1
00:00:00,240 --> 00:00:05,400
रहा कि एक प्रकल्प प्रारंभ कर दिया है। एक

2
00:00:05,400 --> 00:00:10,000
टूरस्थ ग्रामीण जैसा क्षेत्र है लखनऊ से लगा हुआ।

3
00:00:10,000 --> 00:00:14,160
वहां पर एक प्रकल्प चलाया कि वहां के जो निवासी

4
00:00:14,160 --> 00:00:18,320
हैं उनके जो वहां के बच्चे हैं

5
00:00:18,320 --> 00:00:22,400
कम आयु के हैं तो उनको हम निशुल्क शिक्षा वहां उपलब्ध करा रहे हैं।

6
00:00:22,400 --> 00:00:27,240
तो वहां पर एक केंद्र बनाया है जिसके बारे में अभी कुछ दिनों पहले हमने

7
00:00:27,240 --> 00:00:31,600
श्स के माध्यम से आप लोगों को अवगत भी कराया था

8
00:00:31,600 --> 00:00:36,560
तो वहां पर शिक्षा रक्षा सेवा का एक केंद्र उसको बनाने की योजना है।

9
00:00:36,560 --> 00:00:40,720
आज वहां पर कार्यक्रम भी था तो आज

10
00:00:40,720 --> 00:00:45,040
थोड़ा सा अंधड़ आंधी चली थी जिसकी वजह से थोड़ा सा

11
00:00:45,040 --> 00:00:49,440
अव्यवस्था हो गई। परिणाम स्वरूप फल स्वरूप

12
00:00:49,440 --> 00:00:54,600
यहां पर जो है विलंब से आपके सामने उपस्थित हुए।

13
00:00:54,600 --> 00:00:58,880
खैर तो शीर्षक आपने देख ही लिया है।

14
00:00:58,880 --> 00:01:03,680
थोड़े से गंभीर विषय हैं। पिछले कुछ दिनों से जो एक

15
00:01:03,680 --> 00:01:07,840
मामला चल रहा है उसी में कुछ नए तथ्य सामने

16
00:01:07,840 --> 00:01:12,200
आए हैं तो आप लोगों को अवगत कराना हमने उचित

17
00:01:12,200 --> 00:01:15,600
समझा। अब सबसे पहली बात यह है कि आज बहुत

18
00:01:15,600 --> 00:01:19,600
सारी संभावनाएं आपको दिखाई देने वाली है।

19
00:01:19,600 --> 00:01:23,600
बहुत सारे ऐसे गंभीर तथ्य भी और

20
00:01:23,600 --> 00:01:27,600
प्रमाण के साथ हम कुछ बताने वाले हैं। जिनसे बहुत सारी

21
00:01:27,600 --> 00:01:31,680
संभावनाएं आपको दिखने लगेंगी। और वह संभावनाएं क्या होंगी, वह अंत तक

22
00:01:31,680 --> 00:01:35,920
आते-आते आपको पता ही चल जाएगा। मगर जैसा कि शीर्षक है तो

23
00:01:35,920 --> 00:01:40,000
उसी से रिलेटेड बात करेंगे। हम एक

24
00:01:40,000 --> 00:01:44,080
एक नजर में एक ऑब्जरवेशन में एक

25
00:01:44,080 --> 00:01:48,240
कहेंगे कि इस पूरी घटना को अगर एक ग्लांस में देखें तो वो क्या

26
00:01:48,240 --> 00:01:52,480
आपको कहना चाह रही है तो उस पर आज हम बात करेंगे। सबसे

27
00:01:52,480 --> 00:01:56,480
पहले एक इसने अभी भगवतानंद

28
00:01:56,480 --> 00:02:00,880
ने दो वीडियोस बनाए हैं जिसमें कि पूरी शंकराचार्य

29
00:02:00,880 --> 00:02:04,880
जी का मैंने नहीं देखे पूरी शंकराचार्य जी

30
00:02:04,880 --> 00:02:09,040
का उपहास जो कि हम पहले से भी कह रहे थे और वो अब थोड़ा सा और

31
00:02:09,040 --> 00:02:13,240
प्रचंड रूप से और आगे आकर के कर रहा

32
00:02:13,240 --> 00:02:17,280
है। तो इसमें एक बात यह जानने की है कि इसने

33
00:02:17,280 --> 00:02:21,440
अपने कई वक्तव्यों को अपनी परंपरा को अपने आचार्यत्व

34
00:02:21,440 --> 00:02:25,680
को प्रमाणित करने के लिए कई बार

35
00:02:25,680 --> 00:02:29,680
पूज्य गुरुदेव जो हैं पूरी शंकराचार्य उनके शब्द को प्रमाण

36
00:02:29,680 --> 00:02:30,720
के रूप में प्रस्तुत

37
00:02:30,720 --> 00:02:35,000
किया है। इसके अपने वक्तव्य हैं। कई जगह पर इसने किया

38
00:02:35,000 --> 00:02:39,120
है। अपनी परंपरा अपना अस्तित्व उसको जो

39
00:02:39,120 --> 00:02:43,920
बातें बोलता है कि देखो देखो वही बात पूरी के शंकराचार्य जी ने भी बोली है।

40
00:02:43,920 --> 00:02:48,240
तो इस तरह की चीजें इसने अपने वीडियोस में अपने Facebook के जो वक्तव्य

41
00:02:48,240 --> 00:02:52,320
है उस सब में किया है। इसके अलावा इसने

42
00:02:52,320 --> 00:02:56,640
उनका कई बार इसकी पुरानी पोस्ट उठाकर के देख लेंगे तो Facebook

43
00:02:56,640 --> 00:03:00,800
इत्यादि पर और मेरे ख्याल से YouTube वीडियोस में भी मिल जाएगी चीजें

44
00:03:00,800 --> 00:03:05,200
जहां पर पूरी शंकराचार्य जी का खूब महिमा मंडन किया है।

45
00:03:05,200 --> 00:03:09,440
अच्छा शिष्य के रूप में बैठकर उनके चरणों में आध्यात्म

46
00:03:09,440 --> 00:03:13,600
का ज्ञान भी अर्जित किया जिसके बारे में हमने अपने पिछले वीडियो में बताया

47
00:03:13,600 --> 00:03:17,840
भी था कि जब आप आध्यात्मिक ज्ञान किसी से लेते हैं वो आपका गुरु होता है उसका सम्मान

48
00:03:17,840 --> 00:03:22,800
ना करने की स्थिति में भी आप पापी हैं। और

49
00:03:22,800 --> 00:03:26,880
इसने अपने वीडियोस में यह तक कहा है कि पूरी शंकराचार्य

50
00:03:26,880 --> 00:03:30,880
जी की जो बातें हैं वो बातें सब लोगों के समझने

51
00:03:30,880 --> 00:03:34,880
की बस की बात नहीं है। मतलब किसका इशारा उस उस ओर भी

52
00:03:34,880 --> 00:03:39,120
होता है कि जैसे वह अपनी कोई दिव्यता वाली बात बोल रहे हैं या फिर हिंदू

53
00:03:39,120 --> 00:03:43,200
राष्ट्र से साढ़े तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र इत्यादि की बात बोल रहे हैं तो उसमें

54
00:03:43,200 --> 00:03:45,760
भी वो बात आ जाती है कि उनकी बातों को

55
00:03:45,760 --> 00:03:49,760
समझ पाना सब सबके लिए संभव नहीं होता है। मगर ये ये दावा कर रहा है कि यह

56
00:03:49,760 --> 00:03:53,840
समझता है। तो ये प्रमाण के शब्द प्रमाण के रूप में पूरी शंकराचार्य

57
00:03:53,840 --> 00:03:58,240
जी को उपयोग में लाता है। यह अपने अस्तित्व की प्रमाणिकता

58
00:03:58,240 --> 00:04:02,560
के लिए भी उनका उपयोग करता है। अपनी जो कही जाने वाली बातें हैं उसके

59
00:04:02,560 --> 00:04:06,720
लिए भी उनका उपयोग करता है। महिमा मंडन करता है।

60
00:04:06,720 --> 00:04:10,720
है ना? ख्याति प्राप्त करने के लिए शिष्य के रूप में उनसे शिक्षा भी प्राप्त

61
00:04:10,720 --> 00:04:13,640
करता है।

62
00:04:13,640 --> 00:04:18,400
और यह भी कहता है कि हम जो है उनको ज्यादा मतलब

63
00:04:18,400 --> 00:04:22,640
हम औरों से ज्यादा नहीं तो कम से कम यह जरूर कहता है कि मैं गहराई से उन्हें जानता

64
00:04:22,640 --> 00:04:26,640
हूं। मगर इस सब के बाद भी गहराई से जानने के बाद

65
00:04:26,640 --> 00:04:31,040
भी फिर यह उनकी जो दिव्यानुभूति वाला जो ग्रंथ है उसको लेकर के मजाक

66
00:04:31,040 --> 00:04:35,840
बनाने बैठता है क्योंकि इसके द्वारा किए गए

67
00:04:35,840 --> 00:04:39,840
जो उठाए गए जो प्रश्न है उस उस पर सामने वाला कोई सवाल ना करे और

68
00:04:39,840 --> 00:04:43,840
यह बस बोलता रहे सामने वाला सुनता रहे और अगर कोई बोलेगा पूछेगा कि भाई

69
00:04:43,840 --> 00:04:48,160
ठोस प्रमाण लाओ तो ये क्या करेगा कि ये वो ठोस प्रमाण तो दे नहीं पाएगा

70
00:04:48,160 --> 00:04:52,160
तो ये ये सब करेगा अब

71
00:04:52,160 --> 00:04:56,720
ये तो इसकी इसकी एक जो आपने देखा कि एक

72
00:04:56,720 --> 00:05:01,680
पैराग्राफ में अगर इसको जानना चाहे पूरी शंकराचार्य जी को लेकर के यह व्यक्ति क्या है

73
00:05:01,680 --> 00:05:05,760
तो इसने अपने लिए उनका सकारात्मक उपयोग भी किया और

74
00:05:05,760 --> 00:05:10,240
अब अपने लिए उनका नकारात्मक उपयोग भी कर रहा है जो जनता को दिखाई दे रहा है

75
00:05:10,240 --> 00:05:14,560
और वो लोग भी अब इसके विरोध में उतर रहे हैं जो शांत बैठे हुए थे

76
00:05:14,560 --> 00:05:18,640
जो इस मामले में मौन धारण किए हुए थे सामने नहीं आ

77
00:05:18,640 --> 00:05:23,360
रहे थे अब सब जगह से इसका विरोध होना शुरू हुआ है अभी आगे तो और देखिए क्या-क्या होता

78
00:05:23,360 --> 00:05:27,520
तो खैर जब ये गहराई से जानने

79
00:05:27,520 --> 00:05:31,680
का दावा करता है उनको और उनका महिमा मंडन करता है उनके लिए सकारात्मक

80
00:05:31,680 --> 00:05:35,920
भाव रखता है तो फिर उनकी वो बातें जो गढ़ है

81
00:05:35,920 --> 00:05:40,000
उनको लेकर के खुद ही उपास उड़ा अच्छा उपास उड़ाने से मुझे याद आया कि जो

82
00:05:40,000 --> 00:05:44,000
जिस तरीके से उपास उड़ाता उड़ा रहा है ना कि तब क्यों नहीं सेना आ गई यह क्यों नहीं

83
00:05:44,000 --> 00:05:48,320
हो गया वो आर्य समाजी भी इसी तरीके से अवतारवाद और पुराणों का खंडन

84
00:05:48,320 --> 00:05:52,320
करने का प्रयास करते हैं अब तुम यहां कहना ना खंडन नहीं किया आर्य

85
00:05:52,320 --> 00:05:56,400
समाज जी ऐसे ही कहेंगे ना ना खंडन नहीं खंडन किया प्रयास नहीं किया

86
00:05:56,400 --> 00:06:00,400
खंडन किया ऐसे ही मजाक उड़ाएंगे ना तो यह देख लो किस

87
00:06:00,400 --> 00:06:04,720
तरफ जा रहा है व्यक्ति भक्तमाल इस तरीके से भक्तमाल में बहुत सारी कथाएं

88
00:06:04,720 --> 00:06:08,800
दी गई है लीलाएं दी गई है ना जो चमत्कारों से ओतप्रोत

89
00:06:08,800 --> 00:06:12,880
है तो उन उनप भी ये सारी बातें बनती है व्यक्ति आराम से कर रहा

90
00:06:12,880 --> 00:06:16,720
है खैर जो प्रबुद्ध जगत है वो देख

91
00:06:16,720 --> 00:06:20,880
रहा है कि ये क्या कर रहा है हमें ज्यादा उसके उसमें जाने की आवश्यकता नहीं जिसने

92
00:06:20,880 --> 00:06:26,880
अच्छा किया अपने पैर कुल्हाड़ी मारी है करके जो इसने पिछले दो वीडियोस

93
00:06:27,160 --> 00:06:31,520
बनाए भगवान आदि शंकराचार्य जी ने परया

94
00:06:31,520 --> 00:06:35,600
प्रवेश करके वो भी चमत्कार था उसको भी चैलेंज करेगा

95
00:06:35,600 --> 00:06:39,840
श्री राम जी भी परम ब्रह्म थे फिर वो तो केवल अपनी संकल्प

96
00:06:39,840 --> 00:06:43,920
शक्ति से कुछ भी कर सकते थे फिर उनको विलाप क्यों करना पड़ा फिर

97
00:06:43,920 --> 00:06:48,160
उनको रोना क्यों पड़ा तो ये ये सब बातें ये बोल सकता है यह वही

98
00:06:48,160 --> 00:06:52,800
कर रहा है जो आर्य समाज करते हैं जो विधर्मी करते

99
00:06:52,800 --> 00:06:56,880
अवतारवाद को ना मानने के लिए, पुराण को ना मानने के लिए जो उनके तर्क होते हैं वही

100
00:06:56,880 --> 00:07:01,120
तो तर्क है इसके। अच्छा यह कर सकते थे तो यह क्यों नहीं किया?

101
00:07:01,120 --> 00:07:05,120
वो ब्रह्म थे, परम ब्रह्म थे तो वानर सेना की सहायता लेने की क्या जरूरत पड़ गई?

102
00:07:05,120 --> 00:07:09,280
यही तो किया इसने बैठ के। खैर आगे चलते। तो

103
00:07:09,280 --> 00:07:13,280
अब अगर इसकी हम एक जीवनी

104
00:07:13,280 --> 00:07:18,240
को देखें जो इसका जीवन जैसा कि जो इसके द्वारा जो

105
00:07:18,240 --> 00:07:21,760
जीवनी के बारे में बताया गया है।

106
00:07:21,760 --> 00:07:26,720
तो उसमें क्या है कि एक विद्वान पिता थे

107
00:07:26,720 --> 00:07:31,120
जिनके घर इसका जन्म होता है भगवतानंद का। अब विद्वान

108
00:07:31,120 --> 00:07:31,920
पिता भी हैं

109
00:07:31,920 --> 00:07:36,080
और इसका कहना है कि मैं भी बचपन से विद्वान ही था और

110
00:07:36,080 --> 00:07:40,160
शायद संभवत इनके पिताजी भी यही मानते होंगे। तो जाहिर सी बात है

111
00:07:40,160 --> 00:07:45,040
जब जो हमारी जो किसी व्यक्ति की कोई संतान है

112
00:07:45,040 --> 00:07:49,520
वो विद्वान है। लक्षण संपन्न है। है ना?

113
00:07:49,520 --> 00:07:53,840
और विद्वान दंपत्ति की संतान है। तो

114
00:07:53,840 --> 00:07:58,800
कहीं ना कहीं एक भाव बचपन से ही मन में आएगा कि भाई यह किसी

115
00:07:58,800 --> 00:08:03,120
किसी महापुरुष के रूप में जाना जाए। कि किसी

116
00:08:03,120 --> 00:08:07,120
विद्वान पद पर जिस पद को विद्वता के कारण जाना जाता

117
00:08:07,120 --> 00:08:11,360
हो ऐसे पद पर बैठने वाला हो भविष्य में आगे चलकर के।

118
00:08:11,360 --> 00:08:15,360
तो कोई बड़ी बात नहीं है कि ऐसा भी भाव रहा हो कि शंकराचार्य के पद पर

119
00:08:15,360 --> 00:08:19,360
बैठे। यह स्वयं बैठे या इनके पिता के मन में भाव मतलब एक

120
00:08:19,360 --> 00:08:23,360
बचपन से ही होता है ना एक ओरा बना दिया जाता है व्यक्ति के इर्दगिर्द उसको किस दिशा

121
00:08:23,360 --> 00:08:28,040
में चलना है तो ये चलते भी

122
00:08:28,040 --> 00:08:32,480
हैं ये अपना मन में भाव बना लेते हैं मगर अच्छा

123
00:08:32,480 --> 00:08:36,880
इसके साथ ही साथ इनका यह भी कहना है कि बचपन से और भी दिव्यता वाली बातें होने लगी

124
00:08:36,880 --> 00:08:41,120
देवताओं के दर्शन होने लगे ये वो है मगर इसमें कुछ चीजें बाधा भी बाधाएं

125
00:08:41,120 --> 00:08:45,280
भी आती है बाधाएं क्या है जैसे 2016 में प्रेम प्रसंग या उसके बाद फिर

126
00:08:45,280 --> 00:08:46,960
दोबारा से कुछ समय बाद

127
00:08:46,960 --> 00:08:51,360
फिर प्रेम प्रसंग बाईपोलर नाम की बीमारी आ गई।

128
00:08:51,360 --> 00:08:55,440
अच्छा इस सब के साथ ही साथ जब ये शंकराचार्य के मठ

129
00:08:55,440 --> 00:08:59,600
में गए तो ऐसा कोई बड़ी बात नहीं है। इनकी भावना रही हो कि मैं आगे चलकर के भविष्य

130
00:08:59,600 --> 00:09:03,760
का शंकराचार्य बनूं। मगर वहां से इनको निराशा प्राप्त

131
00:09:03,760 --> 00:09:08,240
हुई। तो यह भी एक इनके मन स्थिति

132
00:09:08,240 --> 00:09:12,400
हम लोग जो ये बातें कर रहे हैं इसकी मानसिक स्थिति क्या हो सकती है? उस पर

133
00:09:12,400 --> 00:09:16,080
बात कर रहे हैं। तो

134
00:09:16,080 --> 00:09:20,160
प्रेम में धोखा वो कहते हैं प्यार में धोखा खाए हुए तो प्रेम प्रसंग

135
00:09:20,160 --> 00:09:24,320
में असफल करियर में असफल और

136
00:09:24,320 --> 00:09:28,400
एक जो विद्वता की जो चीज प्राप्त करनी थी ख्याति

137
00:09:28,400 --> 00:09:33,080
उसमें असफल है ना इसके साथ ही

138
00:09:33,080 --> 00:09:37,280
साथ क्या था कि तंत्र मंत्र जैसी दुनिया

139
00:09:37,280 --> 00:09:41,280
में भी प्रवेश कर लिया। आज तंत्र मंत्र पर भी बात करने वाले हैं। तंत्र तंत्र वाली

140
00:09:41,280 --> 00:09:45,440
जो दुनिया है उसमें भी प्रवेश किया। तो तंत्र साधना इत्यादि

141
00:09:45,440 --> 00:09:49,680
में भी ये प्रवेश कर चुके और यही नहीं

142
00:09:49,680 --> 00:09:53,840
है ना यही केवल यही नहीं तंत्र

143
00:09:53,840 --> 00:09:57,920
के आगे की कुछ चीजें जैसे जिन्न को साधना या वो मैं अभी आगे

144
00:09:57,920 --> 00:10:02,080
बात करूंगा। कुछ चीजें सामने आ रही है। कालिया जिन्न की साधना परी की साधना

145
00:10:02,080 --> 00:10:06,400
यह सब तो तंत्र में भी एक भीषण तरीके से नकारात्मक

146
00:10:06,400 --> 00:10:11,400
ऊर्जाओं के लिए जो है यह जो है प्रयासरत रहे

147
00:10:11,400 --> 00:10:15,440
तो इन सब का प्रभाव यह रहा। अच्छा वहां से

148
00:10:15,440 --> 00:10:19,520
निकले जो शंकराचार्य के मठ में जो अपने आप को ख्यापित नहीं कर

149
00:10:19,520 --> 00:10:23,680
पाए वहां असफल हुए। प्रेम प्रसंग में असफल हुए करियर में असफल

150
00:10:23,680 --> 00:10:27,840
हुए। तो फिर इन्होंने एट दी एंड यह

151
00:10:27,840 --> 00:10:32,400
जो भी इनके पास उपलब्धियां थी या जो भी इनके पास जो

152
00:10:32,400 --> 00:10:36,880
विद्वता थी दिमाग था उसका इस्तेमाल करके

153
00:10:36,880 --> 00:10:41,240
इन्होंने क्या किया कि भाई निग्रह संप्रदाय

154
00:10:41,240 --> 00:10:45,520
बनाते ये अगर इनकी जीवनी को

155
00:10:45,520 --> 00:10:50,000
यहां से यहां तक देखें तो कोई गलत नहीं होगा

156
00:10:50,000 --> 00:10:54,560
ऐसा कहना ऐसा प्रतीत होता है ये कोई गलत बात नहीं होगी।

157
00:10:54,560 --> 00:10:58,560
तो फिर अपने आप को प्रमाणित करने के लिए अब जब निग्रह

158
00:10:58,560 --> 00:11:03,360
संप्रदाय बन गया तो अपने आप को प्रमाणित करने के लिए फिर शंकराचार्य के पास

159
00:11:03,360 --> 00:11:08,000
जाना पड़ेगा। जाएंगे भाई शंकराचार्य हमें प्रमाणित कर दें। अच्छा

160
00:11:08,000 --> 00:11:12,400
एक चीज और मैंने देखी है कि इनको

161
00:11:12,400 --> 00:11:16,400
जो प्रश्रय मिला है अन्य बड़े आचार्यों से जैसे कि

162
00:11:16,400 --> 00:11:17,280
ज्योतिष जो

163
00:11:17,280 --> 00:11:21,440
ज्योतिर्मठ है उधर और जो अन्य

164
00:11:21,440 --> 00:11:25,680
बड़े आचार्यों के साथ में इसको जो मिला है मैंने देखा है कि

165
00:11:25,680 --> 00:11:29,760
हालांकि उधर भी इस अगर इसके दृष्टिकोण से देखा जाए तो कोई भी अछूता

166
00:11:29,760 --> 00:11:34,080
नहीं रहा है अशास्त्रीयता से सिवाय इसके सिवाय इसके

167
00:11:34,080 --> 00:11:38,160
अशास्त्रीयता से कोई अछूता नहीं रहा है बल्कि कि यह स्वयं

168
00:11:38,160 --> 00:11:42,240
अनजाने में कहां पर अपने आप को अशास्त्रीय कह चुका है वो जानते ही हैं।

169
00:11:42,240 --> 00:11:46,560
जिसको यह चाहता है कि उस पर बात ना की जाए। जैसे इसने स्वीकार किया कि शास्त्रों

170
00:11:46,560 --> 00:11:50,560
के हिसाब से गाली देना मना है। मगर फिर भी मैं जो है धर्म सम्मत

171
00:11:50,560 --> 00:11:55,400
हूं और तर्क सम्मत हूं और प्रमाण सम्मत हूं। है ना?

