1
00:00:01,040 --> 00:00:05,120
तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप

2
00:00:05,120 --> 00:00:09,440
सभी कुशल पूर्वक होंगे। हमारे साथ यहां पर हमारी गुरु बहन है

3
00:00:09,440 --> 00:00:13,520
विजयश्री और हम लोग लेट

4
00:00:13,520 --> 00:00:17,920
हैं। दिया गया जो आपको समय था उससे करीब

5
00:00:17,920 --> 00:00:21,920
40 से 45 मिनट लगभग लेट हो चुके हैं। 47 मिनट हमको दिखाई

6
00:00:21,920 --> 00:00:26,480
दे रहा है कि लेट हैं हम लोग। तो इसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं।

7
00:00:26,480 --> 00:00:30,720
मैं तो अपनी बात बताऊं तो भैया टेक्निकल हैंड जो है मेरा बहुत कमजोर है

8
00:00:30,720 --> 00:00:34,880
और जो क्या कहते हैं इस तरह के जो

9
00:00:34,880 --> 00:00:40,000
साथी होते हैं जो टेक्नो होते हैं टेक्नो टोनी स्टार टाइप के

10
00:00:40,000 --> 00:00:44,080
वो ऑफ पे है दूर है कोई चट पर बनाने गया है और

11
00:00:44,080 --> 00:00:48,160
तो और ये मेरा फर्स्ट लाइव है और मुझे भी ज्यादा

12
00:00:48,160 --> 00:00:52,480
कुछ पता नहीं था तो हमारे साथ प्रेयर करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत

13
00:00:52,480 --> 00:00:56,560
धन्यवाद पर हम डेफिनेटली क्षमा प्रार्थी है कि आप लोगों को

14
00:00:56,560 --> 00:01:00,560
इंतजार करना पड़ा। पर आई प्रॉमिस यू कि

15
00:01:00,560 --> 00:01:04,720
जितना आपको इंतजार करना पड़ा है यह कन्वर्सेशन उतनी ही अमेजिंग

16
00:01:04,720 --> 00:01:08,800
होने वाली है। एंड वी आर गोइंग टू कवर अ लॉट ऑफ़ थिंग्स एंड वी

17
00:01:08,800 --> 00:01:13,120
आर आल्सो गोइंग टू टेक क्यूएनए। सो फर्स्ट ऑफ़ ऑल पीपल

18
00:01:13,120 --> 00:01:16,240
बिकॉज़ दिस विल बी शेयर्ड ऑन माय पेज एस वेल।

19
00:01:16,240 --> 00:01:20,320
एंड देयर आर टू थिंग्स दैट आर हैप्पेनिंग। आई विल सेट द टोन टू व्हाट

20
00:01:20,320 --> 00:01:24,480
द डिस्कशन इज़ अबाउट। ये डिस्कशन में दो भाषाओं का प्रयोग किया

21
00:01:24,480 --> 00:01:28,560
जाएगा। हिंदी और अंग्रेजी क्योंकि हमारे व्यूअर्स हिंदी

22
00:01:28,560 --> 00:01:32,640
और अंग्रेजी दोनों में ही कंफर्टेबल है। एंड वी बोथ हैव

23
00:01:32,640 --> 00:01:36,880
दैट कंफर्ट इन द लैंग्वेज। आई हैव अ गुड

24
00:01:36,880 --> 00:01:40,880
कंफर्ट इन इंग्लिश एंड ऑफ कोर्स इज़ हिंदी इज़ ग्रेड एज

25
00:01:40,880 --> 00:01:44,960
वी ऑल नो वी हैव ऑल सीन। बिफोर स्टार्टिंग दिस लाइव

26
00:01:44,960 --> 00:01:49,040
आई वांट टू इंट्रोड्यूस यू टू शिवश फॉर द पीपल हु डोंट नो

27
00:01:49,040 --> 00:01:53,360
हु शिवश जी इज़। शिवश जी एक ऐसे

28
00:01:53,360 --> 00:01:57,440
सनातनी है जिन्होंने अपने धर्म को जाना और अपने धर्म को

29
00:01:57,440 --> 00:02:01,680
जानते हुए उन्होंने यह देखा कि समाज में

30
00:02:01,680 --> 00:02:06,400
धर्म के नाम पर लोग कितना अधर्म फैला रहे हैं।

31
00:02:06,400 --> 00:02:10,720
नॉट जस्ट दिस बट ही इज एक्टिवली पार्टिसिपेटिंग

32
00:02:10,720 --> 00:02:14,800
इन रीइंफोर्सिंग धर्म फॉर एवरीबडी

33
00:02:14,800 --> 00:02:19,600
अराउंड अस। इमेजिन पीपल हु स्टार्ट राइटिंग

34
00:02:19,600 --> 00:02:24,080
रॉन्ग थिंग्स अबाउट आवर धर्मा। सोचिए एक बार कि

35
00:02:24,080 --> 00:02:28,080
आपके पढ़ पढ़ पढ़ पढ़ पोते पोतियां किसी

36
00:02:28,080 --> 00:02:31,840
दिन एक पुस्तक उठाएं और उसमें पढ़े कि

37
00:02:31,840 --> 00:02:36,160
शिव जी तो इतने गंदे थे या पार्वती माता कितनी

38
00:02:36,160 --> 00:02:40,320
बुरी थी तो आपको कैसा लगेगा? बातें इतनी

39
00:02:40,320 --> 00:02:45,360
गंदी है कि मैं उनको शब्दों में भी बोल नहीं पा रही।

40
00:02:45,360 --> 00:02:49,760
बट हियर व्हाट वी आर ट्राइंग टू अंडरस्टैंड दैट वी वुडंट वांट दैट।

41
00:02:49,760 --> 00:02:53,920
सो देयर आर अ लॉट ऑफ पीपल हु आर स्टिल

42
00:02:53,920 --> 00:02:57,920
ट्राइंग टू डू दैट विद आवर ओन धर्म। एंड लेट मी रिमाइंड

43
00:02:57,920 --> 00:03:02,320
यू दीज़ आर नॉट पीपल फ्रॉम आउटसाइड। दीज़ आर पीपल

44
00:03:02,320 --> 00:03:06,320
हु आर इंडियन। एंड शिमाश जी हैज़

45
00:03:06,320 --> 00:03:10,400
बीन वर्किंग डे एंड नाइट टू वर्क ऑन दैट एंड वेरी

46
00:03:10,400 --> 00:03:14,400
वेरी लीगली एंड सून वी विल फाइंड अमेजिंग रिजल्ट्स फ्रॉम

47
00:03:14,400 --> 00:03:18,480
दैट मूविंग फॉरवर्ड शिवश जी इज़ आल्सो माय गुरु

48
00:03:18,480 --> 00:03:22,640
ब्रदर वी कम फ्रॉम द सेम गुरु परंपरा एंड टुडे

49
00:03:22,640 --> 00:03:27,520
ऑल द डिस्कशन वी आर गोइंग टू हैव हैज़ वन अमेजिंग बेनिफिट

50
00:03:27,520 --> 00:03:31,600
और वो मोस्ट अमेजिंग यूनिक बेनिफिट एंड द यूनिक क्वालिटी ऑफ़ दिस

51
00:03:31,600 --> 00:03:36,080
चर्चा इज़ कि आपको जो भी इंफॉर्मेशन हम देंगे

52
00:03:36,080 --> 00:03:40,240
वो इंफॉर्मेशन शास्त्रीय होगी इसकी गारंटी हम लेते

53
00:03:40,240 --> 00:03:44,480
हैं। दिस पॉडकास्ट इज़ अनलाइक एनी अदर पॉडकास्ट व्हेयर वी

54
00:03:44,480 --> 00:03:46,960
टेल यू इन अ डिस्क्लेमर इन द

55
00:03:46,960 --> 00:03:51,120
बिगिनिंग कि दिस कन्वर्सेशन इज़ जस्ट फॉर द

56
00:03:51,120 --> 00:03:55,200
सेक ऑफ़ कन्वर्सेशन सेल्फ ओपिनियन हां दीज़ आर सेल्फ ओपिनियंस

57
00:03:55,200 --> 00:03:59,360
एंड आप इसको सीरियसली मत ले एंड आई हैव सीन दिस हैपनिंग इन

58
00:03:59,360 --> 00:04:03,680
मेनी पडकास्ट दैट दे गिव यू दिस डिस्क्लेमर सो आवर डिस्क्लेमर

59
00:04:03,680 --> 00:04:07,760
इज कि हम जो भी चर्चा करेंगे वो शास्त्रीय प्रमाणित होगी

60
00:04:07,760 --> 00:04:11,840
आप इसके बारे में अगर तो शास्त्रीय प्रमाणिक परंपराओं के पास जाके

61
00:04:11,840 --> 00:04:15,840
उन आचार्यों से पूछेंगे तो वो भी आपको सेम ही एडवाइस

62
00:04:15,840 --> 00:04:20,000
करेंगे। सो वेलकम टू अ वन ऑफ अ काइंड पडकास्ट धर्म

63
00:04:20,000 --> 00:04:24,000
अनवी विद विजयश्री एंड ऑफ कोर्स शिवश द्विवेदी

64
00:04:24,000 --> 00:04:28,160
जी। हम लोग क्या-क्या टॉपिक्स कवर करेंगे उसके ऊपर तो हमने

65
00:04:28,160 --> 00:04:32,720
ऑब्वियसली शेयर किया ही था। बट टू मूव फॉरवर्ड

66
00:04:32,720 --> 00:04:37,520
इन अ लिटिल डिफरेंट डायरेक्शन एंड फाइनली स्टार्ट आवर पडकास्ट।

67
00:04:37,520 --> 00:04:41,760
आई विल हैव शिवश्री टॉक अबाउट अ फ्यू थिंग्स विद

68
00:04:41,760 --> 00:04:46,320
यू एंड देन वी विल डेफिनेटली टेक योर क्वेश्चन। तो

69
00:04:46,320 --> 00:04:50,720
हमारी गुरु बहन ने भी बहुत सारा परिचय दिया है और

70
00:04:50,720 --> 00:04:54,800
काफी सारा आपको अवगत कराया कि आज की चर्चा का उद्देश्य क्या है

71
00:04:54,800 --> 00:04:59,360
और अगर हम देखें कि प्राथमिकता में इस चर्चा का उद्देश्य है कि

72
00:04:59,360 --> 00:05:02,080
हमारी गुरु बहन है वो काफी दिनों से

73
00:05:02,080 --> 00:05:06,320
जब से वो पूरी गीताधीश्वर जी के सानिध्य में आई उन्होंने

74
00:05:06,320 --> 00:05:10,560
दीक्षा प्राप्त की और उन्होंने अपने जीवन में जो यथोचित परिवर्तन लाते

75
00:05:10,560 --> 00:05:14,560
हैं आध्यात्मिक उन्नति की ओर उन्होंने और भी ज्यादा स्पीडली उनको को

76
00:05:14,560 --> 00:05:18,720
पकड़ा और उस पथ पर वो आगे बढ़ी हैं। तो ऐसे में क्या है कि

77
00:05:18,720 --> 00:05:23,120
जो उनको फॉलो करते हैं डायरेक्टली जो उनसे जुड़े हुए हैं उनके Instagram

78
00:05:23,120 --> 00:05:27,360
पेज आप जानते हैं तो उसमें उनके पास आए दिन कई क्वेरीज आती

79
00:05:27,360 --> 00:05:31,360
है धर्म से रिलेटेड ब्रह्म से रिलेटेड जो लोग मेरे

80
00:05:31,360 --> 00:05:35,760
फॉलोवर है वो इन दो शब्दों को अच्छे से जानते होंगे। धर्म और ब्रह्म

81
00:05:35,760 --> 00:05:40,160
जिन चीजों पर हमारा सारा पूरा जो सार्वभौम

82
00:05:40,160 --> 00:05:44,640
सिद्धांत है वो टिके हुए तो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा

83
00:05:44,640 --> 00:05:48,720
तो इनको बहुत सारी क्वेरीज आती है तो इसमें जो

84
00:05:48,720 --> 00:05:53,280
प्राथमिकता एक इनकी ओर से जो दी गई है वो

85
00:05:53,280 --> 00:05:57,280
इनके जो वो फॉलोअर्स हैं जो कहीं ना कहीं धर्मनिष्ठ हो रहे

86
00:05:57,280 --> 00:06:01,280
हैं और वो धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। धर्म की जो ऐसी

87
00:06:01,280 --> 00:06:05,280
चीजें है ना वही अकाट अकाट्य सिद्धांत सनातन धर्म

88
00:06:05,280 --> 00:06:09,280
के उनकी ओर आकृष्ट हो रहे हैं और उनकी कई क्वेरीज होती है

89
00:06:09,280 --> 00:06:13,920
वर्णाश्रम को लेकर के धर्म को लेकर के या सर्वशक्तिमान

90
00:06:13,920 --> 00:06:17,120
ईश्वर को लेकर के अपार विषय ग्रंथों को लेकर के

91
00:06:17,120 --> 00:06:21,520
गुरु परंपरा को लेकर के और उसमें भी सार्वभौम गुरु परंपरा को लेकर के

92
00:06:21,520 --> 00:06:25,600
तो इन जो हमारे यहां आहान के जो बेसिक फंडामेंटल्स

93
00:06:25,600 --> 00:06:29,680
है जिनके ऊपर आहान टिका हुआ है आहान का कोई बहुत वृद्ध वो

94
00:06:29,680 --> 00:06:34,000
नहीं है। मगर आप कभी भी स्वतंत्र रूप से अगर गुरुदेव

95
00:06:34,000 --> 00:06:38,960
का जो जगतुगुरु शंकराचार्य जी है उनका अगर आप कोई

96
00:06:38,960 --> 00:06:43,280
सेशन देखेंगे जिसमें कि वो किसी के प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं। कोई अधिवेशन

97
00:06:43,280 --> 00:06:47,440
है तो उसमें जो उनका एक धारा होती है वो लगभग

98
00:06:47,440 --> 00:06:51,760
इनहीं पांच सिद्धांतों के ऊपर वो चल रही होती है कि नास्तिकता का

99
00:06:51,760 --> 00:06:55,760
कैसे जवाब दिया है हमारे सनातन धर्म ने। फिर हमारा ईश्वर

100
00:06:55,760 --> 00:06:59,760
ही ईश्वर कैसे सिद्ध होता है। है ना? सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह

101
00:06:59,760 --> 00:07:04,080
असतो मास सदगमया पहला उसके बाद सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह

102
00:07:04,080 --> 00:07:08,160
फिर अपुषय ग्रंथ फिर ज्ञान

103
00:07:08,160 --> 00:07:12,400
वही प्रमाणित जो परंपरा से प्राप्त हो और लास्ट में परंपरा

104
00:07:12,400 --> 00:07:16,400
और परंपरा का जो वास्तविक ज्ञान है वो हमें किससे मिलता है श्री राम जी

105
00:07:16,400 --> 00:07:20,640
से तो श्री राम जी को फॉलो कर लो या किसी

106
00:07:20,640 --> 00:07:24,720
परंपरा प्राप्त गुरु के आश्रय हो के आप अपने

107
00:07:24,720 --> 00:07:28,800
धर्म के पथ पर आगे बढ़े तो ये इन पांच सिद्धांतों के आसपास हमारा

108
00:07:28,800 --> 00:07:32,160
जो स्ट्रक्चर है खड़ा हुआ है सिद्धांतों का। तो अब

109
00:07:32,160 --> 00:07:36,240
इन्हीं सिद्धांतों को लेकर के इनके पास बहुत सारी क्वेरीज आती हैं। तो

110
00:07:36,240 --> 00:07:40,480
उन्हीं को लेकर के आज हम आगे बढ़ने वाले हैं। आज हमारे पास जो कुछ क्वेरीज

111
00:07:40,480 --> 00:07:44,560
है आई हैव आल्सो मेंशन देम इन द क्वेश्चन स्पेशली

112
00:07:44,560 --> 00:07:48,720
इन द पोस्टर दैट वी ऑल शेयर विद यू टुडे अबाउट आवर लाइव

113
00:07:48,720 --> 00:07:52,720
पडकास्ट। एंड द मोस्ट अमेजिंग थिंग इज कि हम लोग इस समय

114
00:07:52,720 --> 00:07:56,800
लाइव है। यू आर वाचिंग अस लाइव। सो वी विल आल्सो सी द क्वेश्चन वी

115
00:07:56,800 --> 00:08:00,880
गेट एंड वी विल आल्सो ट्राई टू आंसर यू। पर आज के डिस्कशन का

116
00:08:00,880 --> 00:08:04,880
जो हमारा पहला टॉपिक है वो ये है कि व्हाट डस इट मीन

117
00:08:04,880 --> 00:08:08,960
टू फॉलो ऑथेंटिक नॉलेज स्ट्रेट फ्रॉम द शास्त्र एंड नॉट फ्रॉम

118
00:08:08,960 --> 00:08:13,200
सोशल मीडिया ट्रेंड्स। इस प्रश्न को हम थोड़ा तोड़ते हैं

119
00:08:13,200 --> 00:08:17,200
कि जैसे आजकल अ इट्स वेरी कॉमन है

120
00:08:17,200 --> 00:08:21,440
ना कि रील्स के अंदर बोल देते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र बोल दीजिए।

121
00:08:21,440 --> 00:08:25,440
जी या फिर कोई भी बीज अक्षर के साथ आपको वो मंत्र दे

122
00:08:25,440 --> 00:08:29,600
देते हैं स्पेशली प्रणव के साथ तो वो जो हम मंत्र

123
00:08:29,600 --> 00:08:33,680
ले लेते हैं है ना तो वो मंत्र हमें

124
00:08:33,680 --> 00:08:37,680
कैसे पता चले कि हमें वो मंत्र पढ़ने हैं या नहीं पढ़ने हैं या फिर हम

125
00:08:37,680 --> 00:08:41,920
सबसे ज्यादा ये सोचे कि क्या ये जो मंत्र हैं

126
00:08:41,920 --> 00:08:45,920
सोशल मीडिया पे जो हमें मिल रहे हैं हम उसको फॉलो करें ना

127
00:08:45,920 --> 00:08:47,200
करें और एक

128
00:08:47,200 --> 00:08:51,520
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर की क्या रिस्पांसिबिलिटी बनती है आपको बताने

129
00:08:51,520 --> 00:08:56,240
के लिए कि यह मंत्र किसके लिए है या किसके लिए नहीं। जी

130
00:08:56,240 --> 00:09:00,240
तो इसके ऊपर जब हम डिस्कशन करते हैं मेरा पॉइंट ऑफ व्यू ये

131
00:09:00,240 --> 00:09:04,240
रहता है कि जो मंत्र पहले तो दीक्षा के

132
00:09:04,240 --> 00:09:08,400
साथ होते हैं वो आप दीजिए ही मत। है ना? बीज अक्षर को हटा

133
00:09:08,400 --> 00:09:12,400
ही दें। पर ऐसे बहुत सारे श्लोक हैं, कुछ पद है

134
00:09:12,400 --> 00:09:16,480
जिसको बोलकर भी हमें बहुत फल प्राप्त होता है या सबसे ज्यादा

135
00:09:16,480 --> 00:09:20,640
नाम जप है तो आप उसको क्लेरिफाई कर दे कि

136
00:09:20,640 --> 00:09:24,960
आप ये कर सकते हैं। इसके लिए आपको दीक्षा की जरूरत नहीं है।

137
00:09:24,960 --> 00:09:29,440
है ना? तो इसके ऊपर आप भी अगर थोड़ा बताएं

138
00:09:29,440 --> 00:09:33,440
हमारे जो व्यूअर्स है उनको तो दे कैन अंडरस्टैंड इट

139
00:09:33,440 --> 00:09:37,600
मोर। एंड द सेकंड फेस हियर इज टू आल्सो अंडरस्टैंड

140
00:09:37,600 --> 00:09:41,920
कि सोशल मीडिया पर आपको मंत्र

141
00:09:41,920 --> 00:09:46,000
देने वाले लोग आपको मंत्र नहीं दे सकते। है ना?

142
00:09:46,000 --> 00:09:50,000
स्पेशली जो 20 अक्षर वाले मंत्र है और ऐसा क्यों है?

143
00:09:50,000 --> 00:09:54,960
जी दैट इज समथिंग दैट वी आर ट्राइंग टू अंडरस्टैंड।

144
00:09:54,960 --> 00:09:59,600
देखिए ये प्रश्न बहुत वैसे अगर मैं अपनी बात करूं तो हमारे

145
00:09:59,600 --> 00:10:02,400
लगभग हर वीडियो में प्रश्न आ ही जाता है कि भाई

146
00:10:02,400 --> 00:10:06,560
किसी के भी द्वारा प्राप्त होने वाली जो धर्म धर्म की शिक्षा है वो हम क्यों

147
00:10:06,560 --> 00:10:10,960
प्राप्त करें? तो सबसे पहले बात तो यह है कि आप धर्म को

148
00:10:10,960 --> 00:10:15,040
लेकर के कि आप धर्म का ज्ञान लेने के लिए सुन किसको रहे हो यह जानना

149
00:10:15,040 --> 00:10:20,320
बहुत आवश्यक होता है और

150
00:10:20,320 --> 00:10:24,560
ये जानना बहुत आवश्यक होता है कि आप धर्म के विषय में किसको सुन रहे हो किसकी

151
00:10:24,560 --> 00:10:28,800
बातें सुनकर के आप अपनी चीजों का निर्णय कर रहे हो। पहली

152
00:10:28,800 --> 00:10:32,880
बात ये कि हम सुन किसको रहे हैं? तो सुनने के विषय में यदि हम

153
00:10:32,880 --> 00:10:36,880
कहे कि हम शिव जी को मानते हैं। यदि हम कहे कि राम जी को मानते

154
00:10:36,880 --> 00:10:41,120
हैं। जैसे मैं अभी कुछ दिन पहले जो तथाकथित वो सेल्फ

155
00:10:41,120 --> 00:10:45,120
प्रोक्लेम आचार्य है आचार्य प्रशांत उनके अनुयायियों

156
00:10:45,120 --> 00:10:49,280
के पास में गया था। एक छोटी सी कन्वर्सेशन हुई थी हमारे YouTube चैनल पर डली

157
00:10:49,280 --> 00:10:53,360
हुई है। तो उन्होंने कहा कि भाई श्री राम श्री रामचंद्र जी को

158
00:10:53,360 --> 00:10:57,440
ले कोई क्लेम किया था मैंने कि श्री रामचंद्र जी मनुस्मृति को मानते

159
00:10:57,440 --> 00:11:01,440
थे। तो वो जो अनुयाई थे सो कॉल्ड आचार्य

160
00:11:01,440 --> 00:11:05,520
के वो बोलते हैं कि श्री रामचंद्र जी ने लिखी है क्या रामायण? हां हमने देखा

161
00:11:05,520 --> 00:11:09,600
है ये वो कहते हैं कि श्री रामचंद्र जी ने रामायण लिखी है क्या? तो फिर आप ये

162
00:11:09,600 --> 00:11:13,840
कैसे मान सकते हो कि श्री रामचंद्र जी मानते थे अच्छा तो मेरा प्रश्न

163
00:11:13,840 --> 00:11:17,920
वहां पर ये था कि आपको राम शब्द कहां से मिला?

164
00:11:17,920 --> 00:11:22,240
कहां से मिला राम राम शब्द? यदि आप राम के अस्तित्व

165
00:11:22,240 --> 00:11:26,560
को स्वीकार करते हैं कि हां भाई कोई मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र

166
00:11:26,560 --> 00:11:30,880
आए थे जिनके लिए रामो विग्रह धर्म कहा गया

167
00:11:30,880 --> 00:11:34,960
श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है तो जहां से आपको आप राम

168
00:11:34,960 --> 00:11:39,120
के अस्तित्व को मान रहे हैं वहीं से राम के विषय में जो दूसरी जानकारियां

169
00:11:39,120 --> 00:11:43,120
है वो आपको माननी होंगी अगर आप उसी ग्रंथ की दी हुई दूसरी

170
00:11:43,120 --> 00:11:47,520
जानकारियों को डिनाइड कर रहे हैं कि भैया हम इस रामायण

171
00:11:47,520 --> 00:11:51,840
से राम को तो ले रहे हैं मगर मगर जो राम जी के विषय में दूसरी जानकारियां

172
00:11:51,840 --> 00:11:56,000
दे दी गई है कि वो ऐसे थे वो ऐसे करते थे वो वैसे करते थे वो

173
00:11:56,000 --> 00:12:00,320
उन जानकारियों को हम अपने मनो मुताबिक मानेंगे उसको हम मानते हैं ये किसी ने अज्ञानता

174
00:12:00,320 --> 00:12:04,480
वश या फिर लालचवश द्वेषवश भयवश किसी कारण से

175
00:12:04,480 --> 00:12:08,720
प्रभावित रूप से वहां लिख दिया है कि राम जी वनस्पति को मानते थे तो

176
00:12:08,720 --> 00:12:12,800
हमें मानना पड़ेगा यदि हम किसी के कहे हुए के अनुसार श्री राम

177
00:12:12,800 --> 00:12:16,960
जी चंद्र जी तो रामायण लिख के आपको नहीं दे रहे हैं कि भैया मैं था मैंने

178
00:12:16,960 --> 00:12:21,200
यही प्रश्न किया कि रामचंद्र जी ने तो ये नहीं कहा ना कि मैं था। वाल्मीकि

179
00:12:21,200 --> 00:12:25,360
जी ने ही कहा ना कि वो थे। तो अगर वाल्मीकि जी के कहे अनुसार आप राम

180
00:12:25,360 --> 00:12:29,520
का श्री रामचंद्र जी का अस्तित्व स्वीकार कर रहे हैं तो वाल्मीकि जी के कहे

181
00:12:29,520 --> 00:12:33,520
अनुसार ही आपको स्वीकार करना होगा कि रामचंद्र जी मनुस्मृति

182
00:12:33,520 --> 00:12:38,000
को मानते थे। इसी प्रकार से जो लोग ये कहते हैं कि

183
00:12:38,000 --> 00:12:42,160
हम शिव जी को मानते हैं मगर जो शास्त्र है ना शास्त्रों में यू ही कुछ

184
00:12:42,160 --> 00:12:46,240
अपने मन से ऋषियों ने लिख दिया उसको मानना आवश्यक नहीं होता। तो बात ये

185
00:12:46,240 --> 00:12:50,240
आती है कि वो शिव जी को मानते कहां से हैं?

186
00:12:50,240 --> 00:12:54,240
कहां से आपने शिव जी को लिया है? शिव जी का स्वरूप शिव

187
00:12:54,240 --> 00:12:58,640
जी की जो लीलाएं हैं, शिव जी की जो शक्तियां है, जो भी उनकी कथाएं

188
00:12:58,640 --> 00:13:02,880
हैं जिनके कारण आप शिव जी को जानते हो, उन्हें मानते हो, उन्हें भजते हो

189
00:13:02,880 --> 00:13:06,880
वो सारी चीजें आप जो सोर्स ऑफ नॉलेज जहां से आपको मिल रही है

190
00:13:06,880 --> 00:13:11,120
वहीं से आपको मानना पड़ेगा। हां तो जो लोग ये कहते हैं कि ना कि आधी

191
00:13:11,120 --> 00:13:15,200
अधूरी शास्त्र की इतनी बात मान लो इतनी बात मत मानो इसका

192
00:13:15,200 --> 00:13:19,440
खंडन किया गया है हमारे न्याय शास्त्रों में इसको कहा गया है अर्ध कुकुट

193
00:13:19,440 --> 00:13:23,440
न्याय इसको कहा गया है अधूट न्याय मतलब किसी की एक चीज आपने

194
00:13:23,440 --> 00:13:27,440
मान ली और उसी व्यक्ति की दूसरी चीज आपने नहीं मानी आपने कहा शिवजी देखो

195
00:13:27,440 --> 00:13:31,680
ऐसे डमरू बजाते हैं ये प्रमाण है शिवजी के पास डमरू है ये हमने मान लिया

196
00:13:31,680 --> 00:13:35,760
मगर शिवजी के पास त्रिशूल है ये हमने नहीं माना तीसरा नेत्र है ये हमने

197
00:13:35,760 --> 00:13:39,840
नहीं माना यदि आप तीसरा नेत्र नहीं मानते तो आप यह भी मत मानो कि डमरू है। यदि

198
00:13:39,840 --> 00:13:43,840
आप तीसरा नेत्र नहीं मानते तो यह भी मत मानो कि शिवजी थे। कोई

199
00:13:43,840 --> 00:13:47,840
और अपना स्वतंत्र रूप से ऐसा सोर्स ऑफ नॉलेज लाओ जिसमें ये क्लियर

200
00:13:47,840 --> 00:13:48,720
हो कि शिवजी

201
00:13:48,720 --> 00:13:52,960
थे। तो पहली बात तो ये हो गई कि शास्त्रों को पूरा का पूरा मानना आवश्यक

202
00:13:52,960 --> 00:13:57,680
है। उसी को कहते हैं प्रमाण्य बुद्धि। अब दूसरी बात आती है कि

203
00:13:57,680 --> 00:14:01,760
जैसा कि विजय जी ने बताया कि नॉलेज किससे ले? तो

204
00:14:01,760 --> 00:14:06,240
शास्त्रों के द्वारा बताया गया कि नॉलेज किससे ले? इसकी नॉलेज आपके लिए ऑथेंटिक

205
00:14:06,240 --> 00:14:10,240
हो सकती है। हां, ये बहुत जरूरी है क्योंकि इस बात में

206
00:14:10,240 --> 00:14:14,480
मैं एक और चीज ऐड करना चाहूंगी। स्पेशली फॉर माय व्यूअर्स जो भी इनके

207
00:14:14,480 --> 00:14:18,720
व्यूअर्स हैं आप लोग फिर भी बहुत कुछ समझ पाएंगे ऑलरेडी। बट

208
00:14:18,720 --> 00:14:23,120
अ लॉट ऑफ़ माय व्यूअर्स दे आर बिगिनर्स। एंड वो बहुत क्यूरियस

209
00:14:23,120 --> 00:14:27,200
है। एंड यू ऑल वांट टू नो एंड अंडरस्टैंड अ लॉट ऑफ़ थिंग्स एंड दैट्स व्हाई आई एम

210
00:14:27,200 --> 00:14:31,200
गोइंग टू टेक ब्रेक्स एंड ब्रेक इट डाउन फॉर यू। सो यू

211
00:14:31,200 --> 00:14:35,520
कैन अंडरस्टैंड फास्टर। तो अब बात यहां पर दोबारा

212
00:14:35,520 --> 00:14:39,760
ये आ जाती है कि इस इनफ्लुएंसरर ने डाला कि बे

213
00:14:39,760 --> 00:14:43,920
महामृत्युंजय मंत्र बोल लो। इस इनफ्लुएंसरर ने डाला गायत्री

214
00:14:43,920 --> 00:14:48,160
मंत्र बोल लो। और दूसरा बोल रहा है कि नहीं बोलना है दीक्षा

215
00:14:48,160 --> 00:14:52,400
की जरूरत है या ये मंत्र आप नहीं बोल सकते हैं। तो फट

216
00:14:52,400 --> 00:14:56,400
से हम चले जाएंगे। ये तो डिस्क्रिमिनेशन है। कैसे नहीं बोल सकते? जस्ट

217
00:14:56,400 --> 00:15:00,560
बिकॉज़ मंत्र आपको अवेलेबल है। Google पर लोगों ने गाने

218
00:15:00,560 --> 00:15:03,840
गा लिए हैं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप

219
00:15:03,840 --> 00:15:07,840
वो कर लें। मेरा प्रश्न उनके यही सबसे पहले तो हम

220
00:15:07,840 --> 00:15:12,000
थोड़ा पीछे चलते हैं कि माय क्वेश्चन गोस टू यू। आप पहले

221
00:15:12,000 --> 00:15:16,160
ये समझिए आपको मंत्र कहां से मिला? आपको मंत्र पुस्तक से मिला

222
00:15:16,160 --> 00:15:20,160
है। अब वो पुस्तक में वो मंत्र लिखा है। उसका

223
00:15:20,160 --> 00:15:24,400
अर्थ क्या है? उसको आपको देने का दीक्षा होगी ना। इसीलिए

224
00:15:24,400 --> 00:15:28,640
तो गुरु अपना शिष्य बनाता था। मंत्र देके तो शिष्य बनते हैं। अब क्योंकि

225
00:15:28,640 --> 00:15:32,640
आपको गुरु ने मंत्र देके शिष्य नहीं बनाया तो आप ऐसे ही मंत्र मत उठाइए।

226
00:15:32,640 --> 00:15:37,200
अब और पीछे जाते हैं कि अब आपको वो मंत्र गुरु

227
00:15:37,200 --> 00:15:41,440
से कैसे प्राप्त होगा? क्या वीडियो में सुन के प्राप्त होगा?

