1
00:00:02,560 --> 00:00:07,360
सभी को जय श्री

2
00:00:07,360 --> 00:00:11,520
राम आप लोगों के समक्ष अत्यंत

3
00:00:11,520 --> 00:00:15,200
विलंब से आने के लिए हमें खेद

4
00:00:15,200 --> 00:00:19,400
है पर मैं आपसे अपेक्षा करता हूं कि

5
00:00:19,400 --> 00:00:23,760
एक व्यक्ति जिसको चाकुओं

6
00:00:23,760 --> 00:00:29,760
से गोद गोद कर मारने की धमकी दी गई है और

7
00:00:30,320 --> 00:00:34,400
उसके घर की मातृ शक्तियों के साथ भी उनका शील

8
00:00:34,400 --> 00:00:39,320
भंग करने की धमकी दी गई है तो ऐसे व्यक्ति से आप

9
00:00:39,320 --> 00:00:43,880
सामान्य व्यवहार की अपेक्षा नहीं करेंगे कि वह बिल्कुल रेगुलर जैसे यूजुअली

10
00:00:43,880 --> 00:00:47,920
आना चाहिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तो वह सब कुछ

11
00:00:47,920 --> 00:00:52,960
वैसा ही करे है ना

12
00:00:52,960 --> 00:00:57,040
तो अब आप समझ गए होंगे कि देर से

13
00:00:57,040 --> 00:01:03,040
आने का कारण क्या है

14
00:01:05,600 --> 00:01:09,760
इस अच्छा तो हमारे जो गेस्ट हैं शायद

15
00:01:09,760 --> 00:01:14,000
आ चुके हैं आप अपना चेहरा

16
00:01:14,000 --> 00:01:18,120
दिखाएंगे किशन दास जी आने वाले हैं आज जय श्री

17
00:01:18,120 --> 00:01:24,120
कृष्ण जय श्री

18
00:01:24,800 --> 00:01:28,880
कृष्ण कल सब लोग तैयार रहिएगा

19
00:01:28,880 --> 00:01:34,880
रात के 10 बजे हम लोग

20
00:02:04,160 --> 00:02:08,680
अभी तक मैंने देखा कि इनके द्वारा बहुत सारे

21
00:02:08,680 --> 00:02:13,240
वीडियोस बनाए जा रहे हैं हमारे विरुद्ध

22
00:02:13,240 --> 00:02:17,320
और राक्षस का चेहरा बना कर के बहुत सारी चीजें की जा रही है

23
00:02:17,320 --> 00:02:21,600
पर एक बात का जवाब नहीं दिया जा रहा है

24
00:02:21,600 --> 00:02:25,880
कि इनकी किताबों का कारखाना है कहां अगर इनकी

25
00:02:25,880 --> 00:02:29,880
किताबों में सब कुछ सही है क्लीन चट प्राप्त है कोर्ट के द्वारा

26
00:02:29,880 --> 00:02:33,960
जैसा कि ये क्लेम करते हैं तो किताबों

27
00:02:33,960 --> 00:02:39,840
में झूठा पता क्यों लिखा हुआ

28
00:02:39,840 --> 00:02:44,200
है इस बारे में कोई वीडियो नहीं आ रहा है

29
00:02:44,200 --> 00:02:49,120
एक वो बहरा है जो चिल्लाता रहता है

30
00:02:49,120 --> 00:02:53,120
खबर फास्ट वाला वह कहता है

31
00:02:53,120 --> 00:02:59,120
कि भाई तुम्हें क्या मतलब है किताबें कहां छपती है कहां नहीं छपती है

32
00:03:00,440 --> 00:03:05,080
ज्ञान से मतलब है ना तुमको ज्ञान से ज्ञान को हरा ज्ञान को तो हरा ही दिया है

33
00:03:05,080 --> 00:03:09,480
तू आ नहीं पा रहा अपने नाम दान केंद्र से कहीं और बीच की

34
00:03:09,480 --> 00:03:13,560
जगह पर आकर के बात नहीं कर पा रहा है ज्ञान की बात नहीं है बात

35
00:03:13,560 --> 00:03:17,560
ये है कि जब तुम गीता प्रेस गोरखपुर की किताबें उठाते हो तो दिखाते हो नाय

36
00:03:17,560 --> 00:03:21,560
कहां से छप रही है क्यों दिखाते हो इसलिए

37
00:03:21,560 --> 00:03:25,640
दिखाते हो कि जो हम कह रहे हैं कि इसको छापने वाला वो है वही इसको

38
00:03:25,640 --> 00:03:31,640
छापने वाला है तो अपनी किताबों की प्रामाणिकता दिखाओ

39
00:03:32,760 --> 00:03:36,840
ठीक है और ट्वीट

40
00:03:36,840 --> 00:03:42,840
में

41
00:03:59,880 --> 00:04:05,880
भी उसमें कुछ लिख सकते हैं रिट्वीट कर करते समय जैसे

42
00:04:18,040 --> 00:04:21,840
instagram2 वट होता

43
00:04:21,840 --> 00:04:27,000
है तो मेरे ख्याल से वो आए नहीं

44
00:04:27,000 --> 00:04:31,000
है हर हर महादेव सभी को किशन दास जी आने वाले

45
00:04:31,000 --> 00:04:34,160
थे किशन दास जी को जुड़ना

46
00:04:34,160 --> 00:04:40,160
चाहिए मैं देखता हूं फिर एक बार

47
00:06:17,800 --> 00:06:18,300
जी

48
00:06:18,280 --> 00:06:24,280
उनको लिंक मिल गया है आने वाले हैं

49
00:06:29,920 --> 00:06:34,000
बरवाला आश्रम में एक लड़की की करंट लगने से मौत हो गई तो रामपाल जी उसे

50
00:06:34,000 --> 00:06:40,000
क्यों नहीं बचा पाए सोचने वाली बात

51
00:06:48,360 --> 00:06:54,360
है मेरे ख्याल से आ गए हैं

52
00:07:07,040 --> 00:07:11,200
तो रामपाल खुद बीमार होते हैं पूछना चाहिए कि रामपाल स्वयं

53
00:07:11,200 --> 00:07:15,240
को क्यों नहीं बचाते हैं एक वीडियो है रामपाल बोल रहे

54
00:07:15,240 --> 00:07:20,200
हैं कि मैं पहले बीमार था अब नहीं

55
00:07:20,200 --> 00:07:26,200
एक वीडियो में य बोल रहे हैं कि मुझे बहुत अफसोस है जो लोग मारे गए

56
00:07:31,200 --> 00:07:35,200
भाई सा आ ही नहीं रहे लिंक भी मिल गया है मगर नहीं आ रहे हैं यही है

57
00:07:35,200 --> 00:07:40,120
रामपाल का ज्ञान वास्तविकता में यही है

58
00:07:40,120 --> 00:07:44,640
बाकी नाटक करवा लो बहुत सारा बत बहुत बड़ी महाभारत

59
00:07:44,640 --> 00:07:47,760
के दृश्य आ गए घोड़े

60
00:07:47,760 --> 00:07:51,840
वो मुझे फिर वही याद आने लगता है फिर आप

61
00:07:51,840 --> 00:07:56,640
लोग कहोगे क्योंकि क्या है ना कि आजकल की यह जो आमजन

62
00:07:56,640 --> 00:08:01,240
है वो उससे जल्दी समझ जाता है

63
00:08:01,240 --> 00:08:05,400
ये वो दृश्य याद है आपको आप में से किसी ने अगर वो चलचित्र

64
00:08:05,400 --> 00:08:09,800
देखा जाना हो तो जिसमें वो

65
00:08:09,800 --> 00:08:13,800
यह लंबे लंबे घोड़े तगड़े तगड़े घोड़े अब

66
00:08:13,800 --> 00:08:17,840
वो वहां से धनुष निकाल रहा है वो यह कर रहा है तगड़े तगड़े

67
00:08:17,840 --> 00:08:22,120
घोड़े लंबे लंबे घोड़े बड़े बड़े घोड़े एक हास्य

68
00:08:22,120 --> 00:08:26,200
कलाकार था हालाकि वास्तविकता में वो क्रिश्चियन

69
00:08:26,200 --> 00:08:30,200
मिशनरीज के द्वारा कार्यरत एक व्यक्ति है उसने बॉलीवुड के

70
00:08:30,200 --> 00:08:34,440
कई लोगों को धर्मांतरण करवा दिया है आपको शायद जानकारी

71
00:08:34,440 --> 00:08:38,520
हो ऋतिक रोशन और जो राकेश रोशन

72
00:08:38,520 --> 00:08:42,520
है इनको क्रिश्चन बना दिया है और बनाने

73
00:08:42,520 --> 00:08:46,800
में सबसे बड़ा हाथ है जॉनी लीवर का

74
00:08:46,800 --> 00:08:50,920
तो जॉनी लीवर एक कन्वर्जन करने वाला

75
00:08:50,920 --> 00:08:55,120
व्यक्ति कभी देखना ऋतिक रोशन सेरेमनी

76
00:08:55,120 --> 00:09:00,000
डाल के

77
00:09:00,000 --> 00:09:04,200
उसमें दृश्य है के तगड़े तगड़े घोड़े

78
00:09:04,200 --> 00:09:08,560
लंबे लंबे घोड़े इतना बड़ा व ंगम

79
00:09:08,560 --> 00:09:12,680
दृश्य बता दिया कि भाई वास्तविक जो बिंदु है उससे ध्यान

80
00:09:12,680 --> 00:09:16,680
ही हट जाए व्यक्ति का वहां पर व सामने

81
00:09:16,680 --> 00:09:20,720
वाला जो नकारात्मक अभिनय

82
00:09:20,720 --> 00:09:24,920
कर रहा था अमरीश पुरी वो बोलता है उससे वो चिल्ला

83
00:09:24,920 --> 00:09:28,960
रहा होता है कि कहां देखा करण अर्जुन को तो चिल्लाता

84
00:09:28,960 --> 00:09:33,040
है ड़ तगड़े घोड़े वो लंबे लंबे घोड़े वो फिर वो

85
00:09:33,040 --> 00:09:37,360
जो विलन वाला रोल था ना वो कहता है अबे चिल्ला

86
00:09:37,360 --> 00:09:42,840
क्यों रहा

87
00:09:42,840 --> 00:09:46,920
है तो वही हाल इनका है जो

88
00:09:46,920 --> 00:09:51,760
मुख्य बात है ना वो उसके इधर उधर खूब तगड़े तगड़े घोड़े लंबे लंबे घोड़े

89
00:09:51,760 --> 00:09:55,840
कभी कोई वास्तविक व्यक्ति इनको मिल जाए तो तो उसको यही

90
00:09:55,840 --> 00:10:00,000
कहना पड़ेगा अे चिल्ला क्यों रहा है मतलब काम

91
00:10:00,000 --> 00:10:06,000
की बात तो कर इधर-उधर की बहुत सारी बात कर रहे

92
00:10:08,520 --> 00:10:13,680
है भाई कहां रह गए किशन

93
00:10:13,680 --> 00:10:17,840
दास फैक्ट फुल डिबेट में क्या फैक्ट रखे गए हैं उनसे कहो

94
00:10:17,840 --> 00:10:22,200
ना भाई सामने से आके ज्ञान चर्चा करो

95
00:10:22,200 --> 00:10:26,880
अरे अकेले बैठ कर के वीडियो बनाया ना सामने आकर के चर्चा क्यों नहीं कर रहे हैं

96
00:10:26,880 --> 00:10:30,960
और चर्चा अगर करनी है तो केवल अपने ऑफिस में अपने घर में अपने आश्रम में

97
00:10:30,960 --> 00:10:35,200
क्यों करना है क्यों चर्चा

98
00:10:35,200 --> 00:10:39,520
खुले मैदान में करो ना बीच की जगह पर आके करो

99
00:10:39,520 --> 00:10:43,640
ना बक्कल उतार ऐसे बक्कल नहीं उतरता है बक्कल तो तुम्हारे लोगों

100
00:10:43,640 --> 00:10:46,920
का उतरा

101
00:10:46,920 --> 00:10:51,120
है है ना बक्कल तुम्हारे लोगों का उतरा है जितने

102
00:10:51,120 --> 00:10:55,240
लोगों से बात हुई है देख लो तुम्हारे लोगों को बीच में बीच मैदान में मेला

103
00:10:55,240 --> 00:10:59,400
लगा था खरेड़ा था यह वाला नहीं है जब वो जो स्टॉल जो

104
00:10:59,400 --> 00:11:03,440
बंद करवाया था वो नहीं जब पिछले वर्ष वहां पर

105
00:11:03,440 --> 00:11:08,080
तुम्हारे लोगों के मुंह में दही जम गया था

106
00:11:08,080 --> 00:11:12,560
आमने सामने से जब बात होती है तो तुम्हारे लोगों के मुंह में दही जम जाता

107
00:11:12,560 --> 00:11:17,480
है देखना वो जाकर के

108
00:11:17,480 --> 00:11:23,480
हम तो ये टट पंजिया पन वही दिखाओ जाकर

109
00:11:25,360 --> 00:11:29,600
के वो लोग अपना बढ़िया दृश्य बना लेंगे बहुत बढ़िया फिल्म

110
00:11:29,600 --> 00:11:33,640
बना लेंगे अबे इस तरह की फिल्म तो उसने भी बनाई थी राम रहीम ने जेल जाने

111
00:11:33,640 --> 00:11:37,840
से पहले फिल्म बना के गया था ना

112
00:11:37,840 --> 00:11:42,120
बहुत बड़ी सी फिल्म बनाई थी वो मैसेंजर ऑफ

113
00:11:42,120 --> 00:11:46,320
गॉड वैसे ही फिल्में बनाते हो तुम लोग नाटक कंपनी

114
00:11:46,320 --> 00:11:51,160
खोल लो सतलोक आश्रम सतलोक आश्रम नाटक

115
00:11:51,160 --> 00:11:55,200
कंपनी है ना यही करते हो ना एक फिल्म

116
00:11:55,200 --> 00:11:59,600
बनाई है जिसमें वो मेरा छोटा भाई वहां पहुंचा और उसको

117
00:11:59,600 --> 00:12:03,600
शास्त्रार्थ में व हार गया है उसके बाद उसने मुझे फोन मिलाया फिर

118
00:12:03,600 --> 00:12:07,760
मैंने ही उसको वहां कह दिया बने रहो मूर्ख दिख रहा है कि तुमको

119
00:12:07,760 --> 00:12:11,880
मूर्ख बनाया जा रहा है फिर भी तुम लोग मूर्ख बन रहे हो तुम्हारे ही यहां तो तुम्हारे

120
00:12:11,880 --> 00:12:16,200
घर पर आग लगाई जा रही है और लोग उस पर हाथ सेक रहे हैं

121
00:12:16,200 --> 00:12:22,200
और तुम लोग हसते रहो बने रहो

122
00:12:25,320 --> 00:12:29,520
मूर्ख आ जाइए लाइव में

123
00:12:29,520 --> 00:12:33,720
छोटा बच्चा जान के हमको ना समझाना रे है

124
00:12:33,720 --> 00:12:38,360
ना तो भाई किशन दास जी ने आज

125
00:12:38,360 --> 00:12:43,000
भी धोखा ही दे दिया और रामपाल

126
00:12:43,000 --> 00:12:47,000
की दी हुई शिक्षा से हम और क्या ही अपेक्षा कर

127
00:12:47,000 --> 00:12:51,240
सकते हैं हा

128
00:12:51,240 --> 00:12:56,240
धोखेबाज धमकी बाज

129
00:12:56,240 --> 00:13:01,680
कायर ऐसे ही लोग हैं सब

130
00:13:01,680 --> 00:13:05,840
जो रामपाल के नाम से आज जो शिक्षा दी जा रही है उससे तो ऐसे

131
00:13:05,840 --> 00:13:11,840
ही लोग निकल रहे

132
00:13:12,960 --> 00:13:15,240
हैं

133
00:13:15,240 --> 00:13:19,240
हा यह भी लिखा है कि कलयुग में जो स्त्रियां

134
00:13:19,240 --> 00:13:24,160
होंगी वह क्या हो जाएंगी तुम्हारे घर की स्त्रियां वैसी ही होंगी ना

135
00:13:24,160 --> 00:13:29,600
त्र्या चरित्र पर पुरुषों के साथ अठखेलियां करने वाली व्यभिचार

136
00:13:29,600 --> 00:13:33,960
ये भी लिखा है कलयुग के लिए

137
00:13:33,960 --> 00:13:36,760
पायल

138
00:13:36,760 --> 00:13:40,840
परिहार दूसरे फोन से मैंने आपको किया

139
00:13:40,840 --> 00:13:45,080
है जी जी हम

140
00:13:45,080 --> 00:13:49,760
तो सर्वप्रथम आप अपना परिचय दे दे हमारे दर्शकों को

141
00:13:49,760 --> 00:13:53,880
किशन दास आपका नहीं आ रहा फोटो मेरा फोटो नहीं

142
00:13:53,880 --> 00:13:58,640
आ रहा है आपको हां आ गया

143
00:13:58,640 --> 00:14:04,640
जी

144
00:14:05,720 --> 00:14:11,720
मिनट

145
00:14:13,240 --> 00:14:17,360
चलिए हां यही पर्दा फास करते रहना और समझते रहना

146
00:14:17,360 --> 00:14:21,440
हम जीत गए जीत गए वहां जिसको तुम गुरु कह रहे हो ना

147
00:14:21,440 --> 00:14:25,680
उसके साथ क्या क्या हो रहा है क्या क्या नहीं हो रहा है उससे मतलब मत रखना बस यही इसमें चिल्लाते

148
00:14:25,680 --> 00:14:29,960
रहना बस जीत गए जीत गए जीत गए वहा रहा है

149
00:14:29,960 --> 00:14:34,640
भले है ना कर लो पर्दा

150
00:14:34,640 --> 00:14:39,360
फास आपका जो ऑडियो चे आपका जो फोटो स्कप

151
00:14:39,360 --> 00:14:44,160
मतलब रुका हुआ है आपका इंटरनेट ठीक है

152
00:14:44,160 --> 00:14:48,200
बिल्कुल है भाई मेरा फोटो रुक रुक कर आ रहा है

153
00:14:48,200 --> 00:14:52,320
क्या हा आपका रुका हुआ ही है नहीं मैं आपसे

154
00:14:52,320 --> 00:14:57,320
नहीं पूछ

155
00:14:57,320 --> 00:15:03,320
रहा भाई कोई कमेंट करके बता

156
00:15:03,520 --> 00:15:07,520
दे फोटो मेरा वीडियो ठीक चल रहा है ना तो आप भाई

157
00:15:07,520 --> 00:15:11,760
साहब एक बार आप जो है लीव करके दोबारा आ जाओ आप शायद कुछ कनेक्शन

158
00:15:11,760 --> 00:15:16,840
प्रॉब्लम होगी हो गई होगी ठीक है

159
00:15:16,840 --> 00:15:20,920
दोबारा इसी तरह से आना बस वैसे ही आना है जैसे

160
00:15:20,920 --> 00:15:26,920
अभी लिंक को टच किया था वैसे ही

161
00:15:29,520 --> 00:15:34,880
उनको कोई दिक्कत हो रही होगी

162
00:15:34,880 --> 00:15:39,560
दोबारा चर्चा करो फोटो में क्या रखा है

163
00:15:39,560 --> 00:15:43,640
अभी कल का लाइव देख लेना जो व्यक्ति बिना

164
00:15:43,640 --> 00:15:47,680
पहचान के आता है वह क्या कर सकता है उस तक पहुंचने में कितनी दिक्कत

165
00:15:47,680 --> 00:15:53,680
होगी इसलिए यह मर्यादा बनाई गई है

166
00:15:53,840 --> 00:15:57,880
कि चर्चा जो है चेहरे के साथ होगी बिना चेहरे

167
00:15:57,880 --> 00:16:03,880
के नहीं

168
00:16:07,360 --> 00:16:11,360
कल आप लोगों ने लाइव में देखा था ना क्या क्या धमकियां दीी जा रही थी तो यह सब करने

169
00:16:11,360 --> 00:16:15,440
का मौका मिलता है व्यक्ति को जब वह अपने चेहरे को छुपा कर के आता है तो

170
00:16:15,440 --> 00:16:21,400
वह स्वतंत्र अनुभव करता है कि मैं कुछ भी बोल लू कुछ भी कर

171
00:16:21,400 --> 00:16:27,400
दूं है ना

172
00:16:40,520 --> 00:16:44,600
कहां गए भाई साहब दोबारा जुड़ने बड़ा टाइम लग गया इनको भैया

173
00:16:44,600 --> 00:16:49,120
ब्रह्मा कुमारी वाले भी अपनी किताबों में बहुत उल्टा सीधा लिखते

