1
00:00:00,000 --> 00:00:04,240
सभी को जय श्री राम और हिंदू नव वर्ष

2
00:00:04,240 --> 00:00:09,040
की हार्दिक शुभकामनाएं सभी को और

3
00:00:09,040 --> 00:00:14,600
नवरात्र की भी हार्दिक शुभकामनाएं सभी को और

4
00:00:14,600 --> 00:00:18,640
एक जैसे कोई बड़ी घटना में आप समझ

5
00:00:18,640 --> 00:00:22,880
सकते हैं कि अभी तक हमारा जो चैनल का रवैया रहा है काम करने का

6
00:00:22,880 --> 00:00:28,880
वीडियो डालने का जो भी है तो वह

7
00:00:30,160 --> 00:00:34,400
उसके बिल्कुल विपरीत जाकर के हो रहा है। पर जब

8
00:00:34,400 --> 00:00:38,640
वह बात है कि कोई व्यक्ति इस तरह का मिल ही गया है

9
00:00:38,640 --> 00:00:43,080
जो आपको अपने आप को बहुत अलग तरीके का प्रस्तुत करता है

10
00:00:43,080 --> 00:00:47,120
और ऐसे करता है कि जैसे बस हम ही सबसे बड़े

11
00:00:47,120 --> 00:00:52,160
सनकी हैं इस दुनिया में तो ठीक है।

12
00:00:52,160 --> 00:00:58,160
हम भी बहुत बड़े सनकी हैं। तो

13
00:00:59,280 --> 00:01:03,600
क्या है कि हमने जबकि यह बता दिया था

14
00:01:03,600 --> 00:01:08,160
कि भाई अब इसके बाद हमने लाइव के लिए बोल दिया है। आप आ जाइए लाइव

15
00:01:08,160 --> 00:01:12,240
और करिए विजय श्री के बारे में शुरू और फिर परिकरों

16
00:01:12,240 --> 00:01:18,240
को गलत सिद्ध करिए। है ना? ये सब हमने बोल दिया था।

17
00:01:18,600 --> 00:01:22,720
मगर यह सब चीजें मैं समझ रहा हूं क्यों हो रही है। मुद्दे

18
00:01:22,720 --> 00:01:26,720
से भटकना है। अब बहुत बातें खोदी जाएंगी कि पुरी शंकराचार्य जी की भविष्यवाणी का

19
00:01:26,720 --> 00:01:31,040
क्या हुआ? यह हुआ वो हुआ। सारी चीजें हमने बात की। तो खैर अब

20
00:01:31,040 --> 00:01:36,760
देर ना करते हुए अब लाइव रिएक्शन देते हैं फटाफट फटाफट।

21
00:01:36,760 --> 00:01:40,760
और क्या हुआ? चार्ज हो रहा

22
00:01:40,760 --> 00:01:44,880
है। आपने बंद किया था क्या?

23
00:01:44,880 --> 00:01:47,670
ठीक है।

24
00:01:47,670 --> 00:01:51,080
[संगीत]

25
00:01:51,080 --> 00:01:56,560
तो कुछ समाधि भी जुड़ गए हैं।

26
00:01:56,560 --> 00:02:00,560
जय श्री राम सभी को तो भाई चालू

27
00:02:00,560 --> 00:02:06,560
करते हैं। प्ले करते हैं। हम पहले

28
00:02:09,480 --> 00:02:15,480
वाला संतोष विद एक्सपीरियंस देखते हैं।

29
00:02:21,920 --> 00:02:27,920
हां स्पीड देख दो की रखो दो

30
00:02:28,280 --> 00:02:34,280
की बस ऐसे कुछ है क्या इसके नीचे

31
00:02:35,400 --> 00:02:39,960
वो हां

32
00:02:39,960 --> 00:02:45,960
ओके और मैं आपके कमेंट नहीं खाऊंगा

33
00:02:47,360 --> 00:02:53,360
थी और

34
00:02:56,480 --> 00:03:00,960
और एक क्योंकि

35
00:03:00,960 --> 00:03:04,360
तो बोलने में कुछ शब्दों का

36
00:03:04,360 --> 00:03:09,040
एक बात और बता कुछ लोगों के मैसेज कर रहे क्या आज आप शिवाश के लाइव चैट में जाकर

37
00:03:09,040 --> 00:03:13,040
कमेंट कर रहे तो मैं सोच कर की मैंने शिवश के पीछे वीडियो लाइव चैट में ज्यादा कोई नहीं

38
00:03:13,040 --> 00:03:17,120
थी। तो यह सबसे पहले बता रहे हैं जो

39
00:03:17,120 --> 00:03:21,120
आज एक लाइव कमेंट में हमें ऐसा प्राप्त हो रहा था

40
00:03:21,120 --> 00:03:25,120
और हमारे ऑपरेटर ने वहां पर जो सूझबूझ दिखाई सूझबूझ दिखाते हुए

41
00:03:25,120 --> 00:03:29,120
कहा कि फेक आईडी है। बिल्कुल सही कहा क्योंकि लाइव कमेंट में ऐसा हो रहा

42
00:03:29,120 --> 00:03:33,880
था कि भगवतानंद की तरफ से

43
00:03:33,880 --> 00:03:37,040
उसमें कहा जा रहा था कि लिंक दो और ऐसा

44
00:03:37,040 --> 00:03:41,600
है वैसा है। ठीक है? तो वो जो है

45
00:03:41,600 --> 00:03:45,840
वहां पर हमारे ऑपरेटर ने यह सचेत कराया था लोगों को कि यह फेक आईडी

46
00:03:45,840 --> 00:03:50,000
है। तो इन्होंने आकर के वो कमिट

47
00:03:50,000 --> 00:03:54,920
कर दिया। मतलब स्वीकार कर लिया कि हां इनकी आईडी नहीं है।

48
00:03:54,920 --> 00:04:00,920
चलिए मैंने

49
00:04:03,240 --> 00:04:06,280
देखा

50
00:04:06,280 --> 00:04:10,400
और आप आप लोगों को ये जो मैं देख रहा हूं इनकी आवाज

51
00:04:10,400 --> 00:04:14,480
आ रही है क्या? कोई कमेंट करके बता दे जो मैं देख रहा हूं वो आवाज आ

52
00:04:14,480 --> 00:04:20,480
रही है आपको?

53
00:04:24,720 --> 00:04:28,720
करना चाहते हैं किसी भी व्यक्ति के लिए या किसी

54
00:04:28,720 --> 00:04:34,720
महापुरुष के किसी के हो स्वामी हो या कोई

55
00:04:36,640 --> 00:04:41,120
हम भी यही कह रहे थे इन्होंने शुरू में अपने वीडियो में कहा कि किसी भी जो

56
00:04:41,120 --> 00:04:45,360
संत है ऐसा है उसके लिए गाली का उपयोग ना करिए और विरोध

57
00:04:45,360 --> 00:04:49,360
करना है विरोध करिए पर गाली का उपयोग ना करिए। हम भी यही बात आपको समझा रहे थे ना जो

58
00:04:49,360 --> 00:04:53,440
अभी आप अपने फॉलोअर्स को समझा रहे हैं। आपने यही किया

59
00:04:53,440 --> 00:04:57,680
है। इसीलिए हमने आपसे निश्चित दूरी बनाई थी।

60
00:04:57,680 --> 00:05:01,680
विरोध करते अगर आप जहां पर आपको शास्त्रोचित उनका आचरण नहीं

61
00:05:01,680 --> 00:05:05,840
दिख रहा है। ठीक है? तो कोई दिक्कत ना होती। केवल विरोध

62
00:05:05,840 --> 00:05:10,720
करते। शास्त्रोक्त खंडन करते जो आपका पक्ष है वो खंडन नहीं।

63
00:05:10,720 --> 00:05:14,880
खंडन नहीं शास्त्रोक्त पक्ष आप अपना रखते तो कोई दिक्कत नहीं थी। आज आप वही

64
00:05:14,880 --> 00:05:19,440
बात बता रहे हैं लोगों को जिस बात के कारण हमने आपसे निश्चित दूरी बनाना

65
00:05:19,440 --> 00:05:24,800
स्वीकार किया था। ये नहीं इसको मैं कोई

66
00:05:24,800 --> 00:05:30,800
नहीं पता नहीं की

67
00:05:31,760 --> 00:05:36,720
मैं तो सुनते रहूंगा सामने वाले ने कहा कि है तो मैंने देखा

68
00:05:36,720 --> 00:05:40,720
एक तो लगभग किसी लगभग तीन घंटे का है और ये कहां

69
00:05:40,720 --> 00:05:46,000
से है तो पौने आती घंटे तो

70
00:05:46,000 --> 00:05:52,000
ले लिया तो इसने सोचा कि बना

71
00:05:53,760 --> 00:05:58,080
अभी ये बात कर रहे हैं कि तुमने इतना बड़ा मतलब उसकी ओर एक

72
00:05:58,080 --> 00:06:02,280
टोंट कस रहे हैं कि तुमने इतना बड़ा वीडियो क्यों

73
00:06:02,280 --> 00:06:06,320
बनाया क्या कहते हैं उनके इस वीडियो पर उस पे आ रहे

74
00:06:06,320 --> 00:06:12,320
हैं

75
00:06:13,520 --> 00:06:19,320
1.5 है इसकी स्पीड है 1.5

76
00:06:19,320 --> 00:06:23,520
कोई और नहीं होगा मैं

77
00:06:23,520 --> 00:06:27,680
कृपा है ऐसी कृपा करने वाले लोग संसार में कम मिलते है जो अपने जीवन के समय

78
00:06:27,680 --> 00:06:31,840
को देते हुए और आप सब को शास्त्र की एक अद्भुत की अवस्था है शिवा

79
00:06:31,840 --> 00:06:35,840
को धन्यवाद देना चाहेंगे की उन्होंने इतना विस्तृत समय निकाला उन्होंने जीवन से जुड़े बहुत से

80
00:06:35,840 --> 00:06:40,160
पहलुओं पर चर्चा की और पहलुओं पर चर्चा करने के लिए ऐसी ऐसी शब्दावली का ऐसे

81
00:06:40,160 --> 00:06:44,400
प्रमाणों का उन्होंने प्रयोग किया प्रमाणों को हम अभी तक हम्म

82
00:06:44,400 --> 00:06:48,560
मुझे नहीं पता था कि ये सब है तो अब यहां पर यह

83
00:06:48,560 --> 00:06:52,640
प्रमाणों की बात कर रहे हैं। उस पर ध्यान दीजिएगा। यह कह रहे हैं कि ऐसे ऐसे प्रमाणों के

84
00:06:52,640 --> 00:06:56,720
आधार पर जो है बात की है शिवश द्विवेदी जी

85
00:06:56,720 --> 00:07:01,200
ने। उन्होंने बड़ा समय निकाला बात करने के लिए। तो

86
00:07:01,200 --> 00:07:05,200
अगर ये समय निकालने में एक तंज है अगर ये टोंट है कि समय

87
00:07:05,200 --> 00:07:09,200
निकाला तो ये लोग ये पूरी के शंकराचार्य जी और आप जिसजिस की समीक्षा

88
00:07:09,200 --> 00:07:13,280
करते वो सब कह सकते हैं कि भाई तुमने तुम्हारा धन्यवाद जो तुमने हमारे

89
00:07:13,280 --> 00:07:17,520
लिए समय निकाला समीक्षात्मक रूप में ही सही मगर तुमने समय निकाला

90
00:07:17,520 --> 00:07:22,080
तो मैं जीवन ऐसा आ गया मेरे जीवन ऐसा आ गया तो फिर मैंने सोचा शिवा

91
00:07:22,080 --> 00:07:26,160
मेरे जीवन मुझे नहीं पता बच्चा मेरे जीवन का होता तो मैं शिवा जी

92
00:07:26,160 --> 00:07:28,960
का जवाब देता हूं कि बात

93
00:07:28,960 --> 00:07:33,440
आपको अच्छा सबसे पहले एक बात देख लीजिए आप लोग

94
00:07:33,440 --> 00:07:37,600
कि जब तक मैं विनम्र रह रहा था और

95
00:07:37,600 --> 00:07:41,760
मेरा जो टेक था इनके लिए तो जब तक मेरा

96
00:07:41,760 --> 00:07:46,080
वैसा था हम्ल वाला मामला तो तब तक ये बड़े तूफान

97
00:07:46,080 --> 00:07:50,160
मेल की तरीके से बात कर रहे थे। है ना? और

98
00:07:50,160 --> 00:07:54,320
अब देखिए इनका रवैया पूरा चेंज है। यहां तक कि

99
00:07:54,320 --> 00:07:58,480
जो वो बना है ना थंबनेल पहले क्या बना था? जब तक तोड़ेंगे

100
00:07:58,480 --> 00:08:02,560
नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं। और अब थंबनेल क्या बना है कि

101
00:08:02,560 --> 00:08:06,960
नारी के सम्मान की आड़ में ऐसा करने मतलब थोड़ा उसमें सुद्रीकरण

102
00:08:06,960 --> 00:08:11,120
हुआ। चलिए अच्छा है। मैं इसके लिए धन्यवाद देता हूं इनका कि इन्होंने अपनी

103
00:08:11,120 --> 00:08:15,440
शैली में थोड़ा सुधार किया है। चलिए

104
00:08:15,440 --> 00:08:20,400
शास्त्र के कुछ नियमावली याद रखे हैं और नियमा में सा और असाध्य

105
00:08:20,400 --> 00:08:24,520
रखा गया है। तो शास्त्रार्थ में किसी भी ऐसे पक्ष

106
00:08:24,520 --> 00:08:28,480
हो पत्र हो और

107
00:08:28,480 --> 00:08:32,480
एक जानवी वाला गाना उसका शेयर कर ताकि दूसरा को अरे भैया मैं

108
00:08:32,480 --> 00:08:36,480
सुनाऊंगा और चिंता मत करो वो सब होगा की कृपा

109
00:08:36,480 --> 00:08:40,560
के बारे में ऐसे महापुरुष तो लाखों में एक होते है और चिंता मत करो वो सब होगा

110
00:08:40,560 --> 00:08:44,080
शासन श्री कृति के बारे में ऐसे महापुरुष तो लाखों में एक होते है

111
00:08:44,080 --> 00:08:48,160
और जो शास्त्र की विभाग की बात कर रहा हूं तो शास्त्र की जो लिखा है उसमें यहां भी शास्त्र का

112
00:08:48,160 --> 00:08:52,400
नाम भी मालूम पक्ष विपक्ष ही हो उसमें क्या है यहां पर तथ्य को सामने

113
00:08:52,400 --> 00:08:56,640
प्रधानता देते हैं तो कक्ष चर्चा करते है वहां हारे कोई भी चाहे जीते कोई भी उसका मतलब नहीं होता

114
00:08:56,640 --> 00:09:00,640
तो जहां पर पक्ष और विपक्ष की जय पराजय प्रधान हेतु नहीं होते अपितु तथ्य का

115
00:09:00,640 --> 00:09:06,600
निर्णय जहां पर प्रधान हेतु होता है उसको कहा जाता है

116
00:09:06,600 --> 00:09:10,040
वाद स्किप

117
00:09:10,040 --> 00:09:14,160
करिए वादी और वादी का उत्तर देने वाला होता है वादी थोड़ी

118
00:09:14,160 --> 00:09:18,240
बहुत गाड़ियों की आपको रिसर्च पड़ सकती है तो इसलिए उसको आप इग्नोर करेंगे उसकी आप करेंगे

119
00:09:18,240 --> 00:09:22,320
तो यहां पर यथार्थ की करने का प्रयास होता है यथार्थ वादा यहां पर यथार्थ की सिद्धि

120
00:09:22,320 --> 00:09:26,640
करना ही कक्षा का प्रधान उद्देश्य होता है उसको शास्त्रों में वाद कहा जाता है फिर उसके एक

121
00:09:26,640 --> 00:09:31,040
वाद के ही आगे एक और उस भावना सम्मिलित हो जाती है। त की संसद

122
00:09:31,040 --> 00:09:35,040
के एक प्रबल भावना यह हो जाती है की तथ चाहे जो लेकिन कम से कम हमारा

123
00:09:35,040 --> 00:09:40,360
पक्ष जो है हो तो यहां पर उसको कहा जाता है त की

124
00:09:40,360 --> 00:09:44,880
संसि के माध्यम से स्वपक्ष मंडल जल

125
00:09:44,880 --> 00:09:48,880
इतने वैसे तो इतने अब ये शास्त्रार्थ की

126
00:09:48,880 --> 00:09:53,040
विधा के बारे में बात कर रहे हैं और कि वो ऐसा होना चाहिए वैसा

127
00:09:53,040 --> 00:09:57,120
होना चाहिए तो या फिर वो एक शास्त्रार्थ

128
00:09:57,120 --> 00:09:59,120
को के बारे में ही बात करते हुए

129
00:09:59,120 --> 00:10:03,920
सारी व्याख्या इनकी चल रही है। तो अगर

130
00:10:03,920 --> 00:10:08,320
उसमें काफी लंबा विश्लेषण है। मुझे समझ शायद आगे बताएं

131
00:10:08,320 --> 00:10:12,960
कि क्या क्यों ये पक्ष रख रहे हैं जहां पर वादी का पक्ष बन जाए वहां होती है विदंडा

132
00:10:12,960 --> 00:10:17,040
खंडन प्रधान तुमने जो कह दिया बता तीसरा

133
00:10:17,040 --> 00:10:21,280
होता है विकंडा की जहां पर अपना कोई पक्ष नहीं तुमने जो कह दिया उसका विरोध करना ही जहां पर प्रवादी

134
00:10:21,280 --> 00:10:25,280
का पक्ष बन जाए वहां होती है विदंडा खंड प्रधान जहां अपना

135
00:10:25,280 --> 00:10:29,360
कोई पक्ष नहीं तुम जो बोलोगे उसी का खंडन किया जाएगा इस भावना से जहां पर जो कोई व्यक्ति प्रस्तुत

136
00:10:29,360 --> 00:10:33,400
होता है उसको कहते है तो बाद क्या है यथार्थ यथार्थ प्रधान

137
00:10:33,400 --> 00:10:39,080
प्रधान पक्ष मंडने प्रधान जलपक्ष मंडल प्रधान

138
00:10:39,080 --> 00:10:43,120
ये स्थान इत्यादि भी होते हैं इसमें अनेक भेद होते हैं तो

139
00:10:43,120 --> 00:10:47,280
ये सब आते है उसमें स्थान प्रतिपत्ति अपतिपत्ति ये सब छ और 16

140
00:10:47,280 --> 00:10:51,440
ये सब भेद होते है तो ये सब का बहुत सुंदर अनुभव उदाहरण आपको

141
00:10:51,440 --> 00:10:55,600
देखने को मिले हमारे वक्तव्यों में आपने कई बार स्वामी के द्वारा सुना होगा अब

142
00:10:55,600 --> 00:10:59,760
एक बात देखिए कि

143
00:10:59,760 --> 00:11:04,640
जब बात हो रही है इन्होंने कहा कि जब हम

144
00:11:04,640 --> 00:11:08,720
सामने वाले व्यक्ति का विरोध ही करना है। कारण कोई भी हो इन्होंने कहा उसको कहते

145
00:11:08,720 --> 00:11:13,400
हैं वितंडा। ठीक है? तो

146
00:11:13,400 --> 00:11:14,400
इन्होंने

147
00:11:14,400 --> 00:11:18,480
जो मेरे ऊपर व्यक्तिगत प्रहार किया कि तुमने वहां फुचके खाए

148
00:11:18,480 --> 00:11:22,960
ये किया वो किया। ठीक है? वो क्या था?

149
00:11:22,960 --> 00:11:26,960
भाई तुम्हें अगर यथार्थ पे ही बात करनी थी तो तुम व्यक्तिगत चीजों पे क्यों

150
00:11:26,960 --> 00:11:30,960
गए? कि तुम फुचके खाते हो, पाउडर पी कर के वो बनाते हो, यह करते हो,

151
00:11:30,960 --> 00:11:35,040
वो करते हो। तुम तो सिद्धांत पे बात कर रहे थे ना तो ये क्या थी

152
00:11:35,040 --> 00:11:39,040
वितंडा ना मैं ऐसी कौन

153
00:11:39,040 --> 00:11:43,200
सी बात कह रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार अनुचित है मेरी कही हुई बात पर

154
00:11:43,200 --> 00:11:47,360
तुम्हें प्रहार करना था तुमको तुमने अपनी

155
00:11:47,360 --> 00:11:52,200
बात को बड़ा दिखाने के लिए तुमने क्या किया

156
00:11:52,200 --> 00:11:56,280
कि मेरे को ही गलत साबित करना है कि मेरा जो शरीर है मेरा

157
00:11:56,280 --> 00:12:00,800
जो अवयव है जीवन है ये है वो है वो गलत है व्यक्तिगत

158
00:12:00,800 --> 00:12:04,880
हुए तुम जिन सिद्धांतों पर चर्चा हो

159
00:12:04,880 --> 00:12:08,960
रही थी उस पर बात ना करके तुम व्यक्तिगत हुए कि तुम्हारे जीवन में यह हो रहा है वो हो

160
00:12:08,960 --> 00:12:12,960
रहा है और आगे तुमने ऐसे व्यक्ति के जीवन के बारे में जब बात आई तो

161
00:12:12,960 --> 00:12:16,960
बड़ा कन्वीनिएंट वहां पर हुए हो मैंने देखा है वो चलो चलते हैं आगे वो

162
00:12:16,960 --> 00:12:19,920
अंश देख लिया है मैंने

163
00:12:19,920 --> 00:12:23,920
सुनिएगा सुनिए जिस पहले मैं एक बात बता दूं जिस

164
00:12:23,920 --> 00:12:28,160
स्क्रीन रिकॉर्डिंग को दुष के आधार पर दुष्प्रचार

165
00:12:28,160 --> 00:12:29,840
किया जा रहा है मटका

166
00:12:29,840 --> 00:12:34,000
मटके परिकरों का गुरुदेव के परिकरों का वो

167
00:12:34,000 --> 00:12:38,080
स्क्रीन रिकॉर्डिंग जगतगुरु शंकराचार्य जी ने आज से दो वर्ष

168
00:12:38,080 --> 00:12:42,160
पूर्व ही देख ली थी लगभग अगर मैं गलत नहीं हूं तो इतने समय पूर्व ही

169
00:12:42,160 --> 00:12:46,640
देख ली थी और उसके बाद उन्होंने कहा था कि

170
00:12:46,640 --> 00:12:50,720
मेरे जो परिकर हैं हमारे जो परिकर होते हैं दिव्य दिव्य संतों के परिकर

171
00:12:50,720 --> 00:12:54,800
होते हैं और मेरे जो परिकर हैं वो देवताओं के समान ही हैं।

172
00:12:54,800 --> 00:12:57,280
ठीक है?

173
00:12:57,280 --> 00:13:01,360
हां और दूसरी बात अगर व्यक्तिगत जाने की बात है तो व्यक्तिगत तो

174
00:13:01,360 --> 00:13:05,760
कौन जा रहा है वह आप समझ सकते हो। पहली बात तो व्यक्तिगत

175
00:13:05,760 --> 00:13:09,920
तुम गए कब जब तुमने विजय श्री के

176
00:13:09,920 --> 00:13:14,080
पूर्व के जीवन के बारे में बात की ये ऐसी थी वैसी थी

177
00:13:14,080 --> 00:13:18,600
है ना तुमने तुम व्यक्तिगत वहां पर गए

178
00:13:18,600 --> 00:13:22,800
और फिर तुम निराधार रूप से व्यक्तिगत हुए मटके

179
00:13:22,800 --> 00:13:26,800
परिकरों के लिए अगर तुम्हें आकर के विरोध करना है तो ठोस

180
00:13:26,800 --> 00:13:30,800
प्रमाण लाओगे ना कि आधी अधूरी चीजों पर ही बात करने लगोगे और

181
00:13:30,800 --> 00:13:34,880
जब तुम्हारे पास ठोस प्रमाण नहीं है तो तुम प्रमाणों की बात कर रहे तुम्हारे व्यक्तिगत जीवन

182
00:13:34,880 --> 00:13:38,880
पर बात हो रही है तो चलो ने बड़ी सुंदर बात कही थी कलंब

183
00:13:38,880 --> 00:13:42,960
नामक ग्रंथ विधा में इस गुण में हमारे जो संस्था करेंगे हम तो शत्रु

184
00:13:42,960 --> 00:13:44,880
है भी नहीं शिवा के महाराज बड़े गुण है

185
00:13:44,880 --> 00:13:49,120
और शिवश के गुण में हमारे जो शिवश भैया है और बात मेरी

186
00:13:49,120 --> 00:13:53,200
आप मानिए कि इस विवाह में इस गुण में बहस में जीना चाहे तो उसको क्या करना चाहिए

187
00:13:53,200 --> 00:13:57,440
जी ने बड़ी सुंदर बात कही थी कलम नामक ग्रंथ की अगर कोई व्यक्ति किसी बहस में जितना

188
00:13:57,440 --> 00:14:01,600
चाहे तो उसको क्या करना चाहिए और बात मेरी आप मानिए कि इस वि में इस गुण

189
00:14:01,600 --> 00:14:05,840
में हमारे जो शिवश भैया शिवा जी महाराज बड़े गुरु है और शिव

190
00:14:05,840 --> 00:14:10,000
जी की प्रतिभा की तो शत्रु बड़ी प्रस्था करेंगे हम तो शत्रु है नहीं शिवाने योग्य नहीं

191
00:14:10,000 --> 00:14:14,000
उसे शत्रुता ले सके तो क्या है उसमें हमें ना

192
00:14:14,000 --> 00:14:19,360
तुम्हारी शत्रुता पसंद है ना चाहिए और ना तुम्हारी मित्रता चाहिए

193
00:14:19,360 --> 00:14:23,440
ठीक है जो योग्यता की तुम बात कर रहे हो क्योंकि

194
00:14:23,440 --> 00:14:27,440
हमने तुम्हारे प्रति जो भी वीडियोस बनाए थे उन सब में मैत्रीपूर्ण भाव के

195
00:14:27,440 --> 00:14:31,440
साथ ही उसका समापन किया था कि चलो दूर ही से ही दूर

196
00:14:31,440 --> 00:14:35,520
ही दूर से जो कर रहे हैं वो करते रहे और

197
00:14:35,520 --> 00:14:39,680
बहुत बार मैंने भाव प्रकट किया था कि मत मत करो मत करो मत करो

198
00:14:39,680 --> 00:14:43,880
मत बढ़ाओ इस मामले को अभी भी बढ़ा रहे हो ठीक है

199
00:14:43,880 --> 00:14:48,440
और बात योग्यता की है तो भैया हमारी

200
00:14:48,440 --> 00:14:52,560
जो बात कही थी ना तुमने कि वो तुम्हारी अलग से स्वतंत्र पहचान क्या

201
00:14:52,560 --> 00:14:56,640
है हमारी बहुत बड़ी पहचान है तो भाई हम योग्य

202
00:14:56,640 --> 00:15:00,160
नहीं है किसी भी कार्य के योग्य नहीं है हम बस इतने योग्य हैं

203
00:15:00,160 --> 00:15:04,720
कि हम जगतगुरु शंकराचार्य सनातन धर्म की जो सर्वमान्य सार्वभौम

204
00:15:04,720 --> 00:15:08,800
गद्दी है गुरु गद्दी उसके हम एक बहुत छोटे से

205
00:15:08,800 --> 00:15:12,960
कचरे से जैसे कचरे के ढेर में भी उसका कोई बहुत सबसे छोटा

206
00:15:12,960 --> 00:15:17,040
हिस्सा होगा उसमें हम है ठीक है बस यही है और

207
00:15:17,040 --> 00:15:21,120
कोई हमारी योग्यता नहीं है सबसे बेकार वाला कोई भक्त

208
00:15:21,120 --> 00:15:26,600
हो सकता है इस संसार में इस पूरी सृष्टि में वो हम है

209
00:15:26,600 --> 00:15:31,040
तो हमें और कोई योग्यता चाहिए भी नहीं तुम्हारी शत्रुता

210
00:15:31,040 --> 00:15:35,560
और तुम्हारी मित्रता अब तुम ही रखो। चलो

211
00:15:35,560 --> 00:15:40,480
मैं जो दीक्षित जी ने कहा है श्लोक निकाल लेता हूं। जो व्यक्ति

212
00:15:40,480 --> 00:15:44,560
सामने वाले को पराजित करना चाहे चाहे अपना पक्ष उस व्यक्ति का दो कौड़ी का हो चाहे उसके

213
00:15:44,560 --> 00:15:48,720
बुद्धि घास शक्ति हो लेकिन फिर भी वो जीत सकता है। मतलब आपको बस में जीतने के

214
00:15:48,720 --> 00:15:52,880
लिए बहुत ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। आपके पास प्रमाण की भी आवश्यकता नहीं है।

215
00:15:52,880 --> 00:15:57,040
जो व्यक्ति बस में जीतना चाहे उसको किसी ज्ञान बल की आवश्यकता किसी त प्रमाण की आवश्यकता

216
00:15:57,040 --> 00:16:01,520
नहीं है। क्या करना है? सबसे पहला नियम है दीक्षित जी कहते है नभव्यम

217
00:16:01,520 --> 00:16:05,600
उसको डरना नहीं है तो वाद विवाद में जो व्यक्ति जितना चाहता है उसके पास

218
00:16:05,600 --> 00:16:09,680
ज्ञान बल कम है उसके पास प्रमाण बल कम है उसके पास हेतु का अभाव है उस स्थिति में भी वो

219
00:16:09,680 --> 00:16:13,760
व्यक्ति जीत सकता है क्यों न्य उसको डरना नहीं है फुल कॉन्फिडेंस बनाना है सामने वाले को बदल

220
00:16:13,760 --> 00:16:15,440
देंगे डरना नहीं है सबसे पहले आपने घबराना

221
00:16:15,440 --> 00:16:19,680
नहीं आपके पास ज्ञान नहीं है आपका प्रमाण नहीं आप गिर जाइए बस फिर नो धव्यम आपको कुछ समझना

222
00:16:19,680 --> 00:16:23,840
नहीं है सामने वाला का तो आप समझाएंगे और आप समझेंगे तो क्या पाएंगे उसके पास प्रमाण बात

223
00:16:23,840 --> 00:16:27,920
मानी पड़ी इसलिए सबसे पहले समझदारी को बाहर निकाल दीजिए क्यों अगर आप समझने नहीं

224
00:16:27,920 --> 00:16:31,920
आएंगे तो आप अपने जिनको सिर्फ कैसे करें? आप कैसे करें? अच्छा ये लैपटॉप

225
00:16:31,920 --> 00:16:36,080
की आवाज सुनाई दे रही है ना? लैपटॉप में जो बातें चल रही है जो ये

226
00:16:36,080 --> 00:16:40,400
भगवत आनंद बोल रहे हैं समझ में आ रही है ना

227
00:16:40,400 --> 00:16:46,400
मैं सुन रहा हूं वो आप लोगों को भी सुन सुनाई दे रहा है कि मुझे आपको समझाना

228
00:16:47,480 --> 00:16:50,440
पड़ेगा।

229
00:16:50,440 --> 00:16:54,480
हम कोई कमेंट करके बता दे। अच्छा ठीक है। बढ़िया है। करने

230
00:16:54,480 --> 00:16:59,200
के लिए करने के लिए समझदारी से काम नहीं लेना है। नासम से काम लेना है। सामने वाले व्यक्त

231
00:16:59,200 --> 00:17:03,600
अब ये आरोप लगा रहे हैं कि तुमने सामने वाले की बात को समझने का प्रयास नहीं किया

232
00:17:03,600 --> 00:17:07,840
क्योंकि तुम्हें इससे मतलब नहीं था। तुम्हें तो जीतना था वो कोई शास्त्र का प्रमाण

233
00:17:07,840 --> 00:17:12,000
रखते हुए। पहली बात तो यह है कि शास्त्र का प्रमाण रखने की आवश्यकता।

234
00:17:12,000 --> 00:17:16,320
पहली बात तो तब है जब कहीं पर मामला अटके

235
00:17:16,320 --> 00:17:20,920
कि तुम्हारी कोई कही हुई बात जो है मैं स्वीकार नहीं कर रहा। जैसे मैं कह रहा हूं

236
00:17:20,920 --> 00:17:25,040
कि एक हम लोग अगर वैदिक हैं दोनों

237
00:17:25,040 --> 00:17:29,120
और मैं कह रहा हूं कि सभी के मन में जो है ये प्यास है। है ना कि

238
00:17:29,120 --> 00:17:33,120
उसको जो है कभी ना मरने की प्यास और सदैव आनंदित

239
00:17:33,120 --> 00:17:37,120
रहने की प्यास ये जब मैं कह रहा हूं सामने वाला कह रहा

240
00:17:37,120 --> 00:17:41,120
है नहीं है। हम् तो हम शास्त्र बताएंगे

241
00:17:41,120 --> 00:17:45,480
है ना कि शास्त्र में सतो सदगमया तमसो माग मृत्यु

242
00:17:45,480 --> 00:17:49,520
मृतमया है ना तो अगर ऐसी कोई बात

243
00:17:49,520 --> 00:17:53,760
है कि दोनों वैदिक है दोनों वेदों को मानने वाले हैं

244
00:17:53,760 --> 00:17:58,080
और जब मैं कह रहा हूं कि मैं तुम्हारी इस बात से सहमत क्यों हूं

245
00:17:58,080 --> 00:18:02,400
जब मैं ऐसा कह रहा हूं तब शास्त्र को बताने की आवश्यकता है मगर

246
00:18:02,400 --> 00:18:05,600
मैंने दिन में भी बताया था कि यह शास्त्र को

247
00:18:05,600 --> 00:18:09,680
क्यों रख रहे हैं अब कोई एक आध जगह पर आ गया बहुत

248
00:18:09,680 --> 00:18:13,840
प्रेम है उस वक्तव्य से बहुत जैसे मैं कर्मवादी कारस्ते मा फलेशु

249
00:18:13,840 --> 00:18:17,840
कदाचना या असतो मा सद्गमया या फिर

250
00:18:17,840 --> 00:18:22,400
आपका रामो विग्रह धर्म ये सब मेरे जो हृदय से लगे हुए

251
00:18:22,400 --> 00:18:26,400
शास्त्र वचन है ठीक है मगर क्या है कि अब

252
00:18:26,400 --> 00:18:30,840
ये तो मोबाइल में देख रहे हैं तो इसका मतलब जाहिर सी बात है कि

253
00:18:30,840 --> 00:18:35,120
भैया इनके ऐसे नहीं है कि हृदय से लगे हुए वचन हो शास्त्र

254
00:18:35,120 --> 00:18:39,280
के ढूंढ के निकाल के बोल बोल रहे हैं। ठीक है। अच्छी बात है।

255
00:18:39,280 --> 00:18:43,440
बोल लीजिए कोई बात नहीं। उससे कोई दिक्कत नहीं है। मगर अभी एक इनका कहना

256
00:18:43,440 --> 00:18:47,760
यह है कि जो व्यक्ति को केवल बहस जीतनी होती है

257
00:18:47,760 --> 00:18:51,840
उसका पहला कर्तव्य है कि वो कॉन्फिडेंट लेवल में रहे। तो इनकी पिछली लाइव देख लीजिए आकर

258
00:18:51,840 --> 00:18:56,000
के कॉन्फिडेंट में थे कि नहीं? हां। अभी थोड़ा ये हंबल दिख रहा है। जैसा मैं जैसा मैं

259
00:18:56,000 --> 00:19:00,000
शुरू के तीन लाइव वीडियोस में दिख रहा था

260
00:19:00,000 --> 00:19:04,080
और ये अपने हर वीडियो में जो है ताबड़तोड़ तूफान मेल कालका

261
00:19:04,080 --> 00:19:08,160
बेल बने हुए थे। अब अब यह जो है हंबल हुए हैं।

262
00:19:08,160 --> 00:19:12,160
है ना? तो पहली बात कॉन्फिडेंट में कौन था? और दूसरी

263
00:19:12,160 --> 00:19:16,240
बात सामने वाली की कोई बात समझनी नहीं है। तो मैं कह

264
00:19:16,240 --> 00:19:20,640
रहा हूं कि तुमने जो है विरोधाभासी वीडियो डाला मेरे मेरा विरोधाभासी।

265
00:19:20,640 --> 00:19:24,720
तुम कह रहे हो कि नहीं वह उस वीडियो में मिलने वाली सूचना विरोधाभासी है तो

266
00:19:24,720 --> 00:19:28,720
इसका मतलब तुम्हें मेरी बात नहीं समझनी है। तुमने आज एक कम्युनिटी पोस्ट

267
00:19:28,720 --> 00:19:31,560
डाली है

268
00:19:31,560 --> 00:19:35,600
कि उसने पूरा चैट नहीं दिखाया। पहली बात

269
00:19:35,600 --> 00:19:39,680
तो तुम मध्यस्थ के द्वारा बात क्यों कर रहे हो? क्या डायरेक्ट बात

270
00:19:39,680 --> 00:19:43,680
कर यदि तुम्हें बात करनी है इस तरह से मैसेजिंग के द्वारा तो

271
00:19:43,680 --> 00:19:47,920
तुम किसी और को क्यों भेज रहे हो? क्या कोई भय है? पहली

272
00:19:47,920 --> 00:19:52,160
बात। दूसरी बात यह है कि जो बाकी की चैट थी वह आवश्यक नहीं लगी

273
00:19:52,160 --> 00:19:56,160
मुझे क्योंकि मैंने पहले ही वक्तव्य से यह बता दिया जिससे

274
00:19:56,160 --> 00:20:00,160
सिद्ध हो रहा था कि मैं नहीं समझ पाया कि वो जो

275
00:20:00,160 --> 00:20:04,240
संदेश था जो गौरी ने भेजा था वो बहुत इधर की बात उधर करती

276
00:20:04,240 --> 00:20:08,480
है उसकी आईडी है शायद दसनामी दसनामी सेव से शैव

277
00:20:08,480 --> 00:20:12,560
के नाम से कभी कुछ कहेगी मुझे आकर के तुम्हारे बारे में कभी इधर

278
00:20:12,560 --> 00:20:16,640
की बात उधर ये ये सब चीजें वो किया करती है

279
00:20:16,640 --> 00:20:20,640
ना और वह लड़की ही है, मातृ

280
00:20:20,640 --> 00:20:24,640
शक्ति ही है। यह भी मुझे नहीं पता है। वह शायद आवाज कन्वर्ट करके बोलती है।

281
00:20:24,640 --> 00:20:28,720
क्या है उसका उद्देश्य? ये सब चीजें भी नहीं पता है और वह अपने आप को

282
00:20:28,720 --> 00:20:32,720
कहती है कि पूरी के शंकराचार्य जी मेरे जो है दादा हैं यह है वो है फिर

283
00:20:32,720 --> 00:20:35,920
वो जो है जहां पे नहीं

284
00:20:35,920 --> 00:20:39,920
बोलना चाहिए जिसके पक्ष में ऐसी जगह पर जहां वो पूरी

285
00:20:39,920 --> 00:20:44,240
के शंकराचार्य जी का ही विरोध कर रहा है कोई व्यक्ति तो वहां पर उसका पक्ष भी लेती है समय

286
00:20:44,240 --> 00:20:48,480
पे अपनी इच्छा अनुसार अपना मत बदलने लगती है उसके बाद भाई

287
00:20:48,480 --> 00:20:52,480
मेरी स्क्रीन अगर चैट है पहली बात तो तुम कहीं पर फोटो खींच के

288
00:20:52,480 --> 00:20:56,880
उसको क्यों भेज रही हो हां अच्छा अच्छा दूसरी बात ये है मैं

289
00:20:56,880 --> 00:21:01,040
सीधे विषय पर आ जाऊं कि इनका कहना था कम्युनिटी

290
00:21:01,040 --> 00:21:05,120
पोस्ट में कि शिवश ने पूरी चैट नहीं दिखाई भाई आज भी बात

291
00:21:05,120 --> 00:21:09,440
हुई है उससे तो वो भी दिखाऊं क्या जितनी चैट आवश्यक

292
00:21:09,440 --> 00:21:13,440
है यह बताने के लिए कि मैं नहीं समझ पाया

293
00:21:13,440 --> 00:21:17,520
था कि संदेश यह संदेश भगवतानंद की तरफ से आ रहा है

294
00:21:17,520 --> 00:21:22,160
और उतना पर्याप्त था जब मैं यह बोल रहा हूं कि यदि

295
00:21:22,160 --> 00:21:26,160
सत्य के पक्ष रहो तो सामना करो प्रत्यक्ष वार्ता करो। इतने से ही प्रकट हो

296
00:21:26,160 --> 00:21:30,240
गया कि मैं ही समझ रहा हूं कि तुम भगवत आनंद ये जो संदेश आया वो भगवतानंद

297
00:21:30,240 --> 00:21:34,320
के द्वारा भेजा गया। क्यों? क्योंकि सर्वविदित है कि

298
00:21:34,320 --> 00:21:38,400
भगवतानंद ने तो मुझे स्वयं लाइव के लिए कहा है। प्रस्ताव दिया है। तो मैं

299
00:21:38,400 --> 00:21:42,480
भगवतानंद को ये क्यों कहूंगा सत्य के पक्ष पक्षधर हो तो लाइव आओ। तो

300
00:21:42,480 --> 00:21:46,640
उसी वक्तव्य से सिद्ध हो गया। अच्छा दूसरी बात क्या है?

301
00:21:46,640 --> 00:21:51,040
उसके बाद उसने कुछ आगे और भेजा था इनका भेजा हुआ कि भाई प्रत्यक्ष

302
00:21:51,040 --> 00:21:55,360
चर्चा के लिए ही तो आ रहे हैं। मगर तुम कुछ

303
00:21:55,360 --> 00:21:59,440
उसमें फिर आगे बात लिखी तो मैंने उसमें जवाब दोबारा दिया उससे भी यही सिद्ध हो रहा है

304
00:21:59,440 --> 00:22:03,440
कि मैं नहीं जान रहा हूं कि यह संदेश भगवत आनंद की तरफ से आ रहा है। मुझे ये लगा था

305
00:22:03,440 --> 00:22:07,440
कि यह संदेश जो आ रहा है पहली बात तो यह है कि कितने संदेश व्यक्ति देखेगा दिन भर

306
00:22:07,440 --> 00:22:11,840
में। तो अगर गौरी वास्तविकता में कोई मध्यस्थता स्थापित

307
00:22:11,840 --> 00:22:15,840
करना चाहती थी तो कॉल कर लेती मुझे समझाती भगवतानंद है वो आपको यह

308
00:22:15,840 --> 00:22:21,400
संदेश भेज रहे हैं। अच्छा कोई बात नहीं अब क्या

309
00:22:21,400 --> 00:22:23,560
है

310
00:22:23,560 --> 00:22:27,760
कि जब ये मैंने जो लास्ट

311
00:22:27,760 --> 00:22:31,840
में जो संदेश लिखा वो क्या लिखा कि भैया पहली बात यह है

312
00:22:31,840 --> 00:22:35,920
कि अगर तुम भगवतानंद की बात कर रहे हो मतलब मुझे अभी भी लग रहा है कि वह

313
00:22:35,920 --> 00:22:39,920
जो वो जो व्यक्ति है जो यह कह रहा है कि हमने तो तुम्हें लाइव ही बुलाया था। अभी

314
00:22:39,920 --> 00:22:44,400
भी मुझे लग रहा है वो कोई थर्ड पर्सन है। अभी मुझे नहीं पता चला कि भगवतानंदी है। इसलिए

315
00:22:44,400 --> 00:22:48,640
जब मैंने अपनी वीडियो जब मैंने उसको उत्तर लिखा तो मैंने यह सोचा मुझे

316
00:22:48,640 --> 00:22:52,720
ये लगा कि यह व्यक्ति मुझसे WhatsApp के माध्यम से लिख लिखकर चर्चा करना चाहता

317
00:22:52,720 --> 00:22:56,720
है। और जब मैं प्रत्यक्ष वार्ता के लिए कह रहा हूं

318
00:22:56,720 --> 00:23:00,960
तो ये भगवतानंद का नाम दिखा रहा है कि तुमको बुलाया तो था भगवतानंद ने। क्यों नहीं गया?

319
00:23:00,960 --> 00:23:04,960
ऐसा कई लोग करते हैं मुझे। आदत पड़ चुकी है ये ऐसा समझने की। करते हैं

320
00:23:04,960 --> 00:23:06,240
वास्तविकता में कि

321
00:23:06,240 --> 00:23:10,240
जब क्या कहते हैं? पहले तो मुझसे चर्चा करने का प्रयास करेंगे WhatsApp

322
00:23:10,240 --> 00:23:14,320
पर ही और जब मैं कहूंगा लाइव आ जाओ तो वह किसी ऐसे व्यक्ति का नाम लेंगे

323
00:23:14,320 --> 00:23:18,640
जैसे वो आज अलंकार समाज का जो वो

324
00:23:18,640 --> 00:23:23,360
है अंडर कवर्ड गुंडा है ना तो

325
00:23:23,360 --> 00:23:27,360
फिर कहेंगे जब चर्चा करने वाली आएगी तो उसने बुलाया तो था अंडर कवर्ड गुंडे थे

326
00:23:27,360 --> 00:23:31,360
क्यों नहीं गए तो ऐसा ही मुझे यहां पर लगा कि यह व्यक्ति भी यही कर रहा

327
00:23:31,360 --> 00:23:35,600
है कि भगवतानंद ने तुम्हें बुलाया तो था क्यों नहीं गए तो मैंने क्या नाम

328
00:23:35,600 --> 00:23:39,600
मैंने क्या वक्तव्य दिया वहां पर उसको मैंने कहा कि भाई जो

329
00:23:39,600 --> 00:23:43,680
व्यक्ति गुरु निंदा कर चुका है ऐसा ऐसा कर चुका है उसके मंच साझा करने में दिक्कत

330
00:23:43,680 --> 00:23:47,760
है और भी कई प्रॉब्लम्स है वहां पर ठीक है मंच साझा करने

331
00:23:47,760 --> 00:23:52,240
में और उसके बाद फिर मैंने कहा अगले पैराग्राफ

332
00:23:52,240 --> 00:23:56,400
में कि तुमको जब तुमको जब प्रत्यक्ष आकर के वार्ता नहीं करनी

333
00:23:56,400 --> 00:24:00,640
है तो तुम वार्ता कर क्यों रहे हो जब तुम्हें वार्ता नहीं करनी है प्रत्यक्ष आने

334
00:24:00,640 --> 00:24:04,640
के नाम पर किसी और को भेजना है थर्ड थर्ड पर्सन को क्योंकि मैं नहीं

335
00:24:04,640 --> 00:24:08,720
समझ रहा हूं कि ये भगवत आनंद है तो मैं यहां ये लिख रहा हूं। तुमको जब वार्ता करनी नहीं

336
00:24:08,720 --> 00:24:12,880
है वो वार्ता कर क्यों रहा है? यही मैंने वहां लिखा था। तो इससे भी सिद्ध

337
00:24:12,880 --> 00:24:17,200
होता है कि मैं समझ रहा था कि किसी थर्ड पर्सन का मैसेज है जो WhatsApp

338
00:24:17,200 --> 00:24:21,360
के माध्यम से मुझे जो है वो करना चाह रहा है। चैट

339
00:24:21,360 --> 00:24:25,760
परेशान करना चाह रहा है। और जब प्रत्यक्ष आने की बात हो रही है तो फिर वो कह रहा है भगवतानंद

340
00:24:25,760 --> 00:24:29,840
के पास क्यों नहीं गए? यह चर्चा थी। ठीक है? तो जब तुम मेरी बात को

341
00:24:29,840 --> 00:24:33,920
समझ नहीं पा रहे हो। तुम विरोध कर रहे हो। धड़ल्ले से कम्युनिटी पोस्ट डाल रहे

342
00:24:33,920 --> 00:24:38,080
हो। और अभी बात आएगी आगे इसमें जो जो मैंने क्योंकि मैंने सिद्ध किया

343
00:24:38,080 --> 00:24:42,240
है तुम कहांहां मेरी बात को समझ नहीं पाए हो तो वहां ध्यान रखना कि यह जो मंत्र तुमने

344
00:24:42,240 --> 00:24:46,320
बताया तुमने जो शास्त्र का प्रमाण बताया श्लोक बताया है ये तुम्ही पर लागू

345
00:24:46,320 --> 00:24:51,520
हो रहा है क्योंकि तुमने मेरी बात को नहीं समझी

346
00:24:51,520 --> 00:24:56,760
ठीक है चलिए आगे

347
00:24:56,760 --> 00:25:01,680
चलना है उसके बाद से समझदारी

348
00:25:01,680 --> 00:25:06,560
प्राप्त करना चाहता है उसको डरने की आवश्यकता है कुछ समझने के आवश्यकता नहीं क्या करना है

349
00:25:06,560 --> 00:25:10,560
वाचा अब यदि आप अपने विपक्षी की बात को सुनेंगे तो कहीं ना कहीं

350
00:25:10,560 --> 00:25:15,480
आपको बुद्धि आएगी सामने वाली बात कह रहा है

351
00:25:15,480 --> 00:25:20,160
इसको समझना नहीं तो आपको सुनना बंद करना पड़ेगा किसी ने कहा नभ्यम

352
00:25:20,160 --> 00:25:24,160
तो इन्होंने कहा कि सुनना नहीं है तो इन्होंने मेरी बात कहां सुनी ये तो खुद कह रहे

353
00:25:24,160 --> 00:25:28,240
है कि इनके समर्थकों ने अंश काट काट कर दिया तो इसका मतलब क्या है

354
00:25:28,240 --> 00:25:32,240
कि इन्हें मेरी बात सुननी नहीं है जो विरोधाभासी कुछ चीजें तत्व मिल रहे

355
00:25:32,240 --> 00:25:36,400
हैं उसप वीडियो बनाना है तुरंत लाइव करना है। खुद ही ये जो प्रमाण दे रहे हैं शुरुआत

356
00:25:36,400 --> 00:25:41,440
में इस प्रमाण ये सारे जो वक्तव्य है इनहीं के ऊपर लागू हो रहे हैं। चलिए

357
00:25:41,440 --> 00:25:45,440
और हां वो जो मैं बात बता रहा था कि ये प्रमाण दिखा क्यों

358
00:25:45,440 --> 00:25:50,000
रहे भाई जब तुम कोई बात बोलोगे और उसमें मैं यह कहूंगा

359
00:25:50,000 --> 00:25:54,400
कि नहीं नहीं हम आपकी इस बात को नहीं मानते। क्यों मान ले तब आप प्रमाण दिखा दो।

360
00:25:54,400 --> 00:25:58,880
तो प्रमाण ज्यादातर इसलिए दिखाए जाते हैं कि अपना पल्ला

361
00:25:58,880 --> 00:26:03,200
हैवी दिखाने के लिए। कि देखो हम शास्त्र के कितने बड़े ज्ञाता है। हमें शास्त्रों को मालूम है।

362
00:26:03,200 --> 00:26:07,520
भले ही उस बात का कनेक्शन हो रहा हो वहां पे कि नहीं हो रहा हो मगर हमें प्रमाण दिखाने

363
00:26:07,520 --> 00:26:13,520
हैं जबरदस्ती। ठीक है?

364
00:26:13,760 --> 00:26:18,000
अरे वो काम करेगा।

365
00:26:18,000 --> 00:26:24,000
कमाना है तो भाई साहब ये पहला रुको दूसरा भी बताओ।

366
00:26:25,640 --> 00:26:30,200
आपको ना तुम्हें समझना है ना सुनना है ये बात तुम पे लागू होती

367
00:26:30,200 --> 00:26:34,200
है लेवल पर काम करने का भैया

368
00:26:34,200 --> 00:26:38,880
के लगभग 78 के लेवल पर काम करने का दावा कर रहे हैं ऐसे

369
00:26:38,880 --> 00:26:42,880
जी के वक्तव्य में आपको कई बार बोला जहां मैं जो बात कह रहा हूं बात को पूरी तरीके

370
00:26:42,880 --> 00:26:46,880
से सुने बिना ही आप अपनी बात पूरी नहीं कर यही बात तुम्हारे ऊपर भी लागू होती

371
00:26:46,880 --> 00:26:51,760
है तुम्हारे वक्तव्य ये बात तुम पर ही लागू होती है कि

372
00:26:51,760 --> 00:26:55,840
मैं जो कह रहा हूं उसको सुनना नहीं है, समझना नहीं है। सुनना नहीं है। तो यह तो तुमने ही कह

373
00:26:55,840 --> 00:27:00,240
दिया कि मैंने पूरा वीडियो नहीं देखा था। मेरे समर्थकों ने जो मुझे छोटे-मोटे

374
00:27:00,240 --> 00:27:04,320
अंश देगी वो देख भेजे वो देखा था। तो तुमने ये प्रूफ करा है

375
00:27:04,320 --> 00:27:08,400
कि तुमने मेरी बात सुनी नहीं है और समझी भी नहीं है। ये भी मैंने प्रूफ करा है।

376
00:27:08,400 --> 00:27:12,400
आगे देखो तुम क्या जवाब देते हो? वो जो मैंने तुमको बताया है। उसके बारे में क्या

377
00:27:12,400 --> 00:27:16,800
जवाब देते हो? देखते हैं। वही सर क्या हुआ? शिवास जी आपको सिखाना चाह रहे हैं कि आप

378
00:27:16,800 --> 00:27:20,800
करते हो। ना डरना है ना समझना है ना सुनना है बोलना है तो उसे जो सभा

379
00:27:20,800 --> 00:27:24,960
में विजय प्राप्त करने की इच्छा रखा है ऐसे व्यक्ति को डरना नहीं है ना कुछ समझना है

380
00:27:24,960 --> 00:27:29,720
की बात सुननी है तुरंत बोलना है नहीं ऐसा नहीं ऐसा

381
00:27:29,720 --> 00:27:34,160
नहीं क्या तो पहले क्या समझे थे

382
00:27:34,160 --> 00:27:38,320
कि पूरी के शंकराचार्य जी ने चांदी का

383
00:27:38,320 --> 00:27:42,400
छत्र और सिंहासन त्याग रखा है तो वहां

384
00:27:42,400 --> 00:27:46,480
वो जो सम्मेलन हुआ था जिसमें वो बैठे थे अन्य शंकराचार्यों के

385
00:27:46,480 --> 00:27:50,560
साथ है वहां वो उन्हें क्यों बैठना पड़ा क्या व्यवस्था

386
00:27:50,560 --> 00:27:55,120
थी तुम समझे थे नहीं समझे थे

387
00:27:55,120 --> 00:27:59,440
पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्य हम है दीक्षित हम है

388
00:27:59,440 --> 00:28:03,520
और तुम हमको बता रहे हो कि उन्होंने क्या कहा और वो भी उन गुरु द्रोहियों के

389
00:28:03,520 --> 00:28:07,760
आधार पर जिन्हें पूरी के शंकराचार्य जी के दर्शन किए हुए अरसों

390
00:28:07,760 --> 00:28:11,920
अरसे हो गए तुम हमको बताओगे हमारे हमारे गुरु के हम

391
00:28:11,920 --> 00:28:16,080
शिष्य है ना वो क्या कह रहे हैं क्या नहीं कह रहे हैं वो वो

392
00:28:16,080 --> 00:28:20,160
हम हम लोग नहीं बताने के लिए अधिकारी या पूरी के शंकराचार्य जी स्वयं नहीं

393
00:28:20,160 --> 00:28:24,160
अधिकारी है। भाई तुम उतना ही वेट कर लेते विरोध करने का। उनके ही शिष्यों

394
00:28:24,160 --> 00:28:28,160
का विरोध कर रहे थे ना उनके वक्तव्यों के आधार पर तो उनके बोलने

395
00:28:28,160 --> 00:28:32,640
का ही वेट कर लेते। मगर नहीं पूरी के शंकराचार्य

396
00:28:32,640 --> 00:28:36,640
जी को क्या बोलना है? वो क्या बोलना चाह रहे हैं? किस संदर्भ में बोल रहे हैं? यह

397
00:28:36,640 --> 00:28:41,040
ना पूरी के शंकराचार्य जी बताएंगे। यह ना उनके शिष्य बताएंगे जो उनसे दीक्षित

398
00:28:41,040 --> 00:28:45,920
है। यह लुप्त मत के गुप्त आचार्य बताएंगे।

399
00:28:45,920 --> 00:28:49,960
जिनका नाम है भगवत आनंद।

400
00:28:49,960 --> 00:28:54,000
चलिएगा शब्द निकलेगा तो क्या बोलता हूं ऐसे बैठना

401
00:28:54,000 --> 00:28:58,160
है जैसे मेरे सामने कुछ नहीं डरेगा नहीं स्टेशन पे तुम

402
00:28:58,160 --> 00:29:02,480
ऐसे ही बैठे थे हालांकि आज थोड़ा ठीक हो ठीक है

403
00:29:02,480 --> 00:29:06,640
क्लास ही बजाएंगे क्योंकि बाकी कई से असम निर्लजता

404
00:29:06,640 --> 00:29:11,120
पहले होनी चाहिए क्योंकि निर्लज्ज नहीं कल हम अब अब निर्लज्जता

405
00:29:11,120 --> 00:29:15,120
याद आ गई गालियां यूज़ करते हुए निर्लजता याद

406
00:29:15,120 --> 00:29:19,240
नहीं आई जब अपनी पे आई तब निर्लज लज्जा याद

407
00:29:19,240 --> 00:29:23,280
आई जब तुमको लज्जा याद दिलाई जा रही थी

408
00:29:23,280 --> 00:29:27,480
तो तुम्हें याद नहीं थी तुम तो कहोगे कि हम तो सबके सबको भकेंगे

409
00:29:27,480 --> 00:29:31,520
हम जब कोई बराबरी वाला मिल गया जब कोई तुम्हारे

410
00:29:31,520 --> 00:29:35,600
जैसा या तुमसे डेढ़ मिल गया तो तुम्हें लज्जा और निर्लज्जता याद

411
00:29:35,600 --> 00:29:39,600
आ रही है ना फिर भी हम तुम्हारे जैसे नहीं हुए जो तुम

412
00:29:39,600 --> 00:29:43,680
तुम जिस स्तर तक गिरते हो अपने वचनों में है

413
00:29:43,680 --> 00:29:49,120
ना तब भी हम तुम्हारे जैसे नहीं हुए

414
00:29:49,120 --> 00:29:53,360
सामने वाले तिरस्कार को करोगे तिरस्कार

415
00:29:53,360 --> 00:29:57,360
को करो अरे 900 चूहे

416
00:29:57,360 --> 00:30:01,520
खा के बिल्ली चली हज को हम

417
00:30:01,520 --> 00:30:05,680
तिरस्कार कौन कर रहा है किसने तुमने किया

418
00:30:05,680 --> 00:30:10,080
नहीं तुमने किस किसिस का तिरस्कार नहीं किया तिरस्कार

419
00:30:10,080 --> 00:30:14,560
को करो सर्ववेदित है आह्वान की मर्यादा

420
00:30:14,560 --> 00:30:18,680
और तुम्हारे बहुत बोलने की मर्यादा देख ले

421
00:30:18,680 --> 00:30:23,200
कोई अगर कोई सच्चा व्यक्ति होगा सत्य का पक्षधर होगा

422
00:30:23,200 --> 00:30:27,600
तो बताएगा नहीं आान मर्यादा में रहता है

423
00:30:27,600 --> 00:30:31,600
शिवश नारायण द्विवेदी मर्यादा में रहता है और तुम मर्यादा का

424
00:30:31,600 --> 00:30:35,760
उल्लंघन करते हो तिरस्कार में लज्जा में सब में

425
00:30:35,760 --> 00:30:39,760
पीछे हो तिरस्कार करते हो लज्जा भाव नहीं

426
00:30:39,760 --> 00:30:44,080
है जो तुम कह रहे हो निर्लज्ज हो जाना

427
00:30:44,080 --> 00:30:48,160
यही सब तो क्वालिटीज है ना तभी तो फेमस हुए हो तुम भाई

428
00:30:48,160 --> 00:30:52,400
आर्य समाज कैसे फेमस हुआ था उसने सारे परंपरा प्राप्त आचार्यों

429
00:30:52,400 --> 00:30:56,800
के बारे में बुरा बुरा बोलना शुरू कर दिया आज भी देखो गौतम खट्टर फेमस

430
00:30:56,800 --> 00:31:01,440
है क्यों फेमस है वो जानता है भड़काऊ भाषण दूंगा वो भी

431
00:31:01,440 --> 00:31:04,240
अन्यों के खिलाफ कम

432
00:31:04,240 --> 00:31:08,400
शंकराचार्य के लिए दूंगा तो ये हिंदू थोड़ा प्रभावित होंगे

433
00:31:08,400 --> 00:31:12,400
क्योंकि हिंदू तो असली वही से जुड़े हैं शंकराचार्य रामानुजाचार्य इन सब से जुड़े हैं तो वो हिंदू

434
00:31:12,400 --> 00:31:16,560
हमारे पास कैसे आएंगे तो मैं जो है ऐसे मसाले

435
00:31:16,560 --> 00:31:20,640
उत्पन्न करूंगा। वही अपने ट्रेनिंग भी देता है। फिर अपने अनुगत हो जाती है।

436
00:31:20,640 --> 00:31:24,800
दूसरी मातृ शक्ति उनको भी ट्रेनिंग देता है। तुम ऐसे ही बुराई करो मंच पे जाके। वो

437
00:31:24,800 --> 00:31:28,880
आएंगी झांसी की रानी बनके। एक तरफ गाना गाएंगी कि क्या

438
00:31:28,880 --> 00:31:32,960
कहते हैं वो? क्या गाना था?

439
00:31:32,960 --> 00:31:37,200
अरे वो किसी के इश्क में खुद

440
00:31:37,200 --> 00:31:39,640
को भुला

441
00:31:39,640 --> 00:31:43,920
दूं। हो नहीं सकता। वो गाना गाएंगे एक तरफ।

442
00:31:43,920 --> 00:31:47,920
इस कोन को एक तरफ पूजेंग और दूसरी तरफ कृष्ण भगवान की

443
00:31:47,920 --> 00:31:52,240
लीलाओं का खंडन करेंग और फिर एक तरफ जो है जाके ये शंकराचार्य

444
00:31:52,240 --> 00:31:56,400
हमको गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देंगे तो इस कौन ये

445
00:31:56,400 --> 00:32:00,400
जो इसका जो अस्तित्व है आर्य समाज का इसका अस्तित्व ये

446
00:32:00,400 --> 00:32:04,640
जो रोस्टिंग टाइप का कंटेंट देकर के ही है वो पंडे

447
00:32:04,640 --> 00:32:08,960
इस तरह की चीजें भाषा शैली शुरू करके है ना उसी पर ही इसका अस्तित्व

448
00:32:08,960 --> 00:32:13,040
खड़ा हुआ है तो उसी

449
00:32:13,040 --> 00:32:17,120
ऐसी ऐसी ही बातों पर तुम्हारा अस्तित्व खड़ा है। तुमने जो तुम्हारा जो

450
00:32:17,120 --> 00:32:19,520
ये चीजें है ना ये इसी इसी पर

451
00:32:19,520 --> 00:32:23,600
इसी पर ही टिका है जो तुम बोल रहे हो कि निर्लज हो जाना और

452
00:32:23,600 --> 00:32:27,600
सामने वाले का अपमान करना निकलता

453
00:32:27,600 --> 00:32:32,920
है वहां पर चिढ़ाते और हाथ तो राज्य किए थे

454
00:32:32,920 --> 00:32:37,760
कि हाथ तुम्हारी बात में प्रमाण था जब तुमने

455
00:32:37,760 --> 00:32:42,000
यह कहा था कि विजय श्री फ्री मेंशन के लिए कार्य करने

456
00:32:42,000 --> 00:32:46,080
वाली है तुम्हारी बात में प्रमाण था। जब तुमने यह कहा था कि विजय

457
00:32:46,080 --> 00:32:50,320
श्री पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर बैठी है। तुम्हारी बातों में प्रमाण

458
00:32:50,320 --> 00:32:54,880
था। जब तुमने यह कहा था कि

459
00:32:54,880 --> 00:32:59,120
जब तुमने ये कहा था कि विजय श्री वहां पर पूरी के शंकराचार्य जी का मंच साझा करते

460
00:32:59,120 --> 00:33:03,880
हुए और क्या कर रही है? व्यापार कर रही है। तब तुम्हारी बातों

461
00:33:03,880 --> 00:33:09,760
में प्रमाण था। है ना?

462
00:33:09,760 --> 00:33:13,920
तुम्हारी बातों में प्रमाण था। तुम्हारी बातों में प्रमाण था

463
00:33:13,920 --> 00:33:18,480
कि क्या कहते हैं वो मठ के जो परिककर हैं वो

464
00:33:18,480 --> 00:33:22,720
क्या कहते हैं उनके आचरण गलत है ये है वो है तुम्हारी बातों

465
00:33:22,720 --> 00:33:26,880
में प्रमाण था कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने तुमसे ये कहा है

466
00:33:26,880 --> 00:33:30,960
कि वो जो है मत के मठ के जो परिकर है कुछ ऐसा मिला के दे रहे हैं

467
00:33:30,960 --> 00:33:35,120
जिसके जिससे कि वो उनके अनुगत हो रहे हैं पूरी के शंकराचार्य जी

468
00:33:35,120 --> 00:33:39,280
ये सब प्रमाण की बात है वो एलिमेंट तुमने नहीं बताया वो तत्व नहीं बताया तुमने

469
00:33:39,280 --> 00:33:43,440
क्या था वो वो क्या तत्व था

470
00:33:43,440 --> 00:33:48,400
जिससे पूरी के शंकराचार्य जी उनके अनुगत हो रहे हैं हम

471
00:33:48,400 --> 00:33:53,560
वो भी बताना चाहिए था ये सब प्रमाणिक बातें थी ना

472
00:33:53,560 --> 00:33:55,880
तुम्हारी

473
00:33:55,880 --> 00:34:01,880
हेलीकप्टर बच्चा क्या बात करेगा उसका आंसर देना है

474
00:34:02,320 --> 00:34:07,040
देखिए इनका कितनी देर का हो चुका है करीब 15 मिनट हो चुका है

475
00:34:07,040 --> 00:34:11,120
15 मिनट तक अभी तक ये मुख्य मुद्दे पर नहीं आए

476
00:34:11,120 --> 00:34:15,680
ये अपनी बातें सीधे-सीधे बोल सकते थे कि भैया सामने वाले को अगर तुम्हें

477
00:34:15,680 --> 00:34:19,840
जीतना है तो अमुक अमुक चीजें होती है। वही सब शिवाश नारायण द्विवेदी

478
00:34:19,840 --> 00:34:23,920
करता है। मगर बड़ा देर लगाएंगे क्योंकि इनको अपना प्रभाव उत्पन्न

479
00:34:23,920 --> 00:34:27,920
करना है। वो मीडिया का बैच लगा के जाएंगे ना पुलिस स्टेशन कि पुलिस

480
00:34:27,920 --> 00:34:31,920
वाले मुझको मीडिया वाला समझते हुए जो है वो प्रायोरिटी दे और

481
00:34:31,920 --> 00:34:36,160
न्याय से ज्यादा इस बात पर ध्यान दें कि इसके पास मीडिया का बैच है।

482
00:34:36,160 --> 00:34:40,160
इसी तरीके से हम बहुत ज्यादा शास्त्रों के श्लोक पढ़ पढ़ के लोगों को बताएंगे।

483
00:34:40,160 --> 00:34:44,240
देखो हम अपनी हर बात को जोड़ शास्त्र के उससे वचन से जोड़ करके

484
00:34:44,240 --> 00:34:48,480
बोल रहे हैं। इसलिए लोग यह ध्यान देना भूल ही जाए कि भैया इससे इसका

485
00:34:48,480 --> 00:34:54,400
गलत होना कहां सिद्ध हो रहा है? अगर शास्त्र में ये लिखा है तो

486
00:34:54,400 --> 00:34:58,640
भाई पहले तुम गलत सिद्ध तो करो मुझे। उसके बाद यह कहो कि शास्त्र

487
00:34:58,640 --> 00:35:02,640
में तुम्हारे इस लक्षण के लिए ये लिखा है। तुमने मुझे गलत तो सिद्ध

488
00:35:02,640 --> 00:35:06,640
नहीं किया। मैंने तुम्हारी कहां कौन सी बात गलत समझी? तुम पहले यह सिद्ध

489
00:35:06,640 --> 00:35:11,120
कर रहे हो कि शास्त्र में यह लिखा है और तुम्हारी शास्त्र के वचन को सुनकर यह कहां

490
00:35:11,120 --> 00:35:15,200
इन शास्त्रों के वचन जो तुमने पढ़े हैं इनसे यह कहां सिद्ध हो रहा है कि मैं

491
00:35:15,200 --> 00:35:19,200
तुम्हारी अमुक अमुक बात को समझ नहीं पाया। नहीं सिद्ध हो रहा है। मगर

492
00:35:19,200 --> 00:35:23,200
तुम शास्त्रों के वचनों को पढ़ने में ही बहुत सारा समय निकाल लो। जबकि ये समय बचाया जा

493
00:35:23,200 --> 00:35:27,440
सकता था। मगर तुम्हें अपना अपना जो है प्रभाव उत्पन्न करना है ना।

494
00:35:27,440 --> 00:35:31,440
वो प्रभाव उत्पन्न करने की कला है कि हम जो है शास्त्रों को किस तरीके से

495
00:35:31,440 --> 00:35:35,800
संदर्भों का उपयोग करेंगे और जो प्रबुद्ध लोग नहीं

496
00:35:35,800 --> 00:35:39,920
है जो बैल बुद्धि है वो तर्क अपनी तर्क शक्ति

497
00:35:39,920 --> 00:35:44,080
को छोड़ देंगे एक साइड और वो ये सोचेंगे इसने इतने सारे श्लोक पढ़े इतने सारे मंत्र

498
00:35:44,080 --> 00:35:48,240
पढ़े हैं और यही सही है चलिए

499
00:35:48,240 --> 00:35:53,480
चल रहा हो मार्केट में यहां राजा है राजा

500
00:35:53,480 --> 00:35:57,680
साथ राजा का समा जो आपके बचपने

501
00:35:57,680 --> 00:36:01,680
में खूब आप करो। अरे महाराज जी आपके समान मंत्र अरे महाराज जी आपके स्वादान नहीं अरे विजय

502
00:36:01,680 --> 00:36:05,920
तुम्हारे समान कोई योगाचारी नहीं तुम्हारी वाणी में तो मुझे स्वामी दीजिए दिखाई पड़ती है विजय तुम्हारी

503
00:36:05,920 --> 00:36:10,400
जैसी युवा को रखनी चाहिए चाहे विजय जो है वो अंडरवियर में

504
00:36:10,400 --> 00:36:14,560
दिखाई विजय ये टाइम स्ट नोट

505
00:36:14,560 --> 00:36:19,560
कर लेना ये 1651

506
00:36:19,560 --> 00:36:24,680
हम अच्छा अब क्या है

507
00:36:24,680 --> 00:36:28,720
कि अगर किसी को वास्तविकता में किसी की वाणी वाणी

508
00:36:28,720 --> 00:36:33,040
अगर उसमें झलक रही हो तो क्या सिद्धांत होगा?

509
00:36:33,040 --> 00:36:37,040
किसी की वाणी में अगर कोई ऐसा शब्द यूज़ करे जो किसी से मैच खा

510
00:36:37,040 --> 00:36:41,200
रही है वास्तविकता में क्या करें? वहां वहां क्या होगा? उसका भी तो सिद्धांत

511
00:36:41,200 --> 00:36:45,280
होना चाहिए। भाई चापलूसी

512
00:36:45,280 --> 00:36:49,280
करते हैं तो वो मैंने जो किया था वो चापलूसी थी

513
00:36:49,280 --> 00:36:53,600
कि नहीं थी ये कैसे पता चलेगा? हो सकता है वो प्रोत्साहन

514
00:36:53,600 --> 00:36:58,000
हो किसी को आगे बढ़ने के लिए धर्म के पथ पर। यह भी तो हो सकता है।

515
00:36:58,000 --> 00:37:02,000
यही क्यों है कि जो भगवतानंद कहेगा वही क्यों माना जाए

516
00:37:02,000 --> 00:37:06,880
मेरे उस कर्म का? जैसे कि मैंने अभी पानी पिया

517
00:37:06,880 --> 00:37:09,120
तो पानी पीने के पीछे

518
00:37:09,120 --> 00:37:13,120
यही क्यों हो सकता है कि मुझे प्यास लगी थी। यह भी

519
00:37:13,120 --> 00:37:17,280
हो सकता है कि मेरे गले में कुछ अटक रहा था। उसको मुझे ठीक करना था।

520
00:37:17,280 --> 00:37:21,360
तो आपको कंफर्म करना होगा ना तुमने पानी क्यों पिया?

