1
00:00:02,080 --> 00:00:07,280
तो जय श्री राम सभी को आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

2
00:00:07,280 --> 00:00:13,280
और इसका फ्लैप खोल

3
00:00:14,320 --> 00:00:15,440
अ

4
00:00:15,440 --> 00:00:19,600
मैंने आपको जैसा कि बताया था कि हम लोग एक

5
00:00:19,600 --> 00:00:24,240
बड़ा आंदोलन प्रारंभ करने वाले हैं। उसका उद्घोष

6
00:00:24,240 --> 00:00:28,240
हो गया है। जयघोष हो चुका है और मेरे पास जगह जगह से

7
00:00:28,240 --> 00:00:32,720
लोग संपर्क कर रहे हैं। बहुत जल्द दिल्ली में,

8
00:00:32,720 --> 00:00:36,800
पटना में, वाराणसी में, नागपुर में भी मतलब

9
00:00:36,800 --> 00:00:41,040
जगह-जगह से लोग संपर्क कर रहे हैं और रामपाल का पुतला जलाया

10
00:00:41,040 --> 00:00:45,760
जलाने की तैयारी है जगह-जगह पर और साथ ही साथ

11
00:00:45,760 --> 00:00:50,160
जो रामपाल का जो भी सेवक है जो उनके आसपास

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,320
यदि रहता है तो अब आली रे आली क्या कहते हैं वो

13
00:00:54,320 --> 00:00:58,960
क्या कहता है उसमें आली रे आली अ तजी

14
00:00:58,960 --> 00:01:03,280
जी बारी आली तो वह स्थिति आने वाली है। तो अब यह

15
00:01:03,280 --> 00:01:07,280
लोग जो प्रचारक बने घूम रहे हैं इधर-उधर रामपाल के

16
00:01:07,280 --> 00:01:11,280
वो अपनी चीजों को देख लें जो भी उनके साथ होने वाला है।

17
00:01:11,280 --> 00:01:15,520
जगह-जगह पर ये अभियान शुरू होने वाला है और

18
00:01:15,520 --> 00:01:19,760
वो जो समोसे वाला है उसने दो दिन से समोसा लगाया नहीं है। ठेल

19
00:01:19,760 --> 00:01:24,400
और हम अभी एक दो बार वहां पर प्रदर्शन और कर देंगे। जैसे ही समय मिलेगा

20
00:01:24,400 --> 00:01:29,040
और लोगों को वहां बताएंगे। बल्कि वहां जो जब वह समोसे बेच रहा होगा

21
00:01:29,040 --> 00:01:30,720
तो जिस समय उसके समोसे

22
00:01:30,720 --> 00:01:35,200
लोग खा रहे होंगे उसी समय प्लेट लेकर जाने वाले हैं बांटने के लिए। ये लो

23
00:01:35,200 --> 00:01:39,840
जिसके तुम समोसे खा रहे हो वो कौन है उसको जानो। यह सब चीजें होने वाली हैं।

24
00:01:39,840 --> 00:01:43,920
तो अच्छा हमारे इस प्रदर्शन के विरोध में

25
00:01:43,920 --> 00:01:48,720
कुछ हास्यात्मक वीडियोस भी मुझे दिख प्राप्त हुए।

26
00:01:48,720 --> 00:01:52,720
जिसमें जो सबसे प्रमुख रूप से जो वीडियो मुझे मिला है वह मिला है इसका

27
00:01:52,720 --> 00:01:56,720
अभिषेक का और उसमें राघव दास दोनों जो है खड़े हैं।

28
00:01:56,720 --> 00:02:01,280
वही उनका पुराना तरीका किताबों के पीछे खड़े हो जाओ किताबें दिखाओ

29
00:02:01,280 --> 00:02:05,520
और किताबों का कुछ ऐसा अट्रम शटरम

30
00:02:05,520 --> 00:02:09,600
कुछ बनाओ कि मामला जो है अपनी प्रजा को यह बता दो कि देखो

31
00:02:09,600 --> 00:02:13,600
कुछ हुआ तो हमने बोला बाकी उससे कुछ तंत

32
00:02:13,600 --> 00:02:18,640
पानी निकलता है कि नहीं निकलता वो कोई मतलब नहीं है। जैसे कि

33
00:02:18,640 --> 00:02:22,800
हमने कार्यवाही की यहां पर बोला भी लोगों को परास्त भी किया

34
00:02:22,800 --> 00:02:26,800
निरुत्तर भी किया ढेर सारी अनगिनत बार इसके बाद

35
00:02:26,800 --> 00:02:30,960
धरातल पर उतरे धरातल पर उतर के कोर्ट केस किया

36
00:02:30,960 --> 00:02:35,520
रामपाल जिस जेल में बंद है उसके जेलर को यहां बुलवा लिया जेलर को

37
00:02:35,520 --> 00:02:39,600
है ना और तुम्हारा नाम दान सेंटर बंद हो गया वहां

38
00:02:39,600 --> 00:02:43,840
पे लोगों को कहना पड़ा कि यहां पे किताबें

39
00:02:43,840 --> 00:02:46,000
नहीं है यह सब ऐसा

40
00:02:46,000 --> 00:02:50,080
नहीं है कि सिर्फ बस हम औपचारिकता के लिए कर रहे हैं।

41
00:02:50,080 --> 00:02:54,240
हम कुछ ऐसा कर रहे हैं कि हमें प्राप्त करना है अभीष्ट फल केवल औपचारिकता

42
00:02:54,240 --> 00:02:58,960
के लिए नहीं। मगर वो दोनों जो टट्टू हैं किराए के

43
00:02:58,960 --> 00:03:02,960
वो बेचारे दोनों खड़े हो गए। वही अपना पुराना रटा रटाया कि यहां यह लिखा

44
00:03:02,960 --> 00:03:07,440
है वहां वो लिखा है। उसका अपने मन मन के अनुसार अर्थ जो कि अभी मैं बात करने वाला हूं।

45
00:03:07,440 --> 00:03:11,520
तो सबसे पहले राघव दास ने बात की कि यह कुछ नहीं है।

46
00:03:11,520 --> 00:03:16,160
यह भड़काता है और इसकी जो इसके साथ में जो लोग थे

47
00:03:16,160 --> 00:03:20,160
वो इतने कम संख्या वाले थे बोल

48
00:03:20,160 --> 00:03:24,640
रहा था कि बहुत कम हालांकि मैंने पूरा वीडियो नहीं देखा थोड़ा राघव दास की पूरी बात संभवत

49
00:03:24,640 --> 00:03:28,960
मैंने सुन ली और वो फैक्टफुल अभिषेक वो दोबारा तुरंत शुरू हो गया। वही किताबें

50
00:03:28,960 --> 00:03:33,040
खोलना ग्रंथ खोलना उनका अपने अनुसार मैनपुलेशन करना। अभेद का

51
00:03:33,040 --> 00:03:37,040
मतलब बता रहा है कि वह पति पत्नी का रिश्ता है। अभेद शब्द का अर्थ हो

52
00:03:37,040 --> 00:03:41,360
गया पतिप और पतिप में भी बलात्कार भी फिट हो गया। है ना?

53
00:03:41,360 --> 00:03:46,720
यह सब वो कर रहा है। तो अ

54
00:03:46,720 --> 00:03:50,800
वो क्या कह रहा है राघव दास? सबसे पहले तो वो ये बता रहा है कि तुम्हारे साथ

55
00:03:50,800 --> 00:03:55,200
इतनी भीड़ है जितनी तो हमारी गली में इकट्ठा हो जाती है। अबे

56
00:03:55,200 --> 00:03:59,280
मूर्ख व्यक्ति वो भीड़ तेरे ठिलिया कुलचे वाले के लिए

57
00:03:59,280 --> 00:04:01,040
थी। रामपाल के

58
00:04:01,040 --> 00:04:05,280
लिए नहीं। अब तू अपने रामपाल को वास्तविकता में वही घोंंचू समझता है

59
00:04:05,280 --> 00:04:09,360
जो हम लोग समझते हैं तो बात अलग है जो इतना टच्चा है क्योंकि हम लोग उसको

60
00:04:09,360 --> 00:04:13,680
ज्ञान के मामले में तो टच्चा समझते ही है भौतिक रूप से भैया उसके पास संख्या बल है

61
00:04:13,680 --> 00:04:17,760
ऐसा थोड़ी ना है मगर तू उसको अगर ऐसा टच्चा समझता है

62
00:04:17,760 --> 00:04:21,840
ज्ञान के मामले में तो टच्चा है ही मगर वो तू इस मामले में भी उसे टच्चा

63
00:04:21,840 --> 00:04:26,160
समझता है कि वो जो जनता एकत्रित हुई थी वो रामपाल के लिए हुई थी ना

64
00:04:26,160 --> 00:04:30,240
रामपाल को नहीं अब रामपालियों को पकड़ा जाएगा वो तुम्हारे वो

65
00:04:30,240 --> 00:04:34,240
ठेले वाले मित्र के लिए हुई थी एकत्रित उसके लिए तो पर्याप्त है या

66
00:04:34,240 --> 00:04:38,240
तुम ठेले वाले को रामपाल के समान समझते हो तो बात अलग है। यह तुम तय

67
00:04:38,240 --> 00:04:42,320
कर लो कि तुम्हारा वो जो ठेले वाला व्यक्ति है वो रामपाल के बराबर

68
00:04:42,320 --> 00:04:45,840
दमखम वाला है या उनमें अंतर है तुम तय कर लो और

69
00:04:45,840 --> 00:04:49,840
अगर और अगर यह तय हो जाए कि नहीं दोनों बराबर

70
00:04:49,840 --> 00:04:54,000
हैं तो आकर के उसकी भी खीर ले लो। उसके यहां तेल के समोसे

71
00:04:54,000 --> 00:04:58,160
हैं। वह तेल जो भी तुम्हारी वह प्रक्रिया है प्रसिद्ध न्यूज़ समाचारों

72
00:04:58,160 --> 00:05:02,400
वाली समझ रहे हो ना नहाने आने का क्या मामला है वह तुम देख लेना तो फिर उसका भी चालू

73
00:05:02,400 --> 00:05:06,480
कर दो प्रसाद ग्रहण करना अगर रामपाल और वो दोनों एक है तो वो जो संख्या

74
00:05:06,480 --> 00:05:10,560
बल है वो तुम्हारे उस ठेले वाले के लिए था तो तुम ऐसा एक्सपेक्ट

75
00:05:10,560 --> 00:05:14,560
कर रहे हो कि वहां पर संख्या बल रामपाल वाला हो ठेले वाले के लिए यानी

76
00:05:14,560 --> 00:05:19,120
कि रामपाल और ठेले वाला तुम्हारे लिए एक है तो बोलो फिर तुम्हारा

77
00:05:19,120 --> 00:05:23,200
जेल कट्टू ठेले वाला रामपाल यही बोलोगे ना

78
00:05:23,200 --> 00:05:27,360
क्योंकि तुम्हें वही भीड़ चाहिए ठेले वाले के लिए भी जो रामपाल के लिए होनी चाहिए।

79
00:05:27,360 --> 00:05:28,800
कोई अंतर तो

80
00:05:28,800 --> 00:05:32,960
है नहीं। तो यह तो रहा संख्या बल का एक जवाब। अब दूसरा संख्या

81
00:05:32,960 --> 00:05:36,960
बल का जवाब ले लो। यह पहला जवाब भी तुम्हारे ही तुम्हारा ही

82
00:05:36,960 --> 00:05:40,960
जूता तुम्हारे सर पर मारा। अब दूसरा जूता भी तुम्हारा ही है। भाई वो दिखा दीजिए

83
00:05:40,960 --> 00:05:44,480
जरा। एक स्क्रीनशॉट मैंने शेयर किया है। ऐसे

84
00:05:44,480 --> 00:05:48,640
अनेक ऐसे अनेक कमेंट मेरे उसमें

85
00:05:48,640 --> 00:05:53,040
आ रहे हैं। तेरे ही गुरु भाइयों के। तेरे ही रामपाल के फॉलोअर्स

86
00:05:53,040 --> 00:05:57,040
के। तेरे ही तत्व ज्ञानियों के तत्व ज्ञानी क्यों सब तत्व ज्ञानी 15

87
00:05:57,040 --> 00:06:01,040
करोड़ तत्व ज्ञानी है ना पढ़ी है ना अपनी गरिमा गीता की तू हमारी किताबें

88
00:06:01,040 --> 00:06:05,040
पढ़ता है अपनी तो पढ़ता नहीं होगा उसमें क्या रखा है रामपाल के नाम से

89
00:06:05,040 --> 00:06:09,600
छपने वाली किताबों में तुम लोगों के लिए क्या रखा है तुम्हें मालूम है उसमें गोबर है

90
00:06:09,600 --> 00:06:13,760
तुम्हें मालूम है उसमें तुम्हारा रामपाल की खीर है मल मूत्र

91
00:06:13,760 --> 00:06:17,920
इत्यादि ये सब है उसमें है ना है ना तो

92
00:06:17,920 --> 00:06:22,080
देखो भाई तो ये देखो कमेंट दिखाइए इसे ऊपर

93
00:06:22,080 --> 00:06:26,560
करिए ऊपर वाला चित्र दिखाइए। ये क्या लिखा है?

94
00:06:26,560 --> 00:06:30,800
यह रामपाल का जो हमने विरोध प्रदर्शन

95
00:06:30,800 --> 00:06:34,800
किया है उस प्रदर्शन के विरोध में ये कमेंट आ

96
00:06:34,800 --> 00:06:38,800
रहा है तेरे गुरु भाई का रामपाल के तत्व ज्ञानी शिष्य का। तत्व ज्ञानी

97
00:06:38,800 --> 00:06:43,120
शिष्य का मतलब समझा? तत्वज्ञानी वो जो

98
00:06:43,120 --> 00:06:47,280
सच्चा भक्त होता है वही तत्व ज्ञानी है। अब तेरे ये गुरु

99
00:06:47,280 --> 00:06:51,440
भाई भगत तो है ना। पढ़ ले अपनी गरिमा गीता की। सनातन धर्म

100
00:06:51,440 --> 00:06:55,680
की किताबें पढ़ने से पहले राघव दास अपनी तत्व

101
00:06:55,680 --> 00:06:59,920
ज्ञानी की किताबें पढ़ ले जेलकट्टू की शर्म आ जाएगी और

102
00:06:59,920 --> 00:07:04,160
कंफ्यूज हो जाएगा पागल हो जाएगा आत्महत्या करने की सोचेगा अगर पढ़ ली तो

103
00:07:04,160 --> 00:07:07,720
ये क्या पढ़ लिया मैंने

104
00:07:07,720 --> 00:07:11,760
[हंसी] कॉमेडी शो है कॉमेडी शो तो पहले उसको पढ़

105
00:07:11,760 --> 00:07:15,840
ले उसमें उसने लिखा है कि भगत वही है जो तत्व

106
00:07:15,840 --> 00:07:20,000
ज्ञानी है तो ये तेरे तत्व ज्ञानी अब तू भगत तो मानता है ना अपने गुरु

107
00:07:20,000 --> 00:07:24,000
भाइयों को ऐसे अनेक कमेंट आ रहे हैं तेरे भगत

108
00:07:24,000 --> 00:07:28,240
जो कि तत्वज्ञानी है तो तत्वज्ञानी है तो वह क्या लिख रहा है सत्य

109
00:07:28,240 --> 00:07:32,320
अकेला खड़ा होता है और मूर्खों की फौज होती है ले तू

110
00:07:32,320 --> 00:07:32,960
मुझसे कह रहा

111
00:07:32,960 --> 00:07:36,960
है ना कि मेरे पास मेरी फौज नहीं है कम लोग थे तो

112
00:07:36,960 --> 00:07:41,360
फौज कहां होती है मूर्खों के पास ये भी तेरा जूता ही तेरे सर पे इसको

113
00:07:41,360 --> 00:07:45,360
कहते हैं मार ठीक है अकाट्य

114
00:07:45,360 --> 00:07:50,080
बातें होती है यहां यहां वो फरलोबाजी नहीं है बस खड़े हो गए तमाशा कर

115
00:07:50,080 --> 00:07:54,320
और अपने गवार अनपढ़ फॉलोअर्स को संतुष्टि दे दी।

116
00:07:54,320 --> 00:07:58,320
देखो भाई कुछ हुआ तो हमने यह किया। यह फरलोबाजी नहीं है यहां पे। बिल्कुल

117
00:07:58,320 --> 00:08:02,320
कांटे की बात है। और जिस दिन सामना होगा एक खीखी खीखी

118
00:08:02,320 --> 00:08:06,720
खुल जाएगी। बस हिजड़ों की तरह ये सब करो

119
00:08:06,720 --> 00:08:10,720
कि क्या कहते हैं? फोटो बिगाड़ के डाल दो। ये

120
00:08:10,720 --> 00:08:15,520
सब फोटो बिगाड़ के और सबसे बढ़िया चीज है। वीडियो बनाओ।

121
00:08:15,520 --> 00:08:19,680
ये सब करो। इसमें तुम करते रहो, लगे रहो, मगन रहो। मैं जड़ से उखाड़ूंगा,

122
00:08:19,680 --> 00:08:23,760
जमीन पर उतरूंगा। रामपाल के समर्थकों का

123
00:08:23,760 --> 00:08:26,880
जीना दुश्वार।

124
00:08:26,880 --> 00:08:30,880
दुर्गा माता को गाली देने वाले के समर्थकों

125
00:08:30,880 --> 00:08:35,840
को चैन से नहीं रहने दूंगा। मैं अपने पास की बात कर रहा हूं। ठीक है?

126
00:08:35,840 --> 00:08:40,080
तो एक तो ये बात रही तेरा जूता तेरे ही सर। पहला वाला भी तेरा जूता

127
00:08:40,080 --> 00:08:44,320
तेरे ही सर और दूसरा वाला तेरे तत्व ज्ञानी भाई का तेरा जूता तेरे सर। तू

128
00:08:44,320 --> 00:08:48,640
तू संख्या बल ढूंढ रहा है। तू फौज ढूंढ रहा है तेरा। तत्व ज्ञानी भाई कह रहा है

129
00:08:48,640 --> 00:08:52,880
कि फौज तो मूर्खों की होती है। शेर अकेले खड़ा होता है। अब सुन

130
00:08:52,880 --> 00:08:57,280
इतने से बात नहीं बनेगी। हमारे जो सनातन भाई बहन है सनातनी

131
00:08:57,280 --> 00:09:01,440
हिंदुत्ववादी मनुवादी उनके लिए भी सिद्धांत दे दूं जिससे वो

132
00:09:01,440 --> 00:09:05,920
इस बात का उत्तर दे पाए। जुगनू और उल्लू यह तेरे भेजे में नहीं घुसेगा

133
00:09:05,920 --> 00:09:10,080
और तेरे तत्वज्ञानी भक्तों के लिए नहीं। यह हमारे दर्शकों के लिए हमारे जो समर्थक

134
00:09:10,080 --> 00:09:14,320
हैं उनके लिए सिद्धांत जुगनू और उल्लू

135
00:09:14,320 --> 00:09:18,640
सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटिमाते

136
00:09:18,640 --> 00:09:22,800
हुए दिए की ओर आकर्षित होते हैं। है ना? मगर

137
00:09:22,800 --> 00:09:27,200
सूर्य की ओर आकर्षित ना होने में सूर्य के सामर्थ्य

138
00:09:27,200 --> 00:09:31,200
का दोष नहीं है। बल्कि जुगनू और उल्लू के असामर्थ्य का दोष

139
00:09:31,200 --> 00:09:35,360
है। समझ में आया कुछ? हिंदी पढ़ लियो थोड़ा सा जाकर के।

140
00:09:35,360 --> 00:09:39,360
ठीक है? तो जुगनू और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते।

141
00:09:39,360 --> 00:09:42,160
तो इसका क्या मतलब हुआ कि जुगनू और उल्लू

142
00:09:42,160 --> 00:09:46,560
सत्य का निर्णय करने वाले नहीं होते। प्रकाश के विषय में जुगनू

143
00:09:46,560 --> 00:09:50,640
और उल्लू प्रमाण नहीं होते हैं। समझ में आया? और समझ

144
00:09:50,640 --> 00:09:54,800
ले दुनिया में कितने लोग हैं

145
00:09:54,800 --> 00:09:58,800
तेरे अनुसार बोल रहा हूं। तेरी फिलॉसफी के अनुसार मूर्ख व्यक्ति

146
00:09:58,800 --> 00:10:04,800
मैं तो तेरे ही जूता तेरे सर पर मारूंगा। तो मुझे अपनी चीजें लाने की जरूरत ही नहीं है।

147
00:10:04,880 --> 00:10:08,880
ज्यादा लोग काल के काल को फॉलो कर रहे हैं कि ज्यादा लोग तेरे तत्व ज्ञानी

148
00:10:08,880 --> 00:10:12,880
को फॉलो कर रहे हैं? जो तत्व ज्ञानी को फॉलो नहीं कर रहा है वो काल को फॉलो कर रहा है। तो

149
00:10:12,880 --> 00:10:15,280
तेरा तत्व ज्ञानी बेकार हो गया। हो

150
00:10:15,280 --> 00:10:19,920
गया। तत्व ज्ञानी तत्व ज्ञानी का क्या?

151
00:10:19,920 --> 00:10:24,000
क्या क्या निकलता है? चलिए। तो दुनिया भर में

152
00:10:24,000 --> 00:10:28,000
उन लोगों की संख्या ज्यादा है जो रामपाल को फॉलो नहीं कर रहे हैं या उन

153
00:10:28,000 --> 00:10:32,160
लोगों की संख्या ज्यादा है जो रामपाल को फॉलो कर रहे हैं। जाहिर सी

154
00:10:32,160 --> 00:10:36,240
बात है भाई अगर सब समग्र रूप से देखोगे तो हिंदू ही ऐसे मिल जाएंगे

155
00:10:36,240 --> 00:10:40,320
जो रामपाल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। ठीक है? और अगर उसमें

156
00:10:40,320 --> 00:10:44,480
इन सबको जोड़ दो नास्तिक हैं, क्रिश्चियन है, मुस्लिम

157
00:10:44,480 --> 00:10:48,480
है इन सब की संख्या अगर ऐड कर दो तो तुम्हारा ये

158
00:10:48,480 --> 00:10:51,840
जो जेल कट्टू है कहां दिखाई देगा? तो

159
00:10:51,840 --> 00:10:55,920
हो गया बेकार। उड़ा खिल ली अपने तत्व ज्ञानी की। तेरा जूता तेरे

160
00:10:55,920 --> 00:11:00,080
सर मारूंगा मैं। इसलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में।

161
00:11:00,080 --> 00:11:04,080
कोई नहीं है टक्कर में। ऐसे ही नहीं कहते। ठीक है? अब दूसरी बात इसने

162
00:11:04,080 --> 00:11:09,520
यह कही है राघव दास ने कि भाई अ

163
00:11:09,520 --> 00:11:13,680
मेरे पास इसका राघव दास का फोन नंबर है और

164
00:11:13,680 --> 00:11:17,680
इसने मुझे कई बार बुलाया है। मैं आया नहीं हूं। इसने एक

165
00:11:17,680 --> 00:11:22,320
बार मुझे फोन किया था और इसने फोन किया था। यह बात मुझे पता चली थी।

166
00:11:22,320 --> 00:11:26,320
फोन के शायद महीने भर बाद जब वो कार्यक्रम हुआ था ना

167
00:11:26,320 --> 00:11:30,320
इनका तत्व ज्ञानियों की किताबें जलाई गई थी। ध्यान है ना? चौराहे

168
00:11:30,320 --> 00:11:34,800
पे उसी चौराहे पर पुतला जला है। तो जब वह कार्यक्रम हुआ था इनका

169
00:11:34,800 --> 00:11:38,960
जहां से इनकी बिगिनिंग शुरू हुई थी इनके एंड की इनका नाच शुरू

170
00:11:38,960 --> 00:11:43,120
हुआ था इनको नचाना मदारी की तरह तो तब जब किताबें वगैरह जलाई गई

171
00:11:43,120 --> 00:11:47,120
उनको पैरों से कुचल कुचल के जलाया था बाय द वे वो जो थूथुन होती है ना

172
00:11:47,120 --> 00:11:51,280
जहां पे थूथुन छपी है ना तुम्हारे दुर्गा माता को गाली देने वाला जो बाबा

173
00:11:51,280 --> 00:11:55,360
है तुम्हारा उसकी थूथुन जहां छपी है वहां पे मल मूत्र लगा

174
00:11:55,360 --> 00:11:59,680
हुआ जो चप्पल होता है ना उसको रगड़गड़ के कुचला गया था उन फोटो

175
00:11:59,680 --> 00:12:03,760
को और उसको कुच कुचल कुचल के रगड़ रगड़ के ऐसे

176
00:12:03,760 --> 00:12:07,120
करके वो किताबें जलाई गई थी। शर्म की बात है भाई। तुम

177
00:12:07,120 --> 00:12:11,200
लोगों के अनुसार तो बड़ा सम्मान है उसका। हमारे लिए सम्मान नहीं है भैया दुर्गा माता

178
00:12:11,200 --> 00:12:15,520
को गाली देने वाले बाबा तो उसकी यह दुर्गति हुई थी। बहुत बुरी दुर्गति

179
00:12:15,520 --> 00:12:19,520
हुई थी। तो वो जब किताबें

180
00:12:19,520 --> 00:12:23,520
जब जलाई गई थी तो इसने वो जो कार्यक्रम हुआ था जब

181
00:12:23,520 --> 00:12:27,520
इसके थूथून को रगड़ा गया था। वो जो किताबें यह

182
00:12:27,520 --> 00:12:31,600
यह जो सीन था तो जब यह रगड़ा गया

183
00:12:31,600 --> 00:12:35,760
था इसको तब इसके मेरे ख्याल से इसके कुछ दो चार दिन

184
00:12:35,760 --> 00:12:39,760
के अंतराल में ही इसका फोन आया होगा। मैं इसे नहीं जानता था। इसका फोन

185
00:12:39,760 --> 00:12:44,640
मेरे पास आया और इसने मुझसे यह पूछा कि भाई आपके

186
00:12:44,640 --> 00:12:49,200
तुम्हारे क्या-क्या या आपके कहा होगा क्या-क्या प्रश्न है।

187
00:12:49,200 --> 00:12:53,360
तो मैंने मुझे नहीं पता कि कौन कॉल कर रहा है। ठीक है?

188
00:12:53,360 --> 00:12:57,440
तो मैंने और दिन भर में 50 लोग आते हैं। 50 लोग फोन

189
00:12:57,440 --> 00:12:59,680
कर रहे थे उस समय दिन भर में। तो मैंने

190
00:12:59,680 --> 00:13:03,680
कहा भाई मेरे प्रश्न जो भी हैं वीडियोस में डले हुए हैं उनमें देख लो।

191
00:13:03,680 --> 00:13:07,760
अच्छा मुझे अभी तक भी नहीं मालूम है कि ये कोई ऑथेंटिक व्यक्ति है रामपाल की

192
00:13:07,760 --> 00:13:11,840
ओर से। रामपाल ने इसका नाम नहीं लिया अभी तक। ठीक है? तो मुझे यह भी नहीं पता है कि

193
00:13:11,840 --> 00:13:14,960
सतलोक आश्रम से ऑथेंटिक कोई व्यक्ति है। ठीक?

