1
00:00:00,080 --> 00:00:04,360
सभी कुशल पूर्वक होंगे।

2
00:00:04,360 --> 00:00:09,040
अ आज हमारे साथ रामपाल

3
00:00:09,040 --> 00:00:15,040
वालों की ओर से एक व्यक्ति हैं जो जुड़ने वाले

4
00:00:17,480 --> 00:00:23,480
हैं। संभवतः आने वाले होंगे।

5
00:00:26,400 --> 00:00:30,760
जी फोन को सीधा कर लीजिए या फिर आप

6
00:00:30,760 --> 00:00:36,760
ऑटो ऑटो रोटेट ऑन कर लीजिए आप अपने फोन की

7
00:00:36,960 --> 00:00:40,360
हां अभी

8
00:00:40,360 --> 00:00:44,600
ठीक जय श्री राम

9
00:00:44,600 --> 00:00:49,120
तो हां तो ये मैं

10
00:00:49,120 --> 00:00:53,520
कोई भी चर्चा शुरू करने से पहले एक बात आपसे कहूंगा कि

11
00:00:53,520 --> 00:00:59,280
आपको मैं गढ़ा कहूं और ये कहूं कि आपके सर पर दो सींग है तो कैसा रहेगा?

12
00:00:59,280 --> 00:01:03,520
देखो मैं बात मुद्दे की करूंगा जो आप पहले देखो इस लड़ाई के

13
00:01:03,520 --> 00:01:07,840
से नहीं करूंगा मैं। अब आप जो आपकी बात है

14
00:01:07,840 --> 00:01:12,000
वो तो करेंगे ही। एक छोटा सा एक इंट्रोडक्शन मैं

15
00:01:12,000 --> 00:01:16,000
ले रहा हूं। तो क्या आप गधा मैं आपको अगर गधा कहूं या ये

16
00:01:16,000 --> 00:01:20,400
कहूं कि आपके सर पर दो सींग है तो क्या ये ठीक है

17
00:01:20,400 --> 00:01:24,480
या बात करें? देखो मैं बता रहा हूं अगर आप उस

18
00:01:24,480 --> 00:01:28,640
मार्ग में जो मेरे को गलत साबित करो तो आप बोल सकते हो किसको

19
00:01:28,640 --> 00:01:32,720
गलत साबित करो मेरे को अगर गलत साबित करोगे उस चीज मैं तो

20
00:01:32,720 --> 00:01:37,120
मेरे को गधा कह सकते चीज बोलोगे आप वो आपकी इच्छा होती है

21
00:01:37,120 --> 00:01:41,120
यानी कि यानी कि जब हम किसी को गलत साबित कर दे उसके बाद उसे हम

22
00:01:41,120 --> 00:01:45,200
गधा कह सकते हैं जी आप एक बात बताइए अगर

23
00:01:45,200 --> 00:01:49,280
आप किसी को अनपढ़ जो कोई सरकारी नौकरी करने

24
00:01:49,280 --> 00:01:53,200
के बाद भी उसे आप अनपढ़ कहोगे

25
00:01:53,200 --> 00:01:57,280
अरे मैं आपसे मैंने मैंने आपसे प्रश्न पूछा है यानी

26
00:01:57,280 --> 00:02:01,280
कि यानी कि यानी कि किसी को गधा तभी कहना चाहिए जब उसे

27
00:02:01,280 --> 00:02:05,280
हम गलत साबित कर दे सामने से बुलाकर। जी वही बात है ना

28
00:02:05,280 --> 00:02:09,600
जब या फिर वो शिकारी नौकरी करता हो उसे अनपढ़ जहा जाता है। मैंने

29
00:02:09,600 --> 00:02:14,480
आपसे मैं जो पूछ रहा हूं वो बताइए ना कि आप गधा कभी

30
00:02:14,480 --> 00:02:18,720
देखो जी देखो आपसे मैं जो आपने कहा जो मैं आपकी बात मानता

31
00:02:18,720 --> 00:02:22,800
हूं मगर आपने भी जो उस बोर्ड में आपने जो पिछली वीडियो में पहला जो आपने

32
00:02:22,800 --> 00:02:26,880
पहला भाग बनाया उसमें जो आपने कितने गलत सवाल किए हैं उसके बारे में

33
00:02:26,880 --> 00:02:31,040
आप खुद सुन लीजिए। देखिए सवाल रिपीटर क्या किए

34
00:02:31,040 --> 00:02:35,280
हैं वो एक बात अलग है। मैं कह रहा हूं कि किसी को गलत साबित

35
00:02:35,280 --> 00:02:39,360
जब तक सामने से बुलाकर नहीं कर दे तब तक उसे गधा नहीं कहना चाहिए। कहना चाहिए

36
00:02:39,360 --> 00:02:43,600
क्या? तो फिर मैं आपको गधा कहूं। आपको स्वीकार है। फिर मेन बात

37
00:02:43,600 --> 00:02:47,920
आ रही है ना देखो जी बात वही आ रही है। बात वही आ रही है।

38
00:02:47,920 --> 00:02:52,000
अगर आप किसी को अनपढ़ कह रहे हो तो पहले आप उससे देखो कि हां भाई वो सरकारी

39
00:02:52,000 --> 00:02:56,240
जॉब करता था नहीं करता था। उसके डॉक्यूमेंट देखो पता

40
00:02:56,240 --> 00:03:02,000
हम तो देख चुके हम तो देख चुके ना देख चुके

41
00:03:02,000 --> 00:03:06,160
हमने किसको गधा कह दिया है गधा किसको गधे

42
00:03:06,160 --> 00:03:10,320
वाली बात आप अनपढ़ कह रहे हो तो अनपढ़ मूर्ख वो

43
00:03:10,320 --> 00:03:14,480
तो एक ही बात होगी ना अरे भाई यदि कोई अंग्रेजी नहीं बोलता

44
00:03:14,480 --> 00:03:18,640
है और अंग्रेजी बोलने का प्रयास करता है दिखावा करता है तो वो अंग्रेजी

45
00:03:18,640 --> 00:03:23,360
के क्षेत्र में अनपढ़ी तो कहा जाएगा यदि कोई संस्कृत नहीं बोलता

46
00:03:23,360 --> 00:03:27,360
सुनिए संस्कृत नहीं बोलता है संस्कृत बोलने का प्रयास करता है तो

47
00:03:27,360 --> 00:03:32,400
संस्कृत के संस्कृत के क्षेत्र में अनपढ़ी तो कहा जाएगा

48
00:03:32,400 --> 00:03:37,120
विकास कहता है आप किसी का खंडन कर रहे हो तो पहले उसे आप मैच करके देख लो

49
00:03:37,120 --> 00:03:41,680
ठीक है देखो आप अपने मैच कर लिया था

50
00:03:41,680 --> 00:03:45,760
सवाल ये है कि आप किसी को आप किसी को सवाल

51
00:03:45,760 --> 00:03:49,680
ये है कि आप किसी को गधा कहेंगे क्या

52
00:03:49,680 --> 00:03:53,760
हमने आपको गधा कहा था क्या हम

53
00:03:53,760 --> 00:03:57,760
मुझे बाद में पता चला ना यह बात कि आपने मेरा एक फोटो लगाया अपने चैनल

54
00:03:57,760 --> 00:04:01,760
पर और उसमें मेरा फोटो लगा के वहां गधा लिखा फिर वहां पर जो है

55
00:04:01,760 --> 00:04:05,840
सी लगाए हैं तो हम उसमें आप ही बस नहीं है

56
00:04:05,840 --> 00:04:10,480
उसमें दो चार जने और है उस वीडियो में आप देख सकते हो ठीक तो मैं भी तो

57
00:04:10,480 --> 00:04:14,800
अरे मैं भी तो हूं बात ये है मैं भी तो हूं ना

58
00:04:14,800 --> 00:04:17,040
जी अगर किसी को आप बच्चे को अगर छेड़ते हो उसकी

59
00:04:17,040 --> 00:04:21,040
गाली भी सुननी पड़ती है तो

60
00:04:21,040 --> 00:04:25,360
आपको गाली तो मैं आपको यहां गाली दूं।

61
00:04:25,360 --> 00:04:29,600
गाली देने का उद्देश्य नहीं है हमारा। तो फिर आप यहां गाली

62
00:04:29,600 --> 00:04:33,680
कोई आप यहां गाली तो बता रहे हो कि किसी छोटे बच्चे को छेड़ते तो गाली सुननी पड़ती है,

63
00:04:33,680 --> 00:04:38,320
सहनी पड़ती है। तो मैं आपको

64
00:04:38,320 --> 00:04:42,320
बोलोगे तो भाई वो भी बोलेगा ना थोड़ा बहुत के भाई उसमें ऐसा लेगा। यानी कि

65
00:04:42,320 --> 00:04:46,400
गरा बोलने का अगर कारण हो तो बोले। घरा बोलने का अगर कारण

66
00:04:46,400 --> 00:04:50,560
हो तो बोले। आप अपनी बात को ले बैठे हैं। मगर आप अपनी

67
00:04:50,560 --> 00:04:55,360
बात को पूरी नहीं सुन रहे हो। आपने क्या बोला उस वीडियो में? आप अपनी बात अपनी वीडियो तो सुनिए।

68
00:04:55,360 --> 00:04:59,360
बोला है क्या? मैं अनपढ़ हूं। मैं सुनो मैं सुनो

69
00:04:59,360 --> 00:05:03,400
मैं अनपढ़ हूं। इंग्लिश के क्षेत्र में मैं अनपढ़ हूं। मैं अनपढ़

70
00:05:03,400 --> 00:05:07,520
हूं। क्या कहते हैं जो ये तुर्की भाषा है। मैं

71
00:05:07,520 --> 00:05:11,800
नहीं जानता उस मामले में मैं अनपढ़ हूं। इसमें और गधे में अंतर

72
00:05:11,800 --> 00:05:16,000
है। आपने मेरे को पशु ऋतु वो दी ना।

73
00:05:16,000 --> 00:05:20,240
तो मैं पूछ रहा हूं कि जो पशु की उपाधि आप दे रहे हो आपने

74
00:05:20,240 --> 00:05:25,040
मेरे बारे में क्या जान लिया? क्या जान लिया? आपने ऐसे कई वीडियो

75
00:05:25,040 --> 00:05:29,120
उल्टस बताया आपने। कई वीडियो में ऐसे उल्टस बोला हमारे गुरु जी के प्रति तो हम भी

76
00:05:29,120 --> 00:05:32,160
तो थोड़ा बहुत हमने क्या भाई तो वो हमारे भगवानों के प्रति बोल

77
00:05:32,160 --> 00:05:36,160
रहा है तो हम बोलेंगे ना उसको। वो हमारे भगवान के प्रति बोल रहा है। वो

78
00:05:36,160 --> 00:05:40,800
हमारी मां के प्रति बोल रहा है। उल्टा सीधा तो हम बोलेंगे ना उसे।

79
00:05:40,800 --> 00:05:45,040
आप प्रमाण दिखाओ ना। मानसी जी आप प्रमाण दिखाओ। हां तो प्रमाण

80
00:05:45,040 --> 00:05:49,200
हमने प्रमाण दिखा के ही बोला है। सुनो अब जिस वीडियो को कहोगे

81
00:05:49,200 --> 00:05:53,280
उस जिस वीडियो को सुनो जिस वीडियो को कहोगे उस वीडियो में हम दिखाएंगे

82
00:05:53,280 --> 00:05:57,360
कि हमने प्रमाण दिखाए थे। बोलो प्रमाण दिखा

83
00:05:57,360 --> 00:06:02,080
के ही बोला है। हम वीडियो खोलने

84
00:06:02,080 --> 00:06:06,160
प्रमाण दिखा के ही बोला है। तुमने जरूर जो गधा बोला है वो बिना प्रमाण

85
00:06:06,160 --> 00:06:10,400
के बोला है। आप ये बताइए हमारी फोन पे बात क्या हुई

86
00:06:10,400 --> 00:06:14,400
थी? फ़ पे बात हुई मुझे बाद में ये पता चला था ना कि तुमने

87
00:06:14,400 --> 00:06:20,400
गधा कहा है या तो उसको तुम्हें स्वीकारना चाहिए कि हां भाई गधा गलत कहा है।

88
00:06:20,560 --> 00:06:24,640
मैं गधा क्यों स्वीकार करूं? जब तुमने उस वीडियो अपनी वीडियो में जब अनपढ़ नहीं

89
00:06:24,640 --> 00:06:29,040
स्वीकार किया तो हम कैसे कह दे कि भाई तुम गधे हो? क्या?

90
00:06:29,040 --> 00:06:33,120
क्या कह रहे हो? मतलब मतलब ये कह रहा हूं जब आप तुम हमारी

91
00:06:33,120 --> 00:06:37,120
मेरे मुंह से उल्टा निकल गया थोड़ा। मैं ये कह रहा हूं जैसे आप वीडियो में

92
00:06:37,120 --> 00:06:41,280
कह रहे हो कि आप अनपढ़ हो। ठीक है। गुरुजी अनपढ़ बोल रहे हैं।

93
00:06:41,280 --> 00:06:45,520
कोई सी भी आपको मैंने गधा बोल दिया। ठीक है। मैंने मैंने अभी सिद्ध

94
00:06:45,520 --> 00:06:47,440
किया है कि तुम्हारे गुरुजी अमुक अमुक

95
00:06:47,440 --> 00:06:51,600
क्षेत्र में जिसमें वो विद्वान बनने का प्रयास करते हैं उसमें अनपढ़ हैं। अब

96
00:06:51,600 --> 00:06:55,680
तुम मुझे गधा सिद्ध कर दोगे क्या? वही है

97
00:06:55,680 --> 00:07:00,560
कि जब तुम अर्थ सही नहीं लगाओगे तो उसमें सिद्धि होएंगे।

98
00:07:00,560 --> 00:07:05,400
तुमने गधा बोल के ठीक नहीं किया। गधा बोल के तुमने ठीक नहीं किया।

99
00:07:05,400 --> 00:07:09,600
समझे? और आप अपने बात

100
00:07:09,600 --> 00:07:14,240
ले आइए। जिस बात पर आपके टॉपिक पर बात चल रही थी उस बात पर आइए आप।

101
00:07:14,240 --> 00:07:18,000
हम

102
00:07:18,000 --> 00:07:22,400
अब आप बताइए कि क्या आप बात करना चाहते हो?

103
00:07:22,400 --> 00:07:26,880
हां मैं क्या करना चाहता हूं? तुमने कहा था कि तुम आओगे

104
00:07:26,880 --> 00:07:30,880
चैनल पे लाइव छ तारीख को तो तुम उसके बाद आए नहीं। तुमने वो स्क्रीनशॉट भी शेयर

105
00:07:30,880 --> 00:07:36,000
नहीं किए। जो स्क्रीनशॉट बता रहे थे तुमने वो फोन लगाया।

106
00:07:36,000 --> 00:07:40,240
हिमांशी जी मेरे पास है ना स्क्रीनशॉट नहीं पड़े रहते हैं। मैं वीडियो एडिटिंग में वो काट

107
00:07:40,240 --> 00:07:44,720
देता हूं। नहीं नहीं स्क्रीनशॉट नहीं कह रहा हूं।

108
00:07:44,720 --> 00:07:48,960
वो स्क्रीनशॉट मैं नहीं कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं जो नंबर

109
00:07:48,960 --> 00:07:53,040
आपने दिया था वो नंबर मेरे से कट गया। मैंने

110
00:07:53,040 --> 00:07:57,200
जो नंबर दिया था वो आपसे कट गया। मतलब जो आपने वीडियो

111
00:07:57,200 --> 00:08:01,360
में नंबर बताया था ना जो आप पहाड़ी जी के चैनल पे आए थे उस वाली वीडियो

112
00:08:01,360 --> 00:08:02,480
में आपने जो नंबर बताया

113
00:08:02,480 --> 00:08:06,480
था वो नंबर मैंने आपको लगा दिया। उसमें रिचार्ज नहीं है। उस नंबर पे

114
00:08:06,480 --> 00:08:10,640
ऐसा बताया जा रहा था। ठीक है? मगर फिर वो कौन सा नंबर था? कौन सा नंबर था

115
00:08:10,640 --> 00:08:14,800
वो? हिमांशी जी देखो मैं आप ये कह रहा हूं नंबर तो वो आपने

116
00:08:14,800 --> 00:08:18,880
जो आप या तो बोलो मत अगर बोलो तो उसको सिद्ध करोगे ना कि आपकी

117
00:08:18,880 --> 00:08:23,040
बात सुन के हम अपना मुंह बंद कर ले। मत बोलो या तो

118
00:08:23,040 --> 00:08:27,200
आपने अभी कहा कि आपने एक फोन नंबर मिलाया था। मैं कह रहा हूं कौन सा नंबर मिलाया

119
00:08:27,200 --> 00:08:31,360
था। वो जो नंबर मिलाया था उसी का स्क्रीनशॉट दे दो। दर्शकों

120
00:08:31,360 --> 00:08:35,520
को मैं बता दूं यहां पर क्या बात हो रही है कि हम लोग एक बार

121
00:08:35,520 --> 00:08:39,680
पहाड़ी जी के चैनल पर लाइव चर्चा में हमारे बीच में बात हुई वहां

122
00:08:39,680 --> 00:08:43,680
मैंने अपना इनको नंबर दिया इन्होंने अपना भी दिया इनका कहना है

123
00:08:43,680 --> 00:08:48,200
कि मेरा नंबर इन्होंने मिलाया था चर्चा के बाद और उस नंबर

124
00:08:48,200 --> 00:08:52,240
पर जो है ये संदेश प्राप्त हुआ कि मेरा

125
00:08:52,240 --> 00:08:56,560
नंबर जो है बंद है या रिचार्ज ना होने के कारण चालू नहीं है। अब

126
00:08:56,560 --> 00:09:01,120
सभी लोगों को मालूम है मेरा जो नंबर है 7408301869

127
00:09:01,120 --> 00:09:05,720
वो सदैव चालू रहता है। हम

128
00:09:05,720 --> 00:09:09,760
तो जब वो चालू रहता है अनेकानेक पूरी दुनिया से

129
00:09:09,760 --> 00:09:13,840
फोन आ जाते हैं। मगर इनका कहना है कि भाई वो नंबर बंद था। उसमें रिचार्ज नहीं

130
00:09:13,840 --> 00:09:17,600
था। उसमें ये था उसमें वो था। तो मैंने इनसे सरल सी भाषा में

131
00:09:17,600 --> 00:09:21,760
कहा कि कम से कम आपने जो नंबर डायल किया है वो वाला स्क्रीनशॉट तो दिखा

132
00:09:21,760 --> 00:09:25,920
दो। इनका कहना हो सकता है मैंने गलत सुन लिया हो। नंबर गलत हो। मैंने कहा वो गलत नंबर

133
00:09:25,920 --> 00:09:29,920
जो गलत नंबर डायल किया था वो तो दिखा दो। तो इन्होंने नहीं दिखाया

134
00:09:29,920 --> 00:09:33,920
उस बारे में बात हो रही है। खैर आगे चलते हैं। अब

135
00:09:33,920 --> 00:09:36,160
हम

136
00:09:36,160 --> 00:09:39,400
मुख्य बात पे आ जाते हैं।

137
00:09:39,400 --> 00:09:43,600
तो मुझे आप ये बता दीजिए कि आपके जो रामपाल है जो इस समय जेल

138
00:09:43,600 --> 00:09:47,680
में बंद है और आपराधिक मुकदमों

139
00:09:47,680 --> 00:09:52,400
में सजा काट रहे हैं। इनको तत्वदर्थी किस आधार पर माना जाएगा?

140
00:09:52,400 --> 00:09:56,480
पहली बात तो देखो जेल की बात नहीं हुई थी हमारी फोन पर तत्व रस्सी पहचान की बात

141
00:09:56,480 --> 00:10:00,640
हुई थी ठीक है हम तो हम किस व्यक्ति

142
00:10:00,640 --> 00:10:04,640
के बारे में बात कर रहे हैं वो तो बताएंगे ना व्यक्ति

143
00:10:04,640 --> 00:10:09,280
के बारे में तो बाद में होती है तत्वदर्शी संत की पहचान के बारे में बात हुई थी

144
00:10:09,280 --> 00:10:14,000
हां तो तत्वदर्शी संत क्यों कहते हो आप रामपाल को बताओ

145
00:10:14,000 --> 00:10:18,160
जो पेड़ से पेड़ के पत्ते तक से लगाकर जड़

146
00:10:18,160 --> 00:10:22,720
की पहचान बता दे बल्कि टनी तक की पहचान बता दे वो तत्व संत है।

147
00:10:22,720 --> 00:10:26,720
कहां लिखा है? अब मैं तुमको अब सब

148
00:10:26,720 --> 00:10:30,880
चीज बता रहा हूं। गीता खोलिए। आप गीता के हर एक श्लोक में बता देता हूं आपको। हम

149
00:10:30,880 --> 00:10:36,880
बताओ बताओ।

150
00:10:52,080 --> 00:10:58,080
आपको

151
00:11:03,920 --> 00:11:08,480
अरे बड़ी देर लग रही है तो साधारण बच्चों को रटा रहता है ये सब

152
00:11:08,480 --> 00:11:12,480
दो मिनट बस निकालने में टाइम थोड़ा इनके पास एक तो

153
00:11:12,480 --> 00:11:16,640
ये है कि गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में है जो बताया

154
00:11:16,640 --> 00:11:20,720
गया है ओम तत सत भाई साहब अभी आपने 15 वे अध्याय

155
00:11:20,720 --> 00:11:24,560
का कुछ बोला था वो बताओ आप

156
00:11:24,560 --> 00:11:28,800
15वा अध्याय पहले 16 जो 17 अध्याय है उसमें खोल के

157
00:11:28,800 --> 00:11:32,880
उल्टे वृक्ष की बात बताइए कहा लिखी है 15 अध्याय

158
00:11:32,880 --> 00:11:37,040
श्लोक दो के में देखिए उसमें लिखिए दो क्या लिखी है क्या लिखी

159
00:11:37,040 --> 00:11:41,360
है पढ़िए आप खोलिए उसमें हमने इसमें अरे भाई

160
00:11:41,360 --> 00:11:45,360
अरे मैंने पढ़ा हुआ है इसलिए कह रहा हूं। आप पढ़ के सुनाइए। आप जो कह रहे हैं

161
00:11:45,360 --> 00:11:50,000
वो पढ़ के सुना दीजिए मुझे। क्या लिखा है उसमें? उसमें

162
00:11:50,000 --> 00:11:54,320
वही लिखा है जो जड़ से लेकर वर के पत्ते तक का विभाग बता दे

163
00:11:54,320 --> 00:11:58,560
और तना तक का वो बता दे ततशी संत है। ठीक है। उसमें तत्वदर्शी

164
00:11:58,560 --> 00:12:02,160
शब्द लिखा है क्या?