174
00:16:49,120 --> 00:16:54,200
हैं ब्रह्मा कुमारी का कल वीडियो लिया

175
00:16:54,200 --> 00:17:00,200
है कल आने वाला है

176
00:17:00,600 --> 00:17:05,000
अल्लाह सर्वशक्तिमान नहीं है भाई अवतार नहीं ले सकता बहुत सी चीजें

177
00:17:05,000 --> 00:17:09,360
नहीं कर सकता वो वो कहते हैं अल्लाह सिर्फ

178
00:17:09,360 --> 00:17:13,600
अच्छे कार्य ही करके दिखा सकता है अब यह तय

179
00:17:13,600 --> 00:17:19,600
कौन करेगा अच्छा क्या है मनुष्य मनुष्यों के अधीन हो

180
00:17:25,680 --> 00:17:29,920
गया हां जी अब ठीक आ रही है आपको मेरी फोटो

181
00:17:29,920 --> 00:17:32,040
हां

182
00:17:32,040 --> 00:17:36,680
हरि तो आप अपना सबसे पहले

183
00:17:36,680 --> 00:17:40,800
परिचय दे दीजिए मतलब आप रामपाल

184
00:17:40,800 --> 00:17:44,640
जी के शिष्य किस तरह से

185
00:17:44,640 --> 00:17:49,320
हैं किस तरह से मतलब मतलब आपने कब ली दीक्षा

186
00:17:49,320 --> 00:17:53,320
और यह आप सतलोक आश्रम के नाम से जो मैनेजमेंट

187
00:17:53,320 --> 00:17:59,320
अभी चल रहा है उसके साथ है उसके विरोध में इतना थोड़ा सा बता दीजिए

188
00:17:59,800 --> 00:18:05,800
मैंने सन 2012 में नाम दक्षा लिए अच्छा

189
00:18:06,600 --> 00:18:10,720
हां तो मतलब इसमें किसी को दोष ना ल होता

190
00:18:10,720 --> 00:18:14,960
क्या है कि यहां पर आक व्यक्ति जब निरुत्तर होने लगता है तो लोग ये कहने लगते हैं रामपाल

191
00:18:14,960 --> 00:18:19,800
जी का शिश है ही नहीं लो साहब कहानी खत्म

192
00:18:19,800 --> 00:18:23,960
वो आपके ऐसे होते हैं ना उनको क्या है कि देखिए ऐसा है कि जो

193
00:18:23,960 --> 00:18:28,160
कोई नया होता है ना तो वो उसको पूरा ज्ञान मालूम

194
00:18:28,160 --> 00:18:32,400
नहीं होता है तो वैसे मतलब खंडन करते है ना वही

195
00:18:32,400 --> 00:18:36,800
बात है जी तो अभी जो य जो नाम दीक्षा हो रही है

196
00:18:36,800 --> 00:18:40,960
ये इसके द्वारा एलईडी के द्वारा ये सही

197
00:18:40,960 --> 00:18:46,240
है या गलत है सही है बक

198
00:18:46,240 --> 00:18:50,280
पुराने तो यह सही है हां सही

199
00:18:50,280 --> 00:18:55,120
है बिल्कुल सही है मैनेजमेंट के द्वारा जो दिलवाई जा रही है

200
00:18:55,120 --> 00:18:59,880
अब देखिए ऐसा है कि इसमें अब कितने वो

201
00:18:59,880 --> 00:19:04,080
उनको गुरु जी को मानने वाले हैं या नहीं है वो तो गुरु

202
00:19:04,080 --> 00:19:08,080
जी जानते हैं ठीक है अब उनमें क्या है कि

203
00:19:08,080 --> 00:19:14,080
जैसे मान लीजिए कोई अपने स्वार्थ के लिए कर रहा है ना तो वो गलत

204
00:19:15,240 --> 00:19:19,240
है और यह जो बात बताई जाती है कि वह वहां से

205
00:19:19,240 --> 00:19:23,640
जेल से वोह सीधा प्रसारण होता है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होती है वो प्रवचन

206
00:19:23,640 --> 00:19:27,720
देते हैं यह सब सत्य है उसके बारे में हमारे को जानकारी

207
00:19:27,720 --> 00:19:31,920
नहीं है हमने तो जब से गुरु जी का नाम लिया तब से हम उनके

208
00:19:31,920 --> 00:19:35,960
अनुवाई है ठीक है और व उन्हीं

209
00:19:35,960 --> 00:19:40,120
को फॉलो करते हैं अच्छा चलिए

210
00:19:40,120 --> 00:19:44,480
ठीक है मुख्य विषय पर आते हैं सीधे सबसे पहले मुझे यह बताइए

211
00:19:44,480 --> 00:19:48,480
कि रामपाल जी ने रामपाल जी

212
00:19:48,480 --> 00:19:52,760
के अनुसार जो धर्म की व्याख्या है वह क्या है धर्म क्या है

213
00:19:52,760 --> 00:19:56,880
उनके अनुसार धर्म की परिभाषा धर्म

214
00:19:56,880 --> 00:20:02,320
की परिभाषा

215
00:20:02,320 --> 00:20:07,200
हेलो आपका आवाज नहीं आ रहा है जी धर्म की

216
00:20:07,200 --> 00:20:11,800
परिभाषा धर्म की उपयोगिता धर्म

217
00:20:11,800 --> 00:20:15,960
क्या है मनुष्य जीवन के लिए धर्म आवश्यक क्यों

218
00:20:15,960 --> 00:20:20,000
है आपका आवाज कटकट के आ रहा है आपका

219
00:20:20,000 --> 00:20:24,400
इंटरनेट प्रॉब्लम है हमारी आवाज सबको साफ आ रही है

220
00:20:24,400 --> 00:20:28,720
जी हमारा फोन तो बिल्कुल नेटवर्क में है तुम्हारा नाम ठीक

221
00:20:28,720 --> 00:20:32,800
कर लो भाई आर यू एन डी बी ए जेड जड भाई तब तो

222
00:20:32,800 --> 00:20:36,880
तुम्हारा जो कमेंट है कोई हाईलाइट कर पाएंगे

223
00:20:36,880 --> 00:20:41,240
पहले जाओ अपने माता पिता से पिता से पूछ के आओ तुम्हारा सही नाम क्या है

224
00:20:41,240 --> 00:20:45,400
किसकी किसके आप बेटे हो वह नाम लिखो थोड़ा साफ सुथरा सा

225
00:20:45,400 --> 00:20:51,400
तो उसको हम दिखाए पर जी पायल परियार

226
00:20:52,280 --> 00:20:57,080
जी किसके बात कर रहे हैं आप मा पिता का नाम मिनट

227
00:20:57,080 --> 00:21:01,960
आपसे नहीं कर रहे बात वो कमेंट कोई वक्ति है जो गलत बातें कर रहा है उससे बात

228
00:21:01,960 --> 00:21:06,120
अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है आपका आवाज थोड़ा

229
00:21:06,120 --> 00:21:10,200
कट के आ रहा है हमारी आवाज

230
00:21:10,200 --> 00:21:13,200
सभी को सही आ रही

231
00:21:13,200 --> 00:21:18,200
है और आप हमारे पास तो

232
00:21:18,200 --> 00:21:24,200
ब हमारी आवाज सबको सही आ रही है आप ही को प्रॉब्लम

233
00:21:24,480 --> 00:21:29,320
है अच्छा

234
00:21:29,320 --> 00:21:34,400
अभी ठीक

235
00:21:34,400 --> 00:21:38,400
है ठीक है ठीक है हार

236
00:21:38,400 --> 00:21:42,640
है हा थोड़ा सा रुक रुक आ रही आपकी आवाज अब

237
00:21:42,640 --> 00:21:46,640
मैं क्या करूं बताइए क्या किया जाए हा चलिए आप

238
00:21:46,640 --> 00:21:50,680
प्रश्न रखिए मैंने पूछा ना कि रामपाल जी के

239
00:21:50,680 --> 00:21:54,800
अनुसार धर्म क्या है धर्म की आवश्यकता क्या है

240
00:21:54,800 --> 00:21:59,720
क्यों आवश्यक है मनुष्य के लिए धर्म

241
00:21:59,720 --> 00:22:03,960
मनुष्य के लिए वही है जो सत्य को मतलब स्वीकार कर लिए

242
00:22:03,960 --> 00:22:08,280
सबसे पहला प्रश्न मतलब उसका उतर तो यही है जो सत्य कोने

243
00:22:08,280 --> 00:22:14,280
स्वीकार करे ना तो उसके लिए कोई धर्म नहीं होता फिर

244
00:22:14,360 --> 00:22:18,400
क्या जो सत्य को स्वीकार नहीं करे उसके लिए तो

245
00:22:18,400 --> 00:22:23,080
कोई धर्म ही नहीं है नहीं नहीं मैं यह नहीं पूछ रहा धर्म क्या है

246
00:22:23,080 --> 00:22:27,280
एक जनरल सा क्वेश्चन है कि धर्म आवश्यक क्यों धर्म

247
00:22:27,280 --> 00:22:32,160
क्या है क्यों आवश्यक है हमारे

248
00:22:32,160 --> 00:22:37,120
लिए धर्म क्यों आवश्यक है हम

249
00:22:37,120 --> 00:22:41,240
धर्म इसलिए आवश्यक है कि धर्म के अनुसार अगर हम चलेंगे

250
00:22:41,240 --> 00:22:45,400
तो अपने जो भी इस संसार के अंदर जितने

251
00:22:45,400 --> 00:22:49,960
भी है प्राणी सबके अंदर आप

252
00:22:49,960 --> 00:22:54,200
अपना मानवता का भाव अपन रख पाएंगे दूसरी

253
00:22:54,200 --> 00:23:00,200
बात य हा बोलिए बोलिए

254
00:23:03,880 --> 00:23:08,800
क्या एक व्यक्ति कह रहा है खिसिया के मारे

255
00:23:08,800 --> 00:23:14,000
चैनल को बंद कर दे और क्या किया [हंसी] जाए

256
00:23:14,000 --> 00:23:19,760
इतनी कियान है भाई अच्छा

257
00:23:19,760 --> 00:23:23,800
है जी बोलिए आपका

258
00:23:23,800 --> 00:23:27,920
आवाज नहीं आ रहा स बिल्कुल आप धर्म के

259
00:23:27,920 --> 00:23:31,960
पक्ष में और कुछ कहना चाहते हैं या यही कि अगर हम धर्म पर चलेंगे तो सब

260
00:23:31,960 --> 00:23:36,080
में मानव सब में वो मानवों को देख

261
00:23:36,080 --> 00:23:39,600
पाएंगे य यही

262
00:23:39,600 --> 00:23:44,640
है आपका आवाज इस से नहीं आ रहा

263
00:23:44,640 --> 00:23:48,920
है अब भाई मैं क्या करूं आप या तो गलत जगह पर है जहां नेटवर्क

264
00:23:48,920 --> 00:23:53,120
का नेटवर्क इशू है नहीं बिल्कुल हम नेटवर्क

265
00:23:53,120 --> 00:23:57,320
में है घर के अंदर ही हूं मैं अब मैं क्या करूं सब सब लोग कमेंट करके

266
00:23:57,320 --> 00:24:02,200
भाई दो चार कमेंट कर दीजिए आवाज मेरी साफ आ रही है कि

267
00:24:02,200 --> 00:24:06,200
नहीं चंद्रभान चौरसिया जी आप आ जाइए धर्म और

268
00:24:06,200 --> 00:24:11,960
ईश्वर को स्थापित करिए रामपाल के

269
00:24:11,960 --> 00:24:16,000
अनुसार हां बस वही वीडियो देखते रहो रियांशी जी और खुश होते

270
00:24:16,000 --> 00:24:20,600
रहो गुरुदेव को खांसी है बुखार है सर्दी है ुकाम है यह मत सोचो

271
00:24:20,600 --> 00:24:24,840
वो तुम्हें उल्लू बनाते रहेंगे वो देखते रहो बढ़िया फिल्मों जैसा अंदाज में बना देंगे

272
00:24:24,840 --> 00:24:30,840
वीडियो उसको देख देख देख के खुश होते रहो बहुत बढ़िया

273
00:24:31,440 --> 00:24:35,680
डावर चवन प्रास चार रन लोकल क्रिकेट

274
00:24:35,680 --> 00:24:39,680
मैच होते थे पहले बहुत पहले छोटा था मैं तब तो वहां पर

275
00:24:39,680 --> 00:24:43,840
जो सस्ते कमेंटेटर होते थे ना और

276
00:24:43,840 --> 00:24:48,280
वह थोड़ा बहुत पक्ष वाले हो जाते थे अगर बैटिंग टीम के

277
00:24:48,280 --> 00:24:52,280
तोब जब वोह चौका पड़ता था तो वह चिढ़ाने के लिए बोलते थे डावर

278
00:24:52,280 --> 00:24:55,400
चवन प्रस चार

279
00:24:55,400 --> 00:25:01,400
रन तो वैसे ही खुश होते रहो

280
00:25:02,360 --> 00:25:06,400
हां जी परियार जी आप परियार क्यों लिखे अपना नाम आपको

281
00:25:06,400 --> 00:25:09,560
अपना नाम सही करके आना

282
00:25:09,560 --> 00:25:15,560
चाहिए देखिए सब लोग कह रहे हैं कि ऑडियो और वीडियो सब ठीक

283
00:25:16,360 --> 00:25:19,600
है

284
00:25:19,600 --> 00:25:23,840
हां जी बताइए धर्म की आवश्यकता धर्म

285
00:25:23,840 --> 00:25:26,000
क्या

286
00:25:26,000 --> 00:25:30,200
है आपके अनुसार क्या धर्म है बताइए नहीं

287
00:25:30,200 --> 00:25:34,280
अभी आपने बोल लिया क्या कि धर्म को फॉलो

288
00:25:34,280 --> 00:25:38,400
करेंगे तो हमको सब में मानव दिखाई देने लगेगा इसलिए धर्म को फॉलो

289
00:25:38,400 --> 00:25:42,440
करना चाहिए जो सत्य को स्वीकार करे सबसे

290
00:25:42,440 --> 00:25:47,160
पहला तो धर्म यही है क्या जो सत्य को स्वीकार करके नहीं

291
00:25:47,160 --> 00:25:51,840
नहीं सत्य को स्वीकार करें सबसे पहला धर्म यही है तो धर्म का लक्षण हो गया

292
00:25:51,840 --> 00:25:56,800
सत्य को स्वीकार करना धर्म क्या है सबसे

293
00:25:56,800 --> 00:26:01,240
पहले भाई धर्म की आवश्यकता क्या है है क्या

294
00:26:01,240 --> 00:26:07,240
धर्म क्यों आवश्यक है व हमारे

295
00:26:07,720 --> 00:26:12,320
लिए धर्म औसत क्यों है

296
00:26:12,320 --> 00:26:16,440
हां भाई हमक है कोई व्यक्ति है सुनिए

297
00:26:16,440 --> 00:26:20,440
कोई व्यक्ति है अधर्मी समझिए मेरी बात मतलब

298
00:26:20,440 --> 00:26:24,480
उसको उसके जीवन में ना शिष्टाचार है ना अच्छे आचरण है

299
00:26:24,480 --> 00:26:28,680
कुछ नहीं है वो हमसे आकर के यह पूछ रहा है कि भाई

300
00:26:28,680 --> 00:26:32,680
मैं आपसे जानना चाहता हूं कि जो

301
00:26:32,680 --> 00:26:36,840
नियम कायदे कानून आप फॉलो करते हैं वही नियम कायदे कानून

302
00:26:36,840 --> 00:26:40,880
मुझे क्यों फॉलो करने चाहिए तो इस कांटेक्ट में

303
00:26:40,880 --> 00:26:44,960
क्या जवाब है क्यों धर्म आवश्यक है हम कैसे कैसे धर्म

304
00:26:44,960 --> 00:26:49,920
की स्थापना करें प्रत्येक जीवन के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में

305
00:26:49,920 --> 00:26:54,280
क्या है जिस आप सुनिए शिवान

306
00:26:54,280 --> 00:26:58,280
जी आपकी आवाज ना बिल्कुल थोड़ा कटकट के आ रही है हम बकुल

307
00:26:58,280 --> 00:27:02,600
नेटवर्क में हूं और पता नहीं क्या है इसमें आपकी आवाज साफ नहीं आ रही है मेरे को

308
00:27:02,600 --> 00:27:06,880
मैं आपको पाच द कमेंट कर दिख देता हूं जो कमेंट में आपको देख बताएंगे

309
00:27:06,880 --> 00:27:12,880
कि भाई मेरी आवाज कैसी आ रही है कमेंट कर दीजिए भैया भाई

310
00:27:14,000 --> 00:27:18,040
कुछ इनकी जिओ जाति है जिओ हमारी

311
00:27:18,040 --> 00:27:24,000
जाति है रिलायस धर्म हमारा

312
00:27:24,000 --> 00:27:28,520
है एक कोई कमेंट कर रहा है यह देखिए

313
00:27:28,520 --> 00:27:32,000
जीव हमारी जाति है

314
00:27:32,000 --> 00:27:36,040
रिलायस धर्म हमारा है उनको ज्ञान नहीं है

315
00:27:36,040 --> 00:27:40,200
ना तो उनको सबसे पहला तो ज्ञान ही नहीं है ध

316
00:27:40,200 --> 00:27:45,800
क्या है देखिए सब लोग कह रहे हैं कि सही आ रही है

317
00:27:45,800 --> 00:27:49,880
आवाज अब मुझे आप रामपाल जी के द्वारा क्या धर्म की

318
00:27:49,880 --> 00:27:55,880
परिभाषा बताई गई है वह बता दीजिए

319
00:27:58,800 --> 00:28:02,800
धर्म की पहली व्याख्या यही है कि मतलब आप सत्य

320
00:28:02,800 --> 00:28:07,440
को स्वीकार करो ठीक है अब सत्य कहां से मिलेगा आपन

321
00:28:07,440 --> 00:28:11,480
को भाई यह तो आप आप उसका एक वो बता

322
00:28:11,480 --> 00:28:16,040
रहे हैं एक क्या कहते हैं घटक यह करो

323
00:28:16,040 --> 00:28:20,040
सत्य को स्वीकार करो अरे भाई मुझे उसकी आवश्यकता के

324
00:28:20,040 --> 00:28:24,120
अनुसार उसकी परिभाषा तो बताइए कि वो हमारे लिए उपयोगी क्यों है

325
00:28:24,120 --> 00:28:28,120
व हमारे लिए लाभप्रद क्यों है

326
00:28:28,120 --> 00:28:32,200
धर्म की कोई परिभाषा कहीं बताई है कि नहीं बताई है आपके गुरु महाराज

327
00:28:32,200 --> 00:28:38,200
ने बिल्कुल बताई है वो परिभाषा हम बता दीजिए

328
00:28:51,080 --> 00:28:57,080
आप आ जाई भाई कोई

329
00:28:58,520 --> 00:29:03,240
यह क्या हुआ पहली बॉल परही बोल्ड हो गए तो

330
00:29:03,240 --> 00:29:07,480
यह हालत है यह वास्तविकता है इनके ऐसे

331
00:29:07,480 --> 00:29:12,000
न्यूज चैनल वाले भी आएंगे ना तो शुरुआती उसमें ही इनका

332
00:29:12,000 --> 00:29:16,120
ऐसा होगा यह जो भगवत गीता 16 22 16 36 य सब करते रहते

333
00:29:16,120 --> 00:29:20,240
हैं ना यहां तक वो एक वीडियो है उसमें

334
00:29:20,240 --> 00:29:24,400
व इनका शिवम दास आया था जो पता नहीं क्याक उसने गाली

335
00:29:24,400 --> 00:29:30,400
वाली भी दी है है ना

336
00:29:30,760 --> 00:29:34,920
तो यह डांसर तेजा करके कोई आया है

337
00:29:34,920 --> 00:29:40,920
चेहरा दिखाए डांसर

338
00:29:54,800 --> 00:29:59,360
जी जब जब मेन बात मालूम होगी त तभी तो करेंगे

339
00:29:59,360 --> 00:30:03,440
ना यह धर्म क्या है ईश्वर का अस्तित्व कैसे सिद्ध

340
00:30:03,440 --> 00:30:07,640
होता है ईश्वर है ईश्वर सर्वशक्तिमान है

341
00:30:07,640 --> 00:30:11,920
यह सब बातें अगर इनके बारे में जानने का प्रयास ही नहीं किया बस सा 24

342
00:30:11,920 --> 00:30:16,120
में य लिखा है वो ये है वो ये है तो फिर इनका यह

343
00:30:16,120 --> 00:30:22,120
हो जाता है हाल

344
00:30:24,320 --> 00:30:29,800
बुरा आप ही आ जाइए टोपी मास्टर

345
00:30:29,800 --> 00:30:33,800
आप आ जाइए आप लोगों

346
00:30:33,800 --> 00:30:38,320
को कब तक कमेंट में टोपी पहनाते रहेंगे तो वास्तविकता

