1
00:00:03,040 --> 00:00:08,160
जय श्री राम सभी को आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:08,160 --> 00:00:14,160
और मुख्य विषय पर आने से पहले मैं आपको एक सूचना दे दूं

3
00:00:14,800 --> 00:00:18,800
हां तारेंद्र जी आप जुड़िए लिंक भेजा हुआ है आपको ब्लॉक बता

4
00:00:18,800 --> 00:00:22,400
रहा है ब्लॉक है आप

5
00:00:22,400 --> 00:00:27,360
अनब्लॉक कीजिए क्या कहा पर ब्लॉक बता रहा है

6
00:00:27,360 --> 00:00:31,520
जब उसे लिंक को टच किया हां तो

7
00:00:31,520 --> 00:00:37,520
फिर थोड़ा घूम और ब्लॉकेड बता रहा है। यू आर ब्लॉक यू आर ब्लॉकेड

8
00:00:38,080 --> 00:00:42,560
अच्छा तो देखिए भाई ऑपरेटर

9
00:00:42,560 --> 00:00:48,560
जी उनको ब्लॉक बता रहा है वो अब आप किसी दूसरी आईडी से जुड़ जाइए।

10
00:00:49,600 --> 00:00:53,360
किसी दूसरी आईडी से जुड़ जाइए।

11
00:00:53,360 --> 00:00:57,600
हेलो

12
00:00:57,600 --> 00:01:01,600
तो मुख्य विषय पर आने से पहले आपको एक सूचना दे दूं

13
00:01:01,600 --> 00:01:05,680
कि जो हम लोगों ने जो उस दिन विरोध प्रदर्शन

14
00:01:05,680 --> 00:01:09,840
किया था उसमें कुछ अपडेट्स हैं। विरोध

15
00:01:09,840 --> 00:01:13,600
प्रदर्शन हमने एक समोसे वाले के

16
00:01:13,600 --> 00:01:17,680
समोसे वाले का विरोध किया था। उसका नाम है संजय गुप्ता। वह

17
00:01:17,680 --> 00:01:22,080
और उसका भाई दोनों ही लोग वहां पर समोसे बेचते हैं। एक सुबह एक शाम

18
00:01:22,080 --> 00:01:28,000
और उसी से उनका आजीविकोपार्जन उनका घर घर

19
00:01:28,000 --> 00:01:32,000
और जब हमने विरोध किया तो वहां पर कई लोगों

20
00:01:32,000 --> 00:01:36,800
ने आपत्ति जताई हां तारेंद्र जी बताइए

21
00:01:36,800 --> 00:01:40,960
वो अभी ब्लॉकेट ही बता रहा है अगर आगे मांगेगा दूसरी आईडी तो मैं दूसरी खोल

22
00:01:40,960 --> 00:01:46,400
लूंगा लेकिन वहां तक जाने का मिल ही नहीं रहा ना

23
00:01:46,400 --> 00:01:51,600
मैं आपका नंबर दे रहा हूं अपने ऑपरेटर जी को वह आपसे बात करेंगे ठीक है

24
00:01:51,600 --> 00:01:57,600
ठीक है।

25
00:02:20,160 --> 00:02:24,320
तो शुभ सूचना यह है कि

26
00:02:24,320 --> 00:02:28,480
जिस समोसे वाले का हमने लखनऊ में पुतला दहन

27
00:02:28,480 --> 00:02:32,480
किया था रामपाल का जिस दिन हमने रामपाल का पुतला दहन

28
00:02:32,480 --> 00:02:36,640
किया था। उसी दिन हमने रामपाल के एक समर्थक वो जो समोसे

29
00:02:36,640 --> 00:02:42,240
बेचता है उसका नाम संजय गुप्ता है। उसका भी विरोध किया था और

30
00:02:42,240 --> 00:02:43,040
जो सामान्य

31
00:02:43,040 --> 00:02:47,200
हिंदू वर्ग है उससे अपील की थी कि आप जो

32
00:02:47,200 --> 00:02:51,440
है इस समोसे वाले का बहिष्कार करिए। सामाजिक बहिष्कार और

33
00:02:51,440 --> 00:02:55,520
लोगों ने किया। सामाजिक बहिष्कार किया।

34
00:02:55,520 --> 00:02:59,520
लोग आपत्ति जताने लगे। कई लोग वापस लौटने

35
00:02:59,520 --> 00:03:03,840
लगे हैं। पहले तो दो दिन उसकी दुकान ही नहीं खुली थी।

36
00:03:03,840 --> 00:03:08,160
उसने ठेल नहीं लगाई थी दो दिन तक और वह शायद अपने

37
00:03:08,160 --> 00:03:12,400
बाबा जी के जो अड्डे हैं वहां पर चक्कर काट रहे थे कि हमारी मदद करिए। आपने

38
00:03:12,400 --> 00:03:16,400
एक रिकॉर्डिंग भी सुनी होगी हमारे चैनल पर जिसमें कि रामपाल

39
00:03:16,400 --> 00:03:20,560
का एक भगत और रामपाल के जो स्टार प्रचारक हैं उनको फोन लगा

40
00:03:20,560 --> 00:03:24,720
के कह रहा है कि भाई इसको इन बातों का क्या जवाब दें? वो हमारा जीना दुश्वार किए हुए

41
00:03:24,720 --> 00:03:30,720
हैं। तो अह

42
00:03:31,840 --> 00:03:36,160
जब यह सब चीज़ें हुई तो वह व्यक्ति जो है परेशान हुआ

43
00:03:36,160 --> 00:03:38,400
और

44
00:03:38,400 --> 00:03:43,040
वैसे वहां वहां से हमारा जो बोर्ड है वो किसी ने हटाया

45
00:03:43,040 --> 00:03:47,040
जाहिर सी बात है उसी ने हटाया है। पर वो यह बात स्वीकार नहीं करेगा

46
00:03:47,040 --> 00:03:51,440
कि मैंने ही हटाया है। ठीक है? हटाने के बाद भी उसको जब

47
00:03:51,440 --> 00:03:55,920
संतुष्टि नहीं पहुंची क्योंकि उसका जो बिजनेस वहां पर हो रहा था

48
00:03:55,920 --> 00:04:00,000
भीड़ लगती थी समोसे के लिए वह कम होने लगी गिरावट होने लगी वो पहुंचा

49
00:04:00,000 --> 00:04:04,320
थक हार करके अपनी नजदीकी पुलिस चौकी और

50
00:04:04,320 --> 00:04:08,400
उसका यह कहना है कि वो अपनी दुकान पे जो फोटो

51
00:04:08,400 --> 00:04:12,480
लगा के रखता था बाबा की जेल कट्टू बाबा की वो फोटो

52
00:04:12,480 --> 00:04:16,640
उसने हटा दी है हाथ जोड़ के माफी मांग रहा है कि

53
00:04:16,640 --> 00:04:20,640
भाई अब मैं जो है आगे से इस बात इनका इनका प्रचार नहीं करूंगा। मुझे क्षमा

54
00:04:20,640 --> 00:04:24,800
कर दीजिए। तो हमने समय लिया है। हमने समय

55
00:04:24,800 --> 00:04:28,880
दिया है कि हम भाई हम तो दोबारा विरोध करेंगे और इस

56
00:04:28,880 --> 00:04:32,960
बार जब ठेल लगी होगी और लोग समोसे खा रहे होंगे और तब

57
00:04:32,960 --> 00:04:37,600
वहां पर जाकर के पर्चे बांटेंगे जिसमें तुम्हारी जानकारी लिखी हुई होगी।

58
00:04:37,600 --> 00:04:41,920
हमने यह कहा है तो उसको समय दिया गया है

59
00:04:41,920 --> 00:04:45,920
और जो पुलिस विभाग है उसने भी आश्वासन दिया है कि वह बातचीत

60
00:04:45,920 --> 00:04:48,080
कर रहे हैं।

61
00:04:48,080 --> 00:04:52,080
हमने ये कहा कि आप प्रचार करो या ना करो। अब गाड़ी आगे

62
00:04:52,080 --> 00:04:56,080
आ चुकी है। प्रचार बंद करना था तो पहले करना था। अब बात आगे बढ़

63
00:04:56,080 --> 00:04:59,600
चुकी है। अब तो

64
00:04:59,600 --> 00:05:03,840
वो घातक मूवी का डायलॉग था ना एक बढ़िया। अब

65
00:05:03,840 --> 00:05:08,000
तो अब तो जिसके गुर्दा होगा वही जि

66
00:05:08,000 --> 00:05:12,000
वही जिएगा। है ना? जिसके पास

67
00:05:12,000 --> 00:05:16,080
गुर्दा है उसी को जीने का हक है। जैसे घातक का एक डायलॉग था।

68
00:05:16,080 --> 00:05:20,320
तो वो एक सिचुएशन अब पार हो चुकी है कि अब हम करें

69
00:05:20,320 --> 00:05:24,480
या ना करें। तो अब क्या है कि हमारे

70
00:05:24,480 --> 00:05:28,640
साथ हमारे हिंदू समाज के साथ उसी का व्यवहार होगा जो हिंदू

71
00:05:28,640 --> 00:05:33,440
समाज के प्रति कम से कम अपमानजनक बातें नहीं करता है।

72
00:05:33,440 --> 00:05:37,440
अपमानजनक चीजों से जुड़ा हुआ नहीं। आपकी श्रद्धा अपनी किसी में

73
00:05:37,440 --> 00:05:41,520
भी है, जो भी है, वह आप मान रहे हो, ठीक है। मगर आप ऐसी सामग्री से यदि

74
00:05:41,520 --> 00:05:46,080
जुड़े हुए हो तो आप हमारे विरोधी हो। जो हिंदू

75
00:05:46,080 --> 00:05:50,320
प्रतीक चिन्हों का, हिंदू देवी देवताओं का जितने भी हिंदू

76
00:05:50,320 --> 00:05:54,320
के सम्माननीय घटक हैं उन सब का यदि तिरस्कार हो रहा है,

77
00:05:54,320 --> 00:05:58,320
अपमान हो रहा है। ठीक है? ऐसी चीजों से यदि आप

78
00:05:58,320 --> 00:06:02,320
जुड़े हुए तो आप हमारे विरोधी हो। हम अपने समाज का आह्वान करेंगे कि आपका बहिष्कार

79
00:06:02,320 --> 00:06:03,120
किया जाए सामाजिक

80
00:06:03,120 --> 00:06:07,440
आर्थिक हर तरह से और वह अब होगा मैंने कहा

81
00:06:07,440 --> 00:06:11,840
तो अब कुछ छह सात दिनों में इसके आगे की चीजें होंगी

82
00:06:11,840 --> 00:06:16,320
अगर कुछ उधर से ऐसा कुछ आता है

83
00:06:16,320 --> 00:06:20,640
वापसी का मार्ग प्रशस्त होता है उसका सनातन में आने का तो

84
00:06:20,640 --> 00:06:24,880
ठीक है और नहीं होता है क्योंकि बाबा जी रक्षा करेंगे ना

85
00:06:24,880 --> 00:06:28,880
होता है तो हम पर्चे बांटेंगे और उसके बाबा जी उड़ के बचा लेंगे उसका सब

86
00:06:28,880 --> 00:06:33,120
धंधा पानी सब कुछ तो यह अपडेट्स हैं और

87
00:06:33,120 --> 00:06:37,280
कुछ टेक्निकल मुझे लग रहा है दिक्कत आ रही है जो आज आने

88
00:06:37,280 --> 00:06:41,360
वाले हैं तारेंद्र जी उनको जुड़ने में मैं एक बार देख लेता

89
00:06:41,360 --> 00:06:47,360
हूं

90
00:09:37,440 --> 00:09:41,760
तो कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। ज्यादातर जो

91
00:09:41,760 --> 00:09:46,560
जैसा कि गरिमा गीता की में लिखा हुआ है गरिमा

92
00:09:46,560 --> 00:09:50,880
गीता की में लिखा है कि जो रामपाल को मानने

93
00:09:50,880 --> 00:09:55,360
वाले लोग लोग होते हैं वो अनपढ़ होते हैं

94
00:09:55,360 --> 00:09:59,680
ज्यादातर तो जो आने

95
00:09:59,680 --> 00:10:03,840
वाले फॉलोअ हैं जो रामपाल के वो जो

96
00:10:03,840 --> 00:10:08,160
है उनको जुड़ने में दिक्कत आ रही है। दूसरी आई

97
00:10:08,160 --> 00:10:12,480
भाई एक आईडी शायद उस दिन वह कुछ ऐसा कर रहे होंगे जिसकी

98
00:10:12,480 --> 00:10:16,880
वजह से उन्हें ब्लॉक किया गया होगा तो आज

99
00:10:16,880 --> 00:10:22,880
जो है

100
00:10:25,440 --> 00:10:29,440
अब वो दूसरी आईडी से जुड़ने में उनको परेशानी आ रही तो उसी को लेकर के कुछ देर लग

101
00:10:29,440 --> 00:10:35,440
रही है। आ जाते हैं तो हम बात शुरू करते हैं तब तक

102
00:10:36,320 --> 00:10:40,400
अगर पहाड़ी जी या शास्त्रवाद जी उपलब्ध है तो वह

103
00:10:40,400 --> 00:10:44,720
आ सकते हैं।

104
00:10:44,720 --> 00:10:48,720
कुछ चर्चा हो जाए कुछ चीजों की। आप लोग कुछ क्वेश्चन पूछना

105
00:10:48,720 --> 00:10:54,720
चाहते हैं तो आप पूछ सकते हैं।

106
00:10:57,040 --> 00:11:01,040
रामपाल के जो Instagram पर फॉलोअ हैं वह 10 लाख पर थे

107
00:11:01,040 --> 00:11:04,800
और अब

108
00:11:04,800 --> 00:11:08,320
जय जय श्री राम।

109
00:11:08,320 --> 00:11:11,680
ये संख्याओं पर मत जाइए। जुगनू

110
00:11:11,680 --> 00:11:16,160
और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटमाते

111
00:11:16,160 --> 00:11:17,360
हुए दिए की ओर आकर्षित

112
00:11:17,360 --> 00:11:23,360
होते हैं।

113
00:11:35,280 --> 00:11:39,280
एक ही परम तत्व स्वयं को जीव जगत और जगदीश्वर

114
00:11:39,280 --> 00:11:43,200
के रूप में प्रकट करता है।

115
00:11:43,200 --> 00:11:47,440
उसके बाद ब्रह्मा रूप से वो सृष्टि बनाते हैं। विष्णु

116
00:11:47,440 --> 00:11:51,520
रूप से पालन करते हैं और शिव रूप से सृष्टि का

117
00:11:51,520 --> 00:11:56,640
लय कर लेते हैं।

118
00:11:56,640 --> 00:12:01,120
सृष्टि की उत्पत्ति एक बार नहीं हुई है। कई बार हुई है। तो कल्प भेद से

119
00:12:01,120 --> 00:12:05,200
किसी में परम तत्व के परम तत्व को शिव

120
00:12:05,200 --> 00:12:09,200
नाम परम तत्व के शिव नाम की परम तत्व

121
00:12:09,200 --> 00:12:13,200
के शिव नाम को प्रधानता दी जाती है। किसी कल्प

122
00:12:13,200 --> 00:12:17,280
में विष्णु नाम को और फिर उसी को प्रधान

123
00:12:17,280 --> 00:12:23,280
मानते हुए अन्य को उनसे प्रकट दिखाते हुए उसमें महिमा का गान होता है।

124
00:12:24,240 --> 00:12:28,320
हां जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम।

125
00:12:28,320 --> 00:12:32,720
जय श्री राम भैया जय श्री राम

126
00:12:32,720 --> 00:12:36,800
जी आज आज तो हमारा विचार में है कि आज बहुत अच्छा डिस्कशन

127
00:12:36,800 --> 00:12:40,960
होगा जो भी आएंगे लेकिन अब तक तो वो यहां नहीं

128
00:12:40,960 --> 00:12:44,960
रहे एक एक शुभ सूचना यह है कि

129
00:12:44,960 --> 00:12:49,360
जो व्यक्ति पहले रामपाल का प्रबल प्रचारक था रामपाल

130
00:12:49,360 --> 00:12:53,840
की फोटो चिपका के रखता था अपनी समोसे की ठेल पे उसने

131
00:12:53,840 --> 00:12:59,360
अपने समोसे की ठेल से अपने बाबा जी की फोटो फोटो हटा दी है।

132
00:12:59,360 --> 00:13:03,680
खुद हटाई है। क्यों हटाई है? क्योंकि उसको धंधा

133
00:13:03,680 --> 00:13:07,840
करने में क्योंकि उसको धंधा करने में दिक्कत आ रही थी। इसलिए उसने

134
00:13:07,840 --> 00:13:11,840
अपने बाबा जी की फोटो हटा दी है। अब वो छुप करके अपने बाबा जी की भक्ति

135
00:13:11,840 --> 00:13:16,160
करेगा। मगर बाबा जी का नाम प्रचारक नहीं बनेगा। नाम

136
00:13:16,160 --> 00:13:20,480
बता करके लोगों को प्रचारक नहीं बनेगा। यह उसने खुद ने कहा

137
00:13:20,480 --> 00:13:25,200
है कि अब मैं कभी प्रचार नहीं करूंगा। फोटो भी हटा दी ठेल से

138
00:13:25,200 --> 00:13:31,200
और बाबा जी रक्षा करने के लिए नहीं आए। जी

139
00:13:32,000 --> 00:13:36,080
जी भैया ये तो बहुत बढ़िया बात है कि

140
00:13:36,080 --> 00:13:40,560
आखिर इस प्रकार के वो कर रहा है कि

141
00:13:40,560 --> 00:13:46,560
इधर से करने से आपने कुछ आपने कुछ हेडफोन वगैरह लगाया है क्या?

142
00:13:47,120 --> 00:13:51,120
नहीं नहीं बिल्कुल नहीं। कुछ आवाज कट रही है क्या मेरी?

143
00:13:51,120 --> 00:13:55,280
बहुत डिस्टर्ब आ रही है। आ गए आ गए तारण जी आ गए

144
00:13:55,280 --> 00:14:01,280
शास्त्रवाद जी चर्चा के बाद आपको लेते हैं। ठीक है।

145
00:14:06,270 --> 00:14:12,270
[गला साफ़ करने की आवाज़]

146
00:14:17,840 --> 00:14:23,840
आवाज नहीं आ रही है आपकी तारेंद्र जी

147
00:14:27,360 --> 00:14:33,360
तारेंद्र जी जय श्री राम

148
00:14:41,440 --> 00:14:47,440
दोबारा जुड़िए एक बार तारेंद्र जी आपकी आवाज नहीं आ रही है

149
00:14:47,840 --> 00:14:52,000
अब आ रही है हां तो हां अब आई आपकी

150
00:14:52,000 --> 00:14:56,080
आवाज तो मैं शुरू करता

151
00:14:56,080 --> 00:15:00,080
हूं परमात्मा की दया से आप

152
00:15:00,080 --> 00:15:04,160
उस दिन एक भगत को कह रहे थे कि मैं गायत्री मंत्र का जाप करता

153
00:15:04,160 --> 00:15:08,160
हूं बोले सेना तो

154
00:15:08,160 --> 00:15:12,240
कृप गायत्री मंत्र का अर्थ बनवाएंगे हम लोग हम लोग किस विषय

155
00:15:12,240 --> 00:15:16,160
में बात करने बैठे हैं ये बताएंगे

156
00:15:16,160 --> 00:15:20,720
शास्त्र पर शास्त्र किसे कहते हैं देखिए

157
00:15:20,720 --> 00:15:24,800
आप आपने कहा है मत पड़ो कोई चक्कर में

158
00:15:24,800 --> 00:15:29,360
नहीं है कोई टक्कर में तो आपके टक्कर में कोई नहीं है मतलब आप सर्वज्ञानी

159
00:15:29,360 --> 00:15:33,840
है हम तो अनपढ़ गवासी है हम तो गुरु के शिष्य है ना

160
00:15:33,840 --> 00:15:37,840
ये आप हम अरे हम अरे भाई तुम बोलते ही रहोगे कि

161
00:15:37,840 --> 00:15:40,880
हम मुझे भी बोलने दोगे

162
00:15:40,880 --> 00:15:42,560
पहले मुझे बोल लेने दो उसके

163
00:15:42,560 --> 00:15:46,640
बाद बोलने दो तुमने तुमने तीन चार बातें बोली उसमें से किसी एक आध बात में हमें

164
00:15:46,640 --> 00:15:50,640
आपत्ति है तो हमें तुरंत बोलना पड़ेगा

165
00:15:50,640 --> 00:15:54,960
सुनो तो जैसे तुम गुरु के शिष्य हो

166
00:15:54,960 --> 00:15:59,040
नहीं अवसर मैं लूंगा अपने आप सुनिए

167
00:15:59,040 --> 00:16:03,360
जैसे तुम किसी गुरु के शिष्य हो वैसे ही मैं किसी गुरु का शिष्य

168
00:16:03,360 --> 00:16:07,600
हूं। ठीक है? पहली बात और मत पड़ो चक्कर

169
00:16:07,600 --> 00:16:11,920
में कोई नहीं है। टक्कर में का मतलब है कि जो भी व्यक्ति परंपरा

170
00:16:11,920 --> 00:16:16,000
प्राप्त सनातन सिद्धांतों के विरुद्ध खड़ा हुआ है। यह उनको उद्घोष

171
00:16:16,000 --> 00:16:20,160
है कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। अब आपने तीन दो

172
00:16:20,160 --> 00:16:25,120
तीन बातें कही है। एक तो आपकी चर्चा शास्त्र पर है।

173
00:16:25,120 --> 00:16:29,200
एक तो आपकी चर्चा शास्त्र पर है। दूसरी कि आप अपने

174
00:16:29,200 --> 00:16:33,840
गुरु के शिष्य हो। तो आप मुझे पहले देखो ऐसा है

175
00:16:33,840 --> 00:16:39,040
कि यहां पर आकर के वही बात बोलो जिसको सिद्ध कर पाओ।

176
00:16:39,040 --> 00:16:43,680
एक भी पॉइंट ऐसा बोलोगे जिसको सिद्ध नहीं कर पाओगे मैं उसी को खींचूंगा।

177
00:16:43,680 --> 00:16:48,560
उसी को पकड़ लूंगा। अब आपने कहा है कि मैं गुरु का शिष्य हूं।

178
00:16:48,560 --> 00:16:54,560
है ना? हम तो गुरु का अर्थ क्या होता है?

179
00:16:54,880 --> 00:16:58,960
जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

180
00:16:58,960 --> 00:17:03,040
जो अंधकार से प्रकाश हो वही गुरु कहलाता

181
00:17:03,040 --> 00:17:07,280
है। जो सत्य का मार्गदर्श करे जो मोक्ष दे वही गुरु कहलाता

182
00:17:07,280 --> 00:17:12,240
है। जो मोक्ष मार्ग बतलाए वही गुरु कहलाता है।

183
00:17:12,240 --> 00:17:16,320
हो गया। हां। अच्छा

184
00:17:16,320 --> 00:17:20,560
इधर सामने रहिए। थोड़ा अपना फेस सामने ले रखिए। हां। देखिए

185
00:17:20,560 --> 00:17:24,880
इधर पानी आने लगा। इधर पानी आने लगा। तो मैं स्थान

186
00:17:24,880 --> 00:17:29,360
भी चेंज किया हूं। हवा भी चल रही है। फिर ये देख रहे हैं। आप भी देख रहे हैं। मैं भी देख रहा हूं।

187
00:17:29,360 --> 00:17:33,440
तो भैया मैं इसमें क्या कर सकता हूं? यह बताइए। आप स्टैंड ले खरीदिए।

188
00:17:33,440 --> 00:17:37,440
एक 500 एक स्टैंड खरीदिए उसमें लगाइए उसको मोबाइल को अगर करनी है

189
00:17:37,440 --> 00:17:41,920
चर्चा तो। स्टैंड है वो रखा हुआ है लेकिन कोई काम का नहीं।

190
00:17:41,920 --> 00:17:46,480
तो मैं आप हिलिए मत बार-बार।

191
00:17:46,480 --> 00:17:50,480
हम हां। मैं हाथ में रख के चलना। है

192
00:17:50,480 --> 00:17:54,480
ना? आपने कहा है कि गुरु का

193
00:17:54,480 --> 00:17:59,440
अर्थ है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

194
00:17:59,440 --> 00:18:03,520
इसका मतलब है कि क्या आप मान लीजिए आप आपके

195
00:18:03,520 --> 00:18:07,680
घर में बत्ती नहीं आ रही है और ये अंधकार नहीं

196
00:18:07,680 --> 00:18:11,680
हां ये अंधकार रूपी अंधकार अज्ञान रूपी अंधकार से

197
00:18:11,680 --> 00:18:16,240
जो अज्ञान रूपी जो ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाए

198
00:18:16,240 --> 00:18:21,520
ज्ञान रूपी यानी कि कुल मिलाकर के जो आपको तत्व का ज्ञान दे दे

199
00:18:21,520 --> 00:18:26,240
हां तत्व किसे कहते हैं

200
00:18:26,240 --> 00:18:30,240
जो शास्त्रों का मर्म है भेद है। वही तत्व

201
00:18:30,240 --> 00:18:34,880
है। कहां लिखा है?

202
00:18:34,880 --> 00:18:39,040
यह लिखा नहीं है। इसके लिए किसी तत्व ज्ञान बताने

203
00:18:39,040 --> 00:18:43,280
के लिए किसी को आना पड़ता है।

204
00:18:43,280 --> 00:18:47,520
ये लिखा है। तत्वों के विज्ञानों

205
00:18:47,520 --> 00:18:51,600
में भी तत्व है। पांच तत्व है। तो वो तत्व ले जाएंगे क्या? ऐसा कोई नहीं

206
00:18:51,600 --> 00:18:55,680
है जो सूक्ष्म सूक्ष्म बात बतला दे वही तत्व ज्ञान है हर

207
00:18:55,680 --> 00:19:00,240
चीज के बारीकी में कोई ना कुछ पार के पीछे होता है जो उसको बता दे वही तत्व ज्ञान है

208
00:19:00,240 --> 00:19:04,320
सूक्ष्म से सूक्ष्म बात वाह वाह वाह बहुत बढ़िया सूक्ष्म से सूक्ष्म बात बता

209
00:19:04,320 --> 00:19:08,400
दे वो तत्व ज्ञान है तो रामपाल ने आपको क्या सूक्ष्म ज्ञान

210
00:19:08,400 --> 00:19:12,480
दिया है सूक्ष्म ज्ञान गीता का दिया

211
00:19:12,480 --> 00:19:16,560
है वेदों का दिया है मंत्रों का दिया है साधना का दिया है वो क्या वो

212
00:19:16,560 --> 00:19:21,040
क्या दिया है बताया क्या है जो सूक्ष्म है

213
00:19:21,040 --> 00:19:25,440
उसका सूक्ष्म ज्ञान यह है कि जो गीता में वर्णित विधि गीता में लिखी नहीं है।

214
00:19:25,440 --> 00:19:29,760
लेकिन गीता में जो कहा गया है कि उस तत्व ज्ञान को तू तत्वदर्शी

215
00:19:29,760 --> 00:19:33,840
संतों के पास जाकर समझ। तो वो जो तत्व ज्ञान है सूक्ष्म ज्ञान

216
00:19:33,840 --> 00:19:37,840
है वही संत रामपाल जी महाराज ने हमें दिया है। वो क्या दिया है?

