी ये जो आने वाले हैं अभी

26
00:01:48,640 --> 00:01:52,960
हमारे साथ में तो ये उसी से कनेक्टेड है बट

27
00:01:52,960 --> 00:01:57,200
बट पूरी तरीके से मतलब उसी सेंटर का हिस्सा नहीं है शायद कुछ विरोधाभास

28
00:01:57,200 --> 00:02:03,200
भी तो अभी देखते हैं इनको लेते हैं और फिर बात करते हैं।

29
00:02:09,200 --> 00:02:13,520
जय श्री राम विवेक जी जय श्री राम शिवश

30
00:02:13,520 --> 00:02:16,960
जी

31
00:02:16,960 --> 00:02:22,960
जी आपकी आवाज बहुत धीमी आ रही है शिवश जी

32
00:02:23,680 --> 00:02:29,680
आप मेरी आवाज बहुत धीमी आ रही है हां जी

33
00:02:32,620 --> 00:02:36,960
[गला साफ़ करने की आवाज़] मैंने तो अपना फोन स्पीकर आप वॉल्यूम वगैरह इनक्रीस

34
00:02:36,960 --> 00:02:40,880
करके देख लीजिए एक बार एक बार

35
00:02:40,880 --> 00:02:45,040
एक इसमें स्पीकर में शायद आवाज नहीं आ रहा है। स्पीकर का कोई ऑप्शन है

36
00:02:45,040 --> 00:02:48,960
इसमें। हां

37
00:02:48,960 --> 00:02:51,760
अब ठीक है।

38
00:02:51,760 --> 00:02:55,920
नहीं अभी भी आवाज तो कम ही है। आप एक काम करिए पहले एक

39
00:02:55,920 --> 00:03:00,080
बार आउट हो जाइए और फिर दोबारा उसी लिंक से जुड़कर वही प्रोसेस पूरी करते

40
00:03:00,080 --> 00:03:04,160
हुए आ जाइए। अब सेटिंग्स आपको नहीं सही करनी पड़ेगी।

41
00:03:04,160 --> 00:03:10,160
सेटिंग करनी नहीं पड़ेगी तो आ जाएंगे फॉलो करते हुए।

42
00:03:10,160 --> 00:03:14,320
और कैमरे को बहुत ज्यादा दूर भी मत रखिए आप क्योंकि कैमरा

43
00:03:14,320 --> 00:03:20,320
बहुत दूर रख रहे हैं तो उसमें फिर आपकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है।

44
00:03:21,680 --> 00:03:25,680
मैं एक बार आउट करता हूं। आप दोबारा आओ फिर देखो। ठीक है।

45
00:03:25,680 --> 00:03:31,680
हां जी। ठीक है

46
00:03:36,080 --> 00:03:40,400
तो वो जो चर्चा है पूरी चार घंटे के लगभग बना है बट हमने

47
00:03:40,400 --> 00:03:44,560
उसको समराइज करके जो है और दो हिस्सों में

48
00:03:44,560 --> 00:03:48,960
डाल दिया एक हिस्से में जिसमें उस व्यक्ति ने पूछा था कि भाई

49
00:03:48,960 --> 00:03:53,040
अवतार होता है इस संबंध में आपकी धारणा क्या है

50
00:03:53,040 --> 00:03:57,200
मतलब कैसे मानते हो कैसे वह एक जो एक तरीके से उसको

51
00:03:57,200 --> 00:04:01,520
प्रतिज्ञा कह सकते हैं कि आपकी क्या कहना क्या चाहते

52
00:04:01,520 --> 00:04:05,680
तो वह एक पार्ट में है उसने कोई इसमें काउंटर नहीं किया है

53
00:04:05,680 --> 00:04:10,400
और अगर किया है तो हमने उसका निराकरण प्रस्तुत किया है अगर उसने सवाल किए

54
00:04:10,400 --> 00:04:14,560
और दूसरा पार्ट है कि क्या

55
00:04:14,560 --> 00:04:18,560
ईश्वर सब कुछ कर सकता है इस संबंध में और ईश्वर को ईश्वर के

56
00:04:18,560 --> 00:04:22,560
अवतार के विषय में शब्द ही प्रमाण है इस संबंध

57
00:04:22,560 --> 00:04:26,560
में बातचीत उस व्यक्ति का वहां कहना था के लक्षण है वह सब

58
00:04:26,560 --> 00:04:31,920
वैसे हम सनातन शंकर जी के भी बताएंगे मगर अभी बात हो रही है तो

59
00:04:31,920 --> 00:04:36,080
जैसे उसने कहा कि भाई ईश्वर को पहचाने कैसे कि उसमें

60
00:04:36,080 --> 00:04:36,800
ये चीजें हो

61
00:04:36,800 --> 00:04:41,040
सकती है तो हमने उसको कहा भी कि भाई प्रणव को क्यों तुम ईश्वर से संबंधित मानते हो शब्द

62
00:04:41,040 --> 00:04:45,120
प्रमाण है बहुत सी चीजों में ईश्वर से तो उसमें उसने काउंटर नहीं किया उन

63
00:04:45,120 --> 00:04:49,280
चीजों का और एक बहुत बड़ी चीज है कि भाई जब ऋषियों

64
00:04:49,280 --> 00:04:53,680
के अंतःकरण में उनके अनुसार ईश्वर ने वेद

65
00:04:53,680 --> 00:04:57,680
के मंत्र प्रकाशित किए ये तो ऋषियों ने कौन से

66
00:04:57,680 --> 00:05:02,480
लक्षण से पहचाना था क्योंकि कोई भी लक्षण व्यवहार में आने वाला है नहीं उसकी सर्व्यापकता

67
00:05:02,480 --> 00:05:06,560
है ना और अगर एक आध लक्षण आ भी रहा हो वैसे आ नहीं सकता मगर दुर्जन तो

68
00:05:06,560 --> 00:05:10,720
उस न्याय से मान भी ले तो आ भी रहा हो तो मगर सारे लक्षण जब तक घटित नहीं होंगे

69
00:05:10,720 --> 00:05:14,880
लक्षण जब तक घटित नहीं होंगे तब तक कैसे माना जाएगा तो वैसे इस संबंध

70
00:05:14,880 --> 00:05:19,360
में एक प्रॉपर एक चीज है कि हम

71
00:05:19,360 --> 00:05:23,360
वहां पर चर्चा करेंगे मगर इतना है कि भाई आपने कैसे माना कि

72
00:05:23,360 --> 00:05:27,520
ऋषियों के अंतःकरण ईश्वर ने वेद प्रकाशित किए वो कैसे

73
00:05:27,520 --> 00:05:31,760
पहचाना था कि ऋषियों का अनुभव आप पुरुषों का अनुभव शब्द

74
00:05:31,760 --> 00:05:35,840
प्रमाण है ना उन्होंने अनुभव किया कि ईश्वर ही है

75
00:05:35,840 --> 00:05:40,160
वहां तो कोई प्रमाण नहीं था तो सारी चीजें हमारी उसमें बहुत क्लियर है

76
00:05:40,160 --> 00:05:44,160
सामने वाला ना तो काउंटर कर पाया काउंटर तो खैर वो किया

77
00:05:44,160 --> 00:05:48,160
ही नहीं सवाल किए उन सवालों का हम जवाब देते गए और

78
00:05:48,160 --> 00:05:51,840
चर्चा के अंत में उसने कुछ ऐसी चीजें की जिसके कारण हमें

79
00:05:51,840 --> 00:05:56,240
उसे हटाना पड़ा वो आप लोग जानते ही हैं देख सकते हैं तो वो दो पार्ट में जिसको संक्षेप

80
00:05:56,240 --> 00:06:00,320
में देखना हो तो आप जो है उसमें देख सकते हैं। मैं इनको भाई साहब को ले

81
00:06:00,320 --> 00:06:04,800
लेता हूं। जी विवेक जी जय श्री राम।

82
00:06:04,800 --> 00:06:08,960
जय श्री राम। ओम शांति सभी को और नए साल की सभी

83
00:06:08,960 --> 00:06:14,480
को बहुत-बहुत शुभकामना। ठीक आ रही है आवाज? अब बिल्कुल ठीक आ रही है?

84
00:06:14,480 --> 00:06:18,080
हां जी।

85
00:06:18,080 --> 00:06:22,400
तो बोलिए। म आपका अगर कोई सवाल

86
00:06:22,400 --> 00:06:26,480
है तो जिस सवाल से हम चर्चा शुरू कर सकते हैं

87
00:06:26,480 --> 00:06:30,560
तो पहले सबसे पहले थोड़ा सा अपने बारे में जैसे हमारा

88
00:06:30,560 --> 00:06:34,800
जो आपने वो वीडियो देखा उस वीडियो से आपका संबंध क्या

89
00:06:34,800 --> 00:06:39,040
आपके मन में प्रेरणा आई कि आपको हमसे संपर्क करना चाहिए

90
00:06:39,040 --> 00:06:43,200
तो उस संबंध में थोड़ी सी चीजें जो बतानी है वो आप बता दीजिए

91
00:06:43,200 --> 00:06:47,360
अभी हम उस पक्ष में नहीं जा रहे हैं कि आपकी आईडियोलॉजी क्या है धर्म

92
00:06:47,360 --> 00:06:51,520
और ईश्वर के संबंध में अध्यात्म के संबंध में वो एक अलग पक्ष है। है ना?

93
00:06:51,520 --> 00:06:55,600
मगर आपका अपना जो व्यवहारिक अस्तित्व जो आप स्वीकार करते

94
00:06:55,600 --> 00:07:00,000
हैं कि मैं यह हूं, हमारी संस्था यह है और वो जो पालम वाला वीडियो

95
00:07:00,000 --> 00:07:04,000
है उस उस वीडियो से इस प्रकार से कनेक्टेड है। उस केंद्र से

96
00:07:04,000 --> 00:07:07,040
यह विरोध है या विरोध नहीं है जो भी है

97
00:07:07,040 --> 00:07:11,440
वो चीजें आप बता दीजिए। देखिए पालम

98
00:07:11,440 --> 00:07:15,600
वाला जो वीडियो देखा था हमने वैसे पालम

99
00:07:15,600 --> 00:07:19,680
का जो जिस सेंटर में आप गए थे वो हमारे सेंटर

100
00:07:19,680 --> 00:07:24,480
से ही उन्होंने कुछ दिनों पहले अपना एक अलग सेंटर बना लिया।

101
00:07:24,480 --> 00:07:28,480
म हमसे अलग होकर हमसे अलग होकर उन्होंने अपना

102
00:07:28,480 --> 00:07:32,720
एक अलग सेंटर बना लिया। तो अच्छा उनकी

103
00:07:32,720 --> 00:07:36,880
तो म दोनों के

104
00:07:36,880 --> 00:07:41,280
जो कुछ भी है तो

105
00:07:41,280 --> 00:07:45,360
आवाज आ रही है अभी कट गई थी आपकी आवाज। हां तो उसमें

106
00:07:45,360 --> 00:07:51,200
दो म तो म वो जो सेंटर है वो हमारे

107
00:07:51,200 --> 00:07:55,200
म हम हमसे म अलग हो गए और उन्होंने अपना एक अलग सेंटर बना

108
00:07:55,200 --> 00:08:00,720
लिया तो उसमें जो है वो हमारे

109
00:08:00,720 --> 00:08:05,040
एक मिनट थोड़ा सा यहां क्लियर कर दे पहले तो ये

110
00:08:05,040 --> 00:08:09,280
थोड़ा सा बता दीजिए कि मतलब आपका जो संस्था है आपके आपका

111
00:08:09,280 --> 00:08:13,600
भी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम है आपकी संस्था का जी

112
00:08:13,600 --> 00:08:17,760
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय ओरिजिन जो है वो हमारा

113
00:08:17,760 --> 00:08:22,880
है जो 1976

114
00:08:22,880 --> 00:08:27,120
एक मिनट मैं कुछ और पूछ रहा हूं ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के पीछे भी

115
00:08:27,120 --> 00:08:31,120
ब्रह्मा कुमारी है हां जी

116
00:08:31,120 --> 00:08:35,120
ब्रह्मा कुमारी से निकल एक मिनट भाई साहब मैं मतलब

117
00:08:35,120 --> 00:08:39,120
एक पक्ष रख दूं फिर आप उसमें अपनी बात बता दीजिए ब्रह्मा कुमारी से

118
00:08:39,120 --> 00:08:44,320
निकल ब्रह्मा कुमारी से निकलता है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

119
00:08:44,320 --> 00:08:48,560
और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से निकलता है एक नकली आध्यात्मिक

120
00:08:48,560 --> 00:08:52,720
विश्वविद्यालय और ऐसा ही है।

121
00:08:52,720 --> 00:08:57,680
देखिए वो भी हमारे ही अनुयाई थे पहले

122
00:08:57,680 --> 00:09:01,840
उनको कुछ और एक्स्ट्रा करके दिखाना है। आप समझे नहीं मेरी बात। आप

123
00:09:01,840 --> 00:09:06,560
बताइए आप आप अपनी बात बताइए मतलब एक क्लियर कर दीजिए

124
00:09:06,560 --> 00:09:10,880
कि ब्रह्मा कुमारी से अलग होता है पहले आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

125
00:09:10,880 --> 00:09:14,960
कुछ थोड़े बहुत मतभेद से है ना देखिए अलग

126
00:09:14,960 --> 00:09:19,040
अलग नहीं कहेंगे क्या है एक होता है बेसिक

127
00:09:19,040 --> 00:09:24,240
नॉलेज एक्सपेंशन प्राइमरी नॉलेज नहीं वो प्राइमरी

128
00:09:24,240 --> 00:09:28,560
मैं वो नहीं कह रहा नॉलेज होता है मैं वो नहीं कह रहा हूं भाई साहब

129
00:09:28,560 --> 00:09:32,640
मैं ये कह रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारीज का एक एक्सपेंशन है, एक

130
00:09:32,640 --> 00:09:37,920
ब्रांच है आप या कुछ मामलों में क्योंकि

131
00:09:37,920 --> 00:09:38,420
ब्रह्मा

132
00:09:38,320 --> 00:09:42,400
कुमारी में और हमारे में कुछ मतभेद म

133
00:09:42,400 --> 00:09:46,400
ज्ञान के आधार से कुछ मतभेद मैं वही

134
00:09:46,400 --> 00:09:50,400
कह रहा हूं वही कह रहा हूं। तो जिसके कारण

135
00:09:50,400 --> 00:09:54,400
तो अभी अरे भाई साहब विवेक जी ऐसा है ना पहले एक हेडलाइन सेट

136
00:09:54,400 --> 00:09:58,640
कर दे फिर आप अच्छे से बोलिएगा। हेडलाइन यह है कि ब्रह्मा कुमारी

137
00:09:58,640 --> 00:10:02,640
से थोड़े से मतभेद से आपका आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

138
00:10:02,640 --> 00:10:06,880
अलग रूप में स्फुटित हो जाता है। ठीक है? आईडियोलॉजी बेसिक

139
00:10:06,880 --> 00:10:10,960
आईडियोलॉजी है। आईडियोलॉजी बेसिक वही है। बस थोड़ा से कुछ

140
00:10:10,960 --> 00:10:15,040
मतभेद है इसलिए आप आप हो और ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी है।

141
00:10:15,040 --> 00:10:19,040
ठीक है? अब इसके बाद अब इसके बाद ब्रह्मा जो

142
00:10:19,040 --> 00:10:23,680
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है उससे भी एक

143
00:10:23,680 --> 00:10:27,920
और स्फोटित हो जाता है अलग। अब यह जो अलग हुआ है यह

144
00:10:27,920 --> 00:10:30,400
कुछ

145
00:10:30,400 --> 00:10:34,480
क्या कहते हैं जो व्यवहारिक पक्ष है उसको लेकर के अलग हुआ

146
00:10:34,480 --> 00:10:38,480
है जैसे कि मेरी जमीन मेरा मकान या मेरी दुकान इस

147
00:10:38,480 --> 00:10:42,560
तरह की चीजों को लेकर के या फिर इसकी भी आईडियोलॉजी थोड़ी सी क्योंकि

148
00:10:42,560 --> 00:10:46,880
अलग है आपसे इसलिए वो अलग हुआ है। ये कह रहा हूं जैसे आप आपका ब्रह्मा

149
00:10:46,880 --> 00:10:51,200
कुमारीज के साथ प्रॉपर्टी को लेके मामला नहीं है। समझ रहे हैं? आपका ब्रह्मा

150
00:10:51,200 --> 00:10:53,360
कुमारीज के साथ मामला है कि

151
00:10:53,360 --> 00:10:57,360
वो कुछ शिक्षाओं में आप उनसे इतर हो। तो

152
00:10:57,360 --> 00:11:01,440
जैसे यह आपसे अलग हुआ है तो यह शिक्षाओं में इत है या फिर प्रॉपर्टी

153
00:11:01,440 --> 00:11:05,920
इत्यादि को लेकर के या जो कि नहीं मेरा मैं अपने नाम से चलाऊंगा

154
00:11:05,920 --> 00:11:10,000
ये आप लोग गलत कर रहे हो ऐसा कुछ देखिए

155
00:11:10,000 --> 00:11:14,720
उनका क्या म उनकी क्या प्रॉब्लम है

156
00:11:14,720 --> 00:11:18,800
ये हम म इसमें हम हमसे यानी इसके

157
00:11:18,800 --> 00:11:23,200
बारे में हमको कोई डिटेल पता नहीं है लेकिन

158
00:11:23,200 --> 00:11:28,160
और उसमें हमको जाना भी नहीं है तो उनकी समस्या क्या है वो

159
00:11:28,160 --> 00:11:32,320
म वही बता सकते हैं। ठीक है? और इनसे हमको

160
00:11:32,320 --> 00:11:36,560
म कोई लेना देना भी नहीं है। लेकिन वास्तव

161
00:11:36,560 --> 00:11:40,800
में अभी जो हमको परिचय म जिस उद्देश्य से हम

162
00:11:40,800 --> 00:11:44,960
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जो संस्था है वास्तव में संस्था

163
00:11:44,960 --> 00:11:50,400
नहीं है। यह एक परिवार है। ईश्वरीय परिवार

164
00:11:50,400 --> 00:11:54,400
और ईश्वरीय परिवार का

165
00:11:54,400 --> 00:11:59,600
जो हमारा जो लक्ष्य है यह हमारा वसुदेव का कुटुंबरी

166
00:11:59,600 --> 00:12:03,600
थोड़ी पटरी थोड़ी सी बदल रही है। पहले वो जो मामला है ना

167
00:12:03,600 --> 00:12:07,840
उसको क्लियर करना आवश्यक है। जैसे आपने कहा कि हम ओरिजिन है। तो

168
00:12:07,840 --> 00:12:12,960
इसका मतलब आप ये कह रहे हैं वो ओरिजिनल नहीं है। देखिए

169
00:12:12,960 --> 00:12:17,040
हमारे नहीं आपको वो हमारा

170
00:12:17,040 --> 00:12:21,440
वही मामला है। उस उसको हम उससे

171
00:12:21,440 --> 00:12:26,720
उसको जो है हम ज्यादा उसको

172
00:12:26,720 --> 00:12:30,960
उससे हमारा कोई लेना देना नहीं है मतलब वो हमारा आपस का मामला है उसको

173
00:12:30,960 --> 00:12:35,040
हम उनको भी हम ओरिजिनल उनको भी ओरिजिनल माने उनको

174
00:12:35,040 --> 00:12:37,600
भी ओरिजिन

175
00:12:37,600 --> 00:12:43,600
हां जी उनको भी ओरिजिन माने

176
00:12:43,680 --> 00:12:47,680
तो ओरिजिन माना क्या है हम लोग वो अभी अभी अलग हुए

177
00:12:47,680 --> 00:12:52,000
2018 से अरे तो मैं वही कह रहा हूं ना अलग किस बात पे हुए हैं मकान

178
00:12:52,000 --> 00:12:56,080
की बात पे दुकान की बात पे कौन सी बात पर अलग हुए वो

179
00:12:56,080 --> 00:13:00,560
जानना चाह रहा हूं आईडियोलॉजी को लेकर अलग है कि चीज को लेकर अलग

180
00:13:00,560 --> 00:13:03,760
वो मुझे नहीं पता

181
00:13:03,760 --> 00:13:07,760
उसके बाद आप ये क्लेम ये क्लेम कैसे कर रहे

182
00:13:07,760 --> 00:13:11,840
हो कि वो अलग है वो ऐसा क्या कर रहे हैं कि वो अलग है उन्होंने बोर्ड तो आप ही

183
00:13:11,840 --> 00:13:16,160
का लगाया है तो आप यह क्यों नहीं कह रहे हो कि वह हमारा ही ब्रांच

184
00:13:16,160 --> 00:13:18,480
है

185
00:13:18,480 --> 00:13:22,480
क्योंकि उन्होंने जो है हमारे म जो हमारे जो

186
00:13:22,480 --> 00:13:27,200
मधुबन के सिद्धांत है उन नियमों के

187
00:13:27,200 --> 00:13:32,080
अलग अपनी एक संस्था चालू कर दी म अलग से इसी नाम से

188
00:13:32,080 --> 00:13:36,080
उन्होंने एक म अलग सेंटर चालू कर दिया जो

189
00:13:36,080 --> 00:13:40,160
कि हमारे सिद्धांतों के अकॉर्डिंग नहीं है।

190
00:13:40,160 --> 00:13:44,640
जैसे मतलब कुल मिलाकर के जैसे आपके यहां पर जो आपकी

191
00:13:44,640 --> 00:13:48,720
यह जो आपका परिवार है इसको व्यवस्थित रखने के कुछ नियम

192
00:13:48,720 --> 00:13:53,040
कायदे कानून होंगे आपके यहां उन नियम

193
00:13:53,040 --> 00:13:57,040
उन नियम कायदे कानूनों के विरुद्ध जाकर के उन्होंने अपना सेंटर क्योंकि

194
00:13:57,040 --> 00:13:59,200
स्टार्ट किया है इसलिए

195
00:13:59,200 --> 00:14:03,440
वो आप उनको अलग कह रहे हो जी बिल्कुल

196
00:14:03,440 --> 00:14:09,440
तो कुछ थोड़ा सा बताएंगे नियम कायदा कानून क्या था वो थोड़ा सा

197
00:14:10,000 --> 00:14:14,000
नियम कायदा कानून हमारे सेंटर का यह नियम कायदा कानून है

198
00:14:14,000 --> 00:14:18,000
कित जो उन्होंने तोड़ा है अभी

199
00:14:18,000 --> 00:14:22,000
आप जो भी हमारे सेंटर की

200
00:14:22,000 --> 00:14:26,240
निमित होती है तो शिव म परमपिता परमात्मा

201
00:14:26,240 --> 00:14:30,560
आ के कन्या माताओं को आगे बढ़ाते हैं कन्या माताओं

202
00:14:30,560 --> 00:14:33,040
के

203
00:14:33,040 --> 00:14:37,280
सर पर ज्ञान का कलश रखते हैं। कन्या माताओं

204
00:14:37,280 --> 00:14:42,080
को ज्ञान सुनाने के लिए आगे बढ़ाते हैं। प्रोत्साहन आगे

205
00:14:42,080 --> 00:14:46,080
बढ़ाते हैं और उनको ही जो है वो इंचार्ज बनाते हैं।

206
00:14:46,080 --> 00:14:51,600
तो इन सिद्धांतों से हटकर वो मना

207
00:14:51,600 --> 00:14:55,920
तो इन सिद्धांतों पर वो नहीं चल रहे हैं।

208
00:14:55,920 --> 00:15:01,520
और उन्होंने अपना वो क्या वो क्या पुरुषों को आगे बढ़ा रहे हैं क्या?

209
00:15:01,520 --> 00:15:05,520
म खुद ही पुरुषों अभी आप गए तो आपको

210
00:15:05,520 --> 00:15:09,680
म जो भाई साहब मिले थे तो आप तो उनके सेंटर

211
00:15:09,680 --> 00:15:13,840
पर गए थे ना तो वहां पर आपको कोई लेडी मिली क्या कोई माता या

212
00:15:13,840 --> 00:15:14,400
कोई बहन

213
00:15:14,400 --> 00:15:18,560
जो आपको अटेंड करे अटेंड करे मा ज्ञान सुनाने के

214
00:15:18,560 --> 00:15:22,560
लिए तो यहां पर हमारे में जो निमित्त होते

215
00:15:22,560 --> 00:15:26,560
हैं वो जो है कन्या माता होते हैं तो शिव बाबा

216
00:15:26,560 --> 00:15:30,720
ने जब परमपिता परमात्मा जो परमपिता परमात्मा शिव

217
00:15:30,720 --> 00:15:34,720
जो है उन्होंने कन्या माताओं को आगे बढ़ाया ज्ञान

218
00:15:34,720 --> 00:15:38,800
का कलश कन्या माताओं को दिया है बांटने के लिए।

219
00:15:38,800 --> 00:15:43,680
मतलब वो इस चीज को वो इस चीज का उल्लंघन कर रहे हैं।

220
00:15:43,680 --> 00:15:47,920
वो इस चीज का उल्लंघन कर रहे हैं। तो इस समय आपके यहां पर कोई माता

221
00:15:47,920 --> 00:15:51,920
कन्या कोई आपके यहां इस समय कन्या माता होंगी जो ज्ञान का कलश जिनके सर पर

222
00:15:51,920 --> 00:15:56,320
है इस समय। ज्ञान का कलश

223
00:15:56,320 --> 00:16:00,400
स्थूल कलश नहीं है। ज्ञान ज्ञान उनके

224
00:16:00,400 --> 00:16:04,800
पास आता है। मैं समझ गया। ज्ञान उनके पास आता है। उनके पास

225
00:16:04,800 --> 00:16:08,800
आता नहीं है वो परमात्मा तो ज्ञान

226
00:16:08,800 --> 00:16:13,760
देने वाला जो है शिव बाबा उनकी देह में आते होंगे

227
00:16:13,760 --> 00:16:18,160
नहीं नहीं नहीं शिव बाबा तो प्रैक्टिकल में साकार सृष्टि

228
00:16:18,160 --> 00:16:22,160
पर सम्मुख बैठ के हमको म ज्ञान सुनाते हैं किसी

229
00:16:22,160 --> 00:16:26,080
के शरीर में नहीं आते

230
00:16:26,080 --> 00:16:30,400
शरीर में ही आते हैं। अभी ये बात ही हमको क्लियर करना है कि परमपिता

231
00:16:30,400 --> 00:16:35,440
परमात्मा कैसे म सृष्टि पर आते हैं।

232
00:16:35,440 --> 00:16:40,000
वो करेंगे वो एक हमारे दूसरा पक्ष है अभी थोड़ा सा समझ ले

233
00:16:40,000 --> 00:16:44,320
व्यवस्था क्या है वो समझ रहा हूं तो आपके यहां पे

234
00:16:44,320 --> 00:16:48,960
आपके यहां पे कन्या माता कोई होंगी मेन जिनको ज्ञान

235
00:16:48,960 --> 00:16:52,960
जो स्थूल कलश नहीं जो एक ज्ञानार्थक कलश जिनके

236
00:16:52,960 --> 00:16:57,040
सर पर परमपिता परमात्मा ने दे रखा है दे रखा है

237
00:16:57,040 --> 00:17:01,360
है ना तो वो उनका नाम क्या है उनको ही निमित्त

238
00:17:01,360 --> 00:17:05,440
रखा है उनका नाम क्या है? मैं वही कह रहा

239
00:17:05,440 --> 00:17:09,760
हूं। उनका नाम क्या है? जिनको निमित्त रखा है। वो

240
00:17:09,760 --> 00:17:14,400
तो देखिए म वो तो एक सेंटर नहीं है हमारा

241
00:17:14,400 --> 00:17:18,400
ढेर सारे सेंटर है। जितने भी जितने भी

242
00:17:18,400 --> 00:17:22,320
यहां पर शहर है मुख्य मुख्य

243
00:17:22,320 --> 00:17:26,400
शहरों में एक एक सेंटर सेंटर में एक कन्या

244
00:17:26,400 --> 00:17:30,480
माता हेड है। सेंटर में एक एक कन्या माता निमित्त शिव

245
00:17:30,480 --> 00:17:34,480
बाबा ने उनको निमित्त बनाया है। सेंटर बहुत बढ़िया के

246
00:17:34,480 --> 00:17:38,640
लिए बहुत बढ़िया अगली अब अगली बात ये

247
00:17:38,640 --> 00:17:41,200
अगला अगली बात ये है कि वो कौन

248
00:17:41,200 --> 00:17:45,280
व्यक्ति है जो ये जो परंपरा है अच्छा एक चीज और ये

249
00:17:45,280 --> 00:17:49,360
जो कन्या माताओं को आगे करने वाली बात है ये ब्रह्मा कुमारी

250
00:17:49,360 --> 00:17:54,160
से आई है ना ये तो ब्रह्मा कुमारी में भी ऐसा ही होता होगा

251
00:17:54,160 --> 00:17:58,240
हां जी ब्रह्मा कुमारी में भी ऐसा ही होता है लेकिन एक बात है

252
00:17:58,240 --> 00:18:02,960
ब्रह्मा कुमारी में जो होता है वो दिखावे

253
00:18:02,960 --> 00:18:08,160
दिखावे का होता है। जैसे ब्रह्मा कुमारी में

254
00:18:08,160 --> 00:18:12,160
जो भी दिखाने के लिए उनको गद्दी पर बिठाया गया है। लेकिन

255
00:18:12,160 --> 00:18:16,160
पीछे से उनको चलाने वाले सारे पुरुष है। कन्या माता जैसे कि

256
00:18:16,160 --> 00:18:20,320
रबर स्ट रबर स्टैंप है। जैसे कि सारी जो ताकत

257
00:18:20,320 --> 00:18:24,400
है वो तो पुरुषों के हाथ में है। प्रॉपर्टी से लेकर के

258
00:18:24,400 --> 00:18:28,880
जो कुछ भी है बाकी उनका इतना डिटेल मुझे पता नहीं है।

259
00:18:28,880 --> 00:18:33,200
लेकिन कन्या माताओं को सिर्फ रबर स्टैंप की तरह मतलब

260
00:18:33,200 --> 00:18:38,080
एक तरीके से वहां पर भ्रष्टाचार है ब्रह्मा कुमारी में

261
00:18:38,080 --> 00:18:42,160
भ्रष्टाचार की बात नहीं कह रहा मैं नहीं तो दिखावे

262
00:18:42,160 --> 00:18:46,160
का मतलब भ्रष्ट आचरण का मतलब होता है एक मिनट

263
00:18:46,160 --> 00:18:50,560
भाई साहब भ्रष्ट आचरण का मतलब मतलब होता है गलत आचरण

264
00:18:50,560 --> 00:18:54,560
भ्रष्ट यानी गलत और आप ये कह रहे हैं वहां दिखावा हो रहा है यानी ढोंग

265
00:18:54,560 --> 00:18:56,720
हो रहा है तो ढोंग हो रहा है तो उसको भ्रष्टाचार

266
00:18:56,720 --> 00:18:59,680
नहीं कह सकते क्या

267
00:18:59,680 --> 00:19:04,400
हां तो भ्रष्टाचार कह सकते हैं आपके

268
00:19:04,400 --> 00:19:08,480
आपके तरीके से लेकिन भ्रष्टाचार का जो मेन

269
00:19:08,480 --> 00:19:12,640
अर्थ है वो परमपिता परमात्मा ने बताया

270
00:19:12,640 --> 00:19:16,640
है कि भ्रष्टाचार माना भ्रष्ट इंद्रियों से जो आचरण किया जाता

271
00:19:16,640 --> 00:19:20,800
है उससे भ्रष्ट वो उसको भ्रष्टाचार कहा जाता है

272
00:19:20,800 --> 00:19:25,520
तो तो आप ये बताइए जब कोई व्यक्ति ढोंग कर रहा है कोई व्यक्ति

273
00:19:25,520 --> 00:19:29,600
एक मिनट भाई साहब क्लियर करते चले जब कोई व्यक्ति ढोंग कर रहा

274
00:19:29,600 --> 00:19:33,680
है जो चीज है नहीं वास्तविकता कह कुछ और रहा है

275
00:19:33,680 --> 00:19:37,680
यानी कि वाक इंद्री से वो गलत बोल रहा है क्योंकि सच्चाई ये है

276
00:19:37,680 --> 00:19:41,760
कि वही लीड कर रहा है मगर वो एक बता रहा है लोगों को कि मैं नहीं ये लीड

277
00:19:41,760 --> 00:19:46,000
कर रही है जो माता जी है तो ये तो इंद्री के द्वारा भ्रष्टा आचरण

278
00:19:46,000 --> 00:19:49,200
हो गया ना

279
00:19:49,200 --> 00:19:53,200
देखिए हमको इन बातों में मना इन बातों

280
00:19:53,200 --> 00:19:57,680
में हमको जाना नहीं है हमको तो देखिए

281
00:19:57,680 --> 00:20:01,760
सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए कोई बात नहीं है यदि आप किसी

282
00:20:01,760 --> 00:20:05,760
मामले में जजमेंट नहीं देना चाहते हैं तो कोई बात नहीं

283
00:20:05,760 --> 00:20:10,640
उसमें आप बोल दीजिए कि भाई मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता ठीक है तो

284
00:20:10,640 --> 00:20:14,640
अब ये बात आती है कि जैसे जैसे आप हैं तो आपने

285
00:20:14,640 --> 00:20:18,880
कहा हमारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के कई सेंटर हैं

286
00:20:18,880 --> 00:20:23,280
और उस उन सब में माता जी होती है जो लीड करती हैं और

287
00:20:23,280 --> 00:20:27,520
ये जो व्यक्ति है ये जो व्यक्ति है मतलब जो आध्यात्मिक

288
00:20:27,520 --> 00:20:31,920
विश्वविद्यालय पालम वाला जो मामला है इसने एक परंपरा का उल्लंघन

289
00:20:31,920 --> 00:20:36,000
कर दिया है कि वो अब यह वो अब खुद को आगे बढ़ा रहा है माता जी को आगे नहीं बढ़ा रहा

290
00:20:36,000 --> 00:20:40,080
है माताओं को आगे नहीं बढ़ा रहा है ना कह सकते

291
00:20:40,080 --> 00:20:44,560
हां अब बात ये आती है उसने आप मतलब जैसे अभी भी आपके

292
00:20:44,560 --> 00:20:49,040
परिवार जो आपका परिवार है उसके कई कई सेंटर है ना

293
00:20:49,040 --> 00:20:53,120
कई सेंटर है तो इस व्यक्ति ने इस

294
00:20:53,120 --> 00:20:57,200
व्यक्ति ने अपना एक ही सेंटर खोला या इसने अपने कई सेंटर

295
00:20:57,200 --> 00:21:01,600
खोल लिए हैं। अभी तो मुझे एक ही पता है।

296
00:21:01,600 --> 00:21:04,400
पालम। अच्छा। और इस व्यक्ति

297
00:21:04,400 --> 00:21:09,840
का नाम क्या है जिसने खोला है?