347
00:30:38,320 --> 00:30:42,840
में यह हाल है इनका जो कहते ज्ञान चर्चा ज्ञान चर्चा

348
00:30:42,840 --> 00:30:46,840
इनको धर्म की परिभाषा नहीं मालूम इनको ईश्वर का अस्तित्व कैसे सिद्ध होगा यह

349
00:30:46,840 --> 00:30:49,680
नहीं

350
00:30:49,680 --> 00:30:53,760
मालूम एकदम निचले लेवल का अर्थ लेकर के

351
00:30:53,760 --> 00:30:59,760
घूमते हैं और अनर्गल प्रलाप करते हैं

352
00:31:01,440 --> 00:31:05,440
मैंने कोई प्रमाण तो मांगे नहीं है मैंने अभी सिर्फ इतना मा मांगा है कि आपके गुरु

353
00:31:05,440 --> 00:31:09,640
महाराज ने धर्म की व्याख्या क्या की है वही नहीं पता

354
00:31:09,640 --> 00:31:15,640
है जाओ देख लो खुश होलो फैक्ट फुल

355
00:31:18,920 --> 00:31:23,200
डिबेट पंडित लोकी जी को जोड़ दीजिए यह देखिए कल हमारा

356
00:31:23,200 --> 00:31:27,920
यह वीडियो आने वाला है बहुत ही काफी समय से

357
00:31:27,920 --> 00:31:31,920
यह वीडियो जो है रुका हुआ था ब्रह्मा कुमारी इस के साथ हमारी बातचीत

358
00:31:31,920 --> 00:31:36,040
होनी थी तो कल आपको आनंद आएगा

359
00:31:36,040 --> 00:31:40,200
यह चर्चा जरूर देखिए और बहुत

360
00:31:40,200 --> 00:31:46,200
ही निष्कर्ष पूर्ण एक ये चर्चा

361
00:31:53,280 --> 00:31:59,280
है आर्य समाज के साथ चर्चा कीजिए

362
00:32:00,320 --> 00:32:04,400
आर्य समाज के साथ चर्चा हुई

363
00:32:04,400 --> 00:32:08,600
है काफी बार हुई है यह देखो दाग द फायर

364
00:32:08,600 --> 00:32:12,960
के वो जॉनी लीवर काजल काजल

365
00:32:12,960 --> 00:32:17,000
काजल एक्सीडेंट के बाद जो बस

366
00:32:17,000 --> 00:32:21,400
एक ही चीज रह गई थी अरे धर्म क्यों

367
00:32:21,400 --> 00:32:26,360
चाहिए ये मानवता का धर्म क्यों चाहिए भाई तुम्हें वो बताओ ना

368
00:32:26,360 --> 00:32:32,280
क्यों आवश्यक है धर्म

369
00:32:32,280 --> 00:32:36,640
सिस्टम नाम से कौन है चेहरा दिखाएं

370
00:32:36,640 --> 00:32:40,720
और अब जब अगर वह दोबारा आते हैं ना तो उनको आप कहिए अपना

371
00:32:40,720 --> 00:32:44,720
सही नाम लिख कर के आए क्योंकि यह लोग क्या करते हैं परिहार नाम डाल

372
00:32:44,720 --> 00:32:48,880
लेंगे द्विवेदी डाल लेंगे तिवारी डाल लेंगे त्रिपाठी डाल लेंगे और आ

373
00:32:48,880 --> 00:32:53,320
कर के दिखाएंगे कि हम जो है संत रामपाल के भक्त बन गए यह सब इनकी स्ट्रेटजी

374
00:32:53,320 --> 00:32:59,320
है

375
00:32:59,800 --> 00:33:04,000
यह हमारा चैनल है दूसरा सर्वशक्तिमान धन जिसने सब्सक्राइब ना किया हो फॉलो

376
00:33:04,000 --> 00:33:08,640
ना किया हो वो फॉलो

377
00:33:08,640 --> 00:33:12,760
करें पंडित फ्लोकी जी ही आ जाए तो जब तक कोई नहीं

378
00:33:12,760 --> 00:33:18,760
आ रहा है

379
00:33:18,840 --> 00:33:24,840
तो यही गाते रहना परमात्मा का नो मन

380
00:33:25,000 --> 00:33:29,040
सूत ऐसे मूर्खों को हमारे यहां सूता जाता

381
00:33:29,040 --> 00:33:33,040
है सूत भी होता है सूतना भी होता है सूत

382
00:33:33,040 --> 00:33:39,040
दिया जाता

383
00:33:40,520 --> 00:33:44,600
है आप शिवांश द्विवेदी आपके

384
00:33:44,600 --> 00:33:48,120
हिसाब

385
00:33:48,120 --> 00:33:52,800
से केवल पंडित लोग और आप जैसे

386
00:33:52,800 --> 00:33:57,120
ब्लाइंड लोग जाएंगे बाकी लोगों को स्वर्ग यह कहां लिखा है

387
00:33:57,120 --> 00:34:01,240
हमने कन सी जगह कहा है कि जो ब्राह्मण नहीं है

388
00:34:01,240 --> 00:34:06,240
उसको जो है मुक्ति नहीं मिलेगी मोक्ष नहीं मिलेगा हा

389
00:34:06,240 --> 00:34:10,400
यह सब आपको भरा जाता है आपके भाइयों से दूर करने के लिए आपके

390
00:34:10,400 --> 00:34:14,400
अंदर जहर घोला जाता है और फिर उसको जहर को

391
00:34:14,400 --> 00:34:20,400
बिना जांचे परके लेकर के आकर के उगल देते हो अपने भाइयों

392
00:34:21,400 --> 00:34:25,440
पर ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र होने

393
00:34:25,440 --> 00:34:31,080
से किसी के मोक्ष पर कोई फर्क नहीं पड़ता

394
00:34:31,080 --> 00:34:35,240
रियांशी जी यहीं पर चिल्ला पाएंगी आपके

395
00:34:35,240 --> 00:34:39,760
यहां के जो पुरुष है उनका पौरुष बहुत कम है

396
00:34:39,760 --> 00:34:44,720
उनमें इसीलिए वह सामने से चर्चा करने में घबराते हैं

397
00:34:44,720 --> 00:34:48,800
है ना उनको थोड़ा कहिए कि माता जी का दूध

398
00:34:48,800 --> 00:34:52,880
पिए निष्ठा पूर्वक और फिर जो है सामर्थ्य

399
00:34:52,880 --> 00:34:57,280
एकत्रित करें वो ज्ञान और लेकर के आए अपने

400
00:34:57,280 --> 00:35:01,280
जेल मम निवासी अपराधी गुरु से फिर

401
00:35:01,280 --> 00:35:04,800
आके चर्चा

402
00:35:04,800 --> 00:35:10,800
करें यह देखो यह भी एक धर्म की व्याख्या

403
00:35:14,760 --> 00:35:20,760
है जितेंद्र यादव जी अपना चेहरा

404
00:35:21,920 --> 00:35:27,920
दिखाएं किशन दास जी तो पहली बॉल पर ही बोल्ड हो गए

405
00:35:28,080 --> 00:35:31,800
ऋतिक जी अपना चेहरा

406
00:35:31,800 --> 00:35:35,960
दिखाएं भाई जो भी आ रहा है ना चर्चा से जुड़ने के

407
00:35:35,960 --> 00:35:40,600
लिए वह यह सोच कर आए कि आपको

408
00:35:40,600 --> 00:35:46,600
आपके चेहरे के साथ आना

409
00:35:52,800 --> 00:35:56,960
है परमधाम वही है और

410
00:35:56,960 --> 00:36:01,760
प्रलय का में धाम और धामी एक हो जाते

411
00:36:01,760 --> 00:36:07,760
हैं धाम और धामी में कोई अंतर नहीं जसे नाम और नामी में कोई अंतर

412
00:36:16,880 --> 00:36:21,200
नहीं किशन दास जी अब चले गए लग रहा

413
00:36:21,200 --> 00:36:25,760
है ऋतिक जी चेहरा दिखाए

414
00:36:25,760 --> 00:36:31,760
आप सामने ला जरा कैमरे

415
00:36:37,080 --> 00:36:41,640
के हां जी तिक

416
00:36:41,640 --> 00:36:46,080
जी अरे वो क्रिश्चियन हो क्या

417
00:36:46,080 --> 00:36:51,360
हेलो क्रिश्चियन हो क्या हां जी हां जी क्रिश्चियन

418
00:36:51,360 --> 00:36:55,960
हूं

419
00:36:55,960 --> 00:37:00,400
जी चलो भी बता दो धर्म क्या

420
00:37:00,400 --> 00:37:05,840
है धर्म तो हम मानते नहीं सर जी धर्म को नहीं

421
00:37:05,840 --> 00:37:10,600
मानते भाई साहब धर्म नहीं मानते क्रिश्चियनिटी

422
00:37:10,600 --> 00:37:14,840
क्रिच जी क्या मानते हो

423
00:37:14,840 --> 00:37:19,200
हम धर्म नहीं मानते हम भगवान के और इंसान

424
00:37:19,200 --> 00:37:23,240
के बीच में जो होता है ना रिलेशनशिप वो क्रिश्चियनिटी

425
00:37:23,240 --> 00:37:29,240
है क्रिश्चियनिटी को धर्म नहीं है अच्छा

426
00:37:29,360 --> 00:37:34,240
जी भगवान के और इंसान के बीच में जो रिलेशनशिप होता है

427
00:37:34,240 --> 00:37:38,720
वोह क्रिश्चियनिटी है अच्छा तो इसकी आवश्यकता

428
00:37:38,720 --> 00:37:42,760
क्या है जी

429
00:37:42,760 --> 00:37:47,520
इसकी आवश्यकता क्या है आप ठहर के बात करिए स्थाई तरीके

430
00:37:47,520 --> 00:37:51,560
से इसकी आवश्यकता य है स अगर हम धर्म में बात करते हैं

431
00:37:51,560 --> 00:37:52,800
धर्म में

432
00:37:52,800 --> 00:37:57,680
तो इसम इंसान बट जा अच्छा आप मेरी बात सुनो

433
00:37:57,680 --> 00:38:02,400
आप एक स्टेबल स्टेबल हो कर के बात

434
00:38:02,400 --> 00:38:06,480
करिए नई चीज पता लग गई आज हमें क्रिश्चन कोई धर्म नहीं है वैसे धर्म

435
00:38:06,480 --> 00:38:12,480
है नहीं इस इस बात से तो हम भी एग्री करते हैं धर्म बात

436
00:38:13,440 --> 00:38:17,480
है क्या पूछ रहे थे भाई साहब आप मैं पूछ रहा हूं

437
00:38:17,480 --> 00:38:21,480
कि इसकी आवश्यकता क्या है इस रिलेशन की क्यों हमें

438
00:38:21,480 --> 00:38:25,680
जानता है इस रिलेशन को इस रिलेशन को इसलिए

439
00:38:25,680 --> 00:38:29,920
जानना है कि भाई मतलब इस दुनिया में जिस उद्देश्य से भगवान ने भेजा

440
00:38:29,920 --> 00:38:33,920
उस उद्देश्य को पूरा कर सके धर्म भगवान ने बना नहीं

441
00:38:33,920 --> 00:38:38,000
धर्म ब तुमसे पूछ रहा उस बात

442
00:38:38,000 --> 00:38:42,080
करो ना तुम उसके दूसरी चीजों पर क्यों ला रहे हो जो बात चल रही है

443
00:38:42,080 --> 00:38:46,440
उसकी बात करो मतलब क दोगे जब तुमय कह दोगे सुनो

444
00:38:46,440 --> 00:38:51,160
जब तुम यह कहने लगोगे एक एक्स्ट्रा बात की धर्म इंसान ने बनाए

445
00:38:51,160 --> 00:38:55,280
तो फिर क्या होगा कि मुझे वहा पर तुम्हारा खंडन करना पड़ेगा कि नहीं इंसान ने नहीं बनाया

446
00:38:55,280 --> 00:38:59,280
फिर उसम हम लोग विषय बदल जाएगा तो विषय की बात

447
00:38:59,280 --> 00:39:03,520
करिए जिससे कि मुझे दूसरे आंसर आपको ना देने पड़े

448
00:39:03,520 --> 00:39:08,120
तो आपने कहा कि जो क्रिश्चियनिटी

449
00:39:08,120 --> 00:39:12,400
है वो मनुष्य और

450
00:39:12,400 --> 00:39:17,040
भगवान के बीच का रिलेशन है उसका नाम

451
00:39:17,040 --> 00:39:21,440
क्रिश्चियनिटी अब इसकी आवश्यकता क्या है क्यों आवश्यक

452
00:39:21,440 --> 00:39:25,560
मतलब है कटी क्रिश्चियनिटी संबंध

453
00:39:25,560 --> 00:39:29,640
है उसकी आवश्यकता इसलिए है कि भगवान से हम बातचीत कर सके जिसके वो हमारा

454
00:39:29,640 --> 00:39:33,760
बाप है हम उसके बच्चे हैं ये क्य अरे देखो देखो

455
00:39:33,760 --> 00:39:38,000
बाप बात सुनो सुनिए सुनि सुनिए आपने

456
00:39:38,000 --> 00:39:42,480
कहा वो हमारा बाप है हम उसके बच्चे हैं ये तो बाद की बात है जब मैंने क्रिश्चियनिटी

457
00:39:42,480 --> 00:39:46,920
को स्वीकार कर लिया मान आपकी नेट प्रॉब्लम

458
00:39:46,920 --> 00:39:51,040
आर आपकी फोटो रुक गई है भाई आपकी आवाज

459
00:39:51,040 --> 00:39:57,040
आ नहीं कर रही

460
00:39:57,070 --> 00:40:00,640
[संगीत]

461
00:40:00,640 --> 00:40:05,620
एक मिनट

462
00:40:05,620 --> 00:40:08,640
[संगीत]

463
00:40:08,640 --> 00:40:12,800
रुकिए दिनेश

464
00:40:12,800 --> 00:40:16,880
गराडे जितेंद्र यादव जी कैमरा ऑन नहीं हो रहा है तो क्षमा करिए हम

465
00:40:16,880 --> 00:40:21,600
आपको नहीं ले सकते पंडित जी

466
00:40:21,600 --> 00:40:26,080
आपका स्वागत है देर से कर रहा हूं स्वागत हालांकि आप पहले आ चुके हैं जय श्री राम

467
00:40:26,080 --> 00:40:30,240
जय श्री राम वो तो किशन दास जी

468
00:40:30,240 --> 00:40:34,560
का किशन दास जी का देखा आपने क्या हाल हुआ देखा

469
00:40:34,560 --> 00:40:38,600
मैंने लाइव देख रहा था क दिनों से मेरे पीछे

470
00:40:38,600 --> 00:40:42,640
पड़े हुए

471
00:40:42,640 --> 00:40:46,640
थे अब क्या बोलते हैं ये आएंगे क्या दोबारा

472
00:40:46,640 --> 00:40:50,680
आ रहे हैं क्या वो जी का तो पता नहीं

473
00:40:50,680 --> 00:40:54,760
जो वो बच्चा है जो क्रिश्चियन बच्चा है वो मुझे लग रहा है काफी तैयारी

474
00:40:54,760 --> 00:40:58,840
करके आया था सर्वशक्तिमान के

475
00:40:58,840 --> 00:41:03,800
ऊपर आज बात छिड़ गई धर्म पर

476
00:41:03,800 --> 00:41:08,000
आउट ऑफ [हंसी]

477
00:41:08,000 --> 00:41:12,720
सिलेबस य दित है ये दिक्कत है जैसे

478
00:41:12,720 --> 00:41:17,000
अब कोई व्यक्ति देखिए जो मूल घटक है उन पर तो बात होगी कभी

479
00:41:17,000 --> 00:41:21,520
ना कभी पता नहीं कौन सी बात तो यह मूल घटक है

480
00:41:21,520 --> 00:41:27,520
नाराय नारायण

481
00:41:28,840 --> 00:41:32,920
कने आ ग हां

482
00:41:32,920 --> 00:41:37,320
जी अब आ रही है हां जी अब आ रही है अब आ रही है वो थोड़ा

483
00:41:37,320 --> 00:41:41,560
कनेक्ट कर रखा है फोन पापा जीी दूर ले बैठे तो मैं ये पूछ रहा था

484
00:41:41,560 --> 00:41:45,760
आपका इतना धुला धुला क्यों आ रहा है चेहरा अरे मेरा फोन

485
00:41:45,760 --> 00:41:51,760
भाई साहब

486
00:41:56,240 --> 00:42:00,320
sams7ng मैं ये पूछ रहा था कि आपने कहा हम उसके

487
00:42:00,320 --> 00:42:04,520
बेटे हैं और वो हमारा बाप है ये तो तब की बात

488
00:42:04,520 --> 00:42:08,600
है जब व्यक्ति पहले धर्म को स्वीकार कर ले बाइबल को स्वीकार कर ले तब

489
00:42:08,600 --> 00:42:12,640
वो आपके इन प्रमाणों को मानेगा तो वो क्यों स्वीकार

490
00:42:12,640 --> 00:42:17,120
करे क्यों आवश्यक है बाइबल आपकी उसके

491
00:42:17,120 --> 00:42:21,160
लिए आवश्यक भाई इसलिए है व उसका बाबू के

492
00:42:21,160 --> 00:42:25,320
उत्तर में आपको एक एग्जांपल दूंगा हम बोलिए

493
00:42:25,320 --> 00:42:29,320
हम आप हो हम आप जो अपने बाप के साथ आपने रिलेशन

494
00:42:29,320 --> 00:42:33,600
क्यों जरूरी है प्यार मोहब्बत के लिए भाई पहले पहले

495
00:42:33,600 --> 00:42:37,840
यह तो सिद्ध करो कि वो बाप ही है जी बिल्कुल बाप

496
00:42:37,840 --> 00:42:42,320
ही है वह अरे तो य तो तुम क्लेम है तुम्हारा इसको सिद्ध तो

497
00:42:42,320 --> 00:42:44,120
करो अब सिद्ध

498
00:42:44,120 --> 00:42:48,120
मा आपको कैसे करू उसमें आपको हर चीज मिलेगी अच्छा एक बात

499
00:42:48,120 --> 00:42:52,160
बताओ जब व्यक्ति जब व्यक्ति क्रिश्चियनिटी को स्वीकार कर

500
00:42:52,160 --> 00:42:56,600
लेता है ठीक बाइबल को खोल के पढ़ने लगता है

501
00:42:56,600 --> 00:43:00,640
उसके तो ये महता बताई गई होगी ना कि क्यों आवश्यक

502
00:43:00,640 --> 00:43:05,240
हूं मैं तुम्हारे लिए क्यों बाबल तुम्हा लिए

503
00:43:05,240 --> 00:43:09,760
आवश बता रहा हूं बता रहा हूं जो हम शुरू से लेकर लास्ट तक के पाप करते

504
00:43:09,760 --> 00:43:15,440
हैं उन पापों की जो हम शुरू से लेकर लास्ट तक के पाप करते

505
00:43:15,440 --> 00:43:21,040
हैं उन पापों की माफी के लिए यीशु मसीह ने क्रूस पर अपना बलिदान

506
00:43:21,040 --> 00:43:25,080
दिया अच्छा फिर उसके लिए वो पेमेंट वो

507
00:43:25,080 --> 00:43:29,080
पेमेंट उसने चुका दिया इसलिए वो

508
00:43:29,080 --> 00:43:33,600
हमारे लिए जरूरी है व हमारे पा है भाई देखो

509
00:43:33,600 --> 00:43:37,640
देखो मेरी बात सुनो मैं मैं आपको बताऊ बताओ बता बाइबल में

510
00:43:37,640 --> 00:43:42,080
लिखा है यह करना है यह नहीं करना है लिखा है कि नहीं लिखा है

511
00:43:42,080 --> 00:43:46,120
हां जी मतलब लिखी है इधर कुछ लिखी है नियम सब में होते

512
00:43:46,120 --> 00:43:50,200
है नियम नहीं लिखे हैं क्या यह करना है ये नहीं करना है जी लिखा

513
00:43:50,200 --> 00:43:54,360
है मैं बता द रहा हूं लिखा है लिखा है इन्हीं नियमों

514
00:43:54,360 --> 00:43:58,360
को हम धर्म कहते हैं आप ना जाने क्या आपने कहा रिलेशन कहते हो

515
00:43:58,360 --> 00:43:59,120
हालाकि उसमें

516
00:43:59,120 --> 00:44:03,360
भी जाएंगे तो पता नहीं क्या क्या निकलेगा खर जी जी ब

517
00:44:03,360 --> 00:44:07,400
बक जब बाइबल यह कह रही है कि तुमको यह करना है यह नहीं