217
00:19:37,840 --> 00:19:41,840
वो बताओ। वो वो जो बताया कि वो ऐसा है वैसा है वो नहीं। यहां से ले

218
00:19:41,840 --> 00:19:45,920
वहां से ले। वो दिया क्या? जैसे जैसे मैंने

219
00:19:45,920 --> 00:19:50,160
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट जैसे मैंने कहा कि

220
00:19:50,160 --> 00:19:54,240
भाई आप जो है आपको जो है

221
00:19:54,240 --> 00:19:58,240
ये जो चीज है जिस जो आपके काम की है वो Honda

222
00:19:58,240 --> 00:20:02,640
के शोरूम पर मिलेगी और वहां पर वो तारेंद्र तारेंद्र

223
00:20:02,640 --> 00:20:06,800
करके कोई व्यक्ति होगा वो देगा ये सब तो मैंने बता दिया पर वो चीज

224
00:20:06,800 --> 00:20:10,960
क्या है एग्जैक्ट मोटरसाइकिल वो नहीं बता रहे हो आप वो

225
00:20:10,960 --> 00:20:15,440
बताओ वो क्या दिया उन्होंने बताया है वेदों और गीता के अनुसार

226
00:20:15,440 --> 00:20:20,720
एक पूर्ण परमादिक भक्ति करना चाहिए। अन्य अंत देव अन्य देवताओं

227
00:20:20,720 --> 00:20:24,960
का सम्मान करना चाहिए। लेकिन भक्ति से एक पूर्ण परमादिक करना चाहिए। यही गीता

228
00:20:24,960 --> 00:20:29,040
का सार है। सूक्ष्म है। ये सूक्ष्म

229
00:20:29,040 --> 00:20:33,440
बात है। सूक्ष्मतम बात है। ये और इससे सूक्ष्म अगर मैंने आपको बता दिया।

230
00:20:33,440 --> 00:20:39,040
इससे सूक्ष्म इससे सूक्ष्म अगर मैंने आपको बता दिया तो

231
00:20:39,040 --> 00:20:43,040
अगर आपने कहा आपने आपने कहा [चीखने की आवाज़] आपकी बात चालू हो

232
00:20:43,040 --> 00:20:47,120
रही कि परमेश्वर परमेश्वर की सही भक्ति जिसने

233
00:20:47,120 --> 00:20:51,280
बता दी और अन्य देवताओं का सम्मान मगर भक्ति केवल परमेश्वर की

234
00:20:51,280 --> 00:20:55,360
ये आपने कहा ये आपका सूक्ष्म ज्ञान है जो रूप

235
00:20:55,360 --> 00:20:59,440
में एक परमात्मा की भक्ति करना चाहिए ये सूक्ष्म ज्ञान

236
00:20:59,440 --> 00:21:04,960
है ये सूक्ष्मतम ज्ञान है एक इसके अलावा

237
00:21:04,960 --> 00:21:09,200
इसके अलावा और इसके अलावा और वो सूक्ष्म ज्ञान है जो पुराणों

238
00:21:09,200 --> 00:21:13,680
में तो लिखा है लेकिन कथावाचक पुराणवाचक उसे समझ नहीं सके

239
00:21:13,680 --> 00:21:18,080
उसके पीछे का है मैंने क्या कहा है आपको सूक्ष्म

240
00:21:18,080 --> 00:21:22,960
ज्ञान क्या मिला है वो बता दीजिए सूक्ष्मतम ज्ञान

241
00:21:22,960 --> 00:21:27,120
वही तो बता रहा हूं ना कि जो वेद शास्त्रों में लिखा है जिसे अन्य अन्य

242
00:21:27,120 --> 00:21:31,360
आचार्य नहीं समझ सके मैं कथावाचक [हंसी]

243
00:21:31,360 --> 00:21:35,760
समझ सके ये मत बताइए कि कौन क्या नहीं कर पाया। आपका सूक्ष्म

244
00:21:35,760 --> 00:21:39,920
ज्ञान क्या है वो बता दीजिए। अब ठीक है। यहां पर देखिए

245
00:21:39,920 --> 00:21:44,000
उन्होंने जो भी बताया उसके अनुसार हम भक्ति कर रहे हैं। है ना? और ये

246
00:21:44,000 --> 00:21:48,000
मैंने कहा बताया। मैंने कहा क्या बताया? मैंने

247
00:21:48,000 --> 00:21:52,720
कहा क्या बताया? हमें जो बताया कर रहे हैं।

248
00:21:52,720 --> 00:21:54,320
नहीं नहीं वो सूक्ष्म

249
00:21:54,320 --> 00:21:59,040
वो वो सूक्ष्म ज्ञान क्या है? जिसके कारण वो आपके गुरु है।

250
00:21:59,040 --> 00:22:03,120
उसके लिए आप गुरु जी का सत्संग सुन लेना आपको मिल जाएगा। अब रही बात इसकी मैं आपसे

251
00:22:03,120 --> 00:22:07,520
पूछता हूं। नहीं

252
00:22:07,520 --> 00:22:11,680
आप मुझसे अभी अभी आपने अभी आप रामपाल को अपना गुरु सिद्ध

253
00:22:11,680 --> 00:22:15,680
करिए और गुरु सिद्ध करने के लिए आप अपने सूक्ष्म सूक्ष्म

254
00:22:15,680 --> 00:22:19,680
ज्ञान को यहां प्रस्तुत करिए। बताइए क्या है

255
00:22:19,680 --> 00:22:23,760
सूक्ष्म ज्ञान? यानी कि एक

256
00:22:23,760 --> 00:22:27,920
मिनट एक मिनट एक मिनट। यानी कि जो उन्होंने आपको

257
00:22:27,920 --> 00:22:32,000
एक परमेश्वर की भक्ति करना सिखाया है वह एक परमेश्वर की

258
00:22:32,000 --> 00:22:35,520
भक्ति करना और

259
00:22:35,520 --> 00:22:39,600
भक्ति कैसे की है ये कैसे की जाएगी ये और किसकी की

260
00:22:39,600 --> 00:22:43,600
जाएगी ये ये सिखा है ये सूक्ष्म ज्ञान है हम

261
00:22:43,600 --> 00:22:47,680
और वो सब सूक्ष्म वेद में लिखा है अरे भाई मैंने कहा ये

262
00:22:47,680 --> 00:22:51,680
सूक्ष्म ज्ञान है क्या हां है

263
00:22:51,680 --> 00:22:55,760
हां तो अगर मैंने ने और इससे पीछे का

264
00:22:55,760 --> 00:23:00,080
ज्ञान दिया तो आप मैं आपका गुरु हो जाऊंगा। वो

265
00:23:00,080 --> 00:23:04,320
ज्ञान आप अपने पास रखे रहिए। हमें उसकी जरूरत नहीं है। क्योंकि आपका

266
00:23:04,320 --> 00:23:08,480
ज्ञान सूक्ष्म क्योंकि मैं ये सिद्ध करूंगा कि आपका ज्ञान सूक्ष्म नहीं है। उससे

267
00:23:08,480 --> 00:23:09,360
सूक्ष्म बातें मैं

268
00:23:09,360 --> 00:23:13,360
करूंगा आपसे। आपकी मान्यता हो सकती है लेकिन हमारे कोई काम की नहीं

269
00:23:13,360 --> 00:23:17,520
है। नहीं है। मान्यता नहीं है। मैं ये बताओ ये बताओ। उसने उसने

270
00:23:17,520 --> 00:23:22,560
ये बताया आपको बाबा रामपाल ने। उन्होंने ये बताया आपको कि

271
00:23:22,560 --> 00:23:26,560
क्या कहते हैं? इसकी भक्ति नहीं करनी। सम्मान करना है। इसकी भक्ति

272
00:23:26,560 --> 00:23:30,640
करनी है। यह बताया। हम ये बताया कि

273
00:23:30,640 --> 00:23:34,640
भक्ति क्यों करनी है? मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्ति करना

274
00:23:34,640 --> 00:23:38,880
है। मोक्ष है ये सिद्ध कैसे होता है? ईश्वर है सिद्ध कैसे

275
00:23:38,880 --> 00:23:43,360
होता है? क्योंकि वो शास्त्रों में लिखा है। ईश्वर

276
00:23:43,360 --> 00:23:47,440
है ये सिद्ध कैसे होता है? क्योंकि वो शास्त्रों में लिखा

277
00:23:47,440 --> 00:23:51,840
है। शास्त्रों में क्या शास्त्रों में क्या लिखा है ईश्वर

278
00:23:51,840 --> 00:23:55,840
के बारे में जिससे ईश्वर सिद्ध होता है? शास्त्रों में लिखा है कोई

279
00:23:55,840 --> 00:24:00,720
परमात्मा है। किसी लोक में रहता है उसके पास जाने को ही मोक्ष कहते हैं।

280
00:24:00,720 --> 00:24:04,800
मतलब कि आप आप एक मिनट मैं समझ लूं जरा।

281
00:24:04,800 --> 00:24:08,800
मतलब कि आपने कहा कि

282
00:24:08,800 --> 00:24:13,040
कोई ऐसा ग्रंथ है जिस पर आपको विश्वास है। उसमें लिखा

283
00:24:13,040 --> 00:24:17,280
है कि कोई दुनिया में एक परमात्मा है। है ना? जिसके

284
00:24:17,280 --> 00:24:21,520
पास जाने से मोक्ष जिसके पास जाने से मोक्ष मिलता है।

285
00:24:21,520 --> 00:24:24,640
ठीक है हम बस इसके

286
00:24:24,640 --> 00:24:28,880
अलावा और कोई और कोई युक्ति इत्यादि नहीं है ना क्या

287
00:24:28,880 --> 00:24:32,880
है कि उस परमात्मा की भक्ति करने

288
00:24:32,880 --> 00:24:36,960
से उस लोक को चले जाना को ही मोक्ष कहते हैं। अरे भाई मैं कह रहा

289
00:24:36,960 --> 00:24:41,040
हूं ईश्वर ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए और कुछ है या

290
00:24:41,040 --> 00:24:45,200
शास्त्र का नाम है केवल इसके लिए और ये है कि जिन

291
00:24:45,200 --> 00:24:49,520
संतों को परमात्मा मिले उनके [हंसी]

292
00:24:49,520 --> 00:24:53,520
ये शब्द ये सब सब कुछ शब्द प्रमाण में आ गए ये

293
00:24:53,520 --> 00:24:57,760
सब कुछ शब्द प्रमाण हो गया जिसप हमारी आस्था उसने क्या कहा

294
00:24:57,760 --> 00:25:02,720
ये इसमें आ गया वही ग्रंथ हो गए वही वाणी हो गई ठीक है

295
00:25:02,720 --> 00:25:07,360
अभी मैं पूछ रहा हूं इन प्रमाणों से अलग तर्कसंगत

296
00:25:07,360 --> 00:25:13,360
कोई आपके पास उपाय है ईश्वर की सिद्धि का

297
00:25:16,080 --> 00:25:20,080
इसके अलावा और क्या रहेगा? अच्छा इसका मतलब यह

298
00:25:20,080 --> 00:25:24,160
है कि जो व्यक्ति एक मिनट जो व्यक्ति आपके द्वारा माने जाने

299
00:25:24,160 --> 00:25:28,400
वाले बाबाओं में जो व्यक्ति आपके द्वारा मानी जाने वाली किताबों

300
00:25:28,400 --> 00:25:32,480
में बिलीव करता होगा आप केवल उसके ही सामने सिद्ध कर सकते हो कि

301
00:25:32,480 --> 00:25:35,760
इस दुनिया में ईश्वर है।

302
00:25:35,760 --> 00:25:39,920
वरना नहीं सिद्ध कर सकते क्योंकि उनको परमात्मा मिला है

303
00:25:39,920 --> 00:25:44,080
इस कारण वो सत्य है और

304
00:25:44,080 --> 00:25:48,080
मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा है मैंने क्या पूछा है

305
00:25:48,080 --> 00:25:52,320
मैंने क्या मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा है मैंने पूछा है

306
00:25:52,320 --> 00:25:56,560
जैसे आपने कहा कि उसको ही परमात्मा मिला है इस बात पे आपकी

307
00:25:56,560 --> 00:26:01,040
आस्था है ना आपकी आस्था है ना

308
00:26:01,040 --> 00:26:05,200
अब मान लीजिए कोई मुस्लिम है उसकी उसकी आस्था नहीं है

309
00:26:05,200 --> 00:26:09,920
कि उसको परमात्मा मिला। उसने झूठ बोला।

310
00:26:09,920 --> 00:26:14,160
कोई नास्तिक है। उसको उसको बिलीव नहीं है कि उसको परमात्मा मिला।

311
00:26:14,160 --> 00:26:18,240
वो कहेगा रामपाल ने झूठ बोला। ऐसे बहुत से

312
00:26:18,240 --> 00:26:22,240
लोग हैं जिनको आपकी मान्यताओं पर आस्था नहीं है। वो

313
00:26:22,240 --> 00:26:26,400
कहेंगे कि हमें बिलीव नहीं है उसको परमात्मा मिला। और बात तो

314
00:26:26,400 --> 00:26:30,480
यहां परमात्मा को सिद्ध करने की हो रही। उससे पहले परमात्मा को मिलना कैसे मान

315
00:26:30,480 --> 00:26:32,240
ले हम?

316
00:26:32,240 --> 00:26:36,480
ठीक है। जिनको वारसा नहीं है वो मत मान एक मिनट एक मिनट

317
00:26:36,480 --> 00:26:40,640
भाई साहब एक मिनट एक मिनट तो क्या

318
00:26:40,640 --> 00:26:44,720
कहते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो लोग आपके

319
00:26:44,720 --> 00:26:48,800
द्वारा स्वीकार किए जाने वाले धर्म ग्रंथ या आपके

320
00:26:48,800 --> 00:26:53,360
द्वारा स्वीकार किए जाने वाले महापुरुषों में आस्था नहीं रखते हैं।

321
00:26:53,360 --> 00:26:59,360
उनके समक्ष आप ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर सकते।

322
00:27:00,800 --> 00:27:04,880
जो नहीं मानेंगे उसको उसके सामने करने की जरूरत भी नहीं है

323
00:27:04,880 --> 00:27:08,960
क्योंकि नहीं मानेंगे हम कह रहे हैं निरुत्तर कर सकते हो उसे

324
00:27:08,960 --> 00:27:13,360
उसको लॉजिकली उसको गलत साबित कर सकते हो हम

325
00:27:13,360 --> 00:27:17,520
उसे गलत क्यों करें उसको जबरदस्ती मनाना थोड़ी तुम मान जाओ

326
00:27:17,520 --> 00:27:22,000
जबरदस्ती जबरदस्ती मनवाना नहीं जबरदस्ती

327
00:27:22,000 --> 00:27:26,000
मनवाना नहीं तर्क तर्क और युक्ति से उसको ये साबित कर सकते हो

328
00:27:26,000 --> 00:27:30,320
समाज के समक्ष कि ये व्यक्ति गलत है युक्ति क्या है

329
00:27:30,320 --> 00:27:34,400
बस यही युक्ति है कि जिसमें हमारी युक्ति यही है कि जिसमें हमारी आस्था

330
00:27:34,400 --> 00:27:39,280
उसको तुम भी मान लो। यही युक्ति है। वो कहेगा मेरी आस्था

331
00:27:39,280 --> 00:27:43,440
वो कहेगा मेरी आस्था एकंगा बिल्ला में है। उनको

332
00:27:43,440 --> 00:27:47,600
परमात्मा मिला था और वो कह रहा है बच्चे खाओ।

333
00:27:47,600 --> 00:27:51,840
तो उसको मानोगे आप नहीं मानेगा। वो अपनी मानता जहां रखा

334
00:27:51,840 --> 00:27:56,320
वो रखा रहे। हमें जबरदस्ती नहीं मनवाना है। तुम्हारी बात मान जाओ।

335
00:27:56,320 --> 00:28:00,480
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट हां वो अपनी मान्यता जो मानता है उसको रखे

336
00:28:00,480 --> 00:28:04,960
रहे आपको जबरदस्ती नहीं मनवाना है इस पर बात कर लेते हैं आप ये बताओ

337
00:28:04,960 --> 00:28:08,960
कि कोई व्यक्ति बच्चों को काट

338
00:28:08,960 --> 00:28:13,040
करके खा रहा है उसकी मान्यता है कि उसको एक परमात्मा मिला था जिसने

339
00:28:13,040 --> 00:28:17,280
कहा था बच्चों को काट काट करके खाओ तो आप उसको बलपूक रोकोगे

340
00:28:17,280 --> 00:28:20,080
या नहीं रोकोगे

341
00:28:20,080 --> 00:28:24,080
उसको ज्ञान से रोकेंगे कि बच्चे को काट के खाना ये

342
00:28:24,080 --> 00:28:28,320
शास्त्र किसी साहब को नहीं लगता। अरे तो वो आपके शास्त्र को मानता

343
00:28:28,320 --> 00:28:32,560
ही नहीं है ना। ये बताओ ये बताओ इंग्लैंड

344
00:28:32,560 --> 00:28:36,560
का ड्राइविंग लाइसेंस क्या भारत में काम करता है क्या? नहीं

345
00:28:36,560 --> 00:28:41,360
करेगा। भारत का ड्राइविंग लाइसेंस इंग्लैंड में काम करेगा?

346
00:28:41,360 --> 00:28:45,680
नहीं करेगा। नहीं करेगा। इसी प्रकार से जिस व्यक्ति की आस्था

347
00:28:45,680 --> 00:28:49,680
आपके शास्त्रों में नहीं है उसको अपने शास्त्रों का हवाला दे कर के

348
00:28:49,680 --> 00:28:53,680
आप ये सिद्ध नहीं कर सकते। आप यह नहीं कह सकते कि हमारे शास्त्र में लिखा है

349
00:28:53,680 --> 00:28:57,760
तुम जो कर रहे हो गलत है। उसको आप लॉजिकली सिद्ध करिए। ऐसी चीजों

350
00:28:57,760 --> 00:29:01,920
से आपको प्रमाण लाना होगा जिन चीजों को वो भी मानता है तब

351
00:29:01,920 --> 00:29:02,640
वो लॉजिकली

352
00:29:02,640 --> 00:29:06,880
गलत सिद्ध होगा। है आपके पास कोई तरीका? हां

353
00:29:06,880 --> 00:29:11,040
गुरु जी ने तो उनहीं के शास्त्रों से ही बता दिया है कि आपके शास्त्रों

354
00:29:11,040 --> 00:29:15,120
में लिखा हुआ है। नास्तिकों के शास्त्र क्या है?

355
00:29:15,120 --> 00:29:19,200
नास्तिकों के शास्त्र क्या है? नास्तिकों के शास्त्र क्या है?

356
00:29:19,200 --> 00:29:23,280
बताओ। अगर मान लो कोई जीव हत्या करता है मान लो मुसलमान

357
00:29:23,280 --> 00:29:27,440
है तो मुसलमानों के लिए उनहीं के शास्त्र से बता दिया है

358
00:29:27,440 --> 00:29:32,400
कि भाई मोहम्मद साहब ने कोई हत्या नहीं की आप क्यों कर रहे हो

359
00:29:32,400 --> 00:29:37,040
नास्तिकों के शास्त्र क्या है नास्तिकों के शास्त्र क्या है

360
00:29:37,040 --> 00:29:41,120
नास्तिकों कोई शास्त्री ही नहीं है क्योंकि वो नास्तिक कुछ मानते ही नहीं उनके लिए क्या करते थे कोई

361
00:29:41,120 --> 00:29:45,280
कुछ नहीं कर सकता तो क्या करोगे वो जब गलत कर रहे होंगे

362
00:29:45,280 --> 00:29:49,360
खुद के लिए कुछ नहीं कर सकते तो मतलब वो अगर कुछ गलत कर रहे

363
00:29:49,360 --> 00:29:52,640
तो गलत करने दोगे।

364
00:29:52,640 --> 00:29:57,680
अगर कहना नहीं मानता तो करने देंगे। अगर मानता है तो बहुत कुछ बताएंगे।

365
00:29:57,680 --> 00:30:01,760
नहीं नहीं नहीं कहना नहीं कहना नहीं मानेगा। अगर तुम्हारी बात

366
00:30:01,760 --> 00:30:05,920
या तो तुम्हारी बातों में श्रद्धा रख ले आंख बंद करके वरना तुम्हारे पास

367
00:30:05,920 --> 00:30:09,920
कोई उपाय नहीं है उसको तार्किकता से गलत सिद्ध करने का।

368
00:30:09,920 --> 00:30:14,000
प्रमाण प्रमाण देंगे ना प्रमाण। फिर वही

369
00:30:14,000 --> 00:30:18,400
आ गए तुम। तुम्हारे शास्त्रों में उसकी अवस्था नहीं तो प्रमाण क्या दे दोगे?

370
00:30:18,400 --> 00:30:22,560
कोई सुनती है। देखिए

371
00:30:22,560 --> 00:30:26,560
अगर वो सुनने को तैयार होगा तो बताएंगे और नहीं होगा तो कोई जबरदस्ती नहीं

372
00:30:26,560 --> 00:30:30,560
है। तू अपनी रास्ते में हट जाओ। अच्छा ठीक है। इसका मतलब ये है

373
00:30:30,560 --> 00:30:34,560
इसका मतलब ये है कि अगर कोई वैश्यालय खोलना चाहेगा आपके

374
00:30:34,560 --> 00:30:39,520
बगल में नास्तिक है ना तो आप उसको रोकोगे नहीं।

375
00:30:39,520 --> 00:30:43,920
सामाजिक हिसाब से तो रोकेंगे। क्यों रोकोगे? उसको

376
00:30:43,920 --> 00:30:48,320
उसको बताना पड़ेगा ना कि मैं क्यों रोक रहा हूं। क्या बताओगे?

377
00:30:48,320 --> 00:30:53,680
शास्त्र वाली बात नहीं है। अच्छा अब आप इसको छोड़िए आप

378
00:30:53,680 --> 00:30:57,840
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट बात यह नहीं है बात हो रही है बात

379
00:30:57,840 --> 00:31:02,000
हो रही है आपके सूक्ष्म ज्ञान की आपको सूक्ष्म ज्ञान मिला है ना बाबा जी से

380
00:31:02,000 --> 00:31:06,560
वो आप बताइए यहां पे सूक्ष्म ज्ञान आप परमेश्वर की

381
00:31:06,560 --> 00:31:10,560
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे पानी दे

382
00:31:10,560 --> 00:31:15,040
दो भाई जरा पानी दे दो एक मिनट

383
00:31:15,040 --> 00:31:19,360
सूक्ष्म ज्ञान की बात ये हो रही है कि आपने जो पहले से परसी परसाई

384
00:31:19,360 --> 00:31:23,600
थाली है। यानी कि ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध है। इसको

385
00:31:23,600 --> 00:31:27,760
आपने स्वीकार करके चले और कहा कि बाबा जी ने बताया

386
00:31:27,760 --> 00:31:31,840
किसकी भक्ति करनी है, किसकी नहीं करनी है। ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता

387
00:31:31,840 --> 00:31:33,760
है? मोक्ष क्या है? मोक्ष क्यों

388
00:31:33,760 --> 00:31:37,840
आवश्यक है? मोक्ष है ये कैसे सिद्ध होता है? इन सब का तो कोई बात ही नहीं

389
00:31:37,840 --> 00:31:41,840
है। पहले ईश्वर ले आओ। ईश्वर पका पकाया आम है। अब बता

390
00:31:41,840 --> 00:31:47,520
दो ये वाला आम नहीं तोड़ना है। वो वाला आम तोड़ना है। ये सूक्ष्म ज्ञान है।

391
00:31:47,520 --> 00:31:53,520
ये सारा ज्ञान लिखा है आप

392
00:31:55,440 --> 00:31:59,920
पूछ रहा हूं आप सूक्ष्म वेद में लिखा हुआ मुझे नास्तिकता

393
00:31:59,920 --> 00:32:04,160
का खंडन बताइए नास्तिक को क्या उत्तर देते हैं सूक्ष्म आपका जो सूक्ष्म

394
00:32:04,160 --> 00:32:08,240
ज्ञान है वो मुझे नास्तिक को आस्तिक नहीं बनाना कि तुम आस्तिक

395
00:32:08,240 --> 00:32:12,480
बन जाओ हां ये है कि आपने कहा कोई नहीं मेरे चक्कर में प्रश्न का उत्तर

396
00:32:12,480 --> 00:32:17,040
दीजिए आप कहते मैं गायत्री मंत्र का जप करता हूं गायत्री मंत्र का

397
00:32:17,040 --> 00:32:21,520
आगे नहीं आगे आगे नहीं बढ़ने का। आगे नहीं बढ़ने का।

398
00:32:21,520 --> 00:32:26,080
आगे मत बढ़ो।

399
00:32:26,080 --> 00:32:30,320
आगे मत बढ़ो। बताऊंगा। [हंसी] मैं अर्थ बताऊंगा। अभी

400
00:32:30,320 --> 00:32:34,720
बात चल रही है आपके सूक्ष्म ज्ञान की। आप अपना सूक्ष्म ज्ञान यहां दिखाइए।

401
00:32:34,720 --> 00:32:40,720
लोगों को मैंने बता दिया ना? बता दिया।

402
00:32:41,440 --> 00:32:45,760
उसे कुछ मिनटों में सिद्ध नहीं किया जा सकता। अभी

403
00:32:45,760 --> 00:32:49,840
नास्तिकता के खंडन की बात चल रही है। नास्तिकता के खंडन की बात चल

404
00:32:49,840 --> 00:32:54,720
रही है। करनी है। करनी है। करनी है।

405
00:32:54,720 --> 00:32:58,880
अपना गुरु सिद्ध कर पाओगे रामपाल को या

406
00:32:58,880 --> 00:33:02,880
सिद्ध कर पाओगे। उसने तत्व ज्ञान दिया है। अगर इस मैटर पे बात करनी है

407
00:33:02,880 --> 00:33:07,200
तो बात आगे बढ़ेगी वरना जा सकते हो। बोलो। मुझे मालूम है यहां पे

408
00:33:07,200 --> 00:33:11,360
यहां पे तुमको अब वहां आना है जहां पे जहां की तुमने तैयारी कर रखी हो रटंत

409
00:33:11,360 --> 00:33:15,440
विद्या उस पे भी मैं बात करूंगा। मगर आपने यदि यह कहा है कि आप उसके

410
00:33:15,440 --> 00:33:19,440
गुरु के शिष्य हैं तो अभी हम लोग सूक्ष्म ज्ञान की बात कर रहे हैं। आपका सूक्ष्म ज्ञान

411
00:33:19,440 --> 00:33:23,440
क्या है? आपको करनी है। इस पर बात करनी है। हां

412
00:33:23,440 --> 00:33:27,440
या ना में जवाब दीजिए। हां या ना में जवाब दीजिए। करनी है।

413
00:33:27,440 --> 00:33:31,440
आपकी आवाज सुन नहीं रहा कोई। आप म्यूट है। आप म्यूट है। मैंने म्यूट

414
00:33:31,440 --> 00:33:37,040
किया आपको। हां या ना में जब आपको बात करनी है। सूक्ष्म ज्ञान पे

415
00:33:37,040 --> 00:33:41,040
सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है। मैं पूछ रहा हूं हां या ना मुंडी हिला

416
00:33:41,040 --> 00:33:41,540
के

417
00:33:41,200 --> 00:33:47,200
बता दीजिए। सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है।

418
00:33:47,600 --> 00:33:52,320
सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है।

419
00:33:52,320 --> 00:33:56,320
सुनाई नहीं दे रहा है। केवल मुंडी हिलाइए। करनी

420
00:33:56,320 --> 00:34:00,640
है। करनी है। करनी

421
00:34:00,640 --> 00:34:04,640
है ना? कुछ अब ये आगे मत भागना। आगे मत

422
00:34:04,640 --> 00:34:09,200
भागना। जब तक यह बात खत्म नहीं हो जाएगी ना सूक्ष्म ज्ञान वाली तब तक आगे मत भागना।

423
00:34:09,200 --> 00:34:13,360
ठीक है? बोलो हां।

424
00:34:13,360 --> 00:34:16,880
हां ठीक है। चलो

425
00:34:16,880 --> 00:34:21,520
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। अब

426
00:34:21,520 --> 00:34:26,240
जब आप हारने लगते हैं ना तो

427
00:34:26,240 --> 00:34:30,800
मुझे मालूम है सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है।

428
00:34:30,800 --> 00:34:35,360
आपकी आवाज म्यूट है। मैं कोई भी ऐसी चीजें अपने प्लेटफार्म

429
00:34:35,360 --> 00:34:39,440
से निर्गत नहीं होने दूंगा जो अधूरी छूट जाए। जितनी बातें आप बोलोगे वो ऐड

430
00:34:39,440 --> 00:34:43,440
होती चली जाएंगी। बाद में मुझे कुछ याद रहे या ना रहे इसलिए टू

431
00:34:43,440 --> 00:34:47,520
द पॉइंट अभी जो बात चल रही है वो पूरी करिए सूक्ष्म ज्ञान की बात पूरी

432
00:34:47,520 --> 00:34:51,840
करिए वो गुरु है ना आपके तत्व ज्ञान दिया है ना तो भैया पका पकाया

433
00:34:51,840 --> 00:34:56,080
परमेश्वर क्यों पहले परमेश्वर की सिद्धि तो करो पका पकाया मोक्ष क्यों पहले मोक्ष

434
00:34:56,080 --> 00:35:02,080
की सिद्धि तो करो और फिर हम देख लेंगे उसके अनुरूप आपका ईश्वर है कि नहीं

435
00:35:07,440 --> 00:35:11,520
हां भाई तो नास्तिकों का उत्तर क्या है? आपके बाबा जी

436
00:35:11,520 --> 00:35:15,520
ने जो दिया हो? आपके बाबा जी का ज्ञान यहां से शुरू

437
00:35:15,520 --> 00:35:21,360
हो रहा है। आपके बाबा जी का ज्ञान यहां से शुरू हो रहा है।

438
00:35:21,360 --> 00:35:23,840
अरे यार

439
00:35:23,840 --> 00:35:28,080
आपको बात नहीं करनी है क्या? हेलो। आपको

440
00:35:28,080 --> 00:35:32,160
बात नहीं करनी। इसको हटाइए। फोटो को हटाइए। फोटो को हटाइए। फोटो

441
00:35:32,160 --> 00:35:38,160
को हटाइए। फोटो को हटाइए। हटाइए फोटो को। फोटो को हटाइए।

442
00:35:38,320 --> 00:35:42,320
आप यह कह दो कि मेरे बाबा जी से मुझे नास्तिकता का खंडन नहीं

443
00:35:42,320 --> 00:35:48,320
पता चला है तो हम आपके आगे बढ़ते हैं। आपके प्रश्न पर आते हैं।

444
00:35:49,440 --> 00:35:53,520
कहोगे

445
00:35:53,520 --> 00:35:58,880
हां या ना में मुंडी हिलाओ।

446
00:35:58,880 --> 00:36:04,320
नास्तिकता का खंडन दिया है क्या बाबा ने? रामपाल ने?

447
00:36:04,320 --> 00:36:08,400
ये पूछ रहा हूं मैं। उन्होंने सभी के लिए नहीं किया

448
00:36:08,400 --> 00:36:12,640
है। जो नास्तिक है वह नास्तिक ही रहेंगे। आस्तिक आस्तिक ही रहेंगे

449
00:36:12,640 --> 00:36:16,880
और आस्तिकों के लिए उन्होंने दिया है। नास्तिकता

450
00:36:16,880 --> 00:36:20,880
का खंडन दिया है क्या बाबा रामपाल ने? मैं फिर पूछ रहा हूं।

451
00:36:20,880 --> 00:36:24,960
और इस तरीके से फिर चर्चा बिगड़ती है। मुझे अब आपको मजबूरी

452
00:36:24,960 --> 00:36:29,040
में हटाना पड़ेगा। मैं आपके आपके टॉपिक पर आ सकता हूं। आप यह बताइए

453
00:36:29,040 --> 00:36:35,040
कि नास्तिकता का खंडन बाबा रामपाल ने तत्व ज्ञानी ने दिया है कि नहीं दिया है।

454
00:36:39,200 --> 00:36:43,360
मैं आपको ऑन कर रहा हूं। फालतू की बातें मत बोलिएगा। सीधे

455
00:36:43,360 --> 00:36:49,360
टू द पॉइंट बताइए। हां जी बोलिए।

456
00:36:50,800 --> 00:36:55,120
एक मिनट। एक मिनट मैं दोबारा प्रश्न रख रहा हूं। नास्तिकता

457
00:36:55,120 --> 00:37:01,120
का खंडन बाबा रामपाल ने दिया है कि नहीं दिया है?

