1
00:00:03,280 --> 00:00:07,600
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:07,600 --> 00:00:12,160
होंगे और जो बहुत सारे

3
00:00:12,160 --> 00:00:16,240
इस समय प्रकरण चल रहे हैं उन सब से आप

4
00:00:16,240 --> 00:00:22,240
अवगत होंगे। थोड़ा बहुत हम भी आपको अवगत करा देते हैं।

5
00:00:31,360 --> 00:00:35,840
सबसे पहली बात है रामपाल। रामपाल पर एफआईआर

6
00:00:35,840 --> 00:00:39,840
दर्ज हो चुकी है और पुलिस उसमें इन्वेस्टिगेशन कर

7
00:00:39,840 --> 00:00:44,560
रही है फिलहाल। जैसा कि आप लोगों को संज्ञान में होगा कि

8
00:00:44,560 --> 00:00:48,080
जो आने वाली

9
00:00:48,080 --> 00:00:50,480
25

10
00:00:50,480 --> 00:00:54,480
डेट जो दी गई है 25th ऑफ अगस्त की हाई कोर्ट

11
00:00:54,480 --> 00:00:57,200
के द्वारा

12
00:00:57,200 --> 00:01:01,280
तो उस वहां पर पुलिस को कुछ बताना है जाकर के

13
00:01:01,280 --> 00:01:07,280
कि हमने इस बीच ये किया क्योंकि पिछली बार ये हुआ था जो

14
00:01:07,840 --> 00:01:12,640
दिनांक 1 अगस्त 2025 को जो सुनवाई हुई थी तो उसमें

15
00:01:12,640 --> 00:01:16,720
शासन ने यह कहा था कि यह मामला बहुत बड़ा है, गंभीर है और इसमें

16
00:01:16,720 --> 00:01:21,040
अभी तक हम कोई कारवाई नहीं कर पाए हैं। तो इसलिए हमें थोड़ा और समय चाहिए।

17
00:01:21,040 --> 00:01:26,080
तो वो समय इनको मिल गया। इन्होंने एक हफ्ते मांगा था मगर इनको जो है

18
00:01:26,080 --> 00:01:31,200
25 तारीख तक का समय दे दिया गया।

19
00:01:31,200 --> 00:01:35,280
तो अगली जो हमारी हियरिंग होनी है वह 25 को होनी है। उस दिन

20
00:01:35,280 --> 00:01:39,280
कुछ अच्छे समीकरण हमें प्राप्त हो सकते हैं और इस बीच पुलिस

21
00:01:39,280 --> 00:01:44,720
भी कुछ बड़े एक्शन ले सकती है। अ

22
00:01:44,720 --> 00:01:48,880
इसके अलावा दूसरा प्रकरण एक चल रहा है जिसमें कि

23
00:01:48,880 --> 00:01:52,880
संयोग से हमारी भी सीरीज निग्रह निकासिका जो

24
00:01:52,880 --> 00:01:56,960
इस समय अभी-अभी रिलीज की गई है।

25
00:01:56,960 --> 00:02:01,600
उसमें पांच पार्ट आ चुके हैं। छठवा बाकी है।

26
00:02:01,600 --> 00:02:03,280
यह कहा जा सकता है कि संयोग

27
00:02:03,280 --> 00:02:07,280
से कि हम भी उसी समय पर यह रिलीज कर रहे हैं

28
00:02:07,280 --> 00:02:11,280
जिस समय भागवतानंद का विवाद पीएन

29
00:02:11,280 --> 00:02:17,120
मिश्र जी और संदीप देव जी से चल रहा है।

30
00:02:17,120 --> 00:02:21,280
पर ऐसा नहीं है। ये काफी दिन पहले से सुनियोजित था।

31
00:02:21,280 --> 00:02:25,360
इसकी शुरुआत निग्रह निकासिका की तब हो गई थी जब भागवतानंद ने हमें 100 करोड़ का

32
00:02:25,360 --> 00:02:29,360
नोटिस भेजा था। और उस नोटिस में बताया था कि मैं प्रामाणिक आचार्य हूं

33
00:02:29,360 --> 00:02:33,360
शास्त्र संप्रदाय का। तो हमें उसकी रिप्लाई

34
00:02:33,360 --> 00:02:37,440
लिखना था। रिप्लाई में निग्रह निकासिका लिखी गई कि वो प्रमाणिक आचार्य नहीं

35
00:02:37,440 --> 00:02:42,160
है। हो सकता है कि आगे भविष्य में हम कभी लिखते मगर

36
00:02:42,160 --> 00:02:46,240
अ उसने हमको एक कारण दिया लिखने का कि बैठकर

37
00:02:46,240 --> 00:02:50,560
के अब तुम मेरे ऊपर ध्यान दो। हर तरह से सोचो।

38
00:02:50,560 --> 00:02:55,840
तो ध्यान दिया सोचा और निग्रह निकासिका प्राप्त हो गई।

39
00:02:55,840 --> 00:03:00,000
खैर अब इसके बाद दो प्रासंगिक विषय और

40
00:03:00,000 --> 00:03:06,000
उठ खड़े हुए हैं इस विवाद से। मैं जरा सेटिंग ठीक कर लूं अपनी।

41
00:03:13,120 --> 00:03:19,120
डिस्प्ले

42
00:03:42,240 --> 00:03:46,640
तो दो विवाद और उठ खड़े हुए। एक तो

43
00:03:46,640 --> 00:03:51,600
शाक्य द्वीपीय ब्राह्मण वाला और

44
00:03:51,600 --> 00:03:55,600
जांबाला जांबाला से प्रारंभ हुआ। वो शाक द्वीपीय ब्राह्मण पे

45
00:03:55,600 --> 00:03:59,600
आकर के चल रहा है। सब जवाला वाले मामले में हमारा पक्ष

46
00:03:59,600 --> 00:04:03,600
क्या है? वह हम यह जो तथाकथित आचार्य बनकर

47
00:04:03,600 --> 00:04:07,760
घूमता है जो प्रशांत उसको केंद्र में रखते हुए

48
00:04:07,760 --> 00:04:12,080
पहले वीडियो बना चुके हैं और उसके अनुयायियों

49
00:04:12,080 --> 00:04:15,200
को भी

50
00:04:15,200 --> 00:04:19,360
जबाला वाले विषय में जो है काउंटर कर चुके हैं और

51
00:04:19,360 --> 00:04:23,680
हमने अपने कई स्ट्रीम्स में कई वीडियोस में स्पष्ट

52
00:04:23,680 --> 00:04:28,160
लिखते हैं कि किसी को भी हमारा यदि वैचारिक विरोध है तो वह आकर के प्रत्यक्ष

53
00:04:28,160 --> 00:04:32,240
वार्ता कर सकता है। तो यदि ज्वाला वाले विषय में किसी

54
00:04:32,240 --> 00:04:36,720
को कोई आपत्ति है जो हमने कहा है आचार प्रशांत को केंद्र में रखते हुए

55
00:04:36,720 --> 00:04:39,840
तो आ सकता है।

56
00:04:39,840 --> 00:04:44,000
इसके अलावा जो शाक्य वाला मामला जो मुख्य चल रहा है इस समय उसमें

57
00:04:44,000 --> 00:04:48,080
हमारा पक्ष वही है जो शास्त्रों का पक्ष होगा जो प्रामाणिक आचार्यों का परंपरा

58
00:04:48,080 --> 00:04:53,120
प्राप्त आचार्यों का जो पक्ष होगा। अब इसमें एक बात आ रही है कि

59
00:04:53,120 --> 00:04:57,360
सीधे तौर पर इधर पीएन मिश्र जी जुड़े हुए हैं

60
00:04:57,360 --> 00:05:01,680
ज्योतिष पीठ के साथ और इधर सीधे रूप

61
00:05:01,680 --> 00:05:05,760
सीधे तौर पर जो पूज्य राघवाचार्य जी महाराज हैं और

62
00:05:05,760 --> 00:05:07,040
पूज्य जो

63
00:05:07,040 --> 00:05:11,200
विद्या भास्कर जी महाराज हैं इन लोगों ने भी आकर

64
00:05:11,200 --> 00:05:16,000
के सामने से कह दिया है कि शाकदपीय ब्राह्मण प्रामाणिक होते हैं।

65
00:05:16,000 --> 00:05:20,000
तो मुझे लगता है कि इस बात का जो लाभ है वही

66
00:05:20,000 --> 00:05:24,240
वाली सिचुएशन फिर से हो रही है कि भागवतानंद जो कटाक्ष करता

67
00:05:24,240 --> 00:05:28,320
है उसको कहता है कि मैं संतों की निंदा नहीं करता है। वह यह कहता है कि मैं

68
00:05:28,320 --> 00:05:31,360
भाई

69
00:05:31,360 --> 00:05:35,440
मैं तुम्हें किसी व्यक्ति का विरोधी नहीं बना रहा हूं बल्कि उनके उस गलत सिद्धांत का

70
00:05:35,440 --> 00:05:40,160
विरोधी बता बना रहा हूं जो वो बोल रहा है

71
00:05:40,160 --> 00:05:44,240
मगर क्योंकि वो गलत बात बोलने वाला वो व्यक्ति है

72
00:05:44,240 --> 00:05:48,320
जैसे किसी ने उससे प्रश्न पूछा था उसकी जो प्रवचन चल रहा होगा उसमें

73
00:05:48,320 --> 00:05:52,400
कि भाई आप जो है मेरा अनास्था हो रही है तो बोला कि

74
00:05:52,400 --> 00:05:56,800
अरे उनके उस वक्तव्य के प्रति अनास्था होनी चाहिए उनके प्रति नहीं

75
00:05:56,800 --> 00:06:01,040
फिर अगर ऐसा है तो जो गलत वक्तव्य बोलने वाले व्यक्ति हैं

76
00:06:01,040 --> 00:06:05,040
उनके साथ खड़ा होने पर तू फिर क्यों आलोचना करता

77
00:06:05,040 --> 00:06:09,200
है? फिर ये वाली बात आ जाती है। जैसे राजेंद्र दास जी महाराज

78
00:06:09,200 --> 00:06:13,360
किसी अंश में आर्य समाजियों के यहां गए। भाई उनकी अपनी चीजें हैं।

79
00:06:13,360 --> 00:06:17,360
वो गए। उन्होंने कभी ये नहीं कहा मैं आर्य समाज के सिद्धांतों का समर्थन

80
00:06:17,360 --> 00:06:21,520
करता हूं। मगर वो गए तो राजेंद्र

81
00:06:21,520 --> 00:06:22,160
दास जी महाराज

82
00:06:22,160 --> 00:06:26,160
गए या फिर बागेश्वर वाले कहीं पर कुछ अंशों में गलत

83
00:06:26,160 --> 00:06:30,160
लोगों के साथ खड़े हो गए तो गलत लोगों के साथ खड़े हो गए और उनकी

84
00:06:30,160 --> 00:06:34,320
गलती क्या है कि उन्होंने कुछ एक सिद्धांत ऐसा गलत दिया है।

85
00:06:34,320 --> 00:06:38,320
तो इस कारण से बागेश्वर के साथ कोई खड़ा नहीं होना चाहिए। इस

86
00:06:38,320 --> 00:06:42,480
कारण से राजेंद्र दास जी के साथ कोई खड़ा नहीं होना

87
00:06:42,480 --> 00:06:46,480
चाहिए। अगर कोई खड़ा होगा तो तू उसकी निंदा

88
00:06:46,480 --> 00:06:50,560
करेगा। तू वही तो कर रहा है जो तू खुद मना कर रहा है। इसकी

89
00:06:50,560 --> 00:06:54,640
सबसे बड़ी इसके इसके बारे में बात करने में सबसे बड़ी

90
00:06:54,640 --> 00:06:58,800
दिक्कत क्या है कि इसने अपने सिद्धांतों को अभी पूर्ण रूप से प्रस्तुत

91
00:06:58,800 --> 00:07:02,880
तो किया नहीं है ग्रथावली के द्वारा तो इसके वक्तव्यों को खोजना

92
00:07:02,880 --> 00:07:06,880
पड़ता है कि कहां पर इसने अपनी बात को ही काटा है। जब ये कह रहा है कि मैं

93
00:07:06,880 --> 00:07:10,960
किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि उसके गलत सिद्धांत की प्रति तुम्हें

94
00:07:10,960 --> 00:07:15,040
अना मतलब तुम्हें कह रहा हूं कि आस्था मत रखो इसके गलत सिद्धांत में तो

95
00:07:15,040 --> 00:07:19,040
उस गलत सिद्धांत को बोलने वाला निर्गत करने वाला

96
00:07:19,040 --> 00:07:23,040
जो व्यक्ति है उसके साथ जब कोई व्यक्ति खड़ा हो रहा है आस्था पूर्वक तो तुझे वहां पर

97
00:07:23,040 --> 00:07:27,120
क्वेश्चन नहीं करना चाहिए कि भाई गलत सिद्धांत देने वाले के साथ तुम क्यों

98
00:07:27,120 --> 00:07:31,440
खड़े हो तब तो तुम क्वेश्चन भी कर रहे हो इसका मतलब तुम व्यक्ति के सिद्धांत

99
00:07:31,440 --> 00:07:36,320
नहीं बल्कि व्यक्ति पर भी व्यक्ति के प्रति भी अनास्था जगा रहे

100
00:07:36,320 --> 00:07:37,360
दूसरी बात इसके

101
00:07:37,360 --> 00:07:41,520
जो फॉलोअर्स है कई बार आकर के कहते हैं

102
00:07:41,520 --> 00:07:45,760
बहुत सारी चीजें तो याद नहीं रह पाती पर मैं बता देता हूं जो इसके

103
00:07:45,760 --> 00:07:49,760
फॉलोवरर्स है वो कई बार आकर के कहते हैं कि तुम उस जगह पर चुप क्यों हो तुम उस जगह

104
00:07:49,760 --> 00:07:53,840
पर चुप क्यों हो भाई हमें जहां जिसका विरोध करना है और

105
00:07:53,840 --> 00:07:58,720
हमें आवश्यक लगेगा उपयुक्त लगेगा वहां हम करते हैं प्रतिकार करते हैं

106
00:07:58,720 --> 00:08:03,840
और जिन चीजों को हम प्राथमिकता देते हैं उन चीजों को हम प्राथमिकता देते हैं

107
00:08:03,840 --> 00:08:07,920
और अगर बात यही है कि तुमने उसका विरोध क्यों नहीं किया? वहां क्यों नहीं बोला?

108
00:08:07,920 --> 00:08:12,000
वहां मुंह बंद क्यों है? तो हमने अनुराग कश्यप

109
00:08:12,000 --> 00:08:16,400
का विरोध भी नहीं किया है। नरसिम्हा फिल्म में भगवान

110
00:08:16,400 --> 00:08:20,560
शिव का अपमान हो गया। उसमें भी अपना दिमाग खपा

111
00:08:20,560 --> 00:08:24,800
रहे हैं कि कैसे करना है भाई इसमें काम। नरसिम्हा मूवी जिन्होंने

112
00:08:24,800 --> 00:08:28,880
बताई है इस का उन्हें संरक्षण प्राप्त है और

113
00:08:28,880 --> 00:08:33,200
उसमें अच्छे से इस को महिमांडन किया गया है और

114
00:08:33,200 --> 00:08:37,360
बारीकी के साथ इस की विचारधारा को वहां पर प्रोत्साहन की दिया गया है जो

115
00:08:37,360 --> 00:08:42,080
शायद हमारे अन्य ऐसे मर्मज्ञ लोग नहीं देख पाए

116
00:08:42,080 --> 00:08:46,160
उसमें नहीं वो चीजें देख पाए मगर हमने तो देखी ना तो अभी हम उसका

117
00:08:46,160 --> 00:08:50,240
भी विरोध नहीं कर पाए हम अनुराग कश्यप का विरोध नहीं कर पाए जिसने ब्राह्मणों के

118
00:08:50,240 --> 00:08:52,400
लिए बहुत एक कोई फिल्म अभी थोड़े

119
00:08:52,400 --> 00:08:58,400
दिन पहले बनाई थी। बड़ा विवाद चला था। और

120
00:08:59,040 --> 00:09:03,360
लगभग 10 कम से कम 10 बौद्धानुगामी ऐसे हैं जो प्रतिदिन

121
00:09:03,360 --> 00:09:07,360
शंकराचार्य की बुराई करते हैं। हम उनका भी विरोध नहीं कर पाए। तो

122
00:09:07,360 --> 00:09:11,440
इसका अर्थ यह है कि हम अब किसी का विरोध ना करें। क्योंकि हम उनका विरोध नहीं

123
00:09:11,440 --> 00:09:15,680
कर पाए। तो यह एक बचकाना वो होता है जब हमको जो आवश्यक लगेगा हमारी

124
00:09:15,680 --> 00:09:19,840
रणनीति के अंतर्गत होगा। आवश्यक होगा, उपयुक्त होगा, लाभकारी

125
00:09:19,840 --> 00:09:24,720
होगा। हम उसका विरोध जरूर करेंगे। ठीक है? और व्यर्थ में

126
00:09:24,720 --> 00:09:28,880
प्रत्येक किसी ने भी बोल दिया अरे जाओ उसका विरोध करो तो यह भी नहीं संभव है। दूसरी

127
00:09:28,880 --> 00:09:32,880
बात मैं कह रहा था जैसे हमारे मान्य आचार्यों ने आगे आकर के पहल कर दी है कि

128
00:09:32,880 --> 00:09:36,880
भाई शाक्य द्वीपीय ब्राह्मण ऐसा है कि वो प्रामाणिक है और इधर

129
00:09:36,880 --> 00:09:40,960
पीएन मिश्र जी भी सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं ज्योतिष पीठ वालों से तो मेरा

130
00:09:40,960 --> 00:09:44,960
इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाह रहा था जो वर्णाश्रमी नहीं है जो

131
00:09:44,960 --> 00:09:49,280
धर्माभाष है सनातना है वो इस बात का लाभ उठाएंगे

132
00:09:49,280 --> 00:09:54,480
और लाभ उठा रहे हैं ठीक है? तो ऐसे

133
00:09:54,480 --> 00:09:58,720
सार्वजनिक रूप से आगे आकर के और इस तरह से बातों को करने की बजाय

134
00:09:58,720 --> 00:10:02,880
आप लोग पहले सर्वस्मति से आपस में आपका सबका आपस में वार्ता है

135
00:10:02,880 --> 00:10:07,280
चर्चा है। आप लोग आपस में एक चर्चा सौहार्दपूर्ण

136
00:10:07,280 --> 00:10:07,780
करते

137
00:10:07,520 --> 00:10:12,240
हुए और एक निर्णय समाज को दीजिए जिससे कि

138
00:10:12,240 --> 00:10:16,400
ये ऐसे जो तत्व हैं आर्य समाजी स्कन टाइप के जो तत्व है

139
00:10:16,400 --> 00:10:20,480
ये इस ये जो द्वंदवाद छिड़ा हुआ है इसका फायदा ना

140
00:10:20,480 --> 00:10:24,800
उठाएं। यह मेरे मेरा निवेदन है जो प्रामाणिक पीठ

141
00:10:24,800 --> 00:10:29,200
है हमारी प्रमाणिक पीठों से जुड़े हुए जो उसके उसके पीठाधिपति पीठाधीश्वर

142
00:10:29,200 --> 00:10:33,840
है उनसे और उनसे जुड़े हुए लोग कि भाई इस मामले में

143
00:10:33,840 --> 00:10:38,320
एक चर्चा कर ले आपस में और एक निर्णायक वक्तव्य सामने आ जाए

144
00:10:38,320 --> 00:10:41,040
और

145
00:10:41,040 --> 00:10:46,080
आचार्यों से भी यही निवेदन है। अब इसके बाद एक पक्ष और है

146
00:10:46,080 --> 00:10:50,800
कि इसके जो फॉलोअर्स हैं

147
00:10:50,800 --> 00:10:54,960
भागवतानंद के वो अलग-अलग जगह वही

148
00:10:54,960 --> 00:10:59,920
एक क्वेश्चन जिसका जवाब हम अपने वीडियोस में दे चुके हैं और उस जवाब

149
00:10:59,920 --> 00:11:04,880
से संतुष्ट ना होने की स्थिति में यह भी कह चुके कि तुम आकर के सामने से बात कर लो।

150
00:11:04,880 --> 00:11:09,120
तो जिसका हम ऑलरेडी उत्तर दे चुके हैं। उसी बात

151
00:11:09,120 --> 00:11:13,120
को अलग-अलग व्यक्ति एक एक जगह एक एक जगह रिपीट करता रहता है। तो

152
00:11:13,120 --> 00:11:17,360
भाई क्या तुमने अपने आका का वक्तव्य नहीं देखा इस बारे में? वह खुद

153
00:11:17,360 --> 00:11:21,440
यही बात बोल चुका है अपनी वीडियोस में। क्या मैं एक एक व्यक्ति के कमेंट में जाकर के

154
00:11:21,440 --> 00:11:25,520
जवाब दूं उसका? तो वो चाहेंगे कि

155
00:11:25,520 --> 00:11:30,000
यहां नहीं आएगा। यहां मां का दूध नहीं पिया इसने यहां नहीं पिया। वो एक दयानेश

156
00:11:30,000 --> 00:11:34,000
करके शायदश पौराणिक करके एक आईडी है। वो लिख रहा है

157
00:11:34,000 --> 00:11:38,080
अपनी पोस्ट डाल के कि यहां नहीं आएगा जवाब देने। भाई मैं एक-एक व्यक्ति का जवाब

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00:11:38,080 --> 00:11:42,640
नहीं दे सकता। अगर अगर तू जिसको तू मानता है

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00:11:42,640 --> 00:11:47,120
अगर तू उसके प्रति निष्ठा रखता है उसका पक्ष जानता है तो आजा

160
00:11:47,120 --> 00:11:51,520
सामने से बात कर लेंगे कायरों की तरह मुंह छुपाकर

161
00:11:51,520 --> 00:11:55,600
बंद कमरे में बैठकर और टाइप

162
00:11:55,600 --> 00:11:56,100
करना बहुत

163
00:11:56,080 --> 00:12:00,320
आसान होता है धर्म के लिए सामने आकर मुखर हो के प्रखरता

164
00:12:00,320 --> 00:12:04,320
के साथ अपना सीना तान के खड़े होना

165
00:12:04,320 --> 00:12:08,320
इन दोनों बातों में अंतर है। करते रहो वहां बंद कमरे में बैठकर

166
00:12:08,320 --> 00:12:12,640
के हम जब घर की स्त्रियों पर आक्रमण

167
00:12:12,640 --> 00:12:17,360
कर देंगे ना विधर्मी तब वही करना पोस्ट डालना Facebook पर

168
00:12:17,360 --> 00:12:21,440
तो कहने का अर्थ यह है कि एक एक व्यक्ति के कमेंट में जाकर के

169
00:12:21,440 --> 00:12:25,680
हमारे लिए तो संभव है नहीं कि हम अलग-अलग व्यक्तियों की सबकी जो शंकाएं

170
00:12:25,680 --> 00:12:29,760
हैं उसका समाधान करें। हमने अपने पक्ष को बहुत अच्छे

171
00:12:29,760 --> 00:12:33,920
से संतुष्टिजनक पूर्वक निर्गत कर दिया है वीडियो

172
00:12:33,920 --> 00:12:38,160
के माध्यम से। यदि यदि किसी पक्ष पर किसी को आपत्ति है

173
00:12:38,160 --> 00:12:42,240
तो वह आकर के सामने आकर बात करे।

174
00:12:42,240 --> 00:12:46,640
ठीक है? ये सारी चीजें थी।

175
00:12:46,640 --> 00:12:50,960
एक आचार्यों से निवेदन कि वो आपस में बात कर ले

176
00:12:50,960 --> 00:12:55,440
और एक निर्णय समाज को प्रदान करें। दूसरी

177
00:12:55,440 --> 00:12:59,520
जबाला वाले विषय में हम अपना पक्ष बहुत पहले ही प्रस्तुत कर चुके हैं। आवश्यकता

178
00:12:59,520 --> 00:13:03,600
पड़ेगी। कोई अगर सामने से बात करेगा तो अन्यथा आवश्यकता

179
00:13:03,600 --> 00:13:08,960
पड़ेगी तो पुनः प्रस्तुत करेंगे।

180
00:13:08,960 --> 00:13:13,040
तीसरा कि एक एक व्यक्ति अपेक्षा करना बंद करे कि उसके कमेंट

181
00:13:13,040 --> 00:13:17,680
में जाकर के हम उसको व्यक्तिगत रूप से उत्तर देंगे। यदि

182
00:13:17,680 --> 00:13:21,680
उसको लगता है कि वो सत्य का पक्षधर है। उसकी माताजी ने उसको निष्ठा पूर्वक

183
00:13:21,680 --> 00:13:25,760
पिलाया है तो वो सामना करेगा। आमने सामने बात करे।

184
00:13:25,760 --> 00:13:29,840
हम घंटों तक वहां कमेंट में फिर हमने एक बात कही। फिर उधर से पांच मिनट बाद

185
00:13:29,840 --> 00:13:34,480
10 मिनट बाद कोई उत्तर आया। हमारे पास इतना समय नहीं है भाई। तुम्हारे पास होगा।

186
00:13:34,480 --> 00:13:40,480
हमारे पास नहीं है। ठीक? हमारे लिए वो संभव नहीं है

187
00:13:44,160 --> 00:13:48,240
और

188
00:13:48,240 --> 00:13:52,400
निग्रह निकासिका बहुत मेहनत से बनाई है। आप लोग उसे देखें और उसमें

189
00:13:52,400 --> 00:13:56,880
जो प्रश्न खड़े किए हैं इसकी अप्रामाणिकता से संबंधित

190
00:13:56,880 --> 00:14:01,200
वो आप प्रश्न करें जाकर के पूछे और आज भी एक बहुत

191
00:14:01,200 --> 00:14:05,200
सनसनीखेज खुलासा होने वाला है शाम को इसकी परंपरा

