1
00:00:03,360 --> 00:00:07,840
सभी को जय श्री राम और

2
00:00:07,840 --> 00:00:11,800
जैसा कि आप सभी जानते

3
00:00:11,800 --> 00:00:16,160
हैं एक सीरीज चल रही है जो

4
00:00:16,160 --> 00:00:22,160
रामपाल ने अपार्थ किया है भगवत गीता का तो

5
00:00:22,520 --> 00:00:27,280
उसमें जहांजहां पर भी उसने जो

6
00:00:27,280 --> 00:00:31,360
कूड़ा किया है अर्थ के नाम पर कूड़ा उसको हम

7
00:00:31,360 --> 00:00:36,160
ध्यान से एक एक श्लोक जो उसने जो

8
00:00:36,160 --> 00:00:40,320
उसको विवेचना अच्छे शब्दों में उसको डिफाइन करना भी बड़ा खराब लगता

9
00:00:40,320 --> 00:00:44,320
है। अच्छे शब्दों का अपमान लगता है।

10
00:00:44,320 --> 00:00:48,480
जैसे आज मैं एक रील डाल रहा था रामपाल की ही रील

11
00:00:48,480 --> 00:00:52,680
थी वह Instagram पर उसमें यह बात आई

12
00:00:52,680 --> 00:00:56,720
कि रामपाल की जो किताब है गरिमा

13
00:00:56,720 --> 00:01:00,840
गीता की जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री

14
00:01:00,840 --> 00:01:05,200
राम तो रामपाल की जो किताब है मैं उसको पुस्तक

15
00:01:05,200 --> 00:01:09,480
कहने में मुझे दिक्कत होती है तो ग्रंथ तो कह ही नहीं जा सकता उसको

16
00:01:09,480 --> 00:01:13,760
पुस्तक सामान्य हिंदी कहने में भी मुझे समस्या है

17
00:01:13,760 --> 00:01:18,320
इसलिए किताब कहता हूं। तो वह जो

18
00:01:18,320 --> 00:01:18,880
रामपाल

19
00:01:18,880 --> 00:01:23,320
की जो किताब है उसको मुझे बताना था कि यह क्या है?

20
00:01:23,320 --> 00:01:27,440
मतलब रामपाल ने कोई बात अपनी किताब में ऐसी कही है

21
00:01:27,440 --> 00:01:31,520
जिसके आधार पर उसकी ही बात कट जाती है। हम

22
00:01:31,520 --> 00:01:35,680
तो अब मैं जब अपनी किसी वीडियो में

23
00:01:35,680 --> 00:01:40,160
रामपाल की बुक का रेफरेंस ले रहा हूं कि देखो रामपाल ने यहां पे ये लिखा है

24
00:01:40,160 --> 00:01:44,240
तो वहां पर मुझे बताने में समस्या हो रही है कि भाई मैं इसको कैसे बताऊं कि

25
00:01:44,240 --> 00:01:49,200
यह क्या है जिसका मैं रेफरेंस ले रहा हूं। रामपाल द्वारा रचित

26
00:01:49,200 --> 00:01:53,200
ग्रंथ नहीं कह सकता। इतना सम्मान नहीं दे सकता।

27
00:01:53,200 --> 00:01:56,680
रामपाल द्वारा

28
00:01:56,680 --> 00:02:01,120
लिखित पुस्तक नहीं कह सकता। रचित

29
00:02:01,120 --> 00:02:03,560
लिखित

30
00:02:03,560 --> 00:02:07,920
ऐसे अच्छे स्तर वाले शब्दों का उपयोग नहीं कर सकता।

31
00:02:07,920 --> 00:02:12,400
पर फिर भी मैंने वहां पर जैसे तैसे करके मन को मार करके लिखा

32
00:02:12,400 --> 00:02:17,840
कि रामपाल द्वारा लिखित गरिमा गीता की।

33
00:02:17,840 --> 00:02:21,920
तो उसने जो अपार्थ किया है भगवत गीता का उसके संबंध में हमारी

34
00:02:21,920 --> 00:02:26,080
एक सीरीज चल रही है। प्रत्येक बुधवार को साय काल में 7

35
00:02:26,080 --> 00:02:30,400
या 8:00 बजे हम लोग उपस्थित होते हैं और एक-एक

36
00:02:30,400 --> 00:02:33,960
श्लोक पर उसने क्या-क्या टीका टिप्पणी की है उस पर विवेचना करते

37
00:02:33,960 --> 00:02:38,080
हैं और जो निचोड़ आता है उस

38
00:02:38,080 --> 00:02:42,320
एपिसोड का उस निचोड़ को हम लोग सर्वशक्तिमान धर्म

39
00:02:42,320 --> 00:02:46,560
पर बुलेट प्रूफ सेशन वन बुलेट बुलेट

40
00:02:46,560 --> 00:02:50,880
पॉइंट सेशन वन बुलेट पॉइंट सेशन टू बुलेट पॉइंट सेशन

41
00:02:50,880 --> 00:02:55,840
थ्री के नाम से डाल देते हैं।

42
00:02:55,840 --> 00:03:00,000
तो आज आने वाले हैं एक अमित दास।

43
00:03:00,000 --> 00:03:04,880
उनको कई बार आप लोग देख चुके हैं।

44
00:03:04,880 --> 00:03:10,120
यहां पर कई बार वो मुकी खाकर गए हैं और

45
00:03:10,120 --> 00:03:15,320
संभवतः जो उनके यहां से एक ऑर्डर निकला

46
00:03:15,320 --> 00:03:19,360
है कि शिवश नारायण द्विवेदी में द्विवेदी के

47
00:03:19,360 --> 00:03:23,920
उसमें मत जाना। उससे टक्कर मत लेना। तो उस आर्डर का उल्लंघन

48
00:03:23,920 --> 00:03:28,240
करते हुए संभवत वह आ रहे हैं। जहां तक है

49
00:03:28,240 --> 00:03:32,240
ऐसा सुनने में आया था ना कि इन लोगों ने मना किया कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी से

50
00:03:32,240 --> 00:03:36,320
मत टकराओ तुम लोग। हम जब हम नहीं टकरा पा रहे हैं तो तुम क्या तुम किस

51
00:03:36,320 --> 00:03:40,640
खेत की हो? जब वो

52
00:03:40,640 --> 00:03:44,880
लोग यहां तक कहेंगे कि रामपाल को भी हम सामना नहीं करने देंगे। शिवांशु नारायण द्विवेदी

53
00:03:44,880 --> 00:03:47,040
को।

54
00:03:47,040 --> 00:03:49,040
वैसे सच्चाई तो यही है कि वास्तविकता

55
00:03:49,040 --> 00:03:53,040
में रामपाल यदि सामने आ जाए तो उससे ज्यादा

56
00:03:53,040 --> 00:03:58,840
यह लोग तर्क कर लेते हैं जो उसके फॉलोअर्स

57
00:03:58,840 --> 00:04:02,880
हैं। तो मुझे लगता है कि अमित

58
00:04:02,880 --> 00:04:07,640
दास आएगा नहीं। हालांकि उसने मुझसे कहा तो है कि मैं

59
00:04:07,640 --> 00:04:12,280
आऊंगा और उसको सर्वशक्तिमान विषय पर चर्चा करनी

60
00:04:12,280 --> 00:04:16,560
है मैंने उसको लिंक भी दे दिया है। पर

61
00:04:16,560 --> 00:04:20,720
हो सकता है कि भाई उसके मन में आए कि रहने दो भाई क्यों

62
00:04:20,720 --> 00:04:24,800
जा रहे हो? क्यों पड़े हो चक्कर में? कोई

63
00:04:24,800 --> 00:04:29,520
नहीं है टक्कर में। हो सकता है ऐसा हो।

64
00:04:29,520 --> 00:04:33,320
कुछ देर हम

65
00:04:33,320 --> 00:04:37,480
लोग प्रतीक्षा कर लेते हैं।

66
00:04:37,480 --> 00:04:41,680
उनकी तब तक हम लोग एक नजर डाल

67
00:04:41,680 --> 00:04:47,680
लेते हैं। इसकी गरिमा गीता की जब इसी की बात चल रही है।

68
00:05:00,720 --> 00:05:05,360
अच्छा इसने जो अनुत्तमम अनुत्तमम

69
00:05:05,360 --> 00:05:10,080
का गलत अर्थ किया है ना उसका भी बड़ा अच्छा हम लोग इस सीरीज में लेंगे।

70
00:05:10,080 --> 00:05:14,080
जो बातों का बतंगड़ बनाता है ना उसके बातों के बतंगड़

71
00:05:14,080 --> 00:05:19,040
से ही उसका मुंहत जवाब हो इस सीरीज में आप लोग फॉलो करिएगा

72
00:05:19,040 --> 00:05:23,360
और तब तक ऐसा करते हैं कि मैं एक

73
00:05:23,360 --> 00:05:28,000
लिंक दे देता हूं क्योंकि कोई आ नहीं रहा है तो आप में से अगर किसी में

74
00:05:28,000 --> 00:05:32,000
चर्चा करने का साहस हो रामपाल के पक्ष को रखने के लिए तो वह आ

75
00:05:32,000 --> 00:05:37,400
सकता

76
00:05:37,400 --> 00:05:43,400
है टाइप करें

77
00:05:44,160 --> 00:05:50,160
ठीक है। यह मैंने

78
00:06:02,680 --> 00:06:06,920
कमेंट कमेंट कर दिया है मैंने मैसेज

79
00:06:06,920 --> 00:06:12,920
में। आप लोग

80
00:06:19,200 --> 00:06:23,680
कोई जुड़ना चाहे तो जुड़ सकता है।

81
00:06:23,680 --> 00:06:27,720
वैचारिक मतभेद के निमित्त जो लोग वहां कमेंट्स

82
00:06:27,720 --> 00:06:31,840
में अजीब अजीब कमेंट कर रहे हैं वो उनमें से कोई

83
00:06:31,840 --> 00:06:36,560
अगर ढांडस रखता हो तो वह आ सकता है। और

84
00:06:36,560 --> 00:06:42,560
उसको वापस कैसे ले जाएंगे

85
00:06:44,600 --> 00:06:50,600
हम तो मेरे ख्याल से वो चंगूमंगू तो आएंगे

86
00:06:54,360 --> 00:06:58,480
नहीं और अगर कोई यहां पर ऐसा माई का लाल

87
00:06:58,480 --> 00:07:02,560
हो किसी मां ने ऐसा सपूत या

88
00:07:02,560 --> 00:07:06,880
पूत जना हो जो आना चाहे

89
00:07:06,880 --> 00:07:12,880
रामपाल के पक्ष को रखने के लिए तो वह आ सकता है।

90
00:07:42,480 --> 00:07:47,080
हमने अपने पिछले कुछ सेशन में यह

91
00:07:47,080 --> 00:07:51,200
भी जान लिया है कि रामपाल के

92
00:07:51,200 --> 00:07:55,360
अनुसार रामपाल के अलावा कोई भी भगत नहीं है। यह लोग जो एक दूसरे

93
00:07:55,360 --> 00:07:59,760
को भगत जी भगत जी कहते हैं ना तो वह सबसे बड़ा झूठ है। क्यों

94
00:07:59,760 --> 00:08:03,880
झूठ है? क्योंकि रामपाल ने अपनी भगवत गीता में कहा

95
00:08:03,880 --> 00:08:07,400
है

96
00:08:07,400 --> 00:08:12,240
कि तुम्हें जब तत्व ज्ञान हो जाएगा

97
00:08:12,240 --> 00:08:16,480
दो 53 का अर्थ करते समय कहा है कि तुम्हें जब

98
00:08:16,480 --> 00:08:17,040
तत्व

99
00:08:17,040 --> 00:08:21,200
ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात भांति के वचनों

100
00:08:21,200 --> 00:08:25,280
यानी अज्ञानता से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा के ध्यान में पूर्ण

101
00:08:25,280 --> 00:08:29,440
रूप से निश्चल रूप से स्थाई स्थिर हो जाएगी। यानी तत्व ज्ञान

102
00:08:29,440 --> 00:08:33,920
प्राप्त करने के बाद तुम्हारी स्थिर

103
00:08:33,920 --> 00:08:39,480
जो बुद्धि है वह स्थिर हो

104
00:08:39,480 --> 00:08:43,600
जाएगी। तब तू योग यानी यथार्थ भक्ति को प्राप्त

105
00:08:43,600 --> 00:08:47,200
हो जाएगा। यानी तब तू भक्त बनेगा। तो भक्त

106
00:08:47,200 --> 00:08:52,920
कब बने?

107
00:08:52,920 --> 00:08:58,240
जब अमित दास आपका चेहरा नहीं दिख रहा है।

108
00:08:58,240 --> 00:09:01,400
भक्त कब बने

109
00:09:01,400 --> 00:09:05,440
जब तत्व ज्ञान प्राप्त हो गया और तत्व

110
00:09:05,440 --> 00:09:09,840
ज्ञान तो है नहीं किसी को रामपाल के अलावा

111
00:09:09,840 --> 00:09:14,520
तो दुनिया में रामपाल के अनुसार कोई भगत नहीं

112
00:09:14,520 --> 00:09:17,400
है

113
00:09:17,400 --> 00:09:22,160
ना हां भाई अमित दास जी

114
00:09:22,160 --> 00:09:26,400
अमित दास का कहना है कि सर्वशक्तिमान विषय पर चर्चा करनी है अमित

115
00:09:26,400 --> 00:09:32,400
दास बताओ अमित दास कहां से शुरू

116
00:09:33,880 --> 00:09:38,000
करें? मैं शुरू करने से पहले मैं

117
00:09:38,000 --> 00:09:42,240
एक चीज वो दोहरा देना चाहता हूं। मैंने आपको

118
00:09:42,240 --> 00:09:46,560
एक उपनिषद का एक कटिंग भेजी थी आपको।

119
00:09:46,560 --> 00:09:50,680
शायद आपको याद हो तो

120
00:09:50,680 --> 00:09:55,520
हम उस उपनिषद में ये लिखा था कि जो

121
00:09:55,520 --> 00:09:59,520
अपने तर्क से परमात्मा को सिद्ध करेगा वह मोक्ष

122
00:09:59,520 --> 00:10:04,480
को प्राप्त नहीं होगा।

123
00:10:04,480 --> 00:10:08,640
वो कटिंग आप ने जो दिखाई है उसमें ईश्वर के

124
00:10:08,640 --> 00:10:13,600
पारमार्थिक स्वरूप के लिए वर्णन हो रहा है। मैंने

125
00:10:13,600 --> 00:10:17,760
मैंने वो इसलिए आपको भेजा था एक मिनट भाई साहब एक मिनट

126
00:10:17,760 --> 00:10:21,840
एक मिनट बोलिए बोलिए अगर यदि तर्क

127
00:10:21,840 --> 00:10:26,000
से परमात्मा को पहली बात तो ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ

128
00:10:26,000 --> 00:10:30,240
तर्क से करते हैं। हम उसके लिए प्रमाण भी रखते हैं। ठीक है?

129
00:10:30,240 --> 00:10:34,240
जिस उपनिषद से आप यह कह रहे हैं कि परमात्मा को

130
00:10:34,240 --> 00:10:38,280
तर्क से समझा नहीं जा सकता या परमात्मा को जाना नहीं जा

131
00:10:38,280 --> 00:10:42,320
सकता। उनहीं उपनिषदों में परमात्मा को सिर्फ स्वरूप

132
00:10:42,320 --> 00:10:46,320
होना परमात्मा की इतनी आंखें, इतने हाथ, इतने पैर बहुत

133
00:10:46,320 --> 00:10:49,360
सी चीजें उनहीं उपनिषदों में कही गई।

134
00:10:49,360 --> 00:10:53,920
वेदों में कही गई। इसके साथ ही साथ इसके साथ ही साथ

135
00:10:53,920 --> 00:10:59,600
इसके साथ ही साथ उपनिषदों में ही

136
00:10:59,600 --> 00:11:03,840
ईश्वर को यह भी कहा गया है कि ईश्वर निराकार और साकार

137
00:11:03,840 --> 00:11:08,080
दोनों स्वरूपों में है। तो कहीं-कहीं

138
00:11:08,080 --> 00:11:12,080
पर ईश्वर के व्यवहार में समझ में ना आ सकने वाले

139
00:11:12,080 --> 00:11:16,080
रूप की चर्चा होती है। और जब उस रूप की चर्चा होती है

140
00:11:16,080 --> 00:11:20,080
तो यह कहा जाता है कि उसको समझा नहीं जा सकता। उसको बताया नहीं

141
00:11:20,080 --> 00:11:24,160
जा सकता। नीति नीति कह दिया जाता है। जिसका तुम

142
00:11:24,160 --> 00:11:28,800
लोग फायदा उठाते हो। मैं आगे बात करूंगा और

143
00:11:28,800 --> 00:11:32,800
फिर कहीं-कहीं पर उसके व्यवहार में आ सकने वाले रूप की चर्चा होती है।

144
00:11:32,800 --> 00:11:36,880
साकार रूप की चर्चा होती है। सगुण रूप की चर्चा होती है।

145
00:11:36,880 --> 00:11:41,360
अब प्रॉब्लम यह है कि यदि ईश्वर को समझने

146
00:11:41,360 --> 00:11:45,520
के संबंध में तर्क दिया ही नहीं जा सकता तो फिर ये

147
00:11:45,520 --> 00:11:49,520
भी नहीं कहा जा सकता कि ईश्वर जो है सशरीर आता है। सशरीर जाता

148
00:11:49,520 --> 00:11:53,680
है। यह क्या है? यह तर्क है। ईश्वर जो है कुंवारी

149
00:11:53,680 --> 00:11:57,760
दूध का गाय पी कुंवारी गाय का दूध पीता है। यह क्या है? यह

150
00:11:57,760 --> 00:12:01,760
तर्क है। कोई भी चीज आप नहीं बोल सकते ईश्वर को समझने के

151
00:12:01,760 --> 00:12:05,280
संबंध में। ठीक है?

152
00:12:05,280 --> 00:12:09,760
तो यहां पर मानना पड़ेगा कि ईश्वर के दो स्वरूप है। एक भौतिक और एक आध्यात्मिक,

153
00:12:09,760 --> 00:12:13,920
एक व्यवहारिक और एक पारमार्थिक। एक व्यवहार में ना आ सकने

154
00:12:13,920 --> 00:12:18,080
वाला और एक व्यवहार में आ सकने वाला।

155
00:12:18,080 --> 00:12:22,840
चले गए। निकल लिए वो। क्या

156
00:12:22,840 --> 00:12:28,000
हुआ? जय श्री राम। जय श्री राम।

157
00:12:28,000 --> 00:12:32,080
नेट थोड़ा सा स्लो है। अगर बाय चांस कट जाए तो ये मत समझना कि छोड़

158
00:12:32,080 --> 00:12:37,200
के भाग गया मैं। अब आपको समझ में आ गया?

159
00:12:37,200 --> 00:12:41,280
मैंने पूरा सुन नहीं पाया। बात ऐसी है

160
00:12:41,280 --> 00:12:45,440
कि यदि यहां दो बातें हैं। मैं आपको सीधे-सीधे आपने जो कहा ना कि

161
00:12:45,440 --> 00:12:49,920
जो जो परमात्मा के लिए तर्क करता है। ठीक है?

162
00:12:49,920 --> 00:12:54,320
तो यहां दो बातें हैं। पहली बात यदि तर्क नहीं किया सकता तो आप परमात्मा

163
00:12:54,320 --> 00:12:58,800
के लिए कोई भी ऐसी बात नहीं कह सकते जो समझ में आ रही हो।

164
00:12:58,800 --> 00:13:02,880
जैसे कि आप यह भी नहीं कह सकते कि फिर परमात्मा गर्भ माता के गर्भ में

165
00:13:02,880 --> 00:13:06,960
नहीं आता है। परमात्मा कुमारी गाय का दूध पीता है। परमात्मा

166
00:13:06,960 --> 00:13:10,960
जो है ससुरी आता है। ससरी जाता है। ये सब तर्क है।

167
00:13:10,960 --> 00:13:15,200
ये सब जो भी जो भी चीज लॉजिकल लगे जो भी चीज समझ में आए

168
00:13:15,200 --> 00:13:19,520
वो सब तर्क है। तो फिर आप जब वहां पर वेदों

169
00:13:19,520 --> 00:13:20,400
में जब वेदों

170
00:13:20,400 --> 00:13:24,760
में ये कह दिया गया उपनिषदों में ये कह दिया गया कि परमात्मा समझ में नहीं आ

171
00:13:24,760 --> 00:13:30,760
सकता। कौन है भाई? कौन है ये?

172
00:13:30,960 --> 00:13:34,960
कौन है? बैकग्राउंड चल रहा है इनका। अमित जी म्यूट

173
00:13:34,960 --> 00:13:40,960
कर लीजिए। यही हो रही है भक्ति।

174
00:13:41,280 --> 00:13:45,440
मेरे यहां शादी है ना तो पड़ोस में शादी है इसलिए बज रहा है।

175
00:13:45,440 --> 00:13:50,280
पहली बात पहली बात क्या है

176
00:13:50,280 --> 00:13:54,400
कि ये जो व्याख्या हो रही है कि ईश्वर को

177
00:13:54,400 --> 00:13:58,480
समझा नहीं जा सकता। यह ईश्वर के पारमार्थिक स्वरूप की

178
00:13:58,480 --> 00:14:02,880
व्याख्या हो रही है। और अगर ऐसा नहीं होता तो उनहीं उपनिषदों

179
00:14:02,880 --> 00:14:07,040
में उनहीं वेदों में उनहीं शास्त्रों में ईश्वर को समझने वाली चीजें कही गई

180
00:14:07,040 --> 00:14:12,040
है। जैसे तीसरे अध्याय में श्वेता शत्रुपनिषद

181
00:14:12,040 --> 00:14:16,160
में शिव जी की वंदना की जा रही है। हे शिव अपनी कल्याणकारी

182
00:14:16,160 --> 00:14:20,160
मूर्ति से हमारी ओर देखो। है ना?