458
00:37:01,360 --> 00:37:04,480
यह मैंने कहीं नहीं पढ़ा।

459
00:37:04,480 --> 00:37:08,560
तो हम अभी यही माने कि नहीं दिया है। कैसे

460
00:37:08,560 --> 00:37:12,640
मान ले मैंने पढ़ा ही नहीं तो मैं कैसे कह दूं कि दिया है या नहीं दिया है।

461
00:37:12,640 --> 00:37:17,040
तो यहां क्यों चले आए मुंह उठा के? आप आप जो

462
00:37:17,040 --> 00:37:22,720
तैयारी करके आते हैं ना कि नास्तिकता का खंडन दिया है कि नहीं?

463
00:37:22,720 --> 00:37:26,800
नहीं लगता। कोई हराने वाला पैदा नहीं हुआ है। दुनिया का माई का लाल

464
00:37:26,800 --> 00:37:32,800
कोई आप हटे [हंसी]

465
00:37:34,800 --> 00:37:38,880
नास्तिकता का खंडन है आपके पास? अरे

466
00:37:38,880 --> 00:37:43,200
ये पंचरंगी ड्रामा हटाओ सामने से अभी हटाओ।

467
00:37:43,200 --> 00:37:47,520
नास्तिकता का खंडन बताओ। नास्तिकता का खंडन हटाओ

468
00:37:47,520 --> 00:37:52,400
इसको। हटाओ हटाओ। सुनो।

469
00:37:52,400 --> 00:37:56,640
अब ध्यान से सुनो। ठीक है? थोड़ा तसल्ली से बात करो।

470
00:37:56,640 --> 00:38:00,800
आपने कहा कि मेरे बाबा जी ने मुझे यह बताया किसकी भक्ति करनी है। मुख्य

471
00:38:00,800 --> 00:38:04,960
रूप से किसकी नहीं करनी है। ठीक है? यह आपका सूक्ष्मतम ज्ञान

472
00:38:04,960 --> 00:38:09,440
है बाबा जी का। अब मेरा प्रश्न है। मेरा प्रश्न ये है

473
00:38:09,440 --> 00:38:15,200
कि भाई मैं मानू कैसे कि इस दुनिया में कोई परमेश्वर है। अब ये बताइए।

474
00:38:15,200 --> 00:38:19,200
अब आप नहीं मानेगा तो हम तो मना नहीं सकते। तो मेरा प्रश्न

475
00:38:19,200 --> 00:38:23,360
है उसप भी। मेरा प्रश्न है उसप भी। सुनो ध्यान से। आपके बगल

476
00:38:23,360 --> 00:38:27,520
में कोई नास्तिक अगर वैश्यालय खोलेगा तो उसको आप मना कैसे करोगे या खोलने

477
00:38:27,520 --> 00:38:31,680
दोगे यह बताओ हम उस पर नहीं जाएंगे आप शास्त्र की चर्चा

478
00:38:31,680 --> 00:38:36,720
कीजिए कोई उदाहरण मत दो क्यों उदाहरण ना दे

479
00:38:36,720 --> 00:38:38,000
शास्त्र पे भी मैं आऊंगा

480
00:38:38,000 --> 00:38:42,160
शास्त्र पे भी मैं आऊंगा शास्त्र की चर्चा करो शास्त्र

481
00:38:42,160 --> 00:38:46,400
की अच्छा चलिए शास्त्र क्या है ये बताइए प्रामाणिक

482
00:38:46,400 --> 00:38:50,400
शास्त्र किसे कहते हो आप बताइए चलिए जो

483
00:38:50,400 --> 00:38:54,400
पूरा हो चुकी है जो घटनाएं पूर्व काल में घट

484
00:38:54,400 --> 00:38:58,400
चुकी और जिनका लेख संकलन है वही शास्त्र कहलाते हैं। वही

485
00:38:58,400 --> 00:39:02,480
शास्त्र उनहीं को भी कहते हैं। ठीक है। ठीक है।

486
00:39:02,480 --> 00:39:06,480
ठीक है। तो कई अखबारों में छपा है कि जब रामपाल

487
00:39:06,480 --> 00:39:10,720
पकड़ा गया था तो एक किलो निरोध पकड़े गए थे वहां से आश्रम

488
00:39:10,720 --> 00:39:14,720
से। ऐसे मैं नहीं कह रहा हूं। ये अखबारों में छपा है। ठीक है? इसको

489
00:39:14,720 --> 00:39:18,800
जानते होंगे आप। बबीता नाम की किसी महिला के साथ

490
00:39:18,800 --> 00:39:22,960
उसके अवैध संबंध थे बाबा रामपाल के और उसका यौन

491
00:39:22,960 --> 00:39:27,280
शोषण किया था बाबा रामपाल ने ये सब जो लिखा है ऐतिहासिक घटनाओं

492
00:39:27,280 --> 00:39:31,520
के रूप में लिखा है ये शास्त्र है आपके लिए नहीं है शास्त्र

493
00:39:31,520 --> 00:39:35,760
नहीं है वो झूठ फैलाया गया है संत को प्रणाम करने के लिए तो आपने

494
00:39:35,760 --> 00:39:39,920
आपने जो पहली परिभाषा दी है शास्त्र की कि जो घटनाएं घट चुकी है उसका संकलन

495
00:39:39,920 --> 00:39:44,080
शास्त्र है पहली चीज लिखने वाला व्यक्तित्व होना चाहिए जैसे

496
00:39:44,080 --> 00:39:48,320
वेदव्यास जी है हां एक मिनट एक

497
00:39:48,320 --> 00:39:52,400
एक मिनट एक मिनट मैं समझ रहा हूं। आपके आपके मुख से सही परिभाषा आएगी अभी

498
00:39:52,400 --> 00:39:53,520
धीरे-धीरे

499
00:39:53,520 --> 00:39:57,760
तो पहला हो गया इतिहास का संकलन केवल इतिहास का संकलन

500
00:39:57,760 --> 00:40:02,240
शास्त्र नहीं है। है ना? नहीं

501
00:40:02,240 --> 00:40:06,320
एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब बहुत आनंद आएगा। बिल्कुल स्ट्रक्चरल तरीके

502
00:40:06,320 --> 00:40:12,320
से चले। है ना? इतिहास का संकलन

503
00:40:13,040 --> 00:40:17,200
संकलन केवल इतिहास का संकलन शास्त्र नहीं है। किसी प्रामाणिक व्यक्ति

504
00:40:17,200 --> 00:40:22,870
का किसी प्रामाणिक व्यक्ति के द्वारा

505
00:40:22,870 --> 00:40:27,280
[गला साफ़ करने की आवाज़] व्यक्ति द्वारा लिखा गया शास्त्र शास्त्र है। इतिहास का संकलन

506
00:40:27,280 --> 00:40:31,920
शास्त्र है। ठीक है? तो जो प्रमाणिक व्यक्ति है

507
00:40:31,920 --> 00:40:36,240
उसकी प्रमाणिकता का आधार क्या होता है? मतलब ऐसा होता है जैसे

508
00:40:36,240 --> 00:40:40,480
ये अखबार वाले झूठ बोल रहे हैं। और यही अखबार

509
00:40:40,480 --> 00:40:46,400
वाले कहीं-कहीं पे ऐसी खबरें भी छापते हैं जो आपको सच लगती होंगी। लगती है कि नहीं?

510
00:40:46,400 --> 00:40:50,560
कहीं की सच होती है कहीं की झूठ भी होती है। हां सब

511
00:40:50,560 --> 00:40:54,640
सच हो ऐसा नहीं। जैसे आपने कहा कि वेदव्यास जी इत्यादि

512
00:40:54,640 --> 00:40:58,720
आपके लिए वेदव्यास जी जो लिखे वो शास्त्र

513
00:40:58,720 --> 00:41:02,960
है। तो वेदव्यास जी की बातें भी कई जगह बाबा रामपाल

514
00:41:02,960 --> 00:41:06,960
ने कही है कि झूठी है। वेदव्यास जी की बातें भी कई

515
00:41:06,960 --> 00:41:08,560
जगह बाबा रामपाल ने कहा है

516
00:41:08,560 --> 00:41:12,640
कि ये वेदव्यास अज्ञानी है। ब्रह्मा

517
00:41:12,640 --> 00:41:16,880
विष्णु कहा है? कहा है? गरिमा

518
00:41:16,880 --> 00:41:21,200
गीता की बता रहा हूं। बता रहा हूं बता रहा हूं। भैया ऑपरेटर

519
00:41:21,200 --> 00:41:25,280
जी वो ब्रह्मा विष्णु महेश का उसमें कोर्ट मटेरियल वाले फोल्डर में पड़ा

520
00:41:25,280 --> 00:41:29,360
हुआ है। एक वो बना है ना उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश को अज्ञानी कह रहा

521
00:41:29,360 --> 00:41:33,360
है रामपाल वो तब तक आप वीडियो निकालिए तब तक हम इनको इनकी किताब से बताते

522
00:41:33,360 --> 00:41:37,520
हैं। बाबा वेद गरिमा ये जो

523
00:41:37,520 --> 00:41:41,440
गीता है वो किसने लिखी है?

524
00:41:41,440 --> 00:41:45,440
गीता वेदव्यास जी ने लिखी है व्यास जी ने। ठीक

525
00:41:45,440 --> 00:41:49,520
है? तो यानी कि गीता का एक एक अक्षर, एक एक शब्द, एक एक श्लोक प्रमाणिक

526
00:41:49,520 --> 00:41:53,760
है क्योंकि वेदव्यास आपके लिए पूर्णत प्रमाणिक है। एक भी कुछ भी कटिंग

527
00:41:53,760 --> 00:41:58,720
तो नहीं करेंगे। कटिंग तो नहीं करेंगे। नहीं करेंगे।

528
00:41:58,720 --> 00:42:02,960
ठीक है। तो संभवत छठव अध्याय

529
00:42:02,960 --> 00:42:08,800
में गरिमा गीता की में रामपाल लिख रहे हैं कि

530
00:42:08,800 --> 00:42:12,880
गीता जी में जो गीता है भगवत गीता उसमें

531
00:42:12,880 --> 00:42:17,360
जो हठ योग बताया है छठव अध्याय में वो हमें नहीं करना है।

532
00:42:17,360 --> 00:42:21,360
वो गलत है। वो वेद विरुद्ध है। शास्त्र विरुद्ध है। हम

533
00:42:21,360 --> 00:42:25,760
तो यहां तो वेदव्यास की वाणी कट गई।

534
00:42:25,760 --> 00:42:30,480
यहां पर जो गीता था वो बताता है कि ह

535
00:42:30,480 --> 00:42:34,640
उनकी अंकल है उनका नहीं इसका मतलब

536
00:42:34,640 --> 00:42:38,720
इसका मतलब पूरी तरीके से गीता का एक एक अच्छा स्वीकार नहीं है

537
00:42:38,720 --> 00:42:41,680
ना

538
00:42:41,680 --> 00:42:45,840
अरे का जैसे इसका मतलब ये

539
00:42:45,840 --> 00:42:49,840
तो वही बात हो गई ना जैसे अखबार अखबार में भी दो प्रकार का ज्ञान है एक उन्होंने अपने

540
00:42:49,840 --> 00:42:53,840
मन से लिख दिया और एक सत्स लिखा है

541
00:42:53,840 --> 00:42:58,000
पहले इस चीज को समझिए। पहली चीज समझिए मेरी बात।

542
00:42:58,000 --> 00:43:02,160
ये जो तत्व वाली बात है वही तत्व ज्ञान है कि संत रामपाल जी महाराज ने बताया

543
00:43:02,160 --> 00:43:06,320
कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है। एक उसमें गीता ज्ञान दाता ब्रह्म का जिसने

544
00:43:06,320 --> 00:43:10,400
अपने बारे में खुद कहा है और दूसरा उसने पूर्ण परमात्मा ज्ञान दिया है

545
00:43:10,400 --> 00:43:14,400
वो भी है। अब गीता ज्ञान दाता का अपना ज्ञान है कि आप भट योग कीजिए

546
00:43:14,400 --> 00:43:18,560
ऐसे बैठिए वैसे बैठिए फलाना ढिकाना आसन बना लीजिए ये गीता ज्ञान

547
00:43:18,560 --> 00:43:22,640
दाता का ज्ञान है। जो हमें मांगने नहीं क्योंकि उससे मोक्ष नहीं मिलेगा। और

548
00:43:22,640 --> 00:43:26,800
जो परमात्मा वाला ज्ञान है वो अलग है और वो तत्व ज्ञान है और वही

549
00:43:26,800 --> 00:43:30,800
रामपाल जी महाराज ने कहा है यानी कि यानी कि भगवत गीता पूरी

550
00:43:30,800 --> 00:43:34,960
तरीके से स्वीकार नहीं है ना तो जो परमात्मा

551
00:43:34,960 --> 00:43:39,440
वाला ज्ञान है वो स्वीकार है कि

552
00:43:39,440 --> 00:43:44,320
ये बताओ भगवत गीता मान लो मेरे पास ये भगवत गीता है

553
00:43:44,320 --> 00:43:48,640
हां

554
00:43:48,640 --> 00:43:53,040
ये भगवत गीता है हेलो

555
00:43:53,040 --> 00:43:57,280
ये भगवत गीता है। अब इसमें से मैंने इसमें

556
00:43:57,280 --> 00:44:01,680
से मैंने आपने कहा कि कुछ श्लोक कुछ चीजें ऐसी

557
00:44:01,680 --> 00:44:06,000
हैं जो कुछ चीजें कुछ श्लोक

558
00:44:06,000 --> 00:44:10,720
ऐसे हैं जो कि उसका अपना ज्ञान है वो हमारे काम का नहीं है।

559
00:44:10,720 --> 00:44:16,080
वो हमें नहीं चाहिए। झूठ है वो झूठ है।

560
00:44:16,080 --> 00:44:20,320
हां सच है। वो झूठ है। करना

561
00:44:20,320 --> 00:44:24,560
चाहिए। क्योंकि वह गीता ज्ञान दाता ने अपनी भक्ति

562
00:44:24,560 --> 00:44:28,640
के विषय में बताया है और अपना ज्ञान बताया है। उससे पूर्ण मोक्ष नहीं

563
00:44:28,640 --> 00:44:33,680
मिलेगा। इसलिए वो हमें नहीं चाहिए और जिस ज्ञान से हमें मोक्ष मिलेगा

564
00:44:33,680 --> 00:44:37,760
वो गीता में ही लिखा है संकेत रूप में। उसे गुरु

565
00:44:37,760 --> 00:44:42,160
जी ने बताया है। एक मिनट एक मिनट एक मिनट। शास्त्र किसे कहते हैं?

566
00:44:42,160 --> 00:44:46,160
शास्त्र उसको कहते हैं जो मोक्ष की बात करे या मोक्ष और बिन मोक्ष

567
00:44:46,160 --> 00:44:50,960
दोनों की बात करे। मतलब फसाने की और मोक्ष की दोनों की बात करें।

568
00:44:50,960 --> 00:44:56,160
हां उसमें सभी प्रकार का सामंजस्य रहता है।

569
00:44:56,160 --> 00:45:00,240
सभी प्रकार का सामंजस्य रहता है। तो फिर तो

570
00:45:00,240 --> 00:45:04,480
फिर जो अखबार हैं जो सत्य बोल रहे हैं कि ये

571
00:45:04,480 --> 00:45:08,480
ये घटनाएं हुई और उसमें रामपाल के बारे में आपके अनुसार गलत भी लिख

572
00:45:08,480 --> 00:45:12,640
दिया तो वो भी फिर शास्त्र हो गया। सामंजस्य हो गया सभी प्रकार का।

573
00:45:12,640 --> 00:45:16,800
नहीं हो सकता। हम समाचार पत्र को शास्त्र कह

574
00:45:16,800 --> 00:45:20,960
ही नहीं सकते। वो शास्त्र नहीं है तो वो बताओ अंतर

575
00:45:20,960 --> 00:45:24,960
बताओ अंतर क्या है दोनों देखो जो बात माननी

576
00:45:24,960 --> 00:45:29,120
है वो भी उसमें लिखी हुई है जो बात नहीं माननी है वो भी उसमें लिखी

577
00:45:29,120 --> 00:45:33,120
हुई है वही बात आप यहां कर रहे हो कि भगवत गीता में भी जो बात माननी है वो

578
00:45:33,120 --> 00:45:37,120
भी लिखी हुई है और जो नहीं माननी वो भी लिखी हुई है तो फिर शास्त्र कहां से

579
00:45:37,120 --> 00:45:41,440
रहा देखो शास्त्र तो फिर पूरे 18 पुराण है

580
00:45:41,440 --> 00:45:45,680
18 पुराण पूरी भगवत कथा कहानियां है तू बातें मुझसे मत करो

581
00:45:45,680 --> 00:45:49,680
अभी बात ये हो रही है कि तुमने ने अभी थोड़ी देर पहले कहा था कि मैं गीता का एक

582
00:45:49,680 --> 00:45:53,840
एक अक्षर मानता हूं। बिल्कुल रियल है। अब तुम कह रहे हो कि उसमें

583
00:45:53,840 --> 00:45:57,920
कुछ बातें नहीं मानने की है। तो लिखा हुआ मानता हूं कि सत्य लिखा

584
00:45:57,920 --> 00:46:01,920
है। लेकिन अब क्या मानना क्या नहीं मानना ये मेरे मन की मेरे अंदर की बात है।

585
00:46:01,920 --> 00:46:05,920
क्या स्वीकार करना क्या? लिखा तो है। जो लिखा है सत्य लिखा है। गलत नहीं

586
00:46:05,920 --> 00:46:10,480
लिखा। लेकिन मानना ना मानना मेरी बात है। ठीक है। ठीक।

587
00:46:10,480 --> 00:46:11,280
उसमें जब

588
00:46:11,280 --> 00:46:15,280
यह हठ योग का मना कर रहे हैं कि हठ योग हमें नहीं मानना है।

589
00:46:15,280 --> 00:46:19,280
ठीक है? तो वहां रामपाल यह नहीं कह रहे हैं कि वहां पर ये

590
00:46:19,280 --> 00:46:23,360
जो काल का है वो अपना मत है। वहां ये कह रहे हैं कि ये बात वेद से मैच

591
00:46:23,360 --> 00:46:27,360
नहीं करती है। ये बात वेद से मैच नहीं करती है इसलिए

592
00:46:27,360 --> 00:46:30,240
नहीं माननी है।

593
00:46:30,240 --> 00:46:34,480
अपना मत जहां पर इसका खंडन किया है ना छठवे अध्याय का हठ

594
00:46:34,480 --> 00:46:38,560
योग का खंडन किया है। वहां पर काल का अपना मत नहीं है। काल का अपना मत बाद

595
00:46:38,560 --> 00:46:42,800
में है। ऐसा मेरा मत है। ये बात ये

596
00:46:42,800 --> 00:46:46,880
बात बाद में है। छह जगह लिखा है। ऐसा मेरा मत है। ऐसा

597
00:46:46,880 --> 00:46:51,200
मेरा मत छ जगह है। वो काल का अपना मत है। वो [हंसी]

598
00:46:51,200 --> 00:46:55,360
नहीं लिखा है। हठ योग में नहीं लिखा है। हठ योग को ना मानने का कारण

599
00:46:55,360 --> 00:46:59,520
दूसरा बताया है रामपाल ने। देखो उन्होंने कहा कि

600
00:46:59,520 --> 00:47:03,760
कौन सा स्थान हो? मृगला हो। यार मैं आपसे

601
00:47:03,760 --> 00:47:08,960
क्या कह रहा हूं। मैं आपसे क्या कह रहा हूं? बेकार में

602
00:47:08,960 --> 00:47:14,320
वो मोक्ष मार्ग नहीं है सर उसे हमें नहीं मानना बस

603
00:47:14,320 --> 00:47:18,480
मोक्ष मोक्ष मार्ग नहीं है ये गीता में कहां लिखा है कि हट मार्ग मोक्ष

604
00:47:18,480 --> 00:47:22,560
मार्ग नहीं है क्योंकि अगर मान लो जो

605
00:47:22,560 --> 00:47:26,400
उस प्रकार की प्रक्रिया करके ओम मंत्र का जाप करेगा उसे ब्रह्मलोक की

606
00:47:26,400 --> 00:47:30,400
प्राप्ति होगी तो गीता अध्याय आठ श्लोक 16 में कहा गया है

607
00:47:30,400 --> 00:47:33,120
कि

608
00:47:33,120 --> 00:47:37,440
गीता में गीता में ये लिखा है क्या कि मोक्ष वो जो है वो

609
00:47:37,440 --> 00:47:43,440
क्या कहते वो मोक्ष मार्ग नहीं है जो हठ योग है आसन बिछा के बैठना

610
00:47:43,680 --> 00:47:47,760
हठ योग है उससे जो ब्रह्मलोक की प्राप्ति होगी ब्रह्मलोक

611
00:47:47,760 --> 00:47:51,840
जाना मोक्ष पूर्ण मोक्ष नहीं है मैंने आपसे पूछा क्या है

612
00:47:51,840 --> 00:47:57,840
गीता में लिखा है क्या जो हठ योग वाला मामला है वो मोक्ष मार्ग नहीं है

613
00:47:58,160 --> 00:48:02,240
ऐसा गीता में नहीं लिखा है और जो बता रहा है वही तत्व ज्ञान है वही

614
00:48:02,240 --> 00:48:06,640
सूक्ष्म ज्ञान है वही ज्ञान है मोक्ष नहीं मिलेगा

615
00:48:06,640 --> 00:48:10,720
आप मुझे बताइए कि यह कैसे सिद्ध होता है कि हठ योग वाला जो ज्ञान है वो

616
00:48:10,720 --> 00:48:13,920
मोक्ष मार्ग नहीं है। बताइए

617
00:48:13,920 --> 00:48:18,480
क्योंकि जितने भी योगी तपस्वी है जिन्होंने इस प्रकार हठ किया है गीता में तपस्या

618
00:48:18,480 --> 00:48:22,480
करने को मना किया है कि ये योग कौन सा योग परमार तप

619
00:48:22,480 --> 00:48:26,640
पाने वाला योग किसी प्रकार के हठ से प्राप्त नहीं होता

620
00:48:26,640 --> 00:48:31,040
है और वही हट गीता ज्ञान दाता बता रहा है। ठीक है ठीक है।

621
00:48:31,040 --> 00:48:35,200
यानी कि यह कहां लिखा है कि वो वाला योग से प्राप्त नहीं होता है। यह कहां

622
00:48:35,200 --> 00:48:39,360
लिखा है? यह कहां लिखा है?

623
00:48:39,360 --> 00:48:42,320
यह योग ना

624
00:48:42,320 --> 00:48:46,480
व्रत से उपवास से अध्याय छ में है। निकालो। अध्याय

625
00:48:46,480 --> 00:48:50,000
छ में ही तो मना कर रहे हैं।

626
00:48:50,000 --> 00:48:54,160
अध्याय छ में ही तो मना कर रहे हैं कि आसनवासन बिछा के वो जो हठ

627
00:48:54,160 --> 00:49:00,160
योग है वो नहीं करना है। उसकी अपनी अटकल है ना।

628
00:49:01,840 --> 00:49:06,000
गीता को कौन सा गीता का कौन सा वाक्य है जो उसको काट

629
00:49:06,000 --> 00:49:11,600
रहा है यह बताओ

630
00:49:11,600 --> 00:49:15,760
ये इधर काट रहा है यहां पर जो उन्होंने कहा है कि ये योग मैंने

631
00:49:15,760 --> 00:49:19,840
सबसे पहले सुर को दिया था सूर्य ने कुछ ऋषियों को दिया राजियों

632
00:49:19,840 --> 00:49:23,920
को फिर वो तत्व ज्ञान है उधर तत्वदर्शी संत जो ज्ञान बताएंगे

633
00:49:23,920 --> 00:49:28,000
वो इसको काट रहा है कि तत्वदर्शी संत इसको सही नहीं

634
00:49:28,000 --> 00:49:32,080
करेंगे कि ठीक नहीं की गीता से यानी कि तत्वदर्शी जो

635
00:49:32,080 --> 00:49:36,480
बताएगा वो है ना शास्त्र फिर गीता शास्त्र नहीं बचा

636
00:49:36,480 --> 00:49:40,720
शास्त्र किसे कहते हैं ये बताओ जिस शास्त्र उसको कहेंगे ना जिसकी एक एक

637
00:49:40,720 --> 00:49:44,720
बात को मानना हो अगर उसमें आप ये करोगे ये

638
00:49:44,720 --> 00:49:48,720
यहां से ये काट दो वहां से वो काट दो तो वो शास्त्र का बचा एक मैं आपको उदाहरण देता

639
00:49:48,720 --> 00:49:52,320
हूं उदाहरण

640
00:49:52,320 --> 00:49:56,320
सब कुछ लिखा स्वीकार कर ऐसा नहीं है एक

641
00:49:56,320 --> 00:50:00,720
मिनट भाई साहब एक मिनट एक मिनट मैं बताता एक मिनट जैसे

642
00:50:00,720 --> 00:50:05,440
मान लो ये भगवत गीता है। ठीक है? हां। और आपके

643
00:50:05,440 --> 00:50:09,680
हिंदू वो है जो इस भगवत गीता को प्रणाम करता है। अपने माथे

644
00:50:09,680 --> 00:50:13,840
से लगाता है। इसका सम्मान करता है भगवत गीता का। ठीक है? बिल्कुल।

645
00:50:13,840 --> 00:50:17,920
आप कह रहे हैं कि इसमें कुछ बातें ऐसी है जो हमारे मानने योग्य नहीं

646
00:50:17,920 --> 00:50:22,640
है। ठीक। हां। ठीक है।

647
00:50:22,640 --> 00:50:26,640
तो अब बात ये है कि जो जो

648
00:50:26,640 --> 00:50:30,800
बातें मानने योग्य नहीं है इसका मतलब व्यर्थ है। व्यर्थ

649
00:50:30,800 --> 00:50:35,200
है ना? हमारे लिए तो व्यर्थ है। पूर्ण

650
00:50:35,200 --> 00:50:39,760
होना नहीं है। तो उस उस पन्ने को यदि मैं फाड़ दूं

651
00:50:39,760 --> 00:50:43,920
तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। कोई दिक्कत नहीं है। उस

652
00:50:43,920 --> 00:50:48,000
पन्ने को यदि मैं फाड़ दूं हां। हमारे लिए कोई दिक्कत नहीं

653
00:50:48,000 --> 00:50:52,160
है। आपके लिए समाज के लिए हो सकती है। एक तो आप

654
00:50:52,160 --> 00:50:56,160
ही तो तत्व ज्ञान के चेले हैं ना। आपके अनुसार तो दिक्कत नहीं है। वही

655
00:50:56,160 --> 00:51:00,320
सच है ना। यानी ये श्रीमद् भगवत गीता जो शास्त्र है इसमें

656
00:51:00,320 --> 00:51:04,400
से कुछ पन्ने जो आपके अनुसार काल का अपना मत है वो अगर फाड़ दिए

657
00:51:04,400 --> 00:51:07,360
जाए तो आपको कोई दिक्कत नहीं है रामपाल को

658
00:51:07,360 --> 00:51:11,760
कोई दिक्कत नहीं है

659
00:51:11,760 --> 00:51:16,160
ना नहीं है नहीं है हां ये है रियलिटी रामपाल

660
00:51:16,160 --> 00:51:20,720
की हां तो अब बात ये आती है कि पन्ने

661
00:51:20,720 --> 00:51:24,720
एक मिनट एक मिनट एक मिनट

662
00:51:24,720 --> 00:51:28,800
पन्ने फाड़ देने के बाद पन्ने फाड़ देने के बाद

663
00:51:28,800 --> 00:51:33,040
यह वही भगवत गीता रह जाएगी जिस पर हिंदू विश्वास करता था, माथे से लगाता

664
00:51:33,040 --> 00:51:38,320
था। ये भगवत गीता होगी। सेम

665
00:51:38,320 --> 00:51:43,600
हां सुन एक बात बताता हूं। बहुत लोगों ने

666
00:51:43,600 --> 00:51:47,680
मैंने क्या पूछा है? पन्ने फाड़ देने के बाद

667
00:51:47,680 --> 00:51:51,680
मैंने कहा पन्ने फाड़ दे। मैंने कहा पन्ने फाड़ देने के

668
00:51:51,680 --> 00:51:55,680
बाद यह वो भगवत गीता होगी जिसको हिंदू सम्मान करता है। मैं यह पूछ

669
00:51:55,680 --> 00:51:59,680
रहा हूं। मैं आपको इतनी पतली गीता गीता का सार

670
00:51:59,680 --> 00:52:05,680
बता दूंगा बहुत सारी उनके लिखा ही नहीं इसमें है

671
00:52:06,240 --> 00:52:10,400
मैंने क्या पूछा है मैंने क्या पूछा है भगवत

672
00:52:10,400 --> 00:52:14,480
गीता जिसको हिंदू मानता है आपके हिसाब से उसमें से कुछ पन्ने फाड़

673
00:52:14,480 --> 00:52:19,120
दिए जाएंगे कोई दिक्कत नहीं है क्या पन्ने फाड़ने के बाद

674
00:52:19,120 --> 00:52:25,120
क्या पन्ने फाड़ने के बाद

675
00:52:26,800 --> 00:52:31,440
आपकी बात सुनूंगा भी तो सुनो ना

676
00:52:31,440 --> 00:52:35,760
मेरा प्रश्न यह है मैं प्रश्न बोल लूं श्रीमद् भगवत

677
00:52:35,760 --> 00:52:40,000
गीता को हिंदू सम्मान करता है श्रीमद् भगवत गीता हिंदू की आस्था

678
00:52:40,000 --> 00:52:44,000
का विषय है रामपाल बाबा के अनुसार और आपके अनुसार

679
00:52:44,000 --> 00:52:48,080
श्रीमद भगवत गीता के कुछ पन्ने व्यर्थ हैं फाड़ दिए जाए तो कोई दिक्कत नहीं

680
00:52:48,080 --> 00:52:52,240
होनी चाहिए तो यदि पन्ने फाड़ दिए जाएंगे तो क्या जो श्रीमद् भगवत

681
00:52:52,240 --> 00:52:58,240
गीता होगी वो वही भगवत गीता रह जाएगी जिसको हिंदू सम्मान करता है।

682
00:52:59,200 --> 00:53:03,440
पहले भी बहुत सारे पूछा है क्या वो भगवत गीता

683
00:53:03,440 --> 00:53:07,440
रह जाएगी जिसका हिंदू सम्मान करता है। दूसरों की आड़ मत लो।

684
00:53:07,440 --> 00:53:12,160
आप अपना बताओ दूसरों की आड़ मत लो आप।

685
00:53:12,160 --> 00:53:16,240
संक्षिप्त गीता ज्ञान लिख दे और क्या पन्ना निकाल के लिख दे संक्षिप्त ज्ञान

686
00:53:16,240 --> 00:53:20,400
गीता। बहुत सारे लेखों ने तो लिखा है। एक मिनट एक मिनट एक

687
00:53:20,400 --> 00:53:24,480
संक्षिप्त ज्ञान गीता है। अगर मैं कहूं इस ज्ञान गंगा

688
00:53:24,480 --> 00:53:28,480
यह ज्ञान गंगा है ना तुम्हारी

689
00:53:28,480 --> 00:53:32,560
अगर मैं कहूं इसमें कुछ पन्ने जो हैं भूत ने लिख दिए हैं उसको फाड़ दूं

690
00:53:32,560 --> 00:53:37,120
मैं तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा

691
00:53:37,120 --> 00:53:41,120
वो तो तुम करवा ही चुके हो वो तो करवा चुके हो आगे भी

692
00:53:41,120 --> 00:53:45,440
आगे भी मैं तो तुम्हें बुरा नहीं लगा ना बुरा तो लगा

693
00:53:45,440 --> 00:53:49,520
क्योंकि तुमने समझा नहीं अरे भाई तो

694
00:53:49,520 --> 00:53:53,760
इसका मतलब ये है कि आपको बुरा लगे लगेगा जिसमें हमारी आस्था है उसको आपने

695
00:53:53,760 --> 00:53:57,920
छेड़ दिया उसमें इंटरप्ट कर दिया उसमें नहीं छेड़ा है आप समझे

696
00:53:57,920 --> 00:54:02,080
नहीं है आप भी नहीं समझे सुनो सुनो सुनो सुनो अभी

697
00:54:02,080 --> 00:54:06,320
मैं वापस विषय पे वापस विषय पे आ रहा हूं वापस विषय

698
00:54:06,320 --> 00:54:10,560
पे आ रहा हूं सातव अध्याय में गीता सातवें अध्याय में गीता

699
00:54:10,560 --> 00:54:14,800
ज्ञान दाता ने कहा है कि मैं सनातन बीज हूं सनातन

700
00:54:14,800 --> 00:54:19,200
बीज इस सृष्टि का सातव अध्याय में

701
00:54:19,200 --> 00:54:24,160
यह बात सत्य है कि गलत है

702
00:54:24,160 --> 00:54:28,080
कौन से श्लोक में है?