192
00:14:05,200 --> 00:14:09,200
का अंतिम जो चरण है ना वो सनसनीखेज खुलासा सबको हिला के रख

193
00:14:09,200 --> 00:14:13,280
देने वाला है वो अवश्य देखें अभी थोड़ी बहुत देर में वीडियो

194
00:14:13,280 --> 00:14:17,520
आ जाएगा वो जो लास्ट और अंतिम पार्ट है इसका निग्रह

195
00:14:17,520 --> 00:14:21,680
निकास का ठीक है अब ये जो नास्तिक व्यक्ति हैं

196
00:14:21,680 --> 00:14:27,680
जो आए हैं इनको हम स्टेज पर ले लेते हैं।

197
00:14:33,120 --> 00:14:37,200
कैमरा ऑन कर लीजिए अपना।

198
00:14:37,200 --> 00:14:43,200
विस्मय रावत जी

199
00:14:55,840 --> 00:14:59,920
मारुति शर्मा जी हमने नहीं कहा है कि

200
00:14:59,920 --> 00:15:04,080
वो कोई ऑथेंटिक व्यक्ति है। परंतु नहीं

201
00:15:04,080 --> 00:15:08,240
है तो यह बात भी सामने से कही जानी चाहिए ना। फिर एक

202
00:15:08,240 --> 00:15:12,320
बात मैं कहना भूल गया। जब तक ये राउत जी अपना कैमरा ऑन कर रहे

203
00:15:12,320 --> 00:15:18,320
हैं। मैं वो भी बोल देता हूं। क्या है कि

204
00:15:19,280 --> 00:15:23,280
जो आर्य समाजी है ना उनका काम करने का तरीका क्या

205
00:15:23,280 --> 00:15:27,520
है? आर्य समाजियों का इस का

206
00:15:27,520 --> 00:15:31,920
काम करने का तरीका क्या होता है? जाकिर नायक का या ये जो विधर्मी

207
00:15:31,920 --> 00:15:36,160
पार्टीज हैं इनका काम करने का तरीका क्या है? इनका

208
00:15:36,160 --> 00:15:40,480
काम करने का तरीका यह होता है कि जो हमारे

209
00:15:40,480 --> 00:15:44,480
सनातन धर्म के जटिल मुद्दे जिन पर बहुत

210
00:15:44,480 --> 00:15:47,920
प्रमाद फैला हुआ है

211
00:15:47,920 --> 00:15:52,240
और जिनके जिनके संबंध में शंका समाधान

212
00:15:52,240 --> 00:15:56,560
केवल दो लाइन में नहीं हो सकता है। ऐसे जटिल

213
00:15:56,560 --> 00:16:00,720
मुद्दों को जानबूझकर आर्य समाजी स्कॉन जैसी

214
00:16:00,720 --> 00:16:04,720
संस्थाएं या ओसो जैसी संस्थाएं आचार्यों के सामने प्रश्न

215
00:16:04,720 --> 00:16:08,880
खड़ा कर ऐसे जटिल मुद्दों से जुड़े हुए प्रश्नों को खड़ा कर आचार्यों

216
00:16:08,880 --> 00:16:13,360
को असहज स्थिति में डालते हैं। असहज जैसे

217
00:16:13,360 --> 00:16:17,360
कि मान लीजिए मंच पर बैठे हुए हमारे शंकराचार्य

218
00:16:17,360 --> 00:16:21,520
अब कोई आर्य समाज जी आकर के बोले क्या तुम्हारे यहां पर स्त्रियां

219
00:16:21,520 --> 00:16:25,680
मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती गर्भगृह में क्या तुम्हारे यहां पर स्त्रियां

220
00:16:25,680 --> 00:16:30,640
शिवलिंग को छू नहीं सकती अब इसको समझाने में समय चाहिए

221
00:16:30,640 --> 00:16:36,000
जो वहां पर चल रहे प्रसंग के लिए उतना समय तो है नहीं

222
00:16:36,000 --> 00:16:40,960
अब क्या होगा कि या तो वो ये कहे नहीं कर सकती तो क्या होगा

223
00:16:40,960 --> 00:16:45,360
जनता में सनातन धर्म के प्रति परंपरा प्राप्त सिद्धांतों के प्रति अनास्था

224
00:16:45,360 --> 00:16:49,360
हो और यदि वो वहां पर यह कह दे कि नहीं

225
00:16:49,360 --> 00:16:53,680
नहीं ऐसा किसने कहा कि नहीं कर सकती तो क्या होगा तो शास्त्र

226
00:16:53,680 --> 00:16:57,680
का विरोध हो जाएगा तो ऐसी स्थितियां उत्पन्न

227
00:16:57,680 --> 00:17:01,840
करता है आर्य समाज इस कौन इस कौन क्या कहता है अरे ये तो खुद को ही भगवान

228
00:17:01,840 --> 00:17:06,400
मानते हैं ये तो अद्वैत वाले

229
00:17:06,400 --> 00:17:10,480
ये तो खुद की पूजा करवाना चाहते हैं ये क्या है जटिल मुद्दा अद्वैत को समझाने में टाइम

230
00:17:10,480 --> 00:17:14,480
लगेगा कि खुद की पूजा करवाना चाहते हैं कि नहीं करवाना चाहते जाते मगर ये तो

231
00:17:14,480 --> 00:17:18,720
अद्वैत मतलब मैं ही ब्रह्म हूं। ये तो खुद तो क्या जटिल मुद्दा उखाड़ा

232
00:17:18,720 --> 00:17:22,800
तो असहज स्थिति उत्पन्न की। अब इसको समझाने के लिए टाइम चाहिए। आपने प्रश्न तो

233
00:17:22,800 --> 00:17:27,520
खड़ा कर दिया। वही कार्य भागवतानंद भी कर रहा है

234
00:17:27,520 --> 00:17:31,680
कि ऐसे जटिल मुद्दों पर प्रश्न खड़ा करो जिन

235
00:17:31,680 --> 00:17:35,760
पर बात करने में समय लगे जिनको किसी मंच पर बहुत

236
00:17:35,760 --> 00:17:40,480
साधारण रूप से प्रस्तुत करना आज के समय में बहुत

237
00:17:40,480 --> 00:17:44,480
सरल नहीं है। ऐसे जटिल मुद्दे वो खड़े करता है। वही

238
00:17:44,480 --> 00:17:48,640
रणनीति अपना रहा है जो इस और आर्य समाज योगी रही है अपने अपने को बिल्ड

239
00:17:48,640 --> 00:17:52,080
अप करने के लिए

240
00:17:52,080 --> 00:17:56,880
और यदि जटिल मुद्दे पे शांत रह जाए आचार्य जन

241
00:17:56,880 --> 00:18:01,120
मौन हो जाए कि अरे तुम उसके पक्ष में क्यों नहीं बोल रहे हो? अच्छा मुझसे सब

242
00:18:01,120 --> 00:18:05,760
लोग सवाल कर रहे कि तुम क्यों नहीं बोल रहे हो? तुम क्यों नहीं बोल रहे हो? अरे भैया

243
00:18:05,760 --> 00:18:09,760
ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी भी तो नहीं बोल रहे हैं। वहां क्यों

244
00:18:09,760 --> 00:18:13,840
नहीं तुम जाकर के ये सवाल पूछ रहे हो? क्यों नहीं बोल रहे हो? तो कुछ

245
00:18:13,840 --> 00:18:18,000
ऐसी चीजें होती हैं जिस पर कहां मौन रहना है, कहां पर बोलना है प्रकर्ता के साथ।

246
00:18:18,000 --> 00:18:22,400
तो यह सारी चीजें सोचनी पड़ती है। विशेष तौर पर उस समय जब राजतंत्र

247
00:18:22,400 --> 00:18:25,600
नहीं है, लोकतंत्र है।

248
00:18:25,600 --> 00:18:30,320
अब यहां पर यदि कोई

249
00:18:30,320 --> 00:18:32,560
ये

250
00:18:32,560 --> 00:18:37,040
कोई आचार्य मौन रह गया तो लो आत्म मुग्धता मौन हो गए।

251
00:18:37,040 --> 00:18:41,200
और फिर स्वयं के गुरु ने मना किया कि मेरा बारे में बताना मत। तो मैं नहीं बताऊंगा।

252
00:18:41,200 --> 00:18:47,200
व्यक्तिगत रूप से बता दूंगा। हां। तो ये सारी चीजें हैं।

253
00:18:50,000 --> 00:18:56,000
ठीक है। वो आ गए क्या?

254
00:18:57,600 --> 00:19:02,000
आपका चेहरा बहुत धुंधला आ रहा है। कृष्णा राउत जी। वो कैमरा

255
00:19:02,000 --> 00:19:06,160
में थोड़ा प्रॉब्लम है ना इसलिए मैं कैमरा बंद करके बात कर सकता हूं?

256
00:19:06,160 --> 00:19:10,560
नहीं नहीं। कैमरा बंद करके बात नहीं करते हम लोग। अच्छा

257
00:19:10,560 --> 00:19:13,440
ठीक है।

258
00:19:13,440 --> 00:19:15,680
हम

259
00:19:15,680 --> 00:19:19,840
तो आप धर्म को नहीं मानते। मैं

260
00:19:19,840 --> 00:19:24,400
नास्तिक हूं। मैं किसी धर्म में मेरा विश्वास नहीं है।

261
00:19:24,400 --> 00:19:26,640
हम

262
00:19:26,640 --> 00:19:32,640
धर्म में विश्वास नहीं है। यानी कि ईश्वर में विश्वास नहीं है। हां।

263
00:19:33,680 --> 00:19:37,840
अच्छा।

264
00:19:37,840 --> 00:19:41,920
तो सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता, बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर

265
00:19:41,920 --> 00:19:46,240
करते हैं? हम मतलब विज्ञान के बेसिस

266
00:19:46,240 --> 00:19:51,120
पे आधार कर सकते हैं। पहली बार अंतर कब किया था?

267
00:19:51,120 --> 00:19:55,520
अ पहली बार अंतर तब हुआ था जब मतलब अर्ली

268
00:19:55,520 --> 00:20:01,440
जो ट्राइब्स थे उन्होंने एक दूसरे के बीच में अंतर किया। कब किया था?

269
00:20:01,440 --> 00:20:05,440
मैं जब जन्म हुआ था तब से मैंने किया है। मुझे

270
00:20:05,440 --> 00:20:09,520
पता है कौन नहीं विज्ञान की थ्योरी आपने पढ़ ली थी बचपन

271
00:20:09,520 --> 00:20:13,840
में ही। नहीं नहीं पढ़ी थी लेकिन सिंस हमारा जो भी

272
00:20:13,840 --> 00:20:18,160
मतलब मतलब बायोलॉजिकल फंक्शन जो है वो विज्ञान

273
00:20:18,160 --> 00:20:22,160
के आधार पर काम करते हैं। इसीलिए विज्ञान हम यानी कि आपका

274
00:20:22,160 --> 00:20:26,240
कहना ये है कि अगर किसी को उसके मां-बाप बचपन से नहीं सिखाएंगे बहन है,

275
00:20:26,240 --> 00:20:28,560
मां है तो भी वो सीख जाएगा।

276
00:20:28,560 --> 00:20:34,560
सिखाने की जरूरत ही नहीं है। जब हम में इनबिल्ट वो सारी चीजें हैं।

277
00:20:35,120 --> 00:20:39,360
मैं ये पूछ रहा हूं कि क्या आप ये कह रहे हैं

278
00:20:39,360 --> 00:20:43,360
कि यदि किसी को उसके मां-बाप नहीं सिखाते हैं कि

279
00:20:43,360 --> 00:20:47,520
माता कौन है, बहन कौन है, पत्नी कौन है? तो भी वो सीख जाता है।

280
00:20:47,520 --> 00:20:49,760
हां।

281
00:20:49,760 --> 00:20:55,760
उदाहरण उदाहरण के तौर पर

282
00:20:56,800 --> 00:21:00,960
मैं मेरा जो कहने का मतलब ये है जो मतलब जो

283
00:21:00,960 --> 00:21:04,960
इसके पीछे जो विज्ञान है जो लोग इसके पीछे विज्ञान देखते हैं उनको एंथ्रोपोलॉजिस्ट कहते

284
00:21:04,960 --> 00:21:08,960
हैं। एंथ्रोपोलॉजिस्ट ने ये कहा है कि बात करिए। देखिए

285
00:21:08,960 --> 00:21:13,680
अभी आपको उदाहरण देना है। मैं आपको बहुत सारे उदाहरण दे दूंगा। अनगिनत

286
00:21:13,680 --> 00:21:18,080
जिसमें कि बच्चे को माता-पिता ने ही सिखाया है। अनगिनत

287
00:21:18,080 --> 00:21:22,880
अब आप मुझे उदाहरण दीजिए जिसको ना सिखाया हो वो बन गया हो। मतलब

288
00:21:22,880 --> 00:21:25,600
क्या बन जाए?

289
00:21:25,600 --> 00:21:30,160
यही माता बहन और पत्नी में अंतर करने वाला

290
00:21:30,160 --> 00:21:32,640
[संगीत]

291
00:21:32,640 --> 00:21:36,960
अगर एक मान लीजिए एक बच्चे को हम

292
00:21:36,960 --> 00:21:41,760
नव जब किसी का जन्म हुआ होता है। जस्ट जन्म हुआ होता है।

293
00:21:41,760 --> 00:21:44,240
पिता आसपास है क्या इस समय

294
00:21:44,240 --> 00:21:48,960
अभी तो नहीं है नहीं है

295
00:21:48,960 --> 00:21:53,120
कभी ऐसा हुआ है कि आप कपड़ों के बिना घर से बाहर गए हो बचपन में

296
00:21:53,120 --> 00:21:55,840
हां नहीं

297
00:21:55,840 --> 00:22:00,240
यानी आपको ये सेंस लेके पैदा हुए थे कि मुझे कपड़े पहनने हैं

298
00:22:00,240 --> 00:22:03,440
हां

299
00:22:03,440 --> 00:22:08,800
तो अब जब आप झूठ की लड़ाई लड़ रहे हैं तो इसमें आप कर ही क्या सकते हैं

300
00:22:08,800 --> 00:22:13,040
आपके मां-बाप ने आपको कभी ना कभी रोका का है। यह बात तथ्य

301
00:22:13,040 --> 00:22:18,080
है। नंगे बाहर मत जाओ। नग्न अवस्था में बाहर मत जाओ।

302
00:22:18,080 --> 00:22:22,240
आपके माता-पिता ने कभी ना कभी बताया है ये बहन है। ये

303
00:22:22,240 --> 00:22:26,320
मां है। ठीक है? हां। तो अब जब

304
00:22:26,320 --> 00:22:30,320
आप झूठ बोलने लगोगे तो वो काम नहीं चलेगा। आपको अगर नास्तिक बनना

305
00:22:30,320 --> 00:22:35,680
है तो सत्यवादी नास्तिक बनिए। या तो मुझे उदाहरण दीजिए।

306
00:22:35,680 --> 00:22:39,760
ऐसा कोई बच्चा है जिसको उसके मां-बाप ने सिखाया हो कभी ना कभी कि

307
00:22:39,760 --> 00:22:45,040
बिना कपड़ों के बाहर नहीं जाते। बिना हाथ धोए खाना नहीं खाते।

308
00:22:45,040 --> 00:22:49,200
ये सब सभ्यता सिखाई गई है ना उसको मां-बाप के द्वारा कि

309
00:22:49,200 --> 00:22:53,040
उस समय उसने साइंस पढ़ ली थी।

310
00:22:53,040 --> 00:22:57,360
नहीं मैं मैं ये कहने की कोशिश कर रहा हूं कि आप जो कह रहे हैं पढ़ने

311
00:22:57,360 --> 00:22:59,360
की जरूरत है। मैं ये कह रहा हूं कि उसे

312
00:22:59,360 --> 00:23:03,520
पढ़ने की जरूरत है। मैं आपके मैं आपके हिसाब से सारे प्रश्नों

313
00:23:03,520 --> 00:23:07,760
को लूंगा। पहले एक बात को खत्म करिए। अभी बात चल रही है कि

314
00:23:07,760 --> 00:23:11,760
आपको जो यह सभ्यता मिली है माता बहन और पत्नी में अंतर करने की

315
00:23:11,760 --> 00:23:16,000
आपका कहना कि आपने आपके मां-बाप ने नहीं सिखाई है। इसीलिए मैंने पूछा था कि मां-बाप

316
00:23:16,000 --> 00:23:20,000
आपके आसपास हो तो आप पूछ लो। क्या ये बचपन में कभी बिना चड्डी के बाहर गया

317
00:23:20,000 --> 00:23:26,000
था क्या?

318
00:23:28,960 --> 00:23:33,280
यह देखा गया है कि जब एक मतलब ये एक

319
00:23:33,280 --> 00:23:37,360
साइंटिफिक इसको कहते हैं मैं साइंस पे आ रहा हूं मेरे भाई। आप पहले इस

320
00:23:37,360 --> 00:23:41,360
चीज को क्लियर करिए कि आपके माता-पिता ने ही आपको ये सभ्यता दी है

321
00:23:41,360 --> 00:23:45,520
कि मैं बाहर जाऊं तो कपड़े पहन के जाऊं। फिर मैं साइंस पे आऊं। हां

322
00:23:45,520 --> 00:23:50,000
हां हां ठीक है ना? हां। ठीक है। हां। तो ये इनबिल्ट

323
00:23:50,000 --> 00:23:54,240
नहीं था। इनबिल्ट होता तो आपके माता-पिता को ना देनी पड़ती। पहली बात। हां।

324
00:23:54,240 --> 00:23:59,440
ठीक है। तो आपका यह कथन गलत है कि इनबिल्ट है। हां।

325
00:23:59,440 --> 00:24:03,360
अब दूसरी बात आती है साइंस।

326
00:24:03,360 --> 00:24:07,360
क्या साइंस के जितने भी अच्छा साइंस ने ये कहा

327
00:24:07,360 --> 00:24:11,760
है वो साइंस ने कहा होता है? साइंस का कोई एक अपना सेंटर

328
00:24:11,760 --> 00:24:15,040
चल रहा है या साइंस को प्रतिपादित

329
00:24:15,040 --> 00:24:19,440
करने वाले अलग-अलग साइंटिस्ट होते हैं। उनकी थ्योरी होती है। साइंस

330
00:24:19,440 --> 00:24:24,400
क्या है? कहां से स्फूटित हो रहा है?

331
00:24:24,400 --> 00:24:28,400
साइंस हम पहले ऑब्जर्व करते हैं और उनके बीच में रूल्स निकालने की कोशिश करते

332
00:24:28,400 --> 00:24:32,400
हैं। हम मेरा कहने का मतलब है जब हम कहते हैं ये साइंस

333
00:24:32,400 --> 00:24:36,560
कहती है तो साइंस का कोई एक सेंटर है क्या कि ये जो

334
00:24:36,560 --> 00:24:41,040
सेंटर कह देगा ये माना जाएगा ये साइंस ने कहा है।

335
00:24:41,040 --> 00:24:45,120
क्योंकि हम ये जानते हैं क्योंकि हम ये देखते हैं कि एक साइंटिस्ट

336
00:24:45,120 --> 00:24:49,200
ने यदि ये वाली थ्योरी दी है तो उसके ठीक विपरीत दूसरे साइंटिस्ट ने

337
00:24:49,200 --> 00:24:53,360
दूसरी थ्योरी दी है। देखते हैं ना? हां। तो

338
00:24:53,360 --> 00:24:57,840
फिर इसका मतलब जब हम ये कहते हैं कि साइंस ने ये कहा है तो वो

339
00:24:57,840 --> 00:25:01,920
पर्टिकुलर प्रॉपर जो पूरे ह्यूमन बीइंग्स

340
00:25:01,920 --> 00:25:06,320
के द्वारा प्रतिपादित की जाने वाली साइंस है उसके द्वारा निर्गत

341
00:25:06,320 --> 00:25:10,640
होने वाली बात नहीं होती है बल्कि साइंस को फॉलो करने वाले

342
00:25:10,640 --> 00:25:15,040
किसी एक विशेषज्ञ के द्वारा प्रतिपादित कोई नियम होता है जिसको

343
00:25:15,040 --> 00:25:19,120
कुछ और ऑथेंटिक लोगों ने कुछ और प्रामाणिक लोगों ने या कुछ और

344
00:25:19,120 --> 00:25:23,360
ऐसे श्रेष्ठ जनों ने स्वीकार कर लिया होता है जिस पर

345
00:25:23,360 --> 00:25:28,000
जिन पर लोगों की आस्था है। समझ में आ रही है आपको मेरी बात?

346
00:25:28,000 --> 00:25:30,240
यानी कि जब आप यह वक्तव्य दे रहे हैं साइंस

347
00:25:30,240 --> 00:25:34,400
ने ये कहा है तो वो वक्तव्य पूरे ओवरऑल साइंस का नहीं है। वो किस

348
00:25:34,400 --> 00:25:38,480
कुछ साइंटिस्ट का है। उसके अगेंस्ट थ्योरीज भी

349
00:25:38,480 --> 00:25:40,640
है।

350
00:25:40,640 --> 00:25:46,640
मैं बात अभी अपना व्यक्तित्व रख सकता हूं। हां रखिए।

351
00:25:46,960 --> 00:25:51,040
ये मैं ये कहना कोशिश कर रहा हूं। जब एक साइंटिस्ट या

352
00:25:51,040 --> 00:25:55,040
अपना एक व्यक्तित्व रखते हैं तब उस व्यक्तित्व को

353
00:25:55,040 --> 00:25:59,600
टेस्ट किया जाता है यूजिंग रियल वर्ल्ड एप्लीकेशन। मान लीजिए हमें अभी गुरुत्वाकर्षण

354
00:25:59,600 --> 00:26:03,760
के बारे में किसी ने एक थ्योरी दी। अरे भाई आप देखिए

355
00:26:03,760 --> 00:26:07,760
एक एक करके बात चली। मैं नहीं आपको मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आपकी बातें

356
00:26:07,760 --> 00:26:11,760
मैं सारी सिरे से खारिज कर रहा हूं। जो बात चल रही है।

357
00:26:11,760 --> 00:26:16,080
हां। जब आपने ये जो सेंटेंस कहा है उस पर ध्यान दीजिए।

358
00:26:16,080 --> 00:26:20,560
आपने कहा साइंस ये कहती है। साइंस नहीं कहती है। कुछ साइंटिस्ट

359
00:26:20,560 --> 00:26:24,800
ऐसा कहते हैं और मैं आपको ऐसे भी साइंटिस्ट दिखा दूंगा

360
00:26:24,800 --> 00:26:29,040
जो उसके ठीक विपरीत बात कर रहे हैं। हां। लेकिन अगर

361
00:26:29,040 --> 00:26:33,120
वो जो उनके विपरीत बात कर रहे हैं। वो वो वो फिर हमें प्रैक्टिकली

362
00:26:33,120 --> 00:26:37,200
जाके देखना होगा ना क्या हो रहा है। कौन सा साइंटिस्ट? हां। हम अभी ये नहीं कह

363
00:26:37,200 --> 00:26:41,200
सकते साइंस ये कहती है। नहीं तो यहीं पे प्रैक्टिकल शुरू करना पड़ेगा। हां। है

364
00:26:41,200 --> 00:26:45,360
ना? हां। अच्छा। अब दूसरी आगे बात ये

365
00:26:45,360 --> 00:26:49,440
आती है। अब दूसरी आगे बात आती है। क्या साइंस के द्वारा बताए

366
00:26:49,440 --> 00:26:53,440
जाने वाले नियम बदलते हैं या नहीं? मान

367
00:26:53,440 --> 00:26:58,640
लेते हैं कि साइंस ने ये बताया है। हां

368
00:26:58,640 --> 00:27:03,040
हां साइंस के द्वारा नियम बदल बदलते हैं। अगर

369
00:27:03,040 --> 00:27:07,200
नए एक्सपेरिमेंट होते हैं और अगर नई चीज आती है तो वो बदलते हैं।

370
00:27:07,200 --> 00:27:11,360
ये कौन सा सही है। तो इसका मतलब आज आप बचपन

371
00:27:11,360 --> 00:27:15,440
से आपने युवा होने तक या साइंस को ना जानने

372
00:27:15,440 --> 00:27:19,760
तक आपने अपनी बहन को बहन इसलिए माना है क्योंकि माता-पिता ने सिखाया है।

373
00:27:19,760 --> 00:27:23,920
ठीक है? हां। अच्छा। उसके बाद युवा होने के बाद आज की

374
00:27:23,920 --> 00:27:27,920
डेट में आप इसलिए मानते हैं अपनी बहन को बहन क्योंकि साइंस ने कहा है या

375
00:27:27,920 --> 00:27:33,920
माता-पिता की बात भी है और साइंस की बात भी है। हां

376
00:27:35,440 --> 00:27:39,760
समझ रहे हैं आप क्या कहना चाहते हैं? अभी राइट नाउ आपकी जो

377
00:27:39,760 --> 00:27:43,840
आपका जो अपनी बहन को बहन मानने के लिए मां को मां मानने के लिए जो

378
00:27:43,840 --> 00:27:47,920
आपका जो सेंस है वो साइंस से है या फिर

379
00:27:47,920 --> 00:27:52,320
माता-पिता से या दोनों से है?

