1
00:00:02,000 --> 00:00:06,000
सभी को जय श्री राम हमारे

2
00:00:06,000 --> 00:00:10,760
साथ में आज महोदय है जो

3
00:00:10,760 --> 00:00:15,080
भगवान में विश्वास नहीं रखते हैं

4
00:00:15,080 --> 00:00:19,160
इनके अपने कारण होंगे उनको आज हम देखेंगे क्या क्या कारण

5
00:00:19,160 --> 00:00:21,360
है

6
00:00:21,360 --> 00:00:25,920
और हम कोशिश करेंगे कि इनकी जो नास्तिकता है वो दूर हो सके

7
00:00:25,920 --> 00:00:30,880
इनसे

8
00:00:30,880 --> 00:00:35,160
देखिए जो भी हम कार्य कर रहे हैं

9
00:00:35,160 --> 00:00:39,640
और जो भी हम सिद्धांतों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं

10
00:00:39,640 --> 00:00:43,720
वो आकर के यह जो दृश्य है ना

11
00:00:43,720 --> 00:00:48,600
जिन सिद्धांतों का हम प्रचार प्रसार करते हैं वो इस दिन के लिए करते हैं

12
00:00:48,600 --> 00:00:52,600
जब धर्म की स्थापना करने के लिए ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना

13
00:00:52,600 --> 00:00:57,120
करनी आवश्यक हो जाए इसलिए

14
00:00:57,120 --> 00:01:01,240
सितो की आवश्यकता है ऐसे ईश्वर की आवश्यकता है इसको की

15
00:01:01,240 --> 00:01:05,480
स्थापित किया जा ठीक है तो सबसे पहले अतुल कुमार

16
00:01:05,480 --> 00:01:09,680
जी आप हमारे दर्शकों को अपना एक परिचय

17
00:01:09,680 --> 00:01:13,840
दे दीजिए बता दीजिए आपकी आपके बारे में जो भी है

18
00:01:13,840 --> 00:01:17,880
जो आप बताना चाहे जी

19
00:01:17,880 --> 00:01:22,040
सर सर मेरा नाम अतुल कुमार वैष्णव है मैं छत्तीसगढ़ से

20
00:01:22,040 --> 00:01:26,400
हूं और मेरे कुछ सवाल थे

21
00:01:26,400 --> 00:01:30,400
बस ऐसा है और रही बात सर की

22
00:01:30,400 --> 00:01:35,000
तो मैं नास्तिक नहीं हूं सर मैं एक आस्तिक ही हूं पर

23
00:01:35,000 --> 00:01:39,160
मेरे मन में कुछ सवाल है जिनकी जवाब मुझे अध्यात्मिकता की तरफ

24
00:01:39,160 --> 00:01:43,240
से नहीं मिल पा रहा बस यही बस है और जैसे

25
00:01:43,240 --> 00:01:47,320
कोई कोई भगवान को देखने का सबका अलग अलग नजरिया हो सकता है सर

26
00:01:47,320 --> 00:01:51,360
वैसे ही मेरा कुछ अलग नजरिया है बस तो असली कारण

27
00:01:51,360 --> 00:01:55,920
है सर की मेरा दोस्त है विष्णु नाम का ठीक है

28
00:01:55,920 --> 00:01:59,920
तो मैं भगवान पर तो विश्वास करता हूं लेकिन मेरे

29
00:01:59,920 --> 00:02:04,120
स तो उन्होंने मुझे सजेशन दिया कि आपसे मैं एक बार बात करूं

30
00:02:04,120 --> 00:02:08,960
इसलिए फॉर्म भरने के लिए बोले फिर मैं फम भर दिया

31
00:02:08,960 --> 00:02:13,120
नहीं तो उसके लिए तो हमारी क्लासेस चलती है अगर सवाल है तो यह

32
00:02:13,120 --> 00:02:17,680
बात आपसे कल भी हुई थी मेरी तो आपने बताया था सवाल नहीं है विरोध है

33
00:02:17,680 --> 00:02:22,160
जी सर विरोध है क्योंकि आपका भगवान के मानने का

34
00:02:22,160 --> 00:02:26,480
तरीका थोड़ा अलग है और मेरा थोड़ा सा अलग है अच्छा अच्छा

35
00:02:26,480 --> 00:02:30,640
आप मुझे एक बात ब अच्छा ठीक आप क्या है

36
00:02:30,640 --> 00:02:33,240
भगवान को मानने जैसे

37
00:02:33,240 --> 00:02:37,400
आप लोग अच्छा मैं सवाल पूछता हूं एक सवाल जैसे आप ब्रह्मा विष्णु महेश है ठीक

38
00:02:37,400 --> 00:02:41,560
है तो इनको भगवान मानते हैं कि नहीं मैं आपसे जानना चाहता हूं

39
00:02:41,560 --> 00:02:45,600
हां जी मानते हैं हा वही तो उनको मैं

40
00:02:45,600 --> 00:02:49,640
भगवान नहीं मानता ना उन लोगों को चाहे वो ब्रह्मा विष्णु महेश हो चाहे

41
00:02:49,640 --> 00:02:53,720
व ईसा मसीह हो चाहे कोई भी परमेश्वर हो चाहे कोई अल्लाह हो किसी

42
00:02:53,720 --> 00:02:57,800
भी धर्म का ईश्वर को मैं विश्वास नहीं करता सर मेरे हिसाब से

43
00:02:57,800 --> 00:03:02,200
ईश्वर का कुछ अलग ही रूप है ऐसा मैं नास्तिक ह नास्तिक तो कोई नहीं है

44
00:03:02,200 --> 00:03:06,600
ठीक है मतलब आप मानते है इस दुनिया में कोई सत्ता

45
00:03:06,600 --> 00:03:11,520
है नहीं नहीं सर मैं नहीं मानता की दुनिया में कोई सत्ता है

46
00:03:11,520 --> 00:03:15,560
सिर्फ भवान बता रहा सर मैं सिर्फ

47
00:03:15,560 --> 00:03:20,520
प्रकृति को ही भगवान मानता हूं जिसके वजह से हम चल रहे हैं

48
00:03:20,520 --> 00:03:24,520
मेरा तरीका है अब जैसे कोई प्रकृति को कोई चलाने वाला कोई बैठा नहीं है

49
00:03:24,520 --> 00:03:28,640
ऊपर य मैं कह रहा हूं कोई बैठा नहीं है ऊपर प्रकृति

50
00:03:28,640 --> 00:03:33,280
है प्रकृति स्वयंभू खुद ही खुद बना है

51
00:03:33,280 --> 00:03:37,280
सर तो तो जब प्रकृति स्वयंभू है

52
00:03:37,280 --> 00:03:41,840
तो प्रकृति तो वो है ना जो साइंस से डिफाइन होती है जी

53
00:03:41,840 --> 00:03:46,720
सर तो जब प्रकृति स्वयंभू है तो अ

54
00:03:46,720 --> 00:03:48,240
आपका कहने का मतलब है यदि

55
00:03:48,240 --> 00:03:52,360
आप झूठ बोलते हो हम तो आपको कोई

56
00:03:52,360 --> 00:03:56,440
सत्ता है जो नोट कर रही है जो आपको सजा दे ऐसा मानते

57
00:03:56,440 --> 00:04:00,680
हैं नहीं सर ऐसा कुछ भी नहीं मानता सर तो फ इसमें ईश्वर

58
00:04:00,680 --> 00:04:04,760
इसमें ईश्वर की बात कहां आ गई फिर नहीं सर तो

59
00:04:04,760 --> 00:04:08,760
दूसरे शब्दों में अप्रत्यक्ष रूप से जब आप

60
00:04:08,760 --> 00:04:12,800
ये जिन चीजों को आप जान रहे हैं उससे ऊपर की किसी सत्ता को नहीं मान

61
00:04:12,800 --> 00:04:17,160
रहे हैं कि कोई सत्ता है जो निर्णायक धर्म अधर्म के रूप में बैठी हुई है डिसाइड

62
00:04:17,160 --> 00:04:21,440
करने साइंस हमें बोल नहीं रहा है कि आप झूठ बोलोगे तो आपको दिक्कत होगी

63
00:04:21,440 --> 00:04:25,880
साइंस तो नहीं बोल रही ना तो तो यानी कि

64
00:04:25,880 --> 00:04:30,160
जब आप जब आप प्रकृति को ही अंतिम मान रहे हो तो फिर आपके पास वो सत्ता

65
00:04:30,160 --> 00:04:34,280
नहीं है जो दंड का अपराध देती हो इस तरह के मल मोरल

66
00:04:34,280 --> 00:04:39,360
वैल्यू के दंड का अपरा दे एकदम सही सर

67
00:04:39,360 --> 00:04:43,360
तो तो कुल मिलाकर के दूसरे शब्दों में आप बस कह

68
00:04:43,360 --> 00:04:47,480
रहे कि मैं ईश्वर को मानता हूं जबक आप मान नहीं रहे ईश्वर नहीं

69
00:04:47,480 --> 00:04:49,960
सर

70
00:04:49,960 --> 00:04:53,960
भक नहीं एक सेकंड सुनिए मैं ये बोल रहा हूं कि आप

71
00:04:53,960 --> 00:04:58,160
ईश्वर की पूजा करते हैं ना पूरी तरह से गलत है वो मैं सिद्ध

72
00:04:58,160 --> 00:05:02,280
करूंगा व बिल्कुल सही है तो एक अगला टॉपिक है मगर अभी हम लोग बात कर रहे

73
00:05:02,280 --> 00:05:03,280
कि आप ईश्वर को मानते

74
00:05:03,280 --> 00:05:07,600
हैं कि नहीं मानते तो आप ईश्वर को नहीं

75
00:05:07,600 --> 00:05:11,880
मानते मैं भी सिद्ध करूंगा ईश्वर किसे कहते हैं

76
00:05:11,880 --> 00:05:15,960
आप क्या लक्षण होने चाहिए सर

77
00:05:15,960 --> 00:05:20,080
मेरे हिसाब से तो ईश्वर का वही रूप है ठीक है जो हमारे प्रकृति के द्वारा

78
00:05:20,080 --> 00:05:24,200
हमें मिला है इंसानों को जो मिला है जानवरों को जो मिला है ठीक है जिसके वजह

79
00:05:24,200 --> 00:05:28,920
से हम जी पा रहे हैं जीवन अपना व्यतीत कर पा रहे हैं जैसे अपना पानी हो गया

80
00:05:28,920 --> 00:05:33,000
ठीक है आपका वायु हो गया अग्नि हो गया ईश्वर की

81
00:05:33,000 --> 00:05:37,000
ईश्वर की यह परिभाषा कहां लिखी है जो आप बोल रहे हैं

82
00:05:37,000 --> 00:05:41,240
कहीं लिखी नहीं है इसका मतलब इसका मतलब आपने

83
00:05:41,240 --> 00:05:45,760
शब्द तो हमारा ले लिया परिभाषा अपनी ले ली

84
00:05:45,760 --> 00:05:50,960
एकदम सही सर तो फिर आप क्यों कह रहे कि हम ईश्वर को मानते

85
00:05:50,960 --> 00:05:54,200
हैं

86
00:05:54,200 --> 00:06:00,200
बना आप समझे नहीं आप अपना कोई नया शब्द बनाइए ना

87
00:06:00,480 --> 00:06:04,960
सक्तिमान है ईश्वर की परिभाषा के लिए हम किसी प्रामाणिक

88
00:06:04,960 --> 00:06:09,080
डिक्शनरी को लाएंगे उसम क्या ईश्वर की वही परिभाषा लिखी होगी

89
00:06:09,080 --> 00:06:13,960
जो आप बोल रहे नहीं सर जी आप ब्र

90
00:06:13,960 --> 00:06:18,000
वि ईश्वर मानता

91
00:06:18,000 --> 00:06:22,360
हूं आप ये कहिए जैसे आप ब्रह्मा विष्णु महेश को ईश्वर

92
00:06:22,360 --> 00:06:27,280
मानते हैं सुप्रीम मानते सुप्रीम

93
00:06:27,280 --> 00:06:31,600
क्योंकि मेरे लिए प्रकृति सुप्रीम है इसलिए मैं उसको ईश्वर कह रहा हूं बाकी

94
00:06:31,600 --> 00:06:35,600
यह वो ईश्वर नहीं है जो किसी प्रमाणिक डिक्शनरी में ईश्वर की डेफिनेशन

95
00:06:35,600 --> 00:06:39,920
जो दी गई होती है वो वाला ईश्वर नहीं है एकदम सही समझे

96
00:06:39,920 --> 00:06:44,160
आप आप ही पहले इंसान हो जो इसको समझ चुके हो लेकिन सर मैं

97
00:06:44,160 --> 00:06:48,200
ये भी बोल रहा हूं कि आप जिनको इवर मार रहे हो ब कितनी बार बोलोगे

98
00:06:48,200 --> 00:06:52,320
मैं उसका जवाब दे रहा हूं ना कितनी बार बोलोगे दे रहा हूं सुन

99
00:06:52,320 --> 00:06:56,560
लिया मैंने ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा विष्णु महेश

100
00:06:56,560 --> 00:07:00,560
बताइए बताइए हा माफ कर माफ कीजिएगा

101
00:07:00,560 --> 00:07:04,640
तो पहली बात तो ये हो गई कि आप जो है ईश्वर को नहीं मानते वो आपने

102
00:07:04,640 --> 00:07:09,160
अपनी एक डेफिनेशन पकड़ रखी है उसके अनुसार उस

103
00:07:09,160 --> 00:07:09,660
तथा

104
00:07:09,640 --> 00:07:14,600
कथित ईश्वर को आप मानते हैं अपनी एक अलग डेफिनेशन

105
00:07:14,600 --> 00:07:18,800
बना इससे ये भी है कि भाई लोग आप लोग आपको पहचानने में थोड़ी

106
00:07:18,800 --> 00:07:22,840
लोगों को दिक्कत होगी कि ईश्वर वादी है कि नहीं क्योंकि आप ऊपरी तौर पर तो कह दोगे

107
00:07:22,840 --> 00:07:26,840
मैं ईश्वर को मानता हूं अंदरूनी तौर पर तो आप भौतिकवादी ही

108
00:07:26,840 --> 00:07:30,360
हो खैर

109
00:07:30,360 --> 00:07:34,800
तो कोई ऐसी सत्ता है नहीं इसकी बात कर रहे हैं

110
00:07:34,800 --> 00:07:39,440
काफी सारी ऐसी बातें हो गई ना तो मुझे ये लग रहा है कि कौन सा टॉपिक उठाऊं मैं पहले

111
00:07:39,440 --> 00:07:43,600
जिससे कि मैं आपको ईश्वर को प्रूव करू तो सबसे पहले मैं आपको प्रूव

112
00:07:43,600 --> 00:07:48,760
करूंगा कि प्रकृति से ऊपर कोई सत्ता है

113
00:07:48,760 --> 00:07:53,480
ठीक

114
00:07:53,480 --> 00:07:57,600
है प्रार उपनिषद एकती

115
00:07:57,600 --> 00:08:01,880
28 हमारे य उसम कहा गया है असतो

116
00:08:01,880 --> 00:08:06,040
मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया मृत

117
00:08:06,040 --> 00:08:10,920
मतम गमाया तो

118
00:08:10,920 --> 00:08:15,280
इसके अनुसार एक जीव के अंदर की प्यास बताई जा रही

119
00:08:15,280 --> 00:08:19,360
है दुनिया के प्रत्येक जीव के अंदर भी

120
00:08:19,360 --> 00:08:22,840
कभी ना मरने की चा विद्यमान

121
00:08:22,840 --> 00:08:27,720
है क्या साइंस नेय कह दिया है कि आप कभी मरोगे

122
00:08:27,720 --> 00:08:31,880
नहीं नहीं नहीं कहा है फिर भी वह चा विद्यमान

123
00:08:31,880 --> 00:08:36,240
है हा अच्छा एक नास्तिक

124
00:08:36,240 --> 00:08:40,240
व्यक्ति के अंदर भी संपूर्ण ज्ञानी बन

125
00:08:40,240 --> 00:08:44,600
जाने की चाह विद्यमान है कुछ भी ऐसा ना हो

126
00:08:44,600 --> 00:08:49,080
कुछ भी ऐसा ना हो जो मेरे से जानने से रह गया हो

127
00:08:49,080 --> 00:08:53,760
जैसे कि आपने किसी व्यक्ति को पहली बार

128
00:08:53,760 --> 00:08:57,920
देखा तो आप अपनी ओर से प्रयत्न करने लगते हो उसके बारे

129
00:08:57,920 --> 00:09:02,240
में गेस करने कौन कन हो सकता है जब

130
00:09:02,240 --> 00:09:06,440
साइंस केडि जब तक आपको सूचना नहीं मिलेगी तो आपको पता नहीं लगेगा

131
00:09:06,440 --> 00:09:08,600
कि आप वो कौन है मगर

132
00:09:08,600 --> 00:09:12,760
फिर भी साइंस के विपरीत जाकर के आप कोशिश कर रहे हो मुझे

133
00:09:12,760 --> 00:09:18,320
पता लग यानी कि अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान

134
00:09:18,320 --> 00:09:23,480
है कई बार ऐसा होता है

135
00:09:23,480 --> 00:09:28,120
कि कल मैच में कौन जीतेगा

136
00:09:28,120 --> 00:09:32,600
यह भी हम पता लगाना भविष्य देख लेना चाहते हैं

137
00:09:32,600 --> 00:09:36,720
जबकि जो साइंस है वो कह रही है कि नहीं आप भविष्य भी नहीं देख सकते

138
00:09:36,720 --> 00:09:40,920
है ना इसी प्रकार से

139
00:09:40,920 --> 00:09:45,040
कई बार एक नास्तिक के मन में भी एक चा विद्यमान

140
00:09:45,040 --> 00:09:49,240
है कि वह कभी दुखी ना हो सदा आनंदित रहने की चा

141
00:09:49,240 --> 00:09:53,480
विद्यमान जैसे कि मेरे मेरी जो पोजीशन है जैसी मुझे

142
00:09:53,480 --> 00:09:57,480
अच्छी लगती है वो एज इट इज बनी रहे

143
00:09:57,480 --> 00:10:02,160
यानी कि मेरे गालों में कभी झुरिया ना पड़े

144
00:10:02,160 --> 00:10:06,240
मेरे सर के बाल कभी झरे ना मैं गंजा ना हू मेरी

145
00:10:06,240 --> 00:10:10,280
कार है तो उसके टायर घिसे ना मेरे मोबाइल है तो उसमें कभी स्कच ना

146
00:10:10,280 --> 00:10:14,360
आए है ना तो कुल मिलाकर के जो

147
00:10:14,360 --> 00:10:18,520
तीन चा है सत चित आनंद कहते

148
00:10:18,520 --> 00:10:24,520
हैं इसे क्या कहते हैं सत

149
00:10:24,560 --> 00:10:29,440
चित तो इसका अर्थ है

150
00:10:29,440 --> 00:10:34,360
कि हमारे अंदर हम कह तो रहे हैं प्रकृति को ही सुप्रीम मानते हैं