703
00:54:28,080 --> 00:54:34,080
सातवा अध्याय कौन सा श्लोक है?

704
00:54:36,480 --> 00:54:41,600
बता रहा हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़]

705
00:54:41,600 --> 00:54:47,600
कहां है? बड़ी वाली।

706
00:55:01,440 --> 00:55:04,480
ये दसवा श्लोक

707
00:55:04,480 --> 00:55:10,480
अच्छा

708
00:55:12,160 --> 00:55:15,840
ठीक है हम

709
00:55:15,840 --> 00:55:20,640
अच्छा

710
00:55:20,640 --> 00:55:24,820
अब ये सनातन गीत तो कह रहा है अपने आप को ना

711
00:55:24,820 --> 00:55:27,600
[हंसी]

712
00:55:27,600 --> 00:55:31,600
अब आप निकालिए अध्याय आठ के श्लोक मुझे

713
00:55:31,600 --> 00:55:35,600
मुझे आप ये बताइए ये सनातन बीज का क्या करें झूठ माने या सच

714
00:55:35,600 --> 00:55:38,480
माने?

715
00:55:38,480 --> 00:55:42,480
21 ब्रह्मांड के लिए सनातन बीज यही है। सनातन का

716
00:55:42,480 --> 00:55:46,480
अर्थ क्या है? मूर्ख व्यक्ति अरे सनातन का अर्थ

717
00:55:46,480 --> 00:55:51,280
है जिसका ना आदि है ना अंत है और उसका

718
00:55:51,280 --> 00:55:55,440
तो काल का अरे काल का आदि है ना?

719
00:55:55,440 --> 00:55:59,600
काल का आदि है कि नहीं? काल का आदि है कि नहीं?

720
00:55:59,600 --> 00:56:03,760
हां। तो फिर उसको सनातन [हंसी] कैसे कह रहे हो? उसको सनातन क्यों

721
00:56:03,760 --> 00:56:07,920
कह रहे हो? सुनो सुनो सुनो हे अर्जुन तेरे मेरे बहुत जन्म हो

722
00:56:07,920 --> 00:56:12,080
चुके हैं। उन्हें तू तू नहीं जानता मैं जानता हूं क्योंकि उसकी भी जन्म मृत्यु होती

723
00:56:12,080 --> 00:56:16,560
है। यानी कि

724
00:56:16,560 --> 00:56:21,040
यानी कि गीता ज्ञान दाता के अध्याय

725
00:56:21,040 --> 00:56:25,120
चार के श्लोक सात से ये अध्याय सात का श्लोक 10 कट

726
00:56:25,120 --> 00:56:29,280
रहा है। ठीक। यही बात है ना? यही

727
00:56:29,280 --> 00:56:33,280
बात है ना कि और कोई बात है? हां कटेगी बात।

728
00:56:33,280 --> 00:56:37,520
हां तो यह निर्णय तो यह निर्णय एक मिनट

729
00:56:37,520 --> 00:56:41,760
एक मिनट यह निर्णय आपने कैसे किया कि चार सात

730
00:56:41,760 --> 00:56:45,840
से सात 10 काटना है। ये क्यों नहीं कर सकते कि सात 10 से चार सात काटना

731
00:56:45,840 --> 00:56:48,400
है।

732
00:56:48,400 --> 00:56:52,960
यह निर्णय कैसे किया? जैसे एक एक ग्रंथ में दो वाक्य हैं।

733
00:56:52,960 --> 00:56:57,360
विपरीत वाक्य है। एक कह रहा है सनातन बीज, एक कह रहा है जन्म मृत्यु। यह निर्णय

734
00:56:57,360 --> 00:57:01,600
आपने कैसे किया कि चार सात के आधार पर चार 7

735
00:57:01,600 --> 00:57:05,680
10 काटना है। 7 10 के आधार पर चार सात नहीं काटना है। उसको काट

736
00:57:05,680 --> 00:57:09,920
दो। 7 10 को मान लो। चार सात को रख चार सात को काट दो। रख लो

737
00:57:09,920 --> 00:57:14,000
चार 10 को। देखो वो यहीं पर लिखा है। यहीं पर लिखा है। मैं

738
00:57:14,000 --> 00:57:18,320
एक उदाहरण देता हूं। सुनिए। आपका स्टूडियो

739
00:57:18,320 --> 00:57:22,320
बहुत सारे ग्रंथ रखे हैं। इस पर कहेंगे कि भाई ये मेरे खरीदे हुए ग्रंथ

740
00:57:22,320 --> 00:57:26,320
है। स्टूडियो मैंने बना सब कुछ मेरा है। ठीक है? आपका

741
00:57:26,320 --> 00:57:30,480
जितनी है वो आपकी है। लेकिन अगर मैंने कहा सनातन

742
00:57:30,480 --> 00:57:31,920
मैंने कहा सनातन

743
00:57:31,920 --> 00:57:36,000
जिसका कोई आदि नहीं होता है तो वो दूसरा

744
00:57:36,000 --> 00:57:40,080
जिसका कोई अरे मेरे भाई

745
00:57:40,080 --> 00:57:45,520
ये कहां लिखा है? दूसरा सनातन कहां लिखा है? ये बताओ

746
00:57:45,520 --> 00:57:49,840
अध्याय आठ श्लोक 20 निकालो।

747
00:57:49,840 --> 00:57:53,920
हां परंतु उस अव्यक्त से भी

748
00:57:53,920 --> 00:57:58,080
परे अति दूसरा विलक्षण सनातन अव्यक्त भाव है।

749
00:57:58,080 --> 00:58:02,640
इसमें ये लिखा है कि ये सात द वाले सनातन की बात हो रही है।

750
00:58:02,640 --> 00:58:06,720
ये इसमें लिखा है मैंने कहा मैंने कहा इसमें ये

751
00:58:06,720 --> 00:58:11,040
लिखा है कि सात 10 वाले सनातन की बात हो रही है। और मैंने

752
00:58:11,040 --> 00:58:15,760
तुमको क्या कहा? मैंने तुमको क्या कहा? मैं

753
00:58:15,760 --> 00:58:19,840
मैंने कहा मैंने कहा मैंने क्या कहा है आपसे

754
00:58:19,840 --> 00:58:23,920
मैंने यह कहा है कि 7 10 को आप 7 10 को आप इसलिए

755
00:58:23,920 --> 00:58:28,000
काट रहे कि 8 20 से मैच नहीं खा रहा है तो आप 710 से 820 को काट

756
00:58:28,000 --> 00:58:32,160
दो ना आप 8 20 को क्यों रख रहे हो

757
00:58:32,160 --> 00:58:37,200
आपने तय कैसे किया मैं वो जानना चाह रहा हूं कि गीता में अगर दो

758
00:58:37,200 --> 00:58:41,600
अगर गीता में एक अभी तक आप ये कह रहे थे कि भाई एक बात कट

759
00:58:41,600 --> 00:58:45,680
वो कटेगी नहीं वो उसने अपने बारे में बताई मगर आप ये कह रहे हो अब जो

760
00:58:45,680 --> 00:58:47,040
है जो

761
00:58:47,040 --> 00:58:51,200
गीता कहने वाला है उसको सनातन नहीं मानना है। कुल मिलाकर

762
00:58:51,200 --> 00:58:55,280
के उसको मानना है कि वो पैदा होता है। यही है ना? यही

763
00:58:55,280 --> 00:58:59,520
है ना? गीता गीता ज्ञान गीता ज्ञान

764
00:58:59,520 --> 00:59:03,520
दाता का जन्म होता है। ये मानना है ना? वो सनातन

765
00:59:03,520 --> 00:59:07,520
नहीं है। ये मानना है ना? हां। ये मानना है तो

766
00:59:07,520 --> 00:59:11,600
[हंसी] एक जगह वो खुद एक जगह वो खुद कह रहा है। एक जगह वो

767
00:59:11,600 --> 00:59:15,680
खुद कह रहा है कि मेरी जन्म मृत्यु होती

768
00:59:15,680 --> 00:59:20,000
है। एक जगह वो खुद कह रहा है कि मेरा कोई भी सनातन

769
00:59:20,000 --> 00:59:24,880
मुझसे पहले कुछ नहीं। मैं ही सनातन हूं। मैं ही सनातन बीज हूं। ठीक है?

770
00:59:24,880 --> 00:59:28,960
अब हमने ये निर्णय कैसे किया कि सनातन बीज वाले को

771
00:59:28,960 --> 00:59:33,120
काटना है जन्म मृत्यु वाले से या आठ बीज से।

772
00:59:33,120 --> 00:59:37,360
हम यह क्यों नहीं करते कि हम लोग जो है सात 10 को रखें कि नहीं

773
00:59:37,360 --> 00:59:41,520
सनातन बीज ही है और वो जो बोला है चार सात में वो गलत बोला है और वो

774
00:59:41,520 --> 00:59:45,600
जो बोला है आठ 20 में वो गलत बोला है हम ये क्यों नहीं कर सकते मैं

775
00:59:45,600 --> 00:59:49,600
आपसे ये इसलिए पूछ रहा हूं जिससे कि ये निकल के आए

776
00:59:49,600 --> 00:59:54,080
कि भगवत गीता

777
00:59:54,080 --> 01:00:00,080
आवाज नहीं आ रही आपकी

778
01:00:08,480 --> 01:00:13,200
चार्ज नहीं अब आ रही है आवाज हां

779
01:00:13,200 --> 01:00:17,200
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं है ना इसलिए पूछ रहा

780
01:00:17,200 --> 01:00:21,360
हूं मैं ये जिससे कि हमको ये स्पष्ट हो पाए कि भगवत गीता

781
01:00:21,360 --> 01:00:25,360
आपके लिए अंतिम प्रमाण नहीं है। अंतिम प्रमाण कुछ और है जिसके आधार पर आप

782
01:00:25,360 --> 01:00:29,440
ये सेलेक्ट कर रहे हो कि भगवत गीता में क्या रखना है क्या नहीं

783
01:00:29,440 --> 01:00:34,000
रखना है

784
01:00:34,000 --> 01:00:38,320
समझ रहे हो वही बात समझ रहे हो हां

785
01:00:38,320 --> 01:00:43,040
सुनो सुनो सुनो सुनो अब बात ये है

786
01:00:43,040 --> 01:00:47,040
हम लोग जो है भगवत गीता को ऐसे नहीं मानते हैं कि किसी की और किसी

787
01:00:47,040 --> 01:00:51,120
से उसको जो है जांच कर लो और उसमें जो बातें उसके अनुसार सही

788
01:00:51,120 --> 01:00:55,200
हो वो मान लो और जो बात उसके अनुसार सही ना हो वो ना मानो। हम ऐसे नहीं मानते।

789
01:00:55,200 --> 01:00:59,280
भगवत गीता हमारे लिए अंतिम एक मिनट किसी में लिखा है तो नहीं

790
01:00:59,280 --> 01:01:03,840
मानोगे क्या? इसी में लिखा है। अरे अरे

791
01:01:03,840 --> 01:01:08,000
अरे मेरे भाई मैं क्या कह रहा हूं? मैं ये कह रहा हूं भगवत गीता में

792
01:01:08,000 --> 01:01:12,000
काल ने अपने आप को सनातन कहा है। सनातन

793
01:01:12,000 --> 01:01:16,400
कहा है ना काल ने? तो सनातन का मतलब होता है जिसका कोई आदि

794
01:01:16,400 --> 01:01:20,480
नहीं है। जिसकी शुरुआत नहीं है। मगर

795
01:01:20,480 --> 01:01:24,640
तुम्हारे अनुसार काल जन्म लेता है। ठीक है। अब

796
01:01:24,640 --> 01:01:29,440
तुम कह रहे हो कि वो नहीं वो खुद कहता है।

797
01:01:29,440 --> 01:01:33,520
वो खुद कहता है। वो खुद वो वो बिल्कुल सही। बिल्कुल अच्छी बात है। वो

798
01:01:33,520 --> 01:01:37,680
खुद कहता है। मैं आपकी बात मान ली अभी के लिए। मैंने आपकी बात अभी के लिए मान ली।

799
01:01:37,680 --> 01:01:42,160
मैंने आपकी बात मान ली अभी के लिए। मैं मेरा प्रश्न कुछ और है।

800
01:01:42,160 --> 01:01:46,160
जब वो यह भी कह रहा है कि मेरा कोई शुरुआत नहीं है। जब वो

801
01:01:46,160 --> 01:01:49,360
यह भी कह रहा है कि मेरी शुरुआत है तो इसमें से

802
01:01:49,360 --> 01:01:53,520
मेरी शुरुआत है। आपने कैसे तय किया कि ये सच है? और ये मेरा

803
01:01:53,520 --> 01:01:57,680
मेरी शुरुआत नहीं है। ये आपने कैसे किया तय कि ये झूठ है। ये पूछ रहा हूं। सवाल

804
01:01:57,680 --> 01:02:01,760
ये नहीं है कि वो गीता में ये भी कह रहा है कि नहीं कह रहा है। सवाल

805
01:02:01,760 --> 01:02:06,000
ये है आप उसकी दोहरी बात में से एक को प्रमाण दूसरी को प्रमाण क्यों नहीं?

806
01:02:06,000 --> 01:02:10,160
कैसे मान रहे हैं? इस बात को मैं पहले बता

807
01:02:10,160 --> 01:02:14,160
चुका हूं कि गीता दो प्रकार का ज्ञान है। एक गीता

808
01:02:14,160 --> 01:02:18,160
ज्ञान खुद के बारे में बता रहा। मेरी बात तो सुनो। ये कहां लिखा है

809
01:02:18,160 --> 01:02:22,640
गीता? ये गीता में कहां लिखा है?

810
01:02:22,640 --> 01:02:27,280
जो जिसको निकाल दे वही तो तत्वदर्शी संत है। वही सूक्ष्म ज्ञान है।

811
01:02:27,280 --> 01:02:31,280
यानी कि तत्वदर्शी संत यानी कि गीता में क्या सच है? क्या झूठ

812
01:02:31,280 --> 01:02:35,440
है? ये तत्वदर्शी संत बताएगा। ऐसे बोलो ना। झूठ ऐसा

813
01:02:35,440 --> 01:02:39,680
नहीं है जो लिखा है जो लिखा है उसको बता दे विभेद

814
01:02:39,680 --> 01:02:43,760
कर दे वही तत्वदर्शी है वही तत्व ये तो इस सच

815
01:02:43,760 --> 01:02:47,840
इस सच झूठ से मतलब नहीं है कि ये सनातन है कि नहीं काल झूठ

816
01:02:47,840 --> 01:02:52,640
से मतलब नहीं है ये सीमित है

817
01:02:52,640 --> 01:02:57,280
मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा

818
01:02:57,280 --> 01:03:01,280
मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा है मैंने कहा कि

819
01:03:01,280 --> 01:03:06,160
इसको सनातन नहीं मानना है ना तत्व के आधार पे

820
01:03:06,160 --> 01:03:10,880
ये उतना सनातन नहीं है जितना चाहिए। अरे यार

821
01:03:10,880 --> 01:03:14,960
ये आप कौन से शब्दकोश एक मिनट ये कौन से

822
01:03:14,960 --> 01:03:19,520
शब्दकोश में लिखा है इतना उतना वाला सनातन शब्दकोश कहां है?

823
01:03:19,520 --> 01:03:25,520
अध्याय 18 श्लोक 62 निकालो। क्या बताओ?

824
01:03:26,000 --> 01:03:30,080
अध्याय 18 श्लोक 62 में लिखा है कि हे अर्जुन तू सर्वभाव से

825
01:03:30,080 --> 01:03:34,080
उस परमेश्वर की शरण में जा। उसकी कृपा से ही

826
01:03:34,080 --> 01:03:40,080
तू

827
01:03:40,640 --> 01:03:44,800
कृपा से ही तू परम शांति तथा सनातन परमधाम को प्राप्त

828
01:03:44,800 --> 01:03:50,800
होगा। एक सनातन ये है सनातन

829
01:03:50,880 --> 01:03:54,960
सनातन परम तो ये वो नहीं है। ये कहां लिखा है? ये वो नहीं

830
01:03:54,960 --> 01:03:59,040
है। ये कहां लिखा है? अब देखो इसे तत्व बताएगा।

831
01:03:59,040 --> 01:04:03,200
मैंने हां ऐसे बोल ऐसे बोलो ना भाई सीधी बात करो ना

832
01:04:03,200 --> 01:04:07,200
तत्वदर्शी संत बताएगा क्या सच है क्या झूठ है आप गीता से सिद्ध नहीं कर

833
01:04:07,200 --> 01:04:12,000
पाओगे गीता की सीमा में रह के आप ये सिद्ध नहीं कर पाओगे

834
01:04:12,000 --> 01:04:16,000
कि एक बताएंगे ना बताएंगे अरे अरे

835
01:04:16,000 --> 01:04:20,240
रुको अरे रुको अरे भाई रुको मेरी बात सुनो

836
01:04:20,240 --> 01:04:24,240
जो प्रश्न है ना वो ये है प्रश्न ये है कि

837
01:04:24,240 --> 01:04:28,320
आप गीता में दो प्रकार के श्लोक है आप गीता

838
01:04:28,320 --> 01:04:32,400
में यह तय कैसे करेंगे कि इस श्लोक के आधार पर वो श्लोक काटना है। उस श्लोक

839
01:04:32,400 --> 01:04:36,400
के आधार पर यह श्लोक नहीं काटना है। इसको समझो। इसको समझ लो मेरी

840
01:04:36,400 --> 01:04:40,480
बात। जब गीता में दो प्रकार के श्लोक हैं तो आप ये कैसे

841
01:04:40,480 --> 01:04:41,040
तय करोगे

842
01:04:41,040 --> 01:04:45,200
कि इस श्लोक के आधार पर वो श्लोक काटना है। उस श्लोक के आधार पर यह श्लोक क्यों नहीं काटोगे? जैसे

843
01:04:45,200 --> 01:04:49,280
कि जैसे कि अभी आपने कहा कि भाई आपके हिसाब से

844
01:04:49,280 --> 01:04:53,360
गीता में 18 62 में किसी और को

845
01:04:53,360 --> 01:04:57,680
परमधाम या सनातन कहा गया है। ठीक है? ठीक है?

846
01:04:57,680 --> 01:05:01,680
और सातव में सातव अध्याय के 10व श्लोक में जो गीता

847
01:05:01,680 --> 01:05:05,920
कह रहा है वो खुद को सनातन कह रहा है। ठीक है? तो

848
01:05:05,920 --> 01:05:11,920
आप 7 10 के आधार पे 18 62 काट दो ना।

849
01:05:12,160 --> 01:05:16,240
7 10 के आधार पे 18 62 क्यों नहीं काटा? 7 10 के आधार

850
01:05:16,240 --> 01:05:20,240
पे ये आपने 8 20 क्यों नहीं काटा? 7 10 के आधार पे आपने

851
01:05:20,240 --> 01:05:24,320
चार सात क्यों नहीं काटा? अन्यों के आधार पे इसको क्यों काट

852
01:05:24,320 --> 01:05:28,400
रहे हो? वो तो कटा कटाया ही है। काटेंगे

853
01:05:28,400 --> 01:05:32,560
उससे क्या है? है ना? अरे अरे कहां से कटा कटाया है?

854
01:05:32,560 --> 01:05:36,880
जैसे रामपाल की नाक कटी हुई वैसे कटा कटाया क्या? आप तो

855
01:05:36,880 --> 01:05:42,560
लोगों क्रोध कर रहे हैं। क्या समझ लो

856
01:05:42,560 --> 01:05:46,640
ऐसे ऐसे ही आप नहीं समझ रहे हो। ऐसे ही आप नहीं

857
01:05:46,640 --> 01:05:51,520
समझ रहे हो। तो समझाओ तो समझाओ तो समझाओ।

858
01:05:51,520 --> 01:05:55,520
हमें नहीं समझाओ। नहीं समझाना यहां से।

859
01:05:55,520 --> 01:05:56,880
भाग यहां से

860
01:05:56,880 --> 01:05:59,440
भाग

861
01:05:59,440 --> 01:06:02,560
भाग

862
01:06:02,560 --> 01:06:06,720
मेरे ही चैनल पर आकर के वो कटा कटाया बोलेगा भगवत गीता को कटा

863
01:06:06,720 --> 01:06:10,800
कटाया बोलेगा और फिर कहेगा मुझे नहीं समझाना अगर कोई क्लेम कर रहे

864
01:06:10,800 --> 01:06:14,800
हो तो उसको सिद्ध करो सिद्ध करो गीता

865
01:06:14,800 --> 01:06:19,040
में रह के गीता में रह के गीता का ज्ञान कैसे कट

866
01:06:19,040 --> 01:06:25,040
रहा है वो सिद्ध करो बोलो

867
01:06:26,560 --> 01:06:30,640
दो प्रकार का ज्ञान है। आपसे गायत्री मंत्र का अर्थ नहीं आता। अरे

868
01:06:30,640 --> 01:06:35,200
भाई चुप चुप

869
01:06:35,200 --> 01:06:39,200
बात हो रही है कि गीता का ज्ञान गीता से कैसे कट रहा है वो बताओ। दो

870
01:06:39,200 --> 01:06:43,200
प्रकार का ज्ञान बाहर से ले आ रहे हो। तत्वदर्शी बाहर से ले आ रहे हो।

871
01:06:43,200 --> 01:06:49,200
अभी तत्वदर्शी पे मैं आऊंगा।

872
01:06:52,320 --> 01:06:56,560
गायत्री मंत्र का अर्थ है हे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर मेरी

873
01:06:56,560 --> 01:07:00,880
बुद्धि को आप उसमें लगाएं सद्बुद्धि में मैं आपका

874
01:07:00,880 --> 01:07:06,880
वरण करता हूं। हां बस हां

875
01:07:14,000 --> 01:07:18,240
अब हम लोग फिलहाल ये बात कर रहे हैं कि गीता

876
01:07:18,240 --> 01:07:22,400
में गीता एक मिनट एक मिनट भाई साहब देखो हम थोड़ा सा मुख्य विषय पर वापस

877
01:07:22,400 --> 01:07:26,640
आ जाए मुख्य विषय पर वापस आ जाए गीता

878
01:07:26,640 --> 01:07:30,960
में दो प्रकार का ज्ञान आपने कहा इसका कोई प्रमाण गीता में नहीं है

879
01:07:30,960 --> 01:07:35,040
गीता में नहीं लिखा लिखा है। आपने अपने हिसाब से तय किया है। एक मिनट

880
01:07:35,040 --> 01:07:39,120
आपने अपने हिसाब से तय किया। हमने तय नहीं किया है। सुन लीजिए। मेरा

881
01:07:39,120 --> 01:07:43,840
मेरी बात सुन लीजिए। मैं क्या पूछ रहा हूं। आपने अपने हिसाब से तय किया है

882
01:07:43,840 --> 01:07:48,000
और मैंने अपने हिसाब से तय नहीं किया। मैं आपका हिसाब नहीं मानता हूं। मुझे आपको

883
01:07:48,000 --> 01:07:52,240
सिद्ध करना होगा कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है और एक ज्ञान से दूसरा

884
01:07:52,240 --> 01:07:56,320
ज्ञान कटेगा तो उसका आधार क्या होगा। अगर यह बात मान ली जाए कि

885
01:07:56,320 --> 01:08:00,560
गीता में दो प्रकार का ज्ञान है। तो किस ज्ञान से कौन सा ज्ञान कटेगा?

