1
00:00:03,280 --> 00:00:09,040
सभी को जय श्री राम

2
00:00:09,040 --> 00:00:14,040
अ कल हमारी एक चर्चा होने वाली

3
00:00:14,040 --> 00:00:18,920
थी रामपाल दास के शिष्य के साथ

4
00:00:18,920 --> 00:00:23,400
उसका कहना था कि वह सच्चा शिष्य है उनका और यह जो सतलोक

5
00:00:23,400 --> 00:00:27,680
आश्रम वाले हैं ऐसे न्यूज चैनल वाले यह सब ढोंगी

6
00:00:27,680 --> 00:00:32,640
है पाखंडी है ये उसका कहना

7
00:00:32,640 --> 00:00:37,000
आज शाक्त से बात अभी जिनसे बात होने वाली

8
00:00:37,000 --> 00:00:41,080
है कुछ चीजों को लेकर के हम में और इनमें थोड़ा सा वैचारिक

9
00:00:41,080 --> 00:00:45,360
अंतर है और संभवतः आज हम इनके

10
00:00:45,360 --> 00:00:49,640
साथ अपनी इस अंतर को मिटाने का प्रयास करेंगे

11
00:00:49,640 --> 00:00:55,640
यह अपना परिचय स्वयं ही देने वाले हैं तो हम उनको ले लेते हैं

12
00:00:58,040 --> 00:01:02,200
पहले जी जय श्री पुष्पदंत जी

13
00:01:02,200 --> 00:01:06,760
श्रीराम पुष्पं जी जय सीताराम

14
00:01:06,760 --> 00:01:10,120
सीताराम हरि ओम

15
00:01:10,120 --> 00:01:16,120
राम एक बार मव करके वापस आ जाइए मुझे

16
00:01:17,680 --> 00:01:22,000
मेरी आवाज बंद करू

17
00:01:22,000 --> 00:01:27,640
क्या ब आपको हटा

18
00:01:27,640 --> 00:01:33,640
दे जी ठीक

19
00:01:33,720 --> 00:01:38,800
है पाखंड का खंडन जी ब्रह्मा

20
00:01:38,800 --> 00:01:43,160
कुमारी श जो लखनऊ के उनके

21
00:01:43,160 --> 00:01:47,240
टीचर है स्कॉलर उनके साथ हमारी चर्चा हो गई है जिसकी

22
00:01:47,240 --> 00:01:51,840
सूचना आपको कल दे दी गई थी और संडे की सुबह 11:30

23
00:01:51,840 --> 00:01:56,080
बजे वह वीडियो आपके सामने आ जाएगा तब तक आप लोगों को थोड़ा

24
00:01:56,080 --> 00:02:00,960
सा र रखना होगा उस वीडियो को देखने के लिए बहुत

25
00:02:00,960 --> 00:02:05,000
ही कई समय से हम लोग इस बात का

26
00:02:05,000 --> 00:02:09,760
प्रयास कर रहे थे कि ब्रह्मा कुमारी के किसी व्यक्ति के साथ बातचीत

27
00:02:09,760 --> 00:02:13,760
हो पर वह लोग समय देते नहीं है और कैमरा ऑफ भी

28
00:02:13,760 --> 00:02:17,920
करवा लेते हैं जब उनके प्रांगण में हम लोग होते हैं तो बहुत

29
00:02:17,920 --> 00:02:22,120
सी चीजें हैं और जैसे तैसे करके यह प्राप्त हुआ है दुर्लभ है

30
00:02:22,120 --> 00:02:27,640
आप लोग मिस ना करें उसको अवश्य देखें संडे की सुबह 11:30 बजे

31
00:02:27,640 --> 00:02:33,640
वो आएगा

32
00:02:37,200 --> 00:02:41,400
तो अभी जो पुष्पदंत जी है वो पुनः जुड़ चुके

33
00:02:41,400 --> 00:02:45,960
हैं जी पुष्पदंत जी जय

34
00:02:45,960 --> 00:02:50,200
श्रीम हा जय सीताराम राधे राधे

35
00:02:50,200 --> 00:02:56,200
सभी सभी दर्शकों को हरि

36
00:02:58,600 --> 00:03:04,360
ओम जी मेरी आवाज कैसे आ रही है

37
00:03:04,360 --> 00:03:09,480
मुझे

38
00:03:09,480 --> 00:03:15,440
आपके आप दूसरा मोबाइल यूज कर रहे हैं

39
00:03:15,440 --> 00:03:19,680
क्या व अभी अभी बंद अभी आवाज

40
00:03:19,680 --> 00:03:24,120
आया अभी सा आ

41
00:03:24,120 --> 00:03:29,080
नहीं मैं पूछ रहा हूं दूसरी आवाज कोई मोबाइल

42
00:03:29,080 --> 00:03:33,720
तो मुझे री आवाज रिपीट सुनाई दे रही है अभी कोई

43
00:03:33,720 --> 00:03:38,600
हां नहीं नहीं नहीं आवाज साफ आ रहा है आपका

44
00:03:38,600 --> 00:03:43,040
वो टीवी चल रहा था ना इस कारण से

45
00:03:43,040 --> 00:03:47,240
है आपका थोड़ा सा इंटरनेट भी वीक है मुझे ऐसा लग रहा है क्योंकि आपका

46
00:03:47,240 --> 00:03:51,920
जब जो लिप्सिंग है ना वो मैच नहीं खा रही है वॉइस

47
00:03:51,920 --> 00:03:56,120
से अच्छा अच्छा वो थोड़ा क्या है j का नेटवर्क थोड़ा साफ

48
00:03:56,120 --> 00:04:00,640
नहीं रहता ना हमारी इधर थोड़ा प्रॉब्लम जाता है भले

49
00:04:00,640 --> 00:04:05,960
वो थोड़ा आप अपना परिचय बता द मेरा

50
00:04:05,960 --> 00:04:10,480
नाम मेरा नाम पुष्पदंत गायत्री है और

51
00:04:10,480 --> 00:04:14,720
मैं छत्तीसगढ़ के रहने वाला हूं जिला मोहला मानपुर

52
00:04:14,720 --> 00:04:18,720
अंबागढ़ चौकी क्षेत्र से हूं और

53
00:04:18,720 --> 00:04:21,760
यही मेरा परिचय

54
00:04:21,760 --> 00:04:26,000
है थोड़ा सा आध्यात्मिक बैकग्राउंड बताइए कि आपका मतलब

55
00:04:26,000 --> 00:04:30,160
आप क्या मान मतलब कहां से जुड़े हुए हैं क्या मान

56
00:04:30,160 --> 00:04:30,660
वो थोड़ा

57
00:04:30,600 --> 00:04:34,960
सा आध्यात्मिक अब मैं

58
00:04:34,960 --> 00:04:39,040
जुड़ा हूं तो गायत्री परिवार से जुड़ा हूं भैया बचपन से मेरे पिताजी

59
00:04:39,040 --> 00:04:43,560
बहुत पहले से जुड़े थे उसी के परंपरा से हम जुड़े थे

60
00:04:43,560 --> 00:04:47,840
और दीक्षा लिए थे गुरु दीक्षा य गो पवित हमारा संस्कार हुआ था

61
00:04:47,840 --> 00:04:52,200
गुरु के सानिध्य में बैठ कर के कहां

62
00:04:52,200 --> 00:04:56,320
पर मतलब जहां पर हम जाते हैं ना

63
00:04:56,320 --> 00:05:01,400
गायत्री परिवार में वहां से हमारा दीक्षा हुआ था [संगीत]

64
00:05:01,400 --> 00:05:05,840
गायत्री परिवार से एक तरीके से आप जुड़े हुए हैं जी जी

65
00:05:05,840 --> 00:05:10,400
जी यह बात हमें बताई नहीं गई एक्चुअली

66
00:05:10,400 --> 00:05:14,640
आपके आने से पूर्व कि आप गायत्री परिवार से

67
00:05:14,640 --> 00:05:19,280
नहीं तो शिवम भैया को मैं बता दिया था ना जो मेरठ वाले भैया है हमारे मित्र

68
00:05:19,280 --> 00:05:24,000
आपके भी मित्र हमारे मित्र आप भी हमारे मित्र

69
00:05:24,000 --> 00:05:28,160
जी और एक दर्शकों के भैया जी हम

70
00:05:28,160 --> 00:05:32,360
एक दर्शकों से करना चाहता एक बार आपके बीच में हमारा संवाद और

71
00:05:32,360 --> 00:05:36,720
चलने वाला था इसी विषय पर तो हमारा जो पुराना जो मोबाइल है उसमें

72
00:05:36,720 --> 00:05:40,880
से एक्सेप नहीं कर रहा था इस वेबसाइट को तो हमको कई बार धोखा खाना

73
00:05:40,880 --> 00:05:44,920
पड़ा तो कई जो भाई थे उन लोगों ने भी

74
00:05:44,920 --> 00:05:46,560
बोल दिए थे

75
00:05:46,560 --> 00:05:50,680
कि डर के भाग गया करके तो मैं उन जितने भी अभी दर्शक

76
00:05:50,680 --> 00:05:54,920
जुड़े उन भाई से विनम्र प्रार्थना करता हूं कि मैं डर कर नहीं भागा था मेरा मोबाइल

77
00:05:54,920 --> 00:05:59,000
के खराबी होने की वजह से मैं कुछ

78
00:05:59,000 --> 00:06:03,080
उसमें नहीं आ सका आपके साथ जुड़ नहीं सका तो इसके लिए मैं सभी दर्शकों भाई से

79
00:06:03,080 --> 00:06:07,200
मैं क्षमा याचना करता हूं और मुझे क्षमा कीजिएगा अभी नया मोबाइल एक जनवरी

80
00:06:07,200 --> 00:06:11,800
को खरीदा फिर शिवम जी से इसी वेबसाइट पर थोड़ा दो मिनट के लिए हम बात किए

81
00:06:11,800 --> 00:06:15,960
तो कनेक्ट हो गए तो हम बोले शिवम भैया बोले कि हम उनसे भैया जी से बात

82
00:06:15,960 --> 00:06:19,960
करेंगे फिर जुड़ जाना ऐसे करके तो आज हम जुड़े हैं और आपकी धन्यवाद

83
00:06:19,960 --> 00:06:24,320
करते हैं भैया जी कि आपने हमें आप अपने ट पर चैनल

84
00:06:24,320 --> 00:06:28,600
पर बुलाए संवाद करने के लिए सनातन धर्म के लिए आप भी सनातनी

85
00:06:28,600 --> 00:06:32,680
हो मैं भी सना सनातनी हो तो मतलब जो

86
00:06:32,680 --> 00:06:36,800
जिज्ञासा था उ जिज्ञासा को हम जनमानस के बीच में रखेंगे

87
00:06:36,800 --> 00:06:40,880
जिससे कि हमारा जो सनातन धर्म में कई प्रकार के वाद विवाद

88
00:06:40,880 --> 00:06:44,880
होते रहते वह दूर हो जाए और अच्छी जानकारी मिले अच्छे प्रकाश

89
00:06:44,880 --> 00:06:49,160
में सभी लोग आ जाए यह मेरा भावना है बहुत बढ़िया बहुत

90
00:06:49,160 --> 00:06:53,200
बढ़िया तो मैं शुरू करते हम लोग मुख्य विषय पर आ

91
00:06:53,200 --> 00:06:57,840
जाते हैं गायत्री परिवार धर्म की स्थापना

92
00:06:57,840 --> 00:07:01,760
जो है जी धर्म की क्या धर्म की क्या व्याख्या

93
00:07:01,760 --> 00:07:05,760
करता है गायत्री परिवार धर्म क्या है गायत्री परिवार

94
00:07:05,760 --> 00:07:10,000
की सबसे बड़ा प्रचार वो करता

95
00:07:10,000 --> 00:07:14,160
है विचार क्रांति अभियान सबसे

96
00:07:14,160 --> 00:07:18,360
पहले मैं मेरा प्रश्न यह है कि

97
00:07:18,360 --> 00:07:22,880
धर्म की व्याख्या क्या है गायत्री परिवार के अनुसार

98
00:07:22,880 --> 00:07:27,200
धर्म की व्याख्या है यह है कि सत्कर्म करना अच्छे

99
00:07:27,200 --> 00:07:31,240
कर्म करना बुरे चीजों को त्याग करना और सत मार्ग की

100
00:07:31,240 --> 00:07:35,360
ओर प्रेरित होना और सबको प्रेरित प्रेरित करना और जो बुराई

101
00:07:35,360 --> 00:07:39,640
है आप समझे नहीं सत कर्म इज

102
00:07:39,640 --> 00:07:43,640
आल्सो इक्वल टू धर्म जी जी मैं पूछ

103
00:07:43,640 --> 00:07:47,640
रहा हूं कि सत्कर्म क्या है

104
00:07:47,640 --> 00:07:51,880
अब सत्कर्म अच्छे कर्म को सुनिए सत कर्म

105
00:07:51,880 --> 00:07:56,200
और धर्म में कोई अंतर नहीं है जी धर्म भी सत्कर्म

106
00:07:56,200 --> 00:08:00,320
है और सत्कर्म ही धर्म है उसम कोई अंतर नहीं है है ना

107
00:08:00,320 --> 00:08:05,440
जी जी तो वो सत्कर्म है क्या उसकी क्या उपयोगिता

108
00:08:05,440 --> 00:08:09,680
है और मनुष्य के लिए आवश्यक क्यों

109
00:08:09,680 --> 00:08:13,880
है क्यों किसी को धर्म का पालन करना चाहिए यानी कि क्यों किसी

110
00:08:13,880 --> 00:08:16,760
को अच्छे कर्म करने चाहिए सत्कर्म करने

111
00:08:16,760 --> 00:08:21,240
चाहिए मैं यह पूछ रहा हूं अच्छा यह सत्कर्म

112
00:08:21,240 --> 00:08:25,760
हमको इसलिए करना करना चाहिए कि हमारा इससे विचार

113
00:08:25,760 --> 00:08:29,960
संस्कार और घर परिवार का जो नैतिकता है जो परिवार

114
00:08:29,960 --> 00:08:34,000
में जो नेगेटिव है एक प्रकार से उसको दूर

115
00:08:34,000 --> 00:08:38,320
करना और दूर करके अपने आप को आत्म तत्व प्रकाशित करके ब्रह्म

116
00:08:38,320 --> 00:08:42,480
की ओर उन्मुख हो जाना मतलब भगवान की प्राप्ति करना धे करना उसका

117
00:08:42,480 --> 00:08:46,680
ध्यान करना मैं यही इतना जानता हूं ज्यादा तो नहीं धर्म की व्याख्या

118
00:08:46,680 --> 00:08:50,760
तो नहीं कर पाऊंगा लेकिन यही मेरे को इसमें दिखाई देता है इस

119
00:08:50,760 --> 00:08:54,840
चीज को हम फॉलो भी कर रहे कि अपने पहले अपने कर्म को सुधारे अपने

120
00:08:54,840 --> 00:08:58,920
अपने अंदर के दुर्गुण को मिटा कर के अच्छे कर्म करें ये कर्म इसका मतलब

121
00:08:58,920 --> 00:09:03,040
ये नहीं कि हम अच्छे कर्म की स्वर्ग की प्राप्ति के लिए हो ऐसा भाव नहीं है कि हम अच्छे

122
00:09:03,040 --> 00:09:07,040
कर्म करेंगे हम स्वयं प्रकाशित हो जाएंगे तो हमारे सामने जो भी व्यक्ति बैठेगा

123
00:09:07,040 --> 00:09:11,040
अरे कि फलाने के पास हम बैठे थे हमको अच्छा लगा जी उनकी बातों में

124
00:09:11,040 --> 00:09:15,600
अच्छा लगे चलो हम इस बात को हम भी फॉलो करें हमारे जीवन में भी हम इस चीज को उतारे

125
00:09:15,600 --> 00:09:19,640
और हमारे जीवन को भी हम ऐसे नैतिक ऐसे सत मार्ग की

126
00:09:19,640 --> 00:09:23,760
ओ ले चले कि जिससे हमारा जीवन जो दुर्गुण में अंधकार

127
00:09:23,760 --> 00:09:28,360
में है उस प्रकाश के की तरफ आगे

128
00:09:28,360 --> 00:09:32,040
बढ़े मुझे कुछ समझ में नहीं आया स्पष्ट बात आपने कुछ बताई

129
00:09:32,040 --> 00:09:34,360
नहीं

130
00:09:34,360 --> 00:09:38,440
सत्कर्म क्या है और सत्कर्म की उपयोगिता क्या

131
00:09:38,440 --> 00:09:42,440
है अब मैं तो इ

132
00:09:42,440 --> 00:09:46,760
सत्कर्म की आवश्यकता इसलिए है भैया कि हम मैं

133
00:09:46,760 --> 00:09:50,840
अभी अब बताया अब मैं तो ज्यादा समझ नहीं नहीं पा रहा हूं

134
00:09:50,840 --> 00:09:54,880
कि सत्कर्म का मैं जितना जानता हूं उतना आपको बताया मैं आपको समझाने

135
00:09:54,880 --> 00:10:00,600
का प्रयास करता हूं जी जी देखिए

136
00:10:00,600 --> 00:10:05,280
संसार के प्रत्येक प्राणी को मोक्ष चाहिए

137
00:10:05,280 --> 00:10:10,040
जी जी सदा सुखी रहने की आकांक्षा

138
00:10:10,040 --> 00:10:14,120
में सदा जीवित रहने की आकांक्षा में

139
00:10:14,120 --> 00:10:18,120
जी और सर्व सर्वज्ञ

140
00:10:18,120 --> 00:10:22,440
हो जाने की आकांक्षा में वो एक ही चीज ढूंढ रहा

141
00:10:22,440 --> 00:10:27,360
है परम स्वतंत्रता जी जी क्या ढूंढ रहा है

142
00:10:27,360 --> 00:10:31,960
परम स्वतंत्रता जी जी तो जब वो परम स्वतंत्रता

143
00:10:31,960 --> 00:10:36,520
को ढूंढ रहा है है ना तो

144
00:10:36,520 --> 00:10:40,520
सबसे पहली बात तो यहां पर यह सिद्ध हो गई कि जब वह परम स्वतंत्रता को ढूंढ

145
00:10:40,520 --> 00:10:44,520
रहा है तो इसका मतलब परम स्वतंत्रता इस दुनिया में

146
00:10:44,520 --> 00:10:47,280
है जी

147
00:10:47,280 --> 00:10:51,280
उसी को हम भगवान कहते हैं जी कोई है

148
00:10:51,280 --> 00:10:55,600
जो परम स्वतंत्र है जो सभी चीज सभी बंधनों से मुक्त

149
00:10:55,600 --> 00:10:59,600
है उसी को भगवान तो अब जब हमें

150
00:10:59,600 --> 00:11:04,600
ये पता चल गया कि प्रत्येक व्यक्ति परम स्वतंत्र होना चाहता

151
00:11:04,600 --> 00:11:09,040
है तो वह परम स्वतंत्रता तक पहुंचाने वाले

152
00:11:09,040 --> 00:11:13,040
जो नियम है विधि विधान है उनका नाम धर्म है

153
00:11:13,040 --> 00:11:17,280
उन्हीं का नाम सत्कर्म है यानी कि जो कर्म

154
00:11:17,280 --> 00:11:21,680
आपको भगवान की ओर ले जा रहा है वह कर्म सत्कर्म

155
00:11:21,680 --> 00:11:25,680
है वह कर्म धर्म है जो कर्म आपको भगवान से दूर

156
00:11:25,680 --> 00:11:29,800
ले जा रहा है वो कर्म अधर्म है वो कर्म

157
00:11:29,800 --> 00:11:34,040
दुष्कर्म है जैसे कि साइंस नहीं कहती कि झूठ

158
00:11:34,040 --> 00:11:38,720
मत बोलो कहती है क्या नहीं नहीं

159
00:11:38,720 --> 00:11:42,920
मगर धर्म कहता है झूठ मत बोलो क्यों

160
00:11:42,920 --> 00:11:47,600
कहता है झूठ मत बोलो क्योंकि धर्म का वास्तविक फल क्या है

161
00:11:47,600 --> 00:11:51,640
मोक्ष मोक्ष तो अगर इसको

162
00:11:51,640 --> 00:11:57,640
एक पंक्ति बद्ध करके कहना चाहे तो ऐसे कह सकते हैं

163
00:11:57,640 --> 00:12:01,680
कि संसार के प्रत्येक प्राणी में भी

164
00:12:01,680 --> 00:12:05,680
व्याप्त नास्तिक में भी व्याप्त उसकी

165
00:12:05,680 --> 00:12:10,320
जो वास्तविक चा है उसका विषय सच्चिदानंद

166
00:12:10,320 --> 00:12:15,200
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने के निमित्त

167
00:12:15,200 --> 00:12:19,320
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले

168
00:12:19,320 --> 00:12:24,320
शास्त्रों द्वारा बताई गई विधि का नाम धर्म है सत्कर्म