183
00:14:20,160 --> 00:14:24,160
हमारी रक्षा करो। तो ये सब उसमें कहा जा रहा है। तो ये समझने वाली चीजें

184
00:14:24,160 --> 00:14:28,240
भी कही गई है ईश्वर के लिए। तो पहली बात ईश्वर समझ में ना आ

185
00:14:28,240 --> 00:14:32,240
सकने वाले रूप में भी होता है। समझ में आ सकने वाले रूप में भी होता है।

186
00:14:32,240 --> 00:14:35,680
समझ में ना आ सकने वाले रूप के लिए ही ऐसी बातें कही

187
00:14:35,680 --> 00:14:39,920
जाती है कि उसको बताया नहीं जा सकता। उसको समझाया नहीं जा सकता। उसको केवल प्राप्त

188
00:14:39,920 --> 00:14:44,000
किया जा सकता है। पहली बात। दूसरी बात यदि हम यह मान लेंगे कि

189
00:14:44,000 --> 00:14:48,160
समझ में ना आ सकने वाली बात जो है ईश्वर के लिए समझाने वाली कोई

190
00:14:48,160 --> 00:14:52,160
बात नहीं कही जा सकती तो फिर हम यह भी नहीं कह सकते कि वो सशरीर आता है

191
00:14:52,160 --> 00:14:56,160
सशरीर जाता है क्यों बता रहे हैं ईश्वर के बारे में तो समझाया

192
00:14:56,160 --> 00:15:00,400
नहीं जा सकता ना तो कुछ भी नहीं समझा सकते फिर तो तीसरी बात

193
00:15:00,400 --> 00:15:04,560
जब यही बातें तुम ये शास्त्रों में मिली मिलती थी तो

194
00:15:04,560 --> 00:15:08,720
इनहीं का सहारा लेकर के तुम कहते थे देखो देखो काल को भी नहीं पता है

195
00:15:08,720 --> 00:15:12,720
देखो देखो ऋषियों को भी नहीं पता है देखो देखो देखो ये वेद लिखने

196
00:15:12,720 --> 00:15:16,880
वालों को भी नहीं पता है कि ईश्वर कैसा है। तभी तो हम तुम्हारे

197
00:15:16,880 --> 00:15:21,360
पास आएंगे। तुम बता दो जहां पर जाकर के पराकाष्ठा जहां पर समाप्त हो रही है

198
00:15:21,360 --> 00:15:25,360
कि जितना वचनों के द्वारा ईश्वर को समझाया जा सकता है उतना जब

199
00:15:25,360 --> 00:15:29,920
समझाया जा रहा है उसके बाद यह कहा जा रहा है कि इससे आगे की यात्रा

200
00:15:29,920 --> 00:15:34,080
तुम्हें स्वयं से करनी है। तो वहां पर तुमने ये सब बातें उठाई कि देखो देखो

201
00:15:34,080 --> 00:15:38,160
वेद ने मना कर दिया। वेद को भी नहीं पता है। देखो देखो नेति

202
00:15:38,160 --> 00:15:42,240
नेति कह के उसने भी छोड़ दिया। रामायण में भी छोड़ दिया। काल को भी नहीं

203
00:15:42,240 --> 00:15:46,240
पता है। काल भी अज्ञानी है। यह भी अज्ञानी है। वो भी अज्ञानी है। तो

204
00:15:46,240 --> 00:15:50,320
तुम तुमको उससे आगे की चीजें पता होनी चाहिए। फिर ये सब बातें

205
00:15:50,320 --> 00:15:56,320
हैं। अब

206
00:16:00,280 --> 00:16:06,280
बोलो। अरे यार

207
00:16:14,640 --> 00:16:19,040
करने से पूछना आपको प्रश्न करने से पहले

208
00:16:19,040 --> 00:16:23,040
मैं सिर्फ ये पूछना चाहूंगा कि सनातन का अर्थ

209
00:16:23,040 --> 00:16:28,880
क्या है? फिर मैं आपसे प्रश्न करूंगा।

210
00:16:28,880 --> 00:16:32,880
सनातन का अर्थ है नित्य स्थाई। जो किसी भी

211
00:16:32,880 --> 00:16:37,040
देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है।

212
00:16:37,040 --> 00:16:41,000
बिल्कुल बहुत अच्छी बात। यानी कि

213
00:16:41,000 --> 00:16:45,120
वो जैसे कि एक

214
00:16:45,120 --> 00:16:49,280
बात आप समझ लीजिए। आप केवल प्रश्न नहीं करेंगे।

215
00:16:49,280 --> 00:16:53,440
मेरे भी प्रश्नों का जवाब देंगे। यहां पर एक चर्चा है। ये कोई क्लास नहीं

216
00:16:53,440 --> 00:16:57,840
है। नहीं मैं शास्त्रों से हटके मैं बात ही नहीं करता।

217
00:16:57,840 --> 00:17:02,840
नहीं आपकी सारी बातें सुनो। आपकी सारी

218
00:17:02,840 --> 00:17:07,040
बातें अपना प्रश्न करिए। हट के हो गई। अब मेरा

219
00:17:07,040 --> 00:17:11,200
प्रश्न ये है कि क्या वो परमात्मा

220
00:17:11,200 --> 00:17:15,280
विभूति युक्त होकर कर्म करने में समर्थ

221
00:17:15,280 --> 00:17:19,280
है? दूसरा क्या वो परमात्मा प्रकृति

222
00:17:19,280 --> 00:17:23,360
के बिना सृष्टि की रचना कर सकता है? ये दो प्रश्न

223
00:17:23,360 --> 00:17:27,360
है। उसके बाद फिर मैं नेक्स्ट प्रश्न रखूंगा आपके पास। फिर मैं जन्म वाला

224
00:17:27,360 --> 00:17:31,600
प्रमाण रखूं। जन्म वाला रखूंगा। फिर उसके बाद मैं धीरे-धीरे प्रश्न

225
00:17:31,600 --> 00:17:35,680
करूंगा आपसे। पहले इसका प्रमाण इसका उत्तर दीजिए।

226
00:17:35,680 --> 00:17:39,920
क्या वो विभूति युक्त होकर कार्य कर्म करने में समर्थ

227
00:17:39,920 --> 00:17:45,920
है कि नहीं? विभूति युक्त इससे क्या तात्पर्य है?

228
00:17:48,320 --> 00:17:52,560
अब मैं कैसे समझाऊं आपको? अरे प्रश्न तुमने किया तो समझाओगे

229
00:17:52,560 --> 00:17:56,800
तो तुम ही ना। बिल्कुल बिल्कुल। चलो आप आप ये बताइए

230
00:17:56,800 --> 00:18:01,360
कि क्या परमात्मा प्रकृति के बिना

231
00:18:01,360 --> 00:18:05,520
रचना करने में? विभूति विभूति की बात कर रहा हूं कि नहीं?

232
00:18:05,520 --> 00:18:09,520
विभूति का अर्थ बता दीजिए। हां मैं बता रहा हूं। विभूतियां ऐसी होती है परमात्मा

233
00:18:09,520 --> 00:18:13,680
की अनेकों विभूतियां होती हैं। जैसे कि भगवत गीता में बोला

234
00:18:13,680 --> 00:18:19,680
गया है कि परमात्मा की अनेकों विभूतियां सारी एक साथ में परमात्मा ने दिखाई।

235
00:18:20,720 --> 00:18:25,640
यानी कि स्वरूप हां।

236
00:18:25,640 --> 00:18:29,680
हम है ना तो उसे कहते हैं विभूति युक्त क्या

237
00:18:29,680 --> 00:18:34,640
परमात्मा मेरा यही प्रश्न है जब आप ये कह रहे हो

238
00:18:34,640 --> 00:18:38,800
कि विभूति युक्त होकर के परमात्मा क्या

239
00:18:38,800 --> 00:18:44,320
कर सकता है कर्म करने में समर्थ है या नहीं

240
00:18:44,320 --> 00:18:49,200
विभूति युक्त हो के परमात्मा कर्म करने में समर्थ है कि नहीं

241
00:18:49,200 --> 00:18:53,280
तो आप ये बताओ सबसे पहले तो क्या तो विभूति युक्त

242
00:18:53,280 --> 00:18:57,440
के बिना भी परमात्मा के अस्तित्व को मानते हो तो कैसे मानते हो? आप प्रश्न

243
00:18:57,440 --> 00:19:01,440
के ऊपर प्रश्न करोगे तो कैसे बात बनेगी? प्रश्न नहीं कर रहा हूं। आपके प्रश्न

244
00:19:01,440 --> 00:19:04,560
में ही

245
00:19:04,560 --> 00:19:09,640
अरे भाई मेरी बात तो सुन

246
00:19:09,640 --> 00:19:13,760
लो प्रश्न करोगे तो मैं बात नहीं कर पाऊंगा। समझ लो मेरी बात।

247
00:19:13,760 --> 00:19:17,760
मेरी बात समझ लो। हां बात ये है कि हम

248
00:19:17,760 --> 00:19:23,720
प्रश्न कर रहे हैं कि काठ की लकड़ी में जो अग्नि है

249
00:19:23,720 --> 00:19:28,000
वो वो लपट भी काठ की लकड़ी में जो अग्नि

250
00:19:28,000 --> 00:19:32,480
है वो बिना घिसे गरम अपनी गर्माहट से किसी को अपने अपना अस्तित्व

251
00:19:32,480 --> 00:19:36,480
प्रकट कर सकती है क्या समझो मेरी बात तुम्हारा प्रश्न

252
00:19:36,480 --> 00:19:40,480
क्या है तुम्हारा वो प्रकृति वाला भी मैं समझ गया और तुम्हारा ये

253
00:19:40,480 --> 00:19:44,640
भी मैं समझ गया विभूति वाला मगर तुम क्या कह रहे

254
00:19:44,640 --> 00:19:48,720
कि काठ की लकड़ी में काट की लकड़ी

255
00:19:48,720 --> 00:19:54,120
में जो दाहक क्षमता है समझ रहे हो? दाहक क्षमता किसे कहते हैं?

256
00:19:54,120 --> 00:19:58,480
हम समझ रहा हूं मैं। आप बोलिए आप बोलिए। काठ

257
00:19:58,480 --> 00:20:03,040
की लकड़ी में जो दाहक क्षमता है वो

258
00:20:03,040 --> 00:20:07,520
बिना किसी कर्म किए किसी व्यक्ति को अपनी उपस्थिति

259
00:20:07,520 --> 00:20:11,760
महसूस करा सकती है कि नहीं? तुम्हारा इस प्रकार का प्रश्न है। समझ

260
00:20:11,760 --> 00:20:16,160
रहे हो? जैसे कि मैं ना लकड़ी को घिसू,

261
00:20:16,160 --> 00:20:20,080
मैं ना लकड़ी को जलाऊं। फिर भी मुझे पता चल जाए

262
00:20:20,080 --> 00:20:24,240
कि लकड़ी में जला देने की पावर है। जलने की पावर

263
00:20:24,240 --> 00:20:28,400
है, दाहक क्षमता है। तो क्या वो जो अग्नि

264
00:20:28,400 --> 00:20:32,480
है वो अपने अस्तित्व को मेरे समक्ष प्रकट कर सकती

265
00:20:32,480 --> 00:20:36,800
है? क्या बिना मेरे कुछ उसको जलाए बलाए?

266
00:20:36,800 --> 00:20:41,920
मुझे महसूस करा सकती है क्या? उसमें अग्नि है। उसमें दाहक क्षमता है।

267
00:20:41,920 --> 00:20:46,160
ठीक है? तो बात ये है कि तुम पीछे जाकर

268
00:20:46,160 --> 00:20:50,320
के तुमने पहले ही यह माना हुआ है कि इस लकड़ी में

269
00:20:50,320 --> 00:20:54,320
दाहक क्षमता है तब तुम प्रश्न कर रहे हो। तुमने तुमने माना

270
00:20:54,320 --> 00:20:58,320
कि इस लकड़ी में दाहक क्षमता है तब तुम प्रश्न कर रहे हो। तो

271
00:20:58,320 --> 00:21:02,400
बात ये आती है पहले तुम्हें मुझे समझाना होगा कि दाहक क्षमता तक हम जाए

272
00:21:02,400 --> 00:21:06,560
कैसे? क्या होता है दाह क्षमता? तुम्हें

273
00:21:06,560 --> 00:21:12,480
मुझे बताना होगा। परमात्मा क्या है? क्या बताओ? क्या बताऊं?

274
00:21:12,480 --> 00:21:17,120
क्या बताऊं आपको? बताओ। जैसे कि तुमने कहा कि बिना

275
00:21:17,120 --> 00:21:21,200
प्रकृति के सहायता के परमात्मा

276
00:21:21,200 --> 00:21:25,480
कुछ कर सकता है क्या? है ना? तो इसका

277
00:21:25,480 --> 00:21:29,920
मतलब कि प्रकृति के बिना तुम परमा प्रकृति से प्रकृति

278
00:21:29,920 --> 00:21:34,320
के साथ मिलकर तुम कुछ किए बिना भी तुम

279
00:21:34,320 --> 00:21:35,120
ये जानते हो

280
00:21:35,120 --> 00:21:39,280
कि कोई एंटिटी है जो एक्सिस्ट करती है परमात्मा के रूप में

281
00:21:39,280 --> 00:21:43,520
तभी तो तुम ये प्रश्न कर रहे हो हम हां

282
00:21:43,520 --> 00:21:48,160
तो मुझे तुम परमात्मा उस परमात्मा तक पहुंचाओ तो परमात्मा

283
00:21:48,160 --> 00:21:52,320
है ये कैसे पता चला

284
00:21:52,320 --> 00:21:56,400
अरे भाई आप तर्क के ऊपर तर्क करोगे तो कैसे बनेगा?

285
00:21:56,400 --> 00:22:00,880
मैंने प्रश्न किया था कि प्रकृति के बिना क्या वो परमात्मा,

286
00:22:00,880 --> 00:22:04,880
परमात्मा सृष्टि की रचना कर सकता है तो इसका जवाब दीजिए। आप मेरे

287
00:22:04,880 --> 00:22:09,280
से उल्टा प्रश्न कर रहे हो। सीधा मुझे मत मुझे

288
00:22:09,280 --> 00:22:13,920
मुझे सिर्फ इतना समझाइए कि आपके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो परमात्मा

289
00:22:13,920 --> 00:22:18,160
है, क्या वो इतनी शक्तिशाली है कि वो अकेला ही सृष्टि की रचना

290
00:22:18,160 --> 00:22:22,240
कर सकता है कि नहीं? मुझे तो ठीक है तो मुझे तुम परमात्मा की डेफिनेशन

291
00:22:22,240 --> 00:22:27,560
तो बताओ क्या होती है क्या किसे कहते हैं परमात्मा तब तो मैं तुम्हें बताऊं

292
00:22:27,560 --> 00:22:31,400
परमात्मा एक तरीके से

293
00:22:31,400 --> 00:22:35,520
मैं सरल कर देता हूं मैं सरल कर देता हूं अभी

294
00:22:35,520 --> 00:22:39,520
ये मान लो कि मैं जानता ही नहीं हूं कि परमात्मा होता कौन है अब तुम मुझसे

295
00:22:39,520 --> 00:22:43,680
कर रहे हो प्रश्न ठीक है की क्या परमात्मा ऐसा करता कर सकता है

296
00:22:43,680 --> 00:22:47,680
जैसे अभी तुमने विभूति युक्त नाम लिया था मैं समझा दे

297
00:22:47,680 --> 00:22:50,240
रहा हूं अरे सुन तो लो सुन तो

298
00:22:50,240 --> 00:22:54,400
लो जैसे अभी तुमने विभूति युक्त नाम लिया तो मैं विभूति युक्त

299
00:22:54,400 --> 00:22:58,720
से तुम्हारा तात्पर्य समझ नहीं पाया तो तुमने उसको समझाया समझाया

300
00:22:58,720 --> 00:23:03,280
ना अब मैं परमात्मा से तात्पर्य समझ नहीं पा रहा हूं

301
00:23:03,280 --> 00:23:07,520
अब परमात्मा परमात्मा का तात्पर्य बताओ हां मैं तात्पर्य

302
00:23:07,520 --> 00:23:11,600
बताता हूं परमात्मा वो होता है जो हर जगह व्याप्त

303
00:23:11,600 --> 00:23:15,760
हो हर जगह सर्वज्ञ हो सर्वशक्तिमान हो

304
00:23:15,760 --> 00:23:18,960
उससे श्रेष्ठ कोई ना हो

305
00:23:18,960 --> 00:23:23,040
यानी कि सब कुछ करने में समर्थ हो। सब कुछ करने

306
00:23:23,040 --> 00:23:27,600
में समर्थ हो। करने में समर्थ। सब कुछ करने में समर्थ। यानी परमात्मा

307
00:23:27,600 --> 00:23:32,080
वही है जो सब कुछ करने में समर्थ है। समर्थ है। समर्थ

308
00:23:32,080 --> 00:23:36,320
है। हां। तो यानी कि तुम ये मानते हो अकेला

309
00:23:36,320 --> 00:23:40,400
ही परमात्मा सब कुछ कर अकेला ही परमात्मा वो सब कुछ कर सकता

310
00:23:40,400 --> 00:23:44,400
है। अपनी इच्छा से अपनी शक्ति से। ठीक है तो

311
00:23:44,400 --> 00:23:48,800
अब इसी के ऊपर मैंने आपसे इसी के ऊपर मैंने प्रश्न आपसे किया है

312
00:23:48,800 --> 00:23:52,800
कि क्या वो परमात्मा अकेला ही सारी सृष्टि की रचना कर

313
00:23:52,800 --> 00:23:57,120
सकता है कि नहीं जवाब दीजिए मुझे

314
00:23:57,120 --> 00:24:01,440
आप ये बातें मत कीजिए आप घुमाने का प्रयास कर रहे हैं घुमाने

315
00:24:01,440 --> 00:24:05,520
का प्रयास नहीं कर रहा हूं बजाय कि आप समझा रहे हो मुझे

316
00:24:05,520 --> 00:24:09,760
मैं समझा नहीं रहा हूं मैं तुम्हें वहां तक पहुंचा रहा हूं जहां तक मैं पहुंच चुका हूं इसलिए

317
00:24:09,760 --> 00:24:13,960
मैं तुमसे ऐसी बातें कर रहा हूं सुनो बोलिए बोलिए बोलिए। ऐसा

318
00:24:13,960 --> 00:24:18,080
है कि परमात्मा व्यवहारिक रूप से कुछ भी कर

319
00:24:18,080 --> 00:24:22,640
सकता है। वो तुम्हें प्रकृति की बिना सहायता लिए

320
00:24:22,640 --> 00:24:26,800
ये सिद्ध कर देगा कि मैंने जो है ये फलाने फलाने कार्य किए।

321
00:24:26,800 --> 00:24:30,800
ठीक है? मगर पारमार्थिक दृष्टि से वो बहुत सी चीजें

322
00:24:30,800 --> 00:24:34,880
हैं जिनमें वो बंधा हुआ है। पारमार्थिक दृष्टि

323
00:24:34,880 --> 00:24:39,600
से मगर बात ये है कि पारमार्थिक एक मिनट पारमार्थिक

324
00:24:39,600 --> 00:24:43,840
दृष्टि तक आप पहुंचे कैसे? पारमार्थिक दृष्टि तक आप पहुंचे

325
00:24:43,840 --> 00:24:48,560
कैसे? जब आपने किसी को व्यवहार में परमात्मा मान लिया।

326
00:24:48,560 --> 00:24:52,640
अग्नि लकड़ी में छिपी हुई अग्नि तक आप पहुंचे कैसे?

327
00:24:52,640 --> 00:24:57,120
जब लपट बनके जलने वाली अग्नि आपने देख ली।

328
00:24:57,120 --> 00:25:01,200
समझ गए? इसी तरीके से आपने कहा कि परमात्मा सब कुछ करने में

329
00:25:01,200 --> 00:25:05,280
सामर्थ्यवान है। वो है वो सर्वशक्तिमान है। तो यानी

330
00:25:05,280 --> 00:25:09,520
कि आपने किसी को ऐसा जान लिया कि कोई है जो सब कुछ कर सकता है। तब आप

331
00:25:09,520 --> 00:25:13,680
उस परमात्मा तक पहुंचे। यानी कि यह ऐसे है जैसे

332
00:25:13,680 --> 00:25:18,000
एक सोता हुआ व्यक्ति जागने के बाद यह नहीं कह सकता

333
00:25:18,000 --> 00:25:20,800
कि मैं किसी के आवाज देने के कारण जाग गया।

334
00:25:20,800 --> 00:25:24,960
क्यों? क्योंकि अगर वो सो रहा है तो उसका सुनना

335
00:25:24,960 --> 00:25:29,000
सिद्ध नहीं होता। और अगर वो सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं

336
00:25:29,000 --> 00:25:33,200
होता। बात समझ में कुछ? अगर वो सो रहा है तो

337
00:25:33,200 --> 00:25:37,520
उसका सुनना सिद्ध नहीं होता। अगर वो सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता।

338
00:25:37,520 --> 00:25:41,840
इसी प्रकार से यदि तुम परमात्मा को मानते

339
00:25:41,840 --> 00:25:46,000
हो कि परमात्मा है तो परमार्थ की दुनिया में यदि वो समथिंग

340
00:25:46,000 --> 00:25:50,640
समथिंग कुछ नहीं कर पा रहा है तो उसके आधार पर उसको ना मानना सिद्ध नहीं होता

341
00:25:50,640 --> 00:25:54,960
और अगर परमात्मा को नहीं मानते हो परमार्थ की दुनिया में तो व्यवहार

342
00:25:54,960 --> 00:25:59,120
की दुनिया में उसको मानना सिद्ध नहीं होता आई बात समझ

343
00:25:59,120 --> 00:26:05,120
में कुछ इसीलिए मैं तुमसे ऐसे प्रश्न कर रहा

344
00:26:05,720 --> 00:26:09,760
था परमार्थ की कहने का तात्पर्य यह है

345
00:26:09,760 --> 00:26:13,840
जो तुम कहलाना चाह रहे हो। देखो अब मैं तुम्हें बताऊं जैसे प्रकृति

346
00:26:13,840 --> 00:26:17,840
के बिना ठीक है प्रकृति के बिना परमात्मा

347
00:26:17,840 --> 00:26:22,080
ने कुछ किया ये सिद्ध कैसे होगा सोचो

348
00:26:22,080 --> 00:26:26,160
कैसे होगा सिद्ध सोचो अगर नहीं पता है

349
00:26:26,160 --> 00:26:31,240
तो मैं बताऊं बताइए आप बताइए आप हां

350
00:26:31,240 --> 00:26:35,280
तुमको जिसजिस पर विश्वास है जैसे दो ये छोड़

351
00:26:35,280 --> 00:26:39,520
दो नास्तिक लोग बहुत से प्रश्न करते हैं इस तरह के क्या कहते

352
00:26:39,520 --> 00:26:43,560
हैं क्या परमात्मा त्मा दो और दो पांच कर सकता

353
00:26:43,560 --> 00:26:47,600
है। क्या परमात्मा बांझ स्त्री के पुत्र को

354
00:26:47,600 --> 00:26:52,480
जन्म दे सकता है? संतान को जन्म दे सकता है? क्या परमात्मा

355
00:26:52,480 --> 00:26:56,480
खुद का अस्तित्व मिटा सकता है? समझ

356
00:26:56,480 --> 00:27:00,720
रहे हो? तो ये नास्तिकों के इस तरह के बहुत सारे प्रश्न होते हैं।

357
00:27:00,720 --> 00:27:04,880
मगर परमात्मा जो है व्यवहार रूपी प्रपंच में आकर के जो ये लीला

358
00:27:04,880 --> 00:27:10,080
रूपी संसार हमको दिख रहा है। इसमें वो तब कर सकता है जो हम सोच सकते हैं। कैसे?

359
00:27:10,080 --> 00:27:14,160
पहले तो वो सब तरीके से करेगा। अंतत कथवा जैसे

360
00:27:14,160 --> 00:27:18,800
जैसे हम बात करेंगे दो और दो पांच की तो दो और दो पांच

361
00:27:18,800 --> 00:27:20,800
क्या कोई क्रिया है या

362
00:27:20,800 --> 00:27:24,800
एक इंफॉर्मेशन है? क्या है? दो और दो चार होते हैं। दो और

363
00:27:24,800 --> 00:27:29,280
दो पांच नहीं होते। ये कोई वर्क है या फिर एक इंफॉर्मेशन

364
00:27:29,280 --> 00:27:33,680
मात्र है। क्या है ये? ये एक इंफॉर्मेशन

365
00:27:33,680 --> 00:27:37,680
है। हमारे मन में ठुसा हुआ है कि दो और दो चार ही होते

366
00:27:37,680 --> 00:27:41,840
हैं। पांच नहीं होते। तो परमात्मा को कुछ करना नहीं

367
00:27:41,840 --> 00:27:45,920
है। हमें यकीन दिलाना है कि दो और दो कितने होते हैं? पांच।

368
00:27:45,920 --> 00:27:50,160
अब कैसे यकीन दिलाए? कैसे यकीन दिलाए?

