1
00:00:01,600 --> 00:00:06,000
तो सभी को जय श्री राम। आशा

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,680
करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे।

3
00:00:10,680 --> 00:00:14,840
और आज का जो विषय है बहुत ही गंभीर विषय

4
00:00:14,840 --> 00:00:19,280
है। आप लोग देख ही रहे हैं बंगाल इत्यादि

5
00:00:19,280 --> 00:00:23,280
जो क्षेत्र हैं वहां पर हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है और

6
00:00:23,280 --> 00:00:27,840
अभी हमने हाल ही में नागपुर

7
00:00:27,840 --> 00:00:31,920
इत्यादि में भी कुछ ऐसी घटनाएं सुनी है जो अह

8
00:00:31,920 --> 00:00:36,160
हमारे अस्तित्व और आदर्श को दबाया जा रहा है।

9
00:00:36,160 --> 00:00:39,960
तो मैं कुछ

10
00:00:39,960 --> 00:00:44,400
विशेष जो दृष्टिकोण है उनकी तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा।

11
00:00:44,400 --> 00:00:48,640
जितने भी श्रोताग हैं और जो

12
00:00:48,640 --> 00:00:52,720
सेकुलर हैं वो अवश्य

13
00:00:52,720 --> 00:00:57,200
इस वीडियो को जरूर देखें ध्यानपूक जो सेकुलर धर्मनिरपेक्ष विचारधारा

14
00:00:57,200 --> 00:01:01,600
रखते हैं। तो आज हम लोग थोड़ा सा थ्योरिकल बात करेंगे।

15
00:01:01,600 --> 00:01:06,480
समस्या से निकलने समस्या क्या है और उस समस्या का

16
00:01:06,480 --> 00:01:11,160
उपाय क्या है इस पर थ्योरिकल बात करेंगे

17
00:01:11,160 --> 00:01:15,360
और इस श्रंखला में आगे आने वाले दो-तीन दिनों में कुछ एक

18
00:01:15,360 --> 00:01:16,960
महत्वपूर्ण घोषणा की जाएगी

19
00:01:16,960 --> 00:01:21,040
कि प्रैक्टिकली ऑन ग्राउंड एक साधारण से साधारण व्यक्ति के

20
00:01:21,040 --> 00:01:25,720
रूप में हम क्या कर सकते

21
00:01:25,720 --> 00:01:31,720
हैं? शंकर जी हैं। वह भी जुड़े

22
00:01:34,040 --> 00:01:39,160
हैं। उनको जोड़ने का ऑप्शन नहीं आ रहा

23
00:01:39,160 --> 00:01:43,360
है। एक बार दोबारा आप पुनः लीव करके वापस

24
00:01:43,360 --> 00:01:49,360
आए। जय श्री राम सभी को। और

25
00:01:50,160 --> 00:01:54,240
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। इससे संबंधित कुछ सामग्री वगैरह है जो अभी कुछ

26
00:01:54,240 --> 00:01:58,400
दिनों में हमारे YouTube में जो

27
00:01:58,400 --> 00:02:02,400
सेक्शन होता है जहां से आप हमारे से

28
00:02:02,400 --> 00:02:06,880
जुड़ी हुई विचारधाराओं से जुड़ी हुई चीजें जो सिद्धांतों से जुड़ी हुई जो चीजें हैं

29
00:02:06,880 --> 00:02:10,920
वो आप वहां पर प्राप्त कर सकते हैं। तो

30
00:02:10,920 --> 00:02:15,800
मैं उस पर आता हूं मुख्य बिंदु क्या है

31
00:02:15,800 --> 00:02:19,840
कि आज हम लोग बात करेंगे कि हमारी समस्या क्या है

32
00:02:19,840 --> 00:02:23,840
थ्योरिकली और उसका उपाय क्या हो सकता है? कैसे हो सकता है?

33
00:02:23,840 --> 00:02:27,840
और अभी कुछ अह दो-ती दिन में तीन से 4

34
00:02:27,840 --> 00:02:31,920
दिन के अंदर हम लोग एक अभियान

35
00:02:31,920 --> 00:02:35,920
है जिस पर हम अभी गुप्त रूप से कार्य कर रहे हैं

36
00:02:35,920 --> 00:02:40,000
और फिर वो आपके सामने भी आएगा। तो आप

37
00:02:40,000 --> 00:02:44,000
वो अभियान अभी उसमें कुछ तैयारियां बाकी है तो अभी उसकी घोषणा नहीं की जा रही।

38
00:02:44,000 --> 00:02:48,240
ऐसा कोई ऐसा भी नहीं है कि कोई वैसा कुछ सीक्रेट एजेंट

39
00:02:48,240 --> 00:02:52,240
वाला बस यह है कि कुछ तैयारियां चल रही हैं और पूरी होते ही उस

40
00:02:52,240 --> 00:02:56,400
अभियान को आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा। मगर बात यह है कि एक

41
00:02:56,400 --> 00:03:00,880
साधारण से साधारण व्यक्ति होते हुए भी आप कुछ कर पाएंगे।

42
00:03:00,880 --> 00:03:05,360
जो लोग साधार जो लोग भी हैं जो ऐसा सोचते हैं कि हम क्या कर सकते हैं

43
00:03:05,360 --> 00:03:09,440
या मतलब ऐसी चीजें हैं ही नहीं ऐसी स्थितियां नहीं हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है।

44
00:03:09,440 --> 00:03:14,080
जो लोग ऐसा भी सोचते हैं वो भी उस अभियान का हिस्सा बन सकते

45
00:03:14,080 --> 00:03:18,640
बन सकते हैं। बन सकेंगे। तो आप लोग इस श्रंखला से जरूर

46
00:03:18,640 --> 00:03:22,640
जुड़े रहिएगा। अब सबसे पहली बात है कि आज की स्थितियां

47
00:03:22,640 --> 00:03:26,800
क्या है? आप देख रहे हैं कि बंगाल में हमारे भाइयों

48
00:03:26,800 --> 00:03:30,840
के साथ क्या हो रहा है? हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है? नागपुर में क्या हुआ?

49
00:03:30,840 --> 00:03:35,200
अभी कुछ अभी मैंने आने से पहले वो बोर्ड

50
00:03:35,200 --> 00:03:39,200
पर एक न्यूज़ देखी थी। उसमें कितनी सत्यता है

51
00:03:39,200 --> 00:03:43,600
वह नहीं पता है। पर उसमें जो वक्ता था

52
00:03:43,600 --> 00:03:47,680
वह यह कह रहा था कि जब उसने वक बोर्ड

53
00:03:47,680 --> 00:03:51,760
के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाने का

54
00:03:51,760 --> 00:03:56,000
प्रयास किया था तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे पूछा गया कि

55
00:03:56,000 --> 00:04:00,440
भाई अगर वफ बोर्ड अवैध रूप से गलत तरीके

56
00:04:00,440 --> 00:04:04,480
से प्रॉपर्टीज पर अपना हक जमाता है, अधिकार

57
00:04:04,480 --> 00:04:08,560
जमाता है तो तुम्हारी कोई प्रॉपर्टी है क्या जिस पर उसने

58
00:04:08,560 --> 00:04:12,640
ऐसा किया हो? उसके पास जवाब नहीं था। उससे इस

59
00:04:12,640 --> 00:04:16,880
तरह का प्रश्न किया गया तो उसके पास जवाब

60
00:04:16,880 --> 00:04:20,560
नहीं था क्योंकि वह एक समष्टि के रूप से उस याचिका को लेकर

61
00:04:20,560 --> 00:04:23,520
के कोर्ट गया था।

62
00:04:23,520 --> 00:04:27,600
उसके बाद अभी उसने बताया कि अभी यह जो वफ बोर्ड जो

63
00:04:27,600 --> 00:04:31,760
जो नया बिल आया है उसके प्रतिकार स्वरूप जो

64
00:04:31,760 --> 00:04:36,000
मुस्लिम समाज के जो नेता इत्यादि हैं

65
00:04:36,000 --> 00:04:40,240
या ओवैसी इत्यादि ये लोग भी कोर्ट गए

66
00:04:40,240 --> 00:04:44,400
हैं। तो इन लोगों ने कोर्ट जाकर के ये

67
00:04:44,400 --> 00:04:48,560
उसका विरोध कर रहे हैं। जो परिवर्तन हुआ है व बोर्ड में

68
00:04:48,560 --> 00:04:52,640
तो यह उसका विरोध कर रहे हैं। अब जो वक्ता था जो यह न्यूज़ दे रहा था वो एक

69
00:04:52,640 --> 00:04:56,640
जानेमाने वकील हैं जो इस संबंध में आप लोग शायद जानते भी हो उनका नाम मुझे नहीं याद आ रहा

70
00:04:56,640 --> 00:05:00,800
है। वो यह बता रहे थे कि

71
00:05:00,800 --> 00:05:05,120
अब जब ओवैसी इत्यादि जब मुस्लिम समाज के पक्ष में व

72
00:05:05,120 --> 00:05:09,200
बोर्ड के पक्ष में ये जो नया बिल आया है इसके

73
00:05:09,200 --> 00:05:13,440
विरुद्ध जब वो कोर्ट गए तो कोर्ट ने उनसे नहीं पूछा कि आपके

74
00:05:13,440 --> 00:05:17,520
साथ पर्सनली क्या हुआ है? उनसे पूछा गया था।

75
00:05:17,520 --> 00:05:21,760
उनकी जो याचिका थी वह एडमिट भी नहीं हुई। वापस ले वापस

76
00:05:21,760 --> 00:05:26,280
लेनी पड़ी उनको अपनी याचिका उनसे पूछा गया था।

77
00:05:26,280 --> 00:05:30,560
मगर आज जब ये लोग जा रहे हैं सुप्रीम कोर्ट तो

78
00:05:30,560 --> 00:05:34,720
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये नहीं पूछा जा रहा है कि आपके साथ पर्सनल क्या अटैक हुआ?

79
00:05:34,720 --> 00:05:35,680
पर्सनली आपके साथ

80
00:05:35,680 --> 00:05:40,000
क्या हुआ? तो कहने का तात्पर्य यह था उनका कि सुप्रीम

81
00:05:40,000 --> 00:05:44,040
कोर्ट द्वारा भी उनके साथ हिंदुओं के

82
00:05:44,040 --> 00:05:48,240
साथ सौतेला व्यवहार होता है। तो

83
00:05:48,240 --> 00:05:52,960
इसका कारण क्या है? इस पर हम लोग जो है

84
00:05:52,960 --> 00:05:57,680
बात करेंगे। सनातन शंकर जी आपका स्वागत है।

85
00:05:57,680 --> 00:06:02,320
सनातन शंकर जी भी जुड़ चुके हैं।

86
00:06:02,320 --> 00:06:07,200
जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। तो

87
00:06:07,200 --> 00:06:11,520
दिल दहलाने देने वाली तस्वीरें आ रही हैं। बंगाल से आ रही हैं। अभी इससे पहले

88
00:06:11,520 --> 00:06:15,840
भी कुछ चला था तो उस समय भी आई थी और

89
00:06:15,840 --> 00:06:19,920
एक इशारा हमें जगुरु शंकराचार्य जी ने कई बार करा है करते

90
00:06:19,920 --> 00:06:24,160
रहते हैं कि विप्लव की स्थितियां आने वाली है और हम लोग अगर उन स्थितियों

91
00:06:24,160 --> 00:06:28,240
के लिए तैयार नहीं होंगे तो बहुत जल्द ऐसा नहीं है कि वो

92
00:06:28,240 --> 00:06:32,560
जो आग हमसे देखिए मैंने भी आज से कुछ छ महीने पहले जब बांग्लादेश

93
00:06:32,560 --> 00:06:36,880
में घटनाएं हो रही थी तो मैंने भी उस समय कहा था कि हम लोग क्या है ज्यादातर

94
00:06:36,880 --> 00:06:41,200
ये प्रतीक्षा करते रहते हैं कि वो जो आग है वो वो जब तक हमारे

95
00:06:41,200 --> 00:06:45,400
गेट के सामने तक नहीं आ जाएगी तब तक हम लोग नहीं

96
00:06:45,400 --> 00:06:50,320
हिलेंगे। अच्छा छोटा था छोटा था तब मैं कभी-कभी

97
00:06:50,320 --> 00:06:51,200
चंबल

98
00:06:51,200 --> 00:06:56,080
नदी है जो वहां कभी-कभी घूमने गया हूं। छोटा था तब मैं

99
00:06:56,080 --> 00:07:00,160
तो उसमें घड़ियाल पाए जाते हैं। घड़ियाल मैंने

100
00:07:00,160 --> 00:07:05,200
देखा है घड़ियाल और मगरमच्छों की एक प्रकृति होती है।

101
00:07:05,200 --> 00:07:10,080
प्रकृति क्या होती है? जब वह धूप सेक रहे होते हैं।

102
00:07:10,080 --> 00:07:14,600
और बहुत आलसी अवस्था में जब पड़े हुए होते हैं

103
00:07:14,600 --> 00:07:18,640
घड़ियाल तो उनको छोटामोटा कंकड़ पत्थर

104
00:07:18,640 --> 00:07:22,640
मारो चिढ़ाना चाहो तो वो लोग हिलते ही

105
00:07:22,640 --> 00:07:27,280
नहीं है। आप उन्हें जो है परेशान करना चाहो

106
00:07:27,280 --> 00:07:31,280
तो बहुत प्रयत्न करने पर भी वो हिलेंगे नहीं।

107
00:07:31,280 --> 00:07:35,440
मतलब जब तक आप वह जो एक बड़ा सा कुछ ऐसा ले

108
00:07:35,440 --> 00:07:40,160
नहीं जाओगे कि उनको लग जाए कि हां अब जब

109
00:07:40,160 --> 00:07:44,320
क्या कहते हैं जब तक कि उनको यह ना लगे उसको यह ना लगे घड़ियाल को कि भाई अब

110
00:07:44,320 --> 00:07:48,480
ये जो पत्थर है मुझे ऐसा नुकसान पहुंचा सकता है जिससे मेरा

111
00:07:48,480 --> 00:07:52,960
आने वाला जीवन जो भविष्य का जीवन है वो प्रभावित हो जाए तो

112
00:07:52,960 --> 00:07:57,120
तब तक वो घड़ियाल हिलते नहीं थे। ऐसा ही कुछ

113
00:07:57,120 --> 00:08:01,120
हाल आजकल हिंदुओं का है। ये लोग बातें कर

114
00:08:01,120 --> 00:08:05,520
लेंगे ज्यादा से ज्यादा यह होगा YouTube खोल खाल के देख लेंगे सोशल

115
00:08:05,520 --> 00:08:06,240
मीडिया पर यहां

116
00:08:06,240 --> 00:08:10,520
से मैसेज आएगा तो आगे फॉरवर्ड कर देंगे

117
00:08:10,520 --> 00:08:14,560
या अगर और निष्ठा हुई तो किसी आरएसएस

118
00:08:14,560 --> 00:08:18,560
बजरंग दल या हिंदूवादी जो उन्हें प्रायोरिटी से

119
00:08:18,560 --> 00:08:22,640
प्राथमिकता से जो अपने आसपास ऐसा कोई दिखाई देगा

120
00:08:22,640 --> 00:08:27,280
तो उसमें अपना नामांकन करा लेंगे। उसमें भी नामांकन कराने पर भी

121
00:08:27,280 --> 00:08:32,320
कोई आवश्यकता पड़ने पर बहुत ही मुश्किलों से वह अपने घर से निकलेंगे बाहर।

122
00:08:32,320 --> 00:08:36,640
जी जी जी जितना भी चल रहा है इसमें

123
00:08:36,640 --> 00:08:41,120
जो सेकुलरिज्म है ना हमारे देश का वो बहुत बड़ा मतलब जिम्मेवार

124
00:08:41,120 --> 00:08:45,120
है इस बात के लिए और पिछले जब से

125
00:08:45,120 --> 00:08:49,360
हमारा देश आजाद हुआ है और जब से ये मुगल काल हमारे देश में आया फिर अंग्रेजों

126
00:08:49,360 --> 00:08:53,520
का टाइम आया इस टाइम पे हिंदुओं को क्या किया गया सेकुलर बनाया गया

127
00:08:53,520 --> 00:08:57,680
है। उनको यह कहा गया है कि देखो जी सब मजहब के लोग

128
00:08:57,680 --> 00:09:01,920
सब धर्मों के लोग एक साथ रहना चाहिए और सब

129
00:09:01,920 --> 00:09:06,080
धर्मों को जो है वो आपस में मिलजुलकर रहना चाहिए और यह जो मीठी

130
00:09:06,080 --> 00:09:10,400
गोली दी गई है हिंदुओं को इसमें हिंदू इतना अंधा

131
00:09:10,400 --> 00:09:14,480
हो गया है वो यह समझने लग गया है कि भाई अगर आपके

132
00:09:14,480 --> 00:09:18,560
ऊपर कोई दूसरे मजहब वाला अटैक कर भी रहा है तो उसके लिए भी जो

133
00:09:18,560 --> 00:09:21,360
सरकार जिम्मेदार है सरकार को ही आपकी सुरक्षा

134
00:09:21,360 --> 00:09:25,360
करनी है क्योंकि संविधान बना दिया। अब जब संविधान बना दिया तो

135
00:09:25,360 --> 00:09:29,600
यह बात आ जाती है कि भैया जब संविधान हमारी रक्षा कर रहा है तो फिर हमें हथियार

136
00:09:29,600 --> 00:09:33,680
उड़ाने की क्या जरूरत है? कानून ने यह बोला कि आपको कानून हाथ में

137
00:09:33,680 --> 00:09:38,080
नहीं लेना है। अरे भाई जब सड़क पर आप चल रहे हो और आपके ऊपर अटैक

138
00:09:38,080 --> 00:09:42,080
हो रहा है। आपके ऊपर जो है वो इन विधर्मियों द्वारा अटैक किया जा रहा है तो

139
00:09:42,080 --> 00:09:46,240
एटलीस्ट वहां पर तो आप अपनी रक्षा के लिए तो हथियार उठाइए। वहां पर

140
00:09:46,240 --> 00:09:50,240
आप सेकुलरिज्म का चोला पहनकर नहीं रह सकते हो क्योंकि

141
00:09:50,240 --> 00:09:54,480
वो ग्राउंड है वो लेवल है। पुलिस आते-आते टाइम लगता है। सबको पता है

142
00:09:54,480 --> 00:09:58,800
कि भैया पहले बहुत दंगा हो जाता है। दोनों तरफ से बहुत वो चीज हो जाती है।

143
00:09:58,800 --> 00:10:02,800
जब असली तरह से मारकाट हो चुकी होती है तब जाके

144
00:10:02,800 --> 00:10:06,960
पुलिस आती है। पुलिस भी जब नाकाम हो जाती है तो फिर आर्मी डिप्लॉय की जाती

145
00:10:06,960 --> 00:10:11,120
है। तो भाई अगर हिंदू जो हैं वो यह सेकुलरिज्म का चश्मा

146
00:10:11,120 --> 00:10:15,200
उतार कर थोड़ा सा निडरता दिखाएं। एकजुट होकर

147
00:10:15,200 --> 00:10:19,360
कम से कम अपनी कम्युनिटी को ही बचा लो। मान लो

148
00:10:19,360 --> 00:10:23,520
आपके मोहल्ले में 20 घर हैं। अब आपको पता है कि सामने वाले जो

149
00:10:23,520 --> 00:10:27,520
है वो आपके ऊपर अटैक कर रहे हैं। तो एक्चुअली 20 घर मिलकर तो कम से कम अपनी सुरक्षा

150
00:10:27,520 --> 00:10:31,520
का कोई ना कोई इंतजाम तो करें। कहते हैं मुसीबत आने पर बिल्ली भी शेर बन

151
00:10:31,520 --> 00:10:35,760
जाती है। हमने सुना था बचपन में कि भाई जब बिल्ली को ऐसा लगता है कि मुसीबत

152
00:10:35,760 --> 00:10:36,480
आ रही है तो वो

153
00:10:36,480 --> 00:10:40,640
भी गुर्राती है। कई बार वो उसके सामने चार खूंखार

154
00:10:40,640 --> 00:10:44,800
कुत्ते होते हैं जो उसको घेर के खड़े हो गए होते हैं तो बिल्ली भी

155
00:10:44,800 --> 00:10:48,880
अपना आकार बढ़ा बढ़ाकर उनको गुर्रा कर डराने की कोशिश करती

156
00:10:48,880 --> 00:10:53,040
है। अरे हिंदू तो वो भी नहीं कर रहा है। तो कम से कम ये चीज तो आप

157
00:10:53,040 --> 00:10:57,440
करिए। तो ये मेरा एक इसमें पॉइंट है कि

158
00:10:57,440 --> 00:11:01,520
जी बिल्ली वाला जो आपने कहा ना इससे मुझे एक चीज समझ

159
00:11:01,520 --> 00:11:05,920
में आई अभी-अभी जी कि बिल्ली

160
00:11:05,920 --> 00:11:09,920
भी मुसीबत के समय अपनी सीमा से बाहर जाकर के प्रयत्न करना

161
00:11:09,920 --> 00:11:14,000
शुरू करती है। वो जानती है कि मैं कुत्ते से नहीं भिड़ सकती वह

162
00:11:14,000 --> 00:11:18,240
प्रयत्न करती है। मगर हम हिंदु भारतीय हिंदुस्तान

163
00:11:18,240 --> 00:11:23,000
में रहने वाले जो हिंदू हैं। उनकी स्थिति क्या है कि हम शेर

164
00:11:23,000 --> 00:11:27,200
हैं। ऑलरेडी हमारी स्थिति मजबूत है। अभी आज के टाइम

165
00:11:27,200 --> 00:11:31,200
में मगर फिर भी हम बिल्ली की सीमा के

166
00:11:31,200 --> 00:11:35,200
अंदर रह रहे हैं। बिल्ली की सीमा से बाहर निकलना तो बहुत दूर

167
00:11:35,200 --> 00:11:39,360
की बात है। शेर की सीमा में आ जाना तो बहुत दूर की बात है। हम बिल्ली

168
00:11:39,360 --> 00:11:44,080
की सीमा में भी अंदर रह रहे हैं। क्यों? आपने एक पॉइंट दिया

169
00:11:44,080 --> 00:11:48,320
कि मुसीबत आते समय वो ऐसा प्रयत्न करती है। मुसीबत आते

170
00:11:48,320 --> 00:11:51,680
समय। जी। तो यहीं पर पॉइंट है।

171
00:11:51,680 --> 00:11:57,520
पॉइंट क्या है कि हिंदू को लग ही नहीं रहा है कि मुसीबत है।

172
00:11:57,520 --> 00:12:03,400
यह प्रॉब्लम इसको कहेंगे आरामाभास।

173
00:12:03,400 --> 00:12:07,520
आरामाभास आरामाभास कहेंगे ना हमें बहुत आराम है।

174
00:12:07,520 --> 00:12:11,840
उसका आभास जी। तो यह इनका सोचना

175
00:12:11,840 --> 00:12:16,160
है कि कहीं पर किसी महिला के साथ अत्याचार हो रहा है।

176
00:12:16,160 --> 00:12:20,240
कहीं पर किसी के साथ दुराचार हो रहा है। मारपीट हो रही है। उसको मारा

177
00:12:20,240 --> 00:12:24,800
जा रहा है। हिंसा हो रही है। तो ये वो हिंदू हैं जिनको

178
00:12:24,800 --> 00:12:28,800
यह लगता है कि यह मुसीबत मेरी मुसीबत नहीं है। तो वो कहां से फिर बिल्ली

179
00:12:28,800 --> 00:12:33,400
की सीमा से बाहर निकलेंगे? जी। पहले उनको ये तो कह लो।

180
00:12:33,400 --> 00:12:37,600
खैर धर्मनिरपेक्ष कौन होते हैं और कौन

181
00:12:37,600 --> 00:12:41,920
नहीं होते हम लोग इसी श्रंखला में एक एक दो दिन में ही

182
00:12:41,920 --> 00:12:46,000
एक वीडियो लाएंगे धर्मामीटर नाम से उसमें हम

183
00:12:46,000 --> 00:12:50,000
कुछ चीजें बहुत रोचक जानने को मिलेंग और प्रैक्टिकली कुछ

184
00:12:50,000 --> 00:12:54,720
समझ में आएंगी चीजें कि कौन कहां पर है क्या कर रहा है वो बहुत एक

185
00:12:54,720 --> 00:12:58,880
धर्मनिरपेक्ष किसे कहते हैं राष्ट्रवादिता के नाम पर धर्म

186
00:12:58,880 --> 00:13:03,760
का धर्म से द्रोह करने वाले कौन होते हैं सनातना भाष

187
00:13:03,760 --> 00:13:06,720
है ना अध्यात्म भाष नास्तिक

188
00:13:06,720 --> 00:13:10,960
विधर्मी सबकी की विवेचना है उसमें तो हम लोग इसी श्रंखला में वो एक आने

189
00:13:10,960 --> 00:13:14,960
वाला वीडियो उसमें हम बात करेंगे। आज हम बात कर रहे हैं कि हमारी प्रॉब्लम

190
00:13:14,960 --> 00:13:18,960
क्या है और उसका जो जो थ्योरिकल थ्योरिकली उस

191
00:13:18,960 --> 00:13:23,040
प्रॉब्लम का सॉल्यूशन क्या है? तो सब लोग जानते हैं कि हमारी प्रॉब्लम

192
00:13:23,040 --> 00:13:27,040
क्या है? अच्छा प्रॉब्लम का जब हम लोग प्रॉब्लम

193
00:13:27,040 --> 00:13:31,360
के रूट में जाते हैं तो प्रॉब्लम का फेस बदलने लगता है।

194
00:13:31,360 --> 00:13:35,360
जब हम उसके अंदर डेप्थ में जाने लगते हैं। जी। तो जो

195
00:13:35,360 --> 00:13:40,000
हमें दिखाई दे रहा है सबसे पहले तो हमें धर्म और

196
00:13:40,000 --> 00:13:44,160
यह जो लड़ाई हो रही है धर्म और अधर्म के बीच तो कुछ

197
00:13:44,160 --> 00:13:48,240
लोगों को यह भी लगता है कि भाई ये धर्म और अधर्म के चक्कर में लोग मारे जा रहे हैं। कुछ

198
00:13:48,240 --> 00:13:52,400
लोगों को यह भी लगता है। तो पहले सबसे पहले पॉइंट पे तो

199
00:13:52,400 --> 00:13:56,480
लोगों को समस्या नहीं मालूम है और फिर अगर हम उस समस्या

200
00:13:56,480 --> 00:14:01,120
में किसी एक पक्ष से मरने अथवा मारने वाले हैं

201
00:14:01,120 --> 00:14:05,360
तो उसमें भी उसको यह लगता है कि हम अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं। हम किसी और के

202
00:14:05,360 --> 00:14:09,440
लिए लड़ रहे हैं। हम शब्दों के लिए लड़ रहे हैं या गाय माता के लिए लड़

203
00:14:09,440 --> 00:14:13,520
रहे हैं तो इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि वेद में लिखा है। है ना? या वेद

204
00:14:13,520 --> 00:14:17,600
के लिए लड़ रहे हैं तो इसलिए लड़ रहे हैं कि बस हमारी आस्था है। मेरा व्यक्तिगत

205
00:14:17,600 --> 00:14:22,280
उसमें निजी उसमें कुछ नहीं है। ऐसा है।

206
00:14:22,280 --> 00:14:26,480
तो सबसे पहले ये लोग जो सोचते हैं कि ये मेरी निजी

207
00:14:26,480 --> 00:14:30,640
लड़ाई नहीं है। व्यक्तिगत युद्ध नहीं है। एक ये जो है केवल एक

208
00:14:30,640 --> 00:14:34,880
वही है। हम लोग शब्द प्रमाण के लिए लड़ रहे हैं। जिस पर आस्था उसके

209
00:14:34,880 --> 00:14:39,040
लिए उस उनको डेप्थ में जाकर पता चलने की जरूरत है।

210
00:14:39,040 --> 00:14:43,200
अभी मैंने कुछ दिनों पूर्वी एक पहले धर्म और अब सबसे पहला जो चैप्टर

211
00:14:43,200 --> 00:14:47,280
हम लोग बात कर रहे हैं उसमें धर्म और अधर्म का प्रैक्टिकली

212
00:14:47,280 --> 00:14:51,760
आपके जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है? हम उस पर बात कर रहे हैं। तो प्रैक्टिकली

213
00:14:51,760 --> 00:14:55,760
क्या प्रभाव पड़ता है? इस चीज को समझना है। अभी मैंने कुछ

214
00:14:55,760 --> 00:14:59,840
दिनों पूर्व ही एक विद्यालय की कुछ मातृ

215
00:14:59,840 --> 00:15:04,080
शक्तियां थी। मतलब किशोर अवस्था में थी। वह उनका मैंने वीडियो

216
00:15:04,080 --> 00:15:08,560
देखा। उनके टीचर्स ने उन्हें

217
00:15:08,560 --> 00:15:12,640
कुछ उनसे गलती हो गई होगी तो जो छुट्टी का समय होता है उसके बाद

218
00:15:12,640 --> 00:15:17,120
भी उनको स्कूल में ही रोक लिया वो क्लास रूम में बैठी हैं

219
00:15:17,120 --> 00:15:21,200
शायद होंगी 810 या चार पांच

220
00:15:21,200 --> 00:15:25,440
और इतनी अश्लील गालियां दे रही हैं विद्यालय के प्रबंधक को प्रशासन

221
00:15:25,440 --> 00:15:29,600
को इतनी अश्लील कि एक जो पुरुष

222
00:15:29,600 --> 00:15:33,840
है उसको भी शर्म आ जाएगी हमारे आपके जैसे

223
00:15:33,840 --> 00:15:37,440
पुरुष भी वहां शर्मा जाएंगे कि यह लड़कियां हैं।

224
00:15:37,440 --> 00:15:41,440
यह मातृ शक्तियां है और यह हमारे

225
00:15:41,440 --> 00:15:45,520
आपके जैसे ही किसी व्यक्ति के घर में रहती होंगी और

226
00:15:45,520 --> 00:15:49,760
जब वो इस स्तर की अश्लील बातें कर रही है गंदी

227
00:15:49,760 --> 00:15:54,080
इतने स्तर की बातें जब वो कर रही हैं तो फिर उनका निजी

228
00:15:54,080 --> 00:15:58,280
जीवन कैसा होगा? कैसा उनका चरित्र

229
00:15:58,280 --> 00:16:02,400
होगा? क्या है? तो क्या हम आकलन कर सकते हैं?