521
00:37:21,360 --> 00:37:26,320
यह कैसे कह रहे हो तुम? यह तुम अपना मत थोप रहे हो।

522
00:37:26,320 --> 00:37:30,480
कि मुझे जो चापलूसी करनी थी और फिर अगर

523
00:37:30,480 --> 00:37:34,720
तुम चापलूसी तो फिर अपने अन्य चीजों को बैकअप को ला करके केवल

524
00:37:34,720 --> 00:37:39,280
तुम वो जो उसके आधार पर ऐसा सोचा जा सकता है कि चापलूसी है।

525
00:37:39,280 --> 00:37:43,360
ठीक है? ऐसा क्योंकि पानी मैंने पिया तो उसके आधार पर ऐसा सोचा जा सकता है

526
00:37:43,360 --> 00:37:47,600
कि मैंने पानी प्यास लगने के कारण ही पिया है। एक घूंट पिया है। मगर

527
00:37:47,600 --> 00:37:53,280
सिद्ध नहीं होगा अंतिम रूप से वो। मगर तुम बोलो।

528
00:37:53,280 --> 00:37:58,440
तुम्हें उससे कोई मतलब नहीं है। तुम्हें बोलना है चापलूसी

529
00:37:58,440 --> 00:38:02,640
चलो होता है तो कलयुग में

530
00:38:02,640 --> 00:38:06,880
है वो असंभव वाला विषय कर्ज राम की अवज्ञा में

531
00:38:06,880 --> 00:38:10,960
और परिहास में और ये सारी

532
00:38:10,960 --> 00:38:14,960
चीजें तुम अपना अवलोकन करना और अभी आकर आगे क्या-क्या करोगे अपने

533
00:38:14,960 --> 00:38:19,280
वक्तव्यों का जहां मैंने पोल खोली है तुम्हारे वक्तव्यों की वहां कैसी डेंटिंग

534
00:38:19,280 --> 00:38:23,680
पेंटिंग होगी मैं बताऊंगा तुम्हें। ये सारी चीजें तुम पर लागू थी

535
00:38:23,680 --> 00:38:24,640
सब सीखना पड़ेगा

536
00:38:24,640 --> 00:38:28,800
और इस समय आप लोग जब हटाना चाह रहे हैं आपको पकड़ नहीं पा रहे आप चैट में सब गाली गलौज

537
00:38:28,800 --> 00:38:32,880
करते रहते है ना ये सब गाली गलौज इससे कुछ नहीं होगा खाना चाह रहे है आप लोग उसको पकड़ नहीं पा रहे आप

538
00:38:32,880 --> 00:38:36,880
लोग चैट में सब गाली गलौजने की दरेंगे तो कैसे चल पाएंगे भाइयों शिवा आपको जो बताना चाह

539
00:38:36,880 --> 00:38:40,960
रहे है आप उसको पकड़ नहीं पा रहे की मोड बनाइए मोड बनाइए देखो तो भैया

540
00:38:40,960 --> 00:38:44,960
मुझे मोड बनाने आता है ना मैं मोड बनाऊंगा तुम लोग को जितना नाचो देंगे हां उसमें क्या है लेकिन

541
00:38:44,960 --> 00:38:48,960
कम से दूसरे को गाली दोगे तो गाली सुनोगे उसको हमको अगर देना चाहो तो मैं क्या हो पाऊंगा ऐसे 50 लोग दे रहे हैं 50 लोग

542
00:38:48,960 --> 00:38:53,280
देंगे हां उसमें क्या है लेकिन कम से कम दूसरे को गाली दोगे मुझे लगा मैं गाली नहीं बोल रहा

543
00:38:53,280 --> 00:38:57,280
मुझे किसी ना इससे क्या होगा भाई कोई गाली गलौज

544
00:38:57,280 --> 00:39:01,600
किसी को ना दे और मरदित भाषा में अगर

545
00:39:01,600 --> 00:39:07,600
अपना प्रतिकार प्रकट करना है तो वो करे बस

546
00:39:07,840 --> 00:39:12,240
मेरी मुझे दिखाई देगा तो बैन भी करूंगा और फेक आईडी

547
00:39:12,240 --> 00:39:16,720
मैं अपने समर्थकों से कहूंगा ये जो फेक आईडीज बनी है इनके हैंडल्स

548
00:39:16,720 --> 00:39:20,720
आप जो है नोट कर लीजिए और मुझे प्रोवाइड

549
00:39:20,720 --> 00:39:23,800
कराइए। नंबर है मेरा

550
00:39:23,800 --> 00:39:25,960
740830

551
00:39:25,960 --> 00:39:30,000
7408301869 इस नंबर पर ये जो फेक आईडी के जो हैंडल्स है जो

552
00:39:30,000 --> 00:39:34,000
फेक आईडी से चल रहा है ये हैंडल्स आप नोट कर लें और

553
00:39:34,000 --> 00:39:38,080
इनके कुछ आपत्तिजनक कमेंट्स भी नोट कर लें जो बाद

554
00:39:38,080 --> 00:39:42,240
में डिलीट ना हो पाए और वो मुझे आप भेज

555
00:39:42,240 --> 00:39:46,240
दें क्योंकि इन पर कारवाई करनी है जो ये इस तरह से फर्जी

556
00:39:46,240 --> 00:39:50,320
वो भले ही फिर विजय श्री के विजय श्री नाम से फेक अकाउंट

557
00:39:50,320 --> 00:39:54,560
चल रहा हो ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के नाम से फेक अकाउंट चल रहा हो

558
00:39:54,560 --> 00:39:59,200
या भगवतानंद के नाम से फेक अकाउंट चल रहा हो किसी पक्ष या विपक्ष

559
00:39:59,200 --> 00:40:03,200
जो भी फेक अकाउंट ऐसे आपत्तिजनक वो कर रहे हैं उनको आप

560
00:40:03,200 --> 00:40:07,200
नोट करिए और मुझे दीजिए जो किसी को बदनाम करने के लिए प्रयास किया

561
00:40:07,200 --> 00:40:11,280
जा रहा है क्योंकि तुम्हारे जैसे लोग पर चिंता करते हो पहले ये तो काम नहीं

562
00:40:11,280 --> 00:40:15,360
किसी तुम्हारे परलोक है तो तुम्हारे जैसे लोग छोड़ देता हूं

563
00:40:15,360 --> 00:40:19,440
मैं तो तुमको कर दूंगा निकाल पर बात कर तुम बात

564
00:40:19,440 --> 00:40:23,200
प्रतिता वार्ता जिसका कोई कभी नहीं आएगा। अब

565
00:40:23,200 --> 00:40:27,520
हमने इस प्रकार से आपको बताया कि डरना नहीं समझना नहीं सामने वाले की बात सुनना नहीं

566
00:40:27,520 --> 00:40:31,680
लेकिन तुरंत पहले कपट के बोल देना है। असम भ्रांत रीति से निर्लजता पूर्वक प्रतिभागी की आज्ञा

567
00:40:31,680 --> 00:40:35,680
कोस करते हुए राज करते हुए जो व्यक्ति कथा में प्रस्तुत होता है। कलयुग की बड़ी

568
00:40:35,680 --> 00:40:40,000
कृपा इस पर और चाहे कितना बड़ा बैल बुद्धि को हम तुमने

569
00:40:40,000 --> 00:40:44,840
भी यही किया है। अच्छा है। 1858

570
00:40:44,840 --> 00:40:48,960
पे आप लोग टाइम स्ट ले लीजिएगा। 1858 पे

571
00:40:48,960 --> 00:40:53,280
इनका बड़ा अच्छा सा एक चित्र आ रहा है जिससे कि बहुत सारे इनके

572
00:40:53,280 --> 00:40:57,360
भाव प्रकट हो रहे हैं अपनी बातों को कह करके

573
00:40:57,360 --> 00:41:01,880
और ये सारी बातें इन पर ही लागू है। अगर कभी हुई प्रत्यक्ष वार्ता तो मैं बताऊंगा

574
00:41:01,880 --> 00:41:06,240
इनको। एक चलिए अब

575
00:41:06,240 --> 00:41:10,320
हम शिव सर जी की ओर बढ़ते हैं। तो शिव सर ने जो वो वीडियो बनाया है।

576
00:41:10,320 --> 00:41:14,320
इसमें शिवशं बड़ी सुंदर बात करते हैं कि किसी को कभी हम तोड़ते नहीं।

577
00:41:14,320 --> 00:41:18,480
फेरते नहीं दिखाई। कहते किसी को कभी हम छेड़ते नहीं। कोई

578
00:41:18,480 --> 00:41:22,560
हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं। हरि बोल बच्चा बोल परम

579
00:41:22,560 --> 00:41:26,560
की जय हो। का सीमा का हां तो

580
00:41:26,560 --> 00:41:32,560
चलिए अब हमने अपना मंगलाचरण कर दिया

581
00:41:36,360 --> 00:41:42,360
है। वाईफाई

582
00:41:46,080 --> 00:41:50,080
बर्थडे का तो ज्यादा ही स्लो है। इधर से हां हाथ में ले लो

583
00:41:50,080 --> 00:41:54,080
पहले बनते हैं। भैया शिवास जी आपको किस प्रकार से दिखाएंगे कि प्रतिवादी के सामने

584
00:41:54,080 --> 00:41:58,160
अपनी बेइज्जती कैसे कराई जाए उपस्थिति की

585
00:41:58,160 --> 00:42:03,040
सम्मान करते हुए हम सब इनके भाई से इनका स्वागत करेंगे।

586
00:42:03,040 --> 00:42:07,040
अच्छा नाटक है अच्छी नौटंकी ताली वाली बजा के नाटक

587
00:42:07,040 --> 00:42:11,120
करना है। एंटरटेनमेंट भी होना चाहिए थोड़ा

588
00:42:11,120 --> 00:42:16,760
बहुत। अब इसमें इसने मैं बता दूंगा और बोल मैं देखो मैं इसके

589
00:42:16,760 --> 00:42:20,880
एक भाई मैं बता दूंगा और बोल मैं देखो मैं इसकी लग रहा है स्किप कर

590
00:42:20,880 --> 00:42:25,120
इसलिए लाइव में कुछ भी स्किप नहीं अब इसमें इसने कहीं मेरा सुना है आप लोगों को आप मेरे मुंह से सुनी

591
00:42:25,120 --> 00:42:29,120
इसकी लाइव सुनी होगी तो उसको मैं स्किप कर दूंगा क्योंकि मुझे तो पता है मैंने क्या बोला आपको पता है मैंने क्या बोला पहले मेरा लाइफ में

592
00:42:29,120 --> 00:42:33,440
हमने बोला फिर से लाइफ वही कहता हूं उसमें अपनी बात शास्त्र तुम्हारे दिए लेकिन क्योंकि शास्त्र

593
00:42:33,440 --> 00:42:37,560
है ना शास्त्र को आवश्यक नहीं मानेगा तो बाहर वाला कैसे खाएगा

594
00:42:37,560 --> 00:42:41,840
कैसे होता है समर्थन करने के लिए शास्त्रेंगे तो ये सब

595
00:42:41,840 --> 00:42:46,760
मैंने कब कहा कि शास्त्र को प्रमाण नहीं मानूंगा या आवश्यक नहीं मानूंगा

596
00:42:46,760 --> 00:42:50,800
हम मगर शास्त्र का जो संदर्भ जिस बात

597
00:42:50,800 --> 00:42:51,520
के लिए

598
00:42:51,520 --> 00:42:55,920
दिया जा रहा है उस शास्त्र हम बोल रहे हैं कि असतो

599
00:42:55,920 --> 00:43:00,120
सदम तमस मृत्यु मृतमय रा विग्रह

600
00:43:00,120 --> 00:43:04,720
धर्मा अच्छा हम किसी से बात क्या कह रहे हैं कि तुम

601
00:43:04,720 --> 00:43:08,720
धार्मिक नहीं हो तुम्हें सिद्ध यह करना है या तुम जो है

602
00:43:08,720 --> 00:43:12,800
आस्तिक नहीं हो तो शास्त्र रामो विग्रह धर्म

603
00:43:12,800 --> 00:43:17,280
से यह कहां सिद्ध हो रहा है कि जो है

604
00:43:17,280 --> 00:43:21,440
शिवाश नारायण द्विवेदी धार्मिक नहीं है। उसको धार्मिक सिद्ध करने

605
00:43:21,440 --> 00:43:25,840
के लिए तुम्हें यह बोलना पड़ेगा कि शिवाश नारायण द्विवेदी तुम

606
00:43:25,840 --> 00:43:30,240
दो तरह की बातें कर रहे हो। तुमने यहां कुछ कहा यहां कुछ कहा और रामो

607
00:43:30,240 --> 00:43:34,240
दुरनाभि भाषते और रामो विग्रह धर्मा तब

608
00:43:34,240 --> 00:43:38,320
तुम्हें ये कहना पड़ेगा। तब तुम ये सिद्ध करोगे कि हां शिवश नारायण

609
00:43:38,320 --> 00:43:42,400
द्विवेदी धार्मिक थी। मगर तुम कह रहे हो धार्मिक नहीं है और रामो विग्रह धर्मा

610
00:43:42,400 --> 00:43:46,640
इसका क्या रिलेशन है? रामो राम श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप

611
00:43:46,640 --> 00:43:50,720
है। इससे कहां सिद्ध हो रहा है कि शिवश नारायण द्विवेदी धार्मिक नहीं है। तुम्हें बताना पड़ेगा कि

612
00:43:50,720 --> 00:43:55,280
शिवश नारायण द्विवेदी ने यहां पर दो तरह की बातें की है। दोगलापन

613
00:43:55,280 --> 00:43:59,280
दिखाया है और क्योंकि श्री राम दो तरह की बातें नहीं करते। रामो

614
00:43:59,280 --> 00:44:04,000
दुरना वासते इसलिए और फिर उसी क्रम में क्रमशः

615
00:44:04,000 --> 00:44:06,880
क्या है कि रामो विग्रह वान धर्मा

616
00:44:06,880 --> 00:44:11,120
और क्योंकि श्री राम दो दो प्रकार की बातें नहीं करते और क्योंकि

617
00:44:11,120 --> 00:44:15,520
श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है इससे प्रूव हुआ कि शिवश

618
00:44:15,520 --> 00:44:19,680
नारायण द्विवेदी तुम धार्मिक नहीं हो मगर जब तुम शास्त्र

619
00:44:19,680 --> 00:44:23,680
का प्रमाण ऐसे रखोगे कि हमने शास्त्र का प्रमाण तो रखा

620
00:44:23,680 --> 00:44:27,840
जैसे अभी तुमने पीछे बहुत सारी बातें की कि ऐसा होना चाहिए वैसा होना चाहिए

621
00:44:27,840 --> 00:44:31,920
मगर यहां पर शिव द्विवेदी को अवमानना करना सीख लो अवज्ञा

622
00:44:31,920 --> 00:44:36,000
करना सीख सीख लो सामने वाले की सामने वाले को सुनना नहीं है समझना

623
00:44:36,000 --> 00:44:40,480
नहीं है तो तुमने यह तो किया

624
00:44:40,480 --> 00:44:44,680
मगर यह नहीं बताया कि शिवश नारायण द्विवेदी ने अवज्ञा की

625
00:44:44,680 --> 00:44:48,720
कहां हम तो ये कुछ

626
00:44:48,720 --> 00:44:53,040
नहीं है केवल एक सेटिंग है बस अपना उस

627
00:44:53,040 --> 00:44:57,040
श्लोक संख्या इत्यादि ये सब बता करके उसका प्रभाव

628
00:44:57,040 --> 00:45:01,440
उत्पन्न करना मगर जब सामने से बात होगी तो यह सब नहीं हो पाएगा

629
00:45:01,440 --> 00:45:07,440
है ना चलिए

630
00:45:07,480 --> 00:45:11,600
अनावश्यक पुचके पुचके की बात कह रहे हैं कि तुमने पुचके खाया यह

631
00:45:11,600 --> 00:45:15,680
खाया वो खाया हैं अरे हमने कब कहा कि हमारा पुचके खाना

632
00:45:15,680 --> 00:45:20,320
बिल्कुल वो शास्त्रों के अनुसार है कहा है क्या

633
00:45:20,320 --> 00:45:24,480
हमारी हमारा जो जीवन है वो कैसे कहां से हम आए हैं

634
00:45:24,480 --> 00:45:28,640
हमारा बैकग्राउंड क्या है हम कैसे उसे धीरे-धीरे परिवर्तित कर रहे हैं कैसे

635
00:45:28,640 --> 00:45:32,800
अपनी जो चीजें हैं जो आदतें उनमें सुधार लाए हैं जो

636
00:45:32,800 --> 00:45:36,880
आज से पांच साल पहले मैं जिस तरह के आचरण में था वो

637
00:45:36,880 --> 00:45:40,960
आज से दो साल पहले नहीं था और जो आज से दो साल दो साल पहले था

638
00:45:40,960 --> 00:45:45,200
वो आज नहीं हूं। मेरा बचपन तो ऐसा नहीं गुजरा। मैंने तो कभी नहीं कहा कि मेरा बचपन

639
00:45:45,200 --> 00:45:49,200
गुरुकुल में गुजरा है या फिर मुझे जो है देवताओं ने दर्शन दिया था या फिर मैं

640
00:45:49,200 --> 00:45:53,200
जो है 2017 में मुझे जो है यंत्र मिल गया था या फिर

641
00:45:53,200 --> 00:45:57,360
मैं फलाने लुप्त संप्रदाय का गुप्त आचार्य हूं। ये सब तो तुम

642
00:45:57,360 --> 00:46:01,360
कह रहे हो और मैं इन सब बातों को नहीं भी करता। अगर तुम व्यक्तिगत यह

643
00:46:01,360 --> 00:46:05,600
ना होते बातें करते मैं जो कह रहा हूं वह गलत है कि नहीं यह सब बातें करते रहते

644
00:46:05,600 --> 00:46:09,920
मगर तुम कहां गए कि तुमने फुचका खाया क्यों खाया क्या खाया किसके

645
00:46:09,920 --> 00:46:14,000
किसके साथ खाया किस हालात में खाना पड़ा इससे कोई मतलब नहीं है तुमने फुचका

646
00:46:14,000 --> 00:46:18,720
खाया तुमने प्रोटीन पाउडर खाकर के बॉडी बनाई ये सब तुम ये सब तुमने

647
00:46:18,720 --> 00:46:22,960
चालू किया था ना तुमने चालू किया ये

648
00:46:22,960 --> 00:46:27,120
अब प्रत्येक शुक्रवार की बात आ गई तो थोड़ा अब तुम्हारे उसमें वो जो तुमने

649
00:46:27,120 --> 00:46:31,120
बताया ना वो जो सब होता है कि अगर अगर साथ उसको शास्त्र को

650
00:46:31,120 --> 00:46:35,840
जीतना है तो शास्त्रार्थ को जीतना है

651
00:46:35,840 --> 00:46:40,080
तो क्या करो कॉन्फिडेंट हो के बात करो तो आज तुम जो है वैसा कॉन्फिडेंट

652
00:46:40,080 --> 00:46:44,080
नहीं दिखा रहे हो जैसा इससे पिछले वाली सभी लाइव में दिखा रहे ठीक है

653
00:46:44,080 --> 00:46:48,200
चलिए आगे चलते हैं तो अनावश्यक छात्र को मारेगाने

654
00:46:48,200 --> 00:46:52,800
का इच्छा करके ये सात दिन बाद

655
00:46:52,800 --> 00:46:57,880
ठीक है सुनते है

656
00:46:57,880 --> 00:47:02,360
और तो सबसे पहले तो इस तरीके से

657
00:47:02,360 --> 00:47:06,720
की स्वामी जी को मेरे से बच के तो

658
00:47:06,720 --> 00:47:10,880
के सम्मान और समर्थन में बड़ी को पता लगा उस समर्थन

659
00:47:10,880 --> 00:47:15,040
कैसे मिलेगा तो आपका कहने का मतलब है की दुनिया में संसार में ज भी कुछ होगा

660
00:47:15,040 --> 00:47:19,520
अच्छा तो वहां पर सुभाष करने वाला होना चाहिए अब मेरी बात सुन लीजिए

661
00:47:19,520 --> 00:47:25,080
प्रसंग आपको बता दू किस प्रसंग मैंने कहा था किस प्रसंग में कहा था मैं आपको बता

662
00:47:25,080 --> 00:47:29,200
दू पढ़ लिया होगा विजय श्री का एक साक्षात्कार था जिसमें 11 महीने

663
00:47:29,200 --> 00:47:33,360
पहले आप चैनल से उस वाली आईडी से इसने कमेंट किया है। आपकी पूरी टीम को स्वय आभार

664
00:47:33,360 --> 00:47:37,360
आपने अत्यंत कम शब्दों में सनातन धर्म की सर्वतम परिभाषा प्रदान की आंग भाषा में आपके मुख से

665
00:47:37,360 --> 00:47:41,360
निकलने वाली शब्दावली में भगवान आदि शंकराचार्य की परंपरा के महान विद्वान धर्म सम्राट

666
00:47:41,360 --> 00:47:45,520
जी महाराज के शब्द समाज में इसी प्रकार युवाओं के धारण के विषय में प्रकट होने की आवश्यकता

667
00:47:45,520 --> 00:47:49,840
है। प्रभु श्री राम आप सभी पर कृपा बनाए रखे एवं आप सभी अपने जीवन में

668
00:47:49,840 --> 00:47:53,840
यथोचित मनवाछित फलों को प्राप्त कर सके ऐसी प्रार्थना ईश्वर से करते है ऐसा

669
00:47:53,840 --> 00:47:57,840
मतलब जो विजयशील लड़की है उसके प्रति ये व्यक्ति इतना समर्पित हो गया है कि अंग्रेजी

670
00:47:57,840 --> 00:48:02,200
में उसकी कही दो चार बातों से इसको सीधे सम्राट स्वामी याद आ गई

671
00:48:02,200 --> 00:48:06,880
अच्छा अब ये बताइए सबसे पहली बात तो ये है

672
00:48:06,880 --> 00:48:11,040
कि जो हमारे आचार्यों के जो सिद्धांत होते हैं क्या हम

673
00:48:11,040 --> 00:48:13,040
नहीं चाहते हैं वो बच्चे बच्चे

674
00:48:13,040 --> 00:48:17,120
के मुख से जो है निकले बच्चा-बच्चा बच्चा जो है ऐसा हो जाए हमारे यहां

675
00:48:17,120 --> 00:48:21,120
जो उन सिद्धांतों को बोलने वाला हो जाए उन सिद्धांतों को रखने वाला हो

676
00:48:21,120 --> 00:48:25,440
जाए तो अगर कोई रखने वाला हो रहा है उसको कहा जा रहा है

677
00:48:25,440 --> 00:48:29,520
उसी अंश में जिस अंश में वो हुआ तो उसको अगर ये कहा जा रहा है उसके

678
00:48:29,520 --> 00:48:33,840
प्रोत्साहन के लिए उसका एप्रिशिएशन किया जा रहा है तो उसको बस

679
00:48:33,840 --> 00:48:38,200
देखिए तथ्य वही है वही वाली बात है अच्छा

680
00:48:38,200 --> 00:48:42,280
अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा शब्द का उपयोगी

681
00:48:42,280 --> 00:48:46,720
अच्छा है ना अच्छा शब्द का उपयोगी किसी भी प्रकार से आप कर लो।

682
00:48:46,720 --> 00:48:50,960
उसी तरीके से तथ्य तो वही है कि हां मैंने उनका

683
00:48:50,960 --> 00:48:55,520
जो है प्रोत्साहन करने के लिए वहां पर वो लिखा

684
00:48:55,520 --> 00:48:59,520
और अब उसका कोई भी अर्थ आप निकाल लो ये भी निकाल लो कि वो चापलूसी

685
00:48:59,520 --> 00:49:03,520
है या जो आगे कहने जा रहे हैं बहुत बड़ा समर्पण भाव है। वो

686
00:49:03,520 --> 00:49:07,600
भी है। अब समर्पण समर्पण भाव है बहुत बड़ा वो

687
00:49:07,600 --> 00:49:12,000
सिद्ध कैसे होगा? तुम बोल रहे हो कि समर्पण भाव है।

688
00:49:12,000 --> 00:49:16,240
बहुत ज्यादा वहां अनुगत हो गए हैं। नतमस्तक हो गए। बहुत ज्यादा। तुम्हारा यह कहना

689
00:49:16,240 --> 00:49:20,640
है। हम सुन ले पहले तुम्हारा कहना क्या है? पूरा

690
00:49:20,640 --> 00:49:24,640
आसना में शास्त्री विषयों का हो जाता। इसलिए

691
00:49:24,640 --> 00:49:28,480
नहीं आई क्योंकि हमने तुम्हें जब देखा था

692
00:49:28,480 --> 00:49:32,640
जब तुम तुम्हारा वीडियो हमने पहली बार देखा था। उस समय तुम कोई पत्र

693
00:49:32,640 --> 00:49:36,880
का जवाब दे रहे थे जो पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्य द्वारा

694
00:49:36,880 --> 00:49:40,960
कोई कमेंट किया गया होगा। कुछ किया होगा शायद वो आयुष सिंह चौहान का जो नाम

695
00:49:40,960 --> 00:49:45,040
तुम लेते हो बार-बार और वहां पर हमको यह समझ में आया था कि पूरी शंकराचार्य

696
00:49:45,040 --> 00:49:49,200
जी का तुमने कई जगहों पर जो है उनके शास्त्रीय पक्ष का भी तुमने

697
00:49:49,200 --> 00:49:53,800
खंडन किया है और शायद एक वीडियो हमने तुम्हारा ऐसा देखा था जिसमें

698
00:49:53,800 --> 00:49:58,000
कि खंडन का प्रयास किया है खंडन नहीं और

699
00:49:58,000 --> 00:50:02,240
एक पक्ष हमने एक वीडियो शायद तुम्हारा वो वाला देखा था जिसमें तुमने अपनी कहानी सुनाई

700
00:50:02,240 --> 00:50:06,560
थी कि मैं जो है पहले पूरी मठ में रहता था और जो है

701
00:50:06,560 --> 00:50:10,560
मैं वो देता था। सबको जवाब देता था। जो लोग

702
00:50:10,560 --> 00:50:14,640
प्रश्न करते थे पीठ से तो वो लोग ये समझते थे शंकराचार्य तो मैंने वहां पर यह

703
00:50:14,640 --> 00:50:18,640
समझा कि वे व्यक्ति पहले मठ से जुड़ा हुआ था और अब नहीं है जुड़ा हुआ।

704
00:50:18,640 --> 00:50:22,720
मगर मुझे वहां भी तुम्हारी उस दिन ही ये बात खटकी थी कि जब तक ये साथ है तब तक तो

705
00:50:22,720 --> 00:50:26,960
आपके राज को राज रखेगा। अगर राज है तो तुम्हारे अनुसार

706
00:50:26,960 --> 00:50:31,040
और उसके बाद जब तुम अलग हो जाओगे तो उस राज को खोलेगा जिस समय तुमसे

707
00:50:31,040 --> 00:50:35,120
मित्रता थी। उस समय तुम्हारे कौन-कौन सी चीजों में तुम लोग एक मत

708
00:50:35,120 --> 00:50:39,280
थे। तो वो राज भी वो खोलने लगेगा बाद में। तो यह छाप तुम्हारी छूटी और दूसरी

709
00:50:39,280 --> 00:50:43,360
छाप क्या छूटी कि तुम जो है शंकर मत का कहीं कहीं पर

710
00:50:43,360 --> 00:50:43,860
वो

711
00:50:43,600 --> 00:50:47,840
जो है विरोध करते हो। ठीक है? तो जब यह पता

712
00:50:47,840 --> 00:50:51,840
चला तो हमने तुम्हारे ऊपर अलग से कोई रिसर्च करना

713
00:50:51,840 --> 00:50:55,840
तुम्हारा चैनल ऐसा तो है नहीं कि उनका जो प्रतिकार है और

714
00:50:55,840 --> 00:51:00,000
लोग नहीं करते। तो हम क्या सबका सब जाकर के देखने लग जाए?

715
00:51:00,000 --> 00:51:04,720
नहीं देखा। नहीं सुने तुम्हारे वीडियोस। मगर

716
00:51:04,720 --> 00:51:08,800
हमने कहीं भी यह नहीं कहा ना कि तुमने ऐसा नहीं किया है क्योंकि हमने देखा नहीं था इस आधार

717
00:51:08,800 --> 00:51:12,960
पर अगर हम ऐसा बयान देते थे कि तुमने ऐसा नहीं किया है तो तुम्हारी शिकायत

718
00:51:12,960 --> 00:51:17,280
होती कि तुमने हमारा जब देखा नहीं था तुमने चेक नहीं किया जो कि तुमने किया है

719
00:51:17,280 --> 00:51:21,360
तुमने किया है ये कार्य तुमने किया है तुमने देखा नहीं कि हमने क्या

720
00:51:21,360 --> 00:51:25,360
किया क्या नहीं और आगे पक्का से बोल दिया तो ये दोष तो तुम पर ही

721
00:51:25,360 --> 00:51:29,520
आ रहा है भाई तुम पहले पूछते तो पता तो करते कि मैंने कितना

722
00:51:29,520 --> 00:51:33,520
तुम्हें रीड किया है दूर ही दूर से थोड़ा बहुत जानता हूं बस थोड़े

723
00:51:33,520 --> 00:51:37,760
बहुत अंश तुम्हारे पता है कुछ अच्छी चीजें हैं तुमने की है मगर

724
00:51:37,760 --> 00:51:41,760
मैंने ज्यादा तुम पर रिसर्च नहीं किया था कि तुमने कहां

725
00:51:41,760 --> 00:51:45,760
कहां कब कब क्या-क्या किया क्या-क्या नहीं किया है विजय श्री से मेरा

726
00:51:45,760 --> 00:51:49,760
सीधा संपर्क हुआ विजय श्री जब उस इंटरव्यू में जा रही है

727
00:51:49,760 --> 00:51:54,240
तो एक दिन पहले दो दिन पहले मुझे कॉल कर रही है कि मेरा ऐसे इंटरव्यू है उसमें

728
00:51:54,240 --> 00:51:58,320
जो है ऐसा सवाल हो सकता है मुझसे किया जाए विजय

729
00:51:58,320 --> 00:51:58,820
श्री को

730
00:51:58,720 --> 00:52:02,800
वो परिभाषा मैं बता रहा हूं गुरुदेव की कृपा से जो प्राप्त है वो कर

731
00:52:02,800 --> 00:52:06,800
पाते जी महाराज की कृपा से जो प्राप्त है। उसके बाद यथावत रूप से वो प्रयास कर

732
00:52:06,800 --> 00:52:10,800
रही है अगले दिन जाकर के और वहां पर प्रमाणिक आचार्यों की बात भी कर रही है।

733
00:52:10,800 --> 00:52:14,920
परंपरा प्राप्त आचार्यों की बात कर रही हैं। तो ऐसे व्यक्ति को

734
00:52:14,920 --> 00:52:18,920
जो ऐसे व्यक्ति जो कि बिल्कुल विपरीत

735
00:52:18,920 --> 00:52:22,920
उसमें है वातावरण में और वो जब इतने आसानी

736
00:52:22,920 --> 00:52:27,040
से शास्त्र निष्ठता दिखा रहे हैं। प्रमाण बुद्धि दिखा रहे हैं।

737
00:52:27,040 --> 00:52:31,040
वो अपने जीवन में पता नहीं विजय श्री पूर्णतया शास्त्र सम्मत आचरण

738
00:52:31,040 --> 00:52:35,040
कर कब कर पाएंगी। पता नहीं मैं कब कर पाऊंगा और तुमने अगर अपनी जीवन

739
00:52:35,040 --> 00:52:39,840
शैली बता दी तो मैं तुम्हारे अंदर भी दोष निकाल दूंगा शास्त्र निष्ठता का

740
00:52:39,840 --> 00:52:44,080
मतलब शास्त्र निष्ठता के विपरीत दोष मैं आपको बता सकता हूं अगर

741
00:52:44,080 --> 00:52:48,160
अपने जीवन के बारे में आपने बताया जो ट्रांसपेरेंसी आप नहीं रखते हो इसलिए बचे हुए हो कई

742
00:52:48,160 --> 00:52:52,320
बार कहा मैंने तो हां हां ये

743
00:52:52,320 --> 00:52:56,480
है कि परसेंटेज में मैं आपसे ज्यादा हूं और वो

744
00:52:56,480 --> 00:53:00,720
विजयश्री जी वो मुझसे ज्यादा होंगी जो जहां जिनजिन अंशों

745
00:53:00,720 --> 00:53:04,800
में वो शास्त्र के विपरीत आचरण होंगे क्योंकि वह

746
00:53:04,800 --> 00:53:08,800
मेरे काफी दिन बाद जुड़ी है। एक

747
00:53:08,800 --> 00:53:12,880
प्रामाणिक आचार्य की शरण में आई है और इस मामले में तुम मुझसे

748
00:53:12,880 --> 00:53:14,240
सीनियर हो।

749
00:53:14,240 --> 00:53:18,640
ठीक है? यही तो बात है। क्योंकि आपके पिताजी से आपको गायत्री

750
00:53:18,640 --> 00:53:23,440
प्राप्त हो गई थी। तो ये जो चीज है कि

751
00:53:23,440 --> 00:53:27,440
क्या कहते हैं ये? मैंने वहां प्रोत्साहन

752
00:53:27,440 --> 00:53:31,680
क्यों किया? क्योंकि मुझे पता था यहां पे ये हुआ। मैंने तुम्हारा

753
00:53:31,680 --> 00:53:35,760
प्रोत्साहन क्यों नहीं किया? क्योंकि मुझे नहीं पता है कि वहां पर यह कहीं पर यह

754
00:53:35,760 --> 00:53:39,840
हुआ। तो अगर मैंने तुम्हारा विरोध अगर मैंने तुम्हारी प्रशंसा नहीं

755
00:53:39,840 --> 00:53:43,840
की तो तुम्हारा विरोध भी तो नहीं किया। विरोध करता

756
00:53:43,840 --> 00:53:48,360
तब तुम ये कहते कि तुमने हमारी चीज देखे बिना ये विरोध क्यों कर

757
00:53:48,360 --> 00:53:53,280
दिया? मैं सर्वज्ञ थोड़ी ना हूं।

758
00:53:53,280 --> 00:53:57,360
सर्वज्ञ हूं क्या? या तुम सर्वज्ञ हो। अभी आएंगे इससे रिलेटेड प्रश्न आएंगे

759
00:53:57,360 --> 00:54:01,520
अभी। ओके। क्रिया के पास ऊपर और नीचे दोनों पहुंच

760
00:54:01,520 --> 00:54:05,800
ऊपर मैं ऊपर करना चाह रहा हूं बाकी आप जो बात समझना चाहे वो समझ सकते हैं

761
00:54:05,800 --> 00:54:09,840
आप सुनो पेंब्रा इन्होंने शब्दों का उपयोग किया

762
00:54:09,840 --> 00:54:13,920
है किसी मातृ शक्ति के लिए जो अब उस वातावरण में नहीं है जिस

763
00:54:13,920 --> 00:54:19,040
वातावरण में पहले कभी थी अच्छा क्या

764
00:54:19,040 --> 00:54:23,040
तुम्हारी माताओं और बहनों ने कभी अपने जीवन

765
00:54:23,040 --> 00:54:27,120
में उन अंतर वस्त्रों को धारण नहीं किया था अंग वस्त्रों को

766
00:54:27,120 --> 00:54:29,360
धारण नहीं किया था

767
00:54:29,360 --> 00:54:33,520
किया होगा ना सिर्फ उसी में रही हो बचपन में

768
00:54:33,520 --> 00:54:37,760
रही ना बचपन में तो रही मगर जब उनको दिशा

769
00:54:37,760 --> 00:54:41,840
मिली तो वो ठीक हुई कि नहीं ये बात होती है जब उनको दिशा मिली

770
00:54:41,840 --> 00:54:46,080
तो वो ठीक हुई कि नहीं हुई और तो और उनको कौन

771
00:54:46,080 --> 00:54:50,320
से ऐसे पद पर बिठा दिया गया अगर वो सही समय पर हो जाना था उनको

772
00:54:50,320 --> 00:54:54,320
ठीक और सही समय पर अगर ठीक नहीं हुई तो सही समय पर ठीक ना

773
00:54:54,320 --> 00:54:58,320
होने के कारण ना होने की उसमें होते हुए भी

774
00:54:58,320 --> 00:55:02,720
उनको कहां से ऐसी जगह से जोड़ दिया जोड़ दिया गया जिससे सारे समाज

775
00:55:02,720 --> 00:55:07,040
सारे तुम जैसे दंभियों को आपत्ति हो गई

776
00:55:07,040 --> 00:55:11,120
हम कहां से ऐसा जोड़ दिया गया जो उस मातृ शक्ति

777
00:55:11,120 --> 00:55:15,520
को बार-बार तुम ये जो टॉर्चर कर रहे हो

778
00:55:15,520 --> 00:55:19,760
ऐसे ही तुम धर्म से जोड़ोगे ना लोगों को कोई व्यक्ति कैसा भी हो अपने पुराने

779
00:55:19,760 --> 00:55:24,000
जीवन से आना चाहे यहां पर आकर के प्रामाणिक आचार्यों के पास भाई

780
00:55:24,000 --> 00:55:28,000
आज बहुत सारी संस्थाएं हैं जो अनुकूल धर्म प्रस्तुत कर रही

781
00:55:28,000 --> 00:55:32,000
है। धर्भास फैला रही है और व्यक्ति को वहां मिलने लगता है

782
00:55:32,000 --> 00:55:36,080
हम तो धर्म से जुड़ गए। विचार को भी धर्म बताया जा

783
00:55:36,080 --> 00:55:40,560
रहा है। तो जब व्यक्ति उन सारी विपरीत

784
00:55:40,560 --> 00:55:44,480
जो ऐसी संस्थाएं हैं जो जितनी

785
00:55:44,480 --> 00:55:48,480
भी ऐसी संस्थाएं हैं जो धर्भास फैला रही है जो जो

786
00:55:48,480 --> 00:55:52,720
भोग को ही भोग को ही धर्म बता देती है। भोग

787
00:55:52,720 --> 00:55:56,720
को भी धर्म का चोला पहना देती है। तो ऐसी बहुत सारी संस्थाएं हैं।

788
00:55:56,720 --> 00:56:00,800
तो तुम जब कोई वास्तव में कोई विपरीत परिस्थितियों से तुम्हारे पास आएगा तो तुम

789
00:56:00,800 --> 00:56:04,800
उसको कहोगे तुम ये करती थी तुम वो करती थी। और अभी देखूंगा प्रेम प्रसंगों के

790
00:56:04,800 --> 00:56:09,240
बारे में क्या कहोगे अभी वो बाकी है

791
00:56:09,240 --> 00:56:13,760
चलो मेरे पास नहीं हां हर वो चीज है तो यहां इन्होंने क्या प्रदर्शित

792
00:56:13,760 --> 00:56:17,960
किया कि मैंने मैंने विजय श्री के प्रशंसा क्यों की क्योंकि वो कोई महिला

793
00:56:17,960 --> 00:56:23,640
है और दबे हुए शब्दों में क्या

794
00:56:23,640 --> 00:56:27,760
किया दबे हुए शब्दों में अप्रत्यक्ष रूप से ये सब समझ रहे

795
00:56:27,760 --> 00:56:30,200
हैं ना

796
00:56:30,200 --> 00:56:34,320
चलिए 24 26 तो जो

797
00:56:34,320 --> 00:56:38,320
आह्वान ने सीधे सीधे संत कपात्री जी के शब्द ही तुम्हारी वाणी से संबंधित हो

798
00:56:38,320 --> 00:56:43,040
रहे हैं। ऐसा कह दिया तो नीचे विजय ने कमेंट भी किया आपका बहुत-बहुत आभार शिवांश और

799
00:56:43,040 --> 00:56:47,440
जैसा कि आप जानते हैं कि लड़के सिंपिंग करते हैं। भैया जी सिंपिंग करते हुए बढ़िया

800
00:56:47,440 --> 00:56:51,440
के साथ पंक्तियां प्रशंसा सिंपिंग करते हुए 24 48 पे

801
00:56:51,440 --> 00:56:55,680
बोला है भाई हम हमें अंग्रेजी भाषा का भी उतना ज्ञान नहीं है जितना

802
00:56:55,680 --> 00:56:59,920
इनको है। तो ये सिंपिंग करते हैं। इसका क्या है अर्थ जरा देख

803
00:56:59,920 --> 00:57:04,000
लेना क्या बोला हमें समझ नहीं। प्रशंसा नहीं सीधे सम्राट जी के

804
00:57:04,000 --> 00:57:08,120
वचनों के साथ इसके वचन की तुलना कर दी गई और देवी जी ने

805
00:57:08,120 --> 00:57:12,320
बस धर्म सम्राट स्वामी जी के वचनों

806
00:57:12,320 --> 00:57:17,600
से इस देवी जी के वचनों की तुलना कर दी गई ये क्या है भाई

807
00:57:17,600 --> 00:57:21,880
तुलना नहीं की है उन्हीं के वचन को बोल रही है वो और

808
00:57:21,880 --> 00:57:26,240
बोलो उन्हीं की बात को बोल रही है उनके वचन है ही नहीं वो

809
00:57:26,240 --> 00:57:30,240
अरे भाई अगर मैं बोल रहा हूं रामू विग्रहान धर्मा तो

810
00:57:30,240 --> 00:57:34,320
ये किसका वचन वाल्मीकि जी का वचन है ना

811
00:57:34,320 --> 00:57:38,320
रामायण का वचन है ना ये वाल्मीकि द्वारा वाल्मीकि जी द्वारा

812
00:57:38,320 --> 00:57:38,820
लिखा हुआ

813
00:57:38,800 --> 00:57:42,880
और वहां पर शायद संभवत रावण से

814
00:57:42,880 --> 00:57:46,880
संवाद हो रहा है राक्षस का वही वचन है ना ये

815
00:57:46,880 --> 00:57:51,040
और भी एक दो जगह पर आया है तो ये जो उन्होंने

816
00:57:51,040 --> 00:57:55,120
जो विजय श्री जी ने बोला है वो वचन उनका है ही नहीं स्वामी

817
00:57:55,120 --> 00:57:59,280
करपात्री जी का वचन है जो उन्होंने अंग्रेजी में जो है बोलने का प्रयास किया

818
00:57:59,280 --> 00:58:03,520
है वक्तव्य हां उसको थोड़ा उन्होंने एक्सप्लोर

819
00:58:03,520 --> 00:58:07,520
जरूर कर दिया है। उसको क्या कहते हैं? लेमन लैंग्वेज

820
00:58:07,520 --> 00:58:11,680
हां बस उसमें किया है। मगर उनका अपना क्या है? उनको

821
00:58:11,680 --> 00:58:16,000
थोड़ी ना कुछ पता था। करपात्री जी का वचन है वो जो उन्होंने

822
00:58:16,000 --> 00:58:20,240
इस तरह से बताया है। तो यह भी आपकी गलतफहमी

823
00:58:20,240 --> 00:58:24,240
है कि विजय श्री के वचन की तुलना धर्म सम्राट करपात्री जी से की गई है

824
00:58:24,240 --> 00:58:28,400
ना। धर्म सम्राट करपात्री जी के ही वचन की तुलना धर्म

825
00:58:28,400 --> 00:58:32,480
सम्राट करपात्री जी से हो। धर्म सम्राट करपात्री जी के

826
00:58:32,480 --> 00:58:36,640
ही वचन की तुलना धर्म सम्राट करपात्री जी के वचन से हो सकती

827
00:58:36,640 --> 00:58:40,720
है। हां तुम्हारे वचन की तुलना भी नहीं हो सकती उनसे।

828
00:58:40,720 --> 00:58:43,640
ठीक है?

829
00:58:43,640 --> 00:58:47,680
चलो मगर तुम्हें तो चौवा उड़ाना है। ऐसी बातों पर

830
00:58:47,680 --> 00:58:51,680
ही बात करते रहना है घंटों जिससे ना कोई तथ्य

831
00:58:51,680 --> 00:58:55,760
है ना कोई तंत्र है ना पानी। चौवा उड़ाना है बस।

832
00:58:55,760 --> 00:58:59,920
हां तो चलिए पंचाक्षरी आशीर्वाद दिया। अब यह इस समय किसी

833
00:58:59,920 --> 00:59:04,240
छज्जे पर बैठकर बात कर रहे हैं। छत पर बैठकर बात कर रहे हैं। ठीक है?

834
00:59:04,240 --> 00:59:08,560
तो अब ये क्योंकि छत पर बैठकर बात कर रहे हैं। तो हमने क्या किया

835
00:59:08,560 --> 00:59:13,640
कि शास्त्र के वचन बताए कि जो

836
00:59:13,640 --> 00:59:18,320
व्यक्ति क्या कहते हैं? जो व्यक्ति

837
00:59:18,320 --> 00:59:22,960
छत से कूदता है, जो व्यक्ति छत पर नाचता है,

838
00:59:22,960 --> 00:59:26,960
जो व्यक्ति छत पर नाटक करता है, है ना?

839
00:59:26,960 --> 00:59:31,040
उसके साथ ये ये होता है। ये इस संबंध में शास्त्र के कुछ वचन

840
00:59:31,040 --> 00:59:35,040
बता दिए। ठीक है? जबकि हमने यह सिद्ध

841
00:59:35,040 --> 00:59:39,120
नहीं किया कि इसके यहां बैठने से यह सिद्ध होता है कि यह छत पर

842
00:59:39,120 --> 00:59:43,760
नाचने के लिए बैठे हैं। छत पर नाटक करने के लिए बैठे हैं। छत पर कवाली

843
00:59:43,760 --> 00:59:47,760
करने के लिए बैठे हैं। हमने ऐसा कोई शास्त्र का वचन नहीं दिया जिससे कि

844
00:59:47,760 --> 00:59:51,760
अगर छत पर कोई इस तरीके से बैठा हुआ दिखे तो यह समझना चाहिए कि वो कवाली

845
00:59:51,760 --> 00:59:55,760
के लिए बैठा है। कवाली करने बैठा है। हमने यह

846
00:59:55,760 --> 00:59:58,640
नहीं सिद्ध किया शास्त्र के वचन से। हमने सिद्ध किया

847
00:59:58,640 --> 01:00:02,880
कि यदि कोई छत पर बैठकर के कवाली करता है

848
01:00:02,880 --> 01:00:06,880
तो उसका यह परिणाम होता है कवाली करने का। अब

849
01:00:06,880 --> 01:00:10,960
कवाली करना भी तो किसी शास्त्र के वचन से सिद्ध करो

850
01:00:10,960 --> 01:00:15,640
मगर वो हम नहीं करेंगे। हम जो रिलेट ही नहीं कर रहे हैं वो

851
01:00:15,640 --> 01:00:19,840
अप्रासंगिक उन शब्दों को उन वचनों को कहेंगे और उसके वजह

852
01:00:19,840 --> 01:00:23,840
उसके आधार पर प्रभाव उत्पन्न करेंगे और अपनी जय जयकार कराएंगे अपने अंध भक्तों

853
01:00:23,840 --> 01:00:29,080
के द्वारा। आपका बहुत-बत

854
01:00:29,080 --> 01:00:33,520
आभार हम तोड़ रहे हैं 100 आवर्स हर घंटे तो

855
01:00:33,520 --> 01:00:38,640
बनो किसी के हम कहीं से भी

856
01:00:38,640 --> 01:00:42,800
सुनो एक अच्छी इंश्योरेंस अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी

857
01:00:42,800 --> 01:00:46,800
एआई से पूछ रहे हैं एक ऐसी पॉलिसी

858
01:00:46,800 --> 01:00:50,400
जिसमें प्रीमियम पेमेंट हो लिमिटेड

859
01:00:50,400 --> 01:00:56,400
लाइफ टाइम

860
01:00:57,120 --> 01:01:01,200
फ्यूचर से और इस प्रकार से शिवा जी को लगा कि आज हम आज

861
01:01:01,200 --> 01:01:06,920
भी आज सूर्य समस्त का प्राप्त कर

862
01:01:06,920 --> 01:01:11,200
दिया और आपको जो है प्रत्येक

863
01:01:11,200 --> 01:01:15,360
शुक्रवार को जहां मिलने जाते हो वहां पर जो है सारे यज्ञों

864
01:01:15,360 --> 01:01:19,520
का फल प्राप्त होता है। तो जो इलाज के रूप में आपको मिल जाता

865
01:01:19,520 --> 01:01:24,480
है जिस समस्या से आप पीड़ित हैं। है ना

866
01:01:24,480 --> 01:01:28,480
हमने कहा भाई हमने जहां गुरु शंकराचार्य जी का शब्द लिखा

867
01:01:28,480 --> 01:01:32,760
था तो ये हमारे मुका समर्थन किया लगाई तो इसका समर्थन

868
01:01:32,760 --> 01:01:36,760
नहीं है वो सुन लीजिए मैं बताऊंगा संसार में ज भी आग

869
01:01:36,760 --> 01:01:40,960
लगाई सप्तम कैसे तो आपका कहने का मतलब है की दुनिया

870
01:01:40,960 --> 01:01:45,440
में है संसार में ज भी कुछ भी हो कुछ करने वाला

871
01:01:45,440 --> 01:01:49,760
और ज पर दुनिया में कुछ भी कर

872
01:01:49,760 --> 01:01:53,760
नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा ये अनुपाल का एक लक्षण है। अब सुभाष

873
01:01:53,760 --> 01:01:57,760
भैया आपको क्या सिखा रहे है? आपने क्या सिखा? आपको मैं शास्त्र करना सिखा रहा हूं। ठीक है। भैया ने क्या

874
01:01:57,760 --> 01:02:02,000
कहा? मैं ये कहना चाह रहा हूं। मुझ पर आरोप लगाया की मैं ये कहना चाह रहा हूं कि दुनिया में जहां गलत हो रहा

875
01:02:02,000 --> 01:02:06,000
था। तो ये मैंने कभी नहीं कहा। ना मैंने लिखित से ऐसा कहा ना मैंने मुख्य ऐसा कहा। तो शिवा जी

876
01:02:06,000 --> 01:02:10,160
का ये वक्तव्य शास्त्रार्थ में क्या दिखाता है? अनुक्तोपाल नामोपाल

877
01:02:10,160 --> 01:02:14,160
मतलब किस बात का आरोप लगाना। ये गलत है। ये दोष नहीं दिखा रहा है। जब तुमने

878
01:02:14,160 --> 01:02:18,160
कहा कि मैंने ऐसा कर करना था तो तुम्हें ये पहले ये

879
01:02:18,160 --> 01:02:22,720
पूछना चाहिए था कि अगर मैंने ऐसा किया कृपात्री जी महाराज का वो किया

880
01:02:22,720 --> 01:02:26,960
क्या तुम्हें ये बात मालूम थी कि नहीं मालूम थी? अगर तुम ये कहना चाहते हो

881
01:02:26,960 --> 01:02:31,600
कि मैं ये ये क्या कहते हैं? अगर तुम ये कहना चाहते हो

882
01:02:31,600 --> 01:02:35,680
कि मैं जो यह कह रहा हूं कि दुनिया में कहीं भी अच्छा हो तो

883
01:02:35,680 --> 01:02:39,680
मुझे उसका समर्थन करना चाहिए या फिर दुनिया में कहीं भी गलत हो तो उसका मुझे विरोध करना

884
01:02:39,680 --> 01:02:43,920
चाहिए। तो ऐसा तुमने नहीं कहा यदि तुम कहना

885
01:02:43,920 --> 01:02:48,160
चाहते हो तो तुम्हें मुझसे पहले पूछना चाहिए था कि मैंने कृपात्री जी का फलानी फलानी

886
01:02:48,160 --> 01:02:52,160
जगह संघर्ष किया था समर्थन किया था क्या शिवश नारायण द्विवेदी तुमको

887
01:02:52,160 --> 01:02:56,480
पता था कि नहीं पता था मैं बताऊंगा ना मुझे पता है कि नहीं पता है तुमने क्या

888
01:02:56,480 --> 01:03:00,640
किया भाई हु आर यू तुम्हारे को जानने कौन

889
01:03:00,640 --> 01:03:04,760
निकलेगा क्यों निकलूू जानने मैं राम को जानने

890
01:03:04,760 --> 01:03:09,040
निकलूूंगा गुरुदेव को जानने निकलूूंगा थोड़ा बहुत उनके मार्गदर्शन

891
01:03:09,040 --> 01:03:14,040
में राम को जानने का प्रया प्रयास करूंगा। तुम होते कौन हो जिसको जानता हो

892
01:03:14,040 --> 01:03:18,160
व्यक्ति और जहां मुझे पता है वहां भैया समर्थन किया जिस रूप में किया।

893
01:03:18,160 --> 01:03:23,120
अच्छा मैं कह रहा हूं मैंने तुम्हारा समर्थन किया। तुमने मेरी प्रशंसा की

894
01:03:23,120 --> 01:03:27,280
अब तुम कहोगे हमें पता ही नहीं है। तो यही तो मैं भी कह रहा हूं हमें पता नहीं है। तो

895
01:03:27,280 --> 01:03:31,520
अगर तुमने ये जांच नहीं की कि मुझे पता था कि नहीं पता था

896
01:03:31,520 --> 01:03:35,520
और तब तुमने मेरे ऊपर ये दोष लगाया कि मेरे मेरा समर्थन क्यों

897
01:03:35,520 --> 01:03:39,600
नहीं किया। ठीक है? तो अगर तुमने यह जांच नहीं की थी तो तुम्हें

898
01:03:39,600 --> 01:03:43,720
यह नहीं कहना चाहिए था कि मेरा समर्थन क्यों नहीं किया और अगर तब भी तुम यह कह रहे

899
01:03:43,720 --> 01:03:47,840
हो अगर तब भी तुम यह कह रहे हो कि मेरा समर्थन नहीं किया बिना जाने

900
01:03:47,840 --> 01:03:51,920
के मुझे पता था कि नहीं तुमने क्या किया क्या नहीं किया तो वहां पर मैं ये बात कह

901
01:03:51,920 --> 01:03:55,920
रहा हूं कि अगर तुम बिना मैंने मुझे पता है कि नहीं पता है

902
01:03:55,920 --> 01:04:00,080
मगर मुझे तुम्हारा समर्थन करना चाहिए था तो फिर तुम वहां पर यही तो कह रहे हो कि मुझे

903
01:04:00,080 --> 01:04:04,160
दुनिया में हर अच्छी चीज का समर्थन करना है और दुनिया में हर गलत चीज का विरोध

904
01:04:04,160 --> 01:04:08,160
करने वाला होना चाहिए यही तो कह रहे हो तुम

905
01:04:08,160 --> 01:04:12,320
सर्वज्ञ बता रहे हो ना मुझे बिना जाने अगर ये आरोप लगा रहे हो मेरे

906
01:04:12,320 --> 01:04:16,360
ऊपर कि तुमने मेरा समर्थन क्यों नहीं किया तो तुम्हारी दृष्टि में मैं सर्वज्ञ

907
01:04:16,360 --> 01:04:20,400
हूं तो सर्वज्ञ है तो फिर वो संसार के सब सब चीजों का वो करे

908
01:04:20,400 --> 01:04:24,160
समर्थन और सब और या फिर वो क्या कहते

909
01:04:24,160 --> 01:04:29,320
हैं विरोध करे

910
01:04:29,320 --> 01:04:33,840
हम बारे में कभी नहीं भैया ने आपको क्या ज्ञान दिया

911
01:04:33,840 --> 01:04:38,000
कैसे किया जाता है ये ये तुम्हारा वो दूसरा वाला वाला दोष था कि समझना नहीं है सामने

912
01:04:38,000 --> 01:04:42,160
वाले की बात को यहां पर वही कर रहे हो कि मैंने वो उदाहरण

913
01:04:42,160 --> 01:04:48,160
क्यों दिया है लगा दो तुमने कभी नहीं कहा था

914
01:04:48,960 --> 01:04:53,040
तो फिर तुमने बिना जाने जब तुमने नहीं कहा था तो तुमने बिना ये

915
01:04:53,040 --> 01:04:57,040
जाने के शिवश को हमारे बारे में क्या पता है क्या नहीं पता है ये

916
01:04:57,040 --> 01:05:01,440
बात क्यों बोली कि शिवांश ने हमारा समर्थन क्यों नहीं किया या शिवांश ने हमारा समर्थन

917
01:05:01,440 --> 01:05:05,440
नहीं किया इस बात को लेकर दोष क्यों लगाया तुमको पहले पता

918
01:05:05,440 --> 01:05:09,440
करना चाहिए चाहिए था कि शिवश को तुम्हारे बारे में क्या पता है और क्या नहीं पता है और हम

919
01:05:09,440 --> 01:05:13,680
तुम्हारे बारे तुम तुम्हारे जो वक्तव्य हमारे बारे में होते हैं उसमें हम यही बात कहते हैं

920
01:05:13,680 --> 01:05:17,840
तुमने बहुत सी ऐसी बातें बोली है हमारे बारे में जो निराधार रूप से बोली

921
01:05:17,840 --> 01:05:22,000
है और तुम्हें उसके बारे में हमने प्रूफ भी दिखाए बाद में और मैंने अभी आगे देखा

922
01:05:22,000 --> 01:05:26,400
है जब तुम्हारा लाइव चल रहा था तुमने कई कई बार चीजों को छोड़ दिया है छोड़ो

923
01:05:26,400 --> 01:05:31,200
अगले मुद्दे पर आते उसपे बात ही नहीं की फंस रहे हो ना वहां पे इसलिए मैंने नहीं कहा

924
01:05:31,200 --> 01:05:37,200
मैं कम कर सकता हूं क्योंकि मुझे मानवीय शरीर के तुम कहा सीमा का बोध है सीमा का बोध

925
01:05:37,520 --> 01:05:39,520
मुझे मुझे मुझे मुझे

926
01:05:39,520 --> 01:05:43,600
मुझे शुक्रवार का बोध बहुत है। कौन सी गाड़ी से जाते

927
01:05:43,600 --> 01:05:47,760
हो वो थोड़ा पता करना है और अभी

928
01:05:47,760 --> 01:05:53,760
नवरात्र में तो शायद इसी तरीके से देवी की कृपा हो ही

929
01:05:54,280 --> 01:05:59,040
जाएगी। तो शायद थोड़ा बहुत

930
01:05:59,040 --> 01:06:03,120
तुम्हारे अपने उस रोग से या वह जो भी है इंद्रियों

931
01:06:03,120 --> 01:06:07,200
पर तुम अपने को कंट्रोल कर पाओ। है ना? तो

932
01:06:07,200 --> 01:06:11,520
नहीं तो वहां बड़ी-बड़ी जब ट्रेन से कहीं पहुंचने लगते हैं, किसी शहर एंटर

933
01:06:11,520 --> 01:06:15,600
करने लगते हैं तो वहां एंटर करने से पहले जो पुल आता है उसकी दीवारों

934
01:06:15,600 --> 01:06:19,760
में या फिर गांव खेत खलियान के जो दीवारें दिख रही होती है वहीं लिखा

935
01:06:19,760 --> 01:06:23,800
होता है। तो गुप्त रोगी मिले प्रत्येक

936
01:06:23,800 --> 01:06:27,840
शुक्रवार। तो उसका भी बोध इन्हें है। कि

937
01:06:27,840 --> 01:06:32,560
कौन से शहर में कौन से खंभों में यह चीजें लिखी हुई है।

938
01:06:32,560 --> 01:06:36,720
मैं यह पढ़ना चाहूंगा कि हर व्यक्ति हर जगह ना बोल

939
01:06:36,720 --> 01:06:40,720
सकता है ना सकता है ना कुछ कर सकता है ऐसे दुनिया में जहां ज्यादा वहां

940
01:06:40,720 --> 01:06:44,880
शिवाशंस की नहीं बस वो नहीं जा सकता है शिवाश के लिए नहीं जा सकता है शिवा तो फिर तुम ये फिर मैं

941
01:06:44,880 --> 01:06:49,200
वही बात कहूंगा तो फिर तुम ये बात क्यों कह रहे हो कि शिवश ने मेरा समर्थन

942
01:06:49,200 --> 01:06:53,360
क्यों नहीं किया इसका क्या लॉजिक है पहले जान

943
01:06:53,360 --> 01:06:54,800
तो लो कि तुम्हें शिवांश जानता

944
01:06:54,800 --> 01:06:59,600
कितना है तुमने क्या किया क्या नहीं किया है

945
01:06:59,600 --> 01:07:03,760
ज्यादा कुछ नहीं कर सकता सिद्धि हमारी कथा नहीं समस सिद्धि हमारी कथा में रहने के

946
01:07:03,760 --> 01:07:08,080
शिवाजी ने आपको अभी मालूम का सुंदर उदाहरण दिया है नहीं

947
01:07:08,080 --> 01:07:14,080
खुद ही खुद में मिया बन जाओ मालूम

948
01:07:19,560 --> 01:07:22,680
का

949
01:07:22,680 --> 01:07:27,000
सिखाई बोल रही है तो नुकसान

950
01:07:27,000 --> 01:07:31,040
किया इन्होने कहा फिर आगे सुनते अब इतनी बात कर पहली बात

951
01:07:31,040 --> 01:07:35,120
क्योंकि ये उस लड़की को सिखा रहे थे क्या सिखा धर्म की बात क्या है कौन सी मुझे

952
01:07:35,120 --> 01:07:39,280
सिखाई तो उनको उनके गुरु ने सिखाई तो इनका ये कि जहांजहां वो लड़की इनकी

953
01:07:39,280 --> 01:07:43,280
कैसी बातों को कहे वहां वहां पर ये जा रहे बात ये

954
01:07:43,280 --> 01:07:47,280
कर सकते थे तुमने मेरी कैसी बात को कहा तुमने मेरी कही बात को कहा नहीं दे

955
01:07:47,280 --> 01:07:51,280
सकते थे कि तुमने कोई शंग की बात को कहा नहीं यहां पे सबसे पहली बात अभी इन्होंने कहा है

956
01:07:51,280 --> 01:07:55,360
अनुपतो पालन अब इसी की मीमांसा कर लेते है

957
01:07:55,360 --> 01:07:59,440
कि क्या मैंने वहां कमेंट में लिखा है कि तुमने कृपाती जी

958
01:07:59,440 --> 01:08:03,840
के शब्द कहे है अब अनुपतो पालन की मीमांसा करो इनके

959
01:08:03,840 --> 01:08:07,840
यह खुद कह रहे हैं कि वहां मैंने कहा है करपात्री जी के शब्द ध्वनित

960
01:08:07,840 --> 01:08:10,640
हो रहे हैं। यानी कि

961
01:08:10,640 --> 01:08:14,720
सुनाई दे रहे हैं। वहां पे एक जैसा दिख

962
01:08:14,720 --> 01:08:18,880
रहा है, प्रतीत हो रहा है। इस तरह का भाव मैंने डालने का प्रयास किया। मगर तुमने

963
01:08:18,880 --> 01:08:22,880
तो वही सामने वाले को सुनना नहीं है, समझना नहीं है। अनुत्व पालन

964
01:08:22,880 --> 01:08:27,120
तो तुम कर रहे वो दोस्त तो तुम्हारे अंदर आ रहा है। करपात्री जी के शब्द

965
01:08:27,120 --> 01:08:31,200
ध्वनित हो रहे हैं। ध्वनित सुनाई दे रहे हैं।

966
01:08:31,200 --> 01:08:35,880
प्रतीत हो रहा है। वहां पर मेरा यह भाव है ये कहने का

967
01:08:35,880 --> 01:08:39,920
और मैं तो कह रहा हूं कि उन्हीं के शब्द है। कृपात्री जी के ही शब्द

968
01:08:39,920 --> 01:08:44,080
है। विजय सिंह के शब्द है ही नहीं। ना मेरे शब्द है। क्या

969
01:08:44,080 --> 01:08:48,200
दिक्कत है

970
01:08:48,200 --> 01:08:52,400
उससे? बस बात का पतंग बनाना है और कुछ नहीं। स्वामी

971
01:08:52,400 --> 01:08:56,800
को दिया। उनकी बात तुम्हारी वाणी में ये ब्रह्म

972
01:08:56,800 --> 01:09:00,880
ज्ञान देती है और उसकी आदमी इसका भी योग अभी वो चल सके और सब लोग अब ये

973
01:09:00,880 --> 01:09:05,120
सब क्या है बिना किसी आधार के चलो मैंने वहां पर

974
01:09:05,120 --> 01:09:09,440
ये किया कि वहां पर मैंने ये कहा कि तुम्हारे जो शब्द है

975
01:09:09,440 --> 01:09:13,600
तुम्हारी जो वाणी है उसमें कृपात्री जी के जो शब्द है

976
01:09:13,600 --> 01:09:17,680
वो ध्वनित हो रहे हैं। मगर ये कहां का सनातन सिद्धांत है

977
01:09:17,680 --> 01:09:21,680
कि अगर मैं ये कह भी रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार गलत है तो उसका कारण

978
01:09:21,680 --> 01:09:25,840
है कि वो जो उसका बिजनेस बढ़े अगर मैं ये कह भी रहा हूं

979
01:09:25,840 --> 01:09:30,080
कि अगर मैं ऐसा कह भी रहा हूं जो तुम्हारे अनुसार वो

980
01:09:30,080 --> 01:09:34,160
सटीक नहीं है जो कि ऐसा है नहीं मगर दुर्जन तोष न्याय से अगर

981
01:09:34,160 --> 01:09:38,320
मान भी लिया जाए कि वो जो मैं कह रहा हूं वो

982
01:09:38,320 --> 01:09:42,320
ठीक नहीं है तो उसका आधार यही क्यों है कि विजय श्री

983
01:09:42,320 --> 01:09:46,640
का व्यापार बढ़े उसका आधार ये भी तो हो सकता है कि आहान का व्यापार बढ़े।

984
01:09:46,640 --> 01:09:50,800
उसका आधार यह भी तो हो सकता है कि करपाती जी का नाम यहां के लोग भी जान ले।

985
01:09:50,800 --> 01:09:54,800
उसका आधार यह भी तो हो सकता है उसका कारण कि वहां के लोग आहान

986
01:09:54,800 --> 01:09:58,960
को जान ले। उसका आधार यह भी तो हो सकता है कि वहां पर आने वाले दर्शक

987
01:09:58,960 --> 01:10:03,040
भी पूरी के शंकराचार्य जी को जान ले। वहां तक पहुंचे। ये ये क्यों नहीं

988
01:10:03,040 --> 01:10:03,540
हो

989
01:10:03,200 --> 01:10:09,200
सकता है? दूसरी संभावनाएं क्यों नहीं है? जो स्वयंभू

990
01:10:10,040 --> 01:10:14,240
अहंकारी नेता बनकर बैठ गया है। उसके द्वारा सोची जाने

991
01:10:14,240 --> 01:10:19,040
वाली बात ही क्यों है? मैंने अभी बताया ना कि तुम वहां पर आए हो

992
01:10:19,040 --> 01:10:23,040
तो मैं ये सीधे-सीधे कह दूं ये वहां पर इसलिए गया था क्योंकि शिवान से परेशान

993
01:10:23,040 --> 01:10:27,440
हो गया था। वीडियो बनाने के बाद छत से छलांग लगा के कूद कूदने के लिए आया था। आत्महत्या

994
01:10:27,440 --> 01:10:31,520
करने के लिए और मैं अभी से ही कहने लग

995
01:10:31,520 --> 01:10:36,320
देखो देखो छत पर बैठा हुआ है बालकनी पर बैठा हुआ है कूदने के लिए आत्महत्या करने के लिए

996
01:10:36,320 --> 01:10:40,640
तो इसका कोई आधार है क्या कैसे सिद्ध हो रहा है

997
01:10:40,640 --> 01:10:44,880
कि छत पे ये आया है तो आत्महत्या करने ही आया है ये भी सिद्ध हो ये भी

998
01:10:44,880 --> 01:10:49,360
हो सकता है कि यहां पर ये जो है एकांत की वजह से आया हो

999
01:10:49,360 --> 01:10:53,360
ये भी हो सकता है कि यहां पर ये जो है क्या कहते

1000
01:10:53,360 --> 01:10:57,360
हैं यहां ऐसी रोशनी इनको प्राप्त हो रही हो या इंटरनेट के सिग्नल ला रहे हो ये भी हो

1001
01:10:57,360 --> 01:11:02,000
सकता है। क्यों कह रहे हो यार निराधार बातें ऐसे नहीं होता है ना

1002
01:11:02,000 --> 01:11:06,080
मत करो ऐसे मैं पडूंगा

1003
01:11:06,080 --> 01:11:10,600
तुम्हारी चीजों को पकड़ लूंगा

1004
01:11:10,600 --> 01:11:14,880
मैं जो तुम ये करोगे शास्त्रों का प्रभाव उत्पन्न करके

1005
01:11:14,880 --> 01:11:19,280
लोगों के मन में मैं वहां पर ध्यान दिलाऊंगा यहां ये देखो क्या बातों का पतंग बना रहे हैं

1006
01:11:19,280 --> 01:11:23,600
अगर मैंने तुम्हारे हिसाब से वहां पर मुझे नहीं कहना चाहिए था कि करपाती

1007
01:11:23,600 --> 01:11:27,600
जी के शब्द धनित हो रहे हैं तो उससे यह कैसे सिद्ध

1008
01:11:27,600 --> 01:11:31,920
होता है कि मैंने वहां व्यापार के लिए कहा यह तो सिद्ध करो

1009
01:11:31,920 --> 01:11:36,160
वो भी विजय श्री के हो सकता है अपने व्यापार के लिए कहा हो कि आान को देख

1010
01:11:36,160 --> 01:11:40,720
ले वही गाथा चैनल पे हां या फिर पूरी करपात्री

1011
01:11:40,720 --> 01:11:44,720
जी नाम यहां पे आने वाले लोग भी पढ़े कि भाई ये कौन ऐसी विभूति

1012
01:11:44,720 --> 01:11:48,800
है जिनके शब्दों के बारे में बात हो रही है हम

1013
01:11:48,800 --> 01:11:52,880
हो सकता है उसकी वजह से पूरी शंकराचार्य जी तक लोग पहुंचे बहुत सारे कारण हो

1014
01:11:52,880 --> 01:11:57,040
सकते हैं मेरे ऐसा ऐसा लिखने के मगर वही

1015
01:11:57,040 --> 01:12:01,200
कारण माना जाएगा जो लुप्त संप्रदाय के गुप्त

1016
01:12:01,200 --> 01:12:05,920
आचार्य बताएंगे प्रत्येक शुक्रवार को जाने वाले राजस्थान

1017
01:12:05,920 --> 01:12:09,920
जो है ये जो लड़की है इसी प्रकार से स्वयं छात्र रूप में कर रही है प्रत्यक्ष

1018
01:12:09,920 --> 01:12:14,400
रूप से वहां लोगों की पारंपरिक रूप से धर्म की जात को जानती है उसी पर इसीलिए

1019
01:12:14,400 --> 01:12:18,480
ये जो भी करेगी रूप से शास्त्री धर्म ये कमेंट कर

1020
01:12:18,480 --> 01:12:22,640
रहा है अरे मेरे भाई तुम जैसे लोगों पर

1021
01:12:22,640 --> 01:12:25,600
मुझे हंसी आती है जहां पर

1022
01:12:25,600 --> 01:12:29,600
मैंने करपात्री जी का नाम लिया है ना वो दुनिया ऐसी दुनिया

1023
01:12:29,600 --> 01:12:34,160
है जहां ना लोग पूरी के शंकराचार्य जी को जानते हैं

1024
01:12:34,160 --> 01:12:38,160
ना लोग वहां पर क्या कहते हैं कृपात्री जी महाराज जी को जानते

1025
01:12:38,160 --> 01:12:43,400
हैं और उन्हीं को जनवाने के लिए हम आगे भागे फिर रहे

1026
01:12:43,400 --> 01:12:48,760
हैं तो वहां पर जिन लोग जो जिसको दुनिया जानती ही नहीं

1027
01:12:48,760 --> 01:12:52,960
है वहां पर उनका नाम लेने से

1028
01:12:52,960 --> 01:12:57,680
वो योगाचार्य अगर है वो एंडोर्स हो रही है।

1029
01:12:57,680 --> 01:13:01,880
अरे वो सब वर्णाश्रम के विधी लोगों की दुनिया

1030
01:13:01,880 --> 01:13:06,800
है। कम्युनिस्टों की दुनिया है।

1031
01:13:06,800 --> 01:13:11,280
उनको तो मालूम पड़ जाएगा कि कर्पात्री वर्णाश्रम धर्मी कट्टर रूप से

1032
01:13:11,280 --> 01:13:15,440
जो है पालन करने वाले शास्त्र शास्त्रों

1033
01:13:15,440 --> 01:13:20,800
वो तो वो तो और दूर भागेंगे।

1034
01:13:20,800 --> 01:13:24,880
तो वहां पर किस तरीके से वो एंडोर्स होगी करपात्री जी का नाम

1035
01:13:24,880 --> 01:13:28,960
लेने से करपात्री जी का नाम लेने से कहां पर एंडोर्समेंट होगा

1036
01:13:28,960 --> 01:13:33,120
कि हम किसी अच्छे संत इत्यादि के यहां बैठे हैं वहां पर कृपात्री जी का नाम

1037
01:13:33,120 --> 01:13:37,280
वहां से जुड़े हुए लोगों के बीच में धार्मिक कितने कम

1038
01:13:37,280 --> 01:13:41,600
लोग हैं धार्मिक जो सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म से वास्तविकता

1039
01:13:41,600 --> 01:13:45,600
में प्रमाण्य बुद्धि रखते हैं। आचरण करना तो बहुत दूर की बात है।

1040
01:13:45,600 --> 01:13:49,760
मैं इस पर वीडियो बनाऊंगा। तो ऐसी

1041
01:13:49,760 --> 01:13:53,920
जगह जहां पर करपात्री जी फेमस ही नहीं है। ऐसी जगह जहां

1042
01:13:53,920 --> 01:13:58,080
पर कृपात्री जी की वैल्यू लोग जानते ही नहीं है। वहां

1043
01:13:58,080 --> 01:14:02,240
पर कृपात्री जी का नाम लिखने से मेरे भाई वो जो अगर योग शिक्षिका

1044
01:14:02,240 --> 01:14:06,240
योगाचार्य है वो विजय श्री कैसे वहां पर लाभान्वित हो जाएगी।

1045
01:14:06,240 --> 01:14:10,280
ये समझाओ ना

1046
01:14:10,280 --> 01:14:15,120
मुझे उल्टा हम गए वहां पर उनके द्वारा

1047
01:14:15,120 --> 01:14:19,120
अपने जो अभियान है उसको प्रचार करने तो यह होगा

1048
01:14:19,120 --> 01:14:23,280
कि नहीं नहीं इसके इसके द्वारा वह प्रचारित हो रही है।

1049
01:14:23,280 --> 01:14:27,280
मैं गया था ना जब लोगों के पास कि अरे शंकराचार्य राय लखनऊ

1050
01:14:27,280 --> 01:14:31,920
चले चलो शिव के अवतार है उस गद्दी पर बैठने वाले साक्षात

1051
01:14:31,920 --> 01:14:35,920
लोगों का रिएक्शन ये होता है चल चल हवा आने दे ये है आज

1052
01:14:35,920 --> 01:14:40,080
के स्थिति करपात्री जी को करपात्री जी के विषय

1053
01:14:40,080 --> 01:14:44,160
में पुरी शंकराचार्य जी के विषय में हम और तुम जैसे लोग जानते हैं कि अगर

1054
01:14:44,160 --> 01:14:48,240
वो आ जाएंगे तो हम भागेंगे राघवाचार्य जी के विषय में हम और तुम

1055
01:14:48,240 --> 01:14:52,240
जैसे लोग जानते हैं वो कम्युनिस्टों की दुनिया मेरे

1056
01:14:52,240 --> 01:14:56,480
भाई वो लोग आचार प्रशांत जैसों के आने से भागेंगे। सद्गुरु जैसों

1057
01:14:56,480 --> 01:15:00,480
के लोगों के आने से भागेंगे। तो अगर सद्गुरु का नाम वहां लिया जाएगा

1058
01:15:00,480 --> 01:15:04,800
तो वहां पर वो जो है तुम्हारा जो प्रचार वाला वो है वो थोड़ा बहुत

1059
01:15:04,800 --> 01:15:08,800
उसमें भी ऐसा नहीं है बिल्कुल अकाट रूप से सिद्ध हो जाए। मगर तब भी वो

1060
01:15:08,800 --> 01:15:13,360
तुम कहते तो वो बात चलने की संभावना हो सकती है।

1061
01:15:13,360 --> 01:15:17,520
करपाती जैसे वर्णाश्रमी आचार्य पूरी शंकराचार्य जी से

1062
01:15:17,520 --> 01:15:21,520
जैसे वर्णाश्रमी आचार्यों का नाम लेने से वो जो

1063
01:15:21,520 --> 01:15:25,280
कम्युनिस्टों की दुनिया वाला जो चीजें हैं जिनको कुछ नहीं पता

1064
01:15:25,280 --> 01:15:29,360
है परंपरा क्या होती है परंपरा प्राप्त आचार्य क्यों होते हैं कुछ उनको वैल्यूस नहीं

1065
01:15:29,360 --> 01:15:33,360
पता है वहां पर जाकर के और

1066
01:15:33,360 --> 01:15:37,720
जो शिक्षिका योग शिक्षिका है वो अपने आप अपना प्रचार कर

1067
01:15:37,720 --> 01:15:43,720
लेगी बिल्कुल गलत

1068
01:15:43,920 --> 01:15:48,320
देखिए पूरी शंकराचार्य जी के कई शिष्य लोग व्याख्या में देते हैं। पूरी शंकराचार्य

1069
01:15:48,320 --> 01:15:52,320
जी के कई शिष्यों के अतिरिक्त लोग ज्ञान देते हैं। यहां तो उन्हीं को कहा जाता है वहां पर भगवान

1070
01:15:52,320 --> 01:15:56,240
की कितनी टिप्पणी आपको दिख रही थी मुझे नहीं पता लेकिन उसके

1071
01:15:56,240 --> 01:16:00,320
फिर वही बात अभी खुद ही कह रहे थे इन्होंने कहा

1072
01:16:00,320 --> 01:16:04,320
ना कि पूरी शंकराचार्य जी के कितने दीक्षित शिष्यों पर आहान

1073
01:16:04,320 --> 01:16:07,480
की टिप्पणी आपको

1074
01:16:07,480 --> 01:16:11,600
मिलेगी अभी खुद ही अभी खुद ही कहा तो अब फिर वही

1075
01:16:11,600 --> 01:16:15,600
बात आ गई अब मैं इस पर बोलूंगा कि मुझे सर्वज्ञ होना चाहिए मुझे मालूम होना चाहिए पूरी

1076
01:16:15,600 --> 01:16:20,400
शंकराचार्य जी के शिष्य कौन-कौन कहां कहां पर वक्तव्य दे रहे हैं

1077
01:16:20,400 --> 01:16:24,400
खुद ही तो कह रहे हो। खुद ही तो ऐसी संभावना उत्पन्न कर रहे हो। अरे भाई

1078
01:16:24,400 --> 01:16:28,480
मुझे जहां जहां के बारे में पता है मैं जहां उपलब्ध हो गया। सामर्थ के अनुसार

1079
01:16:28,480 --> 01:16:32,720
पहुंच गया। वहां बोल दिया। अभी मैंने लव भारत जो वीडियो बनाया

1080
01:16:32,720 --> 01:16:37,520
था उसके बारे में मुझे पता चला। वहां पर मैंने उसको प्रोत्साहन किया। उस लड़के ने जो बात कही

1081
01:16:37,520 --> 01:16:40,320
तो इसका अगर मैंने उसके चैनल पर जाकर के

1082
01:16:40,320 --> 01:16:44,400
बात कर दी तो इसका मतलब यह है कि या तो मुझे जितने भी लोग हैं

1083
01:16:44,400 --> 01:16:48,880
उन सबके चैनल पर क्यों? पूरी शंकराचार्य जी के गुरु भाई हैं आचार्य रामशंकर

1084
01:16:48,880 --> 01:16:53,040
शुक्ल जी तुम भी जानते हो तुमने कहा कितने लोगों के यहां तुमने वक्तव्य दिया

1085
01:16:53,040 --> 01:16:57,280
तो मैंने उनका उनका चैनल तो यहां से बहुत बार उसको प्रमोट

1086
01:16:57,280 --> 01:17:03,280
किया है उनका जो चैनल है आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का

1087
01:17:07,360 --> 01:17:11,440
तो यहां पर आपकी ये बात गलत हो गई कि कितने लोगों का किया है

1088
01:17:11,440 --> 01:17:15,520
जो दोष लगा रहे हो कि तुम अन एक विजय श्री का ही चैनल के

1089
01:17:15,520 --> 01:17:19,600
प्रमोट कर रहे हो। मैंने अपने चैनल से आचार्य रामशंकर

1090
01:17:19,600 --> 01:17:24,240
शुक्ल जी का चैनल प्रमोट किया है। मैंने वो जो भगवत भगवत वचन वाले

1091
01:17:24,240 --> 01:17:28,240
जो वो है युगल किशोर जी जिनके साथ तुम गए थे

1092
01:17:28,240 --> 01:17:32,240
लाइव गए थे ना उनके चैनल को भी प्रमोट किया। उनको भी प्रोत्साहन प्रोत्साहन

1093
01:17:32,240 --> 01:17:36,240
दिया है। और इंटर ये क्या कहते हैं? Instagram

1094
01:17:36,240 --> 01:17:40,320
पे कोई अच्छी चीज मिल जाती है उसको स्टोरी पर लगाता हूं कि नहीं लगाता हूं। तो यहां तुम्हारी बात खत्म

1095
01:17:40,320 --> 01:17:44,320
हो गई। कितनों को किया है? गिनवा सकता हूं तो मैं कम से कम 100

1096
01:17:44,320 --> 01:17:46,800
नाम

1097
01:17:46,800 --> 01:17:51,200
बेकार की बातें कर रहे हो भगवतानंद खैर मगर क्योंकि

1098
01:17:51,200 --> 01:17:55,360
तुम अपना सनकीपन दिखा रहे हो तो फिर हम बड़े वाले सनकी

1099
01:17:55,360 --> 01:17:57,480
है

1100
01:17:57,480 --> 01:18:03,480
और ये सामने परिभाषा तो नहीं सिखा

1101
01:18:18,640 --> 01:18:22,640
सदाचार की परिभाषा स्वशास्वस्थ की परिभाषा पक्ष की परिभाषा ये

1102
01:18:22,640 --> 01:18:26,880
सब सिखा धर्म की परिभाषा मात्र सिखा देने से

1103
01:18:26,880 --> 01:18:31,040
बात को मात्र किसी और बता देने से करपात्री लेकिन बोलना इस लड़की से करने लगे लड़की

1104
01:18:31,040 --> 01:18:35,280
को बोलना अच्छा अब यहां पर ये क्या कह रहे हैं पहले कह रहे थे उसके शब्दों

1105
01:18:35,280 --> 01:18:39,680
की तुलना करपात्री जी के शब्दों से की गई अब क्या कह रहे हैं लड़की की तुलना जो है

1106
01:18:39,680 --> 01:18:43,760
कृपात्री जी से की यही तो है कि

1107
01:18:43,760 --> 01:18:48,440
उसके आचरण कहां से शुद्ध हो गए थे जो तुमने करपात्री जी महाराज से उसकी तुलना कर दी।

1108
01:18:48,440 --> 01:18:52,480
हम अगर मैंने यह कह दिया कि भैया यहां पर तुमने

1109
01:18:52,480 --> 01:18:56,480
राम की मर्यादा का पालन किया है। राम श्री राम द्वारा बताई गई मर्यादा का पालन

1110
01:18:56,480 --> 01:19:00,640
किया है तो बस मैंने उसको राम कह दिया। अगर

1111
01:19:00,640 --> 01:19:04,800
मैंने कहा कि यहां पे तुमने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा बताए गए सिद्धांत

1112
01:19:04,800 --> 01:19:09,200
का पालन किया है। तो बस वो कृष्ण हो गया।

1113
01:19:09,200 --> 01:19:11,880
क्या तर्क है

1114
01:19:11,880 --> 01:19:16,840
तुम्हारे यह उम्मीद नहीं थी मुझे तुमसे भगवत आनंद सच

1115
01:19:16,840 --> 01:19:21,360
में से करने लगी सिखाया हां

1116
01:19:21,360 --> 01:19:26,040
ले लो तुम्हारी

1117
01:19:26,040 --> 01:19:29,560
विषय

1118
01:19:29,560 --> 01:19:33,640
परित हो रहा है ये सिद्धांत कहां

1119
01:19:33,640 --> 01:19:38,080
है ये यहां पर सिद्धांत की आवश्यकता है ना

1120
01:19:38,080 --> 01:19:42,160
जब तुम यह कह रहे हो कि तुम्हारे इन इन कार्यों से ऐसा परिलक्षित

1121
01:19:42,160 --> 01:19:46,240
हो रहा है तो अब मुझे प्रॉब्लम है तुम्हारे इससे। यहां पर तुम्हें

1122
01:19:46,240 --> 01:19:50,480
सिद्धांत शास्त्र का प्रमाण रखना चाहिए था

1123
01:19:50,480 --> 01:19:54,800
कि अगर तुम ऐसा ऐसा करोगे तो ऐसा

1124
01:19:54,800 --> 01:20:00,480
ऐसा परिलक्षित होगा और ऐसा ऐसा माना जाएगा।

1125
01:20:00,480 --> 01:20:04,720
ठीक है? तो सिद्धांत दो। तेरे लिए कर्तव्य

1126
01:20:04,720 --> 01:20:09,480
अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण मन मुखी बातें मत दो कि ऐसा ऐसा परिवलक्षित

1127
01:20:09,480 --> 01:20:14,000
होगा ऐसी संदिग्धता उत्पन्न होगी

1128
01:20:14,000 --> 01:20:18,160
उसके लिए शास्त्र का प्रमाण दो चलो जहां शास्त्र

1129
01:20:18,160 --> 01:20:22,400
का प्रमाण देना है वहां नहीं देंगे वहां आवश्यक

1130
01:20:22,400 --> 01:20:26,520
नहीं है मगर बहुत सारा ड्रामा

1131
01:20:26,520 --> 01:20:27,520
ग्लोरिफिकेशन

1132
01:20:27,520 --> 01:20:31,600
है ना राज यूटिलाइजेशन और वो क्या था

1133
01:20:31,600 --> 01:20:37,600
प्राण वाला वो सब जरूर

1134
01:20:43,080 --> 01:20:48,080
देंगे। अब ये तो बात किसने कही कि

1135
01:20:48,080 --> 01:20:52,240
आवश्यकता आपको प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी। मुझे कोई प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं पड़ी। ठीक है? प्रोत्साहन की आवश्यकता