169
00:12:24,320 --> 00:12:28,360
है भगवान को प्राप्त कराने वाली विधि

170
00:12:28,360 --> 00:12:31,720
का नाम

171
00:12:31,720 --> 00:12:35,720
सतक हा उसी विधि का नाम धर्म उसी

172
00:12:35,720 --> 00:12:39,800
सत्कर्म का नाम धर्म और जो चीज आपको भगवान से

173
00:12:39,800 --> 00:12:44,000
दूर ले जा रही है वही चीज अधर्म है जैसे कि झूठ बोलोगे तो भगवान से दूर

174
00:12:44,000 --> 00:12:48,800
जाओगे अधर्म है य विचार करोगे तो भगवान से दूर जाओगे अधर्म

175
00:12:48,800 --> 00:12:52,800
है है ना हा तो यह धर्म

176
00:12:52,800 --> 00:12:56,880
और अधर्म में धर्म की व्याख्या

177
00:12:56,880 --> 00:13:00,920
अब मैं जी मुख्य विषय इसलिए क्योंकि ये

178
00:13:00,920 --> 00:13:05,240
कुछ चीजें सेट कर लेने से आगे हमको दिक्कत नहीं आएगी बात करने में

179
00:13:05,240 --> 00:13:09,760
जी तो तो धर्म की आवश्यकता धर्म की परिभाषा तो हमने जान ली

180
00:13:09,760 --> 00:13:14,240
ठीक है जी अब मुझे आप ये

181
00:13:14,240 --> 00:13:18,480
बताएं कि गायत्री परिवार

182
00:13:18,480 --> 00:13:22,800
ईश्वर के अस्तित्व को कैसे सिद्ध करता

183
00:13:22,800 --> 00:13:27,760
है गायत्री परिवार ईश्वर के सत्य को

184
00:13:27,760 --> 00:13:32,600
साकार रूप में स्वीकार करता है अगर इसकी

185
00:13:32,600 --> 00:13:36,640
हम वो कैसा है मैं ये नहीं पूछ रहा

186
00:13:36,640 --> 00:13:41,240
वो है कि नहीं यह गायत्री परिवार कैसे कैसे

187
00:13:41,240 --> 00:13:45,560
एस्टेब्लिश करता है मतलब भगवान

188
00:13:45,560 --> 00:13:47,360
के बारे में ना है ना

189
00:13:47,360 --> 00:13:51,720
भगवान है कि नहीं इसको कैसे एस्टेब्लिश करता है स्थापित कैसे करता

190
00:13:51,720 --> 00:13:56,040
है क्योंकि भगवान होगा क्योंकि जब हम ये सिद्ध

191
00:13:56,040 --> 00:14:00,240
कर देंगे कि भगवान है हां और यह सिद्ध कर देंगे

192
00:14:00,240 --> 00:14:04,360
कि तेरा एकमात्र विकल्प अंतिम विकल्प भगवान ही

193
00:14:04,360 --> 00:14:08,560
है तभी तो कोई व्यक्ति तभी तो कोई व्यक्ति

194
00:14:08,560 --> 00:14:13,160
उसको प्राप्त करने के निमित्त धर्म का पालन करेगा

195
00:14:13,160 --> 00:14:17,960
जब हम व्यक्ति को यह समझाने में सफल हो जाएंगे यह है

196
00:14:17,960 --> 00:14:22,080
और इसी की तुझे जरूरत है हा ठीक

197
00:14:22,080 --> 00:14:26,200
है सरल भाषा में कहे तो यह है और इसी की तुझको

198
00:14:26,200 --> 00:14:30,280
जरूरत है जब हम येय समझाने में सफल हो

199
00:14:30,280 --> 00:14:34,360
जाएंगे तभी तो कोई व्यक्ति धर्म का पालन करेगा

200
00:14:34,360 --> 00:14:39,320
और यह नहीं है या इसकी तुझे आवश्यकता नहीं

201
00:14:39,320 --> 00:14:43,880
है तो कोई व्यक्ति क्यों धर्म का पालन करे क्यों झूठ ना

202
00:14:43,880 --> 00:14:48,200
बोले क्या मिल रहा है भाई भगवान है यह तो सिद्ध ही नहीं हुआ

203
00:14:48,200 --> 00:14:52,440
या मुझे उसकी आवश्यकता है यह भी सिद्ध नहीं हुआ तो मैं क्यों झूठ ना बोलू

204
00:14:52,440 --> 00:14:57,160
मैं क्यों विचार ना करू मैं क्यों अधर्म से बचू

205
00:14:57,160 --> 00:15:01,400
समझ रहे तो इसलिए यव कोई धर्म संस्था

206
00:15:01,400 --> 00:15:02,600
धर्म की बात करने वाले

207
00:15:02,600 --> 00:15:06,600
के लिए कि उसको यह मालूम हो कि ईश्वर की

208
00:15:06,600 --> 00:15:11,240
स्थापना होती कैसे है

209
00:15:11,240 --> 00:15:15,400
जी देखिए ईश्वर की स्थापना के लिए सबसे पहले

210
00:15:15,400 --> 00:15:19,800
तो हमको सदगुरु की शरणागत में जाना होगा हमें

211
00:15:19,800 --> 00:15:23,920
गुरु के सानिध्य में जा सदगुरु की सदगुरु

212
00:15:23,920 --> 00:15:28,160
की शरणागत में जाना होता है तो यहां से हमने कह दिया जैसे कोई एक व्यक्ति

213
00:15:28,160 --> 00:15:32,680
है मान लीजिए नास्तिक है उसको अभी ईश्वर से ही मतलब नहीं है

214
00:15:32,680 --> 00:15:37,240
हा ठीक है और सदगुरु का अर्थ है सत

215
00:15:37,240 --> 00:15:42,080
गुरु अच्छा गुरु अच्छे का मतलब हो गया धर्म

216
00:15:42,080 --> 00:15:46,480
अच्छे का मतलब क्या हो गया हमने भी जाना सकर्म

217
00:15:46,480 --> 00:15:50,640
हा हा तो व्यक्ति को धर्म का धर्म का बोध होना

218
00:15:50,640 --> 00:15:54,880
चाहिए तब तो वो गुरु में जाएगा हा

219
00:15:54,880 --> 00:15:59,040
तो यदि और मान लीजिए कि वो गुरु के पास गया भी है तो वहां पर

220
00:15:59,040 --> 00:16:03,040
जाके गुरु को तो बताना पड़ेगा ना कि ईश्वर है तो वो

221
00:16:03,040 --> 00:16:07,200
गुरु क्या बताएगा वो वो चीज बताइए कि ईश्वर है ये कैसे

222
00:16:07,200 --> 00:16:11,400
सिद्ध करता है गायत्री परिवार तो गुरु

223
00:16:11,400 --> 00:16:16,080
सबसे पहले तो गुरु के सानिध्य में अगर वह नास्तिक व्यक्ति चला जाता है

224
00:16:16,080 --> 00:16:18,280
कि चलो भाई कि हम

225
00:16:18,280 --> 00:16:22,520
हम गुरु के सानिध्य में जाए इस दलदल से हम निकलना चाहते अधर्म के दलदल

226
00:16:22,520 --> 00:16:26,760
से निकलना चाहते हैं और किसी व्यक्ति विशेष से

227
00:16:26,760 --> 00:16:30,880
मतलब प्रभावित हो समझ नहीं रहे दंत जी अधर्म के दलदल

228
00:16:30,880 --> 00:16:34,960
से वो तब निकलना चाहेगा जब उसे यह पता चल जाए कि इस दुनिया

229
00:16:34,960 --> 00:16:39,000
में ईश्वर है वो तब निकलना चाहेगा ना

230
00:16:39,000 --> 00:16:43,160
अभी तो हम बात कर रहे हैं कि तो सबसे पहले तो ईश्वर का अस्तित्व

231
00:16:43,160 --> 00:16:47,280
से स्वीकार होना चाहिए तब तो वो धर्म धर्म को मैं अंतर

232
00:16:47,280 --> 00:16:51,560
करेगा तो पहले वो तो उसका प्रभाव देखेगा

233
00:16:51,560 --> 00:16:55,720
प्रभाव पहले वो देखेगा कि कोई ना कोई ऐसे व्यक्तित्व उसके पास

234
00:16:55,720 --> 00:16:59,760
पहुंचेगा जब वो कोई उसके पास जैसे कि हम दोनों भाई अभी समय चर्चा कर रहे हैं

235
00:16:59,760 --> 00:17:03,920
धर्म की चर्चा अब इस बीच में कई लोग अभी हम आपसे जुड़े हुए

236
00:17:03,920 --> 00:17:08,080
हैं वो भाई को जब हम धर्म की चर्चा करेंगे और कर रहे

237
00:17:08,080 --> 00:17:12,240
उसमें उसको समझ आ जाएगा तब उस दिशा की ओर जाएगा कि चलो भाई मैं भी इस सत मार्ग

238
00:17:12,240 --> 00:17:16,280
की ओर चलू जहां वो बता के पास वही धर्म चर्चा आपसे

239
00:17:16,280 --> 00:17:22,280
पूछ रहा हूं मैं वही धर्म चर्चा आपसे पूछ रहा

240
00:17:23,040 --> 00:17:27,160
हूं आपको बता रहा सदगुरु की शरण में जाने

241
00:17:27,160 --> 00:17:31,360
पर या वो जो आप धर्म च कह रहे हो उसके अनुसार

242
00:17:31,360 --> 00:17:36,320
ईश्वर का अस्तित्व गायत्री परिवार कैसे सिद्ध करता है

243
00:17:36,320 --> 00:17:41,000
ईश्वर का अस्तित्व वही वही वही यह करता है

244
00:17:41,000 --> 00:17:45,200
बताता है गायत्री परिवार कि सबसे पहले वह जन

245
00:17:45,200 --> 00:17:49,720
जन तक की उसकी संदेश को पहुंचाता है

246
00:17:49,720 --> 00:17:53,800
वो संदेश क्या होता है वो संदेश

247
00:17:53,800 --> 00:17:57,880
होता है कि हमें इन बुराइयों को अपने अंदर की

248
00:17:57,880 --> 00:18:01,920
बुराइयों को हटाकर कर सत मार्ग को जाने के लिए हमें सदगुरु की

249
00:18:01,920 --> 00:18:06,000
जरूरत है वहां आप मेरी बात समझ नहीं रहे मैं आपसे पूछ

250
00:18:06,000 --> 00:18:10,000
रहा हूं कि एक व्यक्ति के पास संदेश आया कि सतगुरु

251
00:18:10,000 --> 00:18:14,080
के पास जाओ अब वो सतगुरु के पास पहुंचा अब वो कहेगा

252
00:18:14,080 --> 00:18:18,360
कि मैं जो आप जो शिक्षा दे रहे हो मुझे मेरे द्वारा

253
00:18:18,360 --> 00:18:22,800
उसका पालन करना आवश्यक क्यों है

254
00:18:22,800 --> 00:18:26,720
मैं क्यों मानू कि इस दुनिया में ईश्वर

255
00:18:26,720 --> 00:18:30,840
है अच्छा तो वो तो वो तो सीधा

256
00:18:30,840 --> 00:18:35,200
यह बताएगा ना कि मैं आप क्यों मानो जब आपके

257
00:18:35,200 --> 00:18:38,160
नहीं मानेगा तो वति तो जा भी नहीं पाएगा उस जगह पर

258
00:18:38,160 --> 00:18:42,800
अगर मानेगा तो माछ

259
00:18:42,800 --> 00:18:46,840
रहा इसीलिए मैं पूछ रहा हूं धर्म की संस्थापन धर्म की

260
00:18:46,840 --> 00:18:51,000
स्थापना के लिए ईश्वर का अस्तित्व स्थापित करना

261
00:18:51,000 --> 00:18:55,240
आवश्यक है दृढ़ता के साथ तो जब ईश्वर की

262
00:18:55,240 --> 00:18:59,520
ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना आवश्यक है तो मुझे वो तरीका ताए गायत्री

263
00:18:59,520 --> 00:19:03,600
परिवार का जिसके द्वारा वह ईश्वर के अस्तित्व

264
00:19:03,600 --> 00:19:06,360
की स्थापना करता

265
00:19:06,360 --> 00:19:10,400
है तत्व ईश्वर की अस्तित्व के लिए तो सबसे

266
00:19:10,400 --> 00:19:14,760
पहले तो अभी वह चला गया जब उनकी प्रभाव शक्ति को जानेगा

267
00:19:14,760 --> 00:19:18,920
वहां पर कोई ना कोई गुरु गुरु बताएगा या

268
00:19:18,920 --> 00:19:22,960
उसके जो अनय रहेंगे या साथ रहेंगे गुरु क्या बताएंगे ऐसा

269
00:19:22,960 --> 00:19:26,960
कि वो मान जाए ईश्वर के अस्तित्व को वो क्या बात होती है आपको नहीं

270
00:19:26,960 --> 00:19:31,160
पता है नहीं नहीं सुनो ना वो सबसे पहले वो उस जगह

271
00:19:31,160 --> 00:19:35,200
पर जाएगा तो मैं उस चीज को जानू सबसे पहले जानने के लिए जाएगा तो

272
00:19:35,200 --> 00:19:39,320
सबसे पहले चलो भाय तो उसको पूछ उसको वो तो गया है तो मैं

273
00:19:39,320 --> 00:19:45,200
जानने के लिए जुड़ने के लिए गया है जब जुड़ने के लिए गया तो वो गुरु

274
00:19:45,200 --> 00:19:49,280
मंत्र आप जड़े हो ना आपने दा

275
00:19:49,280 --> 00:19:53,520
भी ली जी जी तो आपको क्या बताया गया है

276
00:19:53,520 --> 00:19:57,960
ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना के बारे में

277
00:19:57,960 --> 00:20:02,480
स्तव ईश्वर की अस्तित्व की स्थापना के बारे में सबसे पहले

278
00:20:02,480 --> 00:20:06,560
जो बताया गया जो दीक्षा दिया दीक्षा देने के बाद में हमारा उन

279
00:20:06,560 --> 00:20:10,680
चीजों पर फॉलो नियम करने की नियम बताएगा

280
00:20:10,680 --> 00:20:15,000
उस नियम के अनुसार हम जब जब हम कार्य किए तो उसका

281
00:20:15,000 --> 00:20:19,240
जो दैवी अवतरण हुआ हमारे अंदर में वो अवतरण हमको उसका प्रभाव

282
00:20:19,240 --> 00:20:23,400
दृष्टि गोचर हुआ इससे हमको उस ईश्वर की अस्तित्व को हमने स्वीकार

283
00:20:23,400 --> 00:20:27,800
किया कि ईश्वर है क्योंकि जब जाएंगे उस जगह पर हम पहले गए ना तो कुछ हमको

284
00:20:27,800 --> 00:20:31,880
अनुभूति हुई उस अनुभव के आधार से

285
00:20:31,880 --> 00:20:35,960
यानी कि मान के चलिए मैं एक मैं आपको एक

286
00:20:35,960 --> 00:20:40,120
बात बताऊं इसमें दो प्रश्न खड़े होते हैं एक तरीके से आपने कहा कि प्रैक्टिकल करके

287
00:20:40,120 --> 00:20:44,600
मुझे दिखाया गया तो मैंने जान लिया कि ईश्वर है ठीक

288
00:20:44,600 --> 00:20:48,800
है जी जी तो प्रैक्टिकल का मतलब है कि आपको यह कहा

289
00:20:48,800 --> 00:20:52,880
गया कि देखो तुम जो हम बता रहे

290
00:20:52,880 --> 00:20:57,360
हैं वैसा वैसा करोगे अगर तो तुम्हारे गले में

291
00:20:57,360 --> 00:21:01,360
कुछ ठंडा ठंडा तुम फील होगा उदाहरण ले रहा हूं उदाहरण

292
00:21:01,360 --> 00:21:05,400
उदाहरण अनुभव वाला उ जी तो उन्होंने कहा कि

293
00:21:05,400 --> 00:21:08,640
जब तुम हमारे कहे अनुसार चलोगे तो तुम्हें अपने गले

294
00:21:08,640 --> 00:21:13,040
में कंठ में कुछ ठंडा ठंडा फील होगा अगर हुआ जी

295
00:21:13,040 --> 00:21:17,720
तो उससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में ईश्वर है

296
00:21:17,720 --> 00:21:21,840
क्या ऐसा है क्या जी जी नहीं नहीं ऐसा नहीं है देखो

297
00:21:21,840 --> 00:21:25,880
हम नहीं जानते थे फिर भी देखो हम नहीं जाने

298
00:21:25,880 --> 00:21:30,000
उन्होने आपको ऐसा क्या बताया होने से क्या अनुभव

299
00:21:30,000 --> 00:21:34,200
होने से आपको यह सिद्ध होता है इस दुनिया में ईश्वर

300
00:21:34,200 --> 00:21:38,480
है नहीं देखो वो यह बताया कि दे जैसे

301
00:21:38,480 --> 00:21:42,600
कि एक रसगुल्ला है ठीक है एक उदाहरण दे एक रसगुल्ला है उस

302
00:21:42,600 --> 00:21:46,960
रसगुल्ला को अगर मैं स्वयं खाता हूं और दूसरे व्यक्ति को मैं बोलूंगा कि भैया रसगुल्ला

303
00:21:46,960 --> 00:21:50,960
खाने से तो बहुत मीठा लगता है व जिंदगी में कभी रसगुल्ला खाया नहीं है तो

304
00:21:50,960 --> 00:21:55,560
उस व्यक्ति को मैं बताऊंगा तो वो क मैं भी खाकर देखो मीठा क्या होता है

305
00:21:55,560 --> 00:21:59,560
तो उसी तरह से वहां से जो हमको ज्ञान मिला उस ज्ञान तत्व को

306
00:21:59,560 --> 00:22:03,680
हमने अभ्यास किया हमारे शरीर में रगड़ना चालू किया तो रगड़ने के बाद जो

307
00:22:03,680 --> 00:22:07,880
उसके ऊर्जा मिला नहीं उस ऊर्जा से उस ऊर्जा से हमको अनुभूति हुआ

308
00:22:07,880 --> 00:22:12,280
कि ईश्वर तो है और ये तो

309
00:22:12,280 --> 00:22:16,720
सुनिए पहली बात तो ये है कि आपने

310
00:22:16,720 --> 00:22:20,840
जब उस रसगुल्ले को रसगुल्ले की बात आप कह रहे हो ना कि रसगुल्ले से आपको वो होता

311
00:22:20,840 --> 00:22:23,720
है तो पहली बात य कि रसगुल्ले का अस्व

312
00:22:23,720 --> 00:22:27,800
आपके सामने स्थापित है रसगुल्ला है आपको दिख रहा है आपकी आंखों

313
00:22:27,800 --> 00:22:32,440
से ठीक है जी जी जी और जिसने भी

314
00:22:32,440 --> 00:22:36,520
चीनी वगैरा खाई है तो उसको चासनी की मिठास

315
00:22:36,520 --> 00:22:40,520
पता है दूसरी बात यह भी है दूसरी

316
00:22:40,520 --> 00:22:44,560
बात यह भी है कि एट द एंड आप यही कह रहे हो कि हमारे पास

317
00:22:44,560 --> 00:22:48,920
बताने के लिए ज्ञान नहीं है केवल वह सिर्फ उसको

318
00:22:48,920 --> 00:22:52,960
सिर्फ क्या कहते प्रैक्टिकली कराया जा सकता है दो दूसरी

319
00:22:52,960 --> 00:22:57,000
बात ये हो गई ज्ञान नहीं है हम उसको समझा

320
00:22:57,000 --> 00:23:01,400
करके यह प्रयास कर सकते उसके सामने ईश्वर का

321
00:23:01,400 --> 00:23:06,040
साबित हो जाए जो ईश्वर को नकार रहा

322
00:23:06,040 --> 00:23:11,920
हो तो उसको

323
00:23:11,920 --> 00:23:15,960
भी पहले सत्संग किया जाता है किसी

324
00:23:15,960 --> 00:23:21,960
भी चीज को जानने के लिए एक दूसरे के बीच में हम दोनों मेरे भाई

325
00:23:26,480 --> 00:23:30,680
सस मैं आपके साथ मैं सत्संगी तो कर रहा हूं एक तरीके

326
00:23:30,680 --> 00:23:36,680
से मुझे समझिए नास्तिक अब मुझे समझाइए कि ईश्वर

327
00:23:39,440 --> 00:23:43,440
है पहले तो ठीक है अभी हम सत्संग करें तो

328
00:23:43,440 --> 00:23:47,520
सत्संग के माध्यम से होता है कुछ ऐसी चीजें होती है कि भगवान के बारे

329
00:23:47,520 --> 00:23:51,520
में चर्चा किया जाता है चर्चा करने के बाद में वहां से उसको

330
00:23:51,520 --> 00:23:55,920
सुन कर के भगवान के प्रति या गुरु के प्रति

331
00:23:55,920 --> 00:23:59,920
उसको भावी भोर जब हो जाता है उसको समझ में आ जाता है तभी वो चीज

332
00:23:59,920 --> 00:24:04,000
पर व प्रवेश करके गुरु से दीक्षा लेगा सबसे पहली बात तब उसका अनुभूति

333
00:24:04,000 --> 00:24:08,440
उनको होगा गुरु मंत्र यानी कि आपके पास ज्ञान बताने

334
00:24:08,440 --> 00:24:12,480
के तौर पर शास्त्रोक्त कोई वर्णन कोई व्याख्या कोई परिभाषा