369
00:27:50,160 --> 00:27:54,160
तो हमको किसी भी चीज पे हमको किसी भी चीज पर यकीन

370
00:27:54,160 --> 00:27:58,240
तब आता है जब हमारी नजरों में जो सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन

371
00:27:58,240 --> 00:28:02,640
है प्रामाणिक जिसको हम प्रमाण मानते हैं वो सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन

372
00:28:02,640 --> 00:28:07,040
हमसे ये कह दे कि हां ये जो बात बोल रहा है ये सही है।

373
00:28:07,040 --> 00:28:11,040
अब परमात्मा ने प्रकृति के बिना कुछ किया ये तुम

374
00:28:11,040 --> 00:28:15,280
कब विश्वास करोगे? जेल में जेल धाम में जो आपके

375
00:28:15,280 --> 00:28:19,280
रामपाल जी बैठे हैं एक सेकंड में अब मेरी भी सुन

376
00:28:19,280 --> 00:28:23,600
लीजिए बहुत देर से आपकी भी सुन अब शुरू किया बोल

377
00:28:23,600 --> 00:28:27,760
मैं तो सुन ही रहा हूं यार तुम्हारी एक मिनट भाई गलत

378
00:28:27,760 --> 00:28:32,320
बात मत करो अब जब तुमने प्रश्न किया तो सुनो गलत कहां बात कर रहे हो

379
00:28:32,320 --> 00:28:35,920
मैं गलत कहां कह रहा हूं गलत नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं मुझे पूरा करने आप

380
00:28:35,920 --> 00:28:40,000
शास्त्रों से शास्त्रों से सारी बातें बाहर बता रहे हो अभी अभी मैं सब कुछ

381
00:28:40,000 --> 00:28:44,400
बताऊंगा अभी सब शास्त्रों से ही बताऊंगा अभी पहले सुन लो। हां बताइए

382
00:28:44,400 --> 00:28:48,480
ना सुन लो पहले सुन लो पहले मुझे फिनिश करने दो। तो क्या

383
00:28:48,480 --> 00:28:53,120
है कि जो ईश्वर है

384
00:28:53,120 --> 00:28:57,600
उसको आपकी जानकारी में कुछ भी किया करना

385
00:28:57,600 --> 00:29:01,680
सिद्ध करने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी होती है। क्योंकि उसके

386
00:29:01,680 --> 00:29:05,680
पास क्या है? ये संसार क्या है? माया

387
00:29:05,680 --> 00:29:09,760
है कि नहीं है? बिल्कुल। हां। तो जब

388
00:29:09,760 --> 00:29:14,080
माया में आपको वो पेड़ दिखा सकता है, वो कुछ भी ऐसा दिखा

389
00:29:14,080 --> 00:29:18,240
सकता है जो है ही नहीं। तो वो

390
00:29:18,240 --> 00:29:22,400
आपको ये भी यकीन दिला सकता है कि मैंने दो और दो पांच कर दिया। अब मैं आपको

391
00:29:22,400 --> 00:29:26,400
बता रहा हूं और एक्सप्लोर कर रहा हूं इसको कैसे कि जब कोई भी ऐसा

392
00:29:26,400 --> 00:29:30,800
उल्टा सीधा काम आएगा तब उसकी जो माया शक्ति है यानी कि इंफॉर्मेशन

393
00:29:30,800 --> 00:29:34,800
चेंज करने वाली शक्ति वो उसको काम उसको यूज़ में लेता है। कैसे

394
00:29:34,800 --> 00:29:38,960
लेता है? आपको जिस पर भरोसा है वो वो आकर के आपसे

395
00:29:38,960 --> 00:29:43,120
कहने लगेगा भैया ईश्वर ने प्रकृति के बिना कोई काम किया तो आप

396
00:29:43,120 --> 00:29:47,120
मानना पड़ेगा अगर आपको उनकी बात पे भी भरोसा नहीं हुआ मान

397
00:29:47,120 --> 00:29:51,120
लो रामपाल जी भी बोलने लगे कि हां

398
00:29:51,120 --> 00:29:55,120
ईश्वर ने बिना प्रकृति के कर दिया और मान लो तुम्हें उनकी

399
00:29:55,120 --> 00:29:59,440
बात पे भरोसा नहीं है तो वो तुम्हारे माइंड को कंट्रोल

400
00:29:59,440 --> 00:30:03,440
करेगा और तुमको यह बिलीव दिलाएगा कि उसने

401
00:30:03,440 --> 00:30:07,920
बिना प्रकृति के समथिंग समथिंग कार्य किए।

402
00:30:07,920 --> 00:30:12,160
अब बात ये आती है क्या वो मनुष्यों के माइंड को कंट्रोल

403
00:30:12,160 --> 00:30:16,480
कर सकता है कि नहीं? अब तुम बता दो कर सकता है कि नहीं बताओ।

404
00:30:16,480 --> 00:30:20,800
परमात्मा सब कुछ कर सकता है।

405
00:30:20,800 --> 00:30:25,040
एक मिनट बोला हुआ है। एक मिनट माइंड को कंट्रोल कर सकता

406
00:30:25,040 --> 00:30:29,120
है। तो वो आपके माइंड को कंट्रोल करके आपको यह दिखा देगा कि

407
00:30:29,120 --> 00:30:33,120
ये देखो भैया हमने प्रकृति के बिना कार्य किया। ठीक? अब यहां पर

408
00:30:33,120 --> 00:30:37,520
एक प्रश्न आता है। कि उसने वास्तविकता में तो नहीं किया।

409
00:30:37,520 --> 00:30:41,840
उसने तो हमें एक तरीके से सम्मोहित करके या हमारे माइंड को कंट्रोल

410
00:30:41,840 --> 00:30:45,840
करके ये कार्य किया। यही प्रश्न आएगा ना इस प्रश्न का उत्तर

411
00:30:45,840 --> 00:30:49,840
क्या है? कि भाई वो हमें वही तो दिखा

412
00:30:49,840 --> 00:30:54,000
रहा है जो है नहीं। वो हमें प्रपंच रूपी संसार

413
00:30:54,000 --> 00:30:58,160
में वही सब तो दिखा रहा है जो है नहीं। कि ये तेरी माता है, ये तेरी बहन

414
00:30:58,160 --> 00:31:02,320
है, ये तेरी पत्नी है, ये तेरे पिता है। वो हमको वही तो दिखा रहा है जो है नहीं।

415
00:31:02,320 --> 00:31:06,240
तो उसने एक इंफॉर्मेशन और दे दी हमको। तो ये सारी चीजें यहां

416
00:31:06,240 --> 00:31:10,480
आकर के खत्म हो जाती हैं। जब आप कोई भी ऐसा उल्टा

417
00:31:10,480 --> 00:31:14,520
सीधा काम लाओगे तो व्यवहार रूपी संसार में वो आपको सब कुछ सिद्ध करके दिखा

418
00:31:14,520 --> 00:31:18,880
देगा। उसने ये कार्य सच्चाई में नहीं किया। इसको सिद्ध

419
00:31:18,880 --> 00:31:22,480
करने वाला भी नहीं होगा कोई।

420
00:31:22,480 --> 00:31:26,480
ठीक है? तो यही होता है व्यवहार और परमार्थ का अंतर। वो

421
00:31:26,480 --> 00:31:30,600
इस प्रपंच सुनिए सुनिए। वो इस

422
00:31:30,600 --> 00:31:35,520
प्रपंचिए। आप मुझे कोई एक भी प्रमाण ये दे दीजिए शास्त्रों से

423
00:31:35,520 --> 00:31:39,680
कि परमात्मा ने प्रकृति युक्त होकर सारी सृष्टि की रचना करी।

424
00:31:39,680 --> 00:31:43,840
सारी बात खत्म नहीं हो

425
00:31:43,840 --> 00:31:47,840
सारी सृष्टि की रचना करी। इसका हमारे से क्या मतलब है? तुम तो पूछ रहे हो क्या

426
00:31:47,840 --> 00:31:51,920
प्रकृति के बिना कर सकता है कि नहीं? एक मिनट मैं ये कह रहा हूं।

427
00:31:51,920 --> 00:31:56,000
आपने सुन नहीं पाया ठीक से। भाई साहब आपने सुन नहीं पाया ठीक से।

428
00:31:56,000 --> 00:32:00,080
आप ये कह रहे हो। मैं ये कह रहा हूं कि प्रकृति के बिना भगवान ने सृष्टि की रचना

429
00:32:00,080 --> 00:32:04,080
करी है तो ऐसा प्रमाण हमें दिखाइए बात ही खत्म हो जाती है।

430
00:32:04,080 --> 00:32:08,720
प्रमाण क्यों दिखाऊं? करी है एक अलग विषय है।

431
00:32:08,720 --> 00:32:12,720
वो उसका प्रमाण मैं आपको दिखा सकता हूं। करतुम अकर्तम वाला।

432
00:32:12,720 --> 00:32:17,560
कर सकता है। हां?

433
00:32:17,560 --> 00:32:21,600
आप अरे भैया 10 जगह ऐसे प्रमाण दिखाएंगे कि वो इतने

434
00:32:21,600 --> 00:32:25,600
इतने कार्य करने में समर्थ नहीं है। जब मैंने यही कह दिया

435
00:32:25,600 --> 00:32:31,600
वो परमात्मा इतने कार्य जब किसी

436
00:32:32,920 --> 00:32:36,960
परमात्मा एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक

437
00:32:36,960 --> 00:32:41,760
मिनट इतना समय ले रहा यार हमें

438
00:32:41,760 --> 00:32:46,160
तुम्हारी चांद चिकनी है। नहीं हमारी साइन चिकनी है तो तुम्हारी

439
00:32:46,160 --> 00:32:50,320
गोली है क्या? अरे हमारे पे तो बाल है नाने के लिए बोला

440
00:32:50,320 --> 00:32:54,720
है क्या? के लिए बोला है क्या? तुम ये बताओ

441
00:32:54,720 --> 00:32:58,200
इनके ऊपर

442
00:32:58,200 --> 00:33:02,400
सुनो एक प्रमाण दे दिया कि भगवान के बारे में कहा

443
00:33:02,400 --> 00:33:06,640
गया कोई प्रमाण नहीं दिया अभी तक आपने अरे

444
00:33:06,640 --> 00:33:11,520
तैत्री उपनिषद दो एक सत्यम अनंतम ब्रह्म लो

445
00:33:11,520 --> 00:33:14,400
हो गया

446
00:33:14,400 --> 00:33:18,400
हां तो फिर आप आप भी खोलिएगा मैं भी उपनिषद का एक नाम बता रहा हूं

447
00:33:18,400 --> 00:33:21,720
आपको

448
00:33:21,720 --> 00:33:26,080
क्या पहले एक मिनट एक एक मिनट बात पहले सुनो पहली

449
00:33:26,080 --> 00:33:31,280
बात ये बताओ जब मैं उपनिषद से प्रमाण दे रहा हूं तो इसको अक्षरस मानोगे कि नहीं मानोगे?

450
00:33:31,280 --> 00:33:35,280
आप मुझे समझाइए इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ है कि जो

451
00:33:35,280 --> 00:33:40,240
परमात्मा है वह अनंत सामर्थ्यवान है। अनंत

452
00:33:40,240 --> 00:33:44,320
अंत नहीं है तो आप ये भी नहीं कह सकते प्रकृति के बिना

453
00:33:44,320 --> 00:33:49,520
नहीं काम कर सकता। कर सकता है। सब कुछ कर सकता है।

454
00:33:49,520 --> 00:33:53,600
फिर ठीक है। जब कोई बाधा नहीं है। जब कोई बाधा

455
00:33:53,600 --> 00:33:57,280
नहीं है तो नहीं है।

456
00:33:57,280 --> 00:34:01,280
अरे तो मैं प्रमाण मैं दूंगा ना आपको क्या वो सब कुछ करने

457
00:34:01,280 --> 00:34:05,360
में समर्थ नहीं है। अरे तो इस एक बात बताओ तुम अगर दे दोगे तो क्या इस

458
00:34:05,360 --> 00:34:09,520
प्रमाण को छोड़ देंगे? तो मतलब जो मैं प्रमाण दूंगा उसको

459
00:34:09,520 --> 00:34:13,600
भी मैं छोड़ दूं? नहीं। नहीं छोड़ेंगे। ऐसा आंसर निकालेंगे

460
00:34:13,600 --> 00:34:17,600
जिनमें दोनों का मान जिनमें दोनों का मान रह जाए तो क्या होगा

461
00:34:17,600 --> 00:34:21,800
कि हां व्यवहार और परमार्थ का अंतर है पारमार्थिक दृष्टिकोण

462
00:34:21,800 --> 00:34:26,080
से भगवान ये कार्य ऐसे ऐसे नहीं कर सकते हैं मगर व्यवहार

463
00:34:26,080 --> 00:34:32,080
प्रपंच रूपी संसार में आके वो कर सकते हैं हो गया

464
00:34:33,640 --> 00:34:38,080
जैसे मैंने एक मिनट एक मिनट जैसे तुम्हारा कहना है कि परमात्मा

465
00:34:38,080 --> 00:34:43,840
साकार है मगर उपनिषद में लिखा हुआ है साकार निराकार दोनों दोनों है।

466
00:34:43,840 --> 00:34:47,920
ठीक है। इसमें ब्रह्मा उपनिषद में

467
00:34:47,920 --> 00:34:52,680
पेज नंबर आप निकालिए। पेज नंबर

468
00:34:52,680 --> 00:34:56,800
है 284 ब्रह्मा कौन सा उपनिषद है

469
00:34:56,800 --> 00:35:00,880
भाई? ब्रह्मा ब्रह्मा का कौन सा उपनिषद है? ब्रह्मा उसका नाम बोलना

470
00:35:00,880 --> 00:35:05,040
नहीं आ रहा मुझे। आपके WhatsApp पर मैंने डाल रखा है वो नाम। तो WhatsApp अभी

471
00:35:05,040 --> 00:35:09,200
नहीं चल रहा है ना। आप नाम तो बोलो। क्या नाम है? बता

472
00:35:09,200 --> 00:35:13,520
मैं बता रहा हूं आपको। बहदार उपनिषद

473
00:35:13,520 --> 00:35:17,520
है। अच्छा बहारण्य उपनिषद है। उसको कह रहे थे ब्रह्मा

474
00:35:17,520 --> 00:35:22,320
यार हे भगवान

475
00:35:22,320 --> 00:35:26,480
इसका पेज नंबर है 248 और

476
00:35:26,480 --> 00:35:30,560
249 जी संधि विच्छेद करके बोल दिया करिए।

477
00:35:30,560 --> 00:35:34,640
जैसे उसका नाम है बृहद आरण्यक भी बोल सकते हैं आप। बहद का मतलब होता है बहुत

478
00:35:34,640 --> 00:35:39,120
विशाल और आर्यणक वेदांग ही है। एक है ना? जैसे

479
00:35:39,120 --> 00:35:44,680
उपनिषद होते हैं, आरण्यक होते हैं, ब्राह्मण ग्रंथ होते हैं। इसका वाक्य हैक

480
00:35:44,680 --> 00:35:48,720
का इसका मेरे पास पीडीएफ पीडीएफ में

481
00:35:48,720 --> 00:35:52,880
है मेरे पास ये पीडीएफ में गुरुजी

482
00:35:52,880 --> 00:35:56,880
ने गोरखपुर से गीता प्रेस गोरखपुर से है ये। अरे

483
00:35:56,880 --> 00:36:00,960
नाम तो पढ़ो लेखक का किसका भाष्य वो? बिल्कुल

484
00:36:00,960 --> 00:36:05,040
पढ़ रहा हूं मैं आपको। [संगीत] अरे शंकराचार्य

485
00:36:05,040 --> 00:36:11,040
शंकर भाष्य होगा और क्या? गीता प्रेस का गीता प्रेस गोरखपुर

486
00:36:11,240 --> 00:36:15,760
से शंकराचार्य विचरित लिखा होगा बिल्कुल

487
00:36:15,760 --> 00:36:21,320
उसप देखो लिखा होगा शंकराचार्य विचरित ऊपर

488
00:36:21,320 --> 00:36:25,320
गोविंद गोरखपुर से अरे

489
00:36:25,320 --> 00:36:30,240
ऐसे कवर निकालो कवर क्या लिखा है कवर पे

490
00:36:30,240 --> 00:36:34,640
कवर पे गीता प्रेस गोरखपुर लिखा है ओनली बस अरे ब्रदर ने तो

491
00:36:34,640 --> 00:36:37,840
लिखा है हां बिल्कुल बिल्कुल

492
00:36:37,840 --> 00:36:42,760
उसके नीचे कुछ लिखा है

493
00:36:42,760 --> 00:36:47,120
सानुवाद सांडर भाष्य हां यही लिखा हुआ है सांडर भाष्य लिखा हुआ है

494
00:36:47,120 --> 00:36:50,560
भाष्य

495
00:36:50,560 --> 00:36:54,720
भाष्य कोई नाम लिखा ही नहीं भैया जो आपके हाथ में शंकर

496
00:36:54,720 --> 00:36:58,080
भाष्य

497
00:36:58,080 --> 00:37:02,280
आ गए शंकराचार्य की शरण में मैं

498
00:37:02,280 --> 00:37:06,480
आपको आ गए शंकराचार्य की शरण में तो

499
00:37:06,480 --> 00:37:12,480
आप वहां से ही प्रमाण मानोगे ना मैं तो मैं तो

500
00:37:12,920 --> 00:37:17,040
नहीं फिर से मैं

501
00:37:17,040 --> 00:37:21,120
प्रमाण मानूंगा मैं उनकी शरण में क्यों जाऊंगा हम लोग बात आप उनकी मान रहे हो

502
00:37:21,120 --> 00:37:23,880
क्या किसको

503
00:37:23,880 --> 00:37:28,000
आप जैसे मैं ज्ञान गंगा को से प्रमाण दूंगा क्या आप

504
00:37:28,000 --> 00:37:32,240
उनको मानोगे क्या तो ज्ञान गंगा में जो हमारे शास्त्र संबंध बात होगी

505
00:37:32,240 --> 00:37:37,040
उसको मानेंगे हम ज्ञान गंगा सीखने वाला

506
00:37:37,040 --> 00:37:41,440
सुनो आप अपने समोन भैया सुनो

507
00:37:41,440 --> 00:37:45,520
ज्ञान गंगा लिखने वाला फ बकवास व्यक्ति हमारे हमारे लिए प्रमाण

508
00:37:45,520 --> 00:37:49,520
नहीं है ठीक है तो इसीलिए मैंने आपको

509
00:37:49,520 --> 00:37:53,920
गीता प्रेस गोरखपुर की जो पुस्तक है वो निकलवाने के लिए कहा है ये गीता

510
00:37:53,920 --> 00:37:58,880
पेज नंबर आप निकालिए पहले शंकराचार्य की पुस्तक है

511
00:37:58,880 --> 00:38:03,440
गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तक बाद में हां ठीक है

512
00:38:03,440 --> 00:38:08,920
ठीक है ठीक है हां हां अब इसका पेज नंबर पेज नंबर है

513
00:38:08,920 --> 00:38:12,960
इसका 284 कौन सा मंत्र

514
00:38:12,960 --> 00:38:16,960
है उसका उपनिषद का ये बताइए इसका डायरेक्ट पेज नंबर

515
00:38:16,960 --> 00:38:21,040
निकाल लेता हूं मैं रामपाल रामपाल के फॉलोवर्स का वो

516
00:38:21,040 --> 00:38:25,440
हो गया आ गए

517
00:38:25,440 --> 00:38:31,440
पेज नंबर है

518
00:38:34,960 --> 00:38:40,960
[संगीत]

519
00:38:42,400 --> 00:38:48,400
अमित जी सितार बज रहे हैं।

520
00:38:51,040 --> 00:38:56,200
हम और पेज नंबर भी साथ ही साथ में आ रहा हूं। 284

521
00:38:56,200 --> 00:39:00,240
288 289 पेज नंबर अरे भाई आ

522
00:39:00,240 --> 00:39:03,880
गया हूं आगे बोलो आप

523
00:39:03,880 --> 00:39:07,880
इसमें इसमें पहले मैं एक छोटी सी हेडलाइन पढ़ा देता हूं

524
00:39:07,880 --> 00:39:12,080
आपको 239 पे लिखा हुआ है कि सबसे

525
00:39:12,080 --> 00:39:16,080
पहले वो ब्रह्म ब्रह्म परमात्मा सबसे पहले

526
00:39:16,080 --> 00:39:20,320
वही था ठीक है उसके बाद

527
00:39:20,320 --> 00:39:24,400
में पेज नंबर आता हूं मैं टू 84

528
00:39:24,400 --> 00:39:28,560
पे अध्याय नौ पे जहां ये कह रहा है कि

529
00:39:28,560 --> 00:39:32,200
एक ब्रह्म ही था

530
00:39:32,200 --> 00:39:38,200
अनेक कारण

531
00:39:38,800 --> 00:39:44,800
अबे भैया तुम पहले अपना नेट सही कर लो

532
00:39:47,200 --> 00:39:51,760
बोलिए नेट ठीक करिए कुछ समझ में नहीं आया आपने क्या बोला है

533
00:39:51,760 --> 00:39:55,920
दोबारा बोलिए अरे वो मैं समझ समझ गया विभूति युक्त वो परमार्थिक दुनिया

534
00:39:55,920 --> 00:39:59,920
की विवेचना कर रहे हैं वहां पर वो उसको ले आए झंडा ऊंचा रहे

535
00:39:59,920 --> 00:40:05,920
हमारा करने कौन सा वाला है

536
00:40:06,440 --> 00:40:10,720
जवाब आपके प्रश्न का जवाब मैंने पहले ही दे दिया है

537
00:40:10,720 --> 00:40:13,920
कि ईश्वर

538
00:40:13,920 --> 00:40:18,160
ईश्वर की पारमार्थिक व्याख्या कहीं पर हुई है कहीं पर कहीं

539
00:40:18,160 --> 00:40:22,160
पर ईश्वर की परमार्थिक व्याख्या हुई है और कहीं

540
00:40:22,160 --> 00:40:26,160
पर ईश्वर की व्यवहारिक व्याख्या हुई है।

541
00:40:26,160 --> 00:40:30,160
श्वेता शत्रोपनिषद में ईश्वर के द्वारा

542
00:40:30,160 --> 00:40:36,160
भगवान शिव की मूर्ति पूजा बता रहे हैं। एक शंकराचार्य उसको मानोगे कि नहीं

543
00:40:36,840 --> 00:40:39,720
मानोगे?

544
00:40:39,720 --> 00:40:44,280
हेलो

545
00:40:44,280 --> 00:40:48,400
हां अरे अपना पहले तुम अपना नेट सही कर लो।

546
00:40:48,400 --> 00:40:52,400
तुम्हारे बस की बात नहीं है। उपनिषदों में बात करना। तुम नेट सही कर

547
00:40:52,400 --> 00:40:58,400
लो पहले।

548
00:41:02,560 --> 00:41:08,000
हां भैया दास जी बताइए।

549
00:41:08,000 --> 00:41:12,400
जय श्री राम।

550
00:41:12,400 --> 00:41:18,400
कैसे हैं सुन जी? बस कृपा है राम जी।

551
00:41:18,800 --> 00:41:22,960
और आप जो सवाल खोज रहे थे उसका जवाब मिला। कौन

552
00:41:22,960 --> 00:41:25,520
सा सवाल?

553
00:41:25,520 --> 00:41:29,840
परमात्मा के बारे में आप सवाल तो खोज ही रहे थे ना पहले से। हमारा कोई सवाल

554
00:41:29,840 --> 00:41:33,080
बाकी नहीं है।

555
00:41:33,080 --> 00:41:37,360
सर्वशक्तिमान हां जो जो परंपरा

556
00:41:37,360 --> 00:41:41,440
प्राप्त सनातन के तारम सिद्धांतों का खंडन करता है उनके लिए

557
00:41:41,440 --> 00:41:44,600
बड़ी बला है ये

558
00:41:44,600 --> 00:41:48,800
सर्वशक्तिमान वही तो हनी रामपाल जी को सर से

559
00:41:48,800 --> 00:41:52,880
पूछ रहे थे कि सर्वशक्तिमान साबित कीजिए तो सवाल का जवाब

560
00:41:52,880 --> 00:41:55,920
मिला

561
00:41:55,920 --> 00:42:00,080
नहीं नहीं वो कहां दे पाएंगे जब तक व्यक्ति

562
00:42:00,080 --> 00:42:04,400
सार्वभम सनातन सिद्धांतों को एक्सेप्ट नहीं करेगा। वो उसका ईश्वर सर्वशक्तिमान

563
00:42:04,400 --> 00:42:08,640
सिद्धि नहीं हो पाएगा। तीन चीजें नहीं मिलेंग उससे। सर्वशक्तिमान

564
00:42:08,640 --> 00:42:14,200
ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म।

565
00:42:14,200 --> 00:42:18,400
अच्छा ये जो ये जो मूर्ख व्यक्ति बाद में जो बात बता रहा है कि

566
00:42:18,400 --> 00:42:22,760
परमात्मा विभूति युक्त कर्म करने में समर्थ नहीं हुआ। तो

567
00:42:22,760 --> 00:42:28,760
वो उसका उत्तर मैं पहले देके आ रहा हूं उसको 15 मिनट।

568
00:42:30,400 --> 00:42:34,880
अच्छा मैं आप लोगों को एक बात बोला था कि आप लोग कितना खोजिएगा

569
00:42:34,880 --> 00:42:39,760
सवाल का जवाब नहीं मिलेगा। क्या रामपाल

570
00:42:39,760 --> 00:42:43,800
मैं आप लोगों को एक बात बोला था आप लोगों को चैनल पे ऐसा ही

571
00:42:43,800 --> 00:42:47,920
आकर बात करके कि आप लोग कितना खोजिएगा उस सवाल

572
00:42:47,920 --> 00:42:53,920
का जवाब सर्वशक्तिमान बोला नहीं मिलेगा या स्वयं रामपाल जी क्यों ना आए

573
00:42:54,160 --> 00:42:58,400
नहीं मिलेगा इनके पास नहीं मिलेगा वो जवाब

574
00:42:58,400 --> 00:43:02,640
आपको एक बात और भी बोले थे आप लोगों को अथम में कि वो जवाब

575
00:43:02,640 --> 00:43:07,760
मिलेगा आप लोगों को 20 जून के बाद इस चीज को है ना आप लोगों

576
00:43:07,760 --> 00:43:11,840
मामा सपोर्ट ले लो। 20 जून को क्या है?