518
00:44:07,400 --> 00:44:11,720
करना है ठीक है तो कोई व्यक्ति य क्लेम करेगा

519
00:44:11,720 --> 00:44:17,720
कि भाई मैं क्यों फॉलो करू इन नियमों

520
00:44:22,600 --> 00:44:28,600
को रे चू

521
00:44:41,080 --> 00:44:43,480
आवाज

522
00:44:43,480 --> 00:44:47,840
[संगीत]

523
00:44:47,840 --> 00:44:52,000
भाब यह ले लीजिए भैया स्क्रीनशॉट स

524
00:44:52,000 --> 00:44:57,360
साहेब

525
00:44:57,360 --> 00:45:01,840
आ जाता हा जी

526
00:45:01,840 --> 00:45:05,960
जी बोलिए जब आपकी बाइबल किसी

527
00:45:05,960 --> 00:45:10,040
से यह कह रही है आवाज आरही जब आपकी बाइबल किसी

528
00:45:10,040 --> 00:45:15,080
से यह कह रही है कि यह कार्य करना है यह नहीं करना है तो

529
00:45:15,080 --> 00:45:18,720
फिर

530
00:45:18,720 --> 00:45:22,800
उसम पूछ सकता है ना कि मुझे यह कार्य मुझे आपके

531
00:45:22,800 --> 00:45:26,960
कहने को क्यों मानना है मैं यह कार्य क्यों करूं यह क्यों ना करूं

532
00:45:26,960 --> 00:45:32,960
क्यों मानू मैं इस नियमावली

533
00:45:41,120 --> 00:45:46,240
को नेटवर्क सही नहीं

534
00:45:46,240 --> 00:45:50,280
है नहीं हो पाएगा

535
00:45:50,280 --> 00:45:53,480
ये तब से वही अटके

536
00:45:53,480 --> 00:45:59,200
हैं ये वही अटक गए हैं इनका टेप रिकॉर्ड वही पर

537
00:45:59,200 --> 00:46:03,600
है जीभ हमारी जाती है जीभ दोबारा दिखा

538
00:46:03,600 --> 00:46:07,680
हमारा कल आने वाला जो वीडियो उसका दिखा दीजिए जरा

539
00:46:07,680 --> 00:46:12,600
सा जीव हमारी जाती है मानव धर्म हमारा

540
00:46:12,600 --> 00:46:17,400
किकी जीव जीव जीव

541
00:46:17,400 --> 00:46:21,600
वो तो समझ गया लेकिन वो मतलब इतना भ्रंश

542
00:46:21,600 --> 00:46:25,760
करना है कि मतलब लिखने में भी जो लिखावट है उसमें

543
00:46:25,760 --> 00:46:29,760
भी कर दो ये देखो ये देखो राम पालियो आपके लिए

544
00:46:29,760 --> 00:46:34,200
क्या क्या लिखा जा रहा है आपको शर्म आनी चाहिए रामपाल

545
00:46:34,200 --> 00:46:38,360
के शिष्यों से ज्यादा हिम्मत वाला तो ईसाई व्यक्ति निकला कम

546
00:46:38,360 --> 00:46:42,400
से कम अपने चेहरे के साथ तो बहस करने आया चेले

547
00:46:42,400 --> 00:46:46,480
तो केवल कमेंट करना सीख के आए हैं एकट फुल डिबेट

548
00:46:46,480 --> 00:46:50,680
का वीडियो देख लो जितनी चाबी भरी सिस्टम ने उतना

549
00:46:50,680 --> 00:46:56,680
चली खिलौना

550
00:46:57,080 --> 00:47:01,200
हां जी किशन दास जी हा जी

551
00:47:01,200 --> 00:47:05,320
कहां चले गए थे आप आपको नेटवर्क

552
00:47:05,320 --> 00:47:09,400
में रहना चाहिए था आज के दिन जब इतने दिनों से हमारी चर्चा की डेट निश्चित

553
00:47:09,400 --> 00:47:13,440
हो रही है बारबार हो के नहीं हो पा रही है तो आपको नेटवर्क वाली जगह पर

554
00:47:13,440 --> 00:47:17,680
रहना चाहिए आज हा ब

555
00:47:17,680 --> 00:47:21,240
ही प्रॉब्लम

556
00:47:21,240 --> 00:47:27,240
था अरे भाई इनका स्क्रीनशॉट लेते रहिए

557
00:47:28,520 --> 00:47:34,520
और बीच-बीच में यहां पर दिखा भी दीजिए जो यह बोल रहे

558
00:47:38,280 --> 00:47:42,640
हैं हां जी किशन दास जी

559
00:47:42,640 --> 00:47:48,640
धर्म आवश्यक

560
00:47:50,480 --> 00:47:54,600
क्यों किशन दास जी आप किसी और दिन आइए जिस दिन आपका नेटवर्क बढ़िया

561
00:47:54,600 --> 00:48:00,600
हो

562
00:48:03,360 --> 00:48:06,960
आवाज नहीं आ रही

563
00:48:06,960 --> 00:48:12,280
आपकी देख देख तू बंद कर

564
00:48:12,280 --> 00:48:16,960
दे देख तू बंद कर दे रामपाल जी महाराज के

565
00:48:16,960 --> 00:48:22,960
अपनी मौत बला रहा है

566
00:48:24,240 --> 00:48:28,360
तू य और ये मैसेज किसी को खाया तो कल तेरे घर से

567
00:48:28,360 --> 00:48:34,360
किसी

568
00:48:34,360 --> 00:48:38,480
के चलिए अब देखिए हम लास्ट बार ट्राई कर रहे

569
00:48:38,480 --> 00:48:42,800
हैं अगर अब आपका कुछ डिस्टरबेंस आया ना तो फिर आप किसी और दिन आइएगा और

570
00:48:42,800 --> 00:48:47,320
उस दिन आप किसी अच्छे नेटवर्क एरिया में रहिएगा ठीक है

571
00:48:47,320 --> 00:48:51,480
हम आपका प्रश्न था कि धर्म धर्म आवश्यक

572
00:48:51,480 --> 00:48:55,480
क्यों क्या है धर्म हा उनकी

573
00:48:55,480 --> 00:49:00,240
उपयोगिता क्या है

574
00:49:00,240 --> 00:49:05,040
धर्म का तो सबसे पहला गुरु जी ने यही बताया आत्म उद्धार ऐसा

575
00:49:05,040 --> 00:49:10,560
परम धर्म नहीं कोई और क्या

576
00:49:10,560 --> 00:49:14,640
आत्मा का उद्धार ही सबसे बड़ा धर्म है

577
00:49:14,640 --> 00:49:18,720
तो मुझे क्यों करना आत्मा का उद्धार उसके लिए पहले

578
00:49:18,720 --> 00:49:23,720
मैं अपनी आत्मा को मानू तो मेरी आत्मा भी

579
00:49:23,720 --> 00:49:28,080
है तो बगैर आत्मा के क्या आप देखिए

580
00:49:28,080 --> 00:49:33,000
आप मेरे सवाल का जवाब दीजिए एक जिज्ञासु खड़ा है अगर

581
00:49:33,000 --> 00:49:37,280
आप आपके रामपाल जी के सामने जब एक

582
00:49:37,280 --> 00:49:41,320
व्यक्ति खड़ा हुआ है जो धर्म को धर्म की आवश्यकता उपयोगिता धर्म की

583
00:49:41,320 --> 00:49:45,360
परिभाषा जानना चाहता है आपने कहा कि आत्मा का उद्धार अब आत्मा

584
00:49:45,360 --> 00:49:49,720
के उद्धार के लिए उसको सबसे पहले बिलीव करना होगा कि आत्मा

585
00:49:49,720 --> 00:49:53,760
है वो बिलीव करवाइए

586
00:49:53,760 --> 00:49:58,000
अच्छा उसको म पता नहीं बिलीव करवाइए उसको

587
00:49:58,000 --> 00:50:02,040
फिर ये बिलीव करवाइए कि उसके लिए धर्म अंतिम विकल्प अगर सिद्ध

588
00:50:02,040 --> 00:50:06,080
करना है और अगर धर्म का मतलब आत्मा का उद्धार तो

589
00:50:06,080 --> 00:50:10,480
उसको फिर ये बिलीव करवाइए कि आत्मा का उद्धार इज

590
00:50:10,480 --> 00:50:14,520
मतलब लास्ट ऑप्शन फॉर यू अरे नास्तिक

591
00:50:14,520 --> 00:50:15,320
व्यक्ति के लिए तो

592
00:50:15,320 --> 00:50:19,440
कोई मतलब धर्म और वो है ही नहीं ना फिर तो भाई साहब देखिए

593
00:50:19,440 --> 00:50:23,600
हर व्यक्ति हर व्यक्ति धर्म को मानने वाला होने से पहले ना मानने

594
00:50:23,600 --> 00:50:27,760
वाला ही होता है आवश्यक नहीं कि कोई व्यक्ति अगर

595
00:50:27,760 --> 00:50:31,800
प्रश्न कर रहा है तो वो जो है नास्तिक ही है हर व्यक्ति धर्म को मानने वाला

596
00:50:31,800 --> 00:50:35,800
ना होने से पहले तक वो ना मानने वाला

597
00:50:35,800 --> 00:50:39,880
था जैसे कि इस दुनिया में इस दुनिया

598
00:50:39,880 --> 00:50:40,380
में जब

599
00:50:40,240 --> 00:50:44,440
बारिश हो रही होती है ना तो कहीं ना कहीं ऐसी जगह जरूर

600
00:50:44,440 --> 00:50:45,440
होती है जहां बारिश

601
00:50:45,440 --> 00:50:49,480
नहीं हो रही होती है हम और कहीं ना कहीं ऐसी जगह जरूर

602
00:50:49,480 --> 00:50:53,520
होती है जहां वो दोनों स्थान आपस में मिल रहे होते हैं कि ये बारिश

603
00:50:53,520 --> 00:50:57,560
हो रही है ये बारिश नहीं हो रही है हम है ना

604
00:50:57,560 --> 00:51:01,720
होता है ना ऐसा हा तो है नहीं पूरी दुनिया में एक साथ बारिश

605
00:51:01,720 --> 00:51:06,720
होती है इसी तरीके से जो नास्तिक होता है

606
00:51:06,720 --> 00:51:10,880
वो धर्म को मानने वाला होने से पहले तक

607
00:51:10,880 --> 00:51:15,440
जस्ट पहले तक वो ना मानने वाला होता है

608
00:51:15,440 --> 00:51:19,480
और ना मानने वाला होता है तो एक जगह ऐसी होती है जब व मिल रहा

609
00:51:19,480 --> 00:51:23,760
होता है यह वही जगह है जब वो पूछ रहा है धर्म मेरे लिए आवश्यक

610
00:51:23,760 --> 00:51:27,880
क्यों [संगीत] क्या

611
00:51:27,880 --> 00:51:31,920
उपयोग तो धर्म पर तो आप जब आएंगे ना त पहले आप ये

612
00:51:31,920 --> 00:51:35,920
मान तो लीजिए कि हां कि आत्मा होती है तो आप

613
00:51:35,920 --> 00:51:39,960
मुझे बताइए कि आत्मा क्यों मानू मैं और अगर

614
00:51:39,960 --> 00:51:44,200
मान भी लू तो उस जैसे कि जैसे मुझसे कोई कहे

615
00:51:44,200 --> 00:51:48,280
कि भाई तुम अगर प्रतिदिन शैंपू करोगे

616
00:51:48,280 --> 00:51:52,400
तो तुम्हारे बालों में चमक रहेगी ठीक है ठीक है

617
00:51:52,400 --> 00:51:56,800
अब मैं चाहूं तो करूं ना ना भी करूं ठीक है मैं गंजा होना चाहता हूं

618
00:51:56,800 --> 00:52:00,520
अमित दास की तरह है

619
00:52:00,520 --> 00:52:04,760
ना तो वो भी मुझे उसकी उसकी आवश्यकता मुझे

620
00:52:04,760 --> 00:52:09,120
मेरी बात सुनिए आपना के प्रसन तो करने से र रुकिए

621
00:52:09,120 --> 00:52:13,200
जो आपने भक्तों के साथ में जो प्रसन किए ना गीता का ज्ञान

622
00:52:13,200 --> 00:52:17,440
किसने दिया वेदों में कबीर नाम है कि नहीं है मतलब

623
00:52:17,440 --> 00:52:21,600
आपके पास यह वाला नहीं है ज्ञान हमारे पास तो बिल्कुल

624
00:52:21,600 --> 00:52:25,760
है गुरु जी का दिया सब कुछ है तो वो बताइए उसी प्रश्न

625
00:52:25,760 --> 00:52:30,360
पर आइए ना फिर वो वही बात करते हैं उसी को आगे बढ़ाते हैं अरे भाई

626
00:52:30,360 --> 00:52:35,200
वो अच्छा ये बताइए गता का ज्ञान मैं उस आ जाता

627
00:52:35,200 --> 00:52:39,360
हूं आपसे आपसे पूछता हूं क्या है

628
00:52:39,360 --> 00:52:43,560
एक पॉइंट बोलता हूं मैं वो जिस पर तैयारी करके आए हैं आप उस पर आउट ऑफ सिलेबस

629
00:52:43,560 --> 00:52:48,480
क्यों पूछ रहे हैं तयारी कर

630
00:52:48,480 --> 00:52:52,840
तयारी करके आए उस परे भी बात हो जाएगी किशन जी देखिए

631
00:52:52,840 --> 00:52:56,880
मैं मैं पता है देखिए अगर हम लोग क्रम से चलेंगे ना

632
00:52:56,880 --> 00:53:00,920
तो मैं आपको यह यकीन के साथ कह सकता हूं कि बाद में आप मेरे से

633
00:53:00,920 --> 00:53:06,000
मना नहीं कर पाएंगे कि यह जो बात हमने की है ये आवश्यक नहीं

634
00:53:06,000 --> 00:53:10,120
थी ये बहुत आवश्यक बात है और जो चर्चा हमारी होनी

635
00:53:10,120 --> 00:53:14,200
है उससे जुड़ी हुई बात हैय तो हमारे गुरु जी ने तो सर्व सिद्ध

636
00:53:14,200 --> 00:53:15,880
करके बता दिया पहले ही

637
00:53:15,880 --> 00:53:20,360
ठीक है अब आप मान नहीं रहे हो तो व बात अलग है क्या मान

638
00:53:20,360 --> 00:53:24,640
आप बताइए तो गुरुजी ने क्या बताया है कि धर्म आवश्यक क्यों है

639
00:53:24,640 --> 00:53:27,720
एक मनुष्य के लिए

640
00:53:27,720 --> 00:53:31,800
धर्म आवश्यक क्यों व तो मैंने आपको बताया क्या

641
00:53:31,800 --> 00:53:34,160
कि आत्मा

642
00:53:34,160 --> 00:53:38,360
को आत्मा का उधार ना हा आत्मा

643
00:53:38,360 --> 00:53:42,560
उधार आत्मा का उद्धार जब आपने बताया तो आपके गुरु ने यह नहीं बताया

644
00:53:42,560 --> 00:53:47,120
कि आत्मा है यह कैसे प्रूव होता है दूसरी बात आत्मा का उद्धार

645
00:53:47,120 --> 00:53:51,240
बहुत जरूरी है एक मनुष्य के लिए यह दो चीजों के बारे में

646
00:53:51,240 --> 00:53:55,360
आपके गुरु जी ने क्या बताया है वो बताइए हमारे

647
00:53:55,360 --> 00:53:59,360
गुरुजी ने तो सब कुछ हमार को बताई है ठीक है देखिए

648
00:53:59,360 --> 00:54:03,600
आप य मान हा मैं

649
00:54:03,600 --> 00:54:08,120
आपसे प्रश्न मैं आपकी बात को मानने से मना नहीं कर रहा हूं

650
00:54:08,120 --> 00:54:12,720
मैं उसमें पूछ रहा हूं कि आपने कहा आत्मा का उद्धार

651
00:54:12,720 --> 00:54:17,080
तो आपके गुरु जी ने आत्मा के होने की सिद्धि कैसे की

652
00:54:17,080 --> 00:54:21,160
और आत्मा के उद्धार की आवश्यकता की और

653
00:54:21,160 --> 00:54:26,840
अत्यंत आवश्यकता की सिद्धि कैसे की यह दो चीज तो बताइए

654
00:54:26,840 --> 00:54:30,920
भाई गीता को पढ़ने तब जाएंगे ना जब गीता की हमारे लिए वैल्यू होगी गीता

655
00:54:30,920 --> 00:54:35,520
की आवश्यकता होगी किसी के लिए तब तो वह प्रमाण मानेगा गीता

656
00:54:35,520 --> 00:54:40,240
को तो गीता पर बात करने से पहले हम लोग

657
00:54:40,240 --> 00:54:44,640
ये तो वो कर ले एस्टेब्लिश कर ले कि हम लोग गीता के पास जा क्यों रहे हैं

658
00:54:44,640 --> 00:54:48,840
क्यों जा रहे हैं वेदों के पास देखिए ऐसा

659
00:54:48,840 --> 00:54:52,920
संसार में नास्तिक नहीं बताया तो कोई बात नहीं हम लोग आगे बढ़

660
00:54:52,920 --> 00:54:58,040
सकते हैं क्या उन्होंने बताया है तो आप मुझे बता दीजिए नहीं बताया तो हम आगे बढ़ते

661
00:54:58,040 --> 00:55:02,160
हैं नास्तिक व्यक्ति है ना कोई ना कोई किसी ना किसी पर तो विश्वास करता ही

662
00:55:02,160 --> 00:55:06,360
है ना अब जैसे जय भीम है तो वो अंबेडकर जी को भगवान

663
00:55:06,360 --> 00:55:10,520
मानते हैं तो वो उनको मान ही रहे मैंने आपसे ये नहीं पूछा है कि नास्तिक

664
00:55:10,520 --> 00:55:15,080
व्यक्ति क्या करता है सुनिए मैं आपसे यह पूछ रहा हूं

665
00:55:15,080 --> 00:55:19,120
कि आत्मा है अगर आत्मा का उद्धार

666
00:55:19,120 --> 00:55:23,680
ही धर्म का मतलब है तो आत्मा है ये क्यों माना

667
00:55:23,680 --> 00:55:27,800
जाए और इस इसके अलावा

668
00:55:27,800 --> 00:55:32,400
आत्मा का उद्धार उसके लिए अंतिम विकल्प है यह क्यों माना जाए

669
00:55:32,400 --> 00:55:36,560
जैसे कि कोई व्यक्ति कोई व्यक्ति बालों को चमकाए बिना

670
00:55:36,560 --> 00:55:40,640
रह सकता है उसको शैंपू की आवश्यकता नहीं है हो

671
00:55:40,640 --> 00:55:44,640
सकता है कि उसको कुछ फायदा हो जाए शैंपू से पर वह शैंपू के बिना भी

672
00:55:44,640 --> 00:55:46,520
रह सकता है उसको

673
00:55:46,520 --> 00:55:50,720
क्रीम लगाने की चेहरे पर आवश्यकता नहीं है हो सकता है कि उसको कुछ फायदा हो जाए क्रीम

674
00:55:50,720 --> 00:55:54,760
लगाने से मगर उसके लिए अंतिम विकल्प नहीं है तो अंतिम विकल्प के

675
00:55:54,760 --> 00:56:00,760
रूप में धर्म को ख्या पित करना सिखाया है क्या आपके गुरु

676
00:56:00,840 --> 00:56:05,280
ने धर्म तो क्या है वोह तो देखिए हम जानते ही है

677
00:56:05,280 --> 00:56:09,280
आप नास्तिक व्यक्ति की बात कर रहे हैं ना नास्तिक व्यक्ति के लिए वैसे तो उसके

678
00:56:09,280 --> 00:56:13,480
लिए तो एक एक ही जीवन होता है ठीक है आत्मा

679
00:56:13,480 --> 00:56:17,680
उसके लिए माने मतलब वो उसको विश्वास ही नहीं करते बिलीव नहीं करते उस

680
00:56:17,680 --> 00:56:21,720
क्या नहीं मानता है इसमें हमारा समय व्यर्थ नष्ट करने की

681
00:56:21,720 --> 00:56:27,560
बजा आप यह बताए आपके गुरु ने आत्मा की सिद्धि

682
00:56:27,560 --> 00:56:32,200
आप उ आपके गुरु ने नहीं बताया है तो बोल दीजिए

683
00:56:32,200 --> 00:56:36,200
बिल्कुल बताया हमारे को बिल्कुल बताया नास्ति व्यक्ति की बात कर रहे हैं नास्तिक

684
00:56:36,200 --> 00:56:40,560
ने तो फिर मैं कह रहा नास्तिक व्यक्ति की बात नहीं कर रहा हूं

685
00:56:40,560 --> 00:56:45,440
एक व्यक्ति गुरु के पास गया है वो जानना चाहता है गुदव