886
01:08:00,560 --> 01:08:04,800
इसका फैसला किस आधार पर होगा? गीता के अंदर से।

887
01:08:04,800 --> 01:08:07,440
यह आप मुझे सिद्ध करिए। या तो ये कहिए गीता के बाहर

888
01:08:07,440 --> 01:08:11,440
से हम तय करेंगे। है ना? ठीक है? समझ गए ना सवाल? हां। एक

889
01:08:11,440 --> 01:08:15,520
समझ गए? जहां गीता ज्ञान दाता कहता है कि

890
01:08:15,520 --> 01:08:19,760
मेरी भक्ति मेरे गुण मेरे तत्व मेरे सब कुछ वो गीता का गीता

891
01:08:19,760 --> 01:08:23,840
ज्ञान दाता खुद का ज्ञान है। और जब अरे मेरे [हंसी] भाई गीता

892
01:08:23,840 --> 01:08:27,840
मेरे भाई मैं पूछ ये रहा हूं। गीता के अंदर से सिद्ध करो कि ऐसा

893
01:08:27,840 --> 01:08:31,840
ऐसा है। यह मुझे न्यूज़ बुलेटिन मत सुनाओ।

894
01:08:31,840 --> 01:08:37,840
गीता के अंदर प्रमाण कहां है? वो बताओ।

895
01:08:38,640 --> 01:08:40,960
हम

896
01:08:40,960 --> 01:08:43,120
निकाले

897
01:08:43,120 --> 01:08:49,120
क्या निकाले? अध्याय सात श्लोक 29

898
01:08:50,000 --> 01:08:54,400
मेरे साथ होकर जरा और मरण से छूटने

899
01:08:54,400 --> 01:08:58,480
के लिए यत्न करते हैं वे पुरुष उस उस अलग

900
01:08:58,480 --> 01:09:02,800
कर रहा है गीता ज्ञान दाता से उस ब्रह्म को संपूर्ण अध्यात्म

901
01:09:02,800 --> 01:09:06,800
को तथा संपूर्ण कर्म को जानते हैं

902
01:09:06,800 --> 01:09:10,960
कर रहा कर दिया अलग कर दिया

903
01:09:10,960 --> 01:09:15,200
है अलग कर दिया नहीं अभी और है अध्याय

904
01:09:15,200 --> 01:09:21,200
आठ निकालो

905
01:09:30,240 --> 01:09:34,240
श्लोक आठ हे पार्थ यह नियम

906
01:09:34,240 --> 01:09:38,240
है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यास रूप योग से युक्त

907
01:09:38,240 --> 01:09:42,480
दूसरी ओर ना जाने वाले से निरंतर चिंतन करता हुआ मनुष्य परम

908
01:09:42,480 --> 01:09:46,480
प्रकाश दिव्य पुरुष को अर्थात परमेश्वर को ही प्राप्त होता है।

909
01:09:46,480 --> 01:09:50,480
यहां ये नहीं कहा मुझे प्राप्त होता है। परमेश्वर को ही प्राप्त होता है।

910
01:09:50,480 --> 01:09:54,480
यह भी अलग हो गया। जो पुरुष सर्व

911
01:09:54,480 --> 01:09:58,800
अनादि सबके नता सूक्ष अति सूक्ष सबके पोषण करने वाले अच

912
01:09:58,800 --> 01:10:03,040
स्वरूप सुख के श्रद्धा से नित चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति पर

913
01:10:03,040 --> 01:10:05,040
सच्चिदानंद परमेश्वर स्मरण करता

914
01:10:05,040 --> 01:10:09,120
है और भक्ति पुरुष अंत काल में भी योग

915
01:10:09,120 --> 01:10:13,280
आपका प्रमाण मैंने एक दो से पर्याप्त है बहुत सारे लाइन लगाने

916
01:10:13,280 --> 01:10:17,360
की जरूरत नहीं है। आपने उसका दिया है ना उस उसका दिया है

917
01:10:17,360 --> 01:10:21,440
ना सुन लो सुन लो सुन लो मैंने सवाल

918
01:10:21,440 --> 01:10:25,520
ये किया है मैंने सवाल ये किया है कि

919
01:10:25,520 --> 01:10:29,760
जहां पर परमेश्वर को गीता ज्ञान दाता से अलग किया जा रहा है आपके

920
01:10:29,760 --> 01:10:33,840
हिसाब से। ठीक है? और एक जगह पर गीता

921
01:10:33,840 --> 01:10:38,160
ज्ञान दाता स्वयं को ही कह रहा है। ठीक? तो हम

922
01:10:38,160 --> 01:10:42,240
यहां पर ये निर्णय कैसे करेंगे कि वो जिसमें उसने अलग

923
01:10:42,240 --> 01:10:46,240
किया है अपने को उस श्लोक को तो रखना है और जिसमें उसने खुद को

924
01:10:46,240 --> 01:10:50,240
बताया उसको नहीं रखना है। सवाल ये है सवाल ये नहीं है कि गीता

925
01:10:50,240 --> 01:10:54,400
में अलग किया है कि नहीं किया है। सवाल ये

926
01:10:54,400 --> 01:10:58,400
है सवाल ये है कि अगर अलग किया है तो

927
01:10:58,400 --> 01:11:02,400
दो में से एक को किस आधार पर रखेंगे? वो आधार गीता में

928
01:11:02,400 --> 01:11:06,160
नहीं है।

929
01:11:06,160 --> 01:11:10,400
कहने का तात्पर्य यह है। कहने का तात्पर्य यह है

930
01:11:10,400 --> 01:11:14,400
कि जिसके प्रति हमारी प्रमाण्य बुद्धि नहीं होती है। इस बात को

931
01:11:14,400 --> 01:11:18,720
समझो थोड़ा जिसके प्रति हमारी प्रमाण नहीं समझा

932
01:11:18,720 --> 01:11:22,960
है। नहीं समझा है। 10 बार एक सवाल नहीं समझा

933
01:11:22,960 --> 01:11:27,040
है। मेरे बीच में मत बोलो। मेरे बीच में मत बोलो। आपको मैंने सुना। आपने

934
01:11:27,040 --> 01:11:31,360
प्रमाण दिए दो तीन प्रमाण जब दो तीन दे दिए उसके बाद मैंने आपको रोका।

935
01:11:31,360 --> 01:11:34,960
मैं अपनी बात रख रहा हूं।

936
01:11:34,960 --> 01:11:38,960
जिसके प्रति हमारी प्रमाण्य बुद्धि होती है उसका

937
01:11:38,960 --> 01:11:43,520
एक भी अक्षर हम कट नहीं करते हैं। भैया ऑपरेटर जी तब तक आप वह उस वाले

938
01:11:43,520 --> 01:11:47,600
वो निकालिए शास्त्र में से इनके तथाकथित शास्त्रों

939
01:11:47,600 --> 01:11:53,040
से उस वाली लाइनें निकालिए ऑपरेटर जी हां

940
01:11:53,040 --> 01:11:56,720
तो

941
01:11:56,720 --> 01:12:00,880
जिसके प्रति हमारी प्रमाण बुद्धि प्रमाण्य बुद्धि होती है उसके प्रति हमारी

942
01:12:00,880 --> 01:12:04,960
दोष दृष्टि नहीं हो सकती कि हमको इसका ये काटना है ये रखना है

943
01:12:04,960 --> 01:12:09,280
और अगर जिसके प्रति दोष दृष्टि है तो उसको उसमें

944
01:12:09,280 --> 01:12:13,280
से क्या काटना है क्या रखना इसके लिए हमारे पास तीसरा कोई ना कोई प्रमाण्य

945
01:12:13,280 --> 01:12:17,680
बुद्धि वाला व्यक्ति चाहिए। जैसे कि रामपाल की जो किताबें

946
01:12:17,680 --> 01:12:21,920
हैं उसमें क्या एक भी अक्षर आप ये कहोगे कि ये गलत है? ये रामपाल

947
01:12:21,920 --> 01:12:25,600
ने गलत बोल दिया है

948
01:12:25,600 --> 01:12:29,600
नहीं कहेंगे। नहीं कहेंगे। इसलिए नहीं कहेंगे क्योंकि

949
01:12:29,600 --> 01:12:33,600
वो आपके लिए प्रमाण है। ठीक है? तो यदि आप ये गीता में मान

950
01:12:33,600 --> 01:12:37,840
रहे हो कि दो प्रकार की बुद्धि दो प्रकार के बातें हैं उसमें

951
01:12:37,840 --> 01:12:41,840
तो प्रॉब्लम ये आ रही है दो प्रकार की बातें दिख रही हैं। है नहीं

952
01:12:41,840 --> 01:12:45,840
हमारी जब हम उसका अर्थ बताते तब मगर फिलहाल अगर आपकी बात मान ली

953
01:12:45,840 --> 01:12:49,840
जाए कि दो प्रकार का अर्थ है तो दो प्रकार के अर्थ में किस

954
01:12:49,840 --> 01:12:53,840
अर्थ के कारण दूसरे अर्थ को काटे इसका समाधान गीता के अनुसार नहीं

955
01:12:53,840 --> 01:12:57,840
हो सकता। जिसको भी आप ले आओगे सनातन बीज

956
01:12:57,840 --> 01:13:01,840
वाली बात को काटने के लिए आप जो भी श्लोक ले आओगे मैं आपसे

957
01:13:01,840 --> 01:13:05,840
यह पूछूंगा कि भैया सनातन बीज के आधार पे आपने इसको क्यों

958
01:13:05,840 --> 01:13:09,840
नहीं काटा आपने उसके आधार पर सनातन बीज को

959
01:13:09,840 --> 01:13:11,920
क्यों काट दिया ये बताओ तो

960
01:13:11,920 --> 01:13:17,040
गीता की सीमा में रह के आप नहीं बता सकते समझ रहे हो

961
01:13:17,040 --> 01:13:21,360
दो में से एक को किस आधार पर चुनना है ये गीता में डिसाइड नहीं हो पाएगा

962
01:13:21,360 --> 01:13:25,440
क्योंकि गीता हो गई गीता के प्रति हमारी दोष दृष्टि हो गई कि इसमें

963
01:13:25,440 --> 01:13:29,520
कहीं कहीं पर गलत है। तो गीता ये नहीं अब बता सकती कि

964
01:13:29,520 --> 01:13:33,600
भैया कहां पे गलत है कहां सही है। गलत नहीं कह रहे हैं। उसे

965
01:13:33,600 --> 01:13:37,600
गलत नहीं कह रहे हैं। क्योंकि गीता ज्ञान दाता खुद के बारे में बता रहा

966
01:13:37,600 --> 01:13:41,760
है। वो उसका अपना ज्ञान है। और जो परमात्मा के बारे में

967
01:13:41,760 --> 01:13:45,840
आपके आपके व्यक्ति ने स्वयं ये लिखा है कि कहीं कहीं

968
01:13:45,840 --> 01:13:50,080
पे वो मिथ्या ज्ञान है। झूठ ज्ञान है। मैं बता देता हूं कहां

969
01:13:50,080 --> 01:13:56,080
लिखा है।

970
01:14:13,920 --> 01:14:16,640
ये सब छोड़ो

971
01:14:16,640 --> 01:14:20,880
गीता का ज्ञान जो हो ना हो सो

972
01:14:20,880 --> 01:14:25,280
ठीक क्यों छोड़े आपके आपके बाबा जी अपनी किताब

973
01:14:25,280 --> 01:14:29,280
में यह कह रहे हैं कि गीता के गीता कहने वाले

974
01:14:29,280 --> 01:14:33,680
ने कई जगह झूठ बोला है और वो झूठ बोलता है

975
01:14:33,680 --> 01:14:37,840
अपना उल्लू सीधा करने के लिए बोला नहीं बता

976
01:14:37,840 --> 01:14:41,840
रहा हूं बता रहा हूं उसका ज्ञान करने लायक नहीं है ये

977
01:14:41,840 --> 01:14:47,040
बोला होगा अरे अरे झूठ बोला है यार ये हमें

978
01:14:47,040 --> 01:14:51,120
तुमने हमारी किताबें पढ़ ली है और ये देखो

979
01:14:51,120 --> 01:14:55,200
ये देखो काल ब्रह्म ने अपना स्वार्थ सिद्ध करने के

980
01:14:55,200 --> 01:14:59,360
लिए झूठ सच का सहारा भी लिया है।

981
01:14:59,360 --> 01:15:03,520
झूठ सच का सहारा भी लिया है। ये लिखा है गरमा

982
01:15:03,520 --> 01:15:06,880
गीता की पेज नंबर 24

983
01:15:06,880 --> 01:15:10,960
अब क्या ये बताओ इसलिए कहा है क्योंकि अर्जुन को कह रहा

984
01:15:10,960 --> 01:15:15,120
था कि अगर तुम जीत जाओगे जीत जाओगे तो अरे

985
01:15:15,120 --> 01:15:20,080
मूर्ख व्यक्ति अरे भैया काल झूठ बोलता है ना

986
01:15:20,080 --> 01:15:24,800
और मर जाओगे तो स्वर्ग कागे मैं मैं पूछ रहा हूं काल झूठ

987
01:15:24,800 --> 01:15:28,800
मैं पूछ रहा हूं काल झूठ बोलता है ना बोल तो गया

988
01:15:28,800 --> 01:15:29,440
ना

989
01:15:29,440 --> 01:15:34,880
बोल तो मैंने बोलता है काल झूठ बोलता है बोलता है ना

990
01:15:34,880 --> 01:15:39,040
गीता किसने गीता गीता गीता किसने बोली गीता किसने

991
01:15:39,040 --> 01:15:43,200
बोली काल ने काल ने काल

992
01:15:43,200 --> 01:15:47,280
तो झूठ बोलता है गीता काल ने बोली है

993
01:15:47,280 --> 01:15:51,280
अर्जुन को कह रहा था पूरा पूरी जब कहानी पुराण पढ़ोगे तब सभा समझ

994
01:15:51,280 --> 01:15:55,440
में अरे भैया मैं कह रहा हूं जो झूठा व्यक्ति है वो कहीं भी झूठ

995
01:15:55,440 --> 01:15:59,520
बोल सकता है ना ये कैसे तय होगा कि उसने गीता में झूठ

996
01:15:59,520 --> 01:16:03,520
नहीं बोला है हम्। युद्ध कराने के लिए उसने

997
01:16:03,520 --> 01:16:08,400
जबरदस्ती प्रेर। अरे यार फालतू की बातें करोगे। फालतू की बातें करोगे।

998
01:16:08,400 --> 01:16:12,400
मैं बात को नहीं मानूंगा। आगे नहीं बढ़ाऊंगा। मैं पूछ रहा हूं जो

999
01:16:12,400 --> 01:16:16,400
झूठ बोल बोलता है वो तो कहीं भी बोल सकता है ना। विषय को दूर रखो। उस विषय को

1000
01:16:16,400 --> 01:16:21,120
दूर रखो। थोड़ा क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें?

1001
01:16:21,120 --> 01:16:26,320
क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें?

1002
01:16:26,320 --> 01:16:30,400
क्यों दूर रखें? इसका आधार क्या है? इसका आधार

1003
01:16:30,400 --> 01:16:34,960
क्या है? इसका आधार क्या है?

1004
01:16:34,960 --> 01:16:38,960
दूर रखने का आधार क्या है?

1005
01:16:38,960 --> 01:16:43,360
मैं पूछ रहा हूं दूर रखने का आधार क्या है मेरे भाई? विषय

1006
01:16:43,360 --> 01:16:44,640
पर बात करनी है आपको।

1007
01:16:44,640 --> 01:16:49,760
विषय पर बात करनी है आपको। विषय पर बात करनी है आपको।

1008
01:16:49,760 --> 01:16:55,760
विषय पर बात करनी है आपको। विषय पर बात करनी है आपको?

1009
01:16:56,000 --> 01:17:02,000
करनी है। करनी है। अच्छा ठीक

1010
01:17:05,280 --> 01:17:09,280
दूर क्यों रखें इसलिए कि आपको समझना

1011
01:17:09,280 --> 01:17:13,440
नहीं है समझना चाहते नहीं है इसी कारण और फिर यहां क्यों आए हो

1012
01:17:13,440 --> 01:17:17,440
तो फिर यहां क्यों आए हो तो फिर यहां क्यों आए फिर तो कोई बात

1013
01:17:17,440 --> 01:17:21,680
मत बोलो जब मुझे समझनी नहीं है तय हो चुका ये कहो कि तुम्हारे तत्व

1014
01:17:21,680 --> 01:17:25,680
ज्ञानी की तत्व निकल चुका अब सुनो वो

1015
01:17:25,680 --> 01:17:29,040
जो उस कर रहे थे

1016
01:17:29,040 --> 01:17:35,040
आपने ढूंढा ऑपरेटर जी वह उस वाला

1017
01:17:41,920 --> 01:17:46,000
ऑपरेटर जी आपने उस वाला ढूंढा क्या? इनकी किताब में

1018
01:17:46,000 --> 01:17:50,640
उस लिखा है। अब मैं आपको दिखाता हूं।

1019
01:17:50,640 --> 01:17:55,360
हां भैया गरिमा गीता की पृष्ठ क्रमांक 63

1020
01:17:55,360 --> 01:17:59,200
इसमें आपका परमात्मा

1021
01:17:59,200 --> 01:18:03,440
कबीर साहब की वाणी दिखाई जा रही है। पष्ठ क्रमांक

1022
01:18:03,440 --> 01:18:08,720
63

1023
01:18:08,720 --> 01:18:14,720
63

1024
01:18:15,920 --> 01:18:20,480
63 में लिखा हुआ है

1025
01:18:20,480 --> 01:18:26,000
कि वह परमात्मा जिसका

1026
01:18:26,000 --> 01:18:30,000
काल ना हो यानी अविनाशी। यह कौन कह रहा है? यह कह रहा है कबीर। कबीर

1027
01:18:30,000 --> 01:18:35,440
कह रहे हैं ये बात। ठीक है? कबीर साहब कहते हैं

1028
01:18:35,440 --> 01:18:40,080
इसी शब्द रमायणी में वो रमायणी लिखी हुई है।

1029
01:18:40,080 --> 01:18:44,400
उसके बाद उसका भावार्थ लिखा गया है आपके रामपाल जी के द्वारा।

1030
01:18:44,400 --> 01:18:48,480
तो रामपाल जी भी कह रहे हैं यह बात और कबीर भी कह रहे हैं। क्या

1031
01:18:48,480 --> 01:18:54,320
कह रहे हैं कि

1032
01:18:54,320 --> 01:18:58,320
63 आ गया। इसमें नीचे आइए जरा इससे पहले

1033
01:18:58,320 --> 01:19:02,640
इनको दिखा दो। ये किसकी वाणी है? पहले दिखा दो पृष्ठ क्रमांक। पृष्ठ

1034
01:19:02,640 --> 01:19:06,800
क्रमांक दिखा दो। इधर पीछे इससे पहले वाला। इससे पहले

1035
01:19:06,800 --> 01:19:10,880
वाला हां हां ये देखो ये ये

1036
01:19:10,880 --> 01:19:15,120
लिखा है कबीर साहब। कबीर साहब कहते हैं इसी

1037
01:19:15,120 --> 01:19:19,520
शब्द रमायणी में और फिर शब्द है और फिर वहां से उसका भावार्थ

1038
01:19:19,520 --> 01:19:23,760
है और अब उसमें नीचे आओ 63 अब

1039
01:19:23,760 --> 01:19:29,520
इसमें 63 में लिखा हुआ है लगभग बीच का हिस्सा है

1040
01:19:29,520 --> 01:19:35,520
उसमें लिखा है कि वह परमात्मा जिसका जैसे अकाल मूरत वह परमात्मा

1041
01:19:36,640 --> 01:19:41,040
जैसे अकाल मूरत मुझे दिख रहा है बिल्कुल सेंटर में है इस समय

1042
01:19:41,040 --> 01:19:45,040
ऊपर से आठवीं दसवीं लाइन होगा मिल

1043
01:19:45,040 --> 01:19:49,040
गया ये मेरा हां मिल गया क्या

1044
01:19:49,040 --> 01:19:53,360
लिखा है वह परमात्मा जिसका जिसका

1045
01:19:53,360 --> 01:19:57,440
काल ना हो यानी अविनाशी अंडरलाइन कर दीजिए दर्शकों के लिए कर

1046
01:19:57,440 --> 01:20:02,160
दीजिए अंडरलाइन वह परमात्मा जिसका

1047
01:20:02,160 --> 01:20:06,320
काल ना हो यानी अविनाशी यह इस समय स्क्रीन पर जितनी लाइनें

1048
01:20:06,320 --> 01:20:11,520
लिख रही है वह गिन के बता दूं एक दो तीन चार पांच छ

1049
01:20:11,520 --> 01:20:15,680
सात आठवीं लाइन इस समय जितनी लाइन दिख रही है उसमें आठवीं

1050
01:20:15,680 --> 01:20:19,920
लाइन है।

1051
01:20:19,920 --> 01:20:24,080
अंडरलाइन कर दीजिए। वह परमात्मा जिसका काल ना हो

1052
01:20:24,080 --> 01:20:24,580
यानी

1053
01:20:24,400 --> 01:20:28,480
अविनाशी। सत्पुरुष वह सच्चा परमात्मा जिसका नाश

1054
01:20:28,480 --> 01:20:32,800
ना हो यानी अविनाशी। शब्द स्वरूपी राम वह परमात्मा

1055
01:20:32,800 --> 01:20:36,960
जिसका वास्तविक स्वरूप सप्त है। शब्द है। और शब्द खंड नहीं

1056
01:20:36,960 --> 01:20:39,840
होता। वह नाश में नहीं आता। यानी अविनाशी। ये

1057
01:20:39,840 --> 01:20:45,840
वह वह अपने से अलग कर दिया कबीर जी ने

1058
01:20:52,640 --> 01:20:56,720
इसके ऊपर है इसके ऊपर थोड़ा तीन चार लाइन वा

1059
01:20:56,720 --> 01:21:01,040
का क्या अर्थ निकल रहा है वह कोई और है ना

1060
01:21:01,040 --> 01:21:07,040
अपने लिए तो मैं कहेंगे ना जैसे वहां वो उस परमात्मा कह रहे हैं

1061
01:21:07,920 --> 01:21:12,800
वह परमात्मा क्यों कह है कबीर अलग है क्या कोई

1062
01:21:12,800 --> 01:21:17,840
हिंदी ग्रामर पढ़ी है व्याकरण पढ़ी है

1063
01:21:17,840 --> 01:21:22,800
कबीर अलग है और कबीर कबीर अलग है अविनाशी परमात्मा अलग है

1064
01:21:22,800 --> 01:21:27,040
वही अविनाशी परमात्मा कबीर ही अविनाशी परमात्मा है तो कबीर कहेगा

1065
01:21:27,040 --> 01:21:31,040
ना मैं मैं हर बार जैसे तुम कह रहे होगे भगवत गीता में काल ने कहा

1066
01:21:31,040 --> 01:21:34,880
उस उस क्यों कहा उस

1067
01:21:34,880 --> 01:21:39,600
उसने अपने बारे में अलग और परमात्मा के बारे में अलग ज्ञान

1068
01:21:39,600 --> 01:21:44,160
यहां पर भी यहां पर भी परमात्मा के बारे परमात्मा को अपने से अलग कर रहा है वो

1069
01:21:44,160 --> 01:21:48,320
कबीर और सुनो और परमा और और

1070
01:21:48,320 --> 01:21:52,480
ले लो और ले लो और ले लो और ले लो

1071
01:21:52,480 --> 01:21:56,640
इसमें वो वाला निकालिए जरा जिसमें वो कहा था कि वो

1072
01:21:56,640 --> 01:22:02,640
क्या कहते हैं प्रहलाद वगैरह सब जो है

1073
01:22:12,860 --> 01:22:18,860
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1074
01:22:25,600 --> 01:22:30,960
वो प्रह्लाद वाला पृष्ठ निकालिए जिसमें प्रह्लाद कहा है। प्रह्लाद

1075
01:22:30,960 --> 01:22:34,960
प्रह्लाद और व्यास ये सब नारद जी इन सबको कहा है कि

1076
01:22:34,960 --> 01:22:40,960
वो सब परमात्मा है।

1077
01:22:54,640 --> 01:22:58,880
ये परमात्मा की वाणी है। गुरु बिन वेद पढ़े

1078
01:22:58,880 --> 01:23:02,880
ज्ञानी अरे भाई साहब अरे रुक

1079
01:23:02,880 --> 01:23:07,200
जाओ भैया रुक जाओ रुक जाओ तुम्हारी एक एक बात तो हम काटेंगे

1080
01:23:07,200 --> 01:23:13,200
हम तुम्हारे जैसों के लिए हमारा जन्म हुआ है दिखा रहे है रुक जाओ

1081
01:23:18,960 --> 01:23:23,440
अच्छा तब तक इनको गीता 13 ज्ञान अमृत का दिखाओ 30

1082
01:23:23,440 --> 01:23:29,440
शंका समाधान का प्रश्न संख्या 30

1083
01:23:34,160 --> 01:23:37,520
हां

1084
01:23:37,520 --> 01:23:42,560
यहां पे ये आ जाओ 59

1085
01:23:42,560 --> 01:23:48,240
गरिमा गीता की 59 पे आ जाओ

1086
01:23:48,240 --> 01:23:53,600
और वह भी निकाल लो तब तक गीता तेरा ज्ञान अमृत

1087
01:23:53,600 --> 01:23:57,600
59 में आ जाओ 59 में यह कबीर की

1088
01:23:57,600 --> 01:24:02,000
वाणी चल रही है। कबीर रामायणी नंबर 36

1089
01:24:02,000 --> 01:24:06,160
और उसका भावार्थ कर रहे हैं। रामपाल ऊपर ही है ऊपर ऊपर पैराग्राफ

1090
01:24:06,160 --> 01:24:11,200
में ऊपर हां और ऊपर

1091
01:24:11,200 --> 01:24:13,760
हां संसार के नर

1092
01:24:13,760 --> 01:24:19,120
नारी सनक सनंदन सनातन तथा

1093
01:24:19,120 --> 01:24:23,200
संत कुमार तथा नारद जी व्यास जी उनके पिता ऋषि

1094
01:24:23,200 --> 01:24:27,600
पाराशर जी प्रह्लाद तथा मुनिंद्र ऋषि जो स्वयं परमात्मा

1095
01:24:27,600 --> 01:24:31,680
कबीर जी ही थे।

1096
01:24:31,680 --> 01:24:36,880
यह व्यास जी स्वयं कबीर हैं।

1097
01:24:36,880 --> 01:24:42,880
तो अब आप आज से कहेंगे वेदों में प्रमाण है व्यास देव भगवान है।

1098
01:24:47,200 --> 01:24:51,280
और दिखाओ भैया आप तब तक गरमा की वो गीता तेरा ज्ञान

1099
01:24:51,280 --> 01:24:57,280
अमृत निकालिए।

1100
01:25:01,200 --> 01:25:05,440
हां भाई तो दो बातें यहां पर आ रही हैं। एक अपने से अलग

1101
01:25:05,440 --> 01:25:09,920
के बारे में कबीर भी बात कर रहे हैं। दूसरा कबीर

1102
01:25:09,920 --> 01:25:14,160
व्यास जी को भी कहा जा रहा है। और तीसरा अब हम आपको

1103
01:25:14,160 --> 01:25:18,320
बंपर धमाका दे रहे हैं। फिर से भगवान

1104
01:25:18,320 --> 01:25:22,480
बताया जा रहा है। श्री कृष्ण को गीता का ज्ञान देने वाला भगवान श्री कृष्ण ही

1105
01:25:22,480 --> 01:25:26,480
थे। शंका समाधान में और प्रश्न जो

1106
01:25:26,480 --> 01:25:31,040
प्रश्न है वह है 30 नंबर का

1107
01:25:31,040 --> 01:25:35,200
नीचे आइए प्रश्न संख्या से नहीं ढूंढेंगे वो उसमें देखिए कॉन्टक्स्ट

1108
01:25:35,200 --> 01:25:39,840
में हां ये 15 चल रहा है हां ये रहा प्रश्न नंबर 15

1109
01:25:39,840 --> 01:25:44,240
वह परमात्मा कौन है जो कुल का मालिक है कहां प्रमाण है

1110
01:25:44,240 --> 01:25:49,440
यही है यही है जहां अभी आपने किया था

1111
01:25:49,440 --> 01:25:51,920
15 नंबर

1112
01:25:51,920 --> 01:25:57,600
कौन सी पुस्तक तेरा ज्ञान अमृत गीता तेरा ज्ञान अमृत

1113
01:25:57,600 --> 01:26:03,040
अभी आए तो थे आप ऑपरेटर जी 15 नंबर पे आपका ऊपर नीचे क्यों हो गए हां

1114
01:26:03,040 --> 01:26:07,120
और नीचे आइए प्रश्न संख्या और नीचे आइए और नीचे आइए और

1115
01:26:07,120 --> 01:26:12,240
नीचे आइए अभी बता रहे हैं आपको प्रश्न संख्या और नीचे आइए इसमें नहीं है

1116
01:26:12,240 --> 01:26:18,240
इसमें नहीं है और नीचे आइए 30 30 नंबर पे आओ

1117
01:26:20,400 --> 01:26:24,400
हां इसमें हां ये देखिए जिंदा

1118
01:26:24,400 --> 01:26:28,400
बाबा का प्रश्न है कि हे परमात्मा धर्मदास गीता का

1119
01:26:28,400 --> 01:26:33,280
ज्ञान किसने दिया? धर्मदास बता रहे हैं कुल के मालिक सर्वशक्तिमान

1120
01:26:33,280 --> 01:26:39,280
भगवान श्री कृष्ण ने यही श्री विष्णु जी भी हैं।

1121
01:26:43,040 --> 01:26:47,440
कहां पर पढ़ रहे हैं? प्रश्न संख्या 30 अरे तुम्हारे

1122
01:26:47,440 --> 01:26:51,520
यहां पर जो है वह प्रश्न बदलते रहते हैं। घपला है ना किताबें छपती कहां पर है? यह

1123
01:26:51,520 --> 01:26:55,520
मामले को लेकर के घपला है। तो अपना देखो ये प्रश्न संख्या 30 कहां

1124
01:26:55,520 --> 01:27:01,520
पर है?

1125
01:27:04,000 --> 01:27:10,000
कितना बज गया? डेढ़ घंटा हो गया।

1126
01:27:20,960 --> 01:27:25,440
सबसे प्रश्न संख्या क्या है?