335
00:24:12,480 --> 00:24:16,800
ऐसी नहीं है कोई तर्क ऐसा नहीं है जिसके कारण गायत्री परिवार ईश्वर

336
00:24:16,800 --> 00:24:20,880
के अस्तित्व को सिद्ध कर सके जो व्यक्ति यह मान ले कि भैया

337
00:24:20,880 --> 00:24:21,380
ईश्वर

338
00:24:21,320 --> 00:24:25,920
है जैसे वो गया गायत्री परिवार और उससे किसी ने कहा

339
00:24:25,920 --> 00:24:30,880
कि भैया देखो हम जैसा जैसा कह रहे हैं वैसा ऐसा करो तो तुम्हें अनुभूति होगी

340
00:24:30,880 --> 00:24:36,880
और वह अनुभूति एजेक्ट कैसी होगी यह बताते हैं क्या

341
00:24:40,160 --> 00:24:46,160
वो क्या हुआ चले

342
00:24:47,920 --> 00:24:53,680
गए क्या हुआ इनको इंटरनेट खराब है क्या

343
00:24:53,680 --> 00:24:58,440
इनका खैर

344
00:24:58,440 --> 00:25:03,360
संडे को जो स्टॉप

345
00:25:03,360 --> 00:25:07,920
फ्रॉड रामपाल फ्रॉड हिंदू रामपाल और स्टॉप एंटी

346
00:25:07,920 --> 00:25:12,280
हिंदू रामपाल इस तरह का हम लोग चालू कर रहे हैं

347
00:25:12,280 --> 00:25:16,040
आप लोग उसमें

348
00:25:16,040 --> 00:25:20,320
जरूर हमें सपोर्ट करें र पर है ना

349
00:25:20,320 --> 00:25:24,440
हां तो मैं यह पूछ रहा हूं कि आपके पास

350
00:25:24,440 --> 00:25:28,600
जो वाद संवाद का कोई माध्यम नहीं है कि आप ईश्वर

351
00:25:28,600 --> 00:25:32,640
के अस्तित्व को किसी के सामने प्रूफ करने का प्रयास कर सके आप

352
00:25:32,640 --> 00:25:37,360
केवल उससे यही कहेंगे भैया गुरुओ अच्छे गुरुओं के पास जाओ

353
00:25:37,360 --> 00:25:41,600
और जाकर के जो है तुम सत्संग करो और ज्ञान चर्चा के माध्यम से जो है

354
00:25:41,600 --> 00:25:45,600
तुम वो करो आपके पास कोई तरीका नहीं

355
00:25:45,600 --> 00:25:49,680
है ज्ञान ज्ञान का कि आप उसको संतुष्ट कर सको

356
00:25:49,680 --> 00:25:54,360
या संतुष्ट करने का प्रयास कर सको

357
00:25:54,360 --> 00:26:00,360
जय श्री राम जय श्री राम

358
00:26:00,880 --> 00:26:06,560
पुष्पदंत

359
00:26:06,560 --> 00:26:11,480
जी हां दिख रहे हैं आप दिख रहे हैं

360
00:26:11,480 --> 00:26:17,480
आपके य ठंडी बहुत है लग रहा

361
00:26:22,270 --> 00:26:26,640
[संगीत] है क्या हुआ आपकी आवाज नहीं आ

362
00:26:26,640 --> 00:26:30,720
रही क्या हुआ की आवाज नहीं आ रही वो शिवम भैया फोन

363
00:26:30,720 --> 00:26:34,840
लगाया था कट गया कर आप डू नोट

364
00:26:34,840 --> 00:26:39,680
डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में आप नो डिस्टर्ब लगा दीजिए फोन में

365
00:26:39,680 --> 00:26:43,680
आपने फिर टीवी स्ट आपने फिर टीवी पर स्टार्ट की

366
00:26:43,680 --> 00:26:47,880
है क्या नहीं नहीं कुछ नहीं किया है तो दोबारा से आइए मेरी आवाज

367
00:26:47,880 --> 00:26:53,200
फिर से रिपीट सुनाई देर मेरी आवाज फिर से रिपीट सुनाई दे रही है

368
00:26:53,200 --> 00:26:58,490
ऐसा फिर कट करके फिर से आऊ

369
00:26:58,490 --> 00:27:04,490
[संगीत]

370
00:27:04,640 --> 00:27:09,160
जी आज आप लोगों ने सर्वशक्तिमान धर्म चैनल पर हमने

371
00:27:09,160 --> 00:27:14,040
एक वीडियो डाला था जिसमें

372
00:27:14,040 --> 00:27:18,160
एक तथाकथित जो ट्रेंड लोग होते

373
00:27:18,160 --> 00:27:23,320
हैं उसके साथ हमारा जो है एक वार्तालाप सुना

374
00:27:23,320 --> 00:27:27,760
होगा जिसमें कि एक व्यक्ति फोन करके हमें बताता है कि हम ब्राह्मण त्रिपाठी

375
00:27:27,760 --> 00:27:31,800
हैं और गोत्र प्रवर पूछने पर वह

376
00:27:31,800 --> 00:27:37,800
बोल्ड हो जाता है

377
00:27:41,440 --> 00:27:46,680
क्लीन आप लोगों में से जिसने नहीं देखा है वह तो अवश्य देख

378
00:27:46,680 --> 00:27:50,240
[संगीत]

379
00:27:50,240 --> 00:27:55,200
ले जी पुष्पदंत जी

380
00:27:55,200 --> 00:27:58,600
जीन

381
00:27:58,600 --> 00:28:03,200
हां भैया सुनाई दे रहा है भैया जी तो मैं ये पूछ रहा

382
00:28:03,200 --> 00:28:07,280
था कि कहने का अर्थ ये है कि आपके पास केवल

383
00:28:07,280 --> 00:28:11,320
यह है बताने के लिए कि भाई देखिए हम

384
00:28:11,320 --> 00:28:15,840
यह बता रहे हैं आपको यह कर लीजिए इससे आपको अनुभव हो जाएगा कि ईश्वर है

385
00:28:15,840 --> 00:28:20,120
और आपके पास कोई वाद संवाद वाला कोई तरीका नहीं है उसको संतुष्ट

386
00:28:20,120 --> 00:28:24,200
करने का जिससे आप प्रयास कर सके

387
00:28:24,200 --> 00:28:28,240
अब ऐसा है भैया अपनी अपनी वो तरीका होता है और

388
00:28:28,240 --> 00:28:32,560
जो अनुभव मुझे मैं तो पहले सत्संग किया सत्संग से बाद मुझे

389
00:28:32,560 --> 00:28:36,800
ईश्वर के प्रति प्रेम हुआ और प्रेम होने के बाद में

390
00:28:36,800 --> 00:28:40,840
मैंने सो देख मेरी मैं एक बात मैं एक बात सुनना चाहू

391
00:28:40,840 --> 00:28:45,040
पूछना चाहूंगा कि आपको अनुभव हुआ इसलिए क्योंकि आप ईश्वर

392
00:28:45,040 --> 00:28:49,600
के अस्तित्व को पहले से प्रेम करते थे तो आप गायत्री परिवार

393
00:28:49,600 --> 00:28:54,560
गए आप ईश्वर के अस्तित्व को पहले पहले से भगवत भक्ति

394
00:28:54,560 --> 00:28:56,720
हां अब जो व्यक्ति ऐसा

395
00:28:56,720 --> 00:29:01,360
है जिसको जो व्यक्ति ऐसा है कि जिसको ईश्वर

396
00:29:01,360 --> 00:29:05,360
का बिल्कुल उसको एक्सेप्टेंस ही नहीं उसकी लाइफ में व

397
00:29:05,360 --> 00:29:09,560
वो सीकर है सकारात्मक बुद्धि है उसकी

398
00:29:09,560 --> 00:29:13,600
उसकी बुद्धि सकारात्मक है मगर अभी उस वो अभी ईश्वर के

399
00:29:13,600 --> 00:29:17,760
अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पाया है तो उसको ईश्वर

400
00:29:17,760 --> 00:29:22,600
के अस्तित्व को स्वीकार करने के लिए भाई सत्संग क्यों जाएगा तभी तो

401
00:29:22,600 --> 00:29:26,760
जाएगा सत्संग तभी तो जाएगा जब मानता हो कि सत्संग जाने

402
00:29:26,760 --> 00:29:30,880
से मुझे प्राप्त होगा ईश्वर धर्म का पालन

403
00:29:30,880 --> 00:29:35,080
क्यों करेगा क्योंकि वो ये मानता है कि धर्म का पालन करने से मुझे प्राप्त

404
00:29:35,080 --> 00:29:39,360
होगा ईश्वर जी जी तो

405
00:29:39,360 --> 00:29:44,720
तो बात यह है ना कि आप पहले ही उसको सत्संग में भेज रहे

406
00:29:44,720 --> 00:29:48,720
हैं और अगर वह सत्संग में आया भी है तो तब तो

407
00:29:48,720 --> 00:29:54,720
उसे बता दो ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता

408
00:29:55,600 --> 00:29:59,760
है नहीं तो उसको तो चर्च देखो हम चर्चा करके उसको

409
00:29:59,760 --> 00:30:03,760
समक्ष सत्संग के बीच में तो बताया जरूर जाता है लेकिन वो जब

410
00:30:03,760 --> 00:30:08,120
उस उस चीज पर जैसे जा साब चर्चा

411
00:30:08,120 --> 00:30:13,440
करके चर्चा करके जो है क्या बताया जाता

412
00:30:13,440 --> 00:30:17,840
है अब वो तो ईश्वर के ही बारे में बताया जाता है भैया सत्संग

413
00:30:17,840 --> 00:30:22,000
में तो ईश्वर कैसे सि होता है मुझे बताइए मैं

414
00:30:22,000 --> 00:30:26,080
आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर है इस दुनिया में यह कैसे सिद्ध होता

415
00:30:26,080 --> 00:30:28,320
है

416
00:30:28,320 --> 00:30:32,400
अब सबसे पहले देखा जाए तो सामान्य दृष्टि से देखा जाए ईश्वर प्रकृति

417
00:30:32,400 --> 00:30:36,440
को मानता हूं सबसे प्रथम ये मूल प्रकृति जो है जो हम

418
00:30:36,440 --> 00:30:40,520
देखते हैं यह मूल प्रकृति है यही ईश्वर अगर यह समझे इंसान तब की बात

419
00:30:40,520 --> 00:30:44,720
है ना समझे तो उसको हम कैसे कर सकते हैं यह मेरी भावना है अब जो पूछ र

420
00:30:44,720 --> 00:30:48,840
उ स्तर कर नहीं जा रहा हूं तो मेरी पहुंच वहां तक की नहीं जा रहा है तो मैं इसका उत्तर आपको

421
00:30:48,840 --> 00:30:53,520
नहीं दे पाऊंगा जो मैं जो मैं जान इसलिए

422
00:30:53,520 --> 00:30:58,000
मैं आपसे इसका उत्तर इसलिए मांग रहा हूं जी जी जी क्योंकि

423
00:30:58,000 --> 00:31:02,160
इससे आगे चलने पर जो हमारी

424
00:31:02,160 --> 00:31:06,520
कुछ चीज है जिसमें आड़े आएंगी ईश्वर का अस्तित्व

425
00:31:06,520 --> 00:31:11,120
सिद्ध ऐसे ही होता है ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध ऐसे ही होता

426
00:31:11,120 --> 00:31:15,680
है कि जो ईश्वर को नहीं भी मानता है

427
00:31:15,680 --> 00:31:20,280
उसके अंदर भी ईश्वर को ही प्राप्त करने की चाह विद्यमान

428
00:31:20,280 --> 00:31:24,760
है क्योंकि जीव मात्र की

429
00:31:24,760 --> 00:31:30,040
चाह का वास्तविक विषय ईश्वर ही

430
00:31:30,040 --> 00:31:34,280
है क्योंकि जी जी जो जीव है वह सत

431
00:31:34,280 --> 00:31:38,680
होना चाहता है व चित होना चाहता है वो आनंद

432
00:31:38,680 --> 00:31:42,920
होना चाहता है जी जी जीव जो है वह सच्चिदानंद

433
00:31:42,920 --> 00:31:46,920
स्वरूप होकर शेष रह जाना चाहता है वह एसी में फ्रिज

434
00:31:46,920 --> 00:31:51,000
में टीवी में कूलर में यही ढूंढ रहा है ठीक

435
00:31:51,000 --> 00:31:55,360
है एक नास्तिक व्यक्ति भी यह मन में कई बार सोचता है कि बारिश

436
00:31:55,360 --> 00:31:59,600
ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए हा जबकि

437
00:31:59,600 --> 00:32:03,760
साइंस यह नहीं कहती भौतिकवाद अभी तक यह नहीं कहता कि कोई व्यक्ति कंट्रोल कर सकता

438
00:32:03,760 --> 00:32:08,200
है बारिश को केवल सोचने मात्र से

439
00:32:08,200 --> 00:32:13,400
फिर भी एक व्यक्ति ऐसा सोच रहा है कि मेरे सोचने से बारिश कंट्रोल हो जाए

440
00:32:13,400 --> 00:32:17,400
हा ठीक है तो एक नास्तिक व्यक्ति भी भगवान

441
00:32:17,400 --> 00:32:21,960
को भले ही तार रहा है मगर उसकी भी

442
00:32:21,960 --> 00:32:27,960
वो भी अंदर से वास्तविकता में भगवान को ही ढूंढ रहा है

443
00:32:29,280 --> 00:32:33,480
हा तो हमारे अंदर की वो

444
00:32:33,480 --> 00:32:37,520
चाह जो हमारे अंदर इनबिल्ट है जिससे हम अलग नहीं हो

445
00:32:37,520 --> 00:32:42,320
सकते हैं उस चाह का अस्तित्व इस दुनिया में

446
00:32:42,320 --> 00:32:46,800
है ऐसी कोई हमारे अंदर की इनबिल्ट चाह नहीं है इनबिल्ट

447
00:32:46,800 --> 00:32:50,920
जिससे हम अलग नहीं हो सकते हमारे अंदर की कोई भी

448
00:32:50,920 --> 00:32:55,280
इनबिल्ट चाह ऐसी नहीं है जिसके सब्जेक्ट जिसका सब्जेक्ट

449
00:32:55,280 --> 00:32:59,600
इस संसार में मौजूद ना हो जैसे हमारे अंदर इनबिल्ट

450
00:32:59,600 --> 00:33:03,880
है क्या प्यास

451
00:33:03,880 --> 00:33:08,520
हम जन्म लेते हैं प्यास के साथ लेते हैं ना

452
00:33:08,520 --> 00:33:12,560
तो प्यास हमारे अंदर इनबिल्ट है तो

453
00:33:12,560 --> 00:33:18,000
उससे हमारे अंदर प्यास होने से य सिद्ध हो गया कि दुनिया में पानी

454
00:33:18,000 --> 00:33:22,320
है हमारे अंदर हमारे अंदर

455
00:33:22,320 --> 00:33:26,560
भूख इनबिल्ट है उससे हम अलग नहीं हो सकते

456
00:33:26,560 --> 00:33:30,760
भूख से भूख से ही यह सिद्ध हो गया

457
00:33:30,760 --> 00:33:35,240
कि दुनिया में क्या है

458
00:33:35,240 --> 00:33:39,920
क्या है दुनिया में भोजन

459
00:33:39,920 --> 00:33:44,560
भोजन आपका इंटरनेट बड़ा स्लो चल रहा

460
00:33:44,560 --> 00:33:45,560
है

461
00:33:45,560 --> 00:33:51,560
अरे कम ज क कम ज्यादा हो रहा

462
00:33:55,240 --> 00:33:59,320
है जय श्री राम आपका वीडियो रुक

463
00:33:59,320 --> 00:34:04,120
गया है ऐसा अभी आया क्या

464
00:34:04,120 --> 00:34:09,040
हां आ

465
00:34:09,040 --> 00:34:14,960
गया आपको कवरेज एरिया में आके बात करनी

466
00:34:14,960 --> 00:34:19,120
चाहिए फिर आपका इंटरनेट रुक रहा है [संगीत]

467
00:34:19,120 --> 00:34:23,160
पीछे हां घर के तरफ जाना पड़ेगा उधर तब वो

468
00:34:23,160 --> 00:34:27,280
आ जाएगा अब इधर क्या है भैया मैं इधर लाइट वेट व्यवस्था कीना तो इधर ही

469
00:34:27,280 --> 00:34:33,280
बैठा हूं

470
00:34:42,120 --> 00:34:47,920
मेरी वीडियो भी अटक रही है

471
00:34:47,920 --> 00:34:53,920
क्या कोई कमेंट करके बता दे पाखंड का खंडन जी बोल रहे हैं

472
00:34:55,450 --> 00:35:01,450
[संगीत]

473
00:35:14,320 --> 00:35:19,880
जी तो ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है

474
00:35:19,880 --> 00:35:24,600
कि प्राणी मात्र

475
00:35:24,600 --> 00:35:29,240
के अंतर आत्मा में मन

476
00:35:29,240 --> 00:35:33,440
में संसार की प्रत्येक बाधा से मुक्त हो जाने की चा

477
00:35:33,440 --> 00:35:38,080
विद्यमान [संगीत]

478
00:35:38,080 --> 00:35:42,840
है मेरा इंटरनेट भी स्लो आ रहा है क्या

479
00:35:42,840 --> 00:35:48,840
कुछ लोग बोल रहे हैं ऐसा तो नहीं आप लोगों

480
00:35:50,200 --> 00:35:56,200
के आपका इंटरनेट स्लो है जी आपका इंटरनेट स्लो

481
00:35:56,200 --> 00:36:00,800
है जी जी जी जी आप

482
00:36:00,800 --> 00:36:06,800
डाउन डाउन कर रहा भैया आप सही सही जगह पर जाक के आइए

483
00:36:18,280 --> 00:36:23,200
ना जी तो मैं वही कह रहा

484
00:36:23,200 --> 00:36:27,320
था और मैं आप लोगों को एक बात की सूचना दे रहा

485
00:36:27,320 --> 00:36:31,400
हूं आने वाले समय में

486
00:36:31,400 --> 00:36:34,560
मेरे साथ हो सकता है

487
00:36:34,560 --> 00:36:38,880
कोई अप्रिय घटना घट जाए

488
00:36:38,880 --> 00:36:43,600
क्योंकि मुझे धमकी वगैरह आ रही है और

489
00:36:43,600 --> 00:36:47,720
आज मुझे किसी ने जिनसे

490
00:36:47,720 --> 00:36:53,720
हमारा द्वंद चल रहा है तेजी से इस समय उनकी ओर

491
00:36:54,920 --> 00:36:59,000
से महिला के साथ छेड़छाड़ करने का

492
00:36:59,000 --> 00:37:04,680
आरोप लगाने की धमकी दी गई है ऑन

493
00:37:04,680 --> 00:37:08,680
कैमरा व हमारे पास है प्रूफ उसका वह धमकी दी गई है

494
00:37:08,680 --> 00:37:14,680
और समय आने पर उसको जो है हम प्रस्तुत कर देंगे

495
00:37:15,960 --> 00:37:20,080
बाकी आप लोगों के सपोर्ट की बहुत आवश्यकता है

496
00:37:20,080 --> 00:37:24,720
कोई भी युद्ध अकेले नहीं लड़ा जाता है

497
00:37:24,720 --> 00:37:29,600
इसलिए आप लोग जैसे भी जो भी कर सके वो करें

498
00:37:29,600 --> 00:37:35,600
और बाकी हमारा तो हम तो कर ही रहे हैं जो कर सकते

499
00:37:43,720 --> 00:37:48,040
हैं धीरज जी पूछ रहे कौन कर रहा है

500
00:37:48,040 --> 00:37:52,080
कौन हमारे विरोध में वीडियोस बनाए जा

501
00:37:52,080 --> 00:37:54,360
रहे

502
00:37:54,360 --> 00:37:58,400
हैं किसका इस समय सबसे ज्यादा हो रहा इस चैनल

503
00:37:58,400 --> 00:38:02,480
के द्वारा तो वही उही लोगों में से

504
00:38:02,480 --> 00:38:06,480
उन्ही लोगों की किसी अनुयाई ने तो हम

505
00:38:06,480 --> 00:38:10,920
इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लोग किस स्तर तक जा सकते हैं

506
00:38:10,920 --> 00:38:15,000
अपनी चीजों को बचाने के लिए क्योंकि इन्होंने यह तक कह

507
00:38:15,000 --> 00:38:20,680
दिया कि भाई हम छेड़छाड़ का आरोप

508
00:38:20,680 --> 00:38:25,840
लगाएंगे जी बताइए पु गाय

509
00:38:25,840 --> 00:38:30,200
जी अभी सा भैया आवाज

510
00:38:30,200 --> 00:38:32,960
आ रहा

511
00:38:32,960 --> 00:38:37,040
है भैया आवाज आ रहा है अभी साहब आवाज तो आ रहा है