151
00:10:34,360 --> 00:10:38,640
मगर प्रकृति के नियमों के ठीक विपरीत

152
00:10:38,640 --> 00:10:43,040
जाने की इनबिल्ट चाह विद्यमान हो रही है

153
00:10:43,040 --> 00:10:47,400
हम प्रकृति को मानते हैं मगर उसको तोड़ देना चाहते उसके नियमों को

154
00:10:47,400 --> 00:10:51,440
तो अब एक नियम है कि हमारे अंदर जो जो

155
00:10:51,440 --> 00:10:56,480
चाह इनबिल्ट है जिसको हम अपने से अलग नहीं कर

156
00:10:56,480 --> 00:11:00,760
सकते उस चाह का जो सब्जेक्ट है मौजूद है

157
00:11:00,760 --> 00:11:05,280
जैसे हम ख से अपने आप को अलग नहीं कर सकते इन

158
00:11:05,280 --> 00:11:11,080
तो उसका जो निवारण है भोजन उसका दुनिया में

159
00:11:11,080 --> 00:11:15,920
अस्तित्व जैसे हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में

160
00:11:15,920 --> 00:11:20,280
पानी है तो जिस प्रकार

161
00:11:20,280 --> 00:11:24,560
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर मौजूद

162
00:11:24,560 --> 00:11:29,440
पानी प्यास और प्यास से पानी का अस्तित्व

163
00:11:29,440 --> 00:11:33,560
होता है भूख से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है उसी

164
00:11:33,560 --> 00:11:37,720
प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी प्रकृति को

165
00:11:37,720 --> 00:11:39,720
कंट्रोल कर लेने की चा विद्यमान

166
00:11:39,720 --> 00:11:44,560
होने के कारण उसका सब्जेक्ट

167
00:11:44,560 --> 00:11:48,600
प्रकृति को कंट्रोल कर लेने वाला सच्चित आनंद स्वरूप परमेश्वर

168
00:11:48,600 --> 00:11:52,600
का अस्तित्व सिद्ध होता है अब या तो आपको

169
00:11:52,600 --> 00:11:56,720
यह कहना पड़ेगा कि मैं मरना चाहता हूं मुझे कोई दिक्कत नहीं मरने से मैं अपने

170
00:11:56,720 --> 00:12:00,720
मां-बाप को भी मरता हुआ देख लूंगा कोई दिक्कत नहीं है जो

171
00:12:00,720 --> 00:12:05,640
कि निराधार बातें होंगी या फिर आपको मानना पड़ेगा

172
00:12:05,640 --> 00:12:10,080
कि मैं प्रकृति को देख पा रहा हूं वह बात अलग है मगर मैं प्रकृति पर कंट्रोल

173
00:12:10,080 --> 00:12:14,200
चाहता हूं मैं प्रकृति के नियमों से मुक्त होना चाहता हूं तो

174
00:12:14,200 --> 00:12:18,400
जो आप ये जो चा है जिसको आप छोड़ नहीं रहे मृत्यु का विचार आते

175
00:12:18,400 --> 00:12:22,600
ही आपके मन में उसको बुला देने का ख्याल आता है हटाओ इधर से

176
00:12:22,600 --> 00:12:26,880
जैसे अभी कोई आपको बाबा मिल जाए और वो यह बताने लगे कि तुम कब मरोगे

177
00:12:26,880 --> 00:12:31,080
मैं बताऊंगा एक सामान्य को अगर कोई यह बताने

178
00:12:31,080 --> 00:12:35,120
लगे कि तुम कब मरोगे मैं बताता हूं

179
00:12:35,120 --> 00:12:39,280
तो वो कहेगा नहीं नहीं मुझे नहीं जानना ज्यादातर ऐसा ही होगा ना

180
00:12:39,280 --> 00:12:43,320
क्यों होता है क् मृत्यु से दूर रहना चाहता है

181
00:12:43,320 --> 00:12:47,320
जबकि प्रकृति का नियम है कि तुम मरोगे

182
00:12:47,320 --> 00:12:51,320
मगर वह प्रकृति को तोड़ देना चाहता है प्रकृति को हरा देना चाहता है तो यह जो

183
00:12:51,320 --> 00:12:54,760
इनबिल्ट चा है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

184
00:12:54,760 --> 00:12:59,480
इस चाह को ना छोड़ पाने के कारण इससे सिद्ध होता है

185
00:12:59,480 --> 00:13:04,240
में कोई है जो प्रकृति को तोड़ सकता है इस दुनिया में कोई है

186
00:13:04,240 --> 00:13:09,640
जो प्रकृति को कंट्रोल करता है अब

187
00:13:09,640 --> 00:13:14,920
बताइए सर तो सामने क्यों नहीं

188
00:13:14,920 --> 00:13:18,800
आता सामने क्यों नहीं

189
00:13:18,800 --> 00:13:24,480
आता सामने नहीं आता आप इसलिए नहीं मानते ईश्वर

190
00:13:24,480 --> 00:13:29,640
को भाई मैं आपके सामने बैठ आप मेरे सामने बैठे

191
00:13:29,640 --> 00:13:33,800
मैं आपके सामने बैठा हूं आप मेरे सामने बैठे हैं तो

192
00:13:33,800 --> 00:13:38,120
मेरे सामने तो ईश्वर बैठा हुआ है आपके रूप में

193
00:13:38,120 --> 00:13:42,200
मानो या ना मानो वो बात एक अलग है आपका कहना है वो

194
00:13:42,200 --> 00:13:46,600
नहीं आता सामने मुझे तो दिख रहा है रूप में बैठा है

195
00:13:46,600 --> 00:13:50,720
और बहुत सारे रू में बैठा है हा तो इसको

196
00:13:50,720 --> 00:13:54,760
सिद्ध कैसे करेंगे आप आप मुझे वो

197
00:13:54,760 --> 00:13:58,840
बता दीजिए कि आप भगवान को सिद्ध कैसे मैंने तो आपकी चाह से सिद्ध

198
00:13:58,840 --> 00:14:02,920
कर दिया ना आपने कहा था कि प्रकृति को कंट्रोल करने

199
00:14:02,920 --> 00:14:07,360
वाली कोई एंटिटी नहीं है मैंने आपके अंदर की इनबिल्ट

200
00:14:07,360 --> 00:14:10,120
चा से सिद्ध कर दिया कि प्रकृति को कंट्रोल

201
00:14:10,120 --> 00:14:14,840
करने वाली एंटिटी है य कहने का मतलब यह है

202
00:14:14,840 --> 00:14:18,880
कि नास्तिक एक नास्तिक अपनी वाणी से भले ही ये कह

203
00:14:18,880 --> 00:14:23,280
रहा है कि भगवान नहीं है मगर वो मांग उसी को रहा है

204
00:14:23,280 --> 00:14:29,200
किसको मांग रहा है कैसे मैंने अभी बताया

205
00:14:29,200 --> 00:14:33,440
की वजह से हां सर इसको आप प्रैक्टिकली

206
00:14:33,440 --> 00:14:37,760
रूप में कैसे सिद्ध कर पाएंगे सच प्रिक रूप में

207
00:14:37,760 --> 00:14:42,680
एक बात बताइए कुल मिला के आपका कहना है कि भगवान नहीं है

208
00:14:42,680 --> 00:14:47,200
इसका मतलब कोई नहीं है जो मृत्यु को हरा सकता

209
00:14:47,200 --> 00:14:51,360
हो कोई नहीं है दुनिया में जो मृत्यु को हरा सकता हो तो फिर आप

210
00:14:51,360 --> 00:14:55,560
मृत्यु को हराने की मांग करना बंद कर दो कौन

211
00:14:55,560 --> 00:14:59,600
कर रहा है सर आप एक एक मिनट आप एक ऐसी मांग कर रहे हो ना

212
00:14:59,600 --> 00:15:03,760
आप एक ऐसी मांग कर रहे हो ना जो कि व्यर्थ है तो आप

213
00:15:03,760 --> 00:15:07,880
व्यर्थ का काम करते हो सर जी आप समझ वो

214
00:15:07,880 --> 00:15:12,080
तो इच्छा है ना तो इच्छा छोड़ दो ना

215
00:15:12,080 --> 00:15:16,200
देखो देखो सुनो सुनो अच्छा अभी एक फम रिलीज हुई

216
00:15:16,200 --> 00:15:20,960
थी अभी एक फिल्म रिलीज हुई थी पुष्पा टू अच्छा

217
00:15:20,960 --> 00:15:25,000
हुई थी की नहीं हुई थी ई थ थी जी जब

218
00:15:25,000 --> 00:15:25,500
वो

219
00:15:25,120 --> 00:15:29,200
लगी जब वो लगी तो कई लोगों के मन में आया मैं पुष्पा टू देख लू ये

220
00:15:29,200 --> 00:15:33,480
क्या है इच्छा है सर इच्छा है

221
00:15:33,480 --> 00:15:37,840
जरूरी नहीं है कि सब लोगों ने उसे देखा ना

222
00:15:37,840 --> 00:15:42,360
नहीं देखा तो उन्होने अपनी उस इच्छा को छोड़ दिया ना

223
00:15:42,360 --> 00:15:46,680
छोड़ दिया छोड़ दिया तो आप इस व्यर्थ की इच्छा को छोड़

224
00:15:46,680 --> 00:15:50,760
दो सर जी उस इच्छा को छोड़ा जा सकता है पिक्चर वाला ठीक

225
00:15:50,760 --> 00:15:56,760
है लेकिन उसको उसको कभी तो देख सकते हैं ना यानी कि

226
00:15:57,040 --> 00:16:01,600
आप मान हो ऐसी इच्छा कर रहे हो जिसका निवारण

227
00:16:01,600 --> 00:16:05,960
नहीं है सर एक बात बताऊ

228
00:16:05,960 --> 00:16:10,000
अगर ऐसी इच्छा हम नहीं करते कि जिसको आज

229
00:16:10,000 --> 00:16:14,040
से 50 साल पहले अगर देखा जाए ठीक है आज से 50 साल 100 साल

230
00:16:14,040 --> 00:16:18,160
पहले अगर देखा जाए तो कोई रोबोटिक इच्छा नहीं करता तो रोबोट बन जाए किसी ने

231
00:16:18,160 --> 00:16:22,640
इच्छा किया उसके ऊपर काम किया धीरे धीरे काम किया तो बना

232
00:16:22,640 --> 00:16:26,880
समझ यानी कि आपका मानना है कि कोई आने

233
00:16:26,880 --> 00:16:30,960
वाले टाइम में कोई होगा जो मृत्यु को जीत लेगा मैं ये

234
00:16:30,960 --> 00:16:35,080
नहीं बोल रहा हूं क्या बोल रहे हैं आप समझ

235
00:16:35,080 --> 00:16:39,080
नहीं रहे मैं बो रहा ज रोबोट आपने जब रोबोट का उदाहरण

236
00:16:39,080 --> 00:16:43,160
दिया है आपने जब रोबोट का उदाहरण दिया है तो

237
00:16:43,160 --> 00:16:47,480
आपने यही तो बताया कि रोबोट की इच्छा किसी ने नहीं की थी रोबोट

238
00:16:47,480 --> 00:16:51,520
की इच्छा किसी ने नहीं की थी आने वाले टाइम में

239
00:16:51,520 --> 00:16:55,720
वो जो रोबोट बन गया तो इस तरीके

240
00:16:55,720 --> 00:16:59,720
से आप भी यही कहना चाह रहे हैं ना कि आने वाले टाइम में कोई होगा जो मृत्यु

241
00:16:59,720 --> 00:17:04,080
को जीत लेगा सर मैं ये नहीं बोल रहा हूं

242
00:17:04,080 --> 00:17:08,080
हा बोलिए क्या बो आपका उदाहरण बता रहे हो

243
00:17:08,080 --> 00:17:12,520
ना ठीक है इच्छा किस मनुष्य के अंदर नहीं होता है

244
00:17:12,520 --> 00:17:16,520
बताइए कहा इसीलिए तो मैं कह रहा हूं कि अगर उसके अंदर ऐसी

245
00:17:16,520 --> 00:17:21,400
इच्छा है जिससे व दूर नहीं हो पा रहा है तो उसका निवारण है

246
00:17:21,400 --> 00:17:25,880
सच्चिदानंद मिला के नास्तिक जो है वो जा

247
00:17:25,880 --> 00:17:30,000
ईश्वर की तरफ ही रहा है कभी ना मरने वाले की तरफ

248
00:17:30,000 --> 00:17:34,160
अखंड ज्ञानी की तरफ और क्या कहते हैं सदा आनंदित

249
00:17:34,160 --> 00:17:38,480
रहने वाले की तरफ जा उधर ही रहा है मांग उसी को बस वो कह रहा है

250
00:17:38,480 --> 00:17:43,280
बस वो कह रहा है कि इस दुनिया में कोई नहीं है जो सच्चिदानंद

251
00:17:43,280 --> 00:17:47,400
हो मगर मुझे सच्चिदानंद चाहिए इस दुनिया में कोई

252
00:17:47,400 --> 00:17:51,520
नहीं है जो सच्चिदानंद हो मगर मुझे सच्चिदानंद चाहिए सर

253
00:17:51,520 --> 00:17:55,560
आपकी स्त से श्वर है कि नहीं कैसे सिद्ध हो रहा है ये बता दीजिए बस आपकी इस

254
00:17:55,560 --> 00:17:59,880
उदाहरण से अच्छा एक सेकंड अरे भाई

255
00:17:59,880 --> 00:18:04,080
ये बताओ आप क्या मूर्ख हो क्या जो ऐसी इच्छा कर रहे हो जिसका अस्तित्व ही ना

256
00:18:04,080 --> 00:18:08,280
हो आप मूर्ख हो क्या सर हा सुनि

257
00:18:08,280 --> 00:18:12,560
सर आज से हज साल प मैं आपको उदाहरण दूं मैं आपको उदाहरण

258
00:18:12,560 --> 00:18:17,360
दूं अगर कोई आपसे ये कहने लगे कोई आपसे ये कहने लगे

259
00:18:17,360 --> 00:18:21,560
कि पुष्पा 10 आ गई है टॉकीज में लगी है देख लो जाकर के मैं देखने

260
00:18:21,560 --> 00:18:25,640
जा रहा हूं मेरी बहुत इच्छा है पुष्पा कौन सी

261
00:18:25,640 --> 00:18:28,160
10 कौन सी

262
00:18:28,160 --> 00:18:32,200
10 जबक आपको अच्छी तरह से मालूम है अभी टू के बाद थ्री नहीं आई

263
00:18:32,200 --> 00:18:36,360
फोर नहीं आई फ नहीं आई सिक्स नहीं आई तो आप उससे क्या

264
00:18:36,360 --> 00:18:40,520
कहोगे उससे मैं उसको मूर्ख ही कहूंगा

265
00:18:40,520 --> 00:18:44,600
तो फिर आप भी तो वही हो कैसे में सिद्ध करो नहीं

266
00:18:44,600 --> 00:18:49,080
सर आप समझ नहीं रहे

267
00:18:49,080 --> 00:18:53,240
को जो मनुष्य की क्रिएटिव इच्छा होती है ना सर वो अलग होती है

268
00:18:53,240 --> 00:18:57,400
अगर कोई प्रोड्यूसर डायरेक्टर सोच रहा है कि 10 साल पहले

269
00:18:57,400 --> 00:19:01,560
10 साल बाद पु बना दूंगा देखूंगा तब वो अलग बात है उसको

270
00:19:01,560 --> 00:19:05,880
पागल मैंने आपसे सवाल क्या किया है मैंने आपसे सवाल क्या किया है

271
00:19:05,880 --> 00:19:10,000
मैंने सवाल ये किया है अभी पुष्पा 10 का अस्तित्व नहीं है नहीं है ना

272
00:19:10,000 --> 00:19:14,280
नहीं नहीं आज की डेट में आपका जो फ्रेंड आपसे कहेगा कि भाई मेरी पुष्पा

273
00:19:14,280 --> 00:19:18,440
10 देखने की बहुत इच्छा हो रही है अच्छा उसको क्या कहो

274
00:19:18,440 --> 00:19:22,560
आज की डेट में मुझे जाना है न बजे देख

275
00:19:22,560 --> 00:19:26,840
सु सर पागल ही कहा तो फिर आप आज की डेट आज की डेट

276
00:19:26,840 --> 00:19:30,880
में आप क्यों कह रहे हो कि भैया मैं मृत्यु

277
00:19:30,880 --> 00:19:35,520
से भागना चाहता हूं अमर होना चाहता हूं हा

278
00:19:35,520 --> 00:19:39,600
तो आप क्या हुए अरे सर जी आपके इस सवाल से

279
00:19:39,600 --> 00:19:43,320
ईश्वर का अस्तित्व से क्या लेना देना है समझाइए पहले तो मैं समझा

280
00:19:43,320 --> 00:19:47,520
रहा हूं ना हमारे अंदर की जो प्यास इनबिल्ट है जिससे

281
00:19:47,520 --> 00:19:51,760
हम खुद को अलग नहीं कर सकते उस उस प्यास का अस्तित्व है दुनिया

282
00:19:51,760 --> 00:19:56,000
में सब्जेक्ट उसका सब्जेक्ट है दुनिया में कैसे

283
00:19:56,000 --> 00:20:00,040
आपने सुनोगे हां जो

284
00:20:00,040 --> 00:20:04,040
मनुष्य है वो अपने आप को भूख से अलग नहीं कर

285
00:20:04,040 --> 00:20:08,040
पा रहा है उससे सिद्ध है कि डंके की चोट में सिद्ध है इस

286
00:20:08,040 --> 00:20:12,080
दुनिया में भोजन है इसी प्रकार से मनुष्य अपने आप

287
00:20:12,080 --> 00:20:16,160
को प्यास से अलग नहीं कर पा रहा है उसको पानी मिले ना मिले मगर

288
00:20:16,160 --> 00:20:20,320
उसके अंदर प्यास होने से ही ये सिद्ध हो रहा है कि दुनिया में पानी है

289
00:20:20,320 --> 00:20:24,320
उसको पानी मिला कि नहीं मिला बाद की बात है ऐसे भी

290
00:20:24,320 --> 00:20:28,320
लोग है जो पानी ना मिल पाने के कारण मर गए तो क्या पानी का अस्तित्व

291
00:20:28,320 --> 00:20:32,480
नहीं था था एकदम था पानी का अस्तित्व क्यों

292
00:20:32,480 --> 00:20:36,760
था क्योंकि उसके अंदर इनबिल्ट प्यास थी

293
00:20:36,760 --> 00:20:41,240
पानी तो जिस प्रकार से आपके अंदर की इनबिल्ट प्यास

