1
00:00:02,240 --> 00:00:06,320
सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप

2
00:00:06,320 --> 00:00:10,720
सभी कुशल पूर्वक होंगे। सभी छोटे भाइयों को

3
00:00:10,720 --> 00:00:16,720
ढेर सारा आशीर्वाद और बड़ों को यथोचित

4
00:00:17,080 --> 00:00:21,200
अभिवादन। काफी दिनों के बाद आज मैं लाइव हुआ हूं।

5
00:00:21,200 --> 00:00:25,360
आप लोगों के समक्ष बीच में आप जो भी चैनल

6
00:00:25,360 --> 00:00:30,160
को रेगुलर फॉलो करने वाले हैं तो

7
00:00:30,160 --> 00:00:34,400
वह इस उन्होंने देखा होगा किन-किन कारणों

8
00:00:34,400 --> 00:00:38,480
से कहां-कहां पर व्यस्त रहे और अभी एक

9
00:00:38,480 --> 00:00:42,600
सज्जन हैं जो रामपाल को फॉलो करते हैं

10
00:00:42,600 --> 00:00:46,640
और रामपाल के पक्ष से यहां

11
00:00:46,640 --> 00:00:52,640
पर प्रस्तुत हो रहे हैं। तो हम उन्हें ले लेते हैं सर्वप्रथम।

12
00:01:04,400 --> 00:01:09,600
जय श्री राम नमस्कार जी जय श्री राम जी नमस्कार

13
00:01:09,600 --> 00:01:13,360
नमस्कार जी बताएं आप शिवम जी आप कहां

14
00:01:13,360 --> 00:01:17,440
से हैं? कैसे हैं? जी मेरी एकदम

15
00:01:17,440 --> 00:01:22,040
सही हम हम जी पठानकोट पंजाब से हैं।

16
00:01:22,040 --> 00:01:26,400
थोड़ा आवाज स्लो आ रही है क्या? हां

17
00:01:26,400 --> 00:01:30,960
जी मेरी आवाज आ रही है आपके पास? हां हां हां

18
00:01:30,960 --> 00:01:36,160
जी हम पठानकोट पंजाब से हैं। हां हां

19
00:01:36,160 --> 00:01:40,240
हां जी जी तो रामपाल जी

20
00:01:40,240 --> 00:01:44,240
से कब से जुड़े हुए हैं आप? रामपाल जी से

21
00:01:44,240 --> 00:01:48,240
जुड़े मुझे लगभग मुझे एक साल हो गया है। लेकिन इनसे

22
00:01:48,240 --> 00:01:52,720
जुड़ने से पहले मैंने पूरा इनको देखा

23
00:01:52,720 --> 00:01:56,960
कि भाई साहब बता क्या रहे हैं ये और बाकी और

24
00:01:56,960 --> 00:02:01,120
लोग क्या बता रहे हैं। पहले मैंने उसको पूरा

25
00:02:01,120 --> 00:02:05,200
उसके बाद मैंने निर्णय लिया कि हां कि यही ज्ञान

26
00:02:05,200 --> 00:02:09,360
सच है या फिर और भी जो जितने भी पंथ चल रहे हैं जितने भी धर्म

27
00:02:09,360 --> 00:02:13,520
है दुनिया में और लोगों की जितनी आइडियोलॉजी है

28
00:02:13,520 --> 00:02:17,600
सोचने का तरीका है क्या वो भी सही है या फिर जो ये बता

29
00:02:17,600 --> 00:02:21,600
रहे हैं और इनमें फर्क क्या है इन सबको

30
00:02:21,600 --> 00:02:25,680
मैंने एक अपने बुद्धि से जितना भी है समझ

31
00:02:25,680 --> 00:02:28,480
के फिर निर्णय लिया कि हां मैं चल

32
00:02:28,480 --> 00:02:32,640
सकता हूं इस पाथ पे। अच्छा। तो

33
00:02:32,640 --> 00:02:38,640
क्या ऐसा देखा आपने रामपाल के ज्ञान में जो विशेष था?

34
00:02:39,280 --> 00:02:43,280
देखो सर जी जब हम इनसे जब मुझे

35
00:02:43,280 --> 00:02:47,680
इनके बारे में बताया गया परमात्मा के बारे में

36
00:02:47,680 --> 00:02:51,920
तब मैंने ध्यान से पहले तुम मैंने इनकी बात को नकार

37
00:02:51,920 --> 00:02:55,920
दिया कि भाई जो आप कह रहे हो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पहले तुम्हें बाद में

38
00:02:55,920 --> 00:03:00,240
कोई यकीन ही नहीं था कि कोई भाई ब्रह्मा विष्णु महेश जी से कोई ऊपर कैसे हो सकता है

39
00:03:00,240 --> 00:03:04,840
कि अब मेरे भगवान के बारे में ऐसा मेरी बात समझ नहीं पाए। मेरा क्वेश्चन दूसरा

40
00:03:04,840 --> 00:03:08,880
है। देखिए जी शास्त्र में कुछ लिखा है और

41
00:03:08,880 --> 00:03:13,440
रामपाल का ये दावा करना कि मैं शास्त्र का वो अर्थ बता रहा हूं

42
00:03:13,440 --> 00:03:17,440
जो किसी और ने नहीं बताया। सर जी आपसे निवेदन है

43
00:03:17,440 --> 00:03:21,440
कि आप प्लीज रामपाल जी कह सकते हो अगर आप कर दो कृपा

44
00:03:21,440 --> 00:03:25,760
करके। ठीक है। ठीक है। ठीक। आप जैसे रामपाल जी का यह निवेद

45
00:03:25,760 --> 00:03:29,920
वो है दावा कि मैं शास्त्रों का वो

46
00:03:29,920 --> 00:03:34,160
अर्थ बता रहा हूं जो किसी और ने नहीं बताया या फिर मैं तुम्हें ज्यादा सटीक अर्थ

47
00:03:34,160 --> 00:03:38,400
बता रहा हूं। ठीक है? इस

48
00:03:38,400 --> 00:03:42,640
दावे के अलावा शास्त्रों के अर्थ को करने के अलावा रामपाल

49
00:03:42,640 --> 00:03:43,520
जी ने वो कौन

50
00:03:43,520 --> 00:03:47,520
सा ऐसा ज्ञान दिया है जो कि आपको बहुत बिरला बिल्कुल

51
00:03:47,520 --> 00:03:51,760
दिमाग को खोल देने वाला लगा। भाई शास्त्र

52
00:03:51,760 --> 00:03:56,560
जैसे जैसे कोई शास्त्र है ना जैसे इंग्लिश में है हमको इंग्लिश नहीं आती

53
00:03:56,560 --> 00:04:00,880
तो कोई शिक्षक आया अंग्रेजी का अच्छा मास्टर उसने इंग्लिश को हिंदी करके

54
00:04:00,880 --> 00:04:05,960
बता दिया तो यह हुआ एक किताब के ज्ञान को आपको दे देना

55
00:04:05,960 --> 00:04:10,000
बाकी उस किताब में जिस तत्व की व्याख्या हो रही है

56
00:04:10,000 --> 00:04:14,560
जैसे ब्रह्म तत्व की माया तत्व की विद्या

57
00:04:14,560 --> 00:04:19,200
की जीव की तो इन सभी यह जो प्रतिपाद्य

58
00:04:19,200 --> 00:04:23,360
विषय हैं इन शास्त्रों के उनके संबंध में उन्होंने कुछ

59
00:04:23,360 --> 00:04:27,680
विशेष ज्ञान दिया है या केवल आप इसी से इसी से आकर्षित

60
00:04:27,680 --> 00:04:31,680
हो गए कि उन्होंने शास्त्रों का ऐसा

61
00:04:31,680 --> 00:04:36,200
अर्थ किया जो किसी और ने नहीं

62
00:04:36,200 --> 00:04:40,240
किया। बिल्कुल जो आपने क्वेश्चन करा यह इतना सिंपल

63
00:04:40,240 --> 00:04:44,320
नहीं है जो आपने बहुत मैं आंसर दे दूं। पर इसको

64
00:04:44,320 --> 00:04:49,440
सिंपल बनाने की कोशिश कर सकता हूं आपके लिए। बताना चाह रहा हूं। जैसे

65
00:04:49,440 --> 00:04:53,440
आपने कहा कि कोई एक टीचर आया उसने हिंदी को इंग्लिश को

66
00:04:53,440 --> 00:04:57,840
हिंदी करके बताया। उसने हमारे लिए सिंपल कर दिया। हां

67
00:04:57,840 --> 00:05:02,280
जैसे कुछ लोगों ने कुछ लोगों ने क्रो का अर्थ कौआ कर रखा

68
00:05:02,280 --> 00:05:06,400
था। तो मान लीजिए किसी ने आकर के क्रो का अर्थ

69
00:05:06,400 --> 00:05:10,400
बताया कि क्रो का अर्थ कौआ नहीं है। तोता है। है

70
00:05:10,400 --> 00:05:14,400
ना? मान लीजिए सपोज़ करिए। या किसी ने पैरट का

71
00:05:14,400 --> 00:05:18,400
अर्थ तोता बताया। तो किसी ने आकर के कहा पैरट

72
00:05:18,400 --> 00:05:22,480
का अर्थ तोता नहीं है कौवा है तो केवल इतने से

73
00:05:22,480 --> 00:05:26,800
हम मान लिया कि हो सकता है पैरेट का अर्थ उसने जो तोता बता वो

74
00:05:26,800 --> 00:05:30,800
कौवा बताया या क्रो का अर्थ उसने तोता बताया हो सकता

75
00:05:30,800 --> 00:05:34,800
है वह सही हो क्या केवल इतने से आप आकर्षित हुए हैं या उन्होंने

76
00:05:34,800 --> 00:05:40,640
वास्तव में कुछ तात्विक विश्लेषण आपको दिया है

77
00:05:40,640 --> 00:05:44,640
हां जी मैं वही कह रहा हूं आपका जो पिछला वो

78
00:05:44,640 --> 00:05:48,720
सवाल था उन्होंने ऐसा क्या बताया? वैसे ही कोई टीचर

79
00:05:48,720 --> 00:05:52,080
जैसे आपने कहा कि इंग्लिश को हिंदी करके बताएगा।

80
00:05:52,080 --> 00:05:56,080
आपने मैं एक बात बताऊं हो क्या रहा है कि आप मेरी बात को रिपीट ना

81
00:05:56,080 --> 00:06:00,240
करें। आप अपनी बात बताएं टाइम बचेगा।

82
00:06:00,240 --> 00:06:04,480
हां जी। उसने अनुवाद तो कर दिया हमने कि भाई जो संस्कृत

83
00:06:04,480 --> 00:06:08,640
थे पुराने जो पहले जो संस्कृत लगा लो सिर्फ ब्राह्मण लोग पढ़ते थे। बाकी किसी

84
00:06:08,640 --> 00:06:12,880
को तो नहीं पढ़ने का हक ही नहीं था। तो ये

85
00:06:12,880 --> 00:06:16,880
देखिए मैं फिर आपको एक बात याद दिलाऊं केवल वही बात करिए जो हमारे

86
00:06:16,880 --> 00:06:20,960
टॉपिक से रिलेटेड हो। अगर आप नया टॉपिक खोलेंगे तो विषयांतर हो जाएगा। फिर हमारा

87
00:06:20,960 --> 00:06:24,960
ये टॉपिक छूट जाएगा। ऐसा कोई भी स्टेटमेंट देने से बचिए

88
00:06:24,960 --> 00:06:29,920
जिसका जिसके दिए बिना इसका काम चल सकता हो।

89
00:06:29,920 --> 00:06:34,000
ऐसा कोई भी स्टेटमेंट देने से बचिए जिसको दिए बिना इस

90
00:06:34,000 --> 00:06:38,320
विषय पर बात करने का काम चल सकता हो। कोई भी अनावश्यक

91
00:06:38,320 --> 00:06:42,360
स्टेटमेंट यदि आप देते हैं तो फिर मुझे उसे ब्रेक करने उधर जाना

92
00:06:42,360 --> 00:06:46,560
पड़ेगा। समझ रहे हैं? जैसे मान लीजिए आपने अभी कहा

93
00:06:46,560 --> 00:06:50,880
पहले ब्राह्मण केवल संस्कृत ही पढ़ते थे हम या संस्कृत

94
00:06:50,880 --> 00:06:54,880
केवल ब्राह्मणों को ही पढ़ाई जाती थी। तो ये आपने एक क्लेम कर दिया। एक स्टेटमेंट

95
00:06:54,880 --> 00:06:58,960
कर दिया। अब हो सकता है मैं इस बात से सहमत ना हूं। तो अब मैं क्या

96
00:06:58,960 --> 00:07:03,200
करूं? ये जो अभी जो हमारा विषय चल रहा है तो इसको छोड़ दूं

97
00:07:03,200 --> 00:07:07,200
और फिर मैं आपको उधर क्वेश्चन करने लगूं कि भाई ये स्टेटमेंट तुम्हारा

98
00:07:07,200 --> 00:07:12,320
गलत है। आप समझ रहे हैं? तो इसलिए अनावश्यक

99
00:07:12,320 --> 00:07:16,320
अनावश्यक किसी भी स्टेटमेंट को देने से बचिए। केवल वो बात करिए

100
00:07:16,320 --> 00:07:20,640
जो इस जो हमारा टॉपिक चल रहा है उससे रिलेटेड है। जी बताइए।

101
00:07:20,640 --> 00:07:24,800
हां जी। तो परमात्मा ने

102
00:07:24,800 --> 00:07:28,880
जैसे पहले मैंने खुद भगवत गीता पढ़ी। आप समझे

103
00:07:28,880 --> 00:07:33,040
नहीं फिर आप शायद मेरा क्वेश्चन भूल गए। क्वेश्चन मेरा

104
00:07:33,040 --> 00:07:37,200
ये है कि किसी ने पैरेट का अर्थ मैं एक बार रिपीट

105
00:07:37,200 --> 00:07:41,440
कर दूं क्वेश्चन। किसी ने पैरेट का अर्थ बताया तोता और

106
00:07:41,440 --> 00:07:45,600
क्रो का अर्थ बताया कौवा। कोई नया व्यक्ति आया वह बोला

107
00:07:45,600 --> 00:07:49,760
पैरट का अर्थ जो है वह तोता नहीं है कौवा है और

108
00:07:49,760 --> 00:07:53,920
क्रो का अर्थ कौवा नहीं है तोता है उसने बता दिया क्या

109
00:07:53,920 --> 00:07:58,080
इतने मात्र से हम उसके प्रति आकर्षित होंगे वास्तव में उसने

110
00:07:58,080 --> 00:08:02,800
कोई तात्विक विश्लेषण किया होगा कौवे का पैरट का कुछ

111
00:08:02,800 --> 00:08:06,800
तात्विक ज्ञान जो दिया हो ऐसा कुछ तो वो मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या

112
00:08:06,800 --> 00:08:10,880
उन्होंने तात्विक विश्लेषण दिया है जिसकी वजह से आप आकर्षित हुए या

113
00:08:10,880 --> 00:08:14,880
फिर उन्होंने किसी और का अर्थ गलत बता बता करके अपना अर्थ केवल सही कर दिया

114
00:08:14,880 --> 00:08:18,880
है। इतना ही वो है वो रहा जिससे कि आप आकर्षित हो

115
00:08:18,880 --> 00:08:22,480
गए। बस मैं यह पूछ रहा हूं। देखो अगर कोई आके

116
00:08:22,480 --> 00:08:26,480
मुझे वो कहेगा तो अगर वो तर्क देगा तभी मैं उसको मानूंगा। बिना

117
00:08:26,480 --> 00:08:30,880
तार्किक मैं मान ही नहीं सकता कि भाई ये कौवा कैसे तूने तोता कह दिया।

118
00:08:30,880 --> 00:08:35,520
सिंपल चीज है। कॉमन सेंस बात है। तो जैसे परमात्मा ने

119
00:08:35,520 --> 00:08:39,520
उन्होंने जब ये ज्ञान दिया तो उन्होंने सबसे पहले मैं क्लियर कर

120
00:08:39,520 --> 00:08:44,160
दूं। इसका मतलब है उन्होंने तर्क के साथ अच्छे से

121
00:08:44,160 --> 00:08:48,160
एक नया अर्थ बताया जो पहले किसी ने नहीं बताया था इसलिए आप

122
00:08:48,160 --> 00:08:52,240
उससे आकर्षित हुए हैं। हां जी आप ये मान

123
00:08:52,240 --> 00:08:56,320
सकते हो लगा लो हर एक की अपनी अर्थ के साथ शास्त्र का नया अर्थ

124
00:08:56,320 --> 00:08:59,200
बताया उन्होंने

125
00:08:59,200 --> 00:09:03,280
हां जी देखो समझना सर जैसे हर एक की बुद्धि

126
00:09:03,280 --> 00:09:07,680
है अपने स्तर की समझने की कि जो एक स्टूडेंट

127
00:09:07,680 --> 00:09:11,920
समझ सकता है गुरु उसके ऊपर के लेवल का होगा

128
00:09:11,920 --> 00:09:16,000
गुरु ने कह दिया 100 स्टूडेंट्स है। गुरु जो ज्ञान दे रहे हैं

129
00:09:16,000 --> 00:09:20,000
100 स्टूडेंट्स उन उस ज्ञान को कैच कर ले, रिसीव कर ले।

130
00:09:20,000 --> 00:09:24,080
ऐसा नहीं हो सकता। हर एक को अलग-अलग समझ आएगा। किसी

131
00:09:24,080 --> 00:09:28,640
ने ऐसे लिखा माय बेस्ट फ्रेंड के ऊपर। माय बेस्ट फ्रेंड के ऊपर आप पढ़ोगे।

132
00:09:28,640 --> 00:09:32,640
आप किस पर्सपेक्टिव से किस स्टाइल से उसको पढ़

133
00:09:32,640 --> 00:09:36,720
रहे हो। आप उसको हाईलाइट करोगे। सेम नहीं नहीं मैं आपकी बात

134
00:09:36,720 --> 00:09:38,080
समझ रहा हूं।

135
00:09:38,080 --> 00:09:42,320
देखिए आप देखिए ऐसे तो बहुत सारी एक्सप्लेनेशन चली जाएंगी।

136
00:09:42,320 --> 00:09:46,640
सिंपल बात यह है कि उन्होंने आपको

137
00:09:46,640 --> 00:09:50,800
धर्म और ब्रह्म इन दो चीजों के गुण अर्थ बताए

138
00:09:50,800 --> 00:09:55,640
हैं या नहीं बताएं। वास्तविक स्वरूप क्या है? ये बताया है कि नहीं बताया

139
00:09:55,640 --> 00:09:59,760
है। उन्होंने ये तो बता दिया कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है।

140
00:09:59,760 --> 00:10:03,840
कबीर भगवान है। ठीक है? यह संज्ञात्मक ज्ञान आपको

141
00:10:03,840 --> 00:10:08,240
मिल गया। संज्ञात्मक ज्ञान आपको मिल गया। अब सात्विक

142
00:10:08,240 --> 00:10:13,440
सात्विक रूप से व्याख्या मिली है ब्रह्म और धर्म की कि नहीं ये पूछ रहा हूं।

143
00:10:13,440 --> 00:10:17,520
हां जी देखो पहली बात जो आपने कहा कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं

144
00:10:17,520 --> 00:10:21,600
है। वो ऐसा बिल्कुल नहीं कह रहे भगवान है वो

145
00:10:21,600 --> 00:10:25,600
उनके बिना ये धरती ये नहीं मैं आपसे कह रहा हूं ना भाई

146
00:10:25,600 --> 00:10:29,680
वो बात मत करो जिसको किए बिना काम चल जाए मैं

147
00:10:29,680 --> 00:10:33,680
आपको सिद्ध करने में लगूं कि आगे ब्रह्मा विष्णु महेश किस किस प्रकार से रामपाल के

148
00:10:33,680 --> 00:10:38,000
अनुसार रामपाल जी के अनुसार भगवान नहीं है मैं

149
00:10:38,000 --> 00:10:42,080
अपना आपका मेरा टाइम वेस्ट होगा ना मैं आपको सिद्ध कर दूंगा। वो

150
00:10:42,080 --> 00:10:46,160
पत्थर की लकीर है वो। रामपाल जी के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश

151
00:10:46,160 --> 00:10:50,320
भगवान नहीं है। राक्षस हैं। उनकी पूजा करने वाले बिल्कुल सड़े

152
00:10:50,320 --> 00:10:53,200
हुए लोग हैं। तो उस पर

153
00:10:53,200 --> 00:10:58,600
मत जाइए आप प्लीज। तो मैं यह कह रहा हूं

154
00:10:58,600 --> 00:11:02,880
कि आप जो है यह बताइए कि उन्होंने यह तो बता दिया कि ब्रह्मा

155
00:11:02,880 --> 00:11:07,520
विष्णु महेश आपके अनुसार समझ ले कि परम तत्व नहीं है। ठीक है? परमात्मा

156
00:11:07,520 --> 00:11:11,920
नहीं है। ठीक है अब चलेगा। अब ठीक है ना? परमात्मा

157
00:11:11,920 --> 00:11:16,160
तो नहीं है ना। पूर्ण ब्रह्म तो नहीं है ना। पूर्ण

158
00:11:16,160 --> 00:11:19,600
ब्रह्म तो नहीं कहा ना?

159
00:11:19,600 --> 00:11:23,600
हां तो रामपाल जी के अनुसार ब्रह्मा विष्णु

160
00:11:23,600 --> 00:11:28,080
महेश पूर्ण ब्रह्म नहीं है। कबीर है

161
00:11:28,080 --> 00:11:32,640
ठीक है? ये तो उन्होंने बता दिया। अब

162
00:11:32,640 --> 00:11:37,440
पूर्ण ब्रह्म की तात्विक व्याख्या उन्होंने आपको दी है

163
00:11:37,440 --> 00:11:41,600
या उसे प्राप्त करने की जो विधि है उसकी तात्विक व्याख्या आपको दी

164
00:11:41,600 --> 00:11:46,080
है या उसके और जीवात्मा

165
00:11:46,080 --> 00:11:50,080
के बीच के संबंध की तात्विक व्याख्या उन्होंने की है। क्या यह सब आपने

166
00:11:50,080 --> 00:11:54,160
जाना है या केवल इतने से ही आप आकर्षित हो गए

167
00:11:54,160 --> 00:11:58,560
हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश पूर्ण ब्रह्म नहीं है

168
00:11:58,560 --> 00:12:02,800
और वो हैं कबीर इतने

169
00:12:02,800 --> 00:12:07,040
से ही खुश हो गए हैं या तात्विक तात्विक व्याख्या आपकी आपको

170
00:12:07,040 --> 00:12:09,680
मिली है

171
00:12:09,680 --> 00:12:14,160
वही तो मैं बताना चाह रहा हूं कि उन्होंने बताया वेदों से

172
00:12:14,160 --> 00:12:18,240
उन्होंने भाई साहब वेदों से जब आप बात करते हैं कि उन्होंने वेदों

173
00:12:18,240 --> 00:12:22,720
से बताया तो यहां बात आ जाती है कि उन्होंने वेदों के अर्थ को बताया।

174
00:12:22,720 --> 00:12:26,800
वह अपने अनुसार बताया। किसी का किसी के अनुसार है। वह सही है, गलत है वह

175
00:12:26,800 --> 00:12:30,880
एक अलग बात है। मैं बोल रहा हूं क्या उन्होंने तात्विक व्याख्या

176
00:12:30,880 --> 00:12:36,200
भी बताई। वो भले ही वेदों से बताई हो या ना बताई हो। उन्होंने डिफाइन

177
00:12:36,200 --> 00:12:40,320
किया परम तत्व जो है उसका तात्विक स्वरूप क्या

178
00:12:40,320 --> 00:12:44,480
है? जीव का तात्विक स्वरूप क्या है? उनके बीच का संबंध क्या है?