512
00:38:37,040 --> 00:38:40,160
पर आपकी वीडियो अटक रही

513
00:38:40,160 --> 00:38:45,960
है अभी तो

514
00:38:45,960 --> 00:38:50,440
डे हां

515
00:38:50,440 --> 00:38:55,080
जी नेटवर्क में आ गया भैया

516
00:38:55,080 --> 00:39:01,080
आप एक बार फिर से रिमूव हो दोबारा

517
00:39:07,440 --> 00:39:09,680
आइए

518
00:39:09,680 --> 00:39:15,680
तो देखिए यह जो जितने भी य सेक्टस है जो बन रहे

519
00:39:16,920 --> 00:39:22,000
हैं

520
00:39:22,000 --> 00:39:28,000
वह थोड़ा हल्का हाथ रखो आप

521
00:39:33,800 --> 00:39:38,120
देखिए जो यह बात है ना जो भी कोई व्यक्ति धर्म

522
00:39:38,120 --> 00:39:42,240
की स्थापना करना चाहता है या धर्म क्या धर्म की बात

523
00:39:42,240 --> 00:39:46,400
करना चाहता है उसके लिए सर्वप्रथम आवश्यक है

524
00:39:46,400 --> 00:39:50,560
कि उसकी धर्म की व्याख्या क्लियर हो जिससे कि वोह लोगों को बता

525
00:39:50,560 --> 00:39:54,920
सके कि तुम्हारा इन नियमों को इन नियमों को मानना क्यों आवश्यक

526
00:39:54,920 --> 00:39:59,440
है तुम्हारे लिए अंततोगत्वा यही एक मात्र विकल्प है

527
00:39:59,440 --> 00:40:03,920
धर्म और उसके लिए आवश्यक है ईश्वर के अस्तित्व की स्थापना

528
00:40:03,920 --> 00:40:08,080
जो कि आप आपको प्राप्त नहीं हुआ हो सकता

529
00:40:08,080 --> 00:40:12,080
गायत्री परिवार ने इसकी व्यवस्था की हो मगर आपके आपकी नॉलेज

530
00:40:12,080 --> 00:40:16,120
में नहीं है तो आपको इस बात की नॉलेज रखनी चाहिए कि ईश्वर

531
00:40:16,120 --> 00:40:20,160
कैसे सिद्ध होता है जी तो जीव की चाह का वास्तविक विषय

532
00:40:20,160 --> 00:40:22,760
ही ईश्वर है सोते जागते उठते

533
00:40:22,760 --> 00:40:26,760
बैठते सुख चयन सब में जो प्राणी मात्र है वह

534
00:40:26,760 --> 00:40:30,920
ईश्वर ही खोज रहा है और यदि कोई इस सत्य

535
00:40:30,920 --> 00:40:34,920
को कहने के बाद भी ईश्वर का खंडन करता

536
00:40:34,920 --> 00:40:39,000
है कि कोई इस दुनिया में सर्वशक्तिमान सत्ता है कि

537
00:40:39,000 --> 00:40:43,160
इस दुनिया में परम स्वतंत्रता है मैं नहीं मानता तो

538
00:40:43,160 --> 00:40:47,200
फिर हम यह कह सकते हैं उससे कि यदि तुम परम स्वतंत्रता को नहीं मानते हो

539
00:40:47,200 --> 00:40:51,520
तो तुम परम स्वतंत्रता को खोज क्यों रहे हो ठीक

540
00:40:51,520 --> 00:40:55,800
है ये बात अब हम लोग आगे चलते हैं

541
00:40:55,800 --> 00:40:59,840
अब हमें ये पता चल गया कि परम स्वतंत्र

542
00:40:59,840 --> 00:41:04,400
होना चाहता है जीव मात्र जिसके

543
00:41:04,400 --> 00:41:09,360
कारण जिसके

544
00:41:09,360 --> 00:41:14,560
कारण परम स्वतंत्र होना चाहता है ईश्वर जिसके

545
00:41:14,560 --> 00:41:18,320
कारण

546
00:41:18,320 --> 00:41:23,280
यह जिके कारण परम स्वतंत्र होना चाहता है

547
00:41:23,280 --> 00:41:27,320
जिसके कारण ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है

548
00:41:27,320 --> 00:41:32,160
ठीक है इसका अर्थ क्या है जी जी जी कि

549
00:41:32,160 --> 00:41:36,240
ईश्वर जो है वो परम स्वतंत्र है इसका अर्थ

550
00:41:36,240 --> 00:41:40,480
ये हुआ ना जी परम स्वतंत्र हा

551
00:41:40,480 --> 00:41:44,880
इसका अर्थ क्या है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है

552
00:41:44,880 --> 00:41:48,880
अवाद है ठीक है हां

553
00:41:48,880 --> 00:41:53,840
जी जी जी अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्या

554
00:41:53,840 --> 00:41:57,880
गायत्री परिवार के द्वारा पूजित परिभाषित प्रतिपादित होने वाला

555
00:41:57,880 --> 00:42:03,880
जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि

556
00:42:04,160 --> 00:42:10,160
नहीं अब व स तो सर्वशक्तिमान

557
00:42:10,600 --> 00:42:15,600
है आपने कहा कि वह साकार है

558
00:42:15,600 --> 00:42:19,640
नहीं देखो भगवान की दो रूप की उपासना होती है एक तो साकार ब्रह्म की एक

559
00:42:19,640 --> 00:42:23,640
निराकार ब्रह्म की अगर हम गायत्री परिवार के में चले जाए तो

560
00:42:23,640 --> 00:42:27,920
मां भगवती भगवान की मातृ रूप में उसकी उपासना

561
00:42:27,920 --> 00:42:32,120
होती अगर उसके मंत्रों को देखा जाए गायत्री गायत्री

562
00:42:32,120 --> 00:42:36,280
को तो उसमें स्पष्ट झलकता है कि उसमें किसी भी देवी देवता

563
00:42:36,280 --> 00:42:41,760
कुछ नहीं उस निराकार ब्रह्म की उपासना है जो जति स्वरूप है

564
00:42:41,760 --> 00:42:46,000
यानी कि जो ब्रह्म है वो सर्वप्रथम निराकार है फिर वो व्यक्त

565
00:42:46,000 --> 00:42:50,000
होता है माता के रूप में हां मा

566
00:42:50,000 --> 00:42:55,680
उसको मां के रूप में बजा गया

567
00:42:55,680 --> 00:43:00,240
है मतलब अंततोगत्वा जो ब्रह्म है वह

568
00:43:00,240 --> 00:43:04,400
व्यवहार में ना आ सकने वाला है ना जो वाणी का विषय

569
00:43:04,400 --> 00:43:08,440
ना हो है ना जिसको शब्दों के द्वारा परिभाषित नहीं किया

570
00:43:08,440 --> 00:43:12,560
जा सकता अ व्यवहार में ना आ सकने वाला वो है

571
00:43:12,560 --> 00:43:17,120
फिर वो जी जी आपके अनुसार माता के रूप में प्रकट होता

572
00:43:17,120 --> 00:43:21,720
है जी जी ऐसा ही है

573
00:43:21,720 --> 00:43:25,880
हां अब उसको माता के रूप में बसते आ रहे है तो जैसा हमको मिला य बात तो

574
00:43:25,880 --> 00:43:29,960
सनातन सत्य है कि उसी को उसी के रूप में हम मानते आ रहे हैं और ये चल रहा है तो

575
00:43:29,960 --> 00:43:34,040
उसी का आध मैं बता नहीं नहीं मैं पूछ

576
00:43:34,040 --> 00:43:38,400
रहा

577
00:43:38,400 --> 00:43:43,040
हूं हेलो जय श्री राम

578
00:43:43,040 --> 00:43:47,320
हां सुन रहा आपका वीडियो बहुत अटक रहा है भाई साब

579
00:43:47,320 --> 00:43:51,200
बड़ी दिक्कत आ रही

580
00:43:51,200 --> 00:43:55,200
है नहीं भाई नेटवक

581
00:43:55,200 --> 00:43:59,080
कम जदा ज्यादा होता है किसी किसी समय

582
00:43:59,080 --> 00:44:04,080
नहीं तो ऐसे कैसे चर्चा करें आपसे आपका तो रुक रहा है ना

583
00:44:04,080 --> 00:44:10,080
मामला हा बात क पटी पर हो रहा

584
00:44:17,360 --> 00:44:21,400
है अभी आया आवाज

585
00:44:21,400 --> 00:44:25,520
जी आ रही है आवाज जी जी जी

586
00:44:25,520 --> 00:44:29,560
तो आपका कहने का मतलब परमात्मा सर्वप्रथम उसका एक व्यवहार

587
00:44:29,560 --> 00:44:33,760
में ना आ सकने वाला रूप है और उसके बाद फि व स्वयं

588
00:44:33,760 --> 00:44:37,240
को माता के रूप में व्यक्त करता

589
00:44:37,240 --> 00:44:41,360
है मां के रूप में भी व्यक्त है पिता के रूप में भी व्यक्त है समय

590
00:44:41,360 --> 00:44:45,800
के अनुसार [संगीत] से

591
00:44:45,800 --> 00:44:50,120
यानी कि यानी कि माता और जो पिता

592
00:44:50,120 --> 00:44:54,400
यानी कि शिव और शक्ति में कोई भेद नहीं है कोई

593
00:44:54,400 --> 00:44:58,520
भेद नहीं कोई अत भेद नहीं है देखो शिव

594
00:44:58,520 --> 00:45:02,520
शब्द से [प्रशंसा] श

595
00:45:02,520 --> 00:45:06,560
मुझे ऐसा बताया गया था मुझे ऐसा बताया गया

596
00:45:06,560 --> 00:45:11,120
था कि आप भेद मानते हैं

597
00:45:11,120 --> 00:45:15,160
आप यह मानते हैं कि भगवती ही है और

598
00:45:15,160 --> 00:45:21,160
जो बाकी ब्रह्मा विष्णु महेश और गणेश जो रूप है भगवान का

599
00:45:21,480 --> 00:45:25,600
वह जो है वोह ब्रह्म ब्रह्म स्वरूप नहीं

600
00:45:25,600 --> 00:45:31,600
है

601
00:45:40,360 --> 00:45:44,520
तो आप लोग हमारे साथ अगर कुछ ऐसा होता है अनुचित या

602
00:45:44,520 --> 00:45:49,280
अप्रिय तो आप लोग जान जाइएगा कि किसने कराया है

603
00:45:49,280 --> 00:45:53,840
और क्या है हो सकता है मैं आपको बता भी ना पाऊ है ना

604
00:45:53,840 --> 00:45:59,840
तो इसलिए

605
00:46:00,040 --> 00:46:04,120
आप लोग आप लोगों पहले से ही मैंने आगाह कर दिया है कि

606
00:46:04,120 --> 00:46:09,080
ऐसा ऐसा हो रहा

607
00:46:09,080 --> 00:46:13,400
है आज ही हमको एक धमकी दी गई है इस तरह की

608
00:46:13,400 --> 00:46:17,520
कि हम जो है वो भी खुले आम दी गई है सड़क पर

609
00:46:17,520 --> 00:46:22,760
दी गई हैया भया क्यों

610
00:46:22,760 --> 00:46:26,920
हा धमकी दे रहे लोगों को क्या हो रहा हा

611
00:46:26,920 --> 00:46:30,920
बताऊंगा आपको ब जी तो हमको ये बताया गया था कि आप

612
00:46:30,920 --> 00:46:34,960
भगवती में और ब्रह्म के जो अन्य पांच रूप है जिनकी व्याख्या

613
00:46:34,960 --> 00:46:39,040
वेदों में भी हुई अन्य नहीं अन्य चार रूप है जो जिनकी व्याख्या वेदों में भी हुई

614
00:46:39,040 --> 00:46:43,320
है पुराणों में भी हुई है आप भगवती में और उनमें

615
00:46:43,320 --> 00:46:47,320
भेद मानते हैं मर अभी आप कह रहे हैं कि नहीं एक ही है

616
00:46:47,320 --> 00:46:51,400
व कभी भगवती है कभी भगवान जी

617
00:46:51,400 --> 00:46:55,680
जी जी नहीं य सनातन सत्य है लेकिन मैं इसमें शिवम भैया को मैं यह बताया

618
00:46:55,680 --> 00:46:59,960
था कि पिता और माता एक ही तत्व है लेकिन

619
00:46:59,960 --> 00:47:04,440
वर्चस्व में मां का स्थान सपरी है सभी जगह पर मां का स्थान सपरी

620
00:47:04,440 --> 00:47:08,960
है य बताया था उस भैया को

621
00:47:08,960 --> 00:47:13,160
पिता जैसे कि अभी आपने बोला स शक्ति में क्या अंतर है अब हम

622
00:47:13,160 --> 00:47:15,040
स संप्रदाय के देखा जाए

623
00:47:15,040 --> 00:47:19,200
तंत्र संप्रदाय से आप उस उस य को स्वाध्याय की

624
00:47:19,200 --> 00:47:23,320
नहीं है तो मेरा एक ही गुरु नहीं एक और गुरु है स्वामी निखिलेश्वरानंद

625
00:47:23,320 --> 00:47:27,360
जी उसके गुरु थे दादा गुरु सच्चिदानंद जी तो

626
00:47:27,360 --> 00:47:31,360
मैं दो पंथ से दीक्षित हूं मैं तो मैं अभी एक अब शिव शक्ति के संबंध

627
00:47:31,360 --> 00:47:35,720
आ गए तो ये एक अलग स्वरूप में जाता है तो मैं थोड़ा इस आपका शव

628
00:47:35,720 --> 00:47:39,800
संप्रदाय है शैव संप्रदाय

629
00:47:39,800 --> 00:47:43,960
जो है आपका वो वर्ण को जन्म से मानता है या कर्म

630
00:47:43,960 --> 00:47:48,680
से मानता है वर्ण को

631
00:47:48,680 --> 00:47:52,840
अब देखो जी इंसान मैं सबसे पहले एक बता दूं मैं ज्यादा

632
00:47:52,840 --> 00:47:57,520
उस मैटर पर नहीं जाऊंगा ये

633
00:47:57,520 --> 00:48:01,600
मैं आपको बस यह पूछ रहा हूं सव संप्रदाय से आप दीक्षित है

634
00:48:01,600 --> 00:48:05,800
वह वर्ण को जन्म से मानता है या कर्म से मानता है

635
00:48:05,800 --> 00:48:09,920
सबसे पहली बात जन्म जन्म सित नहीं होता क्योंकि कर्म से सब चीज

636
00:48:09,920 --> 00:48:14,320
होता है क्योंकि तुलसीदास बाबा लिखते रामचरित्र मानस आप पता नहीं क्यों समझाने

637
00:48:14,320 --> 00:48:18,720
में जा रहे हैं मुझे वह चैप्टर ही अलग है मैं आपसे जनरल

638
00:48:18,720 --> 00:48:22,880
इंफॉर्मेशन मांग रहा हूं जो सव संप्रदाय है

639
00:48:22,880 --> 00:48:27,000
वो जन्म जन्म से मानता है वर्ण को या कर्म से मानता है मैं

640
00:48:27,000 --> 00:48:30,160
पूछ रहाय नहीं पूछ रहासा ऐसा वास्तविकता

641
00:48:30,160 --> 00:48:34,320
में सही है या गलत है व बाद की बात है

642
00:48:34,320 --> 00:48:38,640
देखो भैया अब जी चीज में मैं जानता

643
00:48:38,640 --> 00:48:44,640
हूं जो जैसा मुझे मिला है ज्ञान वो तो

644
00:48:45,360 --> 00:48:51,360
कर्म संप्रदाय

645
00:48:51,960 --> 00:48:57,600
काप क्या नाम है संप्रदाय का

646
00:48:57,600 --> 00:49:01,680
नहीं नहीं वो श शव संप्रदाय जो शिव की उपासना करते व शव

647
00:49:01,680 --> 00:49:05,760
संप्रदाय शक्ति की उपासना कर शक्ति शक्त संप्रदाय गणपति की उपासना

648
00:49:05,760 --> 00:49:10,920
गणपत होता है और स उपासक

649
00:49:10,920 --> 00:49:16,640
मतलब मतलब किसी परंपरा से दीक्षित नहीं है

650
00:49:16,640 --> 00:49:21,560
आप नहीं नहीं ऐसा नहीं है मैं एक एक है और

651
00:49:21,560 --> 00:49:25,560
जो बताया दूसरे कैटेगरी बताया ना उसका भाग अलग खंड है

652
00:49:25,560 --> 00:49:30,080
उसमें ज्यादा नहीं कि आपने शि और शक्ति के संबंधित जो अभी चर्चा होगा

653
00:49:30,080 --> 00:49:34,360
तो उसी विषय पर मैंने उस चीज को लिया था अच्छा

654
00:49:34,360 --> 00:49:39,360
चलिए जैसे कीने मैं ये पूछ रहा हूं

655
00:49:39,360 --> 00:49:43,400
की जो आपने कहा कि गायत्री माता ही

656
00:49:43,400 --> 00:49:45,160
सर्वोपरि है

657
00:49:45,160 --> 00:49:49,320
मतलब भगवती को ही सर्वोपरि रखा गया है है ना यह

658
00:49:49,320 --> 00:49:53,640
कहा आपने तो किसी भगवान के किसी रूप

659
00:49:53,640 --> 00:49:58,080
का सर्वोपरि होना या ना

660
00:49:58,080 --> 00:50:03,880
होना यह किस बात पर निर्भर करता

661
00:50:03,880 --> 00:50:08,760
है म सपरी होना ना होना किस बात पर निर्भर करता

662
00:50:08,760 --> 00:50:14,760
है देख भगवान तो

663
00:50:19,320 --> 00:50:23,400
को अच्छा जाता मैं उसी जगह

664
00:50:23,400 --> 00:50:27,800
पर चलो अभी आया

665
00:50:27,800 --> 00:50:33,800
आवाज सा पा

666
00:50:41,800 --> 00:50:45,920
है तो यह जा चुके हैं फिर से आएंगे मेरे ख्याल

667
00:50:45,920 --> 00:50:49,960
से आशा करते हैं अभी तक की चर्चा आपके लिए कुछ लाभदायक रही

668
00:50:49,960 --> 00:50:55,960
हो

669
00:50:57,280 --> 00:51:01,920
मेरा आग्रह है कोई भी इस तरह से अगर आने वाला है तो वह

670
00:51:01,920 --> 00:51:05,960
हर महादेव पाड़ी जी हर हर

671
00:51:05,960 --> 00:51:10,040
महादेव पहाड़ी जी डेली अपने वीडियोस के माध्यम

672
00:51:10,040 --> 00:51:14,240
से प्रतिकार कर रहे हैं रामपाल के ज्ञान का

673
00:51:14,240 --> 00:51:17,320
अज्ञान का

674
00:51:17,320 --> 00:51:23,320
सॉरी तो आप उनको फॉलो अवश्य करें टी आर पाड़ जी

675
00:51:23,360 --> 00:51:27,440
को मेरा आग्रह है जो भी इस तरह से चर्चा

676
00:51:27,440 --> 00:51:31,680
करने के लिए आते हैं तो वह एक अच्छे इंटरनेट की जगह पर हो तभी

677
00:51:31,680 --> 00:51:35,800
आए उनको जब मतलब ये सुनिश्चित हो जाए कि यहां पर इंटरनेट अच्छा आता

678
00:51:35,800 --> 00:51:40,160
है वहीं आकर के जुड़े अगर जहां पर वह है वहां पर इंटरनेट

679
00:51:40,160 --> 00:51:42,920
अच्छा नहीं है तो वह ना जुड़े और अगर उन्हें

680
00:51:42,920 --> 00:51:46,960
जुड़ना उनके लिए महत्त्वपूर्ण है तो वह अपने घर से निकल कर के उस

681
00:51:46,960 --> 00:51:51,680
जगह जाएं जहां पर इंटरनेट अच्छा हो फिर वहां से वो जुड़े

682
00:51:51,680 --> 00:51:56,120
मेरा आग्रह है इस तरह से क्या होता है समय सबका खराब होता है

683
00:51:56,120 --> 00:52:00,280
और दर्शकों को भी वो कंटेंट नहीं मिल पाता

684
00:52:00,280 --> 00:52:06,280
है जो जिसके लिए व आए हैं देखने के

685
00:52:10,880 --> 00:52:15,280
लिए जी पुष्पदंत जी बताए

686
00:52:15,280 --> 00:52:18,760
बताइए जी भैया

687
00:52:18,760 --> 00:52:22,880
बोलिए अभी जो चर्चा चला शिव और शक्ति ठीक

688
00:52:22,880 --> 00:52:26,880
है अगर आपने ये

689
00:52:26,880 --> 00:52:31,520
कहा कि कहीं ना कहीं शक्ति सर्वोपरि है जी जी

690
00:52:31,520 --> 00:52:36,560
कहीं ना कहीं शक्ति सर्वोपरि है तो जी

691
00:52:36,560 --> 00:52:40,640
जी कहीं ना कहीं शक्ति जो सर्वोपरि आप कह रहे

692
00:52:40,640 --> 00:52:45,200
हो तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि भगवान के किसी रूप

693
00:52:45,200 --> 00:52:49,280
को सर्वोच्च मानने अथवा ना

694
00:52:49,280 --> 00:52:52,840
मानने का क्या आधार है

695
00:52:52,840 --> 00:52:56,920
आपका ना मान इसमें ना मानने कोई विषय ही नहीं तो माना