577
00:43:11,840 --> 00:43:17,200
20 जून को बाद जवाब मिलेगा। 25 जून को हम आपके पास आएंगे।

578
00:43:17,200 --> 00:43:21,360
कौन आप? ठीक है। हां हम आएंगे। जी।

579
00:43:21,360 --> 00:43:25,360
अच्छा। और 20 जून से पहले वो रामपाल जी

580
00:43:25,360 --> 00:43:29,720
का ही हो जाएगा। देहांत। 20 जून से। उसके

581
00:43:29,720 --> 00:43:34,880
बाद उसका देहांत हो जाएगा। रामपाल का

582
00:43:34,880 --> 00:43:39,200
जी। अच्छा क्या बोल रहे हो आपको पता है?

583
00:43:39,200 --> 00:43:41,680
कैसे?

584
00:43:41,680 --> 00:43:45,520
जी मैं जो बोल रहा हूं एकदम सोच समझ के ही बोल रहा हूं। पहले भी बोला था मैं और

585
00:43:45,520 --> 00:43:49,840
अभी भी बोल रहा हूं। ये आने वाली 20 जून

586
00:43:49,840 --> 00:43:54,080
जी आने वाली 20 जून से पहले। अरे पहले क्यों पहले क्यों वापस

587
00:43:54,080 --> 00:43:58,080
भेज रहे हो? मैं इंतजाम कर रहा हूं। किसी दिन उसको जेल से बाहर लाया जाए। उसके उसकी

588
00:43:58,080 --> 00:44:02,400
तूती बंद की जाए। उसको पहले ही आप लुड़काए दे रहे उसका विकेट।

589
00:44:02,400 --> 00:44:06,960
नहीं हम लुड़काने वाले कौन है? उनको पहले ही से तय किया गया है। उसी तरह से

590
00:44:06,960 --> 00:44:11,280
पहले ही से वो भी तय है मगर ये अच्छी न्यूज़ नहीं है हमारे लिए बिल्कुल भी।

591
00:44:11,280 --> 00:44:16,800
उसको पहले बाहर लाते उसका मुंह धुआ करते

592
00:44:16,800 --> 00:44:21,560
उनका जेल में होगा।

593
00:44:21,560 --> 00:44:25,920
क्या होगा? ये तो ये तो मुझे भी निश्चित लगता है कि

594
00:44:25,920 --> 00:44:29,920
उनका जीवन जेल ही जेल में पूरा हो जाएगा। हां हां

595
00:44:29,920 --> 00:44:33,920
और और उनका देहांत जीवन जेल में ही है तो उसका लास्ट

596
00:44:33,920 --> 00:44:38,600
है 20 जून से

597
00:44:38,600 --> 00:44:42,800
पहले और आपके पास आप एक आप एक

598
00:44:42,800 --> 00:44:46,960
वीडियो में पहाड़ी जी को साथ आप बोले थे कि हमसे दास जी आके

599
00:44:46,960 --> 00:44:51,280
संपर्क कीजिए पर्सनली बात करिए भेदभाव छोड़ के

600
00:44:51,280 --> 00:44:55,440
तो मैं तो भेदभाव वाला बात अभी तक कभी किया ही नहीं हूं और रह गया बात

601
00:44:55,440 --> 00:45:00,640
की बात करने की तो मैं बात करूंगा आपसे 25 जून तो मैं बात करूंगा।

602
00:45:00,640 --> 00:45:04,640
25 जून को आइए बैठ के बात करते हैं। हां। जी

603
00:45:04,640 --> 00:45:08,640
ठीक है। आपको जितना अभी जितना आती है ना सब

604
00:45:08,640 --> 00:45:14,280
आदमी वो सब आदमी से मैं बात करूंगा पर 25 दिन के बाद से बात करूंगा।

605
00:45:14,280 --> 00:45:18,400
भाई भाई साहब दास ओके जी हैं। इन्होंने एक भविष्यवाणी हमें

606
00:45:18,400 --> 00:45:22,720
बताई है कि इनको कहीं मेरे ख्याल से कोई दिव्य

607
00:45:22,720 --> 00:45:26,880
वो हुई है। दिव्य ज्ञान धारा प्राप्त हुई है। जिसके अनुसार

608
00:45:26,880 --> 00:45:31,040
ये बता रहे हैं कि 20 जून से पहले जो है रामपाल

609
00:45:31,040 --> 00:45:35,120
नाम का जो व्यक्ति है जो इस समय जेल तेल धाम में अपनी यात्रा कर रहा

610
00:45:35,120 --> 00:45:36,880
है जीवन की वो

611
00:45:36,880 --> 00:45:41,280
20 जून से पहले अपने भगतों को भगतों

612
00:45:41,280 --> 00:45:46,120
को अलविदा कहने वाला

613
00:45:46,120 --> 00:45:50,240
है। तो हमारा वैसे बड़ा मन था कि वो आए

614
00:45:50,240 --> 00:45:54,240
और हम एक बार जो है उसको जो है उसकी वो

615
00:45:54,240 --> 00:45:58,440
जो ऊंट फड़कता है ना उसको फड़कते ऊंट पे उसकी टूटी बंद

616
00:45:58,440 --> 00:46:02,800
करें। खैर आप अपना नंबर दे मुझे

617
00:46:02,800 --> 00:46:07,120
पर्सनल प्राइवेट उसमें चैट में नहीं

618
00:46:07,120 --> 00:46:12,400
नहीं जी मेरा नंबर ले क्या कीजिएगा? मैं अभी नेपाल में रहता हूं। ठीक है।

619
00:46:12,400 --> 00:46:16,480
रह गया बात की जैसा आपको

620
00:46:16,480 --> 00:46:20,480
रह गया बात की बात करने के लिए तो आपको मैं कभी कभी संपर्क कर ही

621
00:46:20,480 --> 00:46:25,480
लेता हूं बीचबीच में जब जरूरत लगता है उस समय

622
00:46:25,480 --> 00:46:30,280
ठीक ठीक है रखते हैं [संगीत]

623
00:46:30,280 --> 00:46:34,600
सब जय श्री राम

624
00:46:34,600 --> 00:46:39,120
जी संदीप नंदनी जी

625
00:46:39,120 --> 00:46:43,840
जय श्री राम जय श्री राम सर

626
00:46:43,840 --> 00:46:49,400
मेरा कोई क्वेश्चन नहीं है। मैं तो ये जानना चाहता हूं कि आप जैसे बोलते हो

627
00:46:49,400 --> 00:46:53,440
कि जो भगवान होते हैं वो सब कुछ सीमाएं लांग

628
00:46:53,440 --> 00:46:57,600
जाते हैं। सब कुछ करते हैं। तो आप हमारे प्रभु राम के बारे में

629
00:46:57,600 --> 00:47:02,400
कि मतलब कि उन्होंने क्यों नहीं करा? क्या

630
00:47:02,400 --> 00:47:06,640
कि सब कुछ कर सकते थे। वो तो माता

631
00:47:06,640 --> 00:47:11,040
सीता को नहीं जाने दिया। लक्ष्मण जी ने रीता जी

632
00:47:11,040 --> 00:47:15,360
पहली बात तो ये है कि आपने पहले तो झूठ बोला कि मेरा कोई क्वेश्चन नहीं है। क्वेश्चन

633
00:47:15,360 --> 00:47:19,680
ही तो है और क्या है? अच्छा बिल्कुल सर ये

634
00:47:19,680 --> 00:47:23,680
क्वेश्चन ही समझ लो आप। हां तो फिर ये क्यों कह रहे हो? मेरा कोई क्वेश्चन

635
00:47:23,680 --> 00:47:27,760
नहीं है। मैं इसका उत्तर दे देता हूं। शिव जी इसको पूरा कर देंगे।

636
00:47:27,760 --> 00:47:31,840
देखिए हां सुनिए सुनिए। आवाज आ रही है आपको? संदीप जी आवाज आ

637
00:47:31,840 --> 00:47:36,160
रही है? हां ईश्वर जो है वो सब कुछ कर सकता है। ठीक है?

638
00:47:36,160 --> 00:47:41,360
सब कुछ कर सकता है। तो क्या वो मर्यादा में भी आ सकता है? अब

639
00:47:41,360 --> 00:47:45,360
सुन रहे हैं। मेरी आवाज आ रही है? बिल्कुल सुन रहा था। आ रही है

640
00:47:45,360 --> 00:47:49,360
ना? सुनिए। ईश्वर सब कुछ कर सकता है। ठीक है?

641
00:47:49,360 --> 00:47:49,860
तो क्या

642
00:47:49,600 --> 00:47:53,760
वो मर्यादा में भी आ सकता है? क्या वो अपने ही रूल में आके बंध सकता है? तो हां राम

643
00:47:53,760 --> 00:47:57,760
के रूप में वो अपने ही बनाए हुए रूल के अंडर आ सकता है और और

644
00:47:57,760 --> 00:48:02,000
उसमें भी बंध सकता है क्योंकि ईश्वर सब कुछ कर सकता है और कृष्ण के रूप में

645
00:48:02,000 --> 00:48:06,080
उन सारे रूल्स को क्रॉस भी कर सकता है। उसके बियों्ड

646
00:48:06,080 --> 00:48:10,240
भी जा सकता है। तोड़ भी सकता है। ठीक है? क्योंकि क्योंकि ईश्वर

647
00:48:10,240 --> 00:48:15,080
सब कुछ कर सकता है। अब मैं आपको एक बात बता दूं। देखिए ऐसा

648
00:48:15,080 --> 00:48:18,360
है

649
00:48:18,360 --> 00:48:22,560
कि आप जो बातें कर रहे हैं कि उन्होंने ऐसा नहीं किया वैसा

650
00:48:22,560 --> 00:48:26,640
नहीं किया ये नहीं किया क्या ये सारे नियम ये

651
00:48:26,640 --> 00:48:30,880
सारे क्वेश्चन जिस ईश्वर के जिस रूप को आप मानते हैं

652
00:48:30,880 --> 00:48:35,840
उस पर लागू नहीं होते

653
00:48:35,840 --> 00:48:40,000
अगर दुनिया एक मिनट अगर दुनिया में कहीं पर कोई

654
00:48:40,000 --> 00:48:44,160
चोरी हो रही है ठीक है तो मेरे ख्याल से

655
00:48:44,160 --> 00:48:48,560
आपका ईश्वर इतना तो सामर्थ्यवान है ना कि उस चोरी को होने से रोक दे

656
00:48:48,560 --> 00:48:52,960
कि नहीं है? इतना तो है ना

657
00:48:52,960 --> 00:48:57,680
ये रामपालियों का ईश्वर जो कबीर है वह सतलोक में बैठा बैठा

658
00:48:57,680 --> 00:49:02,200
चोरी को होने से तो रोक सकता है ना कि नहीं रोक

659
00:49:02,200 --> 00:49:06,240
सकता तो इसका मतलब दुनिया में कहीं भी चोरी हो रही है तो वो

660
00:49:06,240 --> 00:49:11,280
क्यों नहीं रोक रहा है उसका मन

661
00:49:11,280 --> 00:49:15,520
उसकी लीला उसने निर्णय लिया है कि मैं नहीं रोकूंगा

662
00:49:15,520 --> 00:49:19,600
तो नहीं रोकूंगा आप उसके ऊपर

663
00:49:19,600 --> 00:49:23,760
पर बाधा नहीं डाल सकते ना कि हमारे अनुसार यह काम कर दे। कर वो

664
00:49:23,760 --> 00:49:27,840
सब कुछ कर सकता है। तो यह जो वाला क्वेश्चन है यह तो आपके ईश्वर

665
00:49:27,840 --> 00:49:31,840
पर भी लागू हो रहा है। परंतु आपका ईश्वर क्या है कि आपने

666
00:49:31,840 --> 00:49:36,720
अपने ईश्वर को कस्टमाइज किया है। और क्यों किया है कस्टमाइज?

667
00:49:36,720 --> 00:49:40,720
क्योंकि आपको दुनिया को एक नया धर्म, एक नया बाबा, एक

668
00:49:40,720 --> 00:49:44,720
नया ईश्वर देना था। अपना धंधा चलाना था।

669
00:49:44,720 --> 00:49:50,000
अब मैं आपकी बात नहीं कर रहा हूं। अब मैं उनकी बात कर रहा हूं जिनके विरोध में मैं यहां हूं।

670
00:49:50,000 --> 00:49:51,040
जब भी कोई नई

671
00:49:51,040 --> 00:49:55,120
दुकान का शटर खोला जाता है वो भले ही इस्लाम के रूप में

672
00:49:55,120 --> 00:49:59,360
हो वो भले ही ईसाइयत के रूप में हो

673
00:49:59,360 --> 00:50:03,440
वो भले ही रामपाल जैसों के रूप में हो वो भले ही निरंकारी

674
00:50:03,440 --> 00:50:07,520
बाबाओं जैसों के रूप में हो जब भी दुनिया में कोई नया शटर खोला

675
00:50:07,520 --> 00:50:12,480
जाएगा धर्म के नाम पर उसमें सबसे पहली अड़चन आएगी सर्वशक्तिमान

676
00:50:12,480 --> 00:50:16,560
ईश्वर की क्योंकि हमें नया धर्म दुनिया को देना

677
00:50:16,560 --> 00:50:21,400
है नई बातें बतानी है तो हमें जो पहले से जो ईश्वर है पूर्ण

678
00:50:21,400 --> 00:50:26,240
सर्वशक्तिमान उसमें कुछ ना कुछ कटिंग करनी होगी

679
00:50:26,240 --> 00:50:30,240
तो कहीं पर कह देंगे वो जन्म ही नहीं ले सकता वो अवतार नहीं ले सकता

680
00:50:30,240 --> 00:50:34,320
मूर्ति पूजा खत्म कहीं पे कह देंगे मूर्ति पूजा

681
00:50:34,320 --> 00:50:38,640
तो हो सकती है मगर वो निराकार नहीं हो सकता

682
00:50:38,640 --> 00:50:43,040
वो जो है वो माता के गर्भ में नहीं आ सकता अरे

683
00:50:43,040 --> 00:50:47,840
भाई जो पूरे संसार को बना रहा है चला रहा है तुम उस पर नियम लगाओगे

684
00:50:47,840 --> 00:50:51,920
सोच सोचने वाली बात और जब वो नियम में लग गया

685
00:50:51,920 --> 00:50:56,160
तो वो तुम्हारा ईश्वर कहां से रहा? नियम में लगे हुए ईश्वर

686
00:50:56,160 --> 00:51:00,240
का अस्तित्व भी सिद्ध नहीं कर पाओगे। अगर मैं अभी तुमसे पूछने लगूं आपसे

687
00:51:00,240 --> 00:51:04,240
कि ईश्वर है ये सिद्ध कर दो। तो आपको मेरी शरण में आना पड़ेगा।

688
00:51:04,240 --> 00:51:06,080
ईश्वर को सिद्ध करने के लिए। उसी

689
00:51:06,080 --> 00:51:10,480
ईश्वर की शरण में आना पड़ेगा। उस ईश्वर की शरण में आना पड़ेगा।

690
00:51:10,480 --> 00:51:14,560
ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए जो जो सर्व

691
00:51:14,560 --> 00:51:18,960
सामर्थ्यवान है।

692
00:51:18,960 --> 00:51:22,960
तो आप सर्व सामर्थवान ईश्वर का खंडन करते हुए ईश्वर

693
00:51:22,960 --> 00:51:27,040
का अस्तित्व भी सिद्ध नहीं कर सकते। अब जैसे अभी वो अमित दास कर रहा था जो

694
00:51:27,040 --> 00:51:31,040
मैंने उसने कहा कि क्या परमात्मा प्रकृति के

695
00:51:31,040 --> 00:51:35,200
बिना ये कर सकता है? तो परमार्थिक दुनिया जो है यह

696
00:51:35,200 --> 00:51:39,280
जो दिखाई देने वाला प्रपंच रूपी संसार इससे इत दुनिया है

697
00:51:39,280 --> 00:51:43,600
वास्तविक दुनिया परमार्थ उसमें ईश्वर नहीं कर सकता मगर व्यवहार

698
00:51:43,600 --> 00:51:47,840
में कर सकता है इस प्रपंच रूपी संसार में कुछ भी कर सकता है खंभा

699
00:51:47,840 --> 00:51:51,920
फाड़ के प्रकट हो जाएगा मत्स्य अवतार ले लेगा कुर् अवतार ले

700
00:51:51,920 --> 00:51:56,160
लेगा वानर रूप में आ जाएगा नरसिंह अवतार ले लेगा आधा

701
00:51:56,160 --> 00:52:00,400
मानव आधा पशु ऐसा अवतार ले लेगा कुछ भी का मतलब कुछ

702
00:52:00,400 --> 00:52:02,800
भी

703
00:52:02,800 --> 00:52:06,920
नहीं सर मैं तो इतना पूछना चाहता था कि हमारे प्रभु ने इतने दुख क्यों

704
00:52:06,920 --> 00:52:10,960
झेले भगवान होते पहले मेरी एक बात सुनो वो क्यों

705
00:52:10,960 --> 00:52:15,040
झेले की बात तो बाद में मैं अभी करूंगा पहले अभी ये वाली बात पूरी कर लो अब

706
00:52:15,040 --> 00:52:19,200
क्या है यदि हम कुछ भी कर सकने वाले ईश्वर को नहीं

707
00:52:19,200 --> 00:52:21,200
मानते और हम

708
00:52:21,200 --> 00:52:25,280
इस ईश्वर का खंडन करने के लिए कह रहे हैं क्या ईश्वर प्रकृति

709
00:52:25,280 --> 00:52:29,440
में प्रकृति के बिना कार्य कर सकता है तो तुम्हें पहले बताना पड़ेगा ईश्वर होता कौन

710
00:52:29,440 --> 00:52:33,520
है तुम्हें पहले बताना पड़ेगा कि ईश्वर तक तुम

711
00:52:33,520 --> 00:52:37,600
पहुंचे कैसे हो? तो जब तुम्हारे से यह प्रश्न किया जाएगा ना

712
00:52:37,600 --> 00:52:42,080
ईश्वर तक तुम पहुंचे कैसे? तो तुम्हें इस ईश्वर की आवश्यकता पड़ जाएगी।

713
00:52:42,080 --> 00:52:46,160
इस ईश्वर के बिना तुम ईश्वर तक पहुंच ही

714
00:52:46,160 --> 00:52:50,720
नहीं सकते कि तुम ये प्रश्न कर सको कि क्या ईश्वर प्रकृति के बिना

715
00:52:50,720 --> 00:52:54,880
रचना कर सकता है कि नहीं। तो तुम्हें पहले जैसे कि

716
00:52:54,880 --> 00:52:58,960
काठ की लकड़ी से जब तक अग्नि प्रकट नहीं हो जाती है तब तक किसी को

717
00:52:58,960 --> 00:53:03,520
यह बोध नहीं होता है कि उसमें अग्नि है।

718
00:53:03,520 --> 00:53:07,520
समझ रहे हो? जब लपट हमने देख ली लकड़ी में तब

719
00:53:07,520 --> 00:53:11,680
हमें पता चला लकड़ी जल सकती है। इसमें जलने की क्षमता है।

720
00:53:11,680 --> 00:53:15,840
समझ गए ना? उसी तरीके से जब हमने उसी तरीके

721
00:53:15,840 --> 00:53:19,840
से जब हमने व्यवहार में सब कुछ कर सकने वाले ईश्वर को ईश्वर माना

722
00:53:19,840 --> 00:53:23,840
तो हमें उसके द्वारा पता चला कि हां उसका एक पारमार्थिक

723
00:53:23,840 --> 00:53:29,840
अस्तित्व और है। अब आपका परिचय बता दीजिए।

724
00:53:31,680 --> 00:53:35,680
जी सर मेरा नाम संदीप नंदाने है। मैं एक गवर्नमेंट

725
00:53:35,680 --> 00:53:39,800
एम्प्लई हूं और मेरी आस्था प्रभु राम में बहुत है।

726
00:53:39,800 --> 00:53:44,000
बाकी ऐसा लगता है कि प्रभु राम ने कष्ट बहुत झेले

727
00:53:44,000 --> 00:53:48,080
हैं भगवान होकर भी। तो थोड़ा सा मेरे को ऐसा लगता

728
00:53:48,080 --> 00:53:52,480
है कि झेले हैं। वो ठीक है कि वो बताने लोगों को बताने

729
00:53:52,480 --> 00:53:56,480
के लिए झेले हैं या फिर लोगों ने उनकी निंदा करते हैं। इसकी वजह से हुआ

730
00:53:56,480 --> 00:54:00,600
वो। देखिए ऐसा है। पहली बात तो इसको

731
00:54:00,600 --> 00:54:04,640
समझिए कि भगवत गीता में भगवान ने कहा है

732
00:54:04,640 --> 00:54:09,600
समस्त कर्मों को करते हुए भी मुझको तू अकर्ता जान।

733
00:54:09,600 --> 00:54:13,920
ठीक है? अकर्ता क्यों जान? क्योंकि

734
00:54:13,920 --> 00:54:17,640
जिन कर्मों के फल

735
00:54:17,640 --> 00:54:21,680
में आसक्ति होती है कि मैं इस कर्म को करूंगा तो मुझे

736
00:54:21,680 --> 00:54:25,920
यह मिलेगा। मैं इस कर्म को करूंगा तो मुझे मिलेगा। उन कर्मों को किए

737
00:54:25,920 --> 00:54:29,920
जाने के रूप में यह कहा जाता है कि इसने कोई कर्म किया

738
00:54:29,920 --> 00:54:34,920
मगर ईश्वर जो है वह मुक्त है। उसकी किसी कर्म में कोई आसक्ति नहीं

739
00:54:34,920 --> 00:54:39,040
है। तो उसका ये रोना, उसका ये खेलना, उसका ये

740
00:54:39,040 --> 00:54:43,160
हंसना यह सिर्फ लीला मात्र है। और लीला

741
00:54:43,160 --> 00:54:46,720
इसलिए कि आप अपने किसी

742
00:54:46,720 --> 00:54:50,800
ना किसी रूप में भगवान को अपने से जोड़ करके और उसकी

743
00:54:50,800 --> 00:54:54,960
भक्ति करके मुक्त हो सको। इसलिए भगवान ने इतनी प्रकार की

744
00:54:54,960 --> 00:54:58,960
लीलाएं आपको करके बताई कि किसी ना किसी भगवान के किसी ना किसी

745
00:54:58,960 --> 00:55:03,040
रूप से आपको भगवान के किसी ना किसी रूप से उनकी

746
00:55:03,040 --> 00:55:07,440
लीला के कारण अटैचमेंट हो जाएगा और उस अटैचमेंट

747
00:55:07,440 --> 00:55:11,440
के कारण आप उनके पीछे चल चल के चल चल के चल चल के मुक्ति को

748
00:55:11,440 --> 00:55:15,760
प्राप्त कर लोगे। इसलिए भगवान ने कहा कि

749
00:55:15,760 --> 00:55:19,960
यदा धर्मस भवती भारत

750
00:55:19,960 --> 00:55:24,160
धर्मसात्म सजाम जब जब धर्म की हानि

751
00:55:24,160 --> 00:55:28,280
होती है, धर्म की वृद्धि होती है, तब तब मैं प्रकट होता हूं। क्यों होता

752
00:55:28,280 --> 00:55:34,120
हूं? अभी यह बताएंगे आपको पंडित जी क्यों होते हैं?