179
00:12:44,480 --> 00:12:48,560
धर्म का तात्विक स्वरूप क्या है? इत्यादि इत्यादि चाहे भले

180
00:12:48,560 --> 00:12:52,960
वह वेदों से किया हो या नहीं किया हो आप वेदों से बताया वेदों से बताया

181
00:12:52,960 --> 00:12:57,200
वेद को सामने रख के आप प्रभाव डालने का प्रयास

182
00:12:57,200 --> 00:13:01,360
कर रहे हैं मैं अलग चीज पूछ रहा हूं मैं ये पूछ रहा हूं कि उन्होंने शास्त्र

183
00:13:01,360 --> 00:13:05,440
का आपको जो शाब्दिक अर्थ है उसको अपने अनुसार

184
00:13:05,440 --> 00:13:09,760
बताने के अलावा ब्रह्म और ब्रह्म और धर्म

185
00:13:09,760 --> 00:13:14,720
के बारे में तात्विक व्याख्या की है क्या? मैं ये पूछ रहा हूं सिंपल

186
00:13:14,720 --> 00:13:18,720
मैं आपको व्याख्या समझा देता हूं। आप मुझे लग रहा है समझ नहीं पा रहे। ठीक

187
00:13:18,720 --> 00:13:22,880
है। समझ बिना किसी बुक

188
00:13:22,880 --> 00:13:24,880
के बिना मैं

189
00:13:24,880 --> 00:13:28,960
ये नहीं कह रहा बुक बुक की बुक को लिया या नहीं लिया वो नहीं कह रहा। मैं पूछ

190
00:13:28,960 --> 00:13:32,960
रहा हूं समझाया कि नहीं समझाया। बुक को लिया हो ठीक है।

191
00:13:32,960 --> 00:13:37,120
अच्छी बात है। नहीं लिया हो तो भी अच्छी बात है। आपको समझाया कि नहीं

192
00:13:37,120 --> 00:13:41,120
समझाया? हां जी मुझे समझाया मुझे समझ

193
00:13:41,120 --> 00:13:45,200
में भी आया हम समझाया इस तो ठीक

194
00:13:45,200 --> 00:13:49,240
है अब मुझे बता दीजिए कि धर्म की परिभाषा क्या

195
00:13:49,240 --> 00:13:53,160
है किसे कहते हैं धर्म

196
00:13:53,160 --> 00:13:57,440
धर्म देखो धर्म अगर आप एक इंसान ह्यूमन शरीर

197
00:13:57,440 --> 00:14:01,440
में हो तो आपका धर्म देखो आप

198
00:14:01,440 --> 00:14:05,760
जब हम पैदा हुए लगा लो अगर मैं हिंदू हिंदू जो आजकल

199
00:14:05,760 --> 00:14:09,760
चल रहा है उसमें अगर मैं पैदा हुआ होता तो मैं उनके

200
00:14:09,760 --> 00:14:13,920
धर्म के हिसाब से जो भी क्रियाएं है वो मैं करता तो क्या वो धर्म धर्म

201
00:14:13,920 --> 00:14:19,120
के हिसाब से सिर्फ हिंदू धर्म के हिसाब से मैं अभी बात कर रहा हूं

202
00:14:19,120 --> 00:14:23,760
यानी कि हिंदू के अलावा और भी धर्म है आपके अनुसार

203
00:14:23,760 --> 00:14:27,840
धर्म तो सिर्फ एक है वो है ह्यूमैनिटी इंसानियत ऐसे बहुत से

204
00:14:27,840 --> 00:14:31,920
धर्म बन चुके हैं वो इसलिए बने धर्म सिर्फ

205
00:14:31,920 --> 00:14:36,080
एक है ह्यूमैनिटी इंसानियत उसकी इंसानियत के नाम

206
00:14:36,080 --> 00:14:40,160
से कोई बुक छपी है क्या क्योंकि

207
00:14:40,160 --> 00:14:44,560
मतलब वो सुनिश्चित कहां से होता है? वो जो धर्म है ह्यूमेनिटी

208
00:14:44,560 --> 00:14:48,640
नाम का जो धर्म है वो सुनिश्चित कहां से होता है? लोग वेद के

209
00:14:48,640 --> 00:14:52,880
द्वारा कि ह्यूमैनिटी धर्म है। एक तो यानी कि वेद के द्वारा बताया गया धर्म

210
00:14:52,880 --> 00:14:57,040
ही धर्म है और सब धर्म धर्म नहीं सर वेद

211
00:14:57,040 --> 00:15:01,120
के द्वारा नहीं लोग वेद सुनी सुनाई बातों से कि लोगों

212
00:15:01,120 --> 00:15:05,760
ने सुन लिया भाई हां ये चीज अच्छा ठीक है। लोग

213
00:15:05,760 --> 00:15:09,760
हां जी लोकवेद अच्छा लोकवेद के

214
00:15:09,760 --> 00:15:15,760
अलावा लोकवेद के अलावा भी और कोई वेद है क्या?

215
00:15:17,240 --> 00:15:21,280
देखो समझने वाली बात है। ये बहुत सिंपल है। बहुत

216
00:15:21,280 --> 00:15:25,280
सिंपल चीज है। आप सिंपल नहीं कर रहे हैं आप। मैंने आपसे धर्म

217
00:15:25,280 --> 00:15:29,280
की परिभाषा पूछी है। आप बता रहे हैं कि लोगों ने जो सुना

218
00:15:29,280 --> 00:15:33,920
वो धर्म हो गया। लोगों ने जो सुना उसको धर्म कहते हैं। रामपाल जी।

219
00:15:33,920 --> 00:15:39,920
रामपाल जी के अनुसार धर्म क्या है? वह

220
00:15:40,680 --> 00:15:44,800
बताइए। देखो सर धर्म लगा लो अगर

221
00:15:44,800 --> 00:15:49,040
आप आपके सामने किसी का एक्सीडेंट हो गया तो आप उसको बचाने

222
00:15:49,040 --> 00:15:53,120
जाओगे। भाई साहब ये धर्म की उदाहरण दे रहे हैं आप। मैं

223
00:15:53,120 --> 00:15:57,960
परिभाषा पूछ रहा हूं। धर्म की परिभाषा भी यही से निकलेगी

224
00:15:57,960 --> 00:16:02,320
फिर। परिभाषा नहीं है। वो बोलिए परिभाषा बोलिए। मुझे उदाहरण देके

225
00:16:02,320 --> 00:16:06,640
मत बताइए। तो धर्म की परिभाषा यही है कि जो उस समय

226
00:16:06,640 --> 00:16:10,640
पे जैसे जो सुनो कंप्यूटर की बचपन

227
00:16:10,640 --> 00:16:14,720
में मुझे एक परिभाषा सिखाई थी। कंप्यूटर इज एन इलेक्ट्रॉनिक

228
00:16:14,720 --> 00:16:19,080
मशीन व्हिच कैन परफॉर्म आवर

229
00:16:19,080 --> 00:16:23,000
इलेक्ट्रॉनिकल

230
00:16:23,000 --> 00:16:27,200
एंड ऑपरेशंस एट वेरी हाई स्पीड।

231
00:16:27,200 --> 00:16:31,360
यह कंप्यूटर की एक डेफिनेशन है। ठीक है?

232
00:16:31,360 --> 00:16:35,920
ऐसे एक धर्म की डेफिनेशन होगी ना कि धर्म है क्या?

233
00:16:35,920 --> 00:16:40,520
क्या है वो डेफिनेशन? धर्म वो है जो इंसान

234
00:16:40,520 --> 00:16:44,560
को बांध के रखता है। जो इंसान को बताया

235
00:16:44,560 --> 00:16:49,440
कि सही सही और गलत क्या है? सही

236
00:16:49,440 --> 00:16:53,600
और गलत क्या है? तो ये सही और गलत चुनने

237
00:16:53,600 --> 00:16:57,680
का आधार क्या होगा? किन चीजों को सही माना जाएगा? किन चीजों

238
00:16:57,680 --> 00:17:01,920
को गलत माना जाएगा? जिससे किसी की आत्मा

239
00:17:01,920 --> 00:17:06,080
ना दुखे वो सही है। जिससे किसी का नुकसान हो रहा है।

240
00:17:06,080 --> 00:17:10,080
मुझे ऐसा लग रहा है कि आपको रामपाल जी ने धर्म की परिभाषा बताई

241
00:17:10,080 --> 00:17:14,400
नहीं है। क्योंकि अगर बताई होती तो आप इतनी गलतियां ना करते। अब सुनिए

242
00:17:14,400 --> 00:17:18,600
किसी की आत्मा ना दुखे। एक आतंकवादी है जो जेल में बंद

243
00:17:18,600 --> 00:17:22,960
है। वो जेल से निकलना चाहता है। सुनिए।

244
00:17:22,960 --> 00:17:27,040
जेलर उसको जाने नहीं दे रहा है। जेलर के ना जाने देने की वजह

245
00:17:27,040 --> 00:17:33,040
से उसकी आत्मा दुख रही है। अब क्या किया जाए? जेलर का धर्म यह है उसका ताला खोल दे।

246
00:17:34,160 --> 00:17:38,240
नहीं ऐसा ऐसा नहीं कह सकता। इसलिए मैं कह रहा हूं परिभाषा

247
00:17:38,240 --> 00:17:44,240
सटीक दीजिए। परिभाषा सटीक दीजिए।

248
00:17:47,200 --> 00:17:51,360
या अगर नहीं पता है तो बोल दीजिए कि नहीं पता है। छोड़ दीजिए।

249
00:17:51,360 --> 00:17:53,880
दूसरा

250
00:17:53,880 --> 00:17:57,920
आप यानी कि जी ने आपको धर्म की परिभाषा नहीं दी

251
00:17:57,920 --> 00:18:02,080
मगर आप उससे उनसे आकर्षित है। आप मुझे बता सकते हो कि धर्म

252
00:18:02,080 --> 00:18:06,080
क्या होता है फिर आपके हिसाब से मैं बताऊंगा मैं देखिए मेरे गलत

253
00:18:06,080 --> 00:18:10,160
होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं हो जाता। आपने कहा कि रामपाल

254
00:18:10,160 --> 00:18:14,480
जी से आप आकर्षित हुए। है ना? तो मैंने आपसे जब धर्म की परिभाषा

255
00:18:14,480 --> 00:18:18,560
जब आपकी धर्म की परिभाषा पूछी तो आप मुझे उदाहरण देने लगे। किसी की आत्मा ना

256
00:18:18,560 --> 00:18:22,720
दुखे मान लो एक्सीडेंट हो गया है। हो वहां पे एक आदमी

257
00:18:22,720 --> 00:18:26,800
गिर गया उसको बचाना धर्म है। ये उदाहरण देने लगे। मगर आपने मुझे धर्म

258
00:18:26,800 --> 00:18:31,120
की परिभाषा नहीं बताई कि धर्म इसे कहते हैं। उससे ये होता है ये फायदा होता है।

259
00:18:31,120 --> 00:18:36,000
ये है वो है। उसकी उपयोगिता आवश्यकता के अनुसार उसका अस्तित्व सिद्ध हो गया।

260
00:18:36,000 --> 00:18:40,000
तो तो कहने का मतलब ये है अभी आपको जब धर्म

261
00:18:40,000 --> 00:18:44,160
की परिभाषा नहीं पता है तो इसका मतलब यह है कि अभी ये माना जाए

262
00:18:44,160 --> 00:18:48,240
कि आपको धर्म की तात्विक व्याख्या रामपाल जी

263
00:18:48,240 --> 00:18:50,240
के द्वारा तो नहीं मिली।

264
00:18:50,240 --> 00:18:54,480
नहीं फिर आपके हिसाब से क्या होगा

265
00:18:54,480 --> 00:18:58,560
आपके हिसाब से क्या होगा नहीं मैं बताऊंगा पहले अभी आप क्लियर

266
00:18:58,560 --> 00:19:02,640
तो करिए मैं बता दूंगा और ऐसे ही बताऊंगा आप उसको काट नहीं पाएंगे यह मेरा वचन

267
00:19:02,640 --> 00:19:04,960
है

268
00:19:04,960 --> 00:19:09,040
मैं अपनी बताऊंगा मगर मैं मान के चलिए मेरे पास है ही नहीं

269
00:19:09,040 --> 00:19:13,040
मैं एक रिपोर्टर हूं आपसे पूछ रहा हूं आपके रामपाल दास जी ने

270
00:19:13,040 --> 00:19:17,200
आपको धर्म की तात्विक परिभाषा व्याख्या दी है क्या धर्म किसे कहते

271
00:19:17,200 --> 00:19:20,600
हैं

272
00:19:20,600 --> 00:19:24,720
धर्म धर्म वही है जो हम

273
00:19:24,720 --> 00:19:28,720
के रास्ते पर चले और सही की परिभाषा क्या है? किस चीज को सही

274
00:19:28,720 --> 00:19:32,720
मानेंगे? वही तो पूछा जा रहा है। क्या आधार

275
00:19:32,720 --> 00:19:36,960
है सही मानने का किसी चीज को? कर्तव्य और अकर्तव्य कर्म बताती

276
00:19:36,960 --> 00:19:41,040
है भगवत गीता में कि भाई तूने क्या कर्म करने हैं। तो शास्त्रों

277
00:19:41,040 --> 00:19:45,120
ने जो कर्तव्य और अकर्तव्य बताए होंगे उसका कोई कोई आधार

278
00:19:45,120 --> 00:19:49,440
होगा ना कि यह अच्छा है यह बुरा है। आधार

279
00:19:49,440 --> 00:19:53,440
अच्छा बुरा करने का वही तो हमारी भगवत गीता कह

280
00:19:53,440 --> 00:19:57,520
रही है कि तू उस ज्ञान को तत्वदर्शी संत के पास जाके समझ तत्वदर्शी

281
00:19:57,520 --> 00:20:01,520
के पास आप जा चुके हो ना मेरे भाई तो वही तो मैं आपको

282
00:20:01,520 --> 00:20:05,280
कह रहा हूं कि उन्होंने जो बताया सही और गलत कि

283
00:20:05,280 --> 00:20:09,440
हम किसी को शरीर के द्वारा कष्ट दे सकते हैं। आप

284
00:20:09,440 --> 00:20:13,520
किसी को कुछ कह भी दो अगर उसकी आत्मा दुख रही है। आपको यह पता

285
00:20:13,520 --> 00:20:17,520
ही लगेगा कि उसकी आत्मा दुख रही है या नहीं दुख रही क्योंकि यह बहुत सूक्ष्म लेवल

286
00:20:17,520 --> 00:20:21,520
पर हो रहा है। आप किसी के शरीर को चाकू मार दो वो तो चलो हमें दिख जाता

287
00:20:21,520 --> 00:20:25,520
है कि हम उसको कष्ट दे रहे हैं। आतंकवादी गोली मार के किसी को मार रहा है। वो हमें दिख रहा है

288
00:20:25,520 --> 00:20:29,520
वो किसी के शरीर को नष्ट कर रहा है। उसकी आत्मा को कष्ट

289
00:20:29,520 --> 00:20:33,760
देना वो अलग चीज है। तो वो अलग

290
00:20:33,760 --> 00:20:37,920
चीज है। मैं ये बोल रहा हूं आत्मा को दुख क्यों नहीं देना है? वो

291
00:20:37,920 --> 00:20:41,920
क्या है? वो कारण क्या है? क्योंकि आत्मा

292
00:20:41,920 --> 00:20:46,000
परमात्मा का ही एक अंश है। हां आत्मा को

293
00:20:46,000 --> 00:20:50,000
क्योंकि वो अलग नहीं है। हम इस शरीर में अरे मैं पूछ रहा हूं मेरे भाई आप

294
00:20:50,000 --> 00:20:54,080
मेरी बात समझ नहीं रहे हैं। किसी आत्मा का दिल नहीं दुखाना है या मैं

295
00:20:54,080 --> 00:20:58,080
समझता हूं इस बात को कि नहीं दुखाना है। अभी मैं ये पूछ रहा हूं

296
00:20:58,080 --> 00:21:02,160
कि क्यों नहीं दुखाना है? क्या अंतर है दुखाने और ना दुखाने में?

297
00:21:02,160 --> 00:21:06,800
ये पूछ रहा हूं।

298
00:21:06,800 --> 00:21:11,200
भाई शास्त्रों ने आपको बता दिया तुझे यह करना है यह नहीं करना है।

299
00:21:11,200 --> 00:21:15,360
मगर यह भी तो है कि उसने किस आधार पे आपको कहा होगा कि तुझे

300
00:21:15,360 --> 00:21:19,520
यह करना है और ये नहीं करना है। कुछ उसका कारण होगा ना। वो कारण

301
00:21:19,520 --> 00:21:21,920
क्या है?

302
00:21:21,920 --> 00:21:25,920
कहने का मतलब ये है अभी आपने थोड़ी देर पहले बताया कि आपको ये चीज

303
00:21:25,920 --> 00:21:30,160
नहीं पता है। धर्म की परिभाषा धर्म किसे कहते हैं? नहीं पता है

304
00:21:30,160 --> 00:21:34,160
तो क्या मैं मान लूं कि रामपाल जी के द्वारा आपको धर्म की परिभाषा प्राप्त

305
00:21:34,160 --> 00:21:38,720
नहीं है? एक चीज सुनता आपके हिसाब से धर्म की परिभाषा

306
00:21:38,720 --> 00:21:43,120
मुझे एक बात बताइए धर्म की परिभाषा रामपाल जी ने एक मिनट धर्म की व्याख्या

307
00:21:43,120 --> 00:21:48,040
रामपाल जी ने की है कहीं पे आपकी जानकारी में देखो

308
00:21:48,040 --> 00:21:52,240
आप रामपाल जी परमात्मा के द्वारा धर्म

309
00:21:52,240 --> 00:21:56,240
की परिभाषा सिर्फ एक है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म

310
00:21:56,240 --> 00:22:00,400
है बाकी लोगों ने अपने अपने हिसाब से इंसानियत की व्याख्या की है क्या कहीं

311
00:22:00,400 --> 00:22:04,960
पे? इंसानियत देखो ह्यूमैनिटी

312
00:22:04,960 --> 00:22:09,280
एक तो सिखाने से नहीं आती। मैंने कहा मैंने आपसे पूछा देखिए एक-एक

313
00:22:09,280 --> 00:22:13,360
करके चलिए। देखिए टाइम खामखा जाता है। मैं पूछ रहा हूं

314
00:22:13,360 --> 00:22:19,000
क्या इंसानियत की व्याख्या की है किसी ने?

315
00:22:19,000 --> 00:22:23,200
देखो वही तो मैं कह रहा हूं। इंसानियत मतलब अपने आप समझ ले ये इंसानियत

316
00:22:23,200 --> 00:22:27,200
है। कॉन्शियसनेस जो हमारी आत्मा को

317
00:22:27,200 --> 00:22:31,200
आगे देखो। मैं आपसे पूछ रहा हूं सिंपल एक आप छोटे

318
00:22:31,200 --> 00:22:35,440
हो मुझसे। मैं छोटे भाई की तरह एक सिंपल क्वेश्चन पूछ रहा हूं। क्या कभी

319
00:22:35,440 --> 00:22:39,440
किसी लेक्चर में धर्म का अर्थ बताया है? उन्होंने

320
00:22:39,440 --> 00:22:43,440
आपके रामपाल दास जी ने आपकी जानकारी में हो सकता है बताया हो।

321
00:22:43,440 --> 00:22:47,760
हो सकता है बताया हो पर आपकी जानकारी में ना हो। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपकी जानकारी

322
00:22:47,760 --> 00:22:51,760
में रामपाल जी ने कहीं पर धर्म का अर्थ धर्म की परिभाषा

323
00:22:51,760 --> 00:22:55,840
बताई है कि नहीं बताई है। जैसे आज आपसे मेरी चर्चा हो रही

324
00:22:55,840 --> 00:22:59,840
है। ठीक है? धर्म धर्म क्या है? तो इस तरह से उनके साथ कोई

325
00:22:59,840 --> 00:23:04,320
चर्चा हुई है? धर्म क्या है? धर्म किसे कहते हैं?

326
00:23:04,320 --> 00:23:08,480
हुई है कि नहीं हुई है? उनके वचन सुन के जो समझ आया

327
00:23:08,480 --> 00:23:12,800
मुझे भाई साहब मैंने क्या कहा? मैं एक सिंपल

328
00:23:12,800 --> 00:23:17,520
क्वेश्चन पूछ रहा हूं। धर्म शब्द पर बात की है उन्होंने।

329
00:23:17,520 --> 00:23:21,680
या यही बात की है कि अष्टांगी देवी प्रकृति का ये हुआ, फिर वो हुआ, फिर काल

330
00:23:21,680 --> 00:23:25,680
हुआ, फिर ये हुआ, फिर ब्रह्मा, विष्णु, महेश नहीं जी। यही है कि

331
00:23:25,680 --> 00:23:30,800
धर्म धर्म शब्द पर बात की है। धर्म की मीमांसा की है।

332
00:23:30,800 --> 00:23:34,000
हां जी एक ही धर्म है वो मानव धर्म। फिर

333
00:23:34,000 --> 00:23:38,080
मैंने आपसे क्वेश्चन क्या पूछा है? क्या आपकी जानकारी में

334
00:23:38,080 --> 00:23:42,400
रामपाल दास जी ने धर्म की व्याख्या कहीं पे लिखी है? कहीं बोली

335
00:23:42,400 --> 00:23:48,400
है? आज हम धर्म की धर्म का अर्थ बताएंगे। धर्म किसे कहते हैं?