380
00:27:52,320 --> 00:27:56,800
पहला जो था वो साइंस से था फिर माता पिता से।

381
00:27:56,800 --> 00:28:00,800
अरे अभी तो आपने कहा कि बचपन से मुझे माता पिता ने बचपन में ही आपने

382
00:28:00,800 --> 00:28:04,880
थ्योरीज पढ़ ली थी क्या? नहीं मैं मैं अपनी एक बातें

383
00:28:04,880 --> 00:28:09,360
पूरी कहना चाहता हूं। एक जिससे मैं थोड़ा स्पष्ट मैं

384
00:28:09,360 --> 00:28:13,920
आपकी चीजों को मैं समझ रहा हूं। मैं बहुत सारे नास्तिकों से बात कर चुका हूं।

385
00:28:13,920 --> 00:28:18,000
आप मुझे मुझे मालूम है आप क्या-क्या कहना चाह रहे हैं। इसलिए मैं थोड़ा सा पॉइंट टू

386
00:28:18,000 --> 00:28:22,000
द पॉइंट रहने की कोशिश कर रहा हूं और मैं ऐसा नहीं आपको बोलने का मौका नहीं दूंगा।

387
00:28:22,000 --> 00:28:26,560
आपने जो वक्तव्य दिया है अभी आपने कहा कि बचपन से मुझे मेरे माता-पिता ने सिखाया

388
00:28:26,560 --> 00:28:30,640
तब आपके जीवन में साइंस नहीं थी ना तो आपका ये कहना गलत

389
00:28:30,640 --> 00:28:34,800
है कि पहले साइंस थी और फिर माता-पिता। मैं मैं ये

390
00:28:34,800 --> 00:28:38,800
कहने की कोशिश कर रहा हूं। मान मान लीजिए मैं

391
00:28:38,800 --> 00:28:43,440
मेरा कहने का मतलब यह है कि अगर हमारे जो बायोलॉजिकल

392
00:28:43,440 --> 00:28:47,760
फैक्ट है अगर वो इस चीज से अग्री ही नहीं करते तो हम उस नजरिए

393
00:28:47,760 --> 00:28:50,480
से देख ही नहीं पाते। मैं ये कहने की कोशिश कर रहा हूं। आप फिर

394
00:28:50,480 --> 00:28:54,480
से फिर से दोबारा उस पर जा रहे हैं। बायोलॉजिकल

395
00:28:54,480 --> 00:28:58,720
फैक्ट होने के बाद आज तक आपने ये नहीं सुना है कि लोगों ने बहन के साथ रमण

396
00:28:58,720 --> 00:29:02,800
किया है। ऐसे केसेस नहीं है सामने। हां किया

397
00:29:02,800 --> 00:29:06,960
है तो यानी कि बायोलॉजिकल फैक्ट नहीं है। अगर होते तो वो ना करता। जैसे

398
00:29:06,960 --> 00:29:10,960
हमारे पास लोहा खाने का बायोलॉजिकल फैक्टर नहीं है। तो

399
00:29:10,960 --> 00:29:15,520
इसलिए हम लोहा नहीं खाते हैं।

400
00:29:15,520 --> 00:29:19,600
लेकिन ये ये बात भी तो सच है कि मेजरिटी ऑफ़ लोग उस चीज में नहीं जाते हैं

401
00:29:19,600 --> 00:29:23,760
ना। तो हमें एक पैटर्न देखने को मिलता है जिससे हम ये कह सकते हैं कि उसके

402
00:29:23,760 --> 00:29:27,760
पीछे का एक साइंस फक्चुअल है। मेजरिटी ऑफ लोग तो

403
00:29:27,760 --> 00:29:33,760
मेजरिटी ऑफ़ लोग तो आस्तिक है। फिर

404
00:29:35,280 --> 00:29:39,760
लेकिन आस्तिक होने आस्तिक होने का मतलब नहीं नहीं अभी देखिए आप अगर मेजॉरिटी

405
00:29:39,760 --> 00:29:43,840
पे चलेंगे तो मैं मेजरिटी पे सवाल करूंगा। मेजॉरिटी ऑफ़ लोग तो आस्तिक है

406
00:29:43,840 --> 00:29:48,720
ना। दुनिया के कितने परसेंट लोग आस्तिक हैं?

407
00:29:48,720 --> 00:29:52,720
होंगे लेकिन ज्यादातर लोग होंगे आस्तिक होंगे ना तो फिर

408
00:29:52,720 --> 00:29:57,200
वहां मेजरिटी कहां चली गई

409
00:29:57,200 --> 00:30:01,280
आस्तिक आस्तिक होने के पीछे का उसका एक रीजन ये

410
00:30:01,280 --> 00:30:05,760
भी है बस बस इसका मतलब आपको मेजॉरिटी से मतलब नहीं है

411
00:30:05,760 --> 00:30:10,000
तो फिर आप अपनी चीज को सिद्ध करने के लिए मेजॉरिटी मत बताइए। दूसरी

412
00:30:10,000 --> 00:30:14,000
बात यह है कि जो चलिए मान लीजिए आस्तिक भी नहीं है। मगर वह जो मेजरिटी

413
00:30:14,000 --> 00:30:18,080
आप कह रहे हैं ना उन मेजरिटी वाले लोगों में भी बहन को बहन की

414
00:30:18,080 --> 00:30:22,560
तरीके से देखने की जो भावना है वो भावना आई कहां से है? माता-पिता

415
00:30:22,560 --> 00:30:26,800
से। साइंस से नहीं आई है। मेजॉरिटी में देखिए आप फिर आपकी

416
00:30:26,800 --> 00:30:31,920
बात कटेगी।

417
00:30:31,920 --> 00:30:35,920
नहीं समझे? हां। हां। तो आप ये कह रहे हैं मेजॉरिटी ऑफ़ लोग

418
00:30:35,920 --> 00:30:40,000
तो बहन को बहन की तरह से ही देखते हैं। गलत नहीं करते हैं बहन के साथ। यह

419
00:30:40,000 --> 00:30:44,080
मेजॉरिटी ऑफ़ लोगों में ज्यादा मेजोरिटी उन्हीं लोगों की जिनको धर्म

420
00:30:44,080 --> 00:30:48,320
ने सिखाया, माता-पिता ने सिखाया, जो साइंटिस्ट नहीं थे, जिन्होंने साइंस

421
00:30:48,320 --> 00:30:53,120
की वो थ्योरीज नहीं पढ़ी थी जो आप जिनके बल पर कह रहे हैं, मैं इसलिए बैन को बैन मानता हूं।

422
00:30:53,120 --> 00:30:57,200
लेकिन अगर मैं जिस तरह से आपने ये कहा कि हमने ये

423
00:30:57,200 --> 00:31:01,360
सब तब सीखा जब हमें साइंस के थ्योरीस पता नहीं थे। मतलब एक अल्पायु में

424
00:31:01,360 --> 00:31:05,520
मुझे पता नहीं था कि साइंस की थ्योरीज है तो ये हमें धर्म से मिला। आप ये कहने

425
00:31:05,520 --> 00:31:10,080
की कोशिश कर रहे हैं। मैं कहूंगा आप कंक्लूजन पे मत जाइए। प्लीज

426
00:31:10,080 --> 00:31:14,080
मतलब आपका कंक्लूजन हम एक एक बात को काउंटर कर रहे

427
00:31:14,080 --> 00:31:18,400
हैं। एक एक बात को आप कंक्लूजन पे मत जाइए। कंक्लूजन पे भी जाएंगे।

428
00:31:18,400 --> 00:31:22,960
मगर अभी जो बात चल रही है उस पे रहिए। जो आपने बात

429
00:31:22,960 --> 00:31:27,040
आपने जो यह बात कही है कि भाई मेजरिटी ऑफ पीपल जो है बहन को बहन

430
00:31:27,040 --> 00:31:31,040
के तरीके से ही देखते हैं। इसलिए अपवाद की वजह से नियम नहीं बदला जा सकता।

431
00:31:31,040 --> 00:31:35,040
सही बात है। बिल्कुल सही बात। मगर उस मेजरिटी ऑफ

432
00:31:35,040 --> 00:31:39,920
पीपल में मेजरिटी उनहीं लोगों की है जिन्होंने साइंस के द्वारा नहीं

433
00:31:39,920 --> 00:31:44,080
अपने माता-पिता के द्वारा दिए गए धर्म के कारण बहन को बहन के नजरिए से देखा

434
00:31:44,080 --> 00:31:46,960
है। और दूसरी बात आपका जो ये कहना

435
00:31:46,960 --> 00:31:51,440
है कि उसके अंदर ह्यूमन इंस्टिंक्ट है। बहन को बहन के तरीके से देखना।

436
00:31:51,440 --> 00:31:55,440
ठीक है? तो जो ह्यूमन इंस्टिंक्ट है उसके अनुसार उसने

437
00:31:55,440 --> 00:31:59,680
अपने आप बहन को बहन के नजरिए से किसी ने देखा हो तो आप बता दीजिए।

438
00:31:59,680 --> 00:32:04,000
उसको तो बचपन से ही सिखाया गया। अभी मैंने आपसे पूछा उदाहरण दीजिए। मैं तो आपको उदाहरण

439
00:32:04,000 --> 00:32:08,560
दे रहा हूं। आप ही हो एक उदाहरण। आपके माता-पिता ने आपको सिखाया।

440
00:32:08,560 --> 00:32:12,560
सुनिए आपके अंदर से नहीं आया। आपके माता-पिता ने आपको सिखाया। मुझे

441
00:32:12,560 --> 00:32:16,720
आप उदाहरण दीजिए। जिसके माता-पिता से वो रहित हो। समाज से वो रहित

442
00:32:16,720 --> 00:32:21,920
हो। किसी ने ना सिखाया हो और वो जो है बहन को बहन मानने लगा।

443
00:32:21,920 --> 00:32:26,000
मैं आपको एग्जांपल दे सकता हूं। उदाहरण चाहिए आपको ना?

444
00:32:26,000 --> 00:32:30,080
हम मैं आपको उदाहरण दे सकता हूं। एक ऐसे

445
00:32:30,080 --> 00:32:34,240
मतलब ट्राइब्स का एग्जांपल दे सकता हूं। आदिवासियों के एग्जांपल दे सकता हूं

446
00:32:34,240 --> 00:32:38,320
जो लोग भगवान में नहीं मानते हैं। लेकिन भगवान को मानने की बात

447
00:32:38,320 --> 00:32:42,480
नहीं है मेरे भाई। यहां पे तो ये है कि कहां से आ रही है।

448
00:32:42,480 --> 00:32:46,640
आज के टाइम में नहीं मान रहे हैं। मगर उसके जैसे आप भगवान को नहीं मान रहे हैं।

449
00:32:46,640 --> 00:32:51,120
मगर आप बहुत सारी चीजें ऐसी कर रहे हैं दिन भर में जो धर्म से रिलेटेड है।

450
00:32:51,120 --> 00:32:55,200
आपके माता-पिता मान रहे हैं। माता-पिता नहीं मान रहे तो उनके माता-पिता मान रहे हैं। समझ

451
00:32:55,200 --> 00:33:00,720
रहे हैं आप मेरी बात? जैसे कोई यह व्यक्ति कहे कोई यह व्यक्ति कहे

452
00:33:00,720 --> 00:33:02,080
कि यार देखो विदेशों में

453
00:33:02,080 --> 00:33:06,320
तो सनातन धर्म है नहीं वहां के लोग कैसे अपनी अपनी सभ्यता

454
00:33:06,320 --> 00:33:10,400
को मानते हैं कुछ कुतर्की आते हैं ऐसे नास्तिक वो कहे कि

455
00:33:10,400 --> 00:33:15,200
विदेशों में तो सनातन धर्म है नहीं वहां कैसे धर्म पहुंचा भाई ये बताओ

456
00:33:15,200 --> 00:33:19,200
कि आपका थॉमस अलवा एडिसन से कोई मतलब है

457
00:33:19,200 --> 00:33:24,320
क्या संबंध है आपका कोई किससे

458
00:33:24,320 --> 00:33:28,880
थॉमस अलवा एडिसन से कोई संबंध है आपका? नहीं है। नहीं है।

459
00:33:28,880 --> 00:33:33,200
नहीं है। मगर बल तो आपके यहां उसी का जल रहा है ना।

460
00:33:33,200 --> 00:33:37,280
हां। जल रहा है ना? हां। तो इसका

461
00:33:37,280 --> 00:33:41,280
अर्थ क्या हुआ कि आप सीधे तौर पर थॉमस हलवा एडिसन से भले

462
00:33:41,280 --> 00:33:46,080
ही ना जुड़े हो। मगर आपके यहां बल उसी का जल रहा है।

463
00:33:46,080 --> 00:33:50,080
इसी प्रकार से आप सीधे तौर पर धर्म से सनातन धर्म से ना जुड़े हो

464
00:33:50,080 --> 00:33:54,080
मगर जितने अंशों में आपके जीवन में प्रकाश है वो सनातन धर्म से

465
00:33:54,080 --> 00:33:58,320
ही है। नहीं तो आपको बताना पड़ेगा ये कहां से स्टार्ट

466
00:33:58,320 --> 00:34:02,320
हुआ है आपका। वो आज ऐसा कर रहे हैं उसके आधार पे ये नहीं

467
00:34:02,320 --> 00:34:07,360
माना जा सकता कि उनके पीछे धर्म नहीं है। मैं आज का एग्जांपल लेकिन नहीं दे रहा हूं।

468
00:34:07,360 --> 00:34:11,600
मैं जब मैं जब ट्राइब्स की बात कर रहा हूं मैं इधर तीन ट्राइब्स के बारे में बात करना चाहूंगा।

469
00:34:11,600 --> 00:34:15,760
आदिवासियों के एक है हंटर गैदर ट्राइब्स जो 2 लाख साल पहले

470
00:34:15,760 --> 00:34:17,120
जीते थे। दूसरा

471
00:34:17,120 --> 00:34:21,440
है ऑस्ट्रेलियन अबोजिनल जो 500 साल पहले जीते थे और

472
00:34:21,440 --> 00:34:25,760
तीसरा है जो इन ट्राइब्स जो आर्कटिक में पाए जाते हैं वो 5000 साल पहले जीते

473
00:34:25,760 --> 00:34:29,760
थे। इन ट्राइब्स को जब हमने स्टडी किया तब हमें पता चला इनके

474
00:34:29,760 --> 00:34:34,080
बीच में जो मैरिज होता था वो अपने फैमिली मेंबर्स से डिस्टेंट

475
00:34:34,080 --> 00:34:38,320
रिलेटिव से करते थे और ये एक ऐसे टाइम में था जब रिलीजन एक्सिस्ट

476
00:34:38,320 --> 00:34:42,800
नहीं करता था। ये सब प्री रिलीजियस सोसाइटीज थे। जब ये सब क्लेम्स

477
00:34:42,800 --> 00:34:46,800
है। ये क्लेम्स होते हैं। नहीं उस उस

478
00:34:46,800 --> 00:34:50,960
समय सुनिए ये सब क्लेम्स होते हैं। इसीलिए मैं हिस्ट्री में अब जाऊंगा। मैं

479
00:34:50,960 --> 00:34:55,040
खोल के दिखाऊंगा कि वो कर लेते थे। आज के टाइम में ही ले लीजिए चचेरी

480
00:34:55,040 --> 00:34:59,440
बहनों से विवाह करना आपके यहां क्या माना जाता है? हम

481
00:34:59,440 --> 00:35:05,200
तो नहीं करते बहन से। नहीं करते। मुसलमान तो करते हैं।

482
00:35:05,200 --> 00:35:09,440
हां करते हैं। तो खत्म हो गई बात। लेकिन सदर्न

483
00:35:09,440 --> 00:35:13,760
इंडिया में तो लोग करते हैं। मतलब दक्षिण भारत में तो करते हैं। फिर भी

484
00:35:13,760 --> 00:35:17,840
धर्म ने क्या कहा है? लेकिन धर्म ने

485
00:35:17,840 --> 00:35:21,840
क्या कहा है? मनुस्मृति में लिखा हुआ है चचेरी ममेरी फुपेरी बहनों से विवाह

486
00:35:21,840 --> 00:35:25,840
करना त्याज है। धर्म ने कहा यदि किसी के पिता ने सिखा दिया

487
00:35:25,840 --> 00:35:29,920
बेटा मदिरापान मत करना। अब कोई मदिरापान कर रहा है तो आप ये कहेंगे कि

488
00:35:29,920 --> 00:35:32,480
देखो वो तो कर रहा है इसलिए इसका मतलब इसके पिता ने सिखाया

489
00:35:32,480 --> 00:35:36,320
है।

490
00:35:36,320 --> 00:35:40,400
समझ रहे हैं मेरी बात? हां। अगर किसी के पिता ने ये

491
00:35:40,400 --> 00:35:44,560
कह दिया कि बेटा मदिरापान मत करना। उसके पांच 10 लड़के हैं। उनमें

492
00:35:44,560 --> 00:35:49,520
से दो लड़के मदिरापान फिर भी कर रहे हैं। तो उसके आधार पर हम ये थोड़ी ना कहेंगे

493
00:35:49,520 --> 00:35:53,680
कि हां उसके पिता ने सिखाया माता पिता मदिरापान करना।

494
00:35:53,680 --> 00:35:57,680
दूसरी बात दूसरी बात महाभारत में लिखा हुआ

495
00:35:57,680 --> 00:36:02,160
है कि किसी के द्वारा

496
00:36:02,160 --> 00:36:06,480
कर देना कह देना प्रमाण

497
00:36:06,480 --> 00:36:10,560
नहीं होता है। उसको युक्ति युक्त तरीके से शास्त्रों द्वारा

498
00:36:10,560 --> 00:36:14,720
स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है। तो जहां पर जो लोग कर रहे हैं

499
00:36:14,720 --> 00:36:18,880
आप हमारे अन्य वीडियोस देखिएगा हम उनका खंडन करते हैं जो लोग ऐसा करते हैं चचेरी

500
00:36:18,880 --> 00:36:22,880
मरी फुपेरी बहनों से जो विवाह कर लेते हैं उसके आधार पर आप

501
00:36:22,880 --> 00:36:26,960
ये नहीं कह सकते कि धर्म ने सिखाया है ठीक है और

502
00:36:26,960 --> 00:36:31,120
दोनों ही बातें आपने खुद ही उदाहरण दे दिया जिनको धर्म का सही से बोध

503
00:36:31,120 --> 00:36:35,120
नहीं है वो कर रहे हैं वो या तो मुस्लिम बनके कर रहे हैं या साउथ इंडिया में

504
00:36:35,120 --> 00:36:39,280
कर रहे हैं या पूर्वांचल में कर रहे हैं कर रहे हैं धर्म का सही

505
00:36:39,280 --> 00:36:43,440
बोध कराने पर ही व्यक्ति अपनी ममेरी चचेरी फुपेरी बहनों

506
00:36:43,440 --> 00:36:48,800
को त्यागेगा। पहली बात। अब जरा आपकी साइंस पे दोबारा आ जाते हैं।

507
00:36:48,800 --> 00:36:52,800
आपने माना साइंस के नियम बदलते हैं। आज की थ्योरी ने कुछ कहा, कल की

508
00:36:52,800 --> 00:36:57,040
थ्योरी ने कुछ कहा। हां। तो इसका मतलब अगर कल

509
00:36:57,040 --> 00:37:01,280
साइंस ये कह देती है कि बहन के साथ विवाह करने

510
00:37:01,280 --> 00:37:05,360
पर जो है कोई दिक्कत नहीं है तो आपकी नजरें

511
00:37:05,360 --> 00:37:09,360
अपनी बहन को लेकर के बदल जाएगी। लेकिन साइंस ऐसा कहेगा

512
00:37:09,360 --> 00:37:13,440
ही क्यों? ये कोई वो थोड़ी ना है। मैंने आपने खुद

513
00:37:13,440 --> 00:37:17,600
माना ना कि नियम बदलते हैं। कल तक कल तक आंखों का इलाज

514
00:37:17,600 --> 00:37:21,600
नहीं था। आज आंखों का इलाज है। कल उसने कहा था आंखों का इलाज नहीं है। उसके

515
00:37:21,600 --> 00:37:26,160
कुछ साल बाद उसने कहा आंखों का इलाज है। ठीक विपरीत बात बोल दी।

516
00:37:26,160 --> 00:37:30,320
लेकिन वो भी इसलिए है क्योंकि उसके लिए हमें मिला है। प्रमाण मिले हैं। तब जाके

517
00:37:30,320 --> 00:37:34,400
हमने कहा है ना। साइंस ने ये घोषित कर दिया है। इसमें अब कोई नई थ्योरी नहीं आ

518
00:37:34,400 --> 00:37:37,040
सकती है।

519
00:37:37,040 --> 00:37:41,360
आ सकती है। लेकिन हम ऐसे तो नहीं कह सकते कि कि मतलब

520
00:37:41,360 --> 00:37:45,360
अगर ऐसा मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं? नई थ्योरी आ सकती है ना?

521
00:37:45,360 --> 00:37:49,440
हां हां आ सकती है। आ सकती है। चांसेस है तो नई थ्योरी आने

522
00:37:49,440 --> 00:37:53,920
की संभावना पर हम बात कर सकते हैं ना क्योंकि आप मान रहे हैं आ सकती है थ्योरी।

523
00:37:53,920 --> 00:37:58,000
हां आ सकती है। हां। तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं जब ऐसी

524
00:37:58,000 --> 00:38:02,080
थ्योरी आ जाएगी कि बहन के साथ विवाह करने पर कोई

525
00:38:02,080 --> 00:38:03,920
अवगुण नहीं है तो

526
00:38:03,920 --> 00:38:08,400
आपका नजरिया अपनी बहन को या मां को देखने का बदल जाएगा।

527
00:38:08,400 --> 00:38:12,560
लेकिन मेरा सवाल तो वही है कि आप जब बात कर रहे हैं कि ऐसी नई थ्योरी

528
00:38:12,560 --> 00:38:16,800
आएगी तो मेरा सवाल ये उठता है कि ऐसी नई थ्योरी क्यों आएगी? ऐसा क्योंकि

529
00:38:16,800 --> 00:38:20,880
अगर उसके पीछे कोई है ही नहीं। मान लीजिए अरे मेरे भाई इसलिए आएगी

530
00:38:20,880 --> 00:38:25,200
कि इसलिए आएगी कि जैसे आज साइंस अपना काम कर रही है नए प्रयोग

531
00:38:25,200 --> 00:38:29,200
कर रही है बहुत सारे डिसीजन ले रही है ऐसे ही वो करती जाएगी और

532
00:38:29,200 --> 00:38:33,440
हो सकता है नई थ्योरी फिर से आ जाए और नई थ्योरी आएगी क्यों ये आप तब बोलिए

533
00:38:33,440 --> 00:38:38,160
तो फिर आप ये कहिए कि नहीं आएगी नई थ्योरी नहीं आएगी आगे बोलिए

534
00:38:38,160 --> 00:38:42,640
अरे लेकिन जो चेंजेस आते हैं साइंस में वो मतलब हम

535
00:38:42,640 --> 00:38:47,040
एक्सपेरिमेंट करके देखते हैं तब जाके हम करते हैं ऐसा नहीं कि कुछ भी आ सकता है तो

536
00:38:47,040 --> 00:38:51,120
एक्सपेरिमेंट करके करके देखने के बाद आएगी। आपने अपनी बात का सवाल का जवाब

537
00:38:51,120 --> 00:38:55,200
दे दिया। लेकिन अरे लेकिन एक्सपेरिमेंट में आएगा ही नहीं। क्योंकि एक्सपेरिमेंट कह चुके

538
00:38:55,200 --> 00:38:59,920
हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए। तो फिर आप ये बोलिए ना कि नहीं आ सकती नई थ्योरी।

539
00:38:59,920 --> 00:39:04,160
हां इस इस चीज को लेके नहीं आएगी नई थ्योरी। हां नहीं आएगी।

540
00:39:04,160 --> 00:39:08,720
ये डिक्लेअ किसने और कहां पर किया है? साइंटिफिक

541
00:39:08,720 --> 00:39:14,480
पेपर्स में डिक्लेयर्ड हुए हैं। बताइए।

542
00:39:14,480 --> 00:39:18,560
मेरे अभी तो नहीं है लेकिन मैंने पढ़े हैं पेपर जिसमें डिक्लेअ हुए हैं। तो

543
00:39:18,560 --> 00:39:22,640
आप आप लाइए वो वो जहां पर ये डिसीजन दिया हो किसी साइंटिस्ट

544
00:39:22,640 --> 00:39:26,720
ने कि अब इस मामले पे और कोई

545
00:39:26,720 --> 00:39:30,960
थ्योरी नहीं आएगी। पहली बात। दूसरी बात ये भी हमें देखना पड़ेगा

546
00:39:30,960 --> 00:39:35,680
कि वो जो ये बात कह रहा है उसकी बात को वो क्यों माना जाए? डिसीजन

547
00:39:35,680 --> 00:39:40,320
निर्णायक क्यों माना जाए? अच्छा

548
00:39:40,320 --> 00:39:44,480
ये भी देखना पड़ेगा। तो पहले तो आप पेपर लाइए उसके बाद उस पर हम बात करेंगे।

549
00:39:44,480 --> 00:39:48,560
अभी फिलहाल आपके पास पेपर तो है नहीं ना आने के विषय में। ना आने के

550
00:39:48,560 --> 00:39:52,640
विषय में प्रमाण है क्या अभी? नहीं अभी तो नहीं है। नहीं है

551
00:39:52,640 --> 00:39:56,640
तो अभी मैं आपको क्वेश्चन कर रहा हूं वो बताइए। अच्छा

552
00:39:56,640 --> 00:40:00,640
ठीक है। अगर आ जाती है तो आपका क्या होगा? या तो प्रमाण दीजिए ना आने

553
00:40:00,640 --> 00:40:04,800
के विषय में या फिर इस क्वेश्चन का जवाब दीजिए। आपका अपनी बहन को देखने

554
00:40:04,800 --> 00:40:09,200
का नजरिया बदल जाएगा कि अब मैं इसके साथ विवाह कर सकता हूं

555
00:40:09,200 --> 00:40:15,200
या उसी पर डटे रहेंगे। नहीं बहन का मतलब बहन

556
00:40:16,240 --> 00:40:22,240
रुकिए एक मिनट मैं देख रहा हूं पेपर।

557
00:40:24,800 --> 00:40:28,880
हां ये पेपर है एक बीबीसी में निकला है। कजिन

558
00:40:28,880 --> 00:40:33,600
मैरिज न्यू एविडेंस टेल्स अस अबाउट द इफेक्ट्स ऑफ

559
00:40:33,600 --> 00:40:39,600
कजिन मैरिजेस बाय सचल एंड लटकमिस

560
00:40:40,160 --> 00:40:44,480
क्या है इसमें? इसमें ये दिया गया है कि जो कजिन

561
00:40:44,480 --> 00:40:48,480
मैरिजेस हो रहे हैं या फिर जो यूके में जो कजिन मैरिजेस हो रहे हैं

562
00:40:48,480 --> 00:40:53,040
उसमें एक मतलब डिटरमेंटल इफेक्ट आया है और जो इनब्रीडिंग

563
00:40:53,040 --> 00:40:57,280
मेरे भाई मैं पूछ रहा हूं नई थ्योरी नहीं आएगी। ये डिक्लेअ

564
00:40:57,280 --> 00:41:00,240
किया है क्या?