1136
01:20:52,240 --> 01:20:56,240
मुझे ऐसा मैंने नहीं कहा। मैंने बस ये कहा कि अगर तुम धर्म का समर्थन करने के लिए उसके

1137
01:20:56,240 --> 01:21:00,480
प्रोडकास्ट में जा सकते हो तो अनेकाने प्रकरणों में किसी अलाक प्रकरण में तो मेरे संबंध को सकारात्मक

1138
01:21:00,480 --> 01:21:04,480
बात नहीं कर सकते थे। अरे भाई तुम्हारे को मैं नहीं जानता हूं कि तुम कहां

1139
01:21:04,480 --> 01:21:09,120
पर क्या करते हो। तुम्हारे संबंध में हमने बात कही है।

1140
01:21:09,120 --> 01:21:13,120
तुम रील देखो ना जाकर के। अभी थोड़े दिनों पहले कही है तुम्हारे बारे में

1141
01:21:13,120 --> 01:21:15,320
समर्थन

1142
01:21:15,320 --> 01:21:19,440
में। ये तुम्हारे वो है। अज्ञानता वश कर रहे हो तुम। तुम्हें पता नहीं है

1143
01:21:19,440 --> 01:21:23,760
कि हमने कहा है कि नहीं कहा है। और दूसरी बात भाई ये कोई आवश्यक

1144
01:21:23,760 --> 01:21:28,000
नहीं है कि मैं जो है सबका जो है वो करूं। जहां पर मेरी

1145
01:21:28,000 --> 01:21:32,160
अनुकूलता हो गई। जहां मेरी सामर्थ सामर्थ्य हो गई अनुकूलता हो गई

1146
01:21:32,160 --> 01:21:36,480
अनुकूलता शब्द उचित है वहां मैं पहुंच गया मैं

1147
01:21:36,480 --> 01:21:40,560
इस तरीके से नहीं देखता हूं कि तुम्हारे सारे वीडियोस कब आ रहे हैं

1148
01:21:40,560 --> 01:21:42,640
क्या कर रहे हो क्या नहीं कर रहे हो ये सब मुझे नहीं पता

1149
01:21:42,640 --> 01:21:46,640
है जो सुना किसी से सुन लिया और जिस स्तर पर समर्थन देना था

1150
01:21:46,640 --> 01:21:50,720
दे भी दिया तुमको क्या पता चल रहा है अगर मैंने तुम्हारा जो

1151
01:21:50,720 --> 01:21:54,960
वीडियो है वो कहीं पर शेयर किया हो तो इसलिए ऐसी

1152
01:21:54,960 --> 01:21:59,120
बातें मत करो ना जो तुम सिद्धि नहीं कर पा रहे हो मैंने तुम्हारा समर्थन किया।

1153
01:21:59,120 --> 01:22:03,280
पहली बात तो मेरा तुम्हारा क्या कहते विजय श्री को समर्थन

1154
01:22:03,280 --> 01:22:07,920
देने के लिए मेरा तुम्हारा तुमको समर्थन देना आवश्यक नहीं है।

1155
01:22:07,920 --> 01:22:12,120
पहली बात और ऐसा नहीं है कि मैंने तुम्हें समर्थन दिया नहीं है। ठीक

1156
01:22:12,120 --> 01:22:16,400
है? तो ये अनर्गल बातें हैं और कुछ नहीं है। चलो

1157
01:22:16,400 --> 01:22:20,480
खास करके मैंने तो कई बार अच्छे काम तुम्हारा नाम

1158
01:22:20,480 --> 01:22:24,880
लेकर तुमको टैग करके या तुम्हारे मैंने भी किया। मैंने भी किया तुम्हारा

1159
01:22:24,880 --> 01:22:28,880
नाम लेकर किसी ना किसी प्रकार से तुम्हारा प्रोत्साहन किया तुम्हारा तुम्हें

1160
01:22:28,880 --> 01:22:32,880
समर्थन प्रकट किया मगर वो तुम्हें रास नहीं आया वो

1161
01:22:32,880 --> 01:22:36,960
तुम्हें रास नहीं आया मैंने तुम्हारा समर्थन उस समय

1162
01:22:36,960 --> 01:22:41,120
भी किया जब पहली लाइव की थी कि अच्छा कार्य कर रहे हैं मगर तुम्हें

1163
01:22:41,120 --> 01:22:45,600
वो सुनाई नहीं दिया क्योंकि तुम

1164
01:22:45,600 --> 01:22:51,000
बहरे हो जो तुम्हें मैत्री भाव सुनाई नहीं दे रहा है अंधे

1165
01:22:51,000 --> 01:22:55,120
हो जो तुम्हें जो सहिष्णुता है वो दिखाई नहीं

1166
01:22:55,120 --> 01:22:57,840
दे रही और बहुत जल्द गूंगे

1167
01:22:57,840 --> 01:23:01,920
भी हो जाओगे जब कुछ

1168
01:23:01,920 --> 01:23:07,920
जो अनर्गल प्रलाप है ना ये करने के योग्य भी नहीं

1169
01:23:07,960 --> 01:23:12,480
रहोगे लोगों को मार के भेजा देखो आप अच्छी बात

1170
01:23:12,480 --> 01:23:16,840
मेरे मन था तुम अपने चारों आ रहे थे

1171
01:23:16,840 --> 01:23:20,880
आंड था इस व्यक्ति से दूर हो व्यक्ति

1172
01:23:20,880 --> 01:23:25,120
हमारे का तो प्रमाण है प्रमाण वहां किसी शास्त्रीय

1173
01:23:25,120 --> 01:23:29,400
विषय पर किसी मर्यादा पर चर्चा हो झगड़ा नहीं झगड़ा नहीं

1174
01:23:29,400 --> 01:23:33,520
था ये शास्त्री विषय पर ऐसा नहीं

1175
01:23:33,520 --> 01:23:37,760
है इसके हम आपको बहुत सारे अभी उदाहरण दे रहे हैं लगे

1176
01:23:37,760 --> 01:23:42,000
हुए हैं इकट्ठा करके एक बंच देंगे तुम्हें बढ़िया सा

1177
01:23:42,000 --> 01:23:46,320
और तुम्हें बताएंगे तुमने कितनी अवमानना की है जो केवल शास्त्रीय

1178
01:23:46,320 --> 01:23:52,320
विषय पर नहीं शास्त्रीय विषय से बाहर होकर के तुमने बात की

1179
01:23:52,480 --> 01:23:56,760
विषय पर इतिहास पुराण श्रम एक विषय

1180
01:23:56,760 --> 01:24:01,520
पर खंडन करना है खंडन करने की आवश्यकता होती अगर

1181
01:24:01,520 --> 01:24:05,600
हमें कभी तो हम किसी महान व्यक्ति को साधने की आप रूप से यह

1182
01:24:05,600 --> 01:24:09,760
कह दे कि आप मेरे समर्थन में पत्र जारी कर दीजिए या मेरे समर्थन में या पत्र जारी कर दीजिए

1183
01:24:09,760 --> 01:24:13,040
आप रूप से यह तो तुम क्यों रो रहे हो अगर तुम्हें

1184
01:24:13,040 --> 01:24:17,040
प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं है तो आंसू क्यों बहा रहे हो कि शिवश ने मेरा प्रोत्साहन

1185
01:24:17,040 --> 01:24:22,320
नहीं किया Facebook पर तुम्हारा कमेंट था।

1186
01:24:22,320 --> 01:24:27,280
जब लोग शिव मेरी बात वहां पर कर रहे थे

1187
01:24:27,280 --> 01:24:31,840
और मुझे ऐसा कुछ याद है कि शायद एक कोई

1188
01:24:31,840 --> 01:24:36,400
तुम्हारा वो वीडियो है जो वहां पर मैं पहुंच गया था। किसी ने मुझे लिंक दिया था।

1189
01:24:36,400 --> 01:24:40,480
तो संभवत मैंने उसको लाइक किया है। वो पढ़ा है कि नहीं पढ़ा है वो लाइक वो

1190
01:24:40,480 --> 01:24:45,240
देखने का विषय है। मुझे ऐसा लगता है कि मैंने उसे लाइक किया है। वो समर्थन नहीं

1191
01:24:45,240 --> 01:24:49,360
है। उसको चेक करिएगा। शायद वही वाला

1192
01:24:49,360 --> 01:24:54,040
है जिसमें कि आप जो

1193
01:24:54,040 --> 01:24:58,080
है जो दो वीडियोस है इसके एक में वासुदेवाचार्य जी महाराज

1194
01:24:58,080 --> 01:25:02,400
बोले एक में राघवाचार्य जी महाराज बोले हैं उन दोनों वीडियोस की क्लिप

1195
01:25:02,400 --> 01:25:06,400
लगाई है और आपने कहा है दोनों का अभिनंदन है। हालांकि आपने भी वहां पर भी यह कह

1196
01:25:06,400 --> 01:25:10,480
दिया कि जो है अच्छा है हमारे आवाज उठाने के कारण जगह-जगह से आवाज उठने

1197
01:25:10,480 --> 01:25:14,640
लगी है। कारण स्वयं को क्रेडिट दे दिया मगर फिर भी शायद मैंने वहां पर लाइक

1198
01:25:14,640 --> 01:25:18,720
किया है। तो तुम्हारी यह वाली बात भी गलत साबित होगी। अगर मैंने वहां पर लाइक किया होगा

1199
01:25:18,720 --> 01:25:22,800
तो मैं कल वहां पर दिखाऊंगा लोगों को। अभी लोग वहां उस

1200
01:25:22,800 --> 01:25:27,000
वहां जाकर के भगवत आनंद के अच्छा देखना जरा Facebook

1201
01:25:27,000 --> 01:25:28,720
है। Facebook

1202
01:25:28,720 --> 01:25:33,200
चालू करो जरा। Facebook चालू करो जल्दी।

1203
01:25:33,200 --> 01:25:38,600
देखो शायद दिख जाए।

1204
01:25:38,600 --> 01:25:44,360
हां। इस पे यह स्वामी निगराचार्य की आईडी पर जाना

1205
01:25:44,360 --> 01:25:48,400
है। अभी देखते हैं। पहली बात

1206
01:25:48,400 --> 01:25:52,800
तो ऐसा कोई आवश्यक नहीं है। मगर मुझे ऐसा संभवत मेरी स्मृति

1207
01:25:52,800 --> 01:25:57,160
में है कि मैंने वहां पर जाकर लाइक किया

1208
01:25:57,160 --> 01:26:01,200
है। और तुम्हारे पास नोटिफिकेशन आ जाएगी अगर मैं अभी के अभी करूंगा

1209
01:26:01,200 --> 01:26:05,200
तो बाद की नोटिफिकेशन आएगी ना प्रमाण के रूप में दिखा देना।

1210
01:26:05,200 --> 01:26:09,800
तो ऐसा भी नहीं है कि पहले का लायक नहीं है। तो अभी तुम्हारी यहां पर बताता हूं।

1211
01:26:09,800 --> 01:26:13,920
झूठ हम आ गई आ

1212
01:26:13,920 --> 01:26:16,400
तो गई।

1213
01:26:16,400 --> 01:26:19,480
यहां पर इनकी वीडियो

1214
01:26:19,480 --> 01:26:23,640
है। यह मैं यह भगवतानंद जी

1215
01:26:23,640 --> 01:26:27,840
की यह चला रहा हूं। Facebook आईडी खोल रखी है।

1216
01:26:27,840 --> 01:26:32,680
ठीक है। नीचे जा रहे हैं। लॉग इन मांग रहा है

1217
01:26:32,680 --> 01:26:36,880
तो। जल्दी अकाउंट बनाओ तब तक मैं दिखाता हूं। अकाउंट बनाओ

1218
01:26:36,880 --> 01:26:41,120
जल्दी उसमें लॉग इन करो।

1219
01:26:41,120 --> 01:26:45,280
अच्छा अभी वह अकाउंट बनाया जा रहा है कि क्योंकि जो हमारे पास हैं

1220
01:26:45,280 --> 01:26:49,280
सहायक के रूप में उनका वो नहीं है। अकाउंट नहीं बना

1221
01:26:49,280 --> 01:26:53,360
हुआ है। Facebook पे वो अकाउंट बनाएंगे और फिर जाएंगे आईडी पर और

1222
01:26:53,360 --> 01:26:57,600
जो है देखेंगे कि वहां पर लाइक मिला है कि नहीं मिला है। ठीक है? पहली बात। दूसरी

1223
01:26:57,600 --> 01:27:01,600
बात आवश्यक नहीं है कि अगर मैंने कहीं पर लाइक किया है तो आपके यहां भी

1224
01:27:01,600 --> 01:27:05,600
लाइक करूं। पहली बात और अगर मैंने आपको लाइक

1225
01:27:05,600 --> 01:27:09,600
नहीं किया है तो इसका मतलब है कि वहां पर मेरा कोई दूसरा चक्कर है। है ना

1226
01:27:09,600 --> 01:27:13,760
कोई गलत बात यहां सनातन सिद्धांत देना चाहिए था

1227
01:27:13,760 --> 01:27:18,080
कि आप मेरे समर्थन में जारी कर दीजिए या मेरे समर्थन में यह वक्तव्य जारी कर दीजिए

1228
01:27:18,080 --> 01:27:22,080
और की हमारी लिखी हुई पुस्तकों में कीमतियां प्राप्त होती

1229
01:27:22,080 --> 01:27:26,080
है लेकिन यह भी बता दे की बहुत से विद्वानों ने स्वयं ही तक्तिया भेजी है और मैंने किसी

1230
01:27:26,080 --> 01:27:30,080
भी विद्वान को यह नहीं कहा है कि आप मेरी विकृति को सम्मानित करने के लिए या मुझे सम्मान देने के

1231
01:27:30,080 --> 01:27:34,160
लिए मुझे अपने कार्यक्रम को बुलाने के लिए बाध्य है या मैं आपसे आग्रह करूंगा आप मेरे साथ ऐसा कर दीजिए ऐसा मैंने नहीं कहा मैंने

1232
01:27:34,160 --> 01:27:38,160
वीडियो भेजा है आप पढ़िए इसमें क्या है मैंने ये भी कहा है अगर आप शास्त्र का समर्थक देंगे तो पता कीजिए क्योंकि आपका श्लोक है

1233
01:27:38,160 --> 01:27:43,400
उनसे भी पूरा बताएंगे यू नीड इज एन

1234
01:27:43,400 --> 01:27:46,760
आई

1235
01:27:46,760 --> 01:27:49,320
वाली

1236
01:27:49,320 --> 01:27:54,200
दिस लाइक नो वन

1237
01:27:54,200 --> 01:27:58,250
सी गो

1238
01:27:58,250 --> 01:28:00,560
[संगीत]

1239
01:28:00,560 --> 01:28:04,880
लेकिन इनसे कहा है क्योंकि अपनी बात है शास्त्री वाणी का पता होना चाहिए और मैंने

1240
01:28:04,880 --> 01:28:10,360
अपने बारे में नहीं कहा मैं तो मन से शंकराचार्य की बात को भी करता हूं वो स्वामी हिंदुस्तान

1241
01:28:10,360 --> 01:28:14,480
में मामलों में तो मैंने मन के साथ नाम सत्य

1242
01:28:14,480 --> 01:28:18,480
योगी वाले मैंने कहा है एक

1243
01:28:18,480 --> 01:28:22,640
तरफ तू तड़ाक करो उनके लिए फिर मलू पी पीठाधीश्वर देख रहे हो ना आज

1244
01:28:22,640 --> 01:28:28,620
बड़े हमंबल हो गए हैं

1245
01:28:28,620 --> 01:28:34,620
[संगीत]

1246
01:28:39,280 --> 01:28:43,280
ये क्या बात है पूरी के शंकराचार्य जी की

1247
01:28:43,280 --> 01:28:47,360
वाणी वो क्यों नहीं खाली कर पाए? क्यों नहीं हो पाए? इसीलिए तो हिंदू राष्ट्र के लिए

1248
01:28:47,360 --> 01:28:53,360
लड़ रहे हैं। और इसका यहां प्रसंग क्या है?

1249
01:28:58,320 --> 01:29:02,480
तो क्यों रो रहे हो कि हमको प्रोत्साहित नहीं किया। प्रोत्साहन ना लेने वाली

1250
01:29:02,480 --> 01:29:06,480
बात बताऊं। वहीं पर यह कमेंट में रो रहे थे कि शिवश नारायण द्विवेदी

1251
01:29:06,480 --> 01:29:10,880
हमारा हम भले ही वह कर दे मगर वह हमारा समर्थन नहीं करेगा क्योंकि वह पूरी

1252
01:29:10,880 --> 01:29:15,560
मटके परिकरों के बीच का व्यक्ति है और जबकि हमने तुम्हारा प्रोत्साहन

1253
01:29:15,560 --> 01:29:19,680
किया उस उस कमेंट को देखने से पहले हम तुम्हें लाइक दे चुके

1254
01:29:19,680 --> 01:29:24,640
थे वहां पर ठीक है और दूसरी बात क्या है

1255
01:29:24,640 --> 01:29:28,800
संभवत अभी देखता हूं पता नहीं हटा ना लिया हो या मुझे

1256
01:29:28,800 --> 01:29:34,400
ऐसा याद है कि किया था तो

1257
01:29:34,400 --> 01:29:38,400
दूसरी बात यह है कि अगर ऐसा नहीं

1258
01:29:38,400 --> 01:29:43,200
है कि आपको आवश्यकता है तो आपको रोना नहीं चाहिए। हां

1259
01:29:43,200 --> 01:29:47,360
मेरे मन में ये भाव था। मुझे तुम जैसे मनुवादियों की आवश्यकता

1260
01:29:47,360 --> 01:29:51,840
है। बिल्कुल है। मगर कुछ चीजें अगर तुम्हारी

1261
01:29:51,840 --> 01:29:56,160
जो है वो ठीक हो जाए। उसके उसमें मेरी और तुम्हारी अनुकूलता

1262
01:29:56,160 --> 01:30:00,160
हो जाए। प्रतिकूलता की भी मैं कह रहा हूं। तुम कह रहे हो ना तुम्हें

1263
01:30:00,160 --> 01:30:05,120
आवश्यकता नहीं है। मुझे आवश्यकता है। तुम जैसे आज मनुवादी होने चाहिए

1264
01:30:05,120 --> 01:30:09,120
जो शास्त्र के लिए लड़ सकते हो। प्रखर होकर

1265
01:30:09,120 --> 01:30:14,240
के बोल सकते हो। मगर उसमें कुछ दोष है। साथ-साथ

1266
01:30:14,240 --> 01:30:18,240
मर्यादा का उल्लंघन मत करो मेरे भाई। मर्यादा का

1267
01:30:18,240 --> 01:30:22,400
उल्लंघन तो तुम कर रहे हो। कोई मात्र शक्ति है। वह अपने जीवन

1268
01:30:22,400 --> 01:30:26,400
को बदल चुकी है। दिशाहीन थी तब की उसके जीवन से लेकर के और जो है तुम

1269
01:30:26,400 --> 01:30:30,560
बात कर रहे हो कि क्या कहते हैं वह। उसके अंतर जो अंतरंग

1270
01:30:30,560 --> 01:30:34,560
जो उसके वस्त्र है उनका नाम ले रहे हो उसका यहां पर धज्जियां उड़ा रहे हो उसकी गरिमा

1271
01:30:34,560 --> 01:30:38,560
की क्यों किसी को सुधर के अपने जीवन को ठीक से जीने का

1272
01:30:38,560 --> 01:30:42,640
वो नहीं है क्या अधिकार क्या वो

1273
01:30:42,640 --> 01:30:46,720
तुमसे व्यास गद्दी तुम्हारी मांग रही है क्या ऐसा तुम्हारा

1274
01:30:46,720 --> 01:30:49,560
तुमसे मांगा जिसको

1275
01:30:49,560 --> 01:30:53,760
अह देते टाइम तुमको ये सब याद दिलाना पड़ेगा तुम्हारी ये फोटो

1276
01:30:53,760 --> 01:30:59,760
है ऐसा है वैसा है क्या ऐसा तुम्हारा छीन लिया उसने हां

1277
01:31:15,640 --> 01:31:19,760
हां राघवाचार्य जी महाराज का जो वीडियो डाला होगा

1278
01:31:19,760 --> 01:31:25,760
वह हम निकाल रहे हैं।

1279
01:31:36,240 --> 01:31:39,560
कितनी फरवरी हो

1280
01:31:39,560 --> 01:31:45,560
गई ऐसे ही है।

1281
01:31:54,800 --> 01:31:59,120
यह देखो यह देखो इसको

1282
01:31:59,120 --> 01:32:03,200
कहते हैं एक्शन देखो भगवत आनंद

1283
01:32:03,200 --> 01:32:07,920
तुमने कहा ना समर्थन नहीं किया ये देखो

1284
01:32:07,920 --> 01:32:12,160
मेरी आईडी से जब तक नहीं करोगे तब तक कैसे पता चलेगा कि

1285
01:32:12,160 --> 01:32:18,160
मैंने किया है कि नहीं लाइक्स में जाओ अंदर किस-किस के द्वारा लाइक किया गया है

1286
01:32:24,160 --> 01:32:26,840
उसी में गए

1287
01:32:26,840 --> 01:32:31,280
ना हां शायद इससे किया होगा एक्टिविटीज

1288
01:32:31,280 --> 01:32:35,000
में

1289
01:32:35,000 --> 01:32:39,120
जाओ हैं ऐसे कैसे होगा

1290
01:32:39,120 --> 01:32:43,280
नहीं मैंने लाइक किया है कि नहीं वही लिस्ट में पता चलेगा किस-किस ने लाइक किया

1291
01:32:43,280 --> 01:32:49,280
है। उसकी लाइक की लिस्ट में जाओ किस-किस ने किया है।

1292
01:32:50,000 --> 01:32:54,000
आप ढूंढो तब तक मिल जाए तो हम तो वहां

1293
01:32:54,000 --> 01:32:58,000
पर क्या हो रहा था मैं बता दूं वहां संदर्भ कि वो जो वहां पर तुमने अपने आप

1294
01:32:58,000 --> 01:33:02,320
को क्रेडिट भी दे दिया वासुदेवाचार्य जी महाराज का वीडियो था और

1295
01:33:02,320 --> 01:33:06,480
क्या कहते हैं इनका था राघवाचार्य जी महाराज

1296
01:33:06,480 --> 01:33:10,480
का इसमें मैं भी हूं मेरा नाम लिया था इसमें एक बार प्ले

1297
01:33:10,480 --> 01:33:14,720
कर लेना कोई इस की बात हो रही है कि नहीं हो रही ना

1298
01:33:14,720 --> 01:33:20,040
बस इसमें लाइक की लिस्ट में जाओ मेरा नाम ढूंढो कितने लाइक हैं उस

1299
01:33:20,040 --> 01:33:24,200
पर ढूंढो नाम होगा

1300
01:33:24,200 --> 01:33:28,240
मेरा नव वर्ष के हार्दिक

1301
01:33:28,240 --> 01:33:32,400
शुभकामनाएं ठीक है तो तुम्हारे

1302
01:33:32,400 --> 01:33:36,400
अंदर कुछ चीजें हैं जिसके कारण जो है तुम ऐसा कर रहे हो

1303
01:33:36,400 --> 01:33:39,200
मगर ऐसा भी नहीं है कि तुमको बिल्कुल अपने से अलग ही कर दिया

1304
01:33:39,200 --> 01:33:43,200
जाए कुछ दोष हैं कुछ हो सकता है उस पर हम

1305
01:33:43,200 --> 01:33:47,920
लोग चर्चा करें तो पता चले भाई मगर वो सब चीजें तो तुमने ने

1306
01:33:47,920 --> 01:33:52,200
रहने नहीं दी

1307
01:33:52,200 --> 01:33:56,400
और हां या तो आह्वान सिद्ध लाइक

1308
01:33:56,400 --> 01:34:02,360
होगा या शिवश नारायण द्विवेदी के नाम से लाइक

1309
01:34:02,360 --> 01:34:06,480
होगा आपका आ जाएगा आप लेवल पहुंच जाए तो आप यह

1310
01:34:06,480 --> 01:34:10,720
मत कहो ना मेरा प्रोत्साहन क्यों नहीं किया हो अगर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती

1311
01:34:10,720 --> 01:34:14,800
खैर ये मेरा एक तंज था इनके लिए कि हमारे प्रोत्साहन की बात क्यों कर

1312
01:34:14,800 --> 01:34:19,360
रहे हैं अगर मैं सर्वज्ञ नहीं हूं।

1313
01:34:19,360 --> 01:34:23,520
अगर मैं कोई सर्वज्ञ नहीं हूं तो हमसे यह अपेक्षा क्यों कर रहे हैं कि

1314
01:34:23,520 --> 01:34:27,840
मैं सबको लाइक करूं। अच्छा सबको लाइक मतलब सबको समर्थन

1315
01:34:27,840 --> 01:34:31,920
दूं। अगर ये मुझे सबको समर्थन देने वाला नहीं समझ रहे हैं

1316
01:34:31,920 --> 01:34:36,960
तो यह बिना जाने कि हमने इनके कौन-कौन से अच्छे कर्म है।

1317
01:34:36,960 --> 01:34:41,280
यह क्यों सोचा कि इन्होंने मुझे समर्थन क्यों नहीं दिया? विजय

1318
01:34:41,280 --> 01:34:46,880
श्री को क्यों दिया? तो यह थोड़ा

1319
01:34:46,880 --> 01:34:52,280
मेरे ख्याल से युक्ति की कमी है इनके

1320
01:34:52,280 --> 01:34:56,560
पास बैनर लगा के

1321
01:34:56,560 --> 01:35:00,720
नीचे अपना काम करते ताकि हमको समस्या अच्छा तुम मेरे कितने बैनर दिखाओगे जो

1322
01:35:00,720 --> 01:35:04,720
मैंने अपना कोई कार्य किया है और उसमें जो है पूरी

1323
01:35:04,720 --> 01:35:08,720
के शंकराचार्य जी का बैनर बना लगाया हो दिखाओ एक

1324
01:35:08,720 --> 01:35:12,880
नहीं दिखा पाओगे सिर्फ जो मठ का जो प्रकल्प हमें बताया गया है केवल

1325
01:35:12,880 --> 01:35:17,040
उसी प्रकल्प में उनका उनका बैनर होगा अथवा उनका

1326
01:35:17,040 --> 01:35:21,520
कोई जन्मोत्सव मना रहे होंगे तब क्योंकि जैसे करपात्री जी का जन्मोत्सव

1327
01:35:21,520 --> 01:35:26,800
होगा तो उसमें गुरुदेव का नाम होगा करपात्री जी का नाम होगा

1328
01:35:26,800 --> 01:35:30,960
ठीक है तो हमने अपने प्रकल्पों

1329
01:35:30,960 --> 01:35:35,200
में कहां किसी का बैनर लगाया कि यह जो कार्य हम कर रहे हैं

1330
01:35:35,200 --> 01:35:40,080
वाला इनके अनुगत हो के कार्य हो रहा है

1331
01:35:40,080 --> 01:35:43,920
और हमारे प्रत्येक वीडियो में

1332
01:35:43,920 --> 01:35:47,920
गुरुदेव के प्रति एक श्रद्धा की जाती

1333
01:35:47,920 --> 01:35:52,240
है उनको प्रदान करने के लिए केवल उसके लिए वहां पर वो परंपरा

1334
01:35:52,240 --> 01:35:56,320
दिखाई जाती है और वो जो वाक्य लिखा होता है उसका उसका उपयोग

1335
01:35:56,320 --> 01:36:00,400
विनियोग इसलिए नहीं है कि जो है ये जो वीडियो है ये जो है

1336
01:36:00,400 --> 01:36:02,160
मठ से बन रहा है। हम

1337
01:36:02,160 --> 01:36:06,040
अपने पूज्य है जो

1338
01:36:06,040 --> 01:36:10,080
उनको अपनी श्रद्धा अर्पण कर रहे हैं। ठीक

1339
01:36:10,080 --> 01:36:14,160
है? अगर तुलसीदास जी महाराज ने अपने गुरु का नाम लिया अपनी

1340
01:36:14,160 --> 01:36:19,560
रामचरितमानस में सबसे पहले है

1341
01:36:19,560 --> 01:36:23,920
ना तो Facebook लॉगिन कैसे करोगे

1342
01:36:23,920 --> 01:36:28,240
तो आईडी पासवर्ड मेरा कैसे मिलेगा पता नहीं कौन सी आईडी से बनाया

1343
01:36:28,240 --> 01:36:33,160
होगा मुझे खुद ही याद

1344
01:36:33,160 --> 01:36:37,360
नहीं तो चलो 5 मिनट

1345
01:36:37,360 --> 01:36:41,360
के लिए रोकते हैं लाइव को और जो है वह Facebook

1346
01:36:41,360 --> 01:36:45,520
का लेकर के आते हैं मामला। अब जब बात

1347
01:36:45,520 --> 01:36:49,520
की बात है तो फिर पूरी बात करते हैं। ठीक है? तब तक आप

1348
01:36:49,520 --> 01:36:55,520
लोग शुक्रवार की टिकट बुक कराइए राजस्थान की।

1349
01:39:29,040 --> 01:39:33,440
तो वापस आ गए हैं। तो

1350
01:39:33,440 --> 01:39:37,600
इनका कहना है कि तुमने हमें समर्थन नहीं किया बल्कि हमने कई बार समर्थन

1351
01:39:37,600 --> 01:39:41,840
किया। तो यह देखो मैं ज्यादा वो शास्त्रों

1352
01:39:41,840 --> 01:39:46,000
के वचन नहीं बोलता हूं। मगर मैं श्री राम को जितना जान गया हूं थोड़ा बहुत

1353
01:39:46,000 --> 01:39:50,240
भगवत कृपा से श्री राम जी की कृपा से गुरु की कृपा से उतना प्रयास

1354
01:39:50,240 --> 01:39:55,120
जरूर करता हूं कि मैं वही बात बोलूं जो डंकी की चोट

1355
01:39:55,120 --> 01:39:59,200
बिल्कुल यथावत रूप से डंकी की चोट पर वह सिद्ध हो सके।

1356
01:39:59,200 --> 01:40:03,360
ठीक है? तो यह देखिए आप

1357
01:40:03,360 --> 01:40:07,600
इसको कहते हैं रामो विग्रह धर्म इसको कहते हैं रामो

1358
01:40:07,600 --> 01:40:12,560
दनाभि भाषते ये देख लो

1359
01:40:12,560 --> 01:40:15,000
ठीक

1360
01:40:15,000 --> 01:40:19,040
है क्यों मेरी तो आईडी है

1361
01:40:19,040 --> 01:40:23,160
हां हो रहा है फोकस हो रहा है देख लो

1362
01:40:23,160 --> 01:40:27,520
भैया 18 फरवरी 2025 को शिवश

1363
01:40:27,520 --> 01:40:32,360
नारायण द्विवेदी लाइक्स निग्राचार्य है श्री भगवतानंद

1364
01:40:32,360 --> 01:40:36,440
गुरु इनकी पोस्ट को मैंने लाइक किया तो यह भी झूठ हो

1365
01:40:36,440 --> 01:40:40,240
गया और

1366
01:40:40,240 --> 01:40:44,240
ठीक है तो अब तुम्हारा ये भी खत्म हो गया तो ये तुम्हारा

1367
01:40:44,240 --> 01:40:48,840
अहंकार है मेरे भाई तुम्हारा अहंकार

1368
01:40:48,840 --> 01:40:54,600
है

1369
01:40:54,600 --> 01:40:59,360
जो तुमने बिना जांच किए बिना चीजें किए कुछ भी

1370
01:40:59,360 --> 01:41:03,440
और यह वक्तव्य अपने देते हो। यह तुम्हारा अहंकार है।

1371
01:41:03,440 --> 01:41:08,160
इसलिए तुम्हारा ऐसा हो रहा है लफड़ा मेरे साथ।

1372
01:41:08,160 --> 01:41:12,560
तुमको नहीं मालूम है कि मैंने लाइक किया तो मैं क्या करूं? अब वही वाली बात हो गई ना?

1373
01:41:12,560 --> 01:41:16,560
जैसे मुझे नहीं मालूम था तुमने कहां-कहां क्या-क्या किया। जो मालूम पड़ा अगर

1374
01:41:16,560 --> 01:41:20,720
मैं वहां पर रहूं पश्चित और ऐसा कुछ कर उसमें भी मेरे पास अगर कमेंट करना समय

1375
01:41:20,720 --> 01:41:25,040
होना चाहिए। आवश्यक नहीं है कि मैं वहां कर दूं। अच्छा

1376
01:41:25,040 --> 01:41:29,280
अब मैंने किया कि नहीं किया तुम्हें कैसे पता? अब तुम्हें नहीं पता था

1377
01:41:29,280 --> 01:41:33,520
तो अब मैं तुम्हें दोष दे रहा हूं और जबकि तुम्हें पता होना चाहिए क्योंकि

1378
01:41:33,520 --> 01:41:38,320
तुम्हारे पर रिएक्ट किया है तुम्हारे Facebook अकाउंट में

1379
01:41:38,320 --> 01:41:42,920
फिर भी मैं तुम्हें बेनिफिट ऑफ डाउट दूंगा

1380
01:41:42,920 --> 01:41:47,120
कि हो सकता है भाई 2500 वहां पर लाइक है कहां तुम देखने जाओगे

1381
01:41:47,120 --> 01:41:51,200
किस-किस ने लाइक किया है कि नहीं किया है। हां मगर जब तुमको

1382
01:41:51,200 --> 01:41:55,240
नहीं पता है तो मत बोलो ना मेरे भाई बोलोगे तो

1383
01:41:55,240 --> 01:41:59,360
फसोगे चलती लाइफ में हो गया तुम्हारा किरकिरी कि मैंने

1384
01:41:59,360 --> 01:42:03,360
समर्थन तुम्हारा किया है कि नहीं किया है जब तुम्हें नहीं पता

1385
01:42:03,360 --> 01:42:09,360
था तो तुम्हें आरोप नहीं लगाना चाहिए था कि मेरा समर्थन नहीं किया

1386
01:42:14,320 --> 01:42:18,320
ठीक है अब देखो तुम्हारे जो समर्थक हैं अब विषयांतर

1387
01:42:18,320 --> 01:42:22,400
करते नजर आएंगे समर्थन किया कि नहीं किया

1388
01:42:22,400 --> 01:42:26,560
बात यह चल रही है तो समर्थन किया जहां

1389
01:42:26,560 --> 01:42:30,560
मैं पहुंच गया जहां मुझे दिख गया मुझे लोगों ने बताया ऐसा ऐसा है वीडियो डाला

1390
01:42:30,560 --> 01:42:34,880
है जबकि वहां पर भी तुम्हारी एक ऐसी बात थी जो तुम्हारे अहंकार को

1391
01:42:34,880 --> 01:42:39,040
पोषित करने के लिए वहां पर तुमने लिखी थी

1392
01:42:39,040 --> 01:42:43,120
कि हमारे कहने के कारण अब जगह जगह से आवाजें उठ रही है

1393
01:42:43,120 --> 01:42:47,280
ये है ना वहां पर क्यों तुम्हारे कहने का कारण जो है आन

1394
01:42:47,280 --> 01:42:52,520
चैनल पर इस के बारे में बोला बोला गया था

1395
01:42:52,520 --> 01:42:56,640
नहीं इसको कहते हैं रामो विग्रह वान धर्मा मैं

1396
01:42:56,640 --> 01:43:01,520
नहीं हूं उनके जैसा बनने का सदैव प्रयास करता रहूंगा

1397
01:43:01,520 --> 01:43:05,320
दोगली बातें नहीं बोलता हूं

1398
01:43:05,320 --> 01:43:09,440
मैं 18 फरवरी को तुम्हारी उस पोस्ट को

1399
01:43:09,440 --> 01:43:10,320
मैंने लाइक किया

1400
01:43:10,320 --> 01:43:14,720
है तुम्हें नहीं पता तो यह मेरी

1401
01:43:14,720 --> 01:43:18,800
यह मेरी गलती नहीं है कि तुम्हें नहीं पता और ना ही मैं ऐसी अपेक्षा करता हूं कि

1402
01:43:18,800 --> 01:43:22,960
तुम्हें पता होना चाहिए। यह है धर्म। मैं उस बात की तुमसे अपेक्षा

1403
01:43:22,960 --> 01:43:26,960
करता हूं जो शास्त्र कहते हैं, जो राम कहते हैं और तुम उस बात

1404
01:43:26,960 --> 01:43:32,960
की लोगों से अपेक्षा करते हो जो तुम कहते हो। यह है मुझ में और तुम में

1405
01:43:33,400 --> 01:43:37,760
अंतर। देख लिया हो गई किरकरी। बता देना

1406
01:43:37,760 --> 01:43:41,760
इसको जाकर के कि तुम्हें यह नहीं कहना चाहिए था कि

1407
01:43:41,760 --> 01:43:47,760
शिवांश ने तुम्हें समर्थन किया है कि नहीं। यह तो मैंने सबूत दिया है।

1408
01:43:48,080 --> 01:43:52,400
और इसके अलावा भी बहुत सारी जगहों

1409
01:43:52,400 --> 01:43:56,400
पर तुम्हारा समर्थन किया है। जिन अंशों में तुम ठीक हो। क्योंकि गुरुदेव

1410
01:43:56,400 --> 01:44:00,400
ने सिखाया था कि जिसका जहां गुण गुण हो उसकी वहां उतनी वो

1411
01:44:00,400 --> 01:44:04,480
करो और जिसका जितना अंश जो है गलत हो उसका वहां पर

1412
01:44:04,480 --> 01:44:10,280
खंडन करो। खंडन करो। प्रतिकार करो। पूछा था एक दिन गुरुदेव से कि गुरुदेव

1413
01:44:10,280 --> 01:44:14,320
क्या श्री राम ने रावण को भी कभी

1414
01:44:14,320 --> 01:44:17,800
पुरोहित के रूप में स्वीकार किया

1415
01:44:17,800 --> 01:44:21,920
था तो उन्होंने कहा था हां बिल्कुल

1416
01:44:21,920 --> 01:44:25,920
तब से हम करने लगे ये कार्य

1417
01:44:25,920 --> 01:44:29,920
ठीक है चलिए आगे बढ़ते हैं उमर के बता

1418
01:44:29,920 --> 01:44:34,000
दिया समर्थन मिलता है ना समर्थन चलो हो गई ये वाली बात है और ना

1419
01:44:34,000 --> 01:44:38,160
कभी हमको किसी अच्छा अच्छा कार्य कर रहा है। खास करके उसके परिश्रम

1420
01:44:38,160 --> 01:44:42,240
से आपका भी लाभ हो रहा है। आपके गुरु का भी सम्मान हो रहा है। लोगों के अंदर ड्यूटी आ रही है।

1421
01:44:42,240 --> 01:44:46,400
लोग से वैसे उसके परिश्रम का सम्मान करना किसी भी सज्जन के

1422
01:44:46,400 --> 01:44:50,480
लिए कृतता के ज्ञापन का एक उदाहरण होता है। हो गया

1423
01:44:50,480 --> 01:44:54,880
आपकी कभी हमारा समर्थन कर रही है। हमारे शास्त्री की प्रशंसा ये दिखाना आप लोग क्लिप बना

1424
01:44:54,880 --> 01:44:59,040
करके इस व्यक्ति का झूठ दिखाना। अरे भैया जब तुम्हें पता नहीं

1425
01:44:59,040 --> 01:45:03,200
है कि मैंने तुम्हारा समर्थन किया है कि नहीं किया है तो तुम

1426
01:45:03,200 --> 01:45:07,200
क्यों बोल रहे हो कि तुमने कभी समर्थन नहीं किया। यही तो मैं कहता

1427
01:45:07,200 --> 01:45:11,760
हूं वह बातें बोलो उन बातों के लिए लड़ जाओ मर जाओ जो अकाट्य

1428
01:45:11,760 --> 01:45:15,760
हो मगर जिन बातों का दूसरी दूसरे अर्थ निकल सकते हैं जो

1429
01:45:15,760 --> 01:45:19,920
केवल संभावना है उनप मत बोलो मत लड़ो और क्या

1430
01:45:19,920 --> 01:45:24,480
बोला है मैंने अब अकाट रूप से तुम्हें दिखा दिया ना समर्थन

1431
01:45:24,480 --> 01:45:28,960
किया है अब हो गए निग्रह संप्रदाय के निग्रचार्य

1432
01:45:28,960 --> 01:45:33,280
हो गए झूठे साबित यहां पर

1433
01:45:33,280 --> 01:45:37,920
ऐसा नहीं है कि सब अब जो इनके यहां पर फॉलोअर्स हैं। वह विषयांतर

1434
01:45:37,920 --> 01:45:41,920
कर रहे हैं। फिर यह क्यों हुआ? यह होता है बात से दूर

1435
01:45:41,920 --> 01:45:46,640
भागना। दूसरे दूसरे पॉइंट को उखाड़ो जल्दी जल्दी उखाड़ो। दूसरे पॉइंट को उखाड़ो।

1436
01:45:46,640 --> 01:45:51,640
यहां तो ये तो फस गए यार। साक्षात हो गया तो है

1437
01:45:51,640 --> 01:45:55,760
ना? 18 फरवरी को इनकी पोस्ट को लाइक किया है

1438
01:45:55,760 --> 01:46:01,760
और वह भी दिल से किया था। हृदय से किया था।

1439
01:46:05,920 --> 01:46:09,920
ठोकते है वो उनसे सहमत होते है कुछ बिंदु ऐसे जरूर है जिसमें हमने ये कहा कि उनका

1440
01:46:09,920 --> 01:46:14,360
पता हमें पता नहीं लग रहा उन्होंने भी कहा कि हमको इनका पक्ष नहीं लग

1441
01:46:14,360 --> 01:46:18,480
रहा है यहां पर लगा कि उनका परिश्रम उनका शास्त्र शाश्वत है और उस बात

1442
01:46:18,480 --> 01:46:22,560
को अधिक जनता तक पहुंचाना चाहिए तब हमने उनका समर्थन लिखा प्रशंसा की और उन्होंने

1443
01:46:22,560 --> 01:46:26,720
भी मेरे पर ऐसा ही किया जिस समय आप शंकराचार्य जी को ही गाली देने

1444
01:46:26,720 --> 01:46:30,880
वाले रामचार्य से हाथ मिलाते थे ना उस समय राजेश राज्या रामचार्य

1445
01:46:30,880 --> 01:46:35,440
के शास्त्री क्रमांक के आधार पहुंचेगा रामभद्राचार्य

1446
01:46:35,440 --> 01:46:39,520
जी से मैंने हाथ कम मिलाया यह एक विचारणीय बिंदु

1447
01:46:39,520 --> 01:46:44,040
है तुमको समय मिले तो

1448
01:46:44,040 --> 01:46:48,280
बताना रामभद्राचार्य जी से मैंने कब हाथ

1449
01:46:48,280 --> 01:46:52,560
मिलाया क्योंकि उनका जो वो वक्तव्य मैंने सुना है तब से मैं तो उनको सुनता

1450
01:46:52,560 --> 01:46:57,160
भी नहीं हूं कि चारों शंकराचार्य में से कोई नहीं है जो मेरे साथ जो

1451
01:46:57,160 --> 01:47:01,280
है पांच मिनट भी टिक सके संस्कृत में और वहां पर तो

1452
01:47:01,280 --> 01:47:05,800
मैंने ने एक वीडियो भी बनाया था। उस पर प्रतिक्रिया दी थी

1453
01:47:05,800 --> 01:47:08,280
अपनी

1454
01:47:08,280 --> 01:47:14,280
हम तो ये तो निराधार बात है।

1455
01:47:16,060 --> 01:47:20,880
[संगीत] चलिए परिश्रम के प्रति

1456
01:47:20,880 --> 01:47:26,120
यहां ये बताना व्यक्ति जो है ये कर रहा है। व्यक्ति के

1457
01:47:26,120 --> 01:47:30,320
लिए विवेक के प्रति शास्त

1458
01:47:30,320 --> 01:47:32,960
नहीं है।

1459
01:47:32,960 --> 01:47:37,560
है उसमें आपको अपने मान आपके

1460
01:47:37,560 --> 01:47:41,600
लिए भाई मान लो लेकिन आपको उनके प्रति यह भी उसे सब नहीं सीख

1461
01:47:41,600 --> 01:47:45,880
सके है ना मान वाला समर्थन वाला तुरंत हमने वीडियो बनाया

1462
01:47:45,880 --> 01:47:50,160
वाले वीडियो को छोड़ दे आपसे निश्चित रूढ़

1463
01:47:50,160 --> 01:47:54,320
बनाए रखना हमारा YouTube में उसमें आपने कहा विषय को छोड़ दे

1464
01:47:54,320 --> 01:47:58,400
आपसे निश्चित रूढ़ बनाए रखना तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है ना भगवतानंद

1465
01:47:58,400 --> 01:48:03,000
कि तुम अपने पूर्वाग्रह और अपने अहंकार के मारे हुए

1466
01:48:03,000 --> 01:48:09,000
हो। अहंकार ने तुम्हें अंधा कर दिया है।

1467
01:48:10,080 --> 01:48:14,240
ठीक है? उसके मारे हुए हो। उसी कारण से तुम तुम्हारा

1468
01:48:14,240 --> 01:48:18,560
इतना विवेक काम नहीं किया कि मैं यह सोचने से पहले कि उसने मेरा समर्थन

1469
01:48:18,560 --> 01:48:23,520
किया है कि नहीं। या तो पूछ ही लूं कुछ वा ही लूं।

1470
01:48:23,520 --> 01:48:28,240
मगर तुम तो उस बात पर लड़ने मरने आ गए।

1471
01:48:28,240 --> 01:48:32,480
यह यह दिक्कत है। तुम्हें तुम्हारे अहंकार ने मारा है। और तुम यह जो अहंकार

1472
01:48:32,480 --> 01:48:36,480
में आकर के जो छटाक कसी करने के चक्कर में लाइन क्रॉस करते हो फिर

1473
01:48:36,480 --> 01:48:40,480
यह मारेगा। है ना? क्योंकि तुम्हें

1474
01:48:40,480 --> 01:48:44,720
लोकेशना हो गई है। तो लोकेशना

1475
01:48:44,720 --> 01:48:49,600
का वो भगवत गीता में बड़ा अच्छा बताया गया है कि

1476
01:48:49,600 --> 01:48:53,920
जब व्यक्ति को लोकेश वो आसक्ति हो जाती है किसी चीज में। उसी

1477
01:48:53,920 --> 01:48:58,000
कारण उसकी पूर्ति ना होने के कारण आसक्ति की

1478
01:48:58,000 --> 01:49:04,000
पूर्ति ना होने के कारण फिर व्यक्ति के मन में उत्पन्न होता है क्रोध।

1479
01:49:05,840 --> 01:49:10,000
ठीक है? और क्रोध के क्रोध जहां से उत्पन्न होता है

1480
01:49:10,000 --> 01:49:13,480
उसी जगह को पहले जलाता

1481
01:49:13,480 --> 01:49:17,520
है। तो यह जो तुम्हारी आसक्ति है ना लोकेशना

1482
01:49:17,520 --> 01:49:21,320
की अपने अहंकार को पोषित करने

1483
01:49:21,320 --> 01:49:25,920
की यह जो तुम्हारी आसक्ति है इसी

1484
01:49:25,920 --> 01:49:30,080
आसक्ति से तुम्हारे अंदर एक क्रोध उत्पन्न हुआ

1485
01:49:30,080 --> 01:49:34,240
लोकेशना के कारण और फिर वो जो चीजें हैं अहंकार उत्पन्न हुआ

1486
01:49:34,240 --> 01:49:38,480
और फिर वो जो चीजें है वो तुम्हें ब्लाइंड कर देती है। तुम्हें तुम्हारा विवेक क्षीण कर देती

1487
01:49:38,480 --> 01:49:42,480
है। ये सब लिखा है भगवत गीता में। तुम तो ज्यादा तुम तुम्हें तो चार साल की उम्र में

1488
01:49:42,480 --> 01:49:47,040
रट गई थी तो यह श्लोक तुम ही बता दोगे है ना

1489
01:49:47,040 --> 01:49:51,200
तो मैं बताऊंगा भाई मुझे ऐसे याद नहीं है इस तरह से पर हां मर्म

1490
01:49:51,200 --> 01:49:56,320
मुझे याद है एक श्लोक का मर्म ये है और

1491
01:49:56,320 --> 01:50:00,320
तो तुम्हारा विवेक जो है छिन गया है लोकेशना के प्रति आसक्ति में

1492
01:50:00,320 --> 01:50:04,400
तुम ये अच्छाई बुराई का निर्णय नहीं कर पा रहे हो हर जगह तुम्हें वो विवेक

1493
01:50:04,400 --> 01:50:08,400
छिन जाने के कारण हर जगह तुम्हें दिक्कत हो रही

1494
01:50:08,400 --> 01:50:12,400
है निर्णय नहीं ले पा रहे हो सही देख नहीं पा रहे कहां क्या हो रहा है, कहां क्या नहीं हो रहा है। और

1495
01:50:12,400 --> 01:50:16,720
जहां पर अगर नहीं पता है अभाव है जानकारी

1496
01:50:16,720 --> 01:50:21,040
का तो वहां पे भी तुम अपना निर्णय जरूर दे रहे हो। जितनी तुम्हारी जानकारी

1497
01:50:21,040 --> 01:50:25,120
है बस उतना ही दुनिया है। जितनी तुमने देखी बस उतनी दुनिया है। तुमने

1498
01:50:25,120 --> 01:50:29,120
जापान नहीं देखा तो तुम ये बोलोगे कि जापान है ही नहीं। तुमने शिवश नारायण

1499
01:50:29,120 --> 01:50:33,200
द्विवेदी को समर्थन करते हुए नहीं देखा तो तुम ये बोलोगे कि शिवश नारायण द्विवेदी

1500
01:50:33,200 --> 01:50:37,880
ने समर्थन किया ही नहीं। यह सिद्धांत नहीं होता है।

1501
01:50:37,880 --> 01:50:42,080
चलिए इसका क्या है? हम चाहे कितना भी आपके गुरु की इच्छा भी बोल दे

1502
01:50:42,080 --> 01:50:46,320
आपके मन में नहीं आ सकती। आपके मन में यह सारा जो है यह बकवास सिद्ध

1503
01:50:46,320 --> 01:50:50,720
हो गया जब हमने लाइक दिखा दिया है भी हाथ मिला लेते हैं

1504
01:50:50,720 --> 01:50:55,200
हाथ मिलाने को आप बहुत हाथ मिला लेते हैं दुशासन

1505
01:50:55,200 --> 01:50:59,280
खचाते हैं इसलिए धर्म का विरोध करने वाले आरएस से भी हाथ मिला लेते हैं इसलिए अच्छा एक मिनट

1506
01:50:59,280 --> 01:51:03,360
एक मिनट एक मिनट धर्म का प अधर्म का

1507
01:51:03,360 --> 01:51:07,840
पक्ष पक्ष रखने वाले आरएसएस से हाथ मिलाने का मतलब क्या होगा जब मैं आरएसएस

1508
01:51:07,840 --> 01:51:12,640
का कार्यकर्ता हो जाऊंगा आरएसएस में जाकर के मिल जाऊंगा

1509
01:51:12,640 --> 01:51:16,640
आरएसएस एस के लोगों को अगर मैं रामपाल के यहां पर ले जा रहा

1510
01:51:16,640 --> 01:51:20,720
हूं साथ में तो उससे यह हो गया कि मैंने आरएसएस से हाथ मिला लिया। मैंने

1511
01:51:20,720 --> 01:51:24,800
उसके सिद्धांतों को अपना लिया। अगर आरएसएस वाले लोग, बजरंग दल

1512
01:51:24,800 --> 01:51:28,960
वाले लोग या बीजेपी वाले लोग मेरे साथ कहीं पर खड़े हुए हैं

1513
01:51:28,960 --> 01:51:32,960
और वह कोई कार्य में मदद कर रहे हैं जो कार्य धर्म के लिए अनुकूल है।

1514
01:51:32,960 --> 01:51:36,800
जो कार्य तुम्हारे लिए अनुकूल है, मेरे लिए अनुकूल है।

1515
01:51:36,800 --> 01:51:40,800
अगर बीजेपी वाले, आरएसएस वाले ऐसा कर रहे हैं तो

1516
01:51:40,800 --> 01:51:44,880
उसका यही मतलब क्यों निकलेगा कि मैंने जो है आरएसएस जाइन कर ली है।

1517
01:51:44,880 --> 01:51:48,960
यह मतलब क्यों नहीं निकलेगा कि उन्होंने शंकर मठ के प्रति अपनी कृतज्ञता

1518
01:51:48,960 --> 01:51:53,520
दिखाई है या यह जो अभियान है उसके प्रति निष्ठावान

1519
01:51:53,520 --> 01:51:57,600
हुए हैं या चलो मेरे ही प्रति निष्ठावान हुए

1520
01:51:57,600 --> 01:52:01,600
यही तो तुम्हारे पूर्वाग्रह है और तो और

1521
01:52:01,600 --> 01:52:05,840
यह करके तुम विरोध किस कार्य का कर रहे हो यह भी सोचो क्या

1522
01:52:05,840 --> 01:52:10,080
तुम्हारे पक्ष का कार्य नहीं है उस कार्य का जो विरोध कर रहे हो क्या तुम्हारे

1523
01:52:10,080 --> 01:52:15,680
लिए संभव है अकेले जाकर के किसी उसको स्टॉल को उखाड़ देना

1524
01:52:15,680 --> 01:52:19,920
क्योंकि तुम जिसका भी जिसका भी साथ लोगे एट ए टाइम वह व्यक्ति

1525
01:52:19,920 --> 01:52:24,560
तुम्हारे अनुसार जो है तुम्हारे सिद्धांतों को मानने वाला नहीं होगा

1526
01:52:24,560 --> 01:52:29,360
और मैंने कई बार कहा है दो अपने बारे में बताओ कौन-कौन है तुम्हारे साथी संगी

1527
01:52:29,360 --> 01:52:33,600
पता चल जाएगा वो कितने तुम्हारे सिद्धांतों को मानने वाले हैं

1528
01:52:33,600 --> 01:52:37,760
ठीक है तो अगर आरएसएस और बजरंग

1529
01:52:37,760 --> 01:52:41,840
दल वाले मेरे साथ खड़े हैं तो इसका अर्थ यही नहीं है कि मैंने बजरंग दल जाइन कर लिया

1530
01:52:41,840 --> 01:52:46,240
आरएसएस जाइन कर लिया इसका मतलब यह भी कि उन्होंने सनातन के सार्वभौम

1531
01:52:46,240 --> 01:52:50,240
सिद्धांतों को स्वीकार किया। परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण में आए। उतने अंश

1532
01:52:50,240 --> 01:52:51,920
में कम से कम जब वो वहां

1533
01:52:51,920 --> 01:52:55,920
जाकर के रामपाल से मेरे नेतृत्व में वहां खड़े हुए या मेरे

1534
01:52:55,920 --> 01:53:00,080
साथ में वहां खड़े हुए। ठीक है। मेरा आरएसएस

1535
01:53:00,080 --> 01:53:04,320
जाइन करना सिद्ध करो। वरना अगर यह बोलना है तो शास्त्रों

1536
01:53:04,320 --> 01:53:09,560
का करता है कुरान नहीं मानता जो शंकराचार करती है संस्था

1537
01:53:09,560 --> 01:53:13,560
और शंकराचार्य रामभद्राचार्य से कहां पर

1538
01:53:13,560 --> 01:53:18,040
मैंने वो किया है अनुकूलता प्रस्तुत की है वो जरा बताना कहां अनुकूलता

1539
01:53:18,040 --> 01:53:20,600
है

1540
01:53:20,600 --> 01:53:26,600
शंकराचार्य आपका धर्मास

1541
01:53:29,320 --> 01:53:35,000
है तो अच्छा ऐसे

1542
01:53:35,000 --> 01:53:39,440
हिमा है वैसे बहुत सारी बातें होगी आप नहीं

1543
01:53:39,440 --> 01:53:43,520
तो इसका अर्थ ये है ना कि हम बहुत मालूम से पीछे चल रहे है मुझे मालूम हम आगे चल रहे हैं वहां भी तुम्हारा

1544
01:53:43,520 --> 01:53:47,520
सम्मान नहीं कर रहे है ना पूरा जीवन शास्त्री बिताई आप

1545
01:53:47,520 --> 01:53:51,760
बीच में जीवन समास हो रहा है ना वो जब पीछे से कर दिया कि हमने तुम्हारा

1546
01:53:51,760 --> 01:53:55,760
समर्थन किया है की बात आपने कही हमने कभी भी Facebook पर या सोशल मीडिया पर इस प्रकार

1547
01:53:55,760 --> 01:54:00,640
से अपील की हो गाली दे रहे है हमारा समर्थन करो हमें

1548
01:54:00,640 --> 01:54:05,040
से करना है वो करता है चाहिए हा

1549
01:54:05,040 --> 01:54:09,120
मगर अगर तो ऐसे ही हुआ है

1550
01:54:09,120 --> 01:54:13,200
मुझे कोई नहीं सुन लीजिए सुन सुन लीजिए सुन लीजिए फिर से यहां

1551
01:54:13,200 --> 01:54:17,200
पर मैं आपको एक और छोटा सा ज्ञान देने वाला हूं श्री भैया के इस वक्तव्य में एक आपको

1552
01:54:17,200 --> 01:54:21,280
निग्र स्थान प्राप्त हो रहा है निग्र स्थान के 22 प्रकार होता है लेकिन वो इस तरह का विषय नहीं है मुझे

1553
01:54:21,280 --> 01:54:25,440
पता है कि आपको होती है की आवश्यकता होती है भैया

1554
01:54:25,440 --> 01:54:29,520
ने अपने वक्तव्य में आपको एक ज्ञान दिया है आप ध्यान से सुनेंगे इस वीडियो में ये कह रहे है की इन्होंने इनको किसी के समर्थन

1555
01:54:29,520 --> 01:54:33,600
की आवश्यकता किसी ने समझ लिया आपने सुन इनके लाइब्रेरी आप सुन चुके होंगे तो इसको कहते हैं है ना प्रतिज्ञा

1556
01:54:33,600 --> 01:54:37,680
सन्यास मतलब कोई बात आप पहले स्वयं कहे और फिर उसी बात से स्वयं पलट जावे आपने कोई

1557
01:54:37,680 --> 01:54:41,760
बात पहले रखी अरे मेरे भाई तुमने अभी बहुत सारे तंज

1558
01:54:41,760 --> 01:54:44,560
कसे हैं अपने में

1559
01:54:44,560 --> 01:54:48,800
ये ये सीमा है फलानी ये है वो है वो क्या मैं समझ नहीं रहा हूं तंज

1560
01:54:48,800 --> 01:54:54,760
कसे ना तो सामने वाला तंज कस रहा है तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है

1561
01:54:54,760 --> 01:54:59,120
हम और यह तंज के रूप में ही तो बोल रहा हूं मैं कि

1562
01:54:59,120 --> 01:55:03,120
जब तुम क्यों इतना ज्यादा पीड़ित हो कि शिवास ने मेरा समर्थन नहीं

1563
01:55:03,120 --> 01:55:07,200
किया। कौन सा सिद्धांत ये कहता है कि मुझे तुम्हारा समर्थन करना चाहिए था और इस

1564
01:55:07,200 --> 01:55:11,280
बारे में शास्त्र प्रमाण दो। तुम तो अपने मन की बातें कर रहे हो। जहां

1565
01:55:11,280 --> 01:55:15,520
पे शास्त्र प्रमाण रखना होता है वहां नहीं रखते हैं।

1566
01:55:15,520 --> 01:55:19,600
जहां पे अपनी बकवास करनी होती है वहां उसके लिए

1567
01:55:19,600 --> 01:55:24,000
उसको पोषित करने के लिए शास्त्र का प्रमाण रखते हैं। और लोगों की बातें होती है।

1568
01:55:24,000 --> 01:55:28,000
भाई अर्ज किया है तो इनके अंध भक्त कहेंगे वाह वाह वाह वाह वाह

1569
01:55:28,000 --> 01:55:32,000
वाह। फिर ये कहेंगे हम शुरू तो करने दो। वही वाली बात है

1570
01:55:32,000 --> 01:55:36,080
तुम्हारी। यहां शास्त्र का प्रमाण रखना चाहिए था कि तुमको जो

1571
01:55:36,080 --> 01:55:40,560
है राजेश राजौरिया जी से सीखना चाहिए था या फलाने से सीखना चाहिए था।

1572
01:55:40,560 --> 01:55:45,200
इतनी छोटी छोटी सी बात और समर्थन देना चाहिए था।

1573
01:55:45,200 --> 01:55:49,600
तो पहली बात तो समर्थन दिया गया। फिर शास्त्र का प्रमाण दो

1574
01:55:49,600 --> 01:55:53,760
मेरे समर्थन देने से देना आवश्यक है। बिल्कुल वो भी तब भी जब

1575
01:55:53,760 --> 01:55:58,000
मैं तुम्हें ना जानता हूं। तुम्हारे बारे में तुम क्या कर रहे हो नहीं जानता हूं।

1576
01:55:58,000 --> 01:55:59,840
और वरना यह सिद्ध करो

1577
01:55:59,840 --> 01:56:03,920
शास्त्र के प्रमाण से या तो यह सिद्ध करो कि तुम्हारी इन इन

1578
01:56:03,920 --> 01:56:08,120
चीजों से पता सिद्ध होता है कि तुम मेरे बारे में जानते

1579
01:56:08,120 --> 01:56:12,400
हो हम ऐसे होगा ना मीमांसा मनमुखी

1580
01:56:12,400 --> 01:56:17,480
व्याख्या है तुम्हारी पूरी मनमुखी कभी हमने ऐसा किया

1581
01:56:17,480 --> 01:56:21,600
नहीं इसको कहते हैं प्रतिज्ञा सन्यास का स्थान होता है और यदि शिव

1582
01:56:21,600 --> 01:56:25,720
अगर मेरे सुर ध्यान से सुनेता पक्ष है पक्ष की हार हो रही है

1583
01:56:25,720 --> 01:56:29,760
हम अगर मेरे चलो यहां पे नोट कर लो भैया पक्ष की हार

1584
01:56:29,760 --> 01:56:33,840
हो रही है यहां बहुत अच्छा फेस आया है इनका बड़ा अच्छा सा प्यारा

1585
01:56:33,840 --> 01:56:39,840
सा फोटो निकाल लेना बड़ा प्यारा

1586
01:56:40,400 --> 01:56:44,480
इनके वीडियो का 42 39 41 के आसपास ऐसे करके जो

1587
01:56:44,480 --> 01:56:48,720
हंस रहे हैं बड़ा प्यारा सा आया फोटो समाज में उसको नोट कर

1588
01:56:48,720 --> 01:56:54,000
ही रहे ऐसे फोटो जो है इनके वीडियोस में कम मिलते हैं एक मिनट बता

1589
01:56:54,000 --> 01:56:58,400
सही तो नहीं समाज में छात्र अगर मेरे को ध्यान से ना 42 42

1590
01:56:58,400 --> 01:57:04,400
42 42 की तो कहानी है समाज में समाज या काम भी कर ही नहीं

1591
01:57:06,200 --> 01:57:10,560
रहे हम अपनी पीछे नहीं हट पाए समाज राम बाल स्क इत्यादि

1592
01:57:10,560 --> 01:57:14,560
ब्रह्मा कुमारी के नहीं तुमने विरोध किया है पीछे हट रहे हो

1593
01:57:14,560 --> 01:57:18,600
तुमने विरोध किया है तुमने अपनी वीडियो में ये कहा है कि हमने

1594
01:57:18,600 --> 01:57:22,720
इस आर्य समाज अपनी जो

1595
01:57:22,720 --> 01:57:27,040
पिछली लाइव हुई है उसमें तुमने कहा है कि हम जो है इस

1596
01:57:27,040 --> 01:57:31,280
और आर्य समाज के और रामपाल के भी अधिकृत व्यक्ति से नहीं

1597
01:57:31,280 --> 01:57:36,240
मिले। बात नहीं की। वैसे तो यह गलत है।

1598
01:57:36,240 --> 01:57:40,480
वैसे तो यह गलत है। हम अधिकृत व्यक्तियों से भी मिले और

1599
01:57:40,480 --> 01:57:44,560
साधारण व्यक्ति से भी मिले और इसलिए मिले

1600
01:57:44,560 --> 01:57:48,560
कि सा क्योंकि हम साधारण है तो हम साधारण

1601
01:57:48,560 --> 01:57:52,560
से साधारण व्यक्ति से मिले जिससे कि वो जो

1602
01:57:52,560 --> 01:57:55,840
तथ्य हैं वो ज्यादा से ज्यादा बाहर आते जाए।

1603
01:57:55,840 --> 01:58:00,000
इसीलिए मिले। अगर हमारे परंपरा के जो मान्य

1604
01:58:00,000 --> 01:58:04,320
आचार्य गण हैं वह अगर मिले तो हां वहां के सिर्फ

1605
01:58:04,320 --> 01:58:08,560
आचार्यों से ही मिले या वो जिनको आचार्य कहते हैं भाई हमारे अनुसार आपके अनुसार तो आचार्य

1606
01:58:08,560 --> 01:58:12,680
है नहीं वो तो वो उनके द्वारा मान्य जो उनके आचार्य है उनसे ही

1607
01:58:12,680 --> 01:58:16,800
मिले मगर हम हम तो ऐसे नहीं है ना हम

1608
01:58:16,800 --> 01:58:20,800
तो स्वयं हरे कह रहे न्थू कह रहे हैं तो हम फिर भी हम उनके

1609
01:58:20,800 --> 01:58:25,120
यहां के प्रमाणिक लोगों से भी मिले और हम उनके यहां के

1610
01:58:25,120 --> 01:58:29,600
जो केवल फॉलोअ और मात्र है उनसे मिले। ठीक है?

1611
01:58:29,600 --> 01:58:33,680
तो ये गलत और दूसरी बात यहां पर आपका वक्तव्य झूठ हो रहा है कि

1612
01:58:33,680 --> 01:58:38,160
हम इतने में तो अंश में उनका साथ देते हैं। नहीं आपने विरोध किया। एक कोई

1613
01:58:38,160 --> 01:58:42,360
आर्य समाजी है बंगाली। उसने

1614
01:58:42,360 --> 01:58:46,480
आपकी वीडियो लेकर के और नीचे लिखा है देखो शिवा नारायण

1615
01:58:46,480 --> 01:58:50,600
द्विवेदी का सच। मैं इसी दिन का इसी दिन से बचना चाहता

1616
01:58:50,600 --> 01:58:54,640
था। और तुम वही करा रहे हो। आगे आगे चल रहे

1617
01:58:54,640 --> 01:58:58,920
हो डाल डाल। मैं पीछे पीछे आ रहा हूं बात पात तुम वही करा रहे

1618
01:58:58,920 --> 01:59:04,040
हो तो क्या

1619
01:59:04,040 --> 01:59:08,480
है अब देखो एक ये वक्तव्य आ रहा है इतना कौन डिफेंड

1620
01:59:08,480 --> 01:59:12,480
करता है ठीक है तो ये बात तुम वहां जाके क्यों नहीं

1621
01:59:12,480 --> 01:59:16,720
कह रहे हो जो आठ घंटे का लाइव कर रहा है या

1622
01:59:16,720 --> 01:59:20,960
जो भी है रात भर जो जाग रहा है वहां जाके क्यों नहीं कह रहे हो दूसरी

1623
01:59:20,960 --> 01:59:25,040
बात इतना कौन डिफेंड करता है तो यहां किस पैरामीटर से तय होगा कि कितना कितना

1624
01:59:25,040 --> 01:59:29,120
डिफेंड करना है, कितना नहीं करना। तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय

1625
01:59:29,120 --> 01:59:33,240
में शास्त्र प्रमाण है। अपनी कोई बात मनवानी है

1626
01:59:33,240 --> 01:59:38,320
ना तो वहां पर फिर शास्त्र को रखो।

1627
01:59:38,320 --> 01:59:42,320
कितना डिपेंड करता है? कितना नहीं करता है? यह कहां लिखा है? इसका

1628
01:59:42,320 --> 01:59:48,320
पैरामीटर क्या है?