753
00:55:34,120 --> 00:55:38,320
परणा साधु नाम साधुना विनाशा

754
00:55:38,320 --> 00:55:43,120
धर्म संस्थापनाथाय संभवानी युगे युगे।

755
00:55:43,120 --> 00:55:47,280
ठीक है? तो क्यों? साधु का मतलब ये नहीं है जिसकी ऐसी वाली दाढ़ी हो

756
00:55:47,280 --> 00:55:51,440
ट्रायंगल शेप में। साधु का मतलब केवल यह नहीं है।

757
00:55:51,440 --> 00:55:55,680
साधु का मतलब है अच्छा। साधु भक्तों का उद्धार यानी

758
00:55:55,680 --> 00:55:59,760
कि अच्छे भक्तों के उद्धार के लिए। तो भगवान ये जो लीलाएं

759
00:55:59,760 --> 00:56:01,920
करते हैं आकर के मनुष्य रूप में प्रकट

760
00:56:01,920 --> 00:56:06,000
हो के वो इसलिए करते हैं जिससे कि आप उन्हें देख के उनसे अटैच हो

761
00:56:06,000 --> 00:56:10,000
जाओ। उनके उनसे प्रेम करने लगो और प्रेम करने लगो जिस कारण से

762
00:56:10,000 --> 00:56:14,480
आप उनका पीछे भक्ति करके मुक्त हो जाओ। ठीक

763
00:56:14,480 --> 00:56:18,640
है सर इसमें दिक्कत क्या होती है कि हम भी

764
00:56:18,640 --> 00:56:22,720
कोशिश करते हैं कि प्रभु राम सारी का जीवन जिए बाकी वो

765
00:56:22,720 --> 00:56:27,280
हो नहीं पाता कम से हम सरकारी नौकरी करते हैं शास्त्रों

766
00:56:27,280 --> 00:56:31,680
में एक बात लिखी हुई है बोलना नहीं चाह रहे कि शास्त्रों

767
00:56:31,680 --> 00:56:37,680
में एक बात लिखी हुई है कि व्यवस्था में अथवा अज्ञानता

768
00:56:39,720 --> 00:56:44,600
वश धर्म का अनुकरण या मतलब अक्षरश

769
00:56:44,600 --> 00:56:48,720
अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में भी यदि आपके

770
00:56:48,720 --> 00:56:52,720
अंदर धर्म का अनुकरण ना कर पाने का पश्चाताप है तो भी आप

771
00:56:52,720 --> 00:56:56,800
धर्मज्ञ कहलाओगे। बस इतना है कि धर्म

772
00:56:56,800 --> 00:57:00,960
का अनुकरण ना करना इसमें आपकी विवशता

773
00:57:00,960 --> 00:57:05,640
होनी चाहिए। चयन नहीं। जैसे कि प्रभु श्री राम

774
00:57:05,640 --> 00:57:10,720
ने एक ही विवाह किया। दूसरा नहीं किया।

775
00:57:10,720 --> 00:57:14,720
ठीक है? अब आप जो है आपका मन कर रहा है तो आप जो है अपनी पत्नी के बाहर

776
00:57:14,720 --> 00:57:18,960
भी आपका जो है संबंध बन रहा है। तो यह क्या है?

777
00:57:18,960 --> 00:57:23,440
आप चयन पूर्वक धर्म का उल्लंघन कर रहे हैं।

778
00:57:23,440 --> 00:57:27,800
ठीक है? अब प्रभु श्री राम ने पुल बना दिया समुद्र के

779
00:57:27,800 --> 00:57:32,560
ऊपर। आप नहीं बना सकते। मगर ये क्या है? व्यवस्था

780
00:57:32,560 --> 00:57:36,560
पूर्वक आप जो है उनका अनुकरण नहीं कर पा

781
00:57:36,560 --> 00:57:40,560
रहे क्योंकि आप में सामर्थ नहीं है पुल बनाने की। मगर आप में सामर्थ्य है

782
00:57:40,560 --> 00:57:44,720
दूसरा विवाह ना करने की। जैसे कि यह इस वाले भी कहते

783
00:57:44,720 --> 00:57:49,280
हैं बात जब हम राम का उदाहरण देते हैं कि राम ने तो शिव की पूजा की

784
00:57:49,280 --> 00:57:54,520
तो तुम कैसे कह रहे हो कि भैया वो शिव जी भगवान नहीं है।

785
00:57:54,520 --> 00:57:55,520
तो

786
00:57:55,520 --> 00:57:59,760
राम ने शिव की पूजा की तो फिर यहां पर वो इस

787
00:57:59,760 --> 00:58:05,440
वाले तर्क देते हैं। राम ने तो श्री राम ने तो वो सेतु भी बनाया।

788
00:58:05,440 --> 00:58:09,520
तो श्री राम ने जो सेतु बनाया उस

789
00:58:09,520 --> 00:58:13,960
सेतु ना बना पाने में हमारी व्यवस्था है

790
00:58:13,960 --> 00:58:18,320
और शिव की शिव को भगवान ना मानने में

791
00:58:18,320 --> 00:58:22,480
हमारी कोई व्यवस्था नहीं है। चयन है। चयन

792
00:58:22,480 --> 00:58:26,560
है। ठीक है? तो इसलिए यदि आपकी

793
00:58:26,560 --> 00:58:31,280
व्यवस्था है तो कोई अपराधी अपराध ना अपराध दोष ना समझे

794
00:58:31,280 --> 00:58:36,440
और यथा सामर्थ धर्म का पालन करें। बताइए बाबू

795
00:58:36,440 --> 00:58:42,440
जी आत्मा निश्चित

796
00:58:48,080 --> 00:58:53,120
बताओ भाई

797
00:58:53,120 --> 00:58:57,280
बाबूराम आवाज आ रही है आपको ये पिछले वाले

798
00:58:57,280 --> 00:59:02,320
दास जी स्टचू हो गए हैं बाबूराम

799
00:59:02,320 --> 00:59:06,320
अंकित दास जी अच्छा ये एक बात और है कि ये लोग इतनी बार यहां से

800
00:59:06,320 --> 00:59:10,560
पिटपिट कर जा चुके फिर भी आते हैं तो एक ये भी बलमन

801
00:59:10,560 --> 00:59:15,120
सार है सष्णता ही तो है भाई

802
00:59:15,120 --> 00:59:20,440
तुमको जिन क्वेश्चंस पे तुम यहां से भागे थे छिप

803
00:59:20,440 --> 00:59:24,960
करके जिन क्वेश्चन के कारण तुम यहां से भागे थे छिप करके

804
00:59:24,960 --> 00:59:29,600
उन क्वेश्चन के जवाब तो ले आए नहीं वापस

805
00:59:29,600 --> 00:59:34,880
फिर आगे की कहानी चल रही है बताइए भैया

806
00:59:34,880 --> 00:59:38,880
हम हमारे अगर नेट थोड़ा अगर कट

807
00:59:38,880 --> 00:59:43,920
जाता है तो उसमें आपको आपत्ति नहीं होना चाहिए। मैं बात कर रहा हूं आपसे।

808
00:59:43,920 --> 00:59:48,240
ठीक है। बताइए मैं आप मैं

809
00:59:48,240 --> 00:59:52,320
आपसे जानना चाहता हूं कि हमारे

810
00:59:52,320 --> 00:59:56,320
पूर्वज जो हमारे पूर्वज जो दादा परदादा लोग जिनको

811
00:59:56,320 --> 01:00:01,040
आप लोगों ने पित्र बना करके नरक में ठोक दिया। तो

812
01:00:01,040 --> 01:00:06,000
उनका रक्षा कैसे होगा? क्या बोले? क्या बोले?

813
01:00:06,000 --> 01:00:10,000
जो हमारे जो हमारे दादा परदादा लोग हैं जिनको

814
01:00:10,000 --> 01:00:14,560
पितृ बना करके वो पितर लोक में भेज दिए। फिर वो नरक में चले गए।

815
01:00:14,560 --> 01:00:19,280
फिर उसको आप निकालने के लिए रास्ता क्या चुने?

816
01:00:19,280 --> 01:00:24,480
हमने ऐसा किया। ये कहां लिखा है?

817
01:00:24,480 --> 01:00:28,640
पुराण में लिखा है स्कंद पुराण में हमने ऐसा हमने ऐसा किया

818
01:00:28,640 --> 01:00:33,720
कि वो नरक में गए ये कहां लिखा

819
01:00:33,720 --> 01:00:38,080
है पितृ पूजा कौन करवा रहा है पितृ

820
01:00:38,080 --> 01:00:42,160
पुरुष पूजा का प्रमाण हम दे चुके हैं पुरानी लाइव स्ट्रीम देखिए जाकर के

821
01:00:42,160 --> 01:00:45,240
बहुत सारे प्रमाण दिए

822
01:00:45,240 --> 01:00:49,360
हैं अभी आप ईश्वर सर्वशक्तिमान के विषय में बात करनी है आपको

823
01:00:49,360 --> 01:00:53,520
अभी नहीं देंगे दे तो चुके हैं। पितृ पूजा के बहुत

824
01:00:53,520 --> 01:00:57,520
सारे प्रमाण क्या है? हां बताओ

825
01:00:57,520 --> 01:01:02,800
ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं? ठीक है।

826
01:01:02,800 --> 01:01:06,880
ठीक है दे दिए हैं लेकिन तो हम तो जानना चाहते हैं। हम नहीं सुने है ना इसलिए तो आपसे

827
01:01:06,880 --> 01:01:11,040
पूछ रहे हैं। तो सिंगल सिंगल थोड़ी ना जवाब देंगे भाई कि जब जो बनाया

828
01:01:11,040 --> 01:01:15,160
जो अचला आया पित पूजा का प्रमाण तो दे चुके भर भर के प्रमाण दिए। वेदों से दिया

829
01:01:15,160 --> 01:01:19,200
है। जो मार्कंडेय ऋषि का तुम बताते हो वही एक अपने आप

830
01:01:19,200 --> 01:01:23,360
में प्रमाण है। मार्कंडेय पुराण का बताते हो तुम

831
01:01:23,360 --> 01:01:29,360
वही अपने आप में प्रमाण है जो मार्कंडेय पुराण में

832
01:01:29,920 --> 01:01:33,920
गरुड़ पुराण में लिखा है स्कंद पुराण में लिखा है पहले

833
01:01:33,920 --> 01:01:38,880
तो तुम ये बताओ गरुड़ पुराण तुम्हारे पास आया कैसे आज ये बताओ चलो

834
01:01:38,880 --> 01:01:42,200
खत्म कैसे

835
01:01:42,200 --> 01:01:46,720
आया आप लोगों के द्वारा हमारे पास है

836
01:01:46,720 --> 01:01:50,720
मेरे द्वारा आया जो आप लोगों का

837
01:01:50,720 --> 01:01:54,720
जो परंपरा चलते आ रहा है उसके द्वारा हमारे पास आया है। यानी

838
01:01:54,720 --> 01:01:59,360
कि तुम्हें मेरे द्वारा दी गई चीज पर विश्वास है।

839
01:01:59,360 --> 01:02:01,680
बिल्कुल

840
01:02:01,680 --> 01:02:07,440
बहुत अच्छा। मेरे द्वारा मैं जो कहूंगा उस पर तुम्हें विश्वास है।

841
01:02:07,440 --> 01:02:11,440
नहीं आप अगर ग्रंथ से बाहर बताएंगे उस पर विश्वास नहीं है।

842
01:02:11,440 --> 01:02:15,600
किससे बाहर बताऊंगा? ग्रंथ से बाहर बताएंगे

843
01:02:15,600 --> 01:02:19,640
उस पर विश्वास नहीं है तो ग्रंथ क्या है तुम्हारे लिए यह बता

844
01:02:19,640 --> 01:02:23,840
दो जो आप आपने जो ग्रंथ हमको दिए हैं उस ग्रंथ

845
01:02:23,840 --> 01:02:28,560
के उस ग्रंथ के अकॉर्डिंग बताएंगे उस पर हमें विश्वास है

846
01:02:28,560 --> 01:02:32,640
तो ग्रंथ के अकॉर्डिंग हम बता चुके हैं दोबारा आ जाना कल हम लोग पितृ पूजा पे

847
01:02:32,640 --> 01:02:37,800
बात कर लेंगे मैं प्रमाण निकाल के रखूंगा बहुत सारे ठीक

848
01:02:37,800 --> 01:02:41,920
है आ जाना अभी मार्कंडेय ऋषि का

849
01:02:41,920 --> 01:02:46,800
वो ले लो वो जो तुम रुचि रुचि मुनि की कहानी सुनाते हो।

850
01:02:46,800 --> 01:02:51,960
उसके जो पित्र उसमें जो उसके पितर होते हैं वो कह रहे होते हैं कि मेरा श्राद्ध

851
01:02:51,960 --> 01:02:56,160
कर। कह रहे होते हैं कि नहीं? फिर वो कहता है कि नहीं

852
01:02:56,160 --> 01:03:00,240
वो कहते हैं कि नहीं नहीं जब मैं विरक्त हो चुका हूं तो आप

853
01:03:00,240 --> 01:03:04,400
मुझे क्यों सांसारिक दुनिया में डाल रहे हो? तो फिर वो पितर समझाते हैं बेटा तू

854
01:03:04,400 --> 01:03:10,320
सांसारिक होते हुए भी मुक्त हो सकता है।

855
01:03:10,320 --> 01:03:14,320
हमें चाहिए कि हमारे जो दादा परदादा है क्या वो कहीं दुखी तो नहीं है

856
01:03:14,320 --> 01:03:18,480
कहीं नरक में तो ठोके नहीं है। उनका मुक्त हुआ कि नहीं हुआ ये जानकारी हमें अगर

857
01:03:18,480 --> 01:03:22,640
उन्होंने मुक्ति वाले कर्म करके गए होंगे तो मुक्त होंगे और अगर उन्होंने

858
01:03:22,640 --> 01:03:28,000
मुक्ति वाले कर्म नहीं किए होंगे फसने वाले किए होंगे तो फसेंगे।

859
01:03:28,000 --> 01:03:32,000
तो आप लोग किस लिए हैं? आप लोग जो शिक्षा दे रहे हैं हमारे हिंदू

860
01:03:32,000 --> 01:03:36,560
समाज में तो फिर क्या शिक्षा दे रहे हैं? नरक में ठोकने के लिए दे रहे हैं या मोक्ष के लिए दे रहे हैं?

861
01:03:36,560 --> 01:03:40,640
मोक्ष के लिए। तो फिर पितृ पूजा क्यों

862
01:03:40,640 --> 01:03:44,800
करवाते हैं? लोगों के द्वारा उनका जो पूजन होता है उससे दो दो

863
01:03:44,800 --> 01:03:48,800
चीजें होती है। एक उनको सद्गति मिलती है। जिस स्तर में

864
01:03:48,800 --> 01:03:52,880
भी होते हैं वो उससे आगे बढ़ते हैं। और दूसरी हमको

865
01:03:52,880 --> 01:03:57,240
उनका आशीर्वाद प्रदान हमको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता

866
01:03:57,240 --> 01:04:01,280
है। और जो पितृ पूजा के और जो तुम्हारा

867
01:04:01,280 --> 01:04:06,120
वो भगवत गीता वाला श्लोक है जो जिसमें ये कहा गया

868
01:04:06,120 --> 01:04:08,360
है

869
01:04:08,360 --> 01:04:13,360
कि जो पितरों को पूजते हैं वो पितृक में जाते हैं।

870
01:04:13,360 --> 01:04:17,680
जी उसका अर्थ ये है कि जो स्वतंत्र रूप से पितरों

871
01:04:17,680 --> 01:04:22,000
को पूजते हैं वो सोचते हैं यही सब कुछ है। ये भगवान ही है।

872
01:04:22,000 --> 01:04:26,240
जी जो पितरों को भगवान के रूप में पूजते हैं।

873
01:04:26,240 --> 01:04:30,240
उसके लिए वहां पर निषेध किया गया है। भगवान से स्वतंत्र

874
01:04:30,240 --> 01:04:34,480
किसी भी देवता भगवान से स्वतंत्र किसी भी पितृ इत्यादि की यदि भूत

875
01:04:34,480 --> 01:04:38,640
की आप पूजा करते हो तो वहां पर निषेध किया गया है।

876
01:04:38,640 --> 01:04:42,640
यदि आप भगवान को प्राप्त करने के लिए अपने माता-पिता की पूजा कर रहे हो, अपने गुरु

877
01:04:42,640 --> 01:04:46,720
की पूजा कर रहे हो, अपने पितरों की पूजा कर रहे हो, पूर्वजों की पूजा कर रहे हो तो उसकी कोई

878
01:04:46,720 --> 01:04:51,040
आपत्ति नहीं है। तो आप आपने

879
01:04:51,040 --> 01:04:55,040
कभी भी या आपका जो परंपरा चलते आ रहा है आप लोग परंपरा के द्वारा

880
01:04:55,040 --> 01:04:59,200
कभी ऐसा वीडियो बनाए हैं कभी ऐसा समाज में बोले हैं कि पितरों की पूजा नहीं

881
01:04:59,200 --> 01:05:03,280
करना चाहिए अरे क्यों बोले भाई पितरों की पूजा स्वतंत्र रूप से

882
01:05:03,280 --> 01:05:07,360
करना गलत है जब भगवान मान लो तुम पितृ को अभी बोला तो समझ

883
01:05:07,360 --> 01:05:12,120
में नहीं आता क्या अभी क्या बोला

884
01:05:12,120 --> 01:05:16,400
मैंने जब पित्र की पूजा आपने जब

885
01:05:16,400 --> 01:05:22,400
एक मिनट अर्जुन को अर्जुन को तत्व ज्ञान मिला कि नहीं मिला?

886
01:05:23,440 --> 01:05:27,560
उसको मिला कि नहीं मिला? हमें पितरों पर जानना है कि आप लोग पितों की

887
01:05:27,560 --> 01:05:31,760
पूजा अर्जुन साध्य कर्म सब करता था। अब आप बताओ उसको तत्व ज्ञान

888
01:05:31,760 --> 01:05:36,400
मिला था कि नहीं मिला था?

889
01:05:36,400 --> 01:05:40,480
उसको आप जाने मिला कि नहीं मिला। हमें पितों के बारे में हमारे दादा

890
01:05:40,480 --> 01:05:44,800
मालूम है ना वो भागे थे जो मालूम है ना अपना याद आ गई ना स्त्री

891
01:05:44,800 --> 01:05:49,320
भाग गए थे जो दो अर्जुन बना दिए थे इन्होंने अभी

892
01:05:49,320 --> 01:05:53,600
आपको एक मिनट उसी इनकी

893
01:05:53,600 --> 01:05:57,840
किताब में लिख के बैठा है इनका बाबा इनका जो रामपाल है वो

894
01:05:57,840 --> 01:06:03,040
लिख के बैठा है कि अर्जुन को मोक्ष मिला हां

895
01:06:03,040 --> 01:06:07,120
हमने इनको खोल के दिखा दिया हमने इनको एक मिनट बाबू

896
01:06:07,120 --> 01:06:11,200
एक मिनट हमने ने इनको खोल के दिखा दिया तो क्या बोले मालूम है वो दूसरे अर्जुन

897
01:06:11,200 --> 01:06:16,680
की बात हो रही है अच्छा

898
01:06:16,680 --> 01:06:20,800
आप बाहर मत जाइए आप टॉपिक पर बात कर हमारे दादा

899
01:06:20,800 --> 01:06:24,880
परदादा परदादा नहीं हुआ आप ये

900
01:06:24,880 --> 01:06:28,880
बताइए की आपको पितर को आपको पितृ पूजा ना करने का

901
01:06:28,880 --> 01:06:33,280
ज्ञान कहां से मिला है ये बताइए गरुड

902
01:06:33,280 --> 01:06:39,280
गरुड पुराण गरुड पुराण आपके पास आया कहाँ से

903
01:06:41,600 --> 01:06:46,240
आप लोगों का जो परंपरा चलते आ रहा है इस परंपरा के द्वारा हमारे पास आया है।

904
01:06:46,240 --> 01:06:50,840
आया यानी कि तुम्हें हमारे ऊपर भरोसा

905
01:06:50,840 --> 01:06:55,600
है। आपके ऊपर नहीं आपके ग्रंथों के ऊपर भरोसा है। क्यों?

906
01:06:55,600 --> 01:06:59,680
मैं ग्रंथों में झूठ नहीं लिख सकता क्या? मैं ग्रंथों में

907
01:06:59,680 --> 01:07:05,680
झूठ नहीं लिख सकता क्या कि परम पित्रों को मत पूछो। मैं ये बात नहीं लिख सकता क्या?

908
01:07:06,560 --> 01:07:10,880
नहीं तो उसको आप आप जब आपको जब आपको

909
01:07:10,880 --> 01:07:14,880
जब मुखिया बनाया गया आपको श्रेष्ठ रखा गया है तो आप जनता को सही दिशा

910
01:07:14,880 --> 01:07:19,040
देना चाहिए। मेरी बात सुनो। मेरी बात सुनो। अगर पितरों को नहीं

911
01:07:19,040 --> 01:07:23,200
पूजना है। ठीक है? तो तुमको ऐसी

912
01:07:23,200 --> 01:07:27,200
जगह से दिखाना होगा जिस पर तुम्हें पूर्ण रूप से विश्वास है।

913
01:07:27,200 --> 01:07:31,360
पितरों को ना पूजने के बारे में। क्योंकि यदि तुमको तुम

914
01:07:31,360 --> 01:07:35,760
मेरे से प्राप्त ग्रंथ पर ग्रंथ को प्रमाण बनाकर मेरे मेरे सामने प्रस्तुत

915
01:07:35,760 --> 01:07:39,920
कर रहे हो। तो अगर तुम्हें ग्रंथ पर भरोसा है तो

916
01:07:39,920 --> 01:07:43,920
तुम्हारा मेरे ऊपर भरोसा ना होना सिद्ध नहीं होता। और अगर तुम्हारा मेरे ऊपर भरोसा

917
01:07:43,920 --> 01:07:47,920
है तो ग्रंथ पर मेरे ऊपर भरोसा नहीं है तो ग्रंथ पर भरोसा होना

918
01:07:47,920 --> 01:07:52,000
सिद्ध नहीं होता। तो पितरों को ना पूजने के संबंध में तुम्हें

919
01:07:52,000 --> 01:07:56,000
अलग प्रमाण देना होगा जो तुम्हें मुझसे प्राप्त नहीं हुआ हो।

920
01:07:56,000 --> 01:07:59,520
आई बात समझ में?

921
01:07:59,520 --> 01:08:03,520
जो आपके द्वारा जो ग्रंथ हमारे तक आया है वो तो परंपरा से चलते आ रहा

922
01:08:03,520 --> 01:08:07,840
है लेकिन आप आपने उस उस चीज की सच्चाई

923
01:08:07,840 --> 01:08:12,200
हमारे पास अभी तक नहीं रखे कि नहीं आप इस चीज को करोगे तो

924
01:08:12,200 --> 01:08:17,040
पिता झूठ बोल सकता हूं ना

925
01:08:17,040 --> 01:08:21,200
तो फिर हेलो मैं क्या

926
01:08:21,200 --> 01:08:25,200
पूछ रहा हूं हमारे हमारे हिंदू समाज में आप

927
01:08:25,200 --> 01:08:29,520
क्या दिए अबे सुन लो भाई भाई सुन लो

928
01:08:29,520 --> 01:08:33,520
जब बोल रहा है नहीं जब बोल रहा है कि हमसे ही मिलाया हुआ

929
01:08:33,520 --> 01:08:37,600
है तो हमारी बात सही मानोगे कि नहीं मानोगे नहीं वो केवल अपना वो सिंपैथी

930
01:08:37,600 --> 01:08:41,600
गेन करने आया है यहां पर वो ड्रामा बनाने उसके हिसाब

931
01:08:41,600 --> 01:08:45,840
से मतलब कि अगर मैं प्रिंट करके दे दूं तो वो मान लेगा है ना प्रिंट

932
01:08:45,840 --> 01:08:50,160
करके दे दूं बस मैं तो मान लेगा ये कोई बात थोड़ी ना होती है भाई तुम मतलब

933
01:08:50,160 --> 01:08:54,400
थोड़ा सा दिमाग तो लगाओ अपनी बुद्धि लगाओ अपना विवेक का इस्तेमाल किया करो यार ऐसे

934
01:08:54,400 --> 01:08:58,240
मतलब

935
01:08:58,240 --> 01:09:02,400
जब मैंने प्रमाण दे दिया जो कथा तुम देते हो

936
01:09:02,400 --> 01:09:06,480
रुचि मुनि की वेद आदि शास्त्रों से एक पूरी एक पूरा

937
01:09:06,480 --> 01:09:10,480
वो किया था हम लोगों ने कि पितरों को पूजने के बारे में ये देखो यहां

938
01:09:10,480 --> 01:09:14,720
कहा जा रहा है ये देखो यहां कहा जा रहा है ठीक है उसके बाद हम लोग वहां से भी प्रमाण

939
01:09:14,720 --> 01:09:18,960
दे चुके हैं जो इनकी जो जो

940
01:09:18,960 --> 01:09:22,960
ये लोग जो वो कथा वाचते हैं ना कि

941
01:09:22,960 --> 01:09:27,040
वो देखो रुचि मुनि थे कोई उनको जो है उनके पितर जो है बुला रहे थे गृहस्थ

942
01:09:27,040 --> 01:09:31,200
जीवन में दोबारा वो भी अपने आप में एक प्रमाण है। वो भी अपने

943
01:09:31,200 --> 01:09:35,360
आप में एक प्रमाण है। ठीक है? मैंने प्रमाण दे दिया। उपलब्ध करा

944
01:09:35,360 --> 01:09:39,360
दिया कि अब गरुड़ पुराण में लिखा है भाई गरुड़ पुराण में अगर लिखा है तो मार्कंडेय

945
01:09:39,360 --> 01:09:43,160
पुराण को मना थोड़ी ना कर दोगे।

946
01:09:43,160 --> 01:09:47,360
बिल्कुल और दूसरी बात भगवान ने भी तो गीता ने गीता में बोला

947
01:09:47,360 --> 01:09:51,680
है। परंपरा की जब बात हो रही होती तो भगवान बोलते तो है कि पिंड वगैरह की प्रक्रिया

948
01:09:51,680 --> 01:09:55,840
छूट जाएगी। दंग पोस्ट भाई साहब बताएं अब

949
01:09:55,840 --> 01:09:59,840
वो देखो वो क्या कर रहा है आपने हमारे साथ ऐसा किया है वैसा किया

950
01:09:59,840 --> 01:10:04,080
उसको कोई तर्क और प्रमाण की बात नहीं करनी है वो अपना यहां पर सिंपैथी

951
01:10:04,080 --> 01:10:08,240
लोगों को बताने आया क्योंकि उसकी फिल्म पिट रही है ना बाहर लोग छोड़ छोड़ के जा रहे हैं

952
01:10:08,240 --> 01:10:13,200
रामपाल को समझ रहे हैं तो वो यहां पर आए सिंपैथी गेन करने के लिए

953
01:10:13,200 --> 01:10:13,700
ये

954
01:10:13,600 --> 01:10:17,760
लोग एक बाल्टी ज्ञान भर लाते हैं और धीरेधीरे

955
01:10:17,760 --> 01:10:22,400
निकालना शुरू करते हैं और जब ज्ञान का अभाव हो जाता है

956
01:10:22,400 --> 01:10:27,120
तो कुत्त लग जाएगा। लिमिटेड ज्ञान

957
01:10:27,120 --> 01:10:33,120
हां भाई बताइए द इंक पोस्ट जी आप चेहरा दिखाएंगे या

958
01:10:34,440 --> 01:10:38,560
नहीं? तुम क्यों आए हो? टी टीएस एल आई जी

959
01:10:38,560 --> 01:10:42,600
आत्मा को नृत्य करने आए हो

960
01:10:42,600 --> 01:10:46,800
क्या? दंग पोस्ट आप चेहरा दिखाएंगे हटा

961
01:10:46,800 --> 01:10:51,200
दिया जाए आपको। सर क्या टॉपिक है आज?

