1
00:00:03,400 --> 00:00:07,320
सभी को जय श्री

2
00:00:07,320 --> 00:00:11,720
राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

3
00:00:11,720 --> 00:00:17,720
और आज हमारी चर्चा होने जा रही है

4
00:00:19,000 --> 00:00:23,040
जो ब्रह्मा कुमारी के एक फॉलोअर है और मेरे

5
00:00:23,040 --> 00:00:27,040
ख्याल से रिप्रेजेंटेटिव भी है कहीं ना कहीं से तो वह आज हमारे साथ में

6
00:00:27,040 --> 00:00:32,680
है और

7
00:00:32,680 --> 00:00:38,680
मेरी आवाज सभी को क्लियर आ रही

8
00:00:44,960 --> 00:00:50,960
है वो चालू है

9
00:00:51,680 --> 00:00:55,760
क्या अब तो क्लियर आ रही होगी अभी अभी मैंने वाईफाई से कनेक्ट किया पहले वाईफाई

10
00:00:55,760 --> 00:00:58,920
से कनेक्ट नहीं

11
00:00:58,920 --> 00:01:03,760
था ठीक है

12
00:01:03,760 --> 00:01:09,760
कोई किसी चीज की कमी लग रही है क्या देखने

13
00:01:10,640 --> 00:01:14,680
में जय श्री कृष्ण अब

14
00:01:14,680 --> 00:01:18,800
क्लियर है जी ठीक है तो हमारे जो

15
00:01:18,800 --> 00:01:23,120
आज गेस्ट है वह ब्रह्मा कुमारी से

16
00:01:23,120 --> 00:01:27,080
हैं

17
00:01:27,080 --> 00:01:31,160
और वो जुड़े हुए हैं कहीं से ब्रह्मा

18
00:01:31,160 --> 00:01:34,960
कुमारी से तो वह आज हमारे साथ

19
00:01:34,960 --> 00:01:40,960
है जय श्री राम ऋषभ पाटिल

20
00:01:42,280 --> 00:01:46,800
जी आवाज नहीं आ रही आपकी

21
00:01:46,800 --> 00:01:51,520
ऋषभ जी हां आ रहा है

22
00:01:51,520 --> 00:01:56,360
हेलो आ रही है आवाज आपकी आवाज आ रही है मैं एक रिक्वेस्ट

23
00:01:56,360 --> 00:02:02,360
करूंगा जी जी क्वालिटी लो है वीडियो

24
00:02:03,400 --> 00:02:07,880
का य वीडियो किसका अटक रहा है एक हां अब ठीक

25
00:02:07,880 --> 00:02:12,080
है ठीक है वीडियो मेरा रुक रहा है मैं लीव करके एक बार दोबारा से जुड़

26
00:02:12,080 --> 00:02:18,080
जाता हूं आप रुकिए मैं लीव करता हूं ठीक है ठीक

27
00:02:33,520 --> 00:02:38,000
अब ठीक आ रहा है आ रहा है आवाज

28
00:02:38,000 --> 00:02:44,000
आवाज ठीक आ रही है जी भाई

29
00:02:45,560 --> 00:02:46,560
जी

30
00:02:46,560 --> 00:02:50,720
चलिए तो सभी को जय श्री राम सबसे पहले

31
00:02:50,720 --> 00:02:55,000
आप थोड़ा सा ऋषभ जी अपने द्वारा अपना थोड़ा सा परिचय आप दे

32
00:02:55,000 --> 00:02:59,280
दीजिए जी जी मेरा नाम ऋषभ पाटिल है

33
00:02:59,280 --> 00:03:03,880
मैं महाराष्ट्र से मुंबई में रहता हूं फिलहाल पढ़ाई के लिए

34
00:03:03,880 --> 00:03:07,960
हम हमारा एक छोटा गांव है अमलनेर करके जलगांव डिस्ट्रिक्ट में

35
00:03:07,960 --> 00:03:12,760
महाराष्ट्र में तो मैं वहां से बिलोंग करता हूं अभी पढ़ाई के लिए मुंबई में

36
00:03:12,760 --> 00:03:16,920
ह हम अभी बीटेक अभी बीटेक की पढ़ाई कर रहे

37
00:03:16,920 --> 00:03:22,800
लास्ट ईयर में कंप्यूटर साइंस

38
00:03:22,800 --> 00:03:26,840
में हा और भाई

39
00:03:26,840 --> 00:03:30,320
और ब्रह्मा कुमारी से कैसे जुड़े

40
00:03:30,320 --> 00:03:34,960
भाई जी मैं बचपन से इस ज्ञान में चल रहा हूं मतलब मेरी उम्र होगी

41
00:03:34,960 --> 00:03:39,080
फर्स्ट फर्स्ट सेकंड स्टैंडर्ड से मैं इस ब्रह्म कुमारी

42
00:03:39,080 --> 00:03:43,440
संस्थान से जुड़ा मेरी माता के द्वारा हमारी माता जी ब्र कुमारी

43
00:03:43,440 --> 00:03:47,560
में जाती है उनके द्वारा मैं भी ज्ञान में जुड़ा

44
00:03:47,560 --> 00:03:51,600
उस ज्ञान से जुड़ा इस ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ा और अभी तक

45
00:03:51,600 --> 00:03:55,800
हमारा कंटिन्यू हमारे परिवार में मेरे पिताजी भी मेरी माताजी

46
00:03:55,800 --> 00:04:00,680
भी और हम भी हम तीनों इस संस्थान से जुड़े हुए हैं

47
00:04:00,680 --> 00:04:04,760
बहुत बढ़िया तो आपने हमारी एक चर्चा देखी थी

48
00:04:04,760 --> 00:04:08,760
कुछ दिनों पहले ब्रह्मा कुमारी की दीदी थी

49
00:04:08,760 --> 00:04:12,880
उनके साथ अच्छा आप क्ला आप ये क्लासेस वगैरह

50
00:04:12,880 --> 00:04:17,240
भी लेते हैं क्या ब्रह्मा कुमारी नहीं भाई

51
00:04:17,240 --> 00:04:21,560
नहीं भाई जी लेकिन हम ये लेते मी काउंसलिंग लेते मेंटल कासंग

52
00:04:21,560 --> 00:04:25,720
जो होता है हा मी काउंसलिंग इन द सेंस ऐसे

53
00:04:25,720 --> 00:04:29,880
कोई स्पेशल बिजनेस थ वैसे नहीं लेकिन ऐसे फ्री में अगर को

54
00:04:29,880 --> 00:04:34,040
को परेशानी हो किसी को कोई तकलीफ हो किसी को कोई सोल्यूशन नहीं मिलता तब

55
00:04:34,040 --> 00:04:37,800
हम थोड़ी काउंसलिंग लेते हैं मेंटल अवेयरनेस के ऊपर लेते हैं बहुत सारी

56
00:04:37,800 --> 00:04:41,960
डी एडिक्शन केपर लेते है बहुत सारी ऐसे छोटी छोटी जो है टॉप उनके

57
00:04:41,960 --> 00:04:46,080
ऊपर काउंसलिंग भी करते है और हमारा बाय साइड कंटेंट राइटर

58
00:04:46,080 --> 00:04:50,280
भी है हम कंटेंट राइटिंग इन स हम जो मेंटल

59
00:04:50,280 --> 00:04:54,320
हेल्थ आजकल बहुत जरूरी है यूथ के लिए उसके लिए हम

60
00:04:54,320 --> 00:04:58,800
लिखाई मी उसके लिए हम राइटिंग भी करते कंटेंट बनाते मिला कर

61
00:04:58,800 --> 00:05:03,000
कहीं ना कहीं जो ब्रह्मा कुमारीज के जो अभियान

62
00:05:03,000 --> 00:05:07,960
है उनमें कहीं ना कहीं आप कार्यरत है वर्किंग

63
00:05:07,960 --> 00:05:12,320
वर्किंग यस यस तो हमारी जो चर्चा हुई थी उसके

64
00:05:12,320 --> 00:05:16,440
मुख्य कुछ बिंदु है जिसके बारे में शायद आपने हमें कमेंट किया

65
00:05:16,440 --> 00:05:20,640
था और फिर कमेंट के बाद हमने आपको आमंत्रित किया जी भाई

66
00:05:20,640 --> 00:05:24,800
और फिर आमंत्रित होने के बाद आप जो है आज यहां पर उपलब्ध है और मैं अपने

67
00:05:24,800 --> 00:05:28,840
दर्शकों को बता दूं कि इनकी थोड़ी सी टाइमिंग इश्यूज थे इस कारण

68
00:05:28,840 --> 00:05:32,920
से इनके साथ जो चर्चा है वो हमने शाम को ना

69
00:05:32,920 --> 00:05:37,600
रख कर के और आज दिन में रखी है और शाम को

70
00:05:37,600 --> 00:05:41,800
हम अगर वो आ सके

71
00:05:41,800 --> 00:05:45,960
जो जिनके साथ अभी हमारा अरी चर्चा हुई है जो हमारा सेकंड

72
00:05:45,960 --> 00:05:50,000
चैनल है सर्वशक्तिमान धर्म वहां पर अभी

73
00:05:50,000 --> 00:05:52,920
रामपाल के फॉलोअर्स के फॉलोअर के साथ हमारी

74
00:05:52,920 --> 00:05:56,960
चर्चा हुई थी दो दिन पहले और वो चर्चा यहां पर रुकी थी जब

75
00:05:56,960 --> 00:06:01,760
हमने ये कहा था कि पवित्र सद ग्रंथ कौन-कौन से हैं तो

76
00:06:01,760 --> 00:06:05,920
उसके बाद फिर वह कह के चले गए थे दो घंटे के बाद कि उनके पास अब समय

77
00:06:05,920 --> 00:06:10,160
खत्म हो रहा है तो उसके आगे की चर्चा आज शाम को जो है

78
00:06:10,160 --> 00:06:14,640
सर्वशक्तिमान धर्म पर शाम को हो सकती है तो आप लोग वहां पर

79
00:06:14,640 --> 00:06:18,640
जो भी पहुंच सके पहुंच तो हमारी जो चर्चा

80
00:06:18,640 --> 00:06:22,720
हुई थी वह जो दीदी है ब्रह्मा कुमारी वाली उनके साथ तीन विषयों

81
00:06:22,720 --> 00:06:26,840
पर मुख्य हमारी बात हुई थी एक थी कि क्या ब्रह्मा कुमारी

82
00:06:26,840 --> 00:06:31,360
का जो अनुसार कोई ऐसा हमारे पास फंडामेंटल है

83
00:06:31,360 --> 00:06:35,480
जिसके अनुसार हम नास्तिक को समझा सके कि ईश्वर

84
00:06:35,480 --> 00:06:40,880
इस दुनिया में है है ना जी

85
00:06:40,880 --> 00:06:45,120
और फिर दूसरी आगे बात आई थी कि

86
00:06:45,120 --> 00:06:49,400
क्या ईश्वर इस जगत को बनाने

87
00:06:49,400 --> 00:06:53,760
वाला है सब कुछ उसी ने बनाया है और क्या ईश्वर

88
00:06:53,760 --> 00:06:57,800
सर्वशक्तिमान है कुछ यह दो तीन टॉपिक पर हमारी बातें हुई थी तो

89
00:06:57,800 --> 00:07:01,960
उन्हीं में से उन टॉपिक्स को लेकर के आपको आपने अपना

90
00:07:01,960 --> 00:07:06,000
भाव व्यक्त किया है कि वहां पर उत्तर जो है सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो

91
00:07:06,000 --> 00:07:08,320
पाए ब्रह्म कुमारी का जो पक्ष था

92
00:07:08,320 --> 00:07:12,600
और वही पक्ष आप प्रस्तुत करने आए है ना

93
00:07:12,600 --> 00:07:16,800
बिल्कुल ब बकुल मैं सबसे पहले

94
00:07:16,800 --> 00:07:20,840
इस पर ही आता हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ईश्वर

95
00:07:20,840 --> 00:07:24,920
की सिद्धि कैसे होती है सबसे

96
00:07:24,920 --> 00:07:28,960
पहले आपको ब्रह्म कुमारी के बारे में थोड़ा पता है भाई जी उसके

97
00:07:28,960 --> 00:07:33,200
बारे में थोड़ा बोल लि जाए ब्रह्म कुमारी

98
00:07:33,200 --> 00:07:38,160
ब्रह्मा कुमारी के बारे में जो मैं जानता हूं वो ये है

99
00:07:38,160 --> 00:07:43,120
कि ब्रह्मा कुमारी के बारे में जो बताया जाता है

100
00:07:43,120 --> 00:07:47,400
वो यह है कि आपके यहां पर कुछ दिव्य एक दिव्य

101
00:07:47,400 --> 00:07:51,600
शरीर वाले थे जिनका नाम था लेखराज

102
00:07:51,600 --> 00:07:55,720
हा उनके शरीर में ईश्वर आता है और वो

103
00:07:55,720 --> 00:08:00,280
जो बताता है उसको ब्रह्मा कुमारी फॉलो करता है

104
00:08:00,280 --> 00:08:04,960
है ना अब वो ईश्वर का जो नाम

105
00:08:04,960 --> 00:08:09,040
है वो सनातन और हिंदू धर्म ग्रंथों के

106
00:08:09,040 --> 00:08:13,240
नाम से मैच काता है बाकी फीचर वाइज अलग

107
00:08:13,240 --> 00:08:17,400
चीजें हैं मगर सनातन में जो नाम दिए हैं उन नामों

108
00:08:17,400 --> 00:08:21,640
से वह मैच खाता है तो इसलिए यह माना जा सकता है कि

109
00:08:21,640 --> 00:08:23,600
हिंदू धर्म से

110
00:08:23,600 --> 00:08:27,840
ओरिजिन इसका है ब्रह्मा कुमारी इस का तो

111
00:08:27,840 --> 00:08:31,840
यह मुझे पता है और उसके बाद के जाने के बाद जो आज भी आपकी कोई ना कोई

112
00:08:31,840 --> 00:08:36,080
दीदी है जिनकी बॉडी को चुना है ईश्वर ने और फिर

113
00:08:36,080 --> 00:08:40,080
ईश्वर उसके अंदर आता है और अपनी दिव्य वाणी जिसको आप

114
00:08:40,080 --> 00:08:44,680
कहते हो मुरली मुरली

115
00:08:44,680 --> 00:08:48,520
जो वहां पर पहला प्रश्न किया था उसम मैंने कि मुरली क्या है तो

116
00:08:48,520 --> 00:08:53,960
मुरली वही है मेरा वीडियो फिर अटक रहा

117
00:08:53,960 --> 00:08:58,440
है ये कैसे हो स

118
00:08:58,440 --> 00:09:04,400
जो दर्शक है उनका का अटक रहा है किसका अटक रहा

119
00:09:04,400 --> 00:09:09,840
है किसका वीडियो अटक रहा

120
00:09:09,840 --> 00:09:14,480
है कोई कमेंट करके बताएगा

121
00:09:14,480 --> 00:09:18,560
ये कह रहे हैं सही आ रहा है कुछ कह रहे हैं अटक रहा है

122
00:09:18,560 --> 00:09:22,600
आप अपने आप पर चेक करिए शायद अटक नहीं रहा है

123
00:09:22,600 --> 00:09:27,480
डिले आ रहा

124
00:09:27,480 --> 00:09:30,880
है अच्छा

125
00:09:30,880 --> 00:09:34,640
चलिए मैं एक बार लीव करके फिर से आता

126
00:09:34,640 --> 00:09:40,640
हूं आप रुकिए तब तक

127
00:10:11,440 --> 00:10:15,760
जी ऋषभ जी जी भाई जी तो

128
00:10:15,760 --> 00:10:19,920
यह हमें पता है कि आज भी आपकी कोई ना कोई दीदी

129
00:10:19,920 --> 00:10:23,960
है जिनके अंदर आपके अनुसार ईश्वर आता है और वह

130
00:10:23,960 --> 00:10:27,960
डेली कोई ना कोई एक बात बताता है और उस बात को पूरे वर्ल्ड में

131
00:10:27,960 --> 00:10:32,320
आपके द्वारा फैला लिया जाता है ब्रह्मा कुमारी के द्वारा और उसको

132
00:10:32,320 --> 00:10:36,480
एज ए लॉ या एज ए डायरेक्शन

133
00:10:36,480 --> 00:10:40,960
सब लोग फॉलो करते हैं जो ब्रह्मा कुमारी को मानते हैं या कहेंगे

134
00:10:40,960 --> 00:10:45,040
कि फॉलो करने का प्रयास करते हैं जी

135
00:10:45,040 --> 00:10:49,720
जी तो अब इसमें सबसे पहली बात यह हो गई

136
00:10:49,720 --> 00:10:53,760
कि ईश्वर हम लोग अगर इधर से चलेंगे ना तो

137
00:10:53,760 --> 00:10:57,880
हम ज्यादा समझ पाएंगे कि आपके अनुसार ईश्वर

138
00:10:57,880 --> 00:11:02,120
सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ वान है

139
00:11:02,120 --> 00:11:07,000
या नहीं है ब्रह्मा कुमारी

140
00:11:07,000 --> 00:11:11,200
जी सबसे पहली बात यह जो ईश्वर है हम जिसकी बात कर

141
00:11:11,200 --> 00:11:15,760
रहे हैं उसका नाम पहले जानना जरूरी है ठीक है

142
00:11:15,760 --> 00:11:19,920
सबसे पहले यह जानना जरूरी कि वह ईश्वर कौन है

143
00:11:19,920 --> 00:11:24,640
उसका कर्तव्य क्या है उसका मूलभूत

144
00:11:24,640 --> 00:11:28,840
सिद्धांत क्या है उसके गुण क्या है उसके कर्तव्य क्या है सबसे पहली

145
00:11:28,840 --> 00:11:31,040
बात जानना जरूरी है

146
00:11:31,040 --> 00:11:35,320
तो ब्रह्म कुमारी जिस ईश्वर की बात कर रहा है उसका

147
00:11:35,320 --> 00:11:40,080
नाम है परम पिता शिव परमात्मा

148
00:11:40,080 --> 00:11:44,880
जो जिसको हमने युगो युगों से ढूंढा है

149
00:11:44,880 --> 00:11:48,920
जिसको थोड़ा थोड़ा सा क्या है विषयात हो रहा है मुझे क्षमा करिएगा

150
00:11:48,920 --> 00:11:53,040
इंटर किया मैंने एक्चुअली क्या है कि आपके द्वारा

151
00:11:53,040 --> 00:11:57,200
उसको कहा क्या जाता है वो तो मालूम है ना जैसे आप ब्रह्मा कुमारी से आए

152
00:11:57,200 --> 00:12:01,360
ये हमें मालूम है उनका नाम ले एक रास्ता य हमें मालूम है और

153
00:12:01,360 --> 00:12:05,920
मैंने आपको यह भी बताया कि आपके द्वारा जो

154
00:12:05,920 --> 00:12:09,920
ईश्वर का आना बताते हैं उस ईश्वर का जो नाम है वह हिंदू धर्म ग्रंथों

155
00:12:09,920 --> 00:12:14,200
से सनातन धर्म ग्रंथों से मैच करता है मैंने य भी कहा तो हमें उस पर

156
00:12:14,200 --> 00:12:18,640
फोकस करने की आवश्यकता क्या है कि उसका नाम यही

157
00:12:18,640 --> 00:12:22,720
है अपनी बात कर मैं अपनी बात पूरी कर लू तो

158
00:12:22,720 --> 00:12:27,160
अब उसमें मामला यह है कि हम लोग यह डिस्कस कर रहे हैं

159
00:12:27,160 --> 00:12:31,280
किधर से भी शुरू कर सकते हैं तीन चीज ईश्वर

160
00:12:31,280 --> 00:12:35,560
सर्वशक्तिमान मानता है ब्रह्मा कुमारी ईश्वर ब्रह्मा

161
00:12:35,560 --> 00:12:39,920
कुमारीज के अनुसार जो ईश्वर है जी वो अनंत सामर्थ

162
00:12:39,920 --> 00:12:44,400
वान है कि नहीं सर्वशक्तिमान है कि नहीं पहली बात

163
00:12:44,400 --> 00:12:46,040
या फिर हम यहां से चालू कर सकते

164
00:12:46,040 --> 00:12:50,120
कि वो जो दीदी थी उन्होंने एक बात कही थी कि जो

165
00:12:50,120 --> 00:12:54,200
सभी धर्मों के द्वारा माना जाता है जो एक कॉमन चीज है सभी धर्मों

166
00:12:54,200 --> 00:12:58,200
के अंदर वो ईश्वर है ईश्वर के बारे में जो कॉमन चीज है सभी

167
00:12:58,200 --> 00:13:02,320
धर्मों के द्वारा वो ईश्वर है है ना तो इस पर हम लोग वहा बात

168
00:13:02,320 --> 00:13:06,520
नहीं कर पाए थे क्योंकि काफी सारे विषय थे तो यह वाला विषय छूट गया था कि

169
00:13:06,520 --> 00:13:10,760
सभी धर्मों में जो कॉमन है वो ईश्वर कैसे तो वो वो है और एक तीसरा

170
00:13:10,760 --> 00:13:14,760
पक्ष और है कि अगर हम यह

171
00:13:14,760 --> 00:13:18,960
जान ले कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध

172
00:13:18,960 --> 00:13:23,200
होता है तो वो जानने के लिए जिस प्रकार के ईश्वर

173
00:13:23,200 --> 00:13:27,800
की आवश्यकता हमें पड़ेगी हमें पता चल जाएगा कि यही ईश्वर हो सकता है क्योंकि

174
00:13:27,800 --> 00:13:31,960
जो ईश्वर का सिद्ध हो सकता है जो ईश्वर

175
00:13:31,960 --> 00:13:36,000
स्थापित किया जा सकता है वही ईश्वर ईश्वर है वरना हम अगर

176
00:13:36,000 --> 00:13:40,200
अपने मन से ईश्वर के फीचर्स बता दे और उसको सिद्धि ना कर पाए

177
00:13:40,200 --> 00:13:44,320
तो वो ईश्वर ही ईश्वर नहीं है तो इन तीन में से एक मुझे सबसे अच्छा जो लग

178
00:13:44,320 --> 00:13:48,600
रहा है वो यह है कि हम इस वाले को पकड़ लेते हैं

179
00:13:48,600 --> 00:13:52,840
जो सभी धर्मों में एक कॉमन चीज है ईश्वर का वो गुण

180
00:13:52,840 --> 00:13:56,920
है ईश्वर वो है अब जैसे सभी धर्मों ने निराकार

181
00:13:56,920 --> 00:14:01,120
तो माना है ईश्वर को कहीं ना कहीं हम बिल्कुल इसलिए आपने ईश्वर

182
00:14:01,120 --> 00:14:05,160
को निराकार माना ठीक है तो इसको ले लेते

183
00:14:05,160 --> 00:14:09,280
हैं हम लोग अब इसमें क्या है जब

184
00:14:09,280 --> 00:14:13,440
हम यह कहते हैं कि सभी धर्मों के अनुसार तो

185
00:14:13,440 --> 00:14:18,120
सबसे पहले हमें यह जानना पड़ेगा कि धर्म किसे कहते हैं

186
00:14:18,120 --> 00:14:22,600
सभी धर्मों के अनुसार सबसे सभी धर्म के

187
00:14:22,600 --> 00:14:26,880
सबसे पहली बात धर्म जो है हम मतलब दुनिया

188
00:14:26,880 --> 00:14:30,880
में तो बहुत सारी फिलोसोफी इसके ऊपर लेकिन हमारे ब्रह्म कुमारीज

189
00:14:30,880 --> 00:14:35,760
में जो बताया जाता है धर्म किसे कहते हैं उस अनुसार पर हम बताएंगे आपको

190
00:14:35,760 --> 00:14:39,880
सबसे पहले धर्म अर्थात हमारे कर्म

191
00:14:39,880 --> 00:14:43,960
सत्य कर्म जब कर्म सत्य हो जाए तो

192
00:14:43,960 --> 00:14:48,000
वही सच्चा धर्म है और जब तक कर्म असत्य

193
00:14:48,000 --> 00:14:52,720
के मार्ग पर है वो धर्म नहीं हो सकता दूसरी बात

194
00:14:52,720 --> 00:14:56,880
हमारे कर्म जो है अगर किसी भी बात में किसी भी बात

195
00:14:56,880 --> 00:15:00,920
में विकर्म में की ओर जा रहे हैं वो धर्म नहीं हो

196
00:15:00,920 --> 00:15:05,120
सकता धर्म हमें कर्म कैसे करना है कहां करना

197
00:15:05,120 --> 00:15:09,200
है कब करना है किस जगह पर करना है वह

198
00:15:09,200 --> 00:15:13,200
सब सीख देता है और दूसरी बात कि धर्म

199
00:15:13,200 --> 00:15:16,360
जो है यह मानवता को एक सत्य

200
00:15:16,360 --> 00:15:20,920
के आधार पर स्थिर रखता है अगर हम अगर कोई भी

201
00:15:20,920 --> 00:15:24,960
अगर कोई बात भी हो छोटा कर्म भी हो अगर वो असत्य के मार्ग

202
00:15:24,960 --> 00:15:29,000
से हो रहा है विकर्म के मार्ग से हो रहा है वहां पर

203
00:15:29,000 --> 00:15:33,560
धर्म नहीं हो सकता स्वयं मैं यही कहूंगा

204
00:15:33,560 --> 00:15:37,720
हमार ये यहां पर कि हमें जो सिखलाया जाता है जो हमें

205
00:15:37,720 --> 00:15:42,120
शिव सिखला है वो यही सिखला है कि सत्य कर्म

206
00:15:42,120 --> 00:15:46,320
ही सत्य धर्म है जब तक कर्म समझ सम समझ

207
00:15:46,320 --> 00:15:50,520
गया आपकी बात मैं आपकी बात समझ गया एक्चुअली क्योंकि हमारे पास टॉपिक्स बहुत है

208
00:15:50,520 --> 00:15:56,520
तो टाइम की अवेलेबिलिटी के लिए हमको थोड़ा सा संक्षिप्त में रहना