686
00:56:45,440 --> 00:56:49,480
हे गुरुदेव मेरे लिए धर्म आवश्यक क्यों है क्यों मानना

687
00:56:49,480 --> 00:56:53,760
है मुझे धर्म को क्यों मुझे सच ही बोलना है

688
00:56:53,760 --> 00:56:57,960
क्यों मुझे वय विचार नहीं करना है मे मुझे वो अंततोगत्वा

689
00:56:57,960 --> 00:57:02,360
धर्म की आवश्यकता क्यों है वो आप मुझे बताइए जिससे

690
00:57:02,360 --> 00:57:06,800
मैं संतुष्ट हो सकू और गुरु का मतलब क्या है रु

691
00:57:06,800 --> 00:57:11,000
का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला यह जो मेरे प्रश्न आ रहे हैं इनका

692
00:57:11,000 --> 00:57:17,000
निवारण करिए गुरुदेव तो क्या इन प्रश्नों का निवारण किया है आपके गुरु

693
00:57:17,120 --> 00:57:21,120
ने अगर किया है तो आप बता दीजिए या फिर दोनों में से एक

694
00:57:21,120 --> 00:57:27,120
बात बोल दीजिए कि गुरु ने नहीं किया या तो आपको नहीं पता है

695
00:57:28,560 --> 00:57:33,240
हमारे को तो पता ही है बिल्कुल पता ही है ठीक है धर्म क्यों आवश्यक

696
00:57:33,240 --> 00:57:37,320
है धर्म के बिना हम जी नहीं सकते हा

697
00:57:37,320 --> 00:57:41,520
मम के बिना हम जी नहीं सकते यह प्रमाण यह प्रमाण हो गया

698
00:57:41,520 --> 00:57:45,600
यह प्रमाण हो गया आप मुझे प्रमाण दे रहे हैं आपकी बात पर

699
00:57:45,600 --> 00:57:49,760
या तो मैं भरोसा करूं या ना करूं ये मेरा चुनाव होगा मुझे

700
00:57:49,760 --> 00:57:54,400
तर्क पूर्ण व्याख्या चाहिए अभी धर्म

701
00:57:54,400 --> 00:57:58,520
की जैसे कि मैं ने कहा मैंने कहा कि तुम राम

702
00:57:58,520 --> 00:58:02,520
को माने बिना जी नहीं सकते हो श्री रामचंद्र

703
00:58:02,520 --> 00:58:06,600
जो दशरथ के बेटे थे उनको माने बिना जी नहीं सकते हो तो क्या आप इस बात

704
00:58:06,600 --> 00:58:09,560
को मानेंगे

705
00:58:09,560 --> 00:58:14,280
वो आपके अनुसार है ना बस बस

706
00:58:14,280 --> 00:58:18,960
एटली यह आपका प्रमाण हो गया कि आप जो बोल रहे हो उसको मैं मान लू

707
00:58:18,960 --> 00:58:23,120
आपको मुझे सेटिस्फाइड करना है कैसे संतुष्ट तो क्या आपके

708
00:58:23,120 --> 00:58:27,400
गुरु ने धर्म के की व्याख्या जानने

709
00:58:27,400 --> 00:58:33,400
के लिए संतुष्ट किया है अपने शिष्यों

710
00:58:35,020 --> 00:58:41,020
[संगीत]

711
00:58:42,520 --> 00:58:47,360
को बोलिए किशन दास जी

712
00:58:47,360 --> 00:58:51,480
हां धर्म की व्याख्या मतलब आप य सुनना चाहते हैं ना

713
00:58:51,480 --> 00:58:54,000
धर्म क्या

714
00:58:54,000 --> 00:58:58,040
है धर्म आवश्यक धर्म क्या है यह तो आपने मुझे बता दिया

715
00:58:58,040 --> 00:59:02,760
कि आत्मा का उद्धार ही धर्म है अब दो चीज आ गई कि आत्मा है

716
00:59:02,760 --> 00:59:08,080
और अवश क्यों है और आवश्यक क्यों उसका

717
00:59:08,080 --> 00:59:12,280
उ बोलिए तो जब हम आप

718
00:59:12,280 --> 00:59:16,520
जब धर्म को हम जानेंगे तभी तो हमारे को पता चलेगा ना किई धर्म आत्मा के लिए

719
00:59:16,520 --> 00:59:20,600
मतलब उद्धार क्यों करना चाहिए अच्छा तो इसका

720
00:59:20,600 --> 00:59:25,280
मतलब ये है आपका कहने का मतलब ये है कि अगर कोई मुझसे यह कहने लगे

721
00:59:25,280 --> 00:59:29,760
वलय चले जाओ और मैं कहं भा वैश्यालय क्या है

722
00:59:29,760 --> 00:59:33,960
तो हम उसे तर्क देंगे जब वैश्यालय जाओगे उसके बाद ही तो पता चलेगा ना वलय

723
00:59:33,960 --> 00:59:38,000
क्या है पहले क्यों चुनाव कर रहे हो

724
00:59:38,000 --> 00:59:42,120
ऐसा है क्या आपको समझाना पड़ेगा ना

725
00:59:42,120 --> 00:59:48,120
कि वह जगह मेरे लिए उस को अपनाना उसका अस्तित्व क्यों आवश्यक

726
00:59:48,700 --> 00:59:51,640
[संगीत]

727
00:59:51,640 --> 00:59:55,640
है नहीं देखिए ऐसा है कि जब तक आप अच्छाई और बुराई

728
00:59:55,640 --> 00:59:59,800
को नहीं जानेंगे तब तक आपको धर्म के लिए समझना

729
00:59:59,800 --> 01:00:04,200
ही पड़ेगा ना धर्म क्या है चलिए आप आप बता दीजिए अच्छाई और बुराई का आधार

730
01:00:04,200 --> 01:00:09,800
क्या है आप यही बता दीजिए अच्छाई और बुराई का आधार क्या

731
01:00:09,800 --> 01:00:14,040
है अब आधार क्या है आ आधार तो सभी जानते

732
01:00:14,040 --> 01:00:18,040
ही है अच्छाई क्या है और बुराई क्या है तो सभी जानते तो

733
01:00:18,040 --> 01:00:22,160
इसका मतलब रामपाल जी की मतलब जरू एक ही समान होती है

734
01:00:22,160 --> 01:00:26,360
नहीं सभी जानते हैं तो फिर वो रामपाल जी की जरूरत तो है नहीं खम हो ग

735
01:00:26,360 --> 01:00:30,640
सब जानते हैं आप कैसी निराधार

736
01:00:30,640 --> 01:00:36,640
बातें कर रहे हो आप बता रहे हो 2012 से आप श हो सभी जानते

737
01:00:39,320 --> 01:00:43,440
हैं तो सभी जानते हैं तो फिर आप यही तो बात

738
01:00:43,440 --> 01:00:47,800
सभी नहीं जानते भाई साहब सभी नहीं जानते अच्छाई और बुराई का आधार

739
01:00:47,800 --> 01:00:52,640
एलजीबीटी क्य वाले नहीं जानते अच्छाई बुराई का आधार

740
01:00:52,640 --> 01:00:57,280
पता नहीं कैसी बातें कर रहे हैं आप सभी जानते हैं

741
01:00:57,280 --> 01:01:01,720
चलिए बताइए मैं जो धर्म को मानने वाला उनके लिए कर रहा हूं

742
01:01:01,720 --> 01:01:05,880
जो धर्म को जो मानने वाले उनके लिए बात कर रहा हूं मैं तो मैं आपसे

743
01:01:05,880 --> 01:01:09,920
पूछ रहा हूं कि धर्म को मानने वाला कैसे बने व्यक्ति क्यों बने क्यों

744
01:01:09,920 --> 01:01:13,160
उसके लिए धर्म आवश्यक

745
01:01:13,160 --> 01:01:17,200
है कैसे धर्म की स्थापना करें किसी मनुष्य के

746
01:01:17,200 --> 01:01:21,680
जीवन में कि नहीं तेरे लिए सबसे इंपॉर्टेंट धर्म

747
01:01:21,680 --> 01:01:25,920
है ये उसको कैसे समझाए वो बताइए

748
01:01:25,920 --> 01:01:30,040
तो ये नास्तिक व्यक्ति के लिए नहीं आप नास्तिक व्यक्ति

749
01:01:30,040 --> 01:01:34,080
के लिए पूछ रहे हो या कोई धर्म को मानने वाला उसके लिए पूछ रहे हो

750
01:01:34,080 --> 01:01:38,480
एक सामान्य व्यक्ति जो सकारात्मक सोच के साथ आपसे पूछने आया है

751
01:01:38,480 --> 01:01:42,760
उसके लिए पूछ रहा हूं देखिए सामान सामान्य व्य नहीं नहीं सामान्य

752
01:01:42,760 --> 01:01:46,760
व्यक्ति देखिए सामान्य व्यक्ति में तो धर्म

753
01:01:46,760 --> 01:01:51,120
को मानने वाला भी होता है नहीं मानने वाले भी होता है अब मान लीजिए कोई मतलब

754
01:01:51,120 --> 01:01:54,440
ईसाई धर्म को मानने वाला या मुस्लिम धर्म को मानने वाला हि धर्म को मानने

755
01:01:54,440 --> 01:01:58,600
वाला मानने वाला बनने से पहले ठीक पहले तक

756
01:01:58,600 --> 01:02:02,680
ना मानने वाला होता है तो ये वैसा ही व्यक्ति है इसका मतलब ये नहीं

757
01:02:02,680 --> 01:02:06,720
है सोच के आया है इसका मतलब ये नहीं है सुनिए इसका मतलब ये

758
01:02:06,720 --> 01:02:11,440
नहीं है कि वो ये सोच के आया है कि उसको जो है

759
01:02:11,440 --> 01:02:15,640
उसको ठुकराना ही है वह जानना चाहता है व सकारात्मक थॉट

760
01:02:15,640 --> 01:02:19,800
के साथ आया आपके पास आप समझाइए

761
01:02:19,800 --> 01:02:23,960
उसे जब व्यक्ति के अंदर दुख होते हैं ना सुनिए

762
01:02:23,960 --> 01:02:28,440
मेरी बात जब व्यक्ति के अ दुख पढ़ते हैं ना दुख दुख

763
01:02:28,440 --> 01:02:32,440
हां जब वो चारों तरफ से हार जाता सुनिए ठीक है कोई

764
01:02:32,440 --> 01:02:36,600
बीमारी के कारण कोई किसी मतलब किसी भी कारण तब

765
01:02:36,600 --> 01:02:40,720
उसको मतलब पता चलता है कि संसार के अंदर कोई ऐसी भी शक्ति है जो अपने

766
01:02:40,720 --> 01:02:44,840
को सुख दे सकती है तब वो मानता

767
01:02:44,840 --> 01:02:48,840
है मतलब अगर दुख नहीं अगर दुख नहीं होगा व्यक्ति को तो उसको ये समझाया नहीं

768
01:02:48,840 --> 01:02:52,960
जा सकता कि दुनिया में कोई ऐसी भी शक्ति

769
01:02:52,960 --> 01:02:56,960
है हां तो वो नहीं मान सकता जब

770
01:02:56,960 --> 01:03:01,480
तक दुख नहीं होगा उसको संसार को सुख समझ के बैठा

771
01:03:01,480 --> 01:03:05,640
है नहीं वो संसार कोई सुख समझ के बैठा है कि बस जो है यही

772
01:03:05,640 --> 01:03:09,640
है फाइनल है इसके अलावा और कुछ नहीं है मैंने आपको क्या कहा व्यक्ति

773
01:03:09,640 --> 01:03:13,720
को जब तक सुख नहीं होगा तब तक उसको समझाया नहीं जा सकता

774
01:03:13,720 --> 01:03:18,960
तर्क पूर्ण तरीके से बात को नहीं रखा जा स मेरी बात

775
01:03:18,960 --> 01:03:23,080
सुनिए अरे आप मेरी बात सुनिए आप यह बताइए ब धर्म ब धर्म

776
01:03:23,080 --> 01:03:27,080
को आप क्या मानते है [संगीत] अब यह

777
01:03:27,080 --> 01:03:32,680
तो खैर विषयात हो रहा नास्तिक मानते हैं

778
01:03:32,680 --> 01:03:36,920
नहीं नास्तिक मानते हैं ना अब जब नास्तिक मानते

779
01:03:36,920 --> 01:03:41,320
हो तो जय भीम जो अंबेडकर जी थे उन्होंने बहुत धर्म अपनाया

780
01:03:41,320 --> 01:03:45,400
ठीक है अब वो हिंदू धर्म के खिलाफ हो गए हिंदू धर्म में पैदा जरूर हुए लेकिन

781
01:03:45,400 --> 01:03:49,400
उनके खिलाफ हुए उसका कारण क्या था यह क्या

782
01:03:49,400 --> 01:03:53,480
बात है ये तो नया चैप्टर खोल रहे हैं आप

783
01:03:53,480 --> 01:03:56,680
आपसे मैं पूछ रहा हूं

784
01:03:56,680 --> 01:04:00,720
अपनी बात बता जवाब दीजिए आप

785
01:04:00,720 --> 01:04:05,480
अपनी बात बताइए धर्म आवश्यक क्यों

786
01:04:05,480 --> 01:04:09,560
है या तो ये कहिए कि महाराज ने नहीं बताया या ये

787
01:04:09,560 --> 01:04:13,720
कहिए कि मुझे नहीं पता है महाराज ने बताया होगा मैंने इस बारे में जानकारी

788
01:04:13,720 --> 01:04:17,040
प्राप्त नहीं की

789
01:04:17,040 --> 01:04:21,240
है बोलना मत अन म्यूट कर रहा हूं चलिए ये मान लीजिए कि भाई जानकारी

790
01:04:21,240 --> 01:04:26,000
प्राप्त नहीं की है हम आपको बताएंगे बिल्कुल आवश्यक क्यों है

791
01:04:26,000 --> 01:04:30,960
बता दिया कि आत्मा का उधारी हां ठीक है हा

792
01:04:30,960 --> 01:04:34,960
ये मान लीजिए नहीं आप जो बताना चाहते हैं ऐसे मत करिए कि बाद

793
01:04:34,960 --> 01:04:39,160
में आप यह कह सके फिर उसमें कि भाई वह जो है जिद कर रहा था इसलिए उसकी

794
01:04:39,160 --> 01:04:45,160
बात को रखने के लिए मैंने बोल दिया जो सच है वो बोलिए स्पष्ट

795
01:04:47,360 --> 01:04:51,440
बोलिए मैंने यही बताया मैंने यही बताया आपको

796
01:04:51,440 --> 01:04:56,320
कि भाई मैंने

797
01:04:56,320 --> 01:04:59,760
बता दिया आपको मैंने

798
01:04:59,760 --> 01:05:03,880
क्या क्या बता इसके बारे में जानकारी प्राप्त नहीं की मैंने

799
01:05:03,880 --> 01:05:08,240
आवश्यक क्यों है तो सुनिए ऐसा है धर्मा आवश्यक क्यों है

800
01:05:08,240 --> 01:05:12,320
मैं मैं बताता हूं धर्मा आवश्यक क्यों है दिनेश दास

801
01:05:12,320 --> 01:05:16,520
जी आपको पता है क्या आप बताएंगे क्या आप भी आए

802
01:05:16,520 --> 01:05:20,800
हैं आप बता दीजिए फिर मैं रखूंगा अपनी बात

803
01:05:20,800 --> 01:05:24,800
मैं आपको नहीं पता है क्या नहीं ऐसा

804
01:05:24,800 --> 01:05:29,200
तो मैंने नहीं कहा ना तो बताओ पता है कि

805
01:05:29,200 --> 01:05:33,480
नहीं नहीं मैं कुछ और सवाल लेकर के आया हूं उसके बाद मैं इसका भी जवाब दे दूं

806
01:05:33,480 --> 01:05:37,520
कोई दिक्कत नहीं है आपके गुरु ने बताया है कि नहीं आपको वो

807
01:05:37,520 --> 01:05:41,720
कि धर्म की धर्म आवश्यक क्यों है अरे हमारे

808
01:05:41,720 --> 01:05:47,040
गुरु जी ने बताया ये है लेकर ही

809
01:05:47,040 --> 01:05:51,640
बताओ क्या है धर्म देखिए

810
01:05:51,640 --> 01:05:56,720
धर्म क्या है धर्म की परिभाषा तो यह है कि जो धार्मिक

811
01:05:56,720 --> 01:06:00,920
जो धार्मिकता है जो धार्मिकता के अंदर सारी चीजें आती

812
01:06:00,920 --> 01:06:05,040
है जो ज्ञान आता है जो जो भी कुछ धार्मिकता के अंदर आता है वो धर्म है जैसे

813
01:06:05,040 --> 01:06:09,360
कि और धार्मिकता क्या है धार्मिकता क्या

814
01:06:09,360 --> 01:06:11,920
है धार्मिकता क्या है

815
01:06:11,920 --> 01:06:16,080
धार्मिकता क्या है हम धार्मिकता क्या है कि जो

816
01:06:16,080 --> 01:06:20,400
हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि यह करना चाहिए यह नहीं करना चाहिए

817
01:06:20,400 --> 01:06:24,720
यह गलत है और यह सही है जैसे हम किसी को सताते हैं या किसी को

818
01:06:24,720 --> 01:06:29,520
कोई पाप करना या कोई पुण्य होता है या पाप तो आप

819
01:06:29,520 --> 01:06:33,600
ब ये तो आप ये बता रहे हैं कि धर्म सुनिए ये आप ये बता रहे

820
01:06:33,600 --> 01:06:37,920
हैं कि धर्म का वर्णन कहां पर है आप यह बता रहे हैं

821
01:06:37,920 --> 01:06:43,040
अभी मैंने आपसे धार्मिकता धर्म पूछा है क्या

822
01:06:43,040 --> 01:06:47,040
है धर्म यही है कि अब धर्म यही

823
01:06:47,040 --> 01:06:51,240
है कि हम सही मार्ग पर जाए मतलब जो जिस लिए हमें मनुष्य जन्म

824
01:06:51,240 --> 01:06:56,040
प्राप्त हुआ है जिस लिए मनु जन्म प्राप्त हुआ है

825
01:06:56,040 --> 01:07:00,640
धर्म धर्म वो नॉलेज है जिसके कारण हम सही मार्ग पर जाते

826
01:07:00,640 --> 01:07:04,400
हैं

827
01:07:04,400 --> 01:07:08,760
हेलो जी जी जी बोलिए बोलिए यानी कि धर्म

828
01:07:08,760 --> 01:07:14,760
वह है जिसके कारण हम सही मार्ग पर जाते

829
01:07:19,440 --> 01:07:25,440
हैं धर्म वो है जिसके कारण अरे भाई चेहरा तो लाओ सामने

830
01:07:35,720 --> 01:07:39,960
चलिए आपको ही टाइम देते हैं किशन दास जी इन्होने

831
01:07:39,960 --> 01:07:44,160
बताया कि धर्म वही है जो सही मार्ग पर ले जाए अब नास्तिक व्यक्ति के लिए

832
01:07:44,160 --> 01:07:48,520
तो सही मार्ग क्या है अंदर सुनि

833
01:07:48,520 --> 01:07:53,000
ऐसा है ना इन्होने मैं पूछने वाला था यह देखिए

834
01:07:53,000 --> 01:07:57,000
भैया अंबेडकर जी ब में नहीं गए उन्होंने खुद का

835
01:07:57,000 --> 01:08:01,160
धर्म बनाया था नहीं ये तो ब जिसको

836
01:08:01,160 --> 01:08:05,760
शायद नव बध कहते हैं बुद्धम बिल्कुल

837
01:08:05,760 --> 01:08:10,440
ठीक मैं सोच रहा था बोलू लेकिन कोई बात नहीं आपकी बात क्या काटू

838
01:08:10,440 --> 01:08:14,480
ब हा तो मैं यह कह रहा

839
01:08:14,480 --> 01:08:18,560
था कि जब व्यक्ति कहता है कि सही मार्ग पर जाने के लिए धर्म की

840
01:08:18,560 --> 01:08:19,720
आवश्यकता है

841
01:08:19,720 --> 01:08:23,760
तो यहां पर दो प्रश्न उठ जाते हैं एक कि व्यक्ति

842
01:08:23,760 --> 01:08:28,000
सही मार्ग पर क्यों जाए और दूसरा उसको सही

843
01:08:28,000 --> 01:08:32,000
और गलत में अंतर करना आता हो हां तो फिर मैं

844
01:08:32,000 --> 01:08:36,000
यही तो बात कर रहा था आपसे कि नास्तिक व्यक्ति के लिए तो सही और गलत

845
01:08:36,000 --> 01:08:40,000
दोनों मतलब एक बराबर ही है अब देखिए ये जो है ये चले गए हैं