165
00:12:02,160 --> 00:12:07,120
शब्द लिखा है क्या? ततशी संत की पहचान बताइए ना।

166
00:12:07,120 --> 00:12:11,440
तो तत्वदर्शी शब्द कहां पर है? क्यों जाए हम तत्वदर्शी

167
00:12:11,440 --> 00:12:15,920
के पास इसमें भी लिखा हम तत्वदर्शी

168
00:12:15,920 --> 00:12:20,720
को ढूंढ क्यों रहे हैं तभी ढूंढेंगे ना जब उसके बारे में कहीं पर बात शुरू की होगी

169
00:12:20,720 --> 00:12:24,960
कि तुमको तत्वदर्शी के पास जाना है जो गीता

170
00:12:24,960 --> 00:12:29,280
है जो गीता अध्याय देखो जो गीता अध्याय सात

171
00:12:29,280 --> 00:12:33,440
ठीक है श्लोक गीता अध्याय सात श्लोक 18 में है जो

172
00:12:33,440 --> 00:12:37,680
लिखा है उसमें के इसे तेरे लिए कर्तव

173
00:12:37,680 --> 00:12:42,320
और कर्तव बल्कि की शास्त्री ही प्रमाण है। उसमें लिखा है

174
00:12:42,320 --> 00:12:46,320
भाई साहब तत्वदर्शी नाम की कोई चीज होती है। पहले इसको तो बताओ

175
00:12:46,320 --> 00:12:50,920
कहां से है? कौन होता है तत्वदर्शी? आप सीधे पहचान पे पहुंच

176
00:12:50,920 --> 00:12:55,840
गए। तत्वदर्शी होता कौन है? पहले ये तो बताओ प्रमाण से।

177
00:12:55,840 --> 00:12:59,920
चारो वेद का वर्ण देते और पुराणों का वर्ण कहां लिखा है? ये कहां

178
00:12:59,920 --> 00:13:03,920
लिखा है? ये बताओ। ना गीता में लिखा। मैं बता रहा हूं

179
00:13:03,920 --> 00:13:09,920
इसमें। कहां लिखा है?

180
00:13:12,200 --> 00:13:18,200
सच्चिदानंद धर्म की वाणी में बताया गया

181
00:13:24,840 --> 00:13:30,840
है बताया गया

182
00:13:52,560 --> 00:13:56,560
अरे यार तो कच्चे खिलाड़ी आ गए। कच्चे खिलाड़ी

183
00:13:56,560 --> 00:14:00,560
नहीं है जी ऐसी बात नहीं है मगर निकालने में टाइम लगता है क्योंकि और भी पेज है ना इसमें

184
00:14:00,560 --> 00:14:04,640
इसलिए कह रहा हूं। यार ये वाली बातें तो रटी हुई है बच्चों बच्चे बच्चे को रटी

185
00:14:04,640 --> 00:14:08,640
हुई है जो रामपाल को जानता है वो तो बात सही है वो

186
00:14:08,640 --> 00:14:12,800
तो अच्छी बात है मगर जो कहा ना जो प्रमाण सहित है वो उसमें सच्चिदानंद ब्रह्म

187
00:14:12,800 --> 00:14:17,040
की वाणी में बताया गया है जो कहां पे है कहां भगवत

188
00:14:17,040 --> 00:14:21,280
गीता में कहां कहा गया है कि तुमको जो है

189
00:14:21,280 --> 00:14:25,360
क्या कहते हैं ये तत्वदर्शी के पास जाना है

190
00:14:25,360 --> 00:14:27,280
पहले ये तो पता चले कि कहां पे

191
00:14:27,280 --> 00:14:31,280
कहा गया है कि तत्वदर्शी नाम का कोई अस्तित्व है तब तो हम तत्व दर्शी

192
00:14:31,280 --> 00:14:35,280
को ढूंढेंगे जाकर के 15 अध्याय में इसलिए तो मैं कह रहा

193
00:14:35,280 --> 00:14:39,280
हूं जी आपने गीता अध्याय 17 श्लोक 23 अरे भाई साहब

194
00:14:39,280 --> 00:14:43,840
तत्वदर्शी होता क्या है क्यों जाए हम तत्वदर्शी के पास ये तो बताओ पहले

195
00:14:43,840 --> 00:14:47,840
क्यों जाए आपसे अध्याय खोलिए आप खोल ना रहे बताइए

196
00:14:47,840 --> 00:14:52,400
अरे तो बताओगे पेज नंबर कौनसा है अध्याय नंबर कौन सा है

197
00:14:52,400 --> 00:14:56,400
खोल तो रहे है की गीता अध्याय बता तो दिया 17 श्लोक 23 में खोलिए

198
00:14:56,400 --> 00:15:00,400
तत्वदर्शी शब्द है क्या उसमें सच्चिदानंद

199
00:15:00,400 --> 00:15:04,400
कहां पे लिखा है गीता में जो पांचवा वेद है ना पांचवा

200
00:15:04,400 --> 00:15:09,520
वेद के बारे में बताया गया है उसमें जो पांचवा वेद है जो चारों वेद से अलग है पांचवा

201
00:15:09,520 --> 00:15:13,520
वेद हम क्यों माने वो वेद है वो है ना

202
00:15:13,520 --> 00:15:17,600
तुम्हारे शंकराचार्य ने खुद बताया जो कैलाश पर्वत पे है क्या तुम्हारे गुरुजी ने

203
00:15:17,600 --> 00:15:21,680
बताया ना कैलाश पर्वत कहां लिखा है कहा लिखा है बताओ अपने गुरुजी

204
00:15:21,680 --> 00:15:26,080
के उसमें पढ़ी है अरे कहां पे पढू

205
00:15:26,080 --> 00:15:30,160
आप तो वही बात है आप तो एकदम है जब क्लेम आप कर रहे हैं

206
00:15:30,160 --> 00:15:34,240
तो आपको बताना होगा ना कि अध्याय पढ़ाने में इतने इतने पृष्ठ

207
00:15:34,240 --> 00:15:38,480
क्रमांक में इतने अध्याय में इस श्लोक में कहा है

208
00:15:38,480 --> 00:15:42,320
मैं कह दूं तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि सुनो मैं कह दूं तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि

209
00:15:42,320 --> 00:15:47,280
तू गधा है तुम गधे हो तुम्हारे गुरु जी ने कहा है बताओ मैं कह रहा हूं

210
00:15:47,280 --> 00:15:51,280
सुनो सुनो सुभाष जी आप गधे वाली बात पे चिढ़ के आओ ना नहीं नहीं

211
00:15:51,280 --> 00:15:55,360
मैं कह दूं मैं कह दूं कि तुम्हारा पूरा खानदान गधा है तुम्हारे

212
00:15:55,360 --> 00:15:59,520
गुरु जी ने कहा है तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि वो गधे हैं स्वयं तो तुम मान

213
00:15:59,520 --> 00:16:04,480
लोगे तुम प्रमाण मांगोगे ना प्रमाण मांगोगे ना

214
00:16:04,480 --> 00:16:08,800
हमने कुछ मैं क्या मैं क्या पूछ रहा हूं तुम

215
00:16:08,800 --> 00:16:12,880
अगर अगर कोई क्लेम कर रहे हो भाई साहब अगर कोई क्लेम कर रहे

216
00:16:12,880 --> 00:16:17,920
हो तो उसको आप बताइए कहां लिखा है कहा है

217
00:16:17,920 --> 00:16:22,080
हम कह रहे कि भाई बोलो तभी तो बताएंगे अब खोलना कौन सा तुम

218
00:16:22,080 --> 00:16:26,320
मुझे ये बताओ की तत्वदर्शी का शब्द कहां पर आया है भगवत

219
00:16:26,320 --> 00:16:30,960
गीता में तुमको यही नहीं पता

220
00:16:30,960 --> 00:16:35,040
लो भैया अब इनको क्या बता जब 17 खोले गए उसे आगे की कहानी तो बताऊंगा

221
00:16:35,040 --> 00:16:39,120
फिर आप खोल ही ना रहे तो हम अरे तत्वदर्शी लिखा

222
00:16:39,120 --> 00:16:43,280
है क्या 17 में 17 में तत्वदर्शी नहीं लिखा है उसे

223
00:16:43,280 --> 00:16:47,680
खोलो तो एक बार कहां लिखा है तत्व अभी बात हो रही है तत्वदर्शी

224
00:16:47,680 --> 00:16:52,320
कहां लिखा है पहले वो तो निकालो

225
00:16:52,320 --> 00:16:56,400
देखो जी आपसे कहा कि मैं पहले आप बुक श्लोक तो खोले उसके बाद मैं बता

226
00:16:56,400 --> 00:17:00,400
रहा हूं अरे भाई मैं मैं मैं क्यों खोलूं जब मैं वो चीज आप बता

227
00:17:00,400 --> 00:17:04,480
ही नहीं रहे हो कि आपको खोलनी है। बुक को खोलने की आवश्यकता मुझे तब पड़े

228
00:17:04,480 --> 00:17:08,880
जब आप कहो कि हां ये चीज यहां लिखी हो। मुझे ये लगता हो कि नहीं लिखी है तब मैं खोलू।

229
00:17:08,880 --> 00:17:13,560
मैं तो मान रहा हूं आपकी बात। पहले आप बोलो तो कि यहां पे लिखा है इस श्लोक

230
00:17:13,560 --> 00:17:17,920
में। बताइए ये हाल है।

231
00:17:17,920 --> 00:17:21,920
देखो हिमांशी जी अपनी बात रखने के लिए तुम पता नहीं क्या क्या कर लेते हो। अगर

232
00:17:21,920 --> 00:17:26,080
हम जो बता रहे वो आप बोलेंगे तो हम क्या बता रहा हूं भाई? मैं आपसे पूछ रहा हूं कि

233
00:17:26,080 --> 00:17:30,240
हम तत्वदर्शी को ढूंढे क्यों उल्टे वृक्ष की पहचान क्यों देखने

234
00:17:30,240 --> 00:17:34,240
जाए क्या क्या पहचान है तत्वदर्शी की हम क्यों ढूंढे आपने कहा

235
00:17:34,240 --> 00:17:39,120
कि भैया गधे को ढूंढो गधे को ढूंढो अरे क्यों ढूंढे गधे को

236
00:17:39,120 --> 00:17:43,120
अब कह रहे हो ना अध्याय चार श्लोक 34 में खोले एक बार उसमें तो खोल के देखो

237
00:17:43,120 --> 00:17:46,240
एक बार अब आई ना तुमने अब की बात

238
00:17:46,240 --> 00:17:50,960
अब पढ़ो उसको अब मैं मानता हूं पढ़ो उसको अब पढ़ो उसे

239
00:17:50,960 --> 00:17:55,040
हम क्यों पढ़े आप खोलो तो स्क्रीन पे दिखाओ उसे मैं क्यों खोलूं जो तुम बात कह

240
00:17:55,040 --> 00:17:59,040
रहे हो वो उसको पढ़ो। मैं क्यों बोल रहा हूं? तुम क्लेम तुम

241
00:17:59,040 --> 00:18:03,040
क्लेम कर रहे हो। तुम प्रमाण दे रहे हो तो उसको पढ़ो। मुझे मालूम है

242
00:18:03,040 --> 00:18:07,200
वहां तत्वदर्शी लिखा है। मुझे मालूम है तत्वदर्शी लिखा है। मैं कोई

243
00:18:07,200 --> 00:18:11,520
इस पर अविश्वास नहीं कर रहा हूं कि तत्वदर्शी नहीं लिखा है। सुनिए।

244
00:18:11,520 --> 00:18:15,680
हिमांशु जी 17 23 पे आओ एक बार। मैं पहले कह रहा हूं। आप

245
00:18:15,680 --> 00:18:19,760
434 को मुझे पढ़ के सुनाइए कि तत्वदर्शी क्या है वहां पर? क्या लिखा

246
00:18:19,760 --> 00:18:24,160
है? उसमें लिखा है के मैं

247
00:18:24,160 --> 00:18:28,240
कहा के रुको मैं बता रहा हूं एक

248
00:18:28,240 --> 00:18:32,480
मिनट अब मुझे तो अनपढ़ तुम साबित करोगे ना मैं भाई मैं मानता हूं क्योंकि

249
00:18:32,480 --> 00:18:37,520
हमारे गुरु को भी अनपढ़ साबित कर रहे हो

250
00:18:37,520 --> 00:18:43,520
साबित करने की आवश्यकता नहीं है

251
00:18:47,760 --> 00:18:51,760
उसने कहा कि मैंने कहा कि उसका दर्शी संत को पहचान ठीक

252
00:18:51,760 --> 00:18:56,000
है उसे पूर्ण परमात्मा उसे भलीभूति उसे तनवत प्रणाम कर उसका

253
00:18:56,000 --> 00:19:00,000
पट छोड़ कर उसे उसमें लिखा

254
00:19:00,000 --> 00:19:05,320
है एक बार खोल खोल के देखिए

255
00:19:05,320 --> 00:19:09,360
आप खोल के देखिए आप देखो हम मैम बात करेंगे बहुत याद

256
00:19:09,360 --> 00:19:13,680
रहना चुप हो जाओ आप चुप हो जाओ खोल रहा हूं ना आप चुप हो जाओ हम

257
00:19:13,680 --> 00:19:19,680
चुप ही है

258
00:19:32,320 --> 00:19:36,880
ये कहा जा रहा है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी

259
00:19:36,880 --> 00:19:40,960
ज्ञानियों के पास जाकर समझ। इतना

260
00:19:40,960 --> 00:19:45,200
काफी है। इतना काफी है। आगे पढ़िए

261
00:19:45,200 --> 00:19:47,440
ना उसे। अरे भाई आगे लिखा है

262
00:19:47,440 --> 00:19:51,600
भलीभांति दंडवत प्रणाम करने से उनकी सेवा करने से कपट छोड़कर सरलता पूर्वक

263
00:19:51,600 --> 00:19:55,680
प्रश्न करने से परमात्मा तत्व को भलीभांति जानने वाले ज्ञानी महात्मा

264
00:19:55,680 --> 00:19:58,960
तुझे उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे

265
00:19:58,960 --> 00:20:03,040
अभी बोलिए अध्याय 17 श्लोक 23 अरे भाई रुक

266
00:20:03,040 --> 00:20:07,120
जाओ यहां पे अभी प्रश्न है जो आपने प्रमाण दिया

267
00:20:07,120 --> 00:20:11,280
यहां पे कुछ प्रश्न है वो सुनो तो यहां पे कहा जा रहा है

268
00:20:11,280 --> 00:20:15,680
कि आपको तत्वदर्शी ज्ञानी के पास जाना है ठीक ठीक है

269
00:20:15,680 --> 00:20:19,720
ये कहा जा रहा है और आपके हिसाब से

270
00:20:19,720 --> 00:20:23,920
जो रामपाल है वो तत्वदर्शी है।

271
00:20:23,920 --> 00:20:26,280
ठीक है?

272
00:20:26,280 --> 00:20:30,480
अच्छा तो ये इसमें कहा जा रहा है उस ज्ञान को तू

273
00:20:30,480 --> 00:20:34,640
तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। उस ज्ञान को ये कौन

274
00:20:34,640 --> 00:20:37,280
सा ज्ञान है?

275
00:20:37,280 --> 00:20:41,280
वो ज्ञान है जो अर्जुन को कह रहे हैं अर्जुन को कह

276
00:20:41,280 --> 00:20:45,360
रहे है जो गीता गीता अध्याय दो। ठीक है? गीता दो

277
00:20:45,360 --> 00:20:49,520
मेरे भाई जब सुनो सुनो सुनो जैसे मैंने बात की

278
00:20:49,520 --> 00:20:53,680
कि ये रमेश है ठीक है मैंने कहा ये

279
00:20:53,680 --> 00:20:57,840
रमेश है फिर मैंने कहा कि इसको तुम अपने

280
00:20:57,840 --> 00:21:01,840
घर पर ले जाओ उसको तुम अपने साथ में ले जाओ तो हम

281
00:21:01,840 --> 00:21:06,000
उस इस का उपयोग तब करते हैं जब उससे जस्ट पहले

282
00:21:06,000 --> 00:21:10,080
बता चुके होते हैं कुछ उसके उसको संज्ञात्मक रूप से

283
00:21:10,080 --> 00:21:14,080
उसको कुछ बता उसके बारे में कुछ विवरण दे चुके होते हैं तो

284
00:21:14,080 --> 00:21:18,640
यहां जब यह कहा जा रहा है कि उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी के पास जाकर समझ

285
00:21:18,640 --> 00:21:22,720
तो इसका मतलब है कि पिछले श्लोकों में बताया गया है कि किस

286
00:21:22,720 --> 00:21:26,720
ज्ञान की बात हो रही है। समझ रहे हो ना?

287
00:21:26,720 --> 00:21:30,400
तो 433 अब तुम खोलो।

288
00:21:30,400 --> 00:21:34,160
चार3 हां

289
00:21:34,160 --> 00:21:40,160
433 खोल ले लो। क्या लिखा है? पढ़ो।

290
00:22:09,360 --> 00:22:13,440
अरे क्या हुआ? पढ़ना नहीं आता क्या? अभी ये लिखा

291
00:22:13,440 --> 00:22:17,520
है इसमें जो लिखा आपने बताया 433 में बताया गया है।

292
00:22:17,520 --> 00:22:23,520
हां एक मिनट एक मिनट ये मैं निकाल लूंगा। डाउनलोड हो रही

293
00:22:27,640 --> 00:22:31,840
है। अभी तो ऐसा लगता था कि अभी चालू कर दिया पढ़ना

294
00:22:31,840 --> 00:22:36,240
और फिर रुक गए।

295
00:22:36,240 --> 00:22:40,240
जैसे पिटी हुई ट्रेनें नहीं होती है। हल्का सा काफी देर

296
00:22:40,240 --> 00:22:44,480
तक इंतजार करती है। पब्लिक अंदर बैठी हुई ट्रेन में। अब चलेगी अब चलेगी। अब चलेगी।

297
00:22:44,480 --> 00:22:48,560
हल्का सा सड़क करके दिखा देती है। फिर खड़ी हो जाती है। वही

298
00:22:48,560 --> 00:22:52,800
हाल आपने किया। इसमें ये लिखा है मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं उसके बाद फिर

299
00:22:52,800 --> 00:22:56,270
रुक गए बताइए

300
00:22:56,270 --> 00:23:01,600
[संगीत]

301
00:23:01,600 --> 00:23:05,760
के बारे में बता रहे इसमें तो चार 33 में क्या

302
00:23:05,760 --> 00:23:09,920
लिखा है उसमें तो वही बताया भाई इसमें संस्कृत

303
00:23:09,920 --> 00:23:14,400
में अरे मेरे पास हिंदी में नहीं आ रहा मैं हिंदी नहीं आता मुझे संस्कृत नहीं आती है

304
00:23:14,400 --> 00:23:18,400
अरे अपने पास वो वाली भगवत गीता हो तो जरा खोल के दिखा दीजिए

305
00:23:18,400 --> 00:23:23,440
गीता पृष्ठ प्रकाशित जो चार3

306
00:23:23,440 --> 00:23:29,080
ये देखिए पढ़िए इसमें क्या लिखा है

307
00:23:29,080 --> 00:23:33,120
हिंदी हे परम तप अर्जुन द्रव्यम में यज्ञ की अपेक्षा

308
00:23:33,120 --> 00:23:37,400
ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ

309
00:23:37,400 --> 00:23:41,440
है तथा यावन मात्र संपूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त

310
00:23:41,440 --> 00:23:45,680
हो जाते हैं। यानी ज्ञान यज्ञ को श्रेष्ठ कहा जा रहा

311
00:23:45,680 --> 00:23:49,680
है। ठीक है? ज्ञान है

312
00:23:49,680 --> 00:23:54,000
ज्ञान है कि है कौन सी है अभी बताओ आप अभी मैं बताऊंगा अभी एक एक

313
00:23:54,000 --> 00:23:58,000
करके चलो बहुत जल्दी भड़भड़ी में मत रहो मैं दम बताऊंगा

314
00:23:58,000 --> 00:24:02,160
ठीक है यहां से क्या निकला बताया गया उसे भी पढ़िए

315
00:24:02,160 --> 00:24:06,400
तत्व ज्ञान समस्त लीला अभी अभी मैं अभी अभी बात करेंगे बस हटा

316
00:24:06,400 --> 00:24:10,400
लीजिए हटा लीजिए स्क्रीन से इसको हटा लीजिए एक बार एक बार उसमें देख लीजिए

317
00:24:10,400 --> 00:24:14,400
ना पिछली वाली लेयर में क्या उसमें भी तो तत्व ज्ञान को बताया है अरे

318
00:24:14,400 --> 00:24:16,800
भाई ठीक है अभी यहाँ पर किसकी

319
00:24:16,800 --> 00:24:20,960
बात हो रही है ज्ञान यज्ञ और अगले श्लोक में कहा जा रहा है कि

320
00:24:20,960 --> 00:24:25,520
उस ज्ञान को तू तत्व ज्ञानियों के पास जाकर ले।

321
00:24:25,520 --> 00:24:29,520
ठीक है? यानी कि यानी कि

322
00:24:29,520 --> 00:24:34,080
ज्ञान यानी कि उस ज्ञान यानी ज्ञान यज्ञ का ज्ञान।

323
00:24:34,080 --> 00:24:38,160
पिछले श्लोक में क्या बताया जा रहा है? पिछले श्लोक में क्या

324
00:24:38,160 --> 00:24:42,160
बताया जा रहा है? उस ज्ञान को इस श्लोक में

325
00:24:42,160 --> 00:24:46,240
बताया जा रहा है उस ज्ञान को उस ज्ञान को तू तत्व

326
00:24:46,240 --> 00:24:50,400
दर्शी और ज्ञानियों के पास जाके ले और पिछले श्लोक में क्या है ज्ञान

327
00:24:50,400 --> 00:24:54,480
यज्ञ श्रेष्ठ है तो ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है उस

328
00:24:54,480 --> 00:25:00,480
ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाके ले यानी कि

329
00:25:01,800 --> 00:25:05,680
यानी मुक्ति के लिए

330
00:25:05,680 --> 00:25:09,760
यज्ञ करना पड़ेगा मुक्ति के लिए यज्ञ करना पड़ेगा इसका मतलब कहा मैंने कहा है

331
00:25:09,760 --> 00:25:13,920
क्या? मैंने कहा है क्या? मैं अभी आप भागिए मत।

332
00:25:13,920 --> 00:25:17,920
मैं कह रहा हूं ना जब आपसे मैं पूछ रहा था तो आपने कहा आप पढ़ो आप पढ़ो।

333
00:25:17,920 --> 00:25:21,920
अब जब मैं पढ़ रहा हूं बता रहा हूं तो आप बीच-बीच में बोल रहे।

334
00:25:21,920 --> 00:25:26,080
तो पिछले श्लोक में कहा गया कि ज्ञान यज्ञ अत्यंत

335
00:25:26,080 --> 00:25:30,120
श्रेष्ठ है। इस श्लोक में बोला गया उस ज्ञान को तू

336
00:25:30,120 --> 00:25:34,400
तत्वदर्शियों के पास जाकर ले। सहमत है आप इससे?