209
00:15:56,600 --> 00:16:00,880
पड़ेगा हा तो आपने कहा जो सत्य

210
00:16:00,880 --> 00:16:04,880
कर्म है वही धर्म है यानी कि धर्म एक ही है सत्य कर्म

211
00:16:04,880 --> 00:16:08,960
हम तो फिर इस लाइन का मतलब क्या है कि सभी धर्मों में जो एक

212
00:16:08,960 --> 00:16:12,960
कॉमन बात है वो ईश्वर का वो मान माना प्रमाणिक ये सभी

213
00:16:12,960 --> 00:16:17,920
धर्म कहां से आ गए इसका मतलब सत्य के अलावा और भी कुछ धर्म है

214
00:16:17,920 --> 00:16:22,400
या फिर य सभी धर्मों से मतलब है हिंदू मुस्लिम

215
00:16:22,400 --> 00:16:27,040
सिख ईसाई या क्रिश्चियनिटी ना हिंदू मुस्लिम क्रिश्चियनिटी

216
00:16:27,040 --> 00:16:31,720
और इन सबके द्वारा येय सब इन सबको आपने धर्म कहा

217
00:16:31,720 --> 00:16:35,760
क्रिश्चन को भी धर्म कहा हिंदू को भी धर्म कहा ईसा को भी

218
00:16:35,760 --> 00:16:39,920
र् मुस्लिम इस्लाम को भी धर्म कहा तो क्योंकि वो

219
00:16:39,920 --> 00:16:43,960
जो आपने परिभाषा द ना सत्य कर्म धर्म है वो एक अलग

220
00:16:43,960 --> 00:16:48,080
चीज है मगर आप य फिर सत्य कर्म अगर धर्म है तो धर्म एक हो जाएगा उसको बहुवचन

221
00:16:48,080 --> 00:16:52,320
नहीं लग सकता धर्म एक है सत्य जो भी आपको

222
00:16:52,320 --> 00:16:56,600
सत्य कर्म क्या है सत्य कर्म के द्वारा सत्य कर्म

223
00:16:56,600 --> 00:17:00,760
सत्य कर्म के द्वारा ईश्वर की प्राप्ति होती है तो जो

224
00:17:00,760 --> 00:17:04,960
भी कर्म आपको ईश्वर के पास ले जाए वह कर्म

225
00:17:04,960 --> 00:17:09,120
सत्य हो गया जो कर्म आपको ईश्वर से दूर ले जा रहा है वो

226
00:17:09,120 --> 00:17:13,520
कर्म विकर्म हो गया असत्य हो गया यानी धर्म एक ही है सत्य

227
00:17:13,520 --> 00:17:17,520
बिल्कुल तो जब ब्रह्मा कुमारी कह रहा है कि सभी धर्मों के

228
00:17:17,520 --> 00:17:21,760
द्वारा जो फिलोसोफी मान्य है वो हमें मान्य है ठीक है

229
00:17:21,760 --> 00:17:25,800
तो इसका मतलब व यहां इस वाली परिभाषा की बात नहीं कर रहा है

230
00:17:25,800 --> 00:17:30,000
कि सत्य कर्म ही धर्म है वो बात कर रहा कि जो हिंदू

231
00:17:30,000 --> 00:17:34,040
के द्वारा भी मान्य है जो हिंदू के द्वारा भी मान्य है जो मुस्लिम

232
00:17:34,040 --> 00:17:38,400
के द्वारा भी मान्य है जो क्रिश्चन के द्वारा भी मान्य है तो इन

233
00:17:38,400 --> 00:17:42,680
सारे धर्मों से जो कॉमन चीज आएगी वो हमें मानने

234
00:17:42,680 --> 00:17:46,720
है सबसे पहली बात जितने भी धर्म है

235
00:17:46,720 --> 00:17:51,160
हम अगर किसी निष्पक्ष होकर अगर देखे कितने भी

236
00:17:51,160 --> 00:17:55,200
धर्म आपको मुझे इसलिए करना पड़ता है क् मैं मुझे

237
00:17:55,200 --> 00:18:00,400
ऐसा लगने लगता है शायद मैं अपने प्रश्न को समझा नहीं पाया

238
00:18:00,400 --> 00:18:04,920
कि जब आपने यह कह दिया कि मुस्लिम धर्म है

239
00:18:04,920 --> 00:18:09,000
आपने जितने भी धर्म है यानी हम लोग बात कर रहे

240
00:18:09,000 --> 00:18:13,440
हैं हिंदू मुस्लिम क्रिश्चन की है

241
00:18:13,440 --> 00:18:17,480
ना हमें ज्यादा उसम डीप नहीं जाना क्योंकि

242
00:18:17,480 --> 00:18:21,480
अगर उसम जाए बहुत हो

243
00:18:21,480 --> 00:18:25,560
जाएगा डीप नहीं जा रहा हूं आप मैं अपने क्वेश्चन को रखने

244
00:18:25,560 --> 00:18:29,560
के लिए पहले आपकी जो उसको मैं

245
00:18:29,560 --> 00:18:33,960
क्लियर करना चाह रहा हूं कि जब

246
00:18:33,960 --> 00:18:38,160
जब हमने कहा धर्म किसे कहते जो सत्य कर्म है वो धर्म है ठीक है तो

247
00:18:38,160 --> 00:18:42,240
आपने फिर दूसरी जगह यह भी कहा है कि जितने भी धर्म यानी कि आप हिंदू

248
00:18:42,240 --> 00:18:46,400
मुस्लिम सिख ईसाई इनको भी धर्म मानते हैं हिंदू के अलावा

249
00:18:46,400 --> 00:18:51,000
जो चीज है उनको भी आप धर्म कह रहे हैं तभी बहुवचन आ रहा है ठीक है

250
00:18:51,000 --> 00:18:55,280
तो अब बकल अब अब बात ये आती है कि

251
00:18:55,280 --> 00:18:59,560
जो मुस्लिम है इस्लाम है उसमें

252
00:18:59,560 --> 00:19:02,240
कई चीजें ऐसी है

253
00:19:02,240 --> 00:19:06,240
जो धर्म नहीं है कई चीज जो मैच

254
00:19:06,240 --> 00:19:10,240
खाएगी कई चीज है जो मैच खाएगी कई चीज है जो

255
00:19:10,240 --> 00:19:14,720
मैच नहीं खाएगी तो आपने फिर मुस्लिम को धर्म कैसे

256
00:19:14,720 --> 00:19:18,760
कहा सबसे पहली बात अगर हम ऐसे अगर

257
00:19:18,760 --> 00:19:22,760
मानने लगे अगर हम ऐसे इस दुनिया में मानने लगे कि वो धर्म नहीं या

258
00:19:22,760 --> 00:19:26,760
कुछ भी हो कुछ भी हो वो जैसा है जैसा चल रहा है उनकी अपनी मान्यता

259
00:19:26,760 --> 00:19:31,000
है उनका अपना कुछ होगा लेकिन हमें सबको बराबर तो रखना

260
00:19:31,000 --> 00:19:35,400
होगा ना भाई जी अगर हम उनको ऐसे समझ ठीक है

261
00:19:35,400 --> 00:19:39,520
मतलब कहने का मतलब ये है मैं मैं मैं समझ गया कहने

262
00:19:39,520 --> 00:19:43,800
का मतलब यह है कि हम जानते हैं कि उनके कुछ कुछ चीजें हैं जो अधर्म

263
00:19:43,800 --> 00:19:48,320
है विकर्म है मगर फिर भी हम हम उनको ऐसा बोलते हैं

264
00:19:48,320 --> 00:19:52,320
कि हम डायरेक्ट साफ सुथरा ऐसे बोलते नहीं कि तुम गलत हो हम

265
00:19:52,320 --> 00:19:56,440
तुमको भी धर्म ही कह रहे हैं अच्छा तो अब मुझे

266
00:19:56,440 --> 00:20:00,800
एक बात बताइए कि कुछ लोग ऐसे दुनिया में जो अपनी मां के साथ भी अफेयर

267
00:20:00,800 --> 00:20:05,040
करना चाहते हैं हम उनको भी मनाने के लिए कहेंगे क्या कि तुम भी इंसान

268
00:20:05,040 --> 00:20:09,240
हो तुम भी मनुष्य हो क्या कहेंगे हम उनको नीच

269
00:20:09,240 --> 00:20:13,400
कहेंगे या उनको भी उनको भी कह देंगे कि नहीं तुम भी अच्छे हो तुम भी बहुत

270
00:20:13,400 --> 00:20:17,360
बढ़िया हो यह सब सबसे पहली बात उनको तो

271
00:20:17,360 --> 00:20:21,480
सजा दी जाएगी उनको तो सजा जो मातृ द्रोही उसको सजा

272
00:20:21,480 --> 00:20:25,560
तो मिलेगी ना अगर चीज

273
00:20:25,560 --> 00:20:29,640
देखिए अगर कोई गलत है और हम इसलिए कि उसको जो बुरा ना

274
00:20:29,640 --> 00:20:34,800
लग जाए व वो ना जाए तो उसकी सच्चाई से उ

275
00:20:34,800 --> 00:20:38,800
जी जी जी यहां पर यही पर यही एक चीज

276
00:20:38,800 --> 00:20:43,040
है भाई जी अगर वह कर्म तमो प्रधान है

277
00:20:43,040 --> 00:20:47,320
मतलब बहुत नीचे दर्जे का है तब कोई

278
00:20:47,320 --> 00:20:51,840
माफी नहीं है तब हम माफ नहीं कर सकते

279
00:20:51,840 --> 00:20:56,200
अगर वो कर्म जिस कर्म से जिस विकर्म

280
00:20:56,200 --> 00:21:00,600
से इस दुनिया में गंदगी फ है ना तो उस कर्म

281
00:21:00,600 --> 00:21:04,600
को हमेशा यही रूप दिया जाएगा कि उसके लिए वह

282
00:21:04,600 --> 00:21:09,240
सजा के पात्र होगा उसके सिवा और कोई सं नहीं द जाए

283
00:21:09,240 --> 00:21:15,240
मैं इसको अभी क्लियर कर लेता हूं इस्लाम में एक आयत

284
00:21:16,920 --> 00:21:21,520
है मैं उसका जो क्रम है वो भूल गया हूं

285
00:21:21,520 --> 00:21:25,960
जी जी उसमें लिखा हुआ है यदि तुमने अपने मुह जुबानी

286
00:21:25,960 --> 00:21:30,280
किसी को बहन बेटी मां इत्यादि कह भी दी यही भाव है उसका

287
00:21:30,280 --> 00:21:34,360
तो मुंह बोले रिश्तों की कोई वो नहीं होती आप अपनी जुबान से पलट

288
00:21:34,360 --> 00:21:38,440
सकते हैं और पलट करके वो

289
00:21:38,440 --> 00:21:42,720
दूसरा व्यवहार कर सकते हैं आपका वॉइस क्रक

290
00:21:42,720 --> 00:21:44,880
हो

291
00:21:44,880 --> 00:21:48,880
रहा बोलिए बोलिए सुनाई दे रहा सुना मैं

292
00:21:48,880 --> 00:21:52,880
यह कह रहा हूं कि उसमें एक

293
00:21:52,880 --> 00:21:57,160
जगह कहा गया है कुरान में कि आपने यदि

294
00:21:57,160 --> 00:22:01,720
अपनी मुह जुबानी किसी से कोई रिश्ता बना लिया उसकी कोई वैल्यू नहीं है आप

295
00:22:01,720 --> 00:22:05,840
जो है अपनी उस रिश्ते से पलट सकते हो और उसके साथ जैसे आपने किसी

296
00:22:05,840 --> 00:22:10,040
को बहन बोल दिया तो उस पर डटे रहना आवश्यक नहीं है आप चाहो

297
00:22:10,040 --> 00:22:14,120
तो उससे विवाह कर सकते हो दूसरा बहन के ठीक उलट वाला कार्य

298
00:22:14,120 --> 00:22:18,280
भी कर सकते हो तो यह शिक्षा वहां दी गई है तो यह शिक्षा धर्म

299
00:22:18,280 --> 00:22:22,280
तो नहीं है बाद से पलट जाना नहीं है तो

300
00:22:22,280 --> 00:22:26,840
इसका मतलब कुरान के द्वारा जो शिक्षा मिली है वो धर्म नहीं

301
00:22:26,840 --> 00:22:30,840
है हम एक बात के ऊपर से यह डिसाइड नहीं कर सकते

302
00:22:30,840 --> 00:22:32,080
भाई जी सबका अपना अपना

303
00:22:32,080 --> 00:22:36,080
मान है हम किसी को अ मानि नहीं कर सकते अगर हमें किसी

304
00:22:36,080 --> 00:22:40,240
को मान देना है तभी हमें मान मिलेगा अगर हम किसी को ही किसी

305
00:22:40,240 --> 00:22:44,280
को भी मान नहीं द बात बताए एक

306
00:22:44,280 --> 00:22:49,280
बात बताइए कि आपके अनुसार मोक्ष क्या

307
00:22:49,280 --> 00:22:53,760
है मुक्ति मुक्ति वो

308
00:22:53,760 --> 00:22:58,640
वो अवस्था है वो स्थिति है जहां पर आत्मा

309
00:22:58,640 --> 00:23:02,640
बंधन हो जाती आत्मा को

310
00:23:02,640 --> 00:23:06,840
समझ बंधनों से मुक्त हो जाती है तो क्या

311
00:23:06,840 --> 00:23:10,960
कुरान के अनुसार मुक्ति मिल रही है वहा कुरान के अनुसार वही

312
00:23:10,960 --> 00:23:15,280
मुक्ति है जो आपके अनुसार है हमें

313
00:23:15,280 --> 00:23:19,400
भाई जी सबसे पहली बात हम यहां पर किसकी चर्चा करने आए

314
00:23:19,400 --> 00:23:23,480
हम तो ईश्वर की चर्चा करने आए ना हम उस दिन का जो पॉइंट है वही आप

315
00:23:23,480 --> 00:23:27,520
समझ मैं उस चीज को क्यों क्लियर कर रहा हूं आपने कुरान को धर्म

316
00:23:27,520 --> 00:23:31,800
क्यों कहा है बात इसकी है आपने क्रिश्चियन को धर्म क्यों कहा बात इसकी

317
00:23:31,800 --> 00:23:35,880
है इसलिए जब सुनिए सुनिए

318
00:23:35,880 --> 00:23:40,520
अब सुन लीजिए इसमें क्या है कि

319
00:23:40,520 --> 00:23:44,640
जब हमने कहा कि उसकी कोई एक बात के आधार पर हम उसे नकार नहीं सकते

320
00:23:44,640 --> 00:23:47,800
ठीक है तो फिर अब हमारे पास परसेंटेज

321
00:23:47,800 --> 00:23:51,800
होनी चाहिए कि कितनी परसेंट बात सही होगी और कितनी परसेंट

322
00:23:51,800 --> 00:23:56,560
बात गलत होगी उस रेशियो के आधार पर हम उसको प्रमाणिक मानेंगे और

323
00:23:56,560 --> 00:24:00,600
अगर वो रेशियो हमारे रेशियो से मैच नहीं खाया तो हम उसे अप्र माणिक मानेंगे तो

324
00:24:00,600 --> 00:24:04,600
ऐसा कोई रेशियो है क्या आपका सबसे पहले रेशो

325
00:24:04,600 --> 00:24:09,040
की बात अगर सभी धर्मों की पकड़ी जाए तो अगर सभी धर्म अगर हमें यह सिखला

326
00:24:09,040 --> 00:24:13,600
है कि हमारे कर्म जो है वो अच्छे सत्य

327
00:24:13,600 --> 00:24:17,800
और धर्म के आधार पर हो अच्छे मतलब वैल्यूज

328
00:24:17,800 --> 00:24:22,000
के आधार पर हो तो वो हमें मान्य करना होगा

329
00:24:22,000 --> 00:24:26,080
अगर कोई भी धर्म हमें ये सिखला आता है हमारे कर्म के बारे में अगर वो

330
00:24:26,080 --> 00:24:30,320
नहीं सिखला आता है तो वो अधर्म ही हो उस चीज में अधर्म ही

331
00:24:30,320 --> 00:24:34,320
होगा आप मैं ये जानना चाह रहा हूं आपने किसी को

332
00:24:34,320 --> 00:24:39,480
भी धर्म किस आधार पर मानते हैं

333
00:24:39,480 --> 00:24:43,680
आधार हा वो आधार है जो सीख

334
00:24:43,680 --> 00:24:47,800
दी जाती है फॉर एग्जांपल अलग अलग धर्म में अलग अलग सीख जाती है

335
00:24:47,800 --> 00:24:51,960
कुछ कुछ सीख अच्छी भी दी जाती है ऐसे नहीं कि कोई बुरी हमेशा सब

336
00:24:51,960 --> 00:24:56,240
सब धर्मों में बुरी सिख है बाकी धर्मों में भी अच्छी सिख दी गई है

337
00:24:56,240 --> 00:25:00,560
ऐसे मतलब बहुत सारी हम देख सकते अगर प्रत्येक

338
00:25:00,560 --> 00:25:02,960
धर्म का मूल न्यू क्या है अगर देखा जाए

339
00:25:02,960 --> 00:25:07,440
न्यू अगर देखा जाए न्यू मतलब रूट तो वो रूट है

340
00:25:07,440 --> 00:25:11,480
सबके लिए सद्भाव सबके लिए शुभ भावना सबके

341
00:25:11,480 --> 00:25:15,680
लिए शुभकामना अगर ये न्यू है हर एक धर्म बाकी

342
00:25:15,680 --> 00:25:19,840
तो सब बाकी आगे जाके तो बहुत मत मंतर है भाई बहुत

343
00:25:19,840 --> 00:25:23,840
मत अगर उस न्यू के आ कह रहा मतलब आप मानते

344
00:25:23,840 --> 00:25:28,080
हैं ना कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी भी धर्म है आप ये मानते

345
00:25:28,080 --> 00:25:33,040
हैं हां और उसका आधार यह है कि जो भी हमें सत्कर्म सिखा रहा है

346
00:25:33,040 --> 00:25:38,240
तो वो धर्म है फिर भले ही उसने हमको विकर्म भी सिखाया

347
00:25:38,240 --> 00:25:42,360
हो वो आत्मा के ऊपर है ना वह क्या सीख रही वो क्या लेना

348
00:25:42,360 --> 00:25:47,040
चाहती है हम सही दे नहीं अभी हम अभी हम उसकी बात कर रहे

349
00:25:47,040 --> 00:25:51,200
कि कौन सी आईडियोलॉजी हमको सत्य सिखा

350
00:25:51,200 --> 00:25:55,240
रही है तो वो धर्म है कोई भी आइजी अगर हमको सत्य सिखा रही है तो वो

351
00:25:55,240 --> 00:25:59,240
धर्म है और भले ही वो साथ में ो थ बहुत हमें विकर्म

352
00:25:59,240 --> 00:26:04,000
भी सिखा रही हो हमारे अनुसार हो सकता है उनके अनुसार वो विकर्म भी ना हो

353
00:26:04,000 --> 00:26:08,000
जैसे कि यही बात अपनी जुबान से पलट जाना हो सकता है उनको लगे कि अच्छी बात

354
00:26:08,000 --> 00:26:12,400
है ठीक है मगर हमारे अनुसार वो विकर्म है हमारी जानकारी

355
00:26:12,400 --> 00:26:17,080
के अनुसार वो विकर्म है तो हमारे अनुसार हमारे अनुसार

356
00:26:17,080 --> 00:26:18,520
धर्म वो है

357
00:26:18,520 --> 00:26:22,640
जो कोई भी हमें सत्य कर्म सिखा रहा है किसी

358
00:26:22,640 --> 00:26:27,200
एक अंश में फिर भले ही वो थोड़ा बहुत असत्य कर्म भी सिखा रहा हो हमारे अनुसार

359
00:26:27,200 --> 00:26:32,080
वो धर्म है ठीक है तो इसका अर्थ यह है

360
00:26:32,080 --> 00:26:36,280
कि मैं अगर अपनी एक बुक लिखूं

361
00:26:36,280 --> 00:26:40,880
और उसमें लिख दूं कि भगवान की भक्ति

362
00:26:40,880 --> 00:26:45,120
करो तो क्या मेरे द्वारा तैयार यह जो आईडियोलॉजी होगी इसको 10

363
00:26:45,120 --> 00:26:49,160
15 लोग मानते भी होंगे आपके लिए धर्म है क्या ये आप

364
00:26:49,160 --> 00:26:53,160
इसे धर्म कहोगे भगवान भगवान की भक्ति करना यह तो

365
00:26:53,160 --> 00:26:57,240
थोड़ी ना गलत बात है भाई य तो अच्छी बात है मैंने मैंने एक बुक लिख

366
00:26:57,240 --> 00:27:01,760
दी और मैंने उस बुक को नाम दिया शिवांश कृत

367
00:27:01,760 --> 00:27:05,920
धर्म तो आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार कर

368
00:27:05,920 --> 00:27:09,960
लोगे अगर वह ईश्वर प्राप्ति की तरफ लेकर जा रहा है तभी

369
00:27:09,960 --> 00:27:14,280
तो स्वीकार करेंगे अगर उसमें ईश्वर ही नहीं है तो कहां से होगा भाई नहीं मैंने दोनों

370
00:27:14,280 --> 00:27:20,280
बातें लिखी है मैंने दोनों बातें लिखी है तो वो वो आपका

371
00:27:20,720 --> 00:27:24,800
धर्म आधार मतलब आधार आधार मेरे

372
00:27:24,800 --> 00:27:29,160
पास रात में फरिश्ता आता है वो आके बताता है खुदा का भेजा

373
00:27:29,160 --> 00:27:34,040
हुआ या मेरे पास रात में एंजल आता है वो बताता

374
00:27:34,040 --> 00:27:38,080
है अगर सबसे पहली बात र आपने

375
00:27:38,080 --> 00:27:42,200
जो बात कही कि मैं अगर कुछ लिख दू और वो धर्म हो जाए ऐसा

376
00:27:42,200 --> 00:27:46,560
कैसे हो सकता है सबसे पहली बात उसका मल इसका मतलब इसका मतलब केवल

377
00:27:46,560 --> 00:27:51,280
ईश्वर की बात करने वाला ही धर्म नहीं है उसम कुछ और भी ऐड करना पड़ेगा

378
00:27:51,280 --> 00:27:55,440
हा अनुभव में भाई जी अनुभव इस संसार

379
00:27:55,440 --> 00:27:59,720
में सबसे बड़ी बात है हिंदु सबसे आप अगर हिंदू

380
00:27:59,720 --> 00:28:03,800
धर्म का देखा जाए सबसे पहले हमारे धर्म की चर्चा करते सबसे

381
00:28:03,800 --> 00:28:07,800
पहले अगर हमें हिंदू धर्म में जितने भी शास्त्र है जितना

382
00:28:07,800 --> 00:28:11,960
भी है सभी आत्माओं को सभी जो भी है जो भी पढ़ता

383
00:28:11,960 --> 00:28:15,960
है उसे क्या फील होता है अनुभव होता है ना किसका अनुभव

384
00:28:15,960 --> 00:28:20,240
आप समझ नहीं रहे भाई साहब आप दूसरी जगह जा रहे प्रैक्टिकल पर चले जा रहे हैं

385
00:28:20,240 --> 00:28:24,280
वो प्रैक्टिकल वाला बात नहीं हो रही अभी बात हम ये कर रहे हैं कि

386
00:28:24,280 --> 00:28:28,400
आपने कहा कि इस्लाम भी धर्म है क्रिश्चियनिटी भी धर्म है फिर मैंने आपसे

387
00:28:28,400 --> 00:28:32,600
ये पूछा कि अ इस्लाम और

388
00:28:32,600 --> 00:28:35,720
क्रिश्चियनिटी भी अगर धर्म है उसमें आप ये भी मान रहे हैं कि

389
00:28:35,720 --> 00:28:39,800
कुछ ऐसी चीजें हैं जो सही नहीं है मगर फिर

390
00:28:39,800 --> 00:28:44,080
भी आप उसको धर्म मान रहे हैं वो लोग नहीं मानते कि

391
00:28:44,080 --> 00:28:49,200
वो चीजें गलत है हम लोगों के अनुसार व चीजें गलत है फिर भी आप उसको धर्म मान रहे हैं

392
00:28:49,200 --> 00:28:53,520
तो जब हम उसे धर्म मान रहे हैं तो

393
00:28:53,520 --> 00:28:58,360
फिर यह क्या कहते हैं फिर मैंने आपसे पूछा कि फिर जब उसमें

394
00:28:58,360 --> 00:29:02,400
और बुरी गलत बात दोनों है तो फिर आप उसे धर्म क्यों कह रहे हैं तो आपने फिर बताया

395
00:29:02,400 --> 00:29:06,560
कि हां जिसमें विकर्म भी होगा और सत्य कर्म भी होगा तो उसको धर्म

396
00:29:06,560 --> 00:29:10,560
माना जाएगा तो मैं वही कह रहा हूं कि इस बुक में

397
00:29:10,560 --> 00:29:14,640
इस बुक में मैंने भी जैसे मोहम्मद साहब को एक

398
00:29:14,640 --> 00:29:19,360
फरिश्ता आता था जो आ कर के कहता था जिब्राइल और

399
00:29:19,360 --> 00:29:23,560
बाइबल के अनुसार ईसा वोय कहते थे मैं उसका पुत्र परमेश्वर

400
00:29:23,560 --> 00:29:27,600
का तो ऐसे ही मुझे भी लग रहा है कि मुझे ईश्वर की वाणी आ रही है

401
00:29:27,600 --> 00:29:31,760
और मैंने एक बुक लिख दी तो क्या आप इसको अपने धर्म की लिस्ट में ऐड कर लेंगे

402
00:29:31,760 --> 00:29:35,760
इस बुक को नहीं करूंगा बिल्कुल नहीं करूंगा उसम

403
00:29:35,760 --> 00:29:39,960
बत उसमें बहुत सारी गलत बातें भी आपके अनुसार बहुत सारी सही बातें

404
00:29:39,960 --> 00:29:44,160
भी आपके अनुसार तो आप ऐड करेंगे उ नहीं

405
00:29:44,160 --> 00:29:48,360
वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता क फर क्या कारण