336
00:23:49,600 --> 00:23:54,560
देखो वही चीज समझने वाली है। जी मैं आपको वही समझा रहा हूं। लेकिन आप

337
00:23:54,560 --> 00:23:58,800
आप इस चीज को मैंने एक-एक करके चलिए ना आप मैं जानता

338
00:23:58,800 --> 00:24:03,040
हूं आप मुझे क्या समझा रहे हैं। अभी आप इतना बता दीजिए कि धर्म शब्द पर

339
00:24:03,040 --> 00:24:07,120
उन्होंने बात की है कि नहीं की है कि धर्म किसे कहते हैं? हम यहां बता रहे

340
00:24:07,120 --> 00:24:11,360
हैं। किसी किताब में, किसी लेक्चर में, किसी प्रवचन में, धर्म शब्द

341
00:24:11,360 --> 00:24:15,600
पर बात की है उन्होंने? आपकी जानकारी में। हां

342
00:24:15,600 --> 00:24:20,080
वही मैं कह रहा हूं। मेरी जानकारी में धर्म सिर्फ एक है। वो इंसान

343
00:24:20,080 --> 00:24:24,720
मैंने क्वेश्चन क्या पूछा है? इनका नाम क्या था? शिवम जी

344
00:24:24,720 --> 00:24:28,960
मैंने क्वेश्चन क्या पूछा है? मैं क्वेश्चन पूछ रहा हूं। मैंने

345
00:24:28,960 --> 00:24:33,920
क्वेश्चन ये नहीं पूछा है कि धर्म क्या है? अब क्वेश्चन ये है क्या

346
00:24:33,920 --> 00:24:38,000
आपके रामपाल दास जी ने कहीं पर धर्म शब्द से व्याख्या की है।

347
00:24:38,000 --> 00:24:42,400
धर्म किसे कहते हैं? उन्होंने कहा ना हिंदू

348
00:24:42,400 --> 00:24:46,480
सिख ईसाई कोई धर्म न्यारा नहीं है। सिर्फ इंसानियत मानव धर्म हमारा है। भाई

349
00:24:46,480 --> 00:24:49,120
साहब मैंने कहा मानवता वाला जो मानवता

350
00:24:49,120 --> 00:24:53,520
वाला जो धर्म है उसकी कोई व्याख्या की है। धर्म

351
00:24:53,520 --> 00:24:58,400
कहते किसे हैं? इस पर कोई बात की है। देखिए जैसे कि

352
00:24:58,400 --> 00:25:03,200
हमने बताया कि पल्सर

353
00:25:03,200 --> 00:25:08,080
और अपाचे और क्या कहते हैं?

354
00:25:08,080 --> 00:25:12,160
अ फजर एफेड ये सब कुछ अलग

355
00:25:12,160 --> 00:25:17,320
नहीं है। सब एक ही है। मोटरसाइकिल Pulsar,

356
00:25:17,320 --> 00:25:21,680
Apache और क्या कहते हैं आपका? फजर

357
00:25:21,680 --> 00:25:25,680
और एफ जेड यह सब कोई न्यारी नहीं है। यह सब एक ही मोटरसाइकिल

358
00:25:25,680 --> 00:25:29,680
मोटरसाइकिल ही है। सारी सब कोई न्यारी नहीं है। यह तो हो गया। क्या उन्होंने

359
00:25:29,680 --> 00:25:34,600
कहीं पे ये बताया मोटरसाइकिल किसे कहते हैं? क्या होती है

360
00:25:34,600 --> 00:25:38,800
मोटरसाइकिल? उन्होंने तो ये जो आप बता रहे हो ना हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म

361
00:25:38,800 --> 00:25:43,200
नहीं कोई न्यारा। ये डेफिनेशन नहीं है। ये तो वस्तुनिष्ठता

362
00:25:43,200 --> 00:25:47,360
से उन्होंने बताया कि इन सबको आप जो अलग-अलग धर्म समझ रहे हो वो धर्म एक ही

363
00:25:47,360 --> 00:25:52,000
है। मगर धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म किसे कहते हैं? क्यों जाए धर्म के पास?

364
00:25:52,000 --> 00:25:56,040
क्यों आवश्यकता है मुझे धर्म की? क्या

365
00:25:56,040 --> 00:26:00,160
आवश्यकता है धर्म की?

366
00:26:00,160 --> 00:26:04,720
वही कि हम किस समाज में रह रहे हैं? देखिए ये तो आप

367
00:26:04,720 --> 00:26:09,120
देना जवाब। पहले तो मुझे ये बता दो। आपके जो तत्वदर्शी रामपाल जी हैं।

368
00:26:09,120 --> 00:26:13,120
उन्होंने कहीं पर परिभाषा बताई है या नहीं बताई। धर्म शब्द पर

369
00:26:13,120 --> 00:26:17,120
बोला है कि भैया धर्म किसे कहते हैं? आज हम आपको यह बताते हैं।

370
00:26:17,120 --> 00:26:21,200
किसी किताब में, किसी लेक्चर में आपकी जानकारी में बोला है

371
00:26:21,200 --> 00:26:25,280
कि नहीं बोला है? कैसे कैसे शिष्य हो यार? अगर नहीं

372
00:26:25,280 --> 00:26:29,360
बोला है आपकी जानकारी में तो बोल दो कि भैया बोला होगा पर मेरी जानकारी में

373
00:26:29,360 --> 00:26:33,440
नहीं है। सच बोलो ना। सच

374
00:26:33,440 --> 00:26:37,760
बोलना भी तो धर्म है। ये किसने कहा? सच बोलना

375
00:26:37,760 --> 00:26:41,760
धर्म है। सच बोलना धर्म नहीं है। किसने

376
00:26:41,760 --> 00:26:46,480
कहा सच बोलना ही धर्म है? धर्म के जो लक्षण है

377
00:26:46,480 --> 00:26:50,720
10 धर्म के उनमें से एक सत्य बोलना है। 10 लक्षण किसने

378
00:26:50,720 --> 00:26:54,800
बता दिए? 10 किसने बनाए 10 लक्षण 10 शास्त्रों

379
00:26:54,800 --> 00:26:59,440
ने। शास्त्र लिखे किसने ये बताओ मुझे। अरे

380
00:26:59,440 --> 00:27:04,000
नहीं नहीं सीरियसली बात। अभी बात क्या हो रही है? मैं अपनी बात वापस लेता हूं।

381
00:27:04,000 --> 00:27:08,560
नहीं नहीं नहीं विषयंतर नहीं करने दूंगा आपको। मैं पूछ रहा हूं

382
00:27:08,560 --> 00:27:12,640
रामपाल दास ने आपको कहीं पर बताया है धर्म की परिभाषा

383
00:27:12,640 --> 00:27:15,360
क्या है? नहीं आपने अभी 10 धर्म कहे

384
00:27:15,360 --> 00:27:19,360
ना 10 लिखे हुए मुझे बताइए भाई साहब धर्म की परिभाषा क्या है?

385
00:27:19,360 --> 00:27:23,760
रामपाल दास ने बताया है कि नहीं बताया है? मैं आपके सवालों का जवाब दूंगा।

386
00:27:23,760 --> 00:27:28,240
मगर जो विषय चल रहा है पहले उसको खत्म करिए। चलो

387
00:27:28,240 --> 00:27:32,240
जो आप सुनना चाहते हो जहां तक मेरी समझ है मैंने शायद वो लेक्चर

388
00:27:32,240 --> 00:27:36,320
मिस कर दिया हो। कि मुझे वो पता नहीं। लेकिन इसका मतलब अभी के अभी

389
00:27:36,320 --> 00:27:40,320
हम यह मान लेना कि आपको धर्म

390
00:27:40,320 --> 00:27:44,720
की व्याख्या प्राप्त नहीं हुई है रामपाल दास जी से।

391
00:27:44,720 --> 00:27:48,960
मगर आप आकर्षित हो। नहीं मैं आकर्षित सिर्फ इसकी वजह

392
00:27:48,960 --> 00:27:53,120
से नहीं हूं। नहीं नहीं मैं मैं वो मैं आपके पास दूसरे कारण

393
00:27:53,120 --> 00:27:57,600
हो सकते हैं उनसे आकर्षित होने के। मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैंने बस एक बात पूछी

394
00:27:57,600 --> 00:28:03,200
कि धर्म की व्याख्या आपको प्राप्त नहीं है उनसे।

395
00:28:03,200 --> 00:28:07,280
लगा लो धर्म क्या है? हर एक का अपने अपने हिसाब से होगा। मुझे

396
00:28:07,280 --> 00:28:11,280
जहां तक लगता है किसके हिसाब से आप सिर्फ शास्त्र के हिसाब

397
00:28:11,280 --> 00:28:15,360
से अरे मेरे भाई धर्म धर्म कुछ भी हो आपको

398
00:28:15,360 --> 00:28:19,520
उनसे प्राप्त है कि नहीं वो धर्म होगा जो होगा वो अभी

399
00:28:19,520 --> 00:28:23,520
बात करेंगे। क्या होगा? अभी बात हो रही है। आपको जिससे आप

400
00:28:23,520 --> 00:28:27,920
अट्रैक्ट हुए हो जिसके तत्व ज्ञान प्रकाश से आप आकर्षित

401
00:28:27,920 --> 00:28:33,520
हो गए हो। क्या आपको उससे धर्म का अर्थ पता चला कि नहीं पता चला?

402
00:28:33,520 --> 00:28:37,680
मुझे वहीं तक जहां तक मुझे समझ आया मेरी बुद्धि जहां तक मेरी समझ

403
00:28:37,680 --> 00:28:41,680
जा पाई कहीं पे उन्होंने ऐसी हेडिंग लिखी है क्या कि धर्म

404
00:28:41,680 --> 00:28:45,760
किसे कहते हैं? धर्म धर्म किसको कहते हैं? धर्म की व्याख्या

405
00:28:45,760 --> 00:28:49,920
या कुछ भी इस तरीके का आपकी जानकारी में।

406
00:28:49,920 --> 00:28:53,680
हां वही तो मैं कह रहा हूं कि बस

407
00:28:53,680 --> 00:28:57,840
लोगों को दुख ना दो। अरे मैंने आपसे

408
00:28:57,840 --> 00:29:02,480
पूछा क्या है भाई? आप यही तो दिक्कत आती है।

409
00:29:02,480 --> 00:29:07,080
यही दिक्कत आती है। मैं आपसे परिभाषा नहीं पूछ रहा हूं। मैं आपसे पूछ रहा हूं पहले

410
00:29:07,080 --> 00:29:11,280
कि आपके गुरु जी ने कहीं पर बताया है कि धर्म इसे

411
00:29:11,280 --> 00:29:14,240
कहते हैं।

412
00:29:14,240 --> 00:29:18,480
चलो अगर ये मान के चलो कि उन्होंने नहीं बताया। कौन से गुरु ने

413
00:29:18,480 --> 00:29:22,720
आज तक बता दिया। मैं आपको बता दूंगा और आप मेरी परिभाषा

414
00:29:22,720 --> 00:29:27,280
से अगर सेटिस्फाइड ना हो तो आप उसमें तर्क करिएगा और

415
00:29:27,280 --> 00:29:31,280
ये मैं ये कह रहा हूं दुनिया में किसी ने नहीं बताया। मैं कह रहा हूं किसी ने

416
00:29:31,280 --> 00:29:35,360
नहीं बताया। मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं आपके गुरु ने बताया है कि नहीं बताया। मैं

417
00:29:35,360 --> 00:29:39,680
आपसे पूछ रहा हूं। दुनिया में 100 लोग ट्रेन के अंदर 100

418
00:29:39,680 --> 00:29:43,760
लोग बिना टिकट के चल रहे होंगे। इसका मतलब यह नहीं कि आपका बिना टिकट

419
00:29:43,760 --> 00:29:47,840
के चलना वो हो गया। जायज हो गया। आप अपनी बात

420
00:29:47,840 --> 00:29:51,840
करिए। आपके पास टिकट है कि नहीं है? बिल्कुल टिकट

421
00:29:51,840 --> 00:29:56,080
है और सही पति है। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि धर्म की व्याख्या

422
00:29:56,080 --> 00:30:00,080
की है आपके गुरु ने कहीं पर

423
00:30:00,080 --> 00:30:04,080
ये देखो [संगीत] ये

424
00:30:04,080 --> 00:30:08,080
देखो ये पूरा एक ग्रंथ है। ये ग्रंथ

425
00:30:08,080 --> 00:30:12,720
है पूरा। इसका नाम पढ़ो क्या है? क्या है इसका नाम?

426
00:30:12,720 --> 00:30:16,720
धर्म मीमासा धर्म भाषा धर्म

427
00:30:16,720 --> 00:30:20,880
मीमांसा धर्म भाषा नहीं मुझे ध्यान से

428
00:30:20,880 --> 00:30:24,880
दिख नहीं रहा था फिर से दिखाना मुझे केवल छोड़ो

429
00:30:24,880 --> 00:30:29,040
ये ग्रंथ ये ग्रंथ जो है केवल ये धर्म पर है धर्म

430
00:30:29,040 --> 00:30:33,120
क्या होता है किसे कहते हैं केवल इस पर बात हुई

431
00:30:33,120 --> 00:30:33,620
है

432
00:30:33,600 --> 00:30:37,760
आप जो ये बात बोल रहे हैं ना दुनिया के किस गुरु ने बताई है तो यहां पे आप

433
00:30:37,760 --> 00:30:41,840
आपकी जानकारी कम है दुनिया में बहुत ऐसे आचार्य गण

434
00:30:41,840 --> 00:30:45,920
जिन्होंने धर्म की मीमांसा की है। धर्म शब्द पे ही बात की है। धर्म कहते

435
00:30:45,920 --> 00:30:50,160
किसे हैं? और मैं अभी आपको अपनी परिभाषा बताऊंगा। बस पहले आप एक बात क्लियर

436
00:30:50,160 --> 00:30:54,480
कर लीजिए। क्या मैं यह मान लूं कि आपको धर्म की परिभाषा रामपाल

437
00:30:54,480 --> 00:30:59,800
जी ने रामपाल जी से प्राप्त नहीं हुई है।

438
00:30:59,800 --> 00:31:04,000
बिल्कुल जो मैंने आपको कहा वो आपको सच बोलने में बड़ी दिक्कत होती

439
00:31:04,000 --> 00:31:08,160
है। अगर आपको सच बोलने से दिक्कत है तो आप आए क्यों है? सच बोलना नहीं आपको।

440
00:31:08,160 --> 00:31:12,560
मैंने जब आपको कहा सच बोलना धर्म है तो आप बता रहे हैं कि क्या कहते हैं

441
00:31:12,560 --> 00:31:16,560
किसने कह दिया फिर दूसरा टॉपिक आ जाएगा मैं मैं फिर आपको वो बताऊं ये

442
00:31:16,560 --> 00:31:21,120
टॉपिक छूट जाए आपसे मैं पूछ रहा हूं

443
00:31:21,120 --> 00:31:25,600
आपका नाम क्या है मेरा शिवम

444
00:31:25,600 --> 00:31:29,920
ये क्यों बोला पट से शिवम देखो ये वो ये सब बोलना था ना

445
00:31:29,920 --> 00:31:34,000
पहले ये सब बोला ना देखो मगर ये आपको रटा

446
00:31:34,000 --> 00:31:38,000
हुआ सच है सच्चाई इसलिए आपने बिना भड़क बिना

447
00:31:38,000 --> 00:31:42,080
बेरोक टोक आपने तुरंत बोला मेरा शिवम

448
00:31:42,080 --> 00:31:47,480
ऐसे आप बताइए मुझे उसमें मिक्सचर मत करिए

449
00:31:47,480 --> 00:31:48,800
देखो ये

450
00:31:48,800 --> 00:31:52,960
सब मत करो बात को घुमाने का प्रयास मत करो आपने क्यों बता

451
00:31:52,960 --> 00:31:57,040
दिया सच सच बोलना तो धर्म है नहीं झूठ बताते शिवम की बजाय कुछ और बता

452
00:31:57,040 --> 00:32:01,840
देते फिर आप बता दो कि सच क्या है मुझे नहीं पता मैं बताऊंगा

453
00:32:01,840 --> 00:32:06,080
पहले आप यह मुझे बताइए कि आपको आपके गुरु से प्राप्त

454
00:32:06,080 --> 00:32:09,040
है कि नहीं

455
00:32:09,040 --> 00:32:13,440
या फिर शायद मैंने वो लेक्चर अटेंड ना करा हो तो मुझे नहीं पता। ऐसे बोलो ना यार।

456
00:32:13,440 --> 00:32:17,520
कितनी देर लगा दी? करीबन 32 मिनट हो चुके छोटी सी बात पे। आप

457
00:32:17,520 --> 00:32:20,480
सुनो। मैंने आपको सुना। आप सुनो धर्म किसे कहते

458
00:32:20,480 --> 00:32:25,360
हैं? बोलिए।

459
00:32:25,360 --> 00:32:29,680
जीव की चाह के वास्तविक विषय।

460
00:32:29,680 --> 00:32:34,160
जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद

461
00:32:34,160 --> 00:32:38,400
स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने

462
00:32:38,400 --> 00:32:42,920
वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

463
00:32:42,920 --> 00:32:46,960
को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम

464
00:32:46,960 --> 00:32:50,240
धर्म है।

465
00:32:50,240 --> 00:32:54,760
जो परमात्मा को बताए जो शास्त्र वो धर्म

466
00:32:54,760 --> 00:32:59,880
है। आप ये कह दोबारा सुनो जीव की चाह का वास्तविक

467
00:32:59,880 --> 00:33:01,840
विषय जीव की चाह

468
00:33:01,840 --> 00:33:04,240
का

469
00:33:04,240 --> 00:33:08,360
वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

470
00:33:08,360 --> 00:33:12,960
को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा

471
00:33:12,960 --> 00:33:16,960
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने

472
00:33:16,960 --> 00:33:20,000
के निमित्त बताई गई विधि का नाम

473
00:33:20,000 --> 00:33:24,800
धर्म है। अभी आप समझ में आ रहा है?

474
00:33:24,800 --> 00:33:29,040
मतलब कि जिस विधि के द्वारा जिस विधि के द्वारा जिस

475
00:33:29,040 --> 00:33:33,600
काम को करके व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होना है

476
00:33:33,600 --> 00:33:37,760
सरल भाषा में कह दे तो व्यक्ति को क्या चाहिए? जीव

477
00:33:37,760 --> 00:33:43,520
को क्या चाहिए? एक मिनट जीव को क्या चाहिए?

478
00:33:43,520 --> 00:33:48,560
मोक्ष। जीव को क्या चाहिए? मोक्ष की प्राप्ति।

479
00:33:48,560 --> 00:33:52,800
हम जीव को चाहिए मोक्ष। तो जो काम करके मोक्ष

480
00:33:52,800 --> 00:33:56,800
की ओर बढ़ेंगे वह धर्म है। जो काम करके मोक्ष से दूर जाएंगे

481
00:33:56,800 --> 00:33:59,760
वह अधर्म है।

482
00:33:59,760 --> 00:34:03,920
अब अरे मैं कह रहा था इसमें बहुत सारी व्याख्या है

483
00:34:03,920 --> 00:34:08,160
कि क्या ये सच बोलने को क्यों कहा गया? व्यभचार ना

484
00:34:08,160 --> 00:34:12,240
करने को क्यों कहा गया? या चोरी ना करने को क्यों

485
00:34:12,240 --> 00:34:17,200
कहा गया? मांस ना खाने को क्यों कहा गया? मगर मांस ना खाना।

486
00:34:17,200 --> 00:34:21,600
मांस ना खाना धर्म है। मांस खाना अधर्म है। क्यों?

487
00:34:21,600 --> 00:34:25,840
क्योंकि मांस ना खाने से आप मोक्ष की ओर आगे बढ़ोगे। मांस

488
00:34:25,840 --> 00:34:30,640
खाने से आप मोक्ष से दूर हो जाओगे। ये परिभाषा है धर्म की।

489
00:34:30,640 --> 00:34:34,680
जी सर भैया जी मैं आपको यही तो कह रहा था

490
00:34:34,680 --> 00:34:35,680
कि

491
00:34:35,680 --> 00:34:39,840
जब हम सही और गलत का फर्क यही है कि जो सही है वो

492
00:34:39,840 --> 00:34:44,000
आपके पुण्य आपने ये कहां बताया कि सही और गलत का आधार ये है कि कौन सी

493
00:34:44,000 --> 00:34:48,560
चीज आपको परमेश्वर की ओर ले जा रही है बताया था क्या

494
00:34:48,560 --> 00:34:52,880
आपने क्वेश्चन सही और गलत का आधार केवल एक है। जो

495
00:34:52,880 --> 00:34:57,200
चीज आपको परमेश्वर की ओर ले जाएगी वो सही है। किसी का

496
00:34:57,200 --> 00:35:01,280
दिल दुखाएगी वो सही नहीं है। सही और गलत का आधार यह नहीं है कि किसी का दिल

497
00:35:01,280 --> 00:35:05,520
दुखना है कि नहीं दुखना है। सही और गलत का आधार यह है कौन सा कौन

498
00:35:05,520 --> 00:35:09,520
सा कार्य आपको परमेश्वर की ओर ले जा रहा है और कौन सा नहीं ले

499
00:35:09,520 --> 00:35:13,600
जा रहा है। जो नहीं ले जा रहा है वो धर्म नहीं है। जो ले जा रहा

500
00:35:13,600 --> 00:35:16,880
है वो धर्म है।

501
00:35:16,880 --> 00:35:20,880
ये जो परमेश्वर को प्राप्त करने की विधियां हैं ये कई

502
00:35:20,880 --> 00:35:24,960
लोगों ने अपने अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ के भी बताई है। तो वह देखने में लगता

503
00:35:24,960 --> 00:35:30,040
है कि वह फलाना धर्म हो गया। वो फलाना धर्म हो गया। फलाना धर्म हो गया। वास्तविकता

504
00:35:30,040 --> 00:35:34,080
में जो सनातन धर्म है, वेदों के

505
00:35:34,080 --> 00:35:38,160
द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म है, वही आपको वो विधि

506
00:35:38,160 --> 00:35:42,400
और वो परिभाषा बताता है जो ब्रह्म प्राप्ति और ब्रह्म की है। अभी

507
00:35:42,400 --> 00:35:46,480
मैं बताता हूं कैसे। ठीक है? जैसे धर्म की

508
00:35:46,480 --> 00:35:50,640
बात तो हमने कर ली। अब आप मुझे बताइए

509
00:35:50,640 --> 00:35:52,320
कि

510
00:35:52,320 --> 00:35:56,240
ईश्वर है। यह कैसे सिद्ध होता है? बताया है क्या आपके रामपाल जी

511
00:35:56,240 --> 00:36:01,360
ने?