230
00:16:02,400 --> 00:16:06,400
क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हम अच्छा जब वह यह सब कर रही थी

231
00:16:06,400 --> 00:16:10,480
वो ठीक है वो वीडियो वायरल हो गया मगर जब वो यह सब कर रही

232
00:16:10,480 --> 00:16:14,680
थी तो उनके घर वालों को तो नहीं पता है ना कि वो ये सब कर रही

233
00:16:14,680 --> 00:16:18,800
है है ना उनका चरित्र ऐसा है उनके

234
00:16:18,800 --> 00:16:23,120
मुख से ऐसी ऐसी बातें निकल रही है तो ये क्या है

235
00:16:23,120 --> 00:16:27,120
अधर्म का यहां पर अधर्म का प्रभाव है और

236
00:16:27,120 --> 00:16:31,200
धर्म का अभाव है ये जो स्थिति है अब क्या

237
00:16:31,200 --> 00:16:35,280
हम में आप आप में से कोई भी या जो इस वीडियो को देख रहा है वो

238
00:16:35,280 --> 00:16:39,440
यह कल्पना करना चाहेगा कि उसके घर की कोई

239
00:16:39,440 --> 00:16:43,760
बहन बेटी मातृशक्ति अपने अंदरूनी

240
00:16:43,760 --> 00:16:48,000
रूप से ऐसी हो वो इस हद तक जाकर के

241
00:16:48,000 --> 00:16:52,480
खुलेआम कैमरे पर इतनी अभद्र इतनी अश्लील बातें

242
00:16:52,480 --> 00:16:56,720
बोल रही हो बोल सकने वाली हो ऐसा जीवन जी रही हो ऐसे लोगों से प्रभावित

243
00:16:56,720 --> 00:17:01,600
हो ऐसे लोगों के साथ उठती बैठती हो क्या कोई चाहेगा

244
00:17:01,600 --> 00:17:07,280
बिल्कुल नहीं। तो यह है धर्म का प्रभाव।

245
00:17:07,280 --> 00:17:11,600
जहां पर धर्म होता है वहां पर ऐसी स्थितियां कम

246
00:17:11,600 --> 00:17:15,600
होती चली जाती है और जहां पर अधर्म का प्रभाव होता है

247
00:17:15,600 --> 00:17:20,160
वहां पर ऐसी स्थितियां बढ़ती चली जाती है। ये है आपकी लाइफ में प्रैक्टिकली

248
00:17:20,160 --> 00:17:24,560
धर्म किस तरीके से प्रहार करता है। जी

249
00:17:24,560 --> 00:17:28,800
और सुभाष जी एक और एक और बात है इसमें कैसे

250
00:17:28,800 --> 00:17:33,200
प्रैक्टिकली आपके जीवन में अधर्म प्रवेश करता है। जी जी जी

251
00:17:33,200 --> 00:17:37,360
तो इसमें एक और बात है कि देखो अभी ये भी है

252
00:17:37,360 --> 00:17:41,840
कि हमारे जो हिंदुओं को तोड़ दिया गया है बहुत सारे संगठनों में।

253
00:17:41,840 --> 00:17:45,840
अब रामपाल वाले हैं वो अपना एक अलग मान्यता लेकर चल रहे हैं। इस

254
00:17:45,840 --> 00:17:50,000
वाले हैं वो अपना अलग मान्यता लेकर चल रहे हैं। आर्य समाज वाले अपने अलग

255
00:17:50,000 --> 00:17:54,160
ही वेदों की पिपनी लेकर घूम रहे हैं। वो क्या कर रहे हैं? अभी मैंने

256
00:17:54,160 --> 00:17:58,160
वो देखा एक आर्य समाज जी को वो अपनी टेलीग्राम पर पोस्ट कर रहा है कि

257
00:17:58,160 --> 00:18:02,560
भाई शंकराचार्य कहां है? अब जब ऐसी चीजें आ रही है तो शंकराचार्य

258
00:18:02,560 --> 00:18:07,280
उन्हें याद आ रहे हैं। वैसे दिन भर वो शंकराचार्यों को ही कोसते रहेंगे।

259
00:18:07,280 --> 00:18:08,000
अच्छा

260
00:18:08,000 --> 00:18:12,000
नकली शंकराचार्यों पर कभी उन्होंने कोई कोई प्रश्न नहीं उठाया है।

261
00:18:12,000 --> 00:18:16,240
जबकि हमारे देश में बहुत सारे नकली शंकराचार्य घूम रहे हैं। उनके ऊपर कभी वो प्रश्न

262
00:18:16,240 --> 00:18:20,560
नहीं करेंगे। लेकिन जब इस तरह की घटना आएंगी तो उन्हें वो चार मठों के शंकराचार्य

263
00:18:20,560 --> 00:18:24,720
याद आएंगे। भाई शंकराचार्य इस बारे में क्या कर रहे हैं? वो इस बारे में कदम क्यों

264
00:18:24,720 --> 00:18:29,520
नहीं उठा पा रहे हैं? तो ये जो लोग हैं ना ये जो अलग-अलग

265
00:18:29,520 --> 00:18:33,760
उसमें संप्रदायों में संगठनों में बटे पड़े हैं ये भी इसके लिए बहुत जिम्मेदार

266
00:18:33,760 --> 00:18:37,840
हैं जो बंगाल में हो रहा है क्योंकि इन्होंने क्या किया है अंदरूनी

267
00:18:37,840 --> 00:18:41,840
रूप से हिंदू समाज को तोड़ा है हिंदुओं की जो मान्यता है

268
00:18:41,840 --> 00:18:45,840
उसको तोड़ा है ऐसा तोड़ने से जब आर्य समाज कोई होगा वो

269
00:18:45,840 --> 00:18:49,840
कह कहेगा भाई मंदिर टूट रहा है मेरे को क्या मतलब मेरे तो दयानंद सरस्वती लिख के गए हैं

270
00:18:49,840 --> 00:18:54,000
मंदिर टूट गया तो मंदिर में तो जो पत्थर पूजा है वहां पर तो मूर्ति पूजा

271
00:18:54,000 --> 00:18:58,160
करनी नहीं है ईश्वर अवतार ले ही नहीं सकता है तो वह तो बोलेगा ठीक है भाई इससे

272
00:18:58,160 --> 00:19:02,160
तो मेरा लेना देना है नहीं हां कोई दयानंद सरस्वती को कोई गाली देगा तब मैं

273
00:19:02,160 --> 00:19:06,240
आगे आऊंगा तो वह वैसा है रामपाल वाले सोच रहे होंगे कि रामपाल हमारे गुरु है

274
00:19:06,240 --> 00:19:10,320
उन्होंने तो बोल दिया कि भैया ये सब हिंदुओं की जो शास्त्र

275
00:19:10,320 --> 00:19:14,480
है वो सब खराब है जो रामपाल लिख के गया है वही बातें माननी है वो कभी बाहर

276
00:19:14,480 --> 00:19:18,560
निकल के नहीं आएगा अब जो हमारा मूल सनातन धर्म को मानने

277
00:19:18,560 --> 00:19:22,800
वाला हिंदू बच जाता है वो बेचारा यह सोचता है कि मेरे बगल

278
00:19:22,800 --> 00:19:23,300
वाला जो

279
00:19:23,120 --> 00:19:27,120
हिंदू है जो आर्य समाजी है वो तो मेरे साथ नहीं खड़ा खड़ा है। इधर वाला जो है इस

280
00:19:27,120 --> 00:19:31,200
वाला वह मेरे साथ नहीं खड़ा है। तो वह अकेला पड़ जाता है। यह भी इसका बहुत बड़ा कारण

281
00:19:31,200 --> 00:19:35,440
है कि हिंदू संगठित नहीं हो पा रहा है। ये ये भी विवेचना आज भी

282
00:19:35,440 --> 00:19:39,760
है और जो हमारा जो अगला जो वीडियो आएगा ना धर्मामीटर

283
00:19:39,760 --> 00:19:44,080
उसमें भी ये विवेचना है कि ये लोग कौन है और इनका क्या स्तर

284
00:19:44,080 --> 00:19:48,240
है वो अलग हिस्सा है। तो ये विवेचना आज भी

285
00:19:48,240 --> 00:19:52,800
है कि ये किस तरीके क्या मतलब इनका क्या रोल है।

286
00:19:52,800 --> 00:19:56,880
इस यह जो अधर्म रूपी जो चीजें हमारे सामने आ रही

287
00:19:56,880 --> 00:20:01,040
हैं उसमें इनका क्या रोल है? बिल्कुल प्रैक्टिकली बताने जा रहा हूं। तो

288
00:20:01,040 --> 00:20:05,520
जैसे हमने अभी ये जाना कि हम

289
00:20:05,520 --> 00:20:09,680
अपने जीवन में अपने लिए अंतरात्मा से कुछ आवाजें निकलती है हमारे

290
00:20:09,680 --> 00:20:13,680
लिए कि हम हमें भूख लगी तो हमें खाना मिल जाए। ठीक है?

291
00:20:13,680 --> 00:20:17,760
हमें प्यास लगी तो हमें पानी मिल जाए। यह आवाें हमारे अंतर अंतर अंतर्मन

292
00:20:17,760 --> 00:20:22,240
से निकलती हैं जो सिद्ध है तभी के निकलती है।

293
00:20:22,240 --> 00:20:26,240
अब जैसे अभी मैंने देखा अ

294
00:20:26,240 --> 00:20:30,400
तो कुछ दिनों पूर्व की बात है। एक छोटा

295
00:20:30,400 --> 00:20:34,640
सा मोहल्ला था। कुछ शायद कोई परचून की दुकान थी वहां पर

296
00:20:34,640 --> 00:20:38,160
और लोग कुछ सामान खरीद के मतलब एक सड़क का उसमें कैमरे

297
00:20:38,160 --> 00:20:42,400
में दृश्य आया था और एक बेतहाशा एक वैन वो

298
00:20:42,400 --> 00:20:46,480
fortuner गाड़ी वो आती है और पांच 10 लोगों

299
00:20:46,480 --> 00:20:50,560
को कुचल के चली जाती है। ठीक है? और उसमें

300
00:20:50,560 --> 00:20:54,680
से शायद दो की मृत्यु भी हो गई है। मुझे एग्जैक्टली पता नहीं

301
00:20:54,680 --> 00:21:00,560
है। अब यह सोचिए कि वहां परचून की दुकान पे कौन गया होगा।

302
00:21:00,560 --> 00:21:04,800
कोई मेरे जैसा शिवश गया होगा ना नमक लेने,

303
00:21:04,800 --> 00:21:08,840
आटा लेने, सरसों का तेल लेने या कुछ और

304
00:21:08,840 --> 00:21:13,680
लेने शायद उसका अ

305
00:21:13,680 --> 00:21:17,680
क्या कहते हैं? चीनी खत्म हो गई हो उसके यहां राशन में तो चीनी लेने वो गया

306
00:21:17,680 --> 00:21:21,680
हो। वापस लौट रहा होगा। जी और वापस लौटते में उसको

307
00:21:21,680 --> 00:21:25,680
Fortuner वाले ने कुचल दिया और बड़े बेरहमी से मतलब वहां वो फॉर्च्यूर जो

308
00:21:25,680 --> 00:21:30,320
गई है अब पता चला कि भाई जो Fortuner का चालक था

309
00:21:30,320 --> 00:21:34,320
वो अब वो उसके वो किस समाज से था वो सभी जानते हैं लोग बताया जा

310
00:21:34,320 --> 00:21:38,320
रहा है मुस्लिम समाज से था मगर अभी समाज को मत देखिए कि वो किस समाज से

311
00:21:38,320 --> 00:21:42,320
था अभी देखिए कि वो नशे में था उसने

312
00:21:42,320 --> 00:21:46,560
मदिरापान किया हुआ था और उसने बेतहाशा अपनी गाड़ी चलाई उसके कंट्रोल

313
00:21:46,560 --> 00:21:50,800
में नहीं थी उसने 810 लोगों को ऐसे कुचला जैसे मतलब वहां

314
00:21:50,800 --> 00:21:53,360
पर वो मच्छर भी ना कहे उनको

315
00:21:53,360 --> 00:21:57,360
मच्छरों का भी प्राण होता है। ऐसे कुचल के वो चली

316
00:21:57,360 --> 00:22:01,440
गई। तो यह क्या है? अपने नशे में चूर होकर

317
00:22:01,440 --> 00:22:05,520
के जब आप अन्यों के लिए मुसीबत बन रहे हो तो

318
00:22:05,520 --> 00:22:09,600
यही तो अधर्म है। यहीं पर तो धर्म का अभाव है।

319
00:22:09,600 --> 00:22:14,080
उस व्यक्ति के जीवन में धर्म का अभाव है और अधर्म का प्रभाव है।

320
00:22:14,080 --> 00:22:18,800
जो वह व्यक्ति इस तरीके से गाड़ी चलाता हुआ अन्यों के लिए काल बन गया।

321
00:22:18,800 --> 00:22:22,960
मौत बन गया। तो जयपुर

322
00:22:22,960 --> 00:22:27,040
का हादसा जयपुर में हुआ है। हां मातृ शक्तियां

323
00:22:27,040 --> 00:22:31,360
सुरक्षित नहीं है। जिनका चरित्र अच्छा है वो सुरक्षित

324
00:22:31,360 --> 00:22:35,440
नहीं है। और प्रारंभिक स्तर पर मातृशक्तियों

325
00:22:35,440 --> 00:22:40,160
का चरित्र भी ठीक नहीं रह पा रहा है। पुरुषों का चरित्र नहीं ठीक रह पा रहा है।

326
00:22:40,160 --> 00:22:44,240
हम में से जितने लोग यह देख रहे हैं वो सब यही सोचते हैं कि हमारे घर में

327
00:22:44,240 --> 00:22:48,320
ऐसा नहीं होगा। वह सब यही सोचते हैं कि मैं जब परचून की दुकान पर

328
00:22:48,320 --> 00:22:52,400
जाऊंगा तो मैं सकुशल वापस आ जाऊंगा। मेरे साथ ऐसा नहीं होगा कि वहां

329
00:22:52,400 --> 00:22:56,480
से कोई फॉर्च्यून निकलेगी और मुझे जो है पीस के चली जाएगी। हम

330
00:22:56,480 --> 00:22:59,520
सब यही सोचते हैं।

331
00:22:59,520 --> 00:23:03,600
यही समस्या है कि हम धर्म और अधर्म के प्रभाव को अपने

332
00:23:03,600 --> 00:23:08,160
जीवन में समझ नहीं पा रहे कि धर्म की आवश्यकता क्यों है। जब आपके

333
00:23:08,160 --> 00:23:08,720
आप

334
00:23:08,720 --> 00:23:12,800
जहां पर रह रहे हो वहां पर अधर्म होगा। तो इस तरह के हादसेस

335
00:23:12,800 --> 00:23:17,040
आपको देखने को मिलेंगे। आपके घर की मातृ शक्तियां ऐसी ऐसा करती

336
00:23:17,040 --> 00:23:21,360
हुई प्राप्त मिलेंग प्राप्त होंगी इससे भी और विव्स विव्स आपको दृश्य

337
00:23:21,360 --> 00:23:25,520
मिलेंगे जैसे कि वो दृश्य था जिसमें एक पत्नी ने अपने पति

338
00:23:25,520 --> 00:23:29,600
को जो है ड्रम में डाल दिया काट पीट के और ऊपर से

339
00:23:29,600 --> 00:23:33,920
सीमेंट डाल दिया तो धर्म का

340
00:23:33,920 --> 00:23:38,000
प्रभाव क्या है आपके जीवन में धर्म ऐसी स्थितियों से आपको

341
00:23:38,000 --> 00:23:42,880
बचाता है इसलिए आपको धर्म रक्षा करनी होगी

342
00:23:42,880 --> 00:23:46,960
इसलिए आपको धर्म के साथ खड़ा होना होगा।

343
00:23:46,960 --> 00:23:51,120
अगर आप ऐसी स्थितियों से नहीं निकलना आप ऐसी

344
00:23:51,120 --> 00:23:55,200
स्थितियों में लिप्त नहीं होना चाहते। धर्म अब क्या है

345
00:23:55,200 --> 00:23:59,280
कि जैसे मेरे घर की स्त्रियां अश्लील बात ना करें। ये क्या है?

346
00:23:59,280 --> 00:24:03,560
एक नियम है। मदिरा पान

347
00:24:03,560 --> 00:24:07,680
पीकर गाड़ी ना चलाएं। मदिरा पान

348
00:24:07,680 --> 00:24:11,720
ना करें। ये क्या है? यह नियम है। यही

349
00:24:11,720 --> 00:24:16,480
नियम जब एक ऐसी सशक्त एंटिटी

350
00:24:16,480 --> 00:24:20,640
यानी कि भगवान ऐसे सशक्त तत्व से जुड़ जाते हैं। यह नियम किसने दिए?

351
00:24:20,640 --> 00:24:23,760
भगवान ने दिए। भगवान को प्राप्त करना है तो यह

352
00:24:23,760 --> 00:24:28,120
नियम मानने होंगे। जब आपके लिए ये

353
00:24:28,120 --> 00:24:32,160
जो नियम है वो इस रूप में आपके सामने

354
00:24:32,160 --> 00:24:37,280
आ जाते हैं तो यही नियम धर्म कहलाते हैं। जी।

355
00:24:37,280 --> 00:24:41,760
तो आजकल आजकल क्या है ना समाज में यह जो धर्मवीहीनता

356
00:24:41,760 --> 00:24:46,120
हो गई है अभी कश्मीर में एक

357
00:24:46,120 --> 00:24:50,160
फौजी हमारे ही जहां पे मैं रहता हूं वहीं

358
00:24:50,160 --> 00:24:54,160
के आसपास हिमाचल से ही वो व्यक्ति था और वो

359
00:24:54,160 --> 00:24:58,480
शहीद हो गया। अब उसके इंटरव्यू आ रहे हैं सोशल मीडिया पर उस पिता

360
00:24:58,480 --> 00:25:02,560
के कि भाई मेरे बेटे मेरा बेटा शहीद हो गया तो

361
00:25:02,560 --> 00:25:06,720
वो क्या कह रहा था कि भैया क्योंकि सरकार ने मिलिट्री वालों

362
00:25:06,720 --> 00:25:10,720
को सही वो नहीं दिए इंस्ट्रूमेंट इसीलिए मेरा बेटा शहीद हो गया

363
00:25:10,720 --> 00:25:14,720
तो इसके लिए जो है वो मोदी सरकार जिम्मेवार है। तो ये मैं सुन रहा था और

364
00:25:14,720 --> 00:25:18,800
हमारे भी घर में यह बातें हो रही थी तो ये बोला जा रहा था कि देखो

365
00:25:18,800 --> 00:25:22,880
सरकार उन मिलिट्री वालों को वो सहूलियत नहीं दे पा रही है इसलिए वो

366
00:25:22,880 --> 00:25:26,880
शहीद हो गया। तो जब मैंने यह सुना तो मुझे बड़ा दुख भी हुआ। फिर

367
00:25:26,880 --> 00:25:30,880
मैंने अपने ही परिजनों को अपने ही घर वालों को यह समझाया। मैंने कहा देखिए यह

368
00:25:30,880 --> 00:25:35,280
जो क्षत्रिय धर्म होता है ना क्षत्रिय धर्म में अगर कोई व्यक्ति

369
00:25:35,280 --> 00:25:38,960
देश के लिए अगर वीरगति को प्राप्त हो जाता है तो वो

370
00:25:38,960 --> 00:25:43,200
उस पिता के लिए उस मां के लिए एक शौर्य की बात है गर्व

371
00:25:43,200 --> 00:25:47,840
की बात है ना कि उसके लिए आपको सरकारों को या

372
00:25:47,840 --> 00:25:51,920
जो हमारा मतलब सरकारी वो चीजें

373
00:25:51,920 --> 00:25:56,320
हैं और प्रशासन है उसको हमें कोसना चाहिए क्योंकि

374
00:25:56,320 --> 00:26:00,480
जब क्षत्रिय धर्म का वो व्यक्ति पालन कर रहा था उसमें उसमें बहुत ज्यादा

375
00:26:00,480 --> 00:26:04,640
पॉसिबिलिटी थी कि उसकी जान भी जा सकती थी और वो जान उसकी गई

376
00:26:04,640 --> 00:26:08,880
भी देश को देश की रक्षा करते हुए तो उसमें प्रलाप नहीं करना चाहिए

377
00:26:08,880 --> 00:26:13,040
जो मुझे बहुत दुख हुआ कि हमारे समाज इतना धर्म विहीन हो गया

378
00:26:13,040 --> 00:26:17,280
है कि जहां पर उस पिता को यह गर्व करना चाहिए कि मेरा

379
00:26:17,280 --> 00:26:21,440
पुत्र जो है वीरगति को प्राप्त हुआ है। देश के लिए उसने अपनी जान दी

380
00:26:21,440 --> 00:26:25,920
है। वो उस गौरव को अनुभव ना करते हुए

381
00:26:25,920 --> 00:26:30,000
वो प्रलाप कर रहा था। कोस रहा था तो वहां पर यह लगा कि कहीं

382
00:26:30,000 --> 00:26:34,000
ना कहीं ना हमारे समाज में से धर्म विहीनता बहुत मतलब

383
00:26:34,000 --> 00:26:38,000
धर्महीन हो गया है हमारा समाज। वह चीज को यह नहीं कर पा रहे हैं कि

384
00:26:38,000 --> 00:26:42,080
यार यह जो क्षत्रिय धर्म है अगर मिलिट्री में कोई बंदा तो क्षत्रिय ही

385
00:26:42,080 --> 00:26:46,080
हुआ एक तरह से चाहे वैकल्पिक क्षत्रिय है तो उसे उस पर क्या

386
00:26:46,080 --> 00:26:50,480
है कि फक्र होना चाहिए। इसे उसे गौरव महसूस होना चाहिए। उसे

387
00:26:50,480 --> 00:26:54,000
मैसेज नहीं देना चाहिए। मैं यह कहूंगा कि वो

388
00:26:54,000 --> 00:26:58,160
वैकल्पिक रहे। इसी कारण से उनके मन में इस तरह के विचार आ रहे हैं।

389
00:26:58,160 --> 00:27:02,320
जी बिल्कुल क्योंकि वैकल्पिक वो होता है ना कि चलो

390
00:27:02,320 --> 00:27:06,480
उस समय वो त्याग देता अपने धर्म को छोड़ देता। वैकल्पिक

391
00:27:06,480 --> 00:27:10,560
है ना कर्माण करुणा वो छोड़ देता। अरे मरने का

392
00:27:10,560 --> 00:27:14,560
वो आ रहा है मगर उसने नहीं छोड़ा। मगर उसके पिता शायद वो करुणा

393
00:27:14,560 --> 00:27:18,800
वाला ऐसा सोचते हो शायद। उसने नहीं छोड़ा। वो तो अपने धर्म

394
00:27:18,800 --> 00:27:22,880
पर टिका रहा। मगर संभवत उनके पिता के अंदर वह

395
00:27:22,880 --> 00:27:27,520
भावना ना रही हो या कभी-कभी इसमें बेनिफिट ऑफ डाउट यह भी दे दीजिए

396
00:27:27,520 --> 00:27:31,520
भाई किसी का लाल गया है किसी का पुत्र गया है ये भी हो सकता है ये

397
00:27:31,520 --> 00:27:35,600
भी हो सकता है तो उसके उसका जो बुद्धि और विवेक तुरंत की तुरंत उस तरह

398
00:27:35,600 --> 00:27:39,600
का नहीं रह जाता है कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना

399
00:27:39,600 --> 00:27:44,080
है खैर तो हम लोग एक बात ये कर रहे थे

400
00:27:44,080 --> 00:27:48,240
कि धर्म क्या है जो आपकी रक्षा करता है धर्म आपकी

401
00:27:48,240 --> 00:27:52,400
रक्षा करता है और उस धर्म के आधार पर ही एक

402
00:27:52,400 --> 00:27:56,800
दो पाले बनते हैं कि एक वो है जिसको मदिरापान

403
00:27:56,800 --> 00:28:01,440
करना है। जिसको मदिरापान करके कार चलानी है। जिसको

404
00:28:01,440 --> 00:28:05,520
मातृ शक्तियों के का चरित्र बिगाड़ना है। जिसको वैसी

405
00:28:05,520 --> 00:28:09,360
ही मातृ शक्तियां चाहिए जो इस तरह के चरित्र वाली हो। ऐसे

406
00:28:09,360 --> 00:28:13,360
ही पुरुष चाहिए जो इस तरह के चरित्र वाले हो। उसको ऐसा ही

407
00:28:13,360 --> 00:28:17,680
संसार चाहिए। जो सामर्थ्यवान

408
00:28:17,680 --> 00:28:22,520
हो वह जो दुर्बल हो उसको जो है न वो दबाए

409
00:28:22,520 --> 00:28:26,560
कुचले कार वाला पैदल चलने वालों को मार डाले

410
00:28:26,560 --> 00:28:30,920
उसको वैसा ही संसार चाहिए ठीक है

411
00:28:30,920 --> 00:28:35,280
और धर्मवान वो व्यक्ति है और ज्यादातर

412
00:28:35,280 --> 00:28:39,280
वो व्यक्ति है जो ये नहीं चाहते हैं कि जो ताकतवर हो अपने

413
00:28:39,280 --> 00:28:43,440
से निर्बल को मार डाले। ठीक है? तो यह क्या है कि

414
00:28:43,440 --> 00:28:48,160
हम ना मारो यह धर्म है। एक ज्यादा ताकतवर वाला व्यक्ति

415
00:28:48,160 --> 00:28:52,320
जबरदस्ती बिना किसी बात के किसी अपने से कमजोर व्यक्ति को

416
00:28:52,320 --> 00:28:56,320
दबा ना दे कुचल ना दे। ये धर्म। तो

417
00:28:56,320 --> 00:29:00,320
अब जब यह नियमावली बन जाती है कि भाई हम ये ये मानेंगे और हम ये

418
00:29:00,320 --> 00:29:04,560
मानेंगे। ये हो गया धर्म और ये हो गया अधर्म। तो सबको ये क्लियर

419
00:29:04,560 --> 00:29:08,720
होना चाहिए। यह जो धर्म और अधर्म की लड़ाई है ना यह गौ माता को बचाने

420
00:29:08,720 --> 00:29:12,720
की लड़ाई, वेद की लड़ाई, राम की लड़ाई, कृष्ण की लड़ाई, यह आप किसी और के

421
00:29:12,720 --> 00:29:16,720
लिए नहीं लड़ रहे हो। यह लड़ाई आप अपने लिए लड़ रहे

422
00:29:16,720 --> 00:29:21,240
हो कि आप अपने घर के पास वाली परचून की दुकान पर जब

423
00:29:21,240 --> 00:29:24,400
जाओ राशन लेने या जो भी आपको लेना है

424
00:29:24,400 --> 00:29:28,400
वह लेने तो वहां से वापस आते समय आपको कोई फॉर्च्यूर कुचल

425
00:29:28,400 --> 00:29:32,400
ना दे। आपको किसी दिन यह खबर ना

426
00:29:32,400 --> 00:29:36,480
आए कि आपकी घर की बिटिया, आपके घर की बहन या आपके घर

427
00:29:36,480 --> 00:29:40,480
की कोई अन्य मातृ शक्ति इस तरह के चरित्र चारित्रिक

428
00:29:40,480 --> 00:29:44,640
उसमें लिप्त है या आपको कभी यह खबर ना आए

429
00:29:44,640 --> 00:29:49,320
अचानक से कि आपके घर के पुरुष ने यह कार्य

430
00:29:49,320 --> 00:29:53,440
किया इसलिए आपको धर्म की आवश्यकता होती है। अब

431
00:29:53,440 --> 00:29:57,520
जब हमें यह मालूम पड़ गया कि दो पाले हैं कि एक

432
00:29:57,520 --> 00:30:01,200
है अधर्म और एक है धर्म।

433
00:30:01,200 --> 00:30:05,200
तो इसमें जो इस समय जो हम जो हावी

434
00:30:05,200 --> 00:30:09,840
हो रहे हैं जो नष्ट करना चाहते हैं अ

435
00:30:09,840 --> 00:30:13,840
हिंदुओं के अस्तित्व और आदर्श को वो क्यों हावी हो रहे

436
00:30:13,840 --> 00:30:18,000
हैं और हम क्यों वहां पर दुर्बल हो रहे हैं और हमारी

437
00:30:18,000 --> 00:30:22,120
ओर से ऐसा तो कभी नहीं होता है कि हमारी ओर से प्राथमिक रूप से कोई अटैक कर दिया

438
00:30:22,120 --> 00:30:26,560
जाए। ऐसा सुनने में आता है क्या कि हिंदुओं ने प्राथमिकता

439
00:30:26,560 --> 00:30:30,800
से कहीं कुछ अटैक कर दिया हो। प्रतिकार स्वरूप जहां पर अपनी रक्षा

440
00:30:30,800 --> 00:30:34,880
के लिए किया हो बात अलग है। मगर प्राथमिकता से

441
00:30:34,880 --> 00:30:38,960
कहीं पर अटैक किया हो, कहीं कोई आक्रमण किया हो तो हमारी जानकारी में

442
00:30:38,960 --> 00:30:39,460
तो ऐसा

443
00:30:39,440 --> 00:30:43,760
है नहीं। फिर भी नहीं ऐसा नहीं होता। फिर भी ये स्थितियां

444
00:30:43,760 --> 00:30:49,400
आ क्यों रही है कि सामने वाला यह सोच कैसे लेता है

445
00:30:49,400 --> 00:30:53,440
कि हम इनको मार सकते हैं। हम इनको कुचल सकते

446
00:30:53,440 --> 00:30:59,440
हैं।

447
00:31:09,120 --> 00:31:13,200
संभवत इंटरनेट का कुछ इशू हुआ होगा इसलिए थोड़ा वीडियो आपका रुक गया

448
00:31:13,200 --> 00:31:16,160
है शिवाश जी

449
00:31:16,160 --> 00:31:20,320
मेरी आवाज आ रही है जी जी जी जी आ रही

450
00:31:20,320 --> 00:31:24,960
है जी तो

451
00:31:24,960 --> 00:31:29,040
ये ये जो भावना है ये इनके अंदर उद्भाषित क्यों हो जाती है कि हम ये ये कर

452
00:31:29,040 --> 00:31:33,360
सकते हैं इसका कारण है कि हमने अपने

453
00:31:33,360 --> 00:31:37,360
जीवन को जीने के लिए जो नियमावली चुनी थी

454
00:31:37,360 --> 00:31:41,600
मूल में मूढ़ में उस नियमावली को लेकर के हमारे

455
00:31:41,600 --> 00:31:45,840
मतमतांतर बन गए हैं। हम लोग बटे हुए हैं।

456
00:31:45,840 --> 00:31:50,000
और ये बात मैं नहीं बोल रहा हूं। यह ऋग्वेद में दव मंडल में लिखी हुई

457
00:31:50,000 --> 00:31:54,240
बात है कि सदैव एक मत होकर ईश्वर की पूजा

458
00:31:54,240 --> 00:31:54,740
करनी

459
00:31:54,560 --> 00:31:58,720
चाहिए। धर्म के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। जो लोग ये कह देते हैं ना कि

460
00:31:58,720 --> 00:32:03,520
अरे कोई नहीं हमारे यहां तो इतने संप्रदाय हैं तब बटे हुए हैं ये तो पुराना ही चलता आ रहा है।

461
00:32:03,520 --> 00:32:07,600
है ना? इस आधार पर आज नवीन संस्थाएं संगठन बना के हिंदुओं को

462
00:32:07,600 --> 00:32:11,760
बांटने की बांटने का कार्य करते हैं। मगर जो जितने भी हमारे

463
00:32:11,760 --> 00:32:15,880
प्रमाणिक संप्रदाय इत्यादि है वो ब्रह्म तत्व को लेकर के उनमें भिन्नता है। ब्रह्म

464
00:32:15,880 --> 00:32:20,320
तत्व आचरण व्यवहार और धर्म में कोई भिन्नता नहीं है।

465
00:32:20,320 --> 00:32:24,880
सभी एकमत रूप से वर्णाश्रमी है। सभी मूर्ति पूजक है।

466
00:32:24,880 --> 00:32:28,880
ब्रह्म तत्व को लेकर के केवल उनमें भिन्नता है जिससे

467
00:32:28,880 --> 00:32:33,040
जिसका व्यवहार में कोई जिससे कि व्यवहार में आने वाला कोई प्रभाव नहीं

468
00:32:33,040 --> 00:32:35,800
होता है उत्पन्न

469
00:32:35,800 --> 00:32:39,840
मगर क्या है कि सामने वाले को पता है

470
00:32:39,840 --> 00:32:44,560
कि ये हमसे इस समय तो संख्या में ज्यादा ही है हिंदू

471
00:32:44,560 --> 00:32:48,560
सामने वाले को यह पता है कि हमसे भले ही हिंदू ज्यादा हो

472
00:32:48,560 --> 00:32:53,200
मगर यह लोग इतने बटे हुए हैं हर स्तर पर

473
00:32:53,200 --> 00:32:57,200
कि हम आराम से इनको कुछ भी कर सकते हैं और ये लोग बटे होने के कारण

474
00:32:57,200 --> 00:33:01,600
हमारा कुछ नहीं कर सकते। कैसे बटे हैं? किस-किस रूप में बटे हैं?

475
00:33:01,600 --> 00:33:05,560
तो पहला रूप हो जाएगा

476
00:33:05,560 --> 00:33:09,600
कि ये आने वाला जो श्रंखला है उस वीडियो में धर्मामीटर

477
00:33:09,600 --> 00:33:13,680
का एक वो है उसमें हम बताएंगे। मगर अभी उदाहरण के तौर पर अगर ले तो

478
00:33:13,680 --> 00:33:18,280
ब्रह्मा कुमारी, आर्य समाज और

479
00:33:18,280 --> 00:33:22,560
निरंकारी रामपाल भी अपने आप को हिंदू कहता है। हिंदू ही फंसते हैं ना मुसलमान

480
00:33:22,560 --> 00:33:26,800
नहीं फंसते। रामपाली हो गए और

481
00:33:26,800 --> 00:33:30,800
अगर लिस्ट बनाने जाएंगे तो इसमें बहुत ढेर सारे आ जाएंगे। अब तो इस समय वो

482
00:33:30,800 --> 00:33:34,880
भी एक कल्ट जैसा बनने लगा ये स्वषित आचार

483
00:33:34,880 --> 00:33:38,920
प्रशांत का है ना

484
00:33:38,920 --> 00:33:43,120
तो इतने सारे रूपों में हम लोग बटे हुए हैं सामने वाले को पता

485
00:33:43,120 --> 00:33:47,120
है आज आप कोई व्यक्ति अगर

486
00:33:47,120 --> 00:33:51,200
ताबीज नहीं पहने टोपी नहीं लगाए और उसके लक्षण ऐसे प्राप्त

487
00:33:51,200 --> 00:33:55,360
नहीं हो रहे हैं कि वो मुस्लिम है तो आप यह

488
00:33:55,360 --> 00:33:59,520
नहीं बता सकते हो कि यह व्यक्ति आपके आपकी मदद करेगा कि नहीं संकट के समय

489
00:33:59,520 --> 00:34:03,600
धर्म और अधर्म की लड़ाई नहीं बता सकते। क्यों

490
00:34:03,600 --> 00:34:08,240
नहीं बता सकते? कि हो सकता है सामने वाले अच्छा सामने वाले ने अगर

491
00:34:08,240 --> 00:34:12,320
जय श्री राम या हाथ में कलावा भी बांध रखा हो

492
00:34:12,320 --> 00:34:16,720
या फिर ऐसा कुछ उसने धारण कर रखा हो, टीका लगा रखा हो

493
00:34:16,720 --> 00:34:21,440
तब भी आप यह नहीं सोच सकते कि धर्म के नाम पर ये मेरे साथ खड़ा हो जाएगा।

494
00:34:21,440 --> 00:34:24,800
क्यों? बिल्कुल। क्योंकि हो सकता है वो धर्मनिरपेक्ष हो।

495
00:34:24,800 --> 00:34:28,880
कलावा बांधने के बाद बाद भी। टीका लगाने के बाद भी

496
00:34:28,880 --> 00:34:33,120
वह सेुलर विचारधारा को टीका लगाने के बाद भी वह राष्ट्रवाद

497
00:34:33,120 --> 00:34:39,120
के नाम पर धर्म का धर्म से द्रोह रखने

498
00:34:49,120 --> 00:34:53,120
बिल्कुल यह तो है ही के यह पता कर ही नहीं सकते कि भाई

499
00:34:53,120 --> 00:34:57,120
सामने वाला व्यक्ति जो है वो लगा जी

500
00:34:57,120 --> 00:35:01,840
जी अब आ रही है आ रही है आ रही है हां तो हम इतने स्तर पर बटे हुए हैं

501
00:35:01,840 --> 00:35:06,000
यह जो आपने अभी कहा ना कि इस है ब्रह्मा कुमारीज है आर्य

502
00:35:06,000 --> 00:35:10,160
समाज है और बहुत सारे तंत्र है एक नहीं है बहुत

503
00:35:10,160 --> 00:35:14,240
सारे तो इनके इनके रूप में हम इतने बट चुके हैं व्यवहार

504
00:35:14,240 --> 00:35:19,040
में धर्म में व्यवहारिक उसमें हम इतने बट चुके हैं

505
00:35:19,040 --> 00:35:23,040
जिसके कारण आज किसी चीज को लेकर के हम एक मत हो ही नहीं

506
00:35:23,040 --> 00:35:27,560
पा रहे हैं मैं बटे होने का स्वरूप थोड़ा बताऊं

507
00:35:27,560 --> 00:35:31,760
आपको कि पहला हमने ले लिया ऋग्वेद में है कि हमें बटा हुआ

508
00:35:31,760 --> 00:35:35,920
नहीं होना चाहिए। तो यह लोग कहना बंद करें जो लोग ये कहते हैं कि

509
00:35:35,920 --> 00:35:40,560
हम लोग बटे हुए हैं कोई दिक्कत नहीं। बट कर नहीं रहना चाहिए।

510
00:35:40,560 --> 00:35:44,640
मगर बटने का कारण क्या है? और बटे होने का

511
00:35:44,640 --> 00:35:48,720
स्वरूप क्या है? हम लोग बटे हैं। आज 10

512
00:35:48,720 --> 00:35:52,880
लोगों की एक सभा लगा दीजिए। अलग-अलग लोगों की वो आर्य

513
00:35:52,880 --> 00:35:57,120
समाज ना हो। ठीक है? वो शंकर शंकर

514
00:35:57,120 --> 00:36:01,120
संप्रदाय से ना हो वो इस से ना हो वो गायत्री

515
00:36:01,120 --> 00:36:05,120
परिवार से ना हो ब्रह्मा कुमारी से ना हो ऐसे दत्त सामान्य लोगों की

516
00:36:05,120 --> 00:36:09,120
आप सभा लगा दीजिए हिंदुओं की और एक टॉपिक डाल दीजिए

517
00:36:09,120 --> 00:36:13,120
उनके बीच में कोई भी एक टॉपिक ये लो भाई खेलो इस पर

518
00:36:13,120 --> 00:36:17,360
5 से 10 मिनट के अंदर वो सब आपस में मतभेद रखने वाले दिखाई

519
00:36:17,360 --> 00:36:21,800
देंगे आप उस टॉपिक पे जी तो इसका अर्थ क्या

520
00:36:21,800 --> 00:36:26,760
है इसका अर्थ यह है कि आज के

521
00:36:26,760 --> 00:36:31,280
समय एक सिद्धांत ऐसा नहीं है जिसको

522
00:36:31,280 --> 00:36:35,520
लेकर के स्वयं को हिंदू कहने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक

523
00:36:35,520 --> 00:36:39,520
मत एक सिद्धांत मोटे-मोटे तौर के

524
00:36:39,520 --> 00:36:43,680
तौर पर जो मुख्य अह महत्वपूर्ण सिद्धांतों की बात करें

525
00:36:43,680 --> 00:36:48,000
तो मुश्किल से कोई एक सिद्धांत शायद ही संभव हो ऐसा

526
00:36:48,000 --> 00:36:52,120
मिल पाए जिसमें जिस पर स्वयं को हिंदू कहने

527
00:36:52,120 --> 00:36:55,600
वाला उसमें सभी हर प्रत्येक व्यक्ति

528
00:36:55,600 --> 00:36:59,760
एकमत हो जाए। जैसे मैं एग्जांपल जैसे अभी ये कहा

529
00:36:59,760 --> 00:37:04,240
जाए कि नहीं भाई मास है उसको अमुक अमुक स्थितियों

530
00:37:04,240 --> 00:37:08,400
में अमुक अमुक लोगों के द्वारा ही अमुक अमुक विधि के द्वारा

531
00:37:08,400 --> 00:37:12,480
ही ग्रहण करने का प्रावधान है हिंदू

532
00:37:12,480 --> 00:37:16,640
धर्म में। अन्यथा सामान्यतया उसको निषेध ही किया

533
00:37:16,640 --> 00:37:21,120
गया है। है ना? अगर मैं यह बात कहूं

534
00:37:21,120 --> 00:37:25,440
तो अभी इसी बात को लेकर के बहुत सारे मतभेद

535
00:37:25,440 --> 00:37:29,440
खड़े हो जाएंगे। कुछ लोग यह कहेंगे नहीं हम तो सीधे कसाई की दुकान से

536
00:37:29,440 --> 00:37:34,160
मांस लेकर के आते हैं खाते हैं और हम हिंदू हैं। मतलब

537
00:37:34,160 --> 00:37:38,320
शास्त्र सम्मत बातों के विरुद्ध वो आचरण कर रहा है। विरुद्ध वो

538
00:37:38,320 --> 00:37:42,400
आचरण ही नहीं कर रहा है। वो कह रहा है यही धर्म है। शास्त्र

539
00:37:42,400 --> 00:37:46,680
सम्मतता कह रहा है उसमें। फिर भी वह स्वयं को हिंदू कह रहा

540
00:37:46,680 --> 00:37:52,120
है। अभी मैं अगर कह दूं

541
00:37:52,120 --> 00:37:56,720
कि एक नारी सदा ब्रह्मचारी या एक

542
00:37:56,720 --> 00:38:00,800
पत्नी व धर्म धर्म होता है जो प्रभु श्री राम के द्वारा बताया

543
00:38:00,800 --> 00:38:04,800
गया वो श्रेष्ठतम नहीं जिन लोगों के मन

544
00:38:04,800 --> 00:38:08,800
के अंदर ज्यादा की लालसा होगी वो कहने लगेंगे

545
00:38:08,800 --> 00:38:12,880
कि नहीं दो करो तीन करो चार

546
00:38:12,880 --> 00:38:17,120
करो मगर फिर भी वो अपने आप को हिंदू ही बताएगा जी

547
00:38:17,120 --> 00:38:21,200
अच्छा अगर हम लोग ये कहे और थोड़ा

548
00:38:21,200 --> 00:38:25,520
सा आगे चलते हैं दार्शनिकता पर आ जाते हैं। हम ये कहे कि ईश्वर जो है अवतार

549
00:38:25,520 --> 00:38:29,640
ले सकता है तो आर्य समाज आ जाएंगे कि

550
00:38:29,640 --> 00:38:33,720
नहीं अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति पूजा हो सकती है। नहीं हो

551
00:38:33,720 --> 00:38:38,080
सकती। हम ये कहे कि भाई

552
00:38:38,080 --> 00:38:42,080
जो अंतरजातीय विवाह है उससे दिक्कत होती है या हम कहे

553
00:38:42,080 --> 00:38:46,160
शिवजी भी भगवान है तो कौन आ जाएगा? वह कहने लगेगा कि

554
00:38:46,160 --> 00:38:50,240
नहीं नहीं यह है वह है। तो कुल मिलाकर के

555
00:38:50,240 --> 00:38:54,480
कोई भी ऐसा गंभीर सिद्धांत

556
00:38:54,480 --> 00:38:58,640
नहीं है जो हमारे यहां पर स्वयं को हिंदू कहने वाला हर व्यक्ति मानता हो।

557
00:38:58,640 --> 00:39:03,560
ये भी अब तो नहीं रहा है। अब तो यह भी नहीं रहा है कि

558
00:39:03,560 --> 00:39:07,200
वेद कि हम सब वेद का सम्मान करते हैं। चाहे उसका कोई भी

559
00:39:07,200 --> 00:39:11,440
अर्थ ले मगर हम वेद का सम्मान करते हैं। तो

560
00:39:11,440 --> 00:39:16,080
ये भी नहीं रहा। क्यों? ब्रह्मा कुमारीज और रामपाल

561
00:39:16,080 --> 00:39:20,240
यह दोनों अपने आप को हिंदू क्लेम करते हैं। मगर वेद की

562
00:39:20,240 --> 00:39:24,480
बात आने पर ये कहते हैं कि वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है।

563
00:39:24,480 --> 00:39:28,640
अंतिम प्रमाण नहीं है। जी है ना?

564
00:39:28,640 --> 00:39:32,640
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। तो क्या है? हम लोग

565
00:39:32,640 --> 00:39:36,880
हम लोगों की समस्या है बटे हुए होना और

566
00:39:36,880 --> 00:39:40,960
हम बटे हुए हैं। यह हमारा स्वरूप है। हम बटे हुए

567
00:39:40,960 --> 00:39:45,160
हैं। स्वयं को हिंदू कहने वाला प्रत्येक

568
00:39:45,160 --> 00:39:49,360
व्यक्ति कोई उसके पास ऐसा सिद्धांत नहीं है जो बगल वाला भी मान

569
00:39:49,360 --> 00:39:53,480
रहा हो। वैचारिक रूप से हम लोग बटे हुए हैं। ये है

570
00:39:53,480 --> 00:39:58,360
वैचारिक भिन्नता ही हमें एक दूसरे से अलग किए हुए

571
00:39:58,360 --> 00:40:02,360
हैं। अब वो वैचारिक भिन्नता इंडिविजुअली

572
00:40:02,360 --> 00:40:06,400
हो कुल कुल परंपरा के कारण हो या

573
00:40:06,400 --> 00:40:11,640
फिर संगठन बना के हो वो बात की है। मगर वैचारिक

574
00:40:11,640 --> 00:40:16,320
भिन्नता हर दूसरे चरण पर हमको देखने को मिलेगी हमारे समाज में।

575
00:40:16,320 --> 00:40:21,200
और जब विचार अलग-अलग होंगे तो व्यवहार एक कैसे होगा?

576
00:40:21,200 --> 00:40:22,400
जो हमारे विचार ही

577
00:40:22,400 --> 00:40:26,480
अलग हैं। मांस खाने को लेकर के हमारे विचार ही अलग

578
00:40:26,480 --> 00:40:31,000
हैं। अच्छा मैंने ऐसी परंपराएं देखी है कुल परंपराएं

579
00:40:31,000 --> 00:40:35,600
कि हमारे यहां तो ममेरी फुपेरी बहनों से विवाह हो जाता है।

580
00:40:35,600 --> 00:40:39,600
भले ही मनुस्मृति में मना किया गया हो। मगर वह भी अपने आप को हिंदू

581
00:40:39,600 --> 00:40:43,840
कह रहा है। तो स्वयं को हिंदू कहने वाला

582
00:40:43,840 --> 00:40:47,840
जो है एक ऐसा सिद्धांत नहीं है जो स्वयं को हिंदू कहने

583
00:40:47,840 --> 00:40:52,000
वाला प्रत्येक व्यक्ति मानता हो। एक सिद्धांत ऐसा नहीं है। तो

584
00:40:52,000 --> 00:40:56,160
हम लोग कहां से संगठित होंगे और कहां से सामने

585
00:40:56,160 --> 00:41:00,640
वाला हम पर प्रहार करने से डरेगा?

586
00:41:00,640 --> 00:41:04,640
जी बिल्कुल बिल्कुल और सबसे

587
00:41:04,640 --> 00:41:08,800
बड़ी बात यह है कि धर्म की रक्षा के लिए हिंदू

588
00:41:08,800 --> 00:41:12,800
तब आएगा आपने बहुत अच्छा एग्जांपल दिया कि जब तक हम

589
00:41:12,800 --> 00:41:16,960
धर्म को सही से समझेंगे नहीं तब तक धर्म रक्षा के लिए खड़े नहीं होंगे।

590
00:41:16,960 --> 00:41:20,960
जब तक हम यह अपने आप को यह नहीं समझेंगे कि हम सनातन धर्मी है तब तक हम धर्म

591
00:41:20,960 --> 00:41:24,960
रक्षा के लिए खड़े नहीं होंगे। अब मंदिर की मूर्ति तोड़ी जा रही होगी तो आर्य

592
00:41:24,960 --> 00:41:29,360
समाझी कहेगा कि भाई यह तो हमने पहले ही मना किया था कि मूर्ति तो

593
00:41:29,360 --> 00:41:33,440
होनी नहीं चाहिए। मंदिर तो बिना मतलब के बना रखे हैं तो ये अगर तोड़े जा रहे हैं

594
00:41:33,440 --> 00:41:37,440
तो भाई ठीक ही हो रहा है। है ना? तो वो तो खड़ा नहीं होगा। में

595
00:41:37,440 --> 00:41:42,120
इस में एक बात याद आई मुझे जी जी कुछ

596
00:41:42,120 --> 00:41:46,160
धूर्त प्रकार के स्वयं को जो आर्य समाजी कहते हैं

597
00:41:46,160 --> 00:41:51,880
कुछ लोग ऐसी धूर्तता फैलाते हैं कुछ

598
00:41:51,880 --> 00:41:56,960
ऐसी मिथ्या प्रचार करते हैं कि भाई

599
00:41:56,960 --> 00:42:01,760
फलाने आक्रमण में हमने मंदिरों की रक्षा की थी।

600
00:42:01,760 --> 00:42:07,480
फलाने आक्रमणों में हम मंदिर को बचाने गए थे।

601
00:42:07,480 --> 00:42:11,680
अच्छा अब इनसे अगर पूछा जाए कि आर्य समाजी कौन होता

602
00:42:11,680 --> 00:42:16,000
है तो यह क्या कहते हैं जो आर्य समाज की विचारधारा को मानता हो

603
00:42:16,000 --> 00:42:20,160
वही होता है ना यही लोग कहते हैं ना जो अभी एक

604
00:42:20,160 --> 00:42:24,160
भाई साहब आए थे उन्होंने क्या कहा था कि जो आर्य समाज के 10 सिद्धांत जानता

605
00:42:24,160 --> 00:42:28,320
हो और उन्हें मानता हो और हम चेक भी करेंगे कि वो आचरण में लाता है कि नहीं लाता

606
00:42:28,320 --> 00:42:32,560
है। ठीक है तो आर्य समाज के

607
00:42:32,560 --> 00:42:36,800
जो 10 सिद्धांतों को जानता हो और

608
00:42:36,800 --> 00:42:40,880
मैं मानता हूं मतलब आर्य समाज की विचारधारा अपने जीवन

609
00:42:40,880 --> 00:42:45,200
में लागू करता हो। ठीक है? तो आर्य

610
00:42:45,200 --> 00:42:49,200
समाज वो है जो आर्य समाज के सिद्धांत को मानता है। अब

611
00:42:49,200 --> 00:42:52,480
कुछ लोग ये कहते हैं कि आर्य समाजियों ने जाकर के मंदिरों को बचाया

612
00:42:52,480 --> 00:42:56,640
था। तो मंदिर को जो बचाने गया जब इनके ग्रंथों

613
00:42:56,640 --> 00:43:00,720
में लिखा है इनकी किताबों में ठूस दिया है कि मूर्ति पूजा

614
00:43:00,720 --> 00:43:05,120
पाप है अधर्म है तो जो वहां जाकर के मूर्तियों

615
00:43:05,120 --> 00:43:09,600
की रक्षा कर रहा है वो आर्य समाजी कैसे हुआ

616
00:43:09,600 --> 00:43:13,760
बिल्कुल आर्य समाजी वो तब माना जाएगा जब

617
00:43:13,760 --> 00:43:17,920
आर्य समाज ने उसे सिखाया हो कि मूर्ति पूजा भी धर्म है उसकी

618
00:43:17,920 --> 00:43:22,080
रक्षा करना आर्य समाज के पूरे वांग में कहां

619
00:43:22,080 --> 00:43:26,560
पे लिखा है कि मूर्ति पूजा के लिए सकारात्मक

620
00:43:26,560 --> 00:43:30,800
चीजें कुछ लिखी हो। इसका मतलब जो व्यक्ति वहां जाके रक्षा

621
00:43:30,800 --> 00:43:35,280
कर रहा है वो आर्य समाज के सिद्धांतों के विरुद्ध कर रहा है।

622
00:43:35,280 --> 00:43:39,320
जी तो फिर उसको तुम आर्य समाज का तमगा क्यों दे रहे हो?