298
00:21:09,840 --> 00:21:14,320
ये तो वही देव सिंह भाई के घर में खुला है। जिनसे आप

299
00:21:14,320 --> 00:21:18,960
अच्छा वो जिससे मैंने बात की थी उसका घर है वो। हां जी।

300
00:21:18,960 --> 00:21:23,040
अच्छा। हां तो देव सिंह के घर में खुला है तो वो हेड है। वो मतलब

301
00:21:23,040 --> 00:21:27,440
ये कह रहा है कि मेरे ऊपर ज्ञान का क्लश है। नहीं नहीं नहीं

302
00:21:27,440 --> 00:21:31,440
वो क्या कह रहे हैं उनका मतलब कहने का मतलब

303
00:21:31,440 --> 00:21:35,520
ये है कि आपने ये कहा ना कि वो अलग हुए हमसे कौन अलग हुआ है यहां से कौन

304
00:21:35,520 --> 00:21:39,600
गया है? कुछ महीने पहले तक कौन था? जो अब कह रहा है मेरे ऊपर ज्ञान का कलश है।

305
00:21:39,600 --> 00:21:43,920
कौन कह रहा है ज्ञान का कलश? यहां पर क्या है? मर

306
00:21:43,920 --> 00:21:48,720
ढेर सारे अनुयाय है हमारे अनुयाई है हमारे तो वो लोग

307
00:21:48,720 --> 00:21:52,800
म स्वतंत्र है अपनी अपनी तरीके

308
00:21:52,800 --> 00:21:57,120
से चलने के लिए माना नियम जो है वो हम किसी को नियमों

309
00:21:57,120 --> 00:22:01,200
में हम किसी को बांध के नहीं रखते ईश्वर जो है वो स्वतंत्रता

310
00:22:01,200 --> 00:22:05,200
का सम्राट है वो ईश्वर इसलिए कहा जाता है क्योंकि

311
00:22:05,200 --> 00:22:10,000
वो जोर जबरदस्ती जोर जबरदस्ती किसी पर शासन नहीं करता

312
00:22:10,000 --> 00:22:14,160
आप मेरी बात समझ नहीं आप बार बार धार्मिक सुनिए

313
00:22:14,160 --> 00:22:18,160
तो आप जो है ना धार्मिक आध्यात्मिक और दार्शनिक पक्ष में जा रहे

314
00:22:18,160 --> 00:22:19,440
हैं मैं अभी यह

315
00:22:19,440 --> 00:22:23,840
पूछ रहा हूं कि जो वहां पर अब जो ज्ञान का कलश

316
00:22:23,840 --> 00:22:28,240
है ज्ञानार्थक वो ज्ञान का कलश

317
00:22:28,240 --> 00:22:32,480
हम अभी जिस विषय में चर्चा करने के लिए आए हैं मेरा कहने

318
00:22:32,480 --> 00:22:36,480
का मतलब है मेरा कहने का मतलब है कि वहां पर जो व्यक्ति क्लेम

319
00:22:36,480 --> 00:22:40,480
कर रहा है कि जो मेरे मेरे ऊपर ज्ञान का कलश है परमात्मा का परमात्मा

320
00:22:40,480 --> 00:22:44,480
ने दिया है वो व्यक्ति अमोल कोकने नाम का है

321
00:22:44,480 --> 00:22:48,480
जो शायद वकील भी था ना उस विषय में

322
00:22:48,480 --> 00:22:52,480
हम कुछ कह नहीं सकते। वो उनका क्या मत है उस विषय

323
00:22:52,480 --> 00:22:56,560
में हम कुछ [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं कह सकते। जब हमें उनके बारे में पता ही नहीं तो हम उसके बारे

324
00:22:56,560 --> 00:23:00,560
में जजमेंट कैसे दे सकते हैं? नहीं तो आपने ही तो कहा कि अभी थोड़े

325
00:23:00,560 --> 00:23:04,800
दिन पहले तक वो यही पे थे। वो कौन थे? इतना

326
00:23:04,800 --> 00:23:08,880
पता है ऊपर ऊपर की बात पता है। बाकी अंदर की बात है। वो कौन थे जो

327
00:23:08,880 --> 00:23:13,120
अभी कुछ दिन पहले तक यहां थे अब नहीं है। बस ये बता दीजिए।

328
00:23:13,120 --> 00:23:17,200
अमोल कोकने। अमोल कोकने। अच्छा हां

329
00:23:17,200 --> 00:23:21,280
जी। तो उन्होंने फिर अपना जो है एक सेंटर खोला है देव सिंह जी के

330
00:23:21,280 --> 00:23:25,360
घर में और जो है वह अपना यह कहना है उनका

331
00:23:25,360 --> 00:23:29,440
कि वो उनके ऊपर ज्ञान का कलश है। ठीक है? तो ये बात आपको

332
00:23:29,440 --> 00:23:34,000
इसलिए बताना जरूरी था कि आप जहां पर गए थे।

333
00:23:34,000 --> 00:23:35,520
तो

334
00:23:35,520 --> 00:23:39,680
म तो म अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से उन्होंने भी खोल रखा

335
00:23:39,680 --> 00:23:44,400
है तो आप इसमें कंफ्यूजन हो जाएंगे कि भाई सारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

336
00:23:44,400 --> 00:23:49,360
मना क्या एक तरीके हम तो सभी को एक

337
00:23:49,360 --> 00:23:54,320
आपने उसमें टाइटल भी दिया था कि ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है या पागलखाना

338
00:23:54,320 --> 00:23:58,400
अब भाई वहां जो व्यक्ति था वो बातें ही ऐसी कर रहा था आपने

339
00:23:58,400 --> 00:24:02,560
तो देखा ही होगा इसी बात के लिए मैंने आपको

340
00:24:02,560 --> 00:24:06,640
क्लियर किया कि उस सेंटर से हमारा कोई लिंक नहीं है। अच्छा तो

341
00:24:06,640 --> 00:24:10,800
एक बात बताइए कि जैसे एक सामान्य व्यक्ति है

342
00:24:10,800 --> 00:24:14,800
वो कह रहे हैं कि हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले हैं। आप कह रहे हैं कि वो

343
00:24:14,800 --> 00:24:18,880
लोग नहीं है वो नकली है। कुल मिला के बात यही है जब वो लोग नकली है

344
00:24:18,880 --> 00:24:22,880
तो ये हम लोग पहचान कैसे करें? वो नहीं है

345
00:24:22,880 --> 00:24:26,880
तो इसके लिए है ना परमपिता परमात्मा ने सभी

346
00:24:26,880 --> 00:24:31,280
को जजमेंट करने के लिए अलग-अलग म हर एक के

347
00:24:31,280 --> 00:24:35,440
अलग-अलग प्रकार की बुद्धि मिली हुई है सबको जन्म से ही सभी को बुद्धि

348
00:24:35,440 --> 00:24:39,680
की दा मिली हुई है तो अपनीप बुद्धि के अनुसार

349
00:24:39,680 --> 00:24:43,840
ही हमको जज करना है के सच्चाई क्या असलियत क्या

350
00:24:43,840 --> 00:24:47,840
है और असली क्या है नकली क्या है तो

351
00:24:47,840 --> 00:24:50,800
वो तो समझ जितना म

352
00:24:50,800 --> 00:24:55,120
बुद्धि का उपयोग करके जितना समझने की कोशिश करेगा जितना जो गहराई

353
00:24:55,120 --> 00:24:59,120
में जाएगा तो उसको उतने ही मना

354
00:24:59,120 --> 00:25:03,200
गहरे जैसे सागर में गहराई में जितना गहराई में जाएंगे तो उतने

355
00:25:03,200 --> 00:25:07,600
हमको गहरे रतन मिलेंगे ऊपर ऊपर अगर हम तैरेंगे देखेंगे

356
00:25:07,600 --> 00:25:11,680
तो ऊपर ऊपर तो कचरा ही मिलेगा है ना मतलब कहने

357
00:25:11,680 --> 00:25:15,680
का ये है कि मैं मेरी बात समझिए आप मैं

358
00:25:15,680 --> 00:25:19,680
समझ रहा हूं कि आप शायद एक मिनट आप शायद मेरी बात को

359
00:25:19,680 --> 00:25:23,840
समझ नहीं पाते मैंने कहा कि कैसे डिसाइड करेंगे

360
00:25:23,840 --> 00:25:26,240
एक

361
00:25:26,240 --> 00:25:30,320
नहीं नहीं वो बात नहीं है आप दूसरे वे में चले जाते हैं। मैं अभी बताता हूं आपने जो बात कही

362
00:25:30,320 --> 00:25:34,400
ना गहराई में जाने की जैसे कोई ये क्लेम करे जैसे कोई ये

363
00:25:34,400 --> 00:25:39,280
क्लेम करे कि वो किसी का पिता है। ठीक है?

364
00:25:39,280 --> 00:25:43,360
अब उससे हमने कहा भाई दो लोग कह रहे हैं पिता है। तो दोनों ही लोग

365
00:25:43,360 --> 00:25:47,440
पिता तो नहीं हो सकते। एक पिता है। तो अब जो एक पिता है

366
00:25:47,440 --> 00:25:51,440
उससे हम मांगेंगे भाई कुछ हमें चीजें दो। अब वो अगर यह कहेगा गहराई

367
00:25:51,440 --> 00:25:55,680
में जाकर के देखो तो पहले तो उसके साथ जो है वो व्यक्ति जो उसकी संतान

368
00:25:55,680 --> 00:25:59,680
है वह जाकर के एक साल दो साल रहेगा तो यह नुकसान नहीं

369
00:25:59,680 --> 00:26:03,840
है। शुरुआत में कुछ तो चीजें हो प्रमाण के लिए कि हां ये पिता जैसे

370
00:26:03,840 --> 00:26:06,080
बर्थ सर्टिफिकेट में उसका नाम होना

371
00:26:06,080 --> 00:26:10,480
है ना उसके सिग्नेचर होना कुछ ऐसी निशानियां होना तो अब पहले व्यक्ति

372
00:26:10,480 --> 00:26:14,560
अब बुद्धि से सेलेक्ट करना है अपना दिमाग यूज़ करना है तो व्यक्ति वहां जाके पहले

373
00:26:14,560 --> 00:26:18,560
भर्ती हो जाए जो नकली है जो नकली है आपके अनुसार

374
00:26:18,560 --> 00:26:23,840
मगर आप आपने सुनिए दो

375
00:26:23,840 --> 00:26:27,840
नहीं कह सकते एक मिनट भाई साहब अरे नकली नहीं है फिर आप ये क्यों कह रहे हो कि

376
00:26:27,840 --> 00:26:31,840
वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नहीं है आप इस कन्फ्यूजन में ना होना दोनों बातें

377
00:26:31,840 --> 00:26:35,920
नहीं करनी चाहिए ना देखिए सांच को आंच नहीं होती अगर

378
00:26:35,920 --> 00:26:40,080
आप सत्य के रक्षक अगर आप धर्म के रक्षक है तो एक बिंदु भी झूठ नहीं

379
00:26:40,080 --> 00:26:44,080
होनी चाहिए अगर है तो कहिए नहीं है तो

380
00:26:44,080 --> 00:26:48,080
कहिए बीच किसी बात की नहीं है अच्छा

381
00:26:48,080 --> 00:26:52,080
सुनिए मैं जो कह कह रहा था मैं जो कह रहा था आपने कहा बुद्धि से जितनी गहराई में

382
00:26:52,080 --> 00:26:56,320
जाएंगे पता लगता जाएगा तो वो अपनी पूरे जीवन को

383
00:26:56,320 --> 00:27:00,320
वहां पर जो आपके हिसाब से प्रामाणिक नहीं है वहां

384
00:27:00,320 --> 00:27:04,400
पर बिता ये जांचने के लिए कि वो प्रामाणिक है या नहीं

385
00:27:04,400 --> 00:27:08,880
क्या हमारे पास कुछ ऐसा सिस्टम नहीं है

386
00:27:08,880 --> 00:27:12,960
तो ऑफिसियल मना अभी आप वहां पर गए तो कोई

387
00:27:12,960 --> 00:27:16,960
ना कोई तो आपको सही रास्ता दिखाने वाला आपका वीडियो जैसे हमने देखा तो

388
00:27:16,960 --> 00:27:20,960
हमने आपको बताया कि वो म ऑफिशियल नहीं

389
00:27:20,960 --> 00:27:21,460
है

390
00:27:21,200 --> 00:27:25,520
हमारा। ये तो आपका क्लेम है ना। इसके संबंध में

391
00:27:25,520 --> 00:27:29,520
कोई आपके पास सामग्री कुछ साक्ष्य, कुछ तर्क ये कुछ

392
00:27:29,520 --> 00:27:33,600
चीजें होनी चाहिए ना। देखिए ज्ञान को

393
00:27:33,600 --> 00:27:37,760
प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती। अगर

394
00:27:37,760 --> 00:27:41,840
मतलब आप ये कह रहे हो कि कोई वो सेंटर जो

395
00:27:41,840 --> 00:27:46,080
है वो पुराना है म जो जो

396
00:27:46,080 --> 00:27:50,160
हमारा जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जहां से ओरिजिन है तो

397
00:27:50,160 --> 00:27:54,400
वहां से हम म उसके अंडर में रह के जो जो

398
00:27:54,400 --> 00:27:58,720
सेंटर खुले हैं तो वही जो है हमारे म आध्यात्मिक

399
00:27:58,720 --> 00:28:02,880
विश्वविद्यालय के ओरिजिनल सेंटर है तो वो तो आपको

400
00:28:02,880 --> 00:28:06,960
पता नहीं लगेगा आपको बता आपको थोड़ी आपको थोड़ी आसानी

401
00:28:06,960 --> 00:28:12,480
हो जाएगी। मैं बता देता हूं आपको कि

402
00:28:12,480 --> 00:28:16,800
जैसे कि मान लीजिए कि मैं ब्रह्मा

403
00:28:16,800 --> 00:28:21,120
कुमारी से जुड़ा हुआ था। वीरेंद्र देव दीक्षित नाम है ना

404
00:28:21,120 --> 00:28:25,600
जिन्होंने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय शुरू किया था। है ना? तो वीरेंद्र

405
00:28:25,600 --> 00:28:29,680
वीरेंद्र देव दीक्षित जी आध्या ब्रह्माकुमारी से जुड़े हुए थे।

406
00:28:29,680 --> 00:28:33,760
कुछ आइडियोलॉजिकल डिफरेंसेस आए। उनके और ब्रह्मा कुमारीज

407
00:28:33,760 --> 00:28:36,320
के कांसेप्ट में उनको उन्होंने यह माना

408
00:28:36,320 --> 00:28:40,320
कि यह एग्जैक्ट मुरली का सही अर्थ नहीं बता रहे हैं। मुरली का सही अर्थ

409
00:28:40,320 --> 00:28:45,200
थोड़ा ये होना चाहिए। यही बात है। ठीक है? थोड़ा सा

410
00:28:45,200 --> 00:28:49,600
आपने सही कुछ चेंजेस हो तो बदल लीजिएगा। अभी मोटा मोटा बता रहा हूं।

411
00:28:49,600 --> 00:28:53,600
अभी मैं मोटा मोटा बता रहा हूं। तो उन्होंने उन्होंने कहा कि भाई मुरली

412
00:28:53,600 --> 00:28:57,600
का सही अर्थ हम बताएंगे। तो अब वो बताएंगे तो उन्होंने अपना एक

413
00:28:57,600 --> 00:29:01,760
नया परिवार बनाया आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से। उस परिवार

414
00:29:01,760 --> 00:29:04,560
में

415
00:29:04,560 --> 00:29:08,800
हां बोलिए बोलिए वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने आध्यात्मिक

416
00:29:08,800 --> 00:29:12,800
विश्वविद्यालय के वीरेंद्र देव दीक्षित जी

417
00:29:12,800 --> 00:29:16,880
ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से कई ब्रांचेस खोली उन सब

418
00:29:16,880 --> 00:29:20,960
में माताओं को नियुक्त किया। ठीक है? हां। अब

419
00:29:20,960 --> 00:29:24,960
जितने वो ब्रांचेस वीरेंद्र वो जो ब्रांचेस खुलते थे वो

420
00:29:24,960 --> 00:29:29,120
कहीं ना कहीं वीरेंद्र देव दीक्षित जी की अनुमति सिग्नेचर

421
00:29:29,120 --> 00:29:33,200
से खुलते होंगे। सिग्नेचर से खुलते थे या खाली कह दिया ऐसे

422
00:29:33,200 --> 00:29:37,440
ही खुल जाते। मतलब उसमें कोई ऑथराइज जो आज की कानूनी ये

423
00:29:37,440 --> 00:29:41,600
पत्र पत्र वगैरह ऐसा होता था क्योंकि अगर ये होगा तो हम किसी को भी क्लेम

424
00:29:41,600 --> 00:29:46,720
कर सकते भाई इसके पास लेटर नहीं है ये ये नहीं है ऑथेंटिक अगर

425
00:29:46,720 --> 00:29:50,720
ऐसा वर्बल ही था यही दिक्कत है यही दिक्कत है कि भाई वर्बल ही

426
00:29:50,720 --> 00:29:51,440
चल रहा था सब

427
00:29:51,440 --> 00:29:57,280
इसलिए तो अब एक यहां से और दिक्कत

428
00:29:57,280 --> 00:30:01,760
वर्बल ही चल रहा है लेकिन आप जो है ना जो मेन टॉपिक जिस

429
00:30:01,760 --> 00:30:05,840
उद्देश्य से हमने ये कॉन्फ्रेंस किया है

430
00:30:05,840 --> 00:30:09,840
तो मेन क्या हमको ईश्वर जो ईश्वर के बारे में हमको जानना है

431
00:30:09,840 --> 00:30:12,320
तो बाकी

432
00:30:12,320 --> 00:30:16,560
साइड में रख के ये तो

433
00:30:16,560 --> 00:30:20,640
एक छोटी सी शंका है एक छोटी सी शंका है मेरी एक

434
00:30:20,640 --> 00:30:25,360
छोटी सी शंका है बस वो बता दीजिए कि

435
00:30:25,360 --> 00:30:29,680
वीरेंद्र देव जैसे आपने कहा माताओं को आगे बढ़ाना तो वीरेंद्र देव दीक्षित

436
00:30:29,680 --> 00:30:35,680
जी आगे कैसे बढ़े फिर मतलब वो तो स्वयं स्वयं पुरुष

437
00:30:36,160 --> 00:30:40,640
तो देखिए गोपाल कन्हैया के लिए क्या गाया हुआ है

438
00:30:40,640 --> 00:30:44,640
कृष्ण जो म भगवान जो है गोपाल कन्हैया के रूप म

439
00:30:44,640 --> 00:30:48,800
कृष्ण के रूप में गओं को पालने के

440
00:30:48,800 --> 00:30:52,960
म गौ की पालना करते थे तो भगवान

441
00:30:52,960 --> 00:30:56,960
को गौ की पालना करने के लिए ही क्यों आना पड़ता है क्योंकि

442
00:30:56,960 --> 00:31:01,120
भगवान जो है वो दुख हरता है सुख करता है अच्छा तो आप आप

443
00:31:01,120 --> 00:31:04,080
सीधे कह दीजिए

444
00:31:04,080 --> 00:31:08,080
भाई साहब आप सीधे कह दीजिए कि वो स्वयं वो स्वयं आगे नहीं बढ़े वो

445
00:31:08,080 --> 00:31:12,880
तो इन जो ये माताएं हैं इनकी व्यवस्था के लिए थे।

446
00:31:12,880 --> 00:31:17,040
हां नहीं परम अभी आप मेरी बात थोड़ा ध्यान

447
00:31:17,040 --> 00:31:21,280
से सुन लीजिए आपका जो भी प्रश्न है ठीक है

448
00:31:21,280 --> 00:31:25,760
अभी जो है परमपिता परमात्मा शिव मना शिव जो है

449
00:31:25,760 --> 00:31:29,840
वो इस सृष्टि पर हाजिर नाजिर है मनुष्य सृष्टि पर

450
00:31:29,840 --> 00:31:35,200
आ चुके हैं और जो है ये अभी

451
00:31:35,200 --> 00:31:39,280
भाई साहब मैं अब यहां पर आपको थोड़ा ठोस तरीके से कहूंगा ये

452
00:31:39,280 --> 00:31:43,600
वाला जो पक्ष आ चुके हैं धार्मिक क्लेम आध्यात्मिक क्लेम,

453
00:31:43,600 --> 00:31:47,760
दविक क्लेम ये अभी हम पांच मिनट में शुरू करने वाले हैं। बस

454
00:31:47,760 --> 00:31:51,520
मैं अभी इतना जानना चाह रहा हूं कि आपने यह कहा कि वो स्त्रियों

455
00:31:51,520 --> 00:31:55,760
को ही आगे बढ़ाया जाएगा। मगर वो वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं जो है आगे

456
00:31:55,760 --> 00:31:59,760
कैसे बढ़े उनके ऊपर ज्ञान का कलश कैसे आया? अरे

457
00:31:59,760 --> 00:32:03,920
वो तो खुद ही परमपिता परमात्मा परमात्मा का स्वरूप है ना।

458
00:32:03,920 --> 00:32:08,560
उसके उनके अंदर ही जो सुप्रीम सोल शिव है

459
00:32:08,560 --> 00:32:12,720
वो उनके शरीर में ही म उन उनके शरीर के द्वारा

460
00:32:12,720 --> 00:32:17,120
ही ज्ञान सुनाते हैं। प्रवेश प्रवेश करती थी। ठीक है? ये चीज मैंने

461
00:32:17,120 --> 00:32:21,280
यानी कि ये जो माताएं जिनको आप कह रहे हैं ना जिनके ऊपर ज्ञान का कलश होता है। इनके

462
00:32:21,280 --> 00:32:27,280
अंदर परमपिता प्रवेश नहीं करते। नहीं

463
00:32:28,880 --> 00:32:32,960
परमपिता शिव सुनाते हैं ज्ञान उस ज्ञान को

464
00:32:32,960 --> 00:32:36,960
लोगों में बांटने का बांटने के लिए समझ गया

465
00:32:36,960 --> 00:32:40,640
समझ गया

466
00:32:40,640 --> 00:32:44,880
अभी वो वीरेंद्र अभी वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है

467
00:32:44,880 --> 00:32:48,960
जो जिनके अंदर परमपिता परमेश्वर आते थे तो वो अभी

468
00:32:48,960 --> 00:32:52,960
कहां है वो अभी कहां है मतलब उनके अंदर आज भी मुरलियां आती

469
00:32:52,960 --> 00:32:57,040
है डेली या नहीं आती जी [नाक से की जाने वाली आवाज़] देखिए

470
00:32:57,040 --> 00:33:01,760
अभी इस बात को समझने के लिए आपको जो है

471
00:33:01,760 --> 00:33:04,240
थोड़ा

472
00:33:04,240 --> 00:33:08,400
थोड़ा जो मैं अभी बताने जा रहा हूं वो आपको ध्यान से सुनना

473
00:33:08,400 --> 00:33:12,400
पड़ेगा। तो एकदम से आप म लास्ट

474
00:33:12,400 --> 00:33:16,560
सीढ़ी पर पैर रख दोगे तो कुछ समझ नहीं पाओगे।

475
00:33:16,560 --> 00:33:20,720
आप क्या करिए लास्ट सीढ़ी वाली जो बात है वह मुझे बताइए। अगर

476
00:33:20,720 --> 00:33:25,360
नहीं समझ पाया तो मैं कहूंगा कि आप भैया आप विस्तार से बताइए।

477
00:33:25,360 --> 00:33:29,360
जैसे लास्ट सीढ़ी वाला कोई जैसे लास्ट सीढ़ी वाला कोई फार्मूला

478
00:33:29,360 --> 00:33:33,360
है H2SO4 तो H2SO4 मुझे आपने बताया

479
00:33:33,360 --> 00:33:37,440
मैंने कहा मैं तो जानता नहीं हूं H2SO4 NaCl मैं तो जानता नहीं

480
00:33:37,440 --> 00:33:41,920
हूं तो फिर मैं कहूंगा कि आप मुझे पूरा एक्सपेंड कर दीजिए। हो सकता है समझ जाऊं।

481
00:33:41,920 --> 00:33:44,400
एक बार ट्राई तो करिए।

482
00:33:44,400 --> 00:33:48,400
अभी आप समझ लीजिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी है इनका

483
00:33:48,400 --> 00:33:53,520
सफर शुरू कैसे हुआ? तो ब्रह्मा कुमारी

484
00:33:53,520 --> 00:33:58,480
मैंने आप बताइए पूरा हिस्ट्री बताइएगा

485
00:33:58,480 --> 00:34:02,800
आप पूरी हिस्ट्री बताइएगा मगर मुझे अभी ये बता दीजिए कि वो अभी है

486
00:34:02,800 --> 00:34:06,960
परमात्मा उनके अंदर ही आते हैं या किसी और के अंदर आते हैं मतलब वो है कि गए क्या

487
00:34:06,960 --> 00:34:11,120
हुआ उनका वो तो अभी माना अभी शरीर

488
00:34:11,120 --> 00:34:15,360
छोड़ चुके हैं अभी उनका नया जन्म दूसरा जन्म हो चुका

489
00:34:15,360 --> 00:34:21,360
है तो वो जो जन्म है कहां पे

490
00:34:21,520 --> 00:34:25,680
तो वो जो जन्म है उसके लिए तो इशारे है। सारे मुरलियों में इशारे

491
00:34:25,680 --> 00:34:31,280
दिए हुए हैं। बाबा ने जो इशारे इशारे आपने

492
00:34:31,280 --> 00:34:35,440
इशारे डिकोड कर लिया आपने देखिए उनका जो टाइम दिया

493
00:34:35,440 --> 00:34:39,840
टाइम जो म प्रत्यक्ष होने का जो टाइम है वो

494
00:34:39,840 --> 00:34:44,000
फिक्स है जबकि महाशिवरात्रि महाशिवरात्रि जब

495
00:34:44,000 --> 00:34:48,480
होती है तो महाशिवरात्रि माना जब की घोर अज्ञान अंधकार की

496
00:34:48,480 --> 00:34:53,600
रात्रि जब सारी दुनिया में फैलती है जब सारी दुनिया में

497
00:34:53,600 --> 00:34:57,760
माना जैसे अज्ञान के अंधेरे में जैसे सब

498
00:34:57,760 --> 00:35:02,000
ठोकरे खाते रहते हैं। किसी को सही रास्ते का पता नहीं चलता। तो ऐसे

499
00:35:02,000 --> 00:35:06,400
जब सारे ही आधार खत्म हो जाते हैं तब वो

500
00:35:06,400 --> 00:35:10,400
म अंधकार को खत्म करने के लिए वो महाशिवरात्रि

501
00:35:10,400 --> 00:35:14,800
म जब सारी दुनिया में महाशिवरात्रि होती है

502
00:35:14,800 --> 00:35:19,280
वो अभी बहुत जल्दी ही आने वाली है वो टाइम तो उस महाशिवरात्रि

503
00:35:19,280 --> 00:35:23,440
में वो शिव की प्रत्य शिव की प्रत्यक्षता नदी हुई

504
00:35:23,440 --> 00:35:27,600
है ड्रामा में नहीं कह रहा हूं मैं मैं

505
00:35:27,600 --> 00:35:32,240
पूछ और पूछ रहा हूं। मैं भाई साहब पूछ ये रहा हूं।

506
00:35:32,240 --> 00:35:36,240
एक मिनट एक मिनट मेरा सवाल क्लियर मैं सवाल क्लियर कर

507
00:35:36,240 --> 00:35:36,880
दूं

508
00:35:36,880 --> 00:35:41,040
कि जो वीरेंद्र देव दीक्षित है ये

509
00:35:41,040 --> 00:35:45,200
इन्होंने शरीर कब छोड़ा और दोबारा दूसरे शरीर में इनके

510
00:35:45,200 --> 00:35:49,280
आने की संभावना है भविष्य में आने वाले हैं या

511
00:35:49,280 --> 00:35:53,520
फिर अभी भी है किसी शरीर में। एक तो ये हो गया।

512
00:35:53,520 --> 00:35:57,920
एक तो ये हो गया। दूसरा दूसरा सवाल है दूसरा

513
00:35:57,920 --> 00:36:02,000
दूसरा सवाल है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के शरीर में परमात्मा आते

514
00:36:02,000 --> 00:36:06,080
थे तो फिर जो अगला शरीर जो होगा वो परमात्मा पकड़ेंगे

515
00:36:06,080 --> 00:36:10,320
ना उस शरीर को अब वीरेंद्र देव दीक्षित का तो काम खत्म हो जाना चाहिए

516
00:36:10,320 --> 00:36:15,440
जी नहीं क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं परमात्मा नहीं

517
00:36:15,440 --> 00:36:19,760
वीरेंद्र देव दीक्षित स्वयं पर भाई साहब अभी मेरी बहस

518
00:36:19,760 --> 00:36:23,920
नहीं हो रही है आपसे डिबेट नहीं कर रहा हूं मैं आपसे अभी मैं आपकी बातें

519
00:36:23,920 --> 00:36:28,080
सुन रहा हूं मैं अभी भी क्वेश्चन कर रहा हूं। मैं अभी आपको काउंटर नहीं कर रहा हूं।

520
00:36:28,080 --> 00:36:32,240
अभी मेरी क्या है बात कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी स्वयं परमात्मा

521
00:36:32,240 --> 00:36:36,240
तो थे नहीं। क्योंकि आपकी जो आईडियोलॉजी है उसमें ये है परमात्मा पर काया में

522
00:36:36,240 --> 00:36:40,320
प्रवेश करता है। इतना पक्का है। नहीं

523
00:36:40,320 --> 00:36:44,400
आप इस बात को परमात्मा स्वयं आता है।

524
00:36:44,400 --> 00:36:48,560
अभी सुन लीजिए ना। देखिए भाई साहब

525
00:36:48,560 --> 00:36:52,080
भाई साहब सुनिए तो देखिए ऐसा

526
00:36:52,080 --> 00:36:56,160
मैं आपको मैं आपको क्यों देखिए हमारे पास

527
00:36:56,160 --> 00:37:00,160
कोई सुबह तक का तो टाइम है नहीं समझ रहे हैं हो सकता है

528
00:37:00,160 --> 00:37:04,160
कि आप जो बात परमपिता परमात्मा के बारे में पूछा तो आपको

529
00:37:04,160 --> 00:37:09,040
यह बात क्लियर करना जरूरी है कि परमपिता कौन है और परमात्मा कौन है

530
00:37:09,040 --> 00:37:13,120
तो परमपिता जो है अच्छा ठीक है ठीक है समझ गया समझ गया मैं आपकी

531
00:37:13,120 --> 00:37:17,520
बात समझ गया परमपिता परमात्मा परमपिता

532
00:37:17,520 --> 00:37:22,320
के शरीर में आते हैं। यह होगा परमपिता जो है

533
00:37:22,320 --> 00:37:26,400
वह परमात्मा के पिता परमपिता परमात्मा परमपिता

534
00:37:26,400 --> 00:37:31,200
के शरीर में आते होंगे। देखिए परमपिता

535
00:37:31,200 --> 00:37:35,280
अलग है। परमपिता जो है वो है शिव और परमात्मा

536
00:37:35,280 --> 00:37:39,680
वो है शंकर। तो दोनों मिलकर के परमपिता परमात्मा

537
00:37:39,680 --> 00:37:43,920
हो गए। तो नाम पड़ा शिव शंकर। ठीक है? तो शिव

538
00:37:43,920 --> 00:37:49,120
जो है उनको अपना शरीर नहीं है। वो

539
00:37:49,120 --> 00:37:53,280
माने उनको अपना शरीर नहीं है लेकिन है तो ज्ञान के सागर

540
00:37:53,280 --> 00:37:57,840
वो अजन्मा है अकर्ता है अभोक्ता है लेकिन उनके

541
00:37:57,840 --> 00:38:01,920
वो त्रिकालदर्शी है भाई साहब आप ये बताइए

542
00:38:01,920 --> 00:38:06,080
कि जो विजय वीरेंद्र देव दीक्षित है वो शिव है शिव

543
00:38:06,080 --> 00:38:07,360
शिव ने शरीर में प्रवेश

544
00:38:07,360 --> 00:38:11,840
किया है किसी के या शंकर है या कौन है वो बताइए बहुत ज्यादा

545
00:38:11,840 --> 00:38:15,920
उसमें उस पार्ट में मत जाया करिए बहुत ज्यादा वो प्रवचन जैसा वो अभी

546
00:38:15,920 --> 00:38:20,000
चालू करेंगे हम लोग आपको मिलेगा वो बोलने का मौका मिलेगा। अभी

547
00:38:20,000 --> 00:38:24,000
आप मुझे थोड़ी क्लेरिटी दे दीजिए कि वो जो वो जो शरीर है

548
00:38:24,000 --> 00:38:28,080
ना वीरेंद्र देव दीक्षित जी का उसको हम शंकर मान ले या

549
00:38:28,080 --> 00:38:32,480
शंकर जी का प्रवेश मान ले या शिव जी का प्रवेश मान ले वो क्लियर करिए

550
00:38:32,480 --> 00:38:37,520
अभी उनका महिमा मंडन नहीं चाहिए कि वो वो है निर्वाद है

551
00:38:37,520 --> 00:38:41,600
अबाद है ये वो ये सब नहीं चाहिए अभी अभी क्लिटी पहले

552
00:38:41,600 --> 00:38:45,840
मुझे हेडलाइन मिल जाए फिर मैं उनमें से किसी एक हेडलाइन पर अपनी जिज्ञासा

553
00:38:45,840 --> 00:38:49,840
आपसे शांत करूंगा समझ रहे हैं हेडलाइन तो दीजिए मुझे वो

554
00:38:49,840 --> 00:38:53,840
बताइए वीरेंद्र जो दीक्षित जी जो है वो

555
00:38:53,840 --> 00:38:57,840
है शंकर अच्छा और जो उनमें तो

556
00:38:57,840 --> 00:39:02,080
शंकर जो है वो परम पिता है सॉरी वो परमात्मा है म

557
00:39:02,080 --> 00:39:06,320
आत्माओं के बीच में वो परम पार्ट धारी है म इस सृष्टि

558
00:39:06,320 --> 00:39:10,640
रूपी रंग मंच पर वो ऑल राउंड पार्ट धारी है म इस मनुष्य सृष्टि

559
00:39:10,640 --> 00:39:15,040
का जो भाई कितना उनके महिमा मंडलन में लग जाएंगे उनकी पहचान

560
00:39:15,040 --> 00:39:19,200
बस करनी अभी अभी चालू करेंगे ये वाला पार्ट आपको बता तो

561
00:39:19,200 --> 00:39:22,480
रहा हूं। आप उनका महिमा मंडन करने लग जाते हो।

562
00:39:22,480 --> 00:39:26,560
हां तो ठीक है। इस बात में संतुष्ट है आपके वो विजय वीरेंद्र देव

563
00:39:26,560 --> 00:39:30,640
दीक्षित जो है वो शंकर भगवान का एक

564
00:39:30,640 --> 00:39:35,200
ऐसा रूप मनुष्यों के बीच में आते हैं। म वो

565
00:39:35,200 --> 00:39:39,200
म शंकर काम के आधार पर नाम पड़ता है। ठीक है?