1127
01:27:25,440 --> 01:27:30,480
प्रश्न संख्या कुछ लिखा है 31

1128
01:27:30,480 --> 01:27:36,480
31

1129
01:28:04,720 --> 01:28:10,720
30

1130
01:28:21,520 --> 01:28:26,960
इसमें तो प्रश्न संख्या 30

1131
01:28:26,960 --> 01:28:32,160
अरे भाई स्क्रीन पर देख लो ना शंका समाधान में लिखा हुआ है

1132
01:28:32,160 --> 01:28:35,760
30 आया

1133
01:28:35,760 --> 01:28:40,160
हम हां क्या कह रहे है हम

1134
01:28:40,160 --> 01:28:44,560
क्या कह रहे इसमें क्या बता क्या बता रहे है अरे

1135
01:28:44,560 --> 01:28:49,440
पढ़ो ना क्या बता रहे है

1136
01:28:49,440 --> 01:28:53,440
पढ़ो इसी को पढूं क्या लिखा है हां पढ़ो पहले

1137
01:28:53,440 --> 01:28:57,520
30 पढ़ता हूं मैं है ना जिंदा बाबा कहता है हे महात्मा

1138
01:28:57,520 --> 01:29:01,600
धर्मदास पवित्र गीता का किसने दिया धर्मदास का उत्तर है कुल

1139
01:29:01,600 --> 01:29:05,600
के मालिक सर्वशक्तिमान भगवान श्री कृष्ण ने यही श्री विष्णु जी हैं।

1140
01:29:05,600 --> 01:29:09,920
ये धर्मदास धर्मदास का ज्ञान था। फिर जिंदा बाबा धर्मदास

1141
01:29:09,920 --> 01:29:14,800
कौन है? धर्मदास कौन है? धर्मदास बांधवगढ़ के

1142
01:29:14,800 --> 01:29:19,600
बनिया थे। कहने चाहिए जिन परमात्मा मथुरा मिले थे।

1143
01:29:19,600 --> 01:29:23,680
ये वहां की चर्चा है। उनकी चर्चा हो रही थी। धर्मदास के साथ इनकी

1144
01:29:23,680 --> 01:29:27,680
चर्चा ये धर्मदास का ज्ञान है। ये धर्मदास का ज्ञान है। तो ये भगवत गीता

1145
01:29:27,680 --> 01:29:32,400
तुम्हारी ले लो। ये गरिमा गीता की निकालो।

1146
01:29:32,400 --> 01:29:36,400
गरिमा गीता की निकालो। धर्मदास तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है ना। धर्मदास

1147
01:29:36,400 --> 01:29:36,900
झूठ

1148
01:29:36,640 --> 01:29:40,640
बोल सकता है। धर्मदास को जितना ज्ञान था वही

1149
01:29:40,640 --> 01:29:46,640
बता रहा था कि गीता ज्ञान किसने दिया लेकिन परमात्मा ने बताया

1150
01:29:47,280 --> 01:29:51,360
मतलब धर्मदास भी झूठा है। झूठ अज्ञानी था। झूठा

1151
01:29:51,360 --> 01:29:55,840
अरे उसे जितना ज्ञान था बता रहा था। मैं 23 नंबर

1152
01:29:55,840 --> 01:30:01,440
प्रश्न प्रश्न संख्या 23 निकालो।

1153
01:30:01,440 --> 01:30:06,960
जिनका जितना ज्ञान होता है उतना बताता है उसे

1154
01:30:06,960 --> 01:30:11,200
पष् संख्या 23 निकालो गरमा गीता ये पहला पैराग्राफ

1155
01:30:11,200 --> 01:30:15,360
यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से दिया

1156
01:30:15,360 --> 01:30:19,760
है तो इसके ऊपर से पढ़े पहले मैं पढ़ता हूं

1157
01:30:19,760 --> 01:30:23,840
सर्व उपस्थित संगत जिनता तथा ज्ञान के वचनों पर सबसे

1158
01:30:23,840 --> 01:30:27,920
ज्यादा प्रभावित हो गई उसके तीन दिन तक रात्रि व दिन के

1159
01:30:27,920 --> 01:30:31,920
सत्संग ऐसे ही किए उसने बताया कि उसने बताया

1160
01:30:31,920 --> 01:30:35,920
कि मैंने देखा एक व्यक्ति रो रहा है। यह नकली संत की

1161
01:30:35,920 --> 01:30:40,000
कथा है ना। कारण पूछा तो बताया कि मेरे पैर में असनी पीड़ा हो रही

1162
01:30:40,000 --> 01:30:44,160
इसलिए रो रहा हूं। वह संत कहता है कि मैंने उस मूर्ख

1163
01:30:44,160 --> 01:30:48,160
को कहा क्यों चिल्लाता है अज्ञानी? यह कष्ट तो शरीर को

1164
01:30:48,160 --> 01:30:51,760
है। तुझे क्या? बस यह विचार कर वह दुखी व्यक्ति

1165
01:30:51,760 --> 01:30:55,920
चुप हो गया। फिर वही रोया। फिर नहीं रोया।

1166
01:30:55,920 --> 01:30:59,920
दुख का अंत हुआ। इसी प्रकार अज्ञान वश नादान पानी कष्ट पाता

1167
01:30:59,920 --> 01:31:04,000
है। यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम

1168
01:31:04,000 --> 01:31:08,240
से बताया। यानी कि उसको भी ये ज्ञान था कि गीता का ज्ञान

1169
01:31:08,240 --> 01:31:12,400
किसने दिया? तू क्यों रोता है? तू क्यों दुख पाता है? तू

1170
01:31:12,400 --> 01:31:16,640
क्या ले आया है? तू क्या ले जाएगा? यही कृष्ण यही ज्ञान

1171
01:31:16,640 --> 01:31:20,640
किसने दिया? इस प्रकार किसका ज्ञान था? नकली संत का। तो ये लिखने

1172
01:31:20,640 --> 01:31:24,720
वाला का नहीं है ज्ञान। ये उसका ज्ञान है जो नकली संत यानी

1173
01:31:24,720 --> 01:31:29,120
जो नकली संत यहां पे बता रहा है वो बात झूठ है बात उसकी

1174
01:31:29,120 --> 01:31:33,120
अगर मान लो कोई पुस्तक कोई लेखक है जो कहानी लिखता है तुतलों की

1175
01:31:33,120 --> 01:31:37,200
दो तुतलों की तीन तुतलों की के जैसे हम नहीं गए

1176
01:31:37,200 --> 01:31:41,360
नहीं गए हम तो उठाना उठा रहे टूिया ठान उठा रहे ऐसा तो वो लेखक ततला

1177
01:31:41,360 --> 01:31:45,520
थोड़ी है वो तो कहानी बना रहा है अरे भाई मैं ये

1178
01:31:45,520 --> 01:31:50,080
कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि उसने बताया कि मैंने देखा

1179
01:31:50,080 --> 01:31:54,160
देखो इसको नकली संत की कथा पहले सुना कौन रहा है ये बताओ जरा

1180
01:31:54,160 --> 01:31:58,560
हां तो नकली संत का ज्ञान है कि गीता का ज्ञान नकली

1181
01:31:58,560 --> 01:32:02,640
संत की कथा सुना कौन रहा है ये बताओ सुना कौन रहा है

1182
01:32:02,640 --> 01:32:06,800
रामपाल जी महाराज नकली हां नकली संत की कथा कौन सुना

1183
01:32:06,800 --> 01:32:10,800
रहे हैं रामपाल जी महाराज ठीक है लेकिन रामपाल का ज्ञान नहीं है कि गीता ज्ञान

1184
01:32:10,800 --> 01:32:15,360
किसने किया नहीं है नहीं नहीं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं उसमें फिर उन्होंने चालू

1185
01:32:15,360 --> 01:32:19,520
इन्होंने कहा हरियाणा प्रांत के जींद जिले में एक पिंडारा नामक तीर्थ है यह

1186
01:32:19,520 --> 01:32:23,680
रामपाल जी कह रहे हैं वहां पर दो आश्रम है। यह रामपाल जी कह रहे हैं।

1187
01:32:23,680 --> 01:32:28,080
एक समय वहां पर ऐसा ऐसासा हुआ। यह सब हुआ। सेक्रेटरी ने दी थी।

1188
01:32:28,080 --> 01:32:32,640
उस महात्मा जी ने अपने वचन सुनाए। यह अभी तक रामपाल

1189
01:32:32,640 --> 01:32:36,640
ने ही कहा है कि उस महात्मा ने अपने वचन सुनाए। अब इसके आगे

1190
01:32:36,640 --> 01:32:41,040
उसने अपने वचन क्या सुनाए? यह महात्मा अजर अमर है।

1191
01:32:41,040 --> 01:32:45,360
यह ना मरती है, ना जन्मती है। ना ही

1192
01:32:45,360 --> 01:32:49,600
सुखदख का भोगता है। आत्मा तो कोई कष्ट नहीं होता।

1193
01:32:49,600 --> 01:32:53,840
यह वह वचन सुना रहे हैं। यह अज्ञानी यह जन समूह अज्ञान वश

1194
01:32:53,840 --> 01:32:57,920
दुख दुखी सुखी होते हैं। जो भी कष्ट है वह शरीर को उसके कर्म का दंड

1195
01:32:57,920 --> 01:33:02,160
होता है। यह सब फिर वो संत अपनी अच्छी-अच्छी बातें सुना रहे हैं।

1196
01:33:02,160 --> 01:33:07,200
और फिर यहां पर आकर के उन्होंने यह कहा

1197
01:33:07,200 --> 01:33:11,520
कि उसने बताया कि मैंने देखा कि एक व्यक्ति कारण पूछा तो बताया सहनीय

1198
01:33:11,520 --> 01:33:15,680
पीड़ा हो रही थी। वह संत कहता है कि मैंने उस मूर्ख को क्यों चिल्लाता है अज्ञानी? यह

1199
01:33:15,680 --> 01:33:19,760
कष्ट तो शरीर को है। तुझे क्या है? बस यह विचार कर कि वह दुखी व्यक्ति

1200
01:33:19,760 --> 01:33:22,000
चुप हो गया फिर नहीं रोया दुख

1201
01:33:22,000 --> 01:33:26,160
का अंत हुआ इसी प्रकार दुख का अंत हो गया इसी प्रकार

1202
01:33:26,160 --> 01:33:30,400
अज्ञानवश जब उस बाबा ने उस अब यहां पर ये बाबा

1203
01:33:30,400 --> 01:33:34,560
जो कह रहा है वो नहीं चल रहा है उसने ये बताया तो ये कौन लिख रहा है

1204
01:33:34,560 --> 01:33:38,800
ये कौन लिख रहा है उसने ये बताया उसने बताया यानी कि यह

1205
01:33:38,800 --> 01:33:43,040
लेखक लिख रहा है उसने यह बताया

1206
01:33:43,040 --> 01:33:47,360
उसने उसको यह बताया यह लेखक लिख रहा है और उसने उसको क्या बताया

1207
01:33:47,360 --> 01:33:51,440
उसने उसको बताया कि यह जो शरीर है यह जो शरीर है

1208
01:33:51,440 --> 01:33:55,440
उस मूर्ख को उसने उसको बताया कि मैंने उस मूर्ख को कहा कि

1209
01:33:55,440 --> 01:33:59,440
क्यों चिल्लाता है अज्ञानी है कष्ट तो शरीर को होता है बस यह विचार वह व्यक्ति

1210
01:33:59,440 --> 01:34:04,480
चुप हो गया फिर नहीं रोया दुख का अंत हुआ दुख का अंत हो गया रामपाल

1211
01:34:04,480 --> 01:34:09,200
दास ये बोल रहे हैं कि उस संत ने उस व्यक्ति को बताया

1212
01:34:09,200 --> 01:34:13,280
जो रो रहा था कि भैया ये शरीर आत्मा को कुछ नहीं होता

1213
01:34:13,280 --> 01:34:17,680
तू बेकार में ही रो रहा है। जब उस व्यक्ति ने ऐसा विचार किया और यह भी रामपाल

1214
01:34:17,680 --> 01:34:21,680
बता रहे हैं। जब उस व्यक्ति ने ऐसा विचार किया तो वह व्यक्ति चुप हो गया फिर नहीं

1215
01:34:21,680 --> 01:34:25,920
रोया। यह रामपाल बता रहे हैं। नकली संत

1216
01:34:25,920 --> 01:34:30,160
की कथा बताते हुए रामपाल यह बात बोल रहे हैं

1217
01:34:30,160 --> 01:34:34,640
कि एक संत ने एक रोते हुए व्यक्ति को कहा कि भाई

1218
01:34:34,640 --> 01:34:37,040
दर्द जो होता है वो आत्मा को होता है। शरीर

1219
01:34:37,040 --> 01:34:41,040
को नहीं होता है। ठीक है? और शरीर को

1220
01:34:41,040 --> 01:34:45,040
नहीं। एक मिनट। जब तुम विचार करोगे जब उसने ऐसा विचार किया

1221
01:34:45,040 --> 01:34:49,200
तो उसका दर्द खत्म हो गया। यह कौन बता रहा है? यह कहानी सुना

1222
01:34:49,200 --> 01:34:53,600
रहा है रामपाल और फिर जब ये कहानी खत्म हो गई कि जब वो चुप हो गया।

1223
01:34:53,600 --> 01:34:57,680
फिर रामपाल कह रहे हैं इस प्रकार अज्ञान वश नादानी नादान प्राणी कष्ट

1224
01:34:57,680 --> 01:35:01,680
पाता है। यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री

1225
01:35:01,680 --> 01:35:06,080
गीता जी के माध्यम से दिया है। एक अब बात ये आती है

1226
01:35:06,080 --> 01:35:10,480
अब बात एक लेकिन रामपाल

1227
01:35:10,480 --> 01:35:14,560
जी का ज्ञान नहीं है ये। अरे मेरे भाई कहानी कौन सुना रहा है? कहानी तो यहां

1228
01:35:14,560 --> 01:35:18,640
खत्म हो गई ना कि उसको ऐसा ऐसा हुआ। चौथे दिन की भी

1229
01:35:18,640 --> 01:35:22,640
रात्रि कहानी है। पूरी कहानी कहां है? चौथे दिनकर महात्मा जी ने ऐसे

1230
01:35:22,640 --> 01:35:26,720
ही ज्ञान योग से मुक्ति का मार्ग बताया। तो यहां पर उसके

1231
01:35:26,720 --> 01:35:30,720
खुद के वचन नहीं है। उसके खुद के वचन नहीं है। जहां पर है वहां

1232
01:35:30,720 --> 01:35:34,960
पर वो रामपाल बता रहे हैं कि उसने ये वचन कहे। दूसरी

1233
01:35:34,960 --> 01:35:39,040
बात ये है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। मैं मैं बताता हूं।

1234
01:35:39,040 --> 01:35:43,040
आप नहीं मान रहे। मैं बताता हूं। अब ये बताइए कि यहां पर तो लिख दिया

1235
01:35:43,040 --> 01:35:47,040
है कि यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से दिया

1236
01:35:47,040 --> 01:35:51,040
है। ठीक। और पीछे आपको ऐसा कुछ मिल रहा है

1237
01:35:51,040 --> 01:35:52,400
जिसके आधार पर

1238
01:35:52,400 --> 01:35:56,560
ऐसा नहीं माना जा सकता कि यही ज्ञान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता जी के माध्यम

1239
01:35:56,560 --> 01:36:00,960
से दिया है। ठीक। ठीक है? ठीक है ना?

1240
01:36:00,960 --> 01:36:05,040
ऐसा नहीं माना जा सकता। यहां पर लिखा है

1241
01:36:05,040 --> 01:36:09,360
कि भगवान श्री कृष्ण ने ही अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया है।

1242
01:36:09,360 --> 01:36:12,320
यहां पर यह लिखा है।

1243
01:36:12,320 --> 01:36:16,480
इसके पीछे कुछ ऐसा भी लिखा है जिसके कारण ये नहीं माना

1244
01:36:16,480 --> 01:36:22,240
जा सकता कि अर्जुन को श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया है। ठीक।

1245
01:36:22,240 --> 01:36:26,320
ठीक है। हम अरे समझ में आ रही मेरी

1246
01:36:26,320 --> 01:36:30,400
बात कि नहीं? नहीं आ रही। चक्कर आ

1247
01:36:30,400 --> 01:36:36,000
गया। चक्कर नहीं आ क्या बोल दिया [हंसी]

1248
01:36:36,000 --> 01:36:40,160
थोड़ी कोई व्यक्ति निकला इधर ध्यान बढ़ गया था

1249
01:36:40,160 --> 01:36:44,160
अच्छा ठीक है बताता हूं हां बताओ ये जो ये जो लाइन

1250
01:36:44,160 --> 01:36:48,320
है यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया है

1251
01:36:48,320 --> 01:36:52,320
ठीक है हम ये ये लाइन में ऐसा लग रहा

1252
01:36:52,320 --> 01:36:56,480
है कि भगवान श्री कृष्ण ने ही अर्जुन को ज्ञान दिया है गीता का

1253
01:36:56,480 --> 01:37:00,720
लग रहा है एक मिनट एक मिनट अब आपका कहना

1254
01:37:00,720 --> 01:37:04,800
है कि इसके पीछे कुछ ऐसी ऐसी लाइन है जिससे कि यह बात कट जाती है

1255
01:37:04,800 --> 01:37:09,360
कि कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान दिया गीता का

1256
01:37:09,360 --> 01:37:13,520
है ना अरे सही कह रहा हूं ना ठीक है ना

1257
01:37:13,520 --> 01:37:17,680
तो तो अब बात ये आती है कि हम ये

1258
01:37:17,680 --> 01:37:21,840
क्यों माने कि पीछे वाली लाइन से ये बात ये बात

1259
01:37:21,840 --> 01:37:27,600
काट दे हम ये क्यों ना माने इस बात से पीछे वाली लाइन काट दो

1260
01:37:27,600 --> 01:37:31,680
देखो तुम पूरी पुस्तक काट दो नहीं नहीं नहीं

1261
01:37:31,680 --> 01:37:35,680
पूरी पुस्तक नहीं

1262
01:37:35,680 --> 01:37:40,160
आप भागिए मत प्रश्न से मत भागिए प्रश्न ये है

1263
01:37:40,160 --> 01:37:44,560
प्रश्न ये है कि हम ये क्यों ना मान ले कि यहां भी दो तरह का ज्ञान है

1264
01:37:44,560 --> 01:37:48,640
हम ये माने यहां दो तरह का ज्ञान है एक रामपाल ने अपने

1265
01:37:48,640 --> 01:37:53,120
मन का दे दिया और एक परमेश्वर का दिया है रामपाल भी काल है

1266
01:37:53,120 --> 01:37:57,200
हम ये क्यों ना माने आपको जैसा मानना हो मान लीजिए

1267
01:37:57,200 --> 01:38:01,200
हमें जैसा मानना था हमने मान दिया तो तो तुम तो

1268
01:38:01,200 --> 01:38:05,360
हमारे टक्कर में अब तुम हाथ जोड़ रहे हो तो

1269
01:38:05,360 --> 01:38:09,360
कहां तुम कहां तुम सिद्ध कर पा रहे हो कुछ कहां तुम सिद्ध

1270
01:38:09,360 --> 01:38:13,520
कर पा रहे हो अरे भैया सुनो सुनो

1271
01:38:13,520 --> 01:38:17,600
गीता जी में दो तरह की बातें आई तुमने थोक दिया कि एक काल का ज्ञान है एक अपना

1272
01:38:17,600 --> 01:38:21,600
ज्ञान है परमेश्वर का ठीक जबकि तुमने कहा कि काल भी झूठ

1273
01:38:21,600 --> 01:38:24,480
बोलता है ठीक अब यहां पे

1274
01:38:24,480 --> 01:38:28,480
दो तरह की बातें दिख रही यहां पे दो तरह की बातें दिख रही तो तुम उन दोनों बातों

1275
01:38:28,480 --> 01:38:32,560
में सामंजस्य बिठा रहे हो यहां पे ये नहीं

1276
01:38:32,560 --> 01:38:36,720
कह रहे कि दो तरह एक मिनट यहां पे ये नहीं कह रहे कि दो तरह का ज्ञान है

1277
01:38:36,720 --> 01:38:40,720
और जो है एक को छोड़ दो एक को पकड़ लो यहां नहीं कह रहे क्योंकि

1278
01:38:40,720 --> 01:38:44,800
बाबा ने कहा है वहां पे जो है तुम्हारे हिसाब से किसी ऐसे ने कहा है जो

1279
01:38:44,800 --> 01:38:48,880
झूठ बोलता है इसलिए और तुम्हारे लिए गीता जो है शास्त्र

1280
01:38:48,880 --> 01:38:52,960
है कहानी शुरू हुई थी शास्त्र क्या होगा शास्त्र वो होगा जो

1281
01:38:52,960 --> 01:38:57,360
प्रामाणिक व्यक्ति बोले कहानी यही चल रही थी ना

1282
01:38:57,360 --> 01:39:01,440
शास्त्र क्या होगा शास्त्र किसे कहते कहते हैं जो कोई

1283
01:39:01,440 --> 01:39:05,840
प्रामाणिक व्यक्ति बोले हां कोई डरा रहा है क्या आपको

1284
01:39:05,840 --> 01:39:10,880
कैमरे के पीछे खड़ा हुआ बार

1285
01:39:10,880 --> 01:39:14,960
बार देख रहा हूं ना नहीं वो दिखाओ मत दिखाओ मत अभी आपने

1286
01:39:14,960 --> 01:39:20,080
कहा था ना कि कोई लड़की है जो आपको परेशान कर रही है विश्वामित्र जी

1287
01:39:20,080 --> 01:39:24,240
इधर कोई आई थी ना मतलब लड़की परेशान नहीं कर रही मतलब इनके लिए ध्यान बढ़ गया था

1288
01:39:24,240 --> 01:39:28,560
अच्छा तो मैं मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं हमारी

1289
01:39:28,560 --> 01:39:33,200
बात ये चल रही कि शास्त्र उसे कहते हैं।

1290
01:39:33,200 --> 01:39:37,680
शास्त्र उसे कहते हैं जो किसी प्रामाणिक व्यक्ति के द्वारा लिखा गया हो।

1291
01:39:37,680 --> 01:39:40,160
हम ठीक है। हां

1292
01:39:40,160 --> 01:39:46,160
तो क्या काल प्रामाणिक व्यक्ति है?

1293
01:39:46,880 --> 01:39:51,360
काल हम काल क्या कह रहा है? प्रमाणिक व्यक्ति

1294
01:39:51,360 --> 01:39:54,320
हम

1295
01:39:54,320 --> 01:39:58,480
यहां पहले एक बात जो अधूरी लगेगी उसको पूरा कर देता हूं। मैं उसे सुन लीजिए।

1296
01:39:58,480 --> 01:40:02,480
शुरू में गीता ज्ञान दाता ब्रह्म जो श्री कृष्ण से कहता

1297
01:40:02,480 --> 01:40:06,640
कि अर्जुन तू युद्ध कर अगर युद्ध में जीत गया तो पृथ्वी फालतू की बातें मुझसे

1298
01:40:06,640 --> 01:40:11,440
मत लो यार मैं हलवा खाने नहीं आया हूं यहां लपसी चाटने नहीं आया हूं यहां

1299
01:40:11,440 --> 01:40:15,440
आप आप जो है आप जो है मुझे टू द पॉइंट

1300
01:40:15,440 --> 01:40:19,600
रहिए मुझे आपकी बकवास बातें आपकी जो फेंटसी भरी दुनिया है वो

1301
01:40:19,600 --> 01:40:23,600
बिल्कुल नहीं सुननी है बिल्कुल भी नहीं सुननी है टू द पॉइंट

1302
01:40:23,600 --> 01:40:29,600
रहिए काल प्रामाणिक व्यक्ति है या नहीं बस यह बताइए

1303
01:40:31,120 --> 01:40:36,160
तो फिर अर्जुन को उस समय अर्जुन को फिर झूठ का बोला

1304
01:40:36,160 --> 01:40:40,400
अरे तो झूठ यानी यानी झूठा व्यक्ति है ना यानी झूठा

1305
01:40:40,400 --> 01:40:44,480
व्यक्ति है ना हो गया झूठा हो

1306
01:40:44,480 --> 01:40:48,960
गया झूठा मैं अरे यार

1307
01:40:48,960 --> 01:40:52,960
भैया ऐसा है मैं आपको बहुत देर तक झेल चुका हूं। अब अगर आप जो है पॉइंट से

1308
01:40:52,960 --> 01:40:57,200
हटकर बात करें मैं क्लियर आपसे पूछ रहा हूं। आप मुझे शास्त्रों का प्रमाण

1309
01:40:57,200 --> 01:41:01,280
मत दीजिए। मैं अभी आपसे आपकी मान्यता पूछ रहा हूं। क्या काल

1310
01:41:01,280 --> 01:41:05,840
प्रामाणिक व्यक्ति है?

1311
01:41:05,840 --> 01:41:09,920
हम नहीं जानते हैं कि नहीं है। आपको जो मान हो गया

1312
01:41:09,920 --> 01:41:14,000
इसीलिए कहता हूं। इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में। कोई

1313
01:41:14,000 --> 01:41:18,240
नहीं है टक्कर में। अब आप जा सकते हैं।

1314
01:41:18,240 --> 01:41:23,280
अरे तुमने कह तो दिया हम नहीं जानते। और क्या? मैंने कहा क्या हम नहीं जानते।

1315
01:41:23,280 --> 01:41:27,360
हारा हुआ किसे कहते हैं? जो कहता है हाथ खड़े करता है। मैं नहीं मैं मैं नहीं जानता यह

1316
01:41:27,360 --> 01:41:31,360
कहता है वो हारा हुआ है। वो निरत्तर होता है।

1317
01:41:31,360 --> 01:41:35,680
सुनो अब ध्यान अब सुनो शास्त्र उसे कहते हैं

1318
01:41:35,680 --> 01:41:39,920
जो किसी ऐसे की वाणी हो जिस पर हमें अक्षरस विश्वास

1319
01:41:39,920 --> 01:41:44,000
हो। अगर हमारी उसके प्रति दोष दृष्टि है

1320
01:41:44,000 --> 01:41:48,160
तो हमारा उस पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। वो हमारे लिए शास्त्र नहीं है और

1321
01:41:48,160 --> 01:41:53,680
आपके कई जो आपके बुद्धिजीवी गुरु भाई वगैरह है उनसे पूछ लेना

1322
01:41:53,680 --> 01:41:57,680
उनके लिए गीता अंतिम प्रमाण नहीं है तो यहां बात ही खत्म

1323
01:41:57,680 --> 01:42:02,320
हो जाती है आप इसको शास्त्र मत कहो

1324
01:42:02,320 --> 01:42:06,400
गीता को ये शास्त्र नहीं है आपका शास्त्र ये उसका

1325
01:42:06,400 --> 01:42:11,920
है जिसको इसकी एक एक लाइन पर विश्वास हो

1326
01:42:11,920 --> 01:42:16,240
ये शास्त्र उसका है आप लोग क्या कर रहे हो रामपाल

1327
01:42:16,240 --> 01:42:20,240
क्या कर रहा है वो भी बता दूं। रामपाल यह कह रहा है कि मैं

1328
01:42:20,240 --> 01:42:20,880
तुम्हें शास्त्र

1329
01:42:20,880 --> 01:42:25,040
की शास्त्र की बात बता रहा हूं और शास्त्र की बात बताने के नाम

1330
01:42:25,040 --> 01:42:29,120
पर रामपाल ये कह रहा है कि ये शास्त्र जो है एक झूठे ने बोले हैं।

1331
01:42:29,120 --> 01:42:33,200
इसलिए इनकी बातों पर विश्वास मत करो। मेरे साथ चलो। ये

1332
01:42:33,200 --> 01:42:38,320
है उसकी शास्त्रों के प्रति बताई जाने वाली श्रद्धा आस्था।

1333
01:42:38,320 --> 01:42:42,480
हमारे लिए काल जो गीता ज्ञान दाता है वो भगवान श्री कृष्ण

1334
01:42:42,480 --> 01:42:46,720
है हमारे लिए। और वो झूठ नहीं बोल रहे हैं गीता में। समझ गए? क्योंकि

1335
01:42:46,720 --> 01:42:50,720
वेदव्यास जी ने कहा वेदव्यास जी हमारे आचार्य हैं और प्रमाण है।

1336
01:42:50,720 --> 01:42:54,800
गुरु वाणी प्रमाण है। अब अब बात एक रह गई हमारी

1337
01:42:54,800 --> 01:42:58,960
जो आपने कहा था कि परमेश्वर को उसने अलग किया। वो भी दिखा दो

1338
01:42:58,960 --> 01:43:03,760
भाई। परमेश्वर को अलग करने वाला पेज था ना जो 59 नंबर

1339
01:43:03,760 --> 01:43:09,760
वो आप बता दीजिए। परमेश्वर को अलग क्या किया है?

1340
01:43:13,520 --> 01:43:18,560
गीता अध्याय 62 श्लोक 18 गीता

1341
01:43:18,560 --> 01:43:22,560
अरे मैं कह रहा हूं 59 नंबर पर तुम्हारी गरिमा गीता की में लिखा हुआ है।

1342
01:43:22,560 --> 01:43:26,880
कबीर कह रहा है वो परमात्मा वो परमात्मा अपने से अलग कर रहा है परमात्मा को।

1343
01:43:26,880 --> 01:43:32,880
वो बताओ क्यों कर रहा है?

1344
01:43:35,360 --> 01:43:39,680
59 नहीं है और कोई था वो

1345
01:43:39,680 --> 01:43:45,680
63 था शायद हां 63

1346
01:43:49,600 --> 01:43:53,600
यहां एक बात ये है कि जो हम बताते हैं उसे आप स्वीकार करते नहीं है।

1347
01:43:53,600 --> 01:43:57,680
अपनी जबरदस्त तेज आवाज में हमारी बात को दबाते हैं और कहते हैं कि

1348
01:43:57,680 --> 01:44:02,000
जो मैं कह रहा हूं वही नहीं नहीं जो मैं कहता हूं उसको आप स्वीकार

1349
01:44:02,000 --> 01:44:06,080
कर रहे हैं। आपने भी तो कहा आप मानो हम नहीं मानते।

1350
01:44:06,080 --> 01:44:10,400
आपने भी तो कहा आप अपनी बात तर्क और

1351
01:44:10,400 --> 01:44:14,400
आप अपनी बात तर्क और प्रमाण से रखिए। आप इस तरीके से

1352
01:44:14,400 --> 01:44:18,400
आप तो आए थे ना कोई नहीं है चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में। मत

1353
01:44:18,400 --> 01:44:22,400
पड़ो चक्कर में ये करने आए थे ना। अब क्यों ढीले पड़ रहे हो? हवा

1354
01:44:22,400 --> 01:44:26,400
निकल गई। तो बताओ ये अरे तो तुम जो

1355
01:44:26,400 --> 01:44:30,640
कह दोगे तुम तुम जो कह दोगे वो दिन को रात कह दोगे तो मैं रात मान लूं क्योंकि

1356
01:44:30,640 --> 01:44:34,640
तुमने कहा है तुमने कहा कि गीता तुमने कहा

1357
01:44:34,640 --> 01:44:39,200
कि गीता ज्ञान दाता ने गीता में कुछ श्लोकों में जो परमेश्वर

1358
01:44:39,200 --> 01:44:43,520
है उसको अपने से अलग किया है अब मैं यहां पर कबीर की वाणी

1359
01:44:43,520 --> 01:44:48,320
में कबीर के द्वारा परमेश्वर को अलग करना सिद्ध कर रहा हूं

1360
01:44:48,320 --> 01:44:52,640
63 नंबर पृष्ठ और अभी वो अकाल मूर्त वाला वो था कहां

1361
01:44:52,640 --> 01:44:57,360
अभी आपने निकाला 63 नंबर आ गया प्रश्न

1362
01:44:57,360 --> 01:45:01,360
इसमें वही पे आइए बीच में थे बीच में से अकाल मूरत परमात्मा

1363
01:45:01,360 --> 01:45:06,960
दिख रहा है बीचो बीच ऊपर ऊपर इससे ऊपर थोड़ा तीन चार

1364
01:45:06,960 --> 01:45:10,960
इसके छवी लाइन हां

1365
01:45:10,960 --> 01:45:16,960
ये वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी

1366
01:45:17,680 --> 01:45:21,920
बार-बार वह कहा है सत्पुरुष वह सच्चा परमात्मा

1367
01:45:21,920 --> 01:45:26,080
जिसका नाश ना हो। यह अपने से अलग क्यों कर रहा है कबीर? कबीर

1368
01:45:26,080 --> 01:45:30,160
परमात्मा नहीं है। इसका मतलब रामपाल तो बहुत दूर की

1369
01:45:30,160 --> 01:45:33,120
बात है।

1370
01:45:33,120 --> 01:45:37,200
तुम्हारी तुम्हारी उससे युक्ति से तुम्हें जवाब दिया

1371
01:45:37,200 --> 01:45:41,280
है। ये सही लिखा है। इसको अपन गलत कैसे ठहरा

1372
01:45:41,280 --> 01:45:45,440
सकते हैं? तो ऐसे ही वो भी सही लिखा उसको गलत कैसे ठहरा

1373
01:45:45,440 --> 01:45:49,920
सकते हैं कबीर परमात्मा से कोई अलग परमात्मा है

1374
01:45:49,920 --> 01:45:54,640
मैं कह रहा हूं कबीर से कोई अलग परमात्मा है

1375
01:45:54,640 --> 01:45:58,800
वही तो परमात्मा है उससे अलग कोई कैसा होगा तो फिर वो यहां पे वो

1376
01:45:58,800 --> 01:46:02,880
वो यहां पे सर्वनाम का उपयोग क्यों कर रहा है थर्ड पर्सन की तरह वो उसको कहना

1377
01:46:02,880 --> 01:46:06,880
चाहिए कि मैं परमात्मा मैं वो परमा मैं मैं परमात्मा हूं

1378
01:46:06,880 --> 01:46:11,840
जिसका नाश नहीं होता मैं मैं मैं वह मैं वह मैं मैं वह मैं वह मैं वह मैं वह मैं वह मैं मैं वह मैं वह क्यों कर रहा है