623
00:43:39,320 --> 00:43:43,360
और यदि कोई व्यक्ति अपने मन से कुछ भी

624
00:43:43,360 --> 00:43:47,600
करता रहे मगर यदि वह कभी ना कभी आर्य समाज को स्वीकार करने वाला रहा

625
00:43:47,600 --> 00:43:51,680
होगा तो इसलिए उसको कहोगे आर्य समाजी तो अभी वो

626
00:43:51,680 --> 00:43:55,680
अश्लील चैट उस दिन पकड़ी गई थी कहो वो आर्य समाजी है

627
00:43:55,680 --> 00:43:59,760
बोलोगे बिल्कुल आप यही कहोगे ना कि आर्य

628
00:43:59,760 --> 00:44:03,920
समाज के विरुद्ध जाकर के कहा हम नहीं मानते कि वो आर्य समाजी है जो व्यक्ति गलत

629
00:44:03,920 --> 00:44:07,520
कर रहा है वो आर्य समाज के सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर के गलत कर रहा है

630
00:44:07,520 --> 00:44:11,520
हम नहीं मानते वो आर्य समाज जी वहां क्यों अपना टैग नहीं दे रहे हो? उसने भी कभी ना कभी अपने आप

631
00:44:11,520 --> 00:44:16,240
को आर्य समाजी कहा है। तो आपकी परिभाषा के अनुसार

632
00:44:16,240 --> 00:44:20,320
आर्य समाज की विचारधारा या आर्य समाज की नियमावली को मानने

633
00:44:20,320 --> 00:44:24,560
वाला अपने जीवन में लागू करने वाला कम से कम उसके प्रति श्रद्धा

634
00:44:24,560 --> 00:44:28,800
भाव दिखाने वाला लागू ना भी कर पाए तो श्रद्धा भाव दिखाने वाला वो

635
00:44:28,800 --> 00:44:32,880
आर्य समाजी है ना। तो जो धर्म जो मूर्ति के प्रति

636
00:44:32,880 --> 00:44:36,960
सकारात्मक व्यवहार कर रहा है उसको आर्य समाजी क्यों कह रहे हो? वहां पर भी

637
00:44:36,960 --> 00:44:40,960
आप कहो ना कि हम नहीं मानते कि वार समाजी हैं।

638
00:44:40,960 --> 00:44:45,040
वो हिंदू थे। कहीं ना कहीं उनके

639
00:44:45,040 --> 00:44:49,800
अंदर सनातन परंपरा का बीज बाकी था जो उन्होंने जाकर के मूर्तियों की रक्षा

640
00:44:49,800 --> 00:44:53,920
की। आर्य समाधि तो वो तब तक थे ना जब तक उन्होंने उन बातों

641
00:44:53,920 --> 00:44:58,080
को माना कि अगर रामलीला अगर किसी ने देख ली तो उसको इतना पाप

642
00:44:58,080 --> 00:45:02,080
पड़ेगा। जितने 100 वर्षों तक अश्वमेद यज्ञ करोगे उतना पुण्य मिलेगा। उसके

643
00:45:02,080 --> 00:45:05,480
बराबर पाप मिलेगा।

644
00:45:05,480 --> 00:45:10,000
तो यह कहना बहुत ही निर्लज्जता का कार्य है

645
00:45:10,000 --> 00:45:14,000
कि आर्य समाजियों ने मूर्ति मूर्ति की रक्षा की मंदिरों की रक्षा

646
00:45:14,000 --> 00:45:18,400
की। आर्य समाज के अनुसार ऐसे मंदिरों का अस्तित्व

647
00:45:18,400 --> 00:45:22,640
होना ही नहीं चाहिए जिसमें मूर्ति हो। तो

648
00:45:22,640 --> 00:45:26,880
वहां जो रक्षा करने गए जो रक्षा करने गए थे वहा समाजी नहीं

649
00:45:26,880 --> 00:45:30,880
थे। जी कुछ कह रहे हां मैं ये कह रहा था कि हाइपर क्वेस्ट नाम

650
00:45:30,880 --> 00:45:34,960
का एक चैनल है उस पे जब वो व्यक्ति आर्य समाजियों से बात करता

651
00:45:34,960 --> 00:45:39,600
है तो वो आर एस मांझी बन जाता है उस उस देर के लिए एक घंटे के पडकास्ट के लिए

652
00:45:39,600 --> 00:45:43,680
और वो व्यक्ति मैंने देखा है कि वो मंदिरों में भी जाता है मूर्ति पूजा भी

653
00:45:43,680 --> 00:45:47,680
करता है लेकिन जब उस क्षण उस वीडियो को रिकॉर्ड कर रहा होता है तब वो

654
00:45:47,680 --> 00:45:51,760
पूरा उन उनकी बातों को समर्थित करता हुआ यह मानता है कि भाई

655
00:45:51,760 --> 00:45:55,920
आप जो कह रहे हो वो ठीक कह रहे हो तो ये जो दोगले तरह के जो हिंदू हैं

656
00:45:55,920 --> 00:46:00,000
और ये मोहित गड नाम का बंदा जो उनके मंचों पर भी जा रहा है आजकल वो कभी यह

657
00:46:00,000 --> 00:46:04,320
मानता ही नहीं कि मैं आर्य समाज जी हूं। वो ये कहता है कि जी मैं दयानंद को मानता

658
00:46:04,320 --> 00:46:08,400
हूं। लेकिन मैं ये नहीं मानता कि मैं आर्य समाज जी हूं। मतलब ये दोगली तरह की जो बात ये करने

659
00:46:08,400 --> 00:46:12,480
वाले जो हिंदू हैं ना इन्होंने भी हमारे साथ है ऐसे

660
00:46:12,480 --> 00:46:16,480
लोग ऐसे लोग ये जो लोग हैं वो हाइपरस्ट तो व्यापारी है

661
00:46:16,480 --> 00:46:20,640
और ये जो मोहित गौर है ये भी व्यापारी है जी जी क्योंकि ये आर्य समाज

662
00:46:20,640 --> 00:46:24,720
को भी डिनाइड करता है तो ये व्यापारी है ये ये भी नहीं है कि दयानंद के प्रति जो

663
00:46:24,720 --> 00:46:28,960
है कोई समर्पण भाव हो इसका ये है कि मैं अपना धंधा कैसे चलाना

664
00:46:28,960 --> 00:46:33,120
है मुझे लोगों में अपना वो कैसे रखना है कि मैं सबको अच्छा लगू दुकान

665
00:46:33,120 --> 00:46:37,440
जो होती है वो सबको अच्छी लगनी चाहिए ना दुकान पे हम ये थोड़ी ना लिख सकते हैं कि वही

666
00:46:37,440 --> 00:46:37,940
यहां पे

667
00:46:37,680 --> 00:46:41,840
मुस्लिम ना आए। जी जी दुकान तो सबको अच्छी लगनी चाहिए।

668
00:46:41,840 --> 00:46:46,240
अब जैसे यहां पे एक रामपाल का चेला है समोसे की ढेल लगाता

669
00:46:46,240 --> 00:46:50,560
है तो उसने वहां पे ये नहीं लिखा है कि मैं रामपाल का चेला हूं।

670
00:46:50,560 --> 00:46:54,640
रामपाल की फोटो लगा देगा। तो उसके पास लोग जाना

671
00:46:54,640 --> 00:46:59,120
बंद कर देंगे। समोसे खूब उसके बिकते हैं।

672
00:46:59,120 --> 00:47:03,200
है ना? तो उसने नाम अपनी जो वास्तविकता उसको छुपा के रखता है। तो

673
00:47:03,200 --> 00:47:07,360
जिसको दुकान चलानी है अपनी वो व्यक्ति अपनी वास्तविक जो

674
00:47:07,360 --> 00:47:11,600
धारणा है उसको बचा के रखता है। तो ये दुकानदार हैं ये लोग।

675
00:47:11,600 --> 00:47:15,680
ये लोग धंधे वाले लोग हैं। इनको अपना मंच चलाना है। सबको खुश

676
00:47:15,680 --> 00:47:19,680
करके रखना है। इसलिए ये लोग सबके मन की बात

677
00:47:19,680 --> 00:47:24,080
करेंगे। तो ये ना आर्य समाजी है ना कुछ है। और वक्त आने पर उसी

678
00:47:24,080 --> 00:47:28,160
उसी का पक्ष लेंगे। उसी का सब कुछ करेंगे। उसी का सब मानेंगे। उसी

679
00:47:28,160 --> 00:47:32,320
के अनुसार पूजा पद्धति चलाएंगे मगर हम आर्य समाजी नहीं है।

680
00:47:32,320 --> 00:47:36,880
इसी तरीके से हाइपरक्वस्ट मूर्ति पूजा कर रहा है तो परंपरावादी

681
00:47:36,880 --> 00:47:41,280
हो गया। मूर्ति पूजा परंपरा से प्राप्त है। अरे मूर्ति

682
00:47:41,280 --> 00:47:45,360
पूजक तो हो गया। मगर तुम्हारे सामने तुम्हारे सिद्धांतों

683
00:47:45,360 --> 00:47:49,840
की धज्जियां उड़ाई जा रही है। तुम वहां क्यों नहीं बोल रहे हो कि यह तो गलत है।

684
00:47:49,840 --> 00:47:52,960
क्योंकि तुम धंधे वाले हो। तुम दुकान

685
00:47:52,960 --> 00:47:57,200
वाले हो। तुम्हें इससे मतलब नहीं है कि धर्म का कहां लोप हो रहा है, कहां खंडन हो रहा है धर्म

686
00:47:57,200 --> 00:48:01,280
का। तुम्हें अपने रुपए से मतलब है। कैसे फॉलोवर्स मिलियन तक

687
00:48:01,280 --> 00:48:05,520
पहुंचे उससे मतलब है। वो राम मंदिर बेच रहे हैं।

688
00:48:05,520 --> 00:48:09,600
जब ये सारा चल रहा था राम मंदिर बनने का प्रकरण तो वो एक चैनल है आर

689
00:48:09,600 --> 00:48:13,920
एस मांझी का वो राम मंदिर बेच रहा है उस पे वो साथसाथ वो राजनीतिज्ञ

690
00:48:13,920 --> 00:48:18,000
भी है। हां हां हां वो अच्छा उस उस व्यक्ति

691
00:48:18,000 --> 00:48:22,320
के मुख से ही मैंने पुराणों की भी प्रशंसा सुनी है। उसी व्यक्ति के मुख से

692
00:48:22,320 --> 00:48:26,400
उनकी एक वेबसाइट है आर्य समाज की उसप वो पुराण भी बेच रहे हैं।

693
00:48:26,400 --> 00:48:30,400
मतलब बड़ी सुनकर मेरे को हंसी आती है और मेरे एक मित्र हैं। अभी वो आर्य समाज

694
00:48:30,400 --> 00:48:34,400
जी की विचारधारा के हैं। मतलब पहले वो मेरे साथ थे। लेकिन वो

695
00:48:34,400 --> 00:48:38,640
जब वो चैनल पे आते थे वो अपने आप को आर्य समाज जी रिप्रेजेंट करते थे। तो उन्होंने मेरे को फोन

696
00:48:38,640 --> 00:48:42,720
करके पीछे से बताया। कहते हैं जी ऐसा है ये जो आपके जितने भी आर्य समाज जी है

697
00:48:42,720 --> 00:48:46,880
ना ये सारे जो अजय आर्य है ये सब मूर्ति पूजा करते हैं। घर पे

698
00:48:46,880 --> 00:48:50,960
पूरा इनका मंदिर मंदिर बना हुआ है। तो मैं बड़ा सुन के हैरान रहा क्या? मैंने

699
00:48:50,960 --> 00:48:55,120
कहा फिर तो ऑनलाइन माध्यम से क्यों नहीं बोल पाते? कहते क्योंकि ना हम जब डिबेट

700
00:48:55,120 --> 00:48:59,520
करने जाते हैं तो हम पुराणों को डिफेंड नहीं कर पाते इसलिए हम क्या करते हैं अपने आप को आर्य समाजी रिप्रेजेंट

701
00:48:59,520 --> 00:49:03,760
करते हैं वहां पर वो सुन के मेरे को इतनी हंसी आई मैंने कहा भाई आप मतलब

702
00:49:03,760 --> 00:49:08,080
पुराणों को डिफेंड नहीं कर पा रहे हो तो आप आर्य समाजी बन जाओ मुसलमानों

703
00:49:08,080 --> 00:49:12,320
को बोल दो कि हम पुराणों को नहीं मारते वेद से बात करो तो मतलब ये

704
00:49:12,320 --> 00:49:16,320
सनातना आभासी हिंदू जो है ना ये भी हमारे उसके लिए

705
00:49:16,320 --> 00:49:20,480
बहुत बड़ा खतरा है ये व्यूज के लिए चैनल बनाने के

706
00:49:20,480 --> 00:49:24,720
लिए मतलब अपने बस चैनल बनाना है चैनल चलाना है इनको पैसे कमाने

707
00:49:24,720 --> 00:49:28,720
हैं। अब आप देखो मेरे चैनल को देखो जब मैं रिएक्शन

708
00:49:28,720 --> 00:49:32,800
दे रहा था और जनता को जो अच्छा लगता था वो वैसा कर रहा था तो बहुत व्यूज आ रहे

709
00:49:32,800 --> 00:49:36,800
थे। बहुत व्यूज आ रहे थे। जैसे ही मैंने सच बोलना शुरू करा व्यूज कम हो गए।

710
00:49:36,800 --> 00:49:40,880
है ना? लोग कह रहे हैं यार वो आर्य समाजियों के जो रिएक्शन देते थे वही करते रहो तो

711
00:49:40,880 --> 00:49:44,880
तुम्हें बहुत सारे व्यूज मिलेंगे। मैंने कहा मुझे नहीं चाहिए भैया। बेसिकली जब मैं आया था

712
00:49:44,880 --> 00:49:48,880
इस फील्ड में तो मैं जानने आया था कि मेरा सनातन धर्म क्या है। अब

713
00:49:48,880 --> 00:49:52,960
मैं जान गया हूं। धीरे-धीरे मैं वहां तक पहुंचा हूं। मैंने कहा मैं वापस नहीं

714
00:49:52,960 --> 00:49:57,120
जा सकता। अब यू टर्न नहीं है यहां से। क्योंकि पहले मैं जो

715
00:49:57,120 --> 00:50:01,200
कर रहा था कार्य वो अज्ञान बस कर रहा था। मैं यह जान रहा था। मैं

716
00:50:01,200 --> 00:50:05,280
सोच रहा था कि यह मेरा सनातन धर्म है। लेकिन जैसेजैसे मैं आगे बढ़ता

717
00:50:05,280 --> 00:50:09,360
गया तो मुझे बहुत सारे कंट्राडिक्शन दिखते गए। तो जब मुझे उस तरफ

718
00:50:09,360 --> 00:50:13,440
मैं पहुंचा हूं। सच्चाई तक मैं पहुंच गया हूं। तो अब बैक तो मैं नहीं जा

719
00:50:13,440 --> 00:50:17,600
सकता हूं। तो अब हमें जो है वो मूल

720
00:50:17,600 --> 00:50:21,600
सनातन धर्म को जो मैं अब तक समझ पाया हूं। इसी को मुझे आगे बढ़ाना है

721
00:50:21,600 --> 00:50:23,120
और अब मुझे इतना पता है कि जो

722
00:50:23,120 --> 00:50:27,680
मैं कर रहा हूं वो सही कर रहा हूं। वो इसलिए सही कर रहा हूं क्योंकि

723
00:50:27,680 --> 00:50:31,760
जब मैं कंपेयर करता हूं सनातना आभासी लोगों से अपने आप को जैसे कि आपने

724
00:50:31,760 --> 00:50:35,840
एग्जांपल दिया एक जो ये हाइपरस्ट वाला और ये जो राम मंदिर बेच

725
00:50:35,840 --> 00:50:40,000
रहा है अब ये दोगले किस्म के लोग हैं। ये आर्य समाज के

726
00:50:40,000 --> 00:50:44,080
सिद्धांतों को वैसे कह रहे हैं कि हम मान रहे हैं लेकिन एक्चुअल में उसको अपने जीवन

727
00:50:44,080 --> 00:50:48,080
में वो नहीं कर पा रहे। तो ऐसे लोग ऐसे लोगों को आप क्या कहोगे?

728
00:50:48,080 --> 00:50:52,080
तो दोगला ही कहोगे वो चीज मैं नहीं कर सकता भैया दोगला दोगलापन हम नहीं

729
00:50:52,080 --> 00:50:56,320
कर सकते जो हमारा मूल सनातन धर्म है सबको पता है परंपरा से ही हमें ज्ञान मिला

730
00:50:56,320 --> 00:51:00,400
है तो उसको आप कैसे नकार सकते हो मैं उसी पे आ रहा हूं मैं उसी पे

731
00:51:00,400 --> 00:51:04,720
आ रहा हूं तो इसमें क्या है पहला

732
00:51:04,720 --> 00:51:08,720
हमको पता चला कि हमारी प्रॉब्लम

733
00:51:08,720 --> 00:51:12,800
है कि हमें हम लोग बटे हुए हैं और उदाहरणार्थ

734
00:51:12,800 --> 00:51:17,040
उसका स्वरूप भी हमने देखा कि उस बटे होने का स्वरूप क्या है कि

735
00:51:17,040 --> 00:51:21,200
हिंदुओं के पास एक ऐसा सिद्धांत नहीं है

736
00:51:21,200 --> 00:51:25,440
जिसके जिसको स्वयं को हिंदू मानने वाला हिंदू कहने वाला हर व्यक्ति

737
00:51:25,440 --> 00:51:30,240
मानता हो। एक सिद्धांत ऐसा नहीं है। कोई भी बात बोलोगे

738
00:51:30,240 --> 00:51:34,480
उस बात को लेकर के स्वयं को ही हिंदू कहने वाले जो दूसरे लोग होंगे

739
00:51:34,480 --> 00:51:39,160
उसको काटेंगे। तो ये तो हो गया वो

740
00:51:39,160 --> 00:51:43,200
कि हमारी समस्या जो सतही स्तर पर दिखाई दे रही है वो

741
00:51:43,200 --> 00:51:47,280
क्या है? अब इसमें इससे आगे जब चलते हैं

742
00:51:47,280 --> 00:51:51,440
तो इस जो समस्या का जो अगला चरण आता

743
00:51:51,440 --> 00:51:55,440
है वह आता है कि एक हमारे ग्रंथों में डिफरेंसेस

744
00:51:55,440 --> 00:51:59,760
है और एक हमारे ईश्वर तत्व में डिफरेंसेस हमारी आस्था

745
00:51:59,760 --> 00:52:03,760
किन ग्रंथों पर है या तो इसमें डिफरेंसेस है और ये

746
00:52:03,760 --> 00:52:07,760
हमारे ईश्वर तत्व पे डिफरेंसेस तो ये दूसरा चरण आ

747
00:52:07,760 --> 00:52:11,760
गया और एक तो यही है कुछ लोग ऐसे ही मिल जाएंगे जो

748
00:52:11,760 --> 00:52:16,320
नास्तिक होंगे सपोज दैट अभी हमने जो गुरुकुल की हम तैयारी कर रहे हैं।

749
00:52:16,320 --> 00:52:21,040
जहां पर जो आधुनिक शिक्षा है वह दी जाए और उसके साथ-साथ निशुल्क

750
00:52:21,040 --> 00:52:25,120
निशुल्क आधुनिक शिक्षा दी जाए और साथ ही साथ जो है वहां पर अपने धर्म की शिक्षा भी

751
00:52:25,120 --> 00:52:29,120
प्रदान की जाए। तो वो चल रहा है। तो अब

752
00:52:29,120 --> 00:52:33,120
क्या है वहां पर जब हम लोग पैदल मार्च करने गए पैदल

753
00:52:33,120 --> 00:52:37,200
लोगों को आसपास के लोगों को बताने गए कि यहां पे हम ऐसा-सा करने जा रहे हैं। आप

754
00:52:37,200 --> 00:52:41,280
लोग आया करिए। तो क्या हुआ? गेट खोला बाहर तो लिखा है राम

755
00:52:41,280 --> 00:52:45,920
और श्याम बाहर लिखा है नेम प्लेट पे गेट कटाया

756
00:52:45,920 --> 00:52:50,000
अरे मैं इन चीजों में नहीं पड़ता मैं तो मैं जो है नास्तिक टाइप

757
00:52:50,000 --> 00:52:54,560
का व्यक्ति हूं तो नास्तिक मिल गया

758
00:52:54,560 --> 00:52:58,680
नास्तिक मिल गया और नहीं तो फिर धर्मनिरपेक्ष मिल

759
00:52:58,680 --> 00:53:02,720
गया राष्ट्रवादी मिल गया फिर

760
00:53:02,720 --> 00:53:07,480
थोड़ा और आगे चले तो हमारे वो वो आश्रम का नाम है शिव शक्ति श्याम

761
00:53:07,480 --> 00:53:11,520
आश्रम तो वो वो मालूम पड़ा और ही किसी सेक्ट को मानने वाला मिल

762
00:53:11,520 --> 00:53:15,520
गया समाज मिल गया तो ऐसे करके वो जो जो हम

763
00:53:15,520 --> 00:53:19,680
केंद्र बनाना चाहते हैं उसको कि वो हिंदुओं का केंद्र बने तो वो

764
00:53:19,680 --> 00:53:23,920
हिंदू जो है वहां क्यों आएगा वो तो अलग-अलग उसमें विचारधारा में फंसा

765
00:53:23,920 --> 00:53:27,920
हुआ है। तो इसका कारण यही

766
00:53:27,920 --> 00:53:32,120
है कि हमारा जो धर्म और ब्रह्म है वो अलग-अलग

767
00:53:32,120 --> 00:53:36,440
है। हमारा जो धर्म और ब्रह्म है वो अलग-अलग

768
00:53:36,440 --> 00:53:40,720
है। व्यवहार में ही अलग-अलग है। परमार्थ की बात अलग

769
00:53:40,720 --> 00:53:44,800
है। है ना? परंपराओं में जो भेद आता है, जो तात्विक विवेचना

770
00:53:44,800 --> 00:53:48,880
में अंत में जाकर वो पर पारमार्थिक भेद आता है। तो यहां व्यवहारिक

771
00:53:48,880 --> 00:53:53,040
ईश्वर ही व्यवहार में ही ईश्वर अलग-अलग हो गया। धर्म

772
00:53:53,040 --> 00:53:57,120
अलग-अलग हो गया। इस कारण से हम लोग बटे हुए हैं। तो पहला

773
00:53:57,120 --> 00:54:01,120
चरण जो आता है कि हम लोगों को यह नहीं पता है कि नास्तिकता को कैसे शांत

774
00:54:01,120 --> 00:54:05,200
कर सकते हैं। नास्तिकता के लिए सार्वभौम सिद्धांत क्या है? कि संसार

775
00:54:05,200 --> 00:54:09,440
का प्रत्येक आज मैं ज्यादा लंबी व्याख्या नहीं करूंगा नहीं तो धारा बदल जाएगी। संसार

776
00:54:09,440 --> 00:54:09,940
का

777
00:54:09,680 --> 00:54:13,760
प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है।

778
00:54:13,760 --> 00:54:18,480
फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह पहला सिद्धांत है।

779
00:54:18,480 --> 00:54:22,480
इसके डेप्थ में हम लोग कई बार बातें कर चुके हैं अलग-अलग उसमें। तो यह

780
00:54:22,480 --> 00:54:26,560
क्या हो गया? जब आप किसी को अपने जो

781
00:54:26,560 --> 00:54:30,960
हिंदू राष्ट्र हिंदू रक्षा के लिए बुलाने जाओगे

782
00:54:30,960 --> 00:54:35,040
तो वहां पर जो बाधा आपको मिलेगी वो पहली बाधा कौन सी होगी?

783
00:54:35,040 --> 00:54:39,360
नास्तिकता के रूप में। तो व्यक्ति को ये पांच सिद्धांत सदैव

784
00:54:39,360 --> 00:54:44,040
ज्ञात होने चाहिए। कौन से पांच सिद्धांत है?