565
00:41:00,240 --> 00:41:05,120
हां इस इसको लेके उन्होंने कहा है कि यह नहीं होना चाहिए।

566
00:41:05,120 --> 00:41:09,280
आप बातों को घुमा रहे हैं। अब आप अभी तक मुझे लग रहा था किसी सज्जन

567
00:41:09,280 --> 00:41:13,280
से बात कर रहा हूं। मैंने क्या पूछा है? ये डिक्लेअ

568
00:41:13,280 --> 00:41:17,760
करना है इसमें नई थ्योरी नहीं आ सकती। आप कह रहे हो नहीं होना चाहिए ऐसा।

569
00:41:17,760 --> 00:41:21,760
दोनों बातों में फर्क है। आप भी समझ रहे हो। आप मगर यहां पे बातों के

570
00:41:21,760 --> 00:41:25,920
लक्ष्य घुमा रहे हो।

571
00:41:25,920 --> 00:41:30,160
सत्य पे बात करिए। सत्य पे है। आपने अभी दो चार झूठ यहां ऑलरेडी

572
00:41:30,160 --> 00:41:34,240
बोल चुके हो आप। क्या आप बचपन से अपने आप यह सोचा था आपने कि आप जो

573
00:41:34,240 --> 00:41:40,160
है बिना कपड़ों के बाहर नहीं जाएंगे। फिर आपने माना कि हां माता-पिता ने सिखाया।

574
00:41:40,160 --> 00:41:44,160
ठीक है? तो पहली बात यह समझ लीजिए कि साइंस

575
00:41:44,160 --> 00:41:48,480
के अकॉर्डिंगली हम लोग भी एनिमल है।

576
00:41:48,480 --> 00:41:52,800
हां और एनिमल नहीं है।

577
00:41:52,800 --> 00:41:56,880
हम वो सोशल एनिमल बाद में आपने नाम दिया वो

578
00:41:56,880 --> 00:42:00,880
सोशल वो सोशल आ कहां से रहा है? वो सोसाइटी आ कहां से रही है?

579
00:42:00,880 --> 00:42:05,200
क्योंकि हम कहां से आ रही है वो सोसाइटी? उसी को तो ढूंढ रहे हैं क्योंकि

580
00:42:05,200 --> 00:42:09,200
यह देखा गया है कि हम लोग सोसाइटी फॉर्म करके मतलब जीते हैं। हम

581
00:42:09,200 --> 00:42:13,200
एक समाज में रहते हैं तो हम सामाजिक पशु है। हां मगर

582
00:42:13,200 --> 00:42:17,200
उसमें जो नियम सिद्धांत है वो इसीलिए है क्योंकि हमारे अंदर ईश्वर की खोज

583
00:42:17,200 --> 00:42:21,040
करने की आस्था है। इसलिए

584
00:42:21,040 --> 00:42:25,120
भाई साइंस ने ये बताया है क्या आपको कि हम लोग ऐसा क्यों है? सोशल

585
00:42:25,120 --> 00:42:31,120
एनिमल्स क्यों है हम?

586
00:42:31,760 --> 00:42:36,080
क्योंकि ह्यूमन क्योंकि ह्यूमन बीइंग्स में जो ब्रेन

587
00:42:36,080 --> 00:42:40,160
डेवलपमेंट है वो बाकी के कंपैरिजन में थोड़ा ज्यादा है।

588
00:42:40,160 --> 00:42:44,240
तो एक समय में मनुष्य को यह पता चला कि अगर उनको कुछ कार्य

589
00:42:44,240 --> 00:42:48,240
करने हैं तो वो अकेले इन कार्यों को नहीं कर सकता। तो उनको

590
00:42:48,240 --> 00:42:52,320
अपने जो भी काम है या कर्म है उनको विभाजन करके

591
00:42:52,320 --> 00:42:56,400
करना पड़ेगा। एक देखिए काम को करने की तकनीक के

592
00:42:56,400 --> 00:43:00,960
लिए टीम गठित करना अलग होता है। वो तो भेड़िए भी करते हैं।

593
00:43:00,960 --> 00:43:05,120
टीम गठित करके काम करते हैं ना भेड़िए। हां लेकिन वो

594
00:43:05,120 --> 00:43:09,360
भी करते हैं। लेकिन ह्यूमन बींग्स का जो करना है हम ज्यादा अच्छे से करते हैं। हम

595
00:43:09,360 --> 00:43:14,240
ज्यादा अच्छे से करते हैं। और साइंस ने ये भी माना है कि 90%

596
00:43:14,240 --> 00:43:19,120
लोग जो है उनके अंदर जो है भगवान की वो है इनबिल्ट इच्छा।

597
00:43:19,120 --> 00:43:23,120
ये माना है कि नहीं? नहीं इस चीज

598
00:43:23,120 --> 00:43:27,120
को ले मैंने थोड़ा पढ़ा था तो इस चीज को ले मुझे

599
00:43:27,120 --> 00:43:31,200
यह पता चला कि हमारे अंदर वो इनबिल्ट भगवान को मानने

600
00:43:31,200 --> 00:43:36,480
की नहीं है। हमारे अंदर इनबिल्ट है कि हम दूसरों के प्रति डिपेंडेंट रहेंगे।

601
00:43:36,480 --> 00:43:40,720
उस साइंटिफिक पेपर की जो आप बात कर रहे हैं उसमें ये लिखा था कि जब

602
00:43:40,720 --> 00:43:45,360
एक छोटा बच्चा पैदा होता है तो वो अपने माता-पिता के प्रति

603
00:43:45,360 --> 00:43:49,680
डिपेंडेंट होते हैं। उस तरह से जब हम बड़े होते हैं तो हम किसी के प्रति डिपेंडेंट

604
00:43:49,680 --> 00:43:53,920
होने की चाह ना कि एक भगवान को देखने की चाह। वो भगवान

605
00:43:53,920 --> 00:43:57,280
क्या है आपके अनुसार?

606
00:43:57,280 --> 00:44:01,440
मैं मैं तो भगवान को नहीं मानता क्योंकि मैं तो ना

607
00:44:01,440 --> 00:44:05,520
जब आप कह रहे हो कि मैं नहीं मानता कि ऐसा कोई है।

608
00:44:05,520 --> 00:44:11,520
तो वो कैसा है जिसको आप मना कर रहे हो कि वो नहीं है।

609
00:44:11,600 --> 00:44:15,680
लेकिन जो डिफॉल्ट पोजीशन है वो तो नल हाइपोथेसिस है

610
00:44:15,680 --> 00:44:20,480
ना कि मतलब मतलब मान लीजिए अगर आप एक जैसे मैंने कहा

611
00:44:20,480 --> 00:44:24,800
दुनिया में सुनिए जैसे मैंने कहा है दुनिया में कोई ये ठोस

612
00:44:24,800 --> 00:44:28,960
चीज है हां जिसमें मैं अगर हाथ मारूंगा

613
00:44:28,960 --> 00:44:33,040
तो मेरे चोट लग जाएगी। ठीक है? अगर मैं कहूंगा कि

614
00:44:33,040 --> 00:44:37,200
मैं नहीं मानता इस दुनिया में कोई शेखर है

615
00:44:37,200 --> 00:44:41,280
तो मैं उसको बताऊंगा कि शेखर से आप मतलब क्या समझते हैं तो फिर मैं

616
00:44:41,280 --> 00:44:45,280
उसको बताऊंगा हां ऐसी चीज जो कुछ स्टील जैसी फील होती

617
00:44:45,280 --> 00:44:49,440
है जिसमें अगर हम हाथ मारेंगे तो उसमें चोट लग जाएगी तो ऐसे ही

618
00:44:49,440 --> 00:44:51,520
भगवान से आप समझते क्या

619
00:44:51,520 --> 00:44:53,680
है

620
00:44:53,680 --> 00:44:56,960
किसको कहते हैं भगवान

621
00:44:56,960 --> 00:45:01,040
भगवान अकॉर्डिंग टू मतलब अगर हम सभी

622
00:45:01,040 --> 00:45:06,240
रिलजन को लेंगे तो वो डिस्क्राइब करते हैं एक ऑल पावरफुल ओमनीिसेंट

623
00:45:06,240 --> 00:45:11,040
बीइंग को जिसने पूरी सृष्टि को क्रिएट किया है।

624
00:45:11,040 --> 00:45:15,120
अभी आपने साइंस की थ्योरी में क्या माना है? साइंस

625
00:45:15,120 --> 00:45:19,520
की थ्योरी में ये कहा गया है कि लोगों का एक नेचुरल

626
00:45:19,520 --> 00:45:24,240
हैबिट होता है टू बी डिपेंडेंट ऑन अदर्स। डिपेंड डिपेंड

627
00:45:24,240 --> 00:45:28,320
डिपेंड डिपेंड को ही पकड़ लीजिए। जो आप बोल रहे हैं उसी से ही हम

628
00:45:28,320 --> 00:45:33,040
आपको जवाब देंगे। हां डिपेंड होने का इंस्टिंक्ट है ना आपके अनुसार

629
00:45:33,040 --> 00:45:37,280
हां लोगों में हां तो जब डिपेंड होते चले जाएंगे डिपेंड

630
00:45:37,280 --> 00:45:41,280
होते चले जाएंगे जब एक अवस्था ऐसी आएगी कि सब लोग इस पर डिपेंड हो

631
00:45:41,280 --> 00:45:45,360
सकते हैं उसी का नाम है भगवान भगवान

632
00:45:45,360 --> 00:45:49,680
को सर्वाधार भी कहा गया है हमारे यहां औरों

633
00:45:49,680 --> 00:45:53,680
का नहीं मालूम सर्वाधार भी भगवान ही है

634
00:45:53,680 --> 00:45:57,840
तो यदि हम लोग डिपेंड हो रहे हैं अपने माता पिता पर माता पिता भी किसी

635
00:45:57,840 --> 00:46:01,840
पर होंगे वो वो भी किस क्योंकि आपने कहा सब लोग डिपेंड होना चाहते हैं।

636
00:46:01,840 --> 00:46:06,320
तो जहां जाकर के सबका आधार हो जाए निर्भर होने का आधार

637
00:46:06,320 --> 00:46:06,820
उसी

638
00:46:06,640 --> 00:46:10,320
का नाम ईश्वर है।

639
00:46:10,320 --> 00:46:14,720
मैं इसको ले एक पॉइंट कह सकता हूं।

640
00:46:14,720 --> 00:46:18,800
जस्ट आपका मैंने एक YouTube श देखा था जिसमें

641
00:46:18,800 --> 00:46:22,800
आपने सच्चिदानंद की बात करी थी। मैं करूंगा उसप भी

642
00:46:22,800 --> 00:46:26,800
आऊंगा। वो अलग-अलग आ गए। आप पहले एक बात को आपने

643
00:46:26,800 --> 00:46:30,960
आप कोई भी बात खत्म नहीं कर रहे। देखिए आपने देखिए

644
00:46:30,960 --> 00:46:35,040
शुरू में आपने कहा मैं आपको याद दिला दूं। शुरू में आपने कहा कि मैं

645
00:46:35,040 --> 00:46:39,360
अपने आप कपड़े पहनना सीखा। बहन को बहन में अपने आप देखना सीखा। फिर

646
00:46:39,360 --> 00:46:43,520
तर्क करने पर आपने माना कि नहीं कपड़े मुझे माता-पिता ने दिए। बहन

647
00:46:43,520 --> 00:46:47,600
को बहन मुझे माता-पिता ने दिया। उसके बाद अब आज की डेट में आप साइंस

648
00:46:47,600 --> 00:46:51,920
के कारण मान रहे हैं। मैंने आपसे पूछा कि क्या साइंस

649
00:46:51,920 --> 00:46:56,160
कल को जब यह कह देगी कि बहन से विवाह करने पर कोई दिक्कत

650
00:46:56,160 --> 00:47:00,480
नहीं है तो क्या आप मान लेंगे? तो आप उस

651
00:47:00,480 --> 00:47:06,400
चीज का जवाब देने से बचते हुए आपने टॉपिक्स को चेंज भी किया।

652
00:47:06,400 --> 00:47:10,560
अभी आपने मेरा जवाब अभी तक नहीं दिया है कि

653
00:47:10,560 --> 00:47:14,640
यदि साइंस ये कहने लगेगी यदि आप साइंस पर डिपेंड करते हैं तो

654
00:47:14,640 --> 00:47:18,720
साइंस ये कहने लगेगी कि बहन

655
00:47:18,720 --> 00:47:22,400
से विवाह करने पर कोई दिक्कत नहीं है तो क्या आप कर लेंगे?

656
00:47:22,400 --> 00:47:28,400
तो इसका जवाब क्या है?

657
00:47:29,920 --> 00:47:33,920
मेरा लेकिन अब आपने कहा आपका क्वेश्चन आंसर ये आता है कि

658
00:47:33,920 --> 00:47:38,160
साइंस ऐसा कहेगी क्यों? इसलिए कहेगी क्योंकि साइंस बदल सकती है। साइंस

659
00:47:38,160 --> 00:47:42,160
बदल सकती है। सुनिए सनातन जो साइंस के सिद्धांत

660
00:47:42,160 --> 00:47:47,600
है वो सनातन नहीं है। अच्छा कोई हमसे कहे अगर कल को तुम्हारा धर्म कहे

661
00:47:47,600 --> 00:47:51,920
अगर कल को तुम्हारा धर्म ये कहने लग जाए कल को कि बहन

662
00:47:51,920 --> 00:47:56,080
से विवाह कर सकते हो तो क्या करने लगोगे? तो हमारा जवाब होगा कि हमारा

663
00:47:56,080 --> 00:48:00,320
धर्म ये नहीं कहेगा क्योंकि हमारा धर्म सनातन है। सनातन

664
00:48:00,320 --> 00:48:04,000
का मतलब होता है नित्य स्थाई।

665
00:48:04,000 --> 00:48:09,760
जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है।

666
00:48:09,760 --> 00:48:14,160
मगर आपकी साइंस सनातन नियम नहीं है। आपकी

667
00:48:14,160 --> 00:48:18,160
साइंस को आप खुद मानते हैं कि वो बदल रही है। आज कुछ थ्योरी

668
00:48:18,160 --> 00:48:22,560
है। कल को कुछ थ्योरी है। आज आपने कहा 500 साल पहले की कोई ऐसी

669
00:48:22,560 --> 00:48:26,640
सभ्यता मिल गई जो उसको नहीं मानती थी। और वो चचेरे और वो जो है अपनी

670
00:48:26,640 --> 00:48:30,960
बहनों से विवाह नहीं करती थी। अब भैया उससे पहले की कोई थ्योरी निकल आई।

671
00:48:30,960 --> 00:48:35,040
कोई खुदाई हो गई उसमें करती थी फिर लोग बदल गया साइंस

672
00:48:35,040 --> 00:48:38,000
का नियम मुसलमान

673
00:48:38,000 --> 00:48:43,040
मुसलमानों के यहां पर चचेरी बहनों से विवाह वो है अलऊ कर रहे हैं

674
00:48:43,040 --> 00:48:47,520
वहां साइंस का क्या हो गया ह्यूमन इंस्टिट का क्या हो गया ह्यूमन इंस्टिंक्ट

675
00:48:47,520 --> 00:48:51,520
तो ये है सुनिए दो प्रकार के धर्म होते

676
00:48:51,520 --> 00:48:55,760
हैं एक सिद्ध कोटि का होता है और एक साध्य कोटि

677
00:48:55,760 --> 00:48:59,840
का होता है तो ये जो बहन से विवाह ना करना यह

678
00:48:59,840 --> 00:49:04,320
सब साध्य सिद्ध कोटि के धर्म है। सिद्ध कोटि का धर्म सुनिए क्या है?

679
00:49:04,320 --> 00:49:08,320
मैं छत से कूदूंगा तो मेरे चोट लगेगी इसलिए मैं नहीं

680
00:49:08,320 --> 00:49:13,280
कूदूंगा। ये है सिद्ध कोटि का धर्म।

681
00:49:13,280 --> 00:49:17,440
समझ रहे हैं? यह सिद्ध है। इसको मुझे साधना नहीं है। ये सिद्ध

682
00:49:17,440 --> 00:49:21,440
है। मैं छत से कूदूंगा तो मेरे चोट लगेगी इसलिए मैं नहीं कूदूंगा। तो ना

683
00:49:21,440 --> 00:49:25,440
कूदना मेरा सिद्ध कोटि का धर्म हो गया। मगर जिसको मुझे

684
00:49:25,440 --> 00:49:30,000
साधना है। बहुत की दबाव नहीं है मेरे ऊपर।

685
00:49:30,000 --> 00:49:34,000
प्रत्यक्ष रूप से मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। मगर उसको मुझे साधना है। वह है

686
00:49:34,000 --> 00:49:38,560
साध्य कोटि का धर्म और वह हमें धर्म से ही मिलता है।

687
00:49:38,560 --> 00:49:42,800
हमारे या तो मां-बाप आस्तिक होंगे नहीं तो उनके मां-बाप आस्तिक होंगे। अन्यथा

688
00:49:42,800 --> 00:49:47,280
व्यक्ति पशु के समान हो जाएगा। और जहां पर जितना जितना

689
00:49:47,280 --> 00:49:51,280
ढीला धर्म है, जहां धर्म की जितनी कम पहुंच है,

690
00:49:51,280 --> 00:49:53,040
वहां पर ये चीजें तिलांजलि भी

691
00:49:53,040 --> 00:49:57,280
दी जाती है। धर्म के बारे में ज्यादा बोध नहीं है। व्यक्ति पहले लिविन में जाता

692
00:49:57,280 --> 00:50:02,000
है, उसके बाद जो है समलैंगिकता में जाता है,

693
00:50:02,000 --> 00:50:06,000
रेप में जाता है। और उसके बाद धीरे धीरे धीरे धीरे करके

694
00:50:06,000 --> 00:50:10,080
बहनों पर भी जाता है, माओं पर भी जाता है। धर्म

695
00:50:10,080 --> 00:50:14,800
की पहुंच जहां जैसे जैसे घटती जाती है, ये होने लगता है। जी।

696
00:50:14,800 --> 00:50:19,120
इस चीज में मैं दो बातें कहना चाहूंगा। कैसे आपने

697
00:50:19,120 --> 00:50:23,120
उस पर बात कहिए पहले बहन के लिए क्या नजरिया होगा उस पर बात

698
00:50:23,120 --> 00:50:27,280
कहिए। बहन बहन को हमें आदर्श देखना

699
00:50:27,280 --> 00:50:31,600
चाहिए सर। नहीं नहीं जब साइंस ये कह रही है

700
00:50:31,600 --> 00:50:35,680
कि भाई बहन के साथ भी विवाह हो सकता है। रमण

701
00:50:35,680 --> 00:50:41,280
हो सकता है। तब आप क्या कहेंगे?

702
00:50:41,280 --> 00:50:45,280
लेकिन सर बात तो वही आ जाएगी कि फिर वो ऐसा क्यों मतलब

703
00:50:45,280 --> 00:50:49,440
सुन लीजिए उसको नए क्योंकि उसको नए ऐसे एक्सपीर एक्सपेरिमेंट्स

704
00:50:49,440 --> 00:50:53,600
मिल जाएंगे ये कोई बात है क्या वो ऐसा कहेगी क्यों आप जब खुद

705
00:50:53,600 --> 00:50:57,600
कह रहे हो कि साइंस जब साइंस बदलती है ऐसा आप खुद कह रहे हो ना आप

706
00:50:57,600 --> 00:51:01,680
ये कह दो साइंस नहीं बदलती लेकिन लेकिन वो ऐसे रेंडमली तो नहीं बदलती ना

707
00:51:01,680 --> 00:51:05,680
कि आज ऐसा मैं कह रहा हूं रैंडम यार मैं कह रहा हूं 50 साल में करेगी 10

708
00:51:05,680 --> 00:51:10,000
साल में करेगी तब आपका क्या होगा। मैं कहा कह रहा हूं कि अगले ही चढ़ कर देगी।

709
00:51:10,000 --> 00:51:14,000
रेंडम मैंने बोला क्या? मैंने आपको रैंडम बोला क्या? मैंने

710
00:51:14,000 --> 00:51:18,400
बोला अगर साइंस धीरे-धीरे ग्रेजुअली ये चीज निकाल के दे देगी

711
00:51:18,400 --> 00:51:22,480
कि बहन के साथ रमण करने में कोई दिक्कत नहीं है तो क्या आप अपनी बहन के साथ

712
00:51:22,480 --> 00:51:27,360
जो आपका नजरिया है बदल देंगे। मां के साथ जो नजरिया है उसको बदल देंगे।

713
00:51:27,360 --> 00:51:31,520
आप मुझे एक हाइपोथेटिकल सिनेरियो दे रहे हैं। इसलिए मैं कह नहीं पा रहा हूं।

714
00:51:31,520 --> 00:51:35,840
हाइपोथेटिकल सिनेरियो नहीं है। आप यह मान रहे हैं कि साइंस के नियम बदलते

715
00:51:35,840 --> 00:51:39,920
हैं और आपके पास इस बात का अभी प्रेजेंट में कोई

716
00:51:39,920 --> 00:51:44,000
प्रमाण नहीं है कि यह सिद्धांत नहीं बदलेगा। ऐसा किसी

717
00:51:44,000 --> 00:51:47,760
साइंटिस्ट ने कहा हो प्रामाणिक

718
00:51:47,760 --> 00:51:51,840
भागवत अब मान लीजिए भागवतानंद कह दे एक व्यक्ति है भागवतानंद

719
00:51:51,840 --> 00:51:55,840
वो कह दे कि हां ये सिद्धांत नहीं बदलेगा। तो ऐसे किसी अप्रामाणिक

720
00:51:55,840 --> 00:51:56,400
व्यक्ति की बात

721
00:51:56,400 --> 00:52:00,480
भी नहीं चलेगी। पहले तो किसी ने कहा हो फिर वह प्रामाणिक हो फिर

722
00:52:00,480 --> 00:52:04,560
हम उसकी प्रामाणिकता देखेंगे कि उसको कौन कितना मानता है वो बाद की बात है मगर अभी तो

723
00:52:04,560 --> 00:52:10,560
आपके बारे आपके पास सबसे बेसिक चीज भी नहीं है

724
00:52:11,920 --> 00:52:16,320
मैं मेरा ये कहने का मेरा जो कहने का अर्थ यह है

725
00:52:16,320 --> 00:52:20,640
कि जब आप ये कह रहे हैं कि मतलब

726
00:52:20,640 --> 00:52:24,720
मैं ये इसलिए कह रहा हूं क्योंकि साइंस खुद साइंस आपने

727
00:52:24,720 --> 00:52:28,720
कहा कि साइंस अपने नियम बदलती तो यदि हमारे हमारा

728
00:52:28,720 --> 00:52:32,960
आधार साइंस होगा बहन को बहन की दृष्टि से देखने का

729
00:52:32,960 --> 00:52:38,400
तो साइंस के बदलने के साथ-साथ हमारा नजरिया भी बदल जाएगा।

730
00:52:38,400 --> 00:52:42,560
इसलिए हमें मानना होगा कि साइंस से हटके हमारा कोई और आधार है

731
00:52:42,560 --> 00:52:46,800
बहन को बहन मानने का। हम ये कह रहे हैं। हम साइंस

732
00:52:46,800 --> 00:52:50,960
के सिद्धांतों से मदद लेते हैं। मगर साइंस के ऊपर आधारित

733
00:52:50,960 --> 00:52:55,760
हम अपनी मां को मां चैन नहीं कर सकते हैं। बहन को बहन चयन नहीं कर सकते।

734
00:52:55,760 --> 00:52:59,840
आप प्लीज जवाब दीजिए जिससे कि हम आगे बढ़े या जवाब नहीं

735
00:52:59,840 --> 00:53:04,080
है तो फिर आगे बढ़ते हैं। आप इसमें चुप रहेंगे। आपके पास जवाब

736
00:53:04,080 --> 00:53:08,160
नहीं है। मैं एक मतलब अगर एक

737
00:53:08,160 --> 00:53:12,560
साइंटिस्ट का नाम बताऊंगा जो इसने कहा था तो हम चलेगा।

738
00:53:12,560 --> 00:53:16,640
तो हम देखेंगे ना कि उसको माना गया नहीं माना गया। ये सब चीजें भी

739
00:53:16,640 --> 00:53:19,600
आएंगी ना।

740
00:53:19,600 --> 00:53:24,400
ऐसे तो मैं भी कह दूंगा एक साइंटिस्ट का नाम जिसने कहा था कि धर्म होता है

741
00:53:24,400 --> 00:53:30,400
चलेगा आपके लिए

742
00:53:36,720 --> 00:53:40,960
साइंस हां ये बात सच है कि साइंस ऐसा कभी नहीं एक्चुअल में सच बात ये है

743
00:53:40,960 --> 00:53:44,960
कि साइंस ऐसा कभी नहीं कहता कि अ

744
00:53:44,960 --> 00:53:47,280
मतलब

745
00:53:47,280 --> 00:53:51,520
कि ऐसा फाइनली ऐसा कभी होगा नहीं तो एक पॉसिबिलिटी रहती

746
00:53:51,520 --> 00:53:55,920
है। तो मान लीजिए अगर अगर पॉसिबिलिटी है तो मैं उसी पॉसिबिलिटी

747
00:53:55,920 --> 00:53:59,920
पे ही आपसे पूछ रहा हूं मेरे भाई। आप मुझे सत्यता बताएं कि

748
00:53:59,920 --> 00:54:04,480
यदि ऐसा हुआ कि साइंस ने कल को अपनी थ्योरी दे दी कि

749
00:54:04,480 --> 00:54:08,720
बहन के साथ रमण करने पर कोई दिक्कत नहीं है तो आपका नजरिया

750
00:54:08,720 --> 00:54:12,880
आपकी बहन को लेकर के क्या होगा? अगर साइंस ऐसी बातें कहता

751
00:54:12,880 --> 00:54:16,880
है कि बहन के साथ रमणी तो इसका जो इंप्लिकेशन होगा

752
00:54:16,880 --> 00:54:20,880
वो भी अलग होगा। मतलब आप जिस अभी जिस मतलब कह रहे हैं फॉर

753
00:54:20,880 --> 00:54:25,120
एग्जांपल अगर साइंस अपनी बहन को लेके उसको गलत

754
00:54:25,120 --> 00:54:27,920
नजर से ना देखने के लिए ये बाध्यता

755
00:54:27,920 --> 00:54:32,400
फील करते हैं कि नहीं करते अपने जीवन में? हां करते हैं।

756
00:54:32,400 --> 00:54:38,400
हां। तो ये बाध्यता उस समय फील करेंगे या हटा देंगे?

