1
00:00:02,800 --> 00:00:06,960
तो सभी को जय श्री राम हमारे साथ में किशन

2
00:00:06,960 --> 00:00:11,000
दास जी है एक बार आप इन्ह देख चुके हैं

3
00:00:11,000 --> 00:00:13,160
ऑलरेडी

4
00:00:13,160 --> 00:00:17,240
और अभी कुछ दिन में बाहर था लखनऊ

5
00:00:17,240 --> 00:00:21,360
में नहीं था तो थोड़ा सा जो

6
00:00:21,360 --> 00:00:26,080
रेगुलर चीजें य्यब पर आपको देखने को मिल रही थी वो नहीं मिल

7
00:00:26,080 --> 00:00:30,400
पाई किशन दास जी से हमारी चर्चा अधूरी रह गई थी

8
00:00:30,400 --> 00:00:34,480
और हमने उस दिन चर्चा जो की थी वह य की थी कि धर्म की

9
00:00:34,480 --> 00:00:38,480
व्याख्या क्या है जिस पर उन्हें ठीक से बात नहीं हो पाई किशन

10
00:00:38,480 --> 00:00:43,520
दास जी से और नास्तिकता का

11
00:00:43,520 --> 00:00:47,680
क्या समाधान है रामपाल जी के पास इस बारे में भी

12
00:00:47,680 --> 00:00:52,400
हमारी कोई बात नहीं हो पाई उस

13
00:00:52,400 --> 00:00:56,480
दिन तो आज हम जो

14
00:00:56,480 --> 00:01:01,120
कोई नया सवाल ना लेकर के जो रामपाल जी के जो वक्तव्य स्टेटमेंट

15
00:01:01,120 --> 00:01:06,080
है उन पर हम लोग बात करते हैं

16
00:01:06,080 --> 00:01:10,160
जिसके लिए विशेष तौर पर आप आए हैं ना किशन दास जी

17
00:01:10,160 --> 00:01:14,400
रामपाल जी के बताए

18
00:01:14,400 --> 00:01:18,400
स्टेटमेंट जी आवाज आ रही है मेरी

19
00:01:18,400 --> 00:01:22,480
हां आ रही है आपकी आवाज मुझे कम आ रही है

20
00:01:22,480 --> 00:01:28,440
मुझे को कम आ रही है सभी को

21
00:01:28,440 --> 00:01:32,960
जी नहीं ठीक है ठीक है बताइए

22
00:01:32,960 --> 00:01:37,280
देखिए जो लिंक मांग रहे हैं वो अभी धैर्य रखें बारबार

23
00:01:37,280 --> 00:01:41,760
लिंक ना मांगे आवश्यकता होने पर लिंक दे दिया जाएगा आपको

24
00:01:41,760 --> 00:01:45,960
अभी हमारी किशन दास जी की बात हो रही है तब तक धैर्य बनाइए धैर

25
00:01:45,960 --> 00:01:50,680
रखिए तो किशन दास जी जैसे

26
00:01:50,680 --> 00:01:54,840
कि बात वही आ जाती है एक स्टेटमेंट है रामपाल दास

27
00:01:54,840 --> 00:01:59,160
जी का कि सभी धर्म ग्रंथों

28
00:01:59,160 --> 00:02:04,000
से सभी पवित्र जो धर्म के सद ग्रंथ है

29
00:02:04,000 --> 00:02:07,440
उनसे प्रमाणित करके उन्होंने बता दिया है सब कुछ

30
00:02:07,440 --> 00:02:11,960
है ना हा यानी कि वो

31
00:02:11,960 --> 00:02:16,280
मुस्लिम को भी धर्म मानते हैं जो इस्लाम है उसको भी वो धर्म मानते

32
00:02:16,280 --> 00:02:20,320
हैं और वो क्रिश्चियनिटी को भी धर्म

33
00:02:20,320 --> 00:02:24,640
मानते हैं और वो जितने भी इस दुनिया

34
00:02:24,640 --> 00:02:28,840
में कोई होंगे उसको वो धर्म मानते हैं

35
00:02:28,840 --> 00:02:33,000
ठीक है कौन तो मैं यह जानना चाह रहा

36
00:02:33,000 --> 00:02:37,040
था कि किसी भी आईडियोलॉजी को किसी भी शिक्षा

37
00:02:37,040 --> 00:02:41,360
को ज्ञान को बुक को धार्मिक मानने

38
00:02:41,360 --> 00:02:47,360
के लिए मतलब क्या है उनका कारण क्यों मानते

39
00:02:48,440 --> 00:02:52,880
हैं धार्मिक बुक को मानने का कारण क्या है

40
00:02:52,880 --> 00:02:57,120
किसी भी बुक को धार्मिक धर्म से जोड़ने का उनका आधार क्या है क्यों जोड़ते

41
00:02:57,120 --> 00:03:01,120
हैं जैसे मान लीजिए कि मैं अभी ये कहूं कि भाई

42
00:03:01,120 --> 00:03:05,520
मेरे पास एक फरिश्ता आया भगवान का और उसने मुझे ये

43
00:03:05,520 --> 00:03:10,080
शिक्षाए दी है और मेरे नाम से एक आइडल

44
00:03:10,080 --> 00:03:14,320
जीी चल जाए कि शिवा मत या शिवांश

45
00:03:14,320 --> 00:03:18,760
मत एक आइडल जीी चल जाए ठीक है तो

46
00:03:18,760 --> 00:03:22,320
क्या इसको भी वो धर्म मान

47
00:03:22,320 --> 00:03:26,400
लेंगे तो उसका दूसरा प्रमाण भी तो कहीं ना कहीं होना चाहिए ना तब भी

48
00:03:26,400 --> 00:03:30,520
तो मान सकते हैं ना तो मैं वही मैं वही पूछ रहा हूं क्या आधार

49
00:03:30,520 --> 00:03:33,600
है किसी को भी धर्म मानने

50
00:03:33,600 --> 00:03:37,800
का किसी को भी धर्म मानने की मतलब आपने बता दिया

51
00:03:37,800 --> 00:03:42,000
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब धर्म ठीक है वो अपने

52
00:03:42,000 --> 00:03:46,200
अपना धर्म मान रहे हैं सुनि

53
00:03:46,200 --> 00:03:50,240
हम जो है वेद का विरोध जहां पर भी किसी

54
00:03:50,240 --> 00:03:54,360
ने एक पॉइंट पर भी कर दिया उसको हम धर्म नहीं मानते नास्तिक मानते

55
00:03:54,360 --> 00:03:58,880
हैं और धर्म तो बिल्कुल ही नहीं मानते ठीक है तो

56
00:03:58,880 --> 00:04:03,200
अब बात हो रही है कि वो स्टेटमेंट देते हैं कि हमने सभी धर्मों के पवित्र

57
00:04:03,200 --> 00:04:03,700
सद

58
00:04:03,560 --> 00:04:08,360
ग्रंथों को खोल कर दिखा दिया तो वह हिंदू जम को भी मान रहे हैं धर्म

59
00:04:08,360 --> 00:04:12,480
मुस्लिम को भी धर्म मान रहे सबको धर्म ही मान रहे हैं तो अब

60
00:04:12,480 --> 00:04:16,680
किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार करने का कारण वो आधार

61
00:04:16,680 --> 00:04:21,480
क्या है क्यों मानते हैं कौन मानते

62
00:04:21,480 --> 00:04:25,640
हैं रामपाल जी किसी भी किताब को अगर धर्म

63
00:04:25,640 --> 00:04:29,760
माने मैं कह रहा हूं यह मेरी धार्मिक किताब है

64
00:04:29,760 --> 00:04:33,880
रामपाल जी धार्मिक किताब मानेंगे या नहीं मानेंगे मानेंगे तो किस आधार

65
00:04:33,880 --> 00:04:38,240
पर मानेंगे वह आधार क्या है देखिए

66
00:04:38,240 --> 00:04:42,480
ऐसा है कि जैसे मुसलमान है तो मुसलमान अपना वो धर्म

67
00:04:42,480 --> 00:04:46,720
ही उसको मानते हैं मुस्लिम धर्म मुसलमान मुसलमान ने कहीं

68
00:04:46,720 --> 00:04:50,960
भी अपनी किताब में उसको धर्म नहीं लिखा है नहीं लिखा लेकिन

69
00:04:50,960 --> 00:04:55,440
जैसे आम भाषा में क्या कहते हैं जैसे सिख धर्म अब सिख धर्म नहीं है

70
00:04:55,440 --> 00:04:59,840
ठीक है ये एक गुरु औ शिष्य की परंपरा बनाई गई है ठीक

71
00:04:59,840 --> 00:05:03,880
इसका कोई सिख धर्म से नाना नहीं लेकिन बोलते क्या है जैसे हिंदू धर्म

72
00:05:03,880 --> 00:05:07,880
में आपके मैं पूछ रहा हूं आपके जो रामपाल दास जी है

73
00:05:07,880 --> 00:05:12,720
वो इस्लाम को धर्म मानते हैं या नहीं मानते

74
00:05:12,720 --> 00:05:17,000
धर्म तो एक ही है वो आपने उनके सत्संग

75
00:05:17,000 --> 00:05:18,640
में अगर सुना है

76
00:05:18,640 --> 00:05:22,720
कि जैसे मुसलमान धर्म है या सिख धर्म है ऐसा इस लाइन का

77
00:05:22,720 --> 00:05:27,200
मतलब क्या है कि सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथ तो सभी

78
00:05:27,200 --> 00:05:31,320
यानी कि सभी धर्मों के यानी कि इलाम यानी कि एक से ज्यादा धर्म

79
00:05:31,320 --> 00:05:36,000
हो गए वो तो ज्यादा

80
00:05:36,000 --> 00:05:40,960
नहीं वो उनका मानना नहीं है यह आपस में जो

81
00:05:40,960 --> 00:05:45,040
दुनिया को बताने के लिए दुनिया जैसे मान रही है अपना अपना धर्म सब

82
00:05:45,040 --> 00:05:49,120
अलग अलग बना के बैठे हैं तो उनके लिए यानी

83
00:05:49,120 --> 00:05:54,360
कि शुरुआत में किसी को समझाने के लिए उन्होंने यह किया

84
00:05:54,360 --> 00:05:58,520
कि यह क्या कहते हैं उन्होंने किसी को जैसे कोई कुछ मान रहा

85
00:05:58,520 --> 00:06:02,640
है तो उस माने को ही पहले बात करते हुए फिर आगे

86
00:06:02,640 --> 00:06:06,680
उन्होंने बात की है हा अच्छा वास्तविकता

87
00:06:06,680 --> 00:06:11,360
में धर्म एक ही है और वह धर्म कौन सा है क्या

88
00:06:11,360 --> 00:06:15,520
है सनातन धर्म है मानव धर्म है य नहीं

89
00:06:15,520 --> 00:06:19,800
मानव धर्म है कि सनातन धर्म है सनातन धर्म है सनातन

90
00:06:19,800 --> 00:06:24,520
धर्म में ही हम तो मनुष्य है ना हमारा य इस संसार के अंदर मानवता

91
00:06:24,520 --> 00:06:30,040
धर्म निभाना है यानी कि इस्लाम जो है वो धर्म नहीं है

92
00:06:30,040 --> 00:06:33,640
धर्म एक ही है मैं पूछ रहा हूं इस्लाम धर्म है

93
00:06:33,640 --> 00:06:37,800
कि नहीं नहीं इस्लाम धर्म नहीं

94
00:06:37,800 --> 00:06:41,840
है तो इस्लाम के जो ग्रंथ है उनको धार्मिक ग्रंथ

95
00:06:41,840 --> 00:06:45,880
कहेंगे क्या कहेंगे पवित्र वो उनके मानने वाले

96
00:06:45,880 --> 00:06:50,680
पवित्र ही मानते हैं जैसे आप नहीं मानते

97
00:06:50,680 --> 00:06:55,560
क्या रामपाल जी नहीं मानते उनके ग्रंथों को पवित्र

98
00:06:55,560 --> 00:06:59,600
बिल्कुल मानते हैं पवित्र ही है प है तो

99
00:06:59,600 --> 00:07:03,800
मैं वही पूछ रहा हूं किसी भी ग्रंथ को धार्मिक सद ग्रंथ कहने का कारण

100
00:07:03,800 --> 00:07:08,440
क्या है आधार क्या है मैंने इसमें प लिख दिया मान लीजिए

101
00:07:08,440 --> 00:07:12,640
कि भैया यह करो वो करो वो करो मेरे पास भी ईश्वर का आया था

102
00:07:12,640 --> 00:07:16,680
मैंने इसमें लिख दिया और लोग इसको मानने लग गए 100 डेढ़ स

103
00:07:16,680 --> 00:07:20,880
फिर बाद में 500 फिर हजार तो क्या रामपाल जी

104
00:07:20,880 --> 00:07:25,840
इसमें कही हुई सभी बातों को धर्म कहने लगेंगे

105
00:07:25,840 --> 00:07:29,960
या फिर इस किताब को धर्म कहने लगेंगे धार्मिक कहने लगेंगे कहने

106
00:07:29,960 --> 00:07:34,840
लगेंगे सद ग्रंथ कहने लगेंगे तो मेरा पूछना यह है कि

107
00:07:34,840 --> 00:07:38,920
किसी भी किताब इत्यादि को धार्मिक

108
00:07:38,920 --> 00:07:43,160
सद ग्रंथ पवित्र सद ग्रंथ के रूप में स्वीकार करने का आधार

109
00:07:43,160 --> 00:07:48,880
क्या है अगर आप मुझसे सवाल पूछेंगे तो मैं सटासट बता

110
00:07:48,880 --> 00:07:54,000
दूंगा धार्मिक सद ग्रंथ मानने का आधार क्या

111
00:07:54,000 --> 00:07:58,080
है आधार तो यही है कि जो अपने

112
00:07:58,080 --> 00:08:02,200
सद ग्रंथ जो मुस नों के लिए पवित्र कुरान है तो वो उसको

113
00:08:02,200 --> 00:08:06,280
मान के फाइनल उसको मान के चल रहे हैं तो भाई साब मैं आपको एक बात पूछ रहा

114
00:08:06,280 --> 00:08:11,160
हूं ये अगर मुझे कुछ लोग मानने लगेंगे वो इसको भी पवित्र कहेंगे

115
00:08:11,160 --> 00:08:15,600
इसको सत्य कहेंगे तो क्या मेरे मुझे फॉलो

116
00:08:15,600 --> 00:08:20,880
करने वालों के कारण क्या रामपाल दास जी भी इसको पवित्र और सद ग्रंथ कहने

117
00:08:20,880 --> 00:08:25,440
लगेंगे कारण क्या है सद ग्रंथ कहने का

118
00:08:25,440 --> 00:08:29,560
सत ग्रंथ कहने का कारण यही है कि वो उसमें जो लिखी सच्चाई है

119
00:08:29,560 --> 00:08:33,680
जो उनको जो धर्म मान के चल रहे हैं जो परमात्मा भगवान

120
00:08:33,680 --> 00:08:37,760
को अल्लाह को वो अपने अपने हिसाब से उसको मान के चल रहे हैं

121
00:08:37,760 --> 00:08:41,800
तो उनको सद ग्रंथ ही कहेंगे नहीं वो मान के चल रहे हैं वो नहीं पूछ रहा हूं

122
00:08:41,800 --> 00:08:46,200
मैं रामपाल दास जी क्या मानते हैं क्यों सद ग्रंथ कहते हैं

123
00:08:46,200 --> 00:08:50,440
किसी भी ग्रंथ

124
00:08:50,440 --> 00:08:54,640
को सत ग्रंथ इसलिए कहते हैं उ उसके अंदर जो लिखाई

125
00:08:54,640 --> 00:08:58,840
सच्चाई है ना तो सत ग्रंथ वही होते हैं ना जिसमें भाई भगवान का ज्ञान

126
00:08:58,840 --> 00:09:02,840
दिया हुआ है परमात्मा यानी कि जिस जिस बुक के

127
00:09:02,840 --> 00:09:06,880
अंदर एक जो सच्चाई है वो लिखी होगी वो उनके

128
00:09:06,880 --> 00:09:11,040
लिए सद ग्रंथ है हां और बुरे

129
00:09:11,040 --> 00:09:15,760
ग्रंथ क्या है झूठे ग्रंथ क्या है

130
00:09:15,760 --> 00:09:19,920
झूठे ग्रंथ तो जब मनुष्य ने अपने अपने हिसाब से सब बना लिए

131
00:09:19,920 --> 00:09:24,200
वो झूठ ही है जो वेद और शास्त्रों से जो मेल नहीं खाता है

132
00:09:24,200 --> 00:09:26,960
वो झूठे ही

133
00:09:26,960 --> 00:09:32,680
है तो कुरान शास्त्रों से मेल खाती

134
00:09:32,680 --> 00:09:37,720
है कुरान वेदों से मेल खाती है

135
00:09:37,720 --> 00:09:41,800
हां कुछ ऐसी बातें है जो मतलब उसमें मेल खाती है कुछ ऐसी

136
00:09:41,800 --> 00:09:45,840
बातें हैं हम तो यानी कि पूरी तरह मेल नहीं

137
00:09:45,840 --> 00:09:48,480
खाती

138
00:09:48,480 --> 00:09:52,560
है पूरा तो नहीं खाती है या

139
00:09:52,560 --> 00:09:57,120
तो फिर बात तो वही आ गई अगर किसी चीज में कुछ गंदगी है

140
00:09:57,120 --> 00:10:01,080
तो हम उसको पवित्र कैसे कह सकते हैं

141
00:10:01,080 --> 00:10:05,320
और अगर कुछ अगर कुछ कुछ मेल खाने के कारण पवित्र कह रहे हैं

142
00:10:05,320 --> 00:10:05,820
तो

143
00:10:05,520 --> 00:10:09,720
फिर एक आतंकवादी में भी कुछ ऐसी चीज मिल जाएंगी जो मेरे अंदर

144
00:10:09,720 --> 00:10:13,760
भी है तो क्या मैं और आतंकवादी एक जैसे हो जाएंगे तो पुराणों

145
00:10:13,760 --> 00:10:17,760
के अंदर भी आप उनको पूरा मतलब सत मानते

146
00:10:17,760 --> 00:10:21,960
हैं जी अक्षरस उसमें

147
00:10:21,960 --> 00:10:26,000
कुछ मतलब अगर कहीं भी ऐसा मास खाने का अगर लिखा है तो

148
00:10:26,000 --> 00:10:30,200
फिर वो किसका क्या मानेंगे फिर आप आप आकर के हमें क्वेश्चन करिएगा

149
00:10:30,200 --> 00:10:34,320
हम तब उत्तर देंगे फिलहाल अभी बात हो रही है कि किसी भी उसको सद

150
00:10:34,320 --> 00:10:40,320
ग्रंथ कहने का रामपाल दास जी का मुख्य आधार क्या

151
00:10:40,640 --> 00:10:44,960
है सत ग्रंथ पवित्र है सब उसमें जो लिखी बात है उनको जब

152
00:10:44,960 --> 00:10:49,360
जब आप ही तो कह रहे हो कि उसम कुरान में कुछ बातें ऐसी है जो अच्छी नहीं

153
00:10:49,360 --> 00:10:53,360
है हां तो वो ज्ञान किसने दिया फिर उसके ऊपर बात होगी

154
00:10:53,360 --> 00:10:57,480
ना कि किसने दिया क्यों दिया कुरान मैं पूछ रहा

155
00:10:57,480 --> 00:11:01,800
हूं आप समझे नहीं जैसे कॉपी है ये नोटबुक है

156
00:11:01,800 --> 00:11:05,880
इसके अंदर आप कह रहे हैं कि सारी बातें सच्ची नहीं है

157
00:11:05,880 --> 00:11:09,960
तो फिर इसको सद ग्रंथ क्यों कहोगे आप और अगर इसको सद ग्रंथ कहोगे

158
00:11:09,960 --> 00:11:14,400
तो जिसके अंदर सारी बातें सच्ची होंगी उसे क्या कहोगे

159
00:11:14,400 --> 00:11:18,440
और इसको सद ग्रंथ जो आप कह रहे हो अगर थोड़ी सी

160
00:11:18,440 --> 00:11:20,520
बातें मैच हो जाने से दो चीजें

161
00:11:20,520 --> 00:11:24,880
इक्वल हो जाती है तो फिर मैं ये मानना पड़ेगा कि एक आतंकवादी

162
00:11:24,880 --> 00:11:29,520
के अंदर जो चीजें होती है एक आतंकवादी अ

163
00:11:29,520 --> 00:11:33,680
लोगों का मर्डर करता है मातृ शक्तियों के साथ दुष्कर्म

164
00:11:33,680 --> 00:11:37,720
करता है मगर कुछ अंशों में हो सकता है कि उसको किसी पर दया

165
00:11:37,720 --> 00:11:42,000
आ जाए वो पानी पिला दे कुछ अंशों में हो सकता है वो किसी जानवर को सहला

166
00:11:42,000 --> 00:11:46,120
दे किसी को दवा दे दे कुछ अंशों में हो सकता है वो क्या

167
00:11:46,120 --> 00:11:50,360
कहते कोई और अच्छा कार्य कर दे कुछ अंशों में हो सकता है वो भोजन करे भोजन

168
00:11:50,360 --> 00:11:54,960
तो कुछ अंशों में उसने जो अगर कुछ ठीक काम कर दिए तो क्या मैं और आतंकवादी

169
00:11:54,960 --> 00:11:59,400
एक जैसे हो जाएंगे क्या मैं और आतंकवादी

170
00:11:59,400 --> 00:12:03,640
जैसे तभी होंगे जब हम पूरी तरीके से एक जैसे होंगे तो वेदों वेद अगर सद

171
00:12:03,640 --> 00:12:07,640
ग्रंथ है और कुरान को भी आप सद ग्रंथ कह रहे तो इसका मतलब कुरान में

172
00:12:07,640 --> 00:12:11,760
कोई ऐसी चीज नहीं होनी चाहिए जो वेद में वेद के विरोध में हो आप खुद कह

173
00:12:11,760 --> 00:12:15,760
रहे हैं कि कुरान में कुछ ऐसी चीज जो वेद के विरोध में है फिर भी

174
00:12:15,760 --> 00:12:20,000
आप उसको सद ग्रंथ कैसे कह रहे मैंने वेद के विरोध नहीं कहा मैंने कहा

175
00:12:20,000 --> 00:12:24,120
उसमें कुछ जो चीज है वो आपने बताया वेद के

176
00:12:24,120 --> 00:12:30,120
मतलब उसम है वो बातें जो उसे मेल खाती है

177
00:12:30,280 --> 00:12:34,720
थोड़ा सा आज मेरे को फीवर है ज्वर है मुझे

178
00:12:34,720 --> 00:12:35,680
तो

179
00:12:35,680 --> 00:12:40,280
आप लोगों को थोड़ा सा इसलिए दिख रहा होगा चेहरे पर जी क्या कह रहे

180
00:12:40,280 --> 00:12:44,480
थे मतलब कुरान में भी ऐसी को जो बात है वह वेदों से मेल

181
00:12:44,480 --> 00:12:48,560
खाती है मतलब कोई भी ऐसी बात नहीं है जो वेदों से मेल

182
00:12:48,560 --> 00:12:52,680
ना खाती हो नहीं ऐसा नहीं है

183
00:12:52,680 --> 00:12:56,840
वेदों से मेल खाती है जो बात है उसमें लिखी गई है भाई साहब मैंने पूछा

184
00:12:56,840 --> 00:13:01,400
क्या कुरान में सारी बातें एज इट वेदों जैसी है

185
00:13:01,400 --> 00:13:05,400
कोई विरोध तो नहीं है वेदों से नहीं

186
00:13:05,400 --> 00:13:09,640
एजटी तो सारी नहीं है उसमें कुछ है तो उसका तो

187
00:13:09,640 --> 00:13:13,720
फर मतलब कुछ मतलब कुछ बातें हैं जो वेदों का विरोध

188
00:13:13,720 --> 00:13:17,800
करती है हां तो जब वो

189
00:13:17,800 --> 00:13:22,840
वेदों का विरोध करती है तो व सद ग्रंथ कैसे हुआ झूठ बोलती है ना वो कुछ

190
00:13:22,840 --> 00:13:26,920
कुछ ऐसे तो मैं ये क्या बता रहा हूं आपसे जैसे भगवत गीता है

191
00:13:26,920 --> 00:13:31,840
भगवत गीता का भी तो मतलब वो इसम देखिए यके

192
00:13:31,840 --> 00:13:36,080
आपके रामपाल जी अपने गुरु जी से पूछेगा कि अगर भगवत गीता में काल

193
00:13:36,080 --> 00:13:40,160
ने कहीं कहीं पर अपने मन का बोल दिया है तो फिर आप उसको सद ग्रंथ क्यों

194
00:13:40,160 --> 00:13:44,480
कह रहे हो हम नहीं कहते हम सद ग्रंथ उसे कहते हैं जो जिसकी एक अक्षरस

195
00:13:44,480 --> 00:13:48,080
बात सत्य हो व

196
00:13:48,080 --> 00:13:50,880
स बात बताओ मुझे आप एक बात बताओ

197
00:13:50,880 --> 00:13:54,960
मुझे की झूठा व्यक्ति किसे कहते

198
00:13:54,960 --> 00:13:59,160
हैं झूठा व्यक्ति किसे कहते झूठ बोलता है उसे कहते है

199
00:13:59,160 --> 00:14:03,360
झूठ बोलता है क्या वह झूठा व्यक्ति पूरे दिन में जो झूठ बोलता

200
00:14:03,360 --> 00:14:07,360
है क्या वह पूरे दिन में एक बात भी सत्य नहीं कहता

201
00:14:07,360 --> 00:14:11,720
होगा वो तो उसके ऊपर डिपेंड करता है ना आप एक बात बताओ

202
00:14:11,720 --> 00:14:15,920
जो झूठ बोलता है सुनो मैं पूछ रहा हूं

203
00:14:15,920 --> 00:14:20,000
मैं बता रहा हूं उसके ऊपर डिपेंड नहीं करेगा अभी आप बताओगे

