1
00:00:02,840 --> 00:00:06,680
तो सभी को जय श्री

2
00:00:06,680 --> 00:00:12,440
राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

3
00:00:12,440 --> 00:00:18,440
और एक्साइटेड भी होंगे आज की होने वाली चर्चा के

4
00:00:19,160 --> 00:00:23,160
लिए आज कोई आचार्य

5
00:00:23,160 --> 00:00:27,680
जी आ रहे हैं यह अलंकार आर

6
00:00:27,680 --> 00:00:32,800
समाज की ओर से

7
00:00:32,800 --> 00:00:36,960
जो आर्य समाजी है ये और यह

8
00:00:36,960 --> 00:00:41,440
आज हमसे चर्चा करने आ रहे हैं

9
00:00:41,440 --> 00:00:46,560
इस विषय पर कि ईश्वर अवतार क्यों नहीं ले

10
00:00:46,560 --> 00:00:50,800
सकता उन्होंने से ही संपर्क किया था

11
00:00:50,800 --> 00:00:55,600
हमसे आज सुबह भी बात हुई और कुछ दिनों पूर्व बात हुई

12
00:00:55,600 --> 00:01:00,160
थी तो उन्हीं का इंतजार कर रहे तब तक अगर

13
00:01:00,160 --> 00:01:04,360
वो नहीं आ रहे अब तक हम लोग कुछ

14
00:01:04,360 --> 00:01:08,640
क्वेश्चन ले सकते हैं अगर आप लोग कोई क्वेश्चन हो तो आप पूछ सकते हैं

15
00:01:08,640 --> 00:01:12,720
वैसे हम लोग क्वेश्चन आंसर्स का एक वो लेकर आने वाले हैं व चालू हो

16
00:01:12,720 --> 00:01:18,520
जाएगा मतलब नियमित रूप से होता रहा

17
00:01:18,520 --> 00:01:22,640
करेगा जय श्री राम जय श्री राम सभी को

18
00:01:22,640 --> 00:01:27,440
सभी छोटों को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद और

19
00:01:27,440 --> 00:01:32,560
जो बड़े हैं उनको सम्मान यथोचित

20
00:01:32,560 --> 00:01:37,750
अभिवादन

21
00:01:37,750 --> 00:01:41,920
[संगीत] और जो समकक्ष है उनका

22
00:01:41,920 --> 00:01:46,480
भी यथोचित

23
00:01:46,480 --> 00:01:50,840
अभिवादन आर समाज अमर रहे बिल्कुल उसमें

24
00:01:50,840 --> 00:01:55,560
सुधार हो जाए वह जैसा है वैसा ही रहे जो गलत शिक्षाएं

25
00:01:55,560 --> 00:02:00,480
हैं सनातन परंपरा विरुद्ध

26
00:02:00,480 --> 00:02:04,480
वो जो है बदल दी जाए और वो अमर रहे

27
00:02:04,480 --> 00:02:09,400
भी यही प्रार्थना करते

28
00:02:09,400 --> 00:02:14,640
हैं जय श्री राम जय श्री राम और

29
00:02:14,640 --> 00:02:18,840
एक प्रश्न देखा था मैंने

30
00:02:18,840 --> 00:02:24,840
बलात्कारी ईश्वर को बलात्कारी

31
00:02:25,640 --> 00:02:31,400
बोलना ईश्वर को बलात्कारी बोलना गलत है

32
00:02:31,400 --> 00:02:35,600
हां ईश्वर को बलात्कारी बोलना गलत है

33
00:02:35,600 --> 00:02:40,280
य बात सही है नहीं बोलना

34
00:02:40,280 --> 00:02:44,960
चाहिए ईश्वर सर्व सामर्थ्य वान

35
00:02:44,960 --> 00:02:49,560
है उसको असाम वान बोलना भी गलत

36
00:02:49,560 --> 00:02:52,440
है

37
00:02:52,440 --> 00:02:56,680
और सब कुछ करने वाला होते हुए भी ईश्वर पर कोई दोष

38
00:02:56,680 --> 00:03:00,800
नहीं लगता है क्योंकि ईश्वर को सब कुछ करते

39
00:03:00,800 --> 00:03:04,840
हुए भी किसी भी कर्म के फल में आसक्ति नहीं होती है वो

40
00:03:04,840 --> 00:03:10,840
फ्री है तो इसलिए उस पर कोई दोष नहीं लगता

41
00:03:10,960 --> 00:03:15,000
है क्या हो रहा है ऑटोमेटिक बारबार स्टोरी जो

42
00:03:15,000 --> 00:03:19,400
है डाउन हो जा रही है

43
00:03:19,400 --> 00:03:24,960
ईश्वर को जल्दी देखने के लिए क्या कर सकते हैं ईश्वर की

44
00:03:24,960 --> 00:03:29,920
भक्ति ईश्वर की कृपा से ही उनकी उनका

45
00:03:29,920 --> 00:03:34,320
सी को प्राप्त होते हैं और भक्ति भी कृपा से ही आती

46
00:03:34,320 --> 00:03:39,200
है तो ईश्वर की भक्ति करिए

47
00:03:39,200 --> 00:03:44,160
जितना हो सके ईश्वर जल्दी ही दिखते हैं

48
00:03:44,160 --> 00:03:48,800
वैसे तो दो तीन दिन भी आपने अगर मन से भक्ति

49
00:03:48,800 --> 00:03:54,800
की

50
00:03:55,000 --> 00:03:59,080
तो हां जी नेटवर्क इशू नहीं है यहां पर कोई

51
00:03:59,080 --> 00:04:03,280
भी और वाईफाई वगैरह भी ऑन है

52
00:04:03,280 --> 00:04:09,280
तो उन्हें आने में विलंब क्यों हो रहा है मैं नहीं अभी बता

53
00:04:11,760 --> 00:04:16,000
सकता प्रशांत जी के साथ चर्चा हो सकती है मगर वह इतने सुलभ

54
00:04:16,000 --> 00:04:20,040
नहीं है कोई हमारी उनसे वार्ता सुनिश्चित करवा

55
00:04:20,040 --> 00:04:24,200
देगा तो अवश्य ही समय निकालेंगे

56
00:04:24,200 --> 00:04:28,400
इतना सुलभ नहीं है और कुछ लोग कहते हैं कि सीधे

57
00:04:28,400 --> 00:04:32,440
उन्हीं से जाकर करो इनसे क्यों कर रहे हो तो ये लोग उनका

58
00:04:32,440 --> 00:04:37,120
प्रचार क्यों कर रहे हैं जो भाई प्रचार करने निकलोगे

59
00:04:37,120 --> 00:04:40,600
तो आपसे पूछा जाएगा

60
00:04:40,600 --> 00:04:46,600
ना एक मिनट जरा सेटिंग्स ठीक कर लू मैं मोइल

61
00:04:49,080 --> 00:04:55,080
के पले

62
00:05:15,880 --> 00:05:20,040
वैदिक मंत्रों के अनेक अर्थ हो सकते हैं पर हमें कौन सा अर्थ लेना है यह परंपरा से पता

63
00:05:20,040 --> 00:05:24,120
चलेगा और समाज जी अपना अर्थ करते हैं ऐसे

64
00:05:24,120 --> 00:05:28,200
तो रावण को रामायण के श्रीमान बोला है

65
00:05:28,200 --> 00:05:34,200
इसका कोई अर्थ लक्ष्मी कर दे

66
00:05:34,440 --> 00:05:39,200
तो गई तो वापस सृष्टि में आना होगा आर

67
00:05:39,200 --> 00:05:43,320
समा जी बोलते हैं मूर्ति पर कुत्ता मूत जाता है फिर तो वो इनके गुरु की फोटो

68
00:05:43,320 --> 00:05:48,960
पर भी मूत

69
00:05:48,960 --> 00:05:54,960
देगा वो आ नहीं पा रहे मुझे लग रहा है कि उनको जुड़ने में संभवतः

70
00:05:55,200 --> 00:05:57,800
कोई

71
00:05:57,800 --> 00:06:01,920
अ तकनीकी असहजता हो रही होगी मैं समझ

72
00:06:01,920 --> 00:06:06,760
सकता हूं सभी का सभी उतने निपुण नहीं होते

73
00:06:06,760 --> 00:06:10,840
हैं तकनीकी चीजों में

74
00:06:10,840 --> 00:06:15,000
मगर इस निपुण ना होने की स्थिति के कारण उन्हें गवार

75
00:06:15,000 --> 00:06:19,040
नहीं कहना चाहिए जैसा कि यह चंगू

76
00:06:19,040 --> 00:06:23,120
मंगू करा करते हैं कोई अगर इंग्लिश का वर्ड नहीं बोल पाया या फिर इंग्लिश

77
00:06:23,120 --> 00:06:27,800
के वर्ड के बारे में किसी को प्रॉपर जानकारी नहीं है ये जो स्कन वाले

78
00:06:27,800 --> 00:06:31,960
स्न के जो चंगू बंगू है जिन ऊपर कल आपने वीडियो देखा होगा

79
00:06:31,960 --> 00:06:36,200
वो जो है उसको गवार कहने लगते हैं मान लो किसी की भाषा तमिल

80
00:06:36,200 --> 00:06:40,800
नहीं है और उसको तमिल के शब्द का अर्थ नहीं मालूम तो वो गवार हो

81
00:06:40,800 --> 00:06:45,160
गया य चंगू मंगू को या तो सारी भाषाएं

82
00:06:45,160 --> 00:06:49,400
आती हो दुनिया की और नहीं आती होंगी तो गवार कहलाएंगे

83
00:06:49,400 --> 00:06:50,680
जी

84
00:06:50,680 --> 00:06:54,960
जी और हमारा एक कल शॉर्ट वीडियो

85
00:06:54,960 --> 00:06:58,960
डाला गया था जिसम की अ

86
00:06:58,960 --> 00:07:04,520
हमने एक सवाल उठाया था कि जो अ

87
00:07:04,520 --> 00:07:09,080
धार्मिक धर्म कैसे लुप्त होता जा रहा है

88
00:07:09,080 --> 00:07:13,120
लुप्त सा हो गया है समाज से जिस

89
00:07:13,120 --> 00:07:17,760
कारण से अत्यंत घोर से घोर

90
00:07:17,760 --> 00:07:21,800
बहुत निंदनीय चीजें आपको सुनाई दे रही है और यदि

91
00:07:21,800 --> 00:07:25,880
हमने इस पर ध्यान नहीं दिया कि धर्म की स्थापना हो और

92
00:07:25,880 --> 00:07:31,400
प्रयासरत नहीं हुए तो इससे आगे स्थितियां और बढ़ती चली जाए

93
00:07:31,400 --> 00:07:35,560
काफी सारे सो कॉल्ड खुद को वैष्णव कहते हुए शायन आचार्य के भाष्य

94
00:07:35,560 --> 00:07:39,600
को नहीं मान रहे और कह रहे हैं वो बुद्धिस्ट थे

95
00:07:39,600 --> 00:07:43,640
वो काफी सारे नहीं है बहुत अल्प है कुछ है व

96
00:07:43,640 --> 00:07:47,680
आपके संपर्क में आ गए तो आपको काफी सारे लग रहे होंगे मगर मुख्य बात

97
00:07:47,680 --> 00:07:52,040
यह है कि उनसे यह तो आपको पूछना ही चाहिए कि अगर वह बुद्धिस्ट है उनके भाष नहीं मानने

98
00:07:52,040 --> 00:07:57,560
तो आपके आचार्य ने लिखे तो वो तो लाइए वो तो फिर मले पर चले

99
00:07:57,560 --> 00:08:01,640
जाते तो हेलो आचार्य जी आ चुके

100
00:08:01,640 --> 00:08:07,640
हैं आप अपना सीधा कर लीजिए आप अपना

101
00:08:10,360 --> 00:08:15,400
कैमरा घुमा लीजिए एक

102
00:08:15,400 --> 00:08:19,160
साइड

103
00:08:19,160 --> 00:08:23,200
ऐसे उसम एक सेटिंग होती है र आपको सेटिंग पता

104
00:08:23,200 --> 00:08:27,360
नहीं

105
00:08:27,360 --> 00:08:31,680
है एक सेटिंग होती है घुमाने पर वो स्क्रीन रोटेशन

106
00:08:31,680 --> 00:08:37,680
ऑन कर लीजिए अपनी स्क्रीन रोटेशन ऑन है

107
00:08:39,080 --> 00:08:45,080
आपकी स्क्रीन रोटेशन ऑन कर लीजिए

108
00:08:46,240 --> 00:08:50,800
हा तो जी आपका स्वागत है चर्चा के लिए आप पधारे

109
00:08:50,800 --> 00:08:55,040
आपका धन्यवाद

110
00:08:55,040 --> 00:09:00,960
आभार जी

111
00:09:00,960 --> 00:09:03,960
आपने कुछ बोला

112
00:09:03,960 --> 00:09:08,160
हा आवाज आ रही है हा आवाज आ रही है

113
00:09:08,160 --> 00:09:12,200
अब आ रही है अच्छा सबको सादर

114
00:09:12,200 --> 00:09:16,200
नमस्ते जी जी

115
00:09:16,200 --> 00:09:21,000
जी नमस्ते नमस्कार जय श्री राम

116
00:09:21,000 --> 00:09:25,200
जय श्री राम हम भी जय श्री राम बोलते हैं बच बोलो जय

117
00:09:25,200 --> 00:09:31,200
श्री राम जय श्री राम

118
00:09:33,680 --> 00:09:37,760
तो यहां बहुत सारे बच्चे बैठे हुए हैं क्या आपके पास हा गुरुकुल के सभी बच्चे

119
00:09:37,760 --> 00:09:43,120
आ गए हैं सुनने के लिए चर्चा सुनने के लिए

120
00:09:43,120 --> 00:09:47,120
अच्छा स्वागत है थोड़ा सा

121
00:09:47,120 --> 00:09:51,120
आप अपने गुरुकुल और अपने बारे में बता दीजिए जिससे दर्शक जान जाए कहां से हैं

122
00:09:51,120 --> 00:09:55,280
क्या है मैं वैसे तो रहने वाला

123
00:09:55,280 --> 00:09:59,560
उत्तर प्रदेश का हूं जी और पहले कालेज

124
00:09:59,560 --> 00:10:04,000
में मेरी शिक्षा हुई जी फिर उसके पश्चात

125
00:10:04,000 --> 00:10:09,280
मन में आया कि जब सत्या प्रकाश पढ़ा

126
00:10:09,280 --> 00:10:13,520
हम तो मन में विचार आया कि ऋषि दयानंद जो बात कहते

127
00:10:13,520 --> 00:10:17,560
हैं हम या सत्य है असत्य है

128
00:10:17,560 --> 00:10:21,840
इसको स्वयं परखना चाहिए और स्वयं परखने के लिए

129
00:10:21,840 --> 00:10:25,960
संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है तो फिर

130
00:10:25,960 --> 00:10:30,920
मैं पानी महाविद्यालय बहालगढ़ आपने

131
00:10:30,920 --> 00:10:35,480
पंडित यो मी मांस जी का नाम सुना होगा संस्कृत

132
00:10:35,480 --> 00:10:39,600
के विन सभी जानते हैं तो वहां पर चला गया

133
00:10:39,600 --> 00:10:44,360
वहां पर अष्टाध्याई कंठस्थ करके फिर

134
00:10:44,360 --> 00:10:48,480
मा भास से पढ़ा दर्शन पढ़े

135
00:10:48,480 --> 00:10:48,980
अब

136
00:10:48,720 --> 00:10:52,760
लगभग 30 वर्षों से गुरुकुल का आचार्य हूं अच्छा य

137
00:10:52,760 --> 00:10:57,320
छोटा सा तो अभी

138
00:10:57,320 --> 00:11:01,760
महोदय अभी आपके पास जो बच्चे सामने बैठे हुए हैं उनका

139
00:11:01,760 --> 00:11:06,120
मतलब किस कक्षा से किस आयु वर्ग के हैं हां

140
00:11:06,120 --> 00:11:10,800
लगभग 10 वर्ष से लेकर के 18 साल तक के हैं बच्चे

141
00:11:10,800 --> 00:11:15,440
अच्छा जो अभी वहां बैठे हैं साम हां हां हां इसमें

142
00:11:15,440 --> 00:11:19,520
बहुत से बच्चे अष्ट अध्याय याद कर रहे हैं कुछ

143
00:11:19,520 --> 00:11:23,640
अध्याय की व्याख्या पढ़ रहे हैं अच्छा अच्छा कुछ

144
00:11:23,640 --> 00:11:27,680
धातु वृति पढ़ रहे हैं अच्छा परीक्षाएं भी देते

145
00:11:27,680 --> 00:11:31,840
हैं अच्छा तो किसी एक बच्चे से जरा

146
00:11:31,840 --> 00:11:35,920
सा मिलवा जाएंगे थोड़ा सा अगर आपको आपत्ति ना हो तो हां हां

147
00:11:35,920 --> 00:11:41,880
बिल्कुल बिल्कुल किसी छोटे सबसे जो छोटा हो उसको जरा सा बुला

148
00:11:41,880 --> 00:11:45,920
दीजिए अच्छा छोटा बच्चा

149
00:11:45,920 --> 00:11:50,000
आ जाओ

150
00:11:50,000 --> 00:11:54,160
अभिजीत हा

151
00:11:54,160 --> 00:11:59,760
य बैठ जा य

152
00:11:59,760 --> 00:12:03,520
अभिजीत नाम है

153
00:12:03,520 --> 00:12:08,320
आपका अभिजीत आपको गायत्री मंत्र आता

154
00:12:08,320 --> 00:12:12,880
है हां जी सुनाइए हा

155
00:12:12,880 --> 00:12:18,040
जी थोड़ा सा सुनाइए पूरा नहीं थोड़ा

156
00:12:18,040 --> 00:12:24,040
सा ओ भरे भुव

157
00:12:25,800 --> 00:12:29,960
त बस बस बस बस बस आपका यज्ञ

158
00:12:29,960 --> 00:12:35,560
बत हो गया

159
00:12:35,560 --> 00:12:40,440
है जने संस्कार हुआ हा जी

160
00:12:40,440 --> 00:12:46,440
हो गया हा दिखाइए

161
00:12:48,480 --> 00:12:53,240
जने

162
00:12:53,240 --> 00:12:55,640
अरेख

163
00:12:55,640 --> 00:12:59,880
तो आपका यज्ञ संस्कार के सायु में हुआ

164
00:12:59,880 --> 00:13:02,680
बेटा

165
00:13:02,680 --> 00:13:06,920
अच्छा किस आयु में हुआ आपका अरे

166
00:13:06,920 --> 00:13:10,920
ये

167
00:13:10,920 --> 00:13:13,320
अच्छा

168
00:13:13,320 --> 00:13:17,360
11

169
00:13:17,360 --> 00:13:22,040
यानी ब्राह्मण के अनुसार आपका ज जन हुआ है

170
00:13:22,040 --> 00:13:26,560
ब्राह्मण के अनुसार हुआ ऐसा है

171
00:13:26,560 --> 00:13:31,400
शिवांश जी जी आर्य समाज

172
00:13:31,400 --> 00:13:35,720
में जो भी आते हैं आप थोड़ा सा कैमरा वैसे

173
00:13:35,720 --> 00:13:41,720
कर लीजिए उतर आपका कट रहा है अच्छा अच्छा

174
00:13:41,960 --> 00:13:47,960
देखिएगा

175
00:13:48,240 --> 00:13:52,500
य हमारे

176
00:13:52,500 --> 00:13:55,320
[संगीत]

177
00:13:55,320 --> 00:13:59,360
यहां किसी छात्र से किसी प्रकार की जाति चर्चा

178
00:13:59,360 --> 00:14:03,520
नहीं हो अच्छा नहीं नहीं वो ठीक

179
00:14:03,520 --> 00:14:07,600
है पढ़ाने वाले अध्यापक भी हैं हम

180
00:14:07,600 --> 00:14:11,760
बहुत से ऐसे अध्यापक हैं जो 12

181
00:14:11,760 --> 00:14:15,800
12 साल तक यहां शिक्षा दिए बच्चों को लेकिन

182
00:14:15,800 --> 00:14:20,000
हमें पता नहीं चला ये किस बिरादरी के है किस जाति के नहीं

183
00:14:20,000 --> 00:14:24,680
नहीं हमारे साथ छात्र पढ़ते थे जी

184
00:14:24,680 --> 00:14:28,760
नरेश जी अब विदेश आदमी घूमते

185
00:14:28,760 --> 00:14:33,960
हैं वैदिक धर्म का ही प्रचार करते हैं

186
00:14:33,960 --> 00:14:38,200
हम पढ़ कर के निकल गए और पढ़ने

187
00:14:38,200 --> 00:14:42,280
के बाद स्नातक बनने के कई सालों के

188
00:14:42,280 --> 00:14:46,440
बाद किसी व्यक्ति के द्वारा पता चला

189
00:14:46,440 --> 00:14:50,600
कि वे पंजाबी अच्छा हा

190
00:14:50,600 --> 00:14:54,720
और मेरे मित्र रहे साथ हम रहते रहे साथ हम

191
00:14:54,720 --> 00:14:57,040
भोजन भी करते थे तो

192
00:14:57,040 --> 00:15:01,080
आर्य समाज में ऐसा व्यवहार है कि पता ही

193
00:15:01,080 --> 00:15:05,320
नहीं चलता कौन किस बिरादरी का है यहां पर भी जैसे

194
00:15:05,320 --> 00:15:09,320
जो आते हैं पूछते हैं बहुत से लोग पूछते हैं कि इसमें कौन-कौन से बच्चे

195
00:15:09,320 --> 00:15:13,600
ब्राह्मण के हैं हम मना कर देते हैं कि यें

196
00:15:13,600 --> 00:15:17,640
किसी छात्र का जाति का पता नहीं है कौन किस

197
00:15:17,640 --> 00:15:21,720
जाति का है यहां इस पर चर्चा ही नहीं करते नहीं नहीं मैं

198
00:15:21,720 --> 00:15:25,760
असल में पूछ दूसरी बात रहा हूं जैसे इनका जब जने हुआ है यज्ञ

199
00:15:25,760 --> 00:15:30,160
पवित हुआ है इका ज ऐसा है जो गुरुकुल में जाति आप

200
00:15:30,160 --> 00:15:35,080
जैसे जो आप सब सबका ज संस्कार

201
00:15:35,080 --> 00:15:39,640
जी जी मैं एक बात पूछ रहा था मैं एक बात पूछ रहा था

202
00:15:39,640 --> 00:15:43,680
आवा रही है आवाज आ रही है आपकी आपकी आवाज

203
00:15:43,680 --> 00:15:48,120
आ रही है ठीक है बस तो मैं एक बात ये पूछ रहा था

204
00:15:48,120 --> 00:15:52,160
कि जैसे इसका जो जन जैसे आपके बच्चे का जने हो रहा

205
00:15:52,160 --> 00:15:56,280
है तो यह जन के बाद आपने डिसाइड नहीं किया कि

206
00:15:56,280 --> 00:16:00,280
ब्राह्मण है क्षत्रिय या वैश्य है नहीं हम तो

207
00:16:00,280 --> 00:16:04,560
डिसाइड है जब शिक्षा प्राप्त कर लेगा तब

208
00:16:04,560 --> 00:16:09,040
तब डिसाइड करेंगे कि ब्राह्मण है की क्षत्रिय है कि वैसे की सूत्र है

209
00:16:09,040 --> 00:16:12,400
तो तो जो संस्कार विधि है जो मनुस्मृति

210
00:16:12,400 --> 00:16:17,160
उसमें दिया गया है कि ब्राह्मण का जन इतने से इतने वर्ष के बीच में होना

211
00:16:17,160 --> 00:16:21,320
चाहिए जो ब्राह्मण का बच्चा है अष्टमी ब्राह्मण

212
00:16:21,320 --> 00:16:25,440
उने लिखा हुआ है मैं भी जानता हूं जी जी

213
00:16:25,440 --> 00:16:29,520
जी उसका तात्पर्य यह है कि अगर का बच्चा

214
00:16:29,520 --> 00:16:33,920
है आठवी में उसका संस्कार करें क्षत्रिय

215
00:16:33,920 --> 00:16:39,000
का दसवी में वैस का बवे

216
00:16:39,000 --> 00:16:43,200
में ब्राह्मण का इसलिए करें कि अगर माता पिता ब्राह्मण

217
00:16:43,200 --> 00:16:47,320
है तो निश्चित रूप से उसके अंदर कुछ संस्कार आएंगे

218
00:16:47,320 --> 00:16:51,440
अच्छे संस्कार आ ब्राहमण मतलब

219
00:16:51,440 --> 00:16:55,680
प्राथमिक रू शिवांश जी व्याकरण

220
00:16:55,680 --> 00:17:00,240
महाभाष्य में लिखा है कुभ

221
00:17:00,240 --> 00:17:04,400
का प्राचीन काल के ब्राह्मण के लिए प्राचीन काल में जो ब्राह्मण होते