512
00:36:01,360 --> 00:36:05,520
ईश्वर है। इस दुनिया में परमेश्वर है। पूर्ण ब्रह्म है।

513
00:36:05,520 --> 00:36:10,400
यह कैसे सिद्ध होता है?

514
00:36:10,400 --> 00:36:13,840
ये शास्त्र बताते हैं हमारे।

515
00:36:13,840 --> 00:36:18,720
बताइए कैसे सिद्ध होता है? शास्त्रों से पढ़ा होगा ना आपने?

516
00:36:18,720 --> 00:36:22,080
बताइए।

517
00:36:22,080 --> 00:36:26,320
हमारे वेद बताते हैं। अरे मेरे भाई क्या बताते हैं वो बताओ

518
00:36:26,320 --> 00:36:30,640
ना। वेद बताते हैं वो तो ठीक है। तत्वदर्शी के पास तुम गए हो। हम

519
00:36:30,640 --> 00:36:34,920
थोड़ी ना गए तो आप

520
00:36:34,920 --> 00:36:39,520
बताइए। एक तो भगवत गीता सिंपल

521
00:36:39,520 --> 00:36:43,600
कृष्ण जी जो आप मानते हो वो कह रहे हैं उसमें अर्जुन

522
00:36:43,600 --> 00:36:47,600
को कि ये जो ज्ञान मैं तुझे सुना रहा हूं। भाई साहब मैंने

523
00:36:47,600 --> 00:36:53,600
पूछा है मुझे यह बताओ भगवान है यह कैसे सिद्ध होता है?

524
00:36:55,560 --> 00:36:59,760
अरे ये चीज तो हमारे ग्रंथ बताते हैं सर वेद बताते हैं हमारे

525
00:36:59,760 --> 00:37:03,840
तो क्या बताते हैं वो बताइए ना कि ऐसे इन इन कारणों से

526
00:37:03,840 --> 00:37:09,840
सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान ईश्वर है।

527
00:37:13,840 --> 00:37:18,280
कारण बहुत सारे हैं। बताइए

528
00:37:18,280 --> 00:37:23,720
कि हम जब एक सेकंड सर

529
00:37:23,720 --> 00:37:28,240
हम इसमें भी पहले मुझे ये बता दीजिए आप क्या

530
00:37:28,240 --> 00:37:32,320
ईश्वर को सिद्ध करने के विषय में आपको कोई ज्ञान दिया है रामपाल जी ने

531
00:37:32,320 --> 00:37:36,560
कि नहीं ईश्वर है डंके की चोट पर है हम सिद्ध

532
00:37:36,560 --> 00:37:40,560
करते हैं कोई है ऐसा उनका वीडियो लेक्चर बुक रेफरेंस कुछ

533
00:37:40,560 --> 00:37:46,560
है आपकी जानकारी में दिया हो आपकी जानकारी में ना हो तो बता दीजिए

534
00:37:46,560 --> 00:37:51,560
देखो ईश्वर को सिद्ध करना हां वो है

535
00:37:51,560 --> 00:37:55,680
हां वो आप भी नहीं कर सकते मैं भी

536
00:37:55,680 --> 00:37:59,760
नहीं कर सकता देखिए मैं मेरे गलत होने से आपका

537
00:37:59,760 --> 00:38:03,760
सही होना सिद्ध नहीं होता है मैं अभी आपसे क्वेश्चन पूछ रहा हूं रामपाल

538
00:38:03,760 --> 00:38:07,840
दास जी ने ईश्वर को सिद्ध करके बताया है कि नहीं पहले इस क्वेश्चन का जवाब दीजिए

539
00:38:07,840 --> 00:38:12,160
उसके बाद कहिए कि नहीं बताया मगर आप भी नहीं बता सकते

540
00:38:12,160 --> 00:38:16,280
आप पहले मत बताइए पहले अपनी अपना वो बताइए आपकी स्थिति क्या है?

541
00:38:16,280 --> 00:38:20,520
आपके जो तत्वदर्शी जी हैं उन्होंने

542
00:38:20,520 --> 00:38:24,720
आपको बताया कि ऐसे ऐसे सिद्ध होता है।

543
00:38:24,720 --> 00:38:28,720
आज मैं आपके सामने बैठा हूं वेदों को मानने वाला। आपके सामने

544
00:38:28,720 --> 00:38:29,220
कोई

545
00:38:28,960 --> 00:38:33,200
नास्तिक आ जाए। मैं नहीं मानता ईश्वर को। कैसे मान लूं?

546
00:38:33,200 --> 00:38:37,200
क्यों मान लू? तो आपके पास उसके लिए कुछ जवाब है। वो तो

547
00:38:37,200 --> 00:38:41,360
ईश्वर को ही नहीं मानता। वेद को क्यों मानेगा वो? मैं वही ढूंढने

548
00:38:41,360 --> 00:38:45,760
की कोशिश कर रहा हूं बहुत टाइम से कि मैं कैसे किसी नास्तिक को बता पाऊं

549
00:38:45,760 --> 00:38:49,760
कि भाई आपके आपके आपके गुरुदेव ने

550
00:38:49,760 --> 00:38:54,000
आपको ज्ञान दिया। नास्तिकता का खंडन दिया। आपके

551
00:38:54,000 --> 00:38:58,240
गुरुदेव ने आपको जो व्यास जी हैं, ब्रह्मा,

552
00:38:58,240 --> 00:39:02,400
विष्णु, महेश है, शंकराचार्य हैं। इन सब का खंडन

553
00:39:02,400 --> 00:39:08,400
तो करके बताया। नास्तिक का खंडन करके बताया क्या?

554
00:39:09,920 --> 00:39:14,000
देखो आप उनसे आकर्षित हुए ना इसलिए पूछ रहा हूं। आपका

555
00:39:14,000 --> 00:39:18,000
पहला क्वेश्चन क्या था? मैं बताने जा रहा हूं आपको। सुनना। मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं।

556
00:39:18,000 --> 00:39:22,320
आपको नास्तिकता का उत्तर बताया है आपके गुरु ने कि नहीं?

557
00:39:22,320 --> 00:39:26,640
नहीं नहीं इससे पहले क्या पूछा था आपने? उसमें ही आंसर मिलेगा।

558
00:39:26,640 --> 00:39:30,800
क्या? भाई साहब आप मुझे ये बताइए आपके गुरु ने

559
00:39:30,800 --> 00:39:35,040
आपको बताया है कि नहीं बताया है। आपकी याददाश्त में है। कहीं पर नास्तिकता का खंडन

560
00:39:35,040 --> 00:39:37,760
किया हो उन्होंने।

561
00:39:37,760 --> 00:39:42,000
आपके गुरु की किताबें जब खोलोगे तो दूसरे तीसरे

562
00:39:42,000 --> 00:39:46,920
पेज पर शंकराचार्य का विरोध मिल

563
00:39:46,920 --> 00:39:51,040
जाएगा। यानी कि उन्होंने शंकराचार्य के विरोध में क्या कहना है ये

564
00:39:51,040 --> 00:39:55,040
आपको बताया। ब्रह्मा विष्णु महेश पूर्ण

565
00:39:55,040 --> 00:39:59,200
ब्रह्म क्यों नहीं है? ये आपके उसमें भर भर के मिला है। यानी कि ब्रह्मा विष्णु

566
00:39:59,200 --> 00:40:03,440
महेश को क्यों नहीं मानना है? देखो हमारे

567
00:40:03,440 --> 00:40:07,440
जो ये देखिए ये ये देखिए ये क्या कह रहे हैं आपके लोग आपके

568
00:40:07,440 --> 00:40:12,000
भाई लोग क्या कह रहे हैं? शिवम दास ये संत रामपाल

569
00:40:12,000 --> 00:40:17,520
जी महाराज का शिष्य नहीं है। पाखंडी शिवांश का आदमी है। समझ लो।

570
00:40:17,520 --> 00:40:21,520
मैं समझ रहा हूं। पर ऐसा नहीं है। मुझे आपको भी पता है। मुझे भी पता है।

571
00:40:21,520 --> 00:40:25,680
नहीं तो ये अपने भाइयों को बताइए ना आप।

572
00:40:25,680 --> 00:40:30,400
इतनी सी बात पर आपसे जो है खफा हो गए वो

573
00:40:30,400 --> 00:40:34,560
और अभी इनको बुला लेंगे तो आपसे ज्यादा चापर दिमाग के हैं। मैं

574
00:40:34,560 --> 00:40:38,640
रियलिटी को सामने ला रहा हूं। रियलिटी कि देखो मुझे आपसे

575
00:40:38,640 --> 00:40:43,040
कुछ लेना नहीं है। मुझे किसी आपसे भी कुछ लेना नहीं है ना मिल रहा है। मैं सिर्फ

576
00:40:43,040 --> 00:40:47,120
मैंने आपकी वीडियो मैं सिर्फ सच लाना चाहता हूं कि संत रामपाल जी

577
00:40:47,120 --> 00:40:51,200
जो कह रहे हैं उसको हम अगर सिंपल ऐसे बता तो रहा हूं मेरे भाई आप

578
00:40:51,200 --> 00:40:55,280
संत रामपाल जी का पक्ष रखने आए हो वो अच्छी बात है और हमारे आपके बीच में कोई

579
00:40:55,280 --> 00:40:59,520
झगड़ा तो हो नहीं रहा है। बस इसलिए है कि थोड़ा सा मेरी मेरी

580
00:40:59,520 --> 00:41:03,680
बातें सबको स्पष्ट सुनाई दे तो शायद मैं थोड़ा लाउड

581
00:41:03,680 --> 00:41:07,680
रहता हूं अन्यों की अपेक्षागत एक अंदर से एक इनबिल्ट

582
00:41:07,680 --> 00:41:11,840
मेरा वो है ये कि मैं अपनी बात को थोड़ा सा लाउड होके

583
00:41:11,840 --> 00:41:16,320
इसलिए नहीं बोलता सामने वाले को डोमिनेट कर रहा हूं इसलिए बोलता हूं कि

584
00:41:16,320 --> 00:41:20,800
व्यक्ति को मेरे शब्द मेरी आवाज बिल्कुल स्पष्टता के साथ

585
00:41:20,800 --> 00:41:25,120
पारदर्शिता के साथ समझ में आए मैं क्या कह रहा हूं विशेष तौर पर आपको

586
00:41:25,120 --> 00:41:29,200
और फिर जो दर्शक है देखने वाले उनको कोई झगड़ा नहीं है। तो अभी बात

587
00:41:29,200 --> 00:41:33,360
यह हो रही है बैक टू द पॉइंट बात यह

588
00:41:33,360 --> 00:41:37,440
हो रही है कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है? क्या आपके

589
00:41:37,440 --> 00:41:40,960
जो गुरु हैं उन्होंने कभी इस बारे में आपको ज्ञान दिया

590
00:41:40,960 --> 00:41:45,360
है? आपको नास्तिकता का खंडन की करके बताया है। कोई नास्तिक

591
00:41:45,360 --> 00:41:49,520
मिल जाएगा तो आप उसको क्या कहोगे? बताया है कि नहीं बताया? यह

592
00:41:49,520 --> 00:41:53,600
पहले बताइए। उसके बाद बताइएगा कि इसका आंसर क्या है? पहले

593
00:41:53,600 --> 00:41:57,760
तो यह बताइए बताया है कि नहीं बताया है? बिल्कुल बताया

594
00:41:57,760 --> 00:42:02,360
है। इसका आंसर यह है। कहां पर बताया है? कोई बुक में लिखा

595
00:42:02,360 --> 00:42:06,560
है? कोई बुक में लिखा है। कहां पे लिखा है? इस बारे में कहां बात

596
00:42:06,560 --> 00:42:11,280
की है? उनके सत्संग में मिलेगा आपको। कहां पे?

597
00:42:11,280 --> 00:42:15,360
उनके सत्संग में मिलेगा। वो सत्संग में आपको प्रमाण देना होगा।

598
00:42:15,360 --> 00:42:19,680
क्योंकि हम ये कह हमारा ये दावा है कि उन्होंने ऐसा नहीं बताया। तो आप फिर प्रमाण

599
00:42:19,680 --> 00:42:24,080
बताइए कहां बताया है। उनके सत्संग में

600
00:42:24,080 --> 00:42:28,480
तक मैंने समझाने भाई आपने

601
00:42:28,480 --> 00:42:33,840
क्या उनके सारे सत्संग रट लिए हैं क्या

602
00:42:33,840 --> 00:42:38,800
ये संस्कार है जिसके संस्कार वो करेगा

603
00:42:38,800 --> 00:42:43,160
संस्कार की बात ये संस्कार की बात होती है

604
00:42:43,160 --> 00:42:47,520
क्या कौन से दिन का सत्संग है उनका कौन से चैनल पर अवेलेबल

605
00:42:47,520 --> 00:42:53,440
है कुछ बताइए किस प्लेलिस्ट में है बताइए

606
00:42:53,440 --> 00:42:59,440
नास्तिकता के खंडन नाम से कौन सा वीडियो है उनका यही बता

607
00:43:02,200 --> 00:43:08,200
दीजिए क्या हो गया भाई ये तो चले

608
00:43:12,840 --> 00:43:16,960
गए पुष्पेंद्र दास जय श्री राम

609
00:43:16,960 --> 00:43:22,000
जय श्री राम ओनली खंडन गोपाल जी

610
00:43:22,000 --> 00:43:26,160
जी जी नाम बहुत

611
00:43:26,160 --> 00:43:29,320
जबरदस्त है ओनली

612
00:43:29,320 --> 00:43:33,360
खंडन ओनली रामपाल खंडन ऐसा

613
00:43:33,360 --> 00:43:38,040
ऐसा लगता है जैसे कि जी

614
00:43:38,040 --> 00:43:42,320
वो कभी-कभी ऐसी कुछ फिल्में आई है ना जिसमें व्यक्ति

615
00:43:42,320 --> 00:43:46,560
के साथ कुछ जो है ऐसा टॉर्चर हुआ ऐसा टॉर्चर हुआ

616
00:43:46,560 --> 00:43:52,560
उसके बाद वो ऐसा बाहर निकला ओनली खंडन बनके

617
00:43:55,240 --> 00:44:01,240
जी कहां गए? पुष्पेंद्र सिंह कहां गए भाई? पकड़िए उन्हें। कहां चले गए?

618
00:44:01,920 --> 00:44:06,640
भैया आपके साथ भी चले गए। लोग अत्याचार कर दे रहे हैं।

619
00:44:06,640 --> 00:44:09,840
क्या कर दे रहे हैं?

620
00:44:09,840 --> 00:44:14,000
अत्याचार कर दे रहे हैं। एक टॉपिक से

621
00:44:14,000 --> 00:44:18,240
चेंज करने का नाम नहीं। लगे हैं। लगे

622
00:44:18,240 --> 00:44:22,320
हैं। वर्ण विनाशक जी कह रहे हैं कि उनको वो करो

623
00:44:22,320 --> 00:44:28,320
आप चेहरा दिखाएं वर्ण विनाशक

624
00:44:28,840 --> 00:44:33,280
जी गोपाल जी बताइए

625
00:44:33,280 --> 00:44:37,280
इनसे एक बात ये पूछिए कभी भी कि हम काल

626
00:44:37,280 --> 00:44:41,280
के जाल में कैसे पहुंचे कि हाथ खड़ा किया जो पहला

627
00:44:41,280 --> 00:44:45,760
हाथ खड़ा किया उसको स्त्री बना दिया ये बाते

628
00:44:45,760 --> 00:44:49,920
कहां लिखी हुई है हां हां

629
00:44:49,920 --> 00:44:53,920
असल में क्या होता है मैं ये सब बातें हैं मेरी लिस्ट में मगर व्यक्ति फटाफट

630
00:44:53,920 --> 00:44:58,080
फटाफट आंसर देता जाए तो मैं आगे बढूं

631
00:44:58,080 --> 00:45:02,080
ये तो ये तो इनका धर्म है रामपाल दास जी से जो इन्होंने धर्म लिया

632
00:45:02,080 --> 00:45:06,080
है रामपाल से वो क्या लिया है कि जब कोई बात में फंसने लगो तो

633
00:45:06,080 --> 00:45:10,160
सच मत बोलो फिर वहां गोलमोल करो हम्म और जब

634
00:45:10,160 --> 00:45:10,660
अपना

635
00:45:10,400 --> 00:45:16,400
नाम बोलना हो तो पट से बोलो हां बिल्कुल

636
00:45:16,560 --> 00:45:20,840
जब उत्तर बहुत घुमाते बातों को बहुत घुमाए

637
00:45:20,840 --> 00:45:24,960
हैं। वर्ण विनाशक जी कह रहे वर्ण विनाशक जी कह रहे

638
00:45:24,960 --> 00:45:29,120
हैं कि वो चेहरा नहीं दिखाएंगे।

639
00:45:29,120 --> 00:45:33,120
तो वर्ण विनाशक जी हमारे चैनल पर हम लोग जो बात

640
00:45:33,120 --> 00:45:37,120
करते हैं आइडियोलॉजिकल डिसए्रीमेंट पर तो उसमें हम

641
00:45:37,120 --> 00:45:41,280
चेहरा आवश्यक रूप से रखते हैं। हां अगर कोई हमारे समर्थक हैं

642
00:45:41,280 --> 00:45:45,600
डिसए्रीमेंट नहीं है बस केवल अपने भाव व्यक्त करने हैं तो कोई आपत्ति नहीं है।

643
00:45:45,600 --> 00:45:49,600
आप आ सकते हैं। शिवम दास वापस आ

644
00:45:49,600 --> 00:45:54,720
गए हैं। देखिए जी बताइए शिवम दास जी।

645
00:45:54,720 --> 00:45:58,720
हां जी हम कहां थे? हम पूछ रहे थे आपसे कि

646
00:45:58,720 --> 00:46:02,720
आपके जो गुरु हैं उन्होंने किस लेक्चर में किस

647
00:46:02,720 --> 00:46:06,880
सत्संग में वो सत्संग कहां मिलेगा? यह बताया है कि नास्तिकता का खंडन

648
00:46:06,880 --> 00:46:12,880
क्या है? क्या आप यह बता सकते हैं? नहीं तो हम आगे बढ़े।

649
00:46:12,960 --> 00:46:17,120
देखो बिल्कुल बताया है कि जैसे जो ईश्वर है

650
00:46:17,120 --> 00:46:21,120
भाई साहब मैंने अभी आपसे यह नहीं पूछा है कि उन्होंने क्या बताया? मैंने पूछा है कहां

651
00:46:21,120 --> 00:46:25,120
बताया है? कब बताया है वह बताइए। इसका कोई प्रमाण है?

652
00:46:25,120 --> 00:46:25,620
उन्होंने

653
00:46:25,520 --> 00:46:29,600
बताया है? उनका सत्संग मुझे मिलेगा मैं आपको

654
00:46:29,600 --> 00:46:33,600
प्रश्न भी भेज दूंगा। पर अभी इस समय अभी राइट नाउ कोई प्रमाण है

655
00:46:33,600 --> 00:46:37,600
रामपाल दास जी ने नास्तिकता का खंडन

656
00:46:37,600 --> 00:46:43,120
किया है किसी सत्संग में? ऐसा कोई प्रमाण है आपके पास?

