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00:00:01:10 सभी को जय श्री राम। मुझे पता है आप लोग काफी देर से प्रतीक्षा कर रहे होंगे जब से मैं यह थंबनेल देखा होगा आप लोगों ने और थोड़ी सी दायित्व ज्यादा है आप लोग आशा है आप लोग समझने का प्रयास करेंगे क्योंकि यहां पर भी उपलब्ध होना है बहुत सारे प्रकल्प चल रहे हैं उसमें भी उपस्थित होना है बहुत सारे युद्ध भी चल रहे हैं धरातल पर तो सब कुछ मिलाकर के दौड़ना पड़ता है और भगवत कृपा से जो यथाशक्ति प्राप्त होनी चाहिए वह प्राप्त हो जाती है। परंतु व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो ऐसा कोई बहुत बड़ा संख्या बल अर्थ का बल ये सब बहुत ज्यादा ऐसा नहीं है व्यवहारिक दृष्टि से कि प्राप्त हो फिर भी कोई भी काम कार्य रुकता नहीं है। बस यह है कि आप लोगों के समक्ष आने में थोड़ी बहुत अह देर हो जाती है। विलंब हो जाता है। तो आप लोगों ने विषय देख लिया है क्या है
00:01:08:00 अलंकार समाज आर्य समाज की ओर से हमें एक पत्र प्राप्त हुआ है और उनका कोई कार्यक्रम होने वाला है शायद वर्बली याद नहीं है शायद 150 भी वर्षगांठ है ना आर्य समाज की तो उन्होंने बहुत ही आदर पूर्वक हमें एक पत्र भेजा है जिसमें कि उन्होंने बुलाया है कि आर्य समाज के युवाओं के साथ आप जो है आए चर्चा करें आकर के हमारे कार्यक्रम में और बहुत बड़े स्तर पर कार्यक्रम हो रहा है। कार्यक्रम से वो लोग भी जुड़े हुए हैं जिनको मैं कहीं ना कहीं सम्मान की दृष्टि से देखता हूं। यद्यपि हमारे वैचारिक मतभेद है। मगर उनमें कुछ लोग ऐसे हैं जिनको जिनके प्रति मेरी भावना यह लेकर है कि भाई चर्चा का विषय है। हमारे बीच में जो मतभेद है उन मतभेदों को लेकर के कोई चर्चा हो सके और कार्यक्रम से वो लोग भी जुड़े हुए हैं जिनकी जिनके जो गतिविधियां हैं आचरणहीन है जो जो जिनको मैं निकृष्ट दृष्टि से देखता हूं तो दोनों ही तरीके मतलब पूरा आर्य समाज से जुड़े हुए सभी प्रकार के लोग उससे जुड़े उस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। तो सबसे पहले तो मैं
00:02:23:01 आभार व्यक्त करता हूं आर्य समाज का कि उन्होंने जो है पहल की और इस प्रकार से जो है आमंत्रित किया है पत्र भेज के। यद्यपि अभी मुझे कोई बाय पोस्ट या फिजिकली कोई लेटर प्राप्त नहीं हुआ है। अ और मेबी हो सकता है कोई मुझे किसी ने WhatsApp इत्यादि के द्वारा जो है कुछ झूठी सामग्री भेजी हो। मगर जो भी है उस पत्र जो मुझे मिला है उसके आधार पर मैं अपनी बात कह रहा हूं क्योंकि मुझे फिजिकली कुछ ऐसी चीजें प्राप्त नहीं हुई है जिनको आधार बना करके कुछ तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके भेजने वाला कौन है वो भी मैं नहीं जानता किसी ने मुझे WhatsApp किया था और फिर उसके बाद जो YouTube इत्यादि पर सोशल मीडिया पर बहुत सारी बातें सुनाई दी और मेरे साथ-साथ भागवतानंद को भी पत्र भेजा गया था। तो भागवतानंद ने तो अपना उत्तर दे दिया था। तो उससे भी इस बात की पुष्टि हो जाती है कि पत्र निर्गत किए गए हैं क्योंकि उसके पास भी पहुंच रहा है मेरे पास भी पहुंच रहा है और कार्यक्रम भी हो ही रहा है और हां एक बात से और पुष्टि हो जाती है कि आर्य समाज से जुड़े हुए कुछ और भी लोग हैं जो अपना YouTube चैनल इत्यादि चलाते हैं तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की है तो अब ये मान सकते हैं कि हां आर्य समाज से ही आया है तो सबसे पहले तो
00:03:38:02 मैं धन्यवाद व्यक्त करता हूं आभार व्यक्त करता हूं कि आपने इस तरह से एक पहल की कि भाई हम चर्चा कहीं पर कर सके और सीधेसीधे उसमें जैसे पिछले मुझे कई पत्र प्राप्त हो चुके हैं। आर्य समाज के नाम से जो संस्थाएं मुझे पत्र भेज चुकी है दो बार भेजा जाए तो उसमें कहीं ना कहीं कुछ इस तरह से बात कही गई थी कि उसमें अपने पक्ष को स्पष्ट रूप से नहीं रखा गया था कि किस जैसे किस विषय पर चर्चा की जाएगी या फिर रिकॉर्डिंग होगी तो वो कौन करेगा किसका कैमरा चलेगा किसका नहीं चलेगा उनका कहना था कि केवल हमारा ही कैमरा चलेगा ये सब बातें थी तो इस बार बहुत ही व्यवस्थित रूप से पत्र को लिखा गया और हमें एक चीज पर और आपत्ति थी भाई हम आप जो है इसको शास्त्रार्थ की दृष्टि से ना प्रस्तुत करते हुए इसको चर्चा की दृष्टि से प्रस्तुत करें तो उन्होंने वो भी किया तो यह सारी चीजें उनकी तरफ से पहल की गई इन सभी चीजों के लिए उनका आभार पत्र भेजने वालों का और इसके साथ ही साथ मैं अपनी एक त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी भी हूं कि मैं इस पत्र का जो प्रतिक्रिया इस पत्र के उपरांत प्राप्त होने के बाद जो प्रतिक्रिया है वह विलंब से दे रहा हूं। मैं यथा
00:04:53:03 समय से नहीं दे रहा हूं क्योंकि पत्र में जो दिनांक बताई गई है दिनांक 30 से लेकर के अक्टूबर से 2 नवंबर तक ये संभवत मुझे वर्बली याद नहीं है और क्योंकि मेरे पास फिजिकली नहीं है तो मैं उसको हाथ में अभी खोल के पढ़ नहीं सकता हूं और अभी इतना आवश्यक भी नहीं है तो यहां स्क्रीन पर दिखाना भी आवश्यक नहीं है। तो अ दिनांक 30 से लेकर के दो नवंबर तक की उसमें डेट्स हैं और आज 29 तारीख है तो यानी कि कल से वो कार्यक्रम चालू है। तो मैं काफी विलंब से अपनी प्रतिक्रिया इस पर दे रहा हूं। पर इसके लिए मैं मतलब क्षमा प्रार्थी हूं कि मैं यथोचित यथासमय अपना उत्तर प्रस्तुत नहीं करा। आपको अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी। पर इसके पीछे मेरा कोई व्यक्तिगत कारण नहीं था। मैं विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजर रहा हूं, जूझ रहा हूं। न्यायालय से जुड़े हुए मामले हैं। पुलिस से जुड़े हुए मामले हैं। बहुत सारे प्रकल्प तो चल ही रहे हैं। वह तो बात अलग है। वह आपके भी चल रहे हैं। ठीक बात है। मगर थोड़ा सा पुलिस और न्यायालय से जुड़ी हुई कारवाही में क्या होता है कि अचानक से कुछ ऐसी चीजें आ जाती है जो अनएक्सेक्टेड होती है। सुनियोजित तरीके से नहीं होता है। जैसे एक छोटी सी बात अभी आपको बता दूं कि कोर्ट से एक ऑर्डर किया गया था कि भाई जो हरियाणा का जो जेलर है हिसार
00:06:08:07 दो जेल का जहां पे रामपाल कैद है बंद है। उस जेलर को आप दस्ती नोटिस दे के आइए इंपर्सनली मतलब कि खुद से कोई व्यक्ति वहां पर जाए और हाथ में बाय हैंड दे के आए। अब डाक द्वारा भेजना तो आसान होता है, सरल होता है। परंतु जहां से यह सब कुछ ओरिजनेट हो रहा है, जनरेट मतलब जहां से जनरेट हो रहा है तो वहां पर जाने में कई सारी व्यवस्थाएं देखनी पड़गी कि वो भाई आखिरकार रामपाल यदि जेल में है यदि रामपाल जेल में है तो उसके नाम से इतना बड़ा स्कैम चल रहा है और यदि वो नहीं चला रहा है तो कौन चला रहा है? और जिसके जिसके अंडर में वह रामपाल है बंद है वह इस पर कोई एक्शन नहीं ले रहा है वही वो इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहा है कुछ नहीं कर रहा है तो एक प्रश्न के घेरे में वो जगह भी आ जाती है और जब वो जगह आ जाती है और इतना बड़ा स्कैम जुड़ा हुआ है उस जगह से और यह भी हम लोगों को ज्ञात है कि किस तरीके से क्रिमिनल एक्टिविटीज हुई है रामपाल से जुड़ी हुई जो स्थान है जो बरवाला का वो आश्रम है वो अभी भी बंद है फर्जी रूप से किताबें छप रही है तो इतना सब कुछ चल रहा है तो वहां पर कैसे जाया जाए किस ढंग से उसको सुनियोजित किया जाए कौन