222
00:17:04,400 --> 00:17:08,600
थे बड़े त्यागी तपस्वी धर्मात्मा होते थे और आर्य समाज में

223
00:17:08,600 --> 00:17:12,600
ब्राह्मण का बहुत मान्य

224
00:17:12,600 --> 00:17:17,240
है उसचा है यानी कि प्राथमिकता

225
00:17:17,240 --> 00:17:21,440
से जो यज पवित या प्राथमिकता से जो वर्ण हम मानते हैं वह मानते

226
00:17:21,440 --> 00:17:26,200
हैं जन्म से उसके माता पिता कौन है उसके हिसाब से उसको ब्राह्मण क्त्र अथ वै मान लिया

227
00:17:26,200 --> 00:17:30,200
जाएगा नहीं मानते ब्राहमण अ वहा तात्पर्य है कि

228
00:17:30,200 --> 00:17:34,000
अगर ब्राह्मण के परिवार का

229
00:17:34,000 --> 00:17:38,440
है ब्रहण के अनुस मात मान पमान आचार

230
00:17:38,440 --> 00:17:42,960
पुरुष वेद न लिखते है

231
00:17:42,960 --> 00:17:47,320
तो इनका ज जिसके माता पिता विद्वान हा

232
00:17:47,320 --> 00:17:51,880
मैं समझ इनका जो जन हुआ है ये आ से 12 के बीच में हुआ होगा

233
00:17:51,880 --> 00:17:56,320
तो इसका मतलब ब बता आपको

234
00:17:56,320 --> 00:18:00,800
जी देखिए ऐसा एक तो व्यवस्था थी संस्कार विधि में

235
00:18:00,800 --> 00:18:05,360
जो ऋषि दयानंद ने लिखा है ऋषियों का मान्य रखने के लिए

236
00:18:05,360 --> 00:18:09,760
उन्होंने बातें लिखी हैं और

237
00:18:09,760 --> 00:18:13,800
लेकिन अक्षर सा पालन नहीं होता है सामूहिक

238
00:18:13,800 --> 00:18:18,040
रूप से सबका संस्कार श्रावणी पर पर सबका सम जन

239
00:18:18,040 --> 00:18:22,120
संस्कार हो जाता है जो नए बच्चे आते हैं और जो पुराने

240
00:18:22,120 --> 00:18:26,160
बच्चे हैं उ नया धारण करते पुराना उतार देते

241
00:18:26,160 --> 00:18:27,760
मतलब ये ध्यान दि

242
00:18:27,760 --> 00:18:31,840
बना मतलब ये ध्यान दिए बिना ही ब्राह्मण के अनुसार

243
00:18:31,840 --> 00:18:36,360
होना है या क्षत्रिय के अनुसार होना है वो संस्कार विधि को ध्यान दिए

244
00:18:36,360 --> 00:18:40,520
बिना ऐसा है कि

245
00:18:40,520 --> 00:18:45,280
देश काल परिस्थिति के अनुसार कुछ परिवर्तन हम कर लेते हैं

246
00:18:45,280 --> 00:18:50,120
जैसे संस्कार ऋषि दयानंद ने सत्या प्रकाश में

247
00:18:50,120 --> 00:18:54,120
और संस्कार विधि में भी विधवा विवाह का विधान नहीं

248
00:18:54,120 --> 00:18:56,560
किया है

249
00:18:56,560 --> 00:19:00,800
शुद्रास पुनर्विवाह शुद्र विधवा है

250
00:19:00,800 --> 00:19:05,000
उसका लिखा है उन्होंने लेकिन ऋषि दयानंद ने अपने जीवन काल में ही

251
00:19:05,000 --> 00:19:09,200
सभी विधवाओं के विवाह का समर्थन किया था

252
00:19:09,200 --> 00:19:13,200
और स्वामी श्रद्धानंद जी ने विधवा विवाह

253
00:19:13,200 --> 00:19:17,360
का जो है जोर शोर से प्रचार किया समर्थन किया

254
00:19:17,360 --> 00:19:21,760
और करवाना शुरू कर दिया न

255
00:19:21,760 --> 00:19:26,080
ने जो सत्या प्रकाश और संस्कार विधि में यह ऋषियों

256
00:19:26,080 --> 00:19:30,320
का मान्य रखने के लिए उन बातो को रख दिया लेकिन अपने जीवन

257
00:19:30,320 --> 00:19:34,440
काल में उन्होंने पुन विधवाओं के विवाह का समर्थन किया

258
00:19:34,440 --> 00:19:39,680
कि सभी विधवाओं का चाहे ब्राह्मण का हो क्योंकि

259
00:19:39,680 --> 00:19:43,880
ने दो मिनट सुनि जी सर्वत्र

260
00:19:43,880 --> 00:19:47,960
देखा था जो ब्राह्मण की ब्राह्मण

261
00:19:47,960 --> 00:19:52,200
विधवा है या तथाकथित हो या रियल

262
00:19:52,200 --> 00:19:56,200
की ब्राह्मण हो किसी ब्राह्मण

263
00:19:56,200 --> 00:20:00,640
बच्चे की शादी हुई 14 साल की उम्र में या 16 साल की उम्र में

264
00:20:00,640 --> 00:20:04,680
उत्तर प्रदेश बिहार में विवाह होता था उसके बाद दो

265
00:20:04,680 --> 00:20:08,760
साल तीन साल के बाद गौना होता था अ भी ऐसा

266
00:20:08,760 --> 00:20:13,440
कुछ प्रचलन है गांव में तो उस समय

267
00:20:13,440 --> 00:20:17,640
लड़की पति के घर नहीं जाती थी विवाह के समय गौना

268
00:20:17,640 --> 00:20:21,720
के समय जाती थी तो जैसे मान लीजिए युवक है ब्राह्मण

269
00:20:21,720 --> 00:20:25,720
का बेटा है 16 साल की उम्र में उसका विवाह

270
00:20:25,720 --> 00:20:30,160
हो गया गौना नहीं हुआ दुर्भाग्य से उसका देहांत

271
00:20:30,160 --> 00:20:34,200
हो गया ठीक है तो वह जो है लड़की

272
00:20:34,200 --> 00:20:38,920
विधवा हो गई और उसका विवाह नहीं होता था

273
00:20:38,920 --> 00:20:43,880
तो फिर क्या होता था प्राय करके व्यभिचार बनती थी

274
00:20:43,880 --> 00:20:48,160
मैंने अपनी आंखों से देखा है

275
00:20:48,160 --> 00:20:52,200
एक ऐसे ही लड़की जो है वो विधवा

276
00:20:52,200 --> 00:20:54,840
हो गई सारे उसके

277
00:20:54,840 --> 00:20:58,960
सुख छीन लिए गए मुंडन हो गया सफेद

278
00:20:58,960 --> 00:21:03,040
वस्त्र दे दिया गया त्याग तप की उपदेश दे दिया गया लेकिन धीरे धीरे जब बड़ी

279
00:21:03,040 --> 00:21:07,960
हुई तो छुप छुप करके उसने जो है उल्टे सीधे काम शुरू कर द

280
00:21:07,960 --> 00:21:12,240
और आपने भी देखा होगा जो विधवा आश्रम थे महिला ती है

281
00:21:12,240 --> 00:21:17,080
इन सबको देख कर के महर्ष दयानंद सरस्वती ने सबके सभी विधवाओं का विवाह का उन्होंने

282
00:21:17,080 --> 00:21:21,520
समर्थन किया आर्य समाज ने जोर शोर से कहा कि सभी विधवाओं का विवाह हो जाना चाहिए

283
00:21:21,520 --> 00:21:25,560
हम लोग समर्थन करते हैं मतलब ऋषियों

284
00:21:25,560 --> 00:21:29,560
ने नहीं माना था विधवा विवाह आर्य समाज ने माना जो

285
00:21:29,560 --> 00:21:33,640
रीति रिवाज है संस्कार आदि है देश काल परिस्थिति के अनुसार इसके

286
00:21:33,640 --> 00:21:38,000
अंदर परिवर्तन कर लेना चाहिए मुल्ला की तरह कठ मुला नहीं होना चाहिए

287
00:21:38,000 --> 00:21:42,520
आज मुल्ला की क्या हालत है आप देख रहे हैं अधिकतर

288
00:21:42,520 --> 00:21:46,800
पढ़े लिखे जो मुस्लिम है इस्लाम धर्म को छोड़ रहे हैं नास्तिक बन रहे हैं

289
00:21:46,800 --> 00:21:51,640
एकस मुस्लिम आप इनका जब पढ़ेंगे तो सुनेंगे इलाम

290
00:21:51,640 --> 00:21:55,960
को छोड़ बात रखना चाहूंगा आपने काफी विवेचना

291
00:21:55,960 --> 00:22:00,040
मैं थोड़ी सी बात रखना चाहूंगा कि हम कहते कि हमारा जो

292
00:22:00,040 --> 00:22:06,040
धर्म है वो सनातन है

293
00:22:07,720 --> 00:22:13,720
अपरिवर्तनीय

294
00:22:14,960 --> 00:22:19,320
शल नहीं है वह शाश्वत है ठीक है

295
00:22:19,320 --> 00:22:23,440
तो अब हम कह रहे हैं कि जो ऋषियों ने जो चीजें की थी लागू

296
00:22:23,440 --> 00:22:27,560
वो ना करके क्योंकि जो स्त्रिया है व वय विचार

297
00:22:27,560 --> 00:22:31,200
हो रही है इसलिए उनका

298
00:22:31,200 --> 00:22:35,320
हारी मैं मुझे अपनी बात रख मैंने आपका काफी लंबा सुना है मैं

299
00:22:35,320 --> 00:22:39,440
अभी थोड़ा अपनी बात मैंने जो आपका सुना है ना मैं बस

300
00:22:39,440 --> 00:22:43,480
उसको रिपीट कर रहा हूं जिससे मैं जो समझाऊं वो कंफर्म कर

301
00:22:43,480 --> 00:22:48,080
लू बस तो हमारा धर्म हमारा धर्म है सनातन

302
00:22:48,080 --> 00:22:52,240
जो परिवर्तनशील नहीं है नित्य स्थाई शाश्वत तो

303
00:22:52,240 --> 00:22:56,240
आपका कहना है कि ऋषियों ने जो हमें दिया जो विधि विधान

304
00:22:56,240 --> 00:23:00,560
दिया काल परिस्थिति के अनुरूप हम अपने अनुसार अपने

305
00:23:00,560 --> 00:23:04,760
मतलब जो हमें ठीक लगे उसमें हम थोड़ा सा बदलाव कर लेते हैं

306
00:23:04,760 --> 00:23:09,440
अब इसमें पहली प्रॉब्लम य आएगी कि जो बदलाव करेगा वह कौन होगा

307
00:23:09,440 --> 00:23:13,800
पहली प्रॉब्लम तो य किसके द्वारा किया जाने वाला बदलाव मान्य होगा

308
00:23:13,800 --> 00:23:17,800
यह प्रॉब्लम आ गई दूसरी प्रॉब्लम यह आ गई

309
00:23:17,800 --> 00:23:21,800
कि ऋषियों ने क्या सोच समझ करके उस विधान को

310
00:23:21,800 --> 00:23:22,880
दे दिया था और

311
00:23:22,880 --> 00:23:26,880
सही विधान नहीं दिया था यह भी एक प्रॉब्लम आ गई तीसरी

312
00:23:26,880 --> 00:23:31,720
प्रॉब्लम यह आ गई कि हम क्या कह रहे हैं कि व्यभिचार ना हो इसलिए

313
00:23:31,720 --> 00:23:35,840
जो गलत जो जैसे कि गौ हत्या गौ हत्या

314
00:23:35,840 --> 00:23:39,840
को लोग गलत ना कहे इसलिए गौ हत्या के लिए हमने वैद वो

315
00:23:39,840 --> 00:23:44,320
खोल दिए क्या कहते हैं कत्ल खाने वैद कर दिए

316
00:23:44,320 --> 00:23:48,440
उसी तरीके से अगर स्त्री को किसी पुरुष के संपर्क में

317
00:23:48,440 --> 00:23:52,480
नहीं आना है तो हमने उसको पुरुष में पुरुष के संपर्क में आने का

318
00:23:52,480 --> 00:23:56,600
सर्टिफिकेट दे दिया यही हुआ ना शादी करा दी

319
00:23:56,600 --> 00:24:00,680
अच्छा आपका कहना जी जी आपका ये कहना है कि

320
00:24:00,680 --> 00:24:04,760
मैंने मैंने खुद देखा है विधवा हो जाने के बाद जो स्त्रियां

321
00:24:04,760 --> 00:24:09,160
है वो वय विचार हो रही है पर क्या आपने यह नहीं देखा होगा

322
00:24:09,160 --> 00:24:13,320
कि स्त्रियां विधवा वो विवाह में रहते हुए भी व्यभिचार हो रही है पुरुष

323
00:24:13,320 --> 00:24:17,400
हो रहे हैं उसका क्या करें अच्छा हमने उसका विवाह करा दिया कि अब

324
00:24:17,400 --> 00:24:21,640
उसकी विचार जो व्यभिचार है उसके जीवन से समाप्त हो जाए तो प्रश्न य आएगा

325
00:24:21,640 --> 00:24:25,720
उसका फिर से हस्बैंड खत्म हो जाएगा फिर उसका विवाह कराओ फिर अगर खत्म हो

326
00:24:25,720 --> 00:24:30,000
गया तो फिर विवाह कराओ तो ये एक प्रोसेस की वो विचार ना हो व्यभिचारी

327
00:24:30,000 --> 00:24:34,480
तो व्यक्ति विवाह में रहते हुए भी हो रहा है और व्यभिचारी व्यक्ति

328
00:24:34,480 --> 00:24:38,120
अगर वह विवाह होता है फिर खत्म हो जाएगा तो क्या हम फिर विवाह कराएंगे

329
00:24:38,120 --> 00:24:42,200
फिर विवाह कराएंगे तो क्या य एक यह बहुत सारे क्वेश्चन

330
00:24:42,200 --> 00:24:46,320
उ जाते हैं जो आपने व्याख्या की है उ जा क रहे आप देखि

331
00:24:46,320 --> 00:24:50,360
ऐसा है कि संभावना कम होती है

332
00:24:50,360 --> 00:24:54,440
जो ग्रस्त होते हैं आपने भी देखा होगा जब

333
00:24:54,440 --> 00:24:58,440
तक कोई युवक है उसका विवाह नहीं

334
00:24:58,440 --> 00:25:02,560
हुआ है तब तक तो इधर उधर जो है झांकता

335
00:25:02,560 --> 00:25:06,600
है देखता है उल्टे सीधे काम

336
00:25:06,600 --> 00:25:10,680
भी करता है जब विवाह हो जाता है तो प्राय सुधर

337
00:25:10,680 --> 00:25:15,360
जा बहुत कम चांस रहते हैं उस बिगड़ने के ली

338
00:25:15,360 --> 00:25:19,520
हम लोग मान रहे ये हम लोग मान रहे

339
00:25:19,520 --> 00:25:25,160
आप भी तो सुनिए

340
00:25:25,160 --> 00:25:29,160
सुन मैंने खुद देखा है बहुत से लोग हमारे

341
00:25:29,160 --> 00:25:33,160
पास आते हैं और कहते हैं कि य मेरा बेटा बिगड़ा हुआ

342
00:25:33,160 --> 00:25:37,360
है क्या करें देख सुन कर के हम कहते हैं विवाह कर दो

343
00:25:37,360 --> 00:25:41,520
ये खोटे से बध जाएगा तो सुधर जाएगा मैंने अपने जीवन

344
00:25:41,520 --> 00:25:45,760
में ही कई ऐसे युको को सुधारा है ठीक है

345
00:25:45,760 --> 00:25:50,400
प्राय जो है सुधर जाते हैं कहने का मतलब ये है कि जो

346
00:25:50,400 --> 00:25:54,560
हम कहने का मतलब ये है ऋषियों के भी बिगड़ जाते हैं

347
00:25:54,560 --> 00:25:58,640
ग गृहस्थ स्त्रिया भी बिगड़ जाती है लेकिन कने

348
00:25:58,640 --> 00:26:02,840
का जिस स्त्री का विवाह हो जाए तो संभावना

349
00:26:02,840 --> 00:26:07,040
कम र ठीक कहने का अर्थ ये है कि हम

350
00:26:07,040 --> 00:26:10,360
धर्म की बात

351
00:26:10,360 --> 00:26:14,960
जी सनातन किसे कहते हैं सदा भव सनातनम

352
00:26:14,960 --> 00:26:19,600
आज बड़ी जोर शोर से चर्चा हो रही है के सनातन

353
00:26:19,600 --> 00:26:24,120
सनातन धर्म सनातन लेकिन सनातन क्या निरुक्त में कहा है

354
00:26:24,120 --> 00:26:28,560
सदा भव सनातनम जो सदा से रहता है उसको सनातन कहते

355
00:26:28,560 --> 00:26:33,880
सदा से क्या रहता है ईश्वर जीव प्रकृति ये

356
00:26:33,880 --> 00:26:39,080
तीन सनातन है परमात्मा सनातन है जो सदा रहता

357
00:26:39,080 --> 00:26:40,840
है जीव

358
00:26:40,840 --> 00:26:44,840
सदा रहता है और प्रकृति भी सदा रहती है ये तीन

359
00:26:44,840 --> 00:26:49,160
सनातन है हम और इसके अलावा परमात्मा का जो ज्ञान

360
00:26:49,160 --> 00:26:53,240
है हम और परमात्मा का ज्ञान भी

361
00:26:53,240 --> 00:26:57,440
सनातन है तो सनातन का तात्पर्य है वेद

362
00:26:57,440 --> 00:27:01,720
वेद वैदिक ज्ञान ही सनातन है और बाकी

363
00:27:01,720 --> 00:27:05,960
जो चीज है य सनातन नहीं है सनातन वैदिक

364
00:27:05,960 --> 00:27:10,520
धर्म ही वेद का ज्ञान ही सनातन है और य रीति रिवाज

365
00:27:10,520 --> 00:27:15,200
है रीति रिवाज देश काल परिस्थिति के अनुसार

366
00:27:15,200 --> 00:27:19,400
कभी चला जसे किसी काल में प्रथा को महिलाओं

367
00:27:19,400 --> 00:27:23,560
ने अपनाया चलिए

368
00:27:23,560 --> 00:27:27,560
ने वो देखिए आज का हमारा मुख्य टॉपिक य नहीं हम लोग किसी और दिन

369
00:27:27,560 --> 00:27:32,280
बैठ के बात हां हमारा विषय था सारे

370
00:27:32,280 --> 00:27:36,280
प्रश्न हां श्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं

371
00:27:36,280 --> 00:27:40,400
है कई सारे प्रश्न एक मिनट कई सारे प्रश्न

372
00:27:40,400 --> 00:27:44,480
उठते हैं तो उसमें से क्या है कि अभीर हर पॉइंट प अगर बात करेंगे तो

373
00:27:44,480 --> 00:27:48,520
वो इसी का होके रह जाएगा तो एक संपत में मैंने

374
00:27:48,520 --> 00:27:52,560
अपने कुछ क्वेश्चन पुट अप कर दिए हैं हम लोग फिर किसी दिन बैठे

375
00:27:52,560 --> 00:27:57,080
इस बारे में हम पूछेंगे आप इसका उत्तर दीजिएगा ऐसे

376
00:27:57,080 --> 00:28:00,000
एक चीज मैं और

377
00:28:00,000 --> 00:28:04,200
एक मिनट एक चीज मैं और समझा कि आपने

378
00:28:04,200 --> 00:28:08,200
ज बताया कि हमारे संस्कार विधि में बताया गया

379
00:28:08,200 --> 00:28:12,400
है कि ब्राह्मण का जनेऊ इतने से इतने के वर्ष के बीच में हो जाना

380
00:28:12,400 --> 00:28:16,480
चाहिए तो अभी जो आप जन करा रहे हैं यज्ञ पवित जो करा रहे

381
00:28:16,480 --> 00:28:20,640
हैं वो आप इस हिसाब उस विधि के अनुसार नहीं करा रहे

382
00:28:20,640 --> 00:28:26,640
हम सबका एक साथ करा दे रहे वो ब्राह्मण क्षत्रियो वैश्य या सब

383
00:28:30,000 --> 00:28:34,040
सुनि एक मिनट बा

384
00:28:34,040 --> 00:28:39,360
अपनी बात मेरी बात भी

385
00:28:39,360 --> 00:28:43,440
सुनो कभी आप पहन लेते हैं पहनते नहीं

386
00:28:43,440 --> 00:28:49,440
पहनते मैंने

387
00:28:49,560 --> 00:28:54,480
कहा उसको बता दू मैं

388
00:28:54,480 --> 00:28:58,520
बनल है आत्र बात करते

389
00:28:58,520 --> 00:29:02,520
तो आपके अंदर भी तो परिवर्तन आ जाता है आपने प्रश्न पूछा

390
00:29:02,520 --> 00:29:06,560
तो मैं आपको बता दूं ठीक है आपने कहा कि मैं आधुनिक वस्त्र पहन

391
00:29:06,560 --> 00:29:10,560
लेता हूं कभी-कभी तो मैं बिल्कुल आधुनिक वस्त्र पहन लेता

392
00:29:10,560 --> 00:29:14,640
हूं कभी-कभी मगर मैं उस आधुनिक वस्त्र पहनने को धर्म के रूप में

393
00:29:14,640 --> 00:29:19,120
खपत नहीं करता नहीं तो ये सिद्धांत है

394
00:29:19,120 --> 00:29:23,360
मेरा ऐसा करना सही है कभी पढ़ते नहीं प लेकिन

395
00:29:23,360 --> 00:29:28,560
क्या ये बण के लिए उचित है मैं क्या कह रहा हूं मैं क्या कह रहा हूं देखण

396
00:29:28,560 --> 00:29:32,640
प्र ब दे परि

397
00:29:32,640 --> 00:29:36,800
के अ चलता हो भाई साब इसम प्रश्न दो उठते

398
00:29:36,800 --> 00:29:40,800
हैं देश काल परिस्थिति के अनुसार एलजीबीटी क्यू वाले करेंगे कि अभी कल को

399
00:29:40,800 --> 00:29:44,800
लोग कहने लगे देश काल परिस्थिति के अनुसार बहन के साथ विवाह मान्य कर दो

400
00:29:44,800 --> 00:29:45,300
कुछ

401
00:29:45,000 --> 00:29:50,520
लोग ऐसे आएंगे तो फिर दिक्कत य आएगी

402
00:29:50,520 --> 00:29:54,840
सुन एक मिनट साब सुनिए सु

403
00:29:54,840 --> 00:29:59,040
जब तो फिर दिक्कत य आएगी देश काल परिस्थिति के अनुसार अगर कुछ बदलना

404
00:29:59,040 --> 00:30:03,400
है तो वो कौन बदलेगा उसकी दिक्कत आएगी फिर तो

405
00:30:03,400 --> 00:30:07,920
ह माता के साथ सुनि हर व

406
00:30:07,920 --> 00:30:13,200
माता के साथ के

407
00:30:13,200 --> 00:30:17,640
सा दूस बात दूसरी बात य जैसे आपने बोला कि सनातन

408
00:30:17,640 --> 00:30:21,640
शंकर वो अंग्रेजी कपड़े पहन कर के वीडियो बनाता है मैं भी अंग्रेजी

409
00:30:21,640 --> 00:30:25,840
कपड़े पहन लेता हूं तो मैं सपने अंग्रेजी पन को धर्म के रूप में ख्या

410
00:30:25,840 --> 00:30:31,600
पित नहीं करता हूं स

411
00:30:31,600 --> 00:30:35,640
ऐ इसको सम लीजिए को धर्म

412
00:30:35,640 --> 00:30:38,240
बताते रिवाज

413
00:30:38,240 --> 00:30:44,240
नहीं मनुम में मनुस्मृति में

414
00:30:45,600 --> 00:30:47,760
धर्म

415
00:30:47,760 --> 00:30:51,920
लिए लिए तेरे लिए कत

416
00:30:51,920 --> 00:30:56,080
तेरे लिए एक मिनट तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक

417
00:30:56,080 --> 00:31:00,160
मात्र शास्त्र प्रमाण है तो आपका कहने का

418
00:31:00,160 --> 00:31:04,440
मतलब है कि कई मोड़ पर आर्य समाज आर्य समाजी शास्त्रों

419
00:31:04,440 --> 00:31:08,520
पर नहीं चलते हैं मन मुताबिक चलते हो और अपने मन मुताबिक चलने को भी

420
00:31:08,520 --> 00:31:11,680
वह कहते हैं कि य धर्म

421
00:31:11,680 --> 00:31:16,360
है अगर अगर मैं अी

422
00:31:16,360 --> 00:31:22,360
जाते आपका टरनेट इंटरनेट आपका कट रहा है

423
00:31:34,720 --> 00:31:38,720
आवाज आ रही है हम अच्छा

424
00:31:38,720 --> 00:31:42,920
अब हम विषय पर चर्चा करते हैं हां विषय पर करते हैं