294
00:20:41,240 --> 00:20:45,320
भूख के विषय से भोजन सिद्ध हो रहा है प्यास के विषय से पानी सिद्ध

295
00:20:45,320 --> 00:20:49,600
हो रहा है उसी प्रकार से वो इनबिल्ट प्यास जिसको आप छोड़ नहीं पा रहे

296
00:20:49,600 --> 00:20:53,640
पुष्पा टू को आप छोड़ सकते हैं पुष्पा 10 को आप छोड़ सकते हैं

297
00:20:53,640 --> 00:20:58,000
अगर आप इसको क्यों नहीं छोड़ पा रहे उपाद को आप क्यों छोड़ देंगे

298
00:20:58,000 --> 00:20:58,500
क्योंकि

299
00:20:58,320 --> 00:21:02,720
वो नहीं है तो आप छोड़ देते हैं अभी आई नहीं तो कहा से देख लेंगे

300
00:21:02,720 --> 00:21:06,840
तो जब ये जब सच्चिदानंद सच्चिदानंद नहीं है तो क्यों उसको

301
00:21:06,840 --> 00:21:11,120
मांग रहे हो सर जी आप समझ

302
00:21:11,120 --> 00:21:15,200
नहीं लेकिन य सच वाली जो बात है वो आपने कहां

303
00:21:15,200 --> 00:21:20,440
पढ़ी क्या पढ़ी किसी अभी वेद पुराण में पढ़े हो ना

304
00:21:20,440 --> 00:21:24,480
सर हा तो बुरा मान लगता है नाराज मत

305
00:21:24,480 --> 00:21:28,640
होना सर सही में नाराज मत हो नहीं नहीं बुरा क्यों मानेंगे बुरा बुरा

306
00:21:28,640 --> 00:21:33,480
आपको ना लगाओ मैंने आपको पागल कह दिया मूर्ख भी आप सिद्ध हो गए

307
00:21:33,480 --> 00:21:37,640
पागल मैं हूं नहीं पहली तो मैं सही सवाल कर रहा लेकिन आपने

308
00:21:37,640 --> 00:21:42,240
आपने अभी कहा कि भाई जो जि चीज का अस्तित्व नहीं है

309
00:21:42,240 --> 00:21:46,240
उसे मांगने वाला व्यक्ति पागल है है कि नहीं है आप

310
00:21:46,240 --> 00:21:50,520
पागल हो फिर भगवान का अस्व है नहीं तो आप मार रहे तो फिर आप पागल हुए अरे भाई

311
00:21:50,520 --> 00:21:55,440
मैं तो कह रहा हूं कि है तुम अपनी गवाही खुद दे रहे हो मांग तो तुम भी रहे

312
00:21:55,440 --> 00:21:59,520
हो कर रहे कर तो दिया तुम मांगना

313
00:21:59,520 --> 00:22:03,600
बंद कर दो स अरे तुमको

314
00:22:03,600 --> 00:22:07,680
सुनना नहीं है मैं समझ गया अब ड्रामा करना सुनना

315
00:22:07,680 --> 00:22:12,120
है सुनना हैने कहा जब आप सुनो

316
00:22:12,120 --> 00:22:14,000
सुनो जब

317
00:22:14,000 --> 00:22:18,160
जब मैंने कहा आपने यह बताया कि जिस चीज का अस्तित्व नहीं है

318
00:22:18,160 --> 00:22:23,080
उसको मांगने वाला पागल है अब मुझे आप ये बताइए आज की डेट में

319
00:22:23,080 --> 00:22:27,840
आपको मालूम है कि किसी ने मृत्यु को जीत लिया हो नहीं

320
00:22:27,840 --> 00:22:32,400
ठीक है तो आप मृत्यु को जीतने वाले की मांग कर रहे हो ना

321
00:22:32,400 --> 00:22:36,440
लेकिन मैं कहां कह रहा हूं कि भगवान नहीं है मैं तो कह रहा हूं कि भगवान अरे भगवान पे क्यों जा

322
00:22:36,440 --> 00:22:40,520
रहे हो भगवान का अर्थ समझाया कभी भगवान शब्द प

323
00:22:40,520 --> 00:22:44,600
क्यों जा रहे हो भगवान का शब्द का अर्थ समझाया कभी आप जो मांग रहे हो

324
00:22:44,600 --> 00:22:48,760
ना उसी का नाम है भगवान आप जिसको मांग रहे हो

325
00:22:48,760 --> 00:22:52,880
उसी का नाम है भगवान आप सीधे भगवान को देखते हो भगवान शब्द को देखते

326
00:22:52,880 --> 00:22:57,040
हो मांग आप भी उसी को रहे हो मैंने आपसे पूछा

327
00:22:57,040 --> 00:23:01,880
आप मृत्यु को जीतने वा की मांग कर रहे हो आज की डेट में कि नहीं कर रहे हो

328
00:23:01,880 --> 00:23:06,040
एकदम कर रहे लेकिन वो तो इच्छा है ना सर अरे तो फिर अभी अभी तुमने

329
00:23:06,040 --> 00:23:10,080
कहा कि जिसका अस्तित्व नहीं है उसकी इच्छा करने वाला पागल होता है तो

330
00:23:10,080 --> 00:23:14,240
मान लोगे आप पागल हो सर आप समझ नहीं रहे बात मतलब नहीं सिद्ध कर पा रहे हो आप ठीक

331
00:23:14,240 --> 00:23:18,320
से आपको एक ही बात कहनी है आप करो आपको एक ही बात करनी है

332
00:23:18,320 --> 00:23:22,480
आप करो मैंने अभी आपसे क्या कहा आपने खुद कहा कि जिस चीज का

333
00:23:22,480 --> 00:23:26,600
अस्तित्व नहीं है उसे मांगने वाला पागल होता है आप खुद कह

334
00:23:26,600 --> 00:23:29,000
रहे हो कि मृत्यु को जीत लेने वाला कोई नहीं

335
00:23:29,000 --> 00:23:33,120
है फिर भी आप मृत्यु को जीतने की फिर भी आप मृत्यु को जीतने की मांग

336
00:23:33,120 --> 00:23:37,400
कर रहे हो तो मैं कब कह रहा हूं कि भगवान नहीं है फिर

337
00:23:37,400 --> 00:23:41,400
भगवान प आ गए जो कट टू कट बात हो रही फिर दूसरी बात पर क्यों जा रहे हो अभी मैंने

338
00:23:41,400 --> 00:23:46,000
कहा कि क्या आप मृत्यु को जीतने की मांग आज की डेट में करते हो कि नहीं करते

339
00:23:46,000 --> 00:23:50,120
हो सब कर रहे हैं सर सब आप कर रहे हो कि

340
00:23:50,120 --> 00:23:54,200
नहीं कर रहे हो सब तो भगवान को भी मान रहे मैं तो नहीं कर रहा हूं

341
00:23:54,200 --> 00:23:59,120
सर लेकिन सब कर रहे हैं सा साइंस तो कर र मृत्यु को जीतने की बात आप नहीं कर रहे हो

342
00:23:59,120 --> 00:24:03,600
मैं नहीं कर रहा ना सर साइंस की बात कर रहा था मैं आपसे पूछ रहा हूं आप

343
00:24:03,600 --> 00:24:07,600
आज की डेट में मृत्यु की मृत्यु के विचार को त्याग देना

344
00:24:07,600 --> 00:24:11,600
चाहते हो कि नहीं मौत से भाग रहे हो कि नहीं अपनी

345
00:24:11,600 --> 00:24:15,800
सर जो जी रहे व भाग रहे समझो एक एक दिन तो मौत आएगी आएगी अरे आएगी

346
00:24:15,800 --> 00:24:19,920
मगर आप उसे हराना हराने की इच्छा रख रहे हो कि नहीं आज की डेट

347
00:24:19,920 --> 00:24:24,040
में एकदम सर रख रहे हैं इसमें कोई डाउट रख रहे हो ना तो

348
00:24:24,040 --> 00:24:28,040
आज की डेट में कोई अमर नहीं है ना नहीं है

349
00:24:28,040 --> 00:24:33,080
सर तो फिर क्यों मांग रहे हो

350
00:24:33,080 --> 00:24:37,280
अमरता अमरता की खोज हुई नहीं है अभी अमरता की खोज

351
00:24:37,280 --> 00:24:41,920
नहीं हुई अभी तो अमरता क्यों मांग रहे हो सर

352
00:24:41,920 --> 00:24:46,160
ठीक है ठीक है आपकी बात समझ गया लेकिन ये तो मनुष्य

353
00:24:46,160 --> 00:24:50,240
की इच्छा हुई ना सर आप क्या कहना चाहते हो भगवान इच्छा सेले पहले ठीक है

354
00:24:50,240 --> 00:24:54,360
क्या समझे तुमने माना कि तुम पागल हो नहीं सर मैं तो पागल

355
00:24:54,360 --> 00:24:58,680
नहीं हं क्यक मैं तो य सब नहीं जानता तो

356
00:24:58,680 --> 00:25:02,800
तुम खुद कह रहे हो जिसकी प्यास का विषय ना हो उस विषय

357
00:25:02,800 --> 00:25:07,320
को मांगने वाला जो है व्यक्ति पागल है अब मैंने आपको बताया

358
00:25:07,320 --> 00:25:11,440
म से भागने की इच्छा है कि नहीं तो आप कह रहे हो है और जबक आप खुद कह

359
00:25:11,440 --> 00:25:15,800
रहे हो कि मृत्यु से भागने वाला कोई है नहीं विषय है नहीं तो आप पागल हुए ना

360
00:25:15,800 --> 00:25:20,000
पहले इसको सिद्ध करो पागल हो नहीं सर सुनिए सर

361
00:25:20,000 --> 00:25:24,560
मुझे नहीं लग रहा सर उतर मिल पाएगा मेरे सवाल का वो

362
00:25:24,560 --> 00:25:28,680
आप अगर य नहीं वो मिलेगा वो दर्शक देखेंगे वो

363
00:25:28,680 --> 00:25:33,080
दर्शक देखेंगे कि आप मिला कि नहीं मिला वो आप मत करो

364
00:25:33,080 --> 00:25:37,200
चलो अब इतनी बात हमने कर ली है अब एक बात मैं पूछता हूं आपसे

365
00:25:37,200 --> 00:25:41,360
जी सर की आपकी माता है

366
00:25:41,360 --> 00:25:45,680
हा हा सर बहन है

367
00:25:45,680 --> 00:25:49,040
बहन तो नहीं है लेकिन मानता हूं किसको

368
00:25:49,040 --> 00:25:53,120
अच्छा जी तो क्या कोई ऐसा नियम है कि

369
00:25:53,120 --> 00:25:57,240
आप माता जी के साथ कभी भी पत्नी वाला व्यवहार नहीं

370
00:25:57,240 --> 00:26:01,440
करोगे अ है ना सर है सर एकदम सही सवाल

371
00:26:01,440 --> 00:26:05,640
पूछा आपने नजरिया दोनों अलग अलग है सही सही पूछा

372
00:26:05,640 --> 00:26:10,480
आपने नजरिया अलग-अलग है कहां से आया वो नियम

373
00:26:10,480 --> 00:26:14,600
सर पहला तो इसका जवाब है साइंस का साइंस के तरफ से आपको समझाऊ मैं ठीक

374
00:26:14,600 --> 00:26:18,880
है और दूसरा अगर मैं बात करू आपके जीवन में कहां से

375
00:26:18,880 --> 00:26:23,080
आया सर दो दो वज बता रहा हूं ना मैं हम

376
00:26:23,080 --> 00:26:27,080
दो बज बता रहा हूं पहला तो सर आप जीवन आप अपने जीवन में

377
00:26:27,080 --> 00:26:31,200
कहां से आए ये बताइए आपके में आया

378
00:26:31,200 --> 00:26:35,240
एकदम सर एकदम सर एकदम फिर तो उसके तीन वज है पहला है सर

379
00:26:35,240 --> 00:26:39,320
समाज प सुनि बात को सुनि मत प्लीज ठीक

380
00:26:39,320 --> 00:26:43,360
है ठीक है दूसरा इसके पीछे साइंस का भी

381
00:26:43,360 --> 00:26:47,440
कारण है ठीक है की माता को अलग नजर से देखना है बहन को अलग नजर से देखा जाता है

382
00:26:47,440 --> 00:26:51,680
ठीक है पत्नी को अलग नजर से देखा जाता है य साइंस का

383
00:26:51,680 --> 00:26:56,680
दूसरा अगर बात कर ठीक है तो धर्म है

384
00:26:56,680 --> 00:27:00,720
धर्म है धर्म धम नहीं धर्म

385
00:27:00,720 --> 00:27:04,320
को आप ईश्वर को नहीं मानते तो धर्म कहां से आ गया तो धर्म

386
00:27:04,320 --> 00:27:09,160
से श्वर का क्या लेने देना सर धर्म क्या है परिभाषा बताओ

387
00:27:09,160 --> 00:27:13,480
अरे सर मेरे हिसाब से तो धर्म का मतलब सिर्फ इतना है कि ऐसा काम करो

388
00:27:13,480 --> 00:27:17,880
नहीं होता भाई अगर तुम कहीं से ट कोई शब्द ले रहे हो तो उसकी परिभाषा

389
00:27:17,880 --> 00:27:22,200
भी तो लोगे वहां से बता रहा हूं सर मैं

390
00:27:22,200 --> 00:27:26,440
मैं आप आप किसे धर्म मानते हो हिंदू मुस्लिम सय सब है क्या

391
00:27:26,440 --> 00:27:31,200
धर्म केवल हिंदू आर्य वैदिक धर्म है

392
00:27:31,200 --> 00:27:35,280
ठीक है सर लेकिन मैं इन सब को धर्म नहीं मानता ना सर मतलब

393
00:27:35,280 --> 00:27:39,280
मैं भी इस कटेगरी अरे भाई तुम यह बताओ तुम कह

394
00:27:39,280 --> 00:27:43,440
रहे हो सुनो तुम करते क्या हो सुनो तुम्हारा सुन लो तुम करते

395
00:27:43,440 --> 00:27:47,480
क्या हो मैं मनुष्य को मानता हूं अब मनुष्य

396
00:27:47,480 --> 00:27:51,520
क्या है जिसके चार पैर है जो रात में इधर से उधर मकानों में

397
00:27:51,520 --> 00:27:55,560
छलांग लगाती है जो दूध पी जाती है मैं उसे मनुष्य मानता हूं

398
00:27:55,560 --> 00:27:59,560
मनुष्य को मैं मानता हूं ऐसा नहीं नहीं मानता हूं मगर मनुष्य

399
00:27:59,560 --> 00:28:04,080
वो है जो चोरी से घर में घुसे गी दूध पी जाएगी चूहो को खाएगी वो

400
00:28:04,080 --> 00:28:08,320
मनुष्य उसको उसे मनुष्य कहता हूं यह क्या ड्रामा

401
00:28:08,320 --> 00:28:12,680
भाई सर जहा से आपने मनुष्य शब्द लिया

402
00:28:12,680 --> 00:28:16,960
वही से आपको लेना पड़ेगा ना उसकी परिभाषा तो आप धर्म

403
00:28:16,960 --> 00:28:19,520
को ज से ले उठ रहे हो पिक कर रहे हो

404
00:28:19,520 --> 00:28:23,840
वो परिभाषा बताइए सुनि सर आपने पूछा

405
00:28:23,840 --> 00:28:27,840
धर्म तो धर्म काथ मेरे हिसाब से जो मैं मान रहा हूं जो मैंने

406
00:28:27,840 --> 00:28:32,000
पढ़ मेरे मेरे हिसाब से बाला मत बताइए आप

407
00:28:32,000 --> 00:28:36,160
धर्म की परिभाषा बताइए परिभाषा क्या है आपने कहा मैं धर्म को मानता

408
00:28:36,160 --> 00:28:40,400
हूं र् की परिभाषा है सर ऐसा काम करना ठीक है जिससे अपना

409
00:28:40,400 --> 00:28:44,400
भी कल्याण हो प्लस किसी समाज का भी कल्याण हो हर किसी का कल्याण हो य

410
00:28:44,400 --> 00:28:48,080
मेरे लिए ध कौन त

411
00:28:48,080 --> 00:28:52,880
करेगा ये कौन एक मिनट आपने जो परिभाषा बताई है वो अधूरी है

412
00:28:52,880 --> 00:28:57,040
यह कौन तय करेगा आपको जो सही लग रहा है कि मेरा कल्याण

413
00:28:57,040 --> 00:29:01,320
भी है समाज का भी क वही कार्य सही हो

414
00:29:01,320 --> 00:29:05,720
कौन तय करेगा क्या सर एक सेकंड आवाज आ र है एक बार और

415
00:29:05,720 --> 00:29:09,920
जो आपको अपने पॉइंट ऑफ व्यू से दिख रहा है यह कार्य करने का

416
00:29:09,920 --> 00:29:14,080
है वही कार्य सही हो करने योग्य हो यह

417
00:29:14,080 --> 00:29:18,280
कैसे डिसाइड होगा हो सकता है कि आपको जो सही लग रहा है हो सकता

418
00:29:18,280 --> 00:29:22,720
है दूसरे को गलत लग रहा हो और उसको जो सही लग रहा है व आपको सही लग रहा हो हा

419
00:29:22,720 --> 00:29:26,720
एकदम सही सर एकदम सही हो सकता है फर धर्म से

420
00:29:26,720 --> 00:29:31,000
ले आप से लेसे ले नहीं सर

421
00:29:31,000 --> 00:29:34,560
हर सिक्के के दो पहलू होते है सर अगर मैं अगर किसी के साथ

422
00:29:34,560 --> 00:29:38,880
खेल रहा हूं मैं अगर अपना कल्याण चाहता हूं मैं जीता तो दूसरा तो हारेगा ना सर

423
00:29:38,880 --> 00:29:43,000
अरे मेरे भाई बात देखो बात है टॉपिक चेंज

424
00:29:43,000 --> 00:29:47,240
हो र है मैं क्लियर कर दू मैं आपको क्लियर कर दू सवाल पूछ

425
00:29:47,240 --> 00:29:51,520
सर एक सवाल बस सवा एक सवाल

426
00:29:51,520 --> 00:29:55,520
आप एक बात बताइए ठीक है दो आदमी है

427
00:29:55,520 --> 00:30:00,120
ठीक है एक आदमी वो है जो श्वर के अस्तित्व को मानता है रोज

428
00:30:00,120 --> 00:30:04,240
मंदिर जाता है सुबह शाम लेकिन वो काम करता है ऐसे जिससे किसी

429
00:30:04,240 --> 00:30:08,320
का नुकसान हो रहा है ठीक है और एक ऐसा आदमी है जो कभी भगवान को नहीं मानता

430
00:30:08,320 --> 00:30:12,360
व पूरा शीका से बोलता है कि भगवान नहीं है ठीक है लेकिन वो अच्छे काम करता