696
00:52:56,920 --> 00:52:58,080
ही जाएगा इसको क्योंकि

697
00:52:58,080 --> 00:53:02,280
वो भगवान सर्वशक्तिमान है चाहे वो मातृ रूप में हो या पिता के रूप में हो

698
00:53:02,280 --> 00:53:06,440
तो फिर आप ही तो कह रहे हो कि कहीं ना कहीं वो सर्वोपरि है आप भेद कर रहे हो ना

699
00:53:06,440 --> 00:53:10,800
थोड़ा सा व मैं समझ रहा हूं आपकी अनन्य भावना

700
00:53:10,800 --> 00:53:15,400
है आप भगवती में सबको देखो

701
00:53:15,400 --> 00:53:19,640
आप भगवती भगवती को ही सब में देखो और सबको भगवती

702
00:53:19,640 --> 00:53:23,720
में देखो यह तो बात सही है मगर जब आप ऐसे कहने लगेंगे कि

703
00:53:23,720 --> 00:53:27,800
भगवती कहीं ना कहीं सर्वोपरि है तो यहां आप की जो अपनी जो पर्सनल

704
00:53:27,800 --> 00:53:32,440
मनो भावना है व आप हावी कर रहे हैं सनातन सिद्धांतों

705
00:53:32,440 --> 00:53:36,800
पर समझ रहे हैं अच्छा जैसे मुझे मेरी माता इस दुनिया में

706
00:53:36,800 --> 00:53:40,920
मेरी माता जैसा कोई नहीं है इस दुनिया में ये मेरे

707
00:53:40,920 --> 00:53:45,000
लिए मेरी मेरी मेरा अनन्य का भाव है यह

708
00:53:45,000 --> 00:53:49,600
सत्य नहीं है बहुत ऐसी माएं होंगी जो अपने बच्चों के लिए बहुत

709
00:53:49,600 --> 00:53:53,760
बहुत प्यारी होंगी मगर मेरी अन्यता है कि मेरी

710
00:53:53,760 --> 00:53:58,400
मां जैसा कोई नहीं है मैं तो यही ही कहूंगा वास्तविकता

711
00:53:58,400 --> 00:54:02,400
भले ही है नहीं और भी कुछ माए ऐसी है दुनिया

712
00:54:02,400 --> 00:54:07,040
में जिन्होंने अपने बच्चों के लिए बहुत त्याग किया है है

713
00:54:07,040 --> 00:54:11,960
ना अपनी व हा तो अभी हम

714
00:54:11,960 --> 00:54:13,120
जो वो

715
00:54:13,120 --> 00:54:17,280
जो आपका व्यक्तिगत जो वो है ना अनंता अन्यता के लिए

716
00:54:17,280 --> 00:54:21,720
कि सब में मां को देखो और सबको मां में देखो

717
00:54:21,720 --> 00:54:26,520
है ना वो तो ठीक है मगर जब आप ऐसे खंडन करेंगे

718
00:54:26,520 --> 00:54:30,560
कहीं ना कहीं मां सर्वोपरि है और जो पिता है वोह

719
00:54:30,560 --> 00:54:34,600
कहीं ना कहीं थोड़ा समझ रहे हैं तो फिर

720
00:54:34,600 --> 00:54:38,800
मुझे वहां पर आपको पूछना पड़ेगा कि आपका मां

721
00:54:38,800 --> 00:54:43,320
को सर्वोपरि और पिता को थोड़ा

722
00:54:43,320 --> 00:54:47,480
सा नीचे निम्न मानने

723
00:54:47,480 --> 00:54:53,480
का आधार क्या है किस आधार पर कहते

724
00:54:53,520 --> 00:54:57,920
हैं नहीं निम्न की बात नहीं है माता देखो मां

725
00:54:57,920 --> 00:55:01,920
जो एक कार्य कर सकता है वह पिता पिता नहीं करता अगर सांसारिक दृष्टि

726
00:55:01,920 --> 00:55:07,920
से देखा जाए अभी मैं एक चीज आपको बताऊ एक

727
00:55:08,000 --> 00:55:14,000
बुक जो कार्य पिता कर सकता है व मा भी नहीं कर

728
00:55:14,080 --> 00:55:18,120
सकती सक बातो पर चलते हम लोग अगर मन

729
00:55:18,120 --> 00:55:22,160
की बातें करेंगे तो उसम तो काफी इधर उधर होते रहेंगे आप सैद्धांतिक

730
00:55:22,160 --> 00:55:26,320
बातें बोलिए जी मतलब आपको

731
00:55:26,320 --> 00:55:30,680
पढ़ाई गई हो जो आपको शास्त्रों में पता हो आप उसके आधार पर बात करिए

732
00:55:30,680 --> 00:55:35,000
मन के जो तर्क होंगे तो उस पर हमारा खामखा बहुत लंबा टाइम जाएगा

733
00:55:35,000 --> 00:55:39,200
उससे कुछ निचोड़ आना नहीं है आपको जो सिखाया गया है समझाया

734
00:55:39,200 --> 00:55:45,200
गया है पढ़ाया गया है सिद्धांत गायत्री परिवार के आप उनको रखिए

735
00:55:45,680 --> 00:55:50,280
जी देखो येर के सिद्धांत

736
00:55:50,280 --> 00:55:54,640
है त्रिदेव और त्रिदेव और भगवती इसमें कोई अंतर भेद

737
00:55:54,640 --> 00:55:58,920
अब मैं एक बात आपको बता रहा हूं आप आप त्रिकाल संध्या

738
00:55:58,920 --> 00:56:02,800
करते हैं

739
00:56:02,800 --> 00:56:08,800
क्या आप त्रिकाल ब्रम संध्या करते हैं

740
00:56:09,480 --> 00:56:13,680
जी अच्छा तो त्रिकाल ब्रह्म संध्या करते है

741
00:56:13,680 --> 00:56:18,080
तो उस संध्या बंधन में किसकी संध्या बंधन करते हैं आप

742
00:56:18,080 --> 00:56:22,240
मैं भाई साहब आप क्या कर रहे हैं ना आप पहले अपने क्लेम को बता

743
00:56:22,240 --> 00:56:26,720
नहीं रहे हैं आप सीधे समझाने लग रहे हैं समझ

744
00:56:26,720 --> 00:56:30,720
नहीं रहे आप मेरी बात आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये

745
00:56:30,720 --> 00:56:35,040
पूछ रहा हूं कि आप मुझे ये बताइए

746
00:56:35,040 --> 00:56:39,400
कि आपका किसी को सर्वोपरि मानने अथवा ना मानने

747
00:56:39,400 --> 00:56:43,840
का आधार क्या है देखो

748
00:56:43,840 --> 00:56:48,120
वो आधार पहले क्लियर करिए कि जैसे आपने त्रिकाल संध्या

749
00:56:48,120 --> 00:56:52,200
के बारे में बोला तो आप यह बोलिए कि त्रिकाल संध्या में

750
00:56:52,200 --> 00:56:58,200
जिसकी पूजा होगी वो ही सर्वोच्च ब्रह्म है

751
00:56:58,400 --> 00:57:02,520
तो यह मेरा आधार है माता को सर्वोपरि मानने का ऐसा कुछ

752
00:57:02,520 --> 00:57:06,680
क्लेम करिए तब आप त्रिकाल संध्या में पूछिए कि आप किसकी पूजा

753
00:57:06,680 --> 00:57:10,800
करते हैं पहले अपना क्लेम तो बताइए कि मेरा आधार माता

754
00:57:10,800 --> 00:57:14,800
को सर्वोपरि मानने का मेरा आधार यह है क्योंकि

755
00:57:14,800 --> 00:57:18,120
संध्या बंदन जो है सभी के लिए उसमें माता की पूजा

756
00:57:18,120 --> 00:57:22,960
होती है इसलिए मैं यह मानता हूं कि माता ही सर्वोपरि

757
00:57:22,960 --> 00:57:27,120
है अब मैं यही चीज आपको बता रहा बड़े भैया और

758
00:57:27,120 --> 00:57:31,120
आपने उसको बोल दिया जैसे कि आप हम त्रिकाल ब्रह्म संध्या करते हैं ठीक

759
00:57:31,120 --> 00:57:35,720
है कोई कोई लोग एक ही संध्या आप क्लेम तो करिए पहले

760
00:57:35,720 --> 00:57:40,120
आप पहले सिद्धांत बताइए कहिए कि त्रिकाल संध्या

761
00:57:40,120 --> 00:57:44,160
में क्योंकि माता की पूजा होती है इसलिए मैं मानता हूं कि

762
00:57:44,160 --> 00:57:47,520
माता की पूजा ही सर्वोपरि

763
00:57:47,520 --> 00:57:51,960
है तो मैं आपको यही बात आपको बता रहा हूं कि त्रिकाल

764
00:57:51,960 --> 00:57:56,200
संध्या में जो भगवती की उपासना होती है ब्रह्म विद्या सावित्री

765
00:57:56,200 --> 00:58:00,240
की याने गायत्री की उसमें देखो सुबह हम जब वंदन करते

766
00:58:00,240 --> 00:58:04,320
हैं इसका आप नित्य आप गलत

767
00:58:04,320 --> 00:58:08,680
बात कर रहे हो मैं आपको कह रहा हूं पहले आप अपना आधार क्लियर

768
00:58:08,680 --> 00:58:13,640
करिए कि मैं इसलिए मानता हूं माता सर्वोपरि है

769
00:58:13,640 --> 00:58:17,960
वो लाइन बोलिए तो मैं आपसे जब

770
00:58:17,960 --> 00:58:21,960
पूछू अब उस लाइन को आप्लोर करिए तब आप

771
00:58:21,960 --> 00:58:26,520
एक्सप्लोर करके बताइए अभी आप पहले अपना क्लेम तो करिए हो स

772
00:58:26,520 --> 00:58:30,760
आपका क्लेम ही गलत साबित हो जाए चलो

773
00:58:30,760 --> 00:58:33,280
ठीक है मैं अपना अपना क्लेम अपना

774
00:58:33,280 --> 00:58:37,960
बात रख रहा हूं ठी देखो

775
00:58:37,960 --> 00:58:42,200
से करके उसम ले जाता हूं फिर

776
00:58:42,200 --> 00:58:46,800
उसके बाद जो आपके पास है वो आप बताइएगा

777
00:58:46,800 --> 00:58:51,040
जिस मां के गर्भ से हमारा जन्म होता है व मा तीन

778
00:58:51,040 --> 00:58:56,160
कार्य करता है

779
00:58:56,160 --> 00:59:00,280
जाके वापस आइए आवाज नहीं आ रहा है अटक

780
00:59:00,280 --> 00:59:06,280
रहा है ठीक है ठीक है ठीक

781
00:59:08,480 --> 00:59:14,480
है

782
00:59:20,920 --> 00:59:26,920
हम देख लेते हैं एक लास्ट बार देख लेते हैं

783
00:59:34,200 --> 00:59:40,200
वो लिंक दे

784
00:59:48,400 --> 00:59:52,480
दीजिए हां आप अपना क्लेम बोल दीजिए

785
00:59:52,480 --> 00:59:56,480
कि मैं जैसे मैं मेरे से कोई पूछे मैं मान लीजिए दो मिनट के

786
00:59:56,480 --> 01:00:00,760
लिए कि मैं राम को ही सर्वोपरि मानता हूं तो अब मुझसे

787
01:00:00,760 --> 01:00:05,200
कोई पूछ रहा है कि राम को सर्वोपरि आपका किसी को

788
01:00:05,200 --> 01:00:09,440
आपका किसी को सर्वोच्च अथवा सर्वोच्च सर्वोच्च

789
01:00:09,440 --> 01:00:13,480
मानना अथवा ना मानने का आधार क्या है या मुझसे कोई

790
01:00:13,480 --> 01:00:17,600
पूछे कि राम को सर्वोच्च मानने का आधार क्या है तो अब मैं पहले

791
01:00:17,600 --> 01:00:22,000
ये बताऊंगा कि देखो श्री राम

792
01:00:22,000 --> 01:00:23,560
ने श्री राम

793
01:00:23,560 --> 01:00:27,880
ने धनुष्य से रावण को मारा तो इसलिए मेरा आधार

794
01:00:27,880 --> 01:00:32,440
यह है कि जो धनुष्य रावण को मारेगा वही सर्वोच्च

795
01:00:32,440 --> 01:00:36,920
होगा तो यह मेरा आधार है राम को सर्वोच्च मानने का

796
01:00:36,920 --> 01:00:40,960
ठीक है उसके बाद कोई पूछे अच्छा राम ने रावण

797
01:00:40,960 --> 01:00:45,480
को मारा कहां लिखा है क्या हुआ है वह बात की बात है

798
01:00:45,480 --> 01:00:49,760
मैंने आपको अपना क्लेम बताया कि भाई जो रावण को धनुष बाण

799
01:00:49,760 --> 01:00:54,920
से मारेगा वो वही सर्वोच्च होगा यह मेरा आधार

800
01:00:54,920 --> 01:00:59,080
है तो ऐसे आप अपना आधार

801
01:00:59,080 --> 01:01:05,080
बताइए मेरा आधार है श्रीमद् देवी भागवत महापुराण

802
01:01:05,240 --> 01:01:09,320
से आप फिर प्रमाण पर आ रहे हैं आप बोल लीजिए अपनी

803
01:01:09,320 --> 01:01:11,800
बात बोल

804
01:01:11,800 --> 01:01:16,080
लीजिए मैंने आप आ प्रमाण

805
01:01:16,080 --> 01:01:20,360
सुनिए मैंने आपसे प्रमाण मांगा क्या अभी मांगा है क्या

806
01:01:20,360 --> 01:01:24,800
आप प्रमाण बाद में बताइए मुझे आप अपनी बात तो कहिए वो सिद्धांत

807
01:01:24,800 --> 01:01:28,800
क्या है कि जो ऐसा होगा वो सर्वोच्च होगा जो ऐसा

808
01:01:28,800 --> 01:01:33,280
करेगा वो ये होगा वो सिद्धांत तो बता दीजिए फिर मैं अगर मांगू

809
01:01:33,280 --> 01:01:37,800
प्रमाण के संबंध में मुझे प्रमाण दीजिए तो प्रमाण दीजिए आप

810
01:01:37,800 --> 01:01:42,200
सुनो मैं मां को इसलिए प्रमाण दे रहा हूं कि हम निजी जीवन में जब हमारा पादु

811
01:01:42,200 --> 01:01:46,200
मां के गर्भ से हमारा जन्म होता है तो मां ही

812
01:01:46,200 --> 01:01:50,320
तीनों का कार्य करता है पालन भी करता है पोषण भी करता है और हम

813
01:01:50,320 --> 01:01:54,520
मल मूत्र में रहेंगे तो उस मल मूत्र को धो करके उसको शुद्ध करके उसका संघार भी करता

814
01:01:54,520 --> 01:01:58,760
है वो इसलिए मा को मैंने सर्वोपरि माना है पिता को भी उसके

815
01:01:58,760 --> 01:02:03,120
ऐसा बात नहीं कि मैं पिता को नेगलेक्ट कर रहा मा और पिता

816
01:02:03,120 --> 01:02:07,440
यानी की अब मैं आपकी बात को समझने का प्रयास करता हूं आपका

817
01:02:07,440 --> 01:02:11,400
कहना है

818
01:02:11,400 --> 01:02:15,600
कि क्या कहते हैं क्योंकि एक बच्चे के जीवन में मां

819
01:02:15,600 --> 01:02:20,080
की उपयोगिता ज्यादा होती है इसलिए जो

820
01:02:20,080 --> 01:02:24,400
भगवान का ये जो स्वरूप है भगवती

821
01:02:24,400 --> 01:02:28,560
वाला वो सर्वोच्च है और अन्य स्वरूप थोड़े से डाउन

822
01:02:28,560 --> 01:02:32,960
है नहीं नहीं वैसा नहीं कह रहा हू डाउन की बात नहीं है मैं

823
01:02:32,960 --> 01:02:37,120
यहां पर जो मां की महत्वता है मैं उसम कभी नहीं मैं पहले भी आपको

824
01:02:37,120 --> 01:02:41,440
बताया कि मैं ब्रह्म में इसलिए मैं आपको पहले पूछा कि त्रिकाल संध्या

825
01:02:41,440 --> 01:02:45,640
में त्रि गायिक होता है एक ब्रह्म रूप में मध्यान में विष्णु रूप में और शाम

826
01:02:45,640 --> 01:02:49,760
के समय में शिव स्वरूप में होता है लेकिन वही

827
01:02:49,760 --> 01:02:53,760
वह त्रिगुणात्मक है और तीनों के गुण रह कर के तीनों का कार्य

828
01:02:53,760 --> 01:02:57,760
को संभालने की सामर्थ्य मां में है यह बता रहा हूं वही तीनों त्र गुणात्मक

829
01:02:57,760 --> 01:03:01,840
है उसी को हम ब्रह्मा भी कहेंगे सुब सुबह के संध्या

830
01:03:01,840 --> 01:03:05,840
काल में मध्यान काल में भाई साहब आप ना बात को रहे

831
01:03:05,840 --> 01:03:10,400
हो मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे आप पहले मुझे ये बताइए

832
01:03:10,400 --> 01:03:14,680
कि आपका किसी को सर्वोच्च मानने पहली तो यह बताइए कि सर्वोच्च

833
01:03:14,680 --> 01:03:18,720
कोई है कि नहीं है सब बराबर है या थोड़ा बहुत अंतर

834
01:03:18,720 --> 01:03:22,720
है अगर अंतर है कोई सर्वोच्च है तो

835
01:03:22,720 --> 01:03:26,400
उसको सर्वोच्च मानने का कारण क्या है वो हिंदी में

836
01:03:26,400 --> 01:03:30,400
बोल दीजिए भाई साहब एक बार मैं यही

837
01:03:30,400 --> 01:03:35,080
तो मैं आपको बता रहा हूं जी हां आप ये बता रहे

838
01:03:35,080 --> 01:03:39,400
आप ये बता रहे हो सुनिए आप ये बता रहे हो कि मां ही तीनों

839
01:03:39,400 --> 01:03:43,440
के रूप में कार्य करती है आप मुझे यह बताइए

840
01:03:43,440 --> 01:03:47,640
कि क्योंकि भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश बनके कार्य करती

841
01:03:47,640 --> 01:03:51,840
है शास्त्रों के अनुसार इसलिए मैं मानता हूं

842
01:03:51,840 --> 01:03:57,840
कि भगवती ही सर्वोच्च है यह क्यों नहीं बोल पा रहे आप

843
01:03:58,120 --> 01:04:02,760
मैं तो वही तो बता रहा हूं भैया श की बात ले रहा

844
01:04:02,760 --> 01:04:06,840
आध आप वो आधार बोलिए कि जो जो जो

845
01:04:06,840 --> 01:04:11,440
सृष्टि का उत्पत्ति स्थिति और समार करता है

846
01:04:11,440 --> 01:04:15,640
वही सर्वोच्च होता है तो मां भगवती ही ब्रह्मा

847
01:04:15,640 --> 01:04:20,280
विष्णु महेश के रूप में जो सृष्टि है उसका

848
01:04:20,280 --> 01:04:24,360
उसका क्या कहते उत्पत्ति स्थिति और समार करती है इसलिए मां भगवती

849
01:04:24,360 --> 01:04:28,400
सर्वोच्च है य आप ना बोल करय बताने लगते हैं ये

850
01:04:28,400 --> 01:04:32,400
ठीक है नहीं नहीं हा यही बात है यही बात है जो आप

851
01:04:32,400 --> 01:04:36,480
बोल रहे हो यही बात है यही बात है यही बात है यही बात है कि मां

852
01:04:36,480 --> 01:04:40,600
भगवती के रूप में ही जो ईश्वर है वोह उत्पत्ति स्थिति

853
01:04:40,600 --> 01:04:41,880
और समार करता

854
01:04:41,880 --> 01:04:46,040
है मतलब ये ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप मां भगवती ही धारण

855
01:04:46,040 --> 01:04:50,560
करती है और कोई नहीं इसलिए इसलिए

856
01:04:50,560 --> 01:04:54,640
इसलिए मां भगवती ही मां

857
01:04:54,640 --> 01:04:58,680
भगवती ही मे लिए सर्वोच्च है ठीक है जी जी जी

858
01:04:58,680 --> 01:05:03,040
हा भैया अगर मैं अब ये जो बात है कि मां भगवती ही

859
01:05:03,040 --> 01:05:07,360
ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में ये कार्य करती है सारा सृष्टि का

860
01:05:07,360 --> 01:05:11,360
संचालन तो ये बात आप कहेंगे कि आप ये बात शास्त्रों में

861
01:05:11,360 --> 01:05:16,160
लिखी है भागवत में लिखी है देवी भागवत में लिखती है कई जगह लिखी है ठीक है

862
01:05:16,160 --> 01:05:20,160
ठीक है ना ठीक है ठीक है हा हा हा आपका आपका माता को

863
01:05:20,160 --> 01:05:24,560
सर्वोच्च मानने का कारण यही है कि शास्त्रों के अनुसार

864
01:05:24,560 --> 01:05:28,560
शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में