406
00:29:48,360 --> 00:29:50,920
है कि आपने इनको ऐड किया है मेरी बुक ऐड

407
00:29:50,920 --> 00:29:55,520
नहीं करोगे सबसे पहली बात सबसे पहली बात

408
00:29:55,520 --> 00:29:59,600
न्यू क्या है न्यू बहुत जरूरी है अगर हमने कह दिया हां

409
00:29:59,600 --> 00:30:03,840
मुझे आता है मुझे सब होता है वो बुक पढ़ भी लिया जाए वो बुक

410
00:30:03,840 --> 00:30:08,440
पढ़ भी लिया जाए अगर मैं अगर वो बुक पढो भी लेकिन

411
00:30:08,440 --> 00:30:12,760
उसमें वह किसी मनुष्य द्वारा फॉर एग्जांपल व किसी मनुष्य

412
00:30:12,760 --> 00:30:17,920
ने लिखी है या मनुष्य ने बताई है या मनुष्य द

413
00:30:17,920 --> 00:30:20,280
नुष

414
00:30:20,280 --> 00:30:24,400
लिखर आप उ र्म कैसे क पहली बात

415
00:30:24,400 --> 00:30:28,560
सबसे पहली हम किसी की अगर हम किसी को

416
00:30:28,560 --> 00:30:32,640
दोष दे रहे फर एपल किसी को दोष दे रहे हैं किसी को तो आप

417
00:30:32,640 --> 00:30:36,960
मुझे दोष दे तो रहे हो आप मुझे दोष दे तो रहे

418
00:30:36,960 --> 00:30:41,160
आपने मना कियारी चीज को आप स्वीकार नहीं करेंगे

419
00:30:41,160 --> 00:30:45,240
आपने मना किया सबसे पहली बात बुक को

420
00:30:45,240 --> 00:30:49,560
मना करना यह कोई ऐसी वैसी बात नहीं कि हमने बस आया और बता

421
00:30:49,560 --> 00:30:55,560
ख दिया धर्म क्या इतनी सी बात के ऊपर तय होता है

422
00:30:55,920 --> 00:30:59,920
धर्म हमारे पास टॉपिक बहुत सारे और अगर हम लोग गोल

423
00:30:59,920 --> 00:31:04,000
गोल लंबा लंबा बात करेंगे तो चलेगा नहीं तो ऐसा करिए कि आप जो है

424
00:31:04,000 --> 00:31:08,000
सीधी एक परिभाषा दीजिए आप वो कारण बताइए कि आप किसी

425
00:31:08,000 --> 00:31:12,200
भी आइडल जीी को धर्म कब कहते हैं वो एक बार में बता

426
00:31:12,200 --> 00:31:16,480
दीजिए जिससे कि फिर मैं उस पर क्वेश्चन कर सकू आप किसी भी आईडियोलॉजी

427
00:31:16,480 --> 00:31:20,480
को धर्म कब कहते हैं किस कारण से कहते हैं

428
00:31:20,480 --> 00:31:24,480
जब आत्माओं का जब मनुष्य का कल्याण हो

429
00:31:24,480 --> 00:31:28,840
किसी बात में कल्याण हो रहा हो किसी बात की अभी फॉर एग्जांपल

430
00:31:28,840 --> 00:31:32,840
ये जब त देखिए ऐसा होता है देखिए हो क्या रहा है प्रॉब्लम

431
00:31:32,840 --> 00:31:37,120
ये आ रही है भाई कोई पांडे जी अगर देख रहे हो

432
00:31:37,120 --> 00:31:41,480
मॉडरेटर के लिए कोई आ जाए पांडे जी या फिर श्वेतांक

433
00:31:41,480 --> 00:31:47,480
जी या फिर नवीन जी कोई मॉडरेटर एस ए मॉडरेटर पहुंच

434
00:31:48,520 --> 00:31:52,600
जाए कमेंट करके बता दे तो हम लिंक पहुंच देंगे आप तक

435
00:31:52,600 --> 00:31:57,360
देखिए आप मेरी बात आप समझ नहीं रहे हो मैं

436
00:31:57,360 --> 00:32:01,520
जैसे आप आपने कहा कि कोई भी जो आत्मा की बात करता है मैंने

437
00:32:01,520 --> 00:32:05,560
कहा ना कि मैंने अपनी बुक में आत्मा की बात की है भगवान की

438
00:32:05,560 --> 00:32:09,680
बात की है तो फिर आप उसको नहीं स्वीकार कर रहे इसका मतलब

439
00:32:09,680 --> 00:32:14,000
वो परिभाषा नहीं है आपकी धर्म के रूप में तो मैं उस परिभाषा को जानना चाह रहा हूं

440
00:32:14,000 --> 00:32:18,120
कि अने किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार के आधार पर किया

441
00:32:18,120 --> 00:32:22,280
है स्वीकार अर्थात हम उस धर्म को

442
00:32:22,280 --> 00:32:26,320
मान्यता दे रहे बस जैसे फॉर एग्जांपल वो बहुत सारे आजकल

443
00:32:26,320 --> 00:32:30,400
देखो बहुत सारे मट पं ठीक है बहुत सारे मट पंत है सब

444
00:32:30,400 --> 00:32:34,680
किसका रास्ता बता रहे भगवान का रास्ता बता रहे ना जो भगवान का रास्ता

445
00:32:34,680 --> 00:32:38,840
बता रहा हो जिसने यह बताया हो न्यू से कि

446
00:32:38,840 --> 00:32:43,120
भगवान को कैसे पाना है वह अगर न्यू हमें दे रहा हो

447
00:32:43,120 --> 00:32:47,160
तो हम उसे धर्म मानते अगर उस धर्म में कुछ ऐसी बातें

448
00:32:47,160 --> 00:32:51,360
भी है फॉर एग्जांपल कुछ गलत बात कुछ बहुत

449
00:32:51,360 --> 00:32:55,640
मतलब हम कह सकते जिसमें कोई तथ्य नहीं जिसमें कोई

450
00:32:55,640 --> 00:32:59,640
वो नहीं मतलब जिसम का कोई उद्देश्य नहीं है अगर वो चीजें

451
00:32:59,640 --> 00:33:03,600
भी हो अगर वो चीजें हर धर्म में है हर धर्म में एक धर्म

452
00:33:03,600 --> 00:33:08,160
में नहीं हर सारे धर्मों में कुछ ऐसी चीजें है जो

453
00:33:08,160 --> 00:33:12,880
केवल हिंदू हिंदू को छोड़ कर के बात करें क्योंकि हिंदू का ऊपर अगर बात करेंगे

454
00:33:12,880 --> 00:33:17,160
तो सुनिए सुनिए अगर हिंदू में बात करें तो मुझे वहां पर तुरंत उसको फिर

455
00:33:17,160 --> 00:33:21,600
आना पड़ेगा कि भाई मैं हिंदू धर्म में बताओ तो हमारा विषय अलग हो जाएगा

456
00:33:21,600 --> 00:33:25,840
आप हिंदू को मत शामिल करिए बाकी सबको आप कहिए कि हां कमी है और जो है

457
00:33:25,840 --> 00:33:30,120
जो फैक्ट है हां बताइए हा आपने आपने जो सारे धर्म

458
00:33:30,120 --> 00:33:34,240
के नाम लिए उनके बोल रहा हूं बाकी हिंदू धर्म तो हमारा सर्वश्रेष्ठ धर्म है

459
00:33:34,240 --> 00:33:38,560
सबसे पहली बात तो पहली बात कि जो भी उनमें विकर्म

460
00:33:38,560 --> 00:33:42,920
भी हो रहा हो या कुछ भी हो रहा हो तो वोह उनका उनके धर्म

461
00:33:42,920 --> 00:33:46,920
के कुछ सिद्धांत होंगे उनका कुछ होगा लेकिन हम उनको

462
00:33:46,920 --> 00:33:50,920
अपमानित नहीं कर सकते किसी चीज को अपमानित अगर करने लगे

463
00:33:50,920 --> 00:33:55,360
तो इस सुनो बुक को बुक को रिजेक्ट करना अपमान

464
00:33:55,360 --> 00:34:01,360
नहीं है ना कि है

465
00:34:07,800 --> 00:34:13,800
आपका चला गया आप एक बार जा कर के वापस आ जाइए आप फ्रीज हो फ्रीज हो गए

466
00:34:17,720 --> 00:34:21,800
आप जी जी जी जी जी अगर

467
00:34:21,800 --> 00:34:26,080
हम मैं समझ गया आपने कहा कि जिसने नीव से ईश्वर

468
00:34:26,080 --> 00:34:30,120
को प्राप्त करने की विधि बताई हो फिर भले ही उसमें कुछ विकृतियां भी हो

469
00:34:30,120 --> 00:34:34,280
मगर हम उसे धर्म के रूप में स्वीकार करेंगे ठीक है अपमानित नहीं

470
00:34:34,280 --> 00:34:39,440
कर सकते ना अपमानित नहीं कर सकते किसी मानि नहीं कर सकते तो

471
00:34:39,440 --> 00:34:43,760
अ बुक को रिजेक्ट करना कि ये धर्म

472
00:34:43,760 --> 00:34:48,000
नहीं है क्या ये अपमान है

473
00:34:48,000 --> 00:34:52,000
बुक को रिजिक करना क्या ये धर्म मतलब कौन सी बुक पे वो प

474
00:34:52,000 --> 00:34:56,160
जरूरी कोई बक कोई भी बुक कोई भी बुक कोई भी बुक जिसके

475
00:34:56,160 --> 00:35:01,160
लिए हमने कहा ये धर्म नहीं है क्या यह अपमान

476
00:35:01,160 --> 00:35:05,800
हैय वो क्या बता रही है उसके ऊपर डिपेंड है पहली बात व

477
00:35:05,800 --> 00:35:09,880
पूछ रहा हूं वो देख वो आपने जान लिया कि वो क्या बता रही है

478
00:35:09,880 --> 00:35:13,920
उसके बाद आपने कहा एक मिनट भाई साब

479
00:35:13,920 --> 00:35:18,000
एक मिनट मैं पूछ रहा हूं कि आपने जान लिया परख लिया वो बुक

480
00:35:18,000 --> 00:35:22,200
में क्या कहा गया है उसके बाद आपने कहा यह जो बुक है

481
00:35:22,200 --> 00:35:28,160
यह धर्म नहीं है यह अपमान है कि नहीं है

482
00:35:28,160 --> 00:35:32,440
सबसे पहली बात भाई जी अगर वह बुक हमें सही

483
00:35:32,440 --> 00:35:37,000
मार्ग नहीं बता रही कौन से कोई भी मार्ग नहीं बता रही

484
00:35:37,000 --> 00:35:41,280
भाई साब क्वे य नहीं है क्वेश्चन ये है क्या बुक को रिजेक्ट

485
00:35:41,280 --> 00:35:45,600
करना आप अपमान मानते हैं या नहीं मानते हैं हा रिजेक्ट

486
00:35:45,600 --> 00:35:50,000
करूंगा क्योंकि उस चीज में सत्य नहीं कहा भाई साब देखिए

487
00:35:50,000 --> 00:35:54,080
मैं यह नहीं कह रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि बुक को रिजेक्ट करना

488
00:35:54,080 --> 00:35:58,240
आप अपमान मानते हैं कि नहीं मानते यह बताइए को

489
00:35:58,240 --> 00:36:02,640
रिजेक्ट करना मतलब ये कैसा प्रश्न हुआ भाई जी बुक को रिक्ट करना

490
00:36:02,640 --> 00:36:06,720
मैं दोबारा बता देता हूं मैं अच्छे से बता देता हूं कि मैंने

491
00:36:06,720 --> 00:36:10,760
अगर किसी की बुक को कहा भाई यह जो तुम्हारी बुक है इसको हम धर्म

492
00:36:10,760 --> 00:36:14,760
नहीं मानते तो यह क्या सामने वाले का जिसकी बुक को

493
00:36:14,760 --> 00:36:16,560
हमने रिजेक्ट किया है

494
00:36:16,560 --> 00:36:20,560
धर्म ना मानते हुए क्याय उसका अपमान है

495
00:36:20,560 --> 00:36:24,840
उसको तो अपमान ही होगा ठीक है ठीक है ठीक है तो आप अपमान नहीं करते

496
00:36:24,840 --> 00:36:28,920
आप जो है कहते हो कि हा य तो अब मैं अपनी एक बुक लिख

497
00:36:28,920 --> 00:36:33,160
रहा हूं जिसमें कि ईश्वर की नीव से

498
00:36:33,160 --> 00:36:37,160
एक मिनट भाई एक मिनट मैंने ईश्वर की नीव से बात की कि

499
00:36:37,160 --> 00:36:41,600
उसको प्राप्त कैसे करना है सब कुछ करा और इसमें विकृतियां भी है

500
00:36:41,600 --> 00:36:46,200
और मैं दो तीन दिन में इसको करके दे दूंगा तो

501
00:36:46,200 --> 00:36:51,560
मेरा नाम जो होगा वह नाम लेते हुए आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार

502
00:36:51,560 --> 00:36:55,880
करेंगे उसकी पहली बात है अगर आप किस धर्म

503
00:36:55,880 --> 00:37:00,160
किस आधार वो मुख्य चीज है पहले

504
00:37:00,160 --> 00:37:04,640
भाई साहब फिर भाई साहब आपका डेफिनेशन है ना बदल रही है प्रॉब्लम

505
00:37:04,640 --> 00:37:08,840
ये है आपने डेफिनेशन य द कि नीव से जो ईश्वर प्राप्ति की बात

506
00:37:08,840 --> 00:37:12,840
करे ठीक है उसको हम धर्म के रूप में स्वीकार करते हैं फिर भले ही

507
00:37:12,840 --> 00:37:16,920
उसम विकृतियां भी हो तो मैं कह तो रहा हूं कि नीव से मैंने बात की है ईश्वर ऐसा

508
00:37:16,920 --> 00:37:21,080
है वैसा है आपके विरुद्ध है मगर नीव से बात की है आप आपके

509
00:37:21,080 --> 00:37:25,480
विरुद्ध है कुछ चीज आपसे मेल खाएगी कुछ चीजें मेल नहीं खाएगी

510
00:37:25,480 --> 00:37:29,880
और फिर आप कल को इसका जो मैं एक निशान बनाऊंगा

511
00:37:29,880 --> 00:37:31,760
मैं इसमें कोई उड़ता हुआ तोता

512
00:37:31,760 --> 00:37:35,920
बना दूंगा उड़ता हुआ तोता और वो मेरे धर्म ये जो मैंने बनाया

513
00:37:35,920 --> 00:37:40,040
है और इस तोते को जो है वो धर्म के रूप में वो जो चिन्ह होता है ना जैसे हमारा

514
00:37:40,040 --> 00:37:44,040
स्वास्तिक है प्रणव है सूर्य है ये हमारा है

515
00:37:44,040 --> 00:37:48,040
उनका इस्लामिस्ट का वो चांद है और उनका वो क्रॉस

516
00:37:48,040 --> 00:37:52,200
है तो आपके पास जब जाते हैं तो वो सारे निशान होते हैं आपके

517
00:37:52,200 --> 00:37:56,880
पास ना है ना जहां तक मैं जानता हूं

518
00:37:56,880 --> 00:38:01,080
तो इसी तरीके से मैं भी एक तोता उड़ता हुआ तोता

519
00:38:01,080 --> 00:38:05,280
इसका निशान बना दूंगा यह मेरी आईडियोलॉजी का य निशान है निशानी है

520
00:38:05,280 --> 00:38:09,360
तो इस निशान को आप धर्म के रूप में उसके साथ ऐड कर लेंगे इस किताब को

521
00:38:09,360 --> 00:38:14,040
धर्म का नाम दे देंगे धर्म के रूप में स्वीकार कर लेंगे मैं पूछ रहा हूं

522
00:38:14,040 --> 00:38:18,200
मैं तय करने वाला कोई नहीं है मैं तय करने वाला वो धर्म है

523
00:38:18,200 --> 00:38:20,600
या अधर्म

524
00:38:20,600 --> 00:38:25,080
हैब मैंने मेरा प्रश्न क्या है भाई साहब मैंने मेरा प्रश्न क्या है प्रश्न

525
00:38:25,080 --> 00:38:29,360
मैंने आपसे पूछा सुनिए तो मैंने आपसे पूछा है कि आप

526
00:38:29,360 --> 00:38:33,520
किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार कब करते हैं मैंने नहीं पूछा

527
00:38:33,520 --> 00:38:37,880
कि दुनिया कैसे करती है आपका सिद्धांत क्या है ब्रह्मा कुमारी का

528
00:38:37,880 --> 00:38:42,200
सिद्धांत क्या है धर्म ब्रह्मा

529
00:38:42,200 --> 00:38:46,400
कुमारी का सिद्धांत यह है इस संसार में जितने भी धर्म

530
00:38:46,400 --> 00:38:46,900
हो अभी

531
00:38:46,800 --> 00:38:51,680
मुख्य बात कर रहा हूं इस संसार में जितने भी धर्म है उ

532
00:38:51,680 --> 00:38:56,520
से जो धर्म है उसको आप धर्म कहेंगे हा बस बाकी

533
00:38:56,520 --> 00:39:00,720
अपमानित हम को नहीं करना चाहते बस इतना ही रखना चाहते हैं सबको

534
00:39:00,720 --> 00:39:04,920
मान मिले हम किसी को अपमानित नहीं कर सकते यह धर्म है वो धर्म नहीं है

535
00:39:04,920 --> 00:39:09,120
अगर उस बात पर चर्चा की जाए उसके बारे में हमें पूरा अगर नहीं पता हो

536
00:39:09,120 --> 00:39:13,160
हम किस बात के आधार के ऊपर हम यह तय करने वाले हो जाते हैं अगर हम किसी

537
00:39:13,160 --> 00:39:17,160
का अपमान कर जब आप ये तय करने वाले हो सकते हैं एक मिनट जब आप ये

538
00:39:17,160 --> 00:39:21,200
तय करने वाले हो सकते हैं कि ये धर्म है तो आप ये तय करने वाले भी हो सकते हैं

539
00:39:21,200 --> 00:39:25,360
कि धर्म नहीं है जब आप ये बताने वाले हो सकते हैं जब आप

540
00:39:25,360 --> 00:39:29,560
ये बताने वाले हो सकते हैं कि बहन के साथ विवाह मत करो या यह बताने

541
00:39:29,560 --> 00:39:33,680
वाले हो सकते हैं कि इसके साथ विवाह कर लो तो यह बताने वाले भी हो सकते हैं कि इसके

542
00:39:33,680 --> 00:39:37,840
साथ विवाह मत करो जैसे की आपने कहा कि

543
00:39:37,840 --> 00:39:41,920
आइडल जीी पहले से है ठीक है तो कितना पहले से

544
00:39:41,920 --> 00:39:46,840
होनी चाहिए वो आइडल जीी तब आप धर्म के रूप में उसे स्वीकार करेंगे और

545
00:39:46,840 --> 00:39:50,880
फिर मैं अपना क्वेश्चन करू कि कितना पहले से वो आडलज होनी

546
00:39:50,880 --> 00:39:54,960
चाहिए वो आडलज उसके लिए कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं अगर

547
00:39:54,960 --> 00:39:59,360
वो पहले से प्रमाणित है पहले से इस किसने प्रमाणित किया

548
00:39:59,360 --> 00:40:01,800
कौन प्रमाणित कर र है प्रमाणित

549
00:40:01,800 --> 00:40:05,840
उनके उनके अपने अपने धर्मों के जो है फॉलोवर्स वो प्रमाणित मैं

550
00:40:05,840 --> 00:40:09,880
कह रहा हूं इसको मैंने प्रमाणित किया अपने अपने अपने अपने प्रमाणित

551
00:40:09,880 --> 00:40:14,480
करेंगे तो मैं इसको प्रमाणित करर हूं मेरे पाच 10 लोग इसको प्रमाणित कर

552
00:40:14,480 --> 00:40:18,600
देंगे अ वैसा अगर होने लगा आज के संसार में

553
00:40:18,600 --> 00:40:22,920
तो हर कोई अपनी किताब निकाल लेगा ना भाई य कह रहा हूं हो रहा है वही

554
00:40:22,920 --> 00:40:26,960
तो हम सबको धर्म क्यों कह रहे हैं यही मेरा पॉइंट है हम क्यों कह

555
00:40:26,960 --> 00:40:31,640
रहे सबको धर्म हर कोई दूसरे दिन ये कहने लगेगा

556
00:40:31,640 --> 00:40:35,720
अगर हर अगर यही कारण है कि उसको लोग मानने वाले हैं तो यह

557
00:40:35,720 --> 00:40:39,760
तो कोई धर्म का आधार नहीं है हिरण्य कश्यप को मानने वाले ज्यादा थे

558
00:40:39,760 --> 00:40:43,960
कौरवों को मानने वाले ज्यादा थे तो कौरवों को क्योंकि मानने वाले

559
00:40:43,960 --> 00:40:48,080
तो कौरव सही हो जाएंगे क्या तो मानने वाले अगर है

560
00:40:48,080 --> 00:40:52,240
बहुत सारे तो उन्होंने क्योंकि उसको धर्म कह दिया कौरवों को अच्छा

561
00:40:52,240 --> 00:40:58,240
कह दिया तो हम थोड़ी ना मान लेंगे कि कौरव अच्छे हैं पांडव पांच थे

562
00:40:58,520 --> 00:41:03,280
लेकिन भगवान हमें क्या सिखा रहा है वो तो पढ़िए एक बार भाई जी एक

563
00:41:03,280 --> 00:41:07,720
बार सुनिए तो ऋषभ जी हम एक एक करके चलेंगे

564
00:41:07,720 --> 00:41:12,400
अभी बात ये है हम चैप्टर

565
00:41:12,400 --> 00:41:16,640
को हम डिबेट नहीं करना चाहते इस पर क्योंकि हमारा मूल सिद्धांत

566
00:41:16,640 --> 00:41:17,140
वही

567
00:41:16,960 --> 00:41:21,160
था सर्वशक्तिमान का उसके ऊपर ही हम चर्चा करने वाले थे अगर इस बाद

568
00:41:21,160 --> 00:41:25,280
में अगर डिबेट होने लगे तो भगवान को सबसे पहली बात

569
00:41:25,280 --> 00:41:29,720
मेरे लिए तो बहुत बुरी बात है क्योंकि भगवान को पस भगवान जो है

570
00:41:29,720 --> 00:41:33,760
शिव जो हमें सिखाता है वो बस यही सिखाता है कि सर्व धर्म

571
00:41:33,760 --> 00:41:38,040
को किसी भी धर्म का किसी भी कुछ कुल का किसी भी मट का किसी भी पंथ

572
00:41:38,040 --> 00:41:42,160
का किसी का भी अपमान ना करो तो आप मेरा क्यों कर रहे

573
00:41:42,160 --> 00:41:46,320
आप मेरा क्यों कर रहे हैं मेरा मैंने कुछ डिसाइड ही नहीं किया भाई जी

574
00:41:46,320 --> 00:41:50,400
मैंने डिसाइड ही नहीं किया आपने कहा ना मैं इसको कभी नहीं करूंगा स्वीकार आपने

575
00:41:50,400 --> 00:41:54,600
कहा इतनी छोटी सी बात पे अगर मैं डिसाइड करने

576
00:41:54,600 --> 00:41:58,640
लग जाऊ तो इस संसार में तो कितनी सारी चीजें भाई जी बहुत सारी

577
00:41:58,640 --> 00:42:03,120
चीज है ना पझ भाई साहब आप समझ

578
00:42:03,120 --> 00:42:07,280
आप मैं इस चैप्टर को बंद कर रहा हूं मैं आपको ये भी बता दूंगा कि मैंने प्रश्न

579
00:42:07,280 --> 00:42:11,280
रखा क्यों है मगर मैं एक बात बता रहा हूं आप कह रहे कि हम किसी भी धर्म

580
00:42:11,280 --> 00:42:15,520
को किसी का भी अपमान नहीं कर सकते मगर आपने मेरा अपमान किया अब

581
00:42:15,520 --> 00:42:19,720
इसका जो नजर आता है व यह है कि भाई मुझे मेरे को फॉलो करने वाले उतने

582
00:42:19,720 --> 00:42:23,880
लोग नहीं जिससे आपको फर्क पड़े मगर जिनका

583
00:42:23,880 --> 00:42:28,120
ये तो फिर फिर आपका सुनिए

584
00:42:28,120 --> 00:42:32,120
तो आपने उचित कारण नहीं बताया मेरी बुक को डिसन करने

585
00:42:32,120 --> 00:42:36,280
का अब दूसरी बात ये है कि धर्म की वास्तविक जो परिभाषा है

586
00:42:36,280 --> 00:42:40,320
वो सर्वशक्तिमान ईश्वर से कनेक्ट होती है और वो ईश्वर की सिद्धि से भी

587
00:42:40,320 --> 00:42:44,640
कनेक्ट होती है जो हमारे मेन पॉइंट ईश्वर की सिद्धि ईश्वर सर्वशक्तिमान

588
00:42:44,640 --> 00:42:49,400
जो सनातन परिभाषा है धर्म की

589
00:42:49,400 --> 00:42:53,960
वो ये है कि अस्तो मा सद गमय तमसो मा

590
00:42:53,960 --> 00:42:58,160
ज्योतिर्मया मृत मा मतम गम एक

591
00:42:58,160 --> 00:43:02,320
नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह

592
00:43:02,320 --> 00:43:04,960
विद्यमान

593
00:43:04,960 --> 00:43:09,080
है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा

594
00:43:09,080 --> 00:43:13,360
सुखी रहने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक

595
00:43:13,360 --> 00:43:18,000
व्यक्ति के अंदर भी अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान

596
00:43:18,000 --> 00:43:22,040
है बिल्कुल ठीक है तो जिस प्रकार से

597
00:43:22,040 --> 00:43:26,280
हमारे अंदर जो इनबिल्ट इच्छाएं है भूख भूख से

598
00:43:26,280 --> 00:43:30,280
सिद्ध होता है दुनिया में भोजन है प्यास से सिद्ध होता