172
00:11:55,400 --> 00:11:59,600
तो मगर फिर भी ये आज पूरी पीठ के विरोध में ऐसे

173
00:11:59,600 --> 00:12:03,760
क्यों खड़ा हुआ है? पूरी के शंकराचार्य जी के विरोध में क्यों ऐसे खड़ा हुआ है? क्योंकि

174
00:12:03,760 --> 00:12:07,760
आपने इस व्यक्ति को जिनके साथ जिनका भी

175
00:12:07,760 --> 00:12:11,840
विरोध यह कर सकता है। मगर जब शायद मेरे ख्याल से विरोध करने की

176
00:12:11,840 --> 00:12:16,000
बारी आती तो कुछ मीठी आवाज में करता हो या ना करता हो मौन धारण

177
00:12:16,000 --> 00:12:20,000
कर लेता हो। मगर वो विरोध देखने को नहीं

178
00:12:20,000 --> 00:12:24,400
मिलता। यही विरोध देखने को मिलता है। तो दोनों जगह में अंतर क्या दिख रहा है? अंतर

179
00:12:24,400 --> 00:12:28,400
यह दिख रहा है कि जिस तरीके से अन्य जगहों पर इसे

180
00:12:28,400 --> 00:12:32,800
प्रश्रय मिला, इसको बिठाया गया

181
00:12:32,800 --> 00:12:36,960
अपने साथ वो कभी भी इसको पूरी पीठ में नहीं मिला। शंकराचार्य के बगल

182
00:12:36,960 --> 00:12:41,120
में इसको कभी भी नहीं बिठाया गया। जो जगतगुरु है उनके

183
00:12:41,120 --> 00:12:45,120
बगल में इसको कभी नहीं बिठाया गया। वहां गया तो नीचे ही बैठा। तो एक

184
00:12:45,120 --> 00:12:49,360
ये भावना भी हो सकती है। पूरी पीठ से निकाले गए या पूरी पीठ

185
00:12:49,360 --> 00:12:53,440
से स्वयं आ गए असफल हो के। वहां कभी उस तरीके का प्रशय नहीं मिला कि इनको

186
00:12:53,440 --> 00:12:58,160
जो है निग्रचार के रूप में वहां जो है ख्यापित किया जाए या बगल में बिठाया जाए।

187
00:12:58,160 --> 00:13:02,320
यह सारी चीजें भी दिखाई देती है। इसका जो ये व्यवहार

188
00:13:02,320 --> 00:13:07,040
है। खैर अभी मना स्थिति पर हम लोग बात कर रहे थे।

189
00:13:07,040 --> 00:13:11,280
तो ये बचपन से आकांक्षा कि

190
00:13:11,280 --> 00:13:15,360
भाई मैं अह एक विद्वान हूं।

191
00:13:15,360 --> 00:13:19,360
तो विद्वता के क्षेत्र में जाना जाने वाला जो पद है उस पर एक ना

192
00:13:19,360 --> 00:13:23,520
एक दिन ख्यापित हूं। किसी बड़े नाम से जाना चाहूं। इसके

193
00:13:23,520 --> 00:13:27,520
बाद बाधा आ जाती है। दिव्यता भी है। देवताओं के दर्शन भी होते हैं। मगर फिर

194
00:13:27,520 --> 00:13:31,640
बाधा आ जाती है। प्रेम प्रसंग आ जाता है। बाईपोलर आ जाता है।

195
00:13:31,640 --> 00:13:35,920
और दूसरी भी कुछ ऐसी बीमारियां जो अभी कुछ प्रमाणिकता के अधीन

196
00:13:35,920 --> 00:13:40,000
है। जांच के अधीन है। राजस्थान वाला जाना आना। वो राजस्थान वाली बात से

197
00:13:40,000 --> 00:13:42,440
याद आया

198
00:13:42,440 --> 00:13:46,560
कि इसने अपने वीडियोस में जब वो राजस्थान वाली बात उठाई गई

199
00:13:46,560 --> 00:13:47,840
थी कि भाई ये

200
00:13:47,840 --> 00:13:52,080
किसी आदत से ग्रसित है। उस आदत के निवारण के लिए उससे छुटकारा

201
00:13:52,080 --> 00:13:56,080
पाने के लिए इसका इलाज जो है राजस्थान से कराया जा रहा

202
00:13:56,080 --> 00:14:00,160
है। कर रहा है। तो इसने कहा था कि मैं कब गया जोधपुर मैं

203
00:14:00,160 --> 00:14:04,480
कब गया राजस्थान। अब इसने स्वयं अपने Facebook की पोस्ट पर राजस्थान

204
00:14:04,480 --> 00:14:08,720
के डॉक्टर की पर्ची एक दिखाई है कि मेरा इलाज जो हुआ था वो

205
00:14:08,720 --> 00:14:12,800
खांसी, जुकाम इत्यादि का हुआ था। इसने ये खुद अपने

206
00:14:12,800 --> 00:14:17,280
Facebook पोस्ट में डाला है वहां। इसका जुकाम इसका जो इलाज हुआ था वहां से

207
00:14:17,280 --> 00:14:21,280
वही राजस्थान से जिस जिस राजस्थान से इलाज ना करने को

208
00:14:21,280 --> 00:14:25,440
यह सिद्ध कर रहा था इस आधार पर कि मैं कभी गया नहीं उसी राजस्थान से

209
00:14:25,440 --> 00:14:29,520
उसी जोधपुर से यह अपना इलाज होना स्वीकार कर रहा है

210
00:14:29,520 --> 00:14:33,920
सर्दी जुकाम इत्यादि का या जो कुछ भी उसमें बताई हो सामान्य बीमारी

211
00:14:33,920 --> 00:14:38,000
उसका स्वीकार कर रहा है। यानी कि जोधपुर ना जाने के आधार

212
00:14:38,000 --> 00:14:42,160
पे राजस्थान ना जाने के आधार पे इसकी वो बात नहीं मानी जा सकती

213
00:14:42,160 --> 00:14:46,480
कि इसका इलाज नहीं चल रहा है। खैर इसमें आगे भविष्य में और भी तथ्य

214
00:14:46,480 --> 00:14:50,880
खुल सकते हैं और वो है ना गाना किसी दिन मुस्कुरा

215
00:14:50,880 --> 00:14:55,640
कर ये तमाशा हम भी देखेंगे इसी ने याद दिलाया मुझे खैर

216
00:14:55,640 --> 00:14:59,680
तो बीमारी आ गई बाईपोलर आ गया बाधा

217
00:14:59,680 --> 00:15:02,880
आ गई प्रेम प्रसंग आ गया उधर विद्वता

218
00:15:02,880 --> 00:15:06,960
है इसके अनुसार दिव्यता है इसके अनुसार

219
00:15:06,960 --> 00:15:11,040
इसके बाद शंकराचार्य के मठ में प्रवेश भी मिलता

220
00:15:11,040 --> 00:15:15,240
है मगर वहां पर वो स्थिति प्राप्त नहीं हो पाती जो आकांक्षा है जोत्वाकांक्षा

221
00:15:15,240 --> 00:15:19,280
है और तंत्र मंत्र में घुस जाते हैं तो

222
00:15:19,280 --> 00:15:23,440
फिर उसका सहारा लेकर के किसी तरीके से कुछ ना कुछ एक कहानी बना करके

223
00:15:23,440 --> 00:15:27,440
अपने आप को प्रकट कर देते हैं ख्यापित करने का प्रयास करते हैं कि हम

224
00:15:27,440 --> 00:15:32,360
एक संप्रदाय है निग्रह उसके हम आचार्य हैं और संभवतः

225
00:15:32,360 --> 00:15:36,480
अह क्या कहते हैं ये अंतिम आचार्य हैं वही रामपाल

226
00:15:36,480 --> 00:15:40,640
वाली कहानी कि इस मामले में मैं अंतिम नहीं हूं मोहम्मद वाली कहानी

227
00:15:40,640 --> 00:15:44,720
अब कोई और नहीं आएगा संभवत सुना

228
00:15:44,720 --> 00:15:49,440
है मैंने। अच्छा इसने

229
00:15:49,440 --> 00:15:54,080
हमने जो पिछला वीडियो किया है जिसमें इसकी गालियों पर बात की है

230
00:15:54,080 --> 00:15:58,080
उसका एक पीडीएफ प्रॉपर बना करके उसके YouTube डिस्क्रिप्शन में डाला गया है। तो

231
00:15:58,080 --> 00:16:02,080
जिसको भी वो पीडीएफ लेनी हो। जरूरी नहीं है कि उसको इसी नजर

232
00:16:02,080 --> 00:16:06,400
से ले कि भाई भगवत आनंद गाली देता है और उसका इसमें जो है प्रतिकार है।

233
00:16:06,400 --> 00:16:10,480
इस नजर से भी लीजिए कि गाली क्यों नहीं देनी चाहिए। गाली का उपयोग क्यों

234
00:16:10,480 --> 00:16:14,480
नहीं करना चाहिए? एक जनरल इंफॉर्मेशन के रूप में भी बहुत अच्छी पीडीएफ है तो

235
00:16:14,480 --> 00:16:17,920
वहां से आप डाउनलोड अवश्य करें और

236
00:16:17,920 --> 00:16:21,920
इसने स्वयं भी अपने शायद वेबसाइट में या Facebook अकाउंट में कहीं

237
00:16:21,920 --> 00:16:26,000
पर या अपनी बुक में शायद लिखा है कि लोग कहते हैं कि मैं आचार्य क्यों नहीं हूं। किसने

238
00:16:26,000 --> 00:16:30,080
बनाया तुम्हें आचार्य? लो शास्त्रों ने बनाया मुझे आचार्य। फिर शास्त्रों की वहां

239
00:16:30,080 --> 00:16:34,080
पर श्लोक दिए गए हैं और श्लोक में श्लोकों

240
00:16:34,080 --> 00:16:38,680
के आधार पर कह रहा है कि मुझे शास्त्रों ने आचार्य बनाया है और उसी

241
00:16:38,680 --> 00:16:42,720
में जो जो श्लोक है उसी

242
00:16:42,720 --> 00:16:46,960
में लिखा हुआ है कि वह संयमी होते हैं। वह आचार्य हैं। मृदभाषी होते हैं।

243
00:16:46,960 --> 00:16:51,120
वाणी उनकी इस तरीके की चीजें उसी में लिखी हुई है जो अपने आप को आचार्य के रूप में ख्यापित

244
00:16:51,120 --> 00:16:55,200
करने के लिए सिद्ध कर रहा है। अत्यंत विनम्र

245
00:16:55,200 --> 00:16:59,360
है ना शीलवान ये सब वहां लिखा हुआ है। तो ये खैर सीधी बातें हैं। अब

246
00:16:59,360 --> 00:17:03,440
मुख्य पॉइंट पर आते हैं जो बहुत ही गंभीर पॉइंट है कि यह किस ओर

247
00:17:03,440 --> 00:17:07,840
जा रही है यह धारा ये मलेचराज जिन्न की पूजा परी की सिद्धि

248
00:17:07,840 --> 00:17:11,920
ये सब किस ओर जा रही है ये सब आज आप देखेंगे तो फिर से एक

249
00:17:11,920 --> 00:17:16,000
बार छोटा सा क्रम ले लेते हैं विद्वता दिव्यता

250
00:17:16,000 --> 00:17:20,640
और उसके बाद बीमारी प्रेम प्रसंग बाधा उसके बाद

251
00:17:20,640 --> 00:17:24,720
शंकर मठ में प्रवेश मगर वहां पर असफल होना

252
00:17:24,720 --> 00:17:28,880
तंत्र मंत्र में घुसना और तो और नकारात्मकता की

253
00:17:28,880 --> 00:17:32,880
ओर उसमें आगे बढ़ना और अंतत गत्वा कुछ हाथ ना लगने पर

254
00:17:32,880 --> 00:17:33,380
अपने

255
00:17:33,120 --> 00:17:37,520
आप को निग्रह संप्रदाय के अंतिम आचार्य के रूप में या

256
00:17:37,520 --> 00:17:42,080
प्रथम या जो भी जो भी नंबर पर आचार्य हो उसके रूप में ख्यापित करना

257
00:17:42,080 --> 00:17:46,160
और वो एक बात अलग है कि उसको प्रमाणिक सिद्ध कराने के लिए भी

258
00:17:46,160 --> 00:17:50,320
शंकराचार्य के आगे चक्कर काटना।

259
00:17:50,320 --> 00:17:54,640
अब ट्विस्ट क्या आता है कि भाई जब यह चीजें नहीं मन पा

260
00:17:54,640 --> 00:17:59,720
जब यह सारी चीजें नहीं प्राप्त कर पा रहे डिप्रेशन है बाईपोलर

261
00:17:59,720 --> 00:18:04,160
है प्रेम प्रसंग में भी निराश व्यक्ति है करियर

262
00:18:04,160 --> 00:18:09,160
में निराश व्यक्ति है है ना और कुछ

263
00:18:09,160 --> 00:18:13,280
वैसे जो उनका भी प्राप्त हुआ है जो अन्य जो आदतें हैं

264
00:18:13,280 --> 00:18:17,520
जिसके लिए राजस्थान वाली बात होती है जो अभी तक सत्यापित नहीं है मगर

265
00:18:17,520 --> 00:18:21,800
बात उठ रही है

266
00:18:21,800 --> 00:18:25,920
तो इस सब के बाद में भी अपनी वो जोत्वाकांक्षा है कि मैं

267
00:18:25,920 --> 00:18:30,320
अपने आप को ख्यापित करूं एक ऐसी ऐसे व्यक्तित्व

268
00:18:30,320 --> 00:18:35,200
के रूप में जो विध्वता के रूप में जाना जाए जो लोगों के लिए जिसका शब्द प्रमाण

269
00:18:35,200 --> 00:18:39,200
तो फिर ये वही दिखता है इसका षड्यंत्र रचना

270
00:18:39,200 --> 00:18:43,680
क्या कि अन्यों के जो वो कहते हैं ना लूप होल्स देखना

271
00:18:43,680 --> 00:18:47,920
वीक पॉइंट्स है उनको देखना उनका उनको रोस्ट करते

272
00:18:47,920 --> 00:18:52,320
हुए अपने आप को ख्यापित करना। भाई वेदों

273
00:18:52,320 --> 00:18:56,320
के द्वारा जो सीमित क्षेत्र है वैदिक कौन है? उस सीमित क्षेत्र

274
00:18:56,320 --> 00:19:00,320
के अंदर ये वैदिकों से इस बात पर लड़ा है कि तुम्हारा आचरण

275
00:19:00,320 --> 00:19:05,040
यहां गलत है। तुमने यहां ये गलत कर दिया वो कर दिया। वो ठीक है। लड़ा है।

276
00:19:05,040 --> 00:19:09,040
ये बाहर वालों को कितना लड़ करके आया कि उनको लेकर के अंदर आए।

277
00:19:09,040 --> 00:19:13,040
वैदिकों में अंदर वैदिकों में इसने खूब

278
00:19:13,040 --> 00:19:17,040
लड़ाई की है। खूब उत्पात किया। राजेंद्र दास जी का कर लिया। ये कर लिया, उधर कर लिया।

279
00:19:17,040 --> 00:19:21,360
क्योंकि भाई जो करने चलेगा तो उसको कहीं ना कहीं बहुत सारी चीजें हैं जो दिखाई

280
00:19:21,360 --> 00:19:25,520
करने के लिए रणनीतियों का उपयोग करना पड़ेगा। तो इसने सब

281
00:19:25,520 --> 00:19:29,760
पर स्टेटमेंट हालांकि अपनी जगह पर आने पर यह थोड़ा मृदभाषी

282
00:19:29,760 --> 00:19:34,560
हो जाता है। जैसे कि जब इससे क्वेश्चन किया गया था इसने कुछ एक

283
00:19:34,560 --> 00:19:37,040
शास्त्र का नियम बताया था कि अगर कोई तुमको

284
00:19:37,040 --> 00:19:41,200
अंधा कह रहा है तो तुम उसको अगर पलट करके यह कह देते हो कि लंगड़ा तू

285
00:19:41,200 --> 00:19:45,360
भी तो लंगड़ा है तो उसके लंगड़ा होने से तुम्हारे अंधे होने

286
00:19:45,360 --> 00:19:49,360
के बारे में कोई तुमने वो नहीं दिया। पक्ष अपना प्रस्तुत नहीं किया। तो इसको

287
00:19:49,360 --> 00:19:53,440
एक दोष बताया था इसने। मुझे याद नहीं आ रहा है। अपनी एक लाइव में दोष बताया था इसको

288
00:19:53,440 --> 00:19:57,080
ऐसा करना।

289
00:19:57,080 --> 00:20:01,200
तो यह क्या करता है कि जब इस पर कोई बात

290
00:20:01,200 --> 00:20:05,280
आती है जब जब यह किसी पर दोष लगा रहा होता

291
00:20:05,280 --> 00:20:09,440
है सामने वाला अगर इससे कोई क्वेश्चन पूछ लेता है तो इसको याद दिलाता है कि

292
00:20:09,440 --> 00:20:13,840
भाई ये फलाना दोष है। मगर इस पर जब कोई बात पूछी जाती है

293
00:20:13,840 --> 00:20:18,000
या इससे कोई ठोस चीज जैसे हमने इससे ठोस चीजें मांगी कि भाई पूरी मठ

294
00:20:18,000 --> 00:20:22,320
में पूरी पीठ के ऊपर जो तुम आरोप लगा रहे हो उसके संबंध में जो है

295
00:20:22,320 --> 00:20:26,320
वो प्रमाण दो या विजय श्री को

296
00:20:26,320 --> 00:20:30,400
लेकर के जो आरोप लगा रहे हो उसके संबंध में प्रमाण दो तो ये व्यक्ति वहां प्रमाण

297
00:20:30,400 --> 00:20:34,440
देने की बजाय क्या बातें करता है तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र क्या हुआ

298
00:20:34,440 --> 00:20:38,480
चार शंकराचार्य की कितनी पीठे हैं प्रमाणिक ये सब

299
00:20:38,480 --> 00:20:42,480
बातें करने लगता है मतलब जो दोष वह यहां

300
00:20:42,480 --> 00:20:46,480
पर कह रहा है वही दोष तो उस पर आ रहा

301
00:20:46,480 --> 00:20:50,640
है। भाई तूने एक बात कही कि फलाने फलाने के ये आचरण

302
00:20:50,640 --> 00:20:52,080
है। ऐसा ऐसा दोष है।

303
00:20:52,080 --> 00:20:56,640
जब तुझसे प्रमाण मांगा जा रहा है तो तू कह रहा है तुम यहां गलत हो तुम वहां गलत हो।

304
00:20:56,640 --> 00:21:00,800
तो भाई अगर उसको मान भी लिया जाए कि वो व्यक्ति लंगड़ा है। जैसा कि तुमने अपनी

305
00:21:00,800 --> 00:21:04,800
एक वीडियो में कहा। तो तुम्हारा अंधा ना होना सिद्ध नहीं होता

306
00:21:04,800 --> 00:21:08,960
ना। अच्छा विदेश गमन वाली बात

307
00:21:08,960 --> 00:21:12,960
विदेश गमन बागेश्वर वालों ने किया

308
00:21:12,960 --> 00:21:16,960
उसको इस इसने खूब उछाला वो अगर शंकराचार्य जी से मिलने चला गया तो

309
00:21:16,960 --> 00:21:21,040
ये हो गया देखो देखो विदेश गमनकारी से मिल रहे हैं मगर खुद से जब पूछा गया

310
00:21:21,040 --> 00:21:25,280
विदेश गमनकारी से तो इसने स्वयं कह दिया कि भाई विदेश गमनकारी से मिले

311
00:21:25,280 --> 00:21:29,600
उसकी कथा में भी गए मगर हम उसके विदेश गमन का समर्थन

312
00:21:29,600 --> 00:21:33,600
थोड़ी ना करते हैं तो पूरी के शंकराचार्य जी ने कहा लिख के दे दिया था

313
00:21:33,600 --> 00:21:37,760
कि वो बागेश्वर के विदेश देश गमन का समर्थन करते हैं या अमुक अमुक

314
00:21:37,760 --> 00:21:42,880
क्षेत्र जिसमें वो गलत है वो उनका समर्थन करते हैं।

315
00:21:42,880 --> 00:21:47,320
ठीक है? तो अब इसने षड्यंत्र रचना चालू

316
00:21:47,320 --> 00:21:52,160
किया कि लोगों के वीक पॉइंट देखेंगे और

317
00:21:52,160 --> 00:21:56,240
जानते ही आप जो सनसनी वाली चीजें होती है वो ज्यादा लोगों

318
00:21:56,240 --> 00:22:00,400
को वो करती हैं अट्रैक्ट। तो फिर सनसनी वाली चीजें चालू हुई। सनसनी

319
00:22:00,400 --> 00:22:04,560
क्या है भाई? लड़ाई टाइप का सीन दिखेगा तभी मामला बनेगा। इसने कहा भी है कुछ

320
00:22:04,560 --> 00:22:08,560
लोगों से मैं उनका नाम नहीं ले रहा हूं क्योंकि जो लोग इसके सहायक रहे हैं वह हमारे

321
00:22:08,560 --> 00:22:12,720
भी संपर्क में है तो जब वह कहेंगे कि हमारा नाम

322
00:22:12,720 --> 00:22:17,200
ले लो तो हम लेंगे मगर ये तक इसके वर्ड्स रहे हैं

323
00:22:17,200 --> 00:22:21,440
जब इनसे कहा गया कि भैया तुम अगर कोई किसी का किसी बात को रख रहे हो

324
00:22:21,440 --> 00:22:25,760
तो नाम लेके किसी का किसी को रोस्ट मत करो तो इनका कहना है कि व्यूज

325
00:22:25,760 --> 00:22:29,800
नहीं आते उस तरीके से करने पर व्यूज नहीं

326
00:22:29,800 --> 00:22:34,240
आते तो इन्होंने अपनी वो रोस्टिंग एबिलिटी मेंटेन किया बनाया

327
00:22:34,240 --> 00:22:38,400
इस तरीके से करेंगे तो लोग ज्यादा रुचि लेंगे। खैर चलो

328
00:22:38,400 --> 00:22:42,400
रुचि लेंगे और तो इसने षड्यंत्र ये किया

329
00:22:42,400 --> 00:22:46,400
कि अन्यों के वीक पॉइंट ढूंढकर कई ऐसे वीक पॉइंट जिसमें खुद भी

330
00:22:46,400 --> 00:22:50,800
वीक है। मगर अन्यों के वीक पॉइंट ढूंढकर उस पर बोल बोलकर रोस्ट कर करके

331
00:22:50,800 --> 00:22:55,040
जो है स्वयं को ख्यापित करेंगे एक धर्माधिकारी के रूप। ये

332
00:22:55,040 --> 00:22:58,000
षड्यंत्र यहां तक इनका दिखाई देता है। कौन? जो प्रेम

333
00:22:58,000 --> 00:23:02,000
प्रसंग में धोखा खाया, डिप्रेशन में है, बाईपोलर में है और वो अपने

334
00:23:02,000 --> 00:23:06,080
करियर में भी निराश है। तो वह अब निकलता है स्वयं को एक स्वतंत्र

335
00:23:06,080 --> 00:23:10,160
रूप से आचार्य के रूप में स्थापित करने के लिए। ठीक है? अभी देखिएगा यह

336
00:23:10,160 --> 00:23:14,880
रहस्य कहां जाकर के खुलने वाला है। बहुत रोचक रहस्य है आज का।

337
00:23:14,880 --> 00:23:19,880
अब आगे जब हम चलते हैं

338
00:23:19,880 --> 00:23:24,000
कि जब यह यात्रा इसकी देखते हैं तो कल

339
00:23:24,000 --> 00:23:30,000
तक इसके लिए जो

340
00:23:31,360 --> 00:23:35,800
कल तक इसके लिए

341
00:23:35,800 --> 00:23:41,800
जो क्या कहते हैं एक

342
00:23:41,880 --> 00:23:46,160
मिनट कल तक इसके लिए जो सम्माननीय थे

343
00:23:46,160 --> 00:23:50,640
शब्द प्रमाण वाले थे वो आज इसके लिए अपमान

344
00:23:50,640 --> 00:23:54,800
के योग्य हो जाते हैं। वो आज इसके लिए मतलब अशास्त्रीय हो जाते हैं।

345
00:23:54,800 --> 00:23:58,880
कल तक जिन पूरी पीठ के शंकराचार्य जी का यह महिमा गान करते नहीं थकता

346
00:23:58,880 --> 00:24:03,040
था अपने पुराने टाइम में तो धीरे धीरे धीरे धीरे अपने आप को ख्यापित करते करते

347
00:24:03,040 --> 00:24:07,040
करते अब आज इस पे आ गया कि भाई जो शंकर के साक्षात शंकर

348
00:24:07,040 --> 00:24:11,520
के जो स्वरूप होते हैं ये खुद लिखा है अपने उसमें

349
00:24:11,520 --> 00:24:15,520
मगर आज ये इस पे आ गया कि जो है उनका ये कैसे हो सकता है वो कैसे

350
00:24:15,520 --> 00:24:19,600
हो सकता है ठीक है अच्छा वीक पॉइंट की बात ये भी है

351
00:24:19,600 --> 00:24:23,600
कि जब इसके वीक पॉइंट्स पर इससे बात की जाती है तो ये वहां आता ही नहीं है

352
00:24:23,600 --> 00:24:28,000
जैसे हमने इसको चल भाई आजा कर लेते हैं। अगर

353
00:24:28,000 --> 00:24:32,000
तुझे नहीं मतलब तुझे नहीं समझ में आ रही है

354
00:24:32,000 --> 00:24:36,320
प्यार की भाषा स्नेह की भाषा सम्मान की भाषा तो ठीक है आजा

355
00:24:36,320 --> 00:24:40,640
कर लेते हैं आमनासामना तो तब से अब ये दिख नहीं रहा है

356
00:24:40,640 --> 00:24:44,720
अब वो फटाफट फटाफट जो पोस्ट डालना शुरू किए थे हमारी लाइव बंद

357
00:24:44,720 --> 00:24:48,800
होने से पहले भी पोस्ट वहां डल जा रही है ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है अब वह सब बंद है

358
00:24:48,800 --> 00:24:51,280
सक्रियता कमजोर पड़ गई

359
00:24:51,280 --> 00:24:55,280
और जबकि उन दिनों नवरात्र चल रहे थे उस समय इतने

360
00:24:55,280 --> 00:24:59,520
सक्रिय मतलब यह कहा जा सकता है कि भाई साधना भी तो है व्यक्ति के पास मगर

361
00:24:59,520 --> 00:25:03,760
नवरात्रि के दिनों में इतना सक्रिय था व्यक्ति और अब जो है निष्क्रिय

362
00:25:03,760 --> 00:25:09,320
दिख रहा है। खैर आगे चलते हैं।

363
00:25:09,320 --> 00:25:13,520
अब वैसे इसने अपने एक वीडियो में कहा भी है कि भाई जो मूवीज

364
00:25:13,520 --> 00:25:18,000
है वो इससे बनती हैं। मलेच राज वाले उससे

365
00:25:18,000 --> 00:25:22,240
जैसे इसने जो मलेचराज की जो सीरीज चलाई है उस पर इसका

366
00:25:22,240 --> 00:25:26,400
कहना है कि कुछ लोगों के क्वेश्चंस आते हैं कि भाई ये तो

367
00:25:26,400 --> 00:25:30,640
फलानी मूवीज से मैच दिख रहा है। ये तो फलानी मूवीस मूवी से मैच

368
00:25:30,640 --> 00:25:35,160
दिख रहा है। तो इसका वहां पे जवाब ये था कि

369
00:25:35,160 --> 00:25:39,520
भाई वो मूवीज से ये नहीं बना है बल्कि इससे वो

370
00:25:39,520 --> 00:25:43,840
मूवीज बनाई गई है। अब प्रॉब्लम ये है कि जो मलेच्छराज वाली जो सीरीज

371
00:25:43,840 --> 00:25:48,000
है इनके हिसाब से तो इन्होंने ही बनाई है। मतलब उस पर ऐसा

372
00:25:48,000 --> 00:25:52,160
प्रकाश जो डाला है मेरे ख्याल से इनके अनुसार दुनिया में किसी ने भी नहीं

373
00:25:52,160 --> 00:25:56,400
डाला। पर किसने डाला है इस पे आगे बात करेंगे। मगर इसका तो

374
00:25:56,400 --> 00:26:00,480
यही कहना है कि भाई मैं एक ऐसी जानकारी तुम्हारे लिए लेके

375
00:26:00,480 --> 00:26:04,480
आ रहा हूं जो और किसी के पास नहीं है। तो जब वो जानकारी किसी के पास नहीं है तो उससे प्रेरित होकर

376
00:26:04,480 --> 00:26:07,280
के फिल्में क्यों बनेंगी?