425
00:31:42,920 --> 00:31:46,920
विषय पर करते ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं है

426
00:31:46,920 --> 00:31:51,120
अवतार ता है कि नहीं है तो क्या तो

427
00:31:51,120 --> 00:31:55,200
ईश्वर सर्वशक्तिमान है और सर्वशक्तिमान का

428
00:31:55,200 --> 00:32:00,040
अर्थ ये है कि जो चाहे सो एक मिनट भाई साहब

429
00:32:00,040 --> 00:32:04,040
हा हा मैं कुछ बोल रहा हूं ना हां बोलिए बोलिए मैं

430
00:32:04,040 --> 00:32:08,720
अपना प्रश्न रख देता हूं कि क्या आर्य

431
00:32:08,720 --> 00:32:12,880
समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला पूजित होने वाला परिभाषित होने

432
00:32:12,880 --> 00:32:17,080
वाला जो ईश्वर है वह अनंत सामर्थ्य वान सर्वशक्तिमान

433
00:32:17,080 --> 00:32:21,160
है या नहीं अब आप बताइए हां आपके प्रश्न में

434
00:32:21,160 --> 00:32:25,240
ही मेरा उत्तर है आप ये बताइए आप क्या

435
00:32:25,240 --> 00:32:29,520
मानते हैं आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानते हैं और ईश्वर अवतार

436
00:32:29,520 --> 00:32:32,360
लेता है कि नहीं लेता

437
00:32:32,360 --> 00:32:37,680
है आप अपना उत्तर रखिए फिर मेरे से ज प्रश्न

438
00:32:37,680 --> 00:32:42,160
करें प्र मेरे प्रश्न में ही आपका उत्तर है

439
00:32:42,160 --> 00:32:46,320
आप बताइए आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानते हैं

440
00:32:46,320 --> 00:32:50,120
आप अपनी बात कह दीजिए कि हम यह मानते हैं

441
00:32:50,120 --> 00:32:54,880
आप अपनी बात कहिए ठीक है आपने प्रश्न पूछा

442
00:32:54,880 --> 00:32:59,080
ठीक है मैं उत्तर देता हूं फिर मैं प्रश्न पूछूंगा मैं

443
00:32:59,080 --> 00:33:03,280
ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानता हूं और यह मानता हूं कि ईश्वर

444
00:33:03,280 --> 00:33:07,400
नहीं लेता अब मेरा प्रश्न सुनिए अरे भाई जब

445
00:33:07,400 --> 00:33:13,400
आपने ज विषय आपने बोला है कि ईश्वर जो है सर्वशक्तिमान

446
00:33:22,520 --> 00:33:26,720
है भाई साब मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आपने क्लेम

447
00:33:26,720 --> 00:33:31,600
किया है मुझे उसका तो करने दीजिए वो विषय खत्म कहा हो

448
00:33:31,600 --> 00:33:36,080
गया मैं आपसे पूछ रहा हूं यदि वो सर्वशक्तिमान है

449
00:33:36,080 --> 00:33:40,080
सर्वशक्तिमान है तो क्या वह अवतार ले सकता है अब आपने कहा अवतार

450
00:33:40,080 --> 00:33:44,640
नहीं ले सकता जब अवतार नहीं ले सकता तो आवता

451
00:33:44,640 --> 00:33:49,400
नहीं व देखिए

452
00:33:49,400 --> 00:33:53,520
आवश्यकता है कि नहीं दो बातें मत करिए अवतार ले सकता है कि नहीं यह बताइए

453
00:33:53,520 --> 00:33:57,760
पहले नहीं नहीं ले सकता नहीं ले सकता तो

454
00:33:57,760 --> 00:34:02,120
जब वो नहीं ले सकता है तो आपने जो सर्व विशेषण लगाया हुआ है शक्तिमान

455
00:34:02,120 --> 00:34:05,280
के सामने सर्व वो हटा दीजिए

456
00:34:05,280 --> 00:34:10,120
सर्व शक्तिमान का अर्थ यह है कि अपने कार्य में परमात्मा

457
00:34:10,120 --> 00:34:14,280
हम पुन समर्थ है ईश्वर सृष्टि की रचना करने में पालन

458
00:34:14,280 --> 00:34:19,000
करने में संघार करने में जो उसका संविधान संविधान के अनुसार

459
00:34:19,000 --> 00:34:23,120
परमात्मा सब करने में समर्थ है तो इसका

460
00:34:23,120 --> 00:34:27,960
मतलब मेरा प्र सुन मैं अभी आपकी बात

461
00:34:27,960 --> 00:34:32,320
आप प्रश् पूछेंगे ऐसा नहीं है आप जानते

462
00:34:32,320 --> 00:34:36,600
हैं आप जानते हैं कि आपने जो उत्तर दिया है ये अभी पूरा नहीं हुआ है आप खुद जानते

463
00:34:36,600 --> 00:34:42,080
हैं जान फिर वही आप तो उतर दो इस प्रॉब्लम ये

464
00:34:42,080 --> 00:34:46,880
है बा मुझे भी तो पूछने का अवसर दीजिए

465
00:34:46,880 --> 00:34:51,240
कि केवल आप भाई साहब सुनिए आप ज्यादा से ज्यादा क्या

466
00:34:51,240 --> 00:34:55,280
एक मिनट भाई भाई साहब एक मिनट अपनी बात रख लू मैं अपनी बात रख लू कि

467
00:34:55,280 --> 00:35:01,280
मैं क्या करने वाला हूं मैं अपनी बता दूं आपको

468
00:35:21,880 --> 00:35:25,880
मैं के प्रतिकार में आप मुझसे क्वेन करेंगे तो ज्यादा से ज्यादा

469
00:35:25,880 --> 00:35:30,160
यही तो होगा गलत साबित कर देंगे यही करेंगे

470
00:35:30,160 --> 00:35:34,320
ना यही करेंगे ना क्या मेरे क्या मेरे गलत साबित

471
00:35:34,320 --> 00:35:40,320
हो जाने से आपका सही

472
00:35:42,720 --> 00:35:47,160
होना अरे भाई साब

473
00:35:47,160 --> 00:35:51,240
आपका फिर वही बात अभी आपका सिद्धांत क्लियर नहीं हुआ ना आप

474
00:35:51,240 --> 00:35:55,200
अपने

475
00:35:55,200 --> 00:36:01,200
स बोल

476
00:36:06,240 --> 00:36:10,480
देख जो आप बोले हो उस बहुत सारी

477
00:36:10,480 --> 00:36:14,680
जो आप भाई साहब मैं जो भी मानता हूं मैं आपको बताऊंगा

478
00:36:14,680 --> 00:36:18,880
मेरे मानना यदि मेरा मानना आप गलत साबित कर देंगे

479
00:36:18,880 --> 00:36:23,880
तो आप जो है सि नहीं हो जाए

480
00:36:23,880 --> 00:36:29,880
अभी आपकी चीज जस्टिफाई नहीं हो पाई है आप आप अभी आप

481
00:36:30,240 --> 00:36:34,880
नहीं साथ साथ मैं भी प्रश्न पूछूंगा और

482
00:36:34,880 --> 00:36:39,440
सा फिर कोई बात भाई साब फिर कोई बात हो ही नहीं सकती

483
00:36:39,440 --> 00:36:43,720
अगर साथ साथ आप प्रश्न ही पूछते जाएंगे प्रश्न के जवाब में प्रश्न पूछे जाएंगे

484
00:36:43,720 --> 00:36:49,720
तो कोई बात होनी नहीं है अपने

485
00:36:50,960 --> 00:36:55,560
स्टेटमेंट स्टेटमेंट को एकस

486
00:36:55,560 --> 00:37:00,520
कर अपनेट इसे बताने में क्या हर्ज है ये

487
00:37:00,520 --> 00:37:04,640
बताइए बात ये है बात ये है कि विषय बदल जाएगा अभी जो आपने

488
00:37:04,640 --> 00:37:08,800
बोला है वो करना पड़ेगा

489
00:37:08,800 --> 00:37:13,120
अरे क्यों कर ले जब अभी जब चर्चा चल रही तो उसको पूरा करिए ना आप आपने

490
00:37:13,120 --> 00:37:18,040
अपनी कही हुई बात है आपको अपनी कही हुई बात पर डाउट है क्या

491
00:37:18,040 --> 00:37:22,120
आपको अपनी कही हु बात ट है भाई साब भाई साहब आपको चर्चा करनी

492
00:37:22,120 --> 00:37:26,560
नहीं है नहीं जब तक आप उत्तर नहीं देंगे आगे बात नहीं बढ़ेगी आपको

493
00:37:26,560 --> 00:37:30,600
चर्चा करनी नहीं है प्रश्न के जवाब में प्रश्न प्रश्न के जवाब में

494
00:37:30,600 --> 00:37:35,120
प्रश्न नहीं पूछा जाता मत मैंने अपना मंत रख लिया

495
00:37:35,120 --> 00:37:39,160
अरे मैं तो र रहा हं तभी तो आया हं मैं ईश्वर को श्वर अवतार

496
00:37:39,160 --> 00:37:43,240
लेने वाला मानता हं तभी तो आया मैंने आपके गुरु का नाम नहीं पूछा आपने गुरु का भी नाम

497
00:37:43,240 --> 00:37:48,840
पूछ

498
00:37:48,840 --> 00:37:54,280
लियाने

499
00:37:54,280 --> 00:37:58,400
किया मैं बता रहा हूं मैं बता रहा यद मैं आप आया होता

500
00:37:58,400 --> 00:38:04,400
तो अपने बारे में बताता आप अगर कहते तो और हो

501
00:38:10,200 --> 00:38:14,360
सताने ईश्वर को सर्वशक्तिमान मान हमारा मंतव्य

502
00:38:14,360 --> 00:38:19,320
जो है है आपको मालूम

503
00:38:19,320 --> 00:38:23,440
भी आपने क्लेम किया

504
00:38:23,440 --> 00:38:28,080
हैने किया उस पले विय बदलना चाह रहे

505
00:38:28,080 --> 00:38:33,800
मैं विल नहीं बदलना चाहता इसी पर चर्चा करें तो मैं

506
00:38:33,800 --> 00:38:37,880
पूछ आपने शक्तिमान का अर्थ बताया तो मुझे क्वेश्चन करने दीजिए

507
00:38:37,880 --> 00:38:40,800
ना उसके बारे

508
00:38:40,800 --> 00:38:44,880
में वो बात खत्म नहीं हुई ना नहीं पहले

509
00:38:44,880 --> 00:38:50,880
आप बताइए आप बताइए आपका

510
00:38:51,800 --> 00:38:57,800
मत को मानता दिया

511
00:38:57,800 --> 00:39:02,640
अवतार को मानता हूं ईश्वर अवतार ले सकता है अब मैं क्वेश्चन पूछू

512
00:39:02,640 --> 00:39:07,560
ईश्वर अव क् पूछ हा मैं क्वेश्चन पूछू

513
00:39:07,560 --> 00:39:12,120
अब आया ना आपके पास अगला सवाल आया आपके पास अगला सवाल

514
00:39:12,120 --> 00:39:16,240
आया अब आया ना आप अगले सवाल आए जब तक

515
00:39:16,240 --> 00:39:20,760
एक क्वेश्चन पूछा हुआ उससे कोई संतुष्ट नि नहीं

516
00:39:20,760 --> 00:39:25,080
निकलता दूसरा क्वेश्चन अगर लाएंगे दूसरा विषय उड़ेंगे

517
00:39:25,080 --> 00:39:30,640
कि मैं क्या मानता हूं मैं सही हूं कि नहीं मैं गलत नहीं तो फ आपका

518
00:39:30,640 --> 00:39:35,040
विने पूछने उतर दिया फिर आपने समीक्षा कर लू

519
00:39:35,040 --> 00:39:41,040
तो समीक्षा कर अभ समीक्षा

520
00:39:43,920 --> 00:39:49,920
नहीं सुनि आपने

521
00:39:49,960 --> 00:39:54,840
कहा ईश्वर को करने एक मिनट भाई साब

522
00:39:54,840 --> 00:39:59,200
आपने ईश्वर अपने कार्य को करने सामर्थ

523
00:39:59,200 --> 00:40:04,040
वान है इसलिए वह सर्वशक्तिमान है पहली बात तो यह हो गई

524
00:40:04,040 --> 00:40:08,400
कि ईश्वर अपने कार्यों को करने में सामर्थ वान है अपने

525
00:40:08,400 --> 00:40:12,800
मतलब एक सीमा है उसके कार्यों की कि वह सिर्फ अपने कार्य कर

526
00:40:12,800 --> 00:40:17,720
सता एक मिनट भाई साब मैं अभी क्वे क्वे नहीं रखा

527
00:40:17,720 --> 00:40:21,840
मैंने क्वे नहीं रखा तो ईश्वर के कार्यों की सीमा है कि

528
00:40:21,840 --> 00:40:26,720
उसके जो जो काम वो नियत है वही वो कर सकता है उसके बाहर वो नहीं जा सकता ठीक है

529
00:40:26,720 --> 00:40:30,920
अब त आती है कि जब आपसे मैं सर्व

530
00:40:30,920 --> 00:40:35,560
व्यापक का अर्थ पूछूंगा सर्वव्यापक तो सर्वव्यापक

531
00:40:35,560 --> 00:40:40,400
का अर्थ आप क्या बताएंगे मैं बता

532
00:40:40,400 --> 00:40:44,400
दूं व्यापक सर्वत्र है विष्णु सर व्यापक का अर्थ है विष्णु

533
00:40:44,400 --> 00:40:48,720
सर्वव्यापक का अर्थ है कि वो ऐसी कोई जगह नहीं है इंच मात्र

534
00:40:48,720 --> 00:40:52,760
भी एक पॉइंट भी जहा वो ना हो ठीक है हा

535
00:40:52,760 --> 00:40:58,760
विष्णु सर्व कार्थ

536
00:41:00,280 --> 00:41:04,720
भाई साब आपने जवाब दे दिया है यानी कि व्यापक के साथ जब आपने सर्व लगाया

537
00:41:04,720 --> 00:41:08,920
तो आपने अर्थ लिया कि उसकी सीमा से बाहर कुछ है ही नहीं वो

538
00:41:08,920 --> 00:41:13,080
हर जगह है कुछ भी नहीं है जो उसकी सीमा से बाहर है तब आपने य सर्व

539
00:41:13,080 --> 00:41:17,280
का उपयोग किया ठीक है उसके बाद मैं अगर आपसे सर्वज्ञ का अर्थ

540
00:41:17,280 --> 00:41:21,400
पूछू सर्वज्ञ का अर्थ तो क्या आप ये कहोगे कि

541
00:41:21,400 --> 00:41:25,600
वो अपनी चीजों को जानता है इसलिए वो सर्वज्ञ है या वो यह कहोगे वो सब कुछ जानता

542
00:41:25,600 --> 00:41:29,800
है इसलिए वो सर्वज्ञ है हा नहीं सब कुछ जानता है सब कुछ

543
00:41:29,800 --> 00:41:34,240
एक एक पॉइंट भी ऐसा नहीं है दुनिया का संसार का

544
00:41:34,240 --> 00:41:38,320
जानता तो वो सर्वज्ञ यानी यहां पर भी आपने सर्व का जो विशेषण

545
00:41:38,320 --> 00:41:42,760
लिया वो सब कुछ से लिया अर्थ से लिया ठीक है और सर्वव्यापक

546
00:41:42,760 --> 00:41:46,840
का जो आपने लिया कि वो हर जगह है तो आप यह भी नहीं कह सकते कि व नाली में

547
00:41:46,840 --> 00:41:51,520
नहीं है आप यह भी नहीं कह सकते एक मिनट

548
00:41:51,520 --> 00:41:55,640
आप सर्व आप सर्वव्यापक का अर्थ यह मानते हो कि वो नाली में

549
00:41:55,640 --> 00:41:59,720
भी है वो मलम भी है मतलब कि आपने कहीं पर

550
00:41:59,720 --> 00:42:03,920
भी यह नहीं छोड़ा कि कोई दुनिया में ऐसी जगह हो सकती है जहां ईश्वर

551
00:42:03,920 --> 00:42:08,000
ना हो तो आपने सर्वव्यापक में सर्व का अर्थ सब कुछ लिया आपने

552
00:42:08,000 --> 00:42:12,400
सर्वज्ञ में सर्व का अर्थ सब कुछ लिया अब दिक्कत ये है कि आप सर्वशक्तिमान

553
00:42:12,400 --> 00:42:15,720
में कह रहे हो कि वो अपने अपने कार्य जो करने में है सामर्थ

554
00:42:15,720 --> 00:42:20,040
वान है और वह अनावश्यक कार्य दूसरे कार्य नहीं कर

555
00:42:20,040 --> 00:42:24,160
सकता जो उसके कार्य है वही कर सकता है यानी यहां पर आपने

556
00:42:24,160 --> 00:42:28,320
सर्व का जो अर्थ लिया है वो सब कुछ नहीं लिया उसकी सी सीमा

557
00:42:28,320 --> 00:42:32,560
कर दी यानी संसार में कोई ऐसी जगह नहीं है

558
00:42:32,560 --> 00:42:36,560
जहां वो ना हो संसार में कुछ भी ऐसा नहीं है जो वो ना जानता हो मगर

559
00:42:36,560 --> 00:42:40,760
संसार में कुछ ऐसे कार्य हैं जो वह नहीं कर सकता

560
00:42:40,760 --> 00:42:44,760
है तो सर्व का अर्थ आपने खुद ही बदल दिया कौन सा कार्य है

561
00:42:44,760 --> 00:42:48,800
जो देखो ऐसा है जी कि

562
00:42:48,800 --> 00:42:52,960
वेद क्या है वेद परमात्मा का संविधान है

563
00:42:52,960 --> 00:42:57,800
भाई साहब हम लोग वेद वेद भी

564
00:42:57,800 --> 00:43:03,800
वे भी आे

565
00:43:05,360 --> 00:43:11,360
बा

566
00:43:14,520 --> 00:43:18,680
उस अपना कर अपना प्रश्न क्लियर

567
00:43:18,680 --> 00:43:23,040
कर द की यदि वो अनंत

568
00:43:23,040 --> 00:43:27,240
अनंत रूप से सर्वव्यापक व्याप्त है तो व ऐसी

569
00:43:27,240 --> 00:43:31,760
कोई जगह नहीं है जहां वो ना हो अगर वो अनंत रूप से सर्वता है

570
00:43:31,760 --> 00:43:36,040
मिनटर वो अनंत रूप से सर्व ज्ञाता है एक मिनट अगर वह अनंत

571
00:43:36,040 --> 00:43:40,160
रूप से सर्व ज्ञाता है तो ऐसा कुछ नहीं है जो वो ना जानता हो

572
00:43:40,160 --> 00:43:44,520
तो फिर जब वह अनंत रूप से सामर्थ वान है सर्वशक्तिमान है

573
00:43:44,520 --> 00:43:49,320
तो फिर ऐसे कुछ कार्य क्यों है जो वह नहीं कर सकता

574
00:43:49,320 --> 00:43:53,880
बताइए नहीं कौन सा कार्य है जो नहीं कर सकता आप बताइए

575
00:43:53,880 --> 00:43:57,880
अवतार नहीं ले सकता आपने कहा ना अवतार लेने की जरूरत

576
00:43:57,880 --> 00:44:02,080
क्या है नहीं ये बता

577
00:44:02,080 --> 00:44:06,880
अभी बात होही है आप जो है रोटी खा सकते

578
00:44:06,880 --> 00:44:11,560
अभी बात ही मेरी बात भी तो सुनो

579
00:44:11,560 --> 00:44:17,560
तो आप जरूरत मत

580
00:44:21,440 --> 00:44:23,840
लाइने

581
00:44:23,840 --> 00:44:28,000
बोहा बोरहा

582
00:44:28,000 --> 00:44:32,440
बो क्ता बात कर रहे

583
00:44:32,440 --> 00:44:38,440
अभी हम उसकी क्षमता में बात कर रहे हैं बताइए य

584
00:44:44,840 --> 00:44:50,840
धता रसे

585
00:44:58,240 --> 00:45:02,320
समा मा मैंने आपसे क्या पूछा परमात्मा

586
00:45:02,320 --> 00:45:06,320
को आप सर्वशक्तिमान नहीं मानते इसीलिए तो कहते हो कि रावण

587
00:45:06,320 --> 00:45:10,800
को मारने के लिए अवतार लिया क्या रावण के शरीर में नहीं था मन उसका मन

588
00:45:10,800 --> 00:45:14,880
नहीं ये बताओ रावण को मारने के लिए दु

589
00:45:14,880 --> 00:45:18,920
के विनाश के लिए विषय बदल

590
00:45:18,920 --> 00:45:23,080
रहा है भाई साहब विषय बदल रहा है मैं पूछ रहा हूं कि जिसकी सामर्थ्य

591
00:45:23,080 --> 00:45:27,720
का अंत है उसके सामने सर्वशक्तिमान जो लगा रहे हो

592
00:45:27,720 --> 00:45:32,040
आप मेरी बात नहीं सुन रहे अरे सुन तो रहा हूं आप दूसरी

593
00:45:32,040 --> 00:45:36,400
जगह जा रहे हो आप दूसरी जगह जाओ बात तो सुनो

594
00:45:36,400 --> 00:45:36,900
मेरी

595
00:45:36,640 --> 00:45:41,080
बात भी तो सुनो बोलो हा अब ये बताइए परमात्मा जब सर्वत्र

596
00:45:41,080 --> 00:45:45,200
है तो रावण के शरीर में है कि नहीं है है बिल्कुल

597
00:45:45,200 --> 00:45:49,200
है तोब हा जब मारना चाहेगा तो रावण को मार देगा कि नहीं मार

598
00:45:49,200 --> 00:45:53,520
देगा बिल्कुल मार देगा बिना शरीर धारण करे बिना शरीर

599
00:45:53,520 --> 00:45:58,040
धारण किए बिना उतार लिए मार सकता है कि नहीं कर सकता है बकुल ब मार सकता

600
00:45:58,040 --> 00:46:02,040
है शरीर धार क्यों करेगा अरे तो भाई ये

601
00:46:02,040 --> 00:46:06,400
आवश्यकता हो गई ना मैं पूछ रहा हूं हैने

602
00:46:06,400 --> 00:46:10,480
आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछ भाई साहब सुनिए मैं इसका

603
00:46:10,480 --> 00:46:15,560
जवाब भी आपने जो पूछा है मैं इसका जवाब भी जानता

604
00:46:15,560 --> 00:46:19,800
वि आपको पक रख रहा मैं आपसे पूछ रहा ह

605
00:46:19,800 --> 00:46:25,800
भाई साब

606
00:46:28,360 --> 00:46:32,360
अरे भाई मेरा क्वेश्चन ये है आचार जी मेरा क्वेन ये

607
00:46:32,360 --> 00:46:36,080
है मेरा क्वे

608
00:46:36,080 --> 00:46:40,200
य अगर कुछ कार्य है जो वो नहीं कर सकता तो उसके आगे

609
00:46:40,200 --> 00:46:44,800
आपने अन क्यों लगाया है शास्त्रार्थ बस नहीं होती है

610
00:46:44,800 --> 00:46:50,040
आप पहले

611
00:46:50,040 --> 00:46:54,040
बोलिए कह रहे हो सुनिए मैं बताऊ आप यह कह रहे हो

612
00:46:54,040 --> 00:46:58,600
कि क्योंकि सुनि क्यक उस आ

613
00:46:58,600 --> 00:47:02,200
नहीं

614
00:47:02,200 --> 00:47:06,240
इसने बोला मेरा सुन नहीं रहे मैं सुन रहा

615
00:47:06,240 --> 00:47:12,000
हूं आप दूसरी जग क्यों जा रहे हो आप

616
00:47:12,000 --> 00:47:16,040
आवश्यकता लेता है ईश्वर अगर अगर

617
00:47:16,040 --> 00:47:21,680
कोई भी का है दुनिया का नहीं

618
00:47:21,680 --> 00:47:27,680
आ क्यासा पहा बना

619
00:47:30,200 --> 00:47:34,800
भा मैं उत्तर दे रहा हूं आपको आपने प्रश्न पूछा उतर सुनि

620
00:47:34,800 --> 00:47:39,120
दीजिए तो पहली बात यह है कि अगर

621
00:47:39,120 --> 00:47:43,200
आपने जब यह मान लिया कि उसकी सामर्थ्य का अंत है कि वह जन्म नहीं ले

622
00:47:43,200 --> 00:47:47,800
सकता अवतार नहीं ले सकता अनंत अनंत है परमात्मा अनंत है

623
00:47:47,800 --> 00:47:51,960
उसकी शक्ति भी अनंत है देखिए भाई मुझे बोलने दीजिए अगर मैं जवाब देने बैठ

624
00:47:51,960 --> 00:47:56,080
हूं आपको जवाब दे रहा हू आपको मैं आपको जवाब दे रहा हूं भाई साब मैं आपको जवाब