00:07:23:10 जाकर के देके आए तो वो सारी चीजें देखनी पड़ी हमें परंतु प्रशंसा मतलब हर्ष की बात यह है और शुभ सूचना यह है कि वो दस्ती नोटिस जो प्राप्त कराना था रिसीव कराना था जेलर को वो करा दिया गया है। ठीक है? यह आप सबके लिए शुभ शुभ सूचना है और इससे संबंधित दूसरी जो सामग्री है वो भी हम जल्दी निर्गत कर देंगे। फिलहाल आ जाते हैं पॉइंट पर। तो पहला पॉइंट था कि आपका आभार जो आपने इस तरह की पहल की है और दूसरा है कि भाई मैं क्षमा प्रार्थी हूं जो यथा समय अपना उत्तर अपनी प्रतिक्रिया आपको नहीं दे पाया और आज ठीक एक दिन पहले वो भी रात में दे रहा हूं और अभी आने से पहले भी मैं कुछ कार्यवाही कर रहा था तो उसमें भी जो 9 बजे का समय दिया था मैंने खुद स्वयं से उसमें भी मुझे 9:30 बज गए। बस ऐसा करते समय मैं अपनी व्यवस्था ही देखता हूं कि पौष्ट का जो सामर्थ का दोष होता है पौष्ट का दोष होता है कि उसमें कहीं ना कहीं कोई ना कोई गलतियां होती हैं कमियां होती हैं जिनको मैं स्वीकार करते हुए अपनी बात को रख रहा हूं अब बात ऐसी है कि आपने पत्र मुझे भेजा आमंत्रण भेजा बहुत बहुत आभार बहुत ही अच्छी बात है आपने पहल की परंतु कुछ बातें ऐसी हैं जो मुझे बाध्य कर रही हैं करेंगी इस चर्चा से ना जुड़ने के लिए वो बातें कौन सी
00:08:38:12 है? पहली बात है कि ब्लैकिस्टेड कुछ लोग हैं जो इसमें सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। जैसे कि जो ऋषिवाद चैनल चलता था जिसको अब वो किसी और नाम से चलाता है और उस व्यक्ति का नाम बताया जाता है कृतेश पटेल। वह कृतेश पटेल आपके द्वारा भेजे गए पत्र में संयोजक के रूप में उसका नाम लिखा हुआ है। कृतेश पटेल ने अपने पूर्व के जीवन में क्या-क्या कर रखा है यह आपको भलीभांति ज्ञात है। भगवत आदि शंकराचार्य जी के लिए हमारे करपात्री जी महाराज के लिए जो हमारे लिए परिणम में लोग हैं। उन सबके लिए उसने गालियां तक दी है। वो भी अश्लील गालियां। उनके सब tिटर के जो स्क्रीनशॉट वगैरह है वह सब मेरे पास पड़े हुए हैं और कई सारे झूठे आरोप तू तड़ाक की भाषा ये सब उसने किया है। मेरी जानकारी में मैंने ऐसे किसी भी व्यक्ति के साथ जो कि वास्तविकता में सीधे तौर पर अ या तो उसने मेरे साथ व्यक्तिगत रूप से कोई इस तरह का वाद संवाद नहीं किया या फिर वो व्यक्तिगत तौर पर ऑफिशियली सम्मानित भूमिका में आर्य समाज से जुड़ा हुआ है। तो ऐसे किसी व्यक्ति के साथ मैंने कभी भी कोई आपत्तिजनक भाषा शैली का उपयोग नहीं किया मेरी जानकारी में।
00:09:53:13 मगर इस व्यक्ति ने किया है जो सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और संयोजक के रूप में जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही साथ एक आर्यवीरा नाम की लड़की जुड़ी हुई है। जिसने बहुत सारा प्रलाप किया था। वह अतिथि है यहां पर आपके कार्यक्रम में जिसने मेरे ही नहीं मेरे ऊपर व्यक्तिगत कटाक्ष तो दूर की बात है। उसने तो कहीं से जो भूली बिरी पुराने जीवन की कुछ तस्वीरें थी वो निकाल के अपने पास संग्रहित की। फिर तमाम आज आपके यहां से जुड़े हुए आपका नाम लेकर के अपने काम करने वाले लोगों को बुलाया। युवाओं को इकट्ठा किया और वहां पर बैठकर के हंसी ठट्टा हो रहा है। मेरे घर की मातृशक्ति को लेकर के वहां पर फोटो दिखा के हंसी ठट्टा कर रहे हैं। वो उल्टे सीधे बयानबाजी कर रहे हैं। वहां ठाके लगाए जा रहे हैं। बहुत आपत्तिजनक बहुत अभद्र भाषा में मतलब वहां पर बातें हुई। बहुत सारी चीजें हुई। हालांकि उसको लेकर के लीगल प्रोसीडिंग की जा सकती थी और मैं करने की इच्छा रखता था। परंतु बात यह होती है ना कि दो सही रास्तों में से मैंने कई बार इस सिद्धांत का आप लोगों के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया है कि कई बार हमें निर्णय लेना पड़ता है कि इन दोनों में से किसको चुने हम रामपाल को देखें जिसने हमारी दुर्गा मां के लिए बलात्कार तक की बात कह दी गाली दी या हम इसको देखें जिसने
00:11:08:14 मुझको गाली दी तो हमने वहां पर स्वयं की चीज को पीछे किया और रामपाल इत्यादि जैसी चीजों को आगे किया यह बात ठस बुद्धि जो कुछ ऐसे लोग हैं जो हमसे सदैव पूछा करते हैं। तुमने इसको जवाब क्यों नहीं दिया? उसको जवाब क्यों नहीं दिया? उन ठस बुद्धियों को समझ में नहीं आती है कि हमने किसको क्यों जवाब दिया? प्राथमिकता क्यों दिखाई किसी की। तो आर्य वीरा ने जो वीडियो बनाया था मैंने देखा है वह उसके चैनल पर अब नहीं पड़ा हुआ है। परंतु मुझे अभी तक कोई ना ही आर्य वीरा की ओर से ना ही कृतेश पटेल की ओर से कोई ऐसी कोई क्षमा याचना या क्षमा के भाव व्यक्त करते हुए कुछ पंक्त कुछ भी ऐसा कुछ प्राप्त नहीं हुआ बल्कि एक ढोंग और किया था कृतेश पटेल ने जाकर के वो ढोंग भी इसीलिए था कि किसी तरीके से जो है वो जो छटपटा रहा था किसी तरीके से जो उसको उत्तर नहीं मिल रहे थे देने के लिए मुझे तो वो छ किसी भी कारण से वो छटपटा रहा था तो उस कारण से वह वहां तक चला जो हमारी ज्योतिष पीठ है शंकराचार्य जी की ज्योतिष पीठ नहीं द्वारका पीठ और वहां जाकर के उसने जो है एक अपनी बातें ना बताते हुए एक उनको अंधेरे में रखते हुए वहां के जो क्या कहते हैं महाराज जी हैं उनको अंधेरे में रखते हुए अपनी बातें कही और फिर उनसे एक अपनी उसमें समर्थन में सहमति पत्र प्राप्त कर लिया। उनको मालूम ही नहीं इस व्यक्ति
00:12:23:15 ने किया क्या क्या है। आदि शंकराचार्य जी के लिए क्या कहा है। पुराणों को मानने वालों के लिए क्या कहा है? करपात्री जी महाराज के लिए क्या है? हमारे पूर्वाचार्यों के लिए क्या कहा है? यहां तक कि शंगेरी पीठ के लिए क्या कहा है? उसी की वेबसाइट से उठा के उल्टी सीधी जानकारियां प्रस्तुत करते हुए आधी अधूरी और अपने अपनी उसने बातें झोंकी है। खैर अगर उस तो ये मेरी हिसाब से कोई माफी नहीं है। ठीक है? और कृतेश पटेल से व्यक्तिगत रूप से भी मेरा सीधे-सीधे वहां पर टकराव है। जब मैंने प्रथम बार प्रथम एक चर्चा हुई थी। रायपुर आर्य समाज का मंदिर था। वहां के जो पुरोहित थे सूरज आर्य उनके साथ मेरी चर्चा हुई। परंपरा विषयक मैंने सवाल पूछे। उनके पास उत्तर नहीं थे। वह मैंने अपलोड किया। उसमें कहीं भी ऐसी कोई अभद्र भाषा शैली का उपयोग पूरे वीडियो में आपको नहीं मिलेगा। अभी भी आप जाकर के देख सकते हैं। इस वीडियो के निर्गत होने के बाद मुझे प्रतिक्रिया मिलनी प्राप्त हुई। कि तुम्हारा क्या मूत्र निकल जाए, मूत्र निकल जाए। इस तरह मतलब वो बोलने में थोड़ा असहज होता है ये सब चीजें। तो इस तरह की भाषा में मुझे चीजें प्राप्त होने लगी। किसकी ओर से? सो कॉल्ड आर्य समाज। मुझे नहीं लगता कि ऑफिशली जुड़े होंगे। मतलब स्वयं को