204
00:14:20,000 --> 00:14:24,120
जो व्यक्ति झूठ बोलता है भूख लगने पर वह कह रहा है अपनी मां से मां

205
00:14:24,120 --> 00:14:30,120
भूख लगी है खाना दो इतने में उसने सत्य बोला ना

206
00:14:30,160 --> 00:14:34,160
तो फिर उसको झूठा नहीं कहना चाहिए उसको सच्चा कहना चाहिए क्योंकि उसने कहीं ना कहीं तो

207
00:14:34,160 --> 00:14:38,080
सच बोल [संगीत]

208
00:14:38,080 --> 00:14:42,240
दिया देखिए ऐसा है कि हर आदमी के अंदर सब आदमी बुरे

209
00:14:42,240 --> 00:14:47,080
नहीं होते हैं और सब आदमी अच्छे भी नहीं हो भाई साहब के झूठ व्यक्ति किसे

210
00:14:47,080 --> 00:14:51,480
कहेंगे तो झूठ बोलता है उसे कहेंगे और किसे कहेंगे तो जो

211
00:14:51,480 --> 00:14:56,720
जो झूठ बोलता है या जो सिर्फ झूठ बोलता

212
00:14:56,720 --> 00:15:01,360
है तो झूठ बोलता है उसी कहेंगे ना अब

213
00:15:01,360 --> 00:15:05,480
भाई साहब मैंने आपसे ये पूछ रहा हूं कि कोई जिसे आप झूठा

214
00:15:05,480 --> 00:15:09,640
कह रहे हैं वो थोड़ा बहुत सखत भी बोलता है तो जब आप कह रहे हो कि

215
00:15:09,640 --> 00:15:13,800
कुरान या कोई भी ऐसा शास्त्र है जो थोड़ा बहुत झूठ थोड़ा बहुत सत्य बोल रहा

216
00:15:13,800 --> 00:15:18,080
है मगर हम कहेंगे उसको सद ग्रंथ तो इस हिसाब से तो झूठे

217
00:15:18,080 --> 00:15:22,320
व्यक्ति का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा दुनिया में क्योंकि झूठा व्यक्ति

218
00:15:22,320 --> 00:15:26,280
भी किसी ना किसी अंश में सत्य जरूर

219
00:15:26,280 --> 00:15:30,480
बोलेगा उसको दर्द होगा झूठे व्यक्ति को भी झूठे व्यक्ति

220
00:15:30,480 --> 00:15:35,160
को भी अगर दर्द होगा तो वो कहेगा मेरे दर्द हो रहा है ये लो ये सत्य बोल दिया

221
00:15:35,160 --> 00:15:39,440
उसने बोला कि नहीं बोला हा झूठ बोलने

222
00:15:39,440 --> 00:15:43,720
वाला व्यक्ति भी किसी ना किसी अंश में सत्य बोल रहा है तो फिर

223
00:15:43,720 --> 00:15:47,880
जो झूठ बोल रहा है उसको आप झूठा कहते हो

224
00:15:47,880 --> 00:15:52,080
भले ही वह सत्य भी बोल रहा हो तो फिर जो सद ग्रंथ है जिनको

225
00:15:52,080 --> 00:15:57,280
आप सद ग्रंथ कह रहे हो क्यों कह रहे हो जबक वो झूठ भी बोल रहे

226
00:15:57,280 --> 00:16:01,480
हैं समझ पा नहीं उसमें आप

227
00:16:01,480 --> 00:16:06,200
वो कैसे निर्णय करेंगे आपकी उसमें झूठ क्या सही क्या वो आप कैसे निर्णय करेंगे

228
00:16:06,200 --> 00:16:10,280
वो तो बात की बात है मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं किसी को भी सद ग्रंथ

229
00:16:10,280 --> 00:16:12,320
कहने का आधार क्या

230
00:16:12,320 --> 00:16:16,360
है मैंने आपसे सवाल क्या किया मैंने आपसे सवाल क्या किया

231
00:16:16,360 --> 00:16:21,080
है मैंने आपसे सवाल क्या कियाई मेरा आधार क्या है मैं बता दू

232
00:16:21,080 --> 00:16:25,480
सद ग्रंथ कहने का आधार क्या है कि हमारे जो परंपरा

233
00:16:25,480 --> 00:16:30,120
प्राप्त वैदिक वो है शास्त्र ठीक है

234
00:16:30,120 --> 00:16:34,200
जो ईश्वर की प्राप्ति में सहायक हो मोक्ष की प्राप्ति में

235
00:16:34,200 --> 00:16:38,280
सहायक हो सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्राप्ति में सहायक हो वो सद

236
00:16:38,280 --> 00:16:42,320
ग्रंथ है और जिनका अक्षरस एक भी बात हम

237
00:16:42,320 --> 00:16:46,400
काट ना सके वोह सत ग्रंथ है वो हमारे लिए सद

238
00:16:46,400 --> 00:16:50,680
ग्रंथ अब आप अपना सद ग्रंथ का आधार बताइए रुकिए

239
00:16:50,680 --> 00:16:55,200
रुकिए आपने कह दिया कि उस कोई भी बात काट नहीं सके

240
00:16:55,200 --> 00:16:59,720
ठीक है पुराण एक दूसरे का ही खंडन कर रहे हैं

241
00:16:59,720 --> 00:17:03,960
भाई साहब आप आप पुराणों पर प्रश्न लिख लीजिए आप लेकर

242
00:17:03,960 --> 00:17:08,120
आइएगा मैं आपको जवाब दूंगा अभी मैं आपसे आपका आधार पूछ रहा हूं आप

243
00:17:08,120 --> 00:17:12,240
अपने क्वेश्चन का आंसर दीजिए जैसे कि मैं आपको बता दूं

244
00:17:12,240 --> 00:17:16,280
जैसे कि रेलवे में ट्रेन में जब कोई टिकट यात्री बिना टिकट के

245
00:17:16,280 --> 00:17:20,360
पकड़ा जाता है तो उस समय व उसको यह कहने का अधिकार नहीं बहुत सारे लोग घूम रहे हैं

246
00:17:20,360 --> 00:17:24,800
तुम भी तो बिना टिकट के हो आप अपना टिकट दिखाइए

247
00:17:24,800 --> 00:17:27,440
मैंने आपसे अभी क्वेश्चन किया है क्योंकि अगर

248
00:17:27,440 --> 00:17:31,480
आप पुराणों का चैप्टर खोल तो हमारी जो वो है ना वो बदल जाएगी

249
00:17:31,480 --> 00:17:35,960
ट्रैक ही बदल जाएगा हम फिर उस पर चलने लगेंगे अभी मैंने आपसे क्वेश्चन किया

250
00:17:35,960 --> 00:17:41,960
सबसे पहले आप किसी को भी सद ग्रंथ मानने का आधार

251
00:17:44,120 --> 00:17:48,240
बताइए तो सत ग्रंथ मानने का आधार तो यही बताया मैंने आपको

252
00:17:48,240 --> 00:17:52,440
धर्म से जो रिलेटिव जो लोग मान रहे हैं अपने अपने धर्म को जो जो लोग मान

253
00:17:52,440 --> 00:17:58,440
रहे नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं रामपाल दास

254
00:17:59,240 --> 00:18:04,840
का आधार क्या है किसी को भी सद ग्रंथ मानने

255
00:18:04,840 --> 00:18:08,840
का सद ग्रंथ मानने का आधार है जो वेदों से जो जिसकी

256
00:18:08,840 --> 00:18:13,400
वाणी जो बात मेल खाए ना वह है आधार

257
00:18:13,400 --> 00:18:17,400
नास्तिकों की किताब में भी कोई ना कोई ऐसी बात मिल जाएगी जो वेदों से

258
00:18:17,400 --> 00:18:21,480
मेल खाएगी वो भी सद ग्रंथ है यह मैं अभी कॉपी में लिख दे रहा हूं

259
00:18:21,480 --> 00:18:25,640
ईश्वर की भक्ति करो ये लो उसमें

260
00:18:25,640 --> 00:18:29,720
पूरा काम माना कि वो पूरा ही मतलब जो बात वही

261
00:18:29,720 --> 00:18:34,640
पूरी सही है मैंने ये नहीं कहा पूरा माना कि नहीं माना मैंने ये नहीं कहा

262
00:18:34,640 --> 00:18:38,640
ये लो मैंने लिख दिया ईश्वर की भक्ति करो दिख रहा है अब ये हो गया

263
00:18:38,640 --> 00:18:42,640
सद ग्रंथ हो गया अ ये ऐसे लिखने

264
00:18:42,640 --> 00:18:46,720
ग्रंथ हो गया नहीं नहीं ऐसे कोई लिख देगा गाय की भक्ति करो हो जाएगा

265
00:18:46,720 --> 00:18:52,000
फिर तो मैंने कहा ईश्वर की भक्ति करो यही तो वेद कह रहे

266
00:18:52,000 --> 00:18:56,120
है वेद तो क्या कह रहे वे तो वेदों में तो सिर्फ एक ब्रह्म की

267
00:18:56,120 --> 00:19:00,440
बात तक भक्ति बताई गई है उसे आगे फर

268
00:19:00,440 --> 00:19:04,520
तो आप मुझे बता दो किसी को भी सद ग्रंथ मानने का आधार क्या

269
00:19:04,520 --> 00:19:09,400
है आपका आप बता दो ना

270
00:19:09,400 --> 00:19:13,680
आप अपनी परिभाषा बता ही नहीं रहे इतनी देर हो गई घंटे हो गए अरे

271
00:19:13,680 --> 00:19:14,520
मैं बताता

272
00:19:14,520 --> 00:19:19,840
रहा हूं आप समझ कर रहे हैं फ बात तो वही है

273
00:19:19,840 --> 00:19:24,040
नान अरे तो मुसलमान अपने को मानते

274
00:19:24,040 --> 00:19:28,760
यह मत बताओ रामपाल दास जी किसी भी किताब को

275
00:19:28,760 --> 00:19:33,000
ग्रंथ धार्मिक पवित्र किस आधार पर कहते हैं

276
00:19:33,000 --> 00:19:37,040
वो आधार बताओ मुझे मुसलमानों की बात मत बताओ रामपाल दास

277
00:19:37,040 --> 00:19:41,400
जी किस आधार पर कहते हैं वो बताओ रामपाल

278
00:19:41,400 --> 00:19:45,680
जी तो मतलब वेदों वेदों को सत्य मानते

279
00:19:45,680 --> 00:19:49,680
भगवत गीता को ही मत सद ग्रंथ कहते हैं अरे

280
00:19:49,680 --> 00:19:54,240
मैं पूछ रहा हूं आधार क्या है किसी को सद ग्रंथ मानने

281
00:19:54,240 --> 00:19:58,680
का जिसमें परमेश्वर की जो बात लिखी गई है जो

282
00:19:58,680 --> 00:20:04,640
उ से मेल खाती है फ किनसे इसीलिए तो

283
00:20:04,640 --> 00:20:08,720
किनसे सद ग्रंथों से अरे या

284
00:20:08,720 --> 00:20:12,880
जब हम ये चेक कर रहे हैं कि सद ग्रंथ किसी को कब कहा जाएगा तो आप कह रहे हो

285
00:20:12,880 --> 00:20:17,240
कि जिनकी बात सद ग्रंथों से मेल खाएगी उनको सद ग्रंथ कहा

286
00:20:17,240 --> 00:20:21,320
जाएगा तो जिस मैं क्या बता जिस महापुरुष ने जो लीला की

287
00:20:21,320 --> 00:20:25,320
है जो बताया है यहां पर इस संसार में आके तो उनकी

288
00:20:25,320 --> 00:20:29,800
जो वाणी है उनसे जो मेल खाएगी तो वही तो सद ग्रंथ हुए ना मेल खाएगी

289
00:20:29,800 --> 00:20:33,840
वेदों से गीता से कुरान से गुरु ग्रंथ साहिब

290
00:20:33,840 --> 00:20:37,960
से सबसे मेल खाएगी तभी तो वो होगा ना मतलब

291
00:20:37,960 --> 00:20:42,280
आपका कहने का मतलब है कि सद ग्रंथ व है जो गीता वेद

292
00:20:42,280 --> 00:20:46,680
कुराण से मेल खाए हां बिल्कुल वो

293
00:20:46,680 --> 00:20:51,320
सद ग्रंथ है हां तो जो

294
00:20:51,320 --> 00:20:55,600
जिनकी वाणी उनसे मेल खाएगी ना वही तो फर स किनकी

295
00:20:55,600 --> 00:21:00,600
वाणी किनकी वाणी परमात्मा

296
00:21:00,600 --> 00:21:04,720
की परमात्मा की वाणी हां तो परमात्मा

297
00:21:04,720 --> 00:21:08,720
की वाणी आपके हिसाब से कौन सी है हमारे

298
00:21:08,720 --> 00:21:12,880
हिसाब से तो कबीर सागर है और अमृत ग्रंथ साहिब है आपके

299
00:21:12,880 --> 00:21:17,520
हिसाब से कबीर सागर है वेद नहीं

300
00:21:17,520 --> 00:21:21,560
है परमात्मा की वाणी की बात कर रहे हैं ना आप हां वाणी की

301
00:21:21,560 --> 00:21:25,720
बात बता रहा हूं कबीर सागर है और अमर ग्रंथ साहिब है मैंने आपसे पूछा वेद

302
00:21:25,720 --> 00:21:29,760
नहीं है उसमें जो लिखा है वो वेदों से मेल खाएगा कुरान शरीफ से भी मिल

303
00:21:29,760 --> 00:21:35,760
खाएगा मैंने आपसे पूछा वेद आपके लिए परमेश्वर की वाणी नहीं

304
00:21:37,680 --> 00:21:42,160
है हैं परमेश्वर की वाणी है वेद

305
00:21:42,160 --> 00:21:46,240
यार कितने दोगले पने की बात करते हो इसीलिए बात करना अच्छा थोड़ी ना लगता आप लोगों

306
00:21:46,240 --> 00:21:50,960
से क्या दोगले की बात बात बोल दो क्या दोगले पन की बात करी

307
00:21:50,960 --> 00:21:55,160
क्या बोला अभी बोला कि हमारे लिए तो कबीर सागर है अब जब मैंने उसको कुरे

308
00:21:55,160 --> 00:21:59,320
द तो आप आ गए हां वो भी परमेश्वर की कैसे बात बदलते हो नहीं नहीं

309
00:21:59,320 --> 00:22:04,760
परमात्मा की वाणी की बात बोली है आपने बोला लिए तो कबीर सागर

310
00:22:04,760 --> 00:22:09,000
है अरे तो कबीर सागर में मैं क्या बोला हूं परमात्मा की वाणी तो कबीर

311
00:22:09,000 --> 00:22:13,120
सागर में लिखी गई है अब उसम वो वाणी वेदों से बेल खाएगी

312
00:22:13,120 --> 00:22:17,440
अरे मेरे भाई आपके लिए परमेश्वर की वाणी

313
00:22:17,440 --> 00:22:23,440
कौन सी है वेद है कबीर सागर है कौन सी है

314
00:22:29,360 --> 00:22:34,080
कबीर सागर है वेद भी है ठीक है वेदों में तो बताया है

315
00:22:34,080 --> 00:22:39,400
दोनों है सागर के अंदर पूरा ज्ञान है मतलब जन नहीं पूरा

316
00:22:39,400 --> 00:22:42,920
जन कुरान

317
00:22:42,920 --> 00:22:47,040
कुरान कुरान में भी जो बात जो परमात्मा की वाणी से मिल खाएगी

318
00:22:47,040 --> 00:22:51,920
व सत्य है जो बात नहीं मैंने आपसे जो बात नहीं पूछी है

319
00:22:51,920 --> 00:22:56,240
आप उसको सद बात बोलिए फिर अभी मैं पूछ रहा स ग्र

320
00:22:56,240 --> 00:23:00,440
अभी मैंने पूछा सद ग्रंथ आप किसी को सद ग्रंथ

321
00:23:00,440 --> 00:23:04,560
कब कहेंगे उसका आधार बताइए मुझे नहीं यह

322
00:23:04,560 --> 00:23:08,680
आपके ऊपर आप उसको मानो या ना मानो य तो मैं मानने की बात नहीं कह

323
00:23:08,680 --> 00:23:12,760
रहा हूं मैं आपका सिद्धांत पूछ रहा हूं किसी को भी आप

324
00:23:12,760 --> 00:23:17,080
रामपाल दास के फॉलोवर और रामपाल दास सद ग्रंथ

325
00:23:17,080 --> 00:23:21,080
किस आधार पर कहते हैं किसी

326
00:23:21,080 --> 00:23:26,800
भी बुक को सद ग्रंथ किस आधार पर कहते

327
00:23:26,800 --> 00:23:30,800
हैं जो परमा को परमात्मा सिद्ध कर दे उसकी जो

328
00:23:30,800 --> 00:23:34,920
वाणी जो उन्होंने जो लीला की है वह उसके अंदर जो उसका

329
00:23:34,920 --> 00:23:39,080
गवा बने वो उस जो परमात्मा की बात

330
00:23:39,080 --> 00:23:43,280
करे जो परमात्मा की बात करे वोह सद ग्रंथ

331
00:23:43,280 --> 00:23:47,280
है उसके जो लीला करी उसका वर्णन भी तो उसम मिल रहा है

332
00:23:47,280 --> 00:23:51,360
ना वेदों में कुरान में मतलब एक

333
00:23:51,360 --> 00:23:56,440
तरीके से जो परमात्मा के बारे में बताया व सद ग्रंथ है

334
00:23:56,440 --> 00:24:00,000
हा अच्छा

335
00:24:00,000 --> 00:24:04,040
तो जैसे कि अब जो परमात्मा के बारे में बता रहा है वो सत्य बात

336
00:24:04,040 --> 00:24:08,360
हो गई है ना हा तो उसी किताब में जब झूठ

337
00:24:08,360 --> 00:24:12,800
बात लिखी है तो उसको क्या कहेंगे झूठ

338
00:24:12,800 --> 00:24:16,920
ग्रंथ उसी किताब में झूठ बात लिखी तो वही तो बात कह रहा हूं कि

339
00:24:16,920 --> 00:24:21,000
जो मतलब वो जो जो अब सूक्ष्म वेद है पांचवा

340
00:24:21,000 --> 00:24:25,080
वेद अब उस वाणी से जो मु से ये नहीं निकल है कि

341
00:24:25,080 --> 00:24:29,200
हम ये डोरा गलत पीटते हैं सद ग्रंथ मानने का वाकता में हमारा

342
00:24:29,200 --> 00:24:33,240
सद ग्रंथ है हमारा कबीर सागर और जो कबीर सागर से मैच

343
00:24:33,240 --> 00:24:37,240
करने वाली बातें होती है वो हम सबसे दिखा देते हैं बाकी हम नहीं मानते

344
00:24:37,240 --> 00:24:41,360
किसी शास्त्र को उसके अंदर यह लिखा है

345
00:24:41,360 --> 00:24:45,480
कि आप वो जिहाद करिए

346
00:24:45,480 --> 00:24:49,520
मारिए या काफिर को मारिए तो वो क्या पूछा है

347
00:24:49,520 --> 00:24:53,880
भाई साब मैंने आपसे क्या पूछा है किसी को भी सद ग्रंथ

348
00:24:53,880 --> 00:24:58,000
मैंने सद पंक्ति नहीं कही सद वक्तव्य नहीं कहा मैंने

349
00:24:58,000 --> 00:25:02,040
कहा किसी भी बुक को सद ग्रंथ मानने का आधार

350
00:25:02,040 --> 00:25:06,480
क्या है अगर उसमें लिखी हुई सच्ची बातें

351
00:25:06,480 --> 00:25:10,600
उसको सद ग्रंथ कहने का आधार है तो फिर उसमें लिखी हुई झूठ

352
00:25:10,600 --> 00:25:15,520
बातों के आधार पर आप उसको झूठ ग्रंथ भी कहेंगे

353
00:25:15,520 --> 00:25:19,680
क्या उसको देखि उसमें वो काम

354
00:25:19,680 --> 00:25:24,000
मतलब सही है क्या गलत है क्या सही है वह निर्णय तो फिर व संति

355
00:25:24,000 --> 00:25:27,920
करेंगे मैंने पूछा ये है वो सही है कि नहीं है वो बाद में

356
00:25:27,920 --> 00:25:32,160
बात करूंगा ना कि उसमें वाकई में कोई बात गलत है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं

357
00:25:32,160 --> 00:25:36,480
जिन ग्रंथों में सच लिखा है और झूठ भी लिखा है तो सच के कारण

358
00:25:36,480 --> 00:25:41,680
उसे आप सद ग्रंथ कह रहे हैं तो क्या झूठ के कारण आप झूठ ग्रंथ

359
00:25:41,680 --> 00:25:45,680
कहेंगे अगर उसमें पूरा ही पूरा झूठ लिखा तो झूठ ग्रंथ कहेंगे

360
00:25:45,680 --> 00:25:50,040
अगर आधा सच्चाई है आधा गलत है तो फिर उसको सद ग्रंथ ही कहेंगे

361
00:25:50,040 --> 00:25:54,320
अब उसम तो वो बात निकालनी पड़ेगी

362
00:25:54,320 --> 00:25:58,560
मिनट झूठ ग्रंथ कहने के लिए तो पूरा झूठा होना चाहिए

363
00:25:58,560 --> 00:26:02,800
और सद ग्रंथ कहने के लिए आधा भी चल जाएगा चल जाएगा

364
00:26:02,800 --> 00:26:06,960
नहीं उसमें मतलब वो निकालना पड़ेगा सच्चाई क्या

365
00:26:06,960 --> 00:26:11,000
है और गलत क्या है वो तो निकालना पड़ेगा ना मैं पूछ रहा हूं कि

366
00:26:11,000 --> 00:26:15,240
झूठ आधा चल जाएगा आधा झूठ मैं समझ गया आप यह कहना चाहते

367
00:26:15,240 --> 00:26:19,320
हैं कहलाना चाहते हैं कि आप उसको झूठ भी मानो समझ गए

368
00:26:19,320 --> 00:26:23,400
आप ये कहना ये सब सद ग्रंथ नहीं है यह सच्चाई है वो

369
00:26:23,400 --> 00:26:27,840
मैं बाहर निकलवा रहा हूं आपकी मैं आप बाहर निकलवा रहे हो मैं आप

370
00:26:27,840 --> 00:26:32,080
खुद समझ रहे हो इस बात को तो सभी सम नहीं तो आप बोलो ना

371
00:26:32,080 --> 00:26:36,280
हा हमारे लिए वेद सद ग्रंथ नहीं है

372
00:26:36,280 --> 00:26:40,320
किसने बोला वेद सद ग्रंथ नहीं है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं

373
00:26:40,320 --> 00:26:42,920
कि जिसमें आधी झूठ आधी बात भी लिखी

374
00:26:42,920 --> 00:26:47,320
है अगर वो सद ग्रंथ है तो जिसमें पूरी बात लिखी है सच्ची

375
00:26:47,320 --> 00:26:51,680
वो क्या है वो पांचवा वेद है सूक्ष्म वेद

376
00:26:51,680 --> 00:26:55,840
मैंने कहा इस तरीके से उसकी जो क्वालिटी बताते हुए आपने उसको

377
00:26:55,840 --> 00:26:59,840
जो वो दिया है ना गुण गुण गुण गुण से आपने उसको

378
00:26:59,840 --> 00:27:04,320
उपनाम दिया है सद ग्रंथ ऐसा उपनाम बताइए नाम मत

379
00:27:04,320 --> 00:27:08,400
बताइए गुणवाचक नाम बताइए जैसे गुणवाचक नाम है उसका

380
00:27:08,400 --> 00:27:12,480
अपना नाम वेद है मगर गुणवाचक नाम आपने दिया उसको सद ग्रंथ

381
00:27:12,480 --> 00:27:16,160
तो गुणवाचक नाम बताइए

382
00:27:16,160 --> 00:27:20,520
उसका गुणवाचक नाम अमर ग्रंथ साहिब है य

383
00:27:20,520 --> 00:27:23,240
ये गुणवाचक नाम

384
00:27:23,240 --> 00:27:29,240
है सद ग्रंथ

385
00:27:33,080 --> 00:27:37,080
ठीक है दोबारा से बात करते हैं आप मुझे बताइए आपने

386
00:27:37,080 --> 00:27:41,360
कहा कि किसी को भी किसी भी बुक को सद ग्रंथ

387
00:27:41,360 --> 00:27:45,560
मानने का आधार आपका यह है कि उसमें थोड़ी भी अगर सच्ची बात होगी

388
00:27:45,560 --> 00:27:50,440
थोड़ी झूठ भी होगी तो भी हम उसे सद ग्रंथ कहेंगे ठीक है

389
00:27:50,440 --> 00:27:54,520
ठीक है तो क्या यह मेरी जो नोटबुक है इसमें मैंने बात कही है

390
00:27:54,520 --> 00:27:58,600
ईश्वर की भक्ति करो यह सच्ची बात है परमेश्वर की करो

391
00:27:58,600 --> 00:28:03,240
सच्ची बात है लिख दूं लिख देता हूं रुको एक मिनट

392
00:28:03,240 --> 00:28:08,120
अब लिखने से तो थोड़ी हो जाएगा कि आपने लिख दिया और उसम क्या लिखा हुआ है

393
00:28:08,120 --> 00:28:12,160
एक मिनट अभी बात

394
00:28:12,160 --> 00:28:16,320
करेंगे भक्ति

395
00:28:16,320 --> 00:28:20,440
करो यह देखो लिख दिया

396
00:28:20,440 --> 00:28:26,440
ठीक है अब बताइए क्या यह सद ग्रंथ है

397
00:28:28,240 --> 00:28:32,280
क्या लिखा आपने भक्ति करो पूर्ण

398
00:28:32,280 --> 00:28:36,800
ब्रह्म की भक्ति करो हां अच्छा

399
00:28:36,800 --> 00:28:40,840
और और क्या लिखा और उसमें बहुत कुछ लिखा

400
00:28:40,840 --> 00:28:45,080
है एक बात तो सत्य लिख दी ना अब एक बात सत्य लिख

401
00:28:45,080 --> 00:28:49,120
दी बहम की भक्ति करो हम

402
00:28:49,120 --> 00:28:53,200
हम अ पूर्ण ब्रम की भक्ति कैसे होगी उसम अरे फिर वही