846
01:08:40,000 --> 01:08:44,120
मगर मैं अब परिभाषा दे दूंगा तो इसको कॉपी कर देंगे वापस आके बस ये दिक्कत

847
01:08:44,120 --> 01:08:48,440
है बिल्कुल ऐसा है

848
01:08:48,440 --> 01:08:52,960
धर्म आवश्यक इसलिए है कि

849
01:08:52,960 --> 01:08:57,880
धर्म की परिभाषा से पता चल जाएगा धर्म आवश्यक क्यों है

850
01:08:57,880 --> 01:09:01,920
बाबू दास भी आए हैं धर्म की बात बताने धर्म की यही

851
01:09:01,920 --> 01:09:06,000
होता है सभी ग्र में जो प्रमाण लिखा हुआ है बाबू दास को ऊपर ले लो जरा

852
01:09:06,000 --> 01:09:10,280
लिंक दे दो धर्म एक बार बाबू दास का सुन ले

853
01:09:10,280 --> 01:09:14,320
लिंक दे दो जरा बाबूदास को भाई चलो खैर

854
01:09:14,320 --> 01:09:20,320
डिस्टर्ब नहीं करते किशन जी से ही बात चलाते बाबू दास आएगा

855
01:09:20,560 --> 01:09:24,560
नहीं आए तो एक बार सुन ले जर बाबू दास की वैसे समय

856
01:09:24,560 --> 01:09:27,960
आपको दिया था

857
01:09:27,960 --> 01:09:33,960
बाबू दास आना चाहते हो क्या तो कमेंट कर

858
01:09:38,480 --> 01:09:42,560
दो हा ब बाबू नहीं आ

859
01:09:42,560 --> 01:09:46,920
रहे हैं बाबू नहीं आ रहे हैं चलिए ठीक है मैं बता देता हूं धर्म की परिभाषा से

860
01:09:46,920 --> 01:09:51,880
समझ में आ जाए संसार के प्रत्येक प्राणी

861
01:09:51,880 --> 01:09:55,920
में जो वास्तविक चा है

862
01:09:55,920 --> 01:10:00,840
वो सत चित आनंद की चा है है ना

863
01:10:00,840 --> 01:10:05,240
तो हम लोग एसी में टीवी में फ्रिज में कूलर में

864
01:10:05,240 --> 01:10:09,320
पंखे में उठते बैठते कार मकान घर दुकान

865
01:10:09,320 --> 01:10:13,320
सब में हम लोग एक ही चीज ढूंढ रहे हैं सत चितता आनंद यही चीजों को

866
01:10:13,320 --> 01:10:17,680
सब जगह खोज रहे हैं तो जीव की चा का जो वास्तविक

867
01:10:17,680 --> 01:10:22,400
विषय है ना सत चिता आनंद यानी कि सच्चिदानंद

868
01:10:22,400 --> 01:10:26,520
स्वरूप परमेश्वर जीव की का वास्तविक विषय क्या

869
01:10:26,520 --> 01:10:31,640
है वो भगवान को ही ढूंढ रहा है सोते जाते उठते

870
01:10:31,640 --> 01:10:36,280
बैठते तो जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद

871
01:10:36,280 --> 01:10:40,520
स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले

872
01:10:40,520 --> 01:10:42,720
शास्त्र

873
01:10:42,720 --> 01:10:46,880
द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त

874
01:10:46,880 --> 01:10:51,760
करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म

875
01:10:51,760 --> 01:10:55,960
है आपने पसंद क्या किया था नहीं तो

876
01:10:55,960 --> 01:11:00,720
सुनिए सुनिए जी सुनिए तो एक मिनट

877
01:11:00,720 --> 01:11:04,800
एक मिनट की सं जी जीव की जो वास्तविक चा

878
01:11:04,800 --> 01:11:08,880
है ना वो एसीटीवी फ्रीज कूलर नहीं है जब तुम किसी से बात करोगे आप

879
01:11:08,880 --> 01:11:13,760
अगर नास्तिक से भी अंदर भी

880
01:11:13,760 --> 01:11:18,000
अरे किशनदास जी जब मैं बोल रहा हूं तो मुझे बोल लेने दीजिए ना मैं आपको कहूंगा

881
01:11:18,000 --> 01:11:22,080
फिर बोलिएगा आप हा तो नास्तिक व्यक्ति

882
01:11:22,080 --> 01:11:26,320
से भी बात आप अगर करेंगे वो भी कभी कभी ऐसा सोचने लगता

883
01:11:26,320 --> 01:11:30,360
है कि बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए

884
01:11:30,360 --> 01:11:34,480
मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही है वो भी कभी-कभी सोचने

885
01:11:34,480 --> 01:11:38,760
लगता है कि धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए जबकि नास्तिक

886
01:11:38,760 --> 01:11:43,000
व्यक्ति भौतिकवादी है उसने अभी स्पिरिचुअल आध्यात्मिक चीजों

887
01:11:43,000 --> 01:11:47,240
को स्वीकार नहीं किया है और जब वह भौतिकवादी है तो साइंस

888
01:11:47,240 --> 01:11:51,600
के अनुसार एक मनुष्य बारिश के कम ज्यादा होने को कंट्रोल

889
01:11:51,600 --> 01:11:55,960
नहीं कर सकता है मगर फिर भी उसके मन में चा विद

890
01:11:55,960 --> 01:11:59,960
कि वो बारिश को कंट्रोल कर ले उसके मन

891
01:11:59,960 --> 01:12:04,080
में धूप को कंट्रोल करने की चा विद्यमान है

892
01:12:04,080 --> 01:12:08,920
तो यहां पर वो अपनी ही आईडियोलॉजी के अगेंस्ट हो जा रहा है इसका मतलब

893
01:12:08,920 --> 01:12:13,360
उसके अंदर जब चा विद्यमान है सत चित आनंद की तो इससे

894
01:12:13,360 --> 01:12:18,640
सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सत चित आनंद है

895
01:12:18,640 --> 01:12:22,960
ने बता दिया सुनिए सच आनंद आपने बता दिया

896
01:12:22,960 --> 01:12:26,960
अब नास्तिक व्यक्ति के लिए तो स सच्चि तो आनंद है नहीं

897
01:12:26,960 --> 01:12:30,560
उसम खाली चाहा है

898
01:12:30,560 --> 01:12:36,560
चाहा बे आप नास्तिक बन जाओ अभी आपका ब

899
01:12:36,960 --> 01:12:41,640
हो भाई साहब मैं बता तो रहा हूं बता रहा

900
01:12:41,640 --> 01:12:45,760
बता रहा किस जी मैं बता रहा हूं मैं

901
01:12:45,760 --> 01:12:50,320
बता रहा हूं एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

902
01:12:50,320 --> 01:12:56,320
कभी ना मरने की चा विद्यमान है कि नहीं

903
01:12:56,720 --> 01:13:00,960
यह हो गई उसकी सत होने की चा काहे की चा हो गई

904
01:13:00,960 --> 01:13:05,240
सत होने की व सत होना चाहता है ठीक है सत

905
01:13:05,240 --> 01:13:08,520
जो कभी बदलता नहीं है

906
01:13:08,520 --> 01:13:12,760
शाश्वत है ना अच्छा एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर

907
01:13:12,760 --> 01:13:17,440
भी एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी मूर्खता

908
01:13:17,440 --> 01:13:21,520
विहीन बन जाने की चा विद्यमान है

909
01:13:21,520 --> 01:13:25,960
वो सब कुछ जान लेना चाहता है कल इंडिया पाकिस्तान

910
01:13:25,960 --> 01:13:30,520
के मैच में कौन जीतने वाला है वह यह भी जान लेना चाहता है

911
01:13:30,520 --> 01:13:34,920
हा कभी कभी अगर वह कभी भी नए व्यक्ति से मिलेगा

912
01:13:34,920 --> 01:13:39,040
आज मैं किससे मिला हूं वो नए व्यक्ति के बारे में भी

913
01:13:39,040 --> 01:13:43,080
उसको मालूम नहीं है कुछ भी फिर भी व गेस करना शुरू करता है यह यहां से आया

914
01:13:43,080 --> 01:13:47,280
होगा ये ऐसा होगा ये वैसा होगा इसका मतलब उसके अंदर

915
01:13:47,280 --> 01:13:51,360
अखंड ज्ञानी बन जाने की चा विद्यमान है इसी को कहते

916
01:13:51,360 --> 01:13:55,640
हैं चित और आनंद व दुखी

917
01:13:55,640 --> 01:13:59,640
नहीं होना चाहता है मेरे बाल कभी सफेद ना हो मेरी

918
01:13:59,640 --> 01:14:04,000
जो चेहरा है कभी रिंकल्स ना आए मेरी गाड़ी का टायर कभी घिसे नहीं

919
01:14:04,000 --> 01:14:08,120
मेरे पास दुनिया का सबसे अच्छा मोबाइल होना चाहिए मोबाइल में स्क्रैच भी नहीं आना

920
01:14:08,120 --> 01:14:11,800
चाहिए यह क्या है अनंत आनंद इसी

921
01:14:11,800 --> 01:14:15,920
को आनंद कहते हैं जोब हम सचित आनंद कह रहे हैं यह सारी

922
01:14:15,920 --> 01:14:20,040
जो चा है यह नास्तिक के अंदर विद्यमान है और इस चाह

923
01:14:20,040 --> 01:14:24,080
के विद्यमान होने से ही यह सिद्ध होता है कि दुनिया में

924
01:14:24,080 --> 01:14:28,200
कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जैसे कि हमारे

925
01:14:28,200 --> 01:14:32,920
अंदर भूख है तो उसी से पता लग गया कि दुनिया में भोजन

926
01:14:32,920 --> 01:14:37,120
है हमारे अंदर प्यास है तो उसी से पता लग

927
01:14:37,120 --> 01:14:41,040
गया कि दुनिया में पानी है हमारे अंदर

928
01:14:41,040 --> 01:14:45,120
सुनने की चाह है तो उसी से पता लग गया कि दुनिया में

929
01:14:45,120 --> 01:14:49,240
आवाज है हमारे अंदर देखने की चाह

930
01:14:49,240 --> 01:14:49,840
है

931
01:14:49,840 --> 01:14:54,000
तो उसी से पता लग गया कि दुनिया में दृश्य

932
01:14:54,000 --> 01:14:58,000
है ठीक है तो एक नास्तिक व्यक्ति के

933
01:14:58,000 --> 01:15:02,040
अंदर भी व्याप्त सच्चिदानंद एक ना

934
01:15:02,040 --> 01:15:06,160
जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

935
01:15:06,160 --> 01:15:10,280
व्याप्त भूख के होने से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है उसी प्रकार

936
01:15:10,280 --> 01:15:14,480
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सत चित आनंद की

937
01:15:14,480 --> 01:15:18,680
चा से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध

938
01:15:18,680 --> 01:15:23,040
होता है और फल स्वरूप

939
01:15:23,040 --> 01:15:27,440
जब फल स्वरूप व ईश्वर को प्राप्त करने की कोशिश करता है

940
01:15:27,440 --> 01:15:31,480
तो उस कोशिश में उसे जो करना है और जो नहीं करना है

941
01:15:31,480 --> 01:15:35,840
यह जो विधि विधान है इसी का नाम धर्म है

942
01:15:35,840 --> 01:15:40,120
यानी कि धर्म का वास्तविक फल क्या है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

943
01:15:40,120 --> 01:15:44,240
की प्राप्ति मोक्ष और यही धर्म

944
01:15:44,240 --> 01:15:47,440
की उपयोगिता

945
01:15:47,440 --> 01:15:52,720
है अब बात ये आती है कि हमने यह जाना

946
01:15:52,720 --> 01:15:57,280
कि ईश्वर कौन है जो सभी प्रकार के प्राकृतिक

947
01:15:57,280 --> 01:16:01,560
नियमों के ऊपर कंट्रोल कर लेने वाला है

948
01:16:01,560 --> 01:16:05,600
क्योंकि व्यक्ति के अंदर प्रकृति के सभी नियमों को तोड़ देने

949
01:16:05,600 --> 01:16:09,680
की चा विद्यमान थी जिससे कि हम य सिद्ध कर पाए कि इस दुनिया

950
01:16:09,680 --> 01:16:14,320
में कोई सभी नियमों को तोड़ सकने वाला ईश्वर भी है

951
01:16:14,320 --> 01:16:18,880
ठीक है तो अब सवाल यह बनता है आगे

952
01:16:18,880 --> 01:16:23,080
का कि जब ऐसा है तो

953
01:16:23,080 --> 01:16:27,400
यानी कि ईश्वर वही हो सकता है जो किसी भी प्रकार के नियम

954
01:16:27,400 --> 01:16:32,560
से मुक्त हो अद हो सर्वशक्तिमान

955
01:16:32,560 --> 01:16:37,720
हो उसके सामने कोई भी नियम नहीं लग

956
01:16:37,720 --> 01:16:41,920
सकता ठीक है

957
01:16:41,920 --> 01:16:45,960
तो अब बात य आती है क्या

958
01:16:45,960 --> 01:16:50,080
रामपाल दास जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है जिसे

959
01:16:50,080 --> 01:16:56,080
आप कबीर कहते हैं क्या वह सर्वशक्तिमान है

960
01:16:57,000 --> 01:17:01,680
क्या वो जीव क्या वो मनुष्य की चाह का वही ईश्वर है

961
01:17:01,680 --> 01:17:05,800
जिसको प्राप्त करने के लिए उसका धर्म का पालन आवश्यक हो जाए क्या

962
01:17:05,800 --> 01:17:11,800
वोह वही ईश्वर है हां बिल्कुल

963
01:17:13,280 --> 01:17:17,320
अच्छा

964
01:17:17,320 --> 01:17:19,440
तो

965
01:17:19,440 --> 01:17:23,800
जैसे आपके अनुसार रामपाल दास जी के अनुसार

966
01:17:23,800 --> 01:17:28,040
वो जो है तत् लोक से सीधा आता है

967
01:17:28,040 --> 01:17:33,240
जो सफेद दाढ़ी में होता है वही है ना

968
01:17:33,240 --> 01:17:37,200
कैसे आता

969
01:17:37,200 --> 01:17:41,320
है कैसे आता मतलब

970
01:17:41,320 --> 01:17:45,600
आपके अनुसार जो ईश्वर का स्वरूप है जो जिसको परम

971
01:17:45,600 --> 01:17:50,360
सत्य कहा जाए वह कबीर है

972
01:17:50,360 --> 01:17:56,360
ना और परम सत्य का मतलब है जो कभी बदलता नहीं है

973
01:17:56,600 --> 01:18:00,760
शाश्वत बिल्कुल तो कबीर शाश्वत

974
01:18:00,760 --> 01:18:05,880
सत्य है ना बिल्कुल है

975
01:18:05,880 --> 01:18:08,000
हां

976
01:18:08,000 --> 01:18:12,160
तो जब वो शाश्वत सत नीचे आ रहा है तो वह

977
01:18:12,160 --> 01:18:16,160
पहले शिशु के रूप में आ रहा है उसके बाद

978
01:18:16,160 --> 01:18:20,760
वह किशोर हो रहा है फिर उसके दाढ़ी आ रही है

979
01:18:20,760 --> 01:18:25,320
तो क्या यह जो स्वरूप है

980
01:18:25,320 --> 01:18:31,320
ईश्वर का हां जो आप कबीर बता रहे हो ये तो बदल रहा

981
01:18:32,160 --> 01:18:36,280
है यह बदल रहा है सर्वशक्तिमान किसको

982
01:18:36,280 --> 01:18:40,320
कहते हैं फिर सर्वशक्तिमान किसको कहते हैं मैंने वही तो

983
01:18:40,320 --> 01:18:44,760
कहा इसका मतलब देखिए मैं आपको ऐसे बता दूं कि

984
01:18:44,760 --> 01:18:48,800
ईश्वर नीचे आ गया ठीक है अब मैं

985
01:18:48,800 --> 01:18:53,640
आपसे एक प्रश्न पूछ रहा हूं क्या वो पहाड़ बन सकता है

986
01:18:53,640 --> 01:18:57,880
एक प्रश्न पूछ रहा हूं जो कबीर है हां पहाड़

987
01:18:57,880 --> 01:19:00,280
बन सकते

988
01:19:00,280 --> 01:19:04,440
हैं हां बन सकते हैं तो

989
01:19:04,440 --> 01:19:08,480
जब वो पहाड़ बन सकते हैं तो यानी कि उनका जो रूप है वो ट्रांसफॉर्म

990
01:19:08,480 --> 01:19:12,720
हो रहा

991
01:19:12,720 --> 01:19:18,720
है यानी कि यह जो रूप है यह शाश्वत सत्य नहीं

992
01:19:18,880 --> 01:19:23,040
है ये तो प्रति लोक में आप इस इनको देख रहे हैं

993
01:19:23,040 --> 01:19:26,640
ना हम

994
01:19:26,640 --> 01:19:30,960
इस पृथ्वी लोक में तो फिर वो जैसे जैसे आम इंसान

995
01:19:30,960 --> 01:19:35,440
जैसे जीता है वैसे ही वो अपना रूप दिखाते है ना उनको

996
01:19:35,440 --> 01:19:39,600
अगर वो एड जो रूप है ना उनका सतलोक में वो

997
01:19:39,600 --> 01:19:44,320
य उतार दे तो फिर वो आप और हम कोई देख नहीं सकते यानी

998
01:19:44,320 --> 01:19:48,320
कि यानी कि वो अपने असली रूप में नहीं आते हैं यह जो

999
01:19:48,320 --> 01:19:53,000
कबीर का रूप है यह अलग है वो जो रूप है वो अलग है

1000
01:19:53,000 --> 01:19:57,480
परमात्मा की वेदों में तीन बताइए शरीर की भाई साहब

1001
01:19:57,480 --> 01:20:01,480
हम लोग प्रमाण पर बात करेंगे अभी मैं आपसे आपका पक्ष पूछ

1002
01:20:01,480 --> 01:20:05,480
रहा हूं जब मुझे आवश्यकता होगी कि मुझे इसका प्रमाण

1003
01:20:05,480 --> 01:20:11,480
दो तो आप प्रमाण दीजिएगा

1004
01:20:11,920 --> 01:20:16,080
हा बताइए कि ईश्वर अपने वास्तविक

1005
01:20:16,080 --> 01:20:20,720
स्वरूप में आता है या फिर बदल कर के आता

1006
01:20:20,720 --> 01:20:25,200
है जो उनका वास्तविक स्वरूप होता है ना वो उसी रूप में आता

1007
01:20:25,200 --> 01:20:30,120
लेकिन इस पृथ्वी लोक के अंदर वह अपने रूप को बदलते हैं

1008
01:20:30,120 --> 01:20:34,440
जैसे बालक किशोर स्ता जवानी बुढ़ापा व इस तरह से

1009
01:20:34,440 --> 01:20:38,520
अपना वह लीला करते हैं वह वास्तविक

1010
01:20:38,520 --> 01:20:42,600
स्वरूप में ही आते हैं मगर यहां पर अपने रूप को बदलते हैं

1011
01:20:42,600 --> 01:20:46,760
तो जब वो अपने रूप को यहां पर बदल रहे हैं तो उनमें से कौन सा रूप है जो वहां पर बैठा

1012
01:20:46,760 --> 01:20:49,880
है इसको कैसे माने

1013
01:20:49,880 --> 01:20:54,800
हम जब यहां पर उनका रूप बदल रहा है तो आपको यह कैसे पता चला

1014
01:20:54,800 --> 01:20:59,800
में से यही वाला रूप है जो वहां बैठा है तलोक

1015
01:20:59,800 --> 01:21:04,400
में कैसे पता

1016
01:21:04,400 --> 01:21:08,400
चला आप संतो की वाणी तो मान उस पर विश्वास तो करते हैं ना

1017
01:21:08,400 --> 01:21:12,600
मानते तो है ना फिर हम बताएंगे कि व कैसे हैं

1018
01:21:12,600 --> 01:21:16,640
मैं अपने सनातन शास्त्रों को मानता हूं और उनके अनुरूप अगर संतों की

1019
01:21:16,640 --> 01:21:21,120
वाणी होती है तो उसको मानता हूं अच्छा इस

1020
01:21:21,120 --> 01:21:25,400
कते गुरु ग्रंथ और गोविंद सा तो गुरु नानक

1021
01:21:25,400 --> 01:21:29,480
जी को मानते हैं आप उनको तो सही मानते गुरु नानक जी की कोई बात होगी

1022
01:21:29,480 --> 01:21:34,040
जो वेद विरुद्ध नहीं होगी तो मानते हैं बिल्कुल वेद

1023
01:21:34,040 --> 01:21:38,360
गु वेद शास्त्र तो ये जो ज्ञान तो कबीर साहब ने जो दिया ना तो पूरा