1379
01:46:11,840 --> 01:46:17,840
अच्छे से पढ़ो। देखो यह कहता है हां

1380
01:46:18,080 --> 01:46:22,480
जैसे अकाल मूर्त वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी। यानी

1381
01:46:22,480 --> 01:46:27,360
यानी मतलब अर्थ यानी मतलब समझ रहे हैं ना? यानी

1382
01:46:27,360 --> 01:46:31,680
समझ रहा हूं। सब उस परमात्मा को जो अविनाशी

1383
01:46:31,680 --> 01:46:35,920
है उसको शब्द स्वरूपी राम अकाल मूरत प्रस आदि नामों से जाना

1384
01:46:35,920 --> 01:46:40,480
जाता है वो आना है वो तो ये उस उस

1385
01:46:40,480 --> 01:46:44,800
शब्द भी आ गया जो तुमने उस शब्द कहा था ना उस

1386
01:46:44,800 --> 01:46:48,800
उस परमात्मा ये उस आ गया उस उस

1387
01:46:48,800 --> 01:46:53,040
मेरी भगवत गीता से उस निकाला था ना तुमने ये उस भी आ गया

1388
01:46:53,040 --> 01:46:57,120
उस उसमें घुस यहां उस

1389
01:46:57,120 --> 01:47:01,680
कहां लिखा है ये क्या परमात्मा परमात्मा

1390
01:47:01,680 --> 01:47:05,840
जिसको शब्द स्वरूपी राम अकाल मूरत और सतपुरुष आदि नामों

1391
01:47:05,840 --> 01:47:09,920
से जाना जाता है वो तो पाना है यह तो इस प्रकार है

1392
01:47:09,920 --> 01:47:14,000
जैसे जल के तीन पर्यायवाची नाम जैसे जल

1393
01:47:14,000 --> 01:47:18,480
पानी नीर ऐसे कहते रहने से जल प्राप्त नहीं हो सकता

1394
01:47:18,480 --> 01:47:22,640
इसके लिए हेडपंप लगाना पड़ता है आदि आदि मतलब है ना अरे यार

1395
01:47:22,640 --> 01:47:26,640
ये सब बातें क्यों बता रहे हो आप ये अपने से अलग

1396
01:47:26,640 --> 01:47:30,800
क्यों किया है परमात्मा को अपने से अलग

1397
01:47:30,800 --> 01:47:35,040
क्यों किया है? अब आप यहां से जा सकते हैं।

1398
01:47:35,040 --> 01:47:39,360
अब आप यहां से जा सकते हैं। इसीलिए कहते हैं इसीलिए

1399
01:47:39,360 --> 01:47:43,360
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो

1400
01:47:43,360 --> 01:47:47,440
चक्कर में। मेरे परमात्मा के लिए बोलता है आ

1401
01:47:47,440 --> 01:47:51,520
के अपने से अलग कर दिया। और जब अपनी किताब में निकल आया

1402
01:47:51,520 --> 01:47:56,060
था डब्बा डब्बा चब्बा हो गया।

1403
01:47:56,060 --> 01:47:59,600
[हंसी]

1404
01:47:59,600 --> 01:48:05,600
मजा आ रहा था भैया। [हंसी]

1405
01:48:07,920 --> 01:48:11,780
ये देखो

1406
01:48:11,780 --> 01:48:17,780
[खांसने की आवाज़]

1407
01:48:19,280 --> 01:48:23,360
साधक के लक्षण कहूं रहे जो पति पतिव्रता नारी कह कबीर

1408
01:48:23,360 --> 01:48:28,480
परमात्मा को लगे आत्मा प्यारी

1409
01:48:28,480 --> 01:48:32,160
इसमें क्या है

1410
01:48:32,160 --> 01:48:38,160
इसके आगे भावार्थ निकालिए भावार्थ

1411
01:48:40,880 --> 01:48:44,880
अपनी किताब पढ़ेंगे तो पूरी पढ़ेंगे। पीछे का भी लो भाई पीछे का

1412
01:48:44,880 --> 01:48:49,440
काट दो ना। वो भी काल ने बोला काट दो पीछे।

1413
01:48:49,440 --> 01:48:53,440
नकली संत की कथा काट उसको। अपनी

1414
01:48:53,440 --> 01:48:57,520
चीज पढ़ेंगे तो पूरी पढ़ेंगे। देखो पीछे क्या लिखा है। हमारी चीज पढ़ेंगे तो

1415
01:48:57,520 --> 01:49:02,160
उसको काट दो। यहां ये लिखा है वो काट दो।

1416
01:49:02,160 --> 01:49:06,160
मूर्ख कहीं के ना शास्त्र का पता ना गुरु का पता गुरु

1417
01:49:06,160 --> 01:49:10,480
का सूक्ष्म ज्ञान देखा है इनका देख लिया इनका सूक्ष्म

1418
01:49:10,480 --> 01:49:14,560
ज्ञान यही सूक्ष्म ज्ञान मिलता है खीर के माध्यम से विभिन्न

1419
01:49:14,560 --> 01:49:18,560
द्वारों से बहती हुई बहता हुआ दूध जब आता है तब ये परम सूक्ष्म

1420
01:49:18,560 --> 01:49:22,960
ज्ञान मिलता है जो शुरू जब तुम्हारा ये सूक्ष्मतम

1421
01:49:22,960 --> 01:49:27,120
ज्ञान खत्म हो जाता है ना जय श्री राम जब तुम्हारा ये सूक्ष्मतम

1422
01:49:27,120 --> 01:49:31,680
ज्ञान खत्म हो जाता है ना वहां से मनुवादियों का ज्ञान शुरू होता है शंकराचार्य

1423
01:49:31,680 --> 01:49:36,240
का ज्ञान शुरू होता है ध्यान रखना सब खत्म हो जाएगा। जिस दिन शंकराचार्य

1424
01:49:36,240 --> 01:49:40,240
की सुरक्षा का घेरा हट गया। ध्यान रखो

1425
01:49:40,240 --> 01:49:44,240
शंकराचार्य है तो हम हैं। सूक्ष्म ज्ञान

1426
01:49:44,240 --> 01:49:47,200
ले फिर रहे हैं। तुम्हारे

1427
01:49:47,200 --> 01:49:51,280
जो बाबा जी है ना उनकी खीखी निकल आएगी। जिस दिन नास्तिक

1428
01:49:51,280 --> 01:49:55,360
के तौर पर उनसे बात हो गई। सिद्ध कर ईश्वर को। परमेश्वर कौन है?

1429
01:49:55,360 --> 01:49:59,280
कौन नहीं है? ये हम बताते हैं।

1430
01:49:59,280 --> 01:50:03,280
परमेश्वर है ये हम नहीं बताते। ये अपना सीख के आओ शंकराचार्य

1431
01:50:03,280 --> 01:50:09,280
से। क्यों?

1432
01:50:17,440 --> 01:50:23,440
दो दो सनातन जानने मिला भैया।

1433
01:50:23,440 --> 01:50:29,280
शास्त्रवाद जी को ले लीजिए। जी भाटी जी बोले जय श्री राम।

1434
01:50:29,280 --> 01:50:33,280
ये इनका दोगलापन देख के हंसी आ रही थी। पूरा पढ़िए। तुम

1435
01:50:33,280 --> 01:50:37,440
एक श्लोक आगे पीछे नहीं पढ़ते और अपना जजमेंट पारित कर देते

1436
01:50:37,440 --> 01:50:41,760
हो और हमें ज्ञान दे रहे हो पूरा पढ़ लीजिए। क्यों

1437
01:50:41,760 --> 01:50:46,160
पढ़े पूरा? भूल जाते हो।

1438
01:50:46,160 --> 01:50:50,320
नहीं इनसे ये कहो जैसे आप इस इनसे ये कहो जैसे आप पिछले

1439
01:50:50,320 --> 01:50:54,400
श्लोक से पहला श्लोक काट रहे हो। पहले से बाद वाला काट रहे हो अपने अनुसार वैसे ही हम काट

1440
01:50:54,400 --> 01:50:59,360
रहे हैं। पूर्ण संत की कथा कट। अभी ले तेरी किताब में लिखा है।

1441
01:50:59,360 --> 01:51:03,520
सही है। सही है। हां जी। इनके साथ

1442
01:51:03,520 --> 01:51:07,840
यही तरीका ठीक है। बिल्कुल ये सही तरीका है। इनके साथ यही तरीका अपना

1443
01:51:07,840 --> 01:51:12,640
चाहिए। जी ये ये जो है उस उस करके

1444
01:51:12,640 --> 01:51:17,200
हमें अलग करता है। ठीक है? हमारे भगवान कृष्ण को और उस परमात्मा वो परमात्मा

1445
01:51:17,200 --> 01:51:21,200
बोल के परमात्मा को कृष्ण से अलग करता है। ठीक है? तो भाई अभी

1446
01:51:21,200 --> 01:51:25,520
यहां पे जब उस आपने दिखा दिया तो फिर वहां पे एक्सप्लेनेशन देने लग गया। ऐसे ऐसे ऐसे

1447
01:51:25,520 --> 01:51:29,590
कुछ नहीं कितना फिर तो फिर तो हैंडपंप चला रहा है।

1448
01:51:29,590 --> 01:51:33,760
[हंसी] फिर हैंडपंप चला रहा है। वही बात है। मैंने मैंने कमेंट किया

1449
01:51:33,760 --> 01:51:38,000
है एक ठो कि उसको ठूस रहा हूं खाली। [हंसी]

1450
01:51:38,000 --> 01:51:38,500
ठूस नहीं

1451
01:51:38,480 --> 01:51:44,320
पा रहा बेचारा। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब हजम नहीं हो रहा है उसको।

1452
01:51:44,320 --> 01:51:50,320
भाई उस ये ठीक है। उसका मतलब कबीर कहां लिखा है? ये बताओ ना।

1453
01:51:50,640 --> 01:51:56,640
ये तो आगे की बातें यह तो आगे की बातें हैं।

1454
01:51:57,040 --> 01:52:01,840
चलो देखो मिल जाए तो मैं आपको एक चीज दिखाता हूं। बहुत बढ़िया जाते-ते

1455
01:52:01,840 --> 01:52:05,840
विराम होने से पहले दिखा दूं। अगर अर्जुन को

1456
01:52:05,840 --> 01:52:10,480
मोक्ष वाला चीज जी आप बोलिए आप बोलिए।

1457
01:52:10,480 --> 01:52:15,440
सेवक राज आया था ना और चला गया क्या?

1458
01:52:15,440 --> 01:52:19,440
जो [गला साफ़ करने की आवाज़] चेहरा नहीं दिखाते उनको हम भगा देते हैं तेज स्पीड में। हां, ठीक।

1459
01:52:19,440 --> 01:52:22,240
ठीक है।

1460
01:52:22,240 --> 01:52:26,320
ये लोग इतने बेशर्म टाइप के लोग हैं। ऐसी बात बोलने में

1461
01:52:26,320 --> 01:52:30,560
इनको जरा भी वो तकलीफ नहीं होती जो सामने वाले की आस्था पर चोट पहुंच रही है।

1462
01:52:30,560 --> 01:52:36,240
बहुत आराम से बोलते हैं। फाड़ दो। कोई फर्क नहीं पड़ता। देख रहे हो?

1463
01:52:36,240 --> 01:52:40,400
और जब उसके ही किताब को फाड़ने की बात आई तब वहां पर क्या बोल रहा है कि

1464
01:52:40,400 --> 01:52:44,480
बुरा तो लगेगा भाई। अपने पे

1465
01:52:44,480 --> 01:52:46,960
उसको

1466
01:52:46,960 --> 01:52:51,040
उठाते हुए उसे नहीं लगता है बुरा। हां जी क्या कह

1467
01:52:51,040 --> 01:52:53,680
रहे हैं?

1468
01:52:53,680 --> 01:52:59,680
कुछ कह रहे थे प्रेम सिंह भाटी जी।

1469
01:53:02,720 --> 01:53:07,120
नहीं मैं तो नहीं बोला था। कोई और ही बोले भाई साहब वो खीर

1470
01:53:07,120 --> 01:53:11,360
खीर का नशा है खीर का ये खीर का नशा है

1471
01:53:11,360 --> 01:53:15,700
पता नहीं जी कौन सा नशा

1472
01:53:15,700 --> 01:53:21,360
[हंसी]

1473
01:53:21,360 --> 01:53:26,320
भाई इतना भी खीर कैसे खा लिए भाई दिमाग ही उल्टा हो गया इसका

1474
01:53:26,320 --> 01:53:30,400
अरे वो वो खीर तो एक बूंद भी खीर पा लोगे तो नशा हो जाएगा

1475
01:53:30,400 --> 01:53:34,480
ऐसे वो नहीं देखा पादुभूत पादुरभूत [गला साफ़ करने की आवाज़] वाला

1476
01:53:34,480 --> 01:53:37,320
बहुत खतरनाक

1477
01:53:37,320 --> 01:53:42,000
[हंसी] वाह वही नशा है।

1478
01:53:42,000 --> 01:53:48,000
अरे वही मैं बताया ना अभी नहीं जी कौन सा नश

1479
01:53:48,080 --> 01:53:54,080
ये इसका पेज नंबर जरा 99 निकालिए 99

1480
01:53:54,240 --> 01:54:00,240
पीडीएफ के अनुसार 99 कौन सा पेज

1481
01:54:00,480 --> 01:54:05,360
अब ये लोग फिर से उतर के लड्डुओं पर आ गए हैं।

1482
01:54:05,360 --> 01:54:09,600
हम मैंने देखा था एक तो एक इनका वीडियो

1483
01:54:09,600 --> 01:54:13,680
जिसमें देखो भाई खोजने के लिए कुछ जाते हैं। प्रश्न हम सबको

1484
01:54:13,680 --> 01:54:18,400
बिल्कुल छोटा-छोटा कर दो इसको ये भी दिखा दें जो कह रहा है ना कि अर्जुन

1485
01:54:18,400 --> 01:54:21,040
ये देखिए

1486
01:54:21,040 --> 01:54:27,040
प्रश्न क्रमांक 99 गरिमा गीता की

1487
01:54:29,600 --> 01:54:33,650
अर्जुन को तो तत्व ज्ञानी मिला नहीं था। झूठा व्यक्ति मिला था। है ना?

1488
01:54:33,650 --> 01:54:37,760
[हंसी] और यह देखिए क्या लिखा है? अर्जुन यज्ञ में प्रतिष्ठित

1489
01:54:37,760 --> 01:54:40,800
पहला पैराग्राफ लास्ट की तीन लाइन है।

1490
01:54:40,800 --> 01:54:44,800
अर्जुन यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को इष्ट रूप

1491
01:54:44,800 --> 01:54:48,880
में मानकर यज्ञ करता है तथा

1492
01:54:48,880 --> 01:54:51,840
यज्ञों के साथ-साथ वास्तविक नाम का सुमिरण करके पूर्ण

1493
01:54:51,840 --> 01:54:56,160
मोक्ष रूपी अमंत को प्राप्त हो जाता है। अर्थात पूर्ण परमात्मा

1494
01:54:56,160 --> 01:55:02,080
को प्राप्त हो जाता है। लो भाई अर्जुन की मुक्ति हो गई।

1495
01:55:02,080 --> 01:55:06,080
ये देख लेना तारेंद्र जी और ये

1496
01:55:06,080 --> 01:55:10,240
लोग ये लोग क्या कहते रहते हैं कि भाई ये लोग कहते रहते हैं कि भाई मोक्ष कहां हुआ

1497
01:55:10,240 --> 01:55:14,400
पांडवों का ये कहां हुआ वो कहां हुआ देख भाई तेरे ही में लिखा है

1498
01:55:14,400 --> 01:55:19,200
ये भांग के नशे में जो किताबें लिखी है तुमने समझ

1499
01:55:19,200 --> 01:55:23,280
गए बाबा जी ने भांग खा भांग खा के जो किताबें

1500
01:55:23,280 --> 01:55:27,840
लिखी है ना उसी में लिखा है अर्जुन को मोक्ष हो गया

1501
01:55:27,840 --> 01:55:31,840
हम लोग हमारी किताबें हम तुम लोग खोलते अपनी किताबें कभी देखी

1502
01:55:31,840 --> 01:55:37,440
नहीं तो तुम पक्के सनातनी हो जाते [हंसी]

1503
01:55:37,440 --> 01:55:42,240
उनका

1504
01:55:42,240 --> 01:55:46,480
बस छोटा कर दो अर्जुन को मोक्ष भी मिल गया तारेंद्र देख लेना अपना आंखें

1505
01:55:46,480 --> 01:55:50,080
फाड़ फाड़ के देख लेना थोड़ा

1506
01:55:50,080 --> 01:55:54,240
हां जी और कौन-कौन आए हैं आपका शुभ नाम

1507
01:55:54,240 --> 01:56:00,240
क्या है भाई साहब आपके खेत में टहल रहे हैं जी

1508
01:56:00,640 --> 01:56:05,600
आपकी आवाज नहीं आ रही। जी

1509
01:56:05,600 --> 01:56:10,960
जय श्री राम। जय श्री राम। भाई जी। जय श्री राम।

1510
01:56:10,960 --> 01:56:15,120
भाई जी मैं तो आपकी साइड में हूं। मैं तो सिर्फ मैं इसलिए आया हूं लाइव। यह

1511
01:56:15,120 --> 01:56:19,440
इतने बेशर्म है ना यह रामपाल वाले जो चेले हैं

1512
01:56:19,440 --> 01:56:23,600
यह मतलब हमारे जो ग्रंथ है जो हमारे जो भी

1513
01:56:23,600 --> 01:56:27,760
पुराण है हमारे ये उनको कुछ समझते ही नहीं है। इनके लिए तो

1514
01:56:27,760 --> 01:56:32,320
बस ज्ञान गंगा ही सब कुछ है। वही सच है

1515
01:56:32,320 --> 01:56:36,800
सब कुछ है। इसीलिए तो मैंने आज फाड़ने की बात कही ना।

1516
01:56:36,800 --> 01:56:40,800
मैं कह रहा इतने डीप है ना ये ये

1517
01:56:40,800 --> 01:56:44,800
पता नहीं कहां-कहां से लेके आते हैं। कहां-कहां से लाइनें निकाल के लेके आते

1518
01:56:44,800 --> 01:56:48,960
हैं। जी हमारे उसमें ये लिखा है। हमें तो वो लाइन आज तक नहीं मिली जो ये

1519
01:56:48,960 --> 01:56:52,960
पढ़ पढ़ के सुनाते हैं। नहीं नहीं नहीं ये बात गलत है। हमें पता है ये

1520
01:56:52,960 --> 01:56:57,360
कहां से लेके आते हैं। हम उन लाइनों को निकाल के इनका मुंह मुंह तोड़ते हैं।

1521
01:56:57,360 --> 01:57:01,520
हमें पता है कहां से लाते हैं। और कितना भी इनको कह लो इतने बेशर्म

1522
01:57:01,520 --> 01:57:05,680
है ना फिर घूम फिर के वं आ जाते हैं। हर बार इनकी एक ही बात होती

1523
01:57:05,680 --> 01:57:09,760
है कि हमारे तो जी तत्वदर्शी यह है। हमारे तत्वदर्शी वो

1524
01:57:09,760 --> 01:57:14,000
हैं। अरे भाई बताओ जब सृष्टि की रचना

1525
01:57:14,000 --> 01:57:18,480
हुई थी तब बात वहां तक भाई इनके

1526
01:57:18,480 --> 01:57:22,480
तत्वदर्शी का तत्व भी निकाल दिया। मैं कह [गला साफ़ करने की आवाज़] रहा हूं जी जब सृष्टि

1527
01:57:22,480 --> 01:57:26,560
की रचना हो रही थी तब कहां थे ये मेरी ये नहीं समझ में आ रहा। जब महाभारत का युद्ध

1528
01:57:26,560 --> 01:57:32,480
हो रहा था तब कहां था इनका तत्वदर्शी जब

1529
01:57:32,480 --> 01:57:36,480
सबसे बड़ी बात है पका पकाया आम आपने मान लिया परमात्मा इसकी

1530
01:57:36,480 --> 01:57:41,760
नहीं इसकी यही तत्व ज्ञान है इसकी नहीं इसकी

1531
01:57:41,760 --> 01:57:46,080
मैंने कहां से जी

1532
01:57:46,080 --> 01:57:50,080
मैंने रात भी आपका देखा था लास्ट टाइम का जो लाइव था उसमें एक वो

1533
01:57:50,080 --> 01:57:54,080
आ रहा था कोई सोनीपत से था कुछ कोई नाम भूल गया मैं उसका

1534
01:57:54,080 --> 01:57:58,240
वो भी बोल रहा था कि आप यह दिखाओ जी आप मेरे को हमारे उसमें

1535
01:57:58,240 --> 01:58:02,240
तो वो जो अपनी गीता जी में जो श्लोक है उसके बारे में बोल रहा

1536
01:58:02,240 --> 01:58:06,400
था ऊतपटांग ये वो जी फलाना है आप तो अपनी तरफ से बनाते

1537
01:58:06,400 --> 01:58:10,400
हो ये हमारे उसमें तो यह है जी मैं यह

1538
01:58:10,400 --> 01:58:14,640
कहता हूं इनको कि भ तुम समझते क्यों नहीं हो कि जो ग्रंथ पुराण है वही सच

1539
01:58:14,640 --> 01:58:18,880
है और सनातन ही सच है। यह कितना भी कितना भी यह कोशिश

1540
01:58:18,880 --> 01:58:22,880
कर ले सनातन के अलावा कुछ भी सत्य नहीं है। यह समझ

1541
01:58:22,880 --> 01:58:27,200
नहीं पाते इस बात को। इनको कितना भी समझाओ आप ये बेशर्म है पूरे

1542
01:58:27,200 --> 01:58:31,360
हम वही खीर वाली बात आ गई इन्होंने खीर खाई है ना जी उसका असर

1543
01:58:31,360 --> 01:58:34,400
दिख रहा है इनके ऊपर

1544
01:58:34,400 --> 01:58:38,560
वो खीर इनके दिमाग में चढ़ गई है सबसे बड़ी बात आप धूर्तता

1545
01:58:38,560 --> 01:58:42,560
देखिए दोगलापन देखिए अपनी किताब मानेंगे तो पीछे आगे सब

1546
01:58:42,560 --> 01:58:46,640
पढ़ेंगे हमारे में मानेंगे तो पीछे हमारे मानेंगे तो पीछे वाले

1547
01:58:46,640 --> 01:58:47,520
से आगे वाला आगे

1548
01:58:47,520 --> 01:58:51,760
वाले से पीछे वाला अपने मन मुताबिक काट देंगे देखो ये कट रहा है अरे काट दे नकली

1549
01:58:51,760 --> 01:58:55,920
संत की कथा नकली संत की कथा जो लिखा हुआ है टाइटल

1550
01:58:55,920 --> 01:59:00,080
वो काट फिर मान गीता का ज्ञान कृष्ण ने दिया

1551
01:59:00,080 --> 01:59:04,160
हालांकि उस उस पैराग्राफ में उस पैराग्राफ में वो जो

1552
01:59:04,160 --> 01:59:08,160
लाइन है ना गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने दिया है वो लाइन रामपाल की ही लाइन

1553
01:59:08,160 --> 01:59:12,240
है क्योंकि रामपाल [गला साफ़ करने की आवाज़] तो कहानी सुना रहा है नकली संत की कथा और नकली संत

1554
01:59:12,240 --> 01:59:16,400
ने किसको क्या कहा ये भी रामपाल बता रहे हैं और वो कथा खत्म हो गई जब वो

1555
01:59:16,400 --> 01:59:20,400
रो रहा है जब व्यक्ति रोता हुआ चुप हो गया अब चुप होने के

1556
01:59:20,400 --> 01:59:24,480
बाद रामपाल बता रहे हैं कि इसी तरीके जैसे अज्ञानी लोग

1557
01:59:24,480 --> 01:59:28,720
जैसे वो नकली संत का जो वो रोगी था रोता हुआ

1558
01:59:28,720 --> 01:59:33,040
अज्ञानता के कारण वो लोग भटक रहे हैं अज्ञानता के कारण

1559
01:59:33,040 --> 01:59:37,840
और यही बात भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में बताई कितनी अच्छी बात है नैनती

1560
01:59:37,840 --> 01:59:41,840
शस्त्राण नैन धरती पावका तो यहां पे ना चाहते हुए

1561
01:59:41,840 --> 01:59:45,920
भी जाने अनजाने में भांग के नशे में रामपाल से ये गलती

1562
01:59:45,920 --> 01:59:50,960
हुई होगी संभवता जो उसने मान लिया लिख दिया

1563
01:59:50,960 --> 01:59:56,960
हां जी अनिकेत जी बोले

1564
01:59:57,360 --> 02:00:01,840
बोलना वही कह रहा हूं कि

1565
02:00:01,840 --> 02:00:05,840
हर जगह से हार जाते हैं लेकिन वो कहते हैं ना कि रस्सी जल गई लेकिन

1566
02:00:05,840 --> 02:00:09,840
बल नहीं गया इनके पास बोलने के लिए एक ही चीज है कि

1567
02:00:09,840 --> 02:00:14,000
शिवा नारायण द्विवेदी हमको बोलने नहीं देता है बोलने नहीं अरे क्या बोलने नहीं देता है क्या बोलते

1568
02:00:14,000 --> 02:00:19,920
हो तुम वही बात को बार-बार रिपीट करोगे तो वही सुनने के लिए हम बैठे हैं

1569
02:00:19,920 --> 02:00:24,080
एक ही चीज को बार-बार अजीब ही नशा है। से हट के बोलते हैं भाई। दिन

1570
02:00:24,080 --> 02:00:28,560
को रात दिन को रात हां नहीं नहीं दिन भाई जो

1571
02:00:28,560 --> 02:00:32,720
दिन निकलता है वो रात है। अभी इधर

1572
02:00:32,720 --> 02:00:36,720
देखो इधर देखो एक चीज एक चीज ये जो लोग

1573
02:00:36,720 --> 02:00:41,440
हैं कबीर ये लोग ये रामपाल के

1574
02:00:41,440 --> 02:00:45,440
जो है अपने आप को भगत कहते हैं। मगर इनका उद्देश्य पता है क्या है?

1575
02:00:45,440 --> 02:00:49,680
अपने चैनल को हिट करना। रोज वो हमारा जो वो छोटा

1576
02:00:49,680 --> 02:00:53,760
भाई है जय। रोज वह अलग-अलग नाम

1577
02:00:53,760 --> 02:00:57,920
वहां पहुंच करके और इनकी बैंड बजा रहा है। रोज वहां इतनी

1578
02:00:57,920 --> 02:01:02,160
ततड़ी इनकी हो रही है। उसने फलाना पूछा अरे ये तो हम पूछना

1579
02:01:02,160 --> 02:01:06,240
पूछ करके आएंगे। ये हो रहा है इनके चैनल पे और ये लोग हमको न्योता

1580
02:01:06,240 --> 02:01:10,240
दे रहे हैं। हां। बरसात से बचने

1581
02:01:10,240 --> 02:01:12,560
की हैसियत नहीं तुम्हारी और गोलीबारी

1582
02:01:12,560 --> 02:01:16,480
की बात करते हो।

1583
02:01:16,480 --> 02:01:21,440
सही है। सही है आपकी बात। बिल्कुल सही है। बिल्कुल

1584
02:01:21,440 --> 02:01:26,000
सही बात है। अरे तुम्हारे चैनल पेत्त करके आया था। हां

1585
02:01:26,000 --> 02:01:30,240
भाटी जी जाके निरत्तर कर रहे हैं। इनको इनको निरुत्तर

1586
02:01:30,240 --> 02:01:34,240
होने से भी ये बेशर्म लोग हैं। आप निरत्तर कर दोगे फिर भी दूसरे दिन

1587
02:01:34,240 --> 02:01:38,320
लाइव दूसरे दिन फिर भी लाइव का चैलेंज देंगे लोगों को। क्यों? क्योंकि

1588
02:01:38,320 --> 02:01:42,800
उनको लग रहा है वहां कंटेंट बन रहा है। अपना चैनल चलना चाहिए। हमारी

1589
02:01:42,800 --> 02:01:46,240
हार होगी तो होगी।

1590
02:01:46,240 --> 02:01:52,080
वो कौन सा वो है ना 100-100 जूते खा के तमाशा

1591
02:01:52,080 --> 02:01:56,320
ऐसा कुछ है ना हां 100-100 जूते खा के तमाशा

1592
02:01:56,320 --> 02:02:00,400
नहीं वो अलग है 100-100 जूते खा के तमाशा

1593
02:02:00,400 --> 02:02:05,280
घुस के देखूं ऐसा कुछ है

1594
02:02:05,280 --> 02:02:10,160
तरफ है भैया 100-100 जूते खासा घुस के देखता

1595
02:02:10,160 --> 02:02:14,240
था ना बाबू वही है वही है जो भी हो

1596
02:02:14,240 --> 02:02:18,240
जो भी हो कोई भी हो बाबू हो कोई हो मगर बात यह है कि

1597
02:02:18,240 --> 02:02:22,400
तुम निरोत्तर रोज हो रहे हो तुम्हारा बैंड बज रहा है फिर

1598
02:02:22,400 --> 02:02:26,480
भी तुम्हारी यह है कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी आए तुम्हारे चैनल पे अरे

1599
02:02:26,480 --> 02:02:27,760
तुम जाओ अपने बाबा से लिखवा

1600
02:02:27,760 --> 02:02:33,760
लो अपना नाम हम आ जाएंगे तुम्हारे चैनल पे

1601
02:02:34,240 --> 02:02:38,480
तुम्हारे बाबा से अपना नाम लिखवा लो फिर एक बीच

1602
02:02:38,480 --> 02:02:42,880
का चैनल निकाल करके हम लोग उस पर आपसे चर्चा कर लेंगे लिखवा

1603
02:02:42,880 --> 02:02:47,520
लो नाम अपना

1604
02:02:47,520 --> 02:02:52,760
बाबा कह दे भाई यह मेरी ओर से बाबू लड़ेगा हैप्पी रेंट वाइट चम वाला

1605
02:02:52,760 --> 02:02:58,760
[हंसी]

1606
02:03:03,680 --> 02:03:07,830
बेशर्म है इनको कोई असर नहीं है क्या

1607
02:03:07,830 --> 02:03:12,880
[हंसी] पक्के बेशर्म है इन लोगों को

1608
02:03:12,880 --> 02:03:18,880
है ना सेंटर फ्रेश खा के सेंटर फ्रेश का दांत लेकर आते हैं।

1609
02:03:19,360 --> 02:03:22,400
सेंटर फ्रेश का

1610
02:03:22,400 --> 02:03:28,400
जी संजीव कुमार जी बोले जय श्री राम जय श्री राम भैया

1611
02:03:29,680 --> 02:03:33,840
भैया आवाज आ रही है जी आ रही है भैया

1612
02:03:33,840 --> 02:03:37,920
मैं भी इनसे डिबेट करता रहता हूं ये जो है रामपाल जी मैं तो

1613
02:03:37,920 --> 02:03:42,240
सीधा इनसे एक ही बात पूछता हूं कि इनकी बुक में लिखा है कि जो मुस्लिम मोहम्मद

1614
02:03:42,240 --> 02:03:47,040
है वो भगवान शिव का बेटा है। मैं सीधा इनसे पूछता हूं कि रेफरेंस कहां है?