403
00:28:53,200 --> 00:28:57,280
बात मैंने आपने कहा जिसमें आधी बात भी सत्य लिखी होगी वो

404
00:28:57,280 --> 00:29:01,960
भी सद ग्रंथ है आपने कहा ना तो क्या ये आपके लिए

405
00:29:01,960 --> 00:29:06,040
यह सद ग्रंथ है आपके

406
00:29:06,040 --> 00:29:10,040
लिए वो मुझे नहीं दिख रहा क्या है इसमें क्या अरे मैंने

407
00:29:10,040 --> 00:29:14,480
कहा तो यह दिखा तो दिया पूर्ण ब्रम की भक्ति करो यह देख लो

408
00:29:14,480 --> 00:29:18,720
दोबारा अब यह सद ग्रंथ हो गया

409
00:29:18,720 --> 00:29:22,960
केवल इतना लिखने से पूर्ण ब्रम की भक्ति करो फ मुझे वो आधार

410
00:29:22,960 --> 00:29:27,040
बताइए निश्चित पैरामीटर क्या है आपका किसी को

411
00:29:27,040 --> 00:29:30,200
सद ग्रंथ बोलने

412
00:29:30,200 --> 00:29:34,720
का जो विश्वसनीय माने जाते हैं वह सद ग्रंथी है

413
00:29:34,720 --> 00:29:39,560
अरे भाई विश्वसनीय मेरे लिए जो है वो आपके लिए है क्या

414
00:29:39,560 --> 00:29:44,920
मेरे लिए शंकराचार्य जो भाष्य है वो विश्वसनीय है वो आपके लिए है

415
00:29:44,920 --> 00:29:49,200
क्या आप वो बताइए कि आपका आधार क्या है किसी को सद

416
00:29:49,200 --> 00:29:53,320
ग्रंथ मानने का हा शंकराचार्य अगर शंकराचार्य जी

417
00:29:53,320 --> 00:29:58,200
की जो वाणी है जो उनके वचन है वो अगर वेदों से मेल खाते हैं तो माननी

418
00:29:58,200 --> 00:30:02,280
फिर फालतू बात कर रहे हो मैंने अभी आपसे सवाल किया है

419
00:30:02,280 --> 00:30:08,280
कि सद ग्रंथ मानने का कहने का आधार क्या है

420
00:30:08,880 --> 00:30:13,040
आपका क्योंकि क्योंकि आपने कहा था कि भाई जिसमें भी थोड़ी

421
00:30:13,040 --> 00:30:17,120
बहुत भी सत्यवा लिखी होगी आदि भी तो वह सद ग्रंथ है तो मैंने तो

422
00:30:17,120 --> 00:30:21,560
लिख दिया पूर्ण ब्रहम की भक्ति करो तो फिर इसको सद ग्रंथ क्यों नहीं मान रहे हो

423
00:30:21,560 --> 00:30:25,560
नहीं हमारा हमारा आधार पता आप ये बताइए फि आप वेद को कैसे

424
00:30:25,560 --> 00:30:28,840
मान लेते हैय कैसे

425
00:30:28,840 --> 00:30:33,040
मैंने बता दिया है कि जो जीव की चा

426
00:30:33,040 --> 00:30:37,480
के वास्तविक विषय जीव की चा के वास्त विषय

427
00:30:37,480 --> 00:30:41,680
अरे भाई सुनो ना आपने जब सवाल किया तो सुनो मैं आपकी तरह गोल

428
00:30:41,680 --> 00:30:45,840
गोल बातें नहीं करूंगा आप उतनी देर

429
00:30:45,840 --> 00:30:50,120
से यही कर रहे हो कट टकट बात नहीं कर रहे हो आप जीव

430
00:30:50,120 --> 00:30:54,440
की चा सुनोगे जीव की चाह

431
00:30:54,440 --> 00:30:58,440
के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप

432
00:30:58,440 --> 00:31:02,520
को परिभाषित और प्राप्त कराने की विधि बताने वाले जो ग्रंथ है वह

433
00:31:02,520 --> 00:31:06,280
सद ग्रंथ

434
00:31:06,280 --> 00:31:11,040
है तो अब आगे अब आप अपनी परिभाषा बता

435
00:31:11,040 --> 00:31:15,040
दो नहीं नहीं आपने बता दिया कि सद ग्रंथ है अब सद ग्रंथ कौन से

436
00:31:15,040 --> 00:31:19,240
है वो तो बताओ जीव की वो चा तो बता दी आपने फिर वही

437
00:31:19,240 --> 00:31:23,680
बात भाई ऐसे विषयात होता है वेद पुराण उपनिषद

438
00:31:23,680 --> 00:31:28,000
स्मृति ग्रंथ में है रामायण महाभारत यह सब हमारे सद ग्रंथ

439
00:31:28,000 --> 00:31:32,400
है और अक्षरस एक भी बात उसमें झूठ नहीं मानते

440
00:31:32,400 --> 00:31:36,440
हम अक्षरस मानते हैं जो भी सुन

441
00:31:36,440 --> 00:31:40,960
लीजिए सुन लीजिए जो भी परंपरा प्राप्त आचार्यों द्वारा स्वीकार

442
00:31:40,960 --> 00:31:45,520
हमारे ग्रंथावली है वैदिक वांग में जिसमें कि वेद पुराण उपनिषद

443
00:31:45,520 --> 00:31:49,720
स्मृति ग्रंथ आते हैं वो सब हमारे लिए सद ग्रंथ है अब आपका आधार

444
00:31:49,720 --> 00:31:54,000
क्या है वो बताइए नहीं नहीं आप चलो ठीक है आपने बता दिया अब पुराणों

445
00:31:54,000 --> 00:31:58,160
के अंदर ये लिखा है मास खाओ मास खा देखिए विषयात मत करिए

446
00:31:58,160 --> 00:32:02,480
अब मैं आपसे आपका आधार पूछ रहा हूं मैंने आपसे आपका आधार पूछा आपको आपका आधार

447
00:32:02,480 --> 00:32:08,120
मालूम है सद ग्रंथ मानने का या दूसरा विषय च

448
00:32:08,120 --> 00:32:13,000
खोले बता तो दिया आपको कि सद ग्रंथ मानने का आधार यही है कि जो मतलब

449
00:32:13,000 --> 00:32:17,880
परमात्मा की जो ये देखो जितनी बार बोलने आते

450
00:32:17,880 --> 00:32:23,120
ना सीधी बात नहीं करनी आती आप लोगों

451
00:32:23,120 --> 00:32:27,960
कोनी ये झूठ की निशानी होती है क्या झूठ की निशानी

452
00:32:27,960 --> 00:32:32,000
जितनी बार आप बोलने आते हैं उतनी बार आपका

453
00:32:32,000 --> 00:32:36,080
नाम क्या है आपका नाम क्या

454
00:32:36,080 --> 00:32:40,080
है आपका नाम क्या है

455
00:32:40,080 --> 00:32:45,560
किससे पूछ रहे हो आप किसका नाम है मैं आपसे पूछ रहा हूं आपका नाम क्या

456
00:32:45,560 --> 00:32:49,800
है आपको नहीं पता मेरा नाम क्या है मैं एक बार और आपसे

457
00:32:49,800 --> 00:32:54,480
जानना चाह रहा हूं आपका नाम क्या है किस

458
00:32:54,480 --> 00:32:58,880
नया नाम अब आपने मुम मुम किया क्या

459
00:32:58,880 --> 00:33:03,160
किया क्या जो अभी कर रहे थे

460
00:33:03,160 --> 00:33:07,440
अरे भाई सत्य बोलने में दिक्कत होती है क्या आप लोगों को परेशान

461
00:33:07,440 --> 00:33:11,840
करने आते हो आप लोग गोल गोल बातें करने आते हो

462
00:33:11,840 --> 00:33:15,840
नाम बोलने में क्यों नहीं म किया इतना क्यों चला रहे

463
00:33:15,840 --> 00:33:19,880
हो तो क्या करूं मैं सर खाने चले

464
00:33:19,880 --> 00:33:25,080
आते जाइए आप

465
00:33:25,080 --> 00:33:31,080
[संगीत]

466
00:33:34,880 --> 00:33:38,920
ये एक ये आदमी है जो खुदका करता है कमेंट में कभी

467
00:33:38,920 --> 00:33:44,920
सामने नहीं आता

468
00:33:50,150 --> 00:33:56,150
[संगीत]

469
00:34:08,600 --> 00:34:14,600
क्या अजीब लोग है दुनिया में कितनी बार पॉइंट की बात

470
00:34:21,440 --> 00:34:26,400
बोलने जय श्री राम पंडित जी जय श्री राम

471
00:34:26,400 --> 00:34:32,400
कृष्ण ह महादेव

472
00:34:32,520 --> 00:34:37,840
वो लिंक जरा दे दीजिए कोई आना चाहे

473
00:34:37,840 --> 00:34:41,920
तो ना अरे सीधी बात करें

474
00:34:41,920 --> 00:34:46,080
तो बात आगे बढ़ पाए घोल मोल घोल मोल क्लियर कट जवाब

475
00:34:46,080 --> 00:34:51,680
ही नहीं दे रहे यह मेरा सिद्धांत है सद ग्रंथ मानने

476
00:34:51,680 --> 00:34:56,320
का अपना नाम पूछा जितनी बार पॉइंट की बात

477
00:34:56,320 --> 00:35:02,320
नाम पूछा किशन दास यह है सत्य की

478
00:35:02,440 --> 00:35:07,720
निशानी जुड़ा हूं पहले से भरे बैठे हैं क्या

479
00:35:07,720 --> 00:35:12,080
हुआ मैं तो लाइव नहीं देख रहा था बस ऑफिस कीरी मीटिंग खत्म हुई

480
00:35:12,080 --> 00:35:16,080
देखता लाइव जवाइन करते हैं य दे तो कोई आगे

481
00:35:16,080 --> 00:35:20,280
जा चुका है क्या पहले ही हा हा अरे जितनी बार

482
00:35:20,280 --> 00:35:24,400
उनसे मैं कह रहा हूं कि भाई किसी भी ग्रंथ को सद ग्रंथ

483
00:35:24,400 --> 00:35:28,680
मानने का आधार क्या है रामपाल दास जी का

484
00:35:28,680 --> 00:35:33,240
तो वो फिर फिर कह रहे हैं जिसम

485
00:35:33,240 --> 00:35:37,400
जिसम झूठ झूठा ग्रंथ उसे कहेंगे जिसमें पूरी बात झूठ हो

486
00:35:37,400 --> 00:35:43,400
और सद ग्रंथ उसे कहेंगे जिसमें आदि सच्ची हो आदि झूठी हो उसको भी सद ग्रंथ

487
00:35:44,240 --> 00:35:48,280
कहेंगे इसका कैसे कौन सी बात सही है कौन

488
00:35:48,280 --> 00:35:52,640
सी गलत है अब मैंने कहा किय मैंने लिख दी आदि बात सच्ची देखो

489
00:35:52,640 --> 00:35:56,840
क्या ये सद ग्रंथ है मेरा लिखा हुआ

490
00:35:56,840 --> 00:36:01,120
नहीं है क्योंकि इसमें परंपरा प्राप्त

491
00:36:01,120 --> 00:36:05,360
रूप से जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद

492
00:36:05,360 --> 00:36:10,920
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने वाली विधि नहीं लिखी

493
00:36:10,920 --> 00:36:16,160
है

494
00:36:16,160 --> 00:36:22,160
सिंपल वो लिंक दे दीजिए रा

495
00:36:24,020 --> 00:36:29,240
[संगीत]

496
00:36:29,240 --> 00:36:33,320
अब आप लोग परेशान करोगे तो फिर और यह गोल गोल बातें

497
00:36:33,320 --> 00:36:37,520
घुमाना घुमाना एक घंटा हो गया आधे घंटे से मैं बारबार

498
00:36:37,520 --> 00:36:42,000
बार बार बार बार उनसे क्लियर कट कहना चाह रहा हूं कि भाई आप जो है अपनी बात कहिए

499
00:36:42,000 --> 00:36:46,400
वह बात उनको दिक्कत है कहने में क्या दिक्कत है बात कहने में

500
00:36:46,400 --> 00:36:50,440
कि हमारे लिए सबसे मेन जो सद ग्रंथ है वह कबीर

501
00:36:50,440 --> 00:36:54,640
वाणी है बाकी तो हम लोगों को उल्लू बनाते हैं पवित्र सद ग्रंथ

502
00:36:54,640 --> 00:36:58,760
कहके और कोई हमारा सद ग्रंथ नहीं है हम लोगों को उल्लू बनाते

503
00:36:58,760 --> 00:37:03,760
हैं उनको पवित्र सद ग्रंथ कहके

504
00:37:03,760 --> 00:37:09,160
पिन कैसे करते हैं इसको कमेंट

505
00:37:09,160 --> 00:37:15,160
को मैं कर देता

506
00:37:17,400 --> 00:37:22,520
हूं पिन का तो ऑप्शन मुझे भी नहीं मिल रहा

507
00:37:22,520 --> 00:37:28,520
चलिए कोई जुड़ना चाहे तो आ सकता है

508
00:37:29,520 --> 00:37:34,480
कोई बताएगा लाइव में से कैसे करते हैं इसको पन

509
00:37:34,480 --> 00:37:37,280
नब

510
00:37:37,280 --> 00:37:41,920
न जय श्री राम हर्षित जी

511
00:37:41,920 --> 00:37:46,040
जय श्री राम भैया आवाज आ रही है हमारी जी जी आ रही

512
00:37:46,040 --> 00:37:50,160
है जस्ट गाड़ी से उतरे हैं दो मिनट हमने देखा

513
00:37:50,160 --> 00:37:55,120
हमने पूरा लाइव सुना हा ड्राइविंग करते

514
00:37:55,120 --> 00:37:59,480
हा बस दो मिनट दीजिए

515
00:37:59,480 --> 00:38:03,840
एक मिनट कोई आ गया है शायद रंजीत

516
00:38:03,840 --> 00:38:09,760
जी आप उठ के बात करिए बैठ कर

517
00:38:09,760 --> 00:38:14,360
के जी राधे राधे जय श्री राम

518
00:38:14,360 --> 00:38:18,400
राधे राधे मैं आपको लगभग दो तीन महीने से

519
00:38:18,400 --> 00:38:22,760
फॉलो कर रहा हूं देख रहा हूं जी जी आप कार्य

520
00:38:22,760 --> 00:38:26,960
कर रहे हैं उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद आभार

521
00:38:26,960 --> 00:38:29,840
आपका

522
00:38:29,840 --> 00:38:34,040
जी यह सब सब सब कुछ समझते हैं लेकिन यह मन से समय खराब करते

523
00:38:34,040 --> 00:38:38,200
हैं और कुछ नहीं नहीं ये क्या है जो सच्ची बात है

524
00:38:38,200 --> 00:38:42,320
उसको स्वीकार करने से इधर से निकलेंगे उधर से निकलेंगे 50 बार

525
00:38:42,320 --> 00:38:47,160
पूछ रहा हूं कि आपका आधार क्या है आपका आधार क्या है वोह आधार

526
00:38:47,160 --> 00:38:51,200
नहीं व लसी सी उसम कुछ ना कुछ दही सा कर देंगे लस्सी

527
00:38:51,200 --> 00:38:56,440
बना देंगे उसम कोई क्लियर बात ही नहीं है एक भी

528
00:38:56,440 --> 00:39:01,160
पवित्र वो है जिसमें कबीर की बात की जाए कबीर वाणी

529
00:39:01,160 --> 00:39:06,120
और बाकी सब हम समाज को बेवकूफ बनाते हैं वो पाखंड है हमारा

530
00:39:06,120 --> 00:39:10,360
कि हम इसको सद ग्रंथ मानते हैं सीधी बात है और इनका एक एक व्यक्ति

531
00:39:10,360 --> 00:39:14,680
कह भी चुका है यहां पर आके कि भाई देखो हमारे लिए अंतिम प्रमाण तो कबीर वाणी

532
00:39:14,680 --> 00:39:18,800
है और उसमें भी पता है क्या है कबीर वाणी को य सत्यापित करते

533
00:39:18,800 --> 00:39:22,840
हैं वह अमर से अमर पता नहीं कोई

534
00:39:22,840 --> 00:39:24,880
और ग्रंथ है उससे कबीर

535
00:39:24,880 --> 00:39:28,880
वाणी को भी सत्यापित करते हैं अगर मैंने

536
00:39:28,880 --> 00:39:32,960
मैं ये कह रहा हूं कि इसमें इस ग्रंथ में एक भी बात

537
00:39:32,960 --> 00:39:37,320
गलत लिखी है तो यह सद ग्रंथ नहीं कहला सकता जी

538
00:39:37,320 --> 00:39:41,440
सद ग्रंथ तब कहलाएगा जब इसमें हर बात सच्ची हो हा

539
00:39:41,440 --> 00:39:45,440
उसको पूरी तरीके से माना जाता है व स अच्छा एक बात बताइए मैं मान लीजिए

540
00:39:45,440 --> 00:39:49,560
ये इनकी कबीर वाणी है ठीक है इसको मैं कबीर वाणी कह रहा हूं

541
00:39:49,560 --> 00:39:53,600
अब इससे पाच द फ पन्ने में फाड़ दू उसके बाद भीय कबीर वाणी कहलाए

542
00:39:53,600 --> 00:39:57,800
गी क्या ग्रंथ नहीं ये कहलाएगा फटा हुआ कबीर

543
00:39:57,800 --> 00:40:02,640
कबीर वाणी जी क्या कहलाए फटी हुई कबीर वाणी अधूरी कबीर वाणी

544
00:40:02,640 --> 00:40:06,640
इसका मतलब कि जिन बातों को झूठ मानना है

545
00:40:06,640 --> 00:40:12,640
उनको हम इससे हटा रहे हैं पन्ने को फाड़ दिया मैंने झूठ कह

546
00:40:12,720 --> 00:40:16,880
कर यह अभी सत्य से बहुत दूर हो रहे हैं क्या ये फस रहे

547
00:40:16,880 --> 00:40:21,120
हैं इनको समझ में नहीं आ रहा बहुत बड़े जाल में फस रहे हैं फ्रड

548
00:40:21,120 --> 00:40:25,600
हो रहा है इनके साथ देखो अगर किसी को तरीके से

549
00:40:25,600 --> 00:40:29,840
बात करनी है तो व आ सकता और इस तरह से गोल गोल बातों की जलेबिया घुमानी

550
00:40:29,840 --> 00:40:34,040
है आधे घंटे एक घंटे तक उस वो ना आए अगर है किसी

551
00:40:34,040 --> 00:40:38,120
के पास जवाब कि आपका सद ग्रंथ मानने का आधार क्या है किसी

552
00:40:38,120 --> 00:40:40,360
को भी तो वह आ सकता है

553
00:40:40,360 --> 00:40:46,360
यदि माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो

554
00:40:46,520 --> 00:40:50,920
तो कह रहे चिल्ला क्यों रहे हो अरे भाई तुम बारबार

555
00:40:50,920 --> 00:40:55,040
एक ही बात को मुझे बोलना पड़ रहा है मैं आपसे आपका आधार पूछ रहा हूं

556
00:40:55,040 --> 00:40:59,760
आप मुझसे पता नहीं क्याक बातें कर रहे हैं

557
00:40:59,760 --> 00:41:05,760
एक ही कमेंट जो कई बार करे उसको बैन कर

558
00:41:09,760 --> 00:41:14,640
दीजिएगा हेलो चंद्रमा दास अपना

559
00:41:14,640 --> 00:41:18,680
कैमरा ऑन कर

560
00:41:18,680 --> 00:41:23,440
लो सुनाई दे रहा

561
00:41:23,440 --> 00:41:29,120
है दे रहा दे रहा हां कैमरा न

562
00:41:29,120 --> 00:41:33,120
करिए कैमरा नहीं कर पा रहे कैमरा

563
00:41:33,120 --> 00:41:37,120
कर नहीं पा रहे या कैमरा खराब है या करना नहीं है करना

564
00:41:37,120 --> 00:41:43,120
नहीं है तो

565
00:41:43,440 --> 00:41:47,440
जाइए यह होते हैं सिद्धांत यह सिद्धांत होते

566
00:41:47,440 --> 00:41:51,520
हैं इसम मैं नहीं करना पड़ता

567
00:41:51,520 --> 00:41:56,240
तो

568
00:41:56,240 --> 00:42:02,240
जाइए पुष्पदंत जी आए

569
00:42:06,800 --> 00:42:11,680
हैं और दे दीजिए रामपाल

570
00:42:11,680 --> 00:42:15,680
दास जी अ जी बोलिए कह रहे थे

571
00:42:15,680 --> 00:42:20,360
कि एक व्यक्ति से परिचय हुआ है

572
00:42:20,360 --> 00:42:24,400
वो आचार्य जी का फॉलोअर है आचार्य जी समझ रहे हैं य वाले

573
00:42:24,400 --> 00:42:29,160
आचार्य जी बहुत जो फेमस है तो उससे सोच रहे हैं थोड़ा

574
00:42:29,160 --> 00:42:33,160
हां बस वही वही पैट शर्ट पेंट शर्ट वाले और आईआईटी से

575
00:42:33,160 --> 00:42:37,160
पास आउट वो बात हो गई है यहां प कहीं प स्टॉल लगता है एक दो दिन में

576
00:42:37,160 --> 00:42:41,320
जा रहे हैं हां हां हां हां एंटी टास्क

577
00:42:41,320 --> 00:42:45,720
फोर्स ये अभी कम में हुआ है ना नाने उनका

578
00:42:45,720 --> 00:42:49,200
एंटी टेररिज्म

579
00:42:49,200 --> 00:42:53,440
स्क्ड कुंभ में भी तो उनसे उनसे थोड़ी बातचीत की

580
00:42:53,440 --> 00:42:58,320
जाए क्योंकि वो भी थोड़ा हां हां पता चल गया ल

581
00:42:58,320 --> 00:43:02,360
लगती है पता चल गया है इन आज बात भी हुई है

582
00:43:02,360 --> 00:43:06,360
और भगवान ने चाहा तो एक सुंदर सी चर्चा आप लोगों को जल्दी ही

583
00:43:06,360 --> 00:43:10,360
प्राप्त हो जाएगी उनके साथ भी करिए करिए

584
00:43:10,360 --> 00:43:15,320
क्योंकि बहुत अपने हिसाब से बहुत बना बना के कह रहे हैं य

585
00:43:15,320 --> 00:43:19,480
लोग मनमुक चीज पुष्पदंत जी जय श्री राम

586
00:43:19,480 --> 00:43:23,600
हर हर महादेव जय माता दी जय सीताराम जय सीताराम जय

587
00:43:23,600 --> 00:43:28,840
माता दी हरि ओम जय श्री राधा कृष्ण

588
00:43:28,840 --> 00:43:33,200
य चंद्रवाना कह रहे हैं सुनो तो मेरी

589
00:43:33,200 --> 00:43:37,490
चंद्रवाना

590
00:43:37,490 --> 00:43:41,520
[संगीत] दास बाबू दास है क्या

591
00:43:41,520 --> 00:43:45,600
य पर कैमरा ऑन करके आइए चंद्रन जी

592
00:43:45,600 --> 00:43:49,600
आप एक चीज समझिए इनके जो बेसिस है ना वो तक तो

593
00:43:49,600 --> 00:43:53,720
क्लियर है नहीं और ये वो 7 बती ये 14

594
00:43:53,720 --> 00:43:58,000
य 15 ये करते रहते हैं इनके बेसिस तक क्लियर है नहीं इनको

595
00:43:58,000 --> 00:44:02,000
यह तक नहीं पता है कि सत ग्रंथ हम किसे कहे सच

596
00:44:02,000 --> 00:44:07,440
बोलने वाले ग्रंथ और अगर झूठ बोलने वाले ग्रंथ भी सद ग्रंथ

597
00:44:07,440 --> 00:44:11,560
है तो फिर केवल सच बोलने वाले को क्या कहेंगे और फिर मैं

598
00:44:11,560 --> 00:44:15,760
यहां पर लिख रहा हूं इसमें इसको सद ग्रंथ मान लो एक और जोड़ लो अपने उसम निशान में

599
00:44:15,760 --> 00:44:20,120
वो जो किता किताबों में निशान बनाया है ना 3 प्रकार का

600
00:44:20,120 --> 00:44:24,280
इसमें और निशान जोड़ लेना मैं बना दूंगा एक कबूतर नया उसको भी जोड़ देना

601
00:44:24,280 --> 00:44:27,200
इसमें

602
00:44:27,200 --> 00:44:31,320
क्योंकि तुमको चलानी है अपनी दुकाने आपको अपनी दुकान

603
00:44:31,320 --> 00:44:35,480
चलानी है इसलिए किसी को भी वो दुखी नहीं करना है कि हम तुम्हारे

604
00:44:35,480 --> 00:44:39,640
ग्रंथों को मानते नहीं है क्या क्या क्या कहना है हम तो तुम्हारे ग्रंथों

605
00:44:39,640 --> 00:44:43,880
को पवित्र कहते हैं वो बात अलग है कि उसको शैतान ने लिखा है काल ने लिखा

606
00:44:43,880 --> 00:44:47,960
है वो बात और है कि वो झूठ बोलता है वो बात और है कि वो पीस पीस के

607
00:44:47,960 --> 00:44:52,040
खाता है वो बात और है कि वो तुमसे पाप करवाता है वो बात और है

608
00:44:52,040 --> 00:44:56,120
कि इतनी बुराइयां है उसमें कि पूछो नहीं मगर हम तो तुम्हारे उनको