566
00:39:39,200 --> 00:39:44,640
उन्होंने शंकर शंकर माना क्या है? मिक्स।

567
00:39:44,640 --> 00:39:49,040
ठीक है? तो शंकर माना मिक्स। तो उनमें जो है

568
00:39:49,040 --> 00:39:53,600
शंकर माने मिश्र में लिखा हुआ है वर्ण

569
00:39:53,600 --> 00:39:58,160
शंकर जायते सारे वो शंकर होता है भाई साहब वो शंकर होता है

570
00:39:58,160 --> 00:40:02,320
वो शंकर है ये शंकर है भाई साहब भाई साहब

571
00:40:02,320 --> 00:40:06,320
मैंने थोड़ा बहुत पढ़ा है अध्ययन किया आपको दिखा दूं उसमें सा होता है सा सड़क

572
00:40:06,320 --> 00:40:10,320
वाला और शंकर एक मिनट भाई साहब

573
00:40:10,320 --> 00:40:14,560
अंतर है भाई साहब भाई साहब सुनिए सुनिए सुनिए शंकर निम्नता

574
00:40:14,560 --> 00:40:18,800
का अरे सुनिए तो भाई साहब सुनिए देखिए

575
00:40:18,800 --> 00:40:23,360
ये हमारा टॉपिक नहीं है मगर मैं अब मेरी जानकारी जो है वो बता दूं

576
00:40:23,360 --> 00:40:27,520
शंकर एक निम्नता का द्योतक है शंकर श्रेष्ठता का द्योतक

577
00:40:27,520 --> 00:40:31,760
है ठीक अब आप अब आप सबको शंकर और शंकर एक ही मानते हैं

578
00:40:31,760 --> 00:40:35,840
तो आप कोई बात नहीं उसको कह लीजिए आप अपनी बात रखिए क्योंकि वो मेरा विषय

579
00:40:35,840 --> 00:40:37,680
नहीं है। ठीक

580
00:40:37,680 --> 00:40:41,760
है तो अभी बात आपको म समझ में

581
00:40:41,760 --> 00:40:46,080
आ गई मतलब जो परम जो

582
00:40:46,080 --> 00:40:50,240
शंकर भगवान है जो शंकर भगवान है वो वीरेंद्र देव

583
00:40:50,240 --> 00:40:54,960
दीक्षित के रूप में प्रकट होते हैं। हां जी

584
00:40:54,960 --> 00:40:58,960
हां तो अभी शिव जो है वो उन प्रवेश करने वाला

585
00:40:58,960 --> 00:41:02,960
है। शिव शिव में प्रवेश करते हां

586
00:41:02,960 --> 00:41:07,440
उनमें प्रवेश करते क्योंकि शिव अपना शिव को अपना शरीर नहीं है।

587
00:41:07,440 --> 00:41:11,600
तो शिव जो है वो शंकर में प्रवेश करते हैं। यानी कि शिव शंकर बनते

588
00:41:11,600 --> 00:41:15,840
नहीं है। शंकर की बॉडी में प्रवेश करते हैं। हां जी।

589
00:41:15,840 --> 00:41:20,000
इसीलिए शिव के साथ शंकर का नाम जोड़ा जाता है। शिव

590
00:41:20,000 --> 00:41:24,080
ब्रह्मा नहीं कहा जाता। शिव विष्णु नहीं कहा जाता। शिव शंकर कहा जाता

591
00:41:24,080 --> 00:41:29,520
है। क्योंकि शंकर के रूप में ही वो संसार में प्रत्यक्ष होते हैं।

592
00:41:29,520 --> 00:41:33,760
क्योंकि शंकर जो है वही एक ऐसा पुरुषार्थी है जो कि शिव

593
00:41:33,760 --> 00:41:38,000
समान स्टेज को एक सवाल हल हो गया। एक सवाल हल हो गया। दूसरा

594
00:41:38,000 --> 00:41:42,160
वाला जो सवाल है कि वो उनका जो जन्म है मतलब

595
00:41:42,160 --> 00:41:46,320
मृत्यु पिछला जो शरीर था उनका वो पूरा हो चुका है। है

596
00:41:46,320 --> 00:41:50,480
ना? हां जी। और अभी उन्होंने नया शरीर धारण किया है

597
00:41:50,480 --> 00:41:54,160
शंकर ने। हां जी। हां जी।

598
00:41:54,160 --> 00:41:58,320
बिल्कुल। और कभी कभी उनके अंदर शिव

599
00:41:58,320 --> 00:42:03,200
जी आते हैं। कभी कभी उनका

600
00:42:03,200 --> 00:42:07,200
वो उनका मुकर रथ है। कभी कभी की मना ये संगम युग में

601
00:42:07,200 --> 00:42:11,600
ही आते हैं। और संगम युग के बारे में आप समझ लीजिए। मतलब की शंकर

602
00:42:11,600 --> 00:42:16,000
जो बॉडी है वीरेंद्र देव दीक्षित जी की वो

603
00:42:16,000 --> 00:42:20,080
उसमें दो एंटिटीज है। एक निराकार शिव और स्वयं शंकर दो

604
00:42:20,080 --> 00:42:24,160
एंटिटीज है। हां जी। दो आत्माएं हैं। शरीर एक

605
00:42:24,160 --> 00:42:28,320
ही है। अच्छा ठीक है। ठीक है। तो इसको

606
00:42:28,320 --> 00:42:32,400
ऐसे भी तो कह सकते हैं कि शिव ही शंकर बन जाते हैं। इसमें क्या दिक्कत

607
00:42:32,400 --> 00:42:36,480
है? बात तो एक ही हो गई। शिव का मतलब होता

608
00:42:36,480 --> 00:42:40,720
है भोला। और शंकर का मतलब शिव के साथ जुड़ा

609
00:42:40,720 --> 00:42:44,720
हुआ है भोला। और शंकर के साथ जुड़ा हुआ है भाला।

610
00:42:44,720 --> 00:42:48,880
शिव का हम लोग विग्रह बनाते हैं। शिव का लिंग बनाते हैं।

611
00:42:48,880 --> 00:42:53,120
उसको हम शंकर लिंग नहीं कहते। और

612
00:42:53,120 --> 00:42:58,880
नहीं है आप कहते नहीं है मैं बताऊ मैं बताऊ दो आत्मा

613
00:42:58,880 --> 00:43:02,880
भक्ति मार्ग की बात है ना कोई बात नहीं कोई बात नहीं जैसे एक

614
00:43:02,880 --> 00:43:06,960
शरीर है एक शरीर है एक शरीर है उसके अंदर दो

615
00:43:06,960 --> 00:43:09,360
दो आत्माएं है एक शंकर

616
00:43:09,360 --> 00:43:13,760
की और एक परमात्मा स्वयं है

617
00:43:13,760 --> 00:43:18,160
शंकर ही परमात्मा है और शिव जो है वो परमपिता

618
00:43:18,160 --> 00:43:22,800
है परमपिता तो एक शरीर है उसमें दो चीजें हैं।

619
00:43:22,800 --> 00:43:26,960
शंकर भी है और शिव भी है। ठीक है?

620
00:43:26,960 --> 00:43:31,120
शंकर और शिव दोनों में एक शरीर में। तो शिव

621
00:43:31,120 --> 00:43:35,120
पहले जो भी अब वो जो भी कहते हैं वो दोनों कह रहे हैं।

622
00:43:35,120 --> 00:43:39,360
जो भी करते हैं वो दोनों कर रहे हैं। हां जी। म

623
00:43:39,360 --> 00:43:43,360
कहने वाला शिव है। उनके द्वारा नहीं तो तो बात तो दोनों की

624
00:43:43,360 --> 00:43:45,920
है ना वो।

625
00:43:45,920 --> 00:43:49,920
बात तो दोनों की है ना जो है उसमें जो उसमें भी

626
00:43:49,920 --> 00:43:54,320
जो पढ़ाई पढ़ाने वाला है वो है शिव क्योंकि ज्ञान का सागर जो है

627
00:43:54,320 --> 00:43:58,480
वो शिव है शिव में सारा आदि मध्य अंत का ज्ञान भरा हुआ है सृष्टि

628
00:43:58,480 --> 00:44:03,120
के आदि मध्य अंत का ज्ञान मैं दूसरी बात पूछता हूं आप आप

629
00:44:03,120 --> 00:44:07,200
तुरंत अपने चैप्टर्स खोलने लग जाते हैं समझ नहीं मतलब मैं कैसे आपसे

630
00:44:07,200 --> 00:44:11,360
बात करूं मैं अभी मैं अभी ये पूछ

631
00:44:11,360 --> 00:44:15,520
रहा हूं कि जैसे जैसे उन्होंने कुछ उठाया मान

632
00:44:15,520 --> 00:44:20,000
लीजिए कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपनी बॉडी से कुछ उठाया रुमाल उठाया

633
00:44:20,000 --> 00:44:24,000
ठीक अब ये रुमाल रुमाल दोनों दोनों की इच्छा से

634
00:44:24,000 --> 00:44:24,500
उठाए

635
00:44:24,480 --> 00:44:29,120
बॉडी आपका कहना है कि वो सिर्फ शंकर की है शिव जी की नहीं है

636
00:44:29,120 --> 00:44:31,780
ऐसा है

637
00:44:31,780 --> 00:44:36,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] अब देखिए उसमें देखने

638
00:44:36,080 --> 00:44:40,160
में तो नहीं आता कि कौन कर रहा है। मेरा कहने का मतलब ये है कि

639
00:44:40,160 --> 00:44:44,240
वो कौन सी चीज है जिसके कारण हम ये माने कि अलग-अलग है। इसमें

640
00:44:44,240 --> 00:44:48,560
दो है वो क्या है गैपिंग है हवा खाली हवा है

641
00:44:48,560 --> 00:44:54,560
एक आत्मा लेफ्ट में है एक आत्मा राइट में है यह फैसला कैसे हुआ

642
00:44:55,840 --> 00:44:59,840
शिव जो है वो असोचता है और शंकर जो

643
00:44:59,840 --> 00:45:04,000
है वो मनन चिंतनशील है मनस

644
00:45:04,000 --> 00:45:08,240
मतलब मतलब शिव के अंदर शिव के मतलब शिव के अंदर वो नहीं

645
00:45:08,240 --> 00:45:12,560
है ज्ञान नहीं है शिव शिव

646
00:45:12,560 --> 00:45:17,280
जो है अमन शिव जो है

647
00:45:17,280 --> 00:45:21,440
शिव जो है ना वो उसकी म वो अमन

648
00:45:21,440 --> 00:45:26,000
है म उसका मन नहीं है ठीक है तो

649
00:45:26,000 --> 00:45:28,720
वो विचार

650
00:45:28,720 --> 00:45:33,200
हो गया

651
00:45:33,200 --> 00:45:36,800
के लिए सोचना नहीं पड़ता उसको

652
00:45:36,800 --> 00:45:40,880
नहीं नहीं वो जड़ है बुद्धि है उसके बुद्धि है कि नहीं शिव

653
00:45:40,880 --> 00:45:46,160
के वो तो बुद्धि मानो की बुद्धि है।

654
00:45:46,160 --> 00:45:50,320
सेवक जो है वो सोच सकते हैं कि नहीं? मतलब उनके पास

655
00:45:50,320 --> 00:45:55,040
कैपेसिटी है कि नहीं? विचार

656
00:45:55,040 --> 00:45:59,040
देखिए विचार जो है ना उसको करना पड़ता है जिसके

657
00:45:59,040 --> 00:46:03,040
बुद्धि में कोई कन्फ्यूजन है। शिव की बुद्धि में कोई कन्फ्यूजन नहीं

658
00:46:03,040 --> 00:46:07,360
है। इसलिए वो म जो भी बोलता है सत्य

659
00:46:07,360 --> 00:46:11,520
ही बोलता है। उसके मुख से कुछ भी गलत निकल नहीं। जैसे

660
00:46:11,520 --> 00:46:16,240
जैसे कि शिव ने बोला जैसे कि जैसे

661
00:46:16,240 --> 00:46:20,240
जैसे कि शिव ने बोला कि मैं शिव हूं।

662
00:46:20,240 --> 00:46:24,400
ठीक ये एक विचार है ना देखिए

663
00:46:24,400 --> 00:46:28,560
भगवान कभी शिव ने शंकर के मुख से बुलवाया। भाई क्यों बात को पकड़ते

664
00:46:28,560 --> 00:46:33,040
हो? शिव ने शंकर के मुख से बुलवाया कि मैं शिव हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़]

665
00:46:33,040 --> 00:46:37,360
शंकर भी नहीं कहेगा कि मैं शिव हूं। क्योंकि

666
00:46:37,360 --> 00:46:41,360
एक उदाहरण एक उदाहरण दे दीजिए। एक उदाहरण एक उदाहरण

667
00:46:41,360 --> 00:46:47,360
दे दीजिए कि शिव जैसे बोलते हैं तो क्या बोलते हैं?

668
00:46:48,640 --> 00:46:52,640
मैं पूछ रहा हूं आप अरे भाई साहब कुछ और कह रहा

669
00:46:52,640 --> 00:46:56,960
हूं। आप लड़ने बैठे हैं क्या मुझसे? मैं कुछ और पूछ रहा हूं।

670
00:46:56,960 --> 00:47:01,040
तो पता नहीं आप क्या कर रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं कि आप एक उदाहरण

671
00:47:01,040 --> 00:47:07,040
दे दीजिए कि शिव इस तरह की बात बोलते हैं। एक उदाहरण दीजिए मुझे।

672
00:47:08,400 --> 00:47:12,480
देखिए शिव जो है वो इस तरह की बात मना

673
00:47:12,480 --> 00:47:16,960
अभी मुरली की मैं बात आपको पढ़ के सुना दू आपको

674
00:47:16,960 --> 00:47:21,040
हां एक उदाहरण बस उदाहरण चाहिए बहुत लंबा नहीं एक पंक्ति चाहिए बस

675
00:47:21,040 --> 00:47:25,840
एक पंक्ति देखिए जैसे मुरली

676
00:47:25,840 --> 00:47:29,920
में आया है बाप तुम बच्चों को समझाते हैं

677
00:47:29,920 --> 00:47:34,400
तो तुमको बस बस बस बस ये शिवजी ने बोला है ना

678
00:47:34,400 --> 00:47:38,400
हां जी हां तो बात बच्चों को समझाते

679
00:47:38,400 --> 00:47:42,560
हैं। यह बैकरी वाक्य होता है ना उससे पहले

680
00:47:42,560 --> 00:47:46,640
ये मन में होता है। है ना? हम जब ये बोला

681
00:47:46,640 --> 00:47:50,880
गया तब ये सुनने का विषय बना। कानों का विषय बना। जब ये बोला गया

682
00:47:50,880 --> 00:47:55,040
इससे पहले एक विचार था मन में। ठीक है?

683
00:47:55,040 --> 00:47:59,120
तो आप कह रहे हो कि शिवजी के पास मन नहीं है। तो ये

684
00:47:59,120 --> 00:48:03,200
विचार कहां पे था? फिर

685
00:48:03,200 --> 00:48:07,360
उनको विचार करने की जरूरत ही नहीं। अरे मैं क्या कह

686
00:48:07,360 --> 00:48:11,600
विचार कर विचार उसका ये

687
00:48:11,600 --> 00:48:15,600
जो ये जो ये जो सत्य है ये ये जो सत्य है

688
00:48:15,600 --> 00:48:19,600
कि बाप तुम लोगों को बता रहा है ये एक सत्य है ना

689
00:48:19,600 --> 00:48:23,600
सत्य है ना अब ये जो सत्य है इससे पहले कहां था बोलने

690
00:48:23,600 --> 00:48:29,600
से पहले लिखने से पहले ये सत्य कहां था

691
00:48:30,080 --> 00:48:34,160
ठीक है जब बोला तभी तो वाक्य बना मतलब इससे पहले

692
00:48:34,160 --> 00:48:38,240
इससे पहले अस्तित्व में नहीं था। यह जो सत्य है बाप तुम

693
00:48:38,240 --> 00:48:42,240
लोगों तुम लोगों को बता रहा है। यह पहले नहीं था उसमें

694
00:48:42,240 --> 00:48:46,240
अस्तित्व में उससे पहले उससे पहले अस्तित्व में नहीं था। जब बोला

695
00:48:46,240 --> 00:48:50,480
तभी अस्तित्व में आया। अच्छा तो मतलब ये सनातन सत्य

696
00:48:50,480 --> 00:48:54,720
नहीं है। सनातन सत्य है। अभी

697
00:48:54,720 --> 00:48:58,720
आप टॉपिक चेंज कर रहे हैं। नहीं तो आप आप जो

698
00:48:58,720 --> 00:49:02,800
है वो वहां फंसने वाली बात है ना कि आपने ये कह दिया मन नहीं है।

699
00:49:02,800 --> 00:49:06,880
अब मैं उनके द्वारा बोली हुई किसी बात को पूछ रहा हूं। ये बात जो है इससे

700
00:49:06,880 --> 00:49:10,880
पहले किस रूप में थी। अब आप उसको स्वीकार नहीं करोगे तो फिर मैं वहां

701
00:49:10,880 --> 00:49:14,880
पर आपको काउंटर करूंगा कि अगर मुरली सनातन

702
00:49:14,880 --> 00:49:18,400
सत्य है तो वो कम से कम लिखा लिखी दिखाई देने

703
00:49:18,400 --> 00:49:22,560
से पहले वो मन में होनी चाहिए नहीं तो मानना पड़ेगा कि देश काल

704
00:49:22,560 --> 00:49:26,640
परिस्थिति में ये बनाई जा रही है। ये सनातन सत्य

705
00:49:26,640 --> 00:49:31,360
नहीं है। पहले से एक्सिस्ट नहीं करता था ये सत्य। ये बात

706
00:49:31,360 --> 00:49:35,520
अभी आप सत्य सनातन की परिभाषा किसको कहेंगे?

707
00:49:35,520 --> 00:49:39,600
भाई साहब परिभाषा अलग मैं परिभाषा सुनूंगा। आप ये बता

708
00:49:39,600 --> 00:49:44,080
दीजिए यह पहले एक्सिस्ट में नहीं था ना। ठीक है?

709
00:49:44,080 --> 00:49:48,160
नहीं था ना? नहीं था। नहीं था। वो भाई साहब को भेज दीजिए

710
00:49:48,160 --> 00:49:52,400
आप। आप आप जो पीछे से आपको सिखा रहे हैं उनकी आवाज आ रही है। आप उनसे कहिए वो

711
00:49:52,400 --> 00:49:56,560
आ जाए अगर उनको ज्यादा पता है तो। हां। थोड़ा

712
00:49:56,560 --> 00:50:00,640
डिस्टरबेंस आता है। क्या है ना? वो क्या है? जब उनकी वो आवाज आती

713
00:50:00,640 --> 00:50:05,520
है। हां नहीं था। हां नहीं था। ऐसी आवाज आती है ना उनकी तो इरिटेट करती है।

714
00:50:05,520 --> 00:50:08,960
इरिटेट करती है।

715
00:50:08,960 --> 00:50:13,360
अभी एक बात समझ लीजिए कि मनुष्य

716
00:50:13,360 --> 00:50:17,360
को मन होता है। ठीक है? और मनुष्य को भगवान नहीं

717
00:50:17,360 --> 00:50:21,360
कहा जा सकता। क्योंकि उसका मन भाई साहब मैंने सवाल

718
00:50:21,360 --> 00:50:25,440
तो ये पूछा है कि ये जो विचार है जो ये बात है ये बात

719
00:50:25,440 --> 00:50:29,600
होने से बाद के रूप में आने से पहले वाक्य के रूप में आने से पहले

720
00:50:29,600 --> 00:50:33,760
एक विचार ये विचार कहां पे था?

721
00:50:33,760 --> 00:50:39,520
ये ये तो जब बोला तभी तो उत्पन्न हुआ।

722
00:50:39,520 --> 00:50:44,080
अच्छा चलिए छोड़िए अब हटाइए। हो गया। ठीक है। अब हम आगे बढ़ते हैं

723
00:50:44,080 --> 00:50:48,400
कि शिव जी जो है आते हैं शंकर की बॉडी में

724
00:50:48,400 --> 00:50:52,400
और अच्छा शंकर के पास भी अपना मन विचार है कि नहीं है कि वो

725
00:50:52,400 --> 00:50:56,560
भी नहीं है। शंकर के पास मन है। मन

726
00:50:56,560 --> 00:51:00,640
है। हां जी। इन दोनों में से इन दोनों में से सुपर

727
00:51:00,640 --> 00:51:04,640
पावर शिव है। सुपर पावर क्यों है?

728
00:51:04,640 --> 00:51:10,080
अच्छा ठीक ठीक अब समझ में आ गया। तो

729
00:51:10,080 --> 00:51:15,040
अभी जो है आपका कहना ये है कि आपने

730
00:51:15,040 --> 00:51:19,120
आपके यहां पे भी मेल की बॉडी में ही मामला चालू हुआ और आप मगर

731
00:51:19,120 --> 00:51:23,200
आपने जो प्रचारिका बनाया वो स्त्रियों को बनाया। मगर आपके यहां

732
00:51:23,200 --> 00:51:28,240
से जो निकल के गया व्यक्ति अमोल कोकने नाम का उसने

733
00:51:28,240 --> 00:51:33,200
जाहिर सी बात उसने अच्छा उसने वीरेंद्र देव दीक्षित जी की बात को

734
00:51:33,200 --> 00:51:37,760
माना है या नकार दिया है कि मतलब वो अभी भी यही मान रहा है कि

735
00:51:37,760 --> 00:51:41,840
वीरेंद्र देव दीक्षित जी की बॉडी में ही शिव वो शिव शिव

736
00:51:41,840 --> 00:51:46,000
शंकर है मतलब वो दोनों वही है या फिर वो ये कह रहा है मैं हूं मैं शंकर हूँ मेरी

737
00:51:46,000 --> 00:51:50,400
बॉडी में शिव है नहीं नहीं वो वीरेंद्र तो दीक्षित

738
00:51:50,400 --> 00:51:54,640
जी को ही मानते हैं अच्छा ठीक ठीक ठीक अच्छा अब दूसरी बात ये आ गई आपने

739
00:51:54,640 --> 00:51:59,040
कहा है कि उन्होंने पिछली बॉडी छोड़ दी थी और अभी नई बॉडी

740
00:51:59,040 --> 00:52:03,760
में चुके हैं वो बॉडी कौन सी है और कहां है वो

741
00:52:03,760 --> 00:52:08,000
बॉडी अभी बहुत जल्द प्रत्यक्ष होने वाली है संसार में मतलब अभी

742
00:52:08,000 --> 00:52:12,880
अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को नहीं पता है बॉडी कहां है

743
00:52:12,880 --> 00:52:16,960
वो तो अभी परीक्षा का समय है ये महाशिवरात्रि के समय जब परीक्षा

744
00:52:16,960 --> 00:52:21,120
होती है ना तो अभी तक अभी तक सन 1936

745
00:52:21,120 --> 00:52:25,440
से यह संस्था शुरू हुई तब से लेकर अभी तक वीरेंद्र देव दीक्षित

746
00:52:25,440 --> 00:52:30,560
जी का जो शरीर शरीर छोड़ा था उन्होंने वो कब छोड़ा था

747
00:52:30,560 --> 00:52:34,720
वो 2023 के पहले तो

748
00:52:34,720 --> 00:52:38,720
23 से अब तक [नाक से की जाने वाली आवाज़] 23 से अब तक कोई

749
00:52:38,720 --> 00:52:42,880
मुरली नहीं आई है नहीं और

750
00:52:42,880 --> 00:52:47,440
ये ब्रह्मा कुमारीज में तो डेली मुरली आती है ब्रह्मा

751
00:52:47,440 --> 00:52:52,400
कुमारी की जो मुरली आती है ना वो 1969

752
00:52:52,400 --> 00:52:56,960
के पहले की जो उन्होंने ब्रह्मा बाबा ने जो बोला है

753
00:52:56,960 --> 00:53:00,960
उन्होंने वो लिख के छाप करके रखा है उसी मुरलियों को

754
00:53:00,960 --> 00:53:06,960
वो लोग म रिपीट करते रहते हैं डे बाय डे तो नहीं

755
00:53:07,120 --> 00:53:11,120
तो ये नाटक होता है कि आज फिर परमपिता परमात्मा के मतलब शिव जो

756
00:53:11,120 --> 00:53:15,920
है वो किसी बॉडी में आके बोल के गए ये नाटक है

757
00:53:15,920 --> 00:53:20,400
मतलब वो तो अभी भी मानते हैं ना परमात्मा रोज आ रहे हैं

758
00:53:20,400 --> 00:53:24,400
वो आपने उनसे पूछा नहीं कि परमात्मा किसके तन में आ रहे हैं।

759
00:53:24,400 --> 00:53:28,480
आपने उनसे यह बात उन्होंने ना उन्होंने क्लियर की आपको कि ये

760
00:53:28,480 --> 00:53:33,040
मुरलियां आ कहां से रही है? ना आपकी मछ रहा

761
00:53:33,040 --> 00:53:37,040
अनुसार क्या है? आपके अनुसार मैं ये नहीं कह रहा कि है क्या?