194
00:13:14,960 --> 00:13:18,960
तो अब इस अच्छा इसने उस समय यह भी नहीं कहा कि मैं ऑथेंटिक हूं। यही हो कि मैं

195
00:13:18,960 --> 00:13:23,040
ऑथेंटिक हूं कह दे। तो एक नॉर्मल व्यक्ति जो दिन भर में चिलवा भगत

196
00:13:23,040 --> 00:13:27,120
फोन किया करते हैं। वैसा ही एक चिलवा भगत ये था। आज भी है। मगर

197
00:13:27,120 --> 00:13:31,280
उनकी ओर से यह महत्वपूर्ण है। यह इसने नहीं बताया और सीधे इसने कहा कि कितने

198
00:13:31,280 --> 00:13:35,360
कौन-कौन से प्रश्न तो मैंने कहा भाई मैंने जो भी मेरे प्रश्न है वह वहां डले

199
00:13:35,360 --> 00:13:39,440
हुए हैं। वह आप देख लो। और उसके बाद जो है

200
00:13:39,440 --> 00:13:43,600
चर्चा करने बैठ जाओ। तो बाद में यह एमपी खबर एमपी खबर

201
00:13:43,600 --> 00:13:47,600
फास्ट वाले पर कोई मैंने इसकी वह देखी थी चर्चा जिसमें ये कह रहा था कि मैंने उससे

202
00:13:47,600 --> 00:13:51,600
पूछा कौन-कौन से प्रश्न है तो उसने प्रश्न ही नहीं बताए। अरे भाई पहले तू बता तो

203
00:13:51,600 --> 00:13:55,760
सही कि तू किस उद्देश्य से आया है और तू सतलोक आ तेरे जो चिलवा भगत

204
00:13:55,760 --> 00:13:59,760
लोग हैं ये देखा है सूखे चेहरे वाले छुआारे जैसे चेहरे के कितने लोग ये दिन भर

205
00:13:59,760 --> 00:14:04,240
फोन करते हैं। एक एक को मैं प्रश्न बताता घूमूं। तो

206
00:14:04,240 --> 00:14:08,240
यह तो यह रही बात। अब मैंने इसका कभी भी वह नंबर सेव नहीं किया

207
00:14:08,240 --> 00:14:12,480
था राघव का। ठीक है? इसने अलग से अच्छा

208
00:14:12,480 --> 00:14:18,000
इस इसने मुझे नाम भी नहीं बताया। शायद बताया हो तो शायद मैंने ध्यान नहीं दिया हो। राघव

209
00:14:18,000 --> 00:14:22,080
अब क्या है कि इसने मेरा कभी फॉर्म भरा होगा। यह वाला चर्चा चर्चा

210
00:14:22,080 --> 00:14:26,160
में आने वाला। राघव दास की बात बता रहा हूं। इसने कभी फॉर्म भरा होगा। मुझे नहीं मालूम

211
00:14:26,160 --> 00:14:30,000
यह वही व्यक्ति है जो मेरे पास आया तो मैंने उसको प्रश्न नहीं बताया। फिर

212
00:14:30,000 --> 00:14:34,080
वह बाद में एमपी कवर फास्ट पे जाके बोल रहा है कि मुझे प्रश्न नहीं बताया।

213
00:14:34,080 --> 00:14:38,400
उसने अपने प्रश्न नहीं बताए कौन-कौन सी चीजों पर आपत्ति है। हालांकि

214
00:14:38,400 --> 00:14:42,400
हालांकि अगर यह जो 14 प्रश्न लिए फिरते हैं इसके

215
00:14:42,400 --> 00:14:46,480
अलावा ये दूसरे प्रश्न करना बंद कर दें जो 14 प्रश्न

216
00:14:46,480 --> 00:14:50,640
लेकर के घूमते हैं 14 है कि 15 हैं या फिर ये इन्होंने लिस्ट दी आज तक इतने

217
00:14:50,640 --> 00:14:54,640
ही प्रश्न ये सब तो अलग बातें हो गई। मगर ना तो

218
00:14:54,640 --> 00:14:58,800
इसकी पहचान मुझे वहां नोट हुई और जब यह वहां पर आया था एमपी खबर

219
00:14:58,800 --> 00:15:02,960
फास्ट वाले पर तो जब मैंने इसका देखा कि यह व्यक्ति थोड़ा सा मेरे ख्याल

220
00:15:02,960 --> 00:15:07,040
से थोड़ा इंटेलेक्चुअल लग रहा है। अन्य जो छुआारे आते हैं चिलवा

221
00:15:07,040 --> 00:15:11,040
भगत उनकी अपेक्षाकृत यह थोड़ा इंटेलेक्चुअल व्यक्ति दिख रहा

222
00:15:11,040 --> 00:15:15,120
है। तो मैंने जब इसका वो देखा लाइव में उसका वो कट कि एक

223
00:15:15,120 --> 00:15:19,120
व्यक्ति ये कह रहा है कि मैंने शिवश नारायण द्विवेदी को फोन मिलाया उससे पूछा कि

224
00:15:19,120 --> 00:15:23,520
आपको रामपाल के चीजों में कौन-कौन सी चीजों में आपत्ति है

225
00:15:23,520 --> 00:15:27,520
तो उसने बताने से मना कर दिया। जब इसने ये कहा तो मैंने एमपी खबर

226
00:15:27,520 --> 00:15:31,760
फास्ट वाले को फोन मिलाया। हालांकि उससे मेरा वो हो चुका था मुंह वो

227
00:15:31,760 --> 00:15:35,760
सब कि एमपी खबर फास्ट वाले ने कहा कि ग्वालियर आ जाओ। उसके बाद उसने मुकर गया

228
00:15:35,760 --> 00:15:39,840
अपनी बात से कहे। यह सब हो चुका है। उसके बाद बाद भी जब मैंने देखा कि

229
00:15:39,840 --> 00:15:43,840
एक व्यक्ति ऐसा है जिससे बात हो सकती है तो मैंने फोन मिलाया एमपी कवर

230
00:15:43,840 --> 00:15:47,920
फास्ट वाले को और मैंने उससे कहा कि आप तुम्हारी लाइव में एक

231
00:15:47,920 --> 00:15:49,280
व्यक्ति आया था जो

232
00:15:49,280 --> 00:15:53,280
ऐसा ऐसा कह रहा था तुम मुझे उसका नंबर दो। मैं उसको प्रश्न बताऊंगा।

233
00:15:53,280 --> 00:15:57,280
यानी कि अभी तक भी मेरी जानकारी में नहीं है कि राघव दास का नंबर मेरे पास

234
00:15:57,280 --> 00:16:01,280
है। क्योंकि वह जो फोन आया था वह आया गया। 50 लोगों का आता है। मैं सबका नंबर

235
00:16:01,280 --> 00:16:03,200
सेव नहीं करता हूं।

236
00:16:03,200 --> 00:16:06,960
अब राघव दास ने एक

237
00:16:06,960 --> 00:16:10,960
फॉर्म भी भरा हुआ है। अब वह कब भरा है वह मुझे नहीं पता है। मगर

238
00:16:10,960 --> 00:16:15,040
राघव दास नाम से फॉर्म मेरे पास भरा हुआ है। मुझे यह नहीं मालूम था कि यही इसी का ही

239
00:16:15,040 --> 00:16:19,040
है। और वो राघव दास नाम से नहीं है वो फॉर्म। वो फॉर्म भरा हुआ है राघव

240
00:16:19,040 --> 00:16:20,560
मिश्रा के नाम से।

241
00:16:20,560 --> 00:16:24,560
ठीक है? अब क्या होता है कि आज इस व्यक्ति ने

242
00:16:24,560 --> 00:16:28,560
ये कहा। मतलब यह सब पूरी कहानी डिटेल में क्यों बता रहा हूं? क्योंकि तुम

243
00:16:28,560 --> 00:16:32,560
मेरे लिए एक नगण्य व्यक्ति हो। राघव दास। तुम्हारी

244
00:16:32,560 --> 00:16:36,720
गिनती नहीं है मेरी दृष्टि में। एक नगण्य व्यक्ति तुम मेरी

245
00:16:36,720 --> 00:16:41,040
को जान तुम मुझे जानते हो मैं तुम्हें नहीं जानता हूं समझ रहे हो

246
00:16:41,040 --> 00:16:45,360
फिर भी मैंने जब यह देखा कि तुमने मुझसे बात करने की प्रयास किया और मैंने तुम्हें

247
00:16:45,360 --> 00:16:49,440
यथोचित उत्तर नहीं दिया तुमको उस भीड़ में शामिल समझा जो छुआरों

248
00:16:49,440 --> 00:16:53,600
की भीड़ थी उसमें शामिल समझा तो मुझे लगा कि नहीं इससे बात करनी चाहिए व्यक्ति

249
00:16:53,600 --> 00:16:57,680
इंटेलेक्चुअल है तो मैंने एमपी खबर फास्ट वाले से पूछ

250
00:16:57,680 --> 00:17:01,840
लेना उससे मैंने फोन करके पूछा था तुम्हारा नंबर वो रिकॉर्डिंग

251
00:17:01,840 --> 00:17:05,680
भी मेरे पास मिल जाएगी ढूंढूंगा ड्राइव में पड़ी होगी अब यह

252
00:17:05,680 --> 00:17:09,680
सब बातें होने के बाद में मुझे आज तक नहीं पता था कि राघव दास का

253
00:17:09,680 --> 00:17:14,160
नंबर मेरे पास है या नहीं। मगर मेरा तो नंबर सार्वजनिक है ना राघव

254
00:17:14,160 --> 00:17:18,400
दास और तूने कितनी बार बुलाया है मुझे लाइव में बताओ कितना

255
00:17:18,400 --> 00:17:21,840
झूठ बोलेगा अपने गलों को यार शर्म नहीं आती क्या

256
00:17:21,840 --> 00:17:25,920
इसने आज बोला मैंने कई बार उसे लाइव में बुलाया भाई तूने उस दिन भी लाइव में नहीं बुलाया

257
00:17:25,920 --> 00:17:30,080
था तूने कहा था प्रश्न कितने हैं प्रश्न मैंने बताया नहीं फोन कट हो गया

258
00:17:30,080 --> 00:17:34,240
यही हुआ था ना उस दिन भी तूने लाइव में नहीं बुलाया था कि

259
00:17:34,240 --> 00:17:38,800
मैं तुझे हमारे ऑफिशियल चैनल उस समय तो तू कहता तो मैं आ भी जाता

260
00:17:38,800 --> 00:17:42,960
ये जो तेरा ऐसे न्यूज़ व्यूज वाले पे अगर तू बुलाता तो मैं आ जाता।

261
00:17:42,960 --> 00:17:47,040
मगर उस समय भी तूने यह नहीं बताया कि तू कहां पर बुला रहा है। लाइव में बुला रहा है कि

262
00:17:47,040 --> 00:17:51,680
नहीं बुला रहा है। तो यह सारी कहानी अब ये

263
00:17:51,680 --> 00:17:55,680
आज ये बोला कल के वीडियो में शायद कल बोलता है

264
00:17:55,680 --> 00:17:59,680
कि भाई वो हमने उसे कई बार बुलाया। उसके

265
00:17:59,680 --> 00:18:03,760
पास मेरा नंबर है। अरे जो पुरुषत्व है

266
00:18:03,760 --> 00:18:08,160
ना तो अपना नंबर सार्वजनिक कर पहले कर पहली बात तो कि

267
00:18:08,160 --> 00:18:12,160
मुझे जो है तेरा नंबर ढूंढना ना पड़े। तुझसे किसने

268
00:18:12,160 --> 00:18:16,240
कह दिया कि मैंने तेरा नंबर सेव कर रखा है। एमपी खबर फास्ट वाले से

269
00:18:16,240 --> 00:18:20,240
नंबर मांगा था तेरा। पूछ लेना उससे। वो जो ऊंचा सुनता है

270
00:18:20,240 --> 00:18:24,320
ऐ करके बोलता है ना ऐसे। उससे पूछ

271
00:18:24,320 --> 00:18:28,800
लेना अपने बहरे मित्र से कि मैंने नंबर मांगा था कि नहीं?

272
00:18:28,800 --> 00:18:34,400
खैर उसने मुझे नंबर नहीं दिया। बीच में

273
00:18:34,400 --> 00:18:38,720
मेरे मन में यह बात हमेशा अटकी रही कि राघव दास का फोन आया था और मुझसे

274
00:18:38,720 --> 00:18:43,040
बात नहीं कर पाए। ठीक है? अब बात आती है

275
00:18:43,040 --> 00:18:45,360
कि

276
00:18:45,360 --> 00:18:49,360
आज इसने जब यह बोला कि इसके पास मेरा नंबर है। हम लोग कई बार लाइव पे बुला

277
00:18:49,360 --> 00:18:53,600
चुके हैं। तो आज मैंने अपने में देखा क्या मेरे पास राघव

278
00:18:53,600 --> 00:18:57,760
नाम से कोई नंबर सेव है? तो मेरे पास राघव

279
00:18:57,760 --> 00:19:02,000
नाम से नंबर मुझे मिल गया सेव। अब वह देखिए

280
00:19:02,000 --> 00:19:06,080
आप किस नाम से मेरे पास सेव है। हालांकि

281
00:19:06,080 --> 00:19:07,200
यह सब चीजें

282
00:19:07,200 --> 00:19:13,200
प्रामाणिक नहीं होती है। किस नाम से है। यह देखिए

283
00:19:15,920 --> 00:19:20,000
इसको कैसे दिखाऊं कि यह जो है इसका नंबर ना दिखाई दे राघव

284
00:19:20,000 --> 00:19:22,320
दास का।

285
00:19:22,320 --> 00:19:26,400
अब यही तो बात है। पुरुषत्व होता तुम्हारे अंदर तो तुम अपना नंबर

286
00:19:26,400 --> 00:19:30,640
खुद सार्वजनिक करते तो मैं लोगों को दिखा पाता कि यह राघव दास का नंबर है।

287
00:19:30,640 --> 00:19:34,560
यह मेरे पास ऐसे उंगली रख के दिखा देता हूं।

288
00:19:34,560 --> 00:19:39,520
ये देखिए

289
00:19:39,520 --> 00:19:45,520
इसको जूम जूम करोगे क्या मेरा वाला?

290
00:19:52,960 --> 00:19:55,120
ये

291
00:19:55,120 --> 00:19:59,360
अब आपको नहीं दिखाई दे रहा तो बात अलग है। मगर इसमें लिखा हुआ

292
00:19:59,360 --> 00:20:04,000
है एफ आई डी एंड टेम राघव मिश्रा।

293
00:20:04,000 --> 00:20:08,080
मिश्रा मैं क्यों लिख रहा हूं? क्योंकि इसने इस दोगले

294
00:20:08,080 --> 00:20:12,240
व्यक्ति ने जब फॉर्म भरा होगा मेरा जो

295
00:20:12,240 --> 00:20:16,320
चर्चा करने वाले फॉर्म होते हैं ना तो उसमें अपने आप को राघव दास नहीं बताएंगे। वहां पर अपना

296
00:20:16,320 --> 00:20:20,880
भोकाल दिखाएंगे। मिश्रा हैं। हां और वैसे

297
00:20:20,880 --> 00:20:25,120
मिश्रा कौन है? ब्राह्मण कौन है? जो सतयुग के राक्षस हैं। वो

298
00:20:25,120 --> 00:20:26,560
कलयुग में ब्राह्मण है। वो

299
00:20:26,560 --> 00:20:30,560
बात अलग है कि वहां पर यह भी लिखा है कि कलयुग में जो है सारी स्त्रियां

300
00:20:30,560 --> 00:20:34,880
जो है चरित्रहीन हो जाएंगी। तो मुझे लगता है कि यह अपने घर की स्त्रियों

301
00:20:34,880 --> 00:20:39,040
को बबिता के समान ही समझते होंगे। जो बबिता इत्यादि रामपाल के साथ जो मामला

302
00:20:39,040 --> 00:20:43,360
चला था वैसा ही समझते होंगे। क्योंकि शास्त्र तो यह कह रहा है कि ऐसा

303
00:20:43,360 --> 00:20:47,520
हो जाएगा। ऐसा एक दिन आएगा इस तरह का वातावरण होने

304
00:20:47,520 --> 00:20:51,840
लगेगा। उसकी रोकथाम करिए। मगर यह

305
00:20:51,840 --> 00:20:55,920
लोग कह रहे हैं नहीं नहीं कलयुग में सभी ब्राह्मण जो है राक्षस हैं। इस

306
00:20:55,920 --> 00:21:00,000
तरह की बातें तो राक्षस ही ब्राह्मण बनके राक्षस ही ब्राह्मण

307
00:21:00,000 --> 00:21:04,160
होंगे। यह नहीं लिखा है। राक्षस ब्राह्मण बनकर जन्म लेंगे। यह लिखा है।

308
00:21:04,160 --> 00:21:08,320
केवल सारे ब्राह्मण राक्षस होंगे। यह नहीं लिखा है। मगर अगर ऐसी बात

309
00:21:08,320 --> 00:21:12,720
है तो यह भी लिखा है भविष्य की घटनाओं के लिए कि कलयुग में स्त्रियां चरित्रहीन

310
00:21:12,720 --> 00:21:16,720
हो जाएंगी। पराए पुरुषों से बातें किया करेंगी। पराए पुरुषों से ज्यादा चिपकने की

311
00:21:16,720 --> 00:21:20,960
कोशिश किया करेंगी। ये सब भी भविष्यवाणियां है। तो ऐसी स्त्रियां

312
00:21:20,960 --> 00:21:25,200
वर्तमान में है ना और पुरुष भी हो जाएंगे। ऐसे दिन भर वो काम

313
00:21:25,200 --> 00:21:29,200
काम में ये किया करेंगे वो किया करेंगे। हालांकि रामपाल को देखें तो

314
00:21:29,200 --> 00:21:33,280
ये सारी चीजें लागू हो जाती हैं। रामपाल और बबता इत्यादि नाम सुनते

315
00:21:33,280 --> 00:21:37,440
हैं तो ये सारी चीजें लगता है कि वो सब चीजें चरितार्थ हो रही हैं

316
00:21:37,440 --> 00:21:41,920
इन व्यक्तित्वों पर। परंतु

317
00:21:41,920 --> 00:21:46,160
परंतु वहां पर यह तो नहीं माना जा सकता। हम तो ये नहीं मानते कि भाई प्रत्येक स्त्री

318
00:21:46,160 --> 00:21:50,160
पुरुष हो जाएगा। मगर तुम्हारे अनुसार जिस तरह से तुमने सभी ब्राह्मणों को राक्षस

319
00:21:50,160 --> 00:21:54,480
मान लिया तो तुम्हारे अनुसार तुम्हें सभी स्त्रियों को वैसे ही मानना पड़ेगा। चरित्रहीन

320
00:21:54,480 --> 00:21:58,560
सभी पुरुषों को वैसा मानना पड़ेगा। तो तुम स्वयं भी वही हो गए। दिन भर देखने

321
00:21:58,560 --> 00:22:02,640
वाले ताक में रहने वाले कहां मिले जो है हमारे को अभीष्ट फल की

322
00:22:02,640 --> 00:22:07,280
प्राप्ति हो और वही तुम्हारे घर के लोग भी वही हुए। तुम्हारे

323
00:22:07,280 --> 00:22:11,520
साथ में रहने वाली स्त्रियों पर भी तुमने प्रश्न चिन्ह उठा दिया और तुमने

324
00:22:11,520 --> 00:22:15,520
रामपाल पर भी प्रश्न चिन्ह उठा दिया। सब पर उठा दिया।

325
00:22:15,520 --> 00:22:20,000
ठीक। मगर फॉर्म भरते समय राघव दास नहीं

326
00:22:20,000 --> 00:22:22,560
राघव मिश्रा। हर

327
00:22:22,560 --> 00:22:26,720
बात को अपनी को [हंसी] काटते हो। हंसी आती है तुम्हारे तरस

328
00:22:26,720 --> 00:22:27,440
आता है तुम लोगों

329
00:22:27,440 --> 00:22:31,600
पर तुम्हारी बेवकूफियों पर और तुम बनते हो

330
00:22:31,600 --> 00:22:35,040
कि हम चर्चा करेंगे

331
00:22:35,040 --> 00:22:39,200
अगर तेरी सामर्थ्य होती ना तू नपुंसक नपुंसकता

332
00:22:39,200 --> 00:22:43,360
का प्रदर्शन ना करता भाई तू अपना नंबर प्रोवाइड कराता ना जिससे कि

333
00:22:43,360 --> 00:22:47,440
आज मैं आज मैं इस पर दिखा पाता कि मैंने तुझे कितने कॉल किए इस नंबर

334
00:22:47,440 --> 00:22:51,840
पर मैंने दिन में तीन कॉल कर लिए जब मुझे मिल गया कि राघव अच्छा एक चीज और है

335
00:22:51,840 --> 00:22:56,160
पहाड़ी जी के पास इसका नंबर था कभी पहाड़ी जी ने मुझे जिक्र

336
00:22:56,160 --> 00:23:00,240
किया था इस बात का कि राघव दास का नंबर है। तो पहाड़ी जी के पास

337
00:23:00,240 --> 00:23:04,240
आज मुझे याद आया अरे पहाड़ी जी ने कहा था उनके पास नंबर तो ये तो मैंने

338
00:23:04,240 --> 00:23:08,240
जब राघव नाम से ढूंढा अपने में तो राघव नाम से नाम निकल आया रामपाल से

339
00:23:08,240 --> 00:23:12,400
जुड़ा हुआ एक व्यक्ति जिसने फॉर्म भरा है। मगर वो राघव मिश्रा तो मैंने पहाड़ी

340
00:23:12,400 --> 00:23:16,640
जी से एक नंबर मांगा कि आपने कभी एक बार कहा था राघवदास का आपके पास नंबर है। उन्होंने

341
00:23:16,640 --> 00:23:20,800
भेजा। वो नंबर से मैंने यह नंबर मैच किया। कंफर्म हो गया कि हां यही है। पहाड़ी

342
00:23:20,800 --> 00:23:24,960
जी भी राघवदास का जो नंबर दे रहे हैं वही है और यह भी वही है। तो

343
00:23:24,960 --> 00:23:26,720
यह ऐसा दोगला व्यक्ति कि

344
00:23:26,720 --> 00:23:30,880
एक तरफ ये कलयुग के ब्राह्मणों को राक्षस कहते हैं। फिर दूसरी बात

345
00:23:30,880 --> 00:23:34,960
फॉर्म भरते टाइम अपने आप को मिश्रा कहते हैं। और तीसरी

346
00:23:34,960 --> 00:23:38,960
बात कि ये जब फोन करते हैं तो बताते नहीं है कि मैं कौन

347
00:23:38,960 --> 00:23:43,120
बोल रहा हूं। मैं किस लिए मैंने फोन किया है। और उसके बाद

348
00:23:43,120 --> 00:23:47,200
इतने दिनों के बाद आज भी इस व्यक्ति ने जब

349
00:23:47,200 --> 00:23:51,280
लाइव के लिए मुझे अपनी जनता को खुश करने के लिए बातें बोली हैं कि

350
00:23:51,280 --> 00:23:55,440
मैंने उसे बुलाया है, यह किया है, लस्सी पी है,

351
00:23:55,440 --> 00:23:59,520
खीर पी है या वो समोसे वाले के समोसे खाऊंगा ना

352
00:23:59,520 --> 00:24:04,160
पता नहीं किस तरह के ये लोग खाते पीते हैं वो तो खैर अलग बात है।

353
00:24:04,160 --> 00:24:08,640
तो यह सब बात करते हुए भी इस व्यक्ति ने अपना नंबर ना तो सार्वजनिक

354
00:24:08,640 --> 00:24:12,960
किया और ना ही मुझे पर्सनल मैसेज भेज दिया। चलो भाई तुम्हें कायर हो

355
00:24:12,960 --> 00:24:17,040
या फिर ऐसा कुछ नपुंसकता का प्रदर्शन करना है। बचपन में माता

356
00:24:17,040 --> 00:24:21,120
जी ने ऐसा दूध नहीं पिलाया जो तुम्हें पोषण पोषक तत्व

357
00:24:21,120 --> 00:24:25,520
प्राप्त हो पाए हो तो चलो भाई प्राइवेटिवली है ना प्राइवेट

358
00:24:25,520 --> 00:24:29,760
तरीके से व्यक्तिगत रूप से तुम मुझे नंबर भेज देते यह मेरा नंबर है

359
00:24:29,760 --> 00:24:33,760
अपने आप ही मुंगेरी लाल के हसीन सपने कि मेरा नंबर शिवश नारायण द्विवेदी

360
00:24:33,760 --> 00:24:38,000
के पास नहीं शिवश नारायण द्विवेदी के पास तुम्हारी

361
00:24:38,000 --> 00:24:42,560
जो पहचान है यह थल मीडिया पर

362
00:24:42,560 --> 00:24:46,880
इस पहचान के द्वारा आज से पहले तक शिवश नारायण द्विवेदी

363
00:24:46,880 --> 00:24:50,880
के पास तेरा नंबर नहीं था। आज मुझे वो नंबर मिला जब

364
00:24:50,880 --> 00:24:55,520
मैंने राघव टाइप किया वो भी किस नाम से मिला? राघव मिश्रा के नाम से।

365
00:24:55,520 --> 00:24:58,560
तो ये तो तुम्हारी

366
00:24:58,560 --> 00:25:03,040
षड्यंत्र वाली कहानियां है। तुम दोगलों से क्या अपेक्षा कर सकते हैं?

367
00:25:03,040 --> 00:25:07,280
तो इतना सब दोगलापन करने के बाद ये व्यक्ति कह रहा है कि अब ये आएगा

368
00:25:07,280 --> 00:25:11,520
नहीं। क्यों आऊं भाई? पांच महिला और एक बच्चे की हत्या

369
00:25:11,520 --> 00:25:15,680
मेरे पक्ष पर चल रही है। हत्या का आरोप मेरे पक्ष पर है कि तेरे पक्ष पर है?

370
00:25:15,680 --> 00:25:20,720
12 साल जेल काट के तेरा बाबा आया है कि मेरा आया है?

371
00:25:20,720 --> 00:25:26,720
अपराधी अपराधी तुम लोग घोषित हो कि मैं घोषित हूं?

372
00:25:27,200 --> 00:25:31,280
क्यों आऊं भाई तेरे यहां पर? दोगलापन हर पन्ने पर हर बात पर

373
00:25:31,280 --> 00:25:35,760
तुम्हारी दिख रहा है। टपक रहा है दोगलापन तुम्हारे मुंह से। चरित्रहीनता

374
00:25:35,760 --> 00:25:39,840
तुम्हारे मुंह से। व्यभचार तुम्हारे मुंह से टपक रहा

375
00:25:39,840 --> 00:25:43,520
है। मैं तुम्हारे स्थान पर आ जाऊं।

376
00:25:43,520 --> 00:25:49,520
झूठ की सीमा नहीं है जहां पर वहां मैं चला जाऊं। क्यों?

377
00:25:49,600 --> 00:25:53,600
अच्छा ये मेरे को ही तुम्हारे चलो ये तो एक रही कि तुम लोग तुम लोगों का

378
00:25:53,600 --> 00:25:57,600
चरित्र जो है समाज में बदनाम है। ये तो एक इसको अलग हटा दो।

379
00:25:57,600 --> 00:26:01,840
न्यूट्रल हो जाते हैं। तो बेवकूफ व्यक्ति

380
00:26:01,840 --> 00:26:06,080
ये कैसे तय होगा कि मुझे ही तेरे यहां आना है। ये कैसे तय

381
00:26:06,080 --> 00:26:11,280
होगा? न्यूट्रल जगह क्यों नहीं रखेगा तू? बोल

382
00:26:11,280 --> 00:26:15,280
नानी याद आती है ना? और आज

383
00:26:15,280 --> 00:26:19,280
तूने मेरा फोन क्यों नहीं उठाया? तुझे तो पता नहीं है कि मैं तेरे यहां आने वाला हूं कि नहीं आने वाला हूं।

384
00:26:19,280 --> 00:26:23,360
फोन क्यों नहीं उठाया? भाई आऊंगा तो तेरे से संपर्क करूंगा ना कि तेरे

385
00:26:23,360 --> 00:26:27,760
चैनल पे आना है, कब आना है, कहां आना है, कैसे आना है? तू तूने तो संपर्क किया नहीं।

386
00:26:27,760 --> 00:26:32,080
तो तेरे से संपर्क करूंगा ना। तो कैसे करूंगा?

387
00:26:32,080 --> 00:26:36,160
फोन से करूंगा। तो फोन कर रहा हूं तो तू उठा नहीं रहा। अभी भी डायल कर लेते हैं। देख

388
00:26:36,160 --> 00:26:39,200
लो भैया

389
00:26:39,200 --> 00:26:45,200
देखते हैं उठाता है कि नहीं।

390
00:26:45,600 --> 00:26:51,600
राघव राघव मिश्रा बनेंगे। मिश्रा

391
00:26:52,960 --> 00:26:58,960
यह देखो। यह जा रहा है इस पर।

392
00:26:59,280 --> 00:27:05,280
फोन चल रहा है।

393
00:27:08,880 --> 00:27:12,960
फोन कर रहा हूं इस समय।

394
00:27:12,960 --> 00:27:18,240
अब देखते हैं कितना बड़ा पौरुष वाला है ये।

395
00:27:18,240 --> 00:27:23,120
आप जिस व्यक्ति एक बार और मिलाते हैं। हो सकता है बिजी हो।

396
00:27:23,120 --> 00:27:27,360
कृपया खुद शेर का बच्चा एक ही अच्छा।

397
00:27:27,360 --> 00:27:31,760
ठीक है। केवल बोलते नहीं है।

398
00:27:31,760 --> 00:27:35,920
तांडव नृत्य करके दिखाते हैं। समझे? यह केवल

399
00:27:35,920 --> 00:27:41,120
बातों के शेर नहीं है।

400
00:27:41,120 --> 00:27:45,120
यह देखो दोबारा मिला रहा हूं। और किसी

401
00:27:45,120 --> 00:27:49,200
को नंबर चाहिए हो तो व्यक्तिगत रूप से जो है उससे पूछ लेना। नंबर

402
00:27:49,200 --> 00:27:53,360
भी प्रोवाइड करा दूंगा। और प्रामाणिक रूप से राघव जो

403
00:27:53,360 --> 00:27:55,840
है

404
00:27:55,840 --> 00:28:00,160
वो अपने फोन की कॉल डिटेल डाल दे आज के दिन की। प्रामाणिक

405
00:28:00,160 --> 00:28:04,080
वेरीिफाइड

406
00:28:04,080 --> 00:28:08,080
ठीक है यह लग रहा है तुम्हारे राघव को नंबर जो भागा भागा फिर रहा है शिवश

407
00:28:08,080 --> 00:28:13,200
नारायण द्विवेदी

408
00:28:13,200 --> 00:28:16,880
ठीक है

409
00:28:16,880 --> 00:28:20,880
क्यों भागा भागा फिर रहा है उसको मालूम है गवरे तो पागल बन

410
00:28:20,880 --> 00:28:25,040
जाएंगे मगर शिवश नारायण द्विवेदी के सामने तो कोई को कॉल कर रही है

411
00:28:25,040 --> 00:28:29,120
वह उत्तर नहीं दे रहा है अब इस व्यक्ति को मैंने कितने ने कॉल कर ली

412
00:28:29,120 --> 00:28:33,520
अभी तक सुबह से जब से मैंने वो बात जानी कि भाई यह जो है

413
00:28:33,520 --> 00:28:37,520
इसका नंबर मेरे पास है ये कह रहा है तो ऐसा तो नहीं कि किसी नाम से इसका नंबर सेव

414
00:28:37,520 --> 00:28:40,000
हो मेरे पास

415
00:28:40,000 --> 00:28:44,000
अब देखो सुबह से चार दो अभी

416
00:28:44,000 --> 00:28:48,000
हो गई और दो पहले हो चुकी है ये देखो

417
00:28:48,000 --> 00:28:52,080
चार कॉल हो चुकी है बंदे को दिन भर में टाइम नहीं मिला

418
00:28:52,080 --> 00:28:56,080
शिवश नारायण द्विवेदी से बात करने का केवल

419
00:28:56,080 --> 00:29:00,240
तुम जैसे गवर्नरों को बेवकूफ खूब बनाने के लिए ये लोग ठायएं ठायएं

420
00:29:00,240 --> 00:29:04,640
करते हैं। ठाय ठायएं ठायएं दुनिया की ठाय ठायएं ठायएं

421
00:29:04,640 --> 00:29:09,760
और वास्तव में जब किसी मनुवादी

422
00:29:09,760 --> 00:29:13,920
से शंकराचार्य के सैनिक से सामना करने की बात आती है तो पुई

423
00:29:13,920 --> 00:29:16,800
पुई पुई पुई

424
00:29:16,800 --> 00:29:22,800
यह स्थिति है इनकी। ठीक है।

425
00:29:22,800 --> 00:29:26,800
अरे भाई तेरा नंबर तूने सार्वजनिक नहीं किया हुआ है। तुझे पता नहीं है

426
00:29:26,800 --> 00:29:31,440
कि मैंने तेरा नंबर मैं तुझे बेनिफिट ऑफ डाउट दे रहा हूं।

427
00:29:31,440 --> 00:29:35,680
मैं तुझे बेनिफिट ऑफ डाउट दे रहा हूं कि तुझे ऐसा लगता है कि तूने

428
00:29:35,680 --> 00:29:39,840
जब जब मुझे एक बार जब तूने मुझे फोन किया मैं तुझे पहचान गया। मैं नहीं पहचाना।

429
00:29:39,840 --> 00:29:44,720
है कौन तू? क्या औकात है तेरी? हैं?