609
00:44:56,120 --> 00:45:00,360
पवित्र मानते हैं सद ग्रंथ मानते हैं

610
00:45:00,360 --> 00:45:04,600
अरे य चैनल चला र दिन जिस दिन इनका कोई

611
00:45:04,600 --> 00:45:08,680
वास्तविक अधिकृत व्यक्ति सामने आ गया ना आमने सामने की

612
00:45:08,680 --> 00:45:13,320
चर्चा में उसकी ऐसी चटनी होगी मार से नहीं

613
00:45:13,320 --> 00:45:18,480
हाथ पैर से नहीं केवल वक्तव्य

614
00:45:18,480 --> 00:45:23,940
से यही करने लगेंगे

615
00:45:23,940 --> 00:45:29,940
[संगीत]

616
00:45:33,200 --> 00:45:38,480
रामेश्वर जादव कोई

617
00:45:38,480 --> 00:45:41,360
कंजड़ाई

618
00:45:41,360 --> 00:45:45,640
का माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया

619
00:45:45,640 --> 00:45:50,280
क्या आओ आमने सामने से बात करो

620
00:45:50,280 --> 00:45:54,680
दे दो भाई लिंकन को वो बोल रहा है आप मिलेगा

621
00:45:54,680 --> 00:45:59,000
आपको जगह नहीं मिल रहा नहीं मि लिखा है

622
00:45:59,000 --> 00:46:03,000
क्या नहीं मिल रहा आपको जगह नहीं मिलेगा

623
00:46:03,000 --> 00:46:07,640
ऐसे करके कमेंट किया है वो कहां जगह नहीं मिलेगा

624
00:46:07,640 --> 00:46:12,160
नरक में पता नहीं पता नहीं नरक मेंग

625
00:46:12,160 --> 00:46:18,040
में की धरती में पता नहीं वही बता सकता है सामने वाला सतलोक

626
00:46:18,040 --> 00:46:22,880
में सर पता है क्या है जीय कह रहा था अर

627
00:46:22,880 --> 00:46:26,920
जैसे जो बड़े संत होते हैं बहुत अच्छे

628
00:46:26,920 --> 00:46:30,960
नी होते जैसे गुरुदेव है प्रेमानंद जी महाराज जी

629
00:46:30,960 --> 00:46:35,000
है मल कई ऐसे संत होते जो जिनको मतलब काफी वास्तविक

630
00:46:35,000 --> 00:46:39,440
ज्ञान होता है उनकी वाणी में कई बार आपको वो दिखेगा कि वो बहुत

631
00:46:39,440 --> 00:46:43,800
वैसे बोल रहे हैं उसको क्या कहते हैं अथॉरिटेटिव

632
00:46:43,800 --> 00:46:47,800
उनकी वाणी में ऐसा लगता है अथॉरिटेटिव बोल रहे जैसे चढ़कर बात

633
00:46:47,800 --> 00:46:52,400
कर रहे हैं असल में वो कारण होता है सत्य

634
00:46:52,400 --> 00:46:57,120
वो भीगी बिली की तरह इसीलिए बात नहीं करते हैं कि उनके पास अका सत्य है

635
00:46:57,120 --> 00:47:01,320
सत्य का पावर बक बिल्कुल वो इस वजह से सत्य को बिना किसी

636
00:47:01,320 --> 00:47:05,760
हिचके पिचके किए हुए बोलते हैं अब सामने के लिए क्या है

637
00:47:05,760 --> 00:47:09,920
उसको तो बात ही ऐसे करना आता है मैं करके अभी

638
00:47:09,920 --> 00:47:14,040
मैंने उससे पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है उसने खट से बताया कि सन

639
00:47:14,040 --> 00:47:18,400
दस फिर मैं नहीं किया ये है सत्य की

640
00:47:18,400 --> 00:47:22,600
पावर और जब मैं पूछ रहा हूं कि तुम्हारा किसी भी ग्रंथ को किसी

641
00:47:22,600 --> 00:47:26,960
किताब को किसी बुक को सद ग्रंथ कहने का आधार क्या है

642
00:47:26,960 --> 00:47:30,960
तो उसम कर रहा है यानी कि उसको मालूम ही

643
00:47:30,960 --> 00:47:35,320
नहीं है कि मेरा क्या आधार है मेरे जो व

644
00:47:35,320 --> 00:47:39,480
जेल जाने से पहले जो लीला करके यहां पर गए हैं बस मुझे उसको ढोना है इसी

645
00:47:39,480 --> 00:47:42,120
तरीके

646
00:47:42,120 --> 00:47:46,400
से भाई हंसी तो उनका टू चैनल देख लो खबर फास्ट

647
00:47:46,400 --> 00:47:52,400
वालों का हसते हसते कुछ भी कहते हैं वो

648
00:47:54,640 --> 00:47:58,680
लोग वो रामायण और जानते नहीं

649
00:47:58,680 --> 00:48:03,120
रामचरित मानस में हरर

650
00:48:03,120 --> 00:48:07,200
महादेव इनकी ग्रंथों का

651
00:48:07,200 --> 00:48:11,320
क्या बता इनके ग्रंथों का कोई अता पता नहीं

652
00:48:11,320 --> 00:48:15,400
है रामपाल वालों का मेरे पास आया था मैंने उसमें देखा तो

653
00:48:15,400 --> 00:48:19,640
उसको हम कैसे सद ग्रंथ माने वो तो ऐसी बात करते हैं जैसे कि आप

654
00:48:19,640 --> 00:48:23,840
उनका खुद का बनाया हुआ है सारे पुस्तक और जब पता देखोगे तो उनका तो उसका

655
00:48:23,840 --> 00:48:28,040
रियल पता भी नहीं प्रकाशन का कहीं लग रहा है तो कहीं दूसरे

656
00:48:28,040 --> 00:48:32,280
जगह लग रहा है वो खुद नहीं आते दूसरे अपने स्न को भेजता है मेरे घर में भेजा था

657
00:48:32,280 --> 00:48:36,560
और पहली बार मेरे गांव में आया था ना तो मैं उन लोगों को स्पष्ट बोल दिया था कि वो देवी भागवत

658
00:48:36,560 --> 00:48:40,720
लिखा था ज्ञान गंगा में मैं स्पष्ट चैलेंज करता हूं रामपाल को कि मेरे

659
00:48:40,720 --> 00:48:44,720
पास संक्षिप्त देवी भागवत है उसमें कहीं पर उल्लेख नहीं है अष्ट

660
00:48:44,720 --> 00:48:48,720
गी देवी के बारे में उल्लेख नहीं है और जहां पर ऐसे अश्लील बातें लिखे मैं इसमें

661
00:48:48,720 --> 00:48:52,760
नहीं बोलूंगा तो मैं चैलेंज करता हूं करके तो वो लोग फिर चले गए

662
00:48:52,760 --> 00:48:56,960
हम किताब कोई भी खरीदने को नहीं दिया मैंने तो य साइकल स्टोर

663
00:48:56,960 --> 00:49:01,160
बैठा था ऐसा खेत में गया था व आड़ के महीना था तब उसके बाद

664
00:49:01,160 --> 00:49:05,200
एक रोज फ ल आठ अंग यदि कहीं

665
00:49:05,200 --> 00:49:09,360
पर बता दिए जाएंगे माता के तो वह अष्टांग हो गए शिव पुराण

666
00:49:09,360 --> 00:49:10,680
में ऐसे

667
00:49:10,680 --> 00:49:16,680
आया अच्छा अच्छा

668
00:49:20,040 --> 00:49:24,200
अच्छा बोले पाड़ जी आप जो

669
00:49:24,200 --> 00:49:28,400
सवाल कर रहे थे ना ये बहुत ऊंचे लेवल का सवा सवाल है उस स्तर का इनके

670
00:49:28,400 --> 00:49:32,400
पास ज्ञान नहीं है इनके गुरु के पास ही का ज्ञान नहीं था

671
00:49:32,400 --> 00:49:36,480
तो आप उनके जो शिष्य चेले हैं उनसे आप कैसे उम्मीद

672
00:49:36,480 --> 00:49:40,560
लगा सकते हैं कि इन सवालों का व जवाब दे सिंपल बोलना है जो

673
00:49:40,560 --> 00:49:44,800
ग्रंथ सत्य बोलते हो परमेश्वर की प्राप्ति कराते हो

674
00:49:44,800 --> 00:49:48,880
यह हमारा आधार है परंपरा प्राप्त है अब उसमें

675
00:49:48,880 --> 00:49:52,880
वो बोल र है कि भाई वो वेदों से मैच खाते फिर वेद में भी तो यह है फिर

676
00:49:52,880 --> 00:49:57,080
पुराण में भी तो यह है फिर वय है फिर वो है वो एक अंत

677
00:49:57,080 --> 00:50:01,280
नहीं है कोई तब गोल मोल है वेदों

678
00:50:01,280 --> 00:50:06,400
को अधूरा ज्ञान मानते हैं ना वेदों को अधूरा ज्ञान मानते

679
00:50:06,400 --> 00:50:10,760
जी न दे रघुवंशी देवेंद्र रघुवंशी

680
00:50:10,760 --> 00:50:15,360
बारबार एक ही कमेंट अगर आप करेंगे आपको बैन कर दिया जाएगा शिवास

681
00:50:15,360 --> 00:50:19,640
भाई एक बात बताए वेद की रहस्य को अच्छा

682
00:50:19,640 --> 00:50:23,680
से अच्छा व्यक्ति नहीं समझ सकता क्योंकि इसको वेद अध्ययन

683
00:50:23,680 --> 00:50:25,920
सदगुरु के दिशा निर्देश में स्वाध्याय किया

684
00:50:25,920 --> 00:50:29,920
जाता है और उनको समझा जा सकता है नहीं तो

685
00:50:29,920 --> 00:50:34,240
ऐसा कोई दो चार संस्कृत पढ़ने वाले अगर वेद के जैसे रामपाल

686
00:50:34,240 --> 00:50:38,400
जी कर रहे है ना वैसा करना चालू कर दे अर्थ का अनर्थ कर देंगे समझ

687
00:50:38,400 --> 00:50:42,840
आना बहुत मुश्किल है कर रहे कर रहे हैं कर रहे हैं

688
00:50:42,840 --> 00:50:47,240
वो ऐसे मूर्खता जैसे लिखते हैं ग्र अपने पुस्तकों को तो

689
00:50:47,240 --> 00:50:51,440
जैसे कि वही सच लिख रहा अगर वह सच में भगवान होता अपने

690
00:50:51,440 --> 00:50:55,520
आप को भगवान मानता है ईश्वर मानता है तो ईश्वर भगवान मानता है तो वो गलत

691
00:50:55,520 --> 00:51:00,040
कर्म नहीं कर सकता अगर गलत कर्म किया तब तो जेल गया है ना भाई वो सत्कर्म

692
00:51:00,040 --> 00:51:04,280
करे ना भाई अच्छा करे अपने शीष को सही मार्ग

693
00:51:04,280 --> 00:51:08,440
की बात बताए अच्छी मार्ग बताए अभी भी सनातन धर्म में कहीं भी

694
00:51:08,440 --> 00:51:12,480
कबीर दास जी गलत उल्लेख किसी ने नहीं किया पुस्तक पुराण

695
00:51:12,480 --> 00:51:16,600
में कहीं उल्लेख नहीं है लेकिन इन लोगों को सबसे बड़ी टांग खींचना

696
00:51:16,600 --> 00:51:21,120
है सनातन धर्म का भाई जब सनातन धर्म तुम्हारे कबीर पंथ के बारे

697
00:51:21,120 --> 00:51:25,800
मैं आपको मैं आपको एक बात बता ऐसा है देखिए

698
00:51:25,800 --> 00:51:29,800
सबसे पहली बात सभी जो किताबें जितनी भी मत पंथ वालों

699
00:51:29,800 --> 00:51:34,160
की उनको धर्म क्यों कहते हैं वो इसलिए कहते

700
00:51:34,160 --> 00:51:39,200
हैं वो इसलिए कहते हैं कि भाई वो लोग बुरा ना माने

701
00:51:39,200 --> 00:51:41,000
और इनके बहकावे

702
00:51:41,000 --> 00:51:45,600
में आए कि हमारे ग्रंथों की तो य इजत कर रहा है

703
00:51:45,600 --> 00:51:49,720
वास्तविकता य है कि इनके लिए कोई भी सद ग्रंथ नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि य

704
00:51:49,720 --> 00:51:53,720
हर ग्रंथ की बात को कहीं ना कहीं काउंटर करते हैं

705
00:51:53,720 --> 00:51:58,040
कोई भी सद ग्रंथ नहीं है इनके य कार

706
00:51:58,040 --> 00:52:04,040
कर देते कि भैया ये य पर काल ने

707
00:52:04,600 --> 00:52:08,720
बोला ये ज्यादातर दो ग्रंथों पर ज्यादा चर्चा किया है

708
00:52:08,720 --> 00:52:12,840
शिवांश भैया मैंने देखा है इनकी पढ़ है श्रीमद

709
00:52:12,840 --> 00:52:17,000
देवी भागवत तो मैंने य जो बात बोली है

710
00:52:17,000 --> 00:52:21,200
यह जो प्रश्न उठाया वो इसलिए इनका जो सच्चाई है ना पर्दे के पीछे

711
00:52:21,200 --> 00:52:25,440
वाली ये घंग करते हैं सद ग्रंथ कहने का उसको बाहर लाने के लिए मैंने

712
00:52:25,440 --> 00:52:29,760
बोला है उस सच्चाई को बाहर लाने के लिए मैंने बुलाया कि तुम ये

713
00:52:29,760 --> 00:52:33,760
सद ग्रंथ किसी को नहीं मानते हो क्योंकि तुम सभी ग्रंथों में झूठ कहीं ना

714
00:52:33,760 --> 00:52:38,600
कहीं कह देते हो सत ग्रंथ तुम मानते ही नहीं हो

715
00:52:38,600 --> 00:52:42,840
और झांसे में लेने के लिए तुम सब सबकी किताबों को जिसका जिसम

716
00:52:42,840 --> 00:52:47,320
भी वो है विश्वास उसको तुम कह देते हो वहु पवित्र है बहुत सद ग्रंथ है

717
00:52:47,320 --> 00:52:51,440
वास्तविकता में तुम कह रहे हो कि उसम झूठ है वो काल ने बोली वो शैतान ने बोली वो

718
00:52:51,440 --> 00:52:55,600
ये है वो वो है वो तुम्हें खाएगा पीस पीस के तुम्हारा जो मैल निकलेगा पसीना

719
00:52:55,600 --> 00:52:56,520
छूटेगा

720
00:52:56,520 --> 00:53:00,800
पता नहीं कहां कहा का ये इन्हीं लोगों के साथ होता है

721
00:53:00,800 --> 00:53:05,000
ये तो अब ये जो इनका ढोंग है

722
00:53:05,000 --> 00:53:09,120
यह बाहर लाने के लिए मैंने सवाल किया कि आप जो है समस्त धर्म

723
00:53:09,120 --> 00:53:15,120
ग्रंथों को क्यों कहते हैं सभी धर्मों के सद ग्रंथों से खोलकर उन्होंने दिखा दिया

724
00:53:15,120 --> 00:53:19,160
अरे तो आपने जब सबको सद ग्रंथ

725
00:53:19,160 --> 00:53:23,160
माना है तो फिर आप अपना आधार बताइए आपने कैसे मान लिया भाई हम

726
00:53:23,160 --> 00:53:27,400
तो सीधी सीधी बात है जो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा जीव की के वास्तविक विषय

727
00:53:27,400 --> 00:53:32,040
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त और

728
00:53:32,040 --> 00:53:36,080
को परिभाषित करने वाले ग्रंथ है वह सब हमारे लिए सद ग्रंथ है

729
00:53:36,080 --> 00:53:40,320
और उनका एक भी अक्ष एक भी हमारे लिए जो वाक्य है वह गलत नहीं है

730
00:53:40,320 --> 00:53:45,200
वह हमारे लिए सद ग्रंथ

731
00:53:45,200 --> 00:53:49,800
है तो कबी जी को भी नहीं मानते मानने को तो

732
00:53:49,800 --> 00:53:55,800
जी

733
00:53:57,160 --> 00:54:01,240
जगदीश स्वरूप जी आप अपना चेहरा दिखाए एक भैरू दास

734
00:54:01,240 --> 00:54:05,320
करके आए हैं इनको देख लेते हैं अच्छा हा भैरू दस को लीज

735
00:54:05,320 --> 00:54:09,560
इनकी थोड़ा चर्चा करिए कल अधूरी रह गई थी चर्चा मेरी उधर भैरू

736
00:54:09,560 --> 00:54:13,720
दास बताइए अच्छा जो लोग अभी

737
00:54:13,720 --> 00:54:17,880
भैरू दस आप चेहरा दिखाएंगे तो हम फिर उसका इंतजाम करें आपसे

738
00:54:17,880 --> 00:54:21,920
चर्चा होने का सिंगल सिंगल चर्चा कीजिएगा

739
00:54:21,920 --> 00:54:26,440
मैं भैया मैं फिर लेफ्ट कर देता हूं मैं य पर लाइव सुनता हूं फिर

740
00:54:26,440 --> 00:54:32,440
अच्छा अच्छा

741
00:54:35,800 --> 00:54:41,560
राम जगदीश स्वरूप जी तब तक आप बोले जय श्री

742
00:54:41,560 --> 00:54:45,600
राम पंडित जी आप इनसे जरा वो बात कर लीजिए प्राइवेट मैसेज में

743
00:54:45,600 --> 00:54:50,080
चेहरा दिखाएंगे या नहीं भैरु

744
00:54:50,080 --> 00:54:54,400
दस जी जगदीश स्वरूप जी आवाज आ रही

745
00:54:54,400 --> 00:54:58,720
है जी आ रही है कल अच्छा मैंने

746
00:54:58,720 --> 00:55:02,800
कबीर पंथ बहुत देखे गरीब दासिया भी है मतलब इतना नालायक

747
00:55:02,800 --> 00:55:05,920
पंथ मैंने आज तक नहीं

748
00:55:05,920 --> 00:55:10,840
देखा जो जो रामपाल वाले चला रहे हैं कबीर के नाम पे

749
00:55:10,840 --> 00:55:15,280
हम इतना बदतमीज पंथ जो

750
00:55:15,280 --> 00:55:19,320
है मैं काफी कबीर पंथ के साथ में उठता बैठता

751
00:55:19,320 --> 00:55:23,680
रहता हूं हा रायण

752
00:55:23,680 --> 00:55:27,840
पर इतना जो रामपाल जो जेल धाम

753
00:55:27,840 --> 00:55:32,400
निवासी है जो

754
00:55:32,400 --> 00:55:36,520
जी बोले बोले जी जी कबीर इसमें जिसके

755
00:55:36,520 --> 00:55:40,600
साथ में बैठता ह वो कबीर कबीर

756
00:55:40,600 --> 00:55:45,000
जैसे कि हम लोग वेदांती लोग भ्रम को मानते हैं

757
00:55:45,000 --> 00:55:49,000
वैसे भी वोह निराकार को मानते हैं वो लोग निंदा करते कि

758
00:55:49,000 --> 00:55:51,240
जो रामपाल वाले जो पंथ वादी है

759
00:55:51,240 --> 00:55:56,840
जो कबीर को एक

760
00:55:56,840 --> 00:56:00,880
एक काल्पनिक किरदार बना रखा है कि

761
00:56:00,880 --> 00:56:04,920
जो गोरक्षनाथ को दर्शन दिए थे राम को

762
00:56:04,920 --> 00:56:09,080
सहायता की थी एक काल्पनिक गिरदार बना है

763
00:56:09,080 --> 00:56:11,560
बता

764
00:56:11,560 --> 00:56:15,880
जी मैं एक ऐसा व्यक्ति ढूंढ रहा हूं जो थोड़ा समझदार हो

765
00:56:15,880 --> 00:56:20,400
चलो ठीक है वह रामपाल को फॉलो कर रहा है ठीक है थोड़ा

766
00:56:20,400 --> 00:56:24,720
भाई लॉजिक तरीके से बात तो करे वो

767
00:56:24,720 --> 00:56:28,840
ना तो मेरे प्रश्न को समझ पा रहे हैं ना ही फिर उनके पास

768
00:56:28,840 --> 00:56:33,560
शब्द है उत्तर देने के लिए बार-बार वो चकरी घुमा रहे हैं बस बैठे

769
00:56:33,560 --> 00:56:38,400
बैठे अब जैसे मैंने एक व्यक्ति देखा था राघव दास करके है एक

770
00:56:38,400 --> 00:56:42,480
व्यक्ति मेरे विरोध में जो वीडियोस बन रहे थे चर्चा हो रही थी उसमें एक

771
00:56:42,480 --> 00:56:46,560
राघव दास नाम का व्यक्ति था वो थोड़ा मुझे तार्किक लगा था

772
00:56:46,560 --> 00:56:51,320
मैंने उसके लिए संपर्क किया है जिस व्यक्ति ने वो विरोध विरोध वाला वीडियो अब

773
00:56:51,320 --> 00:56:57,320
सोचिए ठीक ठाक विरोधी को भी हमें ही ढूंढे

774
00:56:57,840 --> 00:57:01,880
वो भी मतलब कि हमें सरल हमें सरल कंपट मिल

775
00:57:01,880 --> 00:57:06,040
रहा है तो हम सरल कंपट को छोड़ कर के थोड़ा ठीक ठाक मुझे

776
00:57:06,040 --> 00:57:10,200
लगा बातों से क्योंकि उसने वहां पर एक लॉजिकल बात कही थी

777
00:57:10,200 --> 00:57:14,440
उसने मुझे वहां पर उसने यह कहा राघव दास ने

778
00:57:14,440 --> 00:57:18,480
कि उसने मुझे कभी फोन मिलाया होगा अब वो राघव

779
00:57:18,480 --> 00:57:22,480
दास उसका ओरिजिनल नाम है क्या नाम है वो नहीं मालूम मुझे मगर उस समय उसका राघव दास नाम

780
00:57:22,480 --> 00:57:26,880
लिखा था जहां मैंने उसको देखा तो उसने

781
00:57:26,880 --> 00:57:30,960
यह कहा वहां पर कि भाई मैंने शिवांश को फोन लगाया था और मैंने कहा कि

782
00:57:30,960 --> 00:57:35,680
आपको जो जो भी आपत्ति है रामपाल दास की जिन जिन बातों से

783
00:57:35,680 --> 00:57:39,680
वो वो आप लिख कर के दे दीजिए फिर मैं आपके चैनल पर आपसे चर्चा करने आ

784
00:57:39,680 --> 00:57:43,760
जाऊंगा अब होता क्या है कि यहां पर दिन भर कई लोगों

785
00:57:43,760 --> 00:57:48,080
के फोन आते हैं पक जाता हूं फोन रिसीव कर कर के कर

786
00:57:48,080 --> 00:57:52,080
करके तो उसी झोक में शायद पिछला कोई

787
00:57:52,080 --> 00:57:57,160
जो फोन आया हो या क्या हुआ हो अच्छा एक बात ये भी है कि हमने अपने वीडियोस में

788
00:57:57,160 --> 00:58:01,520
लगभग लगभग सारी बातें बता दी है है ना

789
00:58:01,520 --> 00:58:06,400
मुख्य मुख्य जितनी भी बातें हो सकती है हमने वह बता दी

790
00:58:06,400 --> 00:58:10,520
मगर फिर भी संभवतः पीछे से जो कॉलों की कॉलस की श्रंखला

791
00:58:10,520 --> 00:58:13,280
चल रही हो मैंने उससे यह कह दिया हो

792
00:58:13,280 --> 00:58:17,560
ध्यान ना देते हुए उसकी बात में कि भाई हम कुछ नहीं बताएंगे आप अपनी तैयारी करके

793
00:58:17,560 --> 00:58:22,000
आइएगा तो उसका यह कहना था कि भाई देखो शिवांश

794
00:58:22,000 --> 00:58:26,400
ने मना इसलिए कर दिया प्रश्न लिखकर ना देने के लिए जिस

795
00:58:26,400 --> 00:58:31,240
कि वो समय आने पर अपनी बातों से पलट पाए तो ऐसी बात नहीं है

796
00:58:31,240 --> 00:58:35,360
बात पलटने की नहीं थी बात यही थी कि पीछे से कॉल्स का प्रेशर

797
00:58:35,360 --> 00:58:39,840
कैसा था आपका परिचय हम जानते नहीं आप भी उन्ही भुओ

798
00:58:39,840 --> 00:58:44,680
में से एक हो जो आ कर के मगजमारी करने आए हो

799
00:58:44,680 --> 00:58:48,840
तो हटाया खैर हमने वैसे अपने वीडियोस

800
00:58:48,840 --> 00:58:53,240
में बता दिया है मुख्य मुख्य बात है फिर भी आप अगर हमसे संपर्क

801
00:58:53,240 --> 00:58:57,320
करेंगे यह व्यक्ति राघवदास हमसे अगर संपर्क करता तो हम इसको लिख

802
00:58:57,320 --> 00:59:01,640
करके दे देंगे प्रश्न और उन पर बात होगी है ना

803
00:59:01,640 --> 00:59:05,840
तो मैं ऐसे व्यक्ति को ढूंढ रहा हूं कि भाई रामपाल की तरफ से कोई

804
00:59:05,840 --> 00:59:09,880
एक ठीक ठाक थोड़ा तार्किक व्यक्ति मिले

805
00:59:09,880 --> 00:59:14,560
जैसे मैंने जब बात की थी तो मुझे पवन दास थोड़ा बहुत ठीक लगा था

806
00:59:14,560 --> 00:59:18,560
मतलब कि वह बात करने में समझ रहा था मेरी

807
00:59:18,560 --> 00:59:22,720
बात मैं उसकी बात समझ पा रहा था वो बात अलग है कि उसकी बातें सिद्ध नहीं हुई वो बात अलग