625
00:47:56,080 --> 00:48:00,080
दे रहा हूं आप काट जवाब दे रहा

626
00:48:00,080 --> 00:48:05,080
मैं आपको जवाब दे रहा हूं हा

627
00:48:05,080 --> 00:48:09,840
तो आपने यह कहा कि यहां से शुरू करेंगे आपने यह कहा

628
00:48:09,840 --> 00:48:14,120
कि ईश्वर जन्म नहीं अवतार नहीं ले सकता जन्म नहीं ले सकता तो

629
00:48:14,120 --> 00:48:17,520
फिर भी वो जो है सर्वशक्तिमान

630
00:48:17,520 --> 00:48:18,520
जरूरत

631
00:48:18,520 --> 00:48:22,760
क्या है भाई साहब आपने कहा कि सता

632
00:48:22,760 --> 00:48:26,890
आपने कहा कि नहीं कहा नहीं ये बताओ जन्म ले क्या

633
00:48:26,890 --> 00:48:30,920
[प्रशंसा] कोई सुनिए भाई साहब मैं कह रहा हूं मेरा

634
00:48:30,920 --> 00:48:34,920
कोई काम ना कर पाने का कोई भी कारण हो एक्स वाई जड

635
00:48:34,920 --> 00:48:39,040
कोई भी कारण कि मुझे आवश्यकता नहीं है कि मैं एक देशी हो जाऊंगा कोई

636
00:48:39,040 --> 00:48:43,840
भी कारण हो मगर उसके बाद मुझे सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता

637
00:48:43,840 --> 00:48:47,880
अगर मैं कोई कार्य करने में सक्षम नहीं हूं और

638
00:48:47,880 --> 00:48:52,080
कार्य ना कर पाने का कोई भी कारण हो कि भैया मैं को आवश्यकता

639
00:48:52,080 --> 00:48:57,640
नहीं है भैया मैं सुनिए

640
00:48:57,640 --> 00:49:02,080
उसके बाद मुझे अनंत सामर्थ वान सर्वशक्तिमान नहीं

641
00:49:02,080 --> 00:49:06,720
कहा जा सकता अब मैं आपको आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं ठीक है

642
00:49:06,720 --> 00:49:10,760
एक बात बताइए आपने जो प्रश्न किया के

643
00:49:10,760 --> 00:49:14,840
अर था नहीं ता क्या है आपने जो

644
00:49:14,840 --> 00:49:19,160
प्रश्न किया उसका उत्तर ले लीजिए रावण के अंदर था फिर उसको आवश्यकता क्या है जरूरत

645
00:49:19,160 --> 00:49:23,320
बता रहा हूं अभी यह बताइए आपके

646
00:49:23,320 --> 00:49:28,560
अंदर ईश्वर विद्यमान है कि नहीं

647
00:49:28,560 --> 00:49:32,960
हां विद्यमान है हा तो आपके अंदर

648
00:49:32,960 --> 00:49:37,520
उसका ज्ञान विद्यमान है कि

649
00:49:37,520 --> 00:49:41,680
नहीं परमात्मा का ज्ञान अलग है मेरा ज्ञान अलग है जीवात्मा का

650
00:49:41,680 --> 00:49:45,760
ज्ञान अलग है परमा श्वर है नहीं आपके अंदर ईश्वर है कि

651
00:49:45,760 --> 00:49:51,400
नहीं हा मेरे अंदर सब परिपूर्ण है मेरी

652
00:49:51,400 --> 00:49:56,040
आमा है परि

653
00:49:56,040 --> 00:50:00,120
के ज्ञान के साथ आपके अंदर है नहीं देखो

654
00:50:00,120 --> 00:50:04,480
जीव की सत्ता अलग है परमात्मा की सत्ता अलग है मैं

655
00:50:04,480 --> 00:50:08,520
आपके अंदर ईश्वर है नहीं सुनो तो ऐसे नहीं ये

656
00:50:08,520 --> 00:50:12,560
जो है हा भरवाने वाली बात मत करो हा ऐसे हा भरवाने वाली

657
00:50:12,560 --> 00:50:16,920
बात मत करो बताइए हम जानते आपको परमात्मा

658
00:50:16,920 --> 00:50:21,160
की सत्ता अलग है जीवात्मा की सत्ता अलग है मतलब आपके अंदर

659
00:50:21,160 --> 00:50:25,640
होते हुए भी आपके अंदर होते हुए भी ईश्वर की सारी क्वालिटीज

660
00:50:25,640 --> 00:50:29,760
नहीं है निकल जाती है सुनो पहले ता ये बताओ

661
00:50:29,760 --> 00:50:34,080
परमात्मा जब सर्वत्र है तो शरीर से जब जीवात्मा निकल

662
00:50:34,080 --> 00:50:38,200
जाती है तो परमात्मा रहता है कि नहीं रहता ये बताओ तो इसका मतलब आपके

663
00:50:38,200 --> 00:50:42,560
अंदर होते हुए भी आपके अंदर होते हुए भी परमात्मा का पूरा कंट्रोल

664
00:50:42,560 --> 00:50:46,960
नहीं है आप नहीं नहीं आप ये बताओ लास्ट

665
00:50:46,960 --> 00:50:51,280
में परमात्मा रहता है कि नहीं रहता है अरे रहता है क्यों नहीं रहता है

666
00:50:51,280 --> 00:50:52,520
रहता है मैं क मना कर

667
00:50:52,520 --> 00:50:56,760
रहा हूं हा हा तो जीवात्मा निकल गया ना तो जीवात्मा की सत्ता अलग

668
00:50:56,760 --> 00:51:00,800
परमात्मा की सत्ता अलग है तो इसका मतलब आपके अंदर परमात्मा का

669
00:51:00,800 --> 00:51:05,040
पूरा कंट्रोल नहीं है थोड़ा बहुत कंट्रोल कम है बा कल नहीं

670
00:51:05,040 --> 00:51:09,160
है मैं पूछ ये रहा हूं कि अगर भगवान चाहे

671
00:51:09,160 --> 00:51:13,240
ईश्वर अगर चाहे तो वह केवल मन में एक संकल्प कर ले कि इसको मेरा

672
00:51:13,240 --> 00:51:16,360
ज्ञान हो

673
00:51:16,360 --> 00:51:20,520
जाए मिनट मिनट

674
00:51:20,520 --> 00:51:24,840
आपने सुना नहीं आपने प्रश्न नहीं सुना मैं

675
00:51:24,840 --> 00:51:29,800
अगर आप अगर आपके अंदर भाब अगर आपके

676
00:51:29,800 --> 00:51:34,200
अछ रहा अगर आपके अंदर ईश्वर है

677
00:51:34,200 --> 00:51:39,200
और ईश्वर होना भी छोड़ दो

678
00:51:39,200 --> 00:51:41,880
होना

679
00:51:41,880 --> 00:51:46,560
आपसे भाई साब भाईब भाई साब

680
00:51:46,560 --> 00:51:51,120
मैं पूछ रहा क्या श्वर का आपके पूरा कल

681
00:51:51,120 --> 00:51:55,160
है के अनुसार महाभारत के अनुसार देखिए भाई साहब अभी

682
00:51:55,160 --> 00:52:00,720
जो बात चल रही है

683
00:52:00,720 --> 00:52:05,080
प्रश्न सुन लीजिए मेरा प्रश्न सुन लीजिए भाई मेरा प्रश् सुली

684
00:52:05,080 --> 00:52:09,720
मेरा प्रश्न सुन प्रसे

685
00:52:09,720 --> 00:52:13,840
आपने मन संकल्प करले राव को मार सकता है

686
00:52:13,840 --> 00:52:19,840
उसको अवतार लेने की जरूरत नहीं है उस

687
00:52:23,200 --> 00:52:27,520
प्र आ जाएगा तो फिर मंत्र के रूप में जनने

688
00:52:27,520 --> 00:52:30,200
की आवता

689
00:52:30,200 --> 00:52:35,960
क्या जी बंद करिए हम नहीं करेंगे आपसे

690
00:52:35,960 --> 00:52:41,320
आप कर आपको क्या हैने

691
00:52:41,320 --> 00:52:43,680
क्यों

692
00:52:43,680 --> 00:52:49,680
नहीं आपके प्र आपने कहा

693
00:52:51,800 --> 00:52:56,640
नाता रावण को वो बिना अवतार लिए मार सकता है

694
00:52:56,640 --> 00:53:00,680
आपसे पूछ रहा हूं कि आपको अपना ज्ञान बिना म के दे सकता

695
00:53:00,680 --> 00:53:04,440
है कि

696
00:53:04,440 --> 00:53:09,280
नहीं बना म के

697
00:53:09,280 --> 00:53:14,800
दे अपनान बिना मंत्रों के दे सकता है कि

698
00:53:14,800 --> 00:53:19,760
नहींन बना म के दे सकता है नहीं आपसे

699
00:53:19,760 --> 00:53:25,760
अपता

700
00:53:41,000 --> 00:53:47,000
सता

701
00:54:46,000 --> 00:54:50,080
वो नहीं करेगा हां और उसके बाद क्या

702
00:54:50,080 --> 00:54:54,080
होगा उसके बाद इस्लामिस्ट उनसे पूछेंगे ये ईश्वर को तब तक नहीं

703
00:54:54,080 --> 00:55:00,080
मानेंगे जब तक इनका ईश्वर मल में ना हो

704
00:55:05,800 --> 00:55:11,800
भाग रहे हैं देखिए प्रश्नों से आचार्य 60 वर्ष के हैं

705
00:55:15,960 --> 00:55:20,080
बताइए जब कोई प्रश्न चल रहा है तो अच्छा तुम मानते

706
00:55:20,080 --> 00:55:24,120
हो तो ये कैसे वो कैसे अच्छा उस पर ही बात को घुमा दो डायवर्ट कर दो वो

707
00:55:24,120 --> 00:55:29,720
बातें रही जाए कि सर्व विशेषण कैसे आएगा

708
00:55:29,720 --> 00:55:33,720
हा आप देख लीजिए आप लोग जो आर समाज को फॉलो करते हैं

709
00:55:33,720 --> 00:55:38,040
उनको देख लीजिए क्या हो रहा है पंडित

710
00:55:38,040 --> 00:55:41,040
जी जय श्री

711
00:55:41,040 --> 00:55:45,200
राम र जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर

712
00:55:45,200 --> 00:55:49,280
महादेव देख रहा था मैं पता है मैंने अब यह

713
00:55:49,280 --> 00:55:53,400
जाना है कि आर्य समाज हों ने यह नहीं सीखा कि सत्य

714
00:55:53,400 --> 00:55:57,960
की स्थापना कैसे होगी बल्कि आर्य समाज ने य विषयात कहके

715
00:55:57,960 --> 00:56:01,280
विषयात करके अपने मत को कैसे वर्चस्व ऊचा

716
00:56:01,280 --> 00:56:05,640
किया जाए यही किया होगा सब जगह ब जहां फसने लगो विषयात

717
00:56:05,640 --> 00:56:09,840
करो अरे भाई मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है

718
00:56:09,840 --> 00:56:13,600
अपने अपने सिद्धांत को सिद्ध

719
00:56:13,600 --> 00:56:17,920
करिए 60 वर्ष के आप है आचार्य आप है आर्स

720
00:56:17,920 --> 00:56:21,920
गुल कुर आप चला रहे हैं पस बच्चों को अपने साथ आप बिठाए हुए हैं और

721
00:56:21,920 --> 00:56:26,280
फिर आप कह रहे कि मैं आपसे प्रश्न करूंगा अरे मैंने

722
00:56:26,280 --> 00:56:30,360
प्र का उत्तर देने से मना थोड़ी ना किया फिर मैं जब प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं

723
00:56:30,360 --> 00:56:34,400
तो आप जो है पता नहीं क्या दुर्वाषा ऋषि वहा बैठ के अपने प बच्चों को संतुष्ट

724
00:56:34,400 --> 00:56:38,680
कर रहे होंगे अब अब संतुष्ट कर रहे होंगे अरे व बच्चों गुरुजी

725
00:56:38,680 --> 00:56:42,680
आप जो है सवाल से भाग रहे थे अरे दुर्वाषा ऋषि लो साहब

726
00:56:42,680 --> 00:56:46,680
अरे भाई मैंने पूछा कि पहली बात तो वही जवाब

727
00:56:46,680 --> 00:56:50,880
नहीं आया कि अगर सर्वव्यापक का अर्थ है कुछ भी सर्व के बाहर नहीं

728
00:56:50,880 --> 00:56:55,200
सर्वज्ञ का अर्थ है कि कुछ भी सर्व के बाहर नहीं

729
00:56:55,200 --> 00:57:00,280
तो स मान का अर्थ य क्यों है कि सर्व के बाहर कुछ

730
00:57:00,280 --> 00:57:04,320
है फिर अब इन्होंने मुझसे पूछा कि अगर ईश्वर संकल्प मात्र से

731
00:57:04,320 --> 00:57:08,440
रावण को खत्म कर सकता है कि नहीं ईश्वर संकल्प मात्र से आपको अपना वैदिक

732
00:57:08,440 --> 00:57:12,440
ज्ञान भी दे सकता है मंत्रों की भी आवश्यकता नहीं है और

733
00:57:12,440 --> 00:57:16,640
नहीं दे सकता तो बोलो यह भी बाद है ईश्वर यह भी बोल दो

734
00:57:16,640 --> 00:57:20,960
यह भी बोल दो इसमें बाद है ईश्वर नहीं दे सकता मंत्र के रूप में ही देना पड़ेगा

735
00:57:20,960 --> 00:57:25,160
तो जैसे हमें जो ईश्वर का ज्ञान है उस ज्ञान को प्राप्त करने

736
00:57:25,160 --> 00:57:29,400
के लिए उसका स साकार स्वरूप वेद की आवश्यकता है उसी

737
00:57:29,400 --> 00:57:33,680
प्रकार जो ईश्वर अव्यावहारिक है व्यवहार में नहीं आ सकता उसको

738
00:57:33,680 --> 00:57:37,680
समझने के लिए हमें उसके सगुण साकार स्वरूप उसके अवतार

739
00:57:37,680 --> 00:57:43,480
की आवश्यकता है

740
00:57:43,480 --> 00:57:47,480
सिंपल आप प्रश्न करेंगे जापान कहां है तो वो उत्तर देंगे तुम्हें

741
00:57:47,480 --> 00:57:50,480
अमेरिका के बारे में पता है

742
00:57:50,480 --> 00:57:56,240
है ये वही हो रहा था

743
00:57:56,240 --> 00:58:00,880
वो विषयात ही सीखा है विषयात करना सीखो ओ मेहनत करने वालों

744
00:58:00,880 --> 00:58:05,160
विषयात करना सीखो ओ मेहनत करने वालों डीडी वन देखा था ना किसी ने बचपन

745
00:58:05,160 --> 00:58:11,160
में देखा था नहीं दूरदर्शन मैंने देखा था

746
00:58:13,000 --> 00:58:16,840
ब

747
00:58:16,840 --> 00:58:21,080
वो यह

748
00:58:21,080 --> 00:58:27,080
है तो भाई

749
00:58:27,080 --> 00:58:31,120
कहां गए वह आचार्य जी चले ही गए वो बीच में समझ गए

750
00:58:31,120 --> 00:58:35,160
कि भाई यह तो जड़ तक जाएगा तो पहले ही बोलने लगे नहीं नहीं शास्त्र नहीं होगा

751
00:58:35,160 --> 00:58:39,920
आपके साथ अरे भाई हम शास्त्र कर ही नहीं रहे हम तो चर्चा कर रहे

752
00:58:39,920 --> 00:58:44,520
हैं कोई एक विषय चल रहा है उसको

753
00:58:44,520 --> 00:58:49,120
भाई अभी तो मैं गुस्सा भी नहीं हुआ रोकली जी आज तो मैं गुस्सा नहीं हुआ हूं

754
00:58:49,120 --> 00:58:53,360
आज तो मुझे ओवर आज तो मैं गुस्सा नहीं हुआ आज आप कह रहे हो गुस्सा

755
00:58:53,360 --> 00:58:56,240
हो गए

756
00:58:56,240 --> 00:59:00,360
आज तो मैंने जो मेरा जो वॉइस तेज करना पड़ा वह ओवरलैपिंग

757
00:59:00,360 --> 00:59:04,360
के लिए करना पड़ा कि भाई वह जो है अपनी बार

758
00:59:04,360 --> 00:59:08,600
लगातार बोलते जा रहे थे तो मुझे फिर ओ मुझे मेरी आवाज

759
00:59:08,600 --> 00:59:12,760
भी सुनाई दे तो इसलिए मुझे तेज बोलना पड़ रहा था इसका

760
00:59:12,760 --> 00:59:17,160
मतलब क्या है कि इनके पास अंदरूनी रूप से इनके पास सिद्धांत

761
00:59:17,160 --> 00:59:23,160
नहीं है यह विषय को बदल करके चर्चा में आगे जाने का प्रयास करते

762
00:59:24,120 --> 00:59:28,120
हैं एक मॉडरेटर के साथ करिए जो जो उनको

763
00:59:28,120 --> 00:59:32,400
रोक दे बीच में नहीं वो उनकी भी क्यों सुनेंगे वो

764
00:59:32,400 --> 00:59:36,440
उनकी भी क्यों सुनेंगे जिसको नहीं सुननी वो नहीं सुनेगा मैं आपको मॉडरेटर के लिए

765
00:59:36,440 --> 00:59:40,520
फोन किया था आज आपका फोन आया था हां मैं

766
00:59:40,520 --> 00:59:43,160
मीटिंग में

767
00:59:43,160 --> 00:59:48,640
हगा मिला हां आया था आया था बजे आया

768
00:59:48,640 --> 00:59:52,760
था अरे आप मुझे मैं मैं आ जाता ना तो

769
00:59:52,760 --> 00:59:56,840
हो जाता बहुत सही मैं बता देता कि मैं उसी समय बोलता ना ना कि आप आप ये

770
00:59:56,840 --> 01:00:01,120
बोल रहे हैं येसे भटक रहे हैं कृपया वापस आए टॉपिक पर

771
01:00:01,120 --> 01:00:05,280
तो वो हो जाती है बात तो अच्छा इनका एक खुद

772
01:00:05,280 --> 01:00:09,280
ही का स्टेटमेंट क्या हुआ कि ये जो है अपने गुरुकुल में जो धार्मिक

773
01:00:09,280 --> 01:00:11,480
चीजें कर रहे हैं उसमें ये धर्म

774
01:00:11,480 --> 01:00:15,560
का वो नहीं ले रहे हैं अपने मनमुक ी कर रहे हैं जो दयानंद जी भी

775
01:00:15,560 --> 01:00:19,640
करके चले गए वो भी नहीं कर रहे हैं दयानंद जी ने कहा कि ब्राह्मण का

776
01:00:19,640 --> 01:00:24,000
जनेह इतने से इतने के बीच में होगा तो उस परे ध्यान नहीं दे रहे

777
01:00:24,000 --> 01:00:28,040
हैं और जो इन्होंने एक बात कही कि जब ये जहां से जा रहे होंगे तब

778
01:00:28,040 --> 01:00:32,160
मैं इनको दूंगा तो मैं इनसे पूछता कि आज तक आपने किसी को शूद्र कहा

779
01:00:32,160 --> 01:00:36,600
है क्या नहीं नहीं कहा

780
01:00:36,600 --> 01:00:40,840
है जाते समय बेटा तुमने इतने दिन यहां गुरुकुल में बिताए

781
01:00:40,840 --> 01:00:44,920
और बेटा तुमने जो है गायत्री मंत्र भी पढ़ा ये है वो है मगर तुम हो शूद

782
01:00:44,920 --> 01:00:49,280
राज के बाद गायत्री मंत्र मत पढ़ना आज तक कहा है क्या किसी

783
01:00:49,280 --> 01:00:53,400
को ये एक बहुत बड़ा अभी वो चर्चा आने वाली है अगले हफ्ते

784
01:00:53,400 --> 01:00:58,000
तक आ जाएगी राम पांडे जी आपको भी मैंने फोन किया था अच्छा

785
01:00:58,000 --> 01:01:04,000
जी मेरे पास फोन ही नहीं आया आपके नहीं आया होगा

786
01:01:05,920 --> 01:01:10,000
देखिए गुरुकुल से जाते समय यह किसी को कहते हैं

787
01:01:10,000 --> 01:01:14,640
क्या कि तुम शूद्र आज से गायत्री मंत्र बंद

788
01:01:14,640 --> 01:01:19,440
ये बड़ा बड़ा क्वेश्चन है व आर समाज छोड़ देगा तुरंत

789
01:01:19,440 --> 01:01:24,160
ह आज से समाज नहीं

790
01:01:24,160 --> 01:01:29,120
बाबा बाबाजी पूरी तैयारी के साथ में आए थे कि आपको बोलने ही नहीं देना है

791
01:01:29,120 --> 01:01:33,320
आप चाहे कितना भी कोशिश कर लो आप क्वेश्चन नहीं कर सकते उनसे हां तो बात

792
01:01:33,320 --> 01:01:37,840
ये है ना इनका बैकग्राउंड आपने नहीं बताया कैसे

793
01:01:37,840 --> 01:01:42,080
आए कैसे ये ये खुद आए थे स्वयं आए थे या इनका इनको इनके पास

794
01:01:42,080 --> 01:01:46,120
हमारा नंबर है बीच-बीच में मुझे फोन कर रहे थे एक दिन एक दिन बस सीधे फोन

795
01:01:46,120 --> 01:01:50,600
लगाया और उस पर चिल्लाने लगे हां करो शास्त्रार्थ तुरंत

796
01:01:50,600 --> 01:01:54,680
फोन पे ही तुरंत करो साथ-साथ चालू मैंने कहा क्या साहब मैं अच्छा मैं ट्रेन पकड़

797
01:01:54,680 --> 01:01:58,680
रहा था कहीं स्टेशन पे था मैंने क्या शास्त्र क्या तुम्हारा ईश्वर चाइना में

798
01:01:58,680 --> 01:02:02,720
जन्म क्यों नहीं लेता है क्यों नहीं ले रहा चाइना में जन्म तो मैंने कहा कि

799
01:02:02,720 --> 01:02:06,920
तुम भाई लाइव आकर के आप जो है बात करिए नहीं अभी करो तुरंत यही की यही अब आदमी

800
01:02:06,920 --> 01:02:11,000
सुबह कुल्ला कर रहा हो मंजन कर रहा हो दातून कर रहा हो

801
01:02:11,000 --> 01:02:15,000
कुछ कर रहा हो तो इनको जो है जैसे ही इनका फोन

802
01:02:15,000 --> 01:02:19,240
आया तुरंत इनका शसरा चालू तो इन्होंने देखा सुना होगा चर्चाएं

803
01:02:19,240 --> 01:02:21,160
तो उसमें य थोड़ा शायद

804
01:02:21,160 --> 01:02:25,240
अग्रेसिव मोड में रहे होंगे अभी तो इन्होंने बहुत अपने आप को रोक के रखा था

805
01:02:25,240 --> 01:02:30,440
जब फोन पर बात करते हैं तो बहुत उसमें रहते हैं उत्तेजना

806
01:02:30,440 --> 01:02:34,520
में मुझे मुझे समझाना पड़ता है रुको रुको रुको ऐसे से ऐसे

807
01:02:34,520 --> 01:02:39,920
करेंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा होता बोल रहे होते हैं

808
01:02:39,920 --> 01:02:44,680
चर्चा का ज्ञान ही नहीं है शिवान जी मेरे कने मतलब ये है किन ये खोखला पन है

809
01:02:44,680 --> 01:02:48,920
व कहावत है ना कि थोथा चना बजे

810
01:02:48,920 --> 01:02:53,680
घन चना बना

811
01:02:53,680 --> 01:02:58,160
जी वो वाली बात है है नहीं इनके पास में कुछ ये सब

812
01:02:58,160 --> 01:03:02,160
सब इनके आईडिया है सब कुछ समझते हैं ये और यह आते हैं

813
01:03:02,160 --> 01:03:06,280
अपनी ऐसी की तैसी करवाने के लिए ऐसे ही सब करने के लिए आके हसा के अपने

814
01:03:06,280 --> 01:03:10,320
आप को चले जाते हैं यहां प ऐसी कोई चर्चा होती है मैं देखकर मेरे को बहुत

815
01:03:10,320 --> 01:03:13,720
हसी आ रही थी और वो

816
01:03:13,720 --> 01:03:18,040
भी वही मैं कह रहा हूं कि ऐसे ऐसे आचार्य हो जाते हैं

817
01:03:18,040 --> 01:03:22,040
जिनको सुनने की अरे पहले तो गुड लिनर बनो यार अपना पहले सुनो

818
01:03:22,040 --> 01:03:26,240
उसके बाद उसको जवाब दो सही नहीं समझ में आ रहा फिर आप काउंट करो उनको