785
00:54:44,040 --> 00:54:48,160
पहला कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा

786
00:54:48,160 --> 00:54:52,680
है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह पहला

787
00:54:52,680 --> 00:54:58,280
सिद्धांत इस पर हम एक प्रोग्राम भी लाने वाले हैं इन पांच सिद्धांतों पर

788
00:54:58,280 --> 00:55:02,520
पंचकास्त्र है ना तो यह क्या है

789
00:55:02,520 --> 00:55:06,720
कि ये पांच सिद्धांत ऐसे हैं जो अकाट

790
00:55:06,720 --> 00:55:10,720
हैं और इन पांच सिद्धांतों को लेकर के हम हिंदुओं को

791
00:55:10,720 --> 00:55:14,720
एक कर सकते हैं। ठीक है? आगे हम बात करेंगे

792
00:55:14,720 --> 00:55:19,000
कि हम लोग यह जो

793
00:55:19,000 --> 00:55:23,520
हमारी वैचारिक एकता का अभाव है हमारे बीच में।

794
00:55:23,520 --> 00:55:25,040
उसी के कारण व्यवहारिक

795
00:55:25,040 --> 00:55:29,240
एकता का अभाव है। उसी के कारण सामने वाला हम पर हावी होने की चेष्टा

796
00:55:29,240 --> 00:55:33,440
कुचेष्टा करता रहता है। तो क्यों है? क्योंकि हम बटे

797
00:55:33,440 --> 00:55:37,440
हुए हैं भी विचारों से भी और व्यवहार में भी

798
00:55:37,440 --> 00:55:41,520
तो हम दिख ही नहीं रहे हैं कि कितने हैं। कौन कौन है जो बोलेगा?

799
00:55:41,520 --> 00:55:46,160
जैसे सपोज दैट मैं कहीं पर खड़ा हूं और मैं ये उम्मीद करूं कि यहां के हिंदू मुझे बचाएंगे

800
00:55:46,160 --> 00:55:50,160
तो हम दिख भी नहीं रहे हैं। हम लोग यूनिफॉर्म नहीं है।

801
00:55:50,160 --> 00:55:54,160
हम वह लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में यूनिफ है। वह दिखते

802
00:55:54,160 --> 00:55:58,320
हैं। हम लोग यूनिफॉर्म नहीं है। हम लोग नहीं दिखते

803
00:55:58,320 --> 00:56:02,880
कितने हैं कितने नहीं है। तो वैचारिक

804
00:56:02,880 --> 00:56:07,440
भिन्नता, व्यवहारिक भिन्नता और फिर यूनिफार्म की कमी।

805
00:56:07,440 --> 00:56:11,600
तो अभी जो ये जो पांच सिद्धांत हैं

806
00:56:11,600 --> 00:56:16,400
इनको मैं शॉर्ट में बता दूं और फिर आगे मैं बात करूंगा।

807
00:56:16,400 --> 00:56:20,400
यह पांच सिद्धांत ऐसे अकाट पांच सिद्धांत हैं जो

808
00:56:20,400 --> 00:56:24,560
हर हिंदू को पता होने चाहिए और यदि वह स्वयं को हिंदू कह

809
00:56:24,560 --> 00:56:29,040
रहा है तो वह इन्हें मानने वाला भी होना चाहिए और ये ऐसे सिद्धांत

810
00:56:29,040 --> 00:56:33,120
है जो उसके विरुद्ध धर्म के विरुद्ध बोलने वाला इन सिद्धांतों के

811
00:56:33,120 --> 00:56:37,440
विरुद्ध बोलने वाला कोई भी व्यक्ति इनको काट नहीं सकता है।

812
00:56:37,440 --> 00:56:40,960
पहला सिद्धांत कि

813
00:56:40,960 --> 00:56:44,960
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वह

814
00:56:44,960 --> 00:56:49,200
भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो। यह हो गया नास्तिकता

815
00:56:49,200 --> 00:56:53,520
का उत्तर। जब यह उत्तर आपके पास होगा डेप्थ में आप दूसरे वीडियोस

816
00:56:53,520 --> 00:56:57,920
में देख लीजिएगा। जब यह उत्तर आपके पास होगा तो जो नास्तिकता

817
00:56:57,920 --> 00:57:02,640
फैलाने वाला व्यक्ति होगा वह आपके धर्म कार्य में बाधा नहीं बन पाएगा।

818
00:57:02,640 --> 00:57:06,640
वो जो लोगों को प्रभावित कर रहा होगा वहां पर उनको बोल के अरे दुनिया

819
00:57:06,640 --> 00:57:10,880
में कोई भगवान नहीं है। क्यों जा रहे हो मंदिर? वह प्रभावित नहीं कर पाएगा।

820
00:57:10,880 --> 00:57:15,200
चलो वह स्वयं नहीं आएगा मगर उससे प्रभावित होने से बचेंगे

821
00:57:15,200 --> 00:57:19,840
जो लोग वह तो आएंगे। तो पहला सिद्धांत

822
00:57:19,840 --> 00:57:24,000
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक

823
00:57:24,000 --> 00:57:28,320
ही क्यों ना कहता हो। दूसरा सिद्धांत

824
00:57:28,320 --> 00:57:31,040
कि

825
00:57:31,040 --> 00:57:35,160
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता

826
00:57:35,160 --> 00:57:39,360
है। संसार का ऐसा कोई कार्य नहीं है जो ईश्वर

827
00:57:39,360 --> 00:57:43,440
नहीं कर सकता है। ईश्वर किसी भी प्रकार के

828
00:57:43,440 --> 00:57:47,440
व्यवधान से रहित है। वह सभी प्रकार के नियमों को

829
00:57:47,440 --> 00:57:51,600
बनाने वाला सर्व नियामक है। तो इसके बारे में भी

830
00:57:51,600 --> 00:57:55,680
हमारा चैनल ही हमारा अस्तित्व हमारे चैनल का अस्तित्व ही मेरे ख्याल से इसी सिद्धांत

831
00:57:55,680 --> 00:58:00,400
पर है। हम लोग काफी डेप्थ में बातें कर चुके हैं। तो यह जो

832
00:58:00,400 --> 00:58:04,560
सिद्धांत है यह हम हिंदुओं को मालूम होना चाहिए। अगर यह

833
00:58:04,560 --> 00:58:08,800
सिद्धांत हम हिंदुओं को मालूम होगा। यह ऐसा सिद्धांत है जिससे

834
00:58:08,800 --> 00:58:13,040
सभी लोग प्रेम करते हैं। जिसको ईश्वर से प्रेम है, जिसको धर्म से प्रेम

835
00:58:13,040 --> 00:58:17,040
है, उसको यह बात सुनने में बहुत प्यारी लगती है कि

836
00:58:17,040 --> 00:58:21,440
ईश्वर सर्व सामर्थ्यवान है। ईश्वर अनंत रूप से

837
00:58:21,440 --> 00:58:25,600
शक्तिमान है। सर्वशक्तिमान है। तो इस

838
00:58:25,600 --> 00:58:29,680
एक सिद्धांत के अंतर्गत रहते हुए भी हम हिंदुओं को एकत्र कर

839
00:58:29,680 --> 00:58:34,800
सकते हैं। तीसरा क्या सिद्धांत है? वेद

840
00:58:34,800 --> 00:58:38,960
ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर

841
00:58:38,960 --> 00:58:43,040
ने भी ना रचा हो प्रधारण उपनिषद

842
00:58:43,040 --> 00:58:46,320
दो चार 10 और वो सत्यम

843
00:58:46,320 --> 00:58:50,320
ज्ञानम अंतम ब्रह्म जो पहला सिद्धांत हमने लिया था ईश्वर के

844
00:58:50,320 --> 00:58:54,560
विषय में केवल वही शास्त्र पहला सिद्धांत हमने

845
00:58:54,560 --> 00:58:58,640
लिया था कि संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही स्वयं

846
00:58:58,640 --> 00:59:03,040
को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो तो इसके समर्थन में है असतो मा सद्गमया तमस

847
00:59:03,040 --> 00:59:07,200
ज्योतिर्गम मृत्यु मृतम गम और ईश्वर वही

848
00:59:07,200 --> 00:59:11,520
है जो कुछ भी कर सकता है इसके समर्थन में बहुत सारे हैं मगर एक ले लेते हैं सत्यम ज्ञानम

849
00:59:11,520 --> 00:59:15,520
अनंतम ब्रह्म और ईश्वर

850
00:59:15,520 --> 00:59:19,920
वही है जो कुछ भी कर सकता है इसका फायदा आपको कब मिलेगा जब आप जाएंगे

851
00:59:19,920 --> 00:59:24,000
अपने घर के आसपास और कोई यह कहेगा कि मैं

852
00:59:24,000 --> 00:59:28,760
आस्तिक तो हूं मगर मैं उस ईश्वर को नहीं मानता

853
00:59:28,760 --> 00:59:32,880
मू मैं जो है वेद को नहीं मानता मैं तो कुरान के

854
00:59:32,880 --> 00:59:37,120
द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को मानता हूं। मैं तो बाइबल के द्वारा मिलने वाले ईश्वर

855
00:59:37,120 --> 00:59:42,080
को मानता हूं। ठीक है? तो

856
00:59:42,080 --> 00:59:46,640
वहां आप उसको बताओगे कि ईश्वर वही है जो कुछ भी

857
00:59:46,640 --> 00:59:50,720
कर सकता है। अच्छा ये बात कुरान में भी लिखी है। वो बात और है कि

858
00:59:50,720 --> 00:59:54,880
वो आगे ले नहीं जाते उस बात को। कुरान में भी कहीं पर गलती से कैसे

859
00:59:54,880 --> 00:59:59,280
लिखी वो नहीं पता। मगर यह बात कुरान में भी मेंशन है

860
00:59:59,280 --> 01:00:01,680
कि

861
01:00:01,680 --> 01:00:02,180
जब

862
01:00:02,080 --> 01:00:06,160
कोई आयत तुमसे छीन ली जाती है तो

863
01:00:06,160 --> 01:00:10,320
उससे बेहतर आयत दे दी जाती है। तुम नहीं जानते ईश्वर

864
01:00:10,320 --> 01:00:14,640
जो चाहे कर सकता है। ईश्वर

865
01:00:14,640 --> 01:00:19,040
जो चाहे कर सकता है। तो कुल मिला के ये जो सीमित

866
01:00:19,040 --> 01:00:23,040
ना होने की भावना है उसमें भी मगर वो आगे दूसरी ऐसी चीजें बोल देते हैं कि

867
01:00:23,040 --> 01:00:27,120
उनकी ये बात कट जाती है। जैसे कि ईश्वर की कोई संतान कैसे

868
01:00:27,120 --> 01:00:31,840
हो सकती है? उसकी कोई पत्नी है क्या?

869
01:00:31,840 --> 01:00:35,840
अब यहां पर क्या हुआ? यहां पर ईश्वर ने अपनी उस

870
01:00:35,840 --> 01:00:40,240
बात को ईश्वर जो चाहे कर सकता है वाली बात को

871
01:00:40,240 --> 01:00:44,320
वो कर दिया। खैर हम लोग उस पर आ जाते हैं हमारे

872
01:00:44,320 --> 01:00:48,640
पांच सिद्धांतों पे। तो पहला सिद्धांत असुतो सद्गमया तमसो ज्योतिर्गमय

873
01:00:48,640 --> 01:00:52,720
मृत्यु मृतम गमया हर हिंदू को याद होनी चाहिए। इतनी बात कि

874
01:00:52,720 --> 01:00:56,800
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान कोई ढूंढ रहा है। फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिकी क्यों ना

875
01:00:56,800 --> 01:01:01,120
कहता हो। दूसरा सिद्धांत सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म

876
01:01:01,120 --> 01:01:06,000
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। तीसरा सिद्धांत

877
01:01:06,000 --> 01:01:10,000
ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने

878
01:01:10,000 --> 01:01:13,480
भी ना रचा हो। क्यों?

879
01:01:13,480 --> 01:01:17,280
क्योंकि जो हमारे वेदाद शास्त्र है वो ईश्वर

880
01:01:17,280 --> 01:01:21,280
की स्वास के रूप में है। उन्हें कभी भी ईश्वर ने रचा नहीं है। हम लोग इस

881
01:01:21,280 --> 01:01:26,000
पर बात कर चुके हैं। दूसरे वीडियोस है उसमें आप देखिएगा। तो

882
01:01:26,000 --> 01:01:30,240
अब क्या है यहां पर एक और क्वालिटी मिलेगी धर्म में बाधा डालने वाले

883
01:01:30,240 --> 01:01:34,360
लोगों से लोग जैसे ब्रह्मा कुमारीज वो क्या

884
01:01:34,360 --> 01:01:38,400
कहेंगे कि अरे हमारे पास रोज भगवान आते हैं वो जो बता रहे हैं

885
01:01:38,400 --> 01:01:42,400
वो धर्म है ये वेद वगैरह में धर्म नहीं है वेद इत्यादि

886
01:01:42,400 --> 01:01:46,560
में तो कुछ बातें मानने की कुछ बातें नहीं मानने की हमारे पास तो डायरेक्ट भगवान

887
01:01:46,560 --> 01:01:51,120
आ रहे हैं वो बता रहे हैं वो हम मानेंगे रामपाल तो ऐसे

888
01:01:51,120 --> 01:01:55,360
लोगों के लिए ये सिद्धांत है क्या कि ईश्वर

889
01:01:55,360 --> 01:01:59,360
के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो।

890
01:01:59,360 --> 01:02:03,440
क्योंकि जहां पर ईश्वर का प्रयत्न पूर्वक बुद्धि इन्वॉल्व हो जाएगी तो ईश्वर

891
01:02:03,440 --> 01:02:07,680
तो सब कुछ बना रहे हैं। ईश्वर की मर्जी के बाहर

892
01:02:07,680 --> 01:02:11,840
कुरान रची बन गई क्या दुनिया में?

893
01:02:11,840 --> 01:02:16,080
ईश्वर की मर्जी के बाहर बाइबल बन गई क्या दुनिया में?

894
01:02:16,080 --> 01:02:20,240
है ना? वो ईश्वर की इच्छाओं की सीमा

895
01:02:20,240 --> 01:02:24,400
से बाहर की चीजें हैं क्या? तो खैर केवल वही शास्त्र

896
01:02:24,400 --> 01:02:29,120
प्रमाणिक जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो ब्रदारण उपनिषद दो चार 10

897
01:02:29,120 --> 01:02:32,560
इसके बाद यह सारा ज्ञान जो है

898
01:02:32,560 --> 01:02:36,800
ऐसा अकाट्य ज्ञान हमें प्राप्त कैसे होगा तो वो ज्ञान

899
01:02:36,800 --> 01:02:41,600
प्राप्त होता है परंपरा से गुरु से लक्षण संपन्न सन्यासी

900
01:02:41,600 --> 01:02:46,560
अथर्ववेद 11 5 16 मनुस्मृति 12वा अध्याय 100

901
01:02:46,560 --> 01:02:50,640
12 से 114 भगवत गीता तीन 16 चार

902
01:02:50,640 --> 01:02:54,840
दो निरुक्त में भी दिया है परंपरा

903
01:02:54,840 --> 01:02:58,880
मुंडकोपनिषद एक से चार परंपरा

904
01:02:58,880 --> 01:03:04,200
तो वहां पर परंपरा की महत्ता बताई जा रही है तो परंपरा प्राप्त ज्ञान

905
01:03:04,200 --> 01:03:08,240
लक्षण अंतिम रूप से सन्यासी समस्त

906
01:03:08,240 --> 01:03:12,400
श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला और

907
01:03:12,400 --> 01:03:16,400
अंततो गतवा अपने शिष्य का

908
01:03:16,400 --> 01:03:20,400
संशय दूर कर देने वाला है

909
01:03:20,400 --> 01:03:24,800
ना जी संशय क्या है कि रामपाल बहुत बड़े

910
01:03:24,800 --> 01:03:28,960
तत्वदर्शी है। ठीक है?

911
01:03:28,960 --> 01:03:33,040
मगर जब उनसे पूछा जाता है कि जहां ईश्वर

912
01:03:33,040 --> 01:03:37,240
खड़े होके जहां उसने जब पृथ्वी इत्यादि लोकों का निर्माण

913
01:03:37,240 --> 01:03:41,280
किया मृत्यु लोक का निर्माण किया तो वो जगह

914
01:03:41,280 --> 01:03:45,520
उसने खुद बनाई है कि क्या हुआ था? तो वहां वो सिटी

915
01:03:45,520 --> 01:03:47,560
मिट्टी गुम हो जाती है। ये वो

916
01:03:47,560 --> 01:03:51,680
तत्वदर्शी संशय दूर नहीं। कुरान में तो यही कह दिया जाता है

917
01:03:51,680 --> 01:03:55,760
ज्यादा सवाल मत करो। ज्यादा सवाल करोगे तो तुम्हारे लिए वह आयत खोल

918
01:03:55,760 --> 01:03:59,840
दी जाएंगी जिसके कारण पहले वाले लोग बागी हो गए थे।

919
01:03:59,840 --> 01:04:03,840
इसका मतलब क्या हुआ? कि पहले जो धर्म था वो कुछ और था। आज धर्म

920
01:04:03,840 --> 01:04:07,840
कुछ और है। जब लोगों ने बगावत शुरू की कि हम नहीं हम तो दारू

921
01:04:07,840 --> 01:04:12,000
पिएंगे। हम तो शराब पिएंगे। हम तो जो है विचार करेंगे तो

922
01:04:12,000 --> 01:04:16,000
थोड़ा थोड़ा दारू थोड़ा थोड़ाा इत्यादि जैसी चीजें कुछ

923
01:04:16,000 --> 01:04:20,400
या दारू ना दी गई हो तो और दूसरी चीजें के चलो इतना कर लो हरम

924
01:04:20,400 --> 01:04:24,560
कर लो या ये कर लो जो भी हो उनके यहां अलऊ कर दिया

925
01:04:24,560 --> 01:04:28,560
गया पांच एक में लिखा है ये कुरान में

926
01:04:28,560 --> 01:04:32,960
जी जी तुम ज्यादा सवाल मत करो तुम्हारे लिए आयतें खोल दी जाएंगी

927
01:04:32,960 --> 01:04:37,040
तो गुरु अंत गतवा कौन जो आपका अज्ञानता रूपी अंधकार

928
01:04:37,040 --> 01:04:41,040
दूर कर दे अद्वतारिका उपनिषद गु का मतलब अंधकार, रू का

929
01:04:41,040 --> 01:04:45,440
मतलब निकालने वाला। और इसके बाद

930
01:04:45,440 --> 01:04:51,200
पांचवा सिद्धांत क्या है? रामो विग्रह धर्मा।

931
01:04:51,200 --> 01:04:55,200
नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम

932
01:04:55,200 --> 01:04:59,520
अस्मदाचार्य परताम और इसमें समस्त परंपरा प्राप्त आचार्य

933
01:04:59,520 --> 01:05:02,640
आते हैं। जो राम ने किया वो धर्म है और

934
01:05:02,640 --> 01:05:07,480
धर्म आपको परंपरा प्राप्त आचार्य से मिलेगा और वो आचार्य

935
01:05:07,480 --> 01:05:11,520
आपके श्री संप्रदाय के आचार्य भी हो सकते हैं। शंकर

936
01:05:11,520 --> 01:05:15,680
संप्रदाय के आचार्य भी हो सकते हैं। यहां से आपको धर्म मिलेगा परंपरा

937
01:05:15,680 --> 01:05:19,840
प्राप्त। तो नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यम

938
01:05:19,840 --> 01:05:24,160
अस्मदाचार्य परताम वंदे गुरु परंपरा अब मैं एक

939
01:05:24,160 --> 01:05:28,240
आप आप कुछ कह रहे थे आप बताएं

940
01:05:28,240 --> 01:05:32,320
हां मैं ये कह रहा था ये सैफ नाम का बंदा ये कह रहा है कि क्या तेरा ईश्वर

941
01:05:32,320 --> 01:05:36,880
जो है वो व्यवहार में बलात्कार कर सकता है

942
01:05:36,880 --> 01:05:41,040
तो यह इस तरह से क्वेश्चन करते हैं

943
01:05:41,040 --> 01:05:45,200
इस्लामी ईश्वर जो है वह धर्म स्थापना करते

944
01:05:45,200 --> 01:05:49,200
हैं तुम्हारे रूप में कर सकता है सेफ। तुम बताओ तुम

945
01:05:49,200 --> 01:05:54,560
कर सकते हो कि नहीं? [हंसी]

946
01:05:54,560 --> 01:05:59,280
तुम बताओ। जी जी तो

947
01:05:59,280 --> 01:06:03,280
प्रपंच रूपी संसार है जो ये भी कुरान में

948
01:06:03,280 --> 01:06:07,360
लिखा है कुरान में ये भी लिखा है

949
01:06:07,360 --> 01:06:11,440
ये जो है यह संसार जो है खेल है

950
01:06:11,440 --> 01:06:16,320
तमाशा है ये कुरान में लिखा है तो

951
01:06:16,320 --> 01:06:20,320
क्या तुम्हारे ईश्वर को जिसको तुम ईश्वर कह रहे हो खेल में होने

952
01:06:20,320 --> 01:06:24,800
वाली चीजों से सुखदख होता है क्या

953
01:06:24,800 --> 01:06:28,800
प्रभावित होता है क्या तुम्हारा ईश्वर अगर प्रभावित होता है तभी तो

954
01:06:28,800 --> 01:06:32,880
यह आएगा कि यह कर सकता है यह नहीं कर सकता अगर प्रभावित नहीं हो

955
01:06:32,880 --> 01:06:37,120
सकता है तो सब कुछ कर सकता है कोई सीमा नहीं है क्योंकि उसके वो वहां से देखने

956
01:06:37,120 --> 01:06:41,440
पर तो एक खेल है ना तो पहले तुम तय करो तुम्हारा ईश्वर सुखदख

957
01:06:41,440 --> 01:06:45,840
से प्रभावित होता है कि नहीं वहां भी उसको भी कष्ट होता है क्या

958
01:06:45,840 --> 01:06:50,240
फिर बस बात करना जी और

959
01:06:50,240 --> 01:06:54,640
जिसको भी जिससे भी बात करानी है यहां मंच खुला हुआ है यहां तुम ला सकते हो

960
01:06:54,640 --> 01:06:58,800
चेहरे के साथ आना होगा। यह मर्यादा है। खैर हम लोग

961
01:06:58,800 --> 01:07:00,960
वापस आ जाए।

962
01:07:00,960 --> 01:07:05,040
एक बहुत महत्वपूर्ण बात है जो अभी पिछले कुछ दिनों भगवतानंद इत्यादि से

963
01:07:05,040 --> 01:07:10,920
बात करते समय उठी है कि

964
01:07:10,920 --> 01:07:15,560
शंकराचार्य जो है अकाट्य होते हैं। यह बात

965
01:07:15,560 --> 01:07:20,000
उठी कि तुम ये क्यों कहते हो कि शंकराचार्य

966
01:07:20,000 --> 01:07:24,080
अकाट्य है। उनके मुख से निकलने वाला वाक्य जो है ब्रह्म वाक्य। ये क्यों

967
01:07:24,080 --> 01:07:28,080
कहते हो? तो पहली बात तो मेरी बात सुनो। ब्रह्म

968
01:07:28,080 --> 01:07:32,080
वाक्य भी प्रमाण नहीं है। सोच

969
01:07:32,080 --> 01:07:37,040
के देखो हमारे यहां क्या हुआ? परंपरा प्राप्त

970
01:07:37,040 --> 01:07:41,280
जो ज्ञान विज्ञान है उसके विरोध में बोलने आए ब्रह्म बुद्ध

971
01:07:41,280 --> 01:07:45,360
अवतार ब्रह्म ही थे ना ब्रह्म

972
01:07:45,360 --> 01:07:49,360
वाक्य वाक्य भी प्रमाण नहीं है। किसके आगे? परंपरा प्राप्त

973
01:07:49,360 --> 01:07:53,360
गुरु गोविंद और ग्रंथ के जो सामंजस्य से जो ज्ञान प्राप्त है

974
01:07:53,360 --> 01:07:57,440
उसके विरोध में ब्रह्म स्वयं भी आ गए

975
01:07:57,440 --> 01:08:01,440
अवतरित हो गए कहने लगे मत मानो वेद को तो माना क्या उसको बात

976
01:08:01,440 --> 01:08:05,440
को किसकी बात मानी गुरुओं की बात मानी परंपरा

977
01:08:05,440 --> 01:08:09,600
प्राप्त आचार्यों की बात मानी ना मान लेते तो बन जाओ

978
01:08:09,600 --> 01:08:13,760
आज बौद्ध तुम भी तो जो लोग ये कह रहे हैं

979
01:08:13,760 --> 01:08:16,080
कि ये मत कहो कि शंकराचार्य

980
01:08:16,080 --> 01:08:20,080
अकाट होते हैं वो वो ये सुन ले बहुत जरूरी

981
01:08:20,080 --> 01:08:24,160
चीज है सुनने की मैं इस

982
01:08:24,160 --> 01:08:28,400
दुनिया में ये वाली जो दुनिया है ना इस दुनिया में ऐसे

983
01:08:28,400 --> 01:08:32,400
ही नहीं आया हूं सामान्य तरीके से मैं पहले

984
01:08:32,400 --> 01:08:36,560
अधर्म से विधर्मियों से रामपालियों से अपने जीवन

985
01:08:36,560 --> 01:08:40,640
में भिड़ा जी और एक जो सामान्य सा जीवन

986
01:08:40,640 --> 01:08:45,320
जी रहा होता है जिसके जीवन का लक्ष्य केवल होता है कंजपशन

987
01:08:45,320 --> 01:08:49,360
कंजशन वैसा जीवन जीने वाला व्यक्ति मालूम ही नहीं है कि

988
01:08:49,360 --> 01:08:53,360
जीवन का उद्देश्य मोक्ष है। जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति है। भक्ति

989
01:08:53,360 --> 01:08:57,440
है। यह सब कुछ नहीं मालूम। केवल कमाना है खाना है। कमाना है खाना

990
01:08:57,440 --> 01:09:01,440
है। कमाना है खाना है। हां मगर यह सवाल

991
01:09:01,440 --> 01:09:05,440
जरूर होता था मन में। तदया तम ज्योतिमया जिसके कारण आज

992
01:09:05,440 --> 01:09:09,680
मैं यहां आ गया। ये बात अच्छी है कि प्रारब्ध में कुछ ऐसे कर्म किए

993
01:09:09,680 --> 01:09:13,920
थे कि किसी ऐसे घर में जन्म मिल गया जहां पर राम के बारे में मुझे बचपन

994
01:09:13,920 --> 01:09:18,160
से बताया गया। जहां मुझे हनुमान चालीसा दी गई पढ़ने। यह

995
01:09:18,160 --> 01:09:22,160
एक भाग्य था, प्रारब्ध था। तो मैं

996
01:09:22,160 --> 01:09:26,440
जो है इस रूप में नहीं आया कि मैं जो है

997
01:09:26,440 --> 01:09:30,480
एक वंश परंपरा से मेरे यहां पर जो है शंकराचार्य को माना

998
01:09:30,480 --> 01:09:31,200
जा रहा हो या

999
01:09:31,200 --> 01:09:35,280
वो हमारे कुलगुरु रहे हो। इस कारण से मैं अभी उनके यहां आ गया और आज

1000
01:09:35,280 --> 01:09:39,360
जो है शंकराचार्य का अगर कोई विरोध करेगा तो मैं जो है उसके पीछे