377
00:26:07,280 --> 00:26:11,360
चलो मान लो तुम्हारी जो तुम्हारे पास जो जानकारी है और किसी तुमसे

378
00:26:11,360 --> 00:26:15,440
थोड़ा निम्न स्तर का जो बुद्धिमान होगा उसके पास वो जानकारी होगी। ये

379
00:26:15,440 --> 00:26:20,080
फिल्म के डायरेक्टर्स इत्यादि के पास थोड़ी ना होगी।

380
00:26:20,080 --> 00:26:24,160
तो फिल्में इसका कहना है वो जो फिल्में बनी है वो मलिचराज से प्रभावित होकर के बनी

381
00:26:24,160 --> 00:26:28,160
है। मगर मैं आपको एक बात बता रहा हूं कि आपने ऐसी कई फिल्में देखी होंगी जो

382
00:26:28,160 --> 00:26:32,320
कोई व्यक्ति होता है वो फलाने करियर में वो ठीक से नहीं

383
00:26:32,320 --> 00:26:36,480
अपने आप को सेटल कर पाया ख्यापित कर पाया। उसकी बात

384
00:26:36,480 --> 00:26:40,640
लोगों ने नहीं सुनी, नहीं समझ पाए लोग। है ना? और इस इस तरीके

385
00:26:40,640 --> 00:26:44,800
से नाकाम होते कहीं-कहीं उसके फौल्ट भी थे। फॉल्ट्स भी थे। कोई

386
00:26:44,800 --> 00:26:48,800
बड़ी बात नहीं है कि पूरी पीठ में अपने पैर इसलिए नहीं जमा पाया क्योंकि

387
00:26:48,800 --> 00:26:52,800
इसकी ये चीजें चल रही थी बाइपोलर टाइप की। कोई बड़ी बात

388
00:26:52,800 --> 00:26:57,480
नहीं है। खैर अह

389
00:26:57,480 --> 00:27:01,520
तो उसके फौल्ट्स के कारण या उसकी जो भी कमी रही हो उसके

390
00:27:01,520 --> 00:27:05,760
कारण एक व्यक्ति अपने आप अपना जो करियर भाई प्यार

391
00:27:05,760 --> 00:27:10,080
में तो पहले ही विफल हो चुका है। उसके बाद वह व्यक्ति अपना

392
00:27:10,080 --> 00:27:14,160
करियर बनाना चाहता है विध्वता के क्षेत्र में तो वहां पर भी करियर में भी वह विफल

393
00:27:14,160 --> 00:27:18,400
होता है और वह अपने आप को अब एक स्वतंत्र संप्रदाय

394
00:27:18,400 --> 00:27:22,320
के रूप में ख्यापित करना चाहता है तो फिर अब वो

395
00:27:22,320 --> 00:27:26,320
उसको कहानियां चाहिए होती है तो कहानियां कहां से मिलती है तो ऐसी बहुत सारी

396
00:27:26,320 --> 00:27:30,480
फिल्में जिसमें ऐसा होता है कि व्यक्ति जो है

397
00:27:30,480 --> 00:27:34,640
कैसे बना वो इस इस तरह की मूवीज से

398
00:27:34,640 --> 00:27:38,640
कांसेप्ट उठाता है मलेचरा जैसी जो चीजें हैं

399
00:27:38,640 --> 00:27:43,320
वो कैसे हैं, कैसे दिखाई देती हैं, कहां-कहां रहती

400
00:27:43,320 --> 00:27:48,000
हैं? तो अहंकार, बाइपोलर

401
00:27:48,000 --> 00:27:52,320
और एक चीज और है मुंह में पिशाचिनी। इसने एक वर्ड

402
00:27:52,320 --> 00:27:56,400
यूज़ किया है अपने वीडियोस में। वो वर्ड क्या है? कि कली

403
00:27:56,400 --> 00:28:00,720
पुरुष की बहन उसका नाम है ध्रुपत्नी

404
00:28:00,720 --> 00:28:05,040
या ध्रुपति। ऐसे कुछ नाम था उसका। मुझे याद नहीं आ रहा है वर्बली।

405
00:28:05,040 --> 00:28:09,200
कली पुरुष की बहन ध्रुपति है। या ध्रुपत्नी

406
00:28:09,200 --> 00:28:13,200
ऐसे कुछ था। वो उसका मतलब होता

407
00:28:13,200 --> 00:28:17,200
है गाली। ठीक है? अभी हमने कल शास्त्र का वचन लिया था

408
00:28:17,200 --> 00:28:21,520
जिसमें कि यह बताया गया है जो व्यक्ति गाली दे रहा है

409
00:28:21,520 --> 00:28:26,160
वो अपने मुंह में पिशाचिनी को लेकर के चल रहा है।

410
00:28:26,160 --> 00:28:31,120
पिशाचिनी को लेकर चलने वाला कौन है? जिसके पास देने के लिए गालियां हैं।

411
00:28:31,120 --> 00:28:35,120
कहा था ना अह किसी संत की वाणी है जिसमें कहा जा रहा

412
00:28:35,120 --> 00:28:37,360
है कि तुम मुझे गाली दे लो। लाल है।

413
00:28:37,360 --> 00:28:41,680
इसकी जीहवा बिल्कुल लपलपाती हुई है। भयानक है और इसके शरीर से

414
00:28:41,680 --> 00:28:46,400
बहुत भीषण दुर्गंध आती है। जुआ शराब

415
00:28:46,400 --> 00:28:50,480
व्यभचार और धन के मद स्वर्ण आदि में इसका वास हो गया। और

416
00:28:50,480 --> 00:28:56,480
इस कल पुरुष की बहन का नाम है दुरुपति मतलब

417
00:28:56,520 --> 00:29:00,800
गाली। दुरुपति मतलब गाली।

418
00:29:00,800 --> 00:29:04,800
तो यह देख लीजिए। द्रुपति

419
00:29:04,800 --> 00:29:09,680
मतलब गाली कली पुरुष की बहन है

420
00:29:09,680 --> 00:29:13,680
तो यह कली पुरुष की बहन को और वहां पर शास्त्रों में भी उसे पिशाचनी तो

421
00:29:13,680 --> 00:29:17,760
कहा ही गया है तो ये इसका कनेक्शन देखते जाइए कैसे बन

422
00:29:17,760 --> 00:29:21,960
रहा है धीरे-धीरे तो फिल्मों की स्टोरी उधर

423
00:29:21,960 --> 00:29:26,400
षड्यंत्र दूसरों का अपमान दूसरों में कमियां निकाल करके स्वयं को ख्यापित

424
00:29:26,400 --> 00:29:30,640
करना और अब जो सम्माननीय लोग थे वो अपमान की दृष्टि

425
00:29:30,640 --> 00:29:34,040
से उनको देखने लगना

426
00:29:34,040 --> 00:29:38,520
और इसकी जो कहानी पर्सनल इसने ये कहानी चुराई नहीं मगर

427
00:29:38,520 --> 00:29:42,640
आप इसकी कहानी भी आपको कई ऐसी मूवीज हैं कई

428
00:29:42,640 --> 00:29:46,640
ऐसी फिल्में जिसमें दिख जाएंगी जिसमें कि व्यक्ति नाकाम हो

429
00:29:46,640 --> 00:29:50,720
गया अनेक अनेक जगह जगह से ठोकर खाने लग गया उसके बाद वो समाज के लिए

430
00:29:50,720 --> 00:29:52,560
बन जाता है एक खतरा बहुत

431
00:29:52,560 --> 00:29:56,880
बड़ा खतरा और इसकी कहानी भी कुछ उसी तरफ जा रही है

432
00:29:56,880 --> 00:30:01,040
कि जो अपने करियर को अपनी लव स्टोरी को ठीक से नहीं कर पाया

433
00:30:01,040 --> 00:30:05,280
वो आज समाज के के लिए धीरे-धीरे खतरा बनता जा रहा है। अभी तो कुछ

434
00:30:05,280 --> 00:30:09,560
लोगों ने बोलना शुरू किया है। हो सकता है इसी तरीके से इसका यह होना था

435
00:30:09,560 --> 00:30:15,560
नाश। मैंने उसको बताया था ना कि तुमने गलत तार छेड़ दिए।

436
00:30:15,560 --> 00:30:19,600
तो यह तो इसकी कहानी मगर अब यह जो चीजें हो रही

437
00:30:19,600 --> 00:30:23,760
है इसके कि अमुक अमुक इसके अंदर अहंकार है, बाईपोलर है, मुंह में पिशाचनी

438
00:30:23,760 --> 00:30:27,760
को लेकर के चल रहा है। तंत्र तंत्र साधना में जा रहा है और तंत्र साधना में ही

439
00:30:27,760 --> 00:30:31,840
इतना ही नहीं जा रहा है। गंदी आदतें हैं। गंदी आदतें

440
00:30:31,840 --> 00:30:36,000
हैं। है ना? वो राजस्थान इत्यादि से जुड़ी हुई। तो मुंह

441
00:30:36,000 --> 00:30:40,080
में पिशाचनीय है। गाली को ले चल रहा है। मैं गाली दूंगा। शास्त्र में लिखा

442
00:30:40,080 --> 00:30:44,680
है गाली मत दो मगर मैं गाली दूंगा। यह खुद मान रहा है। तो यह सबका एक

443
00:30:44,680 --> 00:30:49,600
नकारात्मक जो इफेक्ट है वह इसके जीवन में पड़ रहा है।

444
00:30:49,600 --> 00:30:53,680
अब क्या है कि यह तो इफेक्ट पड़ रहा है वो अब इफेक्ट

445
00:30:53,680 --> 00:30:58,160
कहां जा रहा है? वो खतरा कैसे बन रहा है समाज के लिए वो देखते हैं। वो कैसे बन रहा है खतरा?

446
00:30:58,160 --> 00:31:02,400
तो अब वह खतरा बनते हुए जब मतलब खतरा

447
00:31:02,400 --> 00:31:06,560
समाज में बनकर प्रस्तुत हो रहा है तो अब वो जो है एक स्क्रिप्ट

448
00:31:06,560 --> 00:31:08,040
लिखना चालू करता

449
00:31:08,040 --> 00:31:12,080
है। एक स्क्रिप्ट लिखता है कि कैसे लोगों को

450
00:31:12,080 --> 00:31:16,240
डिफेम करना है। किन-किन लोगों को कब कब क्या-क्या बोलना है। वो पूरा अपना

451
00:31:16,240 --> 00:31:20,320
एक सेटअप तैयार करता है इस बारे में। इसी बारे

452
00:31:20,320 --> 00:31:24,400
में अब हमारी ये श्रंखला पूरी चलेगी कि भाई यह किस तरीके से समाज

453
00:31:24,400 --> 00:31:28,400
के लिए खतरा है और आज भी बहुत रोचक चीज क्योंकि मलेच राज पर

454
00:31:28,400 --> 00:31:32,480
आज हम बात कर रहे हैं तो आज बहुत रोचक चीजें आपको सामने आने वाली है। आने

455
00:31:32,480 --> 00:31:36,480
वाली वीडियोस अलग-अलग टॉपिक्स पर होंगी। मगर अभी यह किस तरीके से समाज के

456
00:31:36,480 --> 00:31:41,000
लिए खतरा बन सकता है आने वाले टाइम में वो हम इस पर हम बात

457
00:31:41,000 --> 00:31:45,160
करेंगे। अब क्या है इसमें? हां इसमें वो आक्षेपों पर भी बात

458
00:31:45,160 --> 00:31:49,200
होगी। अ जो खंडन करने का

459
00:31:49,200 --> 00:31:53,440
प्रयास किया है ना ये क्या कहते हैं? सबरी वाला

460
00:31:53,440 --> 00:31:57,840
और बुद्ध वाला उस पर भी बात होगी। सब सारे टॉपिक्स पे एक-एक करके बात होगी विधिवत

461
00:31:57,840 --> 00:32:02,080
तरीके से। ये पूरी सीरीज चलेगी। गुरुदेव के चमत्कारों

462
00:32:02,080 --> 00:32:06,320
पर इसने जो बात उठाई है उस पर भी एक अलग से स्पेसिफिकली

463
00:32:06,320 --> 00:32:10,480
वीडियो बनाएंगे। तो अच्छा एक बात

464
00:32:10,480 --> 00:32:15,360
और है कि जो कोई भी इसमें प्रतिकारात्मक

465
00:32:15,360 --> 00:32:19,360
रूप से लाइव आना चाहता है सामने से बात करना चाहता है जिसको कि गुस्सा है

466
00:32:19,360 --> 00:32:23,360
या कुछ समझ में नहीं आ रही है हमारी बातें वो आ सकता है हमने

467
00:32:23,360 --> 00:32:27,520
पहले भी कहा था यह खुद आ सकता है हमने पहले भी कहा था आज

468
00:32:27,520 --> 00:32:31,600
भी कह रहे हैं काफी पहले कह चुके हैं कि भाई आजा

469
00:32:31,600 --> 00:32:35,600
लाइव बात कर लेते हैं क्योंकि जो हम बचाना चाह रहे थे जो हम लोगों को नहीं दिखाना चाह रहे थे

470
00:32:35,600 --> 00:32:39,840
हमारे आपस का आपस के बीच की हमारी आपस की वैमनसता

471
00:32:39,840 --> 00:32:43,920
जो लोगों के सामने नहीं प्रकट करना चाह रहे थे वो हो चुकी है। अब उसमें कुछ नहीं बचा है। तो

472
00:32:43,920 --> 00:32:47,000
आ

473
00:32:47,000 --> 00:32:51,200
जाओ। तो ये इस श्रंखला में चलेगा। मगर अभी आज हम

474
00:32:51,200 --> 00:32:55,360
बात करेंगे मले म्लेचराज जो है कि यह किस तरीके

475
00:32:55,360 --> 00:32:59,360
से मलेच्छराज से यह प्रभावित है। मलेच्छराज को यह प्रचार

476
00:32:59,360 --> 00:33:03,520
कर रहा है या म्लेच्छराज का विरोध कर रहा है। यह आज हम कुछ फैक्ट्स

477
00:33:03,520 --> 00:33:08,040
पर ध्यान देंगे। सबसे पहली बात है

478
00:33:08,040 --> 00:33:12,080
कि इसका यह कहना है कि भाई यह

479
00:33:12,080 --> 00:33:17,040
खुद भी कहता है यह जो मलेच राज इत्यादि के बारे में बता रहा है वो

480
00:33:17,040 --> 00:33:21,840
यह खुद से नहीं बता रहा वो शास्त्रों में भी है। ठीक है? और

481
00:33:21,840 --> 00:33:26,000
यह जो इलुमिनाटी फ्री मिशनंस इनको भी

482
00:33:26,000 --> 00:33:30,080
लोग पहले से जानते हैं। प्रबुद्ध वर्ग है बहुत सारा जिसने बहुत सारी रिसर्च कर

483
00:33:30,080 --> 00:33:34,240
रखी है। आर्टिकल्स हैं। वीडियोस भी हैं इन सब पर

484
00:33:34,240 --> 00:33:38,320
फ्री मेंशन इत्यादि पर तो बहुत पहले से इनके बारे

485
00:33:38,320 --> 00:33:38,820
में

486
00:33:38,560 --> 00:33:41,560
बहुत सारी चीजें उपलब्ध

487
00:33:41,560 --> 00:33:45,920
है। अब इसने क्या है यह दिखाई देता है कि म्लेच्छराज

488
00:33:45,920 --> 00:33:50,080
शास्त्रों का मिलेच्छ शब्द जो है शास्त्रों से और इधर

489
00:33:50,080 --> 00:33:54,160
फ्रीमेशन इलुमिनाटी को पकड़ करके इसने जो है एक मिक्सर ग्राइंडर में

490
00:33:54,160 --> 00:33:58,160
डाला और एक स्क्रिप्ट तैयार की जो आपके सामने हैरीपॉटर इत्यादि

491
00:33:58,160 --> 00:34:02,320
जो फिल्में हैं उनसे प्रेरित क्योंकि इसका ये कहना गलत

492
00:34:02,320 --> 00:34:06,720
होगा कि फ्री मिशंस या क्या कहते हैं म्लेचराज

493
00:34:06,720 --> 00:34:10,960
से प्रेरित हैरीपॉटर जैसी फिल्में हैं। है ना? ये कहना गलत होगा क्योंकि

494
00:34:10,960 --> 00:34:15,280
ये इसके अनुसार इस तरह की जो जानकारी है इसने सिस्टमेटिकली

495
00:34:15,280 --> 00:34:19,280
वो जानकारी ये दुनिया में लेके आया है वो पहले से नहीं है तो फिर ये ये

496
00:34:19,280 --> 00:34:23,680
नहीं कह सकता कि उसके ऊपर फिल्में बन रही है उससे प्रेरित होकर खैर

497
00:34:23,680 --> 00:34:27,680
तो हैरीपॉटर वगैरह फिल्में है जो उसमें जो बोल्टम होता

498
00:34:27,680 --> 00:34:32,240
है जो मुख्य खलनायक है पूरी सीरीज का

499
00:34:32,240 --> 00:34:36,880
उसके बारे में भी यही कहा जाता था कि उसका जो नाम लोगे तो वो

500
00:34:36,880 --> 00:34:41,040
जो है उससे उसको शक्ति शक्ति मिलेगी। उसका नाम लोगे तो ऐसी

501
00:34:41,040 --> 00:34:45,280
कई फिल्में हैं जिसमें नाम लेने से शक्ति बढ़ती है। ऐसा बोला गया है। तो

502
00:34:45,280 --> 00:34:49,640
यह इधर नाम लेने से शक्ति मिलती है। आपने इसकी सीरीज में देख ही

503
00:34:49,640 --> 00:34:53,680
लिया। अब क्या है कि इसने जो ये स्क्रिप्ट लिख दी इन

504
00:34:53,680 --> 00:34:57,680
सभी इस तरह की फिल्मों के आधार पे। जरूरी नहीं है कि उसी फिल्म मैंने एक उदाहरण के

505
00:34:57,680 --> 00:35:02,520
रूप में नाम लिया है हरीपॉटर का। जरूरी नहीं है। मगर इसने खिचड़ी

506
00:35:02,520 --> 00:35:07,280
पकाई। अब ये करते-करते इसने

507
00:35:07,280 --> 00:35:11,680
केवल यही नहीं किया। इसने विधर्मियों की जो तंत्र साधना है वो भी अपनाने

508
00:35:11,680 --> 00:35:15,680
की कोशिश की वो भी उपयोग किया जो इसको परंपरा से

509
00:35:15,680 --> 00:35:19,760
प्राप्त नहीं अगर ये अगर निग्रह संप्रदाय है भी और इसकी कोई

510
00:35:19,760 --> 00:35:23,840
प्रामाणिक परंपरा है भी पहली बात तो है नहीं मगर दुर्जन

511
00:35:23,840 --> 00:35:28,240
तो उस न्याय से अगर मान लिया जाए कि है तब भी हमारी किसी परंपरा

512
00:35:28,240 --> 00:35:32,240
में वो जो जिन्न की पूजा है पर साधना ये सब तो नहीं मिलता है

513
00:35:32,240 --> 00:35:36,240
परंपरा से शंकराचार्य तो इनकी परंपरा में है नहीं

514
00:35:36,240 --> 00:35:40,480
शंकराचार्य के अनुगत तो ये अपने आप को मानते नहीं है। ये तो उसको उनको निग्रह

515
00:35:40,480 --> 00:35:44,480
करने आए हैं। वो बात और है कि पांच मिनट में सिटी पिट्टी गुम हो जाएगी अगर आमने सामने

516
00:35:44,480 --> 00:35:48,920
बात हो जाए तो। खैर

517
00:35:48,920 --> 00:35:52,960
तो बात ये है कि इसने विधर्मियों की

518
00:35:52,960 --> 00:35:57,120
जो ये तंत्र साधना इत्यादि है उसमें भी प्रवेश किया और अपनी

519
00:35:57,120 --> 00:36:01,200
में प्रवेश किया ही था। बायपोलर था ही डिप्रेशन था ही। प्रेम में

520
00:36:01,200 --> 00:36:05,280
असफल व्यक्ति था ही। करियर में असफल व्यक्ति था ही। तो

521
00:36:05,280 --> 00:36:09,840
अब अपने आप को ख्यापित करने के लिए इसने यह खिचड़ी पगाई म्लेचराज

522
00:36:09,840 --> 00:36:14,360
वगैरह की और इधर क्या होता है

523
00:36:14,360 --> 00:36:18,560
कि यह अपने आप को स्वयं को प्रतिष्ठित करने में भी लगा

524
00:36:18,560 --> 00:36:22,880
हुआ है। किस तरीके से अन्यों को रोस्ट करते हुए

525
00:36:22,880 --> 00:36:27,040
जो वो एक तरीका था ना इसका कि लोगों की कमियां ढूंढो। कहां

526
00:36:27,040 --> 00:36:31,840
पर किसका वो वीक पॉइंट है उसको पकड़ करके उस पर बोलो। शास्त्रोक्त

527
00:36:31,840 --> 00:36:35,920
गलत बात नहीं बोल रहा है सामने वाला। जो व्यवहारिक रूप से कार्य करने जा रहा है तो

528
00:36:35,920 --> 00:36:40,000
उसको रणनीति का उपयोग करना पड़ रहा है। उस रणनीति के चलते वह जो कर

529
00:36:40,000 --> 00:36:44,080
रहा है उसमें दोष देख करके यह आराम से समीक्षा कर रहे हैं। तो इस तरीके

530
00:36:44,080 --> 00:36:48,080
से अपने आप को ख्यापित कर रहा है। अब एक सोचने वाली बात

531
00:36:48,080 --> 00:36:52,400
है जिसके जीवन में इतनी खिचड़ी पकेगी क्या वो व्यक्ति मानसिक

532
00:36:52,400 --> 00:36:56,560
रूप से विक्षिप्त विक्षिप्तता की ओर आगे बढ़ेगा कि नहीं बढ़ेगा?

533
00:36:56,560 --> 00:37:00,560
इतनी खिचड़ी जिसके पकेगी सोचने वाली

534
00:37:00,560 --> 00:37:06,560
बात। खैर

535
00:37:06,640 --> 00:37:10,720
अच्छा एक चीज और है कि ऐसा नहीं है कि यह

536
00:37:10,720 --> 00:37:14,880
जो मानसिक मनो स्थिति जो बन रही है इससे कभी व्यक्ति बाहर नहीं आ सकता।

537
00:37:14,880 --> 00:37:19,040
यदि वो अपना इलाज कराना चाहेगा तो बाहर आ सकता है। मान लीजिए

538
00:37:19,040 --> 00:37:23,040
कि मन मंद बुद्धि हो रहा है व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्तता आ

539
00:37:23,040 --> 00:37:27,280
रही है उसके अंदर हो सकता है। मगर ऐसा नहीं है लालाज

540
00:37:27,280 --> 00:37:31,360
वाली स्थिति हो गई। वो चाहे प्रयत्न करे तो वो उससे बाहर आ सकता

541
00:37:31,360 --> 00:37:35,920
है। मगर जब प्रयत्न करे तब ना जब वो उस और सोचे तब ना कि मेरी मनोस्थिति

542
00:37:35,920 --> 00:37:40,480
खराब हो रही है। वो तो अपनी मनोस्थिति के अनुगत होता चला जा रहा है ना।

543
00:37:40,480 --> 00:37:44,600
यह दिक्कत है तो प्रयास का अभाव है। वह

544
00:37:44,600 --> 00:37:48,640
तो इलाज की बजाय तंत्र साधनाओं में

545
00:37:48,640 --> 00:37:52,720
प्रवेश करता है। जो बहुत ही संवेदनशील और गंभीर होती है। और

546
00:37:52,720 --> 00:37:57,440
इतना ही नहीं वो उसमें घुस जाता है।

547
00:37:57,440 --> 00:38:01,520
जो विधर्मियों की तंत्र साधनाएं हैं उसमें घुसने का प्रयास करता है। उस दुनिया

548
00:38:01,520 --> 00:38:06,240
में भी जाता है। उसके प्रमाण अभी आगे हम देंगे।

549
00:38:06,240 --> 00:38:10,720
दो कदम आगे मतलब और अब ऐसी

550
00:38:10,720 --> 00:38:14,840
दुनिया में जाकर के जब वह इनका चिंतन मनन करेगा श्रवण

551
00:38:14,840 --> 00:38:19,200
करेगा चिंतन मनन श्रवण नहीं बल्कि उनको सिद्ध करने के लिए उपासनाएं

552
00:38:19,200 --> 00:38:21,960
करेगा जिन और परी जैसी चीजों की

553
00:38:21,960 --> 00:38:26,240
उपासना तो इनका परिणाम क्या होगा

554
00:38:26,240 --> 00:38:31,360
इनका परिणाम किसके लिए हितकारी होगा

555
00:38:31,360 --> 00:38:35,760
ऐसी जिस ऑलरेडी जिसके जीवन में इतनी उथलपुथल है

556
00:38:35,760 --> 00:38:39,920
ऑलरेडी वह इतना ज्यादा वीक है और फिर वह

557
00:38:39,920 --> 00:38:44,400
तंत्र में जा रहा है। फिर वह तंत्र में भी दो कदम आगे विधर्मियों के तंत्र में जा रहा है। जिन

558
00:38:44,400 --> 00:38:48,640
साधना कर रहा है, परिधना कर रहा है। तो ये किसके लिए सकारात्मक

559
00:38:48,640 --> 00:38:52,720
हो सकती है? मैं ये पूछना चाह रहा हूं सभी से। अब

560
00:38:52,720 --> 00:38:56,800
इनको जरा वो सामग्री दिखा दीजिए जो

561
00:38:56,800 --> 00:39:02,800
परिसाधना और यह वाली सामग्री है।

562
00:39:09,240 --> 00:39:13,440
हम हां एक मिनट एक मिनट मैं जरा पढ़ पढ़ता जाऊं। एक

563
00:39:13,440 --> 00:39:19,440
मिनट

564
00:39:51,960 --> 00:39:57,960
जी इसको जरा बड़ा कर दीजिए सबके लिए।

565
00:39:58,080 --> 00:40:03,120
अच्छा यह वाले स्क्रीनशॉट्स मुझे भेजे हैं क्या आपने?

566
00:40:03,120 --> 00:40:06,840
हां बस काफी काफी है।

567
00:40:06,840 --> 00:40:11,120
काफी देखिए ये पहला जो स्क्रीनशॉट आप लोगों को दिखाई

568
00:40:11,120 --> 00:40:15,120
दे रहा है। ये बातें हो रही हैं। उस तरफ

569
00:40:15,120 --> 00:40:19,840
निग्गू नाम लिखा हुआ है। मतलब कौन है? आप समझ सकते हैं।

570
00:40:19,840 --> 00:40:24,320
एक मिनट इसको पढ़ के बता दें।

571
00:40:24,320 --> 00:40:29,320
जो सबसे पहला स्क्रीनशॉट है वह ले लीजिए ना। क्रमबद्धता से चलते

572
00:40:29,320 --> 00:40:33,400
हैं।

573
00:40:33,400 --> 00:40:36,600
हां

574
00:40:36,600 --> 00:40:40,720
इसमें यह Facebook पर भी यह पोस्ट डाली गई है। तो ऐसा नहीं

575
00:40:40,720 --> 00:40:44,880
है कि हम जो है इसको सार्वजनिक कर रहे हैं। Facebook पर भी यह किसी ने पोस्ट

576
00:40:44,880 --> 00:40:50,880
डाली है। तो इसको जरा बड़ा करिए जरा।

577
00:40:52,800 --> 00:40:56,800
देखिए यह कोई नंबर है जिस पर यह बात हो रही है। खुले में या

578
00:40:56,800 --> 00:41:01,280
कमरे में भोग आदि क्या है? फिर इसके नीचे चलिए।

579
00:41:01,280 --> 00:41:05,440
यह सब तो पूछना पड़ेगा। थोड़ा समय दें। अच्छा ये पूछने वाला कौन व्यक्ति

580
00:41:05,440 --> 00:41:09,680
है? यह सोचने वाली बात है। कमरे के अंदर

581
00:41:09,680 --> 00:41:14,000
एक मिनट। कमरे के अंदर पवित्रता पूर्वक खिड़की दरवाजे खुले

582
00:41:14,000 --> 00:41:18,240
और श्वेत पेड़े का भोग या खीर। ठीक है? यह निर्देश

583
00:41:18,240 --> 00:41:22,400
दे रहा है जो व्यक्ति है निर्देश दे रहा है जय

584
00:41:22,400 --> 00:41:26,800
माता जी भूदेव सहस्त्र कोटिष चरण वंदन

585
00:41:26,800 --> 00:41:32,200
एवं धोक फिर आगे चलिए प्रणाम

586
00:41:32,200 --> 00:41:36,960
भूदेव अरे भाई ऊपर जाइए मैसेज तो पढ़ने दीजिए

587
00:41:36,960 --> 00:41:41,120
प्रणाम भूदेव मुझे आपसे साधना करने हेतु आज्ञा चाहिए मैं

588
00:41:41,120 --> 00:41:47,120
विप्र चांडालनी साधा करने की अनुमति आगे चलिए

589
00:41:48,160 --> 00:41:52,640
अब देखिए उधर की ओर कौन है वह आपको दिखाई दे रहा होगा नारायण

590
00:41:52,640 --> 00:41:57,120
कालिया जिन जिन्नों का सरदार लगी पुकार हो स्वीकार

591
00:41:57,120 --> 00:42:01,520
मैं बुलाऊं शीघ्र चला आए जो मैं मांगू वो लेकर आए

592
00:42:01,520 --> 00:42:05,760
तीन भवन नौ खंड से लाए ना लेकर

593
00:42:05,760 --> 00:42:10,000
आए तो शिव के तीजे नेत्र से भस्म हो जाए पूरे मंत्र

594
00:42:10,000 --> 00:42:14,400
ईश्वरों वाचा देखा कालिया जिन जिन्नों का सरदार

595
00:42:14,400 --> 00:42:17,760
तेरी हाजिरी का तमाशा दीपावली

596
00:42:17,760 --> 00:42:21,840
की रात्रि से तीन रात मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर

597
00:42:21,840 --> 00:42:25,920
और दक्षिण दिशा होकर रात 12:00 बजे 108

598
00:42:25,920 --> 00:42:29,920
बार जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर पैसा ले लेना है। अधिकतम

599
00:42:29,920 --> 00:42:35,120
10 करोड़ और इसका 25% मुझे देना है।

600
00:42:35,120 --> 00:42:39,200
ठीक है? 25% उनको देना है जो यह

601
00:42:39,200 --> 00:42:43,280
निर्देश दे रहे हैं। इसके बाद आगे

602
00:42:43,280 --> 00:42:47,280
सामने वाला व्यक्ति प्रतिकार कर रहा है। कह रहा है कि अब ये मुस्लिमों वाला प्रयोग करूंगा

603
00:42:47,280 --> 00:42:51,600
क्या? इस तरह की भावना प्रकट कर रहा है। आगे देखिए क्या है?