865
01:05:28,560 --> 01:05:33,240
सारा जगत का पालन समार उत्पति सब करती है ठीक है

866
01:05:33,240 --> 01:05:37,880
देख इतनी सरल लाइन थी आप बोल ही नहीं पा रहे इतनी देर से

867
01:05:37,880 --> 01:05:42,600
जी जी अब मैं बताता हूं आपको शास्त्रों

868
01:05:42,600 --> 01:05:47,280
में यह अगर लिखा है कि माता भगवती

869
01:05:47,280 --> 01:05:51,440
ही ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करती है तो क्या

870
01:05:51,440 --> 01:05:55,760
यह नहीं लिखा है कि शिवजी ही ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश

871
01:05:55,760 --> 01:05:57,280
का रूप धारण करते

872
01:05:57,280 --> 01:06:01,960
हैं यह बात ये बात भी सर्पी है इसमें कोई संदेह नहीं है

873
01:06:01,960 --> 01:06:06,160
तो फिर अंतर क्यों कर रहे हैं

874
01:06:06,160 --> 01:06:10,160
यानी कि एक मिनट यानी कि यानी

875
01:06:10,160 --> 01:06:14,160
कि यह आधार नहीं माना जा सकता जो आपने कहा कि

876
01:06:14,160 --> 01:06:18,480
शास्त्रों के अनुसार मां भगवती ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करती है

877
01:06:18,480 --> 01:06:22,680
यह आधार नहीं माना जा सकता क्योंकि शास्त्रों के ही अनुसार

878
01:06:22,680 --> 01:06:27,280
जैसे मां भगवती से अभी सब कुछ प्रकट हो रहा है वैसे ही शास्त्रों के ही अनुसार

879
01:06:27,280 --> 01:06:31,440
शिवजी से भी सब कुछ प्रकट हो रहा है शास्त्रों के ही अनुसार विष्णु

880
01:06:31,440 --> 01:06:35,600
से ही सब कुछ प्रकट हो रहा है यानी कि अगर आप इन

881
01:06:35,600 --> 01:06:39,720
दूसरे वालों को भी मानते हैं जहां पर मां भगवती प्रकट हो रही

882
01:06:39,720 --> 01:06:43,720
है शिव से ठीक है अगर आप दूसरे प्रमाणों को भी मानते हैं

883
01:06:43,720 --> 01:06:48,000
तो इसका मतलब इसको आधार नहीं मान सकते आपका मां भगवती

884
01:06:48,000 --> 01:06:52,120
को सर्वोच्च समझने का तो वह आधार अब क्या है अब क्यों मानते हो

885
01:06:52,120 --> 01:06:56,120
जब दूसरे प्रमाण भी हमें हमारे पास है तो फिर

886
01:06:56,120 --> 01:07:01,040
जो माता का रूप है और शिव का रूप है उसम भेद क्यों करते

887
01:07:01,040 --> 01:07:05,040
हो देख मैंने इसमें भेद नहीं ये

888
01:07:05,040 --> 01:07:09,600
तो एक ही मैंने पहले बताया भेद की बात नहीं है ना इसमें मैं तो भेद क

889
01:07:09,600 --> 01:07:12,280
बात आप ही तो कह रहे हो सर्वोच्च है कहीं ना कहीं

890
01:07:12,280 --> 01:07:16,520
उनका ज्यादा वो है वो मैं समझ रहा हूं आपकी वो भक्ति है उनके लिए

891
01:07:16,520 --> 01:07:20,760
मगर उनकी भक्ति को आप सिद्धांत के रूप में थोप मत

892
01:07:20,760 --> 01:07:24,840
अगर थोप तो दिक्कत जी

893
01:07:24,840 --> 01:07:28,840
हमारा एक भाव है जैसे कि हम देखे हैं

894
01:07:28,840 --> 01:07:33,040
तो हम सांसारिक दृष्टि देखते हम पुराण की दृष्टि से नहीं देखते पिता

895
01:07:33,040 --> 01:07:37,160
है मां है घर में ठीक है सब कुछ तो आधार पिता

896
01:07:37,160 --> 01:07:41,280
क्या है संसार की ओर जो भी कार्य करना होता है कमाना व

897
01:07:41,280 --> 01:07:45,320
माना मां घर में रहती बालक का पालन पोषण करती है भोजन कराती

898
01:07:45,320 --> 01:07:49,480
है तो इसलिए कहीं भी जाए जैसे कि हमारे सनातन धर्म

899
01:07:49,480 --> 01:07:53,600
में भी कहावत है मातृ देवो भवा पितृ देवो भवा आचार्य देव भवा

900
01:07:53,600 --> 01:07:58,040
अतिथि देवो भवा लेकिन मा का आता है सबसे पहले इसीलिए

901
01:07:58,040 --> 01:08:02,320
मां के स्थान को मैं सर्वोपरि मानता हूं मैं किसी परि चज को नहीं थता

902
01:08:02,320 --> 01:08:07,120
मैं जिद नहीं करता इसके विषय देखि आप

903
01:08:07,120 --> 01:08:11,400
यहां जब हम लोग धर्म की बात करने बैठे हैं जब हम कहीं

904
01:08:11,400 --> 01:08:15,440
से शास्त्रों की मर्मज्ञ संस्था से जुड़ने की बात कर रहे हैं

905
01:08:15,440 --> 01:08:19,600
तो आप अपने व्यक्तिगत तर्क मत दीजिए आपने कहा पुराणों से नहीं वेदों

906
01:08:19,600 --> 01:08:24,080
से नहीं तो मैं आपको एक प्रमाण दे देता हूं व्यक्तिगत तर्क

907
01:08:24,080 --> 01:08:26,600
अमान्य

908
01:08:26,600 --> 01:08:27,480
ब्रह्म सूत्र

909
01:08:27,480 --> 01:08:32,640
में दो एक 11 में व्यक्तिगत तर्क अमान्य

910
01:08:32,640 --> 01:08:36,920
है अब पहले तो मेरा आधार सुन लीजिए किसी को भी सर्वोच्च मानने

911
01:08:36,920 --> 01:08:41,000
और ना मानने का ठीक है

912
01:08:41,000 --> 01:08:45,440
जो हमारे शास्त्र है जो हमारे श्रुति शास्त्र

913
01:08:45,440 --> 01:08:49,480
है उनके द्वारा भगवान के किसी भी रूप को यदि

914
01:08:49,480 --> 01:08:53,920
मोक्ष दायक कल्याणकारी कह दिया गया

915
01:08:53,920 --> 01:08:58,000
जीवन मृत्यु से परे ले जाने वाला कह दिया गया

916
01:08:58,000 --> 01:09:02,360
तो वो रूप हमारे लिए सर्वोच्च है

917
01:09:02,360 --> 01:09:06,760
तो वो रूप शिव को भी कहा गया है वो रूप विष्णु

918
01:09:06,760 --> 01:09:10,920
को भी कहा गया है ये ये एकमात्र आधार है

919
01:09:10,920 --> 01:09:15,080
हमारे शास्त्रों ने किस रूप को मोक्ष दायक

920
01:09:15,080 --> 01:09:19,200
कहा भगवान के किस रूप को मोक्ष दायक कहा ये

921
01:09:19,200 --> 01:09:23,320
एकमात्र आधार है किसी को स्वीकार करने का सर्वोच्च

922
01:09:23,320 --> 01:09:27,440
रूप में परम ब्रह्म के रूप में ठीक है अब दूसरी बात य

923
01:09:27,440 --> 01:09:31,480
आ जाती है कि आपका कहना है कि मैं अपनी प्रैक्टिकल लाइफ में देखता

924
01:09:31,480 --> 01:09:35,680
हूं प्रैक्टिकल जो आपका जो आपने जो तर्क दिया उसमें मैं आपका खंडन करूंगा

925
01:09:35,680 --> 01:09:39,880
मगर पहले मैं आपको बता दूं खंडन नहीं करूंगा मैं समझाने का प्रयास

926
01:09:39,880 --> 01:09:42,520
करूंगा आप तो मित्र है खंडन की कोई बात

927
01:09:42,520 --> 01:09:47,440
नहीं है तो हा तो क्या है उसमें

928
01:09:47,440 --> 01:09:51,920
कि जब आप ये जब आप यह कहते कि नहीं मैं शास्त्रों

929
01:09:51,920 --> 01:09:55,960
नहीं मैं तो सांसारिक दृष्टिकोण से मैं मानता हूं ठीक है तो वहां पर मैं

930
01:09:55,960 --> 01:10:00,080
आपको शास्त्र की एक बात बताता हूं ब्रह्म सूत्र दो 11

931
01:10:00,080 --> 01:10:04,080
वहां लिखा है व्यास जी ने व्यक्तिगत तर्क

932
01:10:04,080 --> 01:10:08,080
अमान्य शास्त्र के विरोध में यदि आप

933
01:10:08,080 --> 01:10:12,160
व्यक्तिगत तर्क दे रहे हैं ये मैं मैं आपको शास्त्र बोल रहा हूं कि

934
01:10:12,160 --> 01:10:16,600
16 दो में लिखा है शिव की भक्ति मोक्ष दायक है

935
01:10:16,600 --> 01:10:20,840
तो शिव हो गए सर्वोपरि अब यहां पर जब मैंने आपको स्थिति

936
01:10:20,840 --> 01:10:24,920
बोल दी तो आप कह रहे हैं सांसारिक दृष्टिकोण से मैं मानता हूं कि वो

937
01:10:24,920 --> 01:10:29,120
है है ना तो यहां क्या हुआ व्यक्तिगत

938
01:10:29,120 --> 01:10:33,240
तर्क क्या हुआ व्यक्तिगत तर्क

939
01:10:33,240 --> 01:10:37,280
आप दे रहे हैं तो व्यक्तिगत तर्क अमान्य है सनातन धर्म

940
01:10:37,280 --> 01:10:41,400
ग्रंथों के आधार पर दो पांच व्यास स्मृति और

941
01:10:41,400 --> 01:10:45,560
ब्रह्म सूत्र दो एक 11 व्यक्तिगत

942
01:10:45,560 --> 01:10:49,720
तर्क अमान्य दूसरी बात अब मैं कह रहा

943
01:10:49,720 --> 01:10:53,720
हूं अब आपके प्रैक्टिकल जो आप बात तर्क दिया है उसका भी जवाब ले

944
01:10:53,720 --> 01:10:57,600
लीजिए आपने कहा कि कहीं ना कहीं वो मां

945
01:10:57,600 --> 01:11:01,600
है वो पालन पोषण और वो सब कर रही है इसलिए वो सर्वोच्च है और

946
01:11:01,600 --> 01:11:05,880
मैं अगर कह दूं कि वो जो पिता है जो बाहर से

947
01:11:05,880 --> 01:11:09,880
अन्न की व्यवस्था कर रहा है मां की भी वो

948
01:11:09,880 --> 01:11:13,960
मां के लिए भी कर रहा है अन्न की व्यवस्था कि तुम घर में बच्चे का भरण

949
01:11:13,960 --> 01:11:18,040
पालन पोषण करो और तुम्हारा भी भरण पालन पोषण पालन

950
01:11:18,040 --> 01:11:22,080
की व्यवस्था मैं करूंगा गेहूं मैं लाऊंगा चावल

951
01:11:22,080 --> 01:11:26,080
मैं लाऊंगा तो मैं कह रहा हूं वो सर्वोच्च

952
01:11:26,080 --> 01:11:30,080
क्यों नहीं वह माता के बराबर क्यों नहीं जो मां की भी भरण

953
01:11:30,080 --> 01:11:34,400
पोषण की व्यवस्था कर रहा है भाई मां अपना कर रही है और बच्चे का कर रही है

954
01:11:34,400 --> 01:11:38,480
पिता तो बाहर से लाकर के मां के लिए भी कर रहा है और वही

955
01:11:38,480 --> 01:11:44,480
करा हुआ माता के माध्यम से बच्चे तक भी पहुंच रहा

956
01:11:46,240 --> 01:11:52,240
है यह तीन प्रकार के हो गए

957
01:12:02,280 --> 01:12:06,360
जी जी तो इसलिए मेरा

958
01:12:06,360 --> 01:12:10,440
मेरा कहना है कि आप अपनी भक्ति करिए माता के प्रति मगर

959
01:12:10,440 --> 01:12:14,520
आप इसमें यह भेद बुद्धि का प्रचार ना करें माता

960
01:12:14,520 --> 01:12:18,560
ही सब में है और सब माता में है इस

961
01:12:18,560 --> 01:12:24,560
दृष्टिकोण को अपनाए बड़ा छोटा ना करें

962
01:12:26,880 --> 01:12:30,960
जैसे प्रयागराज में एक आलो

963
01:12:30,960 --> 01:12:35,000
बाग में आलो माता का मंदिर है तो वहां पर

964
01:12:35,000 --> 01:12:39,160
मैं साय काल में आरती हो रही थी वहां पहुंचा तो

965
01:12:39,160 --> 01:12:44,360
माता के दर्शन करके इतना भाव विभोर हो गया कि

966
01:12:44,360 --> 01:12:48,600
इतना भाव बोर हो गया कि आंसू निकलने लगे क्यों निकलने लगे

967
01:12:48,600 --> 01:12:52,840
क्योंकि वह माता में ही मुझे राम दिखने लगे मेरे राम इतने

968
01:12:52,840 --> 01:12:56,920
सुंदर रूप में यहां पर प्रकट हो गए तो सबको मैंने माता में

969
01:12:56,920 --> 01:13:00,920
देखा और माता को मैंने सब में देखा ठीक

970
01:13:00,920 --> 01:13:05,080
है और यह बात भी गीता में लिखी हुई है

971
01:13:05,080 --> 01:13:09,120
भगवत गीता तो यह तो रही य बात अब

972
01:13:09,120 --> 01:13:14,200
मुझे आप यह बताएं कि

973
01:13:14,200 --> 01:13:18,240
जिस कारण से आप अब तक यह मान रहे हैं कि ऐसा है

974
01:13:18,240 --> 01:13:22,480
वैसा है तो जाहिर सी बात है गायत्री परिवार के द्वारा आपको ये सिखाया

975
01:13:22,480 --> 01:13:26,680
जाता है हां यह मेरा व्यक्तिगत

976
01:13:26,680 --> 01:13:30,840
है उससे उससे नहीं सिखाया गया है यह बात गाय परिवार से आपको

977
01:13:30,840 --> 01:13:35,400
य नहीं सिखाया गया नहीं

978
01:13:35,400 --> 01:13:39,440
नहीं नहीं उसमें कोई अंतर भेद नहीं ये मेरा अनुभव के आधार

979
01:13:39,440 --> 01:13:44,320
पर आपको बताया ये चीज जो अपनी व्यक्तिगत वर्तमान में बताया नाय मेरा अनुभव है

980
01:13:44,320 --> 01:13:48,640
वो अनुभव अनुभव को काट दिया है शास्त्रों ने काट दिया व्यक्तिगत

981
01:13:48,640 --> 01:13:52,880
तर का मान्य होते हैं आप शास्त्रों के विरोध में यदि

982
01:13:52,880 --> 01:13:57,120
आप शास्त्रों को मानने वाले हैं और शास्त्रों के विरोध में व्यक्तिगत तर्क

983
01:13:57,120 --> 01:14:01,120
दे रहे हैं तो आप सिरे से अमान्य है आप

984
01:14:01,120 --> 01:14:05,560
तो यहां नास्तिक सिद्ध हो जाएंगे क्यों क्योंकि जो वेद

985
01:14:05,560 --> 01:14:09,680
जो वेद को नहीं मान जो वेद को नहीं मानते जो वेद

986
01:14:09,680 --> 01:14:14,520
को नहीं मानते हैं वो जो वेद का खंडन करते हैं वह सनातन

987
01:14:14,520 --> 01:14:18,520
परिभाषा के अनुसार नास्तिक मान लिया जाता है क्योंकि वेद का

988
01:14:18,520 --> 01:14:24,520
खंडन करने का मतलब है सर्वशक्तिमान सत्ता का खंडन करना

989
01:14:30,640 --> 01:14:34,800
ठीक है जी जी अब अब मैं ये पूछ रहा हूं कि

990
01:14:34,800 --> 01:14:38,960
चलिए अब अब आई गए तो थोड़ी सी और जानकारी कर ले जी

991
01:14:38,960 --> 01:14:43,200
जी जैसे की आपने कहा कि आपकी दीक्षा हुई है गायत्री

992
01:14:43,200 --> 01:14:47,320
परिवार के द्वारा जी यानी कि आपको गायत्री

993
01:14:47,320 --> 01:14:51,320
मंत्र प्राप्त हुआ है गायत्री परिवार के द्वारा ठीक है

994
01:14:51,320 --> 01:14:56,680
हा जी जी गायत्री परिवार तक य जो गायत्री मंत्र आया

995
01:14:56,680 --> 01:15:00,680
कैसे अब ये तो गुरु परंपरा वाला है उसके गुरु ने उसको दिया

996
01:15:00,680 --> 01:15:04,760
होगा तब से तब उसी से आया है गुरु के कौन है

997
01:15:04,760 --> 01:15:08,800
आपके गायत्री परिवार में गुरु कौन है अब

998
01:15:08,800 --> 01:15:13,640
गुरु पंडित श्री राम शर्मा चार्य को मानते हैं उनके गुरु वही

999
01:15:13,640 --> 01:15:18,280
उनके गुरु उनके हमारे दादा गुरु जी थे सर्वेश्वरा

1000
01:15:18,280 --> 01:15:22,400
अंद जी उनके गुरु अब उसके बारे में मेरे

1001
01:15:22,400 --> 01:15:26,440
को जानने वहां तक मेरा पहुंचने इत नहीं बता सकता मैं यानी कि आपको आपकी पीछे

1002
01:15:26,440 --> 01:15:30,520
की 10 पीढ़ियां भी नहीं पता है नहीं मैं भाई जितना मैं जानता हूं

1003
01:15:30,520 --> 01:15:34,640
उतना बताऊंगा भाई अब क्या कहीं पर लिखा है कि

1004
01:15:34,640 --> 01:15:40,640
पीछे की 10 पीढ़ियां 12 पीढ़ियां 20 पीढ़ियां इतनी ये

1005
01:15:42,280 --> 01:15:46,120
है

1006
01:15:46,120 --> 01:15:50,200
ऐसा नहीं अब वैसा तो मैं अभी पढ़ा नहीं है कोई बुक तो पढ़ा नहीं है तो मैं

1007
01:15:50,200 --> 01:15:54,360
नहीं इसके बारे में बोल ही नहीं सकता इसका मेरे पास कोई उत्तर ही नहीं है आपको पता

1008
01:15:54,360 --> 01:15:58,480
है कि सैद्धांतिक धरातल पर श्री राम शर्मा

1009
01:15:58,480 --> 01:16:03,000
चार्य ने किसको गुरु माना

1010
01:16:03,000 --> 01:16:07,160
है अब उसके बारे में स्वयं हमको

1011
01:16:07,160 --> 01:16:11,240
बताया जाता है कि दादा गुरु जी थे ना सर्वेश्वरा

1012
01:16:11,240 --> 01:16:15,280
नंद जी उन्हीं से उन्होंने गायत्री मंत्र की दीक्षा लिया था और

1013
01:16:15,280 --> 01:16:19,400
दीक्षा लेकर के पुचन करके उसने गायत्री का उसके आज्ञा अनुसार प्रचार

1014
01:16:19,400 --> 01:16:23,480
प्रसार किया था ऐसा हमको बताया पता है कि जो

1015
01:16:23,480 --> 01:16:27,720
जो राम जो राम शर्मा जी हैं

1016
01:16:27,720 --> 01:16:31,840
वो शंकराचार्य को मानते थे सैद्धांतिक धरातल पर गुरु

1017
01:16:31,840 --> 01:16:36,000
रूप में इसके बारे में मेरे को नॉलेज नहीं कुछ नहीं बोल सकता

1018
01:16:36,000 --> 01:16:41,200
मैं उन्होंने बुक लिखी है आदि शंकराचार्य

1019
01:16:41,200 --> 01:16:44,000
अच्छा

1020
01:16:44,000 --> 01:16:48,000
अच्छा तो उन्होंने आदि शंकराचार्य को गुरु रूप में स्वीकार किया

1021
01:16:48,000 --> 01:16:52,560
है दूसरी बात ये है कि आपको

1022
01:16:52,560 --> 01:16:56,720
यदि यह नहीं पता है कि य मंत्र आपके गुरुओं के पास

1023
01:16:56,720 --> 01:17:00,880
कहां से आए दो गुरु का नाम आप ले रहे हैं तो इसका मतलब हम

1024
01:17:00,880 --> 01:17:05,040
यह मानना पड़ेगा कि जिनको पता है कि गायत्री

1025
01:17:05,040 --> 01:17:09,160
मंत्र उनके पास कहां से आया उन्हीं कहीं से

1026
01:17:09,160 --> 01:17:13,320
कॉपी करके आपके गुरुओ ने गायत्री मंत्र आपको दिया यह मानना

1027
01:17:13,320 --> 01:17:17,480
पड़ेगा ना क्योंकि आपको तो पता नहीं है कहां से आया