00:13:38:19 आर्य समाज समझते हैं उस उन लोगों की ओर से जो नवयुवक होते। अब जब वो जब वो प्रतिक्रिया प्राप्त होने लगी तो मैंने भी उनको कहा कि भैया बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो प्रत्यक्ष वार्ता कर लो आके। अब क्या होता है कि वो लोग आगे किसको करते हैं? प्रत्यक्ष वार्ता करने की बात आती है इसी कृतेश पटेल को। ठीक है? अब कृतेश पटेल आता है टेलीग्राम पर हमारी बात हो रही है उधर से कोई बात आ रही है हमें कहा जा रहा है हमारी कोई बात है उधर पहुंचाई जा रही है तो उधर से कोई एक चर्चा के निमित्त नियम बनाने हेतु एक प्रस्ताव रखा जाता है जिससे हम असहमत है असहमत हम इसलिए नहीं है कि ये नियम केवल मुझ पर लागू नहीं होगा इसलिए भी है कि यह नियम तुम पर भी लागू नहीं होगा मगर कोई नियम था जिसको लेकर के मेरी और कृतेश पटेल की असहमति हो गई ठीक है भाई हो गई कोई बात नहीं अब जब उस असहमति असहमति के कारण मैंने कहा कि भाई यह जो आप नियम लागू कर रहे अभी तक आपने जो नियम बताया स्वीकार रहे हैं। मगर अब जो आप नियम ये वाला बता रहे हो ये मुझे अस्वीकार रहे हैं। जब मैंने ये कहा तो कृतेश पटेल यानी कि उस समय उसके चैनल का नाम ऋषिवाज था। तो ऋषिवाज की ओर से जब एक दो बार मैंने ऐसा कहा तो उससे वो जो एक होता है ना धर्म को धारण करना होता है और विपरीत परिस्थितियों में भी धारण करना होता है। तो वो उससे नहीं हुआ। वो तुरंत आगे आ रहे एक एक मिनट की रील बना के
00:14:53:22 पैसा कमाने वाला एक एक रुपया चंदा इकटठा करने वाला और जो है तेरी परंपरा के हम छितड़ उड़ाएंगे आज जो है इससे डर गया उससे डर गया ये सब बातें उसने अभद्र मतलब अभी जैसे आपने मुझे पत्र दिया है और मैं यदि आपको तर्क पूर्ण बात करना कोई उत्तर दे दूं कि इसलिए ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए और आप इसी पत्र में अभी ये सब लिखने लगे कि भैया एक एक मिनट की रील बना करके और ये करने वाला और एक पैसे कमाने वाला यह करने लगा तू तड़ाक पे आ जाए तो फिर वो चर्चा नहीं हो पाएगी जो जिस जिस चर्चा की आप बात करें आपने ऐसा नहीं कहा है परंतु जो आपका कृतेश पटेल है उसने यही किया था कि कल हम तेरी परंपरा के चीथड़े उड़ाएंगे मैंने तो अभी तक देखे नहीं कहां चीतड़े उड़े है ना यद्यपि उसका जो पक्ष है उसके चीथड़े तारतार कर दिए हैं आज अभी से मैं आप लोगों को बता दे रहा हूं जो लोग सुन रहे हैं थोड़े दिनों बाद बच्चा-बच्चा पूछेगा क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है? ये ध्यान रखो। क्रांति आ चुकी है। लोग पूछेंगे तुम्हारी परंपरा क्या है? वेद का अर्थ तुम्हें कहां से प्राप्त हुआ? तो चितड़े किसने उड़ाए हैं? ये इन चीजों से पता लगता है। आज मैं जाकर के देखता हूं ना जब विरोधियों के वीडियोस उसमें मुझे कमेंट सेक्शन में दिखता है
00:16:09:01 कि वहां पर बिल्कुल नई उम्र के युवा बिल्कुल किशोरावस्था वाले वहां पूछ रहे हैं। तुम्हारी परंपरा क्या है? तुम्हारे दो तीन पीढ़ी पीछे के गुरुओं के नाम क्या है? कैसे आए वेद तुम तक? यह पूछा जा रहा है। अभी यह और पूछा जाएगा और जितना ये पूछा जाएगा उतना ही व्यक्ति अपनी परंपराओं को जानने लगेगा। प्रामाणिक परंपराओं को जानने लगेगा और ईश्वर सर्वशक्तिमान ईश्वर को जानने लगेगा। यही मेरे जीवन का उद्देश्य है। इसी के आधार पर हम एकत्रित होते हुए संगठित होते हुए उन विधर्मियों से लड़ सकते हैं जो हमारे वेदों को नष्ट कर देना चाहते हैं। इसी के आधार पे ये सर्वशक्तिमान ईश्वर और ये परंपरा ही हमें एक कर सकती है। कुछ नहीं कर सकता। अपने मनमुखी तरीके से हम जब तक नियम लागू करते रहेंगे उसका विरोध करने वाला कोई ना कोई होता रहेगा। हमें चाहिए अकाट्य सिद्धांत। तो परंपरा के चीथड़े किसने उड़ाए वो उससे होता है। बैक टू द पॉइंट। तो पॉइंट क्या है कि कृतेश पटेल ने व्यक्तिगत रूप से बातचीत होते हुए उसने आदि शंकराचार्य जी कृपात्री जी महाराज हमारे पूर्वाचार्य बहुत सारी चीजें कर रखी है ऐसी जिसके कारण उसके साथ किसी भी प्रकार से सौहार्द पूर्वक सौहार्द पूर्वक मंच साझा नहीं किया जा सकता है। ठीक है? तो वह इससे सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। मेरे डायरेक्टली मेरे पर मेरी फैमिली पर जो है कटाक्ष
00:17:24:16 पूर्वक बात करने वाली जो आर्यवीरा है वो इससे सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। वो वहां अतिथि होकर आएगी। भाई मेरे हिसाब से तो ये लोग सम्मान के योग्य नहीं है। परंतु मैं ऐसी जगह जाऊंगा जहां उसको सम्मान दिया जा रहा है। मैं उस मंच को साझा करूंगा। तो जहां पर इनको सम्मान दिया जा रहा है। तो यद्यपि ये लोग दोबले हो सकते हैं। क्योंकि भाई जहां पर धर्म का बोध नहीं होता है। जब परम स्वतंत्र सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं, परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं और शाश्वत धर्म नहीं तो वहां पर क्या होता है? सिद्धांतों के प्रति व्यक्ति निष्ठावान नहीं रह पाता है। तो सिद्धांतों के प्रति निष्ठावान नहीं है तो अपनी चीजों के साथ समझौता करते रहते हैं। तो क्या समझौता है कि जो व्यक्ति इनके लिए अमुक था इतनी सारी संज्ञा दे डाली थी सारे वीरा ने हां वो अब तैयार हो गए कि जहां पर शिवश नारायण द्विवेदी को सम्मान मिलेगा वहां मैं भी जाऊंगी। या तो यह सम्मान है नहीं जो मुझे नहीं लगता कि सम्मान नहीं है। मैं नहीं मगर क्या आर्य वीरा भी यह मानती है कि सम्मान है? अगर सम्मान है तो वो कैसे तैयार हो रही है? उसके वीडियो को आप जाकर के देखिए। उसने क्या-क्या नहीं कहा? इसके वीडियोस को आप लोग जाकर के देखिए। कृतेश पटेल को क्या-क्या नहीं कहा। परंतु आज ये लोग तैयार क्यों है? इसका मतलब यह दोगले हैं। आवश्यकता अनुसार इनके सिद्धांत बदलते हैं। आवश्यकता अनुसार
00:18:39:20 शिवश नारायण द्विवेदी इनके लिए अमुक है। वो यह है वो लुच्चा है। वो ये है। मगर आवश्यकता अनुसार आदरणीय शिवश नारायण द्विवेदी हो गए। तो ऐसा दोगलापन आपके यहां अपेक्षित है। क्योंकि हमारे अनुसार भैया आपको धर्म का बोध नहीं है। तो यह व्यक्ति जो जुड़ा हुआ है सीधे तौर पर कृतेश पटेल और यह आर्यवीरा यह दोगले हो सकते हैं। हो सकता है कि इन्होंने वाल्मीकि रामायण की वो पंक्ति ना पढ़ी हो। रामो विग्रह धर्म रामो दभाषते मैंने बहुत ठूस ठूस के पढ़ी है। ये वाली पंक्ति बिल्कुल गुद चुकी है हृदय में। तो इसलिए मैं अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं कर सकता। तो सिद्धांत क्या है कि मैंने इन लोगों को ब्लैकिस्ट किया हुआ है। किसी भी प्रकार की चर्चा सौहार्द पूर्वक चर्चा से ब्लैक लिस्ट किया गया है। हां आर्या पार की चर्चा के लिए यदि कहीं सामना होगा जिसमें कि सिद्ध करना होगा कि तुम गलत हो तो मैं बिल्कुल उपस्थित हो जाऊंगा। और यही बात मैं यहां भी कह रहा हूं कि आप इस बारे में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि यह लोग क्यों जुड़े हुए हैं संयोजक और अतिथि के रूप में और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। यदि
00:19:54:28 आपको लगता है कि यह लोग दोषी हैं तो इन्हें बहिष्कृत करें। इस कार्यक्रम से अलग हटाएं और फिर अलग हटाते हुए अपनी बात को रखें। अगर आपकी जानकारी में इनकी गतिविधियां हैं और फिर भी यह आपसे जुड़े हुए हैं। अभी तक जुड़े हुए थे और आपको लगता है कि आपसे त्रुटि हुई है तो आप भी अपना जो क्षमा भाव है वो प्रस्तुत करते हुए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें और यदि आपको लगता है कि ये निर्दोष है। ऐसा नहीं है। पूरी बात होगी। यदि आपको लगता है कि निर्दोष नहीं है। आपको इनका कुछ पक्ष रखता है लगता है। जैसे आर्यवीरा कहने लगे कि हमने अभी अमुक स्त्री के जनेऊ की बात की थी। वो स्त्री पब्लिक फिगर थी और उसने अपने जनेऊ को पब्लिकली प्रस्तुत किया था। हमने उसकी प्राइवेट लाइफ लाइफ नहीं झांकी थी। उस स्त्री ने पब्लिकली अपनी उस चीज को प्रस्तुत किया था। जिस चीज पे हमने बहन कहते हुए कटाक्ष किया था। बहन कहते हुए कोई अश्लील भाषा कोई मर्यादा का उल्लंघन नहीं कर दिया था। कोई इस पर जो है अनैतिक संबंध इत्यादि के आरोप नहीं लगा दिए थे। ठीक है? परंतु आपने हमारी सबसे पहले तो उन चीजों को वो किया पब्लिक किया जो चीजें हमारी निजी थी जिनको