337
00:25:34,400 --> 00:25:38,400
यानी कि यानी कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान जिसको

338
00:25:38,400 --> 00:25:42,480
होता है। ज्ञान यज्ञ वो वाला यज्ञ नहीं होता है जो हवन किया जाता

339
00:25:42,480 --> 00:25:46,640
है। आहुति दी जाती है। ज्ञान यज्ञ का मतलब वो नहीं है। ज्ञान यज्ञ का

340
00:25:46,640 --> 00:25:51,040
मतलब मैं बताऊंगा। ग्रंथों से ही बताऊंगा। मगर फिलहाल

341
00:25:51,040 --> 00:25:55,600
बात ये है कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान जिसके पास होगा वो तत्वदर्शी

342
00:25:55,600 --> 00:26:00,240
है। ठीक है। ठीक है। आप आप साबित करिए।

343
00:26:00,240 --> 00:26:04,240
अरे साबित क्या करना है? यहां से साबित तो हो रहा है कि ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ

344
00:26:04,240 --> 00:26:08,720
है। उस ज्ञान को तू पा जाने तत

345
00:26:08,720 --> 00:26:12,720
पॉइंट तो वही आ रहा है ना जब ततशी ज्ञान यज्ञ बता दिया तो ज्ञान

346
00:26:12,720 --> 00:26:17,120
यज्ञ में और तत्व ज्ञान में क्या अंतर होता है गुण क्या है उसके नहीं नहीं

347
00:26:17,120 --> 00:26:21,280
मैं कह रहा हूं तत्वदर्शी वो है जो ज्ञान यज्ञ का

348
00:26:21,280 --> 00:26:25,360
ज्ञान देगा ठीक है ठीक है वो बात मानता हूं कि वो

349
00:26:25,360 --> 00:26:29,360
कौन सा ज्ञान है बताइए मैं मैं आगे चल रहा हूं भाई एक एक बात

350
00:26:29,360 --> 00:26:33,520
क्लियर करो बिल्कुल कि तत्वदर्शी कौन

351
00:26:33,520 --> 00:26:37,720
है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। ठीक

352
00:26:37,720 --> 00:26:42,160
है? क्लियर हो गया? जी क्लियर हो गया। अब आगे

353
00:26:42,160 --> 00:26:46,400
आपके अनुसार आपके अनुसार जो रामपाल है वो तत्वदर्शी

354
00:26:46,400 --> 00:26:49,680
है। ये भी क्लियर है।

355
00:26:49,680 --> 00:26:54,840
यानी कि वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले व्यक्ति

356
00:26:54,840 --> 00:26:58,880
हैं। क्लियर है ना? सुने आपने ज्ञान यज्ञ

357
00:26:58,880 --> 00:27:03,040
की बात करी है। ठीक है। वो ज्ञान देने वाले हैं। ठीक है? हम हमारा

358
00:27:03,040 --> 00:27:07,680
ज्ञान तो आपको जमना सही ना लग रहा है। भाई मैंने गीता से बात की है। तत्वदर्शी

359
00:27:07,680 --> 00:27:11,840
उसे कहा गया है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान दे। ठीक है?

360
00:27:11,840 --> 00:27:16,400
और आपके अनुसार रामपाल जो है वो तत्वदर्शी है।

361
00:27:16,400 --> 00:27:20,480
यानी कि उनको ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है। वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देते हैं।

362
00:27:20,480 --> 00:27:24,480
इसलिए वो तत्वदर्शी है। ठीक है? ज्ञान का भी

363
00:27:24,480 --> 00:27:28,560
देखो ज्ञान यज्ञ का भी ज्ञान देते हैं और जीवन का सफल करने

364
00:27:28,560 --> 00:27:32,640
के लिए भी ज्ञान यहां पे यहां पे तत्वदर्शी सुनो

365
00:27:32,640 --> 00:27:36,880
मेरी बात को समझो बहुत सारी बातें करने की जरूरत नहीं है मेरे भाई

366
00:27:36,880 --> 00:27:41,840
यहां पे तत्वदर्शी आपने जो चार 34 बोला है उसमें तत्वदर्शी

367
00:27:41,840 --> 00:27:46,080
ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले को कहा गया है अगर

368
00:27:46,080 --> 00:27:50,400
आपको और कुछ मिलाना है इसमें तो दूसरा श्लोक बता दो

369
00:27:50,400 --> 00:27:54,480
नहीं मिलाना नहीं आप अब उसका आप जो बोल ना जीवन का ये करते हैं वो करते

370
00:27:54,480 --> 00:27:58,720
हैं वो वो श्लोक बताइए यहां श्लोक में ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने

371
00:27:58,720 --> 00:28:02,720
वाले को तत्वदर्शी कहा गया है। अब मैं आगे चलूं। हमें सिद्ध

372
00:28:02,720 --> 00:28:06,800
करिए। हमने तो बता दिया। हमने तो बता दिया भाई जो पेड़ से लेकर पेड़ की जड़ से

373
00:28:06,800 --> 00:28:11,040
लेकर पत्ते तक का विभाग बता दे वो अवैध

374
00:28:11,040 --> 00:28:15,120
लिखा है क्या? एक मिनट एक मिनट वो

375
00:28:15,120 --> 00:28:19,280
श्लोक खोलो आप श्लोक खोलो। से

376
00:28:19,280 --> 00:28:25,280
वाला वो तो वही है 15 अध्याय

377
00:28:26,440 --> 00:28:32,200
श्लोक खोल लिया। बोल लिया

378
00:28:32,200 --> 00:28:38,200
पढ़ो 15 चार पढ़ो

379
00:28:38,880 --> 00:28:42,960
उस तत्व को ततशी ज्ञानी महापुरुष के पास जाकर

380
00:28:42,960 --> 00:28:47,040
समझ उनको दंड अरे अरे ये नहीं

381
00:28:47,040 --> 00:28:51,520
है 15वा अध्याय लगाओ ये हटाओ वही खोल दिया आपने

382
00:28:51,520 --> 00:28:55,920
आप आप अपने पास है कि भगवत गीता है कि नहीं आपके पास

383
00:28:55,920 --> 00:28:59,920
मेरे पास नहीं मैं ऑनलाइन देख रहा हूं मैं खाली वो लाइन देख रहा वो संस्कृत में आ रही है

384
00:28:59,920 --> 00:29:02,400
मेरे पास

385
00:29:02,400 --> 00:29:08,400
युगल सरकार डालो युगल सरकार आ जाएगा युगल

386
00:29:11,320 --> 00:29:15,680
सरकार 15 चार में लिखा है कि उसके

387
00:29:15,680 --> 00:29:21,520
पश्चात उस पर 15 चार पढ़ना है ना

388
00:29:21,520 --> 00:29:26,160
पढ़िए पढ़िए हां बिल्कुल 15 चार पढ़ना है क्या पढ़ना है

389
00:29:26,160 --> 00:29:31,040
15 एक दो पढ़ना 15 चार नहीं पढ़ना है। एक दो

390
00:29:31,040 --> 00:29:35,600
तो जब मैं पढ़ रहा हूं तो फिर क्यों कह रहे हो? पढ़िए पढ़िए आप पढ़िए। क्या है ये?

391
00:29:35,600 --> 00:29:39,760
मैं सुन नहीं पाया मैं उसी। हां तो सुन के बोलो ना। सुन नहीं

392
00:29:39,760 --> 00:29:45,440
पाया तो पूछो। चलो पढ़िए आप पढ़िए।

393
00:29:45,440 --> 00:29:51,440
यहां क्या शादी में आए हो क्या? पढ़ो पढ़ो आप पढ़ो।

394
00:29:56,160 --> 00:30:00,560
आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा

395
00:30:00,560 --> 00:30:04,720
रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते

396
00:30:04,720 --> 00:30:08,880
हैं तथा वेद जिस पत्ते कहे गए हैं उस संसार

397
00:30:08,880 --> 00:30:12,960
रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है वह वेद

398
00:30:12,960 --> 00:30:18,320
के तात्पर्य को जानने वाला है। इसमें कहां लिखा है तत्वदर्शी?

399
00:30:18,320 --> 00:30:22,400
तत्व को जानने वाला तत्व ज्ञान को जानने वाला है। अब भाई मैं कह

400
00:30:22,400 --> 00:30:26,400
रहा हूं यहां पर तत्वदर्शी शब्द आया है क्या? एक बार आप

401
00:30:26,400 --> 00:30:30,720
स्क्रीन पे शब्द आया है क्या?

402
00:30:30,720 --> 00:30:35,200
मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं। तुमने चार 34 से तत्वदर्शी

403
00:30:35,200 --> 00:30:39,200
उठाया है कि नहीं उठाया है? चार 34 को मानते हो

404
00:30:39,200 --> 00:30:43,200
कि नहीं मानते? सही बात लिखी है। गीता में मैं

405
00:30:43,200 --> 00:30:47,200
कहता हूं गीता में जो भी लिखा है वो सही लिखा है। मगर उसे दो

406
00:30:47,200 --> 00:30:51,280
प्रकार का ज्ञान है। मैं आपसे मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब

407
00:30:51,280 --> 00:30:55,920
कि चार 34 का जो श्लोक है वो सही है कि गलत है ये बताओ।

408
00:30:55,920 --> 00:31:00,000
वो सही है। सही है। वहां लिखा है कि तत्वदर्शी

409
00:31:00,000 --> 00:31:03,920
वो है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान दे।

410
00:31:03,920 --> 00:31:08,080
ठीक है। तो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले आपके जो महाराज

411
00:31:08,080 --> 00:31:12,400
जी है वो है इसलिए उनको तत्वदर्शी आपने कहा। मैंने

412
00:31:12,400 --> 00:31:16,960
तो पहले बताया ज्ञान से पहचान हुई हमारी तो हमने तो तुम पता नहीं किस

413
00:31:16,960 --> 00:31:21,520
उसे बता रहे हो। पता नहीं भाई साहब मैंने कहा यहां पे तत्वदर्शी

414
00:31:21,520 --> 00:31:25,760
जिसको कहा गया है। तत्वदर्शी उसे कहा गया है जिसको ज्ञान

415
00:31:25,760 --> 00:31:29,840
यज्ञ का ज्ञान है। अब भले ही तत्व से जानने वाले को कुछ भी कहा जाता

416
00:31:29,840 --> 00:31:34,360
हो। तत्व ज्ञाता कहा जाता हो। तत्व तत्व साक्षी कहा जाता हो,

417
00:31:34,360 --> 00:31:38,400
तत्व क्या कहते हैं? तत्वता कहा जाता

418
00:31:38,400 --> 00:31:42,480
हो, तत्व वक्ता कहा जाता हो, मगर तत्वदर्शी किसको कहा गया है?

419
00:31:42,480 --> 00:31:45,840
तत्वदर्शी कहा गया उसे जिसके जो ज्ञान

420
00:31:45,840 --> 00:31:50,000
यज्ञ का ज्ञान दे। समझ गए? अच्छा तो वो

421
00:31:50,000 --> 00:31:54,000
आप ज्ञान आप तो बताइए फिर अब हमें नहीं पता तो आप बताइए। नहीं आप

422
00:31:54,000 --> 00:31:58,320
मैं नहीं कह रहा हूं। पहले आप ये चीज क्लियर कर लो कि

423
00:31:58,320 --> 00:32:02,880
पहले आप ये चीज पहले आप पहले आप ये चीज क्लियर कर लो

424
00:32:02,880 --> 00:32:06,880
कि जो रामपाल जी है वो तत्वदर्शी है कि नहीं ये बताओ पहले

425
00:32:06,880 --> 00:32:11,200
तो हमारे गुरु जी तत्वदर्शी है तत्वदर्शी है

426
00:32:11,200 --> 00:32:15,440
यहां पे तत्वदर्शी किसे कहा जा रहा जिसको ज्ञान यज्ञ का ज्ञान

427
00:32:15,440 --> 00:32:19,600
हो और जो आपने पढ़ा जो 15 श्लोक दो

428
00:32:19,600 --> 00:32:23,600
तीन में देखा एक और तत्वदर्शी नहीं लिखा है उसमें

429
00:32:23,600 --> 00:32:27,600
तत्व ज्ञाता तत्व वेदों को जानने वाला लिखा है।

430
00:32:27,600 --> 00:32:31,120
तत्वदर्शी नहीं लिखा है।

431
00:32:31,120 --> 00:32:35,120
भाई फिर ज्ञान है कि मतलब पहले तो तुम एक बात पहले तो तुम एक

432
00:32:35,120 --> 00:32:39,280
बात क्लियर करो। मतलब तुम्हें चार 34 को नहीं मानते। मैं मानता

433
00:32:39,280 --> 00:32:43,440
हूं क्यों नहीं मानता हूं। तो मानते हो तो ये वाली बात मानते हो ना ज्ञान यज्ञ का ज्ञान

434
00:32:43,440 --> 00:32:47,440
देने वाला तत्वदर्शी है। हां है वो मैं मानता

435
00:32:47,440 --> 00:32:52,280
हूं। मगर मैं ये कहना चाहता हूं। आप समझे मैं क्या कहना चाहता हूं? पहले समझिए।

436
00:32:52,280 --> 00:32:56,400
बताइए जो ज्ञान बता रहे हो आप ज्ञान जानने

437
00:32:56,400 --> 00:33:00,640
वाला वो तत्व संत है ठीक है जो ठीक है 15

438
00:33:00,640 --> 00:33:01,280
अध्याय

439
00:33:01,280 --> 00:33:05,360
श्लोक एक और दो में बताया तत ज्ञान है बताने वाला वो

440
00:33:05,360 --> 00:33:09,760
वो तत संत हमने उससे पहचान कर ली कोई

441
00:33:09,760 --> 00:33:12,120
लिखा है

442
00:33:12,120 --> 00:33:16,240
क्या लिखा है क्या तत्व ज्ञान लिखा तत ज्ञान

443
00:33:16,240 --> 00:33:20,400
बताने वाला है तत्व ज्ञान रखने वाला तत्व ज्ञानी होता

444
00:33:20,400 --> 00:33:24,400
है तत्वदर्शी तो केवल वो भी हो सकता है जिसने दर्शन कर लिया

445
00:33:24,400 --> 00:33:27,480
किसी चीज का

446
00:33:27,480 --> 00:33:31,520
बस जी आप बात कहीं और ले जा रहे हो आप लेके जा रहे

447
00:33:31,520 --> 00:33:36,080
हो आप इस मामले से भटक रहे हो आपने 434 खुलवाया कि नहीं खुलवाया

448
00:33:36,080 --> 00:33:40,080
आपने खुलवाया आपसे मैं पूछना चाहता हूं वो ज्ञान कौन

449
00:33:40,080 --> 00:33:44,080
है चलो हमें नहीं है पता आप बताइए मैं अभी ये सब बातें नहीं कर रहा हूं कि

450
00:33:44,080 --> 00:33:48,080
वो ज्ञान किसका है मैं गलत हूं कि तुम गलत हो मैं अभी केवल ये

451
00:33:48,080 --> 00:33:52,160
जानना चाह रहा हूं कि क्या राम रामपाल जी चार 34 वाले

452
00:33:52,160 --> 00:33:56,240
तत्वदर्शी है कि नहीं है? वो है।

453
00:33:56,240 --> 00:34:00,320
है। ठीक है। यानी कि रामपाल जी तत्वदर्शी है

454
00:34:00,320 --> 00:34:04,480
क्योंकि उनके पास ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है। हां

455
00:34:04,480 --> 00:34:08,560
है। ठीक है। हां। क्योंकि वो ज्ञान

456
00:34:08,560 --> 00:34:13,920
यज्ञ का ज्ञान देते हैं इसलिए उनको तत्वदर्शी कहा जाता है।

457
00:34:13,920 --> 00:34:16,280
जी। ठीक

458
00:34:16,280 --> 00:34:20,320
है। ठीक है ना? हम अब एक

459
00:34:20,320 --> 00:34:24,720
काम करिए आप कि

460
00:34:24,720 --> 00:34:28,960
रामपाल जी द्वारा रचित गीता तेरा ज्ञान अमृत

461
00:34:28,960 --> 00:34:32,960
खोलिए नौवा अध्याय

462
00:34:32,960 --> 00:34:38,960
गरिमा गीता जी की गरिमा गीता की खोलिए नौवा अध्याय

463
00:34:48,720 --> 00:34:54,720
आप खोलिए बोलिए ऑपरेटर

464
00:35:01,400 --> 00:35:05,520
महोदय मैंने आपको अलग से भी उपलब्ध कराया था वो

465
00:35:05,520 --> 00:35:11,520
इस जगह का पिक्चर है

466
00:35:14,600 --> 00:35:19,200
जो अब हम लोग बात कर रहे हैं कि ज्ञान यज्ञ है क्या

467
00:35:19,200 --> 00:35:23,360
और उससे क्या मिलता है? ठीक है। ज्ञान

468
00:35:23,360 --> 00:35:27,520
यज्ञ है क्या? जिसका ज्ञान देने वाले को तत्वदर्शी

469
00:35:27,520 --> 00:35:31,880
कहा जा रहा है वो ज्ञान यज्ञ क्या है?