430
00:29:44,720 --> 00:29:49,040
तू पहचानता है मुझे। तू मैंने बनाया क्या राघव दास से तेरे

431
00:29:49,040 --> 00:29:53,760
ऊपर वीडियो कभी बता तू पहचानता है मुझे

432
00:29:53,760 --> 00:29:58,000
तूने फोन किया है मुझे मेरा नंबर सार्वजनिक है तो तूने कैसे सोच

433
00:29:58,000 --> 00:30:02,640
लिया अगर तू यह सोच भी रहा है कि मैं तुझे पहचानता हूं बेनिफिट ऑफ डाउट दुर्जनोष

434
00:30:02,640 --> 00:30:06,640
न्याय ये सब भाषा वैसे तुम लोगों के समझ में आने वाली है नहीं अपने

435
00:30:06,640 --> 00:30:10,640
लोगों के लिए बोल रहा हूं दुर्जनोष न्याय से बोल रहा हूं कि तू यह

436
00:30:10,640 --> 00:30:15,360
सोच रहा था कि मैं तुझे पहचानता हूं हालांकि तुझे सोचना नहीं चाहिए था सोचना भी घचूपना

437
00:30:15,360 --> 00:30:19,520
है मगर तूने अगर यह सोचा भी तो तूने यह क्यों सोचा कि मैंने तेरा उस

438
00:30:19,520 --> 00:30:24,560
एक फोन नंबर को एक बार कॉल करने को मैंने सेव कर लिया

439
00:30:24,560 --> 00:30:28,560
और तूने यह क्यों सोचा कि तू जब अपने आप को राघव मिश्रा लिखेगा राघवदास

440
00:30:28,560 --> 00:30:32,640
नहीं लिखेगा तो मैं तुझे राघवदास समझ लूंगा।

441
00:30:32,640 --> 00:30:36,720
मतलब खुद जानबूझ के अपना परिचय छिप करके काम

442
00:30:36,720 --> 00:30:40,800
कर रहे हैं। फिर भी यह चाहते हैं कि सामने वाला इसका परिचय समझ ले और

443
00:30:40,800 --> 00:30:45,120
अगर वो ना समझ पाए तो ये लोगों को जाकर के ये झूठ बोलेंगे कि उसके पास मेरा

444
00:30:45,120 --> 00:30:49,200
नंबर है मगर उसने मुझसे संपर्क नहीं किया। ये तो रही संपर्क करने

445
00:30:49,200 --> 00:30:50,240
ना करने की बात।

446
00:30:50,240 --> 00:30:54,560
अब ये बता तेरे प्लेटफार्म पे क्यों आए? भाई मुकदमे मेरे प्लेटफार्म

447
00:30:54,560 --> 00:30:59,520
पे चल रहे हैं कि तेरे पे चल रहे हैं? तेरे पर विश्वास क्यों करे कोई?

448
00:30:59,520 --> 00:31:03,760
तुम्हारी कोई कोई सम्मान है क्या समाज में तुम्हारा? अपने

449
00:31:03,760 --> 00:31:08,000
ही लोगों को खरीद खराब के और जो है पाइप बांट करके पैसा खर्चा करके

450
00:31:08,000 --> 00:31:12,000
तुम भीड़ कमाते हो। ये है तुम्हारी स्थिति।

451
00:31:12,000 --> 00:31:16,160
थूकते हैं लोग तुम्हारी फोटो लगा के। जूते से रगड़ते हैं। जिसको

452
00:31:16,160 --> 00:31:20,320
तुम मानते हो उसको हम जिसे मानते हो उसको तुम भी जूते

453
00:31:20,320 --> 00:31:24,560
से नहीं रगड़ पाओगे। और रगड़ दो। मैं राम को मानता हूं। रगड़ फोटो

454
00:31:24,560 --> 00:31:28,640
पैर से। पता चल जाएगा अभी। मालूम है तुम लोगों की आस्था नहीं

455
00:31:28,640 --> 00:31:32,720
है। दिखावा करते हो मगर रगड़ तो तुम भी नहीं पाओगे ना। तुम्हारी चीजों को लोग रगड़

456
00:31:32,720 --> 00:31:36,960
रहे हैं। समझ में आया? यह अंतर है। इस अंतर को भूलो

457
00:31:36,960 --> 00:31:42,000
मत। बताया है ना कई बार वो बड़ा वाला जानवर

458
00:31:42,000 --> 00:31:46,080
है ना हाथी वो हम हैं। और

459
00:31:46,080 --> 00:31:49,920
वो जो होते हैं ना वो

460
00:31:49,920 --> 00:31:54,000
समझ लेना वो तुम हो। तो पानी में रह के मगर

461
00:31:54,000 --> 00:31:58,000
से बैर नहीं करने का। ह औकात ये सब शब्द

462
00:31:58,000 --> 00:32:02,080
ये सब तुम्हारे ऊपर शोभा नहीं देते हैं। वही दबे कुचले टाइप के व्यक्ति हो

463
00:32:02,080 --> 00:32:03,680
उतने में ही अपना कर लो

464
00:32:03,680 --> 00:32:07,840
और कर रहे थे। तुम्हारे लोगों ने मुझे उकसा दिया कि मैं इस हद

465
00:32:07,840 --> 00:32:12,000
तक इस अभियान को खड़ा कर दूं। और जैसे जैसे उस लड़ाई

466
00:32:12,000 --> 00:32:16,000
में मैं तुम्हें जानता गया तो मेरे अंदर तुम्हारे तंत्र को नष्ट करने

467
00:32:16,000 --> 00:32:20,000
की भावना और पुष्ट होती गई। मैं तो इतना जानता ही नहीं था कि

468
00:32:20,000 --> 00:32:24,000
तुमने इतना सब लिख रखा है। जैसे जैसे विरोध हुआ

469
00:32:24,000 --> 00:32:28,160
चीजें और सामने आई और सामने आई तो पता चला ये तो भाई बिल्कुल ही

470
00:32:28,160 --> 00:32:32,320
अलग चीजें हैं यहां तो अब तो युद्ध स्तर पर काम करना पड़ेगा। हो

471
00:32:32,320 --> 00:32:37,040
रहा है और युद्ध स्तर पर सोच लेना समझ लेना।

472
00:32:37,040 --> 00:32:41,120
तुम्हारा अंत निकट है तुम्हारे इस फर्जी तंत्र का। यह समझ

473
00:32:41,120 --> 00:32:45,440
लो और उसकी वजह होगी एक

474
00:32:45,440 --> 00:32:49,600
लड़ाई जो चालू हुई थी पिछले साल जब किताबें जलाई गई थी

475
00:32:49,600 --> 00:32:53,680
वहां से तुम्हारा अंत सुनिश्चित हो चुका है। ठीक है जो तुमने

476
00:32:53,680 --> 00:32:57,280
ये सब किया है ना

477
00:32:57,280 --> 00:33:02,160
हमारे भगवान का अपमान हमारे आराध्यों का अपमान

478
00:33:02,160 --> 00:33:06,560
जिन जिन जिन चीजों में हमारी आस्था है त्यहार में आस्था है तो त्यहार का मजाक

479
00:33:06,560 --> 00:33:10,960
ग्रंथ में आस्था है तो ग्रंथ का मजाक दो कौड़ी

480
00:33:10,960 --> 00:33:15,360
के लोगों को तुम लोग बेवकूफ बनाया करते हो। पाखंड नहीं है आश्रम में। पाखंड

481
00:33:15,360 --> 00:33:19,360
नहीं है। कोई पत्रकार जाता है वह आकर के कहता है पाखंड नहीं है

482
00:33:19,360 --> 00:33:24,560
आश्रम में। भागे भागे फिरते हैं।

483
00:33:24,560 --> 00:33:28,960
फोन नहीं उठाते हैं। मालूम है एकदम चांद तारे नजर आने लगेंगे।

484
00:33:28,960 --> 00:33:33,360
पाखंड का हिंदी अर्थ क्या होता है? पढ़ा है कभी? निरुक्त

485
00:33:33,360 --> 00:33:39,360
से जाना है। पाखंड पा का [हंसी] मतलब वेद

486
00:33:39,520 --> 00:33:43,600
यह बाद में प्रचलित हुआ है कि पाखंडी किसी ढोंगी को कहा जाता है।

487
00:33:43,600 --> 00:33:47,680
किसी बहरूपियों को कहा जाता है। पाखंडी का वास्तविक अर्थ है

488
00:33:47,680 --> 00:33:51,840
वेद का खंडन करने वाला। अब वेद में लिखा

489
00:33:51,840 --> 00:33:56,000
है जन्म और मरण से मुक्ति वेद के बाहर किसी भी

490
00:33:56,000 --> 00:34:00,320
चीज से नहीं हो सकती। वेद से ही होगी। और तू और तेरा बाबा

491
00:34:00,320 --> 00:34:04,480
ये कहते फिरते हो कि वेद से मुक्ति नहीं होगी। हर पन्ने

492
00:34:04,480 --> 00:34:08,480
पर लिखा है तो यही पाखंड सिद्ध हो

493
00:34:08,480 --> 00:34:12,000
गया। खत्म।

494
00:34:12,000 --> 00:34:16,000
सड़े हुए लोगों को समूह बना के चले आएंगे। पाखंड नहीं है। ये नहीं

495
00:34:16,000 --> 00:34:21,120
है। खत्म। यजुर्वेद में लिखा हुआ है।

496
00:34:21,120 --> 00:34:25,120
श्वेता शत्रोपनिषद में लिखा हुआ है। वेदों के अलावा वेदों के

497
00:34:25,120 --> 00:34:29,120
बाहर कोई मार्ग नहीं है मुक्ति का। ले। अब यदि

498
00:34:29,120 --> 00:34:33,200
तुमने कह दिया वेदों के बाहर है मुक्ति का मार्ग। ठीक

499
00:34:33,200 --> 00:34:37,840
है वेद में नहीं है मुक्ति का मार्ग लिखा है ना हर पन्ने पर

500
00:34:37,840 --> 00:34:41,840
यही पाखंड है क्योंकि वेद खुद कह रहे हैं इसी में है

501
00:34:41,840 --> 00:34:46,000
मुक्ति का मार्ग हो गया खत्म कुछ नहीं बाकी पाखंड सिद्ध करने

502
00:34:46,000 --> 00:34:50,560
के लिए जिस दिन सामना होगा ये सब खीखी खूख ये सब जो ड्रामेबाजी

503
00:34:50,560 --> 00:34:54,880
है ना जो गवर्नरों के लिए बनाते हो ना वीडियोस सब अकल ठिकाने

504
00:34:54,880 --> 00:34:59,520
आ जाएगी

505
00:34:59,520 --> 00:35:03,520
इसको कहते हैं मार तेरा ही जूता

506
00:35:03,520 --> 00:35:07,840
तेरे सर। ठीक है? यहां अकाट्य बातें होती है।

507
00:35:07,840 --> 00:35:11,920
ऐसी वैसी बातें नहीं होती। तो भाई इसके [गला साफ़ करने की आवाज़]

508
00:35:11,920 --> 00:35:16,400
आगे इन्होंने जो अपने वीडियो में वही पुराना तमाशा

509
00:35:16,400 --> 00:35:20,400
के यहां देवी भागवत में ये लिखा है। जबकि इनका जो आका है

510
00:35:20,400 --> 00:35:24,880
वो जेलकट्टू जिनका प्रसाद लोग खाते हैं। ये

511
00:35:24,880 --> 00:35:28,880
वो आका कहता है कि हम पुराण को नहीं मानते। फिर वो

512
00:35:28,880 --> 00:35:33,120
फिर वह देवी देवताओं की बुराई करने के लिए पुराणों का अपना अर्थ निकालते

513
00:35:33,120 --> 00:35:37,200
हुए पुराणों को मानने भी लगता है। क्यों भाई वेद को मानना केवल

514
00:35:37,200 --> 00:35:41,520
गीता को मानना केवल फिर पुराण क्यों ले आता है? मतलब

515
00:35:41,520 --> 00:35:45,520
उससे यदि कोई हमारे पक्ष की चीज निकल रही होगी

516
00:35:45,520 --> 00:35:49,760
तो हम पुराण को नहीं मानते। और उससे यदि कोई हमारे धर्म के विरुद्ध

517
00:35:49,760 --> 00:35:54,080
चीज निकल रही होगी तो हम पुराण को मानते हैं। वो

518
00:35:54,080 --> 00:35:58,240
भी तब जब तुम अपना मनगढ़ंत अर्थ करो। यह तो तुम्हारा दोगलापन है

519
00:35:58,240 --> 00:36:02,480
और तुम बताते हो कि तुम्हारे साथ चर्चा की जाए। तुम्हारे सेंटर आए

520
00:36:02,480 --> 00:36:06,960
जाए। हैं क्या-क्या हुआ था सेंटर में?

521
00:36:06,960 --> 00:36:11,040
किसे कहते हैं व्यभचार? जहां झूठ बोला जाता। झूठ बोलना

522
00:36:11,040 --> 00:36:14,800
भी व्यभचार है। तुम्हारे ऐसे गधे मित्रगण

523
00:36:14,800 --> 00:36:19,600
है। वो नोटिस भेज रहे हैं व्यभचार के अर्थ शब्द पे। गलत

524
00:36:19,600 --> 00:36:23,760
आचरण भी व्यभचार है। ठीक है? जो

525
00:36:23,760 --> 00:36:28,160
नहीं करना है वह करना व्यभचार है। तुम्हारे यहां पर घोषित

526
00:36:28,160 --> 00:36:32,320
है कानून के द्वारा उन्हीं कानून वालों से उनहीं प्रशासनिक लोगों

527
00:36:32,320 --> 00:36:36,400
से तुम आज अपने क्रेडिट लेते हो कि बाबा का इतना

528
00:36:36,400 --> 00:36:40,400
सम्मान हुआ। बाबा का यह सम्मान हुआ। अरे यह भी तो बता कोर्ट ने कहा है कि इसको जो है

529
00:36:40,400 --> 00:36:44,880
इतनी सजा होनी चाहिए। यह बात भी तो हाथी पर चढ़ के बताओ।

530
00:36:44,880 --> 00:36:50,880
कि बाबा का इतना अपमान हुआ। यह कौन बताएगा?

531
00:36:51,040 --> 00:36:55,040
यह कोई नहीं बताएगा। वह अपने अनाकोंडा

532
00:36:55,040 --> 00:36:59,040
वाले पाइप लोगों को देते रहो। जब तक वह पाइप देते रहोगे तब तक वह लोग तुम्हारे

533
00:36:59,040 --> 00:37:03,120
हैं। ठीक है? पैसे से जो चीजें खरीदी

534
00:37:03,120 --> 00:37:07,520
जाती हैं उनकी कोई आयु नहीं होती मेरे भाई।

535
00:37:07,520 --> 00:37:12,000
वह पैसे के साथ साथ ही जाती हैं। ठोस

536
00:37:12,000 --> 00:37:16,240
चीजें होती है ना वह सिद्धांत से आती हैं। ठोस लोग सिद्धांत

537
00:37:16,240 --> 00:37:20,480
से तुम्हारे साथ खड़े होते हैं। पैसों से जिनको तुम अपने साथ लेकर आते हो ना

538
00:37:20,480 --> 00:37:24,560
वो बस वैसे ही होते हैं। पैसे पैसे के साथ आएंगे।

539
00:37:24,560 --> 00:37:28,640
पैसे के साथ जाएंगे और पैसे सदा रहने नहीं वाले। ये तो तुम्हारे बाबा

540
00:37:28,640 --> 00:37:32,720
ने भी माना है। तभी तो मोक्ष ढूंढ रहे हो। इतना तो तुम भी मानते

541
00:37:32,720 --> 00:37:36,720
हो या यहां पे भी कुगत कर दोगे। खैर अब

542
00:37:36,720 --> 00:37:40,720
इन्होंने आगे जो है फिर से कहा है कि भैया वह ब्रह्मा

543
00:37:40,720 --> 00:37:44,960
विष्णु महेश को जो है सिद्ध कर दे भगवान गुणातीत सिद्ध कर दे गुणों

544
00:37:44,960 --> 00:37:48,960
से परे सिद्ध कर दे तो भाई मैं एक दो

545
00:37:48,960 --> 00:37:54,960
चीजें पढूंगा क्योंकि मैं 50 बार बता चुका हूं 50 बार ठीक है

546
00:37:56,150 --> 00:38:02,150
[गला साफ़ करने की आवाज़] एक दो चीजें बता देता हूं

547
00:38:20,160 --> 00:38:25,520
नारायण की

548
00:38:25,520 --> 00:38:29,440
शिवजी बोले ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा

549
00:38:29,440 --> 00:38:33,520
261 नंबर पेज पे हम इसमें यहां देखिएगा

550
00:38:33,520 --> 00:38:37,600
हा दिखाओ शिवजी बोले शिवजी बोले ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा जी बोल

551
00:38:37,600 --> 00:38:41,600
रहे है उसको नहीं दिखाओगे ब्रह्मा जी भी तो कुछ बोल रहे होंगे तब ना शिवजी ने कुछ

552
00:38:41,600 --> 00:38:45,920
बोला है ऐसी आधी अधूरी व्याख्या करोगे क्या शास्त्र पड़ेगा

553
00:38:45,920 --> 00:38:50,000
रे तू ब्रह्मा और शिव का भगवती

554
00:38:50,000 --> 00:38:54,720
की स्तुति करना यहां शिवजी बोले शिवजी भगवान क्या बोले

555
00:38:54,720 --> 00:38:59,360
आपके प्रभाव से पारद भूत हुए तथा उसके बाद अबे पहले

556
00:38:59,360 --> 00:39:03,520
बोलना तो सीख लिख ले पादुरभूत नहीं होता प्रादुर्भूत होता

557
00:39:03,520 --> 00:39:07,680
है मतलब पढ़ना भी नहीं आता ऐसे अनपढ़ गवार है और ये देंगे शास्त्रों

558
00:39:07,680 --> 00:39:12,240
का व्याख्या ये देंगे शास्त्रों का ज्ञान

559
00:39:12,240 --> 00:39:16,640
ना अनपढ़ गवार भी आपसे उत्पन्न हुए एक और

560
00:39:16,640 --> 00:39:20,720
एक और प्रादुर्भ को भगवान क्या बोले के प्रभाव

561
00:39:20,720 --> 00:39:24,720
से पारदुभूत हुए हुए देखो मतलब गवारों को

562
00:39:24,720 --> 00:39:28,880
हिंदी बोलना भी नहीं आ रहा संस्कृत तो बहुत दूर की बात है तथा उसके बाद

563
00:39:28,880 --> 00:39:32,960
ब्रह्मा जी भी आपसे उत्पन्न हुए। कौन बोल रहे हैं शिव जी? ये शिव

564
00:39:32,960 --> 00:39:37,120
जी बोलते हुए आ रहे है इधर इधर संस्कृत है। तुमको जब हिंदी नहीं पढ़नी आ रही तो तुमको

565
00:39:37,120 --> 00:39:41,840
क्या लगता है तुम सही अर्थ कर लोगे? हिंदी है।

566
00:39:41,840 --> 00:39:45,840
261 नंबर पेज पे इसमें यहां देखिएगा।

567
00:39:45,840 --> 00:39:49,840
हां दिखाओ। शिवजी बोले। शिवजी बोले। ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा जी

568
00:39:49,840 --> 00:39:53,840
बोल रहे है उसको नहीं दिखाओगे। ब्रह्मा जी भी तो कुछ बोल रहे होंगे तब ना शिवजी ने

569
00:39:53,840 --> 00:39:57,840
कुछ बोला है। ऐसी आधी अधूरी व्याख्या करोगे। क्या शास्त्र

570
00:39:57,840 --> 00:40:01,840
पड़ेगा रे तू? ब्रह्मा और शिव का

571
00:40:01,840 --> 00:40:06,880
भगवती की स्तुति करना है। तो यहां शिव जी

572
00:40:06,880 --> 00:40:11,280
ये तो बढ़िया कॉमेडी आपने दिखा दी कि

573
00:40:11,280 --> 00:40:15,440
सबसे पहली बात अब इन्होंने आगे क्या है कि जो दुर्गा

574
00:40:15,440 --> 00:40:19,440
माता के बलात्कार का जो मामला है कि उसने बोला है दुर्गा माता

575
00:40:19,440 --> 00:40:23,440
का बलात्कार तो अब तुम लोग सबसे पहले क्या करते हो दुर्गा

576
00:40:23,440 --> 00:40:27,360
माता के संबंध में इस बात को सिद्ध करने के लिए सबसे पहला शास्त्र कौन सा खोलते

577
00:40:27,360 --> 00:40:31,600
हैं ये कबीर सागर अब कबीर सागर कौन से वैदिक

578
00:40:31,600 --> 00:40:36,160
वांगमय से प्रमाणित है कि कबीर सागर जो हमारा ग्रंथ है वो तो तुम कहते हो

579
00:40:36,160 --> 00:40:40,480
पांचवा वेद या सूक्ष्म वेद जो कहा गया है वो हमारे स्मृति ग्रंथों को कहा गया इतिहास

580
00:40:40,480 --> 00:40:44,480
पुराण महाभारत इत्यादि को कहा गया है छंद उपनिषद से मैंने प्रमाण दे दिया

581
00:40:44,480 --> 00:40:49,520
है ये तो तुम कहते हो ना कि सूक्ष्म सूक्ष्म

582
00:40:49,520 --> 00:40:54,400
फूहड़ कहीं के यही सूक्ष्म पादुरभूत

583
00:40:54,400 --> 00:40:58,480
इनको वो खीर वाले टाइम की वो सुगंध आती होगी

584
00:40:58,480 --> 00:41:02,640
जो एक सुगंध होती होगी खीर में मिश्रित हो के आती होगी क्योंकि क्योंकि

585
00:41:02,640 --> 00:41:06,640
वो जो मीडिया खबरों के अनुसार वो जो है पूरे शरीर से

586
00:41:06,640 --> 00:41:10,640
बह के आती है वो जो दूध तो वो जो मलमूत्र के जो द्वार

587
00:41:10,640 --> 00:41:14,800
होते हैं वहां से भी निकल के आता है। उसके बाद वो खीर बनती है मीडिया खबरों के अनुसार

588
00:41:14,800 --> 00:41:19,120
तो उस ऐसी बनी हुई खीर से जो महक

589
00:41:19,120 --> 00:41:23,120
आएगी तो वहां से वो वो बैठ जाएगा तो इनको

590
00:41:23,120 --> 00:41:27,600
जो है प्रादुर प्रादुर्भत भी प्रादुर्भाव या प्रादुर्भूत

591
00:41:27,600 --> 00:41:31,840
उसको वही वो भी इन्हें जो पादुरभूत दिखेगा पादुभूत इसीलिए

592
00:41:31,840 --> 00:41:36,080
बोल रहा है पादुभूत पादुभूत वो दिमाग झनझनाया हुआ है

593
00:41:36,080 --> 00:41:40,320
ना एक मेरे मित्र के पास एक वो था कुत्ता

594
00:41:40,320 --> 00:41:42,800
स्ान बरसात

595
00:41:42,800 --> 00:41:46,880
के दिनों में उसको एक बार कूलर का करंट लग

596
00:41:46,880 --> 00:41:51,040
गया। चिपक गया वह उससे बहुत वफादार था। पर

597
00:41:51,040 --> 00:41:55,520
जब वो करंट वो कूलर के करंट से बच के वापस आया

598
00:41:55,520 --> 00:41:59,840
तो वो पहले तो आसमान में भूके फिर अपने मालिक पे भोंके

599
00:41:59,840 --> 00:42:04,080
सब पर भोंके। तो करंट से क्या होता है? जब हम ऐसी

600
00:42:04,080 --> 00:42:08,160
किसी हादसे से गुजर के आते हैं तो दिमाग झनझना जाता

601
00:42:08,160 --> 00:42:12,720
है। काम करना बंद कर देता है। उसी तरीके से यह

602
00:42:12,720 --> 00:42:16,800
भाई इतनी बढ़िया इतनी जो है ऐसी जो इनके बाबा जी की

603
00:42:16,800 --> 00:42:20,800
जेलधाम की नहा वह वाली खीर मीडिया खबरों खबरों के अनुसार

604
00:42:20,800 --> 00:42:24,800
शरीर से होते हुए आ रहा है दूध मल मूत्र के द्वारों से बहते हुए आ रहा

605
00:42:24,800 --> 00:42:29,360
है दूध हां और उस दूध से बनी हुई यदि सामग्री

606
00:42:29,360 --> 00:42:33,440
ग्रहण की हो तो ऐसे लोगों का फिर जब दिमाग झनझनाया

607
00:42:33,440 --> 00:42:37,600
हुआ मिल रहा है तो उससे सिद्ध हो रहा है कि ऐसी खीर वहां मिली थी जो मीडिया खबरें

608
00:42:37,600 --> 00:42:41,760
ठीक बता रही है ये तो तुम यही प्रकट कर रहे भाई

609
00:42:41,760 --> 00:42:45,760
मीडिया खबरें तुम्हारे अनुसार वह झूठी थी। मगर तुम अपने आचरण से

610
00:42:45,760 --> 00:42:49,760
तो यही सिद्ध कर रहे हो कि तुम्हारा दिमाग झनझनाया हुआ है जिससे पता

611
00:42:49,760 --> 00:42:54,160
चलता है कि तुम्हारे साथ ये खीर वाला हादसा हुआ ही है।

612
00:42:54,160 --> 00:42:57,840
इसीलिए तुम्हें वो प्रादुर भूत की जगह पादुर पादुर दिख रहा

613
00:42:57,840 --> 00:43:01,840
है। हां। अच्छा तो

614
00:43:01,840 --> 00:43:06,560
अब मैं एक दो प्रमाण दे रहा हूं। आवश्यक प्रमाण

615
00:43:06,560 --> 00:43:12,560
क्या है? कि शिव पुराण

616
00:43:14,480 --> 00:43:18,560
9 30 32 शिव से भिन्न

617
00:43:18,560 --> 00:43:23,760
किसी का ईश्वरत्व नहीं है। 9 30 32

618
00:43:23,760 --> 00:43:27,760
शिव से भिन्न विद्वेष विद्वेष सम्यता

619
00:43:27,760 --> 00:43:32,240
है ये। शिव से भिन्न किसी का ईश्वरत्व नहीं है। ठीक है?

620
00:43:32,240 --> 00:43:36,240
और शिव जी को तुम लोग अज्ञानी कहते हो ना। शिव जी को जगतगुरु कहा जा

621
00:43:36,240 --> 00:43:40,400
रहा है। कहां पर कहा जा रहा है? शिव पुराण 10 26 27

622
00:43:40,400 --> 00:43:44,480
विद्वेश्वर समिता उसमें कहा जा रहा है भगवान शिव के लिए

623
00:43:44,480 --> 00:43:48,800
जगतगुरु शब्द है शब्द देख लेना। अब मैं यहां पे दो-दो

624
00:43:48,800 --> 00:43:52,800
कैमरे लगा के नहीं रखता हूं तुम्हारी तरह कि एक कैमरे से सामने वाला

625
00:43:52,800 --> 00:43:57,040
फिर जो है दूसरे कैमरे या तुम तुम लोग एडिट करते होगे कि पहले सामने से

626
00:43:57,040 --> 00:44:01,120
ले लिया फिर ग्रंथ दिखाने के लिए यहां दिखा दिया। थोड़ा मेहनत करो और यदि

627
00:44:01,120 --> 00:44:05,200
कैमरे से छपी हुई चीजें दिखा देने पर ही वह प्रमाणित हो जाएगा तो कोई कुछ भी

628
00:44:05,200 --> 00:44:09,200
छाप सकता है आजकल कंप्यूटर से ठीक है

629
00:44:09,200 --> 00:44:12,160
तो

630
00:44:12,160 --> 00:44:16,400
तो शिव जी जगतगुरु कहे गए हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं शिव

631
00:44:16,400 --> 00:44:20,800
पुराण विद्वेष समिता 10 36 37

632
00:44:20,800 --> 00:44:24,800
और वहीं पर यह भी लिखा है कि शिवलिंग और शिव की प्रतिमा दोनों

633
00:44:24,800 --> 00:44:29,360
के पूजन द्वारा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव महापुराण

634
00:44:29,360 --> 00:44:32,080
एक पांच 31

635
00:44:32,080 --> 00:44:36,400
सब निकल जाएगा। जब मेरे सामने आओगे ना तो यह पादुर

636
00:44:36,400 --> 00:44:41,760
भूति याद आएगा बस पादुर पादुर यही करोगे पादुर पादुर

637
00:44:41,760 --> 00:44:45,840
ये सब मखौल बाजी वहां नहीं चलेगा इसीलिए फोन

638
00:44:45,840 --> 00:44:51,040
नहीं उठा रहे हो बस पादुर पादुर रह जाएगा बाबा जी वाला

639
00:44:51,040 --> 00:44:55,360
तो वो जो खीर का प्रसाद है इनका उसकी जो महक है

640
00:44:55,360 --> 00:44:59,360
वो इन लोगों को याद रह जाती है इसीलिए दिमाग झनझनाया रहता है और इसीलिए

641
00:44:59,360 --> 00:45:03,600
सब लोग ये सब बकवास करते हैं आकर के उल्टी सीधी कोई सिर पैर

642
00:45:03,600 --> 00:45:07,680
नहीं कबीर सागर से प्रमाण देंगे। अच्छा कबीर सागर से

643
00:45:07,680 --> 00:45:11,680
बात बता दूं जो इनकी प्रामाणिक गद्दी है कबीर जी की वो गद्दी

644
00:45:11,680 --> 00:45:15,760
वाले भी मेरे संपर्क में है। उनके अनुसार कबीर बीजक वहां का प्रामाणिक

645
00:45:15,760 --> 00:45:20,000
ग्रंथ है और इनके अनुसार कबीर सागर प्रामाणिक ग्रंथ है। और कबीर सागर

646
00:45:20,000 --> 00:45:24,240
प्रामाणिक ग्रंथ होते हुए भी इनका जो बाबा है जो इनको पादुभूत देता

647
00:45:24,240 --> 00:45:27,280
है। वह बाबा कबीर सागर में

648
00:45:27,280 --> 00:45:32,960
भी कहता है इसने काल में मिलावट कर दी। अरे तो भाई तो प्रमाण माने किसको?

649
00:45:32,960 --> 00:45:37,280
शास्त्रों से तुम्हारा बाबा सिद्ध होता है। ततर्शी

650
00:45:37,280 --> 00:45:41,600
उसी शास्त्र को बाबा कह देता है। इसमें काल ने मिलावट की है। तो फिर किस आधार

651
00:45:41,600 --> 00:45:45,680
पर माने कि बाबा ततर्शी है। बस इस

652
00:45:45,680 --> 00:45:49,680
आधार पे कि बाबा का प्रसाद खाएं और पादुरभूत हो जाए तुम्हारे

653
00:45:49,680 --> 00:45:53,760
जैसे। और जो जो तुम्हारे जैसा पादुभूत होता जाएगा

654
00:45:53,760 --> 00:45:57,760
वो जो है बाबा का भगत हो जाएगा। बाबा को प्रमाण मान लेगा। फिर बाबा

655
00:45:57,760 --> 00:46:02,160
जो जो कहेगा वो प्रमाण है। जो जो कहेगा प्रमाण नहीं है। यह है पादुभूत

656
00:46:02,160 --> 00:46:06,750
की व्याख्या। ठोको ताली। तो

657
00:46:06,750 --> 00:46:08,960
[गला साफ़ करने की आवाज़]

658
00:46:08,960 --> 00:46:13,200
ये शिव जी के बारे में हो गया और जो गुणातीत वाली

659
00:46:13,200 --> 00:46:17,280
बात है। हमने ये पीडीएफ कई बार दे रखी है और मैं यहां पे दोबारा से ये पीडीएफ

660
00:46:17,280 --> 00:46:22,960
दे दूंगा। ठीक है?