1024
01:21:38,360 --> 01:21:42,400
वेद के बिल्कुल उ ये बात की बात है

1025
01:21:42,400 --> 01:21:46,400
अभी मैंने आपसे ये पूछा है बात ये चल रही है कि कबीर जब

1026
01:21:46,400 --> 01:21:50,720
यहां पर आ रहे हैं तो वो शिशु रूप में भी है वो किशोर अवस्था

1027
01:21:50,720 --> 01:21:54,960
में भी है और वो बूढ़े भी हो रहे हैं

1028
01:21:54,960 --> 01:21:59,080
तो वो जब ऐसा कर रहे हैं तो हमें कैसे पता कि इसमें से बूढ़ा वाला

1029
01:21:59,080 --> 01:22:03,480
जो रूप है यही वहां पर बैठा है परमात्मा

1030
01:22:03,480 --> 01:22:08,040
बिल्कुल सा स्वस्त है ठीक है ना सनातन क्या

1031
01:22:08,040 --> 01:22:11,480
क्या कहां चले

1032
01:22:11,480 --> 01:22:15,920
गए पप हो गए उनके

1033
01:22:15,920 --> 01:22:19,520
नेटवर्क की बड़ी प्रॉब्लम है मैं तो सोच रहा था

1034
01:22:19,520 --> 01:22:23,520
कि स्क्रीन शेयर करके जरा क्वेश्चन में लिख देता हूं धर्म आवश्यक क्यों है

1035
01:22:23,520 --> 01:22:28,920
उसे भटकने की जरूरत पड़ेगी लिखा हुआ हैय वापस इस पे आइए वापस इसपे

1036
01:22:28,920 --> 01:22:33,680
आइए अमित दु जी जय श्री राम

1037
01:22:33,680 --> 01:22:38,000
भैया जय श्री राम देखिए जय भवा ये दिख रहा आपको

1038
01:22:38,000 --> 01:22:42,200
ये रामपाल जी है भटके हुए हैं यही लिखूंगा अब ताकि

1039
01:22:42,200 --> 01:22:46,760
जब इस क्वेश्चन प है तो यहां से कूदे ना इधर से उधर ठीक है इसी प

1040
01:22:46,760 --> 01:22:50,840
रहे ये ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पाएंगे इनम इतनी ताकत नहीं है

1041
01:22:50,840 --> 01:22:55,320
ब्रह्मचर्य का पालन करने ये लोग आ रहा है

1042
01:22:55,320 --> 01:23:00,400
चलिए ये तो खैर व्यक्तिगत बातें हो

1043
01:23:00,400 --> 01:23:04,600
गई एक मिनट बड़ी खुशी

1044
01:23:04,600 --> 01:23:08,600
हुई दास जी मैं आपसे एक मिनट में बात कर रहा हूं

1045
01:23:08,600 --> 01:23:13,480
जी अमित दुबे जी और कानपुर से हैं आप

1046
01:23:13,480 --> 01:23:17,120
जी भैया

1047
01:23:17,120 --> 01:23:23,120
कान जी आप कहां चले जाते हैं बारबार

1048
01:23:25,040 --> 01:23:28,600
जी किशन दास जी

1049
01:23:28,600 --> 01:23:33,360
हां आपका कहने का मतलब है कि

1050
01:23:33,360 --> 01:23:37,400
वह जो परमात्मा है वह अपने असली रूप में यहां पर आता नहीं

1051
01:23:37,400 --> 01:23:41,400
है बल्कि असली रूप में वह बन जाता है अंत तक

1052
01:23:41,400 --> 01:23:45,560
आते आते नहीं यह हमने कब कहा कि असली रूप में नहीं आता

1053
01:23:45,560 --> 01:23:49,680
है क्यों वो शिशु अवस्था में आता है ना

1054
01:23:49,680 --> 01:23:55,680
हा वो असली रूप है उसका

1055
01:23:55,730 --> 01:24:01,730
[हंसी]

1056
01:24:04,440 --> 01:24:09,840
कहां चले गए सब लोग चले

1057
01:24:09,840 --> 01:24:15,840
गए

1058
01:24:16,440 --> 01:24:20,480
हम बहुत ज्यादा टाइम नहीं है रामपाल जी रामपाल जी

1059
01:24:20,480 --> 01:24:24,520
के यहां नेटवर्क ही प्रॉब्लम है जेल में है ना

1060
01:24:24,520 --> 01:24:28,560
बेचारे क्या करें बहुत दुखी है इस समय इन लोगों को

1061
01:24:28,560 --> 01:24:32,720
मजा आ रहा है फैक्ट फुल डिबेट के वीडियो देख देख के खुश है रामपाल

1062
01:24:32,720 --> 01:24:35,320
जी दुखी

1063
01:24:35,320 --> 01:24:39,440
है ये नहीं कि उनकी खबर ले उनके लिए बढ़िया बढ़िया

1064
01:24:39,440 --> 01:24:43,560
मुलाकात होती है ना जेल में मुलाकात होती व बढ़िया बढ़िया मिस्ठान

1065
01:24:43,560 --> 01:24:47,560
वगैरा पहुंचाए यह सब नहीं बैठे घर पर फैक्ट

1066
01:24:47,560 --> 01:24:51,760
फुल डिबेट का वीडियो देख लिया सतलोक आश्रम वालों का वीडियो देख लिया खुश

1067
01:24:51,760 --> 01:24:55,760
हो गए वो दुखी है सर्दी लग रही है

1068
01:24:55,760 --> 01:24:59,840
मच्छर काट रहे हैं अभी मेरे न्यूज

1069
01:24:59,840 --> 01:25:03,920
में पता पता चला था कि व शायद वो उनको क्यारी

1070
01:25:03,920 --> 01:25:07,920
संभालने का काम मिला है बगीचा पौधा इत्यादि

1071
01:25:07,920 --> 01:25:10,760
ऐसा कुछ सुनने में आया था हा सही सर देख

1072
01:25:10,760 --> 01:25:14,840
लो भाई क्या कर नेय क्या चल रहा है मैंने देखा

1073
01:25:14,840 --> 01:25:20,440
तो उसम काफी कमेंट किया मैंने य चल क्या रहा है

1074
01:25:20,440 --> 01:25:25,120
य बोलिए जय श्री राम

1075
01:25:25,120 --> 01:25:28,880
हा स

1076
01:25:28,880 --> 01:25:32,920
नमस्ते हा जी तो अभी आप बातें कर रहे

1077
01:25:32,920 --> 01:25:36,920
हैं आपने धर्म की परिभाषा बताई और पिछली बार हम हमारी डिबेट जो है यहीं

1078
01:25:36,920 --> 01:25:41,680
पर बात हमारी अटक गई थी धर्म धर्म क्या है आपने मुझसे पूछा

1079
01:25:41,680 --> 01:25:46,320
था कि धर्म क्या है तो

1080
01:25:46,320 --> 01:25:50,560
मैं थोड़ा बोलू देखो धर्म क्या है आपने जो परिभाषा बताई मैं तो

1081
01:25:50,560 --> 01:25:54,800
आप बोलते नास्तिकों को कैसे समझाओ ग तो

1082
01:25:54,800 --> 01:25:59,000
आपने जो अभी धर्म की परिभाषा बताई है कि भाई जैसे मान लो कोई नास्तिक

1083
01:25:59,000 --> 01:26:03,040
है उसको भी इच्छाएं हैं उसको भी जो है आपने बोला था

1084
01:26:03,040 --> 01:26:07,120
ना सचिदा क्या शब्द बोला था आपने उसको भी

1085
01:26:07,120 --> 01:26:12,120
मतलब जो है रिक्वायरमेंट है

1086
01:26:12,120 --> 01:26:16,680
यही बोला था ना आपने अभी धर्म की परिभाषा के अंदर काफी

1087
01:26:16,680 --> 01:26:20,720
आपने ज्यादा शब्द यूज किए थे एजेक्ट वर्ड तो याद नहीं लेकिन उसका भावार्थ मेरे

1088
01:26:20,720 --> 01:26:24,840
समझ में आ गया आप जो कहना चा लेकिन उस परिभाषा

1089
01:26:24,840 --> 01:26:25,760
को तो मैं नकार

1090
01:26:25,760 --> 01:26:29,840
सकता हूं नकार चलिए बन जाइए थोड़ी देर

1091
01:26:29,840 --> 01:26:33,480
के लिए नास्तिक हो जाए

1092
01:26:33,480 --> 01:26:39,480
खेल थोड़ी देर आप नास्तिक बन जाइए अभी देखिए आपके मु पर टेप

1093
01:26:41,080 --> 01:26:45,080
लगा आप आप आप उसकी जो शब्दों

1094
01:26:45,080 --> 01:26:49,280
को मत पकड़ना भावार्थ पर आ जाओ आप शब्दों को नहीं पकड़ोगे कि खाली आपका ऐसा है हा

1095
01:26:49,280 --> 01:26:55,280
या ना हा ना ना बनिए तो सही मेरी बात को काटिए तो सही

1096
01:26:55,720 --> 01:27:00,000
मैं तो नास्तिक हु ही नहीं ना प्रॉब्लम तो यही है मैं तो आस्तिक हूं अरे भाई

1097
01:27:00,000 --> 01:27:04,040
मैं तो मानता हूं भगवान है जो नहीं मानता मेरी परिभाषा को हटा दो आपको ई अपनी

1098
01:27:04,040 --> 01:27:08,080
परिभाषा दे दो फिर देखो नास्तिक बन के मैं आपकी सारी परिभाषा काट डालूंगा

1099
01:27:08,080 --> 01:27:13,640
और चलो मेरी परिभाषा मत

1100
01:27:13,640 --> 01:27:17,680
छूना एक बार थोड़ा सा आप एक मिनट में एक बार और

1101
01:27:17,680 --> 01:27:21,880
डिफाइन कर दो एक बार थोड़ा सा रिवाइज हो जाएगा एक बार एक बार और बता दो

1102
01:27:21,880 --> 01:27:26,680
शर्ट में बताना लेकिन ज्यादा लंबा उसको एक् मत करना जीव

1103
01:27:26,680 --> 01:27:30,960
की जीव की चाह के वास्तविक

1104
01:27:30,960 --> 01:27:35,440
विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

1105
01:27:35,440 --> 01:27:40,640
प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म

1106
01:27:40,640 --> 01:27:46,240
है शॉर्ट में बताया

1107
01:27:46,240 --> 01:27:50,440
बहुत तो इसको थोड़ा दूसरे शब्दों का प्रयोग करके भी तो थोड़ा

1108
01:27:50,440 --> 01:27:56,440
थोड़ा सा हल्का शब्दों का प्रयोग करो ना

1109
01:27:57,840 --> 01:28:02,280
देखिए आप क्या शब्द को बा

1110
01:28:02,280 --> 01:28:06,840
देखिए संसार का प्रत्येक प्राणी सच्चिदानंद

1111
01:28:06,840 --> 01:28:11,160
स्वरूप परमेश्वर यानी कि भगवान को ही ढूंढ रहा है

1112
01:28:11,160 --> 01:28:15,200
बस वो यह जान नहीं पा रहा है कि मैं जो मोबाइल

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01:28:15,200 --> 01:28:18,320
में मोबाइल

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01:28:18,320 --> 01:28:22,360
में फिल्म में कार में मैं ईश्वर को

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01:28:22,360 --> 01:28:26,560
ही ढूंढ रहा हूं तो जब हम उसे बताते हैं कि देख

1116
01:28:26,560 --> 01:28:31,440
जब तू ईश्वर को नकार रहा है तो यहां पर तू ईश्वर को चाह रहा है

1117
01:28:31,440 --> 01:28:35,520
कहां कहा पर चाह रहा है जैसे कि वो भी ये आकलन कर लेता है कि भाई कल पाकिस्तान

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01:28:35,520 --> 01:28:39,760
से कौन जीतेगा यानी वो भविष्य देखने वाला ब एक मिनट

1119
01:28:39,760 --> 01:28:44,480
एक मिनट यानी कि वह भविष्य देखने वाला बनना चाहता है

1120
01:28:44,480 --> 01:28:48,600
समझ रहे हैं वह भी चाहता है वो भी कई

1121
01:28:48,600 --> 01:28:52,760
बार उसकी म एक मिनट एक मिनट एक

1122
01:28:52,760 --> 01:28:56,760
मिनट वो भी क वो भी कई बार कहता है कि धूप ज्यादा पड़ रही है

1123
01:28:56,760 --> 01:29:00,840
तो कम हो जाए बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए यह सारे थॉट्स उसके उसके मन

1124
01:29:00,840 --> 01:29:04,880
में भी आते हैं क्यों आ रहे हैं जबकि साइंस ने नहीं माना

1125
01:29:04,880 --> 01:29:09,400
कि यू कैन कंट्रोल द वेदर फिर भी आ रहे

1126
01:29:09,400 --> 01:29:12,880
हैं और वोह पर्सन कभी इस बात को मानेगा ही

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01:29:12,880 --> 01:29:17,000
नहीं कि यह जो आप बता रहे हैं भगवान की जो डेफिनेशन है व वो यह

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01:29:17,000 --> 01:29:21,080
कहेगा कि यह मेरी इच्छा है खाली भगवान का रूप थोड़ी है

1129
01:29:21,080 --> 01:29:25,200
अरे जो तुम्हारी वो इच्छा है उसका जो सब्जेक्ट है वही

1130
01:29:25,200 --> 01:29:29,200
भगवान है ना जो तुम्हारी इच्छा है जिसको तुम छोड़ नहीं पा

1131
01:29:29,200 --> 01:29:33,840
रहे हो उस इच्छा का विषय होना सिद्ध है

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01:29:33,840 --> 01:29:37,760
मैं बता रहा हूं मनुष्य के अंदर

1133
01:29:37,760 --> 01:29:41,840
इा मैं बता रहा हूं मैं बता

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01:29:41,840 --> 01:29:45,880
रहा भगवान को एक एंटिटी मत समझिए जिसके मतलब हाथ पैर होंगे

1135
01:29:45,880 --> 01:29:50,960
बस बैठ है देख रहा है अभी कुछ देर के लिए छोड़ दीजिए

1136
01:29:50,960 --> 01:29:55,200
समझिए मैं बता रहा हूं देखिए ऐसा है हमारे अंदर

1137
01:29:55,200 --> 01:30:00,080
जो भी ऐसी चाह है ना जिसको हम छोड़ नहीं सकते हैं

1138
01:30:00,080 --> 01:30:04,240
ठीक है उस चाह का सब्जेक्ट दुनिया में मौजूद है

1139
01:30:04,240 --> 01:30:08,800
उस चाह को पूरा करने वाला जैसे हमारे अंदर प्यास है ना

1140
01:30:08,800 --> 01:30:13,680
तो उस प्यास का निवारण इस दुनिया में मौजूद है सिद्ध है

1141
01:30:13,680 --> 01:30:18,640
अगर हम मैं कहूं अभी इस समय मैं यह कहने लगूं कि भाई

1142
01:30:18,640 --> 01:30:22,680
मेरे अंदर उड़ने वाली मोटरसाइकिल का मोटरसाइकिल

1143
01:30:22,680 --> 01:30:27,320
की चा है तो इस दुनिया में उड़ने वाली मोटरसाइकिल भी नहीं है

1144
01:30:27,320 --> 01:30:28,400
ठीक है

1145
01:30:28,400 --> 01:30:32,520
उड़ने वाली मोटरसाइकिल नहीं है तो मेरी चाह का निवारण इस दुनिया

1146
01:30:32,520 --> 01:30:37,240
में नहीं है मगर इस चा को मैं अपने से अलग कर सकता हूं

1147
01:30:37,240 --> 01:30:41,400
मैं उड़ने वाली मोटरसाइकिल को चाहना छोड़ सकता

1148
01:30:41,400 --> 01:30:45,520
हूं मगर ऐसी कई चाह है मेरे अंदर जिनको

1149
01:30:45,520 --> 01:30:49,560
मैं नहीं छोड़ पा रहा हूं चाहे जो हो जाए मैं मृत्यु से

1150
01:30:49,560 --> 01:30:54,160
दूर भागना चाहता हूं है कि नहीं अम

1151
01:30:54,160 --> 01:30:58,240
चाए नहीं आतंकवादी तो आतंकवादी टेररिस्ट इस बात को नहीं मानेंगे वो

1152
01:30:58,240 --> 01:31:03,320
कहेंगे मैं तो मरना चाहता हूं अरे ई

1153
01:31:03,320 --> 01:31:07,560
सुनो मेरी बात वह मरने में भी आनंद ढूंढ रहे हैं ना तीन

1154
01:31:07,560 --> 01:31:11,800
चीज है ना केवल अमरता नहीं है वो केवल अमरता

1155
01:31:11,800 --> 01:31:15,880
नहीं है केवल च नहीं है तीन चीजों में से एक वो फिर आनंद को ढूंढ

1156
01:31:15,880 --> 01:31:19,920
रहे हैं मर के क्या मिलेगा आनंद वो भी सदा

1157
01:31:19,920 --> 01:31:24,160
सुखी रहना चाहते हैं क्यों मरना चाहते हैं कि भाई झंडा मेरा

1158
01:31:24,160 --> 01:31:28,480
जाए सब लोग इस्लाम को मान ले या कुछ भी जो भी उनका हो

1159
01:31:28,480 --> 01:31:32,680
तो उनको उनको ऐसा लगता है

1160
01:31:32,680 --> 01:31:36,760
कि वो जो उनका झंडा फैर जाएगा तो उनको सदा के लिए आनंद

1161
01:31:36,760 --> 01:31:41,280
मिल जाएगा सदा के लिए

1162
01:31:41,280 --> 01:31:43,760
आनंद समझ

1163
01:31:43,760 --> 01:31:48,120
रहे आनंद हो गया ना वो भगवान

1164
01:31:48,120 --> 01:31:52,840
काने केवल मैंने केवल अमरता थोड़ी ना कहा है

1165
01:31:52,840 --> 01:31:56,920
सत चित आनंद तीनों चीजें हैं यह तो घटक

1166
01:31:56,920 --> 01:32:01,160
है एट द एंड तो एक ही चीज है आनंद एट

1167
01:32:01,160 --> 01:32:05,280
द एंड एक ही चीज है ये तो घटक हो गए तो सच्चिदानंद स्वरूप

1168
01:32:05,280 --> 01:32:10,520
सच्चिदानंद की जो प्राप्ति की चा है वह हर व्यक्ति के अंदर विद्यमान

1169
01:32:10,520 --> 01:32:14,640
है और मृत्यु से भागने की बात है जो कहता

1170
01:32:14,640 --> 01:32:18,640
है कि मैं मरना चाहता हूं ठीक है जैसे

1171
01:32:18,640 --> 01:32:22,680
अभी आप अगर मेरे सामने हो और आप यह कहने लगो कि मैं

1172
01:32:22,680 --> 01:32:26,920
तो नहीं डरता मौत से तो मरना चाहता हूं एक चाटा घुमाऊंगा आपकी पलक झपक

1173
01:32:26,920 --> 01:32:31,240
जाएगी यानी कि आप झूठ बोल रहे हो यानी

1174
01:32:31,240 --> 01:32:35,280
कि आपके अंदर की चा है सुनो

1175
01:32:35,280 --> 01:32:39,360
आपके अंदर की जो चाह है वो आपसे करवा रही है

1176
01:32:39,360 --> 01:32:43,400
आपका शरीर बोल रहा है कि आप मरना नहीं चाहते हो मगर आप

1177
01:32:43,400 --> 01:32:47,480
झूठ बोल रहे हो तो हम सामने वाले को निरुत्तर और निराधार

1178
01:32:47,480 --> 01:32:52,000
बनाते हैं उस अपनी मु अपनी बात उसके मुंह से नहीं बुलवा

1179
01:32:52,000 --> 01:32:56,240
उसको ऐसी स्थिति पर लाकर खड़ा कर देते हैं जब उसकी जो मूर्खता

1180
01:32:56,240 --> 01:32:58,760
है वो बाहर आ जाए तो

1181
01:32:58,760 --> 01:33:02,920
नास्तिक जब हमसे ये कहेगा ना वो आतंकवादी आप कह रहे हो मैं मरना चाहता

1182
01:33:02,920 --> 01:33:07,120
हूं एक डंडा घुमाऊंगा पलक झपक जाएगी चार पांच डंडे मारूंगा

1183
01:33:07,120 --> 01:33:11,240
तो आऊ निकलने लगेगी मुह से ऐसा कुछ नहीं है सर हमने

1184
01:33:11,240 --> 01:33:15,800
ऐसे ऐसे आतंकवादी देखे हैं जिन्होंने कई लोगों को मार दिया जेल में भी गए

1185
01:33:15,800 --> 01:33:19,960
और जेल में भी उन्ह कोई दुख नहीं है अरे मैं पूछ रहा हूं पलक झप