00:21:10:00 हम पब्लिक स्वयं से करते ही नहीं है। वो कहीं भूली बिसरी छूटी रह गई थी। आप लोग भैया अपने आप को बहुत खिलाड़ी समझने लगे कि भैया हमको सोशल मीडिया से कुछ ये मिल गया वो मिल गया। अब हम जंग जीत लेंगे। अब हम परंपरा को तोड़ देंगे। मतलब कि ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं कर पा रहे तो आप जो व्यक्ति ये प्रश्न पूछ रहा है उसके परिवार की फोटो निकाल के लाओगे। यही तो है। यदि आपको आपकी परंपरा पूछी जा रही है वो सामने वाला पूछ रहा है कि आपकी परंपरा क्या है? किस परंपरा से ज्ञान प्राप्त हुआ है? तो उसका जवाब आपके पास अगर नहीं है तो आप उसको उस व्यक्ति जिसने प्रश्न किया उसके पर्सनल लाइफ में उसके सात साल पहले की पांच साल पहले की फोटो निकाल के दिखाओगे। देखो देखो देखो इससे क्या हो गया? मेरे गलत हो जाने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता। ठीक है? तो
00:22:00:07 अगर आपको लगता है कि यह दोषी नहीं है और आपके पास उसके लिए कुछ तर्क है, कुछ युक्तियां है, कुछ प्रमाण है तो आप यह जो आप चर्चा सुनिश्चित करने वाले हैं, इससे पहले एक चर्चा करें और इनको निर्दोष सिद्ध करें। ठीक है? इन लोगों से बात नहीं होगी। आपसे बात होंगी जो इनकी ओर से यह कहेंगे कि यह लोग निर्दोष है और यह जो चर्चा है इनको निर्दोष सिद्ध करने के निमित्त है ना दोषी अथवा निर्दोष इस संबंध में जो चर्चा है वो आप अपने किसी प्लेटफार्म पर रख सकते हैं परंतु वो कोई प्रतिष्ठित प्लेटफार्म होना चाहिए जैसे कि इसमें आपके योगेश भारद्वाज जी आ रहे हैं या आपके जो विवेकानंद जी हैं वहां वाले गुजरात वाले तो ये इस तरह के महानुभाव या फिर आपका आर्य समाज आज का सीधे-सीधे अपना जो चैनल है इन चैनल्स पर आप ऑनलाइन एक चर्चा कर सकते हैं। सौहार्द पूर्वक चर्चा आपके साथ के ये निर्दोष है अथवा नहीं है इस संबंध में। ठीक है? आपका कोई व्यक्ति आकर के बात कर सकता है। ठीक है? तो ये हो गया पहला खंड ब्लैकिस्टेड। लोग क्यों जुड़े हुए हैं? दूसरा खंड है त्रया चरित्र या षड्यंत्र। दूसरा खंड क्या है? त्रया चरित्र या षड्यंत्र। अब इसमें क्या है? आपके इस पत्र में जो लोग संयोजक, सहसंयोजक,
00:23:15:10 अतिथि इत्यादि के रूप में प्रकट किए गए हैं। यह लोग सीधे-सीधे घोषणा कर चुके हैं कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं। और आपका कहना है कि क्या कहते हैं? हमारे आर्य समाजी विद्वानों से बात होगी। ऋषिवाच अपने चैनल में कह चुका है। कृतेश पटेल कह चुका है कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं। मोहित गड ये दावा करता है मैं आर्य समाजी नहीं हूं। आर्यवीराय दावा करती है अपने हर दूसरे वीडियो में आर्य समाजी नहीं हूं तो फिर आर्य समाजियों के रूप में वहां खड़े क्यों मिल रहे हैं? चलो आर्यवीरा तो अतिथि है। अंकुर आर्य भी यही दावा करता है। यद्यपि सब जानते हैं वो आर्य समाजी है। पर भैया यदि ये आर्य समाजी है तो ये लोग आर्य समाजी ना होने की बात क्यों कह रहे हैं? और यदि ये ऐसी बातें कह रहे हैं तो ये दोगले सिद्ध हो रहे हैं। फिर ऐसे दोगले लोगों के साथ एक प्रतिष्ठित आप तो अपने आप को प्रतिष्ठित कहते हैं ना। फिर प्रतिष्ठावान जो समूह है, संस्था है या जो भी है, संगठन इत्यादि है वह कैसे जुड़ा हुआ है? अगर जुड़ा हुआ है तो फिर वो उसका वो हो जाता है जिम्मेदार कि आप इसका उत्तर दीजिए कि भैया ये क्यों कह रहे हैं आर्य समाजी नहीं है ये और अगर आर्य समाजी नहीं है फिर इनका नाम संयोजक सहसंयोजक के रूप में क्यों लिखा गया है? तो यह एक बात आती है
00:24:30:28 कि भैया जब आर्य वीरा आर्य समाजी नहीं है। अंकुर आर्य आर्य समाजी नहीं है। मोहित गड आर्य समाजी नहीं है। ऋषि वाच आर्य समाजी नहीं है। तो फिर इनका जो वो खुद क्लेम कर रहे हैं कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं। हम तो फिर इनका नाम वहां पर संयोजक सहस संयोजक के रूप में आर्य समाजी के रूप में क्यों प्रकट किया गया है? क्यों जुड़े हुए हैं आर्य समाजी होते हुए? और इनसे ही चर्चा होने वाली है। भाई यह आर्य समाजी है नहीं तो इनसे चर्चा होगी। आपने कहा आर्य समाजी विद्वान से चर्चा होगी तो वो कौन से विद्वान होंगे फिर? क्योंकि मुझे तो ऐसा ही लग रहा है कि इनमें से किसी एक से चर्चा होनी है। तो फिर पहले आप इसकी स्थिति को स्पष्ट करें कि आर्य समाजी है कि नहीं? और इसमें एक बहुत रोचक बात और है। रोचक बात क्या है? कि हमको सर्वप्रथम आर्य समाज की ओर से जो पत्र प्राप्त हुआ था उस पत्र में कहा गया था ऐसे ही इसी तरीके से चर्चा या शास्त्रार्थ की चुनौती के रूप में वो दिया गया था शास्त्रार्थ की चुनौती तो हमने उस पत्र में जब उस पत्र को लिखने वाले से जब बात की थी फोन पर तो उसने फोन पर हमें बताया था कि हां जो ऋषि वाच नाम का चैनल है उसको उसके जो वो है संचालक वो है कृतेश पटेल और वो हमारी संस्था से आधिकारिक रूप से जुड़े हुए तो जब हमें यह पता पता
00:25:46:02 लगा तो हमने पत्र के माध्यम से लिखा कि भाई यही बात कही कि कृतेश पटेल आपसे जुड़ा हुआ है तो पहले आप उससे और उसकी ओर से स्वयं के द्वारा क्षमा याचना करिए और उसके बाद हम जो है आपसे चर्चा करते हैं। तो वहां से पत्र में लिखित तौर पर आया क्या कि कृतेश पटेल को हम नहीं जानते और ऋषिवास नाम को हम नहीं जानते। हमारा उससे कोई संबंध नहीं। ये सब उस पत्र में लिखा हुआ हमारे पास आज भी है। हमने वो क्या किया कि हमने वो जानकारी पत्र सहित वीडियो के रूप में निर्गत कर दी जिसको ऑडियो उसमें नाम इत्यादि सब थे तो मेरे ख्याल से YouTube द्वारा हटा दिया गया। हम
00:26:24:21 वो वीडियो तो डिलीट हो गया परंतु यहां पर एक बात साफ नजर आ रही है कि पहले आर्य समाज ये कहता है कि हम कृतेश पटेल से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं जो आज के इस पत्र में भी दिखाई दे रहा है। मगर आपत्ति प्रकट करने पर कृतेश पटेल से संबंधित आर्य समाज फिर ये कहता है कि भैया हम कृतेश पटेल से नहीं जुड़े हुए हैं। हम ऋषिवास से नहीं जुड़े हुए हैं। तो इसको षड्यंत्र के रूप में क्यों ना देखा जाए कि एक षड्यंत्र है। इस तरीके से दोगला नेचर दिखाई दे रहा है। पहले है फिर नहीं है फिर है। तो यह क्या है? स्वयं भी वह कह रहा है कि मैं नहीं हूं आर्य समाज तो ये स्थिति आप स्पष्ट करें। सबसे पहले इन लोगों के साथ आर्य समाज के संबंध को स्थिति को स्पष्ट करें और यदि यह झूठे हैं तो इन्हें बहिष्कृत करें। यदि बहिष्कृत नहीं करते हैं तो फिर यह झूठे नहीं है यह सिद्ध करने के लिए एक हमसे चर्चा करें। यह चर्चा भी आप ऑनलाइन वही पहले वाले उसकी तरह आप ऑनलाइन आयोजित कर सकते हैं। अपने किसी चैनल पर कर सकते हैं। यह जो मैं आपके अपने चैनल पर परंतु प्रतिष्ठित आपके चैनल पर करने की बात कर रहा हूं वो इसलिए कह रहा कर रहा हूं क्योंकि आपकी ओर से एक अच्छी पहल क्या कहते हैं की गई है मुझे पत्र भेज के। तो मैं आपके चैनलों पर आने के लिए भी तैयार हूं। परंतु