431
00:30:12,360 --> 00:30:16,440
है कर्म उसके बुरे नहीं है बस कहता है कि भगवान बुरा है तो आप मुझे बताइए

432
00:30:16,440 --> 00:30:20,600
कि धार्मिक आदमी कौन हुआ वो जो भगवान को मार रहे है या वो

433
00:30:20,600 --> 00:30:25,000
जो भगवान को नहीं मानता बताता हूं बताता हूं हा धार्मिक

434
00:30:25,000 --> 00:30:29,040
आदमी कौन हुआ वो बताता हूं हा पहली बात जो आप ये सोच रहे हो

435
00:30:29,040 --> 00:30:33,160
कि नास्तिक जो धार्मिक है जो भगवान को मना कर रहा है वो तो धार्मिक है

436
00:30:33,160 --> 00:30:37,640
नहीं और जो दूसरा वाला है दूसरा

437
00:30:37,640 --> 00:30:41,960
वाला सुनो दूसरा वाला है जो भगवान

438
00:30:41,960 --> 00:30:46,360
को मानता तो है मगर आचरण कर रहा है उसके

439
00:30:46,360 --> 00:30:49,560
विरुद्ध धर्म के विरुद्ध आचरण कर रहा है तो

440
00:30:49,560 --> 00:30:55,040
वह धार्मिक है मगर धर्म के द्वारा उसकी संज्ञा हुई

441
00:30:55,040 --> 00:30:59,280
अपराधी धर्म के द्वारा उसकी संज्ञा क्या हुई के दृष्टिकोण से

442
00:30:59,280 --> 00:31:03,960
अपराधी और जो नास्तिक है वो धार्मिक नहीं है और सुनो

443
00:31:03,960 --> 00:31:08,720
कैसे मैं बता रहा हूं सुन लो ठीक है

444
00:31:08,720 --> 00:31:13,600
मैंने आपसे जो प्रश्न पूछा था उस पर आते हैं आपके जीवन

445
00:31:13,600 --> 00:31:17,680
में जो क्या कहते हैं निश्चित जो

446
00:31:17,680 --> 00:31:21,720
सिद्धांत है माता के साथ गमन ना करने का एक

447
00:31:21,720 --> 00:31:26,160
जगह बैठ जाइए फिर बात करते

448
00:31:26,160 --> 00:31:29,480
हैं जी

449
00:31:29,480 --> 00:31:33,640
आपके पास जो निश्चित सिद्धांत है माता के साथ गमन ना करने का

450
00:31:33,640 --> 00:31:39,440
वो आपको कहा से मिला

451
00:31:39,440 --> 00:31:45,440
है सर उसके ब बताया मैंने एक बताया धर्म

452
00:31:48,200 --> 00:31:52,240
बताया मिनट मिनट आपने जो धर्म उसका कारण बताया

453
00:31:52,240 --> 00:31:56,640
धर्म का प्रारूप क्या है वो कहा से उित हो रहा है कोई आइजी

454
00:31:56,640 --> 00:32:02,000
है कोई नियमावली को बुक है क्या है

455
00:32:02,000 --> 00:32:06,040
वो धर्म सर समास है सर धर्म

456
00:32:06,040 --> 00:32:10,080
सर आप य पहले तय कर लीजिए धर्म धर्म

457
00:32:10,080 --> 00:32:15,880
धर्म से आया है धर्म समाज से आया क्या कह रहे हैं

458
00:32:15,880 --> 00:32:21,880
आप चले गए

459
00:32:37,640 --> 00:32:42,040
थोड़ा सा कट हो गया था सर ठीक है अब मैं पूछ रहा हूं आपसे

460
00:32:42,040 --> 00:32:46,040
कि धर्म जो आपके पास आया है वो धर्म नहीं

461
00:32:46,040 --> 00:32:50,120
माता को पत्नी की माता के साथ गमन ना करने का सिद्धांत

462
00:32:50,120 --> 00:32:54,560
आपके पास कहां से आया वही तो बता रहा हूं सर

463
00:32:54,560 --> 00:32:58,840
देखिए बोते वेस्टर मर्क प्रक्रिया बोलते हैं सर ठीक है

464
00:32:58,840 --> 00:33:03,760
इसके अरे मेरे भाई अभी आपने जो तीन चीज बताई थी

465
00:33:03,760 --> 00:33:08,040
धर्म समाज और साइंस उनमें से एक किसकी बात कर रहे हो साइंस

466
00:33:08,040 --> 00:33:12,240
साइंस की अच्छा तो

467
00:33:12,240 --> 00:33:16,800
साइंस के आधार पर आप ये मानते हो कि माता के साथ गमन नहीं करना

468
00:33:16,800 --> 00:33:17,800
चाहिए

469
00:33:17,800 --> 00:33:22,400
अरे सर एकदम सही बोल रहे हो आप अरे सरदम

470
00:33:22,400 --> 00:33:26,480
सही बोल रहे सुनि य ज्यादा

471
00:33:26,480 --> 00:33:30,760
बाहर आ रहा हं ठीक है यहां प थ सोर जा रहा है थोड़ा सा

472
00:33:30,760 --> 00:33:34,880
इसीलिए मैं थोड़ा सा बाहर आ रहा हूं एक सेकंड सर एक सेकंड एक सेकंड जस्ट

473
00:33:34,880 --> 00:33:40,880
जा रहा हूं ठीक है हम यहां पे थोड़ा सा स्वर ज्यादा हो गया

474
00:33:42,280 --> 00:33:44,760
इसीलिए

475
00:33:44,760 --> 00:33:49,440
बताइए जी सर जी बताइए बताइए सर

476
00:33:49,440 --> 00:33:53,760
आपने जो तीन पॉइंट बताए थे उसमें से आपका मुख्य कारण क्या है माता

477
00:33:53,760 --> 00:33:57,840
के साथ गमन ना करने का सर

478
00:33:57,840 --> 00:34:02,240
इसके पीछे कारण है वेस्टर मर्क प्रक्रिया ठीक है

479
00:34:02,240 --> 00:34:06,280
18 सा बोल रहे हो ना आप साइंस बोल दो ज्यादा उसको खोल

480
00:34:06,280 --> 00:34:10,440
रहे हो साइंस है ना आपका कारण माता के साथ गमन ना

481
00:34:10,440 --> 00:34:14,480
करने का कारण साइंस है नहीं तीन वज बता रहा

482
00:34:14,480 --> 00:34:18,600
तीन वज न न म है कौन ककन सी

483
00:34:18,600 --> 00:34:23,520
है बताइए एक तो समास ठीक है समाज

484
00:34:23,520 --> 00:34:27,720
दूसरा हा समाज तीसरा सासरा

485
00:34:27,720 --> 00:34:31,760
सा है ठीक है और तीसरा सर धर्म भी है एक तरह से बोले तो धर्म भी

486
00:34:31,760 --> 00:34:32,920
है सर सबसे पहले

487
00:34:32,920 --> 00:34:37,720
आप यह बता दीजिए यह धर्म का प्रारूप क्या है

488
00:34:37,720 --> 00:34:41,800
आपके कोई किताब है कोई आडलज है जिसको आप

489
00:34:41,800 --> 00:34:46,560
धर्म कह रहे हो क्या है वो सर धर्म

490
00:34:46,560 --> 00:34:50,800
जिससे अच्छे काम हो सके अब मा हुआ है क्या

491
00:34:50,800 --> 00:34:55,000
मैं आपसे पूछ रहा हूं व आपको मिला किस रूप में किस रूप

492
00:34:55,000 --> 00:34:59,280
में मिला वो आपने कहाना इसकी वजह से कोई वस्तु है कोई आडलज

493
00:34:59,280 --> 00:35:03,520
है कोई टीचिंग है कोई ज्ञान है किसी का वो पूछ रहा हूं मैं आपसे

494
00:35:03,520 --> 00:35:07,760
क्या है कोई टीचिंग नहीं अनुभव से सर यानी आपके

495
00:35:07,760 --> 00:35:11,800
अंदर से आता है वो अनुभव से बाहर देखता हूं सीखता

496
00:35:11,800 --> 00:35:16,120
हूं उससे आ रहा है क्या सही क्या गलत अरे क्लियर कट बोलो अनुभव

497
00:35:16,120 --> 00:35:20,160
से आ रहा है कि बाहर से आ रहा है दोनों से

498
00:35:20,160 --> 00:35:24,200
दोनों से बाहर से देखा और यहां से तो एक बाहर से हो

499
00:35:24,200 --> 00:35:28,240
गया समाज समाज हो गया और

500
00:35:28,240 --> 00:35:32,240
एक आप जो अंदर से आया तो समाज

501
00:35:32,240 --> 00:35:36,760
की बात कर लेते हैं समाज में इस समय जो है एलजीबीटी

502
00:35:36,760 --> 00:35:40,880
क्यू वालों की संख्या बढ़ती जा रही है हम ठीक है

503
00:35:40,880 --> 00:35:45,240
और दुनिया में बहुत बड़ी एक पन इंडस्ट्री है हां

504
00:35:45,240 --> 00:35:48,400
है एकदम है तो क्या

505
00:35:48,400 --> 00:35:53,320
यह समाज की संख्या बढ़ती जाएगी और ये लोग ऐसा सिखाने लगेंगे

506
00:35:53,320 --> 00:35:57,440
कि माता के साथ गमन करो तो आप भी करने लगोगे कौन बोला

507
00:35:57,440 --> 00:36:01,440
सर आप ही तो कह रहे मैं समाज से प्रभावित हो रहा

508
00:36:01,440 --> 00:36:06,440
हूं नहीं सर तो समाज में तो दो लोग है ना अच्छे और

509
00:36:06,440 --> 00:36:10,520
बुरे करता मैं आपसे कह रहा हूं समाज में जिसकी

510
00:36:10,520 --> 00:36:15,080
संख्या ज्यादा होगी उसकी बात मान लोगे ना कैसे

511
00:36:15,080 --> 00:36:19,120
में मानने का सही और गलत सर क्या सही

512
00:36:19,120 --> 00:36:23,520
क्या गलत है और गलत पैरामीटर क्या है

513
00:36:23,520 --> 00:36:27,680
वही तो बता रहा सर धर्म है सर अरे

514
00:36:27,680 --> 00:36:32,480
धर्म पैरामीटर आ गया अभी आप बात कर रहे थे अनुभव और समाज की अब धर्म का मुझे प्रारूप बताओ

515
00:36:32,480 --> 00:36:36,560
क्या है धर्म अरे सर जी तो समाज से धर्मला धर्म

516
00:36:36,560 --> 00:36:40,720
ने हमें बताया कि क्या सही क्या गलत वो धर्म क्या है कहां

517
00:36:40,720 --> 00:36:44,920
से मिला आपको वो धर्म धर्म की परिभाषा जो है वो है जीव

518
00:36:44,920 --> 00:36:49,160
की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने

519
00:36:49,160 --> 00:36:53,280
वाली नियमावली धर्म है अब आप ईश्वर को नहीं मा

520
00:36:53,280 --> 00:36:58,080
एक मिनट जब आप ईश्वर को ही नहीं मानते हो तो धर्म की परिभाषा बता दो मुझे

521
00:36:58,080 --> 00:37:02,080
क्या है तो सर धर्म से ईश्वर का क्या लेना देना मैंने बताया

522
00:37:02,080 --> 00:37:03,760
ना सच्चिदानंद

523
00:37:03,760 --> 00:37:07,960
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने वाली जो नियमावली है उसका नाम

524
00:37:07,960 --> 00:37:12,080
धर्म है नहीं सर तो आपने तो वेद पुराण में पढ़ा

525
00:37:12,080 --> 00:37:16,680
है ना है कि नहीं धर्म क पढ़ लिया वेद पुराण के अलावा बताओ

526
00:37:16,680 --> 00:37:21,080
वाह सर वा क्या बात कर सर आप बा

527
00:37:21,080 --> 00:37:23,840
क्या

528
00:37:23,840 --> 00:37:27,840
बात दिखाओ वेद पुराण गीता जो सनातन शास्त्र

529
00:37:27,840 --> 00:37:32,400
वो है इनके अलावा लिखा दिखाओ धर्म शास्त्रों के अलावा धर्म लिखा है

530
00:37:32,400 --> 00:37:36,440
दिखाओ अरे ऐसा नहीं है सर आप बात

531
00:37:36,440 --> 00:37:40,520
बता हर चीज लिखा उसको मान लोगे क्या तो फिर

532
00:37:40,520 --> 00:37:44,520
तो फिर हम आपकी बात क्यों माने जो आप धर्म कह रहे हो वही

533
00:37:44,520 --> 00:37:49,080
तो मैं पूछ रहा हूं सर वैसे भी मेरा सवाल तो मुझे सवाल

534
00:37:49,080 --> 00:37:53,840
पूछने किया मत करोना उसके दूसरे शब्द का उपयोग करो

535
00:37:53,840 --> 00:37:57,880
आप खुद ही बोले चले जा रहे हो मुझे दे ही नहीं रहे हो बोलने का कुछ वो

536
00:37:57,880 --> 00:38:02,040
वो दिख रहा है जो लोग देख रहे लाइ उनको दिख रहा है नहीं दिख

537
00:38:02,040 --> 00:38:06,040
रहा है सर नहीं दिख रहा है आप उलझे हुए सवालों के जवाब

538
00:38:06,040 --> 00:38:10,040
दे रहे हो जैसे कि हमने आपसे पूछा माता बहन और पत्नी

539
00:38:10,040 --> 00:38:14,760
में अंतर क्यों करते हो ठीक हैन चीज बताई

540
00:38:14,760 --> 00:38:19,320
आपने बताया समाज साइंस धर्म धर्म का कोई स्पेसिफिक

541
00:38:19,320 --> 00:38:23,480
आपने वो बताया नहीं कि आपका धर्म कहां से आ रहा है आपके पास आपके

542
00:38:23,480 --> 00:38:27,600
पास से आ रहा हैन बिल्ट है आपने

543
00:38:27,600 --> 00:38:31,720
हा या ना जवाब देना मैं फिर से वही सवाल दोहराता हूं ठीक है

544
00:38:31,720 --> 00:38:35,720
कोई ऐसा आदमी है ठीक है मतलब मैं अपनी बात क

545
00:38:35,720 --> 00:38:40,120
धर्म से श्वर क्या लेने देना ऐसा आदमी है जो अच्छे कर्म कर र क्या धार्मिक नहीं हो सकता

546
00:38:40,120 --> 00:38:44,680
और ऐसा तुम्हारी क्या दिमाग खराब है क्या

547
00:38:44,680 --> 00:38:48,680
मैंने तुमसे य पूछा हैने तुमसे य पूछा है मैंने

548
00:38:48,680 --> 00:38:52,720
तुमसे य पूछा है हा धार्मिक नहीं हो सकता सिर्फ अच्छे कर्म

549
00:38:52,720 --> 00:38:57,440
करने वाला व्यक्ति धार्मिक नहीं हो सकता है धार्मिक वही है

550
00:38:57,440 --> 00:39:01,840
हम अरे बोल तो रहा हूं जो ईश्वर को मानता है वो धार्मिक है वो आस्तिक

551
00:39:01,840 --> 00:39:05,960
है अब वो र्म

552
00:39:05,960 --> 00:39:10,000
तो वो अपराधी कहलाएगा ना वो अपराधी

553
00:39:10,000 --> 00:39:14,000
कहलाएगा सुनो सुनो मेरी बात मेरी बात सुनो

554
00:39:14,000 --> 00:39:18,120
कोई व्यक्ति अगर रेप कर देता है

555
00:39:18,120 --> 00:39:22,120
तो क्या हम ये कहने लगे कि वो मनुष्य नहीं है वो जानवर

556
00:39:22,120 --> 00:39:26,200
है अरे सर ग वो जान वो

557
00:39:26,200 --> 00:39:30,400
जानवर के तुल्य हो सकता है जानवर नहीं है

558
00:39:30,400 --> 00:39:34,680
जानवर के तुल्य है जो जानवर जैसा व्यवहार करने

559
00:39:34,680 --> 00:39:38,960
लगे अगर कोई मनुष्य जानवर जैसा मवार करने लगे तो वो जानवर

560
00:39:38,960 --> 00:39:43,160
नहीं है जानवर योनि में जन्म लेने वाला नहीं है वो है मनुष्य मगर

561
00:39:43,160 --> 00:39:47,320
जानवर के तुल्य है इसी तरीके से वो जो जो

562
00:39:47,320 --> 00:39:51,360
धर्म ईश्वर पर आस्था रखने वाला होते हुए भी गलत आचरण

563
00:39:51,360 --> 00:39:55,680
कर रहा है तो वो ऐसा नहीं है कि वो आस्थावान है ही नहीं वो अपराधी

564
00:39:55,680 --> 00:39:58,960
है धार्मिक दृष्टिकोण से

565
00:39:58,960 --> 00:40:03,000
और जो तुम्हारा जो नास्तिक है जो ईश्वर को मानता ही नहीं है

566
00:40:03,000 --> 00:40:07,480
आपकी फोटो फ्रीज हो गई है जो आस्तिक

567
00:40:07,480 --> 00:40:11,480
है जो आस्तिक है वो जो नास्तिक है जो ईश्वर को मानता ही

568
00:40:11,480 --> 00:40:15,480
नहीं है क्योंकि उसके पासस अंतिम रूप से कोई नियमावली

569
00:40:15,480 --> 00:40:19,680
नहीं है मां को मां मानने की बहन को बहन मानने

570
00:40:19,680 --> 00:40:23,680
की इस कारण से वो तब भी निम्न ही कहलाएगा क्योंकि

571
00:40:23,680 --> 00:40:28,080
जो नास्तिक है तब भी उसके कुछ सिद्धांत है मगर

572
00:40:28,080 --> 00:40:32,480
जो आस्तिक है उसके तब भी सिद्धांत है कुछ मगर नास्तिक के कोई सिद्धांत

573
00:40:32,480 --> 00:40:36,520
नहीं होते इसलिए वो हमेशा निम्न कहलाएगा भले ही वो आज की डेट में एक अच्छा

574
00:40:36,520 --> 00:40:40,840
आचरण कर रहा हो क्योंकि नास्तिक

575
00:40:40,840 --> 00:40:45,040
के पास कोई सिद्धांत नहीं है वह कह रहा है कि मेरे साइंस के ऊपर आधारित है

576
00:40:45,040 --> 00:40:49,120
क्योंकि साइंस कहती है तो मालूम पड़ा वो अपनी माता जी के साथ रात में

577
00:40:49,120 --> 00:40:50,000
सो रहा है

578
00:40:50,000 --> 00:40:54,560
पास में और रात में मैसेज आया कि साइंस ने ढूंढ लिया है

579
00:40:54,560 --> 00:40:59,040
कि अब माता के साथ गमन करने पर दिक्कत नहीं है तो बस