470
00:35:31,880 --> 00:35:36,240
तो पेज नंबर एक 180 गरिमा गीता

471
00:35:36,240 --> 00:35:40,400
जी का पिक्चर मैंने उपलब्ध कराया था। वो ऑपरेटर महोदय

472
00:35:40,400 --> 00:35:44,560
से एक बार दोबारा खुलवाइए। वो जो आपने अभी स्क्रीन

473
00:35:44,560 --> 00:35:50,560
पे खुलवाया था दोबारा खुलवाइए। आएगा आएगा। अभी आएगा अभी आएगा सामने

474
00:35:58,680 --> 00:36:02,960
आएगा कहां गए ऑपरेटर महोदय बहुत देर कर रहे हैं चलिए

475
00:36:02,960 --> 00:36:07,000
मैं तब तक यहीं से पढ़ देता हूं वेद

476
00:36:07,000 --> 00:36:11,640
मंत्रों या गीता के

477
00:36:11,640 --> 00:36:15,680
श्लोकों या संतों की वाणी

478
00:36:15,680 --> 00:36:19,680
व सत्संग सुनने को ज्ञान यज्ञ कहा जाता है। इससे मोक्ष

479
00:36:19,680 --> 00:36:24,200
नहीं होगा। ज्ञान यज्ञ क्या है? वेद

480
00:36:24,200 --> 00:36:28,240
मंत्र, गीता के श्लोक, संतों

481
00:36:28,240 --> 00:36:33,080
की वाणी और

482
00:36:33,080 --> 00:36:39,080
सत्संग 180 पेज नंबर 180 पेज नंबर

483
00:36:39,160 --> 00:36:43,280
180 इस बात को मैं मानता हूं। उससे मोक्ष एक मिनट एक मिनट भाई साहब

484
00:36:43,280 --> 00:36:47,360
भाई साहब एक मिनट एक मिनट एक मिनट 180 हां इसमें

485
00:36:47,360 --> 00:36:52,120
दूसरा पैराग्राफ अरे निकल गया ऊपर

486
00:36:52,120 --> 00:36:56,640
जाइए हां इसमें दूसरा पैराग्राफ दूसरे पैराग्राफ की

487
00:36:56,640 --> 00:36:59,960
चौथी

488
00:36:59,960 --> 00:37:04,600
लाइन दूसरे पैराग्राफ की चौथी

489
00:37:04,600 --> 00:37:08,640
लाइन हम बस बस का ऊपर क्यों जा रहा

490
00:37:08,640 --> 00:37:13,800
है ज्यादा चौथी लाइन क्या

491
00:37:13,800 --> 00:37:17,920
है कि गीता के श्लोकों या संतों

492
00:37:17,920 --> 00:37:22,040
की वाणी व सत्संग सुनने को ज्ञान यज्ञ कहा जाता है। इससे मोक्ष नहीं

493
00:37:22,040 --> 00:37:27,440
होता। यानी ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं होगा।

494
00:37:27,440 --> 00:37:32,080
ठीक है और बता देते हैं

495
00:37:32,080 --> 00:37:36,160
जो वो पांच यज्ञ वाला भी है एक मिनट भाई साहब मुझे

496
00:37:36,160 --> 00:37:40,880
अपनी बात पूरी कह देने दो। मेरे को अपनी बात पूरी कह देने दो।

497
00:37:40,880 --> 00:37:45,040
एक जगह और कहा है ना ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं। यज्ञों से मुक्ति

498
00:37:45,040 --> 00:37:48,840
नहीं होगी। वो आपको मैंने अलग से उपलब्ध कराया

499
00:37:48,840 --> 00:37:53,200
है। वो वहां से निकाल के दिखाइए। यज्ञों से मुक्ति

500
00:37:53,200 --> 00:37:57,680
नहीं होगी। फोटो के रूप में उपलब्ध है आपको।

501
00:37:57,680 --> 00:38:03,680
इसको हटा दीजिए। हो गया।

502
00:38:22,080 --> 00:38:26,160
तो एक जगह और इन्होंने कहा है कि यज्ञों

503
00:38:26,160 --> 00:38:30,560
से मुक्ति नहीं होती है और यज्ञ पांच प्रकार के हैं। उसमें से एक ज्ञान यज्ञ है।

504
00:38:30,560 --> 00:38:35,280
यानी कि ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होती। और तत्वदर्शी

505
00:38:35,280 --> 00:38:40,440
कौन है? जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देता

506
00:38:40,440 --> 00:38:44,480
है। ये देखिए यज्ञों

507
00:38:44,480 --> 00:38:48,960
यज्ञों से केवल सांसारिक सुविधाएं मिलती है। मुक्ति नहीं पढ़ लीजिए।

508
00:38:48,960 --> 00:38:52,960
ठीक है? और इसमें नीचे एक मिनट भाई साहब एक

509
00:38:52,960 --> 00:38:57,120
मिनट इसमें नीचे जाइए तो इसमें देखेंगे कि पांचो यज्ञ

510
00:38:57,120 --> 00:39:01,280
पांच प्रकार के यज्ञ उनमें से एक ज्ञान यज्ञ भी है।

511
00:39:01,280 --> 00:39:05,360
दिखाइए इनको ज्ञान यज्ञ भी है।

512
00:39:05,360 --> 00:39:09,760
बड़ा करिए इसको। ये देखिए ज्ञान यज्ञ पर इस समय अंडरलाइन

513
00:39:09,760 --> 00:39:14,000
कर दी गई है। तो ज्ञान यज्ञ भी है। यानी कि ज्ञान

514
00:39:14,000 --> 00:39:18,360
यज्ञ से मुक्ति नहीं होती। ये हमने आपको रामपाल द्वारा

515
00:39:18,360 --> 00:39:22,400
लिखित पुस्तकों से बता दिया। इसका

516
00:39:22,400 --> 00:39:27,120
मतलब रामपाल के अनुसार इसका मतलब रामपाल के अनुसार

517
00:39:27,120 --> 00:39:31,200
यदि वो यदि उसको तुम तत्वदर्शी कहते हो तो रामपाल

518
00:39:31,200 --> 00:39:35,360
के अनुसार वो मोक्ष देने वाला नहीं है। क्यों नहीं

519
00:39:35,360 --> 00:39:39,680
है? क्यों नहीं है? क्यों नहीं है? बताइए बताइए कैसे है? बताइए।

520
00:39:39,680 --> 00:39:43,680
आपने जो बताया है जो आपने बताया कि ज्ञान यज्ञ है।

521
00:39:43,680 --> 00:39:47,840
ठीक है? ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होएगी। एक होता है मंत्र जाप करने का कोई

522
00:39:47,840 --> 00:39:51,920
ज्ञान होता है सुख प्राप्त मैंने कहा ज्ञान यज्ञ है देखिए

523
00:39:51,920 --> 00:39:56,160
बात को भटकाइए मत मुझे लिखा दिखाइए ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होती है

524
00:39:56,160 --> 00:40:00,160
ये लिखा दिखाइए ज्ञान से कैसे मुक्ति हो जाएगी

525
00:40:00,160 --> 00:40:04,320
उससे तो यहां पर वर्तमान के सुख प्राप्त होएगा ना तो तो तत्वदर्शी

526
00:40:04,320 --> 00:40:09,120
कौन है संत रामपाल जी महाराज उसका ज्ञान

527
00:40:09,120 --> 00:40:13,440
भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं तत्वदर्शी कहा किसे गया है गीता में

528
00:40:13,440 --> 00:40:17,600
जो ज्ञान यज्ञ को जानने वाला है वो तत्वदर्शी संत है

529
00:40:17,600 --> 00:40:20,560
तो जो ज्ञान यज्ञ का जो ज्ञान

530
00:40:20,560 --> 00:40:24,960
यज्ञ का ज्ञान देगा वो तत्वदर्शी है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होगी नहीं

531
00:40:24,960 --> 00:40:29,200
होगी नहीं तो हम क्यों जाए रामपाल के पास आप

532
00:40:29,200 --> 00:40:33,280
कहां बात ले बैठ गए आप कहां सो रहे हो पहले ये बताओ अब उन्होंने उसमें

533
00:40:33,280 --> 00:40:37,360
क्या लिखा पहले समझो तो सही क्या लिखा है समझाओ समझाओ

534
00:40:37,360 --> 00:40:41,440
मैं क्या समझ मेरी औकात नहीं है समझाने की परमात्मा जा रहा है उसमें लिखा है

535
00:40:41,440 --> 00:40:45,680
जो ज्ञान यज्ञ को जानने वाला वो ततशी संत है ठीक है। पांच

536
00:40:45,680 --> 00:40:49,760
यज्ञ है जो आपने पहले बता मैं पूछ रहा हूं

537
00:40:49,760 --> 00:40:53,760
मैं पूछ रहा हूं तत्वदर्शी के पास जाना क्यों है? क्यों जाना है? ये

538
00:40:53,760 --> 00:40:57,840
बताइए गीता के अनुसार अपने अनुसार नहीं क्यों जाना है? गीता के अनुसार क्या

539
00:40:57,840 --> 00:41:01,840
लिखा है? क्यों जाना है? इसलिए जाना है अर्जुन को

540
00:41:01,840 --> 00:41:06,000
कह रहे अगर तू अगर सनातनी धर्म को प्राप्त भाई गीता के अनुसार

541
00:41:06,000 --> 00:41:10,000
तत्वदर्शी के पास जाने के लिए इसलिए कहा जा रहा है कि उसके पास जाके

542
00:41:10,000 --> 00:41:14,240
तुझे ज्ञान यज्ञ लेना है ज्ञान यज्ञ के

543
00:41:14,240 --> 00:41:18,560
लिए तुझे तत्वदर्शी के पास जाना है वही तो श्लोक 15

544
00:41:18,560 --> 00:41:22,720
के दो में भी तो बताया है कि तत्व ज्ञान देगा ज्ञान अग्नि देगा वहां पे तत्वदर्शी

545
00:41:22,720 --> 00:41:26,800
नहीं है वहां पे तत्वदर्शी शब्द नहीं है तत ज्ञान

546
00:41:26,800 --> 00:41:30,880
की तो बात हो रही है ना तज्ञ आप मुझे मुझे तत्वदर्शी के पास क्यों जाना

547
00:41:30,880 --> 00:41:36,160
है ये दिखाइए गीता से चार 34 को छोड़ के दिखाइए

548
00:41:36,160 --> 00:41:36,660
करवाने

549
00:41:36,480 --> 00:41:40,560
के लिए जाना है उसमें उसमें मुक्त करवाने के लिए तो जाना है

550
00:41:40,560 --> 00:41:44,720
ना मोक्ष करवाने के लिए मोक्ष करवाने के लिए देखिए

551
00:41:44,720 --> 00:41:48,720
तत्वदर्शी शब्द की शब्द जो उभाषित होता है वो होता है यहां

552
00:41:48,720 --> 00:41:53,120
से आपके अनुसार चार से चार 34 में तत्वदर्शी

553
00:41:53,120 --> 00:41:57,360
उसे कहा गया है जो ज्ञान यज्ञ देगा और ज्ञान यज्ञ से मुक्ति

554
00:41:57,360 --> 00:42:01,840
है नहीं यानी यानी कि अगर रामपाल तत्वदर्शी है

555
00:42:01,840 --> 00:42:06,160
एक मिनट एक मिनट यदि रामपाल तत्वदर्शी है

556
00:42:06,160 --> 00:42:10,160
तो वो मुक्ति देने वाले नहीं है। क्यों नहीं है?

557
00:42:10,160 --> 00:42:14,240
यज्ञ की बात हो रही है। मुक्ति देने की बात नहीं हो रही उसमें। अरे

558
00:42:14,240 --> 00:42:18,400
मेरे भाई वो तत्वदर्शी कौन है? बताओ।

559
00:42:18,400 --> 00:42:22,720
संत रामपाल जी महाराज है। गीता के अनुसार तत्वदर्शी

560
00:42:22,720 --> 00:42:26,880
की व्याख्या क्या है यहां पे? चार 34 में पांचो यज्ञ को

561
00:42:26,880 --> 00:42:31,200
जानता हो। उस तत्वदर्शी के पास

562
00:42:31,200 --> 00:42:35,880
उस तत्वदर्शी के पास तुझे ज्ञान यज्ञ का ज्ञान लेने जाना

563
00:42:35,880 --> 00:42:40,440
है। ज्ञान यज्ञ का ज्ञान तत्वदर्शी कौन

564
00:42:40,440 --> 00:42:44,480
है? एक मिनट तत्वदर्शी कौन है? जो ज्ञान

565
00:42:44,480 --> 00:42:47,840
यज्ञ का ज्ञान देता है।

566
00:42:47,840 --> 00:42:51,680
ठीक है? और ज्ञान यज्ञ के ज्ञान के लिए ही तत्वदर्शी

567
00:42:51,680 --> 00:42:55,840
के पास जाना है। वरना कहीं नहीं लिखा कि उसके लिए तू तत्वद के पास जा। आप

568
00:42:55,840 --> 00:43:00,800
जो 15 चार बताएंगे 15 दो बताएंगे 15 एक बताएंगे

569
00:43:00,800 --> 00:43:05,360
वहां पर तत्वदर्शी नहीं लिखा है तो पहले

570
00:43:05,360 --> 00:43:10,400
सुनो वेदों वहां पे वेदों को जानने वाला लिखा है

571
00:43:10,400 --> 00:43:14,480
बताई गई है आप दो जवाब फिर आप दो जवाब आप दो जवाब आप कह

572
00:43:14,480 --> 00:43:18,640
रहे हो कि ज्ञान है कि मोक्ष नहीं होता है ठीक है उसमें कहां लिखा है कि मोक्ष

573
00:43:18,640 --> 00:43:23,120
नहीं होएगा उसमें लिखा है कि ज्ञान है बगैर तेरा कुछ नहीं होएगा ज्ञान जरूरी है

574
00:43:23,120 --> 00:43:27,120
उसमें लिखा है आप ये आपके रामपाल लिखते हैं। हम नहीं कह

575
00:43:27,120 --> 00:43:31,360
रहे हैं। ये आपके रामपाल कह रहे हैं। रामपाल से कहो गलत क्यों लिख रहे हो? सुनो

576
00:43:31,360 --> 00:43:35,440
सुनो। ज्ञान है ना जो उसको चाहने वाले से मुक्त नहीं होएगा। से

577
00:43:35,440 --> 00:43:39,680
मुक्ति नहीं होगी। ये रामपाल लिख रहे हैं। आप रामपाल को कहिए

578
00:43:39,680 --> 00:43:43,680
क्यों लिखा है? हम तो यही कह रहे है ना कि रामपाल ने खिचड़ी पकाई

579
00:43:43,680 --> 00:43:48,320
है। गलत मत सिद्ध करिए मुझे। हिमांशी जी गलत सिद्ध मत करिए। वो

580
00:43:48,320 --> 00:43:52,640
गलत है तो गलती सिद्ध होंगे। हम अपना अपना पक्ष रख रहे है केवल।

581
00:43:52,640 --> 00:43:57,280
पहले सुनिए आप सुन रहे नहीं है जो को

582
00:43:57,280 --> 00:44:01,600
है ठीक है जो ज्ञान है वो उससे मोक्ष नहीं होएगा कैसे हो जाएगा सत्संग

583
00:44:01,600 --> 00:44:05,680
सुनने से कभी मोक्ष होता है मैंने क्या कहा भाई साहब आप जो

584
00:44:05,680 --> 00:44:07,120
भी बोल रहे है लिखा दिखाइए

585
00:44:07,120 --> 00:44:11,280
मैंने जो भी बोला है लिखा लिखाया है सुनो मैंने जो भी बोला है लिखा लिखाया

586
00:44:11,280 --> 00:44:16,240
है आप जो है मुझे आप मुझे तत्वदर्शी के पास जाना

587
00:44:16,240 --> 00:44:20,320
आप शास्त्रों से आप शास्त्रों से तत्वदशी

588
00:44:20,320 --> 00:44:24,320
आप शास्त्रों से सिद्ध करिए कि तत्वदर्शी कोई

589
00:44:24,320 --> 00:44:28,320
होता है। सुनिए आप शास्त्रों से पहले तत्वदर्शी कोई होता

590
00:44:28,320 --> 00:44:32,320
है। यह सिद्ध करिए और फिर शास्त्रों से मुझे ये दिखाइए कि उसके

591
00:44:32,320 --> 00:44:36,880
पास मुझे जाना है। सुनिए उसमें बता तो दिया गया

592
00:44:36,880 --> 00:44:40,960
संत के पास जा। तो वहां पे वहां पे ये बताया गया ना किस लिए

593
00:44:40,960 --> 00:44:45,200
जाना है वहां ये बताया गया ना किस लिए जाना है वहां ये बताया गया तुझे

594
00:44:45,200 --> 00:44:49,360
ज्ञान यज्ञ के ज्ञान को लेने जाना है मान

595
00:44:49,360 --> 00:44:53,760
जी ज्ञान यज्ञ को लेने जाना है बहुत सही बात है अब ठीक है बात

596
00:44:53,760 --> 00:44:57,840
अच्छी बात है तुम्हें ज्ञान के लेना पड़ेगा नहीं तो उससे मुक्त नहीं होएगा उसे उसे भी

597
00:44:57,840 --> 00:45:02,160
जरूरत है पांच है तो पांच एक जरूरी है ठीक है

598
00:45:02,160 --> 00:45:06,400
आप आपने भी कुछ बनाया है तो खाली सेक्शन सुनने से नहीं हुआ मुझे भाई साहब

599
00:45:06,400 --> 00:45:10,800
ये बताइए मैं तत्वदर्शी के पास वो कौन सी चीज है

600
00:45:10,800 --> 00:45:16,800
जिसको लेने में जाऊं? शास्त्रों से बताइए

601
00:45:18,480 --> 00:45:22,720
शास्त्रों से वही प्रमाण है। देखो जी आप कर रहे हो देखो

602
00:45:22,720 --> 00:45:26,880
मैं वही कहना आप आप है ना वो बात नहीं कर रहे हो जो आपके पास

603
00:45:26,880 --> 00:45:30,960
प्रमाण है। इसके अलावा तत्वदर्शी के पास जाने के लिए तत्वदर्शी

604
00:45:30,960 --> 00:45:35,120
कौन होता है? या तत्वदर्शी होता है? है प्रमाण

605
00:45:35,120 --> 00:45:39,400
कोई? हां है ना है ना रुको और भी देते प्रमाण तो

606
00:45:39,400 --> 00:45:44,240
आपको तत्वदशी लिखा होना चाहिए ये ध्यान रखिएगा

607
00:45:44,240 --> 00:45:48,480
अब बताइए मुझे तत्वदर्शी के लिए तो कई ऐसे श्लोक

608
00:45:48,480 --> 00:45:52,720
है जो मैंने उस मुद्दे पे नहीं आया था खाली परमात्मा के बारे में बताने आया था

609
00:45:52,720 --> 00:45:56,880
लिखा दिखाइए मुझे जो आप कह रहे हैं कि तत्वदर्शी

610
00:45:56,880 --> 00:46:00,880
के पास ये भी होता है वो भी होता है उसके लिए मुझे तत्वदशी वहां लिखा

611
00:46:00,880 --> 00:46:05,520
दिखाओ

612
00:46:05,520 --> 00:46:10,080
एक मिनट बोल दिखाते कोई अध्याय दो श्लोक

613
00:46:10,080 --> 00:46:14,720
15 और 16 में भी कहा गया है। ठीक है गीता अध्याय

614
00:46:14,720 --> 00:46:20,720
दो श्लोक 15 और 16 खोलिए एक बार

615
00:46:29,160 --> 00:46:33,120
हां हां बताइए

616
00:46:33,120 --> 00:46:37,120
गीता अध्याय दो 15 श्लोक

617
00:46:37,120 --> 00:46:41,120
15 खोलिए पहले फिर उसके बाद शब्द पढ़िए आप पहले 15 खोलिए

618
00:46:41,120 --> 00:46:45,120
अरे भाई साहब मैंने तो पढ़ा है इसको इसमें तत्व तत्वदर्शी के बारे में

619
00:46:45,120 --> 00:46:49,440
लिखा हुआ है इसको आप बताइए आप सिद्ध क्या कर रहे हैं वो बताइए

620
00:46:49,440 --> 00:46:53,440
मुझे हिमांशु जी आप कह रहे और बताइए तत्वदर्शी कहां लिखा

621
00:46:53,440 --> 00:46:57,960
है तो 16 में तो लिखा 16 तो भाई इसको अपनी मामले से कनेक्ट तो

622
00:46:57,960 --> 00:47:02,320
करो इसको अपने मामले से जोड़ोगे कि नहीं जोड़ोगे ऐसे

623
00:47:02,320 --> 00:47:06,480
तो सुनो ऐसे तो तत्वदर्शी बहुत जगह लिखा है। तत्वदर्शी

624
00:47:06,480 --> 00:47:10,640
महाभारत में भागवत में लिखा है। आप वो आपसे कनेक्ट होना

625
00:47:10,640 --> 00:47:14,640
चाहिए। आप उसको अपने प्रसंग आप उसको अपने प्रसंग से

626
00:47:14,640 --> 00:47:18,680
कनेक्ट करो। भगत जी सुनिए पहले बात। आपने

627
00:47:18,680 --> 00:47:20,720
कहा है पांच यज्ञ बगैर

628
00:47:20,720 --> 00:47:24,880
मोक्ष नहीं पा सकते। भगत जी पहले आप ये ध्यान दीजिए। भाई साहब मैंने क्या

629
00:47:24,880 --> 00:47:29,120
पूछा है आपसे? आप मेरे को तत्वदर्शी

630
00:47:29,120 --> 00:47:33,120
कौन है? यह शास्त्र से सिद्ध करो। और उसके पास मुझे जाना है।

631
00:47:33,120 --> 00:47:37,120
ये शास्त्र से सिद्ध करो। बस अब बता तो

632
00:47:37,120 --> 00:47:41,120
दिया आपके कितनी बार बताया जो क्या बता दिया आपने कहा दो श्लोक 16

633
00:47:41,120 --> 00:47:45,600
खोलो अब मैं कह रहा हूं कि इसमें क्या लिखा है आप पढ़ के सुना दो जनता को भाई

634
00:47:45,600 --> 00:47:50,080
इससे आपका मामला कहां से हल हो रहा है आप स्क्रीन पे खोले

635
00:47:50,080 --> 00:47:54,080
स्क्रीन पे खोले ना उसे स्क्रीन पर खोले एक बार आपके पास नहीं है

636
00:47:54,080 --> 00:47:57,880
क्या भगवत गीता नहीं है

637
00:47:57,880 --> 00:48:02,000
क्या हो चलो खोलो भैया हिमांशु

638
00:48:02,000 --> 00:48:06,560
जी आप तो वैभवी बात कर रहे हो। दूसरे अध्याय का 16वा श्लोक खोलिए।

639
00:48:06,560 --> 00:48:10,880
जय दयाल गो का जी वाला। अध्याय दो श्लोक

640
00:48:10,880 --> 00:48:14,160
15

641
00:48:14,160 --> 00:48:18,320
अरे हमें पता है तत्वदर्शी कहां कहा गया है उसमें? 16व में कहा गया है। बोलो

642
00:48:18,320 --> 00:48:20,720
भैया।

643
00:48:20,720 --> 00:48:26,720
16 15 दोनों में ही है।

644
00:48:27,360 --> 00:48:31,360
अच्छा आप एक बात और बता दीजिए। एक मिनट हटा

645
00:48:31,360 --> 00:48:35,520
लो एक मिनट एक मिनट और हटा लो एक मिनट हटा लो इसको आपके

646
00:48:35,520 --> 00:48:39,520
हिसाब से काल तत्वदर्शी है कि नहीं है काल

647
00:48:39,520 --> 00:48:42,880
गीता बोलने वाला

648
00:48:42,880 --> 00:48:46,960
काल तत्वदर्शी कैसे हो गया वो काल तत्वदर्शी हो गया तो फिर क्या बात अलग हो

649
00:48:46,960 --> 00:48:51,120
जाएगी ना वो ततशी ज्ञान अलग अरे मैं पूछ रहा हूं मना कर दो ना यार इतना लंबा

650
00:48:51,120 --> 00:48:56,000
क्यों बोलते हो आप लोग वो मना कर दो नहीं काल तत्वदर्शी नहीं है

651
00:48:56,000 --> 00:49:00,480
ऐसा नहीं है वो काल तत्वदर्शी है वो अलग कहानी है वो उसकी अलग व्यक्ति

652
00:49:00,480 --> 00:49:04,960
तत्वदर्शी है नहीं है वो नहीं है नहीं

653
00:49:04,960 --> 00:49:08,960
है वो है ही नहीं है तत्वदर्शी संत रामपाल जी कितनी तरह की बातें बोलोगे अभी कह

654
00:49:08,960 --> 00:49:13,040
रहे थे है क्यों नहीं है वो अलग ज्ञान दे रहा है ना उसका

655
00:49:13,040 --> 00:49:17,120
अलग तत्व है मैं कह रहा हूं काल तत्वदर्शी है आपके अनुसार

656
00:49:17,120 --> 00:49:21,120
कि नहीं है ये बताइए नहीं है नहीं है श्री

657
00:49:21,120 --> 00:49:25,760
कृष्ण भगवान तत्वदर्शी है कि नहीं है नहीं है

658
00:49:25,760 --> 00:49:29,920
नहीं है हां

659
00:49:29,920 --> 00:49:34,120
अब खोलिए

660
00:49:34,120 --> 00:49:38,160
भैया। पढ़िए भाई। दो में तत्वदर्शी किसे कहा

661
00:49:38,160 --> 00:49:42,680
गया?