604
00:42:51,600 --> 00:42:55,840
अब ये मुस्लिमों वाला वाला ही प्रयोग करूंगा। जिन वेताल का साधना करके मोक्ष बिगाड़

605
00:42:55,840 --> 00:42:59,840
दूं अपना। कोई और साधन हो तो बताएं। जो अपने

606
00:42:59,840 --> 00:43:03,920
हिंदू धर्म से हो। तो इन्होंने कुछ कहा होगा। उसको मिटा दिया

607
00:43:03,920 --> 00:43:08,160
गया भेजने वाले के द्वारा। उसके बाद आप कीजिए

608
00:43:08,160 --> 00:43:12,800
ऐसा करके एक वॉइस रिकॉर्डिंग भेजी है। तो

609
00:43:12,800 --> 00:43:16,800
और एक एक बात और कही है कि इस प्रकार की शब्दावली और

610
00:43:16,800 --> 00:43:21,440
चिंतन से बचें। अब आगे लिखा है देखिए

611
00:43:21,440 --> 00:43:25,520
टूटा फूटा है। मगर कुछ जो समझ सकते हो वह अवश्य समझ जाए।

612
00:43:25,520 --> 00:43:30,520
यह क्या लिखा है? जयमाल। आगे ऊपर करिए जरा।

613
00:43:30,520 --> 00:43:34,760
जयमाला आप डरते बहुत हैं। इसके बाद यह देखिए

614
00:43:34,760 --> 00:43:38,800
जो इस्लामिक तंत्र साधना जैसी दिखाई देने वाली चीज है वो

615
00:43:38,800 --> 00:43:43,360
आपके सामने है। चित्र यह एक चैट है जो हमें प्राप्त हुई है।

616
00:43:43,360 --> 00:43:48,840
Facebook इत्यादि से बिंदु के अनुसार 108 सफेद पन्ने पर

617
00:43:48,840 --> 00:43:50,560
लिखकर मोमबत्ती

618
00:43:50,560 --> 00:43:54,640
से जला देना है। जला लेना है। अमावस्या की रात्रि

619
00:43:54,640 --> 00:43:58,720
इसे जिन्न परिसिद्ध हो जाएगी। सर इसे पहले मेरे

620
00:43:58,720 --> 00:44:02,720
पास भेजना पड़ेगा। ठीक है? जिन्न

621
00:44:02,720 --> 00:44:07,520
और परी को सिद्ध कर रहे हैं। आगे देखिए क्या चल रहा है।

622
00:44:07,520 --> 00:44:11,840
भूदेव समस्या यह है कि मेरे पास माला ही नहीं है

623
00:44:11,840 --> 00:44:15,840
और यहां ओरिजिनल मिलता ही नहीं है। मैं स्फटिक माला

624
00:44:15,840 --> 00:44:19,920
कहां से खरीदूं? वैसे यह यंत्र

625
00:44:19,920 --> 00:44:23,920
रोज नया बनाना है या एक ही बनाकर प्रतिष्ठित

626
00:44:23,920 --> 00:44:27,920
रखना है। आगे है एक चौकी पर

627
00:44:27,920 --> 00:44:32,000
वस्त्र बिछाकर उस पर बनाकर रख लें। फिर इसे

628
00:44:32,000 --> 00:44:36,160
ही रखना है। इसके बाद इसे चिड़ियों को या नदी में

629
00:44:36,160 --> 00:44:40,320
डाल देना है। फिर आगे देखिए क्या कहा जा रहा है इधर

630
00:44:40,320 --> 00:44:44,480
के द्वारा। गुरुदेव जैसा केस आपके पास आया सेम मेरे पास एक वर्ष पूर्व आया

631
00:44:44,480 --> 00:44:49,600
है। आप कहे तो बताऊं। नीचे चलिए।

632
00:44:49,600 --> 00:44:53,760
गुरु पूर्णिमा से लेकर देखिए। अब यह शायद

633
00:44:53,760 --> 00:44:55,240
चैट कोई दूसरी चल रही

634
00:44:55,240 --> 00:44:59,360
है। गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले पूर्णिमा तक

635
00:44:59,360 --> 00:45:03,360
खुले में बैठकर आसमान के नीचे सावन आया। बाहर आई। तेरे बाप

636
00:45:03,360 --> 00:45:07,520
शैतान को सजदे की मार आई। परी तू ना आई

637
00:45:07,520 --> 00:45:11,520
तो तुझे तेरे बाप शैतान की मार आई।

638
00:45:11,520 --> 00:45:16,240
51 माला जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर हाथ में फूल देना है।

639
00:45:16,240 --> 00:45:20,320
और साथ रहने को बोलना है। तीन वचन ले ले एवं मृत्यु समय

640
00:45:20,320 --> 00:45:23,920
ना बिगाड़ने बोले।

641
00:45:23,920 --> 00:45:28,080
वजू अवश्य कर ले। देखिए वजू वजू करवा रहे हैं। वजू जो

642
00:45:28,080 --> 00:45:32,400
नमाज से पहले वजू होता है ना कुछ इस तरीके से पता नहीं क्या वो

643
00:45:32,400 --> 00:45:36,400
ना मतलब नहाए नहीं मगर वजू कर ले तो पवित्र मानते हैं अपने आप को।

644
00:45:36,400 --> 00:45:40,400
तो कुछ वो वजू वजू अवश्य कर लें। यह सिखाया जा

645
00:45:40,400 --> 00:45:44,480
रहा है सनातन धर्म में। ऐसे हो गई सनातन धर्म की रक्षा। वजू

646
00:45:44,480 --> 00:45:48,480
अवश्य कर लें। वस्त्र सफेद कुर्ता, पजामा और सिर पर

647
00:45:48,480 --> 00:45:52,720
सिर पर जालीदार टोपी रहेगी। दिशा दक्षिण और

648
00:45:52,720 --> 00:45:56,720
आसन काला प्रसाद में बटाश और

649
00:45:56,720 --> 00:46:00,720
बकरे की चर्बी। आपने यह

650
00:46:00,720 --> 00:46:04,720
प्रयोग किया है। मैंने किया है लेकिन सफल देखिए असफलता यहां

651
00:46:04,720 --> 00:46:08,720
भी है। मैंने किया है। किया तो है लेकिन सफल

652
00:46:08,720 --> 00:46:12,880
नहीं हुआ। अब सामने वाला कह रहा है मैं मुसलमानी प्रयोग नहीं

653
00:46:12,880 --> 00:46:16,720
करूंगा। धन्यवाद।

654
00:46:16,720 --> 00:46:20,720
भूदेव अच्छा इनके पास माला नहीं है दोबारा आ गया वो वाला

655
00:46:20,720 --> 00:46:25,200
दोबारा आ गया यह भी दोबारा है

656
00:46:25,200 --> 00:46:29,600
ठीक है ये हो गया ना इनको वो रिकॉर्डिंग भी सुना दीजिए जो जिसमें

657
00:46:29,600 --> 00:46:34,000
कि संभवत ये जो भगवतानंद है उसी की आवाज

658
00:46:34,000 --> 00:46:38,000
लग रही है वो रिकॉर्डिंग उसी की है कि

659
00:46:38,000 --> 00:46:42,400
नहीं है कहा नहीं जा सकता है मगर एक बार रिकॉर्डिंग

660
00:46:42,400 --> 00:46:47,280
सुना दीजिए क्या है उसमें किसकी की आवाज है। जनता ये

661
00:46:47,280 --> 00:46:52,160
वो करे निर्णय इस बात का कि कौन है इस रिकॉर्डिंग में।

662
00:46:52,160 --> 00:46:56,680
देखें

663
00:46:56,680 --> 00:47:02,680
जरा जो तंत्र साधना के लिए पूछा जा रहा है वो रिकॉर्डिंग

664
00:47:07,580 --> 00:47:13,580
[संगीत]

665
00:47:23,280 --> 00:47:29,280
रिकॉर्डिंग सुना रहे हैं ना

666
00:47:29,680 --> 00:47:33,760
पीले चावल से यंत्र बनाना है तो कैसे बनेगा मतलब चावल को ही वैसे सजा सजा के बनाना पड़ेगा

667
00:47:33,760 --> 00:47:37,840
ना सबके चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा यंत्र बनाना पड़ेगा क्योंकि छोटे-छोटे दाने में पड़ेगा नहीं शुरू से शुरू

668
00:47:37,840 --> 00:47:43,840
से सुनाइए शुरू से और स्पीड कम रखिए ना

669
00:47:44,480 --> 00:47:48,480
पीले चावल से यंत्र बनाना है तो कैसे बनेगा मतलब चावल को ही वैसे सजा सजा के बनाना पड़ेगा

670
00:47:48,480 --> 00:47:52,480
ना सर के चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा यंत्र बनाना पड़ेगा तो बनेगा नहीं रंगोली जैसा पूरा

671
00:47:52,480 --> 00:47:56,720
चावल से बनाना पड़ेगा ऐसे ही करना है क्या इसमें इस मुहूर्त को करना है इस प्रकार इसको शुरू से

672
00:47:56,720 --> 00:48:01,480
लीजिए शुरू

673
00:48:01,480 --> 00:48:05,520
से जाके बनाना पड़ेगा ना अक्षर के चावल से ही लिखने पड़ेंगे फिर बहुत बड़ा

674
00:48:05,520 --> 00:48:09,520
यंत्र बनाना पड़ेगा क्योंकि छोटे-छोटे दाने में से तो बनेगा नहीं रंगोली जैसा पूरा चावल से चलाना पड़ेगा। ऐसे

675
00:48:09,520 --> 00:48:13,680
ही करना है क्या इसमें? तिथि मुहूर्त को करना है। किस प्रकार से करना है?

676
00:48:13,680 --> 00:48:17,760
और इसकी प्रयोग विधि क्या है? किस दिन तिथि मुहूर्त को करना है? किस प्रकार से करना

677
00:48:17,760 --> 00:48:21,920
है? तब नहीं इसमें क्या वचन लेना देना है? ये सब बताइए कुछ किस तंत्र का प्रयोग

678
00:48:21,920 --> 00:48:26,840
है? सावर है या क्या है? ये

679
00:48:26,840 --> 00:48:31,040
आप बोल रहे हैं कि 21 बार जप करना है। किसी भी शुक्रवार के मध्य रात्रि

680
00:48:31,040 --> 00:48:35,120
से करना है। तीन रात्रि 21 बार करना है कि 21 माला करना है। 21 बार जप करने मात्र से

681
00:48:35,120 --> 00:48:39,280
आ जाती है। क्या? ये तो थोड़ा संदिग्ध विधान लग रहा है। इस बार जपने से आ जाए तो तो बड़ा गजब हो जाए।

682
00:48:39,280 --> 00:48:43,600
हमको लग रहा है किस माला होगा। विधान थोड़ा स्पष्ट बताइए आप।

683
00:48:43,600 --> 00:48:47,760
ठीक है? इतना काफी है। तो आप लोग खुद

684
00:48:47,760 --> 00:48:51,840
निर्णय करें किसकी आवाज है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते कौन है

685
00:48:51,840 --> 00:48:55,920
बोलने वाला। फिर भी अगर भगवतानंद इधर

686
00:48:55,920 --> 00:49:00,000
परी की साधना परी को सिद्ध कर रहा है। जिन को सिद्ध कर रहा

687
00:49:00,000 --> 00:49:04,000
है। और ये सब सामग्री जो है एक हमको करते

688
00:49:04,000 --> 00:49:08,640
हैं। एक हमको मेरे निजी परिचित मिले। उन्होंने

689
00:49:08,640 --> 00:49:12,800
अरबी फारसी के मंत्रों से किसी शक्ति की आराधना कर रखी थी। अपने किसी गुरु

690
00:49:12,800 --> 00:49:17,040
से प्राप्त करके वो पीर शक्ति की वो चिमनी लैंप

691
00:49:17,040 --> 00:49:18,880
की चिमनी में वो आते थे

692
00:49:18,880 --> 00:49:22,960
और आते थे तो क्या हुआ था कि जो बुलाता

693
00:49:22,960 --> 00:49:27,040
था उसको नहीं दिखते थे। जो आवाहक उसको नहीं दिखते थे। उसके किसी मीडियम को दिखते थे।

694
00:49:27,040 --> 00:49:31,040
जैसा कि हमने किसी किसी आहान वालों में बताया कि मीडियम भी रखना पड़ता है तो उसको

695
00:49:31,040 --> 00:49:35,120
दिखते थे और इनके छोटे बेटे को दिखते थे। इनको

696
00:49:35,120 --> 00:49:39,120
खुद नहीं दिखते थे। तो 810 साल की उम्र के बच्चे को दिखते थे और एक दो

697
00:49:39,120 --> 00:49:43,280
कभी-कभी बड़े लोगों को भी दिख जाते थे जिनकी बातें नजर खुली होती है या इस प्रकार की जो

698
00:49:43,280 --> 00:49:47,280
छाया वाले होते हैं उनको दिख जाती। तो सबसे पहला इन्होंने प्रयोग क्या किया था? इनकी बहन के दामाद घर से

699
00:49:47,280 --> 00:49:51,280
भाग गए थे। घर वाले बड़े परेशान थे। इनको पता ही नहीं था क्या था। तो इन्होंने सोचा आज उस मंत्र को टेस्ट करते। उन्होंने

700
00:49:51,280 --> 00:49:55,520
उसको बुलाया। वो चिमनी में आया। जो इनका इष्ट था जो पीर था वो आया

701
00:49:55,520 --> 00:49:59,600
और वो पीर जो है वो इनको नहीं दिखता था लेकिन किसी पड़ोसी को दिखने लगा 10

702
00:49:59,600 --> 00:50:03,680
पांच लोग बैठे बोले हां दिख रहा है बोले क्या ऐसा स्वरूप है बोले बिल्कुल ऐसा स्वरूप है तो कहा कि पूछो उनसे

703
00:50:03,680 --> 00:50:07,760
कि जो बुरा भोग देना था भोग इत्यादि देके उसका स्वागत करके फिर कहा कि पूछो इनसे कि वो हमारी

704
00:50:07,760 --> 00:50:11,920
बहन के दामाद कहां भाग गए हैं तो पूछा गया तो बताए कि विंध्याचल

705
00:50:11,920 --> 00:50:15,920
चले जाओ वहां अमुक मोहल्ले में अमुक होटल के अमुक कमरा में वो ठहरा हुआ है बस

706
00:50:15,920 --> 00:50:20,080
तुरंत ये उनका विसर्जन करके सीधे निकले विंध्याचल और उसी मोहल्ले के उसी कमरे में उसी

707
00:50:20,080 --> 00:50:24,080
होटल के कमरे में उसको पकड़े अपने बहन के दामाद को कहा कि यहां कैसे बोले आपको इनफार्मेशन कैसे मिली? बोले यहां से

708
00:50:24,080 --> 00:50:28,080
मिली। उसके बाद से उनको पता नहीं था कि मेरी शक्ति एक्टिवेट हो गई। उन्होंने बस कोई विकल्प नहीं

709
00:50:28,080 --> 00:50:32,080
दिख रहा था। कैसे पता करें? तो टेस्ट कर दिया। टेस्ट कामयाब रहा उनका। मंत्र तो पहले से किया हुआ था। कभी टेस्ट किए नहीं

710
00:50:32,080 --> 00:50:34,000
थे। अब लगने लगा दरबार। आने लगी भीड़।

711
00:50:34,000 --> 00:50:38,280
आने लगी भीड़ और बगल के गांव में हो गई थी एक हत्या। जिनकी हत्या हुई थी वो मेरे पिताजी के अच्छे मित्र

712
00:50:38,280 --> 00:50:42,560
थे। तो उनके कुछ इष्ट मित्र आए

713
00:50:42,560 --> 00:50:46,720
इनके पास। कहा कि भाई बताओ कि हत्यारा कौन है? अब इन्होंने सोचा कि अगर हत्यारे का पता बता देते हैं तो हत्यारा

714
00:50:46,720 --> 00:50:50,880
भी तो बगल के गांव का है। वो भी तो मेरे ऊपर आक्रमण करेगा। क्योंकि ये लोग फिर जाकर हत्यारे को पकड़ेंगे। और अगर नहीं बताते

715
00:50:50,880 --> 00:50:54,960
हैं तो फिर ये लोग कहेंगे कि दुनिया को बताते हो हमारी मदद नहीं करते हो। तो इन्होंने कहा कि भाई हमारी जो

716
00:50:54,960 --> 00:50:59,040
शक्ति है वो हमारे पास अब नहीं आती क्योंकि मध्यम मार्ग निकालना है और ये कारण था कि इनकी शक्ति धीरे-धीरे

717
00:50:59,040 --> 00:50:59,540
क्षीण

718
00:50:59,360 --> 00:51:03,360
भी हो गई। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी हमने कहा कि आप जरा और ये कारण

719
00:51:03,360 --> 00:51:07,440
था कि इनकी शक्ति धीरे-धीरे क्षीण भी हो गई। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने

720
00:51:07,440 --> 00:51:09,360
कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए? जो

721
00:51:09,360 --> 00:51:14,000
शक्ति है वो हमारे ध्यान नहीं क्योंकि मध्यम आवश्यकता पड़ी है।

722
00:51:14,000 --> 00:51:18,080
ध्यान देने वाली बात है। इनको भी आवश्यकता पड़ी। तो यहां से बहुत सारी चीजें निकल के

723
00:51:18,080 --> 00:51:22,320
आ रही हैं कि अह सबसे पहली

724
00:51:22,320 --> 00:51:27,040
बात तो यह बिलीव ये इनके अनुसार ये सारी साधनाएं होती हैं।

725
00:51:27,040 --> 00:51:31,120
है ना? होती है नहीं होती है हम यह बातें नहीं कर रहे मगर इनके अनुसार होती

726
00:51:31,120 --> 00:51:35,280
है इतना पक्का है यह पीर जिन परी वाली

727
00:51:35,280 --> 00:51:40,520
जो साधनाएं हैं इनके अनुसार होती है अब

728
00:51:40,520 --> 00:51:44,880
अ दूसरी बात एक ये भी आ रही है निकल के कि ये बहुत बड़े दिव्य व्यक्ति

729
00:51:44,880 --> 00:51:48,880
हैं जिनके ऊपर देवताओं का अनुग्रह रहा है। ये खुद निग्रह संप्रदाय के वो रहे

730
00:51:48,880 --> 00:51:52,960
हैं। मगर फिर भी इन्हें किसी से ये सारी साधनाएं सीखने के लिए जाना

731
00:51:52,960 --> 00:51:57,040
पड़ रहा है। तो यह भी एक आश्चर्य की बात हो रही है। और एक चीज यह

732
00:51:57,040 --> 00:52:01,280
भी आ रही है कि क्या ऐसे हिंदू राष्ट्र बनेगा? क्या ऐसे हिंदू धर्म की रक्षा

733
00:52:01,280 --> 00:52:05,520
होगी? यह जिन्न परी को सिद्ध करके जिन्न

734
00:52:05,520 --> 00:52:09,760
और परियां सिद्ध की जाएंगी। पीर सिद्ध किए जाएंगे। इनसे सनातन

735
00:52:09,760 --> 00:52:14,400
धर्म की रक्षा होगी। इनको अभी अगर हम यह जो हमने अभीभी

736
00:52:14,400 --> 00:52:19,320
सामग्री देखी है जिसमें कि जो इस्लामिक

737
00:52:19,320 --> 00:52:23,360
मुस्लिम जो जिन इत्यादि को सिद्ध करने की परी को सिद्ध

738
00:52:23,360 --> 00:52:24,480
करने की बात हो रही उसमें

739
00:52:24,480 --> 00:52:28,480
मुझे 25% हिस्सा दे देना मंत्र कैसे होगा ये सब बातें हो रही अगर ये

740
00:52:28,480 --> 00:52:32,480
सब बातें सही है तो ये किस ओर जा रहा है जो जिस ओर हम

741
00:52:32,480 --> 00:52:36,480
अभी शुरू में बात कर रहे थे कि क्या-क्या नकारात्मक परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती

742
00:52:36,480 --> 00:52:40,720
है पहली बात तो वो तीन जो अभी हमने बात बताई कि यदि ये दिव्यता

743
00:52:40,720 --> 00:52:44,720
को प्राप्त आचार्य हैं तो इनको कहीं क्यों जाना पड़ रहा है किसी ज्ञान के

744
00:52:44,720 --> 00:52:48,960
लिए वो भी इस प्रकार के नकारात्मक ज्ञान के लिए

745
00:52:48,960 --> 00:52:53,280
हां और दूसरी बात ये हो गई कि इनके अनुसार ये सारी सिद्धियां

746
00:52:53,280 --> 00:52:57,440
हैं। और तीसरी बात ये हो गई कि ऐसे ही ये धर्म को बचाने निकले

747
00:52:57,440 --> 00:53:01,520
हैं। ऐसे ही बचेगा धर्म सिद्धियों से परियां सिद्ध

748
00:53:01,520 --> 00:53:05,560
होके। ठीक है? इनके अनुसार यह वाली जो सिद्धियां

749
00:53:05,560 --> 00:53:10,000
है तो यह तीन बातें तो अलग है मगर अब

750
00:53:10,000 --> 00:53:14,160
यहां पर क्या बोल रहे हैं कि मुझे भी आवश्यकता पड़ी और उधर की जो सामग्री

751
00:53:14,160 --> 00:53:18,160
ये दिखा रही है कि ऐसी बातें इनकी हो रही है। किसी से निर्देश मांग रहे

752
00:53:18,160 --> 00:53:22,160
हैं, किसी को निर्देश दे भी रहे हैं। किसी को निर्देश दे रहे हैं, किसी से निर्देश

753
00:53:22,160 --> 00:53:26,240
मांग भी रहे हैं। यह दिख रहा है। अब जरा इसकी पुष्टि

754
00:53:26,240 --> 00:53:30,400
करने के लिए इसमें और प्रबल संभावनाएं क्या है? उसके लिए हमें एक

755
00:53:30,400 --> 00:53:36,400
Facebook की पोस्ट भी प्राप्त हुई है। उसको जरा आप चलाइए।

756
00:53:46,400 --> 00:53:52,400
ऊपर से ही चलाइए।

757
00:54:00,640 --> 00:54:05,160
हां वो एक-ए करके दिखाइएगा। वीडियो मत चलाइए। एक-एक करके

758
00:54:05,160 --> 00:54:11,160
दिखाइए। मैं पढूंगा ना।

759
00:54:15,520 --> 00:54:19,600
मुंह में पिशाचनी लेकर चल रहा है। गाली लेकर चल रहा है। खुद कह रहा है

760
00:54:19,600 --> 00:54:23,600
कि कली पुरुष की बहन का नाम वो है और गाली इसके

761
00:54:23,600 --> 00:54:29,320
मुंह में है। तो ये किस ओर दिखा रही

762
00:54:29,320 --> 00:54:35,320
है? किस ओर इशारा कर रही है सारी चीजें?