1629
01:59:53,840 --> 01:59:58,080
यह भी सिद्धांत दो कि जो प्रवृत्ति वाला नहीं होगा

1630
01:59:58,080 --> 02:00:02,160
वो अगर करेगा तो उसका चलेगा मगर जो प्रवृत्ति वाला होगा

1631
02:00:02,160 --> 02:00:08,160
वो अगर करेगा तो उसको टोका जाएगा इसके बारे में सिद्धांत

1632
02:00:09,160 --> 02:00:13,280
दो हम क्या चल रहा था साहस का कार्य किया

1633
02:00:13,280 --> 02:00:18,080
है किसी नहीं साहस का कार्य नहीं किया है ना मैं अधिकृत

1634
02:00:18,080 --> 02:00:22,160
लोगों से कहां मिला? कहां किया साहस का कार्य? अब यहां पर तुम अपनी डेंटिंग पेंटिंग कर रहे

1635
02:00:22,160 --> 02:00:26,640
हो। तुम तो विरोध कर चुके हो। नहीं किया साहस का कार्य।

1636
02:00:26,640 --> 02:00:31,120
मैंने तो केवल वो टच पुंजियों से बातें की है जो कि ऐसा है नहीं। मगर तुम्हारे अनुसार

1637
02:00:31,120 --> 02:00:35,120
तो यही है कि केवल मैंने जो है जो

1638
02:00:35,120 --> 02:00:39,120
है ऐसा ऐसा किया है और तुम्हारे उस वक्तव्य का लोग फायदा उठा

1639
02:00:39,120 --> 02:00:43,520
भी रहे हैं। मेरे विरोध में तुम्हारे

1640
02:00:43,520 --> 02:00:47,520
वक्तव्यों का फायदा उठाएंगे और तुम्हारे विरोध में मेरे वक्तव्यों का

1641
02:00:47,520 --> 02:00:51,680
यही होगा और उदाहरण शुरू हो चुका है।

1642
02:00:51,680 --> 02:00:55,760
बंगाली वाले चैनल पर मैं इसी दिन के इसी दृश्य से बचने

1643
02:00:55,760 --> 02:01:00,160
के लिए निश्चित दूरी मुख्य रूप से इनसे बना रहा था। क्योंकि अगर मैं पास आऊंगा

1644
02:01:00,160 --> 02:01:04,320
तो द्वंद होगा क्योंकि मुझे मालूम है इन्होंने

1645
02:01:04,320 --> 02:01:08,360
कई जगह हल्के शब्दों का उपयोग किया है जो मैं अभी आने वाले समय में प्रस्तुत कर

1646
02:01:08,360 --> 02:01:09,360
दूंगा

1647
02:01:09,360 --> 02:01:12,600
बहुत किया

1648
02:01:12,600 --> 02:01:16,640
बहुत द्वंद होगा तो अगर पास आएंगे

1649
02:01:16,640 --> 02:01:20,880
तो द्वंद होगा और द्वंद

1650
02:01:20,880 --> 02:01:25,120
होगा तो उन लोगों को मटेरियल मिलेगा वो

1651
02:01:25,120 --> 02:01:29,200
मिल रहा है संदीपन रॉय का चैनल देखो जाकर के उसने रील बनाई है

1652
02:01:29,200 --> 02:01:33,520
ये देखो देखो शिवश नारायण द्विवेदी की स्थिति निग्रचार्य

1653
02:01:33,520 --> 02:01:37,680
जी बताते हुए निग्राचार्य जी वहां

1654
02:01:37,680 --> 02:01:41,840
शिवाश नारायण द्विवेदी के विरुद्ध बोल रहे हैं आर्य समाज के मंच से

1655
02:01:41,840 --> 02:01:47,840
बढ़िया

1656
02:01:48,920 --> 02:01:53,120
है कर चुके अब ये नहीं वहां

1657
02:01:53,120 --> 02:01:57,360
को बचाने की यहां क्या कहा किसी के समर्थन की आवश्यकता तब तक

1658
02:01:57,360 --> 02:02:01,440
दिया लेकिन जब पिछला था आया उसमें इन्होंने स्वयं कहा था कि हमने आरएसएस से भी सहयोग लिया

1659
02:02:01,440 --> 02:02:05,800
हमने राम से भी लिया गलत

1660
02:02:05,800 --> 02:02:10,640
आरएसएस के लोगों से सहयोग लिया

1661
02:02:10,640 --> 02:02:14,960
आरएसएस के लोगों से रामभद्राचार्य के

1662
02:02:14,960 --> 02:02:19,040
लोगों से सहयोग लिया अब मुझे समझ में आया भाई

1663
02:02:19,040 --> 02:02:23,760
जब आप अपने आसपास देखोगे हिंदू को ढूंढोगे

1664
02:02:23,760 --> 02:02:28,160
तो कौन मिलेगा या तो वो सबसे पहले आपके के शंकराचार्य

1665
02:02:28,160 --> 02:02:32,800
का अनुगामी हो या ऐसा कोई मिलेगा

1666
02:02:32,800 --> 02:02:37,120
वैसे तो बहुत मुश्किल से मिलता है प्रामाणिक परंपराओं से जुड़ा हुआ व्यक्ति शायद आपके

1667
02:02:37,120 --> 02:02:41,600
यहां ज्यादा मिलता हो पर मैं जिस मैं

1668
02:02:41,600 --> 02:02:45,680
ये जो महानगर है उनमें देख रहा हूं तो परंपरा प्राप्त आचार्यों से जुड़ा हुआ

1669
02:02:45,680 --> 02:02:49,920
व्यक्ति उनकी शरणागत हो में रहने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता

1670
02:02:49,920 --> 02:02:54,080
है प्रायोरिटी से फिर भी अगर देखो तो सबसे नजदीक का हिंदू

1671
02:02:54,080 --> 02:02:58,160
कौन मिलेगा जो सक्रिय होगा इधर-उधर तुरंत जाएगा तो

1672
02:02:58,160 --> 02:03:02,400
वह हिंदू तुम्हें मिलेगा। सबसे पहले हो सकता है परंपरा प्राप्त कोई मिल जाए।

1673
02:03:02,400 --> 02:03:04,240
नहीं मिलेगा तो

1674
02:03:04,240 --> 02:03:08,480
क्या कहते हैं यही वाले लोग तुम्हें पहले मिलेंगे। अब वो

1675
02:03:08,480 --> 02:03:12,560
अब वो आरएस अब वो अपने इस धर्म के पोषण को जितने रूप में वो धर्म को जानते

1676
02:03:12,560 --> 02:03:16,560
हैं उसका पोषण करने के लिए आरएसएस से जुड़े हुए हैं। तो हम ना ले जाए उनको

1677
02:03:16,560 --> 02:03:20,720
साथ में। आरएसएस से हाथ मिलाना। रामभद्राचार्य से हाथ मिलाने

1678
02:03:20,720 --> 02:03:25,280
का मतलब है कि मैं वहां गया कि अपने लोगों को मेरे पास भेजो। आरएसएस

1679
02:03:25,280 --> 02:03:29,400
के पास गया। नहीं किसी की मोबाइल की दुकान है मेरे घर के पास

1680
02:03:29,400 --> 02:03:33,440
में। वो आरएसएस से जुड़ा हुआ है। मेरा कहने का अर्थ था कि

1681
02:03:33,440 --> 02:03:37,440
वो लोग आरएसएस वाले थे। अब मैं वहां क्या उनको ये बताऊं तुम्हारे सिद्धांत गलत है।

1682
02:03:37,440 --> 02:03:41,240
तुम मेरे साथ मत

1683
02:03:41,240 --> 02:03:43,480
चलो।

1684
02:03:43,480 --> 02:03:48,080
हम अब यहां पर तुम्हारा वही दोष है। तुमने बात को समझा नहीं।

1685
02:03:48,080 --> 02:03:52,480
आरएसएस से हाथ मिल गया साहब। वही तो बात है। तुम विदेशगामी

1686
02:03:52,480 --> 02:03:57,160
के साथ खड़े हो गए तो तुम भी विदेशगामी हो गए। तुम्हारे इस सिद्धांत के

1687
02:03:57,160 --> 02:04:01,360
अनुसार हम युक्ति रहित व्यक्ति हो तुम। युक्ति

1688
02:04:01,360 --> 02:04:05,520
रहित अगर इसकी बात की जाए जो तुम चर्चाएं कर रहे हो ध्वस्त

1689
02:04:05,520 --> 02:04:09,680
हो रही तुम्हारी सारी चर्चाएं। युक्ति नहीं है उसमें। और

1690
02:04:09,680 --> 02:04:13,920
जो प्रमाण है वह अप्रासंगिक है।

1691
02:04:13,920 --> 02:04:18,000
मैंने बताया उदाहरण देकर के कि अगर कहीं किसी

1692
02:04:18,000 --> 02:04:22,160
प्रमाण में लिखा हुआ है कि भैया जो शास्त्र में

1693
02:04:22,160 --> 02:04:26,720
जो छत पर जाकर के कवाली करेगा किसी दिन यह तमाशा

1694
02:04:26,720 --> 02:04:30,960
मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे। किसी दिन यह

1695
02:04:30,960 --> 02:04:35,440
तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे। तो

1696
02:04:35,440 --> 02:04:39,560
कोई व्यक्ति कवाली करने अगर गया है छत पर तो उसको फलाना दंड

1697
02:04:39,560 --> 02:04:43,680
मिलेगा। मगर इससे यह कहां सिद्ध हो रहा है कि जो अब

1698
02:04:43,680 --> 02:04:47,680
इस अब इस संबंध में हमने प्रमाण दे दिए। मगर इससे

1699
02:04:47,680 --> 02:04:51,680
यह कहां सिद्ध हो रहा है कि भगवत आनंद इस समय जो छत पर बैठा हुआ है

1700
02:04:51,680 --> 02:04:55,680
वह कवाली करने बैठा हुआ है। कवाली करने के वो

1701
02:04:55,680 --> 02:04:56,320
कवाली

1702
02:04:56,320 --> 02:05:00,400
करने बैठा हुआ है। इस संबंध में पहले प्रमाण दो और फिर

1703
02:05:00,400 --> 02:05:05,040
जो है ये सिद्ध करो कि हां इस इसका ये दंड होता है।

1704
02:05:05,040 --> 02:05:09,200
ठीक है यार ऐसे और

1705
02:05:09,200 --> 02:05:13,280
स्वयं आपके पास गए थे। हे शिवश तुम्हारे समा बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो। तुम राम के बहुत अच्छा

1706
02:05:13,280 --> 02:05:17,360
कार्य करो। मैं तुम्हारा समर्थन करता हूं। ऐसे

1707
02:05:17,360 --> 02:05:20,760
बात कोई मतलब ही

1708
02:05:20,760 --> 02:05:25,040
नहीं साथ कहते हैं प्रतिज्ञा सन्यास नामक निग्रह

1709
02:05:25,040 --> 02:05:29,200
स्थान है ना आगे सुनते हैं अब यहां बोल दिया प्रतिज्ञा सन्यास

1710
02:05:29,200 --> 02:05:33,200
नामक निग्रह स्थान बोल दिया तो इससे लोग खुश

1711
02:05:33,200 --> 02:05:37,200
अरे दादा रे वाह बस शास्त्र का प्रमाण दे दिया अरे मेरे

1712
02:05:37,200 --> 02:05:41,200
भाई तुम्हारे घर के बगल में आग लगेगी हां तो वहां पे

1713
02:05:41,200 --> 02:05:47,200
तुम जाओगे तो ये चेक करोगे क्या कि आरएसएस का तो नहीं

1714
02:05:47,480 --> 02:05:51,600
है। अगर कोई धार्मिक प्रहार हो रहा होगा तो

1715
02:05:51,600 --> 02:05:55,840
वहां पर तुम यह चेक करोगे बीजेपी का तो नहीं है। और वैसे

1716
02:05:55,840 --> 02:06:00,040
भी तुम्हारे अगल-बगल तुम्हें शहरों की बात कर रहा हूं तो कम्युनिस्ट,

1717
02:06:00,040 --> 02:06:04,080
विधर्मी, सेकुलर ये सब ये सब

1718
02:06:04,080 --> 02:06:08,240
लोग मिलते हैं तुम्हें? कौन जाएगा तुम्हारे साथ? जो जो

1719
02:06:08,240 --> 02:06:12,800
कम से कम यह सोच रहा होगा कि मैं धर्म की रक्षा करता हूं आरएसएस

1720
02:06:12,800 --> 02:06:16,800
में रहकर हो जाएगा ना जो कम से कम ये किसी के भी

1721
02:06:16,800 --> 02:06:20,880
अनुगत हो के ये सोच रहा होगा भले ही वो दिशाहीन हो कुछ भी हो जो

1722
02:06:20,880 --> 02:06:25,120
ये सोच रहा होगा कि मैं धर्म के लिए जीता मरता हूं वही जाएगा

1723
02:06:25,120 --> 02:06:31,120
ना लड़ने के लिए कि कम्युनिस्ट

1724
02:06:33,000 --> 02:06:37,040
जाएंगे जो सब ऊपर से बचेंगे इससे क्या होगा

1725
02:06:37,040 --> 02:06:41,200
इनकी जो है आगे निकलेगी तो इनकी को आप समझेंगे मेरा उद्देश्य आपसे लड़ना

1726
02:06:41,200 --> 02:06:45,280
नहीं है मुझसे लड़ना है फिलहाल पिछली कुछ वीडियो में तो यही था कि

1727
02:06:45,280 --> 02:06:50,160
तुम्हें मुझसे लड़ना ही था कम्युनिटी पोस्ट में भी यही था मगर अब थोड़ा सा ठीक लग रहा है

1728
02:06:50,160 --> 02:06:55,040
है ना अब थोड़ा सा ठीक लग रहा है चलो

1729
02:06:55,040 --> 02:06:57,960
बात है

1730
02:06:57,960 --> 02:07:02,240
क्योंकि शास्त्र के गुरु भी उपदेश नहीं करते

1731
02:07:02,240 --> 02:07:06,560
ज्ञान के बोध के कारण ही ज्ञान गुरु का अधिकारी नहीं होता है इसलिए यहां शास्त्र बात

1732
02:07:06,560 --> 02:07:10,560
गुरु जी से गुरु जी से गुरु जी सही शास्त्र की बात पे अगर गुरु जी

1733
02:07:10,560 --> 02:07:14,960
से भिड़ोगे वो ठीक है भिड़ो मगर व्यक्तिगत

1734
02:07:14,960 --> 02:07:19,120
टिप्पणियां मत करो अपना जो वो क्या नाम है उसका कैरी

1735
02:07:19,120 --> 02:07:23,120
मिनाटी नाम है क्या वो वो हुनर यहां मत दिखाओ कैरी

1736
02:07:23,120 --> 02:07:27,600
मिनाटी वाला भड़ो शास्त्रों के अनुसार और भड़ो ही क्यों

1737
02:07:27,600 --> 02:07:31,600
शरणागत हो के प्रश्न पूछो ना पहले

1738
02:07:31,600 --> 02:07:36,400
भड़ो ही क्यों गुरु है तो शरणागत होकर के प्रश्न पूछो

1739
02:07:36,400 --> 02:07:40,400
कैरी मिनाटी क्यों बन रहे हो तुम? धार्मिक

1740
02:07:40,400 --> 02:07:46,400
कैरी मिनाटी बनना है। ये करियर है तुम्हारा।

1741
02:07:55,960 --> 02:08:00,160
कि अपने मन में कोई संशय आने पर उसके निवारण के

1742
02:08:00,160 --> 02:08:04,360
लिए शरणागत होकर प्रश्न करो गुरु से शरणागत

1743
02:08:04,360 --> 02:08:10,360
होकर नहीं किया तुमने प्रश्न शरणागत होकर ठीक

1744
02:08:13,800 --> 02:08:18,000
है हां मैं अभी भी कहता हूं

1745
02:08:18,000 --> 02:08:22,160
मैं अभी भी कहता हूं मैं राम नाम का जाप करता हूं और मुझे जो

1746
02:08:22,160 --> 02:08:26,160
संतुष्टि राम नाम से मिलती है वो ना श्री राम से मिलती है ना राम

1747
02:08:26,160 --> 02:08:30,160
जी से मिलती है ना श्री राम जी से मिलती है वो संतुष्टि मुझे राम से

1748
02:08:30,160 --> 02:08:34,320
मिलती है और उसका भी कारण गुरुदेव ही है

1749
02:08:34,320 --> 02:08:38,400
उनके मुख से जो व्याख्या सुनी थी राम शब्द की तो तुम्हें

1750
02:08:38,400 --> 02:08:42,440
उससे उसमें भी विरोध है

1751
02:08:42,440 --> 02:08:44,600
तुम्हें

1752
02:08:44,600 --> 02:08:48,640
दयानंद के व्यक्तित्व है जो यह सब

1753
02:08:48,640 --> 02:08:52,640
लोग हैं जो इनका जो अवयव है औररा

1754
02:08:52,640 --> 02:08:57,040
है वह ऐसा नहीं है कि इनका खाली नाम ले लिया तो चल जाएगा।

1755
02:08:57,040 --> 02:09:01,040
राम में अपने आप में इतनी शक्ति है, इतना बल

1756
02:09:01,040 --> 02:09:06,000
है कि उसी में सब कुछ वो है।

1757
02:09:06,000 --> 02:09:10,160
मिश्रित है सब कुछ उसी में। अब किसी को मिश्रित

1758
02:09:10,160 --> 02:09:14,240
नहीं लग रहा है तो वो श्री लगा लेता है। किसी को मिश्रित नहीं लग रहा है तो वह श्री

1759
02:09:14,240 --> 02:09:18,320
राम जी लगा देता है। किसी को मिश्रित नहीं लग रहा है तो वह प्रभु श्री राम जी लगा

1760
02:09:18,320 --> 02:09:22,320
देता है। और किसी को मिश्रित लग रहा है वह

1761
02:09:22,320 --> 02:09:26,560
केवल राम बोलता है। तो तुम्हें इससे भी दिक्कत है इस विषय में शास्त्र

1762
02:09:26,560 --> 02:09:31,320
वो नहीं बताओगे कुछ यदि तुम जो

1763
02:09:31,320 --> 02:09:35,360
है किसी मनुष्य का नाम लेते हुए जी बोल रहे हो तो तुम्हें वहां

1764
02:09:35,360 --> 02:09:39,520
पर अगर राम का नाम लेना है तो वहां पर भी जी लगाना आवश्यक है अन्यथा ये शास्त्र

1765
02:09:39,520 --> 02:09:43,520
का खंडन है दिखाओ ना यहां प्रमाण यहां क्यों अपनी मनोखी बातें

1766
02:09:43,520 --> 02:09:47,760
बोल रहे हो ऐसे ही होते हैं तुमको कोई मिला नहीं है इसीलिए तुम कैरी

1767
02:09:47,760 --> 02:09:51,920
मिनाटी बन चले हो धार्मिक चलो अब तो मिल गए

1768
02:09:51,920 --> 02:09:56,880
देखते हैं क्या होता

1769
02:09:56,880 --> 02:10:01,040
लेकिन मैं बताऊंगा हम श्री गोस्वामी जी महाराज के शब्दों

1770
02:10:01,040 --> 02:10:05,120
में प्रभाव करना चाहेंगे कहते हैं न अनीति कछु भाको भाई राम

1771
02:10:05,120 --> 02:10:10,400
राम बजा अनीति कछु भाको भाई

1772
02:10:10,400 --> 02:10:16,400
इसका कोई फायदा नहीं है सम्मान कर लो उसको मत

1773
02:10:16,720 --> 02:10:20,800
ठीक है इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि

1774
02:10:20,800 --> 02:10:24,960
तुम व्यक्तिगत होते हो उपास करते हो जूतों से मारने की बातें करते हो। तू ततड़ाक

1775
02:10:24,960 --> 02:10:29,520
करने लग जाते हो और फिर अभी आके समझाते हो कि किसी की तूतड़ाक

1776
02:10:29,520 --> 02:10:33,680
मत करना। खुद ही तो तूत तड़ाक करते हो। ये ऐसा है ये

1777
02:10:33,680 --> 02:10:36,200
वैसा

1778
02:10:36,200 --> 02:10:41,000
है। कम से कम उस भष का ही सम्मान कर

1779
02:10:41,000 --> 02:10:45,760
लो। जितना अंश उन्होंने बोला है उसका सम्मान कर लो।

1780
02:10:45,760 --> 02:10:49,920
और नहीं संसार का सनातन धर्म की कितनी हानि हो रही है। नहीं तो उसके प्रति

1781
02:10:49,920 --> 02:10:53,920
समाज में शब्द का प्रयोग करना चाहते हो। तो राम जी कुछ लेना चाहते हो लेना चाहते हो

1782
02:10:53,920 --> 02:10:58,240
आज अगर आज अगर दयानंद जीवित हो जाए

1783
02:10:58,240 --> 02:11:02,520
आज अगर

1784
02:11:02,520 --> 02:11:06,640
ये प्रभुपाद जीवित हो जाए

1785
02:11:06,640 --> 02:11:11,920
तो मेरा रवैया उनके लिए भी वैसा ही रहेगा जैसा अमोग लीला के लिए है

1786
02:11:11,920 --> 02:11:16,400
ठीक है वैसा ही रहेगा मगर वो जीवित नहीं है ना और बैर

1787
02:11:16,400 --> 02:11:20,480
मृत्यु के बाद बैर खत्म हो जाता है तो इस विषय में बात नहीं करोगे मृत्यु

1788
02:11:20,480 --> 02:11:24,640
के बाद बैर खत्म होता है कि नहीं होता है और अगर होता है तो

1789
02:11:24,640 --> 02:11:28,640
आपने जो वो पोस्ट में लिखा था कि मेरे तो शत्रु हैं वो

1790
02:11:28,640 --> 02:11:32,640
डिलीट करो जाकर के क्षमा मांगो उसके लिए

1791
02:11:32,640 --> 02:11:36,880
अपनी गलती कहीं पर है तो उसके लिए क्षमा मांगो ना कि

1792
02:11:36,880 --> 02:11:41,200
हां मृत्यु के बाद बैर मिट जाता है। राम जी ने कहा था

1793
02:11:41,200 --> 02:11:45,600
श्री राम तुम श्री राम जी बोलोगे। श्री राम जी ने कहा था

1794
02:11:45,600 --> 02:11:50,080
यह मैंने गलत बोला है कि दयानंद मेरे शत्रु हैं।

1795
02:11:50,080 --> 02:11:56,080
प्रभुपाद मेरे शत्रु हैं। ये तुमने बोला है अपनी कम्युनिटी पोस्ट में।

1796
02:12:01,440 --> 02:12:05,520
ठीक है। तो बोलो जा करके वो बात ही

1797
02:12:05,520 --> 02:12:09,520
नहीं करोगे। जिसमें फंस रहे होंगे वो बात ही नहीं होगी। दूसरी दूसरी बातें होंगी और

1798
02:12:09,520 --> 02:12:13,560
उसमें भी फंस रहे हो। चलो। अंतिम संस्कार की बात

1799
02:12:13,560 --> 02:12:17,600
करना शरीर से क्या करना है हमको ऐसे शरीर का चला दीजिए संस्कार हो

1800
02:12:17,600 --> 02:12:22,320
जाना चाहिए नहीं अंतिम संस्कार की बात नहीं है वहां

1801
02:12:22,320 --> 02:12:26,400
वहां स्पष्ट है कि मृत्यु के बाद बैर

1802
02:12:26,400 --> 02:12:31,800
रहेगा कि नहीं रहेगा तो ये श्री राम जी का वचन

1803
02:12:31,800 --> 02:12:35,920
है राम का वचन है कि मृत्यु के बाद कोई

1804
02:12:35,920 --> 02:12:39,920
बैर नहीं रहता तो तुम

1805
02:12:39,920 --> 02:12:44,320
क्यों कह रहे हो कि दयानंद और ये प्रभुपाद मेरे दुश्मन है

1806
02:12:44,320 --> 02:12:48,400
लोगों को दिखाने के लिए बवाई लूटने के लिए शेर है हमारा शेर

1807
02:12:48,400 --> 02:12:52,680
धर्म का कैरी मिनाटी है ये ये किसी को नहीं

1808
02:12:52,680 --> 02:12:57,200
छोड़ेगा है ना मर्यादा

1809
02:12:57,200 --> 02:13:02,160
अगर मेरे मतलब साक्षात वाणी राम जी कह रहे है मेरे राम

1810
02:13:02,160 --> 02:13:06,400
जो है उससे कोई नहीं है राम जी के कोई शास्त्रीयता नहीं है कोई प्रमाण राम जी अपश

1811
02:13:06,400 --> 02:13:11,120
वाणी बोल रहे है ब्रह्म की वाणी अवतार के हाथों से निकलने पर भी अपश मानी जाती है इसमें भगवत गीता

1812
02:13:11,120 --> 02:13:15,920
उष नहीं मानते अपने पद में तो ब्रह्म विद्या है और साक्षात ब्रहता है

1813
02:13:15,920 --> 02:13:16,720
लेकिन वो पुरुष

1814
02:13:16,720 --> 02:13:20,960
क्लेश कर्म इत्यादि से अपर है इसलिए गीता

1815
02:13:20,960 --> 02:13:25,200
ये सब कहा गया भगवती के इस्तेमाल का इस्तेमान करते है भगवान राम जी के द्वारा

1816
02:13:25,200 --> 02:13:29,200
सेवा है और इस्तेमान हम मान गए तो भगवान श्री राम जी ने क्या

1817
02:13:29,200 --> 02:13:33,360
कहा कि जो अनीति भागो भाई तो बर भराय अगर हम कुछ गलत

1818
02:13:33,360 --> 02:13:37,600
भी करो उनसे डरना मत की राम जी का कैसे करेंगे अगर तुमको लगता है मेरी वाणी में थी कोई शास्त्री

1819
02:13:37,600 --> 02:13:41,600
पक्ष है तो डरना मत तुम उसको बोलना तुम बताना कहते तो ये तो हम

1820
02:13:41,600 --> 02:13:45,680
भी कहते हैं। इसको तुम इस बात से क्यों जोड़ रहे हो?

1821
02:13:45,680 --> 02:13:49,680
क्योंकि ये सारे जो प्रमाण जो ये दिखाते हैं ये अपना

1822
02:13:49,680 --> 02:13:53,680
प्रभाव उत्पन्न करने के लिए दिखाते हैं। बस और कुछ नहीं है।

1823
02:13:53,680 --> 02:13:58,080
इससे कहां सिद्ध हो रहा है कि तुम्हारा तू तड़ाक में बात करना ये शंकराचार्य

1824
02:13:58,080 --> 02:14:02,160
को बुला लो और जो है ये तो मुझे याद है। अभी इसप वर्क नहीं

1825
02:14:02,160 --> 02:14:06,400
किया है मैंने। ये तो मुझे केवल याद है। अभी जब वर्क करूंगा

1826
02:14:06,400 --> 02:14:10,480
तब निकाल के लाऊंगा। वैसे ही जैसे अभी तुम्हारा एक वो बताया ना झूठ पकड़ा

1827
02:14:10,480 --> 02:14:14,480
गया कि शिवश ने कभी हमारा समर्थन नहीं किया। अभी निकाल के

1828
02:14:14,480 --> 02:14:18,480
लाऊंगा मैं शक्ति संहार शक्ति है। हमें क्षति पहुंच

1829
02:14:18,480 --> 02:14:22,640
जाएगी। हमको मानते हमें अपनी प्रचंड शक्ति से बेचैनी घबराहट उत्पन्न होती है उसको साहित्य दर्पण

1830
02:14:22,640 --> 02:14:26,720
में कहा जाता है। चित्त में जो डर उत्पन्न होता हैित में जो बेचैनी घबराहट उत्पन्न

1831
02:14:26,720 --> 02:14:30,800
से चित्त में जो विकल्प उत्पन्न होता है चित्त में जो डर उत्पन्न होता हैित में जो

1832
02:14:30,800 --> 02:14:31,920
बेचैनी घबराहट उत्पन्न

1833
02:14:31,920 --> 02:14:36,600
होती है उसको साहित्य दर्पण में कहा तो भगवान क्या कहते हैं कि जो अनी कछु हा

1834
02:14:36,600 --> 02:14:40,720
भाई हे भाई हे प्रजनों मैं भी कुछ गलत कह रहा हूं तो तुम मुझे भोगना

1835
02:14:40,720 --> 02:14:44,720
भय मत करना डरना होना चाहते

1836
02:14:44,720 --> 02:14:49,200
और इसी मर्यादा का दोनों इसी मर्यादा का पालन करते हुए हमने भी

1837
02:14:49,200 --> 02:14:53,360
और ये केवल राम राम ने हमारे ने भी किया आज शंकराचार्य जी ने भी

1838
02:14:53,360 --> 02:14:57,360
पुराण है जी उदा भगवान शंकराचार्य जी के जैसे बात

1839
02:14:57,360 --> 02:15:01,440
शंकराचार्य जी के शास्त्र का विरोध करने के लिए अगर

1840
02:15:01,440 --> 02:15:05,760
अशास्त्रीय कुछ बात है उसका विरोध करने के लिए हमने नहीं कहा हमने

1841
02:15:05,760 --> 02:15:10,240
उसका विरोध करने उसका विरोध करने के लिए बोला है जहां पर आपने निराधार

1842
02:15:10,240 --> 02:15:15,840
रूप से ये सिद्ध किया कि यहां शास्त्र का पालन नहीं हो रहा है।

1843
02:15:15,840 --> 02:15:20,080
ठीक है? और ऐसी जगह पर शास्त्र के पालन को ढूंढने

1844
02:15:20,080 --> 02:15:24,160
का विरोध किया है जहां पर शास्त्र का पालन हो पाना कठिन है।

1845
02:15:24,160 --> 02:15:28,160
जैसे मैंने बताया ब्राह्मण होते हुए उनको छात्र धर्म का आलंबन

1846
02:15:28,160 --> 02:15:32,440
लेना पड़ रहा है। तो वहां पर तुम उसी दृष्टि से लगा करके

1847
02:15:32,440 --> 02:15:36,560
देखोगे। आपातकाल है। ब्राह्मण को क्षत्रिय का क्षत्रिय धर्म का आलंबन

1848
02:15:36,560 --> 02:15:40,560
लेना पड़ रहा है। तो कई जगह आएंगे जहां रणनीति रणनीति पूर्वक

1849
02:15:40,560 --> 02:15:44,560
काम कार्य करना पड़ेगा। दूसरी बात हमारा मुख्य विरोध

1850
02:15:44,560 --> 02:15:47,200
है जो तुम तू तड़ाक हल्के शब्द उपास

1851
02:15:47,200 --> 02:15:51,480
कैरी मिनाटी बनने का प्रयास करते हो उसके लिए हमने तुम्हें टोका हमने

1852
02:15:51,480 --> 02:15:55,880
शास्त्रोक्त पक्ष रखने के लिए नहीं टोका

1853
02:15:55,880 --> 02:16:00,800
चलो क्या तुम्हें जी को

1854
02:16:00,800 --> 02:16:05,360
बता रहे हो सुनो किसकी मर्यादा का अनुसरण करते क्यों

1855
02:16:05,360 --> 02:16:09,440
श्री रामचंद्र जी की मर्यादा का अनुसरण करने का प्रयास

1856
02:16:09,440 --> 02:16:13,760
का भाव हमारे मन में नहीं होना चाहिए क्या बोल रहे हो तुम?

1857
02:16:13,760 --> 02:16:17,880
रामो विग्रहवान धर्म धर्म का पालन करने का प्रयास

1858
02:16:17,880 --> 02:16:22,160
का हमारे मन में भाव नहीं होना चाहिए। क्या मैंने यह कहा है कि मैं

1859
02:16:22,160 --> 02:16:27,880
श्री राम की मर्यादा का पूर्ण रूप से पालन करता

1860
02:16:27,880 --> 02:16:32,240
हूं। पता नहीं क्या है। लाइव

1861
02:16:32,240 --> 02:16:36,320
ही आ जाते हैं। आज मैंने कल भी अपने उसमें कह दिया है कि लाइव आ

1862
02:16:36,320 --> 02:16:40,320
जाओ। तो यह सब तुम्हारे ये सब जो व्यर्थ

1863
02:16:40,320 --> 02:16:44,480
के प्रलाप है इनसे बच जाते। मैंने अपने पुस्तक आखरी

1864
02:16:44,480 --> 02:16:48,480
में यह भी लिखा है कि हमारा जो ने गलत किया है वो भी वो सम

1865
02:16:48,480 --> 02:16:52,640
शास्त्रीय है। अगर वो शास्त्री है तो यहां पर ये बात है इसमें इसको मान लिया था

1866
02:16:52,640 --> 02:16:56,720
और कुछ लोगों को नाम दीक्षा दी है लेकिन वो जारी करवाया है

1867
02:16:56,720 --> 02:17:01,200
चार लोगों को और कुछ लोगों को नाम से है नहीं

1868
02:17:01,200 --> 02:17:06,080
जारी करवाया है चार लोगों को और कुछ लोगों को नाम की शिक्षा दी है लेकिन वो

1869
02:17:06,080 --> 02:17:10,160
के वो आर्य शिष्य नहीं कहते तारका दीक्षा ऐसी नहीं है कुछ खासा लोगों को लेकिन

1870
02:17:10,160 --> 02:17:14,240
जो ऐसे दीक्षित चाहे या होंगे उनके लिए मैंने छोड़ दी ऐसे बात लिखे लोग से अगर आप

1871
02:17:14,240 --> 02:17:18,240
मेरे किसी भी भगवान शंकर जी भगवान उसको ज्ञान दे वो ज्ञान उसके

1872
02:17:18,240 --> 02:17:22,240
अंदर प्रतिष्ठित नहीं होता है व्यक्ति जो मेरे द्वारा दीक्षित शिक्ष है हमारा और जो

1873
02:17:22,240 --> 02:17:26,560
मेरे कृत के विषय में सोचा है मैं पक्ष है वो सार्वजनिक रूप से सभा में वो

1874
02:17:26,560 --> 02:17:30,640
उसके करता है मांग सकता है दिखाते

1875
02:17:30,640 --> 02:17:34,800
क्या तुम्हारे प्रकार के है तो

1876
02:17:34,800 --> 02:17:39,000
थे महादेव है तुम्हारे इस प्रकार के पक्षधर है क्यों नहीं है

1877
02:17:39,000 --> 02:17:43,760
पक्षधर क्यों है क्यों नहीं है पक्षधर

1878
02:17:43,760 --> 02:17:47,920
क्या तुम सभा में जाकर के उनसे प्रश्न नहीं करते हो क्या हम लोग नहीं

1879
02:17:47,920 --> 02:17:51,560
करते हैं

1880
02:17:51,560 --> 02:17:57,560
प्रश्न कुछ भी

1881
02:17:58,800 --> 02:18:02,800
इनका कहना है कि जो पूरी शंकराचार्य जी हैं वो इस उदारता

1882
02:18:02,800 --> 02:18:06,880
के पक्षधर नहीं है कि उन जो शिष्य गण है श्रोता गण है

1883
02:18:06,880 --> 02:18:12,000
वो उनसे प्रश्न कर सके और यू ही हो रही है सभाएं

1884
02:18:12,000 --> 02:18:17,280
इनका कहना है कि

1885
02:18:17,280 --> 02:18:21,440
प्रश्न करने की उदारता का वो होना चाहिए मगर यह भी शास्त्र में ही लिखा

1886
02:18:21,440 --> 02:18:26,240
है ना कि गुरु गुरु से प्रश्न करने के लिए शरणागत होकर जाओ

1887
02:18:26,240 --> 02:18:30,640
नतमस्तक होकर जाओ मगर तुम्हें तो बगल में बैठना है इसलिए

1888
02:18:30,640 --> 02:18:34,880
तुम वहां उसके पीठ की पीठ की वो करते हो अवेलना

1889
02:18:34,880 --> 02:18:39,360
यह मैं तुम्हारा ही वह सिद्धांत अपना रहा हूं कि मुझे ऐसा लगता है।

1890
02:18:39,360 --> 02:18:44,000
मेरा सिद्धांत यह है कि हो सकता है तुम्हारा और भी कोई कारण हो। मगर तुम्हारा सिद्धांत है

1891
02:18:44,000 --> 02:18:48,160
कि भैया नेगेटिव ढूंढना है तो नेगेटिव यही है कि अन्य अन्य जगह

1892
02:18:48,160 --> 02:18:52,320
पर तुम्हें जो है बैठने को मिल रहा है तो तुम वहां कम पीछे

1893
02:18:52,320 --> 02:18:58,320
पड़ोगे। यहां तुम्हें बगल में कभी बिठाया नहीं जाएगा। तो यहां पीछे पड़ोगे।

1894
02:19:02,920 --> 02:19:07,280
ये तो ऐसे हुआ मगर एक बात अच्छी है

1895
02:19:07,280 --> 02:19:11,280
मुझे एक बात सही लगी कि कम से कम तुमको ये पता

1896
02:19:11,280 --> 02:19:16,440
चल गया कि हां कोई ठीक-ठाक व्यक्ति हम मिल गया

1897
02:19:16,440 --> 02:19:22,440
है हमको सही हो सकते है

1898
02:19:24,120 --> 02:19:28,520
बहुत है और जब अपनी बदलते

1899
02:19:28,520 --> 02:19:32,560
हुए चाहिए हमारे फायर होने की आवश्यकता नहीं ऐसा नहीं है हमारे

1900
02:19:32,560 --> 02:19:36,560
आगे देखते है कब है क्या एडवांस क्लास

1901
02:19:36,560 --> 02:19:41,320
में हमारे स्टूडेंट आए थे थे चाहिए

1902
02:19:41,320 --> 02:19:47,320
जब बनाया जाएगा जिसकी वाणी से बनाया जाएगा उसकी बोल रहे

1903
02:19:49,000 --> 02:19:54,440
होंगे पता नहीं आपको

1904
02:19:54,440 --> 02:19:58,640
दिया है काम नहीं चलता है और दूसरी बात ये है दुनिया में

1905
02:19:58,640 --> 02:20:03,400
हो रहा है सभी नहीं हम भी नहीं उसके

1906
02:20:03,400 --> 02:20:07,440
सब ये तो किसी से संभव नहीं है तुम्हारे बुक नहीं है हमसे भी नहीं उस

1907
02:20:07,440 --> 02:20:13,440
क्योंकि किसी ने पढ़ा नहीं है किसी ने किसी को पढ़ाया तो ये नहीं

1908
02:20:14,200 --> 02:20:20,200
किसी मतलब सामान खाली बैठे है

1909
02:20:20,440 --> 02:20:24,640
क्या कहा हमने तो कहा तुमने तो जब

1910
02:20:24,640 --> 02:20:27,720
भी क्या बोल मतलब

1911
02:20:27,720 --> 02:20:31,960
मतलब क्योंकि

1912
02:20:31,960 --> 02:20:37,960
तुम क्योंकि किसी ने किसी ने इसको साथ दिया किसी और

1913
02:20:38,880 --> 02:20:43,680
यहां पे ये बात नहीं कर रहे हैं। मेरी इस बात का उत्तर नहीं प्रस्तुत कर रहे हैं। ये

1914
02:20:43,680 --> 02:20:48,000
टाइम स्टैंप देख लीजिएगा 2420 जब मैं यह कह रहा हूं कि कोई व्यक्ति

1915
02:20:48,000 --> 02:20:52,080
ने अगर कहीं किसी को समर्थन दिया है और दूसरों को

1916
02:20:52,080 --> 02:20:56,240
नहीं दिया है तो इससे यह सिद्ध नहीं होगा कि वो अन्यों का समर्थन

1917
02:20:56,240 --> 02:21:00,240
अन्यों के अच्छे कार्य का समर्थन नहीं करता है। विरोध करता है।

1918
02:21:00,240 --> 02:21:04,320
समर्थन छोड़ो विरोध करता है। और अगर किसी

1919
02:21:04,320 --> 02:21:08,400
ने किसी को कहीं पर पकड़ा है गलत काम करते हुए

1920
02:21:08,400 --> 02:21:12,640
तो वही की वही कुछ दूसरे लोग हैं जिनको

1921
02:21:12,640 --> 02:21:16,720
पकड़ नहीं पाया। अपनी अल्पज्ञता के कारण

1922
02:21:16,720 --> 02:21:20,800
है ना या असामर्थ्यता के कारण वो नहीं पकड़ पाया। तो इससे यह सिद्ध नहीं

1923
02:21:20,800 --> 02:21:24,960
होता है कि वो उन लोगों के गलत कार्य का विरोध नहीं करता है। यहां पे ये प्रश्न

1924
02:21:24,960 --> 02:21:29,440
का उत्तर नहीं दे रहे आगे कि हम तो मूल विषय पर आ रहे हैं। अभी तक मूल विषय चल रहा था।

1925
02:21:29,440 --> 02:21:34,080
हमारे बीच का मूल विषय क्या है? विजय श्री पे इन्होंने जो वक्तव्य दिया सही दिया

1926
02:21:34,080 --> 02:21:38,080
परिकरों के बारे में जो जिन जिस आधार पर इन्होंने बोला है क्या

1927
02:21:38,080 --> 02:21:42,240
वह सही है यह मूल विषय है ठीक है

1928
02:21:42,240 --> 02:21:46,320
यही है ना मूल विषय अब तक मूल विषय ही चल रहे है और अब यहां

1929
02:21:46,320 --> 02:21:50,480
पर जो इनको शायद सहज नहीं लग रहा है तो वो मूल विषय नहीं है

1930
02:21:50,480 --> 02:21:56,480
टाइम नोट कर लेना 5420

1931
02:21:59,480 --> 02:22:03,520
लगे हमने तुमको ये कहा कर हमने तो कहा ना तुमने तो

1932
02:22:03,520 --> 02:22:07,680
अभी देखिए अभी इसने स्वयं स्वीकारा है इसने मुझसे नहीं कहा कि तुम कर हम

1933
02:22:07,680 --> 02:22:11,840
इसने क्या कहा कि हमने नहीं कहा कि मुझे लाइव कर लेकिन ये व्यक्ति जो इसने श अभी कम्युनिटी

1934
02:22:11,840 --> 02:22:15,840
पोस्ट में डाला है उसमें इस व्यक्ति ने क्या आज ही डाला था उसमें इस व्यक्ति ने स्वयं कहा था कि प्रत्यक्ष

1935
02:22:15,840 --> 02:22:19,920
वार्ता करनी है और प्रत्यक्ष वार्ता करने का तो कमेंट में लाइव आ जाइए लाय कहता है क्योंकि हम

1936
02:22:19,920 --> 02:22:24,160
जाने से काम नहीं तो लाइव आ जाओ लाइव आ जाओ ये सब यही कह रहा था प्रत्यक्ष वार्ता इसका तात्पर्य

1937
02:22:24,160 --> 02:22:28,160
यही प्रदेश होता तथा रूप से इस व्यक्ति ने

1938
02:22:28,160 --> 02:22:32,240
जो कोई गौरी नाम की जो देवी है उनका स्क्रीनशॉट लगाया था अपनी कम्युनिटी पोस्ट में उसमें इसने क्या लिखा

1939
02:22:32,240 --> 02:22:36,160
है इसने लिखा है

1940
02:22:36,160 --> 02:22:39,680
यदि आपको लगता है कि आप सभी के पक्ष है तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करें इसने

1941
02:22:39,680 --> 02:22:44,240
लिखा है प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा इसमें लिखा है

1942
02:22:44,240 --> 02:22:48,800
इसका जवाब पूर्व में दे चुके हैं गौरी वाला जो मामला है गौरी ने जो बिचौलियापन

1943
02:22:48,800 --> 02:22:52,960
दिखाया है कि तुम्हारा वो संदेश यहां लाएगी फिर यहां का संदेश वहां बेचेगी

1944
02:22:52,960 --> 02:22:57,040
फिर मेरे स्क्रीनशॉट लेकर के तुम्हें में भेजेगी और मेरे जो दादा हैं वो

1945
02:22:57,040 --> 02:23:01,120
मेरे जो शपुरी के शंकराचार्य जी हैं वो गौरी जिसका Instagram पे

1946
02:23:01,120 --> 02:23:05,360
पेज है वो दसनावी साहब के नाम से वो बिचौलियापन उसने दिखाया

1947
02:23:05,360 --> 02:23:09,440
है हम क्या कि वो यहां की चीजें वहां भेजे वहां यहां

1948
02:23:09,440 --> 02:23:13,840
की यहां की वहां भेजेगी वहां की यहां नहीं है ना तो वो स्क्रीनशॉट भेजेगी

1949
02:23:13,840 --> 02:23:18,160
ये हुआ है वो हुआ है और इस बिचोलिएपन

1950
02:23:18,160 --> 02:23:22,760
के कारण होने वाली गलतफहमी से उत्पन्न होने वाली ये

1951
02:23:22,760 --> 02:23:28,760
दिक्कतें वो वो सौदागर याद आ रही है

1952
02:23:28,760 --> 02:23:32,960
मुझे वो जो जय वीरू में लड़ाई वो

1953
02:23:32,960 --> 02:23:37,240
किस में राजू और वीरू में लड़ाई करवाई थी ना उसने अमरीश पुरी

1954
02:23:37,240 --> 02:23:41,680
ने ऐसे ही इनके समर्थकों ने आग लगवाई

1955
02:23:41,680 --> 02:23:47,400
लगवाओ भैया ठीक

1956
02:23:47,400 --> 02:23:51,600
है बीच के लोगों की वजह से आग लग रही है जहां तक मुझे

1957
02:23:51,600 --> 02:23:55,680
दिखाई दे रहा है क्योंकि वो मिस मिस इनफार्मेशन वहां पर पहुंचा

1958
02:23:55,680 --> 02:24:00,160
रहे हैं और ये जो है उस मिसइफ पर एक्टिव

1959
02:24:00,160 --> 02:24:04,000
हो रहे हैं। सक्रियता दिखा रहे हैं।

1960
02:24:04,000 --> 02:24:08,000
अच्छा तो अब ये क्या कारण है कि मैंने तो नहीं कहा कि अप्लाई करा मैंने तुम्हें पहले

1961
02:24:08,000 --> 02:24:12,080
भी नहीं कहा कि लाइव आइए। मैंने वहां पर यह समझा

1962
02:24:12,080 --> 02:24:16,080
था कि तुम्हारा कोई पक्षधर है जो

1963
02:24:16,080 --> 02:24:20,720
अच्छा सबसे जरूरी बात यह है कि

1964
02:24:20,720 --> 02:24:24,960
गौरी ने मुझे जो वो मेरा कम्युनिटी पोस्ट दिखाना

1965
02:24:24,960 --> 02:24:30,960
जरा बताता हूं उसमें दिक्कत क्या

1966
02:24:33,080 --> 02:24:37,280
है? गौरी ने क्या किया था? सबसे पहले तो यह नहीं

1967
02:24:37,280 --> 02:24:41,360
बताया कि भगवतानंद ने आपको कुछ भेजा है, संदेश भेजा है

1968
02:24:41,360 --> 02:24:45,360
ना सबसे पहले ना सबसे लास्ट जैसे होता है ना एक पत्राचार का

1969
02:24:45,360 --> 02:24:49,440
माध्यम होता है कि भाई नमस्कार से शुरू हुआ और नीचे अपना नाम डाल दिया

1970
02:24:49,440 --> 02:24:53,600
भगतानंद ठीक है या नमस्कार मत करो जय श्री राम मत करो कुछ

1971
02:24:53,600 --> 02:24:57,680
मत करो मगर नीचे उसी मैसेज में नीचे अपना नाम डाल ऐसा नहीं

1972
02:24:57,680 --> 02:25:02,240
है बहुत ही अधूरा टाइप का मतलब जो एक

1973
02:25:02,240 --> 02:25:06,480
क्या कहेंगे उसको एक अव्यवस्था स्थित मैसेज उसने

1974
02:25:06,480 --> 02:25:10,640
मुझे किया था। वो दिखाता हूं क्या था।

1975
02:25:10,640 --> 02:25:14,640
यह देखो यह मैसेज उसने मुझे किया है। दिख

1976
02:25:14,640 --> 02:25:20,040
रहा है दिख रहा है। दिख रहा ये

1977
02:25:20,040 --> 02:25:22,920
ये

1978
02:25:22,920 --> 02:25:27,200
हां ये देखो। इसमें यह

1979
02:25:27,200 --> 02:25:31,600
मैसेज शुरू हो रहा है तो उसमें कहीं नहीं लिखा है कि यह मैसेज भगवतानंद ने भेजा है।

1980
02:25:31,600 --> 02:25:35,680
फिर उसके बाद दूसरा मैसेज आता है। फिर वहां पर भी नहीं लिखा है कि भगवतानंद ने

1981
02:25:35,680 --> 02:25:39,840
भेजा है। फिर तीसरा मैसेज आता है वहां पे अलग से लिखा है कि यह

1982
02:25:39,840 --> 02:25:44,000
आपके लिए भगवतानंद जी ने भेजा है। तो पहले तो मैं इस पूरे मैसेज

1983
02:25:44,000 --> 02:25:48,000
को पढ़ता रहा हूं, पढ़ता रहा हूं और अनेकानेक मैसेजेस

1984
02:25:48,000 --> 02:25:52,840
आ रहे हैं भले ही मगर मैं बड़े ही ध्यान पूर्वक ये 10 नामी शैव

1985
02:25:52,840 --> 02:25:56,880
का मैसेज पढूं जबकि मुझे मालूम है विरोधी

1986
02:25:56,880 --> 02:26:00,960
भी है। हो सकती है और यह जो है मुझे संशय है उसकी स्थिति को लेकर।

1987
02:26:00,960 --> 02:26:05,920
ये है कौन? यह इंटरनेट पर घूमने वाले

1988
02:26:05,920 --> 02:26:09,920
जो चोर टाइप के लोग हैं कभी-कभी वैसा प्रतीत हो

1989
02:26:09,920 --> 02:26:14,560
रहा है कि हो सकता है लड़की की आवाज में कोई जो है

1990
02:26:14,560 --> 02:26:18,840
पुरुष ही ऐसा कार्य कर रहा हो और या

1991
02:26:18,840 --> 02:26:22,960
फिर अब उसकी स्थिति को लेकर के मैं संशय में हूं

1992
02:26:22,960 --> 02:26:27,120
क्योंकि कभी वो बात हुई तो वो मुझे लगा

1993
02:26:27,120 --> 02:26:31,200
कि जेन्युइन है ठीक है पूरी शंकराचार्य जी के लिए वो रक्त कभी-कभी ऐसा

1994
02:26:31,200 --> 02:26:35,280
लगता है के इनकी ज्यादा मान प्रतिष्ठा है उनके मन में पूरी शंकराचार्य

1995
02:26:35,280 --> 02:26:37,920
जी के सापेक्ष वो इनकी इनका आदर सम्मान

1996
02:26:37,920 --> 02:26:43,920
ज्यादा करती ये भी लगा तो ऐसे व्यक्ति का

1997
02:26:44,240 --> 02:26:49,280
यहां लिखा गया है कि यह बात निग्राचार्य ने ही कही है

1998
02:26:49,280 --> 02:26:53,360
हां तीसरे तीसरे उसमें कही है ये आपके लिए भेजा

1999
02:26:53,360 --> 02:26:57,640
है भगवतानंद जी ने ये उसमें लिखा है तीसरे मैसेज

2000
02:26:57,640 --> 02:27:01,680
में तो ऐसे अव्यवस्थित मैसेज में मेरा ना देख

2001
02:27:01,680 --> 02:27:05,920
पाना एक उसकी संभावना थी। फिर भी ना देख पाने की मैंने देख पाने के लिए अपने दोष

2002
02:27:05,920 --> 02:27:10,520
को मानते हुए वहां पर क्षमा प्रार्थी बोला। अब दूसरी बात यह आती

2003
02:27:10,520 --> 02:27:14,800
है कि जब मैं इसको नहीं देख पाया कि भगवतानंद

2004
02:27:14,800 --> 02:27:18,800
ने भेजा है तो मैं क्या कर रहा हूं वहां पर यह समझ रहा हूं कि भगवतानंद का

2005
02:27:18,800 --> 02:27:22,880
कोई समर्थक है जो अपना मैसेज मुझे गौरी के माध्यम से पहुंचा

2006
02:27:22,880 --> 02:27:27,840
रहा है तो ये बात का जवाब मैंने शुरू में दिया है

2007
02:27:27,840 --> 02:27:31,840
तो जिसको देखना हो वो वहां जाकर के देख

2008
02:27:31,840 --> 02:27:35,920
लगाया क्या कह रहा है कि ये क्या कर रहा है ये क्या

2009
02:27:35,920 --> 02:27:40,520
कर रहा है ये ये स्वयं ही अपने कथन को अपने कथन से काट रहा है कि नहीं काट

2010
02:27:40,520 --> 02:27:46,280
रहा ना ऐसे

2011
02:27:46,280 --> 02:27:50,480
मिलेंगे की बात की बात कर अब ये कह रहे है की हमने ना की बात कही

2012
02:27:50,480 --> 02:27:54,560
थी तो हमने ना की बात इसलिए कही थी क्योंकि तुम लाइव कर ही रहे थे तुम्हारे लोग कमेंट

2013
02:27:54,560 --> 02:27:59,360
तो कर ही रहे लाइव पर बुलाओ तुम भी कर ही रहे थे

2014
02:27:59,360 --> 02:28:04,200
नहीं हमने लाइव पर बुलाने के लिए तुम्हारे लिए कहीं नहीं कहा है

2015
02:28:04,200 --> 02:28:08,480
दिखाओ यह है तुम्हारा झूठ टाइम स्टैंप नोट

2016
02:28:08,480 --> 02:28:12,560
करो भैया। 5635 पे इन्होंने कहा है कि हमने इनको लाइव पे बुलाने की

2017
02:28:12,560 --> 02:28:18,560
बात कही है। ये प्रमाण बताएं कहां कही है लाइव पे बुलाने की

2018
02:28:19,480 --> 02:28:23,360
बात? लाइव

2019
02:28:23,360 --> 02:28:27,440
लोग गए थे कि रिसोर्स आज निगाह। तो

2020
02:28:27,440 --> 02:28:31,520
लाइव आने के बाद कम भेजा आते हैं कि लाइव

2021
02:28:31,520 --> 02:28:35,760
आने के बाद हमें पता है हमने वहां भाव प्रकट किया था कि

2022
02:28:35,760 --> 02:28:39,840
इस पर इन विषयों पर सौहार्दपूर्ण चर्चा हो सकती है।

2023
02:28:39,840 --> 02:28:44,400
तुम्हारे लिए जो भाव प्रस्तुत किया था। हमने कहीं नहीं कहा कि लाइव पर आओ।

2024
02:28:44,400 --> 02:28:48,400
और सौहार्दपूर्ण चर्चा से मेरा मतलब था कि हम कहीं व्यक्तिगत रूप से मिले।

2025
02:28:48,400 --> 02:28:52,560
अगर दिक्कत है तो। ना कि यहां लाइव पर आकर के द्वंद

2026
02:28:52,560 --> 02:28:58,560
करें, लड़े। ठीक है? चलो।

2027
02:28:59,000 --> 02:29:03,480
साहस करने का

2028
02:29:03,480 --> 02:29:07,760
साहस वो केवल इस प्रकार से होंगे क्या

2029
02:29:07,760 --> 02:29:13,760
क्या समझ आ से बात कर रहे है से बात कर रहे है

2030
02:29:26,000 --> 02:29:30,000
कॉल 15 कब समय लगा? फाइनल कॉल 17 कब

2031
02:29:30,000 --> 02:29:34,080
समय लगा? आप लोग जरा घूंघट में खोजिए तो फाइनल कॉल का क्या होता है? बताओ।

2032
02:29:34,080 --> 02:29:38,240
फाइनल कॉल लिखा है। चलिए फाइनल कॉल की बात है। अगर फाइनल कॉल

2033
02:29:38,240 --> 02:29:42,480
की बात है तो मैं इस फाइनल कॉल का कॉल का जो शब्द

2034
02:29:42,480 --> 02:29:46,480
है वो बुलाने की बजाय दूसरे उसमें मैं दिखा दूंगा। कहां-कहां पे

2035
02:29:46,480 --> 02:29:50,480
लिया गया है। वो एक अलंकार के रूप में भी हो सकता है।

2036
02:29:50,480 --> 02:29:54,640
कॉल जैसे हम लोग करते हैं। कहीं की चीज जो

2037
02:29:54,640 --> 02:29:58,880
है यूज़ कर लेते हैं। इसमें हो सकता है मैं कॉल शब्द का यूज़ दूसरे उसमें

2038
02:29:58,880 --> 02:30:03,120
दिखा दूंगा कि माय फाइनल कॉल है ना जिसका

2039
02:30:03,120 --> 02:30:07,120
बुलाने में नहीं हो रहा होगा ऐसा यूज़ कॉल का मैं दिखा दूंगा किया

2040
02:30:07,120 --> 02:30:11,280
जाता है। ठीक है। जैसे इतने तुम नहीं है सर

2041
02:30:11,280 --> 02:30:14,000
सबसे पहला वीडियो बनाया आप गौर करेंगे उसके बाद पहला जो बनाया सारी बात

2042
02:30:14,000 --> 02:30:18,000
सोशल मीडिया पर है और कमेंट बताया यहां पर चैट में जहां नहीं पता गाना सब इतने

2043
02:30:18,000 --> 02:30:23,200
तुम नहीं मुझे नहीं पता मैं तो तुमको प्लेयर पर इतनी बढ़िया तुमको

2044
02:30:23,200 --> 02:30:26,520
सामने वाला राहुल गांधी वाला

2045
02:30:26,520 --> 02:30:30,640
क्या मशराज वाला थंबनेल इसमें राज थंबनेल बना क्यों बनाए उसको कहते

2046
02:30:30,640 --> 02:30:34,640
है क्लिक आप चलाते हैं लोग सब जानते है क्लिक क्या होता है थंबनेल में

2047
02:30:34,640 --> 02:30:38,640
ऐसी बातों को लिखना ऐसा कुछ नहीं है मैंने मलेश राज चला

2048
02:30:38,640 --> 02:30:42,800
करके अप्रत्यक्ष रूप से यह बताने की कोशिश की थी कि इसमें जो

2049
02:30:42,800 --> 02:30:47,120
आपने विजय श्री के बारे में बोला है उससे संबंधित बातों

2050
02:30:47,120 --> 02:30:51,120
भी बातें भी उस वीडियो से संबंधित बातों के संबंध में भी बात

2051
02:30:51,120 --> 02:30:55,120
होने वाली है। यही तो बात है। दिक्कत यही

2052
02:30:55,120 --> 02:30:59,120
है कि तुम अपने पूर्वाग्रह के आधार पर चलते हो। शास्त्रों के आधार पर

2053
02:30:59,120 --> 02:31:03,280
नहीं चलते हो। यही दिक्कत है। हो सकता है तुमने

2054
02:31:03,280 --> 02:31:07,360
शौच शौचाचार इत्यादि में पारंगत हो। बहुत बढ़िया ध्यान रखते हो

2055
02:31:07,360 --> 02:31:11,360
अपने जीवन शैली में। मगर जो साध्य कोटि का धर्म का यह वाला जो भाग है

2056
02:31:11,360 --> 02:31:15,440
ना धर्माचरण उसकी बहुत कमी

2057
02:31:15,440 --> 02:31:19,520
है। सिद्धांतवादी नहीं है। उसमें

2058
02:31:19,520 --> 02:31:23,520
कि आप अपनी बात हम पर थोप रहे हैं। आपको ऐसा

2059
02:31:23,520 --> 02:31:28,240
लग रहा है कि वो क्लिकबेट के लिए है तो आपने बोला क्लिकबेट के लिए है।

2060
02:31:28,240 --> 02:31:29,200
मगर उसका दूसरा

2061
02:31:29,200 --> 02:31:33,760
अर्थ भी हो सकता है। हम वहां पर अप्रत्यक्ष रूप से आपको एक प्रतीकात्मक

2062
02:31:33,760 --> 02:31:37,840
आपसे जुड़ी हुई कोई चीज रख सकते हैं। उसका यह अर्थ भी उसमें यह

2063
02:31:37,840 --> 02:31:42,400
अर्थ भी हो सकता है कि देखो मलेचराज का प्रभाव कैसे बढ़ रहा है। लोग कैसे

2064
02:31:42,400 --> 02:31:46,480
गलतफहमियां पाल रहे हैं। यह अर्थ भी हो सकता है। मगर आपको तो क्लिकबेट

2065
02:31:46,480 --> 02:31:50,480
वाला अर्थ ही पकड़ना है। क्योंकि खुद धंधा कर रहे हो तो दूसरा भी धंधा करने

2066
02:31:50,480 --> 02:31:55,400
वाला दिखेगा। है ना? चलो इसका

2067
02:31:55,400 --> 02:31:59,080
मतलब लिखा जाता है ताकि

2068
02:31:59,080 --> 02:32:03,360
आपको। अच्छा मित्र एक बात मैं कहूं अगर तुमसे कि तुमने पूरी

2069
02:32:03,360 --> 02:32:07,360
मठ का पूरी मठ का नाम लिया है गोवर्धन मठ का नाम लिया तो क्लिकब के लिए लिया

2070
02:32:07,360 --> 02:32:13,360
है तुम कहोगे ना कि नहीं भैया हमने नहीं

2071
02:32:15,880 --> 02:32:20,000
लिया फाइनल कॉल के बारे में बात इनको प्रमाण देना

2072
02:32:20,000 --> 02:32:24,000
है और एक जो है वो कोई

2073
02:32:24,000 --> 02:32:30,000
और बात कही थी क्या मैंने इससे पहले कि हम उनको दे देंगे

2074
02:32:31,320 --> 02:32:37,320
हैं। नहीं नहीं नहीं लाइव पर आने की बात झूठ बोली

2075
02:32:39,160 --> 02:32:44,080
थी। हां वो प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं। वो तो देखा ही ना सबने।

2076
02:32:44,080 --> 02:32:48,240
मतलब इनको हमें ये देना है कि फाइनल जो कॉल शब्द

2077
02:32:48,240 --> 02:32:53,120
का उपयोग है वह अन्य अन्य उसमें भी किया जा सकता है। और ऐसा होता है

2078
02:32:53,120 --> 02:32:57,200
काव्यात्मक शैली में कई बार किसी शब्द को कहीं पर यूज़ कर

2079
02:32:57,200 --> 02:33:01,200
लिया जाता है।

2080
02:33:01,200 --> 02:33:06,040
तो इनको उससे प्रॉब्लम

2081
02:33:06,040 --> 02:33:10,480
और आने के बाद सबसे पहले हमने यही बताया ना

2082
02:33:10,480 --> 02:33:14,720
फाइनल कॉल मतलब मेरा क्या कहना है उस बारे में

2083
02:33:14,720 --> 02:33:18,720
कॉल का देखना जरा और क्या-क्या यूज़ हो सकता है कॉल शब्द का

2084
02:33:18,720 --> 02:33:23,200
यूज़ Google में करके देखो जरा अभी पता पता चलेगा

2085
02:33:23,200 --> 02:33:28,160
देखो कॉल शब्द का शब्द उपयोग जो है बुलाने की बजाय

2086
02:33:28,160 --> 02:33:32,320
और किसी संदर्भ में हो रहा हो तो वह निकालो उससे पूछो

2087
02:33:32,320 --> 02:33:36,800
जरा वो बताएगा उसको क्या कहते हैं ए आई हां

2088
02:33:36,800 --> 02:33:41,040
जो पूछो खत्म क्या चले सामान्य

2089
02:33:41,040 --> 02:33:45,120
सी बात करेंगे बना क्या खत्म हो जाएगी ये

2090
02:33:45,120 --> 02:33:49,120
तो क्लिक होते है ऐसे कहोगे तो ये वाले जो पंडित वाला था स्ट्रेटजी है

2091
02:33:49,120 --> 02:33:53,680
ताकि लोग अधिक पंडित वाला था

2092
02:33:53,680 --> 02:33:57,760
स्ट्रेटजी ताकि लोग अधिक हां तो वो कह रहे हैं विनोद चल

2093
02:33:57,760 --> 02:34:01,760
रहा है। है ना? श्री राम जी ने

2094
02:34:01,760 --> 02:34:05,920
जब सुपनखा आई थी कि मुझसे ब्याह कर लो या मेरे

2095
02:34:05,920 --> 02:34:10,080
को स्वीकार कर लो। तो श्री राम जी ने वहां कहा था तुम्हारे

2096
02:34:10,080 --> 02:34:14,320
लिए लक्ष्मण बहुत बढ़िया रहेंगे। लक्ष्मण से पूछ लो। और फिर लक्ष्मण

2097
02:34:14,320 --> 02:34:16,240
जी ने भी कहा था कि तुम्हारे

2098
02:34:16,240 --> 02:34:20,400
लिए श्री राम जी बहुत अच्छे रहेंगे। तो वास्तविकता में तो नहीं कह रहे थे। वो कह रहे

2099
02:34:20,400 --> 02:34:24,800
थे। विनोद कर रहे थे। विनोद किया था वो

2100
02:34:24,800 --> 02:34:29,120
राम विग्रह धर्म थोड़ा राम

2101
02:34:29,120 --> 02:34:33,360
को ही जान लो अच्छे से बस उतने से ही बहुत कुछ हो जाएगा। फिर आचार्यों से पूछपूछ

2102
02:34:33,360 --> 02:34:37,600
करके अपने जीवन में ये वो तो है ही तुम्हारे जीवन

2103
02:34:37,600 --> 02:34:43,600
में आ

2104
02:34:45,240 --> 02:34:51,240
गया

2105
02:34:51,880 --> 02:34:57,880
हम ठीक

2106
02:35:22,120 --> 02:35:26,640
हम ये देखो आखरी मौके के रूप में

2107
02:35:26,640 --> 02:35:31,520
फाइनल फाइनल कॉल लिखा हुआ है। ठीक है?

2108
02:35:31,520 --> 02:35:36,080
आखिरी मौके के रूप में आप लोगों को दिख पा रहा हो तो फाइनल कॉल

2109
02:35:36,080 --> 02:35:40,200
लिखा हुआ है

2110
02:35:40,200 --> 02:35:44,320
और बुलाने से भिन्न इसी और अर्थ में

2111
02:35:44,320 --> 02:35:48,400
फाइनल कॉल लिखा हुआ है। देखो मोमेंट ऑफ फाइनल डिसीजन

2112
02:35:48,400 --> 02:35:53,600
देखो देखो वो मेरा डिसीजन के उसमें था ना

2113
02:35:53,600 --> 02:35:57,840
क्या था? जब कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण निर्णय के अंतिम चरण

2114
02:35:57,840 --> 02:36:02,400
में होता है तो मैं वहां पर अपना फाइनल डिसीजन बता रहा था कि हां

2115
02:36:02,400 --> 02:36:06,480
मैं अब तुम्हें बुलाता हूं। ठीक है? वहां पर मैं

2116
02:36:06,480 --> 02:36:10,560
तुम्हें अपना डिसीजन दिखा रहा था ना अपना डिसीजन बताने वाला था

2117
02:36:10,560 --> 02:36:14,560
कि हां भैया मेरा फाइनल कॉल क्या है? उसके संबंध में तुम्हारे

2118
02:36:14,560 --> 02:36:19,520
वो लाइव डिस्कशन के इनविटेशन के संबंध में। तो देखो

2119
02:36:19,520 --> 02:36:23,680
यहां देखो मोमेंट ऑफ

2120
02:36:23,680 --> 02:36:28,280
फाइनल डिसीजन लो हो गया हो गया

2121
02:36:28,280 --> 02:36:32,400
चौपट इसलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं

2122
02:36:32,400 --> 02:36:36,480
टक्कर में पॉल शब्द का उपयोग दूसरे अर्थ में

2123
02:36:36,480 --> 02:36:40,720
भी हो सकता है बजाय इसके कि सिर्फ किसी को बुलाया जा रहा है हमने

2124
02:36:40,720 --> 02:36:44,800
वहां ये नहीं दिखाने का प्रयास किया था हो सकता है उसका वो अर्थ भी निकल रहा हो ऐसा कुछ

2125
02:36:44,800 --> 02:36:48,800
नहीं है। हमारी भावना यह थी कि हम अपना फाइनल वक्तव्य दे रहे हैं।

2126
02:36:48,800 --> 02:36:54,280
फाइनल डिसीजन दे रहे

2127
02:36:54,280 --> 02:36:58,480
हैं। हां अब यहां पे एक व्यक्ति पूछ रहा है तुमने जो कुतर्क

2128
02:36:58,480 --> 02:37:02,760
किया है उसके बारे में उसी को आधार बनाके पूछ रहा है। तो फिर इतने वीडियो

2129
02:37:02,760 --> 02:37:07,280
क्यों? अब वीडियो हम तुम्हारे उसमें प्रतिक्रिया दे रहे हैं ना। वो जो इनविटेशन

2130
02:37:07,280 --> 02:37:11,280
था उसके संबंध में हमारा जो आखरी डिसीजन था वो हमने दिया था उसमें।

2131
02:37:11,280 --> 02:37:15,360
बताया था कि अब हम तैयार है और आगे भी रहेंगे। बता दिया। अब तो तुम जो

2132
02:37:15,360 --> 02:37:19,440
प्रतिक्रिया करते रहोगे उस पीछे चलते रहेंगे। अब आगे तो मैंने

2133
02:37:19,440 --> 02:37:24,000
यह सोच लिया है कि तुम डेली एक वीडियो बनाना। मैं आऊंगा जब यहां पर अपने

2134
02:37:24,000 --> 02:37:28,000
कार्य क्षेत्र में तो सबसे पहले आगे तुम्हारा ऑन करूंगा लाइव और फिर चालू हो

2135
02:37:28,000 --> 02:37:32,080
जाऊंगा। डेली एक घंटे का वीडियो निगराचार्य के उत्तर में या फिर

2136
02:37:32,080 --> 02:37:36,720
आ जाना। सिद्ध करना तुमने जो जो बातें कही है

2137
02:37:36,720 --> 02:37:41,120
विजय श्री के बारे में और मठ के बारे में वह बातें सिद्ध करना तुम

2138
02:37:41,120 --> 02:37:45,920
और फिर बताना अपनी परंपरा तुम कहां से हुए हो निग्राचार

2139
02:37:45,920 --> 02:37:50,440
ठीक

2140
02:37:50,440 --> 02:37:54,480
है तो क्या है कॉल शब्द का उपयोग दूसरे अर्थ में भी

2141
02:37:54,480 --> 02:37:58,560
हो सकता है पहली बात अरे तुम्हारे कैसे लोग हैं टॉपिक चेंज करने

2142
02:37:58,560 --> 02:38:02,640
वाले विषय अंतर्गत हां तुम्हारे लोग हैं तो भैया वो तो करेंगे ही तुम उसमें

2143
02:38:02,640 --> 02:38:06,960
उस्ताद हो विषयंतर करने में तो कॉल

2144
02:38:06,960 --> 02:38:11,120
शब्द का उपयोग अन्य उसमें भी हो सकता है। डिसीजन के रूप में वहां पर दिया गया

2145
02:38:11,120 --> 02:38:15,360
है। डिसीजन के रूप में कॉल शब्द का उपयोग करते हैं। होता है। अब

2146
02:38:15,360 --> 02:38:19,960
मेरी अंग्रेजी तुम्हारे इतनी सशक्त नहीं है। मगर मैंने ऐसा सुना

2147
02:38:19,960 --> 02:38:24,000
था। अ ऐसा मेरे स्मरण में था तो

2148
02:38:24,000 --> 02:38:28,240
मैंने ऐसा उसको बनाया। फाइनल कॉल ऑन। अच्छा

2149
02:38:28,240 --> 02:38:32,320
वहां पर देखिए एक बात और है क्या है मेरा वो थंबनेल जरा चेक

2150
02:38:32,320 --> 02:38:36,400
करना क्या थंबनेल है मेरा एक बात और है पकड़ने की मीमांसा करो ना

2151
02:38:36,400 --> 02:38:40,480
यार बिल्कुल सूक्ष्म तरीके से देखो लेंस लगा के देखो नजर आएगी

2152
02:38:40,480 --> 02:38:44,480
दुनिया में अच्छाई दुनिया में अच्छाई नजर

2153
02:38:44,480 --> 02:38:50,480
आने लगेगी मेरे भाई क्या लिखा है यहां पर

2154
02:38:53,280 --> 02:38:57,440
यहां लिखा है फाइनल कॉल कॉल

2155
02:38:57,440 --> 02:39:01,440
फॉर लाइव डिस्कशन। हां, ठीक है।

2156
02:39:01,440 --> 02:39:05,600
इसमें वो इनविटेशन शब्द नहीं लिखा है। कोई बात नहीं। मगर जो कॉल

2157
02:39:05,600 --> 02:39:09,840
शब्द का उपयोग है वो जो है उपयोग हो सकता है डिसीजन

2158
02:39:09,840 --> 02:39:14,000
के रूप में कि फाइनल डिसीजन क्या है? तो मेरा फाइनल कॉल क्या होगा? मैं

2159
02:39:14,000 --> 02:39:18,800
क्या कहूंगा? तो क्योंकि मैंने अभी तक यह सब नहीं

2160
02:39:18,800 --> 02:39:22,960
अभी तक कुछ और कहा था और मैं अब कुछ और कहने वाला था और जो यह वह कहने वाला था

2161
02:39:22,960 --> 02:39:27,200
जिससे मैं अगर तुमने कोई और ऐसी स्थिति

2162
02:39:27,200 --> 02:39:31,360
ना पैदा कर दी कि भैया तुमने बिल्कुल ही कुछ ऐसा कार्य कर दिया कि फिर तो जान के

2163
02:39:31,360 --> 02:39:35,360
दुश्मनी हो गए कि अब तो जो है कुछ नहीं अब तो तलवारें चलनी

2164
02:39:35,360 --> 02:39:39,520
चाहिए। अगर ऐसी स्थितियां नहीं जान दी तो मेरा अब यही कॉल रहेगा

2165
02:39:39,520 --> 02:39:43,520
कि आओ चर्चा करो भाई। मगर तुमने यहां

2166
02:39:43,520 --> 02:39:47,520
पर भी अपना अब इसको कहेंगे अल्पज्ञता

2167
02:39:47,520 --> 02:39:52,040
के आधार पर जो

2168
02:39:52,040 --> 02:39:56,080
है निर्णय दे दिया कि कॉल शब्द का अर्थ ही होता है बुलाना

2169
02:39:56,080 --> 02:40:00,080
नहीं अरे वो तो जब सबको मालूम ही है कि तुमने ही हमको पहले

2170
02:40:00,080 --> 02:40:04,400
बुलाया है हां तो फिर क्यों हम ये बताएंगे

2171
02:40:04,400 --> 02:40:10,400
वहां पर कि हम तुम्हें बुला रहे हैं दिमाग खराब है बिल्कुल

2172
02:40:18,320 --> 02:40:22,720
तो तुम जैसा चलते हो तुम जैसा करते हो वैसा हम लोग करें ये कहां लिखा है

2173
02:40:22,720 --> 02:40:26,880
ये कोई बात है क्या कि तुम जो जो जिसज तरीके का तुम

2174
02:40:26,880 --> 02:40:30,880
थंबनेल लगा रहे हो वैसा ही थंबनेल हम लगाएं भाई हमारा थंबनेल कुछ

2175
02:40:30,880 --> 02:40:35,600
और होता है इससे क्या मतलब है

2176
02:40:35,600 --> 02:40:39,680
हां मगर हमने हमारा वहां मलेच्छराज लिखने का क्या कारण

2177
02:40:39,680 --> 02:40:43,680
था वह हमने बता अब वो तुम्हारा तुम अपने पूर्वाग्रह से ग्रसित हो

2178
02:40:43,680 --> 02:40:47,680
तो उसमें हम क्या कर सकते हैं या तो सनातन सिद्धांत दे दो

2179
02:40:47,680 --> 02:40:52,400
के लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य जो कहेंगे

2180
02:40:52,400 --> 02:40:56,640
वही मान्य होगा बस चाहे शास्त्रों में लिखा हो या ना लिखा हो जहां

2181
02:40:56,640 --> 02:41:01,320
शास्त्र का संदर्भ देना होगा वहां नहीं दोगे खूब भूमिका बनाओगे

2182
02:41:01,320 --> 02:41:05,520
वहां तो नहीं था लेकिन क्या हमारे पति पत्नी के शास्त्रीय

2183
02:41:05,520 --> 02:41:11,080
संबंध और मर्यादा उसी विषय में बदल नहीं सकता लेकिन

2184
02:41:11,080 --> 02:41:15,120
दिया कोई नहीं बैठे दिया लोग उसको

2185
02:41:15,120 --> 02:41:19,120
देखने हां लोग आके देखे उसको सुने वो लोग

2186
02:41:19,120 --> 02:41:23,120
जो तुम्हें जानते हैं और जिन्होंने तुम्हारा वो वीडियो देखा है हमें यह

2187
02:41:23,120 --> 02:41:27,120
भी नहीं मालूम था अब तुमने यहां पे आरोप लगाया है क्लिकबेट का ठीक है चलो

2188
02:41:27,120 --> 02:41:31,760
इसकी मीमांसा करते हैं अब पोस्टमार्टम करते हैं तुमने आरोप क्या लगाया

2189
02:41:31,760 --> 02:41:33,440
कि क्लिकबेट तो इसके

2190
02:41:33,440 --> 02:41:37,520
लिए यह पहले सिद्ध होना चाहिए कि हमें यह पता है कि नहीं कि वो

2191
02:41:37,520 --> 02:41:41,800
तुम्हारा जो है मलेच राज वाला जो शब्द है वह ट्रेंडिंग में

2192
02:41:41,800 --> 02:41:46,080
है। यह भी होना चाहिए ना। अब यह किससे किस प्रकार

2193
02:41:46,080 --> 02:41:50,320
सिद्ध होगा कि हमको मालूम है कि नहीं कि मलेच राज वाला शब्द जो है

2194
02:41:50,320 --> 02:41:54,880
ट्रेंडिंग में है। और फिर तुम तो कहते हो ना कि जो

2195
02:41:54,880 --> 02:41:58,880
क्या कहते हैं हम हमारा जो है प्रोत्साहन करते हो ना

2196
02:41:58,880 --> 02:42:03,040
तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है? अगर अगर उसमें वो क्लिकबेट के रूप में भी

2197
02:42:03,040 --> 02:42:07,520
यूज़ हो रहा है तो तुम्हारा खंडन तो नहीं हो रहा है ना? क्लिकबेट से

2198
02:42:07,520 --> 02:42:13,520
क्लिक क्लिकबेट की अगर बात है तो तुम्हें क्या दिक्कत हो रही है उससे?

2199
02:42:15,360 --> 02:42:19,440
अब देखो तुम्हारे लोग जो है थोड़ा ठंडे पड़ने लगे हैं तो अब बात कर रहे हैं कि हम

2200
02:42:19,440 --> 02:42:23,440
आपके शुभचिंतक हैं और मठ की स्थिति पता करने की कोशिश

2201
02:42:23,440 --> 02:42:27,720
करें तो क्या तुम हमसे ज्यादा शुभचिंतक

2202
02:42:27,720 --> 02:42:33,400
हो? मठ की स्थिति हमसे ज्यादा तुम्हें मालूम है तो तुम बता दो आकर

2203
02:42:33,400 --> 02:42:37,360
के। हम

2204
02:42:37,360 --> 02:42:41,360
और अगर तुमने स्थिति पता नहीं अच्छा मैं कहूं तुम निग्रचार की स्थिति

2205
02:42:41,360 --> 02:42:45,480
जरा जाकर पता कर लो हम आपके शुभचिंतक हैं तो तुम क्या

2206
02:42:45,480 --> 02:42:49,680
कहोगे कि हमें पता है वो ठीक है मैं

2207
02:42:49,680 --> 02:42:53,840
कह रहा हूं वहां छत पर देखो सामने बकर्रा आ गया है तेंदुआ

2208
02:42:53,840 --> 02:42:57,840
आ गया है खा जाएगा निगराचार्य को स्थिति पता कर लो मैं तुम्हारा शुभचिंतक

2209
02:42:57,840 --> 02:43:02,240
हूं क्या कहोगे बकवास बातें करवा लो बस

2210
02:43:02,240 --> 02:43:06,240
दो पांच मिनट के खिलाड़ी हो तुम जो ये बातें कर सत्य से

2211
02:43:06,240 --> 02:43:10,880
करा सत्य के आसपास लिखा है कभी लेकिन नहीं शब्द का पता है एल्गोरिथम कहां पर

2212
02:43:10,880 --> 02:43:16,880
ये जो शब्द का प्रयोग जैसे इसने किया वैसे फाइनल शब्द का इसने प्रयोग

2213
02:43:17,320 --> 02:43:22,080
किया सुन लीजिए आप लाइक एयरपोर्ट क्लोजिंग टाइम

2214
02:43:22,080 --> 02:43:26,080
समथिंग फॉर द फाइनल अनाउंसमेंट समथिंग एल्स मुझे लगता है कि इनका एआई

2215
02:43:26,080 --> 02:43:30,240
कम जानता है

2216
02:43:30,240 --> 02:43:34,240
एयरपोर्ट फाइनल कॉल लास्ट कॉल ऑफ चेंज फाइनल कॉल मीन्स

2217
02:43:34,240 --> 02:43:38,240
द लास्ट चांस फॉर कस्टमर्स टू वाटर ड्रिंक्स बिफोर द प्रोसेस बिफोर डिसिशन को लेने से पहले दिया

2218
02:43:38,240 --> 02:43:42,960
गया अंतिम अवसर। हालांकि गूगल ने इसमें फाइनल कॉल या 12 तारीख अपनी अनुसार बता दिया

2219
02:43:42,960 --> 02:43:46,960
था लेकिन फिर भी फाइनल कॉल का अर्थ फाइनल डिसीजन नहीं होता है। फाइनल कॉल का अर्थ

2220
02:43:46,960 --> 02:43:51,040
होता है निर्णय लेने से पहले दिया गया अंतिम बुलावा अवसर। देखो आप निर्णय लेना है। अभी

2221
02:43:51,040 --> 02:43:55,040
भी तुम्हारे पास अंतिम अवसर है लेकिन एक मिनट अंतिम

2222
02:43:55,040 --> 02:43:59,160
डिसीजन वाला होता है कि नहीं? दिखा

2223
02:43:59,160 --> 02:44:03,600
दें। तो कर सकते हो। तो प्रकाश ये होता है। इसको ज्यादा समझाए। शुद्धि

2224
02:44:03,600 --> 02:44:07,760
होगी मेरे फाइनल कॉल का क्या कर रहा है? फाइनल डिसीजन है नपोसिद्ध है। ऐसे शब्दों को

2225
02:44:07,760 --> 02:44:11,920
ला रहा है। ये भी प्रकार का निगम स्थान हो सकता है यहां पर इसको ये सब अभी ज्ञात होते हैं क्योंकि

2226
02:44:11,920 --> 02:44:15,920
फाइनल कॉल का होता ही है। अंकुर आ रहा है नहीं आ रहा है क्या है बता फाइनल कॉल

2227
02:44:15,920 --> 02:44:20,320
का फाइनल फाइनल कॉल फाइनल डिस्क लगा सामान्य शब्द शब्द का

2228
02:44:20,320 --> 02:44:24,400
बोल रहे हैं। देखो यहां पर चैट जीपीटी में ही लिखा है कि फाइनल कॉल का

2229
02:44:24,400 --> 02:44:28,640
अर्थ यह भी हो सकता है। क्या हो सकता है? क्या

2230
02:44:28,640 --> 02:44:32,640
हो सकता है? लिखा है जब कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण निर्णय के अंतिम

2231
02:44:32,640 --> 02:44:38,640
चरण में होता है।

2232
02:44:48,000 --> 02:44:52,160
और मैं जो कुछ प्रसिद्ध चीजों में इसकी

2233
02:44:52,160 --> 02:44:56,400
उपयोगिता की गई होगी उसको ढूंढो

2234
02:44:56,400 --> 02:45:02,400
जरा और संतुष्टिजनक उदाहरण मिल

2235
02:45:04,680 --> 02:45:08,800
पाए। देखिए इसमें दो चीजों को स्थिति

2236
02:45:08,800 --> 02:45:12,960
की गंभीरता फाइनल कॉल का जो है स्थिति

2237
02:45:12,960 --> 02:45:18,720
की गंभीरता और अंतिम अवसर तो स्थिति की गंभीरता

2238
02:45:18,720 --> 02:45:23,400
को प्रकट करने के लिए भी फाइनल कॉल का उपयोग हो सकता

2239
02:45:23,400 --> 02:45:27,840
है। तो हम स्थिति की गंभीरता बताने जा रहे हैं।

2240
02:45:27,840 --> 02:45:31,920
ठीक है? और आगे अंतिम जो अवसर है वह भी

2241
02:45:31,920 --> 02:45:36,600
एक ऑप्शन

2242
02:45:36,600 --> 02:45:40,640
है। इसी परियोजना योजना का या प्रक्रिया

2243
02:45:40,640 --> 02:45:44,800
के अंतिम चरण को भी फाइनल कॉल कहा जा सकता है। यह देखो।

2244
02:45:44,800 --> 02:45:48,280
यानी कि

2245
02:45:48,280 --> 02:45:52,560
बुलावा आवश्यक नहीं है कि कॉल का उपयोग जो है बुलावे

2246
02:45:52,560 --> 02:45:56,560
में ही लिया हो और यह कहा जा सकता

2247
02:45:56,560 --> 02:46:00,560
है चलो उसको देखो मिल जाए तो यह भी यह भी तो सोच सकते

2248
02:46:00,560 --> 02:46:04,720
हो कि इसको अंग्रेजी की नहीं ज्ञान होगा इसलिए इसने लिख

2249
02:46:04,720 --> 02:46:08,800
दिया सिंपल यह भी तो मुझे बेनिफिट ऑफ डाउट

2250
02:46:08,800 --> 02:46:13,040
दे सकते हो जैसे कि तुमने शुरू में जब अपनी पहली वाली

2251
02:46:13,040 --> 02:46:17,120
लाइव शुरू की थी तो क्या कहते हैं? मैंने

2252
02:46:17,120 --> 02:46:21,120
जैसे मैं जैसे मैंने तुम्हें बेनिफिट ऑफ डाउट दिया कि तुमने अपनी वह लाइक किस-किस ने

2253
02:46:21,120 --> 02:46:25,600
किया है। तुमने चेक नहीं किया है। तुम्हें नहीं पता है। मैं तो

2254
02:46:25,600 --> 02:46:30,560
यह सोचूंगा ये कहूं कि नहीं तुम्हें पता था और तुमने जो है मना किया।

2255
02:46:30,560 --> 02:46:35,360
तो बेनिफिट ऑफ डाउट दे दो कि हो सकता है मैं उस कॉल शब्द का उपयोग

2256
02:46:35,360 --> 02:46:41,360
अन्य रूप से हो सकता है कि नहीं। उस पर भी भड़ रहे हो।

2257
02:46:41,800 --> 02:46:46,400
भड़ो जो प्रतिज्ञा सन्यास और तरी

2258
02:46:46,400 --> 02:46:52,400
क्या समझ आएगा दूसरे प्रोजेक्ट के पास आपको जाना है

2259
02:46:56,760 --> 02:47:00,960
हम देखो यहां पे लिखा है निर्णय

2260
02:47:00,960 --> 02:47:04,440
या अवसर का

2261
02:47:04,440 --> 02:47:08,560
निर्णय निर्णय या अवसर का दूसरा नंबर पर्याप्त है इसके

2262
02:47:08,560 --> 02:47:12,560
लिए निर्णय या अवसर का अंतिम मौका फाइनल कॉल का उपयोग हुआ

2263
02:47:12,560 --> 02:47:16,720
है और ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। इसमें दोष भी हो सकता है कि मैंने ऐसा

2264
02:47:16,720 --> 02:47:20,800
सोचा कि कॉल का उपयोग दूसरी जगह भी हो सकता है। कोई वो नहीं है।

2265
02:47:20,800 --> 02:47:22,960
मगर

2266
02:47:22,960 --> 02:47:27,280
यहां पर उपयोग हो रहा है। निर्णय या

2267
02:47:27,280 --> 02:47:31,600
निर्णय या अवसर निर्णय या

2268
02:47:31,600 --> 02:47:35,840
या अवसर का अंतिम मौका। हां। तो

2269
02:47:35,840 --> 02:47:40,000
लास्ट मोमेंट जो मैंने लास्ट मोमेंट था मेरा जो निर्णय का वो

2270
02:47:40,000 --> 02:47:44,880
था वो जिसमें मैंने बताया कि मैं तैयार हूं। अब

2271
02:47:44,880 --> 02:47:49,600
एनी टाइम एनीवेयर एनीबडी वाले मामले

2272
02:47:49,600 --> 02:47:53,920
तो मैंने वह बताया निर्णय या अवसर

2273
02:47:53,920 --> 02:47:57,040
का अंतिम मौका तो मैंने निर्णय के अंतिम

2274
02:47:57,040 --> 02:48:01,120
मौके को इंगित किया था और वो कोई इतना उसमें

2275
02:48:01,120 --> 02:48:05,760
विरोध लड़ाई की बात नहीं है हो सकता है कि भाई

2276
02:48:05,760 --> 02:48:09,760
मैंने ऐसा सुना है कि कॉल शब्द का उपयोग भी सुना था

2277
02:48:09,760 --> 02:48:13,840
और यहां पर दिखा भी रहे है कॉल शब्द का उपयोग हुआ कहीं

2278
02:48:13,840 --> 02:48:19,840
पर कई जगहों पर और यहां चैट जीपीटी भी बताया ही जा रहा है। ठीक है?