762
00:53:37,040 --> 00:53:42,080
मैं ये कह रहा हूं आपके अनुसार क्या है? आपके अनुसार

763
00:53:42,080 --> 00:53:46,240
18 जनवरी 69 को वो ब्रह्मा बाबा ने शरीर

764
00:53:46,240 --> 00:53:50,640
छोड़ दिया। उससे पहले तक म 1951

765
00:53:50,640 --> 00:53:55,280
से लेकर के 1969 18 जनवरी 1969

766
00:53:55,280 --> 00:53:59,680
तक जो भी ब्रह्मा बाबा ने बोला है वो जो है

767
00:53:59,680 --> 00:54:05,200
मुरलियों के रूप में लिख के या ऑडियो रिकॉर्डिंग करके

768
00:54:05,200 --> 00:54:09,600
रखी हुई है तो उनहीं मुरलियों में से सिर्फ चार पांच साल की मुरलिया

769
00:54:09,600 --> 00:54:13,680
उनके पास शेष है जो रिपीट करते रहते हैं

770
00:54:13,680 --> 00:54:17,680
और ये कहते हैं कि हमारे ऊपर फिर ब्रह्मा बाबा है किसी ना किसी को वहां बिठा देते

771
00:54:17,680 --> 00:54:22,320
हैं और फिर कहते कहते वो ब्रह्मा बाबा आए और बोल गए

772
00:54:22,320 --> 00:54:26,800
पहले पहले वो लोग कहते थे कि गुलजार दादी में वो

773
00:54:26,800 --> 00:54:30,880
म शिव आते थे लेकिन वास्तव में उनमें शिव नहीं आते वो

774
00:54:30,880 --> 00:54:35,360
ब्रह्मा की आत्मा आती है और ब्रह्मा की आत्मा आ के गुलजार

775
00:54:35,360 --> 00:54:39,760
दादी के अंदर अव्यक्त वाणी नाम की वाणी चलाते

776
00:54:39,760 --> 00:54:43,760
हैं तो जिसमें जो है वो ब्रह्मा बाबा

777
00:54:43,760 --> 00:54:47,840
जो है वो देवात्मा है तो देवत्मा जो

778
00:54:47,840 --> 00:54:52,000
है धारणा की वाणी चलाती है। धारणा युक्त वाणी चलाती है। तो उसमें जो

779
00:54:52,000 --> 00:54:56,240
है हमको मनुष्य से देवता म बनने के लिए जो जो धारणा

780
00:54:56,240 --> 00:54:58,080
हमको

781
00:54:58,080 --> 00:55:02,320
जो देवी हमको धारण करनी है तो वो सारी बातें वो ब्रह्मा

782
00:55:02,320 --> 00:55:06,560
बाबा गुलजार दास जी के तन में प्रवेश करके बताते थे।

783
00:55:06,560 --> 00:55:10,720
तो वो पार्ट भी जो है वो 2017

784
00:55:10,720 --> 00:55:14,880
के बाद बंद हो गया।

785
00:55:14,880 --> 00:55:18,960
अच्छा ठीक है कोई बात नहीं। एक बात यह

786
00:55:18,960 --> 00:55:23,440
है कि जैसे हम कह रहे आती है

787
00:55:23,440 --> 00:55:28,000
तो यह बॉडीज जो होती है ब्रह्मा जी हैं शंकर है क्या

788
00:55:28,000 --> 00:55:32,480
यहां के अलावा हमारे बीच के अलावा भी कहीं पर है रहते हैं

789
00:55:32,480 --> 00:55:35,920
आपकी मान्यता क्या है इसमें

790
00:55:35,920 --> 00:55:40,320
देखिए जो भी मना इस पृथ्वी

791
00:55:40,320 --> 00:55:45,200
के अलावा और कहीं भी कोई मनुष्य सृष्टि नहीं है

792
00:55:45,200 --> 00:55:49,200
ना माना इस पृथ्वी के अलावा

793
00:55:49,200 --> 00:55:55,200
और कहीं भी कोई मनुष्य संसार

794
00:55:55,920 --> 00:56:00,480
पृथ्वी के अलावा ये जो शंकर है जो शंकर है

795
00:56:00,480 --> 00:56:04,560
जैसे आपने कहा कि वो वो गए ठीक

796
00:56:04,560 --> 00:56:08,640
है शंकर तो स्वयं देधारी का नाम है ना

797
00:56:08,640 --> 00:56:13,600
हां आत्मा तो अविनाशी है वो तो आत्माशी

798
00:56:13,600 --> 00:56:17,840
आत्मा अविनाशी है तो मतलब शंकर भी वास्तविकता में निराकार आत्मा

799
00:56:17,840 --> 00:56:20,320
ही है।

800
00:56:20,320 --> 00:56:25,520
शंकर भी वास्तविकता में निराकार आत्मा ही है। ऐसा है। हां

801
00:56:25,520 --> 00:56:29,840
शंकर भी आत्मा ही है। और आत्माओं का

802
00:56:29,840 --> 00:56:34,080
भी वो भी आत्मा ही है। आत्मा और

803
00:56:34,080 --> 00:56:38,180
म जो आत्मा और आत्माओं के पिता में

804
00:56:38,180 --> 00:56:42,400
[नाक से की जाने वाली आवाज़] अंतर ये है कि मनुष्य आत्माएं जो है वो इस सृष्टि

805
00:56:42,400 --> 00:56:46,480
में आकर के शरीर धारण कर करके शरीर धारण

806
00:56:46,480 --> 00:56:52,480
करके अपना अपना अनेक जन्मों का पार्ट बजाती है।

807
00:56:53,120 --> 00:56:57,440
लेकिन शिव जो है [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो [गला साफ़ करने की आवाज़] इस सृष्टि

808
00:56:57,440 --> 00:57:01,520
रूपी रंगमंच पर म गर्भ से जन्म

809
00:57:01,520 --> 00:57:05,840
गर्भ से जन्म नहीं लेता और उसका आने का भी जो टाइम है

810
00:57:05,840 --> 00:57:10,080
वो भी गीता में शिव जो है गर्भ से

811
00:57:10,080 --> 00:57:14,320
जन्म नहीं लेता जो शंकर है जो शंकर वो आत्मा है जो शंकर नाम

812
00:57:14,320 --> 00:57:19,040
की वो गर्भ से जन्म लेती है हां जी

813
00:57:19,040 --> 00:57:23,040
अच्छा मतलब वो जो बॉडी होती है वो वो जो बॉडी

814
00:57:23,040 --> 00:57:27,840
होती है वो अविनाशी नहीं होती है वो मतलब

815
00:57:27,840 --> 00:57:30,240
बॉडी

816
00:57:30,240 --> 00:57:34,480
नहीं होती बॉडी जो है वो अविनाशी मना

817
00:57:34,480 --> 00:57:38,720
बॉडी तो अभी 5000 साल से जो है ये मनुष्य

818
00:57:38,720 --> 00:57:42,720
सृष्टि चल रही है ठीक है पांच चार साल से

819
00:57:42,720 --> 00:57:48,720
मनुष्य सृष्टि में ज्यादा से ज्यादा मनुष्य हो गया वो हो गया वो हो गया

820
00:57:48,720 --> 00:57:52,800
तो अभी दोबारा से उसमें आ जाते है एक क्लियर कर कहते हैं कि वो

821
00:57:52,800 --> 00:57:56,880
जो शंकर ने जो जन्म लेना है जब वो जन्म

822
00:57:56,880 --> 00:58:01,520
ले लेंगे तो फिर उस बॉडी में वो आएंगे। जबकि कहना चाहिए कि

823
00:58:01,520 --> 00:58:07,520
बॉडी दोनों लोग धारण करते हैं। शिव को भी बॉडी चाहिए। शंकर को भी बॉडी चाहिए।

824
00:58:07,840 --> 00:58:08,340
दोनों

825
00:58:08,160 --> 00:58:12,160
निराकार है। फिर अंतर क्या है दोनों में? अंतर वही

826
00:58:12,160 --> 00:58:16,880
है कि वो उनके पास मन नहीं है और शंकर के पास मन है।

827
00:58:16,880 --> 00:58:20,960
अंतर यह है कि एक सगुण है एक अगुन है।

828
00:58:20,960 --> 00:58:25,600
लेकिन दोनों मिलकर के सगु नहीं कछु भेद

829
00:58:25,600 --> 00:58:29,600
दोनों मिलकर एक हो जाते हैं स्वभाव संस्कार से। शिव जो

830
00:58:29,600 --> 00:58:33,600
है ना वो इस मनुष्य सृष्टि में जब आता है

831
00:58:33,600 --> 00:58:37,680
तो जो मनुष्य सृष्टि का जो बीज है मनुष्य

832
00:58:37,680 --> 00:58:42,080
सृष्टि का जो आदि पुरुष है जिसको

833
00:58:42,080 --> 00:58:46,080
म जिसको हर धर्म में मान्यता प्राप्त है म जिसमें जिसको हर धर्म

834
00:58:46,080 --> 00:58:50,160
में मान्यता है आदि पुरुष के रूप में जैसे हिंदुओं में उनको

835
00:58:50,160 --> 00:58:55,280
आदिदेव कहते म आदिदेव कहते हैं शंकर को

836
00:58:55,280 --> 00:58:59,680
और जैनियों में आदिनाथ कहते हैं। क्रिश्चियनों में उनको

837
00:58:59,680 --> 00:59:04,240
एडमम कहते हैं। मुसलमानों में उनको

838
00:59:04,240 --> 00:59:09,040
आदम कहते हैं। तो मनुष्य सृष्टि का जो

839
00:59:09,040 --> 00:59:13,040
म बीज है या मनुष्य सृष्टि का जो

840
00:59:13,040 --> 00:59:17,350
आदि पुरुष है उसकी हर धर्म में मान्यता है।

841
00:59:17,350 --> 00:59:21,920
[गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा वो जो है धर्म का मनुष्य

842
00:59:21,920 --> 00:59:24,240
कहने का मतलब है

843
00:59:24,240 --> 00:59:28,480
नहीं कहने का मतलब ये है के मनुष्य

844
00:59:28,480 --> 00:59:32,560
हर धर्म में जो अलग-अलग नाम से आपने कहा कि जो शिव

845
00:59:32,560 --> 00:59:37,600
है वो अगुण है यानी उनके अंदर गुण नहीं है।

846
00:59:37,600 --> 00:59:41,680
नहीं गुण है ये आना जाना

847
00:59:41,680 --> 00:59:44,160
क्या है

848
00:59:44,160 --> 00:59:48,480
गुण आना जाना माने प्रवेश करते हैं तो प्रवेश

849
00:59:48,480 --> 00:59:54,080
करना प्रवेश करना क्या है उनके पास प्रवेश करने का गुण है ना

850
00:59:54,080 --> 00:59:58,080
हां तो वो गुण तो उनके अंदर है लेकिन बिना शरीर के वो

851
00:59:58,080 --> 01:00:02,880
गुण जो है वो प्रत्यक्ष नहीं होते मतलब

852
01:00:02,880 --> 01:00:06,880
मतलब मतलब वो अगुण नहीं है अगुण नहीं

853
01:00:06,880 --> 01:00:11,440
है वो। देखिए उसके अंदर गुण

854
01:00:11,440 --> 01:00:16,560
शिव जो है वो गुण और अवगुण दोनों से परे है।

855
01:00:16,560 --> 01:00:20,720
अरे भाई तो ये प्रवेश करना ये प्रवेश करना क्या है फिर? ये

856
01:00:20,720 --> 01:00:24,960
क्वालिटी है ना एक वो प्रवेश कर सकते हैं किसी के शरीर में। तो प्रवेश

857
01:00:24,960 --> 01:00:29,120
करने के लिए योग्य है। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] तो गुण हुआ ना? गुण

858
01:00:29,120 --> 01:00:33,440
किसे कहते हैं? आप ये बताइए गुण किसे कहते हैं? गुण

859
01:00:33,440 --> 01:00:37,760
माना गुण म जो भी हमारे अंदर

860
01:00:37,760 --> 01:00:39,600
हमारा एक्टिविटीज

861
01:00:39,600 --> 01:00:44,320
है [नाक से की जाने वाली आवाज़] भाई साहब उनको कहिए वो भी आ जाए आप दोनों लोग आ जाइए

862
01:00:44,320 --> 01:00:48,320
आप आ जाओ बगल में आ जाओ बीच में बीच में बोलते हो ना वो अजीब वो थोड़ा

863
01:00:48,320 --> 01:00:52,320
सा विघ्न है आपस में बात कर रहे हैं

864
01:00:52,320 --> 01:00:56,400
वो लोग नहीं नहीं वो आपको बताते हैं ना वो खुसुर फुसुरता वो अच्छा

865
01:00:56,400 --> 01:01:01,760
नहीं लगता है आप तो इतने मतलब स्वयं में ही सामर्थ

866
01:01:01,760 --> 01:01:05,840
समर्थवान दिखते हैं फिर भी आप उनको बोल बोल रहे हैं खुसुर खुसुर खुसुर

867
01:01:05,840 --> 01:01:09,840
खुसुर वो अजीब लग रहा है। देखो चोरी हो रही है। ऐसे नहीं करना

868
01:01:09,840 --> 01:01:15,520
चाहिए। ठीक है। वो लोग नहीं बोलेंगे। आप बोलिए। हां

869
01:01:15,520 --> 01:01:19,760
ये कह रहा था मैं कि आपने कहा वो अवगुण है। गुण नहीं है उनमें।

870
01:01:19,760 --> 01:01:25,760
अब अब जो है ये गुण किसे कहते हैं? ये बता दीजिए।

871
01:01:25,920 --> 01:01:31,600
ठीक है गुण और अवगुणों की जो बात है ना

872
01:01:31,600 --> 01:01:35,920
वो साकार में जब शिव जो है जब

873
01:01:35,920 --> 01:01:41,920
मैं नहीं कह रहा हूं गुण दिखाई कब देता है मैं कह रहा हूं गुण कहते किसे है ये बताइए

874
01:01:43,680 --> 01:01:48,080
ये गुण माना अब गुण की परिभाषा आपके अकॉर्डिंग तो मैं बता नहीं पाऊंगा

875
01:01:48,080 --> 01:01:52,160
म गुण जो अपने अकॉर्डिंग बताइए ना भाई साहब आप

876
01:01:52,160 --> 01:01:56,400
अपने अकॉर्डिंग बताइए ना भाई साहब गुण गुण

877
01:01:56,400 --> 01:02:00,400
जो है वो त्रिकालदर्शी है। ठीक है? और

878
01:02:00,400 --> 01:02:04,640
त्रिमूर्ति के त्रिमूर्ति को भी रचने वाले हैं। ब्रह्मा विष्णु शंकर

879
01:02:04,640 --> 01:02:08,800
को भी रचने वाले हैं। वो ज्ञान का सागर है। उनके अंदर ज्ञान

880
01:02:08,800 --> 01:02:12,880
का अखूट भंडार भरा हुआ है। और प्यार

881
01:02:12,880 --> 01:02:16,880
का सागर कहा जाता है। भाई साहब पता नहीं आप कहां चले जाते हैं। तुरंत आप

882
01:02:16,880 --> 01:02:21,840
अपने प्रवचनों में चले जाते हैं। बार-बार मैं आपको पूछ रहा हूं।

883
01:02:21,840 --> 01:02:25,840
हां तो ये आप कि वो ऐसा करते हैं, वो ऐसा करते

884
01:02:25,840 --> 01:02:29,840
हैं। ये कहां से आ गया? गुण की परिभाषा देनी है ना? तो गुण ही

885
01:02:29,840 --> 01:02:33,840
तो मैं बता रहा हूं। बताइए एक बार और बता दीजिए। गुण

886
01:02:33,840 --> 01:02:37,920
गुण किसे कहते हैं?

887
01:02:37,920 --> 01:02:42,000
गुण जो है वो म शिव के जो शिव के

888
01:02:42,000 --> 01:02:46,320
अंदर जो है वो मैं बता रहा हूं। वो ज्ञान का सागर है।

889
01:02:46,320 --> 01:02:51,040
अरे भाई साहब आप क्या बता रहे हैं कि मैंने पूछा कि भैया

890
01:02:51,040 --> 01:02:55,440
यह बताइए एनर्जी किसे कहते हैं? तो आप बता रहे हैं मोटरसाइकिल

891
01:02:55,440 --> 01:02:59,440
जो है वो वो जो है पेट्रोल का सागर है। पेट्रोल की टंकी है

892
01:02:59,440 --> 01:03:03,520
उसमें पहिया लगा हुआ है। हवा भरी ये क्या है?

893
01:03:03,520 --> 01:03:07,520
भाई मैं पूछ रहा हूं गुण किसे कहते हैं? मेरी जानकारी में गुण ये है

894
01:03:07,520 --> 01:03:13,520
कि वो यह कर सकते हैं। यह कर सकते हैं। वह ऐसे होते हैं। वैसे होते हैं। क्वालिटीज

895
01:03:13,520 --> 01:03:17,600
उसको गुण कहते हैं। किसी की क्वालिटी क्या है? उसको गुण कहते

896
01:03:17,600 --> 01:03:21,920
हैं। है ना? तो आप

897
01:03:21,920 --> 01:03:26,000
तो जब क्वालिटीज को गुण कहते हैं तो आपके जो ये

898
01:03:26,000 --> 01:03:30,320
जो शिव है जिनको आप अगुण कह रहे हैं जिनमें गुण नहीं है। तो

899
01:03:30,320 --> 01:03:36,320
अगर गुण नहीं है तो ये जो प्रवेश कर रहे हैं प्रवेश करना क्या है?

900
01:03:36,400 --> 01:03:40,400
उनके अंदर उनके अंदर किसी को किसी शरीर को धारण करने

901
01:03:40,400 --> 01:03:46,400
का गुण है ना? हां चलो ये चलो ठीक है

902
01:03:47,360 --> 01:03:53,360
तो फिर वो तो फिर वो अगुण नहीं है फिर

903
01:03:55,120 --> 01:03:59,200
चलिए कोई कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं हम

904
01:03:59,200 --> 01:04:03,200
लोग दूसरा चैप्टर अब खोलते हैं। अब छोड़िए ये वाला जो फटसी की दुनिया है

905
01:04:03,200 --> 01:04:07,280
इससे थोड़ा बाहर निकलते हैं और थोड़ा सा दूसरी चीजों पे आते

906
01:04:07,280 --> 01:04:12,400
काफी भारी हो गया उसको लाइट करते थोड़ा अब मुझे ये बताइए

907
01:04:12,400 --> 01:04:16,480
कि आपने बता दिया कि शिव ऐसा करते हैं शंकर ऐसा करते हैं ये है

908
01:04:16,480 --> 01:04:20,560
वो है बहुत सी चीजें मैंने सुनी आपकी अब मुझे बताइए ईश्वर है

909
01:04:20,560 --> 01:04:26,080
यह सिद्ध कैसे होता है [नाक से की जाने वाली आवाज़]

910
01:04:26,080 --> 01:04:31,520
ईश्वर है या सिद्ध ऐसे होता है

911
01:04:31,520 --> 01:04:35,520
अभी आपने टॉपिक छेड़ा है तो इसके लिए जो

912
01:04:35,520 --> 01:04:39,760
है हमारा वाला जो पार्ट है ना कि आप कौन है आप

913
01:04:39,760 --> 01:04:44,160
क्या सोचते हैं और आप जो है आपकी

914
01:04:44,160 --> 01:04:49,200
पहचान इत्यादि के विषय में वो पार्ट अभी खत्म हुआ है। अब मैं आपके जो आध्यात्मिक

915
01:04:49,200 --> 01:04:53,520
विचार हैं है ना उनको जानना चाह रहा हूं कि वो कितने पावरफुल

916
01:04:53,520 --> 01:04:57,680
है। उसमें कितना सामर्थ है। वह जानने के लिए पहला सवाल है

917
01:04:57,680 --> 01:05:01,920
कि आप मुझे बताएं कि ईश्वर है यह सिद्ध

918
01:05:01,920 --> 01:05:06,000
कैसे होता है? ठीक है। ईश्वर जो है पहले

919
01:05:06,000 --> 01:05:10,000
तो आप ईश्वर की परिभाषा समझ लीजिए कि

920
01:05:10,000 --> 01:05:14,000
ईश्वर माना जो है ईश माना शासन करने वाला। और वर

921
01:05:14,000 --> 01:05:18,080
माना श्रेष्ठ। तो जो श्रेष्ठते श्रेष्ठ इस संसार में आकर

922
01:05:18,080 --> 01:05:22,240
के जो श्रेष्ठते श्रेष्ठ शासन करता है। तो वो है

923
01:05:22,240 --> 01:05:26,560
ईश्वर। जिसकी सत्ता जो है वो सभी को

924
01:05:26,560 --> 01:05:30,640
म स्वीकार करनी पड़ती है। नास्तिक से नास्तिक

925
01:05:30,640 --> 01:05:35,200
स्वीकार करनी पड़ती है। होती नहीं है।

926
01:05:35,200 --> 01:05:39,280
ईश्वर है जिसकी सत्ता दो चीजें हो गई। मैं क्लियर

927
01:05:39,280 --> 01:05:41,360
कर रहा हूं। ईश्वर वो है जिसकी सत्ता

928
01:05:41,360 --> 01:05:45,520
सब जगह है। ये ईश्वर है या ईश्वर वो है जिसकी सत्ता सबको

929
01:05:45,520 --> 01:05:49,760
माननी है। भले ही हो ना हो। माननी है, स्वीकार करनी है।

930
01:05:49,760 --> 01:05:53,760
जैसे मान लीजिए जैसे मान लीजिए किसी ने परमाणु बम बना

931
01:05:53,760 --> 01:05:57,840
लिया। वो कह रहा है मेरी सत्ता मानो। नहीं तो परमाणु

932
01:05:57,840 --> 01:06:02,080
लगा दूंगा। ये तो मानना हो गया। देखिए सत्ता

933
01:06:02,080 --> 01:06:06,320
मानी कब जाएगी? जब उसकी सत्ता चलेगी। अगर कोई इंकार

934
01:06:06,320 --> 01:06:10,480
करता है कि नहीं हम ईश्वर को नहीं मानते। अगर कोई कहता है कि हम

935
01:06:10,480 --> 01:06:14,640
ईश्वर को नहीं मानते। जब उसके भी सर पर डंडा बजेगा तो वो भी मानने

936
01:06:14,640 --> 01:06:18,640
के लिए मजबूर हो जाएगा। मतलब है जिसकी सत्ता सब जगह

937
01:06:18,640 --> 01:06:24,640
है। सब जगह है। है

938
01:06:24,960 --> 01:06:28,960
लेकिन हमेशा नहीं है। ईश्वर जो है वो

939
01:06:28,960 --> 01:06:34,960
म कलयुग के अंत में ही इस सृष्टि पर आता है।

940
01:06:35,600 --> 01:06:39,440
अब समझ लीजिए कि कलयुग का

941
01:06:39,440 --> 01:06:44,000
रहता है। ऊपर परमधाम में आत्मलोक में

942
01:06:44,000 --> 01:06:48,080
गीता में देखिए गीता में एक श्लोक आया मतलब अभी मैं सोच रहा

943
01:06:48,080 --> 01:06:52,240
था कि पृथ्वी के अलावा और कोई लोक नहीं है आप आप एक आत्मलोक को मानते

944
01:06:52,240 --> 01:06:56,320
हैं आत्मलोक जहां परमात्मा का लोक ठीक है

945
01:06:56,320 --> 01:07:00,560
जी तो वो परमात्मा के परमात्मा के लोक से

946
01:07:00,560 --> 01:07:05,280
यहां आता है कलयुग कलयुग के अंत में हां

947
01:07:05,280 --> 01:07:10,480
क्योंकि सृष्टि मकान पुराना होता है

948
01:07:10,480 --> 01:07:14,480
अब आप सुन लीजिए ना आप बीच में बोलते रहेंगे तो मेरी बात ये

949
01:07:14,480 --> 01:07:18,480
नहीं जानना चाहता ना कि क्यों आता है जब मैं पूछू तब बता दीजिएगा

950
01:07:18,480 --> 01:07:23,120
मैं अभी वही पर क्वेश्चन कर रहा हूं ना कि भाई जब वो वहां रहता है आत्मलोक

951
01:07:23,120 --> 01:07:27,600
में और जब वो यहां नहीं होता है तो यहां सब फ्री होते हैं मतलब

952
01:07:27,600 --> 01:07:32,480
मतलब यहां उसकी कोई सत्ता नहीं होती है जैसे देखिए

953
01:07:32,480 --> 01:07:36,480
कुमार का जो चाक होता है कुंभ पहले आपने एक बात समझ ली

954
01:07:36,480 --> 01:07:40,560
ना आप एक बात समझ ली ना कि वो क्यों आता वाला प्रश्न मेरा था ही नहीं।

955
01:07:40,560 --> 01:07:44,560
अभी जो आपने बात कही है उसी में से एक प्रश्न कर रहा हूं। क्यों आता है अलग बात हो

956
01:07:44,560 --> 01:07:48,800
जाएगी। ठीक है? तो अभी मुझे ये बताइए कि जब वो वहां

957
01:07:48,800 --> 01:07:50,720
होता है तब भी उसकी सत्ता होती

958
01:07:50,720 --> 01:07:54,800
है नीचे सब जगह या वो तभी

959
01:07:54,800 --> 01:07:59,040
होती है जब वो आता है तब होती है। तब तक बाकी सब सत्ता हीन सत्ता

960
01:07:59,040 --> 01:08:03,920
से रहित होते हैं। उसकी ईश्वर ही सत्ता से रहित होता है संसार।

961
01:08:03,920 --> 01:08:08,000
नहीं नहीं ईश्वर की सत्ता सदा कायम होती है सृष्टि पर

962
01:08:08,000 --> 01:08:12,000
सदा कायम इस सृष्टि पर ईश्वर की सत्ता होती है अब तक मैं अब तक

963
01:08:12,000 --> 01:08:16,320
मैं आपकी बात से एक बात समझाऊं कि ईश्वर वो है जिसकी

964
01:08:16,320 --> 01:08:20,880
सत्ता हर काल में और हर देश में है।

965
01:08:20,880 --> 01:08:24,880
है ना? अब देखिए आप ईश्वर की ईश्वर एक

966
01:08:24,880 --> 01:08:29,280
और बात बताना चाहता हूं आपको कि जो परमपिता

967
01:08:29,280 --> 01:08:33,360
शिव है वो जब इस सृष्टि पर आता है तो

968
01:08:33,360 --> 01:08:37,520
किसी एक व्यक्ति को मना अपने जैसा

969
01:08:37,520 --> 01:08:43,200
संपूर्ण 100% अपने जैसा बना के जाता है।

970
01:08:43,200 --> 01:08:47,280
तो वो जो है इस सृष्टि पर सदा कायम म सृष्टि

971
01:08:47,280 --> 01:08:52,880
को चलाने के लिए निमित रहता है। तो जब कभी भी मना

972
01:08:52,880 --> 01:08:57,280
देखते देखते हैं कि सृष्टि जो है पतन में जा रही है

973
01:08:57,280 --> 01:09:01,840
तो थोड़े म टाइम टू टाइम वो उस सृष्टि को बचाने के

974
01:09:01,840 --> 01:09:06,000
निमित्त बनता है। तो जैसे कि मना

975
01:09:06,000 --> 01:09:10,160
जो सृष्टि का मनुष्य सृष्टि का आदि पुरुष है वो संगम युग

976
01:09:10,160 --> 01:09:14,400
में ही म पुरुषार्थ करके शिव समान बन जाता

977
01:09:14,400 --> 01:09:18,480
है। तो म वो शिव

978
01:09:18,480 --> 01:09:22,560
बाबा कहा जाता है। तो जब फिर से नई सृष्टि की

979
01:09:22,560 --> 01:09:26,800
शुरुआत म परमपिता परमात्मा अभी कलयुग के अंत में आ के

980
01:09:26,800 --> 01:09:31,200
इस कलयुगी सृष्टि का विनाश करके नई सृष्टि का

981
01:09:31,200 --> 01:09:35,760
निर्माण करके वो अपना काम खत्म करके वापस जाके परमधाम

982
01:09:35,760 --> 01:09:40,080
में बैठ जाते हैं। तो फिर किसी को शिव बाबा बना के जाते होंगे।

983
01:09:40,080 --> 01:09:44,320
एक को आप समान बना जाते हैं 100% बाकी सब नंबर वन

984
01:09:44,320 --> 01:09:48,400
कोई उससे थोड़ा कम मेरा प्रश्न अभी मेरा प्रश्न वही

985
01:09:48,400 --> 01:09:52,560
की वही है। वो बना जाते हैं किसको वो बना जाते हैं किसको क्या कर जाते

986
01:09:52,560 --> 01:09:57,280
हैं वो बात एक अलग है। मैं ये पूछ रहा हूं। मैंने

987
01:09:57,280 --> 01:10:01,440
सवाल ये किया है कि उनकी सत्ता हर जगह है

988
01:10:01,440 --> 01:10:04,640
या नहीं है।

989
01:10:04,640 --> 01:10:09,600
हर जगह है। हर समय है।

990
01:10:09,600 --> 01:10:14,000
हर जगह भी है। हर समय भी है।

991
01:10:14,000 --> 01:10:18,480
हर समय में भी है। हर इसको कहते हैं देश काल परिस्थिति

992
01:10:18,480 --> 01:10:22,800
सब में उसकी सत्ता है। है ना?

993
01:10:22,800 --> 01:10:27,280
हां जी। और जब वो जब वो क्या कहते हैं?

994
01:10:27,280 --> 01:10:31,440
जब वो वहां होते हैं आत्मलोक में तो अपना जो कार्यभार है अपने

995
01:10:31,440 --> 01:10:35,680
जैसा एक को बना के जाते हैं यहां 100%

996
01:10:35,680 --> 01:10:39,920
हां जी [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है वो भी तो वो उनका काम करते हां सिर्फ

997
01:10:39,920 --> 01:10:44,000
100 साल के वो उसका काम करते रहते हैं जो उसका काम है वो करते

998
01:10:44,000 --> 01:10:48,080
रहते हैं हां जी अच्छा जब वो वहां होते

999
01:10:48,080 --> 01:10:52,400
हैं और दूसरे को काम दे जाते हैं जब वो वहां होते हैं और दूसरे

1000
01:10:52,400 --> 01:10:56,560
को काम दे जाते हैं तो उस समय यहां पे होने वाली जो चीजें हैं वो उनको उनको

1001
01:10:56,560 --> 01:10:59,520
मालूम होती है कि नहीं

1002
01:10:59,520 --> 01:11:03,520
मतलब उनको बिल्कुल डिस्कनेक्ट बिल्कुल डिस्कनेक्ट होके बैठ

1003
01:11:03,520 --> 01:11:06,160
जाते हैं।

1004
01:11:06,160 --> 01:11:11,520
बिल्कुल डिनेक्ट एक मिनट बिल्कुल डिनेक्ट

1005
01:11:11,520 --> 01:11:15,760
मैं कह रहा हूं बिल्कुल डिस्कनेक्ट होके बैठ जाते हैं या फिर देखते

1006
01:11:15,760 --> 01:11:19,920
हैं पूरा सृष्टि में क्या चल रहा है पूरा देखते हैं। नहीं नहीं बिल्कुल

1007
01:11:19,920 --> 01:11:24,240
डिस्कनेक्ट होके बैठ जाते हैं। उनको उनको कोई मतलब नहीं

1008
01:11:24,240 --> 01:11:27,360
संसार में क्या चल रहा है।

1009
01:11:27,360 --> 01:11:29,040
वो तो एक म

1010
01:11:29,040 --> 01:11:33,200
वो क्या है एक पूरा फिल्म सेटिंग करके ड्रामा का म

1011
01:11:33,200 --> 01:11:37,440
जो ड्रामा जो है ना वो पूरा करके जैसे कोई जैसे

1012
01:11:37,440 --> 01:11:41,600
कोई सिनेमा हॉल में पिक्चर चलाने वाला प्रोजेक्टर चलाने वाला व्यक्ति होता

1013
01:11:41,600 --> 01:11:45,600
होगा उसको मालूम है कि उस फिल्म में क्या होना है तो वो अपना प्रोजेक्टर चला के

1014
01:11:45,600 --> 01:11:50,080
अपना चायवा पीता रहता है बैठता है अलग तो ऐसे ही वो जो

1015
01:11:50,080 --> 01:11:55,190
वो है अपना पिक्चर चालू कर दी और वह अपना जाते हैं

1016
01:11:55,190 --> 01:12:00,240
[नाक से की जाने वाली आवाज़] उनको मालूम है कहां क्या हो रहा है उनको मालूम ही नहीं इसमें और करेक्ट

1017
01:12:00,240 --> 01:12:05,680
और करेक्शन इसमें जो शिव है वो है डायरेक्टर

1018
01:12:05,680 --> 01:12:09,680
वो हमेशा पर्दे के पीछे रहता है और बाकी सब हम

1019
01:12:09,680 --> 01:12:14,160
जो है वो है एक्टर और यह सृष्टि जो है ये रंगमंच

1020
01:12:14,160 --> 01:12:17,280
है

1021
01:12:17,280 --> 01:12:21,440
कि जब वो यहां से जाता है तब भी उसका कंट्रोल सब

1022
01:12:21,440 --> 01:12:25,440
जगह होता है वहां बैठे बैठे या फिर वो कंट्रोल यह जो नीचे

1023
01:12:25,440 --> 01:12:29,440
होता है व्यक्ति जिसको अपने जैसा बना के जाता है उसके माध्यम

1024
01:12:29,440 --> 01:12:33,440
से होता है। इन दोनों के बीच में कोई कनेक्शन होता है कि भाई

1025
01:12:33,440 --> 01:12:38,000
ऐसे से ऐसा या नहीं होता है ये थोड़ा सा क्लियर करें।

1026
01:12:38,000 --> 01:12:42,240
देखिए अभी एक फिल्म एक फिल्म जब बनती है तो फिल्म

1027
01:12:42,240 --> 01:12:46,960
पर्दे पर आने से पहले उसकी शूटिंग होती है।

1028
01:12:46,960 --> 01:12:52,160
ठीक है? तो हर एक पार्टधारी को पता है कि मुझे क्या करना है।

1029
01:12:52,160 --> 01:12:56,400
वो हर एक पार्ट हर एक म एक्टर का वो ड्रामा

1030
01:12:56,400 --> 01:13:00,960
सेट करके जाता है। अब यहां पर एक्टर भी जो है ना

1031
01:13:00,960 --> 01:13:04,960
अपनी क्वालिटी के हिसाब से अपना पार्ट चुनते हैं। जिसमें जितनी

1032
01:13:04,960 --> 01:13:08,960
क्षमता होगी परमात्मा शिव जब इस सृष्टि पर आता है

1033
01:13:08,960 --> 01:13:13,040
तो उसके वो जो ज्ञान सुनाता है तो उस

1034
01:13:13,040 --> 01:13:17,680
ज्ञान को कोई तो 100 परसेंट पकड़ता है और कोई जो है

1035
01:13:17,680 --> 01:13:21,840
वो 1% पकड़ता है। तो नंबर व

1036
01:13:21,840 --> 01:13:25,920
जितने भी सृष्टि पर एक्टर है म ए टू

1037
01:13:25,920 --> 01:13:30,080
जेड जितने भी 500 700 करोड़ म 800 करोड़ जितनी

1038
01:13:30,080 --> 01:13:32,320
भी जनसंख्या है उनमें से हर

1039
01:13:32,320 --> 01:13:36,800
एक का पार्ट जो है वो इस म

1040
01:13:36,800 --> 01:13:41,040
सुप्रीम सोल शिव परमात्मा शिव परमपिता शिव

1041
01:13:41,040 --> 01:13:45,280
वो सेट करके जाता है जिसने जितनी परमात्मा से पढ़ाई

1042
01:13:45,280 --> 01:13:49,280
पढ़ी और जिस अनुसार पढ़ाई पढ़ी उस अनुसार

1043
01:13:49,280 --> 01:13:53,280
उसने अपने अनेक जन्मों का भाग्य इस एक जन्म के पुरुषार्थ में उसने

1044
01:13:53,280 --> 01:13:57,280
बना लिया। जबकि परमात्मा इस सृष्टि पर आता है।

1045
01:13:57,280 --> 01:14:01,840
कब आता है? संगम युग में आता है। और यह संगम युग

1046
01:14:01,840 --> 01:14:05,920
100 साल का होता है। बता दीजिए। अब

1047
01:14:05,920 --> 01:14:10,000
आप मुझे ये बता दीजिए सत्ता से आपका क्या तात्पर्य है? सत्ता का

1048
01:14:10,000 --> 01:14:14,160
मतलब क्या है? नहीं अभी आप ये जो बात तो समझ लीजिए। ये समझ गया।

1049
01:14:14,160 --> 01:14:18,160
मैं समझ गया कि वो फिल्म सेट करके जाता है। उसको सब मालूम ही है।

1050
01:14:18,160 --> 01:14:22,640
उसको सब मालूम है कहां क्या हो रहा है। वो देखे चाहे ना देखे।

1051
01:14:22,640 --> 01:14:26,800
तो ये जो फिल्म है ना ये 5000 साल तक चलती है। अच्छा

1052
01:14:26,800 --> 01:14:30,880
नीचे नीचे जो ये वाले होते हैं जो जो 100% होते हैं जो

1053
01:14:30,880 --> 01:14:35,040
100% होते हैं नीचे वाले इनको भी सब मालूम होता है या

1054
01:14:35,040 --> 01:14:39,360
ये अपने आप में नए होते हैं। इनको केवल 5000 साल में

1055
01:14:39,360 --> 01:14:44,320
ये केवल दृष्टा होते हैं। इनको भविष्य मतलब इनकी क्या क्वालिटीज होती है?