00:27:39:22 वो प्रतिष्ठित होने चाहिए। ऑफिशियली स्वीकार्य होने चाहिए आर्य समाज की ओर से। ठीक है? वहां पर यह चर्चा हो जाएगी कि भाई इस संबंध में यह लोग निर्दोष है या नहीं है इनको यह दोगलापन है कि नहीं त्रया चरित्र है कि नहीं और आप भी अपना अगर ये आप इनको दोषी मानते हैं तो बहिष्कृत करें अथवा इनसे क्षमा इस संबंध में भी क्षमा कर क्षमा के लिए क्षमा के भाव प्रस्तुत करवाए जाए और स्वयं से भी क्षमा के भाव प्रस्तुत किए जाए कि ऐसे व्यक्ति हमारी जानकारी में नहीं था और ऐसा व्यक्ति हमसे जुड़ा हुआ था जो यह कहता है कि आर्य समाज ही नहीं है उसको हम आर्य समाज के रूप प्रस्तुत करते हैं तो आप क्षमा भाव प्रकट करें। जैसे विलंब से प्रतिक्रिया देने के स्वरूप में मैंने भी आते ही सबसे पहले क्षमा के भाव प्रस्तुत किए। ठीक है? अच्छा
00:28:29:03 अब बात यह आती है कि यह भी स्पष्ट करें कि अगर ये लोग नहीं है आर्य समाजी नहीं है संबंध में ही आप अपने स्पष्टीकरण देते हैं। मोहित गौर भी आर्य समाजी नहीं है। तो आप मुझे बताएं वो कौन से विद्वान है जिसके साथ मेरी चर्चा हो सकती है। यह स्पष्ट करें जिनके साथ मेरी चर्चा होगी या हो सकती है। आर्य समाजी के साथ होगी अथवा फाड़े के समाजी के साथ क्योंकि ये लोग तो खुद को कह रहे हैं कि मैं आर्य समाजी हूं नहीं और फिर ये आर्य समाज के कार्यक्रम में संयोजक और सहसंयोजक बन के घूम रहे हैं। आर्य समाजी के रूप में प्रकट हो रहे हैं। तो इनको आर्य समाजी तो माना नहीं जा सकता उस स्थिति में। तो क्या माना जाए? भाड़े का समाजी। तो ये बात आ जाती है। अच्छा निर्दोष हो तो आप चर्चा कर सकते हैं। अब एक बात आती है कि यद्यपि जो मोहित गौर है वो क्योंकि सीधे तौर पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने मैंने वो वीडियो आज तक पूरा नहीं देखा है। वो जो आर्य वीरा ने बनाया था। बस शुरू में ही मैंने देखा था मेरी धर्मपत्नी और पता नहीं मेरे छोटे भाई उसकी भी जो पर्सनल लाइफ है उससे जुड़ी हुई चीजें वहां पर डाल करके हंसी ठट्टा किया गया था तीन-चार घंटे। मैंने वो सुना नहीं है। मेरी जानकारी में मोहित गौर ने सीधे-सीधे व्यक्तिगत कटाक्ष मुझ पर नहीं किए। एक बात ये हो गई। दूसरी बात ये हो गई कि मोहित गड ने बाद में जो है ये भी स्वीकार किया था जो एक मध्यस्थ
00:29:44:12 की बात आई थी जब जो आर्य समाज वाले जो आचार्य प्रशांत थे उन्होंने अपने चैनल पर निर्गत किया था कि मोहित गड और शिवश नारायण द्विवेदी यहां पर मेरे सामने आकर के चर्चा कर ले। तो उस संबंध में हमने जब मोहित ग के लिए आपत्ति जताई थी कि मोहित गौर ने ऐसासा किया तो पहले वो क्षमा मांगे तो मुझे उधर से जवाब आया था वो अनऑफिशियली जवाब आया था कि मोहित गौर का ये कहना है कि वो चर्चा के समय क्षमा मांग लेगा तो इस कारण से कि उसने कम से कम क्षमा का भाव मांगना मांगा नहीं मांगने के लिए उसको स्वीकार किया और सीधे तौर पर उसने कोई व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया यद्यपि उस चर्चा से जरूर जुड़ा हुआ था आरवीरा वाली इसके साथ ही साथ एक बहुत ब्लैकिस्टेड वाला एक समय होता है कि भाई काफी दिनों से हमने कह रखा है कि भैया हम इससे चर्चा नहीं मंच साझा नहीं करना है तो उस कारण से हम इन तीन चीजों के चलते मोहित गड के साथ तब भी चर्चा करने के लिए तैयार है ना हां वो बात अलग है वो दोगला है तो उस बारे में आपका स्पष्टीकरण आएगा मगर फिर भी ब्लैक लिस्टेड है और प्रतेश पटेल कोई माफी नहीं मांग रहा है कुछ नहीं कर रहा है उसको क्या कहते हैं बहिष्कृत कर दिया गया या आर्य मीरा को बहिष्कृत कर कर दिया गया मगर मोहित गौर के लिए हम यह बात नहीं चाहते हैं कि वो मतलब क्षमा याचना ही करें अथवा उसको बहिष्कृत ही
00:30:59:15 किया जाए तभी हम जो है उससे चर्चा करेंगे अथवा आपके कार्यक्रम में आएंगे। तो मोहित गड एक व्यक्ति इस ब्लैक लिस्ट से ऐसा है जो निकल के बाहर आ जाता है जिससे हम चर्चा कर सकते हैं। अब इसमें एक अगला भाग है कि शास्त्रार्थ से बहाने बनाकर शास्त्रार्थ तो इसको नाम ना दिया जाए। चर्चा चर्चा जो धर्म और अधर्म विषयक जो चर्चा है उससे बहाने बना के दूर होने की बात को हम सहमति नहीं देते उसका समर्थन नहीं करते हैं। ऐसी भी प्रतिक्रिया आई है कि भाई हम आपको जिस आपने सौहार्दपूर्ण तरीके से चर्चा करने का प्रस्ताव रखा जो कि बहुत प्रशंसनीय कार्य है। परंतु
00:31:44:24 किसी कहीं से आपको यह जवाब दिया गया कि जो है आप मेरे अनुसार जो है आप जो है चर्चा के नहीं दंड के पात्र हैं। तो ये इस बात का मैं समर्थन नहीं करता हूं क्योंकि जो ये चर्चा है या जो शास्त्रार्थ है यह होता ही दो ऐसे लोगों के बीच में है जो किसी ना किसी विषय लेख को लेकर के असहमति है कि यह ऐसा है कि नहीं है और वो ऐसा है। इसी बात के लिए चर्चा है जिससे सिद्ध हो सके कि हां यह वाला यह कह रहा है कि यह ऐसा है अथवा यह वाला यह कह रहा है यह ऐसा है तो दोनों में से किसी एक की बात सिद्ध हो सके तो चर्चा या जो शास्त्रार्थ इसको कहेंगे तो वो है ही इसीलिए कि वो सिद्ध हो सके कोई एक किसी एक का पक्ष तो हम ये कहते हुए दूरी बना ले कि भैया जो है सामने वाला जो है मेरी नजरों में अवैदिक है या धर्म से हीन है या धर्माचरण नहीं धर्म का आचरण करने वाला नहीं है तो मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। यह अगर कारण दिया गया है चर्चा से दूर हटने का तो मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं। तो मैंने पीएन मिश्र वाले विषय में भी यही कहा था कि भाई तुम्हारा जब सिद्धांत इतना मजबूत है तो डर किस बात का जाकर के सामना करो और सामने करके सिद्ध कर दो ये वाली बात पीछे हटने की क्या आवश्यकता है क्योंकि उस मामले में मैंने ऐसा इसलिए
00:33:00:04 भी कहा था क्योंकि मैं जानता था कि उस मामले में भागवतानंद पीएन मिश्र से चर्चा करने क्यों नहीं जा रहा है क्योंकि कहीं ना कहीं वो अपने संबंधों की रक्षा कर रहा था जो संबंध उसके कहां से थे जित से तो वो इन सब बातों के चलते वो भी वही कार्य कर रहा था। जिन बातों को लेकर के वो दूसरों पर कटाक्ष किया करता है। तो इस कारण से मैंने यह बात तब भी रखी थी कि जो तुम ये कारण दे रहे हो कि सामने वाला गलत है इसलिए मैं उससे चर्चा कर भाई चर्चा हो ही इसलिए रही है कि तुम सामने वाले को गलत सिद्ध कर सकूं। तो उसमें सामने वाला गलत है इसलिए तुम उससे चर्चा नहीं करोगे। ये कहां का सिद्धांत है? अच्छा सामने वाला गलत नहीं है तो क्या चर्चा उससे होगी जो सही है? क्या शास्त्रार्थ उन दोनों पक्ष में होगा? हमारा उससे शास्त्रार्थ होगा जो हमारे अनुसार धर्म सम्मत है जो हमारे अनुसार धर्मज्ञ है क्या उससे शास्त्रार्थ होगा तो ये सरासर एक तर्कहीन बात है असंगत बात है मतलब इसका कोई सर है ना पैर है कि भैया तुम गलत हो इसलिए मैं तुमसे चर्चा नहीं करूंगा और क्या धर्म को मानने वालों के साथ ही चर्चा होती है अच्छा भगवत आदि शंकराचार्य जी ने वेद विरोधी नास्तिकों तक से चर्चा की थी शास्त्रार्थ किया था तो वो वो क्या इनसे ठीक थे? है ना? तो कम से कम वेद को प्रमाण्य