228
00:15:41,440 --> 00:15:45,760
और कौन गुरु है जो आपको वो मंत्र प्राप्त कराएंगे?

229
00:15:45,760 --> 00:15:49,920
तो ऑब्वियसली कोई वीडियो में बोल के आपको मंत्र नहीं दे सकता। फोन पे मंत्र

230
00:15:49,920 --> 00:15:54,080
बोल के आपकी दीक्षा नहीं कर सकता। पैसे लेके आपको मंत्र देके

231
00:15:54,080 --> 00:15:58,640
या चार पांच योगिक ट्रिक्स करवा के आपको वो नहीं कर सकता।

232
00:15:58,640 --> 00:16:02,880
तो अब यह बात आपको समझनी पड़ेगी और जो

233
00:16:02,880 --> 00:16:06,960
भी इनफ्लुएंसरर आपको सबसे पहले क्योंकि हमारा सेकंड टॉपिक इसके

234
00:16:06,960 --> 00:16:11,120
बाद यही आएगा कि आप सबसे पहले देखिए कि आप

235
00:16:11,120 --> 00:16:15,120
जिसे फॉलो कर रहे हैं वो कौन से गुरु परंपरा से आ रहे हैं। अगर

236
00:16:15,120 --> 00:16:18,960
वो किसी गुरु परंपरा से नहीं आ रहे हैं जो शास्त्र प्रमाणित

237
00:16:18,960 --> 00:16:23,040
है। आप उनकी बातों को सीरियसली मत लें। आप उनको बस

238
00:16:23,040 --> 00:16:27,040
एक कंटेंट वैल्यू उनकी है डिपेंडिंग अपॉन हाउ मच मनी यू

239
00:16:27,040 --> 00:16:31,200
कैन इन्वेस्ट। आप पांच कैमरे में इन्वेस्ट करते हैं आपका कंटेंट वैसा बनेगा।

240
00:16:31,200 --> 00:16:35,280
आप एडिटर में इन्वेस्ट कीजिए, कॉपीराइटर में इन्वेस्ट कीजिए,

241
00:16:35,280 --> 00:16:40,160
सोशल मीडिया मैनेजर में इन्वेस्ट कीजिए। दिस इज़ व्हाट आई कॉल फंडिंग।

242
00:16:40,160 --> 00:16:44,320
तो, इट्स नॉट अबाउट द क्वालिटी ऑफ़ द प्रोडक्शन

243
00:16:44,320 --> 00:16:49,360
क्वालिटी ऑफ़ द कंटेंट। बट इट इज रियली अबाउट द ऑथेंटिसिटी

244
00:16:49,360 --> 00:16:53,680
ऑफ द कंटेंट दैट एनीबडी इज गिविंग यू एंड टू नो इट सिंपली

245
00:16:53,680 --> 00:16:57,680
इज टू क्वेश्चन ये कौन से गुरु का चेला है या

246
00:16:57,680 --> 00:17:01,920
ये कौन से गुरु की चेली है एंड हाउ इज दिस

247
00:17:01,920 --> 00:17:06,160
पर्सन गिविंग मी दिस इन तो अब हम यहां से जब

248
00:17:06,160 --> 00:17:10,480
आगे बढ़ेंगे व्हाट आई वांट यू टू टेल टू द व्यूअर्स कि

249
00:17:10,480 --> 00:17:14,640
भाई ये गुरु परंपरा है क्या है ना और एक

250
00:17:14,640 --> 00:17:18,960
मतलब संक्षिप्त में कि अलग-अलग जो हमारी संप्रदाय हैं क्योंकि

251
00:17:18,960 --> 00:17:23,200
देखा जाए तो सारे के सारे जो हमारे संत है चाहे हम चैतन्य

252
00:17:23,200 --> 00:17:27,280
महाप्रभु ले चाहे हम मधवाचार्य ले चाहे हम शंकराचार्य

253
00:17:27,280 --> 00:17:31,280
हमारे खुद की जो गुरु परंपरा है वो ले एवरीबडी इज कंप्लीटली

254
00:17:31,280 --> 00:17:34,560
इंटरवाइन है ना

255
00:17:34,560 --> 00:17:37,520
तो इसमें

256
00:17:37,520 --> 00:17:41,600
एक मैं चीज थोड़ा सा फंडामेंटली अगर सूत्रात्मक शैली में पीछे से

257
00:17:41,600 --> 00:17:45,680
बेस क्लियर करता चलूं हां तो सबसे पहले हम इस पर

258
00:17:45,680 --> 00:17:49,920
नहीं जाएंगे कि भाई किसी को ये मंत्र पढ़ना क्यों निषेध किया गया

259
00:17:49,920 --> 00:17:54,320
और किसी को क्यों कहा गया कि तुम ये करो ये एक अलग चैप्टर है

260
00:17:54,320 --> 00:17:58,400
मगर मगर मगर क्या है कि हमको नॉलेज आ रही है और हमको

261
00:17:58,400 --> 00:18:02,560
किससे लेनी है किससे नहीं लेनी है तो इसके लिए हम अगर जिससे

262
00:18:02,560 --> 00:18:06,560
हम शिव जी को ले रहे हैं जिससे हम राम जी को ले रहे हैं तो राम जी के और शिव जी के विषय

263
00:18:06,560 --> 00:18:10,720
में जो अन्य नियम है वो भी उसी से लेने होंगे ये बात क्लियर हो गई

264
00:18:10,720 --> 00:18:15,120
तो जो अन्य नियम है कि शिव जी और राम जी की पूजा कैसे करनी

265
00:18:15,120 --> 00:18:19,280
गायत्री माता की पूजा कैसे करनी है? गायत्री मंत्र पढ़ना है, किसको पढ़ना है,

266
00:18:19,280 --> 00:18:23,360
किसको नहीं पढ़ना है? या फिर महामृत्युंजय मंत्र पढ़ना है, नहीं

267
00:18:23,360 --> 00:18:27,680
पढ़ना है, किसको पढ़ना है? ये सारी चीजें भी हमें शास्त्रों से लेनी होंगी।

268
00:18:27,680 --> 00:18:31,680
तो शास्त्रों में क्या बताया गया है कि आपको धर्म की व्याख्या किसकी सुननी

269
00:18:31,680 --> 00:18:35,840
है, स्पष्ट बहुत सूत्रात्मक शैली में वो मैं आपको पहले क्लियर कर दूं। क्योंकि

270
00:18:35,840 --> 00:18:40,400
उसी का एक भाग है परंपरा। तो हम अगले स्टेप परंपरा को क्लियर करेंगे।

271
00:18:40,400 --> 00:18:43,120
तो

272
00:18:43,120 --> 00:18:47,120
सबसे पहला जो नियम है जो अंतिम निर्णायक हो आपका

273
00:18:47,120 --> 00:18:51,600
आपके जीवन में आध्यात्मिक विषय में अगर आप भगवत गीता पढ़ेंगे

274
00:18:51,600 --> 00:18:56,080
तो आपको अंतिम निर्णय निर्णायक जो प्राप्त होगा चार 34 और

275
00:18:56,080 --> 00:19:00,080
15 वे अध्याय के अनुसार और अथर्ववेद 11 पांच 16 के

276
00:19:00,080 --> 00:19:04,160
अनुसार और मनुस्मृति 12वा अध्याय 112

277
00:19:04,160 --> 00:19:08,160
से 114 के अनुसार जो अंतिम निर्णय निर्णायक आपके जीवन में होना चाहिए

278
00:19:08,160 --> 00:19:12,800
वो होना चाहिए कोई सन्यासी कोई विरक्त

279
00:19:12,800 --> 00:19:17,280
कोई वैराग्य को पा प्राप्त कर चुका व्यक्ति कोई महापुरुष

280
00:19:17,280 --> 00:19:21,360
जिसके अंदर वैराग्य के लक्षण हो कोई सन्यासी हो तो आपके जीवन

281
00:19:21,360 --> 00:19:25,360
में मान लीजिए कि आप किसी गृहस्थ से दीक्षा शिक्षा ले भी रहे हैं

282
00:19:25,360 --> 00:19:29,600
मगर उसके पीछे भी कोई सन्यासी हो जिसके अंडर अंडर

283
00:19:29,600 --> 00:19:33,760
में वो अनुगत रह के आपको कोई सिद्धांत दे रहा हो और आपको ये मालूम

284
00:19:33,760 --> 00:19:38,000
होना चाहिए कि जिन अंशों में ये वो सन्यासी जिनके ये शिष्य

285
00:19:38,000 --> 00:19:42,080
हैं और मेरे मेरे गुरु जिन अंशों में उनके विरुद्ध जाएंगे तो हम वहां पर

286
00:19:42,080 --> 00:19:46,160
उनको मानेंगे क्योंकि वो अंतिम निर्णायक है और उनको ही हम इनके

287
00:19:46,160 --> 00:19:50,160
रूप में प्राप्त कर रहे हैं। मान लीजिए कि मैं मेरे मेरा

288
00:19:50,160 --> 00:19:54,400
मेरे अंतिम निर्णायक है जगतुगुरु शंकराचार्य ठीक है पूरी पीठाधीश्वर

289
00:19:54,400 --> 00:19:58,160
अब मैं उनसे शिक्षा दीक्षा लेने नहीं

290
00:19:58,160 --> 00:20:02,320
जा पा रहा हूं या शिक्षा लेने नहीं जा पा रहा हूं परंतु उनहीं की ही शिष्य

291
00:20:02,320 --> 00:20:06,800
परंपरा में कोई है जो मेरे घर के काफी निकट है आचार्य

292
00:20:06,800 --> 00:20:11,040
है और उन्होंने वेद वेदांगों का अध्ययन किया है।

293
00:20:11,040 --> 00:20:15,120
पर मैं उनसे वो मेरे लिए सुलभ है। मैं उनसे शिक्षा ले रहा हूं। मगर

294
00:20:15,120 --> 00:20:19,440
मेरे अंतिम निर्णायक तब भी कौन है? सन्यासी पूरी पीठाधीश्वर

295
00:20:19,440 --> 00:20:23,680
मैंने दीक्षा शिक्षा इनसे ले रहा हूं। ठीक है। मगर जितने अंशों में ये उनके विरुद्ध

296
00:20:23,680 --> 00:20:27,680
जाए क्योंकि मैं इनसे शिक्षा और दीक्षा इसलिए ले रहा हूं। इनके रूप

297
00:20:27,680 --> 00:20:31,840
में मैं उनहीं से उन्हीं को अपना गुरु बनाया है। तो अंतिम

298
00:20:31,840 --> 00:20:35,840
निर्णायक आपका कौन होना चाहिए? जिसके जीवन में विरक्तता हो। अलग

299
00:20:35,840 --> 00:20:39,920
शब्द भेद से अलग-अलग जगह पर ये बात स्पष्ट लिखी है। जैसे 11 5 16

300
00:20:39,920 --> 00:20:44,320
अथर्ववेद ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मृति 12वा अध्याय 112

301
00:20:44,320 --> 00:20:48,800
से 114 धर्म प्रसंशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को अधिष्ठाता

302
00:20:48,800 --> 00:20:53,920
ब्रह्मचारी को बनाए। फिर इसी बात को भगवत गीता में कहा गया है कि जो

303
00:20:53,920 --> 00:20:58,080
क्या कहते हैं जो वैराग्य के शस्त्र से ये

304
00:20:58,080 --> 00:21:02,160
माया रूपी प्रपंच का जो मूल है उसको काट दिया जाता है तो वो वैराग्य का

305
00:21:02,160 --> 00:21:06,240
शस्त्र यानी वैरागी के पास होता है। इसी तरीके से कई अध्याय है

306
00:21:06,240 --> 00:21:10,400
उसमें गीता में जहां पर वैराग्य को प्रमोट किया गया है और 15 वे अध्याय में

307
00:21:10,400 --> 00:21:13,360
भी बताया गया है कि वैराग्य को प्राप्त कर लेने वाला

308
00:21:13,360 --> 00:21:17,520
जिसको जिसके लिए मोक्ष सुलभ हो जाता है तो वो

309
00:21:17,520 --> 00:21:21,520
उसके लक्षण बताए गए हैं जो जितेंद्रिय हो जिसका मान मोह नष्ट हो

310
00:21:21,520 --> 00:21:25,600
चुका हो जिसका राग द्वेष में जिसका भाव ना रह गया हो तो

311
00:21:25,600 --> 00:21:29,600
ये सारे लक्षण घटित होते हैं सन्यासी तो पहला लक्षण क्या है कि

312
00:21:29,600 --> 00:21:33,680
आपके जीवन में धर्म और अध्यात्म को लेकर के कोई ना कोई एक

313
00:21:33,680 --> 00:21:38,000
सन्यास ्यासी होना चाहिए। पहला नियम आ गया।

314
00:21:38,000 --> 00:21:42,240
पहला नियम आ गया सन्यासी। दूसरा नियम है कि

315
00:21:42,240 --> 00:21:46,800
वो जो सन्यासी है वो आपको जो शिक्षा दे रहा हो

316
00:21:46,800 --> 00:21:50,960
धर्म शास्त्रों का ज्ञान दे रहा हो। वो ज्ञान भी उसने

317
00:21:50,960 --> 00:21:55,040
किसी गुरु परंपरा से ही प्राप्त किया हो। पीछे से गुरु परंपरा

318
00:21:55,040 --> 00:21:59,200
से उसके पास आ रहा हो। अब गुरु परंपरा क्यों आवश्यक है? मैं अभी बता रहा हूं।

319
00:21:59,200 --> 00:22:03,280
पहले क्लियर कर लो। गुरु परंपरा से वो ज्ञान आपके पास

320
00:22:03,280 --> 00:22:07,360
उनके पास आ रहा हो वो परंपरा से आपको दे रहे हो। एक तीसरा विषय

321
00:22:07,360 --> 00:22:11,760
और है कि वो जितने भी हमारे प्रामाणिक शास्त्र है समस्त

322
00:22:11,760 --> 00:22:16,480
श्रुति स्मृति शास्त्र उनमें सामंजस्य की शिक्षा दे रहा हो। ये वही अर्ध्या

323
00:22:16,480 --> 00:22:20,480
अभी मैंने कहा ना ऐसा नहीं कर सकते कि अथर्ववेद की इतनी चीज मान ली। अथर्ववेद की इतनी चीज

324
00:22:20,480 --> 00:22:24,560
नहीं मानी। ऐसा नहीं कर सकते कि शिव पुराण की एक चीज मान ली और शिव पुराण की दूसरी

325
00:22:24,560 --> 00:22:28,400
चीज नहीं मान ली। इसमें हम वो 3G मेथड के बारे में बात कर रहे हैं। गुरु

326
00:22:28,400 --> 00:22:32,160
और ग्रंथ जी जी तो

327
00:22:32,160 --> 00:22:36,160
हमारा एक मिशन है आहान का। आप जब भी आान का कोई वीडियो देखेंगे लास्ट में एक मिशन

328
00:22:36,160 --> 00:22:40,160
आता है। मिशन गुरु गोविंद और ग्रंथ इसको हमने शॉर्ट में नाम दिया है

329
00:22:40,160 --> 00:22:44,160
एम थ्री जी। तो इस इसमें ये

330
00:22:44,160 --> 00:22:48,240
जो फंडामेंटल्स है हम क्लियर करते हैं सबसे पहले किसी के भी कि

331
00:22:48,240 --> 00:22:52,960
आपका जो गुरु वो अंतिम निर्णायक हो वो सन्यासी हो। फिर वो

332
00:22:52,960 --> 00:22:57,120
ज्ञान परंपरा से देता हो। परंपरा की बात अगर प्रमाण की करें तो भगवत

333
00:22:57,120 --> 00:23:01,440
गीता तीन 16 चार दो शिव पुराण में निरुक्त में

334
00:23:01,440 --> 00:23:05,520
कई जगह पर परंपरा की बात हो रही है। मुंडकोपनिषद में ऋषि लोग अपनी परंपरा

335
00:23:05,520 --> 00:23:09,760
बता रहे हैं। ऋषि गण जो है वो अपनी परंपरा बता रहे हैं कि सबसे पहले ज्ञान उन्होंने उनको

336
00:23:09,760 --> 00:23:13,920
दिया। फिर उन्होंने उन्होंने कहा तक आया। तो

337
00:23:13,920 --> 00:23:18,240
ये आपको परंपरा के उदाहरण हमारे धर्म शास्त्रों में प्रामाणिक

338
00:23:18,240 --> 00:23:22,240
धर्म शास्त्रों में जगह मिल जाएंगे। अब परंपरा का महत्व क्या है? वो

339
00:23:22,240 --> 00:23:26,240
भी थोड़ा सा समझ लीजिए। जब आप अपने घर

340
00:23:26,240 --> 00:23:30,320
के किसी बालक को विद्यालय में एडमिशन कराने ले जाते हैं

341
00:23:30,320 --> 00:23:34,320
या फिर उसको कहीं कोचिंग में पढ़ने के लिए ले जाते हैं तो आप

342
00:23:34,320 --> 00:23:38,560
ये देखते हैं कि जिससे मैं अपने बालक को शिक्षा दिलवा रहा हूं उसने

343
00:23:38,560 --> 00:23:42,720
शिक्षा कहां से ली है? स्कूल कैसा है? वो कहां से वो वो कहां

344
00:23:42,720 --> 00:23:43,600
से प्रामाणिक

345
00:23:43,600 --> 00:23:47,680
है? वो कहां से सर्टिफाइड है? वो स्कूल कहां से प्रमाणिक है? जब भी

346
00:23:47,680 --> 00:23:51,680
हम किसी का सर्टिफिकेशन देखते हैं किसी भी मामले तो उस

347
00:23:51,680 --> 00:23:55,760
सर्टिफिकेशन में यह लिखा होता है कि उसने वो फलानी शिक्षा

348
00:23:55,760 --> 00:23:59,760
कहां से प्राप्त की है यानी कि उसके गुरु का नाम। जैसे इसमें हम ये भी

349
00:23:59,760 --> 00:24:04,000
ये भी उदाहरण दे सकते हैं कि जैसे जब हम बच्चे को जैसे कोई बच्चा

350
00:24:04,000 --> 00:24:08,240
है बच्चा बीमार होता है तो आप पीडियाटिशियन के पास जाते हैं। उसके पास उस चीज की डिग्री

351
00:24:08,240 --> 00:24:12,480
है। हार्ट की बीमारी है तो आप दिल के डॉक्टर के पास जाएंगे। आप कैंसर

352
00:24:12,480 --> 00:24:16,560
के डॉक्टर के पास नहीं जाएंगे। कैंसर का बीमारी है तो कैंसर वाले के पास जाएंगे

353
00:24:16,560 --> 00:24:20,720
तो हर एक फील्ड के स्पेशलिस्ट हैं। है ना? आप उनके पास जाते

354
00:24:20,720 --> 00:24:25,200
हैं। आपको मानसिक पीड़ा आप साइकोलॉजिस्ट के पास जाते हैं। वैसे ही

355
00:24:25,200 --> 00:24:29,600
सनातन धर्म जो एक आध्यात्मिक बॉडी

356
00:24:29,600 --> 00:24:33,760
है। एक लिविंग आध्यात्मिक बॉडी है जिसके अंदर जो आप पीछे

357
00:24:33,760 --> 00:24:37,920
देख रहे हैं इट्स अ स्माल एग्जांपल ऑफ क्या हमारे सनातन धर्म

358
00:24:37,920 --> 00:24:42,160
में रस है, ज्ञान है, विज्ञान है। तो उनकी

359
00:24:42,160 --> 00:24:46,240
एक्सपर्टीज भी ट्रेडिशनली

360
00:24:46,240 --> 00:24:50,320
हमारे पास गुरु परंपरा के माध्यम से आती है।

361
00:24:50,320 --> 00:24:54,320
इसकी मैं आपको एक और एक स्मॉल एग्जांपल दूंगी जिसके अंदर मैं

362
00:24:54,320 --> 00:24:58,400
थोड़ा ये बोलूंगी कि लोग थोड़े ना दोगले हो जाते हैं। पर दोगले कैसे होते

363
00:24:58,400 --> 00:24:58,960
हैं?

364
00:24:58,960 --> 00:25:02,960
हैरीपॉटर देखेंगे वहां पे हाउसेस को मान लेंगे कि हैरी

365
00:25:02,960 --> 00:25:07,040
इस हाउस का था। वो लड़का दूसरे हाउस का था। वो तीसरे हाउस का

366
00:25:07,040 --> 00:25:11,440
था। और वो जो हाउसेस दिखा रहे हैं वो उनकी गुरु परंपरा है। है ना?

367
00:25:11,440 --> 00:25:15,440
तो वो हम मानते हैं शुरू को शुरू से कि दुनिया सबसे शुरू हुई तो

368
00:25:15,440 --> 00:25:19,600
हॉब्स में इतने स्कूल्स थे। तो द स्कूल्स दैट

369
00:25:19,600 --> 00:25:24,080
दे आर ट्राइंग टू शो यू देयर इज एकजेक्टली व्हाट गुरु परंपरा इज।

370
00:25:24,080 --> 00:25:28,560
और गुरु परंपरा हमारी स्टार्ट किसी मनुष्य से नहीं हो रही है।

371
00:25:28,560 --> 00:25:32,800
भगवान से डायरेक्टली स्टार्ट हो रही है। सो दिस इज अ सिस्टम

372
00:25:32,800 --> 00:25:36,880
दैट इज अरेंज्ड बाय द डिवाइन इटसेल्फ। इट्स अ लिविंग बॉडी टिल

373
00:25:36,880 --> 00:25:41,280
नाउ सारी संप्रदाय अभी है। है ना? तो

374
00:25:41,280 --> 00:25:45,440
आपको अब आप बताइए आपको अगर वैसा उस क्वालिटी

375
00:25:45,440 --> 00:25:49,520
का ज्ञान चाहिए जहां पे कुछ भी गोलमोल नहीं हो। कोई आपको लूटने की कोशिश

376
00:25:49,520 --> 00:25:53,600
नहीं कर रहा है तो आप यहां संप्रदाय में जाएंगे

377
00:25:53,600 --> 00:25:59,040
या फिर आप फिर वो साधना के कोर्सेस खरीदेंगे। जी है ना?

378
00:25:59,040 --> 00:26:03,040
अच्छा इसमें मैं कुछ अभी भी जो मोड

379
00:26:03,040 --> 00:26:07,120
लोग अपने आप को कहते हैं या फिर बहुत ज्यादा नहीं समझ पाए होंगे इन

380
00:26:07,120 --> 00:26:11,120
बातों को तो थोड़ा सा लॉजिकली समझा मान लीजिए

381
00:26:11,120 --> 00:26:14,080
कि सबसे पहले अगर कोई ये कहे कि वेद में ये

382
00:26:14,080 --> 00:26:18,320
लिखा है या शिव जी के बारे में मैं आपको ये बता रहा हूं या गायत्री

383
00:26:18,320 --> 00:26:22,560
माता के बारे में गायत्री मंत्र के बारे में मैं आपको ये बता रहा हूं या कोई कुछ भी क्लेम

384
00:26:22,560 --> 00:26:26,720
करे कोई यूट्यूबर करे कोई इंस्टाग्रामर करे वो कुछ भी क्लेम करे हां

385
00:26:26,720 --> 00:26:30,880
क्लेम तो कर ही देते हैं कि मंदिर में बजता है तो ये

386
00:26:30,880 --> 00:26:34,960
मंत्र तो मंदिर में बजता है तो हर कोई तो गलत नहीं हो मंदिर में

387
00:26:34,960 --> 00:26:38,960
बजता है। कोई गलत नहीं हो सकता। जब कचरे वाला गाड़ी लेने वो कचरा लेने आता

388
00:26:38,960 --> 00:26:43,040
है ना तो वो भी आजकल किसी किसी की बेल बजाता है तो वहां पे भी लोगों ने गायत्री मंदिर

389
00:26:43,040 --> 00:26:47,440
लगा रखा है। उसको भी लोग प्रमाण मान के यूज़ करने डोर बेल्ट डोर बेल्ट

390
00:26:47,440 --> 00:26:51,680
और एक और चीज हम ऐड करेंगे। हमने हाल फिलहाल में एक वीडियो देखी थी। हम इसको

391
00:26:51,680 --> 00:26:56,000
अपने तक अब और रख नहीं पा रहे हैं। आई थिंक मुझे एक्सप्रेस कर ही देना चाहिए।

392
00:26:56,000 --> 00:27:00,160
तो ये माता जी है देवी जी। ये

393
00:27:00,160 --> 00:27:04,400
पहले तो गायत्री मंत्र के साथ आपको अ

394
00:27:04,400 --> 00:27:08,560
कॉपर का छोटा सा एक वो हवन कुंड इतने साइज का इतने साइज

395
00:27:08,560 --> 00:27:12,720
का उसके ऊपर चावल और गुड़ को मिक्स करिए और

396
00:27:12,720 --> 00:27:16,880
गैस के ऊपर आप सोचिए गैस के ऊपर आप उस कॉपर के बर्तन

397
00:27:16,880 --> 00:27:21,120
को रखिए और गायत्री मंत्र की आहुति देके स्वाहा कर दीजिए और

398
00:27:21,120 --> 00:27:25,200
इसको बलिव यज्ञ तो आप रोज घर

399
00:27:25,200 --> 00:27:29,360
पे कर सकते हैं। अब आप इस चीज को कितना

400
00:27:29,360 --> 00:27:33,440
मानेंगे? है ना? और इसमें लोग मान रहे हैं ओह माय गॉड

401
00:27:33,440 --> 00:27:37,680
यह तो बहुत इजी है। यह तो मैं कर सकता हूं। मुझे इसका अध्ययन

402
00:27:37,680 --> 00:27:41,840
करके ये समझ आया कि आधे से ज्यादा लोग करने

403
00:27:41,840 --> 00:27:46,000
वाले नहीं है। बट फिर भी एक तो कंडीशनिंग आ रही है दिमाग

404
00:27:46,000 --> 00:27:50,080
में कि लोगों को कंटेंट बनाना है तो कुछ भी बना दो। है

405
00:27:50,080 --> 00:27:54,320
ना? कि फूल डाल दो, तिल डाल दो, कौवे के लिए रख दो

406
00:27:54,320 --> 00:27:58,480
कि कौवा आकर खाएगा तो ठीक है। अगर कौवे ने नहीं खाया तो तो

407
00:27:58,480 --> 00:28:03,040
क्या होगा? तो मतलब और फिर आप देखेंगे कि ये जो इनफ्लुएंसर्स

408
00:28:03,040 --> 00:28:07,200
हैं ये आपको तो बोलेंगे कि चावल और तिल

409
00:28:07,200 --> 00:28:11,360
डाल के रख दो कौवे के लिए और पता नहीं कौन सा मंत्र बोल दो। है ना पितृ

410
00:28:11,360 --> 00:28:15,760
पक्ष में। पर खुद एक ब्राह्मण से ही कर्मकांड करवाएंगे।

411
00:28:15,760 --> 00:28:19,760
जी जी। तो ये इस मैंने एक बहुत अच्छी अभी एक

412
00:28:19,760 --> 00:28:23,920
डॉक्यूमेंट्री टाइप की देखी थी उसका चैनल हां मुझे नहीं

413
00:28:23,920 --> 00:28:27,920
पता कि वो मतलब कहीं गुरु परंपरा से जुड़ा हुआ है कि नहीं मगर मुझे लगता है कि

414
00:28:27,920 --> 00:28:32,000
अगर थोड़ी बहुत उसमें कमियां होंगी भी उसकी मेंटालिटी में

415
00:28:32,000 --> 00:28:36,000
तो शायद थोड़ी बहुत बातचीत करके सुधर जाए अभी तक मैंने देखा नहीं स्पष्ट रूप से

416
00:28:36,000 --> 00:28:40,080
कि क्या कमियां है मगर अगर निकलती है तो उसका नाम चैनल का