819
01:03:26,240 --> 01:03:30,320
क्वेश्चन करो उनको चर्चा होती है ऐसी ये तो बहस हो

820
01:03:30,320 --> 01:03:34,360
गया ना कि हम आके एक दूसरे के साथ बहस करते हैं ना आप बोलो ना मैं

821
01:03:34,360 --> 01:03:39,760
बोलू ऑडियंस ऐसे ही मजे लेती रहती

822
01:03:39,760 --> 01:03:44,080
है अब ये देखिए पहले अपनी बात को रखने के लिए

823
01:03:44,080 --> 01:03:48,120
रावण के शरीर में ईश्वर था कि नहीं था संकल्प मात्र से

824
01:03:48,120 --> 01:03:52,400
रावण को मारा जा सकता है कि नहीं जब मैंने बात रखी तो वो अलग सत्ता है वो अलग सत्ता

825
01:03:52,400 --> 01:03:58,400
है अब उसमें जो है बातें बदलने लगी

826
01:04:00,400 --> 01:04:05,360
अपने आप चले गए आपने हटा दिया उनको नहीं मैंने तो नहीं हटाया है

827
01:04:05,360 --> 01:04:09,960
य बीच में डिस्कनेक्ट हो गए थे दोनों लोग और सुनिए इनके मुखबिर

828
01:04:09,960 --> 01:04:14,240
से हमने क्या क्या प्राप्त किया दयानंद जी जो लिख के गए वो ये नहीं कर रहे हैं

829
01:04:14,240 --> 01:04:18,800
भाई जो धर्म का क्षेत्र है उसमें तो यथावत पालन करिए

830
01:04:18,800 --> 01:04:23,120
जब दयानंद जी लिख और चलो बदलाव कर रहा है तो कौन करेगा कैसे करेगा

831
01:04:23,120 --> 01:04:27,400
किस आधार पर करेगा उसका कोई पैरामीटर होगा कि नहीं तेरे

832
01:04:27,400 --> 01:04:31,480
लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है आपके शास्त्र कहां

833
01:04:31,480 --> 01:04:35,640
है फिर अपने मन मर्जी से कर रहे हो जब अच्छा दूसरी

834
01:04:35,640 --> 01:04:40,760
एक बात है कि क्या कहते हैं

835
01:04:40,760 --> 01:04:44,760
वो विधवा विवा वाली बात कि विधवा जो है व विचार हो रही है

836
01:04:44,760 --> 01:04:49,040
यह कितना लॉजिकल है कितना लॉजिकल है कि ऋषियों

837
01:04:49,040 --> 01:04:53,480
ने विधवा विना पहले तो इन्होंने मान लिया कि विधवा विवाह मना है ऋषियों के द्वारा

838
01:04:53,480 --> 01:04:54,760
यानी कि शास्त्र क्या कहते

839
01:04:54,760 --> 01:04:58,920
हैं विधवा विवाह होना चाहिए यह जो आर्य समाज है अपने मन से कर रहा है ये उन्होने एक्सेप्ट

840
01:04:58,920 --> 01:05:03,120
किया है ठीक है तो इनके लिए

841
01:05:03,120 --> 01:05:07,440
शास्त्र प्रमाण नहीं है कर्तव्य कर्तव्य के विषय में

842
01:05:07,440 --> 01:05:11,760
अपना मन मुताबिक मान्य है दूसरी बात इनका लॉजिक क्या है कि व व्यभिचारी

843
01:05:11,760 --> 01:05:15,960
हो रहे हैं भाई जब तक भोग का निवारण करने के लिए भोग देते रहोगे

844
01:05:15,960 --> 01:05:21,960
तो उसके गर्भ से भी भोग ही निकलेगा बिल्कुल

845
01:05:23,920 --> 01:05:28,240
भोग का निवारण करने के लिए यदि भोग देते रहेंगे

846
01:05:28,240 --> 01:05:32,920
आप तो उसके गर्भ से भी भोग ही निकलेगा

847
01:05:32,920 --> 01:05:36,960
तो क्या है कि आप अगर उसको यह लगा रहे हैं कि तुम्हारा जो भोग

848
01:05:36,960 --> 01:05:41,160
है वो क्या कहते हैं वो ना कहला है अनैतिक ना कहला है इसलिए

849
01:05:41,160 --> 01:05:45,320
हम तुम्ह सर्टिफिकेट दे देते हैं कि तुम जो भोग करना चाहते हो उसको जो है नीति पूर्ण तरीके

850
01:05:45,320 --> 01:05:49,320
से करो तो उसके बाद वो फिर वो और भोग मांगेगी भैया इसमें

851
01:05:49,320 --> 01:05:53,760
भी सर्टिफिकेट दे दो इसमें भी सर्टिफिकेट मेरे चार विवाह कराओ इसमें भी सर्टिफिकेट दे दो

852
01:05:53,760 --> 01:05:57,960
क्योंकि वो भोग कर रही थी अपने पति से बाहर जाकर के भी या

853
01:05:57,960 --> 01:06:02,360
स्त्री से बाहर अपने पत्नी से बाहर जाकर पुरुष भोग कर रहा था इसलिए उसकी

854
01:06:02,360 --> 01:06:08,040
मैंने और चार शादियां मान्य कर दी पांच शादिया मान्य कर दी बना दो

855
01:06:08,040 --> 01:06:10,040
इस्लाम और क्या हैय

856
01:06:10,040 --> 01:06:14,080
हा जैसे आज आजकल की जो गवर्नमेंट भी तो ऐसे ऐसे रूल रेगुलेशन

857
01:06:14,080 --> 01:06:18,160
फॉलो वो अलाव करती है ना आप बेड में भी

858
01:06:18,160 --> 01:06:22,160
बेड में भी सीसीटीवी कैमरा लगाएंगे कि पति पत्नी के साथ विचार कर रहा है

859
01:06:22,160 --> 01:06:26,280
कि नहीं कर रहा है जबरदस्ती कर रहा है कि नहीं कर रहा है तब उसको फाइड करने के लिए

860
01:06:26,280 --> 01:06:30,960
आर्य समाज में भेज दो और इस सब के बावजूद

861
01:06:30,960 --> 01:06:35,040
इस सब के बाद भी आप आज के जो वैवाहिक संबंध उनका वो देख

862
01:06:35,040 --> 01:06:39,160
लीजिए क्या है लोग आत्महत्या क्यों कर रहे हैं भाई तुम्हारी व्यवस्था बहुत बढ़िया है तुम्हारी

863
01:06:39,160 --> 01:06:44,040
व्यवस्था लागू है क्यों कर रहे हैं आत्महत्या

864
01:06:44,040 --> 01:06:48,080
फिर आप आप आचार्य को रिक्वेस्ट कर लीजिए एक बार और

865
01:06:48,080 --> 01:06:52,240
आ जाए एक बार मॉडरेटर के साथ हो जाए या अब नेक्स्ट आप नेक्स्ट

866
01:06:52,240 --> 01:06:56,360
जो भी डिस्कशन रखिए ना वो मॉडरेटर के साथ ही रखिए

867
01:06:56,360 --> 01:07:00,960
उसे क्या होगा किर आपकी भी बात ओवरलैप नहीं होगी और उसे रोक दिया जाएगा

868
01:07:00,960 --> 01:07:04,960
नहीं असल में वहां बच्चों के सामने उनका वो हो रहा था ना तो वह अपने

869
01:07:04,960 --> 01:07:09,240
बच्चों को सुनाने में लग रहे थे बच्चों के सामने कहीं वो ना हो जाए कि गुरु जी के पास उत्तर

870
01:07:09,240 --> 01:07:13,320
नहीं था उतर नहीं था उनके पास दिख रहा था

871
01:07:13,320 --> 01:07:19,320
वना अब कैसे करें तो तो नहीं

872
01:07:20,680 --> 01:07:24,760
था चलो कोई बात नहीं खैर

873
01:07:24,760 --> 01:07:30,760
मुझे इस का पहले से आभास ला कर आ

874
01:07:31,240 --> 01:07:35,400
रहे क्या आभास था हल्ला कर रहे थे और क्या कर रहे थे

875
01:07:35,400 --> 01:07:39,680
वो अल्लाह करने आ रहे हैं इस बात का मुझे आभास

876
01:07:39,680 --> 01:07:44,480
था बच्चों के सामने नहीं नहीं लाही कर रहे

877
01:07:44,480 --> 01:07:50,480
बा का जवाब ही नहीं था मैं क्वेश्चन करूंगा फिर काउंटर क्वेश्चन में तुरंत

878
01:07:52,560 --> 01:07:56,640
करूंगा ये कौन है भाई हिंदुस्तान ू सनातनी भाई

879
01:07:56,640 --> 01:08:00,840
अपने आप को सनातनी तो लिख लो क्योंकि सनातन का यूज तो वो लोग कर रहे हैं हिंदू

880
01:08:00,840 --> 01:08:05,120
तो मना कर रहे हैं अपने आप को हिंदू क्यों कह रहे हो इस कौन के फॉलोवर तो

881
01:08:05,120 --> 01:08:10,720
हिंदू तो मना कर रहे हैं वो लोग वी आर नॉट

882
01:08:10,720 --> 01:08:15,040
हिंदू तो हमने क्या जाना कि अगर ईश्वर

883
01:08:15,040 --> 01:08:19,080
सर्वज्ञ है तो कोई ऐसी चीज ना हो जो उसके जानने से बच गई हो

884
01:08:19,080 --> 01:08:23,120
अगर ईश्वर सर्वव्यापक है तो कोई ऐसी जगह ना हो जो उसके होने

885
01:08:23,120 --> 01:08:27,360
से बच गई हो व्याप्त होने से बच गई हो तो ईश्वर अगर सर्वशक्तिमान है

886
01:08:27,360 --> 01:08:33,040
तो कोई ऐसा कार्य क्यों है जो उसके द्वारा किए जाने से बच

887
01:08:33,040 --> 01:08:37,120
जाए और ईश्वर यदि

888
01:08:37,120 --> 01:08:41,240
सब जगह है वह केवल सं संकल्प मात्र से रावण को मार सकता है तो

889
01:08:41,240 --> 01:08:45,680
वह केवल संकल्प मात्र से आपको अपना ज्ञान भी करा सकता है

890
01:08:45,680 --> 01:08:49,680
वह चाह लेगा आपको ज्ञान हो जाएगा फिर क्यों वो वेदिक मंत्रों

891
01:08:49,680 --> 01:08:53,760
के रूप में दे रहा है अलग सत्ता अलग सत्ता

892
01:08:53,760 --> 01:08:58,320
है य जवाब होगा हा फ वो अलग सत्ता

893
01:08:58,320 --> 01:09:02,640
नहीं य य पर बाद करना पड़ेगा ना ईश्वर को बिल्कुल हा

894
01:09:02,640 --> 01:09:07,040
बाद मानना पड़ेगा ना 21

895
01:09:07,040 --> 01:09:11,400
पंडित हारे थे दयानंद जी से वहीं पर व काशी में शास्त्र

896
01:09:11,400 --> 01:09:16,560
स्मृति स्थल प वही पर बैंड बजा के आए किसी

897
01:09:16,560 --> 01:09:22,560
की कर अभी वीडियो आने वाला

898
01:09:23,480 --> 01:09:27,640
है एक टाइम प बहुत प्रभाव में आ गया था इनके आर्य समा

899
01:09:27,640 --> 01:09:31,880
जीयों के बहुत ज्यादा प्रभाव में आ गया था मैं अपने घर में हमेशा ह हर टॉपिक पर लड़ाई

900
01:09:31,880 --> 01:09:36,080
झगड़ा करता रहता था भगवान बचाए मुझे कैसे कैसे

901
01:09:36,080 --> 01:09:40,320
कैसे कैसे मुझे सद्बुद्धि हुई और कैसे कैसे वहां से बाहर निकला मैं आप

902
01:09:40,320 --> 01:09:44,520
जैसे सद्बुद्धि आदमी के साथ में कांटेक्ट हुआ लोगों को समझा मैं वो उनके

903
01:09:44,520 --> 01:09:48,600
तर्को को समझा फिर जाकर मेरा माइंड मे दिमाग खुला मैं कहा

904
01:09:48,600 --> 01:09:52,680
यार ये चीज है यहां प ये माइंड को बिल्कुल ब्लॉक कर देते हैं मालिक और

905
01:09:52,680 --> 01:09:56,880
मैक्सिमम आजकल के जो हिंदू है ना जो न हिंदू है जिसे मतलब उनको ज्ञान

906
01:09:56,880 --> 01:10:01,040
से कोई मतलब नहीं है धर्म से कोई मतलब नहीं है क्योंकि लोकाचार

907
01:10:01,040 --> 01:10:05,120
में फसे हुए हैं उस लोकाचार को आधार बनाते हुए य कोई भी नियम कानून लागू

908
01:10:05,120 --> 01:10:09,240
कर देते हैं अपने आर्य समाज के अंदर में तो उससे ज्यादा अट्रैक्शन मिलता है

909
01:10:09,240 --> 01:10:13,320
उनको तो उसके लिए व बहुत बढ़िया रहता है आर्य समा को तो उन्ही को कैप्चर

910
01:10:13,320 --> 01:10:17,320
कि हुए उनके माइंड को कैप्चर किया हुआ है इन्होने बिल्कुल अभी

911
01:10:17,320 --> 01:10:21,320
मैं एक प्रमाण बुद्धि वाली बात कर रहा था कि महाभारत में एक

912
01:10:21,320 --> 01:10:25,360
वाक्य आया है कि अगर

913
01:10:25,360 --> 01:10:29,400
अ श्रद्धावन व्यक्ति अच्छे आचरण वाला हो और श्रद्धावन

914
01:10:29,400 --> 01:10:33,520
व्यक्ति खराब आचरण वाला हो फिर भी वह अ श्रद्धावन अच्छे आचरण वाले

915
01:10:33,520 --> 01:10:37,800
से उच्च है कारण क्या है उसका क्योंकि उसकी प्रमाण बुद्धि

916
01:10:37,800 --> 01:10:38,680
धर्म में

917
01:10:38,680 --> 01:10:42,680
श्रद्धा है तो अभी जैसे इन्होंने कहा ना कि तुम भी तो अंग्रेजी

918
01:10:42,680 --> 01:10:46,680
कपड़े पहन लेते हो तो मैं उतने हिस्से में कहूंगा कि मैं गलत हूं

919
01:10:46,680 --> 01:10:50,880
तुम जितने हिस्से में गलत हो तो वहां यह कहो कि तुम गलत हो तुम

920
01:10:50,880 --> 01:10:55,720
अपने गलत को भी सही क्यों कह रहे हो

921
01:10:55,720 --> 01:10:59,920
समझ रहे जैसे कोई व्यक्ति है जो अपनी इंद्रियों को काबू में नहीं कर पा रहा

922
01:10:59,920 --> 01:11:04,240
है उसके पिता ने उसको मना किया बेटा शराब पीना गलत बात है

923
01:11:04,240 --> 01:11:08,440
अब वोह जाकर के शराब पी रहा है अब शराब पीते समय दो तरह

924
01:11:08,440 --> 01:11:12,800
की बुद्धि होनी चाहिए एक कि मुझसे मुझसे रहा नहीं जा रहा मैं पी के रहूंगा

925
01:11:12,800 --> 01:11:17,040
मगर पिताजी जो समझाते वही सही है यह क्या हुआ

926
01:11:17,040 --> 01:11:21,120
यह हुआ श्रद्धा उसकी प्रमाण बुद्धि

927
01:11:21,120 --> 01:11:25,120
अपने पिता में है बिल्कुल और दूसरा व्यक्ति क्या है अरे वो गलत

928
01:11:25,120 --> 01:11:29,320
है यह सही है यही सही है शराब पीना सही है यह गलत

929
01:11:29,320 --> 01:11:33,360
व्यक्ति है तो हम लोग सब लोग अपने अपने जीवन में ऐसी बहुत सी

930
01:11:33,360 --> 01:11:37,600
चीजें कर रहे हैं जो पूर्णत शास्त्र सम्मत नहीं है मगर उतने अंश को हम धर्म

931
01:11:37,600 --> 01:11:42,120
के रूप में खपत नहीं करते हम वहां कहते हैं कि हम य गलती कर रहे हैं

932
01:11:42,120 --> 01:11:46,600
भाई यहां धम य हम धर्म का वो नहीं कर पा रहे

933
01:11:46,600 --> 01:11:50,920
हम लोग प्रयास रत है वैसा बन जाने के लिए मगर हमने धर्म

934
01:11:50,920 --> 01:11:54,000
धर्म को वो नहीं कर लिया यहां पर कि मैंने अगर अंग्रेजी

935
01:11:54,000 --> 01:11:58,040
कपड़े पहन लिए तो ये जो ये संविधान है यही है तेरे लिए

936
01:11:58,040 --> 01:12:02,440
कर्तव्य कर्तव्य में तुझे अंग्रेजी कपड़े पहनने है

937
01:12:02,440 --> 01:12:06,760
रामपाल जी क्या हाल है रामपाल

938
01:12:06,760 --> 01:12:10,880
रामपाल जी के चेलो का क्या हाल चाल है आजकल जी फनन आते हैं कभी कभी

939
01:12:10,880 --> 01:12:14,880
आज सुबह सुबह आ मेरी नींद उसी है फोन से ही आवाज आ रही है या

940
01:12:14,880 --> 01:12:18,920
नेटवर्क इशू है हा आर्य समाज जी

941
01:12:18,920 --> 01:12:23,080
वो मैं उनसे कहना चाहूंगा वो जो अभी आचार्य जी आए थे

942
01:12:23,080 --> 01:12:27,560
वो अगर आना चाहे तो दोबारा आ सकते हैं बीच में मॉडरेटर है कोई अगर अनावश्यक प्रलाप

943
01:12:27,560 --> 01:12:31,640
करेगा तो उनको जो है याद दिलाया जाएगा कि आप अनावश्यक बोल रहे

944
01:12:31,640 --> 01:12:35,480
हैं अभी

945
01:12:35,480 --> 01:12:39,800
नारायण कोई हिंदू का अर्थ पूछ रहा है

946
01:12:39,800 --> 01:12:44,080
रहाती हुई गाय को धोने वाला हिंदू

947
01:12:44,080 --> 01:12:48,880
हिंदू सरोवर से लेकर हिमालय से लेकर हिंदू सरोवर के बीच में

948
01:12:48,880 --> 01:12:53,760
हिंदुस्थान और क्या कहते हैं

949
01:12:53,760 --> 01:12:57,840
वो व वा

950
01:12:57,840 --> 01:13:02,400
कालिका पुराण का एक श्लोक है ना बलि ना कालीना

951
01:13:02,400 --> 01:13:06,840
छने धर्मे कल विरत कलो यव कंता

952
01:13:06,840 --> 01:13:11,280
हिंद वि विंद

953
01:13:11,280 --> 01:13:16,400
वासना कालने लिना नून मधम कलिते

954
01:13:16,400 --> 01:13:20,840
कलो यवने जवने अघोर

955
01:13:20,840 --> 01:13:26,000
अर्घ मा क्रांता हिंद विंद मा

956
01:13:26,000 --> 01:13:30,280
मतलब अर्थ ये है कि काल बलि के चक्र कु चक्र के कारण कली

957
01:13:30,280 --> 01:13:34,320
में अधर्म से वैदिक धर्म के अन्न हो जाने पर तथा घोर

958
01:13:34,320 --> 01:13:38,360
आक्रांता यावो से भारत के विविध भूभाग को को का

959
01:13:38,360 --> 01:13:42,520
उत्पीड़न हो जाने पर जो हिंदू हैं वो विंध्या पर्वत

960
01:13:42,520 --> 01:13:46,640
से और हिंदू सरोवर के बीच में आ गए वो हिंदू कहलाए यह प्रमाण

961
01:13:46,640 --> 01:13:51,040
है हिंदू का होने का ये ग्रंथ है भाई

962
01:13:51,040 --> 01:13:55,880
गर्भ से क ू है उसी का ही पहला दूसरा श्लोक है

963
01:13:55,880 --> 01:14:00,160
जी काली इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान तो नहीं है बस एक खोखले

964
01:14:00,160 --> 01:14:04,200
तौर पर दावा जरूर करते कि हमारा ईश्वर भी सर्वशक्तिमान है अभी सर्वशक्तिमान पर और

965
01:14:04,200 --> 01:14:08,440
बहुत सी बातें चीज थी जैसे इन्होंने कहा कि वो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान

966
01:14:08,440 --> 01:14:12,600
है क्योंकि वह अपने कार्य कर लेता है उसमें किसी की सहायता नहीं लेता

967
01:14:12,600 --> 01:14:16,720
मगर सृष्टि करना अगर उसका कार्य है तो उसके लिए उसको प्रकृति

968
01:14:16,720 --> 01:14:21,160
की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं प्रकृति

969
01:14:21,160 --> 01:14:26,440
की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं बिना प्रकृति के सृष्ट करता है क्या वो संसार की

970
01:14:26,440 --> 01:14:27,440
और

971
01:14:27,440 --> 01:14:32,280
जीव की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं बिना जीव के मनुष्य पैदा करता है क्या

972
01:14:32,280 --> 01:14:36,360
वो और दूसरी बात अगर इस डेफिनेशन को हम ले लेंगे कि आत्म

973
01:14:36,360 --> 01:14:40,520
निर्भर है अगर सर्वशक्तिमान का मतलब है जो अपने कार्य खुद कर

974
01:14:40,520 --> 01:14:44,560
सके तो उसका मतलब है कि वह आत्मनिर्भर है तो

975
01:14:44,560 --> 01:14:49,040
आत्मनिर्भर और सर्वशक्तिमान क्या एक है नहीं सर्वशक्तिमान

976
01:14:49,040 --> 01:14:53,200
आत्मनिर्भर है मगर हर आत्मनिर्भर सर्वशक्तिमान नहीं

977
01:14:53,200 --> 01:14:58,000
है अब मैंने कहा कहा कि भाई मेरा कार्य है ताली बजाना

978
01:14:58,000 --> 01:15:02,360
तो मैं ताली बजा रहा हूं तो मैं सर्वशक्तिमान हो गया

979
01:15:02,360 --> 01:15:07,240
क्या ये कहां की डेफिनेशन है

980
01:15:07,240 --> 01:15:11,520
भाई

981
01:15:11,520 --> 01:15:15,680
और इसके साथ ही साथ बहुत सी चीजें थी जो

982
01:15:15,680 --> 01:15:20,520
समझ गए थे जब मैंने क्वेश्चन किया ना कि मनुष्य के अंदर ईश्वर है कि नहीं

983
01:15:20,520 --> 01:15:25,000
तो वो समझ ग कि ईश्वरी सत्ता अलग है जी सत्ता अलग है

984
01:15:25,000 --> 01:15:29,040
अब सत्ता करने लगे सल आपसे पूछा ना कि

985
01:15:29,040 --> 01:15:34,480
लास्ट में है कि नहीं ईश्वर तो आपने बोल दिया हां तो क र अरे अब क्या

986
01:15:34,480 --> 01:15:39,720
बोलू ये तो मैं एक् नहीं कर रहा था आंसर

987
01:15:39,720 --> 01:15:43,800
हिंदू मुस्लिम की शादी करवा देते और

988
01:15:43,800 --> 01:15:47,800
क्या कह के वो भैया वो बनना चाह रहा था हिंदू बनना चाह रहा था इसलिए हमने विवाह

989
01:15:47,800 --> 01:15:52,160
करवा दिया सर्टिफिकेट दे दिया उसको क कल का

990
01:15:52,160 --> 01:15:58,120
वीडियो सुन रहा था मैं वो आचार्य जी के पास गए थेला आचार्य जी

991
01:15:58,120 --> 01:16:02,240
थे क्या ड्रामा तयार मतलब मैं

992
01:16:02,240 --> 01:16:07,120
समझ नहीं पा रहा हूं कि मतलब इनकी बौद्धिक स्तर कितना बड़ा है कितना छोटा है इनका

993
01:16:07,120 --> 01:16:11,400
जी कुछ नहीं समझ में आता इनका और वैसे वैसे

994
01:16:11,400 --> 01:16:15,880
लोगों को कहते हैं कि हम हिंदुओं की शादी कराते हैं अभी मेरे पास एक कल फोन आया था

995
01:16:15,880 --> 01:16:20,040
कि आपको विवाह से क्या दिक्कत है मैंने कहा कि भैया आपके आपके अनुसार

996
01:16:20,040 --> 01:16:22,480
जो धार्मिक है जो धर्म को मानने

997
01:16:22,480 --> 01:16:26,640
वाला है वही उसी की शादी अपने आप करागे या किसी की भी करा दोगे बोला किसी

998
01:16:26,640 --> 01:16:30,920
की भी नहीं जो धर्म को मानेगा उसी की कराएंगे तो फिर मैंने पूछा

999
01:16:30,920 --> 01:16:35,520
ये बताओ कि मूर्ति पूजक जो है वो धर्म को मानने वाले हैं आपकी नजरों