661
00:46:22,960 --> 00:46:27,200
सुनो। विष्णु पुराण दो एक तीन ब्रह्मा वहां पर जो है विष्णु

662
00:46:27,200 --> 00:46:31,200
भगवान के लिए ही कहा गया अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान

663
00:46:31,200 --> 00:46:35,520
वासुदेव विष्णु ठीक है और वेदों

664
00:46:35,520 --> 00:46:39,840
के द्वारा कौन प्राप्त होता है यह भी समझ लो वेदों के द्वारा

665
00:46:39,840 --> 00:46:44,320
वही भगवान विष्णु प्राप्त होते हैं जो ब्रह्मा विष्णु है महेश सब एक हैं

666
00:46:44,320 --> 00:46:49,680
ये भी समझ लो कहां लिखा है

667
00:46:49,680 --> 00:46:53,680
तुम्हारे लिए बार-बार बस यही करता रहूं जो जिन सवालों के जवाब कई

668
00:46:53,680 --> 00:46:57,840
बार दे चुका हूं। वही सवालों के जवाब देता रहूं क्योंकि तुम लोग वही

669
00:46:57,840 --> 00:47:03,840
वही प्रश्न करोगे बार-बार लोगों को भ्रमित करोगे। तो यह मैं उनके लिए बना रहा हूं।

670
00:47:03,920 --> 00:47:09,120
जिन लोगों को तुम बरगलाओगे कल को

671
00:47:09,120 --> 00:47:14,160
वेद जो है विष्णु के ही परायण हैं। दो तीन 15

672
00:47:14,160 --> 00:47:18,400
वेद नारायण के परायण हैं। समस्त

673
00:47:18,400 --> 00:47:22,560
यज्ञ नारायण की प्रसन्नता के लिए हैं। समस्त योग साधना

674
00:47:22,560 --> 00:47:26,720
तपस्या नारायण के लिए हैं। समस्त साध्य और साधन नारायण

675
00:47:26,720 --> 00:47:31,120
के लिए हैं। ज्ञान द्वारा भी नारायण ही जाने जाते हैं।

676
00:47:31,120 --> 00:47:35,120
ठीक है? ब्रह्मा विष्णु और शंकर

677
00:47:35,120 --> 00:47:39,200
रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं संहार के कारण विकार

678
00:47:39,200 --> 00:47:43,360
रहित विकार नहीं है। शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस

679
00:47:43,360 --> 00:47:47,520
सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है। हो गया। ब्रह्मा

680
00:47:47,520 --> 00:47:51,600
विष्णु महेश का यह परम ब्रह्मता सिद्ध कर दी।

681
00:47:51,600 --> 00:47:55,680
अब ये घोंंचू आगे क्या करते हैं? अब यहां तक राघव दास तो चुप हो गया

682
00:47:55,680 --> 00:48:00,160
था। वो देवी भागवत को ले आया था। देवी भागवत से यह हो रहा है वो हो रहा है। तो यहां पे घोंंचू

683
00:48:00,160 --> 00:48:04,160
सुन ले देवी भागवत में क्या लिखा है? सुन तेरा

684
00:48:04,160 --> 00:48:10,160
बाबा तुझे तुझे कभी नहीं बताएगा। तू अपने बाबा की किताबें पढ़ेगा भी नहीं।

685
00:48:10,720 --> 00:48:15,040
समय आने परमात्मा होते हुए वही देवी ही सगुण हो जाती है।

686
00:48:15,040 --> 00:48:19,200
वही देवी वो वो देवी का वास्तविक स्वरूप क्या

687
00:48:19,200 --> 00:48:23,280
है? वह भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है।

688
00:48:23,280 --> 00:48:27,440
देवी भागवत तीन छ सात और तुम्हारे यहां क्या होता

689
00:48:27,440 --> 00:48:30,480
है कि जो ना तो स्त्री है ना पुरुष है इनके यहां पे

690
00:48:30,480 --> 00:48:34,560
स्त्रियां कैसे बनती है पता है ये लोग क्या करते हैं ये कहते हैं

691
00:48:34,560 --> 00:48:38,640
कि देखो वहां पे जो विवाह हुआ था वहां पे क्या सात फेरे लिए गए थे ये

692
00:48:38,640 --> 00:48:42,720
जो दैय जो योग होते हैं दिव्य शक्तियों के योग इनको

693
00:48:42,720 --> 00:48:46,800
ये मनुष्यों के विवाह के दृष्टि से देखता है तो ये बोलता है कि वहां

694
00:48:46,800 --> 00:48:51,120
पे किसी का सात फेरा हुआ था क्या तो ये सात आठ फेरे सब मनगढ़ंत

695
00:48:51,120 --> 00:48:55,280
है ठीक है तो इसका मतलब क्या है कि कि इनके

696
00:48:55,280 --> 00:48:59,360
यहां पर जो वहां की जो चीजें हैं आध्यात्मिक जगत की चीजें हैं वो एज इट इज़ अप्लाई हो जाती

697
00:48:59,360 --> 00:49:03,920
हैं। तो अब क्या है कि इनके यहां पर इनके

698
00:49:03,920 --> 00:49:07,920
अनुसार रामपाल के अनुसार जो जिसका

699
00:49:07,920 --> 00:49:12,000
जो वो थी ना जिसने एक हाथ उठाया था वो जीवात्माओं में से जिसको ये लोग

700
00:49:12,000 --> 00:49:16,080
भगवती से जोड़ते हैं। वह कैरेक्टर है जो वह कैरेक्टर उसके

701
00:49:16,080 --> 00:49:20,240
जो है स्त्री जो अंग होता है जिसको भग कहते हैं।

702
00:49:20,240 --> 00:49:24,640
वह गुप्तांग स्त्री का वह था ही नहीं। तो वह काल ने अपने नाखूनों

703
00:49:24,640 --> 00:49:28,880
से चिपकाया, एडजस्ट किया। ठीक है? तो

704
00:49:28,880 --> 00:49:33,440
इसका मतलब इनके यहां की स्त्रियां जो होती हैं इनके अनुसार रामपाल

705
00:49:33,440 --> 00:49:37,440
के अनुसार और राघव दास के अनुसार इसके यहां की जो माताएं

706
00:49:37,440 --> 00:49:41,440
और बहनें होती हैं वो आती तो बिना उसके हैं प्रजनन

707
00:49:41,440 --> 00:49:45,600
अंग के प्रजन प्रजननांग के बिना वो आती हैं जन्म

708
00:49:45,600 --> 00:49:50,080
लेती हैं और उसके बाद ये लोग नाखूनों से जिससे वो बाई जाती हैं

709
00:49:50,080 --> 00:49:54,160
वो रामपाल के विवाह सिस्टम के अनुसार जिससे वो बाई जाती हैं फिर वो

710
00:49:54,160 --> 00:49:58,240
लोग उसके वो चिपकाते हैं फेवीक्विक से या फेविकॉल से वो चिपकाते

711
00:49:58,240 --> 00:50:02,400
हैं नाखूनों से उसको एडजस्ट करते हैं। उसके बाद फिर वो आगे जो है स्त्री शरीर

712
00:50:02,400 --> 00:50:06,640
पूरा हो के आगे चलता है मामला। ठीक है? ये

713
00:50:06,640 --> 00:50:10,640
घिनौनी बातें रामपाल ने अपनी किताबों में लिखी हुई है। स्त्री

714
00:50:10,640 --> 00:50:14,800
कैसे आती? पहले स्त्री है। पहले वो शरीर से पूरी

715
00:50:14,800 --> 00:50:18,880
तरीके से स्त्री नहीं है। पहले वो स्त्री घोषित हो गई। लड़की का रूप रंग अच्छा

716
00:50:18,880 --> 00:50:23,120
था। ये सब लिखा है। उसके बाद उसके जो है जो लड़की का जो स्त्री

717
00:50:23,120 --> 00:50:27,360
होने का जो सबसे जो स्वरूप भूत एक अंग मान

718
00:50:27,360 --> 00:50:31,360
लीजिए आप उसको तो वो जो है वो उसके बाद राक्षस उसके लगाता है तब

719
00:50:31,360 --> 00:50:35,360
वो जो है स्त्री बनती है। तो इनके यहां की क्योंकि ये लोग आध्यात्मिक

720
00:50:35,360 --> 00:50:39,440
जगत की चीजों को एज इट इज़ लागू करते हैं अपने यहां। जैसे इन्होंने ब्याह को लागू किया

721
00:50:39,440 --> 00:50:43,600
है। तो इनके यहां क्या है कि स्त्रियां जो हैं

722
00:50:43,600 --> 00:50:47,840
वह तब बनती हैं जब ब्याह हो जाता है और ब्याह होने के बाद जो है जिसके साथ ब्याह

723
00:50:47,840 --> 00:50:52,240
गई हैं वह जो है नाखूनों से फेविक्विक के

724
00:50:52,240 --> 00:50:56,480
फेविक्विक या फेविकॉल पता नहीं जो ज्यादा मजबूती से टिका रहे उसके

725
00:50:56,480 --> 00:51:01,040
द्वारा वो चिपकाया जाता है जो प्रजनन अंग होता है

726
00:51:01,040 --> 00:51:01,540
क्या

727
00:51:01,360 --> 00:51:05,360
ऐसा ही है तो ये फॉल्स चीजें हैं उनका

728
00:51:05,360 --> 00:51:09,440
उदाहरण है ये रामपाल की हास्यात्मक बातें ठोको ताली

729
00:51:09,440 --> 00:51:11,760
अच्छा

730
00:51:11,760 --> 00:51:16,080
तो यहां से हमने क्या सिद्ध कर लिया

731
00:51:16,080 --> 00:51:20,080
कि भगवती वो है ही नहीं जिस जिसके कारण की

732
00:51:20,080 --> 00:51:24,480
उनके साथ बलात्कार होने की बात हालांकि भगवान बहुत

733
00:51:24,480 --> 00:51:28,720
हृदय को दुख होता है जितनी बार मैं ये बात बोलता हूं पर मैं

734
00:51:28,720 --> 00:51:32,880
यह बोलनी पड़ती है आप लोगों को जगाने के लिए छोड़ देते हैं

735
00:51:32,880 --> 00:51:37,040
अब यहां तक ये हो गया अब ये घोंंचू आगे क्या कह रहा है इसने

736
00:51:37,040 --> 00:51:41,280
भगवती के साथ बलात्कार को सिद्ध करने का प्रयास किया कबीर सागर

737
00:51:41,280 --> 00:51:45,360
से जिसको ये खुद प्रामाणिक नहीं मानते उसमें काल ने मिलावट कर रखी है वहां

738
00:51:45,360 --> 00:51:49,360
से सिद्ध करने का प्रयास किया और हम ना तो कबीर सागर को

739
00:51:49,360 --> 00:51:53,440
अगर वो पूरा शुद्ध रूप से भी हो तब भी हमारे लिए वो प्रमाण नहीं है।

740
00:51:53,440 --> 00:51:57,520
मगर यह हमारे लिए हमारे विरोध में की जाने वाली चीजों को सिद्ध कहां

741
00:51:57,520 --> 00:52:02,400
से करेगा ये? लल्लूलाल कबीर सागर से और उसके बाद

742
00:52:02,400 --> 00:52:04,880
कबीर सागर से सिद्ध करने के बाद

743
00:52:04,880 --> 00:52:09,200
फिर आगे ये बोल रहा है कि भैया जो है देवी

744
00:52:09,200 --> 00:52:13,600
और परम ब्रह्म अभेद है। इससे पता लगता है कि वह ब्रह्म जो है

745
00:52:13,600 --> 00:52:17,600
वह उनका पति है। है ना? तो

746
00:52:17,600 --> 00:52:21,600
कई जगह आत्मा को भी परमेश्वर के साथ अभेद कहा गया

747
00:52:21,600 --> 00:52:25,920
है। तेरी किताबों में तेरा जूता ही तेरे सर मारूंगा। तेरी किताबों

748
00:52:25,920 --> 00:52:29,920
में आत्मा को सुन क्या लिखा है दूसरे उसमें दूसरे अध्याय

749
00:52:29,920 --> 00:52:33,920
में जहां पर ये दो 16 वाली बात

750
00:52:33,920 --> 00:52:37,920
आती है ना ननम छिंदती दो 23 जहां आत्मा को वो

751
00:52:37,920 --> 00:52:42,240
कहा गया है शाश्वत नित्य कहा गया है तो वहां पर तेरे बाबा ने लिखा है

752
00:52:42,240 --> 00:52:47,200
कि आत्मा का अभेद जो आत्मा

753
00:52:47,200 --> 00:52:51,200
ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण जो आत्मा है वह अविनाशी

754
00:52:51,200 --> 00:52:55,440
है। ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण ठीक है। वह अविनाशी

755
00:52:55,440 --> 00:53:00,560
है। तो यहां पर भी अभेद चीज हो गई। अब इसका अर्थ हो गया कि आत्मा

756
00:53:00,560 --> 00:53:04,560
रामपाल के अनुसार रामपाल का जो ईश्वर है जिस जो रामपाल

757
00:53:04,560 --> 00:53:08,560
के रूप में प्रकट हुआ है उसमें और रामपाल के अनुसार जो आत्माएं

758
00:53:08,560 --> 00:53:12,720
हैं जो इसके तत्वदर्शी चिलवा भगत हैं वो अभेद है तो इसलिए वह पतिपत्नी

759
00:53:12,720 --> 00:53:16,800
हो गए। यानी कि राघव और इस हिसाब से

760
00:53:16,800 --> 00:53:20,000
देखा जाए तो राघव को और जेलकट्टू को

761
00:53:20,000 --> 00:53:24,480
पतिप्नी मानना पड़ेगा। तो यह राघव जो है

762
00:53:24,480 --> 00:53:28,480
राघव जैसी जो चिलए भगतों की जो तत्व ज्ञानियों की जो आत्मा है

763
00:53:28,480 --> 00:53:32,480
15 करोड़ वह और रामपाल यह सब पति पत्नी क्योंकि वहां अभेद आ गया

764
00:53:32,480 --> 00:53:36,800
मामला अभेद शब्द आ गया तो इसलिए पतिपत्नी हो गए दूसरी बात

765
00:53:36,800 --> 00:53:41,120
कि ब्रह्म का अर्थ जो है हमारे यहां पर तो भाई शिव है शंकर

766
00:53:41,120 --> 00:53:45,120
है ब्रह्म का अर्थ 50 जगह दिखा चुके हैं ब्रह्म का अर्थ

767
00:53:45,120 --> 00:53:49,920
शिव भगवान स्वयं कह रहे हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं ठीक

768
00:53:49,920 --> 00:53:54,080
तो इसको हमारे लिए यह है और तुम्हारे लिए जो तुम मानते हो उसके अनुसार तुम

769
00:53:54,080 --> 00:53:58,080
वो मान लो कि रामपाल और जितने चिलवा भगत आत्माएं हैं वह

770
00:53:58,080 --> 00:54:02,160
सब पतिप हैं और पतिप्नी है और फिर अच्छा

771
00:54:02,160 --> 00:54:06,400
एक चीज और है यहां से इसने केवल एक अभेद शब्द

772
00:54:06,400 --> 00:54:11,760
वो जो अभिषेक है वो अपने वीडियो में कह रहा है कि भाई

773
00:54:11,760 --> 00:54:15,760
जो प्रकृति है और पुरुष को अभेद कहा गया

774
00:54:15,760 --> 00:54:19,840
है अभेद इससे उनका विवाह सिद्ध हो गया और

775
00:54:19,840 --> 00:54:24,000
विवाह से बलात्कार भी सिद्ध हो गया कितने नीच नीचता भरी बातें

776
00:54:24,000 --> 00:54:28,880
हैं भाई। अरे जोक ऑफ द डे तो है ही तुम्हारी मूर्खता।

777
00:54:28,880 --> 00:54:33,120
मगर नीचता कितनी करोगे कि तुमने केवल

778
00:54:33,120 --> 00:54:35,360
एक अभेद शब्द से विवाह निकाल लिया

779
00:54:35,360 --> 00:54:39,600
और विवाह में गौर रूप से तुमने बलात्कार भी मान लिया। यानी

780
00:54:39,600 --> 00:54:43,680
कि इनके यहां पर जो विवाह है उसमें बलात्कार होता है। इसका अर्थ

781
00:54:43,680 --> 00:54:47,760
तो यह मानना पड़ेगा ना। अरे बेवकूफ तेरी बातें इतनी

782
00:54:47,760 --> 00:54:51,760
ज्यादा तेरे ही ऊपर हावी हो जाएंगी ना कि सोचेगा कि भाई कहां

783
00:54:51,760 --> 00:54:55,840
चुल्लू पानी में जाकर के डूब मरूं जो मैंने बोला है।

784
00:54:55,840 --> 00:55:00,800
जो तू बोल रहा है। विवाह का मतलब बलात्कार है क्या?

785
00:55:00,800 --> 00:55:04,880
बलात्कार सिद्ध करना है ना तुझे शास्त्रों से। तो तू

786
00:55:04,880 --> 00:55:09,120
विवाह क्यों दिखा रहा है? हालांकि वो विवाह भी नहीं है। और अगर विवाह मानोगे

787
00:55:09,120 --> 00:55:13,120
तो फिर तेरे ऊपर यह आएगा कि तू पत्नी है रामपाल की कबीर की

788
00:55:13,120 --> 00:55:17,120
और रामपाल कबीर कबीर की पत्नी है। ये सब मानना पड़ेगा। और फिर

789
00:55:17,120 --> 00:55:21,520
उनके बीच तुम्हें ये सब मानना पड़ेगा नाखूनों से इसका ये अंग लगा दिया।

790
00:55:21,520 --> 00:55:25,600
उसका वो अंग लगा दिया। ये सब भी मानना पड़ेगा क्योंकि तुम आध्यात्मिक जगत की चीजों को

791
00:55:25,600 --> 00:55:29,680
एज इट इज मानते हो यहां पर। यह भी तुम्हारे से ही सिद्ध कर दिया। क्योंकि शिव

792
00:55:29,680 --> 00:55:34,080
पार्वती ने या वहां पर दय जगत में होने वाले विवाह में सात फेवरे

793
00:55:34,080 --> 00:55:38,480
तुम्हारी जानकारी में नहीं लिए तो इसलिए यहां पर भी नहीं लेने चाहिए। यानी आध्यात्मिक

794
00:55:38,480 --> 00:55:42,640
जगत की चीजें एज इट इज यहां मानी जाएगी। इसका मतलब रामपाल

795
00:55:42,640 --> 00:55:46,640
कबीर की पत्नी है और जितने 15 करोड़ तथाकथित

796
00:55:46,640 --> 00:55:50,400
15 करोड़ है कि नहीं है मुझे नहीं पता। मगर तुम तो कहते हो 15 करोड़ है। तो

797
00:55:50,400 --> 00:55:55,760
15 करोड़ पत्नियां है रामपाल की फिर हां

798
00:55:55,760 --> 00:56:00,080
और फिर वो किस तरह से जो लोग उस अंग

799
00:56:00,080 --> 00:56:04,080
के साथ नहीं है उस अंग का उस अंग को फिट कैसे

800
00:56:04,080 --> 00:56:08,480
करेंगे नाखूनों के द्वारा फेविकॉल से फेविक्विक से वो सारी क्रियाएं ये सब तुम्हारे

801
00:56:08,480 --> 00:56:13,940
साथ होंगी ना राघव और अभिषेक के साथ ठोको [हंसी]

802
00:56:13,940 --> 00:56:18,240
[गहरी सांस लेने की आवाज़] ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़] तो अभेद का मतलब

803
00:56:18,240 --> 00:56:22,480
होता है कि दो नहीं है एक ही है

804
00:56:22,480 --> 00:56:26,880
केवल दिख दो रहे ये है अभेद और जैसे ही तुम किसी भी

805
00:56:26,880 --> 00:56:31,280
मामले में अलग-अलग कर दोगे तो अभेद नहीं कहलाएगा। यह सनातनियों

806
00:56:31,280 --> 00:56:34,000
के लिए जवाब। ठीक है?

807
00:56:34,000 --> 00:56:38,720
अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] अब इसने एक और कहा है कि गुणातीत।

808
00:56:38,720 --> 00:56:42,720
तो ये जो हमने पीडीएफ आज से दो साल पहले बना रखी थी ना ये सब

809
00:56:42,720 --> 00:56:46,880
जवाब उसी में दे दिए थे। गुणातीत इत्यादि ये सब तो

810
00:56:46,880 --> 00:56:50,960
शायद इसमें मुझे मैं आपका वह भी कर दूं। आज का दिन जो है आगे नहीं

811
00:56:50,960 --> 00:56:56,960
बढ़ पाएंगे हम लोग।

812
00:57:01,760 --> 00:57:07,760
शिव ही निष्कल रूप से ब्रह्म है।

813
00:57:19,520 --> 00:57:23,760
इनका एक आरोप है कि भाई यह लोग जो है ब्रह्मा विष्णु

814
00:57:23,760 --> 00:57:28,480
महेश जो हैं गुणों से रहित नहीं है। अब सुन श्रीमद् भागवत दो 5 18

815
00:57:28,480 --> 00:57:32,880
भगवान माया के गुणों से रहित है। विष्णु भगवान अनंत है सृष्टि

816
00:57:32,880 --> 00:57:37,040
स्थिति और प्रलय करने के लिए रजोगुण सतोगुण एवं तमोगुण माया के यह तीन गुण

817
00:57:37,040 --> 00:57:41,040
उनकी इच्छा से उनके द्वारा स्वीकार किए जाते हैं। और

818
00:57:41,040 --> 00:57:45,040
तब कार्य कारण वाले भेद से वो उस रूप में वहां दिखते हैं। मगर गुणों

819
00:57:45,040 --> 00:57:49,120
से रहित है। ये आ गया। ठीक। शिव जी किसी के किसी भी प्रकार के

820
00:57:49,120 --> 00:57:53,200
गुण से रहित हैं। एवं वही सृष्टि की उत्पत्ति पालन और संहार तीनों करते हुए ब्रह्मा विष्णु

821
00:57:53,200 --> 00:57:57,200
और शिव नाम धारण करते हैं। अतः इस प्रकार शिव जी की वो सिद्ध हो

822
00:57:57,200 --> 00:58:01,440
गई। ये कहां लिखा है? श्रीमद् भागवत 8 7 23 31 महाभारत

823
00:58:01,440 --> 00:58:05,520
अनुशासन पर्व दान धर्म पर्व अध्याय 14

824
00:58:05,520 --> 00:58:08,880
224

825
00:58:08,880 --> 00:58:12,960
अच्छा भगवती के लिए भी आ गया। भगवती सगुणा या निर्गुणा

826
00:58:12,960 --> 00:58:17,040
केवल कार्य भेद से प्रतीत होती है। कार्य कार्य करने वाली के रूप में

827
00:58:17,040 --> 00:58:21,360
सगुण है और जो है कारण के रूप में कि इस सृष्टि

828
00:58:21,360 --> 00:58:25,440
का कारण कौन है तो उस रूप में वो निर्गुण है।

829
00:58:25,440 --> 00:58:29,520
आगे जिस परम पुरुष को त्रिगुणातीत कहा गया जो अभेद है भगवती के

830
00:58:29,520 --> 00:58:33,600
साथ वह त्रिगुणातीत कहा गया है। जिस परम पुरुष को त्रिगुणातीत कहा गया है।

831
00:58:33,600 --> 00:58:37,840
वही उत्पत्ति स्थिति संहार कार्य का संपादन करने वाली महामाया

832
00:58:37,840 --> 00:58:42,320
अर्थात भगवती हैं। कौन है जिस त्रिगुणातीत

833
00:58:42,320 --> 00:58:46,320
अरे हिंदी समझ में नहीं आएगी मैं बता देता हूं थोड़ी तुम तो वो हो ना खीर

834
00:58:46,320 --> 00:58:50,720
वाले फड़ तो हिंदी बता दे त्रिगुणातीत का मतलब होता है गुणों से

835
00:58:50,720 --> 00:58:54,720
तीनों गुणों से रहित परे ठीक है तो ये हो गया शास्त्रों तुम्हें

836
00:58:54,720 --> 00:58:58,720
शास्त्रों से ही समझ में आता है अभी तर्क भी दूंगा और उसके बाद तुम्हारा

837
00:58:58,720 --> 00:59:04,160
थोड़ा सा तुम्हारी थोड़ी सी क्या कहते हैं चुटकी भी लूंगा

838
00:59:04,160 --> 00:59:08,160
तो ये सब आ गया निर्गुण तो एकमात्र परमात्मा देवी ही है देवी भागवत

839
00:59:08,160 --> 00:59:12,320
तीन नौ 70 कहां ले जाओ? निर्गुण। कितनी बार निर्गुण

840
00:59:12,320 --> 00:59:16,560
शब्द आ रहा है भाई। तुम कह रहे हो वो गुणों से प्रभावित है। अब चिलए भगतों

841
00:59:16,560 --> 00:59:20,720
तुम एक बात बताओ। तत्वदर्शी तुम एक

842
00:59:20,720 --> 00:59:24,160
बात बताओ। हालांकि तुम्हारे बाबा के अनुसार ही तुम लोग फड़ हो और गवार

843
00:59:24,160 --> 00:59:29,280
हो। तुम्हारी गरिमा गीता की में लिखा हो। अब चिलवे भक्तों तुम एक बात बताओ।

844
00:59:29,280 --> 00:59:34,480
एक तरफ तुम कहते हो कि ब्रह्मा विष्णु महेश स्वयं गुण है।

845
00:59:34,480 --> 00:59:38,640
गीता में कहा जा रहा है इन तीनों गुणों से रहित हो जाओ। ठीक है? तो

846
00:59:38,640 --> 00:59:42,720
यह कह रहा है इनका बाबा कि वहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश से अलग

847
00:59:42,720 --> 00:59:46,880
होने की बात की जा रही है। गीता में कहा जा रहा है कि ये जो सतजो तम गुण

848
00:59:46,880 --> 00:59:50,880
यानी कि यहां इस संसार में हम जिन चीजों के प्रति आकर्षित होते हैं वो या तो

849
00:59:50,880 --> 00:59:55,120
सतोगुणी होती है या रजोगुणी होती है या फिर तमोगुणी होती है। तो इनसे

850
00:59:55,120 --> 00:59:59,200
इनकी भक्ति मत करो। यानी इनके पीछे माया जगत के सतम गुण के पीछे

851
00:59:59,200 --> 01:00:03,440
मत भागो। भगवान के पीछे भागो। यह कहा जा रहा है। मगर इसने वहां सतरज और तम का अर्थ निकाल

852
01:00:03,440 --> 01:00:07,760
लिया कि वो ब्रह्मा विष्णु महेश ही है। अब तू यह बता कि ब्रह्मा,

853
01:00:07,760 --> 01:00:11,920
विष्णु, महेश सतर और तम गुण है तेरे हिसाब से तेरा ही जूता तेरे साथ

854
01:00:11,920 --> 01:00:16,000
ठोको ताली। अब तू यह बता कि सतरज और तम

855
01:00:16,000 --> 01:00:20,160
यह ब्रह्मा विष्णु महेश यह गुण है या गुणों से प्रभावित है अगर

856
01:00:20,160 --> 01:00:24,960
गुणों से प्रभावित है जो कि तू कह रहा है तेरा ये चलवा भगत कह रहा है जो

857
01:00:24,960 --> 01:00:29,040
बिना प्रजनन अंग के अभी तुम्हारे ही

858
01:00:29,040 --> 01:00:33,440
शास्त्र तुम्हारी शास्त्र व्याख्या के अनुसार रामपाल की पत्नी सिद्ध होते हो

859
01:00:33,440 --> 01:00:37,520
तो ये जो अभिषेक कह रहा है या कह रही है मैं समझ क्या कहूं अभिषेक

860
01:00:37,520 --> 01:00:39,200
तुम्हें रामपाल की पत्नी होने

861
01:00:39,200 --> 01:00:43,200
के नाते स्त्रीलिंग शब्द का उपयोग करूं या मतलब मतलब तुम्हारे जो सड़े

862
01:00:43,200 --> 01:00:47,200
घिसे पिटे सिद्धांत है उनके अनुसार रामपाल की पत्नी होने के नाते

863
01:00:47,200 --> 01:00:51,200
राघव और अभिषेक तुम्हारे लिए स्त्रीलिंग प्रोनाउंसिएशन करूं

864
01:00:51,200 --> 01:00:55,200
उच्चारण करूं या फिर पुल्लिंग करूं। चलो पुल्लिंग ही कर

865
01:00:55,200 --> 01:00:59,280
लेता हूं। नहीं तो तुम पता नहीं कहां आज ही रात को कहीं ऐसा ना हो मेरे कारण जो

866
01:00:59,280 --> 01:01:03,280
है कहीं जो है इंतजाम कर लो। ऐसा कुछ चुल्लू भर

867
01:01:03,280 --> 01:01:07,280
पानी में है ना। तो पुल्लिंग कर देता हूं। तो यह

868
01:01:07,280 --> 01:01:11,920
जो चिलए भगत हैं यह कह रहा है अभिषेक कह रहा है कि

869
01:01:11,920 --> 01:01:16,000
और यह राघव दास कह रहा है कि यह जो है गुणों से प्रभावित नहीं है।

870
01:01:16,000 --> 01:01:20,320
शिवश नारायण द्विवेदी सिद्ध अबे तू पहले तय कर ले कि वह गुणों से प्रभावित

871
01:01:20,320 --> 01:01:24,640
है या तेरे आका के अनुसार वो गुण ही है। तो

872
01:01:24,640 --> 01:01:28,880
गुण ही है तो वो खुद से प्रभावित है क्या? क्या बताया

873
01:01:28,880 --> 01:01:32,960
बता रहा है भाई तू ये? प्रभावित होना एक क्रिया है। क्रिया होती है दो

874
01:01:32,960 --> 01:01:38,000
के बीच में। क्रिया किसके बीच में होती है? ये सब ये सब बातें तुम्हें कहां मालूम है?

875
01:01:38,000 --> 01:01:42,000
अब जब यह वाली बात आ ही गई है तो पूर्णतीत तो मैंने शास्त्रों से दिखा दिया। अब मैं

876
01:01:42,000 --> 01:01:46,160
चलते चलते एक बात और पूछ लेता हूं। यह लोग गुणों से प्रभावित है। चल मान

877
01:01:46,160 --> 01:01:50,240
लिया ये लोग तो थे नहीं काल के समय में। फिर वहां पे वो

878
01:01:50,240 --> 01:01:54,400
कौन से गुणों से प्रभावित हुआ तेरा काल?