657
00:46:43,120 --> 00:46:47,200
हां वो मतलब ऐसा है पर डायरेक्ट प्रमाण

658
00:46:47,200 --> 00:46:51,280
भाई साहब प्रमाण हम आपकी बात पर विश्वास कर ले मैं वही कह

659
00:46:51,280 --> 00:46:55,360
रहा हूं कि प्रॉपर मुझे वो कौन सा सत्संग है वो याद नहीं अभी इस टाइम पे यानी अभी आपके

660
00:46:55,360 --> 00:46:59,440
पास प्रमाण नहीं है आप ये मान सकते हो कि नहीं

661
00:46:59,440 --> 00:47:03,600
है ठीक है तो नास्तिकता का खंडन उन्होंने कहां बताया है

662
00:47:03,600 --> 00:47:07,840
यह आपको नहीं पता है पर उन्होंने बताया है यह आपको पता है और उस बताए

663
00:47:07,840 --> 00:47:12,640
हुए के अनुसार अब आप नास्तिकता का खंडन मुझे बताने वाले हो है

664
00:47:12,640 --> 00:47:17,120
हां जी हां चलिए अब बताइए

665
00:47:17,120 --> 00:47:21,280
देखो पहाड़ी जी एक एक मिनट एक मिनट पहाड़ी जी का जरा वेलकम पहाड़ी

666
00:47:21,280 --> 00:47:25,760
जी जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव शिवश

667
00:47:25,760 --> 00:47:29,840
भाई सभी को जय श्री राम हर हर महादेव ठीक है शिवश भाई आप कंटिन्यू

668
00:47:29,840 --> 00:47:34,480
रखिए पहले इनको जी जी जी बिल्कुल जी

669
00:47:34,480 --> 00:47:38,960
अब बताइए शिवम दास जी नास्तिकता का क्या उपाय है आपके

670
00:47:38,960 --> 00:47:40,960
गुरु से मिला हुआ आपको

671
00:47:40,960 --> 00:47:43,680
आपके पास

672
00:47:43,680 --> 00:47:49,080
देखो परमात्मा के बारे में

673
00:47:49,080 --> 00:47:54,360
जानकारी वो खुद धरती परमात्मा क्या

674
00:47:54,360 --> 00:47:58,360
परमात्मा के बारे में जानकारी ईश्वर के बारे में

675
00:47:58,360 --> 00:48:02,720
जानकारी वो खुद आके बताते हैं धरती पे उनके अलावा

676
00:48:02,720 --> 00:48:08,720
मैं आपसे पूछ रहा हूं परमात्मा है ये कैसे सिद्ध होता है

677
00:48:09,040 --> 00:48:13,040
देखो ये सिद्ध होता आपके पास अभी पॉइंट होगा। अभी आप शुरू में

678
00:48:13,040 --> 00:48:17,040
तो ये बोल रहे थे कि ये तो आप भी सिद्ध नहीं कर सकते। अब आप कह रहे हो कि

679
00:48:17,040 --> 00:48:21,200
सिद्ध होता है और गुरु गुरु ने आपको बताया भी है। इनमें से कौन सी बात

680
00:48:21,200 --> 00:48:25,200
सच है? कौन सी बात झूठ है? नहीं वही मैं बता रहा हूं। आपके पास फोन

681
00:48:25,200 --> 00:48:30,920
होगा अभी इस टाइम पे आप मैं आपसे पूछ रहा हूं। भाई साहब आपने थोड़ी देर पहले कहा था

682
00:48:30,920 --> 00:48:35,120
कि परमात्मा है। यह तो आप भी सिद्ध नहीं कर सकते। कोई

683
00:48:35,120 --> 00:48:39,120
सिद्ध नहीं कर सकता। ये आपने कहा था कि नहीं कहा था? नास्तिक के

684
00:48:39,120 --> 00:48:43,200
पॉइंट ऑफ व्यू से कहा था कि अगर वो नास्तिक क्या है? वो चाहेगा कि भाई मुझे

685
00:48:43,200 --> 00:48:47,360
वो दिखे। मैं कह रहा हूं मैं कह

686
00:48:47,360 --> 00:48:51,440
रहा हूं आप आपने जो ये कहा था कि नास्तिक कोई यह

687
00:48:51,440 --> 00:48:56,800
कहेगा कि मुझे दिखे तो आप उसको दिखाने के रूप में सिद्ध नहीं कर सकते। ये कह रहे हो।

688
00:48:56,800 --> 00:49:01,040
हां यह मैं कह सकता हूं कि हम उसको बाकी आप सिद्ध

689
00:49:01,040 --> 00:49:05,400
कर सकते हो कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है।

690
00:49:05,400 --> 00:49:10,720
थरेटिकली थ्योरेटिकली चलिए बताइए बताइए

691
00:49:10,720 --> 00:49:15,200
देखो आपके पास फोन है अभी इस समय हां

692
00:49:15,200 --> 00:49:19,840
आप देखो उस फोन पे कितने सारे बैक्टीरियास होंगे माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स

693
00:49:19,840 --> 00:49:23,840
जो हमारी इस आंख से दिख नहीं रहे क्योंकि

694
00:49:23,840 --> 00:49:28,000
हमारा जो ह्यूमन आई है वो 0.9% ही देख

695
00:49:28,000 --> 00:49:32,320
पाता है। जहां तक मैंने स्टडी करी है इसके ऊपर।

696
00:49:32,320 --> 00:49:36,400
एक मिनट रुकिए। एक मिनट रुकिए। यह परिभाषा आप मुझे दे देंगे।

697
00:49:36,400 --> 00:49:40,560
इनके द्वारा दी हुई रामपाल के द्वारा दी हुई क्योंकि यह परिभाषा

698
00:49:40,560 --> 00:49:44,880
खंडनीय है। मतलब इसका खंडन हो सकता है। और यह परिभाषा

699
00:49:44,880 --> 00:49:49,120
मैं सुन चुका हूं। दो लड़के बात कर रहे थे। वो जो फ्लैट

700
00:49:49,120 --> 00:49:53,280
फ्लैट दुनिया को फ्लैट देख रहे थे। वो दुनिया के दूसरे डायमेंशन

701
00:49:53,280 --> 00:49:57,440
से देख नहीं पा रहे थे। तो दो बातें यहां से आई है कि

702
00:49:57,440 --> 00:50:02,080
आप जो परिभाषा मुझे दे रहे हैं यह इसका खंडन हो सकता है और

703
00:50:02,080 --> 00:50:06,120
दूसरी बात ये है कि आपको अब यही परिभाषा दिखानी

704
00:50:06,120 --> 00:50:10,160
होगी रामपाल के रामपाल जी के द्वारा बताई जाने वाली के रूप

705
00:50:10,160 --> 00:50:12,000
में ठीक है वही अब आपने

706
00:50:12,000 --> 00:50:16,000
परिभाषा बोली आपको सिंपल लैंग्वेज में बता रहा हूं आपने

707
00:50:16,000 --> 00:50:20,000
जो मुझे वो परिभाषा बताई आपने अपने सिंपल लैंग्वेज में मुझे जो समझ नहीं आई तो

708
00:50:20,000 --> 00:50:24,000
वही जो परमात्मा की वाणी है वो जो आपको समझ नहीं आएगी वही मैं सिंपल मैं बता रहा हूं

709
00:50:24,000 --> 00:50:28,080
आपको बताइए बताइए बताइए लगा लो जैसे

710
00:50:28,080 --> 00:50:32,560
आपके पास अभी फोन है हां उसके उसके ऊपर कितने माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स

711
00:50:32,560 --> 00:50:36,720
है वो हम अपनी आंखों से नहीं देख सकते इसी

712
00:50:36,720 --> 00:50:40,960
अगर वही हम चीज माइक्रोस्कोप के नीचे देखें तो हमें वहीं पे जीवित प्राणी

713
00:50:40,960 --> 00:50:45,120
दिखेंगे चलते हुए तो इसका मतलब ये नहीं कि अगर हम माइक्रोस्कोप को साइड

714
00:50:45,120 --> 00:50:49,120
कर दे तो वो वहां पे नहीं है बल्कि वो उसी स्थान पे मौजूद

715
00:50:49,120 --> 00:50:53,200
है उसी समय बस वो हमें दिख नहीं रहे इसलिए हम उसको मान नहीं रहे कि भाई वो

716
00:50:53,200 --> 00:50:57,360
नहीं है यहां अगर हमारे पास वही दृष्टि खुल जाए यानी कि

717
00:50:57,360 --> 00:51:01,760
अगर हमसे यह कहा जाए कि तुमको कोई चीज है जो दिख नहीं रही है

718
00:51:01,760 --> 00:51:05,760
तो ना दिखने के कारण तुम ये नहीं मान सकते तो ना दिखने वाली के

719
00:51:05,760 --> 00:51:10,080
रूप में हम किसी भी चीज का नाम तुमको जो लेंगे तुम्हें मानना चाहिए कि वो है।

720
00:51:10,080 --> 00:51:14,080
ना दिखने वाली रूप के रूप में हम किसी भी चीज का नाम

721
00:51:14,080 --> 00:51:18,320
लेंगे तो तुम्हें मानना चाहिए कि वो है। हम यह कहे कि

722
00:51:18,320 --> 00:51:22,320
यहां पर एक उड़ने वाला डायनासोर खड़ा हुआ है आपके बगल में। मगर

723
00:51:22,320 --> 00:51:27,040
जैसे कि माइक्रोस्कोप के बिना वह नहीं दिखते कीड़े तो एक स्पेसिफिक

724
00:51:27,040 --> 00:51:31,040
आंख के बिना तुम्हें वह उड़ने वाला डायनासोर नहीं दिख रहा है। इसलिए तुम ये मान लो

725
00:51:31,040 --> 00:51:35,040
कि बगल में उड़ने वाला डायनासोर है। ये तो ये

726
00:51:35,040 --> 00:51:39,040
तो फिर आपकी मनमाना हो गया। मनमाना कैसे हो गया? आप समझ नहीं रहे

727
00:51:39,040 --> 00:51:43,040
हो। ना दिखने वाली नहीं ना दिखने वाली चीजें भी

728
00:51:43,040 --> 00:51:47,200
दिखती है। इससे ये सिद्ध होता है कि ईश्वर भी है। ये कैसी डेफिनेशन है

729
00:51:47,200 --> 00:51:51,360
भाई? इसका मतलब कोई भी व्यक्ति आकर के कह देगा कि आपके आसपास यह

730
00:51:51,360 --> 00:51:55,520
चीज है। अब हम कहेंगे कि नहीं दिख रही है तो आप कहोगे कि ना दिख

731
00:51:55,520 --> 00:51:59,680
तो तुम्हें वो माइक्रो वो जो क्या कहते हैं बैक्टीरियास भी नहीं दिख

732
00:51:59,680 --> 00:52:03,840
रहे हैं। ना दिखने वाली चीज के आधार पर आप

733
00:52:03,840 --> 00:52:07,920
ईश्वर को सिद्ध कर रहे हैं। ईश्वर भैया ईश्वर

734
00:52:07,920 --> 00:52:11,920
है ये सिद्ध करो। और मैं यह बता रहा हूं कि

735
00:52:11,920 --> 00:52:16,080
चलो मान लिया कि ना दिखने वाली है। आपके आसपास मैंने क्लेम

736
00:52:16,080 --> 00:52:20,560
किया कि आपके आसपास जो है हाथी है मैम है।

737
00:52:20,560 --> 00:52:24,880
हाथी के पहले का जो हाथी जिसका वंशज है बहुत पुराना टाइम मैम मैम

738
00:52:24,880 --> 00:52:29,360
हाथी आपके आसपास वो है मैम। अब

739
00:52:29,360 --> 00:52:33,360
आप कहोगे कि दिख नहीं रहा तो मैं कहूंगा मैं बैक्टीरिया भी तो नहीं दिख रहे। ना

740
00:52:33,360 --> 00:52:37,520
दिखने के आधार पर आप सिद्ध कर रहे हैं कि ईश्वर है।

741
00:52:37,520 --> 00:52:41,600
यह तो एक उसके क्वेश्चन का आंसर हो सकता है कि ईश्वर है तो दिखता क्यों नहीं

742
00:52:41,600 --> 00:52:42,160
है?

743
00:52:42,160 --> 00:52:46,400
तो हम कह सकते हैं कि हां हमारे पास वो स्पेसिफिक लेंस स्पेसिफिक

744
00:52:46,400 --> 00:52:50,560
आईज नहीं है जिससे हम ईश्वर को देख सके। मगर ईश्वर है ये सिद्ध

745
00:52:50,560 --> 00:52:54,640
करने के लिए तो आपको दूसरी चीजें देनी होंगी ना। ये तो एक अलग क्वेश्चन है कि

746
00:52:54,640 --> 00:52:58,640
ईश्वर है तो दिखता क्यों नहीं है? ये तो उसका जवाब दे रहे हो

747
00:52:58,640 --> 00:53:02,720
आप। उनको मैंने आपसे यह नहीं कहा कि ईश्वर है तो दिखता क्यों नहीं है? मैंने

748
00:53:02,720 --> 00:53:06,760
आपसे पूछा है ईश्वर है तो यह कैसे सिद्ध होता

749
00:53:06,760 --> 00:53:10,960
है? हम उनको थ्यरेटिकली सिर्फ शास्त्र

750
00:53:10,960 --> 00:53:14,960
दिखा सकते हैं। हम शास्त्र वो शास्त्रों ने क्या बताया है ईश्वर को सिद्ध

751
00:53:14,960 --> 00:53:19,200
होने के विषय में? ईश्वर सिद्ध होते कैसे? शास्त्र के अलावा

752
00:53:19,200 --> 00:53:23,520
हम उनको कोई और चीज दे ही नहीं सकते जिनसे उनको पता लग जाए। अगर हम उनको

753
00:53:23,520 --> 00:53:27,520
शास्त्रों में क्या डेफिनेशन दी है? ईश्वर को

754
00:53:27,520 --> 00:53:31,680
सिद्ध करने के निमित्त हां वही देखो एक

755
00:53:31,680 --> 00:53:35,840
तो आपके पास पूरा गुरु हो जो बता सके दूसरी चीज परमात्मा

756
00:53:35,840 --> 00:53:40,320
के बारे में आपके पास गुरु है ना पूरा आपके

757
00:53:40,320 --> 00:53:44,800
पास गुरु है ना पूरा हां जी

758
00:53:44,800 --> 00:53:49,360
आपके पास तो गुरु है ना पूरा तो उसने बताया है ना आपको

759
00:53:49,360 --> 00:53:53,600
बोलना मैंने देखा है सत्संग में सुना है तो बताओ हमें कैसे

760
00:53:53,600 --> 00:53:57,920
सिद्ध होता है हमारा क्वेश्चन ये नहीं है कि ईश्वर है तो दिखता क्यों नहीं है?

761
00:53:57,920 --> 00:54:02,000
उसके उस क्वेश्चन के जवाब में आप यह कह सकते हो कि जैसे बैक्टीरिया नहीं दिख रहे बिना

762
00:54:02,000 --> 00:54:06,800
माइक्रोस्कोप के वैसे ही आपको ईश्वर नहीं दिख रहा है उस स्पेसिफिक

763
00:54:06,800 --> 00:54:10,880
जो लेंस है या जो भी है उसके बिना मगर मेरा क्वेश्चन

764
00:54:10,880 --> 00:54:15,120
ये नहीं मैंने कहा ईश्वर है ये कैसे प्रूव होता है कैसे सिद्ध

765
00:54:15,120 --> 00:54:19,680
होता है ईश्वर है एक तो

766
00:54:19,680 --> 00:54:23,840
संस्कार आपके पुराने कैसे हैं एक तो आपके

767
00:54:23,840 --> 00:54:27,040
उनको समझने के

768
00:54:27,040 --> 00:54:31,360
दूसरे नास्तिकता का खंडन है आपके पास। यही

769
00:54:31,360 --> 00:54:35,600
बताया था गुरुदेव ने आपके। देखो मैं आपको वही सिंपल

770
00:54:35,600 --> 00:54:39,600
लैंग्वेज में बताने जा रहा हूं। तो इसमें मैं गलतियां कर रहा हूं शायद कि मैं वो

771
00:54:39,600 --> 00:54:44,320
बताइए बिना गलतियों के बताइए।

772
00:54:44,320 --> 00:54:48,400
तो देखो नास्तिकता नास्तिक जो इंसान है अगर वो

773
00:54:48,400 --> 00:54:52,720
आपके सामने आ गया तो आप कैसे उनको बताओगे? मैं बता दूंगा।

774
00:54:52,720 --> 00:54:57,040
मैंने आपको फिर कहा मैं आपको बताऊंगा और अकाट से बातें बताऊंगा।

775
00:54:57,040 --> 00:55:01,280
मैं आपको बताऊंगा और अकाट से बातें बताऊंगा। अभी आप मुझे बताइए कि

776
00:55:01,280 --> 00:55:05,360
आपके गुरु ने नास्तिकता का खंडन पहली बात तो आपने क्लेम किया है कि

777
00:55:05,360 --> 00:55:10,080
इसी तरह की परिभाषा आपके गुरु ने दी है। तो वो आपको देना होगा।

778
00:55:10,080 --> 00:55:14,160
ठीक है? आपके पास कोई की बुक है क्या?

779
00:55:14,160 --> 00:55:20,160
आपके गुरु की आपके पास आपके गुरु की कोई बुक है क्या इस समय?

780
00:55:21,680 --> 00:55:26,000
बुक है? वह तो सब वो तो सब पढ़ ही रहे हैं ज्ञान गंगा पढ़ी

781
00:55:26,000 --> 00:55:32,000
है ना उठाइए दिखाइए जरा

782
00:55:38,680 --> 00:55:43,040
रुकिए जी हम इस पे हाथ रख

783
00:55:43,040 --> 00:55:47,360
के बोलिए कि मैंने सत्संग सुना है जिसमें उन्होंने नास्तिकता

784
00:55:47,360 --> 00:55:51,280
का खंडन बताया है।

785
00:55:51,280 --> 00:55:55,360
देखिए मैंने ना इस पर हाथ रखा हुआ है और मैं यह कह रहा

786
00:55:55,360 --> 00:55:59,600
हूं कि मैंने जहां तक समझा है

787
00:55:59,600 --> 00:56:04,080
भाई साहब यहीं पर दिक्कत है यही दिक्कत

788
00:56:04,080 --> 00:56:08,240
है आपसे मैंने पूछा था उन्होंने नास्तिकता का खंडन बताया आपने बताया

789
00:56:08,240 --> 00:56:12,240
हां सत्संग में बताया मैं भेज दूंगा बता दूंगा अभी मैं कह रहा हूं इस बुक

790
00:56:12,240 --> 00:56:16,320
पर हाथ रख के बोल दीजिए एक बार हमें तसल्ली हो जाएगी तो आप फिर देखिए

791
00:56:16,320 --> 00:56:22,320
देखो अभी मैं पिता का नाम पूछूंगा पट से बता दोगे

792
00:56:23,200 --> 00:56:27,680
वही तो समझने वाली बात है। सच बोलने के लिए सोचना नहीं पड़ता है।

793
00:56:27,680 --> 00:56:31,680
खरा होता है सच मेरे भाई। आप हाथ रख के बोलिए ना

794
00:56:31,680 --> 00:56:35,680
कि हां मैंने ऐसा सत्संग देखा है रामपाल का रामपाल जी

795
00:56:35,680 --> 00:56:40,480
का जिसमें उन्होंने बताया है नास्तिकता का तोड़।

796
00:56:40,480 --> 00:56:44,720
परेशान कर रहे हो खामखा। आगे चलते हैं दूसरे प्रश्न पर।

797
00:56:44,720 --> 00:56:49,200
नहीं मैं परेशान नहीं कर रहा। पर जिस टाइप के कह रहे हो ना इससे

798
00:56:49,200 --> 00:56:53,280
किसी को भी ज्ञान नहीं हो सकता। ये आप

799
00:56:53,280 --> 00:56:57,440
ये ये आपका पर्सपेक्टिव है। आप अगर

800
00:56:57,440 --> 00:57:01,680
ये जो परिभाषाएं जिन पर मैं बात कर रहा हूं ना धर्म दुनिया

801
00:57:01,680 --> 00:57:05,760
से विलुप्त हो जाएगा। अगर जो जिन बातों पर

802
00:57:05,760 --> 00:57:10,000
मैं बात कर रहा हूं उन पर आप बात नहीं करोगे धर्म का कोई अस्तित्व नहीं बचेगा।

803
00:57:10,000 --> 00:57:14,000
कोई पूछेगा बच्चा अपनी मां से मां मैं क्यों मानू भगवान को? क्यों

804
00:57:14,000 --> 00:57:18,000
मानू मैं धर्म को? तो मां उसको बता वो कोई उसको बता ही नहीं पाएगा कि

805
00:57:18,000 --> 00:57:22,160
धर्म है क्या? क्यों मानना चाहिए धर्म? उसको बताने वाला होना चाहिए।

806
00:57:22,160 --> 00:57:26,320
बेटा तुम जो ये टीवी, फ्रिज, कार, एसी ये सब में

807
00:57:26,320 --> 00:57:30,600
जो तुम खुशियां ढूंढ रहे हो ना इन सब खुशियों की जड़ में भगवान

808
00:57:30,600 --> 00:57:34,880
है। तो धर्म को इसलिए मानो क्योंकि वो तुमको सबसे बड़ी

809
00:57:34,880 --> 00:57:38,400
खुशी भगवान तक पहुंचाते हैं।

810
00:57:38,400 --> 00:57:42,760
जिन बातों पर मैं बात कर रहा हूं इसके बिना धर्म का अस्तित्व ही नहीं

811
00:57:42,760 --> 00:57:47,200
है। और आपके जो गुरु हैं अभी तक आपकी जानकारी

812
00:57:47,200 --> 00:57:51,440
में उन्होंने आपको वो ज्ञान नहीं दिया है। जिससे कि यह जिस पर यह इमारत

813
00:57:51,440 --> 00:57:55,520
खड़ी होती है। नास्तिक जब हरा नास्तिक जब आस्तिकों के पास आते

814
00:57:55,520 --> 00:57:59,920
हैं ना तो फिर आपके अनुसार तो हम लोग छुप जाएंगे। हम लोग उनसे सामना

815
00:57:59,920 --> 00:58:04,000
करेंगे। नास्तिकों को हम लोग खदेड़ेंगे और उसके बाद आप आ जाना कि

816
00:58:04,000 --> 00:58:08,160
नहीं ये शंकराचार्य का ज्ञान गलत था। हमारा

817
00:58:08,160 --> 00:58:13,240
सही है। हम है असली

818
00:58:13,240 --> 00:58:17,440
तत्वदर्शी। समझ रहे हो मेरी बात? तो आप इस पर मत जाइए

819
00:58:17,440 --> 00:58:22,160
कि यह गान किसी काम का है कि नहीं है। आप इस पर जाइए

820
00:58:22,160 --> 00:58:26,240
कि अगर चलो मैं हाथ रख रख के नहीं बोल रहा हूं। आप खुद

821
00:58:26,240 --> 00:58:30,400
से एडमिट कर लो कि हां आपने कोई ऐसा सत्संग नहीं देखा है जिसमें उन्होंने पर्टिकुलर

822
00:58:30,400 --> 00:58:35,280
नास्तिकता का खंडन किया हो। देखा है? बिल्कुल।

823
00:58:35,280 --> 00:58:39,520
अगर मैं आपको सीधा कहूं कि उन्होंने जो कहा है जो मैंने समझा है उस हिसाब

824
00:58:39,520 --> 00:58:43,600
से नास्तिक का खंडन हो सकता है। मैं कह रहा हूं हो सकता है।

825
00:58:43,600 --> 00:58:47,680
चलो आपने जो अभी परिभाषा बताई थी ये बताते हुए मेरे गुरु ने नास्तिकता

826
00:58:47,680 --> 00:58:51,840
का जो खंडन बताया वो मैं आपको बता रहा हूं। यही बताई थी ना वही

827
00:58:51,840 --> 00:58:56,000
तो मैं कह रहा हूं आपको। हां बताई उसी उसी

828
00:58:56,000 --> 00:59:00,080
हिसाब से जो मैंने समझा तो चलो इसमें हाथ रख के कह

829
00:59:00,080 --> 00:59:04,080
दो कि नास्तिकता का खंडन जो उन्होंने समझाया है वो मैंने

830
00:59:04,080 --> 00:59:08,720
उसका रूपांतरण करके बताया

831
00:59:08,720 --> 00:59:12,880
रूपांतरित मतलब क्या कह रहे हो आप मतलब ट्रांसलेट करके

832
00:59:12,880 --> 00:59:16,960
उन्होंने किसी वीडियो में ऐसा उदाहरण दिया होगा ना कि भगवान इसलिए नहीं

833
00:59:16,960 --> 00:59:21,280
दिखता है क्योंकि हम उसको ऐसे ऐसे देख नहीं सकते फिर उसका

834
00:59:21,280 --> 00:59:25,280
उसी उसी बात को उसी कहानी को आपने थोड़ा सा और एडवांस

835
00:59:25,280 --> 00:59:29,520
लेवल में माइक्रोस्कोप बैक्टीरिया के साथ मिला करके बता दिया। मगर

836
00:59:29,520 --> 00:59:33,600
यह मिला तो आपको आपके गुरु से है ना कि भगवान को हम

837
00:59:33,600 --> 00:59:37,840
इसलिए नहीं देख सकते कि जिस प्रकार से अमू कुछ कुछ चीजों को देखने

838
00:59:37,840 --> 00:59:42,240
के लिए कुछ कुछ स्पेशल साइट्स चाहिए होती है।

839
00:59:42,240 --> 00:59:47,640
उसी तरीके से भगवान को देखने के लिए स्पेशल आंखें चाहिए होती है।

840
00:59:47,640 --> 00:59:52,480
बिल्कुल हम ये उन्होंने बताया है।

841
00:59:52,480 --> 00:59:56,480
यह लगा लो इन्होंने बताया पर उस चीज को समझने के लिए जो मैंने इस