1028
01:17:17,480 --> 01:17:21,840
परंपरा क्या है आपको पता है आपकी आपको कैसे पता

1029
01:17:21,840 --> 01:17:26,560
जोन आपको कैसे पता कि जो ज्ञान आप को दिया जा रहा है

1030
01:17:26,560 --> 01:17:30,560
वेद के अर्थ के रूप में वो वही ज्ञान है जो ईश्वर ने वहां दिया

1031
01:17:30,560 --> 01:17:34,560
था शुरुआत में हम क्योंकि आपको आपके गुरुओं का नाम तो पता

1032
01:17:34,560 --> 01:17:38,680
ही नहीं है अब दो जने को जानते हैं जी ज्यादा तो जानते नहीं तब

1033
01:17:38,680 --> 01:17:42,840
क्या क्या बताएं आपको तो इसका मतलब आपका जो गायत्री

1034
01:17:42,840 --> 01:17:46,880
मंत्र का अर्थ जो आप ले रहे हैं वो कहां से लिया है आपको नहीं पता है वो

1035
01:17:46,880 --> 01:17:51,640
गुरुओं से आया है परंपरा से आया है या आपने मन से दे दिया है आपको नहीं पता

1036
01:17:51,640 --> 01:17:56,920
है नहीं ये तो गुरु परंपरा ही बताया जाता है

1037
01:17:56,920 --> 01:18:00,200
अरे गुरु परंपरा क्या है

1038
01:18:00,200 --> 01:18:04,320
आपकी तो वही वही तो बताते जो जो गुरु उसके गुरु ने दिया

1039
01:18:04,320 --> 01:18:08,960
उसके गुरु ने उसको दिया वही स वो परपरा क्या है देखिए

1040
01:18:08,960 --> 01:18:13,520
देखिए गुरु ने उसको दिया तो मैं जिन गुरुओं का अस्तित्व

1041
01:18:13,520 --> 01:18:17,640
है हमें मालूम है जो राम शर्मा चार्य से बहुत पुराना है वो

1042
01:18:17,640 --> 01:18:21,720
मैं आपको बता दे रहा हूं आदि शंकराचार्य जी का अस्तित्व

1043
01:18:21,720 --> 01:18:25,960
श्री राम शर्मा चार्य से करीब ई हजार

1044
01:18:25,960 --> 01:18:29,960
वर्ष पुराना है ठीक है अच्छा

1045
01:18:29,960 --> 01:18:34,640
जी उनका अस्तित्व सिद्ध है और इसके साथ ही साथ

1046
01:18:34,640 --> 01:18:39,200
श्री राम शर्मा चार्य सैद्धांतिक धरातल

1047
01:18:39,200 --> 01:18:43,920
पर आदि शंकराचार्य जी को ही अपना गुरु मानते थे यह मेरे पीछे

1048
01:18:43,920 --> 01:18:48,400
य पंचदशी रखी है पंचदशी

1049
01:18:48,400 --> 01:18:52,560
इस पंचदशी का जो अनुवाद करने

1050
01:18:52,560 --> 01:18:56,560
वाले हैं वो है स्वामी प्रखर

1051
01:18:56,560 --> 01:19:00,960
प्रज्ञानंद सरस्वती पंचदशी किसका शास्त्र है पता है आपको

1052
01:19:00,960 --> 01:19:05,560
किसका शास्त्र शंकराचार्य जी का हा शंकराचार्य

1053
01:19:05,560 --> 01:19:09,920
कौन से विद्यारण्य स्वामी चंगेरी के शंकराचार्य

1054
01:19:09,920 --> 01:19:14,160
थे वो तो इसमें उनको गुरु

1055
01:19:14,160 --> 01:19:15,320
रूप में माना है

1056
01:19:15,320 --> 01:19:20,160
आपके जो स्वामी प्रखर प्रज्ञानंद सरस्वती जी है उन्होंने

1057
01:19:20,160 --> 01:19:24,280
और गुरु रूप में माना है तभी तो उनके शास्त्र की व्याख्या की है

1058
01:19:24,280 --> 01:19:28,400
ठीक है जी जी मैं आपको बता देता हूं देखिए ये

1059
01:19:28,400 --> 01:19:32,520
इसमें इनके इनके गुरु का नाम भी लिखा है मंत्र

1060
01:19:32,520 --> 01:19:36,600
दक्षा हम ये देखिए गायत्री

1061
01:19:36,600 --> 01:19:41,280
जी जी लिखा है हां हां हां वो

1062
01:19:41,280 --> 01:19:45,680
थोड़ा हां आपके जो ये है ये जो

1063
01:19:45,680 --> 01:19:50,200
प्रज्ञानंद सरस्वती ये राम शर्मा जी से दीक्षित

1064
01:19:50,200 --> 01:19:54,960
है गुरु है ना गायत्री परिवार से इनका सीधा-सीधा संबंध

1065
01:19:54,960 --> 01:19:59,080
ठीक है तो सैद्धांतिक रा पर इनको गुरु

1066
01:19:59,080 --> 01:20:03,160
इन्होंने गुरु किसको माना

1067
01:20:03,160 --> 01:20:07,920
है शंकराचार्य ठीक है जी

1068
01:20:07,920 --> 01:20:12,520
जी अब मुझे आप एक बात बताइए

1069
01:20:12,520 --> 01:20:17,880
कि क्या शंकराचार्य जी

1070
01:20:17,880 --> 01:20:21,960
ने वर्ण को कर्म से

1071
01:20:21,960 --> 01:20:26,800
माना है

1072
01:20:26,800 --> 01:20:30,840
अब मैं शंकराचार्य के बारे में ज्यादा नहीं जानता तो इसको मैं नहीं बोल सकता आपको

1073
01:20:30,840 --> 01:20:35,400
जानना चाहिए सुनिए इसलिए जानना चाहिए

1074
01:20:35,400 --> 01:20:40,320
इसलिए जानना चाहिए आपको आपको इसलिए जानना चाहिए

1075
01:20:40,320 --> 01:20:44,600
कि आपको यह कह कर के ज्ञान दिया जा रहा है कि जो गुरु परंपरा से आया है वही

1076
01:20:44,600 --> 01:20:48,840
हम आपको दे रहे हैं ठीक है आपको यह पता चल गया कि भाई गुरु

1077
01:20:48,840 --> 01:20:52,920
कौन थे पुराने तो अब आपको जो ज्ञान दिया जा रहा

1078
01:20:52,920 --> 01:20:57,360
है वो पुराने गुरुओ से मैच हो रहा है या विरोध कर रहा है

1079
01:20:57,360 --> 01:21:02,240
अगर विरोध हो रहा है जितने अंश में विरोध है उतने अंश में आपको इनका ज्ञान क्यों मानना

1080
01:21:02,240 --> 01:21:06,240
चाहिए शंकराचार्य जो

1081
01:21:06,240 --> 01:21:09,800
वर्ण है उसको जन्म से

1082
01:21:09,800 --> 01:21:15,160
नहीं जन्म से नहीं मानने वालों का विरोध करते हैं शंकराचार्य

1083
01:21:15,160 --> 01:21:18,240
शंकराचार्य जो कर्म आधारित वर्ण

1084
01:21:18,240 --> 01:21:23,200
व्यवस्था है वो नहीं मानते क्योंकि वो व्यवस्था व्यवस्था ही नहीं है अगर उस पर बात करेंगे बहुत देर हो जाएगी

1085
01:21:23,200 --> 01:21:28,400
मगर अभी बात मैं कर रहा हूं अगर गायत्री परिवार के

1086
01:21:28,400 --> 01:21:33,080
द्वारा जो वर्ण है उसको

1087
01:21:33,080 --> 01:21:37,200
कर्म से माना जाता है तो इसका अर्थ है कि

1088
01:21:37,200 --> 01:21:42,000
गायत्री परिवार के जो लोग हैं वह गुरु का विरोध कर रहे

1089
01:21:42,000 --> 01:21:46,120
हैं गुरु विरोध है और गुरु विरोध के लिए

1090
01:21:46,120 --> 01:21:50,800
बहुत अवस्था है बहुत सारी व्यवस्था पुराणों में

1091
01:21:50,800 --> 01:21:54,800
शति शास्त्रों में भी है कि जो गुरु

1092
01:21:54,800 --> 01:21:58,960
में और भगवान में भेद करे भेद बुद्धि रखे सब विरोध करने पर यह है वो

1093
01:21:58,960 --> 01:22:02,400
है बहुत सारे दंड है

1094
01:22:02,400 --> 01:22:08,400
तो क्या हुआ कहने का

1095
01:22:11,610 --> 01:22:15,640
[संगीत] अर्थ भाई य स्क्रीनशॉट लेकर

1096
01:22:15,640 --> 01:22:20,880
दिखा दीजिए जरा यह देखिए

1097
01:22:20,880 --> 01:22:25,160
धमकी स्क्रीनशॉट लेक दिखा दीजिए तो कहने का अर्थ आदि

1098
01:22:25,160 --> 01:22:29,400
शंकराचार्य जी ने वर्ण को कर्म से नहीं माना है

1099
01:22:29,400 --> 01:22:33,520
क्योंकि कर्म से मानने पर वो व्यवस्था ही नहीं होगी और

1100
01:22:33,520 --> 01:22:37,760
हम लोग किसी और दिन इस बात का रख लेंगे विवेचना आप ही आ जाइएगा

1101
01:22:37,760 --> 01:22:41,920
मगर अच्छी जगह इंटरनेट हो तब ठीक है किसी और

1102
01:22:41,920 --> 01:22:46,560
वर्ण ज से या कर्म से तो आप आ कर के उसम आप काउंटर करिएगा

1103
01:22:46,560 --> 01:22:51,040
फिलहाल आपको मैं बता दूं आदि शंकराचार्य ने

1104
01:22:51,040 --> 01:22:55,880
वर्ण को कर्म से नहीं माना है जन्म से माना है

1105
01:22:55,880 --> 01:22:59,960
ठीक है तो यहां पर इतनी इंफॉर्मेशन के अनुसार

1106
01:22:59,960 --> 01:23:04,120
अगर यदि आप बता रहे हैं कि गायत्री परिवार जो है वो क्या कहते

1107
01:23:04,120 --> 01:23:08,280
हैं कर्म से मानता है तो इतने अंश में गायत्री परिवार गुरु

1108
01:23:08,280 --> 01:23:12,440
विरोधी है यानी कि अधर्म

1109
01:23:12,440 --> 01:23:16,440
है ठीक है बाकी आपके

1110
01:23:16,440 --> 01:23:21,160
साथ कोई हमारा ऐसा कोई वैचारिक खास अंतर है नहीं आप

1111
01:23:21,160 --> 01:23:25,320
जो है आपने बताया कि वो शिवो शक्ति वो आपकी

1112
01:23:25,320 --> 01:23:29,440
अनन्य है माता के प्रति हम उसको प्रणाम करते हैं और बहुत अच्छे

1113
01:23:29,440 --> 01:23:34,160
भक्त है आप माता के भगवती के और रहिए और सब सब में उनको देखिए

1114
01:23:34,160 --> 01:23:38,400
उनको सब में देखिए और जो माता

1115
01:23:38,400 --> 01:23:42,800
के मंत्री दीक्षा ले ले माता को ही माता में ही अपनी

1116
01:23:42,800 --> 01:23:47,080
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग चुन ले उसको यही बताइए कि माता

1117
01:23:47,080 --> 01:23:51,880
ही सर्वोपरि है ऐसा ही मान कर के आप चलो

1118
01:23:51,880 --> 01:23:56,320
जी ये देखिए इस तरह की धमकियां आ रही है हमको वो देखिए सामने

1119
01:23:56,320 --> 01:24:00,320
मैं कमेंट में अभी पढ़ रहा था ना चैट में देख रहा था बहुत सारे चाकू मारेंगे बक

1120
01:24:00,320 --> 01:24:04,520
रहे हैं गाली बक रहे हैं आपको चाकू

1121
01:24:04,520 --> 01:24:08,720
मारने वाली अभी देखा है कमेंट निकाल एक

1122
01:24:08,720 --> 01:24:12,720
कोई बड़ा करके दिखा दीजिए कोई भी एक तीन एक साथ है

1123
01:24:12,720 --> 01:24:16,760
ना इसमें तो बहुत सारे दिए जी वो बहुत सारे गाली बकर ये क्या क्या

1124
01:24:16,760 --> 01:24:20,760
लिख रहे दुबे हुए को बहुत सार शब्द जो बोला नहीं जा सकता आपके

1125
01:24:20,760 --> 01:24:26,760
लिए लिखे हैं ये मैं पढ़ सकता

1126
01:24:27,080 --> 01:24:31,280
मत प माता बहन भी जुड़े होंगे ना मत पढ़ो मत पढ़ो मत पढ़ो

1127
01:24:31,280 --> 01:24:35,200
को मतलब

1128
01:24:35,200 --> 01:24:39,400
नहीं पढ़ने का कोई अर्थ नहीं है ना उसमें बहुत सारे गलत गलत शब्द लिखा

1129
01:24:39,400 --> 01:24:45,400
गया है फिर कोई मतलब नहीं है

1130
01:24:55,840 --> 01:24:59,480
कौन है भाई उड़न

1131
01:24:59,480 --> 01:25:03,480
फेडर ठीक है पुष्पदंत जी हम लोग किसी और दिन वो वर्ण व्यवस्था पर

1132
01:25:03,480 --> 01:25:07,760
बात कर लेंगे मगर आपको जांचना चाहिए आदि शंकराचार्य क्या कहते थे वर्ण

1133
01:25:07,760 --> 01:25:13,760
व्यवस्था के बारे में ठीक है नहीं नहीं जरूर जरूर ठीक ठीक है

1134
01:25:13,920 --> 01:25:17,920
भैया तो ये आज हमारी इनके साथ बात

1135
01:25:17,920 --> 01:25:22,360
थी कुछ चीजें थी जो शायद हमें आशा है कि

1136
01:25:22,360 --> 01:25:26,760
समझने का प्रयास करेंगे पुष्पदंत जी और फिर से हमारी

1137
01:25:26,760 --> 01:25:30,920
चर्चा आप लोग देख पाएंगे उन ट्रेडरस

1138
01:25:30,920 --> 01:25:35,800
जी बताए आपका चेहरा दिख नहीं रहा है

1139
01:25:35,800 --> 01:25:39,600
जुड़ क्या

1140
01:25:39,600 --> 01:25:44,320
हा आप जुड़ गए आपका चेहरा

1141
01:25:44,320 --> 01:25:49,120
नहीं एक सेकंड लेट में जाक फर जुड़ता हूं

1142
01:25:49,120 --> 01:25:55,120
लाइट में चले जाओ वसे चले जाओ कोई दिक्कत नहीं है

1143
01:26:03,360 --> 01:26:08,080
गाने वाले कहां के लोग हैं जो आपको गाली दे र है वो

1144
01:26:08,080 --> 01:26:12,200
अब यह तो अपना नाम राम पाली लिखे हुए संत रामपाल

1145
01:26:12,200 --> 01:26:16,240
संत रामपाल महाराज इनके यही सिखाते

1146
01:26:16,240 --> 01:26:20,360
हैं नहीं मैं तो एक वीडियो देख रहा था आप पुस्तक का दुकान लगा था

1147
01:26:20,360 --> 01:26:24,360
उसमें जाकर के वो ये आप बंद कराने के लिए

1148
01:26:24,360 --> 01:26:28,360
बोल रहे थे कि एक माता जी थे ना वो पुस्तक बेच रहे थे उसके बगल में एक और

1149
01:26:28,360 --> 01:26:34,360
लड़का कोई खड़ा था पुस्तक बंद करने के लिए बोल रहे थे तो देखा मैंने आपके

1150
01:26:43,520 --> 01:26:47,880
य इसमें एक बात और है ना कि जैसे आपने कहा ना कि माता सुप्रीम

1151
01:26:47,880 --> 01:26:51,880
है और क्या कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप वही

1152
01:26:51,880 --> 01:26:56,000
लेती है तो उसमें ये वाली बात ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप

1153
01:26:56,000 --> 01:27:01,000
में आने के बाद वो कोई छोटी थोड़ी ना हो जाती है

1154
01:27:01,000 --> 01:27:05,000
इसमें छोटे वाली बात ही नहीं ना हम जैसे के अभी आपको आपने हम चर्चा कि

1155
01:27:05,000 --> 01:27:09,120
तो उसम त्रिकाल ब्रह्म सं में तो वही तो दिखता है ना वही तो है दूसरा थोड़ी अंतर्द

1156
01:27:09,120 --> 01:27:13,520
कहा उसम अंतर्द है शक्ति कस

1157
01:27:13,520 --> 01:27:17,520
बस बस फिर कोई बात ही नहीं है बस आप ये वाला बात पता करना कि गायत्री

1158
01:27:17,520 --> 01:27:21,600
मंत्र के गुरु परंपरा क्या है क्या जो

1159
01:27:21,600 --> 01:27:25,800
गायत्री परिवार है वो वही शिक्षा दे रहा है वही न दे रहा है जो गुरुओ ने दिया

1160
01:27:25,800 --> 01:27:30,440
जिनको वो गुरु कहता है यह सब चीजें आप प करना ठीक है

1161
01:27:30,440 --> 01:27:34,720
जी जी जय श्री राम अंश शर्मा जी

1162
01:27:34,720 --> 01:27:39,200
जी जय श्री राम जय श्री राम जी जो भैया जी ने कहा कि देवी के लिए

1163
01:27:39,200 --> 01:27:43,360
तो इन्होंने बीच में वो देवी पुराण का भी जो उसम लिया था तो इसमें ब्रह्मा

1164
01:27:43,360 --> 01:27:47,480
विष्णु महेश का तो कोई भेद नहीं क्योंकि देवी पुराण में भगवती खुद ही कह रही है ब्रह्मा

1165
01:27:47,480 --> 01:27:51,480
विष्णु महेश में जो भेद करता है वो मेरा दोषी है और

1166
01:27:51,480 --> 01:27:55,480
भगवती देवी पुराण में स्पष्ट कह रही है कि मेरे पूजन

1167
01:27:55,480 --> 01:27:59,320
का जो फल भी देंगे वह स्वयं नारायण ही

1168
01:27:59,320 --> 01:28:03,360
देंगे देवी पुराण में एक बात देवी पुराण में एक बात और दी

1169
01:28:03,360 --> 01:28:07,520
गई है मैं जो तात्विक बात है पहली बात तो यह

1170
01:28:07,520 --> 01:28:12,320
लिखा है लोग कहते हैं शक्ति के बिना भगवान कुछ नहीं है

1171
01:28:12,320 --> 01:28:18,320
और शक्ति माता है

1172
01:28:19,240 --> 01:28:25,240
मगर जलाई गई किताब में यह था गायत्री जी

1173
01:28:26,240 --> 01:28:31,520
यह देखिए गायत्री माता के लिए क्या लिखा हुआ

1174
01:28:31,520 --> 01:28:35,840
है गायत्री माता के लिए बड़ा बद्दा लिखा है इन्होंने अगले

1175
01:28:35,840 --> 01:28:40,120
पेज प किसका बख ये

1176
01:28:40,120 --> 01:28:45,080
रामपाल का ये देखिए

1177
01:28:45,080 --> 01:28:50,080
आप में ये क्या क्या उल्टा पुल्टा लिखा है

1178
01:28:50,080 --> 01:28:54,280
भाई आप नहीं जानते क्या राम पालियो को चलिए

1179
01:28:54,280 --> 01:28:58,280
अरे मैं एक बात बता रहा हूं ये रामपाल वालों का

1180
01:28:58,280 --> 01:29:02,360
एक बुक आया था ज्ञान गंगा तो ज्ञान गंगा बुक बेचने

1181
01:29:02,360 --> 01:29:06,520
के लिए आया तो मैं इसी साइकिल स्टोर पर बैठा था जहां पंचर सुधारते वहां पर मेरा खेत

1182
01:29:06,520 --> 01:29:10,560
है बसि साहब के पास तो आया फिर उसने बोला कि पुस्तक के बारे में दिखाया फिर

1183
01:29:10,560 --> 01:29:14,600
अष्ट गी देवी की बात एक मैं मोबाइल वहां छोड़ दिया है कि मैं आपको दिखाते एक

1184
01:29:14,600 --> 01:29:19,440
कथावाचक भी चीज को कुछ जगह पर बोला है तो

1185
01:29:19,440 --> 01:29:23,640
मैं बोला अष्टांगी दुर्गा के बारे में बोला देवी भागवत में है हनुमान प्रसाद पदार गीता

1186
01:29:23,640 --> 01:29:27,640
प मैं बो मैं तुमको चैलेंज करता हूं गीता प्रेस गोरखपुर के हनुमान

1187
01:29:27,640 --> 01:29:32,360
प्रसाद पुदार के में कहीं पर अष्ट देवी के बारे में उल्लेख नहीं है

1188
01:29:32,360 --> 01:29:36,400
मैंने उसको बोला चलो मैं दिखाता फिर एक बार मैं से काल के च ज्ञान गंगा पढ़ना

1189
01:29:36,400 --> 01:29:40,680
चाहिए तो वो लोग फ्री में देते हैं पुस्तक इस बात के लिए मैं धन्यवाद करता हूं कि फी बांटते