879
01:01:54,400 --> 01:01:54,960
अच्छा

880
01:01:54,960 --> 01:01:59,280
अब तुम लोग यह कहोगे कि नहीं नहीं यह जो है

881
01:01:59,280 --> 01:02:03,520
जो ब्रह्मा विष्णु महेश उनका गुणों से प्रभावित होना दिखाई देता है तो

882
01:02:03,520 --> 01:02:08,640
भाई तेरा जो तेरे अनुसार जो भी परमात्मा का स्वरूप है

883
01:02:08,640 --> 01:02:12,640
तेरा रामपाल जेल कट्टू वो भीख मांग रहा है दया की फिर उसको तू

884
01:02:12,640 --> 01:02:17,120
गुणों से परे क्यों नहीं गुणों से प्रभावित क्यों नहीं मांग रहा है मान रहा है

885
01:02:17,120 --> 01:02:21,200
जमानत मांग रहा है अभी वो सुनने में आ रहा है हाई कोर्ट में

886
01:02:21,200 --> 01:02:25,280
इसको तारीख पे प्रकट होना है वहां पर तो ये उड़ के जाके प्रकट नहीं हो रहा है।

887
01:02:25,280 --> 01:02:29,360
जबकि यह तो अंतर्यामी है। ये तो इनका खीर वाला सबका स्वामी है। मगर वो

888
01:02:29,360 --> 01:02:33,360
वहां पर हाई कोर्ट जा नहीं पा रहा। उड़ के गायब हो के ये सब नहीं कर पा रहा। बड़ा गजब

889
01:02:33,360 --> 01:02:37,680
का सर्वशक्तिमान ईश्वर है इनका। वो वहां प्रकट नहीं हो पा रहा है। जबकि कबीर

890
01:02:37,680 --> 01:02:41,760
ही इसके रूप में बैठे हैं इनके अनुसार। है ना? तो वो कोर्ट में जा नहीं पा

891
01:02:41,760 --> 01:02:46,000
रहा है। कोर्ट बुला रही है। वहां पर पता है क्या लिख के दिया जा रहा है एप्लीकेशन में कि हमारे

892
01:02:46,000 --> 01:02:50,160
गुरु जी की ना रामपाल की तबीयत खराब है।

893
01:02:50,160 --> 01:02:54,160
10 तरह की बीमारियों ने घेर रखा है रामपाल को।

894
01:02:54,160 --> 01:02:58,400
इसलिए वो तारीख पे नहीं आ सकते हैं। आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए

895
01:02:58,400 --> 01:03:02,720
उनकी तारीख करवा लीजिए। क्यों बे? ये

896
01:03:02,720 --> 01:03:07,120
कौन से गुणों से प्रभावित है तुम्हारा बाबा? हैं?

897
01:03:07,120 --> 01:03:10,000
यह एप्लीकेशन लिख रहा है। अच्छा लिख रहा है तो झूठ

898
01:03:10,000 --> 01:03:14,000
लिख रहा है क्योंकि प्रभावित क्योंकि बीमार तो वह है नहीं तो झूठ लिख रहा है। तो यह कौन सा

899
01:03:14,000 --> 01:03:18,400
गुण हुआ? तमोगुण हुआ, रजोगुण हुआ, सतोगुण हुआ। कौन से गुण से प्रभावित

900
01:03:18,400 --> 01:03:22,400
है? और फिर इतनी सारी चीजें जो मार्केट में चल

901
01:03:22,400 --> 01:03:26,480
रही है मालूम है ना भविता इत्यादि इतनी थैली भर के 1 किलो ये मिला, वो मिला।

902
01:03:26,480 --> 01:03:30,800
ये सब। ये कौन से गुणों की वो पहचान? तो ये सब होते हुए और जेल

903
01:03:30,800 --> 01:03:34,640
गया। जेल में रहा।

904
01:03:34,640 --> 01:03:38,080
तमाम सारी चीजें।

905
01:03:38,080 --> 01:03:40,320
अच्छा

906
01:03:40,320 --> 01:03:44,560
तुम्हारा बाबा कहता है कि मैं भगवान

907
01:03:44,560 --> 01:03:48,640
हूं। कबीर का अवतार हूं तो फिर काहे को गरीब दास के पास जाना

908
01:03:48,640 --> 01:03:52,640
पड़ रहा है भाई? मंत्र लेने तंत्र लेने। क्यों गुरु के पास

909
01:03:52,640 --> 01:03:56,640
जाना पड़ रहा है? अज्ञानी भी था। तो अज्ञानी होते हुए खुद

910
01:03:56,640 --> 01:04:00,800
को जो है भगवान बोल रहा है या तो भगवान तुम्हारे यहां अज्ञानी है

911
01:04:00,800 --> 01:04:04,960
और या फिर अज्ञानी होते हुए वो बोल रहा है तो वो गुणों से प्रभावित है

912
01:04:04,960 --> 01:04:09,040
या फिर एक तीसरी चीज जब तुम लाओगे ये तो उनकी लीला है

913
01:04:09,040 --> 01:04:13,280
लीला ले आओगे ना तो लीला केवल रामपाल पे फिट हो सकती है

914
01:04:13,280 --> 01:04:17,440
और कहीं तो फिट हो नहीं सकती इसलिए तुम ये कहोगे भले ही शास्त्रों में लिखा

915
01:04:17,440 --> 01:04:21,600
हो कि वो गुणातीत है मगर शास्त्रों में दी गई लीलाओं के आधार पर

916
01:04:21,600 --> 01:04:25,120
वो गुणों से प्रभावित है और भले ही रामपाल का कहीं किसी

917
01:04:25,120 --> 01:04:29,280
शास्त्र में ना लिखा हो कुछ भी मगर प्रत्यक्ष रूप से

918
01:04:29,280 --> 01:04:33,360
सिद्ध हो जाने पर तुम यह कहोगे कि वो गुणों से प्रभावित नहीं

919
01:04:33,360 --> 01:04:37,920
है। वो रोज शौचालय जा रहा है। रोज शौच जा रहा है।

920
01:04:37,920 --> 01:04:42,240
मगर वो किसी चीज से वो माया से प्रभावित नहीं है। वो संसार के उसमें

921
01:04:42,240 --> 01:04:46,240
नहीं है। दाब में प्रकृति से परे है। वो जबकि

922
01:04:46,240 --> 01:04:50,400
रोज लोटा लेकर के वो भी जाता है। जाता है ना कि नहीं जाता?

923
01:04:50,400 --> 01:04:54,480
रोके बैठा है। रोके बैठा है तो तुम्हारी खीर का और तुम्हें झटका लगा

924
01:04:54,480 --> 01:04:58,600
होगा। फिर तो अगर रोके बैठा होगा तो तो

925
01:04:58,600 --> 01:05:02,240
[गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] ये सब बातें हैं।

926
01:05:02,240 --> 01:05:06,800
राघव दास ने जो संपर्क करने वाला जो बेवकूफ बनाया है अपने गवर्नरों को

927
01:05:06,800 --> 01:05:12,800
तत्व ज्ञानियों को उसके बारे में मैंने बता दिया।

928
01:05:12,800 --> 01:05:16,880
मां भगवती के साथ दुराचरण के लिए कबीर सागर खोला। कबीर सागर की क्या

929
01:05:16,880 --> 01:05:20,960
वैल्यू है? इनके ही अनुसार हमारे अनुसार तो भाई जब तक वेद की सीमा में है तब तक

930
01:05:20,960 --> 01:05:25,040
मोस्ट वेलकम है। यदि उसका कुछ ऐसा अर्थ निकल रहा है जो वेद के विरुद्ध है। नो

931
01:05:25,040 --> 01:05:29,120
वेलकम तुम्हारे अनुसार भी उसका वेलकम नहीं है। क्योंकि जब तक उसका अर्थ

932
01:05:29,120 --> 01:05:33,200
जो है रामपाल के अनुसार निकल रहा है तब तक वेलकम है। वरना नो वेलकम। तो जो

933
01:05:33,200 --> 01:05:37,680
चीज तुम्हारे खुद के लिए प्रमाण नहीं है वो हमारे को प्रमाण क्यों दिखा रहा है बे?

934
01:05:37,680 --> 01:05:40,240
मूर्ख कहीं के जेब में नहीं है।

935
01:05:40,240 --> 01:05:43,200
टल्ला टिल्ला मांग रहा है लाल किला। फिर

936
01:05:43,200 --> 01:05:47,040
तीसरी बात कि हमारे यहां आना पड़ेगा।

937
01:05:47,040 --> 01:05:51,280
इसका भी मैंने उत्तर दे दिया कि पांच महिला और

938
01:05:51,280 --> 01:05:55,280
एक बच्चे की हत्या का मुकदमा मेरे ऊपर नहीं चल रहा है। मेरे पक्ष के ऊपर नहीं चल रहा

939
01:05:55,280 --> 01:05:59,520
है। 12 साल जेल में मैं नहीं रह के आया। ठीक है? और

940
01:05:59,520 --> 01:06:03,600
हर पन्ने पर तुम्हारा दोगलापन हर बात में तुम्हारा दोगलापन सिद्ध हो

941
01:06:03,600 --> 01:06:07,600
रहा है। मेरा नहीं सिद्ध हो रहा है। और तब भी मैं

942
01:06:07,600 --> 01:06:11,760
तुझे अपने आने की थोड़ी ना कह रहा हूं। है पुरुषत्व

943
01:06:11,760 --> 01:06:15,760
शेष तो बीच के स्थान पर मिल पता चल

944
01:06:15,760 --> 01:06:21,280
जाएगा यह राग कितना बड़ा तुम लोग तत्व ज्ञानी हो समझ गए

945
01:06:21,280 --> 01:06:26,000
चौथी बात मैंने यह भी दिखा दिया ऑन लाइव स्ट्रीम

946
01:06:26,000 --> 01:06:30,240
कितना साहस है इसके अंदर जो ताल ठोक रहा है वीडियो में कि मैंने उसको

947
01:06:30,240 --> 01:06:34,480
कई बार बुलाया अरे मनुवादी शंकराचार्य के सैनिक का फोन

948
01:06:34,480 --> 01:06:38,640
तक उठाने की तो सामर्थ्य है नहीं तुम में बात करते हो तुम सामना

949
01:06:38,640 --> 01:06:42,640
करोगे मालूम है तुम्हें में केवल ज्ञान

950
01:06:42,640 --> 01:06:46,640
से केवल वार्तालाप से तुम्हारी थूथुन को रगड़ दिया

951
01:06:46,640 --> 01:06:49,120
जाएगा।

952
01:06:49,120 --> 01:06:53,440
जगह नहीं मिलेगी मुंह छुपाने की। ये मालूम है तुम्हें। इसलिए

953
01:06:53,440 --> 01:06:58,160
अपने गवर्नरों के लिए वीडियो बनाते हो कि गवर्नर संतुष्ट हो जाए।

954
01:06:58,160 --> 01:06:58,660
उसके

955
01:06:58,560 --> 01:07:02,720
बाद फिर तुम कह रहे हो कि गुणातीत है। शास्त्रों से दिखा

956
01:07:02,720 --> 01:07:06,880
दिया और तर्क से भी दिखा दिया। फिर तुम्हारा ही जूता तुम्हारे

957
01:07:06,880 --> 01:07:10,960
सर भी मार दिया। ठीक है? और यह भी मैंने बता दिया

958
01:07:10,960 --> 01:07:15,040
कि भाई अगर इनके यहां के सिद्धांतों को मान लिया जाए। हालांकि मैं इनके

959
01:07:15,040 --> 01:07:19,440
यहां के सिद्धांतों को नहीं मानता और एक मातृशक्ति होने के नाते सभी स्त्रियों

960
01:07:19,440 --> 01:07:24,160
का सम्मान है। मगर इनके सिद्धांतों को मान लिया जाए तो इनके यहां की स्त्रियां

961
01:07:24,160 --> 01:07:28,160
ब्याह के बाद जब फेरे जब फेरे नहीं इनका जो 17 मिनट वाला ब्याह

962
01:07:28,160 --> 01:07:32,480
है उसके बाद इनके यहां की स्त्रियां

963
01:07:32,480 --> 01:07:37,120
वो 17 मिनट वाले विवाह के बाद जब पति के द्वारा फेविकोल

964
01:07:37,120 --> 01:07:41,360
से या फेविक्विक से एक विशेष प्रकार का अंग उनके चिपकाया जाता है।

965
01:07:41,360 --> 01:07:45,520
तब वह संपूर्ण रूप से वह स्त्री बनती है, वह महिला बनती है जिनको

966
01:07:45,520 --> 01:07:49,600
हम महिला कहते हैं। साधारण लोग यह तो खीर जगत के लोग है ना भाई

967
01:07:49,600 --> 01:07:53,120
इनकी तो बात ही निराली है। ठीक है?

968
01:07:53,120 --> 01:07:57,200
यह भी मैंने बता दिया। गुणों से रहित होना भी सिद्ध हो गया।

969
01:07:57,200 --> 01:08:01,440
और अगर शास्त्रों में कहीं पर वर्णन नहीं है रामपाल

970
01:08:01,440 --> 01:08:05,440
का। वो दिख रहा है जो रोज लोटा लेकर के जाता हुआ संडास तब

971
01:08:05,440 --> 01:08:09,440
भी वह प्रकृति के दाब में सिद्ध नहीं होता है क्योंकि भैया बाबा

972
01:08:09,440 --> 01:08:13,760
ने पाइप बांटे हैं ना बाबा ने खीर खिलाई है ना बाबा ने प्रसाद

973
01:08:13,760 --> 01:08:17,840
भंडारे कराए हैं ना इसलिए भले ही तीन

974
01:08:17,840 --> 01:08:21,920
चार दिन उनसे कह दो बाबा बिना लोटे के बिना बिना संडास

975
01:08:21,920 --> 01:08:26,080
के रहो परमेश्वर हो पता चल जाएगा तुम्हारी खीर का जायका

976
01:08:26,080 --> 01:08:30,080
बढ़ जाएगा मगर नहीं भले ही बाबा बिना

977
01:08:30,080 --> 01:08:34,160
बिना संडास के ना रह पा रहा हो भले ही बाबा बिना सोए ना रह पा रहा हो

978
01:08:34,160 --> 01:08:38,480
मगर बाबा का कहीं कोई वर्णन नहीं है शास्त्रों में मगर फिर भी वह तत्व ज्ञानी

979
01:08:38,480 --> 01:08:42,880
है वो जगतगुरु है वो परमेश्वर का अवतार है

980
01:08:42,880 --> 01:08:47,120
और यह अन्यायपूर्ण बातें तुम चाहते हो कि हम मान ले

981
01:08:47,120 --> 01:08:51,280
हम ये सारी चीजें भी बता दी और जितना उन्होंने

982
01:08:51,280 --> 01:08:55,280
जहर उगला है बकवास की है अपने उसमें तो जो भी इंटेलेक्चुअल पर्सन है

983
01:08:55,280 --> 01:09:00,880
प्रबुद्ध जन है उनको सबको यहां पर जवाब मिल गया होगा ठीक है

984
01:09:00,880 --> 01:09:04,880
अब मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो पिछली बार हमने अध्ययन किया

985
01:09:04,880 --> 01:09:08,960
था चैप्टर फाइव

986
01:09:08,960 --> 01:09:13,040
का अध्ययन हमने जो किया था उसके बुलेट पॉइंट्स अभी बोल

987
01:09:13,040 --> 01:09:17,360
रहा हूं और जो आगे चैप्टर जो आगे बढ़ेगा वो अगले एपिसोड

988
01:09:17,360 --> 01:09:21,440
में हम लोग बढ़ाएंगे क्योंकि काफी देर हो चुकी है। अब बुलेट पॉइंट्स

989
01:09:21,440 --> 01:09:22,880
जब मैं बोल रहा हूं तो हम लोग आते हैं

990
01:09:22,880 --> 01:09:27,280
मुख्य विषय पर। बाबा की सन्यास

991
01:09:27,280 --> 01:09:31,360
और गृहस्थ के विषय में बाबा मुझे लग रहा है कि आज

992
01:09:31,360 --> 01:09:35,600
तक समझ नहीं पाया कि उसको चूज किसे करना है, विरक्तता

993
01:09:35,600 --> 01:09:39,680
को चूज़ करना है या फिर गृहस्ती को चूज़ करना है। इसलिए बाबा ने

994
01:09:39,680 --> 01:09:44,000
ऐसा इसमें अ क्या कहेंगे भाई? पंचर

995
01:09:44,000 --> 01:09:48,720
कर देने वाला ज्ञान दिया है। दिमाग को पंचर कर देने वाला ज्ञान कि

996
01:09:48,720 --> 01:09:52,800
आप फिर से झंडू बाब इत्यादि ले लीजिए हाथ साथ में।

997
01:09:52,800 --> 01:09:58,640
तो भैया बाबा सबसे पहले मैं संक्षेप में बता दूं

998
01:09:58,640 --> 01:10:02,800
बुलेट पॉइंट स्टार्ट हो रहे हैं यहां से कि सबसे पहले बाबा

999
01:10:02,800 --> 01:10:07,200
कहता है कि कर्म सन्यास या फिर कर्म

1000
01:10:07,200 --> 01:10:11,440
सन्यास दो हैं। एक घर में रहकर हठ पूर्वक इंद्रियों पर संयम

1001
01:10:11,440 --> 01:10:15,440
रखते हुए व्यक्ति रहे वो भी कर्म सन्यास है और या फिर

1002
01:10:15,440 --> 01:10:19,520
वो जंगल में जाकर के रहे वो भी कर्म कर्म सन्यास है।

1003
01:10:19,520 --> 01:10:23,520
और ये दोनों शास्त्र विरुद्ध है। अब देखते जाना बाबा ने क्या

1004
01:10:23,520 --> 01:10:27,840
रायता फैलाया है। अब देखो

1005
01:10:27,840 --> 01:10:31,920
इसके बाद कर्म योगी क्या है? कर्म योगी वो

1006
01:10:31,920 --> 01:10:36,320
है जो घर में शास्त्र विधि पूर्वक भक्ति करे। यहां पे

1007
01:10:36,320 --> 01:10:38,480
इंद्रियों का निग्रह नहीं है।

1008
01:10:38,480 --> 01:10:42,560
बस वो शास्त्र विधि पूर्वक भक्ति करे। यानी कि वह अगर

1009
01:10:42,560 --> 01:10:46,640
नाम जप कर रहा है शास्त्र विधि पूर्वक कुल मिलाकर के एक

1010
01:10:46,640 --> 01:10:50,880
ही बात है। नाम जप यानी कि वह यदि भक्ति कर रहा

1011
01:10:50,880 --> 01:10:55,280
है तो वो घर में रह के कुछ भी कर रहा हो

1012
01:10:55,280 --> 01:10:59,360
वो जो है कर्म योगी कहलाएगा। भले ही वह चोर हो। चोर कैसे सिद्ध होता

1013
01:10:59,360 --> 01:11:03,600
है? क्योंकि यह पेज नंबर 103 पर

1014
01:11:03,600 --> 01:11:07,920
यही कहते हैं आगे कर्म योगी के बारे में बताते हुए कि जो व्यक्ति शास्त्र

1015
01:11:07,920 --> 01:11:11,920
विधि के शास्त्र विरुद्ध तरीके से भी घर पर रह के

1016
01:11:11,920 --> 01:11:15,760
और जो है

1017
01:11:15,760 --> 01:11:21,760
क्या लिखा है 103

1018
01:11:23,040 --> 01:11:27,920
दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में रहते हैं तथा शास्त्र

1019
01:11:27,920 --> 01:11:31,920
साधना शास्त्र विधि विरुद्ध करते हैं। यानी

1020
01:11:31,920 --> 01:11:36,160
कि शास्त्र विधि विरुद्ध जो साधना

1021
01:11:36,160 --> 01:11:40,400
कर रहे हैं वह भी कर्म योगी हैं। और

1022
01:11:40,400 --> 01:11:44,560
शास्त्र विधि सहित जो साधना कर रहे हैं वह भी कर्म योगी हैं।

1023
01:11:44,560 --> 01:11:48,800
तो अब अगर यह कहें ये लोग यानी कि सबसे पहले क्या सिद्ध

1024
01:11:48,800 --> 01:11:53,520
हो गया कि व्यक्ति यदि रामपाल से नाम दीक्षा लेकर के चोरी भी कर रहा है।

1025
01:11:53,520 --> 01:11:57,680
चोरी कर रहा है। व्यभचार कर रहा है। बलात्कार कर रहा है। कुछ भी कर रहा है। जैसे

1026
01:11:57,680 --> 01:12:01,840
कि झूठ बोलना इत्यादि जो राघवदास इत्यादि अभिषेक का अभी हमने

1027
01:12:01,840 --> 01:12:06,000
देखा तो यह लोग भी कर्म योगी हैं बाबा के जो

1028
01:12:06,000 --> 01:12:10,080
राइफल ले खड़े होते हैं इनके यहां पर जो पकड़े जाते हैं जिन

1029
01:12:10,080 --> 01:12:14,080
पर देशद्रोह का मुकदमा लगता है ये सब ये सब जो है कर्म योगी है क्योंकि इन्होंने बाबा से

1030
01:12:14,080 --> 01:12:18,160
नाम दी इच्छा ले रखी है तो आपको अपने नाम के साथ कर्म योगी लिखने लगो

1031
01:12:18,160 --> 01:12:23,360
अब अच्छा लगेगा अलंकारिक तो ये सब कर्म योगी है बाबा के अनुसार

1032
01:12:23,360 --> 01:12:27,360
शास्त्र विधि के अनुसार घर में रहकर साधना करने वाला

1033
01:12:27,360 --> 01:12:30,960
उसको इंद्रिय निग्रह नहीं करना है। केवल शास्त्र विधि

1034
01:12:30,960 --> 01:12:35,520
के अनुसार यदि वह घर में रह के वो कर रहा है तो भी वह

1035
01:12:35,520 --> 01:12:39,600
कर्म योगी है। और शास्त्र विरुद्ध अगर वह घर में साधना

1036
01:12:39,600 --> 01:12:43,600
कर रहा है तब भी वो कर्म योगी है। यह बाबा का

1037
01:12:43,600 --> 01:12:48,640
ज्ञान है। ठीक है? और ऊपर क्या कह रहा है कि

1038
01:12:48,640 --> 01:12:53,440
कर्म सन्यास वो है जिसमें कि शास्त्र विरुद्ध कर्म

1039
01:12:53,440 --> 01:12:57,440
सन्यास वो है जो घर में रहे या जंगल में

1040
01:12:57,440 --> 01:13:01,760
जाकर रहे मगर वह शास्त्र विरुद्ध है।

1041
01:13:01,760 --> 01:13:06,000
कर्म सन्यास दो प्रकार का होता है। एक सन्यास तो वह होता है जिसमें साधक परमात्मा

1042
01:13:06,000 --> 01:13:10,000
प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर घर त्याग कर हट के जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र

1043
01:13:10,000 --> 01:13:14,080
विधि विधि रहित साधना करता है। यह भी कर्म सन्यास है। शास्त्र विधि

1044
01:13:14,080 --> 01:13:18,400
रहित भी कर्म सन्यास है। शास्त्र विधि रहित

1045
01:13:18,400 --> 01:13:22,560
कर्म सन्यास भी है। शास्त्र विधि रहित कर्म योग भी

1046
01:13:22,560 --> 01:13:26,640
है। सब कुछ है। शास्त्र विधि रहित कर्म योग भी है।

1047
01:13:26,640 --> 01:13:29,600
और शास्त्र

1048
01:13:29,600 --> 01:13:33,840
शास्त्र विधि के अनुसार भी कर्म सन्यास भी है। शास्त्र विधि

1049
01:13:33,840 --> 01:13:37,840
के अनुसार भी कर्म योग भी है। ये इस बाबा का ज्ञान है।

1050
01:13:37,840 --> 01:13:41,920
तत्व ज्ञान सब कुछ है। सब कुछ है और कुछ भी नहीं

1051
01:13:41,920 --> 01:13:46,000
है। देखो ध्यान से सुनो। कर्म सन्यास दो प्रकार के होते हैं।

1052
01:13:46,000 --> 01:13:50,000
एक तो सन्यास वह होता है जिसमें साधक परमात्मा प्राप्ति के लिए प्रेरित

1053
01:13:50,000 --> 01:13:54,160
होकर घर त्याग कर हट करके जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि रहित

1054
01:13:54,160 --> 01:13:58,160
साधना करता है। दूसरा घर पर रहते हुए भी हठ योग करके घंटों एक

1055
01:13:58,160 --> 01:14:02,240
स्थान पर बैठकर शास्त्र विधि त्याग कर साधना करता है। यह दोनों ही

1056
01:14:02,240 --> 01:14:06,240
कर्म सन्यासी हैं। यानी कि कर्म सन्यासी कौन है?

1057
01:14:06,240 --> 01:14:10,320
जो शास्त्र विरुद्ध चल रहा है। ठीक है? अब जब कर्म योगी की

1058
01:14:10,320 --> 01:14:14,320
बात आएगी तो कम से कम कर्म योगी को तो शास्त्र विधि के अनुसार चलने वाला मानना

1059
01:14:14,320 --> 01:14:18,400
चाहिए ना। मगर कर्म योगी में शास्त्र विधि के अनुसार ये दोनों काम

1060
01:14:18,400 --> 01:14:22,640
करे जंगल में रह के या घर पर रह के वो भी कर्म योगी है। और फिर कर्म

1061
01:14:22,640 --> 01:14:26,640
योगी वो भी है जो शास्त्र विधि विरुद्ध ये दोनों काम करे जंगल में रह के

1062
01:14:26,640 --> 01:14:31,120
या घर पे रह के। अरे कहना क्या चाहते हो? कर्म

1063
01:14:31,120 --> 01:14:35,200
योगी और कर्म सन्यासी में कोई अंतर नहीं है। यह कहना चाहते हो और शास्त्र

1064
01:14:35,200 --> 01:14:39,360
विधि में और शास्त्र विरुद्ध में कोई अंतर नहीं है। यह कहना चाहते हो बाबा जी

1065
01:14:39,360 --> 01:14:44,000
कहना क्या चाहते हो? नहीं पता। आगे

1066
01:14:44,000 --> 01:14:48,000
देखिए इसका क्या मामला होता है। एक इन्होंने वो बहुत फैलाई

1067
01:14:48,000 --> 01:14:50,800
हुई है।

1068
01:14:50,800 --> 01:14:55,040
ज्ञान गंगा का मैं एक पेज बता रहा हूं। वो

1069
01:14:55,040 --> 01:15:00,000
आप निकालिए।

1070
01:15:00,000 --> 01:15:04,080
196 देखिए इस बाबा ने कितना तत्व ज्ञान

1071
01:15:04,080 --> 01:15:08,160
दिया है। 196 197 पेज नंबर ज्ञान

1072
01:15:08,160 --> 01:15:12,480
गंगा निकालिए। ठीक है? तब तक मैं पढ़ रहा हूं। तो कर्म

1073
01:15:12,480 --> 01:15:16,480
योगी का समझ लिया आपने। यानी कि कुल मिलाकर बाबा के अनुसार

1074
01:15:16,480 --> 01:15:20,560
शास्त्र विधि के अनुसार करने में और शास्त्र विरुद्ध करने में कोई

1075
01:15:20,560 --> 01:15:24,720
अंतर नहीं है और ना कर्म सन्यास में कोई अंतर है ना कर्म योगी में कोई अंतर है क्योंकि

1076
01:15:24,720 --> 01:15:29,200
शास्त्र विधि द्वारा पूजा करने वाले को भी यह कर्म योगी कर्म सन्यासी

1077
01:15:29,200 --> 01:15:33,360
दोनों कह रहा है और शास्त्र विधि विधि विरुद्ध

1078
01:15:33,360 --> 01:15:37,440
शास्त्र विधि के अनुसार चलने वाले को कर्म सन्यासी कर्म योगी

1079
01:15:37,440 --> 01:15:41,440
दोनों कह रहा है और शास्त्र विधि विरुद्ध चलने का चलने वाले को भी यह

1080
01:15:41,440 --> 01:15:46,000
कर्म योगी और कर्म सन्यासी दोनों कह रहा है। ठोको ताली।

1081
01:15:46,000 --> 01:15:50,000
ठीक है? अब ये तो इसकी खिचड़ी हमने देख ली। अब हम देखते हैं एक

1082
01:15:50,000 --> 01:15:54,160
इनके द्वारा बहुत एक बात फैलाई जाती है। रुचि ऋषि की जो कथा है

1083
01:15:54,160 --> 01:15:58,240
197 पेज नंबर एक बहुत बड़ा खुलासा होने वाला है रुचि

1084
01:15:58,240 --> 01:16:02,400
ऋषि को लेकर के यहां पर। तो आप चाहे तो यहां से कट लगा लें। 1 घंटा 20 मिनट

1085
01:16:02,400 --> 01:16:06,400
दिखाई दे रहा है। तो यहां से इस रुचि ऋषि वाले चैप्टर को आप

1086
01:16:06,400 --> 01:16:11,040
लोग लेकर के डालिए। रुचि ऋषि के बारे में क्या किया है।

1087
01:16:11,040 --> 01:16:13,760
अ

1088
01:16:13,760 --> 01:16:17,840
गीता ज्ञान यह यह श्राद्ध क्या

1089
01:16:17,840 --> 01:16:22,160
श्राद्ध का विरोध कर रहा है यहां पर यह पेज नंबर 215

1090
01:16:22,160 --> 01:16:26,160
हां शास्त्र विधि विरुद्ध इसमें नीचे चलिए

1091
01:16:26,160 --> 01:16:32,160
नीचे चलिए इसमें आएगी ऋषि ऋषि की कथा

1092
01:16:35,920 --> 01:16:41,120
श्राद्ध वाला आया कोई और आगे चलिए

1093
01:16:41,120 --> 01:16:45,600
ऊपर जाइए ऊपर हां हां हां हां हां हां हां नीचे नीचे नीचे

1094
01:16:45,600 --> 01:16:50,080
नीचे जाइए ये इसी का प्रमाण मार्कंडेय

1095
01:16:50,080 --> 01:16:54,480
पुराण में मार्कंडेय पुराण में निकलता है जिसमें

1096
01:16:54,480 --> 01:16:58,720
कि एक रुचि नाम का साधक ब्रह्मचारी रहकर वेदों के अनुसार साधना

1097
01:16:58,720 --> 01:17:02,880
कर रहा था देखिए ब्रह्मचारी रहना वेदों के अनुसार मान

1098
01:17:02,880 --> 01:17:06,960
लिया इसने पहली बात तो ब्रह्मचारी का मतलब क्या हुआ ब्रह्म के

1099
01:17:06,960 --> 01:17:11,040
लिए आचरण करने वाला ठीक तो ब्रह्म के

1100
01:17:11,040 --> 01:17:15,280
लिए जो आचरण कर रहा है। वेदों के अनुसार है वो आचरण यानी कि वेद विरुद्ध भक्ति

1101
01:17:15,280 --> 01:17:19,440
नहीं है। अब यहां पर क्या है कि वह विवाह नहीं करना चाहते। इसका

1102
01:17:19,440 --> 01:17:23,440
मतलब वो विरक्त है। तो यहां अभी क्या कह रहा है कि जो सन्यास होता है जंगल

1103
01:17:23,440 --> 01:17:28,240
में जाकर के सन्यासी बनता है। वो जो है गलत है।

1104
01:17:28,240 --> 01:17:29,440
ठीक है?