1001
01:09:39,360 --> 01:09:43,440
पड़ जाऊंगा। उसका विरोध करने लगूंगा क्योंकि शंकराचार्य को शंकराचार्य के

1002
01:09:43,440 --> 01:09:48,560
प्रति मेरी अंधभक्ति है। सुनो मैं कैसे आया।

1003
01:09:48,560 --> 01:09:52,640
जब एक मुसलमान से मेरी धर्म

1004
01:09:52,640 --> 01:09:56,640
और अधर्म को लेकर के चर्चा होने लगी।

1005
01:09:56,640 --> 01:10:00,720
जब मेरा धर्म मेरे धर्म का अस्तित्व

1006
01:10:00,720 --> 01:10:05,320
मेरे धर्म का पक्ष मुझे रखना था तो एक सवाल

1007
01:10:05,320 --> 01:10:09,440
अटका। वो व्यक्ति भी कौन था? इसको भी समझो।

1008
01:10:09,440 --> 01:10:14,640
क्षत्रिय कुल में उत्पन्न और

1009
01:10:14,640 --> 01:10:18,720
मेरे साथ व्यायाम करता था, वर्कआउट

1010
01:10:18,720 --> 01:10:22,880
करता था। हालांकि उससे पहले भी मैं ऐसी स्थितियां से जूझ रहा था। मगर

1011
01:10:22,880 --> 01:10:26,880
एक होता है ना कि जैसे घड़ा भर जाता है।

1012
01:10:26,880 --> 01:10:30,880
तो वो घड़ा भरने वाली जो स्थिति थी वो यह था। यह व्यक्ति वो

1013
01:10:30,880 --> 01:10:34,920
मेरे साथ व्यायाम करता था। एक दिन वो मेरे घर पर

1014
01:10:34,920 --> 01:10:39,840
आया। मैंने उसे भोजन के लिए बुलाया था।

1015
01:10:39,840 --> 01:10:43,920
भोजन पा लेने के बाद हम लोग जब बैठे बात करना

1016
01:10:43,920 --> 01:10:46,880
शुरू किया

1017
01:10:46,880 --> 01:10:51,440
तो मैंने उससे उसका जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण है वो पूछ लिया

1018
01:10:51,440 --> 01:10:55,520
सौभाग्य से मेरा सौभाग्य था कि मैंने पूछ लिया तो जब

1019
01:10:55,520 --> 01:11:00,080
मैंने इससे ऐसा पूछा तो वो बोलता है मुझे इस्लाम बहुत पसंद है।

1020
01:11:00,080 --> 01:11:04,160
अच्छा तब मेरे लाइफ अच्छा एक टर्निंग पॉइंट और

1021
01:11:04,160 --> 01:11:08,240
है जो इस से जुड़ा हुआ है वो कभी और बताऊंगा एक ये टर्निंग पॉइंट

1022
01:11:08,240 --> 01:11:12,400
है। तो मेरा एकदम से यह हुआ यह क्या

1023
01:11:12,400 --> 01:11:16,400
तो उसके बाद से मेरी खोज शुरू हुई उसके बाद उसके पहले जो अध्ययन था वह

1024
01:11:16,400 --> 01:11:20,560
था मगर उसके बाद से खोज शुरू हुई तो फिर उससे तर्क वितर्क चालू

1025
01:11:20,560 --> 01:11:24,560
हुए कि नहीं क्यों सनातन इज बेस्ट वो बोल रहा है इस्लाम इज

1026
01:11:24,560 --> 01:11:28,680
बेस्ट तो ये सब चीजें चालू हुई

1027
01:11:28,680 --> 01:11:32,880
उससे जूझते समय एक समय आया जब

1028
01:11:32,880 --> 01:11:38,320
वो मुझे वेद के भाष्य अपने अनुरूप बता रहा था

1029
01:11:38,320 --> 01:11:42,800
है ना? वेदों का अर्थ वो अपने अनुरूप मुझे बता रहा था।

1030
01:11:42,800 --> 01:11:46,960
तो समस्या यह आई मैंने कहा तुम्हारे नहीं माने

1031
01:11:46,960 --> 01:11:51,120
जाएंगे। उसने कहा तुम्हारे क्यों माने जाएंगे? क्या जवाब

1032
01:11:51,120 --> 01:11:56,000
था इसका? बताओ। अगर हमने परंपरा को छोड़ दिया।

1033
01:11:56,000 --> 01:12:00,080
परंपरा प्राप्त गुरुओं को छोड़ दिया तो वेद के इस

1034
01:12:00,080 --> 01:12:02,000
मंत्र के कई अर्थ निकल सकते हैं।

1035
01:12:02,000 --> 01:12:06,080
यही अर्थ क्यों माना जाए? इसका क्या जवाब होगा? यह जो

1036
01:12:06,080 --> 01:12:10,080
मूर्ख लोग हैं, धूर्त लोग हैं, मूर्ख वो

1037
01:12:10,080 --> 01:12:14,320
जो आज भगवतानंद के चक्कर में शंकराचार्य

1038
01:12:14,320 --> 01:12:18,560
की अकाटता को चुनौती दे रहे हैं। और धूर्त वो

1039
01:12:18,560 --> 01:12:22,720
जो अपने संगठन बनाने के चक्कर में आर्य समाज जैसे

1040
01:12:22,720 --> 01:12:27,440
लोग वो परंपरा प्राप्त आचार्यों पर जब गण में जाओगे

1041
01:12:27,440 --> 01:12:31,440
तो तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा इस बात का कि तुम्हारा

1042
01:12:31,440 --> 01:12:35,600
क्यों माना जाए। एक समय आएगा

1043
01:12:35,600 --> 01:12:39,920
जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे होंगे

1044
01:12:39,920 --> 01:12:44,400
तब तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा ऐसा उत्तर दोगे

1045
01:12:44,400 --> 01:12:48,960
जिसको जो मानना है वो मान यही उत्तर तो दोगे

1046
01:12:48,960 --> 01:12:53,840
बहुत बड़ी बात है यही समय आया था मेरे पास

1047
01:12:53,840 --> 01:12:57,920
उस मुस्लिम से जूझते हुए कि मेरा उत्तर

1048
01:12:57,920 --> 01:13:01,920
क्यों मान्य तो मैंने कहा कि इसलिए

1049
01:13:01,920 --> 01:13:05,920
मान्य क्योंकि यह परंपरा प्राप्त आचार्य बता

1050
01:13:05,920 --> 01:13:10,000
रहा है। यह वह बता रहा है जिसने अपने गुरु से यह वेद

1051
01:13:10,000 --> 01:13:14,320
लिए थे। ये वेद जाकिर नायक के पास आए कैसे? मुस्लिमों

1052
01:13:14,320 --> 01:13:17,040
के पास आए कैसे? जिससे आए उस

1053
01:13:17,040 --> 01:13:21,280
पर अविश्वास नहीं कर सकते ना। तो वेद किसी ना किसी प्रकार से

1054
01:13:21,280 --> 01:13:25,360
यहां पर आ रहे हैं ना। परंपरा से आ रहे हैं ना। तो परंपरा को हम मना नहीं

1055
01:13:25,360 --> 01:13:29,440
कर सकते। परंपरा प्राप्त आचार्यों को

1056
01:13:29,440 --> 01:13:33,760
हम मना नहीं कर सकते। उन पर अविश्वास प्रकट

1057
01:13:33,760 --> 01:13:37,760
नहीं कर सकते। अविश्वास प्रकट कर दिया परंपरा प्राप्त आचार्य

1058
01:13:37,760 --> 01:13:42,080
पर तो उससे प्राप्त होने वाले हमें वेदों पर भी अविश्वास हमारा

1059
01:13:42,080 --> 01:13:46,080
सिद्ध हो जाएगा। और फिर तुम धर्म की रक्षा कैसे करोगे?

1060
01:13:46,080 --> 01:13:50,160
फिर तो यही करोगे कि जो तुम्हारे विरुद्ध खड़ा है। तुम्हारे पास भले ही उसका

1061
01:13:50,160 --> 01:13:54,240
कोई वैचारिक उत्तर हो ना हो। बस तुम उससे तलवार से लड़ोगे। बस

1062
01:13:54,240 --> 01:13:58,240
मैं सही क्यों हूं? तुम ये नहीं सिद्ध कर पाओगे। केवल तुम

1063
01:13:58,240 --> 01:14:02,240
लड़ पाओगे हथियार लेकर के। फिर तुम्हारे साथ कौन खड़ा हो कौन नहीं खड़ा

1064
01:14:02,240 --> 01:14:06,240
हो बातें बात की है। तुम्हारे पास वैचारिक उत्तर

1065
01:14:06,240 --> 01:14:11,000
नहीं होगा। तो मैं हिंदुओं का ध्यान दिलाना चाहता

1066
01:14:11,000 --> 01:14:13,400
हूं।

1067
01:14:13,400 --> 01:14:17,880
क्या कि वेद और ईश्वर

1068
01:14:17,880 --> 01:14:22,800
के वेद और ईश्वर के संबंध में प्रमाण क्या है? प्रमाण

1069
01:14:22,800 --> 01:14:26,960
वेद और ईश्वर के संबंध में कि हां कृष्ण ईश्वर

1070
01:14:26,960 --> 01:14:31,040
हैं। हां वेद ही धर्म है। क्या प्रमाण है

1071
01:14:31,040 --> 01:14:32,160
इसके संबंध में तुम्हारे

1072
01:14:32,160 --> 01:14:36,440
पास? मैं आज उन हिंदुओं से पूछ रहा हूं जिन्होंने भगवतानंद के चक्कर

1073
01:14:36,440 --> 01:14:40,560
में यह कहा कि शंकराचार्य अकाट नहीं होते। यह कहना गलत

1074
01:14:40,560 --> 01:14:45,280
है। सिद्ध करो शंकराचार्य अकाट होते हैं। तो

1075
01:14:45,280 --> 01:14:49,360
तो भाई वेद और ईश्वर के संबंध में जो प्रमाण है ना वह प्रमाण

1076
01:14:49,360 --> 01:14:52,720
है शब्द प्रमाण।

1077
01:14:52,720 --> 01:14:56,800
किसी ने तुमको कहा है कि यह ईश्वर की वाणी है

1078
01:14:56,800 --> 01:15:00,800
तो वह ईश्वर की वाणी है। अगर कहने वाले के प्रति

1079
01:15:00,800 --> 01:15:05,040
तुमने अविश्वास खड़ा कर दिया तो फिर वो शब्द

1080
01:15:05,040 --> 01:15:09,600
प्रमाण तुमने अपना खत्म कर दिया। कर दिया।

1081
01:15:09,600 --> 01:15:13,640
तो फिर तुम्हारे पास कोई प्रमाण नहीं है कि वह वेद ईश्वर की ही वाणी

1082
01:15:13,640 --> 01:15:17,680
है। राम ईश्वर है। कृष्ण ईश्वर है। वेद के द्वारा

1083
01:15:17,680 --> 01:15:21,840
बताया गया धर्म धर्म है। तो अपने एक

1084
01:15:21,840 --> 01:15:26,560
शब्द प्रमाण को तो तुम्हें बचा के रखना ही होगा ना।

1085
01:15:26,560 --> 01:15:31,200
अगर तुमने सब पर झूठ झूठा होने का आरोप लगा दिया

1086
01:15:31,200 --> 01:15:35,360
तो तुम्हारा वो शब्द प्रमाण खत्म। तुमने हिंदू धर्म को

1087
01:15:35,360 --> 01:15:39,440
वैचारिक रूप से नष्ट कर दिया। और जब विचार ही नहीं है हिंदू धर्म का तो

1088
01:15:39,440 --> 01:15:43,520
व्यवहार कहां से बचेगा? कहां से बचेगा?

1089
01:15:43,520 --> 01:15:47,760
इसलिए कहता हूं इसलिए लड़ता मरता हूं शंकराचार्य की अकाटता

1090
01:15:47,760 --> 01:15:51,840
के पीछे। क्योंकि जिस दिन तुमने अपने परंपरा प्राप्त सभी

1091
01:15:51,840 --> 01:15:56,320
गुरुओं में दोष दृष्टि रख के और उनके प्रति अविश्वास प्रकट कर दिया

1092
01:15:56,320 --> 01:16:00,320
उस दिन तुमसे तुम्हारा शब्द प्रमाण छीन लिया जाएगा

1093
01:16:00,320 --> 01:16:04,320
छीन जाएगा तुम्हारी अपनी वाणी के द्वारा तुम देखो

1094
01:16:04,320 --> 01:16:08,480
शंकराचार्य झूठ बोलते हैं शंकराचार्य ने यहां ये झूठ बोला ये वो

1095
01:16:08,480 --> 01:16:12,480
किया ये उनकी अकाटता की रक्षा के लिए प्रयास मत करो तुम

1096
01:16:12,480 --> 01:16:16,560
उनकी दोष दृष्टि रखो और उनहीं की नहीं जितने आचार्य

1097
01:16:16,560 --> 01:16:20,640
परंपरा प्राप्त सब पर तुमने दोष दृष्टि डाल ली। वैसे भी गिने चुने कुछ बचे हैं

1098
01:16:20,640 --> 01:16:24,720
और उनकी सब पर तुमने विश्वास अविश्वास प्रकट कर दिया तो तुम्हारे पास

1099
01:16:24,720 --> 01:16:28,800
क्या क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा? वेद को वेद मानने के लिए

1100
01:16:28,800 --> 01:16:33,520
वेद को धर्म मानने के लिए वेद को अपारुषय मानने के लिए क्या शब्द प्रमाण रह जाएगा?

1101
01:16:33,520 --> 01:16:38,080
कैसे कहोगे ये वही वेद है जो वहां ऋषियों से चल के आए हैं।

1102
01:16:38,080 --> 01:16:42,080
कैसे अपना धर्म सिद्ध करोगे? और जब सिद्ध

1103
01:16:42,080 --> 01:16:46,880
नहीं कर पाओगे तो ये व्यवहारिक ये तो आ नहीं है। फिर आगे और नाश करोगे।

1104
01:16:46,880 --> 01:16:51,120
इसलिए शंकराचार्य की अकाटता इसलिए परंपरा प्राप्त आचार्यों

1105
01:16:51,120 --> 01:16:55,200
की अकाटता की रक्षा करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण को बचाने

1106
01:16:55,200 --> 01:16:59,200
के लिए ये इसमें डालो इस बात को।

1107
01:16:59,200 --> 01:17:02,800
वेद वेद अपश्य है। ये ये गुरु शिष्य परंपरा ने

1108
01:17:02,800 --> 01:17:07,040
ही बताया। यही चीज यही चीज ना मुझे भी समझ में आई थी।

1109
01:17:07,040 --> 01:17:11,360
और आर्य मां जी इस चीज को समझते नहीं है कि भाई तुम वेद में तो कहीं स्पष्ट

1110
01:17:11,360 --> 01:17:15,360
रूप से लिखा नहीं हुआ कि वेद अपष है। बताया किसने? परंपरा प्राप्त

1111
01:17:15,360 --> 01:17:19,440
आचार्यों ने अच्छा वहां से तुमने वो तो ले लिया कि वेद अपोरष है वो तुम बताते

1112
01:17:19,440 --> 01:17:23,520
फिर रहे हो लेकिन तुम उस परंपरा को नकार दे रहे हो जैसे कि आपने कहा कि जो परंपरा को नकार

1113
01:17:23,520 --> 01:17:27,800
दिया तो फिर वेद अपष है ये तुम तक कैसे आया तुम्हें वो सिद्ध करना

1114
01:17:27,800 --> 01:17:31,840
पड़ेगा तो ये बहुत बड़ा सिद्धांत आपने जो पांच सिद्धांत बताए हैं

1115
01:17:31,840 --> 01:17:35,840
ये मैं तो कह रहा हूं लिख लेने चाहिए जो भी वीडियो को

1116
01:17:35,840 --> 01:17:39,840
इसको अभी देख रहे हैं या आप बाद में देखेंगे वो इन

1117
01:17:39,840 --> 01:17:43,840
पांच सिद्धांतों को अगर लिख के रख लेंगे तो आपको कोई भी

1118
01:17:43,840 --> 01:17:48,240
डाउट डाउट होगा ही नहीं। कोई संशय होगा ही नहीं। धर्म को लेकर के सनातन

1119
01:17:48,240 --> 01:17:52,600
धर्म मूल रूप से है क्या?

1120
01:17:52,600 --> 01:17:57,160
जी। तो कहने का अर्थ यह

1121
01:17:57,160 --> 01:18:01,520
है कि आपको अपने शब्द प्रमाण की रक्षा

1122
01:18:01,520 --> 01:18:05,680
करनी होगी। अपने शब्द प्रमाण के प्रति इस प्रकार से अविश्वास

1123
01:18:05,680 --> 01:18:09,920
अनास्था प्रकट करते रहोगे तो तुम पर ही हावी होगा ना सामने वाला

1124
01:18:09,920 --> 01:18:14,320
के। वेद का अर्थ तू क्यों करेगा? मैं क्यों नहीं करूंगा? करूंगा मैं वेद का अर्थ निकालूंगा

1125
01:18:14,320 --> 01:18:18,480
भैंसे की बलि गाय की बलि वेदों से

1126
01:18:18,480 --> 01:18:22,720
मैं करूंगा ना अर्थ मैं करूंगा मैं निकालूंगा चचेरे में मेरे फुफेरे

1127
01:18:22,720 --> 01:18:26,720
भाइयों भाइयों से शादी करने का अर्थ मैं निकालूंगा

1128
01:18:26,720 --> 01:18:30,720
तू क्यों निकालेगा तो आप अपने धर्म की रक्षा नहीं कर पाएंगे

1129
01:18:30,720 --> 01:18:34,880
अगर आपने अपने शब्द प्रमाण पर हमला कर दिया उसके प्रति अविश्वास

1130
01:18:34,880 --> 01:18:39,040
प्रकट कर दिया तो इसलिए जो मेरे जीवन में

1131
01:18:39,040 --> 01:18:43,120
जो शंकराचार्य के लिए जो अकाट्य शब्द आया है ना वो ऐसे नहीं आया कि मैं जो

1132
01:18:43,120 --> 01:18:47,360
मेरे कुल परंपरा में शंकराचार्य पद की पूजा होती है या किसी कारण से

1133
01:18:47,360 --> 01:18:51,680
मुझे वो अच्छे लगे और मैं उनके अनुगत हो गया। भाई

1134
01:18:51,680 --> 01:18:56,240
जब तर्क करने जाओगे ना जब कहीं निकलोगे किसी से सामना होगा ना

1135
01:18:56,240 --> 01:19:00,400
तब यही सिद्धांत काम आएंगे जिनका आज तुम पीछे

1136
01:19:00,400 --> 01:19:04,400
पड़े हो यही शंकराचार्य काम आएंगे जिनको आज तुम कह रहे

1137
01:19:04,400 --> 01:19:07,600
हो कि नहीं यह है वो है और अगर ये लोग

1138
01:19:07,600 --> 01:19:11,920
जो ऐसा कर रहे हैं प्रश्न शंकराचार्य कोट्य क्यों कह दिया हंसी

1139
01:19:11,920 --> 01:19:15,920
कर रहे हैं। यह लोग चाहे तो शंकराचार्य के उन वाक्यों का बहुत

1140
01:19:15,920 --> 01:19:20,080
अच्छा समाधान है जिसको लेकर के लोग आवाजें मतलब ये खिचड़ी

1141
01:19:20,080 --> 01:19:24,080
पका रहे हैं। साढ़े तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र और ये सब बातों

1142
01:19:24,080 --> 01:19:28,160
ये जो भगवत आनंद ने अपने YouTube वीडियोस में वही वही

1143
01:19:28,160 --> 01:19:32,400
अगर चाहे तो इन पंक्तियों की रक्षा वो स्वयं कर सकता है। मुझे मालूम

1144
01:19:32,400 --> 01:19:36,480
है उसमें इतना सामर्थ है। वो अगर तर्क करने पर आएगा। वो इन

1145
01:19:36,480 --> 01:19:40,960
सिद्धांतों की ये जो वाक्य हैं शंकराचार्य के इन

1146
01:19:40,960 --> 01:19:45,040
वाक्यों की रक्षा वो स्वयं कर सकता है। मगर वो क्या कर रहा है? ऐसी चीजों

1147
01:19:45,040 --> 01:19:49,200
का फायदा उठा रहा है जिस पर कि कोई कुछ बोला नहीं जा रहा है। हालांकि हमने अपने वीडियोस

1148
01:19:49,200 --> 01:19:53,360
में भी बता दिया। मगर बात यह

1149
01:19:53,360 --> 01:19:57,520
है कि यदि आपने अपने शब्द प्रमाण को ही खंडित कर रखा है

1150
01:19:57,520 --> 01:20:02,720
तो अंतत गत्वा आप अपने धर्म के दुश्मन कहलाएंगे।

1151
01:20:02,720 --> 01:20:06,720
आपको अपने शब्द प्रमाण को बचाना होगा और अगर तुम शंकराचार्य को

1152
01:20:06,720 --> 01:20:10,800
छीन रहे हो समाज से परंपरा प्राप्त आचार्यों को छीन रहे हो समाज

1153
01:20:10,800 --> 01:20:14,800
से और तुम स्वयं को सनातनी और हिंदू कहते हो तो

1154
01:20:14,800 --> 01:20:19,040
दो ना उन्हें दूसरा विकल्प विकल्प

1155
01:20:19,040 --> 01:20:22,720
तो दो कि ये हमारा शब्द प्रमाण है और वो होना

1156
01:20:22,720 --> 01:20:26,880
चाहिए शब्द प्रमाण परंपरा प्राप्त आचार्य होना चाहिए लक्षण संपन्न सन्यासी

1157
01:20:26,880 --> 01:20:30,960
होना चाहिए वैदिक वांगमय का गाता होना

1158
01:20:30,960 --> 01:20:35,040
चाहिए संशय दूर कर सकने वाला होना चाहिए।

1159
01:20:35,040 --> 01:20:39,040
दो विकल्प तब तुम्हारे हाथ खड़े हो जाएंगे।

1160
01:20:39,040 --> 01:20:43,120
अरे औरों की छोड़ो अपनी परंपरा नहीं बता पा रहे हो। और शब्द

1161
01:20:43,120 --> 01:20:47,360
सनातन धर्म के शब्द प्रमाण तुम हमला कर रहे हो। गुरु

1162
01:20:47,360 --> 01:20:51,760
क्या है? गुरु शब्द प्रमाण है। शंकराचार्य

1163
01:20:51,760 --> 01:20:55,760
क्या है? शंकराचार्य शब्द प्रमाण है। वो कह रहा

1164
01:20:55,760 --> 01:20:59,840
है यह वेद है। यह आया है वहां ष्टि के प्रारंभ से अब

1165
01:20:59,840 --> 01:21:04,480
तक और तुम अपने शब्द प्रमाण के

1166
01:21:04,480 --> 01:21:08,640
विरोध में आसानी से आवाजें

1167
01:21:08,640 --> 01:21:13,280
उठा लोगे नहीं वो अकाट नहीं होते है वो है तो जरा सोचो

1168
01:21:13,280 --> 01:21:17,280
जब मुस्लिमों से नास्तिकों से विधर्मियों से सामना होगा तब

1169
01:21:17,280 --> 01:21:21,520
यही शब्द प्रमाण तुम्हारे काम आएगा। जब आर्य समाजियों से

1170
01:21:21,520 --> 01:21:25,680
बात होती है तो यही तर्क तो प्रस्तुत किया जाता है कि जहां से तुम्हारे

1171
01:21:25,680 --> 01:21:29,680
पास वेद आए जहां से तुम्हारे पास मंत्र आए वहां से

1172
01:21:29,680 --> 01:21:33,680
अर्थ भी आया अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो अर्थ नहीं मान रहे हो तो वेद क्यों मान रहे हो

1173
01:21:33,680 --> 01:21:37,680
वेद मान रहे हो तो अर्थ क्यों नहीं मान रहे हो तो अगर तुम

1174
01:21:37,680 --> 01:21:38,180
उसके

1175
01:21:38,000 --> 01:21:42,000
प्रति अविश्वास प्रकट कर दोगे अपने अकाट्य

1176
01:21:42,000 --> 01:21:46,080
उनकी अकाट्यता पर आप जब उंगली उठा दोगे तो आप

1177
01:21:46,080 --> 01:21:50,240
अपने धर्म का नाश करोगे ठीक है और मैं इसलिए अकाट्य

1178
01:21:50,240 --> 01:21:54,320
बोलता हूं। मेरे उनकी अकाट्यता के लड़ने का कारण

1179
01:21:54,320 --> 01:21:59,040
ये है क्योंकि मुझे आगे लड़ना है। तुमसे नहीं लड़ना है।

1180
01:21:59,040 --> 01:22:03,040
जी मुझे आगे जाना है। आगे युद्ध खड़ा है। युद्ध की घड़ी आगे है।

1181
01:22:03,040 --> 01:22:07,200
वहां लड़ना है। वहां मैं इन चीजों को अगर सुरक्षित

1182
01:22:07,200 --> 01:22:11,280
नहीं रखूंगा। अपने शब्द प्रमाण को तो वहां नहीं लड़ पा। तुम लोग इन इस

1183
01:22:11,280 --> 01:22:15,680
दूर दृष्टि को नहीं देखोगे। तुम्हारे पास इतनी दूर दृष्टि नहीं है ना भगवतानंद

1184
01:22:15,680 --> 01:22:19,840
के पास है। भागवतानंद तुम्हारे लिए भी मैं कह रहा हूं। तुम्हारे

1185
01:22:19,840 --> 01:22:23,880
पास भी वो दूर दृष्टि नहीं है। तुम अपने सनातन धर्म

1186
01:22:23,880 --> 01:22:28,360
के जो साक्ष्य है तुम्हारे पास उन पर हमला कर रहे

1187
01:22:28,360 --> 01:22:32,400
हो। और जबकि तुम्हारे पास इतना सामर्थ्य है कि जो प्रश्न तुम उठा

1188
01:22:32,400 --> 01:22:36,800
रहे हो उनका उत्तर तुम स्वयं दे सकते हो।

1189
01:22:36,800 --> 01:22:40,960
ठीक है? खैर अब इसमें एक बात आती है। एक बात

1190
01:22:40,960 --> 01:22:44,960
और कर लूं मैं। आप बोल आप बता दीजिए आप कुछ कह रहे फिर मैं आपकी बात पूरी

1191
01:22:44,960 --> 01:22:49,040
कर हां मैं ये कह रहा हूं कि अभी जो यह हो रहा है ना वेस्ट बंगाल में जो

1192
01:22:49,040 --> 01:22:53,120
आज की हमारी स्ट्रीम का टॉपिक भी है तो वो इसलिए भी हो रहा है क्योंकि वर्ण

1193
01:22:53,120 --> 01:22:57,440
व्यवस्था जो जन्म से नहीं मानी लोगों ने उसको जन्म से ना मानकर

1194
01:22:57,440 --> 01:23:02,000
इन्होंने जो वैकल्पिक रूप से कर दी ये भी बहुत बड़ा कारण है।

1195
01:23:02,000 --> 01:23:06,000
मुझे याद है जब ये डायरेक्ट एक्शन डे हुआ था तो उसमें एक गोपाल पाठा

1196
01:23:06,000 --> 01:23:10,400
नाम का एक व्यक्ति था जो कि अपना मेरे कसाई

1197
01:23:10,400 --> 01:23:15,040
था वो पर वो क्षत्रिय वर्ण से था उस व्यक्ति ने

1198
01:23:15,040 --> 01:23:19,280
जो है वो अपना धर्म को फॉलो किया और

1199
01:23:19,280 --> 01:23:23,280
गोपाल पाठा ने एक ही दिन में जब प्रत्युत्तर देना शुरू किया तो

1200
01:23:23,280 --> 01:23:27,280
जो सामने वाला पक्ष था जिसने दो दिन में कितने नरसंहार कर दिया था हिंदुओं का

1201
01:23:27,280 --> 01:23:31,680
वो पक्ष रुक गया इवन महात्मा गांधी जी को यहां से जाना पड़ा गोपाल पाठा

1202
01:23:31,680 --> 01:23:35,680
के हाथ पांव जोड़ने पड़े कि भाई रुक जा मत यह कर। तो गोपाल

1203
01:23:35,680 --> 01:23:39,840
पाठ ने कहा कि अगर मेरे हिंदू हिंदुओं पे अगर कोई भी

1204
01:23:39,840 --> 01:23:43,840
विधर्मी अगर कुछ भी करेगा तो मैं यह तब तक नहीं रोकूंगा जब तक मैं

1205
01:23:43,840 --> 01:23:48,000
10 गुना मारकाट नहीं कर दूं। तो वो व्यक्ति क्षत्रिय वर्ण

1206
01:23:48,000 --> 01:23:51,840
का था। हमारे वर्णाश्रम जो है वो जन्म से हटा

1207
01:23:51,840 --> 01:23:55,840
दिया गया। इसीलिए आज बंगाल की ये स्थिति हो गई

1208
01:23:55,840 --> 01:24:00,080
है। ये बात समझ में नहीं आ रही है लोगों को। आर एस मांझी क्या कर रहे हैं?