599
00:43:30,280 --> 00:43:34,280
है कि दुनिया में पानी है इसी प्रकार एक नास्तिक

600
00:43:34,280 --> 00:43:38,520
व्यक्ति के अंदर भी सत चित आनंद की चा

601
00:43:38,520 --> 00:43:43,480
होने से य सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

602
00:43:43,480 --> 00:43:47,160
है तो ईश्वर यहां पर ईश्वर

603
00:43:47,160 --> 00:43:51,440
हमें सिद्ध हो गया कैसे हुआ सिद्ध कि नास्तिक

604
00:43:51,440 --> 00:43:55,680
के अंदर भी ईश्वर को ही प्राप्त करने की चा है नास्तिक भी ईश्वर को ढूंढ

605
00:43:55,680 --> 00:43:59,800
रहा है बस वो अपनी मना ईश्वर को नहीं ढूंढ रहा ठीक

606
00:43:59,800 --> 00:44:03,920
है अब यहां पर एक बात आई की वो जो सत चित आनंद होना

607
00:44:03,920 --> 00:44:08,120
चाहता है तो व सच्चितानंद जो होना चाहता है

608
00:44:08,120 --> 00:44:12,200
इसको अगर हम डिफाइन करेंगे तो इसमें आएगा कि वह अबाध होना

609
00:44:12,200 --> 00:44:17,120
चाहता है आपने कहा मोक्ष क्या है सभी बंधनों से मुक्ति

610
00:44:17,120 --> 00:44:21,320
आबाद अबाध होना चाहता है तो ईश्वर कौन

611
00:44:21,320 --> 00:44:25,560
है ईश्वर कौन हो सकता है इस चाह का सब्जेक्ट कौन हो सकता है

612
00:44:25,560 --> 00:44:29,640
इस चाह का सब्जेक्ट वही हो स जो अबाध हो अबाध

613
00:44:29,640 --> 00:44:34,560
बन जाने की चाह का निराकरण कौन करेगा जो अबाध हो है ना

614
00:44:34,560 --> 00:44:39,040
तो ये अब बात ये आती है यह जो मैंने तो

615
00:44:39,040 --> 00:44:43,080
जो धर्म की परिभाषा में आपको बता रहा था कि जीव की चाह

616
00:44:43,080 --> 00:44:47,640
के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

617
00:44:47,640 --> 00:44:52,640
को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों

618
00:44:52,640 --> 00:44:57,120
द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त

619
00:44:57,120 --> 00:45:01,320
बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है हमारे लिए धर्म

620
00:45:01,320 --> 00:45:02,360
नहीं है

621
00:45:02,360 --> 00:45:06,440
ये जो क्रिश्चन इस्लाम वगैरह है हम ये मक्खन नहीं लगाते

622
00:45:06,440 --> 00:45:10,520
कि आप लोगों में विकृति है तब भी हम आपको धर्म कहे वो भी अपने आप को धर्म नहीं कहते

623
00:45:10,520 --> 00:45:14,560
उनके अपने अपने अलग अलग वर्ड है उनका वर्ड है

624
00:45:14,560 --> 00:45:18,640
मजहब है वो दन है वो उनका वर्ड है रिलीजन है वो भी अपने आप को धर्म नहीं

625
00:45:18,640 --> 00:45:22,880
कहते हम ये मक्खन नहीं लगाते तुम भी धर्म क्यों क्योंकि उनके

626
00:45:22,880 --> 00:45:28,040
द्वारा दिए गए ज्ञान विज्ञान के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति नहीं है

627
00:45:28,040 --> 00:45:32,160
मोक्ष है ही नहीं ईश्वर है ही नहीं

628
00:45:32,160 --> 00:45:36,200
ना तो वहां परम स्वतंत्र मोक्ष है ना ही वहां पर सर्वशक्तिमान

629
00:45:36,200 --> 00:45:41,120
ईश्वर है और ना ही वो धर्म शाश्वत है हम

630
00:45:41,120 --> 00:45:45,200
तो इसलिए जहां पर ये तीन चीजें नहीं होंगी वो धर्म नहीं है अकॉर्डिंग

631
00:45:45,200 --> 00:45:49,200
टू सनातन ठीक है यह धर्म की परिभाषा है

632
00:45:49,200 --> 00:45:53,400
अब आपने धर्म की दूसरी दूसरी परिभाषा बताए कि कोई भी ईश्वर की बात कर रहा है भले ही आधी सही कर रहा

633
00:45:53,400 --> 00:45:57,520
आधी गलत कर रहा हो वो भी धर्म है तो ऐसे नहीं परिभाषा

634
00:45:57,520 --> 00:46:01,680
यही है धर्म वो है जो जिसकी अक्षरस एक एक बात आपको

635
00:46:01,680 --> 00:46:07,680
ईश्वर की प्राप्ति में काम आए अक्षरस जी

636
00:46:08,200 --> 00:46:12,240
अच्छ अपमानित नहीं करना चाहता बस उसके अपमानित नहीं

637
00:46:12,240 --> 00:46:16,240
करना चाहता बस आपने मुझे अपमानित किया ना

638
00:46:16,240 --> 00:46:21,000
वो चीज मैं अपमानित किसी और कोसे अपमा

639
00:46:21,000 --> 00:46:25,200
नहीं कहा आपने मुझसे कहा कि नहीं कहा मैं आपको कभी नहीं स्वीकार करूंगा धर्म के रूप

640
00:46:25,200 --> 00:46:29,840
में धर्म के रूप में अगर इतना बड़ा

641
00:46:29,840 --> 00:46:33,920
सब्जेक्ट के ऊपर मतलब आपने एक बुक लिख दिया और

642
00:46:33,920 --> 00:46:38,160
उसके ऊपर इतना बड़ा चर्चा का बता रहे हो कि आपने धर्म स्वीकार नहीं किया अगर

643
00:46:38,160 --> 00:46:42,560
ऐसे इस छोटी सी बात के ऊपर आप धर्म का है या नहीं

644
00:46:42,560 --> 00:46:46,600
वो वो प्रमाणित के ऊपर आ जाए तो

645
00:46:46,600 --> 00:46:50,720
आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार मेरी मेरी ये बुक भी धर्म मानना

646
00:46:50,720 --> 00:46:54,840
चाहिए था आपको आपकी या तो परिभाषा गलत है किसी भी

647
00:46:54,840 --> 00:46:59,760
किसी भी आइडल जीी को एक मिनट किसी भी आइडल जीी को

648
00:46:59,760 --> 00:47:04,000
धर्म के रूप में स्वीकार करना करने के निमित्त जो आपने

649
00:47:04,000 --> 00:47:08,400
परिभाषा बताई है या तो व परिभाषा आपने गलत आपकी परिभाषा कुछ और

650
00:47:08,400 --> 00:47:13,080
है आपने दूसरी परिभाषा बता दी है और अगर जो परिभाषा बताई है

651
00:47:13,080 --> 00:47:17,200
वो सही है आप उसको मानते हो फॉलो करते हो तो फिर आपको इसे स्वीकार करना

652
00:47:17,200 --> 00:47:21,200
चाहिए था मगर आपने इसे स्वीकार नहीं किया और जो आप ये कह रहे हो कि

653
00:47:21,200 --> 00:47:23,360
हम किसी का अपमान नहीं करते हम इसलिए नहीं बोलते

654
00:47:23,360 --> 00:47:27,560
कि तुम धर्म नहीं हो तो यहां पर भी आपने उस चीज को फॉलो नहीं किया आपने

655
00:47:27,560 --> 00:47:31,600
अपने सिद्धांत को तोड़ दिया दो बार को तोड़ा नहीं

656
00:47:31,600 --> 00:47:35,800
भाई जी पहले अभी पहली बात सुन ली बहुत हो सबसे प

657
00:47:35,800 --> 00:47:40,120
ब इसके इस टॉपिक के परर बहुत हो गया सबसे पहली बात

658
00:47:40,120 --> 00:47:44,240
भाई जी हम अपने आपके जो सिद्धांत उस दिन जो आपका प्रश्न

659
00:47:44,240 --> 00:47:49,200
था उस प्रश्न के ऊपर आते जो भी आपकी प्रश्न उसन उस प्र

660
00:47:49,200 --> 00:47:53,680
असल देखि मैं आ जा रहा उसी पर आ रहा हूं वो प्रश्न तो था

661
00:47:53,680 --> 00:47:58,560
तो यह धर्म की बात इसलिए की है धर्म वही है

662
00:47:58,560 --> 00:48:03,200
जिसके द्वारा सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्राप्ति हो मोक्ष हो

663
00:48:03,200 --> 00:48:07,200
है ना अब अब हम इस्लाम को भी धर्म कह रहे हैं

664
00:48:07,200 --> 00:48:11,360
वहा वो खुद चीक चक के कह रहा है हमारा ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं है कहीं पर कह रहा

665
00:48:11,360 --> 00:48:15,440
है दूसरी जगह कह रहा है व फलाने नहीं कर सकता वो ये नहीं कर सकता व सर्व शक्तिमान

666
00:48:15,440 --> 00:48:19,880
नहीं है उसका मोक्ष मोक्ष भी नहीं है हा तो उनका

667
00:48:19,880 --> 00:48:24,480
अपना तो उनका अपना है तो हम उसे धर्म क्यों कहे झूठ क्यों बोले

668
00:48:24,480 --> 00:48:28,520
सत्य कर्म सुनिए सत्य जो है वो हमें भगवान

669
00:48:28,520 --> 00:48:32,560
के पास ले जाता है झूठ कर्म नहीं हम जानते

670
00:48:32,560 --> 00:48:37,000
हैं कि वो धर्म नहीं है हम जानते कि वो धर्म नहीं है फिर भी हम

671
00:48:37,000 --> 00:48:38,440
उससे कह रहे कि नहीं नहीं तुम धर्म

672
00:48:38,440 --> 00:48:42,960
हो और यहां पर आपने मेरे साथ भेदभाव कर दिया

673
00:48:42,960 --> 00:48:47,040
यहां पर भी य धर्म नहीं है मैं जानता हूं य धर्म नहीं है मैं जानता हूं मगर आपने यहां पर

674
00:48:47,040 --> 00:48:51,080
तो मेरा वो नहीं रखा सम्मान आपने

675
00:48:51,080 --> 00:48:55,080
आपने मुझसे कहा कि नहीं नहीं मैं इसको नहीं स्वीकार करूंगा खैर अब हम उस पर

676
00:48:55,080 --> 00:48:59,440
आ जाते ईश्वर सर्व शक्तिमान बात कर लेते हैं

677
00:48:59,440 --> 00:49:03,520
तो अब हमारे सामने एक बात आई है कि धर्म की

678
00:49:03,520 --> 00:49:07,680
परिभाषा यही है कि जो सभी बंधनों से मुक्त करा दे वो धर्म है ठीक

679
00:49:07,680 --> 00:49:12,040
है और सभी बंधनों से मुक्त करा दे तो सभी बंधनों

680
00:49:12,040 --> 00:49:16,280
से मुक्त कराने वाला है ईश्वर और ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त

681
00:49:16,280 --> 00:49:20,400
बताई गया बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो धर्म तो

682
00:49:20,400 --> 00:49:24,400
सबसे पहली बात है कि क्या ब्रह्मा

683
00:49:24,400 --> 00:49:28,640
कुमारी सभी बंधनों से मुक्त ईश्वर की बात

684
00:49:28,640 --> 00:49:32,800
करता है या ईश्वर पर कुछ बंधन है

685
00:49:32,800 --> 00:49:37,520
नहीं नहीं ईश्वर पर कोई बंधन बंधन मुक्त है वो

686
00:49:37,520 --> 00:49:41,680
सदाशिव वो जन्म मरण के चक्र में भी नहीं आता वो किसी

687
00:49:41,680 --> 00:49:46,480
बंधन के भी चक्र में नहीं आता वो निराकार स्वरूप

688
00:49:46,480 --> 00:49:50,520
ते शिव है उसको कोई बंधन नहीं हो सकता

689
00:49:50,520 --> 00:49:53,600
कोई बंधन अच्छा शिव कभी

690
00:49:53,600 --> 00:49:57,680
भगवान कभी बन बधन नहीं हो सकता यानी कि अनंत सामर्थ्य

691
00:49:57,680 --> 00:50:01,680
वान है हम अनंत

692
00:50:01,680 --> 00:50:06,400
सामर्थ्य वान शक्तिमान सर्वशक्तिमान है ही

693
00:50:06,400 --> 00:50:10,680
सर्वशक्तिमान बिल्कुल सर्वशक्तिमान बक

694
00:50:10,680 --> 00:50:14,840
तो इसका मतलब वो सब कुछ कर सकने में सामर्थ्य

695
00:50:14,840 --> 00:50:19,000
शली है समर्थ वो रचयिता है इस संसार का रचयिता

696
00:50:19,000 --> 00:50:23,400
है वो ठीक है वो सबसे पहली बात और मात पिता भी है

697
00:50:23,400 --> 00:50:27,440
सबसे पहली बात भाव है वो भाव है वो भावी

698
00:50:27,440 --> 00:50:30,240
है हमारा

699
00:50:30,240 --> 00:50:34,320
है मैं आपकी बात को स्वीकार कर रहा हूं भाई साहब मैं आपकी बात को

700
00:50:34,320 --> 00:50:38,320
स्वीकार कर रहा हूं आप उस पर ब जाइए

701
00:50:38,320 --> 00:50:42,320
तो जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह

702
00:50:42,320 --> 00:50:46,720
सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है व सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ

703
00:50:46,720 --> 00:50:51,080
वान है तो सबसे पहला पॉइंट आता है कि क्या

704
00:50:51,080 --> 00:50:56,040
ब्रह्मा कुमारी के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है

705
00:50:56,040 --> 00:51:00,160
वो अवतार ले सकता है स्वयं साकार रूप

706
00:51:00,160 --> 00:51:04,280
में मनुष्य के बीच में आ सकता है या नहीं

707
00:51:04,280 --> 00:51:08,400
आ सकता आ आया है आया

708
00:51:08,400 --> 00:51:09,320
है

709
00:51:09,320 --> 00:51:13,640
आया किस रूप में आया है किस रूप में

710
00:51:13,640 --> 00:51:17,640
आ उसने माध्यम चुना माध्यम

711
00:51:17,640 --> 00:51:22,080
नहीं माम नहीं वो स्व परया

712
00:51:22,080 --> 00:51:28,080
प्रवेश नहीं पर काया प्रवेश स्वयं

713
00:51:28,680 --> 00:51:32,760
स्वयं निराकार है ना निराकार है ना निराकार

714
00:51:32,760 --> 00:51:36,840
अगर निराकार को इसी माध्यम से आना होगा निराकार

715
00:51:36,840 --> 00:51:41,160
का जो रूप है निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप हम जिसे कहते शिव

716
00:51:41,160 --> 00:51:45,160
वो निराकार इस यहां पर आकर साकार माध्यम

717
00:51:45,160 --> 00:51:49,240
लेता है साकार माध्यम अर्थात साकार माध्यम

718
00:51:49,240 --> 00:51:54,000
से अपना जो ज्ञान है सत्य ज्ञान वो सिखाता है यानी

719
00:51:54,000 --> 00:51:58,200
प्रवेश कर सकता है पर स्वयं अवतरित नहीं हो सकता नहीं

720
00:51:58,200 --> 00:52:02,520
हो सकता नहीं हो सकता वो निराकार है जी तो

721
00:52:02,520 --> 00:52:07,080
अभी हम लोग बात कर लेंगे जो निराकार है वो साकार कैसे हो सकता है उस पर बाद में

722
00:52:07,080 --> 00:52:11,160
पर पहले यह बात कर ले कि जब हमने कहा कि उसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं

723
00:52:11,160 --> 00:52:15,280
होता तो यह नियम तो लागू हो गया ना कि वो नहीं आ सकता वो बंधन

724
00:52:15,280 --> 00:52:19,720
में आ गया ना वो यह काम नहीं कर पा रहा बन वो बंधन

725
00:52:19,720 --> 00:52:23,960
अगर उसने शरीर लिया उसने अगर साकार शरीर ले भी लिया

726
00:52:23,960 --> 00:52:24,680
तो अर्थात

727
00:52:24,680 --> 00:52:28,960
क्या हुआ इसका अर्थ क्या हु आप समझिए अगर

728
00:52:28,960 --> 00:52:33,040
कोई शरीर लेता है इस इस संसार में अगर कोई शरीर लेर

729
00:52:33,040 --> 00:52:38,000
है वो खुद को बंधन में ला रहा है ना वो मतलब इसका अर्थ

730
00:52:38,000 --> 00:52:42,800
ईश्वर ईश्वर सुनिए ईश्वर उसका नाम है जो बंधन

731
00:52:42,800 --> 00:52:46,880
में होते हुए भी मुक्त है हां वही तो

732
00:52:46,880 --> 00:52:50,960
बोल रहा हू मैं तो अगर व साकार लेलेगा अगर वो साकार स्वरूप धारण कर

733
00:52:50,960 --> 00:52:55,800
लेगा तो ऐसा नहीं है कि उसकी जो सर्व व्यापकता खत्म हो गई वो बंधन में आ गया

734
00:52:55,800 --> 00:53:00,720
स बात उसको माध्यम चुनना होगा वो माध्यम लेगा

735
00:53:00,720 --> 00:53:04,920
देखिए य आपका आपकी अपनी शिक्षा है कि आप यह मानते हो मैंने

736
00:53:04,920 --> 00:53:09,200
एक बात कही कि यदि कारण कोई भी हो कारण

737
00:53:09,200 --> 00:53:13,200
कोई भी हो दुनिया का एक चिंदी मात्र भी कोई एक

738
00:53:13,200 --> 00:53:17,640
कार्य है जो अगर ईश्वर नहीं कर पा रहा है तो उसे सर्वशक्तिमान

739
00:53:17,640 --> 00:53:21,840
नहीं कह सकते अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान

740
00:53:21,840 --> 00:53:25,840
नहीं होता वह रचयिता कैसे हो सकता है रचयिता है

741
00:53:25,840 --> 00:53:29,840
ना यता हमेशा मतलब सर्वशक्तिमान का अर्थ ये

742
00:53:29,840 --> 00:53:33,840
नहीं है कि वो सब कुछ कर सकता है वो सब कुछ कर सकता

743
00:53:33,840 --> 00:53:37,880
है लेकिन नियम है वो नियमों के ऊपर चलने वाला है वो नियम को

744
00:53:37,880 --> 00:53:39,720
तोड़कर किसी और चीज

745
00:53:39,720 --> 00:53:44,120
के ऊपर नहीं आ सकता वो अगर फॉर एग्जांपल वो गलत काम नहीं करता है

746
00:53:44,120 --> 00:53:48,160
यानी वो गलत काम नहीं करता अपने नियमों को नहीं तोड़ता

747
00:53:48,160 --> 00:53:52,320
वो हमेशा पूरे ब्रह्मांड के नियमों के आधार पर सब

748
00:53:52,320 --> 00:53:56,560
कुछ करता है अगर वो चाहे तो सेकंड में अगर उसके पास क्षमता है लेकिन

749
00:53:56,560 --> 00:54:00,560
वो नहीं करेगा क्योंकि क्योंकि एक चीज है वो ब्रह्मांड के नियम को

750
00:54:00,560 --> 00:54:04,720
फॉलो करता है ब्रह्मांड के जो नियम है ब्रह्मांड के जो

751
00:54:04,720 --> 00:54:08,920
वसूल है उन नियमों के आधार वो सीधा एक नियम अगर हम उसने

752
00:54:08,920 --> 00:54:12,920
नियम तोड़ दिया तो फिर हमारे और उसके अंदर क्या भी अंतर

753
00:54:12,920 --> 00:54:17,080
होगा क्या नियम तो हम भी तोड़ रहे हैं ना बहुत सारे तो

754
00:54:17,080 --> 00:54:21,960
हमारे और उसके अंदर को ये बहुत सारी बातें हो जाएंगी हमारे उसके बीच में अंतर

755
00:54:21,960 --> 00:54:26,040
चलिए इसको भी लिख और बुरे काम नहीं करता और नियमों पर चलता है ठीक

756
00:54:26,040 --> 00:54:28,880
है

757
00:54:28,880 --> 00:54:33,200
ठीक है अब इसमें बात य आती है कारण मैंने क्या कहा कारण

758
00:54:33,200 --> 00:54:37,400
कोई भी हो वो नियमों पर चलता है वो अपने नियम नहीं तोड़ता है

759
00:54:37,400 --> 00:54:41,400
ठीक है आप ये कह रहे तो इसका मतलब है कि

760
00:54:41,400 --> 00:54:45,800
दुनिया में कुछ कार्य ऐसा है जो वो नहीं कर सकता

761
00:54:45,800 --> 00:54:50,760
गुप्त रीति से करता है उसका कार्य गुपत ई

762
00:54:50,760 --> 00:54:54,960
बात को बात से बात का जवाब नहीं दे रहे आपने कहा कि वो सिर्फ

763
00:54:54,960 --> 00:54:59,120
नियमों पर चलता है तो क्या वह अपने नियमों के जो उसने

764
00:54:59,120 --> 00:55:03,560
अपने नियम बताए हैं आपको उस नियम के विरुद्ध जा सकता

765
00:55:03,560 --> 00:55:07,640
है नहीं जाएगा वो नहीं जाएगा जाएगा नहीं मैं

766
00:55:07,640 --> 00:55:11,800
कह रहा हूं उसके अंदर कैपेबिलिटी है कि नहीं उसके अंदर

767
00:55:11,800 --> 00:55:15,800
कैपेबिलिटी है लेकिन वो नहीं करेगा वो करेगा ही नहीं पहली बात

768
00:55:15,800 --> 00:55:19,960
तो अरे जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है तो आप

769
00:55:19,960 --> 00:55:24,120
ये कैसे क सकते कि वो नहीं करेगा अगर आप यह कह रहे कि वो नहीं करेगा

770
00:55:24,120 --> 00:55:28,920
तो इसका मतलब आपके आपको उस

771
00:55:28,920 --> 00:55:33,120
यह महसूस हो रहा है भाई यह विरोधा भास हो रहा है भगवान के प्रति आप

772
00:55:33,120 --> 00:55:37,200
भगवान के प्रति आप वो डाउट ले रहे हो बात

773
00:55:37,200 --> 00:55:41,560
समकी बात समझाऊ जैसे की

774
00:55:41,560 --> 00:55:45,600
एक तरीके से जो ईश्वर है वह सिर्फ

775
00:55:45,600 --> 00:55:49,680
पॉजिटिव चीज ही कर रहा है नेगेटिव चीज नहीं

776
00:55:49,680 --> 00:55:54,440
कर करता आप एक बात बताइए आतंकवादी

777
00:55:54,440 --> 00:55:58,560
जो बम से दुनिया इधर उधर लोगों को मार

778
00:55:58,560 --> 00:56:02,680
देते हैं उसको इलीगल तौर पर बम

779
00:56:02,680 --> 00:56:06,880
बना करके कोई देता है बिल्कुल तो बम

780
00:56:06,880 --> 00:56:10,920
बनाने वाला बम को बनाने वाला

781
00:56:10,920 --> 00:56:14,960
वो बुरा काम कर रहा है कि नहीं कर रहा है बिल्कुल कर रहा

782
00:56:14,960 --> 00:56:19,600
है बिल्कुल कर रहा है तो दुनिया में जो बुराई कर रहे हैं

783
00:56:19,600 --> 00:56:23,880
उनको बनाने वाला ईश्वर है कि नहीं बनाने वाला ईश्वर

784
00:56:23,880 --> 00:56:28,520
है बिल्कुल बुराई करने वाला जो है वो उसके कर्मों के आधार पर

785
00:56:28,520 --> 00:56:31,920
उसके कर्म

786
00:56:31,920 --> 00:56:36,720
मिनट बुराई करने वाले को ईश्वर बना रहा है कि नहीं

787
00:56:36,720 --> 00:56:41,920
पहले मैं य पूछ ब करने वा बुराई करने वाला कौन है वो

788
00:56:41,920 --> 00:56:43,960
बताइए करने वाला

789
00:56:43,960 --> 00:56:48,440
एक मनुष्य मनुष्य कौन है मनुष्य कौन है एक आत्मा

790
00:56:48,440 --> 00:56:52,720
जिसने शरीर धारण किया है हा आत्मा पहले कौन सी स्टेट

791
00:56:52,720 --> 00:56:56,720
में होती है कौन सी अवस्था में होती है सबसे पहले

792
00:56:56,720 --> 00:57:01,200
आप अपना जवाब दीजिए ना मैं आपके अकॉर्डिंग हो सकता है सब कुछ ना बताऊ

793
00:57:01,200 --> 00:57:05,400
वही तो बस आत्मा जो होती है सबसे पहली

794
00:57:05,400 --> 00:57:09,680
बात हम मूल प आते मूल प आत्मा जो होती है

795
00:57:09,680 --> 00:57:12,240
पह

796
00:57:12,240 --> 00:57:16,880
बात जी बोलिए बोलिए बोलिए आत्मा जो हो

797
00:57:16,880 --> 00:57:21,160
आत्मा जो होती है सबसे पहली बात उसकी अवस्था सबसे पहले सतो प्रधान

798
00:57:21,160 --> 00:57:25,320
रहती है वो जो ऊपर से आती है वो बहुत स्वच्छ होती है सतो

799
00:57:25,320 --> 00:57:29,480
प्रधान रहती है सात्विक रहती है लेकिन जैसे जैसे वह जन्म लेने

800
00:57:29,480 --> 00:57:33,680
लगती है आगे जाकर उसके कर्म विकर्म बनने लगते

801
00:57:33,680 --> 00:57:37,720
हैं वह बुरे कर्म करने लगती है क्योंकि देह भान विकार

802
00:57:37,720 --> 00:57:41,760
जो है उससे बुरे कर्म कराता है वो जो

803
00:57:41,760 --> 00:57:46,080
वो जब आई समझ गया ईश्वर तो मैं समझ गया ईश्वर

804
00:57:46,080 --> 00:57:51,400
ने तो पवित्र बनाया था व फिर अपना खुद उसकी फ्रीविल हैने