1105
01:17:29,440 --> 01:17:34,640
उसको यह गलत कह रहा है। और मार्कंडेय

1106
01:17:34,640 --> 01:17:38,640
पुराण में जब पितर उसको कह रहे

1107
01:17:38,640 --> 01:17:42,880
हैं अपने पुत्र को प्रकट होकर के कि भाई तू विवाह के मार्ग पर चल। विवाह

1108
01:17:42,880 --> 01:17:47,120
के द्वारा होते हुए भी अगर तू अनासक्त भाव से संयम पूर्वक धर्म

1109
01:17:47,120 --> 01:17:51,200
का निर्वाह करते हुए यदि तू वहां गृहस्ती का निर्वाह

1110
01:17:51,200 --> 01:17:55,360
करेगा तब भी तू मुक्त हो जाएगा। यह पितर वहां पर कह रहे हैं तो यह उनका खंडन

1111
01:17:55,360 --> 01:17:59,440
कर रहा है कि देखो एक व्यक्ति वेद विरुद्ध वेद के अनुसार चल रहा था

1112
01:17:59,440 --> 01:18:03,440
तो उसके पितर आकर के उसको गलत दिशा में ले जा रहे हैं। उसका विवाह करवा रहे

1113
01:18:03,440 --> 01:18:07,600
हैं। यानी कि विवाह करने की शिक्षा गलत है। रुचि ऋषि

1114
01:18:07,600 --> 01:18:11,600
वाले प्रकरण में रामपाल ने यह माना है। और फिर यहां पे

1115
01:18:11,600 --> 01:18:15,840
बार-बार कह रहा है कि विरक्त रहना गलत है और ब्रह्मचारी आजीवन रहना

1116
01:18:15,840 --> 01:18:20,240
गलत है। जो विवाह करके जो चलेगा और वो नाम दीक्षा

1117
01:18:20,240 --> 01:18:24,320
लेकर के जाप करते हुए वो सही है। वो बात और है कि उसमें आगे उसने

1118
01:18:24,320 --> 01:18:29,120
ये भी माना कि चोरी भी करेगा वो भी सही है।

1119
01:18:29,120 --> 01:18:33,120
कर्म योगी कहा है उसको इसने। तो यह इसकी खिचड़ी है। अब देखिए अब

1120
01:18:33,120 --> 01:18:37,200
इसको इसी किताबों से पहले दिखाता हूं कि इसने यहां पर यह कहा

1121
01:18:37,200 --> 01:18:41,280
है कि पितर अगर तुम्हें विवाह करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं कि तुम जो है विवाह

1122
01:18:41,280 --> 01:18:45,360
कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए गृहस्थ होते हुए भी तुम जो

1123
01:18:45,360 --> 01:18:49,440
है वहां आगे पहुंच सकते हो। क्रमिक अभिव्यक्ति हो सकती

1124
01:18:49,440 --> 01:18:53,600
है तुम्हारे जीवन में। क्रमिक विकास हो सकता है अध्यात्म का।

1125
01:18:53,600 --> 01:18:57,680
तो यह पितर समझाने का प्रयास वहां पर कर रहे हैं रुचि ऋषि को। तो यह वहां पर

1126
01:18:57,680 --> 01:19:01,680
पितरों का खंडन करने के लिए कह रहा है कि देखो देखो वो वेद के अनुसार चल रहा

1127
01:19:01,680 --> 01:19:06,240
था तो यह उसको वेद के विरुद्ध ले जा रहे हैं। ठीक पितर

1128
01:19:06,240 --> 01:19:10,240
पितरों को गलत साबित करने उसके चक्कर में खुद ही को गलत साबित कर लिया। इसका

1129
01:19:10,240 --> 01:19:14,320
मतलब इसके अनुसार मार्कंडेय पुराण की

1130
01:19:14,320 --> 01:19:18,400
जो रुचि ऋषि की कथा है उसमें इसने माना है कि विरक्तता

1131
01:19:18,400 --> 01:19:22,400
ही सही है और जो गृहस्थ वाला आश्रम है वो गलत है। विवाह

1132
01:19:22,400 --> 01:19:26,400
करना गलत है। अब ये जगह-जगह पर अपनी इस बात का खंडन करता है। देखिए

1133
01:19:26,400 --> 01:19:29,760
कहां-कहां पे करेगा।

1134
01:19:29,760 --> 01:19:35,760
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1135
01:19:35,920 --> 01:19:40,960
कहां-कहां पर करेगा

1136
01:19:40,960 --> 01:19:46,400
पेज पेज नंबर 36 निकालिए

1137
01:19:46,400 --> 01:19:52,400
पेज नंबर 36 इसी का गरिमा गीता की

1138
01:20:00,880 --> 01:20:05,920
पेज नंबर 36 में इस व्यक्ति ने विरक्तता

1139
01:20:05,920 --> 01:20:10,160
को सही भी माना है और गलत भी माना है। जैसे मार्कंडेय पुराण में विरक्तता

1140
01:20:10,160 --> 01:20:14,640
को सही माना है। तो पेज नंबर पेज नंबर 33

1141
01:20:14,640 --> 01:20:20,320
पहले 33 निकालिए। 33 तो पेज नंबर 33 में

1142
01:20:20,320 --> 01:20:25,920
यह जो है फिर से

1143
01:20:25,920 --> 01:20:30,640
सन्यास का समर्थन कर रहा है। पेज नंबर 33

1144
01:20:30,640 --> 01:20:35,040
इतनी ज्यादा बेईमानी की है ना इस व्यक्ति ने। इतनी ज़्यादा

1145
01:20:35,040 --> 01:20:39,200
इतनी ज़्यादा भ्रष्टता इतनी ज़्यादा धूर्तता इतने झूठ बोले हैं कि

1146
01:20:39,200 --> 01:20:43,520
उसमें यह निर्णय करना कठिन हो जाता है

1147
01:20:43,520 --> 01:20:47,600
कि शुरू करें तो कहां से करें? किसको पकड़ के बात करें? किस बात को

1148
01:20:47,600 --> 01:20:51,680
पकड़ के बात करें? यह निर्णय करना कठिन हो जाता है। इतना झूठ परोसा

1149
01:20:51,680 --> 01:20:55,680
है इसने। सब कुछ कह दिया भाई। ए बी सी डी एफ जी एच आई

1150
01:20:55,680 --> 01:20:59,760
जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी यू वी डब्ल्यू एक्स वाई जेड। तो

1151
01:20:59,760 --> 01:21:03,840
ये जब एप्पल की स्पेलिंग पूछी गई किस अक्षर से शुरू होती है? तो मैंने पूरी ए बी सी

1152
01:21:03,840 --> 01:21:08,240
डी पढ़ दी। उसी तरीके से इस बाबा ने हर चीज बोल दी जिससे

1153
01:21:08,240 --> 01:21:13,040
कि कोई भी चीज मेरी सब कुछ मान ले। मैंने तो यह भी बोला है। तो इसने जो है

1154
01:21:13,040 --> 01:21:17,120
घर गृहस्ती को जो है विरोध किया है। सन्यास को

1155
01:21:17,120 --> 01:21:21,280
माना है रुचि ऋषि की कथा में। तो अब सबसे पहले तो हमने

1156
01:21:21,280 --> 01:21:25,360
वहां पर देख लिया पृष्ठ संख्या 103 पे इसने

1157
01:21:25,360 --> 01:21:29,440
ग्र गहस्ती को श्रेष्ठ माना है और कर्म जो सन्यास है उसको

1158
01:21:29,440 --> 01:21:33,600
जो है गलत माना है वहां पर वो ऐसे ही विरक्त होकर के रह रहे हैं रुचि ऋषि

1159
01:21:33,600 --> 01:21:37,680
तो उनको सही कह रहा है और यहां पर कह रहा है कि ऐसे रहना जो है वो गलत

1160
01:21:37,680 --> 01:21:40,960
है घर में रहो घर में रह करके इंद्रिय निग्रह

1161
01:21:40,960 --> 01:21:45,440
मत करो इंद्रिय निग्रह मतलब अपने आप को संयमित रखने का प्रयास मत करो बस भक्ति करो

1162
01:21:45,440 --> 01:21:49,600
यानी कि रामपाल ऐसे ही रहता होगा बबता इत्यादि ऐसे

1163
01:21:49,600 --> 01:21:53,600
ही रहता होगा। वहां पर संयम की आवश्यकता कोई नहीं है। इसीलिए ऐसे कह रहा है। इसीलिए

1164
01:21:53,600 --> 01:21:57,680
जो वीडियो का टाइटल है वो यह रखा गया कि भाई क्या काम वासना अभी भी बाकी है

1165
01:21:57,680 --> 01:22:01,680
या अभी जो शारीरिक बदलाव होते हैं, वृद्धावस्था आ जाती है।

1166
01:22:01,680 --> 01:22:05,840
उसमें जो है कई विषयों को लेकर के असामर्थ्यता

1167
01:22:05,840 --> 01:22:10,000
आ जाती है। उसके कारण क्या वो चीजें नहीं है कि अभी भी वही है। क्योंकि

1168
01:22:10,000 --> 01:22:14,240
इसके लेख को देख करके ऐसा लगता है गरिमा गीता की में जो इसने

1169
01:22:14,240 --> 01:22:18,320
अह वो हुआ दिया है ज्ञान तत्व ज्ञान। उससे ऐसा समझ में आता

1170
01:22:18,320 --> 01:22:22,560
है कि इसका जो चरित्र है ना वह समझ में आता है इसका खुद का चरित्र

1171
01:22:22,560 --> 01:22:26,640
कैसा है। कभी यह सोचता है कि विरक्त हो जाओ। कभी यह सोचता है गृहस्थ हो जाओ।

1172
01:22:26,640 --> 01:22:30,720
कभी यह सोचता है कि इंद्रियों का निग्रह करो। कभी यह सोचता है ना करो। तो

1173
01:22:30,720 --> 01:22:34,800
जब ये पढ़ाने बैठता है तो करो इंद्रियों विषयों का इंद्रियों का

1174
01:22:34,800 --> 01:22:38,800
निग्रह। मगर जब यह जो है घर जाता होगा या फिर जो इनके

1175
01:22:38,800 --> 01:22:42,880
जो कुछ क्या-क्या मिले थे कोई कोई कहता है गुफा है मीडिया में ऐसा कुछ

1176
01:22:42,880 --> 01:22:47,200
बताया गया कि इसका कुछ अपना एक कमरा था तो उसमें जाता होगा तो इंद्रियों का निग्रह

1177
01:22:47,200 --> 01:22:51,200
मत करो ये सब चीजें शायद होती होंगी जिस कारण से इसने बार-बार

1178
01:22:51,200 --> 01:22:55,680
अपनी ही बात को काटा है। रुचि ऋषि में इसने

1179
01:22:55,680 --> 01:22:56,320
सन्यास

1180
01:22:56,320 --> 01:23:00,320
का समर्थन और गृहस्थ का विरोध किया है। अब यह क्या कह

1181
01:23:00,320 --> 01:23:04,400
रहा है? सबसे पहले तो पृष्ठ क्रमांक 103 पे

1182
01:23:04,400 --> 01:23:08,400
इसने सन्यास का विरोध और गृहस्थ जीवन का समर्थन

1183
01:23:08,400 --> 01:23:13,360
किया है। हालांकि जो संयमित जीवन के अनुसार और

1184
01:23:13,360 --> 01:23:17,600
शास्त्रोचित जो निर्देश दिए गए उनके अनुसार चलने पर हमारी

1185
01:23:17,600 --> 01:23:21,760
गीता हमारे शास्त्रों के अनुसार दोनों ही मार्ग फलदायक है। ये गीता में भी लिखा

1186
01:23:21,760 --> 01:23:25,920
हुआ है। मगर इसने जो है क्या किया है? सन्यास का समर्थन

1187
01:23:25,920 --> 01:23:30,240
रुचि ऋषि वाली में और गृहस्थ का विरोध और पृष्ठ क्रमांक

1188
01:23:30,240 --> 01:23:34,320
103 गरिमा गीता की वहां पर इसने क्या किया है कि सन्यास का

1189
01:23:34,320 --> 01:23:38,400
विरोध और गृहस्थ का समर्थन इसके बाद ये यहां पे नहीं रुकता

1190
01:23:38,400 --> 01:23:42,480
है। इसने जो है फिर से एक तरफ

1191
01:23:42,480 --> 01:23:46,800
ये हट पूर्वक इंद्रिय निग्रह करना मना करता है।

1192
01:23:46,800 --> 01:23:50,880
यही कर्म कर्म योगी वाले में और और भी जगह-जगह मगर फिर यह पेज

1193
01:23:50,880 --> 01:23:55,760
नंबर एक 33 पे गरिमा गीता की पेज नंबर 33

1194
01:23:55,760 --> 01:23:59,840
वहां क्या होता है ये पेज नंबर 33 है ना हां ये ये

1195
01:23:59,840 --> 01:24:03,920
जिसको तत्वदर्शी संत नहीं मिला वह परमात्मा के स्मरण में स्थित नहीं हो सकता क्योंकि उसका

1196
01:24:03,920 --> 01:24:08,240
मन वश में नहीं है मन वश में होना चाहिए पहली बात यह ध्यान रखिए इंद्रिय

1197
01:24:08,240 --> 01:24:11,760
निग्रह मन वश में होना चाहिए उस अयुक्त यानी परमात्मा

1198
01:24:11,760 --> 01:24:15,760
पर ना टिके मन वाले पुरुष में अब देखिए एक जगह

1199
01:24:15,760 --> 01:24:20,160
विरक्तता का विरोध करता है। फिर एक जगह समर्थन करता है। फिर एक जगह

1200
01:24:20,160 --> 01:24:24,400
इंद्रिय निग्रह का विरोध करता है। फिर दूसरी जगह समर्थन करता है। यह तत्व

1201
01:24:24,400 --> 01:24:28,480
ज्ञानी बाबा हैं। अच्छा तो उसकी बुद्धि स्थिर

1202
01:24:28,480 --> 01:24:32,640
नहीं है। उस

1203
01:24:32,640 --> 01:24:37,040
देखो यहां इसके ही अगले पैराग्राफ में ये कह रहा है क्योंकि

1204
01:24:37,040 --> 01:24:41,120
पूर्ण संत रूपी केवट नाव के साथ नहीं है तो उस नाव को जल में वायु हर

1205
01:24:41,120 --> 01:24:45,120
लेती हैं। यानी अपनी इच्छा अनुसार भटकाती हैं। वैसे ही पूर्ण संत के

1206
01:24:45,120 --> 01:24:49,280
अभाव में तत्व ज्ञान ना होने से जल में नाव की भांति विषयों

1207
01:24:49,280 --> 01:24:53,920
में विचरती हुई इंद्रियों में से मन जिस इंद्रिय के साथ लगा है वह एक ही इंद्रिय

1208
01:24:53,920 --> 01:24:58,160
उस अभक्त की बुद्धि को हर लेती है तो यहां क्या हुआ इंद्रिय निग्रह

1209
01:24:58,160 --> 01:25:02,400
करना चाहिए यहां बाबा जी ये मान रहे हैं वहां पे कह रहे हैं नहीं नहीं नहीं इंद्रिय

1210
01:25:02,400 --> 01:25:06,480
निग्रह नहीं होना चाहिए इंद्रिय निग्रह नहीं करना केवल नाम जपो यहां इंद्रिय निग्रह

1211
01:25:06,480 --> 01:25:10,640
का समर्थन कर रहा है कि इंद्रिय निग्रह होना चाहिए अब मैं आपसे पूछता

1212
01:25:10,640 --> 01:25:14,640
हूं सब बातें छोड़ दो अगर क्या नाम जब जप रहे

1213
01:25:14,640 --> 01:25:18,800
हो अपने ईश्वर का नाम जप रहे हो तो क्या फ्रीलांस रहने चाहिए क्या फ्री

1214
01:25:18,800 --> 01:25:22,800
चाहे जहां पर जिस भी इंद्र को विषय देना है उसका

1215
01:25:22,800 --> 01:25:26,800
भोग का विषय है उसको करने का प्रयास करना चाहिए बाबा ऐसा ही रहता

1216
01:25:26,800 --> 01:25:31,520
है क्या मैं रामपालियों से पूछ रहा हूं क्या अपने घर में ऐसे ही रहते हो

1217
01:25:31,520 --> 01:25:35,520
कहीं पर भी संयम नहीं करते हो किसी भी क्षेत्र में संयम

1218
01:25:35,520 --> 01:25:39,680
नहीं करते हो बाबा का तो नहीं पता है उसके बारे में तो बहुत सी चीजें हैं मगर

1219
01:25:39,680 --> 01:25:44,320
तुम लोग क्या करते हो तुम बताओ इंद्रिय निग्रह करते हो हो ना

1220
01:25:44,320 --> 01:25:48,320
संयम करते हो ना

1221
01:25:48,320 --> 01:25:52,560
ठीक है यह हो गया अब देखिए विरक्तता का विरोध

1222
01:25:52,560 --> 01:25:56,720
विरक्तता का समर्थन इंद्रिय निग्रह का विरोध इंद्रिय निग्रह

1223
01:25:56,720 --> 01:26:02,560
का समर्थन अब

1224
01:26:02,560 --> 01:26:06,720
मैं आपको दिखाता हूं इसी में 36 पेज नंबर पर देखिए अब मैं आपको सन्यास का

1225
01:26:06,720 --> 01:26:11,360
यहां पर समर्थन दिखाता हूं देखिए इसमें देखिए क्या लिखा है

1226
01:26:11,360 --> 01:26:15,760
इसमें लिखा है

1227
01:26:15,760 --> 01:26:20,240
36 इसमें लिखा है [गला साफ़ करने की आवाज़]

1228
01:26:20,240 --> 01:26:23,760
कि

1229
01:26:23,760 --> 01:26:28,080
रात्रि में दो प्रकार के व्यक्ति जागते हैं। एक तो सांसारिक भोगों की इच्छा वाला

1230
01:26:28,080 --> 01:26:32,080
सोते हुए भी स्वप्न में उन्हीं में भटकता रहता है। दूसरा परमात्मा की भक्ति में लगा

1231
01:26:32,080 --> 01:26:36,080
स्थिर बुद्धि वाला साधक रात्रि में स्वप्न में भी परमात्मा में विचार

1232
01:26:36,080 --> 01:26:40,400
विचार करता है। आगे क्या लिखा है? भावार्थ जो सांसारिक व्यक्ति भौतिक

1233
01:26:40,400 --> 01:26:44,480
पदार्थों की प्राप्ति के लिए दिन भर भटकता है। ये जो भौतिक पदार्थों की प्राप्ति

1234
01:26:44,480 --> 01:26:48,560
है ना यही जो माया के पीछे पड़े रहने का खंडन

1235
01:26:48,560 --> 01:26:52,880
किया है गीता में वही है। भौतिक पदार्थों की जो भक्ति करते हैं माया की भक्ति करते हैं।

1236
01:26:52,880 --> 01:26:56,880
माया को ढूंढते रहते हैं। वो खंडन किया तो उसको ये लोग बनाते हैं। ब्रह्मा

1237
01:26:56,880 --> 01:27:00,960
विष्णु महेश की भक्ति मना की गई है। हालांकि खैर इधर आ जाते हैं। तो

1238
01:27:00,960 --> 01:27:04,960
जो सांसारिक व्यक्ति भौतिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए दिन भर भटकता है यानी नहीं भटकना

1239
01:27:04,960 --> 01:27:09,200
चाहिए। भौतिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए नहीं भटकना चाहिए। संयमी

1240
01:27:09,200 --> 01:27:13,360
साधक की इच्छा उन पदार्थों की नहीं होती। ठीक है? यानी

1241
01:27:13,360 --> 01:27:17,440
कि विरक्तता भौतिक पदार्थों के लिए विरक्तता का यहां समर्थन आ

1242
01:27:17,440 --> 01:27:18,160
गया।

1243
01:27:18,160 --> 01:27:22,400
उसके लिए वे दिन भी रात्रि के समान है। अन्य लोग तो सांसारिक पदार्थों की प्राप्ति

1244
01:27:22,400 --> 01:27:26,560
के लिए सजग रहते हैं। परंतु स्थिर बुद्धि वाला उनसे मुख

1245
01:27:26,560 --> 01:27:30,640
मोड़े रहता है। अब भाई भौतिक पदार्थों से मुख मोड़ने वाला विरक्त हो गया

1246
01:27:30,640 --> 01:27:34,720
ना। भौतिक पदार्थों से मुख मोड़ने वाला विरक्त

1247
01:27:34,720 --> 01:27:38,960
हो गया तो भौतिक पदार्थ तो भोजन भी है तो भोजन से मुंह मोड़ने

1248
01:27:38,960 --> 01:27:43,280
वाला व्रत हो गया व्रत का तो खंडन पर तू तो समर्थन

1249
01:27:43,280 --> 01:27:48,160
कर रहा है यहां पर तेरे जूता ही तेरा ही जूता सदैव तेरे सर पर मारूंगा

1250
01:27:48,160 --> 01:27:52,320
जो जो आएगा ना हमारे धर्म का अपमान करने हमारे भगवान का अपमान करने उसी

1251
01:27:52,320 --> 01:27:56,320
का जूता उसके सर पर पड़ेगा ये देख और जिसने

1252
01:27:56,320 --> 01:28:00,560
भी अपनी मां जिसको भी उसकी माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है

1253
01:28:00,560 --> 01:28:06,560
वो आकर की बात करी सामने से

1254
01:28:08,080 --> 01:28:12,160
तो यहां पे इसने व्रत का और विरक्तता का पुनः समर्थन कर दिया। अब इस बाबा

1255
01:28:12,160 --> 01:28:16,320
से कोई पूछे भाई तू विरक्तता का समर्थन करता है कि विरोध करता है? क्या

1256
01:28:16,320 --> 01:28:20,480
ऐसा है कि भविता के सामने आते ही तुझे गृहस्ती याद आने लगती है

1257
01:28:20,480 --> 01:28:24,480
और जैसे ही जनता को बेवकूफ बनाता बनाना होता है मंचों से तो तुझे

1258
01:28:24,480 --> 01:28:28,640
वहां पर विरक्तता याद आ जाती है। कर्म योगी में तू कहना क्या चाहता

1259
01:28:28,640 --> 01:28:32,720
है कि शास्त्र विरुद्ध कर शास्त्र विरुद्ध चीजें करने वाला तो कर्म सन्यासी

1260
01:28:32,720 --> 01:28:36,720
हो गया मान लिया तो इसका मतलब कर्म योगी क्योंकि कर्म योगी और कर्म सन्यासी

1261
01:28:36,720 --> 01:28:40,960
में अंतर है। तो कर्म योगी अगर तूने कर्म सन्यासी शास्त्र विरुद्ध

1262
01:28:40,960 --> 01:28:45,120
वाले को माना है तो भैया कर्म योगी तू उसको मान ले भाई हमें

1263
01:28:45,120 --> 01:28:49,200
झंडू बाम नहीं लगाना पड़ेगा सर पे तो कर्म योगी तू उसको मान

1264
01:28:49,200 --> 01:28:53,280
ले जो शास्त्र विधि के अनुसार तेरी वाली अभी तो तेरी वाली के अनुसार बात कर रहा हूं तो

1265
01:28:53,280 --> 01:28:57,520
तू उसको मान ले कर्म योगी जो शास्त्र विधि के अनुसार चले मगर तू कर्म

1266
01:28:57,520 --> 01:29:02,800
योगी में भी ये घुसेड़ दे रहा है कि कर्म योगी में इसने क्या घुसेड़ दिया

1267
01:29:02,800 --> 01:29:06,960
103 कर्म योगी में फिर तू कह रहा है कर्म योगी दो प्रकार

1268
01:29:06,960 --> 01:29:10,960
के हैं एक तो बाल बच्चों सहित सांसारिक कार्य करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार

1269
01:29:10,960 --> 01:29:15,200
भक्ति साधना करता है या ना शादी करवा के घर पर या किसी आश्रम में रहता

1270
01:29:15,200 --> 01:29:19,280
हुआ सांसारिक कर्म अथवा सेवा करता

1271
01:29:19,280 --> 01:29:23,200
हुआ शास्त्र विधि अनुसार भक्ति करता है। यानी कि विरक्त और

1272
01:29:23,200 --> 01:29:27,440
गृहस्थ दोनों कर्म योगी हैं। और ऊपर वाले पैराग्राफ में विरक्त

1273
01:29:27,440 --> 01:29:31,440
और गृहस्थ दोनों कर्म सन्यासी हैं। बस यहां दोनों

1274
01:29:31,440 --> 01:29:35,600
पैराग्राफ में अंतर ये है कि ऊपर वाला शास्त्र विधि विरुद्ध साधना कर रहा है और

1275
01:29:35,600 --> 01:29:39,920
नीचे वाला शास्त्र विधि सहित साधना कर रहा है। मगर इसने क्या किया

1276
01:29:39,920 --> 01:29:44,640
तीसरा एक पैराग्राफ और लिखा 103 नंबर का पेज दिखा दो आप यहां।

1277
01:29:44,640 --> 01:29:48,800
103 नंबर इसने क्या किया यहां पर कर्म योग में नीचे लिखा

1278
01:29:48,800 --> 01:29:52,800
है दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में

1279
01:29:52,800 --> 01:29:56,880
रहते हैं तथा साधना शास्त्र विधि विरुद्ध करते हैं अरे मेरे भाई तो

1280
01:29:56,880 --> 01:30:00,960
वो तो कर्म सन्यासी है ना शास्त्र विरुद्ध वाला तो कर्म सन्यासी

1281
01:30:00,960 --> 01:30:05,280
है ना तो यहां पे भी घुसेड़ दिया कर्म शास्त्र विरुद्ध विरोध को पागल

1282
01:30:05,280 --> 01:30:09,280
है क्या भांग खा के लिखी है क्या ये किताबें ऐसा विवरण लिखा है ना ये

1283
01:30:09,280 --> 01:30:13,360
देखिए इसका घचूपन देखिए कर्म सन्यास का विवरण कर्म

1284
01:30:13,360 --> 01:30:17,520
सन्यास दो प्रकार के होते हैं। एक तो सन्यास वह होता है जिसमें साधक परमात्मा

1285
01:30:17,520 --> 01:30:21,680
प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर घर त्याग कर हटके जंगल

1286
01:30:21,680 --> 01:30:25,840
में बैठ जाता है। यानी कि घर त्याग कर

1287
01:30:25,840 --> 01:30:30,080
नहीं रहना चाहिए। यह वो वाला खंडन है जो वहां पर रुचि ऋषि की तपस्या

1288
01:30:30,080 --> 01:30:34,240
में है। रुचि ऋषि का समर्थन कर रहा है। पितरों का विरोध करने के लिए। यहां पे

1289
01:30:34,240 --> 01:30:38,480
रुचि ऋषि पितरों का समर्थन कर रहा है व्यक्ति। पित पितर कह रहे हैं ना गस्त

1290
01:30:38,480 --> 01:30:42,480
ग्रस्त हो जाओ। विवाह करके कर लो। कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए कर लो। तो

1291
01:30:42,480 --> 01:30:46,720
यहां पे पितरों का समर्थन कर रहा है। यह क्या कह रहा है? घर त्याग कर हटके जंगल

1292
01:30:46,720 --> 01:30:50,720
में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि साधना करता है। दूसरा घर पर रहते

1293
01:30:50,720 --> 01:30:54,720
हुए भी हठ योग करके घंटों एक स्थान पर बैठकर शास्त्र विधि त्याग कर साधना

1294
01:30:54,720 --> 01:30:58,800
करता है। ये दोनों ही कर्म सन्यास यानी कि शास्त्र विरुद्ध तरीके से चलना

1295
01:30:58,800 --> 01:31:02,960
कर्म सन्यास है। तो जाहिर सी बात है कि कर्म योगी की जब बात बताओगे

1296
01:31:02,960 --> 01:31:07,120
तो शास्त्र विधि सहित चलना कर्म योगी होगा। मगर वहां ये क्या कह रहा है?