757
00:54:39,120 --> 00:54:43,200
ये बाध्यता फील करेंगे। क्यों करेंगे?

758
00:54:43,200 --> 00:54:49,200
जब साइंस ने बाध्यता हटा दी तो फिर क्यों करेंगे?

759
00:54:59,760 --> 00:55:03,840
जब आप ऐसा मैं एक्चुअल में मेरा कन्फजन इस चीज

760
00:55:03,840 --> 00:55:07,840
पर हो रहा है कि जब आप ये कहेंगे कि साइंस ने ये

761
00:55:07,840 --> 00:55:12,080
कह दिया कि ऐसा करने मतलब ऐसा करना है तो इसका अर्थ ये होगा कि हमारा

762
00:55:12,080 --> 00:55:16,320
जो जेनेट मतलब जेनेटिक है या डीएनए है वो हम सबसे अलग है।

763
00:55:16,320 --> 00:55:20,560
आप जब ऐसी बातें कहते हैं या फिर आप जब ऐसा हाइपोथेटिकल सिचुएशन देते हैं

764
00:55:20,560 --> 00:55:24,640
तो आप एक ऐसी चीज के बारे में कह रहे हैं। मैं हाइपोथेटिकल सिचुएशन नहीं दे

765
00:55:24,640 --> 00:55:28,880
रहा हूं मेरे भाई। आपने खुद माना है साइंस खुद कहती है कि कभी

766
00:55:28,880 --> 00:55:32,880
ऐसा नहीं होगा वो ऐसा कभी नहीं कह यानी कि ऐसे ऐसा हो सकता

767
00:55:32,880 --> 00:55:37,280
है ऐसा असंभव नहीं है कि ऐसा ना हो साइंस

768
00:55:37,280 --> 00:55:41,440
देखिए हमारा जी मैं आपको उसी ओर पॉइंट आउट कर रहा हूं कि हमारे

769
00:55:41,440 --> 00:55:43,120
जो एथिक्स होते हैं नैतिकता

770
00:55:43,120 --> 00:55:47,440
होती है उसका आधार यदि हम साइंस को बना देंगे तो क्योंकि साइंस

771
00:55:47,440 --> 00:55:51,520
का एक वो है प्रकृति है कि वो बदलती है तो हमारी नैतिकता भी

772
00:55:51,520 --> 00:55:55,760
बदलेगी तो आपको हम जिस तरह से इसलिए

773
00:55:55,760 --> 00:56:00,000
हमारी नैतिकता का आधार वो नियम वो स्त्रोत होगा

774
00:56:00,000 --> 00:56:04,080
जो कभी ना बदलता हो। उसी का नाम धर्म है उसी का नाम सनातन। तो अगर

775
00:56:04,080 --> 00:56:08,160
आप ऐसा जिस तरह से मैंने आपको दिखाए कुछ पेपर्स दिखाए कि जिसमें ये

776
00:56:08,160 --> 00:56:12,320
सब लिखा हुआ है और आप अभी ये कह रहे हैं कि ऐसा हो सकता है। तो आपको

777
00:56:12,320 --> 00:56:16,400
भी मुझे वैसे प्रमाण दिखाने पड़ेंगे कि ऐसा हो रहा है। तब जाके मैं कुछ

778
00:56:16,400 --> 00:56:20,400
बता तो रहा हूं। मुस्लिम मुस्लिम विवाह कर तो रहे हैं। ये प्रमाण नहीं

779
00:56:20,400 --> 00:56:24,640
दिया मैंने आपको। मैं आपको थ्योरी तो मैं आपको आपके विपरीत थ्योरी

780
00:56:24,640 --> 00:56:28,720
तो बहुत सारी दे दूंगा मगर मुझे उसकी जरूरत ही नहीं है। मैं आपको दिखा रहा हूं ना कि

781
00:56:28,720 --> 00:56:33,200
मुस्लिम ऐसा कर रहे हैं अपने इंस्टिंक्ट के अगेंस्ट जाकर के कर रहे हैं

782
00:56:33,200 --> 00:56:37,200
के अगेंस्ट और सुनिए मैंने आपको सिद्ध और साध्य

783
00:56:37,200 --> 00:56:41,280
दो बताई बात। क्या बताई कि सिद्ध कोटि के धर्म को व्यक्ति

784
00:56:41,280 --> 00:56:45,280
त्याग नहीं पाता है। त्याग नहीं सकता है। उस वो कूदेगा

785
00:56:45,280 --> 00:56:49,520
तो उसके चोट लगेगी। ये सिद्ध कोटि का धर्म है। तो मुसलमान को इसको

786
00:56:49,520 --> 00:56:53,760
तो अप्लाई करना ही पड़ेगा कि मैं ना कूदू। या तो मरने के लिए कूदू या तो चोट

787
00:56:53,760 --> 00:56:58,240
के लिए कूदू। वो ये नहीं सोचेगा कि मैं गिरूंगा और चोट नहीं लगेगी।

788
00:56:58,240 --> 00:57:02,400
ठीक है? मगर वो इसको अप्लाई क्यों नहीं कर रहा है? अगर ये भी सिद्ध कोटि

789
00:57:02,400 --> 00:57:06,560
का धर्म है। साइंस का मतलब सिद्ध कोटि का धर्म। तो वो

790
00:57:06,560 --> 00:57:10,640
इसको अप्लाई क्यों नहीं कर रहा है? इसके बिना कैसे आराम से रह रहा है वो? आपने

791
00:57:10,640 --> 00:57:16,400
कहा कि मेजरिटी में होता है। दूसरे नंबर की जनसंख्या मुसलमानों की है।

792
00:57:16,400 --> 00:57:21,840
बट और क्रिश्चियन में भी होता है।

793
00:57:21,840 --> 00:57:25,920
हां ऐसा तो मतलब हिंदू में भी कुछ कुछ में होते हैं। फिर मैंने

794
00:57:25,920 --> 00:57:30,080
कहा हिंदू में तो मना किया है ना नहीं होता है। मुसलमान में मना नहीं किया। उनकी किताब में लिखा

795
00:57:30,080 --> 00:57:34,080
है कर सकते हो। जहां पर उन्होंने मना नहीं किया और जहां पर वो लोग ऐसा

796
00:57:34,080 --> 00:57:38,320
कर रहे हैं तो उनको वैसा फल मिल रहा है। जहां पर ऐसा कहा गया

797
00:57:38,320 --> 00:57:42,320
है। फिर आप दूसरी दूसरी बातों पे क्यों जा रहे हो मेरे भाई? मैं कह रहा हूं मैंने

798
00:57:42,320 --> 00:57:46,400
आपने मुझसे प्रमाण मांगा तो मैंने आपको सिद्ध कर दिया कि मेजरिटी ऑफ लोगों

799
00:57:46,400 --> 00:57:52,240
के यहां पर यही है कि बहन के साथ चचेरी बहन के साथ विवाह कर लो।

800
00:57:52,240 --> 00:57:56,400
नहीं एक्चुअल में सच बात कहा जाए तो अगर हम पूरा पपुलेशन लेंगे अर्थ का

801
00:57:56,400 --> 00:58:00,640
तो अगर पृथ्वी का लेंगे तो मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिज नहीं कर रहे हैं। मेजोरिटी

802
00:58:00,640 --> 00:58:04,960
ऑफ़ लोग अगर आप ले लीजिए फिर भी कजिन मैरिज नहीं कर रहे हैं।

803
00:58:04,960 --> 00:58:08,960
ठीक है? मगर एक बहुत बड़ा हिस्सा तो कर रहा है ना। आप मुझे

804
00:58:08,960 --> 00:58:12,960
एक साइंटिस्ट का पेपर दे रहे हो। सुनो आप मुझे मुझसे आपने

805
00:58:12,960 --> 00:58:13,460
क्या पूछा

806
00:58:13,440 --> 00:58:17,440
था कि जैसे मैंने आपको थ्योरी दी है। पेपर दिए हैं। आप भी मुझे कुछ

807
00:58:17,440 --> 00:58:21,600
पेपर दे दीजिए। थ्योरी दे दीजिए। फिर उसमें बात ये आती है कि वो कितना

808
00:58:21,600 --> 00:58:25,840
प्रमाणिक है? वो बात किसने कही है? किसके लिए ऑथेंटिक है, किसके लिए नहीं ऑथेंटिक है।

809
00:58:25,840 --> 00:58:30,000
इसलिए मैं जड़ पर आपसे बात कर रहा हूं। और मेजॉरिटी ना भी हो।

810
00:58:30,000 --> 00:58:34,080
मगर एक बहुत बड़ी संख्या उनके यहां नियम है कि कजन सिस्टर

811
00:58:34,080 --> 00:58:38,240
से शादी कर लो। कोई दिक्कत नहीं है। जिस जिस

812
00:58:38,240 --> 00:58:42,320
जगह पे वो लोग साइंस को मान रहे हैं उस जगह पे उनकी संख्या बहुत कम

813
00:58:42,320 --> 00:58:46,400
है। बहुत कम है। अगर जगह पे साइंस को मान रहे हैं। क्रिश्चियन

814
00:58:46,400 --> 00:58:50,880
और मुस्लिम्स के यहां पर चचेरी बहनों से विवाह करना अलाउ है।

815
00:58:50,880 --> 00:58:54,960
और दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या क्रिश्चियन को मानने वालों की है। सेकंड

816
00:58:54,960 --> 00:58:59,040
नंबर पर मुस्लिम को मानने वालों की है। हां वो बात सच है। तो ये

817
00:58:59,040 --> 00:59:03,040
बहुत बड़ा हिस्सा है। अब वो करते हैं कि नहीं करते वो नहीं उनके

818
00:59:03,040 --> 00:59:07,280
यहां नियम है कि कर सकते हो लेकिन मैं तो उन हां

819
00:59:07,280 --> 00:59:11,440
वो बात सच है लेकिन उन्होंने जो नियम बनाए हैं वो तो साइंस के आधार पर

820
00:59:11,440 --> 00:59:15,520
बनाए ही नहीं है तो वो अपने कुछ भी भाई मैं ये नहीं कह रहा हूं आप पता नहीं

821
00:59:15,520 --> 00:59:19,680
कहां जा रहे हो आपका कहना है कि ये जो इंस्टिंक्ट है ये ह्यूमन

822
00:59:19,680 --> 00:59:23,840
इंस्टिंक्ट है तो मैं आपको बता रहा हूं ये ह्यूमन इंस्टिटक्ट वहां कहां गया

823
00:59:23,840 --> 00:59:28,240
इतनी इतनी बड़ी आबादी में

824
00:59:28,240 --> 00:59:32,480
ये इनबिल्ट आपने कहा ये इनबिल्ट जैसे कि मैं मैं

825
00:59:32,480 --> 00:59:36,480
गिरूंगा जीने की इच्छा रखना ना मरने

826
00:59:36,480 --> 00:59:41,440
की इच्छा ये इनबिल्ट है ठीक है इसके बिना कोई नहीं है

827
00:59:41,440 --> 00:59:45,440
अगर मैं किसी की ओर हाथ फिराऊंगा तो उसकी पलक

828
00:59:45,440 --> 00:59:49,440
झपक जाएगी तो ये इच्छा इनबिल्ट है। इसके बिना वो

829
00:59:49,440 --> 00:59:53,600
नहीं है। तो ये कैसी इनबिल्ट इच्छा है जिसके बिना इतना क्रिश्चियंस और मुस्लिम्स

830
00:59:53,600 --> 00:59:58,240
का इतना बड़ा जो जन समूह है वो आराम से रह रहा है।

831
00:59:58,240 --> 01:00:02,240
सर देखिए इवन दो हमारी इनबिल्ट इच्छा है मैं

832
01:00:02,240 --> 01:00:06,240
मैं कुछ कहना चाहूंगा एक पूरा पॉइंट रखना चाहूंगा इवन

833
01:00:06,240 --> 01:00:10,400
दो ह्यूमन बीइंग्स की ऐसी इनबिल्ट इच्छा है लेकिन ह्यूमन बीइंग्स के पास फ्री

834
01:00:10,400 --> 01:00:14,400
विल भी है जिसके कारण वो इनबिल्ट इस इनबिल्ट इच्छा के अगेंस्ट जा पा

835
01:00:14,400 --> 01:00:18,400
रहे हैं। मैं एक एक एग्जांपल दूंगा। ह्यूमन बीइंग्स की नेचुरल इच्छा है कि

836
01:00:18,400 --> 01:00:22,960
वो जीना चाहते हैं। लेकिन फिर भी ऐसे कुछ लोग हैं जो इस जीना

837
01:00:22,960 --> 01:00:27,200
नहीं चाहते और सुसाइड कर लेते हैं। लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो इनबिल्ट

838
01:00:27,200 --> 01:00:31,200
इच्छा नहीं है ह्यूमन बींग्स के बीच में कि वो जीना चाहते हैं। चलिए

839
01:00:31,200 --> 01:00:35,200
चलिए चलिए जो लोग सुसाइड कर लेते हैं वो भी अपने

840
01:00:35,200 --> 01:00:39,200
आनंद के लिए करते हैं। नहीं वो अपने

841
01:00:39,200 --> 01:00:43,280
आनंद जो लोग सुसाइड कर लेते हैं वो सुसाइड करके भी यह प्रूव

842
01:00:43,280 --> 01:00:47,360
कर रहे हैं कि इस शरीर में ही मेरा अस्तित्व नहीं है। इससे इधर

843
01:00:47,360 --> 01:00:51,520
भी मेरा अस्तित्व है। जिससे कि मैं अपनी इस देह को नष्ट करके

844
01:00:51,520 --> 01:00:56,080
खुश रह पाऊंगा।

845
01:00:56,080 --> 01:01:00,560
सुसाइड तो सबसे बड़ा उदाहरण है। और दूसरी बात फिर आप मेजरिटी

846
01:01:00,560 --> 01:01:04,560
यहां कहां ले गए? दुनिया में कुछ चंद लोग सुसाइड कर रहे हैं। अभी आप थोड़ी देर

847
01:01:04,560 --> 01:01:08,800
पहले कह रहे थे मेजॉरिटी ऑफ़ पीपल क्या करते हैं? देखा जाता है। हां, मेजॉरिटी

848
01:01:08,800 --> 01:01:12,800
ऑफ़ पीपल सुसाइड नहीं करते। उसी तरह से अगर उसी तरह से अगर

849
01:01:12,800 --> 01:01:17,360
आप पृथ्वी के सारे लोग लेंगे मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिजेस नहीं करते।

850
01:01:17,360 --> 01:01:21,520
अगर आप मुसलमानों के भी एक्सक्लूड कर लीजिए। मैं मेरा ये है अगर

851
01:01:21,520 --> 01:01:25,520
आप देखेंगे तो इन टोटल कुछ परसेंटेज ऑफ लोग करते नहीं।

852
01:01:25,520 --> 01:01:29,760
अगर मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिजेस करते हैं। भाई मेरे भाई सबसे

853
01:01:29,760 --> 01:01:33,760
पहली बात तो ये है कि मेजॉरिटी का तो बात वहां खत्म हो गई।

854
01:01:33,760 --> 01:01:37,920
जब मैंने आपको कहा कि दुनिया में मेजॉरिटी में लोग नास्तिक हैं क्या?

855
01:01:37,920 --> 01:01:42,080
तो आपने कहा नहीं मेजॉरिटी में तो आस्तिक हैं। यहां खत्म हो गई। दूसरी बात मैंने

856
01:01:42,080 --> 01:01:46,240
आपसे पूछा क्या आपके अंदर अपने आप ये भावना आई? आपने पहले झट

857
01:01:46,240 --> 01:01:50,240
से झूठ बोला था कि मैं अपने आप सीखा हूं। कपड़ों कपड़े पहन के ही

858
01:01:50,240 --> 01:01:54,240
बाहर जाना। बहन को बहन की नजरें देखना मैं अपने आप ही सीखा हूं। फिर

859
01:01:54,240 --> 01:01:58,640
भी मैंने वहां पर मेजॉरिटी की बात कही थी। तो आपने कहा था

860
01:01:58,640 --> 01:02:02,640
क्या कहते हैं? वहां भी आपने अपनी चीज को प्राथमिकता दी तब आपने ये नहीं

861
01:02:02,640 --> 01:02:06,720
सोचा था कि नहीं होता तो यही है कि लोग अपने आप

862
01:02:06,720 --> 01:02:10,720
नहीं सीखते। उनको कोई ना कोई सिखाता ही है। तो आपने वहां पर अपने आप को

863
01:02:10,720 --> 01:02:14,880
प्रायोरिटी दी। वहां खत्म हो गई। और मेजरिटी की बात आपको मैं बता दूं।

864
01:02:14,880 --> 01:02:20,240
आपने कहा कि मैं एक साइंटिस्ट का दे दूं जिसने ये लिखा है कि अब ऐसा नहीं होगा।

865
01:02:20,240 --> 01:02:24,320
आपने कहा ना? हां। आपने यहां पर मेजॉरिटी को ध्यान

866
01:02:24,320 --> 01:02:28,320
में नहीं दिया। दुनिया के लाखों करोड़ों साइंटिस्ट ने नहीं लिखा

867
01:02:28,320 --> 01:02:32,880
कि अब ऐसा नहीं होगा। मगर एक ने लिखा तो आपने उसको प्रायोरिटी दे दी।

868
01:02:32,880 --> 01:02:36,960
लेकिन ज्यादातर लोगों ने तो मैंने जो कहा वो लिखा है। ज्यादातर

869
01:02:36,960 --> 01:02:41,200
लोगों ने मैंने जो कह रहा हूं अब ऐसा नहीं होगा। ये पूछा जा रहा है। अब ऐसा नहीं

870
01:02:41,200 --> 01:02:45,200
होगा। अब ऐसा नहीं होगा। ये ज्यादातर लोगों ने लिखा है या कम

871
01:02:45,200 --> 01:02:49,360
लोगों ने लिखा है। यहां भी आपने मेजॉरिटी को पीछे कर दिया।

872
01:02:49,360 --> 01:02:53,760
ठीक है? अब आपने पूछा कि आप उदाहरण दीजिए कि कहां पे नहीं माना जाता है।

873
01:02:53,760 --> 01:02:57,760
और ऐसी थ्योरीज भी है। यद्यपि मैं उनको लेके नहीं चल रहा हूं।

874
01:02:57,760 --> 01:03:02,080
ऐसी थ्योरीज भी है कि बहन के साथ मुसलमानों ने अपने साइंटिस्ट

875
01:03:02,080 --> 01:03:06,160
तैयार कर रखे हैं कि हां बहन के साथ विवाह हो सकता है। एक ही घर में विवाह हो

876
01:03:06,160 --> 01:03:10,160
सकता है। लेकिन जो साइंटिस्ट वो तैयार कर रहे हैं वो डिस्रूव्ड

877
01:03:10,160 --> 01:03:14,880
है। मैंने मैंने वो पढ़ा है लेकिन कौन अप्रूव करता है उन्हें?

878
01:03:14,880 --> 01:03:19,440
अगर वह जो कह रहे हैं वो एक्चुअल में मतलब एक्चुअल

879
01:03:19,440 --> 01:03:23,520
मैंने आपको मैंने आपको इस संबंध में कई प्रकार से संतुष्ट कर दिया

880
01:03:23,520 --> 01:03:27,520
है। कई प्रकार से मैंने आपको बताया है। मैंने आपको सीधे-सीधे बताया कि

881
01:03:27,520 --> 01:03:31,520
साइंस के नियम बदलते हैं। बहुत सारे नियम है जो बदले और साइंस ये कहती

882
01:03:31,520 --> 01:03:36,240
भी है कि अब आपने खुद कहा कि ऐसा नहीं होगा या साइंस कभी नहीं कहती।

883
01:03:36,240 --> 01:03:40,240
अब आप कह रहे हैं कि मैंने आपको एक साइंटिस्ट दिया है। आप मुझे अभी बता रहे

884
01:03:40,240 --> 01:03:44,240
थे कि ऐसा नहीं होगा। साइंस कभी नहीं कहती कि अब आगे ऐसा

885
01:03:44,240 --> 01:03:48,400
दूसरी थ्योरी नहीं आएगी। फिर आप अपनी ही बात को काट करके मुझे एक

886
01:03:48,400 --> 01:03:52,400
साइंटिस्ट का वो प्रमाण दे रहे हो कि एक साइंटिस्ट है जिसने ये कहा

887
01:03:52,400 --> 01:03:56,480
है कि आगे ऐसा नहीं होगा। तो यानी साइंस ये कहती है कि

888
01:03:56,480 --> 01:04:00,640
ऐसा नहीं होगा। नहीं मैंने मैंने मैंने जो

889
01:04:00,640 --> 01:04:05,440
मैंने यह कहा है कि जो साइंटिस्ट ने दिया था उसमें यह लिखा था कि

890
01:04:05,440 --> 01:04:09,840
जो कजिन मैरिजेस हो रहे हैं या फिर जो आपस के फैमिली में मैरिजेस

891
01:04:09,840 --> 01:04:13,840
हो रहे हैं वो मतलब डिसएडवांटेजेस मतलब उससे हेल्थ

892
01:04:13,840 --> 01:04:18,000
डिग्रेड हो सकता है। भाई तो ये तो आपने शुरू में भी कह दिया था। तो ये तो वही

893
01:04:18,000 --> 01:04:22,160
वाली बात हो गई कि अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए आप जो चीज पहले

894
01:04:22,160 --> 01:04:26,240
से सबको मालूम है उसी चीज को और आप डेकोरेट करके बता रहे हो।

895
01:04:26,240 --> 01:04:30,320
पूछा यह जा रहा है कि किसी ने यह कहा है क्या कि आगे ऐसा नहीं होगा?

896
01:04:30,320 --> 01:04:34,320
आप बता रहे हो कई साइंटिस्ट ऐसे हैं जिसने यह कहा है कि ऐसा नहीं होना

897
01:04:34,320 --> 01:04:39,040
चाहिए। इन दोनों बातों में अंतर है।

898
01:04:39,040 --> 01:04:43,200
हां मतलब साइंस तो ऐसा आप मेरी एक बात

899
01:04:43,200 --> 01:04:47,600
से मुकर रहे हैं। जवाब देने से पीछे हट रहे हैं कि यदि साइंस

900
01:04:47,600 --> 01:04:52,640
अपने नियमों के ठीक विपरीत बात कह देती है। कई बार

901
01:04:52,640 --> 01:04:56,800
उसकी नई-नई रिसर्चेस आती है। जेनेटिक्स पे वो काम करते हैं तो

902
01:04:56,800 --> 01:05:00,880
कई बार ऐसा होता है। उसने पहले जो नियम दिया था उसके ठीक विपरीत वो दे देते

903
01:05:00,880 --> 01:05:05,360
हैं। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि यदि साइंस ने यह कह दिया कि बहन के साथ रमण

904
01:05:05,360 --> 01:05:09,520
करने में कोई आपत्ति नहीं है तो आपकी नजर

905
01:05:09,520 --> 01:05:14,240
आपकी बहन को लेकर के बदल जाएगी या वही रहेगी जो आज है?