1615
02:03:47,040 --> 02:03:51,040
और उनके पास उसका कोई रेफरेंस नहीं होता। इनकी सृष्टि रचना का

1616
02:03:51,040 --> 02:03:55,040
भी कोई रेफरेंस नहीं है। उल्टा सीधा वही इनके पास कोई

1617
02:03:55,040 --> 02:03:59,040
रेफरेंस नहीं है। और सीधा ये बात करेंगे कि आगे की बताओ ब्रह्मा का पिता कौन है?

1618
02:03:59,040 --> 02:04:03,040
विष्णु ऐसे उनका पिता कौन है? तो मैंने गुरु ग्रंथ साहब जी

1619
02:04:03,040 --> 02:04:07,120
में एक वाणी पढ़ी थी कबीर महाराज जी की। वो भगवान कृष्ण को कह रहे थे कि तू ही मेरा

1620
02:04:07,120 --> 02:04:11,200
परमेश्वर है। तू ही मेरा पति है। तो सीधा मैंने भी उनसे पूछ लिया। बताओ कबीर

1621
02:04:11,200 --> 02:04:16,000
जी का पति पिता कौन है? पति कौन है?

1622
02:04:16,000 --> 02:04:20,000
फिर उनके पास जवाब नहीं होता है। वो कहते कबीर जी का पति कैसे हो सकता है? मैंने कहा ये तो

1623
02:04:20,000 --> 02:04:24,720
वाणी में लिखा हुआ है। हम

1624
02:04:24,720 --> 02:04:28,720
ऐसे ऐसे मैं भी इनसे डिबेट करता हूं। फिर जब पॉइंट की पॉइंट टू पॉइंट चलता हूं तो

1625
02:04:28,720 --> 02:04:33,440
फिर इनके पास जवाब नहीं होता है। फिर गाली गलौज करके वो निकालते हैं।

1626
02:04:33,440 --> 02:04:35,120
हम

1627
02:04:35,120 --> 02:04:39,360
हमने अपने चैनल पर ये दिखाया है गुरु ग्रंथ साहिब का कुछ

1628
02:04:39,360 --> 02:04:43,520
बातें जहां पे इनके सारे कथन का एकदम खंडन हो जाता है। सिरे

1629
02:04:43,520 --> 02:04:47,760
से कबीर बीज में दिए वो वो दिखाया

1630
02:04:47,760 --> 02:04:52,160
था सुनिए ये गुरु ग्रंथ साहब में है कबीर

1631
02:04:52,160 --> 02:04:56,640
मोक्ष का दान मांग रहे हैं किससे कि रावण का

1632
02:04:56,640 --> 02:05:00,800
रावण को हराने वाले वानर सेना वाले और सारण पानी

1633
02:05:00,800 --> 02:05:04,880
यानी धनुरधारी राम और दुर्योधन का घमंड चूरचूर करने वाले

1634
02:05:04,880 --> 02:05:09,040
कृष्ण मतलब आपने इतना अलौकिक कार्य किया है तो मेरा भी

1635
02:05:09,040 --> 02:05:13,120
मुझे भी मोक्ष का दान दे दीजिए और जो गुरु ग्रंथ साहिब की जो वाणी

1636
02:05:13,120 --> 02:05:17,360
है वह सबसे प्रमाणिक कबीर के मरने के सबसे

1637
02:05:17,360 --> 02:05:21,440
बाद वो संकलित है। ये बाकी कप बहुत

1638
02:05:21,440 --> 02:05:25,520
बाद की है। 300 साल बाद की भी है वो भी प्रमाणिक

1639
02:05:25,520 --> 02:05:30,640
है। बिल्कुल कबीर बीजक में लिखा हुआ है

1640
02:05:30,640 --> 02:05:35,120
कि [गला साफ़ करने की आवाज़]

1641
02:05:35,120 --> 02:05:40,320
ये वाला जरा चलाइए जरा।

1642
02:05:40,320 --> 02:05:44,400
इसमें राम जी से वह प्रार्थना कर रहे हैं

1643
02:05:44,400 --> 02:05:48,400
कि भाई इसी जन्म में नेत्रों को दर्शन दे दीजिए। कबीर जी प्रार्थना कर रहे

1644
02:05:48,400 --> 02:05:53,120
हैं राम जी से दर्शन की ये भी नहीं कि निर्गुण निर्गुण उपासक

1645
02:05:53,120 --> 02:05:57,280
राम जी के दर्शन की बात कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि

1646
02:05:57,280 --> 02:06:01,520
इस इस जन्म का वो मुझे सार्थक कर दीजिए वरना फिर जो है जन्म मरण में आना पड़ेगा।

1647
02:06:01,520 --> 02:06:05,680
मगर मतलब कबीर मोक्ष मांग रहे हैं। राम को भगवान मान रहे हैं। कबीर

1648
02:06:05,680 --> 02:06:10,640
का जन्म मरण होता है। तीनों बातें इसी एक ऐसी एक उससे

1649
02:06:10,640 --> 02:06:14,800
सिद्ध हो जाती है। ये फिर भैया गुरु ग्रंथ साहब में हमने

1650
02:06:14,800 --> 02:06:19,520
बहुत बहुत जन्म मरण देख लिया। अब हमें मुक्ति दो। राम रघुनाथ

1651
02:06:19,520 --> 02:06:23,680
रघुनाथ मुक्ति हां ये कह रहा है फर्जी लाइव डिबेट

1652
02:06:23,680 --> 02:06:27,760
चल रहा है। एंट्री नहीं दे रहा है। डर के मारे कांप रहा है। मरने के बाद भाई

1653
02:06:27,760 --> 02:06:32,800
मेरे क्या काम आएगा? साफसाफ

1654
02:06:32,800 --> 02:06:36,800
जो लोग कबीर को परमात्मा मानते हैं उनको ये शाखी दिखा दो। भाग ही जाएंगे। रुकेंगे

1655
02:06:36,800 --> 02:06:41,120
नहीं आसपास। कबीर जग 270 साखी है ये ठीक है उसमें कबीर

1656
02:06:41,120 --> 02:06:45,600
क्या कह रहा है कि मुवे दर्शन देवगे आवे कमने काम

1657
02:06:45,600 --> 02:06:49,680
प्रभु धनुषधारी दशरथ नंदन प्रभु श्री राम जी से प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रभु

1658
02:06:49,680 --> 02:06:53,680
मुझे दर्शन दे दो मरने के बाद दर्शन दोगे मेरे क्या काम आएगा साफ साफ

1659
02:06:53,680 --> 02:06:57,680
आप मोह शब्द का आप देख रहे हो ये जो पाखंडी लोग बोलते हैं कबीर की

1660
02:06:57,680 --> 02:07:01,680
मृत्यु नहीं होती कबीर की मृत्यु तो होती है ये आप आप लोगों को बेवकूफ बना

1661
02:07:01,680 --> 02:07:05,840
के क्योंकि आपने कबीर भजन ठीक से पढ़ा नहीं अब

1662
02:07:05,840 --> 02:07:09,920
यहां से कितनी बातें सही सिद्ध हुई है। देखो पहली बात राम

1663
02:07:09,920 --> 02:07:14,000
जी की भक्ति कौन से राम की? धनुरधारी

1664
02:07:14,000 --> 02:07:18,000
राम की। ठीक है? वो उसमें भी पंचंगी ड्रामा करते

1665
02:07:18,000 --> 02:07:22,080
हैं ना ये लोग भाई जो है

1666
02:07:22,080 --> 02:07:26,720
कौन सा राम कौन सा? धनुरधारी राम। और फिर तीसरा

1667
02:07:26,720 --> 02:07:30,800
कि जन्म मृत्यु होती है और मोक्ष कौन देते हैं? राम। ये कबीर विचक

1668
02:07:30,800 --> 02:07:35,600
से सिद्ध है। हालांकि वो लोग। हालांकि

1669
02:07:35,600 --> 02:07:39,760
वो लोग बोलेंगे कि काल ने बोला इतने महामूर्ख

1670
02:07:39,760 --> 02:07:45,760
है रघुनाथ लिख रहे हैं कबीर उसको नहीं मान रहे उसका कोई और अर्थ कर रहे हैं।

1671
02:07:46,640 --> 02:07:52,560
चलिए ठीक है सभी का समय देने के लिए आभार और अगर आपको

1672
02:07:52,560 --> 02:07:56,800
चर्चा करनी है तो फॉर्म भरिए और सामने आकर

1673
02:07:56,800 --> 02:08:01,040
बात करिए। ठीक है? जिसको भी चर्चा करनी

1674
02:08:01,040 --> 02:08:05,040
है वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर यह नंबर आपके

1675
02:08:05,040 --> 02:08:09,040
सामने स्क्रीन पर आ रहा है। आप इस नंबर पर WhatsApp करिए

1676
02:08:09,040 --> 02:08:13,120
और चर्चा करिए आकर के जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी

1677
02:08:13,120 --> 02:08:17,280
है। बात यही है जो बोलने

1678
02:08:17,280 --> 02:08:21,360
की बात है वही वो सीधी बात है कि

1679
02:08:21,360 --> 02:08:25,440
आप अगर विषय से भटके बात करेंगे बार-बार प्रश्नों को प्रश्न जो पूछा

1680
02:08:25,440 --> 02:08:30,880
जा रहा होगा उसे छोड़कर के दूसरा दूसरी बातें करेंगे तो

1681
02:08:30,880 --> 02:08:35,040
मुझे आपको टोकना पड़ेगा। ठीक है? और यदि आप चाहते हैं कि

1682
02:08:35,040 --> 02:08:39,120
भाई मैं आपके आपके साथ किसी न्यूट्रल चैनल पर आऊं तो आप

1683
02:08:39,120 --> 02:08:43,120
अपने बाबा से यह बात लिखवा लाइए कि आप उसकी ओर से आ रहे हैं। मैं

1684
02:08:43,120 --> 02:08:48,000
न्यूट्रल चैनल पर आ जाऊंगा। राघव और ये जो

1685
02:08:48,000 --> 02:08:52,480
ये जो टच्चे टाइप के लोग हैं क्या नाम है? राघव और फैक्ट बाय अभिषेक।

1686
02:08:52,480 --> 02:08:56,800
जो खीर के नशे में पादुभूत पादुभूत करते हैं। जिनको खीर

1687
02:08:56,800 --> 02:09:00,960
की गंध आती रहती है लगातार। इसीलिए उनको पादुभूत याद रहता है।

1688
02:09:00,960 --> 02:09:01,840
ऐसे लोग हैं

1689
02:09:01,840 --> 02:09:06,080
जिनको जो बहुचरर्चित हैं, स्टार प्रचारक हैं रामपाल गैंग के ऐसे

1690
02:09:06,080 --> 02:09:10,160
लोगों के साथ भी मैं बीच के चैनल पर आने को तैयार हूं। बीच के

1691
02:09:10,160 --> 02:09:14,480
स्थान पर आने को तैयार हूं। तो या तो रामपाल द्वारा घोषित

1692
02:09:14,480 --> 02:09:18,720
हो या फिर रामपाल से सीधे तौर पर जुड़ने के मामले में वो प्रसिद्ध

1693
02:09:18,720 --> 02:09:23,200
हो। मैं बीच के स्थान पर उससे चर्चा कर लूंगा और उसके

1694
02:09:23,200 --> 02:09:27,360
मुंह में टेप चिपकाऊंगा। ठीक है? और यदि इन दोनों चीजों का अभाव

1695
02:09:27,360 --> 02:09:31,600
है आप गए गुजरे हो अपने यहां पर आपकी कोई वह ऐसी खास

1696
02:09:31,600 --> 02:09:35,840
वैल्यू नहीं है तब भी आपका अपमान नहीं होगा आपका स्वागत है आप हमारे

1697
02:09:35,840 --> 02:09:39,920
यहां पर आइए और चर्चा करिए मगर अपने शब्दों का ध्यान रखिए कि आप क्या

1698
02:09:39,920 --> 02:09:44,240
बोल रहे हैं और अनुशासन का ध्यान रखिए कि विषय से भागिए मत

1699
02:09:44,240 --> 02:09:48,400
जैसे वो एक तरतड़ी ले आए भाई कि गायत्री मंत्र का अर्थ

1700
02:09:48,400 --> 02:09:52,640
बता दो हे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर हम तेरा ध्यान करते हैं

1701
02:09:52,640 --> 02:09:56,640
तू हमें सद्बुद्धि की ओर प्रेरित तू हमारा मन

1702
02:09:56,640 --> 02:10:00,960
सद्बुद्धि में लगा। सद्बुद्धि विचारों में लगा।

1703
02:10:00,960 --> 02:10:04,000
यह उसका अर्थ है।

1704
02:10:04,000 --> 02:10:08,240
अब वो साहब वो जो तैयारी करके आया था वो तो

1705
02:10:08,240 --> 02:10:12,240
वही खत्म देखो ऐसा है कि यहां पर

1706
02:10:12,240 --> 02:10:16,400
आकर के आप यह क्लेम मत करो कि मैं यह हूं, मैं फलाना हूं, वह परमात्मा है। क्लेम करोगे, फंस

1707
02:10:16,400 --> 02:10:17,440
जाओगे।

1708
02:10:17,440 --> 02:10:21,520
अब गुरु का क्लेम किया शुरू में तो गुरु का सूक्ष्म

1709
02:10:21,520 --> 02:10:25,600
ज्ञान का तत्व निकल गया। सब सारा निकल गया। ग्लूकोज लेवल

1710
02:10:25,600 --> 02:10:30,000
डाउन हो गया गुरु के तत्व ज्ञान का। सब डाउन हो गया।

1711
02:10:30,000 --> 02:10:33,520
सेवक राज चेहरा दिखाएं।

1712
02:10:33,520 --> 02:10:37,760
जिसने भी रामपाल की ओर से जिसने भी अपनी मां का दूध पिया

1713
02:10:37,760 --> 02:10:41,760
है और वह रामपाल की बातों को किस्से कहानियों को

1714
02:10:41,760 --> 02:10:45,840
रामपाल के द्वारा किताबों में लिखे गए कीचड़ को यदि

1715
02:10:45,840 --> 02:10:49,840
वह सही सिद्ध कर सकता है तो वह आ सकता है। यदि

1716
02:10:49,840 --> 02:10:53,920
तुम वहां के बहुचरर्चित व्यक्ति हो तो हम तुम्हारे साथ बीच में चर्चा

1717
02:10:53,920 --> 02:10:58,000
करने का बीच के स्थान में चर्चा करने का विचार करेंगे। यह हम

1718
02:10:58,000 --> 02:11:03,040
तय करेंगे कि तुम इस्ला तुम बहुचरर्चित हो कि नहीं। यह नहीं कि

1719
02:11:03,040 --> 02:11:07,280
हमारे 2500 सब्सक्राइबर हैं। बहु चर्चित हैं। हम आ गए। वह हम देखेंगे

1720
02:11:07,280 --> 02:11:11,280
कि हमारे अनुसार तुम बहुचरर्चित हो कि नहीं। तो अगर बहु चर्चित हो

1721
02:11:11,280 --> 02:11:15,360
रामपाल गैंग की ओर से तुम्हें जाना जाता है रामपाल वालों में तुम्हारा

1722
02:11:15,360 --> 02:11:19,360
तुम्हें तुम्हारी प्रसिद्धि है तो हम तुम्हारे साथ बीच के स्थान पर

1723
02:11:19,360 --> 02:11:23,840
चर्चा करने को तैयार हैं। और यदि ना

1724
02:11:23,840 --> 02:11:27,920
यदि प्रसिद्धि नहीं है और ना ही रामपाल या अगर प्रसिद्धि नहीं

1725
02:11:27,920 --> 02:11:32,080
है तो रामपाल के द्वारा घोषित करवा लो अपने आप को। यह मेरा व्यक्ति चर्चा करेगा

1726
02:11:32,080 --> 02:11:33,360
आपसे।

1727
02:11:33,360 --> 02:11:37,600
ठीक है? और अगर ना प्रसिद्धि है मेरे अनुसार

1728
02:11:37,600 --> 02:11:41,840
मेरी जानकारी जैसे राघव की प्रसिद्धि है। है वो भले ही टच्चे

1729
02:11:41,840 --> 02:11:45,840
मगर रामपालियों के बीच में राघव और अभिषेक की प्रसिद्धि है। इसलिए

1730
02:11:45,840 --> 02:11:49,840
मैं उसके साथ बीच में चर्चा करने को तैयार हूं। अन्यथा

1731
02:11:49,840 --> 02:11:54,000
मैं उसको भी कहता चल भाग बाबा के साथ बीच

1732
02:11:54,000 --> 02:11:58,320
में चर्चा होगी। मगर ठीक है बाबा अभी

1733
02:11:58,320 --> 02:12:02,400
नहीं मिल रहा है तो उसके ये चेले चापड़ ही ठीक है यही मिल जाए इन्हीं

1734
02:12:02,400 --> 02:12:06,480
को दबोच लें तो प्रसिद्धि भी नहीं है और बाबा का बाबा की घोषणा

1735
02:12:06,480 --> 02:12:10,480
भी नहीं है तो क्या है आप यहां चैनल पर आइए अनुशासित रहिए

1736
02:12:10,480 --> 02:12:14,720
विषय से मत भागिए और शब्दों की मर्यादा बनाए रखिए आपके

1737
02:12:14,720 --> 02:12:18,320
साथ स्वार्थ पूर्वक चर्चा होगी

1738
02:12:18,320 --> 02:12:23,360
और चर्चा में विघ्न तब पड़ता है जब आप सामने वाले की

1739
02:12:23,360 --> 02:12:28,320
जो चीजें हैं उनके लिए

1740
02:12:28,320 --> 02:12:32,560
निर्विवाद रूप से निर्भीक रूप से होकर के और गलत बातें

1741
02:12:32,560 --> 02:12:36,960
बोलते हैं या फिर भागने की कोशिश करते हैं विषय से तो विघ्न

1742
02:12:36,960 --> 02:12:41,200
पड़ता है और उत्तेजना आती है और रोकना

1743
02:12:41,200 --> 02:12:45,200
पड़ता है टोकना पड़ता है। ठीक है? जैसे बड़े आराम से तुमने मान लिया

1744
02:12:45,200 --> 02:12:48,400
भगवत गीता को फाड़ दो कोई फर्क नहीं पड़ता। और जब तुम्हारे

1745
02:12:48,400 --> 02:12:52,720
बाबा की किताबें फटने की बारी आई तो तुम्हारा मुंह सूख गया। टूतड़ी

1746
02:12:52,720 --> 02:12:56,880
निकल गई। इसको कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं

1747
02:12:56,880 --> 02:13:01,440
टक्कर में। अब यह जो सेवक राज है इनका मुंह नहीं दिखाने लायक है। लगता है

1748
02:13:01,440 --> 02:13:05,600
कि रामपाल के यहां पर इनके साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसके

1749
02:13:05,600 --> 02:13:09,680
कारण ये किसी को मुंह दिखाने के योग्य नहीं रह गए हैं। छापा

1750
02:13:09,680 --> 02:13:13,680
पड़ा था शायद उस समय पकड़ धकड़ हुई थी। इसीलिए

1751
02:13:13,680 --> 02:13:17,840
तो मुंह छुपा रहे हैं। तो यहां वही व्यक्ति आए जो अपनी पहचान के साथ आ सकता

1752
02:13:17,840 --> 02:13:22,880
है। जिसके गुर्दा है वह आए। जिसके गुर्दा नहीं है वह ना आए।

1753
02:13:22,880 --> 02:13:26,960
ठीक है। जिसके पास गुर्दा है उसी को

1754
02:13:26,960 --> 02:13:32,960
जीने का हक है। क्यों अनिकेत जी

1755
02:13:33,520 --> 02:13:39,520
है?

1756
02:13:44,080 --> 02:13:48,400
आपका बैकग्राउंड किसी का बैकग्राउंड से आवाज आ रहा है? किसी के बैकग्राउंड

1757
02:13:48,400 --> 02:13:52,560
से आवाज आ रही है। चलिए ठीक है पूरा करते हैं। दो घंटे 13 मिनट हो गए हैं।

1758
02:13:52,560 --> 02:13:56,640
सभी को जय श्री राम। किसी को कुछ बोलना तो नहीं है। जय

1759
02:13:56,640 --> 02:14:00,880
श्री राम भाई। जय श्री राम। जय श्री राम। सेवक राज सेवक

1760
02:14:00,880 --> 02:14:05,040
राज अगर तुम्हारे अंदर तुम्हें माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध

1761
02:14:05,040 --> 02:14:09,200
पिलाया है तो अपना थोबड़ा लेकर के आओ।

1762
02:14:09,200 --> 02:14:13,520
चोरों की तरह नहीं। नपुंसक नपुंसक हो क्या? वाला दूध पिया

1763
02:14:13,520 --> 02:14:17,840
है। नपुंसक हो क्या? इन्होंने तो रामपाल

1764
02:14:17,840 --> 02:14:22,080
वाला दूध पियो है। जी। रामपाल वाला दूध। इसीलिए मुंह मुंह दिखाने

1765
02:14:22,080 --> 02:14:26,160
लायक नहीं बचे हो क्या? क्या ऐसा हो गया तुम्हारे साथ? गैंग

1766
02:14:26,160 --> 02:14:30,320
गैंग बना के तो कुछ नहीं गलत कर दिया गया तुम्हारे साथ। जिसके कारण

1767
02:14:30,320 --> 02:14:34,320
तुम मुंह दिखाने लायक नहीं हो। ठीक है? तो मुंह दिखाने लायक हो करके आओ

1768
02:14:34,320 --> 02:14:38,320
फिर आना। अपने बाबा जी से कहो और खीर पिलाओ जिससे मैं मुंह दिखाने

1769
02:14:38,320 --> 02:14:43,040
लायक बन जाऊं। जय श्री राम। तो गरम गरम खीर

1770
02:14:43,040 --> 02:14:46,560
गरम गरम खीर

1771
02:14:46,560 --> 02:14:50,560
गरम गरम खीर हो गरम [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं गरम

1772
02:14:50,560 --> 02:14:54,800
नहीं गरम होकर के ठंडा हो के ही दूध आएगा

1773
02:14:54,800 --> 02:14:59,520
तभी तो उसके साथ जो तत्व आएंगे वो जो इनके लिए अमृतुल्य तत्व होते हैं

1774
02:14:59,520 --> 02:15:03,840
जो मल द्वार गुदा द्वार इत्यादि से बह के दूध आता है तो जो तत्व

1775
02:15:03,840 --> 02:15:08,160
होते हैं इनके लिए अमृतुल्य तत्व होते हैं तभी तो वो शेष रह जाएंगे

1776
02:15:08,160 --> 02:15:12,400
अगर दूध आने के बाद उसको उबाला गया तो ये सब मर जाएगा ये सब अमृत अमृत

1777
02:15:12,400 --> 02:15:16,480
तुल्य तत्व तो ठंडे ही दूध की बनानी पड़ती है।

1778
02:15:16,480 --> 02:15:20,560
ठंडी जहां तक मेरा अनुमान है

1779
02:15:20,560 --> 02:15:25,440
यदि मीडिया की खबरें सत्य है तो

1780
02:15:25,440 --> 02:15:29,600
हां ये लोग ये लोग जो है कितने मूर्ख होते हैं

1781
02:15:29,600 --> 02:15:33,760
भाई यहां पर आ कर के नहीं कर सकते चर्चा ये लोग सेवक

1782
02:15:33,760 --> 02:15:37,840
सेवक जो है ये बहुत अभद्रता करता है अपने हर लाइव में आप देखे

1783
02:15:37,840 --> 02:15:41,920
होंगे ये चर्चा नहीं कर सकता। मैंने

1784
02:15:41,920 --> 02:15:47,920
नहीं देखा। नहीं मेरे मेरे चैनल पे आया है कई बार।

1785
02:15:48,000 --> 02:15:52,320
इससे एक सवाल पूछा भाई 21 ब्रह्मांड कहां लिखा है?

1786
02:15:52,320 --> 02:15:56,320
आया कई बार और पर और आज भी आप देख ही

1787
02:15:56,320 --> 02:16:00,480
रहे होंगे भैया। एक वो जो व्यक्ति आया था 21 ब्रह्मांड बोलने लग गया था। आपने जो

1788
02:16:00,480 --> 02:16:04,800
सुनाया उसको भाई सनातन का अर्थ क्या होता है? चुप [हंसी] हो गया।

1789
02:16:04,800 --> 02:16:08,960
अच्छा ये भी बोल रहा था क्या? ये भी बोल रहा था क्या?

1790
02:16:08,960 --> 02:16:13,120
अरे जब आपने बोला था ना कि सातव अध्याय में जब भगवान कहते हैं कि

1791
02:16:13,120 --> 02:16:17,200
मैं ही सनातन सनातन हूं इस तरह से तो आप पूछते

1792
02:16:17,200 --> 02:16:21,280
हैं काल सनातन है क्या तो बोलता है भाई काल अपने लिए अपने 21 किस ब्रह्मांड

1793
02:16:21,280 --> 02:16:25,360
के लिए बोल रहा है वो सनातन है तो आपने बोला था ना उसे कि अरे मूर्ख

1794
02:16:25,360 --> 02:16:29,520
सनातन का अंश अर्थ पता है आपने बोला था ना उसे अभी अरे

1795
02:16:29,520 --> 02:16:33,920
भैया दो सनातन है दोद सनातन हां फिर दोद सनातन

1796
02:16:33,920 --> 02:16:37,920
पे आया तो यही बात है कि वो 21 ब्रह्मांड को लाया था ये जब भी जब

1797
02:16:37,920 --> 02:16:40,720
भी भगवान भगवान की सर्वश्रेष्ठता की बात आएगी। ये 21 ब्रह्मांड

1798
02:16:40,720 --> 02:16:44,800
लेकर आएगा। तो पूछ लीजिए 21 ब्रह्मांड कहां लिखा है? तो बोलते बंद [हंसी]

1799
02:16:44,800 --> 02:16:49,120
नहीं इसमें बात ये आती है कि जब हमने कहा कि यह सनातन

1800
02:16:49,120 --> 02:16:53,280
है। तो अगर 21 ब्रह्मांड का भी है तो वो सनातन नहीं

1801
02:16:53,280 --> 02:16:57,520
है। सनातन तो कहीं से शुरू नहीं होना चाहिए। चाहे 21 ब्रह्मांड

1802
02:16:57,520 --> 02:17:02,960
के लिए सनातन हो। 21 ब्रह्मांड के लिए वो सनातन कहां है?

1803
02:17:02,960 --> 02:17:07,040
भाई अगर 21 ब्रह्मांड का मालिक है तो मालिक है। सनातन नहीं है। सनातन तो

1804
02:17:07,040 --> 02:17:12,000
उसकी शुरुआत नहीं होनी चाहिए। सनातन तो वो है ना।

1805
02:17:12,000 --> 02:17:16,000
बिल्कुल बिल्कुल। अच्छा 21 ब्रह्मांडों के लिए है तो उसमें

1806
02:17:16,000 --> 02:17:20,320
हमारा पृथ्वी लोक आता है कि नहीं आता है? आता है। तो हमारे लिए वो सनातन

1807
02:17:20,320 --> 02:17:26,320
है। फिर तो हम मान रहे हैं सनातन। क्या दिक्कत है अब तुम्हें?

1808
02:17:29,200 --> 02:17:33,280
21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है तो हम उसको सनातन मान रहे हैं

1809
02:17:33,280 --> 02:17:37,360
तो फिर तुम्हें क्या परेशानी है? फिर वो कहेगा नहीं सनातन है नहीं तो इसका

1810
02:17:37,360 --> 02:17:41,440
मतलब सनातन नहीं है ना फिर क्यों कह रहा है 21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है समझ में आ

1811
02:17:41,440 --> 02:17:46,320
रहा है शास्त्रवाद जी

1812
02:17:46,320 --> 02:17:50,400
21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है तो हमारे लिए सनातन है

1813
02:17:50,400 --> 02:17:54,800
वो हम मान रहे हैं उसे सनातन तो वो कहेगा नहीं ये वास्तविक

1814
02:17:54,800 --> 02:17:58,960
सनातन नहीं है हां तो वहां लिखा है क्या वास्तविक सनातन है क्या

1815
02:17:58,960 --> 02:18:03,280
नकली सनातन है कि मैं इस

1816
02:18:03,280 --> 02:18:09,200
संसार मैं इस संसार का नकली सनातन बीज हूं। [हंसी]

1817
02:18:09,200 --> 02:18:13,680
लिखा है क्या वहां?

1818
02:18:13,680 --> 02:18:18,320
चलिए जय श्री राम। जबरदस्त जय श्री उसका रील बहुत अच्छा कटेगा लेकिन

1819
02:18:18,320 --> 02:18:22,560
कल नेपाली वाला भी बढ़िया था भैया। वो पुराना

1820
02:18:22,560 --> 02:18:26,640
है नेपाली वाला। अच्छा ऐसा क्या ठीक

1821
02:18:26,640 --> 02:18:32,640
है। जय श्री राम सभी जय श्री राम।

1822
02:18:49,730 --> 02:18:53,730
[संगीत]