1297
01:31:07,120 --> 01:31:11,120
यह भी दो प्रकार का होता है। एक तो बाल बच्चों सहित सांसारिक कार्य करता हुआ शास्त्र

1298
01:31:11,120 --> 01:31:15,280
विधि अनुसार भक्ति साधना करता है या ना शादी करता करवा करके

1299
01:31:15,280 --> 01:31:19,280
घर पर या किसी आश्रम में रहता हुआ सांसारिक कर्म अथवा सेवा करता हुआ

1300
01:31:19,280 --> 01:31:23,280
शास्त्र विधि अनुसार साधना करता है। ये दोनों कर्म योगी हैं। मगर

1301
01:31:23,280 --> 01:31:27,360
अब दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में रहते

1302
01:31:27,360 --> 01:31:31,440
हैं तथा शास्त्र विधि विरुद्ध कर शास्त्र साधना शास्त्र विधि

1303
01:31:31,440 --> 01:31:35,680
विरुद्ध करते हैं या शादी ना करवा कर किसी आश्रम में सेवा

1304
01:31:35,680 --> 01:31:41,600
करते हैं तथा साधना भी शास्त्र विधि के विपरीत करते हैं पागल है क्या

1305
01:31:41,600 --> 01:31:45,840
फिर कर्म सन्यास कहां ले जाएगा अलग से तूने कर्म योगी में भी कर्म सन्यास

1306
01:31:45,840 --> 01:31:49,760
वाली चीजें डाल ली

1307
01:31:49,760 --> 01:31:54,080
ठीक है बुलेट पॉइंट्स में आगे चलते हैं

1308
01:31:54,080 --> 01:31:58,160
अब बुलेट पॉइंट्स में हम लोग आ जाते हैं। आगे चलते हैं। तो पांच दो की

1309
01:31:58,160 --> 01:32:02,240
व्याख्या करते हुए यह व्यक्ति यह व्यक्ति

1310
01:32:02,240 --> 01:32:06,560
पांच दो की व्याख्या करते हुए कहता है कि भाई यहां पे

1311
01:32:06,560 --> 01:32:10,640
पांच दो के उसमें इसने लिखा है कि 16 से 23 तक गीता

1312
01:32:10,640 --> 01:32:15,200
अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है शास्त्र विधि अनुसार ये वो

1313
01:32:15,200 --> 01:32:19,200
तो जो साधना त्यागने की है पांच दो के उसमें लिखा

1314
01:32:19,200 --> 01:32:23,440
है अर्थात ना करने वाली है तथा जो करने वाली है उनके लिए शास्त्रों

1315
01:32:23,440 --> 01:32:27,680
को प्रमाण मानना चाहिए तो यहां पर जो त्यागने की साधना है वह गीता हमारे

1316
01:32:27,680 --> 01:32:31,760
शास्त्रों में बताई गई रामपाल के अनुसार तो बात यह है कि जिसको त्यागने को कहा गया

1317
01:32:31,760 --> 01:32:35,840
है उसको करने को कहां पे कहां पर कहा गया है यह बात फिर

1318
01:32:35,840 --> 01:32:39,920
बाबा जी को बतानी होगी विद प्रूफ जो वो बता नहीं पाएंगे

1319
01:32:39,920 --> 01:32:43,920
वो अपने जीवन भर की पाइप बांट दें खीर बांट

1320
01:32:43,920 --> 01:32:47,920
दें किडनी बेच के बांट दें गुर्दा बेच के बांट दें जो भी कर

1321
01:32:47,920 --> 01:32:53,920
ले मगर वो बता नहीं पाएंगे आगे आ जाइए पष्ठ संख्या 108

1322
01:32:54,240 --> 01:32:58,640
फिर इसने [गला साफ़ करने की आवाज़] पांच तीन में सन्यास का समर्थन किया। देखिए

1323
01:32:58,640 --> 01:33:03,040
पांच तीन में सन्यास का समर्थन कैसे किया है।

1324
01:33:03,040 --> 01:33:05,200
अह

1325
01:33:05,200 --> 01:33:05,760
पांच

1326
01:33:05,760 --> 01:33:09,840
तीन में इसने सभी का समर्थन कर दिया। सन्यास का भी, जंगल में रहने वाले का भी,

1327
01:33:09,840 --> 01:33:13,840
विरक्त का भी, गृहस्थ का भी सबका समर्थन कर दिया। जबकि एक तरफ कहता है

1328
01:33:13,840 --> 01:33:18,080
कि जंगल में रह के साधना करना यह शास्त्र विरुद्ध है। त्याग कर साधना

1329
01:33:18,080 --> 01:33:22,080
करना। जबकि मार्कंडेय वाले में कहता है कि भाई रुचि जी सही कर रहे

1330
01:33:22,080 --> 01:33:26,080
थे रुचि ऋषि। यह कहना क्या चाहता है? यह सोचने में ही आप

1331
01:33:26,080 --> 01:33:30,240
पागल हो जाओगे। तो 108 पे प्रश्न संख्या

1332
01:33:30,240 --> 01:33:34,400
और सबसे नीचे से सेकंड पैरा सेकंड लास्ट पैराग्राफ यह भावार्थ

1333
01:33:34,400 --> 01:33:38,640
कर रहा है अध्याय पांच श्लोक तीन में शास्त्र विधि अनुसार साधना

1334
01:33:38,640 --> 01:33:42,640
करने वाले कर्म योगी का विवरण है। ये अब ध्यान से सुनिएगा यहां पर ये

1335
01:33:42,640 --> 01:33:46,720
बात क्योंकि बहुत दिमाग लगाना पड़ेगा क्योंकि इसने इतने झूठ बोले

1336
01:33:46,720 --> 01:33:50,720
हैं ना उन झूठों को समझने में भी उन असत्य भाषणों को

1337
01:33:50,720 --> 01:33:54,960
समझने के लिए भी बहुत आपको ब्रेन चाहिए। ये सामर्थ्यवान जो इनको

1338
01:33:54,960 --> 01:33:58,960
धारण कर पाए क्योंकि इसने इतने झूठ बोले हैं कि आप यह नहीं समझ

1339
01:33:58,960 --> 01:34:02,960
पाओगे कौन सी जगह से झूठ को पिक करना है। तो इस अब

1340
01:34:02,960 --> 01:34:07,360
ये क्या कह रहा है पांच तीन में शास्त्र विधि अनुसार साधना

1341
01:34:07,360 --> 01:34:11,680
करने वाले कर्म योगी का विवरण है। जो श्रद्धालु भक्त

1342
01:34:11,680 --> 01:34:16,000
चाहे बाल बच्चों सहित या रहित यानी गस्थ

1343
01:34:16,000 --> 01:34:21,040
या विरक्त या किसी आश्रम में रहकर

1344
01:34:21,040 --> 01:34:21,600
सतगुरु

1345
01:34:21,600 --> 01:34:25,680
व संगत की सेवा में रहत है। वह सर्वथा सर्वथा राग द्वेष

1346
01:34:25,680 --> 01:34:29,840
रहित होता है। वास्तव में वही सन्यासी है। यह लिख दिया।

1347
01:34:29,840 --> 01:34:34,000
यानी कि इसने गृहस्थ वाला विरक्त वाला दोनों को इसने अब यहां मान लिया।

1348
01:34:34,000 --> 01:34:38,160
दोनों ठीक है। एक तरफ गलत कहता है। एक तरफ सही कहता है। आगे पांच

1349
01:34:38,160 --> 01:34:42,480
श्लोक चार में कहता है ज्ञान योगी व गृहस्ती। यहां पे ज्ञान योगी यानी ईशांख

1350
01:34:42,480 --> 01:34:46,560
योगी यानी वो बात हो रही है सन्यास और वो कर्म योगी की अपनी

1351
01:34:46,560 --> 01:34:50,880
गीता के अनुसार। तो अब यह कह रहा है पांच श्लोक चार में ज्ञान

1352
01:34:50,880 --> 01:34:55,520
योगी व गृहस्ती दोनों की एक ही उपलब्धि बताई गई है। यह रामपाल

1353
01:34:55,520 --> 01:34:59,920
खुद कह रहा है श्लोक पांच चार की व्याख्या करते समय कि

1354
01:34:59,920 --> 01:35:04,000
गीता में ज्ञान योगी यानी कि कर्म सन्यास वाले

1355
01:35:04,000 --> 01:35:08,000
की और कर्म योगी यानी गृहस्थ की एक ही उपलब्धि बताई

1356
01:35:08,000 --> 01:35:13,520
है गीता में रामपाल के अनुसार इसको नोट कर लो आप अभी आगे मजा आएगा।

1357
01:35:13,520 --> 01:35:17,600
फिर यदि कोई कहता है कि ज्ञान योगी श्रेष्ठ या गस्थ श्रेष्ठ है तो वह

1358
01:35:17,600 --> 01:35:21,680
पंडित नहीं है। अब यहां पर देखो इसको चैन नहीं पड़ रहा है। इसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा

1359
01:35:21,680 --> 01:35:25,840
है कि ज्ञान योगी शास्त्र विरुद्ध है या गृहस्ती शास्त्र विरुद्ध

1360
01:35:25,840 --> 01:35:29,920
है। यानी कि इसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा कि ज्ञान योगी जो होता है

1361
01:35:29,920 --> 01:35:34,240
यह ज्ञान योगी जो होता है वो शास्त्रों के विरुद्ध साधना

1362
01:35:34,240 --> 01:35:36,800
करने वाला होता है। यह नहीं लिखा गीता में। मगर इसने

1363
01:35:36,800 --> 01:35:40,880
दोनों को ही बेकार कह दिया। ना ही इसमें यह लिखा है कि गस्ती जो होता

1364
01:35:40,880 --> 01:35:44,880
है वह शास्त्र विरुद्ध साधना करने वाला होता है। मगर इसने गस्त को भी अमान्य कर दिया।

1365
01:35:44,880 --> 01:35:48,880
फिर खुद कहता है कि यदि भक्ति शास्त्र विधि अनुकूल नहीं

1366
01:35:48,880 --> 01:35:53,200
है तो वह चाहे गस्ती हो या ज्ञानी हो दोनों ही असफल है। यानी कि अगर शास्त्र

1367
01:35:53,200 --> 01:35:57,280
के अनुसार होगी तो चाहे

1368
01:35:57,280 --> 01:36:01,440
वो गृहस्ती हो और चाहे वो विरक्ति हो दोनों ही फिर

1369
01:36:01,440 --> 01:36:05,520
सही होंगे। तो भाई इसमें मना कौन कर रहा है कि यहां उन

1370
01:36:05,520 --> 01:36:09,680
गृहस्थों की बात हो रही है जो शास्त्र विधि विरुद्ध है। मगर इसको तो अपना पेच लड़ाते चलना

1371
01:36:09,680 --> 01:36:15,680
है। अच्छा फिर से आगे जाकर के कह रहा है कि

1372
01:36:16,960 --> 01:36:21,040
अब देखिए पहले इसने माना कि दोनों की एक ही उपलब्धि बताई है।

1373
01:36:21,040 --> 01:36:25,040
ठीक है? फिर आगे आगे बता रहा है

1374
01:36:25,040 --> 01:36:29,680
इसी श्लोक में पांच चार में ही यह कह रहा है कि पांच श्लोक

1375
01:36:29,680 --> 01:36:33,680
चार में दोनों की उपलब्धि एक बताई है। फिर आगे कह रहा है स्वयं

1376
01:36:33,680 --> 01:36:38,080
भगवान कह रहे हैं कि शास्त्र विधि रहित साधना

1377
01:36:38,080 --> 01:36:42,320
कर्म सन्यासियों से कर्म योगी उत्पन्न है। अब यहां पे दोनों

1378
01:36:42,320 --> 01:36:46,880
की उपलब्धि अलग-अलग मान रहा है। क्योंकि कर्म सन्यास

1379
01:36:46,880 --> 01:36:50,960
कर्म सन्यास में त्याग का अभिमान होना स्वाभाविक है। इसका कोई प्रमाण नहीं है। कर्म

1380
01:36:50,960 --> 01:36:55,440
सन्यास में त्याग का अभिमान होता है। कोई सन्यास नहीं, कोई प्रमाण नहीं है।

1381
01:36:55,440 --> 01:36:59,440
ठीक है? अध्याय पांच के श्लोक पांच में कहा है कि ज्ञान योगी तथा कर्म योगी एक ही

1382
01:36:59,440 --> 01:37:03,440
स्थान प्राप्त करते हैं। यह इसने माना है अध्याय

1383
01:37:03,440 --> 01:37:07,680
पांच के श्लोक चार और पांच में इसने यह माना है कि कर्म

1384
01:37:07,680 --> 01:37:11,680
योगी और ज्ञान योगी यानी कि कर्म सन्यासी एक ही

1385
01:37:11,680 --> 01:37:16,640
स्थान प्राप्त करते हैं। जिनकी साधना यदि शास्त्रानुकूल

1386
01:37:16,640 --> 01:37:20,960
है और जो कोई ऐसा जानता है उसे ही ज्ञान कहते हैं। उसे ही ज्ञान।

1387
01:37:20,960 --> 01:37:24,960
ठीक? अब इसने आगे क्या कहा है? इसी बात के

1388
01:37:24,960 --> 01:37:30,480
बारे में अगले प्रश्न पर आइए आप 109

1389
01:37:30,480 --> 01:37:34,080
109 में नीचे आ जाइए विशेष

1390
01:37:34,080 --> 01:37:38,160
अब ये विशेष में क्या कह रहा है विशेष में ये कह

1391
01:37:38,160 --> 01:37:42,640
रहा है कि गीता जी के अन्य अनुवादकर्ताओं ने जो गीता

1392
01:37:42,640 --> 01:37:46,800
अध्याय पांच श्लोक चार में लिखा है कि सन्यास और कर्म

1393
01:37:46,800 --> 01:37:51,040
योग द्वारा एक ही फल मिलता है। ठीक है? यह

1394
01:37:51,040 --> 01:37:55,040
गलत अनुवाद है क्योंकि अध्याय पांच श्लोक छ के आधार से गलत

1395
01:37:55,040 --> 01:37:59,280
सिद्ध होता है। भाई तूने ही तो अनुवाद

1396
01:37:59,280 --> 01:38:03,280
किया है। दोनों की उपलब्धि एक है। हालांकि वही अनुवाद सही

1397
01:38:03,280 --> 01:38:07,360
है। अनुवाद से अनुवाद क्यों काट रहा है भाई तू?

1398
01:38:07,360 --> 01:38:11,520
दोनों की उपलब्धि एक है। तूने उसमें बड़ा छोटा किया है। दोनों से एक ही

1399
01:38:11,520 --> 01:38:16,080
दोनों को एक ही उपलब्धि पे ले जाने वाला बताया गया है। ठीक है? गीता के अनुसार। मगर

1400
01:38:16,080 --> 01:38:20,560
तूने खुद अभी कहा कि ये पांच श्लोक

1401
01:38:20,560 --> 01:38:24,720
चार में ज्ञान योगी व गृहस्ती दोनों की एक ही उपलब्धि बताई गई है। फिर इसी

1402
01:38:24,720 --> 01:38:29,280
प्रश्न में ऊपर कहा है 109 में ऊपर दिखाइए। देखिए इसके

1403
01:38:29,280 --> 01:38:33,280
पंचर दिमाग को पंक्चर कर देने वाला ज्ञान सबसे पहला

1404
01:38:33,280 --> 01:38:38,640
पैराग्राफ उसकी लास्ट की दो लाइनें

1405
01:38:38,640 --> 01:38:42,640
अध्याय पांच। यह अध्याय पांच लिखा है। सेकंड लाइन उसको

1406
01:38:42,640 --> 01:38:46,720
अंडरलाइन करिए जरा। यह तू अनुवाद कर

1407
01:38:46,720 --> 01:38:50,880
रहा है फड़ कहीं के। यह देख यह रामपाल

1408
01:38:50,880 --> 01:38:55,200
ने अनुवाद क्या किया है? अध्याय पांच के श्लोक

1409
01:38:55,200 --> 01:38:59,200
पांच में कहा है कि ज्ञान योगी तथा कर्म योगी एक

1410
01:38:59,200 --> 01:39:03,440
ही स्थान प्राप्त करते हैं। यह कहा है। यह माना है रामपाल ने।

1411
01:39:03,440 --> 01:39:09,440
अब नीचे विशेष में यह क्या कह रहा है?

1412
01:39:09,920 --> 01:39:14,640
के ही स्थान प्राप्त नहीं करते।

1413
01:39:14,640 --> 01:39:18,640
ठीक है? अध्याय पांच के श्लोक चार और

1414
01:39:18,640 --> 01:39:22,640
पांच दोनों में रामपाल ने माना कि दोनों कर्म योगी और

1415
01:39:22,640 --> 01:39:26,720
कर्म सन्यासी एक ही स्थान पे आप प्राप्त करते हैं या ज्ञान योगी और गृहस्थ दोनों एक ही

1416
01:39:26,720 --> 01:39:30,880
स्थान प्राप्त करते हैं। यह मान लिया रामपाल ने। फिर खुद रामपाल ही कह

1417
01:39:30,880 --> 01:39:35,040
रहा है कि गीता के जो अनुवादक हैं अन्य उन्होंने गलत किया

1418
01:39:35,040 --> 01:39:39,360
है क्योंकि दोनों एक ही स्थान प्राप्त नहीं करते। सन्यास मार्ग तो शास्त्र

1419
01:39:39,360 --> 01:39:43,600
विरुद्ध है। अब यहां सन्यास मार्ग शास्त्र विरुद्ध हो गया। यानी

1420
01:39:43,600 --> 01:39:47,920
रुचि ऋषि वहां पर पितरों की बात ना मान के सही कर रहे थे। ठोको

1421
01:39:47,920 --> 01:39:51,920
ताली। ठोको ताली। आवाज नहीं

1422
01:39:51,920 --> 01:39:56,160
आ रही तालियों की। तो भाई यह इसका सब पंचर

1423
01:39:56,160 --> 01:40:00,240
कर देने वाला दिमाग वह है। इसमें जाते कुछ तर्क और दे दूं

1424
01:40:00,240 --> 01:40:05,360
मैं कि यदि

1425
01:40:05,360 --> 01:40:09,840
आप किसी के अनुवाद पर निर्भर हैं तो आपको बाद वाला अनुवाद

1426
01:40:09,840 --> 01:40:13,920
कुछ और लग रहा है। यह वाला कुछ आपने यह निर्णय कैसे लिया कि बाद वाले

1427
01:40:13,920 --> 01:40:18,000
के अनुसार इसको बदलना है। यह यह क्यों नहीं हो सकता कि इसके अनुसार बाद

1428
01:40:18,000 --> 01:40:22,080
वाले को समझे। यह निर्णय कैसे होगा? इसीलिए कहा ना

1429
01:40:22,080 --> 01:40:26,160
अर्ध कुकुट न्याय नहीं कर सकते। सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों

1430
01:40:26,160 --> 01:40:30,400
में सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है। एक भी श्लोक

1431
01:40:30,400 --> 01:40:36,240
को काट नहीं सकते। श्लोक को काटोगे तो उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न आ जाएगा।

1432
01:40:36,240 --> 01:40:40,400
सब कौन समझाया इन भुओं को? इनको समझाते समझाते मेरे सर में दर्द हो जाता

1433
01:40:40,400 --> 01:40:46,400
है।

1434
01:40:48,240 --> 01:40:52,560
तो ये आज का रुचि ऋषि वाला हो गया। राघव ने जो चैलेंज

1435
01:40:52,560 --> 01:40:56,720
के बारे में बेवकूफ बनाया गवर्नरों को वो हो गया। और

1436
01:40:56,720 --> 01:41:01,040
जो जिन बातों को लेकर के हम लड़ रहे हैं इस तंत्र

1437
01:41:01,040 --> 01:41:05,200
से अपराधिक तंत्र से उन चीजों को

1438
01:41:05,200 --> 01:41:09,360
डिफेंड करने के लिए जो उसने अपने गवर्नरों को मूर्ख बनाने के लिए उल्टे सीधे

1439
01:41:09,360 --> 01:41:13,360
प्रमाण प्रस्तुत करें उसका निराकरण हो गया। साथ ही

1440
01:41:13,360 --> 01:41:17,440
साथ जो पिछले सप्ताह हमने एपिसोड जो नाइन है

1441
01:41:17,440 --> 01:41:21,600
इस श्रंखला का उसमें जो अध्ययन किया था उसके बुलेट पॉइंट्स आज मैंने

1442
01:41:21,600 --> 01:41:23,440
आपको यहां सुना दिए।

1443
01:41:23,440 --> 01:41:27,840
आशा करते हैं आपको आनंद आया होगा। थोड़ा सा लिंक दे दीजिए तो

1444
01:41:27,840 --> 01:41:31,840
थोड़ा सा मैं काम डाउन हो जाऊं। बहुत बड़े ट्रॉमा से निकलता हूं जब मैं इसको

1445
01:41:31,840 --> 01:41:35,840
पढ़ता हूं। रामपाल को यह आपको लिंक दिया गया

1446
01:41:35,840 --> 01:41:39,680
है। कोई

1447
01:41:39,680 --> 01:41:43,680
वो अगर उपलब्ध तो वह आ जाए। वैचारिक मतभेद के निमित्त

1448
01:41:43,680 --> 01:41:47,920
चर्चा करने ना आए। वो आना है तो फॉर्म भरे। हमारा नंबर दिया

1449
01:41:47,920 --> 01:41:52,240
गया है। हम राघव दास और अभिषेक की तरह

1450
01:41:52,240 --> 01:41:56,720
जो है उस तरह की स्त्री नहीं है जिसके

1451
01:41:56,720 --> 01:42:00,720
विवाह के बाद वो अंग चिपकाया जाता है। अंग विशेष चिपकाया

1452
01:42:00,720 --> 01:42:05,600
जाता है फेविकॉल फेवीक्विक के द्वारा और फिर उस

1453
01:42:05,600 --> 01:42:09,680
बाबा से बाबा के साथ जो है

1454
01:42:09,680 --> 01:42:13,760
संजोग होता है उनका जो बाबा खुद इसी प्रकार से अंग को चिपका

1455
01:42:13,760 --> 01:42:18,000
कर जो है अपने तथाकथित परमेश्वर के साथ संजोग करके आता

1456
01:42:18,000 --> 01:42:22,240
है। बड़ा गु्थी है बड़ी कोई

1457
01:42:22,240 --> 01:42:28,240
आना चाहता है लाइव में कुछ विचार प्रकट करने के लिए तो आ सकता है।

1458
01:42:31,760 --> 01:42:37,760
तब तक मैं कमेंट पढ़ लेता हूं।

1459
01:42:44,480 --> 01:42:48,800
ये बात बिल्कुल सही बता रहे हैं। रामपाल ने जो मार्ग बनाया है उस पर चलकर

1460
01:42:48,800 --> 01:42:53,200
रामपाल के ही अनुसार लोगों को नरक के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। अभी देखो

1461
01:42:53,200 --> 01:42:59,200
उसकी किताबें पढ़ने में कितना नरक मिल रहा है।

1462
01:43:19,760 --> 01:43:25,760
अच्छा आज खीर दिवस है। ओ हो हो

1463
01:43:26,320 --> 01:43:32,320
रामपाल के बारे में कुछ

1464
01:43:39,120 --> 01:43:45,120
ये क्या कहना चाहती हैं? समझ में नहीं आ रहा है।

1465
01:43:45,440 --> 01:43:47,920
बोलिए

1466
01:43:47,920 --> 01:43:53,920
बताइए आपकी बात।

1467
01:44:06,480 --> 01:44:11,360
एक व्यक्ति कह रहा है वेदों में प्रमाण है रामपाल शैतान है।

1468
01:44:11,360 --> 01:44:15,360
हां कई उसी की किताबों से भी निकाला जा सकता

1469
01:44:15,360 --> 01:44:21,360
है क्योंकि उसने इतनी खिचड़ी पकाई है ना।

1470
01:44:22,240 --> 01:44:26,400
अनिकेत जी लीजिए अनकेत जी को स्टेज

1471
01:44:26,400 --> 01:44:32,160
पर लीजिए जय श्री राम अनकेत जी

1472
01:44:32,160 --> 01:44:38,160
हां जय श्री राम भैया जय श्री राम

1473
01:44:43,200 --> 01:44:47,200
इस वीडियो को मुझे दोबारा से अगर मैं और

1474
01:44:47,200 --> 01:44:51,440
क्लेरिटी के साथ प्रस्तुत करना चाहूं ना जो आज मैंने इंफॉर्मेशन दी है कर्म सन्यास

1475
01:44:51,440 --> 01:44:56,320
कर्म योग के बारे में तो मुझको काफी मेहनत करनी पड़ेगी उसको

1476
01:44:56,320 --> 01:45:00,400
बिंदुगत तरीके से बताने के लिए

1477
01:45:00,400 --> 01:45:05,840
जी भाटी जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

1478
01:45:05,840 --> 01:45:09,920
बस हम तो आज श्रोता ही है आप ही बोलिए लेकिन नहीं

1479
01:45:09,920 --> 01:45:14,080
डालेंगे आपके बीच मेरा हो गया मेरा हो गया अरे लगातार

1480
01:45:14,080 --> 01:45:20,080
एक डेढ़ घंटे से बोल तो रहा हूं बड़ा समय बांध दिया आज तो आपने

1481
01:45:25,520 --> 01:45:30,240
क्लीन बोल्ड कर दिया आपने एकदम से

1482
01:45:30,240 --> 01:45:34,240
जिन्होंने नहीं देखा है अभियान शुरू हो चुका है हां बोलिए

1483
01:45:34,240 --> 01:45:38,720
बोलिए आप बोलिए मैं अभी बाद में बोलता हूं बोलिए हां

1484
01:45:38,720 --> 01:45:43,360
अब ये लोग क्या करेंगे कहेंगे मालूम है नई बात कहेंगे क्या

1485
01:45:43,360 --> 01:45:47,680
कि देखो शिवश एकदम से ये हो गया है

1486
01:45:47,680 --> 01:45:51,920
और उसका उसका दिमाग नहीं सही चल रहा है। शास्त्रों में प्रमाण है। सूक्ष्म

1487
01:45:51,920 --> 01:45:56,160
सूक्ष्म वेद है। ये वही रिपीट करेंगे। बार-बार बार-बार

1488
01:45:56,160 --> 01:46:00,240
वो मैं बता रहा हूं आपको। वो जो मैंने बताया था रॉकी जो

1489
01:46:00,240 --> 01:46:04,560
कुत्ता था ना मित्र के यहां जो हवा में भौक रहा था। उस भौकने

1490
01:46:04,560 --> 01:46:08,800
का कोई प्रयोजन नहीं था। उसका दिमाग झटका खा गया था। इसी प्रकार

1491
01:46:08,800 --> 01:46:12,880
से इनका सही है। हां। इसी प्रकार से यह जो यह

1492
01:46:12,880 --> 01:46:16,160
बोलते हैं ना आके अपनी रिपीटेड

1493
01:46:16,160 --> 01:46:20,240
रिपीट करते हैं ना रिपीटेशन करते हैं जो यह बातें बोलते हैं

1494
01:46:20,240 --> 01:46:24,720
ये इसका कोई प्रयोजन नहीं होता है कि हम जवाब दे रहे हैं वास्तविकता

1495
01:46:24,720 --> 01:46:28,720
में हम कुछ ऐसा बोल रहे हैं जिससे सामने वाले की बात कटे कम

1496
01:46:28,720 --> 01:46:32,960
से कम वो प्रभावित तो हो इनका काम बस बोलना होता है कि हमने

1497
01:46:32,960 --> 01:46:37,040
कुछ बोला जिससे हमारी जनता को लगा वाह ठोको ताली हो

1498
01:46:37,040 --> 01:46:40,640
गया इंतजाम हो गया अच्छा जनता भी कैसी है अरे तेरी तेरा

1499
01:46:40,640 --> 01:46:45,360
तेरा तो बैंड बज गया। अरे तेरा तो वीडियो बन गया। वीडियो बनने से बैंड

1500
01:46:45,360 --> 01:46:49,360
निग्गू वाली बात निग्गू हां

1501
01:46:49,360 --> 01:46:53,360
हां निग्गू भी यही करता है ना वो तो अच्छा हुआ। उस समय मेरे

1502
01:46:53,360 --> 01:46:57,680
फोन में बैटरी कम थी नहीं तो मैं उसका पोस्टमार्टम तभी कर देता। मतलब वीडियो

1503
01:46:57,680 --> 01:47:01,680
बना देना ही किसी के लिए ये बहुत बड़ा झंडा है। अच्छा वो एक

1504
01:47:01,680 --> 01:47:05,680
बात और कह रहा था राघव दास कह रहा था कि भाई तू और

1505
01:47:05,680 --> 01:47:09,680
कर क्या सकता है? तू तो यही कर सकता है। पुतला जा। अबे भचू कहीं के

1506
01:47:09,680 --> 01:47:13,760
तेरी औकात क्या है? तू क्या कर सकता है? ये बार-बार बुक के पीछे

1507
01:47:13,760 --> 01:47:17,840
खड़ा हो के अपने गवर्नरों को सुना सकता है उल्टी सीधी चीजें।

1508
01:47:17,840 --> 01:47:22,080
अरे हम तो तेरी छाती पे खड़े होकर एक हम तो तेरी छाती

1509
01:47:22,080 --> 01:47:26,720
पे हम तो तेरी छाती पे खड़े हो के आ रहे हैं। वहां के कोऑर्डिनेटर

1510
01:47:26,720 --> 01:47:30,800
भागे हुए। तेरे यहां महिलाएं आकर कह रही है। यहां किताब नहीं है किताब नहीं

1511
01:47:30,800 --> 01:47:35,040
है। और यह कह रहा है मुंडिका आश्रम आजा। वहां मेरा घर है मुंडका में।

1512
01:47:35,040 --> 01:47:39,360
एड्रेस दिया है क्या तूने? एड्रेस दे कहां पर चिपकाना

1513
01:47:39,360 --> 01:47:43,760
है तो हम देखेंगे किस किस प्रकार से चिपकेगा पर्चा

1514
01:47:43,760 --> 01:47:47,840
और मैंने तो खुद उस वीडियो में कहा है ना भाई मुझे पूरी दुनिया में बदलाव नहीं लाना

1515
01:47:47,840 --> 01:47:51,840
मुझे मेरी गली में लाना है जो हिंदू है वो अपनी गली में बदलाव लाएगा हर

1516
01:47:51,840 --> 01:47:57,520
हिंदू अपनी गली में बदलाव लाएगा सब सही हो जाएगा

1517
01:47:57,520 --> 01:48:01,760
हमें रामपाल [गला साफ़ करने की आवाज़] को नहीं पकड़ना है रामपालियों को पकड़ना है ध्यान रख लो आप सब

1518
01:48:01,760 --> 01:48:06,000
लोग अपने बगल वाले अपने घर के पास निकटतम

1519
01:48:06,000 --> 01:48:10,640
रहने वाले वाले रामपाली के यहां जाओ और वहां यह पर्चा चिपकाओ

1520
01:48:10,640 --> 01:48:14,720
कि वह किसको चंदा देता है। तुम्हारी मां को गाली देने

1521
01:48:14,720 --> 01:48:18,960
वाले वाले को वो चंदा देता है। उस उसके

1522
01:48:18,960 --> 01:48:23,040
यहां पर शांतिपूर्वक तरीके से कोई लड़ाई झगड़ा नहीं। उसके आसपास दीवारों पर

1523
01:48:23,040 --> 01:48:27,040
ये पर्चा चिपकाओ। जैसे लोगों के घर के बाहर लिख देते थे ना

1524
01:48:27,040 --> 01:48:31,200
यह गद्दार का घर है। ऐसे ही आसपास उसके लोगों को

1525
01:48:31,200 --> 01:48:35,440
बताओ कि यह उन लोगों से जुड़ा हुआ है। उन लोगों से इसका

1526
01:48:35,440 --> 01:48:39,440
संबंध है जो तुम्हारी मां को गाली देते हैं। इसके साथ किसी

1527
01:48:39,440 --> 01:48:43,440
भी प्रकार का संबंध रखने वाला अपनी माता के अपनी दुर्गा

1528
01:48:43,440 --> 01:48:49,200
मां के बारे में प्रचारित होने वाली ऐसी भ्रामक बातों का समर्थक कहलाएगा।

1529
01:48:49,200 --> 01:48:51,360
बताओ

1530
01:48:51,360 --> 01:48:55,600
यह सारी सामग्री हमारे पास ड्राइव में उपलब्ध है। WhatsApp

1531
01:48:55,600 --> 01:48:59,840
करिए, ड्राइव लीजिए। ये सारी प्रचार सामग्री आप आपको उपलब्ध है।