1056
01:14:44,320 --> 01:14:47,360
इनकी क्वालिटी यह होती है कि इन्होंने अपनी आत्मा में

1057
01:14:47,360 --> 01:14:51,440
जितनी जितनी पावर भर ली तो उस अनुसार वह श्रेष्ठ से

1058
01:14:51,440 --> 01:14:55,680
श्रेष्ठ म इनको जैसे संगम युग में जो भी पार्ट

1059
01:14:55,680 --> 01:14:59,840
इन्होंने भर लिया अपनी आत्मा में ये अनेक जन्मों तक

1060
01:14:59,840 --> 01:15:04,480
ये पावर काम करती है आत्मा में। अरे भाई इन्होंने

1061
01:15:04,480 --> 01:15:09,120
जब मेरी बात को आप समझिए भाई साहब। थोड़ा सा भटक रहे हैं आप।

1062
01:15:09,120 --> 01:15:13,920
मैं यह पूछ रहा हूं जब सुनिए सुनिए जब जो

1063
01:15:13,920 --> 01:15:18,080
शिव शिव जी है जो शिवजी वो जब यहां पिक्चर चालू करके जाते

1064
01:15:18,080 --> 01:15:22,080
हैं तो आपने कहा कि एक व्यक्ति को अपने जैसा बना के जाते हैं। उसके

1065
01:15:22,080 --> 01:15:27,840
अंदर सारी पावर होती है। वो देहधारी होता है। इतना तो है।

1066
01:15:27,840 --> 01:15:32,080
सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं। परमात्मा आता है तो सारी

1067
01:15:32,080 --> 01:15:36,240
दुनिया के लिए म सारी दुनिया ही उससे उसके ज्ञान से लाभान्वित

1068
01:15:36,240 --> 01:15:40,480
होती है। कोई म कोई 100% जैसे

1069
01:15:40,480 --> 01:15:44,480
टीचर पढ़ाता है आपने तो कहा था कि एक व्यक्ति को 100% अपने जैसा

1070
01:15:44,480 --> 01:15:48,640
बना के जाता है। लेकिन

1071
01:15:48,640 --> 01:15:52,720
तो सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं पढ़ाई पढ़ाता ना। पढ़ाई तो सभी को पढ़ाता है। मैं

1072
01:15:52,720 --> 01:15:56,720
यह नहीं कह रहा हूं। 100% एक को बना के जाता है कि सब कईों को

1073
01:15:56,720 --> 01:16:00,320
बना के जाता है। क्लियर कर दीजिए।

1074
01:16:00,320 --> 01:16:03,280
को एक ही 100%

1075
01:16:03,280 --> 01:16:07,280
एक जो है 100% पुरुषार्थ बनता है और शिव किसी

1076
01:16:07,280 --> 01:16:11,520
को नहीं एक व्यक्ति एक व्यक्ति तपस्या से अपनी बल

1077
01:16:11,520 --> 01:16:15,600
से पुरुषार्थ से 100% शिव के जैसा बनता है ये भी

1078
01:16:15,600 --> 01:16:20,400
पहले से ही सेट होता है एक ही बनेगा हां हां

1079
01:16:20,400 --> 01:16:24,640
और ये भी पहले से ही सेट होता है इनकी जो यादगार है

1080
01:16:24,640 --> 01:16:28,880
इनकी जो यादगार मैं मैं दूसरा प्रश्न पूछ रहा हूं मैं कह रहा हूं आप मुझे

1081
01:16:28,880 --> 01:16:33,680
सत्ता से मतलब बता दीजिए। सत्ता क्या है?

1082
01:16:33,680 --> 01:16:37,760
सत्ता माने अथॉरिटी उसकी पावर जैसे राजा है।

1083
01:16:37,760 --> 01:16:41,840
प्रैक्टिकल बताइए। पावर पावर से मत प्रैक्टिकल बता दीजिए।

1084
01:16:41,840 --> 01:16:47,040
एक उदाहरण देके बता दीजिए कि पावर से मतलब क्या है?

1085
01:16:47,040 --> 01:16:51,440
भाई देखिए बात ये है। मैं देखिए पावर पे प्रश्न क्यों किया मैंने?

1086
01:16:51,440 --> 01:16:55,600
आपने कहा कि यह जो फिल्म है वो रची हुई है पहले से

1087
01:16:55,600 --> 01:16:59,840
वो चल रहा है उसमें वो बार-बार पिक्चर चालू करके जाता

1088
01:16:59,840 --> 01:17:04,240
है और पिक्चर चालू करते टाइम जिन्होंने पुरुषार्थ किया होता है

1089
01:17:04,240 --> 01:17:08,640
उनको वो इधर से उधर ले जाकर के छोड़ के दोबारा से और एक व्यक्ति जो है तपस्या

1090
01:17:08,640 --> 01:17:12,720
वाला हो जाता है अपने अपने हिसाब से अपने अपने हिसाब से पुरुषार्थ

1091
01:17:12,720 --> 01:17:16,880
के हिसाब से लोगों को अगला जो सृष्टि चालू होती है उसमें उनको रोल मिल जाता

1092
01:17:16,880 --> 01:17:18,320
है यही है

1093
01:17:18,320 --> 01:17:22,560
देखिए हर जब भी यह सृष्टि का पुनर्निर्माण होता

1094
01:17:22,560 --> 01:17:26,560
है तब तब शिव इस सृष्टि पर आता है। जब जब हुए

1095
01:17:26,560 --> 01:17:30,560
धर्म की हानि बड़े अधम असुरों अभिमानी अरे भाई मैं पूछ क्या रहा

1096
01:17:30,560 --> 01:17:34,800
हूं मैंने इसलिए पूछा है यह प्रश्न कि जब सब कुछ पहले

1097
01:17:34,800 --> 01:17:38,800
से सेट है तो सत्ता का मतलब क्या है फिर जब सब कुछ सेट है

1098
01:17:38,800 --> 01:17:42,880
तो सत्ता का क्या मामला है ये पूछ रहा हूं मैं और दूसरी बात ये

1099
01:17:42,880 --> 01:17:46,960
भी पूछ रहा हूं कि जो लोग इस दुनिया से उस दुनिया में प्रवेश

1100
01:17:46,960 --> 01:17:50,960
करते हैं अगले नाटक में वो किसी ने पुरुषार्थ कम किया

1101
01:17:50,960 --> 01:17:54,960
है तो उनका रोल बदलता है या फिर ये भी पहले से सेट होता है कि

1102
01:17:54,960 --> 01:17:58,960
इसका क्या मतलब वो जो इस इस दुनिया में जो जिसका जो रोल

1103
01:17:58,960 --> 01:18:03,360
था अगली दुनिया में भी उसका वही रोल रहेगा। ऐसा कुछ है। अभी अभी

1104
01:18:03,360 --> 01:18:07,440
यहां पर एक बात और समझने की है आप शायद म उसको समझ नहीं

1105
01:18:07,440 --> 01:18:11,440
पाए। एक बात और बतानी है आपको कि जब ये सृष्टि

1106
01:18:11,440 --> 01:18:15,840
की शुरुआत होती है तो

1107
01:18:15,840 --> 01:18:20,000
म जनसंख्या जो है वो बहुत

1108
01:18:20,000 --> 01:18:24,800
थोड़ी होती है। सिर्फ 9 लाख जनसंख्या होती है सतयुग के आदि में।

1109
01:18:24,800 --> 01:18:28,800
जब सृष्टि की शुरुआत होती है, नई सृष्टि की शुरुआत होती है तो 9

1110
01:18:28,800 --> 01:18:32,800
लाख से इस सतयुग की शुरुआत होती है और 5000

1111
01:18:32,800 --> 01:18:33,760
साल बाद कलयुग

1112
01:18:33,760 --> 01:18:37,840
के अंत में आकर के परमधाम से सारी आत्मा जब नीचे उतर

1113
01:18:37,840 --> 01:18:42,320
आती है तो कुछ समय पहले वो परमात्मा

1114
01:18:42,320 --> 01:18:46,720
शिव जब सारी आत्मा नीचे उतरने को होती है तब वो परमात्मा

1115
01:18:46,720 --> 01:18:50,720
शिव को भी सृष्टि पर आना पड़ता है। जबकि सारी ही आत्मा

1116
01:18:50,720 --> 01:18:54,960
सृष्टि पर मौजूद होती है तब वो आ के ऐसा मैंने

1117
01:18:54,960 --> 01:18:58,960
ज्ञान सुना था कि भाई साहब मैंने प्रश्न दूसरा पूछा

1118
01:18:58,960 --> 01:19:02,960
है। मैंने ये पूछा है कि जैसे यह जो मैं अभी जो इस समय

1119
01:19:02,960 --> 01:19:07,600
कर रहा हूं यह मैंने यह अपनी जैकेट की चैन ऊपर की

1120
01:19:07,600 --> 01:19:11,680
यह पिक्चर का एक सीन है ना है ना अब जब

1121
01:19:11,680 --> 01:19:16,000
पिक्चर दोबारा चालू होगी तो मैं अगली पिक्चर में

1122
01:19:16,000 --> 01:19:20,240
मेरी ही आत्मा ये चैन ऊपर करेगी किसी शरीर को धारण करके या

1123
01:19:20,240 --> 01:19:24,240
फिर किसी और ने जो कर्म किए होंगे उसके हिसाब से

1124
01:19:24,240 --> 01:19:28,960
उसको मेरे जैसी बॉडी मिलेगी और फिर वो करेगी इस चैन को ऊपर नीचे कौन करेगा

1125
01:19:28,960 --> 01:19:32,960
मैं नहीं मेरी आत्मा ही करेगी या किसी दूसरे की? सेम

1126
01:19:32,960 --> 01:19:36,960
टू सेम वही सेकंड बाय सेकंड पांच चार साल में जो कुछ भी

1127
01:19:36,960 --> 01:19:41,280
बीता वो सेम टू सेम रिपीट होता है। मैं कह रहा हूं घटनाएं

1128
01:19:41,280 --> 01:19:45,440
सारी वही होंगी। मैं कह रहा हूं मैं

1129
01:19:45,440 --> 01:19:48,880
कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भाई साहब मैं कह रहा हूं घटनाएं सारी

1130
01:19:48,880 --> 01:19:53,200
वही होंगी। जो रोल को प्ले कर रहे हैं वो लोग बदल

1131
01:19:53,200 --> 01:19:57,280
जाएंगे या फिर वो एज इट इज वही रहेंगे। जैसे मेरी

1132
01:19:57,280 --> 01:20:01,600
आत्मा ने अभी ये किया इस जन्म इस नाटक में

1133
01:20:01,600 --> 01:20:06,160
ये जो आज की जो डेट है एक

1134
01:20:06,160 --> 01:20:11,360
एज इट इज वही रहेगा तो अगले जन्म में भी मैं यही करूंगा

1135
01:20:11,360 --> 01:20:15,440
अगले जन्म की बात नहीं कर रहा मैं अगली सृष्टि अगली सृष्टि

1136
01:20:15,440 --> 01:20:20,640
अगली सृष्टि उसमें भी यही करूंगा

1137
01:20:20,640 --> 01:20:25,520
यही करोगे अभी जैसे हम बातचीत कर रहे हैं

1138
01:20:25,520 --> 01:20:29,520
ठीक है ठीक ठीक है भाई साहब समझ गया भाई साहब समझ गया

1139
01:20:29,520 --> 01:20:33,680
यानी कि मेरी जो आत्मा है वो हर 5000 वाली साल

1140
01:20:33,680 --> 01:20:37,760
वाली जो सृष्टि होती है उसमें 1 दिसंबर

1141
01:20:37,760 --> 01:20:42,080
2026 के दिन शाम को 824 बजे

1142
01:20:42,080 --> 01:20:46,320
के आसपास ये चैन ऊपर नीचे करती है ना सही है

1143
01:20:46,320 --> 01:20:50,400
एज इट इज अब ये बताइए कि पुरुषार्थ का क्या मतलब

1144
01:20:50,400 --> 01:20:55,360
रहा अब ये बता दीजिए पुरुषार्थ का क्या मतलब रहा और

1145
01:20:55,360 --> 01:20:59,680
इसका क्या मतलब मतलब रहा सप्ताह का। अभी बता दीजिए।

1146
01:20:59,680 --> 01:21:03,920
अभी पुरुषार्थ का मतलब यह है कि आपको जो म आपको

1147
01:21:03,920 --> 01:21:07,920
जो अभी पता है कि अभी आप चैन ऊपर नीचे कर रहे हैं। अभी तक का ही

1148
01:21:07,920 --> 01:21:12,160
पता है आपको। आगे क्या होना है उसका पता नहीं है और

1149
01:21:12,160 --> 01:21:16,160
इस जन्म में अभी तक जो समय बिताया आपने इस एक जन्म

1150
01:21:16,160 --> 01:21:20,160
का ही आपको पता है इसके बाद आने वाले जन्मों का आपको पता

1151
01:21:20,160 --> 01:21:23,600
नहीं है उसमें हमको

1152
01:21:23,600 --> 01:21:27,680
उसमें [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमको हम क्या बनेंगे लेकिन अभी

1153
01:21:27,680 --> 01:21:32,320
हम संगम युग में संगम युग संगम युग का इतना महत्व है

1154
01:21:32,320 --> 01:21:35,840
कि परमात्मा शिव जब सृष्टि पर आया हुआ है भाई साहब

1155
01:21:35,840 --> 01:21:39,920
मैं पूछ रहा हूं मेरे पुरुषार्थ करने से फायदा क्या होगा वो

1156
01:21:39,920 --> 01:21:44,000
बताइए क्या आप अगर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की

1157
01:21:44,000 --> 01:21:48,080
शिक्षाओं पर चलेंगे तो आपको यह फायदा मिलेगा

1158
01:21:48,080 --> 01:21:52,720
यह होगा आप तो मनुष्य से देवता बनेंगे

1159
01:21:52,720 --> 01:21:57,120
इसी जन्म में यानी यानी कि अगली सृष्टि में अगली

1160
01:21:57,120 --> 01:22:03,120
सृष्टि में जो मैंने इस सृष्टि में नहीं पाया है वो मिल जाएगा

1161
01:22:03,440 --> 01:22:07,440
सतयुग देखिए सतयुग की शुरुआत होगी तो वो देवता ही सृष्टि

1162
01:22:07,440 --> 01:22:11,600
होगी [हंसी] तो देवता देवता म जो अभी जो

1163
01:22:11,600 --> 01:22:15,920
परमात्मा से यानी कि मेरी आत्मा ने इस सृष्टि

1164
01:22:15,920 --> 01:22:20,080
में जो किया है जरूरी नहीं कि अगली सृष्टि में मेरी आत्मा

1165
01:22:20,080 --> 01:22:24,080
वही एज इट इज करेगी।

1166
01:22:24,080 --> 01:22:28,400
अगर मैंने पुरुषार्थ किया तो बदल जाएगा। 5000 साल 5000

1167
01:22:28,400 --> 01:22:32,400
साल में ज्यादा से ज्यादा एक आत्मा 84 जन्म लेती है। 5000 साल

1168
01:22:32,400 --> 01:22:35,360
में

1169
01:22:35,360 --> 01:22:39,520
मैं ये पूछ रहा हूं जैसे मैंने अभी एक तारीख बताई तो

1170
01:22:39,520 --> 01:22:44,320
अगर मैंने पुरुषार्थ किया और अगले जन्म में भी मुझे यही चीज मिली

1171
01:22:44,320 --> 01:22:50,320
इस तारीख के दिन तो मुझे फायदा क्या मिला वो बता दीजिए।

1172
01:22:51,040 --> 01:22:55,280
आपको अगले जन्म का तो पता नहीं है ना। इस जन्म

1173
01:22:55,280 --> 01:22:59,520
में आप पुरुषार्थ इस जन्म में आपको पुरुषार्थ करने के लिए शरीर मिला है।

1174
01:22:59,520 --> 01:23:03,600
इस जन्म में आपको पुरुषार्थ तो इस जन्म में आप

1175
01:23:03,600 --> 01:23:07,600
जो पुरुषार्थ करेंगे उस पुरुषार्थ के आधार पर आपके

1176
01:23:07,600 --> 01:23:11,920
अगले 84 जन्म डिपेंड करेंगे कि आपको वही राजा बनना

1177
01:23:11,920 --> 01:23:15,680
है या

1178
01:23:15,680 --> 01:23:20,400
देवता बनना है राजा बनना है

1179
01:23:20,400 --> 01:23:24,720
ये जो पुरुषार्थ है पुरुषार्थ से मिलने वाला राजा बनना देवता

1180
01:23:24,720 --> 01:23:28,720
बनना ये सब जो चीजें हैं ये बदल सकती है तो ये फिक्स्ड

1181
01:23:28,720 --> 01:23:33,120
पिक्चर नहीं है। ये फिक्स नहीं है।

1182
01:23:33,120 --> 01:23:37,360
फिक्स जो म अभी आपको है ना अपने अनेक

1183
01:23:37,360 --> 01:23:41,520
जन्मों का तो पता नहीं है ना। आपको तो सिर्फ इस एक जन्म के जितने समय

1184
01:23:41,520 --> 01:23:45,840
अभी आप कहने का कहने का मतलब है जो पिक्चर फिक्स

1185
01:23:45,840 --> 01:23:49,840
है ये ईश्वर के लिए। आपको तो यहां के हिसाब से करना है और

1186
01:23:49,840 --> 01:23:53,920
आपको नहीं मालूम है कि ये फिक्स पिक्चर है। तो आप पुरुषार्थ करो। ये बात

1187
01:23:53,920 --> 01:23:58,160
है। नहीं नहीं आप समझे नहीं। मैं ये बता

1188
01:23:58,160 --> 01:24:02,240
रहा हूं कि आपको तो अभी इस जन्म का अभी तक का

1189
01:24:02,240 --> 01:24:06,240
ही पता है कि अभी तक क्या हुआ है मेरे साथ। अरे भैया मैं ये

1190
01:24:06,240 --> 01:24:10,320
कह रहा हूं मैं प्रश्न ये कर रहा हूं कि जो अगली सृष्टि होगी

1191
01:24:10,320 --> 01:24:14,400
अगर उसमें भी मुझे 1 दिसंबर 2026 के दिन ये चैन ऊपर नीचे

1192
01:24:14,400 --> 01:24:18,560
करनी है तो आज के बाद अगर मैंने पुरुषार्थ किया भी है

1193
01:24:18,560 --> 01:24:22,640
या अब से पहले जो किया भी होगा उसका मुझे फल क्या मिलेगा अगर वो

1194
01:24:22,640 --> 01:24:26,800
फिक्स है कि मुझे यही करना है क्या कुछ अपग्रेडेशन होगा नहीं

1195
01:24:26,800 --> 01:24:30,960
होगा अपग्रेडेशन होगा तो बदल गया सीन बदल गया अपग्रेडेशन

1196
01:24:30,960 --> 01:24:35,200
नहीं होगा तो मेरी मेहनत का मुझे फल क्या मिला वो वो तो जो फल

1197
01:24:35,200 --> 01:24:39,200
है मेरी मेहनत का वो इसी जन्म जन्मों में मिलना है या

1198
01:24:39,200 --> 01:24:43,600
सृष्टि बदलने पर भी मिलना है। सृष्टि बदलने

1199
01:24:43,600 --> 01:24:47,600
पर भी आपकी आत्मा में अभी आप समझ लीजिए एक बार मैं जो बताना चाह रहा हूं

1200
01:24:47,600 --> 01:24:52,000
वो आप समझने की कोशिश कीजिए। सुन लीजिए थोड़ा

1201
01:24:52,000 --> 01:24:56,080
अभी हम संगम युग में संगम युग का आप मतलब समझ गए

1202
01:24:56,080 --> 01:25:00,080
कि परमात्मा जब इस सृष्टि पर आया सन 1936 से लेकर

1203
01:25:00,080 --> 01:25:04,080
या 2036 तक ये है संगम युग का पीरियड।

1204
01:25:04,080 --> 01:25:08,320
मेरी एक बात सुनो भाई साहब विवेक नाम है ना आपका जो बातें बोलने

1205
01:25:08,320 --> 01:25:12,320
के बिना काम चल जाए वो मत बोलो जैसे परमात्मा आया

1206
01:25:12,320 --> 01:25:16,800
अब आपने बताया कि 201936 से ये ये बोलने की आवश्यकता

1207
01:25:16,800 --> 01:25:20,880
नहीं है बार-बार क्या जरूरत है ये बताने पर आप सिद्धांत

1208
01:25:20,880 --> 01:25:24,960
बताइए ना आप उसमें तारीख क्यों बता रहे हैं बार-बार उसमें

1209
01:25:24,960 --> 01:25:29,680
जो आपकी एक्सप्लेनेशन है वो बहुत एक मिनट उसमें जो

1210
01:25:29,680 --> 01:25:33,840
आपकी एक्सप्लेनेशन है वो बहुत लंबी हो जाती है जिसके कारण

1211
01:25:33,840 --> 01:25:38,480
जो मुख्य विषय होता है उससे ध्यान हटता है। आप आप वस्तुनिष्ठ

1212
01:25:38,480 --> 01:25:42,800
जानकारियां मत दीजिए। सिद्धांत बताइए केवल कि परमात्मा आता है।

1213
01:25:42,800 --> 01:25:46,240
जैसे परमात्मा 1936 से यहां तक आता है। ये क्या बता

1214
01:25:46,240 --> 01:25:50,480
ये क्यों बता एक बार बता भी दिया आपने कि वो आए थे 1936 से चालू

1215
01:25:50,480 --> 01:25:54,640
हुआ है। ये सब बता तो दिया आपने बार-बार उसको क्यों बता रहे हैं?

1216
01:25:54,640 --> 01:25:59,360
जिससे कि हम लोग ये सोचने लग जाए। हां वही वही है परमात्मा। वही है परमात्मा। ये

1217
01:25:59,360 --> 01:26:03,600
इसलिए उन उन बातों को कहने से बचिए। जिन बातों

1218
01:26:03,600 --> 01:26:08,720
को कहे बिना काम चल सके श में रखिए बातें थोड़ी बताइए

1219
01:26:08,720 --> 01:26:13,520
में बात यह है आप एक जन्म परमात्मा से पढ़ाई पड़ेंगे

1220
01:26:13,520 --> 01:26:17,600
तो 84 जन्म आपको 84 जन्म

1221
01:26:17,600 --> 01:26:21,680
आपको कुछ नहीं करना पड़ेगा राजा बनेंगे महाराजा

1222
01:26:21,680 --> 01:26:25,680
बनेंगे आप मनुष्य से देवता बनेंगे ढाई हजार साल की

1223
01:26:25,680 --> 01:26:30,000
जो सृष्टि परमात्मा तैयार कर अपने भविष्य को बदल सकता हूं

1224
01:26:30,000 --> 01:26:34,320
अगर मैं पुरुषार्थ करूंगा तो आप पुरुषार्थ करेंगे

1225
01:26:34,320 --> 01:26:38,400
परमात्मा से जो पढ़ाई पढ़ के आप देवी गुणों को धारण

1226
01:26:38,400 --> 01:26:42,480
करेंगे तो मनुष्य देवता भविष्य को बदल सकता हूं अगर

1227
01:26:42,480 --> 01:26:46,640
मैं पुरुषार्थ करूंगा परमात्मा से पढ़ाई करूंगा तो हां

1228
01:26:46,640 --> 01:26:50,640
जी बिल्कुल तो भविष्य को बदल कैसे सकता हूं भविष्य तो

1229
01:26:50,640 --> 01:26:54,720
पहले से तय है तय नहीं है आपको पता है

1230
01:26:54,720 --> 01:26:58,880
आपका अगले जन्म में क्या बनेंगे मुझे नहीं मुझे नहीं

1231
01:26:58,880 --> 01:27:01,360
है मगर मैं वही बनूंगा ना जो जो परमात्मा ने

1232
01:27:01,360 --> 01:27:05,360
फिक्स कर रखा है। मैं तो वही बनूंगा। हो सकता है

1233
01:27:05,360 --> 01:27:09,760
आपने म अभी पुरुषार्थ नहीं किया। जैसे आप अगर अभी पुरुष

1234
01:27:09,760 --> 01:27:14,320
आप तो यही सोचेंगे कि जो होना है सो होना है तो हम खाना नहीं मना

1235
01:27:14,320 --> 01:27:18,400
बैठे रहेंगे। खाना अपने आप आ जाएगा। हम अपने हाथ से उठाएंगे नहीं

1236
01:27:18,400 --> 01:27:22,400
खाएंगे नहीं तो पेट में मैं वही तो कह रहा हूं। मैं वही तो कह रहा हूं कि ये

1237
01:27:22,400 --> 01:27:26,720
सब फिक्स है ना भाई। मुझे कुछ करने की जरूरत क्यों है फिर?

1238
01:27:26,720 --> 01:27:30,960
फिक्स फिक्स जो है वो म

1239
01:27:30,960 --> 01:27:35,120
आपका पुरुषार्थ करने का भी अगर आपके ड्रामा में फिक्स होगा तो

1240
01:27:35,120 --> 01:27:39,280
आप पुरुषार्थ करेंगे। अगर आपने हिम्मत की

1241
01:27:39,280 --> 01:27:43,280
कि हमको पुरुषार्थ करना है। मनुष्य से देवता बनना है। देखिए ऐसा है। आपके

1242
01:27:43,280 --> 01:27:47,520
पास इस बात का जवाब नहीं है। हम रोज इस बात का जवाब देते हैं लोगों को। मैं बता देता

1243
01:27:47,520 --> 01:27:52,000
हूं। मैं बता देता हूं। आपके पास इस बात का सटीक उत्तर नहीं है। मैं दे देता हूं।

1244
01:27:52,000 --> 01:27:56,000
वाल्मीकि रामायण में लिखा है। अरे सुन लो अब मैं बता रहा हूं। बहुत देर हो

1245
01:27:56,000 --> 01:28:00,080
गई। आप बता नहीं पा रहे हो। वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है भाग्य के

1246
01:28:00,080 --> 01:28:04,320
भरोसे। अरे सुन लो भाई मैं आपको सुन तो रहा हूं इतना लंबा

1247
01:28:04,320 --> 01:28:08,400
लंबा। वाल्मीकि रामायण में लिखा है वाल्मीकि रामायण में

1248
01:28:08,400 --> 01:28:12,720
लिखा है भाग्य के भरोसे रहने वाला जो होता है वो नो नो नो नो नो नो नो नो नो नपुंसक

1249
01:28:12,720 --> 01:28:16,640
होता है। ठीक है? तो अब बात ये है अरे

1250
01:28:16,640 --> 01:28:20,640
भाई सुन लो भाई सुन लो मेरे भाई।

1251
01:28:20,640 --> 01:28:24,640
क्या है कि यह पिक्चर फिक्स्ड है।

1252
01:28:24,640 --> 01:28:28,720
मगर यह किसको पता है? ईश्वर को। अगर

1253
01:28:28,720 --> 01:28:32,720
आपकी थ्योरी को मैं इस समय सपोर्ट कर रहा हूं। ये पिक्चर

1254
01:28:32,720 --> 01:28:36,720
फिक्स्ड है। ये किसको पता है? ईश्वर को। हमारे अनुसार हमें हमारी जानकारी

1255
01:28:36,720 --> 01:28:41,120
फिक्स्ड नहीं है। तो हमारा व्यवहार क्या है? व्यवहार यही है

1256
01:28:41,120 --> 01:28:45,120
कि जो है हमें कर्म करना है, पुरुषार्थ करना है। उसके अनुसार हमें

1257
01:28:45,120 --> 01:28:49,520
मिलेगा जो मिलेगा। हमें ये नहीं सोचना जो होगा वही मिलेगा। क्योंकि वो जो

1258
01:28:49,520 --> 01:28:53,840
वाली बात है एक मिनट भाई साहब परमात्मा जो है वो

1259
01:28:53,840 --> 01:28:59,520
हर जन्म में आ के शूटिंग नहीं करता वो इस कलयुग के अंत में

1260
01:28:59,520 --> 01:29:03,600
भाई साहब इस पूरी 5000 साल की इस पूरी 5000

1261
01:29:03,600 --> 01:29:07,680
की साल की सृष्टि में जो होना होगा वो परमात्मा को वही होना है ना

1262
01:29:07,680 --> 01:29:10,320
पता है ना उसको

1263
01:29:10,320 --> 01:29:14,640
हां ठीक है आपने आप अगर अपने

1264
01:29:14,640 --> 01:29:18,720
सुनो हमें अपने पर्सेक्टिव से जो दिख रहा है वो वो हमें करना

1265
01:29:18,720 --> 01:29:22,880
है और यह बात सत्य है कि परमात्मा को पता है कि क्या होने वाला है क्या होगा

1266
01:29:22,880 --> 01:29:26,960
वो त्रिकालदर्शी है उसको पता है वो ड्रामे में क्या होना है क्या नहीं होना है ठीक

1267
01:29:26,960 --> 01:29:30,960
है यही है ना देखिए त्रिकालदर्शी के बच्चे

1268
01:29:30,960 --> 01:29:31,840
भी मास्टर

1269
01:29:31,840 --> 01:29:35,840
त्रिकालदर्शी होते हैं वो बच्चों को भी म जिन जो बच्चे उससे

1270
01:29:35,840 --> 01:29:39,920
पढ़ाई पढ़ते हैं अरे भैया वाली बात वो अलग चैप्टर है कि उसके

1271
01:29:39,920 --> 01:29:44,240
और बच्चे कितने हैं और कौन-कौन लोग हैं जो त्रिकालदर्शी है वो अलग चैप्टर है

1272
01:29:44,240 --> 01:29:48,240
मैं अभी ये कह रहा हूं कि हमें अपने आंख से जो दिख रहा है वो कार्य करना है।

1273
01:29:48,240 --> 01:29:53,680
भले ही हमें मालूम है कि सब कुछ फिक्स है। ठीक है? मैं यह कह रहा हूं।

1274
01:29:53,680 --> 01:29:58,080
जैसे कि जैसे कि हमें मालूम है एक नजर

1275
01:29:58,080 --> 01:30:02,160
से हमको मालूम है कि पृथ्वी गोल है। मगर हमारी नजरों से दिख रहा है कि

1276
01:30:02,160 --> 01:30:06,240
पृथ्वी चपटी है। तो हमें चलना कैसे है? अपनी नजरों के हिसाब से

1277
01:30:06,240 --> 01:30:10,320
कि पृथ्वी चपटी है मगर वो बात अलग है कि वास्तविकता में पृथ्वी

1278
01:30:10,320 --> 01:30:14,480
गोल है। वास्तविकता है हमारी दृष्टि जो है धोखा

1279
01:30:14,480 --> 01:30:19,280
हमारी दृष्टि से जो दिख रहा है वो धोखा अरे भाई तो फिर तुम मुझे वजहार

1280
01:30:19,280 --> 01:30:23,360
क्यों कर भाई इतना लंबा खींच रहे हो बात को जब तुम जब तुम इसको भी

1281
01:30:23,360 --> 01:30:27,680
ठुकरा दोगे कि हमारी नजर धोखा दे देती है वो सही बात है तो फिर व्यक्ति पुरुषार्थ

1282
01:30:27,680 --> 01:30:31,840
क्यों करेगा पुरुषार्थ इसलिए करेगा क्योंकि

1283
01:30:31,840 --> 01:30:36,160
हमको राजा बनना है मनुष्य से देवता बनना है तो

1284
01:30:36,160 --> 01:30:40,880
वही बनूंगा ना मैं तो वही बनूंगा ना जो लिखा है नाटक

1285
01:30:40,880 --> 01:30:43,920
मैं तो वही बनूंगा।

1286
01:30:43,920 --> 01:30:48,240
भगवान किसी का भाग्य लिखता नहीं है। वो

1287
01:30:48,240 --> 01:30:52,640
मैं कह रहा हूं भगवान ने लिखा है जो पिक्चर पहले से सेट है।

1288
01:30:52,640 --> 01:30:56,640
जो नाटक पहले से सेट है मेरे भाई विवेक जी जो नाटक पहले

1289
01:30:56,640 --> 01:31:00,640
से सेट है वही होना है। तो फिर मुझे पुरुषार्थ करने की आवश्यकता

1290
01:31:00,640 --> 01:31:05,520
क्या रह गई? आपको पुरुषार्थ करने की आवश्यकता

1291
01:31:05,520 --> 01:31:09,600
इसलिए है क्योंकि आपको मालूम नहीं है कि आगे क्या होने वाला

1292
01:31:09,600 --> 01:31:13,600
है। मैं वही तो कह रहा था। मैं वही कह रहा हूं जो मुझे मेरे

1293
01:31:13,600 --> 01:31:17,760
नजरिए से जो दिखाई दे रहा है उसके अनुसार काम करना है। वो बात अलग है कि मेरा

1294
01:31:17,760 --> 01:31:22,160
वो चीजें सब सेट है। भगवान ने आपको बताया

1295
01:31:22,160 --> 01:31:26,160
कि आपको पुरुषार्थ करना है। आप ये पुरुषार्थ करेंगे तो

1296
01:31:26,160 --> 01:31:30,480
ऐसे बनेंगे। ये पुरुषार्थ करेंगे तो ऐसे बनेंगे। ध्यान नहीं देना

1297
01:31:30,480 --> 01:31:34,720
है। की पिक्चर फिक्स है। सुनिए। अब एक पॉइंट

1298
01:31:34,720 --> 01:31:38,800
निकल के आया। एक पॉइंट निकल के आया है। एक पॉइंट निकल

1299
01:31:38,800 --> 01:31:43,040
के आया है विवेक जी। एक पॉइंट निकल के आया है विवेक जी

1300
01:31:43,040 --> 01:31:47,040
कि इस बात पे ध्यान नहीं देना है कि पिक्चर फिक्स है।

1301
01:31:47,040 --> 01:31:51,120
ये पॉइंट निकल के आया है। ठीक है? पिक्चर फिक्स है। इस पे ध्यान नहीं देना

1302
01:31:51,120 --> 01:31:55,440
है। तभी हम पुरुषार्थ करेंगे ना। पहली बात। सुनो। अब अब

1303
01:31:55,440 --> 01:31:58,640
बात ये है सत्ता क्या

1304
01:31:58,640 --> 01:32:02,720
संगम युग का आपने जो पूछा भाई वो बताओ

1305
01:32:02,720 --> 01:32:03,280
सत्ता क्या

1306
01:32:03,280 --> 01:32:08,160
है ईश्वर की सत्ता सब जगह है वो बताओ देखिए

1307
01:32:08,160 --> 01:32:12,960
सत्ता क्या है सत्ता माना परमात्मा का जो ज्ञान है

1308
01:32:12,960 --> 01:32:16,960
तो ज्ञान के आधार पर जो हमारी आत्मा के अंदर संस्कार भर जाते हैं

1309
01:32:16,960 --> 01:32:21,120
अच्छे या बुरे तो उन म निर्णय शक्ति

1310
01:32:21,120 --> 01:32:25,120
जो हमारे अंदर भर जाती है जब राजा है और राजा के अंदर

1311
01:32:25,120 --> 01:32:29,280
म कंट्रोलिंग पावर जो होती है वो कहां से आती है? उन्होंने राजा

1312
01:32:29,280 --> 01:32:33,280
म जैसे शिवाजी महाराज हो गए महाराणा प्रताप हो गए

1313
01:32:33,280 --> 01:32:37,280
पृथ्वीराज चौहान हो गए तो इन्होंने ये कंट्रोलिंग पावर इनके

1314
01:32:37,280 --> 01:32:41,280
अंदर आई कहां से इन्होंने इनके लिए कोई स्कूल कॉलेज था क्या नहीं

1315
01:32:41,280 --> 01:32:45,440
ये परमात्मा ने संगम युग में संगम युग में इनके अंदर संस्कार

1316
01:32:45,440 --> 01:32:50,000
शिवाजी महाराज के गुरु थे समर्थ रामदास गुरु

1317
01:32:50,000 --> 01:32:54,000
शिष्य परंपरा है हमारे यहां पर वो उनके गुरु थे

1318
01:32:54,000 --> 01:32:58,640
यह ग्रंथ रखा हुआ है समर्थ रामदास का ये देखिए

1319
01:32:58,640 --> 01:33:02,640
ठीक है? ये शिवाजी के गुरु थे। तो यह कहना बंद करिए कि कोई स्कूल

1320
01:33:02,640 --> 01:33:07,040
कॉलेज थे क्या? खैर अब आप अपनी बात बताइए मुझे कि

1321
01:33:07,040 --> 01:33:11,680
वो सत्ता क्या है?