808
00:59:22,720 --> 00:59:26,760
है मगर वो तब भी पले भी नहीं बना

809
00:59:26,760 --> 00:59:28,280
रहा था बातों

810
00:59:28,280 --> 00:59:32,280
की कि जब भी सच जब भी कुछ बताने की बारी आए तो वो

811
00:59:32,280 --> 00:59:38,280
यह नहीं कर रहा था कि मैं सच बताऊंगा ही नहीं उल्टी सीधी बातें

812
00:59:40,120 --> 00:59:44,280
करूंगा तो कोई अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहता है

813
00:59:44,280 --> 00:59:48,600
वत्सल भट्ट जी आ गए हैं भैया माफ करना

814
00:59:48,600 --> 00:59:52,960
के लिए थोड़ी जल्दी बोल रहा था किसके

815
00:59:52,960 --> 00:59:57,040
लिए लिंक लिंक वाला मैसेज मैंने किया हा आते ही

816
00:59:57,040 --> 01:00:01,200
आप लिंक मांगने लगते हैं मेरा स्वास्थ भी बिगड़ा

817
01:00:01,200 --> 01:00:06,000
[संगीत] हुआ दिमाग बिगड़

818
01:00:06,000 --> 01:00:10,280
माफ करना भया माफ करना कोई बात नहीं कोई बात नहीं

819
01:00:10,280 --> 01:00:16,200
जी आप कुछ कह रहे थे बीच में जो

820
01:00:16,200 --> 01:00:20,520
है भा साब जो आपने कहा था कि मैंने कभी

821
01:00:20,520 --> 01:00:25,440
मैंने कबी बहुत देखे मगर मैंने कभी वो नहीं देखा इतना

822
01:00:25,440 --> 01:00:29,560
ऐसा नहीं हां जी जी इतना जो षड्यंत्र करता

823
01:00:29,560 --> 01:00:33,880
है अपना जो प्रपंच जो अपना विस्तार

824
01:00:33,880 --> 01:00:38,680
है आश्रमों का विस्तार है प्रपंच है षड्यंत्र बढ़ा रहा है

825
01:00:38,680 --> 01:00:44,360
तो मैं इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि

826
01:00:44,360 --> 01:00:48,880
जो जिसका परम आदर्श एक जो आदर्श पुरुष होता है एक

827
01:00:48,880 --> 01:00:52,960
पंथ का वो आदर पुरुष अभी कैद में बंद

828
01:00:52,960 --> 01:00:57,040
है उसको लोग आदर्श मानने वाले बहुत घूम रहे हैं अभी मैं वर्तमान

829
01:00:57,040 --> 01:01:01,320
में प्रयागराज कुंभ मेला में हूं वहां से मैं लाइव

830
01:01:01,320 --> 01:01:05,560
हो रहा हूं तो यहां पर भी यहां पे

831
01:01:05,560 --> 01:01:10,120
आचार्य प्रशांत का पंडाल तोड़ा गया है क्योंकि नागाव द्वारा यहां नागाव

832
01:01:10,120 --> 01:01:14,120
का स्वछंद चलता है तो आपने देखा ही

833
01:01:14,120 --> 01:01:18,160
होगा कि जैसे कितना बदतमीज करता है एक दोगले पन वाली बात है

834
01:01:18,160 --> 01:01:22,280
कि आप कुंभ मेला को अंधविश्वास घोषित कर रहे

835
01:01:22,280 --> 01:01:26,280
हो और अपना अपना दुकान चला रहे हो कहां पर प्रयागराज मेला

836
01:01:26,280 --> 01:01:30,480
में तो वैसे ही गंगा स्नान के लिए आप मना कर रहे हो

837
01:01:30,480 --> 01:01:31,200
कबीर पंथ में

838
01:01:31,200 --> 01:01:35,320
भी काफी पंथ ऐसा है कि गंगा स्नान के लिए मना करते हो फिर यहां पर कु

839
01:01:35,320 --> 01:01:39,480
मेला में आपकी पुस्तक बिकती है य मेरे को बहुत

840
01:01:39,480 --> 01:01:44,000
एतराज था तो कबीर पंथ बहुत ही षडयंत्र कारी

841
01:01:44,000 --> 01:01:46,400
है

842
01:01:46,400 --> 01:01:50,640
के देखो एक एक होता है कि विधांत वेदांत

843
01:01:50,640 --> 01:01:54,760
होता है कि ब्रम में हूं और सब

844
01:01:54,760 --> 01:01:59,040
भ्रम है सब भ्रम है वो आसुरी

845
01:01:59,040 --> 01:02:03,080
वेदांत होता है कि मैं ही भ्रम हूं बाकी कोई भ्रम नहीं मैं ही भगवान हूं

846
01:02:03,080 --> 01:02:07,480
और कोई भगवान नहीं है हम बोलते कि व राम तत्व तुम्हारे अंदर भी विराजमान

847
01:02:07,480 --> 01:02:11,000
है मेरे अंदर भी विराजमान

848
01:02:11,000 --> 01:02:15,560
जी पंडित जी चले गए मैं उनसे बात नहीं कर

849
01:02:15,560 --> 01:02:20,120
पाया पंडित जी से निवेदन है वापस आए जी

850
01:02:20,120 --> 01:02:24,240
आपका नाम है विभ कुमार बताइए जय श्री

851
01:02:24,240 --> 01:02:28,400
राम

852
01:02:28,400 --> 01:02:32,800
विवश कुमार जी सुन पा रहे हैं आप

853
01:02:32,800 --> 01:02:38,800
फोटो इनका चिपक गया है आ गया आ गया

854
01:02:47,840 --> 01:02:53,840
वापस विवस कुमार जी बताइए

855
01:03:02,320 --> 01:03:06,360
विवश कुमार जी को हटा दीजिए समय खराब हो रहा है भेरू

856
01:03:06,360 --> 01:03:10,290
दास कैमरा ऑन

857
01:03:10,290 --> 01:03:13,040
[संगीत]

858
01:03:13,040 --> 01:03:19,040
करें भेरू दास कैमरा ऑन करिए

859
01:03:20,880 --> 01:03:26,880
[संगीत]

860
01:03:34,160 --> 01:03:38,600
आप भेरु दस है हां जी हा जी

861
01:03:38,600 --> 01:03:43,200
भेस हां बताइए भेस जी जय श्री

862
01:03:43,200 --> 01:03:47,400
राम राम राम स साब जय बिंदी छोड़ हां

863
01:03:47,400 --> 01:03:51,760
बताइए भेरू महादेव आप वो

864
01:03:51,760 --> 01:03:55,840
बता पाएंगे कि ये जो किसी भी

865
01:03:55,840 --> 01:04:01,080
ग्रंथ को सद ग्रंथ किस आधार पर कहते हैं

866
01:04:01,080 --> 01:04:06,560
आप आपके रामपाल दास जी आवाज सही नहीं आ रही

867
01:04:06,560 --> 01:04:09,040
है

868
01:04:09,040 --> 01:04:13,520
आप मैं पूछ रहा हूं किसी भी सद ग्रंथ को

869
01:04:13,520 --> 01:04:17,880
सद ग्रंथ किस आधार पर कहते हैं रामपाल दास जी

870
01:04:17,880 --> 01:04:23,040
किसी भी पुस्तक को सद ग्रंथ किस आधार पर कहते हैं रामपाल

871
01:04:23,040 --> 01:04:27,120
दास है आपके य का नेटवर्क ठीक नहीं

872
01:04:27,120 --> 01:04:33,120
है भाई साब चार वेद छ शास्त्र

873
01:04:33,760 --> 01:04:38,080
18 भाई साहब मैंने आपसे नियम पूछा है कि सद ग्रंथ

874
01:04:38,080 --> 01:04:44,080
मानने का नियम क्या है

875
01:04:44,600 --> 01:04:49,080
उनका हमारे गुरु जी ने बताते सूक्ष्म वेद से बताते

876
01:04:49,080 --> 01:04:55,080
कबीर साब जी की वाणी से क्या

877
01:04:56,360 --> 01:05:00,840
क्या बताते हैं कबीर साब जी की वाणी से बताते हैं सूक्ष्म वेद से

878
01:05:00,840 --> 01:05:05,160
मैं समझ नहीं पाया मेरा क्वेश्चन ये है कि किसी भी किसी भी ग्रंथ

879
01:05:05,160 --> 01:05:11,160
को सद ग्रंथ कहने का कारण क्या है रामपाल दास जी

880
01:05:15,960 --> 01:05:19,960
का उसमें ज्ञान सही लिखा हुआ है इसलिए सद

881
01:05:19,960 --> 01:05:24,280
ग्रंथ कहते हैं सत्य ज्ञान लिखा हुआ मतलब सत्य

882
01:05:24,280 --> 01:05:30,280
बोलने वाला सद ग्रंथ है

883
01:05:31,000 --> 01:05:35,040
हां अच्छा तो फिर

884
01:05:35,040 --> 01:05:41,040
यह इसका अर्थ यह है कि जिसको व सद ग्रंथ कहते हैं उसमें झूठ नहीं लिखा है कहीं

885
01:05:45,360 --> 01:05:49,560
भी इसका मतलब यह है कि वह जिसको सद

886
01:05:49,560 --> 01:05:55,560
ग्रंथ कहते हैं उसमें कहीं भी झूठ नहीं लिखा है

887
01:05:57,800 --> 01:06:01,840
जो झूठ लिखा उसको मत मानो नहीं नहीं नहीं मैं

888
01:06:01,840 --> 01:06:06,040
अभी यह पूछ रहा हूं कि सद ग्रंथ किसे कहते हैं

889
01:06:06,040 --> 01:06:10,320
अगर अगर सत्य बोलने वाले को सद ग्रंथ कहते हैं

890
01:06:10,320 --> 01:06:14,720
तो अगर उसमें यानी कि सद ग्रंथ व है जिसमें

891
01:06:14,720 --> 01:06:18,920
सच लिखा हो है ना

892
01:06:18,920 --> 01:06:22,920
तो इसका मतलब जिसको जिसको वो सद ग्रंथ कह रहे हैं इसका

893
01:06:22,920 --> 01:06:28,920
मतलब जिसको वो सद ग्रंथ कह रहे हैं उसम झूठ नहीं लिख होता है लिखने वाले

894
01:06:31,760 --> 01:06:35,920
ने लिखने वाले ने तो कुछ भी लिख दो सद ग्रंथ सद ग्रंथ कहते

895
01:06:35,920 --> 01:06:40,000
व तो शरू सेही कहते आए अभी से नया नाम निकला है भाई

896
01:06:40,000 --> 01:06:43,440
साहब

897
01:06:43,440 --> 01:06:48,360
मैंने मैंने आपसे पूछा है प्रामाणिक का आधार

898
01:06:48,360 --> 01:06:52,480
प्रामाणिक का आधार क्या है प्रमाणित का आधार

899
01:06:52,480 --> 01:06:57,480
प्रमाणित का आधार जो प्रमाणित ग्रंथ होता है का टीका होता

900
01:06:57,480 --> 01:07:02,680
है जो महापुरुषों की वाणी है

901
01:07:02,680 --> 01:07:06,720
अच्छा तो महापुरुषों की वाणी है जिनका टीका

902
01:07:06,720 --> 01:07:12,720
होता है अच्छा आपके हिसाब से कोई भी महापुरुष कब होता

903
01:07:13,640 --> 01:07:18,120
है क्योंकि महापुरुष अपने ज्ञान से होता नहीं

904
01:07:18,120 --> 01:07:22,880
सुनिए सुनिए सु क्योंकि दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं

905
01:07:22,880 --> 01:07:28,360
जो नास्तिकों को भी महापुरुष मानते हैं

906
01:07:28,360 --> 01:07:32,440
तो वो उनकी सोच है तो फिर आपकी सोच क्या है

907
01:07:32,440 --> 01:07:37,080
किसी को महापुरुष मानने

908
01:07:37,080 --> 01:07:41,080
की हमारी सोच है कि जो वेद शास्त्र

909
01:07:41,080 --> 01:07:46,040
प्रमाणित जो ज्ञान बताते हैं वही महापुरुष है

910
01:07:46,040 --> 01:07:50,240
भाई साहब मैं पूछ रहा हूं सबसे पहला प्रश्न था कि वेदों को

911
01:07:50,240 --> 01:07:54,240
किसी भी शास्त्र को आप सद ग्रंथ क्यों कहते हैं तो आपने कहा जो महापुरुषों की

912
01:07:54,240 --> 01:07:58,320
वाणी होती है उसको हम ग्रंथ कहते हैं तो अब मैं पूछ रहा हूं कि किसी को

913
01:07:58,320 --> 01:08:02,320
भी महापुरुष के रूप में क्यों स्वीकार करते हैं आप तो आप कह रहे जो वेद शास्त्र

914
01:08:02,320 --> 01:08:06,520
अरे वेद शास्त्र की ही तो हम लोग वो निकाल रहे हैं अभी हम वेद

915
01:08:06,520 --> 01:08:10,560
शास्त्र को चेक कर रहे हैं कि इसको सद ग्रंथ कैसे कहा आपने तो अब इसी

916
01:08:10,560 --> 01:08:15,160
को आप प्रमाण के रूप में थोड़ी ना ले सकते जैसे कि मैं किसी से पूछ रहा हूं

917
01:08:15,160 --> 01:08:19,360
कि तुम तुमने चोरी की है कि नहीं मैं चोर

918
01:08:19,360 --> 01:08:23,640
से पूछ रहा हूं चोरी की है कि नहीं तो चोर ने बोल दिया नहीं की तुमने मान लिया

919
01:08:23,640 --> 01:08:27,840
ऐसे होता है क्या तो चोर को प्रमाणित पर

920
01:08:27,840 --> 01:08:28,840
उसके

921
01:08:28,840 --> 01:08:34,840
जो चोरी की है सामान बरामद करेंगे

922
01:08:36,280 --> 01:08:40,960
या या सुनेंगे तो कहेंगे थड़ी क देंगे

923
01:08:40,960 --> 01:08:45,920
मैं यह नहीं कह रहा भाई साहब मैं आपसे य कह

924
01:08:45,920 --> 01:08:50,000
रहा मैं आपसे यह कह रहा हूं कि

925
01:08:50,000 --> 01:08:54,840
अगर सत्य बोलने के कारण हम किसी को भी सद ग्रंथ कहते हैं

926
01:08:54,840 --> 01:08:59,000
तो जिसको आप सद ग्रंथ कह रहे हैं उसमें झूठ भी लिखा

927
01:08:59,000 --> 01:09:04,760
हो सकता है या सिर्फ सच लिखा होता है यह

928
01:09:04,760 --> 01:09:09,040
बताइए जिस ग्रंथ में जैसे प्रमाणित जो ग्रंथ होता

929
01:09:09,040 --> 01:09:13,200
है उसमें हो सकता है मान लो प्रामाणिकता

930
01:09:13,200 --> 01:09:18,320
प्रमाणिकता का आधार क्या है रामपाल दास जी के

931
01:09:18,320 --> 01:09:22,680
लिए हमारे पास सूक्ष्म ज्ञान है उससे हम

932
01:09:22,680 --> 01:09:27,480
पता लगा लेते हैं यानी जी जो बात

933
01:09:27,480 --> 01:09:31,640
है मैंने अभी ये नहीं पूछा है कि किस शास्त्र की कौन सी बात सही

934
01:09:31,640 --> 01:09:35,720
है और कौन सी बात गलत है मैंने अभी आपसे पूछा है कि किसी

935
01:09:35,720 --> 01:09:39,840
को भी सद ग्रंथ कहने का आपका आधार क्या है अगर आपका

936
01:09:39,840 --> 01:09:43,960
आधार किसी को भी सद ग्रंथ कहने का ये है कि उसमें सत्य लिखा

937
01:09:43,960 --> 01:09:48,160
होना चाहिए ठीक है तो ये मैंने इसमें सत्य लिखा है ये देखो

938
01:09:48,160 --> 01:09:52,240
हम ये देखो लिखा है

939
01:09:52,240 --> 01:09:56,320
ये सत्य बात है कि नहीं दिख रहा है पढ़

940
01:09:56,320 --> 01:10:01,800
के सुनो क्या लिखा पूर्ण पढ़ना नहीं आता क्या आपको थोड़ा जूम

941
01:10:01,800 --> 01:10:06,560
करो पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो

942
01:10:06,560 --> 01:10:10,880
चलो मैं पढ़ के सुना दे रहा हूं पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो

943
01:10:10,880 --> 01:10:15,680
ठीक है यह सत्य बात है ना हा

944
01:10:15,680 --> 01:10:19,880
तो क्या यह सद ग्रंथ है हा बिल्कुल यह

945
01:10:19,880 --> 01:10:24,320
सद ग्रंथ

946
01:10:24,320 --> 01:10:28,920
है हां हो गया

947
01:10:28,920 --> 01:10:32,360
यह इनकी सद ग्रंथ की

948
01:10:32,360 --> 01:10:36,520
परिभाषा नहीं तो आप क्या प्रमाणित करना चाहते आप ही तो बोलो हमारी तरफ

949
01:10:36,520 --> 01:10:40,720
से प्रमाणित ये करना चाहता हूं कि आप लोग झूठ बोलते

950
01:10:40,720 --> 01:10:44,800
हैं उसके अग आप क्या साबित करना चाहते

951
01:10:44,800 --> 01:10:48,880
हो क्या मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं

952
01:10:48,880 --> 01:10:53,280
ये साबित करना चाह रहा हूं कि आप लोग झूठ बोलते

953
01:10:53,280 --> 01:10:58,320
अरे भाई आपने अगर सवाल किया तो जवाब सुनो ना

954
01:10:58,320 --> 01:11:02,640
दो बार मैंने बोलने की कोशिश की दोन बार आपने बीच में टाा दी आपने सवाल

955
01:11:02,640 --> 01:11:06,720
किया है तो जवाब सुनो मैं ये बताना चाह रहा हूं कि आप लोग ये

956
01:11:06,720 --> 01:11:11,280
झूठ बोलते

957
01:11:11,280 --> 01:11:15,720
हैं अरे उनकी साइड से थोड़ा डिले आ रहा है ना इसलिए थोड़ा कम्युनिकेशन

958
01:11:15,720 --> 01:11:19,960
गप हो रहा है उनका नेटवर्क बहुत खराब है ऐसा है भाई साहब सुनिए आपने

959
01:11:19,960 --> 01:11:24,080
एक सवाल किया है कि क्या कहते

960
01:11:24,080 --> 01:11:28,240
हैं सवाल ही भूल गया उन्होने क्या किया था

961
01:11:28,240 --> 01:11:32,560
आपने एक सवाल किया था कि आप प्रमाणित

962
01:11:32,560 --> 01:11:36,560
क्या करना चाहते हो यह सवाल आपने किया तो मैं प्रमाणित

963
01:11:36,560 --> 01:11:40,920
ये करना चाहता हूं पहली बात के आप इन सबको सद ग्रंथ नहीं मानते हैं

964
01:11:40,920 --> 01:11:44,960
मैं इस बात को बाहर ला रहा हूं आपकी सच्चाई को बाहर ला

965
01:11:44,960 --> 01:11:49,040
रहा हूं हम इनको हा तो लाओ कौन सी सच्चाई को बाहर

966
01:11:49,040 --> 01:11:53,240
ला रहे हो जनता तो देखे तो मैंने दिखाया ना अभी आपने इसको

967
01:11:53,240 --> 01:11:56,480
भी सद ग्रंथ मान लिया है

968
01:11:56,480 --> 01:12:00,480
ये दिखा तो दिया कैसे माने इसको आपने माना

969
01:12:00,480 --> 01:12:04,560
ना यह सद ग्रंथ है

970
01:12:04,560 --> 01:12:09,040
क्या नाम ग आप मानते हो कि नहीं इस

971
01:12:09,040 --> 01:12:13,080
ग ग्रंथ का नाम क्या शिवांश रचना

972
01:12:13,080 --> 01:12:17,240
हा तो ये परमाण थोड़ी है क्या इसम जो आपने

973
01:12:17,240 --> 01:12:21,480
जो अपनी तरफ सेही पूछ रहा हं आप मुझे अपने सद ग्रंथ

974
01:12:21,480 --> 01:12:26,680
की परिभाषा बता दीजिए

975
01:12:26,680 --> 01:12:30,680
फिर मैं पूछ रहा हू जो प्रमाणित ग्रंथ है मेरी बात

976
01:12:30,680 --> 01:12:34,840
सुन वो प्रमाणित प्रमाणित प्रमाणित की परिभाषा तो बताइए आप

977
01:12:34,840 --> 01:12:40,160
किसको प्रमाणिक मानेंगे किसको नहीं मानेंगे उसका आधार क्या है

978
01:12:40,160 --> 01:12:44,200
आपका चार वेद छ शास्त्र 18 पुराण जो है मैंने आपसे

979
01:12:44,200 --> 01:12:48,520
नाम नहीं पूछा है तो फिर प्रमाण ग्र किसको मा

980
01:12:48,520 --> 01:12:52,600
आप किसको मानोगे मैंने मैं तो वेद को मानता हूं और उसके

981
01:12:52,600 --> 01:12:56,680
आधार पर जो पुराण है उपनिषद है मानता मगर

982
01:12:56,680 --> 01:13:00,760
आप कुरान को आप जो है कुरान को भी मानते हैं जो वेदों

983
01:13:00,760 --> 01:13:05,200
का विरोध करते हैं आप उनको भी ग्रंथ कहते कुरा में मेरी बात सुनो

984
01:13:05,200 --> 01:13:09,360
कुरान में जो वेद वेद प्रमाणित जो बात लिखी होगी कुरान में वह

985
01:13:09,360 --> 01:13:13,400
सही है गीता में जो प्रमाणित वेद की लिखी

986
01:13:13,400 --> 01:13:17,400
व बात सही है पुराणों में जो वेद का ज्ञान मिलता है व वो

987
01:13:17,400 --> 01:13:21,640
पुराण सही है ठीक है तो फिर

988
01:13:21,640 --> 01:13:25,920
मैंने आपको कहा फिर आप जब पुरान में

989
01:13:25,920 --> 01:13:30,720
या किसी भी ग्रंथ में कुछ ऐसी बातें हैं जो वेद से मैच नहीं खा रही है

990
01:13:30,720 --> 01:13:36,720
तो फिर उनको आप सद ग्रंथ के आधार पर बोल देते हो हा

991
01:13:37,600 --> 01:13:41,800
बोलो बोलो सद ग्रंथ है ही पहले से ही बोला हमारी हम

992
01:13:41,800 --> 01:13:45,840
हमारी तरफ से तो बनाया नहीं पहले से बोला

993
01:13:45,840 --> 01:13:50,080
पहले से पहले से तो चार वाको में भी बोला है अरे पहले

994
01:13:50,080 --> 01:13:56,080
मानते होने बोला पहले से

995
01:13:56,880 --> 01:14:01,680
कहां से थे तो वो सद ग्रंथ है नहीं फिर क्या बोले

996
01:14:01,680 --> 01:14:05,800
आप एक काम करिए पहले से को थोड़ा परिभाषित करिए आपका पहले से क्या है चा

997
01:14:05,800 --> 01:14:09,800
दिन पहले से 10 दिन पहले से 100 दिन पहले से

998
01:14:09,800 --> 01:14:14,160
300 दिन पहले से हज दिन पहले से 2000 दिन पहले से

999
01:14:14,160 --> 01:14:18,400
2000 साल पहले से क्या है आपका पहले से वाला क्या है आपका

1000
01:14:18,400 --> 01:14:21,880
पहले से की परिभाषा क्या है

1001
01:14:21,880 --> 01:14:26,200
आपकी श से ग्रंथ शरू सेही को नए तो बनाया नहीं है

1002
01:14:26,200 --> 01:14:30,320
वो तो पहले से ही सत ग्रंथ है उसका नाम ही सत ग्र है यानी

1003
01:14:30,320 --> 01:14:34,400
कि आपका एक कारण हो गया कि वो सत्य बोलता हो दूसरा कारण हो

1004
01:14:34,400 --> 01:14:38,960
गया कि वो पहले से हो शुरू से हो हां

1005
01:14:38,960 --> 01:14:44,040
सृष्ट की आदि से हो हां

1006
01:14:44,040 --> 01:14:48,640
शृष्टि की आदि से हो हां

1007
01:14:48,640 --> 01:14:53,240
सही हा शृष्टि की आदि से

1008
01:14:53,240 --> 01:14:57,440
हो अरे हां हा

1009
01:14:57,440 --> 01:15:00,720
कुरान कब आई

1010
01:15:00,720 --> 01:15:04,920
है कुरान मोहम्मद साहब जी के समय आई थी तो

1011
01:15:04,920 --> 01:15:09,600
वो तो की आद से नहीं वो तो सट की आद से

1012
01:15:09,600 --> 01:15:13,640
नहीं भला आदमी उसमें वेद संबंधित ज्ञान लिखा हुआ है ब्रम

1013
01:15:13,640 --> 01:15:18,840
ने दिया था मालूम है पूरा का पूरा लिखा है कि थोड़ा बहुत अलग

1014
01:15:18,840 --> 01:15:22,920
है अरे समझ में नहीं आ रहा तो कान खोल के सुन लो मैं क्या बोल

1015
01:15:22,920 --> 01:15:27,240
रहा हूं जैसे चार वेद छ सा रा पुराण है उसमें गीता कुरान

1016
01:15:27,240 --> 01:15:31,240
बाइबल उसमें जो वेदों का ज्ञान लिखा हुआ है समझ में नहीं

1017
01:15:31,240 --> 01:15:35,320
आ रही क्या समझ में आ रही है मैं आपसे पूछ रहा

1018
01:15:35,320 --> 01:15:39,360
हूं कुरान में अक्षरस वेदों की वेदों के अनुसार ज्ञान लिखा है

1019
01:15:39,360 --> 01:15:43,360
या थोड़ा बहुत विरोध है और अगर विरोध है तो उसके बावजूद भी आप