2279
02:48:21,240 --> 02:48:25,360
चलो कई तीन साल का 300 साल तो नहीं कहा हो सकता है जैसे ये

2280
02:48:25,360 --> 02:48:28,280
लोग शब्द

2281
02:48:28,280 --> 02:48:32,640
कहा नहीं होगा।

2282
02:48:32,640 --> 02:48:36,800
कई 350 साल 350 साल तो नहीं रहा। हो सकता है जैसे ये लोग शब्द का अपने अनुसार

2283
02:48:36,800 --> 02:48:40,800
बता देते हैं। अब ये क्या करना है? समाजवादी बात कर भाई। समाज लोग शब्द का भी सही बता देते

2284
02:48:40,800 --> 02:48:45,040
हैं। हमने अर्थ नहीं बदला। हमने सीधे कहा कि हम जो

2285
02:48:45,040 --> 02:48:49,200
आचार्य कुछ ऐसी वाणी बोल रहे हैं जो उनके

2286
02:48:49,200 --> 02:48:53,600
अनुगत होने वाले लोगों के लिए ही है।

2287
02:48:53,600 --> 02:48:57,760
शंकराचार्य शंकराचार्य इसलिए नहीं है कि उन्होंने

2288
02:48:57,760 --> 02:49:02,320
भविष्यवाणी की है सा वर्ष में हिंदू राष्ट्र की या उन्होंने बताया कि मधुमक्खी

2289
02:49:02,320 --> 02:49:05,920
की सेना है।

2290
02:49:05,920 --> 02:49:10,320
ठीक है? शंकराचार्य शंकराचार्य इसलिए है क्योंकि वह शंकर परंपरा के प्रामाणिक आचार्य

2291
02:49:10,320 --> 02:49:14,360
होते हैं। लक्षण संपन्न सन्यासी होते

2292
02:49:14,360 --> 02:49:18,400
हैं। तमस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा

2293
02:49:18,400 --> 02:49:22,560
देने वाले होते हैं। अपने

2294
02:49:22,560 --> 02:49:26,960
शिष्य का संशय दूर कर देने वाले होते हैं।

2295
02:49:26,960 --> 02:49:31,200
यदि आपको उनकी इस वाणी से वाणी से कोई दिक्कत है, कोई संशय है तो जाके

2296
02:49:31,200 --> 02:49:35,360
पूछ लीजिए। हम तो लड़ने मरने नहीं जा रहे इसलिए कि शंकराचार्य

2297
02:49:35,360 --> 02:49:40,000
ने सा वर्ष की भविष्यवाणी की है। इसको मानो मानो मानो।

2298
02:49:40,000 --> 02:49:44,160
हम तो नहीं जा रहे इसके लिए लड़ने। पहले शंकराचार्य को शंकराचार्य मानो। उसके

2299
02:49:44,160 --> 02:49:48,400
बाद देखो उनकी वाणी में तुम्हारी निष्ठा हो रही है कि नहीं हो रही है। अगर नहीं हो रही तुम

2300
02:49:48,400 --> 02:49:52,400
चले जाओ भैया। शंकराचार्य

2301
02:49:52,400 --> 02:49:57,440
को शंकराचार्य मानने के लिए तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र की भविष्यवाणी आवश्यक नहीं है।

2302
02:49:57,440 --> 02:50:01,840
ठीक है? तो हम शंकराचार्य का प्रचार करते हैं। और

2303
02:50:01,840 --> 02:50:07,400
आवश्यकता पड़ने पर जहां पर उसकी उपयोगिता होती है वहां पर बोलते भी

2304
02:50:07,400 --> 02:50:11,440
है। तो शंकराचार्य का प्रचार हम इस आधार पे शंकर

2305
02:50:11,440 --> 02:50:15,600
मठ का प्रचार शंकर संप्रदाय का प्रचार हम इस आधार पे नहीं करते हैं

2306
02:50:15,600 --> 02:50:20,240
कि उन्होंने वह जो है सा वर्ष की जो है अवधि दी है।

2307
02:50:20,240 --> 02:50:21,040
इस रूप इस

2308
02:50:21,040 --> 02:50:25,360
आधार पे हम प्रचार नहीं करते। ये उनके

2309
02:50:25,360 --> 02:50:29,360
लिए होती है ये बातें जो उनके प्रति श्रद्धावान है। उन्होंने

2310
02:50:29,360 --> 02:50:33,440
बताया भी है वो तीन का मतलब क्या है? मैंने ठीक से समझा नहीं है

2311
02:50:33,440 --> 02:50:37,440
और आचार्य की वाणी है वह जाकर के आप उनसे पूछ सकते हैं मिल

2312
02:50:37,440 --> 02:50:41,600
सकते हैं और मैं भी पूछूंगा कि तीन वर्ष का अर्थ क्या लिया था आपने

2313
02:50:41,600 --> 02:50:45,680
उन्होंने किसी वीडियो में बोला है तो मैंने यह नहीं बोला है

2314
02:50:45,680 --> 02:50:49,760
जो तुम आर्य समाज से मेल खाने वाला मुझे बता रहे हो कि शब्द का अर्थ ही

2315
02:50:49,760 --> 02:50:54,680
बदल दिया से करते करते संयम को उसी प्रकार के

2316
02:50:54,680 --> 02:50:58,720
कारण बुलाया है अच्छा ठीक है हम आगे सुनते

2317
02:50:58,720 --> 02:51:02,800
है खैर यहां पर कॉल का अर्थ हमने दिखा दिया है।

2318
02:51:02,800 --> 02:51:07,320
निर्णय या अवसर का अंतिम मोमेंट। ठीक

2319
02:51:07,320 --> 02:51:11,360
है? निर्णय या अवसर का अंतिम मोमेंट।

2320
02:51:11,360 --> 02:51:17,320
कॉल का

2321
02:51:17,320 --> 02:51:22,960
अर्थ। चलो।

2322
02:51:22,960 --> 02:51:27,040
और अगर हिंदू राष्ट्र की बात करें तो नेपाल

2323
02:51:27,040 --> 02:51:31,120
में देखिए क्या-क्या हो रहा है। चीजें हो रही हैं। और फिर सबसे

2324
02:51:31,120 --> 02:51:36,000
बड़ी बात है कि इससे तुम्हें दिक्कत क्या हुई? भाई देखो अगर

2325
02:51:36,000 --> 02:51:40,080
आर्य समाज यह कहेगा कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। इससे

2326
02:51:40,080 --> 02:51:46,080
दिक्कत यह होगी कि व्यक्ति की मूर्ति पूजा में निष्ठा

2327
02:51:46,680 --> 02:51:51,040
टूटेगी। व्यक्ति की क्या कहते हैं?

2328
02:51:51,040 --> 02:51:55,200
क्या कहते मंदिरों जिनमें मूर्तियां है उनको बचाने की निष्ठा टूटेगी और

2329
02:51:55,200 --> 02:51:59,200
सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्रतिष्ठा ना हो पाने के कारण जो अंतःकरण

2330
02:51:59,200 --> 02:52:03,360
में जो निष्ठा होनी चाहिए भगवान के प्रति विश्वास होना चाहिए वो नहीं बनेगा धर्म

2331
02:52:03,360 --> 02:52:07,440
के प्रति तो वहां तो ये दिक्कत हो रही है मगर गुरुदेव भगवान की

2332
02:52:07,440 --> 02:52:11,440
ये वाणी जो है सा वर्ष की वो

2333
02:52:11,440 --> 02:52:15,760
उन्होंने कही है वह आगे भविष्य में सिद्ध होगी या नहीं होगी उसके कारण क्या प्रभाव

2334
02:52:15,760 --> 02:52:21,200
होगा इससे धर्म ब्रह्म को क्या प्रभाव पड़ जाएगा व्यक्ति को

2335
02:52:21,200 --> 02:52:25,840
जो उनके प्रति निष्ठावान है वह कुछ ना कुछ अपना ढूंढ ही लेंगे संतुष्टि

2336
02:52:25,840 --> 02:52:29,840
और जो उनके प्रति निष्ठावान नहीं है वो इस के कारण निष्ठावान

2337
02:52:29,840 --> 02:52:32,480
होने वाले नहीं है।

2338
02:52:32,480 --> 02:52:36,720
तो इससे इससे रिलेशन क्या है हमारे धर्म प्रचार का

2339
02:52:36,720 --> 02:52:42,720
वो समझ में नहीं आया। इसमें जो है ना इसमें

2340
02:52:53,000 --> 02:52:57,240
चलो फिर के

2341
02:52:57,240 --> 02:53:01,640
लिए क्या

2342
02:53:01,640 --> 02:53:06,160
किसी बिना सोचे समझे सामने वाले समझे सामने वाले का जाओ

2343
02:53:06,160 --> 02:53:12,160
जल्दी जाओ

2344
02:53:15,480 --> 02:53:21,480
रिलेशनशिप बॉडी

2345
02:53:27,720 --> 02:53:31,760
से ये देखो मिल गया।

2346
02:53:31,760 --> 02:53:35,840
ठीक है? ये देखो

2347
02:53:35,840 --> 02:53:38,920
क्या लिखा है?

2348
02:53:38,920 --> 02:53:43,120
निर्णय घोषणा के संदर्भ में और

2349
02:53:43,120 --> 02:53:47,240
उदाहरण भी दिया है। मैच में

2350
02:53:47,240 --> 02:53:51,640
आउट देने का कॉल अंपायर का

2351
02:53:51,640 --> 02:53:56,080
था। अब अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। लो

2352
02:53:56,080 --> 02:54:00,160
हो गया बंटादार। इसीलिए हम कार्य

2353
02:54:00,160 --> 02:54:04,360
वही करते हैं जो ठोस होता

2354
02:54:04,360 --> 02:54:08,640
है। अब क्या हुआ? हो गया।

2355
02:54:08,640 --> 02:54:12,880
कॉल शब्द का उपयोग हो गया ना और अंतिम अंतिम कॉल भी तुम्हारा

2356
02:54:12,880 --> 02:54:17,600
है। लो फाइनल कॉल भी हो गया वहां।

2357
02:54:17,600 --> 02:54:22,000
ठीक है? चलो भाई यह भी अच्छा हुआ।

2358
02:54:22,000 --> 02:54:26,160
मिल गया। खैर इसमें वैसे बेनिफिट ऑफ डाउट दिया जा सकता था। इससे कोई इतनी बड़ी

2359
02:54:26,160 --> 02:54:30,480
भारी वो नहीं है कि मेरी अंग्रेजी में अल्पज्ञता है तो मैंने ही लिख दिया होगा

2360
02:54:30,480 --> 02:54:34,560
डिसीजन के संबंध में। मगर तुम उसमें भी कह रहे हो कि इसने वह क्लिकबेट

2361
02:54:34,560 --> 02:54:38,560
बनाई। लोगों को यह दिखाना चाहा कि मैं बुला रहा

2362
02:54:38,560 --> 02:54:44,560
हूं तुमको। अरे मैं क्यों दिखाऊंगा जब लोगों को पता है कि तुमने मुझे पहले दिखाया

2363
02:54:55,080 --> 02:54:59,520
है। रिलेशन नहीं है मगर आप ज्यादा अकाट अकाट

2364
02:54:59,520 --> 02:55:03,600
अरे भाई तो हम हम कब किस बारे में कह रहे हैं और

2365
02:55:03,600 --> 02:55:08,240
तुम लाइव आ जाओ ना फॉर्म भर दो लाइव आ जाओ

2366
02:55:08,240 --> 02:55:12,400
तुमको लगता है कि तुम सत्य के पक्षधर हो माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध

2367
02:55:12,400 --> 02:55:13,520
पिलाया है तो

2368
02:55:13,520 --> 02:55:17,520
प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करो अन्यथा मुंगेरी लाल

2369
02:55:17,520 --> 02:55:19,840
के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए

2370
02:55:19,840 --> 02:55:23,440
वो

2371
02:55:23,440 --> 02:55:27,760
भाई जब हम ऐसे पहली बात तो यह है कि कई चीजें ऐसी

2372
02:55:27,760 --> 02:55:32,000
है जिसमें हम उनके वैचारिक वो नहीं है। एकता

2373
02:55:32,000 --> 02:55:36,000
नहीं है वैचारिक फिर भी हम लोग शांत है एक दूसरे को लेकर के नहीं बोल रहे

2374
02:55:36,000 --> 02:55:40,000
हैं क्योंकि वर्णाश्रमी है क्योंकि अमुक अमुक चीजें हैं।

2375
02:55:40,000 --> 02:55:44,080
मगर जब भी किसी बात पे यदि अटकेगा मामला तो दूसरी बातें

2376
02:55:44,080 --> 02:55:48,080
सारी खुद खुद डाली जाएगी। तो तुमने क्योंकि हमें ये

2377
02:55:48,080 --> 02:55:52,160
कैसे पूछ लिया तो अब हम ये सारी चीजें खोल देंगे। सारे विषय खोल देंगे। मगर उस

2378
02:55:52,160 --> 02:55:57,120
पर बात नहीं करेंगे। उसको सिद्ध नहीं करेंगे। क्यों भाई उसको ही सिद्ध करो ना

2379
02:55:57,120 --> 02:56:01,280
और अगर दूसरी कुछ चीजें हैं जिन पर तुम्हें लगता है कि वह अकाट नहीं है तुम उनको

2380
02:56:01,280 --> 02:56:05,440
बोल सकते हो तो इसका मतलब तुम्हें छूट मिल गई है कुछ भी अपने मन से बोलने

2381
02:56:05,440 --> 02:56:09,600
के लिए और हमने बोला है तो तुमको दिक्कत होगी जान दियो जान

2382
02:56:09,600 --> 02:56:13,760
भी करोगे जो तुम्हें छूट मिल गई है अगर अगर कुछ

2383
02:56:13,760 --> 02:56:17,760
ऐसे मामले हैं जो अभी सुलझना बाकी है और जो कि इतना धर्म और ब्रह्म

2384
02:56:17,760 --> 02:56:23,200
से वो उसका कोई ऐसा कुछ खास वो नहीं है।

2385
02:56:23,200 --> 02:56:27,200
ठीक है? मगर तुम्हें लगता है कि ऐसे कुछ ऐसे मामले हैं

2386
02:56:27,200 --> 02:56:31,880
जिन पर बात जो अभी जो है ठोस रूप से जिन पर बात नहीं हुई है।

2387
02:56:31,880 --> 02:56:34,960
मगर क्योंकि उन बातों पर हम कुछ

2388
02:56:34,960 --> 02:56:39,040
नहीं बोल रहे हैं तो इसलिए तुमको छूट मिल गई है। उन बातों पर तुम कुछ नहीं बोल

2389
02:56:39,040 --> 02:56:43,120
रहे तो तुम्हें छूट मिल गई है कि अब तुम कुछ भी बोलते रहो। भाई जिसमें तुमसे

2390
02:56:43,120 --> 02:56:47,280
अकाट्य चीजें मांगी गई उसमें तो अकाट्य चीजें दो। तुम

2391
02:56:47,280 --> 02:56:51,760
विषयंतर करोगे। अगर तुम्हें लगता है कि गुरुदेव

2392
02:56:51,760 --> 02:56:55,760
ने कुछ ऐसी बात बोली है जो अकाट नहीं है तो इसका मतलब तुम्हें अकाट

2393
02:56:55,760 --> 02:57:00,480
बोलने की छूट मिल गई क्या? अकाट के बिना बोलने की छूट मिल गई।

2394
02:57:00,480 --> 02:57:04,480
हमारे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध होगा क्या?

2395
02:57:04,480 --> 02:57:08,560
तुम तो अपने आप को सही सिद्ध करो। अगर

2396
02:57:08,560 --> 02:57:12,560
तुम अगर तीन वर्ष में हिंदू राष्ट्र नहीं बना या उनकी बात का कुछ मतलब

2397
02:57:12,560 --> 02:57:16,560
है या जो भी है। पहली बात यह समझ लो ये

2398
02:57:16,560 --> 02:57:20,560
जितने भी चमत्कारिक व्याख्यान हैं गुरुदेव के

2399
02:57:20,560 --> 02:57:26,560
द्वारा दिए जाने वाले यह उनके लिए है जो उनमें श्रद्धावान

2400
02:57:27,640 --> 02:57:31,760
है। और शंकराचार्य में श्रद्धावान होने के लिए इन

2401
02:57:31,760 --> 02:57:35,760
वक्तव्यों की आवश्यकता नहीं है शंकराचार्य को कि हम जो

2402
02:57:35,760 --> 02:57:40,200
है हमें जो हमारे पास मधुमक्खियों की सेना है या ये

2403
02:57:40,200 --> 02:57:44,320
है। आप उनकी शरणागति पहले प्राप्त करिए। किस लिए? क्योंकि वो

2404
02:57:44,320 --> 02:57:48,320
शंकराचार्य है। उसके बाद देखिए कि उनके वो वक्तव्य

2405
02:57:48,320 --> 02:57:52,720
देने के बाद भी आप उनमें श्रद्धावान रह पा रहे हैं कि नहीं रह पा रहे हैं।

2406
02:57:52,720 --> 02:57:58,720
जहां तक मुझे उम्मीद है कि रह पाएंगे। ठीक है?

2407
02:58:00,680 --> 02:58:05,040
हम चलिए मैं नहीं बैठा मैं आपको बताने बताना

2408
02:58:05,040 --> 02:58:09,280
कैसे किया जाता है मैं आपको नहीं स्वयं अपना करियर

2409
02:58:09,280 --> 02:58:13,280
खराब करते हुए आपको ज्ञान दे रहे हैं यार कृपा

2410
02:58:13,280 --> 02:58:18,240
हम कर रहे हैं आपने बताइए इज्जत करना सीख परिश्रम करता है ना तो

2411
02:58:18,240 --> 02:58:22,400
इज्जत करना सम्मान परिश्रम सम्मान हम की बात नया शब्द

2412
02:58:22,400 --> 02:58:26,640
सीखें इसलिए हम को पहले धन्यवाद देंगे और इतना ही नहीं धन्यवाद देंगे पूरी

2413
02:58:26,640 --> 02:58:28,800
नौटंकी

2414
02:58:28,800 --> 02:58:32,800
पूरी नौटंकी अब इनका जो है नोट कर

2415
02:58:32,800 --> 02:58:37,720
लेना इन्होंने चैट जीपीटी के आधार पर ये सिद्ध किया था इन्होंने टाइमिंग है

2416
02:58:37,720 --> 02:58:41,840
1652 इन्होंने बोला है कि फाइनल कॉल का अर्थ जो है फाइनल

2417
02:58:41,840 --> 02:58:42,640
डिसीजन नहीं हो

2418
02:58:42,640 --> 02:58:46,720
सकता है चैट जीपीटी के आधार पर इन्होंने यह चीज सिद्ध की

2419
02:58:46,720 --> 02:58:50,720
है। तो अब चैट जीपीटी के आधार पर हम यह सिद्ध

2420
02:58:50,720 --> 02:58:55,280
कर रहे हैं कि फाइनल कॉल का अर्थ फाइनल डिसीजन हो सकता है।

2421
02:58:55,280 --> 02:59:00,920
ठीक है चैट जीपीडी दिखा दो

2422
02:59:00,920 --> 02:59:06,920
भाई इनका नोट कर लेना और बनाना

2423
02:59:09,160 --> 02:59:13,520
कटिंग तब तक होगा जब तक जो

2424
02:59:13,520 --> 02:59:19,520
तुम्हारे जो लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य है

2425
02:59:20,200 --> 02:59:24,320
जो जब तक वो जो जो बात बोल रहे हैं हर उस बात का

2426
02:59:24,320 --> 02:59:28,320
हम उत्तर नहीं दे देते तब तक होता रहेगा और फिर कहेंगे लाइव आ

2427
02:59:28,320 --> 02:59:32,960
जाना। यह देखो तुम्हारे जो

2428
02:59:32,960 --> 02:59:37,040
लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य हैं वह एक छान के आसपास बोल

2429
02:59:37,040 --> 02:59:41,360
रहे हैं। चैट जीपीटी के आधार पर दंभ भर रहे हैं कि कॉल

2430
02:59:41,360 --> 02:59:45,440
शब्द का अर्थ निर्णय में नहीं लिया जा सकता। फाइनल कॉल का

2431
02:59:45,440 --> 02:59:49,520
अर्थ अंतिम निर्णय नहीं हो सकता। चैट जीपीटी ही यह बता रहा

2432
02:59:49,520 --> 02:59:53,520
है कि जब कोई व्यक्ति

2433
02:59:53,520 --> 02:59:57,640
जब कोई

2434
02:59:57,640 --> 03:00:02,160
व्यक्ति प्राधिकरण कोई निर्णय लेता है या घोषणा करता है

2435
03:00:02,160 --> 03:00:06,400
उसको भी कॉल कह सकते हैं। यहां नीचे उदाहरण दिया गया है। मैच

2436
03:00:06,400 --> 03:00:10,560
में आउट देने का कॉल अंपायर का था। किसको बुला रहा था अंपायर?

2437
03:00:10,560 --> 03:00:14,960
बताइए भैया। अब अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। लो

2438
03:00:14,960 --> 03:00:19,200
अंतिम फैसला तुम्हारा कॉल है। यहां तो बोल दिया चैट जीपीटी ने

2439
03:00:19,200 --> 03:00:23,840
कि अंतिम फैसले को कॉल कहा जा सकता है किसी का।

2440
03:00:23,840 --> 03:00:28,720
अंतिम फैसला फाइनल कॉल। ठीक है? चलो

2441
03:00:28,720 --> 03:00:32,720
ये दिखाना लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य को खुद ही खुश

2442
03:00:32,720 --> 03:00:38,720
हो जाते हो।

2443
03:00:49,920 --> 03:00:54,080
देखिए हमने वो वीडियो देखा जिसमें वो वालों के खिलाफ वीडियो हमने बनाया

2444
03:00:54,080 --> 03:00:58,080
था उसमें मैंने मेरा फोटो लगाया मतलब ये कहते हमने कहा था गुरुदेव मनाया जाए ऐसा

2445
03:00:58,080 --> 03:01:02,160
गलत किया है चीज उसके पीछे भी इनकी मंशा है मेरा मोटिव है वो

2446
03:01:02,160 --> 03:01:06,160
केवल इतना हैकि इस के विषय में कह रहे थे और इसके पीछे भी

2447
03:01:06,160 --> 03:01:10,320
मतलब ये कहते हमने कहा सबमि ऐसा गलत किया है एक चीज मेरा

2448
03:01:10,320 --> 03:01:14,400
फोटो लगाया मतलब ये कहते गुरु सप्तमी के खिलाफ वीडियो

2449
03:01:14,400 --> 03:01:18,720
बनाया था उसमें इन्होंने मेरा फोटो लगाया हमने वो वीडियो देखा भी जिसमें वो इस वालों के

2450
03:01:18,720 --> 03:01:22,800
खिलाफ वीडियो बनाया था उसमें इन्होंने मेरा फोटो लगाया मतलब ये कहते हैं कि उन्होंने निगाह

2451
03:01:22,800 --> 03:01:26,800
गुरु सप्तमी बनाया ऐसा गलत किया लेकिन उसके पीछे भी इनकी मंशा है

2452
03:01:26,800 --> 03:01:30,880
मेरा मोटिव है वो केवल इतना है क्योंकि इस के विषय में उसका कह रहे थे और इस

2453
03:01:30,880 --> 03:01:34,880
वाले में और इस वाले जितने भी बातें अपने वीडियो में या अपने लेखों में या और भी कम्युनिटी

2454
03:01:34,880 --> 03:01:38,880
पोस्ट में कर रहे थे हमारे उनके दोनों के चैनल को अटैक किया जाता था तो मजबूरी में इनको एक कहना पड़ा कि

2455
03:01:38,880 --> 03:01:42,960
सर वो गलती से एक बार इन्होंने वो शब्द आ रहा है। इसके अलावा और कुछ नहीं और इनके पास कुछ भी नहीं

2456
03:01:42,960 --> 03:01:47,200
है। बस एक बार उसमें ये बात तो तुम्हारी वही वो हो चुकी

2457
03:01:47,200 --> 03:01:51,520
है कि हमने वो लाइक किया है तुम्हारे अह

2458
03:01:51,520 --> 03:01:55,600
तुम्हारा जो वो है ना 18 फरवरी को तुम्हारा वो रील जो पोस्ट

2459
03:01:55,600 --> 03:01:59,840
की है तुमने Facebook पर वहां हमारा लाइक शो होगा और तुम दिखाना अपना

2460
03:01:59,840 --> 03:02:03,920
प्रमाण दो कि हमने तुम्हारा वो लाइक नहीं किया। दूसरी बात तुम

2461
03:02:03,920 --> 03:02:05,520
कह रहे हो यहां पे भी पूर्वाग्रह

2462
03:02:05,520 --> 03:02:09,520
है ना भाई जहां पर संभावनाएं दूसरी है वहां तुम्हारी बात क्यों मानी जाए और

2463
03:02:09,520 --> 03:02:13,600
अगर मानी जाए तो वहां शास्त्र प्रमाण दो कि हमारी बात इसलिए मानी जाए

2464
03:02:13,600 --> 03:02:17,600
तुम्हारे मन से थोड़ी ना होगा यहां शास्त्र प्रमाण तुम्हें देना

2465
03:02:17,600 --> 03:02:21,840
चाहिए कि नहीं इन्होंने हमारा नाम इसलिए लिया था क्योंकि इनको

2466
03:02:21,840 --> 03:02:25,840
लोग टैग कर रहे थे ऐसा नहीं है हमने इसलिए नहीं लिया था क्योंकि 18 फरवरी

2467
03:02:25,840 --> 03:02:30,160
को जिस दिन हमने तुम्हारी वह पोस्ट लाइक की थी उसी दिन हमने वहां के कमेंट्स

2468
03:02:30,160 --> 03:02:35,040
पढ़े थे और उन कमेंट्स में

2469
03:02:35,040 --> 03:02:39,040
मैंने देखा था कि वहां तुम तुमको ऐसा लग रहा है कि हमने तुम्हें समर्थन

2470
03:02:39,040 --> 03:02:43,200
नहीं दिया है। तो इसलिए अपना वो भाव

2471
03:02:43,200 --> 03:02:47,360
प्रकट करने के लिए अपनी मर्यादा में रहते हुए

2472
03:02:47,360 --> 03:02:51,920
हमने तुम्हारा नाम लिया था। और दूसरी बात क्रोध भी था

2473
03:02:51,920 --> 03:02:56,640
उन लोगों के लिए जो ऐसा कर रहे थे

2474
03:02:56,640 --> 03:03:02,440
तो तुम अपनी बात जो कह रहे हो ना कि नहीं ऐसा नहीं इसने ऐसा इसलिए

2475
03:03:02,440 --> 03:03:06,560
किया ये जो है ग्रंथों के

2476
03:03:06,560 --> 03:03:10,560
सामने इसलिए बैठा है क्योंकि यह दिखाना चाहता है कि मेरे पीछे

2477
03:03:10,560 --> 03:03:14,560
ग्रंथ है इसलिए नहीं बैठ इसका और दूसरा कोई कारण नहीं

2478
03:03:14,560 --> 03:03:19,280
हो सकता तो यह पूर्वाग्रह है तुम्हारा

2479
03:03:19,280 --> 03:03:21,400
जिसको तुम थोप रहे

2480
03:03:21,400 --> 03:03:26,360
हो। तुमको इस बात को शास्त्र के प्रमाण से सिद्ध करना

2481
03:03:26,360 --> 03:03:30,560
चाहिए कि मैं यहां पर इसलिए बैठा हूं क्योंकि मेरे मेरा

2482
03:03:30,560 --> 03:03:35,440
जो है दिखे कितने शास्त्र है। और भी कारण हो सकते हैं

2483
03:03:35,440 --> 03:03:39,520
कि मेरे सामने जगह ही ना हो। मेरे पास इतनी ही जगह हो। कई कारण

2484
03:03:39,520 --> 03:03:43,600
हो सकते हैं इधर बैठने का कि पीछे बैकग्राउंड ठीक-ठाक कौन सा लग रहा है? यही ठीक

2485
03:03:43,600 --> 03:03:47,680
लग रहा है। यही बैठ जाते हैं भाई।

2486
03:03:47,680 --> 03:03:52,160
ठीक है? तो इस यह कटिंग आप लोग ले लेना।

2487
03:03:52,160 --> 03:03:56,160
एक छ के एक छ पर बोला है इन्होंने जो यह कटिंग लेना और इनको

2488
03:03:56,160 --> 03:04:00,960
दिखाना इनके इनके मुंह पर मारना कि देख

2489
03:04:00,960 --> 03:04:05,120
कॉल शब्द का उपयोग निर्णय के रूप में है और अंतिम निर्णय

2490
03:04:05,120 --> 03:04:09,120
के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग भी हो सकता है। गलत

2491
03:04:09,120 --> 03:04:13,120
नहीं है। अच्छा इसकी अंग्रेजी करो जरा। Google से

2492
03:04:13,120 --> 03:04:16,920
ट्रांसलेट ट्रांसलेट करो।

2493
03:04:16,920 --> 03:04:21,120
कि इसका ट्रांसलेशन करो कि यह

2494
03:04:21,120 --> 03:04:25,200
जो है मेरा अंतिम कॉल है। मतलब इंग्लिश में लिखो यह बात। फाइनल कॉल है।

2495
03:04:25,200 --> 03:04:29,360
इट्स माय फाइनल कॉल या जो भी उसकी अंग्रेजी बनती हो। और फिर देखो उसकी हिंदी

2496
03:04:29,360 --> 03:04:33,520
क्या दे रहा है वो? इस मामले में

2497
03:04:33,520 --> 03:04:36,600
इस केस में यह मेरा फाइनल वो

2498
03:04:36,600 --> 03:04:40,680
है। फाइनल कॉल है। इसकी हिंदी क्या दे रहा है

2499
03:04:40,680 --> 03:04:46,680
वह? लिख दूं। अच्छा

2500
03:04:50,400 --> 03:04:56,400
इस पूरे प्रकरण में यह मेरा फाइनल कॉल

2501
03:04:56,520 --> 03:05:00,800
है। इसको पूर्णतया पहले इंग्लिश में लिखो फिर देखो उसका ट्रांसलेशन

2502
03:05:00,800 --> 03:05:06,800
क्या दे रहा है। Google या चैट

2503
03:05:07,000 --> 03:05:12,880
जीपीटी कितनी बार तुम अपनी लाइव में झूठे सिद्ध हो रहे हो।

2504
03:05:12,880 --> 03:05:16,280
यहां लिखा वैसे

2505
03:05:16,280 --> 03:05:20,880
बना पूरे के पूरे निकाल अच्छा अब कोई कह रहा है चैट जीपीटी रिलायबल

2506
03:05:20,880 --> 03:05:25,200
सोर्स नहीं है तो फिर किसी विद्वान को लाइए और कहलवाइए

2507
03:05:25,200 --> 03:05:29,280
उनसे कि अंतिम निर्णय अंतिम अंतिम निर्णय के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग नहीं

2508
03:05:29,280 --> 03:05:33,360
हो सकता है। तुम तो चैट जीपीटी को ही आधार बना रहे हो ना हमारी बात

2509
03:05:33,360 --> 03:05:39,360
का खंडन करने के लिए

2510
03:05:41,160 --> 03:05:46,040
लोग इसीलिए लोगों की नजर में सही बनाए रखने के

2511
03:05:46,040 --> 03:05:50,190
लिए 25

2512
03:05:50,190 --> 03:05:53,440
[संगीत]

2513
03:05:53,440 --> 03:05:58,240
ये सब पूर्वाग्रह बोल रहे हो हम इसके लिए नहीं जीते हैं भाई

2514
03:05:58,240 --> 03:06:02,400
तुम हमारी कहानी जानते नहीं हो और कोई जरूरी नहीं है कि जानने वाला

2515
03:06:02,400 --> 03:06:06,560
होना मगर यह सब तुम्हारे पूर्वाग्रह हैं और हम इस तरह से कार्य नहीं करते कि

2516
03:06:06,560 --> 03:06:10,800
अपनी अपने पूर्वाग्रह को थोपे किसी पर

2517
03:06:10,800 --> 03:06:14,960
तुमने जो है ये ऑरेंज कलर का जो वस्त्र पहन रखा है

2518
03:06:14,960 --> 03:06:19,760
धारण किया है जो हो सकता है तुमने

2519
03:06:19,760 --> 03:06:23,840
बिना देखे बिना सोचे समझे यह सोचा

2520
03:06:23,840 --> 03:06:27,920
हो कि मुझे ठंड लग रही है और हम कह दें कि तुमने जो भगवा कलर का

2521
03:06:27,920 --> 03:06:32,000
धारण किया अपने आप को हिंदुत्व का प्रेमी दिखाने के लिए तो ये

2522
03:06:32,000 --> 03:06:36,480
हम नहीं थोपेंगे तुम्हारे ऊपर। हां पूछ लेंगे तुमने क्यों धारण किया? अगर तुम्हारा ऐसा

2523
03:06:36,480 --> 03:06:42,480
हमें तुम्हारा अर्थ गलत लगेगा तो हो सकता है प्रतिकार करें।

2524
03:06:44,720 --> 03:06:50,720
वन नंबर

2525
03:06:50,760 --> 03:06:54,760
है। देखिए ये चैट

2526
03:06:54,760 --> 03:06:59,720
जीपीटी सेंटेंस बना करके दे रहा है

2527
03:06:59,720 --> 03:07:04,320
कि दिस इज़ माय फाइनल डिसीजन

2528
03:07:04,320 --> 03:07:07,880
इन दिस एंटायर मैटर।

2529
03:07:07,880 --> 03:07:12,320
एंड आई एम टेकिंग माय फाइनल कॉल रिगार्डिंग दिस एंटायर

2530
03:07:12,320 --> 03:07:17,880
सिचुएशन। ठीक

2531
03:07:17,880 --> 03:07:22,000
है? तो हो सकता है फाइनल कॉल

2532
03:07:22,000 --> 03:07:26,240
के रूप में फाइनल डिसीजन का फाइनल डिसीजन के रूप में फाइनल कॉल का उपयोग

2533
03:07:26,240 --> 03:07:31,120
हो सकता है।

2534
03:07:31,120 --> 03:07:35,120
अगर 5 मिनट तक कोई नहीं बात तो सरकार ऐसी कॉपी दे रहे थे तो कोई क्यों नहीं वहां पहुंचेगा?

2535
03:07:35,120 --> 03:07:39,200
पहुंचेगा। पहुंचे थे

2536
03:07:39,200 --> 03:07:44,000
वहां पहुंचे पांच मिनट तक बात

2537
03:07:44,000 --> 03:07:46,640
नहीं

2538
03:07:46,640 --> 03:07:51,280
हां

2539
03:07:51,280 --> 03:07:55,440
तुम्हारी बुद्धि छोटी है भगवत आनंद और कुछ नहीं है अब

2540
03:07:55,440 --> 03:07:59,760
मैं समझा तुम छोटी बुद्धि के व्यक्ति हो मतलब

2541
03:07:59,760 --> 03:08:03,840
बच्चे हो अभी आयु में तो छोटे हो

2542
03:08:03,840 --> 03:08:08,160
ही 7 आठ साल वह अब पता लग रहा आयु का प्रभाव है। अनुभव का

2543
03:08:08,160 --> 03:08:12,320
कमी है तुम्हें। संकीर्ण विचारधारा है तुम्हारी। तो उसी

2544
03:08:12,320 --> 03:08:16,400
संकीर्ण विचारधारा से तुम्हें जो संकीर्ण संकीर्ण दिखता है उसी सब तुम सब

2545
03:08:16,400 --> 03:08:21,080
तुम डिसीजन ले लेते हो। तुमको कोई मिला

2546
03:08:21,080 --> 03:08:25,120
नहीं। ऐसा जो तुम्हारी शैली में तुमसे बात करे

2547
03:08:25,120 --> 03:08:30,520
तो तुम सोचने लगे कि अब मैं हो गया। जयकांत

2548
03:08:30,520 --> 03:08:36,160
शिखरे हम अब तुम्हें सिंघम मिल गया।

2549
03:08:36,160 --> 03:08:40,640
तो वो दिखाओ जरा क्या था मैं मेरा चैनल खोलो जरा लाओ इधर

2550
03:08:40,640 --> 03:08:44,800
चैनल खोलो मेरा मेरे चैनल पर जाओ और

2551
03:08:44,800 --> 03:08:50,800
बताओ इनको क्या बोल रहे हैं पहले इनका सुन मेरे चैनल पे जाओ वीडियोस की लिस्ट

2552
03:08:51,520 --> 03:08:56,320
हां

2553
03:08:56,320 --> 03:09:00,400
थोड़ा वर्क किया करो होमवर्क भी किया करो थोड़ी बहुत ठीक है और नहीं

2554
03:09:00,400 --> 03:09:06,320
किया है होमवर्क तो मत बोलो कोई नहीं तुमसे कहने जा रहा है कि बोलो

2555
03:09:06,320 --> 03:09:10,400
कितनी बार तुम झूठे सिद्ध होगे सबूतों के साथ और नीचे

2556
03:09:10,400 --> 03:09:14,400
नहीं जा सकते। अरे तो नीचे ही

2557
03:09:14,400 --> 03:09:20,400
नहीं जा रहा। अरे आवान कौन लोग धर्मा को लोगो?

2558
03:09:29,360 --> 03:09:34,200
यह क्या लिख रहे हैं कि प्रोवाइडेड बाय शिवश इज

2559
03:09:34,200 --> 03:09:38,560
एन ऑस्कर वन का क्या मतलब

2560
03:09:38,560 --> 03:09:41,080
ऑब्सकर्ड

2561
03:09:41,080 --> 03:09:45,200
वर्ड मैं बता रहा हूं एक मिनट ये

2562
03:09:45,200 --> 03:09:51,200
ऑब्सकर्ड वन का क्या

2563
03:09:51,960 --> 03:09:55,560
अर्थ क्या मतलब

2564
03:09:55,560 --> 03:09:59,760
मतलब सिद्ध करो भैया तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय

2565
03:09:59,760 --> 03:10:03,920
में शास्त्र प्रमाण है तो सिद्ध करो लाओ मेरा वो

2566
03:10:03,920 --> 03:10:07,960
मेरा खोल दो वो क्या कहते हैं

2567
03:10:07,960 --> 03:10:12,360
अह

2568
03:10:12,360 --> 03:10:18,360
हां देखता हूं रुक

2569
03:10:21,000 --> 03:10:26,840
जाओ तो ठीक है क्लियर मीन िंग नहीं है तो क्या करें क्लियर नहीं है

2570
03:10:26,840 --> 03:10:30,880
तो हम तो इनका कहना है हमने

2571
03:10:30,880 --> 03:10:35,120
रामभद्राचार्य का रामभद्राचार्य जी का विरोध

2572
03:10:35,120 --> 03:10:39,920
नहीं किया प्रतिकार नहीं किया विरोध तो हम क्या ही करेंगे उनका

2573
03:10:39,920 --> 03:10:45,720
प्रतिक्रिया नहीं प्रदान की ये

2574
03:10:45,720 --> 03:10:50,000
देखो ये देखो देख

2575
03:10:50,000 --> 03:10:54,840
लिया कितनी बार झूठे सिद्ध हो गए यह मैंने उसी विषय पर बनाया

2576
03:10:54,840 --> 03:10:59,040
है पांच मिनट संस्कृत वाले विषय पर और हां

2577
03:10:59,040 --> 03:11:03,280
सीधा स्वामी वाला विषय मुझे नहीं पता है ठीक है

2578
03:11:03,280 --> 03:11:07,280
और आवश्यक नहीं है कि मैं बनाऊं समय भी होना चाहिए और वो उतना आवश्यक

2579
03:11:07,280 --> 03:11:11,280
होना भी चाहिए बहुत लोग दुनिया

2580
03:11:11,280 --> 03:11:15,440
में बहुत से लोगों ने गुरुदेव का विरोध किया है तो मैं एक-एक

2581
03:11:15,440 --> 03:11:19,440
करके सब पर वीडियो नहीं बना सकता और अगर मैं एक वीडियो

2582
03:11:19,440 --> 03:11:23,600
बना करके गुरुदेव का पक्ष रख लूंगा और गुरुदेव के सिद्धांत

2583
03:11:23,600 --> 03:11:28,320
को अंतिम रूप से स्थापित कर दूंगा तो उसमें सबका विरोध भी होगा।

2584
03:11:28,320 --> 03:11:32,480
ठीक है? तो नाम ले ले के मैं सबका वीडियो नहीं बना सकता। मगर

2585
03:11:32,480 --> 03:11:36,480
मैंने इनका भी हाथ जोड़ के और इनको सम्मान देते हुए ही वीडियो

2586
03:11:36,480 --> 03:11:40,640
बनाया था क्योंकि मैं इनके स्तर का नहीं हूं। मैं स्वयं को नहीं समझता

2587
03:11:40,640 --> 03:11:44,720
हूं। तुम समझते होगे। तुम समझते होगे। मैं नहीं समझता अपने

2588
03:11:44,720 --> 03:11:48,520
को इनके स्तर का।

2589
03:11:48,520 --> 03:11:52,880
और गुरुदेव जाने और यह जाने। फिर भी मैंने इनका एक अपनी मर्यादा

2590
03:11:52,880 --> 03:11:56,880
में रहते हुए प्रतिकार किया। यहां पर तुम्हारा ये झूठ सिद्ध हुआ। तुम्हारी

2591
03:11:56,880 --> 03:12:02,880
ये कही जाने वाली बात कि हमने वहां प्रतिक्रिया नहीं दी। ठीक है

2592
03:12:06,680 --> 03:12:12,160
चलो कुछ हो रहा है कुछ हो रहा है

2593
03:12:12,160 --> 03:12:16,240
तुम जो पोस्ट लिख रहे हो उस पोस्ट का हमें तब

2594
03:12:16,240 --> 03:12:20,320
से हम लोग निरंतर हमको दिख रही है हम वहां पढ़ रहे

2595
03:12:20,320 --> 03:12:24,800
हैं क्योंकि अभी तुमसे सीधे-सीधे बातचीत शुरू हो गई है

2596
03:12:24,800 --> 03:12:28,800
वीडियोस के माध्यम से उससे पहले हमें नहीं पता चलता था

2597
03:12:28,800 --> 03:12:33,040
तुम कब क्या कर रहे लोग बता देते थे। वो

2598
03:12:33,040 --> 03:12:37,680
जो तुम्हें निग्गू कहते हैं वो बता देते थे कभी-कभी।

2599
03:12:37,680 --> 03:12:41,760
वो जो मेरी चीजें तुमको बता रहे हैं अपने अनुसार वो बता

2600
03:12:41,760 --> 03:12:47,760
देते थे कभी-कभी या और कुछ लोग बताते थे।

2601
03:12:49,400 --> 03:12:53,600
चलो पकड़ रहा है। उस स्थिति में तक बात नहीं पहुंच

2602
03:12:53,600 --> 03:12:57,680
पा रही। हमें पोस्ट कर यह गलत बात ऐसा कुछ नहीं है। हम

2603
03:12:57,680 --> 03:13:03,560
तक बात पहुंची और हमने कई लोगों का वो किया। ठीक

2604
03:13:03,560 --> 03:13:08,200
है? हमने यहां तक कि योगी जी ने जो स्टेटमेंट दिया

2605
03:13:08,200 --> 03:13:12,320
था अ पूज्य गुरुदेव को गुरुदेव के

2606
03:13:12,320 --> 03:13:16,320
ऊपर जो स्टेटमेंट दिया था कि कोई भी आचार्य श्री राम से बड़ा नहीं

2607
03:13:16,320 --> 03:13:20,760
है। उस पर भी हमने उन्हीं दिनों बोला था। चलो बात हो जाती है

2608
03:13:20,760 --> 03:13:25,720
और साथ में तो सामना

2609
03:13:25,720 --> 03:13:30,080
नहीं कोई शंका कर अब यहां भी पूर्वाग्रह

2610
03:13:30,080 --> 03:13:34,360
है पहली बात तो मैं ऐसा है ही नहीं कि मैंने वहां पर बात नहीं की दूसरी बात ऐसा

2611
03:13:34,360 --> 03:13:38,560
है कि यह तुम्हारा फिर पूर्वाग्रह है कि अगर मैं नहीं

2612
03:13:38,560 --> 03:13:42,560
टकरा रहा हूं तो इसका एक ही अर्थ है कि सामर्थ्य नहीं रखते हो। इसका अर्थ यह भी

2613
03:13:42,560 --> 03:13:46,560
हो सकता है कि मेरे बगल में जो एक ऐसा व्यक्ति है जो जिसके

2614
03:13:46,560 --> 03:13:50,560
बुलाने पर 50 लोग आते हैं और जब मुझे रामपाल की किताबें जलानी

2615
03:13:50,560 --> 03:13:54,560
होती हैं तो वो जाता है यह सोचे समझे बिना कि

2616
03:13:54,560 --> 03:13:58,640
मैं शंकराचार्य जी को मानने वाला हूं। वो वहां पर दुर्गा

2617
03:13:58,640 --> 03:14:03,440
मां को गाली देने वालों से लड़ने के लिए मेरे साथ जाता है।

2618
03:14:03,440 --> 03:14:04,560
ठीक है? और

2619
03:14:04,560 --> 03:14:08,560
मैं अपने वीडियोस में उसके बारे में भी बोलूंगा।

2620
03:14:08,560 --> 03:14:12,800
मगर जब वो जा रहा होगा मेरे साथ तब नहीं कहूंगा नहीं पहले तू अपने गुरु का मानना

2621
03:14:12,800 --> 03:14:16,720
छोड़ तब तू मेरे साथ जाएगा।

2622
03:14:16,720 --> 03:14:19,880
ठीक है?

2623
03:14:19,880 --> 03:14:23,920
तो पूर्वाग्रह से ग्रसित हो संकीर्ण विचारधारा है तुम्हारी।

2624
03:14:23,920 --> 03:14:28,480
झूठ पर झूठ बोले जा रहे हो। अधूरी अधूरी जानकारियों पे निर्णायक वक्तव्य

2625
03:14:28,480 --> 03:14:32,560
नहीं दिए जाते। और तुमने दिए। कई बार सिद्ध हो गया। अभी वह

2626
03:14:32,560 --> 03:14:36,560
एफबी वाला लाइक दिखा दिया। अभी यह दिखा दिया। रामभद्राचार्य जी के लिए मैंने

2627
03:14:36,560 --> 03:14:40,640
प्रतिकारात्मक वीडियो बनाया और योगी और मोदी

2628
03:14:40,640 --> 03:14:46,160
जो शासन तंत्र हैं उनके लिए मैंने बोला। ठीक है?

2629
03:14:46,160 --> 03:14:50,560
और मैं कहूं कि जो लोग ब्राह्मणोचित धर्म

2630
03:14:50,560 --> 03:14:54,640
के साथसाथ क्षत्रियचित धर्म का आलंबन भी ले रहे

2631
03:14:54,640 --> 03:14:58,720
हैं तो उनसे आप यह अपेक्षा करना बंद कर दीजिए कि धरातल

2632
03:14:58,720 --> 03:15:02,800
पर कार्य करते समय भी वो जो है हां वो धर्म की व्याख्या गलत करने

2633
03:15:02,800 --> 03:15:06,960
लगे तो गलत है कि धर्म रक्षा के नाम पर धर्म की व्याख्या ही बदल दी।

2634
03:15:06,960 --> 03:15:11,040
धर्म रक्षा कर रहे इसलिए धर्म की व्याख्या ही बदल दें। यह नहीं सिद्धांत पूछा जाएगा तो

2635
03:15:11,040 --> 03:15:15,200
वही बताएंगे। ये नहीं करेंगे कि कृष्ण और अल्लाह एक है। ठीक है?

2636
03:15:15,200 --> 03:15:19,440
सम्मान करता है बिनेस नहीं करता कोई आपके बिना देखने से

2637
03:15:19,440 --> 03:15:21,240
पता

2638
03:15:21,240 --> 03:15:25,680
नहीं देखो पहले सीसी बात है जो हमारी बात

2639
03:15:25,680 --> 03:15:30,080
हुई बताऊंगा कैसे हुई लाइव का विषय है अब क्या बोलना है की उसने पहले से

2640
03:15:30,080 --> 03:15:36,080
दिया था

2641
03:15:38,040 --> 03:15:43,000
पहले रखा है मतलब उसका नाम रखा

2642
03:15:43,000 --> 03:15:47,120
है और रखा मतलब इस क्लास एग्जाम में फाइनल डिसीजन दे चुके होंगे। फाइनल

2643
03:15:47,120 --> 03:15:51,280
डिसीजन मतलब फाइनल फाइनल ड्राफ्ट और कोई फाइनल नहीं होता है ना कि फाइनल फर्स्ट फाइनल सेकंड फाइनल

2644
03:15:51,280 --> 03:15:55,760
थर्ड पीपीटी बना रहे हैं यहां बैठ के। ये ड्राफ्ट वन ड्राफ्ट डॉट ड्राफ्ट वन डॉट

2645
03:15:55,760 --> 03:16:00,000
टू डॉट 3 डॉट4 फाइनल ड्राफ्ट फाइनल ड्राफ्ट वन फाइनल ड्राफ्ट टू फाइनल फाइनल

2646
03:16:00,000 --> 03:16:04,160
ड्राफ्ट फाइनल फाइनल ड्राफ्ट वन फाइनल ड्राफ्ट ये पीपीटी बना

2647
03:16:04,160 --> 03:16:08,320
रहे हो तो हां तो अ

2648
03:16:08,320 --> 03:16:13,600
क्या कहते हैं किसके संबंध में?

2649
03:16:13,600 --> 03:16:17,200
फाइनल कॉल रिगार्डिंग

2650
03:16:17,200 --> 03:16:21,440
लाइव डिस्कशन हां तो उसके संबंध में फाइनल कॉल था फाइनल कॉल

2651
03:16:21,440 --> 03:16:25,520
टू तो नहीं कर रहे तो क्या दांत दिखाने की यहां बात हो गई समझ में

2652
03:16:25,520 --> 03:16:29,520
नहीं आया ये तुम्हारा जो जोक है ना वो वैसा

2653
03:16:29,520 --> 03:16:33,600
जोक है जो पहले जो हंसी की हास्य फिल्में आती

2654
03:16:33,600 --> 03:16:37,600
थी तो उसमें वाकई में व्यक्ति को हंसी आती थी जैसे गोलमाल वन देखोगे

2655
03:16:37,600 --> 03:16:41,600
टू भी देखोगे तो उसमें वाकई में लोगों को हंसी हंसी आएगी। मगर उसके

2656
03:16:41,600 --> 03:16:45,600
बाद जब थ्री में देखोगे, फोर में देखोगे तो वहां पर जनता पॉपकर्न खाती

2657
03:16:45,600 --> 03:16:49,600
हुई खामा हंसती हुई दिखेगी। तो तुम्हारा जोक भी वैसा ही

2658
03:16:49,600 --> 03:16:54,000
है। जिसमें हंसी नहीं आएगी। तुम ही हंस लोगे जबरदस्ती। और वही

2659
03:16:54,000 --> 03:16:58,080
वाह वाह वाह वाह अम्मा शुरू तो करने दो। वो हाल है।

2660
03:16:58,080 --> 03:17:02,240
इसमें क्या दांत दिखाने की बात हो गई भाई। हमने कहां कहा कि फाइनल कॉल

2661
03:17:02,240 --> 03:17:06,240
टू, फाइनल कॉल थ्री। डिसीजन के बारे में जो हमारा फाइनल कॉल था

2662
03:17:06,240 --> 03:17:10,400
वो दे दिया। अब तो नहीं लिखा हमने दूसरी चर्चा में दिन में भी नहीं लिखा तुम्हारा

2663
03:17:10,400 --> 03:17:14,720
यह वक्तव्य सुनने से पहले तक यह हो कि तुम्हारा यह वक्तव्य हमने सुन लिया है इसलिए

2664
03:17:14,720 --> 03:17:18,960
नहीं लिखा तो हमने दिन में जो अभी लाइव की थी उसमें भी हमने नहीं लिखा

2665
03:17:18,960 --> 03:17:22,960
कि फाइनल कॉल जो है वो टू

2666
03:17:22,960 --> 03:17:28,960
फाइनल कॉल थ्री ये सब तो नहीं लिखा हमने तो इसमें क्या हंस रहे हो

2667
03:17:29,200 --> 03:17:29,700
अरे

2668
03:17:29,520 --> 03:17:33,000
पहले लिख तो देने

2669
03:17:33,000 --> 03:17:37,200
दो फिर वही बात अगला वीडियो क्या मैं इस संबंध वहां देखो

2670
03:17:37,200 --> 03:17:41,360
ना फाइनल कॉल किसके किसके साथ लिखा हुआ है। मतलब तुम

2671
03:17:41,360 --> 03:17:45,360
पर बात ही ना करूं। अगर वहां डिस्कशन के संबंध में मैंने

2672
03:17:45,360 --> 03:17:49,360
फाइनल कॉल लिख दिया तो अब तुम कुछ भी करते रहो तुम पर बात ही ना करूं।

2673
03:17:49,360 --> 03:17:53,360
तो ऐसा तो नहीं होगा ना। झूठे की हद तक झूठे

2674
03:17:53,360 --> 03:17:58,080
की हद तक और चोर के घर तक जाएंगे हम।

2675
03:17:58,080 --> 03:18:03,040
ठीक है। चलो।

2676
03:18:03,040 --> 03:18:07,200
चलो खैर आज तुम्हारी एक चीज जो थोड़ा सा हंबलनेस देख

2677
03:18:07,200 --> 03:18:11,200
के अच्छा लगा। यह कुछ अच्छा है। एक एक ही वीडियो बनाने

2678
03:18:11,200 --> 03:18:15,760
से ऐसा परिवर्तन आ गया है। मुझे पहले कर देना चाहिए था

2679
03:18:15,760 --> 03:18:20,040
जो मैं नहीं करना चाहता था। ये गलती थी

2680
03:18:20,040 --> 03:18:24,160
क्योंकि तुमने वो उस कहावत को सिद्ध कर दिया। लातों के भूत बातों से

2681
03:18:24,160 --> 03:18:28,360
नहीं मानते। मैं करता रहा, गिड़गिड़ाता

2682
03:18:28,360 --> 03:18:32,480
रहा। गिड़गिड़ाना ही कहेंगे। हम आपके साथ नहीं करना चाहते

2683
03:18:32,480 --> 03:18:36,840
हैं। यह वह सब कर रहा था ना। प्रयास कर रहा था नहीं

2684
03:18:36,840 --> 03:18:41,040
माने हम फिर जब अपना

2685
03:18:41,040 --> 03:18:45,120
दिखाया तुमको तुम्हारे स्टाइल में बोल के तो तुम्हें अकल आ

2686
03:18:45,120 --> 03:18:50,080
गई आज बड़ी प्यारीप्यारी आवाज में बात कर रहे हो

2687
03:18:50,080 --> 03:18:54,480
हंसते हुए चलो कोई बात नहीं और इससे पहले वाले में शिवश

2688
03:18:54,480 --> 03:18:59,400
मैं तुम्हारा करियर खा

2689
03:18:59,400 --> 03:19:03,920
जाता मतलब बात है अपने उसमें

2690
03:19:03,920 --> 03:19:09,920
दम है अपने कार्यों में है ना देना चाहेंगे

2691
03:19:15,760 --> 03:19:19,920
चलो खैर एक बात तो मैं भी कहूंगा जैसे तुमने शुरू में कहा हाथ

2692
03:19:19,920 --> 03:19:25,920
जोड़े थे तो मैं भी एक कहूंगा कि

2693
03:19:26,040 --> 03:19:30,400
वो कोई कायदे का मिला तो है थोड़ा बहुत ही सही मगर

2694
03:19:30,400 --> 03:19:35,360
अभी काफी मतलब तर्क से बहुत दूर

2695
03:19:35,360 --> 03:19:39,360
और प्रमाण रटे हैं मगर उसको जो है संबंध नहीं स्थापित

2696
03:19:39,360 --> 03:19:43,600
कर पा रहे और तर्क

2697
03:19:43,600 --> 03:19:47,840
संगत बहुत तर्क की बहुत कमी है। युक्ति

2698
03:19:47,840 --> 03:19:52,240
नहीं है बिल्कुल भी और अधूरी

2699
03:19:52,240 --> 03:19:56,720
जानकारी पर कार्य करने वाले हो तो उसमें भी दिक्कत है।

2700
03:19:56,720 --> 03:20:00,720
झूठे सिद्ध हो जा रहे हो उसके कारण क्योंकि मैं तो यह अगर मैं चाहूं तो यह

2701
03:20:00,720 --> 03:20:04,800
बोल सकता हूं कि तुम यहां झूठ बोल रहे हो जानबूझकर तुम्हें पता है कि मैंने लाइक किया है फिर भी

2702
03:20:04,800 --> 03:20:08,880
झूठ बोल रहे हो यह कह सकता हूं मगर वहां पर मैं बेनिफिट ऑफ

2703
03:20:08,880 --> 03:20:12,880
डाउट दे रहा हूं तुम्हें क्योंकि कोई भी संभावना तुम्हारे सही होने की अगर

2704
03:20:12,880 --> 03:20:14,720
निकल सकती है तो शिवश

2705
03:20:14,720 --> 03:20:19,360
नारायण द्विवेदी तुमको सही कहेगा तुम्हारे सही पक्ष को ढूंढ निकालेगा

2706
03:20:19,360 --> 03:20:23,440
जिस दिन तुम्हारा कोई भी सही पक्ष नहीं निकलेगा तब शिवश नारायण

2707
03:20:23,440 --> 03:20:28,120
द्विवेदी तुम्हारे तुमको जो उस विषय में गलत

2708
03:20:28,120 --> 03:20:32,480
कहेगा उस विषय में यह है शिवश

2709
03:20:32,480 --> 03:20:36,560
नारायण द्विवेदी यह है आह्वान और यह है राम का प्रभु श्री

2710
03:20:36,560 --> 03:20:41,040
राम का साधारण भक्त और यह है जगुरु शंकराचार्य जी का अल्पज्ञ

2711
03:20:41,040 --> 03:20:45,200
शिष्य ठीक है मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं

2712
03:20:45,200 --> 03:20:49,440
जो जहां पर संभावना निकल रही हो वहां पर वहां पर भी जो है अपना पूर्वाग्रह

2713
03:20:49,440 --> 03:20:55,440
घुसेड़ो

2714
03:20:56,640 --> 03:21:01,200
तो उसको अच्छे दिखा ठीक है उसको ये

2715
03:21:01,200 --> 03:21:05,200
कामते तो मिल गए तो ये जो ने कहा

2716
03:21:05,200 --> 03:21:09,200
कि हमें कभी तुम लाए तुम्हारे साथ नहीं कर सकते भाई तुम्हारा स्तर

2717
03:21:09,200 --> 03:21:14,440
नहीं है हम क्योंकि तुम्हारा स्तर नहीं है पूरा नहीं कर सकते बात नहीं तुम्हारी बात

2718
03:21:14,440 --> 03:21:18,720
कर तुम फिर उसी मेरे वीडियो को देख के बातें कर रहे बात करना चाह रहे थे

2719
03:21:18,720 --> 03:21:22,960
आमने सामने की बात करना चाह रहे हो आमने सामने बात कर तुरंत जाओ किसी नहीं करना चाह रहे

2720
03:21:22,960 --> 03:21:27,280
लेकिन तुम अपना एक्सेप्ट मैंने मैंने कल की लाइव में कह दिया है कि हम लाइव करेंगे।

2721
03:21:27,280 --> 03:21:31,520
हो गया। यह बात भी खत्म हो गई तुम्हारी।

2722
03:21:31,520 --> 03:21:35,520
तुम्हारा तो एक-एक वाक्य कटता जा रहा है भाई। अभी शायद

2723
03:21:35,520 --> 03:21:41,520
या तो तुमने सुना नहीं है इसलिए तुम ये बातें बोल रहे

2724
03:21:43,160 --> 03:21:49,160
हो। अभी अभी इसी वीडियो में इनकी आवाज कट जाएगी।

2725
03:21:54,480 --> 03:21:58,560
तो कहा नहीं बुलाए क्यों नहीं बुलाया भाई हम

2726
03:21:58,560 --> 03:22:02,680
नहीं

2727
03:22:02,680 --> 03:22:08,680
क्या है

2728
03:22:18,160 --> 03:22:22,160
इसलिए इसलिए क्योंकि उनके के द्वारा मैंने व्यक्तिगत रूप से जिसको

2729
03:22:22,160 --> 03:22:26,160
भी मैं लूंगा लाइव में यह इनका कहना है कि तुम हमारे समर्थकों को

2730
03:22:26,160 --> 03:22:30,240
लाइन में बुला रहे हो हमको नहीं बुला रहे इसलिए क्योंकि उन समर्थकों

2731
03:22:30,240 --> 03:22:34,560
ने व्यक्तिगत रूप से गुरुदेव इत्यादि के लिए ऐसे शब्द ऐसा

2732
03:22:34,560 --> 03:22:38,640
ऐसी पंक्ति नहीं कही है मेरी जानकारी में जो कि

2733
03:22:38,640 --> 03:22:43,040
जो है मर्यादा को क्रॉस करने वाली लाइनें हैं। ठीक है?

2734
03:22:43,040 --> 03:22:47,920
और तुम्हारी लाइनों का एक गुच्छा दूंगा तुम्हें बना करके।

2735
03:22:47,920 --> 03:22:52,320
वैसे तो सब सर्वविदित है तुम्हारे द्वारा अपमान मगर फिर भी

2736
03:22:52,320 --> 03:22:56,320
मैं तुम्हें गुच्छा दे दूंगा पूरा

2737
03:22:56,320 --> 03:22:58,400
पड़ेगी एक

2738
03:22:58,400 --> 03:23:03,480
प्रश्न आ रहा है ब्रह्म मुहूर्त में क्या कर रहे हो ठीक है

2739
03:23:03,480 --> 03:23:08,440
तो ये आपातकालीन स्थिति है

2740
03:23:08,440 --> 03:23:12,880
ठीक है आपत्ते तो हमने और किया है हमने

2741
03:23:12,880 --> 03:23:16,360
मान लिया है कल तो किसी को

2742
03:23:16,360 --> 03:23:21,200
मानक हमने ये मान लिया ताकि लोगों को

2743
03:23:21,200 --> 03:23:25,520
हमने कहा हमने ये मान लिया किसी

2744
03:23:25,520 --> 03:23:28,680
को पकड़ेगा हम

2745
03:23:28,680 --> 03:23:32,720
समझते हमने इसका अर्थ गलत समझा ही नहीं है तो ये बात ही गलत

2746
03:23:32,720 --> 03:23:37,200
खत्म हो गई पहली बात तो और

2747
03:23:37,200 --> 03:23:41,680
बहन का अर्थ यदि मैं जानने वाला हूं

2748
03:23:41,680 --> 03:23:45,680
तब भी मैं बहन शब्द का उपयोग पत्नी

2749
03:23:45,680 --> 03:23:49,680
के रूप में करूं बाद में कि हमने अर्थ गलत समझ लिया था तो मैं वहां

2750
03:23:49,680 --> 03:23:53,840
पर दोषी होऊंगा। मगर मैं इंग्लिश भाषा को आंग्ल भाषा को जानने वाला व्यक्ति

2751
03:23:53,840 --> 03:23:57,920
नहीं हूं। मैंने अपनी लाइफ में यह भी कहा। इसी लाइव में कहा

2752
03:23:57,920 --> 03:24:02,640
है जिसको तुम सुन रहे हो। ठीक है? तो फिर ये दोष मुझे नहीं लगेगा।

2753
03:24:02,640 --> 03:24:06,640
बहन शब्द के उपयोग को बाद में बदलकर पत्नी के

2754
03:24:06,640 --> 03:24:10,880
लिए कर देने वाले उसमें दोष लगेगा क्योंकि मैं हिंदी को जानने वाला हूं।

2755
03:24:10,880 --> 03:24:13,760
हिंदी भाषा हिंदी भाषी व्यक्ति हूं। मगर मैं अंग्रेजी

2756
03:24:13,760 --> 03:24:19,760
भाषी व्यक्ति नहीं हूं। तो यह बात भी तुम्हारी खत्म हो गई।

2757
03:24:24,360 --> 03:24:30,360
चलिए उसका

2758
03:24:42,520 --> 03:24:46,560
लाइव हो भारी है

2759
03:24:46,560 --> 03:24:50,760
तो विज्ञान को विकलांग विकलांग को ज्ञान कर दिया कर

2760
03:24:50,760 --> 03:24:55,800
दिया ऐसा तो मत करो हम तुम्हारा

2761
03:24:55,800 --> 03:24:59,840
समझते ऐसा तो मत करो हर तरह से तुम्हारी वो

2762
03:24:59,840 --> 03:25:05,560
हो रही

2763
03:25:05,560 --> 03:25:11,560
है

2764
03:25:14,760 --> 03:25:20,760
आगे भाई

2765
03:25:23,240 --> 03:25:27,280
रहेगा तुम्हारा रहेगा झूठ तुम्हारा रहेगा

2766
03:25:27,280 --> 03:25:31,520
झूठ तुम्हारा रहेगा पूर्वाग्रह तुम्हारा

2767
03:25:31,520 --> 03:25:35,760
तुम्हारा रहेगा अप्रासंगिकता तुम्हारा ये सब रहेगा

2768
03:25:35,760 --> 03:25:40,440
तुम्हारा रहेगा झूठ तुम्हारा रहेगा पूर्वाग्रह तुम्हारा रहेगा

2769
03:25:40,440 --> 03:25:44,880
अप्रासंगिकता ये सब तुम्हारा रहेगा उसी शैली

2770
03:25:44,880 --> 03:25:50,880
में जो तुम चर्चा का जिसको नाम दे रहे हो

2771
03:25:59,360 --> 03:26:01,880
संसार

2772
03:26:01,880 --> 03:26:06,000
में बता पूरे संसार में

2773
03:26:06,000 --> 03:26:10,640
वकील हमको नोटिस भेजा है उसमें ज्यादा अनपढ़ को लिखा अच्छा सुनिए आपको

2774
03:26:10,640 --> 03:26:14,720
याद रखना है कोई भी वकील जब नोटिस भेजता है इस बार मेंबर है कि इस बार

2775
03:26:14,720 --> 03:26:18,880
एसोसिएशन वकील एसोसिएशन में उसका जो राइटिंग वो रहेगा प्रेशन उसका

2776
03:26:18,880 --> 03:26:23,120
रहेगा देखो लॉयर और एडवोकेट मतलब लॉयर की क्या है कोई भी व्यक्ति को

2777
03:26:23,120 --> 03:26:29,120
आय कानून की जो पड़ा है उसका लॉयर होता है लेकिन लॉयर होने से कोर्ट में जा चुके

2778
03:27:53,840 --> 03:27:54,340
ठीक

2779
03:27:54,000 --> 03:27:56,480
है

2780
03:27:56,480 --> 03:28:00,640
मतलब और लाइव नहीं करेंगे ना ये ठीक

2781
03:28:00,640 --> 03:28:04,640
ठीक है ठीक ठीक हो गया की नींद

2782
03:28:04,640 --> 03:28:08,800
लेगे और फिर अपना जो कृत उसको संपादित करके फिर कुछ पारायण इत्यादि

2783
03:28:08,800 --> 03:28:13,040
करके और फिर एक लाइव करेंगे फिर जाकर भगवती का श्रृंगार करेंगे फिर आएंगे

2784
03:28:13,040 --> 03:28:16,680
फिर एक

2785
03:28:16,680 --> 03:28:20,040
ठीक

2786
03:28:20,040 --> 03:28:24,200
चलो ये जो

2787
03:28:24,200 --> 03:28:30,200
है

2788
03:28:34,520 --> 03:28:38,640
हम तो बैटल फॉर सिविलाइजेशन तुम यह सब बातें मत करो

2789
03:28:38,640 --> 03:28:43,280
कि तुम्हारे मन में मेरे लिए जो है सम्मान है।

2790
03:28:43,280 --> 03:28:47,280
तुम्हारे जैसे लोगों से मुझे सम्मान प्राप्त नहीं करना है। जो

2791
03:28:47,280 --> 03:28:51,520
बिना जाने ताने किसी मातृशक्ति के पीछे पड़ गए हो।

2792
03:28:51,520 --> 03:28:55,840
उसको उसका पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया तुम जैसे लोगों ने। खैर चलो

2793
03:28:55,840 --> 03:28:59,840
कोई बात नहीं। उसका बनता

2794
03:28:59,840 --> 03:29:04,120
है ये सब और उसके बाद जब हां उसके बाद नोटिस जारी करता है तो उतनी बात ध्यान

2795
03:29:04,120 --> 03:29:08,400
नोटिस बढ़ाइए। चलो ये जो वकील वाला विषय है वो वकील

2796
03:29:08,400 --> 03:29:14,400
देखेगा एडवोकेट

2797
03:29:14,600 --> 03:29:17,480
देखेगा

2798
03:29:17,480 --> 03:29:21,520
कि वहां सुभाष का तुम्हारा चक्कर खा जाएंगे लाइसेंस कैसे

2799
03:29:21,520 --> 03:29:26,080
हो जाएगा तुम्हारा वहां सुभाष का समर्थन करते तुम्हारा चक्कर खा जाएंगे

2800
03:29:26,080 --> 03:29:30,720
लाइसेंस कैसे हो जाएगा तुम्हारा तुम बनो ना ये के चक्कर में

2801
03:29:30,720 --> 03:29:34,800
के चक्कर में तुम्हारा खा जाएंगे नंबर है तुम्हारे सिग्नेचर

2802
03:29:34,800 --> 03:29:38,960
है वही है ठीक है फोटो लगा

2803
03:29:38,960 --> 03:29:44,280
पढ़ रहा

2804
03:29:44,280 --> 03:29:49,600
था फिर वापस

2805
03:29:49,600 --> 03:29:55,600
मैं कर दूंगा मैं कर दूंगा

2806
03:30:07,440 --> 03:30:12,040
बाद उसने मुझे दूसरी बात नोटिस पांच के बाद मैंने

2807
03:30:12,040 --> 03:30:16,960
पढ़ा नोटिस मुझे पूछा मिल गया पूछा क्या मिल गया

2808
03:30:16,960 --> 03:30:21,200
मिल गया माध्यम से तो हम इसको पढ़ेंगे

2809
03:30:21,200 --> 03:30:25,480
अपने कानून जो भी हमारे सलाहकार है उनसे बरामद करेंगे भैया इसमें

2810
03:30:25,480 --> 03:30:30,680
जो एडवोकेट का पक्ष है वो है हमारा क्या आगे

2811
03:30:30,680 --> 03:30:34,800
को सबसे बड़ी बात को पर भेजा जाएगा ये एक ता से संपर्क

2812
03:30:34,800 --> 03:30:39,120
करने का माध्यम लेकिन उसका पूर्व में नहीं

2813
03:30:39,120 --> 03:30:43,440
आएगा अभिषेक द्विवेदी ने चक्कर में छोड़ो और तुम हमसे ही काम कर

2814
03:30:43,440 --> 03:30:47,760
क्योंकि जिस उम्र में ना उसके उस समय हमारे पिताजी हमको प्रथम अपील पदाधिकारी

2815
03:30:47,760 --> 03:30:52,080
के लिए आवेदन लिखवाकर बताते थे बोलना कैसे

2816
03:30:52,080 --> 03:30:56,320
आठ साल को देखते तो इस मामले में गलती

2817
03:30:56,320 --> 03:31:00,560
बनाने के खिलाफ ऐसा कभी भी आपको बीएस गया नहीं किया

2818
03:31:00,560 --> 03:31:04,560
और आईपीसी सीआरपीसी की सारी धारा लगभग वो सारे के सारे पिताजी अकेले

2819
03:31:04,560 --> 03:31:05,060
रहे

2820
03:31:04,640 --> 03:31:08,640
बिना किसी की सहायता से थे और सब जगह जब वो मुसलमानों ने पता करने के लिए लगाए थे वो

2821
03:31:08,640 --> 03:31:12,640
शायद भी अब तो मर गया अब मेरे पिताजी पर जितने आरोप लगे थे सब मुसलमानों

2822
03:31:12,640 --> 03:31:16,640
ने कर दिया लगभग मेरे पिताजी का ये जो सब चला

2823
03:31:16,640 --> 03:31:20,920
रहा था वहां पर मिसियों के पिताजी कुछ कर रहे थे वहां के बनवास के बीच में कम मारना बना रहे

2824
03:31:20,920 --> 03:31:25,800
थे समझा और मेरे पिताजी अपने मेरे पिता

2825
03:31:25,800 --> 03:31:29,840
तो भाई तगड़ा उससे बहुत तगड़ा काम करते और

2826
03:31:29,840 --> 03:31:33,840
एक बिना सब अपराध कर दिया और अंत

2827
03:31:33,840 --> 03:31:38,000
पिताजी धरातल पे काम करने की बात करते हैं। पिताजी

2828
03:31:38,000 --> 03:31:42,320
बहुत जगह वो लड़े लड़ाई शायद धर्म से संबंधित थी तो

2829
03:31:42,320 --> 03:31:46,400
प्रणम में है। मगर उन्होंने तो समीक्षा नहीं की

2830
03:31:46,400 --> 03:31:50,480
ना आचार्यों की जगतगुरु की गद्दी पर बैठे

2831
03:31:50,480 --> 03:31:54,480
हुए लोगों की समीक्षा नहीं करी ना पब्लिकली आकर के तो उनसे अपनी तुलना क्यों

2832
03:31:54,480 --> 03:31:58,480
कर रहे हो? हमने तो यह बताया है कि तुम समीक्षा

2833
03:31:58,480 --> 03:32:02,560
इसलिए कर पा रहे हो क्योंकि तुम धरातल पर एक्टिव नहीं हो और

2834
03:32:02,560 --> 03:32:06,800
एक्टिव हो जाओ कुछ करो जाकर के फिर बता देना कितनी समीक्षा

2835
03:32:06,800 --> 03:32:10,880
कर रहे हो क्योंकि एक्टिव होगे तो तुम्हें छात्र धर्म का आलंबन लेना

2836
03:32:10,880 --> 03:32:15,200
होगा रणनीति बनानी होगी फिर तुम्हारी रणनीति का रणनीति

2837
03:32:15,200 --> 03:32:19,200
जो तुम्हारी रणनीति होगी उसका खंडन हम करेंगे यहां बैठ कर के चश्मा लगा के

2838
03:32:19,200 --> 03:32:19,760
लेंस लगा

2839
03:32:19,760 --> 03:32:25,760
के चलो क्या है तुम्हारे खिलाफ क्या तुम

2840
03:32:27,320 --> 03:32:31,640
पिता बता रहा है उसके बाद से बता

2841
03:32:31,640 --> 03:32:36,080
दिया करता था बेटा बातें हम नहीं देते उसको अभ्यास हो

2842
03:32:36,080 --> 03:32:39,720
डिलीट करते नोटिस देते डिली करते नोटिस देते डिलीट

2843
03:32:39,720 --> 03:32:43,760
करते मत हो रहा है कि क्या अपना करियर नापने

2844
03:32:43,760 --> 03:32:47,840
पर इसको मतलब इतनी डांट से और इतना हम वकील

2845
03:32:47,840 --> 03:32:51,920
नहीं है लेकिन वकीलों के गतिविधि से अदालती कारवाई से अवगत है और कुछ नहीं तो

2846
03:32:51,920 --> 03:32:56,000
मेरे पास इंटरनेशनल लॉ की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री भी है तो

2847
03:32:56,000 --> 03:33:02,000
ऐसा मत समझो की क्या मुद्दा

2848
03:33:06,440 --> 03:33:12,440
है तुमको नहीं

2849
03:33:14,760 --> 03:33:18,880
है अच्छा करियर है तुम्हारे लिए अच्छा करना करियर

2850
03:33:18,880 --> 03:33:24,880
नहीं है वो हमारे समाज से लड़ने के लिए से लड़ने के पूरी शंकराचार्य किसी से बात कर लेते

2851
03:33:26,760 --> 03:33:30,880
अरे पहले तो सिद्धांत कहां है कि धर्म

2852
03:33:30,880 --> 03:33:35,040
की रक्षा करने के लिए केवल उसी का साथ लिया जाएगा

2853
03:33:35,040 --> 03:33:39,920
जो तुम्हारे सिद्धांतों से बिल्कुल यथावत सहमत होगा।

2854
03:33:39,920 --> 03:33:45,040
तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। कहां है?