417
00:28:40,080 --> 00:28:44,240
नाम है इंडिक्स नाम है शायद तो उसने अभी एक डॉक्यूमेंट्री बनाई

418
00:28:44,240 --> 00:28:44,740
है

419
00:28:44,400 --> 00:28:49,200
छोटी सी जिसमें उसने ये बताया है कि एक फैशन आया है नया।

420
00:28:49,200 --> 00:28:53,200
एक समृद्ध लोगों ने एक फैशन नया निकाला है। भाई लोगों के पास इतना

421
00:28:53,200 --> 00:28:57,200
टाइम कहां से होता है? तो मैं तो पहले तो यही सोच लेता हूं कि लोग इतनी

422
00:28:57,200 --> 00:29:01,520
अब इसको क्या कहेंगे? साधारण भाषा में कहे तो चोचलेबाजी। इन चोचलेबाजियों

423
00:29:01,520 --> 00:29:05,520
के लिए कहां से आपके पास टाइम आता है कि अब लोगों ने एक नया

424
00:29:05,520 --> 00:29:09,680
फैशन निकाला कि अब लोग अब जो उनके हिसाब से जो कपड़े

425
00:29:09,680 --> 00:29:13,680
होते हैं वो उनके लिए फैशन नहीं है या फिर ज्वेलरी होती है वो

426
00:29:13,680 --> 00:29:17,920
उनके लिए अब फैशन नहीं है या फिर हेयर स्टाइल वो जावेद हबीब

427
00:29:17,920 --> 00:29:22,560
ये वो सब ये सब उनका अब नया फैशन है कि हम किसी विचारधारा

428
00:29:22,560 --> 00:29:26,640
को जोड़ के अपना फैशन दिखाते कि हम इसको मानते

429
00:29:26,640 --> 00:29:29,600
हैं समझ

430
00:29:29,600 --> 00:29:33,760
विचारधारा कैसी कि मैं सपोर्ट करता हूं समलैंगिकता

431
00:29:33,760 --> 00:29:37,920
को मैं सपोर्ट करता हूं वो जो आजकल वो

432
00:29:37,920 --> 00:29:42,080
चेंज हो रहा है ना लिंग परिवर्तन इत्यादि मैं इन सब चीजों को मतलब जो हमारे धर्म

433
00:29:42,080 --> 00:29:46,080
के विरुद्ध चीजें हैं और जिसको लेकर के एक ताना बाना बुना जाता है

434
00:29:46,080 --> 00:29:50,160
सनातन धर्म के विरोध में उन चीजों को लेकर के वो लोग खुद कहते हैं कि मैं जो

435
00:29:50,160 --> 00:29:54,320
है उसको सपोर्ट करता हूं ऐसे कई लोग आपको मिल जाएंगे बट

436
00:29:54,320 --> 00:29:59,280
खुद की पर्सनल लाइफ में उन लोगों वो चीजें ओन नहीं कर

437
00:29:59,280 --> 00:29:59,780
अपने

438
00:29:59,600 --> 00:30:03,760
लिए वो एक ब्राह्मण ढूंढेंगे हवन कराने के लिए जबकि दूर जाकर के कहेंगे कि मैं जो वर्ण

439
00:30:03,760 --> 00:30:07,840
व्यवस्था को नहीं मानता मैं कास्टिज्म को नहीं मानता कास्टिज्म घृणा मूलक

440
00:30:07,840 --> 00:30:11,840
अलग है और व्यवस्था मूलक अलग है उसप हम फिर बात करेंगे

441
00:30:11,840 --> 00:30:15,920
तो ये जो एक नया फैशन समृद्ध लोगों ने

442
00:30:15,920 --> 00:30:20,080
ओन किया है क्या नया फैशन कि जो चीज हम नहीं भी मानते

443
00:30:20,080 --> 00:30:24,160
हैं भले ही मगर हम सपोर्ट उसको करके दिखाते हैं कि देखो देखो हमारी कितनी ब्रॉड

444
00:30:24,160 --> 00:30:28,480
माइंडेड विचारधारा है हम कितने ज्यादा ज्यादा ओपन माइंडेड है। ये सब वो करके दिखा।

445
00:30:28,480 --> 00:30:33,120
हमारे एक मित्र हैं। उन्होंने हमें बताया कि एक कोई ऐसे मतलब इनफ्लुएंसरर

446
00:30:33,120 --> 00:30:37,200
है जो कंटेंट बनाते हैं। कंटेंट है, व्यूअरशिप है।

447
00:30:37,200 --> 00:30:41,280
लोग देखते हैं, कंज्यूम करते हैं। उसमें उनको किसी आचार्य

448
00:30:41,280 --> 00:30:45,280
ने बोला साउथ में कि आप ये काम गलत करते

449
00:30:45,280 --> 00:30:50,160
हैं। कुछ कुछ चीजों को लेके सारा नहीं कुछ कुछ चीजों को लेके ये मत करिए।

450
00:30:50,160 --> 00:30:54,160
उसके बाद और वो आचार्य है। है ना? और उस आचार्य से जब

451
00:30:54,160 --> 00:30:58,240
वो व्यक्ति वापस आता है तो वो बोलता है कि दे आर सो

452
00:30:58,240 --> 00:31:02,400
ट्रेडिशनलिस्ट हम भाई पूरा ज्ञान आप

453
00:31:02,400 --> 00:31:06,560
सनातन धर्म का ट्रेडिशन का ही तो दे रहे हो एक एक ग्रंथ एक एक मंत्र

454
00:31:06,560 --> 00:31:10,880
एक एक साधना तो उसके बाद पीछे

455
00:31:10,880 --> 00:31:15,440
में जाके व्यक्ति बोल रहा है कि आप बड़े ट्रेडिशनलिस्ट

456
00:31:15,440 --> 00:31:19,520
है मतलब फ्लेक्स मतलब को ले पर करने दो

457
00:31:19,520 --> 00:31:23,840
परंपरा को ले हीन भावना और सच कहूं तो लोगों को आजकल धर्म

458
00:31:23,840 --> 00:31:28,480
नहीं चाहिए। लोगों को आजकल कस्टमाइज धर्म चाहिए। कस्टमाइज

459
00:31:28,480 --> 00:31:32,480
समझ मुझे मंत्र बोल के मजा आया मतलब

460
00:31:32,480 --> 00:31:36,560
मजेदार बस बस बस तो मैं इसमें वो एक बात खत्म करने

461
00:31:36,560 --> 00:31:40,720
वाला था जो तर्क मैं बताने वाला हूं परंपरा को लेकर। हां

462
00:31:40,720 --> 00:31:44,960
अब परंपरा की बात परंपरा को लेकर के एक लॉजिकल ग्राउंड है कि मान

463
00:31:44,960 --> 00:31:50,960
लीजिए कोई आज आपसे यह कहे कि भाई

464
00:31:51,200 --> 00:31:55,440
टी एच ए टी यानी दैट दैट का मतलब

465
00:31:55,440 --> 00:31:59,680
दैट का प्रोनाउंसिएशन दैट नहीं होता है दैट होता है कोई आपसे

466
00:31:59,680 --> 00:32:03,680
ये कहे तो आप उससे सबसे पहला प्रश्न क्या करोगे भाई

467
00:32:03,680 --> 00:32:07,920
कहां से तूने पढ़ाई की है हां कोई भी बोलता है अंग्रेजी

468
00:32:07,920 --> 00:32:11,920
का शब्द गलत हो जाता है तो व्यक्ति बोलता कहां से पढ़ा? कहां से पढ़ा है।

469
00:32:11,920 --> 00:32:16,720
इसका मतलब कि आजकल कोई एक्सेप्ट करे या ना करे

470
00:32:16,720 --> 00:32:21,040
एक्सेप्ट करे या ना करे वो डायरेक्ट और इनडायरेक्टली

471
00:32:21,040 --> 00:32:25,120
वो परंपरा को फॉलो कर रहा है। हम अपने जीवन के हर क्षेत्र में परंपरा को फॉलो ही

472
00:32:25,120 --> 00:32:29,280
कर रहे हैं। जो भी व्यक्ति पढ़ाई कर रहा है जो भी व्यक्ति किसी से बाजा बजाना तक सीख

473
00:32:29,280 --> 00:32:30,720
रहा है वो देखता है कि

474
00:32:30,720 --> 00:32:34,800
सर्टिफाइड कहां से? हां इसका मतलब हम अपने जीवन के हर क्षेत्र में परंपरा

475
00:32:34,800 --> 00:32:39,200
को ही चाहते हैं। बट नाम लेकर के शंकराचार्य परंपरा

476
00:32:39,200 --> 00:32:43,200
नाम लेकर के और जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जो

477
00:32:43,200 --> 00:32:47,440
विषय है यानी कि धर्म अध्यात्म उसको लेकर के हम लोग परंपरा

478
00:32:47,440 --> 00:32:51,520
नहीं चाहते हैं। उसमें हम मनचाही चीजें चाहते हैं। जबकि हम डॉक्टर के पास

479
00:32:51,520 --> 00:32:55,520
जाएंगे तो ये सर्टिफाइड है कि नहीं? ये कहीं राह चलता कोई झोलाचाप तो नहीं है। ये

480
00:32:55,520 --> 00:32:59,520
सारी चीजें अब इसमें एक बात आती है कि ये तो हमने टेक्निकली समझ

481
00:32:59,520 --> 00:33:03,600
लिया। मैं एक छोटा सा उदाहरण और दे दूं। एक बार कहीं डिस्कशन चल

482
00:33:03,600 --> 00:33:07,680
रहा था मुस्लिम के साथ। मुस्लिम लोग

483
00:33:07,680 --> 00:33:11,760
हमारे ग्रंथों का अर्थ करते हैं उल्टा पुल्टा अपने हिसाब से। आपने जाकिर

484
00:33:11,760 --> 00:33:15,760
नायक का नाम अगर सुना होगा। उसने उल्टा पुल्टा अपने हिसाब से खूब अर्थ

485
00:33:15,760 --> 00:33:20,640
किया मुस्लिम। अब हम उससे अगर यह कहे

486
00:33:20,640 --> 00:33:25,040
कि भैया तुम इसके अर्थ करने का अधिकार नहीं रखते हो क्योंकि तुमने परंपरा

487
00:33:25,040 --> 00:33:29,040
से अध्ययन नहीं किया है। जिस प्रकार से कोई अगर डैड को

488
00:33:29,040 --> 00:33:33,200
दाट बोलेगा तो हम उससे कह सकते हैं भैया तुम्हारा सर्टिफिकेशन कहां से किसने

489
00:33:33,200 --> 00:33:37,360
तुमको 10थ पास किया है क्या उसने ये माना है ऐसे नहीं बोलते हां इसे

490
00:33:37,360 --> 00:33:41,440
ऐसे नहीं बोलते तो वहां तो हम जब उससे ये कहेंगे तो वो

491
00:33:41,440 --> 00:33:45,440
कहेगा भाई मैं परंपरा को नहीं मानता जबकि उनके यहां परंपरा को

492
00:33:45,440 --> 00:33:46,000
ना मानने

493
00:33:46,000 --> 00:33:50,240
की स्थिति में भी वो स्वयं परंपरा को मानते हैं कि कुरान का अर्थ हम वही

494
00:33:50,240 --> 00:33:54,240
मानेंगे जो हमारे यहां चैन ऑफ नरेशन से आ रहा होगा। चैन ऑफ नरेशन

495
00:33:54,240 --> 00:33:58,480
से जो अर्थ आ रहा होगा हम वो अर्थ मानेंगे नहीं तो हर व्यक्ति अपना अपना अर्थ

496
00:33:58,480 --> 00:34:02,560
लगाएगा तो धर्म के बहुत सारे अर्थ हो जाएंगे और धर्म

497
00:34:02,560 --> 00:34:06,800
का अर्थ क्या होता है जो आपको मर्यादा देता है मर्यादा यानी आपको लिमिटेड करता

498
00:34:06,800 --> 00:34:11,040
है आपकी रेखा खींचता है कि ये नहीं करना है ये धर्म है

499
00:34:11,040 --> 00:34:15,360
और ये करना है ये धर्म है तो धर्म का अर्थ

500
00:34:15,360 --> 00:34:19,680
धर्म का अर्थ ही है धर्म का पर्यावसान है निश्चितता में यानी

501
00:34:19,680 --> 00:34:23,760
कि वो फिक्स होना चाहिए धर्म का मतलब ही फिक्स होना चाहिए और

502
00:34:23,760 --> 00:34:27,760
जब हम ऐसी खुली छूट दे देंगे कि कोई व्यक्ति अपने मन से धर्म का कुछ

503
00:34:27,760 --> 00:34:31,760
भी अर्थ कर रहा है तो निश्चितता कहां रह गई? तो फिर वो धर्म नहीं रहेगी। वो फिर धर्म नहीं रहा। वो

504
00:34:31,760 --> 00:34:35,840
तो फिर वो पशु तुल्य चीजें हो गई। पर एग्जांपल आ जाती

505
00:34:35,840 --> 00:34:40,000
है कि अगर हम जो आप भी बोलते हैं बहुत बार अगर हम इतनी

506
00:34:40,000 --> 00:34:44,080
ओपन विंडो दे देंगे ना कि जो जिसको यू नो सब अपनी मर्जी

507
00:34:44,080 --> 00:34:48,320
के मालिक है। एवरीबडी इज गोइंग टू थिंक द वे दे आर

508
00:34:48,320 --> 00:34:52,640
तो फिर आप आपको फिर बुरा लगेगा जब वो व्यक्ति

509
00:34:52,640 --> 00:34:56,960
माता बहन और बेटी में फर्क नहीं कर पाएगा। ये जो माता

510
00:34:56,960 --> 00:35:01,120
बहन और बेटी का फर्क है ये वो लिमिट है। ये

511
00:35:01,120 --> 00:35:05,840
वो लिमिट कैसे है कि इट लिमिट्स यू टुवर्ड्स द अधर्म

512
00:35:05,840 --> 00:35:10,080
दैट यू डोंट बिकम अ धार्मिक। आप अधार्मिक कार्य नहीं करें।

513
00:35:10,080 --> 00:35:14,560
वो लिमिट जो क्रिएट करता है दैट इज मर्यादा।

514
00:35:14,560 --> 00:35:18,720
और वो मर्यादा क्या है? वो हमारे

515
00:35:18,720 --> 00:35:22,960
शास्त्र हमारा धर्म सनातन धर्म इटसेल्फ इज दैट मर्यादा।

516
00:35:22,960 --> 00:35:27,360
जी जब हम मुझे ऐसा लगता है कभी-कभी हम बोलते हैं कि हमारा

517
00:35:27,360 --> 00:35:31,360
धर्म है ना तो मुझे लगता है कि लोग धर्म को अपने

518
00:35:31,360 --> 00:35:35,520
से अलग करके देखते हैं। जबकि धर्म ये है कि एक माता बहन

519
00:35:35,520 --> 00:35:39,840
और बेटी में फर्क है ना तो जब आप में इतनी वेरिएशन

520
00:35:39,840 --> 00:35:43,840
डिस्टिंशन है टू अंडरस्टैंड ऑल दी थिंग्स तो आप उसको

521
00:35:43,840 --> 00:35:47,840
अलग मत कीजिए। सनातन धर्म कैन नॉट बी अ डिफरेंट थिंग फ्रॉम

522
00:35:47,840 --> 00:35:51,920
यू। इट इज यू। इट इज व्हेन यू वांट एवरीबडी टू ट्रीट यू राइट। इट

523
00:35:51,920 --> 00:35:56,000
इज़ व्हेन यू वांट द राइट रिजल्ट्स। सो अब दोबारा

524
00:35:56,000 --> 00:36:00,080
वापस आ जाते हैं कि थोड़ा सूत लायक भी आ जाता है। इस बात को लेके मैं अपनी

525
00:36:00,080 --> 00:36:04,160
एक बात खत्म कर दूं। हां। अभी आपने कहा जय

526
00:36:04,160 --> 00:36:08,160
धर्म की बात आपने की तो श्री रामचंद्र जी की मुझे याद आ जाती है। जबकि धर्म की

527
00:36:08,160 --> 00:36:12,560
बात होती है। अह एक बार कोई कॉलेज में एक कार्यक्रम

528
00:36:12,560 --> 00:36:16,240
चल रहा था तो एक कोई लड़का था जिसने ये कहा था जय श्री

529
00:36:16,240 --> 00:36:20,800
राम। वहां पर उसने उद्घोष कर दिया था। तो उसको वहां के जो

530
00:36:20,800 --> 00:36:24,800
उसके जो प्रिंसिपल थे या मैनेजर थे जो भी थे कॉलेज के उन्होंने प्रशासन ने

531
00:36:24,800 --> 00:36:28,880
उसको नीचे उतार दिया स्टेज से क्यों उतारते समय उन्होंने ये पूछा था

532
00:36:28,880 --> 00:36:33,040
कि इसका क्या लॉजिक है जय श्री राम यहां क्यों बोल रहे हो क्या लॉजिक है हां वो

533
00:36:33,040 --> 00:36:37,440
लेडी थी शायद वो लेडी तो ये जो बात कह रही है अभी

534
00:36:37,440 --> 00:36:42,320
विजय जी वो बात ही वहां पर उस बच्चे को मालूम होनी चाहिए वो क्या बात

535
00:36:42,320 --> 00:36:46,400
कि राम जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हमको सबसे पहले पता

536
00:36:46,400 --> 00:36:50,400
होना चाहिए राम कौन है राम के के लिए लिखा हुआ है वाल्मीकि रामायण 337

537
00:36:50,400 --> 00:36:54,480
13 में रामो विग्रह धर्मा राम धर्म का साक्षात

538
00:36:54,480 --> 00:36:58,640
स्वरूप है विग्रह है और धर्म क्या है धर्म ही ना पशु

539
00:36:58,640 --> 00:37:01,600
भी समाना

540
00:37:01,600 --> 00:37:05,600
सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी

541
00:37:05,600 --> 00:37:09,680
है इस ये जो निर्णय है ये हम धर्म के आधार पर कर पाते हैं।

542
00:37:09,680 --> 00:37:13,840
अगर हमारे पास धर्म नहीं है तो हम सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता

543
00:37:13,840 --> 00:37:18,080
है कौन बहन है कौन पत्नी है इसका निर्णय नहीं कर सकते किसके साथ कैसा व्यवहार

544
00:37:18,080 --> 00:37:22,320
करना है इसका निर्णय नहीं कर सकते फिर हम में और जानवरों में कोई अंतर नहीं रह जाएगा

545
00:37:22,320 --> 00:37:27,040
क्योंकि जानवरों में हम में जो मुख्य चीजें है वो सेम है

546
00:37:27,040 --> 00:37:31,040
क्या कहते हैं उनको भी भूख लगती है आहार निद्रा भय मैथुन ये चार

547
00:37:31,040 --> 00:37:35,200
चीजें हम में और उनमें सामान्य है आहार यानी कि खाना निद्रा यानी

548
00:37:35,200 --> 00:37:40,480
कि सोना भय यानी कि सर्वाइवल और

549
00:37:40,480 --> 00:37:44,560
मैथुन यानी कि जो रिप्रोडक्शन वाली जो एक शक्ति है जीवो

550
00:37:44,560 --> 00:37:48,640
में वो। तो यह चार चीजें हम में और उनमें

551
00:37:48,640 --> 00:37:52,720
समान है। बस एक चीज हमारे पास एक्स्ट्रा है। धर्म उनके पास धर्म नहीं है।

552
00:37:52,720 --> 00:37:56,800
वो अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर नहीं कर सकते और हम कर सकते हैं। यही अंतर

553
00:37:56,800 --> 00:38:00,880
है पशु और मनुष्यों में। तो जब हम कहते हैं जय श्री राम। तो हम

554
00:38:00,880 --> 00:38:04,880
यह नहीं कहते पर्टिकुलर हम अपनी किसी आईडियोलॉजी की चय कर रहे हैं या

555
00:38:04,880 --> 00:38:09,040
हम हमारा उस मान लो कि वो आपके अनुसार एक पात्र है श्री रामचंद्र

556
00:38:09,040 --> 00:38:13,040
अन्यों के लिए पात्र है तो हम जब कह रहे हैं जय श्री राम तो हमारे लिए हो

557
00:38:13,040 --> 00:38:16,880
सकता है कि वो पात्र मगर वो समष्टि के रूप से जो राम को नहीं भी जानता

558
00:38:16,880 --> 00:38:21,040
उसके लिए भी जय श्री राम कहना इसलिए उचित है कि राम का अर्थ है धर्म

559
00:38:21,040 --> 00:38:25,040
धर्म का अर्थ है वो नियम जो आपको पशुओं से भिन्न मनुष्य बनाते

560
00:38:25,040 --> 00:38:29,440
है यानी कि जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते है उन नियमों की जय

561
00:38:29,440 --> 00:38:33,520
जो हमें हमें इंसान बनाते हैं। तो इसका अर्थ क्या हुआ? इसका अर्थ

562
00:38:33,520 --> 00:38:37,520
क्या हुआ? कि ये नियम सदा जीवित रहने चाहिए। इसलिए कहते हैं

563
00:38:37,520 --> 00:38:41,600
जय श्री राम। और जो मैं एक जो तर्क पूर्ण एक बात कहने वाला

564
00:38:41,600 --> 00:38:45,600
था कि इनफ्लुएंसर्स की बात क्यों नहीं सुनी जाए? परंपरा प्राप्त

565
00:38:45,600 --> 00:38:49,600
आचार्यों की बात क्यों सुनी जाए? तो उसमें फाइनली जो एक बात

566
00:38:49,600 --> 00:38:53,760
आती है कि हम श्री राम, श्री शिव जी या किसी की भी आराधना

567
00:38:53,760 --> 00:38:58,320
कर रहे हैं, कोई भी आराधना कर रहे हैं। ये आराधना का बेस होता है हमारे शास्त्र।

568
00:38:58,320 --> 00:39:02,480
अब आप कहेंगे कि ठीक है हम शास्त्रों से ले लेते हैं। आप ये कह देंगे तो शास्त्र

569
00:39:02,480 --> 00:39:06,640
आपको मिलते कहां से हैं? दुकानों से। आप पब्लिश पब्लिशिंग हाउस

570
00:39:06,640 --> 00:39:10,960
से मिलते हैं। पब्लिशिंग हाउस के पास वो शास्त्र आए कहां से? हां।

571
00:39:10,960 --> 00:39:15,120
कहां से? ये बहुत भाई ऐसे तो मैंने भी कभी सोचा

572
00:39:15,120 --> 00:39:19,520
होता है। हां। तो ये जो शिव पुराण है, जो वेद है, उपनिषद है,

573
00:39:19,520 --> 00:39:23,520
ये क्या अभी 1000 साल पहले लिखे गए हैं? नहीं लिखे गए। तो

574
00:39:23,520 --> 00:39:27,520
फिर ये पब्लिशिंग हाउस के पास ये हजारों लाखों साल पुराने

575
00:39:27,520 --> 00:39:31,760
जो शास्त्र हैं वो कैसे आए? तब पता चलेगा कि वो शास्त्र

576
00:39:31,760 --> 00:39:32,260
हमारे

577
00:39:32,080 --> 00:39:36,240
पास आए हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों से। तो फिर इसका अर्थ क्या है? कि

578
00:39:36,240 --> 00:39:40,320
हम वेद किससे ले रहे हैं? आचार्य से। परंपरा प्राप्त। हम उपनिषद

579
00:39:40,320 --> 00:39:44,320
किससे ले रहे हैं? आचार्यों से। परंपरा प्राप्त। अब हम ये मान रहे हैं कि ईश्वर

580
00:39:44,320 --> 00:39:48,400
की वाणी है। ये मान रहे हैं ना हम? ये ईश्वर की वाणी है। ईश्वर प्रदत्त

581
00:39:48,400 --> 00:39:52,880
है। ठीक है? ईश्वर के द्वारा दिए गए हैं। ये हमारे जीवन का अंतिम प्रमाण है।

582
00:39:52,880 --> 00:39:57,040
ये कोई बस मजेदार ट्रिक पे गया हुआ एक्सपीरियंस नहीं है किसी तो

583
00:39:57,040 --> 00:40:01,040
यदि हम ये मानते हैं कि ये ईश्वरीय है ये जो ग्रंथ है ये

584
00:40:01,040 --> 00:40:05,280
ईश्वरीय है हम किस आधार पर मानते हैं क्योंकि इस आचार

585
00:40:05,280 --> 00:40:09,360
में जिसने हमको दिया है इस आचार्य पर हमें विश्वास है

586
00:40:09,360 --> 00:40:13,520
इसलिए हम ये मानते हैं ये ग्रंथ ईश्वरीय है तो जब हम

587
00:40:13,520 --> 00:40:17,520
इसका अर्थ करेंगे तो हमें ये देखना होगा कि जो

588
00:40:17,520 --> 00:40:21,680
अर्थ हम मान रहे हैं इसका वो इस आचार्य ने भी माना है कि नहीं हां

589
00:40:21,680 --> 00:40:25,760
तो हमें हमें जब परंपरा प्राप्त आचार्यों से मिलने वाले ग्रंथों पर विश्वास

590
00:40:25,760 --> 00:40:30,160
है तो परंपरा प्राप्त आचार्यों के अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं होगा?

591
00:40:30,160 --> 00:40:34,320
तो अगर इसको सूत्रात्मक शैली में कहे तो यदि हमें परंपरा

592
00:40:34,320 --> 00:40:38,320
प्राप्त आचार्यों के द्वारा मिलने वाले अर्थ पर विश्वास नहीं है

593
00:40:38,320 --> 00:40:42,320
तो हमें उनके द्वारा मिलने वाले ग्रंथ पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता।

594
00:40:42,320 --> 00:40:46,400
और यदि हमें उनके द्वारा मिलने वाले ग्रंथ पर विश्वास है तो उनके द्वारा

595
00:40:46,400 --> 00:40:47,280
मिलने वाले अर्थ

596
00:40:47,280 --> 00:40:51,680
पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता। मूर्खता है। हां।

597
00:40:51,680 --> 00:40:55,680
तो इसके अंदर हम और आप यह नहीं कह सकते कि नहीं

598
00:40:55,680 --> 00:40:59,680
ये आचार्य लालची है या अज्ञानी है इसलिए उन्होंने गलत अर्थ कर दिया।

599
00:40:59,680 --> 00:41:04,000
अरे भाई अगर वो तुमको गलत अर्थ दे सकते हैं वो तुम्हें गलत ग्रंथ

600
00:41:04,000 --> 00:41:08,080
भी तो दे सकते हैं। ग्रंथ पर विश्वास क्यों? तो यदि मान रहे हो

601
00:41:08,080 --> 00:41:12,080
शिव जी को तो पूरा मानो पूरा शास्त्रों को और यदि पूरा शास्त्रों को मान रहे हो तो

602
00:41:12,080 --> 00:41:16,080
पूरा गुरु परंपरा है। हां और ये आज बहुत ही सुंदर

603
00:41:16,080 --> 00:41:20,480
बात हुई है। दिस इज द फर्स्ट टाइम आई हैव आल्सो लाइक एक्सप्लोर दिस आईडिया

604
00:41:20,480 --> 00:41:24,480
विद हिम कि किसी भी पब्लिशिंग हाउस के पास आपके शास्त्र आने

605
00:41:24,480 --> 00:41:28,560
से पहले उनके पास भी कैसे पहुंचे? उनके पास पहुंचे। आपके

606
00:41:28,560 --> 00:41:32,640
ऋषियों के कारण ऋषियों ने लिखे थे। और बात यहां पर आ जाती

607
00:41:32,640 --> 00:41:36,720
है कि जब आपके पास ये शास्त्र ग्रंथ आए हैं आप

608
00:41:36,720 --> 00:41:41,040
उसकी ट्रांसलेशन पढ़ के भी उसका अर्थ स्वयं से खुद मत निकालिए।

609
00:41:41,040 --> 00:41:45,120
जब आपको कोई आचार्य गुरु बोलते हैं

610
00:41:45,120 --> 00:41:49,360
ना कि खुद से अकेले नहीं पढ़ना है। उसका मतलब यह नहीं है कि आप

611
00:41:49,360 --> 00:41:53,600
बुरे हैं या आप खराब हैं और आप योग्य नहीं है। ऐसे

612
00:41:53,600 --> 00:41:57,680
वो सिर्फ यह चाहते हैं कि अगर आप किसी

613
00:41:57,680 --> 00:42:01,840
कैपेबल टीचर के अंदर पढ़ेंगे तो आपसे कोई भी

614
00:42:01,840 --> 00:42:02,400
पॉइंट

615
00:42:02,400 --> 00:42:06,400
मिस नहीं होगा। आप किसी चीज का गलत अर्थ नहीं

616
00:42:06,400 --> 00:42:10,480
निकाल लेंगे और वो आपके चित्त के अंदर वो कंफ्यूजन

617
00:42:10,480 --> 00:42:14,480
बैठेगी नहीं है ना तो हमें बहुत ज्यादा

618
00:42:14,480 --> 00:42:18,560
ध्यान रखना चाहिए एंड मैं क्यों इसके ऊपर इतना एफ

619
00:42:18,560 --> 00:42:22,880
एम्फसाइज कर रही हूं क्योंकि मुझे यह रियलाइज हुआ है

620
00:42:22,880 --> 00:42:26,880
कि जब तक हम लोगों को इस चीज के बारे

621
00:42:26,880 --> 00:42:31,040
में क्वेश्चन करने में मजबूर नहीं करेंगे तब तक ये

622
00:42:31,040 --> 00:42:35,600
लोग अपने आचार्य परंपरा गुरु गुरु परंपरा की तरफ देखेंगे ही इन्हें।

623
00:42:35,600 --> 00:42:40,000
क्यों? क्योंकि स्क्रोल करना इजी है। है ना? मैं भी कंटेंट

624
00:42:40,000 --> 00:42:44,080
बनाती हूं। आई आल्सो मेक कंटेंट ऑन इट। बट आई मेक कंटेंट विद

625
00:42:44,080 --> 00:42:48,160
अ लॉट ऑफ रिस्पांसिबिलिटी। मेरे को कितनी बार आपको पूछना पड़ता

626
00:42:48,160 --> 00:42:52,240
है कि ये ठीक है, ये ठीक था? ये वाला फैक्ट ठीक है। क्या ये

627
00:42:52,240 --> 00:42:56,560
मंत्र में मतलब बीज अक्षर है? नहीं है। और जब मैं गुरुदेव

628
00:42:56,560 --> 00:43:00,800
से नहीं मिली थी, मेरी दीक्षा नहीं हुई थी, मैं कितनी गलतियां कर रही थी। पर

629
00:43:00,800 --> 00:43:04,960
मैंने वो सब हटाया है। जी और

630
00:43:04,960 --> 00:43:09,200
आप एक जब मेरा दीक्षा का समय है दीक्षा के बाद का आप देखिए

631
00:43:09,200 --> 00:43:13,440
कुछ चीजें आप देखेंगे कि पहले हो रही थी और उसके बाद आप एक बहुत बड़ा

632
00:43:13,440 --> 00:43:17,760
एक बहुत बड़ा चेंज तो मैंने देखा है कि ये पहले अपने

633
00:43:17,760 --> 00:43:21,920
हर वीडियो के अंत में बोलती थी प्रणव शक्ति प्रणव आप तो बोल

634
00:43:21,920 --> 00:43:26,000
सकते हैं क्योंकि लोगों को नहीं पता प्रणव क्या है? मुझे तो क्या है कि

635
00:43:26,000 --> 00:43:30,400
मैं स्वयं को सदैव अशुद्ध जैसा एक लगता है वो दासत्व

636
00:43:30,400 --> 00:43:34,480
भाव होता है तो वो मेरे अंदर रहता है कि मैं निकृष्ट हूं तो सदैव ऐसा लगता

637
00:43:34,480 --> 00:43:38,800
है कि मैं पवित्र चीजों को ना बोलूं ना उपचारित करूं बहुत रेयर केसेस

638
00:43:38,800 --> 00:43:42,800
में उपचारित करूं तो असहज सा लगता है फिर भी मैं बोल देता हूं जिससे जो सुनने

639
00:43:42,800 --> 00:43:46,800
वाले उनको समझ में आउट है क्योंकि हमने तो पूछा था कि

640
00:43:46,800 --> 00:43:50,800
अगर एजुकेशन पपस के लिए कुछ बोलना भी पड़े सामने वाले को नहीं समझ आ रहा

641
00:43:50,800 --> 00:43:54,880
तो मैंने कहा था फिर आप समझा सकते ये अपने वीडियो के अंत

642
00:43:54,880 --> 00:43:58,880
में ओम शक्ति ओम बोलती थी। तो इसके पीछे भी एक कहानी है

643
00:43:58,880 --> 00:44:02,880
कि वो कैसे बोलना बंद किया मगर वो फिर कभी लंबा होता चला जाएगा। मगर

644
00:44:02,880 --> 00:44:07,120
आज के आप इनके वीडियोस देखेंगे तो एक बहुत ही स्पष्ट उदाहरण है कि इनके

645
00:44:07,120 --> 00:44:11,120
जीवन में कैसे इन्होंने चेंजेस किए कि अब ये अपने किसी वीडियो के अंत

646
00:44:11,120 --> 00:44:15,120
में प्रण ओम शक्ति ओम नहीं बोलती है। अपने अच्छा मेरे

647
00:44:15,120 --> 00:44:19,760
से जुड़ चुकी थी। मैंने इनको कभी नहीं कहा अपने से कि आप ऐसा मत करो।

648
00:44:19,760 --> 00:44:23,760
ये ये चीज इनके अंदर अपने से आई इन्होंने एक दिन मुझसे बोला

649
00:44:23,760 --> 00:44:27,760
कि आपने मुझे सब कुछ बता दिया। गायत्री मंत्र नहीं बोलना है या स्त्रियों को

650
00:44:27,760 --> 00:44:31,840
नहीं बोलना चाहिए या अमुक अमुक ऐसे कार्य करना चाहिए। मगर आपने

651
00:44:31,840 --> 00:44:32,800
मुझे ये क्यों नहीं बोला?