962
01:10:51,200 --> 01:10:55,840
टॉपिक पर बात हो रही है। मैंने थंबनेल नहीं देखा है। टॉपिक यही है क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान

963
01:10:55,840 --> 01:11:01,400
है रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने

964
01:11:01,400 --> 01:11:05,920
वाला? रामपाल तत्वदर्शी है।

965
01:11:05,920 --> 01:11:10,240
यह टॉपिक है। आप चेहरा दिखाइए

966
01:11:10,240 --> 01:11:15,520
पहले तो फिर बात करेंगे आपसे।

967
01:11:15,520 --> 01:11:19,600
यह बाबू बाबूलाल और राम इसको बाबूराम को

968
01:11:19,600 --> 01:11:23,600
इसको अमित दास को लेना बंद करो। यह लोग कर चुके अपनी कई बार

969
01:11:23,600 --> 01:11:27,600
आ के ये सब निरुत्तर हो के जा चुके हैं। उसके बाद फिर कोई अलग

970
01:11:27,600 --> 01:11:31,680
नया पॉइंट लेकर के आते हैं। अरे जब तक एक पॉइंट खत्म नहीं हुआ तुम नया पॉइंट ला क्यों

971
01:11:31,680 --> 01:11:35,760
रहे हो? पहले तो यह बताओ। गाना तुम चिल्लाते हो कि हमारे

972
01:11:35,760 --> 01:11:41,760
गुरु तत्वदर्शी है। यह है वह है।

973
01:11:45,200 --> 01:11:49,360
तुम क्यों आए हो भाई बताओ बोलो मैं इसलिए

974
01:11:49,360 --> 01:11:53,520
आया हूं क्यों आप कह रहे हो कि डिबेट करनी है ठीक है इतना हमें इतना

975
01:11:53,520 --> 01:11:57,680
ज्ञान नहीं है ठीक है जितना आप संत ग्रंथ खोल के अपने पास रखे हैं अपने

976
01:11:57,680 --> 01:12:01,760
हिसाब से ठीक है उस हिसाब से हमारे पास उतना ज्ञान नहीं है हमारे

977
01:12:01,760 --> 01:12:05,760
पास कम ज्ञान है आपके सुने हम

978
01:12:05,760 --> 01:12:08,960
पहले

979
01:12:08,960 --> 01:12:13,040
रोने आ रोने आए हो रोने

980
01:12:13,040 --> 01:12:17,120
कैसे अरे क्या कर रहे हो ज्ञान नहीं है हमारे पास ज्ञान नहीं है क्लास

981
01:12:17,120 --> 01:12:21,280
में आया करो फिर पढ़ने के लिए सुनो तुम लोग हर बार धमकी सी देते हो

982
01:12:21,280 --> 01:12:27,120
क्या मतलब हुआ निकलो

983
01:12:27,120 --> 01:12:31,440
भाई संडे को ना संडे सैटरडे को ना क्लास होती है आ जाया करो वहां

984
01:12:31,440 --> 01:12:35,840
संडे को क्लास होती है पढ़ने आना उसमें हां

985
01:12:35,840 --> 01:12:41,840
घर का ज्ञान मिल जाएगा तुम्हें

986
01:12:44,080 --> 01:12:50,080
आत्मा नित्य है कि अनित्य है क्या हुआ पता चला

987
01:12:56,720 --> 01:13:00,800
सनातन इतिहास जी कबीर दास जी को हम भक्ति बोलते हैं बोलेंगे तो

988
01:13:00,800 --> 01:13:06,560
ज्यादा अच्छा रहेगा हम डिसरिस्पेक्ट नहीं करते हैं उनको

989
01:13:06,560 --> 01:13:10,560
ठीक है नहीं मगर वो स्वयं कहते थे ना मैं

990
01:13:10,560 --> 01:13:14,960
कबीर कुत्ता राम का उसको वो कह रहे हैं इंग्लिश में

991
01:13:14,960 --> 01:13:18,960
अच्छा अगर उस भाव से कह रहे हैं तो ठीक है नहीं तो फिर जनरल थोड़ा अच्छा नहीं

992
01:13:18,960 --> 01:13:24,960
लगता है ये हां उस भाव से ही कह रहे हैं वो

993
01:13:25,520 --> 01:13:31,520
मैं समझ गया समझ गया जी

994
01:13:38,880 --> 01:13:42,880
कोई आए भैया कुछ नया ऐसा ले आए जिसमें हमको सोचना

995
01:13:42,880 --> 01:13:47,200
पड़ जाए। आज अमित दास देखो उपनिषद ले आया। उपनिषदों के हम लोग प्रमाण

996
01:13:47,200 --> 01:13:51,440
कभी इनके सामने रखते नहीं थे। क्योंकि इन लोगों ने अपनी किताबों में उपनिषद

997
01:13:51,440 --> 01:13:55,520
नहीं लिख रखा है। अब वो उपनिषद लेके आया। उसमें भी उसको पता नहीं था। शंकराचार्य

998
01:13:55,520 --> 01:13:59,600
का भाष्य लेकर आया है। जा अपने गुरु से जाके करवा पहले उपनिषदों का भाष

999
01:13:59,600 --> 01:14:05,600
पता लगेगा। उसको यही नहीं पता था कि कौन सा उपनिषद लेना

1000
01:14:05,720 --> 01:14:09,760
है। उपनिषद ही नहीं बोल पा रहा था। तो फिर अब क्या बोले

1001
01:14:09,760 --> 01:14:14,080
फिर अब ऐसे नहीं होता यार यार बेेज्जती

1002
01:14:14,080 --> 01:14:19,240
होती

1003
01:14:19,240 --> 01:14:23,600
है आ रहा है। अबे सद्गुरु

1004
01:14:23,600 --> 01:14:27,600
लाइव क्या बोलते हैं अगर माता ने निष्ठा से दूध पिलाया है ना तो लाइव आ

1005
01:14:27,600 --> 01:14:33,600
जाओ। इतना पकड़ पकड़ कर रहे हो वहां चैट में

1006
01:14:38,480 --> 01:14:43,320
मेरी बहुत इच्छा थी जो मैंने बुक का पीडीएफ आपको

1007
01:14:43,320 --> 01:14:47,520
भेजा भैया वो फोन पे बात करिएगा आप वो वाली

1008
01:14:47,520 --> 01:14:51,680
बात पंडित जी को भी वो बुक का पीडीएफ शेयर

1009
01:14:51,680 --> 01:14:55,760
कर दीजिए क्या कह रहा है हमारे

1010
01:14:55,760 --> 01:14:59,840
गुरु जी का नाम सही से ले लो समझे तुम्हारे गुरु जी हमारे

1011
01:14:59,840 --> 01:15:04,000
पूजनीय भगवान का नाम सही से लेते हैं क्या? हां

1012
01:15:04,000 --> 01:15:08,080
ऐसे कर करके जो अज्ञानी बोलते हैं तू तड़ाक करते हैं तब

1013
01:15:08,080 --> 01:15:11,000
नहीं ध्यान

1014
01:15:11,000 --> 01:15:15,200
आता। तो जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो

1015
01:15:15,200 --> 01:15:21,200
वो आके रामपाल का पक्ष रखे नंबर ले लो। 7408301869

1016
01:15:30,400 --> 01:15:36,400
यह यह वही है क्या परमात्म तत्व ज्ञान वही है

1017
01:15:36,760 --> 01:15:40,840
क्या ये तुम अपने दुखड़े अपने रामपाल के पास जाके

1018
01:15:40,840 --> 01:15:45,040
रो बाबू राम ये अपने दुखड़े जो है

1019
01:15:45,040 --> 01:15:49,120
ये रामपाल के पास जाके रो जेल में जैसे वो रो रहा है जमानत की

1020
01:15:49,120 --> 01:15:53,120
भीख मांग रहा है उसके पास जाके रो ये दुखड़े अपने

1021
01:15:53,120 --> 01:15:57,200
के हम जो है वहां रोने गए थे शिवश के स्टेज पर हमको

1022
01:15:57,200 --> 01:16:00,240
निकाल दिया गया

1023
01:16:00,240 --> 01:16:04,480
यहां बकवास करने आए हो यहां बकवास सुनने के लिए बैठे ना तुम्हारी कि तुमने

1024
01:16:04,480 --> 01:16:09,040
सदैव ये किया ये किया ये सब सुनने बैठे हैं तुम्हारी उसको सुनते रहे

1025
01:16:09,040 --> 01:16:11,240
तुम्हारा

1026
01:16:11,240 --> 01:16:15,440
दुखड़ा तो हम अच्छे हो जाएंगे कौन

1027
01:16:15,440 --> 01:16:19,440
है भाई जिसकी माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वो आ जाए

1028
01:16:19,440 --> 01:16:23,600
ये भाई नंबर नीचे आ रहा है ये खामखा का दुकड़ा रोने ना आए

1029
01:16:23,600 --> 01:16:27,680
कट टू कट पॉइंट की बात कोई करनी हो तो वह आ जाए। रामपाल को

1030
01:16:27,680 --> 01:16:31,720
तत्वदर्शी सिद्ध

1031
01:16:31,720 --> 01:16:35,760
करो। रामपाल के द्वारा बताए जाने वाले ईश्वर को ईश्वर

1032
01:16:35,760 --> 01:16:39,840
सर्वशक्तिमान सिद्ध करो। गीता कहने

1033
01:16:39,840 --> 01:16:44,000
वाले को श्री कृष्ण से अलग कोई

1034
01:16:44,000 --> 01:16:48,080
नेगेटिव एंटिटी ईश्वर ना होकर सिद्ध करो।

1035
01:16:48,080 --> 01:16:54,080
तुम्हारी तो खाट खड़ी हो जाएगी। है कोई माई का लाल?

1036
01:16:55,840 --> 01:16:59,840
हो किसी माता जी ने ऐसा पूत जना हो तो

1037
01:16:59,840 --> 01:17:03,560
आ

1038
01:17:03,560 --> 01:17:07,600
जाए। अरे तुझसे कर तो लिए ज्ञान चर्चा

1039
01:17:07,600 --> 01:17:13,600
भाग गया था तू अर्जुन की बात पे। कितनी बार करूं?

1040
01:17:14,880 --> 01:17:19,000
मार्कंडेय पुराण से जो यह पित वाला मामला

1041
01:17:19,000 --> 01:17:23,200
है पित वाला मामला जैसे वरबली मुझे कोई प्रमाण

1042
01:17:23,200 --> 01:17:27,200
नहीं याद था मगर मगर मार्कंडेय पुराण इनहीं के कारण याद

1043
01:17:27,200 --> 01:17:32,000
है कि मार्कंडेय पुराण में कहा गया है कि तुम जो है

1044
01:17:32,000 --> 01:17:36,000
गृहस्थ हो जाओ श्राद्ध तर्पण करो हमारा और तुम गृहस्थ

1045
01:17:36,000 --> 01:17:40,000
होते हुए भी मुक्ति को प्राप्त हो जाओगे तो वहां पर रामपाल ने

1046
01:17:40,000 --> 01:17:44,160
इस बात का खंडन किया है और भगवत गीता के दूसरे अध्याय

1047
01:17:44,160 --> 01:17:49,040
में रामपाल खुद इस बात को मान रहा है कि गस्थ होते हुए भी व्यक्ति

1048
01:17:49,040 --> 01:17:55,040
विषयों में विचरता हुआ भी मुक्त हो सकता है। अब बताइए

1049
01:17:56,280 --> 01:18:02,080
तो दो प्रकार की बातें

1050
01:18:02,080 --> 01:18:08,000
जय श्री राम भैया जय श्री राम बताएं

1051
01:18:08,000 --> 01:18:13,280
भैया आपका जो तर्क करने का जो है ना वह बहुत अच्छा लगता है।

1052
01:18:13,280 --> 01:18:17,280
जी मैं आपसे मैं आपसे यह मतलब मदद चाहता हूं कि जैसे

1053
01:18:17,280 --> 01:18:21,280
अभी क्या है कि मैं यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं तो उसमें

1054
01:18:21,280 --> 01:18:25,280
क्या है कि तर्क का महत्व बहुत होता है तो आपके जो तर्क है मुझे बहुत अच्छे

1055
01:18:25,280 --> 01:18:30,400
लगे तो इसमें हम किस प्रकार से सीख सकते हैं

1056
01:18:30,400 --> 01:18:34,640
भाई मैं कैसे बताऊं मैं तो आप उस क्लास में आया करिए कोई समस्या

1057
01:18:34,640 --> 01:18:38,960
हो तो उसको उस पर जब हम लोग डिस्कस करेंगे तभी वो चीजें सामने

1058
01:18:38,960 --> 01:18:41,840
आएंगी

1059
01:18:41,840 --> 01:18:45,840
वैसे तो मेरा वो तर्क मेरे नहीं होते हैं। गुरुजनों से प्राप्त तर्क

1060
01:18:45,840 --> 01:18:50,160
है वो सब। कुछ समय में शिव जी एथिक्स में भी क्लास

1061
01:18:50,160 --> 01:18:54,320
लेने वाले हैं यूपीएससी एस्पिरेंट्स के लिए। धर्म

1062
01:18:54,320 --> 01:18:57,120
और एथिक्स

1063
01:18:57,120 --> 01:19:02,320
मैं कीर्ति कीर्ति को पकडूंगा कभी ना कभी। मिला समय तो

1064
01:19:02,320 --> 01:19:06,560
नहीं सच में सच में आपके तर्क बहुत जोरदार होते

1065
01:19:06,560 --> 01:19:09,040
हैं।

1066
01:19:09,040 --> 01:19:13,280
वो सोच के आया था आज अमित दास इसको इसी के उपनिषद से ही निकाल

1067
01:19:13,280 --> 01:19:15,920
के बताऊंगा।

1068
01:19:15,920 --> 01:19:18,280
वही

1069
01:19:18,280 --> 01:19:22,320
तो उसको मैंने बताया कि भाई तुम अगर यह

1070
01:19:22,320 --> 01:19:26,480
कह रहे हो कि परमात्मा प्रकृति के बिना अगर कर सकता है तो पहले तुम परमात्मा को सिद्ध

1071
01:19:26,480 --> 01:19:30,720
तो करो कि परमात्मा को मैं समझू क्या मुझे सिद्ध

1072
01:19:30,720 --> 01:19:34,960
करवाओ परमात्मा तो जब तक तुम सिद्ध करवाओगे तो तुम मेरे ही रास्ते

1073
01:19:34,960 --> 01:19:39,120
से होके वहां तक पहुंचोगे वरना पहुंच नहीं पाओगे जो भी व्यक्ति यह बात आज ध्यान

1074
01:19:39,120 --> 01:19:43,120
कर लीजिए जो आहान के फॉलोअ है जो शंकर परंपरा के

1075
01:19:43,120 --> 01:19:47,360
फॉलोअ है वो इस बात को ध्यान रखिए कि जब भी कभी कोई आपके ईश्वर

1076
01:19:47,360 --> 01:19:51,840
का खंडन पारमार्थिक दृष्टि से करने के आधार पर करे

1077
01:19:51,840 --> 01:19:55,920
समझ रहे हैं क्या परमार्थ में ईश्वर जो है अपने एक

1078
01:19:55,920 --> 01:19:56,880
और ईश्वर बना

1079
01:19:56,880 --> 01:20:01,360
सकता है क्या यहां से वेदों वेदों पर चलने वाली जीवात्मा

1080
01:20:01,360 --> 01:20:05,360
को वो के साथ वो वहां परमार्थिक दुनिया में अन्याय कर सकता

1081
01:20:05,360 --> 01:20:09,360
है हम इस तरह के क्वेश्चन अगर करें

1082
01:20:09,360 --> 01:20:13,680
तो एक बात सदैव याद रखना कि पारमार्थिक दुनिया में ईश्वर

1083
01:20:13,680 --> 01:20:17,000
पहले ये सिद्ध तो

1084
01:20:17,000 --> 01:20:21,200
करो। ये क्वेश्चन बनता है। जब वो सिद्ध करेंगे तो उन्हें

1085
01:20:21,200 --> 01:20:25,360
आपके ईश्वर से होकर गुजरना होगा। व्यवहार के

1086
01:20:25,360 --> 01:20:29,440
में सब कुछ कर लेने वाले ईश्वर से होकर गुजरना होगा। आपके ईश्वर को

1087
01:20:29,440 --> 01:20:33,600
ईश्वर मानना पड़ेगा तब वो पारमार्थिक दुनिया के ईश्वर तक पहुंच

1088
01:20:33,600 --> 01:20:37,600
पाएंगे। ठीक है? और आप अगर सीधे कह दो कि भाई

1089
01:20:37,600 --> 01:20:41,640
वो नहीं कर सकता है मगर व्यवहार में सब कुछ तो देखो हो गया

1090
01:20:41,640 --> 01:20:45,760
ना कर सकता है हो गया ना वो ये करेंगे तो इसलिए

1091
01:20:45,760 --> 01:20:50,160
आपको पहले उनको मनवाना होगा पहले तू मान मेरे ईश्वर को

1092
01:20:50,160 --> 01:20:54,320
वरना तू परमार्थ की बात ही मत कर परमार्थ में ईश्वर

1093
01:20:54,320 --> 01:20:58,320
है ये कैसे पता प्रकृति से इत भी ईश्वर

1094
01:20:58,320 --> 01:21:02,720
है ये कैसे पता तब पता है जब भगवान ने कृष्ण

1095
01:21:02,720 --> 01:21:06,800
रूप में आकर के ऐसे ऐसे कार्य करके दिखाए राम रूप में आकर के

1096
01:21:06,800 --> 01:21:10,800
वानर रूप में आ के नरसिंह रूप में आ के ऐसे ऐसे कार्य

1097
01:21:10,800 --> 01:21:12,000
करके दिखाए जो किसी के

1098
01:21:12,000 --> 01:21:16,080
बस की बात नहीं थी। तब आपको पता चला उनके

1099
01:21:16,080 --> 01:21:20,080
द्वारा आपको पता चला कि हां भगवान का कोई रूप ऐसा है। परमार्थ

1100
01:21:20,080 --> 01:21:24,160
में भी ईश्वर का अस्तित्व है। इस देखी जाने वाली इस व्यवहार

1101
01:21:24,160 --> 01:21:28,160
में आ सकने वाले संसार से इधर भी पारमार्थिक

1102
01:21:28,160 --> 01:21:32,560
संसार है। उसमें ईश्वर का स्वरूप ऐसा है। तो आपने पहले माना

1103
01:21:32,560 --> 01:21:37,760
कि ईश्वर ईश्वर है। कौन सा? सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म।

1104
01:21:37,760 --> 01:21:42,440
ठीक है? इस बात को आप सब लोग याद रखें। परमार्थ में

1105
01:21:42,440 --> 01:21:46,560
परमार्थिक आधार पर आपके ईश्वर का खंडन कोई नहीं

1106
01:21:46,560 --> 01:21:50,800
कर सकता। क्योंकि परमार्थ तक कोई पहुंच ही नहीं सकता है बिना आपके ईश्वर

1107
01:21:50,800 --> 01:21:54,960
के। तो यदि उसने परमार्थ के आधार पर आपके ईश्वर का हाथ छोड़

1108
01:21:54,960 --> 01:21:59,360
दिया तो फिर से वो परमार्थ से वंचित हो गया।

1109
01:21:59,360 --> 01:22:03,600
और अगर हाथ पकड़ा है तो परमार्थ के आधार पर वो

1110
01:22:03,600 --> 01:22:08,400
आपके ईश्वर का खंडन नहीं कर सकता। जी

1111
01:22:08,400 --> 01:22:12,480
भैया भैया सनातन की परिभाषा में यह लागू होता है क्या कि वो

1112
01:22:12,480 --> 01:22:16,640
पहले भी था बाद में भी रहेगा या सनातन की परिभाषा ये है कि जो देश

1113
01:22:16,640 --> 01:22:20,800
काल परिस्थिति में ना बदले क्योंकि जो ये गीता अध्याय 18 श्लोक 62

1114
01:22:20,800 --> 01:22:25,120
का जो उदाहरण देते हैं जो हम लोग बोलते हैं वो

1115
01:22:25,120 --> 01:22:27,120
थोड़ा सरल सरलार्थिक बोलते

1116
01:22:27,120 --> 01:22:31,200
हैं जो पहले भी था और आज भी है वो बाद में भी रहेगा उसका

1117
01:22:31,200 --> 01:22:35,760
मतलब यही है ना कि वो कभी भी बदलने वाला नहीं है भाई

1118
01:22:35,760 --> 01:22:39,840
अब जैसे हम कहे जो किसी देश काल परिस्थिति में नहीं बदलता। अब जैसे हम कहे

1119
01:22:39,840 --> 01:22:43,840
कि वह पहले नहीं था अब है बदला। जबकि वो तो

1120
01:22:43,840 --> 01:22:47,960
नहीं बदलता तो सनातन के ये दोनों रूपांतरित

1121
01:22:47,960 --> 01:22:52,480
मतलब समानांतर थे।

1122
01:22:52,480 --> 01:22:56,800
तो भैया मैं वही सोच रहा था तो इसका इस हिसाब से तो इनका वो सतलोक

1123
01:22:56,800 --> 01:23:00,960
भी तो सनातन परमधाम कैसे हुआ? तो ये बोलते हैं कि

1124
01:23:00,960 --> 01:23:05,040
नहीं है ना नहीं है वो इसने अपने

1125
01:23:05,040 --> 01:23:09,200
गीता में अध्याय में बोला है सनातन से आगे एक और अनामय

1126
01:23:09,200 --> 01:23:13,360
लोक है अलख लोक है वहां जाना है पहाड़ी

1127
01:23:13,360 --> 01:23:17,920
जी जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव सभी लोगों को

1128
01:23:17,920 --> 01:23:22,560
हर हर महादेव

1129
01:23:22,560 --> 01:23:27,040
जय श्री राम ये लोग चर्चा के लायक के नहीं है अमित और

1130
01:23:27,040 --> 01:23:31,760
क्या है बाबू और एक और ये टी एस कुछ नाम करके है ये।