1532
01:48:59,840 --> 01:49:04,240
ये पर्चा चिपकाइए और पुतला जला सकते हैं तो पुतला जलाइए।

1533
01:49:04,240 --> 01:49:08,320
जी यही बात मैं कह रहा था। यही बात मैं

1534
01:49:08,320 --> 01:49:12,560
कह रहा था। जिस प्रकार आपने जो पुतला दहन वाला किया ये पूरे भारतवर्ष

1535
01:49:12,560 --> 01:49:16,560
में गलीगली में होना चाहिए। हम क्या है कि बहुत

1536
01:49:16,560 --> 01:49:20,640
सहिष्णुता अब बहुत ज्यादा रखनी है। मुखर विरोध जो आपने

1537
01:49:20,640 --> 01:49:25,760
शुरू किया है वो भारत के हर कोनेकोने में होना चाहिए।

1538
01:49:25,760 --> 01:49:30,000
ये बहुत अच्छा सराहनीय आपका स्टेप था और इसका अनुकरण

1539
01:49:30,000 --> 01:49:35,520
हम सबको निश्चित रूप से करना चाहिए। बिल्कुल

1540
01:49:35,520 --> 01:49:39,600
और मेरे पास कई लोगों ने संपर्क किया भी है। आज ही किया है। बहुत जल्द दिल्ली

1541
01:49:39,600 --> 01:49:43,840
में पटना में। जी जगहजगह होना चाहिए। जगह-जगह ब्लॉक

1542
01:49:43,840 --> 01:49:48,720
मुख्यालय पे तहसील स्तरों पे जिला मुख्यालय पे जगह-जगह होना चाहिए। ये

1543
01:49:48,720 --> 01:49:52,880
ये भगवान का काम है। कोई छोटा-मोटा काम नहीं है।

1544
01:49:52,880 --> 01:49:56,960
वो यार कुछ नहीं है। उनमें कोई नहीं है। बिल्कुल मतलब

1545
01:49:56,960 --> 01:50:00,960
धूल में लट मार रहे हैं। जिसमें इतने तलीनता से लगे

1546
01:50:00,960 --> 01:50:05,040
हुए हैं। इतनी निष्ठा से लगे हुए हैं। हमारा ये भगवत कार्य है। यह बहुत

1547
01:50:05,040 --> 01:50:11,040
अच्छा लगा। यह कोनेकोने में होना चाहिए। यह बिगुल बच जाना चाहिए निश्चित रूप से।

1548
01:50:12,320 --> 01:50:16,480
अनिकेत जी तो तैयार हो ही चुके हैं। बहुत जल्द अपने क्षेत्र

1549
01:50:16,480 --> 01:50:20,560
में करने वाले हैं कार्यक्रम। भाटी जी भी करेंगे और जितने भी

1550
01:50:20,560 --> 01:50:24,640
लोग हैं जानकारी में कई लोगों के मुझे फोन आ चुके हैं। अब जगह

1551
01:50:24,640 --> 01:50:30,000
होने वाला है।

1552
01:50:30,000 --> 01:50:34,000
पिछली बार पिछली बार भैया आपने यही चीज आप जो आप बोल रहे

1553
01:50:34,000 --> 01:50:38,320
हो ना यही चीज पिछली बार आपने बोला था कि

1554
01:50:38,320 --> 01:50:42,480
मेरे गली में मेरी मां का अपमान होगा और मैं सुन के लूंगा। इतना कायर

1555
01:50:42,480 --> 01:50:46,480
नहीं हूं। वो दिल पर मेरे बात छप गई थी। इसके लिए जब

1556
01:50:46,480 --> 01:50:50,560
मैं जा रहा था तो मेरे यहां से मात्र 5 से 7 मिनट का ही

1557
01:50:50,560 --> 01:50:54,800
दूरी है जहां पर वो लोग ये सब प्रचार करते थे। मैं जा रहा था सडनली

1558
01:50:54,800 --> 01:50:58,880
मिल गए वो लोग और ताज्जुब की बात तो मुझे वो लगी कि वो

1559
01:50:58,880 --> 01:51:03,040
आपको जानते हैं यहां के लोग भी [हंसी] तो मैंने उसमें

1560
01:51:03,040 --> 01:51:07,280
जब उसने वीडियो बंद करवाया पहले बोला ऐसे ही बात करो तो मैंने बोला शिवा

1561
01:51:07,280 --> 01:51:11,520
नारायण द्विवेदी को जानते हो बोलता है हां नाम सुना है मैंने फिर फोटो दिखाया

1562
01:51:11,520 --> 01:51:15,520
आपका बोलता हां हां ये महाराज को जानते हैं पंडित

1563
01:51:15,520 --> 01:51:19,920
जी को तो ये सब इनके बातों में आप मत फसो

1564
01:51:19,920 --> 01:51:23,920
मुझे वो लपेट रहा था [हंसी] मुझे लपेट रहा था।

1565
01:51:23,920 --> 01:51:27,600
मैं बोला ये तो डिबेट के लिए बुलाते हैं। तुम लोग आते ही नहीं हो। कर लो

1566
01:51:27,600 --> 01:51:31,600
डिबेट। मैं नंबर दे देता हूं। ये वो बोलते देखो डिबेट करना तो हमारे गुरु से

1567
01:51:31,600 --> 01:51:36,240
करो। मैं बोला यार तुम्हारे गुरु आकर एक ही चीज बोलते हैं कि

1568
01:51:36,240 --> 01:51:40,800
मेरा चैलेंज है सबको सबको

1569
01:51:40,800 --> 01:51:44,880
हरा देंगे। और कैसे हराएंगे? बस बोल दिया तो हरा दिया।

1570
01:51:44,880 --> 01:51:48,880
नहीं नहीं तुम ये कहो तुम अपने गुरु का नंबर दे दो ना। कर लेते

1571
01:51:48,880 --> 01:51:54,880
हैं उसी से। नंबर लाओ। नंबर [गला साफ़ करने की आवाज़] तो दो

1572
01:51:55,440 --> 01:51:59,680
हवा में कर ले क्या? हां तो

1573
01:51:59,680 --> 01:52:03,840
मैं एक चीज एक संदेश सभी को दे दूं। हां एक संदेश दे दूं मैं

1574
01:52:03,840 --> 01:52:08,640
तो मैंने उससे पूछा सर

1575
01:52:08,640 --> 01:52:13,200
एक एक संदेश मैं दे देता हूं। फिर आप आप लोग अपनी बात रखिए।

1576
01:52:13,200 --> 01:52:18,240
सभी जितने भी हिंदू हैं और जिनके मन में भी रोष है

1577
01:52:18,240 --> 01:52:22,640
रामपाल के तंत्र को उसकी गतिविधियों को लेकर के ठीक है

1578
01:52:22,640 --> 01:52:26,800
अब भी जिसका खून ना खौला खून नहीं वो पानी है

1579
01:52:26,800 --> 01:52:30,960
जो अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए काम ना आए वह बेकार जवानी

1580
01:52:30,960 --> 01:52:34,960
है ठीक है तो आप अगर

1581
01:52:34,960 --> 01:52:39,120
हिंदू हैं और दुर्गा माता को आप अपनी मां

1582
01:52:39,120 --> 01:52:43,280
मानते हैं भगवती मानते हैं या सनातन धर्म से जुड़े हुए

1583
01:52:43,280 --> 01:52:47,440
किसी भी भगवान के स्वरूप के प्रति आपकी आस्था है। सनातन धर्म

1584
01:52:47,440 --> 01:52:51,840
में आपकी आस्था है और आप रामपाल के मामले

1585
01:52:51,840 --> 01:52:55,920
से अवगत नहीं है तो अवगत हो जाइए और जिनके मन में पहले

1586
01:52:55,920 --> 01:53:00,640
से रोष है तो आपको कोई झगड़ा नहीं करना है। कोई लूटखसोट

1587
01:53:00,640 --> 01:53:05,440
कुछ नहीं। केवल जहां आपके निकटतम

1588
01:53:05,440 --> 01:53:09,840
रामपाली कोई रह रहा है। उसका सामाजिक

1589
01:53:09,840 --> 01:53:12,640
बहिष्कार करवाइए।

1590
01:53:12,640 --> 01:53:17,600
यह लोग हम ही लोगों से अर्थ प्राप्त

1591
01:53:17,600 --> 01:53:21,840
कर रहे हैं। आजीविका प्राप्त कर रहे हैं। हम ही लोगों से और उसका

1592
01:53:21,840 --> 01:53:24,080
उपयोग इसी प्रकार से हमारे

1593
01:53:24,080 --> 01:53:28,080
हमारी आस्था का जो विषय हैं उनका अपमान करने में लगा रहे हैं।

1594
01:53:28,080 --> 01:53:32,240
तो अब समय आ चुका है। खड़े हो जाइए। जगह-जगह पर अगर

1595
01:53:32,240 --> 01:53:36,320
आपके पास सामर्थ्य है बजरंग दल सक्रिय है विश्व हिंदू

1596
01:53:36,320 --> 01:53:40,640
परिषद सक्रिय है जो हिंदुत्ववादी कोई दल मिल जाए संस्था मिल जाए

1597
01:53:40,640 --> 01:53:44,640
उसके साथ संपर्क करिए उसको ये चीजें बताइए पुतला दहन करिए

1598
01:53:44,640 --> 01:53:48,640
अगर कर सकते हैं तो नहीं कर सकते कम से कम अपने घर के

1599
01:53:48,640 --> 01:53:52,720
पास रहने वाले सबसे पहला सबसे मोस्ट इंपॉर्टेंट यह ध्यान रखिए

1600
01:53:52,720 --> 01:53:56,880
पुतला दहन से भी ज्यादा इंपॉर्टेंट है आप अपने घर के पास

1601
01:53:56,880 --> 01:54:00,880
रहने वाले रामपाली का सामाजिक बहिष्कार करिए

1602
01:54:00,880 --> 01:54:04,880
लोगों को बताइए यह कौन व्यक्ति है जो यहां पर नौकरी कर रहा है

1603
01:54:04,880 --> 01:54:09,120
इसके यहां उसके मालिक को बताइए जहां वह नौकरी कर रहा है

1604
01:54:09,120 --> 01:54:13,120
लोगों को बताइए जहां वो परचूनी दुकान खोले बैठा है या और कोई दुकान खोले बैठा है

1605
01:54:13,120 --> 01:54:18,400
उसके आसपास पर्चे चिपकाओ उसकी दुकान पर मत चिपकाओ उसके आसपास चिपकाओ

1606
01:54:18,400 --> 01:54:22,400
उसके आसपास उद्घोष करो यह कौन है जैसे हमने किया वहां

1607
01:54:22,400 --> 01:54:26,400
पर वो बोर्ड लगाओ अभी अकल ठिकाने

1608
01:54:26,400 --> 01:54:30,880
आने लगेगी जगह जगह पर इनका बहिष्कार करो

1609
01:54:30,880 --> 01:54:35,680
अभी मेरे पास संपर्क आने लगा उस समोसे वाले का।

1610
01:54:35,680 --> 01:54:39,280
ठीक है? मैं बताऊंगा जो भी जैसा भी होगा आगे।

1611
01:54:39,280 --> 01:54:41,600
तो

1612
01:54:41,600 --> 01:54:46,080
यह सब आप लोग चालू करें और देखिए किस तरीके से आपको

1613
01:54:46,080 --> 01:54:50,160
अभी से ही तुरंत यह करते ही आपको संतोष हृदय को पड़ने लगेगा।

1614
01:54:50,160 --> 01:54:54,320
मुझे बड़ा संतोष है। बिल्कुल उसकी छाती

1615
01:54:54,320 --> 01:54:58,400
पर उसके वहां पेड़ पर जहां पर उसका ठेला लगता है वहीं पर लगा के

1616
01:54:58,400 --> 01:55:02,480
आया हूं बोर्ड और दो दिन से दिख नहीं रहा है वो और

1617
01:55:02,480 --> 01:55:06,800
अभी दिखेगा तो फिर वहां जाकर के करूंगा। इससे

1618
01:55:06,800 --> 01:55:11,360
तो मुझे कोई नहीं रोक सकता ना। मैं फिर वहां जाकर के

1619
01:55:11,360 --> 01:55:15,600
बताऊंगा लोगों को लाउडस्कर लेकर के। यह कौन व्यक्ति है जिसके

1620
01:55:15,600 --> 01:55:19,200
तुम समोसे खा रहे हो।

1621
01:55:19,200 --> 01:55:23,360
ठीक है तो यह सब है जी अब आप

1622
01:55:23,360 --> 01:55:29,360
लोग बोले जी अनिकेत जी आपको अपनी बात पूरी करनी

1623
01:55:36,320 --> 01:55:40,480
हां तो मैंने उन लोगों से पूछा बुक वगैरह

1624
01:55:40,480 --> 01:55:44,480
के बारे में कहां पर छपती है तो ये लोग वही बोले वो हमारा हरियाणा में

1625
01:55:44,480 --> 01:55:48,560
छपता है मैंने बोला वो तो इललीगल है बोलते लीगल ये है बोला मुझे बुक

1626
01:55:48,560 --> 01:55:53,120
दो। बोले बुक हम लोग लेकर घूमते। पहले तो एड्रेस बताने के लिए वो हिचकिचा

1627
01:55:53,120 --> 01:55:57,600
रहा था वो वीडियो में भी आप लोग देखोगे सब लोग तो बाद में उससे मैंने एड्रेस उगलवा लिया।

1628
01:55:57,600 --> 01:56:01,680
फिर उस एड्रेस पर मैं गया तीसरे दूसरे तीसरे दिन तो वहां पर कोई नहीं

1629
01:56:01,680 --> 01:56:05,760
था। ये लोग एड्रेस भी झूठा बताते हैं। तब कि

1630
01:56:05,760 --> 01:56:09,920
हमारा यहां पर एड्रेस है। हम यहां पर ऐसा-सा काम करते हैं। वगैरह फिर मैंने

1631
01:56:09,920 --> 01:56:14,480
भैया 10 दिन कंटिन्यू उस स्टेशन पर उस ब्रिज पर मैंने

1632
01:56:14,480 --> 01:56:18,560
आता आना जाना देखा। वहां पर तीन-तीन बार चार-चार बार जाता था वो लोग आना

1633
01:56:18,560 --> 01:56:22,720
बंद कर दिए। वो लोग वहां पर 10 दिन से आना बंद कर दिए। आज तक मुझे नहीं

1634
01:56:22,720 --> 01:56:27,280
दिखे वापस। तो जैसा आपने बताया ना कि संतुष्टि है। मुझे भी काफी संतुष्टि

1635
01:56:27,280 --> 01:56:32,160
मिला कि भाई मेरी मां का अपमान करने वालों को मैंने यहां से भगा दिया।

1636
01:56:32,160 --> 01:56:34,320
दिख नहीं रहे हैं। क्योंकि अन्नदान के

1637
01:56:34,320 --> 01:56:38,320
नाम पर उन लोग दान मांग रहे थे। गरीबों को, बुजुर्गों

1638
01:56:38,320 --> 01:56:42,560
को हम खाना खिलाते हैं। अच्छा ये भी नहीं एक वक्त

1639
01:56:42,560 --> 01:56:46,560
और याद आई वाशरूम के नाम एक बात और अच्छी याद

1640
01:56:46,560 --> 01:56:50,560
आई है। यह लोग कहते हैं अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा

1641
01:56:50,560 --> 01:56:54,720
मुहिम। अन्नपूर्णा मुहिम। हालांकि तुम्हारे बाबा ने तो ये कह ही दिया कि मैं चंदा

1642
01:56:54,720 --> 01:56:58,720
लेकर के ही करता हूं काम सारे। दूसरी बात

1643
01:56:58,720 --> 01:57:02,800
यह है कि भाई तुमने जब यह स्कीम चलाई है

1644
01:57:02,800 --> 01:57:07,120
जो अन्नपूर्णा मुहिम अन्नपूर्णा मुहिम क्यों चलाई है?

1645
01:57:07,120 --> 01:57:11,200
राम पूर्ण यह जो अपना जेल कट्टू पूर्ण मुहिम

1646
01:57:11,200 --> 01:57:15,200
क्यों नहीं चलाई है भाई हमारी जो देवी है

1647
01:57:15,200 --> 01:57:19,280
अन्नपूर्णा माता उनका नाम लेकर के क्यों चल रहा है तू और

1648
01:57:19,280 --> 01:57:23,360
अन्नपूर्णा के बारे में बता दूं साल के 365 दिन वहां

1649
01:57:23,360 --> 01:57:27,360
पर भूखों को भोजन मिलता है बनारस में चले जाना

1650
01:57:27,360 --> 01:57:31,680
अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा अनाकोंडा पाइप

1651
01:57:31,680 --> 01:57:35,760
गिन नहीं पाओगे इतने चीजें जो है सनातनियों के यहां की जाती

1652
01:57:35,760 --> 01:57:39,760
है और उसका ढिंढोरा नहीं पीटा जाता तुम्हारे तुम्हारे

1653
01:57:39,760 --> 01:57:44,800
जैसे लोगों की तरह हाथी पर चिल्ला के हमने यह कर दिया हमने यह कर दिया

1654
01:57:44,800 --> 01:57:50,800
कंटिन्यू अनिकेत जी

1655
01:57:53,280 --> 01:57:57,440
हां ऐसा तो अनेक लोग कर रहे हैं भारतवर्ष में हजारों की तादाद

1656
01:57:57,440 --> 01:58:01,440
में लोग कर रहे हैं लेकिन वह प्रचार नहीं करते अपना वो कर्तव्य

1657
01:58:01,440 --> 01:58:06,080
समझ के ऐसा कर रहे हैं और विभिन्न प्रकल्पों में

1658
01:58:06,080 --> 01:58:10,240
यह तो नाम मात्र का करते थोड़ा बहुत है और उसका प्रचार में जितना पैसा

1659
01:58:10,240 --> 01:58:14,560
यह वो दान में लगाते हैं उससे सहना मुझे लगता है ये प्रचार में अपना

1660
01:58:14,560 --> 01:58:18,800
वो वीडियो क्रिएशन में प्रचार में ज्यादा ज्यादा प्रचार

1661
01:58:18,800 --> 01:58:22,880
पे बस इनका काम है सोशल मीडिया पे हावी होना बस किसी

1662
01:58:22,880 --> 01:58:27,280
ने भी वीडियो बना दिया सोशल मीडिया पे उसको बिल्कुल रौंद डालो धरातल पे

1663
01:58:27,280 --> 01:58:31,360
महाराज अरे धरातल पे अनिकेत जी को कैसे हां ये महाराज जी को मैं

1664
01:58:31,360 --> 01:58:35,360
जानता हूं महाराज धरातल पे क्या हो गए महाराज हो गए [हंसी] बाकी

1665
01:58:35,360 --> 01:58:39,440
शिवश जी मैं मैं जिस शहर से हूं वहां उस शहर

1666
01:58:39,440 --> 01:58:43,440
में हमारे दो तीन प्रमुख हॉस्पिटल है वहां एक कोचिंग के संचालक हैं। वो

1667
01:58:43,440 --> 01:58:47,520
भोजन कराते हैं। करोड़ों रुपया साल का खर्च करते हैं लेकिन उनका कोई

1668
01:58:47,520 --> 01:58:51,920
प्रचार नहीं है। ऐसे मतलब हर अपने हर कस्बे में लोग होंगे सनातनी

1669
01:58:51,920 --> 01:58:57,920
विभिन्न हमारे मंदिर होंगे जो बड़े-बड़े हॉस्पिटल चला रहे हैं।

1670
01:59:01,920 --> 01:59:06,240
जी मनप्रीत जी आप भी बोले फिर मुझे लगता है समय काफी हो गया है

1671
01:59:06,240 --> 01:59:11,440
जी जय श्री राम जय श्री राम भाई

1672
01:59:11,440 --> 01:59:15,840
ये तो बहुत अच्छा लगा आपकी वीडियो देख के पुतला दहनली

1673
01:59:15,840 --> 01:59:20,160
और जो है बाकी सारा जो आपने किया इसके लिए

1674
01:59:20,160 --> 01:59:24,240
तो इसमें दिल्ली में जो एक बारी देखना चाह रहे थे पर शायद हम भी ऐसा

1675
01:59:24,240 --> 01:59:28,320
ही करना चाहते हैं तो क्या इसके लिए अनुमति लेनी पड़ती है और दिल्ली में

1676
01:59:28,320 --> 01:59:32,480
भी आपका कोई ग्रुप या संगठन ऐसा हां जो कि

1677
01:59:32,480 --> 01:59:36,480
चीजें तैयार चीजें दिल्ली की तैयारी चल रही है और इस

1678
01:59:36,480 --> 01:59:40,800
तरह की बात आप मुझसे व्यक्तिगत कर लीजिएगा फोन पे। जी जी

1679
01:59:40,800 --> 01:59:44,880
बिल्कुल ठीक है बाकी हमारे चेक भाइयों को भी काफी

1680
01:59:44,880 --> 01:59:49,360
इन्होंने अंदर ले लिया है उल्टा सीधा पट्टी पढ़ा के तो इसलिए

1681
01:59:49,360 --> 01:59:53,520
उनको भी अवेयरनेस के लिए वो देखिए आली रे आली वो आप

1682
01:59:53,520 --> 01:59:58,000
बताओगे सही से आप उधर ही के हो महाराष्ट्र वो बताओ जरा

1683
01:59:58,000 --> 02:00:02,720
अनिकेत जी आली रे आली

1684
02:00:02,720 --> 02:00:05,440
क्या है वो

1685
02:00:05,440 --> 02:00:08,480
चले गए क्या

1686
02:00:08,480 --> 02:00:12,880
अनकेत जी इनके जी नहीं है अभी हां

1687
02:00:12,880 --> 02:00:17,200
आता तू जी वारी आली आता तू जी वारी

1688
02:00:17,200 --> 02:00:21,360
आली आली रे आली आ आवाज

1689
02:00:21,360 --> 02:00:26,080
आ रही बारी आ हां हां आ रही है

1690
02:00:26,080 --> 02:00:30,320
ओ आली रे आली [हंसी] आता

1691
02:00:30,320 --> 02:00:34,720
तू जी बारी आली ठीक है तो समझ लो जितने भी रामपालियों

1692
02:00:34,720 --> 02:00:39,440
रह रहे हो मेरे जैसों के आसपास आली रे आली

1693
02:00:39,440 --> 02:00:43,520
आता तुझ बारी आ चुटकी बजा के चुटकी चुटकी बजा के करता

1694
02:00:43,520 --> 02:00:47,600
है भैया चुटकी बजा के करता है चुटकी बजा के ऐ सारे

1695
02:00:47,600 --> 02:00:51,600
रामपालियों सुन लो जो भी किसी हिंदुत्ववादी व्यक्ति के आसपास रह

1696
02:00:51,600 --> 02:00:56,000
रहे हो आली रे आली आ तु

1697
02:00:56,000 --> 02:01:00,880
तुजी वारी आली ठीक है समझ लो

1698
02:01:00,880 --> 02:01:06,880
ये इनका अनिकेत जी का वीडियो है जो इन्होंने उनको पकड़ा था

1699
02:01:07,840 --> 02:01:12,800
यह लोग अपना एड्रेस भी झूठा बता रहे थे। इनका चैनल है

1700
02:01:12,800 --> 02:01:18,080
राधा माधव म्यूजिक करके आप लोग सब्सक्राइब कर लीजिएगा उनका चैनल

1701
02:01:18,080 --> 02:01:22,480
और मनप्रीत जी की बात हो ही गई और

1702
02:01:22,480 --> 02:01:28,000
भाटी जी आपकी राधा माधव म्यूजिक हां

1703
02:01:28,000 --> 02:01:32,000
अरे इसको ब्लॉक करो ना एक ही कॉपी पेस्ट कर रहा है पागल कहीं का क्या नाम

1704
02:01:32,000 --> 02:01:36,000
है इसका ना नैतिक खुजली क्या

1705
02:01:36,000 --> 02:01:40,080
खजूरिया ये नंबर देख लीजिएगा यह नंबर पर आप

1706
02:01:40,080 --> 02:01:44,400
कॉल करोगे ना कोई उठाता नहीं। कोई उठाता नहीं है।

1707
02:01:44,400 --> 02:01:50,080
यह नंबर पर कॉल करेगा ना कोई नहीं उठाता है। अच्छा

1708
02:01:50,080 --> 02:01:54,080
अच्छा ये जो नंबर है [हंसी] अच्छा ये लोग चंदा

1709
02:01:54,080 --> 02:01:58,160
मांग रहे थे। नहीं कोई नहीं उठाएगा। मैं कितने 10

1710
02:01:58,160 --> 02:02:02,160
नंबर से मैंने फोन किया। नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ये लोग मेरा पर्सनल नंबर तो

1711
02:02:02,160 --> 02:02:06,480
ब्लॉक कर दिए। हां दो लेडीज लोग भी थी वहां पर।

1712
02:02:06,480 --> 02:02:11,760
हां मैं कह रहा हूं मुझे पकड़ के चंदा मांग के मुझे समझा रहे थे कि अभी

1713
02:02:11,760 --> 02:02:14,480
भी आचार्य

1714
02:02:14,480 --> 02:02:17,840
चंदा मांग रहे थे। हां

1715
02:02:17,840 --> 02:02:22,000
चलिए ठीक है। बहुत-बहुत आभार सभी का जुड़ने के लिए और आशा

1716
02:02:22,000 --> 02:02:24,800
करते हैं आपका जो आज की जो यात्रा चलो वो

1717
02:02:24,800 --> 02:02:29,920
तो एक पुतला दहन कार्यक्रम वो आप सबको पता चल गया। एक बात फिर से बोल दूं।

1718
02:02:29,920 --> 02:02:34,400
रामपाल को नहीं रामपालियों को पकड़ो।

1719
02:02:34,400 --> 02:02:38,800
यह मन में डाल लो आप इस तंत्र को नष्ट करना है

1720
02:02:38,800 --> 02:02:43,520
हिंदू विरोधी तंत्र को तो रामपाल को नहीं रामपालियों

1721
02:02:43,520 --> 02:02:48,160
को पकड़ो अपने घर के आसपास रहने वाले रामपालियों

1722
02:02:48,160 --> 02:02:52,320
का टोटल बहिष्कार करो टोटल बॉयकॉट रामपाल

1723
02:02:52,320 --> 02:02:56,400
बॉयकॉट मूवमेंट उसको समर्थन देने वाला

1724
02:02:56,400 --> 02:03:00,480
व्यक्ति जहां भी किसी आप जैसे किसी धर्मनिष्ठ

1725
02:03:00,480 --> 02:03:04,720
व्यक्ति के पास रह रहा है उसके घर के पास पास जाकर के आप

1726
02:03:04,720 --> 02:03:08,800
विरोध प्रदर्शन करिए। उसके बारे में वहां के समाज को बताइए। वहां

1727
02:03:08,800 --> 02:03:12,800
के समाज को अपील करिए। उसका बहिष्कार करने की क्रांति

1728
02:03:12,800 --> 02:03:16,800
आएगी। आप ला सकते हो। उसके घर के

1729
02:03:16,800 --> 02:03:20,800
आसपास आपको केवल यह जानकारी वाले पर्चे चिपकाने

1730
02:03:20,800 --> 02:03:24,960
हैं कि रामपाल कौन है? वो क्या कर रहा है? और यह व्यक्ति

1731
02:03:24,960 --> 02:03:29,200
उससे जुड़ा है। और इस प्रकार इस व्यक्ति से जुड़ने वाला व्यक्ति कौन सिद्ध

1732
02:03:29,200 --> 02:03:33,600
होगा? यह आपको केवल बताना है। अपने घर के आसपास

1733
02:03:33,600 --> 02:03:37,680
दुर्गा मां को गाली देने वाले का समर्थन करने वाला चैन से

1734
02:03:37,680 --> 02:03:40,000
नहीं रहना चाहिए। उसको रात

1735
02:03:40,000 --> 02:03:44,880
में चैन से नींद नहीं आनी चाहिए। और उसके लिए

1736
02:03:44,880 --> 02:03:48,960
लाठी भाले की नोक पर नहीं गोली बारूद के नोक पर

1737
02:03:48,960 --> 02:03:53,040
नहीं केवल संविधान की सीमा में रहते हुए आपको अपनी बात को

1738
02:03:53,040 --> 02:03:57,040
रखना है। ध्यान रखिए आपके घर के पास

1739
02:03:57,040 --> 02:04:01,120
आपके गली मोहल्ले में आपकी जानकारी में दुर्गा मां

1740
02:04:01,120 --> 02:04:06,000
को गाली देने वाले का समर्थक चैन से नहीं रहना चाहिए।

1741
02:04:06,000 --> 02:04:10,320
अभी से प्रण ले लो सारे के सारे और यह टॉपअप

1742
02:04:10,320 --> 02:04:14,640
है सोने पर सुहागा। यदि वहां के दल इत्यादि

1743
02:04:14,640 --> 02:04:18,800
आपके साथ हो जाते हैं तो आप एक अच्छा सा प्रदर्शन करिए

1744
02:04:18,800 --> 02:04:22,800
और इसका पुतला अच्छा मत बनाना। ऐसा ही सड़ा हुआ सा

1745
02:04:22,800 --> 02:04:27,360
बनाना। पुतला बहुत सुंदर मत बना देना। तो ऐसे ही पुतला बनाइए

1746
02:04:27,360 --> 02:04:31,440
और उसको जो है जलाइए। अपना विरोध दिखाइए।

1747
02:04:31,440 --> 02:04:35,360
अपना रोष प्रकट करिए। ठीक है? तो

1748
02:04:35,360 --> 02:04:40,240
यह देखिए यहां पर ये इनका बाबा जी का पुतला जलते हुए

1749
02:04:40,240 --> 02:04:44,400
तो सभी का

1750
02:04:44,400 --> 02:04:50,400
आभार समय देने के लिए

1751
02:04:52,480 --> 02:04:58,480
ये पुतला जल रहा है।

1752
02:04:59,600 --> 02:05:03,920
सभी का आभार समय देने के लिए और सभी को जय श्री राम

1753
02:05:03,920 --> 02:05:08,160
जय श्री राम अनकेत जी जय श्री राम भाटी जी जय श्री राम मनप्रीत जी जय श्री राम

1754
02:05:08,160 --> 02:05:13,760
जय जय श्री वो आप बताओगे सही से आप बताइए

1755
02:05:13,760 --> 02:05:18,000
फिर फिर एक बार याद दिला रहा हूं रामपाल को नहीं

1756
02:05:18,000 --> 02:05:22,080
रामपालियों को पकड़ो यही है अपना उद्घोष रामपाल

1757
02:05:22,080 --> 02:05:28,080
को नहीं रामपालियों को पकड़ो जय श्री राम

1758
02:05:50,270 --> 02:05:54,270
[संगीत]