1020
01:15:43,360 --> 01:15:47,600
उसको सद ग्रंथ कैसे कह रहे हो

1021
01:15:47,600 --> 01:15:51,640
अरे थोड़ा बहुत होगा तो किसी ने अनुवाद करता नहीं कि होगा या मान

1022
01:15:51,640 --> 01:15:56,000
लो किसी ने मिस प्रिंट ता नहीं अनुवाद करता

1023
01:15:56,000 --> 01:16:00,080
की बात नहीं कर रहा हूं मैं मैं अनुवाद करता जो

1024
01:16:00,080 --> 01:16:03,680
वहां से लिखा है जो कुरान में ओरिजनली लिखा है मैं उसकी बात

1025
01:16:03,680 --> 01:16:09,680
कर रहा हूं

1026
01:16:09,840 --> 01:16:13,840
हां बोलो बोल तो दिया बोलो नहीं क्या

1027
01:16:13,840 --> 01:16:17,920
बोलना चाहते क्या कुरान में अक्षरस वेद सम्मत ज्ञान है या थोड़ा

1028
01:16:17,920 --> 01:16:22,480
बहुत इधर उधर है और अगर थोड़ा बहुत इधर उधर है

1029
01:16:22,480 --> 01:16:26,120
फिर उसको सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो

1030
01:16:26,120 --> 01:16:32,120
तो फिर उसको क्या बोलले कौन सा बोल बताओ झूठा ग्रंथ क्या बोले

1031
01:16:32,160 --> 01:16:37,880
अमान्य

1032
01:16:37,880 --> 01:16:42,240
बो यानी की जिस जो व्यक्ति थोड़ी

1033
01:16:42,240 --> 01:16:46,360
सही और थोड़ी गलत बात बोलेगा उसको भी आप

1034
01:16:46,360 --> 01:16:50,560
सत्यवादी बोलोगे अरे तो सही बात है

1035
01:16:50,560 --> 01:16:55,280
सही लिखे सही बोलेंगे नहीं उसम कौन साही बातो को

1036
01:16:55,280 --> 01:16:58,360
आप बोलते सद

1037
01:16:58,360 --> 01:17:03,080
ग्र क्या बो पहले बात तो हमने गलत क्या बोला यह बताओ

1038
01:17:03,080 --> 01:17:07,080
हमारा ज्ञान किसने हमारा ज्ञान

1039
01:17:07,080 --> 01:17:11,080
गलत है बताओ आपका ज्ञान गलत ये है

1040
01:17:11,080 --> 01:17:15,480
सबसे पहली बात यह है कि अगर कुरान में आपने कहा कि वेदों के अनुसार

1041
01:17:15,480 --> 01:17:18,960
जो बात होगी वह सद ग्रंथ है अब मैं आपसे

1042
01:17:18,960 --> 01:17:23,240
पहले पूछ रहा हूं क्या आपको इस बारे में जानकारी है कि कुरान में थोड़ी

1043
01:17:23,240 --> 01:17:27,360
बहुत बात ही सही मगर व वे का विरोध करती है कि नहीं करती है इस

1044
01:17:27,360 --> 01:17:31,080
बात का नॉलेज है आपको कि नहीं

1045
01:17:31,080 --> 01:17:35,200
है पूछ रहा है करती है तो

1046
01:17:35,200 --> 01:17:39,320
जब थोड़ा बहुत भी कोई झूठ बोल रहा है जब थोड़ा बहुत भी कोई झूठ बोल

1047
01:17:39,320 --> 01:17:44,000
रहा है तो आप उसको सद ग्रंथ कह रहे हैं कह रहे है

1048
01:17:44,000 --> 01:17:48,120
ना हा तो कहते हैं बिल्कुल कहते हैं

1049
01:17:48,120 --> 01:17:52,520
अब ये बताइए कि कोई व्यक्ति थोड़ा बहुत झूठ और थोड़ा बहुत सत्य बोले

1050
01:17:52,520 --> 01:17:57,400
तो उसको आप सत्यवादी कहेंगे

1051
01:17:57,400 --> 01:18:01,520
तो उसकी सही बात तो माननी पड़ेगी नहीं मैं सही बात की बात

1052
01:18:01,520 --> 01:18:05,560
नहीं कह रहा हूं आप सद वक्तव्य बोलिए आप

1053
01:18:05,560 --> 01:18:10,280
सुनिए सुनिए भाई साहब आप सद वक्तव्य बोलिए कि

1054
01:18:10,280 --> 01:18:14,400
भैया सुन लीजिए सुन लीजिए आप सद वक्तव्य बोलिए

1055
01:18:14,400 --> 01:18:18,720
आप सद ग्रंथ कैसे बोल रहे आप उस पूरे के पूरे व्यक्ति को

1056
01:18:18,720 --> 01:18:24,720
प्रमाण मानने का ढोंग क्यों कर रहे हैं जब आप मानते नहीं

1057
01:18:25,040 --> 01:18:29,680
का ड आपका समझने का डंग है सही बात सही माने

1058
01:18:29,680 --> 01:18:35,560
आपसे मैंने पूछा कि उसमें थोड़ी बहुत

1059
01:18:35,560 --> 01:18:40,200
बा बात को गुमा मत हमारा ज्ञान क्या गलत है य बताओ

1060
01:18:40,200 --> 01:18:44,480
मैं वही बता रहा हूं अभी आपसे अभी आपसे प्रश्न

1061
01:18:44,480 --> 01:18:49,800
पूछ बिल्कुल बताओ हमारे पास भी है प्रश्न आप भी देना सवाल

1062
01:18:49,800 --> 01:18:54,080
जवाब मैं ये पूछ रहा हूं जिस किताब में आधी

1063
01:18:54,080 --> 01:18:58,160
बात स लिखी है आधी बात सही लिखी है और

1064
01:18:58,160 --> 01:19:03,760
उसको आप कह रहे हैं कि वो सद ग्रंथ है ठीक है तो झूठा ग्रंथ किसे

1065
01:19:03,760 --> 01:19:07,960
कहेंगे झूठी बात को कहेंगे झूठी बात

1066
01:19:07,960 --> 01:19:12,480
को कहेंगे हां मतलब

1067
01:19:12,480 --> 01:19:17,000
सद ग्रंथ कहेंगे जिसमें झूठी और सच्ची दोनों बातें होंगी

1068
01:19:17,000 --> 01:19:21,880
और झूठा ग्रंथ उसे कहेंगे जिसमें कोई झूठी बात लिखी होगी

1069
01:19:21,880 --> 01:19:26,640
या उसकी सिर्फ झूठी बात को सद ग्रंथ कहेंगे क्या

1070
01:19:26,640 --> 01:19:30,800
कहेंगे अरे भाई जो ज्ञान सही है उस ज्ञान को मानना है

1071
01:19:30,800 --> 01:19:34,920
और झूठ ज्ञान को नहीं मानना देखिए मैं ज्ञान

1072
01:19:34,920 --> 01:19:39,880
की बात नहीं मैं ग्रंथ की बात कर रहा हूं आपने उसको सद ग्रंथ कैसे कहा

1073
01:19:39,880 --> 01:19:43,920
बात आगे घुमाओ मत बात को सबको पता है आप क्या बोलना चाहते

1074
01:19:43,920 --> 01:19:48,840
हो सब अन्न खाते समझ में आई नहीं सबको पता

1075
01:19:48,840 --> 01:19:54,840
है की बा म कर

1076
01:20:05,840 --> 01:20:09,880
आपर ये बात वेद के हिसाब से है कि नहीं यह

1077
01:20:09,880 --> 01:20:14,280
बात वेद के हिसाब से है कि नहीं म्यूट हो भाई चिल्ला क्यों रहे हो आप म्यूट हैय

1078
01:20:14,280 --> 01:20:19,040
बात के हिसाब से है कि नहीं खोलो उनको खोलो

1079
01:20:19,040 --> 01:20:25,040
यह बात वेद के हिसाब से है कि नहीं जीरी बात सुन

1080
01:20:27,760 --> 01:20:30,640
मैं पूछ रहा य बात

1081
01:20:30,640 --> 01:20:36,560
वेद ये बात वेद के हिसाब से

1082
01:20:36,560 --> 01:20:42,080
हैय बात वेद के हिब

1083
01:20:42,080 --> 01:20:48,080
[प्रशंसा]

1084
01:20:48,600 --> 01:20:51,120
से

1085
01:20:51,120 --> 01:20:55,240
भा पूण ब्रह्म की भक्ति करना लिखा है मैंने यह

1086
01:20:55,240 --> 01:20:59,240
बात वेद के सम्मत है कि नहीं

1087
01:20:59,240 --> 01:21:03,880
मैंने लिखा है मैंने लिखा है

1088
01:21:03,880 --> 01:21:07,920
अन म्यूट करिए इनको सुनना नहीं है इनको सिर्फ

1089
01:21:07,920 --> 01:21:12,000
बोलना है जी हा हा मेरे को

1090
01:21:12,000 --> 01:21:16,360
भी सुनने दो और

1091
01:21:16,360 --> 01:21:20,400
वो देखिए अब जो बात चल रही है अगर उससे इधर उधर की आपने

1092
01:21:20,400 --> 01:21:25,440
बात की तो क्षमा करिए मुझे आपको हटाना पड़

1093
01:21:25,440 --> 01:21:31,440
इनको हटा

1094
01:21:32,920 --> 01:21:37,320
दीजिए जाइए आप जाइए भेरू दास जी आप आपको बात घुमानी

1095
01:21:37,320 --> 01:21:42,160
आपको कट टू कट बात भी करनी है बात आपको घुमानी है

1096
01:21:42,160 --> 01:21:46,680
क्या करना चाह रहा है सिद्ध क्या करना चाह रहा

1097
01:21:46,680 --> 01:21:51,160
है कौन बोल रहा है ऊपर आ जाओ

1098
01:21:51,160 --> 01:21:56,760
चंद्र मान दास हां बोल रहा हूं

1099
01:21:56,760 --> 01:22:01,560
एक मिनट आ गए क्या ऊपर ऊपर आए

1100
01:22:01,560 --> 01:22:05,760
आप कर आप सिद्ध क्या करना चाह रहा है लाइट

1101
01:22:05,760 --> 01:22:10,240
में आ थोड़ा लाइट में चेहरा दिखाओ अपना लाइट नहीं है तो

1102
01:22:10,240 --> 01:22:12,840
जाओ य

1103
01:22:12,840 --> 01:22:16,840
से ये सब प्लानिंग करके आ पहले बिना चहरे

1104
01:22:16,840 --> 01:22:21,240
केरा करके आए एक बात समझ में नहीं आती कि

1105
01:22:21,240 --> 01:22:25,280
यह लोग एक तरफा प्यार क्यों करते हैं क्योंकि

1106
01:22:25,280 --> 01:22:29,960
जो कबीर रामपाल वाले है व कुरान को मानेंगे कुरान

1107
01:22:29,960 --> 01:22:35,960
वाले रामपाल को नहीं मानेंगे [संगीत]

1108
01:22:37,800 --> 01:22:42,520
भेरु दस जी मैं एक बार आपको विषय क्लियर कर दू मैं क्या आपसे पूछ

1109
01:22:42,520 --> 01:22:48,520
रहा बा आपको सुनना है भदास

1110
01:22:49,000 --> 01:22:53,080
जी हां मेरे को सुनना है ठीक है मैं अभी

1111
01:22:53,080 --> 01:22:56,960
सवाल पूछ रहा हूं आप सम

1112
01:22:56,960 --> 01:23:01,360
कि अगर किसी अगर किसी बुक में

1113
01:23:01,360 --> 01:23:05,400
कोई एक बात झूठी लिखी है और एक बात सच्ची

1114
01:23:05,400 --> 01:23:10,440
भी लिखी है तो आपका कहना है कि वो हमारे लिए सद ग्रंथ है ठीक

1115
01:23:10,440 --> 01:23:14,720
है ठीक है तो आप कुरान

1116
01:23:14,720 --> 01:23:18,960
का ही हवाला क्यों दे रहे गीता का भी तो दो दे देखा बात

1117
01:23:18,960 --> 01:23:23,000
को घुमाओ क्यों अपने भड़काने वाली बात क्यों कर रहे हो आपको सवाल का जवाब नहीं देना है

1118
01:23:23,000 --> 01:23:27,160
भाई साहब सवाल का जवाब देना आपको आपको बात नहीं करनी आपको

1119
01:23:27,160 --> 01:23:31,280
इधर उधर की बातें करके उसको फसाद पैदा करके और जो बातों को उलझा करके

1120
01:23:31,280 --> 01:23:34,000
गायब हो जाना

1121
01:23:34,000 --> 01:23:38,120
है चंद्रवाना दास आपके जो नुस्खे हैं य काम

1122
01:23:38,120 --> 01:23:42,240
नहीं आएंगे आप अपनी बत्ती जलाए वह जो रामपाल दास जी है उनसे

1123
01:23:42,240 --> 01:23:46,280
भक्ति करें उनकी आपके जीवन में लाइट जलाए प्रकाश लाए

1124
01:23:46,280 --> 01:23:50,520
और फिर आए जिससे आपका थोपड़ा दिख सके जी अमित कुमार

1125
01:23:50,520 --> 01:23:54,960
जी बोलिए जय श्री राम

1126
01:23:54,960 --> 01:23:59,480
अरे बोलेंगे आप कई बार आके जा चुके विवांश कुमार जी

1127
01:23:59,480 --> 01:24:03,600
विवांश कुमार जी बोलिए

1128
01:24:03,600 --> 01:24:09,560
मेरा आप लोगों से कहना है मैंने

1129
01:24:09,560 --> 01:24:14,800
आप परिचय क्या लेना चाहते हैं बोलिए

1130
01:24:14,800 --> 01:24:20,040
अरे भाई आप जानते हैं हम क्या परिचय लेना चाहते हैं बताइए

1131
01:24:20,040 --> 01:24:25,440
ना रामपाल के रामपाल के

1132
01:24:25,440 --> 01:24:29,840
हां हां हां हां तो ऐसे बताओ सबसे पहले कि मैं रामपाल का शिष्य हूं

1133
01:24:29,840 --> 01:24:33,880
या अपने बारे में वही तो आपसे पूछना चाह रहे थे कि आप क्या जानना चाहते हैं

1134
01:24:33,880 --> 01:24:38,120
हमारा परिचय तो क्यों क्यों तो आपको पता है आपको

1135
01:24:38,120 --> 01:24:42,200
पता है अच्छी तरह से जग जाहिर बात है वो खामा खा की बातें कर रहे हो खर

1136
01:24:42,200 --> 01:24:45,120
बिल्कुल बिल्कुल

1137
01:24:45,120 --> 01:24:49,160
मैं कह रहा मैं ये कह रहा हूं जो बात चल रही है उस बारे में

1138
01:24:49,160 --> 01:24:54,840
आपके पास जवाब है जो बात अभी चल रही है उस बारे में है जवाब

1139
01:24:54,840 --> 01:24:58,880
मेरा आप लोगों से कुछ और प्रश्न है इस प्रश्न आप कर लीजिएगा मैं आपसे

1140
01:24:58,880 --> 01:25:02,880
पूछ रहा हूं जो बात चल रही है उस बारे में आपके पास जवाब है जी

1141
01:25:02,880 --> 01:25:05,920
बिल्कुल जवाब है

1142
01:25:05,920 --> 01:25:10,240
बताइए देखिए जैसे आपने पूछा है अभी कि जो

1143
01:25:10,240 --> 01:25:14,240
शास्त्र में झूठ बात और सत बात दोनों लिखा हुआ है

1144
01:25:14,240 --> 01:25:18,800
उसको हम सत ग्रंथ क्यों कहे यही ना आपका क्वेश्चन है

1145
01:25:18,800 --> 01:25:22,920
जी तो मेरा कहना है कि देखिए आपको पुराणों

1146
01:25:22,920 --> 01:25:27,160
में लिखा हुआ है पुराणों का ज्ञान जो है तो षि ऋषियों ने दिया है ब्रह्मा

1147
01:25:27,160 --> 01:25:31,200
जी ने ऋषियों को ज्ञान दिया है तो बर्मा जी खुद कहते हैं कि हमारी

1148
01:25:31,200 --> 01:25:36,120
जानकारी में जितना नॉलेज है कुछ साची और कुछ

1149
01:25:36,120 --> 01:25:40,320
झूठ मैं अपने हिसाब से मतलब जितना हमको पता है मैं

1150
01:25:40,320 --> 01:25:44,520
तुम लोगों को बता नारद जी को ऐसा बात कह र बर्मा जी

1151
01:25:44,520 --> 01:25:48,600
आप बताइए जितना जान गा मिनट मैं समझ गया आपकी बात

1152
01:25:48,600 --> 01:25:52,840
में समझ गया आपकी बात में समझ गया क्या ब्रह्मा जी ने

1153
01:25:52,840 --> 01:25:57,120
कहा है कि मैंने झूठ कहा है ग्रंथ में ब्रह्मा

1154
01:25:57,120 --> 01:26:01,400
जी ने ग्रंथों में ऐसा लिखा है पुरा में आपने ू शब्द

1155
01:26:01,400 --> 01:26:06,520
का उपयोग किया है ब्रह्मा जी ने कहीं पर य कहा है कि मैंने झूठ बोला है कहीं कहीं

1156
01:26:06,520 --> 01:26:10,920
पर ब्रह्मा जी ने यह कहा कि कुछ ज्ञान और कुछ अज्ञान

1157
01:26:10,920 --> 01:26:15,080
की बात बता रहा मतलब कुछ सच मतलब उने कहा

1158
01:26:15,080 --> 01:26:20,480
मैंने क पर अज्ञान दिया है हा उसने बोला

1159
01:26:20,480 --> 01:26:24,520
है परहा कहा है कुछ क क परने

1160
01:26:24,520 --> 01:26:25,280
बताया बताओ

1161
01:26:25,280 --> 01:26:29,440
कहा लिखा है पुराणों में लिखा है आपको दिखा दूंगा लिखा

1162
01:26:29,440 --> 01:26:33,040
है बताओ ना कहा लिखा

1163
01:26:33,040 --> 01:26:37,400
है आपको जो है ना देवी पुराण लेना पड़ेगा ठीक है

1164
01:26:37,400 --> 01:26:41,800
अभी पास बताओ लिखा है सुनिए ना मैं

1165
01:26:41,800 --> 01:26:45,880
अभी मैं उसका पेज नंबर मुझे याद नहीं है मैं वो सारा डिटेल

1166
01:26:45,880 --> 01:26:50,160
से बताऊंगा आपको आप इस समय लेम वापस ले लीजिए जो आपने

1167
01:26:50,160 --> 01:26:55,280
कहा है कि ब्रह्मा जी ने कहीं कहीं पर अज्ञान कहा है

1168
01:26:55,280 --> 01:27:01,280
ठीक है वापस

1169
01:27:01,520 --> 01:27:05,560
लेसे नहीं भाई साब देखि स्पष्ट बात किया करिए अभी आपके

1170
01:27:05,560 --> 01:27:11,560
पास प्रमाण है मेरा मेरा एक

1171
01:27:14,760 --> 01:27:19,680
बार मेरे पास विषय चल रहा है उसका जवाब है

1172
01:27:19,680 --> 01:27:24,440
और फिर हमने आपसे पूछा तो आपने कहा हा फिर बात आगे च

1173
01:27:24,440 --> 01:27:28,640
अब आप या तो बोल दीजिए मेरे पास जो विषय चल रहा है उसका जवाब नहीं है

1174
01:27:28,640 --> 01:27:32,760
तो हम आगे चले मैं कह रहा हूं कि

1175
01:27:32,760 --> 01:27:36,920
आपको पेज नंबर अगले सेशन में दिखा सकता हूं या फिर अभी टाइम

1176
01:27:36,920 --> 01:27:41,160
लगेगा हमको निकालने में देवी पुरान अभी अवेलेबल मेरे पास भी है लेकिन

1177
01:27:41,160 --> 01:27:45,280
मेरा नेट प्रॉब्लम के कारण मैं थोड़ा सा बाहर आया हूं मैंने दो

1178
01:27:45,280 --> 01:27:50,080
तीन बार आपसे रिक्वेस्ट मतलब भेजा लेकिन मेरा नेट नहीं चल

1179
01:27:50,080 --> 01:27:54,520
रहा तो आप अगले से में दिखा

1180
01:27:54,520 --> 01:27:58,640
एक मिनट मैं आपकी बात समझ गया मैं समझ रहा हूं आप अगले

1181
01:27:58,640 --> 01:28:02,800
सेशन में हमको ये दिखाएंगे कि पुराणों में

1182
01:28:02,800 --> 01:28:06,800
या अन्य शास्त्रों में ब्रह्मा जी ने यह कहा है कि कहीं कहीं पर मैंने

1183
01:28:06,800 --> 01:28:11,160
अज्ञान दिया है हा एकदम दिखाएंगे

1184
01:28:11,160 --> 01:28:15,360
दिखाए और नहीं दिखा पाए तो

1185
01:28:15,360 --> 01:28:16,520
अगर दिखाए

1186
01:28:16,520 --> 01:28:20,680
देंगे 100 में 100% आपको बोल रहे हैं चलिए आप दिखाएंगे ठीक

1187
01:28:20,680 --> 01:28:24,920
है अभी मैं अब बात ये हो रही थी सुनिए

1188
01:28:24,920 --> 01:28:29,560
आप दिखाएंगे आपको मैंने रियायत दी है ये भी आप समझिए

1189
01:28:29,560 --> 01:28:33,800
ये एक रियायत है रहम है जो मैंने आपको अभी अभी दिया है क्योंकि

1190
01:28:33,800 --> 01:28:37,800
आप जो बात बोल रहे उसका आपके पास प्रमाण नहीं है अब सुनिए मेरी

1191
01:28:37,800 --> 01:28:41,960
बात जाएगी ढूंढने में पूरा प पूरी

1192
01:28:41,960 --> 01:28:46,440
मंडली ढूंढने में जुड़ जाएगी ढ के लाओ

1193
01:28:46,440 --> 01:28:50,840
हा मैं अब मैं यह कह रहा हूं सुनिए

1194
01:28:50,840 --> 01:28:54,200
बोलिए

1195
01:28:54,200 --> 01:28:59,160
जैसे कि रामपाल दास जी का सिद्धांत क्या है

1196
01:28:59,160 --> 01:29:03,360
किसी भी शास्त्र को सद ग्रंथ मानने का अगर उसमें थोड़ी बहुत

1197
01:29:03,360 --> 01:29:07,520
बात भी झूठी लिखी है अज्ञान लिखा है तो

1198
01:29:07,520 --> 01:29:13,520
फिर उसको भी आप सद ग्रंथ कह रहे हैं तो झूठा ग्रंथ किसे

1199
01:29:14,320 --> 01:29:18,960
कहेंगे झूठा ग्रंथ किसे कहेंगे आप भी बतलाइए

1200
01:29:18,960 --> 01:29:23,040
हम तो झूठा ग्रंथ उसे कहते हैं जिसमें थोड़ा बहुत भी

1201
01:29:23,040 --> 01:29:28,080
झूठ हो

1202
01:29:28,080 --> 01:29:32,480
देखिए बात बताओ आप एक बात बताओ आप एक बात बताओ

1203
01:29:32,480 --> 01:29:37,000
मैं आपसे अभी आपसे भी पूछ लेता हूं जैसे कोई चोर है

1204
01:29:37,000 --> 01:29:41,680
ठीक है ठीक है वो कटग में खड़ा हुआ है

1205
01:29:41,680 --> 01:29:45,760
और वो यह बोल रहा है व वास्तव में चोर है पर वह बचने के लिए बोल रहा है कि

1206
01:29:45,760 --> 01:29:50,160
मैं चोर नहीं हूं यानी कि व झूठ बोल रहा है ठीक ठीक है

1207
01:29:50,160 --> 01:29:54,240
वही व्यक्ति यह भी बोलता है कि मुझे भूख लग रही है खाना दो यह सच बोल

1208
01:29:54,240 --> 01:29:58,560
रहा है हां अभी हम चोर को झूठा कहेंगे

1209
01:29:58,560 --> 01:30:02,400
या सच्चा

1210
01:30:02,400 --> 01:30:06,600
कहेंगे चोर पर विश्वास करोगे

1211
01:30:06,600 --> 01:30:10,640
आप देखिए पहले तो य प्रमाणित करना पड़

1212
01:30:10,640 --> 01:30:14,720
चोर है अरे मैंने आपको बता दिया ना

1213
01:30:14,720 --> 01:30:18,720
कि वह चोर ही है अब बात करिए हां

1214
01:30:18,720 --> 01:30:22,840
चोर ही है ठीक है हां तो

1215
01:30:22,840 --> 01:30:27,440
उसकी तो नहीं करना पड़ेगा नहीं करोगे

1216
01:30:27,440 --> 01:30:32,800
ना क्योंकि उसने कहीं भी झूठ बोल

1217
01:30:32,800 --> 01:30:37,120
दिया हा लेकिन कुछ इसी प्रकार से इसी

1218
01:30:37,120 --> 01:30:41,120
प्रकार से जब कहीं भी यह जो ग्रंथ है उसने जब

1219
01:30:41,120 --> 01:30:45,200
झूठ बोल दिया तो उसको आप सद ग्रंथ कैसे बोल रहे हो नहीं

1220
01:30:45,200 --> 01:30:49,520
नहीं सुनिए देखि स्थिति केच के ऊपर किया जाएगा

1221
01:30:49,520 --> 01:30:55,360
भूख लगाको दे दिया जाए खाने के लिए ऐसा भी तो हो सता है

1222
01:30:55,360 --> 01:30:58,840
क्या गलत

1223
01:30:58,840 --> 01:31:03,000
बो एक बात कहो मैंने आपसे जब यह पूछा था कि झूठा ग्रंथ

1224
01:31:03,000 --> 01:31:07,120
किसे कहेंगे तो आपने मुझसे खट से बोल दिया आप कैसे कहेंगे मैंने बता भी दिया अब आप