1000
01:16:35,520 --> 01:16:39,960
में नहीं है अधर्म ही है सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है

1001
01:16:39,960 --> 01:16:44,080
मूर्ति पूजा अधर्म में पाप है तो अगर मूर्ति

1002
01:16:44,080 --> 01:16:48,120
पूजा अधर्म में पाप है तो मूर्ति पूज को का विवाह क्यों करा रहे हो अपने

1003
01:16:48,120 --> 01:16:52,240
यहां अगर तुम मुसलमान को कन्वर्ट करा कर कि

1004
01:16:52,240 --> 01:16:56,280
पहले उसको सनातनी बनाते हो फिर उसका विवाह कराते हो तो तुम मूर्ति पूजक को कन्वर्ट

1005
01:16:56,280 --> 01:17:00,520
क्यों नहीं करा रहे हो आर समाजी

1006
01:17:00,520 --> 01:17:04,520
में या तो उसको अधर्मी मान लो या मान लो कि नहीं नहीं हम ऐसे ही

1007
01:17:04,520 --> 01:17:08,560
कहते हैं वरना हम तो अंदर से तो हम भी वही है हम भी मूर्ति की पूजा

1008
01:17:08,560 --> 01:17:13,320
करते हैं अंदर

1009
01:17:13,320 --> 01:17:17,320
से शिवान जी आजकल रामपाल जी के क्या हाल चाल है उनके चेलो का क्या हाल

1010
01:17:17,320 --> 01:17:21,520
चाल है चेलो के फोन उन आते थोड़ा मुझे इधर समय नहीं मिल रहा है क्योंकि

1011
01:17:21,520 --> 01:17:25,640
कुंभ में जाने के कारण र समाज और इन सब के चैप्टर रिओपन हो गए थी केस

1012
01:17:25,640 --> 01:17:29,840
फाइल्स इनकी काफी दिन से क्लोज पड़ी हुई थी

1013
01:17:29,840 --> 01:17:34,280
वो रिओपन हो गए तो उसमें लगातार वही चलता जा रहा है तो

1014
01:17:34,280 --> 01:17:38,320
इसलिए अभी रामपाल जी को थोड़े रामपाल वालों को मैंने थोड़ी वो दे दी है

1015
01:17:38,320 --> 01:17:42,320
थोड़ा आराम कर लो थोड़ा सा रिलैक्स अभी टाइम

1016
01:17:42,320 --> 01:17:46,320
आउट चल रहा है हां तेरी बारी है कमर कसले तेरे बस

1017
01:17:46,320 --> 01:17:50,800
में है सारे मसले तो तैयारी कर लो थोड़ी

1018
01:17:50,800 --> 01:17:54,960
उसके बाद दोबारा किसी दिन तुम्हारी फाइल खोल देंगे बाकी

1019
01:17:54,960 --> 01:17:59,040
ग्राउंड पर चल रहा है वो बताएंगे नहीं मगर ग्राउंड पर काफी कुछ चल रहा

1020
01:17:59,040 --> 01:18:03,120
है और सबसे बड़ी बात है कि लोग इतने अलर्ट हो गए हैं इस

1021
01:18:03,120 --> 01:18:07,280
समय कि कहीं भी अगर इनकी पुस्तकें बेची जा रही है नॉर्मली जहां

1022
01:18:07,280 --> 01:18:11,360
इनका प्रभाव ज्यादा है वहां तो बात अलग है मगर जो सामान्य जगह है

1023
01:18:11,360 --> 01:18:15,560
जहां अभी प्रभाव नहीं है वहां पर अगर कोई पुस्तक भेजता हुआ मिल रहा है तुरंत

1024
01:18:15,560 --> 01:18:20,440
लोग बाग पुलिस को बुला रहे हैं ऐसे बहुत से मामले सामने आ रहे हैं

1025
01:18:20,440 --> 01:18:24,880
तो ये जागरूकता तो ले ही आए हम लोग आजकल

1026
01:18:24,880 --> 01:18:28,320
एक और चीजें चल रही है मुझे बहुत बाद में बहुत लेट समझ में

1027
01:18:28,320 --> 01:18:32,360
आया वो उसका जो मेन एजेंडा है जैसे कि इस एक टॉपिक

1028
01:18:32,360 --> 01:18:36,440
पर मैंने आपको कॉल करके कंफर्मेशन लिया था शिव गुरु के नाम से शिव गुरु

1029
01:18:36,440 --> 01:18:40,560
का जो टॉपिक चल रहा है आपको एक बार कॉल किया था आपको याद होगा शायद हम

1030
01:18:40,560 --> 01:18:44,840
कि हमारे पूर्वांचल में ना पूर्वांचल और बिहार के साइड में शिव

1031
01:18:44,840 --> 01:18:49,080
चर्चा बहुत जोरो सरो प है बहुत जोर सोर से शिव चर्चा चलता है

1032
01:18:49,080 --> 01:18:53,080
जिसमें उनका मानना ये है कि शिव शिव को ही वो गुरु गुरु मान के

1033
01:18:53,080 --> 01:18:57,160
और उनका गुणगान करते स्तुति वगैरह करते हैं उसमें क्या

1034
01:18:57,160 --> 01:19:01,240
है कि जो अन्य प्रकार की जो जातियां है ठीक है जिसमें जो भाई

1035
01:19:01,240 --> 01:19:05,680
ब्राह्मण वर्ग है चाहे क्षत्रिय वर्ग चाहे वैश्य वर्ग हो चाहे शूद्र वर्ग हो

1036
01:19:05,680 --> 01:19:09,720
कोई भी व्यास ग में बैठकर प्रवचन करना स्टार्ट कर देता है

1037
01:19:09,720 --> 01:19:13,760
कोई भी नहीं भाई मेरे को ज्ञान है मेरे को शिव गुरु जी के वो है मैं शिव जी को

1038
01:19:13,760 --> 01:19:17,800
वो करूंगी और शिव को ही गुरु मान बाद में मेरे को य एजेंडा

1039
01:19:17,800 --> 01:19:21,800
ये एजेंडा लगा मेरे को कि जो कुल गुरु होते हैं ना ये

1040
01:19:21,800 --> 01:19:25,800
कुल गुरु का रिप्लेसमेंट है कोई कुल गुरु बनाया ग नहीं

1041
01:19:25,800 --> 01:19:29,920
क्यों नहीं बनाएगा कि हमारे शिव गुरु ही है व वही है सब कुछ हमारे

1042
01:19:29,920 --> 01:19:34,120
लिए और बहुत जोरो सोरो पर चल रहा है बहुत जोर स चल रहा है मेरे को थोड़ा

1043
01:19:34,120 --> 01:19:38,800
सा पॉजिटिव पॉइंट भी लगा कि चलो ठीक है जो गांव के जो महिलाए वगैरह है

1044
01:19:38,800 --> 01:19:42,880
जो थोड़ा सा धर्म कार्य करती है तो एक दूसरे के अंदर में बाउंडिंग होता

1045
01:19:42,880 --> 01:19:43,480
है

1046
01:19:43,480 --> 01:19:47,720
एक दूसरे को समझती है तो तीसरा वर्ग ना उनके बीच में खलल पैदा

1047
01:19:47,720 --> 01:19:52,280
नहीं कर सकता उनको तोड़ नहीं सकता तो मुझे एक पॉजिटिव पॉइंट ऐसा भी लगता

1048
01:19:52,280 --> 01:19:56,440
है लेन बाद में जो मेन जो एजेंडा है ना वो मुझे यही लगा कि कुल

1049
01:19:56,440 --> 01:20:00,480
गुरु की इन फ्यूचर में कोई आवश्यकता ही नहीं होगी क्यों क्योंकि हमारे तो हमारे लिए

1050
01:20:00,480 --> 01:20:05,040
तो शिव ही गुरु है उन्हीं को हम गुरु मानके अपना कार्य करते हैं याहे कोई भी

1051
01:20:05,040 --> 01:20:09,440
अपना वाली बात है कुल मिलाकर कर्मणा कर्मणा हर जगह कर्मणा कर दो

1052
01:20:09,440 --> 01:20:13,560
जिससे जो हमारी परंपरा प्राप्त जो हमारे को प्राप्त है वो नष्ट हो जाए और

1053
01:20:13,560 --> 01:20:17,800
फिर कर्मणा के नाम पर विदेशियों को ला दो मलेच्छ को ला दो और उन

1054
01:20:17,800 --> 01:20:22,480
उनके हाथ में अपनी सत्ता दे दो और दोबारा से गुलाम बन जाओ मिटा दो सनातन

1055
01:20:22,480 --> 01:20:26,520
धर्म क्योंकि जैसे ही हम लोग चीज जैसे ही हम लोग

1056
01:20:26,520 --> 01:20:30,560
भक्ति के नाम पर कर्म के नाम पर सत्ता किसी और को किसी को भी देने

1057
01:20:30,560 --> 01:20:34,960
लग जाएंगे बांटने लग जाएंगे तो उसमें मुस्लिम भी आ जाएगा उसमें क्रिश्चन

1058
01:20:34,960 --> 01:20:38,960
भी आ जाएगा उसमें कोई भी व्यक्ति आ जाएगा कर्म के नाम पर भक्ति

1059
01:20:38,960 --> 01:20:43,000
के नाम पर कोई भी आपकी धार्मिक सत्ता को अतिया ले ये ी ओर ले जा

1060
01:20:43,000 --> 01:20:48,240
रहे हैं भले ही आर समाज हो या भले ही इसकन

1061
01:20:48,240 --> 01:20:52,240
हो कर्म और ये भक्ति के नाम पर ये लोग धार्मिक सत्ता

1062
01:20:52,240 --> 01:20:56,760
हमारी भेज देंगे अंततोगत्वा वो लोग सिखाएंगे एक दिन आ कर के देखो

1063
01:20:56,760 --> 01:20:58,760
कृष्णा और क्राइस्ट एक है हम बताते

1064
01:20:58,760 --> 01:21:02,920
थे मगर जैसे सारी कलाए जो है कृष्ण में उ

1065
01:21:02,920 --> 01:21:07,240
भाषित होती है इसलिए बाकी सब जो है निम्न है इसी प्रकार से क्राइस्ट

1066
01:21:07,240 --> 01:21:11,520
के अंदर एक पॉइंट गुण और ज्यादा है कृष्ण से भी

1067
01:21:11,520 --> 01:21:15,600
इसलिए वह कृष्ण से भी श्रेष्ठ है हम मानते

1068
01:21:15,600 --> 01:21:19,960
बहुत है कृष्ण को एक दिन य आएगा देखिएगा इनके ही मंदिरों में हम मानते

1069
01:21:19,960 --> 01:21:23,960
बहुत है कृष्ण को जैसे अभी शिव और विष्णु को मानते हैं

1070
01:21:23,960 --> 01:21:27,960
ऐसे ही हम मानते बहुत है कृष्ण को मगर क्या है ना

1071
01:21:27,960 --> 01:21:32,640
हम उनका अनादर नहीं एक पॉइंट थोड़ा सा ज्यादा है क्राइस्ट

1072
01:21:32,640 --> 01:21:36,920
तो कृष्ण की जगह कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम उसके बाद क्राइस्ट रह गए

1073
01:21:36,920 --> 01:21:41,120
कृष्ण सेकेंडरी हो गए धीरे धीरे उतरते उतरते नीचे आ गए फ धीरे धीरे गायब

1074
01:21:41,120 --> 01:21:45,200
होने लगे बास नहीं ये आपने ये

1075
01:21:45,200 --> 01:21:49,200
सब डीप स्टेट के पार्ट है शिवा जी पता नहीं आप जानते हो नहीं जानते डीप स्ट का

1076
01:21:49,200 --> 01:21:53,280
एक पार्ट यह भी है पूरे विश्व में एक नया रिलीजन क्रिएट करना

1077
01:21:53,280 --> 01:21:57,720
है एक नया धर्म स्थापित कर और धर्म गा

1078
01:21:57,720 --> 01:22:02,000
वो धर्म कैसा रहेगा वो अब्राहम अब्राहम रिलीजन

1079
01:22:02,000 --> 01:22:06,240
के थॉट के अकॉर्डिंग चलेगा तो यह जो जितने भी एजें है

1080
01:22:06,240 --> 01:22:10,360
जितने भी एजेंट है चाहे य आर्य समाज हो स्कोन हो चाहे ब्रह्म कुमारी हो

1081
01:22:10,360 --> 01:22:14,280
चाहे ब्रह्म समाज हो यह सब उसी

1082
01:22:14,280 --> 01:22:18,960
के कोई आर समाधि आए आपका चेहरा दिखाइए भाई

1083
01:22:18,960 --> 01:22:22,080
साब नहीं

1084
01:22:22,080 --> 01:22:25,560
दिखाएंगे चले गए

1085
01:22:25,560 --> 01:22:29,760
आप जो शिव गुरु की बात कर रहे थे ना देखिए भाव से तो आप किसी को भी अपना गुरु

1086
01:22:29,760 --> 01:22:34,600
बना सकते हैं लेकिन क्या आपको गुरु ज्ञान दे रहा है

1087
01:22:34,600 --> 01:22:39,040
गुरु कैसे आपने उसे गुरु बना लिया क्या उसने आपको शिष्य बनाया यह कैसे पता लगेगा आपको

1088
01:22:39,040 --> 01:22:43,720
क्या आपने शिव से पूछा जाके यह बताइए या शिव ने आपको बताया

1089
01:22:43,720 --> 01:22:47,720
तो ऐसा तो है नहीं तो अपने मन से कुछ भी करने से नहीं हो जाता ना

1090
01:22:47,720 --> 01:22:51,760
उसके लिए फिर आपको बनाना ही पड़ेगा आपको गुरु चाहिए गुरु

1091
01:22:51,760 --> 01:22:55,960
आजकल कुछ लोग यह कहने लगे हैं कि करोड़ों का फंड आ रहा है

1092
01:22:55,960 --> 01:23:00,000
हमको यहां प कॉलर माइक यहां प कॉलर माइक खराब हो गया

1093
01:23:00,000 --> 01:23:06,000
तो दो महीने से इंतजार कर रहे हैं कि रिपेयर हो जाए हा बिल्कुल

1094
01:23:06,760 --> 01:23:10,800
जो भी बोल रहा है भैया उसके मुह में घी शक्कर हा

1095
01:23:10,800 --> 01:23:15,000
फंड आ रहा है य यात्रा करने के लिए फंड नहीं है यहां पर बहुत से कार है जो अटके

1096
01:23:15,000 --> 01:23:20,760
हुए हैं उनके लिए फंड नहीं है ये लोग कह रहे करोड़ों रुपए का फंड आ रहा

1097
01:23:20,760 --> 01:23:26,760
है कौन आया थामा भाई करोड़

1098
01:23:27,400 --> 01:23:31,480
मत ये ये इनके देखिए इनके

1099
01:23:31,480 --> 01:23:35,920
कमेंट आ रहे हैं इस समय आर समा जीयों

1100
01:23:35,920 --> 01:23:40,040
के चैट में कुछ लिख रहे हैं घर से उठवा लेंगे वही

1101
01:23:40,040 --> 01:23:44,640
रामपाल का जो एक्सट्रीम लेवल पर जब चले गए थे हम

1102
01:23:44,640 --> 01:23:49,160
तो जो होने लगा था वही य हो रहा है ले लो भाई स्क्रीनशॉट ले लो

1103
01:23:49,160 --> 01:23:55,160
काम आएगी कभी बताने की

1104
01:23:56,520 --> 01:24:00,520
तो बहुत सारी चीजें हैं वो हम लोग बात कर सकते थे अगर एक एक

1105
01:24:00,520 --> 01:24:04,560
करके बात करते तो कुल मिलाकर बात होती इसलिए नहीं है कभी भी क्यों नहीं

1106
01:24:04,560 --> 01:24:08,680
होती है क्योंकि सामने वाले कोय मालूम है कि ज्यादा बात करूंगा तो भेद

1107
01:24:08,680 --> 01:24:12,800
खुल जाएगा इसलिए बात को होने ही मत दो

1108
01:24:12,800 --> 01:24:16,800
नहीं नहीं ये तो बिल्कुल प्रिपेयर्ड हो ग थे पहले से ही वो लग गया था मुझे इनकी बातों को

1109
01:24:16,800 --> 01:24:20,840
सुनते ही ऑलरेडी प्रिपेयर्ड थेन बोलने

1110
01:24:20,840 --> 01:24:25,760
ही नहीं देना शिवान जी को चाहे कितना भी कोशिश कर ले

1111
01:24:25,760 --> 01:24:29,920
अच्छा एक एक बात बहुत बढ़िया है यह लोग आर्य समाजी

1112
01:24:29,920 --> 01:24:33,920
लोग यह कहते हैं कि ईश्वर अपने कार्यों को करने

1113
01:24:33,920 --> 01:24:38,040
के लिए किसी की सहायता नहीं लेता ठीक है फिर ये दूसरी

1114
01:24:38,040 --> 01:24:42,160
और दावा करते हैं कि वह जब धर्म की स्थापना करती करनी होती है तो

1115
01:24:42,160 --> 01:24:46,320
महापुरुषों को भेजता है अब एक बात बताओ

1116
01:24:46,320 --> 01:24:50,720
ईश्वर खुद आकर के धर्म की स्थापना करेगा तो आत्मनिर्भर है

1117
01:24:50,720 --> 01:24:54,800
ना सहायता लेने वाला है या किसी जीव को भेजेगा जा भाई

1118
01:24:54,800 --> 01:24:58,880
धर्म की स्थापना करके आ दयानंद जी के रूप में या कृष्ण के रूप में

1119
01:24:58,880 --> 01:25:03,280
या राम के रू इनके हिसाब से ये तो सहायता ले रहा है

1120
01:25:03,280 --> 01:25:07,360
बिल्कुल ये तो सहायता ले रहा है ना कार्य करने में

1121
01:25:07,360 --> 01:25:11,400
अपनी उसके कार्य उत्पत्ति स्थिति समार और वो कर्मों का फल लेना वो

1122
01:25:11,400 --> 01:25:11,900
तो सब

1123
01:25:11,760 --> 01:25:16,280
में सहायता ले रहा है प्रकृति की सब में सहायता ले रहा है जीव की

1124
01:25:16,280 --> 01:25:20,320
और धर्म की स्थापना की बात आ जाए तो खुद आके करेगा तब तो कहा जाएगा वो खुद

1125
01:25:20,320 --> 01:25:24,320
करता है भाई आत्मनिर्भर है वो तो महान आत्माओं को भेज रहा है दूसरी

1126
01:25:24,320 --> 01:25:28,360
आत्माओ को भेज रहा है क्यों भेज रहा है वो तो आत्मनिर्भर है उसको तो किसी की जरूरत

1127
01:25:28,360 --> 01:25:32,480
नहीं है खुद करे तो इनकी चीजों से इन्हीं की बातें कटती है अच्छा

1128
01:25:32,480 --> 01:25:36,600
उस समय चेहरा देखने लायक था आचार्य जी का जब मैंने पूछा कि आपके शरीर

1129
01:25:36,600 --> 01:25:41,120
में ईश्वर है कि नहीं उनको याद आ गया

1130
01:25:41,120 --> 01:25:46,280
सब सारी नॉलेज याद आ गई उस समय

1131
01:25:46,280 --> 01:25:50,360
चलिए ठीक है आज की चर्चा को यहीं पर समाप्त करते हैं

1132
01:25:50,360 --> 01:25:54,440
क्योंकि वो जा चुके हैं जाने के बाद हम लोगों को मेरे ख्याल से आधा घंटा हो चुका

1133
01:25:54,440 --> 01:25:58,480
आधा पन घंटा तो लेंथ खामा खा बढ़ जाएगी तो

1134
01:25:58,480 --> 01:26:03,360
लोग देखेंगे कम फिर उस चर्चा को है ना

1135
01:26:03,360 --> 01:26:07,440
ठीक है फिर सभी को जय श्री राम और हमारा जो हमसे किसी भी

1136
01:26:07,440 --> 01:26:11,680
बात पर अगर वैचारिक मतभेद रखते वैचारिक मतभेद के निमित्त

1137
01:26:11,680 --> 01:26:15,720
आप ट कर सकते हैं यह हमारा नंबर है वहां पर फॉर्म

1138
01:26:15,720 --> 01:26:19,800
मिलेगा चर्चा का लाइव स्ट्रीम चर्चा का उस फॉर्म को भर दीजिए हम आपसे

1139
01:26:19,800 --> 01:26:24,360
संपर्क कर लेंगे दूसरी बात ट पर किसी भी प्रकार का सवाल

1140
01:26:24,360 --> 01:26:26,800
करने का प्रयास ना करें ट

1141
01:26:26,800 --> 01:26:30,880
पर ही चर्चा करने का प्रयास ना करें अगर ऐसा करेंगे तो मुझे

1142
01:26:30,880 --> 01:26:35,000
आपको ब्लॉक करना पड़ेगा क्योंकि मेरे पास समय नहीं है ट पर आपसे चर्चा करने

1143
01:26:35,000 --> 01:26:39,040
का ठीक है तो यह सब चीजें

1144
01:26:39,040 --> 01:26:44,280
याद रखिए और जिसको भी संपर्क करना वो कर सकता है 7408

1145
01:26:44,280 --> 01:26:48,360
30169 एक आने वाला है

1146
01:26:48,360 --> 01:26:52,360
और मोहम्मद अपनी चेहरा नहीं दिखा रहे पता नहीं

1147
01:26:52,360 --> 01:26:58,360
कौन है प्राइवेट चैट में गालिया दे रहे

1148
01:26:58,880 --> 01:27:02,960
हैं अच्छा थोड़ी भाषा ठीक हो गई अभी

1149
01:27:02,960 --> 01:27:07,720
मोहम्मद बिलाल [हंसी]

1150
01:27:07,720 --> 01:27:11,840
उद्दीन

1151
01:27:11,840 --> 01:27:16,000
अरे चलो ठीक है हमारे ये वाले सिद्धांत जो इतने

1152
01:27:16,000 --> 01:27:20,040
तगड़े हैं इतने तगड़े इतने स्ट्रंग है

1153
01:27:20,040 --> 01:27:24,320
सर्वशक्तिमान ईश्वर वाला कि मतलब व्यक्ति आने

1154
01:27:24,320 --> 01:27:28,440
बाद अगर अगर केवल बात करे ना मतलब वो झगड़ा ना

1155
01:27:28,440 --> 01:27:32,640
करे चिल्लम चिल्ली ना करे बात अगर करे तो पाच 10 मिनट के अंदर

1156
01:27:32,640 --> 01:27:36,720
निर्णय आ जाएगा अब देखिए व्यक्ति ज कैसे अपनी बात को घुमाता

1157
01:27:36,720 --> 01:27:40,960
है जैसे मैंने कहा कि सर्व क्यों लगा रहे हो अगर सीमा कांत है अरे

1158
01:27:40,960 --> 01:27:45,160
तो सर्व हो जाएगा एक देशीय कैसे रह जाएगा अगर वो अवतार लेले एक देशीय हो जाएगा

1159
01:27:45,160 --> 01:27:49,400
व फिर सर्व देशीय नहीं रहेगा अरे भाई कोई कारण है ना कोई भी कारण

1160
01:27:49,400 --> 01:27:53,600
है कि तू इस कुर्सी पर नहीं चढ़ पा रहा है कारण कोई भी है

1161
01:27:53,600 --> 01:27:58,440
मगर सर्व मत लगाओ ना मत लगाओ बोलो सर्व नहीं है

1162
01:27:58,440 --> 01:28:02,520
सर्व भी लगाएंगे और फिर बाधित भी करेंगे फिर

1163
01:28:02,520 --> 01:28:06,520
दूसरा वेदों के प्रमाण को मानते हो कि नहीं भाई वेदों के प्रमाण को भी

1164
01:28:06,520 --> 01:28:11,080
मानेंगे अभी हम आपसे पूछ रहे हैं सब कुछ कर सकता है कि नहीं फिर तीसरा

1165
01:28:11,080 --> 01:28:14,080
कि उसको जरूरत क्या है आवश्यकता क्या है अरे भैया

1166
01:28:14,080 --> 01:28:18,440
मंत्रों के रूप में ज्ञान देने की क्या आवश्यकता है मन में सोचे यहां ज्ञान हो गया

1167
01:28:18,440 --> 01:28:22,600
व्यक्ति को क्या ईश्वर ऐसा कर सकता है

1168
01:28:22,600 --> 01:28:27,000
कि नहीं मगर वो मंत्रों के रूप में सगुण साकार स्वरूप क्यों दे रहा है ज्ञान का

1169
01:28:27,000 --> 01:28:31,480
ज्ञान का सगुण साकार स्वरूप क्यों दे रहा

1170
01:28:31,480 --> 01:28:35,720
है अरे यहां तक चर्चा लेकिन पहुंचेगी नहीं ना बीच में

1171
01:28:35,720 --> 01:28:40,240
ही कुछ ना कुछ हो जाता है

1172
01:28:40,240 --> 01:28:44,400
फिर खुद ही कहने लगे तुमसे शास्त्रार्थ नहीं होगा अरे भैया तुमने हमारी इतनी