906
01:05:14,240 --> 01:05:18,400
जब साइंस ऐसा मेरा मेरा कहने का मतलब ये है जब आप

907
01:05:18,400 --> 01:05:22,400
अगर ऐसा कोई रिजल्ट मेरा मैं मैं जो कहने की कोशिश कर रहा हूं वो आप थोड़ा

908
01:05:22,400 --> 01:05:26,480
समझने की कोशिश करिए। रीजन मैं आपको दे रहा हूं ना साइंस

909
01:05:26,480 --> 01:05:31,200
साइंस बदलती है ये रीजन है साइंस बदलती है ना

910
01:05:31,200 --> 01:05:35,760
साइंस की थ्योरी बदलती है ना साइंस

911
01:05:35,760 --> 01:05:40,160
यानी कि आप आप ये कह रहे हो ये थ्योरी नहीं बदलेगी नहीं

912
01:05:40,160 --> 01:05:44,240
मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये थ्योरी नहीं बदलेगी लेकिन तो फिर ये

913
01:05:44,240 --> 01:05:45,520
मान लो फिर

914
01:05:45,520 --> 01:05:49,600
उस चीज को सपोज करके आप मुझे जवाब दो नहीं नहीं बात

915
01:05:49,600 --> 01:05:53,920
तो सुनने की कोशिश करिए मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूं जब जब साइन जब

916
01:05:53,920 --> 01:05:58,080
मान जब साइंस एक अलग थ्योरी देती है तो उसके

917
01:05:58,080 --> 01:06:02,160
पीछे का जो रीजन होता है वो पूरा अलग हो जाता है। इस अरे मेरे भाई तो मैं

918
01:06:02,160 --> 01:06:06,560
कह तो रहा हूं जो रीजन होता है अलग हो जाता है। मैं आपकी बात समझ रहा हूं।

919
01:06:06,560 --> 01:06:10,800
मैं कह रहा हूं या तो आप ये डिक्लेअ करिए कि साइंस इस बारे

920
01:06:10,800 --> 01:06:14,880
में नई थ्योरी नहीं देगी। या फिर मेरा जो सपोज किया

921
01:06:14,880 --> 01:06:19,040
हुआ बात है उस पर आप अपना जवाब दीजिए। या तो ये बोल दीजिए

922
01:06:19,040 --> 01:06:23,200
इस पर नहीं देगी। अगर दे सकती है तो उस बात पर अपना जवाब

923
01:06:23,200 --> 01:06:27,280
दीजिए। उस बात को मानते हुए सुनिए जो आप देखिए

924
01:06:27,280 --> 01:06:31,440
मेरे पास इतना समय नहीं है। आप अगर बचने की कोशिश करेंगे

925
01:06:31,440 --> 01:06:36,080
सवाल से भागने की कोशिश करेंगे तो मैं उस पर पकड़े रहूंगा और जो अच्छी

926
01:06:36,080 --> 01:06:40,880
अच्छे अच्छा जो डिस्कशन हो सकता होगा आगे वो रुक जाएगा।

927
01:06:40,880 --> 01:06:45,120
इसलिए आप अपने इस चीज को क्लियर करिए। या तो आप यह कहिए यहां पे

928
01:06:45,120 --> 01:06:50,400
कि साइंस इस बारे में अपनी थ्योरी नहीं बदलेगी।

929
01:06:50,400 --> 01:06:54,400
तो आप जवाब ना दे अच्छा है कोई बात नहीं सुनिए तो

930
01:06:54,400 --> 01:06:58,640
आप डिक्लेअ करिए आप तो साइंटिस्ट खुद बन जाइए खुद साइंस बन जाइए और ये कह दीजिए

931
01:06:58,640 --> 01:07:00,800
नहीं बदलेगी और या फिर

932
01:07:00,800 --> 01:07:04,800
अगर बदल सकती है तो फिर आप अपना वो स्टैंड बताइए कि आप बहन को

933
01:07:04,800 --> 01:07:08,880
लेकर के आपकी दृष्टिकोण क्या होगा? आप मुझे बोलने देंगे। थोड़ा

934
01:07:08,880 --> 01:07:13,120
मैं बोल सकता हूं। मैं बोलने दूंगा। देखिए आप अगर इधर उधर भागेंगे पॉइंट

935
01:07:13,120 --> 01:07:17,120
की बात नहीं करेंगे तो फिर मैं आपको इंटरप्ट करूंगा। इसलिए आप

936
01:07:17,120 --> 01:07:21,360
पॉइंट की बात पूरा पॉइंट रहिए। मैं यह कहने

937
01:07:21,360 --> 01:07:25,440
की कोशिश कर मैं यह कहने की कोशिश कर रहा हूं। आपने अभी कहा कि साइंस अगर ऐसा कहती

938
01:07:25,440 --> 01:07:29,520
है तो मेरा इस चीज में सवाल होगा कि जब साइंस ऐसा कहेगी

939
01:07:29,520 --> 01:07:33,760
इसका मतलब ये होगा कि मान लीजिए एक मां अपने बच्चे को पैदा

940
01:07:33,760 --> 01:07:37,760
कर रही है तो बच्चे का जो डीएनए है वो मां के डीएनए से

941
01:07:37,760 --> 01:07:43,760
मिलता ही नहीं है। तब आप ऐसा ऐसा पॉसिबल है? बताइए।

942
01:07:44,640 --> 01:07:48,640
आप मान लीजिए चलिए अब इसमें इसमें थोड़ा जाते हैं।

943
01:07:48,640 --> 01:07:52,640
आपका कहना है कि मां के साथ रमण ना करने की बात साइंस इसलिए

944
01:07:52,640 --> 01:07:57,360
कहती है कि मां के साथ उसका डीएनए मैच करता है। हां मतलब

945
01:07:57,360 --> 01:08:01,760
प्रूफ होता है। हां एक मिनट अगर इस पर ही चोट कर दी जाए

946
01:08:01,760 --> 01:08:06,000
कि जिसके साथ डीएनए मैच होगा उसके साथ रमण

947
01:08:06,000 --> 01:08:10,160
करने पर कोई दिक्कत नहीं है। अगर साइंस इस नियम

948
01:08:10,160 --> 01:08:14,160
को ही बदल दे तो ऐसा क्यों कोई कहेगा? ऐसा कहने से

949
01:08:14,160 --> 01:08:18,400
अरे भाई ऐसा इसलिए कहेगा क्योंकि साइंस के नियम खोज के अनुसार

950
01:08:18,400 --> 01:08:22,480
समय के अनुसार बदलते हैं। इसलिए कहेगा उसमें खोजे होती

951
01:08:22,480 --> 01:08:26,480
है। या तो आप आप इतनी बार इस बात को लंबा खींचने की

952
01:08:26,480 --> 01:08:31,920
बजाय आप ये कहिए ना मैं नहीं मानता कि इसमें जो है नियम बदलेगा।

953
01:08:31,920 --> 01:08:36,000
ये कहिए ना फिर। आप कह रहे हो ना ऐसा नहीं हो सकता है। आप

954
01:08:36,000 --> 01:08:40,240
एक मिनट आपकी बात से ही आपको जवाब दूं। आपने अभी क्या कहा कि क्या

955
01:08:40,240 --> 01:08:44,560
ऐसा हो सकता है किसी बच्चे का उसकी मां के साथ डीएनए मैच ना करे

956
01:08:44,560 --> 01:08:48,800
आपने ये कहा ना तो इसका मतलब आप ये मानते हो क्योंकि किसी बच्चे

957
01:08:48,800 --> 01:08:53,120
का उसकी मां के साथ डीएनए मैच नहीं कर ना करे ऐसा

958
01:08:53,120 --> 01:08:57,440
पॉसिबल नहीं है इसलिए ये पॉसिबल नहीं है कि कल को ये थ्योरी बदल जाए

959
01:08:57,440 --> 01:08:59,920
हां वही कहने की कोशिश कर हां तो यानी

960
01:08:59,920 --> 01:09:05,040
कि मैं नहीं मानता कि इस मामले में साइंस की थ्योरी बदलेगी हां

961
01:09:05,040 --> 01:09:09,040
तो ये क्यों नहीं बोल रहे इतनी देर से मैं मैं एक्चुअल में वही

962
01:09:09,040 --> 01:09:13,040
बोलने की कोशिश कर रहा था। सुनिए सर एक अरे भाई कहां बोल रहे हो तुम? अब एक घंटा हो

963
01:09:13,040 --> 01:09:17,120
गया आपको। आप कहां बोल रहे हो? सुनिए। अच्छा सुनो।

964
01:09:17,120 --> 01:09:21,120
अब मैं आपकी बात समझ गया। अब मैं आपकी बात समझ गया। आपने डिक्लेअ

965
01:09:21,120 --> 01:09:25,840
कर दिया कि इस मामले में साइंस की थ्योरी नहीं बदलेगी। नहीं।

966
01:09:25,840 --> 01:09:31,840
नहीं भाई। ये आपकी बात क्यों मानी जाए?

967
01:09:31,840 --> 01:09:36,880
किसी साइंटिस्ट ने ऐसा कहा है। पहले तो ये बात आएगी।

968
01:09:36,880 --> 01:09:40,960
हां इसका इसका रीजन है कि क्यों ऐसा माना जाए क्योंकि

969
01:09:40,960 --> 01:09:45,200
जब क्योंकि जब भी जब जब दो इंडिविजुअल

970
01:09:45,200 --> 01:09:49,280
के बीच में मतलब बच्चा पैदा करते हैं अगर उन

971
01:09:49,280 --> 01:09:53,440
दोनों के डीएनए सीक्वेंस जो है वो सेम है और वो बच्चा भाई मैं

972
01:09:53,440 --> 01:09:57,760
आपसे ये पूछ रहा हूं मुझे ये बताइए क्या किसी साइंटिस्ट ने ये माना

973
01:09:57,760 --> 01:10:02,080
है इसमें नई थ्योरी नहीं आ सकती हां इसमें सब

974
01:10:02,080 --> 01:10:06,480
जितने भी साइंटिफिक जर्नल है और साइंटिफिक कम्युनिटी है। उन्होंने

975
01:10:06,480 --> 01:10:10,560
इस चीज को माना है कि इसमें नहीं हो सकता। नहीं थ्योरी

976
01:10:10,560 --> 01:10:14,560
नहीं आ सकती। नहीं नहीं बात को घुमाइए मत। नहीं नहीं

977
01:10:14,560 --> 01:10:15,200
इस नियम

978
01:10:15,200 --> 01:10:20,640
के विपरीत नहीं आ सकती। वो बताइए कहां कहां है?

979
01:10:20,640 --> 01:10:25,040
आप 12वीं कक्षा की बायोलॉजी बुक ले लीजिए। आप 11वीं कक्षा की बायोलॉजी

980
01:10:25,040 --> 01:10:31,040
बुक ले लीजिए। आप दिखाइए। आपके पास बुक है। दिखाइए।

981
01:10:33,040 --> 01:10:37,680
अभी नहीं अभी तो नहीं है। लिखा है ना इसमें नई थ्योरी नहीं आएगी।

982
01:10:37,680 --> 01:10:40,080
नहीं

983
01:10:40,080 --> 01:10:44,800
क्या लिखा है? उसमें ये लिखा है कि जो भी

984
01:10:44,800 --> 01:10:49,040
मतलब जब भी एक फैमिली मेंबर के बीच में दूसरे फैमिली मेंबर्स के बीच में विवाह

985
01:10:49,040 --> 01:10:53,120
होगा उससे जो बच्चे उत्पन्न होंगे वो अरे मेरे भाई मैं इसके बैड

986
01:10:53,120 --> 01:10:57,120
रिजल्ट्स की बात नहीं कर रहा हूं। ये लिखा है क्या इसमें नई थ्योरी

987
01:10:57,120 --> 01:11:02,320
नहीं आएगी?

988
01:11:02,320 --> 01:11:06,880
ऐसे तो मतलब आप जो कह रहे हैं वैसा तो नहीं भाई सुनो सुनो

989
01:11:06,880 --> 01:11:10,960
बहुत सारी साइंस की किसी समय की किताबें होंगी जिसमें लिखा होगा कि अमुक

990
01:11:10,960 --> 01:11:15,600
अमुक लालाज बीमारी है इसका कोई इलाज नहीं है

991
01:11:15,600 --> 01:11:19,600
इसका मतलब ये नहीं कि आज की डेट में इलाज नहीं है। तो उस समय

992
01:11:19,600 --> 01:11:24,000
की साहित्य की किताब के अनुसार वह चीज तो सही थी मगर उसके बाद वो

993
01:11:24,000 --> 01:11:28,000
इलाज आ गया उन बीमारियों का। इसका अर्थ

994
01:11:28,000 --> 01:11:32,160
है कि अगर कहीं पर किसी चीज का खंडन हो रहा है तो उससे ये सिद्ध नहीं होता है कि आगे

995
01:11:32,160 --> 01:11:36,800
भी नहीं होगा। ऐसे ये चीज पॉसिबल आगे भी नहीं है।

996
01:11:36,800 --> 01:11:42,800
या तो उसमें डिक्लेअ करो आप।

997
01:11:42,880 --> 01:11:47,040
अरे लेकिन आप जैसा कह रहे आप इस विषय में अपनी तैयारी

998
01:11:47,040 --> 01:11:51,280
पूरी करके आइए। कि यह थ्योरी बदली नहीं जा सकती है।

999
01:11:51,280 --> 01:11:55,360
आगे आप लेकर के आइए। ठीक है? अब मैं आपसे पूछ

1000
01:11:55,360 --> 01:11:59,360
रहा हूं आपके पास आज की डेट में कोई पक्का आधार नहीं

1001
01:11:59,360 --> 01:12:03,120
है बहन को बहन मानने का।

1002
01:12:03,120 --> 01:12:07,360
समझ गए? हां। और आप जो बहन को बहन मानते हैं वो इसी

1003
01:12:07,360 --> 01:12:11,360
कारण से मानते हैं क्योंकि आपके माता-पिता ने आपको बताया

1004
01:12:11,360 --> 01:12:15,760
कि ये बहन है बेटा। इसकी ओर दृष्टि मत डालना।

1005
01:12:15,760 --> 01:12:19,920
और उसके बाद आपको अपनी इन भावनाओं जो आपको माता-पिता से सिखाई गई

1006
01:12:19,920 --> 01:12:24,160
है इनको सपोर्ट देने वाली थ्योरी भी साइंस में मिल जाती है। जिससे यह सिद्ध

1007
01:12:24,160 --> 01:12:28,160
होता है कि हमारे धर्म ने जो हमारे नियम बताए हैं वो

1008
01:12:28,160 --> 01:12:32,400
कहीं ना कहीं हमारे फायदे के लिए ही बताए होते हैं। हमारे

1009
01:12:32,400 --> 01:12:36,400
लिए अच्छे फलदायक ही होते हैं। परंतु पूरी तरीके से

1010
01:12:36,400 --> 01:12:40,400
साइंस को प्रमाण नहीं माना जा सकता। क्योंकि साइंस में क्या है? साइंस पहली

1011
01:12:40,400 --> 01:12:44,640
बात तो कोई एक निश्चित नियमावली नहीं है। एक साइंटिस्ट कुछ कहेगा,

1012
01:12:44,640 --> 01:12:48,880
दूसरा साइंटिस्ट कुछ कहेगा। इसके अलावा वो आए दिन खुद ही

1013
01:12:48,880 --> 01:12:52,960
एक ही साइंटिस्ट अपनीप चीजों को स्टेटमेंट को बदल देता है। पहले मैंने

1014
01:12:52,960 --> 01:12:57,120
ये देखा था। अब मैं यह महसूस कर रहा हूं। तो इसलिए उसके ऊपर हम डिपेंड

1015
01:12:57,120 --> 01:12:57,920
नहीं हो सकते।

1016
01:12:57,920 --> 01:13:01,920
यह हमारे लिए अंतिम प्रमाण है। प्रमाण हमारे लिए कुछ और है।

1017
01:13:01,920 --> 01:13:06,080
उसको समझने के लिए हम साइंस का उपयोग ले सकते हैं। कहीं-क

1018
01:13:06,080 --> 01:13:10,160
पे हम साइंस की बातों से समझ पाते हैं। ये सिद्धांत धर्म का क्यों दिया

1019
01:13:10,160 --> 01:13:14,160
गया? पहली बात। अब ये बताइए अब सच्चिदानंद पर आ जाते

1020
01:13:14,160 --> 01:13:19,360
हैं। मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूं इसके ऊपर। बोलिए।

1021
01:13:19,360 --> 01:13:23,680
तब आप क्या करेंगे? जब साइंस के जो नियम है वह आपके रिलजन

1022
01:13:23,680 --> 01:13:29,680
के नियम से पूरे विपरीत जाते हैं।

1023
01:13:30,080 --> 01:13:33,680
अगर वो मेरे

1024
01:13:33,680 --> 01:13:38,720
उदाहरण दे सकता हूं। हां

1025
01:13:38,720 --> 01:13:42,800
आप आप मनुस्मृति को मानते हैं ना? अरे भाई मैं

1026
01:13:42,800 --> 01:13:46,800
आपको बता दे रहा हूं ना साइंस के नियम जहां पर हमारे रिलीजन के नियम से

1027
01:13:46,800 --> 01:13:52,080
विपरीत जाएंगे तो हम अपने रिलीजन को फॉलो करेंगे।

1028
01:13:52,080 --> 01:13:56,560
मैं मैं उसका एक उदाहरण देना चाहूंगा। हम्म बोलिए। उदाहरण

1029
01:13:56,560 --> 01:14:00,720
क्यों दे रहे हैं? मैंने आपको जवाब दे तो दिया। बात यह है आप समझ नहीं रहे हो।

1030
01:14:00,720 --> 01:14:04,880
आप मनुस्मृति खोलोगे मनुस्मृति में हम आपको उसको

1031
01:14:04,880 --> 01:14:09,280
उसकी व्याख्या फिर खुल जाएगी। फिर एक घंटा हो जाएगा। अब मैं आपको सच्चिदानंद

1032
01:14:09,280 --> 01:14:13,280
पर लाना चाहता हूं। फिर मनुस्मति की चर्चा पे एक घंटा हो जाएगा। समझो

1033
01:14:13,280 --> 01:14:17,360
मेरी बात को। आपकी बात का जवाब मैंने दे दिया। अगर साइंस हमारे धर्म

1034
01:14:17,360 --> 01:14:22,160
के ठीक विपरीत जाएगी तो हम अपने धर्म को प्राथमिकता देंगे।

1035
01:14:22,160 --> 01:14:26,480
साइंस को नहीं देंगे। भले ही वो मतलब फ्यूचर

1036
01:14:26,480 --> 01:14:32,400
मतलब इन जनरल वो डेट्रिमेंटल होगा आपके लिए फिर भी आप रिलजन को मानेंगे।

1037
01:14:32,400 --> 01:14:37,920
डेट्रिमेंटल का हिंदी अर्थ क्या है? मतलब हानिकारक होगा।

1038
01:14:37,920 --> 01:14:42,160
हानिकारक होना सिद्ध करना होगा आपको। जिस तरह से आपने

1039
01:14:42,160 --> 01:14:46,160
अभी एक दिया कि मुसलमानों जो है फर्स्ट कजिन मैरिज करते

1040
01:14:46,160 --> 01:14:50,160
हैं क्योंकि उनके रिलजन में ऐसा लिखा हुआ है। लेकिन ये जो

1041
01:14:50,160 --> 01:14:54,080
है मतलब हानिकारक है और मतलब ये हानिकारक

1042
01:14:54,080 --> 01:14:58,160
है। ये सिद्ध है। तो उसी तरह से तो इस कारण

1043
01:14:58,160 --> 01:15:02,160
एक व्यक्ति को अपने रिलजन से नहीं मतलब बिलीव करना चाहिए और

1044
01:15:02,160 --> 01:15:07,840
साइंस से बिलीव करके अपने कजिन से मैरिज नहीं करनी चाहिए।

1045
01:15:07,840 --> 01:15:12,000
साइंस पे बिलीव करके अपने कजिन से मैरिज नहीं करनी चाहिए। नहीं

1046
01:15:12,000 --> 01:15:16,160
मतलब जो उसके अंदर ह्यूमन इंस्टिट आ रहा है इनबिल्ट वो इच्छा

1047
01:15:16,160 --> 01:15:21,120
ले पैदा हो रहा है तो उसको बाहरी दबाव की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए।

1048
01:15:21,120 --> 01:15:25,200
तो फिर वहां पर वो कैसे अलव किया गया कि बहुत अच्छा है चचेरी बहन से विवाह

1049
01:15:25,200 --> 01:15:29,200
कर लो। वहां तो साइंस को पढ़ने की भी आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यदि

1050
01:15:29,200 --> 01:15:33,600
वो इनबिल्ट है। मैंने आपको उदाहरण दिया। जैसे मैं लोहा नहीं खा सकता हूं

1051
01:15:33,600 --> 01:15:37,600
तो मेरे अंदर लोहे को खाने की कोई इच्छा नहीं है। मेरे अंदर

1052
01:15:37,600 --> 01:15:43,040
इनबिल्ट नहीं है कि मैं लोहा खाऊं।

1053
01:15:43,040 --> 01:15:48,480
हां। तो मैं यहां पर ये कह रहा हूं।

1054
01:15:48,480 --> 01:15:53,120
ठीक है। अब बात करते हैं सच्चिदानंद की।

1055
01:15:53,120 --> 01:15:57,120
हां। आपने वो वीडियो सुना है कि नहीं सुना है? हां

1056
01:15:57,120 --> 01:16:00,800
मैंने सुना है। हम

1057
01:16:00,800 --> 01:16:05,600
तो आप अपना पक्ष रख ही फिर सुना है तो। [संगीत]

1058
01:16:05,600 --> 01:16:10,000
उस आप मुझे करेक्ट करिएगा अगर मैं कुछ गलत कह रहा हूं।

1059
01:16:10,000 --> 01:16:14,160
आपने ये कहा था कि मनुष्य में एक चाह होती है

1060
01:16:14,160 --> 01:16:18,160
जीने के लिए और उनकी एक सर्टन क्यूरोसिटी होती है, जिज्ञासा होती

1061
01:16:18,160 --> 01:16:22,640
है और मतलब सच्चिदानंद जो क्वालिटीज

1062
01:16:22,640 --> 01:16:26,800
है वो हम में होती है। जिस तरह से एक आदमी के

1063
01:16:26,800 --> 01:16:31,120
भूख लगने का प्रमाण है कि खाद्य एक्सिस्ट करता है। फूड एक्सिस्ट करते हैं।

1064
01:16:31,120 --> 01:16:35,120
और एक आदमी को प्यास लगती है क्योंकि वाटर एक्सिस्ट

1065
01:16:35,120 --> 01:16:39,280
करता है। उसी तरह से हमारे अंदर जो सच्चिदानंद गुण है यह इस बात का प्रमाण

1066
01:16:39,280 --> 01:16:45,280
है कि जो भगवान है वो एक्सिस्ट करते हैं।

1067
01:16:45,920 --> 01:16:49,920
हम यही आपका मतलब तर्क

1068
01:16:49,920 --> 01:16:54,000
था ना हां आप देखिए देखिए नास्तिकों

1069
01:16:54,000 --> 01:16:58,640
में और आस्तिकों में सबसे बड़ी एक दिक्कत क्या है?

1070
01:16:58,640 --> 01:17:02,800
जो बीच में वैचारिक मतभेद आ रहा है वह इस कारण से

1071
01:17:02,800 --> 01:17:06,960
आ रहा है कि जब आप आस्तिकों को काउंटर करते हैं तो

1072
01:17:06,960 --> 01:17:12,960
आप यह ध्यान नहीं देते कि

1073
01:17:13,520 --> 01:17:17,680
आप क्या सोचते हो कि ये ब्रह्मा जी है कमल पर बैठे हुए हैं। मैं नहीं मानता

1074
01:17:17,680 --> 01:17:21,760
कि ऐसा कोई है। या ये विष्णु जी हैं। ये गरुड़ की सवारी कर

1075
01:17:21,760 --> 01:17:26,240
रहे हैं। मैं नहीं मानता कि ऐसा कोई है। या आपने जिस भी रूप में जिसके द्वारा प्रतिपादित

1076
01:17:26,240 --> 01:17:30,320
होने वाले ईश्वर को देखा हो। है ना? आप

1077
01:17:30,320 --> 01:17:34,720
कभी ये नहीं समझने का प्रयास करते हैं कि अंततः अंतो

1078
01:17:34,720 --> 01:17:40,160
अंतत गत्वा इन्होंने ईश्वर कहा किसे है।

1079
01:17:40,160 --> 01:17:44,240
अंततो गत्वा इन्होंने ईश्वर उसे ही कहा है जहां जिसको हम

1080
01:17:44,240 --> 01:17:47,520
लोग खोज रहे हैं।

1081
01:17:47,520 --> 01:17:51,600
सारी लड़ाई खत्म हो जाए। आप ध्यान ही नहीं दे रहे हो। ईश्वर हम किसको

1082
01:17:51,600 --> 01:17:56,320
कह रहे हैं? सच्चिदानंद स्वरूप को कह रहे हैं। सच्चिदानंद

1083
01:17:56,320 --> 01:18:00,320
देने वाले को ईश्वर नहीं कह रहे हैं। सच्चिदानंद स्वरूप को कह रहे

1084
01:18:00,320 --> 01:18:05,200
हैं। आपकी फोटो फ्रीज हो गई है क्या?

1085
01:18:05,200 --> 01:18:10,960
नहीं दिखाई दे रहा है। नहीं मुझे तो फ्रीज दिख रही है आपकी फोटो।

1086
01:18:10,960 --> 01:18:16,960
अह एक मिनट।

1087
01:18:23,090 --> 01:18:28,400
[संगीत] जी

1088
01:18:28,400 --> 01:18:33,360
हेलो

1089
01:18:33,360 --> 01:18:37,120
हां

1090
01:18:37,120 --> 01:18:41,520
आप क्या तो सबसे बड़ी पहली प्रॉब्लम ये है कि आप जो नास्तिक

1091
01:18:41,520 --> 01:18:45,680
होते हैं वो ऊपरी तौर तौर पर सतह लेवल पर

1092
01:18:45,680 --> 01:18:49,680
यह सोचते हैं कि भाई ऐसा कोई नहीं हो सकता। यहां कोई नहीं बैठ सकता। यह है वह

1093
01:18:49,680 --> 01:18:53,840
है। आप यह ध्यान नहीं देते हैं कि अंतत गतवा हमने ईश्वर कहा

1094
01:18:53,840 --> 01:18:58,400
किसे है? हमने ईश्वर सच्चिदानंद

1095
01:18:58,400 --> 01:19:02,400
स्वरूप को कहा है। यानी उस स्टेज को कहा

1096
01:19:02,400 --> 01:19:06,480
है जिस स्टेज को हम पाना चाहते हैं। मुक्ति का नाम ही

1097
01:19:06,480 --> 01:19:10,880
ईश्वर है। मुक्ति स्वरूप ईश्वर है। ज्ञान स्वरूप ईश्वर है।

1098
01:19:10,880 --> 01:19:15,040
सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर है। अब यदि बात यह आती

1099
01:19:15,040 --> 01:19:19,120
है कि क्या आप मुक्ति को मानते हैं कि नहीं?