1131
01:23:31,760 --> 01:23:35,840
ये चर्चा के लायक के वो तो रोने आया

1132
01:23:35,840 --> 01:23:39,920
था। हां ये चर्चा के लायक के

1133
01:23:39,920 --> 01:23:44,240
नहीं क्योंकि देखा होगा कि जब भी आते हैं ये दो चीजें लेके आते हैं।

1134
01:23:44,240 --> 01:23:48,480
उसके बाद ये फुल हो जाते हैं। तो अभी एक न्यूज़

1135
01:23:48,480 --> 01:23:52,480
एक दो दिन पहले की देख रहा था कि 50 60 लोग अभी मैंने आपको भी भेजा

1136
01:23:52,480 --> 01:23:56,560
था। गांव में गए थे प्रचार करने तो गांव वालों ने इनको वहां से भगाया

1137
01:23:56,560 --> 01:24:00,800
है। बहुत बढ़िया। हां। तो अब ये व्यापक

1138
01:24:00,800 --> 01:24:05,120
रूप से मतलब कि हर एक जगह अब वो होने लगा इनका विरोध।

1139
01:24:05,120 --> 01:24:09,360
पहले लोगों को पता नहीं था। बिल्कुल बिल्कुल।

1140
01:24:09,360 --> 01:24:14,000
हां। चलिए तो अच्छे परिणाम प्राप्त हो ही रहे हैं।

1141
01:24:14,000 --> 01:24:18,080
जी जी जी बिल्कुल बहुत अच्छी 15 20 परिवार

1142
01:24:18,080 --> 01:24:22,160
निकलना की बात उस दिन कल की लाइव में जुड़ नहीं पाए

1143
01:24:22,160 --> 01:24:26,160
थे वो सारे लोग तीन चार ही लोग जो जुड़े थे उनके परिवार

1144
01:24:26,160 --> 01:24:30,160
के जो निकले हैं अभी और लोग भी जुड़ना चाह रहे थे तो अगली

1145
01:24:30,160 --> 01:24:34,320
लाइव जब आप रखोगे तो उनसे संपर्क करके एक बार उनसे

1146
01:24:34,320 --> 01:24:37,840
भी बात करनी है। यह व्यक्ति भंगू

1147
01:24:37,840 --> 01:24:41,920
राम अभी कह रहा है कमेंट में कि जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध

1148
01:24:41,920 --> 01:24:46,000
पिलाया हो मुझसे चर्चा करें और जब ऊपर आता है तो कहता है कि तुमने हमारे

1149
01:24:46,000 --> 01:24:50,640
समाज को यह दिया है वो दिया तब वो प्रमाण तर्क भूल जाता है

1150
01:24:50,640 --> 01:24:54,280
तब बात करना भूल जाता

1151
01:24:54,280 --> 01:24:58,400
है अरे ये बहुत बड़े दोगले में मैं कैसे मैं बता रहा

1152
01:24:58,400 --> 01:25:02,560
हूं कि जब रामायण में राम जी और सीता

1153
01:25:02,560 --> 01:25:06,560
जी जब लिख रखा है साफ-साफ तो यह कहते हैं कि यह कह रहा

1154
01:25:06,560 --> 01:25:10,560
था उस दिन कि जो राम है ये ये भी काल है ये वाले राम

1155
01:25:10,560 --> 01:25:14,240
नहीं है ये दूसरे राम है

1156
01:25:14,240 --> 01:25:18,560
अब राम जय श्री राम राधेश जी हां

1157
01:25:18,560 --> 01:25:22,800
चरण स्प गुरु जी जय हो गई जय हो जय

1158
01:25:22,800 --> 01:25:26,800
हो जय हो आज आज शुरू में अमित दास की खोपड़ी के ऊपर से

1159
01:25:26,800 --> 01:25:30,360
निकल गई सारी [हंसी]

1160
01:25:30,360 --> 01:25:34,960
बातें उपनिषद उपनिषद को ले आया

1161
01:25:34,960 --> 01:25:37,680
मैंने कहा

1162
01:25:37,680 --> 01:25:43,680
बाबूराम बाबूराम बाबूराम तो रोने आया था

1163
01:25:43,680 --> 01:25:47,760
ये लोग अब रोने आते हैं इतने बेशर्म है साले इनका

1164
01:25:47,760 --> 01:25:51,760
कुछ हिसाब वो नहीं है समझो बोलो भाषा भाषा की मर्यादा

1165
01:25:51,760 --> 01:25:53,600
रख

1166
01:25:53,600 --> 01:25:57,760
भाषा की थोड़ी मर्यादा रखें भैया भैया जैसे आपने अभी

1167
01:25:57,760 --> 01:26:01,760
बताया था कि वो 62 में सनातन इनका लोग है ही नहीं

1168
01:26:01,760 --> 01:26:07,760
तो आप मतलब इनको लंबा उत्तर क्यों देते

1169
01:26:08,160 --> 01:26:12,560
जैसे आप आप तो डायरेक्ट भी उत्तर दे सकते हो किसी को भी ये

1170
01:26:12,560 --> 01:26:16,560
1862 वाला जैसे आप सनातन की परिभाषा के आधार पर इनको निरत्तर कर

1171
01:26:16,560 --> 01:26:22,000
दोगे तो भी आप इनको लंबा उत्तर क्यों देते हो

1172
01:26:22,000 --> 01:26:25,120
किस बारे में

1173
01:26:25,120 --> 01:26:29,200
जैसे वो आपसे पूछते 18 के नहीं नहीं

1174
01:26:29,200 --> 01:26:33,200
जैसे ये बोलते कि 18 के 62 में बोल रहे कि उस परमेश्वर की शरण में जा तो

1175
01:26:33,200 --> 01:26:37,520
फिर आप इनको बहुत लंबा उत्तर देते हो लेकिन आप तो जैसे आप सनातन

1176
01:26:37,520 --> 01:26:41,680
की परिभाषा के आधार पर भी इनको निरत्तर कर सकते हो तो भी आप मतलब लंबा

1177
01:26:41,680 --> 01:26:45,680
उत्तर क्यों देते हो कहने का मतलब ये है वो दर्शकों के लिए

1178
01:26:45,680 --> 01:26:49,840
होता है कि वो समझते भी चले क्योंकि वास्तविकता में इन लोगों से

1179
01:26:49,840 --> 01:26:53,920
चर्चा करना फहड़ लोगों से चर्चा करना है

1180
01:26:53,920 --> 01:26:58,320
बिल्कुल बैल बुद्धि तो इसलिए कम से कम थोड़ा सा सार्थक

1181
01:26:58,320 --> 01:27:02,400
बनाते हैं कि दर्शकों को समझ में आता रहे कि कुछ ना

1182
01:27:02,400 --> 01:27:06,480
कुछ उनको तत्व ज्ञान या कुछ भी जो भी थोड़ा बहुत गुरु कृपा से गुरुजनों

1183
01:27:06,480 --> 01:27:08,640
की कृपा से जो प्राप्त है वो थोड़ा बहुत

1184
01:27:08,640 --> 01:27:13,200
प्राप्त होता रहे। है ना? वो थोड़ा सा हम

1185
01:27:13,200 --> 01:27:17,200
यहां पे उसकी चर्चा करते रहे। अब जैसे अभी अभी यह जो बात

1186
01:27:17,200 --> 01:27:21,440
मैंने बताई है ना कि पारमार्थिक ईश्वर हालांकि रामपाल

1187
01:27:21,440 --> 01:27:25,600
वालों के लिए आवश्यक नहीं है। मगर जब नास्तिक आपसे तर्क करने आएगा

1188
01:27:25,600 --> 01:27:29,600
आर्य समाज आपसे तर्क करने आएगा इस वाला आपसे तर्क

1189
01:27:29,600 --> 01:27:33,600
करने आएगा तब आपको इस वाली जो ये जो अभी मैंने परमार्थ और व्यवहार

1190
01:27:33,600 --> 01:27:38,000
का अंतर बताते हुए एक व्याख्या दी है। उसकी आपको आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन इन फणों

1191
01:27:38,000 --> 01:27:42,000
के लिए आवश्यकता नहीं है। उनका लेवल थोड़ा इनसे ठीक है। तो उनके

1192
01:27:42,000 --> 01:27:46,720
लिए आपको आवश्यकता पड़ जाएगी जो अभी मैंने व्याख्या दी है जो

1193
01:27:46,720 --> 01:27:50,720
जी जी ये भाजी तो ये खुद एक प्रूफ है कि रामपाल के

1194
01:27:50,720 --> 01:27:56,040
जाल से निकले हैं आपकी वीडियो देख के। हां

1195
01:27:56,040 --> 01:28:00,160
भाई और ये हमारी ये है

1196
01:28:00,160 --> 01:28:04,640
जय श्री राम। इनके भी [संगीत]

1197
01:28:04,640 --> 01:28:08,720
चलता हूं। जय श्री राम। जय श्री राम जय श्री राम नारायण

1198
01:28:08,720 --> 01:28:13,080
नारायण

1199
01:28:13,080 --> 01:28:19,080
गणेश जी नमस्ते नमस्ते जय श्री

1200
01:28:19,240 --> 01:28:23,520
राम नहीं हरी नहीं वो हरी लिखा हुआ है लेकिन में हरी

1201
01:28:23,520 --> 01:28:28,400
है हरी अच्छा हरी है

1202
01:28:28,400 --> 01:28:34,400
डबल बार वाई लिखा है ना तो वो लगा ह हैरी

1203
01:28:36,880 --> 01:28:41,120
मैं भी आपका सपोर्ट देखता रहता हूं। पहाड़ी जी से तो बात होती रहती है मेरी। अच्छा

1204
01:28:41,120 --> 01:28:46,640
अच्छा

1205
01:28:46,640 --> 01:28:51,920
अच्छा अच्छा

1206
01:28:51,920 --> 01:28:55,920
इनके बाल फसे हैं इस जगह।

1207
01:28:55,920 --> 01:29:00,080
अच्छा। अरे भाई कोई नहीं है क्या ये चंगू

1208
01:29:00,080 --> 01:29:04,720
मंगू के अलावा जो अभी रोने आए थे। इनसे

1209
01:29:04,720 --> 01:29:08,800
सर कोई हो तो बताओ भाई अभी मेरी एनर्जी ज्यादा निकल वो

1210
01:29:08,800 --> 01:29:12,800
नहीं हुई यूज़ नहीं हुई है बाकी है अभी तो

1211
01:29:12,800 --> 01:29:18,800
कोई हो तो आ जाओ अभी अभी सर फट नहीं रहा है

1212
01:29:21,520 --> 01:29:25,600
अच्छा मुझे लगा था कि ये आज कुछ ऐसा लाएगा हालांकि इसने टॉपिक

1213
01:29:25,600 --> 01:29:29,760
अच्छा लेके आया मगर वो टॉपिक जो है समझने वाला

1214
01:29:29,760 --> 01:29:34,400
व्यक्ति वो है नहीं वो सारी बातें सुन सुनने के बाद बोला भैया

1215
01:29:34,400 --> 01:29:39,040
मैंने तो ये प्रश्न किया इसका उत्तर कहां मिला मुझे?

1216
01:29:39,040 --> 01:29:43,600
हम अच्छा जिनों लोगों ने सुना

1217
01:29:43,600 --> 01:29:48,400
उन लोगों को समझ में आया कि नहीं मेरा उत्तर अमित दास का जो प्रश्न था

1218
01:29:48,400 --> 01:29:53,120
बिल्कुल आया आपने एक्चुअली क्या विद कॉन्टेक्स्ट समझा दिया ना

1219
01:29:53,120 --> 01:29:57,200
हां और मतलब उस वो ऐसा उत्तर था कि उसके बाद

1220
01:29:57,200 --> 01:30:01,600
वाला जो कोई प्रश्न उसके बाद भी प्रश्न होता उसका भी उत्तर आप पहले ही दे चुके थे

1221
01:30:01,600 --> 01:30:05,680
फिर भी उसने वो प्रश्न किया फिर भी उसने प्रश्न किया फिर भी

1222
01:30:05,680 --> 01:30:07,040
वही प्रश्न किया जो शुरू

1223
01:30:07,040 --> 01:30:11,280
में किया था नया नहीं किया प्रश्न उसने वही शुरू पहले ही कर दिया।

1224
01:30:11,280 --> 01:30:15,960
करपात्री जी का परम भक्त ऐसे ही थोड़ी ना बोल देते हैं लेटर पैड पे।

1225
01:30:15,960 --> 01:30:20,000
और मैं मैं जिस समय वो उत्तर दे रहा था तो मैं उसको देख

1226
01:30:20,000 --> 01:30:24,160
रहा था। वो ऐसे कर रहा था। हां हां हां हां

1227
01:30:24,160 --> 01:30:28,160
मुझे वो पहली लाइन याद रखनी है। ये सब कुछ समाप्त होने के बाद मुझे

1228
01:30:28,160 --> 01:30:34,160
क्या बोलना है?

1229
01:30:34,400 --> 01:30:38,400
एक बात तो है एक बात तो है कि घूम फिर फेर के हमारे

1230
01:30:38,400 --> 01:30:42,560
शंकराचार्य जी के ही शरण में इनको आना पड़ता है। आएंगे ही बिना

1231
01:30:42,560 --> 01:30:46,800
शंकर की शरण में आए काम नहीं चलता है ना। अब

1232
01:30:46,800 --> 01:30:50,800
आज देखो ये ले आया ये शंकर भाष्य अब उपनिषदों

1233
01:30:50,800 --> 01:30:55,040
में तो भाष किया नहीं है। अच्छा अब इसकी जो तात्विक विवेचना

1234
01:30:55,040 --> 01:30:59,040
है जो इसकी है जो इसमें लिखा है वो मानना पड़ेगा। एस इट इज

1235
01:30:59,040 --> 01:31:03,200
शंकराचार्य को मानना पड़ेगा। शंकराचार्य तो इतनी बातें कह रहे हैं। पहली

1236
01:31:03,200 --> 01:31:07,680
बात तो इनके समझ में ही आ जाए वो बहुत है। और फिर ये

1237
01:31:07,680 --> 01:31:11,880
एक छोटी सी बुक

1238
01:31:11,880 --> 01:31:16,080
है। ये शंकराचार्य की बुक

1239
01:31:16,080 --> 01:31:20,080
है। बहुत छोटी सी है। आप लोग मंगाइएगा। गीता प्रश्न

1240
01:31:20,080 --> 01:31:24,400
इसमें इसका नाम है प्रश्नोत्तरी।

1241
01:31:24,400 --> 01:31:28,640
प्रश्नोत्तरी। हां। तो इसमें एक जगह कहा

1242
01:31:28,640 --> 01:31:32,960
है प्रश्न पूछ रहा है शिष्य कि

1243
01:31:32,960 --> 01:31:37,120
क्या करना चाहिए जो मुक्त हो जाए क्या करना चाहिए जो मुक्त

1244
01:31:37,120 --> 01:31:42,840
हो जाए तो तो शंकराचार्य जी कहते हैं शिव और विष्णु की

1245
01:31:42,840 --> 01:31:46,880
भक्ति और विष्णु की एक्चुअली क्या है कि इसका इसका कॉन्टेक्स्ट बता देता

1246
01:31:46,880 --> 01:31:51,120
हूं भगवत आदि गुरु शंकराचार्य ने मतलब ये लेगसी बहुत सारी लेगसी

1247
01:31:51,120 --> 01:31:55,120
उन्होंने एक्चुअली स्टार्ट की थी जैसे प्रस्थान पर भाष्य करना महाभारत

1248
01:31:55,120 --> 01:31:59,200
से गीता को निकालने वाले पहले भी पहले वही थे मतलब उन्होंने ही एसएस दिया था भगवत

1249
01:31:59,200 --> 01:32:03,200
गीता का सबसे शंकराचार्य जी ने ही भगवत गीता पर प्रथम

1250
01:32:03,200 --> 01:32:07,680
मतलब उसको एक अलग से निकाल के ग्रंथ के रूप में उस पर भाष्य किया

1251
01:32:07,680 --> 01:32:11,680
नहीं पहले से पूरी की पूरी महाभारत थी उससे गीता निकाली पहली

1252
01:32:11,680 --> 01:32:15,760
बार भगवान आदि शंकर भगवान शंकराचार्य जी ने ठीक

1253
01:32:15,760 --> 01:32:19,840
है तो उनके बोल उनके जब वो कुछ भी ग्रंथ लिखते हैं ना तो उनका एक

1254
01:32:19,840 --> 01:32:23,840
स्टाइल होता है लिखने का और वो ऐसा होता है कि वो प्रश्न करते हैं और फिर

1255
01:32:23,840 --> 01:32:26,960
उसका उत्तर देते हैं वो वो प्रश्न प्रश्न जिज्ञासु के प्रश्न होते

1256
01:32:26,960 --> 01:32:31,040
हैं। तो जैसे कि कुछ भी बात हो रही है जैसे आप तत्वबोध ले लीजिए, आत्मबोध पढ़ लीजिए

1257
01:32:31,040 --> 01:32:35,120
हर में ही वह प्रश्न करेंगे और उसके बाद उसका काउंटर क्वेश्चन करते हैं कि

1258
01:32:35,120 --> 01:32:39,280
इसका अर्थ क्या है और फिर उसका उत्तर देते हैं। फिर उसका काउंटर क्वेश्चन करते हैं फिर उसका उत्तर स्वयं देते हैं।

1259
01:32:39,280 --> 01:32:43,440
तो ये उनका तरीका है जो आपकी आपको प्रश्न में भी मिलेगा।

1260
01:32:43,440 --> 01:32:49,440
तो मतलब ऐसा

1261
01:32:50,360 --> 01:32:54,480
है चलो खैर देर आए दुरुस्त आए आज शंकराचार्य तक

1262
01:32:54,480 --> 01:32:58,560
पहुंच तो गए कम से कम

1263
01:32:58,560 --> 01:33:03,680
आपके चरणों में पहुंचने में देर नहीं लगेगी आप ही ने कहा था

1264
01:33:03,680 --> 01:33:08,800
नहीं नहीं मेरे चरणों में नहीं आना भाई

1265
01:33:08,800 --> 01:33:12,960
आ रहा है नहीं आपकी वीडियो देखेंगे ना आपने ही तो ऐसा कहा बोलेंगे

1266
01:33:12,960 --> 01:33:18,480
ना जैसे कभी-कभी हमारे शंकराचार्य जी के कुछ बयान ले आ जाते हैं ये लोग

1267
01:33:18,480 --> 01:33:22,880
ऐसे ही आपके बयान भी ले ले आएंगे किसी दिन तो आपके चरणों का आलंबन

1268
01:33:22,880 --> 01:33:27,440
लेते बोलेंगे देखो शिवशी जी ऐसा बोल रहे हैं नहीं नहीं

1269
01:33:27,440 --> 01:33:31,520
एक्चुअली क्या है वो सीखते भी बहुत हैं मतलब सीख थोड़ा बहुत ही सीखते हैं लेकिन सीखते भी वो

1270
01:33:31,520 --> 01:33:35,600
काफी है एक बात मैं आपको बता दूं एक बात बताऊं मैं आपको आज की

1271
01:33:35,600 --> 01:33:39,680
तारीख में अमित दास का लेवल रामपाल से ज्यादा अच्छा है

1272
01:33:39,680 --> 01:33:43,680
हां सही आईक्यू लेवल आज की डेट मैंने देखा

1273
01:33:43,680 --> 01:33:47,680
मैंने देखा उसको और शब्दों का चयन देखिए

1274
01:33:47,680 --> 01:33:50,480
रामपाल नहीं गया

1275
01:33:50,480 --> 01:33:54,480
शब्दों का चयन देखिए कि शिवा जी को कह रहे हैं

1276
01:33:54,480 --> 01:33:59,440
कि आपके द्वारा जो ईश्वर प्रतिपादित हो रहा है

1277
01:33:59,440 --> 01:34:03,440
तो मैं समझ गया मैंने कहा वाह वाह सीख रहे हो कम से कम चलो कुछ तो सीख रहे हो बढ़िया है

1278
01:34:03,440 --> 01:34:07,520
सीखो सीखो ये तो एक अच्छी बात है ना मेरे कारण कम से कम इतना तो

1279
01:34:07,520 --> 01:34:11,840
आ रहा है भगवत कृपा से इतना तो हो रहा है इन लोगों की हिंदी का स्तर

1280
01:34:11,840 --> 01:34:16,520
बढ़ रहा है थोड़ा थोड़ा ये

1281
01:34:16,520 --> 01:34:20,640
तो नहीं रामपाल ने तो वही फता बताई थी होठ

1282
01:34:20,640 --> 01:34:24,320
हिला हिला के ऐसे कर कर

1283
01:34:24,320 --> 01:34:26,840
[हंसी]

1284
01:34:26,840 --> 01:34:31,200
के जो जो भी आप बता रहे हैं चाहे वो नेगेटिव

1285
01:34:31,200 --> 01:34:35,280
रूप में ले सीख रहे हैं चाहे पॉजिटिव रूप में सीख रहे हैं पर सीख रहे जरूर है

1286
01:34:35,280 --> 01:34:39,360
जो जमा हो रहा है उनके अंदर चाहे नेगेटिव रूप में ले रहे हैं उसको पर

1287
01:34:39,360 --> 01:34:43,840
सीख रहे हैं इतना जरूर है नहीं मगर आज अमित दास ने वेदांत

1288
01:34:43,840 --> 01:34:48,640
कहते हैं उपनिषद को उपनिषद को हाथ में लिया कम से कम उपनिषद से रिलेटेड

1289
01:34:48,640 --> 01:34:52,640
बात की हालांकि उसकी अधिकार की सीमा के बाहर है वो फिर भी

1290
01:34:52,640 --> 01:34:57,440
उसने उपनिषद विषयक प्रश्न किया तो ये

1291
01:34:57,440 --> 01:35:01,920
आज की डेट में अमित दास का आईक्यू लेवल

1292
01:35:01,920 --> 01:35:06,360
बौद्धिक क्षमता रामपाल से आगे रामपाल का इतना नहीं

1293
01:35:06,360 --> 01:35:10,400
है अभी तो रामपाल कोई मिलेगा तो कोई गलिया अगर

1294
01:35:10,400 --> 01:35:14,400
हमारा कोई वो मतलब फॉलो करता होगा चैनल तो कोई गली

1295
01:35:14,400 --> 01:35:18,400
का बच्चा भी ना बच में इस तरह से उसको

1296
01:35:18,400 --> 01:35:22,400
कर देगा किनारे देखना रात को नींद नहीं आएगी बोलेगा

1297
01:35:22,400 --> 01:35:26,640
कि अगला अवतार मैं ही हऊंगा अब एक अवतार

1298
01:35:26,640 --> 01:35:31,040
तो हो गया संजय दास के रूप में रामपाल का

1299
01:35:31,040 --> 01:35:35,120
अभी रामपाल जी पहाड़ी जी रामपाल तो अभी

1300
01:35:35,120 --> 01:35:39,120
20 जून से पहले टपक जाएगा ऐसा बोल के गया एक बंदा

1301
01:35:39,120 --> 01:35:39,620
हां

1302
01:35:39,360 --> 01:35:43,920
एक मिनट कह तो रहा था कि रामपाल की रामपाल जाने वाला है।

1303
01:35:43,920 --> 01:35:47,920
20 जून से पहले और 25 जून को शिवश जी से बात करेगा। ऐसा बोल के गया

1304
01:35:47,920 --> 01:35:52,000
है। 20 जून की डेट है। ये 20 जून की डेट है। आज से छ

1305
01:35:52,000 --> 01:35:56,080
महीने पहले सात महीने पहले लिख रखी है। गुरुकुल गोविंद जी ने लिख रखी है। ये

1306
01:35:56,080 --> 01:36:00,320
वहां भी आया था। वहां भी बोला था। हां वहां भी बोला था। वहां भी बोला था। मैं

1307
01:36:00,320 --> 01:36:04,880
वहां भी बोला था। वहां भी बोला था। बोला से पहले

1308
01:36:04,880 --> 01:36:09,840
खड़ा कर लिया है। पहले ही वो देखो आप लोग ये सोचे

1309
01:36:09,840 --> 01:36:13,920
इन लोगों ने अपना एंपायर पहले ही खड़ा कर लिया है। इनके पास सारे इंतजाम है।

1310
01:36:13,920 --> 01:36:17,920
रामपाल जिस दिन मरेगा उस दिन यह लोग क्या-क्या करेंगे?