1190
01:29:40,680 --> 01:29:44,720
हैं उसमें है क्या चीजें जरा मेरे को जानना है करके तो लाए बाइज्जत दिए

1191
01:29:44,720 --> 01:29:46,680
कोई रुपया पैसा नहीं ले और अच्छे से बर्ताव

1192
01:29:46,680 --> 01:29:50,680
कि मैंने उसको चाय पानी पिलाया और उसको सादर विदा किया था उन लोगों को तो

1193
01:29:50,680 --> 01:29:55,480
पुस्तक देखा मैंने पढ़ा तो बहुत सारी ऐसी चीजें लिखे गई है जो

1194
01:29:55,480 --> 01:29:59,480
कहना भी अच्छा बात नहीं है फिर उसको हम कुछ नहीं बोले उनको विध द

1195
01:29:59,480 --> 01:30:03,680
क्योंकि अति जैसे मैं आपको वो बता रहा था

1196
01:30:03,680 --> 01:30:07,800
उसमें एक बात ये लिखी गई है कि शक्ति

1197
01:30:07,800 --> 01:30:11,840
शक्तिमान को द्वैत भाव में नहीं डालती

1198
01:30:11,840 --> 01:30:16,000
समझ रहे जसे लोग ये कहते है ना शक्ति के बिना शिव कुछ नहीं

1199
01:30:16,000 --> 01:30:20,040
ये रस की बात है वो है सिद्धांत प

1200
01:30:20,040 --> 01:30:24,840
जब जाएंगे तो कहना पड़ेगा कि शक्ति शक्तिमान को द्वैत भाव में नहीं डालती

1201
01:30:24,840 --> 01:30:29,400
जैसे की शिवांश भाई सुनो ना एक मिनट वो क्या है मेरा

1202
01:30:29,400 --> 01:30:33,640
नेट पर खत्म होने वाला है डाटा तो आप चले जाइए

1203
01:30:33,640 --> 01:30:37,800
मैं बता दूंगा य पर आप चले जाइए नेट प डाटा खत्म हो ग मैसेज

1204
01:30:37,800 --> 01:30:43,120
आ गया कोई बात नहीं कोई बात नहीं जय श्री तो

1205
01:30:43,120 --> 01:30:47,440
शक्ति शक्तिमान को दैत भाव में नहीं डालती कहां लिखा है यह लिखा है देवी

1206
01:30:47,440 --> 01:30:52,160
भागवत जैसे कि मैंने कहा कि भगवान यहां खड़े हैं

1207
01:30:52,160 --> 01:30:56,440
ठीक है अब भाई खड़े तो उनका हाथ है एक

1208
01:30:56,440 --> 01:31:00,960
तो क्या दो तत्व हो गए क्या उनका हाथ अलग हो गया

1209
01:31:00,960 --> 01:31:01,960
क्या

1210
01:31:01,960 --> 01:31:06,040
वो अपने हाथों से कुछ करते हैं तो इसका मतलब हाथ अलग हो गया और

1211
01:31:06,040 --> 01:31:10,280
वो अलग हो गए यानी कि शिव है ही वही जिसमें शक्ति

1212
01:31:10,280 --> 01:31:14,400
है अगर शक्ति नहीं है तो शिव ही नहीं है अगर आप शिव को शिव मान

1213
01:31:14,400 --> 01:31:18,640
रहे तो आपको मानना पड़ेगा कि उसम शक्ति है तो शक्ति के अलग

1214
01:31:18,640 --> 01:31:24,520
होने की स्थिति का वर्णन ही नहीं हो सकता

1215
01:31:24,520 --> 01:31:28,880
जैसे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सच्चिदानंद

1216
01:31:28,880 --> 01:31:33,080
स्वरूप भैया ये भी तो भगवान में अगर य गुण है तो निर्गुण

1217
01:31:33,080 --> 01:31:37,440
कैसे यह गुण नहीं है यह उनका स्वरूप

1218
01:31:37,440 --> 01:31:40,000
भूत लक्षण

1219
01:31:40,000 --> 01:31:44,560
है भगवान भगवान तब ही है जब वह सच्चिदानंद स्वरूप है

1220
01:31:44,560 --> 01:31:49,600
और गुण क्या है जिनसे अलग होने के बाद भी भगवान भगवान

1221
01:31:49,600 --> 01:31:53,960
है जैसे आप भगवान अपनी त्रिगुण मई माया में आए

1222
01:31:53,960 --> 01:31:59,000
और उन्होंने तरह तरह के रूप लिए तरह तरह की लीलाएं

1223
01:31:59,000 --> 01:32:03,080
की मगर उनसे अलग होने के बाद भी वो

1224
01:32:03,080 --> 01:32:07,200
है सच्चिदानंद स्वरूप सच्चिदानंद से अलग हो जाएंगे तो वोह है

1225
01:32:07,200 --> 01:32:11,560
क्या नहीं है ठीक है तो इसलिए

1226
01:32:11,560 --> 01:32:15,720
यह लक्षण है उनका स्वरूप भूत लक्षण

1227
01:32:15,720 --> 01:32:17,040
तो पहली बात तो यह हो गई

1228
01:32:17,040 --> 01:32:21,160
दूसरी बात उसमें एक चीज और लिखी है कि ना ही

1229
01:32:21,160 --> 01:32:25,840
मैं स्त्री हूं ना ही मैं पुरुष

1230
01:32:25,840 --> 01:32:30,120
तो यहां पर वो माता के तत्व को ही सर्वोपरि मानने वाले

1231
01:32:30,120 --> 01:32:34,720
जो सिद्धांत है उसका खंडन हो गया भेद करने वाली

1232
01:32:34,720 --> 01:32:38,800
हम क्या है टची नाम का उसको वर्ण व्यवस्था पर परंपरा

1233
01:32:38,800 --> 01:32:42,840
पर बोल रहा है शिवांश भैया जय श्री राम जय श्री

1234
01:32:42,840 --> 01:32:47,000
राम आदेश च भैया आपसे थोड़ी बातचीत मतलब

1235
01:32:47,000 --> 01:32:52,080
बात करनी थी मुझे ये जो एमपी

1236
01:32:52,080 --> 01:32:57,880
खबर ये जो एमपी एमपी खबर फास्ट करके जो चैनल है

1237
01:32:57,880 --> 01:33:02,080
youtube1 दो हफ्ते पहले का या फिर मतलब 11 11

1238
01:33:02,080 --> 01:33:06,160
डेज पहले का उन्होंने इस तरीके से डाला है कि शिवांश का भाई

1239
01:33:06,160 --> 01:33:10,200
पोंगा पंडित वो आया और हमसे चर्चा की

1240
01:33:10,200 --> 01:33:14,440
और चर्चा करने के बाद शिवांश को ही कॉल लगाया और शिवांश

1241
01:33:14,440 --> 01:33:18,560
ने ही हमें फोन पर कहा कि वहां से भाग जाओ और

1242
01:33:18,560 --> 01:33:22,720
वो लोग जो भी कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं उनका जितना भी तथ्य है वो सारी चीजें सही

1243
01:33:22,720 --> 01:33:27,080
है तो ये लोग इस तरीके से लोगों को बहलाती फुसला

1244
01:33:27,080 --> 01:33:31,120
हैं कि मतलब समझ में ही ना आए जो खुद को बैल मानते

1245
01:33:31,120 --> 01:33:32,240
हैं वो मानेंगे उनकी

1246
01:33:32,240 --> 01:33:36,600
वो बात जो खुद को स्वीकार कर चुके हैं कि हम तो बैल बुद्धि

1247
01:33:36,600 --> 01:33:40,840
हैं मानेंगे उसकी बात मतलब ये लोग खुद

1248
01:33:40,840 --> 01:33:45,320
के ही लोगों को पंडित बनाकर और खुद के ही लोगों को रामपाल

1249
01:33:45,320 --> 01:33:49,480
का मतलब जो भी है रामपाल जी का शिष्य बनाकर एक दूसरे में

1250
01:33:49,480 --> 01:33:53,920
ही ये डिबेट करते हैं और जब कहा जाए

1251
01:33:53,920 --> 01:33:57,960
करने के लिए तो आते नहीं है एक चैनल है एसए न्यूज

1252
01:33:57,960 --> 01:34:02,000
करके हा एस न्यूज करके भी है उस पर बहुत

1253
01:34:02,000 --> 01:34:06,120
सारे यही चीज आ रही है कि व अपने लोगों को विपक्ष बनाकर उनको खड़ा करते

1254
01:34:06,120 --> 01:34:10,360
हैं और लास्ट में फिर व मान जाते हैं हा हा हम तो इस ज्ञान के बारे में जानते नहीं थे

1255
01:34:10,360 --> 01:34:16,360
और अब हम इसका अध्ययन करेंगे आपके गुरुजी का सत्संग सुनेंगे और ऐसा ऐसा व बात करते

1256
01:34:18,520 --> 01:34:22,520
हैं य ले लीजिए य वाला प्राइवेट

1257
01:34:22,520 --> 01:34:27,440
चैट वाला

1258
01:34:27,440 --> 01:34:31,720
य एक मिनट प्राइवेट चैट में आए तो इसका मतलब जुड़े होंगे तो फका

1259
01:34:31,720 --> 01:34:37,680
आई एड्रेस निकल सकता

1260
01:34:37,680 --> 01:34:41,760
है जी बताइए मैं जानता हूं ऐसे न्यूज वाले क्या

1261
01:34:41,760 --> 01:34:45,880
करते हैं चेहरे को राक्षस बनाया था

1262
01:34:45,880 --> 01:34:50,600
उन्होने क्या करें क्या करें सामना नहीं कर सकते ना

1263
01:34:50,600 --> 01:34:54,640
क्या कर व दिखाते भी ऐसे मतलब पडि जी आए ना तो ऐसे

1264
01:34:54,640 --> 01:34:59,840
पूरा ऐसे त्रिकुंड भी पूरा धारण ऐसे करेंगे या तिलक भी ऐसे जैसे पूरा धारण

1265
01:34:59,840 --> 01:35:04,080
करेंगे पंडित जी बैक जय श्री राम

1266
01:35:04,080 --> 01:35:08,680
जय श्री कृष्ण हर हर महादेव जय श्री राम ह

1267
01:35:08,680 --> 01:35:12,760
महादेव आपको देख के बड़ा दर्शकों को सुखद एहसास मिल

1268
01:35:12,760 --> 01:35:16,960
रहा हो रहा होगा बड़े

1269
01:35:16,960 --> 01:35:21,240
वत मैं तो जब मुझे पता लगा बश हो रही है

1270
01:35:21,240 --> 01:35:25,360
क्या नहीं नहीं भैया फैन चल रहा है फैन चल रहा है भैया मैं बंद

1271
01:35:25,360 --> 01:35:29,520
कर देता हूं इतनी ठंड में कहां प है आप साउथ

1272
01:35:29,520 --> 01:35:33,840
इंडिया मैं नहीं मैं मुंबई में रहता हूं भैया हा

1273
01:35:33,840 --> 01:35:37,960
तोव साउथ ही हो गया एक तरीके से यहां तो कड़कड़ जा रहे हैं

1274
01:35:37,960 --> 01:35:42,320
य तो हया जाम जा रही है

1275
01:35:42,320 --> 01:35:48,320
हां हमारा भी गाव उत्तर प्रदेश का ही है बट हम रहते मुंबई

1276
01:35:49,040 --> 01:35:55,040
में जी के भाई आए थेर आया र

1277
01:35:56,600 --> 01:36:00,760
फ शमा ने फोन करके बलाया मैं उसके आगे की कहानी बताता हू ना फ शमांस बोला

1278
01:36:00,760 --> 01:36:04,920
उन्होंने वहां से भाग जाओ लेकिन वो नहीं भागे फके

1279
01:36:04,920 --> 01:36:08,920
बाद व शास्त्रार्थ जो शास्त्रार्थ हुआ था व पर वो जीत गए फ

1280
01:36:08,920 --> 01:36:13,440
इसके बाद उन्हीं के चरण ने पिया हा हाा

1281
01:36:13,440 --> 01:36:17,600
हा चरण धो के पिया हा

1282
01:36:17,600 --> 01:36:22,560
ऐसी कहानी वो बता रहे उसके आगे कहानी मैं बता देता

1283
01:36:22,560 --> 01:36:27,000
हूं मैंने कहा वैसे वो इतने वैसे वो इतने नीच है

1284
01:36:27,000 --> 01:36:31,720
कि ड्रामा करने के लिए ये भी करना पड़ेगा तो कर देंगे

1285
01:36:31,720 --> 01:36:35,920
और और शिवांश जी को कॉल भी लगा शिवांश जी ने कहा कि वो जो जो भी काम कर रहे

1286
01:36:35,920 --> 01:36:40,120
हैं वो सही कर रहे हैं वो सब प्रमाणित है वेद के

1287
01:36:40,120 --> 01:36:44,880
अनुसार ऐसा उन्होंने कहा मतलब बनाए थे वीडियो

1288
01:36:44,880 --> 01:36:49,200
इसको अंग्रेजी में क्या कहते हैं पता है डे ड्रीमिंग

1289
01:36:49,200 --> 01:36:55,200
सबने देखना हा

1290
01:36:55,200 --> 01:36:59,240
सिचुएशन क्रिएट करना

1291
01:36:59,240 --> 01:37:01,560
जी

1292
01:37:01,560 --> 01:37:06,040
तो ठीक है फिर आज की चर्चा सार्थक रही कुछ कुछ

1293
01:37:06,040 --> 01:37:09,320
आगे फिर देखा जाएगा

1294
01:37:09,320 --> 01:37:13,560
और ब्रह्मा कुमारी के साथ हमारी चर्चा हो चुकी है

1295
01:37:13,560 --> 01:37:17,920
वीडियो आने वाला है 1130 बजे रविवार

1296
01:37:17,920 --> 01:37:22,400
को यह रिलीज होगा बहुत बढ़िया चर्चा हुई है आनंद आएगा आप लोगों को

1297
01:37:22,400 --> 01:37:26,720
भैया आप लोग श शिवाज भ ये

1298
01:37:26,720 --> 01:37:30,960
आपने अभी जो कहा ब्रह्मा कुमारी इस के बारे में मतलब वीडियो आने वाला है और

1299
01:37:30,960 --> 01:37:35,200
मैं ये कहना चाहता हूं कि जैसे रामपाल जितने भी इनकी

1300
01:37:35,200 --> 01:37:37,840
जो भी कंपनी कह लीजिए जो भी है

1301
01:37:37,840 --> 01:37:41,960
जैसे इनको आपने एक्सपोज किया है उसी तरीके से आप ब्रह्मा कुमारी वालों

1302
01:37:41,960 --> 01:37:46,160
को भी एक्सपोज करिए क्योंकि भैया एक्चुअली मेरे परिवार में ही

1303
01:37:46,160 --> 01:37:51,200
एक दो जन ऐसे हैं जो कि उनसे जुड़े हुए

1304
01:37:51,200 --> 01:37:55,240
हैं हां तो आप जिस तरीके से तथ्य देंगे तो मैं उनके

1305
01:37:55,240 --> 01:37:59,320
सामने प्रस्तुत कर सकता हूं और उनको कह सकता हूं ना अभी तो ये

1306
01:37:59,320 --> 01:38:03,600
पौने दो घंटे का वीडियो बहुत पर्याप्त हैय आप लाइए उनको ब्रह्मा

1307
01:38:03,600 --> 01:38:07,640
कुमारी वालों को एक्चुअली यह लोग बात नहीं करते हैं ना

1308
01:38:07,640 --> 01:38:11,960
तो बात हो गई है अब देखिएगा आप लोग वीडियो है

1309
01:38:11,960 --> 01:38:16,040
इची करके कोई है जो विरोधाभास प्रकट कर रहे हैं ची

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01:38:16,040 --> 01:38:21,040
जी हमारा नंबर नोट कर लीजिए 74836

1311
01:38:21,040 --> 01:38:23,840
और उस पर

1312
01:38:23,840 --> 01:38:28,080
हमारा फॉर्म प्राप्त कर लीजिए फॉर्म को भरिए और

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01:38:28,080 --> 01:38:32,840
सामर्थ्य वान की तरह योद्धा की तरह सामना करिए सिद्धांतों

1314
01:38:32,840 --> 01:38:37,120
का कायरों की तरह जिन्होंने बचपन में माता का दूध

1315
01:38:37,120 --> 01:38:42,480
ना पिया हो उनकी तरह आचरण ना

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01:38:42,480 --> 01:38:46,920
करें अगर माता जी ने निष्ठा पूर्वक दुख का पान कराया

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01:38:46,920 --> 01:38:51,800
है स्वागत है हा ठीक है ना इची

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01:38:51,800 --> 01:38:56,080
जी वैसे ची हिची नाम की कंपनी थी ना वो

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01:38:56,080 --> 01:39:01,320
बाहर की वि विदेश की कहीं हा

1320
01:39:01,320 --> 01:39:05,320
जी ये वाले ता अपने आप को समझ रहे

1321
01:39:05,320 --> 01:39:09,480
हैं कोई बात नहीं आइए उसी की माया में ही लपेट दिया जाएगा

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01:39:09,480 --> 01:39:13,640
आप जो माया ता लाता है श

1323
01:39:13,640 --> 01:39:17,840
आदित्य आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए क्या करना होगा सबसे

1324
01:39:17,840 --> 01:39:22,000
पहले गोवर्धन मठ का प डाउनलोड करिए गोवर्धन

1325
01:39:22,000 --> 01:39:26,680
का प डाउनलोड करके व आपको रजिस्टर करवा दीजिए

1326
01:39:26,680 --> 01:39:30,920
और उसके साथ-साथ वहां से आपको वो

1327
01:39:30,920 --> 01:39:35,000
आएगा साथ ही साथ जो आपके प्रांत के आपको

1328
01:39:35,000 --> 01:39:39,840
नंबर दे दिया जाएगा आप लोग हमसे संपर्क कर लेना तो आपके क्षेत्र में जो

1329
01:39:39,840 --> 01:39:43,840
सक्रिय होंगे आपके वानी के कार्यकर्ता

1330
01:39:43,840 --> 01:39:47,960
तो व आपसे जो है संपर्क करेंगे ठीक है सबसे पहले अपने आपको

1331
01:39:47,960 --> 01:39:52,000
रजिस्ट करवा जैसे बजरंग जैसे बजरंग

1332
01:39:52,000 --> 01:39:56,080
दल वालों का विश्व हिंदू परिषद लोगों का जैसे ब्रांच होता है उसी तरीके से आदित्य वाहिनी का

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01:39:56,080 --> 01:39:58,720
भी हम

1334
01:39:58,720 --> 01:40:04,400
अच्छा ठीक

1335
01:40:04,400 --> 01:40:08,480
है अरे इनका स्क्रीनशॉट ले लो भाई प्राइवेट चैट वाले धमकी दे रहे

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01:40:08,480 --> 01:40:12,800
हैं गायत्री पार्क के पास रहता है ना

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01:40:12,800 --> 01:40:17,040
तू तेरे भाई का नाम आदित्य है ना सुधर जा समझ जा रामपाल

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01:40:17,040 --> 01:40:21,000
महाराज के खिलाफ मत

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01:40:21,000 --> 01:40:25,120
बोल रामपाल महाराज से कहिए अपनी वो किताबें

1340
01:40:25,120 --> 01:40:29,520
फट दे अपने वो वीडियोस मिटवा दे जिन्होने जिसम उन्होंने ब्रह्मा

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01:40:29,520 --> 01:40:33,720
विष्णु महेश भगवती और गणेश के विरुद्ध बोला है शंकराचार्य के विरुद्ध बोला

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01:40:33,720 --> 01:40:37,920
है और अपने ऐसे न्यूज चैनल वाले से कहो सारे वीडियो मिटा

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01:40:37,920 --> 01:40:42,760
दे जिसमें उन्होंने हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों की निंदा की है

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01:40:42,760 --> 01:40:47,520
है ना मेरा वीडियो रख लेना सौगात में

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01:40:47,520 --> 01:40:51,800
मेरी ओर से तुम्हारे ऊपर एक रहम है मेरे ऊपर जो वीडियो बनाया

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01:40:51,800 --> 01:40:56,040
वो रख लेना बाकी सारे वीडियो मिटा दो सारे वो किताबों

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01:40:56,040 --> 01:41:00,880
को फाड़ डालो आग लगा दो और खूब करो कबीर की भक्ति क्या दिक्कत

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01:41:00,880 --> 01:41:05,040
है दिक्कत रामपाल की या कबीर की भक्ति से नहीं है दिक्कत

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01:41:05,040 --> 01:41:09,480
है ब्रह्मा विष्णु महेश की निंदा से दिक्कत है

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01:41:09,480 --> 01:41:13,840
आचार्यों की निंदा से ठीक

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01:41:13,840 --> 01:41:14,840
है

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01:41:14,840 --> 01:41:19,000
तो ठीक है सभी को जय श्री राम आने

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01:41:19,000 --> 01:41:23,320
के लिए आभार तां जी आपसे मैं बात करता हूं वो हमारा

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01:41:23,320 --> 01:41:27,400
जोर का वो हैला ठीक

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01:41:27,400 --> 01:41:31,400
है शीराम भैया जय श्रीराम