1186
01:33:19,960 --> 01:33:24,000
केगी कि नहीं अरे

1187
01:33:24,000 --> 01:33:28,120
झ पकने से व भगवान का सिद्ध होना वो कहा रे या उनके

1188
01:33:28,120 --> 01:33:32,200
अंदर बचने की चा विद्यमान है ना वो अपनी चा के विरुद्ध बोल रहे

1189
01:33:32,200 --> 01:33:38,200
तुमसे पलक झपक रही है व बचना

1190
01:33:40,080 --> 01:33:44,240
चाहते उसल से बाहर निकलने की चाह नहीं है फिर

1191
01:33:44,240 --> 01:33:50,240
से निकले और फिर से

1192
01:33:51,040 --> 01:33:55,640
मारे हरि ओम जी सुनि प्रश् मत करिए

1193
01:33:55,640 --> 01:34:01,640
आपने एक प्रश्न किया कि कई आतंकवादी होते हैं जो

1194
01:34:01,920 --> 01:34:05,960
कहते मिनट मिनट धम बोल रहा

1195
01:34:05,960 --> 01:34:10,360
हूं तो बोल लेने दीजिए ना बोले दीजिए

1196
01:34:10,360 --> 01:34:14,960
आपने दो प्रश्न एक साथ कर लिए सुनिए क्या था एक आपने कहा

1197
01:34:14,960 --> 01:34:19,160
कि कई आतंकवादी ऐसे होते हैं जो यह कह देते

1198
01:34:19,160 --> 01:34:23,760
मैं तो मरना चाहता हूं मैंने उसके आपको दो उत्तर दिए जो यह बोल रहा है

1199
01:34:23,760 --> 01:34:27,800
आतंकवादी उसके पास भी जा जो मरना चाहता है यानी

1200
01:34:27,800 --> 01:34:32,440
कि जिसको मरने का भय नहीं है उसके पास भी जाकर के आप जब चाटा घुमाओ

1201
01:34:32,440 --> 01:34:36,520
तो उसकी पलक झपके गी पहली बात यानी कि वो झूठ बोल रहा है उसकी

1202
01:34:36,520 --> 01:34:40,560
वो चा है मगर वो झूठ बोल रहा है दूसरी बात जरूरी

1203
01:34:40,560 --> 01:34:44,920
नहीं है अरे सुन लो वो जनता डिसाइड

1204
01:34:44,920 --> 01:34:48,920
करेगी जरूरी है कि नहीं ठीक है अभी मैं जो बोल रहा हूं वो सुन लो पूरा

1205
01:34:48,920 --> 01:34:53,040
दूसरी बात दूसरी बात क्या हुई आप ऐसे

1206
01:34:53,040 --> 01:34:55,160
बोल करके वो जो मैं

1207
01:34:55,160 --> 01:34:59,200
बोल रहा होता हूं धारा प्रवाह में वो भुला देते हो तो फिर क्या होता

1208
01:34:59,200 --> 01:35:03,760
है दूसरी बात क्या थी हा दूसरा प्रश्न आपने यह बोला

1209
01:35:03,760 --> 01:35:07,800
कि वह इससे यह कहां सिद्ध होता है

1210
01:35:07,800 --> 01:35:11,840
पलक झपक से कि ईश्वर है हमने यह सिद्ध किया कि

1211
01:35:11,840 --> 01:35:16,200
उसके अंदर कभी ना मरने की चा विद्यमान है इसका मतलब

1212
01:35:16,200 --> 01:35:20,440
कि इस दुनिया में कोई है जो कभी नहीं

1213
01:35:20,440 --> 01:35:24,440
मरता जब वह किसी भी अजनबी से मिल टाइम यह

1214
01:35:24,440 --> 01:35:28,480
सोचने लगता है कि यह कौन है तो इसका मतलब है कि

1215
01:35:28,480 --> 01:35:32,920
वह कभी भी अनजान किसी भी ज्ञान से बेखबर

1216
01:35:32,920 --> 01:35:36,920
नहीं बनना चाहता इसका मतलब है कि इस दुनिया में कोई बा खबर है

1217
01:35:36,920 --> 01:35:41,000
आपके वह रामपाल जी की भाषा में इसका मतलब

1218
01:35:41,000 --> 01:35:45,280
है कि इस दुनिया में कोई अखंड ज्ञानी है अमर

1219
01:35:45,280 --> 01:35:49,800
है अखंड ज्ञानी है और

1220
01:35:49,800 --> 01:35:53,840
वोह एन केन प्रकार अगर मरना भी चाह रहा है तो वो

1221
01:35:53,840 --> 01:35:58,000
यह चाहता है कि वह आनंदित हो जाए वह जो प्राप्त जिसमें वह अपना सुख सोच

1222
01:35:58,000 --> 01:36:02,080
रहा है वो उसको प्राप्त हो जाए तो वह जो है सदा के लिए आनंदित

1223
01:36:02,080 --> 01:36:06,520
हो जाएगा इसका मतलब है कि इस दुनिया में कोई है जो सदा आनंदित

1224
01:36:06,520 --> 01:36:10,360
है समझ में आया आपको क्योंकि हमारे

1225
01:36:10,360 --> 01:36:14,600
अंदर अगर प्यास है तो अगर हमारे अंदर

1226
01:36:14,600 --> 01:36:18,800
प्यास है तो इसका मतलब है कि इस दुनिया में पानी है उस

1227
01:36:18,800 --> 01:36:22,840
प्यास का निवारण तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति

1228
01:36:22,840 --> 01:36:26,920
के अंदर भी व्याप्त प्यास का विषय पानी सिद्ध

1229
01:36:26,920 --> 01:36:31,080
होता है उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सत

1230
01:36:31,080 --> 01:36:35,240
चिता आनंद की चा का विषय सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध हो

1231
01:36:35,240 --> 01:36:39,560
गया ऐसी चा सुन लीजिए ऐसी चा

1232
01:36:39,560 --> 01:36:43,920
जिसको वो छोड़ नहीं पा रहा अब अब इसमें फैक्ट

1233
01:36:43,920 --> 01:36:48,160
क्या है कि नास्तिक यह कह रहा है कि भाई मैं अमरता चाहता

1234
01:36:48,160 --> 01:36:52,240
तो हूं मगर मैं नहीं मानता कि इस दुनिया में कोई अमर है यही

1235
01:36:52,240 --> 01:36:56,520
तो कहेगा भाई मैं ज्ञानी बनना तो चाहता हूं मगर मैं नहीं मानता

1236
01:36:56,520 --> 01:37:00,640
कि इस दुनिया में कोई अखंड ज्ञानी है यही तो कहेगा भाई

1237
01:37:00,640 --> 01:37:04,720
मैं आनंदित होना तो चाहता हूं मगर मैं नहीं मानता कि इस दुनिया में कोई आनंदित

1238
01:37:04,720 --> 01:37:09,200
है यही तो कहेगा तो इसका मतलब क्या हुआ इसका मतलब

1239
01:37:09,200 --> 01:37:13,200
जिम में जो ट्रेड मिल की मशीन लगी होती है ट्रेड मिल देखा है

1240
01:37:13,200 --> 01:37:17,560
आपने ट्रेड मिल देखा है जिस पर दौड़ते हैं जिम

1241
01:37:17,560 --> 01:37:21,600
में वर्कआउट करते हैं हा देख

1242
01:37:21,600 --> 01:37:25,960
उस परे दौड़ने वाला जो व्यक्ति जो दौड़ तो रहा है

1243
01:37:25,960 --> 01:37:30,000
मगर पहुंच कहीं नहीं रहा है वहीं की वही दौड़ रहा है

1244
01:37:30,000 --> 01:37:34,040
नास्तिक वो बन जाता है क्यों अब उससे पूछो कहां जा रहे हो वो

1245
01:37:34,040 --> 01:37:38,560
बोलेगा अमरता बोलेगा अखंड ज्ञान बोलेगा अनंत आनंद

1246
01:37:38,560 --> 01:37:42,880
अच्छा फिर उससे पूछो क्या इस दुनिया में अमरता है

1247
01:37:42,880 --> 01:37:46,960
अखंड ज्ञान है अनंत आनंद है वो कह रहा नहीं है

1248
01:37:46,960 --> 01:37:51,360
अबे तो दौड़ क्यों रहे हो उसी तरफ तो दौड़ रहे हो दुनिया

1249
01:37:51,360 --> 01:37:55,520
के जितने भी वैज्ञानिक हैं वोह हर पल जिस खोज में लगे हुए

1250
01:37:55,520 --> 01:38:00,120
हैं अंतिम खोज क्या हो सकती है उनकी

1251
01:38:00,120 --> 01:38:04,160
ऐसी कौन सी खोज होगी वैज्ञानिकों की

1252
01:38:04,160 --> 01:38:09,080
जिको खोज लेने के बाद वैज्ञानिक मैं संतुष्ट हो गया

1253
01:38:09,080 --> 01:38:13,280
उसी खोज का नाम ईश्वर है जन है उसी खोज

1254
01:38:13,280 --> 01:38:18,160
का नाम ज्ञान है उसी खोज का नाम ईश्वर है

1255
01:38:18,160 --> 01:38:22,240
तो जिसको वह खुद खोज रहा है उसी को

1256
01:38:22,240 --> 01:38:26,240
कह रहा है कि वोह है ही नहीं जब तुम पहले ही डिक्लेयर कर रहे हो

1257
01:38:26,240 --> 01:38:30,400
कि वह है ही नहीं तो तुम खोज क्यों रहे हो जब तुम खुद ही ताल ठोक

1258
01:38:30,400 --> 01:38:34,760
रहे हो और अगर तुम य यह मानते हो कि है

1259
01:38:34,760 --> 01:38:39,200
तो आगे बढ़ो तो नास्तिक और आस्तिक में अंतर क्या

1260
01:38:39,200 --> 01:38:41,240
हुआ आस्तिक व्यक्ति

1261
01:38:41,240 --> 01:38:45,800
जहां जा रहा है वहां के लिए वह कहता है कि हां वह इस दुनिया में है

1262
01:38:45,800 --> 01:38:49,840
नास्तिक व्यक्ति भी वही जा रहा है मगर वह यह कहता है वो इस दुनिया में है

1263
01:38:49,840 --> 01:38:53,640
नहीं

1264
01:38:53,640 --> 01:38:58,000
अंतर बहुत बड़ा अंतर हो गया जो हा अंतर तोही है

1265
01:38:58,000 --> 01:39:02,040
जो आस्तिक वो भगवान से जोड़ेगा नास्तिक व्यक्ति उसको भगवान से नहीं

1266
01:39:02,040 --> 01:39:06,120
जोड़ेगा नास्ति व्यक्ति कहेगा मैं मेरी नौकरी कर रहा हूं तो पैसा मिल रहा है तो मैं एसी

1267
01:39:06,120 --> 01:39:10,360
लगाया मैंने कूलर लगाया री आप

1268
01:39:10,360 --> 01:39:14,440
यहां पर जिस कारण से आए थे वह कारण हमको ठुकराई है ना हमारी परिभाषा

1269
01:39:14,440 --> 01:39:18,600
को धर्म की परिभाषा ठुकराई है आपने

1270
01:39:18,600 --> 01:39:22,840
आपने हम तो आस्तिक व्यक्ति है हम तो धर्म की बातों को मानेंगे क्योंकि हम पहले से

1271
01:39:22,840 --> 01:39:27,600
इन चीजों को स्वीकार करते हैं धर्म की आपने बात बताई तो मैं तो

1272
01:39:27,600 --> 01:39:32,480
हा उस धर्म की बात कोही ठुकराने के लिए आया हूं मैं तो तो

1273
01:39:32,480 --> 01:39:36,760
ठुकराए आपने बोला आतंकवादी है उसके जब थप्पड़ मारेंगे तो उसकी पलक

1274
01:39:36,760 --> 01:39:40,840
झपक गगी मैं आपको एग्जांपल देता हूं भगत

1275
01:39:40,840 --> 01:39:44,920
सिंह जी थे भगत सिंह जी तो फांसी पर चढ़े थे उनकी कोई उनके साथ ऐसा कोई सीन नहीं

1276
01:39:44,920 --> 01:39:49,000
था वो दुखी नहीं थे जरूरी नहीं है कि एक मिनट वो

1277
01:39:49,000 --> 01:39:53,680
दुखी नहीं थे हा नहीं थे

1278
01:39:53,680 --> 01:39:56,520
उने अपने बकेश्वर दत्त को पत्र

1279
01:39:56,520 --> 01:40:02,520
लिखा था छोटे भाई को दुख भरा

1280
01:40:03,400 --> 01:40:08,880
फलत महा दुखी नहीं

1281
01:40:08,880 --> 01:40:12,920
थे क्यों थे दुखी क्योंकि वह जो चाहते

1282
01:40:12,920 --> 01:40:17,680
थे व नहीं हो सक नहीं हुआ अरे व

1283
01:40:17,680 --> 01:40:21,680
तो छोड़ दो व्यक्ति की चा क्या है एक मिनट व्यक्ति

1284
01:40:21,680 --> 01:40:26,800
की चा क्या है परम स्वतंत्रता वो तो खुद ही स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे

1285
01:40:26,800 --> 01:40:31,560
थे व्यक्ति की चाह क्या है परम स्वतंत्रता

1286
01:40:31,560 --> 01:40:35,760
और वह खुद ही उसके लिए लड़ रहे हैं वह

1287
01:40:35,760 --> 01:40:40,560
आजादी चाहते थे उनके जाने तक आजादी मिल गई थी क्या

1288
01:40:40,560 --> 01:40:44,880
दुखी नहीं थे खामा खा की बात कर रहे हो नहीं मिली ना

1289
01:40:44,880 --> 01:40:49,120
ठीक है ठीक है वो जनता देख लेगी आपका कहना है भगत सिंह दुखी नहीं थे

1290
01:40:49,120 --> 01:40:55,120
वो बहुत खुश थे सेटिस्फाइड थे

1291
01:40:55,120 --> 01:41:00,600
वो वो मौत से डरे नहीं थे मैं ये कह रहा हूं आप बोले डर जाते हैं और ऐसा

1292
01:41:00,600 --> 01:41:04,720
नहीं मौत से भय था मगर स्वतंत्रता की जो

1293
01:41:04,720 --> 01:41:09,640
चाह थी वो उस पर हावी थी मौत से भय पर हावी थी

1294
01:41:09,640 --> 01:41:14,120
बिल्कुल ऐसा नहीं है मौत से भय था मगर स्वतंत्रता

1295
01:41:14,120 --> 01:41:18,240
की जो लड़ाई की वो चाह थी इच्छा थी वो उस पर हावी थी

1296
01:41:18,240 --> 01:41:24,240
इसलिए वो फांसी पर छड़ गए चलिए अब समय हो रहा है ज्यादा

1297
01:41:25,000 --> 01:41:30,400
हां और तैयारी करके

1298
01:41:30,400 --> 01:41:34,720
आइए चलिए अब आज का तो अब हो

1299
01:41:34,720 --> 01:41:39,440
गया किशन दास जी आपसे ज्यादा बात नहीं हो पाई आपके नेटवर्क के कारण

1300
01:41:39,440 --> 01:41:45,440
किसी और दिन आपके साथ चर्चा रखते हैं अरे

1301
01:41:45,880 --> 01:41:50,120
अभी अभी नहीं रख पाएंगे अभी

1302
01:41:50,120 --> 01:41:54,200
अब नहीं रख सकते 10 बज चुका है और हमने आपके

1303
01:41:54,200 --> 01:41:58,280
साथ आपके साथ दो घंटे रखे थे हमने बगर आपका

1304
01:41:58,280 --> 01:42:02,480
आना जाना ही लगा रहा बारबार आप आते ही कहां हो टाइम हम

1305
01:42:02,480 --> 01:42:06,960
हमने बताया आपने बोला कि हम फ्री नहीं है

1306
01:42:06,960 --> 01:42:10,960
फिर अरे और किसी दिन कर लीजिएगा आपके

1307
01:42:10,960 --> 01:42:14,960
लोगों की तरफ से जान से मारने की धमकी भी तो दी जा रही है अभी

1308
01:42:14,960 --> 01:42:19,040
तो आपने बात भी शुरू नहीं की थी पूरी तरह से फिर आप बीच में कह रहे हो टाइम

1309
01:42:19,040 --> 01:42:23,240
नहीं है मैंने आपसे क्या बो 10 बज चुके हैं अब

1310
01:42:23,240 --> 01:42:27,480
आप किसी और दिन आ जाइए आपका स्वागत है ठीक है नहीं आप धर्म

1311
01:42:27,480 --> 01:42:31,680
प चर्चा करना चाहते तो पूरी करिए फिर अधूरा मत छोड़िए हम भाई साहब अभी आज

1312
01:42:31,680 --> 01:42:35,840
तो नहीं हो पाएगी आप मेरे गोली मार दो अब

1313
01:42:35,840 --> 01:42:40,160
चलिए अजीब बात कर रहे हो मैं अजीब नहीं कर कल का

1314
01:42:40,160 --> 01:42:44,720
कल रात को नहीं आप

1315
01:42:44,720 --> 01:42:45,560
कल रात को 8

1316
01:42:45,560 --> 01:42:49,680
बजे करते हैं दूसरे चैनल प करेंगे सर्वशक्तिमान धर्म प कर लेंगे

1317
01:42:49,680 --> 01:42:53,920
कल कल क्योंकि इस पे वो ब्रह्मा कुमारी वाला चल रहा होगा ना

1318
01:42:53,920 --> 01:42:58,080
तो दूसरे चैनल पर आपके साथ कर लेते हैं दो घंटे करेंगे

1319
01:42:58,080 --> 01:43:02,280
आ से 10 मगर आप ऐसे नेटवर्क में रहिएगा कि आपको जाना आना

1320
01:43:02,280 --> 01:43:06,800
ना पड़े बारबार ठीक है आप दिन में रख लीजिए

1321
01:43:06,800 --> 01:43:10,840
दिन में नहीं रख सकते कल वो होता है कल कार्य होते हैं बहुत सारे संडे

1322
01:43:10,840 --> 01:43:15,760
के दिन ठीक है कार्य इससे महत्त्वपूर्ण तो कोई कार्य है ही नहीं

1323
01:43:15,760 --> 01:43:20,120
अरे भाई साहब आपको क्या पता है खामखा क्यों इंटरप्ट कर रहे हो आपको बहस

1324
01:43:20,120 --> 01:43:23,280
ज लड़नी है क्या

1325
01:43:23,280 --> 01:43:27,880
कल भंडारा होता है हर संडे को मंदिर

1326
01:43:27,880 --> 01:43:31,960
में भंडारे का क्या मतलब पता हैय तो बस उठा के खा लेते

1327
01:43:31,960 --> 01:43:35,320
हैं

1328
01:43:35,320 --> 01:43:39,920
क कल जो है थोड़ा सेवा करते हैं थोड़ा

1329
01:43:39,920 --> 01:43:44,200
कीर्तन करते हैं भगवान के नाम का बैठते हैं थोड़ा सा और उसी

1330
01:43:44,200 --> 01:43:50,200
के कारण यह सब हो रहा है जो दुनिया में जो थोड़ी बहुत धर्म की स्थापना है

1331
01:43:54,160 --> 01:43:58,200
इन लोगों को यह नहीं पता कि सबसे पहले कौन सा धर्म आया सनातन धर्म

1332
01:43:58,200 --> 01:44:02,200
सर्वोपरि सबसे पहले सनातन धर्म आद

1333
01:44:02,200 --> 01:44:06,240
सनातन सनातन तो हमारा है सुनिए सनातन हमारा

1334
01:44:06,240 --> 01:44:10,400
है और इनका आदि सनातन है अब सनातन

1335
01:44:10,400 --> 01:44:14,400
क्या है जो जो कभी ना जन्मा वो हुआ आदि सनातन

1336
01:44:14,400 --> 01:44:17,880
वो है जो कभी ना कभी जन्मा आदि

1337
01:44:17,880 --> 01:44:22,280
सनातन कभी ना कभी आदि हमारा अनादि

1338
01:44:22,280 --> 01:44:26,320
है ठीक है तो चलिए सभी को जय श्री राम आने

1339
01:44:26,320 --> 01:44:30,320
के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद समय देने के लिए और किशन दास जी आपके साथ

1340
01:44:30,320 --> 01:44:34,600
हमारी चर्चा कल 8 बजे

1341
01:44:34,600 --> 01:44:38,600
प्रारंभ होगी सर्वशक्तिमान धर्म चैनल जो हमारा दूसरा चैनल है

1342
01:44:38,600 --> 01:44:44,560
ठीक है जय श्री राम हरर महादव जय श्री राम

1343
01:44:44,560 --> 01:44:48,560
महादेव हर हर महादेव जय श्री राधा रानी