1209
01:24:00,080 --> 01:24:04,320
ब्राह्मण बना रहे हैं सबको। अब सब सबको तुम ब्राह्मण ही बना दोगे। तो जो क्षत्रिय

1210
01:24:04,320 --> 01:24:08,320
वाला काम है वह करेगा कौन? क्षत्रिय वाला काम कोई करेगा नहीं। वो

1211
01:24:08,320 --> 01:24:12,480
तो फिर उसी में क्या होता है कि हिंदू भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। क्योंकि

1212
01:24:12,480 --> 01:24:16,800
आपके पास क्षत्रिय है ही नहीं। क्योंकि आपके पास क्षत्रिय कौन है? वैकल्पिक रूप से मिलिट्री

1213
01:24:16,800 --> 01:24:20,960
और पुलिस वाले और पुलिस वाले किसके अधीन है? सरकार के अधीन। वो तो आएंगे नहीं ग्राउंड

1214
01:24:20,960 --> 01:24:25,040
लेवल पर रक्षा करने। तो जहां पर जब वो जन्म से अगर कोई क्षत्रिय

1215
01:24:25,040 --> 01:24:29,280
होगा वही व्यक्ति लड़ पाएगा। गा भी देखा ना महाराणा सांगा सांगा

1216
01:24:29,280 --> 01:24:34,320
राणा सांगा के लिए कुछ कहा था एक व्यक्ति ने संसद में तो क्या किया उन क्षत्रिय

1217
01:24:34,320 --> 01:24:38,400
लोगों ने जो जन्म से राजपूत थे उन्होंने उसकी ईंट से ईंट खड़ी

1218
01:24:38,400 --> 01:24:42,640
कर दी उसके घर को घेर लिया था मैंने वो वीडियो देखे उनमें

1219
01:24:42,640 --> 01:24:46,640
उन भाइयों की जो क्षत्रिय कुल के थे यहां से पूरा छिल गया पूरे

1220
01:24:46,640 --> 01:24:50,720
शरीर लेकिन उनके उफ तक नहीं है मुंह पे और वह कह रहे हैं कि हम अभी भी

1221
01:24:50,720 --> 01:24:54,960
लड़ेंगे हमारे जो राणा सांगा के लिए अगर किसी ने कोई भी

1222
01:24:54,960 --> 01:24:59,120
गलत बात कही तो हम उसको छोड़ेंगे नहीं तो वो होते हैं जन्म से क्षत्रिय

1223
01:24:59,120 --> 01:25:03,360
वाले तो वर्ण को जन्म से नहीं मानोगे तब भी यह प्रॉब्लम आएगी तो हिंदुओं को भागने

1224
01:25:03,360 --> 01:25:06,960
पर खड़ा होना पड़ेगा तो ये एक पॉइंट था अभी एक

1225
01:25:06,960 --> 01:25:11,120
मोहतरमा है या कौन है ये रिद्धिमा कपूर ये कह रहे हैं कि भारत के कई टुकड़े कर दिए कि हिंदू

1226
01:25:11,120 --> 01:25:15,200
केवल अकाट्य प्रमाण का प्रत्तर देता रह गया तो ये आपके लिए था जो मैंने

1227
01:25:15,200 --> 01:25:19,600
अभी कहा है अरे इन ऐसे लोगों को मुझे लेने दिया करिए मेरे मैं ऐसे

1228
01:25:19,600 --> 01:25:24,560
लोगों के लिए मुझे लगता है मेरा जन्म है भारत के कई टुकड़े हो गए

1229
01:25:24,560 --> 01:25:28,880
और हम क्या करते क्या बोला इन्होंने? क्या बोला? भारत

1230
01:25:28,880 --> 01:25:33,520
के कई टुकड़े हो गए और हिंदू केवल अकाट्य प्रमाण से प्रति उत्तर देता रहा।

1231
01:25:33,520 --> 01:25:37,600
हां, इसमें एक लाइन और जोड़ दीजिए। एक लाइन और जोड़ दीजिए कि हिंदू

1232
01:25:37,600 --> 01:25:41,600
केवल YouTube पे कमेंट करता रहा। हां हिंदू केवल

1233
01:25:41,600 --> 01:25:45,840
YouTube पे कमेंट कर रहा है। बिल्कुल। मैं ऐसे ही लोगों के लिए जन्मा हूं ना। वही

1234
01:25:45,840 --> 01:25:49,920
फैसला ऑन द स्पॉट। जी जी। है ना? भारत के कई टुकड़े

1235
01:25:49,920 --> 01:25:53,920
हो गए। मगर हिंदू केवल क्या करता रहा? दूसरे की किसी की फोटो

1236
01:25:53,920 --> 01:25:58,160
दूसरे को बदनाम करने के लिए और वो YouTube पर जाकर कमेंट करता

1237
01:25:58,160 --> 01:26:02,320
रहा। हो गया दिल इनका नकली है। हां नकली है।

1238
01:26:02,320 --> 01:26:06,400
दिल गार्डन गार्डन हो गया। खैर

1239
01:26:06,400 --> 01:26:10,400
खैर जी मैं ये कह रहा था अब एक बात आती है जो

1240
01:26:10,400 --> 01:26:14,600
हमने अभी बात की ना कि अपने शब्द प्रमाण को आप जो है आघात पहुंचा रहे

1241
01:26:14,600 --> 01:26:18,800
हो। अपने वैसे ही आचार्य कम है परंपरा प्राप्त। मगर आप जब

1242
01:26:18,800 --> 01:26:22,080
अपने परंपरा प्राप्त आचार्यों पर अविश्वास प्रकट कर रहे हो

1243
01:26:22,080 --> 01:26:26,120
तो आप जो है हिंदू धर्म को ही सनातन को नष्ट नष्ट करने पे तुले हो।

1244
01:26:26,120 --> 01:26:30,320
खैर अब बात आती है कि इसमें

1245
01:26:30,320 --> 01:26:34,640
एक चीज आ जाएगी कि भाई

1246
01:26:34,640 --> 01:26:38,640
गुरु अगर कोई ऐसा आचरण करे जो कि हमारे

1247
01:26:38,640 --> 01:26:43,040
सनातन धर्म के विरुद्ध हो तो हम

1248
01:26:43,040 --> 01:26:47,600
उसमें दोष दृष्टि ना रखें। ठीक है?

1249
01:26:47,600 --> 01:26:51,600
तो यहां पर दो बातें हो रही है। इसको समझ लीजिए। गुरु यदि

1250
01:26:51,600 --> 01:26:55,840
कुछ कह रहा है यह सत्य है और आप उस पर दोष दृष्टि

1251
01:26:55,840 --> 01:26:59,920
कर रहे हो तो इस इस प्रक्रिया

1252
01:26:59,920 --> 01:27:03,920
के द्वारा इस गतिविधि के द्वारा आप अपने सनातन को नष्ट कर

1253
01:27:03,920 --> 01:27:08,000
रहे हो। मगर गुरु ने सिखाया कि ये मैं तुम्हें जो

1254
01:27:08,000 --> 01:27:12,000
ग्रंथ दे रहा हूं इसमें ये अमुक अमुक जो लाइन है इनका कोई भी

1255
01:27:12,000 --> 01:27:16,240
वो करे उल्लंघन इसमें जो धर्म है इसका

1256
01:27:16,240 --> 01:27:21,200
यदि कोई उल्लंघन करे तो वो आचरण अधर्म युक्त ही मानना

1257
01:27:21,200 --> 01:27:25,600
तो यदि तुम गुरु के वचन वचनों को वचनों

1258
01:27:25,600 --> 01:27:29,920
के प्रति गुरु के द्वारा दी जाने वाली जो सीख है उसके

1259
01:27:29,920 --> 01:27:34,000
प्रति जब तुम अविश्वास दिखाओगे तो वहां पर आप सनातन पर

1260
01:27:34,000 --> 01:27:37,280
प्रहार करोगे। मगर गुरु कह रहा है कि तुम्हारा यह

1261
01:27:37,280 --> 01:27:41,280
ग्रंथ है और इसमें लिखी

1262
01:27:41,280 --> 01:27:45,440
हुई एक एक बात सत्य है और फिर भी गुरु का कोई आचरण उसके विरुद्ध

1263
01:27:45,440 --> 01:27:49,840
जा रहा है तो हां वहां उस आचरण पर आप कह सकते हो

1264
01:27:49,840 --> 01:27:53,920
गुरु के प्रति अविश्वास नहीं प्रकट कर सकते। अगर करोगे तो

1265
01:27:53,920 --> 01:27:58,200
सनातन पर आप सनातन को नष्ट करने की तैयारी कर सकते।

1266
01:27:58,200 --> 01:28:02,560
आचरण वो कह रहा है हां इसमें लिखा है मदिरापान करना मना

1267
01:28:02,560 --> 01:28:06,560
है ठीक बात है मगर वो मदिरापान कर रहा है वहां पर वो आप

1268
01:28:06,560 --> 01:28:10,640
गुरु से कह सकते हो कि आप मद्रापान तो वो भी कहेगा करपात्री जी कहते थे

1269
01:28:10,640 --> 01:28:14,640
कि जहां पर शास्त्रों में और गुरु के उसमें अंतर आ

1270
01:28:14,640 --> 01:28:20,040
जाए वहां पर शास्त्र को प्रमाण प्रधानता देना मगर वो जो शास्त्र

1271
01:28:20,040 --> 01:28:24,240
होंगे वो भी तो गुरु से ही मिले होंगे तो उनहीं

1272
01:28:24,240 --> 01:28:28,240
शास्त्रों को शास्त्र मानोगे ना जो गुरु से मिले हैं या किसी

1273
01:28:28,240 --> 01:28:32,720
इस्लाम वाले के द्वारा दे देने पर भी तुम मान लोगे कि यह भी शास्त्र है।

1274
01:28:32,720 --> 01:28:37,120
कुरान को भी मान लोगे शास्त्र है। बाइबल को भी मान लोगे शास्त्र है।

1275
01:28:37,120 --> 01:28:41,200
तो गुरु के प्रति अविश्वास प्रकट करना एक अलग चीज है। और

1276
01:28:41,200 --> 01:28:45,200
गुरु का कोई आचरण जो शास्त्र से बाहर जा रहा है उस

1277
01:28:45,200 --> 01:28:49,200
पर प्रश्न करना एक अलग चीज है। गुरु के प्रति अविश्वास

1278
01:28:49,200 --> 01:28:52,560
प्रकट नहीं कर सकते। गुरु जिन शास्त्रों के लिए कहेगा

1279
01:28:52,560 --> 01:28:57,520
कि यह शास्त्र हमारे शास्त्र है वही शास्त्र शास्त्र है।

1280
01:28:57,520 --> 01:29:01,600
और फिर उन शास्त्रों के आधार पर यदि गुरु का कोई आचरण

1281
01:29:01,600 --> 01:29:06,080
दहिक रूप से उसके बाहर जा रहा है तो आप प्रश्न कर सकते हो।

1282
01:29:06,080 --> 01:29:10,080
मगर आप गुरु की अगर गुरु की क्रेडिबिलिटी पर ही उंगली उठा दोगे कि ये

1283
01:29:10,080 --> 01:29:14,080
गुरु झूठ बोल रहा है। यहां पे वो अज्ञानी हो गया। यहां पे वो मूर्ख हो गया या वो

1284
01:29:14,080 --> 01:29:18,720
यहां पर लालच वश बोल रहा है। यहां पे वो द्वेष वश बोल रहा है। तो क्या किया आपने?

1285
01:29:18,720 --> 01:29:22,720
अपने शब्द प्रमाण को खत्म कर दिया। नष्ट कर दिया। फिर क्या होगा कि

1286
01:29:22,720 --> 01:29:27,760
उसके द्वारा दिया गया जो शास्त्र है। वह भी शास्त्र नहीं है।

1287
01:29:27,760 --> 01:29:32,000
कैसे है शास्त्र बताओ? तो यह बातें हैं

1288
01:29:32,000 --> 01:29:36,560
ध्यान रखने की है कि हमें हिंदुओं को

1289
01:29:36,560 --> 01:29:40,720
यूनफॉर्म होने की आवश्यकता है और हमें हम

1290
01:29:40,720 --> 01:29:44,720
हिंदू जो बटे हुए हैं उनको एक शत्रु होने की आवश्यकता है।

1291
01:29:44,720 --> 01:29:48,880
उनको संगठित होने की आवश्यकता है। संगठित होने के लिए हमें चाहिए

1292
01:29:48,880 --> 01:29:52,880
होंगी। हमें चाहिए होगी संशय से हमारा निवारण। जिन

1293
01:29:52,880 --> 01:29:56,960
संशयों के कारण हम बटे हुए हैं। संशय क्या है? चार 40

1294
01:29:56,960 --> 01:30:00,960
संशयात्मा विनश्यति हम संशयों के कारण बटे हुए हैं।

1295
01:30:00,960 --> 01:30:05,040
किसी का कुछ संशय किसी का कुछ संशय है तो हम लोग एक

1296
01:30:05,040 --> 01:30:07,920
हो सकते हैं जब हमारे संशय संशय जो है वो कटे

1297
01:30:07,920 --> 01:30:12,320
हैं। कुछ कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों को लेकर हम एक शत्रु

1298
01:30:12,320 --> 01:30:16,640
एक मत हो। तो हमारे संशय कटते हुए हमें जो सार्वभौम सिद्धांत

1299
01:30:16,640 --> 01:30:21,440
है वो कहां से मिलेंगे? गुरु से। गुरु कौन होगा?

1300
01:30:21,440 --> 01:30:25,520
जो परंपरा प्राप्त हो।

1301
01:30:25,520 --> 01:30:29,600
ठीक है? तो हमें हमारे सार्वभौम सिद्धांत जिन सिद्धांतों

1302
01:30:29,600 --> 01:30:33,600
के आधार पर हम हम अपने पड़ोस में रहने वाले हिंदू को अपने

1303
01:30:33,600 --> 01:30:38,840
साथ खड़ा कर सकते हैं वो सिद्धांत हमें गुरु से मिलते

1304
01:30:38,840 --> 01:30:43,040
हैं। परंपरा प्राप्त गुरु।

1305
01:30:43,040 --> 01:30:47,120
तो यह पहला चरण है। आगे आने वाले वीडियो में

1306
01:30:47,120 --> 01:30:51,360
हम लोग बात करेंगे अह धर्मामीटर के बारे में कि कौन किस

1307
01:30:51,360 --> 01:30:55,440
प्रकार का हिंदू है, कौन किस प्रकार का आस्तिक है, कौन किस प्रकार का

1308
01:30:55,440 --> 01:30:59,440
विधर्मी है और उसमें आपको थोड़ी सरलता होगी लोगों

1309
01:30:59,440 --> 01:31:03,760
को समझने में वो जरूर देखिएगा और इसके

1310
01:31:03,760 --> 01:31:07,920
बाद बिल्कुल एक प्रैक्टिकली एक योजना है जो हम तीन से चार दिन

1311
01:31:07,920 --> 01:31:12,000
में आपके सामने प्रस्तुत कर सक कर कर देंगे जिसके द्वारा आप यह

1312
01:31:12,000 --> 01:31:16,480
समझ पाएंगे कि आप एक सामान्य से सामान्य व्यक्ति होते हुए भी

1313
01:31:16,480 --> 01:31:20,320
किस प्रकार अपने धर्म की रक्षा करने में निमित्त बन सकते हैं।

1314
01:31:20,320 --> 01:31:24,560
जी सनातन शंकर जी बिल्कुल बिल्कुल जो

1315
01:31:24,560 --> 01:31:28,720
आपने पांच सिद्धांत बताए और जो आप ये सीरीज लेकर आने

1316
01:31:28,720 --> 01:31:32,800
चाह रहे हैं जो वो भी बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि आज जो हमारा

1317
01:31:32,800 --> 01:31:37,120
समाज विघटित हो गया है संगठनों के नाम पर, संप्रदायों के नाम पर और संप्रदाय

1318
01:31:37,120 --> 01:31:41,360
भी कैसे जो कि गुरु शिष्य परंपरा से नहीं चल रहे हैं। वह स्वषित

1319
01:31:41,360 --> 01:31:45,440
रूप से ऐसे संगठन बने पड़े हैं। ये बहुत बड़ा कारण है आज जो बंगाल में

1320
01:31:45,440 --> 01:31:49,680
हो रहा है उसके लिए और जो पांच सिद्धांत हमारे हैं उनको

1321
01:31:49,680 --> 01:31:53,840
फॉलो नहीं कर पा रहा है हिंदू वो भी बहुत बड़ा रीजन है वर्णाश्रम

1322
01:31:53,840 --> 01:31:57,920
को आप जन्म फॉलो तो दूर की बात है

1323
01:31:57,920 --> 01:32:01,920
उन्हें जानता ही नहीं है जानता ही नहीं है वो भी बात है कि सबसे

1324
01:32:01,920 --> 01:32:06,080
पहले तो पता होना चाहिए कुल मिलाकर के

1325
01:32:06,080 --> 01:32:10,240
अगर हम अभी आज की पूरी चर्चा का अगर निचोड़ देखें तो

1326
01:32:10,240 --> 01:32:14,240
हिंदू की जो यह दुर्दशा आज बंगाल में दिख रही जो हिंदू

1327
01:32:14,240 --> 01:32:18,480
को दबाया जा रहा है उसका कारण है हिंदू जो है बटा हुआ है

1328
01:32:18,480 --> 01:32:24,360
ब और बटे हुए का कारण है संशय अर्थात उसके

1329
01:32:24,360 --> 01:32:28,480
पास सनातन के संबंध में जो सार्वभौम सिद्धांत है

1330
01:32:28,480 --> 01:32:33,480
वो नहीं है और सार्वभौम सिद्धांत ना होने का

1331
01:32:33,480 --> 01:32:36,160
कारण सार्वभौम सिद्धांत

1332
01:32:36,160 --> 01:32:40,240
ना होने का कारण क्या है गुरु

1333
01:32:40,240 --> 01:32:44,560
के प्रति अनभिज्ञता गुरु का अभाव

1334
01:32:44,560 --> 01:32:48,640
और फिर गुरु में भी गुरु होने पर भी क्या

1335
01:32:48,640 --> 01:32:53,680
वहां पर विकृति है कि कोई अप्रामाणिक गुरु भी गुरु है

1336
01:32:53,680 --> 01:32:57,680
ठीक है तो फिर वहां पर क्या है उसका निवारण क्या है कि

1337
01:32:57,680 --> 01:33:02,240
परंपरा प्राप्त गुरु और जब ये

1338
01:33:02,240 --> 01:33:06,640
कुछ इस तरीके से जो हमें धर्म प्राप्त होता है परंपरा प्राप्त आचार्यों

1339
01:33:06,640 --> 01:33:10,960
से तो हमें तीन चीजें मिलती है वो होती है

1340
01:33:10,960 --> 01:33:15,440
सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत

1341
01:33:15,440 --> 01:33:19,520
धर्म ये तीन चीजें हमें मिलती है और यही वो तीन घटक

1342
01:33:19,520 --> 01:33:23,760
है जो हमें एक कर सकते हैं। तो ये आज का था थ्योरिकली

1343
01:33:23,760 --> 01:33:28,320
हमने जाना कि हमारा वैचारिक अप्रोच क्या होना चाहिए सनातन

1344
01:33:28,320 --> 01:33:32,400
को संगठित करने के लिए हिंदुओं को संगठित करने के लिए। अभी इसके

1345
01:33:32,400 --> 01:33:36,640
बाद हम एक और वैचारिक लाएंगे एक से दो दिन में और उसके बाद आपके समक्ष

1346
01:33:36,640 --> 01:33:40,640
प्रस्तुत करेंगे। ग्राउंड रियलिटी ग्राउंड में आप क्या कर सकते हैं? एक

1347
01:33:40,640 --> 01:33:44,880
सामान्य हिंदू होते हुए अपने धर्म की रक्षा में कैसे निमित्त

1348
01:33:44,880 --> 01:33:49,280
बन सकते हैं। ठीक है जी सनातन शंकर जी आप कुछ बताएं

1349
01:33:49,280 --> 01:33:51,840
उसके बाद हम इसको विराम

1350
01:33:51,840 --> 01:33:56,000
जी जी तो ये बहुत इंपॉर्टेंट है कि सबसे पहले हमें यह समझना

1351
01:33:56,000 --> 01:34:00,240
पड़ेगा कि हमारे सनातन धर्म के ऐसे कौन से सिद्धांत हैं

1352
01:34:00,240 --> 01:34:04,480
जिनको के हम यह मानेंगे कि अकाट्य सिद्धांत

1353
01:34:04,480 --> 01:34:08,720
है। इन सिद्धांतों की कोई काट नहीं है और मोटा-मोटा रूप से जो

1354
01:34:08,720 --> 01:34:13,360
भी मजहब वाले हैं या दूसरे

1355
01:34:13,360 --> 01:34:17,360
संप्रदायों को मानने वाले हैं वो भी मोटा-मोटी रूप से इसको मानते जरूर

1356
01:34:17,360 --> 01:34:21,520
हैं। लेकिन कहीं ना कहीं वो बीच में मिस कर जाते

1357
01:34:21,520 --> 01:34:25,520
हैं। जैसे परंपरा मिस कर गए या फिर उन्होंने क्या किया? वही पे वही

1358
01:34:25,520 --> 01:34:30,160
पर वो विरोधी हो जाते हैं। हां वहीं पे वो विरोधी हो जाते हैं। अच्छा स्वषित

1359
01:34:30,160 --> 01:34:34,320
रूप से वो ये मनमुखी अनुवाद करने लग जा रहे हैं। आचार्य प्रशांत कुछ अलग

1360
01:34:34,320 --> 01:34:38,400
अनुवाद कर दे रहे भगवत गीता के किसी श्लोक का। आर्य समाज

1361
01:34:38,400 --> 01:34:42,480
वालों ने तो भगवत गीता के वो 630 श्लोक हटा ही दिए। जहां पर

1362
01:34:42,480 --> 01:34:46,640
श्री कृष्ण जो है योग की बात कर रहे हैं। परंपरा

1363
01:34:46,640 --> 01:34:50,720
की बात कर रहे हैं। आत्मा और परमात्मा के विषय में बात कर रहे हैं। वो सब उन्होंने हटा

1364
01:34:50,720 --> 01:34:55,040
दिए। तो उनको तो बात अलग ही उनको तो कर ही नहीं सकते। तो मनमुखी

1365
01:34:55,040 --> 01:34:59,120
रूप से अनुवाद किए जा रहे हैं। और फिर कुछ लोग तो मैंने यह भी सुने हैं कि जो

1366
01:34:59,120 --> 01:35:03,440
कहते हैं कि जी हमारे गुरु का कोई गुरु नहीं है। हमारे गुरु को स्वयं

1367
01:35:03,440 --> 01:35:07,000
जो ज्ञान है वो ईश्वर ने डायरेक्ट दिया है। ऐसे भी मैंने सुने

1368
01:35:07,000 --> 01:35:11,200
हैं। जैसे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान वाले हैं। उनका उनके

1369
01:35:11,200 --> 01:35:15,440
गुरु हैं। वो अभी है नहीं दुनिया में। वो 10 साल से कहते हैं शरीर

1370
01:35:15,440 --> 01:35:19,440
छोड़ के गए हुए हैं। वो वापस आएंगे। तो उन्होंने बोला कि मेरे को मेरे को कहा था कि

1371
01:35:19,440 --> 01:35:23,440
भैया तुम दीक्षा ले लो। तो मैंने कहा जब आपके गुरु वापस आएंगे मैं तब उनसे लूंगा

1372
01:35:23,440 --> 01:35:27,440
दीक्षा जब वो जीवित हो जाएंगे तो वहां पर उनके पास भी उत्तर

1373
01:35:27,440 --> 01:35:31,440
नहीं था क्योंकि उनके उनके गुरु का गुरु कोई है ही नहीं। तो यह बहुत इंपॉर्टेंट

1374
01:35:31,440 --> 01:35:35,440
बात है। बंगाल की स्थिति का जो कारण है वो यही है

1375
01:35:35,440 --> 01:35:39,600
कि हम अपने मूल सनातन धर्म से हट गए हैं। हम अपने

1376
01:35:39,600 --> 01:35:43,760
मूल सनातन धर्म को नहीं पहचान पा रहे हैं। यह बहुत बड़ा बहुत बड़ा

1377
01:35:43,760 --> 01:35:47,920
रीजन है कि जो बंगाल में स्थिति हो रही है और वर्णाश्रम को

1378
01:35:47,920 --> 01:35:51,920
आप जन्म से नहीं मान रहे हो। ये भी इसका बहुत बड़ा कारण है। ये ये

1379
01:35:51,920 --> 01:35:56,080
उसमें ही आ गया ना शाश्वत धर्म में शाश्वत धर्म धर्म तीन घटक

1380
01:35:56,080 --> 01:36:00,480
बताए जो मैंने पांच सिद्धांत दिए हैं। उसमें शुरू के जो दो तीन सिद्धांत हैं