652
00:44:32,800 --> 00:44:36,960
मैं अपने वीडियो के हर वीडियो के अंत में बोल रही हूं ओम शक्ति ओम। आपने मुझे बोला क्यों?

653
00:44:36,960 --> 00:44:40,960
तो मैंने इसको जवाब दिया। एक बार गुरुदेव ने कहा था जगतुगुरु शंकराचार्य जी ने

654
00:44:40,960 --> 00:44:45,120
कि भैया किसी को पूरा पूरा घी एक ही दिन में नहीं पिला

655
00:44:45,120 --> 00:44:47,760
देना चाहिए।

656
00:44:47,760 --> 00:44:51,760
तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं शुरुआत में इनको कह देता कि भाई तुम्हें प्रणव बोलना नहीं

657
00:44:51,760 --> 00:44:56,010
चाहिए तो हो सकता है इनका कुछ और हल्ट हो जाता जयकांत का

658
00:44:56,010 --> 00:45:00,960
[हंसी] आता है क्वेश्चन

659
00:45:00,960 --> 00:45:04,960
तो अंदर से वो एक जो फील आई तो इन्होने जो है प्रणव का उच्चारण

660
00:45:04,960 --> 00:45:09,120
करना बंद किया तो ये एक स्पष्ट चेंज था प्रणव के अलावा और

661
00:45:09,120 --> 00:45:13,280
भी जैसे क्योंकि स्कूल में है ना जैसे आप अभी देखते है बच्चों

662
00:45:13,280 --> 00:45:17,600
को गायत्री मंत्र कराते हमारे स्कूल में भी करा ही देते चीज तो मुझे जब

663
00:45:17,600 --> 00:45:21,760
समझ आया अब कैसे इतनी डिटेल में जाए

664
00:45:21,760 --> 00:45:25,920
बिना कि कुछ मंत्र जिनका उच्चारण हम कर रहे थे इनफैक्ट महामृत्युंजय

665
00:45:25,920 --> 00:45:30,080
मंत्र का उच्चारण आई यूज टू डू अ लॉट अपने क्लासेस में भी मैं करती

666
00:45:30,080 --> 00:45:34,080
थी एंड देन वी वुड चट अ लॉट ऑफ़ मंत्र वि द बीज अक्षर क्योंकि मुझे नहीं

667
00:45:34,080 --> 00:45:38,240
पता था ना एंड आई ओपनली टॉक अबाउट इट एंड आई ओपनली से

668
00:45:38,240 --> 00:45:42,320
इट कि जब मुझे नहीं पता था तो मैं भी करती थी पर जब

669
00:45:42,320 --> 00:45:46,560
मुझे समझ आया और एक दिन में समझ नहीं आया आया ओवर द पीरियड

670
00:45:46,560 --> 00:45:47,920
टाइम रह के आई स्टार्टेड

671
00:45:47,920 --> 00:45:52,160
क्वेश्चनिंग क्योंकि मुझे यह पता था कि मेरे पास इतना ज्ञान नहीं

672
00:45:52,160 --> 00:45:56,160
है जितना उनके पास है तो मुझे क्वेश्चन करना चाहिए समझना

673
00:45:56,160 --> 00:46:00,400
चाहिए नॉट क्वेश्चनिंग टू आर्ग्यू क्वेश्चनिंग

674
00:46:00,400 --> 00:46:04,560
टू लर्न है ना तो जब मैंने धीरे धीरे धीरे धीरे मुझे

675
00:46:04,560 --> 00:46:08,560
समझ आया और फिर मेन बात ये आती है कि

676
00:46:08,560 --> 00:46:13,440
चलो समझ आया मैंने छोड़ा उसका फायदा क्या हुआ उसका बहुत फायदा हुआ

677
00:46:13,440 --> 00:46:17,440
मतलब मुझे ऐसा लग रहा था। यह उस टाइम की बात है कि मेरी लाइफ

678
00:46:17,440 --> 00:46:21,520
में मुझे ऐसा लग रहा था प्रॉब्लम्स जा ही रही है। कुछ ना कुछ कुछ ना

679
00:46:21,520 --> 00:46:25,600
कुछ गलत होता ही रहता है। और क्यों हो रहा है मुझे समझ

680
00:46:25,600 --> 00:46:29,920
नहीं आया। और जैसे ही ये छोटा सा शोधन

681
00:46:29,920 --> 00:46:34,160
हुआ ना कि बस ये मंत्र नहीं बोलना है। मैंने कभी

682
00:46:34,160 --> 00:46:38,240
नहीं सोचा था कि कुछ मंत्र ना बोलने से मेरी लाइफ की प्रॉब्लम्स

683
00:46:38,240 --> 00:46:43,600
खत्म हो जाए। पर ऐसा हुआ है मनुष्य

684
00:46:43,600 --> 00:46:47,920
मनुस्मृति में भी है वाल्मीकि रामायण में तो नारद जी स्पष्ट बोलते हैं

685
00:46:47,920 --> 00:46:52,160
श्री रामचंद्र जी से कि आप आपके आसपास जब कभी अकालिक घटनाएं

686
00:46:52,160 --> 00:46:56,240
होने लगे ये वाल्मीकि रामायण में वचन जब कभी आसपास

687
00:46:56,240 --> 00:47:00,240
देखिए अकाल वाली चीजें होने लगे जो अनएक्सेक्टेड होती है अचानक

688
00:47:00,240 --> 00:47:02,960
से घटनाएं तो आप समझ लीजिए कि आपके

689
00:47:02,960 --> 00:47:07,440
पास आसपास जो अविजन कोई तप

690
00:47:07,440 --> 00:47:11,440
कोई ऐसी चीजें चल चल रही अवधि पूर्ण मतलब विधि विरुद्ध हो के चल रही

691
00:47:11,440 --> 00:47:15,440
है। अब वो विधियां क्यों बनी है वो एक अलग सेक्शन है कि भेद का नाम

692
00:47:15,440 --> 00:47:19,680
ही संसार है। भेद का नाम ही संसार है। तो इसी का रास्ता

693
00:47:19,680 --> 00:47:24,080
अलग है। इसी का रास्ता अलग है। मगर गंतव्य सबका एक है। क्योंकि कार्मिक साइकिल

694
00:47:24,080 --> 00:47:28,160
डिफरेंट है। जी। आज अगर हम सबका एक ही कार्मिक साइकिल होता

695
00:47:28,160 --> 00:47:33,120
तो हम अमीबा अमीबा की तरह होते। बट हम अमीबा नहीं है। वी आर नॉट वन सेल्फ।

696
00:47:33,120 --> 00:47:37,120
आई एम इन माय बॉडी। ऑल यू व्यूअर्स आर इन योर ओन बॉडीज। आपके पेरेंट्स

697
00:47:37,120 --> 00:47:41,120
अलग हैं। मेरे पेरेंट्स अलग हैं। भाई बहन अलग हैं। मित्र अलग हैं।

698
00:47:41,120 --> 00:47:45,200
जन्म का स्थान अलग है। हमारे आर्थिक स्थिति अलग

699
00:47:45,200 --> 00:47:49,520
है। है ना? हमारी सोशल स्थिति अलग है। मानसिक स्थिति अलग है। ये अलग

700
00:47:49,520 --> 00:47:54,160
क्यों है? क्यों हमारे जीवन में कुछ लोग आए कुछ लोग गए कुछ घटनाएं

701
00:47:54,160 --> 00:47:58,720
होगी हुई है क्योंकि हमारे कर्म अलग है

702
00:47:58,720 --> 00:48:02,960
इसी कर्म के आधार पे हमें ये सब मिला है अगर मैं एक प्रश्न पूछू

703
00:48:02,960 --> 00:48:07,360
मैंने ऐसा क्या मुझे मेरे ये माता पिता ही क्यों मिले तो आपका

704
00:48:07,360 --> 00:48:11,440
पॉइंट नहीं जाएगा ना कि कर्म से मिले ना बिल्कुल अभी मैं इसमें एक

705
00:48:11,440 --> 00:48:15,520
चीज ले लेता हूं आर्य समाज का ये कहना है कि

706
00:48:15,520 --> 00:48:18,000
भगवान जो है वो भेद क्यों करेगा

707
00:48:18,000 --> 00:48:22,000
भगवान जो है वो भेद क्यों करेगा जबकि भगवान ने स्त्री और पुरुष

708
00:48:22,000 --> 00:48:26,160
में भेद किया कि बॉडी वाइज भेद किया। भगवान

709
00:48:26,160 --> 00:48:30,320
ने पेड़ को अलग बनाया, मोटरसाइकिल को अलग बनाया, माइक

710
00:48:30,320 --> 00:48:35,040
को अलग बनाया, चार्जर को अलग बनाया। कान बनाया नाक बनाया आंख

711
00:48:35,040 --> 00:48:39,040
जब तक जब तक दो चीजें एक दूसरे से डिफरेंट है तब तक

712
00:48:39,040 --> 00:48:43,360
ही संसार है जब तक ये डिफरेंट नहीं है भेद नहीं है

713
00:48:43,360 --> 00:48:47,840
तो अद्वैत की स्थिति है वो तो मोक्ष की स्थिति है। अच्छा अब

714
00:48:47,840 --> 00:48:51,920
एक छोटी सी बात सोचिए कि किसी को मान लीजिए कि चलिए ठीक है

715
00:48:51,920 --> 00:48:56,000
हम लोग इस बात पे ध्यान नहीं देते कि स्त्री पुरुष का ही है

716
00:48:56,000 --> 00:49:00,080
या फिर अमुक वर्ण परंपरा है दूसरी वर्ण परंपरा है हम अगर

717
00:49:00,080 --> 00:49:04,320
इस पर ध्यान दें किसी को साउथ अफ्रीका के ऐसे जंगलों

718
00:49:04,320 --> 00:49:08,480
में जन्म दिया कि शायद उसका पूरा जीवन बीत जाए वो वेद शब्द का नाम तक

719
00:49:08,480 --> 00:49:12,800
ना सुन पाए क्यों दिया ईश्वर ने अगर

720
00:49:12,800 --> 00:49:16,960
अगर आपके पूर्व जन्म से कोई अंतर नहीं नहीं होता है। कोई

721
00:49:16,960 --> 00:49:21,440
मतलब नहीं होता है पूर्व जन्म से इस जन्म का और आपको जो है बिल्कुल वो

722
00:49:21,440 --> 00:49:25,600
ईश्वर बिल्कुल यथावत सबको एक ही जैसे जन्म देता है। तो सबको बिल्कुल वहां

723
00:49:25,600 --> 00:49:29,760
उसके जहां वेद मंत्र का उच्चारण चल रहा हो उसके बगल में जन्म ले

724
00:49:29,760 --> 00:49:33,040
सबको इक्वली जन्म ले निकलते ही माता

725
00:49:33,040 --> 00:49:37,120
के गर्भ से और तुरंत वेद मंत्र कानों में गया। मगर ऐसा तो नहीं होता है। किसी किसी

726
00:49:37,120 --> 00:49:41,200
का जीवन बीत जाता है। शायद वो वेदों तक ना पहुंच पाए। अपने कर्म ही सुधार पाए

727
00:49:41,200 --> 00:49:45,440
जीवन में। हां इसकी और सिंपल एग्जांपल है थोड़ी मतलब

728
00:49:45,440 --> 00:49:49,440
और कैजुअल एग्जांपल है कुछ लोगों का जीवन बीत जाता है उन्हें पता नहीं होता है कि

729
00:49:49,440 --> 00:49:53,440
दाल चावल क्या है तो ऐसा क्यों है क्यों है है ना

730
00:49:53,440 --> 00:49:57,440
ऐसा क्यों है सिंपल कर लो बिल्कुल कि जीवन बीत जाता है

731
00:49:57,440 --> 00:50:01,600
ये नहीं पता है कि पाव भाजी क्या है तो इसका अर्थ है कि

732
00:50:01,600 --> 00:50:05,600
ईश्वर ने कुछ सोच समझ के ही आपको अमुक अमुक शरीर में भेजा है

733
00:50:05,600 --> 00:50:09,760
और अब उस अमुक शरीर के अनुसार जो आपकी विधियां है जो आपको

734
00:50:09,760 --> 00:50:13,840
प्राप्त हुई है कि आप अगर इस तरह के शरीर में आए हैं तो आपको भगवान

735
00:50:13,840 --> 00:50:17,840
को प्राप्त करने का रास्ता ये है। आप अगर इस तरह के शरीर में आए हैं तो

736
00:50:17,840 --> 00:50:22,240
आपके द्वारा भगवान को प्राप्त किए जाने का रास्ता ये है। वो विधियां ही हमें डिफरेंट

737
00:50:22,240 --> 00:50:26,240
करती है कि ये जो स्त्रियां है वो अपने पति के लिए करवा

738
00:50:26,240 --> 00:50:30,800
का व्रत रखेंग। हरतालिका वो तीज का व्रत रखेंग।

739
00:50:30,800 --> 00:50:35,040
क्या कहते हैं ये जो अभी आज छठ पर्व

740
00:50:35,040 --> 00:50:39,040
है छठ पूजा ये व्रत रखेंग। वहीं पर पुरुषों के

741
00:50:39,040 --> 00:50:43,440
लिए दूसरी चीजें और कहीं-क पर तो यह तक कहा गया कि स्त्रियों

742
00:50:43,440 --> 00:50:48,000
को स्पेशली अलग से कोई भी जो मंत्र

743
00:50:48,000 --> 00:50:48,500
इत्यादि

744
00:50:48,480 --> 00:50:52,640
है या तप इत्यादि करने की आवश्यकता नहीं। यदि वो पूरी निष्ठा पूर्वक अपने

745
00:50:52,640 --> 00:50:56,640
उस पति की सेवा कर दे। उस पति का सेवा का मतलब सहयोग कर दे

746
00:50:56,640 --> 00:51:00,640
जो पति धर्म पर आए। जो पति अपनी धर्म के प्रति जो

747
00:51:00,640 --> 00:51:04,640
अध्यात्म के प्रति पूरी निष्ठा से चल रहा है तो यदि पत्नी उसका पूर्ण रूप

748
00:51:04,640 --> 00:51:08,800
से सहयोग करेगी तो उसको मिलने वाला जो पुण्य है वो पत्नी को भी

749
00:51:08,800 --> 00:51:12,880
प्राप्त होगा और इसका मतलब यह नहीं है कि जो महिलाएं

750
00:51:12,880 --> 00:51:16,960
काम कर रही हैं वो भी एक सहयोग ही है। जो महिलाएं

751
00:51:16,960 --> 00:51:21,280
काम कर रही हैं जिनके जो अपने शील की रक्षा

752
00:51:21,280 --> 00:51:25,440
करते हुए शील की सुरक्षा की सीमा में रहते हुए अगर वो आज

753
00:51:25,440 --> 00:51:29,600
इस विपत्ति काल में संक्रमण काल भी कहते हैं और अपने

754
00:51:29,600 --> 00:51:33,600
पति का उसकी इच्छा के अनुगत रहते हुए सहमति से

755
00:51:33,600 --> 00:51:37,600
यदि वो अगर कर रही है तो इसमें कोई दोष दृष्टि नहीं देखनी चाहिए

756
00:51:37,600 --> 00:51:41,680
क्योंकि आज का समय भी ऐसा नहीं रह गया है कि क्या कहते हैं हां बहुत

757
00:51:41,680 --> 00:51:45,760
अलग बहुत डिफरेंट वातावरण और आज के समय को देखते

758
00:51:45,760 --> 00:51:51,120
हुए मतलब बात सिर्फ इतनी है कि

759
00:51:51,120 --> 00:51:55,280
इस टॉपिक के ऊपर स्पेशली कि

760
00:51:55,280 --> 00:51:59,520
इट्स मतलब ऐसा नहीं है कि सिर्फ वही है। है ना?

761
00:51:59,520 --> 00:52:03,520
दोनों की इक्वली रोल प्ले होता है। है

762
00:52:03,520 --> 00:52:07,760
ना? एक पुरुष के ऊपर जो जिम्मेदारियां है वो है ही। एंड हम

763
00:52:07,760 --> 00:52:11,760
लोग बहुत एक हेल्दी रिलेशनशिप के बारे में बात कर रहे हैं। आई नो कि कुछ लोग क्वेश्चन

764
00:52:11,760 --> 00:52:15,840
करते हैं ओ बट ऐसा हो जाता है। दे स्टार्ट टॉकिंग द नेगेटिव नैरेटिव ऑफ द

765
00:52:15,840 --> 00:52:20,160
सोसाइटी बट वी आर टॉकिंग अबाउट द एक्यूट

766
00:52:20,160 --> 00:52:24,320
मतलब कंप्लीट पॉजिटिव सिनेरियो ऑफ अ रिलेशनशिप। एक हम

767
00:52:24,320 --> 00:52:28,400
लोग एक ऐसे रिलेशनशिप की बात कर रहे हैं जिसमें नेगेटिविटी है

768
00:52:28,400 --> 00:52:32,800
ही नहीं जिसमें केवल समर्पण भाव है पुरुष और

769
00:52:32,800 --> 00:52:36,960
स्त्री दोनों के तरफ से। है ना? तो हम उसको ले आपको

770
00:52:36,960 --> 00:52:40,960
उदाहरण दे रहे हैं। नहीं तो फिर देखा जाए तो फिर अगर प्रॉब्लम्स है

771
00:52:40,960 --> 00:52:45,280
तो आप देखिए कोर्ट में कितनी लाइन लगी हुई है। प्रॉब्लम्स तो बहुत है। बट हम उनको

772
00:52:45,280 --> 00:52:49,600
अपना आधार नहीं मानते हैं। जब हमें अपने लिए कुछ करना

773
00:52:49,600 --> 00:52:53,840
होता है। है ना? हम एक लेवल सेट करते हैं तो हम ऊपर देखते हैं कि मुझे आगे

774
00:52:53,840 --> 00:52:57,840
बढ़ना है। आप पीछे नहीं देखते हो कि अरे ये व्यक्ति तो

775
00:52:57,840 --> 00:53:01,840
मतलब शराब पीता है और गंदे काम करता है। मैं तो

776
00:53:01,840 --> 00:53:05,920
इससे बहुत अच्छा हूं। आप आगे देखिए आपसे और कितने अच्छे हैं। आपको कहां जाना

777
00:53:05,920 --> 00:53:10,160
है। जी तो वैसी बात है और इसके

778
00:53:10,160 --> 00:53:14,480
अंदर अब हम थोड़ा आगे बढ़ अभी तक का एक मैं

779
00:53:14,480 --> 00:53:18,800
वो दे दूं कि धर्म का ज्ञान किससे लेना है? परंपरा प्राप्त

780
00:53:18,800 --> 00:53:23,040
आचार्य से अंतिम निर्णायक लक्षण संपन्न सन्यासी

781
00:53:23,040 --> 00:53:27,040
तीसरा समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा और

782
00:53:27,040 --> 00:53:31,200
चौथा गुरु वही जो आपका अज्ञानता रूपी अंधकार

783
00:53:31,200 --> 00:53:35,360
दूर कर दे। भू का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने

784
00:53:35,360 --> 00:53:39,520
वाला। भगवत गीता में कहा गया है कि संशय

785
00:53:39,520 --> 00:53:43,520
आत्मा विनति चार 40 अद्वतार का उपनिषद में कहा गया है और

786
00:53:43,520 --> 00:53:47,680
स्कंद पुराण में भी कहा गया है कि गुरु ही आपके संशय को खत्म

787
00:53:47,680 --> 00:53:51,920
करता है। भगवत गीता ने क्या कहा कि संशयात्म विनति संशय आपके विनाश

788
00:53:51,920 --> 00:53:55,920
का कारण है। और स्कंद पुराण ने क्या कहा? गुरु गीता ने क्या कहा? संशय का

789
00:53:55,920 --> 00:54:00,000
निवारण क्या है? गुरु। तो गुरु वही जो आपका संशय रूपी अंधकार दूर

790
00:54:00,000 --> 00:54:04,080
कर दे। तो ये चार पॉइंट लेकर के आप जिस पर भी घटित हो जाए ये चार पॉइंट

791
00:54:04,080 --> 00:54:07,440
परंपरा सन्यास

792
00:54:07,440 --> 00:54:11,760
सामंजस्य की शिक्षा और आपका अज्ञानता रूपी अंधकार

793
00:54:11,760 --> 00:54:15,840
दूर कर दे कि भैया ईश्वर वही है

794
00:54:15,840 --> 00:54:21,840
जो कुछ भी कर सकता है। इस तरह के जो सवाल आते हैं सुतो

795
00:54:21,840 --> 00:54:26,160
इन सवालों का उत्तर दे सके आपको है ना तो वो आपका

796
00:54:26,160 --> 00:54:30,320
गुरु होने के लायक है। इस तरह से अपने गुरु का निर्णय करें। धर्म के विषय में किसको सुनना

797
00:54:30,320 --> 00:54:34,480
है और किसको नहीं सुनना है। अब आप अगला चैप्टर अब अगला चैप्टर हमारा है

798
00:54:34,480 --> 00:54:38,720
एक श ठीक है एक शॉर्ट इंट्रोडक्शन कि ये जो हमारे

799
00:54:38,720 --> 00:54:42,720
गुरुजन है है ना संत जन जो संतों की कम्युनिटी है

800
00:54:42,720 --> 00:54:46,800
कि कैसे सही जगह पहुंचना है। है ना? चमत्कार को तो नमस्कार

801
00:54:46,800 --> 00:54:51,280
होता ही है। बट चमत्कार कुछ क्षण का है ना?

802
00:54:51,280 --> 00:54:55,680
पर हमें तो मरना है और वह तो परम सत्य है।

803
00:54:55,680 --> 00:54:59,920
उसके बाद मृत्यु के बाद का जो चमत्कार है उस

804
00:54:59,920 --> 00:55:04,000
वो चमत्कार को नमस्कार कहां पे होगा? वो चमत्कार

805
00:55:04,000 --> 00:55:08,000
किसके पास है? हम उसको नमस्कार करें। इस तरह के जो हमारे

806
00:55:08,000 --> 00:55:12,640
गुरुजन है इस तरह का जो गुरु परंपरा ज्ञान है अलग-अलग संप्रदाय

807
00:55:12,640 --> 00:55:16,800
संप्रदायों का तो उन संप्रदायों के कुछ संप्रदायों के नाम

808
00:55:16,800 --> 00:55:21,120
हम आपके सामने प्रस्तुत करेंगे जो आपको शिवा जी बताएंगे।

809
00:55:21,120 --> 00:55:25,360
देखिए पहुंचना कैसे है इसके लिए मैं आपको बहुत ही सरल रास्ता

810
00:55:25,360 --> 00:55:29,760
बता रहे हैं। पहुंचना कैसे है क्योंकि अगर ज्यादा हम डीप में जाएंगे और

811
00:55:29,760 --> 00:55:33,840
थोड़ा सा कठिन हो जाएगा समझने में। मगर पानी थोड़ा सा

812
00:55:33,840 --> 00:55:36,880
रुक जाइए। हमें थोड़ा सा जल पीना है। है ना?