1100
01:19:19,120 --> 01:19:23,280
मुक्त हो जाना मानते हैं कि नहीं कि मैं मुक्त हो जाऊं। अगर नहीं मानते

1101
01:19:23,280 --> 01:19:27,680
हैं तो फिर ये इच्छा आपके अंदर क्यों आ रही है कि मैं मुक्त हो जाऊं।

1102
01:19:27,680 --> 01:19:31,760
और अगर आप इच्छा होते हुए भी यह कहेंगे कि मेरे इच्छा होने से

1103
01:19:31,760 --> 01:19:35,760
ये सिद्ध नहीं होता कि वो उसका कोई अस्तित्व है। तो

1104
01:19:35,760 --> 01:19:39,760
फिर ऐसे में भी आप मूर्मति सिद्ध होंगे। भाई

1105
01:19:39,760 --> 01:19:43,440
क्योंकि मैं जाना तो चाहता हूं वहां पर पर वो जगह नहीं है तो आप

1106
01:19:43,440 --> 01:19:47,680
वहां पर भी आपकी बात ही खंडित होगी। तो इसको आप थोड़ा

1107
01:19:47,680 --> 01:19:52,400
क्लियर करिए।

1108
01:19:52,400 --> 01:19:56,720
मेरा कहने कहने का मतलब ये था कि अगर एक

1109
01:19:56,720 --> 01:20:00,800
मनुष्य की बस चाह है तो इससे इस बात से साबित नहीं हो

1110
01:20:00,800 --> 01:20:04,800
सकता कि वो चीज सच में एक्सिस्ट करती है। मैं यह

1111
01:20:04,800 --> 01:20:09,280
कहने की कोशिश कर रहा था। ऐसी कौन सी चाह है जिसका विषय ना हो?

1112
01:20:09,280 --> 01:20:13,280
बताइए। मान लीजिए एक मनुष्य की

1113
01:20:13,280 --> 01:20:17,280
चाह हो सकती है कि वो उड़ना चाहता है। लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि

1114
01:20:17,280 --> 01:20:21,440
उनके पंख होंगे। उस चाह के बिना आप आराम

1115
01:20:21,440 --> 01:20:26,240
से जी सकते हैं या नहीं? उड़ने वाली चाह के बिना।

1116
01:20:26,240 --> 01:20:30,240
हां जी सकते हैं। मरने ना मरने की चाह

1117
01:20:30,240 --> 01:20:34,320
को आप छोड़ के जी पा रहे हैं। आप आज की डेट में उड़

1118
01:20:34,320 --> 01:20:38,320
नहीं पा रहे हैं। आपको दुख हो रहा है क्या? नहीं नहीं हो

1119
01:20:38,320 --> 01:20:42,800
रहा है। नहीं हो रहा है। जब मौत की बात आएगी मरने

1120
01:20:42,800 --> 01:20:48,000
की विचार तक आएगा। दुख होगा कि नहीं होगा?

1121
01:20:48,000 --> 01:20:52,080
हां हां होगा। होगा। इसका मतलब

1122
01:20:52,080 --> 01:20:56,080
यह वह चाह है जिसको आप छोड़ नहीं सकते।

1123
01:20:56,080 --> 01:20:58,480
उन चाहों को जिनसे आप इसका कंपैरिजन

1124
01:20:58,480 --> 01:21:02,640
कर रहे हैं उनको आप छोड़ सकते हैं। वो आपके द्वारा बनाई गई चाह है। ये

1125
01:21:02,640 --> 01:21:07,840
इनबिल्ट चाह है। इसको इससे अपने आप को अलग करके बताइए ना।

1126
01:21:07,840 --> 01:21:12,080
तो वही मैंने कहा ना वही मैंने कहा ना।

1127
01:21:12,080 --> 01:21:16,240
अभी इनबिल्ट से अलग करने की बात ही तो कर रहा था। क्यों नहीं कर पा रहे हो अलग?

1128
01:21:16,240 --> 01:21:21,520
अलग कर दो इस चाह से। इस चाह के बिना आप दुखी ना हो।

1129
01:21:21,520 --> 01:21:25,840
मौत का ख्याल आने पर आपको दुख नहीं होना चाहिए। उससे भागो मत।

1130
01:21:25,840 --> 01:21:30,160
तो कोई दिक्कत नहीं है। फिर मान लिया जाएगा। मगर आपको तो दुख है। अभी आपकी

1131
01:21:30,160 --> 01:21:34,640
ओर मैं आप बन जाओ बहुत बड़े नास्तिक। मैं नहीं मानता कि दुनिया में कोई सत्य है।

1132
01:21:34,640 --> 01:21:38,800
मैं नहीं मानता दुनिया में कोई अमृत्व को प्राप्त है या मैं अमृत्व को प्राप्त

1133
01:21:38,800 --> 01:21:43,360
कर सकता हूं। तो पहली बात तो वो अलग काउंटर है कि जब आप अमरत्व

1134
01:21:43,360 --> 01:21:47,520
है ही नहीं। इस दुनिया में आप मान ही नहीं रहे हो तो क्यों चाह रहे हो कि मैं अमृत

1135
01:21:47,520 --> 01:21:51,600
को पा लूं। मगर दूसरी बात यह है कि आप नाश्ते

1136
01:21:51,600 --> 01:21:55,760
को आप अमृत को नहीं मानते हो। आप 200 साल की आयु में

1137
01:21:55,760 --> 01:21:59,840
भी जब आपके पिताजी आपके माता बीमार पड़ेंगे तो आप उनको हॉस्पिटल भेजोगे बच

1138
01:21:59,840 --> 01:22:05,840
जाए। क्यों? मरने दो ना। क्यों भाग रहे हो मौत से?

1139
01:22:08,480 --> 01:22:12,560
लेकिन यह जो हम ये जो हमारा

1140
01:22:12,560 --> 01:22:16,560
आप जो कह रहे हैं इस चीज को ले कह रहे हैं कि ये भगवान का आपने जो अभी एक

1141
01:22:16,560 --> 01:22:20,560
उदाहरण दिया है वो मैंने काट दिया।

1142
01:22:20,560 --> 01:22:25,280
उदाहरण आपने दिया था ऐसी चाह का जो आप अपने से अलग कर सकते हो।

1143
01:22:25,280 --> 01:22:29,440
आप उसका कंपैरिजन उस चाह से नहीं कर सकते जिससे आप अपने आप को अलग

1144
01:22:29,440 --> 01:22:33,600
नहीं कर सकते। आप ऐसा उदाहरण दीजिए उस चाह का

1145
01:22:33,600 --> 01:22:37,600
जिसका विषय भी ना हो और जिसको जिससे आप अपने आप को अलग भी ना कर

1146
01:22:37,600 --> 01:22:42,160
पा रहे हो। ऐसा उदाहरण दीजिए।

1147
01:22:42,160 --> 01:22:46,320
एक जो मनुष्य मनुष्य की एक ऐसी चाह

1148
01:22:46,320 --> 01:22:50,640
है कि वो एक ऐसा मशीन बनाए जिससे जितने भी एनर्जी

1149
01:22:50,640 --> 01:22:54,880
आप उसको दे रहे हैं वो कभी वेस्ट ना जाए। इसको परपेचुअल मशीन कहते हैं। मतलब

1150
01:22:54,880 --> 01:22:58,880
मान लीजिए अगर आप गाड़ी चला रहे हैं तो उसमें से कितना जो एनर्जी है

1151
01:22:58,880 --> 01:23:02,880
वह वेस्ट हो जाता है। उनका मनुष्य की इस चीज की एक इच्छा

1152
01:23:02,880 --> 01:23:06,960
है कि वो एक ऐसे मशीन को बनाए जिससे कोई भी

1153
01:23:06,960 --> 01:23:11,280
एनर्जी वेस्ट ना जाए जिससे बहुत सारे क्राइसिस जो है वो सॉल्व

1154
01:23:11,280 --> 01:23:15,360
हो सकते हैं। और ये मनुष्य की चाह है

1155
01:23:15,360 --> 01:23:19,360
करने की। लेकिन इवन दो वो चाहता है जिससे बहुत सारे इंप्रूवमेंट

1156
01:23:19,360 --> 01:23:23,520
हो सकते हैं। वैसा हो नहीं पा रहा है क्योंकि मतलब जो भौतिक विज्ञान

1157
01:23:23,520 --> 01:23:27,680
के नियम है वो उसके अगेंस्ट चला जा रहा है। तो

1158
01:23:27,680 --> 01:23:32,320
उसका दुख हो रहा है क्या? हां हो रहा है। कहां हो रहा है?

1159
01:23:32,320 --> 01:23:36,480
उसके बिना तो आप आराम से रह रहे हो। कहां रो रहे हो?

1160
01:23:36,480 --> 01:23:40,560
मौत का विचार आते ही आपको वहां से जिस चीज का अस्तित्व

1161
01:23:40,560 --> 01:23:44,720
नहीं है ना उसके ना होने की स्थिति का बोध होते ही आपको दुख

1162
01:23:44,720 --> 01:23:48,880
होगा। यहां पर आप काम चला ले रहे हो। ठीक है? कोई

1163
01:23:48,880 --> 01:23:52,880
दिक्कत नहीं है। मगर मौत का ख्याल आते ही आपको दुख हो

1164
01:23:52,880 --> 01:23:57,920
रहा है। माता-पिता के मरने की घड़ी नजदीक आते ही आपको दुख हो रहा है।

1165
01:23:57,920 --> 01:24:02,080
और आपकी बात बता दूं साइंटिस्ट हर वक्त क्या करने

1166
01:24:02,080 --> 01:24:06,880
की जुगाड़ में है आविष्कार के द्वारा? बताइए।

1167
01:24:06,880 --> 01:24:10,880
कौन सा ऐसा आविष्कार होगा जिसको करने के बाद साइंटिस्ट आराम से बैठ जाएंगे

1168
01:24:10,880 --> 01:24:15,280
कि अब मुझे कोई आविष्कार नहीं करना है। बताइए कैसा आविष्कार

1169
01:24:15,280 --> 01:24:19,360
हो सकता है? ऐसे आविष्कार के बारे में

1170
01:24:19,360 --> 01:24:24,960
तो अभी ज्ञान नहीं है।

1171
01:24:24,960 --> 01:24:29,120
नहीं नहीं अगर ऐसा आप जो पूछ रहे हैं कि मतलब साइंस

1172
01:24:29,120 --> 01:24:33,440
का कोई लिमिट है या नहीं? मतलब इतने देर तक पढ़ेंगे उसके बाद और मतलब खत्म हो जाए।

1173
01:24:33,440 --> 01:24:37,440
ये आप कहने की कोशिश कर रहे हैं ना। मैं ये कह रहा हूं कि वो कौन सा आविष्कार

1174
01:24:37,440 --> 01:24:41,520
होगा जिसके बाद साइंटिस्ट ये कह दे कि

1175
01:24:41,520 --> 01:24:45,680
इसके बाद अब मुझे कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं। कुछ है? कुछ हो

1176
01:24:45,680 --> 01:24:50,720
सकती है? हां है मतलब एक ऐसी

1177
01:24:50,720 --> 01:24:55,120
इस चीज को थ्योरी ऑफ एवरीथिंग कहते हैं जिसमें हम

1178
01:24:55,120 --> 01:24:59,280
ऐसा इक्वेशन निकालेंगे गणित निकालेंगे जिससे ब्रह्मांड में

1179
01:24:59,280 --> 01:25:03,360
होने वाले सारे मतलब जो भी काम है क्रिया कर्म है जो भी प्रोसेससेस

1180
01:25:03,360 --> 01:25:07,520
है उन सबको हम एक ही इक्वेशन में समझ सकते हैं।

1181
01:25:07,520 --> 01:25:11,600
तो अगर कुल मिलाकर के कुल मिलाकर के अगर मेरी भाषा में

1182
01:25:11,600 --> 01:25:13,600
साधारण भाषा में कहें

1183
01:25:13,600 --> 01:25:17,840
तो साइंटिस्ट की खोज जाके खत्म कहां पर होती है?

1184
01:25:17,840 --> 01:25:21,840
सच्चिदानंद पर ही होती है। सर्वशक्तिमान सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1185
01:25:21,840 --> 01:25:26,240
पर। क्यों? मान लीजिए कि वो ऐसा चाहता है। कुल मिलाकर के

1186
01:25:26,240 --> 01:25:30,400
ये सारी खोज जो समाप्त होगी ना जाकर के वो होगी कि वो कुछ

1187
01:25:30,400 --> 01:25:34,560
ऐसा बना ले, ऐसा पा ले, ऐसे हो जाए कि

1188
01:25:34,560 --> 01:25:39,120
वह जो चाहे जिस घड़ी जिस क्षण

1189
01:25:39,120 --> 01:25:42,320
वैसा ही हो जाएगा।

1190
01:25:42,320 --> 01:25:46,320
समझ गए ना? वो जो चाहे अब मेरे पंख आ जाए तो

1191
01:25:46,320 --> 01:25:50,320
मैं पंख से उड़ लूं। अब मैं वो आप कौन सी मैं कौन

1192
01:25:50,320 --> 01:25:55,280
सी मशीन बता रहे थे आप अभी? जिसमें

1193
01:25:55,280 --> 01:25:59,600
परपेचुअल मशीन मतलब जितना एनर्जी हम देंगे उतना ही एनर्जी

1194
01:25:59,600 --> 01:26:04,080
का वो काम करेगा और कोई वेस्टेज नहीं होगा। हां

1195
01:26:04,080 --> 01:26:08,480
तो मेरे अनुसार ऐसी मशीन बन जाए।

1196
01:26:08,480 --> 01:26:12,800
मैं एक सेकंड के अंदर यहां से वहां हो जाऊं। ट्रांसमिट

1197
01:26:12,800 --> 01:26:17,200
हो जाऊं बल्कि उससे भी कम समय में। तो ये सारी

1198
01:26:17,200 --> 01:26:21,360
चीजें अगर कहीं किसी दिन उसने प्राप्त कर ली कि जो मैं चाहूं

1199
01:26:21,360 --> 01:26:25,600
वो हो जाए। जो मैं चाहूं वो हो जाए।

1200
01:26:25,600 --> 01:26:29,120
अगर उसने प्राप्त कर ली तो उसी दिन उसको चैन मिलेगा।

1201
01:26:29,120 --> 01:26:33,200
इसी को मुक्ति कहते हैं। इसी को ईश्वर कहते हैं। तो कुल मिलाकर के

1202
01:26:33,200 --> 01:26:37,200
जो आपकी जो दौड़ है वह उसी ओर तो जा रही है जिस ओर हम जा रहे हैं। बस

1203
01:26:37,200 --> 01:26:41,280
आप में और हम में एक अंतर है कि आप जहां जा रहे हैं आप खुद ही कह रहे हैं वो

1204
01:26:41,280 --> 01:26:45,280
है नहीं और हम जहां जा रहे हैं हम कह रहे हैं वो है।

1205
01:26:45,280 --> 01:26:49,920
मैंने आपसे पूछा कि ऐसी इनबिल्ट इच्छा बताइए

1206
01:26:49,920 --> 01:26:54,000
जिसका अस्तित्व भी ना हो और जिसके बिना वो जी ना पा रहा हो।

1207
01:26:54,000 --> 01:26:58,000
जैसे भोजन इनबिल्ट इच्छा है। भोजन के बिना जीने

1208
01:26:58,000 --> 01:27:00,960
में दिक्कत है उसे

1209
01:27:00,960 --> 01:27:06,560
ईश्वर को इंसान को मनुष्य को सॉरी

1210
01:27:06,560 --> 01:27:10,720
आपने बताया एक मशीन एक मशीन है नहीं है तो भी हम

1211
01:27:10,720 --> 01:27:14,800
लोग आराम से जी रहे हैं। दुखी हो रहे हैं। मगर मैं बता दूंगा

1212
01:27:14,800 --> 01:27:19,360
ये मर रहा है तो आप दुखी होंगे। उस समय

1213
01:27:19,360 --> 01:27:23,440
आप मौत के साथ जीना नहीं चाहते हैं। आप अपने परिजनों के

1214
01:27:23,440 --> 01:27:28,000
लिए कह सकते हैं वो कम मरेंगे आपको दुख नहीं होगा।

1215
01:27:28,000 --> 01:27:33,840
माता-पिता कम मरेंगे तो आपको दुख ना होगा।

1216
01:27:33,840 --> 01:27:37,920
मान मान लीजिए अगर वो एक ऐसी स्थिति में है जिसमें

1217
01:27:37,920 --> 01:27:42,080
वो बीमार है और तड़प-तड़प के जी रहे हैं तो तब मृत्यु मिलना ज्यादा

1218
01:27:42,080 --> 01:27:46,240
आसान होगा। ज्यादा देन लिविंग तड़प तड़प के जीने से ज्यादा अच्छी बात है।

1219
01:27:46,240 --> 01:27:50,400
तो वो जो तड़प रहे हैं आप कौन सी एज होगी जब यह मान लेंगे

1220
01:27:50,400 --> 01:27:55,360
कि इस में उनको दुख हो तो मुझे दुख ना हो बताइए

1221
01:27:55,360 --> 01:28:00,000
नहीं दुख दुख तो जिसकी ऐ में होगा तो हमें भी दुख ही लगेगा

1222
01:28:00,000 --> 01:28:04,080
हम इसका मतलब आप उसके बिना चैन से नहीं रह पा रहे

1223
01:28:04,080 --> 01:28:08,160
हैं नहीं हम

1224
01:28:08,160 --> 01:28:12,480
मगर इसके बिना आप चैन से रह रहे हैं जब आएगी तब आएगी अभी

1225
01:28:12,480 --> 01:28:17,040
मूवी देखने जाना है अभी सैद सपाटा करना है

1226
01:28:17,040 --> 01:28:21,200
तो इसका मतलब ये आपकी इनबिल्ट इच्छा नहीं है। इनबिल्ट इच्छा के मूल

1227
01:28:21,200 --> 01:28:21,700
में ये

1228
01:28:21,600 --> 01:28:25,680
है सब कुछ कर सकने वाला। ठीक है?

1229
01:28:25,680 --> 01:28:31,200
मगर इनबिल्ट इच्छा नहीं है। और सुनिए

1230
01:28:31,200 --> 01:28:35,360
सब कुछ कर सकने वाली इच्छा क्या होती है मालूम है? जिसके बाद

1231
01:28:35,360 --> 01:28:39,360
आपकी कोई इच्छा बाकी ना रह जाए। शेष ना रह जाए। वो इच्छा सच्चिदानंद

1232
01:28:39,360 --> 01:28:43,520
है। जैसे आपने कहा ना कि ये मशीन के बिना

1233
01:28:43,520 --> 01:28:48,080
भी हम रह सकते हैं। मशीन बन भी जाएगी उसके बाद भी आपकी कई इच्छाएं शेष रह जाएंगी।

1234
01:28:48,080 --> 01:28:52,400
मगर सच्चिदानंद वो है वो इच्छा है जिसके बाद आपकी कोई भी इच्छा शेष

1235
01:28:52,400 --> 01:28:56,480
नहीं रह जाती। कंप्लीट उसी को साइंटिफिक लैंग्वेज

1236
01:28:56,480 --> 01:29:00,640
में आप अविष्कार मान लो। उसी को साइंटिफिक लैंग्वेज में हम ईश्वर कहते हैं। मुक्ति

1237
01:29:00,640 --> 01:29:05,200
कहते हैं। मोक्ष कहते हैं। ज्ञान स्वरूप सच्चिदानंद

1238
01:29:05,200 --> 01:29:09,440
स्वरूप परमात्मा

1239
01:29:09,440 --> 01:29:13,840
आई होप कि आप मेरी बात कुछ समझ पा रहे हैं। हां

1240
01:29:13,840 --> 01:29:18,560
समझ पा रहे हैं। हम

1241
01:29:18,560 --> 01:29:23,600
सच का अर्थ क्या है? सच्चिदानंद तीन भाग में डिवाइडेड है ना।

1242
01:29:23,600 --> 01:29:27,840
आपस में एक दूसरे का ही रूपांतरित वर्णन है व्यवहार

1243
01:29:27,840 --> 01:29:31,840
के भेद से। बाकी सब एक ही है। सत का मतलब कि

1244
01:29:31,840 --> 01:29:36,320
सत स्वरूप हो जाना। अपना जो एक्सिस्टेंस है

1245
01:29:36,320 --> 01:29:40,640
अपना जो अस्तित्व है वह सत हो जाना

1246
01:29:40,640 --> 01:29:44,720
मैं कभी मर नहीं सकता नैन चिनती शस्त्राण नैनती पावका ना

1247
01:29:44,720 --> 01:29:48,800
चैन क्ले मारता सत स्वरूप हो

1248
01:29:48,800 --> 01:29:52,960
जाना मुझे कुछ नहीं हो सकता मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा ये सत स्वरूप है

1249
01:29:52,960 --> 01:29:56,960
अब सत स्वरूप में ही सुख भी है मेरा सुख वैसा ही रहे जैसा है मेरे बाल कभी

1250
01:29:56,960 --> 01:30:01,600
झड़े नहीं मेरे कभी झुर्रिया ना आए मेरे माता पिता सदैव सुखी रहे

1251
01:30:01,600 --> 01:30:07,600
ये क्या है अनंत आनंद की भूख

1252
01:30:08,080 --> 01:30:12,240
और कुछ ना जान ना जानने के विषय का दुख भी मुझे ना हो

1253
01:30:12,240 --> 01:30:16,240
कि मैं समथिंग समथिंग नहीं जानता हूं तो उसकी कमी अभाव ना हो मुझे अभाव

1254
01:30:16,240 --> 01:30:20,240
मुक्त हो जाना किसी भी प्रकार का इतना सा भी

1255
01:30:20,240 --> 01:30:24,400
किसी प्रकार का अभाव ना हो उसको कहते हैं पूर्ण और

1256
01:30:24,400 --> 01:30:28,400
उसी को कहते हैं हम परमेश्वर फिर उसके बाद वो दूसरी चीजें है कि वो अवतार कैसे

1257
01:30:28,400 --> 01:30:32,880
लेता है उसका रूप होता है ये है वो है फिर वो उसके अवतार

1258
01:30:32,880 --> 01:30:36,960
लेने के विषय में ना मानने के विषय में उसका सच्चिदानंद स्वरूप होना खंडित हो जाने

1259
01:30:36,960 --> 01:30:41,840
के विषय में फिर विभिन्न थ्योरीज में आपस में टकराव होता है।

1260
01:30:41,840 --> 01:30:45,920
मगर मूल यही है कि सच्चिदानंद के

1261
01:30:45,920 --> 01:30:50,400
बिना आप भी खुश नहीं है। आप भी अंतत गतवा सच्चिदानंद

1262
01:30:50,400 --> 01:30:54,640
पर ही डिपेंड है। आपने कहा ना डिपेंड होना चाहते हैं।

1263
01:30:54,640 --> 01:30:58,720
तो डिपेंड में जब अंतत गतवा डिपेंड होते चले जाए तो अंत में

1264
01:30:58,720 --> 01:31:02,720
जो डिपेंड जिस पर होते हैं जो प्रारंभिक बिंदु है उसी

1265
01:31:02,720 --> 01:31:07,360
का नाम ईश्वर जिस पर सब कुछ आधारित

1266
01:31:07,360 --> 01:31:11,440
और जहां पर जाकर के आपकी सारी चिंताएं भगवत गीता

1267
01:31:11,440 --> 01:31:15,520
में क्या कहा गया जैसे आप साइंस की बात करते हैं मैं इसको

1268
01:31:15,520 --> 01:31:20,000
भगवत गीता से इसका उत्तर दूं वो ज्ञान जिसके

1269
01:31:20,000 --> 01:31:23,920
बाद कुछ और जानना बाकी नहीं रह जाता

1270
01:31:23,920 --> 01:31:28,480
उसका उसका नाम ईश्वर है। उसका नाम मोक्ष है।

1271
01:31:28,480 --> 01:31:32,640
तो आप साइंस के जरिए जाना वही चाह रहे हैं। मगर बस इतनी

1272
01:31:32,640 --> 01:31:37,200
सी बात है। आप जब ये कह देते हैं कि वो है ही नहीं तो आपको पागल कहा जाएगा।

1273
01:31:37,200 --> 01:31:41,280
मैं जा रहा हूं वो नरसिम्हा मूवी आई

1274
01:31:41,280 --> 01:31:45,440
है देखने। पर नरसिम्हा मूवी तो एक्सिस्ट ही नहीं करती। मॉल तो एक्सिस्ट ही नहीं करता। कहां

1275
01:31:45,440 --> 01:31:49,680
जाओगे तुम? नहीं मैं जा रहा हूं। कहां जा रहे हो? कि फलानी मूवी

1276
01:31:49,680 --> 01:31:53,840
देखने। मूवी है नहीं मूवी नहीं है।

1277
01:31:53,840 --> 01:31:57,920
आपको मानना पड़ेगा ना स्वीकार करने का और सुनिए यह जो

1278
01:31:57,920 --> 01:32:02,000
इच्छा हमारे अंदर आ रही है कैसे आती है इसको मैं आपको थोड़ा समझा देता हूं

1279
01:32:02,000 --> 01:32:06,400
कैसे आती है

1280
01:32:06,400 --> 01:32:10,800
आपके अंदर अभी कोई ऐसी चीज है आपके पास जो

1281
01:32:10,800 --> 01:32:15,120
आपको प्राप्त ना हुई हो और उस चीज का अभाव हो आप

1282
01:32:15,120 --> 01:32:19,280
कोई भी फोन मोबाइल टीवी कैमरा कार

1283
01:32:19,280 --> 01:32:23,440
बिल्डिंग कुछ भी हां हां है मतलब

1284
01:32:23,440 --> 01:32:27,280
ऐसी तो बहुत सारी इच्छाएं है

1285
01:32:27,280 --> 01:32:33,120
ऐसी तो बहुत सारी इच्छाएं होती है जो प्राप्त नहीं एक इच्छा का नाम बताइए

1286
01:32:33,120 --> 01:32:37,120
अ एक एग्जाम में मैं चाहता था अच्छे अंक आ

1287
01:32:37,120 --> 01:32:41,760
जाए लेकिन उतने अच्छे अंक नहीं आए

1288
01:32:41,760 --> 01:32:46,000
रिजल्ट हां नहीं मैं पूछ रहा हूं जैसे कोई भौतिक

1289
01:32:46,000 --> 01:32:50,080
कोई वस्तु हो कोई मोबाइल हो जो आप लेना चाहते हो कोई कार हो आप लेना

1290
01:32:50,080 --> 01:32:55,180
चाहते हो इस तरह कोई वस्तु है

1291
01:32:55,180 --> 01:32:59,520
[संगीत] हां मतलब मकान

1292
01:32:59,520 --> 01:33:03,600
अच्छा लैपटॉप आए लैपटॉप आए कौन सी

1293
01:33:03,600 --> 01:33:06,480
कंपनी का

1294
01:33:06,480 --> 01:33:10,800
कोई मतलब इससे अच्छी कंपनी मुझे इतना तो पता नहीं लेकिन इससे अच्छा आप देखिए आपके

1295
01:33:10,800 --> 01:33:14,960
अंदर लैपटॉप की इच्छा कब आई

1296
01:33:14,960 --> 01:33:19,280
जब मुझे यह पता चला कि मतलब मैंने अपने कार्य देखे कि क्या-क्या

1297
01:33:19,280 --> 01:33:23,520
करना चाहिए उसके अनुसार देखा क्योंकि आपको पता

1298
01:33:23,520 --> 01:33:27,280
है कि इस दुनिया में लैपटॉप है।

1299
01:33:27,280 --> 01:33:31,280
पहली पहली बात तो यही है ना किसी चीज को प्राप्त करने की इच्छा

1300
01:33:31,280 --> 01:33:35,520
कब आ रही है आपके अंदर? जब वो एक्सिस्ट करती है। जब

1301
01:33:35,520 --> 01:33:39,520
वो एक्सिस्ट करती है। आपके अंदर मार्क्स को प्राप्त करने की इच्छा क्यों आई? जब

1302
01:33:39,520 --> 01:33:43,600
मार्क्स का प्राप्त होना एकिस्ट करता है। उसी तरीके

1303
01:33:43,600 --> 01:33:48,080
से हमारे अंदर इनबिल्ट ये सच्चिदानंद को प्राप्त करने की इच्छा क्यों आई?