580
00:40:59,040 --> 00:41:03,360
वहीं से बदल गया मामला तो ऐसे नहीं

581
00:41:03,360 --> 00:41:07,800
इसलिए व नास्तिक जो है उसकी क्रेडिबिलिटी नहीं है वहां

582
00:41:07,800 --> 00:41:12,280
आस्तिक के सामने मेरी थोड़ी तबीयत स्वास्थ

583
00:41:12,280 --> 00:41:14,800
खराब

584
00:41:14,800 --> 00:41:18,840
है नास्तिक लोग यह तो खैर छोटे बच्चे टाइप के हैं

585
00:41:18,840 --> 00:41:22,880
ज्यादातर उलझे हुए होते हैं सवाल का जवाब ही नहीं देते ठीक से

586
00:41:22,880 --> 00:41:27,720
सीधे-सीधे समाज धर्म अब धर्म अलग से पकड़ लिया

587
00:41:27,720 --> 00:41:31,920
अब धर्म को पूछ रहे कहां से आया तो कहो ना मेरी इच्छा है उसको मैं धर्म

588
00:41:31,920 --> 00:41:37,920
कह रहा हूं तो फिर हम

589
00:41:39,800 --> 00:41:44,480
पूछेंगे हेलो सर हां जी सर

590
00:41:44,480 --> 00:41:48,560
नेटवर्किंग प्रॉब्लम हो सकता है बताइए ठी हो सकता है मैं आपसे कुल

591
00:41:48,560 --> 00:41:52,800
मिलाकर दोबारा आ जाता हूं जो आप धर्म नाम ले रहे हैं या तो इसको छोड़

592
00:41:52,800 --> 00:41:58,200
दो या फिर इसकी परिभाषा बताओ आपकी जो परिभाषा हो वो बताओ

593
00:41:58,200 --> 00:42:02,320
नहीं सर आप ही बता दीजिए एक बार इसकी परिभाषा आपके हिसाब से क्या मा

594
00:42:02,320 --> 00:42:06,760
करनी नहीं है आपको क्लियर बात अब करनी नहीं है करनी है आपकी जो आपकी

595
00:42:06,760 --> 00:42:10,840
जो परिभाषा है धर्म की वो बताइए सटीक आपने देखिए एक

596
00:42:10,840 --> 00:42:15,280
बता दिया कि समाज के कारण में माता को गमन नहीं करता हूं एक साइंस के कारण

597
00:42:15,280 --> 00:42:19,400
हम लोग इसको तब बात करेंगे जब आपके तीनों पॉइंट को हम समझ ले समाज में

598
00:42:19,400 --> 00:42:23,480
क्या होता है इसलिए आप नहीं करते हो माता के साथ गमन और साइंस कहती

599
00:42:23,480 --> 00:42:28,000
है इसलिए आप नहीं करते हो माता के साथ गमन और जो धर्म की बात है नहीं

600
00:42:28,000 --> 00:42:32,400
साइंस है आपके शरीर में ही साइंस वही बात है एक बात है सही बात है ठीक

601
00:42:32,400 --> 00:42:36,400
नहीं आपने जो तीसरी बात कही है ना धर्म आपने जो तीसरी बात कहि है धर्म

602
00:42:36,400 --> 00:42:40,800
इसको हमें समझा दो ये क्या है क्या है ये आपकी

603
00:42:40,800 --> 00:42:44,840
वही तो बता रहा हूं ना सर ऐसा काम करना जिससे लोगों

604
00:42:44,840 --> 00:42:49,160
का कल्याण हो वही धर्म है यानी अरे मेरे

605
00:42:49,160 --> 00:42:53,320
भाई वो जो काम करना है वो कोई वस्तुनिष्ठ थोड़ी ना हो रहा

606
00:42:53,320 --> 00:42:55,280
है यानी कि

607
00:42:55,280 --> 00:42:59,320
आपको जो लग रहा है कि समाज का कल्याण होगा वो

608
00:42:59,320 --> 00:43:03,360
आपका धर्म है और आपको लगता है कि माता के साथ गमन करने से

609
00:43:03,360 --> 00:43:07,800
समाज का कल्याण नहीं होगा इसलिए आप गमन नहीं करते हो

610
00:43:07,800 --> 00:43:11,840
एकदम सही तो यानी कि आप अपने अनुभव को धर्म कह

611
00:43:11,840 --> 00:43:17,090
रहे हो ना

612
00:43:17,090 --> 00:43:20,440
[संगीत]

613
00:43:20,440 --> 00:43:24,880
अपने कर रहा हूं क्या आपने अनुभव नहीं किया है क्या ऐसा आपकी

614
00:43:24,880 --> 00:43:29,920
आपकी जो है फोटो और वॉइस अटक रही

615
00:43:29,920 --> 00:43:34,560
बार बार ना कट र सर

616
00:43:34,560 --> 00:43:39,240
को नहीं सर मेरे हिसाब से आप बताइए

617
00:43:39,240 --> 00:43:43,480
आप धर्म को क्या अच्छा नहीं मानते है आप अपने को तो धर्म

618
00:43:43,480 --> 00:43:45,720
कह रहे

619
00:43:45,720 --> 00:43:50,160
हो मैंने बात हैने

620
00:43:50,160 --> 00:43:54,400
वाले को धर्म बोलते हैं मैं आपसे पूछ रहा हूं कि

621
00:43:54,400 --> 00:43:59,280
आप अपने अनुभव को धर्म कह रहे हो या किसको क रहे हो किसका अनुभव है वो

622
00:43:59,280 --> 00:44:03,440
काम बुरा करने वाले को सर आपका पूरा क पूरा क

623
00:44:03,440 --> 00:44:09,440
आप नेटवक खराब है सही नेटवर्क में आके बात

624
00:44:19,040 --> 00:44:23,360
करिए एक असल में बात इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि

625
00:44:23,360 --> 00:44:27,440
इन्होंने एक शब्द अलग से ले रखा है धर्म भाई जब तुम

626
00:44:27,440 --> 00:44:31,960
ईश्वर को मानते नहीं हो तो धर्म को लाओ मत बीच में

627
00:44:31,960 --> 00:44:36,120
अब धर्म को ये कह रहे हैं कि वो मेरा अनुभव है तो पहली

628
00:44:36,120 --> 00:44:40,200
बार जब ये निर्वस्त्र बाहर जा रहे होंगे तो इनको माता जी ने

629
00:44:40,200 --> 00:44:44,400
कहा होगा कि भाई वस्त्र पहन के जाओ हम कि अपने आप इनका

630
00:44:44,400 --> 00:44:48,400
अनुभव हुआ था व क्या मैं

631
00:44:48,400 --> 00:44:53,360
आपकी पूरी बात नहीं सुन पाया था ना चला गया था नेटवर्क इसलिए अब बताइए सर बताइए

632
00:44:53,360 --> 00:44:57,360
हां मैं ये कह रहा हूं कि क्या आप अपने अव

633
00:44:57,360 --> 00:45:01,640
को धर्म कह रहे हैं ये धर्म की संज्ञा आप दे किसको रहे हैं

634
00:45:01,640 --> 00:45:05,840
अनुभव कोही धर्म कह रहा सर अच्छे कर्म करने वाला धर्म बात

635
00:45:05,840 --> 00:45:10,320
मत करो भाई भी वाली बात मत करो सटीक बात करो सटीक

636
00:45:10,320 --> 00:45:15,080
ये जो धर्म की इंफॉर्मेशन है क्या सही है क्या गलत यह इंफॉर्मेशन प्रोवाइड

637
00:45:15,080 --> 00:45:19,080
कहां से हो रही है आपको नहीं सर तो आप यह

638
00:45:19,080 --> 00:45:23,320
कहना चाहते हो जो वेद पुराण में लिखा है वही सही है फिर वही बात अभी मैं आपसे

639
00:45:23,320 --> 00:45:27,720
क्वेश्चन किया है ना आप धर्म किसे कह रहे हो अच्छे

640
00:45:27,720 --> 00:45:31,880
कर्म को धर्म कह रहा हूं बुरे कर्मों को अधर्म कह रहा गलत क्या अच्छा

641
00:45:31,880 --> 00:45:34,320
कर्म क्या अच्छा कर्म है क्या बुरा

642
00:45:34,320 --> 00:45:38,360
कर्म है इसकी कोई नियमावली की बुक है आपके पास या

643
00:45:38,360 --> 00:45:42,440
कहां से सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन कहां पर है कि वह अच्छा कर्म क्या है

644
00:45:42,440 --> 00:45:46,640
बुरा कर्म क्या है अनुभव है ना क्या है अनुभव

645
00:45:46,640 --> 00:45:50,680
है सर अनुभव से ही तो आदमी सीखता है सर सही तो बात बार पूछ चुका बोल

646
00:45:50,680 --> 00:45:54,720
दो ना अनुभव को धर्म कह रहा हूं अनुभव ही धर्म

647
00:45:54,720 --> 00:45:59,320
है सर अच्छे कर्म करू ना वो धर्म बुरे कर्म कर

648
00:45:59,320 --> 00:46:04,760
खराब है वो अच्छे कर्म काम नि

649
00:46:04,760 --> 00:46:09,680
होगा अच्छे कर्म का निर्णय कहां से होगा कि अच्छा है

650
00:46:09,680 --> 00:46:13,880
कल्याण से सय से होगा वो बताओ

651
00:46:13,880 --> 00:46:18,040
कल्याण से सर किसी का कल्याण हो रहा अच्छा धर्म है आप नहीं समझ पाओ

652
00:46:18,040 --> 00:46:22,040
कल्याण की परिभाषा क्या है

653
00:46:22,040 --> 00:46:26,360
जिससे भला हो सर अ भला का परिभाषा मत पूछना भले की परिभाषा क्या है पूछनी

654
00:46:26,360 --> 00:46:30,400
पड़ेगी क्योंकि आपसे पूछूंगा ना क्वेश्चन अच्छा मैं सवाल करूंगा

655
00:46:30,400 --> 00:46:34,480
तो फिर आप जवाब नहीं दे पाओगे फिर वो बाद की बात है अभी आप अपने

656
00:46:34,480 --> 00:46:38,920
धर्म को क्लेरिफाई नहीं कर पा रहे आप मुझे ये बताइए कि

657
00:46:38,920 --> 00:46:43,280
भले की परिभाषा क्या है ऐसा क्या हो जिससे माना जाए कि सामने

658
00:46:43,280 --> 00:46:48,160
वाले का भला हुआ ऐसा क्या हो उसके साथ

659
00:46:48,160 --> 00:46:49,480
सामने वाले का भला सर

660
00:46:49,480 --> 00:46:53,640
जिससे उसका भला हो ना कि किसी का नुकसान हो एकदम नुकसान भी ना हो किसी

661
00:46:53,640 --> 00:46:57,920
का उसका भी भला हुआ मैं आपसे पूछ रहा हूं कि सामने

662
00:46:57,920 --> 00:47:02,200
वाले का भला हो ऐसी कौन सी प्रक्रिया है जिससे हम ये मानेंगे

663
00:47:02,200 --> 00:47:06,760
कि उसको उसका भला हुआ वो क्या है प्रक्रिया

664
00:47:06,760 --> 00:47:11,440
देख कर के सर आप नहीं समझ पाओ ता

665
00:47:11,440 --> 00:47:15,640
है पास आपके पास शब्द नहीं है आप हसने

666
00:47:15,640 --> 00:47:19,840
आए आ आपने मुझे सवाल करने का मौका

667
00:47:19,840 --> 00:47:23,880
ही कहा दिया है अभी अरे भाई जब तुम उल्टी सीधी बातें कर रहे हो तो

668
00:47:23,880 --> 00:47:27,880
मैं उसमें से सफाई करके अपनी बात करने की टॉपिक तो निकालूं

669
00:47:27,880 --> 00:47:32,000
ना तुम कह रहे हो कि धर्म वो है जिससे किसी का कल्याण हो

670
00:47:32,000 --> 00:47:36,000
अब मैंने कहा कल्याण की परिभाषा क्या है जिससे किसी का भला हो अब मैं पूछ रहा हूं

671
00:47:36,000 --> 00:47:40,000
भला क्या है कि देख कर के पता लगेगा तो हम क्या देखेंगे क्या

672
00:47:40,000 --> 00:47:44,160
ऐसा हो रहा होगा जिससे हमय मानेंगे कि उसका भला हो गया क्या वो हवा

673
00:47:44,160 --> 00:47:48,280
में उछल रहा हो या वो अपनी दाढ़ी बना रहा हो ऐसा

674
00:47:48,280 --> 00:47:53,080
क्या हो उसके साथ उसको क्या उसमें हम क्या देखेंगे जिससे हम उसका भला मान

675
00:47:53,080 --> 00:47:57,200
ले बोलिए लाभ सर लाभ अब किसी

676
00:47:57,200 --> 00:48:01,200
का लाभ हो अब ऐसा नहीं बोल रहा हू कि हर लाभ नहीं सर हर प्रकार का लाभ नहीं

677
00:48:01,200 --> 00:48:05,080
ठीक है कुछ लाभ ऐसे भी है ठीक है जिनसे

678
00:48:05,080 --> 00:48:09,160
खराब है ठीक मैं हर ला की बात नहीं कर रहा मुझे आप निश्चित नियमावली

679
00:48:09,160 --> 00:48:13,240
बताइए कि वो जो आप कह रहे हो कल्याण हो

680
00:48:13,240 --> 00:48:17,280
उसकी परिभाषा क्या है वो कुछ और कुछ जो आप कह रहे हो उसका

681
00:48:17,280 --> 00:48:22,000
निश्चित पैरामीटर क्या है निश्चित बताइए ना

682
00:48:22,000 --> 00:48:24,840
जैसे की

683
00:48:24,840 --> 00:48:29,000
सुनो जैसे की कुछ लोग कह देंगे कि हमारा भला तो माता के साथ

684
00:48:29,000 --> 00:48:33,040
गमन करने में है तो क्या हम उसको वो उसके लिए

685
00:48:33,040 --> 00:48:37,240
क हा तुम सही कर रहे हो भला हो गया उसका

686
00:48:37,240 --> 00:48:41,240
अरे सर क्या उसको समाज नहीं बताएगा क्या सही है

687
00:48:41,240 --> 00:48:45,280
गलत है समाज प आइए फिर आप धर्म पर मत जाइए

688
00:48:45,280 --> 00:48:49,400
धर्म उल्टा सीधा धर्म की व्याख्या करते हु मत जाइए आप समाज मान कि मेरे

689
00:48:49,400 --> 00:48:53,560
लिए समाज है आपने धर्म को लिया

690
00:48:53,560 --> 00:48:58,200
ना बीच में आप समाज मानिए ना

691
00:48:58,200 --> 00:49:03,960
नहीं सर मैंने धर्म को लिया क्योंकि आप इस की बात कर रहे थे नाय समाज

692
00:49:03,960 --> 00:49:08,480
है समाज है साइंस है धर्म है

693
00:49:08,480 --> 00:49:12,960
फिर धर्म आ गया धर्म के पीछे तो समाज है ना

694
00:49:12,960 --> 00:49:17,120
धर्म के पीछे समाज नहीं है सर समाज से धर्म निकला है ना कि धर्म से समाज

695
00:49:17,120 --> 00:49:20,160
धर्म एक तरीका है जिससे चल रहा है समाज कहीं से कुछ

696
00:49:20,160 --> 00:49:24,720
काम पागल आदमी भाई कैसा पागल आदमी जो तू कह रहा वही तो मैंने कहा

697
00:49:24,720 --> 00:49:29,080
नहीं सर आप नहीं जवाब दे पा रहे हो ठीक से अरे भाई धर्म के पीछे समाज

698
00:49:29,080 --> 00:49:33,120
है तुम भी तो वही कह रहे हो कि धर्म से समाज से धर्म निकला धर्म से

699
00:49:33,120 --> 00:49:37,440
समाज नहीं निकला मैंने भी तो वही कहा कि धर्म के पीछे समाज है

700
00:49:37,440 --> 00:49:41,840
धर्म का अंतिम निर्णायक समाज है यही तो मैंने कहा

701
00:49:41,840 --> 00:49:45,880
दोनों तो सेम ना सर स मैं भी तो वही कह रहा हूं सर मैं

702
00:49:45,880 --> 00:49:51,520
भी तो वही कह रहा हूं तुम मेरे को ये कहते हुए कह रहे हो कि तुमने गलत

703
00:49:51,520 --> 00:49:55,640
बोला आप अरे सर जी आप भी सही

704
00:49:55,640 --> 00:50:00,000
हो सुनो जब मैंने ये कहा कि धर्म के पीछे समाज है

705
00:50:00,000 --> 00:50:04,080
तो आपने कहा नहीं नहीं सर धर्म के पीछे समाज नहीं है फिर खुद ही वही बात बता रहे

706
00:50:04,080 --> 00:50:08,080
हो कि क्या कहते हैं जो धर्म है वो समाज से निकला है

707
00:50:08,080 --> 00:50:12,080
समाज धर्म से नहीं निकला है एक बेटे के पीछ के

708
00:50:12,080 --> 00:50:16,120
लिए कहा सुनले तो ऐसा मत करो कोही

709
00:50:16,120 --> 00:50:21,200
बात बोलो जो सच हो ऐसा मत करो कोई बात बोलो

710
00:50:21,200 --> 00:50:25,400
जो हां तो यानी कि आपके पास दो चीजें

711
00:50:25,400 --> 00:50:29,560
है समाज और साइंस धर्म

712
00:50:29,560 --> 00:50:35,400
भी फिर धर्म आ गया धर्म के पीछे समाज ही तो

713
00:50:35,400 --> 00:50:36,400
है

714
00:50:36,400 --> 00:50:40,920
अरे सर ध धर्म के मूल में क्या

715
00:50:40,920 --> 00:50:45,000
है मूल में क्या है धर्म के धर्म

716
00:50:45,000 --> 00:50:50,120
सर कार्य अच्छे करोना सर धर्म है वो धर्म के मूल में क्या

717
00:50:50,120 --> 00:50:54,680
है धर्म का मूल कर्म है सर

718
00:50:54,680 --> 00:50:59,920
समाज नहीं है

719
00:50:59,920 --> 00:51:03,120
समाज नहीं

720
00:51:03,120 --> 00:51:07,160
है अरे सर आपका आवाज नहीं आ रहा था सर

721
00:51:07,160 --> 00:51:10,120
आपका नेटवर्क खराब

722
00:51:10,120 --> 00:51:14,360
है हेलो धर्म के मूल में अभी आपने माना

723
00:51:14,360 --> 00:51:18,680
ना अगर वो गलत कर रहा होगा तो समाज भी तो देखेगा

724
00:51:18,680 --> 00:51:23,160
तो यानी कि धर्म का निर्णय समाज से हो रहा

725
00:51:23,160 --> 00:51:28,200
है कहने का मतलब ये है मेरा

726
00:51:28,200 --> 00:51:32,320
कहने का मतलब मेरा सुनिए सुनिए मैं ये कहना चाह रहा हूं कि