763
00:54:44,560 --> 00:54:48,720
खैर इसको पढ़ते हैं। एक पोस्ट डाली है किसी ने Facebook पर अभिजीत

764
00:54:48,720 --> 00:54:52,720
तिवारी नाम से है। इसने अपनी एक इस व्यक्ति ने अपनी

765
00:54:52,720 --> 00:54:56,800
एक आपबीति सुनाई है। उसमें क्या लिख रहा है वो कि एक

766
00:54:56,800 --> 00:55:01,200
गुप्त बात जो हम लिखना नहीं चाहते थे। लेकिन भगवान की अनुमति से लिख रहे हैं। लिखने

767
00:55:01,200 --> 00:55:05,200
से पहले अपने यज्ञ पवीत और कुलदेवी का सौगंध खाते हुए

768
00:55:05,200 --> 00:55:09,440
लिख रहे हैं कि अगर इसमें जरा सी भी हमारे द्वारा गलत

769
00:55:09,440 --> 00:55:13,520
लिखा गया हो तो तत्काल हम मृत्यु को प्राप्त हो जाए। ये शपथ लेते हुए लिख

770
00:55:13,520 --> 00:55:18,080
रहा है। शपथ की वैल्यू होती है। अकॉर्डिंग टू भगवतानंद।

771
00:55:18,080 --> 00:55:23,160
तो बात संभवत अक्टूबर 2022 की है।

772
00:55:23,160 --> 00:55:27,600
हम कपाल भैरव यानी क्षितज सोमानी क्षितज

773
00:55:27,600 --> 00:55:32,080
सोमानी का नाम आपने भगवतानंद के मुख से भी कई बार सुना होगा।

774
00:55:32,080 --> 00:55:36,120
आचार्य श्री आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी और एक

775
00:55:36,120 --> 00:55:40,400
साक्षी बाद में जुड़े आचार्य श्री वैभव क्षेत्रज्ञ

776
00:55:40,400 --> 00:55:45,040
जी आपस में कई बार कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करते रहते थे।

777
00:55:45,040 --> 00:55:49,600
हमको तंत्र आदि में शुरू से ही बहुत रुचि रहा है।

778
00:55:49,600 --> 00:55:53,760
उसी क्रम में हमें निग्रचार्य

779
00:55:53,760 --> 00:55:57,920
श्री भगवतानंद गुरु यह नाम लिया है। यहां पर से संपर्क

780
00:55:57,920 --> 00:56:02,080
हुआ था। यह उसने नाम यहां पर लिया है। क्यों लिया? क्योंकि उसने यहां मेंशन

781
00:56:02,080 --> 00:56:06,080
किया है। शायद अब ये उतनी आस्था नहीं रखता है।

782
00:56:06,080 --> 00:56:10,080
उसके आचार्यत्व में लिखने वाला। मगर उसने यहां पर मेंशन

783
00:56:10,080 --> 00:56:14,160
किया है तो उसकी आईडी को मेंशन किया है। इसलिए उसने यहां पर पूरा का पूरा

784
00:56:14,160 --> 00:56:18,160
नाम यहां दिखाई देगा आपको। ठीक है? आगे चलते हैं। जो उस

785
00:56:18,160 --> 00:56:22,240
समय सबको कालिया जिन्न की साधना बांटते फिर रहा था। अब इस व्यक्ति की

786
00:56:22,240 --> 00:56:26,320
जो पोस्ट है ये आज हम पहली बार देख रहे हैं। हमें आज ही प्राप्त हुई है।

787
00:56:26,320 --> 00:56:30,560
ये अभी आने से कुछ समय पूर्व दो-तीन घंटे पूर्व जब हम इस लाइव की तैयारी

788
00:56:30,560 --> 00:56:34,640
कर रहे थे। तो कालिया जिन्न के सिद्ध होने की बात वहां भी कर रहे हैं। अपने

789
00:56:34,640 --> 00:56:38,960
वीडियो में भी यह पीर पीर वगैरह की आवश्यकता की बात करते हुए दिख रहे हैं।

790
00:56:38,960 --> 00:56:43,200
और यहां पर यह क्या बता रहा है व्यक्ति कि यह उस समय

791
00:56:43,200 --> 00:56:47,280
सबको कालिया जिंद की साधना बांटते फिर रहा था। कोई

792
00:56:47,280 --> 00:56:51,440
बहुत बड़ी बात नहीं है। यह वही व्यक्ति हो जिसके साथ उसकी अभी चैट

793
00:56:51,440 --> 00:56:55,880
देखी है। है ना? यह जो

794
00:56:55,880 --> 00:56:59,920
जिसको मार्तंड भैरव कहा जा रहा है संभवत यह प्रसून

795
00:56:59,920 --> 00:57:00,420
मिश्र

796
00:57:00,400 --> 00:57:03,880
नाम के कोई व्यक्ति

797
00:57:03,880 --> 00:57:08,000
हैं जो जांच जो जानना पड़ेगा कि कंफर्म करने के

798
00:57:08,000 --> 00:57:12,240
लिए उसको समय चाहिए होगा। तो अब क्या है कि यह

799
00:57:12,240 --> 00:57:16,240
व्यक्ति साधना देने के लिए जब हमें इस बारे में पता चला तो हमने भी

800
00:57:16,240 --> 00:57:20,560
संपर्क किया। यह भी प्रभाव में आ गए कालिया जिन के लिए

801
00:57:20,560 --> 00:57:24,960
और संपर्क किया तो क्या हुआ कि

802
00:57:24,960 --> 00:57:29,200
यह जब हमें इस बारे में पता चला हमने इससे संपर्क किया यह व्यक्ति साधना देने के लिए राजी

803
00:57:29,200 --> 00:57:33,520
हो गया। इसने खुद से मंत्र रिकॉर्ड कर और मंत्र लिखकर

804
00:57:33,520 --> 00:57:37,840
और खुद अच्छी तरीके से हमें समझा दिया। हमने स्थान

805
00:57:37,840 --> 00:57:42,080
चयन किया और वह स्थान हमें मिल भी गया। फिर शुरुआत

806
00:57:42,080 --> 00:57:46,240
शुरू होता है असली खेल। साधना देकर यह व्यक्ति

807
00:57:46,240 --> 00:57:50,400
निश्चिंत हो गया। मतलब इसको अब कोई मतलब नहीं था। हमने बस उस साधना का अभ्यास

808
00:57:50,400 --> 00:57:54,480
ही शुरू किया था। जैसे मंत्र बोलना सीखना पहले दिन

809
00:57:54,480 --> 00:57:58,720
हमें कोई आभास नहीं हुआ। लेकिन दूसरे दिन से ही हमें कुछ अजीब अजीब

810
00:57:58,720 --> 00:58:02,800
एहसास होने लगा। ऐसे में लगा कि कोई हमें फॉलो कर

811
00:58:02,800 --> 00:58:06,960
रहा है। एक बार तो हम जब साधना करने की योजना बना ही

812
00:58:06,960 --> 00:58:10,560
रहे थे।

813
00:58:10,560 --> 00:58:15,040
योजना बना ही रहे थे। स्थान देखने गए कि इतना कस के आंधी आई

814
00:58:15,040 --> 00:58:19,440
कि हमें लगा कि हम उसमें खड़े नहीं रह पाएंगे ठीक से। फिर अचानक

815
00:58:19,440 --> 00:58:23,840
से आया वह रात्रि जो हमने कभी कल्पना

816
00:58:23,840 --> 00:58:27,920
नहीं की थी। कांफ्रेंस पर चित

817
00:58:27,920 --> 00:58:32,000
सोमानी और आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी के साथ बात कर

818
00:58:32,000 --> 00:58:36,160
रहे थे। अपना सारा अनुभव साझा कर रहे थे। यह

819
00:58:36,160 --> 00:58:41,280
भगवतानंद जी ने हमें नहीं आचार्य जी यानी शायद वह हैं।

820
00:58:41,280 --> 00:58:45,520
मार्तंड भैरव जी शायद वो है तो क्या

821
00:58:45,520 --> 00:58:48,120
कर रहे

822
00:58:48,120 --> 00:58:52,320
थे हम आचार्य श्री मार्तंड भैरव जी

823
00:58:52,320 --> 00:58:56,400
के साथ बात कर रहे थे और अपना सारा अनुभव साझा कर रहे

824
00:58:56,400 --> 00:59:00,560
थे। आचार्य जी ने हमें दो-तीन बार पहले भी टोक चुका था कि आप यह

825
00:59:00,560 --> 00:59:04,640
साधना मत करो। यानी मार्तंड भैरव जी

826
00:59:04,640 --> 00:59:08,720
ने बंद कर दो। तो जब हम आपस में बात कर ही रहे होते हैं तभी

827
00:59:08,720 --> 00:59:12,880
कुछ मेरे साथ अभी अजीब अजीब घटनाएं शुरू हो जाती हैं। समय रात्रि

828
00:59:12,880 --> 00:59:16,960
का था और हम गांव में साधना करने के लिए आ गए थे।

829
00:59:16,960 --> 00:59:21,200
मेरा पूरा परिवार मेरे गांव से 12 किलोमीटर दूर

830
00:59:21,200 --> 00:59:25,280
फला अमुक अमुक नाम की जगह पर रहता था। रहता है।

831
00:59:25,280 --> 00:59:25,780
गांव

832
00:59:25,760 --> 00:59:29,840
में सिर्फ मेरे बाबा रहते हैं। बाबा से भी

833
00:59:29,840 --> 00:59:33,840
हमने झूठ बोला था कि हम लक्ष्मी की साधना करना चाहते हैं। जबकि हम साधना कालिया

834
00:59:33,840 --> 00:59:37,920
जिन्न की करने की योजना बना रहे थे। जिस

835
00:59:37,920 --> 00:59:42,480
रात्रि की यह घटना है। अब उसे सुनिए।

836
00:59:42,480 --> 00:59:46,840
अगला पेज लगा

837
00:59:46,840 --> 00:59:52,840
दीजिए। अगला पेज शो कर दीजिए।

838
01:00:01,120 --> 01:00:05,360
जिस रात्रि की घटना है उसे अब सुनिए। उस रात्रि मेरे बाबा ने हमें

839
01:00:05,360 --> 01:00:09,440
बोला कि आज हम घर नहीं बाहर घर से दूर

840
01:00:09,440 --> 01:00:13,520
कुछ स्थान पर सोएंगे। कुछ अनाज की रखवाली का मुद्दा था। इस बात

841
01:00:13,520 --> 01:00:17,600
को बातों के प्रभाव में यह व्यक्ति भूल गया तो कहता है कि हम भूल

842
01:00:17,600 --> 01:00:21,680
गए और हम अचानक से बात करने लगे। आचार्य श्री मार्तंड

843
01:00:21,680 --> 01:00:25,920
भैरव और सोमानी से बात करते करते जब हम अपने बाहर वाले

844
01:00:25,920 --> 01:00:30,160
रूम में गए तो देखा कि मेरे बाबा की शक्ल का ही एक व्यक्ति

845
01:00:30,160 --> 01:00:34,560
बिछावन पर कंबल ओढ़ के मंत्र जाप कर रहा है। बाबा इसके चले गए थे।

846
01:00:34,560 --> 01:00:38,640
यह बता रहा था। बाबा इसके चले गए थे और अब इसने

847
01:00:38,640 --> 01:00:40,800
घर में वापस आकर के देखा है तो बाबा वहां

848
01:00:40,800 --> 01:00:45,520
बैठे हैं। आचार्य श्री भैरव जी ने मेरे बाबा से बात करना चाहा।

849
01:00:45,520 --> 01:00:49,680
जब हम अपने बाबा के पास फोन लेकर गए। फोन पर वो जो भैरव थे वो

850
01:00:49,680 --> 01:00:53,760
भैरव नाम के व्यक्ति है वो थे तो उन्होंने कहा

851
01:00:53,760 --> 01:00:57,920
कि बाबा से मेरी बात कराओ तो यह फोन ले बाबा की ओर बढ़ा जो इसको

852
01:00:57,920 --> 01:01:01,920
बाबा के रूप में दिख रहा था फोन लेकर गए तो उनकी आंख

853
01:01:01,920 --> 01:01:06,080
और चेहरा देखकर हम पूरी तरह से डर गए जो

854
01:01:06,080 --> 01:01:10,280
बाबा के रूप में कंबल ओढ़ के बैठे थे ये उसको देख के डर

855
01:01:10,280 --> 01:01:15,120
गए ये उसको देख के इतना डर गया

856
01:01:15,120 --> 01:01:19,360
कि उनके डांट सुनकर हम भाग गए चले गए। आंगन

857
01:01:19,360 --> 01:01:23,920
की तरफ भय के मारे हम रोने लगे। यह सभी घटना के साक्षी

858
01:01:23,920 --> 01:01:28,080
आचार्य श्री भैरव जी और क्षितिज सोमानी है। क्योंकि यह दोनों

859
01:01:28,080 --> 01:01:32,160
हमारे कॉन्फ्रेंस पर ही थे। उस समय भैरव जी ने कहा कि

860
01:01:32,160 --> 01:01:36,400
तुरंत आप किसी मंदिर में चले जाइए। क्योंकि मेरे घर में ही हमारी

861
01:01:36,400 --> 01:01:40,400
कुलदेवी का मंदिर था तो हम चले गए और स्थान पकड़ कर रोने

862
01:01:40,400 --> 01:01:44,480
लगे। उस समय सुमानी ने मेरा चित्र मांगा तो हमने

863
01:01:44,480 --> 01:01:48,560
इनको चित्र भी दिया। कई बार कॉल भी किया। लगातार भैरव

864
01:01:48,560 --> 01:01:52,560
जी और सोमानी हमारे साथ कॉन्फ्रेंस पर बने हुए थे। लेकिन मंत्र

865
01:01:52,560 --> 01:01:56,160
देने वाला भोगानंद सोया हुआ था कंबल ओढ़कर

866
01:01:56,160 --> 01:02:01,480
और बार-बार फोन करने पर भी नहीं उठा रहा

867
01:02:01,480 --> 01:02:05,840
था। तब क्षितज सुमानी ने मेरी माताजी, पिताजी से बात किया

868
01:02:05,840 --> 01:02:10,480
जो कि सिर्फ और सिर्फ मेरे माता और पिताजी के आवाज था।

869
01:02:10,480 --> 01:02:14,800
वास्तव में वे लोग नहीं थे। इसका रहस्य मुझे बाद में अपने माता और पिताजी

870
01:02:14,800 --> 01:02:18,800
से ही पता चला कि हमें कोई फोन नहीं आया था। मतलब चित सुमानी के

871
01:02:18,800 --> 01:02:22,880
द्वारा इनकी माताजी और पिताजी से बातचीत होने की बात ये बता रहे हैं। मगर

872
01:02:22,880 --> 01:02:26,960
बाद में पता चल रहा है कि माताजी पिताजी की बात किसी से नहीं हुई थी। ऐसा इस व्यक्ति का

873
01:02:26,960 --> 01:02:30,960
कहना है। इसके आगे क्रम उसके बाद किसी कारण

874
01:02:30,960 --> 01:02:35,360
से भैरव जी का फोन नहीं लगने लगा। लेकिन चित सोमानी

875
01:02:35,360 --> 01:02:39,360
रात भर कॉल पर मेरे साथ रहे। उसके बाद डर के कारण हम

876
01:02:39,360 --> 01:02:43,680
अपनी कुल देवता को पुकारने लगे कि हमें बचाइए। उस समय हमें

877
01:02:43,680 --> 01:02:47,840
अपने कुल देवता भगवान श्री उम्मत भैरव का आभास हुआ जो

878
01:02:47,840 --> 01:02:52,160
हमें दंडित कर रहे थे। कुल परंपरा से बाहर जाने का और इस्लामी

879
01:02:52,160 --> 01:02:56,760
साधना हमारे कुल में करने का तुम्हारा हिम्मत कैसे हुआ

880
01:02:56,760 --> 01:03:00,800
है? वह मेरे द्वारा किए गए कृत से बहुत रुष्ट थे।

881
01:03:00,800 --> 01:03:04,960
ऐसा इनको आभास हुआ। हमें डांट रहे थे। इसका आभास हुआ। उसी

882
01:03:04,960 --> 01:03:09,120
क्रम में यह भी बात आई कि हमारे देवता ने कहा कि कुल परंपरा

883
01:03:09,120 --> 01:03:11,520
के बाहर मत जाओ। अपने कुल में रहो।

884
01:03:11,520 --> 01:03:15,520
एक गृहस्थ व्यक्ति होने के नाते हमारे देवता ने ऐसा भी हमें आदेश

885
01:03:15,520 --> 01:03:19,680
प्रदान किया कि तुम्हें एक सन्यासी से दीक्षा भी नहीं लेनी चाहिए जो

886
01:03:19,680 --> 01:03:23,920
कि शास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो गलत नहीं है। इसके लिए भी

887
01:03:23,920 --> 01:03:28,000
डांटा हमें और बोला कि तुम क्यों बाहर इधर-उधर जाते रहते हो? तुम पहले अपनी

888
01:03:28,000 --> 01:03:32,160
कुल परंपरा में टिके रहो। लेकिन पूज्य गुरुदेव पुरी

889
01:03:32,160 --> 01:03:37,000
आचार्य के दिव्यता और उनके मार्गदर्शन पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं

890
01:03:37,000 --> 01:03:41,120
था। उसी समय हमें देवता के दिव्य प्रताप से यह भी आभास हुआ

891
01:03:41,120 --> 01:03:45,280
कि पूज्य गुरुदेव के पूज्य गुरुदेव पूरी पीठाधीश्वर कोई सामान्य व्यक्ति

892
01:03:45,280 --> 01:03:51,280
नहीं है। अगला पेज लाइए।

893
01:04:05,960 --> 01:04:10,000
हम इसके बाद

894
01:04:10,000 --> 01:04:14,320
इसके बाद दिव्य अनुभूतियों का दौर शुरू होता है। बहुत सारे स्वप्न

895
01:04:14,320 --> 01:04:18,560
आए। आदेश प्राप्त हुए। यह साधना करो।

896
01:04:18,560 --> 01:04:22,960
यहां जाओ वहां जाओ। इसे हम अपने कुल देवता के मार्गदर्शन

897
01:04:22,960 --> 01:04:27,840
के बिना स्वतः लिख नहीं सकते। इसलिए हमें क्षमा करें सभी।

898
01:04:27,840 --> 01:04:31,840
बात आती है अब इस भगवतानंद की। एक बात यहां मैं स्पष्ट

899
01:04:31,840 --> 01:04:35,920
कर देना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति के भूत के आधार पर भविष्य का आकलन नहीं किया जा

900
01:04:35,920 --> 01:04:40,240
सकता। अगर भूत में व्यक्ति सही होगा तो उसे सही बोला जाएगा।

901
01:04:40,240 --> 01:04:44,400
चाहे जितने अंश में वो मैं हो और अगर वर्तमान

902
01:04:44,400 --> 01:04:48,480
में व्यक्ति सही होगा तो उसे सही बोला जाएगा। लेकिन भविष्य में अगर व्यक्ति गलत हो

903
01:04:48,480 --> 01:04:54,400
जाएगा तो उसे गलत भी बोला जाएगा।

904
01:04:54,400 --> 01:04:58,480
यह व्यक्ति इतना धूर्त और कृतज्न है कि

905
01:04:58,480 --> 01:05:03,120
कहा नहीं जा सकता। कहा नहीं जा सकता। रामभद्राचार्य

906
01:05:03,120 --> 01:05:07,120
केस में जब पुलिस इसको उठाने के लिए आने वाली थी। इसके खिलाफ

907
01:05:07,120 --> 01:05:11,120
एफआईआर हो गया था तो इसको कोर्ट में पेश होना ही पड़ता। उस समय इस व्यक्ति ने

908
01:05:11,120 --> 01:05:15,280
हमसे मदद मांगी थी। और इस व्यक्ति को अपने देवता की आज्ञा

909
01:05:15,280 --> 01:05:19,360
से जो हमने मंत्र सुझाया। वह इसने

910
01:05:19,360 --> 01:05:23,600
किया और वह फलित भी हुआ। कई बार अग्नि स्तंभन

911
01:05:23,600 --> 01:05:27,600
आदि प्रयोग सीखने की गुजारिश कर चुका है। इस व्यक्ति

912
01:05:27,600 --> 01:05:31,680
की कई मुद्दों पर हमने सोमानी ने और मार्तंड भैरव जी

913
01:05:31,680 --> 01:05:35,840
ने बहुत मदद की है। लेकिन यह सब भूल गया।

914
01:05:35,840 --> 01:05:40,000
हमने बहुत पहले ही सुमानी और आचार्य श्री मार्तंड

915
01:05:40,000 --> 01:05:44,080
भैरव जी को कह दिया था कि देखिएगा भविष्य में इसका हम

916
01:05:44,080 --> 01:05:48,480
लोगों से भयंकर विवाद होगा जो कि सबके सामने है। हमने खुलकर

917
01:05:48,480 --> 01:05:52,480
कभी इसका पोल खोलने की कोशिश नहीं की क्योंकि हम सीधे बोलते तो लोग

918
01:05:52,480 --> 01:05:56,640
हमारी बातों पर विश्वास नहीं करते। और इस घटना के साक्षी सिर्फ

919
01:05:56,640 --> 01:06:00,720
और सिर्फ क्षतिज सोमानी मार्तंड भैरव ही थे। इसलिए

920
01:06:00,720 --> 01:06:04,880
हमने चित सोमानी को बोला कि तुम इसके पास जाओ ताकि तुम

921
01:06:04,880 --> 01:06:09,200
देख सको खुद कि कितना यह भ्रष्ट है। क्योंकि

922
01:06:09,200 --> 01:06:09,700
हम सिर्फ

923
01:06:09,680 --> 01:06:14,000
अपने मुख से बोलते तो शायद चितमानी हमारी बातों पर भरोसा

924
01:06:14,000 --> 01:06:18,160
नहीं करते। लेकिन चितमानी गए

925
01:06:18,160 --> 01:06:22,320
और दो-तीन दिन बाद ही इस फर्जी की पोल खुलने लगी।

926
01:06:22,320 --> 01:06:26,560
उसने उन्होंने वहां देखा कि इसका आचरण और दिनचर्या इतना भ्रष्ट है

927
01:06:26,560 --> 01:06:31,040
कि इसके शास्त्रवादी होने का प्राथमिक लक्षण ही इसके अंदर चरतार्थ

928
01:06:31,040 --> 01:06:35,200
होता हुआ नहीं दिखता है। यह अंग्रेजी दवाइयों पर जीता है। अब

929
01:06:35,200 --> 01:06:39,280
देखिए दवाइयों की बात आ रही है। उधर इलाज की बात आ रही है।

930
01:06:39,280 --> 01:06:43,440
तो यह अंग्रेजी दवाइयों पर जीता है और इसके दिनचर्या को देखते

931
01:06:43,440 --> 01:06:47,600
हुए क्षितिज सोनी ने जब इसे प्रश्न किया कि यह सब

932
01:06:47,600 --> 01:06:51,600
क्या है? तो इसने कहा कि महासाम्राज्य अभिषिक्त

933
01:06:51,600 --> 01:06:56,400
साधक को उतना नियम मानने की जरूरत नहीं है।

934
01:06:56,400 --> 01:07:00,280
अपने लिए खैर ये कन्वीनिएंट हो ही जाते

935
01:07:00,280 --> 01:07:04,640
हैं। फिर सोमानी ने हमें फोन किया कि हम तो फंस गए।

936
01:07:04,640 --> 01:07:09,040
हम बोले आप वापस चले आइए और ये चले भी आए। इस फर्जी

937
01:07:09,040 --> 01:07:13,120
की सत्यता को सत्यता उनको भी पता चल गई। उसके

938
01:07:13,120 --> 01:07:17,440
बाद हम खुलकर बोलने लगे और जो जो बात बोले भैरव जी और चित सोमानी

939
01:07:17,440 --> 01:07:21,520
साक्षी है कि यह लोग अपनी आंखों से उसके अंदर देखे थे। कोई

940
01:07:21,520 --> 01:07:24,800
जिस बात का कोई क्योंकि जिस बात का कोई प्रमाण नहीं दिखता

941
01:07:24,800 --> 01:07:28,800
था हम जानकर भी उसे नहीं बोलते थे। यह व्यक्ति

942
01:07:28,800 --> 01:07:32,880
आरोप लगाता है हम पर कि हमने यही बोला था। हमने यह

943
01:07:32,880 --> 01:07:36,880
बोला था कि पुर आचार्य भी आपको निग्राचार मानते हैं। इस

944
01:07:36,880 --> 01:07:40,960
बात को लेकर यह पुर आचार्य जी को लेटर भी लिख चुका है कि आप

945
01:07:40,960 --> 01:07:45,200
ऐसा बोले थे अपने एक शिष्य से। मतलब यह व्यक्ति आज

946
01:07:45,200 --> 01:07:49,280
झूठ बोल रहा है कि हम जिन आदि साधना नहीं करते।

947
01:07:49,280 --> 01:07:53,600
लेकिन यह बात सच मानता है कि हमने बोला हमने

948
01:07:53,600 --> 01:07:57,760
किस प्रकरण में बोला यह लिखे यह व्यक्ति देवताओं

949
01:07:57,760 --> 01:08:01,920
के नाम पर छल प्रपु करने वाला व्यक्ति है और आज

950
01:08:01,920 --> 01:08:06,000
भगवती की माया देखिए जिस बात को लेकर यह पूरी आचार्य को लेटर लिख

951
01:08:06,000 --> 01:08:10,400
चुका है इस बात का शुरुआत शुरुआती जड़ को यह मानने से इंकार

952
01:08:10,400 --> 01:08:14,640
कर रहा है। इससे पूछा जाए कि लेटर पर इसने इस घटना

953
01:08:14,640 --> 01:08:19,360
को इसने इस घटना को दर्ज किया है तो इसका शुरुआती बिंदु क्या है?

954
01:08:19,360 --> 01:08:23,760
कुल मिलाकर यह इतना धूत व्यक्ति है कि अपने द्वारा दी गई कालिया

955
01:08:23,760 --> 01:08:27,760
जिन साधना के दुष्प्रभाव को यह नहीं बोला कि इस घटना

956
01:08:27,760 --> 01:08:31,760
के बाद हमारी मरण जैसी स्थिति हो गई थी और हम कैसे कैसे

957
01:08:31,760 --> 01:08:36,000
बचे हैं। लेकिन इस बात को यह बोलता है किकि हमने

958
01:08:36,000 --> 01:08:40,440
सन्यासी से मंत्र ले लिया इसलिए हमारे कुल देवता ने हमें दंडित किया

959
01:08:40,440 --> 01:08:44,560
है। आज तो यह झूठ की हर सीमा लांगते हुए इस बात से

960
01:08:44,560 --> 01:08:48,880
भी मुकर रहा है कि हमने ऐसी साधना भी कुछ दी थी। हम लोग प्रमाण

961
01:08:48,880 --> 01:08:52,960
इकट्ठा कर रहे हैं। यह जो व्यक्ति यहां लिख रहा है, वह प्रमाण इकट्ठा कर

962
01:08:52,960 --> 01:08:57,040
रहा है। क्योंकि बात दो वर्ष

963
01:08:57,040 --> 01:09:01,040
पुरानी हो गई है। समय आने पर सब चीज प्रकाशित किया

964
01:09:01,040 --> 01:09:05,280
जाएगा। इस महा ठक की सारी पोल एक-एक कर खोली जाएगी।

965
01:09:05,280 --> 01:09:09,280
हमारे पास पूरा का पूरा इसका एल्बम है। जहां पर इसने मंत्र को उपदेश

966
01:09:09,280 --> 01:09:13,440
किया है। ना सिर्फ लिखित बल्कि रिकॉर्ड करके भी दिया है। यह

967
01:09:13,440 --> 01:09:17,600
बहुत फ्रॉड व्यक्ति है। इसकी हकीकत सबके सामने है। अंत में

968
01:09:17,600 --> 01:09:21,600
हमसे कुछ भूल हुई हो तो हमारे कुल देवता भगवान श्री

969
01:09:21,600 --> 01:09:26,400
भैरव से क्षमा याचना। बाकी अगर कुछ गलत कहा है तो मार्तंड भैरव जी और क्षितिज्मानी

970
01:09:26,400 --> 01:09:30,560
जी सही करें। इस घटना के बाद से हम

971
01:09:30,560 --> 01:09:34,880
सबसे दूर हो गए हैं। कभी भी सार्वजनिक तौर पर इसका उल्लेख नहीं किया

972
01:09:34,880 --> 01:09:39,360
क्योंकि कई लोग इस चीज को स्वीकार नहीं करते हैं और वह हमारे मानसिक

973
01:09:39,360 --> 01:09:43,520
स्थिति पर भी सवाल उठाने लगते हैं। अब कुछ घटनाएं तो हम लाइव दिखा

974
01:09:43,520 --> 01:09:47,840
नहीं सकते हैं। इसलिए हमने इस स्थिति पर मौन साधे

975
01:09:47,840 --> 01:09:51,840
मौन साधे रहे। यहां तक कि उस महाच को भी बोला

976
01:09:51,840 --> 01:09:55,440
था कि विवाद चाहे कुछ भी हो जाए कभी भी यह प्रकरण सामने नहीं आना

977
01:09:55,440 --> 01:09:59,600
चाहिए। लेकिन बार-बार यह व्यक्ति इस चीज का उल्लेख करते रहा। अंत

978
01:09:59,600 --> 01:10:03,680
में हमें यहां लिखना पड़ रहा है ताकि लोग हमें ही दोषी ना समझे

979
01:10:03,680 --> 01:10:07,680
और हमारी स्थिति को समझने का प्रयास करें। धन्यवाद। ये अपना नाम बता रहे हैं

980
01:10:07,680 --> 01:10:12,840
अभिजीत तिवारी। ठीक है?