00:34:15:25 बुद्धि के रूप में कहने वाले कम से कम तो है ना आर्य समाज हमारे अनुसार की बात कर रहा हूं। कहने वाले तो है तो फिर भगवत आर शंकराचार्य जी ने बौद्धों से शास्त्रार्थ करके नास्तिकों से शास्त्रार्थ करके तुम्हारे अनुसार जो व्यक्ति ये कह रहा है उसके अनुसार गलत किया था। तो मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। इस तरीके से क्या कहते हैं जो अगर हमें अपने मत को सिद्ध करना है तो क्यों सिद्ध करना है जिससे कि जो धर्म को नहीं जानता है नहीं मानता है वो धर्म को जानने लगे मानने लगे तो ये कहना कि जो धर्म को नहीं जानता नहीं मानता मैं उसे धर्म के बारे में बताऊंगा ही नहीं अपने पक्ष को जाकर सिद्ध करूंगा ही नहीं ये कहां का न्याय है भाई हम धर्म की बात उसी को तो बताएंगे सबसे ज्यादा प्राथमिकता से जो धर्म जो धर्म को नहीं जानता है जो धर्म से अनविज्ञ है तो तुम चर्चा से आपको दूर नहीं होना चाहिए था यह कहते हुए कि भैया तुम धर्म को नहीं जानते हो इसलिए हम तुमको नहीं धर्म को जनवाएंगे नहीं। ठीक है? तो आपको जनवाना चाहिए और सबसे बड़ी बात है कि अगर आप सामने वाले को सही नहीं भी कर पाए तो उससे जुड़े हुए बहुत से लोग हैं जो उस चर्चा को सुनेंगे उससे प्रभावित होंगे और आपकी ओर वो अपने कदम बढ़ाएंगे। तो इस चीज का हम समर्थन नहीं करते। यह कहते हुए
00:35:30:26 चर्चा से दूर हटना कि भैया जो सामने वाला भेद विरोधी है इसलिए हम वो वर्ण व्यवस्था को नहीं मानता इसलिए हम चर्चा नहीं करेंगे। वो भेद विरोधी है इसलिए हम चर्चा को नहीं करेंगे या वो अपने गुरु की बात नहीं मानता इसलिए हम चर्चा नहीं। ये सब बातें आपको चर्चा में सिद्ध करनी है जाकर। तो आप अपना डिक्लेअ कैसे कर रहे हो? आपको चर्चा का शास्त्रार्थ का मतलब ही है कि तुम्हें अपने पक्ष को जो विरोधी जो तुम्हारा विपक्षी है उसके विपक्ष में तुम्हें ये सब बातें जो तुम क्लेम कर रहे हो इनको सिद्ध करना है और वो वहां प्रोटेक्ट करेगा कि नहीं तुम जो कह रहे हो वो गलत कह रहे हो फिर शास्त्रार्थ का अर्थ क्या है शास्त्रार्थ के दिखावे के लिए ही होता है कि दो लोगों के बीच में गेम होना है उसके लिए ही शास्त्रार्थ होना है नहीं भाई जो वास्तविकता में ये भी कह रहा है कि ये वेद विरोधी है ये भी कह रहा है कि वेद विरोधी दोनों कह रहे हैं कि हम वेद सम्मत है तो इन लोगों के बीच में शास्त्रार्थ होता है तय करने के लिए कि वास्तविकता में कौन वेद विरोधी है कौन वेद सम्मत है अब तुम सामने वाले को कह रहे हो तुम वेद विरोधी इसलिए हम शास्त्र नहीं शास्त्रार्थ का अस्तित्व क्या रहा ये सोचने वाली बात है तो कुल मिलाकर के ये पूर्णतया अनुचित है ये कहते हुए दूर होना कि जो है शास्त्रार्थ जो है उसके साथ नहीं किया जाएगा जो ऐसा है वर्ण व्यवस्था को नहीं मानता है और बहुत सारी ऐसी बातें भी कही
00:36:46:02 गई है भागवत के द्वारा हर समाज वाले पत्र में जो कि अनावश्यक थी। जब सीधे-सीधे आमंत्रित किया गया था तो उससे रिलेट जाना है कि नहीं जाना है वाली बात पर बात करनी थी। नहीं जाना है उसके संबंध में भी पक्ष हो सकता है। ऐसा नहीं पर ये वाला पक्ष गलत है और इसके अलावा जो अनलगल बहुत सारा लंबा एक पत्र लिखा गया। बहुत सारे जो आरोप थे वो लिखे गए। अगर आर्य समाज चाहता तो वो भी ऐसे ही आरोप उसके अनुसार जो आरोप है वो है कि नहीं है वो अलग बात है। परंतु वो भी अपने आरोप लगा के भेजता। तो तुम्हें फिर मुझे लगता है कि तुम फिर उस पत्र का जवाब देते ही ना। क्यों नहीं देते कि तुम्हें हृदय तुम्हारे को खराब लगता। परंतु यदि कोई व्यक्ति सम्मान पूर्वक अगर प्रश्न कर रहा है वो भले ही हमारी वैचारिक मान्यताओं से सहमत नहीं है तो तुमको उसका यह जवाब देना है कि हम नहीं जाएंगे अथवा जाएंगे। नहीं जाएंगे तो क्यों नहीं जाएंगे? जाएंगे तो उसमें तो आवश्यक है ही नहीं। ये बताना। अच्छा। तो इससे हम सहमत नहीं है। परंतु अच्छा हां एक बात और है कि यह पूर्णता अनुचित तो है ही इस प्रकार से ये बात कह करके कि भैया जो है तुम गलत हो इसलिए हम तुम्हें गलत सिद्ध करने नहीं आएंगे। अरे भैया तुम गलत हो वो गलत है। यही तो तुम्हें जाकर के सिद्ध करना है। तो ये तो पूर्णतया निराधार है। अनुचित है जिसका हम समर्थन नहीं करते।
00:38:01:06 और वो भी तब यह व्यक्ति कह कौन ये व्यक्ति कह रहा है जिसके तीन सिद्धांत है पहला सिद्धांत है शास्त्रार्थ द्वारा पाखंड का नाश करना ये इनका सिद्धांत है भागवतानंद का है ना शास्त्रार्थ के द्वारा पाखंड का नाश करना तो जब आपको शास्त्रार्थ का अवसर मिल रहा है तो क्यों नहीं कर रहे हो भाई शास्त्रार्थ द्वारा पाखंड का नाश करो और अगला चरण है कि अगर शास्त्रार्थ से संभव ना हो तो शस्त्र के द्वारा युद्ध में सामने वाले को परास्त करके धर्म की स्थापना करना तो युद्ध का तो मुझे नहीं लगता अभी तुम्हारे पास कोई इंतजाम है तो तुम्हें कम से कम शास्त्रार्थ का अवसर तो स्वीकार कर लेना चाहिए था तुम्हारे साथ तो ऐसी पर्सनल अटैक वाली चीजें भी नहीं थी ऋषिवाच इत्यादि के द्वारा अगर थी तो तुम्हें वो कारण रखना चाहिए था शास्त्रार्थ से दूरी बनाने का जो कारण है वो उसका मैं समर्थन नहीं करता हां अच्छा एक इसमें अराजकता की बात और आ जाती यदि तुम्हें कोई गलत लग रहा है तो उस पर उसकी बात भी सुने बिना क्या उसकी गर्दन काट दोगे भाई वो कह रहा है कि मैं वेद समत हूं। मुझे बोलने का अवसर दो। तुम कह रहे हो नहीं तुम्हारी बात ही नहीं सुना जाए। गर्दन ही काट दी जाएगी। ऐसे यह न्याय ये न्यायपूर्ण मुझे नहीं लगा तो मैं इसका समर्थन नहीं करता। आपके पास कई अन्य और कारण हो सकते हैं शास्त्रार्थ में ना जाने के चर्चा
00:39:16:07 में ना जाने के। परंतु ये जो रवैया है ये बिल्कुल ठीक नहीं है। यही रवैया पीएन मिश्र के समय था। वही रवैया आज यहां है। यही रवैया गुरु चरण दास के लिए था और वही रवैया मेरे लिए था। जहां अब मेरे लिए तो दूसरी स्थितियां है। खैर चलो मेरे को मत गिनो पर गुरु चरण दास के लिए भी कि तुम गलत हो। तुम अपने गुरु की बात नहीं मानते हो इसलिए तुम्हारी तुमसे बात नहीं करूंगा। पी एन मिश्र गलत है। वो अपने गुरु की बात नहीं मानते इसलिए उनसे बात नहीं करूंगा। अब आर्य समाज है। आर्य समाज वेद विरोधी है। वर्णाश्रमी नहीं है। इसलिए मैं बात नहीं करूंगा। तो भैया शास्त्रार्थ होगा किससे? शास्त्रार्थ का अस्तित्व क्या है? फिर ये सोचने वाली बात है। ये कारण नहीं है। दूसरे कारण हो सकते थे शास्त्रार्थ से दूरी बनाने के। तो इस तरह से अराजकता फैलाना हमें सनातन धर्म नहीं सिखाता कि सामने वाला यदि यह कह रहा है कि भाई मुझे मेरा पक्ष रखने दो तो उसका पक्ष रखे बिना ही उसके पक्ष रख सुने बिना ही आपको निर्णय कर देना। अब आप यदि ये कहे कि निर्णय पूर्व में बहुत बार हो चुके हैं तो फिर आपके हिसाब से फिर कोई सनातन सिद्धांत दे दीजिए कि क्या होने के बाद शास्त्रार्थ बंद हो जाएगा। हम या इसको तो शास्त्रार्थ भी नहीं कहा गया है। इसको तो धर्म चर्चा कही गई है। धर्म चर्चा आप कर सकते थे। खैर ठीक है। यह कहते हुए चर्चा से दूरी बनाना मुझे ठीक नहीं लगा कि सामने वाला गलत है इसलिए उससे चर्चा नहीं करूंगी। अच्छा दूसरी
00:40:31:20 बात क्या है? एक चीज मुझे भागवतन के लेटर में अच्छी लगी जो मैंने देखा उसमें उसने मैंने एक बार इनकी बड़ी-बड़ी बातें सुनी थी। दया दयानंद जी के लिए बहुत बड़ी बढ़िया बढ़िया बातें सुनाई जाती है कि भाई किसी ने उनको पत्र भेजा दयानंद जी को तो दयानंद जी को जब पत्र भेजा गया तो दयानंद जी ने उसमें व्याकरण संबंधी जो गलतियां थी वो बताते हुए पत्र का उत्तर दिया तो ये मैं सुनता था तो मैं मतलब वो बात मुझे जो है स्ट्राइक करती थी कि भाई अगर वास्तव में ऐसा हुआ है तो दम था बंदे में जो भी थे दयानंद जी में बात थी तो जब भागवतानंद ने जो उत्तर दिया है जो पत्र का आर्य समाजियों के पत्र का तो उसमें उसने व्याकरण संबंधियां जो व्याकरण संबंधी जो त्रुटियां सही की है वो बहुत जबरदस्त लगा मुझे तो वो अच्छी चीज थी वो कहीं ना कहीं वो स्ट्राइक की उसने प्रभावित किया मुझे कि भाई हमारी साइट से भी पुराणों को मानने वाली साइड से वर्णाश्रमियों की साइड से भी कोई है जो इनके यहां ये सब कहा जा रहा है तो कोई किसी ने आज पत्र का जवाब ऐसे दिया व्याकरण संबंधी त्रुटियां सही करते हुए दिया अच्छा लगा वो। खैर अब आगे बढ़ते हैं। तो कुल मिलाकर के बात क्या है