1322
01:33:11,680 --> 01:33:16,080
भाई साहब सत्ता तो अभी बता दिया मैंने। परमात्मा की जो सत्ता है

1323
01:33:16,080 --> 01:33:18,480
वो है ज्ञान। तो

1324
01:33:18,480 --> 01:33:22,560
ज्ञान जो है ज्ञान से ही वो ज्ञान एक ही बात है। सत्ता और

1325
01:33:22,560 --> 01:33:26,640
ज्ञान एक ही बात है। अच्छा आप सत्ता का क्या अर्थ निकाल रही है?

1326
01:33:26,640 --> 01:33:31,280
मैं नहीं समझ पा रहा हूं। आपने अथॉरिटी बोला था ना? अथॉरिटी

1327
01:33:31,280 --> 01:33:35,280
अथॉरिटी हां तो अथॉरिटी बोला था ना अरे

1328
01:33:35,280 --> 01:33:39,600
अरे अभी आप मुझसे पूछ रहे हो तो मैंने पूछा आपने अथॉरिटी बोला था। अथॉरिटी

1329
01:33:39,600 --> 01:33:44,240
का मतलब पूरी दुनिया की कोई भी डिक्शनरी खोलेंगे तो उसमें निकले कंट्रोल

1330
01:33:44,240 --> 01:33:48,560
जिसका वो निर्णायक हो जो जहां का वो वहां का सत्ताधारी वहां का निर्णायक

1331
01:33:48,560 --> 01:33:52,640
कहलाता है वही अथोराइज्ड होता है। जैसे कि आपके यहां

1332
01:33:52,640 --> 01:33:56,640
पर एक वर्बल अथॉरिटी चलती थी जिसका उल्लंघन

1333
01:33:56,640 --> 01:34:00,640
किया है इन्होंने अमोल कोकने ने वर्बल [गला साफ़ करने की आवाज़] अथॉरिटी का

1334
01:34:00,640 --> 01:34:04,640
कि भाई तुमने अपने को ही आगे बढ़ा लिया। पुरुषों को आगे बढ़ा लिया। जबकि

1335
01:34:04,640 --> 01:34:08,640
कन्याओं को स्त्रियों को प्रचारिका के रूप में निकालना था। इसको कहते हैं।

1336
01:34:08,640 --> 01:34:12,640
अब आप कह रहे हो सत्ता का मतलब ज्ञान है। तो ज्ञान और सत्ता

1337
01:34:12,640 --> 01:34:16,800
एक ही बात है। देखिए परमात्मा जो है वो

1338
01:34:16,800 --> 01:34:20,800
ज्ञान के आधार पर ही अपनी सत्ता कायम

1339
01:34:20,800 --> 01:34:24,880
करता है। बिना ज्ञान के सत्ता कैसे कायम होगी?

1340
01:34:24,880 --> 01:34:29,680
सत्ता का मतलब है कंट्रोल। ठीक है? कंट्रोल

1341
01:34:29,680 --> 01:34:33,680
के कंट्रोल का मतलब हमारी जानकारी में क्या है? वो मैं पहले बता दूं।

1342
01:34:33,680 --> 01:34:37,840
जैसे कि सुनिए जैसे कि ये पड़ा हुआ है ये ये एक

1343
01:34:37,840 --> 01:34:42,000
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। मेरा इस पर ये कंट्रोल है कि मैं इसको उठा

1344
01:34:42,000 --> 01:34:46,000
सकता हूं नीचे से ऊपर। ये मेरा कंट्रोल है इसके ऊपर। ठीक है?

1345
01:34:46,000 --> 01:34:50,080
ये सत्ता है मेरी इसके ऊपर। फिलहाल इतनी इतना काम मैं

1346
01:34:50,080 --> 01:34:54,560
कर सकता हूं। इसको नीचे से उठा सकता हूं। ठीक? अब ज्ञान क्या है?

1347
01:34:54,560 --> 01:34:58,640
ज्ञान तो ये तो जड़ वस्तु है। तो जड़ वस्तु को तो मैं

1348
01:34:58,640 --> 01:35:02,800
ज्ञान दे नहीं पाऊंगा। ठीक है? तो क्या

1349
01:35:02,800 --> 01:35:08,720
अब आप थोड़ा सा क्लियर करिए कि ज्ञान के रूप में वो सत्ता क्या मामला है वो

1350
01:35:08,720 --> 01:35:12,800
ज्ञान के रूप में म सत्ता ऐसे है कि परमात्मा

1351
01:35:12,800 --> 01:35:16,880
जो है वो म किसी के ऊपर जोर

1352
01:35:16,880 --> 01:35:21,440
जबरदस्ती कंट्रोल नहीं करता है जैसे किसी कोई गलत चीज है जैसे

1353
01:35:21,440 --> 01:35:25,600
मैंने पूछा करता क्या है आप ये क्यों बता रहे हो वो ऐसा नहीं करता है

1354
01:35:25,600 --> 01:35:29,920
मैंने पूछा ज्ञान ये क्या मामला है आप बताइए

1355
01:35:29,920 --> 01:35:34,000
ईश्वर का कंट्रोल ही सत्ता है या उसका ज्ञान

1356
01:35:34,000 --> 01:35:38,240
ही सत्ता है। कंट्रोल जो है वो जोर जबरदस्ती

1357
01:35:38,240 --> 01:35:42,560
का कंट्रोल नहीं है उसका। यानी कि ईश्वर का कंट्रोल नहीं है।

1358
01:35:42,560 --> 01:35:46,640
ईश्वर का कंट्रोल नहीं है। आप जो है ज्ञान को ही कंट्रोल

1359
01:35:46,640 --> 01:35:48,720
कह रहे हैं। निरर्थक

1360
01:35:48,720 --> 01:35:52,720
नहीं। हर चीज की वो समझ देता है कि यह कार्य करने क्यों

1361
01:35:52,720 --> 01:35:57,680
नहीं करना? ज्ञान कहते हैं ना। इसको तो ज्ञान कहते हैं ना।

1362
01:35:57,680 --> 01:36:02,000
तो ज्ञान के आधार से ही अपनी सत्ता मैं समझ गया

1363
01:36:02,000 --> 01:36:06,080
वो ज्ञान देके एक मिनट भाई साहब एक मिनट भाई

1364
01:36:06,080 --> 01:36:10,480
साहब ज्ञान देके वो ज्ञान दे के और

1365
01:36:10,480 --> 01:36:16,480
वो कोशिश करता है कि ज्ञान के माध्यम से वहां अच्छा अच्छा हो जाए।

1366
01:36:16,800 --> 01:36:20,960
अच्छा देखिए अभी है ना आपको हम जो बात समझाना चाह रहे

1367
01:36:20,960 --> 01:36:25,120
थे उस बात को आप समझने के लिए हमको बोलने का मौका नहीं दे

1368
01:36:25,120 --> 01:36:29,280
रहे। अरे भाई साहब देखिए बात ऐसी है कि जो मैं प्रश्न

1369
01:36:29,280 --> 01:36:34,000
पूछता हूं आप उसका जवाब ना दे अभी

1370
01:36:34,000 --> 01:36:38,160
प्रश्न पूछने से हमारा जो लिंक है वो टूट जाता है हम जो

1371
01:36:38,160 --> 01:36:42,640
बोलना चाहते हैं नहीं नहीं

1372
01:36:42,640 --> 01:36:46,720
मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए बात ऐसी है बात ऐसी है कि

1373
01:36:46,720 --> 01:36:51,280
आप जो है ना जो मैं पूछ रहा हूं जो मैंने बताया

1374
01:36:51,280 --> 01:36:55,440
जो हम मुख्य बात जो हम समझाना चाह रहे वो बात रह

1375
01:36:55,440 --> 01:36:59,440
जा रही है तो नहीं रह रही है ना भाई साहब नहीं रह रही बात ऐसी

1376
01:36:59,440 --> 01:37:04,000
है आप जो हर बात कर रहे हैं आप हर बात जो कर रहे हैं

1377
01:37:04,000 --> 01:37:08,000
वो सुन लीजिए आप जो भी बात कर रहे है ना

1378
01:37:08,000 --> 01:37:12,080
वो तर्क पूर्ण तरीके से सिद्धि नहीं हो रही है बात

1379
01:37:12,080 --> 01:37:16,080
आपको झूठ नहीं लग रही है आपने अभी तक सुना ही नहीं ना

1380
01:37:16,080 --> 01:37:20,160
हम जो तर्क पूर्ण वाक्य मना तर्क पूर्ण आप क्या चाहते हो कि

1381
01:37:20,160 --> 01:37:24,320
मैं जो है आपको ऑन करके और बैठ जाऊं और आप जो है इस अपना प्रवचन

1382
01:37:24,320 --> 01:37:28,400
चलाओ दो तीन घंटे दो तीन घंटे की बात नहीं

1383
01:37:28,400 --> 01:37:32,480
आप आधा घंटा ही सुन लो आधा घंटे ये आपको पहले

1384
01:37:32,480 --> 01:37:36,560
कहना चाहिए था कि मैं आऊंगा तो आधा घंटे पहले मैं बोलूंगा सिर्फ ये

1385
01:37:36,560 --> 01:37:40,640
बोला था आपने ये चर्चा है ये ये चर्चा

1386
01:37:40,640 --> 01:37:46,320
है या फिर ये कोई एक आपका प्रवचन का सेशन है

1387
01:37:46,320 --> 01:37:50,640
चर्चा से जो है वो बातें सिद्ध नहीं होती चर्चा करने से

1388
01:37:50,640 --> 01:37:54,720
म ढेरों भाई साहब ये भी एक चर्चा का विषय है कि बातें सिद्ध होती है कि

1389
01:37:54,720 --> 01:37:58,800
नहीं होती? यह आपका क्लेम है। आपका दावा है।

1390
01:37:58,800 --> 01:38:02,800
इस संबंध में आपसे मैं कुछ बातें करूंगा तो वो चर्चा बन जाएगी। तो ये कहना गलत

1391
01:38:02,800 --> 01:38:06,880
है। चर्चा करने से बातें सिद्ध नहीं होती। बातें हम जब प्रवचन देते हैं तब सिद्ध होती

1392
01:38:06,880 --> 01:38:10,960
है। कहने का मतलब ये है हम लोग काफी पास

1393
01:38:10,960 --> 01:38:15,040
में आ गए। हम लोग काफी पास में आ गए। आपका कहने का मतलब ये है

1394
01:38:15,040 --> 01:38:19,120
एक मिनट। आपका कहने का मतलब ये है कि जो

1395
01:38:19,120 --> 01:38:23,200
परमात्मा है वो ज्ञान देता है सब जगह। उस ज्ञान के माध्यम से

1396
01:38:23,200 --> 01:38:27,200
ही जो उसकी बात को समझ जाता है वो ठीक काम करने लगता है। जो उसकी

1397
01:38:27,200 --> 01:38:31,200
ज्ञान को नहीं समझता है वो थोड़ा अपने हिसाब से चलता है। इसी को परमात्मा

1398
01:38:31,200 --> 01:38:35,360
की सत्ता भी बोला जाता है। ऐसा ही है। नहीं नहीं आपने पूरी

1399
01:38:35,360 --> 01:38:40,400
बात समझी नहीं। तो

1400
01:38:40,400 --> 01:38:44,720
अब समझ लो। आप बीच में अब बोलेंगे तो फिर लिंक टूट जाएगा मेरा। परमा

1401
01:38:44,720 --> 01:38:48,880
भाई अब आप तो अब आप तो कल सुबह तक बोलते जाओगे तो मुझे बोलना पड़ेगा ना। आप मुझे

1402
01:38:48,880 --> 01:38:52,880
थोड़ा बता दो। पांच 10 मिनट बोलना है। कितनी देर बोलना है आपको? बताओ। अभी कितनी

1403
01:38:52,880 --> 01:38:57,120
देर बोलना है? मुझे बस पांच मिनट बोल लेने दीजिए। उसके बाद

1404
01:38:57,120 --> 01:39:01,680
बोलो बोलो। पांच मिनट में बोलो बोलो चालू हो गया। ठीक।

1405
01:39:01,680 --> 01:39:05,680
अभी परमात्मा जो है वो जब इस सृष्टि पर आता है

1406
01:39:05,680 --> 01:39:10,080
तो तीन मुख्य रूप से म

1407
01:39:10,080 --> 01:39:14,960
तीन मूर्तियों की रचना करता है। ब्रह्मा विष्णु और शंकर।

1408
01:39:14,960 --> 01:39:19,280
तो वो जो ब्रह्मा विष्णु शंकर है वो इसी साकार मनुष्य

1409
01:39:19,280 --> 01:39:23,840
सृष्टि में म अनेक जन्म लेते लेते कलयुग के अंत में

1410
01:39:23,840 --> 01:39:28,400
साधारण मनुष्य साधारण मनुष्य के रूप में होती है

1411
01:39:28,400 --> 01:39:32,480
तो वास्तव में ब्रह्मा विष्णु शंकर जो है वो इस सृष्टि

1412
01:39:32,480 --> 01:39:34,400
रूपी रंगमंच की जो हीरो हीरोइन पार्ट

1413
01:39:34,400 --> 01:39:38,640
धारी आत्माएं है जिनको हम एडमम यू बोलते हैं आदम

1414
01:39:38,640 --> 01:39:42,880
हवा बोलते हैं या शंकर पार्वती कहते हैं जो मनुष्य सृष्टि के आदि पुरुष

1415
01:39:42,880 --> 01:39:47,040
है तो उनमें वो परमात्मा शिव जो है नंबर व

1416
01:39:47,040 --> 01:39:51,040
प्रवेश करके पहले तो म जो कृष्ण

1417
01:39:51,040 --> 01:39:55,200
में प्रवेश करता है उसका नाम रखता है ब्रह्मा ब्रह्मा

1418
01:39:55,200 --> 01:39:59,360
सुन लीजिए पहले तो ब्रह्मा नाम इसलिए रखता है क्योंकि

1419
01:39:59,360 --> 01:40:03,360
ब्रह्मा माने वो बड़ी ते बड़ी मां ब्रह्मा माने बड़ी और

1420
01:40:03,360 --> 01:40:07,520
मां माने मां और परम जो परम पिता शिव है वो है बड़े

1421
01:40:07,520 --> 01:40:11,840
से बड़ा पिता तो वो जिसका आधार लेता है नई मनुष्य सृष्टि की रचना

1422
01:40:11,840 --> 01:40:15,920
करने के लिए उसका नाम रखता है ब्रह्मा तो ब्रह्मा के द्वारा वो ब्राह्मण की

1423
01:40:15,920 --> 01:40:20,240
सृष्टि रचता है। जो कि शास्त्रों में लिखा है कि ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण

1424
01:40:20,240 --> 01:40:24,320
निकले। तो यह जो ब्राह्मण की सृष्टि की ओरिजिन की बात है। अभी

1425
01:40:24,320 --> 01:40:28,480
जो समय चल रहा है यह सृष्टि के ओरिजिन की बात है। जबकि ब्रह्मा के मुख

1426
01:40:28,480 --> 01:40:33,680
से वो परमात्मा शिव ज्ञान सुना के ब्राह्मणों की मंशावली

1427
01:40:33,680 --> 01:40:37,760
ब्राह्मणों की सृष्टि अभी तैयार कर रहे हैं। जिसकी याद

1428
01:40:37,760 --> 01:40:41,920
जो अभी ब्रह्मा कुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय सारे भारत में फैले

1429
01:40:41,920 --> 01:40:46,000
हुए हैं जगह जगह। अब उसी में से जो है दो तरीके के ब्राह्मण

1430
01:40:46,000 --> 01:40:49,920
हो जाते हैं। एक तो मना रावण कुंभकरण

1431
01:40:49,920 --> 01:40:53,680
मेघनाथ जैसे और एक

1432
01:40:53,680 --> 01:40:57,680
म विश्वामित्र जैसे श्रेष्ठ ब्राह्मण

1433
01:40:57,680 --> 01:41:01,840
जो कि मना हर धर्म में म शास्त्रों में

1434
01:41:01,840 --> 01:41:05,840
उनको देवासुर दे देव और देवता और असुरों के रूप

1435
01:41:05,840 --> 01:41:10,080
में भी दिखाया गया है। कौरव और पांडवों के रूप में भी दिखाया गया है उनहीं

1436
01:41:10,080 --> 01:41:14,080
को और उनहीं को जो है राम

1437
01:41:14,080 --> 01:41:18,160
और रावण राम संप्रदाय और रावण संप्रदाय के रूप में शास्त्रों में

1438
01:41:18,160 --> 01:41:22,240
इनका वर्णन है। शास्त्र जो भी लिखे गए हैं वो सारे अभी

1439
01:41:22,240 --> 01:41:26,320
संगम युग की बात है ना कि सतयुग त्रेता युग की कोई बात है।

1440
01:41:26,320 --> 01:41:30,320
और दूसरी बात परमात्मा म ब्रह्मा के मुख से जो मां

1441
01:41:30,320 --> 01:41:34,480
का पार्ट बजाता है म ब्राह्मणों की सृष्टि तैयार करता है तो

1442
01:41:34,480 --> 01:41:38,560
उनमें दो म एक तो श्रेष्ठ ब्राह्मण जो कि ब्रह्मा

1443
01:41:38,560 --> 01:41:42,800
के मुख की मुख से जो ज्ञान निकला परमात्मा शिव के शिव ने जो ब्रह्मा

1444
01:41:42,800 --> 01:41:47,120
के मुख से ज्ञान दिया उस ज्ञान को महत्व देने वाले और जो

1445
01:41:47,120 --> 01:41:51,280
मुख वंशावली ब्राह्मण कहे गए वो जो कि ब्रह्मा की देह को ही देखते

1446
01:41:51,280 --> 01:41:55,600
रहे तो जो ब्रह्मा की देह से जिन्होंने देह की पालना जो ली

1447
01:41:55,600 --> 01:42:00,320
जिन जिन्होंने ली वो तो मना शास्त्रों में दिखाया गया है कि असुर

1448
01:42:00,320 --> 01:42:04,400
जो है वो ब्रह्मा से म वरदान लेने के निमित्त बने ब्रह्मा ने

1449
01:42:04,400 --> 01:42:05,040
असुरों को ही

1450
01:42:05,040 --> 01:42:09,440
वरदान दिए ज्यादातर और शंकर

1451
01:42:09,440 --> 01:42:13,920
म जो राम वाली आत्मा है

1452
01:42:13,920 --> 01:42:16,880
माना

1453
01:42:16,880 --> 01:42:20,960
अनेक जन्म लेते लेते सतयुग के आदि से लेकर कलयुग के अंत तक अनेक

1454
01:42:20,960 --> 01:42:25,040
जन्म लेते लेते वो साधारण मनुष्य के रूप में इस सृष्टि पर कहीं ना कहीं

1455
01:42:25,040 --> 01:42:29,280
है तो उसमें परमात्मा शिव प्रवेश करके शंकर

1456
01:42:29,280 --> 01:42:33,440
का पार्ट बजाते हैं। माना वो शंकर जो है उसके

1457
01:42:33,440 --> 01:42:38,160
द्वारा पिता का पार्ट बजाते हैं और कृष्ण म ब्रह्मा

1458
01:42:38,160 --> 01:42:42,240
कृष्ण उर्फ ब्रह्मा के रूप ब्रह्मा के द्वारा मां का

1459
01:42:42,240 --> 01:42:46,320
पार्ट बजाते हैं। सुप्रीम सोल शिव तो वो सुप्रीम सोल

1460
01:42:46,320 --> 01:42:50,400
शिव उसके लिए मना ब्रह्मा के द्वारा मां का पार्ट और शंकर के

1461
01:42:50,400 --> 01:42:55,040
द्वारा पिता का पार्ट बजाता है। इसीलिए उनको बोलते हैं तमेव माता

1462
01:42:55,040 --> 01:42:59,120
पिता तमेव म तुम ही हो माता पिता तुम ही हो एक

1463
01:42:59,120 --> 01:43:04,560
शिव के लिए बोलते हैं एक मिनट और

1464
01:43:04,560 --> 01:43:08,960
फिर वो शंकर के द्वारा वो मैसे

1465
01:43:08,960 --> 01:43:13,040
कलयुगी संसार का विनाश करके इस कलयुगी

1466
01:43:13,040 --> 01:43:17,200
संसार का विनाश करते हैं क्योंकि हर हर बम

1467
01:43:17,200 --> 01:43:21,360
बम शंकर के नाम के साथ जुड़ा हुआ है। जब से 1936 से परमात्मा

1468
01:43:21,360 --> 01:43:25,760
का कार्य शुरू हुआ है तब से ये एटम बम भी बनना शुरू हो गए

1469
01:43:25,760 --> 01:43:29,760
और कलयुग के जब ये मनुष्य म भगवान का जो

1470
01:43:29,760 --> 01:43:33,760
ईश्वरीय कार्य चल रहा है उनकी जो नई दुनिया की

1471
01:43:33,760 --> 01:43:38,960
सतयुगी दुनिया की राजधानी तैयार हो जाएगी जो कि 16108

1472
01:43:38,960 --> 01:43:43,120
माला के रूप में गाया जाता है तो वो 16108

1473
01:43:43,120 --> 01:43:47,280
की माला रूपी मन के जो पुरुषार्थ करके म आत्मा रूपी मन के

1474
01:43:47,280 --> 01:43:51,440
जो पुरुषार्थ करके भगवान के गले का हार बनते हैं। कोई

1475
01:43:51,440 --> 01:43:55,600
तो आठ के रूप में सर में दिखाते हैं। कोई 108 के रूप में गले

1476
01:43:55,600 --> 01:43:59,760
में दिखाते हैं। कोई भुजाओं में कोई कमर में और कोई बड़े बड़े

1477
01:43:59,760 --> 01:44:04,000
मंदिरों में 16000 की माला दिखाते हैं। तो वो माला

1478
01:44:04,000 --> 01:44:08,240
के मन के जो है वो परमात्मा का बनाया हुआ श्रेष्ठ श्रेष्ठ आत्माओं

1479
01:44:08,240 --> 01:44:12,320
का संगठन है। जो कि सारी सृष्टि से चुन करके

1480
01:44:12,320 --> 01:44:16,320
ज्ञान के माध्यम से मना चुन के

1481
01:44:16,320 --> 01:44:21,440
रुक जाइए।

1482
01:44:21,440 --> 01:44:24,080
एक मिनट

1483
01:44:24,080 --> 01:44:28,080
44 44 22 हो रहा है आप जो है 45 तक बोल

1484
01:44:28,080 --> 01:44:31,680
46 तक बोलिए आप

1485
01:44:31,680 --> 01:44:37,200
डेढ़ [नाक से की जाने वाली आवाज़] मिनट दिया शंकर के द्वारा जो म जो

1486
01:44:37,200 --> 01:44:41,600
मनुष्य सृष्टि जो की जो राजधानी

1487
01:44:41,600 --> 01:44:45,760
परमात्मा की जो म श्रेष्ठते श्रेष्ठ राजधानी जो तैयार

1488
01:44:45,760 --> 01:44:49,760
हो जाती है तो उसके बाद जो है यह विनाश

1489
01:44:49,760 --> 01:44:53,760
शुरू हो जाता है। तो जो एटम म पहले तो तीसरा

1490
01:44:53,760 --> 01:44:57,760
विश्व युद्ध शुरू होगा भारत में भारत के भारत के अंदर ही

1491
01:44:57,760 --> 01:45:02,000
और भारत के आसपास के जो अनेक धर्म है म अनेक धर्म

1492
01:45:02,000 --> 01:45:06,160
मत पंथ इस्लामी बुद्धि क्रिश्चियन आदि जो है वो सारे ही आपस

1493
01:45:06,160 --> 01:45:10,480
में लड़ेंगे और माना जो अनेकता को एक

1494
01:45:10,480 --> 01:45:14,480
एक में एकता में बदलने के लिए यही युद्ध होगा। ये

1495
01:45:14,480 --> 01:45:18,560
तीसरा विश्व युद्ध हो गया। हो गया। ठीक है। मुझे नहीं सुनना।

1496
01:45:18,560 --> 01:45:22,720
मुझे नहीं सुनना भाई। एक तक नहीं सुनना मुझे। रुक जाओ। एक मिनट एक प्रश्न

1497
01:45:22,720 --> 01:45:26,720
है। आप मेरे किस प्रश्न का जवाब दे रहे हो?

1498
01:45:26,720 --> 01:45:30,800
मैं आपके कोई प्रश्न का जवाब नहीं दे रहा। मैं जो आपने कहा था ना कि

1499
01:45:30,800 --> 01:45:34,800
सत्ता को समझना है तो मुझे बोलने दो। क्यों कहा था?

1500
01:45:34,800 --> 01:45:36,800
झूठ बोला था क्या?

1501
01:45:36,800 --> 01:45:40,960
तो अरे सत्ता माना क्या है? ईश्वर की सत्ता मेरे प्रश्न का मेरे

1502
01:45:40,960 --> 01:45:45,520
प्रश्न का उत्तर दे रहे हो ना? आपसे मैंने पूछा कि मोटरसाइकिल

1503
01:45:45,520 --> 01:45:49,520
सुनो आपसे मैंने पूछा कि मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? आपसे

1504
01:45:49,520 --> 01:45:53,840
मैंने पूछा मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? कि भैया सन 1947 मेंटा

1505
01:45:53,840 --> 01:45:57,840
को जमशेदपुर में स्टील मिला था और जो है सन 1948 तक उन्होंने

1506
01:45:57,840 --> 01:46:01,920
वहां काम किया। अब ऐसा करेंगे आगे उनका फ्यूचर प्लान ये है। इसमें

1507
01:46:01,920 --> 01:46:05,920
भैया मैंने मोटरसाइकिल पूछा है। मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? ये कहां

1508
01:46:05,920 --> 01:46:10,080
पर आया? मैंने पूछा है सत्ता से मतलब क्या है?