2855
03:33:45,040 --> 03:33:49,760
शास्त्र का प्रमाण भैया यह कहा जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर

2856
03:33:49,760 --> 03:33:54,000
यदि लुटेरों का भी मनुष्मति में कहा गया है ना लूट का धन

2857
03:33:54,000 --> 03:33:58,560
भी हो उससे भी धर्म की रक्षा करने के लिए आप उसको ले सकते हो

2858
03:33:58,560 --> 03:34:02,800
उसका उपयोग कर सकते हो तो फिर तुम शास्त्र प्रमाण दो

2859
03:34:02,800 --> 03:34:06,880
कि धर्म की रक्षा करने के लिए उसका नहीं लिया

2860
03:34:06,880 --> 03:34:10,960
जाएगा साथ जो तुम्हारे सिद्धांतों को नहीं मानता होगा

2861
03:34:10,960 --> 03:34:15,600
पहली बात और

2862
03:34:15,600 --> 03:34:19,680
दूसरी बात यह है कि अवेलेबिलिटी नाम की भी कोई चीज

2863
03:34:19,680 --> 03:34:23,080
होती है ना

2864
03:34:23,080 --> 03:34:27,440
पूरे लखनऊ में कितने शिष्य हैं पहले नंबर

2865
03:34:27,440 --> 03:34:31,600
ये ढूंढना है फिर क्या वो सारे शिष्यों का फोन नंबर मेरे पास है कि नहीं

2866
03:34:31,600 --> 03:34:35,680
दूसरे नंबर ये ढूंढना है फिर वो शिष्य

2867
03:34:35,680 --> 03:34:39,680
किस-किस स्थिति में कौन-कौन है जब मुझे 4 बजे पता लग रहा है 4:30 बजे

2868
03:34:39,680 --> 03:34:44,080
मुझे वहां पहुंचना है तो मैं ये ढूंढूंगा अरे वो सब छोड़ो

2869
03:34:44,080 --> 03:34:48,640
अगर तुम्हारे घर में किसी की किसी का स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा

2870
03:34:48,640 --> 03:34:52,960
तो तुम ये ये ढूंढोगे क्या कि किसी ऐसे को बोला तुम्हारे सिद्धांत

2871
03:34:52,960 --> 03:34:57,760
को मानता हो सबसे पहले कौन मिलेगा तुम्हें पड़ोसी

2872
03:34:57,760 --> 03:35:01,840
और हां मेरे पड़ोस में आरएसएस और बजरंग दल को मानने वाले लोग थे वो

2873
03:35:01,840 --> 03:35:06,000
मिले मुझे तो मैं बैठा रहा हूं तब तक दुर्गा मां को गाली देने

2874
03:35:06,000 --> 03:35:10,080
वालों के लिए कि जब मेरे वो शंकराचार्य जी के शिष्य

2875
03:35:10,080 --> 03:35:14,160
आएंगे मैं तभी उनको रोकने जाऊंगा भले ही मुझे कोई हिंदू ऐसा मिल रहा

2876
03:35:14,160 --> 03:35:18,360
हो जो अभी भटका हुआ है। परंतु वह इस मामले में मेरे साथ देने को तैयार

2877
03:35:18,360 --> 03:35:23,160
है। भले ही मुझे कोई ऐसा व्यक्ति मिल रहा हो

2878
03:35:23,160 --> 03:35:27,200
जो प्रमाण्य बुद्धि अपने धर्म में रखता है। हालांकि उसको धर्म की

2879
03:35:27,200 --> 03:35:31,360
परिभाषा आती है कि पूर्ण रूप से कि नहीं आती वो एक अलग विषय और

2880
03:35:31,360 --> 03:35:37,360
वो मेरे जाने के लिए मेरे साथ जाने के लिए तैयार है।

2881
03:35:49,880 --> 03:35:53,920
चलिए बोले शंकाचार्य की धारा पर काम करो तुम्हारे ऐसा काम कर

2882
03:35:53,920 --> 03:35:58,000
रहे हो शंकाचार्य के पास जाने की बोले हम ये पढ़ रहे हैं कि आप आशीर्वाद चाहिए आपके संसाधन का प्रयोग करने चाहिए

2883
03:35:58,000 --> 03:36:02,080
ताकि तुमने मत की व्यवस्थाओं पर पत्र नहीं उठाया कभी भी बल्कि यही कारण है ये क्या

2884
03:36:02,080 --> 03:36:06,160
नाम है कि कभी भी तुमने मत की व्यवस्थाओं पर पत्र नहीं उठाया कभी भी बल्कि

2885
03:36:06,160 --> 03:36:10,560
जिन वकिलों के नीचे तुम काम करते हो वही वकील तुम्हारी ये जो अभिषेक काम करता है वही फकीरों ने कोई शंकराचार्या

2886
03:36:10,560 --> 03:36:14,800
के अवस्थाए आज पर बात करके बहुत बताया है महाराज आपस में

2887
03:36:14,800 --> 03:36:18,880
लोग इसके बाद ये सभी वीडियो बना रहे है ना इनके लोग ऐसे ऐसे शब्दों के लिए भी ऐसी शिकार हो सकती है

2888
03:36:18,880 --> 03:36:23,360
जिसका कोई दो नहीं तो इसीलिए मैं ये कहता हूं क्या

2889
03:36:23,360 --> 03:36:27,520
है जिसका कोई दो नहीं लोग बहुत बुरे पकड़ेंगे ये सभी वीडियो बना रहे हैं ना ऐसे

2890
03:36:27,520 --> 03:36:31,760
ऐसे शब्दों के लिए भी ऐसी कारवाई हो सकती है जिसका कोई दो नहीं अच्छा बढ़िया तो

2891
03:36:31,760 --> 03:36:35,840
कर लेना कारवाई कर लेना इसीलिए तुम्हारे से सभी हाथ मिलाते हो कल को तुमको समाज के

2892
03:36:35,840 --> 03:36:39,920
साथ करती है ये सब शास्त्र के प्रमाण से क्यों नहीं बोल रहे? बहुत बड़े शास्त्रज्ञ हो। क्यों

2893
03:36:39,920 --> 03:36:43,920
नहीं बोल रहे शास्त्र के प्रमाण से कि हमने अगर आरएसएस का साथ ले लिया

2894
03:36:43,920 --> 03:36:49,080
है तो हम धंधा है ये हमारा।

2895
03:36:49,080 --> 03:36:53,440
हम और तुमने नहीं लिया क्या? तुम भी धंधेबाज

2896
03:36:53,440 --> 03:36:57,440
हो गए। तो शास्त्र का प्रमाण तो है नहीं इस विषय में कि अगर तुमने ले

2897
03:36:57,440 --> 03:37:02,280
लिया किसी से तो तुम जो है धंधेबाज हो जाओगे

2898
03:37:02,280 --> 03:37:06,320
और पास आ जाते हैं। पहली बात तो

2899
03:37:06,320 --> 03:37:10,400
शास्त्र का प्रमाण है नहीं कि तुम जो है

2900
03:37:10,400 --> 03:37:14,880
व्यक्ति अगर जो सिद्धांत को पूरी तरीके से मानने वाला नहीं होगा

2901
03:37:14,880 --> 03:37:18,960
उसका साथ ले लोगे तो तुम जो है धंधेबाज

2902
03:37:18,960 --> 03:37:24,920
हो जाओगे। शास्त्र का प्रमाण नहीं है। जहां देना होता है वहां नहीं देते हो।

2903
03:37:24,920 --> 03:37:29,080
चलो बस बकबक करा

2904
03:37:29,080 --> 03:37:33,120
लोका के लोग भी कुछ करते हैं शास्त्रीयता कारण तो भी उनका करते हैं इसीलिए हम तो

2905
03:37:33,120 --> 03:37:37,200
धर्म को मान रखते हुए शंकराचार्य जी के विरुद्ध भी कुछ करते है शास्त्रीयता का कारण तो भी उनका

2906
03:37:37,200 --> 03:37:41,520
करते हमारे धार्मिक संप्रदाय सीमा में क्या है नहीं है

2907
03:37:41,520 --> 03:37:45,600
हमने समर्थन नहीं किया जो फिल्मों का योग कर रहे थे जो सुरक्षा के लिए बात करते हैं जो

2908
03:37:45,600 --> 03:37:49,840
तो हमारा उसे निजी नहीं है हमने कभी ये नहीं कहा कि हमसे निश्चि बनाएंगे तो मेरा धर्म मेरा करता है कि हम उसे

2909
03:37:49,840 --> 03:37:54,160
निश्चित धुरी बनाएंगे क्योंकि तुम्हें धर्म का बोध नहीं है क्योंकि पहली बात तो तुम गुरु विहीन

2910
03:37:54,160 --> 03:37:59,160
हो क्योंकि तुम अपना लुप्त एक संप्रदाय बना रहे हो कल्पना के आधार

2911
03:37:59,160 --> 03:38:03,360
पे लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य बन रहे हो तो तुम गुरु विहीन

2912
03:38:03,360 --> 03:38:04,160
हो इसलिए

2913
03:38:04,160 --> 03:38:09,120
तुम्हें धर्म का बोध नहीं है तुम्हें ये नहीं पता है

2914
03:38:09,120 --> 03:38:13,520
कि गुरुदेव की निंदा करने वाले की जीवा ना काट सको

2915
03:38:13,520 --> 03:38:18,440
तो उससे दूरी तो कम से कम बना ही लो ये तुम्हें नहीं पता

2916
03:38:18,440 --> 03:38:22,480
है तुम्हें यह सब पता है कि इसको गोलगप्पे खाने चाहिए कि नहीं तुम्हें

2917
03:38:22,480 --> 03:38:26,480
ये सब पता है कि क्या कहते हैं इतनी बार

2918
03:38:26,480 --> 03:38:30,640
मिट्टी से शौच करना है या यह धोना है ये धोना है सब अच्छा है और इसके

2919
03:38:30,640 --> 03:38:35,280
लिए प्रणम्य हो तुम ये सब पता है ठीक है भक्षवक्ष

2920
03:38:35,280 --> 03:38:39,440
में तुम्हें ज्ञान है ये सब पता है मगर दूसरे

2921
03:38:39,440 --> 03:38:43,680
जो धार्मिक आचरण है कि अन्यों के साथ तुम्हारा क्या व्यवहार होना चाहिए

2922
03:38:43,680 --> 03:38:47,680
उस व्यवहार का तुम्हें ज्ञान नहीं है। उसमें जो धार्मिक आचरण होना चाहिए

2923
03:38:47,680 --> 03:38:52,400
वो तुम्हें नहीं पता है। इसलिए

2924
03:38:52,400 --> 03:38:57,200
तुम्हें नहीं पता। तुमने पहली बात तो यह है कि

2925
03:38:57,200 --> 03:39:01,200
जो हमारे गुरु हैं बल्कि हमारे ही नहीं तुम्हारे भी

2926
03:39:01,200 --> 03:39:05,360
गुरु हैं। तो तुमने कहीं पे अपने वक्तव्य में कहा भी है कि मैं तो

2927
03:39:05,360 --> 03:39:09,360
शिष्य होने का कर्तव्य निभा रहा हूं। मगर उनसे प्रश्न पूछने की

2928
03:39:09,360 --> 03:39:13,360
तुम्हारी शैली तो गलत है। शास्त्र विरोधी है। तो यहां तुम्हारा खंडन

2929
03:39:13,360 --> 03:39:18,080
क्यों नहीं होगा? ये हमने कभी नहीं कहा। अभी तो

2930
03:39:18,080 --> 03:39:19,320
पर

2931
03:39:19,320 --> 03:39:23,520
लगा सही है यहां पर कोई नहीं के साथ खड़े इतना में

2932
03:39:23,520 --> 03:39:27,840
किसी धंधे के चक्कर में तुमने आज समाधि और आज कुछ क्षेत्र में प्रभावी शंकर परंपरा

2933
03:39:27,840 --> 03:39:31,920
दिया कम से कम कोई वश दिया किसी

2934
03:39:31,920 --> 03:39:37,920
ऐसे सब संप्रदाय के शिष्यों को एक करके विश्व में रखने वाले को एक

2935
03:39:38,360 --> 03:39:42,880
काम कोई तुम्हारी घर की स्त्रियों

2936
03:39:42,880 --> 03:39:46,880
पर जब आक्रमण करेगा तो तुम यह ढूंढना कि यहां पर आसपास मेरे

2937
03:39:46,880 --> 03:39:51,280
रामानुज परंपरा का कौन है? और फिर तुम्हें कैसे पता कि मैंने नहीं ढूंढा।

2938
03:39:51,280 --> 03:39:55,440
मैं तो मैं तो पकडूंगा ना। तुमने एक पता लगाया मैंने ढूंढा है कि नहीं ढूंढा

2939
03:39:55,440 --> 03:39:59,480
है। भाई मैंने तो मैसेजेस किए थे अनेकों

2940
03:39:59,480 --> 03:40:03,600
को। हां नहीं आया कोई तो

2941
03:40:03,600 --> 03:40:08,840
मैं रुका रहूं आने तक।

2942
03:40:08,840 --> 03:40:13,960
क्या तर्कहीन अप्रासंगिकता

2943
03:40:13,960 --> 03:40:17,160
पूर्वाग्रह

2944
03:40:17,160 --> 03:40:21,200
हां क्या क्या है संकीर्णता विचारधारा की

2945
03:40:21,200 --> 03:40:25,200
कि नहीं नकारात्मक सकारात्मक दोनों अर्थ है पर मैं नकारात्मक

2946
03:40:25,200 --> 03:40:30,640
को ही पकडूंगा

2947
03:40:30,640 --> 03:40:35,360
तुमने क्या किया है तुम कहां पे रहते हो

2948
03:40:35,360 --> 03:40:39,440
यह बताओ सब छोड़ो तुम कहां पे रहते हो? तुम अपने शहर का नाम

2949
03:40:39,440 --> 03:40:43,600
बताओ। नजदीकी जो डिस्ट्रिक्ट हो मैं देखता हूं वहां पे। तुम्हारे नजदीक में कहां पे राम

2950
03:40:43,600 --> 03:40:47,600
रामपाल का नाम दान सेंटर है और तुम्हारे पिताजी ने भी बहुत सारे केस लड़े

2951
03:40:47,600 --> 03:40:52,440
हैं और जीते हैं और तुम्हें भी अच्छा खासा ज्ञान है। तो रामपाल की लड़ाई

2952
03:40:52,440 --> 03:40:56,800
लड़ो। वहीं से मुकदमा कर दो उनके ऊपर। और उनकी जो सामग्री

2953
03:40:56,800 --> 03:41:00,800
है वो इललीगल है पूर्णतया। इस बारे में ठोस प्रमाण मैं तुम्हें दे रहा

2954
03:41:00,800 --> 03:41:06,800
हूं। लड़ो लड़ो मुकदमा। नहीं लड़ोगे

2955
03:41:07,440 --> 03:41:11,520
यहां चिकचिक बाजी करो खुद कुछ करना नहीं है जो कुछ

2956
03:41:11,520 --> 03:41:15,600
कर रहा है उसको तुम ये बता रहे हो तुम्हें ऐसा करना चाहिए था ये जाने बिना कि

2957
03:41:15,600 --> 03:41:20,160
तुम्हारे द्वारा दिए जाने वाले विकल्पों का आलंबन उसने लिया कि नहीं लिया है

2958
03:41:20,160 --> 03:41:24,280
क्या भाई अहंकार की भी अति होती

2959
03:41:24,280 --> 03:41:29,280
है इसमें बहुत बड़ा

2960
03:41:29,280 --> 03:41:31,720
बात कर

2961
03:41:31,720 --> 03:41:37,400
दिया ऐसे मैंने ये बता दिया अच्छी बात

2962
03:41:37,400 --> 03:41:41,520
को है क्या सत्य

2963
03:41:41,520 --> 03:41:45,760
है तो सत्य है आगे सुना नहीं उसने कहा है की ये मेरे बारे में बोलने वाले

2964
03:41:45,760 --> 03:41:49,760
सत्य है ठीक है और सत्य से अघात सत्य बात सत्य

2965
03:41:49,760 --> 03:41:53,840
की तो नहीं है आज ही सत्य है और सत्य से सत्य है सुनने

2966
03:41:53,840 --> 03:41:58,080
आगे सुना नहीं है जो सत्य है तो सत्य है

2967
03:41:58,080 --> 03:42:02,160
सुन सुन आगे सुना नहीं कहा है की ये मेरे बारे में बोलने वाले सत्य है ठीक है और सत्य से

2968
03:42:02,160 --> 03:42:06,320
सत्य सत्य से अघात सत्य को तो अब सुने बात सत्य कितनी है आज

2969
03:42:06,320 --> 03:42:10,480
भी सत्य है वो भी सत्य है बिलकुल भी सत्य नहीं है की अघात सत्य है क्या ऐसे सत्य

2970
03:42:10,480 --> 03:42:14,720
अघात ही होता है तो हो जा वो सत्य नहीं होता है इसने कहा वो सत्य बात है

2971
03:42:14,720 --> 03:42:20,720
सुनते है क्या है नहीं

2972
03:42:25,480 --> 03:42:28,920
हो के

2973
03:42:28,920 --> 03:42:34,920
साथ है

2974
03:42:35,080 --> 03:42:39,760
को इतने नहीं भैया ने बोला श्दावली है जैसे स्वामी

2975
03:42:39,760 --> 03:42:43,840
ब्रह्मचारी जी भी स्वामी सरस्वती हो चुके है उनकी भी शरी है भैया बोल अरे भैया अरे भैया

2976
03:42:43,840 --> 03:42:48,000
तो शब्दावली होती है लोगों की तो मैंने ऐसे भैया कर दिया इसके साथ मुझे भाईचारा नहीं रखना है पता नहीं है ये सिवा

2977
03:42:48,000 --> 03:42:52,240
कब्जा करा कब्जा करा समा मैं पहले बोल चुका हूं तुम्हें

2978
03:42:52,240 --> 03:42:56,240
तुम्हारा उत्तर दे दे रखा है चलो तुमने यहां पे कहा मैंने पहले ही कह दिया ना शुरू

2979
03:42:56,240 --> 03:43:00,320
में हमें ना तुम्हारी मित्रता चाहिए ना तुम्हारे वो चाहिए ये क्या

2980
03:43:00,320 --> 03:43:04,320
कहते हैं शत्रुता खैर तुम्हें अगर लेनी

2981
03:43:04,320 --> 03:43:08,400
है तो तुम कर लो मगर हमें तुम्हारी मित्रता की कोई आवश्यकता

2982
03:43:08,400 --> 03:43:12,720
नहीं है। ठीक है भ्रातत्व

2983
03:43:12,720 --> 03:43:16,880
तो बहुत दूर की बात है। चलो हां और

2984
03:43:16,880 --> 03:43:21,200
भाई के रूप में अगर तुम्हें लेना है कि नहीं लेना है वो हम तुमसे

2985
03:43:21,200 --> 03:43:25,200
डिसाइड नहीं करेंगे। वो हमारे गुरुदेव हैं। बोलते हैं कि हम

2986
03:43:25,200 --> 03:43:29,720
100 और तुम पांच और बाहर का कोई आ जाए तो 105 तो उस सापेक्ष

2987
03:43:29,720 --> 03:43:34,080
में हम कहेंगे कि तुम्हारे भाई हो तुम मत कहो।

2988
03:43:34,080 --> 03:43:38,440
मगर मत कहो मगर तुम कभी अगर परेशान हो जाओगे कहीं पर अगर

2989
03:43:38,440 --> 03:43:40,560
फंसेगे और हम देख रहे होंगे

2990
03:43:40,560 --> 03:43:44,720
कि यहां पर जो है तुम्हें बचाना चाहिए। है ना? तो

2991
03:43:44,720 --> 03:43:50,720
हम जरूर बचाएंगे।

2992
03:43:50,800 --> 03:43:55,520
भाई कौन स्वीकार करते हैं भाई छोटा ना बड़ा किसी प्रकार से इससे हमारा कोई भाईचारा

2993
03:43:55,520 --> 03:43:59,520
भाईचारा तो है जब तक वेदों में प्रमाण्य बुद्धि है

2994
03:43:59,520 --> 03:44:04,200
भाईचारा है तो तुम स्वीकार करो या ना करो बात अलग है ठीक

2995
03:44:04,200 --> 03:44:08,320
है उस सापेक्ष से वेद विरोधियों

2996
03:44:08,320 --> 03:44:11,400
के सापेक्ष

2997
03:44:11,400 --> 03:44:15,840
से चलो तुम्हारे स्वीकार करने से

2998
03:44:15,840 --> 03:44:20,240
संबंध थोड़ी ना बन बनेंगे बिगड़ेंगे जो संबंध होंगे वो होंगे।

2999
03:44:20,240 --> 03:44:25,280
जो संबंध नहीं होंगे वो नहीं होंगे। चलो

3000
03:44:25,280 --> 03:44:29,040
क्या

3001
03:44:29,040 --> 03:44:33,120
और अब अब तुम्हारी ये जो व्याख्या की है इतनी सब मैंने तो अब

3002
03:44:33,120 --> 03:44:39,040
छोटे भाई के रूप में हो। भटके हुए छोटे भाई।

3003
03:44:39,040 --> 03:44:43,040
मतलब बड़े नहीं हो। छोटे हो। मैं अगर 35 36 साल

3004
03:44:43,040 --> 03:44:47,360
का हूं तो मेरा एक छोटा भाई है। एक हिंदू है सनातन वैदिक

3005
03:44:47,360 --> 03:44:52,360
आर्य हिंदू भटका हुआ। वो थोड़े अपने पूर्वाग्रह से अहंकार

3006
03:44:52,360 --> 03:44:56,800
से अपने किसी मंतव्य से धंधे धंधे की वजह से

3007
03:44:56,800 --> 03:45:00,800
वो जो है अपने आप को ख्यापित में करने में लगा हुआ है। मगर हिंदू

3008
03:45:00,800 --> 03:45:05,120
होने के नाते वर्णाश्रमी होने के नाते वैदिक होने के नाते वेदों

3009
03:45:05,120 --> 03:45:09,120
में प्रमाण्य बुद्धि रखने के नाते वो मेरा भाई है।

3010
03:45:09,120 --> 03:45:13,280
तुम मत मानो। तुम्हारे करने से नहीं होता है ना

3011
03:45:13,280 --> 03:45:17,600
शास्त्रों से होता है गुरु वाक्यों से होता है

3012
03:45:17,600 --> 03:45:21,880
तुम मत

3013
03:45:21,880 --> 03:45:27,880
मानो हम

3014
03:45:33,920 --> 03:45:38,080
एक भाई

3015
03:45:38,080 --> 03:45:42,320
क्या इससे भी दिक्कत हो गई देखो अब ठीक है कह के आगे बढ़ने लगे एक 28

3016
03:45:42,320 --> 03:45:46,640
38 पे देखो एक 28 38 टाइम स्टैंप लगाओ

3017
03:45:46,640 --> 03:45:50,800
क्या कहा है इन्होंने वहां पे देखो पहले बोले विरोध करने लगे फिर उसके

3018
03:45:50,800 --> 03:45:54,800
बाद देखा कि ये तो ठीक बात है तो आगे बढ़ गए क्यों क्योंकि अगर तुम मेरे साथ नहीं जाते ना

3019
03:45:54,800 --> 03:45:59,040
अगर तुम मेरा साथ नहीं जाते तो पूरे पिछवाले तुमको इतनी गालियां देते और तुम्हारा

3020
03:45:59,040 --> 03:46:03,600
वो बचा छोड़ दिया जो 100 105 वाजपेय इसका मतलब हम बाहर वाले हैं।

3021
03:46:03,600 --> 03:46:08,320
इन्होंने अभी बोला जल्दबाजी में इन्होंने बोला क्या बोला?

3022
03:46:08,320 --> 03:46:12,480
इसका मतलब हम बाहर के हैं। फिर जब आगे व्याख्या सुनी तो इनको पता चल गया

3023
03:46:12,480 --> 03:46:17,040
ये हम गलत बोल गए तो उस विषय को छोड़ दिए। एक 28 48

3024
03:46:17,040 --> 03:46:21,040
और वो भी चौपट। यही कारण है कि तुम मेरे साथ नहीं लिखना चाहते। एक और उदाहरण देता हूं। वो

3025
03:46:21,040 --> 03:46:25,040
उदाहरण इसलिए देता हूं क्योंकि वो व्यक्ति खुले आमने लगे। का नाम लूंगा और सब तुम्हारा नाम

3026
03:46:25,040 --> 03:46:29,160
इस पत्र में लूंगा। कैसे लूंगा? इस आगे इस लाइन में उसके आगे वाले लाके बताऊंगा।

3027
03:46:29,160 --> 03:46:33,440
जब जी के था गौशाला में हमारा

3028
03:46:33,440 --> 03:46:37,040
रामायण का व्याख्यान हुआ था उस व्याख्यान में यात्रा

3029
03:46:37,040 --> 03:46:41,280
गोकुल का तो वहां पर प्रबंधक रूप में प्रशांत मिश्र जी थे तो प्रशांत

3030
03:46:41,280 --> 03:46:45,400
मिश्र जी कर रहे थे बैठकर बोलना है आप लगा दे

3031
03:46:45,400 --> 03:46:49,600
मैं व्यवस्था की थी क्योंकि मैंने कहा था मैं मोबाइल से ही रिकॉर्ड कर लूंगा लेकिन उन्होंने व्यवस्था की

3032
03:46:49,600 --> 03:46:53,680
थी हालांकि वो व्यवस्था पर आए जो मुझे माला पहना रहे तो उन्होंने मुझे वो सारे फोटो भेज

3033
03:46:53,680 --> 03:46:58,240
खुद ही भेज और कहा की फोटो साधन मत कीजिएगा और आपके क्यों

3034
03:46:58,240 --> 03:47:02,240
क्यों आपके और मेरे क्षेत्र में कोई असा बात है क्या हम लोग कोई खत्म कर

3035
03:47:02,240 --> 03:47:06,480
रहे हैं क्या कोई श्राप के विचार कर रहे हैं नहीं या कोई हम लोग ऐसा कोई शरीर

3036
03:47:06,480 --> 03:47:10,640
कर नहीं मैं करने बैठा हूं तो

3037
03:47:10,640 --> 03:47:14,880
वहां पर वो व्यक्ति जिसने तुम्हें सम्मान दिया है अगर वो गुरुदेव का शिष्य है

3038
03:47:14,880 --> 03:47:18,960
तो वो धूर्त है जो तुम्हारे साथ इस तरह से खड़ा हुआ बिना किसी

3039
03:47:18,960 --> 03:47:23,600
द्वंद के धूर्त है जो गुरुदेव का शिष्य होते हुए

3040
03:47:23,600 --> 03:47:27,760
तुम्हें सम्मान प्रकट कर रहा है तो वो उसको

3041
03:47:27,760 --> 03:47:31,840
अगर या तो उसको मालूम मालूम नहीं है हम यह बेनिफिट ऑफ डाउट दे दे कि

3042
03:47:31,840 --> 03:47:36,240
तुमने यह सब मजाक उड़ाया है कि नहीं उड़ाया है। अनावश्यक रूप से अपनी श्रेष्ठता

3043
03:47:36,240 --> 03:47:39,560
को सिद्ध करने के लिए

3044
03:47:39,560 --> 03:47:44,000
तुमने ये शंकराचार्यों के लिए अवमानना

3045
03:47:44,000 --> 03:47:48,000
वाले शब्द पंक्तियां बोली है कि नहीं बोली? तुमने केवल शास्त्रोक्त विषय

3046
03:47:48,000 --> 03:47:52,040
पर बात नहीं की है। मिस्टर

3047
03:47:52,040 --> 03:47:56,160
भगवतानंद तुमने केवल शास्त्रोक्त विषय की पर बात नहीं की। तुमने कैरी मिनाटी

3048
03:47:56,160 --> 03:48:00,720
बनने की कोशिश की है धर्म का। धार्मिक कैरी मिनाटी बनने की कोशिश की तुम

3049
03:48:00,720 --> 03:48:05,040
और होते जब अपनी तुम उसमें वो हो गए

3050
03:48:05,040 --> 03:48:09,400
डूब गए अहंकार में कि अब बस अब तुम्हारे को कोई कहेगा नहीं कुछ

3051
03:48:09,400 --> 03:48:15,400
तो तुमने ये किया कि

3052
03:48:19,000 --> 03:48:23,120
अ तो तुम्हें तो तुम ये सब बात कर

3053
03:48:23,120 --> 03:48:28,120
रहे हो तो मैनेजर आप मुझे मेरा काम

3054
03:48:28,120 --> 03:48:32,240
मैं करने बैठा हूं। क्यों मर से आपत्ति आएगी? और यहां तक मन

3055
03:48:32,240 --> 03:48:36,560
से आपत्ति आएगी ना क्योंकि तुम हमारे गुरु के निंदक हो। निंदा

3056
03:48:36,560 --> 03:48:40,960
की है तुमने। भाई चलो कहीं शास्त्र शास्त्रीय

3057
03:48:40,960 --> 03:48:44,960
पक्ष की बात है। तुम मधुमक्खी सेना का मजाक क्यों

3058
03:48:44,960 --> 03:48:49,120
उड़ा रहे हो भाई? तुम ही तो तो क्या तुम उनमें हरिहर

3059
03:48:49,120 --> 03:48:53,440
का तेज नहीं मानते हो? ये सब नहीं मानते हो। इन बातों का मजाक क्यों उड़ा रहे हो? मजाक

3060
03:48:53,440 --> 03:48:58,160
ही तो उड़ा रहे हो। इस विषय में पूछो उनसे जाके

3061
03:48:58,160 --> 03:49:01,160
पूछा

3062
03:49:01,160 --> 03:49:05,200
तुमने मजाक ही तो उड़ा रहे हो तुम उनका यहां पर यहां पर तो

3063
03:49:05,200 --> 03:49:09,760
कोई शास्त्र शास्त्रीय बात है ही नहीं

3064
03:49:09,760 --> 03:49:14,080
शास्त्र के पक्ष की तो बात है ही नहीं कि तुम यहां कोई शास्त्रीय उनका वो कर रहे हो

3065
03:49:14,080 --> 03:49:18,160
उन्होंने अपने अंदर कोई दिव्यता दिव्य विद्या का वो बताया है कि भैया

3066
03:49:18,160 --> 03:49:22,320
मेरे पास ऐसे कोई दिव्य शक्ति है तो क्या तुम ये कह रहे हो कि ऐसी

3067
03:49:22,320 --> 03:49:26,640
दिव्य शक्ति हो नहीं सकती है अब तुम ना तुम्हारा कहना है कि तुमको देवताओं

3068
03:49:26,640 --> 03:49:30,720
के दर्शन होते थे। तभी तुम अब हम उसका

3069
03:49:30,720 --> 03:49:35,040
मजाक उड़ाए कि तभी तुम्हें जो है हर हफ्ते जो है राजस्थान

3070
03:49:35,040 --> 03:49:39,040
जाना पड़ता है प्रत्येक शुक्रवार को। हम ऐसे तुम्हारा

3071
03:49:39,040 --> 03:49:43,040
मजाक उड़ाए उन देवताओं के दर्शन का। तुम्हें यंत्र मिला। उसी को

3072
03:49:43,040 --> 03:49:47,040
तुमने बाद में बैटबॉल खेला। ये सब मजाक उड़ाए तुम्हारा। तो

3073
03:49:47,040 --> 03:49:51,120
यही देख लो। यहीं पर तुमको मैंने बता दिया। और जब इस मजाक को

3074
03:49:51,120 --> 03:49:55,320
उड़ाने के बाद भी और जानने के बाद भी कोई ऐसा व्यक्ति

3075
03:49:55,320 --> 03:49:59,600
है जो क्या कहते हैं तुम्हें

3076
03:49:59,600 --> 03:50:03,920
सम्मान दे रहा है तुम्हारा तुम्हारे साथ खड़ा है तो वो

3077
03:50:03,920 --> 03:50:07,920
धूत है फिर या फिर एक बेनिफिट ऑफ डाउट और

3078
03:50:07,920 --> 03:50:12,000
दे दो कि उसको धर्म का बोध नहीं है मगर तुम

3079
03:50:12,000 --> 03:50:16,000
तो उसके साथ खड़े हो तुम्हें तो धर्म का बोध है उसको बताना चाहिए कि हमने तुम्हारे

3080
03:50:16,000 --> 03:50:16,500
गुरु

3081
03:50:16,240 --> 03:50:21,600
के लिए यहां उपहास बनाया है बिना बात के

3082
03:50:21,600 --> 03:50:26,480
करो ना कि मेरे पास मधुमक्खियों की सेना है।

3083
03:50:26,480 --> 03:50:30,840
इस बात का शास्त्रोक्त खंडन

3084
03:50:30,840 --> 03:50:35,360
करो। अगर तुम चमत्कारों को घटित होना स्वीकार

3085
03:50:35,360 --> 03:50:39,360
करते हो तो फिर तुम्हें यहां पर मजाक

3086
03:50:39,360 --> 03:50:43,520
नहीं उड़ाना चाहिए इस वक्तव्य का। क्या ले रहा है? क्या लिए ले रहा है तुम्हारा? ये क्या बिगाड़ दे रहा है

3087
03:50:43,520 --> 03:50:47,520
वक्तव? यही है। अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास। तो अपनी

3088
03:50:47,520 --> 03:50:51,760
बारी आई। मुझे देवताओं के दर्शन होते थे। मेरा जो जन्म है

3089
03:50:51,760 --> 03:50:55,760
वो बड़ा ही दिव्य है। हम तो जन्मे ही बहुत दिव्य उसके साथ

3090
03:50:55,760 --> 03:51:00,160
है। हम तो बचपन से ही सुधरे हुए हैं।

3091
03:51:00,160 --> 03:51:04,880
और फिर तुम्हारे दिव्य जन्म में तुम्हारा आ रहा है बाईपोलर। कृष्ण

3092
03:51:04,880 --> 03:51:08,960
कुमार जी क्या

3093
03:51:08,960 --> 03:51:13,120
नेता षड्यंत्र कर बैठे हैं जिन लोगों की औकात नहीं है कि मत से डरते हैं

3094
03:51:13,120 --> 03:51:17,200
से डरते हैं वो लोग जो षड्यंत्र कर बैठे हैं इन लोगों की औकात नहीं है कि

3095
03:51:17,200 --> 03:51:21,520
मत कर देखो औकात ये

3096
03:51:21,520 --> 03:51:26,400
औकात शब्द ये है मर्यादा का उल्लंघन

3097
03:51:26,400 --> 03:51:30,800
ठीक है ये औकात शब्द बोला है ना एक 310

3098
03:51:30,800 --> 03:51:31,360
पे देखो

3099
03:51:31,360 --> 03:51:34,960
नोट करो

3100
03:51:34,960 --> 03:51:39,120
औकात बोला ना तुमने यह है मर्यादा गुरु यह ठीक वर्ड नहीं है जब

3101
03:51:39,120 --> 03:51:43,520
तुम प्रबुद्ध लोगों के बीच में हो जब तुम शास्त्र के

3102
03:51:43,520 --> 03:51:48,480
पक्ष को रखने वाले हो तो औकात की बात मत करो किसी की

3103
03:51:48,480 --> 03:51:52,560
रेस्पेक्टेड वर्ड्स में चलो और या फिर अपने आप को घोषित

3104
03:51:52,560 --> 03:51:58,560
कर दो कि मैं तो मर्यादा का उल्लंघन करने वाला ही हूं।

3105
03:51:59,800 --> 03:52:05,800
चलो उसी को थोड़ा सुंदर निरूपण से बोल सकते हो।

3106
03:52:06,720 --> 03:52:10,960
किसके साथ? यही तुम्हारी चिढ़ है। तुमको जो है साथ में बिठाया

3107
03:52:10,960 --> 03:52:15,040
नहीं जा रहा है। तुमको बैठना है साथ में जैसे अन्य जगह

3108
03:52:15,040 --> 03:52:19,120
जाकर के तुम्हें मिलता है सिंहासन मंच पर। यह दिक्कत है तुम्हारी।

3109
03:52:19,120 --> 03:52:23,120
तुमको बनना है लुप्त संप्रदाय का गुप्त आचार्य। तो तुमको

3110
03:52:23,120 --> 03:52:28,200
बराबरी चाहिए। दिक्कत यह

3111
03:52:28,200 --> 03:52:32,440
है और सबसे बड़ी बात है कि अगर तुम इसमें

3112
03:52:32,440 --> 03:52:36,560
कुछ ऐसा दिखा भी दोगे मैं कह रहा

3113
03:52:36,560 --> 03:52:40,880
हूं एक बार को दुर्जन तोष न्याय थे अगर तुम अपने वीडियो में

3114
03:52:40,880 --> 03:52:45,400
अपने द्वारा कोई ऐसा तथ्य प्रस्तुत कर भी

3115
03:52:45,400 --> 03:52:49,520
दोगे कि भैया उससे सिद्ध ही हो गया कि जो पूरी मठ के जो परिकर

3116
03:52:49,520 --> 03:52:53,680
है वो गलत है एक मिनट को मान लेते हैं तब

3117
03:52:53,680 --> 03:52:57,920
भी जो हमारा तुम्हारे विवाद का विषय है वो उसमें कुछ बदलाव

3118
03:52:57,920 --> 03:53:01,920
नहीं आ जाएगा क्योंकि हमने कहा था कि

3119
03:53:01,920 --> 03:53:06,680
कोई विवाद तब बोलो जब तुम अकाट्य प्रमाण को लेकर आओ

3120
03:53:06,680 --> 03:53:12,480
रखो अन्यथा मत बोलो गंभीर गंभीर बातें मत करो फिर

3121
03:53:12,480 --> 03:53:17,040
ठीक है तो बात वही की व रहेगा

3122
03:53:17,040 --> 03:53:21,360
यहां जीत और हार की बात नहीं है सिद्धांत की बात है अगर तुम

3123
03:53:21,360 --> 03:53:21,860
वो

3124
03:53:21,760 --> 03:53:26,840
ले भी आओगे तो वह एक अलग पक्ष कि उसके अनुरूप जो है कार्यवाही

3125
03:53:26,840 --> 03:53:31,200
होगी। मगर तुम अधूरे प्रमाणों को जो

3126
03:53:31,200 --> 03:53:35,600
संभावना वाले प्रमाण है उनको जो है आधार बनाते

3127
03:53:35,600 --> 03:53:39,920
हुए ये सब चीजें मत बोलो। गंभीर बातें मत करो।

3128
03:53:39,920 --> 03:53:44,840
ऐसे किसी पर आक्षेप मत लगाओ। ठोस चीजों पर चलो।

3129
03:53:44,840 --> 03:53:49,760
ठोस निकाले लेकिन मेरे साथ

3130
03:53:49,760 --> 03:53:53,840
क्यों? क्योंकि बाहर से सिद्धांत वाली प्रशांत चाहते भी

3131
03:53:53,840 --> 03:53:58,240
सिंडिकेट के खौफ से लोग चाहे इस बात का आते भी होंगे ये थोड़ी कहा था प्रशांत

3132
03:53:58,240 --> 03:54:02,400
चाहते भी होंगे सामर्थ नहीं है सामर्थक कभी नहीं

3133
03:54:02,400 --> 03:54:06,480
तो प्रधान मिश्र जी का नाम से कभी नहीं लिखते और अच्छा भी नहीं कल उन्होंने जो

3134
03:54:06,480 --> 03:54:10,520
600 पर टिप्पणी की कल जो उन्होंने 600 पर टिप्पणी की जिसमें उन्होंने इस पर मैं लिखना

3135
03:54:10,520 --> 03:54:14,680
जरा ये आप क्या नाम है शनि जी का

3136
03:54:14,680 --> 03:54:19,280
त्याग आपको दिखा दूं तो

3137
03:54:19,280 --> 03:54:23,280
उस पर यह आप देख रहे हो तो मैं आपको दिखा दूं यह वाला

3138
03:54:23,280 --> 03:54:28,160
उसके बाद करता हूं। आइए यहां पर कोई आप लोग में से बात करेंगे तो

3139
03:54:28,160 --> 03:54:31,320
दिखाने

3140
03:54:31,320 --> 03:54:37,320
में चलिए आप देख लीजिए इसमें क्या लिखा है फोटो भी देख लीजिए

3141
03:54:39,960 --> 03:54:44,000
लीजिए अब इसका क्या है इसका मतलब ये क्या है

3142
03:54:44,000 --> 03:54:48,040
इसलिए क्या लिखा है इसमें ये फोटो क्या सामने का त्याग स्वामी कौन शंकराचार्य तो

3143
03:54:48,040 --> 03:54:53,840
नहीं शंकराचार्य की बात शंकराचार्य जी के शंकराचार्य

3144
03:54:53,840 --> 03:54:57,960
होता लेकिन जैसे गजानन शंकराचार्य जी

3145
03:54:57,960 --> 03:55:02,080
केचार होता लेकिन जैसे गजानंद मिश्र ने इस निर्ग

3146
03:55:02,080 --> 03:55:06,080
असं नहीं है भविष्य को तो भगवान का अवतार बता

3147
03:55:06,080 --> 03:55:10,160
सारे सा है मैं वैसे नाम तुम लोग

3148
03:55:10,160 --> 03:55:14,160
हो ना किसी को हम कभी छेड़ते नहीं और कोई पेड़ पे छोड़ते नहीं

3149
03:55:14,160 --> 03:55:20,160
किसी वाले नियम पर हम किसी को नहीं छोड़ते कितने लोग सब तुम्हारे सम्मान का लिहाज

3150
03:55:23,720 --> 03:55:28,000
क्या चाकू से अब सम्मान

3151
03:55:28,000 --> 03:55:32,760
को इसलिए सम्मान की बखिया उदेड़ दोगे चार साल से चुप थे मगर

3152
03:55:32,760 --> 03:55:37,280
अब सम्मान की बखिया इसलिए उदेड़ोगे क्योंकि जयकांत

3153
03:55:37,280 --> 03:55:41,440
सिगरे का ईगो हर्ट हो गया है। अगर 4

3154
03:55:41,440 --> 03:55:45,520
साल से किसी के सम्मान की रक्षा की है तो इसका मतलब तुम्हें यह अधिकार प्राप्त

3155
03:55:45,520 --> 03:55:49,760
हो गया कि तुम किसी के बारे में भी कुछ भी बोलते रहो और तुम्हें

3156
03:55:49,760 --> 03:55:54,480
कुछ ना कहा जाए क्योंकि तुमने चार साल से किसी के सम्मान की रक्षा की है।

3157
03:55:54,480 --> 03:55:59,360
ये तुम्हारे दुर्जन तो ऐसे मैं तुमको बता रहा हूं। तुम्हारी बात मानते हुए

3158
03:55:59,360 --> 03:56:03,520
हां चार साल से तुमने सम्मान की रक्षा की है। वो मुझे दिख नहीं रहा है। बोलते तो आए

3159
03:56:03,520 --> 03:56:07,760
हो तुम। बस अब ये है कि अब क्योंकि तुम्हारा ईगो हर्ट

3160
03:56:07,760 --> 03:56:11,760
हो गया तो तुम पीछे पड़ोगे। प्रमाण कहां से मिले? मेरी बात कैसे सिद्ध हो

3161
03:56:11,760 --> 03:56:17,760
जाए? यह हो सकता

3162
03:56:21,640 --> 03:56:25,840
है। तुमने चार साल से अगर सम्मान की रक्षा की है

3163
03:56:25,840 --> 03:56:29,840
दुर्जन तोष न्याय से। पहली बात तो यह है कि आज तुम पहली बात तो

3164
03:56:29,840 --> 03:56:34,440
यह है कि तुम तीन चार साल से क्या कर रहे हो? फिर क्यों बोल रहे हो उस

3165
03:56:34,440 --> 03:56:40,440
पर? और यह कहां का सिद्धांत है कि अगर तुमने

3166
03:56:40,880 --> 03:56:44,880
जो प्रयास किया है चार साल से वो रक्षा करने का तो

3167
03:56:44,880 --> 03:56:49,040
इसका अर्थ है कि तुम जो है

3168
03:56:49,040 --> 03:56:53,040
किसी की भी कुछ भी निराधार बात किसी के लिए भी बोलने वाले हो गए रावण हो

3169
03:56:53,040 --> 03:56:57,120
गए क्या हाव हो

3170
03:56:57,120 --> 03:57:01,200
गए क्या तुम रावण हो गए तुम प्रभु

3171
03:57:01,200 --> 03:57:05,440
श्री राम के साधारण भक्त हो गए और फिलहाल जो

3172
03:57:05,440 --> 03:57:09,680
कलयुग के जो टेंपरेरी वाले हो लोकल टाइप के रावण तो तुम्हारे लिए भक्ति

3173
03:57:09,680 --> 03:57:13,480
पर्याप्त

3174
03:57:13,480 --> 03:57:18,680
है। सालों से बोलते

3175
03:57:18,680 --> 03:57:22,720
हैं कहां देख इसमें भैया कोई विषय की बात

3176
03:57:22,720 --> 03:57:28,600
नहीं हो रही है फिर भी क्या है इसमें

3177
03:57:28,600 --> 03:57:32,720
कितने पता नहीं क्या लिखा

3178
03:57:32,720 --> 03:57:36,800
है निर्विक के लिए स्वामी जी का त्याग और समर्पण सभी प्रेरणा है तो निरपान

3179
03:57:36,800 --> 03:57:40,880
से प्रेरणा तो प्रेरणा को मान रहे हो तो फिर ऐसे ही का समर्थन करोगे फिर आएगा स्वामी

3180
03:57:40,880 --> 03:57:44,960
जी के पढ़ने वाले है उन्हें बेहती का लोटा रखा है वो लिखा है निंदा करने से समय

3181
03:57:44,960 --> 03:57:49,320
मेरे लोगों को आज मैं उसको सा करूंगा आज तो नहीं

3182
03:57:49,320 --> 03:57:53,600
किया आप स्वयं क्योंकि आप जानते है की सचिव पैसा ले आप जानते है सचिव

3183
03:57:53,600 --> 03:57:58,120
ने कैसे नहीं करना तो करने

3184
03:57:58,120 --> 03:58:02,160
दीजिए प्रयास करने क्या आपसे सुन रहे अगर

3185
03:58:02,160 --> 03:58:06,240
अभी तक हम किसी ने सबसे निराश किया है आप

3186
03:58:06,240 --> 03:58:10,480
मैंने तो तुमको ये बात कही थी ना ऐसे लोगों को

3187
03:58:10,480 --> 03:58:14,640
लेकर के युद्ध में नहीं उतरा जाता है जो वक्त आने पर साथ छोड़ दे

3188
03:58:14,640 --> 03:58:18,640
ढूंढना पड़ता है गुरुदेव कहते हैं चयन

3189
03:58:18,640 --> 03:58:22,960
शिक्षण प्रशिक्षण तुम्हारा दोष है ये

3190
03:58:22,960 --> 03:58:26,960
हल्के लोगों की बातों को लेकर के मुंह के कहे गए कथनों को लेकर के

3191
03:58:26,960 --> 03:58:28,480
जो राम में राम को

3192
03:58:28,480 --> 03:58:32,640
जानते नहीं है राम ने क्या सिखाया है या जानते हैं तो उसको अपने जीवन

3193
03:58:32,640 --> 03:58:36,640
में लाते नहीं है ये सब लेकर के तुम आगे

3194
03:58:36,640 --> 03:58:40,800
बढ़ रहे वाला लेकर तो ये तो तुम्हारे साथ होगा ही। मैंने ऐसी लाइन में बोला

3195
03:58:40,800 --> 03:58:44,880
है वो लोग आएंगे नहीं। आगे जब तुम बात करोगे यही बातें बोली है कि

3196
03:58:44,880 --> 03:58:49,120
समय आने पर वो तुम्हारा साथ छोड़ देंगे जिनके आधार पर तुम आज बात कर रहे हो।

3197
03:58:49,120 --> 03:58:54,000
तुम्हारा मुतासा हो जाएगा। दिक्कत आएगी।

3198
03:58:54,000 --> 03:58:58,000
और अपने अहंकार को पोषित करोगे। करते रहो। मैं

3199
03:58:58,000 --> 03:59:02,160
पीछे पीछे चलूंगा तुम्हारे। जब तक तुम

3200
03:59:02,160 --> 03:59:06,640
बोलते रहोगे तब तक मैं बोलता रहूंगा। भगवत आनंद

3201
03:59:06,640 --> 03:59:12,440
जब तक तुम बोलते रहोगे तब तक मैं तुम्हारे पीछे पड़ा रहूंगा। बोलता

3202
03:59:12,440 --> 03:59:16,640
रहूंगा और अन्यथा आ जाना लाइव कर

3203
03:59:16,640 --> 03:59:21,240
लेना भाई और तुम्हारे उन आधे अधूरे अध कचरे प्रमाणों को भी ले

3204
03:59:21,240 --> 03:59:24,200
आना।

3205
03:59:24,200 --> 03:59:28,800
हम मैंने तो यही कहा था ना तुमसे

3206
03:59:28,800 --> 03:59:33,920
कि मत हल्के फुल्के चीजों पर लेकर के युद्ध नहीं लड़े जाते।

3207
03:59:33,920 --> 03:59:38,560
मैं मूर्ख मूर्ख साबित होता ना अगर तुम्हारे दिए हुए

3208
03:59:38,560 --> 03:59:42,880
अनर्गल हल्के प्रमाणों के आधार पर चला जाता वो जो तुमने कहा था

3209
03:59:42,880 --> 03:59:47,120
जाना हाथ पैर पकड़ लेना ये कर लेना मैं तो मूर्ख सिद्ध होता क्योंकि

3210
03:59:47,120 --> 03:59:51,200
तुम्हारे आधार पर मैं कहा गया मैं गया और तुम्हारा जो आधार है

3211
03:59:51,200 --> 03:59:55,360
उससे आज तुम भिड़ रहे भिड़ना पड़ रहा है तुम्हें यही मैं कह रहा था जो तुमने

3212
03:59:55,360 --> 04:00:00,080
समझा नहीं क्योंकि तुम्हें लड़नी लड़ना था केवल

3213
04:00:00,080 --> 04:00:04,480
तुम्हारा इसमें था कि कोई कल का है जिसने गुरुकुल

3214
04:00:04,480 --> 04:00:08,480
में शिक्षा भी प्राप्त नहीं की है जिसके वत दोष

3215
04:00:08,480 --> 04:00:12,480
लगा हुआ है जिसमें वो कौन होता है मुझे बोलने वाला मैं किसी के बारे में

3216
04:00:12,480 --> 04:00:16,480
बात करूंगा नहीं ऐसा नहीं

3217
04:00:16,480 --> 04:00:21,280
किसी के भी बारे में बात नहीं करोगे और तुमको मिलेंगे

3218
04:00:21,280 --> 04:00:25,400
तुम्हारे जैसे लोग तुमको सबक सिखाने वाले लोग

3219
04:00:25,400 --> 04:00:29,520
मिलेंगे भगवान ने यह कार्यभार शायद मुझे सौंपा

3220
04:00:29,520 --> 04:00:33,040
है मैं कर रहा हूं

3221
04:00:33,040 --> 04:00:35,800
ऐसा नहीं है

3222
04:00:35,800 --> 04:00:39,440
ना साथ में जाने जाते मैंने कहा ना खेल

3223
04:00:39,440 --> 04:00:44,520
अच्छा है तुम्हारा बहुत बढ़िया है खेलो आदमी गलत चुन

3224
04:00:44,520 --> 04:00:50,520
लिया

3225
04:00:57,240 --> 04:01:03,240
चलो आपने जो हमारा सहयोग की बात

3226
04:01:03,760 --> 04:01:09,760
ये सब बकवास बातें हैं जो तुम अपने उनसे कर रहे हो करते

3227
04:01:11,880 --> 04:01:15,920
रहना निरर्थक बात है निरर्थक बातें उसने ये कहा उसने वो

3228
04:01:15,920 --> 04:01:19,920
कहा उसने ये कहा प्रमाण रूप में जिसको रख सके उस पर बात होती है ये सब

3229
04:01:19,920 --> 04:01:24,000
नहीं होता उसने ये कहा ऐसे अगर हम तुम्हारे बारे में बात करने लग जाए तो फिर वो सारे तथ्य

3230
04:01:24,000 --> 04:01:28,720
जो हमने कहे थे मान लेना शुक्रवार वाली बात

3231
04:01:28,720 --> 04:01:34,360
मान

3232
04:01:34,360 --> 04:01:37,000
किया

3233
04:01:37,000 --> 04:01:42,440
है वो ताकि उठा

3234
04:01:42,440 --> 04:01:47,880
देता है उसका पेट निकाल बनाया है

3235
04:01:47,880 --> 04:01:52,680
और ये देखो क्या दिखा

3236
04:01:52,680 --> 04:01:57,520
देता है उसका पेट निकाल जो बनाया है और

3237
04:01:57,520 --> 04:02:03,000
बातें ने कहा मैं नहीं

3238
04:02:03,000 --> 04:02:08,520
जानता बता नहीं लेकिन मैं बता दूंगा सबको

3239
04:02:08,520 --> 04:02:12,640
है पढ़कर बताया करते नहीं है

3240
04:02:12,640 --> 04:02:16,920
इसको पीडीएफ कर देता हूं पहले पीडीएफ में कर

3241
04:02:16,920 --> 04:02:21,360
लो तो ये प्रधान जी ने जो अच्छा किया हमने

3242
04:02:21,360 --> 04:02:25,440
तो आजीवन नहीं जब तक ये पुस्तक रहेगी धरती पर पुस्तक नहीं जब तक ये पुस्तक रहेगी

3243
04:02:25,440 --> 04:02:29,760
धरती पर तब तक अच्छा

3244
04:02:29,760 --> 04:02:33,640
उससे कोई मतलब नहीं

3245
04:02:33,640 --> 04:02:37,540
है। मेरे

3246
04:02:37,540 --> 04:02:42,840
[संगीत]

3247
04:02:42,840 --> 04:02:47,040
साथ इफ यू आर समवन हु प्रोग्रासनेट्स अ लॉट नो मैटर

3248
04:02:47,040 --> 04:02:51,120
हाउ हार्ड यू ट्राई बट यू कैन नॉट गेट थिंग्स डन देन लिसन टू मी फॉर

3249
04:02:51,120 --> 04:02:55,400
द नेक्स्ट वन मिनट। आई एम शेयर वि यू द थ्री मोर

3250
04:02:55,400 --> 04:03:00,600
आपकी सत्ता बढ़ाकरण करने के

3251
04:03:00,600 --> 04:03:06,600
साथ स्वयं के बारे में जो बातें मुझे बताई

3252
04:03:07,480 --> 04:03:12,320
आप शासन नहीं करा सकते क्यों

3253
04:03:12,320 --> 04:03:16,480
क्यों भाई आज तक क्यों चार साल से क्यों जो है निजी उसको

3254
04:03:16,480 --> 04:03:20,560
वो कर रहे थे क्योंकि आज तक तुम्हारे ईगो को

3255
04:03:20,560 --> 04:03:24,800
हर्ट नहीं हुआ इनका कहना है कोई प्रशांत मिश्र

3256
04:03:24,800 --> 04:03:29,200
जी हैं जिनके साथ इनकी चैट है या जिनके पास उनके

3257
04:03:29,200 --> 04:03:33,520
नाम से पर्याप्त वो है। ठीक है? इत्यादि इत्यादि

3258
04:03:33,520 --> 04:03:37,520
कुछ भी है। अब प्रशांत मिश्र जी की वाणी कितना क्रेडिबिलिटी है

3259
04:03:37,520 --> 04:03:41,600
वो बाद की बात है। मैं नहीं जानता हूं। जाहिर सी बात है। मगर इनका कहना है कि इनके

3260
04:03:41,600 --> 04:03:45,680
पास पर्याप्त सामग्री है। प्रशांत मिश्र के आधार पर यह सिद्ध करने के

3261
04:03:45,680 --> 04:03:49,680
लिए कि मठ के परिकरों में

3262
04:03:49,680 --> 04:03:53,920
दोष है। पहली बात तो मैंने तुमको बताया कि तुम हल्के

3263
04:03:53,920 --> 04:03:57,920
लोगों के हल्के चीजों पर आगे बढ़ते हो तो तुम्हारा यह होना ही था।

3264
04:03:57,920 --> 04:04:02,480
विश्वासघात तुम्हारे साथ जो हो रहा है मैंने बोला ऐसी लाइव में आगे

3265
04:04:02,480 --> 04:04:08,480
आज की लाइव में बोला है देख लेना। दूसरा क्या है

3266
04:04:09,240 --> 04:04:13,880
कि अब तुम्हारा कहना है कि मैं तुम्हारे निजता के चक्कर

3267
04:04:13,880 --> 04:04:18,480
में वह बंद नहीं कर सकता। वह गोवर्धन मटकी

3268
04:04:18,480 --> 04:04:21,640
उसको भंग नहीं कर सकता।

3269
04:04:21,640 --> 04:04:25,840
अच्छा तो अब तक क्यों नहीं किया था? तो बात यह नहीं

3270
04:04:25,840 --> 04:04:29,840
है तुम्हें धर्म की चिंता नहीं है। तुम्हें वर्चस्व की चिंता है। तुम्हें अपनी

3271
04:04:29,840 --> 04:04:33,920
श्रेष्ठता की चिंता है। तुम्हें अपने आचारत्व पद की

3272
04:04:33,920 --> 04:04:38,160
चिंता है कि कोई आकर के उसको कैसे हिला रहा है।

3273
04:04:38,160 --> 04:04:42,240
और तुम्हें एक बात बता दूं जो तुम जीत ढूंढ रहे हो। मैं

3274
04:04:42,240 --> 04:04:46,320
कह रहा हूं कि अगर तुम ले भी आए प्रमाण अगर

3275
04:04:46,320 --> 04:04:50,400
तुम प्रमाण ले भी आए बिल्कुल अकाट प्रमाण वैसे ऐसा

3276
04:04:50,400 --> 04:04:54,400
संभव नहीं है। मगर दुर्जन तोष न्याय से अगर तुम ले भी आते

3277
04:04:54,400 --> 04:04:58,400
हो अकाट्य प्रमाण तब भी हमारी तुम्हारी जो

3278
04:04:58,400 --> 04:05:02,640
बात है वह इस बारे में नहीं है कि तुमने

3279
04:05:02,640 --> 04:05:06,960
अकाट्य प्रमाण में क्या सिद्ध किया। इस बात पर है कि तुमने हमें अकाट्य

3280
04:05:06,960 --> 04:05:11,040
प्रमाण क्यों नहीं दिए? वहां मैंने हमने तुम्हें ललकारा था कि कोई बात है तो

3281
04:05:11,040 --> 04:05:15,920
आप अकाट्य प्रमाण लेकर आइए। आप अकाट्य प्रमाण के बिना

3282
04:05:15,920 --> 04:05:21,120
निराधार बातें मत बोलिए। वो तुमने बोली है।

3283
04:05:21,120 --> 04:05:24,440
ठीक है तो क्या हुआ इसका अर्थ क्या

3284
04:05:24,440 --> 04:05:28,640
हुआ कि आपको जो तुम जीत के भूखे

3285
04:05:28,640 --> 04:05:32,640
हो वर्चस्वता के भूखे हो वो भी कुछ नहीं मिलने वाला बाकी तुम ले आओ देख लेंगे

3286
04:05:32,640 --> 04:05:36,640
तुम्हारा क्या है क्या नहीं है और विश्वासघात का सबक तो तुम्हें

3287
04:05:36,640 --> 04:05:40,640
मिल ही गया ऐसे ही सबका गायब हो जाना इसलिए कही सुनी बातों पर भरोसा नहीं

3288
04:05:40,640 --> 04:05:44,640
करते सब लोग राम नहीं होते हैं सब लोग

3289
04:05:44,640 --> 04:05:48,880
राम नहीं होते तो इसलिए कि सबकी कही सुनी बातों से ऐसे

3290
04:05:48,880 --> 04:05:53,120
जंग लड़ने के लिए नहीं निकला जाता है। यह मैं तुम्हें तुमसे बड़ा होने के नाते

3291
04:05:53,120 --> 04:05:57,200
तुम्हें बता रहा हूं। समझ में आ रहा है? यह सब चीजें तुमको कभी किसी

3292
04:05:57,200 --> 04:06:01,200
ने बताई नहीं। जैसे तुम कह रहे हो ना कि तुम ये तुम्हें ये नहीं

3293
04:06:01,200 --> 04:06:05,360
बताया गया। ये नहीं हुआ वो हुआ। मैं बोलता था। ऐसे ही तुमको ये सब तुम्हारी समीक्षा

3294
04:06:05,360 --> 04:06:09,320
ये वाली तो किसी ने की नहीं बैठकर

3295
04:06:09,320 --> 04:06:13,440
के। आधी अधूरी चीजों को लेकर के जंग नहीं लड़ी जाती मेरे

3296
04:06:13,440 --> 04:06:16,080
भाई।

3297
04:06:16,080 --> 04:06:20,240
और हां एक बात और है इसने

3298
04:06:20,240 --> 04:06:24,560
क्या किया है भगवतानंद ने मेरा जो

3299
04:06:24,560 --> 04:06:28,960
भाई होने का वो अस्वीकार किया है और फिर ब्राह्मण

3300
04:06:28,960 --> 04:06:33,040
होने के नाते संभवत भाई फिर कहा भी है मत

3301
04:06:33,040 --> 04:06:39,040
कर भाई

3302
04:06:56,120 --> 04:07:00,120
कैसे हमने तुम्हारे लेटर पर अपने वीडियो में बात नहीं की

3303
04:07:00,120 --> 04:07:04,160
है। जिन प्रश्नों पर हमने बात की है क्रमबद्धता से उसको

3304
04:07:04,160 --> 04:07:08,240
देख लेना दोबारा लाइव को वह प्रश्न Instagram पर पहले ही घूम रहे

3305
04:07:08,240 --> 04:07:12,240
थे। एक कैंपेन प्रॉपर चलाया जा रहा था विजय

3306
04:07:12,240 --> 04:07:16,320
श्री के विरुद्ध और वहां पर आने वाले जो सवाल उठाए जा रहे थे उन

3307
04:07:16,320 --> 04:07:20,320
सारे सवालों को कलेक्ट करके हमने लाइव में बात की थी।

3308
04:07:20,320 --> 04:07:24,320
हमने तुम्हारी पीडीएफ का जिक्र किया था मगर पीडीएफ के बारे में

3309
04:07:24,320 --> 04:07:28,360
बात नहीं की थी पूरी क्रमबद्धता से। ठीक

3310
04:07:28,360 --> 04:07:32,400
है? हमने तुम्हारे केवल मुख्य रूप से उस अंश को उठाया

3311
04:07:32,400 --> 04:07:36,400
था। उस पर मुख्य रूप से बात की थी जिसमें तुमने फ्री मेंशन

3312
04:07:36,400 --> 04:07:40,400
से जोड़ा था विजयश्री को और जिसमें तुमने उनके बारे में

3313
04:07:40,400 --> 04:07:44,720
यह सब कहा था कि वो जो है मंच पर बैठी

3314
04:07:44,720 --> 04:07:48,800
पहली बात और फिर क्योंकि वहां पर मठ

3315
04:07:48,800 --> 04:07:53,120
की प्रतिष्ठा की भी बात है तो हम उसके लिए भी खड़े हुए। हालांकि मठ को हमारी आवश्यकता

3316
04:07:53,120 --> 04:07:57,360
नहीं है कि हमें उसके लिए खड़ा होना पड़े। मगर क्योंकि वहां वही की वही जहां हम एक

3317
04:07:57,360 --> 04:08:01,600
चीज के लिए बोल रहे हैं वहीं पर दूसरी चीज दिख रही है। तो वहां हमने वह बात भी रखी। मगर

3318
04:08:01,600 --> 04:08:05,600
तुम्हारी उस वीडियो के लिए हमने लाइव नहीं किया था।

3319
04:08:05,600 --> 04:08:09,680
तो यह तुम्हारा कहना यहां गलत होता है कि हमने हमने पीडीएफ में वही बात

3320
04:08:09,680 --> 04:08:12,520
की थी। हमने

3321
04:08:12,520 --> 04:08:16,640
तुम्हारे तुमने जो मुख्य रूप से जो विजय श्री का वीडियो दिखाया,

3322
04:08:16,640 --> 04:08:20,720
ये किया, वो किया उस पर बात की थी अपने लाइव में। हमने तुम्हारे पूरे के पूरे

3323
04:08:20,720 --> 04:08:26,720
वीडियो को मुख्य नहीं बनाया था। अपने लाइव का आधार नहीं बनाया था।

3324
04:08:31,040 --> 04:08:37,040
मतलब

3325
04:08:45,840 --> 04:08:50,160
अभी देखो अभी देखो बात क्या है जैसे वो जो लेटर है

3326
04:08:50,160 --> 04:08:54,720
किसने लिखा किसने नहीं लिखा उन लोगों को जब घसीटा जाएगा

3327
04:08:54,720 --> 04:08:59,480
वो लोग भी ऐसे ही भागेंगे प्रशांत मिश्र की तरह जिनका तुम नाम ले रहे

3328
04:08:59,480 --> 04:09:03,920
हो ऐसे जंग नहीं लड़ी जाती युद्ध नहीं लड़े जाते ऐसे

3329
04:09:03,920 --> 04:09:09,920
ये ये सब बचकानी चीजें आप कर रहे हैं आप और क्या है

3330
04:09:11,520 --> 04:09:17,040
अभी वह बालक जो है ना चार साल वाला बड़ा नहीं हो पाया ठीक से

3331
04:09:17,040 --> 04:09:21,120
बालक जो है अभी वो चार साल वाला वो बड़ा नहीं हो पाया हो पाया ठीक

3332
04:09:21,120 --> 04:09:25,200
से इसलिए इसलिए ये सब चीजें हो

3333
04:09:25,200 --> 04:09:29,440
रही है बुलाओ उनको अद्वैत विजयंती और

3334
04:09:29,440 --> 04:09:34,840
आशुतोष भट्ट आशुतोष भट्ट भट्ट तो शायद गुरुदेव के शिष्य भी नहीं

3335
04:09:34,840 --> 04:09:40,840
है मेरी जानकारी में तो नहीं है खैर

3336
04:09:42,480 --> 04:09:48,480
मतलब

3337
04:09:56,000 --> 04:10:00,720
वेदा टेल्स वेदा टेल्स वाले जो है आशुतोष भट्ट है जो

3338
04:10:00,720 --> 04:10:04,800
वेदा टेल्स वाले आशुतोष भट्ट है जो वो गुरुदेव से दीक्षित है कि

3339
04:10:04,800 --> 04:10:09,040
नहीं मुझे नहीं पता और दूसरी बात यह है वेदा टेल्स

3340
04:10:09,040 --> 04:10:13,480
और आशु वेदा टेल्स वाले आशुतोष भट्ट

3341
04:10:13,480 --> 04:10:17,760
और ये बात कंफर्म की है चलो ठीक है उनसे

3342
04:10:17,760 --> 04:10:21,920
पूछा जाएगा बाकी यह है कि हमने तुम्हारे वीडियो के बारे में बात नहीं की

3343
04:10:21,920 --> 04:10:26,080
थी वो पीडीएफ हमारा मुख्य बिंदु नहीं था। तुमने

3344
04:10:26,080 --> 04:10:30,080
बात की है मगर हम तुम्हारे उस अंश पर जोर दे रहे हैं जो तुमने

3345
04:10:30,080 --> 04:10:34,120
विजय श्री के बारे में निराधार तथ्य दिए। ठीक है?

3346
04:10:34,120 --> 04:10:38,160
प्रीमेशंस और मंच पर बैठना ये मुख्य रूप से और बाकी

3347
04:10:38,160 --> 04:10:44,160
फिर उसके साथ जो दूसरी चीजें जुड़ी थी उस पर हमने बात की थी।

3348
04:10:51,520 --> 04:10:57,520
उस

3349
04:11:02,560 --> 04:11:06,560
कंप्लेंट दी थी एफआईआर कराई एफआईआर दर्ज हो गई कि नहीं हुई यह नहीं पता है

3350
04:11:06,560 --> 04:11:11,880
कंप्लेन का पता है कंप्लेंट का फोटो आपने प्रसारित किया था

3351
04:11:11,880 --> 04:11:16,480
और अच्छा आयुष जी जरा एक कमेंट करके बता दीजिए जो ये

3352
04:11:16,480 --> 04:11:22,480
भगवतानंद बोल रहे हैं इनकी आवाज आ आ रही है कि

3353
04:11:24,200 --> 04:11:28,400
नहीं तो यह बोल रहे हैं कि एक व्यक्ति ने जो है कंप्लेंट कराई

3354
04:11:28,400 --> 04:11:32,760
थी वो व्यक्ति अगर मुझे मिल जाता तो मैं भी उसको मार मारता ही पीटता

3355
04:11:32,760 --> 04:11:37,040
ही वहां पर स्वामी नारायण वाले पहुंचे थे मठ

3356
04:11:37,040 --> 04:11:41,120
में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो वो उनकी चापलूसी कर रहा था

3357
04:11:41,120 --> 04:11:45,280
गाड़ी खड़ी करने को लेकर के उसने मैं अपनी कार से

3358
04:11:45,280 --> 04:11:50,040
वहां पहुंचा था साथ में परिवार भी था

3359
04:11:50,040 --> 04:11:54,240
तो किसी ने मटका जहां पर शिविर लगा हुआ था वहां पर बहुत

3360
04:11:54,240 --> 04:11:58,360
सारी बाइक मोटरसाइकिल खड़ी कर दी

3361
04:11:58,360 --> 04:12:03,240
थी तो मैं बहुत थक करके आया था

3362
04:12:03,240 --> 04:12:06,560
कोई गुरु भाई थे जो जा रहे थे वापस

3363
04:12:06,560 --> 04:12:10,560
तो उनको छोड़ के आया था मैं पैदल पहले थोड़ा कार से

3364
04:12:10,560 --> 04:12:14,800
उसके बाद वहां से लेकर के ऊपर तक प्रयागराज का जोशी वाला पुल है वहां

3365
04:12:14,800 --> 04:12:18,960
तक उनको उनका लगेज वगैरह लेकर के और मैं छोड़ के उन्हें आया था।

3366
04:12:18,960 --> 04:12:23,120
मतलब उसमें अच्छा खासा शारीरिक परिश्रम हुआ था आने जाने। उसके

3367
04:12:23,120 --> 04:12:27,200
बाद गाड़ी लेकर वापस आया था। तो मैं गाड़ी खड़ी करनी थी उसी जगह पर गाड़ी

3368
04:12:27,200 --> 04:12:32,200
का जहां स्पेस था तो वहां पर बहुत सारी मोटरसाइकिल्स खड़ी हुई

3369
04:12:32,200 --> 04:12:36,320
थी। इधर-उधर के लोगों की मटके लोगों की नहीं, शिविर के लोगों

3370
04:12:36,320 --> 04:12:40,400
की नहीं इधर-उधर के लोगों की खड़ी हुई। मैंने उन सारी मोटर

3371
04:12:40,400 --> 04:12:44,560
साइकिल्स को एक-एक करके एक-एक करके और जो है

3372
04:12:44,560 --> 04:12:48,880
वहां पर जगह बनाई

3373
04:12:48,880 --> 04:12:52,880
और जब मैं आखिरी मोटरसाइकिल को साइड करने लगा

3374
04:12:52,880 --> 04:12:56,880
तो वो धूर्त व्यक्ति आया और जो है सीधे अपनी

3375
04:12:56,880 --> 04:13:01,440
गाड़ी डालने लगा। मैंने उसको इशारा किया मत लगाओ मत लगाओ।

3376
04:13:01,440 --> 04:13:05,680
तो वो बोला कि ये है वो है बहाने झूठ झूठे बहाने मुझे बोलने लगा।

3377
04:13:05,680 --> 04:13:09,840
यह वह व्यक्ति है तो चलो मैंने तो उदारता दिखाई कि चल

3378
04:13:09,840 --> 04:13:13,840
ठीक है भाई तू गुरु भाई है गुरुदेव के पास गुरुदेव से दीक्षित

3379
04:13:13,840 --> 04:13:18,640
है मैंने एक वो दे दिया ठीक है तू ही लगा ले लगा ली

3380
04:13:18,640 --> 04:13:21,760
मगर मेरे घर मेरे परिवार में जो मातृशक्तियां थी जो

3381
04:13:21,760 --> 04:13:26,000
उनको बड़ा रहम आया मुझ पर क्योंकि मैं ऑलरेडी उन्होंने देखा था थका हुआ हूं

3382
04:13:26,000 --> 04:13:30,000
और मैंने करीबन 15 20 मिनट उन मोटरसाइकिल्स को एक साइड किया कार

3383
04:13:30,000 --> 04:13:34,080
लगाने के लिए है ना और उसमें आकर के उसने अपनी कार घुसेड़

3384
04:13:34,080 --> 04:13:38,080
दी 50 झूठे बहाने बना कि मैं मरीज ले आया हूं। मरीज

3385
04:13:38,080 --> 04:13:42,240
ले जाना है। थोड़ी देर बाद वही व्यक्ति मुझे स्वामी नारायण मत वालों

3386
04:13:42,240 --> 04:13:46,360
के जो है चापलूसी करता

3387
04:13:46,360 --> 04:13:50,400
दिखा। तो मुझे बड़ा गलत लगा।

3388
04:13:50,400 --> 04:13:54,640
ठीक व्यक्ति नहीं है जो घूम रहा है। मगर मैंने कुछ कहा नहीं। तुमने

3389
04:13:54,640 --> 04:13:58,800
जब वो एफआईआर वो कंप्लेंट की कॉपी डाली थी। बड़ा अच्छा लगा था। ठीक है। पिटाई

3390
04:13:58,800 --> 04:14:03,760
अगर हुई है तो सही हुआ है उसके साथ। ठीक है।

3391
04:14:03,760 --> 04:14:07,760
मूर्त व्यक्ति था होनी चाहिए ऐसे लोगों की पिटाई कर रहा

3392
04:14:07,760 --> 04:14:12,360
होगा जरूर कुछ

3393
04:14:12,360 --> 04:14:17,120
बदमाशी भाई मेरे मैं ये कह रहा हूं आपको

3394
04:14:17,120 --> 04:14:23,120
का सफाया करने का धंधा करना है ना

3395
04:14:25,440 --> 04:14:29,920
मठ में फैलने की विकृति है तो उसको लाउडस्कर पे बोल बोल करके

3396
04:14:29,920 --> 04:14:34,160
मठ को सही करोगे क्या ढूंढो ऐसे कौन से लोग है

3397
04:14:34,160 --> 04:14:38,600
जिनका जो अपनी बात से बात के पक्के हो ऐसे लोगों को

3398
04:14:38,600 --> 04:14:42,640
ढूंढो उनके साथ मिलकर के जो है शोधन

3399
04:14:42,640 --> 04:14:46,800
का कार्य करो तुम अपने को ख्यापित

3400
04:14:46,800 --> 04:14:50,880
कर रहे हो और कुछ नहीं है शोधन का तरीका यह

3401
04:14:50,880 --> 04:14:55,760
नहीं है चिल्लाना शुरू कर दो लाउडस्कर में लेकर के

3402
04:14:55,760 --> 04:15:00,760
उन बातों को लेकर के जिन बातों को तुम्हारे अनुसार सामने वाला छुपा रहा

3403
04:15:00,760 --> 04:15:05,360
है ये शोधन थोड़ी ना है

3404
04:15:05,360 --> 04:15:10,080
आप बौखला से इस मामले में हाईलाइट ना हो सके

3405
04:15:10,080 --> 04:15:14,240
हो सके इसलिए लोगों का दिमाग भटकाने के लिए ना भटकाने के लिए आप

3406
04:15:14,240 --> 04:15:20,080
प्रोजेक्ट किया गया है ना हो

3407
04:15:20,080 --> 04:15:24,160
ये ठीक है आपके अनुसार ये हो रहा है वो ठीक है यहां पे मुझे अच्छा

3408
04:15:24,160 --> 04:15:28,400
लगा कि तुमने दोनों विकल्प सोचे तुमने अपना पूर्वाग्रह थोपा

3409
04:15:28,400 --> 04:15:32,880
नहीं कि चाहे तो अनजाने में हो रहा है चाहे वो आपको

3410
04:15:32,880 --> 04:15:37,040
प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित किया गया है। तुमने यहां पे विकल्प

3411
04:15:37,040 --> 04:15:41,040
योग उपयोग में लिया है। संभावनाएं हो सकती है जितनी उतनी लेनी

3412
04:15:41,040 --> 04:15:47,040
चाहिए। अपना मत अपना पूर्वाग्रह थोपना नहीं चाहिए जो तुम थोपते

3413
04:15:52,520 --> 04:15:56,520
हो। नहीं

3414
04:15:56,520 --> 04:16:00,760
किया उस समय कर्मचारी का

3415
04:16:00,760 --> 04:16:06,120
नाम का नाम हो गया को अपना डाला गया

3416
04:16:06,120 --> 04:16:10,160
जब पूरा करने के लिए हां बिल्कुल बिल्कुल

3417
04:16:10,160 --> 04:16:14,480
क्योंकि जो ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी हैं और

3418
04:16:14,480 --> 04:16:18,480
सचिव जी हैं वो सामर्थ्यवान है वो जब चाहे तब

3419
04:16:18,480 --> 04:16:23,760
अपने जो है सामर्थ्य का उपयोग करके तुम्हारा जवाब तुम्हारा

3420
04:16:23,760 --> 04:16:27,840
प्रस्तुत कर सकते हैं। सब कुछ सामर्थ्यवान है।

3421
04:16:27,840 --> 04:16:31,920
जगतगुरु शंकराचार्य जी की शरण में है वह लोग। तो इसलिए

3422
04:16:31,920 --> 04:16:35,920
हमें हमें उनके लिए बोलने के लिए आने के लिए आवश्यकता ही नहीं है। जब व्यक्तिगत उन

3423
04:16:35,920 --> 04:16:40,000
पर बात हो रही है तो है ना और ना

3424
04:16:40,000 --> 04:16:44,720
ही हमें कोई उनकी तरफ से ऐसे निर्देश मिले कि तुम्हें बोलूं।

3425
04:16:44,720 --> 04:16:50,040
पूर्ण रूप से सामर्थवान है। जिस दिन चाहेंगे उस दिन तुम्हारा सारा ठीक कर देंगे।

3426
04:16:50,040 --> 04:16:54,640
मगर वहां पर एक ऐसी मातृशक्ति जिसकी यात्रा मैंने स्वयं देखी

3427
04:16:54,640 --> 04:16:58,640
उसके लिए मैंने बोला हां यह बात सही है मैं

3428
04:16:58,640 --> 04:17:03,040
चुप रहता था तुम्हारे वीडियोस देखता तो था पहले भी नहीं आता था बोलने

3429
04:17:03,040 --> 04:17:07,040
तो तुम जब ये खुद स्वीकार कर रहे हो कि मैं विजय श्री के

3430
04:17:07,040 --> 04:17:11,200
लिए बोलने आया हूं यहां पर स्वीकार कर लिया नोट करो इनका

3431
04:17:11,200 --> 04:17:13,880
एक

3432
04:17:13,880 --> 04:17:17,920
436 तो तुम जब ये खुद स्वीकार कर रहे हो कि मैं मुख्य रूप से

3433
04:17:17,920 --> 04:17:22,160
विजय श्री के लिए बोलने आया हूं। तो फिर तुम ये क्यों कह रहे हो कि मैं

3434
04:17:22,160 --> 04:17:26,160
जो है वो क्योंकि वो उससे मेरा

3435
04:17:26,160 --> 04:17:30,240
तुम्हारे अनुसार कोई भी संबंध है। ठीक है? तुम जब ये खुद

3436
04:17:30,240 --> 04:17:34,240
स्वीकार कर रहे हो कि मैं विजय श्री के लिए बोलने आया हूं। हमारे तुम्हारे बीच में

3437
04:17:34,240 --> 04:17:38,760
विवाद का मूल कारण है तुम्हारा विजय श्री पर बोलना। ठीक

3438
04:17:38,760 --> 04:17:42,800
है? तो अगर तुम जब यह खुद स्वीकार कर रहे हो तो फिर तुम यह कैसे कह रहे

3439
04:17:42,800 --> 04:17:48,640
हो कि विजयश्री की बात करके मैं जो है मामले को भटका रहा हूं।

3440
04:17:48,640 --> 04:17:52,720
अच्छा तुम्हारा शायद यह सोचना होगा कि तुम्हारे वीडियो में मैंने विजय

3441
04:17:52,720 --> 04:17:56,720
श्री के नाम लेने का उपयोग किया है मठ के परिकरों को

3442
04:17:56,720 --> 04:18:02,440
बचाने के लिए। यह शायद तुम कहना चाह रहे हो।

3443
04:18:02,440 --> 04:18:06,880
तो ऐसा सोचा जा सकता है। इसको पूर्वाग्रह कहेंगे और क्या कहेंगे?