662
00:49:42,680 --> 00:49:46,800
पढ़िए। मैं पढ़ देता हूं। असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और

663
00:49:46,800 --> 00:49:51,360
सत का अभाव नहीं होता। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व तत्वदर्शी

664
00:49:51,360 --> 00:49:56,880
पुरुषों द्वारा देखा गया है। ठीक है?

665
00:49:56,880 --> 00:49:59,200
तो

666
00:49:59,200 --> 00:50:03,680
यहां पर कहा गया असत वस्तु की सत्ता नहीं होती

667
00:50:03,680 --> 00:50:08,320
और सत वस्तु का अभाव नहीं होता। इस प्रकार

668
00:50:08,320 --> 00:50:12,400
आपने वो हिमांशु जी वो नीचे श्लोक क्यों कर दिया ऊपर

669
00:50:12,400 --> 00:50:14,800
कर

670
00:50:14,800 --> 00:50:18,880
अभी निकाला था हटा दिया वो निकाला था निकाल दो भैया दोबारा

671
00:50:18,880 --> 00:50:23,600
लगा दो 16वा है 16वा 16वा इसके आगे वाला

672
00:50:23,600 --> 00:50:27,840
अलग अलग कर कोई बात नहीं 15वा निकाल

673
00:50:27,840 --> 00:50:32,480
ये आ गया। अब दोबारा सुन लो।

674
00:50:32,480 --> 00:50:36,640
असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत का

675
00:50:36,640 --> 00:50:41,280
अभाव नहीं होता। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व

676
00:50:41,280 --> 00:50:44,920
तत्वदर्शी पुरुषों द्वारा देखा गया है। ठीक

677
00:50:44,920 --> 00:50:50,520
है? तो यहां पर तत्वदर्शी कौन

678
00:50:50,520 --> 00:50:55,680
है? पहले तो आप अपना पक्ष रख दो। फिर मैं अपनी बात बताऊं।

679
00:50:55,680 --> 00:51:00,320
इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी कौन है?

680
00:51:00,320 --> 00:51:04,640
इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही रहेंगे।

681
00:51:04,640 --> 00:51:08,640
मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि उसका नाम क्या है? उसके लक्षण क्या

682
00:51:08,640 --> 00:51:13,200
है? उसके गुण क्या है? वो बताओ इस श्लोक के अनुसार।

683
00:51:13,200 --> 00:51:17,640
समा गुण तो वही है ना जो तत्व ज्ञान दे। अब वाली बात का

684
00:51:17,640 --> 00:51:21,920
है पांच में इस श्लोक में

685
00:51:21,920 --> 00:51:26,880
इस श्लोक में तत्वदशी के कुछ लक्षण बताए गए हैं।

686
00:51:26,880 --> 00:51:30,880
अब 16 खोलिए उसमें लक्षण पूरा मिल जाएगा आपको। 16 ही तो पढ़ा है

687
00:51:30,880 --> 00:51:35,760
ये। इसमें लक्षण बताए तो गए हैं। असत वस्तु को

688
00:51:35,760 --> 00:51:39,760
असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत वस्तु का अभाव

689
00:51:39,760 --> 00:51:43,760
नहीं होता। इस प्रकार जो दो इन दोनों

690
00:51:43,760 --> 00:51:47,760
को तत और असत को इस प्रकार जानता

691
00:51:47,760 --> 00:51:52,480
है वो तत्वदर्शी कहा गया है दो6 में

692
00:51:52,480 --> 00:51:56,480
कौन कहा गया है दोबारा बताइए तत्व

693
00:51:56,480 --> 00:51:59,920
सत्य को ना जानते है ना वो तत्वदर्शी संत को कहा गया है ठीक

694
00:51:59,920 --> 00:52:04,560
है मगर तुम यार भाई आगे क्यों भागते हो

695
00:52:04,560 --> 00:52:09,040
इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी वो है जो सत्य

696
00:52:09,040 --> 00:52:13,040
और असत कि इस प्रकृति को जानता हो, इस भाव

697
00:52:13,040 --> 00:52:17,200
को जानता हो, इस लक्षण को जानता हो कि सत्य का अभाव नहीं

698
00:52:17,200 --> 00:52:21,360
होता और असत का कभी असत की कभी सत्ता नहीं होती।

699
00:52:21,360 --> 00:52:25,520
जो इसको जानता है वो तत्वदर्शी है।

700
00:52:25,520 --> 00:52:30,160
वो है वो तो पहचान है। ठीक है। ठीक है। हां।

701
00:52:30,160 --> 00:52:34,160
अब ये बताओ कि ये बात यहां बताई किसने है? असत वस्तु की

702
00:52:34,160 --> 00:52:38,560
सत्ता नहीं है और सत का अभाव नहीं है। किसने बोली ये बात?

703
00:52:38,560 --> 00:52:42,640
ये काल ने बोली है अर्जुन के सामने काल काल

704
00:52:42,640 --> 00:52:46,640
ने बोली है तो यानी कि वो ये जानता है कि

705
00:52:46,640 --> 00:52:50,880
एक मिनट यानी कि काल ये जानता है कि असत वस्तु की सत्ता

706
00:52:50,880 --> 00:52:54,880
नहीं है और सत वस्तु का अभाव नहीं है। काल ये जानता है। तभी

707
00:52:54,880 --> 00:52:57,600
तो बोल रहा है।

708
00:52:57,600 --> 00:53:01,600
उसे अभाव नहीं है। उसे पता नहीं है। उस परमात्मा के बारे में पता नहीं

709
00:53:01,600 --> 00:53:05,840
है कि यहां पर है वो। ठीक है। उसे अभाव नहीं है सत्य के बारे में। देखो समान

710
00:53:05,840 --> 00:53:09,680
बाकी तुम्हारी [हंसी]

711
00:53:09,680 --> 00:53:12,880
मेरी बात सुनो।

712
00:53:12,880 --> 00:53:15,200
एक मिनट हटाइए। ये

713
00:53:15,200 --> 00:53:19,440
बात कौन बोल रहा है? असत वस्तु की सत्ता नहीं है और सत

714
00:53:19,440 --> 00:53:23,520
वस्तु का अभाव नहीं है। ये बात कौन बोल रहा है? ये तो श्री कृष्ण

715
00:53:23,520 --> 00:53:27,760
के शरीर में प्रवेश करके काल बोल रहे है। ना काल। ठीक है? तो

716
00:53:27,760 --> 00:53:31,840
काल जो बोल रहा है और यहां यह भी बताया गया है कि

717
00:53:31,840 --> 00:53:36,160
इस प्रकार जो बोला गया है उस प्रकार

718
00:53:36,160 --> 00:53:40,320
दोनों को तत्व से जानने वाला तत्वदर्शी है। इस प्रकार तो

719
00:53:40,320 --> 00:53:44,640
यानी कि काल अगर बोल रहा है कि असत वस्तु की सत्ता नहीं होती।

720
00:53:44,640 --> 00:53:48,640
सत वस्तु का अभाव नहीं होता। तो काल ये जानता है ना कि असत

721
00:53:48,640 --> 00:53:53,280
वस्तु का क्या होता है? और सत वस्तु का क्या नहीं होता है। काल

722
00:53:53,280 --> 00:53:57,600
जानता है ना दोनों समझने वाला दोनों

723
00:53:57,600 --> 00:54:01,600
को समझने वाला मैं कह रहा हूं इस प्रकार मैं कह रहा हूं इस

724
00:54:01,600 --> 00:54:06,160
प्रकार जो बताया जा रहा है उस प्रकार

725
00:54:06,160 --> 00:54:10,160
दोनों प्रकार मैं कह रहा हूं मेरी बात आप

726
00:54:10,160 --> 00:54:14,960
देखिए आप जो बोल रहे हैं वो लिखा दिखाइए चलिए अब

727
00:54:14,960 --> 00:54:19,040
से लिखा दिखाया आप खुद ही मैं बोल तो रहा हूं जो यहां पे

728
00:54:19,040 --> 00:54:23,520
पहली लाइन लिखी हुई है उसके बाद लिखा हुआ है इस प्रकार

729
00:54:23,520 --> 00:54:27,760
दोनों का ही तत्व से जानने वाला दोनों को ही तत्व

730
00:54:27,760 --> 00:54:30,320
से जानने वाला तत्वदर्शी है। इस प्रकार

731
00:54:30,320 --> 00:54:34,400
किस प्रकार सत वस्तु का अभाव नहीं होता और असत वस्तु की

732
00:54:34,400 --> 00:54:38,960
सत्ता नहीं होती। तो यानी कि काल ये जानता है

733
00:54:38,960 --> 00:54:42,960
काल जो बोल रहा है वो ये जानता है कि सत वस्तु

734
00:54:42,960 --> 00:54:46,960
का अभाव नहीं होता और असत वस्तु की सत्ता नहीं होती।

735
00:54:46,960 --> 00:54:51,120
और क्योंकि वो ये जानता है तो इस प्रकार जानने वाला होते हुए

736
00:54:51,120 --> 00:54:55,200
काल तो यहां पर तत्वदर्शी सिद्ध हो गया। अगर तुम इस श्लोक को वो नहीं मानते

737
00:54:55,200 --> 00:55:00,160
काल ने अपने मन से बोला है अपने मन से तो नहीं बोला

738
00:55:00,160 --> 00:55:04,480
सुनिए आप सुनिए आप एक मिनट एक मिनट पहले तो तुम ये क्लियर

739
00:55:04,480 --> 00:55:08,560
एक मिनट पहले तो तुम ये क्लियर कर दो कि काल ने श्लोक अपने मन

740
00:55:08,560 --> 00:55:12,880
से बोला है कि नहीं बोला है अगर बोला है तो इस श्लोक के हिसाब से काल तत्वदर्शी

741
00:55:12,880 --> 00:55:16,800
सिद्ध हो रहा है

742
00:55:16,800 --> 00:55:20,880
ततशी संत है ना वो अलग है ठीक है आप कह रहे हो उसमें सिद्ध हो रहा है वो कैसे

743
00:55:20,880 --> 00:55:25,120
काल सिद्ध हो जाएगा समान अभी हमको आप अभी हमको

744
00:55:25,120 --> 00:55:29,280
यहां पर लेकर आए हो। दो 16 पर लेकर आए हो। हां

745
00:55:29,280 --> 00:55:34,080
बिल्कुल 16 तो यहां पे यहां के श्लोक के अनुसार

746
00:55:34,080 --> 00:55:38,240
काल जो है वो तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है। अब आप ये बताइए श्लोक

747
00:55:38,240 --> 00:55:42,320
को आप मानेंगे कि नहीं मानेंगे? नहीं हो रहा। तत्वदर्शी संत

748
00:55:42,320 --> 00:55:46,560
हो ही नहीं रहा वो सिद्ध। किस हिसाब से आप उसका अर्थ ही उल्टा लगा रहे हो? क्या अर्थ

749
00:55:46,560 --> 00:55:50,560
है आप बताओ? चलो दुनिया की बात छोड़ दे। काफी लंबी

750
00:55:50,560 --> 00:55:54,560
वीडियो होगी आपकी। आप बताइए तदशी तत्व कौन है उसकी पहचान आप

751
00:55:54,560 --> 00:55:58,640
बताइए चलो हम तो पागल है जैसे भी अब आप बताइए हम लोग तो

752
00:55:58,640 --> 00:56:02,640
पागल है अब हमें तो जगाओ फिर आप जगाओ आप चलो हम तो लोग तो पागल है आप जगाओ

753
00:56:02,640 --> 00:56:06,760
के कहां पहचान है कौन है शंकराचार्यदर्शी संत तो बताओ आप

754
00:56:06,760 --> 00:56:11,760
बताओ चलो आप बता दो फिर ब्रह्मा

755
00:56:11,760 --> 00:56:16,240
बता देते हैं बताओ फिर आप बताओ

756
00:56:16,240 --> 00:56:20,320
ऐसा है कि वेद में

757
00:56:20,320 --> 00:56:24,560
कहा गया है कि

758
00:56:24,560 --> 00:56:29,040
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है।

759
00:56:29,040 --> 00:56:32,640
11 पांच 16 मनुस्मृति

760
00:56:32,640 --> 00:56:36,800
में कहा गया है 112 से 100 14 में 12

761
00:56:36,800 --> 00:56:41,120
अध्याय में कि धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता

762
00:56:41,120 --> 00:56:45,760
एक मिनट अब बोलो मत बीच में धर्म में संशय होने पर

763
00:56:45,760 --> 00:56:50,320
धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए

764
00:56:50,320 --> 00:56:54,880
और भगवत गीता में अनेकानेक बार वैराग्य

765
00:56:54,880 --> 00:56:58,960
की बात हो रही है किसकी बात हो रही है वैराग्य विरक्त कि जो

766
00:56:58,960 --> 00:57:02,960
भी व्यक्ति उसका जो लक्षण होता है उसके अंदर जो

767
00:57:02,960 --> 00:57:07,120
प्रमुख लक्षण है वो है वैराग्य यानी कि सन्यास विरक्त

768
00:57:07,120 --> 00:57:11,200
होना चाहिए तो पहला लक्षण क्या आया

769
00:57:11,200 --> 00:57:13,760
विरक्ति

770
00:57:13,760 --> 00:57:17,840
ठीक है दूसरा लक्षण क्या आया कि

771
00:57:17,840 --> 00:57:21,880
एवं परंपरा प्राप्तिमम भगवत गीता चार दो

772
00:57:21,880 --> 00:57:26,000
मुंडकोपनिषद में जो ऋषि हैं वो अपनी

773
00:57:26,000 --> 00:57:30,000
परंपरा बता रहे हैं जो वैदिक डिक्शनरी जिसे कहा

774
00:57:30,000 --> 00:57:34,240
जाता है निरुक्त उसमें कहा जा रहा है कि परंपरा

775
00:57:34,240 --> 00:57:38,400
से प्राप्त ज्ञान ही होता है ज्ञान परंपरा परंपरा के बारे

776
00:57:38,400 --> 00:57:42,720
में बात की जा रही है उसमें 13 वे अध्याय के संभता

777
00:57:42,720 --> 00:57:46,720
दूसरे पाद में कहा जा रहा है कि भले ही व्यक्ति के पास

778
00:57:46,720 --> 00:57:47,840
तर्क हो

779
00:57:47,840 --> 00:57:51,920
मगर श्रुति परंपरा से परंपरा से जो श्रुति परंपरा श्रुति

780
00:57:51,920 --> 00:57:56,080
वाक्य में प्राप्त होते हैं श्रुति उसका प्रमाण ना हो

781
00:57:56,080 --> 00:58:00,160
तो उसका तो ज्ञान है वह अमान्य होता है।

782
00:58:00,160 --> 00:58:04,400
इस प्रकार से परंपरा हो जाता है। दूसरा लक्षण

783
00:58:04,400 --> 00:58:09,120
तीसरा लक्षण होता है समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में

784
00:58:09,120 --> 00:58:13,200
सामंजस्य की शिक्षा ही साधु सम्मत धर्म

785
00:58:13,200 --> 00:58:17,840
है। ठीक है? और चौथा लक्षण है।

786
00:58:17,840 --> 00:58:21,840
चौथा लक्षण है। अद्वैत का उपनिषद जो

787
00:58:21,840 --> 00:58:26,000
तीसरा लक्षण बताया मैंने मत्स्य पुराण से था। 145वा अध्याय

788
00:58:26,000 --> 00:58:30,320
52वा श्लोक श्रोत स्मार्थ धर्म का युक्ति

789
00:58:30,320 --> 00:58:35,280
युक्त मतलब पूर्ण रूप से पालन करने वाला ही साधु संवत धर्म का

790
00:58:35,280 --> 00:58:39,360
अंत में अद्व तारका उपनिषद के अनुसार गुरु शब्द

791
00:58:39,360 --> 00:58:43,520
की जो व्याख्या है गुरु गुरु शब्द की व्याख्या है

792
00:58:43,520 --> 00:58:47,600
उसके अनुसार गुरु का मतलब अंधकार गुरु का मतलब निकालने वाला जो

793
00:58:47,600 --> 00:58:52,000
व्यक्ति अज्ञानता को मिटाए वही आपका गुरु हो सकता है अंधकार

794
00:58:52,000 --> 00:58:56,240
को मिटाए तो ये चारों जिस पर अप्लाइड हो जाएंगे।

795
00:58:56,240 --> 00:59:00,480
लक्षण से वो सन्यासी हो। ज्ञान उसका परंपरा

796
00:59:00,480 --> 00:59:03,200
प्राप्त हो। आउटपुट में वो

797
00:59:03,200 --> 00:59:07,280
समस्त शति स्मृति शास्त्रों का सामंजस्य करते हुए

798
00:59:07,280 --> 00:59:11,520
शिक्षा देता हो। अंतत गथवा अपने शिष्य

799
00:59:11,520 --> 00:59:16,320
का संशय दूर कर देता हो। वो होता है

800
00:59:16,320 --> 00:59:21,840
तत्वदर्शी, तत्वज्ञानी, आचार्य या गुरु।

801
00:59:21,840 --> 00:59:26,160
तो इसके लिए हमें बेराग होना पड़ेगा। एक मिनट

802
00:59:26,160 --> 00:59:31,200
एक मिनट आपको नहीं। अब जैसे मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूं।

803
00:59:31,200 --> 00:59:35,200
एक मिनट एक मिनट हिमांशु जी आपने कहा कि होकर ही वो

804
00:59:35,200 --> 00:59:39,440
प्राप्ति होएगी। ठीक है। आपने खुद अपने तो

805
00:59:39,440 --> 00:59:43,440
क्या बैराग होने से हमारी मोक्ष हो सकती है? और जो दुनिया

806
00:59:43,440 --> 00:59:47,600
आपने मुझसे ये पूछा है कि तत्व ज्ञानी तत्वदर्शी किसे कहते

807
00:59:47,600 --> 00:59:51,680
हैं? तो शास्त्रों के अनुसार उसकी जो व्याख्या बताई गई है उसका जो

808
00:59:51,680 --> 00:59:56,680
लक्षण बताया गया है वो विरक्तता है। उसके अंदर विरक्ति होती

809
00:59:56,680 --> 01:00:00,800
है। केवल विरक्ति होना ही मात्र इस बात का कारण नहीं है

810
01:00:00,800 --> 01:00:04,960
कि उससे मुक्ति हो जाएगी। इस बात को भी समझिए। किसी

811
01:00:04,960 --> 01:00:09,040
व्यक्ति ने तुम्हारे रामपाल ने ही कहा है। सुनो। रामपाल

812
01:00:09,040 --> 01:00:13,200
ने ही कहा है कि व्यक्ति के पास व्यक्ति जो है

813
01:00:13,200 --> 01:00:17,520
इंद्रियों पर नियंत्रण कर ले हठ पूर्वक। ठीक है?