1509
01:46:10,080 --> 01:46:14,160
ज्ञान के रूप में सत्ता है या सत्ता का वास्तविक ईश्वर

1510
01:46:14,160 --> 01:46:20,160
का ईश्वर का वास्तविक कंट्रोल है। ईश्वर का

1511
01:46:20,640 --> 01:46:24,800
अनेक झूठे धर्मों का विनाश करके एक सत्य सनातन

1512
01:46:24,800 --> 01:46:29,520
धर्म की स्थापना करके जाता है। ये उसकी सत्ता है। ये तो युद्ध है।

1513
01:46:29,520 --> 01:46:33,600
आपने कहा कि एक मिनट विवेक जी थोड़ा

1514
01:46:33,600 --> 01:46:38,240
सा अपने माइंड को खोल के कान को खोल के सुनो क्या कह रहा है सामने वाला।

1515
01:46:38,240 --> 01:46:42,240
आपने कहा था वो सर्वज्ञ सत्ताधारी है। अब आप

1516
01:46:42,240 --> 01:46:46,400
जो है उसको एक केवल परिस्थिति में सीमित कर रहे हो कि वो

1517
01:46:46,400 --> 01:46:50,400
जो पाखंडी धर्म होंगे उनको खत्म करके जाएगा। भाई जो हमेशा

1518
01:46:50,400 --> 01:46:52,000
जिसकी जहां पर सत्ता है उसका

1519
01:46:52,000 --> 01:46:56,320
क्या हुआ? और आपने दूसरी बात ये कही कि भैया वो

1520
01:46:56,320 --> 01:47:00,560
क्या कहते हैं? जोर जबरदस्ती करके किसी को कंट्रोल नहीं करता है। जबकि आपने शुरू

1521
01:47:00,560 --> 01:47:04,720
में बताया था कि जो सत्ता नहीं मानता उसको डंडा पड़ता तब मान लेता है। यह

1522
01:47:04,720 --> 01:47:09,520
डंडा क्या है? वो डंडा ड्रामा का डंडा है।

1523
01:47:09,520 --> 01:47:13,600
जब परिस्थित परिस्थितियां ऐसी

1524
01:47:13,600 --> 01:47:19,600
विकराल उनके सामने आ जाती है अपने ही उल्टे कर्मों का

1525
01:47:22,480 --> 01:47:26,480
है तब उसको याद आता है कि यार भगवान ने हमको तो सही रास्ता बताया था लेकिन

1526
01:47:26,480 --> 01:47:30,640
हमने गलत रास्ता चुना तब

1527
01:47:30,640 --> 01:47:34,880
नहीं है एक अलग मैकेनिज्म है जो यह देखता है कि गलत

1528
01:47:34,880 --> 01:47:40,880
रास्ते पर कौन चल रहा है उसको दंड मिलता है ईश्वर की सत्ता नहीं

1529
01:47:41,520 --> 01:47:45,680
गलत रास्ते पर दंड क्या है वो तो खुद म जो उल्टे

1530
01:47:45,680 --> 01:47:49,840
कर्म करेगा वो खुद ही अपने उसके सामने म

1531
01:47:49,840 --> 01:47:54,000
उसके पास कोई एक मैकेनिज्म एक कोई मैकेनिज्म

1532
01:47:54,000 --> 01:47:58,080
है ना जो ये एक कोई सत्ता है ना कोई शक्ति है ना जो देख रही

1533
01:47:58,080 --> 01:48:02,160
है कि गलत कर्म कोई कर रहा है तो उसको दंड दो कोई सत्ता है

1534
01:48:02,160 --> 01:48:06,400
ना तृतीय कोई शिव के साथ धर्मराज

1535
01:48:06,400 --> 01:48:08,880
मैंने

1536
01:48:08,880 --> 01:48:13,200
शिव के साथ जो है वो धर्मराज भी है। धर्मराज जो है

1537
01:48:13,200 --> 01:48:18,720
यानी सत्ता में नाम नहीं रहा हूं। है ना सत्ता

1538
01:48:18,720 --> 01:48:23,200
सत्ता तो मैंने कब सत्ता से तो इंकार नहीं किया मैंने। वो तो सत्ता सदा

1539
01:48:23,200 --> 01:48:27,360
कह रहा हूं कि ईश्वर जोर जबरदस्ती नहीं करता है। ईश्वर जोर जबरदस्ती नहीं

1540
01:48:27,360 --> 01:48:31,520
करता है तो जो दंड है वो कौन देता है? अब आपने कहा धर्मराज देता है।

1541
01:48:31,520 --> 01:48:36,400
धर्मराज के ऊपर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं? धर्मराज

1542
01:48:36,400 --> 01:48:41,120
जो है वो म धर्मराज

1543
01:48:41,120 --> 01:48:45,200
वो दंड देने के निमित्त बनता है वो उसके पास अथॉरिटी

1544
01:48:45,200 --> 01:48:49,280
है क्योंकि उसने यानी कि यानी कि जहां पर

1545
01:48:49,280 --> 01:48:53,440
कोई कुछ गलत यानी कि दुनिया में जहां पे भी कोई कुछ

1546
01:48:53,440 --> 01:48:56,560
गलत करता है वहां पर धर्मराज के

1547
01:48:56,560 --> 01:49:00,560
द्वारा ईश्वर की सत्ता होती है। इतनी सी बात

1548
01:49:00,560 --> 01:49:03,600
बतानी है।

1549
01:49:03,600 --> 01:49:06,000
आप

1550
01:49:06,000 --> 01:49:10,080
प्रचार करने चले आए यह होता है वो होता है कोई साफ सुथरी

1551
01:49:10,080 --> 01:49:15,120
बात नहीं कर रहे हो आप सामने वाला पागल समझ रखा है क्या आपने

1552
01:49:15,120 --> 01:49:19,440
टॉर्चर दिया आपने मुझे पांच छ मिनट आपने

1553
01:49:19,440 --> 01:49:23,520
आप मेरी बात को समझ नहीं पा रहे अरे भाई कुछ

1554
01:49:23,520 --> 01:49:27,520
समझाने वाली बात होगी समझने वाली तब तो समझूंगा मैं आपसे पूछ रहा हूं खेत की

1555
01:49:27,520 --> 01:49:31,760
आप बता रहे हो खलियान की मैं पूछ रहा हूं मूली की आप बता रहे हो टमाटर की

1556
01:49:31,760 --> 01:49:35,840
मैंने मैंने आपसे पूछा सत्ता क्या है? तो आप सत्ता के बारे में बताओ। धर्मराज जो

1557
01:49:35,840 --> 01:49:39,920
है वो वो दंड देता है। ये सत्ता है ये कंट्रोल है। जो गलत करता है उसको दंड

1558
01:49:39,920 --> 01:49:42,640
देता है धर्मराज।

1559
01:49:42,640 --> 01:49:46,800
अब दंड देने के निमित्त कौन बनता है? वही बता रहा हूं। वहां ये हुआ वो वो

1560
01:49:46,800 --> 01:49:50,880
हुआ। आखिर में मैंने फिर पूछा तो आप बता रहे हो कि वो जो आखिर में आएगा वो

1561
01:49:50,880 --> 01:49:54,880
पाखंड का नाश करेगा। वो सत्ता है। फिर मैंने पूछा जब वो वो सत्ता

1562
01:49:54,880 --> 01:49:59,040
है तो तुमने क्यों कहा? हर समय हर स्थिति में हर जगह

1563
01:49:59,040 --> 01:50:04,160
उसकी सत्ता है। वो तो एक स्थिति में हो गई ना। हर स्थिति में नहीं हुई वो।

1564
01:50:04,160 --> 01:50:08,400
हर स्थिति में उसकी सत्ता है।

1565
01:50:08,400 --> 01:50:11,840
हर स्थिति में उसकी सत्ता है। सत्ता है। तो वो किस

1566
01:50:11,840 --> 01:50:15,920
रूप में है? यानी कि कोई गलत कर रहा है तो उसको

1567
01:50:15,920 --> 01:50:20,400
गलत नहीं करना चाहिए। नहीं तो वहां पर उसको दंड मिलता है।

1568
01:50:20,400 --> 01:50:24,640
यह सत्ता है। देखिए दंड जो है दंड देने के लिए वो

1569
01:50:24,640 --> 01:50:28,640
निमित्त बनता है। परमात्मा अगर किसी को दंड देगा ना

1570
01:50:28,640 --> 01:50:32,720
तो उसके साथ उसका हिसाब किताब बन जाएगा। लेकिन परमात्मा

1571
01:50:32,720 --> 01:50:36,880
किसी को दंड नहीं देता। वो दंड देने के लिए उसको अधिकारी

1572
01:50:36,880 --> 01:50:40,880
बनाता है जो कि सारे संसार का म सारे

1573
01:50:40,880 --> 01:50:44,960
संसार को म उन लोगों को सहन करने के निमित्त बनता

1574
01:50:44,960 --> 01:50:48,960
है। जैसे मां होती है बच्चों को म लालन पालन

1575
01:50:48,960 --> 01:50:53,040
रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ धर्मराज के ऊपर

1576
01:50:53,040 --> 01:50:57,200
धर्मराज के ऊपर ईश्वर के धर्मराज धर्मराज को अगर ईश्वर

1577
01:50:57,200 --> 01:51:01,760
बनाता है तो ईश्वर की सत्ता धर्मराज पे हुई ना धर्म

1578
01:51:01,760 --> 01:51:06,480
जो धर्मराज है वो ईश्वर के अनुसार चलेगा या अपने मन से चलेगा

1579
01:51:06,480 --> 01:51:10,560
ईश्वर के अनुसार ही चलेगा यानी धर्मराज के द्वारा ईश्वर की सत्ता

1580
01:51:10,560 --> 01:51:14,560
हुई जैसे प्राइम मिनिस्टर अपनी पुलिस या फौज के द्वारा

1581
01:51:14,560 --> 01:51:18,640
राष्ट्रपति अपनी सत्ता स्थापित करता है। यही हुआ

1582
01:51:18,640 --> 01:51:20,880
ना?

1583
01:51:20,880 --> 01:51:25,040
यही ठीक है। हां यानी कि

1584
01:51:25,040 --> 01:51:27,040
दुनिया में कुछ अच्छा बुरा हो रहा है

1585
01:51:27,040 --> 01:51:31,040
तो उस पर जो है ईश्वर की सत्ता है। देखिए

1586
01:51:31,040 --> 01:51:35,680
अभी जो शिव जो है वो तो अकर्ता है। वो दुनिया में

1587
01:51:35,680 --> 01:51:39,840
नाम मत बताओ। मैं पूछ रहा हूं ईश्वर की सत्ता है कि नहीं? ऊपर

1588
01:51:39,840 --> 01:51:43,840
कोई अच्छा बुरा जो हो रहा है उस पर कंट्रोल ईश्वर का

1589
01:51:43,840 --> 01:51:46,720
है कि नहीं?

1590
01:51:46,720 --> 01:51:51,520
ईश्वर के कंट्रोल में है। रह के वो अपना कार्य कर रहा है।

1591
01:51:51,520 --> 01:51:55,600
ठीक है। ईश्वर का कंट्रोल है। यानी कि अच्छा हो रहा है तो

1592
01:51:55,600 --> 01:52:00,720
वो ईश्वर की सत्ता में हो रहा है। बुरा हो रहा है तो ईश्वर की सत्ता में हो रहा है।

1593
01:52:00,720 --> 01:52:04,800
बिल्कुल अच्छा बुरा जो भी भाई साहब

1594
01:52:04,800 --> 01:52:09,040
भाई साहब मैं आपकी जंग वो फटसी नहीं सुनने बैठा हूं।

1595
01:52:09,040 --> 01:52:14,000
आपने ऑलरेडी इसमें मुझे ना दो घंटे टॉर्चर कर रखा है।

1596
01:52:14,000 --> 01:52:18,160
अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] जाकर के आपने क्लियर कट बात की है। अब जाकर के आपने क्लियर कट बात की

1597
01:52:18,160 --> 01:52:22,160
है। नहीं तो मुझे इतना ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही

1598
01:52:22,160 --> 01:52:26,320
है आपसे आपकी वास्तविक बात को निकलवाने के लिए पूछो नहीं। खैर

1599
01:52:26,320 --> 01:52:30,640
अब मैं आगे बता आगे पूछ रहा हूं कि

1600
01:52:30,640 --> 01:52:35,280
इसमें ये कहां से आ गया? इसमें यह कहां से आ गया कि

1601
01:52:35,280 --> 01:52:39,520
जो ईश्वर है सवाल यह था ईश्वर है यह कैसे

1602
01:52:39,520 --> 01:52:43,360
सिद्ध होता है?

1603
01:52:43,360 --> 01:52:48,080
ईश्वर जब मैंने आपसे एक बार फिर से बता दूं जब मैंने आपसे पूछा था

1604
01:52:48,080 --> 01:52:52,160
तो आपने मुझे बताया था जब मैंने पहले पूछा आपसे कि

1605
01:52:52,160 --> 01:52:56,160
ईश्वर है कैसे सिद्ध होता है? तो आपने कहा कि

1606
01:52:56,160 --> 01:53:00,400
ईश्वर की पहले डेफिनेशन समझो। तो मैंने कहा ठीक है बताओ। तो आपने

1607
01:53:00,400 --> 01:53:04,720
कहा ईश्वर वो है जिसकी सब जगह सत्ता है।

1608
01:53:04,720 --> 01:53:09,280
ठीक है? मैंने ये नहीं ईश्वर माना माना

1609
01:53:09,280 --> 01:53:13,520
श्रेष्ठ से श्रेष्ठ शासनकर्ता [गला साफ़ करने की आवाज़] जो शासन पर

1610
01:53:13,520 --> 01:53:17,920
सत्ता आ गई ना यार। क्या बात कर रहे हो आप? शासन

1611
01:53:17,920 --> 01:53:22,000
का तो वही है। सत्ता ही है। तो बात

1612
01:53:22,000 --> 01:53:26,080
तो एक ही है ना। ठीक है अभी।

1613
01:53:26,080 --> 01:53:30,560
तो तो समझ गए तो बात म उस बात को रिपीट क्यों तो

1614
01:53:30,560 --> 01:53:34,560
तो यह सिद्ध कैसे होता है कि सत्ता

1615
01:53:34,560 --> 01:53:38,560
है कैसे सिद्ध होता है वो बताओ ये

1616
01:53:38,560 --> 01:53:42,720
ड्रामा जो चल रहा है ना उसकी सत्ता क्या है अभी आप

1617
01:53:42,720 --> 01:53:46,960
सांस ले रहे ये प्रकृति आपको फल दे रही है प्रकृति

1618
01:53:46,960 --> 01:53:51,280
आपका पोषण कर रही है जमीन में बीज बोते हो तो पौधे निकलते

1619
01:53:51,280 --> 01:53:55,600
हैं तो ये सारी ईश्वर ने जो है प्रकृति को ऐसा बनाया

1620
01:53:55,600 --> 01:53:58,640
म्

1621
01:53:58,640 --> 01:54:04,640
क्यों मानू प्रकृति को ईश्वर ने बनाया है मैं क्यों मानू

1622
01:54:05,280 --> 01:54:09,280
आप मानो ना मानो इससे हमें कोई फर्क नहीं मैं उसमें पूछ रहा हूं

1623
01:54:09,280 --> 01:54:13,520
क्या आपके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के पास ऐसा ज्ञान है जो

1624
01:54:13,520 --> 01:54:17,680
नास्तिकता का उत्तर दे सको आप या मानो ना मानो

1625
01:54:17,680 --> 01:54:22,080
करके छोड़ दिया है नास्तिक नास्तिक से नास्तिक

1626
01:54:22,080 --> 01:54:26,240
भी जो है ना वो अंत में परमात्मा को अरे वो बाद की बात

1627
01:54:26,240 --> 01:54:30,400
है जीते जी कोई व्यक्ति जानना चाहता है कि

1628
01:54:30,400 --> 01:54:34,560
मैं कैसे मानूं कि इस दुनिया में कोई सत्ता है जो अच्छे कर्म का अच्छा फल

1629
01:54:34,560 --> 01:54:39,440
देगी बुरे कर्म का बुरा फल देगी यह मैं कैसे मानू

1630
01:54:39,440 --> 01:54:43,520
भाई अगर मैं चोरी करूंगा तो यहां का इंडिया का कानून है कि

1631
01:54:43,520 --> 01:54:47,520
वो जो है अगर मैं पकड़ में आ गया पुलिस के तो वो मुझे दंड देगा ये मुझे

1632
01:54:47,520 --> 01:54:51,840
मालूम है प्रत्यक्ष प्रमाण ठीक है मगर मैं बुरा

1633
01:54:51,840 --> 01:54:56,080
करूंगा तो मेरे को दंड मिलना ही मिलना है वो धर्मराज के द्वारा या

1634
01:54:56,080 --> 01:55:00,560
आपके जो पर जो ईश्वर है उनके सिपाही

1635
01:55:00,560 --> 01:55:05,840
के द्वारा मुझे दंड मिलना ही मिलना है। ये पक्की बात है। ये मैं कैसे मानूं?

1636
01:55:05,840 --> 01:55:09,840
कैसे मानू कि एक कोई कैसे मानू कि एक

1637
01:55:09,840 --> 01:55:14,160
कोई सर्वसत्ताधारी सबका शासक

1638
01:55:14,160 --> 01:55:18,160
है कोई जो सब जानता है जो सब देख रहा है।

1639
01:55:18,160 --> 01:55:22,240
कोई हर हर कोई अपने कर्मों के अनुसार ही

1640
01:55:22,240 --> 01:55:26,320
अगले जन्म में म अगले जन्म में फल पाता है।

1641
01:55:26,320 --> 01:55:30,320
कोई अगर इंसान मैंने क्या पूछा? मैंने क्या पूछा है?

1642
01:55:30,320 --> 01:55:34,400
इस संसार में कोई ईश्वर भी है जिसके

1643
01:55:34,400 --> 01:55:38,640
हाथ में सब सारा कंट्रोल है। जो सब कुछ जानता है जो

1644
01:55:38,640 --> 01:55:43,280
सब कुछ कर सकता है। यह सिद्ध कैसे होता है?

1645
01:55:43,280 --> 01:55:47,680
भाई साहब मैंने आपको बता दिया कि भगवान जो है वो सृष्टि

1646
01:55:47,680 --> 01:55:52,560
रूपी नाटक का जो शूटिंग जो है रिहर्सल

1647
01:55:52,560 --> 01:55:56,880
वो अरे भैया आप ये कह रहे हो भगवान ये करता है मैं कह रहा हूं भगवान

1648
01:55:56,880 --> 01:56:00,880
है ये कैसे सिद्ध होगा आप मैं आप ये बता

1649
01:56:00,880 --> 01:56:04,960
रहे हो भगवान ने ये किया ये ये करेगा ये ये करता है मैं पूछ

1650
01:56:04,960 --> 01:56:09,840
रहा हूं कि भगवान है जिसकी आप बात कर रहे हो वो सिद्ध कैसे होता है

1651
01:56:09,840 --> 01:56:13,920
ये ज्ञान मिला है क्या मुरली के द्वारा आपको ये पूछ रहा हूं वीरेंद्र

1652
01:56:13,920 --> 01:56:17,920
दीक्षित ने दिया था ये ज्ञान वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है

1653
01:56:17,920 --> 01:56:22,160
उन्होंने ज्ञान दिया था कि ईश्वर है कैसे सिद्ध

1654
01:56:22,160 --> 01:56:26,560
होता बिल्कुल दिया गया है। बताइए

1655
01:56:26,560 --> 01:56:29,360
सर आप वाकई अगर आप समझना चाहते हैं

1656
01:56:29,360 --> 01:56:33,680
मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] समझने के लिए आपने पांच छ मिनट स्टोरी बताई हमारे

1657
01:56:33,680 --> 01:56:37,840
यहां वो क्या लिखी गई है कहानी कहानी बताई

1658
01:56:37,840 --> 01:56:43,360
आपने आपने सिद्धांत नहीं बताया सिद्धांत क्या होता है

1659
01:56:43,360 --> 01:56:45,840
हां

1660
01:56:45,840 --> 01:56:50,320
अभी आप हमें बोलने ही नहीं देंगे तो आप समझेंगे कैसे

1661
01:56:50,320 --> 01:56:54,400
भैया फिर से मैं विनम्रता पूर्वक आपसे कह रहा हूं।

1662
01:56:54,400 --> 01:56:58,560
विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए

1663
01:56:58,560 --> 01:57:02,880
विवेक जी सुनिए विवेक जी सुनिए आप जो है मुझे यह बताएं

1664
01:57:02,880 --> 01:57:07,040
कि जिस ईश्वर की फीचर्स आप बता रहे हो कि वो

1665
01:57:07,040 --> 01:57:11,600
ये करता है वो ये करता है वो ये है वो वो है तो मेरे

1666
01:57:11,600 --> 01:57:16,000
मैं कैसे मानूं कि उसका अस्तित्व है ये कैसे मानूं

1667
01:57:16,000 --> 01:57:19,440
ये बताओ

1668
01:57:19,440 --> 01:57:23,680
आप अपनी आत्मा को देख सकते हैं आप मैंने

1669
01:57:23,680 --> 01:57:27,760
कहा कि मुझे दिखाओ। मैंने कहा कि मुझे दिखाओ। मैंने कहा है कि मुझे

1670
01:57:27,760 --> 01:57:32,000
दिखाओ। देखिए मैंने कहा है क्या?

1671
01:57:32,000 --> 01:57:36,640
भगवान जो मैंने देखो ये रटे रटाए डायलॉग मत बोलो भाई।

1672
01:57:36,640 --> 01:57:40,640
ये बहुत आगे बहुत पीछे की चीजें हैं। आप

1673
01:57:40,640 --> 01:57:44,800
मुझे बताओ ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? या

1674
01:57:44,800 --> 01:57:49,040
फिर जो भी व्यक्ति आ के एक मिनट एक मिनट भाई साहब

1675
01:57:49,040 --> 01:57:53,840
भाई साहब एक मिनट जो भी व्यक्ति आ के जो भी व्यक्ति

1676
01:57:53,840 --> 01:57:57,920
जो भी व्यक्ति आ जो भी व्यक्ति आ भी व्यक्ति

1677
01:57:57,920 --> 01:58:02,000
आहारे बाबा आते हैं उन्होंने कहा गिल्ली डंडा खेलो

1678
01:58:02,000 --> 01:58:07,280
तो उसकी बात मान ले वो एक कहानी सुनाए हमको उसकी बात मान ले

1679
01:58:07,280 --> 01:58:13,200
भाई पहले आप बताइए

1680
01:58:13,200 --> 01:58:17,360
अर्जुन ने भी भगवान से ये प्रश्न पूछा था कि हम आपके दिव्य रूप

1681
01:58:17,360 --> 01:58:21,360
को कैसे देख सकते हैं तो भगवान ने बोला तुम मुझे देखने की बात

1682
01:58:21,360 --> 01:58:25,360
नहीं देख मेरे भाई मैं रूम को देखने की बात नहीं कर रहा

1683
01:58:25,360 --> 01:58:29,680
हूं। अरे मेरे भाई रिकॉर्डर मत चलाओ।

1684
01:58:29,680 --> 01:58:33,920
अरे मेरे भैया रिकॉर्डर नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि ईश्वर

1685
01:58:33,920 --> 01:58:38,240
है सिद्ध कैसे होता है? मैं नहीं कह रहा हूं कि मुझे ईश्वर दिखाओ। मैंने कहा क्या?

1686
01:58:38,240 --> 01:58:42,480
ज्ञान को। ईश्वर जो ज्ञान आकर ईश्वर जब खुद सृष्टि

1687
01:58:42,480 --> 01:58:46,560
पर आता है तो वो जो ज्ञान देता है उस ज्ञान के आधार पर ही

1688
01:58:46,560 --> 01:58:50,640
हम पर आता है ईश्वर सृष्टि पर आता

1689
01:58:50,640 --> 01:58:54,800
है ये कैसे सिद्ध होता है चलो

1690
01:58:54,800 --> 01:58:59,120
कैसे सिद्ध होता है हां वो खुद आ के जो ज्ञान

1691
01:58:59,120 --> 01:59:03,280
देता है म ज्ञान के आधार से ही सिद्ध होता है कि ईश्वर जो ज्ञान

1692
01:59:03,280 --> 01:59:07,680
देगा उसमें सारी सृष्टि को परिवर्तन करने का जी मैं आपसे

1693
01:59:07,680 --> 01:59:11,680
मैं आपसे कहूं कि एक मिनट अगर मैं आपसे कहूं ईश्वर

1694
01:59:11,680 --> 01:59:15,760
इस सृष्टि पर आता है और वो क्योंकि आके ज्ञान देता है उसके ज्ञान से

1695
01:59:15,760 --> 01:59:20,160
सिद्ध होगा। अब उस ईश्वर ने ही मुझे बताया है कि गिल्ली

1696
01:59:20,160 --> 01:59:25,600
डंडा खेलो। तो मैं उसकी बात मान लो। मेरी बात मान लोगे आप।

1697
01:59:25,600 --> 01:59:29,280
साहब गिल्ली डंडा खेलने के लिए भगवान नहीं बोलेगा।

1698
01:59:29,280 --> 01:59:33,280
हां वही मैं कह रहा हूं। इसका मतलब इसका मतलब किसी

1699
01:59:33,280 --> 01:59:37,280
के भगवान होने के विषय मैं उसी पे आ रहा हूं।

1700
01:59:37,280 --> 01:59:41,280
किसी के भगवान होने के मैं वही मैं उसी पे आ रहा हूं मेरे

1701
01:59:41,280 --> 01:59:45,520
भाई कि किसी के भगवान होने के संबंध में कुछ फिक्स

1702
01:59:45,520 --> 01:59:49,600
चीजें होंगी है ना उनमें से कुछ चीजें अभी आपने मुझे

1703
01:59:49,600 --> 01:59:51,760
बताई

1704
01:59:51,760 --> 01:59:56,000
देखिए भगवान ने भी अर्जुन को मना

1705
01:59:56,000 --> 02:00:00,080
अपने अस्तित्व के बारे में जब बताया तो ज्ञान के कह रहा हूं

1706
02:00:00,080 --> 02:00:04,160
मेरे भाई मैं ये नहीं कह रहा हूं भगवान ने अर्जुन को बताया देखो ऐसा है

1707
02:00:04,160 --> 02:00:08,880
गीता की बात वो मानेगा जो पहले गीता को मानता हो।

1708
02:00:08,880 --> 02:00:13,120
गीता में भगवान ने कुछ कहा है। श्री कृष्ण भगवान ने कहा है। आपके

1709
02:00:13,120 --> 02:00:17,200
अनुसार वो कौन थे? उन्होंने कहा है। वो कोई व्यक्ति तब

1710
02:00:17,200 --> 02:00:21,360
सुनेगा समझेगा जब उसकी उसमें आस्था हो। आस्था तब होगी जब

1711
02:00:21,360 --> 02:00:25,440
वो उस गीता को भगवान के द्वारा प्रदत्त मानता हो या किसी

1712
02:00:25,440 --> 02:00:29,680
ना किसी रूप से आस्था हो। मगर मैं अभी आपको जीरो की बात पूछ

1713
02:00:29,680 --> 02:00:33,760
रहा हूं। ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है? आप कह रहे हो वो आके ज्ञान

1714
02:00:33,760 --> 02:00:38,240
देता है। अरे भाई आके ज्ञान देता है। ये तो बाद की बात है।

1715
02:00:38,240 --> 02:00:42,240
वो है वो एक्सिस्ट करता है। ये कैसे सिद्ध होता है? जैसे मैंने

1716
02:00:42,240 --> 02:00:44,560
कहा कि भैया ये जो बोतल

1717
02:00:44,560 --> 02:00:50,560
है ये ये बोतल जो है ये है ये कैसे सिद्ध होती है?

1718
02:00:51,120 --> 02:00:55,280
वो तो आप अभी म

1719
02:00:55,280 --> 02:00:59,280
बोतल अभी बोतल आप हाथ में दिखाया आपने आपने

1720
02:00:59,280 --> 02:01:03,520
जब तक दिखाया नहीं मुझे तब तक मुझे पता नहीं कि आपके

1721
02:01:03,520 --> 02:01:07,760
म टेबल पे बोतल रखा है ईश्वर को बिना देखे ईश्वर

1722
02:01:07,760 --> 02:01:11,920
को बिना देखे बात ईश्वर को बिना देखे ये बात सिद्ध नहीं होगी

1723
02:01:11,920 --> 02:01:16,400
कि ईश्वर है नहीं

1724
02:01:16,400 --> 02:01:21,440
है आपकी यह मुरली में आया

1725
02:01:21,440 --> 02:01:26,320
ईश्वर ईश्वर इस सृष्टि पर आता है। ये मुरली में

1726
02:01:26,320 --> 02:01:30,320
एक मिनट आपने अभी बताया था कि हमारे पास मुरली में हमें सिखाया गया

1727
02:01:30,320 --> 02:01:34,320
है कि नास्तिकों का उत्तर क्या है? ईश्वर

1728
02:01:34,320 --> 02:01:38,320
है ये कैसे सिद्ध होता? एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब मैं

1729
02:01:38,320 --> 02:01:42,320
क्या कह रहा हूं विवेक जी विवेक जी आपने अभी कहा दो मिनट पहले विवेक

1730
02:01:42,320 --> 02:01:46,480
जी कि मुरली में हमें बताया गया है कि ईश्वर है ये कैसे

1731
02:01:46,480 --> 02:01:50,640
सिद्ध होता है ये आपने कहा अब आप कह रहे हैं अब

1732
02:01:50,640 --> 02:01:54,640
आप कह रहे हैं कि मुरली में ये मुरली में ये बताया गया है

1733
02:01:54,640 --> 02:01:58,960
कि मुरली में ये बताया गया है कि ईश्वर को बिना देखे उसकी सिद्धि

1734
02:01:58,960 --> 02:02:01,840
नहीं होती

1735
02:02:01,840 --> 02:02:05,840
अरे वो जब सृष्टि देखिए गीता में

1736
02:02:05,840 --> 02:02:10,320
लिखा ईश्वर को बिना देखे माना वो जो साकार सृष्टि पर

1737
02:02:10,320 --> 02:02:14,960
है

1738
02:02:14,960 --> 02:02:19,200
मैं पूछ रहा हूं मुरली में क्या लाइन लिखी थी यही लाइन लिखी थी बिना

1739
02:02:19,200 --> 02:02:23,360
देखे उसकी सिद्धि नहीं होगी बस मैं पूछ रहा हूं आपसे लिखी है एक

1740
02:02:23,360 --> 02:02:27,520
लाइन में एक लाइन में ईश्वर का जो ज्ञान है वो किताबों

1741
02:02:27,520 --> 02:02:31,680
में ज्ञान नहीं का उत्तर 100

1742
02:02:31,680 --> 02:02:36,640
लाइन में लिखा है नास्तिकता का उत्तर कुछ तो बता बता दो

1743
02:02:36,640 --> 02:02:42,640
गीता में लिखा है न विदु सुरना नरको

1744
02:02:44,880 --> 02:02:48,880
बताया गया है ईश्वर ईश्वर है ये कैसे

1745
02:02:48,880 --> 02:02:53,280
सिद्ध होता है मुरली में क्या लिखा था वो बताइए देखिए

1746
02:02:53,280 --> 02:02:58,560
गीता में लिखा है न विदुर प्रभ

1747
02:02:58,560 --> 02:03:01,520
दे मनुष्य

1748
02:03:01,520 --> 02:03:05,680
सर्व म गीता में जो म मुझे

1749
02:03:05,680 --> 02:03:10,000
जब तक मुझे देवता गण भी नहीं जानते ऋषि गण भी नहीं जानते महर्षि

1750
02:03:10,000 --> 02:03:14,000
गण भी नहीं जानते जब मैं खुद आता हूं तभी मैं

1751
02:03:14,000 --> 02:03:19,600
खुद अपना परिचय खुद देता हूं स्वयं

1752
02:03:19,600 --> 02:03:23,680
एक मिनट भाई साहब विवेक जी मैं समझ गया आप क्या कहना चाह रहे गीता

1753
02:03:23,680 --> 02:03:27,760
में ये लिखा है कि मुझे पहचान नहीं पाते मैं अपना परिचय खुदा के देता हूं तब समझ में आता

1754
02:03:27,760 --> 02:03:32,000
है जब भगवान खुद आता है तब तभी उसको हम पहचान

1755
02:03:32,000 --> 02:03:36,000
पाते हैं यानी कि जब तक भगवान

1756
02:03:36,000 --> 02:03:40,000
नहीं आएगा जब तक भगवान नहीं आएगा तब तक हम किसी

1757
02:03:40,000 --> 02:03:44,080
को ये नहीं समझा सकते कि भगवान है कि नहीं है। और

1758
02:03:44,080 --> 02:03:48,320
दूसरी बात एक मिनट भाई साहब एक भाई साहब एक मिनट

1759
02:03:48,320 --> 02:03:52,480
एक मिनट मैं आपको म्यूट कर दूं। आप थोड़ा इंटरप्ट कर देते

1760
02:03:52,480 --> 02:03:56,480
हो। मैं म्यूट कर दूं आपको। एक मिनट सुनिए।

1761
02:03:56,480 --> 02:04:00,480
अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। मैं अपनी बात बोल रहा हूं। आप चुप हो जाइए। अभी आपकी

1762
02:04:00,480 --> 02:04:04,640
आवाज नहीं आ रही है। अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है। मैंने म्यूट

1763
02:04:04,640 --> 02:04:08,720
किया है। मैं अपनी बात एक बोल रहा हूं। देखिए पहली बात तो यह हो गई कि जब तक भगवान

1764
02:04:08,720 --> 02:04:12,800
आएगा नहीं तब तक ये आप सिद्ध नहीं कर सकते कि भगवान है। पहली

1765
02:04:12,800 --> 02:04:16,960
बात। दूसरी बात यह है कि आपने कहा कि गीता में यह कहा गया कि वो मुझे

1766
02:04:16,960 --> 02:04:21,040
पहचान करने के लिए बात होना कि मैं अपनी पहचान करवाता

1767
02:04:21,040 --> 02:04:25,120
हूं। यह बात एक अलग है और वो है कि नहीं इस

1768
02:04:25,120 --> 02:04:29,680
संबंध में हम किसी को क्या बताएं यह बात एक अलग है जैसे कि शिवश

1769
02:04:29,680 --> 02:04:33,680
नारायण द्विवेदी विवेक जी है कि नहीं ये कैसे सिद्ध होता है कि भाई

1770
02:04:33,680 --> 02:04:34,800
वहां जाओगे उनका

1771
02:04:34,800 --> 02:04:38,800
घर मिलेगा वहां पर एक ये होगा उनके दो बच्चे होंगे वो कह रहे हो हमारे पापा आ रहे

1772
02:04:38,800 --> 02:04:42,800
हैं वहां उनकी हो सकता है फोटो हो उनका घर हो ठीक है इतनी कुछ

1773
02:04:42,800 --> 02:04:46,800
कई सारे प्रमाण हो सकता है वहां आप दिख भी जाओ दिखना भी एक प्रमाण

1774
02:04:46,800 --> 02:04:50,800
हो गया ठीक दूसरा ये है कि हम पहचानेंगे कैसे कि भाई

1775
02:04:50,800 --> 02:04:54,880
विवेक जी हैं कि भाई वो सांवले से होंगे और वो जो है

1776
02:04:54,880 --> 02:04:58,880
यह जो फोटो में जो चित्र है ना ऐसे दिख रहे होंगे या उन्होंने जैकेट पहन रखी होगी या उनकी

1777
02:04:58,880 --> 02:05:03,200
पत्नी का नाम ये होगा उनके बच्चों का नाम ये होगा ये ये पहचान हो गई या

1778
02:05:03,200 --> 02:05:07,200
इस तरीके की और भी पहचान तो गीता में जो कहा है वो

1779
02:05:07,200 --> 02:05:11,600
पहचानने के विषय में कहा है जो बात आपने अभी कही वो अस्तित्व

1780
02:05:11,600 --> 02:05:15,600
है इस संबंध में वहां नहीं कहा है और आपने कहा है कि हमें

1781
02:05:15,600 --> 02:05:20,080
मुरली में बताया गया है तो मुझे आप देखिए अगर

1782
02:05:20,080 --> 02:05:24,080
है तो ठीक है। नहीं है तो हम आगे बढ़ते हैं। जरूरी नहीं है कि उस प्रश्न का जवाब

1783
02:05:24,080 --> 02:05:28,080
आप आपके पास है। बिल्कुल पक्का नहीं है यह। ठीक है? तो अब मुझे

1784
02:05:28,080 --> 02:05:32,160
बताइए क्या ईश्वर है इस संबंध में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के

1785
02:05:32,160 --> 02:05:36,160
पास कोई शिक्षा है? कोई ज्ञान है?