1173
01:28:44,400 --> 01:28:49,680
चर्चा देख रखी है फिर तुम य आ करके बता रहे हो शास्त्रार्थ नहीं

1174
01:28:49,680 --> 01:28:55,040
होगा इन्होंने खुद स्वीकार किया है डिबेट हार चुके हैं

1175
01:28:55,040 --> 01:28:59,400
हां तो जब हार ही चुके तो फिर क्या परेशान हो जल बन मछली की तरह क्यों फड़फड़ा

1176
01:28:59,400 --> 01:29:03,520
रहे हो जब तुम हरा चुके हो तो जलन मछली की तरह क्यों फड़फड़ा

1177
01:29:03,520 --> 01:29:07,560
रहे हो भाई फड़फड़ा तो उसके अंदर नहीं होती है जो जीता होता है

1178
01:29:07,560 --> 01:29:11,560
वो चैन से बैठता है है ना झूठे की हद तक और

1179
01:29:11,560 --> 01:29:15,760
चोर के घर तक तुम्हारे जो दो कौड़ी के वो जो

1180
01:29:15,760 --> 01:29:20,200
तर्क वर्क लाते हो ना समय नहीं मिलता है जो तुम देते हो के

1181
01:29:20,200 --> 01:29:24,240
वो सब लोग हो को कहते वो सेक्स गुरु है ये

1182
01:29:24,240 --> 01:29:28,240
ते वो सेक्स गुरु है तो अच्छा दुनिया

1183
01:29:28,240 --> 01:29:29,160
में हर कोई सेक्स से

1184
01:29:29,160 --> 01:29:33,600
ही जन्म ले रहा है तो सेक्स गुरु होना क्या बुरी बात है अरे भैया सेक्स

1185
01:29:33,600 --> 01:29:37,760
सेक्स गुरु होना में बुरी बात तब है जब वो जो धार्मिक सिद्धांत है कि इससे बाहर

1186
01:29:37,760 --> 01:29:42,440
जाकर के सेक्स नहीं करना है और तब वोह व्यक्ति सेक्स कराए

1187
01:29:42,440 --> 01:29:46,440
वो बुरी बात है यह इनके कुतर्क होते हैं दुनिया में सब

1188
01:29:46,440 --> 01:29:50,600
जगह सेक्स ही हो रहा है अगर दुनिया में कल को सब जगह पन इंडस्ट्रीज खुलने लगेगी

1189
01:29:50,600 --> 01:29:55,600
तो तुम्हारा वो धर्म हो जाएगा है ना

1190
01:29:55,600 --> 01:29:59,840
दुनिया में सब लोग बहन के साथ विवाह करने लगेंगे तुम्हारा वो धर्म हो जाएगा इन् जैसे लोगों

1191
01:29:59,840 --> 01:30:05,640
का यही वास्तविकता तो सामने लाता हूं मैं इनके तर्क

1192
01:30:05,640 --> 01:30:09,760
देखिए अरे भाई दुनिया में सब लोग सेक्स अरे भाई दुनिया में सब लोग अगर

1193
01:30:09,760 --> 01:30:14,120
धर्म के बाहर जाकर के सेक्स करने लग जाएंगे तो हम उसे क्या धर्म मान ले

1194
01:30:14,120 --> 01:30:18,120
इस समय भीषण गर्मी पड़ने वाली है मई जून में तू एसी मत चालू करना पंखा

1195
01:30:18,120 --> 01:30:22,320
मत चालू करना गर्मी पड़ रही है पड़ेगी उससे

1196
01:30:22,320 --> 01:30:26,320
बचने का उपाय मत करना तू यह सब कुतर

1197
01:30:26,320 --> 01:30:30,560
किया करते लोग बैठ गए आपस ही आपस में खुश हो जाते हैं

1198
01:30:30,560 --> 01:30:34,800
हां प्रशांत पर भी वीडियो बनाएंगे अभी कुछ कम लोग मिले

1199
01:30:34,800 --> 01:30:37,920
हैं

1200
01:30:37,920 --> 01:30:42,120
उसके हां तो इसके सिद्धांतों के अनुसार देखिए धर्म

1201
01:30:42,120 --> 01:30:46,640
की धर्म का जहां पर अभाव है वहां पर अंत में यही

1202
01:30:46,640 --> 01:30:50,640
है धर्म का जहां पर अभाव है वहां अंत में यही है तो ये जो

1203
01:30:50,640 --> 01:30:54,960
कलयुगी योगी है जो धर्म का चोला ड़ करके फिर कई जगह कह देंगे कि विदेशों

1204
01:30:54,960 --> 01:30:59,040
में धर्म कहां से आया इसके कुतर्क सुनो मैंने सुने इसके कुत किसी

1205
01:30:59,040 --> 01:31:03,080
से कह रहा है कि विदेशों में तो सनातन धर्म है नहीं तो फिर वहां पर क्या बहन

1206
01:31:03,080 --> 01:31:07,360
को बहन नहीं मानता व्यक्ति अरे बेवकूफ यहां पर थॉमस अल्वा एडिसन

1207
01:31:07,360 --> 01:31:11,680
नहीं है तो तू बल्ब कैसे जला रहा है

1208
01:31:11,680 --> 01:31:15,800
थॉमस अल्वा अगर तू बल्ब जला रहा है तो तेरे पास थॉमस अल्वा एडिसन

1209
01:31:15,800 --> 01:31:19,800
से बल्ब आया ना बेवकूफ मूर्ख तो इसका मतलब दुनिया में

1210
01:31:19,800 --> 01:31:24,200
जहां कहीं भी जो भी कुछ धार्मिक आचरण हो रहा है वो कहीं ना कहीं सनातन से ही ग

1211
01:31:24,200 --> 01:31:28,240
है सिंपल अब वहां पर सनातन की किताबें नहीं है अपने सही रूप में

1212
01:31:28,240 --> 01:31:32,440
यहां पर थम सलमा एडिसन का जन्म नहीं हुआ तुमने दुकान से खरीदा तो इसका मतलब

1213
01:31:32,440 --> 01:31:36,440
यह कहोगे कि बल्ब थॉमस अल्वा एडिसन से नहीं मिला किसी और से

1214
01:31:36,440 --> 01:31:41,040
मिला तुमने अगर प्रोविजन स्टोर से बल्ब खरीद लिया इलेक्ट्रिक

1215
01:31:41,040 --> 01:31:45,200
इलेक्ट्रिकल दुकान सेर बल्ब खरीद लिया तो तुम यह कहोगे हमको थॉमस एडिसन

1216
01:31:45,200 --> 01:31:49,200
से बल्ब नहीं मिला है हमने तो इलेक्ट्रिक शॉप से लिया है हा हद होती

1217
01:31:49,200 --> 01:31:53,880
है मूर्खता की यह इनके कुतर के

1218
01:31:53,880 --> 01:31:58,040
बच्चों जैसी अपनी सभा लगा कर के आजकल वो पेड एडवर्टाइज और चला रहे हो

1219
01:31:58,040 --> 01:32:02,240
मुझसे योग सीखो और उस समय अपना

1220
01:32:02,240 --> 01:32:06,520
जो ये ओशो वादी पन है उसको छुपा के रखते हैं क्योंकि भाई ज्यादा जनता

1221
01:32:06,520 --> 01:32:11,960
तो वही वाली है अपनी वाली मूर्ति पूजा करने वाली सैद्धांतिक

1222
01:32:11,960 --> 01:32:16,320
तो क्या कहते हैं अपनी जो वास्तविकता है उसको छुपा के रखते हैं ये

1223
01:32:16,320 --> 01:32:20,400
लोग हां जी बताइए आचार्य जी

1224
01:32:20,400 --> 01:32:24,600
वापस आ गया आप आप म्यूट है रुक जाइए चलिए

1225
01:32:24,600 --> 01:32:29,040
ठीक है बोलिए बताओ हा

1226
01:32:29,040 --> 01:32:34,760
आप ये बताइए द्रोपदी को बचाने के

1227
01:32:34,760 --> 01:32:39,080
लिएना बताना आपको है

1228
01:32:39,080 --> 01:32:43,280
आपने तो आपने उसका जवाब ले लीजिए भाई साहब

1229
01:32:43,280 --> 01:32:45,960
आपने

1230
01:32:45,960 --> 01:32:50,280
क् संकल्प मात्र से रावण को मार सकता है कि नहीं

1231
01:32:50,280 --> 01:32:56,280
तो हम मैं पूछ रहा हूं व संकल्प मात्र से आपको अपना ज्ञान

1232
01:32:59,200 --> 01:33:03,400
पहले मेरा प्रश्न सुनिए क्यों क्यों

1233
01:33:03,400 --> 01:33:09,400
जब

1234
01:33:18,280 --> 01:33:22,400
आप कर आपने प्रश्न किया था

1235
01:33:22,400 --> 01:33:26,560
व संकल्प मात्र ब्राह्मण को मार सकता है तो उसे अवतार

1236
01:33:26,560 --> 01:33:30,640
लेने की आवश्यकता क्या है अगर तुम उसे अवतार की आवश्यकता बता रहे हो तो ईश्वर वादित हो रहा

1237
01:33:30,640 --> 01:33:34,800
है अब मैं पूछ रहा हूं अगर वो अगर वो अपना ज्ञान बिना

1238
01:33:34,800 --> 01:33:39,400
मंत्रों के दे सकता है संकल्प मा से दे सकता है सुन

1239
01:33:39,400 --> 01:33:43,440
लीजिए सुन लीजिए ईश्वर अपना जन

1240
01:33:43,440 --> 01:33:47,440
ईश्वर अपना ज्ञान संकल्प मात्र से दे सकता है कि नहीं अगर

1241
01:33:47,440 --> 01:33:51,480
दे सकता है तो मंत्रों की आवश्यकता क्या है ये बता देता क्यों नहीं

1242
01:33:51,480 --> 01:33:55,680
वैदिक वैदिक ग्रंथों की आवश्यकता क्या है तैयार हूं सुनो सुनो मैं

1243
01:33:55,680 --> 01:34:00,000
तैयार बैठा हूं क दे दे मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं तो तैयार

1244
01:34:00,000 --> 01:34:04,120
बैठा हूं क भगवान दे दे ज्ञान का ज्ञान दे

1245
01:34:04,120 --> 01:34:09,520
ब कोका मन वो जब चाहेगा देगा जब चाहेगा जिस रूप से

1246
01:34:09,520 --> 01:34:14,240
देगा नहीं कर सकते दे क्यों नहीं रहा

1247
01:34:14,240 --> 01:34:18,320
उसका मन है ना कब किसको देगा है वो दे नहीं

1248
01:34:18,320 --> 01:34:22,520
उसका मा तो इसका मतलब

1249
01:34:22,520 --> 01:34:26,760
बात मानते हो कि नहीं कि ईश्वर का ज्ञान जो है ईश्वर वेद के स्वरूप

1250
01:34:26,760 --> 01:34:30,760
में देता है यह बताओ मानते हो कि नहीं नहीं वेद के

1251
01:34:30,760 --> 01:34:34,760
अभी तो कहा है आपके मन में दे सकता है अभी तो आपने कहा कि आपको दे सकता है

1252
01:34:34,760 --> 01:34:38,800
कि नहीं दे सकता अभी तो कहा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपका दे

1253
01:34:38,800 --> 01:34:42,880
दिया तो ईश्वर दे सकता है कि नहीं सुनो सुनो

1254
01:34:42,880 --> 01:34:47,320
सुनो अब मेरा भी प्रश्न सुनो ना आपके अनुसार ईश्वर

1255
01:34:47,320 --> 01:34:51,320
सं देखो आप केवल प्रश्न पूछ पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ

1256
01:34:51,320 --> 01:34:54,320
रहा हूं ईश्वर

1257
01:34:54,320 --> 01:34:58,360
ये बताओ भाई साहब मैंने आपसे अभी प्रश्न पूछा उसका उत्तर

1258
01:34:58,360 --> 01:35:02,360
नहीं मिला मुझे रुक जाइए मैंने दोनों लोगों को म्यूट कर दिया है

1259
01:35:02,360 --> 01:35:07,120
कोई को कोई नहीं बोलेगा अभी रुक जाइए मैंने दोनों लोगों को म्यूट किया है मेरी बात सुनिए

1260
01:35:07,120 --> 01:35:11,280
एक बार में एक व्यक्ति बोलेगा तभी यह चर्चा हो पाएगी वरना ये चर्चा नहीं हो सकती आप

1261
01:35:11,280 --> 01:35:15,400
भी शिवांश जी और आचार्य जी अगर आप दोनों लोग बोलते रहेंगे तो दर्शकों

1262
01:35:15,400 --> 01:35:19,520
को ना हमें कुछ समझ में नहीं आएगा ठीक है तो इसको थोड़ा सा बारी-बारी करके

1263
01:35:19,520 --> 01:35:24,920
चलते हैं अभी मैं म्यूट रखता हूं मैं अन म्यूट कर दूंगा तब आप बोलिएगा

1264
01:35:24,920 --> 01:35:29,800
आचार्य जी आप मेरी बात सुन रहे

1265
01:35:29,800 --> 01:35:33,800
हैं ठीक है आचार्य जी ठीक हा

1266
01:35:33,800 --> 01:35:38,240
हा हा आप आप मेरी बात सुन रहे हैं मैंने अभी शिवान जी को

1267
01:35:38,240 --> 01:35:42,440
किया ठीक है बस अभी एक प्रश्न एक एक करके चलते

1268
01:35:42,440 --> 01:35:46,520
हैं आपका भी प्रश्न लेंगे और उनको शिवान जी को जवाब देना पड़ेगा ठीक

1269
01:35:46,520 --> 01:35:50,720
है मैं मैं उसकी जिम्मेदार ऐसा है शिवा की आदत है केवल

1270
01:35:50,720 --> 01:35:54,840
प्रश्न पूछते हैं पूछने नहीं देते सुनि आप नहीं बोल रहे

1271
01:35:54,840 --> 01:35:59,120
देखिए वो म्यूट है वो म्यूट है शिवा जी आप म्यूट है आप म्यूट है ठीक है

1272
01:35:59,120 --> 01:36:03,120
शिवा जी देखिए शिवा जी की कोई आवाज नहीं आई है ठीक है उन्होंने एक प्रश्न पूछा है

1273
01:36:03,120 --> 01:36:07,320
ठीक है आपसे मैं हा मेरा प्रश्न सुनि सुनि अब

1274
01:36:07,320 --> 01:36:11,520
तक है 3 बजे से यही पूछते आए हैं मुझे बोलने नहीं दिया ने जी

1275
01:36:11,520 --> 01:36:15,800
मैं नहीं था मैं नहीं था वहा पर अभी मैं आया हूं हा मैं प्रश्न पूछता हूं य उत्तर

1276
01:36:15,800 --> 01:36:20,000
देंगे बस उसका कंटिन्यू बस उसी प्रश्न को कंटिन्यू करके फिर आपको

1277
01:36:20,000 --> 01:36:24,320
आपका ही प्रश्न का उत्तर देंगे वो देंगे वो देंगे नहीं जा रहे यहां से कहीं भी ठीक है

1278
01:36:24,320 --> 01:36:28,320
उन्होने जब उनका प्रश्न ये था कि एक

1279
01:36:28,320 --> 01:36:32,880
बार फिर से मैं आपको आपको प्रश्न याद है क्या प्रश्न पूछा था

1280
01:36:32,880 --> 01:36:37,000
उन्होंने आप बता पाएंगे पीछे

1281
01:36:37,000 --> 01:36:41,120
की बात है छोड़िए मैं प्रश्न पूछ रहा हूं शरू करते उने

1282
01:36:41,120 --> 01:36:44,920
उन्होंने प्रश्न क्या किया था उन्होंने प्रश्न क्या किया था आप ये बताइए एक बार बस

1283
01:36:44,920 --> 01:36:49,000
आप दर्शको को बता दीजिए प्रश्न किया था

1284
01:36:49,000 --> 01:36:53,920
कि क्या सभी लोगों का जन् संस्कार एक बार में कर देते हैं मैंने कहा नहीं

1285
01:36:53,920 --> 01:36:58,200
उस नहीं प्रश् अभी जो प्रश् कि वो बता देखिए

1286
01:36:58,200 --> 01:37:00,920
सीधी बात नहीं आप

1287
01:37:00,920 --> 01:37:04,920
बताइए

1288
01:37:04,920 --> 01:37:08,960
ब जी ईश्वर अवतार ले सकता

1289
01:37:08,960 --> 01:37:13,120
है कि नहीं ले सकता है ये प्रश्न पूछा तो मैं इस प्रश्न

1290
01:37:13,120 --> 01:37:17,400
की व्याख्या करता हूं रुक जाइए रुक जाइए रुक जा आपको म्यूट करता

1291
01:37:17,400 --> 01:37:21,760
एक बार एक बार फिर से प्रश्न सुन लीजिए हा जी शट किया

1292
01:37:21,760 --> 01:37:25,760
मैं प्रश्न बता रहा हूं अपना मेरा प्रश्न इनसे ये है

1293
01:37:25,760 --> 01:37:29,920
आचार जी आप म्यूट है आप मेरा प्रश्न

1294
01:37:29,920 --> 01:37:34,160
इनसे ये है कि इन्होंने कहा कि रावण

1295
01:37:34,160 --> 01:37:38,200
को व बिना बिना अवतार लिए संकल्प मात्र से मार सकता

1296
01:37:38,200 --> 01:37:42,320
है तो फिर उसको संकल्प लेने की क्या आवश्यकता है तो मैंने इनसे

1297
01:37:42,320 --> 01:37:46,360
प्रश्न किया कि वो हमें अपना ज्ञान बिना वेद

1298
01:37:46,360 --> 01:37:50,440
मंत्रों के केवल मन में सोच लेगा संकल्प मात्र से करा सकता है तो फिर

1299
01:37:50,440 --> 01:37:54,560
उसे वैदिक स्वरूप देने की आवश्यकता क्या है मंत्रों के रूप में ने की आवश्यकता क्या है

1300
01:37:54,560 --> 01:37:58,720
ठीक है अब अगर ये ये कह रहे तो दे क्यों नहीं रहा अगर य ये कह रहे कि दे

1301
01:37:58,720 --> 01:38:00,000
क्यों नहीं रहा तो इसका जवाब

1302
01:38:00,000 --> 01:38:04,160
यह है कि अगर वो संकल्प मात्र से रावण जैसों को मार सकता है तो मार क्यों

1303
01:38:04,160 --> 01:38:08,320
नहीं रहा फिर ये भी आ गया अगर वो मार सकता है तो मार

1304
01:38:08,320 --> 01:38:13,040
क्यों नहीं रहा ठीक है ठीक है ठीक है उनको उनको जवाब देने दीजिए इसका

1305
01:38:13,040 --> 01:38:17,120
बारी बारी चलते है ठीक है जी आचार्य जी इसका उत्तर दे उत्तर

1306
01:38:17,120 --> 01:38:21,200
दे आप नहीं अ जब ये कह रहे हैं कि रावण को मारने के लिए स्वर

1307
01:38:21,200 --> 01:38:25,240
अवतार लेता है तब मैंने कहा के अगर उसको मारना

1308
01:38:25,240 --> 01:38:29,480
होगा तो संकल से मार लेगा रावण को मारेगा क्यों जब परमात्मा

1309
01:38:29,480 --> 01:38:33,760
ने रावण को जन्म दिया तो उसको कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता है व

1310
01:38:33,760 --> 01:38:38,400
अपने मृत्यु से मरेगा परमात्मा उसको मारेगा क्यों अलग से

1311
01:38:38,400 --> 01:38:41,040
उसको बीच में

1312
01:38:41,040 --> 01:38:45,560
मारेगा मेरा प्रश्न है सुनि मेरा प्रश्न य है

1313
01:38:45,560 --> 01:38:51,440
श्वर अर ता है आचार

1314
01:38:51,440 --> 01:38:56,280
जी उनका प्रश्न कि कर सकता है कि नहीं सकना

1315
01:38:56,280 --> 01:39:00,280
क्यों करना नहीं देखिए ऐसा

1316
01:39:00,280 --> 01:39:04,560
है फसाने की बात मत करिए हमारी देखो मैं भी प्रश्न पूछ र

1317
01:39:04,560 --> 01:39:09,120
जिसम आप फस रहे हो वो बात क्यों ना की जाए जिसम आप फस रहे हो वो

1318
01:39:09,120 --> 01:39:13,160
बात ये कहां लि आप

1319
01:39:13,160 --> 01:39:17,400
सुनिए आप अगर किसी बात रहे हो तो ये हमारी दिक्कत नहीं है

1320
01:39:17,400 --> 01:39:22,000
आप अगर किसी बात प फस रहे हो तो हमारी दिक्कत नहीं है अपने सितो को करो

1321
01:39:22,000 --> 01:39:26,280
दूसरी बात मेरा प्रश्न ये नहीं है मेरा प्रश्न

1322
01:39:26,280 --> 01:39:30,280
ये नहीं है मेरा प्रश्न य है क्या ईश्वर क्या मेरा प्रश्न

1323
01:39:30,280 --> 01:39:34,360
ये है क्या ईश्वर क्या ईश्वर संकल्प मात्र से अपना ज्ञान

1324
01:39:34,360 --> 01:39:38,560
दे सकता है कि नहीं मैं ये पूछ रहा हूं केवल प्र नहीं नहीं यही

1325
01:39:38,560 --> 01:39:42,840
बताओ केव दे सकता है कि नहीं और अभी आपने कहा

1326
01:39:42,840 --> 01:39:47,000
वो मारेगा क्यों अभी आपने जो कहा वो मारेगा क्यों तो फिर ईश्वर

1327
01:39:47,000 --> 01:39:51,680
का कर्म का फल देने का डिपार्टमेंट किसका है भाई नहीं

1328
01:39:51,680 --> 01:39:55,680
मारेगा उसको जन्म दिया है एक मिनट श्वर

1329
01:39:55,680 --> 01:39:59,880
एक मिनट ईश्वर कर्मों के फल स्वरूप ईश्वर

1330
01:39:59,880 --> 01:40:04,760
कर्मों के फल स्वरूप किसी को मार सकता है कि नहीं मृत्यु दे सकता है कि नहीं

1331
01:40:04,760 --> 01:40:07,200
नहीं जिसको जन्म दिया है

1332
01:40:07,200 --> 01:40:11,800
उसका कर्म करने की पूरी स्वतंत्रता है उसको

1333
01:40:11,800 --> 01:40:16,000
क अगर कर्मों का फल उसको देना होगा किय मर जाए तो मार

1334
01:40:16,000 --> 01:40:20,000
नहीं सकता ईश्वर उसे देखो जब

1335
01:40:20,000 --> 01:40:24,720
उसकी जितनी आय होगी बीच में क्यों मारेगा बीच में क म

1336
01:40:24,720 --> 01:40:27,560
आ

1337
01:40:27,560 --> 01:40:31,560
रहे उत्तर मिल गया है ये नहीं जाएगा उन्होने आचार्य ने

1338
01:40:31,560 --> 01:40:35,760
अपना उत्तर दे दिया यही है उत्तर उनका ठीक है वो क्यों करेगा ये उत्तर नहीं है उनका

1339
01:40:35,760 --> 01:40:39,920
कि वो कर सकता है कि नहीं इनका उत्तर क

1340
01:40:39,920 --> 01:40:44,000
के मैंने पूछा है कर्मों के फल स्वरूप कर्मों के फल

1341
01:40:44,000 --> 01:40:46,560
स्वरूप

1342
01:40:46,560 --> 01:40:50,800
भगवान मैंने पूछा क्या सुन लीजिए कर्मों के फल स्वरूप

1343
01:40:50,800 --> 01:40:55,720
ईश्वर किसी को मृत्युदंड दे सकता है नहीं

1344
01:40:55,720 --> 01:41:00,400
कर्मों के फल स्वरूप देगा लेकिन तो फिर क्यों क रहे हो े

1345
01:41:00,400 --> 01:41:05,520
जन्म दिया तो हा ज

1346
01:41:05,520 --> 01:41:09,680
मारेगा मारेगा तो आज क्यों नहीं मार रहा अगर

1347
01:41:09,680 --> 01:41:13,960
को मारेगा तो आज क्यों नहीं मार रहा श्वर अ

1348
01:41:13,960 --> 01:41:18,400
ले सकता है तो आज क्यों नहीं ले रहाय बताओ

1349
01:41:18,400 --> 01:41:23,440
उसका मन उसका मन

1350
01:41:23,440 --> 01:41:28,240
ये क्या बात हुई उसका मन द्रोपदी को बचाने के लिए दो बार

1351
01:41:28,240 --> 01:41:32,400
आया म्यूट कर दिया है आपको आप सुनिए अब सुनिए म्यूट कर दिया