727
00:51:32,320 --> 00:51:36,520
जब आप समाज को ले रहे हो तो अलग से धर्म को मत लो क्योंकि आपने बताया

728
00:51:36,520 --> 00:51:40,720
कि धर्म का निर्णय समाज से ही हो रहा है समझ रहे

729
00:51:40,720 --> 00:51:44,760
जब आप धर्म को समाज को ले रहे हो तो आप साइंस ले रहे हो वोह ठीक है मगर

730
00:51:44,760 --> 00:51:49,120
धर्म को अलग से मत लो धर्म उसी से निकल रहा है ओरिजिन उसका वही है

731
00:51:49,120 --> 00:51:55,120
समाज सर अगर धर्म का ओरिजन क्या है

732
00:51:57,280 --> 00:52:02,960
हा वही है समाज इसलिए मैं कह रहा हूं धर्म को अलग से

733
00:52:02,960 --> 00:52:06,960
लो धर्म अपने आप में अलग अस्तित्व नहीं है समाज से ही निकल

734
00:52:06,960 --> 00:52:11,440
रहा है समाज ही य तय कर रहा है यह अच्छा कार्य है यह करने का है

735
00:52:11,440 --> 00:52:17,440
समाज ही तय कर रहा है यह बुरा कार्य है यह करने का नहीं

736
00:52:19,600 --> 00:52:25,600
है पले नेटवक में

737
00:52:38,400 --> 00:52:42,560
चलिए ठीक है आज के लिए इतना काफी है

738
00:52:42,560 --> 00:52:48,560
इनका नेटवर्क ठीक है नहीं आते हैं तो देख लेते हैं

739
00:52:56,920 --> 00:53:01,120
हेलो मैं ये कह रहा था कि जब आप समाज को ले रहे हो तो क्योंकि

740
00:53:01,120 --> 00:53:05,280
धर्म भी समाज से ही है क्या करना है क्या नहीं करना है तो अलग

741
00:53:05,280 --> 00:53:09,320
से एक और ऑप्शन बनाने की कन्फ्यूजन पैदा होगी इसलिए उसको

742
00:53:09,320 --> 00:53:14,200
अलग से रखने की आवश्यकता नहीं है

743
00:53:14,200 --> 00:53:19,760
हा मेरे पछे कारण सुन ना क्या कारण

744
00:53:19,760 --> 00:53:23,840
सु मैंने धर्म को इसलिए कहा क्योंकि धर्म का नाम मैंने इसलिए लिया

745
00:53:23,840 --> 00:53:29,080
क्योंकि धर्म से लोग ईश्वर को जोड़ते हैं भगवान को जोड़ते हैं क्योंकि वो

746
00:53:29,080 --> 00:53:33,960
है क्योंकि वो है आप कैसे सि करोगे

747
00:53:33,960 --> 00:53:38,280
अच्छा ये बताओ आपका नाम क्या है मेरा नाम सर अतुल

748
00:53:38,280 --> 00:53:43,000
वैष्णव अतुल वैष्णव स कैसे सिद्ध करोगे

749
00:53:43,000 --> 00:53:47,200
सर सर्टिफिकेट है सर तो मेरे पास

750
00:53:47,200 --> 00:53:52,000
ग्रंथ है अच्छा अच्छा तो सर एक बात बताइए

751
00:53:52,000 --> 00:53:56,000
आप क्या मानते है क्या ग्रंथ में सब लिखा सही है अभी टॉपिक चेंज मत करो

752
00:53:56,000 --> 00:54:00,840
अभी तुम काउंटर करो मैं उनको किताबों को नहीं

753
00:54:00,840 --> 00:54:05,120
मानता सर वो तो बुलाने का तरीका है सर आप नाम की बात कर रहेने पूछा

754
00:54:05,120 --> 00:54:09,160
नाम पूछा तो मैंने तुम उनको काउंटर करो

755
00:54:09,160 --> 00:54:13,240
ना धर्म की परिभाषा धर्म शब्द जहा से आया वहा से लोगे कि

756
00:54:13,240 --> 00:54:17,280
नहीं लोगे लेंगे सर लेकिन वही

757
00:54:17,280 --> 00:54:21,280
से सही हैय कैसे लेे वही से सही कैसे लेलो ठी है अब यह

758
00:54:21,280 --> 00:54:27,080
बताओ तुम्हारा नाम जो सर्टिफिकेट में लिखा है वही सही है यह कैसे

759
00:54:27,080 --> 00:54:29,240
सर जी सर जी क्या बात कर रहे हो कहां

760
00:54:29,240 --> 00:54:33,360
से कहां टॉपिक आप जोड़ रहे हो आप बताइए मुझे ऐसे ऐसे ही छते है ना जैसे

761
00:54:33,360 --> 00:54:37,480
तुम लोग छते हो ऐसे पर आपने

762
00:54:37,480 --> 00:54:41,480
नाम का बात किया ना नाम एक तरीका है किसी को बुलाने का बस नाम आपका

763
00:54:41,480 --> 00:54:45,600
नाम क्या है सर तो ये आपका नाम नहीं है मतलब आपका

764
00:54:45,600 --> 00:54:49,680
नाम इसको माने कि ना माने अतुल पिताजी का नाम क्या है मानोगे सर

765
00:54:49,680 --> 00:54:54,400
मानो ना सर पिताजी का नाम क्या है लक्षमण दास वैष्ण सर

766
00:54:54,400 --> 00:54:58,800
तो वो पिताजी का नाम कहां लिखा है कैसे मान ले वही है

767
00:54:58,800 --> 00:55:02,880
अरे सर जी फिर वही सर

768
00:55:02,880 --> 00:55:06,880
जी एक बात बताइए नाम क्या है पहले य पूछ वो

769
00:55:06,880 --> 00:55:11,600
तो बताइए कैसे मान ले कि आपके पिताजी का नाम लक्ष्मण दास है

770
00:55:11,600 --> 00:55:15,680
लक्ष्मण दास है कैसे मानोगे सर सर्टिफिकेट है एक

771
00:55:15,680 --> 00:55:19,880
चीज ठीक है दूसरी चीज हमें बताया गया है कि उनका नाम है वैसे

772
00:55:19,880 --> 00:55:23,880
ही मेरा नाम रखा गया है रखा गया है ऐसे ही मैं बता रहा हूं कि हमारे

773
00:55:23,880 --> 00:55:28,080
पास ग्रंथ है और हमें बताया गया है तो आप उसको

774
00:55:28,080 --> 00:55:32,160
कैसे दिखा पाएंगे मैं तो अपने पिताजी को लाकर खड़ा कर सकता हूं भगवान को लाकर खड़

775
00:55:32,160 --> 00:55:36,200
कर सकते हो क्या अभी बात ये हो रही है कि धर्म किसे कहते धर्म की परिभाषा

776
00:55:36,200 --> 00:55:40,200
की बात हो रही है अभी ईश्वर के अस्तित्व की बात नहीं हो रही है मे सवाल जवाब नहीं दे पाओगे

777
00:55:40,200 --> 00:55:44,960
सर इसलिए नहीं क्यों नहीं दूंगा तुम हसने लगते हो

778
00:55:44,960 --> 00:55:49,360
अभी बात किसकी हो रही है अभी बात य हो रही है धर्म की परिभाषा

779
00:55:49,360 --> 00:55:53,880
किसकी मानी जाए तो धर्म की परिभाषा

780
00:55:53,880 --> 00:55:58,000
ग्रंथों में लिखी हुई धर्म की परिभाषा नहीं मानेंगे तो हम आपसे ये

781
00:55:58,000 --> 00:56:02,440
कहेंगे कि आपके पिता का नाम ये क्यों माना जाए

782
00:56:02,440 --> 00:56:06,760
आपके सर्टिफिकेट नहीं मानेंगे समझ

783
00:56:06,760 --> 00:56:10,760
गए तो कहा का टॉपिक आप कहा जोड़ रहे हो समझ

784
00:56:10,760 --> 00:56:15,240
में आ रहा है आपको क्यों आप इसको कैसे सिद्ध करोगे

785
00:56:15,240 --> 00:56:19,640
अरे भाई सुनो तुम दो चीजों को मिला रहे हो ईश्वर के अस्तित्व

786
00:56:19,640 --> 00:56:23,760
की बात नहीं हो रही थी अभी अभी बात हो रही थी कि धर्म की परिभाषा क्या है

787
00:56:23,760 --> 00:56:27,880
तो आपने कहा धर्म की पर आपने

788
00:56:27,880 --> 00:56:32,320
आपने कहा धर्म की परिभाषा वो नहीं मानेंगे जो ग्रंथ में लिखी होगी हमारी अपनी परिभाषा

789
00:56:32,320 --> 00:56:34,880
धर्म

790
00:56:34,880 --> 00:56:39,320
की अच्छा ले च सु धर्म की परिभाषा

791
00:56:39,320 --> 00:56:43,360
वो नहीं मानेंगे जो ग्रंथ में लिखी होगी तो फिर

792
00:56:43,360 --> 00:56:48,080
इसी प्रकार से हम आप पता का नाम

793
00:56:48,080 --> 00:56:52,480
आपके पिता का नाम हम वो कैसे मान ले जो सर्टिफिकेट में लिखा हुआ

794
00:56:52,480 --> 00:56:56,560
है हा समझ रहे

795
00:56:56,560 --> 00:57:00,440
तो ये तो रही सवा

796
00:57:00,440 --> 00:57:04,640
सवाल अभी करेंगे हो जाएगा छूट जाएगा सवाल अभी करेंगे

797
00:57:04,640 --> 00:57:08,920
इसलिए मैंने कहा था आप जो है समाज लो

798
00:57:08,920 --> 00:57:14,280
सास लो मगर धर्म को आप बीच में मत लाओ क्योंकि धर्म है

799
00:57:14,280 --> 00:57:18,520
नहीं अभी आपने कहा धर्म से ईश्वर का संबंध है आप टॉपिक

800
00:57:18,520 --> 00:57:22,840
को छोड़ रहे हो अभी बात य चल रही है कि माता बहन और पत्नी में आप अ

801
00:57:22,840 --> 00:57:27,040
किस आधार पर करते हो तो आपने तीन आधार बताए थे सा

802
00:57:27,040 --> 00:57:31,120
और र्म जिसम से एक जो धर्म व अनावश्यक है क्योंकि उसके मूल में भी

803
00:57:31,120 --> 00:57:37,120
समाज है तो आप धर्म का नाम मत लो अलग से एक तो व

804
00:57:37,280 --> 00:57:41,680
परिभाषा धम की आपकी जो परिभाषा है धर्म की

805
00:57:41,680 --> 00:57:45,720
वो धर्म श की हुई है जहा से उसके

806
00:57:45,720 --> 00:57:50,480
विरोध में ठीक अरे सर जी

807
00:57:50,480 --> 00:57:54,480
तो गलत भी तो हो सकता है आपकी उत्पत्ति वाली बात फिर

808
00:57:54,480 --> 00:57:59,640
आपके बाप का नाम भी तो गलत हो सकता है अरे

809
00:57:59,640 --> 00:58:02,320
सर

810
00:58:02,320 --> 00:58:06,320
ते आपको अपने पिता के नाम शक हैम रखते

811
00:58:06,320 --> 00:58:10,360
नाम क्यों रखते आपको आपके पिता के नाम पर शक है किसी

812
00:58:10,360 --> 00:58:14,480
को अभी नाम क्यों रखते हैं बताइए आपको आपके पिता

813
00:58:14,480 --> 00:58:15,800
के नाम पर शक

814
00:58:15,800 --> 00:58:20,320
है मैं आपसे पूछ रहा हूं कि नाम क्यों रखते हैं जिससे

815
00:58:20,320 --> 00:58:24,480
कि हम जान पाए ये ये है ये ये है ये ये है क्लासिफिकेशन कर पाए एकदम

816
00:58:24,480 --> 00:58:28,520
सही जवाब एकदम सही जवाब उसी प्रकार से मेरा पिता का नाम रखा गया है जिसे जान पा

817
00:58:28,520 --> 00:58:32,560
रहे हैं ठीक है अरे तो भाई जिसको तुम अपना पिता बता रहे हो

818
00:58:32,560 --> 00:58:37,120
वही तुम्हारा पिता है हम कैसे मान ले अच्छा

819
00:58:37,120 --> 00:58:41,240
ऐसा बात है अब आप मुझसे पूछ रहे हो कि जो मेरे साथ सुनि ना

820
00:58:41,240 --> 00:58:45,280
सर आप मुझे पूछ रहे हो कि जो बाप मेरे साथ रहता है जिसे मैं पिता मार रहा हूं य क्या

821
00:58:45,280 --> 00:58:49,400
सबूत है कि मेरे पास पिता है वो यही पूछ रहे हो ना हा वही आपका पिता है वो

822
00:58:49,400 --> 00:58:54,320
क्या है कैसे मान ले कैसे मान ले कि वो पिता है मेरे साथ

823
00:58:54,320 --> 00:58:58,360
ठीक है ये तो सर सवाल का काउंटर हो गया फिर मैं कैसे मान

824
00:58:58,360 --> 00:59:03,240
लू कि भगवान जो है आपका है अस्तित्व में यानी कि एक

825
00:59:03,240 --> 00:59:07,320
ज देखो अभी ईश्वर के अस्तित्व की बात नहीं चल

826
00:59:07,320 --> 00:59:11,800
रही है अभी बात चल रही है कि आपने कहा धर्म की परिभाषा

827
00:59:11,800 --> 00:59:16,320
यह है ठीक है मैंने कहा नहीं धर्म श एक मिनट

828
00:59:16,320 --> 00:59:20,400
भाई मैंने आपको बताया धर्म शब्द की उत्पत्ति जहां से होती

829
00:59:20,400 --> 00:59:24,720
है वही पर उसकी परिभाषा दी हुई है वो परिभाषा में माननी पड़ेगी

830
00:59:24,720 --> 00:59:28,800
तो आपने बताया कि हम हो सकता है उसने धर्म की गलत परिभाषा लिख

831
00:59:28,800 --> 00:59:30,960
दी हो तो इस प्रकार से

832
00:59:30,960 --> 00:59:34,960
तो जैसे आप यहां पर आए तो आप अगर अपना पिता हमें बताएंगे कि ये है तो

833
00:59:34,960 --> 00:59:39,400
हमें मानना पड़ेगा कि यही है क्योंकि हम आपसे ही आपके पिता को जान रहे हैं

834
00:59:39,400 --> 00:59:43,640
ठीक है अब आप अगर ये कहोगे आप अगर ये कहोगे

835
00:59:43,640 --> 00:59:47,720
कि धर्म धर्म को हम जान तो हम धर्म शब्द को रहे शास्त्रों से

836
00:59:47,720 --> 00:59:51,800
मगर हम परिभाषा नहीं े शास्त्रों से तो हम हम भी कह सकते हैं कि हम जान तो रहे

837
00:59:51,800 --> 00:59:56,240
हैं आपके पिता को आपसे मगर हम परिभाषा नहीं मानेंगे आपकी

838
00:59:56,240 --> 01:00:01,880
आपका पिता है आप उनके पुत्र हो समझ में

839
01:00:01,880 --> 01:00:06,840
आया को छोड़ दो धर्म शब्द को छोड़ दो समाज और सास

840
01:00:06,840 --> 01:00:11,000
कर या फिर तुम लगे रहो धर्म है तो कैसे

841
01:00:11,000 --> 01:00:15,240
छोड़ को छोड़ क्या अरे कहा से धर्म है तुम्हारा

842
01:00:15,240 --> 01:00:19,280
कहां से धर्म है वो बताओ ना धर्म का प्रारूप तुमने कहा तुमने कहा धर्म

843
01:00:19,280 --> 01:00:23,360
का प्रारूप है समाज तो जब समाज को आपने

844
01:00:23,360 --> 01:00:27,880
लडी ले लिया है जब समाज को है

845
01:00:27,880 --> 01:00:32,040
तो फिर अलग से फर धर्म का ऑप्शन क्यों ला रहे हो मत लाओ या तो धर्म

846
01:00:32,040 --> 01:00:36,520
की अपनी या तो धर्म की अपनी या तो धर्म की अपनी

847
01:00:36,520 --> 01:00:40,600
सिद्ध करो धर्म की अपनी जो वो है एक्जिस्टेंस

848
01:00:40,600 --> 01:00:44,800
वो सिद्ध करो सर जी तो आप किसे धर्म

849
01:00:44,800 --> 01:00:46,120
मानते हो मेरे हिसाब से तो धर्म

850
01:00:46,120 --> 01:00:50,240
है अरे भाई हिब से मैं बात कर रहा हूं यदि तुम्हारा

851
01:00:50,240 --> 01:00:54,480
धर्म समाज से निकल रहा है और समाज को ऑलरेडी

852
01:00:54,480 --> 01:00:58,560
आपने ऑप्शन में लिया है तो फिर उससे निकलने

853
01:00:58,560 --> 01:01:03,640
वाली एक और चीज को क्यों रख रहे हो या तो

854
01:01:03,640 --> 01:01:09,640
उस सता उसकी सत्ता समाज से अलग प्रूफ

855
01:01:10,240 --> 01:01:14,240
करो एक मिन सर आवाज नहीं आया आपका एक मिनट

856
01:01:14,240 --> 01:01:19,120
एक बार फिर आवाज नहीं आ

857
01:01:19,120 --> 01:01:23,200
रहा धर्म जहा से निकल रहा है जब

858
01:01:23,200 --> 01:01:27,800
धर्म जहां से निकल रहा है जब धर्म से निकल रहा है

859
01:01:27,800 --> 01:01:32,160
उसकी जहां से व निकल रहा है उसको आपने लिया समाज

860
01:01:32,160 --> 01:01:36,200
और साइंस भी ले लिया अब जब समाज आपने ले लिया तो समाज

861
01:01:36,200 --> 01:01:40,440
में आपका धर्म वही से निकलता है तो समाज जब ले लिया तो उसम सब आ गया फिर अलग

862
01:01:40,440 --> 01:01:45,480
से धर्म क्यों कह रहे हो समझ रहे हो

863
01:01:45,480 --> 01:01:49,560
या अगर अलग से लेना है अगर धर्म को अलग से लेना

864
01:01:49,560 --> 01:01:54,480
है तो धर्म की अपनी अलग सत्ता सिद्ध करो बिना समाज के

865
01:01:54,480 --> 01:01:58,560
चलिए सर समझ गया मैं आपकी इसीलिए क्या करते हम धर्म को चली

866
01:01:58,560 --> 01:02:03,520
छोड़ते है चाहिए एहसान नहीं

867
01:02:03,520 --> 01:02:07,800
चाहिए वोसा कर र सर मैं आपसे

868
01:02:07,800 --> 01:02:12,040
छोटा नहीं अब आपकी दो बात हो गई

869
01:02:12,040 --> 01:02:16,960
समाज और साइंस ठीक है सर हा

870
01:02:16,960 --> 01:02:21,360
तो आपने कहा सास साइंस को ले लेते हैं

871
01:02:21,360 --> 01:02:25,480
साइंस आपका आधार है ईश्वर को ना मानने का है ना

872
01:02:25,480 --> 01:02:29,560
तो ईश्वर को ना मा क्या ऐसा क्या ऐसा होता है साइंस