00:41:47:06 कि अगर आप अ हां एक पक्ष और है कि भागवतानंद एक बात भागवतानंद की ओर से कही जा सकती थी जो मैं भी कह रहा हूं कि ये जो चर्चा है ये आप ऐसे मंच पर रख रहे हैं जिस मंच में उस विचारधारा का महिमा मंडन किया जा रहा है जो विचारधारा हमारे अनुसार हमारे अनुसार अभी तक हमारी जानकारी में गलत है जिसका प्रचार नहीं होना चाहिए जो नहीं फैलनी चाहिए जिस पर लोगों का विश्वास नहीं होना चाहिए। तो ऐसी जगह आपने हमको चर्चा के लिए आमंत्रित किया जहां बैठकर के हम जो है महिमा मंडन सुने तो आपको कोई न्यूट्रल मंच का आयोजन करना चाहिए था। यदि आप हमें उस जगह से जोड़ना चाहते आपकी उसमें मान्यता है आप अपने जो सिद्धांत है उसमें मान्यता है उनका आपको प्रचार करना है खूब करिए। परंतु वहां पर उसके प्रोत्साहन के निमित्त जो कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है उसमें हमको भागीदार बनाना बिल्कुल भी उचित नहीं ठहरता है। ठीक है तो आपको जो है ऐसे मंच में बुलाना उचित नहीं है तो यहां पे भागवतानंद की असहमति हो सकती है कि भैया तुम चर्चा करनी है तो ऐसे मंच पे करो चर्चा जहां जो न्यूट्रल मंच हो किसी एक मान्यता को पोषित करने वाले मंच में भागीदारी निभा करके हम उस कार्यक्रम को
00:43:02:19 सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं है। यह पक्ष हो सकता था। हां मेरा इसमें यह कहना है कि यदि मैंने जो पीछे ठोस बातें कही है वो कहीं ना कहीं निर्वाह करने में उसमें जो है गंभीर वो कुछ ठोस कदम उठाने पड़ सकते हैं आर्य समाज को जो उनके लिए कठिन हो सकता है तो इसलिए यदि वो उन चीजों को करते हैं तो मेरा निवेदन तो यही है यदि आप इस चर्चा को ऐसे मंच में जहां पर आपकी मान्यता का विशेष रूप से पोषण किया जा रहा हो ऐसे मंच की बजाय किसी न्यूट्रल मंच पर आयोजित करें नहीं करेंगे तो हम भविष्य में आयोजित करने के लिए प्रयास करेंगे। मगर किसी न्यूट्रल मंच में आयोजित करें ये चर्चा। तो यह मेरा आपसे मतलब ऐसा ऐसी मेरी अपेक्षा है कि आप इस तरह का प्रयास करते तो मुझे अधिक न्याय प्रिय आपकी वो जो आचरण है वो दिखाई देता कि आपने एक न्यूट्रल मंच पर हमको बुलाया ना कि भैया वो जो आर्य समाज है उसकी 150 वर्षगांठ का आयोजन हो रहा है और वहां पर जो है वक्ता आएंगे और जो महिमागान करेंगे और हम वहां बैठकर के सुनेंगे। परंतु क्योंकि मैंने बहुत ठोस पीछे डिमांड ऐसी करी है कि या तो आप अपने संयोजक को या अपनी अतिथि को अलग हटाइए या फिर उससे क्षमा कहलवाइए। स्वयं भी उनकी ओर से क्षमा भाव प्रस्तुत किए कीजिए उनके द्वारा अमुक अमुक
00:44:17:25 कृत्य कृत्यों के चलते। तो यदि आप उसमें अपनी सकारात्मकता प्रस्तुत करते हैं तो फिर मैं इसके लिए आपको बाध्य नहीं करूंगा कि आप मुझे ऐसा ही मंच प्रदान करिए। फिर मैं जो है इस चर्चा से जुड़ूंगा यदि आप ऐसा ऐसा करते हैं। परंतु चर्चा से जुड़ते समय भी आप आपसे मैं कुछ यह मांग रखता हूं कि आप जो है अह जो चर्चा की जो वस्तुनिष्ठता के साथ जानकारी मुझे प्रोवाइड कराएं कि वहां पर चर्चा मेरी कब होगी किससे होगी क्योंकि अगर ये लोग हट रहे हैं नहीं हट रहे हैं तो क्या ये आर्य समाजी है आर्य समा हां एक बात और स्पष्ट करी है मैं पत्र के रूप में भी ये जारी करवा दूंगा कि किसी को आर्य समाजी मानने का जो प्रॉपर नियम है वो वो क्या है? क्योंकि जो मेरे हिसाब से जो जो दयानंद जी में प्रमाण बुद्धि रखता है वो आर्य समाजी है। दयानंद जी के सिद्धांतों में प्रमाण बुद्धि रखता है वो आर्य समाजी है। परंतु ये लोग उनमें प्रमाण बुद्धि रखते हुए भी अपने आप को आर्य समाजी होने से दूर कर लेते हैं। तो आपको धारणा वो प्रस्तुत करें परिभाषा क्योंकि होता क्या है कि कई बार ये जब फंसने लगते हैं आर्य समाज के किसी सिद्धांत के कारण तो ये अपने आप को आर्य समाजी होने से दूर करते हुए बचा लेते हैं कि
00:45:33:01 भैया मैं आर्य समाज को मैं आर्य समाजी नहीं हूं। मैं तो वो हूं। मैं तो ये हूं। मैं तो खोजी हूं। मैंने मैं अभी किसी का भी नहीं हूं। तो ये ऐसे कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। तो आप यह परिभाषा कि आर्य समाजी किसको माना जाए, किसको ना माना जाए इस परिभाषा को यथोचित तरीके से प्रदान करें। अच्छा अब क्या है कि इसके साथ ही साथ यदि वो आप मेरी जो पिछली जो मैंने अपनी डिमांड्स आपको बताई है वो होते हुए और आपके लिए बड़ा असहज हो रहा है कि आप स्वतंत्र रूप से कोई मंच व्यवस्थित किसी मंच की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं तो मैं फिर आऊंगा आपके इसी में मगर आपको करना क्या होगा एक तो कार्यक्रम की वस्तुनिष्ठता के साथ मुझे जानकारी दें कि उसमें मेरी उपस्थिति क्या होगी कब होगी मेरी और मेरी उपस्थिति इस तरीके से सुनियोजित की जाए कि मुझे वहां पर आपका जो कार्यक्रम चल रहा है महिमागान चल रहा है उससे अलग दिखाई दूं मैं वो कार्यक्रम है उस कार्यक्रम के अवसर पर मैं वहां गया तो परंतु मैं उस महिमागान का भागीदार नहीं बना मैं उस कार्यक्रम का भागीदार नहीं बना वो व्यवस्था फिर आपको देखनी होगी और किसके के साथ होना है। इन अगर यह माफी नहीं मांग रहे हैं, बहिष्कृत हो चुके हैं अथवा इनकी वो जो स्थिति है वो ठीक हुई। ये आर्य समाजी है कि नहीं है। इन उसके बाद निचोड़
00:46:48:12 क्या निकला? इनके साथ होना है किसी और के साथ होना है। ये सारी जानकारियां आप सार्वजनिक करें और मेरी उपस्थिति उसमें यथोचित रूप से मुझे बताएं। अभी पूर्व में एक वो हुआ था शास्त्रार्थ यहां पर यह सो में में एक शास्त्रार्थ हुआ था और उसमें भी देखिए अ शास्त्रार्थ होते समय जो आर्य समाजी वो इतना उग्र हो गए तू ये कर ले तू वो कर ले तू तड़ाक तो इस इन सब बातों के बारे में क्या इस तरह की गतिविधियां वहां भी हो सकती हैं तो इसमें आश्वस्त करें हमें है ना कि ऐसा नहीं होगा पत्र लिख के मतलब अपने अपनी ओर से स्पष्टीकरण दें कि अह इस तरह का व्यवहार आपके यहां हो ही रहा है। जो खुद को आर्य समाजी नहीं कह रहे हैं। आप उसको आर्य समाजी कह रहे हैं। जो ऐसी भाषा उपयोग में कर चुके हैं किसी के परिवार तक को नहीं छोड़ा। अपनी वो क्या कहते हैं? द्वेष भावना को व्यक्त करने के चक्कर में परिवार तक को नहीं छोड़ा। तो ऐसे लोगों को आप जो है अतिथि और जो है सम्मानित पदाधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। और आपकी ओर से अभी सो वाले शास्त्रार्थ उसमें यह हो चुका है कि व्यक्ति उठ खड़े हुए तू तड़ाक