805
00:57:51,400 --> 00:57:56,200
उसको नहीं आप एक बात बताइए आपका ईश्वर

806
00:57:56,200 --> 00:57:59,600
देख सकता है या नहीं सर्वशक्तिमान

807
00:57:59,600 --> 00:58:03,640
वो आदि मध्य अंत का मालिक है भाई त्रिकाल दर्शी भाई तो फिर आपके

808
00:58:03,640 --> 00:58:07,920
ईवर को आपके आपके ईश्वर को ये पता नहीं था कि वो गलत कार्य

809
00:58:07,920 --> 00:58:12,040
करेगा वो पता है उसे उसे सबके बारे में पता इसका मतलब उसने जब

810
00:58:12,040 --> 00:58:16,200
उसको बनाया था तो उसको पता था ये आगे जाकर के बुराई करने वाला

811
00:58:16,200 --> 00:58:20,240
है फिर भी उसने बनाया बनाया मतलब आत्मा जो

812
00:58:20,240 --> 00:58:24,320
है वो अविनाशी है अविनाशी अरे आत्मा

813
00:58:24,320 --> 00:58:28,400
नहीं जब उन्होंने उसको देह दी जब उन्होंने उसको देह दी मनुष्य रूप

814
00:58:28,400 --> 00:58:32,400
में भेजा हर एक का पार्ट है भाई हर एक का

815
00:58:32,400 --> 00:58:36,440
अपना अपना पार्ट है फॉर एमल जैसे आपका एक यूनिक पार्ट है

816
00:58:36,440 --> 00:58:40,560
आप जैसे सारे यूथ को इंस्पायर करते हो बहुत सारे यूथ को बताते हो

817
00:58:40,560 --> 00:58:44,800
आपका एक खुद का पार्ट है बराबर मेरा अपना एक पार्ट है ए

818
00:58:44,800 --> 00:58:49,120
स्टूडेंट किसी और का अपने मात पिता का अपना एक पार्ट है हर एक का पार्ट

819
00:58:49,120 --> 00:58:53,280
अलग अलग है उसमें भगवान बस हमें

820
00:58:53,280 --> 00:58:57,480
हमारी आत्मा को शुद्ध पवित्र बनाता है बाकी जो भी है

821
00:58:57,480 --> 00:59:01,600
सब कर्मों के आधार पर ही होता है हमारा जो भी

822
00:59:01,600 --> 00:59:05,960
बात देखिए वो बहुत लंबा बताने की आवश्यकता नहीं है अगर हम लोग क्योंकि अभी डिस्कशन

823
00:59:05,960 --> 00:59:10,200
बहुत हैय तो एक छोटे से कुछ क्वेश्चन चल रहे हैं

824
00:59:10,200 --> 00:59:14,480
अभी क्या है कि आपने कहा कि ईश्वर जो है सिर्फ पॉजिटिव

825
00:59:14,480 --> 00:59:14,980
चीजें

826
00:59:14,840 --> 00:59:19,240
करता है मगर वो यह जानते हुए भी कि कौन बुराई कर रहा है

827
00:59:19,240 --> 00:59:23,280
ईश्वर उसे बना रहा है वो जानता है रेप करेगा पर वो रेपिस्ट

828
00:59:23,280 --> 00:59:27,440
को जन्म दे रहा है सबसे पहली बात वो जन्म नहीं दे रहा है

829
00:59:27,440 --> 00:59:31,640
वो जन्म नहीं दे रहा है वो सबसे पहली बात वो जो कर्म कर रहा है वो

830
00:59:31,640 --> 00:59:35,920
उसके खुद के कर्म है उसमें भगवान का कोई हस्ताक्षेप नहीं है

831
00:59:35,920 --> 00:59:40,160
भगवान बस रचता है वो ये नहीं दे इसके कर्म उसके

832
00:59:40,160 --> 00:59:44,480
वो सब कुछ जो भी आधारित कर रहा है उस उसके अंदर हम भगवान

833
00:59:44,480 --> 00:59:48,760
को नहीं ला सकते अगर हम विकर्म को भगवान से जोड़ रहे हैं तो ये सबसे

834
00:59:48,760 --> 00:59:52,960
ब आप यहां पर इंटरप्ट करना चाहूंगा मैंने आपसे पूछा

835
00:59:52,960 --> 00:59:57,040
है कि अगर भगवान भविष्य देख सकता

836
00:59:57,040 --> 01:00:01,040
है तो क्या उसको मालूम है कि नहीं कि वह व्यक्ति रेप करेगा मैं उसे बनाऊ या

837
01:00:01,040 --> 01:00:05,120
ना बनाऊ सबसे पहली बात पहली बात भाई जी पहली

838
01:00:05,120 --> 01:00:09,200
बात वो रचयिता सबके बारे में जानता है लेकिन क या कि

839
01:00:09,200 --> 01:00:13,440
हम ये माने हम ये माने कि उसने सब कुछ बनाया

840
01:00:13,440 --> 01:00:17,480
है इसलिए वो ईश्वर है उसका हर चीज में हस्तक्षेप नहीं

841
01:00:17,480 --> 01:00:21,640
है उसकी सत्ता नहीं है वो ह सत्ता नहीं

842
01:00:21,640 --> 01:00:25,720
हस्ताक्षेप बोल रहा हूं हस्ताक्षेप मतलब अगर मैं कोई कर्म कर रहा

843
01:00:25,720 --> 01:00:29,880
हूं जब कहीं पर कोई गलत कार्य हो रहा है जब कहीं पर कोई गलत कार्य

844
01:00:29,880 --> 01:00:34,760
हो रहा है तो उस वहां पर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं है

845
01:00:34,760 --> 01:00:38,920
ईश्वर की अगर सत्ता होगी होती अगर फॉर एग्जांपल होती तो वो कर्म ही

846
01:00:38,920 --> 01:00:42,960
नहीं होता वहां प ईश्वर की वहां पे सबसे पहली बात ईश्वर

847
01:00:42,960 --> 01:00:47,320
या ईश्वर की सत्ता सब जगह नहीं है ईश्वर की सत्ता

848
01:00:47,320 --> 01:00:51,320
है भाई जी आप फॉर एग्जांपल ईश्वर की सत्ता का अर्थ पहले बताइए

849
01:00:51,320 --> 01:00:56,280
ईश्वर की सत्ता का अर्थ क्या है दुनिया में दुनिया में जो कहते

850
01:00:56,280 --> 01:01:00,400
हिलता है तो ईश्वर की सत्ता से हिलता है

851
01:01:00,400 --> 01:01:05,120
भगवान यह खुद कह रहा है मैं कर्म भवान

852
01:01:05,120 --> 01:01:09,400
देखिए भगवान क्या कह रहे हैं सुनिए सुनिए सुनि सुनिए देखिए

853
01:01:09,400 --> 01:01:13,400
भगवान सुनिए तो सुनिए सुनिए भगवान क्या कह रहे हैं

854
01:01:13,400 --> 01:01:17,400
यह प्रमाण हो गया अभी हम लोग केवल मैं आपकी आईडियोलॉजी

855
01:01:17,400 --> 01:01:21,680
जानना चाह रहा हूं मुझे आपकी यह आवश्यकता नहीं है भगवान ने कहा है कि नहीं कहा

856
01:01:21,680 --> 01:01:26,800
ब्रह्मा कुमारी क्या मानता है क्या सोचता है क्या कह

857
01:01:26,800 --> 01:01:30,920
वो बताइए जब आप प्रमाण देंगे जब आप

858
01:01:30,920 --> 01:01:35,080
प्रमाण देंगे तो मेरे पास भी अपने प्रमाण है फिर वो दूसरा

859
01:01:35,080 --> 01:01:39,080
क्लास चालू हो जाएगा और दूसरा क्स चालू हो जाएगा

860
01:01:39,080 --> 01:01:43,160
और यह टॉपिक रह जाएगा तो आप अपनी आइजी बताइए मैं आपसे

861
01:01:43,160 --> 01:01:45,320
प्रमाण नहीं मांग रहा हूं

862
01:01:45,320 --> 01:01:49,320
ठीक है ठीक है देखि मैं आपको इसको सरल कर द जैसे

863
01:01:49,320 --> 01:01:53,320
आपने बताया फ्रीविल होती है ठीक है एक बच्चे

864
01:01:53,320 --> 01:01:57,640
ने अभी अभी जन्म लिया ठीक है

865
01:01:57,640 --> 01:02:02,000
निर्दोष उसने कुछ नहीं किया है सुनामी आ

866
01:02:02,000 --> 01:02:06,360
गई हम तो सुनामी

867
01:02:06,360 --> 01:02:10,480
में वो बच्चा डेड हो गया मृत्यु को प्राप्त हो गया

868
01:02:10,480 --> 01:02:14,760
निर्दोष था कुछ नहीं किया था उसने ये बुरा कार्य है कि नहीं है

869
01:02:14,760 --> 01:02:18,920
उसका मर जाना बेमौत बेमौत अकाली मृत्यु जिसे

870
01:02:18,920 --> 01:02:22,960
कहा जाता है अकाल मृ कहते हम दुखद है कि नहीं जो

871
01:02:22,960 --> 01:02:27,000
अ वो तो दुखद है दुखद दुखद है तो यह कार्य

872
01:02:27,000 --> 01:02:31,160
किसने किया यह कार्य किसने किया य कार्य यह

873
01:02:31,160 --> 01:02:35,440
कार्य पहली बात सबसे पहली बात यह कार्य क्यों हुआ पहली बात वो जानना जरूरी

874
01:02:35,440 --> 01:02:39,640
है सुनामी क्यों आई वो जानना जरूरी है सुनामी इसलिए

875
01:02:39,640 --> 01:02:44,160
ये जो जितने भी कार्य हो रहे ना प्रकृति में आजकल जैसे अभी कैलिफोर्निया में

876
01:02:44,160 --> 01:02:48,200
भाई साहब मैं कह रहा हूं उस बच्चे का दोष नहीं था वो अभी जन्मा है

877
01:02:48,200 --> 01:02:52,520
उसके अकॉर्डिंग तो वो कार्य किसने किया

878
01:02:52,520 --> 01:02:56,520
न्यू प जा रहा हूं मैं न्यू प जा रहा हूं मैं हमेशा मूल तत्व के आधार

879
01:02:56,520 --> 01:03:02,520
बात करता ह भाई जी

880
01:03:04,600 --> 01:03:08,920
बोलिए जो प्रकृति आज जो जिसके बारे में जो सुनामी वगर

881
01:03:08,920 --> 01:03:13,160
जो कुछ आ रहा है वो क्यों हो रहा है वो पहले जानना जरूरी है

882
01:03:13,160 --> 01:03:17,400
हमने प्रकृति को बहुत दुख दिया है प्रकृति इसके वजह

883
01:03:17,400 --> 01:03:22,280
से यह सारे कार्य जो है सुनामी के वो

884
01:03:22,280 --> 01:03:26,280
इंसान प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ समझ गया के साथ

885
01:03:26,280 --> 01:03:30,280
बहुत बुरा हुआ सुनामी आ गया ठीक है प्रकृति के साथ बहुत

886
01:03:30,280 --> 01:03:35,160
बुरा हुआ सुनामी आ गया सुनामी आ गया उसम एक निर्दोष

887
01:03:35,160 --> 01:03:39,160
उसमें एक निर्दोष बच्चा भी मरा

888
01:03:39,160 --> 01:03:43,280
व आत्मा कहा से पहली बात पहली बात वो आत्मा

889
01:03:43,280 --> 01:03:47,360
अभी की नहीं है उसने अभी अभी ज जन्म शरीर दवारा

890
01:03:47,360 --> 01:03:51,520
लिया है लेकिन उसकी यात्रा तो बहुत बड़ी है आपकी बातें में पता

891
01:03:51,520 --> 01:03:55,880
है क्या मैं प्रिडिक्टेबल है आप क्या आंसर दोगे प्रिडिक्टेबल है

892
01:03:55,880 --> 01:04:00,200
इसका अर्थ यह है इसका अर्थ यह है कि जो कार्य

893
01:04:00,200 --> 01:04:04,320
हमको देखने में बुरे लग रहे हैं वह कार्य

894
01:04:04,320 --> 01:04:08,320
जो हमको देखने बुरे लग रहे हैं वो कार्य भी बुरे नहीं होते हैं उनका कार्य

895
01:04:08,320 --> 01:04:12,560
का पीछे कोई सिस्टम होता है है

896
01:04:12,560 --> 01:04:16,760
इसका मतलब इसका मतलब जो कार्य हमको देखने में बुरे लग रहे हैं

897
01:04:16,760 --> 01:04:19,840
उन कार्यों के रूप में वो तो ईश्वर की सत्ता के रूप

898
01:04:19,840 --> 01:04:23,880
में ही रहा है मगर उन कार्यों के होने का भी एक कारण है जो हमें नहीं

899
01:04:23,880 --> 01:04:28,240
दिख रहा कारण है हां नहीं दिख रहा है वही इसका मतलब इसका मतलब

900
01:04:28,240 --> 01:04:32,960
ये है कि ईश्वर भी हमें बुराई करता हुआ दिख सकता

901
01:04:32,960 --> 01:04:36,960
है बुराई करता हुआ दिख सकता है मतलब जैसे

902
01:04:36,960 --> 01:04:41,000
आपने कहा कि वो जो बच्चा जो सुनामी के कारण मरा आपने

903
01:04:41,000 --> 01:04:45,120
कहा कि उसने पूरा पिछले जन्म में कुछ ना कुछ किया होगा जिसके कारण उसकी ऐसी मृत्यु

904
01:04:45,120 --> 01:04:49,440
हुई यही कहा ना हम अब

905
01:04:49,440 --> 01:04:53,480
यहां से जब हम देख रहे हैं तो एक निर्दोष बच्चा मारा गया तो ये बुराई

906
01:04:53,480 --> 01:04:57,480
हो गई वो बात और है उसके पीछे वो

907
01:04:57,480 --> 01:05:01,520
बात और है उसके पीछे का फैक्ट कुछ और है तो जब वो बच्चा मारा गया

908
01:05:01,520 --> 01:05:05,600
तो इस तरीके से ये जो लीला है निर्दोष बच्चा मारा गया इस रूप

909
01:05:05,600 --> 01:05:10,120
में भगवान हमें बुरा कर्म करते हुए दिख गया ना

910
01:05:10,120 --> 01:05:14,120
भगवान कर्म करते हुए दिख गया मतलब अरे भाई य सुनामी किसकी

911
01:05:14,120 --> 01:05:18,360
मर्जी से आई सुनामी प्रकृति के नियमों

912
01:05:18,360 --> 01:05:22,720
अनुसार हो रही है प्रकृति भगवान उधर प्रकृति सुनामी

913
01:05:22,720 --> 01:05:26,960
हो जाए ऐसा कभी नहीं बोल सकता क्योंकि वो मात वो अपने बच्चों का

914
01:05:26,960 --> 01:05:31,160
कभी दुख दर उनको नहीं दे सकता खुद हो मतलब पहली बात

915
01:05:31,160 --> 01:05:35,200
ये है कि प्रकृति के पास अपनी चेतना है नियम

916
01:05:35,200 --> 01:05:39,240
है नियम प्राण शक्ति जिसे हम कहते प्राण शक्ति सारे संसार

917
01:05:39,240 --> 01:05:43,600
में व्यापक है जिस प्राण शक्ति के आधार पर प्रकृति चलती है प्रकृति

918
01:05:43,600 --> 01:05:47,720
यह सारे संसार में जो प्राण शक्ति है वह प्राण शक्ति ही

919
01:05:47,720 --> 01:05:52,200
सब कुछ कराती है प्रकृति के द्वारा सबसे पहले यह बात जानना जरूरी

920
01:05:52,200 --> 01:05:57,080
है प्रक प्राण शक्ति है उसम

921
01:05:57,080 --> 01:06:01,680
भगवान मैं जो है इस क् मैं इसको क्लियर कर दूं थोड़ा

922
01:06:01,680 --> 01:06:05,960
कि ये जो प्रकृति जब उस निर्दोष

923
01:06:05,960 --> 01:06:10,320
बच्चे को मार रही है पहली बात तो यह बताइए कि वो जो बच्चे का मरना

924
01:06:10,320 --> 01:06:15,080
है वो बुरी बात है कि नहीं है पहले तो ये बता दीजिए

925
01:06:15,080 --> 01:06:19,400
वो बुरी वो बुरी बात मतलब वो दुखद घटना है ना कुछ भी हो जाए वो दुख

926
01:06:19,400 --> 01:06:23,600
दुखी तो बुरा है दुखद है दुखद है वो किसी

927
01:06:23,600 --> 01:06:27,720
मां के लिए दुखद है कि लिए है कि वो जो जो बच्चा निर्दोष

928
01:06:27,720 --> 01:06:31,760
मारा गया और जिस भी तरीके से मारा गया वहां पर

929
01:06:31,760 --> 01:06:35,880
ईश्वर की सत्ता थी कि नहीं थी वहां पर ईश्वर

930
01:06:35,880 --> 01:06:41,330
की सत्ता नहीं थी

931
01:06:41,330 --> 01:06:43,720
[संगीत]

932
01:06:43,720 --> 01:06:49,720
क्यों आपका नेट नेट की कोई प्रॉब्लम है आपको

933
01:07:06,760 --> 01:07:12,760
आपकी वो नहीं आ रही वॉइस चिपक गया

934
01:07:12,800 --> 01:07:17,040
है तो अब इनकी ईश्वर की सत्ता भी सब जगह नहीं है ऐसा कुछ प्रतीत

935
01:07:17,040 --> 01:07:21,080
हो रहा है ऐसा कुछ आने वाला है सामने कि ईश्वर की सत्ता हर जगह

936
01:07:21,080 --> 01:07:23,880
नहीं है ठीक

937
01:07:23,880 --> 01:07:28,320
है तो

938
01:07:28,320 --> 01:07:34,320
अभी वह सब चीजें सामने

939
01:07:43,280 --> 01:07:49,280
आएंगी मैं कहूंगा कि आप दोबारा से जुड़ जाएं

940
01:08:07,880 --> 01:08:12,040
मैं एक काम करता हूं तब तक कोई बीके बीके का पक्ष रखने के लिए आना चाहता

941
01:08:12,040 --> 01:08:16,360
है तो आ सकता है क्योंकि बी के से संबंधित बात चल रही है ब्रह्मा कुमारी

942
01:08:16,360 --> 01:08:22,360
इस का पक्ष रखने के लिए कोई आना चाहे तो आ सकता है

943
01:08:54,520 --> 01:09:00,000
हां चेहरे के साथ आओगे तो इस्लाम पर जरूर बात करेंगे

944
01:09:00,000 --> 01:09:05,480
विशाल आप बीके का पक्ष लेने आए

945
01:09:05,480 --> 01:09:10,000
क्या जय सेती जय श्री राम भैया

946
01:09:10,000 --> 01:09:14,600
जय श्री राम जय श्री राम शिवांश भाई

947
01:09:14,600 --> 01:09:19,080
जय श्री राम जगनाथ जय

948
01:09:19,080 --> 01:09:23,120
जगन्नाथ मेरे गुरु भाई हो एक दो जवाब आ

949
01:09:23,120 --> 01:09:28,480
रहे मैं उनको थोड़ा बता दूं कि यदि

950
01:09:28,480 --> 01:09:32,520
उसने कुछ कर्म ऐसे किए हैं जिसके कारण उसके साथ यहां पर ऐसा कुछ हो रहा है

951
01:09:32,520 --> 01:09:36,640
तो इसका मतलब ये है कि दुनिया में जो हमें बुराई लग रही है बुराई नहीं है सब

952
01:09:36,640 --> 01:09:40,640
कुछ अच्छा ही है सबके पीछे का कोई ना कोई लॉजिक है तो

953
01:09:40,640 --> 01:09:44,720
फिर हम ये बाधा कैसे लगा सकते हैं कि ईश्वर नहीं कर सकता जब

954
01:09:44,720 --> 01:09:48,720
कुछ बुरा है ही नहीं जब आत्मा मरती ही नहीं जैसे किसी ने अभी कमेंट किया

955
01:09:48,720 --> 01:09:52,960
आत्मा कभी नहीं मरती इसलिए अगर कोई वो हो रहा है तो कुछ बुरा नहीं है उसमें कुछ

956
01:09:52,960 --> 01:09:57,400
उसके उसके अपने कर्मों का वो है इसका मतलब यदि जो हमें बुरा लग रहा है वो वास्तविकता

957
01:09:57,400 --> 01:10:01,560
में बुरा है ही नहीं यही तो मेरा पॉइंट है जो हमें बुरा लग रहा है

958
01:10:01,560 --> 01:10:05,640
वो बुरा वास्तविकता में बुरा नहीं है इसलिए ईश्वर पर हमें

959
01:10:05,640 --> 01:10:09,640
बाधा नहीं लगा सकते कि ईश्वर ये नहीं कर सकता ईश्वर वो नहीं कर सकता क्योंकि ईश्वर

960
01:10:09,640 --> 01:10:13,960
को वो दृष्टि प्राप्त है जो हमें प्राप्त नहीं है हम बुराई देख रहे हैं जिसमें वो बुराई बुराई

961
01:10:13,960 --> 01:10:18,840
है ही नहीं ईश्वर को वास्तविकता दिख रही है कि सब कुछ फ्लैट है

962
01:10:18,840 --> 01:10:23,200
दूसरी बात इन्होने कहा कि जैसे सुनामी आ रही है वहा प्रकृति मार रही है नवजात शिशु

963
01:10:23,200 --> 01:10:27,320
को तो वहां पर ईश्वर की सत्ता नहीं य मानना पड़ेगा और अगर

964
01:10:27,320 --> 01:10:31,520
नहीं है और अगर उसका बच्चे का मरना बुरा है बुराई उसको

965
01:10:31,520 --> 01:10:35,680
बुराई मानते हो तो फिर वहां पर ईश्वर के द्वारा व कार्य

966
01:10:35,680 --> 01:10:39,800
होना दिख रहा है और या फिर ये कह दो कि वो बुराई है ही नहीं बच्चे ने कुछ कर्म

967
01:10:39,800 --> 01:10:43,840
ऐसे किए या फिर दुनिया में अच्छा बुरा जो भी है वो हमारे लिए ईश्वर के लिए कुछ भी बुरा नहीं

968
01:10:43,840 --> 01:10:47,960
है जैसे भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में कहा कि मैं उन कर्मों में लिप्त

969
01:10:47,960 --> 01:10:51,880
नहीं

970
01:10:51,880 --> 01:10:56,080
होता मैं कर्मों में लिप्त नहीं होता समस्त कर्म को करने

971
01:10:56,080 --> 01:11:00,280
वाला करता होते हुए भी तू मुझको अकता जान क्यों क्योंकि उनको

972
01:11:00,280 --> 01:11:04,560
व सम दृष्टि प्राप्त है अच्छाई और बुराई के

973
01:11:04,560 --> 01:11:08,560
बीच अरुण जी आप अपना चेहरा दिखाए और

974
01:11:08,560 --> 01:11:13,440
उसके बाद

975
01:11:13,440 --> 01:11:17,680
आएम जय श्री राम मतलब मैं पहले पीड़ी

976
01:11:17,680 --> 01:11:21,680
ही था ब्रह्मा कुमारी में च था मतलब गुरुदेव

977
01:11:21,680 --> 01:11:26,040
से जब मैंने वीडियो सुना पा साल पहले की बात है ब्रह्मा कुमारी

978
01:11:26,040 --> 01:11:30,240
से पीड़ा मतलब मतलब यह जो चंगुल है उससे मैं छूटा अपने

979
01:11:30,240 --> 01:11:34,560
जो पुरी के गुरुदेव है उनसे और इनके द्वारा पीड़ित

980
01:11:34,560 --> 01:11:38,800
कई परिवार है अभी कई परिवार है मतलब जो बेघर

981
01:11:38,800 --> 01:11:42,880
हो गए अनाथ हो गए हैं जिनके द्वारा नाव संस्था स्वीकार

982
01:11:42,880 --> 01:11:47,200
कर रही है और उनकी प्रॉपर्टी सारी रख ली गई है ऐसे कई लोग है

983
01:11:47,200 --> 01:11:51,760
तो शिवांश भाई आप एक मुद्दा उठा सकते है गुरुदेव के पास

984
01:11:51,760 --> 01:11:56,040
या फिर अभि मुक्तेश्वर जी के पास के इन संस्थाओं

985
01:11:56,040 --> 01:12:00,240
को हिंदू धर्म से अलग किया जाए क्योंकि यह संस्था जो है हिंदुओं को इतना

986
01:12:00,240 --> 01:12:04,480
गुमराह कर रही है इतना गुमराह कर रही है आज आपको मैं लिस्ट

987
01:12:04,480 --> 01:12:07,000
दे सकता हूं बहुत लोगों का ठीक है

988
01:12:07,000 --> 01:12:11,000
तो आपको मैं इंस्टा प या किसी में मेल मेल द्वारा या

989
01:12:11,000 --> 01:12:15,040
फिर किसी और के द्वारा मेल करा सकता आप देख लीजिए जो भी है

990
01:12:15,040 --> 01:12:19,320
ऐसा नहीं है कि सिर्फ यह संस्था सिर्फ अच्छी अच्छी बातें करें जो इसके पीछे की बुराई

991
01:12:19,320 --> 01:12:23,360
है बहुत भयंकर है आप सुन के आपके कान खड़े य हिंदू

992
01:12:23,360 --> 01:12:27,640
है ही नहीं और शास्त्र मानते वो हिंदू हिंदू

993
01:12:27,640 --> 01:12:31,880
कैसे है देखिए पहली बात तो वो हिंदू के अलावा एक परिभाषा दे रहे वो भी धर्म

994
01:12:31,880 --> 01:12:36,120
है वो भी धर्म है फिर बता रहे हैं अपमान नहीं करते तो हम तुम्हारा अपमान कर सकते

995
01:12:36,120 --> 01:12:40,400
क्योंकि तुमने बुक लिखी और तुम हमारे लिए बेकार के लोग हो