814
01:00:17,520 --> 01:00:18,640
और वो

815
01:00:18,640 --> 01:00:22,880
अपने मन में भगवान की भक्ति ना करे, चिंतन मनन उसका अच्छा ना हो

816
01:00:22,880 --> 01:00:27,040
तो भी उसकी मुक्ति नहीं होगी। मगर केवल ऐसा नहीं है कि

817
01:00:27,040 --> 01:00:31,120
उसके अंदर वो विरक्त दिखाई दे रहा है।

818
01:00:31,120 --> 01:00:35,600
परंतु उसके अंदर जो है भक्ति भाव नहीं है, चिंतन नहीं है, ज्ञान नहीं है।

819
01:00:35,600 --> 01:00:39,600
और उसके बिना ही वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल कर रहा है। तो एक ना एक दिन उसका वो

820
01:00:39,600 --> 01:00:43,840
जो इंद्रियों का कंट्रोल है वो छूट जाएगा। मगर जिसको तत्व ज्ञान

821
01:00:43,840 --> 01:00:48,240
हो जाता है उसका एक परम लक्षण है कि उसके अंदर विरक्ति दिखाई देती है

822
01:00:48,240 --> 01:00:52,480
और मैं तो यह कह रहा हूं कि सब बातें हटा दो सब बातें

823
01:00:52,480 --> 01:00:56,560
हटा दो आप विरक्तता को एक साइड कर दिए शास्त्र प्रमाण है

824
01:00:56,560 --> 01:01:00,560
उसमें ढेर सारे विरक्तता के लिए इसी भगवत गीता

825
01:01:00,560 --> 01:01:04,720
में शास्त्र प्रमाण है ढेर सारे वैराग के

826
01:01:04,720 --> 01:01:09,040
ठीक है इसको एक साइड कर दो जैसे दूसरे

827
01:01:09,040 --> 01:01:13,120
अध्याय में कहा जा रहा है राग द्वेष दूर हो जाता है लाभ हानि नहीं

828
01:01:13,120 --> 01:01:17,360
देखता है। यह सब कहा गया दूसरे अध्याय में आपकी इसी इसी

829
01:01:17,360 --> 01:01:21,520
में दूसरे अध्याय में आपके रामपाल जी ने भी ये स्वीकार किया है कि

830
01:01:21,520 --> 01:01:25,600
भैया उसके वो जो है राग द्वेष से फ्री हो जाता है। लाभ हानि

831
01:01:25,600 --> 01:01:29,680
से मुक्त हो जाता है। ऐसा हो जाता है वैसा हो जाता है। ये सब इन्होंने कहा है।

832
01:01:29,680 --> 01:01:34,240
तो यही तो विरक्तता है। यही तो

833
01:01:34,240 --> 01:01:38,320
यही विरक्ति है ना मगर इसको एक साइड कर दो। सब

834
01:01:38,320 --> 01:01:42,880
कुछ एक साइड कर दो। तो मगर अंत में एक बात आती है कि गुरु वही

835
01:01:42,880 --> 01:01:46,960
जो अपने शिष्य का जो संचय है वो दूर

836
01:01:46,960 --> 01:01:50,960
कर दे। अज्ञानता दूर कर दे। मगर उसको

837
01:01:50,960 --> 01:01:54,960
क्या कहा जाएगा जो खुद अज्ञानी हो। उसको आप गुरु कह सकते

838
01:01:54,960 --> 01:01:59,920
हैं क्या? जो खुद अज्ञानी हो

839
01:01:59,920 --> 01:02:04,080
जो अज्ञानी हो उसे हम गुरु क्यों कहेंगे? मगर आप क्या सिद्ध करना चाहते? वो अभी

840
01:02:04,080 --> 01:02:08,320
मेरे समझ में नहीं आ रहा है। आगे मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं।

841
01:02:08,320 --> 01:02:12,280
ऐसा है

842
01:02:12,280 --> 01:02:16,640
कि ऐसा है कि

843
01:02:16,640 --> 01:02:20,640
मैंने अभी एक बात बताई कि आप सब कुछ बातें एक साइड कर दो।

844
01:02:20,640 --> 01:02:24,720
शास्त्र के प्रमाणों को एक साइड कर दो। मगर एक लक्षण तो होना चाहिए

845
01:02:24,720 --> 01:02:28,800
ना कि गुरु वही जो अपने शिष्य का संशय दूर कर दे। इतना तो मानोगे

846
01:02:28,800 --> 01:02:31,080
ना।

847
01:02:31,080 --> 01:02:35,440
कितना तब मैं पूछ रहा हूं कि आपके रामपाल

848
01:02:35,440 --> 01:02:39,920
जी ने कहा है पहले आप यह बता दीजिए कि रामपाल

849
01:02:39,920 --> 01:02:44,000
जी जो आत्मा है उसे नित्य मानते हैं कि

850
01:02:44,000 --> 01:02:48,160
नहीं मानते हैं अविनाशी मानते हैं कि नहीं मानते हैं

851
01:02:48,160 --> 01:02:53,760
आत्मा अविनाशी है और नित्य

852
01:02:53,760 --> 01:02:57,920
नित्य भी है मतलब मतलब मतलब

853
01:02:57,920 --> 01:03:02,160
वो मरती भी आत्मा आपके कहना है मैं संस्कृत नहीं जानता हिंदी में बोल

854
01:03:02,160 --> 01:03:06,400
मरती नहीं जो थी है और रहेगी हमेशा से

855
01:03:06,400 --> 01:03:10,800
थी हमेशा तक रहेगी थी और रहेगी

856
01:03:10,800 --> 01:03:15,040
है तो आत्मा नित्य है वो

857
01:03:15,040 --> 01:03:19,280
है और रहेगी अच्छा ठीक है अच्छा इनको इनकी भगवत

858
01:03:19,280 --> 01:03:23,600
गीता का है है और रहेगी नहीं वो

859
01:03:23,600 --> 01:03:27,920
वो हमेशा से थी है और रहेगी जैसे परमात्मा

860
01:03:27,920 --> 01:03:31,920
हमेशा हमेशा से था है और रहेगा। ऐसे ही आत्मा

861
01:03:31,920 --> 01:03:37,920
नित्य थी है और रहेगी। हां बिल्कुल

862
01:03:40,200 --> 01:03:44,320
अच्छा तो अब इनको इनकी जो गरिमा गीता की है

863
01:03:44,320 --> 01:03:50,320
उसका पेज क्रमांक दिखाइए।

864
01:03:56,040 --> 01:04:00,320
तीन तीन नहीं तीन नहीं

865
01:04:00,320 --> 01:04:06,320
उसका पेज क्रमांक

866
01:04:08,120 --> 01:04:14,120
है 17 17 निकालिए।

867
01:04:18,480 --> 01:04:22,880
17 में इसका आप निकालिए नीचे से दूसरा पैराग्राफ

868
01:04:22,880 --> 01:04:27,120
नीचे से 17व पेज का

869
01:04:27,120 --> 01:04:31,440
नीचे से दूसरा सेकंड लास्ट हां इसको

870
01:04:31,440 --> 01:04:35,640
थोड़ा बड़ा

871
01:04:35,640 --> 01:04:40,280
करिए। हां इसमें

872
01:04:40,280 --> 01:04:44,320
देखिए ये जो पैराग्राफ है नीचे

873
01:04:44,320 --> 01:04:48,480
से दूसरा दूसरा पैराग्राफ उसमें नीचे से तीसरी लाइन देखिए

874
01:04:48,480 --> 01:04:52,480
परमात्मा लिखा है। नीचे से तीसरी लाइन

875
01:04:52,480 --> 01:04:56,640
नहीं नहीं ये वाला नहीं पहले आप इससे ऊपर वाले पैराग्राफ

876
01:04:56,640 --> 01:05:00,720
में जाइए। हां अब इस पैराग्राफ में नीचे से हां

877
01:05:00,720 --> 01:05:04,880
ये इसको इसको परमात्मा के अतिरिक्त

878
01:05:04,880 --> 01:05:09,040
कोई नित्य नहीं है। ये देखिए क्या

879
01:05:09,040 --> 01:05:13,200
लिखा है भाई साहब। हेलो के सुनिए

880
01:05:13,200 --> 01:05:17,600
अब आपने तो अपनी बात रख ली पिछली वीडियो में बात आपने कही

881
01:05:17,600 --> 01:05:22,800
भाई साहब पहले आप एक बात बताइए आत्मा नित्य है कि नहीं

882
01:05:22,800 --> 01:05:26,880
आत्मा नित्य है मगर परमात्मा के बगैर है अगर परमात्मा के साथ

883
01:05:26,880 --> 01:05:31,600
है वो तो नित्य है परमात्मा के साथ परमात्मा

884
01:05:31,600 --> 01:05:35,760
के साथ वो अविनाशी है नित्य का मतलब है क्या वो

885
01:05:35,760 --> 01:05:39,840
थी वो है वो रहेगी मगर ये कह रहा है यहां पे कहा जा रहा

886
01:05:39,840 --> 01:05:43,920
है कि परमात्मा की भी उत्पत्ति होती है। मतलब एक समय ऐसा

887
01:05:43,920 --> 01:05:47,920
था जब परमात्मा वो आत्मा का अभाव था। यहां कहा

888
01:05:47,920 --> 01:05:51,920
जा रहा है कि आत्मा की भी उत्पत्ति होती है। मतलब एक समय ऐसा था

889
01:05:51,920 --> 01:05:55,680
जब आत्मा नहीं थी। यहां लिखा है। देखिए

890
01:05:55,680 --> 01:06:01,680
देखिए कहां लिखा है। इसी पैराग्राफ में खोलिए

891
01:06:03,560 --> 01:06:09,560
भैया। उसी लाइन को पढ़िए।

892
01:06:10,160 --> 01:06:14,320
भाई साहब कहां चले गए अपना थोपड़ा दिखाइए सॉरी

893
01:06:14,320 --> 01:06:18,720
चेहरा दिखाइए भाई साहब थोपड़ा दिखा दिया जीने

894
01:06:18,720 --> 01:06:23,040
हां भाई अब तुम गधा कहोगे तो थोड़ा बहुत तो हम भी चुटकी ले ही सकते हैं

895
01:06:23,040 --> 01:06:28,200
कुछ भी कह लो कुछ भी कह लो कोई प्रॉब्लम

896
01:06:28,200 --> 01:06:32,240
नहीं तो ये देखिए परमात्मा के अतिरिक्त

897
01:06:32,240 --> 01:06:38,240
कोई भी नित्य नहीं है आगे इसी को और अंडरलाइन कर दीजिए ब्लू वाला क्योंकि

898
01:06:39,880 --> 01:06:45,800
क्योंकि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा

899
01:06:45,800 --> 01:06:49,920
से हुई है। उत्पत्ति

900
01:06:49,920 --> 01:06:53,920
हुई है। यानी कि एक समय ऐसा था जब वो नहीं थी। तो

901
01:06:53,920 --> 01:06:58,080
पहली बात तो आपको अपना ही ज्ञान नहीं है कि हमारे बाबा जी कह के क्या गए

902
01:06:58,080 --> 01:07:02,240
हैं। तो आप उनका पक्ष रखने आए हो। आगे

903
01:07:02,240 --> 01:07:07,200
मेरा प्रश्न सुनिए। मेरा प्रश्न सुनिए। मेरा प्रश्न सुनिए।

904
01:07:07,200 --> 01:07:11,360
दीजिए। अच्छा इसका इसका कोई उत्तर है आपके पास?

905
01:07:11,360 --> 01:07:15,360
आपने कहा कि आत्मा नित्य है वो थी है और रहेगी। आपके

906
01:07:15,360 --> 01:07:19,360
बाबा जी कह रहे हैं कि नहीं आपके बाबा जी कह रहे हैं वो एक समय ऐसा था जब

907
01:07:19,360 --> 01:07:25,040
वो नहीं थी। उसकी उत्पत्ति परमात्मा से हुई है।

908
01:07:25,040 --> 01:07:29,040
वो आत्मा थी जो हमारी आत्मा है थी जो हमारी आत्मा

909
01:07:29,040 --> 01:07:33,360
है। ठीक है? हम परमात्मा के साथ ही है। ठीक है। पहले भी

910
01:07:33,360 --> 01:07:37,760
थी और अभी भी है। परमात्मा परमात्मा के वचन से हम थे। ये

911
01:07:37,760 --> 01:07:42,160
भाई साहब लिखा दिखाइए। लिखा दिखाइए। आपके बाबा जी के द्वारा लिखा दिखाइए।

912
01:07:42,160 --> 01:07:46,480
हमने आपको लिखा दिखाया है। एक समय ऐसा था जब परमात्मा आत्मा नहीं थी।

913
01:07:46,480 --> 01:07:50,720
परमात्मा के अतिरिक्त आप भाई साहब आप संस्कृत को नहीं जानते

914
01:07:50,720 --> 01:07:55,040
हैं ना। नित्य का मतलब होता है जो था है और रहेगा।

915
01:07:55,040 --> 01:07:59,200
आपके बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा नित्य नहीं है। परमात्मा

916
01:07:59,200 --> 01:08:03,200
के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि सब

917
01:08:03,200 --> 01:08:07,640
कुछ जो परमात्मा के अतिरिक्त है एक समय ऐसा था जब वो नहीं था। तत्व

918
01:08:07,640 --> 01:08:11,760
से तत्व से वो नहीं था। तो

919
01:08:11,760 --> 01:08:15,840
अब बात आती है कि पहले तो यहां पर हम लोग ये मान लेते हैं

920
01:08:15,840 --> 01:08:19,920
कि आपको ये बात पता नहीं थी। आज आपको पता चल गई। ठीक है? नहीं ये बात

921
01:08:19,920 --> 01:08:23,920
पता थी। बता दिया ऐसी बात नहीं है। तो बताइए फिर आत्मा को आत्मा को आप

922
01:08:23,920 --> 01:08:29,520
क्या मानते हैं? नित्य मानते हैं कि अविनाशी मानते हैं? क्या मानते हैं?

923
01:08:29,520 --> 01:08:33,920
आत्मा वचन से हुई है। परमात्मा के तो अविनाशी होगी। अब

924
01:08:33,920 --> 01:08:38,640
अविनाशी है। ठीक है मान लिया। आप उससे पहले की बात कर रहे हो।

925
01:08:38,640 --> 01:08:40,080
आपका टॉपिक की बात

926
01:08:40,080 --> 01:08:44,080
कर रहे हो। आत्मा परमात्मा से भी पहले थी। आपका कहने का उद्देश्य यही है

927
01:08:44,080 --> 01:08:48,080
ना? परमात्मा से पहले नहीं थी। आत्मा सदा से थी। भाई

928
01:08:48,080 --> 01:08:52,640
मैं ये थोड़ी ना कह रहा हूं कि जब वो थी तो परमात्मा उस समय नहीं था। परमात्मा

929
01:08:52,640 --> 01:08:56,640
भी सदा से है। आत्मा भी सदा से है। मैं आपसे पूछ रहा

930
01:08:56,640 --> 01:09:00,880
हूं आप ये मानते हैं कि नहीं कि आत्मा सदा से है। मैं आपसे

931
01:09:00,880 --> 01:09:05,040
पूछ रहा हूं। आत्मा सदा से मगर परमात्मा का

932
01:09:05,040 --> 01:09:09,040
उसे मतलब भाव नहीं था कि परमात्मा है कि ठीक है। आत्मा को

933
01:09:09,040 --> 01:09:13,040
पता नहीं था कि परमात्मा है। मैं आपसे पूछ रहा

934
01:09:13,040 --> 01:09:17,680
हूं कि परमात्मा सदा से था है और रहेगा।

935
01:09:17,680 --> 01:09:22,080
क्या आत्मा भी इसी तरह से थी है और रहेगी है

936
01:09:22,080 --> 01:09:26,320
या फिर वो किसी समय पे नहीं थी। परमात्मा ने उसको अपनी वचन शक्ति

937
01:09:26,320 --> 01:09:30,720
से उत्पन्न किया जो कि यहां लिखा है। आप क्या मानते हैं?

938
01:09:30,720 --> 01:09:34,800
मैं मानता हूं कि आत्मा थी। अगर उसे परमात्मा का अभाव नहीं था

939
01:09:34,800 --> 01:09:38,800
कि परमात्मा है। परमात्मा ने भाई साहब

940
01:09:38,800 --> 01:09:43,200
आप जो बोल रहे हैं पहले तो ये वाली बात लिखी कहां है आपके महाराज जी ने वो बताइए।

941
01:09:43,200 --> 01:09:47,200
पहले तो गरिमा गीता गरिमा गीता को पूरी पढ़ लीजिए।

942
01:09:47,200 --> 01:09:51,680
ठीक है समाज। अरे पूरी पढ़ लूं। कौन सा मैं तो आपको पेज नंबर के साथ बता रहा हूं। ये

943
01:09:51,680 --> 01:09:55,680
बकवास बातें आप किया करो समझे। देखो

944
01:09:55,680 --> 01:10:00,320
जी हम कह रहे आपसे गरीब आप प्रश्न संख्या बताइए

945
01:10:00,320 --> 01:10:04,720
नहीं तो जाकर के आपको ज्ञान लेना है तो ब्रह्म सूत्र पढ़ लीजिए शंकर भाष्य

946
01:10:04,720 --> 01:10:08,880
भाष्य फिर आप बताइए फिर कौन से कौन सी साधना करनी चाहिए

947
01:10:08,880 --> 01:10:12,960
फिर आप बताइए चलो हम तो मैं बताऊंगा अभी जो टॉपिक चल रहा है पहले उसको

948
01:10:12,960 --> 01:10:18,040
खत्म करिए अभी जो टॉपिक चल रहा है पहले उसको खत्म करिए

949
01:10:18,040 --> 01:10:22,120
ये आपका क्या मानना है आत्मा

950
01:10:22,120 --> 01:10:26,160
आपका क्या मानना है आत्मा थी या

951
01:10:26,160 --> 01:10:31,480
नहीं थी उसके उत्पन्न होने से पहले

952
01:10:31,480 --> 01:10:35,680
थी थी तो ये आपके बाबा जी ने कहां पर कहा

953
01:10:35,680 --> 01:10:38,640
है

954
01:10:38,640 --> 01:10:42,720
भाई अब मैं क्या बताऊं मैं गरिमा गीता नहीं है स्क्रीन शेयर करके मैं बता

955
01:10:42,720 --> 01:10:46,720
देता ठीक है अरे तो भाई तुमको ये

956
01:10:46,720 --> 01:10:50,880
बताओ क्या यहां अगर गरिमा गीता की होती तो क्या तुम उस

957
01:10:50,880 --> 01:10:55,600
पूरी किताब को पढ़ते क्या जादू मंत्र टोने के लिए

958
01:10:55,600 --> 01:11:00,480
जो आपने लाइन बताई उस पेज को पढ़ते आप खोल ही ना रहे हो उसको लाइन पूरी पढ़िए एक बार

959
01:11:00,480 --> 01:11:04,480
भाई इनको गरमा गीता खोल के बता दो गरमा गीता खोल दो वो पेज पढ़ो

960
01:11:04,480 --> 01:11:08,800
भैया आराम से इसमें इसमें क्या परमात्मा के

961
01:11:08,800 --> 01:11:13,640
कोई भी नित नहीं है ठीक है इसमें ये लिखा

962
01:11:13,640 --> 01:11:18,560
है 17 में भी अविनाशी आत्मा की महिमा बताई गई

963
01:11:18,560 --> 01:11:22,720
ठीक है परमात्मा के कोई भी कोई भी आत्मा कोई

964
01:11:22,720 --> 01:11:26,720
परमात्मा के बच से अपने शरीर की से पहले

965
01:11:26,720 --> 01:11:31,280
आत्मा अभी अभाव था। पहले भले ही वर्तमान

966
01:11:31,280 --> 01:11:35,360
में आत्मा भी अविनाशी है परंतु

967
01:11:35,360 --> 01:11:39,760
परमात्मा का उस समय भी अभाव

968
01:11:39,760 --> 01:11:43,920
नहीं था। ठीक है? इसमें लिखा है जो गीत जो उसमें लिखा है आपने

969
01:11:43,920 --> 01:11:48,160
वो लाइन तो पढ़ी नहीं है। बताओ बताओ। आप

970
01:11:48,160 --> 01:11:52,320
नीचे पढ़िए उसमें जो देखिए आप उसमें क्या लिखा है कि अविनाशी परंतु

971
01:11:52,320 --> 01:11:56,320
आत्मा अभी वर्तमान में है। ठीक है? उसमें अभाव

972
01:11:56,320 --> 01:12:00,400
नहीं था। आत्मा मतलब आत्मा को अभाव नहीं था कि मैं हूं। उसे आत्मा का

973
01:12:00,400 --> 01:12:04,480
अभाव नहीं है। तुम्हारा क्या दिमाग खराब है क्या? यहां क्या

974
01:12:04,480 --> 01:12:08,480
लिखा है? उत्पत्ति से सुनो। उत्पत्ति से पहले आत्मा

975
01:12:08,480 --> 01:12:13,280
का अभाव था। अभाव क्या होता है? अभाव क्या होता है?