873
01:02:29,560 --> 01:02:33,640
में कि आज कुछ कहा गया और उसके बाद कुछ नई इन्वेंशन हुई

874
01:02:33,640 --> 01:02:34,160
वो बदल

875
01:02:34,160 --> 01:02:36,320
गया

876
01:02:36,320 --> 01:02:40,320
सिद्धांत बदल जाता है सर साइंस में

877
01:02:40,320 --> 01:02:44,360
बदल जाता है है ना एकदम सही कि जैसे आज आज ये चीज नहीं

878
01:02:44,360 --> 01:02:48,400
नहीं ये चीज गलत है कल को हो सकता है सही है या ये चीज आज सही है कल को हो सकता

879
01:02:48,400 --> 01:02:53,000
है गलत सा के सि बदलते हैं तो यानी कि

880
01:02:53,000 --> 01:02:57,480
यानी कि साइंस पहली बात तो ये है कि आपने ने अच्छे से जान लिया है

881
01:02:57,480 --> 01:03:01,720
कि दुनिया में ऐसा कोई साइंटिस्ट नहीं है जो यह कहता हो नहीं माता के साथ गमन

882
01:03:01,720 --> 01:03:06,000
करने में कोई दिक्कत नहीं है हा

883
01:03:06,000 --> 01:03:10,040
कोई मतलब की सर ऐसा नहीं है मतलब कहने का मतलब मेरा है कि को

884
01:03:10,040 --> 01:03:14,760
गलत है और करसे सासे

885
01:03:14,760 --> 01:03:18,920
सा सुनि सुनि ऐसे साइंटिस्ट

886
01:03:18,920 --> 01:03:23,520
भी दुनिया में है ऐसे साइंटिस्ट भी दुनिया में है

887
01:03:23,520 --> 01:03:27,920
जो कि इस तरह के संबंध का

888
01:03:27,920 --> 01:03:31,920
समर्थन करते हैं अरे सर तो उनकी बात

889
01:03:31,920 --> 01:03:36,640
है ना भी पूछ रहा हूं

890
01:03:36,640 --> 01:03:41,040
हा ठीक है ऐसे साइ दुनिया में है

891
01:03:41,040 --> 01:03:45,160
जो ऐसे संबंधों का समर्थन करते हैं और ऐसे साइंटिस्ट भी दुनिया में

892
01:03:45,160 --> 01:03:49,200
है जो ऐसे संबंध का विरोध करते हैं ठीक है

893
01:03:49,200 --> 01:03:53,720
सर सुनिए अबरा मेरा पूछना ये है

894
01:03:53,720 --> 01:03:58,080
आपसे कि कल को अगर प्रॉपर सभी साइंटिस्ट नेय

895
01:03:58,080 --> 01:04:02,200
निकाल लिया कि माता के साथ गमन में कोई दिक्कत नहीं है बल्कि अच्छा है तो

896
01:04:02,200 --> 01:04:06,360
आप करने लगोगे सुनि सर सुनिए ना सर मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा

897
01:04:06,360 --> 01:04:10,560
हूं वो बताइए आप करने लगोगे हा बता सर सुनेंगे

898
01:04:10,560 --> 01:04:14,600
तभी तो बता पा आप ब बताने से पहले आप

899
01:04:14,600 --> 01:04:18,800
कहते हो सुनिए ना सर भाई मैं जब आपसे कह रहा हूं बताओ तो फिर उसम एक एक्स्ट्रा

900
01:04:18,800 --> 01:04:24,200
लाइन की आवश्यकता नहीं है कि सुनिए ना सर देखि

901
01:04:24,200 --> 01:04:28,680
देख आप जो बोल रहे हो कि साइन शाश्वत नहीं है मैं मार रहा हूं शाश्वत नहीं है

902
01:04:28,680 --> 01:04:33,000
ठीक है लेकिन कुछ चीजें सिद्ध हो चुकी है और जो एकदम करेक्ट

903
01:04:33,000 --> 01:04:37,120
है उन्हें बदला नहीं जा सकता सर ठीक है उन्हें बदला

904
01:04:37,120 --> 01:04:41,720
कहां जा सकता है 181 में एक स्टडी हुआ था उसको बोलते हैं

905
01:04:41,720 --> 01:04:45,720
वेस्टर मर का अभिक्रिया ठीक है वो शरीर का प्रक्रिया होता है वो

906
01:04:45,720 --> 01:04:49,760
जैसे उसम ना नवजात शिशु को लिए थे अलग-अलग नवजात शिशु को लिए थे

907
01:04:49,760 --> 01:04:53,840
और उनको एक साथ रखा गया तो बाद में उनके बी पाया गया एक बात बताइए

908
01:04:53,840 --> 01:04:57,840
एक बात बताइए ये जो आप मुझे रिसर्च बता रहे हैं

909
01:04:57,840 --> 01:05:02,360
इस पर ठप्पा किसने लगाया कि अब ये बदलेगा नहीं

910
01:05:02,360 --> 01:05:04,400
अरे सर जी बदलेगा नहीं तो आप क्या कहना

911
01:05:04,400 --> 01:05:08,400
चाहते हो कि सर्फ धर्म धर्म शाश्वत है उसम कुछ गलत नहीं है

912
01:05:08,400 --> 01:05:13,640
देखो देखो देखो छोटे भाई जैसे हो मेरा गलत

913
01:05:13,640 --> 01:05:17,760
होना मेरा गलत होना उससे ये सिद्ध नहीं होगा कि आप सही

914
01:05:17,760 --> 01:05:21,840
हो आप फिलहाल अपने को सिद्ध करो ठीक है मैं कर

915
01:05:21,840 --> 01:05:26,000
रहा हूं ना सर फिलहाल अपने आप अपने को सिद्ध करो य

916
01:05:26,000 --> 01:05:30,560
वो धर्म शाश्वत है फिर उस क्वेन चला जाए फिर ये बात छूटी जाए ये विषय

917
01:05:30,560 --> 01:05:34,760
होता है आप मुझे बताइए क्या उस पर ठप्पा

918
01:05:34,760 --> 01:05:38,760
किसने लगाया कि वो बदलेगा नहीं बदलेगा

919
01:05:38,760 --> 01:05:42,840
नहीं ऐसा ल सा के नियम बदलते हैं

920
01:05:42,840 --> 01:05:46,920
जान रहा हूं सर मैं भी लेकिन स्टडी में पूरा पा गया

921
01:05:46,920 --> 01:05:51,320
सर पूरा तरीके से सिद्ध हो चुका है य बात ठीक

922
01:05:51,320 --> 01:05:55,640
है पहली बात तो ये हो गई मतलब आपका कहना है

923
01:05:55,640 --> 01:05:59,880
नियम जो साइंस का है ये बदलेगा नहीं वो नियम

924
01:05:59,880 --> 01:06:04,080
सच में नहीं बदलेगा कुछ नियम ऐसे हैं जो दिया ब किसने

925
01:06:04,080 --> 01:06:08,880
लगाया साइंटिस्ट ने लगाया है सरकार ने लगाया है सुप्रीम कोर्ट ने लगाया है

926
01:06:08,880 --> 01:06:13,120
सर दिखाओ कहां प कौन सा वो है नोट कराओ

927
01:06:13,120 --> 01:06:17,200
कौन-कौन से साइंटिस्ट ने लगाया है आगे बात करते अभी मैं उस किताब को लिखा

928
01:06:17,200 --> 01:06:19,560
नहीं हूं इसीलिए लया

929
01:06:19,560 --> 01:06:23,560
नियम बदलेगा नहीं बताओ साइंटिस्ट ने लगाया

930
01:06:23,560 --> 01:06:27,720
है सर नाम बताओ जैसे अभी रिसर्च का नाम बता रहे थे अब

931
01:06:27,720 --> 01:06:31,960
साइंटिस्ट का नाम बताओ जिसने लगा वेस्टन मर्क

932
01:06:31,960 --> 01:06:36,840
अभिक्रिया है रोबर्ट हुसनी नाम से था उस किताब पास

933
01:06:36,840 --> 01:06:40,840
लगाया य बदलेगा नहीं हा तो

934
01:06:40,840 --> 01:06:44,880
नहीं सर नहीं सर आप बता रहा सर झूठ की लई

935
01:06:44,880 --> 01:06:47,040
म

936
01:06:47,040 --> 01:06:51,280
नेपा लगाया वो कौन है वो बताओ

937
01:06:51,280 --> 01:06:55,800
साइंटिस्ट है सभी साइंटिस्ट मिल

938
01:06:55,800 --> 01:07:01,240
रोबर्ट नी न बर्ग और बहुत सारे वैज्ञानिक है सर

939
01:07:01,240 --> 01:07:05,600
इसने कभी बदलेगा नहीं वेस्टर्न

940
01:07:05,600 --> 01:07:09,600
मर्क अभिक्रिया है सर किसने कहा है

941
01:07:09,600 --> 01:07:14,120
रिसर्च किसने की य मत बताओ रिसर्च किसने

942
01:07:14,120 --> 01:07:19,440
कि किसीने नहीं ऐसा

943
01:07:19,440 --> 01:07:23,520
किसीने क्या सर ये अपने मन से

944
01:07:23,520 --> 01:07:27,520
की साइंटिस्ट नेभी ब अरे सर

945
01:07:27,520 --> 01:07:31,920
जी मैं विज्ञान की पूरी बात नहीं ब रहा हूं मैं वेस्टर मरक प्रक्रिया की बात कर रहा था

946
01:07:31,920 --> 01:07:36,040
मैं आपसे कह रहा हूं आपने कहा ये वो सिद्धांत है जो बदलेगा नहीं

947
01:07:36,040 --> 01:07:40,200
उसके बाद मैंने पूछा यह किसने बताया यह किसने ठप्पा लगाया बदलेगा

948
01:07:40,200 --> 01:07:44,640
नहीं आपने कहा कि साइंटिस्ट ने बताया य बदलेगा नहीं

949
01:07:44,640 --> 01:07:48,880
सुप्रीम कोर्ट ने बताया बदलेगा नहीं एक मिनट सुप्रीम कोर्ट ने बताया बदलेगा

950
01:07:48,880 --> 01:07:52,960
नहीं ठीक है फिर मैंने पूछा उसके नाम बताओ

951
01:07:52,960 --> 01:07:58,960
किसने कहा सुप्रीम कोर्ट ने कौन से ऑर्डर में कहा ये बदलेगा नहीं नियम

952
01:08:09,960 --> 01:08:15,960
बताओ आपका चेहरा रुक गया है जाम हो

953
01:08:20,400 --> 01:08:24,840
गया नेटवर्क नहीं आ रहा है सर माफ करना ठीक है सुप्रीम कोर्टम

954
01:08:24,840 --> 01:08:28,920
कोर्ट ने कौन से ऑर्डर में दिया है कि यह जो माता के साथ गमन का

955
01:08:28,920 --> 01:08:32,960
सिद्धांत है साइंटिस्ट का यह कभी बदल नहीं सकता कहां लिखा

956
01:08:32,960 --> 01:08:37,160
है सर मैंने ऐसा कब कहा ये तो आप बो रहे हो आपने

957
01:08:37,160 --> 01:08:43,160
कहा पंडित जी मैंने ऐसा कब कहा सर एक मिनट दिखाते

958
01:08:45,160 --> 01:08:49,560
मिनट अतुल जी आप थोड़ा विज्ञान प

959
01:08:49,560 --> 01:08:53,600
मैं आप यह कह रहे कि विज्ञान का कोई नियम बदल नहीं सकता यही कह रहे

960
01:08:53,600 --> 01:08:58,240
है ना नहीं ये ये कह रहे है कि ये वाला नियम नहीं बदलेगा क्योंकि

961
01:08:58,240 --> 01:09:02,480
ये इनको इनके या इनका क्योंकि इन टकता वहां से मिली है

962
01:09:02,480 --> 01:09:06,560
विज्ञान का ये वाला नियम बदल नहीं सकता आप ये कह रहे हैं आवाज आ रही है आपको

963
01:09:06,560 --> 01:09:10,560
नारायण हां वो म्यूट है इस समय हां

964
01:09:10,560 --> 01:09:14,640
बोलिए बोलिए म्यूट करिए मैं कह रहा हूं कि आप जो ये नियम

965
01:09:14,640 --> 01:09:18,760
बता रहे हैं ये नियम बदल नहीं सकता ये सिद्ध

966
01:09:18,760 --> 01:09:23,240
है जी सर ये सिद्ध है ठीक है हेलो

967
01:09:23,240 --> 01:09:27,320
तो आप हा हेलो आवाज आ रही है आपको जी

968
01:09:27,320 --> 01:09:32,040
सर जी जी जी बताइए बताए मैं ये कह रहा हूं कि

969
01:09:32,040 --> 01:09:36,120
आज से कुछ वर्ष पूर्व मान लीजिए

970
01:09:36,120 --> 01:09:40,160
अंजन 1930 से पहले ठीक है ग्रेविटी का

971
01:09:40,160 --> 01:09:44,240
सिद्धांत समझते हैं ग्रेविटी का सिद्धांत क्या है सारे ग्रह एक दूसरे को अट्रैक्ट करते हैं

972
01:09:44,240 --> 01:09:48,920
ग्रेविटेशनल फोर्स का सिद्धांत वो सिद्ध था जी सर ठीक है

973
01:09:48,920 --> 01:09:53,120
बक आज भी वो पढ़ाया जाता है क्योंकि

974
01:09:53,120 --> 01:09:57,840
नियम है वो सिद्ध है ठीक है फ इसके बाद अरे भाई

975
01:09:57,840 --> 01:10:00,800
तुम अपना शोर बंद करो पहले भाई

976
01:10:00,800 --> 01:10:04,840
शोर ब कर मिनट उसके आप

977
01:10:04,840 --> 01:10:09,120
बोलिए पंडित जी मैं कह रहा हूं कि उसके बाद अल्बर्ट आइंस्टाइन नाम

978
01:10:09,120 --> 01:10:13,280
के एक साइंटिस्ट आए उन्होंने ग्रेविटी का सिद्धांत जो है व अलग

979
01:10:13,280 --> 01:10:17,280
दे दिया बिल्कुल ठीक है उन्होंने कुछ और ही दे दिया उन्होंने

980
01:10:17,280 --> 01:10:21,480
स्पेस और टाइम का के बीच के बीच की रिलेटिविटी बताई जिसकी

981
01:10:21,480 --> 01:10:25,800
वजह से क्या बोलते हैं जो ग्रह है वो एक दूसरे के ऊपर आकर्षित

982
01:10:25,800 --> 01:10:30,080
होते हैं सिद्धांत बदल गया अगर आप यह बोल रहे हैं कि आज के समय

983
01:10:30,080 --> 01:10:34,160
सबसे छोटी वस्तु मान लीजिए अभी के लिए कह रहा हूं इलेक्ट्रॉन है

984
01:10:34,160 --> 01:10:38,400
अ ये सिद्धांत है स्पीड ऑफ लाइट जो है वो न

985
01:10:38,400 --> 01:10:42,400
10 पावर 8 मीटर पर सेकंड है एप्रोक्सीमेट ठीक है आप कह रहे इससे

986
01:10:42,400 --> 01:10:46,680
ऊपर उसके आगे कोई सी नहीं जाती सिद्धांत है क्योंकि इस सिद्धांत को हम यूज करते हैं है ना

987
01:10:46,680 --> 01:10:50,800
एस अ कांस्टेंट सी जो लाइट की स्पीड है वो हमले चलते इससे तेज कोई वस्तु

988
01:10:50,800 --> 01:10:54,800
जा नहीं सकती लेकिन टिकली उसके बाद भी प्रूफ कर दिया कि इसके

989
01:10:54,800 --> 01:10:58,880
बाद भी हो सकती हैसे इससे आगे जा सकते हैं

990
01:10:58,880 --> 01:11:03,400
तो उसके लिए क्या क्या चीज होंगी वो बताया गया है ठीक है आप मेरी बात सुन रहे

991
01:11:03,400 --> 01:11:07,680
हैं ठीक है मैं आपको बताना चारहा विज्ञान

992
01:11:07,680 --> 01:11:11,760
का सिद्धांत ठीक है कभी एब्सलूट हो ही नहीं सकता

993
01:11:11,760 --> 01:11:15,800
आप ये तक प्रूव नहीं कर सकते स्टिकली बता रहा मैं आपको ठीक

994
01:11:15,800 --> 01:11:19,960
है आप य भी नहीं कल का सर उगा कि नहीं यह

995
01:11:19,960 --> 01:11:24,040
भी आप केवल और केवल 99.99% शर हो सकते हैं

996
01:11:24,040 --> 01:11:28,120
लेकिन 0 जी सर एक अभी

997
01:11:28,120 --> 01:11:32,200
कल का सूरज उगेगा नहीं उगेगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि एट नहीं है

998
01:11:32,200 --> 01:11:36,480
एकदम सही राइट स ठीक है जी तो जब आप ये कह रहे हैं कि वो

999
01:11:36,480 --> 01:11:40,520
जो भी आपने जो अपका रिसर्च य से य से यहां से मैं बात करता हूं यहां से

1000
01:11:40,520 --> 01:11:44,880
मैं बात करता हूं ठीक है तो कहने का मतलब ये

1001
01:11:44,880 --> 01:11:48,960
है कि साइंस के सिद्धांत खास

1002
01:11:48,960 --> 01:11:53,120
तौर पर आपने कहा ये वाला सिद्धांत है वो बदलेगा नहीं तो साइंस के सिद्धांत

1003
01:11:53,120 --> 01:11:57,400
जो है शाश्वत नहीं है ठीक है और आप हीने माना

1004
01:11:57,400 --> 01:12:01,480
आप ही ने माना कि आज भी ऐसे साइंटिस्ट है जो कह रहे हैं नहीं

1005
01:12:01,480 --> 01:12:06,320
नहीं माता के साथ गमन करने में कोई दिक्कत नहीं आज भी है आपने माना ना

1006
01:12:06,320 --> 01:12:10,360
आपने माना इस बात को एक बात बताइए सुनिए सुनि भाई

1007
01:12:10,360 --> 01:12:14,360
जो टॉपिक चल रहा है उसको पहले खत्म करो जब मैंने आपसे य

1008
01:12:14,360 --> 01:12:18,560
पूछा आपने माना ना कि ऐसे भी साइंटिस्ट है जो इसका समर्थन करते