842
00:59:56,480 --> 01:00:00,640
चीज को उनकी सत्संग से जो समझा वो मैं आपको

843
01:00:00,640 --> 01:00:04,880
बता रहा हूं लेकिन आप उस चीज को

844
01:00:04,880 --> 01:00:08,960
लगा लो कॉम्प्लिकेट कर रहे हो कॉम्प्लिकेट नहीं कर रहा हूं छोटे

845
01:00:08,960 --> 01:00:13,120
भाई आपने उस चीज को कभी जाना ही नहीं चलिए आप आप एक

846
01:00:13,120 --> 01:00:17,840
काम करिए नास्तिकता का खंडन अब करके दिखाइए चलिए

847
01:00:17,840 --> 01:00:22,880
बताइए नास्तिकता के क्या जवाब है आपके पास

848
01:00:22,880 --> 01:00:26,600
देखो कोई नास्तिक इंसान

849
01:00:26,600 --> 01:00:30,640
हम बोलिए नहीं मानता क्योंकि वो उसको देख

850
01:00:30,640 --> 01:00:34,640
नहीं सकते क्योंकि अरे भाई मैंने आपसे कहा मैं ये नहीं कह रहा

851
01:00:34,640 --> 01:00:40,360
हूं भगवान है तो दिखता क्यों नहीं है आप मुझे बताइए भगवान है सिद्ध कैसे होता

852
01:00:40,360 --> 01:00:44,400
है अब देखिए अगर ज्यादा देर इसको खींचेंगे हम लोग दूसरे उस

853
01:00:44,400 --> 01:00:48,760
प्रश्न पर आते हैं यह विश्वास की बात है एक तो

854
01:00:48,760 --> 01:00:52,800
क्या कि भगवान है या नहीं। तो

855
01:00:52,800 --> 01:00:56,800
कितनी बार यार अपनी बात बदलते हो आप। पहले कह रहे हो

856
01:00:56,800 --> 01:01:00,880
कि नास्तिकता का खंडन सबसे पहले आपने कहा किसी के पास नहीं है। फिर

857
01:01:00,880 --> 01:01:04,960
कहा मेरे गुरु ने बताया है। फिर मैं फिर आपने बताया कि ये

858
01:01:04,960 --> 01:01:08,960
एक परिभाषा बताने लगे। फिर मैं अब पूछ रहा हूं कि ये परिभाषा तो इस

859
01:01:08,960 --> 01:01:12,960
क्वेश्चन का जवाब है। तो आप कह रहे हो ये तो विश्वास की बात है। शुरू में ही कह देते

860
01:01:12,960 --> 01:01:17,200
विश्वास की बात है। हमारे गुरु ने नहीं बताया। हमारे गुरु ने ये बताया

861
01:01:17,200 --> 01:01:22,000
विश्वास की बात है। आपके गुरु ने यही बताया विश्वास की बात है।

862
01:01:22,000 --> 01:01:26,000
नहीं फिर आप बता सकते हो मुझे कि कैसे कर सकते हो। मैं बताऊंगा मेरे

863
01:01:26,000 --> 01:01:31,440
भाई मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं। आपके गुरु ने बताया है कि नहीं सिंपल।

864
01:01:31,440 --> 01:01:35,440
अरे बताया पर मैं आपको वो समझा नहीं पा रहा हूं या फिर आप वो समझ नहीं पा रहे। मैं

865
01:01:35,440 --> 01:01:37,920
कह रहा हूं। कहा कि ये तो विश्वास की बात

866
01:01:37,920 --> 01:01:42,400
है। क्या आपके गुरु ने इतना ही बताया है? विश्वास की बात है।

867
01:01:42,400 --> 01:01:46,400
वही चीज है कि शायद मैं आपको वो समझा नहीं पा रहा हूं। नहीं आप

868
01:01:46,400 --> 01:01:51,040
यह बताइए मुझे विश्वास की बात है कि नहीं है? एक

869
01:01:51,040 --> 01:01:55,120
तो चलो विश्वास की बात भी है। बिल्कुल है। विश्वास की

870
01:01:55,120 --> 01:01:59,280
बात भी है। यानी कि दूसरी चीज भी है आपके पास ईश्वर

871
01:01:59,280 --> 01:02:03,680
को सिद्ध करने के लिए। दूसरी चीज ये है कि आपका

872
01:02:03,680 --> 01:02:08,640
खुद का एक्सपीरियंस भाव क्या है आपका? क्या एक्सपीरियंस बताइए?

873
01:02:08,640 --> 01:02:12,640
प्रैक्टिकली समझाइए मुझे थोड़ा सा। अरे वही मैं कह रहा

874
01:02:12,640 --> 01:02:16,640
हूं। अगर आप देखो ऐसे देश में पैदा होते जहां भगवान का कुछ निशान ही नहीं था तो

875
01:02:16,640 --> 01:02:20,800
आप भगवान को मानते भी नहीं। आप शंकराचार्य जी से जुड़ते भी नहीं। अरे मेरे

876
01:02:20,800 --> 01:02:24,800
भाई मैं पूछ रहा हूं कि मैं एक बिल्कुल अनजान व्यक्ति

877
01:02:24,800 --> 01:02:28,960
हूं। मुझे कुछ नहीं पता है। अभी आप मुझे बताइए कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध

878
01:02:28,960 --> 01:02:32,360
होता है?

879
01:02:32,360 --> 01:02:36,480
सिंपल। नहीं है तो छोड़िए। दूसरे आगे बढ़ते हैं। क्यों उसको खींच

880
01:02:36,480 --> 01:02:40,640
रहे हैं? नहीं पता है तो छोड़ दीजिए। तो आप

881
01:02:40,640 --> 01:02:45,200
अपने हिसाब से बता दो अगर आप ये मान के चलो पहले छोड़िए तो सही

882
01:02:45,200 --> 01:02:49,200
चलो छोड़ दिया क्या छोड़ा

883
01:02:49,200 --> 01:02:53,440
छोड़ने का मतलब है ये कहिए हां इस बारे में भी मुझे नहीं पता है कि उन्होंने

884
01:02:53,440 --> 01:02:57,520
क्या बताया है चलो मुझे नहीं पता उन्होंने क्या बताया अभी

885
01:02:57,520 --> 01:03:01,520
चलो मुझे नहीं पता मत कहो स्पष्ट बोलो खरा ऐसे मत दिखाओ कि

886
01:03:01,520 --> 01:03:06,280
हमारी वजह से बोल रहे हो मजबूरी नहीं है कोई मुझे नहीं पता मुझे नहीं

887
01:03:06,280 --> 01:03:12,280
पता हैं मुझे नहीं पता बताओ बता सकते हो मुझे।

888
01:03:16,680 --> 01:03:21,040
हां गला खराब करवा देते हो यार इतनी देर बाद करवा करवा

889
01:03:21,040 --> 01:03:25,040
के। नहीं तो आप बताओ फिर कैसे

890
01:03:25,040 --> 01:03:29,120
एक नास्तिक को आप बताओगे कि भगवान है। बता

891
01:03:29,120 --> 01:03:34,600
रहा हूं। ऐसा

892
01:03:34,600 --> 01:03:39,200
है दुनिया के प्रत्येक जीव में

893
01:03:39,200 --> 01:03:43,600
स्वयं को नास्तिक कहने वाले व्यक्ति में भी तीन

894
01:03:43,600 --> 01:03:47,000
प्रकार की प्यास विद्यमान

895
01:03:47,000 --> 01:03:51,560
है। सत्य की प्यास वो कभी मरना नहीं

896
01:03:51,560 --> 01:03:55,880
चाहता। चित्त की प्यास वो कभी मूर्ख नहीं बनना

897
01:03:55,880 --> 01:03:59,920
चाहता। आनंद की प्यास, अनंतानंद की प्यास वो कभी

898
01:03:59,920 --> 01:04:04,080
दुखी नहीं होना चाहता। सतचित आनंद यह

899
01:04:04,080 --> 01:04:08,120
तीन प्रकार की जो प्यास है वह एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त

900
01:04:08,120 --> 01:04:12,320
है। इस प्यास को बदार उपनिषद एक मिनट

901
01:04:12,320 --> 01:04:16,480
भाई साहब सुनना है आपको कि नहीं सुनना है? जी हां जी

902
01:04:16,480 --> 01:04:20,560
बोलिए ब्रदारण्यक उपनिषद एक

903
01:04:20,560 --> 01:04:24,800
तीन 28 में इस प्यास को कहा गया है असतो मा सदगमया

904
01:04:24,800 --> 01:04:29,360
तमसो मागया मृत्यया

905
01:04:29,360 --> 01:04:31,920
भाई साहब बीच में मत बोलो

906
01:04:31,920 --> 01:04:35,920
आपको जब कहा था बोलो बोलो बोलो तो तुम घंटो घुमा घुमा

907
01:04:35,920 --> 01:04:40,000
के और विश्वास की बात है उसके बाद आ गए मुझे नहीं पता है अब जब

908
01:04:40,000 --> 01:04:45,640
सामने वाला बोल रहा तो उसमें ब्रेक वो कर रहे हो बोलिए बोलिए

909
01:04:45,640 --> 01:04:48,280
हम

910
01:04:48,280 --> 01:04:53,000
तो ऐसी कोई इनबिल्ट प्यास नहीं

911
01:04:53,000 --> 01:04:57,680
है जीव में जिसका विषय

912
01:04:57,680 --> 01:05:01,920
जिसके विषय का अस्तित्व ना हो। जैसे कि एक

913
01:05:01,920 --> 01:05:06,320
नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी भूख है तो भूख

914
01:05:06,320 --> 01:05:10,480
होने से यह सिद्ध होता है कि दुनिया में भोजन है। मेरे अंदर

915
01:05:10,480 --> 01:05:14,480
प्यास है। प्यास होने से यह सिद्ध होता है कि दुनिया में

916
01:05:14,480 --> 01:05:18,640
प्यास बुझाने वाला क्या है? पानी है। मेरे अंदर

917
01:05:18,640 --> 01:05:23,120
सुनने की प्यास है। उसी से सिद्ध होता है दुनिया में ध्वनि है।

918
01:05:23,120 --> 01:05:27,200
मेरे अंदर देखने की प्यास है। उसी से सिद्ध होता है कि दुनिया में

919
01:05:27,200 --> 01:05:30,960
दृश्य है। तो जिस प्रकार

920
01:05:30,960 --> 01:05:34,960
भूख का विषय भोजन सिद्ध है। भूख होने मात्र से

921
01:05:34,960 --> 01:05:38,960
भोजन सिद्ध होता है। जिस प्रकार प्यास होने मात्र से पानी

922
01:05:38,960 --> 01:05:43,200
सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त

923
01:05:43,200 --> 01:05:47,280
सतचित आनंद की प्यास से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

924
01:05:47,280 --> 01:05:52,200
का अस्तित्व सिद्ध होता

925
01:05:52,200 --> 01:05:56,880
है। एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी-कभी यह सोचता है

926
01:05:56,880 --> 01:06:01,200
उसको जाना है सड़क सड़क पर निकल कर के स्कूटर से मोटरसाइकिल

927
01:06:01,200 --> 01:06:05,360
से तो बारिश हो रही है तो वो कम हो जाए नास्तिक व्यक्ति भी सोच लेता

928
01:06:05,360 --> 01:06:09,600
है क्यों भाई जब कोई बारिश को कंट्रोल करने वाला

929
01:06:09,600 --> 01:06:13,600
है ही नहीं इस दुनिया में तो तुम क्यों सोच रहे हो कि बारिश जो है कम

930
01:06:13,600 --> 01:06:17,600
हो जाए तुम्हारे अनुसार एक नास्तिक व्यक्ति भी सोचता है सर्दी कम

931
01:06:17,600 --> 01:06:21,680
हो जाए धूप कम हो जाए इसका

932
01:06:21,680 --> 01:06:25,920
मतलब वह भले ही भगवान को मना तो कर रहा है, परमेश्वर

933
01:06:25,920 --> 01:06:30,000
को मना तो कर रहा है मगर मन ही मन बार-बार मांग रहा है कि दुनिया

934
01:06:30,000 --> 01:06:35,720
में कोई परमेश्वर जैसी चीज हो जो इस प्रकृति को मेरे लिए कंट्रोल

935
01:06:35,720 --> 01:06:40,320
करे। तो जिस प्रकार भूख का विषय भोजन सिद्ध होता है।

936
01:06:40,320 --> 01:06:44,400
प्यास का विषय पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार

937
01:06:44,400 --> 01:06:49,440
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सच्चिदानंद

938
01:06:49,440 --> 01:06:53,680
की प्यास का विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व

939
01:06:53,680 --> 01:06:57,680
सिद्ध होता है। जिसको नास्तिक भी नहीं नकार सकता। क्या नास्तिक

940
01:06:57,680 --> 01:07:01,760
कहेगा कि उसके माता-पिता इतने वर्ष की आयु में अगर

941
01:07:01,760 --> 01:07:02,480
बीमार पड़ेंगे

942
01:07:02,480 --> 01:07:06,640
तो वो उनका इलाज नहीं कराएगा। कराएगा ना।

943
01:07:06,640 --> 01:07:10,720
हर हाल में कराएगा। जो उसके प्रियजन होंगे वो कितने

944
01:07:10,720 --> 01:07:14,720
भी बूढ़े हो जाए। उसका अंतिम प्रयास रहेगा कि

945
01:07:14,720 --> 01:07:20,720
वह बच जाए मरे ना। यानी कि मृत्यु विहीन जीवन

946
01:07:21,680 --> 01:07:25,680
यह नास्तिक भी चाहता है। तो दुनिया के प्रत्येक

947
01:07:25,680 --> 01:07:29,760
प्राणी मात्र के अंदर जो व्याप्त चाह है जिससे वो चाह करके

948
01:07:29,760 --> 01:07:33,760
भी दूर नहीं हो पा रहा है। उस चाह से ये सिद्ध हो जाता है कि इस

949
01:07:33,760 --> 01:07:38,400
दुनिया में उस चाह की पूर्ति करने वाला कोई परमेश्वर

950
01:07:38,400 --> 01:07:40,640
है।

951
01:07:40,640 --> 01:07:45,640
ठीक है? अब बात ये आती है

952
01:07:45,640 --> 01:07:50,240
कि जीव की चाह क्या है? जीव

953
01:07:50,240 --> 01:07:54,320
की चाह है प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त

954
01:07:54,320 --> 01:07:59,120
हो जाना। यही चाह है ना जीव की।

955
01:07:59,120 --> 01:08:05,120
बिल्कुल है ना? इसका मतलब ईश्वर कौन होगा?

956
01:08:05,360 --> 01:08:09,560
जो मुक्ति जो जो मुक्ति दिलाए आपको जो

957
01:08:09,560 --> 01:08:13,760
सर्वशक्तिमान हो और जो प्रकृति के सभी बंधनों

958
01:08:13,760 --> 01:08:16,160
से

959
01:08:16,160 --> 01:08:18,000
मुक्ति दिलाए।

960
01:08:18,000 --> 01:08:22,080
मुक्त हो मुक्ति दिलाए नहीं वह तो बाद की बात है वो स्वयं तो मुक्त

961
01:08:22,080 --> 01:08:26,160
होना चाहिए ना स्वयं भी तो मुक्त होना चाहिए

962
01:08:26,160 --> 01:08:28,880
ना

963
01:08:28,880 --> 01:08:33,040
तुम्हें पता कैसे लगेगा कि हम मुक्त है कौन है वो बाद की बात है

964
01:08:33,040 --> 01:08:37,200
अभी बात हो रही है कि ईश्वर कौन हो सकता है

965
01:08:37,200 --> 01:08:41,720
अभी बात ये हो रही है ईश्वर वही हो सकता है जो प्रकृति के सभी बंधनों

966
01:08:41,720 --> 01:08:45,920
से मुक्त हो पानी कौन हो सकता है जो प्यास को बुझा

967
01:08:45,920 --> 01:08:48,080
सके

968
01:08:48,080 --> 01:08:52,080
है ना भोजन कौन हो सकता

969
01:08:52,080 --> 01:08:56,480
है जो भूख को मिटा सके ईश्वर कौन हो सकता है

970
01:08:56,480 --> 01:09:01,160
जो स्वयं मोक्ष स्वरूप हो जो आपकी मोक्ष की प्यास

971
01:09:01,160 --> 01:09:05,560
को मिटा सके ठीक है

972
01:09:05,560 --> 01:09:09,880
तो अब जब हमने ये जान लिया

973
01:09:09,880 --> 01:09:14,720
कि प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त ईश्वर होना चाहिए

974
01:09:14,720 --> 01:09:18,960
तो अब बात आती है हमारा हमारा चौथा क्वेश्चन आता है।

975
01:09:18,960 --> 01:09:23,120
चौथा है कि तीसरा है? तीसरा है।

976
01:09:23,120 --> 01:09:27,120
पहला था धर्म क्या है? दूसरा नास्तिकता क्या है? नास्तिकता का

977
01:09:27,120 --> 01:09:31,360
उपाय क्या है? और अब आ गया। तो ये देखो धर्म

978
01:09:31,360 --> 01:09:33,120
कैसे कनेक्ट होता है? इसको

979
01:09:33,120 --> 01:09:35,800
समझ लो आज

980
01:09:35,800 --> 01:09:40,240
कि एक व्यक्ति है। सबसे पहले हम उसको यह प्रूफ

981
01:09:40,240 --> 01:09:44,480
करते हैं कि संसार में कोई ईश्वर है। किसी भी व्यक्ति

982
01:09:44,480 --> 01:09:48,720
को पहले हम ये प्रूफ करते हैं कि इसमें ईश्वर है संसार में। पहले तू ईश्वर को मान।

983
01:09:48,720 --> 01:09:53,120
कैसे प्रूफ करते हैं? तो हमने बताया कि उसके

984
01:09:53,120 --> 01:09:57,280
अंदर जो व्यक्ति ईश्वर को ना मानने वाला है वह भी सदा सुखी रहना

985
01:09:57,280 --> 01:10:01,280
चाहता है। जबकि प्रकृति हर पल उसको जो है

986
01:10:01,280 --> 01:10:05,440
दुखी कर रही है। जो

987
01:10:05,440 --> 01:10:09,520
दुनिया का कोई भी व्यक्ति है वो भी

988
01:10:09,520 --> 01:10:13,520
मरना नहीं चाहता है। वो भी क्या कहते हैं? आज्ञा

989
01:10:13,520 --> 01:10:17,600
विहीन जीवन चाहता है। जी भैया जी आपने बस एक चीज सोची

990
01:10:17,600 --> 01:10:21,600
है कि हम हर समय हर इंसान खुश ही रहना चाहता है।

991
01:10:21,600 --> 01:10:25,600
मरना क्यों नहीं चाहता? मरना ये सत्य है। चाहे

992
01:10:25,600 --> 01:10:29,920
कोई भी हो मरेगा। अरे मेरे भाई जीवन

993
01:10:29,920 --> 01:10:33,920
मरण के चक्कर से दूर तुम्हारे गुरु करवाते हैं कि नहीं। फालतू की बात क्यों कर

994
01:10:33,920 --> 01:10:38,240
रहे हो? मैंने आपको बताया था ना जो चीज अनावश्यक

995
01:10:38,240 --> 01:10:42,720
हो वो ना करो। खामखा जीवन मरण से चक्र

996
01:10:42,720 --> 01:10:46,960
जीवन मरण के चक्र से छुटाने की बात आपके गुरु करते हैं कि नहीं करते हैं?