00:48:03:22 आजा कल बैठ लें। आज बैठ लें। तो ये सब नहीं है। ये सारी बातें आप जो है इन सब बातों में अपना स्पष्टीकरण दें और पीछे वाली जो हमारी जो डिमांड है उनको मानते हुए यदि आप इस बात को आगे बढ़ाते हमारे वहां आने के संबंध में तो हम आएंगे। यह व्यवस्था इतनी सी आपको देखनी होगी कि हमारा उस कार्यक्रम से महिमागान वाले हिस्से से हमारा पथक्करण दिखाई दे और वस्तुनिष्ठता के साथ वो पथक्करण होने के बाद उस कार्यक्रम की और हमारी उस कार्यक्रम में उपस्थिति की किसके साथ चर्चा है ये सब जानकारियां ठोस तरीके से वस्तुनिष्ठता के साथ निर्गत ठीक है तो ये मेरा पूरा एक आपको क्या कहते हैं प्रत्युत्तर था आपने जो आमंत्रण दिया उसके लिए आभार और देर से आपको उत्तर देने के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं फिर से एक बार और अ ये जो सारी बातें मैंने बोली है लिपिबद्ध हो के भी आपको प्राप्त हो जाएंगी वीडियो के नीचे लिंक भी दे दिया जाएगा और जिस नंबर से मेरे पास वो पीडीएफ आया था अगर वो नंबर मुझे मिल जाएगा क्योंकि वो नंबर क्या कहते हैं मेरे मोबाइल में एक सेटिंग लगी रहती है 24 उसमें 24 घंटे में डिलीट हो जाता है सब कुछ अगर मैं सेव
00:49:18:28 ना करूं तो वो इसलिए लगी रहती है कि बहुत सारे मैसेजेस आते हैं क्योंकि मेरा नंबर जो है वो सार्वजनिक है। तो इस कारण से अगर वो मुझे मिल जाएगा वो नंबर तो वहां पर दे दूंगा यहां पर लिंक डाल दूंगा। यदि कोई मुझे फोन द्वारा मैसेज करता है कि भाई आप मुझे वो संदेश दे दीजिए तो मैं वहां पर भी पीडीएफ उपलब्ध करा दूंगा। और बस इतना ही है। अच्छी पहल है आपकी और ईश्वर आपको सद्बुद्धि प्रदान करें। ऐसी मंगल आपकी मंगल कामना के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूं। और हां इस संबंध में आपके कोई व्यक्ति हैं जो शायद दिल्ली में ही कहीं रहते हैं तो उनका उनके उनके साथ मेरी फोन पर चर्चा हो चुकी है। मैंने अपनी ये सब बातें उनको भी कही थी। तो उन्होंने कहा था कि मैं आर्य समाज से इस बारे में बात करूंगा। बात करके बताऊंगा। परंतु दो दिन तीन दिन पहले मेरी सारी बातें हुई है फोन पर। तो वो रिकॉर्डेड बातें भी हैं और अभी भविष्य में मैं उसको निर्गत कर दूंगा। क्या बातें हुई थी। तो वो उन्होंने कहा था कि मैं आपको उत्तर दूंगा। मगर उन्होंने अभी तक उत्तर नहीं दिया। मैं उसके इंतजार में भी थोड़ा सा रिलैक्स था कि भाई मैंने अपना जवाब दे दिया है तो अब उधर से उत्तर आना है। मगर अभी तक उत्तर आया नहीं। तो मैंने कहा मैं ऑफिशियली चीजें कर दूं। ठीक है? तो अभी कोई कंचन जी है वो आने को कह रही हैं। कंचन जी लिंक दे दिया जाए कंचन जी को।
00:50:35:08 लिंक दे दीजिए। आ जाइए कंचन जी लिंक ये रहा आपके सामने [हंसी] आ जाओ भैया। कोई कह रहा है कि
00:51:26:14 कोई कह रहा है कि वह कृतेश पटेल है जो कंचन जी की वह है वो कृतेश पटेल तो ठीक है अभी पता चल जाएगा अभी वो लिंक मांग रहे थे ना थोड़ी देर पहले वो लिंक अभी वो कुछ देर पहले लिंक मांगा है उन्होंने तो आप जो है वह प्रदर्शित कर दीजिए यहां पर थोड़ी देर पहले उन्होंने जो लाइव चैट होती है उसमें लिंक के लिए कहा था कि लिंक प्रदान कर दो। तो कंचन जी को लिंक प्रदान कर दिया गया है। ये देखिए कंचन जी ने कहा यस लिंक दो। इससे पहले वाली क्या बात हो रही है थोड़ा सा देखिए। किस बात पर इन्होंने कहा है लिंक दो।
00:52:21:06 वो प्रदर्शित कर दीजिए। किस बात पर इन्होंने कहा है? किसी की बात पर इन्होंने यस कहा है। क्या बात है? शुरू से कह रही हूं कि WhatsApp पर कॉल किया है। मैंने तेरे गुरु ने बोला लिंक सेंड कर देगा। किया नहीं है।
00:52:53:08 मुझे WhatsApp करने के लिए कह रही हैं क्या? WhatsApp कॉल किया है। मुझे WhatsApp कॉल किसी मातृशक्ति ने किया है मुझे अभी संज्ञान में नहीं है। अगर आपने किया है तो आप एक बार और कर दीजिए। बहुत सारी चीजें चल रही होती है तो नहीं हो पाता है। और कौन सा लिंक किस लिंक की बात कर रही है? कौन सा लिंक सेंड कर दूंगा वो जरा देखिए। पीछे से थोड़ा कन्वर्सेशन देख लीजिए। हो सकता है इन्होंने अभी चर्चा में आने के लिए लिंक ना मांगा हो। राज मल्होत्रा करके जुड़े हैं।
00:53:25:18 आपकी आवाज कट रही है बहुत ज्यादा। आप कुछ बोल रहे हैं मुझे? मेरी आवाज कट रही है। अभी भी कट रही है। जी आवाज कट रही है। कंचन जी आप एक बार एक काम करिए एक बार और दोबारा से कंचन अपना नाम बताते हुए और मुझे मैसेज कर दीजिए। आपको जो अलंकारियों को मुझसे दो ही प्रकार के लिंक चाहिए होते हैं। एक वो कहते हैं कि भाई दो दो क्या एक ही प्रकार का लिंक चाहिए होता है कि
00:54:14:19 क्या है? काट नहीं काट नहीं रही है। हां बताइए राज मल्होत्रा जी। तो अलंकारियों को वो डिबेट में आने वाले लिंक ही चाहिए होते हैं। तो आपने शायद मांगा है। मुझे नहीं पता कि आपने मांगा है कि नहीं। पर आप जो है दोबारा मैसेज करिए 740 7408301869 पर और जो है वो लिंक आपको मिल जाएगा। वैसे एक काम करते हैं ना डिस्क्रिप्शन में भी वो लिंक डाल ही दीजिए। पर यह है कि फिर बिना बात के व्यक्ति जो है फॉर्म भरने लगेगा नियंत्रित रूप से। चलिए बताइए ताज मल्होत्रा जी जय श्री राम।
00:54:53:01 अच्छा अभी मैं जो है तीनों औरतवाद नेटवर्क ठीक से नहीं आ रहा आपका तो मुझे जो है गुरु परंपरा पे इनको इनको भैया कोई शांत कराओ नेटवर्क ठीक से नहीं आ रहा है आप ऐसी जगह जाए जहां पर नेटवर्क हो और वहां जाकर के बात करें ठीक है तो हमने अपना उत्तर दे दिया व्यर्थ में इसको और लंबा ना किया जाए स्ट्रीम को और
00:55:34:04 अनार्य अनार्य जी अपना पेज दिखाएं अपना फेस दिखाएं अनार जी। चलिए ठीक है फिर मुझे लगता नहीं है कोई अर्थपूर्ण बात अभी होनी है किसी से।
00:56:08:19 हां यदि अभी जो मैंने उत्तर दिया उसमें किसी को असहमति वो अभी भी आ सकता है कोई पक्ष रखने के लिए। आना चाहे तो। यदि कंचन जो है वह जो अनऑफिशियल गुंडा है अलंकारी अलंकारियों का वह नहीं है कंचन जी तो कंचन जी भी आ सकती हैं। कहां है कंचन जी? दोबारा से लिंक दे दिया गया है। स्क्रीन पर प्रदर्शित हो रहा है।
00:56:52:04 ठीक है। फिर मुझे लगता नहीं और कोई है। चलिए तो बाकी अभी रामपाल की अपडेट्स आपको और मिलेंग कुछ आने वाले समय में। तो सभी को जय श्री राम। सभी लोग कुशल पूर्वक रह और आज भी कई जगह पर गोपाष्टमी मनाई गई है और कल भी गोपाष्टमी है तो आप कल जिन जो नहीं मना पाए हैं वो कल गोपाष्टमी अवश्य मनाएं और हमें अपने जो आपके वीडियोस हैं गोपाष्टमी गौ माता के पूजन के वो हमें शेयर करें जिससे कि हम अपने ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपके वीडियोस दिखाकर लोगों को प्रेरित करें कि वो भी गौ माता के प्रति जो है अपनी आस्था प्रकट करें। कम से कम गोपाष्टमी वाले दिन आवश्यक रूप से और अन्यों को प्रेरित करें और इसमें सबसे पहला जो आवश्यक है कि गौ माता से बनने वाले जो उत्पाद हैं उनका सेवन बढ़ाएं अपने जीवन में जिससे कि गौ माता की उपयोगिता सिद्ध हो समाज में जितना उनकी उपयोगिता सिद्ध होती चली जाएगी तो उतनी ही उनका उतना ही उनका संरक्षण शुरू होगा वेद लक्षणा गाय की पहचान करें कौन सी गाय वेद लक्षणा होती है।
00:58:07:27 दासान दास कौन है? चेहरा दिखाएं। बताएं जय श्री राम। चलिए। ठीक है। अब फिर कभी चर्चा होती है। जय श्री राम। कल गोपाष्टमी का पर्व है। आज भी था। तो जो नहीं बनाए हैं, वह बनाएं और अपनी वीडियो में शेयर करें और आर्य समाज को उस पत्र के लिए पुनः एक आभार प्रकट करते हुए अपनी चीजें मैंने आपको बता ही दी। मैं आज की इस स्ट्रीम को विराम दे रहा हूं। सभी को जय श्री राम।
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