1352
01:41:32,400 --> 01:41:36,760
आपको आपके अनुसार भी ईश्वर कर्मों का फल देता

1353
01:41:36,760 --> 01:41:41,000
है ठीक है यही है इनका चले गए वो चले गए वो

1354
01:41:41,000 --> 01:41:45,280
वो जाना ही पड़ेगा उनको ऐसे नहीं होता ऐसे नहीं होए ये क्या है जो सिंपैथी

1355
01:41:45,280 --> 01:41:49,840
का गेम होता है ना सिंपैथी वाला कार्ड ये लोग वो निकालना चाहते हैं

1356
01:41:49,840 --> 01:41:53,920
तो उन्होंने उत्तर दे दिया ना उन्होंने दिया कि हमारा मन वैर की

1357
01:41:53,920 --> 01:41:58,080
बात जो कर रहे हैं ये क्या है ये इमोशनल कार्ड खेलते हैं ऐसी

1358
01:41:58,080 --> 01:42:02,160
बातें बोलो जिससे जनता ब उत्तर है उसका भी उत्तर है

1359
01:42:02,160 --> 01:42:06,320
लेकिन वहां तक बात नहीं जा पा रही उसका भी जवाब है देने के लिए उसका

1360
01:42:06,320 --> 01:42:10,400
उसका उत्तर है मगर बात ये है कि जो विषय चल रहा है उसको तो

1361
01:42:10,400 --> 01:42:14,480
खत्म करें वही वही विष दूसरा विषय क्यों खोद रहे हो अभी पूछा

1362
01:42:14,480 --> 01:42:18,560
ये जा रहा है जब इनके हिसाब से भी ईश्वर मृत्युदंड दे सकता है तो ये

1363
01:42:18,560 --> 01:42:20,680
क्यों कह रहे हैं कि ईश्वर क्यों दे

1364
01:42:20,680 --> 01:42:24,840
देगा मृत्युदंड अब जब हमने कहा दे सकता है तो आ आज क्यों नहीं दे रहा है अरे भैया

1365
01:42:24,840 --> 01:42:29,280
तो तुम नहीं मानते हो तो तुम कहो ना कि ईश्वर कर्मों का फल नहीं देता है

1366
01:42:29,280 --> 01:42:33,400
तुम कहो ना ये बात अब उसम द्रौपदी की बात बोल रहे हैं दूसरी बातें

1367
01:42:33,400 --> 01:42:37,520
बोल रहे हैं वो क्यों बोल रहे हैं जनता का अपनी ओर वो प्रभाव

1368
01:42:37,520 --> 01:42:42,400
उत्पन्न करने के लिए जनता में जैसे मैंने एक वो देखा था दृश्य

1369
01:42:42,400 --> 01:42:46,760
क्या कहते हैं जैसे होता है ना कि किसी ने कत्ल कर दिया है

1370
01:42:46,760 --> 01:42:51,120
किसी ने कत्ल कर दिया है या कत्ल नहीं भी किया है और वो

1371
01:42:51,120 --> 01:42:55,320
आरोपी एक्यूज पर्सन के रूप में टगरी में खड़ा हुआ है ठीक

1372
01:42:55,320 --> 01:42:59,360
है अब जो सामने वाला वकील है अधिवक्ता

1373
01:42:59,360 --> 01:43:03,360
उसका उसको उसका लक्ष्य य है कि मैं इस कटघरे में खड़े हुए व्यक्ति

1374
01:43:03,360 --> 01:43:07,760
को सजा दिलवा हं वो क्या कर रहा है कि वो जो

1375
01:43:07,760 --> 01:43:11,800
निर्दय तरीके से जो हत्या की गई है विक्टिम की जो मरा है उसकी

1376
01:43:11,800 --> 01:43:16,560
जो निर्दय तरीके से हत्या हुई है उसकी फोटो दिखा रहा है जज को क्यों दिखा रहे हो भाई

1377
01:43:16,560 --> 01:43:20,640
उस फोटो से क्या सिद्ध हो रहा है केवल तुम लोगों के मन

1378
01:43:20,640 --> 01:43:24,760
में वो जो एक्यूज्ड पर्सन है उसके विरोध में नफरत

1379
01:43:24,760 --> 01:43:29,280
भर रहे हो नफरत प्रभाव उत्पन्न कर रहे हो वही हाल है इनका

1380
01:43:29,280 --> 01:43:33,280
कि जब इनके पास तर्क और प्रमाण युक्ति इत्यादि नहीं है तो यह लोगों के

1381
01:43:33,280 --> 01:43:35,760
मन में अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए इमोशनल

1382
01:43:35,760 --> 01:43:39,760
बातें करने लगते हैं भाई तुमसे पूछा य जा रहा है जब तुम खुद

1383
01:43:39,760 --> 01:43:43,760
मानते हो कि ईश्वर कर्मों का फल दे सकता है मृत्यु के रूप में

1384
01:43:43,760 --> 01:43:47,840
तो तुम यह सवाल करने वाले होते ही नहीं हो कि भैया

1385
01:43:47,840 --> 01:43:51,960
ईश्वर जो है मारेगा क्यों बण को जैसे उन्होने अपने

1386
01:43:51,960 --> 01:43:56,240
मन को ईश्वर के मन से लि उ बो जैसे ईश्वर का वैसे हमारा

1387
01:43:56,240 --> 01:44:00,240
मन उसके बाद बाद में क्या कह रहे है अगर ईश्वर मार सकता तो मार क्यों

1388
01:44:00,240 --> 01:44:04,480
नहीं रहा तो ये सवाल तो उनसे भी बनता है कि ईश्वर अगर कर्मों का फल

1389
01:44:04,480 --> 01:44:08,560
दे सकता है तो क्यों नहीं दे रहा है क्यों नहीं दे रहा

1390
01:44:08,560 --> 01:44:12,840
है तो इसका मतलब आपको मानना पड़ेगा कि जब जहां ईश्वर को जिसका

1391
01:44:12,840 --> 01:44:17,440
फल देना होता है वो दे भी रहा है हो सकता है आपको पता ना हो हो सकता है

1392
01:44:17,440 --> 01:44:21,560
कि निठारी हत्याकांड करने वाला व्यक्ति आपके आज के टाइम में

1393
01:44:21,560 --> 01:44:25,920
दुखी हो आपको नहीं पता है ईश्वर ने दिया दंड

1394
01:44:25,920 --> 01:44:29,920
ठीक है तो जो अन्याय कर रहा है उसको किस रूप में ईश्वर दंड दे रहा है

1395
01:44:29,920 --> 01:44:33,960
ये हम लोग नहीं जानते ना मगर हम लोग यह जानते हैं कि ईश्वर धन्य

1396
01:44:33,960 --> 01:44:38,080
देता है कर्मों का फल देता है ये तो ये भी मानते हैं तो फिर ये कहने

1397
01:44:38,080 --> 01:44:42,120
वाले कौन होते हैं कि अगर वह ईश्वर कर्मों का फल देता है तो फिर आज

1398
01:44:42,120 --> 01:44:46,280
क्यों नहीं दे रहा है अभी क्यों नहीं दे रहा है मतलब

1399
01:44:46,280 --> 01:44:50,360
कुल मिलाकर के जब अवतार को नकारना हो तो ये कहेंगे वो लड़ क्यों

1400
01:44:50,360 --> 01:44:50,860
नहीं रहा है वो

1401
01:44:50,800 --> 01:44:54,800
दंड क्यों नहीं दे रहा है और अपने सिद्धांत के लिए वो कभी भी कहीं भी अपने मन से जब

1402
01:44:54,800 --> 01:44:59,000
देता रहता है उसका बिल्कुल न्याय पूर्ण सिद्धांत है

1403
01:44:59,000 --> 01:45:03,520
यह बात तो वहां भी लागू होगी ना कि कर्मों का फल वो देता है तो दे क्यों नहीं रहा

1404
01:45:03,520 --> 01:45:07,680
है जी अभी अभी इसी समय अभी इसी

1405
01:45:07,680 --> 01:45:12,000
समय कहीं ना कहीं दुनिया में किसी व्यक्ति ने किसी मच्छर को मारा

1406
01:45:12,000 --> 01:45:16,240
होगा प्राणी की हत्या की होगी ठीक है ईश्वर उसे दंड

1407
01:45:16,240 --> 01:45:20,320
क्यों नहीं दे रहा है तो हमें कहना पड़ेगा कि ईश्वर कब किस रूप में किसको

1408
01:45:20,320 --> 01:45:24,320
दंड देता है यह हम नहीं कह सकते मगर वह देता है हम कह सकते हैं

1409
01:45:24,320 --> 01:45:28,440
बिल्कुल ठीक है तो उसका मन वो किस रूप में कैसे

1410
01:45:28,440 --> 01:45:32,440
दे हो सकता है आपको पता ही ना लगे अब मैंने एक दिन सवाल

1411
01:45:32,440 --> 01:45:36,480
किया था ये लोग एक आरोप लगाते कि क्या ईश्वर ऐसे

1412
01:45:36,480 --> 01:45:40,600
कार्य कर सकता है गणित कार्य कर सकता है तो मैंने एक दिन सवाल किया

1413
01:45:40,600 --> 01:45:44,800
था इनके गुरुकुल चलाते हैं आचार्य जी वो उनका स्वभाव

1414
01:45:44,800 --> 01:45:48,920
बड़ा बढ़िया था तो मैंने उनसे सवाल किया था कि अगर किसी

1415
01:45:48,920 --> 01:45:53,040
व्यक्ति के ऊपर उल्का पिन डा के गिर गया राम से तो

1416
01:45:53,040 --> 01:45:57,080
ये क्या मानेंगे ईश्वर ने धोखा दिया कि नहीं दिया बिना बताए उसकी मृत्य हो

1417
01:45:57,080 --> 01:46:01,080
गई कुछ नहीं पता था धोखा है ये तो

1418
01:46:01,080 --> 01:46:05,400
मौसम साफ था ना कोई भविष्यवाणी हुई कि उल्का पिंड आने वाला है

1419
01:46:05,400 --> 01:46:05,920
उल्का पिंड

1420
01:46:05,920 --> 01:46:10,280
आके गिर गया खत्म हो गया वो तो इसमें क्या मानेंगे इसमें

1421
01:46:10,280 --> 01:46:14,320
मानेंगे कि उसके कर्मों का उसको फल दिया ईश्वर ने अच्छा उसके कर्मों का

1422
01:46:14,320 --> 01:46:18,920
फल दिया मगर धोखा दिया कि नहीं धोखे से मारा कि नहीं मारा

1423
01:46:18,920 --> 01:46:23,040
तो हमें ये मानना होगा कि जो कार्य हमें सामने से दिख

1424
01:46:23,040 --> 01:46:27,800
ऐसे दिख सकते कि ईश्वर ने गलत किया मगर उसके पीछे का कारण

1425
01:46:27,800 --> 01:46:31,960
जानने के बाद ने कर्मों का फल दिया तो हमें मानना होगा

1426
01:46:31,960 --> 01:46:36,760
कि ईश्वर जो करता है सही करता है तो इसका मतलब अगर उसने बाली का वध

1427
01:46:36,760 --> 01:46:41,120
किया पेड़ के पीछे जाकर के या उसने जो है वो

1428
01:46:41,120 --> 01:46:45,160
वो जो राजा बली था उसको जो है धोखे से उसकी तीन पग धरती के नाम पर पूरा

1429
01:46:45,160 --> 01:46:49,160
व सब कुछ ले लिया उसका तो उसको वो भी उसके कर्मों का फल दिया

1430
01:46:49,160 --> 01:46:53,160
ईश्वर ने बिल्कुल तो येय

1431
01:46:53,160 --> 01:46:58,440
इनके तरीके हैं और

1432
01:46:58,440 --> 01:47:02,800
ये चलिए ईश्वर का वही वही है कि

1433
01:47:02,800 --> 01:47:07,480
यह फस य एक्चुअली उत्तर उसका नहीं दे पा रहे थे कि कर सकता है कि नहीं

1434
01:47:07,480 --> 01:47:11,480
जब आपके पास इसका उत्तर नहीं होगा तो आपके पास उसका सबसे जो क्लोजेस्ट

1435
01:47:11,480 --> 01:47:15,480
जो आंसर होगा वो यही होगा क्यों क्या क्या जरूरत है ठीक है और

1436
01:47:15,480 --> 01:47:19,960
यही समानता है मुझे जब यह इस्लाम पंथ से भी प्रश्न

1437
01:47:19,960 --> 01:47:24,000
पूछा जाता है कि ईश्वर का आकार सता आकार हो सकता है

1438
01:47:24,000 --> 01:47:28,080
कि नहीं तो उनका भी उत्तर यही होता है कि इसको जरूरत क्या है आकार लेने की

1439
01:47:28,080 --> 01:47:33,160
येय बस यही य समानता मुझे दिखती है उसम सर मैंने

1440
01:47:33,160 --> 01:47:37,360
उनसे मैं अब वो नहीं आएंगे उनका मन ठीक

1441
01:47:37,360 --> 01:47:41,360
नहीं है शुरू से अगर होते तो शायद यह थोड़ा सा थोड़ा

1442
01:47:41,360 --> 01:47:45,440
सा सही हो जाता और मुझे लगता है कि अब जो जो उन्होंने उत्तर

1443
01:47:45,440 --> 01:47:49,440
दे दिया ना अब क्या है कि उनसे कभी क्या होता है कि

1444
01:47:49,440 --> 01:47:54,160
आप ना हमेशा मनवा नहीं सकते अपनी बात को

1445
01:47:54,160 --> 01:47:58,160
सम उस भाव से नहीं कह रहा हूं जी ये बात वो भी जानते हैं कि इसका

1446
01:47:58,160 --> 01:48:02,240
जवाब नहीं है कि कर सकता है कि नहीं ये ये दे नहीं सकते उसका जब देंगे तो

1447
01:48:02,240 --> 01:48:06,280
पढना कम हो जाएगा उनका ये बात जानते हैं वो तो वो कभी नहीं देंगे आप

1448
01:48:06,280 --> 01:48:10,360
इसको ये समझिए तो तो ना उस चर्चा को वहीं पर उस चर्चा के उस पार्ट को

1449
01:48:10,360 --> 01:48:13,440
वही विराम देकर फिर दूसरी चर्चा पर बढ़ जाना चाहिए क्योंकि जनता

1450
01:48:13,440 --> 01:48:17,680
तो देख ही रही है व समझ रही है अंत में जब निर्णय होता तो हम बता देते कि आपने

1451
01:48:17,680 --> 01:48:21,920
इसका उत्तर दिया आपने उसका उत्तर नहीं दिया आपने उसका उत्तर क्यों नहीं दिया क्योंकि आपने इसका

1452
01:48:21,920 --> 01:48:26,280
इस तरह से जवाब दिया वो सब नोट करके बता देते तो

1453
01:48:26,280 --> 01:48:30,400
वो आप सही कह रहे हैं देखिए दिक्कत कहां हुई जैसे मैं पूछ कुछ रहा हूं

1454
01:48:30,400 --> 01:48:34,440
मैंने पूछा य क्या आप इस सिद्धांत को मानते हो कि नहीं ईश्वर कर्मों का फल देता

1455
01:48:34,440 --> 01:48:38,680
है तो जब आप इसको मानते हो कर्मों का फल देने वाले सिद्धांत को तो यह कैसे

1456
01:48:38,680 --> 01:48:42,800
कह सकते हो कि दे क्यों नहीं रहा जी जी बिल्कुल इतने अंश में तो आप स्वयं

1457
01:48:42,800 --> 01:48:46,880
भी दयानंद के विरोध में चले गए जी

1458
01:48:46,880 --> 01:48:51,000
बोलो ना कि हम दयानंद को नहीं मानते खुल के बोलो फिर आपसे

1459
01:48:51,000 --> 01:48:55,200
ना फिर आपसे जो है सना विरोधी के तरीके से बात किया अभी तक सनातन

1460
01:48:55,200 --> 01:48:59,200
का चोला ड़ कर के बात कर रहे हो फिर जब आपके पास दयानंद का भी सहारा नहीं

1461
01:48:59,200 --> 01:49:03,560
रह जाएगा तो फिर हम आपसे सनातन विरोधी के तौर पर बात करेंगे और फिर जब आपका सनातन

1462
01:49:03,560 --> 01:49:07,600
विरोधी धर्मा भास का भी सहारा नहीं रह जाएगा तब हम आपसे नास्तिक

1463
01:49:07,600 --> 01:49:11,880
के अनुसार बात करेंगे और जब आपके पास नास्तिकता का भी सहारा

1464
01:49:11,880 --> 01:49:17,880
नहीं ले रह जाएगा तब हम आपका जो

1465
01:49:22,880 --> 01:49:26,960
को काट के बोल रहे कि अगर वो देता है तो दे क्यों नहीं रहा है अरे भाई कर्मों का फल देता है

1466
01:49:26,960 --> 01:49:31,000
तो क्यों नहीं दे रहा ये तो तुम वो भी मानते दयानंद जी क्यों नहीं दे रहा कर्मों का फल मैंने

1467
01:49:31,000 --> 01:49:35,000
तुम्हें हटा दिया अभी तुम यही रोना रोगे अभी तुम अपने बच्चों के बीच

1468
01:49:35,000 --> 01:49:39,080
में जाक रोना रोगे मुझे म्यूट किया गया मुझे हटाया गया यही रोना

1469
01:49:39,080 --> 01:49:43,120
रहोगे ना तो क्यों नहीं कर्मों का फल दे रहा ईश्वर मुझे आपके अनुसार

1470
01:49:43,120 --> 01:49:47,440
ईश्वर कर्मों का फल देता है क्यों नहीं दे रहा

1471
01:49:47,440 --> 01:49:51,480
तो फैक्ट ये आएगा उत्तर ये आएगा कि ईश्वर कब किसको किस रूप में

1472
01:49:51,480 --> 01:49:55,720
उसके कर्मों का फल देता ईश्वर ही जानता है हम केवल

1473
01:49:55,720 --> 01:49:59,720
ये जानते हैं कि वो देता है ठीक है

1474
01:49:59,720 --> 01:50:03,760
जी ऑडियंस में जो कुछ लोग कमेंट कर रहे हैं आप लोगों से हाथ जोड़ के रिक्वेस्ट

1475
01:50:03,760 --> 01:50:07,840
करता हूं मैं कि ना दयानंद जी के बारे में ना जो आचार्य जी आए थे उनके बारे में

1476
01:50:07,840 --> 01:50:12,560
ना किसी के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें अच्छा है ठीक है

1477
01:50:12,560 --> 01:50:16,720
तो आप लोगों से बस रिक्वेस्ट कर रहा हूं मैं कोई भी हो

1478
01:50:16,720 --> 01:50:20,800
आप अपने मतलब आप कटाक्ष कर सकते हैं लेकिन उसमें भी अभद्रता ना हो तो अच्छा

1479
01:50:20,800 --> 01:50:25,080
है मलब कर यह देखिए प्रश्न पूछा जा रहा है कि आवाजे

1480
01:50:25,080 --> 01:50:29,080
हक से बात कब करोगे तो भाई देखिए

1481
01:50:29,080 --> 01:50:33,160
जो व्यक्ति अपना चेहरा छिपाकर बात करता है उससे हम

1482
01:50:33,160 --> 01:50:37,240
बात नहीं करते हैं तो आवाज आ यदि चेहरा दिखाकर बात कर सकता है

1483
01:50:37,240 --> 01:50:38,000
और हमसे अगर

1484
01:50:38,000 --> 01:50:42,160
उसका संपर्क होता है हमने तो अपना नंबर सार्वजनिक कर रखा है

1485
01:50:42,160 --> 01:50:46,200
अगर उसके अंदर गुर्दा है कि वह अपने पक्ष को मजबूती

1486
01:50:46,200 --> 01:50:50,600
के साथ रखने में सामर्थ्य वान है ये लाइन ठीक नहीं है

1487
01:50:50,600 --> 01:50:54,840
अगर माता ने सुनिए सुनि सुनिए

1488
01:50:54,840 --> 01:50:59,200
अगर गुर्दा है माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है

1489
01:50:59,200 --> 01:51:03,360
तो वो हमसे संपर्क कर ले अन्यथा अपने संपर्क सूत्र को सार्वजनिक

1490
01:51:03,360 --> 01:51:07,400
कर ले कर दे हम संपर्क कर लेंगे और आवश्यक

1491
01:51:07,400 --> 01:51:11,400
नहीं कि व हमारे चैनल पर आए या हम उसके चैनल पर जाए किसी बीच का

1492
01:51:11,400 --> 01:51:15,840
चैनल ढूंढ कर के मॉडरेटर के साथ चर्चा कर लेंगे हमारे बहुत साधारण

1493
01:51:15,840 --> 01:51:20,040
से सिद्धांत है मगर वही उसी में पूरी दुनिया

1494
01:51:20,040 --> 01:51:24,040
हि जाती है ईश्वर अच्छा मैं दर्शकों

1495
01:51:24,040 --> 01:51:28,160
को एक चीज और बता दूं कि

1496
01:51:28,160 --> 01:51:31,400
यह क्या कहते

1497
01:51:31,400 --> 01:51:35,400
हैं हम लोग एक सिद्धांतों

1498
01:51:35,400 --> 01:51:39,480
का प्रेम ला रहे हैं पाच सिद्धांत ईश्वर

1499
01:51:39,480 --> 01:51:44,200
वही है वो संसार के प्रत्येक मनुष्य

1500
01:51:44,200 --> 01:51:48,200
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही खुद को नास्तिक क्यों ना कहता

1501
01:51:48,200 --> 01:51:52,880
हो पहला सिद्धांत आवान के जो पांच मुख्य सिद्धांत है

1502
01:51:52,880 --> 01:51:56,960
संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही खुद को नास्तिक ही क्यों ना कहता

1503
01:51:56,960 --> 01:52:01,480
हो य पहला है दूसरा है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है

1504
01:52:01,480 --> 01:52:05,760
तीसरा है ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना रचा

1505
01:52:05,760 --> 01:52:10,040
हो चौथा है ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से और

1506
01:52:10,040 --> 01:52:14,760
पांच में के दो फैक्टर हैं परंपरा तो कौन सी

1507
01:52:14,760 --> 01:52:19,080
परंपरा शंकराचार्य परंपरा नारायण समारंभा शंकराचार्य

1508
01:52:19,080 --> 01:52:23,280
मध्यमाम अश्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु परम

1509
01:52:23,280 --> 01:52:27,400
और परंपरा में अन्य परंपराएं भी आती है अन्य

1510
01:52:27,400 --> 01:52:31,560
प्रामाणिक परंपराएं भी आती है केवल शंकराचार्य परंपरा

1511
01:52:31,560 --> 01:52:35,760
कोई लक्ष्य करके नहीं है यह इसमें रामानुजाचार्य जी की परंपरा

1512
01:52:35,760 --> 01:52:39,800
भी आती है इसमें अन्य जितने भी प्रामाणिक हमारे परंपरा

1513
01:52:39,800 --> 01:52:44,200
प्राप्त आचार्यों के संप्रदाय वह सब आते हैं और इस

1514
01:52:44,200 --> 01:52:46,520
इस इस पायदान पर दूसरा जो

1515
01:52:46,520 --> 01:52:51,360
वो है फैक्टर वो क्या है रामो विग्रहवां धर्म

1516
01:52:51,360 --> 01:52:55,400
रा श्री राम का साक्षात स्वरूप है जब जब जीवन

1517
01:52:55,400 --> 01:52:59,400
में कुछ भी समझ में ना आए क्या करना है और क्या नहीं करना है तो

1518
01:52:59,400 --> 01:53:03,560
श्री राम को फॉलो करें ठीक है तो

1519
01:53:03,560 --> 01:53:07,680
ये पांच सिद्धांतों को लेकर हम चल रहे हैं और इनको लेकर के कुछ

1520
01:53:07,680 --> 01:53:11,800
पेंटिंग हम लोग अपनी उसमें देने वाले हैं तो आप

1521
01:53:11,800 --> 01:53:16,000
सबसे निवेदन है कि उनको आप अपने घर पर लगाएं और इससे हमारी

1522
01:53:16,000 --> 01:53:20,560
थोड़ी आर्थिक सहायता भी हो जाएगी और इन सिद्धांतों को अपने घर पर अपने

1523
01:53:20,560 --> 01:53:24,600
जहां पर आप चाहे कि लोग उन सिद्धांतों को पढ़े वहां पर

1524
01:53:24,600 --> 01:53:28,760
इन सिद्धांतों को आप लगाइए अपने आप ठीक है आर्थिक

1525
01:53:28,760 --> 01:53:32,840
सहायता तो हो जाएगी क्योंकि करोड़ों की फंडिंग अभी अभी हमें हो नहीं रही है

1526
01:53:32,840 --> 01:53:37,640
तो जब होगी तो नारायण

1527
01:53:37,640 --> 01:53:41,800
चलिए जय श्री राम ठीक है चलिए फिर जय श्री राम जय

1528
01:53:41,800 --> 01:53:45,800
श्री कृष्ण हर हर महादेव हर हर महादेव