976
01:12:13,280 --> 01:12:17,520
मतलब आत्मा थी। अब आप था का मतलब

977
01:12:17,520 --> 01:12:20,640
आत्मा नहीं थी।

978
01:12:20,640 --> 01:12:24,720
भाई साहब आप है ना अब जैसे कोई कह रहा है कि भाई उधर हैगा तो आइसक्रीम वाला

979
01:12:24,720 --> 01:12:28,640
आया तो भाई क्या होता है भाई साहब एक मिनट अभाव का मतलब

980
01:12:28,640 --> 01:12:33,600
क्या होता है अभाव का मतलब का मतलब क्या होता है

981
01:12:33,600 --> 01:12:37,360
है कि स्थल है

982
01:12:37,360 --> 01:12:41,440
मतलब है कि हवाब का मतलब है होता है ये देख लो

983
01:12:41,440 --> 01:12:44,720
भैया रामपालियों का ज्ञान

984
01:12:44,720 --> 01:12:49,600
भाई अब अब तुम क्या कर भाई सारे तुम्हारे भाई्राइ

985
01:12:49,600 --> 01:12:53,680
मुझे एक बात एक बात बताओ अभाव का मतलब अभाव का मतलब था

986
01:12:53,680 --> 01:12:57,680
होता है और भाव का मतलब क्या होता है एक मिनट एक

987
01:12:57,680 --> 01:13:02,080
मिनट एक मिनट एक एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट अभाव

988
01:13:02,080 --> 01:13:06,240
का मतलब तो है होता है अभाव है अभाव का मतलब

989
01:13:06,240 --> 01:13:11,520
है होता है और अभाव का मतलब क्या होता है

990
01:13:11,520 --> 01:13:16,160
अभाव में थी मतलब मतलब अभाव भय थी। ठीक है।

991
01:13:16,160 --> 01:13:20,400
अरे भाई अरे भाई तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं कि उसका अभाव

992
01:13:20,400 --> 01:13:24,880
था वो नहीं थी एक समय क्योंकि उसकी उत्पत्ति हुई है। जिसकी उत्पत्ति

993
01:13:24,880 --> 01:13:28,960
हुई है तो उत्पत्ति से पहले वो नहीं था। नहीं तो उसकी उत्पत्ति नहीं

994
01:13:28,960 --> 01:13:33,040
होती। और अगर आत्मा की उत्पत्ति होते हुए भी तुम कह रहे हो कि उसका

995
01:13:33,040 --> 01:13:37,200
अभाव था इसलिए वो है तो इसका मतलब परमात्मा का भी अभाव

996
01:13:37,200 --> 01:13:41,360
वो मानना पड़ेगा। परमात्मा का अभाव था क्योंकि उसकी उत्पत्ति नहीं हुई।

997
01:13:41,360 --> 01:13:44,880
परमात्मा की भी उत्पत्ति माननी पड़ेगी।

998
01:13:44,880 --> 01:13:48,880
क्या आप अपने शरीर आपका जो शरीर चला जाएगा ठीक है? एक बहन की बात

999
01:13:48,880 --> 01:13:53,040
सुनिए। आपका शरीर चला जाएगा। आपकी आत्मा होगी क्या? हम हम

1000
01:13:53,040 --> 01:13:57,440
लोग कहेंगे वो आत्मा मेरी बात सुनो। विषय को भटकाओ मत। विषय को भटकाओ

1001
01:13:57,440 --> 01:14:01,520
मत। अगर अभाव का मतलब है मैं पूछ रहा हूं।

1002
01:14:01,520 --> 01:14:06,320
अगर अभाव का मतलब मैं पूछ रहा हूं। इतने तो बड़े

1003
01:14:06,320 --> 01:14:10,400
से आते हैं अनपढ़ गवार कहीं के जिनको यह नहीं पता है कि अब का

1004
01:14:10,400 --> 01:14:15,040
मतलब क्या होता है?

1005
01:14:15,040 --> 01:14:19,120
अब आपका मतलब होता है कि वो नहीं थी और यह बताओ अगर

1006
01:14:19,120 --> 01:14:23,280
वो थी अगर वो थी तुम्हारे बाबा जी ने ये क्यों लिखा कि उनकी

1007
01:14:23,280 --> 01:14:27,280
उत्पत्ति हुई है परमात्मा से बताइए उत्पत्ति

1008
01:14:27,280 --> 01:14:31,280
निराकार में थी आत्मा निराकार में थी ना आत्मा निराकार में

1009
01:14:31,280 --> 01:14:35,920
थी तो ये बात आपके बाबा जी ने कहा लिखी है बताइए

1010
01:14:35,920 --> 01:14:40,000
अरे भाई लाइन पढ़ तो ली नीचे अब क्या मैं अब मैं हौप आगे मैं क्या बताऊं

1011
01:14:40,000 --> 01:14:44,680
निराकार वाली बात कहां लिखी है कि वो निराकार कार में थी फिर उसको उत्पन्न

1012
01:14:44,680 --> 01:14:48,960
किया साकार में ये कहां लिखा है

1013
01:14:48,960 --> 01:14:53,360
अभाव में थी परमात्मा के शरीर में थी कहेंगे हट भगा

1014
01:14:53,360 --> 01:14:58,280
इनको यहां से अभाव का मतलब नहीं पता

1015
01:14:58,280 --> 01:15:04,280
है बेवकूफी की हद होती

1016
01:15:05,560 --> 01:15:11,560
है अब आप का मतलब है

1017
01:15:11,680 --> 01:15:15,760
आज जी देखो आप बात करना चाहते हो ना किसी को बेवकूफ गधा बोलो कोई

1018
01:15:15,760 --> 01:15:19,760
बात नहीं अगर आपको जाना चाहता नहीं करनी बात मत करो पहले आप चीज सुनो आप समझ

1019
01:15:19,760 --> 01:15:23,760
जाओगे लेकिन जाना तो य पर पड़ेगा ऐसा है ना सुनो इनको भाई

1020
01:15:23,760 --> 01:15:29,760
साहब म्यूट करो फिर लो

1021
01:15:30,720 --> 01:15:36,720
हां दिखाइए चेहरा

1022
01:15:37,440 --> 01:15:41,760
मैं कहना चाहता हूं सुनो एक मिनट मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो

1023
01:15:41,760 --> 01:15:45,920
बोल रहा हूं मैं। मेरी बात सुनो। मैं तुम्हें अपना प्रश्न समझा दूं। मैं तुम्हें अपना प्रश्न

1024
01:15:45,920 --> 01:15:50,080
समझा दूं। मैं तुम्हें अपना प्रश्न समझा दूं।

1025
01:15:50,080 --> 01:15:54,160
मेरी मेरा प्रश्न समझ लो कि यहां पे लिखा है कि आत्मा का

1026
01:15:54,160 --> 01:15:58,560
किसी ना किसी समय अभाव था। और दुनिया की सारी डिक्शनरी

1027
01:15:58,560 --> 01:16:02,960
देख लेना। अगर कहा जा रहा है कि अभाव था तो उसका मतलब है कि

1028
01:16:02,960 --> 01:16:07,920
उसकी सत्ता नहीं थी किसी समय। ठीक है? और

1029
01:16:07,920 --> 01:16:12,080
यदि अभाव का मतलब यह होता है कि है तो क्या तुम

1030
01:16:12,080 --> 01:16:16,520
कह सकते हो कि परमात्मा का भी अभाव था। क्या तुम ये बात

1031
01:16:16,520 --> 01:16:20,640
बोलोगे? अच्छा इसके साथ ही साथ तुम्हारे बाबा जी ने कहा है कि

1032
01:16:20,640 --> 01:16:24,680
उसकी उत्पत्ति हुई। एक मिनट भाई साहब इनको म्यूट करो

1033
01:16:24,680 --> 01:16:28,800
भैया। इनको म्यूट करो। अब

1034
01:16:28,800 --> 01:16:32,880
सुनो तुम्हारे बाबा जी ने कहा है कि आत्मा की

1035
01:16:32,880 --> 01:16:37,120
उत्पत्ति हुई। तुम्हारा कहना है कि आत्मा उससे पहले निराकार रूप में

1036
01:16:37,120 --> 01:16:41,280
थी। तो यह बात तुम्हें दिखानी पड़ेगी ना कि बाबा जी ने कहीं पर

1037
01:16:41,280 --> 01:16:45,360
कहा हो कि निराकार रूप में थी और शारीरिक रूप में उत्पत्ति हुई है।

1038
01:16:45,360 --> 01:16:49,360
जबकि बाबा जी क्या कह रहे हैं? तीन बड़ी-बड़ी बातें परमात्मा के

1039
01:16:49,360 --> 01:16:52,480
अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि कोई भी ऐसा नहीं

1040
01:16:52,480 --> 01:16:56,800
है जो आ है और रहेगा। यही बात खत्म हो गई।

1041
01:16:56,800 --> 01:17:00,880
फिर तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा की उत्पत्ति

1042
01:17:00,880 --> 01:17:04,880
परमात्मा से हुई है। फिर तुम्हारे बाबा यहां ये नहीं कह रहे कि

1043
01:17:04,880 --> 01:17:09,200
साकार रूप में उत्पत्ति हुई है। बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा

1044
01:17:09,200 --> 01:17:14,040
की उत्पत्ति परमात्मा से हुई है। फिर तीसरा कह रहे हैं

1045
01:17:14,040 --> 01:17:18,240
कि आत्मा का किसी समय पर अभाव था। परमात्मा का नहीं

1046
01:17:18,240 --> 01:17:22,240
था।

1047
01:17:22,240 --> 01:17:26,400
अगर अभाव का मतलब अगर अभाव का मतलब है होता है तो वो

1048
01:17:26,400 --> 01:17:30,640
जरा पेज खोलो जरा वो वाला समाज जी

1049
01:17:30,640 --> 01:17:34,800
पहले बात सुनो एक मिनट एक मिनट आपको सबूत दे दूं

1050
01:17:34,800 --> 01:17:38,880
नहीं मुझे सबूत नहीं चाहिए मेरे को सबूत बहुत देखो एक मिनट एक मिनट आपने

1051
01:17:38,880 --> 01:17:42,960
माना है कि परमात्मा वो आत्मा का जो अभाव था अभाव का मतलब होता

1052
01:17:42,960 --> 01:17:47,360
है नीचे देखिए परमात्मा का उस समय भी अभाव

1053
01:17:47,360 --> 01:17:51,360
नहीं था यानी यानी कि नीचे लिखा कि परमात्मा उस समय

1054
01:17:51,360 --> 01:17:55,600
नहीं था। अभाव का मतलब है होता है ना।

1055
01:17:55,600 --> 01:17:59,680
अभाव का मतलब है होता है। तो परमात्मा उस समय नहीं था। ये

1056
01:17:59,680 --> 01:18:04,160
लिखा है नीचे।

1057
01:18:04,160 --> 01:18:08,400
तो आप आप क्या सिद्ध करना चाहते हो? ये बताओ। सिद्ध ये करना चाहता हूं। पहले

1058
01:18:08,400 --> 01:18:14,000
आपको ये मानना होगा कि आत्मा एक समय पर नहीं थी।

1059
01:18:14,000 --> 01:18:18,560
आपके राम के अनुसार हमारे गुरु जी के अनुसार

1060
01:18:18,560 --> 01:18:22,640
हमारे गुरु जी कहते हैं आत्मा थी पहले भी थी मगर भाई साहब आप

1061
01:18:22,640 --> 01:18:27,280
मुझे लिखा दिखाइए भाई साहब लिखा दिखाइए

1062
01:18:27,280 --> 01:18:31,360
क्या लिखा है ये मैं बोल तो रहा हूं ये दिखा तो रहा हूं आपको कि परमात्मा का

1063
01:18:31,360 --> 01:18:35,520
उस समय भी अभाव नहीं था आप अगर कह रहे हो आप अगर कह रहे

1064
01:18:35,520 --> 01:18:39,600
हो आप अगर कह रहे हो आप अगर कह रहे हो कि

1065
01:18:39,600 --> 01:18:43,600
आत्मा का अभाव था। अभाव का मतलब

1066
01:18:43,600 --> 01:18:47,600
है आत्मा थी। तो जब परमात्मा के लिए आएगा अभाव

1067
01:18:47,600 --> 01:18:51,680
नहीं था। तो इसका मतलब परमात्मा नहीं था। तो क्या आप ये

1068
01:18:51,680 --> 01:18:55,760
मानते हो परमात्मा नहीं था किसी समय पे? अब मेरी तो सुन लो

1069
01:18:55,760 --> 01:18:59,760
आप। हम बोलिए। कह दी।

1070
01:18:59,760 --> 01:19:03,840
ठीक है। आप कह रहे अब आप नहीं था। ठीक है। आपकी बात हम मानते हैं। आपने जो कहा आप

1071
01:19:03,840 --> 01:19:07,920
जीते मैं हारा। ठीक है। ज्ञान चर्चा में मैं हारा। आप ठीक है। टॉपिक

1072
01:19:07,920 --> 01:19:11,920
है ये आप आप जीत गए। अभी कह रहा हूं आप जितने एपिसोड

1073
01:19:11,920 --> 01:19:15,920
बना रहे हो जिस भी ग्रंथ को खोल लो ठीक है यहां से सुनिए देखो मेरी

1074
01:19:15,920 --> 01:19:19,760
बुराई नहीं है आपसे आप ज्ञान चर्चा में हार गए तो आप ज्ञान मत दीजिएगा

1075
01:19:19,760 --> 01:19:23,920
ठीक है नहीं दे रहा हूं मैं लास्ट बात बोल रहा हूं आना उसी रास्ते पड़ेगा अगर परमात्मा

1076
01:19:23,920 --> 01:19:29,920
को पाना है ना तो उसी रास्ते आना पड़ेगा राम राम

1077
01:19:30,160 --> 01:19:36,160
भाग गए इसको कहते हैं क्लीन चिट

1078
01:19:37,000 --> 01:19:41,120
बोल्ड ऐसे किया है क्या कभी किसी है जो व्यक्ति हाथ

1079
01:19:41,120 --> 01:19:43,800
जोड़ के गया

1080
01:19:43,800 --> 01:19:48,320
हो और बात ऐसी नहीं है कि

1081
01:19:48,320 --> 01:19:52,320
इनको हराना इनको इस तरह से निरुत्तर करना या निशब्द करना कोई बहुत

1082
01:19:52,320 --> 01:19:56,320
बड़ी बात होती है इनके कुतर्कों का भी

1083
01:19:56,320 --> 01:20:00,400
जवाब देने के लिए मेरा जन्म हुआ है। ऐसे

1084
01:20:00,400 --> 01:20:03,400
कुतर्कियों के

1085
01:20:03,400 --> 01:20:08,320
लिए बहुत लो लेवल के बहुत निम्नतम लेवल के

1086
01:20:08,320 --> 01:20:12,320
सड़े हुए अगर ज्ञान की दृष्टि से देखा

1087
01:20:12,320 --> 01:20:15,480
जाए तो दो कौड़ी

1088
01:20:15,480 --> 01:20:19,680
के बातें लेकर के जो तुम परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का खंडन

1089
01:20:19,680 --> 01:20:25,680
करने निकलते हो गवार अनपढ़ कहीं

1090
01:20:25,880 --> 01:20:31,880
के मगर मैं तुम्हारे कुतर्कों को भी कुचलूंगा

1091
01:20:38,960 --> 01:20:44,160
तुम्हारे कुतर्कों की दुनिया में जाकर के वहां पे तुम्हारा मुंह बंद कराऊंगा।

1092
01:20:44,160 --> 01:20:48,720
हालांकि उसकी आवश्यकता नहीं है। जब तुम यह मुंह से निकाल रहे होते ना

1093
01:20:48,720 --> 01:20:53,400
यह चीजें तो वहीं से समझ में आ रहा होता

1094
01:20:53,400 --> 01:20:57,520
है कि अभाव का मतलब है ये सब चीजें

1095
01:20:57,520 --> 01:21:01,760
हम निकाल रहे होते हैं तो दुनिया को वही समझ में आ जाता है कि तुम कितने

1096
01:21:01,760 --> 01:21:05,760
बड़े वो हो मगर मैं तुम्हारा मुंह बंद कराऊंगा

1097
01:21:05,760 --> 01:21:10,000
ऐसे ही उन कुतर्कों की दुनिया में उतर के कब

1098
01:21:10,000 --> 01:21:16,000
तक बोलोगे तुम

1099
01:21:20,720 --> 01:21:24,840
एक जन और जुड़े हैं।

1100
01:21:24,840 --> 01:21:29,200
7408301869 किसी को चर्चा करनी हो तो इस नंबर पर संपर्क

1101
01:21:29,200 --> 01:21:33,280
करें, WhatsApp करें और चर्चा सुनिश्चित करें। अब

1102
01:21:33,280 --> 01:21:39,280
चर्चा के लिए अब और किसी को नहीं लेना है। डेढ़ घंटा हो चुका है।

1103
01:21:41,920 --> 01:21:46,240
भैया श्री सीताराम रोशनी में आ जाइए सीताराम

1104
01:21:46,240 --> 01:21:52,240
चेहरा दिखाइए भाई साहब पुष्पेंद्र

1105
01:21:55,440 --> 01:22:01,040
ये आ चुके हैं कई बार आ चुके हो ना

1106
01:22:01,040 --> 01:22:05,120
जी जी जी हां

1107
01:22:05,120 --> 01:22:11,120
जी हां बोलिए हां

1108
01:22:11,240 --> 01:22:16,880
बताइए आपके जो महाशय हैं बाबा जी हैं वह तत्व ज्ञानी है।

1109
01:22:16,880 --> 01:22:21,280
जी बिल्कुल आत्मा नित्य है कि अनित्य

1110
01:22:21,280 --> 01:22:23,600
है?

1111
01:22:23,600 --> 01:22:27,600
आत्मा अनित्य है जो आप अभाव के पीछे पड़ रहे हो। अभाव का मतलब होता क्या है?

1112
01:22:27,600 --> 01:22:31,760
क्या होता है? आप बताइए क्या होता है अभाव? आप बताइए ना

1113
01:22:31,760 --> 01:22:36,080
आप बताइए आप। मतलब यह 16 में

1114
01:22:36,080 --> 01:22:40,320
216 में देख लो। सुनो सुनो सुनो सुनो हम तो अज्ञानी

1115
01:22:40,320 --> 01:22:44,400
लोग हैं मूर्ख है पागल है अज्ञानी हो आप बताइए बता दिया

1116
01:22:44,400 --> 01:22:48,560
अभाव का मतलब एक समय ऐसा था जब वो नहीं थी उसका अभाव था

1117
01:22:48,560 --> 01:22:54,040
यही है अभाव का मतलब अच्छा अभाव का मतलब ये होता

1118
01:22:54,040 --> 01:22:58,320
है मतलब होता है किसी अभाव का अभी तुमने क्या कहा

1119
01:22:58,320 --> 01:23:02,400
म्यूट करो इनको अभी इन्होंने क्या कहा कि हम तो अज्ञानी है अब जब

1120
01:23:02,400 --> 01:23:08,400
ज्ञानी व्यक्ति जब ज्ञान दे रहा है तो क्यों बोल रहे हो

1121
01:23:09,280 --> 01:23:13,680
म्यूट हो तुम म्यूट हो म्यूट हो म्यूट हो पहले प्रेशर

1122
01:23:13,680 --> 01:23:17,760
अपना कम करो सुनाई दे रहा है म्यूट हो तुम्हारी आवाज

1123
01:23:17,760 --> 01:23:21,840
नहीं आ रही यहां अरे भाई ये कुतर्की आदमी अपना कुछ कंटेंट लेके

1124
01:23:21,840 --> 01:23:27,720
फिर भाग जाता है ये हटा दो इसको इसको केवल बकबक करने आना

1125
01:23:27,720 --> 01:23:31,840
है अब किसी को मत लीजिए विरोधी व्यक्ति को थोड़ी सी बात

1126
01:23:31,840 --> 01:23:35,920
करके पूरा करेंगे आज एकादशी का व्रत भी था तो

1127
01:23:35,920 --> 01:23:40,240
ठीक है। इतनी एनर्जी काफी है। निखिल जी जय श्री राम। ओनली खंडन

1128
01:23:40,240 --> 01:23:44,400
भाई गोपाल जी कैसे हैं?

1129
01:23:44,400 --> 01:23:48,080
बढ़िया बढ़िया जय श्री राम।

1130
01:23:48,080 --> 01:23:52,720
आया आनंद आया। कैसे कैसे ये लोग रामपाल

1131
01:23:52,720 --> 01:23:56,640
बिल्कुल आनंद आया।

1132
01:23:56,640 --> 01:24:02,640
रामपाल का ज्ञान लोग

1133
01:24:05,440 --> 01:24:10,160
शिवा मेरे को लगता है कि रामपाल

1134
01:24:10,160 --> 01:24:15,560
को अथॉरिटी दे दी है कि अपना भी ज्ञान तुम बांट सकते हो मेरे नाम

1135
01:24:15,560 --> 01:24:20,520
से अगर अगर खोजेंगे तो कोई लेटर वगैरह मिल जाएगा जेलधाम

1136
01:24:20,520 --> 01:24:24,720
से कि मेरी तरफ से आप लोगों को जो मन करे वो

1137
01:24:24,720 --> 01:24:29,280
आप लोग बोल सकते हैं समाज में

1138
01:24:29,280 --> 01:24:33,280
उसमें वो कहेंगे रामपाल जी ओ सुनू बेटा ओ सुनू

1139
01:24:33,280 --> 01:24:37,680
बेटा ये जो ये है ना जो वो क्या कहते हैं उसको

1140
01:24:37,680 --> 01:24:41,680
जो उसके वो होते हैं जो इनके एजेंट

1141
01:24:41,680 --> 01:24:46,160
होते हैं उसको कुछ नाम दिया है कोऑर्डिनेटर और सुन बेटा ओ वो कोऑर्डिनेटर

1142
01:24:46,160 --> 01:24:50,320
है ना वो वो सब मेरे ही बनाए हुए हैं तू चिंता ना करियो सुन बेटा

1143
01:24:50,320 --> 01:24:56,320
जेलधाम से आया था ना एक वीडियो

1144
01:24:56,400 --> 01:24:59,440
हां गोपाल जी

1145
01:24:59,440 --> 01:25:03,600
जय श्री राम जय श्री राम एक ये जो मनोज दास मनोज

1146
01:25:03,600 --> 01:25:08,480
दास करके करके था ना जिन्होंने आपके ऊपर भी कुछ वीडियो बनाए थे।

1147
01:25:08,480 --> 01:25:12,560
हां उसके साथ मेरी ज्ञान चर्चा हुई। मैंने उससे पहले एक ही

1148
01:25:12,560 --> 01:25:16,640
सवाल पूछा था कि आत्मा ने काल को देख के हाथ

1149
01:25:16,640 --> 01:25:20,800
खड़ा किया। ये बात कहां पे लिखी है? इसका प्रमाण बताओगे? वो

1150
01:25:20,800 --> 01:25:25,200
बातें घुमाने लग गया। फिर उसको वही सवाल पूछता हूं। फिर घुमाता

1151
01:25:25,200 --> 01:25:29,280
है। मैं बोला आपका नाम क्या है? तो बोलता है मनोज दास। बोला अभी कैसे डायरेक्ट बोल दिया?