813
00:55:36,880 --> 00:55:41,280
क्योंकि हमारा एकदम वी हैव अ वेरी सिंपल सेटअप

814
00:55:41,280 --> 00:55:45,760
एंड आई एम थस्टी एंड हम लोग का बिकॉज़ दिस इज द लाइव पडकास्ट

815
00:55:45,760 --> 00:55:49,840
ऐसा नहीं है कि हम कट कर सकते हैं। फिर वीडियो कट करेंगे फिर एडिट

816
00:55:49,840 --> 00:55:54,080
करके डालेंगे। आप तब तक मैं अपना चीजें बताता हूं।

817
00:55:54,080 --> 00:55:58,240
संप्रदाय। तो सबसे पहले तो यह है कि अगर हमारे

818
00:55:58,240 --> 00:56:02,240
शास्त्रों का हम अध्ययन करते तो हमें कई प्रामाणिक संप्रदाय हमें

819
00:56:02,240 --> 00:56:06,400
प्राप्त होते हैं। जैसे कि जिस परंपरा से हमने

820
00:56:06,400 --> 00:56:10,480
अध्ययन कर किया है मतलब जिन परंपरा प्राप्त

821
00:56:10,480 --> 00:56:14,560
आचार्य के द्वारा दिए गए सिद्धांतों की सीमा में रहकर हम अपने

822
00:56:14,560 --> 00:56:18,560
शास्त्रों का अध्ययन करते हैं वो है शंकराचार्य परंपरा।

823
00:56:18,560 --> 00:56:22,960
यह भगवान नारायण से प्रारंभ होती है और नारायण

824
00:56:22,960 --> 00:56:27,840
जी ज्ञान देते हैं ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी ज्ञान देते हैं वशिष्ठ जी को वशिष्ठ जी ज्ञान देते हैं

825
00:56:27,840 --> 00:56:32,800
शक्ति को शक्ति ज्ञान देते हैं पाराशर को पारासर जी ज्ञान देते हैं

826
00:56:32,800 --> 00:56:36,960
व्यास जी को व्यास जी ज्ञान देते हैं सुखदेव जी को सुखदेव जी ज्ञान देते हैं

827
00:56:36,960 --> 00:56:41,120
ग पादाचार्य को वो ज्ञान देते हैं गोविंद पाद जी को वो ज्ञान देते हैं आदि

828
00:56:41,120 --> 00:56:45,440
शंकराचार्य आदि शंकराचार्य जी के बारे में अगर हम शास्त्रों का अध्ययन करें

829
00:56:45,440 --> 00:56:49,680
तो वो शिव जी के अवतार अनेक

830
00:56:49,680 --> 00:56:51,920
पुराण है पूर्ण पुराण शिव पुराण उसमें

831
00:56:51,920 --> 00:56:56,000
शिव जी के अवतार का वर्णन मिलता है शिव जी के अवतार माने गए

832
00:56:56,000 --> 00:57:00,320
उसके बाद शिव जी जब आते हैं कब आते हैं जब यहां पर नास्तिकवाद फैला हुआ था

833
00:57:00,320 --> 00:57:04,800
कि भगवान है ही नहीं कोई नित्य ईश्वर है ही नहीं बौद्धों का

834
00:57:04,800 --> 00:57:09,040
फैला हुआ था कि भाई भगवान है ही नहीं वेदों का खंडन तो उसको आकर

835
00:57:09,040 --> 00:57:13,200
के वो नास्तिकवाद को खत्म करते हैं और चार पीठों

836
00:57:13,200 --> 00:57:17,360
की स्थापना करते हैं और उसमें उनके गुरु शिष्य परंपरा से आज भी

837
00:57:17,360 --> 00:57:22,080
शंकराचार्य और ये लिख के जाते हैं कि भाई मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़

838
00:57:22,080 --> 00:57:26,240
लक्षण संपन्न सन्यासी मुझ शिव का रूप ही मान्य है। इसलिए जो

839
00:57:26,240 --> 00:57:30,640
उनकी गद्दी पर अब विराजमान होता है उनके उनकी परंपरा में उसको शंकराचार्य

840
00:57:30,640 --> 00:57:34,800
कहा जाता है। इसी तरीके से कुछ और परंपराएं हैं। रामानुज परंपरा

841
00:57:34,800 --> 00:57:39,040
है। श्री संप्रदाय कहते हैं इसे और निकाचार्य परंपरा है

842
00:57:39,040 --> 00:57:43,200
और मधवाचार्य परंपरा है।

843
00:57:43,200 --> 00:57:47,200
रामानंद रामानंदाचार्य वो रामानंदाचार्य उनमें बीच में

844
00:57:47,200 --> 00:57:51,200
अलग हो गया था मगर कई बार ऐसा भी सुनने में आता है कि रामानंदाचार्य मगर अब

845
00:57:51,200 --> 00:57:55,280
वो अलग मानते तो अलग ही हमें मानना चाहिए ना रामानंदाचार्य परंपरा है और

846
00:57:55,280 --> 00:57:59,280
शैव परंपराएं भी है कई प्रामाणिक शैव परंपराएं भी है

847
00:57:59,280 --> 00:58:03,440
शाक परंपराएं भी है सौर परंपराएं भी है कुछ लुप्त हो जाती

848
00:58:03,440 --> 00:58:07,280
है मगर जो आपको आपके धर्म का जो प्रामाणिक ज्ञान

849
00:58:07,280 --> 00:58:11,520
है वो देने के लिए पर्याप्त रूप से अभी भी हमारे आचार्य गण विराजमान

850
00:58:11,520 --> 00:58:15,760
है इससे मुझे याद आ गया कि परंपरा से रिलेटेड एक बात मेरे अंदर बार-बार

851
00:58:15,760 --> 00:58:19,760
आ रही थी जो बहुत इंटरेस्टिंग है पर मैं बता नहीं पाया। अभी कर देते हैं इस

852
00:58:19,760 --> 00:58:24,240
बात को कि यदि आपसे कोई कहे

853
00:58:24,240 --> 00:58:28,480
है ना कि तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है।

854
00:58:28,480 --> 00:58:32,640
तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। ये किसी कवि

855
00:58:32,640 --> 00:58:36,800
है कोई उसने ये बात लिखी थी। अपनी कविता की एक लाइन है। एक रानी

856
00:58:36,800 --> 00:58:40,880
थी जो पहले दिन भर में थ्री टाइम्स इन ए डे भोजन करती थी।

857
00:58:40,880 --> 00:58:44,960
तीन बेर खाती थी। आज वो दिन भर में सिर्फ तीन बेर खा रही है

858
00:58:44,960 --> 00:58:49,120
छोटेोटे। तो कवि ने अपनी लिखते समय एक ही

859
00:58:49,120 --> 00:58:53,120
शब्द लिखा। तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। अब अगर हम

860
00:58:53,120 --> 00:58:57,200
इसका अर्थ उस जिसने उस लाइन को लिखा है। उसकी ट्रेडिशन से

861
00:58:57,200 --> 00:59:01,360
नहीं लेंगे। तो इसका अर्थ कोई भी अपने मनमर्जी से लगा सकता है। कि

862
00:59:01,360 --> 00:59:05,760
हो सकता है पहले वो तीन बेर खाती थी। अब वो थ्री टाइम्स इन अ डे खा रही है।

863
00:59:05,760 --> 00:59:09,840
पहले वो वो दोनों बार तीन बेर ही खाती थी। मतलब वो कंफ्यूजन

864
00:59:09,840 --> 00:59:13,840
हो जाएगी। तो इसलिए जिसने उस लाइन को लिखा है कि तीन

865
00:59:13,840 --> 00:59:18,160
बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। उसकी ट्रेडिशन जो होगी वो अपने शिष्य

866
00:59:18,160 --> 00:59:22,400
को बताएगा मैंने इसका क्या अर्थ है? क्यों लिखा है? फिर वो अपने शिष्य को बताएगा।

867
00:59:22,400 --> 00:59:26,400
तो इसी तरीके से जो शास्त्र इत्यादि है वो आपके पास जब परंपरा से

868
00:59:26,400 --> 00:59:31,200
आए हैं तो उसी परंपरा से आपको ज्ञान भी लेना चाहिए। जी जी।

869
00:59:31,200 --> 00:59:35,680
मुझे आपने जो भी समझाया उससे एक चीज याद आती है मेबी

870
00:59:35,680 --> 00:59:39,840
क्लास 12 में हम लोग इंग्लिश पढ़ रहे थे उसमें मैकप पढ़ा रहे

871
00:59:39,840 --> 00:59:44,080
थे तो वो इंग्लिश लिटरेचर में जो सर आते थे पढ़ाने के लिए

872
00:59:44,080 --> 00:59:48,560
वो हम लोग पढ़ लेते थे और फिर वो क्योंकि दाय

873
00:59:48,560 --> 00:59:53,360
साइन ऐसे करके लिखा होता था वो इंग्लिश अलग से लिखी होती थी उन्होंने

874
00:59:53,360 --> 00:59:57,440
तो उसके बाद जो लिटरेचर का हमारा टीचर

875
00:59:57,440 --> 01:00:01,520
थे वो उसका अर्थ लगाते थे और हमें उसका का अर्थ समझाते

876
01:00:01,520 --> 01:00:05,520
थे। जी। तो जब हमें मैकथ के लिए अर्थ लगाने के लिए

877
01:00:05,520 --> 01:00:10,240
पिक्चर की जरूरत पड़ रही। तो हमें

878
01:00:10,240 --> 01:00:14,400
अपने संस्कृत पहले तो आपको लैंग्वेज ही नहीं आती। इंग्लिश में तो तुक्का

879
01:00:14,400 --> 01:00:18,400
चल भी जाएगा। है ना? उसका अर्थ लगाने का और उसके अर्थ

880
01:00:18,400 --> 01:00:22,480
का अर्थ लगाने का। जैसे अभी वो वृण्यक उपनिषद में जब भांति

881
01:00:22,480 --> 01:00:26,560
का वो है वो पढ़ के भी नहीं समझ आता है कभी-कभी कि क्या लिखा

882
01:00:26,560 --> 01:00:30,640
है क्या बोल रहे हैं। तो आपको आचार्य की जरूरत

883
01:00:30,640 --> 01:00:34,640
पड़ेगी ही पड़ेगी। अब इसीलिए स्कंद पुराण में गुरु

884
01:00:34,640 --> 01:00:37,520
गीता में एक बात कही गई है कि मनुष्य चाहे चारों वेद

885
01:00:37,520 --> 01:00:41,680
पढ़ ले, सारे पुराण पढ़ ले, उपनिषद पढ़ ले, जप,

886
01:00:41,680 --> 01:00:45,840
तप, व्रत, दान, पुण्य, यज्ञ सब कुछ व्यर्थ

887
01:00:45,840 --> 01:00:49,920
है। अगर आपका कोई प्रामाणिक आचार्य गुरु नहीं है। क्योंकि व्यक्ति ये

888
01:00:49,920 --> 01:00:54,240
सभी चीजें गुरु के बिना आपको भ्रम में डाल देंगे। भ्रमित

889
01:00:54,240 --> 01:00:58,400
हो जाएंगे आप। जैसे एक छोटा सा एग्जांपल दे। भ्रम में कैसे

890
01:00:58,400 --> 01:01:02,880
हो जाएंगे? बहुत छोटा सा एग्जांपल हनुमान जी जब माता सीता को

891
01:01:02,880 --> 01:01:07,280
ढूंढने जाते हैं अशोक वाटिका में तो वाल्मीकि रामायण में बहुत स्पष्टीकरण

892
01:01:07,280 --> 01:01:11,680
के साथ वहां पर ये तक लिखा है कि हनुमान जी माता सीता के

893
01:01:11,680 --> 01:01:15,760
शरीर के उन अंगों के बारे में भी विचार कर रहे हैं जिन अंगों के बारे

894
01:01:15,760 --> 01:01:20,400
में विचार करना आपत्तिजनक दिखाई देता है किसी पुरुष के द्वारा किसी महिला

895
01:01:20,400 --> 01:01:24,400
अब वहां पर हनुमान जी कौन है जो उनको माता कहते मगर उनके उन अंगों

896
01:01:24,400 --> 01:01:28,560
की भी व्याख्या करता है वो व्याख्या स्पष्ट शब्दों में वहां लिखी हुई है तो

897
01:01:28,560 --> 01:01:32,640
अगर कोई व्यक्ति गुरु के द्वारा प्राप्त सिद्धांतों की सीमा गलत उत्तर

898
01:01:32,640 --> 01:01:36,640
निकाल नहीं पड़ेगा तो उसको यह आएगा कि हनुमान जी ऐसा कैसे सोच

899
01:01:36,640 --> 01:01:40,640
सकते हैं सीता माता के बारे में और ऐसी ही चीजों का फायदा

900
01:01:40,640 --> 01:01:44,800
उठा के सनातन विरोधी हम पर प्रहार करते हैं ऐसी चीजों

901
01:01:44,800 --> 01:01:49,440
का अब इसका अर्थ क्या है अर्थ ये है कि हम माने या ना माने

902
01:01:49,440 --> 01:01:52,560
हम अपनी माताओं बहनों को भी अगर किसी कहीं पर

903
01:01:52,560 --> 01:01:56,880
ढूंढने जाते हैं हनुमान जी ने तो सीता माता को कभी देखते हैं बाल देखते

904
01:01:56,880 --> 01:02:00,880
हैं हनुमान जी ने तो कभी सीता माता को नहीं देखा था। मगर हम

905
01:02:00,880 --> 01:02:04,960
जब अपनी माता माताओं को बहनों को ढूंढने जाते हैं

906
01:02:04,960 --> 01:02:09,120
कहीं पर कि भाई वो यहां पर होंगी वहां पर होंगी। तो पहला जो पैरामीटर होता

907
01:02:09,120 --> 01:02:13,120
है कि हम किसको ढूंढने आए हैं तो वो

908
01:02:13,120 --> 01:02:17,280
पहला पैरामीटर होता है कि हम किसी स्त्री को ढूंढने आए। जी। तो

909
01:02:17,280 --> 01:02:21,360
जब स्त्री को ढूंढने आए हैं तो स्त्री से जुड़ी हुई चीजें हमारे सबकॉन्शियस माइंड

910
01:02:21,360 --> 01:02:25,360
में चलती है। हां हम पुरुष वो नहीं देख। हां। हम पुरुष को नहीं देखे। क्यों

911
01:02:25,360 --> 01:02:29,760
नहीं देखे? क्योंकि हमें कुछ पता है कि स्त्री ऐसी दिखेगी और पुरुष ऐसा दिखेगा।

912
01:02:29,760 --> 01:02:33,760
तो उस मंतव्य से उस वर्गीकरण के

913
01:02:33,760 --> 01:02:37,840
निमित्त जो हमारे सबकॉन्शियस माइंड में जो सोच

914
01:02:37,840 --> 01:02:42,160
चल रही होगी अभी भी होता है जब हम बोलते हैं कि आप वहां पे देखेंगे लड़की

915
01:02:42,160 --> 01:02:46,560
होगी उसने पिंक कलर की टीशर्ट डाली होगी चोटी बनाई होगी।

916
01:02:46,560 --> 01:02:50,560
बिल्कुल बिल्कुल तो जो जो जिन कारणों से हम ये सेट करते

917
01:02:50,560 --> 01:02:54,560
हैं कि भैया हम एक लड़की को ढूंढ रहे हैं उनहीं कारणों को वहां पर

918
01:02:54,560 --> 01:02:58,720
स्पष्ट रूप से व्याख्या कर दी कि वाल्मीकि जी क्योंकि हमारे यहां पर हर

919
01:02:58,720 --> 01:03:02,800
चीज मतलब ट्रांसपेरेंसी के साथ चली है ना स्पष्ट चीजें बताई गई है आपको कई

920
01:03:02,800 --> 01:03:06,800
जगह पे काफी सेंसिटिव टॉपिक था हां तो इसी कारण से अब इसको अगर

921
01:03:06,800 --> 01:03:07,920
आप गुरु के द्वारा

922
01:03:07,920 --> 01:03:12,080
समझने का प्रयास नहीं करोगे तो आप उल्टा ले जाओगे इन बातों को

923
01:03:12,080 --> 01:03:16,160
और स्पेशली इसीलिए आप देखेंगे कि स्पेशली सबसे ज्यादा का जो

924
01:03:16,160 --> 01:03:20,240
विरोध लोग करते हैं वो राधा और कृष्ण जी का करते हैं वो इसलिए करते हैं क्योंकि वो

925
01:03:20,240 --> 01:03:24,320
लीला को अपने दिमाग की गंदगी से समझते हैं। जबकि

926
01:03:24,320 --> 01:03:28,320
लीला तो मतलब जितना हमने सुना है कि

927
01:03:28,320 --> 01:03:32,480
जो आचार्य गण भी है जिन लोगों से मेरी बात हुई है वो कहते

928
01:03:32,480 --> 01:03:36,640
हैं लीला तो अंत की बात है। आप समझ ही नहीं पाएंगे कि लीला

929
01:03:36,640 --> 01:03:40,720
का रहस्य क्या है। उसके लिए आपको रसिक बनना पड़ेगा।

930
01:03:40,720 --> 01:03:44,720
वो है ना जानवी जानवी और वो मीनाक्षी रावत

931
01:03:44,720 --> 01:03:48,720
वगैरह जो हां उन्होंने अभी मैंने मेरे पास भी कोई रिक आई थी हमने देखा

932
01:03:48,720 --> 01:03:52,720
था जिसमें वो बोलते हैं कि कृष्ण तो

933
01:03:52,720 --> 01:03:56,880
थोड़ी है वस्त्र थोड़ी चुराते हैं या माखन थोड़ी चुराते थे तो

934
01:03:56,880 --> 01:04:01,200
मुझे इतना बुरा लगा वो देखकर कि पांच आयु पांच वर्ष

935
01:04:01,200 --> 01:04:05,360
की आयु का बालक भगवान को छोड़ दे एक बार

936
01:04:05,360 --> 01:04:09,360
जी पांच वर्ष की आयु का बालक पिठोरी करता

937
01:04:09,360 --> 01:04:13,360
है मजाक करता है। वह तो कभी महिलाओं को उस

938
01:04:13,360 --> 01:04:17,760
नजरिए से नहीं देखता है। कपड़े ले भाग गया। आप

939
01:04:17,760 --> 01:04:22,000
पांच वर्ष के थे जब कृष्ण जी उनके अंदर इतनी गंदी

940
01:04:22,000 --> 01:04:22,960
चीज कैसे सोच

941
01:04:22,960 --> 01:04:27,040
सकते हैं? और फिर उसका लीला चिंतन एक अलग जानवी को तो

942
01:04:27,040 --> 01:04:31,120
मैं देख रहा हूं जो जानवी है उनका तो पता नहीं समझ में नहीं आता

943
01:04:31,120 --> 01:04:35,440
है आज वो छठ पर्व का वो प्रमोशन कर रही है अरे भैया पहले तुम निश्चित कर लो

944
01:04:35,440 --> 01:04:39,600
कि क्या तुम जिस धारणा को मानती हो आज समाजी धारणा को जहां ईश्वर निराकार

945
01:04:39,600 --> 01:04:43,680
है वहां छठ पर्व किस तरह से बनाया जाता है बनाया जाता है कि नहीं बनाया जाता फिर तुम

946
01:04:43,680 --> 01:04:47,840
प्रमोशन करो तुम एक तरफ आ जाओगी स्पॉन का प्रमोशन करने जहां मतलब

947
01:04:47,840 --> 01:04:52,320
जहां पे तुम्हें चांदनी दिख जाएगी वहीं पर तुम चांद बन जाओगे

948
01:04:52,320 --> 01:04:57,360
चलिए तो वो तो जने कपड़ों के ऊपर से डाल

949
01:04:57,360 --> 01:05:01,680
अब इसके बारे में हम आगे ये जाएंगे कि भगवान की लीला

950
01:05:01,680 --> 01:05:06,160
अगर टॉपिक आया तो मैं बताता हूं छोटी सी बात है तो बहुत सिंपल

951
01:05:06,160 --> 01:05:10,560
देखिए वो गुण रखते हैं बहुत रस क्या है क्या है वो एक चीज है एक

952
01:05:10,560 --> 01:05:14,720
चीज ऐसी है जो आपको जो सार्वभौम सिद्धांत है जो आपको पकड़ के

953
01:05:14,720 --> 01:05:18,800
रखना है हमेशा काम आएगा भगवान ने ये क्यों किया भगवान ने वो क्यों किया सब

954
01:05:18,800 --> 01:05:23,040
में काम आएगा क्या ईश्वर वही है जो कुछ

955
01:05:23,040 --> 01:05:27,200
भी कर सकता है। ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है।

956
01:05:27,200 --> 01:05:31,360
ईश्वर सभी नियमों के बनाने वाला सर्व नियामक। इसलिए ईश्वर

957
01:05:31,360 --> 01:05:35,440
हसेगा भी, ईश्वर रोएगा भी। रोएगा भी। और अगर इसको थोड़ा सा तर्क से

958
01:05:35,440 --> 01:05:38,240
अगर हम समझना चाहे तो जो

959
01:05:38,240 --> 01:05:42,480
लोग ईश्वर को कृष्ण के रूप में आने वाला नहीं मानते। ठीक है? जैसे आर्य

960
01:05:42,480 --> 01:05:46,720
समय उनका भी ईश्वर सब जगह व्याप्त है। सब जगह है।

961
01:05:46,720 --> 01:05:50,720
तो वो सगुण रूप में आ के किसी को देखे या ना देखे

962
01:05:50,720 --> 01:05:54,800
मगर वो सबको देख रहा है। तो जब ईश्वर सबको

963
01:05:54,800 --> 01:05:58,960
देख रहा है तो ईश्वर ने आपको सरलता से समझाने के

964
01:05:58,960 --> 01:06:03,120
लिए एक रूप लेकर के एक लीला रच करके बताया

965
01:06:03,120 --> 01:06:07,120
कि मैं सब कुछ देख रहा हूं। मुझसे कुछ भी छुपा नहीं

966
01:06:07,120 --> 01:06:11,280
है। मैं सर्व सामर्थ्यवान हूं। तो फिर इसमें

967
01:06:11,280 --> 01:06:15,680
आपको आपत्ति क्यों हो गई? क्या निराकार

968
01:06:15,680 --> 01:06:19,840
क्या निराकार ईश्वर सब कुछ नहीं देख रहा है? क्या निराकार ईश्वर वहां

969
01:06:19,840 --> 01:06:24,000
पर नहीं है जहां पर स्त्रियां स्नान कर रही है

970
01:06:24,000 --> 01:06:28,160
वो भी देख रहा है मगर यदि वो कृष्ण के रूप में आ के उसने देख लिया तो इनको

971
01:06:28,160 --> 01:06:32,160
आपत्ति होगी कृष्ण जी को कैसे देख सकते हैं अरे भाई तुम्हारा निराकार ईश्वर नहीं जानता

972
01:06:32,160 --> 01:06:36,320
क्या वहां स्नान कर रही है अज्ञान है क्या वहां अज्ञानी है क्या ईश्वर

973
01:06:36,320 --> 01:06:40,640
तो ये छोटी सी बातें है आप इस बात को सदव ध्यान रखें ईश्वर सर्व

974
01:06:40,640 --> 01:06:44,960
सामर्थ्यवान है वो कहीं पर प्राकट रूप से होते हुए भी अथवा

975
01:06:44,960 --> 01:06:49,040
ना होते हुए भी वो सारे कार्य कर और देख रहे हैं। उन सब में उपलब्ध

976
01:06:49,040 --> 01:06:53,040
है जो जो भी कार्य इस दुनिया में घटित हो रहे हैं उनसे वो जुड़े हुए

977
01:06:53,040 --> 01:06:53,540
हैं।

978
01:06:53,280 --> 01:06:57,520
हम आपको इनका थोड़ा और सिंपल करके बता देंगे इन केस यू नो लाइक फॉर

979
01:06:57,520 --> 01:07:01,680
फ्यू ये ये बोलना चाह रहे हैं कि

980
01:07:01,680 --> 01:07:05,840
जब भगवान जब आप समाज में जाएंगे क्योंकि बात हमारी

981
01:07:05,840 --> 01:07:10,000
धर्म की हुई, गुरु परंपरा की हुई है, शास्त्रों की हुई है। फिर अब नेक्स्ट

982
01:07:10,000 --> 01:07:14,240
टॉपिक ये आता है कि अब आप कुछ ऐसे हिंदू खुद को हिंदू

983
01:07:14,240 --> 01:07:18,560
कहने वाले लोगों को देखेंगे जो बोलेंगे कि हम केवल

984
01:07:18,560 --> 01:07:22,560
ये पांच पुस्तकों को मानते हैं और बाकी की आठ को हम नहीं

985
01:07:22,560 --> 01:07:26,640
मानते हैं तो हमें ऐसे लोगों पर विश्वास नहीं करना है और जब

986
01:07:26,640 --> 01:07:30,640
वो लोग आपको बोलेंगे कि इतनी गंदी गंदी बातें लिखी हुई है।

987
01:07:30,640 --> 01:07:34,720
अब होता क्या है कि जब ये लोग बोलते हैं दो चार लाइनें सुनते हैं

988
01:07:34,720 --> 01:07:38,720
और जो लोग मान लेते हैं वो कभी ग्रंथ खोल के पढ़ते नहीं है। जी

989
01:07:38,720 --> 01:07:42,880
आपको जब कोई मंत्र बताता है तो आप कभी टाइम निकाल के पढ़ते नहीं है

990
01:07:42,880 --> 01:07:47,440
कि कि इसने जो मंत्र बताया यह सही है या नहीं। यह गलत है या नहीं।

991
01:07:47,440 --> 01:07:51,440
है ना? तो अब उसी के कारण आपको यह बताया जा रहा

992
01:07:51,440 --> 01:07:56,000
है जब आपके धर्म पर ये मेरी माता जी ने मुझे सिखाया था कि बेटा

993
01:07:56,000 --> 01:08:00,160
जब आप ये मेरी माता की बेटी कहे बेटी

994
01:08:00,160 --> 01:08:04,560
बेटी बेटी माता में जो कभी भी किसी

995
01:08:04,560 --> 01:08:08,560
बिटिया को आप बेटा ना कहे क्योंकि इससे हम उसे बता रहे हैं कि

996
01:08:08,560 --> 01:08:12,960
भाई तुम्हारे बेटी होने से हमें दिक्कत है हम जो है उसको

997
01:08:12,960 --> 01:08:16,960
उसको उसमें भी बेटा ही ढूंढ रहे हैं ये गलत बात है और जगुरु शंकराचार्य

998
01:08:16,960 --> 01:08:20,960
जी ने भी इस ये बात एक बार बताइए अपने चीजों में से। ठीक है।

999
01:08:20,960 --> 01:08:25,040
ठीक है। हम समझ रहे हैं। चलिए वापस जाते हैं। रिवाइंड करते हैं थोड़ा

1000
01:08:25,040 --> 01:08:29,120
सा इसको। तो जैसे मेरी माताजी की सबसे बड़ी सीख

1001
01:08:29,120 --> 01:08:33,840
मुझे क्या है? है ना? मेरी माता जी ने मुझे बताया बेटी

1002
01:08:33,840 --> 01:08:38,000
आप मैं आपके सारे प्रश्नों का उत्तर आपको नहीं दे सकती हूं क्योंकि सभी

1003
01:08:38,000 --> 01:08:42,400
प्रश्नों का उत्तर मेरे पास नहीं है पर हमारा धर्म बहुत

1004
01:08:42,400 --> 01:08:46,480
महान है। हमारे देश ने बहुत सारी परिस्थितियां देखी हैं

1005
01:08:46,480 --> 01:08:50,720
और हर परिस्थिति में सबसे ज्यादा हमला हमारे धर्म

1006
01:08:50,720 --> 01:08:54,880
पे धर्म ग्रंथों पे और धर्म धर्माचार्यों

1007
01:08:54,880 --> 01:08:59,200
पे किया गया है। तो कभी भी कोई भी अगर तुम्हें बोले

1008
01:08:59,200 --> 01:09:03,440
कि तुम्हारा धर्म ऐसा है वैसा है यह गलत है सही है

1009
01:09:03,440 --> 01:09:07,760
कभी भी विश्वास मत करना अपने धर्म पर विश्वास करना एक

1010
01:09:07,760 --> 01:09:12,080
दिन तुम्हें ऐसा व्यक्ति या कोई व्यक्ति जरूर मिलेगा

1011
01:09:12,080 --> 01:09:16,080
जो तुम्हें उसका सही अर्थ बता पाएगा अभी मेरे

1012
01:09:16,080 --> 01:09:20,160
पास उत्तर नहीं है। दिस वास द पेशेंस ऑफ माय मदर एंड

1013
01:09:20,160 --> 01:09:23,680
वो बात क्योंकि मैं बहुत ही छोटी थी तो बहुत महान बात कह

1014
01:09:23,680 --> 01:09:27,840
गई आपकी माता जी मैं उनको प्रणाम करता हूं तो वो बात मेरे साथ रह

1015
01:09:27,840 --> 01:09:31,840
गई मैं आपको बताती हूं क्योंकि वो बात मेरे साथ

1016
01:09:31,840 --> 01:09:35,840
रह गई उस बात के कारण ही मैं इतना ओपन

1017
01:09:35,840 --> 01:09:40,080
माइंडेड और अपने आप को मूर्ख समझकर कि मुझे

1018
01:09:40,080 --> 01:09:44,080
कोई क्वेश्चन मतलब मैं मैं क्वेश्चन भी कर रही हूं तो मैं मूर्ख ही हूं

1019
01:09:44,080 --> 01:09:48,160
कि मैं समझूंगी मैं जानूंगी और जैसेजैसे आप समय देते

1020
01:09:48,160 --> 01:09:52,720
जाएंगे, जानते जाएंगे, आपकी लाइफ सिंपल होती जाएगी। आप चीजों को समझते लाएंगे। एंड

1021
01:09:52,720 --> 01:09:56,720
थिंग्स विल बिकम इज़ियर। सो हियर द पॉइंट कमिंग बैक टू द टॉपिक। हियर

1022
01:09:56,720 --> 01:10:00,880
द पॉइंट वाज़ दैट एनीबडी हु टेल्स यू कि ये चीज

1023
01:10:00,880 --> 01:10:05,040
लिखी है, वो चीज लिखी है। डोंट बिलीव इन इट। अंटिल और

1024
01:10:05,040 --> 01:10:09,120
अनलेस आपने उसका अध्ययन एक शास्त्र प्रमाणिक गुरु के साथ नहीं किया

1025
01:10:09,120 --> 01:10:13,360
है। आप मेरे व्यूज भी देखेंगे। आप देखेंगे मैं बार-बार बोल रही हूं। शास्त्र प्रमाणिक

1026
01:10:13,360 --> 01:10:17,440
गुरु शास्त्र प्रमाणिक आचार्य शास्त्र प्रमाणिक संप्रदाय तो

1027
01:10:17,440 --> 01:10:21,520
उसका मेन रीजन एक ही है मेरी लाइफ में क्योंकि मुझे

1028
01:10:21,520 --> 01:10:25,760
ये एक क्या बोलेंगे कि पुण्य

1029
01:10:25,760 --> 01:10:29,760
की तरह मुझे प्रारब्ध पूर्वक मिल गया मिला है और उसके

1030
01:10:29,760 --> 01:10:33,920
बाद मेरे जीवन में जो परिवर्तन आए हैं क्योंकि ये सत्य का मार्ग है तो

1031
01:10:33,920 --> 01:10:38,160
मेरा सिर्फ वही है शेयर करने का नहीं तो कोई अपनी तिजोरी खोल कर बैठता

1032
01:10:38,160 --> 01:10:38,720
नहीं

1033
01:10:38,720 --> 01:10:43,040
है ना जैसे मिल जाता है वो ले लेता है मैं गुरु गोविंद

1034
01:10:43,040 --> 01:10:47,200
ग्रंथ के ऊपर जो बात कर रहा था उसमें मैं एक जो इन्होंने क्वेश्चन किया

1035
01:10:47,200 --> 01:10:52,000
था ना कि जो हमारी कुछ परंपराएं उनके बारे में बता दीजिए और

1036
01:10:52,000 --> 01:10:56,080
कैसे पहुंचा जाए एक प्रामाणिक गुरु तक ये आपका प्रश्न था वो कैसे पहुंचा

1037
01:10:56,080 --> 01:11:00,480
जाए वाली बात नहीं हो पाई क्योंकि बहुत बढ़त विषय है तो बार-बार कभी-कभी

1038
01:11:00,480 --> 01:11:04,480
हां और कभी-कभी हम लोग थोड़े इमोशनल भी हो जाते हैं इस चर्चा

1039
01:11:04,480 --> 01:11:08,480
में क्योंकि हमें हमारे सामने ये सब चीजें आती रहती है कि

1040
01:11:08,480 --> 01:11:12,560
कुछ लोग क्या कर रहे हैं और हमें बुरा थोड़ा ये लगता है क्योंकि जो

1041
01:11:12,560 --> 01:11:16,800
कंज्यूमर है ऑन द अदर साइड ऑफ द स्क्रीन इतने मतलब

1042
01:11:16,800 --> 01:11:20,880
भोले हैं कि मतलब किसी ने मतलब भारतीय वेशभूषा

1043
01:11:20,880 --> 01:11:25,040
बनाई नहीं और चार पंक्तियां प्यारी सी बोल दी और आप उसके दीवाने

1044
01:11:25,040 --> 01:11:30,160
हो जाते हैं। तो उसके लिए हमें बुरा भी लगता है। तो

1045
01:11:30,160 --> 01:11:34,320
माफ़ कीजिए कि किस किस व्यक्ति को हम किस चीज के लिए देख रहे

1046
01:11:34,320 --> 01:11:38,400
हैं। इससे हमें किस चीज का श्रवण करना चाहिए। तो मैं सरलता में एक

1047
01:11:38,400 --> 01:11:42,400
रास्ता बताता हूं। देखिए सबसे पहले हमने नीव क्या है? मिशन, गुरु, गोविंद और