981
01:10:12,840 --> 01:10:16,880
तो यह एक सोचने वाली बात है। किस

982
01:10:16,880 --> 01:10:21,280
ओर यह धारा जा रही है। यह खुद अपने पीर की साधना को लेने की आवश्यकता

983
01:10:21,280 --> 01:10:25,280
दिखा रहे हैं। इनसे मिलती जुलती आवाज की हमने रिकॉर्डिंग अभी

984
01:10:25,280 --> 01:10:31,280
सुनी। वो इन्हीं की आवाज है कि नहीं वो सोचने वाली बात है

985
01:10:34,040 --> 01:10:38,240
और फिर जो है पहले का हम

986
01:10:38,240 --> 01:10:42,480
लोग बता ही चुके हैं वहां साधना मांगी जा रही है। कहीं पर यह साधना

987
01:10:42,480 --> 01:10:46,480
मांग रहे हैं। कहीं पर वो साधना किसी को दे रहे हैं। यहां पर एक व्यक्ति उसी

988
01:10:46,480 --> 01:10:50,800
प्रकार के कालिया जिन की साधना की बात कर रहा है कि उससे उसको कितनी परेशानी हुई।

989
01:10:50,800 --> 01:10:55,360
तो ये सब सारी चीजें अह

990
01:10:55,360 --> 01:10:59,720
आपको एक जब ग्लांस में देखेंगे तो आपको ये नजर

991
01:10:59,720 --> 01:11:04,640
आएगा कि पहली बात यह म्लेच्छराज

992
01:11:04,640 --> 01:11:09,040
अगर कोई है तो यह उसका विरोधी है या उसका पक्षकार

993
01:11:09,040 --> 01:11:13,040
उसका प्रचारक यह सोचने वाली बात है और या फिर यह

994
01:11:13,040 --> 01:11:17,120
स्वयं ही उससे प्रभावित तो नहीं है और या फिर इसकी

995
01:11:17,120 --> 01:11:21,280
जो ये मानसिक स्थिति है जो ये बिगड़ गई है बायपोलर और ये जो

996
01:11:21,280 --> 01:11:25,840
राजस्थान के इलाज और प्रेम में असफलता

997
01:11:25,840 --> 01:11:29,920
करियर में असफलता उसका परिणाम है। यह सारी

998
01:11:29,920 --> 01:11:33,920
चीजें अब देखिए एक और जो मिलेच्छ से प्रभावित

999
01:11:33,920 --> 01:11:37,920
होने वाली बातें देखिए क्या-क्या है जिस ओर हम लोग ध्यान देना चाहिए हमें क्या

1000
01:11:37,920 --> 01:11:43,160
है ये अपने वीडियोस में कहता है कि वो

1001
01:11:43,160 --> 01:11:47,280
जो सबके हृदय में एक लाल बत्ती कुछ वो वीडियो दिखाइए

1002
01:11:47,280 --> 01:11:49,200
लाल बत्ती वाला सबके हृदय में लाल बत्ती

1003
01:11:49,200 --> 01:11:55,200
जलेगी

1004
01:12:10,960 --> 01:12:15,200
जो छह अनुशासन है सात में से छह अनुशासन की आज हम चर्चा करेंगे। पहला अनुशासन

1005
01:12:15,200 --> 01:12:19,200
यह करता है। तुम्हारे हृदय में सदैव एक ज्योति जल रही है।

1006
01:12:19,200 --> 01:12:23,280
जब भी कोई निर्णय करना हो उस ज्योति का अनुसरण करना। यह पहला नियम कहता

1007
01:12:23,280 --> 01:12:27,280
है। अब देखिए यहां पर यह व्यक्ति कह रहा है कि तुम्हारे हृदय में सदैव

1008
01:12:27,280 --> 01:12:31,360
एक लाल एक ज्योति जल रही है और आपने ध्यान से

1009
01:12:31,360 --> 01:12:36,520
देखा हो तो यह अपने सभी वीडियोस में एक लालटेन एक बत्ती लेकर के चलता

1010
01:12:36,520 --> 01:12:40,800
है। तो ऐसा मतलब ऐसा दिखाई

1011
01:12:40,800 --> 01:12:45,680
दे रहा है कि ये कह तो रहा है कि वो लाल बत्ती से लोग सब जो है

1012
01:12:45,680 --> 01:12:50,080
प्रभावित हो। मगर स्वयं एक बत्ती लेकर के चल रहा है जिससे कि जिसकी

1013
01:12:50,080 --> 01:12:54,160
ओर लोग आकर्षित हो। जिसके बारे में लोग चिंतन मनन श्रवण करें। ये अपने हर

1014
01:12:54,160 --> 01:12:59,800
वीडियो में लेकर के चल रहा है। फिर आगे क्या है

1015
01:12:59,800 --> 01:13:04,080
कि हां एक बहुत जरूरी बात

1016
01:13:04,080 --> 01:13:08,080
इसने कहा कि ये एक नियम

1017
01:13:08,080 --> 01:13:12,160
इसने बताया। दूसरा नियम है शायद कि तुम उससे प्यार करो जो तुमसे

1018
01:13:12,160 --> 01:13:18,160
प्यार करे। वो दिखाइए वीडियो।

1019
01:13:34,080 --> 01:13:40,080
वीडियो दिखाइए वाला

1020
01:13:54,480 --> 01:13:58,560
राम वृक्ष ने वृक्षराज के अनुसार दूसरा नियम बनवाया वह यह है कि

1021
01:13:58,560 --> 01:14:02,560
जो तुमसे प्यार करे उससे तुम भी प्यार करो। अब ये नियम है।

1022
01:14:02,560 --> 01:14:06,560
लगता है कि आदर्श समाज की परिकल्पना की जा रही है। और इन नियमों को ऐसी शब्दावली में

1023
01:14:06,560 --> 01:14:10,640
ऐसी परिभाषा में आगे व्यक्त किया गया है कि लोगों की बड़ी आकर्षक लगती है। लोगों को लगता है ये तो बिलकुल सच्चा

1024
01:14:10,640 --> 01:14:15,200
मार्ग है। इसमें क्या बुराई है? इसमें क्या शैतानियत है? इसमें क्या नकारात्मकता है? सबसे बड़ी नकारात्मकता

1025
01:14:15,200 --> 01:14:19,200
वही है जिसको आप ना पहचान सके जो आपको अच्छाई

1026
01:14:19,200 --> 01:14:24,400
का वेश बनाकर बनाओ कि जो तुमसे प्यार करे उससे तुम भी प्यार करो।

1027
01:14:24,400 --> 01:14:28,400
देखिए ये प्यार वाली जो बात है जो तुमसे

1028
01:14:28,400 --> 01:14:32,400
प्यार करे उससे तुम प्यार करो। और इसके जीवन में प्यार वाली जो चीज है

1029
01:14:32,400 --> 01:14:36,880
वो रही है। यह प्रभावित रहा है प्यार वाली बात से कि भाई असफल

1030
01:14:36,880 --> 01:14:41,040
होना। और इधर ये दूसरा नियम है मम्लेचराज का जो तुमसे प्यार करे उससे तुम प्यार

1031
01:14:41,040 --> 01:14:45,360
करो। उधर क्या है? प्रेम प्रसंग की असफलता। तो इसको थोड़ा सा कनेक्ट करते जाइएगा।

1032
01:14:45,360 --> 01:14:51,360
अभी हम एक निष्कर्ष पर पहुंचने वाले हैं। फिर इसके बाद अगला क्या

1033
01:14:51,560 --> 01:14:54,440
है

1034
01:14:54,440 --> 01:14:58,960
कि अब क्या है कि इसको अगर हम

1035
01:14:58,960 --> 01:15:03,120
जोड़ करके देखें सारी जो चीजें नजर आ रही हैं तो क्या दिख रहा है कि बुरी

1036
01:15:03,120 --> 01:15:07,120
शक्तियों के प्रभाव में क्या कैसा

1037
01:15:07,120 --> 01:15:11,520
परिणाम आएगा? बुरी शक्तियों के प्रभाव में जो ओतप्रोत रहेगा उधर

1038
01:15:11,520 --> 01:15:15,920
बीमारी उधर असफलताएं और फिर उधर जो है तंत्र साधना

1039
01:15:15,920 --> 01:15:20,040
उसमें कालिया जिन्न की साधना और यह और वो तो परिणाम क्या

1040
01:15:20,040 --> 01:15:24,720
होगा आगे परिणाम स्वरूप इसके जीवन में स्वयं मलेच्छराज

1041
01:15:24,720 --> 01:15:28,880
के नियमों का पालन आपको दिख जाएगा। जिस मलेच्छराज का

1042
01:15:28,880 --> 01:15:32,960
यह विरोध करता हुआ दिख रहा है। उसी मलेच्छराज के

1043
01:15:32,960 --> 01:15:37,520
नियमों का पालन करता हुआ यह व्यक्ति आपको दिखेगा।

1044
01:15:37,520 --> 01:15:41,520
यह वास्तविकता आपके सामने हम क्रमबद्धता से आज लेकर आए। आगे

1045
01:15:41,520 --> 01:15:46,320
भी लाएंगे। यह किस ओर जा रही है धारा आप देखते जाइए।

1046
01:15:46,320 --> 01:15:50,640
अच्छा इसने एक बात और कही है जो मलेच राज्य से इसका जीवन जो प्रभावित

1047
01:15:50,640 --> 01:15:54,800
दिखता है कि 2015 में इसको जो

1048
01:15:54,800 --> 01:16:00,800
है आप वो वीडियो चला दीजिए जरा। चलाइए।

1049
01:16:02,480 --> 01:16:07,320
करने के लिए सेना भेजी थी 2015

1050
01:16:07,320 --> 01:16:13,320
में इलुमनाटी

1051
01:16:13,480 --> 01:16:15,280
ने प्रिय है।

1052
01:16:15,280 --> 01:16:19,600
मैं जिस स्थान पर बैठकर ये बात कह रहा हूं उस स्थान पर मैं

1053
01:16:19,600 --> 01:16:23,920
29 जुलाई 2015 की रात को ही बैठा हुआ था। क्यों? क्योंकि

1054
01:16:23,920 --> 01:16:27,920
मुझे धमकी आई थी इसी मृक्षराज के कुछ गुलामों से जो मेरा अपहरण

1055
01:16:27,920 --> 01:16:32,160
करना चाहते थे और तब हम अपने घर से लगभग 1280 किलोमीटर

1056
01:16:32,160 --> 01:16:36,240
दूर इस जगह पर बैठे थे। समय था रात के 7:00 बजे और

1057
01:16:36,240 --> 01:16:42,240
दिनांक था 29 जुलाई 2015।

1058
01:16:44,280 --> 01:16:48,400
तो यह जिस जगह पर बैठकर के वीडियो

1059
01:16:48,400 --> 01:16:52,880
बना रहा है और एक एक चीज और थी कि

1060
01:16:52,880 --> 01:16:56,960
जो वीडियो बनाते समय की जो चंद्र ग्रहण की स्थिति चंद्रमा इत्यादि की ग्रह

1061
01:16:56,960 --> 01:17:02,960
नक्षत्रों की जो स्थिति रही है वो वाला वीडियो दिखा दीजिए।

1062
01:17:04,160 --> 01:17:08,280
तो इसकी जो सक्रिय होने की जो जो मलेच राज

1063
01:17:08,280 --> 01:17:12,480
को समाज में प्रस्तुत करने की जो टाइमिंग और जो

1064
01:17:12,480 --> 01:17:16,840
ग्रह नक्षत्र रहे हैं जो दिनांक इत्यादि रही है वो भी बहुत सेम रहे

1065
01:17:16,840 --> 01:17:20,880
हैं। है ना? तब भी प्रभावित था। तब किडनैपिंग के

1066
01:17:20,880 --> 01:17:25,360
लिए फोन आया था। धमकी आई थी। आज जो यह वहां से वीडियो बना रहा है

1067
01:17:25,360 --> 01:17:31,080
और वीडियो बना करके मच राज के बारे में लोगों को बता रहा है

1068
01:17:31,080 --> 01:17:35,120
और बना बनाते टाइम जो इसकी जो समय धारा है

1069
01:17:35,120 --> 01:17:39,560
वो जो ग्रहण नक्षत्र इत्यादि होते हैं वो भी सेम यह खुद बोल रहा है।

1070
01:17:39,560 --> 01:17:40,960
देखिए अपना

1071
01:17:40,960 --> 01:17:45,120
ठिकाना यहीं पर बनाए। अभी इस वीडियो क्लिप में चार मिनट की रिकॉर्डिंग हमारी नहीं हो पाई

1072
01:17:45,120 --> 01:17:49,280
किसी तकनीकी खराब के कारण इस श्रंखला की घोषणा जब हमने की थी उसी समय से हमारे फोन

1073
01:17:49,280 --> 01:17:53,280
पर ऑटोमेटिक फील्ड्स में कुछ ऐसी बातें स्वयं आ रही है जो की ऑफलाइन बा है ऐसा नहीं की मैं

1074
01:17:53,280 --> 01:17:57,440
कुछ नेट पर सर्च कर रहा हूं या कुछ ट्रेलर रिलीज कर रहा हूं तो एल्गोरिद पकड़कर कुछ सजेशन मिल रहे है ऐसा नहीं

1075
01:17:57,440 --> 01:18:01,600
है मतलब बिल्कुल ऑफलाइन तरीके से भी जिस

1076
01:18:01,600 --> 01:18:05,840
मोबाइल से वाईफाई या सिम कनेक्टेड नहीं है उन मोबाइल्स पर भी कुछ सर्च करने पर फोल्डर

1077
01:18:05,840 --> 01:18:10,000
पर भी सर्च करने पर ड्राइव में भी सर्च करने पर कुछ ऐसी बातें अप्रत्या रूप से सामने आ रही है जो की हमारे

1078
01:18:10,000 --> 01:18:14,000
संज्ञान में नहीं थी और अभी क्या हुआ कि जब मैं इस क्लिप की दूसरी प्रति बना

1079
01:18:14,000 --> 01:18:18,080
रहा था एक दूसरा भाग अब रिकॉर्ड कर रहा था। तो लगभग पांच मिनट रिकॉर्डिंग होने के बाद वो स्वयं कैमरा बंद

1080
01:18:18,080 --> 01:18:21,920
हुआ और उसके बाद वो रिकॉर्डिंग स्वयं मिट गई। इसलिए हम इस वक्त को पुनः रिकॉर्ड कर रहे हैं।

1081
01:18:21,920 --> 01:18:26,080
ठीक है। एक मिनट। अब देखिए पहली बात तो यह है जहां

1082
01:18:26,080 --> 01:18:30,320
पर इसने बताया कि यह बताने का प्रयास कर रहा है कि जो बुरी शक्तियां

1083
01:18:30,320 --> 01:18:34,480
हैं वह इसको यह कार्य करने से रोक रही है वो इतनी प्रभावशाली है कि सब

1084
01:18:34,480 --> 01:18:38,640
कुछ इंटरनेट इत्यादि बंद होने के बावजूद भी इसके फोन को कंट्रोल किया जा सक

1085
01:18:38,640 --> 01:18:42,640
रहा है उनके द्वारा जो है किया जा रहा है तो अब

1086
01:18:42,640 --> 01:18:47,440
पहली बात सोचने वाली यह है कि

1087
01:18:47,440 --> 01:18:51,840
जो शक्तियां इसके फोन को कंट्रोल कर रही हैं तो वह शक्तियां

1088
01:18:51,840 --> 01:18:56,080
बाद में जब इसने पूरी रिकॉर्ड कर ली तो फिर वो वहां पर उसको कंट्रोल

1089
01:18:56,080 --> 01:19:00,400
क्यों नहीं किया? जैसे इसके क्वेश्चन होते हैं दिव्यानुभूति या जो भी आर्य

1090
01:19:00,400 --> 01:19:04,480
समाज के क्वेश्चन होते हैं कि अगर भगवान में इतनी शक्ति है तो वो ऐसा क्यों नहीं

1091
01:19:04,480 --> 01:19:08,720
कर सकते? तो भगवान की तो अपनी वो इच्छा होती है वो कब क्या क्यों कर मगर बुरी शक्तियों

1092
01:19:08,720 --> 01:19:12,800
का तो सिंगल पॉइंट एजेंडा है ना कि उनको उसको रोकना है यह वीडियो बनाने

1093
01:19:12,800 --> 01:19:17,040
से। तो जब वह वीडियो बनाने से रोकना चाह रही है और वह

1094
01:19:17,040 --> 01:19:21,120
कंट्रोल कर सकती है इसके मोबाइल को तो उसके बाद अगर वह 4 मिनट का 5 मिनट

1095
01:19:21,120 --> 01:19:25,200
का कंट्रोल कर सकती थी तो उसके बाद दोबारा जब वीडियो शूट हुआ तो तब कंट्रोल

1096
01:19:25,200 --> 01:19:29,280
क्यों नहीं हुआ सोचने वाली बात मगर एक वो वीडियो

1097
01:19:29,280 --> 01:19:33,800
और दिखा दीजिए आगे

1098
01:19:33,800 --> 01:19:37,920
वाला अ चंद्र ग्रहण वाला कि उस दिन भी यही

1099
01:19:37,920 --> 01:19:41,920
था आज भी वही है यद्यपि अमावस्या को आसुरी शक्तियां अधिक होती है किंतु

1100
01:19:41,920 --> 01:19:45,920
अनाम नेक्स्ट की ऊर्जा की कलाओं के आधार पर घटती बढ़ती है। ये इसकी विशेषता

1101
01:19:45,920 --> 01:19:50,080
है। इसीलिए पूर्णिमा की रात्रि को अनाक्ष की शक्तियां

1102
01:19:50,080 --> 01:19:54,480
सर्वाधिक उत्कर्ष को प्राप्त होती है। जो कि आज भी अलग-अलग

1103
01:19:54,480 --> 01:19:58,480
शैतान के उपासकों के द्वारा आराधित हो रहे हैं और संजोग से जब ये वीडियो रिकॉर्ड

1104
01:19:58,480 --> 01:20:03,360
किया जा रहा है तो आज भी जो रात है वो पूर्णिमा की है।

1105
01:20:03,360 --> 01:20:07,520
तो देखिए तीन चीजें हो गई कि जब यह वीडियो

1106
01:20:07,520 --> 01:20:12,000
बनाते हैं तो इनके आसपास वह शक्तियां मौजूद है जैसा कि

1107
01:20:12,000 --> 01:20:16,720
इनका जो वीडियो है वो अपने आप डिलीट हो जाता है। दूसरा पक्ष बता रहा हूं मैं।

1108
01:20:16,720 --> 01:20:20,720
जब यह वीडियो बनाते हैं तो इनका वह वीडियो डिलीट हो जाता है। ज्यादातर उसी जगह

1109
01:20:20,720 --> 01:20:25,200
बनाते हैं जब पहले भी वह जो शक्ति थी उससे प्रभावशाली

1110
01:20:25,200 --> 01:20:29,440
गतिविधियां हो चुकी हैं। और तो और जो समय

1111
01:20:29,440 --> 01:20:33,960
नक्षत्र इत्यादि है जो भी चंद्र ग्रहण या पूर्णिमा जो भी

1112
01:20:33,960 --> 01:20:38,120
है एक समय नक्षत्र वह भी सेम टू सेम चल रहा है

1113
01:20:38,120 --> 01:20:42,440
और इनके साथ में वह शक्ति आसपास है प्रभावित

1114
01:20:42,440 --> 01:20:47,000
है। वह बात और है। अच्छा एक चीज और है।

1115
01:20:47,000 --> 01:20:48,880
कि जब हम यह बात

1116
01:20:48,880 --> 01:20:53,040
कहते हैं कि यह मच्छराज अगर कोई शैतान है इस दुनिया में तो यह उसका

1117
01:20:53,040 --> 01:20:57,200
विरोधी है या प्रचारक तो यह बात आती है कि इसने अपनी वीडियोस में उसके

1118
01:20:57,200 --> 01:21:01,440
कुछ नाम बताए हैं कि इन नामों को लेने से उसकी शक्ति बढ़ती है।

1119
01:21:01,440 --> 01:21:05,520
तो अब आप एक बात बताइए कि जब यह नाम बताएगा तो

1120
01:21:05,520 --> 01:21:09,520
उसका नाम ज्यादा से ज्यादा लिया जाएगा या नाम को नहीं बताएगा। उसके

1121
01:21:09,520 --> 01:21:14,280
बारे में बताएं मगर उसके उन नामों को ना बताएं जिससे कि उसकी शक्ति बढ़ती है।

1122
01:21:14,280 --> 01:21:18,320
तो क्या उसको जो जिन नामों को लेने से उसकी शक्ति बढ़ती है

1123
01:21:18,320 --> 01:21:22,320
मिलेराज की उन नामों को जब ये सार्वजनिक रूप से बोल देगा

1124
01:21:22,320 --> 01:21:26,320
तो क्या कहीं ना कहीं उसको लिए जाने वाली संख्या जो है उसमें

1125
01:21:26,320 --> 01:21:30,560
वृद्धि नहीं होगी। अच्छा वह बात अलग है कि इसने जो उपाय भी बता दिए

1126
01:21:30,560 --> 01:21:35,520
मगर कितने लोग हैं जो उन उपायों का ध्यान रखेंगे नाम लेते समय

1127
01:21:35,520 --> 01:21:40,080
है ना यह सब सोचने वाली बात है कि यह म्लेच राज का प्रचारक

1128
01:21:40,080 --> 01:21:44,480
है या विरोधी है एक बुरी शक्ति का या फिर यह मानसिक

1129
01:21:44,480 --> 01:21:48,480
स्थिति से गुजर रहा है वो मानसिक स्थिति में बात करेंगे मगर अभी जो मैं नाम वाली

1130
01:21:48,480 --> 01:21:54,120
बात कर रहा हूं ऐसी भी आपने कई फिल्में देखी होंगी

1131
01:21:54,120 --> 01:21:58,160
जिसमें कोई जो विलन की पार्टी

1132
01:21:58,160 --> 01:22:02,640
होती है। वह अपनी किसी चीज को समाज में प्रख्यात

1133
01:22:02,640 --> 01:22:03,920
कराने के लिए फेमस

1134
01:22:03,920 --> 01:22:08,480
कराने के लिए अपने लिए ही कोई बुरा अटेमप्ट करवा लेती है।

1135
01:22:08,480 --> 01:22:12,560
मुझे ऐसा ध्यान आ रहा है एक वो

1136
01:22:12,560 --> 01:22:16,640
आपने फिल्म देखी हो शायद जिसने देखी हो कलयुग

1137
01:22:16,640 --> 01:22:21,080
कलयुग मूवी में जिसमें वो

1138
01:22:21,080 --> 01:22:25,600
कुणाल नाम का शायद अभिनेता है। उस मूवी में भी

1139
01:22:25,600 --> 01:22:29,600
यही होता है कि जो यह जो अश्लील फिल्में बनाने

1140
01:22:29,600 --> 01:22:34,000
वाली जो एक वेबसाइट थी वह अपना प्रचार करने के लिए ही कुछ

1141
01:22:34,000 --> 01:22:38,560
लोगों को पकड़वा देती है जिनकी वो फिल्म बना रही थी अश्लील

1142
01:22:38,560 --> 01:22:42,720
चलचित्र बना रहे थे तो उनको वो पुलिस के हवाले

1143
01:22:42,720 --> 01:22:46,880
करवाती जिससे कि वो केस लाइमलाइट हो उस सुनवाई हो कोर्ट तक जाए अखबारों

1144
01:22:46,880 --> 01:22:51,280
में छपे तो इस सबसे लोगों को यह मालूम पड़े कि दुनिया में कोई अश्लील

1145
01:22:51,280 --> 01:22:55,280
चलचित्र बनाने वाली वेबसाइट है तो यह भी

1146
01:22:55,280 --> 01:22:59,280
एक तरीका है ना इम्लेशराज अपना नाम लोगों से अगर

1147
01:22:59,280 --> 01:23:03,360
इसकी कहानी सत्य है तो वो कहना उच्चारण करवाना चाहता

1148
01:23:03,360 --> 01:23:07,520
है उसको गुंजायमान बनाना चाहता है तो उसको अपने प्रचारक के द्वारा

1149
01:23:07,520 --> 01:23:11,600
प्रस्तुत करवा रहा है तो

1150
01:23:11,600 --> 01:23:15,920
ये सारी चीजें भी है। इसका जो है उसी स्थान पर बैठकर वीडियो बनाना उसी

1151
01:23:15,920 --> 01:23:19,040
उसी ग्रह नक्षत्र में वीडियो बनाना और तो और इसके

1152
01:23:19,040 --> 01:23:24,160
आसपास उस शक्ति का होना इसके द्वारा खुद कहा जाना

1153
01:23:24,160 --> 01:23:28,640
है ना? यह सब चीजें किशोर इशारा कर रही है कि मलेच

1154
01:23:28,640 --> 01:23:32,880
राज अगर है तो यह उसका प्रचारक है या विरोधी है। अभी मना

1155
01:23:32,880 --> 01:23:37,760
स्थिति की बात अभी हम आगे करेंगे। जी आप वीडियो चला दीजिए।

1156
01:23:37,760 --> 01:23:41,760
सीरिया में भी इसकी गतिविधियां हमने 2017 से 18 के मध्य में देखी

1157
01:23:41,760 --> 01:23:45,840
थी। अनुभव की थी। मतलब देखी थी। मतलब गया नहीं था। अनुभव की थी और एक सा परंपरा

1158
01:23:45,840 --> 01:23:50,000
के साधक से इसकी पुष्टि भी की थी। तो हमने आपको इस विषय में

1159
01:23:50,000 --> 01:23:51,920
मूलभूत जानकारी आज देने का प्रयास

1160
01:23:51,920 --> 01:23:56,720
किया। ये देखिए देखिए यहां पर देखिए ये

1161
01:23:56,720 --> 01:24:01,120
मच्छराज के कितना निकटतम है यह भी सोचने वाली बात है। फलानी

1162
01:24:01,120 --> 01:24:05,440
जगह देखी थी फलानी जगह देखी म्लेच राज से इसकी कितनी निकटता

1163
01:24:05,440 --> 01:24:09,680
है। एक निकट्टा वाला वीडियो और है वह दिखाइए कि हमने इसको

1164
01:24:09,680 --> 01:24:15,680
जो है मैंने इसका घर देखा था जब

1165
01:24:19,640 --> 01:24:23,680
देखिए ऐसा इसके घर अगर मैं कुल चित्र एल डिजाइनर होता तो आपको मैं दिखा देता लेकिन

1166
01:24:23,680 --> 01:24:28,080
मैं असमर्थ हूं मैं एआई से इसके घर का डिजाइन बनाने का बहुत प्रयास करता मैंने अपने जीवन के तीन दिन में यहां पे

1167
01:24:28,080 --> 01:24:32,080
ज्ञान है ग्राफिक डिजाइन से बस मैंने तीन दिन प्रेशर किया लेकिन जो मैंने देखा इसके घर का नक्शा वो नहीं दिखा सकता

1168
01:24:32,080 --> 01:24:36,160
हूं आपको मैं संख्या मत कीजिएगा मेरे पास डाटा नहीं है मैं बस आपको वर्णन करता हूं आप बंद करके वो जानकारी को समझने

1169
01:24:36,160 --> 01:24:40,240
का प्रयास करे की आप एक ऐसे स्थान पर है जो लगभग लगभग आधा

1170
01:24:40,240 --> 01:24:44,320
किलोमीटर लंबा और आधा किलोमीटर चौड़ा है। मतलब वो स्क्वायर नहीं है। आप ऐसा समझे की वो आधा किलोमीटर