1786
02:05:36,160 --> 02:05:40,160
क्योंकि ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान है ना? हां। तो वो बताइए। मैं

1787
02:05:40,160 --> 02:05:44,240
एक समझ लीजिए आपके सामने नास्तिक है। वह कह रहा है भाई मैं नहीं मानता ईश्वर है।

1788
02:05:44,240 --> 02:05:50,240
अब मुझे सिद्ध करिए ईश्वर कैसे है? वह बताइए आप।

1789
02:05:50,480 --> 02:05:55,040
देखिए नास्तिक नास्तिक [गला साफ़ करने की आवाज़] जो है वो अहंकारी

1790
02:05:55,040 --> 02:05:59,440
बहुत होते हैं। रावण में भी अहंकार था। तो रावण

1791
02:05:59,440 --> 02:06:03,440
ने म अपनी म मैंने आपको फिर से

1792
02:06:03,440 --> 02:06:07,680
म्यूट किया है। मैंने आपको फिर से म्यूट किया है। आप मुझे उदाहरण

1793
02:06:07,680 --> 02:06:11,680
दे दे के ये मत बताइए कि भैया देखो भगवान को मान लो मान लो क्योंकि उसके साथ

1794
02:06:11,680 --> 02:06:15,680
ऐसा हुआ था। उसके साथ ऐसा हुआ था। यह उदाहरण दे दे के मत बताइए। मुझे

1795
02:06:15,680 --> 02:06:19,760
बताइए मैं कैसे मानू कि ईश्वर है? ठीक है? यह मत बताइए

1796
02:06:19,760 --> 02:06:23,760
रावण के साथ गलत हुआ था। देखो उसने माना नहीं था। हिरण्यकश्यप के साथ गलत हुआ था। उसने माना नहीं

1797
02:06:23,760 --> 02:06:28,080
था। पहली बात तो यह है कि रावण और हिरण्यकश्यप के ऊपर मेरा बिलीव होना चाहिए और बिलीव

1798
02:06:28,080 --> 02:06:33,200
होने के लिए मैं आस्तिक होना चाहिए हूं। समझ रहे हैं मेरी बात?

1799
02:06:33,200 --> 02:06:37,360
समझ रहे हैं? नहीं। अभी मैं अभी अनम्यूट कर रहा हूं। आप मुझे जो है ये

1800
02:06:37,360 --> 02:06:41,360
बताइए कि ईश्वर है। इस बात की सिद्धि कैसे होती

1801
02:06:41,360 --> 02:06:45,520
है?

1802
02:06:45,520 --> 02:06:49,520
बोलिए। नास्तिक भी नास्तिक से जो आस्तिक है वो

1803
02:06:49,520 --> 02:06:54,080
तो थोड़ा सा ज्ञान सुन थोड़ा सा उनको म ज्ञान सुनाएंगे

1804
02:06:54,080 --> 02:06:58,160
तो वो मान लेगा जो नास्तिक है वो तो तब

1805
02:06:58,160 --> 02:07:02,400
मान लेगा आपको मैं आखरी मौका दे रहा हूं भाई साहब मैंने बहुत

1806
02:07:02,400 --> 02:07:06,640
समय खर्च कर लिया मैं एक लास्ट चांस आपको दे रहा हूं जो मैंने पूछा

1807
02:07:06,640 --> 02:07:10,640
है उसका उत्तर है तो बोलिए नहीं तो बोल दीजिए कि नहीं है आप फिर से

1808
02:07:10,640 --> 02:07:14,720
नास्तिक और आस्तिक की क्वालिटी बता रहे हो कि उसको ज्ञान देंगे वो समझ जाएगा उसको नहीं

1809
02:07:14,720 --> 02:07:18,720
देंगे वो नहीं समझ जाएगा अरे भैया नास्तिक से आप क्या कहोगे कि

1810
02:07:18,720 --> 02:07:22,880
ये देख ऐसे ऐसे सिद्ध होता है कि कि जो है

1811
02:07:22,880 --> 02:07:26,880
ईश्वर है। जैसे अगर कोई मुझसे कहेगा कि विवेक जी है कैसे सिद्ध होता

1812
02:07:26,880 --> 02:07:32,160
है? ये दिख रहे हैं भाई ये दिख रहे हैं। देख लो ये विवेक जी है।

1813
02:07:32,160 --> 02:07:36,160
तो ऐसी कौन सी बात है आपके पास जो आप नास्तिक से बोलोगे

1814
02:07:36,160 --> 02:07:40,240
कि ईश्वर है। ये देख मैंने सिद्ध कर दिया। जरूरी नहीं है वो देखने

1815
02:07:40,240 --> 02:07:44,400
से ही सिद्ध हो। जरूरी नहीं है देखने से ही सिद्ध हो। मगर वो कैसे

1816
02:07:44,400 --> 02:07:48,880
सिद्ध होगा वो आप बताइए

1817
02:07:48,880 --> 02:07:52,960
सामना होगा तभी तो वो म नास्तिक समझता है कि

1818
02:07:52,960 --> 02:07:57,440
भाई हमसे ताकतवर कोई चीज है नहीं हमारे पास एटम बम है शक्ति

1819
02:07:57,440 --> 02:08:01,600
लेकिन एटम बम उसने बना तो लिए लेकिन उसके पास फोड़ने की ताकत नहीं है

1820
02:08:01,600 --> 02:08:05,760
भाई साहब से आप क्या कहोगे ईश्वर है ऐसे सिद्ध

1821
02:08:05,760 --> 02:08:10,240
होता है एक चांस और दे रहा हूं मैं उसके बाद ये लाइव वो करूंगा

1822
02:08:10,240 --> 02:08:14,480
ये आपका दिख रहा है वो पागल आप मना कर रहे थे पागलखाना नहीं है वो

1823
02:08:14,480 --> 02:08:18,880
दिख रहा है क्या है वहां पर

1824
02:08:18,880 --> 02:08:23,280
आप ये तक नहीं बोल पा रहे हैं कि भैया हमारे पास हमारे पास नहीं है

1825
02:08:23,280 --> 02:08:27,520
नहीं पता हमको हो सकता है आया हो हमारे

1826
02:08:27,520 --> 02:08:31,680
पास ईश्वर का परिचय है तो हम क्यों ईश्वर का परिचय

1827
02:08:31,680 --> 02:08:36,000
नहीं ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है भाई ईश्वर को सिद्ध तो करो तब तो हम देखेंगे

1828
02:08:36,000 --> 02:08:40,320
कि ईश्वर कौन है पहले ईश्वर को सिद्ध तो करो जैसे

1829
02:08:40,320 --> 02:08:44,720
कि हमने कहा हमने कहा हमने कहा कि भैया हमारे

1830
02:08:44,720 --> 02:08:48,880
पास मोटरसाइकिल का परिचय है कि वह लाल कलर की है।

1831
02:08:48,880 --> 02:08:53,040
उसके दो टायर है उसके यह है। अभी वो मोटरसाइकिल हमारे सामने नहीं है।

1832
02:08:53,040 --> 02:08:57,040
ठीक दूर है कहीं मोटरसाइकिल का हमारे पास परिचय है। फिर

1833
02:08:57,040 --> 02:09:01,040
मैंने कहा ये मोटरसाइकिल होती है कैसे सिद्ध होता है? तो ये

1834
02:09:01,040 --> 02:09:04,320
हमारे पास नहीं है। मैं पूछ रहा हूं होने के विषय में उसका अस्तित्व

1835
02:09:04,320 --> 02:09:08,960
होने के विषय में कुछ है? बिल्कुल है।

1836
02:09:08,960 --> 02:09:13,040
वीरेंद्र वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा इतना

1837
02:09:13,040 --> 02:09:17,200
मना जो [गाना गाने की आवाज़] 40 साल जो ज्ञान सुनाया

1838
02:09:17,200 --> 02:09:21,520
गया उनमें सृष्टि के आदि मध्य अंत का सारा

1839
02:09:21,520 --> 02:09:25,760
ही उसमें रहस्य भरा हुआ है। तो कोई

1840
02:09:25,760 --> 02:09:29,920
कहने का मतलब है क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के

1841
02:09:29,920 --> 02:09:34,000
पास आदि मध्य और अंत का

1842
02:09:34,000 --> 02:09:38,000
ज्ञान है। इसलिए मान लिया जाए कि वह ईश्वर है और वह

1843
02:09:38,000 --> 02:09:42,560
है तो इससे सिद्ध होता है कि वह ईश्वर है मतलब ईश्वर होता है

1844
02:09:42,560 --> 02:09:46,800
और कैसे सिद्ध होगा चलो आप एक मिनट के लिए आप ही बता दीजिए कि ईश्वर

1845
02:09:46,800 --> 02:09:51,040
कैसे सिद्ध होगा मैं तो मैं तो कर ही दूंगा मैं मेरा कार्य

1846
02:09:51,040 --> 02:09:57,040
रोज सिद्ध करता हूं मेरा कार्य मैं कर दूंगा नहीं

1847
02:09:57,120 --> 02:10:01,760
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मैं बताऊंगा विवेक जी मैं बताऊंगा

1848
02:10:01,760 --> 02:10:06,400
आप लड़ने की कोशिश मत करो मैं बताऊंगा आपको अगर बता

1849
02:10:06,400 --> 02:10:10,720
तो बताइए वही कर रहे हो आप बताओ बताओ अभी आप पहले अपना

1850
02:10:10,720 --> 02:10:15,120
पक्ष क्लियर करो आपके पास है बिल्कुल

1851
02:10:15,120 --> 02:10:20,800
हां बताइए क्या है वो बताइए क्या है

1852
02:10:20,800 --> 02:10:24,880
हमने बता दिया जो बताना था आपको जो समझना है अभी आप समझ

1853
02:10:24,880 --> 02:10:28,880
नहीं पा रहे देव दीक्षित ने इतना ज्ञान दिया है जिससे वो सिद्ध

1854
02:10:28,880 --> 02:10:32,960
होता है कि वो ईश्वर है तो इसमें सबसे पहली बात आ जाएगी कि उन्होंने कहानी

1855
02:10:32,960 --> 02:10:36,960
किससे बताए हैं जो जिसको आप

1856
02:10:36,960 --> 02:10:40,960
ज्ञान कह रहे हो वो कथाएं सुनो जिसको आप ज्ञान कह

1857
02:10:40,960 --> 02:10:45,120
रहे हो सबसे पहली बात वो कथाएं है कथाएं ये होगा वो होगा वो

1858
02:10:45,120 --> 02:10:49,120
होगा तो क्या ये मान लिया तो क्या ये माना जाए जो कथाएं सुनाए वो ईश्वर है

1859
02:10:49,120 --> 02:10:53,680
और देखो वो ईश्वर है जो सुना रहा है उसका अस्तित्व सिद्ध हो गया

1860
02:10:53,680 --> 02:10:58,000
आपने तो सुनी संसार में सुनो वीरेंद्र

1861
02:10:58,000 --> 02:11:02,000
देव दीक्षित जी की सत्ता है एक एक मिनट एक मिनट आपने कहा ना

1862
02:11:02,000 --> 02:11:07,600
उसकी सत्ता हर जगह होती है

1863
02:11:07,600 --> 02:11:11,600
हां हां तो इस समय यहां पर उसकी सत्ता है क्या जहां

1864
02:11:11,600 --> 02:11:14,960
मैं बैठा हूं।

1865
02:11:14,960 --> 02:11:19,120
बिल्कुल [नाक से की जाने वाली आवाज़] अच्छा तो वीरेंद्र

1866
02:11:19,120 --> 02:11:23,200
देव दीक्षित इस संबंध में क्या करते हैं कि वो मैं अगर उनके बारे में कुछ

1867
02:11:23,200 --> 02:11:28,880
अनापशनाप बोलूं या वो बोलूं उल्टा सीधा इस संबंध में क्या है?

1868
02:11:28,880 --> 02:11:32,880
वो तो कलंकीधर का पार्ट कलंकीधर अवतार

1869
02:11:32,880 --> 02:11:37,120
इसीलिए गाया हुआ है कि म भगवान का एक अवतार

1870
02:11:37,120 --> 02:11:41,280
कलंकीधर अवतार भी है कि वो कलंकों को धारण कर लेता है।

1871
02:11:41,280 --> 02:11:46,000
वो म कलंको से विचलित नहीं होता। कोई अगर

1872
02:11:46,000 --> 02:11:50,000
हमने जो काम हमने जो गलत काम किया नहीं है और हमारे ऊपर कोई

1873
02:11:50,000 --> 02:11:54,000
आरोप लगाते तो साधारण व्यक्ति जो है वो विचलित हो जाता है कि ऐसे

1874
02:11:54,000 --> 02:11:58,000
हमको क्यों कह दिया? इसने हमको ऐसे कैसे कह दिया? मैंने

1875
02:11:58,000 --> 02:12:02,160
तो ऐसे किया नहीं। मैं तो ऐसे हूं नहीं। लेकिन भगवान का जो पार्ट होगा

1876
02:12:02,160 --> 02:12:06,320
वो इन बातों से विचलित नहीं होगा। वो हंसते हंसते इन कलंकों को भी

1877
02:12:06,320 --> 02:12:10,480
धारण कर लेगा कि भाई म बच्चे

1878
02:12:10,480 --> 02:12:14,560
हैं बच्चों को म उसके अंदर वो दया

1879
02:12:14,560 --> 02:12:18,560
भाव है क्षमा भाव है तो उनको भी सहन कर लेता

1880
02:12:18,560 --> 02:12:22,960
है कि ये सारे संसार ये सारे सारा संसार जो है

1881
02:12:22,960 --> 02:12:27,040
वो मेरे बच्चे हैं तो बच्चों को आपका कहने का

1882
02:12:27,040 --> 02:12:31,280
मतलब यह है आपका कहने का मतलब यह है कि वीरेंद्र

1883
02:12:31,280 --> 02:12:36,320
देव दीक्षित जो है वह सर्वशक्तिमान और श्रेष्ठतम शासक

1884
02:12:36,320 --> 02:12:40,400
और सर्वज्ञ ईश्वर हैं। और

1885
02:12:40,400 --> 02:12:44,800
क्योंकि वह है तो इससे सिद्ध हुआ कि वो है मतलब वो उनका अस्तित्व

1886
02:12:44,800 --> 02:12:49,040
है। आपका कहने का मतलब ये है। ठीक है। हां जी बिल्कुल हां जी।

1887
02:12:49,040 --> 02:12:53,440
हां ये चीज क्लियर हो गई। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी

1888
02:12:53,440 --> 02:12:58,880
वो अगर सर्वशक्तिमान है तो वो नित्य भी तो होने चाहिए।

1889
02:12:58,880 --> 02:13:03,040
नित्य तो सदा इस सृष्टि रूपी नाटक

1890
02:13:03,040 --> 02:13:08,000
में एक सेकंड भी उनका पेट कम नहीं होता। जब

1891
02:13:08,000 --> 02:13:12,160
वीरेंद्र देव अभी मैं उस शरीर की बात कर रहा हूं जिसको देखने के

1892
02:13:12,160 --> 02:13:16,240
कारण आप मुझे ये सिद्ध कर रहे हो कि वो है तो अब मैं

1893
02:13:16,240 --> 02:13:20,480
उस शरीर की बात कर रहा हूं। जो दिखा जो आंखों का विषय है

1894
02:13:20,480 --> 02:13:24,640
और जब आप ये कह दोगे कि नहीं वो वो शरीर छोड़ने के बाद भी है तो वो उसमें फिर

1895
02:13:24,640 --> 02:13:28,880
सिद्धि आ जाएगी कि उसको देखा किसने कैसे? समझ

1896
02:13:28,880 --> 02:13:33,120
रहे हो? देखिए हां आ आप

1897
02:13:33,120 --> 02:13:38,480
आत्मा अविनाशी है। शरीर विनाशी है। आत्मा

1898
02:13:38,480 --> 02:13:42,560
भाई साहब नास्तिक व्यक्ति आत्मा को मानता नहीं है ना। उसको सिद्ध

1899
02:13:42,560 --> 02:13:46,560
करिए ना आत्मा है। परमात्मा है आत्मा है। यही तो मैं कह रहा हूं।

1900
02:13:46,560 --> 02:13:50,720
फिर आप आप जब आप जब अविनाशी वाले पार्ट को जब सिद्ध

1901
02:13:50,720 --> 02:13:54,720
कर रहे हो तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी को क्यों ला रहे बीच में कहने का मतलब

1902
02:13:54,720 --> 02:13:58,880
ये है अविनाश कहने का मतलब

1903
02:13:58,880 --> 02:14:02,960
वीरेंद्र देव दीक्षित जी मेरी आंखों का विषय है इस कारण से आप सिद्ध

1904
02:14:02,960 --> 02:14:07,200
कर रहे हो कि देखो वो है जबकि उसके अंदर की जो वो आत्मा

1905
02:14:07,200 --> 02:14:11,280
है उस शरीर के अंदर की जो अभी दूसरे शरीर को धारण

1906
02:14:11,280 --> 02:14:16,400
करने वाली है हम उसकी स्थिति की बात कर रहे हैं हम

1907
02:14:16,400 --> 02:14:20,400
तो जब इस संसार में जब टोटल विनाश होगा

1908
02:14:20,400 --> 02:14:24,560
तो उस म जो जो अभी वीरेंद्र जो दीक्षित का जो अभी

1909
02:14:24,560 --> 02:14:28,880
अगला जो हमारा जन्म है वो उस टोटल

1910
02:14:28,880 --> 02:14:33,200
विनाश में भी वो अकेला ही बचेगा सारे संसार में

1911
02:14:33,200 --> 02:14:37,360
मैं ये कह रहा हूं कि जो शरीर नष्ट हो रहा है वो तो ईश्वर है नहीं

1912
02:14:37,360 --> 02:14:41,600
तो हमें अदृश्य ईश्वर की स्थापना करनी है जो जो दिखाई नहीं दे रहा है

1913
02:14:41,600 --> 02:14:45,600
हमें सिद्धि किसकी करनी है फिलहाल

1914
02:14:45,600 --> 02:14:49,760
हमें सिद्धि हमें नास्तिक के समक्ष एक उस ईश्वर

1915
02:14:49,760 --> 02:14:54,000
की सिद्धि करनी है जो निराकार है आपने कहा ना परमात्मा निराकार है

1916
02:14:54,000 --> 02:14:58,640
तो आंखों का विषय तो है नहीं परम पिता वही तो

1917
02:14:58,640 --> 02:15:03,680
वही तो ईश्वर है परमपिता शिव ही तो ईश्वर है

1918
02:15:03,680 --> 02:15:08,480
ईश्वर मेन ईश्वर कौन है मेन ईश्वर कौन है मेन

1919
02:15:08,480 --> 02:15:13,920
परम पिता ही है हां तो वो है ये कैसे सिद्ध होता है ये बताओ

1920
02:15:13,920 --> 02:15:19,920
वो इस सृष्टि पर आ के और सारे संसार को

1921
02:15:20,960 --> 02:15:25,120
है यह आपका क्लेम है मेरे भाई। आप अपने क्लेम को तर्क की जगह

1922
02:15:25,120 --> 02:15:29,440
पर यूज़ कर रहे हो। अभी समय दावा है।

1923
02:15:29,440 --> 02:15:33,760
ये आपका क्लेम है। विवेक जी लालने के पाव पालने

1924
02:15:33,760 --> 02:15:38,240
में दिखाई देते हैं। सूर्य जब उदय विवेक

1925
02:15:38,240 --> 02:15:42,320
जी सुनिए अब मैंने आपको म्यूट किया है। दोबारा सुनिए। यह जो आप दंत

1926
02:15:42,320 --> 02:15:46,400
कथाएं बोल रहे हैं यह आपका क्लेम है कि वह ऐसा करता है, वह ऐसा

1927
02:15:46,400 --> 02:15:50,880
करता है, वह यह होता है। मैंने आपसे पूछा है निराकार जो आप परमात्मा

1928
02:15:50,880 --> 02:15:54,960
कह रहे हो, उसकी सिद्धि कैसे होती है कि वो है वो एक्सिस्ट

1929
02:15:54,960 --> 02:15:59,200
करता है। वो सिद्धि बताइए। अब मैं लास्ट बार पूछ रहा हूं। अगर आपने इस प्रश्न

1930
02:15:59,200 --> 02:16:03,520
का उत्तर नहीं दिया तो क्या कहते हैं?

1931
02:16:03,520 --> 02:16:07,840
हम लोग अगली बार करेंगे। मैं ये मान लूंगा कि आपके पास उत्तर है नहीं।

1932
02:16:07,840 --> 02:16:09,440
ठीक है? अब मैं

1933
02:16:09,440 --> 02:16:13,520
लास्ट बार पूछ रहा हूं। नहीं तो हम लोग ये मानेंगे हमारे पास उत्तर नहीं है। आप जो भी कहते रहो

1934
02:16:13,520 --> 02:16:17,840
क्या है कि निराकार परमात्मा की सिद्धि करिए। आप वीरेंद्र दीक्षित

1935
02:16:17,840 --> 02:16:22,000
को बीच में लाए। वीरेंद्र दीक्षित जी की जो बॉडी है वो नित्य नहीं

1936
02:16:22,000 --> 02:16:26,080
थी। आंखों का विषय दिया वो निराकार परमात्मा नहीं है। निराकार परमात्मा को

1937
02:16:26,080 --> 02:16:32,080
एक नास्तिक के समक्ष सिद्ध कैसे करें? ये बोलिए।

1938
02:16:35,520 --> 02:16:40,080
दृष्टि रूपी नाटक खत्म होने वाला होगा ना। नास्तिक जो है वो

1939
02:16:40,080 --> 02:16:44,640
लास्ट में जाकर के रुक जाइए आप रुक जाइए मैं समझ गया आपके पास नहीं है

1940
02:16:44,640 --> 02:16:48,880
ठीक है आपके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में जो

1941
02:16:48,880 --> 02:16:53,200
वीरेंद्र दीक्षित जी नाम से जो आ रहे हैं वो आप बता रहे हो उन्होंने सारी रहस्य

1942
02:16:53,200 --> 02:16:57,360
खोल दिए मगर वो ये नहीं बता पाए कि निराकार परमात्मा है

1943
02:16:57,360 --> 02:17:02,480
ये सिद्ध कैसे होता है मैं बता देता हूं आपको मैं बता देता हूं

1944
02:17:02,480 --> 02:17:06,880
बहदार उपनिषद में लिखा हुआ है एक तीन 28 में असतो

1945
02:17:06,880 --> 02:17:11,200
मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर गमया मृत्युमा

1946
02:17:11,200 --> 02:17:15,200
मम गमया इसमें जीव मात्र की चाह बताई

1947
02:17:15,200 --> 02:17:19,520
जा रही है। एक जीव जो है वो

1948
02:17:19,520 --> 02:17:23,680
सत हो जाना चाहता है। सत स्वरूप हो जाना चाहता है। मैं मृत्यु

1949
02:17:23,680 --> 02:17:25,280
विहीन जीवन।

1950
02:17:25,280 --> 02:17:29,680
एक जीव जो है वो चित हो जाना चाहता है। यानी कि अज्ञता विहीन

1951
02:17:29,680 --> 02:17:33,920
जीवन। चित का मतलब अखंड ज्ञान। सत

1952
02:17:33,920 --> 02:17:38,720
का मतलब अमरता। और आनंद का मतलब

1953
02:17:38,720 --> 02:17:42,960
सदा सुखी रहने वाला जो जीव है वह सतित

1954
02:17:42,960 --> 02:17:47,280
आनंद हो जाना चाहता है। अब एक नियम

1955
02:17:47,280 --> 02:17:51,360
है हमारे अंदर जिस जिस चीज की प्यास है

1956
02:17:51,360 --> 02:17:55,440
उस चीज का जो निराकरण करने वाला उसका सब्जेक्ट है उसका

1957
02:17:55,440 --> 02:17:59,600
अस्तित्व सिद्ध है। जैसे हमारे अंदर प्यास है तो

1958
02:17:59,600 --> 02:18:03,840
इसका मतलब दुनिया में पानी है। हमारे हमारे अंदर भूख

1959
02:18:03,840 --> 02:18:07,920
है तो इसका मतलब दुनिया में भोजन है। हमारे अंदर सुनने की क्षमता

1960
02:18:07,920 --> 02:18:12,160
है। इसका मतलब दुनिया में आवाज है। हमारे अंदर देखने की क्षमता

1961
02:18:12,160 --> 02:18:16,400
है। इसका मतलब दुनिया में दृश्य है। तो

1962
02:18:16,400 --> 02:18:20,400
जिस प्रकार एक अच्छा ये नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी है।

1963
02:18:20,400 --> 02:18:24,560
जो सवाल कर रहा है कि मैं नहीं मानता ईश्वर है। उसके अंदर

1964
02:18:24,560 --> 02:18:28,640
भी है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के

1965
02:18:28,640 --> 02:18:33,600
अंदर आपकी आवाज नहीं आ रही है। जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर

1966
02:18:33,600 --> 02:18:37,760
अह भी व्याप्त प्यास का विषय पानी सिद्ध होता

1967
02:18:37,760 --> 02:18:40,640
है। भूख का विषय भोजन सिद्ध होता है।

1968
02:18:40,640 --> 02:18:44,640
उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त ये

1969
02:18:44,640 --> 02:18:48,640
जो सतचितानंद की चाह है इससे ये सिद्ध होता है कि

1970
02:18:48,640 --> 02:18:54,160
इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है।

1971
02:18:54,160 --> 02:18:59,520
जो कि उसकी चाह का विषय है। ठीक है?

1972
02:18:59,520 --> 02:19:03,600
हमारे एक नास्तिक व्यक्ति भी यह चाहता है कि धूप ज्यादा

1973
02:19:03,600 --> 02:19:07,600
पड़ रही है तो कम हो जाए। बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी

1974
02:19:07,600 --> 02:19:11,680
कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने वाला बनना

1975
02:19:11,680 --> 02:19:15,840
चाहता है। जबकि विज्ञान ने अभी तक नहीं कहा कि तुम मन में सोचोगे और मौसम

1976
02:19:15,840 --> 02:19:19,920
को कंट्रोल कर लोगे। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो

1977
02:19:19,920 --> 02:19:24,000
मौसम को भी कंट्रोल कर सकता है। वो

1978
02:19:24,000 --> 02:19:28,560
भविष्य देख लेना चाहता है। कल कल एक मिनट भाई साहब एक मिनट वो आपका

1979
02:19:28,560 --> 02:19:34,080
आपका जो ईश्वर है ना उस पर परिभाषा सेट नहीं होगी। मैं उसी पर आऊंगा। तो

1980
02:19:34,080 --> 02:19:39,040
क्या कहते हैं? अगला क्या था? हां एक नास्तिक व्यक्ति भी

1981
02:19:39,040 --> 02:19:43,440
कल मैच में कौन जीतने वाला है? कभी-कभी यह आशा

1982
02:19:43,440 --> 02:19:47,600
करने लगता है। यह जीत जाए। मेरे अनुसार कल भविष्य फल आ जाए। भविष्य को

1983
02:19:47,600 --> 02:19:51,840
कंट्रोल करने वाला भविष्य को देख लेने वाला भी बनना चाहता

1984
02:19:51,840 --> 02:19:55,680
है। इसका मतलब है इस दुनिया में कोई है जो भविष्य भी जानता है। भविष्य

1985
02:19:55,680 --> 02:20:01,440
को भी देखता है। ठीक है? तो यह हो गई सच्चिदानंद की सिद्धि।

1986
02:20:01,440 --> 02:20:05,600
ठीक? अब आपके पास एज ए नास्तिक अगर कोई काउंटर

1987
02:20:05,600 --> 02:20:09,760
क्वेश्चन हो तो मुझे बताते जाइए। मैं हर चीज को तोड़ता जाऊंगा। ठीक है? एज

1988
02:20:09,760 --> 02:20:14,000
ए नास्तिक अगर आप नास्तिक बनके ये जो मैंने

1989
02:20:14,000 --> 02:20:18,160
सर्वशक्तिमान सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म ईश्वर की जो

1990
02:20:18,160 --> 02:20:22,400
स्थापना की है ये है। उसको अगर आप एक

1991
02:20:22,400 --> 02:20:26,480
नास्तिक के नजरिए से काट सकते हैं तो बताइए। नहीं तो हम अगले

1992
02:20:26,480 --> 02:20:31,840
चैप्टर पर चले

1993
02:20:31,840 --> 02:20:36,160
आपने जो बोला उसी पर बोलना चाह रहा हूं कि नास्तिक जो अपने को नास्तिक

1994
02:20:36,160 --> 02:20:40,160
कहता है कि भाई हम आत्मा को नहीं मानते हम परमात्मा को नहीं मानते

1995
02:20:40,160 --> 02:20:44,480
लेकिन उसके अंदर भी आत्मा है या नहीं देखिए

1996
02:20:44,480 --> 02:20:48,960
भाई साहब सिद्धि सिद्धि इस बात की हो रही है कि क्या हम किसी को

1997
02:20:48,960 --> 02:20:53,040
यह बिलीव दिला सकते हैं कि ईश्वर है तो आप बिलीव नहीं

1998
02:20:53,040 --> 02:20:57,040
दिला पाए आप बिलीव नहीं दिला पाए। आप उसको दिखा रहे हैं वीरेंद्र

1999
02:20:57,040 --> 02:21:01,040
दीक्षित को जो अभी मर गए हैं। तो

2000
02:21:01,040 --> 02:21:05,120
आप ठीक है। अब इस बारे में बहुत लंबी बहस हो

2001
02:21:05,120 --> 02:21:09,120
गई है। मेरी बात सुनिए। मेरी बात सुनिए। अब आप एक छोटा सा क्वेश्चन

2002
02:21:09,120 --> 02:21:13,200
कर रहा हूं। एक छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं। उसको छोड़ दीजिए। उस मत बोलिए। बहुत घंटों

2003
02:21:13,200 --> 02:21:17,280
हमने रगड़ लिया उसको। अभी मुझे मैं पूछ रहा हूं कि जब

2004
02:21:17,280 --> 02:21:21,360
सब जगह ईश्वर की सत्ता है तो यह जो अच्छाई और

2005
02:21:21,360 --> 02:21:25,440
बुराई दोनों चीजें हैं आपने कहा वहां पर भी ईश्वर की सत्ता है। है

2006
02:21:25,440 --> 02:21:29,440
ना? सत्ता है। ना तो जहां पर बुराई

2007
02:21:29,440 --> 02:21:34,400
हो रही है वहां पर भी ईश्वर की सत्ता है।

2008
02:21:34,400 --> 02:21:40,320
मम वर्तमान वर्तते मनुष्य पार सर्व

2009
02:21:40,320 --> 02:21:44,480
यदा देव मना मेरे

2010
02:21:44,480 --> 02:21:48,800
मन का ही अनुसरण सारे संसार म

2011
02:21:48,800 --> 02:21:52,960
संसार के सारे प्राणी करते हैं। भाई साहब मैंने क्या पूछा? मैंने

2012
02:21:52,960 --> 02:21:56,960
क्या पूछा भाई साहब? मैंने पूछा क्या है? इसका सिंपल जवाब नहीं दे पाएंगे क्या

2013
02:21:56,960 --> 02:22:00,960
आप? मैंने पूछा ईश्वर की सत्ता है जहां पे बुराई हो रही है कि नहीं? हां

2014
02:22:00,960 --> 02:22:04,960
या ना जवाब दे दो भाई। हर कार्य का आदि जो है

2015
02:22:04,960 --> 02:22:10,480
वह परमेश्वर से होता है। मतलब गीता में भी बोला है

2016
02:22:10,480 --> 02:22:14,480
आप सरल शब्दों में एक्सेप्ट करते हैं ना हां

2017
02:22:14,480 --> 02:22:19,280
है सत्ता ये स्वीकार करने में दिक्कत हो रही क्या

2018
02:22:19,280 --> 02:22:25,280
जाइए आप यहां चलिए

2019
02:22:30,470 --> 02:22:34,880
[गला साफ़ करने की आवाज़]

2020
02:22:34,880 --> 02:22:40,880
पागल खाने की फैक्ट्री ना कहे तो क्या कहें?

2021
02:22:48,720 --> 02:22:54,720
ठीक है सभी को जय श्री राम।

2022
02:23:07,760 --> 02:23:11,760
तो