1304
01:33:48,080 --> 01:33:52,160
क्योंकि सच्चिदानंद एक्सिस्ट करता है। अब एक बात और मैं आपको बता दूं।

1305
01:33:52,160 --> 01:33:56,240
इस चीज में मैं एक बात कहना चाहूंगा इस चीज को लेके

1306
01:33:56,240 --> 01:33:56,880
कि आप कह

1307
01:33:56,880 --> 01:34:01,200
रहे हैं कि हम जो पाना चाहते हैं वो ऑलरेडी एक्सिस्ट करती है। इसलिए

1308
01:34:01,200 --> 01:34:05,280
हम मतलब उसको पाना चाहते हैं। लैपटॉप एक्सिस्ट करता है इसलिए मैं उसको पाना चाहता

1309
01:34:05,280 --> 01:34:09,280
था। लेकिन ऐसे तो बहुत सारे उदाहरण है जो लोग चाहते

1310
01:34:09,280 --> 01:34:13,360
थे तब एक्सिस्ट नहीं करता था। उन्होंने खुद उस चीज का निर्माण किया जिससे

1311
01:34:13,360 --> 01:34:17,360
वो चीज आई। फॉर एग्जांपल हम चाहते थे कि वो चीज आई

1312
01:34:17,360 --> 01:34:21,520
वो चीज आई मगर वो जो सिद्धांत था वो तो एक्सिस्ट करता

1313
01:34:21,520 --> 01:34:26,240
था ना कि ऐसा करने से ऐसा बन जाएगा वो

1314
01:34:26,240 --> 01:34:29,760
तो एक्सिस्ट करता था ना

1315
01:34:29,760 --> 01:34:33,920
वो भौतिक रूप से वो चीज जो आई है सामने खड़े

1316
01:34:33,920 --> 01:34:38,080
होकर के वो किसी ने बनाई किसी देश काल परिस्थिति में मगर

1317
01:34:38,080 --> 01:34:42,160
वो सिद्धांत जो था किस सिद्धांत से वह बनेगा वो तो

1318
01:34:42,160 --> 01:34:46,640
एक्सिस्ट करता था ना यानी कि उसका अस्तित्व था। सैद्धांतिक

1319
01:34:46,640 --> 01:34:50,720
धरातल पर उसका अस्तित्व था। उस समय भी जिस समय लोग

1320
01:34:50,720 --> 01:34:54,960
ये मानते थे कि ऐसा नहीं है। हां। सैद्धांतिक

1321
01:34:54,960 --> 01:34:59,360
धरातल पर उसका अस्तित्व था। अभी मैं आपको एक दूसरी बात बता रहा हूं

1322
01:34:59,360 --> 01:35:02,640
कि

1323
01:35:02,640 --> 01:35:06,640
अब पहली नंबर बात हमने क्लियर कर ली कि भाई कोई चीज है दुनिया

1324
01:35:06,640 --> 01:35:12,640
में। इसीलिए हमारे अंदर चाह आ रही है। अब दूसरी बात आती है

1325
01:35:12,960 --> 01:35:17,360
अ हां कि जैसे लैपटॉप

1326
01:35:17,360 --> 01:35:20,800
इस दुनिया में बन गया है।

1327
01:35:20,800 --> 01:35:24,880
ठीक है? हमारे अंदर तभी वो चाह आ रही है।

1328
01:35:24,880 --> 01:35:28,960
मगर हमारे अंदर ईश्वर है। ये

1329
01:35:28,960 --> 01:35:34,000
बिना बताए भी ईश्वर की चाह है। सच्चिदानंद के रूप में।

1330
01:35:34,000 --> 01:35:38,240
तो यह जब हमने अखबार में नहीं पढ़ा जब

1331
01:35:38,240 --> 01:35:42,480
तक हमारे माता-पिता ने भी नहीं बताया हमको कि कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1332
01:35:42,480 --> 01:35:46,640
है या जब हमने ये नहीं बताया तब भी ये चाह क्यों

1333
01:35:46,640 --> 01:35:51,040
एक्सिस्ट कर रही है इस पर अगर ध्यान देंगे तो हमारा जो संबंध

1334
01:35:51,040 --> 01:35:57,040
है और उसे प्राप्त करने का जो आकर्षण है वो समझ में आ जाएगा।

1335
01:35:58,720 --> 01:36:02,960
भाई लैपटॉप कभी ना कभी किसी ने बनाया और बनाने

1336
01:36:02,960 --> 01:36:07,120
के बाद जब आपको इंफॉर्मेशन मिली तो आज आप लैपटॉप सीधे-सीधे मांग सकते

1337
01:36:07,120 --> 01:36:11,360
हो। कंप्यूटर मांग सकते हो। मुझे आईफोन का मोबाइल

1338
01:36:11,360 --> 01:36:15,360
चाहिए मांग सकते हो। मगर ये सच्चिदानंद को हम जन्म से क्यों

1339
01:36:15,360 --> 01:36:19,520
मांग रहे हैं? बच्चे को बच्चा जो नवजात होता

1340
01:36:19,520 --> 01:36:23,520
है तो कई बार माताओं को उसके पैर को बांधना पड़ता है। किसी

1341
01:36:23,520 --> 01:36:27,680
फीते से यह कूद ना जाए। यानी कि बच्चे के अंदर

1342
01:36:27,680 --> 01:36:31,920
और उस समय भी बच्चा अपने आप खींचता है। रस्सी से

1343
01:36:31,920 --> 01:36:36,000
तोड़ना चाहता है। यानी कि उस समय भी मुक्ति की

1344
01:36:36,000 --> 01:36:40,480
चाह होती है। प्रत्येक मनुष्य में मुक्ति की चाह।

1345
01:36:40,480 --> 01:36:44,880
उस समय भी बच्चे की ओर अगर आप पलक झपकाओ हाथ घुमाओ

1346
01:36:44,880 --> 01:36:49,360
तो वो भी बचने का प्रयास करता है। यह चाह कहां से आई?

1347
01:36:49,360 --> 01:36:53,680
जब आपको पता ही नहीं है, अबोध है उस समय मुक्ति

1348
01:36:53,680 --> 01:36:58,000
की चाह कहां से आ गई आपके अंदर? तो पता चलता

1349
01:36:58,000 --> 01:37:02,480
है क्योंकि हम उस सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर के ही अंश हैं।

1350
01:37:02,480 --> 01:37:06,560
इसलिए वो सारे हमारे अंदर गुण है।

1351
01:37:06,560 --> 01:37:11,120
और उनहीं गुणों के कारण हम उसकी ओर आकर्षित हैं। इनबिल्ट

1352
01:37:11,120 --> 01:37:14,320
क्योंकि तत्वतः हम भी सच्चिदानंद

1353
01:37:14,320 --> 01:37:18,720
स्वरूप ही है। इसलिए हम सच्चिदानंद की ओर अंश हमेशा अपनी

1354
01:37:18,720 --> 01:37:23,200
अंशी की ओर आकर्षित होता है वह वाली थ्योरी तो इसलिए

1355
01:37:23,200 --> 01:37:27,360
हमारे अंदर जन्म से ही यह चाह व्याप्त होती है कि हमें उसको प्राप्त

1356
01:37:27,360 --> 01:37:31,920
करना है और हम प्राप्त करनी कोशिश करते हैं। जी बताइए।

1357
01:37:31,920 --> 01:37:36,080
इसमें भी मैं एक बात कहना चाहूंगा ऐसी बहुत सारी चीजें हैं

1358
01:37:36,080 --> 01:37:40,160
जो हमें पता है कि वो कभी एक्सिस्ट कर नहीं पाएंगे लेकिन फिर भी हम

1359
01:37:40,160 --> 01:37:44,320
चाहते हैं कि वो एक्सिस्ट करे तो तब आप क्या करेंगे? तब भी वो चाह एक्सिस्ट करती है। मैंने

1360
01:37:44,320 --> 01:37:48,400
कहा ना उनके उस चाह के मूल में पूर्णता है। किसी

1361
01:37:48,400 --> 01:37:52,400
भी चीज का अभाव ना होना। आप पंख वाला हाथी सोच रहे हैं। मैं

1362
01:37:52,400 --> 01:37:56,560
पंख लग जाए उड़ जाऊं वो पॉसिबल नहीं है। उसमें भी पूर्ण हो जाने की चाह

1363
01:37:56,560 --> 01:38:00,800
है। पूर्णता पूर्ण ना शब्द आए ना मेरी डिक्शनरी

1364
01:38:00,800 --> 01:38:04,880
में। पूर्ण सबके मुंह में पूर्णता की चाह है। पूर्ण

1365
01:38:04,880 --> 01:38:09,760
पूर्ण हो जाऊं। जो चाहूं जैसा चाहूं वैसा बन जाए।

1366
01:38:09,760 --> 01:38:14,480
जो साइंटिस्ट की मैंने अभी आपको बात बताई उसमें भी तो यही था।

1367
01:38:14,480 --> 01:38:18,480
उस चाह के मूल में भी पूर्णता है। सभी पूर्ण

1368
01:38:18,480 --> 01:38:22,960
हो जाना चाहते हैं। सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना चाहते हैं। अबाध्य

1369
01:38:22,960 --> 01:38:27,120
बन जाना चाहते हैं। यहीं से ईश्वर का एकिस्ट सिद्ध होता है।

1370
01:38:27,120 --> 01:38:29,600
फिर वो बाद की बात है कि अब हमें

1371
01:38:29,600 --> 01:38:33,920
क्या करना है? ईश्वर को प्राप्त कैसे करना है? तो कर्मेंद्रियों

1372
01:38:33,920 --> 01:38:38,080
से क्या करना है? ज्ञानेंद्रियों से क्या सोचना है? यह सब फिर आगे की बात है।

1373
01:38:38,080 --> 01:38:42,320
तो कर्मेंद्रियों से क्या हो गया कि माता और क्योंकि

1374
01:38:42,320 --> 01:38:46,400
आपको अपने शरीर को ऐसा ऐसा रखना है तो माता और बहन से विवाह नहीं करना

1375
01:38:46,400 --> 01:38:50,480
है। अमुक अमुक स्त्रियों से विवाह नहीं करना है। अमुक अमुक स्त्रियां ही आपके

1376
01:38:50,480 --> 01:38:54,480
लिए ग्रह हैं। ये सारी फिर नियमावली बनती है कि आप

1377
01:38:54,480 --> 01:38:58,720
अपने शरीर को ऐसा कैसे रख पाए कि आपकी

1378
01:38:58,720 --> 01:39:02,880
जो कॉन्शियसनेस है उस स्तर तक जा पाए जहां पर वो मुक्ति

1379
01:39:02,880 --> 01:39:08,240
से मिल मिलान कर पाए। मुक्ति के साथ एक ही भूत हो पाए।

1380
01:39:08,240 --> 01:39:13,200
और यदि आप अपने कर्मेंद्र्रियों से यह हाथों का धोना,

1381
01:39:13,200 --> 01:39:17,520
गुप्तांग को धोना, मल मूत्र के त्याग के बाद अपने शरीर

1382
01:39:17,520 --> 01:39:21,680
को स्वच्छ रखना जिससे कि स्वच्छता की अनुभूति आपके अंदर

1383
01:39:21,680 --> 01:39:26,000
आए। ये सब चीजें भी धर्म से आती है। सिखाई

1384
01:39:26,000 --> 01:39:30,000
जाती है। सीखो। अब ये पवित्रता क्या है? शुद्धता

1385
01:39:30,000 --> 01:39:34,080
और पवित्रता। शुद्धता पवित्रता वही है कि

1386
01:39:34,080 --> 01:39:38,400
हम अपने शरीर को सर्वप्रथम साफ सुथरा रखें जिससे कि हमारे चित्त

1387
01:39:38,400 --> 01:39:42,720
की शुद्धि हो पाए वो पाने में सहायक हो। कई लोग कहते हैं अरे माला जपने

1388
01:39:42,720 --> 01:39:44,720
से क्या होता है? माला जपने से मिल

1389
01:39:44,720 --> 01:39:48,800
जाएगा। भाई क्या किसी ने केवल हाथ धो लिया तो

1390
01:39:48,800 --> 01:39:53,680
उसको हम स्वच्छ मान ले। नहाए ना भले ही। मगर

1391
01:39:53,680 --> 01:39:58,000
क्योंकि नहाने से ही पूरी तरह सफाई होती है। इसलिए क्या हाथ धोना

1392
01:39:58,000 --> 01:40:02,240
बंद कर दें? तो यह सब एक दूसरे के घटक होते हैं।

1393
01:40:02,240 --> 01:40:06,320
तो इसी तरीके से अब कोई कहे कि जो धोती नहीं पहनेगा वह क्या

1394
01:40:06,320 --> 01:40:10,320
भक्त नहीं है? ऐसे ऐसे कुतर्क किए जाते हैं ना। धोती

1395
01:40:10,320 --> 01:40:14,560
पहने जो तिलक नहीं लगाएगा वो क्या भक्त नहीं है? अगर मान लिया भगवान है भी तो चुटिया

1396
01:40:14,560 --> 01:40:18,880
की क्या जरूरत है? शिख की क्या जरूरत है? ये सब एक दूसरे के पूरक घटक

1397
01:40:18,880 --> 01:40:22,960
होते हैं। इनमें से एक भी चीज को आप हटाओगे तो आपकी जो यात्रा

1398
01:40:22,960 --> 01:40:26,960
है वो कटना ही होगी। और इन चीजों का आप सत्य

1399
01:40:26,960 --> 01:40:31,440
सहिष्णुता की क्रमिक अभिव्यक्ति के अनुसार जब आप प्रतिपादन करते जाएंगे, आलमन

1400
01:40:31,440 --> 01:40:35,920
लेते जाएंगे तो आप अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते जाएंगे। सहायक है एक दूसरे के लिए।

1401
01:40:35,920 --> 01:40:39,920
जैसे शरीर की शुद्धता में हाथ धोना भी सहायक है। मुंह का कुल्ला

1402
01:40:39,920 --> 01:40:44,080
करना भी सहायक है। मुंह धोना भी सहायक है और नहाना भी सहायक

1403
01:40:44,080 --> 01:40:48,160
है। है ना? उसी प्रकार से

1404
01:40:48,160 --> 01:40:51,680
ये सब फिर नियम होते हैं। जी बताइए।

1405
01:40:51,680 --> 01:40:55,760
यह तो फिर तो मेरा प्रश्न वही हो जाता है कि मान लीजिए

1406
01:40:55,760 --> 01:40:59,920
ऐसी कोई चीज है जो आपके धर्म ग्रंथ में लिखी है जो असल में सहायक

1407
01:40:59,920 --> 01:41:03,920
नहीं है तब आप क्या करेंगे ये आप पहले सिद्ध

1408
01:41:03,920 --> 01:41:09,280
करना होगा कि सहायक नहीं है वो आप सिद्ध करिए ना

1409
01:41:09,280 --> 01:41:13,280
मैं एक्चुअल में मनुस्पति का एग्जांपल देना चाहता था इसी इसी कारण

1410
01:41:13,280 --> 01:41:17,360
के लिए ये एग्जांपल ले आप किसी और दिन आइए कि हम उस डिबेट

1411
01:41:17,360 --> 01:41:21,600
का नाम रखेंगे मनुस्मति पर सवाल ठीक है। अभी

1412
01:41:21,600 --> 01:41:25,600
हमने धर्म अभी हमने धर्म और ब्रह्म की बात की है।

1413
01:41:25,600 --> 01:41:30,480
अब आपको मनुस्मति में बात करनी है तो एक दिन मनुस्मति के लिए आ जाइए।

1414
01:41:30,480 --> 01:41:34,720
बाकी मैंने आपको जो है

1415
01:41:34,720 --> 01:41:38,800
धर्म से और ब्रह्म से समझाया कि ईश्वर है ये कैसे

1416
01:41:38,800 --> 01:41:43,760
सिद्ध होता है और धर्म क्यों है? उसका स्त्रोत क्या है?

1417
01:41:43,760 --> 01:41:48,320
साइंस ये कहती है क्या? झूठ मत बोलो।

1418
01:41:48,320 --> 01:41:52,320
नहीं ऐसा तो नहीं तो फिर झूठ बोलने में कोई दिक्कत

1419
01:41:52,320 --> 01:41:55,710
नहीं फिर

1420
01:41:55,710 --> 01:42:01,710
[संगीत]

1421
01:42:02,000 --> 01:42:06,000
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेंज अब मनुस्मति को लेके आइए अगली बार फिर

1422
01:42:06,000 --> 01:42:10,160
चर्चा करेंगे आपसे ठीक है अच्छा लगा चर्चा करके और चीजें

1423
01:42:10,160 --> 01:42:14,800
लेके आइए और थोड़े प्रश्न थे मेरे

1424
01:42:14,800 --> 01:42:18,800
आप आप गुरु परंपरा में मानते मानते हैं ना हम मानते हैं

1425
01:42:18,800 --> 01:42:22,880
बहुत अच्छे से मानते हैं तो

1426
01:42:22,880 --> 01:42:27,440
आप मतलब मैं आप अपने जो टॉपिक्स है गुरु परंपरा मनुस्मृति

1427
01:42:27,440 --> 01:42:31,440
ये सब हमें लिख के भेज दीजिए एक एक दिन करके चर्चा कर लेंगे पौने दो घंटे

1428
01:42:31,440 --> 01:42:35,840
की चर्चा हो गई है आप किसी और पाइए

1429
01:42:35,840 --> 01:42:40,160
मैं एक्चुअल में मैंने आपको एक वीडियो का लिंक दिया था ना जो

1430
01:42:40,160 --> 01:42:44,560
मैं नहीं देख पाता बहुत सारे WhatsApp आते हैं मैं नहीं देख पाता

1431
01:42:44,560 --> 01:42:48,640
बहुत विशेष जब कोई बात होती तभी देख पाता हूं। मैं मैं ये पूछना

1432
01:42:48,640 --> 01:42:52,880
चाहता कि जो भी मतलब पुराण प्रश्न को अगली बार पूछिए

1433
01:42:52,880 --> 01:42:57,200
अगली चर्चा में। आज धर्म और ब्रह्म की हमने सिद्धि की है।

1434
01:42:57,200 --> 01:43:01,280
आप जो है मनुस्मति पर क्वेश्चन करिए और आप जो है इस

1435
01:43:01,280 --> 01:43:04,080
पर क्वेश्चन करिए गुरु परंपरा।

1436
01:43:04,080 --> 01:43:06,880
ठीक है? अगले

1437
01:43:06,880 --> 01:43:12,880
चलिए जय श्री राम।

1438
01:43:15,040 --> 01:43:19,520
आशा करते हैं आप सभी को चर्चा अच्छी लगी होगी। क्या

1439
01:43:19,520 --> 01:43:23,520
होता है जब बहुत सारी चीजें हो जाती है तो कई ऐसी चीजें होती है जो हमारे पास है

1440
01:43:23,520 --> 01:43:27,520
पर याद भी नहीं रहती है स्मरण नहीं रहता है तो और फिर

1441
01:43:27,520 --> 01:43:33,520
टॉपिक चेंज होते हैं बार-बार तो [संगीत]

1442
01:43:35,120 --> 01:43:39,680
चीजें हैं। बाकी मैंने आपको बताया था आचार्यों

1443
01:43:39,680 --> 01:43:43,680
से निवेदन है कि वह आपस में सौहार्दपूर्ण चर्चा कर

1444
01:43:43,680 --> 01:43:48,080
ले एक और निर्णय दे समाज को क्योंकि जो ये अलग-अलग

1445
01:43:48,080 --> 01:43:52,160
विपरीतार्थक जो वक्तव्य आ रहे हैं उसकी वजह से समाज में जो विप्लव की स्थितियां

1446
01:43:52,160 --> 01:43:56,160
बनी उसमें सभी मान्य जो आचार्य गण है वह आपस

1447
01:43:56,160 --> 01:44:00,400
में बात कर ले और तभी सार्वजनिक हो इस प्रकार

1448
01:44:00,400 --> 01:44:06,400
की बातें क्योंकि एक और

1449
01:44:06,640 --> 01:44:11,040
जहां एक और हमारे पूज्य जो राघवाचार्य जी विद्या भास्कर जी आ रहे हैं। दूसरी

1450
01:44:11,040 --> 01:44:16,080
ओर भी ज्योतिष पीठ से जुड़े राम मंदिर के लिए उन्होंने

1451
01:44:16,080 --> 01:44:20,320
अग्रणी होकर के काफी युद्ध किया है पीएन मिश्र

1452
01:44:20,320 --> 01:44:24,960
जी। तो ऐसी स्थिति में इस तरह का टकराव जो

1453
01:44:24,960 --> 01:44:28,960
विधर्मी है या धर्मभासी हैं, सनातनाभाष हैं

1454
01:44:28,960 --> 01:44:34,960
उनको ना लाभान्वित करें और

1455
01:44:37,920 --> 01:44:41,920
हमने जबाला वाला अपना पक्ष आचार्य प्रशांत के समय दे दिया था और

1456
01:44:41,920 --> 01:44:46,080
इसमें भी सादय ब्राह्मणों वाले में हमारा ऐसा कोई भाव नहीं

1457
01:44:46,080 --> 01:44:50,160
है। जो भी शास्त्र और गुरु गोविंद ग्रंथ के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत होगा वही

1458
01:44:50,160 --> 01:44:54,880
हमारा सिद्धांत है। और

1459
01:44:54,880 --> 01:44:59,120
अ जो कमेंट के माध्यम से अपना

1460
01:44:59,120 --> 01:45:03,200
उत्तर चाहते हैं जो भागवतानंद के पक्षधर उनको

1461
01:45:03,200 --> 01:45:07,200
भागवतानंद को कम से कम सुन लेना चाहिए जो ये कह चुका है अपने कई वक्तव्यों

1462
01:45:07,200 --> 01:45:11,280
में कि हम एक एक व्यक्ति को कमेंट के माध्यम से उत्तर देना

1463
01:45:11,280 --> 01:45:15,840
हमारे लिए संभव नहीं और भागवत

1464
01:45:15,840 --> 01:45:19,920
की जो एक बात है कि वो असहज स्थिति में डालता है और इसी आधार पर

1465
01:45:19,920 --> 01:45:24,000
वो जो है वाहवाही कमाता आता है जैसे आर्य समाज कौन

1466
01:45:24,000 --> 01:45:28,160
अरे ये तो खुद को भगवान मानते हैं। अरे ये तो शूद्रों को मंदिर

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में नहीं घुसने देना चाहते। ऐसी ऐसे ही प्रश्नों को ला के आचार्यों

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के सामने जो मंच पर बैठे हैं जिनको दुनिया सुनती है उनके सामने

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ऐसे ही प्रश्न रखेगा जिससे जिसके वहां पर

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उत्तर देने में धर्म की कहीं ना कहीं से क्षति हो सकती हो। या तो शास्त्र

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विरुद्ध बोल दे या फिर ऐसी बात बोल दे जो अभी बड़ा जो

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जन सामान्य का वर्ग है वो विरोधी हो जाए।

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तो इसलिए वहां पर एक गुरुदेव ने बात कही थी कि एक ही दिन में घी

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नहीं पिलाया जाता है। तो ऐसे प्रश्नों को जो विवाद का विषय होते हैं

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उन्हीं विषयों को रखता है जिससे कि आचार्यों को बोलने में असहजता

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हो और उस असहजता का फायदा उठाता है।

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अगर मौन रह गए तो फायदा उठाया या कहीं पर कुछ वक्तव्य दिया तो उसका

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फायदा उठाया और

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ठीक है। आशा करते हैं आपको अच्छी लगी हो चर्चा। सभी को जय श्री राम।

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[संगीत]

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तो