1171
01:24:44,320 --> 01:24:48,400
रेडियस का एक गोलाकार क्षेत्र है। उस गोलाकार क्षेत्र के मध्य में एक तल्ले का एक घर है। ये

1172
01:24:48,400 --> 01:24:52,640
अंडर ग्राउंड नहीं है। ये जमीन टूटा है और उसकी छत एक तरफा स्लोप वाली है। एक तरफा

1173
01:24:52,640 --> 01:24:56,960
स्लोप वाली उसकी छत है। दो तरफ स्लोप नहीं है। एक तरफा स्लोप है। बिलकुल काले रंग का घर है। उस घर के ठीक सामने

1174
01:24:56,960 --> 01:25:00,960
आग जल रही है। कुछ टूटे हुए वाहन है। कुछ बिजली के खंबे जहां पुराने बल्ब लग रहे है। और उन बल्बों

1175
01:25:00,960 --> 01:25:04,960
की रोशनी ज तक है वहां तक प्रकाश है। उसके आगे भक्त नाम है और मैं बहुत निर्भय प्रवृत्ति का

1176
01:25:04,960 --> 01:25:06,960
व्यक्ति हूं मैं पर्वत निर्भता पूर्व वितरण करता हूं और

1177
01:25:06,960 --> 01:25:11,040
उस घर की धारा मैंने लगभग आधे मिनट तक देखी मैंने स्वयं को वहां पर आध्यात्मिक रूप से अनुभव किया लेकिन वो इतना भयाक

1178
01:25:11,040 --> 01:25:15,120
करने वाला था वो भूतला कुछ नहीं था बस धारा था परिवेश

1179
01:25:15,120 --> 01:25:19,120
था कुछ टूटे वाहन थे और सामने अग्नि था और इसी इसी दृश्य में इतनी नकारात्मकता थी इतनी

1180
01:25:19,120 --> 01:25:23,200
आसुरी तत्वों का उसमें प्रतिष्ठापन था की मेरे जैसा निर्भर व्यक्ति के निर्देश से काप गया

1181
01:25:23,200 --> 01:25:27,280
और उसके आगे देखने का साहस कुछ समय नहीं कर पाया था और इस स्थान का नाम क्या है ये खोजने में बहुत

1182
01:25:27,280 --> 01:25:31,280
परिश्रम किया और तब जाकर पता चला की ये स्थान का कोई निश्चित नाम नहीं है मतलब ये उसका हेड क्वार्टर जो है हेड

1183
01:25:31,280 --> 01:25:35,280
क्वार्टर की तरह संज्ञा इसको कहते है पगम। इसका नाम है पैरागम। पैरागम का जो

1184
01:25:35,280 --> 01:25:39,280
मुख्यालय है पैरागम एक उपलक्षण है। मतलब अगर नक्ष यहां बैठा है तो इसी जगह का नाम हो जाएगा पैरागम। अगर नक्षराज दिल्ली बैठा

1185
01:25:39,280 --> 01:25:43,280
है तो उस जगह का नाम हो जाएगा पैरागम। अगर नक्षराज वाशिंगटन में बैठा है तो उस संस्था का नाम हो जाएगा पैरागम। और पैरागम कोई ऐसी

1186
01:25:43,280 --> 01:25:47,360
स्थान नहीं है। पैरागम वो थोर है जिसका नक्ष बैठता है उसका हेड क्वार्टर है। चाहे वही बना

1187
01:25:47,360 --> 01:25:51,440
आपका नाम हो जाएगा पैरागम। इस प्रकार से तो कहने का

1188
01:25:51,440 --> 01:25:55,600
मतलब यहां पर यह है कि यह बहुत निकटता रखता है।

1189
01:25:55,600 --> 01:25:59,840
यह उसी समय सक्रिय होता है जिस समय वो शक्तियां सक्रिय

1190
01:25:59,840 --> 01:26:04,160
थी। यह उसी जगह पर सक्रिय है जहां पर वह सक्रिय

1191
01:26:04,160 --> 01:26:09,640
पहले वह शक्तियां पहले सक्रिय हो चुकी हैं

1192
01:26:09,640 --> 01:26:13,680
और यह जो है विरोधी होने के रूप में भी उसके

1193
01:26:13,680 --> 01:26:17,840
प्रचार का कार्य कर देता है। यह कहते हुए कि इसके नाम को नहीं लेना चाहिए। मगर

1194
01:26:17,840 --> 01:26:22,360
नाम मैं आपको बता दे रहा हूं। अब इसने

1195
01:26:22,360 --> 01:26:26,400
जो नाम लेते समय बचाव क्या रखना है यह भी बताया। मगर

1196
01:26:26,400 --> 01:26:30,400
वह भी एक बात हो सकती है कि क्योंकि मैं इसका विरोधी हूं तो आपको

1197
01:26:30,400 --> 01:26:34,640
मैं बचाव बता रहा हूं। वह बचाव कितना कारगर सिद्ध होगा नहीं होगा वह एक बात अलग

1198
01:26:34,640 --> 01:26:38,640
है। मगर नाम लेना बहुत खतरनाक है। नाम

1199
01:26:38,640 --> 01:26:44,520
लेने से उसकी शक्तियां बढ़ती हैं और नाम इसने सार्वजनिक कर

1200
01:26:44,520 --> 01:26:45,920
दिया। के आधार

1201
01:26:45,920 --> 01:26:50,320
पर हमने एआई से कुछ चित्र बनाए हैं जो की इस वीडियो में इस श्रृंखला के इस एपिसोड में आपको समय-समय

1202
01:26:50,320 --> 01:26:54,400
पर दिखाए जाते। एक क्रू स्वरूप एक शैतान का जिसका

1203
01:26:54,400 --> 01:26:58,480
एक बात और है एक बात और ध्यान देने की है। यह मच्छराज को इतना ज्यादा

1204
01:26:58,480 --> 01:27:02,880
जानता है। वह कहां-कहां चलता है उसका मूवमेंट है। उसका घर देख चुका है। उसकी

1205
01:27:02,880 --> 01:27:06,960
सक्रिय होने की जो टाइमिंग्स है उसमें उसी में सक्रिय होता

1206
01:27:06,960 --> 01:27:10,960
है। जो जगह पर वो सक्रिय हो चुकी है वो क्या कहते हैं? वहां पर

1207
01:27:10,960 --> 01:27:15,040
वो सक्रिय होता है। स्थान वाला भेद भी नहीं है। काल वाला भेद भी

1208
01:27:15,040 --> 01:27:19,120
नहीं है। और तो यह प्रूफ भी हो रहा है क्योंकि वह शक्तियां वहां पर थी जब इसका

1209
01:27:19,120 --> 01:27:23,200
वीडियो मिटाया गया। ठीक है? तो यह प्रूफ भी हो रहा है कि वह शक्तियां जिनकी

1210
01:27:23,200 --> 01:27:27,360
बात कर रहा है वह और यह बहुत निकटता से जानता है। उसके चित्रों को इसने एआई

1211
01:27:27,360 --> 01:27:31,440
से बनाने का बनाने की कोशिश की है। इस पूरी जो सीरीज है इसकी

1212
01:27:31,440 --> 01:27:35,520
एडिटिंग इत्यादि म्यूजिक इत्यादि का सिलेक्शन वगैरह भी संभवत इसने

1213
01:27:35,520 --> 01:27:39,920
स्वयं ही किया है। तो ये कितना ज्यादा निकट है अम्लेक्षराज

1214
01:27:39,920 --> 01:27:43,920
के। अगर वो है तो यह यहां पर हम लोग इस ओर जा

1215
01:27:43,920 --> 01:27:49,040
रहे हैं। जी चलाइए आप वीडियो।

1216
01:27:49,040 --> 01:27:53,200
जब मैं अपने कक्ष में सो रहा था तो काल लगभग 4

1217
01:27:53,200 --> 01:27:57,280
बजे ये देखिए यहां पर भी इसके हाथ में लालटेन है। आपके हृदय

1218
01:27:57,280 --> 01:28:01,440
में एक ड्यूटी सदैव जलती रहनी चाहिए। ये

1219
01:28:01,440 --> 01:28:05,520
ध्यान देने वाली बातें हैं कि आपको किस ओर ध्यान आकर्षित

1220
01:28:05,520 --> 01:28:11,040
हो रहा है आपका। जी प्ले करिए।

1221
01:28:11,040 --> 01:28:15,200
प्रात काल लगभग 4 बजे जब मैं अपने कक्ष में सो रहा था तो

1222
01:28:15,200 --> 01:28:19,360
किसी व्यक्ति ने हमारे कक्ष के द्वार पर दस्तक दी तो एक दो बार तो मैं सुन नहीं पाया

1223
01:28:19,360 --> 01:28:23,440
और कुछ देर के बाद जब मेरे नेत्र खुले जब मुझे अनुभव हुआ कि कोई दरवाजे पर है मैं बाहर निकला

1224
01:28:23,440 --> 01:28:27,440
मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि कामाख्या में ही एक महानुभाव

1225
01:28:27,440 --> 01:28:31,440
जो पाठ जपा करते हैं यहां के है तो नहीं किंतु साध तपस्या के लिए यही पर प्रवास कर

1226
01:28:31,440 --> 01:28:35,440
रहे है वो दरवाजे पर थे प्रात काल चार बजे तो मैंने उनसे पूछा भाई आप क्यों आए हैं तो

1227
01:28:35,440 --> 01:28:39,520
वो बड़े घबराए हुए थे बेचैन उनका चेहरा दिख रहा था वो हमारे कक्ष में आए फिर हमारे साथ बैठ उन्होंने बताया

1228
01:28:39,520 --> 01:28:43,520
की आप जोराज श्रंखला अभी निर्गत कर रहे है उससे जुड़ी कुछ बातें कर कहनी है हमने

1229
01:28:43,520 --> 01:28:47,600
सोचा अभी चार बजे सुबह क्या बात करनी है मैंने पूछा क्या बात उन्होंने कहा की अभी अभी उन्हें एक स्वप आया है जिस स्वप्न में

1230
01:28:47,600 --> 01:28:51,680
कोई व्यक्ति है जो वही किसी परंपरा के साधक है और उन्होंने कहा की भाई में पहले

1231
01:28:51,680 --> 01:28:55,680
वृक्षराज के संगठन में जुड़ा हुआ था और वृक्षराज के नर इत्यादि में दिया करता था किंतु मुझे इस

1232
01:28:55,680 --> 01:28:59,680
प्रकार के अभियानों में बड़ी ग्लानी हुई मुझे बहुत अफसोस हुआ की मैं क्या कर रहा हूं तो मुझे प्रायश्चित करना है

1233
01:28:59,680 --> 01:29:03,680
और मैं देवी जी की आराधना इत्यादि कर रहा हूं तो इसीलिए मैं यहां पर आया हूं तपस्या करने के लिए और मैं

1234
01:29:03,680 --> 01:29:04,400
बताऊंगा किराज

1235
01:29:04,400 --> 01:29:08,720
वस्तु का कैसा दिखता है जिस प्रकार के चित्र जिस प्रकार के घटनाक्रम उसके विषय में प्रसारित किए जा रहे

1236
01:29:08,720 --> 01:29:13,200
उनसे अधिक स्पष्ट और उनसे अधिक ठोस मैं आपको चित्र बनाकर दिखा रहा हूं क्योंकि मैं उस तत्व को भौतिकता

1237
01:29:13,200 --> 01:29:17,200
से जानता हूं। साधक जी ने बताया इस सत्र में जो व्यक्ति उनसे मिले उन्होंने बताया कि वो ये

1238
01:29:17,200 --> 01:29:21,200
सब तामसी विद्याएं पश्चात विद्याएं सीखने के लिए अफगानिस्तान के क्षेत्र में गए थे और वहां से सारी विद्याएं काली शक्तियां

1239
01:29:21,200 --> 01:29:25,200
वो सीख कर जगा कर आए थे और उसी की आराधना करते थे किंतु उसके मार्ग में चलते हुए इन्हें आत्मज्ञानी हुई

1240
01:29:25,200 --> 01:29:29,200
इन्हें यह बोध हुआ की मैं तो बहुत ही नकारात्मक मार्ग पर निकल पड़ा हूं। तो फिर भगवती की आराधना करते हुए धीरे धीरे उस

1241
01:29:29,200 --> 01:29:33,200
मार्ग से मुक्त होने का प्रयास कर रहे थे। तो उन्होंने एक श्रेष्ठ वर्ण के दीवार पर उसका चित्र बना कर दिखाया

1242
01:29:33,200 --> 01:29:37,360
की वो कैसा दिखता है? तो उसमे भी दो शक्तिया एक तो वाहन के रूप में है और एक जो उसके ऊपर सवार

1243
01:29:37,360 --> 01:29:41,360
है तो ज मैंने आपको आक्ष और उसके भीतर बैठे हुए अनामृक्ष के बारे में बताया था वहां पर ऐसा ही

1244
01:29:41,360 --> 01:29:45,440
भाव है की एक उसको ढूंढ रहा है और दूसरा उसके ऊपर सवारी कर रहा है अब भौतिक रूप से सवारी कर रहा है की सांस्कार रूप से सवारी

1245
01:29:45,440 --> 01:29:49,440
कर रहा है ये तो ये सब शक्तियां स्थूल रूप में तो कुटस होती नहीं है की भाई हाथ से तो चाहे बड़ा होगा पैर होगा तो चाहे बड़ा होगा

1246
01:29:49,440 --> 01:29:53,520
ये सब काम शक्तियां है अपनी इच्छा के अनुसार वो आकृति और भाषा स्वर इत्यादि

1247
01:29:53,520 --> 01:29:57,520
को परिवर्तित करने का सामर्थ रखती है ये सब शक्तियां तो उन्होंने जो चित्र बनाया और वो जो साधक प्रात काल मुझसे मिलने

1248
01:29:57,520 --> 01:30:01,680
आए थे उन्होंने जो बताया वो लगभग सात फीट का एक पुरुष

1249
01:30:01,680 --> 01:30:05,840
जिसकी ऊपरी खाल नहीं है ऊपर की चमड़ी नहीं है उसकी जो मांसपेशिया वो दिखती ऊपरी खा लेंगे।

1250
01:30:05,840 --> 01:30:10,400
7 फीट का एक पुरुष जो साला उठा है और

1251
01:30:10,400 --> 01:30:14,400
नहीं देख पाए। ठीक है। तो कहने का मतलब

1252
01:30:14,400 --> 01:30:18,640
ये है ये मलेच राज को इतना ज्यादा ब्रीफली

1253
01:30:18,640 --> 01:30:19,440
जानने वाला

1254
01:30:19,440 --> 01:30:23,600
कौन है व्यक्ति? यह खुद है। इतना ज्यादा उसकी बारीकियों

1255
01:30:23,600 --> 01:30:27,600
को जानने वाला यह खुद है। और जहां

1256
01:30:27,600 --> 01:30:31,920
वो जी शास्त्र उसे बता रहे हैं। बाइबल ऑफ़ जेनेसिस और हदीस

1257
01:30:31,920 --> 01:30:36,000
से नहीं बता रहे हैं। इसीलिए तो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। को केवल निजी देश में निग्रचार

1258
01:30:36,000 --> 01:30:40,000
का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन इसको मैं

1259
01:30:40,000 --> 01:30:42,720
बोल दूं एक बार

1260
01:30:42,720 --> 01:30:46,960
बहुत बढ़िया तो ये मैंने बताया देश

1261
01:30:46,960 --> 01:30:51,120
काल का सक्रिय होने का देश काल सेम है। सक्रिय

1262
01:30:51,120 --> 01:30:56,000
होने का प्रमाण है। ठीक है? ये खुद दे रहा है। और

1263
01:30:56,000 --> 01:31:00,000
उसकी जो बहुत ऐसी चीजें हैं जो कोई सामने से मिला हो वही

1264
01:31:00,000 --> 01:31:04,640
जान सकता है। वह जैसे कि वह कैसा दिख रहा है और उसका घर

1265
01:31:04,640 --> 01:31:08,640
उसके मूवमेंट ज्यादा से ज्यादा वो जानता है और इस सब

1266
01:31:08,640 --> 01:31:12,880
के बाद इसने जितनी भी एडिटिंग है स्वयं की है भगवतानंद

1267
01:31:12,880 --> 01:31:16,880
ने म्यूजिक वगैरह खुद लगाई है उसके चित्र बनाए ऐसे तो

1268
01:31:16,880 --> 01:31:21,120
सारी चीजें एक और इशारा कर रही है कि या तो मलेच्छराज के प्रभाव

1269
01:31:21,120 --> 01:31:25,200
में है या फिर जो मना स्थिति है इसकी मानसिक स्थिति

1270
01:31:25,200 --> 01:31:29,200
है उसी की उपज है मलेच्छराज है ना वो भी

1271
01:31:29,200 --> 01:31:33,440
मैं आपको बताऊंगा कि वो वो किस तरह से सामने आ रहा है इसकी मना स्थिति

1272
01:31:33,440 --> 01:31:35,040
के कारण भी वो मलेचराज

1273
01:31:35,040 --> 01:31:39,280
नाम का एक एक की एक एंटिटी गड़ी गड़ी जा सकती है। वो भी एक बीमारी होती है। मैं बताऊंगा

1274
01:31:39,280 --> 01:31:43,520
आपको। मगर अच्छा एक चीज और है कि इस जो

1275
01:31:43,520 --> 01:31:48,320
इसकी पूरी जो कहानी है राज की इसमें इसने

1276
01:31:48,320 --> 01:31:52,480
चीजें सांकेतिक तो उठाई है फलाने बुक से सांकेतिक उठा

1277
01:31:52,480 --> 01:31:56,840
ली या फलाने ग्रंथ से सांकेतिक वो तो उठाई है जैसे रामपाल करता है ना

1278
01:31:56,840 --> 01:32:01,080
संकेत कि वहां पे अगर सूक्ष्म ग्रंथ कह दिया गया तो

1279
01:32:01,080 --> 01:32:05,280
सूक्ष्म वहां पे सूक्ष्म वेद बोल दिया गया तो हमने सूक्ष्म

1280
01:32:05,280 --> 01:32:09,760
वेद मान लिया कबीर वाणी को वहां पे अगर तत्वदर्शी बोल दिया गया जो

1281
01:32:09,760 --> 01:32:14,640
ठीक ठीक व्याख्या करेगा तो वो मान लिया गया इसको रामपाल को

1282
01:32:14,640 --> 01:32:18,880
तो ऐसे साकेत संकेतों को तो इसने उठाया है थ्योरी पेपर

1283
01:32:18,880 --> 01:32:23,120
से आर्टिकल से या ग्रंथों से मगर

1284
01:32:23,120 --> 01:32:27,280
प्रमाण के रूप में इसने अपनी जो अपनी सिद्धि अपनी साधना है उसको

1285
01:32:27,280 --> 01:32:31,600
ही रखा है। अपनी अपने शब्दों को ही प्रमाण के रूप में इसने प्रस्तुत किया है। संकेत

1286
01:32:31,600 --> 01:32:35,760
को लिया है। वहां संभावनाएं उत्पन्न करने वाली चीजों को लिया है। मगर जो पूरी

1287
01:32:35,760 --> 01:32:40,000
कहानी के लिए प्रमाण है उसमें ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा अधिकांशता जैसे

1288
01:32:40,000 --> 01:32:44,080
रामपाल की कहानी है ना पूरी कि भाई देखो देखो वेदों में यहां पर यह

1289
01:32:44,080 --> 01:32:48,080
लिखा है इसलिए मैं यह हूं इसलिए कबीर भगवान

1290
01:32:48,080 --> 01:32:50,160
संकेत यहां के उठा लिए गए उन

1291
01:32:50,160 --> 01:32:54,240
संकेतों के आधार पर देखो देखो ये अच्छा अर्जुन तो स्वयं वहां खड़ा हुआ

1292
01:32:54,240 --> 01:32:58,320
है कृष्ण के पास फिर कृष्ण किस तत्वदर्शी के रूप पास जाने की बात कर

1293
01:32:58,320 --> 01:33:02,560
रहे हैं है ना संकेत मिल गया किसी और के पास जाने का तो वो किसी

1294
01:33:02,560 --> 01:33:06,560
और अरे किसी और के पास जाने की बात ठीक है चलो मान लिया मगर

1295
01:33:06,560 --> 01:33:10,640
वो तुम ही हो ये कैसे माना जाए तो वो तुम ही हो मैं सिर्फ उसकी वाणी प्रमाण

1296
01:33:10,640 --> 01:33:15,000
है तो इसी तरीके से संकेत तो इसने उठाए

1297
01:33:15,000 --> 01:33:19,120
हैं मगर वो संकेत जाकर वही पूरे होते

1298
01:33:19,120 --> 01:33:23,280
हैं उसी चीज को ख्यापित करते हैं जिसको यह कर रहा है तो इस इस

1299
01:33:23,280 --> 01:33:27,360
बात के लिए इसकी वाणी ही प्रमाण है और ऐसे में जब इससे कोई यह

1300
01:33:27,360 --> 01:33:31,440
पूछ लेता है तो यह क्रोधित होता है क्रोधित होता हुआ भी दिखता है सबूत मांगने

1301
01:33:31,440 --> 01:33:37,440
पर क्रोधित हो जाता है देखिए

1302
01:33:40,120 --> 01:33:41,440
चलाइए ये सब

1303
01:33:41,440 --> 01:33:45,440
सनातनी शास्त्रों से हम बता रहे हैं। कोई बाइबल और जेनेसिस और हदीसों से नहीं बता रहे हैं। इसलिए जो कहता हूं उसको कई

1304
01:33:45,440 --> 01:33:49,680
बार श्रद्धा पूर्वक सुनना सीखो। केवल निजी देश में निग्रचार का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक

1305
01:33:49,680 --> 01:33:53,760
सत्य है जो वास्तविक संकट है सनातन के ऊपर उसकी उपेक्षा मत करो। क्योंकि हम नहीं बताएंगे तो हम बताने वाले बचे नहीं

1306
01:33:53,760 --> 01:33:57,760
है अधिक लोग। अब देखो हम तुमको और भी कुछ प्रमाण देते है। अच्छा

1307
01:33:57,760 --> 01:34:01,280
एक प्रश्न बड़ा सुंदर लोगों ने पूछा था जो युग पुराण के श्लोक से हमको सुना आ गया वो भी हम तुमको बताएंगे।

1308
01:34:01,280 --> 01:34:05,360
एक वो श्लोक और था ना एक वो वीडियो था एक

1309
01:34:05,360 --> 01:34:09,680
जिसमें ये बोल ये बोलता है कि

1310
01:34:09,680 --> 01:34:13,680
लड़कियां व्हील बना रही हैं। ये सब पैशाचिक वो नहीं है शक्ति

1311
01:34:13,680 --> 01:34:18,000
तो और कौन करा रहा है? वो वाला वीडियो और दिखाइए।

1312
01:34:18,000 --> 01:34:22,320
उसमें भी इसका क्रोध इससे सबूत मांगने पर कैसे क्रोधित हो रहा है।

1313
01:34:22,320 --> 01:34:26,600
भाई हम लोग रामपाल से क्या पूछते हैं कि चलो मान

1314
01:34:26,600 --> 01:34:31,520
लिया कि वेदों में लिखा है कि

1315
01:34:31,520 --> 01:34:35,920
वो गाय का दूध पिएगा वो चरवाहा होगा वो ये होगा वो वो होगा। चलो संकेत

1316
01:34:35,920 --> 01:34:40,080
मिल गए परमात्मा के। अब वो परमात्मा वही कबीर

1317
01:34:40,080 --> 01:34:44,160
है जो कबीर जिसको तुम कबीर कह रहे हो। ये कैसे माना जाए? वेदों

1318
01:34:44,160 --> 01:34:48,160
में कवि नाम आ गया तो कवि नाम आ गया। मान लो

1319
01:34:48,160 --> 01:34:52,320
वेदों में कबीर भी लिखा है। कवि नहीं उसका अर्थ वो ले लो जो तुम कहते होगे।

1320
01:34:52,320 --> 01:34:56,400
कबीर है वो कवि कबीर है। तो ठीक है। अगर वो कबीर शब्द आ

1321
01:34:56,400 --> 01:35:00,400
गया उसको कबीर समझना ठीक है। मगर वो वही कबीर क्यों?

1322
01:35:00,400 --> 01:35:04,800
जिसको तुम मान रहे हो तो वहां पर उनका शब्द प्रमाण है। संकेत यहां से लिया शब्द

1323
01:35:04,800 --> 01:35:09,120
प्रमाण है। इसी तरीके से संकेत लिए ग्रंथों से मगर प्रमाण क्या है?

1324
01:35:09,120 --> 01:35:12,720
इसका खुद का शब्द। देखिए और

1325
01:35:12,720 --> 01:35:16,800
तुम्हारे अंत चेतना पर इतना प्रभाव डाल चुके हैं कि सर पहन के खड़े मूत रहे हो वो और

1326
01:35:16,800 --> 01:35:20,320
साजिश गम कराए घूम रही है बिना पैसा के शक्ति के तुमको लग रहा है अब इससे ज्यादा क्या प्रमाण दे

1327
01:35:20,320 --> 01:35:26,200
तुमको गलीगली में रील लेकिन यहां पे क्या हुआ बहुत

1328
01:35:26,200 --> 01:35:30,320
बढ़िया इसने कहा कि भाई देखिए ऐसा ऐसासा हो रहा है तो ये क्या

1329
01:35:30,320 --> 01:35:34,560
बिना पैशाचिक शक्ति के हो रहा है तो बिना पैशाचिक शक्ति के हो रहा है ये कोई नहीं कह रहा है

1330
01:35:34,560 --> 01:35:38,880
मगर वो पैशाचिक शक्ति के लिए कि जिस रूप में है जैसी दिखती

1331
01:35:38,880 --> 01:35:43,040
है ऐसा करती है वैसा ऐसा करती है। उसकी जो वस्तुनिष्ठता है उस

1332
01:35:43,040 --> 01:35:47,040
जानकारी के लिए तो तुम्हारे शब्द ही प्रमाण हो रहे हैं ना

1333
01:35:47,040 --> 01:35:51,200
तुम्हारे अनुसार। तो ये

1334
01:35:51,200 --> 01:35:57,200
सारा ताना है।

1335
01:35:57,240 --> 01:36:01,440
अ तो इस तरीके से क्यों पढ़ना है?