1381
01:36:00,480 --> 01:36:04,560
वो आपके प्रैक्टिकली काम ऐसे आते हैं कि जब आप किसी को लेने जाओगे अपने

1382
01:36:04,560 --> 01:36:08,560
साथ खड़ा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाने के लिए कि चलो भाई धर्म

1383
01:36:08,560 --> 01:36:12,960
की रक्षा करनी है तो अगर आपके पास नास्तिकता का उत्तर होगा

1384
01:36:12,960 --> 01:36:16,960
तो आप वहां पर अगर वो नास्तिक मिल गया नास्तिक नास्तिकता वहां

1385
01:36:16,960 --> 01:36:21,280
बोलने वाला मिल गया नास्तिकता से लोग प्रभावित हो रहे होंगे तो आपके पास नास्तिकता

1386
01:36:21,280 --> 01:36:22,240
का उत्तर होगा

1387
01:36:22,240 --> 01:36:26,480
क्या उत्तर है अगर वहां पर विधर्मी मिल गया कि हम जो है

1388
01:36:26,480 --> 01:36:30,560
उस ईश्वर को नहीं मानते जैसे तुम मानते हो जैसे इस्लाम

1389
01:36:30,560 --> 01:36:34,800
और बाइबल अगर वो मिल गया तो आपके पास क्या उत्तर होगा आपके

1390
01:36:34,800 --> 01:36:39,440
पास उत्तर होगा ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तुम्हारा ईश्वर क्या अवतार नहीं ले सकता क्या

1391
01:36:39,440 --> 01:36:43,760
तो वहां पर आप विधर्मी को परास्त करोगे और

1392
01:36:43,760 --> 01:36:48,200
अपने लोगों को वहां जो उससे प्रभावित हो रहे होंगे उनको ला पाओगे अपने

1393
01:36:48,200 --> 01:36:52,800
उस क्या कहते हैं अभियान से जोड़ पाओगे फिर उसके बाद

1394
01:36:52,800 --> 01:36:56,800
फिर उसके बाद तीसरा फिर तीसरा व्यक्ति कौन मिलेगा जो मतलब

1395
01:36:56,800 --> 01:37:00,960
यह जो दूसरा चरण है ना उसमें या तो व्यक्ति सर्वशक्तिमान विरोधी

1396
01:37:00,960 --> 01:37:06,280
होगा और या फिर वो वेद विरोधी होगा। तो वेद विरोधी हो गया

1397
01:37:06,280 --> 01:37:10,400
ये विधर्म वेद विरोध में सर्वशक्तिमान का

1398
01:37:10,400 --> 01:37:14,400
विरोध भी शामिल है। तो विधर्मी हो गए। मुस्लिम मिल गए कि हमारे पास

1399
01:37:14,400 --> 01:37:18,640
तो स्वयं ऊपर वाले का जिब्राइल आया था। उसने भेजा

1400
01:37:18,640 --> 01:37:22,640
है। तो हमारे पास स्वयं ये आया था। तो उसका उत्तर क्या है? ईश्वर

1401
01:37:22,640 --> 01:37:27,120
के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणित जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। लो

1402
01:37:27,120 --> 01:37:31,120
उत्तर नहीं था मुफ्ती जसो के पास हम गए थे जा चुके

1403
01:37:31,120 --> 01:37:35,120
पूछा था मैंने कि कैसे तोबा डब्बा चब्बा हो

1404
01:37:35,120 --> 01:37:37,400
गया था हालांकि उस समय

1405
01:37:37,400 --> 01:37:41,760
तो हम बस एक क्या कहेंगे कि एक प्रयोग

1406
01:37:41,760 --> 01:37:45,880
करने गए थे प्रयोग कि जो मैं सोच रहा हूं उसकी क्या वो है

1407
01:37:45,880 --> 01:37:50,000
स्थिति है ना मैंने भी वो वीडियो देखा था मैंने देखा था

1408
01:37:50,000 --> 01:37:54,000
वो वीडियो तो लास्ट में वो जब उनके पास उत्तर नहीं था तो वह इधर उधर की

1409
01:37:54,000 --> 01:37:58,000
बात करने लग गए थे फिर पहला प्रश्न मेरा विधर्मियों से ही था जो लोग यह

1410
01:37:58,000 --> 01:38:02,000
सोचते हैं कि मैं अपनों के पीछे पड़ा हूं। कुछ लोग ऐसे भी है ना तुम हिंदुओं से ही प्रश्न करते

1411
01:38:02,000 --> 01:38:06,400
हो। जाओ जाकर देखो। पहला प्रश्न विधर्मी से किया था मैंने

1412
01:38:06,400 --> 01:38:10,480
कि तुम्हारा ईश्वर सब कुछ कर सकता है। हां किसी भी नियम के नीचे

1413
01:38:10,480 --> 01:38:14,720
नहीं है। नहीं अवतार ले सकता है? नहीं वो तो नहीं ले सकता। तो

1414
01:38:14,720 --> 01:38:18,720
नियम लागू हो गया। ये पहला प्रश्न विधर्मियों से था। खैर

1415
01:38:18,720 --> 01:38:22,960
तो ये जो शुरू के तीन सिद्धांत है यही आपको जीत दिलाते हैं। इसी

1416
01:38:22,960 --> 01:38:27,520
में छुपा है। परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म।

1417
01:38:27,520 --> 01:38:31,760
मोक्ष किससे रिलेटेड है? नास्तिकता के उत्तर से। नास्तिक को आस्तिक

1418
01:38:31,760 --> 01:38:36,320
कैसे बनाएंगे? तू भी मोक्ष ढूंढ रहा है। तो

1419
01:38:36,320 --> 01:38:40,480
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान मोक्ष स्वरूप ईश्वर कौन होता है?

1420
01:38:40,480 --> 01:38:44,640
मोक्ष स्वरूप। तो संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ

1421
01:38:44,640 --> 01:38:48,640
रहा है। फिर वह भले ही खुद को नास्तिक क्यों ना कहता हो। यह हो गया

1422
01:38:48,640 --> 01:38:52,400
परम स्वतंत्र मोक्ष। फिर विधर्मी को आप चुप कराओगे।

1423
01:38:52,400 --> 01:38:56,880
कैसे कराओगे? ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। विधर्मी को नहीं

1424
01:38:56,880 --> 01:39:00,880
सनातना भाष को। जितने सनातना भाष मिलेंगे

1425
01:39:00,880 --> 01:39:04,880
वो सब ईश्वर को बाधित करेंगे। ईश्वर यह नहीं कर सकता वो नहीं कर सकता।

1426
01:39:04,880 --> 01:39:09,120
सनातना भाष तो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है।

1427
01:39:09,120 --> 01:39:12,600
और फिर तीसरा कौन मिलेगा?

1428
01:39:12,600 --> 01:39:16,640
विधर्मी विधर्मी क्या करेगा? वेद को भी नकारेगा और सर्वशक्तिमान

1429
01:39:16,640 --> 01:39:20,640
ईश्वर को भी नकारेगा। तो ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक

1430
01:39:20,640 --> 01:39:25,360
जिन्हें ईश्वर ने भी ना रचा हो। तो तीनों चीजें हो गई। परम स्वतंत्र मोक्ष

1431
01:39:25,360 --> 01:39:29,680
शाश्वत वो सर्वशक्तिमान ईश्वर और तीसरा शाश्वत धर्म। ये

1432
01:39:29,680 --> 01:39:33,840
तीन चीजें आपको बचाती हैं। और ये तीन चीजें आपको प्राप्त कैसे

1433
01:39:33,840 --> 01:39:37,840
होती हैं? तो चौथा चौथा आ गया कि परंपरा प्राप्त

1434
01:39:37,840 --> 01:39:42,000
गुरु परंपरा प्राप्त आचार्य और पांचवा आ गया परंपराओं

1435
01:39:42,000 --> 01:39:46,920
में परंपरा शंकराचार्य परंपरा शंकर परंपरा

1436
01:39:46,920 --> 01:39:51,840
तो क्या कहते हैं वो नारायण समारंभा

1437
01:39:51,840 --> 01:39:56,400
शंकराचार्य मध्यमाम अस्मदाचार्य पर अस्मदाचार्य परताम

1438
01:39:56,400 --> 01:40:01,120
वंदे गुरु परंपरा तो ये पांच सिद्धांत आपके पास होने चाहिए

1439
01:40:01,120 --> 01:40:05,120
आप समाज को एक कर पाओगे संगठित कर पाओगे लोगों को अपने

1440
01:40:05,120 --> 01:40:07,840
साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा कर पाओगे।

1441
01:40:07,840 --> 01:40:12,080
आप कितने भी सामान्य व्यक्ति क्यों ना हो आप एक क्रांति ला पाओगे

1442
01:40:12,080 --> 01:40:16,160
अपने समाज में अपने परिवार में अपने रिश्ते

1443
01:40:16,160 --> 01:40:20,240
नाते अपने कुल खानदान है ना जी सनातन

1444
01:40:20,240 --> 01:40:24,320
जी पूरा करें फिर आज का हां हां नहीं आपने सारा कुछ

1445
01:40:24,320 --> 01:40:28,400
ही कवर कर लिया जो बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट थे काफी बढ़िया ये

1446
01:40:28,400 --> 01:40:32,400
स्ट्रीम रही है जी तो हमें हमें भी काफी कुछ जानने को मिलता है आपके

1447
01:40:32,400 --> 01:40:36,720
चैनल से और अ जो मेरे मेरे अंदर जो ये आया प्रेरणा

1448
01:40:36,720 --> 01:40:40,800
आई वो भी आपसे ही आई है। मैं कई बार बोल भी चुका हूं इस बात को कि आपसे बड़ी

1449
01:40:40,800 --> 01:40:45,040
प्रेरणा मिलती है इस बात को लेकर। चाहे कोई कुछ भी बोले उससे मुझे फर्क

1450
01:40:45,040 --> 01:40:49,040
नहीं पड़ता। पर विधर्म के अगेंस्ट

1451
01:40:49,040 --> 01:40:53,280
में और अपने ही हिंदुओं के अंदर जो संप्रदाय हैं उनके अगेंस्ट में बोलने की प्रेरणा

1452
01:40:53,280 --> 01:40:57,520
मुझे आपसे मिली है। ये बात मैं किसी भी मंच पर बोलने के लिए मतलब वो

1453
01:40:57,520 --> 01:41:01,680
इस बात का गलत अर्थ निकाल लेंगे कि अपने हिंदुओं में जो संप्रदाय उनके

1454
01:41:01,680 --> 01:41:05,960
खिलाफ बोलने की? इसको ऐसे बोले का मतलब है संगठन ऐसे

1455
01:41:05,960 --> 01:41:11,600
बोले ऐसे बोले जो स्वयं को हिंदू कह तो रहा है

1456
01:41:11,600 --> 01:41:15,680
हां सनातनास नहीं तो ये लोग तो इन लोगों को

1457
01:41:15,680 --> 01:41:20,000
सन सनातनाभास हां ये सबसे सही वर्ड है सनातना आभास

1458
01:41:20,000 --> 01:41:22,880
के भैया इस वालों के साथ खड़े होते हैं तो हरे रामा

1459
01:41:22,880 --> 01:41:26,960
हरे कृष्णा ले चल चल देते हैं उनके सिद्धांतों को देखते हो तो

1460
01:41:26,960 --> 01:41:31,200
वहां पर आप उसको मूल सनातन धर्म से बिल्कुल अलग पाते हो आर्य

1461
01:41:31,200 --> 01:41:35,200
समाज के साथ आप चलते हो दयानंद सरस्वती सत्यार्थ प्रकाश की जय हो

1462
01:41:35,200 --> 01:41:39,280
ऐसे बोलते हुए चलते हो तो आप अपने आप को सोचते हो कि मैं हिंदू हूं लेकिन वहां पर

1463
01:41:39,280 --> 01:41:43,840
आप ये मूर्खता कर रहे होते हो कि आप परंपरा को भी नकार रहे होते हो अपने अवतारों

1464
01:41:43,840 --> 01:41:47,840
को भी नकार रहे होते हो राम कृष्ण को भी नकार रहे होते

1465
01:41:47,840 --> 01:41:51,840
हो और जो हमारे सनातन धर्म में मंदिर में हम पूजा करने जाते हैं उसको भी

1466
01:41:51,840 --> 01:41:56,000
आप नकार रहे हो मतलब सारा कुछ आपने खत्म कर दिया एक तरह से रामपाल

1467
01:41:56,000 --> 01:42:00,000
के साथ तो बिल्कुल वो तो बिल्कुल ही आउट ऑफ सिलेबस चीजें हैं

1468
01:42:00,000 --> 01:42:04,480
तो वो सनातना आभास जो मुझे था और उसके अगेंस्ट में

1469
01:42:04,480 --> 01:42:08,480
बोलना अच्छा रामपाल के अगेंस्ट में आप बोल दो कोई कुछ नहीं बोलता लेकिन जब इस

1470
01:42:08,480 --> 01:42:12,560
के अगेंस्ट में बोलोगे तो 10 लोग खड़े हो जाते हैं। आर्य समाज के अगेंस्ट में खड़े बोलो

1471
01:42:12,560 --> 01:42:16,800
तो 10 लोग और खड़े हो जाते हैं। अरे भाई ये तो हिंदू ही है। हिंदुओं को बचा रहे हैं। क्योंकि उन्होंने

1472
01:42:16,800 --> 01:42:20,800
क्या किया है? एक ढिंढोरा पीटा है कि हम हिंदुओं

1473
01:42:20,800 --> 01:42:24,880
के लिए खड़े हैं। जबकि एक्चुअल में वो नहीं खड़े हैं। वो आपके विरोधी

1474
01:42:24,880 --> 01:42:29,520
हैं। लेकिन उन्होंने ढिंढोरा पीटते हैं। सब लोग इस पर मैं ये कहूंगा

1475
01:42:29,520 --> 01:42:33,600
जो लोग ऐसा कहते हैं उनको कभी

1476
01:42:33,600 --> 01:42:38,440
बस इतना नहीं हुआ है कि उनकी जो जो मान्यताएं हैं किसी ने उसको

1477
01:42:38,440 --> 01:42:42,800
बिल्कुल चरितार्थ रूप से काट दिया हो। बस इतना

1478
01:42:42,800 --> 01:42:46,880
हुआ है उनके जीवन में जो लोग ऐसे पक्ष लेने आते हैं जैसे मान

1479
01:42:46,880 --> 01:42:51,040
लीजिए कि कोई मूर्ति पूजक है और जो आपसे ये कह रहा है कि आर्य समाज

1480
01:42:51,040 --> 01:42:55,040
से क्यों बोल रहे हो? वह भी तो हिंदू ही है। क्या हुआ है? यह वो है। उसको बस

1481
01:42:55,040 --> 01:42:59,040
यह नहीं पता है कि अगर वह शिव जी का भक्त है तो उनके लिए लिखा हुआ

1482
01:42:59,040 --> 01:43:03,520
है कि जो है शिवजी तो है। क्या वो

1483
01:43:03,520 --> 01:43:07,600
है? ऐसे लिखा हुआ है ना। जी। तो उसको ये

1484
01:43:07,600 --> 01:43:11,600
सब चीजों से वो गुजरा नहीं है। इसलिए वो दूर ही दूर से बस स्थाई स्तर

1485
01:43:11,600 --> 01:43:15,840
पर। अच्छा रामपाल में क्यों खुश हो जाते हैं? वही लोग जो आर्य समाजियों का विरोध

1486
01:43:15,840 --> 01:43:20,320
करने पर रामपाल वाले में खुश हो जाते हैं। क्यों होते हैं? क्योंकि रामपाल

1487
01:43:20,320 --> 01:43:24,400
की चीजें वो देख रहे हैं जो यह वाली चीजें हैं कि अरे वेद को मत पढ़ो

1488
01:43:24,400 --> 01:43:28,720
और गीता बोलने वाला वो है यह है काल है राक्षस है तुमको

1489
01:43:28,720 --> 01:43:33,440
खाएगा तब वो तब उनको गुस्सा लगता है। अच्छा

1490
01:43:33,440 --> 01:43:37,440
कुल मिला के बात यही है कि उनकी किसी मान्यता को प्रत्यक्ष रूप

1491
01:43:37,440 --> 01:43:41,520
से जब तक कोई आर्य समाजी या इस वाला इस तरह का सनातन भासी क्रॉस नहीं

1492
01:43:41,520 --> 01:43:45,640
कर जाता है तब तक वो ऐसी बातें आपसे करते रहेंगे

1493
01:43:45,640 --> 01:43:49,840
मिलीजुली है ना जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल चलिए

1494
01:43:49,840 --> 01:43:53,520
फिर आने का सभी को आभार समय देने के लिए वैभव पालेवाल

1495
01:43:53,520 --> 01:43:57,760
जी एक प्रश्न बार-बार पूछ रहे हैं कि गायत्री मंत्र वाला पडकास्ट था

1496
01:43:57,760 --> 01:44:01,840
उसका सही उत्तर क्या है? मांगना चाहिए कि नहीं मांगना चाहिए? क्यों नहीं मांगना चाहिए?

1497
01:44:01,840 --> 01:44:05,920
जब तक हम व्यवहार को प्राप्त हैं इनका प्रश्न है वह

1498
01:44:05,920 --> 01:44:10,440
जो मैंने पूछा था ना गायत्री मंत्र में तो मांग रहे हैं। ध्यान

1499
01:44:10,440 --> 01:44:14,720
है गायत्री मंत्र में तो मांग रहे हैं। तो व्यवहार में है

1500
01:44:14,720 --> 01:44:18,880
जब तक तब तक हमें मांगना चाहिए और मांगने से मिलता

1501
01:44:18,880 --> 01:44:23,520
है। यह व्यवहार में सिद्ध है। दो तरह के सत्य हैं। व्यवहार

1502
01:44:23,520 --> 01:44:27,920
व्यवहारिक सत्य और पारमार्थिक सत्य। पारमार्थिक दृष्टि के अनुसार

1503
01:44:27,920 --> 01:44:32,080
आपको आपके कर्मों का फल मिलेगा। जी व्यवहारिक

1504
01:44:32,080 --> 01:44:36,400
दृष्टि के अनुसार आपने ईश्वर से कुछ मांगा है तो आपको मिला

1505
01:44:36,400 --> 01:44:40,960
है। सिंपल ठीक है। पारमार्थिक दृष्टि से देखेंगे

1506
01:44:40,960 --> 01:44:44,960
आध्यात्मिक दृष्टि से देखेंगे तो आपने जब राम नाम जपा भगवान से प्रार्थना

1507
01:44:44,960 --> 01:44:49,280
की तो आपके कर्म अच्छे होने लगे। भगवान का स्मरण करने के कारण

1508
01:44:49,280 --> 01:44:54,080
आपने अच्छे कर्म किए। उससे आपको अच्छा फल प्राप्त हो गया। यह क्या हुआ?

1509
01:44:54,080 --> 01:44:58,480
सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर। मगर एक व्यवहारिक दृष्टि से व्यवहारिक

1510
01:44:58,480 --> 01:45:03,200
दृष्टि से क्या हुआ? आपने मांगा आपको मिला तो व्यवहार

1511
01:45:03,200 --> 01:45:07,440
व्यवहार के अनुसार करना है तो आप मांगिए यही सोचिए कि भगवान

1512
01:45:07,440 --> 01:45:09,120
दे रहे हैं

1513
01:45:09,120 --> 01:45:13,600
यही सोचना है जैसे कि पृथ्वी गोल है वैज्ञानिक

1514
01:45:13,600 --> 01:45:17,680
मान्यता के अनुसार पृथ्वी गोल है परंतु

1515
01:45:17,680 --> 01:45:21,840
आप व्यवहार कैसा कर रहे हैं जैसी पृथ्वी आपको दिख रही है तो

1516
01:45:21,840 --> 01:45:25,920
वो सूक्ष्म दृष्टि हो गई कि पृथ्वी गोल है मगर व्यवहार नहीं कर रहे हो ना उसके उसके

1517
01:45:25,920 --> 01:45:30,000
अनुसार व्यवहार कैसा कर रहे हो कि पृथ्वी जो चपटी है।

1518
01:45:30,000 --> 01:45:34,400
चपटा मान के व्यवहार कर रहे हो ना? उसी तरीके से व्यवहार

1519
01:45:34,400 --> 01:45:38,560
क्या है? ईश्वर से मांगा जाता है। ईश्वर देते हैं। यह

1520
01:45:38,560 --> 01:45:42,720
व्यवहारिक सत्य है। और जी सूक्ष्म सत्य दूसरा

1521
01:45:42,720 --> 01:45:46,720
है। और ये जो आर्य समाजी हैं या ये जितने भी

1522
01:45:46,720 --> 01:45:50,880
लोग सनातन वासी हैं ये लोग अपने कस्टमाइज

1523
01:45:50,880 --> 01:45:55,120
तरीके से कहीं पर केवल व्यवहार को मानते हैं और कहीं पर केवल

1524
01:45:55,120 --> 01:45:59,200
परमार्थ को और कहीं पर परमार्थ और व्यवहार दोनों को मान लेते हैं। ये अपने

1525
01:45:59,200 --> 01:46:03,200
तरीके से चलते हैं। इनका कहीं केवल व्यवहार है। कहीं केवल परमार्थ

1526
01:46:03,200 --> 01:46:07,360
है। अब जैसे परमार्थ क्या हुआ कि अरे

1527
01:46:07,360 --> 01:46:11,600
वह तो कहता है मैं अजन्मा हूं। हां भाई पारमार्थिक रूप से अजन्मा

1528
01:46:11,600 --> 01:46:15,600
है ईश्वर। अब वो जन्म कैसे ले सकता है? तो यहां

1529
01:46:15,600 --> 01:46:20,080
इन्होंने केवल परमार्थ को माना। केवल परमार्थिक स्थिति पर वो कर दिया।

1530
01:46:20,080 --> 01:46:24,840
परमार्थ के आधार पर व्यवहार को काट दिया। व्यवहार में आत्मा भी तो अजन्मी

1531
01:46:24,840 --> 01:46:28,960
है। मगर वही तो व्यवहार में जन्म लेती हुई दिख रही है। प्रकट

1532
01:46:28,960 --> 01:46:33,120
हो रही है। तो कहीं पर वो व्यवहार को मानते हैं केवल। अच्छा व्यवहार

1533
01:46:33,120 --> 01:46:37,280
को केवल कैसे मानते हैं? अच्छा अच्छा अगर होता तो

1534
01:46:37,280 --> 01:46:41,520
यहां अभी बचाने क्यों नहीं आ रहा निर्भया केस में? ये केवल व्यवहार

1535
01:46:41,520 --> 01:46:45,600
कर दिया। अब वो सूक्ष्म दृष्टि छोड़ दी कि

1536
01:46:45,600 --> 01:46:49,680
भगवान जिसके साथ जो भी आचरण करता है उसके पीछे सूक्ष्मता होती

1537
01:46:49,680 --> 01:46:53,920
है कि उसका पीछे क्या प्रारब्ध है। उसने पीछे क्या कर्म किए हैं। कैसे

1538
01:46:53,920 --> 01:46:58,000
अच्छा एक बात सोचने की है कि

1539
01:46:58,000 --> 01:47:02,240
जिसको ब्रह्म ज्ञान हो वो ब्राह्मण इनके हिसाब से

1540
01:47:02,240 --> 01:47:06,400
ठीक है? तो उसका यज्ञ पवीत होता

1541
01:47:06,400 --> 01:47:10,400
है। जिन ऋषियों को इन्होंने वेदों के मंत्र दिए थे

1542
01:47:10,400 --> 01:47:14,480
ईश्वर ने उनका यज्ञ पवित होकर दिए थे। बिना यज्ञ

1543
01:47:14,480 --> 01:47:19,200
पवित के दिए थे। कैसे दिए?

1544
01:47:19,200 --> 01:47:23,200
तो जन्म से माना ना उनको। नहीं तो श्रंखला ही नहीं

1545
01:47:23,200 --> 01:47:27,600
चलेगी। श्रृंखला ही नहीं चलेगी। बिल्कुल। उनको जन्म से चुना ना

1546
01:47:27,600 --> 01:47:31,800
कि उनका प्रारब्ध ऐसा था कि उनको मंत्र दृष्टा बनाया

1547
01:47:31,800 --> 01:47:36,080
जाए। प्रारब्ध था ना मंत्र दृष्टा

1548
01:47:36,080 --> 01:47:40,160
बनाने के लिए मानना पड़ेगा। नहीं

1549
01:47:40,160 --> 01:47:44,400
तो यदि वो ऋषियों को मंत्र दृष्टा बनाते

1550
01:47:44,400 --> 01:47:48,400
हैं हमें क्यों नहीं बना रहे? बनाओ मैं तो

1551
01:47:48,400 --> 01:47:52,560
कहीं पर वह खाली व्यवहारिक हो जाता है आर्य समाज कहीं वह पारमार्थिक

1552
01:47:52,560 --> 01:47:56,720
हो जाता है केवल और कहीं वो व्यवहार परमार्थ दोनों को ले चलता

1553
01:47:56,720 --> 01:48:01,200
है ठीक है ये है तो मुझे लगता है संतुष्टिजनक

1554
01:48:01,200 --> 01:48:05,200
उत्तर मिल गया होगा और आने के लिए आपका सबका देखने के

1555
01:48:05,200 --> 01:48:09,760
लिए आभार और हम ये दो तीन वीडियो लाने वाले हैं आज हमने थ्योरिकल

1556
01:48:09,760 --> 01:48:13,840
हमारे हमारी थ्योरिकल अप्रोच कैसी होनी चाहिए अपने सनातन की

1557
01:48:13,840 --> 01:48:19,840
रक्षा के लिए सनातन को

1558
01:48:21,040 --> 01:48:25,120
सनातन को रक्षा करने के लिए और संगठित करने के लिए हमारी वैचारिक

1559
01:48:25,120 --> 01:48:29,120
अप्रोच कैसी होनी चाहिए इसी में एक वीडियो और आएगा थर्मामीटर वो

1560
01:48:29,120 --> 01:48:33,280
बहुत रोचक है इंटरेस्टिंग है आप लोग देखिएगा और उसके बाद हम लोग ग्राउंड रियलिटी

1561
01:48:33,280 --> 01:48:37,680
पे हमें क्या करना है उससे रिलेटेड एक आपके सामने एक चर्चा लाएंगे

1562
01:48:37,680 --> 01:48:41,680
बिल्कुल पिन पॉइंट कि आप अगर अपने धर्म की रक्षा में निमित्त बनना चाहते हैं

1563
01:48:41,680 --> 01:48:45,840
तो आप ये तो करिए कम से कम ठीक है जुड़ने के लिए सभी का आभार।

1564
01:48:45,840 --> 01:48:50,320
सनातन शंकर जी आपको भी बहुत सारा साधुवाद। आपने इतना समय दिया

1565
01:48:50,320 --> 01:48:54,400
और जय श्री राम। सभी का सभी का आभार। जय श्री राम।

1566
01:48:54,400 --> 01:48:58,400
जय श्री राम जी।