3444
04:18:06,880 --> 04:18:10,880
आप ऐसा सोच सकते हो। मगर हमने इसलिए ऐसा नहीं किया। आपको सिद्ध

3445
04:18:10,880 --> 04:18:15,200
करना होगा। फिर अब यहां ऐसी जगह पर शास्त्र लाने चाहिए आपको।

3446
04:18:15,200 --> 04:18:19,880
यहां शास्त्र दो प्रमाण। कि मेरी किन गतिविधियों से ऐसा लगता

3447
04:18:19,880 --> 04:18:24,960
है शास्त्र के नियम के अनुसार कि

3448
04:18:24,960 --> 04:18:28,960
जिस जिस वीडियो में मैंने विजय श्री का होने के कारण मैंने

3449
04:18:28,960 --> 04:18:33,600
वो जो प्रतकारात्मक वीडियो बनाया है

3450
04:18:33,600 --> 04:18:37,720
तो उसमें मैं विजय श्री का उपयोग कर रहा हूं मठ को बचाने के

3451
04:18:37,720 --> 04:18:41,920
लिए हम विजय श्री से मुझे कोई मतलब नहीं है

3452
04:18:41,920 --> 04:18:45,920
तो तुमको इस संबंध में शास्त्र का प्रमाण देना पड़ेगा अगर वो

3453
04:18:45,920 --> 04:18:51,920
वाला पूर्वा दूसरा वाला विकल्प है तो चलो

3454
04:18:59,560 --> 04:19:03,680
उसने क्या कही थी इसका नाम लेना है सीधा के सामने

3455
04:19:03,680 --> 04:19:07,680
रखना तुम्हारी वीडियो से नहीं ये इसलिए कहते है

3456
04:19:07,680 --> 04:19:11,680
वहां नहीं होना चाहिए पहले से वीडियो

3457
04:19:11,680 --> 04:19:16,160
पहले बंद थी उस पर बात कर रहे हो इसका अर्थ क्या है हम कोई शंकराचार्य

3458
04:19:16,160 --> 04:19:20,400
नहीं हम कोई शंकराचार्य को नहीं बोल रहे इस कारण हम परिकों की उनहीं अवस्थाओं पर

3459
04:19:20,400 --> 04:19:24,480
मठ में सभी ब्रह्माचारी करने वाले स्त्रियों के

3460
04:19:24,480 --> 04:19:30,480
आने जाने क्यों कर रहे है अरे

3461
04:19:30,640 --> 04:19:34,200
जबरदस्ती कुछ का कुछ कर

3462
04:19:34,200 --> 04:19:38,320
दोगे। बात ये हो रही है बात प्रसंग ये चल रहा है। विषय

3463
04:19:38,320 --> 04:19:42,320
ये चल रहा है भगवतानंद कि क्या

3464
04:19:42,320 --> 04:19:46,400
मैंने तुम्हारे वीडियो बनाने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दी

3465
04:19:46,400 --> 04:19:50,520
विजय पर उठने वाली उंगलियों के संबंध में

3466
04:19:50,520 --> 04:19:54,640
नहीं। बात यह चल रही है कि क्या मैंने वो वीडियो तुम्हारे लिए बनाया था

3467
04:19:54,640 --> 04:19:58,640
कि नहीं? तो यहां पे तुम यह क्यों बता रहे हो कि हमारा ऐसा बोलना ठीक है कि

3468
04:19:58,640 --> 04:20:02,880
नहीं है? तुम्हें यह सिद्ध करना है यहां पर कि वो वीडियो

3469
04:20:02,880 --> 04:20:06,880
मैंने तुम्हारे लिए बनाया था कि नहीं। अब जब उस बात में फंस रहे हो या

3470
04:20:06,880 --> 04:20:11,040
उसका तुम्हारे पास जवाब नहीं है तो तुम दूसरा प्रसंग ला के बातें कर रहे हो। उससे

3471
04:20:11,040 --> 04:20:15,120
क्या मतलब है? तुम्हें यह सिद्ध करना है कि मैंने वो वीडियो तुम्हारे लिए ही

3472
04:20:15,120 --> 04:20:19,280
बनाया है। और तुम इस बात को मान रहे हो कि पहले से वो क्वेश्चन

3473
04:20:19,280 --> 04:20:23,600
उठ रहे थे। तो यहां पर अपनी गुरु द्रोही वाली बात कि हम गुरु निंदक नहीं है। मटकी

3474
04:20:23,600 --> 04:20:28,240
व्यवस्थाओं पर उंगली उठाई है। अधर्म यह है वह है।

3475
04:20:28,240 --> 04:20:32,400
बात ये हमने यह क्वेश्चन नहीं हमने वहां पर यह नहीं कहा है

3476
04:20:32,400 --> 04:20:36,520
कि तुमने जो कहा है वो धर्म अधर्म के संबंध में है कि नहीं? हमने ये कहा

3477
04:20:36,520 --> 04:20:40,880
है प्रसंग ये चल रहा है, विषय ये चल रहा है कि हमने वीडियो

3478
04:20:40,880 --> 04:20:45,040
तुम्हारे वीडियो के संबंध में बनाया है कि नहीं? तो तुमने खुद

3479
04:20:45,040 --> 04:20:45,840
मान लिया कि मैया

3480
04:20:45,840 --> 04:20:51,840
मैंने उनके लिए बनाया था। मगर अब दूसरी बात छेड़ दी। इसलिए

3481
04:20:53,080 --> 04:20:59,040
करना है

3482
04:20:59,040 --> 04:21:03,040
देखो यहां इन्होंने ये बात छोड़ दी कि हमने वीडियो इनके वीडियो के संबंध में बनाया

3483
04:21:03,040 --> 04:21:07,120
था कि नहीं मुख्य विषय ये था अब इस पर बात ना करके अब इस पर बात कर रहे हैं कि

3484
04:21:07,120 --> 04:21:11,120
हमने क्यों बोला ऐसा भाई पहले एक बात खत्म

3485
04:21:11,120 --> 04:21:15,440
तो कर रहे बात क्या चल रही है वही प्रसंग

3486
04:21:15,440 --> 04:21:20,840
चल रहा है उस पर बात नहीं हो रही है विषय विषय अंतर

3487
04:21:20,840 --> 04:21:25,120
हम आओ कभी लाइव में कभी आओ ना जी

3488
04:21:25,120 --> 04:21:31,120
हवेली में

3489
04:21:36,640 --> 04:21:40,880
ित है। हम गुरुदेव के शिष्य हैं। तुम कौन होते बताने वाले कि उन्होंने क्या कहा? किस संदर्भ

3490
04:21:40,880 --> 04:21:45,120
में कहा। अभी तुम्हारा पाखंड का खंडन या तुम्हारे जो

3491
04:21:45,120 --> 04:21:49,200
चार शिष्य हैं या जो भी शिष्य हैं हम

3492
04:21:49,200 --> 04:21:53,200
हम उनको बताने लगे कि तुम्हारे हां हम उनको बताने

3493
04:21:53,200 --> 04:21:57,280
जाए कि भैया मान लो कोई भी बात हो और उसके संबंध में तुम्हारी वाणी हमें

3494
04:21:57,280 --> 04:22:01,800
प्राप्त हो जाए। कोई भी विषय हो और हम तुम्हारे लोगों से मिले।

3495
04:22:01,800 --> 04:22:06,000
तुम्हारे डायरेक्ट जो तुम्हारे शिष्य हैं उनको ये बताएं। हमारे गुरु ने

3496
04:22:06,000 --> 04:22:10,080
यहां पर यह कहा है उस उसका अर्थ वो कुछ बताएं नहीं उनके

3497
04:22:10,080 --> 04:22:14,240
यह कहने का यह अर्थ था हमने उनसे बात की है बैठे हैं हम वहां पर उनके

3498
04:22:14,240 --> 04:22:18,240
साथ तब भी हम उनका विरोध करेंगे क्या नहीं कर सकते क्योंकि वो तुम्हारे

3499
04:22:18,240 --> 04:22:22,320
प्रामाणिक शिष्य हैं वो तुम्हारे शिष्य है वो तुमसे मिलते हैं बैठते

3500
04:22:22,320 --> 04:22:26,320
हैं तुम्हारे बातों का सही अर्थ वो जानते हैं

3501
04:22:26,320 --> 04:22:31,000
तो हम उनको क्लेम नहीं कर सकते

3502
04:22:31,000 --> 04:22:35,040
हम हम उनको क्लेम नहीं कर सकते तुम हमें क्लेम क्यों कर

3503
04:22:35,040 --> 04:22:39,680
रहे हो भाई? हम उनके पास गए हैं ना बैठे हैं ना

3504
04:22:39,680 --> 04:22:43,680
तो उनके उन्होंने नाम लिया है क्या विजय श्री का? हमने बता दिया

3505
04:22:43,680 --> 04:22:48,400
और भी महिलाएं आती थी। अब बताओ क्या करोगे?

3506
04:22:48,400 --> 04:22:51,920
तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। विजना डलाती थी वो बिजना

3507
04:22:51,920 --> 04:22:56,240
डलाती है। बेर शब्द का उपयोग कहां कौन क्यों कर रहा है? ये लिखने

3508
04:22:56,240 --> 04:23:00,480
वाला ही बताएगा ना अपने शिष्य को। या तुम कह दोगे कि नहीं उन्होंने तो कहा

3509
04:23:00,480 --> 04:23:05,160
है कि दोनों जगह बेर वही है खाने वाला

3510
04:23:05,160 --> 04:23:07,400
बेर

3511
04:23:07,400 --> 04:23:11,440
हां इसलिए आप ये जो योगाचार

3512
04:23:11,440 --> 04:23:15,520
वाली बात कर रहे हो कि गुरुदेव ने योगाचार की निंदा की है पहली बात

3513
04:23:15,520 --> 04:23:19,600
तो योगाचार उनको विजय श्री को कहना और कहना चाहिए अपने आप

3514
04:23:19,600 --> 04:23:23,840
को वो सिद्ध करो और दूसरी बात यह है कि

3515
04:23:23,840 --> 04:23:29,280
गुरुदेव ने किसके लिए कहा किस संदर्भ में कहा यह तुम हमको मत बताओ

3516
04:23:29,280 --> 04:23:35,280
लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य नहीं बताएंगे।

3517
04:23:43,440 --> 04:23:47,440
क्यों भाई किसी आयोजन में अब देखो

3518
04:23:47,440 --> 04:23:52,800
ये जो चीज है ये ये देखो देखो

3519
04:23:52,800 --> 04:23:56,880
कितनी महिला कितनी महिलाएं पाल रखी है

3520
04:23:56,880 --> 04:24:01,320
ये है अमर्यादित लाइन नोट करो एक 45

3521
04:24:01,320 --> 04:24:05,600
31 ये है रैकेट है

3522
04:24:05,600 --> 04:24:09,840
यह तरीका नहीं है ना बात करने का फिर यह हुआ मर्यादा

3523
04:24:09,840 --> 04:24:13,040
का उल्लंघन

3524
04:24:13,040 --> 04:24:17,040
क्यों भाई गुरुदेव के दर्शन करने कहीं पर एक से ज्यादा

3525
04:24:17,040 --> 04:24:21,040
महिलाएं नहीं जा सकती हैं। और हमने तो यह तक कहा कि

3526
04:24:21,040 --> 04:24:25,120
वो मठ में रह ही नहीं रही है। हमने यह तक कहा कि गुरुदेव ने कहा आती है वो

3527
04:24:25,120 --> 04:24:29,840
एक बार गई है मठ में। ये सब सुनाई नहीं दिया। हां।

3528
04:24:29,840 --> 04:24:33,280
ये सब नहीं सुनाई दिया।

3529
04:24:33,280 --> 04:24:37,280
देखो रैकेट चला रहे हो क्या तुम? अगर एक से ज्यादा

3530
04:24:37,280 --> 04:24:42,240
महिलाएं हैं तो उसका मतलब हो गया रैकेट है वह।

3531
04:24:42,240 --> 04:24:46,320
सिद्ध कर कौन सा सनातन सिद्धांत कहता है

3532
04:24:46,320 --> 04:24:51,240
कि एक से ज्यादा महिलाएं हैं तो वह रैकेट है। सिद्ध

3533
04:24:51,240 --> 04:24:54,840
कर

3534
04:24:54,840 --> 04:25:00,800
चलो और जो योग सिखा

3535
04:25:00,800 --> 04:25:06,800
तुम हमें मत बताओ हमारे गुरुदेव ने क्या कहा है?

3536
04:25:07,920 --> 04:25:12,360
तुम्हारी महिला कौन है

3537
04:25:12,360 --> 04:25:18,360
ऐसा तुम्हारी महिला है ऐसा क्या

3538
04:25:19,400 --> 04:25:24,080
ऐसा कैमरे पर

3539
04:25:24,080 --> 04:25:27,400
फालतू की बकवास करवा

3540
04:25:27,400 --> 04:25:31,600
लो तब तो एक ये जो है बहुत हीन

3541
04:25:31,600 --> 04:25:35,680
स्तर की बातें बोल रहे हैं। मतलब दीन स्तर

3542
04:25:35,680 --> 04:25:40,320
की बातें मतलब जो वह है ना

3543
04:25:40,320 --> 04:25:45,120
लेवल ऑफ़ थिंकिंग वह बहुत गिरा हुआ है यहां पर

3544
04:25:45,120 --> 04:25:49,280
तो क्या कर्तव्य नहीं था गुरुदे से पूछते गुरुदेव कौन है गुरुदेव हमको पहचान बताइए

3545
04:25:49,280 --> 04:25:53,280
क्योंकि आप कौन है लोगों को पहचान है हमको तो नहीं पहचान पा रहे गुरुदे का नाम बताइए गुरुदे नाम

3546
04:25:53,280 --> 04:25:57,360
बताने पूछा का प्रयास किया नहीं का प्रयास कर उसके खिलाफ वीडियो बना

3547
04:25:57,360 --> 04:26:01,600
रहे किसको जो मार रहे है कुमारी भी है योगाचार्य

3548
04:26:01,600 --> 04:26:05,680
भी कह रहे है और तुम लोगों से जा रही है एक है अनेक

3549
04:26:05,680 --> 04:26:10,160
है पूरा पूरा ग्रोह है तुम लोगों का ऐसा मतलब अनेक अनेक

3550
04:26:10,160 --> 04:26:14,400
हैं पहली बात उसको ग्रोह कहते हैं ये शास्त्र से सिद्ध

3551
04:26:14,400 --> 04:26:18,880
करना होगा अगर एक से ज्यादा मात्र शक्तियां

3552
04:26:18,880 --> 04:26:22,960
मठ में दर्शन हेतु आ रही हैं प्रवचन सुनने आ रही हैं वो एक से

3553
04:26:22,960 --> 04:26:27,200
ज्यादा है तो तुम्हें सिद्ध करना होगा पहली बात

3554
04:26:27,200 --> 04:26:31,320
और दूसरी बात है

3555
04:26:31,320 --> 04:26:35,520
कि क्या कहा है एक और है एक है

3556
04:26:35,520 --> 04:26:39,760
कुंवारी भी नहीं कहा जा रहा है तो कितने ऐसी महिलाएं हैं जो पूरी

3557
04:26:39,760 --> 04:26:44,640
म में आ जा रही है कुंवारी भी है जो आचार्य भी कहला रहे हैं और से

3558
04:26:44,640 --> 04:26:48,800
एक है नहीं कहा जा रहा है तो कितनी ऐसी महिलाएं

3559
04:26:48,800 --> 04:26:52,960
हैं जो पूरी मच में आ जा रही है कुमारी भी है योगाचार्य भी कह

3560
04:26:52,960 --> 04:26:57,280
रही है योगाचार्य हां ये बात थी

3561
04:26:57,280 --> 04:27:01,600
योगाचार्य कौन कहला रहा है भाई सिद्ध करो

3562
04:27:01,600 --> 04:27:05,760
इसीलिए मैंने कहा था डाल डाल पातपात अब चलेंगे और इसीलिए

3563
04:27:05,760 --> 04:27:10,160
मैंने कहा था कि ऐसा करो तुम सब छोड़ो लाइव आ जाओ

3564
04:27:10,160 --> 04:27:14,320
कह दिया मैंने क्योंकि मैं तुम्हारे साथ भिड़ता हुआ नहीं दिखना चाहता था इसलिए

3565
04:27:14,320 --> 04:27:18,400
मैंने मना किया था मगर ठीक है तुमको भिड़ता हुआ दिखना पसंद है तुम्हें और

3566
04:27:18,400 --> 04:27:22,640
कोई मतलब नहीं रहा है कि और कौन से अभियान फिर वो होंगे इफेक्टेड

3567
04:27:22,640 --> 04:27:25,280
होंगे और फिर इतना कंटेंट तो बन ही रहा है मुझे

3568
04:27:25,280 --> 04:27:29,280
लगता था कि शायद तुम मान जाओगे पर तुम नहीं मानोगे तो आ जाओ लाइव

3569
04:27:29,280 --> 04:27:33,600
कोई बात नहीं ठीक है एक है

3570
04:27:33,600 --> 04:27:38,880
मैंने कहा नहीं कहा इतना कहा है ना कैसे हम

3571
04:27:38,880 --> 04:27:43,040
यहां पे तुमने शब्द पे ध्यान दिया ना एक है तो यहां पे ये दूसरा

3572
04:27:43,040 --> 04:27:47,360
शब्द है आती है तो आती है शब्द का क्या करोगे आती

3573
04:27:47,360 --> 04:27:51,440
है तो मतलब काफी बार आती जाती है हम वो तो

3574
04:27:51,440 --> 04:27:55,760
एक ही बार गई है उससे पहले तो वो जानती नहीं थी पूरी के शंकराचार्य

3575
04:27:55,760 --> 04:27:59,760
जी को दीक्षा उन्होंने ली है अह क्या कहते हैं

3576
04:27:59,760 --> 04:28:04,720
जयपुर में जो उनका वो हुआ था जन्मोत्सव और वो

3577
04:28:04,720 --> 04:28:08,880
चातुर्मास में वहां गई है। फसोगे हर

3578
04:28:08,880 --> 04:28:14,880
जगह फसोगे चलो

3579
04:28:16,640 --> 04:28:22,640
स्वयं को स्वयं को योगाचार नहीं कहा उन्होंने

3580
04:28:34,000 --> 04:28:38,400
ये सब बातें हमको मत बताओ ये सब बातें उनको बताओ जिनको आप आपके

3581
04:28:38,400 --> 04:28:42,560
अनुसार जिन पर आप भरोसा करते हो और लट्ठ ले निकले हो ऐसे नहीं लड़ा

3582
04:28:42,560 --> 04:28:47,440
जाता है। फिर बता रहा हूं ये सब बातें हमको ना मत बताओ

3583
04:28:47,440 --> 04:28:51,520
कि मैं ये करूंगा आचार्य रामशंकर शुक्ल जी के साथ वो है वो

3584
04:28:51,520 --> 04:28:55,520
है। ये सब हमें मत बताओ। सब उनको बताओ। हमने तुमको

3585
04:28:55,520 --> 04:28:59,520
बताया ना कि हल्के टूटे फूटे प्रमाण लेकर के युद्ध

3586
04:28:59,520 --> 04:29:03,520
नहीं लड़े जाते। पर तुम्हें समझ में नहीं आया। अब तुम्हें दिक्कत हो रही है। सब

3587
04:29:03,520 --> 04:29:07,520
जगह से आवाजें उठ रही है। अब तुम्हारे को तुम्हारा जो

3588
04:29:07,520 --> 04:29:11,520
गुप्त लुप्त संप्रदाय का गुप्त सिंहासन है वो डामाडोल होता

3589
04:29:11,520 --> 04:29:17,520
हुआ नजर आ रहा है। इसलिए दिक्कत

3590
04:29:21,400 --> 04:29:25,400
है। नहीं एक कार्य करना एक्सटेंशन बोर्ड ले

3591
04:29:25,400 --> 04:29:29,680
लो एक लंबी लीड वीड ले लो और

3592
04:29:29,680 --> 04:29:33,840
एक्सटेंशन बोर्ड लगा लो और चार्जर लगा के लाइव किया करो मैं भी वैसे

3593
04:29:33,840 --> 04:29:37,840
ही लाइव कर रहा हूं फिलहाल हालांकि कैमरा है पर कैमरे

3594
04:29:37,840 --> 04:29:42,680
से अभी तक वो तकनीकी असुविधा होने के

3595
04:29:42,680 --> 04:29:46,800
कारण मोबाइल से ही कर रहा हूं और कैमरे से भी करूंगा तो एक हद होगी

3596
04:29:46,800 --> 04:29:51,360
ना कैमरे की तो आपको चार्जिंग की व्यवस्था रखनी चाहिए अपने पास

3597
04:29:51,360 --> 04:29:55,360
जो एक्सटेंशन बोर्ड एक बना लीजिए खूब लंबा सा इसमें तार हो और जो

3598
04:29:55,360 --> 04:29:59,600
है उसको लगा करके आप

3599
04:29:59,600 --> 04:30:05,600
कर सकते हैं लाइव

3600
04:30:08,600 --> 04:30:13,920
लंबी करेंगे

3601
04:30:13,920 --> 04:30:18,120
अब समय आ गया है क्योंकि जयकार सिगरे का ईगो हर्ट कर दिया सिंघम

3602
04:30:18,120 --> 04:30:24,120
ने अब समय आ गया है

3603
04:30:30,160 --> 04:30:33,000
उनका ज्ञान विज्ञान

3604
04:30:33,000 --> 04:30:37,920
उनका उसके कारण पूरी में कोई सुधार नहीं हो रहा है

3605
04:30:37,920 --> 04:30:42,760
ले रहे हैं इसलिए पड़ेगा पड़ेगा तो क्रमश हो

3606
04:30:42,760 --> 04:30:46,880
जाएगा ये सब विषय पर बात होगी लेकिन क्रमश

3607
04:30:46,880 --> 04:30:51,280
होगी जिस प्रकार से लोग कमेंट में पूछना है कि तुम्हारा वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है मेरे वजन

3608
04:30:51,280 --> 04:30:54,080
क्या

3609
04:30:54,080 --> 04:30:58,160
गुरुदेव की भविष्यवाणी तीन वर्ष वाली वो सिद्ध

3610
04:30:58,160 --> 04:31:04,160
हो रही है कि नहीं हो रही उसका धर्म से क्या संबंध

3611
04:31:04,200 --> 04:31:08,200
है वजन क्यों नहीं बढ़ रहा है लोग पूछ रहे

3612
04:31:08,200 --> 04:31:10,680
हैं

3613
04:31:10,680 --> 04:31:14,800
क्या बताया हां ये सब क्यों

3614
04:31:14,800 --> 04:31:18,880
किया जा रहा है बुधबक्की की सेना है तीन वर्ष सिंधु

3615
04:31:18,880 --> 04:31:22,880
राष्ट्र क्योंकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके वो तुम भटका

3616
04:31:22,880 --> 04:31:27,160
रहे

3617
04:31:27,160 --> 04:31:31,360
हो तो क्या गुरुदेव से यही पूछा जाना चाहिए था कि गुरुदेव जब दिए हो गए

3618
04:31:31,360 --> 04:31:35,600
थे गुरुदेव भैया कैसी हो सुन लो ना

3619
04:31:35,600 --> 04:31:39,840
उसको तो तुम किसी का प्रोडक्ट क्यों नहीं देख चेहरे में देखते रहो वीडियो में भैया कैसे देख रही हो

3620
04:31:39,840 --> 04:31:44,480
सुन लो वो स्वयं कोई बात

3621
04:31:44,480 --> 04:31:48,560
बता रही है ना वो गलत पहली बात तो मैंने उसका वो

3622
04:31:48,560 --> 04:31:52,680
पडकास्ट पूरा का पूरा पूरा देखा ही नहीं है। मैंने तो वहां

3623
04:31:52,680 --> 04:31:57,160
पर उसने मुझे बताया कि यह वाला शूट यहां हुआ

3624
04:31:57,160 --> 04:32:01,280
है। मैंने उसका शॉट देखा विजय श्री जी का

3625
04:32:01,280 --> 04:32:05,280
जो शॉट था वो देखा Instagram पर। फिर उन्होंने बताया

3626
04:32:05,280 --> 04:32:09,360
यह चैनल है महागाथे यहां पर मैंने दिया है। तो मैंने

3627
04:32:09,360 --> 04:32:13,520
पूरा का पूरा पडकास्ट आज भी नहीं देखा है। हां

3628
04:32:13,520 --> 04:32:17,520
मगर क्योंकि मैंने उनका वो शॉर्ट क्लिप वहां देख लिया था तो उसके आधार पर मैंने इस

3629
04:32:17,520 --> 04:32:22,000
वीडियो के नीचे वो कमेंट किया था। क्योंकि वो वीडियो इंग्लिश में भी था शायद।

3630
04:32:22,000 --> 04:32:26,800
तो मैं इंग्लिश में उतनी गति रखता नहीं हूं। मैं समझ सकता हूं।

3631
04:32:26,800 --> 04:32:30,800
समझने का प्रयास कर सकता हूं। मगर मैं इंग्लिश

3632
04:32:30,800 --> 04:32:35,520
के साथ फ्रेंडली नहीं। असहज हूं। भावनाएं

3633
04:32:35,520 --> 04:32:39,920
कनेक्ट नहीं हो पाती तो तुमने देख ही रहे हो कि वो वीडियो इंग्लिश

3634
04:32:39,920 --> 04:32:42,160
में है तो फिर मैंने वो पूरा

3635
04:32:42,160 --> 04:32:46,320
नहीं सुना खैर चलो बता तुम्हारी YouTube

3636
04:32:46,320 --> 04:32:50,520
कमेंट में लोग बता देना इसके लिए ऐसा नहीं

3637
04:32:50,520 --> 04:32:54,880
हम कमेंट में तो बता देना इसके लिए ऐसा बात बता

3638
04:32:54,880 --> 04:32:58,960
बता रही है ना वो ऐसा तो तुम्हारी योगाचार्य नहीं कहा उसने

3639
04:32:58,960 --> 04:33:03,720
अपने को YouTube कमेंट में तो बता देगा क्या कर

3640
04:33:03,720 --> 04:33:08,000
प्रक उसके बाद नहीं कभी

3641
04:33:08,000 --> 04:33:12,000
नहीं मैं मैं जाके तुम्हारे साथ

3642
04:33:12,000 --> 04:33:16,120
ये है कि मैं रावण हूं मैं कभी गलत नहीं हो

3643
04:33:16,120 --> 04:33:20,520
सकता हनुमान कैसे आकर के मुझे वो सिखा रहा है

3644
04:33:20,520 --> 04:33:25,600
हम तुम्हारा ये दिक्कत है तुम गलत नहीं हो सकते

3645
04:33:25,600 --> 04:33:30,960
योगाचार्य ने ही कहा उस

3646
04:33:30,960 --> 04:33:35,040
वैसे अगर देखा जाए तो वह पडकास्ट भी

3647
04:33:35,040 --> 04:33:39,280
गुरुदेव से दीक्षा लेने से पहले हो रही है। अगर उस पर तुम यह बनाओगे कि

3648
04:33:39,280 --> 04:33:43,280
योगाचार मान लो कहा मेरी जानकारी में नहीं है। मगर वो तो गुरुदेव

3649
04:33:43,280 --> 04:33:49,280
से दीक्षा लेने से पहले की पडकास्ट तो वहां भी बात खत्म हो जाएगी। मैं नहीं सोचता

3650
04:33:51,160 --> 04:33:57,120
नहीं बैठे हुए हैं। क्या है?

3651
04:33:57,120 --> 04:34:02,400
अच्छा तुम्हारे गुरु भाई आ के वहां कमेंट करके बता रहे हैं। ये फिर दिक्कत हो गई।

3652
04:34:02,400 --> 04:34:06,480
भाई ऐसी चीजों पर हमारी चीजें नहीं होती

3653
04:34:06,480 --> 04:34:10,480
है। निर्णय नहीं लेते हम। किसी ने बस कमेंट करके कह

3654
04:34:10,480 --> 04:34:14,720
दिया वो गुरु भाई है कि नहीं जांच पाए कि नहीं जांच पाए। वो कितने क्रेडिबल

3655
04:34:14,720 --> 04:34:19,840
है। सारे गुरु भाई बिल्कुल रामचंद्र जी है क्या? श्री रामचंद्र जी।

3656
04:34:19,840 --> 04:34:23,920
नहीं बनने का प्रयास कर रहे हैं। उनमें से पता नहीं कितने बनने का

3657
04:34:23,920 --> 04:34:28,080
प्रयास कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था ना कि लाखों

3658
04:34:28,080 --> 04:34:32,720
मनुष्यों में से कोई मुझे मुझे खोजता है। फिर उनमें से कोई मुझे

3659
04:34:32,720 --> 04:34:36,960
क्या कहते हैं? जान पाता है। फिर कोई उनमें से मुझे पाने

3660
04:34:36,960 --> 04:34:41,040
के लिए प्रयत्न करता है। तो पता नहीं उसमें

3661
04:34:41,040 --> 04:34:45,280
से प्रयत्न करने वाले कितने हैं जो गुरुदेव से जुड़े हुए हैं। तो यह भी देखना

3662
04:34:45,280 --> 04:34:51,280
पड़ेगा किसकी वाणी क्रेडिबिलिटी है किसकी नहीं है।

3663
04:34:52,120 --> 04:34:56,240
चलो चलिए आपका भी देखेंगे रिसर्च आपका इतना उत्तम

3664
04:34:56,240 --> 04:35:00,480
है ना इतना उन्नत है ना इनके रिसर्च का चाहिए भी चाहिए आपका भी देखेंगे

3665
04:35:00,480 --> 04:35:04,720
रिसर्च आपका इतना उत्तम है ना इतना उन्नत है ना रिसर्च का अपना माथा पी पी फसने के लिए

3666
04:35:04,720 --> 04:35:10,720
हो जाएंगे

3667
04:35:11,080 --> 04:35:15,120
चाहिए स्वीकार किया है कौन सा रामायण आचार्य ने स्वीकार

3668
04:35:15,120 --> 04:35:19,520
किया है ये एक लंबा विषय है हां पिछले प्रश्न किया है कि

3669
04:35:19,520 --> 04:35:23,760
उनका वजन क्यों बढ़ते जा रहा है? बात है भैया। कौन से प्रामाणिक आचार्य तुमको

3670
04:35:23,760 --> 04:35:27,920
स्वीकार किया है? सही बात है। इस इस जगह ये जो संदर्भ चल

3671
04:35:27,920 --> 04:35:32,000
रहा है इसका मैं इंतजार कर रहा था क्योंकि यही एक

3672
04:35:32,000 --> 04:35:36,800
है जो सैद्धांतिक बात कुछ होगी और तो ज्यादातर

3673
04:35:36,800 --> 04:35:40,960
खामखा की बातें ज्यादा हुई। चलो तुम किनको

3674
04:35:40,960 --> 04:35:44,960
प्रमाणिक मानते हो? क्योंकि भाई अपना किसी व्यक्ति का संदर्भ दूंगा। यहां पर

3675
04:35:44,960 --> 04:35:48,960
मैं छोटा सा उदाहरण देता हूं। विद्या स्वामी जी है कई बार मतलब मैं जानता हूं चार पांच

3676
04:35:48,960 --> 04:35:52,960
जब वो वाराणसी में वाराणसी से बगल में एक नाम जगह कोई है कोई है

3677
04:35:52,960 --> 04:35:56,680
ऐसे पूछा

3678
04:35:56,680 --> 04:35:59,800
ना

3679
04:35:59,800 --> 04:36:04,320
लेकिन स्वामी जी वीडियो

3680
04:36:04,320 --> 04:36:08,400
होगा वो हाल आप देखना वहां पर वो कह रहे हैं हमारे मतलब

3681
04:36:08,400 --> 04:36:13,840
जी और वो साथ करता है हम भी करेंगे ऐसा वो कह रहे है और एक बात

3682
04:36:13,840 --> 04:36:18,000
अरे मेरे भाई तुम्हारे तुम्हारा उन्होंने यह कह दिया कि तुम शास्त्र

3683
04:36:18,000 --> 04:36:22,280
सम्मत हो तो तुम्हारा संप्रदाय प्रामाणिक है। ये कहां से हो गया? तुमने अपने आप

3684
04:36:22,280 --> 04:36:26,480
को समाज में निग्रचार रूप नाम से

3685
04:36:26,480 --> 04:36:30,560
स्थापित किया है। उसका उन्होंने उपयोग किया तो यहां इससे ये कहां सिद्ध हो

3686
04:36:30,560 --> 04:36:36,560
गया कि वो तुम्हारा संप्रदाय ये कह रहे हैं कि प्रामाणिक

3687
04:36:38,600 --> 04:36:44,600
है। श्री आशीष के घर में आशीष के घर

3688
04:36:46,280 --> 04:36:50,320
में प्राप्त हुआ था और

3689
04:36:50,320 --> 04:36:56,320
तो वहां पर के साथ में दो दिन किया तो

3690
04:36:58,200 --> 04:37:02,960
समय के साथ अपनी प्रामाणिक परंपरा है इस प्रकार

3691
04:37:02,960 --> 04:37:07,240
अच्छा इनकी अपनी प्रामाणिक परंपरा है तो भाई इसमें जो है आप ही ने कहा है कि गुरु

3692
04:37:07,240 --> 04:37:11,280
अगर क्या कहते हैं शास्त्रों के अनुकूल नहीं होगा तो फिर आप उसमें वहां

3693
04:37:11,280 --> 04:37:15,600
पर प्रश्न कर सकते तो उनकी शरणागत हो के पूछेंगे भाई प्रश्न कि निग्रह

3694
04:37:15,600 --> 04:37:20,000
संप्रदाय प्रमाणिक है कि नहीं पूछ लेंगे अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो

3695
04:37:20,000 --> 04:37:24,000
ठीक है और बोलो क्योंकि अब इसमें दोष आएगा

3696
04:37:24,000 --> 04:37:28,920
ना कि कहां से कौन-कौन से शास्त्रों के आधार पर वो हो रहा है

3697
04:37:28,920 --> 04:37:33,280
चलिए तो अगर ऐसी जानकारी है तो ठीक है फिर फिर प्रमाणिक

3698
04:37:33,280 --> 04:37:37,520
मान लेंगे अगर तुम्हें वासुदेवाचार्य जी जैसे प्रामाणिक आचार्य वो

3699
04:37:37,520 --> 04:37:42,520
मान रहे हैं पूछेंगे पहले अपने संशय को दूर करेंगे। ठीक है?

3700
04:37:42,520 --> 04:37:46,560
चलो वो वीडियो हमारे चैनल पर देख सकते हो। चैनल पर भी देख सकते हो।

3701
04:37:46,560 --> 04:37:50,720
जनवरी महीने में हुआ था और साल को देखा होगा शायद ये जनवरी महीने 2000

3702
04:37:50,720 --> 04:37:53,840
23 में हुआ था शायद। 2023 में हो सकता है। 203

3703
04:37:53,840 --> 04:37:57,920
में हुआ होगा क्योंकि तो प्रश्न पहला क्या है? प्रश्न को

3704
04:37:57,920 --> 04:38:01,920
समझो। तुम्हारी परंपरा क्या है? और उसके लिए सरलतम में

3705
04:38:01,920 --> 04:38:06,240
एक उपाय है परंपरा को प्रामाणिक सिद्ध करने के लिए कि

3706
04:38:06,240 --> 04:38:10,240
क्या तुम्हें प्रमाणिक आचार्यों के द्वारा स्वीकार किया

3707
04:38:10,240 --> 04:38:15,200
गया है कितनों के द्वारा स्वीकार किया गया है मगर यदि

3708
04:38:15,200 --> 04:38:19,520
मिल जाता है तो फिर वहां पर एक संशय तो उत्पन्न होगा किस आधार पर उन्होंने प्रामाणिक

3709
04:38:19,520 --> 04:38:23,760
कहा है क्या नहीं कहा है तो तुम्हारी शैली में हम जाकर के उनसे पूछेंगे तुम्हारे तरीके

3710
04:38:23,760 --> 04:38:27,920
से नहीं पूछेंगे पूछेंगे पता करेंगे भाई

3711
04:38:27,920 --> 04:38:32,720
और होगा तो मानेंगे भी अगर होगा चीजें सिद्ध होंगी

3712
04:38:32,720 --> 04:38:37,000
वास्तविकता में ऐसा ही है तो मानेंगे भी मान लेंगे प्रमाणिक

3713
04:38:37,000 --> 04:38:41,120
संप्रदाय लो चलो और इधर

3714
04:38:41,120 --> 04:38:45,360
204 दिसंबर में अंग्रेजी बताओ जल्दी से समझाओगे इसे बताता हूं उधर मई मेरी सरादान

3715
04:38:45,360 --> 04:38:49,520
हुआ था सर और इधर दिसंबर में बताओ जल्दी समझाओ इसे बता रहा हूं मई

3716
04:38:49,520 --> 04:38:53,840
में मेरी सगाई हुई थी और इधर 204 दिसंबर में अंग्रेजी बताओ जल्दी से समझाओ

3717
04:38:53,840 --> 04:38:57,920
इसे बता रहा हूं उधर मई में मेरी सरादान हुआ था सर और इधर दिसंबर में

3718
04:38:57,920 --> 04:39:02,240
हुआ तो उसे से बात है उसमें हमारा जो है पैदा हुआ नहीं मतलब ऐसे ही

3719
04:39:02,240 --> 04:39:06,320
उनकी नानी ने जो बात है वो वो तो 2017 से ही मेरा जो रिश्ता था

3720
04:39:06,320 --> 04:39:08,880
दो हमारे घर पत्नी है उनकी नानी ने ये इच्छा

3721
04:39:08,880 --> 04:39:12,880
की थी कि मैं उनकी नाति से बात करूं और उस समय वो देवी थे थे

3722
04:39:12,880 --> 04:39:16,880
उसकी तैयारी भी थी बहुत अतिक्रमण नहीं हुआ था तो फिर उन्होंने कहा लेकिन उसी सामान्य से नहीं बन

3723
04:39:16,880 --> 04:39:21,200
पाए और दृष्ट से पायदारी साफ नहीं कर पाए और भी नहीं बन पाई वा तो बाद

3724
04:39:21,200 --> 04:39:25,360
उनसे ही हुआ लेकिन करना पड़ा जो निर्देश था

3725
04:39:25,360 --> 04:39:29,400
तो थी पता नहीं जानवी कहां से पैदा हो गई समझना पड़ेगा

3726
04:39:29,400 --> 04:39:34,520
खैर मैं यहां पे बता रहा था ये बात पता नहीं जाने कहा

3727
04:39:34,520 --> 04:39:39,040
पड़ेगा मैं यहां पे बता रहा था ये बात की ये घटना जनवरी 2000

3728
04:39:39,040 --> 04:39:43,440
23 का हो स्वामी जी के चैनल पर आप देख सकते है मेरा पुराना चैनल हो गया चैनल पर हमने अपलोड किया है

3729
04:39:43,440 --> 04:39:47,600
आप देख सकते है वहां भी स्वीकार किया है फिर से आए कब आए 2000 पिछले

3730
04:39:47,600 --> 04:39:51,760
साल स्वामी जी जनार्दन दास जी वहां पर स्थान बन रहा है उपलब्ध

3731
04:39:51,760 --> 04:39:55,840
है YouTube पर श्री वैष्णव के साथ यहां पर हम श्री वैष्णव नहीं स्वामी जी के साथ मंच पर विद्वान

3732
04:39:55,840 --> 04:39:59,840
थे उन्होंने हमारा श्री वैष्णव के समय जहां पर हम श्री वैष्णव नहीं है लेकिन पांच छात्र जी के

3733
04:39:59,840 --> 04:40:03,840
समय एकता में से जो श्री वैष्णव नहीं थे फिर भी पांच व्याख्यान करने आ गए थे विद्या स्वामी

3734
04:40:03,840 --> 04:40:07,920
बीच में थे उनके भाई हम थे और दाने जी और स्वामी थे तो वहां पर विद्याल जी ने जो संस्कृत

3735
04:40:07,920 --> 04:40:11,920
भाषा दिया हमने भी संस्कृत में ही भाषा दिया था जो प्रस्ताव थे वो मेरे पास आए

3736
04:40:11,920 --> 04:40:16,000
थे स्वामी जी का संस्कृत में जो कहा था उसको मैदान में तेलुगु बोल रहा है लेकिन आप वहां पर निग्रचारी शब्द सुन

3737
04:40:16,000 --> 04:40:20,080
सकते है और स्वामी जी ने कहा निग्र जैसे अलग-अलग आगम में अलग

3738
04:40:20,080 --> 04:40:23,920
आसना पद्धति है जैसे आगम है शक्त आगम है निग्रह आगम है पांच आगम है वैसा आगम है

3739
04:40:23,920 --> 04:40:28,000
ऐसा है और फिर हमारा नाम लिखा भाग में निग्रचार्य बैठे हुए तो शास्त्रों के माध्यम

3740
04:40:28,000 --> 04:40:32,760
से शास्त्रों के हाथ बा भाग में निग्रहचार्य बैठे हुए हैं।

3741
04:40:32,760 --> 04:40:36,800
इससे नहीं होता है कि उन्होंने प्रमाणिक माना। वो जो

3742
04:40:36,800 --> 04:40:40,800
पहले वाला था वो अतीक था। अगर वो है तो उसमें हमें हमारे अंदर की

3743
04:40:40,800 --> 04:40:45,200
कुछ जिज्ञासा है वो शांत करेंगे और फिर मान लेंगे।

3744
04:40:45,200 --> 04:40:51,200
ठीक है? दूसरी बात ये आती है

3745
04:40:51,320 --> 04:40:55,440
कि आप तुम तो जाकर के राजेंद्र दास जी महाराज जी के बगल में

3746
04:40:55,440 --> 04:41:00,000
बैठे हो। मगर तुम्हारे अनुसार उनकी जो चीजें हैं वह प्रामाणिक नहीं है। अशास्त्रीय

3747
04:41:00,000 --> 04:41:04,000
है। यानी कि किसी के बगल में बैठने से कुल मिलाकर के यह सिद्ध नहीं

3748
04:41:04,000 --> 04:41:08,080
होता है कि उसको वो प्रमाणिक मानता है कि नहीं मानता है।

3749
04:41:08,080 --> 04:41:12,320
ठीक है? और तुम अभी आगे बात आएगी कि

3750
04:41:12,320 --> 04:41:16,640
वो प्रमाणिक मानने के विषय में। तो किसी के बगल में बैठ जाने,

3751
04:41:16,640 --> 04:41:20,880
खड़े हो जाने से यह सिद्ध नहीं होता है। पूज्य गुरुदेव जो हैं उनके

3752
04:41:20,880 --> 04:41:25,680
पास अभी अमित शाह और योगी जी दोनों लोग आए थे।

3753
04:41:25,680 --> 04:41:29,680
और वह बैठे थे वहां उनके पास गुरुदेव के पास हालांकि नीचे बैठे थे गुरुदेव

3754
04:41:29,680 --> 04:41:33,680
थोड़ा सा ऊपर बैठे थे मगर बैठे थे ना उनके पास तो इससे सिद्ध नहीं

3755
04:41:33,680 --> 04:41:37,760
हो गया कि गुरुदेव उनको मान गए उनकी चीजों को मान गए

3756
04:41:37,760 --> 04:41:39,200
सब चीजें सही है उनकी

3757
04:41:39,200 --> 04:41:43,280
ओके है ठीक है चलो ये वाला तुम्हारा पूरा कर

3758
04:41:43,280 --> 04:41:47,520
ले जल्दी से हां सही आज इस प्रकार है तो एक उदाहरण

3759
04:41:47,520 --> 04:41:51,520
संपर्क के लिए दे दिया है तुमको और क्यों कारण मान्यता

3760
04:41:51,520 --> 04:41:55,600
वाली बात नहीं कही इस प्रकार से लेकिन शास्त्र के रूप में या शास्त्र व्यक्ति के रूप में

3761
04:41:55,600 --> 04:41:59,680
रूप में रूप में तो शास्त्र निष् व्यक्ति के शब्द तो हमने भी

3762
04:41:59,680 --> 04:42:03,680
शायद यूज़ किया है तुम्हारे लिए अभी बात हो रही है आपके पास ज्ञान आया

3763
04:42:03,680 --> 04:42:08,080
कहां से परंपरा एक सदाचार आचार्य के रूप में आएगा

3764
04:42:08,080 --> 04:42:12,080
सवाल बताएगा तो वो कई बार समस है देखो तुम कमाई

3765
04:42:12,080 --> 04:42:16,080
मांगते हो और फिर उदाहरण भी फिर भी अगर तुम कमाई नहीं मानते हो तो उन लोगों की छुट्टी है

3766
04:42:16,080 --> 04:42:20,240
हमको देखो तुम कमाई मांगते हो और फिर लिख लेंगे तो प्रवेशिका को भेज देंगे

3767
04:42:20,240 --> 04:42:24,800
फिर तुम्हारे मनभूति समझ सके इसके फिर वीडियो बनाकर एक एक श्लोक को पढ़कर प्रमाणित

3768
04:42:24,800 --> 04:42:27,920
करके उसका विश्लेषण समझा

3769
04:42:27,920 --> 04:42:32,640
मंदबुद्धि कौन है जो इस वीडियो को शुरू से देखेगा उसको पता लग जाएगा मंदबुद्धि

3770
04:42:32,640 --> 04:42:36,880
कौन है संकीर्ण विचारधारा वाला कौन है पूर्वाग्रह

3771
04:42:36,880 --> 04:42:41,680
से ग्रसित कौन है और

3772
04:42:41,680 --> 04:42:46,400
क्या कहते हैं वो होता है ना जिसको

3773
04:42:46,400 --> 04:42:50,480
आईडिया नहीं होता है कि कैसे तर्क करते हैं कैसे बहस करते हैं वो वो वाला

3774
04:42:50,480 --> 04:42:54,560
जिसको जीतना है ज्ञान ना होते हुए तो वह कौन है वो

3775
04:42:54,560 --> 04:42:59,360
इस वीडियो को जो देखेगा पूरा वो समझ जाएगा

3776
04:42:59,360 --> 04:43:03,440
और भी एक दो उपाधियां थी जो मिल रही थी इसी वीडियो के आधार केवल इसी

3777
04:43:03,440 --> 04:43:07,920
वीडियो के आधार पर तुम्हारी दो तीन चीजें तो मैंने ऑन

3778
04:43:07,920 --> 04:43:12,240
चलती हुई लाइव में निकाली है तुम्हारे झूठ दिखाए हैं और तुम्हारे

3779
04:43:12,240 --> 04:43:16,320
अल्पज्ञता के आधार पर दिए गए निर्णायक वक्तव्य दिखाए अब

3780
04:43:16,320 --> 04:43:20,720
तुम में मुझे एक छोटा बच्चा नजर आ रहा है और कुछ नहीं हो तुम जिसने

3781
04:43:20,720 --> 04:43:24,960
शास्त्रों को रटा है मगर मगर तर्क शक्ति बिल्कुल

3782
04:43:24,960 --> 04:43:30,400
जीरो है। बिल्कुल जीरो।

3783
04:43:30,400 --> 04:43:35,040
युक्ति है ही नहीं, प्रासंगिकता है ही नहीं, संबंध है ही नहीं। बस

3784
04:43:35,040 --> 04:43:39,120
प्रमाणों को तुमने रटा है। समझ बात आएगी। तब फिर पूछा की प्रामाणिक बनता है।

3785
04:43:39,120 --> 04:43:43,120
क्योंकि प्रामाणिक अपमानिक कहां होता है? जब हम अपना प्रमाण तुम्हारे सामने अच्छे प्रकार से व्यवस्थित

3786
04:43:43,120 --> 04:43:47,120
कर छोटे मोटे प्रकार से हमने बहुत कुछ कहा है। छोटे मोटे तारों में हमने कहा है। छोटे लेखों में छोटे-छोटे

3787
04:43:47,120 --> 04:43:52,840
वीडियो में इंटरव्यू में कहा। लेकिन उतना प्रमाणिक अभी उसे प्रमाणिक बनाने के लिए तुम्हारे बुद्धिमान

3788
04:43:52,840 --> 04:43:57,240
के बुद्धि वाले तो नहीं है तो तुम

3789
04:43:57,240 --> 04:44:02,680
जो बुद्धि वाले लोगों के लिए जो तुम्हारा

3790
04:44:02,680 --> 04:44:06,880
है तो मतलब कि तुम्हारी बुद्धि

3791
04:44:06,880 --> 04:44:11,200
वाले ये सिद्धांत कहां पर है? पर्याप्त नहीं है। मतलब बुद्धि

3792
04:44:11,200 --> 04:44:16,160
वाले लोगों के लिए जो है तुम दे चुके हो

3793
04:44:16,160 --> 04:44:20,240
और तुम्हारी जो बुद्धि है तो मैं जो है अल्प बुद्धि हूं तो मेरे

3794
04:44:20,240 --> 04:44:24,480
लिए तुम्हारा वो प्रवेशिका लिखनी पड़ रही है।

3795
04:44:24,480 --> 04:44:28,720
अच्छा तो ये कुछ मामला जच नहीं रहा है।

3796
04:44:28,720 --> 04:44:32,880
क्या बोल रहे हो? इसके लिए हमको मेहनत करके एक दिव्य की रचना करनी पड़ी भगवती

3797
04:44:32,880 --> 04:44:37,040
गीता से जिसका नाम हां मैं स्वीकार करता हूं। यह गलती मैं भी स्वीकार करता हूं। लेकिन

3798
04:44:37,040 --> 04:44:41,040
बताए गए निर्धारित समय से विलंब से हो रही है। लेकिन इसका एक बहुत महत्वपूर्ण कारण है तुम्हारे सम्मुख जो

3799
04:44:41,040 --> 04:44:45,520
हमारा समय है। दूसरा बहुत नहीं

3800
04:44:45,520 --> 04:44:49,920
इसका कारण है तुम्हारा अहंकारी होना। इसका

3801
04:44:49,920 --> 04:44:54,800
कारण है तुम में लोकेशना होना। इसका कारण है

3802
04:44:54,800 --> 04:44:59,600
तुम्हें धर्म का बोध ना होना। किसके साथ कैसा व्यवहार करना है।

3803
04:44:59,600 --> 04:45:03,600
इस बात का बोध ना होना। शायद तुम्हें यह मालूम है

3804
04:45:03,600 --> 04:45:07,680
कि तुमको अपने निजी जीवन में क्या करना है। मगर

3805
04:45:07,680 --> 04:45:12,680
तुम्हें व्यवहार का व्यवहारिक जो धर्म है ना वो नहीं पता

3806
04:45:12,680 --> 04:45:17,000
है। अन्यों के साथ क्या व्यवहार करें वो सब नहीं पता

3807
04:45:17,000 --> 04:45:18,000
था।

3808
04:45:18,000 --> 04:45:22,160
इसका कारण यही है। जो तुम कैरी मिनाटी बनने चले हो

3809
04:45:22,160 --> 04:45:26,160
ना धर्म के ये कारण है। मैं

3810
04:45:26,160 --> 04:45:30,320
लिख रहा था तो मैंने सोचा 100 से 150 पीठ का अपने जगह को तोड़ कर दूंगा।

3811
04:45:30,320 --> 04:45:34,560
साल बाद तो 70 पेज संस्कृत फिर दूंगा 70 पेज 49 50 पे जाते

3812
04:45:34,560 --> 04:45:38,560
पूर्ण करूंगा लेकिन जब मैं ग्रंथ लिख बैठा है तो मुझे समझ में आया अगर मैं प्रमाण छोड़ देता हूं फिर

3813
04:45:38,560 --> 04:45:42,800
यहां ये शंका हो सकती है प्रति हो सकता है या फिर नहीं किया गया यानी कि तुम

3814
04:45:42,800 --> 04:45:47,040
जो अब लिखने वाले हो उसमें तुम्हें मालूम है कि शंका उत्पन्न हो सकती है

3815
04:45:47,040 --> 04:45:51,040
तो फिर शंका करने वाले को जो जिन शंकाओं से तुम खुद सेटिस्फाइड हो

3816
04:45:51,040 --> 04:45:55,200
कि हां ऐसी शंका हो सकती है तो शंका करने वाले को तुमने मंदबुद्धि

3817
04:45:55,200 --> 04:45:57,480
कैसे

3818
04:45:57,480 --> 04:46:01,520
कहा अरे भाई जो केवल तुम्हारे उतने से कह देने पर मान

3819
04:46:01,520 --> 04:46:05,880
रहे हैं उनको तुमको कहना चाहिए जो शब्द हमको कह रहे

3820
04:46:05,880 --> 04:46:09,920
हो क्योंकि उनके मन में शंका नहीं उत्पन्न हो रही है। इसका मतलब कुछ

3821
04:46:09,920 --> 04:46:13,920
ऐसी चीज है जो पूछी जा सकती है। मगर वो बिना पूछे मान ले रहे

3822
04:46:13,920 --> 04:46:17,920
हैं। इसको तो अंधभक्ति कहेंगे ना। ध्यान नहीं दे रहे हैं।

3823
04:46:17,920 --> 04:46:22,640
तथ्यों को टटोल नहीं रहे हैं। कोई

3824
04:46:22,640 --> 04:46:26,560
वहां पर वो वाला नियम लागू है क्या कुरान का? उसमें लिखा

3825
04:46:26,560 --> 04:46:30,560
है ज्यादा सवाल मत करो। वरना तुम्हारे लिए वह

3826
04:46:30,560 --> 04:46:34,400
आयत खोल दी जाएंगी जिनके कारण पहले के लोग भागी

3827
04:46:34,400 --> 04:46:38,400
हो गए। जिन शंकाओं का उत्पन्न

3828
04:46:38,400 --> 04:46:42,560
होना तुम खुद स्वीकार कर रहे हो उन शंकाओं का उत्पन्न जिन

3829
04:46:42,560 --> 04:46:47,360
मस्तिष्कों में हो सकता है उनको तुम अल्पबुद्धि कह रहे हो।

3830
04:46:47,360 --> 04:46:51,360
यहां पर क्या होता है तो मैं काम करने लगा और मैं आपको वचन देता हूं

3831
04:46:51,360 --> 04:46:55,440
विश्वास दिलाता हूं। मेरी जब आप निग्र प्रवेशिका पढ़ेंगे

3832
04:46:55,440 --> 04:46:59,440
तो निग्र प्रवेशिका की गुणवत्ता से आप करेंगे इस लुक को लिख कितना परिश्रम दिया गया है और

3833
04:46:59,440 --> 04:47:03,600
परिश्रम के कारण जो विलंब हो रहा है

3834
04:47:03,600 --> 04:47:07,840
दे देना तब बात करना अभी बातें मत छोड़ना 800 से अधिक

3835
04:47:07,840 --> 04:47:12,080
संप्रदाय प्रमाण बताया गया है 750 ग्रो

3836
04:47:12,080 --> 04:47:16,720
नहीं बता रहा 70 श्लोक नहीं ग्रंथ 750 एक एक ग्रंथ से कई श्लोक

3837
04:47:16,720 --> 04:47:20,720
मतलब एक ग्रंथ की बात करते

3838
04:47:20,720 --> 04:47:24,720
मंत्र के विषय में तो फिर माना लेकिन वो कम से कम ये शास्त्र प्रमाण मानेंगे

3839
04:47:24,720 --> 04:47:28,720
उनके लिए केवल उनके लिए नहीं अभी तो नहीं नहीं मानेंगे शास्त्र

3840
04:47:28,720 --> 04:47:32,720
प्रमाण भी मानेंगे उनकी व्याख्या भी देखी जाएगी कहां

3841
04:47:32,720 --> 04:47:36,960
से कौन सी संप्रदाय से हो रही है और ये भी पूछा जाएगा

3842
04:47:36,960 --> 04:47:41,520
कि ब्रह्म सूत्र कहां से आ रहा है भागवत कहां से आ रही है

3843
04:47:41,520 --> 04:47:45,760
ये सब भी देखना पड़ेगा शास्त्र प्रमाण के साथ साथ कौन सा

3844
04:47:45,760 --> 04:47:50,160
भाव किसका तत्व विवेचन तुमने स्वीकार किया वो सब चीजें है चलो

3845
04:47:50,160 --> 04:47:54,160
शास्त्र पुराण माने उनके लिए मतलब नाम भी नहीं सुने होंगे

3846
04:47:54,160 --> 04:47:58,160
ठीक से तुमने 75 80 ग्रंथों के नाम नहीं सुने हैं आज

3847
04:47:58,160 --> 04:48:02,480
नहीं सुने हैं राम का नाम सुना है राम

3848
04:48:02,480 --> 04:48:06,720
का नाम सुना है और उसको बहुत अच्छे से धारण करने का प्रयास किया

3849
04:48:06,720 --> 04:48:10,880
है तुम्हारी तरह वो 70 80 ग्रंथ

3850
04:48:10,880 --> 04:48:15,280
या 700 ग्रंथ जो है उन सबको लेकर के और केवल

3851
04:48:15,280 --> 04:48:19,280
लेकर के और लोगों को दिखाने के लिए ऐसा

3852
04:48:19,280 --> 04:48:24,240
जीवन नहीं हमने राम का नाम सुना है।

3853
04:48:24,240 --> 04:48:28,480
शंकराचार्य का नाम सुना है। वो पर्याप्त है हमारे लिए।

3854
04:48:28,480 --> 04:48:30,920
ठीक

3855
04:48:30,920 --> 04:48:35,280
है? वो क्या है? यहीं पर एक श्लोक है।

3856
04:48:35,280 --> 04:48:39,840
मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले। सारे उपनिषद पढ़ ले।

3857
04:48:39,840 --> 04:48:44,680
जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ यज्ञ

3858
04:48:44,680 --> 04:48:48,960
इत्यादि सब कुछ व्यर्थ है। यदि कोई प्रामाणिक

3859
04:48:48,960 --> 04:48:53,040
आचार्य नहीं है तो क्योंकि इन प्रामाणिक आचार्य के बिना गुरु

3860
04:48:53,040 --> 04:48:58,000
के बिना यह सभी चीजें तुम्हें

3861
04:48:58,000 --> 04:49:02,000
भटका देंगी, भ्रमित कर देंगी। तो

3862
04:49:02,000 --> 04:49:05,280
वो 700 ग्रंथ का तुम्हारा अर्थ कहां से आ रहा है?

3863
04:49:05,280 --> 04:49:09,360
कौन सा ले रहा है? कैसे तुम्हारा तत्व आया? कौन सा तुम्हारा सिद्धांत

3864
04:49:09,360 --> 04:49:13,840
है वो सब भी तो देखना पड़ेगा। बनाओ बनाओ प्रवेशिका बनाओ।

3865
04:49:13,840 --> 04:49:18,080
मतलब प्रवेशिका से पहले तक तुम परंपरा में बात नहीं करोगे अपनी। तुम

3866
04:49:18,080 --> 04:49:22,080
सिद्ध नहीं करोगे कि मैं निग्रचार के हूं। अभी टाइम है सिद्ध करने में

3867
04:49:22,080 --> 04:49:26,880
तो सिद्ध नहीं हो तो अभी मत बोलो। अभी भगवत आनंद बोला।

3868
04:49:26,880 --> 04:49:31,760
क्यों बोल रहे हो? अभी प्रवेशिका बना लो। सिद्ध कर दो फिर बोलना।

3869
04:49:31,760 --> 04:49:35,920
कोई बात नहीं बोल लो। कोई बात नहीं। है उस पे केवल तुम्हारा

3870
04:49:35,920 --> 04:49:39,920
एक भौका दिख रहा है हम इतना बड़ा एक बोलना तो पटरी के बोल देते है सेटअप जो तुम्हारा

3871
04:49:39,920 --> 04:49:44,800
है ना उस सेटअप के कारण अब एक सुप्रीम कोर्ट के वकील का भी फोन आ रहा है मैं जरा वही

3872
04:49:44,800 --> 04:49:49,640
नोटिस क्यों अच्छा एक इससे पहले जोस ने लाइव हूं

3873
04:49:49,640 --> 04:49:54,160
तो अच्छा हां एक छोटस ने कहा है

3874
04:49:54,160 --> 04:49:58,160
शंकचार्य ने कहा है मैं क्लास सुना देता हूं जैसा वो क्या कह रही है

3875
04:49:58,160 --> 04:50:02,160
अभी इसको डाल सकता है और इसमें इसमें इसमें रिदमम से विजय और गुरु शंकराचार्य ये तो

3876
04:50:02,160 --> 04:50:06,320
टाइटल है बहुत गलत मतलब सोचो रिदमम कपू या विद्या के प्रति ये व्यक्ति

3877
04:50:06,320 --> 04:50:10,320
कितना अधिक बुरा हुआ है अटैच में महसूस करता है की विद्या एक इंटरव्यू दे

3878
04:50:10,320 --> 04:50:14,480
दे तो सिंपल करते कमेंट करते कहा विजय अरे आम भाषा में मुझे बात

3879
04:50:14,480 --> 04:50:19,520
का दर्शन हो मानो वो बात किसी से निकली

3880
04:50:19,520 --> 04:50:20,320
नहीं एक

3881
04:50:20,320 --> 04:50:24,320
मिनट एक मिनट अगर विजय श्री का मैंने प्रोत्साहन किया

3882
04:50:24,320 --> 04:50:28,400
तो इससे ये कैसे सिद्ध हुआ कि मैं यह कह रहा हूं कि विजय श्री से पहले किसी ने

3883
04:50:28,400 --> 04:50:33,600
धर्म की परिभाषा नहीं बताई क्या बचकाने तर्क है

3884
04:50:33,600 --> 04:50:37,760
छोटे बच्चों की तरह बात करते हो। आज

3885
04:50:37,760 --> 04:50:42,160
रात में मुझे जो तुम्हारा बड़प्पन था वो

3886
04:50:42,160 --> 04:50:46,320
सब नष्ट हो गया। अब केवल एक छोटा बच्चा नजर आ रहा है जो

3887
04:50:46,320 --> 04:50:50,480
जििद कर बैठा है। जििद कर बैठे हो और कुछ

3888
04:50:50,480 --> 04:50:54,640
दया भी आ रही है तुम्हारे ऊपर। इसमें तुम इतने

3889
04:50:54,640 --> 04:50:58,720
ज्यादा मुझको छोटे अनुभव कर रहा हूं। मैं तुम्हारे प्रति करुणा

3890
04:50:58,720 --> 04:51:02,400
का भाव उत्पन्न हो रहा है।

3891
04:51:02,400 --> 04:51:06,480
सही बता रहा हूं। ऐसी बचकानी बातें कर रहे हो। अगर मैं अगर

3892
04:51:06,480 --> 04:51:10,560
मैं विजय श्री को मैं प्रोत्साहन दे रहा हूं कि तुमने अच्छा

3893
04:51:10,560 --> 04:51:14,560
है ये है वो है तो उससे ये कहां सिद्ध हो रहा है कि उससे पहले धर्म की व्याख्या किसी ने

3894
04:51:14,560 --> 04:51:18,880
नहीं की। ये कौन सा सिद्धांत है भाई? कहां के तुम आचार्य

3895
04:51:18,880 --> 04:51:23,360
हो? ये कैसी बातें कर रहे हो? फंस जाओगे। बहुत बुरा मत मत आना। प्रार्थना

3896
04:51:23,360 --> 04:51:27,680
करना कि तुम मेरा तुमसे सामना ना हो। नहीं तुम बहुत बुरा फसोगे।

3897
04:51:27,680 --> 04:51:32,120
फस जाओ। अब करुणा आ रही तुम्हारे

3898
04:51:32,120 --> 04:51:35,360
ऊपर। वजन भी कम है तो उस तरह से भी

3899
04:51:35,360 --> 04:51:39,520
देखता हूं। जििद कर बैठे हो तुम

3900
04:51:39,520 --> 04:51:45,520
और कुछ नहीं। अपने बड़प्पन को मनवाने की जिद।

3901
04:51:46,240 --> 04:51:50,240
बहुत-बहुत धन्यवाद। अरे भाई टिक नहीं पाओगे तो

3902
04:51:50,240 --> 04:51:54,480
तुम बताओ ना। तुम आ जाओ। बता दो।

3903
04:51:54,480 --> 04:52:00,480
कि अगर मैंने किसी से ये कहा है ये सुन लो इनका वक्तव्य क्या है? सुनो

3904
04:52:02,360 --> 04:52:06,840
भाई ने कौन सी कमेंट कहा यहां पे क्या बोल रहा है

3905
04:52:06,840 --> 04:52:11,680
ये तो सिंक करते कौन सी कमेंट कहा विजय आंग्ल भाषा में

3906
04:52:11,680 --> 04:52:16,680
भाषा का दर्शन मानो वो आगे से निकली और

3907
04:52:16,680 --> 04:52:20,720
देखो अगर मैं कह रहा हूं कि तुम्हारी आंग्ल भाषा में जो तुमने

3908
04:52:20,720 --> 04:52:25,240
धर्म की परिभाषा दी है ये सुनो भाई क्या नाम है तुम्हारा

3909
04:52:25,240 --> 04:52:29,440
तुम्हारे आचार्य कह रहे हैं अगर आंग्ल भाषा में ये कुछ

3910
04:52:29,440 --> 04:52:33,440
नहीं है। ये रोस्टिंग में इन्होंने एक्सपर्टीज हासिल

3911
04:52:33,440 --> 04:52:37,520
करी है। तो उसकी ये ख्याति थी। खैर

3912
04:52:37,520 --> 04:52:41,600
वो दूसरी दूसरा कारण भी हो सकता है। जो मुझे

3913
04:52:41,600 --> 04:52:47,240
लग रहा है वो तो यही है भाई।

3914
04:52:47,240 --> 04:52:51,640
खैर

3915
04:52:51,640 --> 04:52:57,640
जो विजय जो इन्होंने कहा कि

3916
04:52:57,680 --> 04:53:01,760
तुम्हारी वाणी तुम्हारी आंग्ल भाषा में जो है ऐसा ध्वनित हो

3917
04:53:01,760 --> 04:53:05,920
रहा है अगर बात महाराज बोल रहे हैं धनित हो रहे हैं तो इससे

3918
04:53:05,920 --> 04:53:10,160
ये कहां सिद्ध हो रहा है कि मैंने यह कहा कि मतलब

3919
04:53:10,160 --> 04:53:14,480
इससे यह अर्थ भी निकलता है दूसरा वाला कि इससे पहले

3920
04:53:14,480 --> 04:53:18,960
धर्म की परिभाषा किसी ने नहीं कही तो क्यों बोल रहे हो ये

3921
04:53:18,960 --> 04:53:22,960
क्या मतलब तुमको अगर क्या

3922
04:53:22,960 --> 04:53:26,960
कहते हैं ये वो वाली बात है मैं तुम्हारा तुम्हारे तरीके समझाऊं

3923
04:53:26,960 --> 04:53:31,040
कि तुमको अगर वासुदेवाचार्य जी महाराज जी ने अपने बगल में बिठा लिया तो इसका मतलब

3924
04:53:31,040 --> 04:53:35,440
तुमसे बड़ा कोई दुनिया में है ही नहीं। हां

3925
04:53:35,440 --> 04:53:39,520
ये कहां से अगर मैं ये कहने लगू तुम्हारा ये ड्रामा करूं ये जो तुमने

3926
04:53:39,520 --> 04:53:43,600
अभी अभी बोला है मुझे वासुदेवाचार्य जी ने यहां पर बिठाया था। ऐसे है वैसे

3927
04:53:43,600 --> 04:53:47,600
है। मैं इसमें एक्टिंग करके बोलूं। वासुदेवाचार्य जी ने मुझे

3928
04:53:47,600 --> 04:53:51,600
यहां पर बिठाया था। अब जो है मुझसे बड़ा कोई है ही नहीं।

3929
04:53:51,600 --> 04:53:56,240
तो हो गई बस ना शास्त्र चाहिए ना कुछ चाहिए।

3930
04:53:56,240 --> 04:54:00,480
है ना? तो देखो

3931
04:54:00,480 --> 04:54:02,320
जरा क्या कुतर्क कर

3932
04:54:02,320 --> 04:54:06,120
रहे हैं तुम जिसको फॉलो कर रहे

3933
04:54:06,120 --> 04:54:10,440
हो और लाइव आ जाओ। फॉर्म भर दो लाइव आओ।

3934
04:54:10,440 --> 04:54:15,280
7408301869 सामना करो। सत्य के पक्षधर हो तो सामना करो।

3935
04:54:15,280 --> 04:54:21,280
अन्यथा मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहो।

3936
04:54:27,960 --> 04:54:32,080
सदैव सदैव भाई मुझे लग रहा है कि मेरा मंच प्रमोट

3937
04:54:32,080 --> 04:54:36,080
हो रहा है। मनुवादियों का प्रमोशन होता है क्या? तुम

3938
04:54:36,080 --> 04:54:40,800
अपने दिल पे हाथ रख के बताओ। अपने हृदय पे हाथ रखो। बताओ

3939
04:54:40,800 --> 04:54:46,640
क्या मनुवादियों का प्रमोशन होता है आज के इस भौतिकवादी युग में?

3940
04:54:46,640 --> 04:54:51,600
तब जगह कम्युनिस्ट विचारधारा भौतिकवादी विचारधारा नास्तिक विचारधारा

3941
04:54:51,600 --> 04:54:55,760
प्रभावी है मलेच्छराज है ना तुम्हारे अनुसार तो

3942
04:54:55,760 --> 04:54:59,840
हम तो उस विचारधारा के लोगों का ही उपयोग करके अपने चैनल

3943
04:54:59,840 --> 04:55:05,080
को प्रमोट करवा रहे हैं हमसे वो कहां प्रमोट हो

3944
04:55:05,080 --> 04:55:09,600
जाएंगे ये भी तुम्हारा कुतर्क है

3945
04:55:09,600 --> 04:55:13,760
भाई मनुवाद का तुम पक्ष ले रहे हो इसलिए तुम आज तक जो है 20 30 हजार

3946
04:55:13,760 --> 04:55:17,360
अटके हुए हो अभी बोलने लगो वर्णाश्रम के विरोध में देखो

3947
04:55:17,360 --> 04:55:23,360
कैसे मीटर

3948
04:55:23,800 --> 04:55:28,120
भागेगा चलो खैर कोई बात

3949
04:55:28,120 --> 04:55:32,160
नहीं तो ये तुम्हारे तर्क है तुम्हारे निग्रह संप्रदाय के

3950
04:55:32,160 --> 04:55:36,880
आचार्य के सुन रहे हो ना फॉलोवर्स उसको पकड़

3951
04:55:36,880 --> 04:55:40,240
भाई

3952
04:55:40,240 --> 04:55:44,320
भाई देखो यार भाई उसको सर

3953
04:55:44,320 --> 04:55:48,680
सदैव उसको प्रमोट करने वाली बात सुन लो।

3954
04:55:48,680 --> 04:55:52,720
सदैव मेरे चैनल को एक्टिव रूप से

3955
04:55:52,720 --> 04:55:57,240
जो काम कर रहा हूं वो शायद 2022 या 23 से एक्टिव

3956
04:55:57,240 --> 04:56:01,520
हूं और आज तक उसको

3957
04:56:01,520 --> 04:56:06,680
मैंने एक दो बार लाइव में लिया है विजयश्री

3958
04:56:06,680 --> 04:56:10,960
को। ये सदैव वाली बात कहां से हो गई? सदैव

3959
04:56:10,960 --> 04:56:14,960
सदैव सदैव। अच्छा तो ये सिद्धांत पता नहीं कहां से आते

3960
04:56:14,960 --> 04:56:19,200
हैं तुम्हारे मनमुखी शायद वही परंपरा से आते होंगे लुप्त वाली से लुप्त

3961
04:56:19,200 --> 04:56:23,440
सिद्धांत लुप्त परंपरा लुप्त आचार यही

3962
04:56:23,440 --> 04:56:27,600
है ना किसको पकड़ मैंने भाई

3963
04:56:27,600 --> 04:56:31,920
मत भाई चमत्कार क्लिंज लगता है तो तुमको

3964
04:56:31,920 --> 04:56:32,520
लगता है

3965
04:56:32,520 --> 04:56:36,880
ना हमें शास्त्र का प्रमाण रखो

3966
04:56:36,880 --> 04:56:40,880
क्लिंज लगता है तो अब यहां शास्त्र का प्रमाण नहीं दोगे

3967
04:56:40,880 --> 04:56:45,200
यहां दोगे बहुत क्लियर है मगर ठीक है तुम्हारी शैली अच्छी है यहां पर

3968
04:56:45,200 --> 04:56:50,400
छोटे हो ठीक है ठीक लग रहा है

3969
04:56:50,400 --> 04:56:54,560
भाई मत कर मैंने मैंने ऐसे मैं हाथ जोड़ता

3970
04:56:54,560 --> 04:56:58,800
नहीं हूं मत कर नहीं हो पाएगा बहुत बुरा

3971
04:56:58,800 --> 04:57:03,600
करेगा मत कर भाई मैं भी मैं भी मैंने भी हाथ जोड़े थे

3972
04:57:03,600 --> 04:57:08,000
मैंने भी हाथ जोड़े थे वाणी के द्वारा हाथ ही जोड़े थे कि मत करो मत करो

3973
04:57:08,000 --> 04:57:12,480
मत बढ़ाओ इस मामले को आगे पर तुमने सुना हाथी

3974
04:57:12,480 --> 04:57:16,720
जोड़े थे ना कि हम आपके ऐसे ऐसे आप आप करके और जो है मैं

3975
04:57:16,720 --> 04:57:20,880
तुमको लगा कि डर रहा है मैं हूं रावण दसर वाला खा जाऊंगा

3976
04:57:20,880 --> 04:57:25,960
इसको करियर खा जाऊंगा ये है वो है

3977
04:57:25,960 --> 04:57:30,240
आओ कटेगा तू अभी भी उसमें

3978
04:57:30,240 --> 04:57:34,640
जो विनोद वाला टाइम है उसमें भी वो कटेगा बहुत बड़ा कटेगा

3979
04:57:34,640 --> 04:57:38,640
अरे मैं भी यही कह रहा हूं भाई तुम प्रार्थना करना ईश्वर

3980
04:57:38,640 --> 04:57:43,400
से सामना ना हो वरना तुम्हारी जो सच्चाई है

3981
04:57:43,400 --> 04:57:47,440
ना वो आ जाएगी सबके सामने कितना

3982
04:57:47,440 --> 04:57:47,940
तुम्हारा

3983
04:57:47,760 --> 04:57:50,040
वो

3984
04:57:50,040 --> 04:57:54,320
है ये क्या है कवालियों वाली मंडली बनाकर लाइव

3985
04:57:54,320 --> 04:57:58,400
किया था भाई अगर ये विरोध करने वाले

3986
04:57:58,400 --> 04:58:02,480
हो सचिन भारद्वाज तो आप आ सकते हैं लाइव फॉर्म भर

3987
04:58:02,480 --> 04:58:08,480
दीजिए 7408301869

3988
04:58:14,160 --> 04:58:18,800
एक ही मैसेज बार-बार करोगे तो बैन कर देंगे।

3989
04:58:18,800 --> 04:58:23,360
ये जो निग्रहचार्य स्पीक्स नाम से जो वो है वो और राम

3990
04:58:23,360 --> 04:58:28,080
करके है एक ही मैसेज बार-बार ना करें। बैन कर देंगे। नजर जैसी पड़ेगी तो

3991
04:58:28,080 --> 04:58:32,240
ठीक है। फॉर्म भरो लाइव आओ। तो तुम्हारे

3992
04:58:32,240 --> 04:58:36,480
जो वो है ना आचार्य वह अभी कह रहे हैं अभी वो अपनी परंपरा

3993
04:58:36,480 --> 04:58:40,960
को सिद्ध करने की स्थिति में नहीं है। लिख रहे हैं फिर सिद्ध करेंगे।

3994
04:58:40,960 --> 04:58:45,040
चलो भाई तब तक इंतजार करते हैं और हां वो प्रमाणिक वाली बात

3995
04:58:45,040 --> 04:58:51,040
है तो देख लेंगे किसने कहा है किस आधार पर कहा है ठीक

3996
04:58:53,720 --> 04:58:58,640
है ठीक है दे रहा है दे रहा है प्रसिद्धि दे रहा है क्या कर रहा है

3997
04:58:58,640 --> 04:59:02,800
सब कर रहा है अच्छा प्रसिद्धि मैं कैसे दे रहा हूं प्रसिद्धि

3998
04:59:02,800 --> 04:59:06,800
मैं कैसे दे रहा हूं मैं प्लेटफार्म कैसे दे रहा हूं विजय श्री के आज की

3999
04:59:06,800 --> 04:59:10,880
आज की तारीख में 1.5 लाख फॉलोअ है मेरे मेरे YouTube

4000
04:59:10,880 --> 04:59:14,880
और इंस्टा दोनों को मिलाकर के क्या कहते हैं जो एक्टिव

4001
04:59:14,880 --> 04:59:19,040
वाला YouTube है वो पुराना वाला नहीं उस पर तो व्यूज देख लो जिसमें 8000

4002
04:59:19,040 --> 04:59:23,440
फॉलोवर्स हैं। अगर मैं तीनों को मिला दूं 80000 20000

4003
04:59:23,440 --> 04:59:27,640
और 20000 1 लाख 20000 तब भी होता है। ठीक

4004
04:59:27,640 --> 04:59:31,760
है? विजय श्री के तब भी 1.5 लाख फॉलोअ है मुझसे 3000

4005
04:59:31,760 --> 04:59:36,080
ज्यादा। मैं कैसे उसको प्रमोट कर रहा हूं?

4006
04:59:36,080 --> 04:59:40,880
वह मेरे चैनल पर आएगी तो मैं प्रमोट ना हमारा चैनल प्रमोट होगा।

4007
04:59:40,880 --> 04:59:45,440
उस चैनल के जरिए चलने वाला अभियान प्रमोट होगा।

4008
04:59:45,440 --> 04:59:49,520
वो सिद्धांत प्रमोट होंगे कि मातृ शक्तियां जो है गायत्री मंत्र

4009
04:59:49,520 --> 04:59:53,760
नहीं पढ़ना चाहिए। प्रणव का उच्चारण नहीं करना चाहिए। तुम्हारे

4010
04:59:53,760 --> 04:59:58,120
जैसे लोग होंगे तो धर्म का पतन निश्चित

4011
04:59:58,120 --> 05:00:02,160
है। क्योंकि तुम किसी को सुधरने ही नहीं दोगे। सुधरेगा तो टांग

4012
05:00:02,160 --> 05:00:04,800
खींचोगे।

4013
05:00:04,800 --> 05:00:08,720
जो समझ लो समझ जाएंगे अब जिसमें अपना नहीं था जल्दी इस वीडियो में

4014
05:00:08,720 --> 05:00:12,880
आप ये देख लीजिए इसमें और विद्या दोनों दिख रहे है अगर विद्या का नाम को

4015
05:00:12,880 --> 05:00:16,960
संस्कृत में भान भी होता है तो अगर मैं प्लान को विद्या प्रेमी कहूं तो आप यहां विद्या को

4016
05:00:16,960 --> 05:00:21,120
मत मानिएगा है ना क्योंकि विद्या का भान वैसे कहा नहीं हो सकता है तो विद्या

4017
05:00:21,120 --> 05:00:25,120
प्रेमी का ये होता है कि जैसे भांग को उठाने के बाद व्यक्ति प्रणाम कर कुछ बोल वैसे ये भी कुछ बोल रहा

4018
05:00:25,120 --> 05:00:30,760
है भगवतानंद का मतलब जो है

4019
05:00:30,760 --> 05:00:35,120
वो भगवत तत्व का आनंद लेने वाला भी है।

4020
05:00:35,120 --> 05:00:39,200
तो इसलिए अगर मैं उस संबंध में कुछ कहूं भगवत

4021
05:00:39,200 --> 05:00:43,360
आनंद के संबंध में तो आप सदैव ये ना समझिएगा

4022
05:00:43,360 --> 05:00:47,680
कि जो है यह बात जो है भगवतानंद के ही बारे में हो रही है।

4023
05:00:47,680 --> 05:00:52,080
है ना? ठीक है? सदैव ना समझिएगा ऐसा।

4024
05:00:52,080 --> 05:00:56,640
वो कहीं पे जोड़ के उसका अर्थ दूसरा बनाया जा सकेगा। चलिए

4025
05:00:56,640 --> 05:01:00,720
लीजिएगा जो कि सब है ना? ऐसा नोटिस नहीं आएगा। ऐसे नोटिस भेजने वाले का

4026
05:01:00,720 --> 05:01:04,880
क्या मैं उसको तो पहले वकालत सीखनी चाहिए तो ये बैठा हुआ है बढ़िया से

4027
05:01:04,880 --> 05:01:09,120
रहा है ये वो लगाओ नोटिस भेजने वाले का क्या मैं कहूं

4028
05:01:09,120 --> 05:01:15,120
उसको वकालत सीखनी चाहिए ये कह रहे हैं

4029
05:01:18,640 --> 05:01:24,120
अपना दिया जा रही है अपना और क्या

4030
05:01:24,120 --> 05:01:28,320
करते है यहां पे इन्होने यही से थोड़ी देर पहले

4031
05:01:28,320 --> 05:01:33,160
इन्होंने जो विजय को फिर से हमारे साथ जो है

4032
05:01:33,160 --> 05:01:37,280
वो विजय के बारे में बात हो रही है। उन्होंने बोला

4033
05:01:37,280 --> 05:01:41,360
कितना आया? कहां से मेरी पद्धति? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है

4034
05:01:41,360 --> 05:01:45,360
आचार्य किसने? आचार्य कौन बनता है? कहां से मेरी पद्धति? तुम्हें पता है कि

4035
05:01:45,360 --> 05:01:49,840
हम योग शिक्षक है। उन्होंने बोला किसने बनाया तुम्हें योगाचार्य? कहां से मेरी पद्धति?