996
01:12:40,400 --> 01:12:44,400
अरे उनके मूलिया जो छपती है जब मैं ब्रह्मा कुमारी में

997
01:12:44,400 --> 01:12:48,640
था उनकी मुरलिया में लिखा है कि शास्त्र गपो है वेद गपो

998
01:12:48,640 --> 01:12:52,800
है ऐसे प्रमाण आपको मैं भेज सकता हूं ऐसे ऐसे प्रमाण है

999
01:12:52,800 --> 01:12:56,880
जिसमें हिंदू भड़क उठ सकता है लेकिन आज तक ये लोग जो

1000
01:12:56,880 --> 01:13:00,920
प्रदर्शनी लगाते हैं ना यह लोग जो सात दिन का कोर्स लगाते हैं इसमें थोड़ी-थोड़ी

1001
01:13:00,920 --> 01:13:05,400
मतलब थोड़ी-थोड़ी मिर्च मसाले डाल के हिंदू धर्म की बातें लेके

1002
01:13:05,400 --> 01:13:09,840
मतलब लोगों को धर्म परिवर्तन किया जा रहा है मतलब बेस बनाया जा रहा है धर्म परिवर्तन

1003
01:13:09,840 --> 01:13:14,160
के लिए एक बहुत बड़ा मतलब इनको एक गिरोह

1004
01:13:14,160 --> 01:13:18,320
समझ लीजिए और शिवश भाई मैं तो य अनुरोध

1005
01:13:18,320 --> 01:13:22,120
करता हूं आप मेरे लिए गुरु भाई हो

1006
01:13:22,120 --> 01:13:26,200
पर आपको ये मैंने एक दिन दिन शायद

1007
01:13:26,200 --> 01:13:30,320
एक हफ्ते पहले बोला था कि ब्रह्मा कुमार इसके ऊपर मुद्दा उठाइए ठीक है मुद्दा

1008
01:13:30,320 --> 01:13:34,520
तो उठाइए पर थोड़ी बहुत चीज है जो पीछे से भी वर्क करनी है

1009
01:13:34,520 --> 01:13:38,680
तो आप आचार्यों के बात जाकर यह बात बता सकते हैं मैंने

1010
01:13:38,680 --> 01:13:42,680
भी बताई तो थी पर मेरी बात मतलब वो बोल रहे

1011
01:13:42,680 --> 01:13:46,680
कि कोई समुदाय टूट है कोई प्रूफ तो हो

1012
01:13:46,680 --> 01:13:50,680
प्रूफ बिना प्रूफ के नहीं बता सकता तो आपको थोड़ी बहुत चीजें मैं बता सकता हूं

1013
01:13:50,680 --> 01:13:54,720
जो डीएम में मैं बताऊंगा फिर हो पाए तो तो आप थोड़ा इस पर

1014
01:13:54,720 --> 01:13:58,720
जदा बिल्कुल आपने जो भी चीज बोली है आपने जो भी चीजें

1015
01:13:58,720 --> 01:14:02,920
बोली है वो जांच के अधीन है हम लोग जांच करेंगे वो उनमें कितनी सच्चाई है तथ्यात्मक

1016
01:14:02,920 --> 01:14:06,920
है और आप अपनी चीजें हमें दे दीजिएगा हम उसको

1017
01:14:06,920 --> 01:14:11,320
देखेंगे और यह जो अगर बात वहां पहुंचाने की लगेगी दिखाई देगी तो वहां भी पहुंचाएंगे

1018
01:14:11,320 --> 01:14:15,520
फिलहाल हम लोग ये बात कर रहे देखिए ऐसा है

1019
01:14:15,520 --> 01:14:20,240
हम लोगों को जो दृष्टि प्राप्त है उसके अनुसार दुनिया में अच्छाई और बुराई है

1020
01:14:20,240 --> 01:14:24,360
ईश्वर जिधर से देख रहा है उसके लिए सब इक्वल है तो फिर

1021
01:14:24,360 --> 01:14:28,360
ईश्वर पर दोष नहीं लगता है कि भैया वो भगवान ने कहा ना क्योंकि

1022
01:14:28,360 --> 01:14:32,360
उनको किसी कर्म में फला शक्ति नहीं है तो

1023
01:14:32,360 --> 01:14:36,640
फला शक्ति के ना होने के कारण वह किसी भी कर्म को करने वाले

1024
01:14:36,640 --> 01:14:37,240
होते हुए

1025
01:14:37,240 --> 01:14:42,040
भी उस कर्म में वो लिप्त नहीं है इस कारण

1026
01:14:42,040 --> 01:14:46,360
से जैसे कि कोई व्यक्ति यहां से मुक्त हो गया

1027
01:14:46,360 --> 01:14:50,440
उसको पता चल गया जिस दुनिया में मैं था वो सब माया था प्रपंच ता में खामखा अपने आप को

1028
01:14:50,440 --> 01:14:54,560
जो है सोच रहा था मैं गिर रहा हूं मैं मर रहा हूं वास्तविकता में तो मुझे कुछ हो ही नहीं सकता नैनम

1029
01:14:54,560 --> 01:14:58,640
सि सस्ता नन ती पाव का तो जब ये उसको पता लग

1030
01:14:58,640 --> 01:15:02,800
जाता है जब वो मुक्त हो गया है जब वहां से वो देखता है अरे सुनामी से डर रहे

1031
01:15:02,800 --> 01:15:07,280
हैं भाग रहे हैं ये सब कैसे पागल ऐसे लगेगा ना

1032
01:15:07,280 --> 01:15:11,360
जैसे कई बार होता है जो घर के बड़े होते हैं जो बच्चे होते हैं किसी ऐसी चीज

1033
01:15:11,360 --> 01:15:15,480
को लेकर के परेशान हो रहे होते हैं रो रहे होते हैं मुझे वो चाहिए

1034
01:15:15,480 --> 01:15:20,640
मुझे ये करना है जो चीजें बड़ों के लिए बिल्कुल वैल्यूलेस

1035
01:15:20,640 --> 01:15:24,640
थी तो बड़े हंस रहे होते हैं उन चीजों को लेकर के और बच्चे रो रहे

1036
01:15:24,640 --> 01:15:28,880
होते हैं तो अब बड़े हंस रहे हैं तो क्या इस पर बच्चे बच्चों का बुरा

1037
01:15:28,880 --> 01:15:33,120
मानना सही है क्या अब बच्चे भह खा रहे हैं कि मैंने

1038
01:15:33,120 --> 01:15:37,160
होमवर्क नहीं किया है आज आज हम लोग याद करें जब हम छोटे

1039
01:15:37,160 --> 01:15:41,200
थे थर्ड क्लास में फोर्थ स्टैंडर्ड में तो कई बार ऐसा होता तो

1040
01:15:41,200 --> 01:15:45,360
मेरे साथ कई बार हुआ कि मेरा पूरी पूरी मतलब होमवर्क जो है मेरा

1041
01:15:45,360 --> 01:15:49,560
पूरा नहीं रहता था तो जब मैं वो गया मैं डरता

1042
01:15:49,560 --> 01:15:52,800
था कि आज सर कितना मारे भय सुबह से प्रेयर से

1043
01:15:52,800 --> 01:15:57,200
प्रार्थना होती थी जो असेंबली प्रेयर वहां से लेकर के

1044
01:15:57,200 --> 01:16:01,200
और जब तक वो पीरियड और यह पता लग जाए कि जिसकी आज वो चेक होने वाला

1045
01:16:01,200 --> 01:16:05,200
है होमवर्क चेक होने वाला है वो सर नहीं आए वाह वाह वाह वाह आज लगता है

1046
01:16:05,200 --> 01:16:09,200
यार कितनी छोटी सी बात के लिए हम बह खाते थे तो

1047
01:16:09,200 --> 01:16:13,280
हमारे ही जीवित रहते हुए ही हम में कितना अंतर आया कि जो चीजें हमारे लिए

1048
01:16:13,280 --> 01:16:17,360
अच्छी या बुरी थी आज वही चीजें हमारे लिए महत्वहीन है

1049
01:16:17,360 --> 01:16:21,400
तो हम कैसे सोच सकते हैं कि यह जो अच्छाई और बुराई जो हमें दिख रही है वो

1050
01:16:21,400 --> 01:16:25,600
ईश्वर के लिए भी अच्छाई और बुराई है जैसे आर समाजी मातृ शक्ति

1051
01:16:25,600 --> 01:16:29,840
थी उन्होंने कहा कि वह चूहों के कूदने से अपने आप को जब ईश्वर नहीं बचा

1052
01:16:29,840 --> 01:16:33,960
पा रहा है तो हमको क्या बचाएगा अरे भाई चूहों का कूदना आपको बुरा लग

1053
01:16:33,960 --> 01:16:38,160
रहा है आपको बुरा लग रहा है वो ईश्वर है ईश्वर

1054
01:16:38,160 --> 01:16:42,640
को नहीं लग रहा है ना बुरा भैया ऐसे

1055
01:16:42,640 --> 01:16:46,880
बहुत होते हैं दूसरी

1056
01:16:46,880 --> 01:16:50,960
दूसरी बात अगर ऐसे बुराई देखी जाए तो या तो आपको मानना

1057
01:16:50,960 --> 01:16:55,040
पड़ेगा मेरा जो ईश्वर है भविष्य नहीं देख सकता या तो

1058
01:16:55,040 --> 01:16:59,360
आपको मानना पड़ेगा कि मेरे ईश्वर की सब जगह सत्ता नहीं है

1059
01:16:59,360 --> 01:17:03,480
या तो आपको मानना पड़ेगा कि मेरा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं

1060
01:17:03,480 --> 01:17:07,680
है सर्वव्यापक नहीं है

1061
01:17:07,680 --> 01:17:08,180
है

1062
01:17:07,880 --> 01:17:12,080
ना यह सब आपको मानना पड़ेगा तब आप कह दो कि हमारा ईश्वर

1063
01:17:12,080 --> 01:17:16,520
ये कार्य नहीं कर सकता तो फिर वह ईश्वर कहां बचा

1064
01:17:16,520 --> 01:17:20,760
जो सर्वशक्तिमान नहीं है जिसकी सर्वत्र सत्ता नहीं है

1065
01:17:20,760 --> 01:17:25,920
जो सब कुछ कर नहीं सकता है जो अनंत सामर्थ वान नहीं है

1066
01:17:25,920 --> 01:17:30,080
वो फिर सर्वशक्तिमान कैसे ब फिर वो ईश्वर ही कैसे बचा

1067
01:17:30,080 --> 01:17:34,120
और जब वो ईश्वर नहीं बचा तो फिर ऐसे घटिया ईश्वर को प्राप्त करने के

1068
01:17:34,120 --> 01:17:38,760
निमित्त तुम क्या बता रहे हो ये ये बात आ जाएगी

1069
01:17:38,760 --> 01:17:43,440
जब जब ना तो वो अनंत सामर्थ वान है ना तो वह सर्वशक्तिमान है

1070
01:17:43,440 --> 01:17:47,920
ना ही वह भविष्य देख सकता है ऐसे ऐसे किसी एंटिटी

1071
01:17:47,920 --> 01:17:52,320
को आप ईश्वर कह करके उसको पुजवा रहे हो उस तक लोगों को पहुंचा रहे हो

1072
01:17:52,320 --> 01:17:58,320
वो उसको खुद मोक्ष नहीं है वो बंधनों में है

1073
01:17:58,720 --> 01:18:03,200
आज मैं वहां से कॉलेज से आ रहा था भैया तो

1074
01:18:03,200 --> 01:18:07,280
कहीं पर मतलब साइड पर भंडारा या कुछ ऐसा लगा था तो वो

1075
01:18:07,280 --> 01:18:11,400
साई साई का मंदिर था तो बाहर बोर्ड पर पता

1076
01:18:11,400 --> 01:18:15,600
है क्या खा लिखा था उन्होंने अनंत ब्रह्मांड

1077
01:18:15,600 --> 01:18:19,760
नायक संत श्री साई राम बाबा ऐसा कु मलब इतना

1078
01:18:19,760 --> 01:18:23,960
मतलब वो जो मतलब हम पूज्य जो संत के पहले जो मतलब

1079
01:18:23,960 --> 01:18:28,880
लगाते हैं ना की मतलब जो उपाधि लगाते आचार्य के

1080
01:18:28,880 --> 01:18:33,160
नाम के पहले वो वो उपाधि साई के मंदिर के

1081
01:18:33,160 --> 01:18:37,360
उस पर वहां प लिखी और इसमें

1082
01:18:37,360 --> 01:18:41,600
एक शुरुआती बात रह जाती है बार-बार कि ठीक है आपका कहना

1083
01:18:41,600 --> 01:18:45,840
है

1084
01:18:45,840 --> 01:18:49,840
कि आप इस आपका कहना है कि भाई

1085
01:18:49,840 --> 01:18:54,320
उसका एक कारण है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता उसका कारण है

1086
01:18:54,320 --> 01:18:58,640
कारण मगर फिर उसको सर्वशक्तिमान मत

1087
01:18:58,640 --> 01:19:02,800
कहो अगर कोई कारण है उससे य थोड़ी ना हो जाता

1088
01:19:02,800 --> 01:19:06,960
है व सर्व लगा रहेगा क्योंकि भाई कोई कारण है शिवांश नारायण

1089
01:19:06,960 --> 01:19:11,200
द्विवेदी दो सवा दो पर उसने चर्चा के लिए कहा था

1090
01:19:11,200 --> 01:19:15,280
पर वह आ नहीं सका अब वह जब नहीं आ सका

1091
01:19:15,280 --> 01:19:21,080
सवा दो पर फिर भी हम कहेंगे कि वह सवाद पर आया है क्योंकि उसका ना आने का कारण

1092
01:19:21,080 --> 01:19:25,120
था अगर मैंने कहा कि सवा दो पर मुझे लाइव होना

1093
01:19:25,120 --> 01:19:29,360
है और मैं सवा पर नहीं आया दो 20 पर आया

1094
01:19:29,360 --> 01:19:33,360
और मेरा कोई कारण था रास्ते में मेरी चैन खराब हो गई थी साइकल से आ रहा था

1095
01:19:33,360 --> 01:19:37,640
और चैन उतर गई थी मैं उसको चढ़ा रहा था तो क्योंकि

1096
01:19:37,640 --> 01:19:41,680
मेरे पास कारण है इसलिए हम य यह कहने लगेंगे कि मैं सवा प आया

1097
01:19:41,680 --> 01:19:45,680
था नहीं यहां हम यही कहेंगे कि भाई एक कारण था जिसके

1098
01:19:45,680 --> 01:19:49,680
कारण वो दो 20 पर आया सवा पर नहीं आया उसी तरीके

1099
01:19:49,680 --> 01:19:53,720
से अगर कोई कारण है कोई भी एक कार्य ना कर पाने का

1100
01:19:53,720 --> 01:19:59,720
तो हम उसको सर्वशक्तिमान नहीं कह सकते

1101
01:20:01,120 --> 01:20:05,400
फिर और इसी प्रकार से जैसे इन्होंने कहा

1102
01:20:05,400 --> 01:20:09,480
कि भाई बच्चे का मरना दुखद है बच्चे की मृत्यु क हुई क्योंकि उसने पीछे

1103
01:20:09,480 --> 01:20:13,800
से कुछ किया था तो वह जो बुरा कार्य है वह है

1104
01:20:13,800 --> 01:20:17,840
अगर वह बुरा है अब उसका पीछे कोई कारण है तो

1105
01:20:17,840 --> 01:20:21,920
ऐसे ही भगवान जब आपको बुरा करते हुए दिख रहे हैं तो उसके

1106
01:20:21,920 --> 01:20:25,960
पीछे कोई कारण हो सकता है उसको ढ कोशिश करो मगर ये मत कहो कि

1107
01:20:25,960 --> 01:20:30,400
वो ये कार्य नहीं कर सकता और अगर ये कहोगे कि नहीं

1108
01:20:30,400 --> 01:20:34,520
वो जो है ये नहीं कर सकता तो उसकी जो सर्व सामर्थ है वो सर्व व्यापकता है

1109
01:20:34,520 --> 01:20:38,560
नित्यता है सनातन जो उसका गुण है सच्चिदानंद सब

1110
01:20:38,560 --> 01:20:42,720
भंग हो जाएगा व ईश्वर ही नहीं सिद्ध होगी फिर वो जो ईश्वर है वो सिद्ध

1111
01:20:42,720 --> 01:20:47,200
नहीं हो पाएगा क्योंकि ईश्वर की सिद्धि ही है सर्वशक्तिमान

1112
01:20:47,200 --> 01:20:52,200
ईश्वर से बाद हो जाएगा फिर

1113
01:20:52,200 --> 01:20:56,240
वो तो आप अने कहा कि वो बुरे कार्य नहीं

1114
01:20:56,240 --> 01:21:00,800
करता है या तो वो ना करे फिर आप कह रहे हो कर तो रहा है पर कारण है

1115
01:21:00,800 --> 01:21:05,200
उसका तो इसका मतलब कारण हो तो कर सकता है बुरे कार

1116
01:21:05,200 --> 01:21:09,240
कारण हो कारण हो तो बुरे कार्य वो कर

1117
01:21:09,240 --> 01:21:13,240
सकता है तो फिर बुरे कार्य करने वाला भी आपको एक्सेप्ट करना पड़ेगा

1118
01:21:13,240 --> 01:21:17,280
कि ईश्वर है और दूसरी एक बात और है जो उस दिन भी इन्होने बताई

1119
01:21:17,280 --> 01:21:21,440
थी ईश्वर सृष्टि का समार नहीं करता है तो ईश्वर सर्वत्र

1120
01:21:21,440 --> 01:21:25,640
समान रूप से सर्वव्यापक होते हुए उसकी सत्ता नहीं है सब जगह

1121
01:21:25,640 --> 01:21:30,520
वो समार नहीं करता है वो सर्व सामर्थ्य वान नहीं

1122
01:21:30,520 --> 01:21:34,560
है और भी कई सारे उस पर नियम लागू है

1123
01:21:34,560 --> 01:21:38,600
मगर फिर भी वो अनंत सामर्थ वान है सर्वशक्तिमान है ईश्वर

1124
01:21:38,600 --> 01:21:42,720
है तुमको उसे प्राप्त करना है मुरली के रूप में उसको प्राप्त करने की विधि बताई जा रही

1125
01:21:42,720 --> 01:21:47,680
है जो कि सनातन नहीं है क्योंकि वो डेली आ रही है

1126
01:21:47,680 --> 01:21:52,600
डेली आ रही तो सनातन किसी भी देश काल परिस्थिति में जो ना उत्पन्न हो ना खत्म

1127
01:21:52,600 --> 01:21:56,720
हो वो सनातन है तोय मुरली सिद्धांत है

1128
01:21:56,720 --> 01:22:00,760
सनातन नहीं है वो बात और है कि वो जो नाम उपयोग में लिए जाते हैं इनकी

1129
01:22:00,760 --> 01:22:04,800
ओर से चुनाव चिन्ह के रूप में जो लेते हैं य वो

1130
01:22:04,800 --> 01:22:07,560
हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में मिल जाते जिस कारण से

1131
01:22:07,560 --> 01:22:12,040
इनको हिंदू धर्म के रूप में जाना और देखा जाता है मगर

1132
01:22:12,040 --> 01:22:16,520
वास्तविकता बिल्कुल उलट है जिसके लिए इस्लाम भी धर्म है क्रिटी

1133
01:22:16,520 --> 01:22:21,000
भी धर्म है वो हिंदू कैसे नहीं हो सकता वो धर्म नहीं

1134
01:22:21,000 --> 01:22:25,240
है क्योंकि ज जहा ही प्राप्त

1135
01:22:25,240 --> 01:22:29,240
नहीं हो रहा है मोक्ष ही प्राप्त नहीं हो रहा है धर्म ही नहीं है शाश्वत नहीं

1136
01:22:29,240 --> 01:22:33,600
है तो वो सनातन कहां से हो ग तो

1137
01:22:33,600 --> 01:22:39,600
मैं अरुण जी जय श्री राम

1138
01:22:39,720 --> 01:22:45,720
बताइए एक मिनट आपकी आवाज नहीं आ रही

1139
01:22:45,800 --> 01:22:51,240
बोलिए आपने अपने आपको को म्यूट कर रखा है हा अब ठीक

1140
01:22:51,240 --> 01:22:55,520
है नमस्कार सभी को य अच्छा

1141
01:22:55,520 --> 01:22:59,720
वि पकड़ा है ब्रह्म कुमारी का यह हिंदू धर्म में घुस

1142
01:22:59,720 --> 01:23:04,080
के हिंदू में घुन का काम कर रहे हैं तो इनका

1143
01:23:04,080 --> 01:23:08,120
सारा कुछ जय जुड़ हुए थे आपसे

1144
01:23:08,120 --> 01:23:12,400
वो सब कुछ आपको भेज देंगे सारी डिटेल मेरे पास है मैं कहेंगे तो 500

1145
01:23:12,400 --> 01:23:17,480
फैमिली इनसे पीड़ है बर्बाद हो चुकी है उनको भी जोड़

1146
01:23:17,480 --> 01:23:21,560
सकता काफी काम कर रहे जितना हो सक कर र है ले हमें

1147
01:23:21,560 --> 01:23:22,680
भी कुछ मदद चाहिए होती

1148
01:23:22,680 --> 01:23:27,440
है सपोर्ट चाहि होता है हमारी समित पहुच तो समित

1149
01:23:27,440 --> 01:23:31,680
दायरे में ही बात कर पा रहे हैं तो आप जैसे धर्म

1150
01:23:31,680 --> 01:23:35,880
रक्षक अगर आपके आपके आते हैं तो ये जो जो गलत चीज फैला

1151
01:23:35,880 --> 01:23:41,320
रही है वो सारी चीज उपलब्ध करवा सकता हूं मैं आपको जैसे

1152
01:23:41,320 --> 01:23:45,360
बक पहले आ थे पहले जो भाई साहब आए थे जो

1153
01:23:45,360 --> 01:23:49,440
कह के गए और चले गए उनको भी मैं कहूंगा कि आप जो है

1154
01:23:49,440 --> 01:23:53,720
के जरिए हमसे जुड़े और हमको वो सामग्री भेजे जो आप भेजना चाह रहे थे

1155
01:23:53,720 --> 01:23:57,480
ठीक है जी

1156
01:23:57,480 --> 01:24:01,720
जी जी सुरेंद्र जी आपका

1157
01:24:01,720 --> 01:24:05,840
आपका न में

1158
01:24:05,840 --> 01:24:08,280
चे

1159
01:24:08,280 --> 01:24:12,480
74036 दे देता हूं

1160
01:24:12,480 --> 01:24:16,440
बताइए

1161
01:24:16,440 --> 01:24:20,600
स आप बोलिए सर ंबर बोलिए

1162
01:24:20,600 --> 01:24:26,000
यह देखिए

1163
01:24:26,000 --> 01:24:30,280
महादेव शिवांश भैया जी ठीक है महादेव जय श्री राम

1164
01:24:30,280 --> 01:24:35,040
अभी कुछ टाइम पूर्व में जय सती नाम के जो भ्राता जी आए थे

1165
01:24:35,040 --> 01:24:39,040
तो उन्होंने एक बात कही थी बोला कि जिन जिन में मतलब ब्रह्मा

1166
01:24:39,040 --> 01:24:43,320
कुमारी में ऐसे होता है कि वह संपत्ति अपने नाम कर लेते हैं तो ऐसी संस्था

1167
01:24:43,320 --> 01:24:47,560
को हिंदू समाज से बाहर कर देना चाहिए पर एक प्रकार से देख हिंदू समाज

1168
01:24:47,560 --> 01:24:51,560
में अनेक मत संप्रदाय है यदि हम सभी को ऐसे बार करेंगे तो

1169
01:24:51,560 --> 01:24:55,800
इसका मतलब य हिंदू समाज तो पूरे टुकड़ों में बट जाएगा ऊंट

1170
01:24:55,800 --> 01:24:59,960
की गर्दन लंबी हो तो इसका मतलब यह नहीं कि हम ट की गर्दन को काट दे उसमें कुछ सुधार

1171
01:24:59,960 --> 01:25:04,080
ला सकते हैं उनको समझा सकते हैं ऐसा नहीं कि हिंदू समाज से बाहर कर दिया

1172
01:25:04,080 --> 01:25:08,280
जाए ऐसे बहुत मत संप्रदाय सब अपना अपना अलग है देखि वो तो उनका

1173
01:25:08,280 --> 01:25:12,320
रोष था मगर हम लोग सुधरी करण पर कार्य करते

1174
01:25:12,320 --> 01:25:16,360
हैं सुधार परही हमारा कार्य है और दूसरी एक बात यह

1175
01:25:16,360 --> 01:25:20,400
भी है कि जब तक वो सुधार नहीं है तब

1176
01:25:20,400 --> 01:25:25,200
तक कुछ ना कुछ हमें ऐसा करना होगा जिससे कि हमारे ू

1177
01:25:25,200 --> 01:25:29,640
दि भ्रमित ना हो अगर हम

1178
01:25:29,640 --> 01:25:31,480
बिल्कुल सामान्य

1179
01:25:31,480 --> 01:25:35,560
ही रखेंगे उनको भी जो हिंदू धर्म का अपने आप को कहते हुए

1180
01:25:35,560 --> 01:25:39,720
भी हिंदू धर्म विरोधी बातें कर रहे हैं और

1181
01:25:39,720 --> 01:25:43,720
हम उसम कोई निशानी नहीं लगाएंगे कि नहीं भैया इससे बच के रहना है इससे जो

1182
01:25:43,720 --> 01:25:48,000
है यह इस तरह से कार्य कर रहा है तो फिर वह तो इधर हम लोग भरते

1183
01:25:48,000 --> 01:25:52,840
जाएंगे एक गागर भरेंगे दूसरी एक गागर भरेगी दूसरी फुट जाएगी

1184
01:25:52,840 --> 01:25:56,960
तो कुछ ना कुछ तो ऐसा करना मगर बाहर निने की बात

1185
01:25:56,960 --> 01:26:01,200
नहीं बात कही हिंदू धर्म से अलग कर दिया जाए तो ऐसे बहुत