1009
01:12:18,560 --> 01:12:22,800
हैं तो आपने यस बोला था

1010
01:12:22,800 --> 01:12:27,360
बोला था कि नहीं सर जी आप एक बात

1011
01:12:27,360 --> 01:12:31,400
बताओ आप जाइए आपसे बात करके अच्छा लगा ठीक है

1012
01:12:31,400 --> 01:12:37,080
आपका आभार आने के लिए इनको अब मत लीजिएगा हो गया इनका

1013
01:12:37,080 --> 01:12:41,160
बस नास्तिक भी कैसे कैसे चले आते हैं थोड़ा

1014
01:12:41,160 --> 01:12:45,200
बहुत उनका कुछ लेवल भी नहीं होता है

1015
01:12:45,200 --> 01:12:49,840
एक बात का जवाब ठीक से नहीं दिया इन लोगों ने

1016
01:12:49,840 --> 01:12:53,840
अरे ये इस विज्ञान की थ्योरी पर ही साइंस की थ्योरी पर ही फस जाते हैं

1017
01:12:53,840 --> 01:12:58,000
अभी ठीक है हां

1018
01:12:58,000 --> 01:13:02,320
आपको पता है जितनी बार आप उससे कोई बिल्कुल कांटे

1019
01:13:02,320 --> 01:13:06,640
की बात करोगे कि यह है क्या तो वो दूसरी बात पर जाएगा

1020
01:13:06,640 --> 01:13:10,880
यही सिद्धांत है सबका देख कोई भी

1021
01:13:10,880 --> 01:13:15,720
कोई भी रिसर्च लिखा होता है शिवांश जी सुनिए

1022
01:13:15,720 --> 01:13:19,760
जो नास्तिक बनके ईश्वर का विरोध कर रहा हो उसका भी

1023
01:13:19,760 --> 01:13:24,120
यही सिद्धांत है और या जो विधर्मी बन के

1024
01:13:24,120 --> 01:13:28,280
सनातन ईश्वर का विरोध कर रहा हो उसका भी यही सिद्धांत है और

1025
01:13:28,280 --> 01:13:32,320
या फिर जो आस्तिक का चोला ड़ के और सनातनी का चोला ड़

1026
01:13:32,320 --> 01:13:36,320
करके और सनातन ईश्वर का विरोध कर रहा हो उसका भी यही सिद्धांत है कि जब

1027
01:13:36,320 --> 01:13:40,480
काटे की बात कोई फसेगी तो सुनिए ना सर जी ये

1028
01:13:40,480 --> 01:13:44,560
ना सर जी मैं तो आप य बताओ फिर इससे हो

1029
01:13:44,560 --> 01:13:47,040
जाएगा जी आप

1030
01:13:47,040 --> 01:13:51,280
बोले जी मैं ये कह रहा हूं कि विज्ञान का भी कोई सिद्धांत

1031
01:13:51,280 --> 01:13:55,640
अगर दिया जाता है ना तो उसमें भी एब्सलूट

1032
01:13:55,640 --> 01:13:59,720
100% जैसी कोई चीज नहीं होती है स फिसली आप कह सकते हो

1033
01:13:59,720 --> 01:14:03,920
लेकिन उसे प्रूव नहीं कर सकते ठीक है और जो उन्होंने

1034
01:14:03,920 --> 01:14:08,040
अब कोई अगर मान लीजिए उसके ऊपर भी उन्होंने कोई रिसर्च किया

1035
01:14:08,040 --> 01:14:12,280
होगा तो रिसर्च करने के लिए उन्होने क्या लो चार पांच सैंपल लिए होंगे

1036
01:14:12,280 --> 01:14:16,400
बच्चों के लोगों के ठीक है सैंपल ही लेंगे ना कि पूरी

1037
01:14:16,400 --> 01:14:20,640
जनता के ऊपर रिसर्च कर चुके हैं कि वो एब्सलूट कह सकते नहीं नहीं धरती पर अगर कोई पैदा

1038
01:14:20,640 --> 01:14:25,040
होगा तो वो अपनी माता के साथ गमन नहीं कर सकता ये तो कोई सिद्धांत नहीं है ना

1039
01:14:25,040 --> 01:14:29,200
सिद्धांत क्योंकि उन्होने सब पे तो नहीं किया हुआ है तो उन्होंने सैंपल लिया होगा अमुक

1040
01:14:29,200 --> 01:14:33,280
अमुक देशों से लिया होगा अमुक अमुक ट्राइब से लिया होगा फलाना

1041
01:14:33,280 --> 01:14:37,520
फलाना ठीक है उसके बाद भी वो एब्सलूट ये नहीं कह सकते कि नहीं नहीं अब ये नियम

1042
01:14:37,520 --> 01:14:42,080
आ चुका है अब ऐसा नहीं होगा अगर ऐसा होता अगर ये नियम होता साइंस द्वारा प्रूफ तो

1043
01:14:42,080 --> 01:14:46,080
तो आज के समय क्या विचार नहीं होता है होता है तो वो तो

1044
01:14:46,080 --> 01:14:50,160
वहां पर फिर सिद्धांत का क्या रहा उनका बात ये है तो ये

1045
01:14:50,160 --> 01:14:55,400
जो ये बिल्कुल ही मतलब बेसलेस बात थ बेसलेस इस बात से थी

1046
01:14:55,400 --> 01:14:59,520
नास्तिकता के सिद्धांत नहीं है इनके पास के मैं नास्तिक हूं क्यों यूं

1047
01:14:59,520 --> 01:15:02,440
ही है बस मजे में इनके

1048
01:15:02,440 --> 01:15:06,880
चार पांच कंटाप नहीं पड़े हैं ठीक से कपा

1049
01:15:06,880 --> 01:15:10,920
जी होते तो उसम इसी को बता कि तुम ये भी पूछ सकते थे तुम य भी पूछ सकते थे ऐसे नहीं

1050
01:15:10,920 --> 01:15:15,720
पूछा पूछा आप सुनो इसका

1051
01:15:15,720 --> 01:15:19,760
जवाब इनके बचपन में ठीक से मारे जाते चरपा ल तोल के

1052
01:15:19,760 --> 01:15:23,760
कं कं इनकी जो इस तरह से बसी है

1053
01:15:23,760 --> 01:15:28,120
ये बंद होती होते एक बात करने में कुछ ठहराव होता

1054
01:15:28,120 --> 01:15:32,160
सुनिए ना अरे क्या सुने भाई जो पूछा जा रहा है वो

1055
01:15:32,160 --> 01:15:36,480
तुम बता नहीं रहे हो और जब तुमने समाज ले लिया साइंस

1056
01:15:36,480 --> 01:15:41,040
ले ली तो एक खंबा और खड़ा कर दिया धर्म अब उसमें व्यक्ति कंफ्यूज होता रहे

1057
01:15:41,040 --> 01:15:45,280
जब वो साइंस को खत्म कर दे जब वो धर्म को वो समाज को खत्म कर दे तुम्हारी

1058
01:15:45,280 --> 01:15:50,040
लिस्ट से उसके बाद खामखा उसको धर्म को भी खत्म करना पड़े

1059
01:15:50,040 --> 01:15:54,080
है ना परिभाषा जी अगर इन्हे

1060
01:15:54,080 --> 01:15:58,160
धर्म परिभाषा हा वही कह रहा हूं ना अगर

1061
01:15:58,160 --> 01:16:02,400
धर्म की मूल परिभाषा उनको पता पता होती तो धर्म का प्रयोग ही नहीं करते इस जगह

1062
01:16:02,400 --> 01:16:06,520
क्योंकि यह बिल्कुल मजाक वाली बात ही है कि

1063
01:16:06,520 --> 01:16:10,600
मैं धर्म को मानता हूं समाज के से सीखा धर्म से सीखा ऐसे नहीं

1064
01:16:10,600 --> 01:16:15,680
करना चा अरे धम सीखा होही गए

1065
01:16:15,680 --> 01:16:19,880
आस्तिक समाज आस्तिक भी तो है समाज

1066
01:16:19,880 --> 01:16:25,680
आस्तिक भी तो है वो क्यों नहीं सीख लेते समाज से

1067
01:16:25,680 --> 01:16:30,200
भाई आज भी दुनिया में 100 में से परसेंटेज

1068
01:16:30,200 --> 01:16:34,560
ऑफ आस्तिक बहुत ज्यादा है जी

1069
01:16:34,560 --> 01:16:38,640
तो वो क्यों नहीं सीख रहे हो

1070
01:16:38,640 --> 01:16:42,640
तुम हां और राम पालियो को कहूंगा जो दूसरे लोग

1071
01:16:42,640 --> 01:16:46,760
हो कि नास्तिकों से लड़ना सीखिए हमारी य क्लासेस ले लिया करिए जब हम

1072
01:16:46,760 --> 01:16:50,800
नास्तिकों का मुह बंद कराते हैं उनकी सच्चाई बाहर लाते तुम्हारे

1073
01:16:50,800 --> 01:16:55,040
पास तो कुछ है नहीं है ना बाबा जी ने कभी बताया ही नहीं

1074
01:16:55,040 --> 01:16:59,040
धर्म ईश्वर कैसे सिद्ध होता है नास्तिकता का खंडन क्या

1075
01:16:59,040 --> 01:17:03,160
है उन्होंने बस तीन पाच 16 चार पाच जन्म मेरा भी जन्म मरण

1076
01:17:03,160 --> 01:17:07,600
होता है फ बा चरो

1077
01:17:07,600 --> 01:17:11,680
देवी और व जो कलयुग के ब्र सतयुग

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01:17:11,680 --> 01:17:15,160
के ब्राह्मण कलयुग के राक्षस

1079
01:17:15,160 --> 01:17:19,440
ही आरी

1080
01:17:19,440 --> 01:17:23,840
बात चलिए धन्यवाद आपका समय से आ

1081
01:17:23,840 --> 01:17:28,520
गया जी मैं देख रहा था लाइ था कभी से लेकिन

1082
01:17:28,520 --> 01:17:34,520
मुझे भी कंट्रोल नहीं हुआ मैंने कहाय अब ये कहीं और ही रेल गाड़ी जा रही

1083
01:17:34,840 --> 01:17:39,080
है जो इनकी रिसर्च है ना उसी को अभी मैं कर देता हूं अभी बैठा

1084
01:17:39,080 --> 01:17:43,160
देता हूं नहीं इसकी तो बंदने की रिसर्च भी नहीं है कुछ वो भी

1085
01:17:43,160 --> 01:17:47,160
नहीं है नहीं है नहीं क्योंकि जब उन्होने हान बर्ग का नाम दे

1086
01:17:47,160 --> 01:17:51,160
दिया ना हाइजनबर्ग का पहली बात तो उस रि हाइजनबर्ग है ही नहीं हाइजनबर्ग

1087
01:17:51,160 --> 01:17:55,320
ने अनसर्टेन प्रिंसिपल दिया था वो इलेक्ट्रॉन के मतलब वो आप समझ लीजिए

1088
01:17:55,320 --> 01:17:59,320
कि वो अलग ही है वो ठीक है बिल्कुल अलग है ठीक है उससे कोई लेना देना

1089
01:17:59,320 --> 01:18:03,400
नहीं है लेकिन ये हाजन बग प आ गए अभी तो ये अगर

1090
01:18:03,400 --> 01:18:09,080
आज रहते तो अभी मैं इनसे पूछने वाला था साइंस वाला

1091
01:18:09,080 --> 01:18:13,240
मामला तुमने बचपन में जब तुमको कहा होगा बेटा

1092
01:18:13,240 --> 01:18:17,480
माता के साथ गमन नहीं करना है या जो भी है ऐसे नहीं करते वैसे नहीं करते

1093
01:18:17,480 --> 01:18:22,240
कि मैंने तो साइंस अभी पड़ी नहीं है तो अभी तो करू

1094
01:18:22,240 --> 01:18:22,740
ना मुझे

1095
01:18:22,640 --> 01:18:27,240
समाज का झे समाज का अनुभव है

1096
01:18:27,240 --> 01:18:31,240
और सबसे बड़ी बात क्या है कि अगर कोई

1097
01:18:31,240 --> 01:18:35,400
नास्तिक है और वो आचरण से सही है इसका मतलब उसकी कोई सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन

1098
01:18:35,400 --> 01:18:39,600
वो आस्तिक है तब वो ऐसा है

1099
01:18:39,600 --> 01:18:43,960
पीछे उसके मूल में आस्तिक है मानना

1100
01:18:43,960 --> 01:18:48,760
पड़ेगा एक बात और बोलना चाहूंगा अतुल जी के लिए अगर वो सुन रहे होंगे तो

1101
01:18:48,760 --> 01:18:52,920
लाइव अगर देख रहे हैं तो देखिए आपके बचाव में कह देता हूं एक बात

1102
01:18:52,920 --> 01:18:57,520
जो आप नियमावली बता रहे हैं ना वो एक अल्प काल के लिए या लिमिटेड

1103
01:18:57,520 --> 01:19:01,720
टाइम पीरियड के लिए किसी स्पेसिफिक सरकमस्टेंसस के लिए बिल्कुल सही हो सकती है

1104
01:19:01,720 --> 01:19:05,880
लेकिन वो नियम फिर भी शाश्वत नहीं है ठीक है तो अगर वो

1105
01:19:05,880 --> 01:19:09,960
नियम शाश्वत नहीं है तो मतलब मतलब आपके पास जो बेस है ना बेस

1106
01:19:09,960 --> 01:19:14,280
वो शाश्वत नहीं है टर्नल नहीं है तो वो नहीं होगा तो फिर आप टर्नल नियम

1107
01:19:14,280 --> 01:19:18,320
नहीं बना सकते तो जब आपका बेस टनल नहीं है तो आप यय नहीं क सकते कि

1108
01:19:18,320 --> 01:19:22,480
नहीं नहीं य माता के साथ गमन ना करना एक धर्म है मतलब ये नियम है

1109
01:19:22,480 --> 01:19:26,560
शाश्वत नियम है ऐसा नहीं है ना वो बात तो आपको थोड़ा

1110
01:19:26,560 --> 01:19:31,240
सा ना दर्शन पर भी विचार करना पड़ेगा थोड़ा सा फिलोसोफी को समझिए

1111
01:19:31,240 --> 01:19:35,440
ये तो ऐसा नास्तिक था जो अभी आया था ये ऐसे नास्तिक थे

1112
01:19:35,440 --> 01:19:37,640
कि इन्होंने आज तक सोचा नहीं है ठीक से कि

1113
01:19:37,640 --> 01:19:41,760
नास्तिक क्यों क्यों हूं मैं इस कारण से बहके बहके जवाब दे रहे

1114
01:19:41,760 --> 01:19:46,000
थे जब मैंने पूछा कि ठप्पा किसने लगाया बदलेगा नहीं तो

1115
01:19:46,000 --> 01:19:50,080
साइंटिस्ट ने लगाया सुप्रीम कोर्ट ने लगाया सबको

1116
01:19:50,080 --> 01:19:54,960
बोल दिया और बाद में कह रहा है कि मैंने कब बोला

1117
01:19:54,960 --> 01:19:59,360
बिल्कुल चलिए सभी को जय श्री राम

1118
01:19:59,360 --> 01:20:03,720
ठीक था जी जय श्री राम और अभी एक बहुत ही अच्छी एक

1119
01:20:03,720 --> 01:20:08,480
वीडियो डाली गई है सर्वशक्तिमान धर्म चैनल पर हमारे

1120
01:20:08,480 --> 01:20:12,800
उसमें यह जो काल को सदाशिव कहा है ना रामपाल

1121
01:20:12,800 --> 01:20:18,240
ने उस पर फसाया है किसी को वो वीडियो देखिएगा आप लोग जय श्री

1122
01:20:18,240 --> 01:20:22,600
राम चलिए कुछ लोग जवाइन करना चाह रहे हैं अभी तो नहीं हो पाएगा

1123
01:20:22,600 --> 01:20:27,080
अरे अब ठीक है अब रहने दीजिए मेरा तबीयत मेरी तबीयत खराब थी इनसे

1124
01:20:27,080 --> 01:20:32,120
मैंने आज का वो कह दिया था अमन मिश्रा

1125
01:20:32,120 --> 01:20:36,320
जीथ हां अमन मिश्रा जी आप जो है जो भी जवाइन करना चाहता

1126
01:20:36,320 --> 01:20:40,360
है वह एक नंबर है नंबर दे दीजिए पंडित

1127
01:20:40,360 --> 01:20:43,840
जी 7408

1128
01:20:43,840 --> 01:20:48,160
30169 तो आप जो है

1129
01:20:48,160 --> 01:20:52,640
इस पर ट करें और ट करने के बाद आपको आईडियोलॉजिकल

1130
01:20:52,640 --> 01:20:57,520
डिस्कशन का एक फम प्राप्त होगा उस फॉर्म को भर दें

1131
01:20:57,520 --> 01:21:01,600
और फॉर्म को भरने के बाद हम आपसे संपर्क कर लेंगे यह भी ऐसे ही आए थे

1132
01:21:01,600 --> 01:21:05,040
हमारे टच में कहीं से

1133
01:21:05,040 --> 01:21:09,320
तो क्या कहते हैं इनसे मैंने आज का कह दिया था कि भाई

1134
01:21:09,320 --> 01:21:13,360
दो बजे ढाई बजे जो है आपके साथ वार्ता होगी तो कर ली अन्यथा आज हमारा

1135
01:21:13,360 --> 01:21:17,400
स्वास्थ इतना गड़बड़ था कि करते नहीं आपको लग रहा होगा बोलने

1136
01:21:17,400 --> 01:21:22,120
में भी दिक्कत है जो गला है उसमें वो कोल्ड हो गया बहुत ज्यादा

1137
01:21:22,120 --> 01:21:26,120
ठीक है सभी को जय श्री राम पंडित जी आपका बहुत बस एक लास्ट लाइन

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01:21:26,120 --> 01:21:30,240
गमा जी क्या बोलते सबके लिए कैमरा ऑन करना आवश्यक है मैं क्षमा चाहूंगा मैं इस समय नहीं कर पाया

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01:21:30,240 --> 01:21:34,600
हूं मैं ट्राई कर रहा हूं मेरा कैमरा चालू नहीं हो पा रहा है वरना मैं अवश्य कैमरा ऑन कर

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01:21:34,600 --> 01:21:39,080
ये नियम सबके लिए है यह मेरे लिए भी है यह शिवान जी के लिए भी है और

1141
01:21:39,080 --> 01:21:43,200
जो मतभेद में आ रहे हैं मतभेद के लिए आ रहे हैं या जो समर्थन में आ रहे सबके लिए कैमरा ऑन करना बहुत

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01:21:43,200 --> 01:21:47,240
अति आवश्यक ठीक है और मैं भी आगे से ध्यान रखूंगा कि कैमरा

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01:21:47,240 --> 01:21:51,240
ऑन करके ही आऊ मैं इस समय नहीं कर पा रहा हूं क्योंकि मेरा कैमरा खराब हो मु

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01:21:51,240 --> 01:21:55,240
आना जरूरी था इसलिए मैं आ जय श्री राम जय श्री राम