1311
01:36:17,920 --> 01:36:22,480
ये सारे इंतजाम इन लोगों ने कर रखे हैं। इनके ये जो गैंग है जो चल रहा है।

1312
01:36:22,480 --> 01:36:26,480
और रामपाल के कोई लड़का है उसको भगवान के अवतार के रूप में वो

1313
01:36:26,480 --> 01:36:30,000
खड़ा कर रहे हैं।

1314
01:36:30,000 --> 01:36:34,800
धीरेंद्र नाम है उसका। धीरेंद्र धीरेंद्र नाम है उसका। हां। हां।

1315
01:36:34,800 --> 01:36:38,800
एक एक चीज अच्छी होगी जाने के बाद कि कम से कम हमें कोई बाहर मिल

1316
01:36:38,800 --> 01:36:42,960
जाएगा जिसको हम पकड़ सके। अभी वो क्या है कि जेल

1317
01:36:42,960 --> 01:36:47,120
में सुरक्षित है। अभी ये लोग कहते रहते हैं कि रामपाल से ज्ञान चर्चा करो।

1318
01:36:47,120 --> 01:36:51,120
रामपाल से ज्ञान चर्चा कैसे करें भाई? वहां जेल में जाए क्या उससे ज्ञान

1319
01:36:51,120 --> 01:36:55,520
चर्चा करने? उसको छुड़ा के लाओ बाहर। तब तो ज्ञान एक

1320
01:36:55,520 --> 01:37:01,520
दो मर्डर करना पड़ेगा। तब उससे बात हो पाएगी।

1321
01:37:01,520 --> 01:37:05,680
रामपाल का तंत्र भी तो तीन भागों में बांट बांट चुका है। एक

1322
01:37:05,680 --> 01:37:09,840
बन गया है ये पवन दास का एक बन गया संजय दास का और एक

1323
01:37:09,840 --> 01:37:14,400
जो ये बाबूराम का ये इनका जो गुट है ये तीन गुट बन गए

1324
01:37:14,400 --> 01:37:18,720
संजय

1325
01:37:18,720 --> 01:37:23,600
ये पवन दास तो बहुत ऊंचा है। बहुत ऊंचा है पवन दास।

1326
01:37:23,600 --> 01:37:27,760
पवन दास का वीडियो देखो ना तो पहले कितने तो वो करता है महाराजाओं

1327
01:37:27,760 --> 01:37:31,840
के महाराजा देवताओं के देवता क्या बोलता है रामपाल जी

1328
01:37:31,840 --> 01:37:35,840
के लिए अनाथों के नाथ देवताओं के महाराज क्या क्या

1329
01:37:35,840 --> 01:37:40,160
बोल देता है उसके बाद में फिर वीडियो शुरू होती है उसकी हां

1330
01:37:40,160 --> 01:37:44,240
कितना बोलता है कितना बोलता है पूरी रैप करता है वही वो

1331
01:37:44,240 --> 01:37:48,720
बंदा अच्छा पहाड़ी जी जी पहाड़ी जी

1332
01:37:48,720 --> 01:37:52,720
कल आपके उस लाइव में वो आया था लोकेश दास

1333
01:37:52,720 --> 01:37:56,800
हां हां हां हां लोकेश दास जो आया था उसकी

1334
01:37:56,800 --> 01:38:00,800
चर्चा मेरे को काफी बहुत अच्छी लगी। नहीं नहीं वो बात करने का

1335
01:38:00,800 --> 01:38:05,200
तरीका सही है। सही है उसका बहुत सही गए। ये आते हैं ना

1336
01:38:05,200 --> 01:38:09,200
बाबूराम अमित दास इनसे वो बहुत अच्छा है। बहुत अच्छी तरीके से

1337
01:38:09,200 --> 01:38:13,200
उसने बातचीत करी और एंड में उसने अपना हाथ जोड़ के माफी भी मांगी

1338
01:38:13,200 --> 01:38:17,200
कि देखो भाई हमारे ऊपर वीडियो मत बना देना। हां बोल

1339
01:38:17,200 --> 01:38:21,880
के भी गया।

1340
01:38:21,880 --> 01:38:26,240
हां अरे एक मैंने ऐसा है वो

1341
01:38:26,240 --> 01:38:30,400
पहाड़ी जी वो भी अब असमंजस में है अब निकलने

1342
01:38:30,400 --> 01:38:35,680
वाला है उनके तंत्र से इसके लिए वो ऐसी चर्चा कर रहा था

1343
01:38:35,680 --> 01:38:40,840
उनके तंत्र से अब निकलने निकल निकलने वाला है

1344
01:38:40,840 --> 01:38:44,880
वो हम YouTube पे लाइव में अरे भाई

1345
01:38:44,880 --> 01:38:50,720
कोई आना चाहता है तो आ जाए

1346
01:38:50,720 --> 01:38:55,120
जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वो आ जाए। रामपाल

1347
01:38:55,120 --> 01:38:59,280
को तत्वदर्शी कबीर को सर्वशक्ति

1348
01:38:59,280 --> 01:39:03,680
शिवश जी शिवश जी शिवश जी

1349
01:39:03,680 --> 01:39:07,760
इन्होंने एक वीडियो बनाई है। आज देखा है YouTube पे मैंने सुनता तो नहीं

1350
01:39:07,760 --> 01:39:11,840
है। इनकी वीडियो मैं कभी सुनता नहीं क्योंकि खाली हेडिंग पढ़ता हूं। आपके ऊपर बनाई

1351
01:39:11,840 --> 01:39:16,480
है आपके ऊपर। शिवश जी। अच्छा

1352
01:39:16,480 --> 01:39:20,880
ऐसा हेडिंग है उसमें। शिवश जी

1353
01:39:20,880 --> 01:39:25,200
मैं इनकी वीडियो सुनता नहीं हूं क्योंकि मेरे कान के पर्दे फट जाएंगे। खाली हेडिंग

1354
01:39:25,200 --> 01:39:28,320
पढ़ लेता हूं करके बस

1355
01:39:28,320 --> 01:39:32,400
गुरु जी ने गाली देना नहीं सिखाया बोला है। बड़वा शिवश

1356
01:39:32,400 --> 01:39:35,480
जी स्पष्ट लिखा

1357
01:39:35,480 --> 01:39:37,360
है। अब

1358
01:39:37,360 --> 01:39:41,440
अब उस वीडियो में उन्होंने हेलो हेलो अब उस वीडियो में उन्होंने क्या

1359
01:39:41,440 --> 01:39:45,440
बोला है वो तो मेरे को पता नहीं। मैंने देखी नहीं है। मैंने खाली हेडिंग पढ़ी है

1360
01:39:45,440 --> 01:39:49,040
बस।

1361
01:39:49,040 --> 01:39:53,280
तू नहीं खाएगा गुठली नहीं खाएंगे हम एक भी अरे स्ट्रीम

1362
01:39:53,280 --> 01:39:57,680
ऐड चर्चा हो रही है वहां पर शास्त्र जी गुठली आप नीचे

1363
01:39:57,680 --> 01:40:01,680
चले जाइए बैक स्टेज पे वहां खाइए गुदा गुठली सब खाइए

1364
01:40:01,680 --> 01:40:05,760
वहां पर

1365
01:40:05,760 --> 01:40:09,920
क्या हो गया क्या हुआ कुछ नहीं बैकग्राउंड

1366
01:40:09,920 --> 01:40:14,320
नॉइस आ रहा था वो उनका गुठली नहीं मना कर रहे थे गुठली नहीं खाएंगे

1367
01:40:14,320 --> 01:40:18,560
आम खा रहे है आम का सीजन चल रहा है तभी लगता

1368
01:40:18,560 --> 01:40:22,880
है ऐसा ही कौन खा रहा है गुठली

1369
01:40:22,880 --> 01:40:26,880
शास्त्र जय श्री राम भैया जय श्री राम

1370
01:40:26,880 --> 01:40:30,560
जय श्री राम

1371
01:40:30,560 --> 01:40:34,160
भैया जी प्रणाम जय श्री राम

1372
01:40:34,160 --> 01:40:38,920
हर्ष जी है ये जो

1373
01:40:38,920 --> 01:40:43,360
है इन्होंने शास्त्रवाल नाम से चैनल डाला है अपना

1374
01:40:43,360 --> 01:40:47,440
पहाड़ी जी ये भी आपकी सहायता करेंगे आने वाले समय मैंने

1375
01:40:47,440 --> 01:40:51,360
जी जी

1376
01:40:51,360 --> 01:40:55,680
भैया जी प्रणाम जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम

1377
01:40:55,680 --> 01:41:01,680
राम जय सिया राम मैंने आपको मेंशन Instagram पे आज

1378
01:41:01,680 --> 01:41:06,000
हां किस नाम से आईडी आपकी

1379
01:41:06,000 --> 01:41:12,000
बताना मत स्टेज पे ना वो अरबी भाषा

1380
01:41:13,040 --> 01:41:18,800
आप ऐसा करो वो चैट में लिख दो आप

1381
01:41:18,800 --> 01:41:22,800
अच्छा मैं जानता हूं इनको आर के एस जी को।

1382
01:41:22,800 --> 01:41:28,800
अच्छा अच्छा तो बाद में बता दीजिएगा कोई ऐसी बात हो तो।

1383
01:41:35,280 --> 01:41:40,080
आ रहा है। मुझे लगता नहीं कि अब कोई आएगा। भैया

1384
01:41:40,080 --> 01:41:44,720
भैया चलिए जी। हेलो

1385
01:41:44,720 --> 01:41:48,960
जी जी भैया आज था रामपाल जी के ऊपर ये जो मतलब रामपाल

1386
01:41:48,960 --> 01:41:53,040
का जो ये चल रहा था ये लाइव रामपाल जी के विषय

1387
01:41:53,040 --> 01:41:57,760
पर तो उसी में गीता जी के अनुसार जो हम लिखे थे ना कि

1388
01:41:57,760 --> 01:42:02,000
पूरा प्रमाण खोज के लाए हैं उसका कि श्रीमद भगवत गीता के अनुसार

1389
01:42:02,000 --> 01:42:06,560
ईश्वर कौन है जो कि इसमें खुद इसमें गीता

1390
01:42:06,560 --> 01:42:11,360
4.6 में भगवान कहते हैं कि हम ही हैं। अरे

1391
01:42:11,360 --> 01:42:15,880
सबसे अच्छे सबसे अच्छे जो प्रमाण है भगवान के संबंध

1392
01:42:15,880 --> 01:42:20,720
में वो आपको मिलेंगे सातव अध्याय में

1393
01:42:20,720 --> 01:42:24,960
सातव अध्याय में इस ये जो प्रॉपर जो

1394
01:42:24,960 --> 01:42:28,240
ये है क्या कहते हैं रामपाल जो इसने

1395
01:42:28,240 --> 01:42:32,480
जो वो किया है ना पुतर्क या जो भी किया पार गीता का उसको

1396
01:42:32,480 --> 01:42:36,600
काटने वाले बहुत से प्रमाण आपको सातव अध्याय में मिलेंगे

1397
01:42:36,600 --> 01:42:40,720
और नौवे अध्याय में आपको मोक्ष के संबंध में जो

1398
01:42:40,720 --> 01:42:44,800
यह मोक्ष का खंडन करता है ना रामपाल कि गीता बोलने वाले

1399
01:42:44,800 --> 01:42:48,880
की शरण में जाने से आपको शाश्वत शांति नहीं मिलेगी। वो नौवे अध्याय में

1400
01:42:48,880 --> 01:42:53,120
आपको मिल जाएगा कि जो गीता बोलने वाले यानी भगवान श्री कृष्ण हमारे अनुसार

1401
01:42:53,120 --> 01:42:57,440
और इसके अनुसार काल उसकी शरण में जो जाएगा उसको शाश्वत

1402
01:42:57,440 --> 01:43:01,600
का मिल जाएगी। खत्म है यहां पर। और रामपाल का खेल तो वही

1403
01:43:01,600 --> 01:43:06,560
खत्म है। जब उसने अपनी गीता में इसमें

1404
01:43:06,560 --> 01:43:08,960
दूसरे

1405
01:43:08,960 --> 01:43:13,120
दूसरे अध्याय के दूसरे अध्याय की शुरुआत

1406
01:43:13,120 --> 01:43:17,520
में लिख दिया कि परमात्मा के अतिरिक्त

1407
01:43:17,520 --> 01:43:22,040
कोई भी नित्य नहीं

1408
01:43:22,040 --> 01:43:26,520
है। अब बताइए तो फिर परमात्मा का

1409
01:43:26,520 --> 01:43:31,320
अंश कैसे हुआ फिर आत्मा? जब वो नित्य नहीं है

1410
01:43:31,320 --> 01:43:36,080
तो अंश कहते हैं ना

1411
01:43:36,080 --> 01:43:40,880
परमात्मा का अंश कैसे हो गई ये देखो

1412
01:43:40,880 --> 01:43:43,800
ये वो देखो ये क्या लिखा है परमात्मा के

1413
01:43:43,800 --> 01:43:48,480
अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं

1414
01:43:48,480 --> 01:43:54,480
बड़ा कर दीजिए जरा मेरा वाला

1415
01:43:54,840 --> 01:43:59,040
कॉलम देख रहे है परमात्मा कहते

1416
01:43:59,040 --> 01:44:03,080
कोई भी नित्य नहीं

1417
01:44:03,080 --> 01:44:07,120
है। ये पष्ठ संख्या 17 है। ये बहुत बड़ा प्रमाण

1418
01:44:07,120 --> 01:44:13,120
है। यहीं पर सब खत्म हो गया। बैंड बज गया।

1419
01:44:14,560 --> 01:44:18,560
भैया इसमें जो श्रीमद् भगवत गीता में जो लोग दावा करते हैं ना

1420
01:44:18,560 --> 01:44:22,720
कि तत्व ज्ञान केवल रामपाल के पास है तत्वदर्शी

1421
01:44:22,720 --> 01:44:26,960
के पास जा गीता के अनुसार बोला गया है तो उसी में ये भी तो बोला गया उसके अगले ही श्लोक

1422
01:44:26,960 --> 01:44:31,360
में कि तुम अगर तत्व ज्ञान प्राप्त कर लेगा तो सारे तो संपूर्ण भूतों को

1423
01:44:31,360 --> 01:44:35,840
मुझ में ही देखेगा भगवान श्री कृष्ण में ही देखेगा

1424
01:44:35,840 --> 01:44:40,160
ये सारी चर्चाएं हम लोगों ने की तो है आप तो हमेशा देखते हो

1425
01:44:40,160 --> 01:44:44,640
आपने सारी चर्चाएं देखी है लगभग लगभग है ना

1426
01:44:44,640 --> 01:44:48,960
जी भैया सब देखा है लेकिन इसमें जो ये तत्व ज्ञान वाला जो

1427
01:44:48,960 --> 01:44:53,040
बात आ रहा है बार-बार लोग 16 है और एक जगह

1428
01:44:53,040 --> 01:44:57,440
ये तत्वदर्शी में और फंसे हैं दो में

1429
01:44:57,440 --> 01:44:58,800
अगर आप वो सीरीज देख रहे

1430
01:44:58,800 --> 01:45:02,800
हो भगवत गीता वाली जो सीरीज चल रही है हमारी उसमें 216

1431
01:45:02,800 --> 01:45:08,040
में भगवान ने कहा है [संगीत]

1432
01:45:08,040 --> 01:45:12,240
कि क्या कहते हैं उसको जो सत होता है उसका

1433
01:45:12,240 --> 01:45:16,480
कभी अभाव नहीं होता और

1434
01:45:16,480 --> 01:45:20,760
जो असत होता है उसकी कभी सत्ता नहीं होती और इस

1435
01:45:20,760 --> 01:45:25,640
प्रकार इन दोनों को जानने वाला तत्वदर्शी होता

1436
01:45:25,640 --> 01:45:29,760
है तो वहां से गीता को कहने वाला वो

1437
01:45:29,760 --> 01:45:33,840
तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है क्योंकि जो सत है

1438
01:45:33,840 --> 01:45:37,920
उसका कभी अभाव नहीं होता और जो असत है उसकी कभी सत्ता नहीं होती ये

1439
01:45:37,920 --> 01:45:41,920
किसने बताया यह बताया हमको गीता कहने वाले ने

1440
01:45:41,920 --> 01:45:46,120
इसका मतलब उसको पता है कि सत का कभी अभाव नहीं होता और

1441
01:45:46,120 --> 01:45:50,400
असत की कभी सत्ता नहीं होती। तो यहां से वो तत्वदर्शी

1442
01:45:50,400 --> 01:45:54,800
सिद्ध हो गया। इसीलिए रामपाल ने कभी भी दो 16 की बात नहीं की तत्वदर्शी

1443
01:45:54,800 --> 01:45:58,880
में। तत्वदर्शी के लिए भी हमको और दूसरे ग्रंथों में जाने की आवश्यकता

1444
01:45:58,880 --> 01:46:03,880
नहीं है। हालांकि महाभारत में है, भागवत में है। इवन

1445
01:46:03,880 --> 01:46:07,920
तत्वदर्शी इसने वशिष्ठ जी को इनके कबीर

1446
01:46:07,920 --> 01:46:12,160
ने जो इसने अपनी बुक में छाप रखा है उसमें तत्वदर्शी लिखा

1447
01:46:12,160 --> 01:46:14,280
है। वशिष्ठ जी

1448
01:46:14,280 --> 01:46:19,480
को। अब

1449
01:46:19,480 --> 01:46:25,480
बताइए। कुछ भी बोले जाते

1450
01:46:25,640 --> 01:46:30,000
हैं। इसी में भैया भगवत गीता में ही 8:15 में भी 8:16

1451
01:46:30,000 --> 01:46:34,080
में भी भगवान को प्राप्त होकर के मोक्ष को प्राप्त होता है। मतलब भगवान श्री

1452
01:46:34,080 --> 01:46:38,160
कृष्ण को प्राप्त होकर के मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। और ये लोग कहते हैं कि कि अगर

1453
01:46:38,160 --> 01:46:42,160
हम लोग जाएंगे वैकुंठ या फिर कृष्ण को प्राप्त होंगे तो मोक्ष नहीं देने वाले

1454
01:46:42,160 --> 01:46:46,560
हैं वो। जबकि भगवत गीता में स्पष्ट लिखा है 81 में ही

1455
01:46:46,560 --> 01:46:51,640
86 में ही लिखा हुआ है 81 8 16 में उसमें कि

1456
01:46:51,640 --> 01:46:55,760
और नो में भी लिखा है कि मेरे को पूजा करो

1457
01:46:55,760 --> 01:47:01,760
मेरे को मन मन लगाओ मेरा भक्त बनो मेरा पूजा

1458
01:47:03,880 --> 01:47:08,200
करो ये पूछ रहे हैं अवनीश दीक्षित

1459
01:47:08,200 --> 01:47:12,400
जी कि लोग आजकल आ क्यों क्यों

1460
01:47:12,400 --> 01:47:16,640
नहीं रहे हैं अपने गुरु की वाणी सच साबित करने?

1461
01:47:16,640 --> 01:47:20,640
उनको आपसे डर तो नहीं लग रहा। डर तो है। डर

1462
01:47:20,640 --> 01:47:25,840
तो है और ये डर होना चाहिए।

1463
01:47:25,840 --> 01:47:28,520
रुद्र तनवी

1464
01:47:28,520 --> 01:47:33,040
जी जय सियाराम। जय श्री राम। जय सियाराम।

1465
01:47:33,040 --> 01:47:37,280
जी मेरा मेरे मित्र का ये प्रश्न है कि ईश्वर को

1466
01:47:37,280 --> 01:47:41,840
यह पृथ्वी ये संसार बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

1467
01:47:41,840 --> 01:47:45,840
ईश्वर ने बिना किसी प्रयोजन के संसार बनाया है। श्वतापनिषद के चौथे

1468
01:47:45,840 --> 01:47:50,480
अध्याय में लिखा है। ये उसका स्वरूप

1469
01:47:50,480 --> 01:47:54,640
एक उसका लक्षण है। जैसे आप आंख से ये नहीं कह सकते वो देखती

1470
01:47:54,640 --> 01:47:58,960
क्यों है? वो देखती है इसलिए वो आंख है। ईश्वर ईश्वर इसीलिए

1471
01:47:58,960 --> 01:48:03,040
क्योंकि उसने संसार बनाया है। संसार बनाने के अलावा यदि

1472
01:48:03,040 --> 01:48:07,120
ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध आप कर दें। संसार बनाए बिना यदि

1473
01:48:07,120 --> 01:48:11,160
आप ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध कर दे तो आपका यह प्रश्न जायज

1474
01:48:11,160 --> 01:48:15,280
ठहरेगा। आप ईश्वर को ईश्वर तक पहुंचे कैसे? फिर से वही बात

1475
01:48:15,280 --> 01:48:19,240
आ गई। आपने आप ईश्वर को जानते कैसे

1476
01:48:19,240 --> 01:48:24,960
हो? कैसे मालूम आपको कि ईश्वर नाम की कोई चीज है।

1477
01:48:24,960 --> 01:48:29,040
क्योंकि हमारा अस्तित्व है। इसकी वजह से हम जानते हैं कि ईश्वर

1478
01:48:29,040 --> 01:48:34,160
है। यानी कि आप ईश्वर पर बिलीव करते हो।

1479
01:48:34,160 --> 01:48:38,400
जी यानी कि ईश्वर ने शक्ति बिना किसी प्रयोजन

1480
01:48:38,400 --> 01:48:42,640
से बनाई। इसके आधार पर आप ईश्वर पर अविश्वास नहीं करते।

1481
01:48:42,640 --> 01:48:46,920
नहीं करोगे। जी बस हो

1482
01:48:46,920 --> 01:48:51,040
गया। ये सब पारमार्थिक जो प्रश्न होते हैं इनके आधार पर हम ईश्वर

1483
01:48:51,040 --> 01:48:55,840
का वर्णन नहीं कर सकते। है ना?

1484
01:48:55,840 --> 01:49:00,560
समझ रहे है ना? धन्यवाद आपका।

1485
01:49:00,560 --> 01:49:04,800
जी जी। ईश्वर ने बिना किसी प्रयोजन के

1486
01:49:04,800 --> 01:49:08,960
सृष्टि बनाई। जैसे बैठे-बैठे इस समय भी मैं हिल रहा हूं। क्यों हिल

1487
01:49:08,960 --> 01:49:13,200
रहा हूं? बिना किसी प्रयोजन के मेरी शक्ति है। मेरे पास सामर्थ्य है हिलने

1488
01:49:13,200 --> 01:49:17,280
का। ऐसे ही ईश्वर के पास सामर्थ है तो उसने बनाई। इसमें

1489
01:49:17,280 --> 01:49:21,440
उसका कोई हेतु नहीं है। प्रयोजन नहीं है कि इसलिए बनाई क्योंकि हेतु होगा तो

1490
01:49:21,440 --> 01:49:26,320
सच्चिदानंद नहीं रह जाएगा। ठीक है?

1491
01:49:26,320 --> 01:49:31,920
चले गए भाई साहब।

1492
01:49:31,920 --> 01:49:35,920
और अगर वह सच्चिदानंद नहीं रह जाएगा तो फिर वह

1493
01:49:35,920 --> 01:49:40,400
आपके अनुसार ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध नहीं होगा।

1494
01:49:40,400 --> 01:49:44,920
ठीक है ना? चलिए फिर समय देने के लिए आभार। सभी को जय श्री

1495
01:49:44,920 --> 01:49:49,760
राम। शास्त्रवाद जी आपका भी

1496
01:49:49,760 --> 01:49:52,560
कौन बोला?

1497
01:49:52,560 --> 01:49:56,640
मैं बोल रहा हूं। जी अगर थोड़ा

1498
01:49:56,640 --> 01:50:01,040
सा समय हो तो एक बुक इंट्रोड्यूस करा रहा हूं।

1499
01:50:01,040 --> 01:50:07,040
आप भी हम लोग भी देख सकते हैं। हम लोग हम लोग हम लोग

1500
01:50:08,960 --> 01:50:13,080
ये जो ये जो बुक

1501
01:50:13,080 --> 01:50:17,360
हैद शूद्रों की खोज ये हम लोग

1502
01:50:17,360 --> 01:50:21,840
निखिल जी निखिल जी हम लोग इस पर पहले अलग से चर्चा कर लेंगे। फिर हम लोग इसको इंट्रोड्यूस

1503
01:50:21,840 --> 01:50:26,800
करेंगे। ठीक है? इस पर हम लोग बात करेंगे। आप मुझे फोन करिएगा। है ना?

1504
01:50:26,800 --> 01:50:31,840
ठीक है। तो लाइव के बाद मैं फोन करता हूं। जी जी जय श्री राम।

1505
01:50:31,840 --> 01:50:35,840
जय जय श्री राम।