1152
01:25:29,280 --> 01:25:34,320
घुमा के बोलना चाहिए था। गुड।

1153
01:25:34,320 --> 01:25:38,400
बाद में बाद में वो गीता जी पे आ गया। गीता जी के

1154
01:25:38,400 --> 01:25:42,640
बारे में बोल रहा है कि अध्याय चार के 34 में बोला तत्वदर्शी

1155
01:25:42,640 --> 01:25:44,480
के शरण में जा। मैं बोला पहले ये बताओ

1156
01:25:44,480 --> 01:25:48,880
अध्याय चार का 38 पढ़ा बोला पढ़ा बोला बताओ क्या पढ़ा है?

1157
01:25:48,880 --> 01:25:52,880
पता नहीं। मैं बोला अध्याय चार का नाम क्या है? पता नहीं कोई

1158
01:25:52,880 --> 01:25:56,960
जवाब नहीं। फिर वो वहां से भाग गया देवी भागवत पुराण पे। मैंने

1159
01:25:56,960 --> 01:26:01,600
उसको वहां पे पूछ लिया। वहां पे वो चुप हो गया। फिर बोलता है हम सनातनी

1160
01:26:01,600 --> 01:26:05,600
है यह है। बोला अच्छा बताओ तो सनातनी में कितने गुण होते हैं? सनातनी हो

1161
01:26:05,600 --> 01:26:09,680
ना आप में कितने गुण है सनातनी के? वहां चुप हो गया। वो

1162
01:26:09,680 --> 01:26:13,920
जहांजहां भागा उसके वहीं सवाल खड़ा कर दिया। लास्ट

1163
01:26:13,920 --> 01:26:18,080
में वो फोन काट के भाग गया। हालांकि

1164
01:26:18,080 --> 01:26:22,560
जो प्रभुत्व वर्ग है समाज का उसको जागरूक

1165
01:26:22,560 --> 01:26:26,720
करने के लिए रामपाल के विरोध में इतना विश्लेषणात्मक वीडियो

1166
01:26:26,720 --> 01:26:30,720
बनाना आवश्यक नहीं है। मगर हमारा जो एक बहुत बड़ा

1167
01:26:30,720 --> 01:26:35,160
वर्ग है जो अज्ञानता वश

1168
01:26:35,160 --> 01:26:39,440
और इस तरीके से इन इस प्रकार के लोगों के जाल में जो फंस

1169
01:26:39,440 --> 01:26:43,600
रहा है तो कई बार ऐसा होता है ना कि जो

1170
01:26:43,600 --> 01:26:47,880
घर का जो कमजोर बालक होता

1171
01:26:47,880 --> 01:26:52,560
है ना जी उसकी ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है।

1172
01:26:52,560 --> 01:26:57,040
उसी प्रकार से वास्तविकता यही है कि इनकी चीजें सब

1173
01:26:57,040 --> 01:26:59,840
पूर्ण है। कोई मेहनत की आवश्यकता

1174
01:26:59,840 --> 01:27:04,240
नहीं है। पर फिर भी

1175
01:27:04,240 --> 01:27:08,480
जो हमारा जो यह वाला वर्ग है जो छोटे भाई हैं बहुत सारे जो भटक

1176
01:27:08,480 --> 01:27:12,480
रहे हैं इनके कारण तो इसलिए आवश्यक है कि उनको दिखाना

1177
01:27:12,480 --> 01:27:16,800
कि देखो तुम क्या छोड़ के और कहां जा रहे हो

1178
01:27:16,800 --> 01:27:20,960
और यह देखो इनका हाल क्या है पहाड़ी जी ने इन पर वीडियो

1179
01:27:20,960 --> 01:27:24,960
बना दिया तो यह स्ट्राइक भेज रहे हैं ज्ञान नहीं है ना सामने आने

1180
01:27:24,960 --> 01:27:29,280
का साहस तो है नहीं सामर्थ्य तो है नहीं तो टीआर पहाड़ी

1181
01:27:29,280 --> 01:27:35,280
जी को कॉपीराइट क्लेम भेजा है है

1182
01:27:35,560 --> 01:27:41,560
ना? कौन से चैनल से भेजा है

1183
01:27:42,000 --> 01:27:46,080
भाई? कोई अगर किसी को चर्चा करनी है तो

1184
01:27:46,080 --> 01:27:50,320
वह हमसे संपर्क करें। WhatsApp के द्वारा हमारा

1185
01:27:50,320 --> 01:27:54,880
नंबर यहां पर प्रदान किया जा रहा है। यदि कोई सहायता

1186
01:27:54,880 --> 01:27:58,960
करना चाहता है तो सहायता कर सकता है। आर्थिक बल हमें प्रदान कर सकता

1187
01:27:58,960 --> 01:28:03,520
है। बहुत सारे कार्य हैं। जो हम कर रहे हैं आप लोगों को संभवत

1188
01:28:03,520 --> 01:28:07,680
पता हो और बारकोड इत्यादि

1189
01:28:07,680 --> 01:28:11,680
भी यहां पर उपलब्ध करा दिया गया है। यदि आप सहायता करना चाहते

1190
01:28:11,680 --> 01:28:16,400
हैं तो आप स्वेच्छ अनुसार कुछ सहायता कर सकते हैं। हमें बल प्राप्त होगा

1191
01:28:16,400 --> 01:28:21,280
और जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है।

1192
01:28:21,280 --> 01:28:26,160
जैसे कोई राजस्थान नाम से आया है, दंग बॉस नाम से आया है, कोई

1193
01:28:26,160 --> 01:28:30,320
पता नहीं क्या-क्या नाम है। तो भैया एक बार शेयर कर

1194
01:28:30,320 --> 01:28:35,280
दीजिए। स्क्रीनशॉट ले लूं। किस बात का?

1195
01:28:35,280 --> 01:28:39,520
बारकोड जो अभी शेयर किए थे वो एक बार थोड़ा शेयर कर दीजिए।

1196
01:28:39,520 --> 01:28:45,520
शेयर कर दीजिए बारकोड ऑपरेटर महोदय।

1197
01:28:51,680 --> 01:28:55,760
ठीक है? ये हमारा बारकोड है संस्था का तो आप इसमें कर

1198
01:28:55,760 --> 01:28:59,840
सकते हैं। बाकी बहुत अच्छा लगा आज चर्चा में

1199
01:28:59,840 --> 01:29:04,000
और जिसको भी चर्चा करनी है वो हमसे WhatsApp द्वारा संपर्क

1200
01:29:04,000 --> 01:29:09,360
करें। वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा।

1201
01:29:09,360 --> 01:29:13,760
मैंने जो बुक भेजी थी आपको वो आपने देखी। जेलधाम

1202
01:29:13,760 --> 01:29:18,000
से छूट कर आए हैं। हां कुछ लोग 15 से भी अधिक लोग

1203
01:29:18,000 --> 01:29:24,000
जेलधाम से छूट कर वापस आ गए हैं। बताएं ओनली खंडन जी।

1204
01:29:24,240 --> 01:29:28,640
हां जी। 10 से 15 परिवार निकल गए हैं रामपाल के जाल से।

1205
01:29:28,640 --> 01:29:33,520
सनातन धर्म में वापसी हो गई है। जी बहुत बढ़िया।

1206
01:29:33,520 --> 01:29:38,480
बहुत बढ़िया। जी। और इनके अंदर डर डाला हुआ है। डर काल का डर

1207
01:29:38,480 --> 01:29:42,560
कि आप नाम छोड़ देंगे तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। आपके घर में ऐसा हो

1208
01:29:42,560 --> 01:29:46,720
जाएगा। बहुत कुछ और ये पैसों का धंधा देखिए किस तरीके से खोल रखा

1209
01:29:46,720 --> 01:29:50,720
है। इनके घर में अशांति फैल जाती है। फिर इनको बोलते

1210
01:29:50,720 --> 01:29:54,760
हैं अर्जी लगवाओ। अर्जी लगाने के पैसे लेते हैं। किसी से

1211
01:29:54,760 --> 01:29:58,960
11000 किसी से 5100 हां ये सारी रिकॉर्डिंग है मेरे

1212
01:29:58,960 --> 01:30:03,040
पास। अच्छा मैंने मैंने बहुत

1213
01:30:03,040 --> 01:30:06,720
रिपोर्ट पढ़ी थी जिसमें आया था कि जब ये अरेस्ट

1214
01:30:06,720 --> 01:30:10,880
हुए थे तो उधर निकला था कि जिस सिंहासन

1215
01:30:10,880 --> 01:30:15,040
के ऊपर ये बैठते थे जेल धाम वासी बाबा

1216
01:30:15,040 --> 01:30:19,120
जी जिस सिंहासन के ऊपर बैठते थे उस सिंहासन के नीचे राइफल

1217
01:30:19,120 --> 01:30:24,080
रखी रहती थी

1218
01:30:24,080 --> 01:30:28,080
ऐसी हां ये तो बरवाला कांड में देखे ही थे ना इनके

1219
01:30:28,080 --> 01:30:32,240
चेले भी सब हथियार ले खड़े थे तो

1220
01:30:32,240 --> 01:30:36,320
और ये सारनाम 31,000 में देते हैं सारनाम जो तीसरा इनका

1221
01:30:36,320 --> 01:30:40,320
सारनाम है। आज आप पहले तो उसकी एक लाख

1222
01:30:40,320 --> 01:30:43,680
कीमत थी।

1223
01:30:43,680 --> 01:30:48,760
आप देखिए वो व्यक्ति भागा कैसे?

1224
01:30:48,760 --> 01:30:53,600
अरे राजेश सिंह जी हां चलो निष्कर्ष गुरु जी।

1225
01:30:53,600 --> 01:30:58,240
आशीर्वाद भैया कैसे हैं आप? बस दया है आपकी।

1226
01:30:58,240 --> 01:31:03,160
आज का कैसा लगा? बहुत बहुत ही अच्छा बहुत

1227
01:31:03,160 --> 01:31:07,280
अच्छा गोपाल जी जय श्री राम। जय श्री

1228
01:31:07,280 --> 01:31:13,280
राम। जय श्री राम।

1229
01:31:14,640 --> 01:31:18,880
ठीक है। तो सभी

1230
01:31:18,880 --> 01:31:22,880
का समय देने के लिए आभार। और फिर

1231
01:31:22,880 --> 01:31:27,440
मिलेंगे। यदि कोई आता है अपनी अपनी

1232
01:31:27,440 --> 01:31:33,080
क्या कहेंगे? मृत्यु को पुकारता है तो जरूर उसका उसकी इच्छा पूरी

1233
01:31:33,080 --> 01:31:37,200
करेंगे। तो भाई किसी को भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है तो वो

1234
01:31:37,200 --> 01:31:41,680
संपर्क कर सकता है और जो अपनी अज्ञानता

1235
01:31:41,680 --> 01:31:46,560
है उसकी मृत्यु के लिए वो मैं आमंत्रित कर सकता है।

1236
01:31:46,560 --> 01:31:50,560
ठीक है? मैंने मैंने बुक का पीडीएफ भेजा था उसको

1237
01:31:50,560 --> 01:31:54,720
आपने देखा। अभी समय नहीं मिला है थोड़ा सा। हम देखने वाले

1238
01:31:54,720 --> 01:31:58,960
हैं। कई सारी चीजें चल रही हैं। तो बहुत

1239
01:31:58,960 --> 01:32:03,120
सारे कार्य रहते हैं। बहुत सारे कभी कभी

1240
01:32:03,120 --> 01:32:07,840
कार्य पूरे नहीं होते। मैं मैं बताऊं

1241
01:32:07,840 --> 01:32:12,080
वैसी छह सात बुक्स ऐसी देखो ये देखो प्रशांत

1242
01:32:12,080 --> 01:32:16,240
कुमार क्या कह रहा है? रिपोर्ट मारो इसको।

1243
01:32:16,240 --> 01:32:20,560
यह इनका तरीका है। सामना करने का हिम्मत नहीं है क्योंकि

1244
01:32:20,560 --> 01:32:26,200
मालूम है ना मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में।

1245
01:32:26,200 --> 01:32:30,480
मैंने मैंने छ सात बुक ऐसी रखी जिसमें शास्त्रों से प्रमाण

1246
01:32:30,480 --> 01:32:35,360
है कि ऐसे शद्रों के साथ हुआ था।

1247
01:32:35,360 --> 01:32:39,360
हम लोग बात करेंगे फिर सभी का आभार। समय देने के

1248
01:32:39,360 --> 01:32:43,600
लिए सबको आभार और राजेश सिंह जी आपको भी आभार। आप आए गोपाल

1249
01:32:43,600 --> 01:32:47,840
जी आपको आभार और जिसको भी बात

1250
01:32:47,840 --> 01:32:52,000
करनी है वो हमसे WhatsApp पर

1251
01:32:52,000 --> 01:32:56,320
संपर्क करें और उसके बाद हमारी चर्चा सुनिश्चित हो जाएगी कब कितने बजे हम लोग बैठने

1252
01:32:56,320 --> 01:33:00,400
वाले हैं जो भी अभी आने की सोच रहे हैं कि मुझे लिंक

1253
01:33:00,400 --> 01:33:04,880
दो मुझे लिंक दो वो ये बात ध्यान रखें कि पहली बात हमारी चर्चा में

1254
01:33:04,880 --> 01:33:09,040
चेहरे के साथ आना होता है तो वो ये सोच रहे हो कि अपनी आइडेंटिटी छुपा

1255
01:33:09,040 --> 01:33:13,040
कर आएंगे जिससे कि जब वो निरत्तर होंगे। उनका मुंह काला

1256
01:33:13,040 --> 01:33:14,320
होगा तो वो अपनी

1257
01:33:14,320 --> 01:33:18,320
जो असफलता है उसको छिपा सके। तो ऐसा

1258
01:33:18,320 --> 01:33:22,560
नहीं है पॉसिबल। वो आए अपने चेहरे के साथ। उनके अंदर यदि साहस है

1259
01:33:22,560 --> 01:33:26,800
यदि वो स्वयं को सत्य के पक्षधर समझते हैं और बचपन में मात

1260
01:33:26,800 --> 01:33:30,960
निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो जितने रामपाल के फॉलोअ

1261
01:33:30,960 --> 01:33:35,840
हैं उनमें से जो भी ऐसा हो गुर्दा रखता हो वो सामना करें प्रत्यक्ष

1262
01:33:35,840 --> 01:33:40,480
साहस के साथ आए अपने चेहरे के साथ। ठीक है?

1263
01:33:40,480 --> 01:33:43,840
और

1264
01:33:43,840 --> 01:33:47,840
और भैया एक लेके आया करो मन की बातें मत बोला करो कई बार

1265
01:33:47,840 --> 01:33:52,080
अपने बाबा जी के विरुद्ध भी चले जाते हो अपने को बचाने के लिए

1266
01:33:52,080 --> 01:33:57,760
ये सब बातें भी है ठीक है बाबा जी ने दे दिए

1267
01:33:57,760 --> 01:34:01,920
चेहरे के साथ आए और इस नंबर पर

1268
01:34:01,920 --> 01:34:04,840
संपर्क करें

1269
01:34:04,840 --> 01:34:09,040
7408301869 पहाड़ी जी जय श्री राम जय श्री राम हर हर

1270
01:34:09,040 --> 01:34:12,440
महादेव सभी लोगों

1271
01:34:12,440 --> 01:34:16,560
को आज बड़ा आनंद आया जिस प्रकार से निरुत्तर होकर गए

1272
01:34:16,560 --> 01:34:20,800
थे जिस प्रकार से जो दहाड़ रहे थे ना उस दिन ये कि हम आपसे डिबेट

1273
01:34:20,800 --> 01:34:24,800
करेंगे हम आपको निरुत्तर करेंगे मतलब कि बोलते

1274
01:34:24,800 --> 01:34:28,880
है ना एक क्या है बड़े दर्शन छोटे दर्शन वाला क्या

1275
01:34:28,880 --> 01:34:29,640
था एक

1276
01:34:29,640 --> 01:34:34,720
कहावत बड़े बोल दर्शन छोटे वाले हिसाब वही हुआ आज

1277
01:34:34,720 --> 01:34:38,960
ऊंची दुकान फीका पकवान

1278
01:34:38,960 --> 01:34:42,960
नाम बड़े और दर्शन छोटे। मुझे तो ये भी प्रतीत हुआ

1279
01:34:42,960 --> 01:34:48,920
कि शायद हिंदी तक पढ़नी नहीं आती इनको जो आए थे।

1280
01:34:48,920 --> 01:34:53,520
शायद हां हिंदी नहीं। अभाव का मतलब कह रहे हैं कि है

1281
01:34:53,520 --> 01:34:58,160
और फिर मैं पूछ रहा हूं परमात्मा का अभाव नहीं था। तो इसका मतलब परमात्मा

1282
01:34:58,160 --> 01:35:02,160
नहीं था। अभाव का मतलब है सत्ता है। तो इसका

1283
01:35:02,160 --> 01:35:07,310
मतलब परमात्मा की सत्ता नहीं थी किसी समय। हम

1284
01:35:07,310 --> 01:35:09,600
[संगीत]

1285
01:35:09,600 --> 01:35:12,840
अभाव का मतलब

1286
01:35:12,840 --> 01:35:16,880
है छोटी छोटी रीले कटेगी पता चलेगा ज्ञान कैसा है ऐसे ही लोग

1287
01:35:16,880 --> 01:35:21,200
तो फसे हैं के ऐसे ही लोग फसे हैं यही

1288
01:35:21,200 --> 01:35:25,440
यही फंसते हैं रामपाल के चंगुल में जिनको ये तक नहीं पता है भाव का मतलब

1289
01:35:25,440 --> 01:35:29,840
अभाव का मतलब क्या है बिल्कुल ठस बुद्धि

1290
01:35:29,840 --> 01:35:34,400
ठस बुद्धि बिल्कुल ठस बुद्धि

1291
01:35:34,400 --> 01:35:38,400
भैया व्याकरण भी तीन धर्म टनी लेके

1292
01:35:38,400 --> 01:35:42,800
और हथौड़ा मारना पड़े तब जाकर के थोड़ा सा वहां पे कुछ कुछ

1293
01:35:42,800 --> 01:35:47,280
चीज घुसेगी। टैनी ले हथोड़ा मार मार।

1294
01:35:47,280 --> 01:35:51,280
इनकी ऐसी बुद्धि कैसे हो गई जो पांच मंत्र देते हैं

1295
01:35:51,280 --> 01:35:55,520
ना शुरू में। ये उनका जप करते हैं अपवित्र अवस्था

1296
01:35:55,520 --> 01:35:59,520
में। कहीं पर भी इनको ये भी नहीं बताया गया कि ये कहां पर

1297
01:35:59,520 --> 01:36:03,680
जप करना चाहिए, कैसे करना चाहिए। पांच पांच मंत्र जपते हैं अपवित्र अवस्था

1298
01:36:03,680 --> 01:36:08,000
में। बुद्धि तो भ्रष्ट होएगी। हां

1299
01:36:08,000 --> 01:36:12,120
एक मिनट इन लोगों को ले लूं मैं बोल

1300
01:36:12,120 --> 01:36:17,680
दूं। दिनेश कुमार करके कोई जुड़ा है।

1301
01:36:17,680 --> 01:36:21,880
दिनेश कुमार और एक और थे कोई वो कहां

1302
01:36:21,880 --> 01:36:26,160
गए? काफी देर से थे। पी

1303
01:36:26,160 --> 01:36:30,160
ओ करके उनकी स्पेलिंग थी कुछ तो

1304
01:36:30,160 --> 01:36:34,080
आप सभी लोग संपर्क करें।

1305
01:36:34,080 --> 01:36:38,320
किसी और दिन आप नंबर ले लीजिए 7408301869

1306
01:36:38,320 --> 01:36:42,480
ये नंबर आ रहा है इस पर हमें WhatsApp कर दीजिए हमारी चर्चा सुनिश्चित हो जाएगी

1307
01:36:42,480 --> 01:36:48,480
उस दिन समय लेकर के हम और आप जुड़ेंगे ठीक है ठीक है ना दिनेश

1308
01:36:48,840 --> 01:36:54,840
जी सुन रहे हैं आप मुझे दिनेश [संगीत]

1309
01:36:56,040 --> 01:36:59,240
जी रिपीट

1310
01:36:59,240 --> 01:37:05,240
कीजिएगा एक बार नंबर रिपीट कीजिए 7408301869

1311
01:37:08,480 --> 01:37:14,480
ठीक है दिनेश जी

1312
01:37:15,920 --> 01:37:19,920
चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम राजपूत जी

1313
01:37:19,920 --> 01:37:24,400
जय सिंह जी जय श्री राम पहाड़ी जय श्री राम

1314
01:37:24,400 --> 01:37:28,560
जय श्री राम ओनली खंडन गोपाल भाई जय

1315
01:37:28,560 --> 01:37:32,720
श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम हर हर

1316
01:37:32,720 --> 01:37:38,720
महादेव जी हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर

1317
01:37:39,320 --> 01:37:43,320
महादेव कल