997
01:10:46,960 --> 01:10:48,320
आपने उनसे क्यों नहीं पूछा

998
01:10:48,320 --> 01:10:52,320
जाकर के कि क्यों नहीं करना चाहते? क्यों बनना नहीं चाहते? वो आपकी मूल

999
01:10:52,320 --> 01:10:57,760
प्रकृति है जीव की। नहीं देखो अगर मुझे ना

1000
01:10:57,760 --> 01:11:01,920
मैं आपसे ज्ञान लेने नहीं आया। एक चीज समझना। मैं आपसे सुनने आया हूं। समझने

1001
01:11:01,920 --> 01:11:06,080
आया हूं कि आपका क्या पर्सेक्टिव है। मैं आपको समझा रहा हूं। अभी वो समझो आप।

1002
01:11:06,080 --> 01:11:10,240
जो मैं बोल रहा हूं वो समझ लो। उसके बाद आपको क्वेश्चन आए तो वो बोलिएगा।

1003
01:11:10,240 --> 01:11:15,080
ठीक है? अभी जो बोल रहा हूं वो सुन लो। वो क्या है

1004
01:11:15,080 --> 01:11:19,160
कि पहले व्यक्ति को ईश्वर की

1005
01:11:19,160 --> 01:11:23,200
आवश्यकता ईश्वर का अस्तित्व ये सिद्ध होता है कि तुम

1006
01:11:23,200 --> 01:11:27,200
दुनिया में हर पल, हर क्षण जिसे तलाश रहे

1007
01:11:27,200 --> 01:11:31,520
हो। वो ये टीवी, फ्रिज, कूलर नहीं है। वो ये कार,

1008
01:11:31,520 --> 01:11:35,760
मोबाइल और बिल्डिंग नहीं है। वो ईश्वर है। परमेश्वर

1009
01:11:35,760 --> 01:11:39,760
है वो जिसको तुम ढूंढ रहे हो। बस तुम जानते नहीं हो कि मैं

1010
01:11:39,760 --> 01:11:43,760
ईश्वर को ढूंढ रहा हूं। क्यों? एसी लगाएगा दो-तीन घंटे

1011
01:11:43,760 --> 01:11:47,760
बैठेगा एसी में। उसके बाद उससे वो बोर हो जाएगा।

1012
01:11:47,760 --> 01:11:51,760
जबकि उसको लगता था एसी पा के मैं सुखी हो जाऊंगा। रसगुल्ला खाएगा

1013
01:11:51,760 --> 01:11:56,080
एक रसगुल्ला खाएगा दो रसगुल्ला खाएगा। तीसरा तीन रसगुल्ले खाएगा। चौथे

1014
01:11:56,080 --> 01:12:01,840
पांचवे में बोर हो बोर हो जाएगा। वही रसगुल्ला उसके लिए कष्टदायक हो जाएगा।

1015
01:12:01,840 --> 01:12:03,360
तो इसका मतलब वह

1016
01:12:03,360 --> 01:12:07,360
सुख को तलाश तो रहा है हर पल मगर वह अनंत सुख को तलाश

1017
01:12:07,360 --> 01:12:11,360
रहा है और यह एसी टीवी फ्रीज कंप्यूटर के माध्यम

1018
01:12:11,360 --> 01:12:15,440
से वो तलाश उसी को रहा है किसको परमेश्वर को जिससे

1019
01:12:15,440 --> 01:12:21,440
मिलने वाला सुख कभी समाप्त नहीं होता अनंत आनंद

1020
01:12:21,720 --> 01:12:26,240
तो जब हमने मनुष्य के अंतिम विकल्प के रूप में

1021
01:12:26,240 --> 01:12:30,240
ईश्वर को स्थापित कर दिया उसके बाद ये बताया जाता

1022
01:12:30,240 --> 01:12:34,320
है कि अब जब ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो गया है तो

1023
01:12:34,320 --> 01:12:38,480
ईश्वर को तू ऐसे प्राप्त कर सकता है। अगर तुम सत्य

1024
01:12:38,480 --> 01:12:42,560
के मार्ग पर चलोगे तो तुम प्राप्त कर सकते हो। अगर तुम मांस नहीं

1025
01:12:42,560 --> 01:12:46,560
खाओगे तो तुम प्राप्त कर सकते हो। अगर तुम व्यभचार

1026
01:12:46,560 --> 01:12:50,880
नहीं करोगे तो तुम प्राप्त कर सकते हो। साथ ही साथ जब तुम उसकी भक्ति

1027
01:12:50,880 --> 01:12:54,880
करोगे तो तुम प्राप्त कर सकते हो। इस तो

1028
01:12:54,880 --> 01:12:59,040
यह क्या हो गया? यह सब हो गया धर्म। ईश्वर का अस्तित्व

1029
01:12:59,040 --> 01:13:03,280
सिद्ध हुआ। उसके बाद उसको प्राप्त कराने के निमित्त बताई जाने वाली विधि

1030
01:13:03,280 --> 01:13:07,440
का नाम हो गया धर्म। यह करना है और यह नहीं करना है। तेरे

1031
01:13:07,440 --> 01:13:11,520
लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। फिर शास्त्र बताते हैं कि

1032
01:13:11,520 --> 01:13:15,520
आपको क्या करना है, क्या नहीं करना है। अब बात ये आती है कि हमने यह

1033
01:13:15,520 --> 01:13:18,640
जाना कि ईश्वर जो है वो

1034
01:13:18,640 --> 01:13:22,880
सभी बंधनों से मुक्त है। क्योंकि वो वही है जो

1035
01:13:22,880 --> 01:13:26,960
किसी भी जीव को सभी बंधनों से मुक्त कर देने वाला है। इसीलिए

1036
01:13:26,960 --> 01:13:31,040
उसको ईश्वर परमेश्वर कहते हैं। पूर्ण ब्रह्म कहते हैं।

1037
01:13:31,040 --> 01:13:35,120
तो अब बात आती है क्या? रामपाल दास

1038
01:13:35,120 --> 01:13:39,680
ने रामपाल जी ने रामपाल

1039
01:13:39,680 --> 01:13:43,800
जी के द्वारा प्राप्त होने वाला जो ईश्वर है वो

1040
01:13:43,800 --> 01:13:49,800
सर्वशक्तिमान है। सभी बंधनों से मुक्त

1041
01:13:51,080 --> 01:13:57,080
है। कभी

1042
01:13:59,200 --> 01:14:03,360
देखो जो आपने जितनी भी चीजें कही ये सारी

1043
01:14:03,360 --> 01:14:07,360
चीजें इंसानों की बनाई हुई है। एक नास्तिक इंसान इस चीज को नहीं भाई

1044
01:14:07,360 --> 01:14:10,840
साहब आप मेरे सवालों का जवाब

1045
01:14:10,840 --> 01:14:15,800
दीजिए। आप मुझे बताइए क्या कबीर

1046
01:14:15,800 --> 01:14:21,120
सर्वशक्तिमान है? अनंत सामर्थ्यवान है या नहीं?

1047
01:14:21,120 --> 01:14:25,080
जय श्री

1048
01:14:25,080 --> 01:14:29,640
राम। है ना? बिल्कुल है। यानी

1049
01:14:29,640 --> 01:14:33,760
कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नीचे नहीं आता। ईश्वर

1050
01:14:33,760 --> 01:14:38,160
किसी किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला

1051
01:14:38,160 --> 01:14:43,360
सर्व नियामक है। ईश्वर पर कोई नियम लागू नहीं हो सकता।

1052
01:14:43,360 --> 01:14:45,760
बिल्कुल।

1053
01:14:45,760 --> 01:14:49,840
सही है। इंसान परमात्मा मां की कोख से पैदा नहीं

1054
01:14:49,840 --> 01:14:53,880
होता। वो ऐसी अरे मैं मैं ये पूछ रहा हूं वो सर्वशक्तिमान है

1055
01:14:53,880 --> 01:14:58,560
ना। सब कुछ कर सकता है कि नहीं? शिवांग

1056
01:14:58,560 --> 01:15:02,720
जी देखो आप अपना पॉइंट ऑफ व्यू समझाना चाह रहे हो पर आप गलत तरीके

1057
01:15:02,720 --> 01:15:06,880
से समझा रहे हो। मुझे जहां तक समझ आया। आप मिसगाइड

1058
01:15:06,880 --> 01:15:10,960
करके समझा रहे हो। आप भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं। क्या ईश्वर

1059
01:15:10,960 --> 01:15:15,040
आपके द्वारा बताया जाने वाला जो ईश्वर है वो सब कुछ कर सकता है

1060
01:15:15,040 --> 01:15:19,040
कि नहीं? नहीं मैं वही कह रहा हूं आपको। मैंने जहां तक आपको समझा

1061
01:15:19,040 --> 01:15:23,200
मैं यही समझना चाह रहा था कि मुझे लगा आपकी बात में कोई सच्चाई हो सकती है।

1062
01:15:23,200 --> 01:15:27,560
लेकिन आप जिस तरीके से बात कर रहे हो जिस तरीके से आप कह रहे हो

1063
01:15:27,560 --> 01:15:31,600
वो मैं आपका अपने लिए समीक्षा लेने के लिए नहीं बैठा

1064
01:15:31,600 --> 01:15:35,600
हूं। अभी मैं आपको बता दूं मैं आपकी समीक्षा कर रहा हूं क्या कि

1065
01:15:35,600 --> 01:15:39,760
आप किस तरीके से बैठे हुए? किस तरीके से आप उत्तर दे रहे हो? आप

1066
01:15:39,760 --> 01:15:40,260
विषय

1067
01:15:40,080 --> 01:15:44,240
पर बात करिए भाई साहब मेरी समीक्षा मत करिए आप वही कह रहा हूं आप सुनना

1068
01:15:44,240 --> 01:15:48,560
पूरा सुनना हां मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके आपके जो गुरु

1069
01:15:48,560 --> 01:15:53,040
हैं उन्होंने आपके गुरु स्वयं को तत्वदर्शी कहते हैं

1070
01:15:53,040 --> 01:15:57,600
तो उन्होंने तत्व से आपको बताया है ईश्वर कैसा है क्या है

1071
01:15:57,600 --> 01:16:01,840
तात्विक व्याख्या की है वही आप सुनना पूरा सुनना तभी

1072
01:16:01,840 --> 01:16:06,120
आपको समझ आएगा ऐसे बीच में अगर बोलोगे फिर आपको भी समझ नहीं आएगा

1073
01:16:06,120 --> 01:16:11,000
बोलिए दूसरी बातें बोलोगे फिजूल की तो मैं रोकूंगा

1074
01:16:11,000 --> 01:16:15,520
बताइए नहीं पूरा सुनना पड़ेगा आपको क्योंकि आप पूरा सुनना

1075
01:16:15,520 --> 01:16:20,240
अरे आप तो अभी सृष्टि रचना पढ़ने लगोगे तो मैं क्या करूंगा उसका

1076
01:16:20,240 --> 01:16:24,480
नहीं मैं सृष्टि रचना ही पढूंगा नहीं मैं एक बात कह रहा हूं तो आप कहां अगर

1077
01:16:24,480 --> 01:16:30,480
अगर विषय के अनुसार बात करोगे तो मैं नहीं रोकूंगा बोलिए

1078
01:16:32,560 --> 01:16:36,560
मैं आपको बताता हूं मैं आपको सिंपल भाषा में

1079
01:16:36,560 --> 01:16:41,040
जितना हो सके बताता हूं तो ये आपने दो लाइनें

1080
01:16:41,040 --> 01:16:45,360
व्यर्थ बोली मैं आपको बताता हूं।

1081
01:16:45,360 --> 01:16:50,240
मैं आपको सिंपल सी भाषा में बताता हूं। क्या है ये?

1082
01:16:50,240 --> 01:16:54,320
जब हो चुका है कि आपको बताना है तो आप बताइए ना भाई।

1083
01:16:54,320 --> 01:16:59,040
परमात्मा सहरी धरती पर आते हैं और

1084
01:16:59,040 --> 01:17:03,040
कोख से पैदा नहीं होते और वो कुंवारी गाय का दूध

1085
01:17:03,040 --> 01:17:08,800
भाई साहब मैंने आपसे पूछा क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं?

1086
01:17:08,800 --> 01:17:13,040
ईश्वर इन सारे चक्रों से मुक्त है तभी तो सर्वशक्तिमान है जो हमें मुक्ति

1087
01:17:13,040 --> 01:17:17,360
दिलाएगा अगर वो इन बंधनों से मैं कह रहा हूं यानी कि वो सर्वशक्तिमान

1088
01:17:17,360 --> 01:17:22,440
है ना सर्वशक्तिमान है वो

1089
01:17:22,440 --> 01:17:26,800
हां सर्वशक्तिमान है सभी झंझटों से मुक्त है

1090
01:17:26,800 --> 01:17:32,280
तो वो कुछ भी कर सकता है ना बिल्कुल

1091
01:17:32,280 --> 01:17:38,240
हां तो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है क्या

1092
01:17:38,240 --> 01:17:42,560
ले सकता है। ले सकता है। अगर उसकी होगी

1093
01:17:42,560 --> 01:17:46,800
ले सकता है। ले सकता है। ये मेरा मत

1094
01:17:46,800 --> 01:17:50,880
है। मत आप अपना मत मत बताइए। भाई साहब आप यहां रामपाल जी के

1095
01:17:50,880 --> 01:17:55,120
पक्ष से खड़े हैं। रामपाल जी जो कहते हैं वो बताइए। शास्त्रों के हिसाब

1096
01:17:55,120 --> 01:17:59,520
से परमात्मा मैं आपसे मैं आपसे शास्त्रों

1097
01:17:59,520 --> 01:18:03,680
के बारे में पूछूंगा। मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं। क्या आपका जो

1098
01:18:03,680 --> 01:18:08,320
ईश्वर है आपके अनुसार बताया जाने वाला ईश्वर है वह सब कुछ कर सकता है?

1099
01:18:08,320 --> 01:18:12,400
आपने कहा हां फिर मैंने पूछा क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता

1100
01:18:12,400 --> 01:18:16,400
है? अब आप बताएं हां कि ना जय हो जय हो जय श्री

1101
01:18:16,400 --> 01:18:20,400
राम।

1102
01:18:20,400 --> 01:18:24,400
देखो वो मां की कोख से जन्म नहीं लेता क्योंकि वो अजन्मा

1103
01:18:24,400 --> 01:18:28,480
है। मैंने आपसे क्या पूछा है भाई साहब? मैंने आपसे क्या पूछा

1104
01:18:28,480 --> 01:18:32,560
है? वह लेता है कि नहीं लेता है यह अलग मैटर है। ले सकता है कि नहीं

1105
01:18:32,560 --> 01:18:36,640
ले सकता है यह अलग मैटर है। आप बताइए ले सकता है कि नहीं? उनकी

1106
01:18:36,640 --> 01:18:41,200
जन्म मृत्यु नहीं होती है। वो नहीं लेता नहीं ले सकता। नहीं ले सकता

1107
01:18:41,200 --> 01:18:47,200
तो फिर इसका मतलब यह नहीं कह सकते कि वह सब कुछ कर सकता

1108
01:18:53,160 --> 01:18:57,280
है। सब कुछ कर सकता है। पर समझने

1109
01:18:57,280 --> 01:19:03,280
वाली बात ये है कि परमात्मा कौन है?

1110
01:19:03,680 --> 01:19:08,080
परमात्मा वो है जो सह शरीर आते हैं धरती पे। भाई साहब

1111
01:19:08,080 --> 01:19:12,960
मैंने आपको पूछा आप परमात्मा सर्वशक्तिमान तो है ना

1112
01:19:12,960 --> 01:19:17,120
है कि नहीं है हां जी तो क्या है सर्वशक्तिमान

1113
01:19:17,120 --> 01:19:20,720
का अर्थ बताइए

1114
01:19:20,720 --> 01:19:25,760
बातें बनाई गई उड़ाई गई जो

1115
01:19:25,760 --> 01:19:29,760
जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो अच्छा

1116
01:19:29,760 --> 01:19:33,760
अगर सब कुछ सब कुछ सब कुछ कर सकता है या आवश्यक नहीं

1117
01:19:33,760 --> 01:19:37,920
है हां जो सब कुछ कर सकता आवश्यक नहीं है।

1118
01:19:37,920 --> 01:19:42,000
अगर परमात्मा खुद जन्म और मरण कर रहा है, खुद जन्म रहा है, मर रहा है तो

1119
01:19:42,000 --> 01:19:46,000
वो परमात्मा नहीं है। मैं आपसे देखिए ऐसा है जन्म

1120
01:19:46,000 --> 01:19:50,160
और मरण की बात ये है अगर परमात्मा जन्म और मरण

1121
01:19:50,160 --> 01:19:54,560
के लिए विवश है तो वो परमात्मा नहीं है। मगर यदि वो स्वतंत्र

1122
01:19:54,560 --> 01:19:58,800
है। उसका मन वो जन्म ले उसका मन वो अपनी मृत्यु

1123
01:19:58,800 --> 01:20:03,520
भी दिखा दे। अपने शरीर को त्याग के भी दिखा दे। उसका मन

1124
01:20:03,520 --> 01:20:08,480
उसकी इच्छा पर निर्भर होना चाहिए। ये नहीं कि वो ले ही नहीं सकता।

1125
01:20:08,480 --> 01:20:12,960
दोनों बातों में फर्क है। दोनों बातों में अंतर है।

1126
01:20:12,960 --> 01:20:17,040
प्रकृति के सुनिए प्रकृति के बंधनों से मुक्त होने का

1127
01:20:17,040 --> 01:20:18,760
मतलब ये नहीं है कि

1128
01:20:18,760 --> 01:20:22,800
वो प्रकृति के बंधनों से मुक्त है। इसलिए उसको छत

1129
01:20:22,800 --> 01:20:27,520
से कूदने की आवश्यकता नहीं है। वो नहीं कूद सकता। नहीं साहब

1130
01:20:27,520 --> 01:20:31,520
उसका मन वो कूदे। उसका मन वो कूदने के बाद भी उसके चोट ना लगे। ये

1131
01:20:31,520 --> 01:20:36,280
है सर्वशक्तिमान। भगवान का पद क्या रह गया? अगर उसका मन ही

1132
01:20:36,280 --> 01:20:40,400
चलाएगा मन ही चलाएगा तो इंसान हां वो तो इंसान भगवान

1133
01:20:40,400 --> 01:20:44,560
मैं कह रहा हूं मन चलाएगा कि नहीं चलाएगा इस पर भी हम बात करेंगे लिख लीजिए अभी

1134
01:20:44,560 --> 01:20:50,560
बात हो रही है कि वो सब कुछ कर सकता है या नहीं

1135
01:20:54,560 --> 01:20:58,640
सब कुछ कर सकता है तो महात्मा कर सकता है तो

1136
01:20:58,640 --> 01:21:02,880
माता के गर्भ से जन्म ले सकता है देखिए

1137
01:21:02,880 --> 01:21:07,440
बात ऐसी है मैं बताऊं शिव दास जी कि जब भी हम

1138
01:21:07,440 --> 01:21:11,680
जो वास्तविक ईश्वर है वास्तविक धर्म

1139
01:21:11,680 --> 01:21:15,800
है उसके विरोध में कोई नया

1140
01:21:15,800 --> 01:21:20,080
धर्म कोई नई विचारधारा कोई नई व्याख्या

1141
01:21:20,080 --> 01:21:24,240
कोई नया ईश्वर गणते हैं तो वहां पर वो जो

1142
01:21:24,240 --> 01:21:28,240
ईश्वर होता है वो बाधित हो जाता है वो सर्वशक्तिमान

1143
01:21:28,240 --> 01:21:32,320
नहीं होता है और उसको प्राप्त करने की जो विधि बिताई गई होती

1144
01:21:32,320 --> 01:21:37,840
है वो भी धर्म ना हो के

1145
01:21:37,840 --> 01:21:42,480
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम शिवम

1146
01:21:42,480 --> 01:21:47,560
जी चले गए फिर गायब दास जी फिर गायब हो

1147
01:21:47,560 --> 01:21:52,160
गए मैं आ रहा था अगले क्वेश्चन पे चलिए

1148
01:21:52,160 --> 01:21:56,400
सबसे थोड़ा थोड़ा परिचय ले ले और सुन दास जी अब आप जो है अगली

1149
01:21:56,400 --> 01:22:01,280
बार आइए हम कल एक बजे लाइव हो जाएंगे दोबारा से

1150
01:22:01,280 --> 01:22:03,920
हां भाई

1151
01:22:03,920 --> 01:22:08,400
भैया मेरे गुरुदेव मेरे गुरुदेव महाराज कहते हैं

1152
01:22:08,400 --> 01:22:12,640
कि ऐसे जो लोग हैं निरर्थक बात

1153
01:22:12,640 --> 01:22:16,960
तर्क करने वाले ये यहां पे काशी में एक छोटे से बच्चे

1154
01:22:16,960 --> 01:22:20,960
से तर्क कर ले एक छोटा सा बच्चा

1155
01:22:20,960 --> 01:22:24,960
इनको जो सिद्धांतों को पढ़ रहा है वो इनको हराने

1156
01:22:24,960 --> 01:22:28,960
की ताकत रखता है ये बस वो वो वाला ज्ञान ले आए यहां

1157
01:22:28,960 --> 01:22:32,960
ये लिखा है ब्रह्मा विष्णु महेश ये नहीं है यहां ये लिखा है देवी नहीं है कि यहां ये

1158
01:22:32,960 --> 01:22:37,360
लिखा है हनुमान जी नहीं है। रामचंद्र नहीं है। यहां ये लिखा है कि श्राद्ध करना खराब है।

1159
01:22:37,360 --> 01:22:41,440
यहां ये लिखा है कि उपवास करना खराब है। यहां ये लिखा है दिवाली मनाना खराब

1160
01:22:41,440 --> 01:22:45,600
है। क्या क्या चीजें नहीं करनी है? ये सब ये सब ले आते हैं। कोई

1161
01:22:45,600 --> 01:22:50,000
तात्विक विवेचना है ही नहीं। कोई रामपाल का कोई फॉलोअ

1162
01:22:50,000 --> 01:22:53,520
है क्या यहां पे? अभी इनमें से

1163
01:22:53,520 --> 01:22:57,600
कोई रामपाल का फॉलोअ कोई भी मैं

1164
01:22:57,600 --> 01:23:00,400
हूं भैरवदास।

1165
01:23:00,400 --> 01:23:04,800
अरे मेरी आवाज आ रही है

1166
01:23:04,800 --> 01:23:09,760
एक एक मिनट आपकी भी आ रही है आपका स्वागत है जय श्री राम

1167
01:23:09,760 --> 01:23:14,240
जय श्री राम हर हर महादेव है

1168
01:23:14,240 --> 01:23:18,240
भैरूलाल जी आप आप रामपाल के फॉलोअर हैं रामपाल जी

1169
01:23:18,240 --> 01:23:22,960
के हां जी हां जी हां तो आप बताइए

1170
01:23:22,960 --> 01:23:27,040
सर्वशक्तिमान हां जी बताइए

1171
01:23:27,040 --> 01:23:32,240
सर्वशक्तिमान के बारे क्या बताना है?

1172
01:23:32,240 --> 01:23:36,400
क्या जो आपका ईश्वर है जिसको आप भज रहे हो वो प्रकृति के सभी

1173
01:23:36,400 --> 01:23:41,320
बंधनों से मुक्त है कि नहीं है? बिल्कुल

1174
01:23:41,320 --> 01:23:45,440
हां क्या वो सब कुछ कर सकता है कि नहीं? बिल्कुल

1175
01:23:45,440 --> 01:23:50,160
कर सकते हैं। अच्छा तो क्या वो

1176
01:23:50,160 --> 01:23:54,560
माता के गर्भ से जन्म ले सकते हैं कि नहीं? उन्होंने

1177
01:23:54,560 --> 01:23:58,560
विधान बना रखा है। मैंने पूछा ले सकते हैं

1178
01:23:58,560 --> 01:24:02,640
कि नहीं?

1179
01:24:02,640 --> 01:24:05,520
आप चेहरा दिखाइए।

1180
01:24:05,520 --> 01:24:09,680
ये रट्टू तोता की तरह भैर दास जी भी शुरू हो गया। और

1181
01:24:09,680 --> 01:24:13,840
एक विधान बना रखा है तो काहे के लिए सर्वशक्तिमान है।

1182
01:24:13,840 --> 01:24:18,880
ऑल ऑल द ऑल द

1183
01:24:18,880 --> 01:24:23,520
क्या कहते हैं? हेटर्स ऑफ आवा अगर आपके पास

1184
01:24:23,520 --> 01:24:27,760
ठोस उत्तर हुआ करे तो आया करिए अपना अपमान करवाने मत आया करिए क्योंकि

1185
01:24:27,760 --> 01:24:31,920
आप निर्भर होंगे आपकी विचारधारा वहां पर ठीक दिखाई देगी ठोस

1186
01:24:31,920 --> 01:24:36,880
उत्तर लेकर आया

1187
01:24:36,880 --> 01:24:42,880
जी बताइए हां जी

1188
01:24:46,640 --> 01:24:51,120
बोलिए हां जी ले सकता है कि नहीं

1189
01:24:51,120 --> 01:24:55,520
बिल्कुल ले सकते ले सकते हैं। तो आपके

1190
01:24:55,520 --> 01:24:59,520
रामपाल जी ने ये बात कहां कही है? कही

1191
01:24:59,520 --> 01:25:03,680
है। कहां कही है? उनके

1192
01:25:03,680 --> 01:25:07,840
सत्संग सुनना। सत्संग नहीं हमें प्रमाण दिखाइए। कौन

1193
01:25:07,840 --> 01:25:12,000
से सत्संग में कही है? बताइए। चलिए झूठ

1194
01:25:12,000 --> 01:25:16,120
पे झूठ झूठ पेठ। कौन

1195
01:25:16,120 --> 01:25:20,240
से कौन से सत्संग में? ज्ञान गंगा मेरे

1196
01:25:20,240 --> 01:25:24,640
पास है। बताइए कौन से पेज पर लिखा है माता गर्भ से जल ले सकता है? बताइए।

1197
01:25:24,640 --> 01:25:28,640
मेरे को याद याद नहीं है। याद नहीं है तो

1198
01:25:28,640 --> 01:25:33,120
याद करके आइए। चलिए ये कौन सी बात है? इतना इंपॉर्टेंट

1199
01:25:33,120 --> 01:25:37,200
आप सवाल का जवाब लेके आ रहे हैं और यहां आ के कह रहे मुझे याद नहीं

1200
01:25:37,200 --> 01:25:42,560
है। कितनी अच्छा आपके पास ज्ञान गंगा है कि नहीं?