1048
01:11:42,400 --> 01:11:46,400
ग्रंथ। इनके सामंजस्य से ही इनमें इसको

1049
01:11:46,400 --> 01:11:50,880
क्या कहेंगे? सामंजस्य को क्या कहते हैं इंग्लिश में? एक बार सेंटेंस बताइए।

1050
01:11:50,880 --> 01:11:53,760
मतलब जैसे तीनों में तीनों की बात रह जाए जिसमें

1051
01:11:53,760 --> 01:11:58,000
गुरु, गोविंद और ग्रंथ उसको इंग्लिश में क्या कहेंगे? बैलेंस। बैलेंस

1052
01:11:58,000 --> 01:12:02,160
कह सकते हैं। संतुलन बना रहे तीनों में मतलब तीनों में से किसी का भी खंडन ना हो।

1053
01:12:02,160 --> 01:12:07,040
तीनों की बात रह के जो आपको बात प्राप्त हो गुरु, गोविंद और ग्रंथ।

1054
01:12:07,040 --> 01:12:11,040
तीनों की बात। सो ही इस ट्राइंग टू से दैट यू शुड

1055
01:12:11,040 --> 01:12:15,120
नॉट गो अगेंस्ट आइदर ऑफ दी स्त्री।

1056
01:12:15,120 --> 01:12:19,120
मतलब ये तीनों में से किसी चीज को अगेंस्ट नहीं जाना है। लाइक यू हैव टू

1057
01:12:19,120 --> 01:12:23,280
बिलीव इन ऑल ऑफ दी थ्री थिंग्स टूगेदर। मतलब क्या है? जैसे आपने

1058
01:12:23,280 --> 01:12:27,440
आपको जो गुरु ने ज्ञान दिया है। ऐसा नहीं है कि केवल उसकी बात ही रह

1059
01:12:27,440 --> 01:12:31,840
जाए। उसमें ग्रंथ की बात भी इन्वॉल्व होनी चाहिए। और इन दोनों

1060
01:12:31,840 --> 01:12:36,160
चीजों से मिलकर के आपको प्राप्त होने वाला जो ईश्वर है वो ईश्वर होना चाहिए। गोविंद

1061
01:12:36,160 --> 01:12:40,240
होना चाहिए। तो गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ

1062
01:12:40,240 --> 01:12:44,240
नहीं केवल गोविंद भी नहीं गोविंद भी अगर आपके पास आ जाए रूप बदल

1063
01:12:44,240 --> 01:12:48,240
के कि मैं तुम्हें आज बोल रहा हूं जाओ जाकर के जो है

1064
01:12:48,240 --> 01:12:52,560
चोरी कर लो अगर गोविंद आपके पास आ के ऐसा कह दे वेश बदल

1065
01:12:52,560 --> 01:12:56,560
के लीला पूर्वक तो आप उनको कहिए भैया मैं आपको प्रणाम करता हूं आप

1066
01:12:56,560 --> 01:13:00,960
कृष्ण जी बन के आए राम जी बन के आए मैं आपको प्रणाम करता हूं मगर जो परंपरा प्राप्त

1067
01:13:00,960 --> 01:13:05,120
लेसन है जो मुझे मिले हैं लेसन मैं उनको उनका विरोध

1068
01:13:05,120 --> 01:13:08,800
नहीं कर सकता और ऐसा हुआ भी है। हमारी हिस्ट्री में ऐसा हुआ भी है। बुद्ध

1069
01:13:08,800 --> 01:13:12,960
के रूप में भगवान विष्णु जी आए। उन्होंने यज्ञों की रक्षा के लिए सही

1070
01:13:12,960 --> 01:13:17,120
पर वेदों का विरोध किया। जितने अंश में उन्होंने कहा तो हम सब ने कहा प्रणाम

1071
01:13:17,120 --> 01:13:21,200
प्रणम में तो हो हमारे लिए पर आप हमारे लिए अनुसरणीय अनुकरणीय

1072
01:13:21,200 --> 01:13:25,520
नहीं हो। हमने हमारे परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को पकड़े

1073
01:13:25,520 --> 01:13:29,600
रखा। नहीं तो आज हम सब लोग क्या हो गए होते? बद्ध बन गए होते। अच्छा

1074
01:13:29,600 --> 01:13:34,160
या बुद्ध की विचारधारा को प्राप्त हो जाते या कम से कम वेद विरोधी तो बन ही जाते। क्योंकि

1075
01:13:34,160 --> 01:13:38,240
कुछ लोग ये नहीं मानते ना कि दो दो बुद्धा है वो वाली फिर चैप्टर

1076
01:13:38,240 --> 01:13:42,800
खुल जाएगा तो उस नहीं जाते

1077
01:13:42,800 --> 01:13:46,800
तो कैसे जाए प्रामाणिक आचार्य तक सिंपल आपके जीवन

1078
01:13:46,800 --> 01:13:51,040
में इन तीन चीजें गुरु गोविंद या ग्रंथ में से कोई भी एक चीज होगी

1079
01:13:51,040 --> 01:13:55,040
जो पहले आएगी हो सकता है आपके जीवन में ज्यादातर के जीवन में गोविंद

1080
01:13:55,040 --> 01:13:59,200
पहले आते हैं क्यों क्योंकि वो जिस भी घर में जन्म लेते हैं वहां की माता जब मंदिर जाती

1081
01:13:59,200 --> 01:14:03,440
है तो गोविंद दिखते हैं वहां मंदिर की ओर तो हो सकता है आपके जीवन में गोविंद

1082
01:14:03,440 --> 01:14:07,760
पहले आए कि हम कृष्ण को मानते हम राम को पहले मानते थे। कुछ केसेस

1083
01:14:07,760 --> 01:14:11,920
में ऐसा होता है कि आपके पास पहले शास्त्र आए। कुछ केसेस

1084
01:14:11,920 --> 01:14:16,320
में ऐसा होता है कि आपके पास पहले गुरु आया। तो जो भी जिनके

1085
01:14:16,320 --> 01:14:20,320
भी उसमें आप जाए सानिध्य में वहीं से आप अपनी

1086
01:14:20,320 --> 01:14:24,480
जर्नी शुरू कर लीजिए। जिसके जीवन में गुरु पहले आ गया उसको तो बात खत्म

1087
01:14:24,480 --> 01:14:28,640
हो गई। प्रारब्ध पूर्वक आ गया। वो आपको गोविंद

1088
01:14:28,640 --> 01:14:32,960
ग्रंथ है ना? मगर यदि आपके जीवन में ग्रंथ पहले आए तो ग्रंथों

1089
01:14:32,960 --> 01:14:37,040
का अध्ययन कर लीजिए। ग्रंथों में देख लीजिए कि प्रामाणिक गुरु की क्या व्याख्या

1090
01:14:37,040 --> 01:14:42,240
हमने आपको बताया भी है 11 पांच 16 में आपको बताया

1091
01:14:42,240 --> 01:14:46,720
दिस पोस्ट जब पोस्ट हो जाएगा तो आप पीछे जाके और जो ज्यादातर

1092
01:14:46,720 --> 01:14:50,880
लोगों पर जो अप्लाई होता है जो रूल वो है गोविंद गोविंद सबके जीवन में आ जाते हैं

1093
01:14:50,880 --> 01:14:54,960
बिना उसके चाहे वो शिव के रूप में हो किसी तो आपको क्या करना

1094
01:14:54,960 --> 01:14:57,840
है गोविंद का पैर पकड़ लीजिए जी उनका

1095
01:14:57,840 --> 01:15:01,920
पैर मत छोड़िए राम राम राम राम राम राम राम राम शिव शिव

1096
01:15:01,920 --> 01:15:06,080
शिवा शिव शिवा शिव इतना इतना जपिए इतना जपिए मैं छोडूंगा नहीं

1097
01:15:06,080 --> 01:15:10,720
जी अपने आप आपके लिए जो अपेक्षित चीजें होंगी वो आप तक पहुंचंगी

1098
01:15:10,720 --> 01:15:14,720
क्योंकि भगवान ने कहा है भगवत गीता में कहा है 92

1099
01:15:14,720 --> 01:15:18,880
में कि तू मेरी शरण में आ जा तेरी प्राप्ति की रक्षा और आप

1100
01:15:18,880 --> 01:15:23,200
प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा तो आपके जीवन में यदि

1101
01:15:23,200 --> 01:15:27,280
गोविंद पहले आ गए तो उनके ही पैर पकड़ लो और पैर पकड़ने का सबसे

1102
01:15:27,280 --> 01:15:31,440
सरल रास्ता है नाम जप जी नाम जप आप चालू कर दीजिए

1103
01:15:31,440 --> 01:15:35,440
भगवान का पैर पकड़ भगवान मुझे जो भी आप दिलाना है आप दिलाते

1104
01:15:35,440 --> 01:15:40,000
जाओ। आपके जीवन में ऐसे चेंजेस आएंगे, ऐसे चमत्कार होने शुरू हो जाएंगे

1105
01:15:40,000 --> 01:15:44,000
कि आप बिलीव नहीं कर पाओगे। ये मेरा ही जीवन है किसी और का जीवन है। हे जी

1106
01:15:44,000 --> 01:15:48,160
तो देखिए नाम जप इसीलिए वो सबसे ज्यादा बोलते हैं इट वास इजी टू ऑल कॉमन

1107
01:15:48,160 --> 01:15:52,160
टू ऑल क्योंकि नाम जप से आप हर तरफ जिधर

1108
01:15:52,160 --> 01:15:56,320
आपका रास्ता होगा ना आपका शिव जी की तरफ होगा वो आपको उधर ले जाएगा।

1109
01:15:56,320 --> 01:16:00,560
चाहे आप अभी राम नाम जप रहे हो। आप मतलब इतना इंटरेस्टिंग

1110
01:16:00,560 --> 01:16:04,560
है ये। तो शरद जी कह रही है कैसे भी आए बस सोशल मीडिया सो

1111
01:16:04,560 --> 01:16:08,560
कॉल्ड इनफ्लुएंसर्स ना आए। बिल्कुल सही कह

1112
01:16:08,560 --> 01:16:12,960
रही है। हां। तो हम आपको ये मतलब

1113
01:16:12,960 --> 01:16:16,960
बहुत दिनों से आई वास ट्राइंग पर क्योंकि बहुत सारी चीजें थी

1114
01:16:16,960 --> 01:16:21,280
और एक जैसे कुछ लोग बोलेंगे ना एक मिनट की रील में मेरे पास भी बहुत लोग कमेंट

1115
01:16:21,280 --> 01:16:25,440
करते थे कि ये ये आपने बताया नहीं पर ये अब एक मिनट में इतनी

1116
01:16:25,440 --> 01:16:29,440
सारी बातें नहीं हो सकती है। और दूसरी बात ये है कि

1117
01:16:29,440 --> 01:16:33,600
मुझे जितना पता है और मैं जितना समझा सकती हूं मैं

1118
01:16:33,600 --> 01:16:37,600
उतनी कोशिश करती हूं। बट मैंने भी ये पहले लॉन्ग फॉर्मेट में अभी इससे पहले किया नहीं

1119
01:16:37,600 --> 01:16:41,760
है। अभी स्टार्ट हुआ है। और दूसरा क्योंकि मुझे ऐसा लगता

1120
01:16:41,760 --> 01:16:45,920
है कि मैं बहुत मेरा ना मतलब मैं कुछ भी नहीं हूं।

1121
01:16:45,920 --> 01:16:49,920
मुझे तो कुछ पता ही नहीं है। तो मुझे एक ऐसा

1122
01:16:49,920 --> 01:16:54,080
जैसे आज ये मेरे साथ हैं। है ना? तो जब इन्हें पता

1123
01:16:54,080 --> 01:16:58,240
है तो हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बैठ के आपसे बात करें

1124
01:16:58,240 --> 01:17:02,240
जो आपको और स्पष्टता के साथ और क्लेरिटी के साथ और

1125
01:17:02,240 --> 01:17:06,240
अलग-अलग परस्पेक्टिव के साथ और टेक्निकल्स के साथ जैसे ये बोलते हैं

1126
01:17:06,240 --> 01:17:10,560
गीता 23 12 इस तरह से तो वो आपको बता पाए

1127
01:17:10,560 --> 01:17:15,120
ताकि आपको भी समझ आए अलग-अलग प्रस्पेक्टिव से कि

1128
01:17:15,120 --> 01:17:19,120
पॉइंट क्या है और एक्चुअली देखा जाए तो इस पूरे पडकास्ट

1129
01:17:19,120 --> 01:17:23,280
का पॉइंट है आपको एक धर्मा अनबी नाम

1130
01:17:23,280 --> 01:17:27,360
अनबेल अनबीर नाम रखा है हमने कि आपको पता चले

1131
01:17:27,360 --> 01:17:28,080
कि

1132
01:17:28,080 --> 01:17:32,160
धर्म है क्या मतलब चल क्या रहा है कि कहां

1133
01:17:32,160 --> 01:17:36,320
जाना है कहां नहीं जाना है कहां खोजना है क्योंकि जब हम रील

1134
01:17:36,320 --> 01:17:40,400
डालते हैं कि गुरु के पास हाउ टू फाइंड अ गुरु क्वेश्चन यही आता रहता है कि

1135
01:17:40,400 --> 01:17:44,480
मुझे मेरे गुरु पास से मिलेंगे मैं कैसे अपने गुरु को प्राप्त करूं है

1136
01:17:44,480 --> 01:17:48,480
ना संप्रदाय कौन सी है मैं कहां पे जाऊं कैसे जाऊं धर्म क्या है जो अभी

1137
01:17:48,480 --> 01:17:52,560
हमने अभी तक कवर कर लिया है अब सबसे सुंदर चीज अभी तक जो हुई

1138
01:17:52,560 --> 01:17:57,200
है जो हमें अपने नेक्स्ट चरण के पास लेके जाती है वो ये है

1139
01:17:57,200 --> 01:18:01,280
कि अगला क्वेश्चन जो हमारे पास सबसे ज्यादा आता है व्हाट

1140
01:18:01,280 --> 01:18:06,800
इज द राइट वे टू डू साधना

1141
01:18:06,800 --> 01:18:11,120
है ना तो मैं थोड़ा सा उसके ऊपर बता दूंगी सबसे

1142
01:18:11,120 --> 01:18:15,120
पहले मैं आप सबको एक बार दोबारा ये याद दिलाना चाहती हूं

1143
01:18:15,120 --> 01:18:19,440
कि जब हम आजकल देख रहे हैं रजिस्टर फॉर शिव

1144
01:18:19,440 --> 01:18:23,440
साधना 10 दिन पहले महाशिवरात्रि के 10 दिन

1145
01:18:23,440 --> 01:18:27,520
नहीं 15 दिन पहले से आपको शिवरात्रि का कंटेंट मिलेगा। 10

1146
01:18:27,520 --> 01:18:31,520
दिन पहले आपको बता दिया जाएगा कि शिवरात्रि के इतने

1147
01:18:31,520 --> 01:18:35,600
सोमवार में हम ये ये ये करेंगे। प्लीज रजिस्टर कर लीजिए। तो

1148
01:18:35,600 --> 01:18:39,600
ये व्यक्ति को आपके पैसे चाहिए। आपको कुछ मंत्र पढ़ाने

1149
01:18:39,600 --> 01:18:43,600
के और कुछ लिखवाने के और जो सब चार बातें

1150
01:18:43,600 --> 01:18:47,600
महादेव के बारे में करने के लिए। है ना? अब मैं आपको एक चीज

1151
01:18:47,600 --> 01:18:51,760
बताती हूं क्योंकि एक कमेंट आया था मेरे पास तो एक व्यक्ति ने बोला कि यह मेरे पैसे की

1152
01:18:51,760 --> 01:18:56,000
एक बेस्ट इन्वेस्टमेंट थी। मैंने यह कोर्स किया। मैं यह

1153
01:18:56,000 --> 01:19:00,240
बोल रही हूं क्यों आपको अच्छा लगेगा? आप शिव चालीसा

1154
01:19:00,240 --> 01:19:04,400
पढ़ेंगे आपको अच्छा नहीं लगेगा। आप शिव जी का नाम लेंगे आपको अच्छा नहीं लगेगा। आपको

1155
01:19:04,400 --> 01:19:08,560
शिव जी के बारे में कोई चार बातें बताएगा। आपको अच्छा नहीं लगेगा। आप

1156
01:19:08,560 --> 01:19:12,880
अगर ऐसा कर रहे हैं तो उसे साधना मत बोले। आप

1157
01:19:12,880 --> 01:19:17,040
कोर्स बोलिए ना कि शिवजी के ऊपर मैंने यह कोर्स बनाया है। इसमें

1158
01:19:17,040 --> 01:19:21,120
मैं यह चीजें कवर कर रहा हूं। इट्स अ कोर्स। उसको साधना बोल के मत

1159
01:19:21,120 --> 01:19:21,840
भेजें।

1160
01:19:21,840 --> 01:19:26,080
क्योंकि पहली बात साधना बिकती नहीं है। साधना मिलती

1161
01:19:26,080 --> 01:19:30,400
है अपने गुरु से। दीक्षा में प्राप्त होती है। आपको गुरु बताता

1162
01:19:30,400 --> 01:19:34,720
है कि तुम्हारा साधन क्या है? तुम्हें किसकी साधना करनी है। कितना मंत्र

1163
01:19:34,720 --> 01:19:38,720
करना है, कैसे करना है, स्नान कब करना है? और पूरा

1164
01:19:38,720 --> 01:19:42,800
उसका जो न्यास है, है ना? मुझे कितना अच्छा लग रहा है बातें

1165
01:19:42,800 --> 01:19:46,880
बोलते हुए क्योंकि एक टाइम था जब मुझे जीरो पता था ये सब बातों के बारे में आई

1166
01:19:46,880 --> 01:19:50,880
वास आल्सो अ जीरो आई डिड नॉट नो अबाउट एनीथिंग बट टुडे आई फील गुड एंड दैट इज

1167
01:19:50,880 --> 01:19:54,880
व्हाई आई वांट टू शेयर बिकॉज़ आई नो मेनी पीपल आर आउट देयर लाइक जैसे मैं थी

1168
01:19:54,880 --> 01:19:59,040
पहले तो इस इतनी सारी चीजें हैं तो जो आपको

1169
01:19:59,040 --> 01:20:03,200
कोर्स दे रहा है ना अगर वो इतने सच्चा है ना आपको को मतलब

1170
01:20:03,200 --> 01:20:07,360
साधना दे रहा है सॉरी नॉट द कोर्स जो कोर्स दे रहा है वो तो कोर्स ही पकड़ आएगा

1171
01:20:07,360 --> 01:20:11,920
बट जो आपको साधना करवा रहा है साधना बेच बेच रहा है।

1172
01:20:11,920 --> 01:20:15,920
उसको यही नहीं पता कि यह बेचने की चीज नहीं है। आप

1173
01:20:15,920 --> 01:20:20,000
साधना मत बोले। हम आपका विरोध नहीं करेंगे। जी। हम आपको बोलेंगे

1174
01:20:20,000 --> 01:20:24,080
कि आइए हम क्या कहते हैं? ये स्तोत्र सीखने वाले

1175
01:20:24,080 --> 01:20:28,160
हैं। आ जाइए। ये फीस है और ये होगा। हम समझ सकते

1176
01:20:28,160 --> 01:20:32,400
हैं कि कोर्स बोल रहा है। अब अगर मैं उसका अनुसरण करती हूं तो

1177
01:20:32,400 --> 01:20:36,720
मेरे ऊपर। देखिए एक बात है शास्त्रों के अनुसार जो

1178
01:20:36,720 --> 01:20:37,220
धर्म

1179
01:20:37,200 --> 01:20:41,280
की शिक्षा है उसका मूल्य नहीं दिया जा सकता। यदि कोई

1180
01:20:41,280 --> 01:20:45,440
दान स्वरूप अपना जो सुविधा इत्यादि हम प्रदान

1181
01:20:45,440 --> 01:20:49,600
कर रहे हैं। ये ऋषिकेश में एक चीज होती है। हम बताएंगे मैं मैं बोल रही हूं।

1182
01:20:49,600 --> 01:20:53,760
नहीं नहीं प्लीज प्लीज आई हैव टू से दिस। ऋषिकेश में क्या होता है

1183
01:20:53,760 --> 01:20:57,760
कि क्योंकि मैं तो वहीं पे रही हूं। अभी काफी साल हो गए। पांच साल से ज्यादा

1184
01:20:57,760 --> 01:21:01,840
हो गए। तो ऋषिकेश में क्या होता है कि वॉकिंग क्लासेस होती है योगा

1185
01:21:01,840 --> 01:21:06,080
क्लासेस या कोई भी क्लास आती है है ना हीलिंग ऑल दैट तो

1186
01:21:06,080 --> 01:21:10,560
उसमें लोग बोलते हैं डोनेशन बेसिस है ना तो अब जो अंग्रेज

1187
01:21:10,560 --> 01:21:14,560
आते हैं तो उनका क्योंकि सिस्टम थोड़ा वैसा रहता है तो वो आपको कोई ना कोई

1188
01:21:14,560 --> 01:21:18,720
डोनेशन दे देते हैं लाइक पैसे वो आपको दे देते हैं और उनके लिए ₹500 देना आपको

1189
01:21:18,720 --> 01:21:23,280
कोई बहुत बड़ी बात नहीं पर कोविड के बाद सीजन

1190
01:21:23,280 --> 01:21:27,440
डाउन हो गया है ना तो शुरू शुरू में तो डोनेशन बेस पे लोग

1191
01:21:27,440 --> 01:21:31,520
बहुत समझते थे कि है ना कि अच्छा ही लगता था कि कोविड के बाद एक

1192
01:21:31,520 --> 01:21:35,840
आउटसाइड एक्सपीरियंस हो रहा है कि यार यह ले पैसे मुझे बहुत अच्छा लगा।

1193
01:21:35,840 --> 01:21:39,920
पर फिर उसके टाइम पे उस थोड़े टाइम बाद लोगों के पास पैसे नहीं थे। है

1194
01:21:39,920 --> 01:21:43,920
ना? पैसे बहुत कम थे। तो लोग क्या और लोग डोनेशन

1195
01:21:43,920 --> 01:21:48,160
नहीं देते थे। है ना? तो क्या होता था कि सोचिए योगा क्लास या कोई इवेंट

1196
01:21:48,160 --> 01:21:52,400
है डोनेशन बेस्ड। सब इवेंट में आए। सबने क्लास कर दी। किसी ने आपको ₹10

1197
01:21:52,400 --> 01:21:56,480
भी नहीं दिए। तो अब उससे नुकसान हो रहा है। पीपल आर लाइक कि यार डोनेशन नहीं

1198
01:21:56,480 --> 01:22:00,560
आया। डोनेशन नहीं आई। जी। फिर उन्होंने क्या शुरू किया लिखना

1199
01:22:00,560 --> 01:22:04,720
डोनेशन बेस्ड मिनिमम डोनेशन ₹0। तो

1200
01:22:04,720 --> 01:22:08,880
जो आपको वो चार्ज कर रहे हैं ना वो इसलिए क्योंकि उन्हें चाहिए

1201
01:22:08,880 --> 01:22:13,040
इतना तो चाहिए। ये कर सकते हैं कि जैसे मान लीजिए उनका कुछ एक सुविधा

1202
01:22:13,040 --> 01:22:17,120
शुल्क होता है ना कि वो चीजें ऑर्गेनाइज करने में उनका इतना खर्च हो रहा है। वो एनजीओ

1203
01:22:17,120 --> 01:22:21,280
नहीं है ना। मैं वही तो बोल रही हूं। एक प्राइवेट है। उस रूप में लिया जा सकता है। मगर

1204
01:22:21,280 --> 01:22:25,520
धर्म शास्त्रों के हिसाब से इसको निम्न विहीन भावना से। बहुत अत्यंत

1205
01:22:25,520 --> 01:22:29,600
व्यवस्था हो तो कहीं पर लागू करने की बात की गई तो बात

1206
01:22:29,600 --> 01:22:33,680
परंतु सबसे पहला तो यही है कि आप धर्म को व्यापार की दृष्टि से देखें

1207
01:22:33,680 --> 01:22:37,760
ही ना आप जो है अपने को त्याग करके

1208
01:22:37,760 --> 01:22:42,080
बलिदान पूर्वक इस मैदान में कूदे और जब आप ऐसा

1209
01:22:42,080 --> 01:22:46,240
करते हैं कि हमने भाई जो है समर्पण की भावना

1210
01:22:46,240 --> 01:22:50,640
से ही केवल एक कल्याण की भावना से अपने रास्ते बनाए तो अवश्य

1211
01:22:50,640 --> 01:22:54,880
ही फिर भगवान कहते ना तू मेरी शरण में आजा तेरी प्राप्ति की रक्षा अप्राप्ति की चिंता

1212
01:22:54,880 --> 01:22:59,280
में आप बिलीव नहीं करोगे कि मैंने अपने जीवन में

1213
01:22:59,280 --> 01:23:03,680
ये मैं अपने उसके लिए नहीं कह रहा हूं कि मैं अपनी बढ़वती मान

1214
01:23:03,680 --> 01:23:07,520
क्योंकि मैं दिन भर ये चिंतन करता रहता हूं। मेरे से आज इतनी सारी गलतियां हो रही है। मेरा

1215
01:23:07,520 --> 01:23:11,680
इसमें दिमाग रहता है। मगर मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूं कि मैंने अपने

1216
01:23:11,680 --> 01:23:16,000
जीवन में जहां जहां पर कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का निर्वाह

1217
01:23:16,000 --> 01:23:20,000
किया है। उसके बाद मेरे जीवन में ऐसे परिवर्तन

1218
01:23:20,000 --> 01:23:24,080
हुए चमत्कारी जिसकी मैंने अपेक्षा नहीं की। जब जब मैंने

1219
01:23:24,080 --> 01:23:28,080
कठिन परिस्थितियों में धर्म को पकड़े रहा कि नहीं नहीं मैं यही करूंगा इसको

1220
01:23:28,080 --> 01:23:32,160
नहीं छोड़ सकता जहां जहां पर हम ऐसा कर जाते हैं ना जहां हम कठिन

1221
01:23:32,160 --> 01:23:36,320
परिस्थितियों में विषम परिस्थिति विपरीत परिस्थितियों में जब हम धर्म का त्याग

1222
01:23:36,320 --> 01:23:40,400
नहीं करते फिर आपके लिए आगे धर्म इतना सरल रास्ता कर देता है कि आप

1223
01:23:40,400 --> 01:23:44,480
मतलब वो आपने अपने लिए सोचा भी नहीं होता है और आज भी

1224
01:23:44,480 --> 01:23:48,880
मैं हूं मेरी कोई आर्थिक स्थिति कोई ऐसी नहीं है कि मैं बहुत बड़ा कुछ मैंने

1225
01:23:48,880 --> 01:23:53,120
ऐसा खड़ा कर लिया हो मगर मुझे इतना विश्वास कि हमारे

1226
01:23:53,120 --> 01:23:57,440
साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता मेरे पीछे राम

1227
01:23:57,440 --> 01:24:01,440
है मेरे पीछे गुरु गोविंद ग्रंथ है मेरा कोई माई का लाल कुछ

1228
01:24:01,440 --> 01:24:05,440
नहीं बिगाड़ सकता मेरे से कोई दुनिया में इस जीवन इस दुनिया में विजय प्राप्त

1229
01:24:05,440 --> 01:24:09,520
नहीं कर सकता क्योंकि मेरे पास राम है और मेरा कोई

1230
01:24:09,520 --> 01:24:13,680
भी काम नहीं रुकता है नहीं रुकता बस भगवान से प्रार्थना करता हूं

1231
01:24:13,680 --> 01:24:18,320
जो भी काम है जो भी मेरे अभीष्ट फल होते हैं वो मुझे प्राप्त

1232
01:24:18,320 --> 01:24:22,480
तो हमें ये भावना लेकर के आगे जी प्रश्न अब आगे आगे बढ़ रहे हैं।

1233
01:24:22,480 --> 01:24:22,980
मैं

1234
01:24:22,720 --> 01:24:27,040
एक चीज कहूंगा कि मुझे लगता है कि काफी विषय होगा। तो हम इसको

1235
01:24:27,040 --> 01:24:31,040
कई चैप्टर्स में करें और मुझे लगता है थोड़ा सा आप जो भी करें उसके बाद

1236
01:24:31,040 --> 01:24:35,120
क्वेश्चन भी ले ले। कई लोग इंतजार में बार-बार पूछ रहे हैं कि क्वेश्चन कब

1237
01:24:35,120 --> 01:24:39,440
लेंगे? तो एक्चुअली हमने जो

1238
01:24:39,440 --> 01:24:43,600
बाद के कुछ क्वेश्चन थे वो ऑलरेडी कवर कर लिए है। जैसे हमने ये भी कवर

1239
01:24:43,600 --> 01:24:47,840
कर लिए। हाउ टू आइडेंटिफाई फेक स्पिरिचुअल इनफ्लुएंसरर एंड सेल्फ डिक्लेयर्ड

1240
01:24:47,840 --> 01:24:52,160
गुरुस। अगर आप हमारे वीडियो का फ्रंट मतलब जो इनिशियल कन्वर्सेशन

1241
01:24:52,160 --> 01:24:56,400
देखेंगे एकजेक्टली हाउ यू विल आइडेंटिफाई कि है या नहीं

1242
01:24:56,400 --> 01:25:00,880
है और अब आगे बढ़ेंगे कि एंड फाइनली हाउ इज सनातन

1243
01:25:00,880 --> 01:25:05,280
धर्म डिफरेंट फ्रॉम ऑल द न्यू एज बिलीफ

1244
01:25:05,280 --> 01:25:09,600
सिस्टम और इसके अंदर वही वाला आपका आ जाता है कि हमारा

1245
01:25:09,600 --> 01:25:13,920
ईश्वर सर्वशक्तिमान है ये वाला सिद्धांत

1246
01:25:13,920 --> 01:25:17,920
पर उससे पहले एक श छोटा सा एक क्वेश्चन जो हमारा बचा

1247
01:25:17,920 --> 01:25:22,000
हुआ है वो यह है कि व्हाट इज द राइट वे टू

1248
01:25:22,000 --> 01:25:26,160
डू साधना? तो ये दो चीजें हैं। इन्हें कवर

1249
01:25:26,160 --> 01:25:30,320
करके अब हम प्रश्न उत्तर की तरफ बढ़ेंगे।

1250
01:25:30,320 --> 01:25:34,880
तो पहले हम कवर करते हैं हाउ टू डू व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना।