1186
01:26:01,200 --> 01:26:05,400
मत संप्रदाय में कह दिया कि वो तो उनका रोष था

1187
01:26:05,400 --> 01:26:09,400
हम सुधार पर ही कार्य करते मगर हमको लोगों को यह तो ताना ही पड़ेगा कि

1188
01:26:09,400 --> 01:26:13,880
ब्रह्मा कुमारी को आप हिंदू धर्म मान करके मत चलो

1189
01:26:13,880 --> 01:26:17,920
क्योंकि उसमें शिव है ब्रह्मा है यह सब मान

1190
01:26:17,920 --> 01:26:22,080
के आप मत चलो उसका वास्तविकता कुछ और है हमें

1191
01:26:22,080 --> 01:26:27,040
यह बताना पड़ेगा हां जब सु हो जाएगा

1192
01:26:27,040 --> 01:26:31,400
हा उनका जो मुख्य केंद्र था मा में वहा मैं करीबन आ साल रहा

1193
01:26:31,400 --> 01:26:35,640
हूं माउंट अबू में विद्या अध्ययन किया मैंने वहा

1194
01:26:35,640 --> 01:26:39,840
पर तो उनका ऐसा कुछ है मतलब अपना

1195
01:26:39,840 --> 01:26:43,920
जो कोर्स आदि वो देते हैं सा दिन का रखते हैं और कुछ संपत्ति आदि

1196
01:26:43,920 --> 01:26:46,800
अपने नाम करते हैं व्यक्ति की

1197
01:26:46,800 --> 01:26:51,520
उ काफी म बुरा भी है तो मतलब वो उन्होने

1198
01:26:51,520 --> 01:26:56,000
कुछ ऐसे भा सबसे पहली बात तो यही है वो कह रहे हैं कि

1199
01:26:56,000 --> 01:27:00,160
वह धर्म नहीं है मैं जानता हूं मगर मैं अपमान नहीं करना चाहता इसलिए मैं जो है उनको

1200
01:27:00,160 --> 01:27:04,160
धर्म कहता हूं लेखराज बाबा यह सिखा रहे हैं मुरली

1201
01:27:04,160 --> 01:27:08,680
के द्वारा यही सिखा रहे हैं ना

1202
01:27:08,680 --> 01:27:12,720
अच्छा फिर मैंने कहा कि जो जो ऐसा गंदा व्यक्ति होगा

1203
01:27:12,720 --> 01:27:16,920
कि जो बहुत ही गंदा होगा उसको मैं कहूंगा तो कौन कितना गंदा होगा कितना

1204
01:27:16,920 --> 01:27:21,880
गंदा नहीं होगा इसका रेशियो क्या है यह नहीं पता

1205
01:27:21,880 --> 01:27:26,120
सिद्धांत हीनता है ना देखिए पराका देखिए कुल मिलाकर

1206
01:27:26,120 --> 01:27:30,400
कहना यह है कि आपको इन सेक्ट को अपने मिलाना है इनको फॉलो

1207
01:27:30,400 --> 01:27:35,080
करने वाले लोग हैं शिवांश नारायण द्विवेदी को फॉलो करने वाला कोई नहीं है ऐसा

1208
01:27:35,080 --> 01:27:39,160
कि कोई एक मत पंथ चल रहा हो तो हम उसको क्यों मान ले धर्म तो

1209
01:27:39,160 --> 01:27:43,520
शिवांश नारायण द्विवेदी की लिखी हुई किताब को हम टकरा देंगे

1210
01:27:43,520 --> 01:27:49,520
मगर मोहम्मद की दी हुई किताब को हम स्वीकार कर

1211
01:27:49,720 --> 01:27:54,240
लेंगे वो किताब भी वैसे ही है जैसे शिवांश की किताब है इनके लिए

1212
01:27:54,240 --> 01:27:58,240
मुसलमानों के लिए होगी इनके लिए वो किताब वैसी है जैसे शिवांश

1213
01:27:58,240 --> 01:28:02,280
की है मगर शिवांश की ठुकराए क्योंकि शिवांश को फॉलो करने वाले

1214
01:28:02,280 --> 01:28:06,400
उतने नहीं है मगर मोहम्मद की अपना लेंगे क्योंकि मोहम्मद

1215
01:28:06,400 --> 01:28:10,480
को फॉलो करने वाला दुनिया में बहुत आदमी है है ना तो

1216
01:28:10,480 --> 01:28:15,600
यह इनका तरीका है हां विशाल जी

1217
01:28:15,600 --> 01:28:20,040
बोलिए बोलिए विशाल जी

1218
01:28:20,040 --> 01:28:24,120
भैया मैं एक पहले बात रखना चाहता हूं और दूसरी मतलब

1219
01:28:24,120 --> 01:28:28,240
अनुरोध करना चाहता हूं आपसे मतलब की जब पिछली

1220
01:28:28,240 --> 01:28:33,560
लाइव थी वो मतलब कल वाली न बजे वाली

1221
01:28:33,560 --> 01:28:37,560
उसमें उसम आपने वो मॉडरेटर के रूप में मतलब मॉडरेटर

1222
01:28:37,560 --> 01:28:41,720
तो नहीं थे लेकिन वह सहायक थे हमारे जो राम पांडे जी करके

1223
01:28:41,720 --> 01:28:46,040
थे ना वो मतलब उन्होंने मतलब बहुत अच्छा कर्य ब उसम उन्होंने

1224
01:28:46,040 --> 01:28:50,040
बोला कि मतलब वहां पर कोई मतलब निष्कर्ष मतलब रिजल्ट कुछ आया नहीं

1225
01:28:50,040 --> 01:28:54,120
लेकिन रिजल्ट तो भ आ गया था ना कि मतलब वो निरुत्तर हो गया था

1226
01:28:54,120 --> 01:28:58,280
सामने वाला इसलिए मतलब आपको व्यक्तिगत निंदा करने

1227
01:28:58,280 --> 01:29:02,720
लगा था आपकी कि आप पाखंडी और मतलब अन्य अन्य कोई बात

1228
01:29:02,720 --> 01:29:04,840
मतलब कौन कह रहा था कि उसमें

1229
01:29:04,840 --> 01:29:08,960
रिजल्ट नहीं आया था मतलब उन्होंने वो बोल रहे थे देखि

1230
01:29:08,960 --> 01:29:13,520
देखने वाला हो तो आज जो अभी जो चर्चा हुई है इसमें भी रिजल्ट आया है

1231
01:29:13,520 --> 01:29:17,520
क्या आया है पहला कि ब्रह्मा कुमारी झूठ बोलता है वो मानता है

1232
01:29:17,520 --> 01:29:21,760
कि कुरान धर्म नहीं है मगर वो धर्म कहता है नहीं नहीं वैसे नहीं वैसे

1233
01:29:21,760 --> 01:29:26,040
नहीं सुनिए तो और पाश उसम

1234
01:29:26,040 --> 01:29:30,200
वो जिस कारण जिस कारण से मुसलमान का धर्म मुसलमान को धर्म

1235
01:29:30,200 --> 01:29:34,240
कहेगा इस्लाम को धर्म कहेगा क्रिश्चियनिटी को धर्म कहेगा उसी

1236
01:29:34,240 --> 01:29:39,320
कारण से वह शिवांस के धर्म को धर्म नहीं

1237
01:29:39,320 --> 01:29:43,360
कहेगा यानी की अब सर्म नहीं है विकर्म

1238
01:29:43,360 --> 01:29:48,080
है दूसरी बात मैं आपकी बात से सहमत हूं आपकी बात

1239
01:29:48,080 --> 01:29:52,320
से पूरा कर लू दूसरी बात इनके द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं हो

1240
01:29:52,320 --> 01:29:57,080
रहा और तीसरी बात ये है कि वो

1241
01:29:57,080 --> 01:30:01,760
बुराई को बनाने वाला वो नहीं है यानी कि बुराई का एक्जिस्टेंस

1242
01:30:01,760 --> 01:30:05,760
है वो उसकी सत्ता के बाहर है तो वह

1243
01:30:05,760 --> 01:30:10,360
सर्वत्र सर्वव्यापक रूप से सत्ता नहीं है उसकी

1244
01:30:10,360 --> 01:30:15,720
कुछ दुनिया में ऐसा है जो उसकी सत्ता से बाहर है वहा ईश्वर कुछ नहीं कर सकता

1245
01:30:15,720 --> 01:30:19,760
बाद तो बाधित है तो फिर वो और वो सब कुछ बनाने वाला

1246
01:30:19,760 --> 01:30:24,040
नहीं है क्योंकि बुराई को बनाने वाला वो नहीं है बुराई का एक्जिस्टेंस अपने आप है

1247
01:30:24,040 --> 01:30:28,160
तो क्या हुआ कि वो ना तो सब कुछ बनाने वाला है और ना

1248
01:30:28,160 --> 01:30:32,480
ही सब कुछ करने वाला है ना ही उसकी सब जगह सत्ता

1249
01:30:32,480 --> 01:30:36,760
है तो ना तो ये पहली बात तो ये कि इनके द्वारा ईश्वर

1250
01:30:36,760 --> 01:30:40,920
सिद्धि नहीं हो सकता दूसरी बात यह है कि अगर ये किसी प्रकार से कुछ

1251
01:30:40,920 --> 01:30:44,920
हमारी हमारी डेफिनेशन को लेकर के ईश्वर को सिद्ध करने भी लग जाए

1252
01:30:44,920 --> 01:30:49,040
तो डेफिनेशन ख केवल इस बात प ईश्वर ने सब कुछ बनाया है

1253
01:30:49,040 --> 01:30:53,040
इस बात पर भी ये लोग ईश्वर को सिद्ध नहीं कर सकते क्योंकि बाद में खुद ही कहेंगे इनकी दीदी

1254
01:30:53,040 --> 01:30:54,400
ने कहा था कि

1255
01:30:54,400 --> 01:30:58,560
ईश्वर कीड़ों को पैदा नहीं करता है

1256
01:30:58,560 --> 01:31:02,640
कीड़े हमारे लिए कीड़े है भाई जो पेंटिंग बनाने वाला है

1257
01:31:02,640 --> 01:31:06,640
उसके लिए यह फरेड से लेकर के व जो टो तक का मामला है सब

1258
01:31:06,640 --> 01:31:10,640
एक है कीड़े हमारे लिए कीड़े उसके लिए

1259
01:31:10,640 --> 01:31:15,040
उसकी दुनिया है संसार है वो कलर भर रहा है

1260
01:31:15,040 --> 01:31:19,520
और सब एक दूसरे के पूरक

1261
01:31:19,520 --> 01:31:23,560
हैया कह रहा था मतलब वो जब समझा रहे थे

1262
01:31:23,560 --> 01:31:28,360
ना उनको बहुत सवाद पूर्णक और बहुत मतलब मर्यादित अच्छे तरीके से उन्होंने समझाया

1263
01:31:28,360 --> 01:31:32,400
लेकिन वो मतलब जो समझा रहे थे ना कि मतलब बोल रहे थे उस टाइम प कि अगर

1264
01:31:32,400 --> 01:31:36,600
मतलब आप ऐसे मतलब बोलते रहोगे तो कुछ रिजल्ट नहीं मिलेगा

1265
01:31:36,600 --> 01:31:40,640
तो मतलब मेरा इसमें ये कहना है कि रिजल्ट तो मतलब पहले आ ही चुका है कि

1266
01:31:40,640 --> 01:31:45,120
मतलब वो सीधी नहीं कर पाया

1267
01:31:45,120 --> 01:31:49,160
तो मतलब मुझे थोड़ा ऐसा समझ में नहीं कि वो रिजल्ट मतलब कौन से वे

1268
01:31:49,160 --> 01:31:53,280
में कह रहे थे मतलब वो बात है कि मतलब मैं गलत हूं या मतलब

1269
01:31:53,280 --> 01:31:55,800
कुछ ऐसा

1270
01:31:55,800 --> 01:32:00,160
नहीं सही हो आप सही हो सही कह रहा हूं

1271
01:32:00,160 --> 01:32:03,370
सुरेंद्र जी

1272
01:32:03,370 --> 01:32:07,560
[संगीत] बताए एक अनुरोध ये है कि

1273
01:32:07,560 --> 01:32:09,640
मतलब मैं कहना चाहता

1274
01:32:09,640 --> 01:32:13,640
हूं आपको कि मतलब भगवत पाद

1275
01:32:13,640 --> 01:32:17,680
जो शंकराचार्य जी है हमारे वर्तमान के पूरी पीठाधीश्वर मलब

1276
01:32:17,680 --> 01:32:21,680
उनके ग्रंथ और जो धर्म सम्राट स्वामी श करपात्री जी महाराज के जितने

1277
01:32:21,680 --> 01:32:25,680
ग्रंथ अगर आप मतलब आप जितने ग्रंथ से परिचित हैय

1278
01:32:25,680 --> 01:32:29,680
आपको पता है कि जितने भी ग्रंथ उन्होंने लिखे उनकी एक बार लिस्ट मतलब

1279
01:32:29,680 --> 01:32:33,960
आप कुछ अगर अपलोड कर दे पब्लिक

1280
01:32:33,960 --> 01:32:38,560
ठीक है आप लोग दो मिनट रुकिए यहां पर मैं एक बार उनसे संपर्क कर लेता हूं

1281
01:32:38,560 --> 01:32:42,560
तब तक वल आप रहो यहां पर हा और हा

1282
01:32:42,560 --> 01:32:46,640
कोई अभद्रता ना हो और बात को रखे और डायरेक्ट किसी

1283
01:32:46,640 --> 01:32:50,720
पर लीगल और इलीगल वाला आरोप ना लगाए हम लोग लीगल इलीगल

1284
01:32:50,720 --> 01:32:55,360
नहीं शास्त्रीय और शास्त्रीय धार्मिक और धार्मिक की बात कर सकते

1285
01:32:55,360 --> 01:32:59,920
लीगल और लीगल पर हम प्रश्न खड़े कर सकते हैं वो जांच का विषय है

1286
01:32:59,920 --> 01:33:05,920
कोर्ट का कानून का विषय है ठीक है जी जी मैं आता हूं अभी

1287
01:34:50,640 --> 01:34:56,640
[संगीत]

1288
01:41:38,480 --> 01:41:39,480
तो

1289
01:41:39,480 --> 01:41:44,320
जय श्री राम सभी को और वो भाई साहब अब आएंगे नहीं

1290
01:41:44,320 --> 01:41:49,160
दोबारा मैं एक बात क्लियर कर दूं देखिए है क्या

1291
01:41:49,160 --> 01:41:53,360
कि यदि हम मानते हैं कि ईश्वर सब कुछ बनाने वाला है तो हमें मानना होगा कि

1292
01:41:53,360 --> 01:41:57,440
ईश्वर ने जिसको हम बुराई मानते हैं जिसको हम बुराई मानते हैं वो

1293
01:41:57,440 --> 01:42:01,440
भी उन्होंने ही बनाया है ठीक है और अगर वो बुराई बुराई नहीं है

1294
01:42:01,440 --> 01:42:05,440
फिर आप उसके पीछे की चीज देख रहे हो तो फिर आप ये मत कहो कि ईश्वर ये नहीं कर सकता क्योंकि

1295
01:42:05,440 --> 01:42:09,480
वो बुराई बुराई है ही नहीं फिर क्यों कह रहे हो कि ईश्वर ये नहीं कर सकता है ना

1296
01:42:09,480 --> 01:42:13,600
वो बुराई बुराई नहीं है आप ही बता रहे हो वो बच्चे का पिछला जन्म था जिसमें

1297
01:42:13,600 --> 01:42:17,960
कि उसने कुछ ऐसा किया था जिसके कारण उसकी देह के साथ ये वाला कष्ट आया

1298
01:42:17,960 --> 01:42:22,080
तो इसका मतलब जो हमको बुरा करते हुए ईश्वर दिख रहा है उसके पीछे कोई कारण हो सकता

1299
01:42:22,080 --> 01:42:26,120
है वस्तुत ईश्वर नहीं कर रहा है बुरा और दूसरा तरीका

1300
01:42:26,120 --> 01:42:30,120
ये देख ले कि ईश्वर ने यदि सब कुछ बनाया है तो ईश्वर के

1301
01:42:30,120 --> 01:42:34,160
लिए अच्छाई और बुराई में अगर जो गुण रूप से देखेंगे तो ईश्वर सभी

1302
01:42:34,160 --> 01:42:38,360
कर्मों को करने वाला होते हुए भी अकता है क्योंकि वो यहां के प्रपंच

1303
01:42:38,360 --> 01:42:42,360
रूपी संसार की अच्छाई बुराई से कनेक्ट नहीं है हम लोग कनेक्ट

1304
01:42:42,360 --> 01:42:46,440
है मुक्त ईश्वर मुक्त है तो फिर ये दोष

1305
01:42:46,440 --> 01:42:50,600
इस पर नहीं आ सकता कि क्या कहते हैं ईश्वर ने बुराई की ईश्वर

1306
01:42:50,600 --> 01:42:55,040
में दोष है तो इस कारण से ईश्वर कुछ भी कर सकता है

1307
01:42:55,040 --> 01:42:59,120
कुछ भी कुछ भी मतलब कुछ भी एक कार्य भी ऐसा नहीं हो सकता

1308
01:42:59,120 --> 01:43:03,200
जो वो ना कर सके और अगर हम यह कहे कि नहीं नेगेटिव वाले कार्य

1309
01:43:03,200 --> 01:43:07,320
नहीं कर सकता तो जो भी दुनिया में किसी को ईश्वर कहता है उसके द्वारा

1310
01:43:07,320 --> 01:43:11,480
न केन प्रकार ईश्वर के द्वारा जिसको बुराई कहता है वह कार्य होना

1311
01:43:11,480 --> 01:43:15,480
में प्रूफ कर दूंगा या फिर उसको मानना पड़ेगा ईश्वर की

1312
01:43:15,480 --> 01:43:19,800
सत्ता सब जगह नहीं है ईश्वर भविष्य नहीं देख सकता यह सब उसको मानना

1313
01:43:19,800 --> 01:43:23,840
पड़ेगा फिर वो ईश्वर नहीं रह जाएगा तो पहली बात ब्रह्मा

1314
01:43:23,840 --> 01:43:28,600
कुमारी का जो ईश्वर है व ईश्वर सिद्ध नहीं होता दूसरी बात वो सभी

1315
01:43:28,600 --> 01:43:32,800
चीजों को बनाने वाला नहीं है इसलिए ब्रह्मा कुमारी का ही जो ईश्वर

1316
01:43:32,800 --> 01:43:36,880
का कांसेप्ट है जिसने सब कुछ बनाया जिसने सब कुछ बनाया व

1317
01:43:36,880 --> 01:43:41,440
ईश्वर है तो ब्रह्मा कुमारी की अपनी ही जो परिभाषा उसके अनुसार भी

1318
01:43:41,440 --> 01:43:45,600
जिसने सब कुछ बनाया वो ईश्वर है तो वो उसने सब कुछ नहीं बनाया तो उन्ही

1319
01:43:45,600 --> 01:43:50,520
की परिभाषा के अनुसार जो ईश्वर है वो भी ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर सिद्ध नहीं होता

1320
01:43:50,520 --> 01:43:54,640
दूसरी बात यह है कि अगर हमय केवल कह देंगे कि ईश्वर ने सब कुछ

1321
01:43:54,640 --> 01:43:59,280
बनाया है और हम उसका कोई कनेक्शन नहीं फिट कर सकते

1322
01:43:59,280 --> 01:44:04,080
मनुष्य से तो उसमें दिक्कत आएगी फिर व्यक्ति को धर्म

1323
01:44:04,080 --> 01:44:08,120
व्यक्ति के लिए धर्म जो है अंतिम विकल्प नहीं होगा क्यों नहीं होगा

1324
01:44:08,120 --> 01:44:10,160
कि भाई ठीक है वो पावरफुल है हम

1325
01:44:10,160 --> 01:44:14,160
क्या करें इसमें जब तक आप वो कनेक्शन नहीं बताओगे कि तुम्हारी चाह

1326
01:44:14,160 --> 01:44:18,640
का वास्तविक विषय वही है है ना

1327
01:44:18,640 --> 01:44:23,120
दुनिया में कोई एलन मस्क है हम क्या करें

1328
01:44:23,120 --> 01:44:27,720
पूजा करने लगे उसकी तो सबसे ज्यादा पैसे वाला है

1329
01:44:27,720 --> 01:44:31,800
तो केवल ये आधार नहीं हो सकता उसकी पूजा करने का उसकी भक्ति

1330
01:44:31,800 --> 01:44:37,800
करने का तो यह बात एक हो गई दूसरी बात

1331
01:44:38,240 --> 01:44:42,600
है दूसरी बात एक हो गई हा ईश्वर

1332
01:44:42,600 --> 01:44:46,840
सिद्ध नहीं हो सकता पहली बात तो ये है कि ईश्वर को मनुष्य

1333
01:44:46,840 --> 01:44:51,280
के अंतिम विकल्प के रूप में ब्रह्मा कुमारी स्थापित नहीं करता है

1334
01:44:51,280 --> 01:44:55,520
दूसरी बात यह है कि ब्रह्मा कुमारी

1335
01:44:55,520 --> 01:44:59,640
के द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं हो पाता है तीसरी बात यह है कि ब्रह्मा

1336
01:44:59,640 --> 01:45:03,880
कुमारी जो टूटी फूटी एक परिभाषा लेकर चलता है कि सभी

1337
01:45:03,880 --> 01:45:07,880
चीजों को बनाने वाला रचयिता ईश्वर है इसलिए

1338
01:45:07,880 --> 01:45:11,880
पता चलता है कि दुनिया में ईश्वर है तो वह भी क्योंकि यह खुद कह रहे

1339
01:45:11,880 --> 01:45:16,000
हैं कि बहुत सारी चीजें जिसको ईश्वर ने नहीं बनाया तो उस रूप में भी इनकी

1340
01:45:16,000 --> 01:45:20,240
परिभाषा के अकॉर्डिंग ईश्वर सिद्ध नहीं होता दूसरी बात यह है कि इनके

1341
01:45:20,240 --> 01:45:24,880
द्वारा इनके अनुसार ईश्वर सर्व मान नहीं है सर्वव्यापक

1342
01:45:24,880 --> 01:45:25,380
नहीं है

1343
01:45:25,280 --> 01:45:29,320
सर्वत्र समान रूप से सत्ता धारण करने वाला नहीं है इसका अर्थ है

1344
01:45:29,320 --> 01:45:33,600
कि जीव की चाह का वास्तविक विषय नहीं है इनके अनुसार

1345
01:45:33,600 --> 01:45:37,760
और तीसरी बात यह है कि यह झूठ बोलते हैं कि हम

1346
01:45:37,760 --> 01:45:41,920
उसको भी धर्म मानते हैं इसको भी यह मानते हैं वह मानते हैं यह सब झूठ है पाखंड

1347
01:45:41,920 --> 01:45:46,080
है और वास्तव में वह कह रहा था कह

1348
01:45:46,080 --> 01:45:50,200
रहे थे भाई साहब कि हम धर्म नहीं मानते हैं ऋषभ जी ये कह रहे थे तोय झूठ

1349
01:45:50,200 --> 01:45:54,560
हुआ सत नहीं बोल रहे हैं और

1350
01:45:54,560 --> 01:45:58,560
और जो इन्होंने परिभाषा बताई किसी को भी धर्म कहने की उस परिभाषा

1351
01:45:58,560 --> 01:46:02,640
को खुद ही ठुकरा दिया जब इन्होंने मेरी बुक को ठुकराया और फिर उन्होंने कारण

1352
01:46:02,640 --> 01:46:06,800
बताया कि हम क्यों नहीं ठुकराते किसी को भी उस कारण को भी नहीं निभाया

1353
01:46:06,800 --> 01:46:10,880
जब इन्होंने मेरी बुक को ठुकराया यह सारा आज का जो इनके साथ जो

1354
01:46:10,880 --> 01:46:15,080
चर्चा हुई है वह एक निचोड़ निकला है

1355
01:46:15,080 --> 01:46:21,080
मोहित शर्मा जी जय श्री राम

1356
01:46:23,960 --> 01:46:28,160
आपका मट है ज

1357
01:46:28,160 --> 01:46:32,280
श्रीम आज भया एक बात तो क्लियर हो गई है जितने भी ने

1358
01:46:32,280 --> 01:46:36,760
अलग अलग पंथ बनाए कोई सिद्धांत सिद्ध होता ही नहीं

1359
01:46:36,760 --> 01:46:41,240
भी एक भी सिद्धांत कोई भी एकही बात किसी पर भी अड़ने की कोई बात जो है

1360
01:46:41,240 --> 01:46:45,280
सिद्ध होती ही नहीं क दूसरी बात चाता

1361
01:46:45,280 --> 01:46:49,360
हं जो साई बाबा है

1362
01:46:49,360 --> 01:46:53,760
मार्केट में नया भगवान आ लोगों ने पता नहीं कब से बना दिया फ बना

1363
01:46:53,760 --> 01:46:57,840
समझ नहीं आता ये कहा से आया जबक मैंने कहीं से

1364
01:46:57,840 --> 01:47:03,160
सुना है शायद पता नहीं स एक मिनट

1365
01:47:03,160 --> 01:47:07,160
रुकिए यह भाई साहब एक जो विरोधाभास प्रकट कर रहे हैं

1366
01:47:07,160 --> 01:47:11,200
देखिए पहली बात तो अपना नाम ही थोड़ा सा अगर आप धार्मिक चर्चा से जुड़े हुए

1367
01:47:11,200 --> 01:47:15,400
हैं तो नाम तो कम से कम थोड़ा मर्यादा वाला रखें और

1368
01:47:15,400 --> 01:47:19,560
दूसरी बात यह है कि माता जी ने निष्ठा पूर्वक अगर दूध पिलाया है तो आप सामने आकर के

1369
01:47:19,560 --> 01:47:24,160
विरोध करिए यहां पर अपनी बात को रखिए हो सकता है कि आपके मजबूत हो

1370
01:47:24,160 --> 01:47:28,240
कायरो की तरह व्यवहार करने से यही प्रतीत होगा कि आपके पास

1371
01:47:28,240 --> 01:47:32,800
जो है आपने बचपन में आपको कुपोषण है

1372
01:47:32,800 --> 01:47:36,800
आपको छ महीने तक कम से कम जो माता का दुख पान होता है व भी नहीं किया गया जिसके

1373
01:47:36,800 --> 01:47:39,000
कारण आप अपनी चेहरे को दिखा

1374
01:47:39,000 --> 01:47:43,360
नहीं पा रहे हैं कुपोषित है सामने नहीं आ पा रहे है

1375
01:47:43,360 --> 01:47:47,480
ना जी मोहित जी इस भाई को मैं जरा एक बात

1376
01:47:47,480 --> 01:47:51,560
कहना चाहूंगा मैं खुद भी नास्तिक रह चुका हूं मैंने भी साइंस पढ़ ली बहुत अच्छे से पढ़ ली

1377
01:47:51,560 --> 01:47:55,600
है शायद मैं इतने जदा कासे जाता ये भी नहीं जानता होगा पर फिर

1378
01:47:55,600 --> 01:47:59,800
भी भगवान की स्थिति को भगवान के सिद्ध होने को य साइंस नकार नहीं सकता

1379
01:47:59,800 --> 01:48:03,920
कोई कारण नहीं है अरे ये खुद ढूंढ रहा है अभी इसी के मुंह से बुलवा

1380
01:48:03,920 --> 01:48:08,440
उा इसको परर परर ऊपर आ जाए बस ये ऊपर आ जाए इसी के मुंह से बुलवा

1381
01:48:08,440 --> 01:48:12,920
उा बिल्कुल इनके पास कोई जवाब ही नहीं है

1382
01:48:12,920 --> 01:48:16,960
तो वही होगा अभी जो थोड़ी देर पहले भाई साहब कह रहे थे टॉपिक चेंज करिए

1383
01:48:16,960 --> 01:48:20,760
मैं इस टॉपिक के लिए नहीं आया

1384
01:48:20,760 --> 01:48:24,840
था अच्छा मैंने सुना था की जो लाला लाजपतराय

1385
01:48:24,840 --> 01:48:28,920
हमारे पंजाब केसरी मैंने सुना है कि उन्होने

1386
01:48:28,920 --> 01:48:33,760
साई बाबा की पिठाई कर दी थी चोरी करते पकड़े गए थे

1387
01:48:33,760 --> 01:48:38,320
किसने लाला लाजपत लाला लाजपत

1388
01:48:38,320 --> 01:48:42,640
राय हम लोग सैद्धांतिक विषय पर जानकारी रखते सैद्धांतिक विषय

1389
01:48:42,640 --> 01:48:46,720
पर बात करते हैं जो इस तरह के बस जानकारिया है इसके आधार पर बात करने

1390
01:48:46,720 --> 01:48:51,280
लेे तो बहुत कहीं का कहीं चलने लगेगा हुआ होगा कभी क्या हमें

1391
01:48:51,280 --> 01:48:55,480
ऐसा अगर मालूम भी होता है तो इन बातों को हम रखते नहीं है

1392
01:48:55,480 --> 01:48:59,520
जैसे कि कहीं प हरे कृष्ण वाला संकीर्तन

1393
01:48:59,520 --> 01:49:03,640
होता है वहां पर आजकल आगे लोगों में मैरिज

1394
01:49:03,640 --> 01:49:07,720
करा दी जा रही है सुनने में आया देखा भी है वीडियो अब हम इन बातों

1395
01:49:07,720 --> 01:49:11,920
को क्या रखें सैद्धांतिक धरातल प आप देखिए एक

1396
01:49:11,920 --> 01:49:15,920
ही तो सिद्धांत है आपको हमारे लगभग हर डिबेट में घुमा फिरा के वही सिद्धांत मिलेगा

1397
01:49:15,920 --> 01:49:20,120
सर्वशक्तिमान ईश्वर धर्म क्या है ईश्वर सिद्ध कैसे होता है देखिए उसी

1398
01:49:20,120 --> 01:49:24,240
में ही सब कुछ ध्वस्त है बिलकुल और हम यह तक

1399
01:49:24,240 --> 01:49:28,360
कहते हैं कि आप ये चीजें ये मेन चीजें दे दीजिए जिसके कारण धर्म धर्म

1400
01:49:28,360 --> 01:49:34,360
है हम आपके हो गए चलिए कहां चल ना

1401
01:49:36,240 --> 01:49:38,800
है

1402
01:49:38,800 --> 01:49:42,960
भैया जय श्री राम आप आ जाइए ना वो जो जो भी चीज आपको

1403
01:49:42,960 --> 01:49:47,120
गलत लग रही है आइए ऊपर या फिर फॉर्म भर के आइए किसी दिन

1404
01:49:47,120 --> 01:49:52,840
बैठते हैं कायरो वाला व्यवहार क्यों

1405
01:49:52,840 --> 01:49:57,000
भी थोड़ा अच्छा लगा थोड़ा अच्छा लगा थोड़ा सा आपकी भाषा शैली अभी

1406
01:49:57,000 --> 01:50:01,000
अभी सुधर गई ये होता है देखो अभी देखो भाषा शैली सुधर गई

1407
01:50:01,000 --> 01:50:05,120
मैं ईश्वर को मानता हूं बस अभी अभी हर मैसेज जो आ रहा था उसमें वो था

1408
01:50:05,120 --> 01:50:09,240
हास्य वाला व व्यंग चित्र था ना इससे पहले बहुत सारे कमेंट्स आ रहे थे

1409
01:50:09,240 --> 01:50:13,280
इनके तो उसमें हास्य वाले व्यंग चित्र वगैरह थे अब सम्मान आ गया मैं ईश्वर

1410
01:50:13,280 --> 01:50:17,400
मानता हूं मगर आपकी सम्मान आ गया देखो इसको चलती

1411
01:50:17,400 --> 01:50:21,520
चलती लाइफ में ही सुधार देते लोगों को तो सुधी कर हुआ अच्छा लगा

1412
01:50:21,520 --> 01:50:25,680
आप सुधरे और और आप जो है वो फॉर्म भरिए और जो चीज गलत लग रही

1413
01:50:25,680 --> 01:50:28,320
है उसका प्रतिकार करिए सामने से आकर के हम तो घर से

1414
01:50:28,320 --> 01:50:32,440
निकले ही थे बांध कर सर पे कफन जहां तेली पर लिए लो बड़ चले है ये

1415
01:50:32,440 --> 01:50:36,880
कदम जिंदगी तो अपनी महिमा मौत की महफिल में है सरफरोशी

1416
01:50:36,880 --> 01:50:41,240
की तमन्ना हमारे दिल में है हाथ जिन में हो जुनू कटते

1417
01:50:41,240 --> 01:50:45,520
नहीं तलवार से सर जो उड़ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से

1418
01:50:45,520 --> 01:50:46,020
दूर

1419
01:50:45,840 --> 01:50:49,960
रह पाए जो हमसे दम कहां मंजिल में है सर फरोशी की तमन्ना अब

1420
01:50:49,960 --> 01:50:54,040
हमारे दिल में है तो ये जो जजबा है ना यह

1421
01:50:54,040 --> 01:50:58,200
तब आता है जब हमारे पास सत्य की ताकत होती है यह ऐसे ही नहीं आता

1422
01:50:58,200 --> 01:51:02,600
य कॉन्फिडेंस ऐसे ही नहीं मौत से आख से आंख मिलाता है

1423
01:51:02,600 --> 01:51:06,960
कोई तो यह जजबा लाइए अपने अंदर जो प्रकट हो

1424
01:51:06,960 --> 01:51:11,360
निकलो अपने घर से बाहर अपने आरामदायक जो आपका जो वह है क्राइटेरिया

1425
01:51:11,360 --> 01:51:15,840
उससे बाहर निकलो ट टफ जिंदगी को

1426
01:51:15,840 --> 01:51:19,880
चुनो तब पता चलेगा तब पता आपके आचरण से

1427
01:51:19,880 --> 01:51:24,040
प्रतीत होगा कि आपके पास कौन सा सत्य है जो आपकी

1428
01:51:24,040 --> 01:51:28,280
एक कायरता है यही बता दे रही है कि आपको आपके पास सिद्धांत नहीं

1429
01:51:28,280 --> 01:51:32,360
है बिल्कुल ऐसे ही नहीं चले गए लोगों को कैंप में हा भैया आपका

1430
01:51:32,360 --> 01:51:36,800
ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं अका सिद्धांत था ना इसलिए गए

1431
01:51:36,800 --> 01:51:40,880
थे नहीं नहीं होता हमारे पास भी अकाट्य सिद्धांत ऐसे ही कहीं

1432
01:51:40,880 --> 01:51:44,920
कुछ दूसरी डीपी लगा कर के कमेंट कर रहे होते कहीं कहीं पर लोगों को

1433
01:51:44,920 --> 01:51:49,160
परेशान कर रहे होते अका सिद्धांत है ना

1434
01:51:49,160 --> 01:51:54,680
जी मोहित जी कम से कम कम से कम असली तो बन कर आओ

1435
01:51:54,680 --> 01:51:58,840
नहीं मैं वही कह रहा हूं यह चेहरा छिपाने में भी चेहरा

1436
01:51:58,840 --> 01:52:01,000
छिपाने में भी सिद्धांतों की कमी

1437
01:52:01,000 --> 01:52:05,680
है बिल्कुल है

1438
01:52:05,680 --> 01:52:09,800
और जिसको अपने सिद्धांत पर डाउट होता है

1439
01:52:09,800 --> 01:52:14,240
वह व्यक्ति घबराता है अपनी असलियत से भागता है

1440
01:52:14,240 --> 01:52:18,560
और किसको अपने सिद्धांत पर डाउट होता जिसका सिद्धांत अकाट्य नहीं

1441
01:52:18,560 --> 01:52:22,840
होता उसको डाउट होता है इस तरीके से मेरा स

1442
01:52:22,840 --> 01:52:26,920
कर सकता है अगर थोड़ा बहुत भी विचारक होगा उसको डाउट होता है तो

1443
01:52:26,920 --> 01:52:32,840
वो फिर इस तरीके से नहीं निकलता मैदान

1444
01:52:32,840 --> 01:52:38,480
में व सद ग्रंथ

1445
01:52:38,480 --> 01:52:42,480
वाले सद ग्रंथ वाले सद ग्रंथ वाले मोहित जी

1446
01:52:42,480 --> 01:52:46,520
मोहित जी क्या कह रहे बछ था

1447
01:52:46,520 --> 01:52:50,640
मुझे धन्यवाद भया ज श्रम जी जय श्री

1448
01:52:50,640 --> 01:52:56,640
राम ज श ठीक है तो

1449
01:52:59,720 --> 01:53:05,120
दो घंटे की हो चुकी है और यह हमारा नंबर है

1450
01:53:05,120 --> 01:53:09,240
7408

1451
01:53:09,240 --> 01:53:13,600
30169 इस पर आप जो है अगर हमारे वैचारिक मतभेद

1452
01:53:13,600 --> 01:53:18,120
रखते हमसे तो आप जो है इस पर आए इस पर ट करें

1453
01:53:18,120 --> 01:53:22,480
और जो है एक फॉर्म होगा एलॉजिक

1454
01:53:22,480 --> 01:53:28,480
डिशन के लिए उसको भर कर के आप आ सकते हैं

1455
01:53:28,720 --> 01:53:34,360
भैया हेलो एक मिनट एक मिनट

1456
01:53:34,360 --> 01:53:39,240
और आज का हमने जो देखा वो यही है

1457
01:53:39,240 --> 01:53:43,240
ब्रह्मा कुमारी के द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं है ब्रह्मा कुमारी का कहना यह है

1458
01:53:43,240 --> 01:53:47,960
कि ईश्वर वह है जो सब कुछ बनाता है मगर

1459
01:53:47,960 --> 01:53:52,040
ब्रह्मा कुमारी केही अनुसार आगे चलकर के ईश्वर जो है कई ऐसी चीजें है जो

1460
01:53:52,040 --> 01:53:56,520
नहीं बना बता है तो ब्रह्मा कुमारी

1461
01:53:56,520 --> 01:54:00,560
की परिभाषा के अनुसार जो कि पूरी नहीं है क्योंकि वो अंतिम विकल्प के रूप

1462
01:54:00,560 --> 01:54:05,440
में स्थापित नहीं कर रही ईश्वर को तो उसके अनुसार

1463
01:54:05,440 --> 01:54:09,480
भी ईश्वर सिद्ध नहीं हो रहा है क्योंकि उनका ईश्वर जो है सब कुछ नहीं बना रहा है

1464
01:54:09,480 --> 01:54:13,880
ब्रह्मा कुमारी के अनुसार दूसरी बात ब्रह्मा कुमारी

1465
01:54:13,880 --> 01:54:19,480
के ईश्वर की सत्ता हर जगह नहीं है और तीसरी बात

1466
01:54:19,480 --> 01:54:24,120
की बहुत से कार्य है जो वो नहीं कर सकता सत्ता

1467
01:54:24,120 --> 01:54:29,440
हर जगह नहीं है बहुत से कार्य वो नहीं कर सकता है और

1468
01:54:29,440 --> 01:54:33,840
दूसरी बात ब्रह्मा कुमारी झूठ बोलता है यह पाखंड करता है कि

1469
01:54:33,840 --> 01:54:38,040
हमारे लिए सभी धर्म धर्म है व झूठ है मुसलमान को धर्म नहीं मानता

1470
01:54:38,040 --> 01:54:42,400
है वो तो हिंदू को भी नहीं मानता तो वो धर्म नहीं मानता पाखंड है धर्म

1471
01:54:42,400 --> 01:54:43,800
कहना किसी को

1472
01:54:43,800 --> 01:54:47,880
भी ब्रह्मा कुमारी अपनी मुरली कोई धर्म मानता है

1473
01:54:47,880 --> 01:54:53,880
यह सत्यता है और

1474
01:54:53,920 --> 01:54:59,440
तीसरा क्या है

1475
01:54:59,440 --> 01:55:03,640
कि उसका यह कहना है कि हम धर्म इसलिए कह देते हैं

1476
01:55:03,640 --> 01:55:07,760
कि अपमान ना हो तो इसका मतलब हिंदू को धर्म भी इसलिए

1477
01:55:07,760 --> 01:55:12,400
कह रहा है अपमान ना हो मुस्लिम को धर्म भी इसलिए कह रहा है अपमान ना हो और क्रिश्चियनिटी

1478
01:55:12,400 --> 01:55:16,440
को भी धर्म इसलिए कह रहा है कि अपमान ना हो वो बात और है कि वो

1479
01:55:16,440 --> 01:55:20,880
मेरी किताब को धर्म इसलिए नहीं कह रहा है मेरे मान अपमान से उसे चिंता नहीं है क्यों

1480
01:55:20,880 --> 01:55:25,440
क्योंकि मेरे फॉलोअर्स उतने नहीं जितने क्रिटी मुस्लिम और हिंदू जम के इसलिए

1481
01:55:25,440 --> 01:55:29,440
वो यहां पर ल करके कह रहा है कि मैं तुम्हारी किताब

1482
01:55:29,440 --> 01:55:34,120
को कभी भी स्वीकार नहीं करूंगा ठीक

1483
01:55:34,120 --> 01:55:40,000
है एक शंका

1484
01:55:40,000 --> 01:55:44,280
है आप फम भर कर के आइए जोहर जी

1485
01:55:44,280 --> 01:55:49,200
और जहर जहर जी फम भर के आइए और हमको

1486
01:55:49,200 --> 01:55:53,200
अपना पान कराइए इससे हम मूर्च हो जाए

1487
01:55:53,200 --> 01:55:59,200
आपका पान करके सुरेंद्र विष्ण जी

1488
01:55:59,560 --> 01:56:03,600
बोलिए अजर अमर और नित्य है सर्वशक्तिमान है तो अजर अमर

1489
01:56:03,600 --> 01:56:06,600
नित्य भी

1490
01:56:06,600 --> 01:56:11,840
होगा तो

1491
01:56:11,840 --> 01:56:15,960
जब आवश्यकता कुछ नहीं है यं

1492
01:56:15,960 --> 01:56:20,000
ही आवश्यकता उसको ईश्वर अच्छा ईश्वर है ईश्वर ने सृष्टि

1493
01:56:20,000 --> 01:56:24,040
बनाई है ना जी बद

1494
01:56:24,040 --> 01:56:28,680
तो ईश्वर ने सृष्टि बनाई है तो उसको सृष्टि बनाने की आवश्यकता क्या

1495
01:56:28,680 --> 01:56:32,760
पड़ी तो सचिदानंद स्वरूप है सुनि

1496
01:56:32,760 --> 01:56:37,400
वो सच्चिदानंद स्वरूप है आवश्यकता कुछ नहीं है वो अपने उसके मन है

1497
01:56:37,400 --> 01:56:42,000
उसको आवश्यकता नहीं अच्छा सुनिए उसने वेद शास्त्र दिए

1498
01:56:42,000 --> 01:56:46,640
ठीक है अगर ब्रह्मा कुमारी की मान ले तो मुरली देता

1499
01:56:46,640 --> 01:56:50,720
है समाज की मान ले तो वेद देता है इस्लाम की मान ले तो

1500
01:56:50,720 --> 01:56:55,160
कुरान देता है तो उसको कुरान मुरली

1501
01:56:55,160 --> 01:56:59,400
वेद की आवश्यकता क्या पड़ी सीधे अपने मन में सोचता

1502
01:56:59,400 --> 01:57:04,320
और मन के अंदर सारा ज्ञान आ

1503
01:57:04,320 --> 01:57:08,560
जाता मगर उसने प्रॉपर एक प्रोटोकॉल रचा के वेद पढ़ो

1504
01:57:08,560 --> 01:57:12,680
यह करो यह सब रचा अकॉर्डिंग टू य जो विभिन्न व

1505
01:57:12,680 --> 01:57:17,040
है फिलॉसफी तो यह आवश्यकता नहीं है य उसने सृष्टि

1506
01:57:17,040 --> 01:57:22,760
में किसी पेड़ को लंबा किसी पेड़ को छोटा यही तो संसार है

1507
01:57:22,760 --> 01:57:27,360
समझ रहे अच्छा इसका दूसरा पर्सपेक्टिव ये है

1508
01:57:27,360 --> 01:57:31,760
जैसे ये आवश्यकता वाली बात वो भी कहते हैं अलंकार वाले वो कहते

1509
01:57:31,760 --> 01:57:35,920
भा क्या कहते हैं आवश्यकता क्या है उसको आवश्यकता नहीं है वो बिना

1510
01:57:35,920 --> 01:57:40,600
आए भी कर सकता है पर वो आ कर के करना चाह रहा है

1511
01:57:40,600 --> 01:57:45,160
और इसके पीछे उसका एक रीजन होता है कि हमारा जो पर्सपेक्टिव है जहां ईश्वर

1512
01:57:45,160 --> 01:57:49,200
जो मनुष्य है वह कमजोर है वो बाधित है और उसकी दृष्टि सीमित

1513
01:57:49,200 --> 01:57:53,320
है तो उस सीमित दृष्टि के अनुसार व एक अवतार लेता

1514
01:57:53,320 --> 01:57:57,360
हैय मतलब ये जो संसार है ये एक प्रपंच

1515
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है उसके लिए संसार

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मा अवतार लिया तो जो मतलब निर्गुण सा

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निराकार ईश्वर है तो सर्वशक्तिमान है तब वो

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अवतार लेगा तो अवतार लेते टाइम भी उसके अंदर सर्वशक्ति विद्यमान

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रहेगी बिल्कुल बिल्कुल लक्षण साम

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01:58:18,680 --> 01:58:22,760
से वस्तु साम मैं आपको इसका उदाहरण देता हूं बहुत

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बढ़िया एक उदाहरण देता हूं आजकल वो एआई चल रहा है एई

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देखा है जी जी जी अच्छा एआई में

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अगर हम लोग ऐसा भी हो रहा है कि एआई का कोई कैरेक्टर

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बन करके आ जाता है मेल या फीमेल रूप में और

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वह एआई से आप जो भी पूछना चाहते हैं वह आपसे बात करता है सामने

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से जी देखते हैं जी जी

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हो रहा है ना ऐसा कई ऐसी बैंक कई ऐसे और दूसरी

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एप्लीकेशन है जिसमें की वो जो एप्लीकेशन जो भी कुछ बताना चाहती है

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वो एक कैरेक्टर आ जाता है और वह कैरेक्टर आ कर के आपसे बात

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करता

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है अब वो जो कैरेक्टर आ कर के आपसे बात कर रहा

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है उसको ऐसी कोई चीज है जो ना पता

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हो और पीछे एआई को पता

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हो नहीं ना तो वो जो कक्टर है ना व

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का अवतार है क्या है अ ए आई का

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अवतार और वोह आकर के आपसे बात इसलिए कर पा रहा है जिससे कि

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आप कनेक्ट हो पा रहे हो आपके अंदर भावनाए आ पा रही है आप

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बहुत दिन तक उसको यूज करने लगो तो व आपके दोस्त किसी ना

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किसी थोड़ा सा ऐसा आपसे भावना बन जाएगी अवतार

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व ए आई का अवतार है व समझ रहे

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वो आपसे बात करेगा मेल या फीमेल वॉइस में और आकर के वो जो है

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वो एआई ही है जो पूरी नॉलेज है वही है मगर

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उसने एक अवतार लिया जिससे कि आप उसके साथ व्यवहार कर

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सको यही अवतार ईश्वर का है

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तो फिर भ्राता जी जैसे कि ईश्वर ने अवतार लिया अवतार लेने से पहले

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02:00:10,080 --> 02:00:14,400
उसकी सर्वशक्तिमान वाली सिद्धियां थी शक्तियां थी कि वो मतलब

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त्रिकाल दर्शी भी यदि जब वो अवतार लेगा तो अवतार लेने के बाद भी

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एक तो मानव रूप में अवतार लेगा यानी कि देह रूप में अवतार

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लेगा तो जब उसमें दे रूप में जो शक्ति विद्यमान हो जाएगी

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तो निराकार होते हुए जो उसमें शक्तिया थी वह विद्यमान रहेगी दोनों प बिल्कुल

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02:00:31,720 --> 02:00:33,440
बिल्कुल जब

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मैं वही तो कह रहा हूं कि वो जो कैरेक्टर आपको ए आई का जो एक करैक्टर

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है एआई का जो अवतार है क्या कुछ ऐसा होगा जो ए आई

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02:00:41,600 --> 02:00:45,440
को मालूम हो और उस अवतार को ना मालूम

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02:00:45,440 --> 02:00:50,080
हो भाई एआई से आप क्वेश्चन करते हो ना

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02:00:50,080 --> 02:00:55,280
जी तो ए आई को जवाब देता

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02:00:55,280 --> 02:00:59,360
है तो क्या कुछ ऐसा होगा जो उस अवतार को ना मालूम हो ए आई

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02:00:59,360 --> 02:01:04,040
को मालूम हो दोनों को मालूम

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02:01:04,040 --> 02:01:08,440
रहेगा सेम ऐसे ही ईश्वर का अवतार है

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ईश्वर ने अवतार इसलिए लिया है क्योंकि जब आपके सामने कोई उसका रूप नहीं होगा

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02:01:12,480 --> 02:01:16,480
तो आपके अंदर एक कनेक्शन जो होता है ना भावनात्मक वो नहीं बन पाएगा

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02:01:16,480 --> 02:01:21,320
आप व्यवहार नहीं कर पाओगे अब देखो जैसे हम लोग

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02:01:21,320 --> 02:01:25,320
अपने चेहरे के साथ में वीडियो बनाते हैं

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02:01:25,320 --> 02:01:29,400
तो इसके साथ व्यवहार ज्यादा हो पाएगा या जिसने चेहरा नहीं दिखाया उसके

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02:01:29,400 --> 02:01:35,400
साथ व्यवहार ज्यादा हो पाएगा

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बताइए जैसे कि सिंपल बात है हमारे

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02:01:40,440 --> 02:01:45,240
यहां पर ईश्वर के साकार स्वरूप को लिया गया तो

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02:01:45,240 --> 02:01:49,760
हमारे ईश्वर सनातन ईश्वर के ऊपर कितनी फिल्में है

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02:01:49,760 --> 02:01:55,760
और अल्लाह के ऊपर कितनी फिल्में है

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व्यवहार नहीं कर पा रहे ना वहा पर ईश्वर के साथ ईश्वर

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02:02:00,000 --> 02:02:04,040
के साथ व्यवहार नहीं हो पा रहा है वहा क्योंकि ईश्वर का कोई रूप ही प्राप्त

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02:02:04,040 --> 02:02:08,280
नहीं है कैसे हवा की फिल्म बना दे तो व्यवहार

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02:02:08,280 --> 02:02:12,280
करने के लिए ईश्वर का रूप होता है आप

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02:02:12,280 --> 02:02:16,600
कहां से मैं वसे

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02:02:16,600 --> 02:02:20,640
रहने वाला जोधपुर का बीएचयू से स्टडी कर रहा हं शास्त्री

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02:02:20,640 --> 02:02:25,280
बहुत बढ़िया ठीक है फिर अब किसी और दिन

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02:02:25,280 --> 02:02:29,840
आप संतुष्ट हो गए जी बता जी

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02:02:29,840 --> 02:02:34,200
चलिए भया भैया हा

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02:02:34,200 --> 02:02:38,600
आप वो वीडियो से परिचित है जो मतलब वर्तमान रामानुजाचार्य

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02:02:38,600 --> 02:02:43,200
जी जो है राघवाचार्य जी उन्होंने मतलब उनके

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02:02:43,200 --> 02:02:47,240
क्लेम को मतलब डिसन किया है स्वामी नारायण वाले को

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02:02:47,240 --> 02:02:51,200
कि मतलब जो बताते कि वो रामानुजाचार्य के सिद्धांत पर

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02:02:51,200 --> 02:02:55,240
चलते लेकिन कि नहीं चलते हो

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मालूम नहीं है करिएगा ठीक है करिएगा हा

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उन्होंने बहुत वित वीडियो बनाया हां करिए चलिए

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सभी को जय श्री राम जय श्री राम भैया