4036
05:01:49,840 --> 05:01:54,000
तुम्हें पता है कि हम अभी उसको डाल सकते हैं। तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य

4037
05:01:54,000 --> 05:01:58,000
कैसे होते हैं? तुम्हें पता है कि हम योग शिक्षक थे। उन्होंने बोला किसने

4038
05:01:58,000 --> 05:02:02,000
बनाया तुम्हें योगाचार्य? कहां से मेरी पदवी? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है कि

4039
05:02:02,000 --> 05:02:06,080
आचार्य बनाया किसने? आचार्य कौन बनता है? आचार्य का टाइटल देता कौन है? यूनिवर्सिटी

4040
05:02:06,080 --> 05:02:10,320
देती। पहली बात यहां पर क्लीन हो गया कि उन्होंने क्या कहा था अपने

4041
05:02:10,320 --> 05:02:14,560
बारे में कि हम योग शिक्षक हैं। और गुरुदेव

4042
05:02:14,560 --> 05:02:18,720
ने किस भाव से यह कहा वो एक अलग बात है। किसने बनाया

4043
05:02:18,720 --> 05:02:24,720
तुम्हें योगाचार्य? मगर इन्होंने अपने लिए कमिट किया कि मैं योग शिक्षक हूं।

4044
05:02:26,280 --> 05:02:30,320
वापस पहले बताओ सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो ये शिवश इतना सिंिंग कर रहा है इस

4045
05:02:30,320 --> 05:02:34,800
लड़की के साथ अभी ध्यान दीजिए शिवश इतनी सिंपिंग कर रहा है

4046
05:02:34,800 --> 05:02:38,920
आचार्य का टाइटल है और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते है मेरे वीडियो में कई बार फिर

4047
05:02:38,920 --> 05:02:43,040
से टाइटल है और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते है मेरे

4048
05:02:43,040 --> 05:02:47,360
वीडियो में कई बार इन लोगों का लोभास

4049
05:02:47,360 --> 05:02:51,440
लोग की बात है एक आचार की का टाइटल है और कोई

4050
05:02:51,440 --> 05:02:56,000
शंकाचार्य जी के चेले कमेंट करते मेरे वीडियो में कई बार फिर से शंकराचार्य

4051
05:02:56,000 --> 05:03:00,080
और कोई पांडे जी अभी ध्यान दीजिए शिव चिंतन कर रहा है की ये लड़की खुले

4052
05:03:00,080 --> 05:03:04,480
की यूनिवर्सिटी आ जाए और कोई शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते हैं मेरे वीडियो में परिवार की

4053
05:03:04,480 --> 05:03:10,480
शंकराचार्य के बारे लोगों का कितने लोगों की बात

4054
05:03:11,000 --> 05:03:15,280
है कहां से होता है जैसा कर लोगे

4055
05:03:15,280 --> 05:03:19,360
यार अजय हम इस उम्र में ऐसे रहेंगे क्या बिल्कुल रहेंगे अगर पापा जैसी

4056
05:03:19,360 --> 05:03:23,440
सही प्लानिंग की तो पर हमें तो इस ऐज तक वेट करना पड़ेगा ना बिलकुल नहीं हमने तो

4057
05:03:23,440 --> 05:03:27,440
अभी इन्वेस्ट किया है LIC के न्यू जीवन शांति ने जो हमें देगा

4058
05:03:27,440 --> 05:03:31,680
डिफर्ड एनुअल मतलब कुछ साल बाद से रेगुलर इनकम LIC के एनटी

4059
05:03:31,680 --> 05:03:35,680
प्लान से एनटी ऑप्शन और नियमित इनकम पाने में फ्लेक्सिबिलिटी भी

4060
05:03:35,680 --> 05:03:39,680
भाई तूने ये जो चार घंटे बर्बाद किए है ना ये एक्सेल रिपोर्ट बनाने में ये

4061
05:03:39,680 --> 05:03:44,000
देख मैंने एक मिनट में वो सेम एक्सेल रिपोर्ट बना के दिखा दिया वो भी एआई

4062
05:03:44,000 --> 05:03:48,000
से तू अगर ऐसे ही काम करता रहेगा ना तो सैलरी अप्रेजल तो भूल जा तेरी नौकरी भी

4063
05:03:48,000 --> 05:03:52,160
नहीं रहेगी तुझे एआई विद एक्सेल सीखना पड़ेगा ये चार घंटे बर्बाद करके

4064
05:03:52,160 --> 05:03:56,240
कुछ नहीं हो सकता है। ये एआई तेरे सारे एक्सेल रिपोर्ट बना के दे

4065
05:03:56,240 --> 05:04:00,240
सकता है। तेरे बिना यूनिवर्सिटी के आज भी शिक्षा व्यवस्था है। उसमें बिना

4066
05:04:00,240 --> 05:04:04,480
के ग्रेजुएशन का ग्रेजुएशन का ही समानांतर शास्त्री को बना दिया है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने एमए

4067
05:04:04,480 --> 05:04:08,880
का ही समांतर आचार्य की डिग्री को बना दिया है। अमुक विश्वविद्यालय से नियुक्तिचार्य अमुक विश्वविद्यालय से आयुर्वेदाचार्य

4068
05:04:08,880 --> 05:04:13,040
अमुक विश्वविद्यालय से क्या करनाचार्य न्यायाचार्य करते है कि नहीं तो आचार्य

4069
05:04:13,040 --> 05:04:17,120
की उपाधि नहीं दे रहे यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी को खींचने की बात करते पता चल रहा है

4070
05:04:17,120 --> 05:04:22,160
कि इस लड़की के पास क्या धन है और इस लड़की की तारीफ कर सके वेदांत

4071
05:04:22,160 --> 05:04:26,240
आचार्य की उपाधि देती है यूनिवर्सिटी। इस बात का खंडन

4072
05:04:26,240 --> 05:04:30,240
नहीं करना चाहिए कि आचार्य की उपाधि कोई गुरु ही अपने

4073
05:04:30,240 --> 05:04:35,080
शिष्य को दे। अगर सरकारी तंत्र चला रहे

4074
05:04:35,080 --> 05:04:39,280
हैं ना? तो अगर वो ये चीज चला रही हैं।

4075
05:04:39,280 --> 05:04:43,280
चला रहे हैं कि शास्त्री होना चाहिए या आचार्य होना चाहिए तो इस बात का तुम

4076
05:04:43,280 --> 05:04:47,600
खंडन नहीं करते हो क्या? तुम पक्ष ले रहे हो

4077
05:04:47,600 --> 05:04:51,600
कि सरकार बताएगी कौन आचार्य? कौन नहीं आचार्य? फिर तो ये आचार प्रशांत जैसे खड़े

4078
05:04:51,600 --> 05:04:55,760
होंगे। बिल्कुल पक्की रूप पक्की बात है। फिर तो तो

4079
05:04:55,760 --> 05:05:00,160
इसका मतलब तुम ऐसे जो लोकतांत्रिक

4080
05:05:00,160 --> 05:05:04,160
व्यवस्था के अनुसार जो आचार्य पद प्राप्त कर रहे हैं लोग तो फिर तुम उनके

4081
05:05:04,160 --> 05:05:08,160
साथ हो। चाहे वो प्रामाणिक हो गुरु परंपरा से हो ना हो उन्होंने वहां

4082
05:05:08,160 --> 05:05:12,280
जाके एमए कर लिया। वो हो गए आचार्य। है

4083
05:05:12,280 --> 05:05:14,920
ना?

4084
05:05:14,920 --> 05:05:19,040
तो हम तो हमें तो नहीं मानना चाहिए। जब तक गुरु परंपरा से नहीं

4085
05:05:19,040 --> 05:05:23,120
है उसे आचार्य नहीं मानना चाहिए। भले ही वो जो सरकारी तंत्र है

4086
05:05:23,120 --> 05:05:27,600
लोकतंत्र है उसने उसको आचार्य शास्त्री की डिग्री दी होम

4087
05:05:27,600 --> 05:05:32,000
है क्या? तो अगर यहां वो सोच समझ के कर रही है या जानबूझ

4088
05:05:32,000 --> 05:05:36,240
के कर रही है जो भी है उनकी इस बात की रक्षा करनी चाहिए तुमको

4089
05:05:36,240 --> 05:05:42,240
और इसको धर्मज्ञा के रूप में स्थापित कर सके।

4090
05:05:42,240 --> 05:05:46,400
धर्मज्ञा के रूप में उसको स्थापित नहीं करना है। उसके यहां आने के कारण

4091
05:05:46,400 --> 05:05:51,040
जो उसके हमसे बहुत ज्यादा संख्या में बहुत आगे

4092
05:05:51,040 --> 05:05:55,200
जो फॉलोअर्स हैं उसके उनको यहां आकर्षित करने के लिए भी

4093
05:05:55,200 --> 05:05:59,200
किया जा रहा है। और यह जो आर्य समाज के द्वारा खड़ी

4094
05:05:59,200 --> 05:06:03,280
की गई जो मातृ शक्तियां हैं जिनका वह आलंबन लेकर

4095
05:06:03,280 --> 05:06:07,280
के जो थोड़ा सा मेंटली एक ब्रेन वाश करते

4096
05:06:07,280 --> 05:06:11,600
हैं वो लोग कि वो हमको गायत्री मंत्र पढ़ने से रोकते हैं।

4097
05:06:11,600 --> 05:06:15,840
तो यहां पर यह भी उद्देश्य है कि एक लड़की एक मातृ शक्ति आकर

4098
05:06:15,840 --> 05:06:19,840
के बोल रही है कि गायत्री मंत्र नहीं पढ़ती हूं और और मुझे बहुत

4099
05:06:19,840 --> 05:06:24,080
अच्छा लगता है अनुवाद के सिद्धांतों में रहना तो इसलिए

4100
05:06:24,080 --> 05:06:28,360
है तुम्हारा पूर्वाग्रह है क्योंकि तुम संकीर्ण विचारधारा के व्यक्ति हो

4101
05:06:28,360 --> 05:06:32,640
इसलिए बता दे जिसको ये नहीं पता कि आचार्य दे रही है उसी

4102
05:06:32,640 --> 05:06:36,960
लड़की का और वो भी नहीं शंकराचार्य से मिलने के बाद वाला इंटरव्यू चल रहा है ना शंक

4103
05:06:36,960 --> 05:06:41,200
से मिलने वाली बता रही है विजय ये विजय बोल रहीम कपूर की यूनिवर्सिटी

4104
05:06:41,200 --> 05:06:45,520
विद्या की डिग्री यूनिवर्सिटी तो पढ़ लिखने को तो क्या कर रहे यूनिवर्सिटी देती

4105
05:06:45,520 --> 05:06:49,600
है पर उसकी दी हुई डिग्री मान्य नहीं है हमारे जैसों के लिए तुम्हारे जैसों

4106
05:06:49,600 --> 05:06:53,840
के लिए होगी लुप्त संप्रदाय के गुप्ता आचार्य हो हमारे जैसों के लिए मान्य नहीं है हमारे

4107
05:06:53,840 --> 05:06:57,680
लिए आचार्य वही है जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों के

4108
05:06:57,680 --> 05:07:01,960
यहां से घोषित हो वो आचार्य ठीक

4109
05:07:01,960 --> 05:07:06,080
है शास्त्र करेंगे ये लोग सिखाएंगे और इनके चक्कर में आचार्य को समय

4110
05:07:06,080 --> 05:07:10,160
खराब करना पड़ेगा किसी का पाप मानते हैं तब पाप समझते समझते क्या जो है इसी

4111
05:07:10,160 --> 05:07:14,160
दो साल दुर्भाग्य हम भी समझते हैं।

4112
05:07:14,160 --> 05:07:18,240
हम पर जो समय वेस्ट कर रहे हैं रात भर जाग के ये दुर्भाग्य है। संध्या वंदन का समय

4113
05:07:18,240 --> 05:07:23,720
निकल गया और कर रहे हैं। ठीक

4114
05:07:23,720 --> 05:07:27,760
है। क्या था? तूफानी फैसला

4115
05:07:27,760 --> 05:07:33,160
करेगा रोशनी का। दिया वो जलेगा जिसमें

4116
05:07:33,160 --> 05:07:37,520
दम। दो वर्षों हो गए। हमारे ऊपर उज्जैन है। अब क्या करवाएंगे?

4117
05:07:37,520 --> 05:07:41,600
इसी दो साल पहले अमावस्या को उज्जैन में हमारे गुरु विचारों ने करवाया था और बढ़ रहे थे थोड़ी

4118
05:07:41,600 --> 05:07:45,760
पीड़ा मंत्र का बंद होता है हनुमान जी का सफर जब ब्रह्मा बनता है तो हम लोग मनुष्य

4119
05:07:45,760 --> 05:07:50,720
मंत्र होता है तो आंशिक पीड़ा हमको परिवार खेलनी पड़ी थी मुझे

4120
05:07:50,720 --> 05:07:55,200
पीड़ा खेलनी पड़ी लेकिन जब हमने घर में काम किया समाप्त हो गई हमारी

4121
05:07:55,200 --> 05:07:59,360
हमारे घर पर उन्होंने करना प्रारंभ किया था घर वाले विशेष करके हमारे घर के जो

4122
05:07:59,360 --> 05:08:03,520
वहां पर ने कहा कि इस प्रकार से

4123
05:08:03,520 --> 05:08:07,600
उनका संरक्षण दिया तो आज दो वर्ष पूरे किया वाले विशेष

4124
05:08:07,600 --> 05:08:10,920
करके हमारे घर के

4125
05:08:10,920 --> 05:08:15,040
जो होता है तो होता है बने तमास्या को उज्जैन

4126
05:08:15,040 --> 05:08:19,440
में हमारे गुरुचार करवाया था और असफल रहे थे उज्जैन करवाया था इसी दो साल

4127
05:08:19,440 --> 05:08:23,440
तमावस्या को उज्जैन में हमारे गुरु चारों ने करवाया था और असफल रहे थे थोड़ी कष्ट पीड़ा तो मंत्र का

4128
05:08:23,440 --> 05:08:28,080
बल होता है हनुमान जी ब्रह्मास्त्र बने थे हनुमान जी के स्तर पर जब ब्रह्मास्त्र बन सकता है तो हम लोग तो मनुष्य है

4129
05:08:28,080 --> 05:08:32,160
मंत्र बल होता है तो कुछ आंशिक पीड़ा हमको सब परिवार झेलनी पड़ी

4130
05:08:32,160 --> 05:08:36,720
थी मुझे नहीं झेलनी पड़ी है हनुमान जी भी ब्रह्मास्त्र बन सकते और विचार करवाएंगे

4131
05:08:36,720 --> 05:08:40,800
दो साल पहले चैत्र अमावस्या को उज्जैन में हमारे विरुद्ध विचार उन्होंने करवाया था

4132
05:08:40,800 --> 05:08:44,880
और असफल रहे थे थोड़ी पीड़ा तो हमको हुई मंत्र का बल होता है हनुमान जी के

4133
05:08:44,880 --> 05:08:48,160
बंधे हनुमान जी के स्तर पर जो ब्रह्मा उससे आगे

4134
05:08:48,160 --> 05:08:53,720
बल होता है तो हमको परिवार खेलनी पड़ी मुझे नहीं खेलनी

4135
05:08:53,720 --> 05:08:58,400
पड़ी व्यक्ति यहां परेशान ये है कि अपने वो जो निग्रहचार

4136
05:08:58,400 --> 05:09:02,400
वाली जो वो है ना उसको भी बचाना है जो पवा

4137
05:09:02,400 --> 05:09:06,400
है उसका निग्रचार जो पद है उसको भी बचाना है तो ध्यान

4138
05:09:06,400 --> 05:09:12,400
रखना है कि परिवार वालों को झेलनी पड़ी मुझे नहीं झेलनी पड़ी

4139
05:09:12,760 --> 05:09:16,880
और दूसरी बात यह है कि मेरे ऊपर भी अविचार करवाया

4140
05:09:16,880 --> 05:09:22,040
है अभी तीन चार दिन पहले जो है

4141
05:09:22,040 --> 05:09:26,080
और मुझे मेरे परिवार को भी नहीं झेलनी पड़ी मुझे तो क्या मेरे

4142
05:09:26,080 --> 05:09:32,080
परिवार को भी नहीं झेलनी पड़ी अब बताओ क्या करें दो मेरे ऊपर अविचार

4143
05:09:32,360 --> 05:09:36,800
तुम करवा दोबारा और ना करवाया करना अगर ना करवाना

4144
05:09:36,800 --> 05:09:41,080
स्वीकार कर रहे हो तो मैं कह रहा हूं तुम विचार करवा

4145
05:09:41,080 --> 05:09:45,120
दो मेरे पीछे राम वो देखें करवा

4146
05:09:45,120 --> 05:09:50,280
दो

4147
05:09:50,280 --> 05:09:55,000
अविचार सैद्धांतिक लड़ाई छोड़ दो बस बकवास

4148
05:09:55,000 --> 05:10:01,000
करवाओ फिल्म बनवाओ भूमिका

4149
05:10:01,240 --> 05:10:05,560
बनवाओ पड़ी थी लेकिन समाप्त हो गई हमारी

4150
05:10:05,560 --> 05:10:10,520
हमारे घर किया था विशेष करके हमारे घर के

4151
05:10:10,520 --> 05:10:16,520
जो

4152
05:10:17,640 --> 05:10:22,480
परिस को बकरा उसी से कहा महाराज जी

4153
05:10:22,480 --> 05:10:26,760
का आया है उधर से आप क्या करना था बकरा हमको कहा

4154
05:10:26,760 --> 05:10:30,430
गया दूसरा

4155
05:10:30,430 --> 05:10:33,400
[संगीत]

4156
05:10:33,400 --> 05:10:37,840
सा बकरा

4157
05:10:37,840 --> 05:10:42,120
और ये कहा गया था उसी मुझे मैसेज कहा महाराज

4158
05:10:42,120 --> 05:10:46,640
जी का आया है उधर से आपके विचार करना था हमको कहा गया

4159
05:10:46,640 --> 05:10:50,800
तो हम क्या करेंगे बोले देखो मुझे ये जो अभिचार करवाया

4160
05:10:50,800 --> 05:10:54,880
है ये किसने बनाई है बताइए पता है जिसने तुम वरुण शौर्य

4161
05:10:54,880 --> 05:10:59,760
है ना जिसने तुम्हें वो बताया था वो

4162
05:10:59,760 --> 05:11:03,760
गोलगप्पे वाली बात है ना उसी ने बताई है

4163
05:11:03,760 --> 05:11:06,240
मुझे यह

4164
05:11:06,240 --> 05:11:10,240
कि तुमने विचार करवाया हो गया भाई

4165
05:11:10,240 --> 05:11:14,400
जिस तरह से तुम बातें करते हो यह है वो है उसको मनवाने का ऐसे

4166
05:11:14,400 --> 05:11:18,400
रूप में रखते हो जैसे तुम्हारी कोई व्यक्तिगत घटना है उसको मानने या ना

4167
05:11:18,400 --> 05:11:22,400
मानने से भी काम चल रहा है तो कोई बात नहीं है मगर जब तुम प्रमाण

4168
05:11:22,400 --> 05:11:26,480
के रूप में अपनी व्यक्तिगत जीवन की चीजों को रखोगे तो कैसे चलेगा पर

4169
05:11:26,480 --> 05:11:32,480
तो कोई भी कुछ भी बोले जब तुम कुछ भी बोल सकते हो लो

4170
05:11:33,520 --> 05:11:39,520
काम कर

4171
05:12:05,760 --> 05:12:10,000
ये अच्छी बात है जिसको बचाना है जिसको बचाएगा

4172
05:12:10,000 --> 05:12:12,480
ये

4173
05:12:12,480 --> 05:12:16,560
अभी इसको डाल सकता है। तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं? उन्हें पता है

4174
05:12:16,560 --> 05:12:20,720
कि हम योग शिक्षक है। उन्होंने बोला किसने बनाया योगाचार्य? कहां से मेरी

4175
05:12:20,720 --> 05:12:24,960
पद्धति? एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है कि आचार्य बनाया किसने? आचार्य कौन

4176
05:12:24,960 --> 05:12:29,200
बनता है? आचार्य का टाइटल देता कौन है? यूनिवर्सिटी देती है। नहीं वो आपको पीएचडी का टाइटल देती है।

4177
05:12:29,200 --> 05:12:33,200
तो लोगों को ये जानना भी बहुत जरूरी है कि कौन होगा? जैसे हमने तो शैली पूछी

4178
05:12:33,200 --> 05:12:37,360
थी कि उसका व्यवहार व्यवहार कैसा रहेगा और उसकी खुद की जो मतलब जीवन में जो आगे सीख

4179
05:12:37,360 --> 05:12:41,520
रहा होगा वो कैसी रहेगी। उसकी शैली क्या होगी? पर उसमें जो हमें उत्तर चाहिए था गुरुदेव ने वो दे दिया की

4180
05:12:41,520 --> 05:12:45,600
सबसे पहले जो लोग खुद को आचार्य बोल रहे हैं आप प्लीज पहले समझिए कि कहां से आचार्य कौन सी

4181
05:12:45,600 --> 05:12:48,640
परंपरा से आचार्य उसी में आपको पता चल जाएगा कि ये फॉलो

4182
05:12:48,640 --> 05:12:52,640
करना है या नहीं करना है और सच है आप किसी को मत मानिए आप भाषचार्य को तो मानेंगे

4183
05:12:52,640 --> 05:12:56,960
तो उनके चार मत है ये लड़की परंपरा की ओर आस्था कर रही है बोल

4184
05:12:56,960 --> 05:13:02,960
के ये बुरा लग रहा होगा गंभीियों

4185
05:13:05,000 --> 05:13:11,000
को कर दी इसका क्या होता है तो लगाती थी तभी तो शब्द आया

4186
05:13:11,240 --> 05:13:15,280
यह शब्द क्यों आया? यह कहां से

4187
05:13:15,280 --> 05:13:20,240
सिद्ध हुआ? योगाचार्य वो शब्द आया। कई बार ऐसा होता है

4188
05:13:20,240 --> 05:13:24,720
कि गुरुदेव से कोई व्यक्ति पूछता है कुछ तो गुरुदेव कहते हैं अच्छा

4189
05:13:24,720 --> 05:13:28,720
तुम्ही को करना है। ऐसा करना है। ऐसा प्रसंग होता है। गुरुदेव कई बार ऐसा

4190
05:13:28,720 --> 05:13:32,800
करते हैं। मगर उस उसमें यही होता है कि गुरुदेव का

4191
05:13:32,800 --> 05:13:37,040
विनोद होता है उसमें। तो ऐसा कुछ

4192
05:13:37,040 --> 05:13:41,280
नहीं है। यह केवल एक रिलेट रिलेटेबल हो सकता है कि गुरुदेव

4193
05:13:41,280 --> 05:13:45,400
ने समझा कि कहीं स्वयं के लिए तो नहीं कह रही कि योगाचार्य है

4194
05:13:45,400 --> 05:13:49,520
ना और वो अपने आप को योग शिक्षक कह रही

4195
05:13:49,520 --> 05:13:55,400
कह रही है इसको इसका

4196
05:13:55,400 --> 05:13:59,520
क्या यहां पर युवाचार गुरुदेव तो है मत

4197
05:13:59,520 --> 05:14:03,600
मानिए हमारे शंकराचार्य को तो मानिए चार मठ है चार मठों को देखिए समझिए तो गुरुदेव

4198
05:14:03,600 --> 05:14:04,100
तो

4199
05:14:03,840 --> 05:14:06,800
है

4200
05:14:06,800 --> 05:14:10,960
यहां पर युवाचार का मत मानिए आप

4201
05:14:10,960 --> 05:14:15,120
पता चल जाएगा बोल रहे है प्लीज पहले समझिए की कहां से आचार्य कौन सी परंप दे दिया

4202
05:14:15,120 --> 05:14:19,200
की सबसे पहले जो लोग खुद को कैसे उसकी शैली क्या होगी पर उसमें जो हमें उत्तर चाहिए था

4203
05:14:19,200 --> 05:14:23,600
गुरुदेव ने वो देखो मतलब जीवन में जो आगे वो होगा जैसे हमने तो शैली पूछ सकते

4204
05:14:23,600 --> 05:14:28,480
तो कौन बनता है आपकी मेरी पत्नी योग शिक्षक है

4205
05:14:28,480 --> 05:14:32,640
तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं एकदम

4206
05:14:32,640 --> 05:14:38,160
कहीं और से नहीं आया था ना वो शब्द उन्होंने बोला था योगाचार्य कैसे होते

4207
05:14:38,160 --> 05:14:42,240
हम हां ये ये ये कहा जा सकता है कि गुरुदेव ये समझ रहे हो

4208
05:14:42,240 --> 05:14:46,720
कि वो खुद को योगाचार्य इंगित कर रही है तो वहां पर हो सकता है

4209
05:14:46,720 --> 05:14:50,720
गुरुदेव ने ऐसा समझा हो और तब उन्होंने पूछा तो उन्होंने क्लियर

4210
05:14:50,720 --> 05:14:55,280
किया नहीं नहीं हम योगाचार्य नहीं है इसमें क्या दिक्कत होगी

4211
05:14:55,280 --> 05:14:59,280
योगाचार देखो किसी अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा स्वयं को

4212
05:14:59,280 --> 05:15:03,600
योगाचार्य कहे जाने का खंडन किया है गुरुदेव ने इससे

4213
05:15:03,600 --> 05:15:08,160
हमें कहां परहेज है क्योंकि क्योंकि जो ये

4214
05:15:08,160 --> 05:15:12,240
विजय श्री जी है इन्होंने कहीं भी अपने आप को योगाचार्य कहा ही नहीं है। ये तुम्हें साफ

4215
05:15:12,240 --> 05:15:16,760
सुनाई दे रहा है और आज जो ये सब

4216
05:15:16,760 --> 05:15:19,120
ये जो विवाद हुआ है

4217
05:15:19,120 --> 05:15:23,200
इससे एक साल लगभग पहले की वीडियो देख रहे हो उसमें भी यह हो रहा है। तब

4218
05:15:23,200 --> 05:15:27,280
विवाद तो तब नहीं था। तब वो अपने आप को योग शिक्षक कह रही है। यही से उसकी

4219
05:15:27,280 --> 05:15:33,280
सत्यता प्रमाणिक हो रही है।

4220
05:15:36,880 --> 05:15:40,960
ना ना ना ऐसा नहीं है। कई बार गुरुदेव ऐसा करते हैं कि कोई व्यक्ति कुछ

4221
05:15:40,960 --> 05:15:45,200
प्रश्न कर रहा है किसी पक्ष को जानने के लिए तो सबसे पहले विनोद

4222
05:15:45,200 --> 05:15:51,200
में या किसी कारण से गुरुदेव उसी से पूछ लेते हैं। है ना?

4223
05:15:51,280 --> 05:15:55,600
आपको तो दिक्कत नहीं है। बैठो बैठो ऐसे भी करते हैं। डायरेक्ट

4224
05:15:55,600 --> 05:15:59,680
उसने जो प्रश्न पूछा है उसी से पूछ लेते हैं। चलो खैर ये भी

4225
05:15:59,680 --> 05:16:02,920
पूर्वाग्रह है।

4226
05:16:02,920 --> 05:16:06,680
इसको हुआ

4227
05:16:06,680 --> 05:16:11,280
पूर्वाग्रह तो और इसका अर्थ ये ऐसा नहीं

4228
05:16:11,280 --> 05:16:15,120
वो शंका नहीं है।

4229
05:16:15,120 --> 05:16:19,440
जो जो अच्छा सबसे पहली बात तो उसने इस बात का

4230
05:16:19,440 --> 05:16:23,600
स्वयं स्वीकार किया कि एक गुरु ही अपने शिष्य को आचार्य

4231
05:16:23,600 --> 05:16:27,680
का पद दे सकता है। वो स्वयं इस बात को स्वीकार कर रही है। तो फिर इसमें

4232
05:16:27,680 --> 05:16:31,840
कहीं जगह रही नहीं गई। जब उनको आचार्य नहीं कहा है तो वो इस बात का खुद ही विरोध

4233
05:16:31,840 --> 05:16:36,160
कर रही है कि अगर कोई मुझे आचार्य समझता हो तो ना समझे। सिंपल

4234
05:16:36,160 --> 05:16:41,320
लगातार जो है आती है वीडियो को आप

4235
05:16:41,320 --> 05:16:47,320
अपने वीडियो दिखाने का प्रयास कर रहा हूं

4236
05:16:48,040 --> 05:16:53,800
महाराज में की परिभाषा को जानते

4237
05:16:53,800 --> 05:16:58,480
हैं आचार्य तो ये भी नहीं कह सकते हो विजय सही सही है आपको

4238
05:16:58,480 --> 05:17:02,880
मेरे गुरुदेव होंगे गुरुदेव मैं विजा का साथ कभी नहीं छोडूंगा ऐसा कुछ नहीं है

4239
05:17:02,880 --> 05:17:06,880
क्योंकि गुरुदेव के पास में गया हूं ना रहा रहता हूं कई बार देखता

4240
05:17:06,880 --> 05:17:10,880
हूं गुरुदेव किससे क्या कह रहे हैं। हां तुम दूर दूर

4241
05:17:10,880 --> 05:17:14,960
बैठे-बैठे दाल भात में मूसर चंद जरूर बनते हो। उसी का परिणाम

4242
05:17:14,960 --> 05:17:19,680
है ये जो आज तुम्हारे प्रति मुझे दया आ रही है।

4243
05:17:19,680 --> 05:17:25,240
तुम्हारा सारा जो आग वो था ना वो एक जो इमेज थी बिगड़

4244
05:17:25,240 --> 05:17:31,240
गई। सारी इमेज बिगड़ गई।

4245
05:17:35,340 --> 05:17:39,920
[संगीत]

4246
05:17:39,920 --> 05:17:45,920
Q2 पाई लग रहे हो Q2

4247
05:17:47,080 --> 05:17:51,280
पाई आदित्य Q2 पाई लग रहे हो Q2

4248
05:17:51,280 --> 05:17:55,360
पाई वो इमेज खो दी तुमने है ना

4249
05:17:55,360 --> 05:17:57,720
तो क्या

4250
05:17:57,720 --> 05:18:03,720
था कि

4251
05:18:04,360 --> 05:18:08,480
हम कि नहीं गुरुदेव अगर योगाचार्य के बारे में

4252
05:18:08,480 --> 05:18:12,480
बात कर रहे हैं पहली बात तो ये है तो तुम मत बताओ गुरुदेव क्या कह रहे

4253
05:18:12,480 --> 05:18:16,560
हैं क्या नहीं कह रहे हैं तुम उनके पास जाकर बैठकर के अनुगत हो के बात नहीं

4254
05:18:16,560 --> 05:18:20,760
कर रहे हो हम लोग कर रहे हैं हमारे गुरु हैं

4255
05:18:20,760 --> 05:18:25,120
वो और या तो उनसे वो कहलवा दो जाकर के

4256
05:18:25,120 --> 05:18:29,280
जो तुम बिल्कुल स्पष्ट कर रहे हो स्पष्ट कहलवा दो कहीं की

4257
05:18:29,280 --> 05:18:33,280
ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती का कुवा जोड़ा वाली बात मत

4258
05:18:33,280 --> 05:18:39,280
करो। ठीक है। चलो

4259
05:18:46,720 --> 05:18:49,640
अच्छा

4260
05:18:49,640 --> 05:18:55,640
आप देखता हूं क्या होता

4261
05:19:06,760 --> 05:19:10,960
है हमारे लिए 15 मिनट का जो था वो

4262
05:19:10,960 --> 05:19:15,280
बहुत लेकिन तुम एक करने वाली महिला की अवसर वलत

4263
05:19:15,280 --> 05:19:20,400
करोगे वहां पर बैठकर के लिए नहीं करोगे

4264
05:19:20,400 --> 05:19:24,560
अनावश्यक वकालत भाई पहले यह तो सिद्ध

4265
05:19:24,560 --> 05:19:29,640
करो कि उसने ऐसा कौन सा कार्य किया है जिसके कारण उसका विरोध करना

4266
05:19:29,640 --> 05:19:33,680
पड़े हैं उसके पुराने फोटो के आधार पर उसका

4267
05:19:33,680 --> 05:19:37,840
मजाक बनाया जा रहा है उसकी छींटाकसी हो रही है तो वहां मैं

4268
05:19:37,840 --> 05:19:42,240
अगर लोगों को यह कह रहा हूं कि ऐसा मत करो है ना

4269
05:19:42,240 --> 05:19:48,240
एक मिनट जरा एक

4270
05:19:49,760 --> 05:19:53,840
तो अगर वहां पर मैं यह कह रहा हूं कि ऐसा मत करो। इसकी पुरानी फोटो के

4271
05:19:53,840 --> 05:19:58,160
आधार पर इसको आज के टाइम में ये सब मत करो। तो यह अनावश्यक

4272
05:19:58,160 --> 05:20:02,160
वकालत है। तो अब यहां ऐसी जगहों पर जो है शास्त्र के प्रमाण

4273
05:20:02,160 --> 05:20:06,560
की आवश्यकता होती है। वहां तुम अपनी बातें करते हो। केवल तुम शास्त्र का प्रमाण

4274
05:20:06,560 --> 05:20:11,280
लोगों को डराने के लिए देते हो। छोटे भाई

4275
05:20:11,280 --> 05:20:15,360
ठीक है। तुम शास्त्र का प्रमाण लोगों

4276
05:20:15,360 --> 05:20:19,520
को केवल डराने के लिए देते हो। खौफ बनाने के लिए टेरर

4277
05:20:19,520 --> 05:20:23,680
बनाने के लिए देते हो और कोई कारण नहीं तुम्हारे शास्त्र के प्रमाणों का। क्योंकि जहां

4278
05:20:23,680 --> 05:20:29,680
आवश्यकता है वहां तो देते नहीं। अपने मन मनमुखी व्याख्या करते चले गए। करते चले गए।

4279
05:20:31,200 --> 05:20:35,200
वाइट वाश कहां किया? तुम्हारे खुद ही के साथी तो तुमसे भाग रहे हैं। तुम्हारा विरोध कर

4280
05:20:35,200 --> 05:20:39,520
रहे हैं। जो कल तक तुम्हारे लिए प्रमाण होते थे। तुम्हारे अनुसार

4281
05:20:39,520 --> 05:20:43,680
जो लोग तुम्हारे लिए प्रमाण थे वह लोग भाग रहे हैं। मैंने तो तुमसे

4282
05:20:43,680 --> 05:20:47,840
यह कहा था कि अगर तुम्हें मेरे से जंग मेरे साथ जंग लड़नी है कोई मुझे

4283
05:20:47,840 --> 05:20:51,840
युद्ध में शामिल करना है तो मुझे ठोस चीज जला कर दो और

4284
05:20:51,840 --> 05:20:57,840
नहीं दिया। तुमको तो मुझे से लड़ना था।

4285
05:21:03,040 --> 05:21:07,040
हम हां यह धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। ये

4286
05:21:07,040 --> 05:21:11,280
जो है धर्म धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं और विवेकी का दायित्व ज्यादा

4287
05:21:11,280 --> 05:21:15,680
होता है। ये अपने आप को निग्रहचार्य बोल रहे हैं। केवल व्यक्तिगत

4288
05:21:15,680 --> 05:21:20,000
धर्म को धारण कर लेने से कुछ नहीं होता है कि मुझे शौच ये करना है इत्यादि

4289
05:21:20,000 --> 05:21:24,080
ये ये वाला मंत्र मुझे बोलना है। यहां पे है

4290
05:21:24,080 --> 05:21:28,160
ना जो सामाजिक रूप से आपका क्या आपकी आपका रोल

4291
05:21:28,160 --> 05:21:32,480
होना चाहिए उसमें उस धर्म का भी धारण उस धर्म को भी धारण करना

4292
05:21:32,480 --> 05:21:36,960
आवश्यक होता है केवल शौचाचार इत्यादि में बहुत पारंगत

4293
05:21:36,960 --> 05:21:41,120
होने से विधि जो अपना भक्ष अभक्ष में ध्यान रखने से प्रणम्य है बढ़िया

4294
05:21:41,120 --> 05:21:45,600
है मगर अपने आप को निगराचार्य भी बोल रहे हैं ना धर्म का धर्म को स्थापित

4295
05:21:45,600 --> 05:21:46,240
करने वाले बोल

4296
05:21:46,240 --> 05:21:52,240
रहे हैं ना तो इनसे पहले प्रश्न किया जाएगा और

4297
05:21:53,080 --> 05:21:57,440
जो वह तो तैयार है ना जहां पर वह गलत है उसको बताओ

4298
05:21:57,440 --> 05:22:02,320
वो मान जाएगी वो तो कह रही है ना किसी ने बताया ही नहीं

4299
05:22:02,320 --> 05:22:06,560
पहले बताओ तो गलत क्या हो रहा है जबरदस्ती वही

4300
05:22:06,560 --> 05:22:10,720
वाली बात तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी किसकी किसी की भी अरे बताओ तो गलत

4301
05:22:10,720 --> 05:22:15,160
क्या कर रही है तुम्हें तुम्हें किस बात की तकलीफ

4302
05:22:15,160 --> 05:22:19,440
है क्या ऐसा वो कर रही है जो उसे नहीं करना चाहिए वो

4303
05:22:19,440 --> 05:22:23,440
बताओ फिर उस पर बात की जाए मीमांसा की जाए और सामने

4304
05:22:23,440 --> 05:22:27,440
आओ मुंह मत छुपाओ मार दो मार

4305
05:22:27,440 --> 05:22:32,880
दो

4306
05:22:32,880 --> 05:22:36,880
क्यों अकाट्य प्रमाण अगर मैं बोल रहा हूं तो ये तुम्हारे लिए कैसे है मैं वहां

4307
05:22:36,880 --> 05:22:40,880
पे ये भी बोल रहा हूं कि अपने गुरु द्रोही जो गुरुद्रोही भाई है मतलब

4308
05:22:40,880 --> 05:22:45,120
गुरु द्रोही भाई कहां से हुए भाई हो भी गए वो प्रमाण्य बुद्धि

4309
05:22:45,120 --> 05:22:49,360
के कारण खैर जो गुरु द्रोही है उनके लिए बोल रहा हूं ना

4310
05:22:49,360 --> 05:22:53,360
वहां बोल भी रहा हूं कि कहीं तुम तुम अपने ईगो पर

4311
05:22:53,360 --> 05:22:57,920
ना ले जाओ इस बात को। वहां मैं इस बात का ध्यान रख रहा हूं।

4312
05:22:57,920 --> 05:23:02,000
जयकांत सिगरे का ईगो हर्ट ना हो जाए। मैं इस बात का ध्यान

4313
05:23:02,000 --> 05:23:06,080
रख रहा हूं। वहां सुन ध्यान देना जरा मैं जब अकाट प्रमाण मांगूंगा।

4314
05:23:06,080 --> 05:23:10,720
देखना वहां मैं कैसे तुम्हारे ईगो को बचाने का प्रयास करता हूं।

4315
05:23:10,720 --> 05:23:16,720
देखना दोबारा

4316
05:23:20,560 --> 05:23:26,560
क्या

4317
05:23:29,320 --> 05:23:33,600
करेगा कोई व्यक्ति बोले तो गलत नहीं बोले

4318
05:23:33,600 --> 05:23:37,600
तो भी गलत तो पहली

4319
05:23:37,600 --> 05:23:41,720
बात तो मैंने तुम्हारे लिए बोली नहीं है तुमने अदब के लिया है अपने

4320
05:23:41,720 --> 05:23:45,600
ऊपर और

4321
05:23:45,600 --> 05:23:49,680
चलो ठीक है। बाकी इसमें वैसा कुछ मुझे दिख नहीं रहा है कि मुझे जवाब

4322
05:23:49,680 --> 05:23:55,280
देना है। बोल लो।

4323
05:23:55,280 --> 05:23:59,360
चुप रहे गलत मैंने चुप रहने पे गलत कहां कहा? तुम्हारी ये वाली

4324
05:23:59,360 --> 05:24:03,960
समीक्षा कब की? कि चुप रहे तुम गलत। कब समीक्षा की ये

4325
05:24:03,960 --> 05:24:09,960
वाली? हां? जबरन कुछ भी

4326
05:24:14,800 --> 05:24:19,360
प्रयास नहीं तुम भी जुड़े हुए हो

4327
05:24:19,360 --> 05:24:23,600
YouTube पार्टनर हो तुम मोनेटाइज है ना तुम्हारा चैनल तुम भी जुड़े हुए हो

4328
05:24:23,600 --> 05:24:27,760
और तुम अपने अपना जो वो है उसको

4329
05:24:27,760 --> 05:24:32,000
थोड़ा सार्वजनिक करो जीवन जैसे उसने किया है

4330
05:24:32,000 --> 05:24:36,560
फिर देखो तुम्हें जोड़ते हैं मलच्छ सार्वजनिक

4331
05:24:36,560 --> 05:24:40,800
तो करो अपना जीवन तभी तो आएगा ना मजा खेल का सबकी सबकी

4332
05:24:40,800 --> 05:24:45,040
समीक्षा तुम कर रहे हो। अपने जीवन को सार्वजनिक करो। जैसे

4333
05:24:45,040 --> 05:24:49,200
उसने अपनी फोटो फोटो डाली है। जहां गई ये गई उसके साथ मिली।

4334
05:24:49,200 --> 05:24:53,360
सार्वजनिक करो। तब तुम्हें जोड़ेंगे फ्री मिशन से। और कोई

4335
05:24:53,360 --> 05:24:57,360
अगर विवत्स संस्था होगी सनातन विरोधी उससे जोड़ देंगे। करो

4336
05:24:57,360 --> 05:25:01,360
तो सार्वजनिक तुम भी जुड़े हुए हो। अभी जोड़ रहे

4337
05:25:01,360 --> 05:25:05,560
हैं। YouTube के पार्टनर हो। YouTube बहुत

4338
05:25:05,560 --> 05:25:09,600
सारी मलेच उससे जुड़े हुए हैं। और सुनो

4339
05:25:09,600 --> 05:25:10,320
तुम YouTube

4340
05:25:10,320 --> 05:25:14,400
के पार्टनर हो। YouTube पे ही बहुत सारा ऐसा कंटेंट है जो बिल्कुल

4341
05:25:14,400 --> 05:25:18,720
सनातन विरोधी है और वो YouTube उसका भी पार्टनर है।

4342
05:25:18,720 --> 05:25:22,880
तो तुम उनके तो उनके पार्टनर हो एक तरीके से जो जो

4343
05:25:22,880 --> 05:25:26,960
है जो अश्लील

4344
05:25:26,960 --> 05:25:30,960
ये सब वीडियोस बना रहे हैं। नेक्स्ट टू अश्लील पोंड

4345
05:25:30,960 --> 05:25:35,760
वाले वीडियोस हैं। वह सब चल रहे हैं। तुम उनके पार्टनर हो।

4346
05:25:35,760 --> 05:25:39,760
ठीक है। हो गया सिद्ध। चलो

4347
05:25:39,760 --> 05:25:43,920
नहीं है शायद। अगर वो 17 गोली मारी लेवल पर उसने अपने पत्नी की

4348
05:25:43,920 --> 05:25:49,920
साल कर दो 13

4349
05:25:51,000 --> 05:25:55,200
46 मुझे नहीं लगता कि महिला किसी छोटेमोटे वजह के चक्कर में मुझे भी नहीं लगता

4350
05:25:55,200 --> 05:25:59,360
है जिस तरीके से आपका बाईपोलर इत्यादि का इतिहास

4351
05:25:59,360 --> 05:26:03,440
है मुझे भी नहीं लगता है कि आप जो है कोई लुप्त संप्रदाय के

4352
05:26:03,440 --> 05:26:07,520
प्रतिष्ठित आचार्य ठीक है तो इससे क्या करें

4353
05:26:07,520 --> 05:26:11,600
किसी को जो लगता है उससे करने से रोक थोड़ी ना लगेगा आप अपना निर्णय लेने के

4354
05:26:11,600 --> 05:26:16,080
लिए स्वतंत्र है। प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो सब धूमिल हो जाएगा। सब कुछ तहसनहस

4355
05:26:16,080 --> 05:26:20,960
हो जाएगा। और ईश्वर से प्रार्थना यही करना है कि प्रत्यक्ष वार्ता ना

4356
05:26:20,960 --> 05:26:26,400
वरना चुन्नू मुन्नू बन जाओगे।

4357
05:26:26,400 --> 05:26:28,880
जी

4358
05:26:28,880 --> 05:26:32,880
दीक्षा दिलवाइए भाई और

4359
05:26:32,880 --> 05:26:37,120
धर्म की स्थापना के लिए आवश्यक है कि लोग अपने प्रामाणिक

4360
05:26:37,120 --> 05:26:41,120
आचार्य को जान जाए उसकी सार जो वो

4361
05:26:41,120 --> 05:26:45,440
सार्वभौम तत्व है वो उनमें जो सार्वभौम सिद्धांत है

4362
05:26:45,440 --> 05:26:49,520
उन सिद्धांतों के छत्र के नीचे हम एक

4363
05:26:49,520 --> 05:26:53,520
हो सके वैचारिक एकता और उसके बाद व्यवहारिक

4364
05:26:53,520 --> 05:26:57,520
एकता और तब हम जब संगठित होकर के हाथी

4365
05:26:57,520 --> 05:27:01,840
बन के बैठेंगे तब किसी में यह बल नहीं होगा किसी स्वान

4366
05:27:01,840 --> 05:27:06,800
में कि हमारी और भके आज हम लोग बटे हुए हैं क्योंकि

4367
05:27:06,800 --> 05:27:10,800
लोग अपने प्रामाणिक आचार्य को नहीं जानते हैं। सार्वभौम आचार

4368
05:27:10,800 --> 05:27:15,600
गद्दी को नहीं जानते हैं। हम लोग बटे हुए हैं। ठीक है?

4369
05:27:15,600 --> 05:27:19,920
तो क्या कह रहे थे तुम? चक्कर में है

4370
05:27:19,920 --> 05:27:24,400
कोई शंकाचार्य जी से मुझे नहीं लगता तुम करना 20000्राइबर

4371
05:27:24,400 --> 05:27:28,640
का चैनल में तुम उसको करने जा रहे हो क्या लाइव दर्ज 20000 के चैनल

4372
05:27:28,640 --> 05:27:33,120
में लाइव करने जा रहा हूं अबे उसके डेढ़ उसके

4373
05:27:33,120 --> 05:27:38,080
डेढ़ लाख फॉलोअ है जाके चेक कर ले छोटू

4374
05:27:38,080 --> 05:27:41,600
अब तो तू क्यूटिपाई क्यूटिपाई हो गया है रात रात भर

4375
05:27:41,600 --> 05:27:46,560
में जो तेरे तर्क सुने हैं मैंने तो छोटा भाई जैसा ही लग रहा है वो जो

4376
05:27:46,560 --> 05:27:50,720
भोला भोला वाला होता है बस उसके अंदर जिद्द होती है। जििद

4377
05:27:50,720 --> 05:27:54,920
तुम्हारे अंदर भी जिद्द है।

4378
05:27:54,920 --> 05:27:59,280
चुन्नू क्या बोल रहे हो? 1.5 लाख फॉलोअ वाला व्यक्ति

4379
05:27:59,280 --> 05:28:04,360
20,000 फॉलोअ वाले के पेज पर आएगा।

4380
05:28:04,360 --> 05:28:08,480
हम वो वीडियो वहां प्रमोट होगा।

4381
05:28:08,480 --> 05:28:13,520
हमें फायदा होगा। चुन्नू मुन्नू तुम हो।

4382
05:28:13,520 --> 05:28:18,080
तुम्हारा तो पों्स वाला वो ऐड याद आ रहा है मुझे। गुगली गुगली गोश

4383
05:28:18,080 --> 05:28:22,240
मगर गाल है नहीं तुम्हारे पिचके आएगा नहीं हाथ में कुछ वजन

4384
05:28:22,240 --> 05:28:27,080
इतना कम है इसलिए

4385
05:28:27,080 --> 05:28:31,760
हम इस प्रकार से कहानी से तिवारी करने लग गई वो

4386
05:28:31,760 --> 05:28:35,960
वाली वाली महिला

4387
05:28:35,960 --> 05:28:41,960
का लग रहा है विश्वास है

4388
05:28:42,200 --> 05:28:46,320
जानिता से तुम्हारी हृदय से कह रहे इसको मैंने

4389
05:28:46,320 --> 05:28:50,320
इस बात का तुमने यहां पे मुझे लग रहा है कि यहां हृदय से बोल रहे

4390
05:28:50,320 --> 05:28:54,480
हो। यहां पे तुमने हृदय से बोला है थोड़ा दिख रहा है।

4391
05:28:54,480 --> 05:28:59,200
एक होता है आभास जैसा अच्छा लगा। भाई जैसी फीलिंग आई

4392
05:28:59,200 --> 05:29:03,360
मगर फिर भी तुम्हारे वो तुम्हारी वो

4393
05:29:03,360 --> 05:29:07,520
शंका है। ऐसा कुछ है नहीं। मैं वहीं

4394
05:29:07,520 --> 05:29:11,520
पर खड़ा होता हूं। वहीं पर अड़ जाता हूं। वहीं पर भिड़ जाता हूं। जहां मुझे

4395
05:29:11,520 --> 05:29:16,320
अकाट्यता दिखती है। मैंने राम को इसलिए चुना

4396
05:29:16,320 --> 05:29:21,280
क्योंकि वहां मुझे अकाटता दिखी। कोई नहीं काट सकता।

4397
05:29:21,280 --> 05:29:25,880
मैंने शंकराचार्य को इसलिए चुना कि

4398
05:29:25,880 --> 05:29:29,920
मुझे वहां अकाट्यता दिखी। और आज

4399
05:29:29,920 --> 05:29:34,000
मैं जिस विवाद में खड़ा हो गया हूं उसको भी मैंने इसीलिए

4400
05:29:34,000 --> 05:29:39,040
चुना है क्योंकि मुझे उसमें अकाट्यता दिख रही है।

4401
05:29:39,040 --> 05:29:42,080
ठीक है? तो यह तुम जो हृदय से बोल रहे हो छोटे

4402
05:29:42,080 --> 05:29:46,360
चुन्नू मुन्नू यह तुम्हारा वो

4403
05:29:46,360 --> 05:29:50,840
है शंका है इसे मिटा

4404
05:29:50,840 --> 05:29:55,120
दो विजयश्री कोई प्रायोजित नहीं है

4405
05:29:55,120 --> 05:29:59,120
फ्री मिशनंस के द्वारा पहली दिक्कत वाली बात तो यह है ना

4406
05:29:59,120 --> 05:30:03,200
कि तुम डिसाइड नहीं कर पा रहे हो कि वो व्यापार के लिए वहां गई है फ्री मिशनंस

4407
05:30:03,200 --> 05:30:07,200
के लिए वहां गई है ना ये तुम डिसाइड नहीं कर पा रहे हो तुमने अभी यहां

4408
05:30:07,200 --> 05:30:11,280
पर हृदय से कहा यानी तुम्हें तुम्हें इस बात को लेकर के शंका है कि मैंने वहां

4409
05:30:11,280 --> 05:30:15,280
उसको जानबूझकर किया है या बिना अनजाने में किया है। मगर पहले

4410
05:30:15,280 --> 05:30:19,600
तुम कह चुके हो कि वो मैंने अपने धंधे को प्रमोट इत्यादि

4411
05:30:19,600 --> 05:30:23,680
करने के लिए किया है। तो यह भी तुम्हारा गलत व्यवहार

4412
05:30:23,680 --> 05:30:27,680
है। ठीक नहीं है। और टोटे हो

4413
05:30:27,680 --> 05:30:31,680
तुम। थोड़ा बस यह है तुमने ग्रंथ

4414
05:30:31,680 --> 05:30:35,680
के श्लोक याद करे हैं और उनको कहां पर

4415
05:30:35,680 --> 05:30:40,480
रखना है कहां नहीं रखना है वो नहीं सीख पाए।

4416
05:30:40,480 --> 05:30:44,920
इसी कारण से जहां रखना होता है वहां शांत रहते

4417
05:30:44,920 --> 05:30:49,560
हो। हां ये सवाल आ रहा है देखो ये वाला

4418
05:30:49,560 --> 05:30:53,600
अकाट्य मैं इसलिए नहीं जुड़ा था शंकराचार्य जी से। ये

4419
05:30:53,600 --> 05:30:57,440
बाद की बातें हैं। साढ़े तीन वर्ष वाली भविष्यवाणी

4420
05:30:57,440 --> 05:31:02,760
मनुमक्खी के सेना ये बाद की बातें हैं। वो शंकराचार्य

4421
05:31:02,760 --> 05:31:07,040
हैं। सार्वभौम गुरुगद्दी जिसने

4422
05:31:07,040 --> 05:31:11,360
बचाया था सनातन धर्म को नष्ट होने से उस पर बैठने

4423
05:31:11,360 --> 05:31:15,960
वाले परंपरागत रूप से बैठने वाले वो आचार्य

4424
05:31:15,960 --> 05:31:20,240
हैं। बौद्धों का खंडन करने वाले वो आचार्य

4425
05:31:20,240 --> 05:31:24,960
हैं। नास्तिकता का खंडन करने वाले वह आचार्य हैं।

4426
05:31:24,960 --> 05:31:29,120
एक ऐसे ऐसी परंपरा के आचार्य जिनका विरोध करते

4427
05:31:29,120 --> 05:31:33,600
हुए ईश्वर की सिद्धि ही नहीं हो सकती। एक ऐसी परंपरा

4428
05:31:33,600 --> 05:31:37,920
का आचार्य एक ऐसी परंपरा के आचार्य जिनका विरोध

4429
05:31:37,920 --> 05:31:42,760
करते हुए ईश्वर की सिद्धि ना हो पाने के

4430
05:31:42,760 --> 05:31:47,680
कारण धर्म की स्थापना ही नहीं हो सकती।

4431
05:31:47,680 --> 05:31:51,840
और एक ऐसी परंपरा के आचार्य जिसके अंदर रह

4432
05:31:51,840 --> 05:31:56,240
के उस मत के अंदर रह के सबके अपने अपने स्वमत

4433
05:31:56,240 --> 05:32:01,440
पोषित कर सकते हैं। इसलिए जुड़ा था उनसे।

4434
05:32:01,440 --> 05:32:07,440
ठीक है। चलो

4435
05:32:11,680 --> 05:32:15,680
नहीं नहीं नहीं सीधा मोक्ष हो जाएगा। ये सब कुछ नहीं। मेरे

4436
05:32:15,680 --> 05:32:19,680
जीवन का जो उद्देश्य को उस दिन पूरा हो गया था। जब मुझे गुरुदेव

4437
05:32:19,680 --> 05:32:23,800
दिख गए थे। मुझे श्री राम नाम की दीक्षा मिल गई थी। अब तो

4438
05:32:23,800 --> 05:32:28,000
बस केवल मैं वो कर रहा हूं जो

4439
05:32:28,000 --> 05:32:32,240
गुरुदेव ने बताया, शास्त्र ने बताया वो करने का प्रयास करता हूं। बाकी और कोई उद्देश्य

4440
05:32:32,240 --> 05:32:38,240
नहीं है जीवन का।

4441
05:32:46,440 --> 05:32:50,480
हम जिस स्थान पर बैठकर तुम्हारा भविष्य और उस लड़की के पीछे काम करना चाहते

4442
05:32:50,480 --> 05:32:54,560
हो समझ रहा हूं जो मैंने कहा

4443
05:32:54,560 --> 05:32:58,560
पॉइंट इस दृष्टिकोण में आना जाना बहुत बड़े वैश्विक महिला ऐसी

4444
05:32:58,560 --> 05:33:04,360
महिला ऐसी संस्थाओं का बहुत बड़े कार्य

4445
05:33:04,360 --> 05:33:10,360
है तुम अपने उस पर ध्यान दो

4446
05:33:15,680 --> 05:33:19,760
थे परंपरा है तुम्हारी तुम

4447
05:33:19,760 --> 05:33:24,920
बोल रहे हो

4448
05:33:24,920 --> 05:33:29,600
तुम इसको आएंगे अगर लंबा बताएगा

4449
05:33:29,600 --> 05:33:34,200
बता देंगे

4450
05:33:34,200 --> 05:33:38,480
अच्छा होगा अच्छे से आऊंगा निकला नहीं

4451
05:33:38,480 --> 05:33:42,920
है

4452
05:33:42,920 --> 05:33:48,440
दीक्षा किसी और दिशा में जा रहा है

4453
05:33:48,440 --> 05:33:52,880
क्या बोलगा क्या है तब मैं वापस करूंगा

4454
05:33:52,880 --> 05:33:58,880
दीक्षा किसी दिया

4455
05:34:01,360 --> 05:34:07,360
[हंसी]

4456
05:34:09,760 --> 05:34:13,840
विदेश गमन करने वाले किसी भी व्यक्ति को हम ना समर्थन देते हैं विदेश गमन प्रति

4457
05:34:13,840 --> 05:34:15,040
में और ना उस व्यक्ति का

4458
05:34:15,040 --> 05:34:19,280
प्रोत्साहन करने के अच्छा किया ना किसी को ऐसा करने की सलाह ठीक तो अगर तुम गमन

4459
05:34:19,280 --> 05:34:23,600
विषय पर इतना ही कमर हो इसको मतज्ञान स्थान कहा जाता है मतज्ञान

4460
05:34:23,600 --> 05:34:29,320
ग्रस्थान का क्या अर्थ है

4461
05:34:29,320 --> 05:34:33,880
कि वन रिलेशनशिप लाइफ टाइम

4462
05:34:33,880 --> 05:34:39,880
लिटली रिलेशनशिप योर बॉडी

4463
05:34:42,840 --> 05:34:46,600
हमने आपने कहा

4464
05:34:46,600 --> 05:34:51,160
तुम भी होगा ये सिद्ध नहीं होता पहला वाला हां

4465
05:34:51,160 --> 05:34:55,360
बिल्कुल भी बिल्कुल बिलकुल बिलकुल तो यही हमने कहा ना

4466
05:34:55,360 --> 05:34:59,480
किसी दूसरे के गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता है पीछे कहा है

4467
05:34:59,480 --> 05:35:03,600
हमने अच्छा हुआ तुमने उसको प्रमाण दे दिया इन्होंने यहां पे

4468
05:35:03,600 --> 05:35:07,680
जो प्रमाण दिया 2 17 32 जरा नोट कर लेना भैया धन्यवाद आपका

4469
05:35:07,680 --> 05:35:11,840
प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए। वो जो है पीछे हमने यही बात तुम्हें

4470
05:35:11,840 --> 05:35:16,200
याद दिलाई है कि हमारे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता

4471
05:35:16,200 --> 05:35:20,320
है। तो फिलहाल क्या मैं तुम्हें गलत करके अपने आप को सिद्ध

4472
05:35:20,320 --> 05:35:24,560
कर रहा हूं क्या सही? नहीं नहीं नहीं मैं तुम्हें तुम्हारा

4473
05:35:24,560 --> 05:35:29,360
जो है कॉन्फिडेंस लेवल जो होता है ना समीक्षा करते समय

4474
05:35:29,360 --> 05:35:30,160
जो तुम

4475
05:35:30,160 --> 05:35:34,320
समीक्षा करते समय उलते हो उसको जरा डाउन करने के लिए तुमसे

4476
05:35:34,320 --> 05:35:38,640
प्रश्न करता हूं और कर सकता हूं ना तुम तो आचार्य हो मैं थोड़ी ना आचार्य हूं

4477
05:35:38,640 --> 05:35:42,720
क्या दिक्कत हो रही है अगर तुम और तुम्हारे जो सवाल है उन पर

4478
05:35:42,720 --> 05:35:47,120
बात करने के बाद तीसरा सवाल ला रहा हूं ना प्रमाणिक प्रमाणिकता पर

4479
05:35:47,120 --> 05:35:51,280
भाई मेरे पास भी तो प्रश्न हो सकते हैं कि तुम शास्त्रोक्त हो कि नहीं हो जब

4480
05:35:51,280 --> 05:35:55,360
तुम तुम दुनिया भर से शास्त्र शास्त्रों की बात पूछ रहे हो

4481
05:35:55,360 --> 05:36:01,360
हां तो मेरे पास भी तो सवाल हो सकते हैं। तुम शास्त्र हो कि नहीं हो?

4482
05:36:01,880 --> 05:36:06,240
और जो जो आज की जो परिस्थिति

4483
05:36:06,240 --> 05:36:10,240
है जो विपरीत काल चल रहा है उसमें

4484
05:36:10,240 --> 05:36:14,360
जैसे ही हम अपने कक्ष से बाहर निकलते हैं तुरंत कहीं ना

4485
05:36:14,360 --> 05:36:18,480
कहीं शास्त्र की मर्यादा का कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में उल्लंघन

4486
05:36:18,480 --> 05:36:22,560
हो जा रहा है। तो वातावरण ही इतना दूषित

4487
05:36:22,560 --> 05:36:26,560
हो गया। ली वातावरण के लिए शुद्ध करने के लिए सब लोग लड़ रहे हैं। उन

4488
05:36:26,560 --> 05:36:30,560
लोगों को नहीं लड़ने वालों को भी यह नहीं पता है कि यदि जिस दिन सुधरेगा तो तो उनको

4489
05:36:30,560 --> 05:36:34,800
भी जीवन में काफी दिक्कतें आने वाली है। है ना? पूर्ण

4490
05:36:34,800 --> 05:36:39,040
रूप से शास्त्र वो हो जाएगा। बहुत सी दिक्कतें आएंगी। उनको जिन जिन चीजों की आदत

4491
05:36:39,040 --> 05:36:44,080
पड़ गई है वो चीजें छीनंगी। फिर भी लड़ रहे हैं।

4492
05:36:44,080 --> 05:36:50,080
चलो

4493
05:36:52,320 --> 05:36:58,320
क्या आता है कि कोसा

4494
05:36:58,760 --> 05:37:04,760
गया करने वाले

4495
05:37:11,360 --> 05:37:15,840
क्योंकि तुम हां पहली बात तो यह है कि हम यहां ये बोल क्यों रहे हैं

4496
05:37:15,840 --> 05:37:19,840
कि तुम किसी के साथ उठने बैठने से अगर अपनी प्रामाणिकता को सिद्ध कर रहे

4497
05:37:19,840 --> 05:37:24,080
हो यदि तो तुम जो है साथ में

4498
05:37:24,080 --> 05:37:28,080
तुम्हारे साथ में जो प्रमाणिक गतिविधि वाला व्यक्ति बैठ रहा है जुड़ रहा है वो भी

4499
05:37:28,080 --> 05:37:32,240
प्रमाणिक सिद्ध हो जाएगा उस हिसाब से वहां पे ये बोला है

4500
05:37:32,240 --> 05:37:38,240
ठीक है

4501
05:37:39,760 --> 05:37:43,760
फिर आगे और अगर साथ में उठने

4502
05:37:43,760 --> 05:37:48,400
बैठने से कोई व्यक्ति शास्त्रोक्त सिद्ध होता है, प्रामाणिक सिद्ध होता है

4503
05:37:48,400 --> 05:37:52,640
तो तुम्हारे साथ में जो है ये विदेशगामी

4504
05:37:52,640 --> 05:37:56,720
व्यक्ति जो है खड़ा है। तुम उससे आतिथ्य स्वीकार कर रहे हो। क्योंकि तुमने

4505
05:37:56,720 --> 05:38:00,720
कहा ना अप्रामाणिक व्यक्ति से जो है गांठ गांठ है बोलते हैं मिलते

4506
05:38:00,720 --> 05:38:05,280
हैं करौली सरकार आते हैं बागेश्वर वाले आते हैं

4507
05:38:05,280 --> 05:38:09,360
तो बागेश्वर वाले जो आते हैं वहां पर उनके जो अंश

4508
05:38:09,360 --> 05:38:13,680
को उन्हें पता चलता है कि गलत है तो वहां पर उनका खंडन किया कि नहीं गुरुदेव

4509
05:38:13,680 --> 05:38:17,680
ने मगर उसका मतलब यह है कि वो अगर साथ में खड़े हो रहे हैं तो प्रशय दे

4510
05:38:17,680 --> 05:38:22,000
रहे हैं तो इसका मतलब तुम विदेशगामी को प्रश्रय दे रहे हो ये है बात

4511
05:38:22,000 --> 05:38:26,000
नहीं है साथ में खड़े हम यहां पे तुमको दोष नहीं दे रहे तुमको याद

4512
05:38:26,000 --> 05:38:30,160
दिला रहे हैं कि साथ में खड़े होने का मतलब प्रश्रय नहीं है और तुम

4513
05:38:30,160 --> 05:38:34,240
आप यहां पे वही कर रहे हो अपने आप को बता रहे हो कि हमने विदेश गमन का साथ

4514
05:38:34,240 --> 05:38:38,560
नहीं दिया है। ठीक है।

4515
05:38:38,560 --> 05:38:42,880
विदेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को हम समर्थन देते हैं।

4516
05:38:42,880 --> 05:38:46,880
और उस व्यक्ति का है नहीं देते।

4517
05:38:46,880 --> 05:38:50,960
तो इसका मतलब जाति पात का करो विदाई करने वाले

4518
05:38:50,960 --> 05:38:54,960
को वो कभी भी समर्थन नहीं देते हैं गुरुदेव। तो फिर क्यों

4519
05:38:54,960 --> 05:38:59,360
कह रहे हो कि वो क्यों आ रहा है वहां पर? क्योंकि साथ में खड़ा हो जाने से आशीर्वाद

4520
05:38:59,360 --> 05:39:03,520
प्राप्त कर लेने से उनको समर्थन मिल गया उनके कार्य के

4521
05:39:03,520 --> 05:39:07,720
लिए वो सिद्ध नहीं होता

4522
05:39:07,720 --> 05:39:11,920
है कि इसको ऐसा करने तो अगर तुम्हारे

4523
05:39:11,920 --> 05:39:17,920
इतना ही कम हो उसको मतलब कहा जाता

4524
05:39:19,560 --> 05:39:23,600
है तो शिवा किया लोगों

4525
05:39:23,600 --> 05:39:27,680
ने किया शिवा का उदाहरण

4526
05:39:27,680 --> 05:39:31,680
प्रस्तुत किया है विषय विदेश गमन हमने विदेश गमन करने वाले व्यक्ति का ना समर्थन किया ना प्रोत्साहन किया

4527
05:39:31,680 --> 05:39:36,160
ना इस प्रकार का कृत कभी स्वयं किया जिन लोगों ने किया उनका विरोध किया और

4528
05:39:36,160 --> 05:39:40,160
विदेश गमन के विरोध में स्वामी जी का जो मत है उस मत का हमने प्रसारण किया जबकि

4529
05:39:40,160 --> 05:39:44,160
तुम्हारे ही अन्य गुरु भाई को वो भाई लिया कर तुम बार बार गुरु भाइयों को

4530
05:39:44,160 --> 05:39:48,240
मत लाया करो यार जी के सिद्धांत तुम्हारा वो फेल हो गया

4531
05:39:48,240 --> 05:39:52,400
वहां जब रो रहे थे अभी मिश्रा जी के लिए कि तुमने हमें धोखा

4532
05:39:52,400 --> 05:39:57,200
दिया मत बोलो गुरु भाइयों की बात

4533
05:39:57,200 --> 05:40:01,360
आधी रोटी पर दाल मत लो। वही कहा था मैंने कि ये

4534
05:40:01,360 --> 05:40:07,360
संभावना उत्पन्न करने वाले प्रमाणों पे वो मत

4535
05:40:10,200 --> 05:40:14,240
करो। उसका सा बताते हुए वैदिक प्राणों की निकालते हैं

4536
05:40:14,240 --> 05:40:18,240
बेचारे के वहां पर

4537
05:40:18,240 --> 05:40:22,480
वैदिक प्राणों की झंडा बताते हैं। सिद्धांत का बदलते

4538
05:40:22,480 --> 05:40:27,160
हुए वैदिक प्राणों की से निकालते हैं बेचाने के लिए। जी

4539
05:40:27,160 --> 05:40:31,360
के पापी जी के सिद्धांत का झंडा करते हैं। दूसरे कपा

4540
05:40:31,360 --> 05:40:35,480
जी के सिद्धांत का सा करते हुए ब्राह्मणों की निकालते हैं बचाने के

4541
05:40:35,480 --> 05:40:39,520
लिए तुमने कुछ नहीं कहा क्योंकि वहां पर बात तुमको पर्सनली

4542
05:40:39,520 --> 05:40:43,600
नहीं चू रही थी। विजय सुन रही थी मेरे बात ये है और क्या है? क्यों नहीं कहा? तुम

4543
05:40:43,600 --> 05:40:47,680
पहले तुम पहले तय कर लो कि विजय सिंह का मामला क्या है? मैं

4544
05:40:47,680 --> 05:40:51,840
पैसों के लिए उसको लाता हूं या उसके साथ जो तुम जो एक प्रदर्शित

4545
05:40:51,840 --> 05:40:56,080
कर रहे हो वह संबंध है मेरा या फिर मैं भी फ्री मिशनंस

4546
05:40:56,080 --> 05:41:00,880
के लिए कार्यरत हूं या अनजाने में हूं तुम पहले तय कर लो

4547
05:41:00,880 --> 05:41:05,120
और अगर तुम कंफ्यूज हो तो फिर बात मत करो बोलो

4548
05:41:05,120 --> 05:41:09,360
मत आरोप मत लगाओ चार तरह की बातें तुम कर रहे हो तुम इस वाले जैसे हो गए

4549
05:41:09,360 --> 05:41:15,360
यहां पर सब बातें कर लो कोई एक बात तो फिट हो ही जाएगी

4550
05:41:20,000 --> 05:41:24,360
जाने के लिए तब तुमने कुछ नहीं कहां

4551
05:41:24,360 --> 05:41:28,560
क्या सिद्धांत का श्राद्ध करते हुए

4552
05:41:28,560 --> 05:41:32,800
वैदिक ब्राह्मणों की वैकेंसी निकालते हैं जाने के लिए तब

4553
05:41:32,800 --> 05:41:37,760
तुमने कुछ नहीं कहा नहीं हमें हमारे संज्ञान में नहीं है और

4554
05:41:37,760 --> 05:41:42,000
वैकेंसी निकालते होंगे तो निकाल भी सकते हैं ठीक है

4555
05:41:42,000 --> 05:41:46,000
हमें इस बारे में बोध नहीं है और अगर पता चलेगा कोई

4556
05:41:46,000 --> 05:41:50,080
ऐसी चीज तो अगर वहां पर आवश्यक होगा

4557
05:41:50,080 --> 05:41:56,080
हमारे बोलने से कुछ उपयोगिता सिद्ध हो रही होगी तो

4558
05:41:57,400 --> 05:42:01,600
जरूर क्योंकि वहां पर बात उनको पर्सनली नहीं चूक रही थी विजय श्री नहीं

4559
05:42:01,600 --> 05:42:05,920
थी मेरे बात ये क्या है और विजय श्री जहांजहां इन्वॉल्व

4560
05:42:05,920 --> 05:42:10,000
है तो अटैच हो जाता है वो अटैचमेंट फैल जाती है ऑटोमेटिक अटैच हो जाती है

4561
05:42:10,000 --> 05:42:14,160
वैसे अटैच हो जाता है बेचारा हमको बड़ी जलन हो रही है तो शिवास मुझे यार उससे

4562
05:42:14,160 --> 05:42:18,160
समझने का हो जाती है वैसे क्यों तुमको बड़ी जलन हो रही है जलन हो रही

4563
05:42:18,160 --> 05:42:21,160
है

4564
05:42:21,160 --> 05:42:25,440
क्या छोटे हो तुम भाई अटैच

4565
05:42:25,440 --> 05:42:29,440
हो जाता है बेचारा शिवाश शिवांश तो है कि विजयंश है समझ

4566
05:42:29,440 --> 05:42:33,520
नहीं आता से अटैच हो जाता है तुम कैसे

4567
05:42:33,520 --> 05:42:39,520
अटैच हो रहे हो

4568
05:42:39,560 --> 05:42:45,560
तुम शकल देखने लायक है

4569
05:42:46,320 --> 05:42:50,320
हालांकि ये बात तुम कह सकते हो कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी क्या मैं सत्य का

4570
05:42:50,320 --> 05:42:54,800
परमात्मा नहीं बोल सकता बिलकुल ठीक लेकिन जिन

4571
05:42:54,800 --> 05:42:58,800
लोगों ने मेरा सम्मान किया जिस समय जिन लोगों ने मेरा फिर

4572
05:42:58,800 --> 05:43:02,960
जिन लोगों जिन लोगों उस कुकृत का बोध नहीं

4573
05:43:02,960 --> 05:43:07,280
था ये ऐसा कर चुके है

4574
05:43:07,280 --> 05:43:11,360
जब समय ऐसा बोध हुआ तो हमने इसका बहिष्कार करना आरंभ किया उदाहरण

4575
05:43:11,360 --> 05:43:14,480
उसको मैं एक नाम लेना चाहता

4576
05:43:14,480 --> 05:43:14,980
मैं बहुत

4577
05:43:14,960 --> 05:43:18,960
अच्छे से नाम लेना चाहूंगा और ये मेरे मन की पीड़ा है जिसको मैं व्यक्त नहीं करना चाहता था लेकिन

4578
05:43:18,960 --> 05:43:23,960
मैं करूंगा करूंगा करूंगा कृष्ण शास्त्री

4579
05:43:23,960 --> 05:43:25,600
जो श्रीनाथ

4580
05:43:25,600 --> 05:43:31,600
जी के शास्त्री के है धाम में रखते हैं वैदिक

4581
05:43:36,160 --> 05:43:40,320
ये लाइव देखो भैया कितने बड़े हैं

4582
05:43:40,320 --> 05:43:44,400
चुन्नू है और कुछ नहीं बन गया लेकिन जो खर्च

4583
05:43:44,400 --> 05:43:48,560
हुआ उसको किया इसका ये नहीं है की हम सम्मान करने हा फिर उस शिक्षा

4584
05:43:48,560 --> 05:43:52,640
के आ गए उनहीं के थे और

4585
05:43:52,640 --> 05:43:58,120
विशेष धर्म का हम धर्म का बता

4586
05:43:58,120 --> 05:44:02,320
लेकिन अपने अध्या को एक बार आते भी कथा सुनने

4587
05:44:02,320 --> 05:44:06,320
फिर आते एक बार मिलने पीड़ा प्रतिमा

4588
05:44:06,320 --> 05:44:10,720
से कुंडली लिखवा दूसरे के लिए बड़े आत थे उनके लिए हमने प्रार्थना किया

4589
05:44:10,720 --> 05:44:14,800
अपने वस्त से किया फिर जब हम उस वहां से जब जा रहे थे मुझसे मिलने आए जाने समय अगर कोई समय

4590
05:44:14,800 --> 05:44:18,880
नहीं था तो उन्होंने मुझसे प्रयाग करके धाम में वही लेने आए थे तो अनुराग जी मुझसे मिलने

4591
05:44:18,880 --> 05:44:22,880
आए जाने समय अगर कोई समय नहीं था तो फोन में बात की और उन्होंने एक मैसेज का मैं

4592
05:44:22,880 --> 05:44:26,880
जान मैसेज का उत्तर नहीं दिया तो फिर मैंने सब समझ लिया की शायद ये मुझसे संबंध रखने में कुछ नहीं

4593
05:44:26,880 --> 05:44:31,440
रखते तो अगर कोई आपका संबंध आगे रखने मुझे नहीं रखता है आपसे आगे क्यों संबंध रखेंगे

4594
05:44:31,440 --> 05:44:35,680
डू यू फील टायर्ड आफ्टर क्लाइंबिंग जस्ट वन फ्लाइट ऑफ़ स्टेयर्स योर आउट ऑफ ब्रेथ

4595
05:44:35,680 --> 05:44:39,840
ट्रेन एंड दोज़ फ्यू स्टेप्स फील लाइक रखिंग अ मैराथन इट फील्स एज

4596
05:44:39,840 --> 05:44:43,840
इफ योर बॉडी इज वर्किंग अगेंस्ट तो नहीं

4597
05:44:43,840 --> 05:44:48,160
इसका अर्थ ये नहीं का स्मरण करने की इसका अर्थ ये है धीरेधी करके उस व्यक्ति से मेरा संबंध अंत

4598
05:44:48,160 --> 05:44:52,480
समाप्त ही हो जाता है क्यों धीरेधी करके

4599
05:44:52,480 --> 05:44:57,360
एक मिनट एक मिनट धीरेधीरे करके अंततः मेरा उस व्यक्ति से

4600
05:44:57,360 --> 05:45:01,440
संबंध समाप्त ही हो जाता है मतलब तुम्हारा कहना है कि संबंध

4601
05:45:01,440 --> 05:45:05,760
होना नहीं चाहिए अंतिम स्थिति यही है। अच्छा या फिर तुम यह स्वीकार

4602
05:45:05,760 --> 05:45:10,080
कर रहे हो कि धीरे-धीरे करके समाप्त ही हो जाता है तो हो सकता है किसी और का भी हो रहा हो

4603
05:45:10,080 --> 05:45:13,680
जहां तुम्हें गलत दिख रहा है फिर क्यों लड़ रहे हो

4604
05:45:13,680 --> 05:45:18,240
वहां पर भी तो धीरे-धीरे हो सकता है समाप्ति की ओर बढ़ रहा हो

4605
05:45:18,240 --> 05:45:22,240
वहां तुम्हें एट अ टाइम रिजल्ट क्यों चाहिए कि अभी के अभी मुझे समाप्त दिखना चाहिए इसका मतलब

4606
05:45:22,240 --> 05:45:26,240
तुम्हारा ये धीरे-धीरे वाला सिद्धांत ही गलत है। सिद्धांत तो वही

4607
05:45:26,240 --> 05:45:30,240
पकड़ना होगा कि किसी के साथ अगर संबंध है किसी अंश में

4608
05:45:30,240 --> 05:45:35,120
तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम उसके जो है वो हो गए।

4609
05:45:35,120 --> 05:45:39,280
समर्थक हो गए। अगर श्री राम ने पुरोहित के रूप में रावण को बुला

4610
05:45:39,280 --> 05:45:43,280
लिया तो श्री राम रावण के समर्थक हो गए। उसके इस कार्य के समर्थक

4611
05:45:43,280 --> 05:45:49,120
हो गए कि उसने सीता का हरण किया है। ठीक है?

4612
05:45:49,120 --> 05:45:53,440
तो यहां प्रकरण यही चल रहा था कि भैया

4613
05:45:53,440 --> 05:45:57,520
कोई साथ में खड़ा होने से समर्थक नहीं हो जाता है। तो वहां आपने ही

4614
05:45:57,520 --> 05:46:01,600
उत्तर दे दिया। यही बात माननी पड़ेगी

4615
05:46:01,600 --> 05:46:05,680
कि साथ में खड़ा होने से समर्थक नहीं हो जाता है। तो तुम्हें ये बातें नहीं कहनी चाहिए।

4616
05:46:05,680 --> 05:46:10,240
करोड़ी सरकार क्यों आ रहा है? बीजेपी वाले क्यों आ रहे हैं? भाई शंकराचार्य

4617
05:46:10,240 --> 05:46:16,240
किसी से मिलेगा ना। तब तो शोधन होगा ना किसी का।

4618
05:46:22,480 --> 05:46:26,840
लेकिन अगर

4619
05:46:26,840 --> 05:46:32,840
सके अगर

4620
05:46:39,840 --> 05:46:44,080
यही हुआ था कि इतिहास है कि ऐसा ऐसासा

4621
05:46:44,080 --> 05:46:48,160
हुआ है उनके जीवन में। उनको पश्चाताप है उस

4622
05:46:48,160 --> 05:46:52,240
जीवन का। यही जो विदेश गमन की बात तुमने की। विदेश गमन

4623
05:46:52,240 --> 05:46:56,400
हुआ था उनके जीवन में तो तुमने कहा ना कि हुआ था पश्चाताप भी है। उसके

4624
05:46:56,400 --> 05:47:00,400
बाद तुमने किसी विधि के द्वारा उसको जो है बताई

4625
05:47:00,400 --> 05:47:04,960
16 मिनट 16 मिनट 16 मिनट तक लाइव चला है। समय में लाइव अभी

4626
05:47:04,960 --> 05:47:09,320
दो घंटे चला है। क्योंकि मेरी

4627
05:47:09,320 --> 05:47:15,320
समय फिर मिलेंगे। फिर मिलेंगे। क्या छोटू

4628
05:47:15,480 --> 05:47:21,480
छोटू फिर मिलेंगे। हां चलो ठीक

4629
05:47:21,480 --> 05:47:26,920
है। समय देने के लिए धन्यवाद

4630
05:47:26,920 --> 05:47:31,120
और खेल अच्छा था छोटू तुम्हारा।

4631
05:47:31,120 --> 05:47:35,440
अब तुम चुन्नू मुन्नू लग रहे हो और कुछ नहीं। तुम्हारी बातें इतनी सुन ली मैंने।

4632
05:47:35,440 --> 05:47:39,680
कुछ उसमें रह नहीं गया है। खेल अच्छा खेला था। आदमी

4633
05:47:39,680 --> 05:47:43,680
गलत चुन लिया। जय श्री राम। सही