1251
01:25:34,880 --> 01:25:37,840
क्योंकि लास्ट वाला जो पार्ट है वो बहुत सुंदर सी

1252
01:25:37,840 --> 01:25:42,160
समरी बनता है। जी। देखिए राइट वे टू डू साधना

1253
01:25:42,160 --> 01:25:46,160
के विषय में मैंने अभी आपको एक चीज बताई कि आप सबसे पहले क्योंकि आपके घर में

1254
01:25:46,160 --> 01:25:50,720
गोविंद तो होते ही तो आप गोविंद को समर्पित

1255
01:25:50,720 --> 01:25:54,720
रूप से कि मुझे कोई प्राप्त नहीं करनी है कोई चीज इस भावना को मन

1256
01:25:54,720 --> 01:25:59,600
में रखते हुए आदि शंकराचार्य जी ने अपने भगवत गीता भाष्य में कर्म

1257
01:25:59,600 --> 01:26:01,840
करे

1258
01:26:01,840 --> 01:26:06,080
का अर्थ करते हुए वहां पर एक बात कही कि उस समय आप ये भी मत सोचिए

1259
01:26:06,080 --> 01:26:10,080
अपना कर्म करते समय कि मुझे मोक्ष मिलेगा सिर्फ अपने

1260
01:26:10,080 --> 01:26:14,240
देखिए अंदरूनी सबकशसली हमारे मूल में वो है कि

1261
01:26:14,240 --> 01:26:18,320
हमें मोक्ष चाहिए। हम जो भी ढूंढ रहे हैं वो है सत ही स्तर

1262
01:26:18,320 --> 01:26:22,320
पर अपने आपको क्या बताना है बुद्धि पूर्वक अपने आपको क्या

1263
01:26:22,320 --> 01:26:26,480
बताना है। किस सिद्धांत को कितना कहां लगाना है? हां वो है मूल

1264
01:26:26,480 --> 01:26:30,480
में है कि हम क्या क्यों कर रहे हैं। अब हमारी हर चीज में एक ही चीज

1265
01:26:30,480 --> 01:26:34,560
छुपी हुई है कि हमें सच्चिदानंद चाहिए। हमें मोक्ष चाहिए। इससे

1266
01:26:34,560 --> 01:26:38,560
कोई डिनाई नहीं कर सकता है। मगर हम जब सत ही स्तर पर अपने मन को

1267
01:26:38,560 --> 01:26:42,720
बताते हैं हमें क्या चाहिए? हम ये क्यों कर रहे हैं? तो हमें वहां पर सिर्फ इतना

1268
01:26:42,720 --> 01:26:46,800
बताना है। मुझे नहीं पता मैं क्यों कर रहा हूं। मैं सिर्फ इसलिए कर रहा हूं

1269
01:26:46,800 --> 01:26:50,800
क्योंकि शास्त्र ने कहा है क्योंकि भगवान ने कहा है। इस

1270
01:26:50,800 --> 01:26:53,040
समर्पण भावना के साथ जब आप भक्ति

1271
01:26:53,040 --> 01:26:57,040
करना भगवान की शुरू करते हैं जो उन्होंने पूछा कि साधना के

1272
01:26:57,040 --> 01:27:01,120
लिए सबसे राइट पथ क्या है? तो क्योंकि जब जब

1273
01:27:01,120 --> 01:27:05,360
शास्त्रीय दृष्टि से जाते हैं तो उसमें अलग-अलग लोगों के अधिकार की सीमा

1274
01:27:05,360 --> 01:27:09,680
सीमा में अलग-अलग साधनाएं होती है। स्त्री के अनुसार अलग साधना

1275
01:27:09,680 --> 01:27:13,680
है। पुरुष के अनुसार अलग साधना है। उसमें भी विवाहित स्त्री

1276
01:27:13,680 --> 01:27:17,680
की अलग है। अविवाहिता की अलग है। और सबसे सुंदर बात मैं

1277
01:27:17,680 --> 01:27:21,760
आपको इसको और शॉर्ट में भी बताती हूं। स्पेशली फॉर फीमेल्स

1278
01:27:21,760 --> 01:27:25,760
कि जैसे कुछ महिलाएं अब काम कर रही है। है ना? आपके डिफरेंट स्ेड्यूल

1279
01:27:25,760 --> 01:27:30,000
है। इवन फॉर मेल है ना? स्टडीज हैं, कुछ पढ़ रही है, कॉलेज जाती है, स्कूल

1280
01:27:30,000 --> 01:27:34,160
जाती हैं। तो हमें क्या होता है कि हमारा लाइफ स्टाइल पहली

1281
01:27:34,160 --> 01:27:38,720
चीज क्या है कि आपका यूनिक कोड आपके लिए स्पेसिफिकली

1282
01:27:38,720 --> 01:27:43,040
जो साधना होगी वो मेरे लिए जरूरी नहीं है वो सेम होगी। है ना?

1283
01:27:43,040 --> 01:27:47,280
और ये चीज का जो ज्ञान है जिनको ये दिखता है जिनके पास

1284
01:27:47,280 --> 01:27:51,280
ये दृष्टि है वो दोबारा हम शुरू में आ जाते हैं

1285
01:27:51,280 --> 01:27:55,520
अपने वीडियो के कि वो एक परंपरा प्राप्त आचार्य है की दवा

1286
01:27:55,520 --> 01:27:59,680
है आचार्य के शहर में तो आप आपका जो आंसर

1287
01:27:59,680 --> 01:28:04,560
बनता है व्हाट इज द राइट वे टू डू साधना ये प्रश्न

1288
01:28:04,560 --> 01:28:08,320
आपका उत्तर जो है वो आपको तब मिलेगा जब आप

1289
01:28:08,320 --> 01:28:12,640
एक शास्त्रीय प्रमाणित संप्रदाय से या किसी शास्त्रीय प्रमाणित

1290
01:28:12,640 --> 01:28:16,880
मैं ये नहीं कह रही हूं तुरंत गुरु बना लीजिए। पहले किसी संप्रदाय के पास जाइए।

1291
01:28:16,880 --> 01:28:20,880
अलग-अलग संप्रदायों में जाइए। देखिए आपका कहां पे भाव बन रहा

1292
01:28:20,880 --> 01:28:24,960
है। फिर उनको समझिए। उनके सिद्धांत को समझिए कि इस

1293
01:28:24,960 --> 01:28:29,360
संप्रदाय में ये फिलोसफी मानते हैं। इस संप्रदाय में ये फिलोसफी

1294
01:28:29,360 --> 01:28:33,680
यहां पे बन जाती है। ये फिलोसफी फिर आगे जाके यहां ग्रो कर जाती है।

1295
01:28:33,680 --> 01:28:37,760
उसको समझिए। उसके बाद साधना में आइए और तब तक

1296
01:28:37,760 --> 01:28:41,840
यह जो एक्सप्लोरेशन फेस है ना हमारा तब तक

1297
01:28:41,840 --> 01:28:46,400
आपकी साधना नाम जप और अपने कर्मों को सही रखना

1298
01:28:46,400 --> 01:28:50,400
और मैंने एक बार मैं तो यहां तक कहता हूं कि अगर आपने नाम जप को पकड़

1299
01:28:50,400 --> 01:28:54,480
लिया तो आपके कर्म भी ऑटोमेटिकली सुधरते जाएंगे हां वो हमारी साधना

1300
01:28:54,480 --> 01:28:58,560
है और बाकी बहुत जैसे चालीसा है चालीसा तो सब

1301
01:28:58,560 --> 01:29:03,440
पढ़ते हैं 20 अक्षर हटा दीजिए चालीसा पढ़िए जितने भी जो

1302
01:29:03,440 --> 01:29:07,440
रामचरितमानस इत्यादि जैसे हमारे इनसे जुड़ी हुई

1303
01:29:07,440 --> 01:29:11,600
जितनी भी भक्ति के निमित्त जो बातें बताई गई है वो सारी आपके अधिकार की सीमा

1304
01:29:11,600 --> 01:29:15,760
में आती है। सबके अधिकार की सीमा में आती है। तो आप सब उनका आलंबन ले सकते हैं।

1305
01:29:15,760 --> 01:29:19,840
उससे आपके जीवन में जो भी अभीष्ट होगा वही कैरी ऑन होना होगा। वही कैरी

1306
01:29:19,840 --> 01:29:23,440
ऑन होगा। या फिर किसी गुरु का आना अपेक्षित होगा तो वो गुरु

1307
01:29:23,440 --> 01:29:27,600
आएंगे। किसी मंत्र का आना, किसी ग्रंथ का आना जो भी आपके जीवन

1308
01:29:27,600 --> 01:29:31,600
के लिए अपेक्षित होगा वो फिर आपको भगवान करेंगे। मगर भगवान को

1309
01:29:31,600 --> 01:29:36,080
सर्वशक्तिमान रूप में स्वीकार करके करिएगा। ये बाधित वाला नहीं।

1310
01:29:36,080 --> 01:29:40,080
निराकार टाइप के अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति नहीं हो सकती। ये

1311
01:29:40,080 --> 01:29:44,080
सब नहीं। भगवान सर्वशक्तिमान है। सर्व समर्थवान है। इस भावना

1312
01:29:44,080 --> 01:29:48,320
को मन में लेते हुए ही उनका जप करिएगा। क्योंकि भगवत गीता

1313
01:29:48,320 --> 01:29:52,560
में भगवान ने ये बात भी कही है कि जो लोग मुझे मानव रूप में देख

1314
01:29:52,560 --> 01:29:56,800
के मुझे ब्रह्म नहीं समझते मेरे ब्रह्म भाव को भूल जाते हैं। मूर्ख है

1315
01:29:56,800 --> 01:30:00,800
और ऐसे लोग मुझे प्राप्त नहीं कर पाते। तो उनके जीवन में अभी चेंज

1316
01:30:00,800 --> 01:30:04,960
नहीं आएंगे। तो आपको जो सर्वशक्तिमत्ता है उनकी स्वीकार करती होगी। इसके

1317
01:30:04,960 --> 01:30:09,360
जैसा कोई नहीं है। इसके आगे अब किसको ही

1318
01:30:09,360 --> 01:30:13,680
हैज़ ऑलरेडी एक्चुअली एक्सप्लेन लास्ट पार्ट ऑफ आवर क्वेश्चन व्हिच इज़ आई विल रिपीट

1319
01:30:13,680 --> 01:30:17,840
अगेन। हाउ इज सनातन धर्म डिफरेंट फ्रॉम द ऑल फ्रॉम

1320
01:30:17,840 --> 01:30:22,000
ऑल न्यू एज बिलीफ सिस्टम्स हैशटग रिलीजन। जी

1321
01:30:22,000 --> 01:30:26,320
इसको मैं आपको एक चीज आई विल शेयर विद यू

1322
01:30:26,320 --> 01:30:30,640
कि द फर्स्ट थिंग इज टू अंडरस्टैंड द

1323
01:30:30,640 --> 01:30:34,880
मेजर ये चीज मैंने अपने प्रोग्राम्स में भी इस बार रिसेंटली

1324
01:30:34,880 --> 01:30:38,800
आई ट्राई टू टीच माय स्टूडेंट्स कि

1325
01:30:38,800 --> 01:30:42,800
ये आपने बहुत जगह सुना होगा कि लोग बोलते हैं

1326
01:30:42,800 --> 01:30:46,960
सारे रास्ते अलग-अलग है बट जाना सबको एक ही जगह पे है। एकम

1327
01:30:46,960 --> 01:30:49,600
शब्द विप्रदा

1328
01:30:49,600 --> 01:30:53,760
इस तरह के चीजों का वो अलग अर्थ लेते हैं। यहां पर हम आपको इसके अंदर एक चीज

1329
01:30:53,760 --> 01:30:58,080
बताते हैं कि ये जो मतलब ये हमें जो समझ आया आप बताइएगा

1330
01:30:58,080 --> 01:31:02,640
हम अगर इस बात को ठीक समझ पाए। अब ये जो हम बोलते हैं कि

1331
01:31:02,640 --> 01:31:06,960
सब रास्ते अलग-अलग है बट जाना हमें एक ही तरफ है। ये एक

1332
01:31:06,960 --> 01:31:11,600
ही तरफ और रास्ते जो अलग-अलग है ये अलग-अलग दूसरे रिलीजंस

1333
01:31:11,600 --> 01:31:15,760
नहीं है। कि ये सारे अलग-अलग रिलीजंस एक तरफ

1334
01:31:15,760 --> 01:31:20,080
जाएंगे। यह जो अलग-अलग रास्ते हैं यह हमारे शास्त्र

1335
01:31:20,080 --> 01:31:24,320
के दर्शन है जो अलग-अलग दर्शन है छह ये

1336
01:31:24,320 --> 01:31:28,400
मैं हूं इट्स विद इन द सनातन धर्म दर्शन फिलोसफी द सिक्स

1337
01:31:28,400 --> 01:31:32,400
हिंदू द सिक्स हिंदू फिलोसफीस ऑफ आवर सनातन

1338
01:31:32,400 --> 01:31:36,400
धर्म इट इज दैट डिफरेंट डिफरेंट पार्ट दैट

1339
01:31:36,400 --> 01:31:41,040
लीड टू वन निराकार कुल मिलाकर के परंपरा

1340
01:31:41,040 --> 01:31:45,120
प्राप्त वैदिक जो हमारे सिद्धांत है उनके लिए बात कही गई

1341
01:31:45,120 --> 01:31:49,360
है हां नॉट फॉर ये नहीं है कि किसी बच्चे ने अभी मेरे पास फोन आया था एक

1342
01:31:49,360 --> 01:31:53,600
उसने कहा कि एकदम वो इस वाला व्यक्ति बार-बार परेशान कर रहा है कि

1343
01:31:53,600 --> 01:31:54,240
से आपको

1344
01:31:54,240 --> 01:31:58,240
प्रॉब्लम है से आपको प्रॉब्लम है क्योंकि वो अलग कर देते हैं हां

1345
01:31:58,240 --> 01:32:02,880
वो वो कई जगह अल्लाह और ये क्रिश्चियनिटी से जोड़ देते हैं और वो

1346
01:32:02,880 --> 01:32:06,960
आपको महादेव से और बाकी कोई महादेव का अपमान करते

1347
01:32:06,960 --> 01:32:11,120
हैं बहुत अपमान करते हैं तो वो मुझे बोल रहा था कि क्या प्रॉब्लम रिस्पांसिव है तो मैंने कहा

1348
01:32:11,120 --> 01:32:15,680
ये प्रॉब्लम रिस्पांसिव तो वो बोला कि अरे भाई एकम विप्र

1349
01:32:15,680 --> 01:32:19,840
सत बहुदा तो मैंने कहा कि भाई एक बच्चा सुपरमैन

1350
01:32:19,840 --> 01:32:23,920
की कॉमिक्स ला के कहेगा ये भगवान है मान लोगे क्या हां सुपरम पढ़ के

1351
01:32:23,920 --> 01:32:29,200
बोलेगा कि सुपरम से मुझे शिव जी मिल जाएंगे एकम एकम सद विप्रती

1352
01:32:29,200 --> 01:32:33,520
है ना तो वही वो विप्र है मेरा

1353
01:32:33,520 --> 01:32:37,920
मेरा यही ईश्वर है ये भी है ऐसा नहीं है जो परंपरा प्राप्त प्रमाणिक

1354
01:32:37,920 --> 01:32:41,920
वैदिक सिद्धांत है उनके लिए ये बात कही अच्छा नाउ

1355
01:32:41,920 --> 01:32:46,080
कमिंग टू डिफरेंट बता दू सनातन में

1356
01:32:46,080 --> 01:32:50,160
वो कंपैरेटिव पर्सेक्टिव से मैं अब बता देता हूं। देखिए सबसे पहले

1357
01:32:50,160 --> 01:32:54,160
आप ये समझ लीजिए कि धर्म क्या है? धर्म क्या है? जीव

1358
01:32:54,160 --> 01:32:58,400
की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप

1359
01:32:58,400 --> 01:33:02,640
परमेश्वर जिसको मोक्ष भी कहते हैं। जीव क्या ढूंढ रहा है?

1360
01:33:02,640 --> 01:33:07,040
जीव की चाह का वास्तविक विषय क्या है? हम हर जगह क्या ढूंढ रहे हैं?

1361
01:33:07,040 --> 01:33:09,600
सच्चित आनंद। हम ऐसा आनंद

1362
01:33:09,600 --> 01:33:14,320
ढूंढ रहे हैं जो कभी समाप्त ना हो। हम ऐसा ज्ञान ढूंढ रहे हैं जो कभी

1363
01:33:14,320 --> 01:33:18,320
खत्म ना हो यानी उसका कहीं अंत ना हो और हम अपने अस्तित्व

1364
01:33:18,320 --> 01:33:22,320
को भी सत वाला अस्तित्व ढूंढ रहे हैं कि हम कभी मरे नहीं कभी मृत्यु को प्राप्त

1365
01:33:22,320 --> 01:33:27,520
ना हो इस बात को ही कहा गया अस्तो मा सग मृत्यु

1366
01:33:27,520 --> 01:33:31,520
तो जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप

1367
01:33:31,520 --> 01:33:34,880
परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले वेदाद

1368
01:33:34,880 --> 01:33:39,440
शास्त्रों द्वारा जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद

1369
01:33:39,440 --> 01:33:43,520
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम

1370
01:33:43,520 --> 01:33:45,760
धर्म है। यानी कि

1371
01:33:45,760 --> 01:33:50,080
सिंपल भाषा में कहे तो जो ईश्वर है उसको प्राप्त कराने

1372
01:33:50,080 --> 01:33:54,240
वाले जो डस एंड डोंट्स है वही धर्म है। ये करना अगर

1373
01:33:54,240 --> 01:33:58,240
ईश्वर तक जाना है तो ये करना है ये नहीं करना है। डूस एंड डोंट्स। और ऐसे

1374
01:33:58,240 --> 01:34:02,400
डूस एंड डोंट्स में क्या आ जाता है? सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है, कौन बहन

1375
01:34:02,400 --> 01:34:06,480
है, कौन पत्नी है। इस स्त्री से विवाह नहीं करना है। इस स्त्री से करना है। ये क्या हो गया?

1376
01:34:06,480 --> 01:34:10,480
डूस एंड डोंट्स। ठीक है? तो क्यों? ऐसा क्यों करना है? इससे विवाह नहीं करना।

1377
01:34:10,480 --> 01:34:14,640
इससे करना है। ऐसा क्यों करना है? क्योंकि हमको ईश्वर तक जाना है।

1378
01:34:14,640 --> 01:34:18,800
इसीलिए कहा गया कि धर्म उसी के पास है जो आस्तिक है। धर्म उसी

1379
01:34:18,800 --> 01:34:22,880
के पास है जो ईश्वर को मानता है। अगर हम किसी नास्तिक को ले

1380
01:34:22,880 --> 01:34:27,280
ले तो उसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर करने का आधार

1381
01:34:27,280 --> 01:34:31,440
का कोई कारण नहीं है। वो कर रहा है क्योंकि उसके मां-बाप जो आस्तिक

1382
01:34:31,440 --> 01:34:35,440
है उसने उसे सिखाया है और उसके पास कोई ठोस आधार नहीं है। हमारे पास

1383
01:34:35,440 --> 01:34:39,440
है क्योंकि हमें ईश्वर तक जाना है। इसलिए हमें ये मान ठीक है? तो धर्म ये

1384
01:34:39,440 --> 01:34:43,440
है। अब क्या आ जाती है बात कि किस तक जाना है? धर्म

1385
01:34:43,440 --> 01:34:47,440
कहां से शुरू हुआ? जीव की चाह का वास्तविक विषय ईश्वर। ईश्वर

1386
01:34:47,440 --> 01:34:51,440
कौन है? ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। ईश्वर

1387
01:34:51,440 --> 01:34:55,520
किसी भी तरह के व्यवधान से रहित है। ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के

1388
01:34:55,520 --> 01:34:59,520
नीचे नहीं है। अगर नियम लग गया तो जिस पर नियम लगा वो ईश्वर नहीं है।

1389
01:34:59,520 --> 01:35:00,800
ईश्वर में अभाव नहीं

1390
01:35:00,800 --> 01:35:04,880
हो सकता किसी चीज का। ईश्वर ये नहीं कर सकता। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ईश्वर की

1391
01:35:04,880 --> 01:35:08,960
मूर्ति नहीं हो सकती। ईश्वर उड़ नहीं सकता। ईश्वर का हम ईश्वर तक जा ही इसलिए रहे

1392
01:35:08,960 --> 01:35:12,960
हैं क्योंकि ईश्वर अभाव रहित है। तो अगर हम ये

1393
01:35:12,960 --> 01:35:17,280
कह दे ईश्वर ये नहीं कर सकता तो वो ईश्वर सिद्ध नहीं होगा।

1394
01:35:17,280 --> 01:35:21,360
तो इसलिए हमारा धर्म धर्म क्यों है? अन्यों का धर्म धर्म क्यों नहीं

1395
01:35:21,360 --> 01:35:26,000
है? कि सनातन धर्म के विरुद्ध जितनी भी आईडियोलॉजीस

1396
01:35:26,000 --> 01:35:30,000
आई है उन सबका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होता क्योंकि उन सबका

1397
01:35:30,000 --> 01:35:34,160
ईश्वर खुद कहते हैं कि वो बाधित है यानी कि वो सर्वशक्तिमान

1398
01:35:34,160 --> 01:35:38,560
नहीं है। वो सब कुछ नहीं कर सकता। इस्लाम का ईश्वर छह 150

1399
01:35:38,560 --> 01:35:42,800
में कहा गया कि उसकी कोई संतान कैसे हो सकती है? जबकि कोई

1400
01:35:42,800 --> 01:35:46,880
उसकी पत्नी ही नहीं है। यानी कि वो ईश्वर कहां पर लिमिटेड हो गया कि पत्नी

1401
01:35:46,880 --> 01:35:51,680
होगी तो संतान होगी। यह ना सकना वाली बात नहीं कर सकता।

1402
01:35:51,680 --> 01:35:55,760
ही कांट डू इट। यह जो चीज है यह हमारे ईश्वर के साथ नहीं आती।

1403
01:35:55,760 --> 01:35:59,840
इसलिए इस ईश्वर को प्राप्त कराने वाले जो ड्स एंड डोंट्स है वो

1404
01:35:59,840 --> 01:36:03,920
धर्म कहलाते हैं। और वो जो ईश्वर के नाम पे ईश्वराभास

1405
01:36:03,920 --> 01:36:08,560
या ईश्वर जैसा मिलता जुलता कोई वाइस कैप्टन या फिर उसको और एक

1406
01:36:08,560 --> 01:36:13,280
कह सकते हैं कि ईश्वराभास जैसा और कोई भी शब्द है तो जो मिलता

1407
01:36:13,280 --> 01:36:16,160
जुलता जो सो कॉल्ड ईश्वर है तथाकथित ईश्वर

1408
01:36:16,160 --> 01:36:20,160
तो उसको प्राप्त कराने वाली जो उन्होंने नियमावली दी है उसको धर्म

1409
01:36:20,160 --> 01:36:24,320
नहीं कहा जा सकता क्योंकि वहां पर ईश्वर ही नहीं है। वो सब कुछ नहीं कर सकता।

1410
01:36:24,320 --> 01:36:28,480
हमारा ईश्वर यदि कोई कहे कि वो जन्म नहीं

1411
01:36:28,480 --> 01:36:32,480
ले सकता तो श्री राम कृष्ण के रूप में वो जन्म लेता है। अगर कोई कहे कि

1412
01:36:32,480 --> 01:36:36,560
वो अपने शरीर का नाश नहीं कर सकता। इनहीं रूपों में आ के वो अपने शरीर को नष्ट करके

1413
01:36:36,560 --> 01:36:40,800
दिखा देता है। कोई कहे कि वो मत्स्य नहीं बन सकता। वो मत्स अवतार

1414
01:36:40,800 --> 01:36:44,800
लेता है। कोई कहे कि वो पूर्व नहीं बन सकता। वो पूर्व अवतार लेता है।

1415
01:36:44,800 --> 01:36:49,040
कोई कहे वो वरा नहीं बन सकता। वो वरा अवतार लेता है। कोई कहे कि वो आधा

1416
01:36:49,040 --> 01:36:53,440
जानवर आधा इंसान नहीं बन सकता। वो नरसिंह अवतार बन जाता है। कोई कहे

1417
01:36:53,440 --> 01:36:57,120
कि वो झूठ नहीं बोल सकता तो वो छलिया कृष्ण

1418
01:36:57,120 --> 01:37:01,440
बन जाता है। मोहिनी बन जाता है। और अगर कोई कहे कि वो केवल

1419
01:37:01,440 --> 01:37:04,480
सत्य नहीं बोल सकता तो वो राम बन जाता है।

1420
01:37:04,480 --> 01:37:08,560
तो हमारा वो ईश्वर है जो कुछ भी कर सकता है उसके लिए

1421
01:37:08,560 --> 01:37:12,960
एक लाइन नहीं बोली जा सकती। ही कांट डू इट।

1422
01:37:12,960 --> 01:37:17,200
यह लाइन जिसके सामने लग जाएगी वो बाधित ईश्वर है वह सनातन ईश्वर

1423
01:37:17,200 --> 01:37:21,200
नहीं है। और जब यह लाइन लग जाएगी तो इसी लाइन के लग जाने

1424
01:37:21,200 --> 01:37:25,440
के कारण सनातन विरोधी सारे जो आइडियोलॉजीस है वो हार जाती है। ढेर

1425
01:37:25,440 --> 01:37:29,680
हो जाती है और वहीं पर हमारी जो जीत है वो सुनिश्चित होती है।

1426
01:37:29,680 --> 01:37:33,840
हमारा धर्म धर्म कहलाता है। उस ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त जो मनुष्य

1427
01:37:33,840 --> 01:37:37,920
की चाह का वास्तविक विषय है। जी हम क्या चाहते हैं? हम जैसे

1428
01:37:37,920 --> 01:37:42,000
एक नास्तिक भी है वो भी अपने मन में कई बार ये सोचता है कि बारिश ज्यादा पड़ रही है

1429
01:37:42,000 --> 01:37:46,240
तो कम हो जाए। धूप ज्यादा निकली है तो कम हो जाए। नास्तिक भी सोच रहा है विज्ञान

1430
01:37:46,240 --> 01:37:50,240
के विरुद्ध जाकर के वो ये सोच रहा है कि धूप कम हो जाए। मेरे अनुसार ये

1431
01:37:50,240 --> 01:37:54,400
दुनिया चलने लगे। क्यों सोच रहा है? क्या विज्ञान ने कहा है कि तुम्हारे अनुसार ये दुनिया

1432
01:37:54,400 --> 01:37:58,400
चलेगी। तो इसका मतलब उसके उस नास्तिक के अंदर भी

1433
01:37:58,400 --> 01:38:02,560
सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह विद्यमान है। जिससे

1434
01:38:02,560 --> 01:38:06,880
यह सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई है जो सब कुछ कर सकता

1435
01:38:06,880 --> 01:38:11,040
है। तो जब हमारा ईश्वर सिद्ध कहां से हुआ कि

1436
01:38:11,040 --> 01:38:15,200
एक नास्तिक के अंदर भी सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है।

1437
01:38:15,200 --> 01:38:19,280
जिससे ईश्वर सिद्ध हुआ, धर्म सिद्ध हुआ। तो फिर ईश्वर

1438
01:38:19,280 --> 01:38:19,780
कौन

1439
01:38:19,600 --> 01:38:23,600
होगा? उसका जो सब कुछ कर सकता है। तो इसी कारण से

1440
01:38:23,600 --> 01:38:27,760
हम सनातन को ही एकमात्र कहा जा सकता है कि वो धर्म है और

1441
01:38:27,760 --> 01:38:32,000
सनातन के विरुद्ध जितनी भी और अन्य आइडियोलॉजीस आई है वो धर्म

1442
01:38:32,000 --> 01:38:36,000
नहीं। उनको जो भी वो नाम दे एंड वि दैट वी विल

1443
01:38:36,000 --> 01:38:40,320
कंक्लूड द सेशन बाय सेइंग दिस इज हाउ सनातन धर्म इज डिफरेंट फ्रॉम

1444
01:38:40,320 --> 01:38:44,960
ऑल द डिफरेंट न्यू एज बिलीफ सिस्टम बिकॉज़ हियर

1445
01:38:44,960 --> 01:38:49,200
वी हैव द डिवाइन एज़ द डिवाइन

1446
01:38:49,200 --> 01:38:53,680
वर्किंग एज़ अ बॉडी दैट कैन डू एवरीथिंग एंड एनीथिंग

1447
01:38:53,680 --> 01:38:57,840
एंड इज़ नॉट लिमिटेड एंड इज़ सेड ओ द

1448
01:38:57,840 --> 01:39:02,400
डिवाइन डज़ंट नीड टू डू इट। डिवाइन नीड्स टू डू एवरीथिंग बिकॉज़ एवरीथिंग इज़ एनीवे

1449
01:39:02,400 --> 01:39:06,720
हैपेनिंग एंड इफ अ पीपल आर गेटिंग मैरिड देन द डिवाइन इज़

1450
01:39:06,720 --> 01:39:11,040
मेकिंग दैट पॉसिबल। सो द डिवाइन इज़ मेकिंग इट हैपन।

1451
01:39:11,040 --> 01:39:15,040
तो दिस इज़ जो इन्होंने अभी आपको जो सिद्धांत दिए हैं

1452
01:39:15,040 --> 01:39:19,120
इसे एकदम रिवाइंड करके एक बार दोबारा सुन लीजिए। आपको और ज्यादा

1453
01:39:19,120 --> 01:39:23,200
क्लेरिटी मिलेगी। बार-बार सुनिए कि सनातन धर्म

1454
01:39:23,200 --> 01:39:27,840
बाकी सभी के सभी न्यू एज बिलीफ सिस्टम हैश स्लश

1455
01:39:27,840 --> 01:39:31,840
रिलीजन से अलग क्यों है? एंड विथ दैट

1456
01:39:31,840 --> 01:39:34,960
वी विल कंक्लूड आवर टुडेज़ वंडरफुल सेशन।

1457
01:39:34,960 --> 01:39:38,960
अगेन थैंक यू सो मच फॉर वेटिंग फॉर अस टुडे एंड

1458
01:39:38,960 --> 01:39:43,760
प्लीज मेक श्योर दैट यू टेक अवे ऑल द

1459
01:39:43,760 --> 01:39:48,000
फैक्ट्स दैट वी शेयर विद यू एंड यू आर मोर एंड मोर अवेयर