1336
01:36:01,440 --> 01:36:05,600
इसकी स्पीड धीमी करके चलाइए ना। इतना स्ट्रेट क्यों चला रहे हैं? डेढ़ पे चलाइए

1337
01:36:05,600 --> 01:36:11,360
या तो 1.5 पे चलाइए। मेरे ख्याल से दो पे चल रहा है।

1338
01:36:11,360 --> 01:36:15,520
में रील बनाकर लड़कियां जो है सो नाच रही है और व्यभचार फैला रही है। इतनी अंदर की मानसिकता

1339
01:36:15,520 --> 01:36:19,520
पर प्रभाव पड़ जा रहा है। क्यों पड़ रहा है बिना किसी पैशाचिक शक्ति के? तो जिस पैशाचिक शक्ति

1340
01:36:19,520 --> 01:36:23,760
के माध्यम से ऐसा हो रहा है उसका जहांजहां संदर्भ जिस प्रकार से प्राप्त होगा चाहे अधिक परंपरा

1341
01:36:23,760 --> 01:36:27,840
से चाहे अनुभूत परंपरा से हम उसका वर्णन करेंगे। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना

1342
01:36:27,840 --> 01:36:30,400
है तो अपने कंबल तान और सो जाओ। तुम्हारे लिए हम थोड़े बना रहे हैं

1343
01:36:30,400 --> 01:36:34,400
ये सब बातें। करेंगे। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपने कंबल तान

1344
01:36:34,400 --> 01:36:40,000
और सो जाओ। तुम्हारे लिए हम थोड़े बना रहे हैं ये सब बातें। [संगीत]

1345
01:36:40,000 --> 01:36:44,240
हम तो अब समराइज कर ले थोड़ा सा

1346
01:36:44,240 --> 01:36:48,320
कि इनके जीवन में डिप्रेशन रहा ही है कुछ मैंने बायपोलर नाम

1347
01:36:48,320 --> 01:36:52,480
की जो बुक है वो थोड़ी बहुत देखी तो डिप्रेशन था इनको

1348
01:36:52,480 --> 01:36:56,560
दुख से गुजरे हैं संकट की स्थितियों से गुजरे और फिर आगे

1349
01:36:56,560 --> 01:37:00,640
जो है डिप्रेशन है बाईपोलर है कुछ

1350
01:37:00,640 --> 01:37:04,720
ऐसे रोग भी हैं जिन जो अभी प्रमाणिक नहीं है कि हैं इनको आदतें

1351
01:37:04,720 --> 01:37:08,800
कुछ और प्यार में असफल करियर

1352
01:37:08,800 --> 01:37:13,480
में असफल फिर स्वयं को ख्यापित करने के लिए दौड़

1353
01:37:13,480 --> 01:37:17,840
नकारात्मक विधि का आलंबन उसके बाद नकारात्मक

1354
01:37:17,840 --> 01:37:22,160
चीजों में प्रवेश कर जाना ऐसी संवेदनशील गंभीर साधनाओं

1355
01:37:22,160 --> 01:37:26,320
में विधियों में प्रवेश करने कर जाना जहां के लिए प्रज्ञा शक्ति और जो

1356
01:37:26,320 --> 01:37:30,320
विल पावर वगैरह है वो बहुत स्ट्रांग चाहिए होती है व्यक्ति को उसमें प्रवेश

1357
01:37:30,320 --> 01:37:34,480
कर जाना साथ ही साथ इसके

1358
01:37:34,480 --> 01:37:38,640
जो लक्षण है वो भी साथ में लेकर के चलना जैसे कली पुरुष की बहन है जो

1359
01:37:38,640 --> 01:37:43,120
जिसका नाम है द्रुपति वो जो गाली

1360
01:37:43,120 --> 01:37:46,000
उसको अपने मुख में लेकर के चलना जिसे पिशाचिनी

1361
01:37:46,000 --> 01:37:50,880
कहा गया है शास्त्रों में भी और इसने भी माना तो इन सबका जो एक

1362
01:37:50,880 --> 01:37:55,120
अंत में एक इफेक्ट आता है कि या तो यह खुद एक

1363
01:37:55,120 --> 01:37:59,120
जो जिस शक्ति से लड़ने की बात कर रहा है यह प्रबल संभावनाएं

1364
01:37:59,120 --> 01:38:03,280
यहां पर उत्पन्न हो रही है कि यह खुद उस शक्ति के प्रभाव में है। यह

1365
01:38:03,280 --> 01:38:08,000
इस तरीके से उस शक्ति के लिए ही कार्य कर रहा है जिसके बारे में यह बात कर रहा है।

1366
01:38:08,000 --> 01:38:12,080
जिन्न की साधना, परी की साधना यह सब धर्म को बचाने के

1367
01:38:12,080 --> 01:38:16,120
लिए नहीं होता है। कहां लिखा है हमारे शास्त्रों में?

1368
01:38:16,120 --> 01:38:20,240
बताइए। है ना? यही इसको इसके संप्रदाय से मिला है। क्या

1369
01:38:20,240 --> 01:38:24,920
लुप्त संप्रदाय से? सोचने वाली बात।

1370
01:38:24,920 --> 01:38:29,040
तो अब तीन संभावनाएं हैं जो मैं आपको

1371
01:38:29,040 --> 01:38:33,440
बता रहा हूं। या तो यह

1372
01:38:33,440 --> 01:38:37,440
या तो यह खुद मलच्छराज है। अगर अगर वो ओरिजिनल

1373
01:38:37,440 --> 01:38:41,760
वाला भी नहीं अगर वो ओरिजिनल वाला मच्छराज भी नहीं जो इसने ख्यापित

1374
01:38:41,760 --> 01:38:45,920
किया। मगर इसके ताना-बाना जो इसने बुना है उसके अनुसार जो

1375
01:38:45,920 --> 01:38:50,160
मलेच्छराज नाम की एंटिटी बनी है वो ये खुद ही है। अब यहां पर मन

1376
01:38:50,160 --> 01:38:54,240
स्थिति आती है। मनस्थिति कैसे कि कोई एक

1377
01:38:54,240 --> 01:38:58,320
बीमारी होती है उसका नाम ध्यान नहीं आ रहा है मुझे जिसमें व्यक्ति

1378
01:38:58,320 --> 01:39:01,280
खुद से ही बात करने लगता है। दूसरे

1379
01:39:01,280 --> 01:39:05,640
रूप में इस पर एक मूवी बनी है कार्तिक कॉलिंग

1380
01:39:05,640 --> 01:39:10,520
कार्तिक। उसमें वह व्यक्ति क्या करता

1381
01:39:10,520 --> 01:39:15,320
था? अच्छा ये वीडियो पूरा सुना

1382
01:39:15,320 --> 01:39:17,040
दीजिए। ये सब सनातनी

1383
01:39:17,040 --> 01:39:21,040
शास्त्रों से हम बता रहे हैं। कोई बाइबल और जेनेसिस और हदीसों से नहीं बता रहे हैं। इसलिए जो कहता हूं उसको कई बार श्रद्धा

1384
01:39:21,040 --> 01:39:25,040
पूर्वक सुनना सीखो। केवल निजी देश में निग्रह का विरोध करना है। इसके चक्कर में जो वास्तविक सत्य

1385
01:39:25,040 --> 01:39:29,360
है जो वास्तविक संकट है सनातन के ऊपर उसकी उपेक्षा मत करो। क्योंकि हम नहीं बताएंगे तो हम बताने वाले बचे नहीं है अनेक

1386
01:39:29,360 --> 01:39:33,360
लोग। अब देखो हम तुमको और भी कुछ प्रमाण देते है। अच्छा एक प्रश्न बड़ा

1387
01:39:33,360 --> 01:39:37,360
सुंदर लोगों ने पूछा था जो युग पुराण के श्लोक से हमको सम्मान आ गया वो भी हम तुमको बता देते है क्या

1388
01:39:37,360 --> 01:39:41,760
है वो विषय जब आर्द्रवलक्ष इबिसिन के विद्रोह

1389
01:39:41,760 --> 01:39:45,760
भी की सेना से बचकर या निकल कर भाग रहा था और जब वो रेगिस्तान में गया

1390
01:39:45,760 --> 01:39:49,760
वहां पर उसको 15 लोग मिले थे ऐसा हमने बताया था वो 15 लोग कौन थे इसका अर्थ है की वो 15 लोग तो

1391
01:39:49,760 --> 01:39:53,760
वृक्ष भी पुराने है वर्तमान से ज्यादा पुराने है तो लोग पूछते है वो 15 लोग कौन है ये 15 लोग कौन है

1392
01:39:53,760 --> 01:39:57,760
इसके विषय में पूरे के शंकराचार्य जी ने लिखा है संकेत में लिखा है लेकिन उसको डिकोड नहीं किया है

1393
01:39:57,760 --> 01:40:02,880
हो सकता है वो दृष्टिकोण से नहीं लिखा हो लेकिन अर्थ उसका वही है जब वर्तमान

1394
01:40:02,880 --> 01:40:06,000
से ज्यादा पुराने है तो लोग पूछते हैं 15 लोग कौन है ये 15 लोग कौन है इसके विषय में

1395
01:40:06,000 --> 01:40:10,080
पूरी के शंकराचार्य जी ने लिखा है उसको देखिए यहां पर क्या

1396
01:40:10,080 --> 01:40:14,080
है पूरी के शंकराचार्य जी के शब्दों को अपने लिए उपयोग में

1397
01:40:14,080 --> 01:40:18,240
ले रहा है ना पूरी शंकराचार्य जी ने लिखा है अब उनके वो जो

1398
01:40:18,240 --> 01:40:22,320
शब्द है उनको संकेत प्रमाण तो ले रहा है कि पूरी शंकराचार्य जी सही बात करते

1399
01:40:22,320 --> 01:40:26,320
हैं क्योंकि इसकी बातों से मैच कर रहे कर रही है तो उनको प्रमाण के रूप में उपयोग कर

1400
01:40:26,320 --> 01:40:31,040
रहा है मगर फिर भी उनके वो जो शब्द है वो सांकेतिक है मगर उनको अपने लिए

1401
01:40:31,040 --> 01:40:36,200
प्रमाणिक उसमें यूज़ कर ले रहा है। तो

1402
01:40:36,200 --> 01:40:40,240
अब उसको और चलाना है तो चला दीजिए। पूरा पूरा कर

1403
01:40:40,240 --> 01:40:46,240
दीजिए।

1404
01:40:51,920 --> 01:40:55,960
ठीक है। तो अभी मैं जो बात कर रहा था कि दो चीजें

1405
01:40:55,960 --> 01:41:00,240
हैं कि अगर इसके द्वारा जो बताई गई प्रचारित

1406
01:41:00,240 --> 01:41:04,560
वो जो शक्ति है वो है तो इसकी प्रबल

1407
01:41:04,560 --> 01:41:08,640
संभावनाएं हैं कि यह उसका विरोधी नहीं बल्कि उसके लिए कार्य करने वाला व्यक्ति

1408
01:41:08,640 --> 01:41:12,800
ही है। क्यों? इस ओर भी देखिए कि जितने भी संत है जो

1409
01:41:12,800 --> 01:41:16,880
आज थोड़ा बहुत यह खुद कह चुका है। इसने खुद अपने किसी वक्तव्य में

1410
01:41:16,880 --> 01:41:20,960
यह कहा है कि हिंदू राष्ट्र के लिए अगर कोई कार्य करता हुआ मुझे कोई दिख रहा है

1411
01:41:20,960 --> 01:41:24,960
तो वो पूरी के शंकराचार्य जी हैं। और आज ये इस स्थिति में है

1412
01:41:24,960 --> 01:41:29,040
कि पूरी के शंकराचार्य जी का ही विरोध कर रहा है। पूरी के शंकराचार्य जी का ही उपहास

1413
01:41:29,040 --> 01:41:33,040
कर रहा है। अनेकानेक तरीकों से वो हो पा रहा है कि नहीं हो पा रहा अलग

1414
01:41:33,040 --> 01:41:37,040
मैटर। मगर अपनी ओर से पुरजोर विरोध ये कर रहा है। पूरी पीठ का

1415
01:41:37,040 --> 01:41:41,360
पूरी के शंकराचार्य ठीक है। तो

1416
01:41:41,360 --> 01:41:45,440
अब भाई जो जिसको अधर्म फैलाना उसके रास्ते का सबसे

1417
01:41:45,440 --> 01:41:49,600
बड़ा रोड़ा कौन है? धर्माचार्य जिनके पास धर्म है जो धर्म को बताएंगे

1418
01:41:49,600 --> 01:41:53,600
विशुद्ध रूप से तो पहले उनको भी तो नष्ट करना होगा। तो जितने

1419
01:41:53,600 --> 01:41:57,600
भी ऐसे संत हैं जो किसी तरीके से रणनीति का उपयोग करके जो भी कुछ भी कार्य

1420
01:41:57,600 --> 01:42:01,760
करने का प्रयोग कर रहे हैं। इसने सबको टारगेट कहीं ना कहीं किया। जितने अंशों

1421
01:42:01,760 --> 01:42:06,240
में वह गलत दिख सकते थे दुनिया को उतने अंशों में उसने पकड़ खुद भी है।

1422
01:42:06,240 --> 01:42:07,120
ऐसा नहीं है कि

1423
01:42:07,120 --> 01:42:11,120
यह कहीं पर गलत नहीं है। मगर इसने अपनी चीजों को अपनी चीजों पर बात

1424
01:42:11,120 --> 01:42:15,920
नहीं की। इसको ऐसा क्यों करना पड़ा या उसमें जो है थोड़ा नम्र हो गया, विनम्र हो गया।

1425
01:42:15,920 --> 01:42:20,160
खैर तो अब यह अनावश्यक रूप से यह जो सभी

1426
01:42:20,160 --> 01:42:24,320
संतों को मुख्य रूप से जिनको यह खुद भी मानता है कि हिंदू राष्ट्र के लिए कार्य करने

1427
01:42:24,320 --> 01:42:28,320
वाले अगर कोई है तो पूरी के शंकराचार्य जी उनको खुद टारगेट कर रहा है।

1428
01:42:28,320 --> 01:42:32,480
तो इसकी प्रबल संभावनाएं हैं कि यह म्लेच्छराज

1429
01:42:32,480 --> 01:42:36,720
का विरोधी नहीं बल्कि म्लेराज का प्रचारक है। उसके लिए कार्य

1430
01:42:36,720 --> 01:42:40,720
करने वाला है। वह जहां सक्रिय होता था वही यह सक्रिय होता है। वह जब सक्रिय

1431
01:42:40,720 --> 01:42:45,480
होता था वही यह सक्रिय होता है। तभी सक्रिय होता है। और तो और

1432
01:42:45,480 --> 01:42:49,680
इसकी जो इसके आसपास उस शक्ति के होने की निशानी यह खुद

1433
01:42:49,680 --> 01:42:53,840
बताता है कि मेरा मोबाइल पर यह हो गया वह हो गया। अच्छा

1434
01:42:53,840 --> 01:42:58,000
इसके साथ ही साथ इसकी अगर यह सब नहीं है यह उससे प्रभावित नहीं

1435
01:42:58,000 --> 01:43:02,080
है तो फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि इसकी भी प्रबल संभावनाएं हैं

1436
01:43:02,080 --> 01:43:06,720
कि इतना सारा इसने जो झेला है अपनी लाइफ में इसने

1437
01:43:06,720 --> 01:43:11,120
दुख झेला, कष्ट झेला और वो प्यार में, प्रेम प्रसंगों

1438
01:43:11,120 --> 01:43:15,440
में सफलता झेली, करियर में सफलता झेली। वहां से निराशा हाथ लगी।

1439
01:43:15,440 --> 01:43:19,680
फिर इसने गलत चीजों का आलंबन लिया। गलत विधि का

1440
01:43:19,680 --> 01:43:22,800
लोगों का दुष्प्रचार करना उसका आलंबन लिया।

1441
01:43:22,800 --> 01:43:27,120
लोगों को बुरा भला कहना गाली का आलंबन लिया। पिशाचिनी का आलंबन लिया। कली

1442
01:43:27,120 --> 01:43:31,600
पुरुष की बहन का आलंबन लिया। उसको अपने मुख में लेकर के चलना चालू किया।

1443
01:43:31,600 --> 01:43:35,840
और तो और तंत्र साधना में घुसा। वो सामान्य रूप से नहीं।

1444
01:43:35,840 --> 01:43:39,920
जिन्न को सिद्ध करने गया। जिन्न को सिद्ध करवाने। कालिया जिन्न को सिद्ध करवाने

1445
01:43:39,920 --> 01:43:43,920
की इसने बात की। परी को सिद्ध करवाने की इसने बात की। तो इन

1446
01:43:43,920 --> 01:43:48,000
सबके कारण कोई बहुत बड़ी बात नहीं है कि इसकी मना स्थिति

1447
01:43:48,000 --> 01:43:52,040
इसके इसको एक कोई मानसिक रूप से ऐसी कोई स्थिति इसकी

1448
01:43:52,040 --> 01:43:56,080
बनी जो अ जो एक

1449
01:43:56,080 --> 01:44:00,240
मूवी का नाम था कार्तिक कॉलिंग कार्तिक उसमें वो क्या

1450
01:44:00,240 --> 01:44:05,040
करता था? उसको एक बीमारी हो जाती तो वो दिन में अपने

1451
01:44:05,040 --> 01:44:09,840
दिन में बात करता था। अपनी आवाज को रिकॉर्ड कर देता था और रात को

1452
01:44:09,840 --> 01:44:14,240
रिकॉर्ड करने के बाद रात को उसको वो कॉल आता था उसके नंबर पर वो कुछ सेटिंग

1453
01:44:14,240 --> 01:44:18,400
कर देता था रात को उसको कॉल आता था और उसमें उसकी आवाज खुद ही सुनता था कि देखो

1454
01:44:18,400 --> 01:44:22,560
मुझे जो उसका कॉल आ रहा है किसी का किसी शक्ति का किसी वैसी

1455
01:44:22,560 --> 01:44:26,800
शक्ति का कॉल आ रहा है और सुनता था फिर उसके अनुसार कार्य करता था उसको ऐसा लगता था

1456
01:44:26,800 --> 01:44:31,280
अभी आपने जो वो मर्डर केस देखा है ना अ

1457
01:44:31,280 --> 01:44:35,600
जिसमें उसने कोमल ने अपने पति

1458
01:44:35,600 --> 01:44:37,920
को मर्डर करके ड्रम में डाल दिया था। सीमेंट

1459
01:44:37,920 --> 01:44:42,080
भर दिया था। उसमें उसका जो प्रेमी था जिसके यहां पर शैतान

1460
01:44:42,080 --> 01:44:46,160
की वो जिसके यहां जो दीवार थी उसमें शैतान का चित्र मिला

1461
01:44:46,160 --> 01:44:50,160
था। उस प्रेमी को भी ऐसा लगता था कि उसकी मरी हुई मां

1462
01:44:50,160 --> 01:44:54,240
उससे बात करती हैं। और बाइपोलर नाम की जो बीमारी होती

1463
01:44:54,240 --> 01:44:58,240
है उसमें उसके ऐसे भी लक्षण बताए गए हैं कि ऐसा हो सकता है कि जो

1464
01:44:58,240 --> 01:45:02,560
है व्यक्ति को ऐसा एहसास हो कि उससे असाधारण शक्तियां बात कर रही हैं।

1465
01:45:02,560 --> 01:45:06,640
तो इन सबका निचोड़ के दिखाई दे रहा है कि जो यह

1466
01:45:06,640 --> 01:45:10,640
ताना-बाना बुना गया है म्लेच्छराज का वो इसके द्वारा ही बुना गया है। उसका

1467
01:45:10,640 --> 01:45:14,720
डिसऑर्डर है। इसकी प्रबल संभावनाएं उसने उसको गुण करके

1468
01:45:14,720 --> 01:45:19,280
अपने आप को उससे प्रभावित माना या अपने आप को उसका विरोधी के रूप में प्रस्तुत करने का

1469
01:45:19,280 --> 01:45:23,360
कार्य किया। मगर क्योंकि वो भी वही है। क्योंकि दूसरी ओर से

1470
01:45:23,360 --> 01:45:27,360
भी वही खेलने वाला है। तो उसके बहुत सारे प्रभाव इसके जीवन में इसको देखने को

1471
01:45:27,360 --> 01:45:31,760
मिलते हैं। मेरे साथ यहां यह हुआ मेरे साथ वहां यह हुआ। तो यह

1472
01:45:31,760 --> 01:45:36,000
तीन चार जो प्रबल संभावना है उस पर हमने आज प्रकाश डाला है।

1473
01:45:36,000 --> 01:45:40,240
यह जो कुल मिलाकर के क्या बात है कि या

1474
01:45:40,240 --> 01:45:45,320
तो एक स्वयं म्लेच्छराज के

1475
01:45:45,320 --> 01:45:49,360
लिए कार्यरत है। उसका विरोधी नहीं उसका

1476
01:45:49,360 --> 01:45:53,360
प्रचारक है। उसका नाम लोगों को बताता है जिससे कि उसका नाम ज्यादा

1477
01:45:53,360 --> 01:45:57,680
से ज्यादा लोग ले या तो ये उसके लिए खुद कार्यरत है।

1478
01:45:57,680 --> 01:46:01,840
और या फिर दूसरे हिस्से में यह भी बहुत जगह दिखाई दे रहा है कि म्लेच

1479
01:46:01,840 --> 01:46:05,840
राज ये खुद है। अब यह खुद अगर वो जो असाधारण शक्ति

1480
01:46:05,840 --> 01:46:09,920
वाला म्लेच राज नहीं है तो कम से कम यह कार्तिक कॉलिंग कार्तिक वाला

1481
01:46:09,920 --> 01:46:13,920
तो दिखाई दे रहा है। यह जो मलेच्छराज बना है काल्पनिक कररेक्टर तो

1482
01:46:13,920 --> 01:46:19,480
यह खुद ही उस रोल को निभा रहा है

1483
01:46:19,480 --> 01:46:23,520
उसमें। अच्छा सोचने वाली बात है कि बायपोलर्स की

1484
01:46:23,520 --> 01:46:27,560
बुक के कवर पर लड़की का चित्र क्यों

1485
01:46:27,560 --> 01:46:31,920
है? यह जब स्वयं एक पुरुष है तो वहां पर लड़की

1486
01:46:31,920 --> 01:46:35,960
क्या कर रही

1487
01:46:35,960 --> 01:46:40,080
है? तो इससे क्या झलक रहा है कि

1488
01:46:40,080 --> 01:46:44,560
यह अपने उस प्यार को नहीं भूल पाया जो प्रेम प्रसंग है उसको नहीं भूल पा रहा है

1489
01:46:44,560 --> 01:46:48,720
और इधर मच्छराज का वो क्या है दुनिया को क्या सिखा रहा है मच्छराज

1490
01:46:48,720 --> 01:46:52,800
जो तुमसे प्यार करे तुम उससे प्यार करो तो वो जो उसको जो

1491
01:46:52,800 --> 01:46:56,800
ठेस पहुंची है कि इसने जिससे प्यार किया उससे इसको प्यार नहीं मिला

1492
01:46:56,800 --> 01:47:01,520
तो अब वो मच्छराज के रूप में दुनिया को मनवाना चाह रहा है

1493
01:47:01,520 --> 01:47:05,520
तो यह बहुत सारी संभावना है जिस पर हमने आज बात की है और

1494
01:47:05,520 --> 01:47:09,600
अगर इन सारी संभावनाओं पर ध्यान ना भी दे तो कुल मिलाकर एक

1495
01:47:09,600 --> 01:47:13,600
बात तो आपने आज देखी कि कालिया जिन्न की साधना

1496
01:47:13,600 --> 01:47:17,840
करने की बात कौन कर रहा है? परी परी को सिद्ध करने की बात कौन

1497
01:47:17,840 --> 01:47:22,160
कर रहा है? कौन मंत्र मांग रहा है? कैसे करना है? कितने बार में हो जाएगा?

1498
01:47:22,160 --> 01:47:27,280
तरीका पूछ रहा है। पहली बात क्या ये उचित है?

1499
01:47:27,280 --> 01:47:31,520
जो स्वयं निग्रह संप्रदाय से जिसको स्वयं दिव्यत्व प्राप्त

1500
01:47:31,520 --> 01:47:34,560
है बचपन से उसको यह फिजूल की

1501
01:47:34,560 --> 01:47:38,640
साधना करने के लिए दूसरे के अनुगत होना पड़ रहा है। दूसरी बात

1502
01:47:38,640 --> 01:47:43,120
और क्या इन साधनाओं से हमारे धर्म को कोई लाभ होने वाला है?

1503
01:47:43,120 --> 01:47:47,120
मुस्लिम साधनाओं से इस्लाम की साधनाओं से यह सब

1504
01:47:47,120 --> 01:47:51,520
प्रश्न अपने आप से करें जो इनके समर्थक हैं अथवा

1505
01:47:51,520 --> 01:47:55,760
विरोधी हैं अथवा न्यूट्रल है। ठीक है? और आगे

1506
01:47:55,760 --> 01:48:00,240
हम यह श्रंखला चलाते रहेंगे। इसमें कुछ और भी बहुत रोचक

1507
01:48:00,240 --> 01:48:04,240
तथ्य आपके सामने आएंगे। जैसे उधर से भी कहा गया उस व्यक्ति ने भी अपनी उसमें

1508
01:48:04,240 --> 01:48:09,640
कहा कि आने वाले समय में बहुत सारे प्रमाण वगैरह उपलब्ध कराएंगे।

1509
01:48:09,640 --> 01:48:14,160
तो किसी तरीके से इस पर

1510
01:48:14,160 --> 01:48:18,480
एक ग्लांस में अगर आप देखें एट ए ग्लांस भगवत आनंद एट ए ग्लांस

1511
01:48:18,480 --> 01:48:22,480
तो आपको ये सारी चीजें दिखने लगेंग कि मलेच राज से प्रभावित है या

1512
01:48:22,480 --> 01:48:26,800
मृच्छराज के अनुगत है या म्लेच राज के सानिध्य में है या म्लेच राज का विरोधी

1513
01:48:26,800 --> 01:48:31,520
है ये सोचने वाली बात और अगर वो असाधारण शक्ति नहीं है

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01:48:31,520 --> 01:48:35,680
ही नहीं वो ठीक है वह सब एक कपोल तो वो कपोल कल्पना

1515
01:48:35,680 --> 01:48:39,920
के रूप में भी यह खुद ही है इसने ऐसा नहीं है कि

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01:48:39,920 --> 01:48:44,080
वो क्या कहते हैं गड़ी है फिर यह प्रभावित है उससे

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01:48:44,080 --> 01:48:49,080
वो जो बीमारी है वो मना स्थिति वाली बात यह भी संभावना प्रबल है

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01:48:49,080 --> 01:48:50,080
और

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01:48:50,080 --> 01:48:54,080
फिर एक पूरा का पूरा षड्यंत्र भी दिखाई देता है। यह सारी चीजें

1520
01:48:54,080 --> 01:48:58,320
हम लोग इस श्रंखला में आपको धीरे-धीरे प्रकाश डालते रहेंगे। आप

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01:48:58,320 --> 01:49:02,480
लोग भी इस पर अपना जो है प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

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01:49:02,480 --> 01:49:06,800
और हां किसी को अगर इस मामले में विवाद में

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01:49:06,800 --> 01:49:10,960
किसी प्रकार से भगवत आनंद का पक्ष लेना है तो

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01:49:10,960 --> 01:49:16,720
वह प्रत्यक्ष चर्चा के लिए आ सकते हैं। हमारा नंबर सार्वजनिक है 7408301869

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01:49:16,720 --> 01:49:20,880
ठीक है। आगे जो आने वाला आने वाली कड़ी है उसमें

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01:49:20,880 --> 01:49:25,120
हम लोग अह ईसा पर बात करेंगे। जीसस पर बात करेंगे।

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01:49:25,120 --> 01:49:29,120
उस वो जो वैष्णव शब्द आया हालांकि उस पर बात कर चुके हैं मगर अब तरीके

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01:49:29,120 --> 01:49:33,640
से करेंगे विस्तृत तरीके से तो आप लोग बने

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01:49:33,640 --> 01:49:37,640
रहिएगा जय श्री राम