1225
01:31:07,120 --> 01:31:11,160
मुझे बताइए झूठा ग्रंथ किसे कहेंगे

1226
01:31:11,160 --> 01:31:15,600
हम बताते हैं झूठा ग्रंथ जो है

1227
01:31:15,600 --> 01:31:21,240
उसे हम कहेंगे कि जिसका

1228
01:31:21,240 --> 01:31:25,360
ज्ञान आवाज थोड़ा नेटवर्क का प्रॉब्लम हो हो सकता है आवाज

1229
01:31:25,360 --> 01:31:29,760
जा रहा है मेरा क्लियर काम चल रहा है

1230
01:31:29,760 --> 01:31:34,320
बताइए बताइए झूठा ग्रंथ उ हेलो

1231
01:31:34,320 --> 01:31:39,560
बोलिए बोलिए झूठा ग्रंथ हम उसे

1232
01:31:39,560 --> 01:31:43,680
कहेंगे जिसका ज्ञान गीता और

1233
01:31:43,680 --> 01:31:48,160
वेद के विरुद्ध हो

1234
01:31:48,160 --> 01:31:52,720
अच्छा बहुत बढ़िया बात बो आपने बहुत बढ़िया

1235
01:31:52,720 --> 01:31:57,080
जो गीता और वेद के विरुद्ध होगा उसको आप झूठा ग्रंथ बोलेंगे

1236
01:31:57,080 --> 01:32:01,880
ठीक है एकदम बिल्कुल एकदम अच्छा

1237
01:32:01,880 --> 01:32:06,040
क्या गीता और वेद में कहीं भी यह लिखा है क्या कि ब्रह्मा विष्णु

1238
01:32:06,040 --> 01:32:10,400
महेश का जो जन्म है वह मैथुन प्रक्रिया से हुआ

1239
01:32:10,400 --> 01:32:15,160
है बिल्कुल बिल्कुल कहां लिखा

1240
01:32:15,160 --> 01:32:20,040
है कहां लिखा है भाई आपने

1241
01:32:20,040 --> 01:32:24,160
है ना गीता जी को

1242
01:32:24,160 --> 01:32:29,240
पहले 14 अध्याय का तीन नंबर श्लोक

1243
01:32:29,240 --> 01:32:33,680
निकालिए उसम लिखा हुआ है

1244
01:32:33,680 --> 01:32:37,920
गीता जी को गीता जी को समझना कठिन है ठीक है लेकिन

1245
01:32:37,920 --> 01:32:41,960
एक बार फिर से निकालिए आप हम भी गीता को लाते है थोड़ा आपको

1246
01:32:41,960 --> 01:32:46,920
व जो शलोक हैता हु निकाल लिया नंबर

1247
01:32:46,920 --> 01:32:51,960
बताइए गीता जी

1248
01:32:51,960 --> 01:32:55,180
अध हा

1249
01:32:55,180 --> 01:33:00,040
[संगीत]

1250
01:33:00,040 --> 01:33:04,120
मेरे मत ब्रह्म रूप मूल प्रकृति संपूर्ण भूतों की योनि है

1251
01:33:04,120 --> 01:33:08,560
अर्थात गर्भधान का स्थान है उस योनि में चेतन समुदाय

1252
01:33:08,560 --> 01:33:12,680
गर्भ को स्थापन करता हूं उस जड़ चेतन के संयोग से

1253
01:33:12,680 --> 01:33:16,680
सब भूतों की उत्पत्ति होती है ऐसा

1254
01:33:16,680 --> 01:33:20,920
लिखा है ना मैथुन प्रक्रिया मैथुन ये मैथुन थोड़ी

1255
01:33:20,920 --> 01:33:24,920
ना है मैथुन दिखाइए मैथुन मैथुन समझ रहे

1256
01:33:24,920 --> 01:33:29,080
हैं ना कहते हैन किसे

1257
01:33:29,080 --> 01:33:33,080
कहते मैथुन क्रिया कहते जो स्त्री पुरुष के संयोग

1258
01:33:33,080 --> 01:33:37,560
से जो मतलब प्राण का उत्पत्ति हो उसे मैथुन क्रिया करते हैं

1259
01:33:37,560 --> 01:33:42,440
तो वो दिखाइए ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति मैथुन से हो रही है वो

1260
01:33:42,440 --> 01:33:47,400
दिखाइए तो उसमें थोड़ा आगे तो और पढ़िए स्टेप में वहा नहीं

1261
01:33:47,400 --> 01:33:52,080
गुणों की उत्पत्ति है प्रकृति से हुई है

1262
01:33:52,080 --> 01:33:56,680
कौन से खा मैंने कहा मैथुन क्रिया हुई

1263
01:33:56,680 --> 01:34:00,840
मैथुन क्रिया सुनिए सुनिए जैसे हवा

1264
01:34:00,840 --> 01:34:05,360
है सुनिए हवा है हवा बकुल हवा

1265
01:34:05,360 --> 01:34:07,280
है बिल्कुल है

1266
01:34:07,280 --> 01:34:11,680
तो जो जो ये क्या कहते हैं जड़ हो गई प्रकृति

1267
01:34:11,680 --> 01:34:15,840
जो पंखे के अंदर की मोटर होती है पंखे के अंदर

1268
01:34:15,840 --> 01:34:20,040
की मोटर होती है वो हो गई जड़ प्रकृति और उसके अंदर विद्युत प्रवाह

1269
01:34:20,040 --> 01:34:24,280
होता है वो हो गया ब्रह्म अब इन दोनों

1270
01:34:24,280 --> 01:34:28,320
के संयोग से भी हवा उत्पन्न हो रही है ना तोय

1271
01:34:28,320 --> 01:34:33,200
प्रक्रिया है क्या कोई देखिए आप

1272
01:34:33,200 --> 01:34:37,600
है क्या नहीं सुनिए आप जैसे एजाम पल दे रहे हैं

1273
01:34:37,600 --> 01:34:41,760
हा इस को क्या मुझे मैन बताओ

1274
01:34:41,760 --> 01:34:46,000
सुनो मेरा सवाल सुन लो दोबारा मुझे मैथुन प्रक्रिया से ब्रह्मा

1275
01:34:46,000 --> 01:34:50,280
विष्णु महेश को उत्पन्न होने वाला दिखाओ आप

1276
01:34:50,280 --> 01:34:54,680
उसको देवी पुराण में भी देख सकते हैं क्या

1277
01:34:54,680 --> 01:34:58,680
लोक क्रमांक बोलो और सुनो अब ये टाइम वेस्ट अगर करवाया ब

1278
01:34:58,680 --> 01:35:04,680
खोलने बा मैथन नहीं लिखा तो मैं क्या

1279
01:35:11,200 --> 01:35:16,000
करूंगा क्या कर या सुनि थोड़ा सा

1280
01:35:16,000 --> 01:35:20,880
आप मैथ कया को दूसरे भाषा में और

1281
01:35:20,880 --> 01:35:24,960
भी क्या क्या कहते हैं क्या क्या क्या बात बोल रहे

1282
01:35:24,960 --> 01:35:29,840
हैं मैथन होता है मेरे भाई सुनिए क्या नाम है इनका

1283
01:35:29,840 --> 01:35:33,840
जी क्या नाम है अरे इनका नाम है ये अपना

1284
01:35:33,840 --> 01:35:37,840
विभाष कुमार जी वि वि जी देखिए ऐसा है

1285
01:35:37,840 --> 01:35:41,920
मैथुन प्रक्रिया वो है जो हाड मास के जो य

1286
01:35:41,920 --> 01:35:46,080
स्त्री और पुरुष होते हैं इनके बीच में जो जिसको इंग्लिश

1287
01:35:46,080 --> 01:35:50,440
में आजकल सेक्स कहा जाता है ठीक है ठीक हैय

1288
01:35:50,440 --> 01:35:54,480
अब आप मुझे किसी भी वैदिक वांगम में ब्र विष्णु महेश के

1289
01:35:54,480 --> 01:35:59,240
लिए दिखा दीजिए कि वह जो है इस प्रक्रिया से उत्पन्न हो रहे हैं

1290
01:35:59,240 --> 01:36:03,320
क्योंकि आपके जो यह जेल जेल

1291
01:36:03,320 --> 01:36:07,320
धाम निवासी संत है आपके उन्होंने ये लिखा है कि से

1292
01:36:07,320 --> 01:36:12,200
उत्पन्न होते हैं तो आप मुझे लिखा दिखाइए कहां पर मैथुन हुआ

1293
01:36:12,200 --> 01:36:16,200
मैथुन दिखाइए थो आप जो है ना

1294
01:36:16,200 --> 01:36:20,320
थोड़ा से बात कर थोड़ा प्रमाण ले जाता हं अभी टाइम लगेगा

1295
01:36:20,320 --> 01:36:24,480
ना आप लोगों को तालाब में आ जाइए 10 बजे तक चलेगा

1296
01:36:24,480 --> 01:36:26,440
फिर बंद हो जाएगा ठीक है

1297
01:36:26,440 --> 01:36:32,440
चलिए तो अब 13 14 मिनट 17 मिनट है अभी ठीक है

1298
01:36:32,800 --> 01:36:37,480
क जय श्रीराम बोलिए

1299
01:36:37,480 --> 01:36:41,560
देखिए एक बात जो है ना आपने जितना भी पुराण

1300
01:36:41,560 --> 01:36:45,960
है संतपाल जी महाराज ने पुराण को खोल के दिखाया है आप देखिए बकवास य मत करिए

1301
01:36:45,960 --> 01:36:51,960
प्लीज बकवास मत कर आप जाइए प्रमाण लेके आए

1302
01:36:52,520 --> 01:36:56,520
प्लीज श्री राम भाई जी जय श्री राम अंत में अपनी बात रखनी है ना

1303
01:36:56,520 --> 01:37:00,640
बिना रखे क चले जाएंगे जय श्री राम पंत जी

1304
01:37:00,640 --> 01:37:04,720
मैंने कहा इनको प्रमाण मत दिखाए बहुत हो गया बहुत प्रमाण दिखा लिए

1305
01:37:04,720 --> 01:37:08,880
प्रमाण दिखाने की कोई जरूरत नहीं है इनको ऐसे ही धोए इनको

1306
01:37:08,880 --> 01:37:13,200
किताब क पूछ आप स्कूल के आगे पड़े

1307
01:37:13,200 --> 01:37:17,400
की पीछे पड़े कुछ ऐसे प्रश्न कर वैदिक अलौकिक

1308
01:37:17,400 --> 01:37:21,760
ज्ञान से इनसे इनको प्रमाण दिखाने से कुछ होने वाला नहीं है

1309
01:37:21,760 --> 01:37:25,760
आप दो तीन महीने से किताब खोलते खोलते इनका बुद्धि में

1310
01:37:25,760 --> 01:37:30,120
इतनी जड़ बुद्धि है ऐसा तो भगवान कस

1311
01:37:30,120 --> 01:37:34,160
मैंने कहीं देखा नहीं कभी कैसे लोग पड़े होंगे कुछ पड़े नहीं

1312
01:37:34,160 --> 01:37:39,000
पड़े कैसी बुद्धि है उसे देख के बड़ा विस्मय होता है हमें तो

1313
01:37:39,000 --> 01:37:45,000
आप यह देखिए कि एक शिष्य आया उसने

1314
01:37:45,480 --> 01:37:49,760
बोला कोई व्यक्ति ये हो रहा है यह कह रहा है कि जो प्रक्रिया रामपाल

1315
01:37:49,760 --> 01:37:54,000
और बविता जी के बीच में हुई थी

1316
01:37:54,000 --> 01:37:58,000
वो समझा रहा है उनसे जाके पूछ इलिए तो जेल में

1317
01:37:58,000 --> 01:38:02,000
है जेल में इसीलिए जेल में है जो सच्चाई है भैया ये शंकराचार्य

1318
01:38:02,000 --> 01:38:06,280
जी को बहुत गाली देते य चैट में देखिए उससे

1319
01:38:06,280 --> 01:38:10,480
अपने शंकराचार्य जी का मान बढ़ता है क्योंकि दुश्मन जितना ज्यादा

1320
01:38:10,480 --> 01:38:14,720
जिस संत के बारे में जहर उगलेगा उस संत के प्रति जो सही लोग होंगे

1321
01:38:14,720 --> 01:38:19,520
उनमें आस्था आएगी समझ रहे हैं

1322
01:38:19,520 --> 01:38:23,640
भाई यदि कोई मैं आपको बताऊ जैसे

1323
01:38:23,640 --> 01:38:28,080
मुस्लिम है जैसे आजकल एक स्ट्रेटजी है कि भाई मुस्लिम आतंकवादी

1324
01:38:28,080 --> 01:38:32,320
है जो जिहादी है उनकी तरफ से ऐसा माना जाता है

1325
01:38:32,320 --> 01:38:36,560
कि वोह एक तरीके से अपना जिहाद फैलाना चाहते हैं और पूरे

1326
01:38:36,560 --> 01:38:40,880
में एक तंत्र लाना चाहते हैं जिसमें वह क्या कहते हैं उसको शरीयत

1327
01:38:40,880 --> 01:38:44,880
कहते शरिया शरिया शरिया शरिया लाग करना

1328
01:38:44,880 --> 01:38:49,360
चाते भारत में गजवा हिंद से संबोधित है वो हा गजवा

1329
01:38:49,360 --> 01:38:53,480
तो गजवा लाना चाहते हैं तो अब वो जिस भी हिंदू

1330
01:38:53,480 --> 01:38:57,600
की तरफ के किसी भी व्यक्ति की जब वो बुराई करेंगे तो ऑटोमेटिक वो

1331
01:38:57,600 --> 01:39:00,680
जो हिंदूवादी जो लीडर होगा वो ऑटोमेटिक वो सब हिंदुओं

1332
01:39:00,680 --> 01:39:05,000
का हीरो बन जाएगा तो ये रामपाल वालों को ज्यादातर

1333
01:39:05,000 --> 01:39:09,040
हिंदू जानता है यह जितना बुराई करेंगे शंकराचार्य की उतना

1334
01:39:09,040 --> 01:39:13,920
ही शंकराचार्य के पक्ष में लोगों के मन में श्रद्धा होती रहेगी उमड़ती

1335
01:39:13,920 --> 01:39:17,920
रहेगी भाई शंकराचार्य में दम है जो इसको मजबूर होना पड़ रहा है बार-बार शंकराचार्य

1336
01:39:17,920 --> 01:39:21,920
का खंडन करने के लिए समझ रहे हैं वो क

1337
01:39:21,920 --> 01:39:26,440
भी नहीं सकते भ इसे तो हम खंडन भी नहीं

1338
01:39:26,440 --> 01:39:30,520
बोलेंगे खंडन भी नहीं बोले जो भी आलोचना या निंदा जो भी

1339
01:39:30,520 --> 01:39:35,280
सोच लो विशाल भाटिया जी जय श्री राम

1340
01:39:35,280 --> 01:39:39,360
जय श्री राम सभी को आ गए छोटे नंद बंदर हटाने

1341
01:39:39,360 --> 01:39:43,600
सबका आडंबर अरे एक मिनट

1342
01:39:43,600 --> 01:39:47,680
विशाल जी अरे विभास जी आपको नहीं देखना प्रमाण नहीं गए लेने

1343
01:39:47,680 --> 01:39:51,920
आप प्रमाण प्रमाण ले आए क्या विभास जी

1344
01:39:51,920 --> 01:39:55,920
किसका प्रमाण ठीक है आप लोग थोड़ा बात करिए हम

1345
01:39:55,920 --> 01:40:00,200
आप लोग वार्तालाप अरे तो जाइए ना य बैठे क्यों है

1346
01:40:00,200 --> 01:40:04,640
प्रमाण ले आइए कोई प्रमाण नहीं है

1347
01:40:04,640 --> 01:40:08,800
आप प्रमाण लेजी टट पुंजी है ब्रह्मा विष्णु

1348
01:40:08,800 --> 01:40:12,880
महेश का कहीं भी वैदिक वांगम में आविर्भाव वो

1349
01:40:12,880 --> 01:40:15,680
जो हो रहा है पूरे में कहीं पर भी नहीं है कि

1350
01:40:15,680 --> 01:40:20,080
मैथुन प्रक्रिया से हो रहा है मैथुन प्रक्रिया स्टार्ट मनु शतरूपा से हो रही है

1351
01:40:20,080 --> 01:40:24,400
बिल्कुल हम बताते हैं ना हां जी बोलिए

1352
01:40:24,400 --> 01:40:28,560
विशाल सबसे पहले तो आप सभी को महाकुंभ की

1353
01:40:28,560 --> 01:40:32,680
बहुत-बहुत बधाई पूर्ण महाकुंभ की पूरा अनंत खुशियों से भरपूर हो

1354
01:40:32,680 --> 01:40:37,360
सभी सनातन के लिए ऐसी मेरी प्रार्थना है

1355
01:40:37,360 --> 01:40:41,480
तो अभी मैं पद्म पुराण का इन दिनों स्वाध्याय कर रहा हूं पद्म पुराण

1356
01:40:41,480 --> 01:40:46,400
में दो बड़े खुलासे हुए हैं मैं बताना चाहूंगा बोलिए

1357
01:40:46,400 --> 01:40:50,480
जैसे अब जैसे अपनी पुस्तक पर इन्होंने कहा है कि गीता

1358
01:40:50,480 --> 01:40:54,800
पढ़ने से जो है मोक्ष नहीं होता कहा है ना इन्होने ऐसा हा

1359
01:40:54,800 --> 01:40:58,840
तो अभी ये ये आया मेरे

1360
01:40:58,840 --> 01:41:02,880
पास यह मेरे हाथ में एक सेकंड गीता महात्म पदम

1361
01:41:02,880 --> 01:41:08,880
पुराण का हा

1362
01:41:11,320 --> 01:41:15,680
रुकिए भैया सवा घंटा जब बहुत कार्य कर रहे है हमारी जिंदगी

1363
01:41:15,680 --> 01:41:20,840
में ये देखिए आज आज मैंने अपना कैमरा

1364
01:41:20,840 --> 01:41:25,120
प ये देख ब बहुत ही कार्य रहा है भगवान

1365
01:41:25,120 --> 01:41:29,200
ा निर्मित तन माया गुण गोप भगवान तो अपनी

1366
01:41:29,200 --> 01:41:34,120
इच्छा से प्रकट होते हैं ये जूम कर सकते है क्या इसको

1367
01:41:34,120 --> 01:41:38,320
जीता जी बड़ा कर दीजिए इनका वाला हमारा

1368
01:41:38,320 --> 01:41:42,960
वाला सबका छोटा कर दीजिए उनका बड़ा कर [संगीत]

1369
01:41:42,960 --> 01:41:47,360
दीजिए छोटे नने बंदर मिटाए सबके आडंबर

1370
01:41:47,360 --> 01:41:51,440
तो ये है मेरे पास संक्षिप्त पद्म पुराण गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित

1371
01:41:51,440 --> 01:41:55,560
अब जैसे कहते हैं ये गीता के मेन 11 अध्याय प

1372
01:41:55,560 --> 01:41:59,560
ये लोग इतना पूछते हैं कि जहां पर श्री कृष्ण ने कहा कि मैं बड़ा हुआ काल हूं तो

1373
01:41:59,560 --> 01:42:03,560
वह काल है जो और उस काल ने अपने को ब्रह्म भी कहा है तो अब यह देखिए इसमें

1374
01:42:03,560 --> 01:42:07,760
ये क्या लिखा है यह संक्षिप्त पद्म पुराण गीता

1375
01:42:07,760 --> 01:42:11,880
महात्म उत्तरखंड पेज नंबर 849

1376
01:42:11,880 --> 01:42:16,040
पूर्णानंद पूर्णानंद संदू श्री कृष्ण नामक

1377
01:42:16,040 --> 01:42:20,080
ब्रह्म यहां पर देखिए श्री कृष्ण नामक ब्रह्म श्री कृष्ण को ब्रह्म बोल दिया श्री

1378
01:42:20,080 --> 01:42:24,280
कृष्ण नामक ब्रह्म के मुख से कुरुक्षेत्र में अपने मित्र अर्जुन के प्रति जो अमृतम

1379
01:42:24,280 --> 01:42:26,320
उपदेश निकला था वही श्री विष्णु

1380
01:42:26,320 --> 01:42:30,440
का परम तात्विक रूप है तुम उसी का चिंतन करो वह मोक्ष

1381
01:42:30,440 --> 01:42:34,480
के लिए प्रसिद्ध रसायन है संसार भय से डरे हुए मनुष्यों की आदि

1382
01:42:34,480 --> 01:42:38,560
व्याधि का विनाशक तथा अनेक जन्मों के दुखों का नाश करने वाला है

1383
01:42:38,560 --> 01:42:42,560
मैं उसके सिवा दूसरे किसी साधना को ऐसा नहीं देखता अतः

1384
01:42:42,560 --> 01:42:46,680
उसी का अभ्यास करो भगवत गीता के 11 अध्याय का यह महात्म जिसमें भगवान शिव

1385
01:42:46,680 --> 01:42:50,680
ऐसा कह रहे हैं माता पार्वती को ये महात्म सुना रहे हैं यहां प देखिए श्री कृष्ण को ब्रह्म

1386
01:42:50,680 --> 01:42:54,200
बोल दिया

1387
01:42:54,200 --> 01:42:58,640
कि गीता पढ़ने से एक एक अध्याय में इसकी प्रति लिखी हुई है कि जो इस अध्याय का उस

1388
01:42:58,640 --> 01:43:02,880
अध्याय बात य है विशाल जी आप अपना फ्रंट कैमरा

1389
01:43:02,880 --> 01:43:07,080
ऑन करिए एक दूसरा खुलासा भी है दूसरा बस कर दीजिए

1390
01:43:07,080 --> 01:43:11,760
कर दीजिए पहले कर दीजिए आप कर दीजिए

1391
01:43:11,760 --> 01:43:15,880
खुलासा आज इनका करके रहूंगा मैं तो खुद हैरान हो गया मेरे छूट गए हैं

1392
01:43:15,880 --> 01:43:20,840
अच्छा पता है आपको एक चीज बताऊ आप तब तक निकालिए मैं एक बात

1393
01:43:20,840 --> 01:43:25,160
बोलू ये लोग जब आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न सुनते हैं ना

1394
01:43:25,160 --> 01:43:29,200
रामपाल के फॉलोअर्स तो ये लोग अपने मन में ये देखो कैसी

1395
01:43:29,200 --> 01:43:33,400
बातें कर रहा है वो तात्विक बात है वो मगर ये देखो कैसी

1396
01:43:33,400 --> 01:43:37,440
बातें कर रहा है उनके आउट ऑफ द

1397
01:43:37,440 --> 01:43:41,800
सिलेबस बाउंस मार गई बात ये क्या होता सर्वशक्तिमान ईश्वर खाली जगह

1398
01:43:41,800 --> 01:43:46,840
ईश्वर के अलावा खाली जगह थी कि नहीं थी तो फिर वो वहां पर यह बोलने लगते हैं

1399
01:43:46,840 --> 01:43:52,040
कि यह कैसी बात कर रहा है

1400
01:43:52,040 --> 01:43:56,400
भाई वो नहीं था आपने वो एक वीडियो में नहीं बोल

1401
01:43:56,400 --> 01:44:00,680
बो आपको बताया गया कि ऐसे न्यूज ऐसे न्यूज चैनल वाले कुंभ

1402
01:44:00,680 --> 01:44:04,800
में आ गए हैं आ गए तो मेहमान है तो अब हमारी परंपरा है मेहमान

1403
01:44:04,800 --> 01:44:09,160
को खाली पेटना भेजने की तो खा पिला के मोटा करना है इनको

1404
01:44:09,160 --> 01:44:13,640
हां हां अच्छे से उनको वहां पर बढ़िया नाश्ता पानी सब दिया

1405
01:44:13,640 --> 01:44:17,800
मिल जाएंगे और सुनि आपसे अगर मिलना हो तो आप हमको इंस्टा पर डीएम कर दोगे मतलब स्थान

1406
01:44:17,800 --> 01:44:22,120
वहां पे हां हां वो लगाया तो है स्टोम में

1407
01:44:22,120 --> 01:44:26,280
अच्छा ये देखिए एक बड़ा खुलासा ये कल मैं टीआर पहाड़ी जी के चैनल पर भी गया

1408
01:44:26,280 --> 01:44:30,280
था तो मैंने यह प्रमाण दिखाया था कृष्ण ब्रह्म वाला और दूसरा ये मैं

1409
01:44:30,280 --> 01:44:34,280
आपको फिर से दिखा दे रहा हूं ये पद्म पुराण का विष्णु सहस्त्र

1410
01:44:34,280 --> 01:44:38,400
नाम स्तोत्र है एक महाभारत में है अनुशासन पर्व में और एक ये है इसका

1411
01:44:38,400 --> 01:44:42,640
पेज नंबर 718 अब ये पद्म पुराण विष्णु

1412
01:44:42,640 --> 01:44:46,880
सहस्त्र नाम जो भगवान शिव माता पार्वती को सुना रहे हैं इसमें ये देखिए 176

1413
01:44:46,880 --> 01:44:51,280
शलोक नंबर बताया पेज नंबर

1414
01:44:51,280 --> 01:44:55,080
718 अच्छा

1415
01:44:55,080 --> 01:44:59,200
अब ये देखिए अब इसका यह 176 वा श्लोक है विष्णु सहस्त्र नाम

1416
01:44:59,200 --> 01:45:03,600
पद्म पुराण इसमें देखिए भगवान शिव के लिए भगवान विष्णु के लिए क्या शब्द आया

1417
01:45:03,600 --> 01:45:08,920
यह देखिए पहले मैं वो पूरा श्लोक पढ़ दे रहा हूं त्र त्रिकाल जित कंदर्प

1418
01:45:08,920 --> 01:45:13,800
मुनीश्वर आद कबीर ग्रीव सर्व वाग शव

1419
01:45:13,800 --> 01:45:17,960
ये देखिए कबीर शब्द आया विष्णु भगवान के लिए कवीर जैसे बोलते हैं ना कबीर