1460
01:39:48,000 --> 01:39:52,080
अबाउट व्हाट काइंड ऑफ़ चॉइसेस यू आर मेकिंग इन लाइफ एंड आई जस्ट शेयर अ

1461
01:39:52,080 --> 01:39:56,080
पर्सनल थिंग विद यू फ्यू इयर्स बैक आई वाज़ अ

1462
01:39:56,080 --> 01:40:00,160
वेरी डिफरेंट पर्सन एंड आय डिडन्ट नो एनीथिंग

1463
01:40:00,160 --> 01:40:04,320
लाइक आय सेड आय डिडन्ट इवन नो द मंत्रज़ आई वास अ चैंटिंग

1464
01:40:04,320 --> 01:40:08,320
रोंग मंत्र्रास एंड आई हैड अ वेरी डिफिकल्ट लाइफ एंड

1465
01:40:08,320 --> 01:40:12,560
प्रॉब्लम्स दैट आई डिडट नो व्हाई दे वर हैपनिंग टू मी बट एवर

1466
01:40:12,560 --> 01:40:16,640
सिंस आई ट्राइड टू क्वेश्चन हंबली फ्रॉम अ

1467
01:40:16,640 --> 01:40:20,720
प्लेस ऑफ जिज्ञासा नॉट आर्गुमेंट एंड गव

1468
01:40:20,720 --> 01:40:24,720
मायसेल्फ द टाइम टू लर्न एंड आई एम स्टिल गिविंग मसेल्फ द टाइम टू लर्न

1469
01:40:24,720 --> 01:40:29,040
आई होप आई मूव सक्सेसफुली फॉरवर्ड इन माय पाथ एंड सो डू सो

1470
01:40:29,040 --> 01:40:33,040
यू ऑल आल्सो डू दैट इज व्हाई आई एम शेयरिंग विद

1471
01:40:33,040 --> 01:40:37,760
यू क्वेश्चन हंबली एंड सीक

1472
01:40:37,760 --> 01:40:42,160
ओनली द ट्रुथ। अपना स्टैंडर्ड इतना ऊंचा करो ना। इतना

1473
01:40:42,160 --> 01:40:46,400
ऊंचा करो कि आपको कोई मूर्ख और बुद्धू बना

1474
01:40:46,400 --> 01:40:50,080
ही ना पाए। बिकॉज़ यहां पे अगर आप मूर्ख और बुद्धू बन गए

1475
01:40:50,080 --> 01:40:54,080
तो योर लाइफ इज वेस्टेड एंड यू आर इन अ ह्यूमन बॉडी। एंड

1476
01:40:54,080 --> 01:40:58,160
दिस जन्म इज वेरी वेरीरी प्रेशियस टू यू। एंड विथ दैट आई विल

1477
01:40:58,160 --> 01:41:02,240
कंक्लूड द सेशन। थैंक यू सो मच फॉर गिविंग अस टाइम। एंड

1478
01:41:02,240 --> 01:41:06,240
अभी हम आपके क्वेश्चन देखेंगे और उसके ऊपर

1479
01:41:06,240 --> 01:41:11,040
थोड़ी सी चर्चा करेंगे। कुछ थोड़े से क्वेश्चन ले लेते हैं क्योंकि हम लोगों ने शुरू

1480
01:41:11,040 --> 01:41:15,200
लेट किया था। एक्चुअली कुछ और काम भी थे। कुछ धरातल की

1481
01:41:15,200 --> 01:41:19,200
चीजें भी थी तो लेट होने के कारण हम कर रहे थे। जी जी

1482
01:41:19,200 --> 01:41:23,360
जी। सो यू कैन ऑल हु सो एवर इज देयर विद अस।

1483
01:41:23,360 --> 01:41:27,440
प्लीज सेंड अस योर क्वेश्चन एंड आई विल जस्ट टेक सम टाइम टू गो

1484
01:41:27,440 --> 01:41:31,840
थ्रू द चैट। लेट्स डू इट। साथ कंचन

1485
01:41:31,840 --> 01:41:36,080
जी के बार-बार प्रश्न आ रहे हैं। कुछ कोई कंचन जी का कोई एक टॉपिक है वो आप

1486
01:41:36,080 --> 01:41:40,240
ले सकते हैं। पीछे पीछे से लिख लीजिए। कंचन जी कोई एक मुख्य प्रश्न

1487
01:41:40,240 --> 01:41:43,280
हो आपका तो

1488
01:41:43,280 --> 01:41:47,440
जी धन्यवाद आपका। सरस जी बोल रही है कि इंग्लिश बोलते हुए अच्छे

1489
01:41:47,440 --> 01:41:51,520
लिखते हैं। आपका धन्यवाद। और इंग्लिश के साथ मैं बहुत

1490
01:41:51,520 --> 01:41:55,840
ज्यादा सहज नहीं हूं। वो

1491
01:41:55,840 --> 01:41:59,840
शालू जी बोल रहे हैं कि आप जो भक्ति बताते हैं

1492
01:41:59,840 --> 01:42:04,160
उससे मुझे क्या मिल सकता है? रिप्लाई करना भाई।

1493
01:42:04,160 --> 01:42:05,360
हां इससे

1494
01:42:05,360 --> 01:42:09,760
आप उत्तर दीजिए हम और इससे आपको जो वास्तविक शांति

1495
01:42:09,760 --> 01:42:13,760
है जो आप दिन भर ढूंढ रहे हैं। एक्चुअली क्या था एक दिन

1496
01:42:13,760 --> 01:42:16,640
मुझे ये जो

1497
01:42:16,640 --> 01:42:20,880
का संदर्भ है ना सच बता रहा हूं। जिस दिन मुझे इसका अर्थ

1498
01:42:20,880 --> 01:42:24,960
पता चल गया था। उस दिन मुझे नींद आई थी। आप सच मैं

1499
01:42:24,960 --> 01:42:29,200
बता रहा हूं। मैं अभी मैं थोड़ा सा भावुक भी हो रहा हूं अपने उस समय को याद करते हुए। जिस

1500
01:42:29,200 --> 01:42:33,200
दिन आपको आपकी लाइफ का गोल मिल जाता है ना उस दिन आपको

1501
01:42:33,200 --> 01:42:37,600
चैन की नींद आती है। पता है मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

1502
01:42:37,600 --> 01:42:41,600
मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है कि उसको पता नहीं कि मेरी समस्या क्या है। वो

1503
01:42:41,600 --> 01:42:45,680
दिन भर इसी में ढूंढ रहा है। मुझे क्या चाहिए? वास्तविक है। आप

1504
01:42:45,680 --> 01:42:49,680
कभी कैलकुलेट करिए। अच्छा वो सब छोड़िए। आपके जीवन की जो प्रॉब्लम्स वगैरह

1505
01:42:49,680 --> 01:42:53,760
है जो भी उद्देश्य है कभी उनको एक नोटपड पर लिखिए। आप जिस

1506
01:42:53,760 --> 01:42:57,840
दिन उसको लिख लेंगे ना उस दिन आपको संतुष्टि मिल जाएगी। रिलैक्स हो जाएंगे आप

1507
01:42:57,840 --> 01:43:02,080
क्योंकि आपने नोट कर लिया। यानी कि अब आप सुनिश्चित हो गए हैं। ये जो विकराव है ना

1508
01:43:02,080 --> 01:43:06,480
अपनी समस्याओं को ना जानना। ये आपकी तकलीफ है। तो आपकी जो सबसे

1509
01:43:06,480 --> 01:43:10,640
मूल तकलीफ है, सबसे मूल तकलीफ है वो है कि आपको पता नहीं

1510
01:43:10,640 --> 01:43:14,640
है कि आपको चाहिए क्या? एक्सजेक्टली। जिस दिन आपको ये पता चल जाता है

1511
01:43:14,640 --> 01:43:18,640
चाहिए क्या? आपकी आत्मा भूखी है। असतो मासमया चिल्ला रही है।

1512
01:43:18,640 --> 01:43:20,400
असतो मागया तमसो

1513
01:43:20,400 --> 01:43:24,400
मागया ये आपकी आत्मा चिल्ला रही है। आप

1514
01:43:24,400 --> 01:43:28,800
इस पर ध्यान नहीं दे रहे। आप एसी पे ध्यान दे रहे हो। आप कार पे ध्यान दे रहे हो। आप Mahindra

1515
01:43:28,800 --> 01:43:32,800
की नई कार आई है कर जैसी उस पर ध्यान दे रहे हो। सफारी पे ध्यान दे रहे हो नए मॉडल

1516
01:43:32,800 --> 01:43:37,120
में आने वाली या फिर वो जो विदेशी कारें आ रही है उनपे ध्यान। मगर आत्मा

1517
01:43:37,120 --> 01:43:41,360
आपकी रो रही है। उसको भोजन नहीं दे रहे हो। उसको राम नाम का उच्चारण

1518
01:43:41,360 --> 01:43:45,600
नहीं सुना रहे हो। जिस दिन आप सुनाओगे ना मन से राम नाम का उच्चारण आपको

1519
01:43:45,600 --> 01:43:49,760
तब संतोषजनक नींद आएगी। यह नींद मिलती है आपको धर्म

1520
01:43:49,760 --> 01:43:53,760
के पथ पर चलने से साधना मार्ग पर आने से नींद चैन की

1521
01:43:53,760 --> 01:43:58,000
नींद और फिर वो आपका परमार्थ तो बात अलग ही है। आपका व्यवहार

1522
01:43:58,000 --> 01:44:02,000
तो अलग है ही वो सब सुनिश्चित होता है। मगर ये जो नींद है ना इसको

1523
01:44:02,000 --> 01:44:06,160
आप चार तोले की चैन खरीद के फॉर्च्यूर खरीद के भी आप चैन की नींद

1524
01:44:06,160 --> 01:44:10,640
प्राप्त नहीं कर पाओगे। वह नींद आपको आती है अस्तोमा सद्गमया

1525
01:44:10,640 --> 01:44:14,720
को जानने के बाद यह प्रश्न करने के बाद और इसका उत्तर मिल जाने के बाद

1526
01:44:14,720 --> 01:44:18,800
उत्तर क्या है? सत्यम ज्ञानम अंतम ब्रह्म और उसका सरल

1527
01:44:18,800 --> 01:44:22,960
भाषा में जो उत्तर है वो है राम। तो ये आपको मिलता है।

1528
01:44:22,960 --> 01:44:27,280
ठीक है? गायत्री मंत्र कौन से ग्रंथ में है? हमारे

1529
01:44:27,280 --> 01:44:33,280
वेद में है। विश्वामित्र जी द्वारा इसका दर्शन किया गया है।

1530
01:44:35,680 --> 01:44:39,360
और गायत्री मंत्र

1531
01:44:39,360 --> 01:44:43,360
में ऐसी क्या शक्ति है जिसके कारण हर

1532
01:44:43,360 --> 01:44:46,960
कोई उसे नहीं कर सकता।

1533
01:44:46,960 --> 01:44:51,040
हर कोई उसे कर सकता है मगर उसके अलग-अलग रूप है। जैसे कि गायत्री मंत्र

1534
01:44:51,040 --> 01:44:55,600
का एक रूप मानस में है। जनक सुदा जननी जानकी अच्छे से करना जानकी।

1535
01:44:55,600 --> 01:44:59,680
तो जैसे कि एक बॉलर का रोल अलग होता है। बैट्समैन का रोल

1536
01:44:59,680 --> 01:45:04,640
अलग होता है। अब बॉलर कहे कि मैं पैड पहन के बॉलिंग कराऊंगा।

1537
01:45:04,640 --> 01:45:08,640
तो बॉलर अगर वो भी फास्ट बॉलर और

1538
01:45:08,640 --> 01:45:12,720
वो कहे कि मैं पैड पहन के और हाथों में ग्लव्स पहन करके बॉल कराऊंगा तो

1539
01:45:12,720 --> 01:45:16,720
क्या बॉल स्विंग करेगी? तो क्योंकि बॉलिंग करनी है उसको और बॉलिंग करने

1540
01:45:16,720 --> 01:45:20,720
के अनुसार वो टीम में एडमिट है तो उसके अनुसार उसकी विधि है कि भैया तुम्हें

1541
01:45:20,720 --> 01:45:24,960
बिल्कुल फ्री रहना है। जिसको बल्लेबाजी करनी है वो पैड पहनेगा वो जो है ग्लव्स

1542
01:45:24,960 --> 01:45:28,960
पहनेगा वो उस तरीके से पिच पर उतरेगा। तो इसी प्रकार से गायत्री मंत्र

1543
01:45:28,960 --> 01:45:33,040
के कई रूप है। आपको बता दूं कि गायत्री मंत्र हमारा 24

1544
01:45:33,040 --> 01:45:37,120
अक्षरों का 24,000 श्लोकों की हमारी रामायण है। गायत्री मंत्र

1545
01:45:37,120 --> 01:45:41,360
का ही वो एक्सप्लोर एक्सप्लोर किया गया गायत्री मंत्र को।

1546
01:45:41,360 --> 01:45:45,440
तो क्यों किया गया? क्या आवश्यकता क्योंकि बॉलर के लिए अलग

1547
01:45:45,440 --> 01:45:48,160
चीजें हैं।

1548
01:45:48,160 --> 01:45:51,440
अब हमारा अगला क्वेश्चन है राधा वल्लभ

1549
01:45:51,440 --> 01:45:55,840
इन श अगर कहे कि गायत्री मंत्र

1550
01:45:55,840 --> 01:45:59,920
नहीं पढ़ना चाहिए ये नहीं कहा जा रहा है। गायत्री मंत्र जिस रूप में आप पढ़ रहे हो वो

1551
01:45:59,920 --> 01:46:04,160
वाला विश्वामित्र जी उस रूप में ना पढ़ के उसके

1552
01:46:04,160 --> 01:46:08,320
कई अन्य रूप है उसमें आप गायत्री मंत्र भी किसका रूप है? फिर उस हिसाब

1553
01:46:08,320 --> 01:46:12,400
से तो आप प्रणव का उच्चारण करो। शास्त्रों के अनुसार जो

1554
01:46:12,400 --> 01:46:16,560
सूक्ष्म वेद है वो प्रणव है। ओम खाली ओम का बस हो गया गायत्री

1555
01:46:16,560 --> 01:46:20,560
मंत्र उसी को एक्सप्लोर किया है गायत्री मंत्र में उसी को एक्सप्लोर किया चार वेदों में

1556
01:46:20,560 --> 01:46:24,800
उसी को फिर आगे 18 पुराणों में उसी को आगे स्मृति में वही उसका व्याख्या

1557
01:46:24,800 --> 01:46:28,880
ही तो चल रही है एक्सपेंशन देवी भागवत लेना है गीता

1558
01:46:28,880 --> 01:46:33,200
प्रेस का ले या चौक चौखंबा का गीता प्रेस से भी आता है संस्कृत

1559
01:46:33,200 --> 01:46:37,440
हिंदी दोनों में और चौखंबा से भी आता है फिलहाल मुझे लगता है सस्ता

1560
01:46:37,440 --> 01:46:41,600
तो आपको वही पड़ जाएगा गीता प्रेस से जी सकते और अगर आपके पास

1561
01:46:41,600 --> 01:46:45,600
ऐसा कोई मतलब इफ यू डोंट हैव द रिस्ट्रिक्शन ऑन मनी देन मे

1562
01:46:45,600 --> 01:46:48,240
बी दे

1563
01:46:48,240 --> 01:46:52,560
आज ही हमारी बात हो रही थी ना कि आप प्रश्न को ठीक से देख के कुछ

1564
01:46:52,560 --> 01:46:56,560
वैसे तत्व भी रहते हैं हमारे चैनल पर जो केवल हां हां हम

1565
01:46:56,560 --> 01:47:00,720
नहीं है वो और बहुत सारे लोग आपस में ही बात कर रहे हैं कोई प्रश्न पूछ रहा है उसका उत्तर

1566
01:47:00,720 --> 01:47:04,720
दे रहा है तो जी का कोई एक प्रश्न था वो बहुत सटीक लग रहा था पर वो

1567
01:47:04,720 --> 01:47:06,560
बहुत पीछे छूट गया वो दोबारा कर नहीं

1568
01:47:06,560 --> 01:47:10,640
रही है हां अच्छा प्रश्न था अब अगला है राधा वल्लभ

1569
01:47:10,640 --> 01:47:15,040
संप्रदाय के बारे में कुछ बताना। राधा

1570
01:47:15,040 --> 01:47:19,120
वल्लभ संप्रदाय के बारे में तो प्रेम जी महाराज से ही आप ज्यादा जानकारी

1571
01:47:19,120 --> 01:47:23,200
वो अच्छे से देंगे और प्रामाणिक संप्रदाय है राधा

1572
01:47:23,200 --> 01:47:27,360
वल्लभ संप्रदाय तो उनसे आप जुड़ सकते हैं। और इसी

1573
01:47:27,360 --> 01:47:31,680
के साथ हम अपने क्वेश्चन को कंप्लीट करेंगे। आज हम

1574
01:47:31,680 --> 01:47:35,680
आप सब हमारे साथ जुड़े उसका बहुत-बहुत धन्यवाद। जो लोग हमारे साथ बाद

1575
01:47:35,680 --> 01:47:39,760
में जुड़े हैं, प्लीज समय निकाल के इस वीडियो को दोबारा देखिएगा। जब हम इसे

1576
01:47:39,760 --> 01:47:43,760
पोस्ट कर देंगे। यह वीडियो यहीं पर ही रहेगी आप लोगों के लिए आप लोगों की सुविधा

1577
01:47:43,760 --> 01:47:48,160
के लिए। हमें बहुत बहुत अच्छा लगा कि आप सब लोग हमारे साथ जुड़े

1578
01:47:48,160 --> 01:47:52,240
और आपको अगर कुछ कहना है तो आप बोल दीजिए। मैं तो बस

1579
01:47:52,240 --> 01:47:56,400
यही कहूंगा कि भगवान का आज का जो सेशन का जो अगर

1580
01:47:56,400 --> 01:48:00,480
सूत्रात्मक अगर एक एंड कर दूं तो आप किससे शिक्षा

1581
01:48:00,480 --> 01:48:04,640
लेनी है ये आपको पता चला और कैसे सही साधना तक पहुंचना है

1582
01:48:04,640 --> 01:48:08,720
भगवान का पैर पकड़ लीजिए पैर मत छोड़िए चाहे जो

1583
01:48:08,720 --> 01:48:12,720
हो जाए अपने आप किसी ना किसी दिन वो कहेंगे ये तो मान ही नहीं रहा पीछे ही पड़

1584
01:48:12,720 --> 01:48:16,800
गया तो फिर वो आपको दे देंगे आपका अभी भीष्ट फल जो होगा जी

1585
01:48:16,800 --> 01:48:21,120
मैं आप सबके साथ एक अपना एक एक्सपीरियंस शेयर करना चाहूंगी

1586
01:48:21,120 --> 01:48:21,760
की

1587
01:48:21,760 --> 01:48:25,760
मेरे जीवन में गुरुदेव आने से पहले और अभी भी मुझे मुझे

1588
01:48:25,760 --> 01:48:29,920
लगता नहीं सच ही है। मैं अभी भी बहुत चीजें

1589
01:48:29,920 --> 01:48:34,400
सीख रही हूं और मैं आशा करती हूं कि मेरे जीवन

1590
01:48:34,400 --> 01:48:38,640
में जो मेरे जीवन को सार्थक करने वाले कर्म

1591
01:48:38,640 --> 01:48:42,640
है और उस उन कर्मों को सार्थक

1592
01:48:42,640 --> 01:48:46,640
करने के लिए जिस धर्म के जिस पथ पर और जिन

1593
01:48:46,640 --> 01:48:50,800
सिद्धांतों से मेरा निर्वाह होगा जिससे मैं आगे बढूंगी

1594
01:48:50,800 --> 01:48:54,880
वो मैं आशा करती हूं कि मेरे गुरुदेव की कृपा मुझ पर

1595
01:48:54,880 --> 01:48:59,600
रहे और मुझे गोविंद के रास्ते रास्ते पर बनाए रखें।

1596
01:48:59,600 --> 01:49:03,680
पर यहां पर पहुंचने से पहले मैं हर बार शेयर करती हूं।

1597
01:49:03,680 --> 01:49:07,680
एक बार दोबारा शेयर कर दूंगी। मैंने बहुत प्रे

1598
01:49:07,680 --> 01:49:11,760
किया था महादेव को और मैंने हमेशा यही

1599
01:49:11,760 --> 01:49:16,240
प्रे किया था कि मुझे याद है तो मैं यही बोलती थी कि महादेव

1600
01:49:16,240 --> 01:49:20,480
मुझे बहुत सारे टीचर्स मिल रहे हैं बट गुरु नहीं मिल रहे। एंड मैं कभी

1601
01:49:20,480 --> 01:49:24,560
टीचर्स का डिसरिस्पेक्ट नहीं कर रही थी क्योंकि कल एक शिक्षक अध्यापक के

1602
01:49:24,560 --> 01:49:28,720
पास एक गुण था जो मैं आज भी उनसे सीख रही हूं। तो पर

1603
01:49:28,720 --> 01:49:32,720
मुझे ना गुरु नहीं मिल रहे थे क्योंकि वही बात हो रही थी ना कि एंड

1604
01:49:32,720 --> 01:49:36,800
मुझे ऐसा एक जगह चाहिए जहां पर बस बोल दिया

1605
01:49:36,800 --> 01:49:40,800
तो अब बस यही है क्योंकि हर तरफ तो गुरु

1606
01:49:40,800 --> 01:49:45,200
की बात होती है ना भगवान राम के भी गुरु थे तो गुरु की विशेषता तो है

1607
01:49:45,200 --> 01:49:49,280
तो मैंने बहुत प्रे किया और मैं बोलती थी महादेव को जाके और आदि

1608
01:49:49,280 --> 01:49:53,360
शंकर जी के जाके मैं बोलती थी कि मुझे आप ही चाहिए।

1609
01:49:53,360 --> 01:49:58,480
मुझे ऐसे मुझे एकदम आप ही चाहिए तो मुझे आप ही दें। तो अब

1610
01:49:58,480 --> 01:50:02,720
एक सर्कल ले लेते हैं बैक यू नो बिग स्टोरी लॉन्ग स्टोरी

1611
01:50:02,720 --> 01:50:06,880
शॉर्ट कि मतलब मैं कृपा ही बोलूंगी कि भगवान

1612
01:50:06,880 --> 01:50:11,040
की कृपा रही कि उन्होंने मुझे हमारे पूज्य गुरुदेव

1613
01:50:11,040 --> 01:50:15,200
जो शंकराचार्य जी है वो हमें प्राप्त हुए

1614
01:50:15,200 --> 01:50:19,520
तो वैसे ही मैं आप सभी को बोलूंगी कि आप लोगों

1615
01:50:19,520 --> 01:50:24,000
का जो वो परफेक्ट मोमेंट है आपके जो भी गुरु बनेंगे

1616
01:50:24,000 --> 01:50:28,160
आप उसके लिए किसी से भी प्रे करें है कि शिव जी से करें,

1617
01:50:28,160 --> 01:50:32,240
राम जी से करें, राजा जी से करें, किसी से भी करें वो आप जिसमें

1618
01:50:32,240 --> 01:50:36,560
आपकी आस्था बन रही है उनसे प्र उनसे प्रे कीजिए, उनसे प्रेम कीजिए

1619
01:50:36,560 --> 01:50:40,640
और उनसे प्रार्थना कीजिए और नाम जप कीजिए। खूब नाम

1620
01:50:40,640 --> 01:50:44,800
जप कीजिए। मंदिर जाइए। है ना? ये जो डेली है ना

1621
01:50:44,800 --> 01:50:48,960
विदाउट एनी हसल बसल द डेली थिंग्स दैट यू कैन डू। आप

1622
01:50:48,960 --> 01:50:51,920
वो करना शुरू करिए और आई प्रॉमिस

1623
01:50:51,920 --> 01:50:56,160
यू कि आप एक दिन आपके निश्चित गुरु के पास

1624
01:50:56,160 --> 01:51:00,160
जरूर पहुंच जाएंगे और फिर उसके बाद आपकी जो जर्नी

1625
01:51:00,160 --> 01:51:04,640
है वो दोबारा स्टार्ट होगी। यू विल हैव अ रिब्थ एक्सपीरियंस।

1626
01:51:04,640 --> 01:51:08,960
एंड दैट्स ऑल आई हैव टू शेयर विद यू ऑल टुडे। एक छोटी छोटी सी बातें पूछी।

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01:51:08,960 --> 01:51:13,040
एक पूछ रहे हैं कि शिव जी के लिए कौन सी चीज हम

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01:51:13,040 --> 01:51:17,120
शिव शिवा शिवा शिव आप जपना शुरू करिए। पीछे पढ़ना पड़ेगा। शिव जी

1629
01:51:17,120 --> 01:51:21,120
के पीछे पड़ना हां तभी मानते हैं पीछे पड़ जाना मैंने अभी बोला

1630
01:51:21,120 --> 01:51:25,200
ना मैं पीछे पड़ गई और कोई पूछ रहे हैं बार बार क शायद

1631
01:51:25,200 --> 01:51:29,520
लाइव के अंत में आपको बार दिखाई दे और एक पूछ रहे हैं कि सच्चिदानंद में जाने

1632
01:51:29,520 --> 01:51:33,520
के बाद दोबारा जन्म नहीं होता तो हम पहले से ही तो सच्चिदानंद में थे तो

1633
01:51:33,520 --> 01:51:37,520
जन्म क्यों हुआ जन्म लेने वाला ब्रह्म है और आप

1634
01:51:37,520 --> 01:51:42,000
जीव है दूसरी बात ये है कि ब्रह्म है ये आपने माना कैसे

1635
01:51:42,000 --> 01:51:46,160
अगर आपने मान लिया तो अब आप ये जो आप बात कह रहे हैं उसके आधार पर ब्रह्म

1636
01:51:46,160 --> 01:51:50,320
का खंडन नहीं कर सकते और अगर आप ये किसी दिन आ जाना चर्चा

1637
01:51:50,320 --> 01:51:54,320
में आ जाना तो आपको अच्छे से बता देंगे। ठीक है ना? सच्चिदानंद है ये कैसे सिद्ध होता

1638
01:51:54,320 --> 01:51:58,320
है? पहले ये बताओ सच्चिदानंद है क्या? जब आप सच्चिदानंद को सिद्ध कर

1639
01:51:58,320 --> 01:52:02,400
दोगे तो उसका खंडन नहीं कर सकते। खंडन कर रहे हो तो सिद्ध नहीं कर सकते। ठीक है?

1640
01:52:02,400 --> 01:52:06,640
तो ये चीजें हमारे पास नहीं चलेंग। वो उनको आप बरगला दो जिन्होंने

1641
01:52:06,640 --> 01:52:07,140
ग्रंथों

1642
01:52:06,960 --> 01:52:12,320
को ना देखा हो। और प्रांजल जी आप अगर

1643
01:52:12,320 --> 01:52:16,400
क्या कहते हैं? प्रांजल जी आप अगर आवाहन कॉल ऑफ धर्मा के पेज

1644
01:52:16,400 --> 01:52:20,480
पे जाएंगे वहां पे आपको उनके डिस्क्रिप्शन में क्यूआर कोड एक्सेस कोड सब

1645
01:52:20,480 --> 01:52:24,720
मिल जाएगा। प्लीज मेक योर डोनेशन टुवर्ड्स आन टुडे एंड

1646
01:52:24,720 --> 01:52:28,720
आई वुड लव फॉर ऑल और एक बहुत जरूरी घोषणा याद आ गया

1647
01:52:28,720 --> 01:52:32,880
मुझे परसों के दिन गोपाष्टमी है। आप सब लोग

1648
01:52:32,880 --> 01:52:37,040
जो भी हमारे फॉलोअ है जो भी देख रहे हैं इसको गौ माता का पूजन

1649
01:52:37,040 --> 01:52:41,120
अवश्य करें और अपने छोटे छोटे से वीडियो क्लिप्स हमें शेयर करें। शेयर करने के लिए

1650
01:52:41,120 --> 01:52:45,280
हमारा नंबर आपके पास है 740830 18869 अभी लाइव

1651
01:52:45,280 --> 01:52:49,280
के अंत में भी पूरा एक पेज आपको दिखाई देगा तो आप जरूर से

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01:52:49,280 --> 01:52:53,440
जरूर गोपाष्टमी के दिन गौ माता के पूजन करें और वो क्लिप्स हमारे

1653
01:52:53,440 --> 01:52:57,440
साथ शेयर करें जिससे कि हम यहां पर वो क्लिप्स आपकी शेयर करके और अन्यों

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01:52:57,440 --> 01:53:01,440
को भी प्रेरित करें गौ माता के लिए दीदी भैया

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01:53:01,440 --> 01:53:05,600
मेरा भी अपने आप को नष्ट नहीं वो व्यवहार

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01:53:05,600 --> 01:53:09,600
में अपने आप को नष्ट कई बार कर चुके हैं अपने शरीर को नष्ट करना उनके लिए कोई

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01:53:09,600 --> 01:53:14,000
बहुत बड़ी बात नहीं है। तो ठीक है। जी फिर

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01:53:14,000 --> 01:53:18,160
जी चलिए अब आज के हमारे इस अमेजिंग

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01:53:18,160 --> 01:53:22,240
सेशन को हम क्लोज करेंगे और आशा करते हैं कि आप लोगों के साथ

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01:53:22,240 --> 01:53:26,480
टाइम पर और जल्दी हम दोबारा मिले और यह

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01:53:26,480 --> 01:53:30,480
दोबारा कर पाए। धन्यवाद आप सभी का हमारा साथ देने के

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01:53:30,480 --> 01:53:34,960
लिए और अभी तक हमारे साथ बने रहने के लिए। हर हर महादेव। महादेव

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01:53:34,960 --> 01:53:38,960
की कृपा आप सब पर बनी रहे। जय श्री राम।

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01:53:38,960 --> 01:53:42,960
जय श्री राम जय गौ माता