1201
01:25:42,560 --> 01:25:48,320
है। है तो कितनी देर लगेगी देखने में?

1202
01:25:48,320 --> 01:25:52,000
अरे वो तो बड़ी है। एक टाइम लगता है देखना पड़ता है। कल

1203
01:25:52,000 --> 01:25:56,400
तक बता देंगे। कल एक बजे हम दोबारा लाइव होंगे। कल बता देंगे कल तक।

1204
01:25:56,400 --> 01:26:00,400
क्या क्या बताना? यही बताना है कि उन्होंने कहां

1205
01:26:00,400 --> 01:26:04,880
से कहा है कि माता गर्भ से ईश्वर जन्म ले सकता है। अरे

1206
01:26:04,880 --> 01:26:09,600
तो वो वो पूरा याद थोड़ी रहता है क्या? वो तो बड़ी-बड़ी

1207
01:26:09,600 --> 01:26:13,840
कल तक ढूंढ लोगे कि नहीं? नहीं ढूंढ पाएंगे। एक एक

1208
01:26:13,840 --> 01:26:17,920
घंटे की होती है उसमें वो हमारे गंगा की बात

1209
01:26:17,920 --> 01:26:22,080
कर रहा हूं ज्ञान गंगा में लिखा है ना ज्ञान

1210
01:26:22,080 --> 01:26:26,320
गंगा में लिखा है ना हां बिल्कुल लिखा है तो

1211
01:26:26,320 --> 01:26:30,400
वो तो वो तो आपके पास रखी है ना हां बिल्कुल रखी है

1212
01:26:30,400 --> 01:26:34,800
ढूंढ पाओगे कल तक नहीं ढूंढ पाएंगे उसमें क्रमांक

1213
01:26:34,800 --> 01:26:40,760
संख्या थोड़ी लिखी हुई है इनको निकालो भाई यहां से बहुत तेजी के साथ जाइए आप

1214
01:26:40,760 --> 01:26:45,200
चलिए बकवास करने आते आते हैं झूठ पे झूठ

1215
01:26:45,200 --> 01:26:51,200
झूठ पे झूठ झूठ की लड़ाई

1216
01:26:53,520 --> 01:26:57,760
अरे शिवश जी ये पता है सुनिए सुनिए हर जगह

1217
01:26:57,760 --> 01:27:02,160
ये पीटे मतलब मतलब क्या कहते हैं उसको वैचारिक

1218
01:27:02,160 --> 01:27:06,320
स्तर पे भी पीटे जा रहे हैं। ज्ञान स्तर पे भी स्तर

1219
01:27:06,320 --> 01:27:11,120
में भी ये पीटे जा रहे हैं। लेकिन ये मानने वाले नहीं है। अब

1220
01:27:11,120 --> 01:27:15,920
यह बंदा भैरूलाल प्रजापति यहां पराल

1221
01:27:15,920 --> 01:27:20,000
जी आपको मैं एक बात बताऊ एक एक मिनट भेरूलाल जी

1222
01:27:20,000 --> 01:27:24,080
एक मिनटल जीाल जी मैं कुछ कह रहा हूं हां

1223
01:27:24,080 --> 01:27:28,720
बिल्कुल भैरूललाल जी को म्यूट करिए म्यूट करिए

1224
01:27:28,720 --> 01:27:32,880
भैरूलाल जी आप ये बताइए यदि ज्ञान गंगा में यह

1225
01:27:32,880 --> 01:27:37,040
नहीं लिखा होगा कि रामपाल दास जी ने यह

1226
01:27:37,040 --> 01:27:41,200
कहा है कि ईश्वर माता के गर्भ से जन्म ले सकता

1227
01:27:41,200 --> 01:27:46,400
है तो आप रामपाल दास को मानना छोड़ देंगे।

1228
01:27:46,400 --> 01:27:50,400
उनका विधान बनाया हुआ तुम्हारे कहने से थोड़ी चलेगा क्या? क्या पूछा है? मैंने

1229
01:27:50,400 --> 01:27:56,400
आपसे क्या पूछा है? मैंने मैंने आपसे क्या पूछा? परमा

1230
01:28:00,080 --> 01:28:04,240
रामपाल का फॉलोअ और कोई है? अभी

1231
01:28:04,240 --> 01:28:08,240
झगड़ा करने के मूड में थे। अगर आप कुछ देर और इनसे बात करते झगड़ा। अरे

1232
01:28:08,240 --> 01:28:12,560
ये पता है। ये क्या झगड़ा करेंगे यार झगड़ा मतलब वो वैचारिक

1233
01:28:12,560 --> 01:28:16,720
झगड़ा करने की भी सामर्थ इनमें नहीं है। इसीलिए दिक्कत है ना यह खाली रट्टू

1234
01:28:16,720 --> 01:28:20,720
तोते हैं। जितनी चाबी घुमाई गई है उतना ही

1235
01:28:20,720 --> 01:28:24,960
ये कर सकते हैं। और एक चीज हम तो बता रहे हैं कि खुला ओपन चैलेंज

1236
01:28:24,960 --> 01:28:28,960
है कि ये इनके जो वो फर्जी चैनल्स बना के रखे

1237
01:28:28,960 --> 01:28:34,200
हैं ना चाहे फैक्टफुल डिबेट हो चाहे ऐसे न्यूज़ हो। मैं इनमें

1238
01:28:34,200 --> 01:28:38,720
कोई किसी में इतनी सामर्थ्य नहीं है जो लाइव डिबेट

1239
01:28:38,720 --> 01:28:43,200
जो है हम लोगों से मैं ये कह रहा हूं

1240
01:28:43,200 --> 01:28:47,200
मैं ये कह रहा हूं कि ये जो लोग हैं

1241
01:28:47,200 --> 01:28:51,200
ये जितने भी चैनल्स हैं है ना ये केवल वहीं

1242
01:28:51,200 --> 01:28:55,440
तक सीमित है जब तक ये वीडियो बनाते हैं। किसी में इतनी

1243
01:28:55,440 --> 01:28:59,680
आज तक वह नहीं हुई हिम्मत कि कोई बड़े चैनल ने यह कह दिया हो कि शिवश नारायण

1244
01:28:59,680 --> 01:29:03,920
द्विवेदी इस नंबर पर हमसे संपर्क करें और इस नंबर पर हमसे

1245
01:29:03,920 --> 01:29:08,160
संपर्क करके और दिन तारीख सुनिश्चित करें और हम जो है उससे बात चर्चा करेंगे ज्ञान

1246
01:29:08,160 --> 01:29:12,160
चर्चा भाई साहब आप तो बड़े रिस्पेक्ट से बात कर

1247
01:29:12,160 --> 01:29:15,840
रहे हो हम तो इनको सीधे कह रहे हैं कि मूर्खों की फौज है ये पूरी

1248
01:29:15,840 --> 01:29:20,400
अनपढ़ गवार मूर्खों की फौज इनको हम घोषित कर चुके हैं ऑलरेडी

1249
01:29:20,400 --> 01:29:24,560
अगर ये अपनी लाज बचाना चाहते हैं अपने का थोड़ा

1250
01:29:24,560 --> 01:29:28,560
सा भी मान बचाना चाहते हैं। बस बस इनको खुला चैलेंज है भाई

1251
01:29:28,560 --> 01:29:33,200
किसी भी दिन बस बस

1252
01:29:33,200 --> 01:29:37,440
भेरूलाल जी की एक बार भेरूल जी लड़िएगा मत लड़िएगा मत आगे

1253
01:29:37,440 --> 01:29:41,600
आगे एक छोटी सी बात और कर लेते हैं हां

1254
01:29:41,600 --> 01:29:46,440
आपको तसल्ली के साथ अगर कुछ कहना हो तो

1255
01:29:46,440 --> 01:29:50,560
बताइए था 2006 में आप इतने दिन आप

1256
01:29:50,560 --> 01:29:54,640
इतना अरे भाई इनको कुछ नहीं है इनको

1257
01:29:54,640 --> 01:29:58,640
मत लेना अबकी बार अब इनको मत लेना। चलिए

1258
01:29:58,640 --> 01:30:02,720
थोड़ा सा भूले बिरे लोग हैं आज काफी इकट्ठा हो गया तो

1259
01:30:02,720 --> 01:30:06,720
आप बात कर ले और फिर जो बढ़ाएं मैंने सोचा था कि इनको हटा

1260
01:30:06,720 --> 01:30:10,720
दो हटा दो मत लो मत लो वो वो उनका टेप रिकॉर्डर चालू

1261
01:30:10,720 --> 01:30:15,040
है लगातार उनको ऊपर ना लो उनको बोल लेने दो बोलना

1262
01:30:15,040 --> 01:30:18,560
है।

1263
01:30:18,560 --> 01:30:22,560
हां पहाड़ी जी बताएं। जी इससे पहले भी तो

1264
01:30:22,560 --> 01:30:26,800
एक दिन आपसे चर्चा हुई थी इनकी शायद भैरूलाल नाम के जो है ये

1265
01:30:26,800 --> 01:30:31,040
हुई होगी इतने लोगों से इनकी नहीं हुई थी इनसे अरे

1266
01:30:31,040 --> 01:30:35,360
इनसे नहीं हुई थी वो तत्वदर्शी जी से हुई थी

1267
01:30:35,360 --> 01:30:39,520
अच्छा जी हां श्री

1268
01:30:39,520 --> 01:30:44,160
108 परम तत्वदर्शी संत माधव दास जी से हुई थी

1269
01:30:44,160 --> 01:30:48,160
जो वो क्या कहते हैं कवि परमात्मा के अवतार ये वाले जो प्रश्न है ना

1270
01:30:48,160 --> 01:30:52,240
ये धर्म और नास्तिकता का खंडन और सर्वशक्तिमान ईश्वर इसको

1271
01:30:52,240 --> 01:30:56,520
बार-बार इसीलिए पूछता हूं जिससे दर्शक भी इन चीजों से

1272
01:30:56,520 --> 01:31:00,640
बिल्कुल अभ्यस्त हो जाए इन मामलों में कि उनको जो

1273
01:31:00,640 --> 01:31:04,640
है एक ये जो बेसिक ऑफ धर्म है ना बेसिक ऑफ

1274
01:31:04,640 --> 01:31:10,120
ईश्वर ये हमेशा मेरे पास कई बार फोन आते हैं कि हमारे वहां पे

1275
01:31:10,120 --> 01:31:14,160
अ हमारे यहां पे क्या कहते हैं वो घूम रहे हैं

1276
01:31:14,160 --> 01:31:18,240
और वो मुझसे पूछते हैं सात अध्याय सातवें का इसका क्या जवाब दूं उसका

1277
01:31:18,240 --> 01:31:22,560
क्या जवाब दूं आपको यह सब करने की जरूरत नहीं है। आपके

1278
01:31:22,560 --> 01:31:26,720
यहां पर जब यह रामपाल जैसे लोग आते हैं। आपको केवल मूल प्रश्न

1279
01:31:26,720 --> 01:31:31,280
पकड़ के रखिए। क्या कबीर सर्वशक्तिमान है? सब कुछ कर सकता है?

1280
01:31:31,280 --> 01:31:33,680
क्या धर्म की परिभाषा है इसमें?

1281
01:31:33,680 --> 01:31:38,560
क्या ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किया गया है इसमें? सिंपल।

1282
01:31:38,560 --> 01:31:43,120
सबसे अच्छी बात है। जी। आपको

1283
01:31:43,120 --> 01:31:48,160
सुनते सुनते और आपके ऑथेंटिक प्रश्नों को सुनते सुनते ही मेरे को याद हो गया।

1284
01:31:48,160 --> 01:31:52,160
हां। मैं इसीलिए बार-बार रिपीट करता हूं। ये जो

1285
01:31:52,160 --> 01:31:56,160
दो तीन प्रश्न है अगर ये हम सामने रखे तो

1286
01:31:56,160 --> 01:32:00,240
सामने वाला व्यक्ति आगे बढ़ ही नहीं पाएगा। खत्म खत्म हो जाता है। वो जितने

1287
01:32:00,240 --> 01:32:04,480
भी तथाकथित झूठे तंत्र हैं वो सब इन दो तीन चार प्रश्नों

1288
01:32:04,480 --> 01:32:08,560
में खत्म हो जाते हैं। और मैं हमें मैं सदैव ये चाहता हूं

1289
01:32:08,560 --> 01:32:12,560
कि हम जितने भी सामान्य लोग हैं सामान्य

1290
01:32:12,560 --> 01:32:16,800
लोग। ठीक है? वो सभी शास्त्रों के ज्ञाता नहीं बन सकते।

1291
01:32:16,800 --> 01:32:21,120
कभी भी कभी भी नहीं बन पाएंगे। तो आप ये जो

1292
01:32:21,120 --> 01:32:25,120
मूल प्रश्न है ना सर्वशक्तिमान ईश्वर परम

1293
01:32:25,120 --> 01:32:29,200
स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म इनको सदैव पकड़ के रखिए। आपका कोई

1294
01:32:29,200 --> 01:32:33,640
बाल बांका नहीं कर पाएगा। इनको पकड़ के रखिए मूल प्रश्नों

1295
01:32:33,640 --> 01:32:37,840
को। बाद की बात तो वो वहां क्या लिखा है? वहां क्या लिखा है? वो तो बाद

1296
01:32:37,840 --> 01:32:43,840
की बातें है ना। पहले आप सिद्ध तो करिए कि हम वहां जाए क्यों?

1297
01:32:44,200 --> 01:32:48,400
हम तो कोई भी एक सामान्य सा व्यक्ति भी अपने धर्म

1298
01:32:48,400 --> 01:32:52,960
की रक्षा कर सकता है। केवल इन तीन सिद्धांतों के आधार पर

1299
01:32:52,960 --> 01:32:57,080
परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत

1300
01:32:57,080 --> 01:33:01,840
धर्म और जैसे वो आपने

1301
01:33:01,840 --> 01:33:06,720
वो देखी थी फिल्म आई थी मिस्टर इंडिया देखी थी

1302
01:33:06,720 --> 01:33:11,440
जी देखी होगी मिस्टर इंडिया में

1303
01:33:11,440 --> 01:33:15,440
उसके पास एक गैजेट होता है जिस गैजेट को वो इनको मत लो

1304
01:33:15,440 --> 01:33:19,760
भाई इनको हटा दो इनको मत लो कैसे आ रहे हैं बार-बार इनका

1305
01:33:19,760 --> 01:33:23,920
का हो गया। ये बात नहीं करने आए। झगड़ा करने आए हैं।

1306
01:33:23,920 --> 01:33:28,320
मिस्टर इंडिया में अभी ले रहा हूं मैं बस। भाटिया जी आपको ले रहा हूं। बस

1307
01:33:28,320 --> 01:33:32,560
मिस्टर इंडिया में उसके पास एक गैजेट होता है नायक जो था फिल्म

1308
01:33:32,560 --> 01:33:36,720
का वो गैजेट में वो जब भी बटन दबाता

1309
01:33:36,720 --> 01:33:40,720
था तो वो अदृश्य हो जाता था। इनविज़िबल हो जाता था। मगर

1310
01:33:40,720 --> 01:33:45,280
लास्ट में जब उसकी फाइनल फाइट हो रही होती है विलेन के साथ

1311
01:33:45,280 --> 01:33:49,840
तो वह कहता है कि मैं आज इस बटन को नहीं दबाऊंगा। आज मैं एक सामान्य

1312
01:33:49,840 --> 01:33:53,920
आज मैं एक सामान्य नागरिक बनके सामान्य हिंदुस्तानी बनके वह जो

1313
01:33:53,920 --> 01:33:58,000
विलेन था वह भारत का शत्रु था। वो कहता है आज

1314
01:33:58,000 --> 01:33:59,280
मैं एक सामान्य नागरिक

1315
01:33:59,280 --> 01:34:03,280
बनके तुझे हराऊंगा। तो इसका मतलब क्या है कि आपके पास आप

1316
01:34:03,280 --> 01:34:07,360
ये अपेक्षा मत करो कि कोई स्पेशल गैजेट हो जो शास्त्रों का

1317
01:34:07,360 --> 01:34:11,520
तड़ा तड़ा आपको सब कुछ बता दे। हैं? सभी जितने भी

1318
01:34:11,520 --> 01:34:15,680
प्रश्न ये लोग उठाते हैं सबके उत्तर है। बहुत बढ़िया उत्तर है। मगर

1319
01:34:15,680 --> 01:34:20,560
आप उसके इंतजार में मत रहो। सामान्य व्यक्ति बन के हराओ इन्हें।

1320
01:34:20,560 --> 01:34:24,880
बच्चा बच्चा हरा सकता है। केवल एक बात सर्वशक्तिमान

1321
01:34:24,880 --> 01:34:28,960
ईश्वर खत्म। हर वो व्यक्ति जो सनातन

1322
01:34:28,960 --> 01:34:34,120
धर्म का परंपरा प्राप्त आचार्यों का शंकराचार्य

1323
01:34:34,120 --> 01:34:38,320
का अन्य परंपराओं का खंडन करने आएगा। वो इस एक प्रश्न

1324
01:34:38,320 --> 01:34:42,760
से ध्वस्त है। सिर्फ एक प्रश्न सर्वशक्तिमान

1325
01:34:42,760 --> 01:34:46,960
ईश्वर जी भाटिया जी बताएं।

1326
01:34:46,960 --> 01:34:51,680
सबसे पहले तो बोल सियावर रामचंद्र की

1327
01:34:51,680 --> 01:34:55,680
जय जय जय पवन सुत हनुमान

1328
01:34:55,680 --> 01:35:00,000
की जय जय तो

1329
01:35:00,000 --> 01:35:04,080
आज काफी टाइम बाद आप लोगों से जुड़ना हुआ है बहुत सारी शुभकामनाएं मैं

1330
01:35:04,080 --> 01:35:08,160
आपको देता हूं और कल जेष्ठ का महीना स्टार्ट हो रहा है तो कल पांच बड़े मंगल

1331
01:35:08,160 --> 01:35:13,880
भी होंगे आपके यहां लखनऊ में मनाए जाएंगे तो उसके

1332
01:35:13,880 --> 01:35:18,560
लिए से प्रार्थना है कि आप आए प्रगति कृपा प्राप्त होते हैं आपकी

1333
01:35:18,560 --> 01:35:23,520
को हां अब वो इनका गीता जो है ना ये

1334
01:35:23,520 --> 01:35:27,680
गरिमा गीता की इसका एक एक चैप्टर एक एक

1335
01:35:27,680 --> 01:35:31,760
श्लोक इसकी मीमांसा करेंगे अभी दिन डिसाइड नहीं किया मगर

1336
01:35:31,760 --> 01:35:35,920
हफ्ते में दो दिन रखेंगे इनका एक एक श्लोक जो इन्होंने किया है उसका

1337
01:35:35,920 --> 01:35:40,160
कंपैरेटिव हमारी गीता में क्या लिखा है इन्होंने क्या लिखा है उसका

1338
01:35:40,160 --> 01:35:45,440
तार्किक और प्रमाणिक उत्तर देते हुए एक एक श्लोक की बात करेंगे

1339
01:35:45,440 --> 01:35:48,400
बिल्कुल

1340
01:35:48,400 --> 01:35:52,400
ऐसा ही करना है। जय श्री राम। चलिए जय श्री राम।

1341
01:35:52,400 --> 01:35:56,400
जय श्री राम। मैंने बधाई दी थी। आज राधा रमण जी का प्रागट्य

1342
01:35:56,400 --> 01:36:01,760
दिवस है। हां आप सभी को बधाई। सबको बधाई।

1343
01:36:01,760 --> 01:36:07,760
धन्यवाद।

1344
01:36:08,480 --> 01:36:12,480
कुछ मतलब मैं ये कह रहा हूं कि ये आगे जब

1345
01:36:12,480 --> 01:36:17,760
क्लियर बात कहने को डरते काहे को है? जब आपने बोला कि सर्वशक्तिमान

1346
01:36:17,760 --> 01:36:21,840
तो एक बार तो हिचक गए मतलब कि हिचकते हैं कि सर्वशक्तिमान का अर्थ ये

1347
01:36:21,840 --> 01:36:26,240
होता है कि सब कुछ कर लेने वाला हम किसी नियम के नीचे नहीं

1348
01:36:26,240 --> 01:36:32,240
पर उन्होंने देखा किंतु परंतु उसमें लग जाएगा उनका हम

1349
01:36:32,520 --> 01:36:36,560
जैसे कुछ देर के लिए अमर होना या कुछ देर के लिए अविनाशी है

1350
01:36:36,560 --> 01:36:40,560
वो ज्यादा साल जीता है तो वो अविनाशी है इसलिए अविनाशी बोलते हैं

1351
01:36:40,560 --> 01:36:46,560
पर अंतत मृत्यु होती है तो अविनाशी शब्द बन गया क्यों

1352
01:36:48,080 --> 01:36:52,560
जब मृत्यु होने वाले को अविनाशी कहेंगे तो मृत्यु ना होने वाले को अविनाशी

1353
01:36:52,560 --> 01:36:58,160
थोड़ी ना कहेंगे। कुछ और कहेंगे। जी

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खैर वो तो सभी ने देखा ही हुआ है कि जब ये सामने आते हैं तो इनका क्या असर

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होता है। जी देव जी आप अपनी बात बोले उसके बाद लाइव को आज

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समाप्त करेंगे। जल्दी से मुझे करना था। बताएं देव जी।

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जी सभी को जय श्री राम। हर हर महादेव। जय श्री राम।

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बड़े दिनों के बाद आपके दर्शन हुए। अरे दर्शन

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की कोई बात थोड़ी ना है। चलिए

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अच्छा लगा सबसे मिलके काफी दिनों के बाद। सभी को जय श्री

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राम। हर हर महादेव। हर हर महादेव। हर

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हर महादेव।