1420
01:45:17,960 --> 01:45:22,280
देव कबीर मनीषी ये दिख रहा है कब कबीर है ग्रीव

1421
01:45:22,280 --> 01:45:26,480
अब ये देखो इसका नीचे संधि विच्छेद भी दिया गया है कवि और है ग्री अलग

1422
01:45:26,480 --> 01:45:30,600
कर दो तो वो जो संधि विच्छेद का ऊपर हा है रा है वो गायब हो जाता है तो ये देखिए

1423
01:45:30,600 --> 01:45:34,720
यहां पे कवि का मतलब बताया है त्रिकाल दर्शी विद्वान अब देखिए यहां प भगवान विष्णु

1424
01:45:34,720 --> 01:45:39,160
के लिए कवीर शब्द आ गया इसका मतलब वेदों में जो कबीर है वो परमात्मा

1425
01:45:39,160 --> 01:45:43,920
नारायण है और अगर भगवान श्री कृष्ण गीता के 18वें अध्याय के

1426
01:45:43,920 --> 01:45:47,960
छठवें श्लोक में अगर अर्जुन को कह भी रहे हैं कि तुम उस परमेश्वर की शरण में जाओ तो एक तरह

1427
01:45:47,960 --> 01:45:52,040
से नारायण की बात कर रहे हैं और वो नारायण की बात हो रही है तो एक तरह से अपनी ही बात कर रहे

1428
01:45:52,040 --> 01:45:56,800
हैं ट्स गीता की सारी चन खत्म

1429
01:45:56,800 --> 01:46:01,200
बहुत बढ़िया अब आप सामने लाइए अपना

1430
01:46:01,200 --> 01:46:05,400
चेहरा वाला नहीं अने वीडियो में बोला भया व हरियाणवी

1431
01:46:05,400 --> 01:46:09,240
साइड के बोलते में प्रमाण

1432
01:46:09,240 --> 01:46:10,240
है

1433
01:46:10,240 --> 01:46:14,880
वो बहुत अच्छा लगता है एक बार फिर से

1434
01:46:14,880 --> 01:46:19,200
बोले आप सामने तो आइए मैं आपको कुछ बता रहा

1435
01:46:19,200 --> 01:46:23,200
मेरा प्र ऐसा है हम लोग बहुत

1436
01:46:23,200 --> 01:46:27,320
खेल लिए डिफेंसिव अपने प्रमाण दिखा दिखा के हमने

1437
01:46:27,320 --> 01:46:31,360
खूब खेला है शुरू में खेला है कि नहीं पाड़ी जी आपने बहुत ज्यादा

1438
01:46:31,360 --> 01:46:35,920
उसे उससे क्या होता है उस उसमें ये लोग क्या कहेंगे

1439
01:46:35,920 --> 01:46:40,160
आपसे यह तो ऋषियों का अपना मत है यह तो काल ने झूठ

1440
01:46:40,160 --> 01:46:44,360
बोल दिया यह आपसे जो कहेंगे तो पूर्व पक्ष पर पहले प्रश्न

1441
01:46:44,360 --> 01:46:48,360
करें ना हम लोग कि तुम अगर इसकी किसी भी बात को

1442
01:46:48,360 --> 01:46:54,360
झूठ बोल रहे हो तो फिर आप इसे सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो

1443
01:46:54,720 --> 01:46:58,920
तो फिर लड़ाई केवल इस बात की होगी आप मतभेद केवल

1444
01:46:58,920 --> 01:47:03,040
इस बात का रह जाएगा कि तुम्हारा ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं क्योंकि सनातनी

1445
01:47:03,040 --> 01:47:07,200
तो तुम रह नहीं जाओगे बिलकुल अगर तुमने वेदों के किसी भी अंश

1446
01:47:07,200 --> 01:47:11,320
को मना कर दिया जैसे अभी देखिए वो व्यक्ति कह रहा था कि भाई जो

1447
01:47:11,320 --> 01:47:15,520
शुरू से हो फिर मैंने कहा कि वो क्या कहते हैं जो मोहम्मद साहब के द्वारा

1448
01:47:15,520 --> 01:47:19,600
लिखा हुआ तो शुरू से नहीं है वेदों के अनुसार है तो मैं भी तो वेदों के अनुसार लिख रहा हूं नहीं

1449
01:47:19,600 --> 01:47:23,880
तुम्हारा नहीं है तुमको तुम कहो लोगों को बटर लगाने

1450
01:47:23,880 --> 01:47:28,440
के लिए आप जो है सबको सद ग्रंथ कहते हो मुसलमान बुरा ना माने

1451
01:47:28,440 --> 01:47:33,320
कन बुरा ना माने इसलिए आप सबको सद ग्रंथ कहते हो

1452
01:47:33,320 --> 01:47:37,360
और अब जो वो भाई साहब अगर वापस आ जाएंगे वैसे अब टाइम

1453
01:47:37,360 --> 01:47:40,760
तो नहीं

1454
01:47:40,760 --> 01:47:45,000
है जी अगर वो वापस आ जाएंगे

1455
01:47:45,000 --> 01:47:49,120
तो क्या कहते हैं उनसे व बात हो जाएगी भेरू दस

1456
01:47:49,120 --> 01:47:53,280
जी आपको बात करनी है या केवल अपनी बात बोलनी है अगर ऐसा है तो आप सकते

1457
01:47:53,280 --> 01:47:59,280
अगर आप अगर बात करनी है तो हम लोग बात कर सकते हैं आना चाहते

1458
01:48:00,160 --> 01:48:03,720
हैं

1459
01:48:03,720 --> 01:48:08,080
जी तो मेरी बात यह चल रही है कि

1460
01:48:08,080 --> 01:48:13,240
आपका कहना है कि वेदों के अनुसार जो ग्रंथ

1461
01:48:13,240 --> 01:48:17,360
होगा कहीं पर भी अगर उसने वेद समत बात कर दी तो व

1462
01:48:17,360 --> 01:48:23,160
सद ग्रंथ है ऐसा ही है

1463
01:48:23,160 --> 01:48:27,640
[संगीत] अरे शिवान जी सद ग्रंथी है

1464
01:48:27,640 --> 01:48:31,920
वोह तो पहले से ही है इसमें आप बार-बार एक ही चीज को रट लगाए पूछ रहे हो

1465
01:48:31,920 --> 01:48:37,120
अरे यार उसको अपन कैसे गलत ग्रंथ कह देंगे गीता

1466
01:48:37,120 --> 01:48:41,200
क्योंकि उसमें आपके हिसाब से झूठ है

1467
01:48:41,200 --> 01:48:45,320
हमारे हिसाब से क्यों उसमें लिखा हुआ होगा तो झूठ ही होगा नहीं भाई उसमें

1468
01:48:45,320 --> 01:48:49,320
गीता में कुछ बात ऐसी है जो सच नहीं है तो उसको

1469
01:48:49,320 --> 01:48:53,520
सद ग्रंथ मत कहिए हमारा ये कहना है ये ढोंग है फिर सद ग्रंथ

1470
01:48:53,520 --> 01:48:55,840
कहना उसे और अगर ऐसा है

1471
01:48:55,840 --> 01:48:59,840
कि किसी भी एक बात के सत्य हो जाने से सद ग्रंथ उसको माना

1472
01:48:59,840 --> 01:49:04,000
जाएगा तो मैंने य लिख दिया यह वेद समत बात मैंने लिख दी

1473
01:49:04,000 --> 01:49:08,760
अब बोल दीजिए शिवांस रचित सद ग्रंथ हैय बोल

1474
01:49:08,760 --> 01:49:13,000
दीजिए ये सद ग्रंथ है कि नहीं हमारा

1475
01:49:13,000 --> 01:49:17,360
ज्ञान क्या गलत है वो बताओ और आपका ज्ञान कैसे वो साबित करो

1476
01:49:17,360 --> 01:49:21,560
ज्ञान गलत बोल तो रहा हूं जिसम झूठ लिखा हुआ है उसको आप सद

1477
01:49:21,560 --> 01:49:25,960
ग्रंथ कैसे कह रहे हो भ जो चर कहने से

1478
01:49:25,960 --> 01:49:31,760
क्या वो गलत हो जाता है क्या मेरी बात सुनो सद ग्र

1479
01:49:31,760 --> 01:49:35,880
कहने जो व्यक्ति जो व्यक्ति दिन भर में आधा सच

1480
01:49:35,880 --> 01:49:40,920
आधा झूठ बोले उसको सच्चा व्यक्ति नहीं कहते हैं

1481
01:49:40,920 --> 01:49:44,720
ये आपकी परिभाषा गलत है

1482
01:49:44,720 --> 01:49:48,920
तो अरे शिवान जी घुमाओ मत आप मतलब

1483
01:49:48,920 --> 01:49:53,080
ऐसे बात कोल की बात

1484
01:49:53,080 --> 01:49:57,760
की बात बोने आपसे बात बोली है

1485
01:49:57,760 --> 01:50:01,760
मैंने आपसे क्लियर बात बोली है आपको नहीं सुनना है

1486
01:50:01,760 --> 01:50:05,840
नहीं सुनना है आपको नहीं सुनना जाइए आप कबी कबीर दास

1487
01:50:05,840 --> 01:50:09,880
ने कबीर दास ने कुरान को गाली दी है अने

1488
01:50:09,880 --> 01:50:11,080
दोहो में इनको

1489
01:50:11,080 --> 01:50:15,120
पता नहीं है क्या अर दोहा चौपाई कबिर दास की य लोग पढ़ रहे

1490
01:50:15,120 --> 01:50:19,200
हैं उन्होंने कितनी निंदा की कुरान की पशु भले

1491
01:50:19,200 --> 01:50:23,400
की कितनी निंदा की है इन्होने आपका प्रश्न है जी यह

1492
01:50:23,400 --> 01:50:27,800
बताओ जंगल है जंगल से पेड़ लेकर जाएंगे

1493
01:50:27,800 --> 01:50:32,040
क्या पूरा जंगल समाप्त हो जाएगा इससे

1494
01:50:32,040 --> 01:50:36,200
हमारा जो क्वेश्चन है वो मैच कहां से कर रहा है भाई हमने पूछा

1495
01:50:36,200 --> 01:50:40,280
यह है कि अगर केवल एक केवल आधी अधूरी बातें सत्य हो

1496
01:50:40,280 --> 01:50:44,440
जाने से उसे आप सद ग्रंथ कहेंगे तो आधी अधूरी बातें झूठ

1497
01:50:44,440 --> 01:50:49,080
हो जाने से उसको झूठ ग्रंथ क्यों नहीं कहेंगे असद ग्रंथ क्यों नहीं कहेंगे

1498
01:50:49,080 --> 01:50:53,240
यह कैसा सिद्धांत है कि असद ग्रंथ होने के लिए

1499
01:50:53,240 --> 01:50:57,240
तो आपको वो पूरा झूठ हो तब कहोगे और सद ग्रंथ होने के लिए व

1500
01:50:57,240 --> 01:51:03,120
आधा ू आधा सच्चा भी हो तो आप उसको स क

1501
01:51:03,120 --> 01:51:07,320
लोगे अभी मैंने वो फैक्ट बाय अभिषेक को ं पर मैसेज किया कि तुम खाली

1502
01:51:07,320 --> 01:51:11,440
बंद कमरे में वीडियो ही बनाते रहोगे शिवांश जी के सामने आके चर्चा भी करोगे कोई जवाब

1503
01:51:11,440 --> 01:51:15,480
नहीं आया अरे वो नहीं देगा व कायर है

1504
01:51:15,480 --> 01:51:20,000
य सब अब आगे उन्होने बचपन में माता का दूध नहीं पिया है

1505
01:51:20,000 --> 01:51:24,040
अरे वो चैनल से पैसा कमा रहे हैं भाई तुम्हें क्या लगता है कि व ऐसे बना

1506
01:51:24,040 --> 01:51:28,080
रहे वीडियो उनका घर ही उसी से चल रहा है उनका और दूसरे से

1507
01:51:28,080 --> 01:51:32,600
बोलते कि दुकान खोल रखी है चलिए जय श्री राम मैं फिर मिलूंगा आपसे

1508
01:51:32,600 --> 01:51:36,720
आपको एक बात बताऊ अगर मैं दिल्ली गया

1509
01:51:36,720 --> 01:51:40,960
और मैं दिल्ली जाकर के वो जो इनका पर्दा फास किया जो इनकी किताबें नकली

1510
01:51:40,960 --> 01:51:45,560
छप रही है जय श्री राम विशाल जी जय श्री राम

1511
01:51:45,560 --> 01:51:49,640
ज उसम मेरा कितना खर्चा आया होगा सोच सकते

1512
01:51:49,640 --> 01:51:53,800
हैं आप त मैं गया आना जाना वहां

1513
01:51:53,800 --> 01:51:58,400
रुकना ठहरना और भी बहुत सी चीज

1514
01:51:58,400 --> 01:52:02,520
मेरे 18000 सब्सक्राइबर है इस समय कितना

1515
01:52:02,520 --> 01:52:06,960
वो आ जाता होगा रेवेन्यू सोच के देखिए और इसमें भी इतना

1516
01:52:06,960 --> 01:52:11,040
समय देना पड़ता है इसकी एडिटिंग है यह है वो है

1517
01:52:11,040 --> 01:52:15,200
और यह लोग कहते कि दुकाने चल रही है जिस दिन मैं शुद्ध सनातन

1518
01:52:15,200 --> 01:52:18,520
धर्म के विरोध में बोलने लगू

1519
01:52:18,520 --> 01:52:22,520
है ना वर्णाश्रम धर्म का विरोधी हो जाऊ

1520
01:52:22,520 --> 01:52:26,840
रवाद का दुश्मन हो जाऊ क्रिश्चियनिटी वाली बातें बोलने लगू अभी चैनल भागने

1521
01:52:26,840 --> 01:52:31,520
लगेगा यट खुद इसको भगाने में मदद करेगा

1522
01:52:31,520 --> 01:52:35,920
वास्तविकता तो यह है कि ऐसे जो शुद्ध धर्म बताने वाले चैनल्स

1523
01:52:35,920 --> 01:52:40,560
है आप इनमें कई बार देखेंगे तो अभद्र ड लगाए जाते हैं

1524
01:52:40,560 --> 01:52:44,640
यह बहुत बड़ी स्ट्रेटजी होती है ऐसे

1525
01:52:44,640 --> 01:52:48,760
आपको इन चैनल्स पर ऐसे ड देखेंगे जो थोड़े से अश्लीलता

1526
01:52:48,760 --> 01:52:53,360
की ओर जा रहे होंगे ऐसे ड दिखेंगे तो यह सोचना तो बंद कर देना

1527
01:52:53,360 --> 01:52:57,400
चाहिए कि भैया वो दुकान चल रही है उससे

1528
01:52:57,400 --> 01:53:01,600
भैया वो मैंने भी एक टाइम पर उनको मैसेज किया था वो रियल

1529
01:53:01,600 --> 01:53:05,600
इंटेंशन वाले भाई नहीं है हा उनको किया

1530
01:53:05,600 --> 01:53:10,080
था कुछ कोई बीजेपी का वो था ना तो उन्होंने हमारे मतलब भगवान के बारे में

1531
01:53:10,080 --> 01:53:14,360
उल्टा सीधा बोला था तो मैंने बोला था कि उन पर वीडियो बनाओ फिर उन्होंने मैसेज

1532
01:53:14,360 --> 01:53:18,520
किया कि बनाते कुछ समय में मैंने शायद आपको स्क्रीनशॉट भी बेजा था लेकिन फिर

1533
01:53:18,520 --> 01:53:22,520
उनका वो मैसेज नहीं आ वीडियो नहीं बनाया

1534
01:53:22,520 --> 01:53:24,920
नहीं बनाया

1535
01:53:24,920 --> 01:53:29,000
है वो साजिश है वो केवल इन्हीं के खिलाफ बोल सकते हैं

1536
01:53:29,000 --> 01:53:35,000
बैती गंगा में हाथ धोने वाले लोग हैं

1537
01:53:35,040 --> 01:53:41,040
वो अर्जुन जी आप अपना कैमरा ऑन करेंगे तो ही आपको लिया

1538
01:53:43,840 --> 01:53:47,960
जाएगा देखिए बेरो दस जी एक काम हो सकता है आप

1539
01:53:47,960 --> 01:53:52,160
यह कह सकते हैं आपके पास इस प्रश्न का जवाब नहीं है तो हम दूसरे पर चल सकते

1540
01:53:52,160 --> 01:53:56,320
हैं आगे बढ़ सकते हैं आपकी आवाज

1541
01:53:56,320 --> 01:54:01,960
अभी नहीं सुनाई दे रही आपको ऐसे करना है ऐसे करना

1542
01:54:01,960 --> 01:54:06,080
है बिल्कुल चलिए खैर अब 10 बज चुके

1543
01:54:06,080 --> 01:54:11,080
हैं हम लोग कल आएंगे 10 ब चुका भया जय श्री

1544
01:54:11,080 --> 01:54:16,200
राम आप कुछ कह दीजिए आप कुछ कह नहीं पाए बताइए

1545
01:54:16,200 --> 01:54:20,240
हा ये हमा महाकुंभ में इनकी टीम

1546
01:54:20,240 --> 01:54:24,440
गई है कुछ सुनने में आ रहा है देखा जाएगा गई होगी जाने

1547
01:54:24,440 --> 01:54:28,520
दीजिए नंबर दो बात एक बात इनका एक स्लोगन बन गया है

1548
01:54:28,520 --> 01:54:32,800
कि पाखंड की दुकान बंद हो रही है एक बार महाकुंभ में

1549
01:54:32,800 --> 01:54:36,920
जाकर देखें तो इनको पता चलेगा कि सनातन

1550
01:54:36,920 --> 01:54:40,920
कितना मजबूत है और सनातन क्या है वहां

1551
01:54:40,920 --> 01:54:45,360
जाकर इनको पता चलेगा पिछले कुंभ में 28 करोड़ लोगों ने

1552
01:54:45,360 --> 01:54:49,400
श्री गंगा माता में डुबकी लगाई थी इस बार 40

1553
01:54:49,400 --> 01:54:50,200
से 50

1554
01:54:50,200 --> 01:54:54,360
करोड़ आने की संभावना है तो दुकान नहीं सबसे पहली नंबर वन

1555
01:54:54,360 --> 01:54:58,360
बात तो दुकान जिन्होंने खोली थी वो प्रचार कर रहे कर रहे सड़कों

1556
01:54:58,360 --> 01:55:03,520
में दुकान जिन्होंने खोली थी वो इस समय जेल में भी पड़े

1557
01:55:03,520 --> 01:55:07,680
जी सड़को में प्रचार किया जा रहा है नया प्रोडक्ट आता तो प्रचार होता

1558
01:55:07,680 --> 01:55:13,200
है ना उसका वही तो कर रहे

1559
01:55:13,200 --> 01:55:18,800
हैं तो आईईटी बाबा करके

1560
01:55:18,800 --> 01:55:22,920
कोई आपने देखा हो तो

1561
01:55:22,920 --> 01:55:27,120
अरे सनातन सनातन धर्म को मजाक बना रखा है लोगों ने करें क्या

1562
01:55:27,120 --> 01:55:31,160
जगदीश जगदीश स्वरूप ब्रह्मचारी जी आप भी अपनी बात अपना वक्त

1563
01:55:31,160 --> 01:55:35,600
दे दीजिए तो फिर हम इसको पूरा करें आज हा

1564
01:55:35,600 --> 01:55:39,600
देखो अभी रियल इंटेंशन की बात हुई थी अभी बीच में

1565
01:55:39,600 --> 01:55:43,720
कोई वत्सल भट करके बोल रहे थे जो

1566
01:55:43,720 --> 01:55:48,160
धर्मी लोग है आर्य समाज है

1567
01:55:48,160 --> 01:55:52,360
कुछ रामपाल वाले भी है म जिस प्रक्रिया की

1568
01:55:52,360 --> 01:55:56,480
लोग निंदा कर रहे हैं उस प्रक्रिया को करने वाले जो स्नान करने वाले है

1569
01:55:56,480 --> 01:56:00,560
उनके बीच में जाकर के अपनी दुकान चलाना

1570
01:56:00,560 --> 01:56:04,760
और अपने प्लॉट जो आवंटे करवाना सरकार

1571
01:56:04,760 --> 01:56:05,360
से

1572
01:56:05,360 --> 01:56:09,440
यह कितना बड़ा दोगलापन है य उसके उनके

1573
01:56:09,440 --> 01:56:13,480
अंदर का परमात्मा जो है उनको लोग कितने झुठला रहे

1574
01:56:13,480 --> 01:56:17,920
हैं और यहां पर जो पुस्तक पुस्तक बांटे जा रहे है

1575
01:56:17,920 --> 01:56:23,360
तो मेरा कहना है कि जो बचारे लगे हुए है

1576
01:56:23,360 --> 01:56:27,800
श्रद्धा से अपना प्रक्रिया स्नान करना चाहिए और

1577
01:56:27,800 --> 01:56:31,800
जो असामाजिक तत्व है कि रामपाल जैसे है आर्य समाज है जो मैंने देखा

1578
01:56:31,800 --> 01:56:35,880
था भ्रमण किया इनका आर्य समाज का भी लगा

1579
01:56:35,880 --> 01:56:40,320
हुआ है तो काफी लोगों ने विरोध भी किया था कि नहीं होना चाहिए

1580
01:56:40,320 --> 01:56:44,320
पर यह चीज है कि असामाजिक तत्व जो है

1581
01:56:44,320 --> 01:56:48,680
वो स्वयं देखे कि हम लोग क्या कर रहे हैं य षडयंत्र जो

1582
01:56:48,680 --> 01:56:52,800
हिंदू धर्म में विकृत हो चुका है उसको शुद्धीकरण अवश्य है

1583
01:56:52,800 --> 01:56:56,920
और आप जो कार्य कर रहे हैं आवान जी बहुत सुंदर कार्य है य शुद्धिकरण

1584
01:56:56,920 --> 01:57:01,160
आपको हमें लोगों को ही करना पड़ेगा बहुत

1585
01:57:01,160 --> 01:57:06,240
बहुत धन्यवाद मि की हार्दिक शुभ ओम नमो नारायण

1586
01:57:06,240 --> 01:57:10,720
रायण एक बार

1587
01:57:10,720 --> 01:57:16,000
भे मेरी आवाज रिपीट कहां से आ रही

1588
01:57:16,000 --> 01:57:20,080
है भेरु दास जी आपसे आ रही है क्या अब

1589
01:57:20,080 --> 01:57:26,080
आ रही है मेरी बाज रिपीट नहीं आ रही

1590
01:57:28,640 --> 01:57:32,880
हां भल दास जी आप क टीवी

1591
01:57:32,880 --> 01:57:36,160
में भी चल रहा

1592
01:57:36,160 --> 01:57:40,680
है कहीं और भी चल रहा है क्या

1593
01:57:40,680 --> 01:57:44,920
य यही चल रहा है तो आप एक काम करि

1594
01:57:44,920 --> 01:57:50,920
ली कर दोबारा आ

1595
01:57:53,640 --> 01:57:57,480
या आप अभी एक बार लीव करके वापस

1596
01:57:57,480 --> 01:58:03,480
आ क्योंकि आपकी आवाज रिपीट आ रही है

1597
01:58:07,520 --> 01:58:11,680
मुझे माइक बंद कर सभी अपना तभी उसे पता से आ रही डल

1598
01:58:11,680 --> 01:58:15,680
आवाज उ उ से आ रही भैया य

1599
01:58:15,680 --> 01:58:19,760
सवा घंटा ज जो होता है मतलब व ऐसा कंपलसरी है कि हमें बैठ के ही

1600
01:58:19,760 --> 01:58:24,840
करना पड़ेगा मतलब थोड़ा कुछ भ्रमण हो जाता

1601
01:58:24,840 --> 01:58:29,240
है क्योंकि मैं जब कॉलेज जाता हूं ना सुबह तो मतलब

1602
01:58:29,240 --> 01:58:33,760
आधा घंटा है मेरा कॉलेज जाने का तो मतलब आधे आधे घंटे में मतलब

1603
01:58:33,760 --> 01:58:37,880
कैलकुलेशन करके करता हूं मैं तो कुछ पूरे पूरे दिन में किसी

1604
01:58:37,880 --> 01:58:41,920
भी प्रकार से करिए वह आपका

1605
01:58:41,920 --> 01:58:46,760
आगे बढ़ेगा जब आप अभी छोड़ेंगे नहीं एनीहाउ पूरा कर लेंगे

1606
01:58:46,760 --> 01:58:52,760
वो फिर आगे बढ़ेगा कन्हैया चौधरी जी का कहना है कि वो

1607
01:58:53,080 --> 01:58:57,080
अपने स्वार्थ के लिए आजकल जो अलंकार वाले हैं वो रामपाल

1608
01:58:57,080 --> 01:59:01,320
से मिल रहे हैं वेदों को पूरी तरीके से मानने वाले

1609
01:59:01,320 --> 01:59:05,320
वेदों को पूरी तरीके से वेदों को पूरी तरीके से मानने का

1610
01:59:05,320 --> 01:59:08,680
दावा करने वाले वेदों को अधूरा मानने वालों से हाथ मिला रहे

1611
01:59:08,680 --> 01:59:13,160
हैं क्या जोड़ा

1612
01:59:13,160 --> 01:59:17,440
है शिवा जी गीता अध्याय

1613
01:59:17,440 --> 01:59:21,520
सात का वो बताए इस पर हम लोग

1614
01:59:21,520 --> 01:59:25,640
बात करेंगे गीता अध्याय सात का जब पूछ रहे हैं बहुत

1615
01:59:25,640 --> 01:59:29,720
अच्छी तैयारी है मेरे पास क्योंकि वो कहते हैं

1616
01:59:29,720 --> 01:59:34,600
ना कि क्यों पड़े हो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

1617
01:59:34,600 --> 01:59:38,680
जी ठीक है सभी को जय श्री राम

1618
01:59:38,680 --> 01:59:42,680
जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव
