1
00:00:02,560 --> 00:00:07,480
सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

2
00:00:07,480 --> 00:00:09,720
होंगे

3
00:00:09,720 --> 00:00:14,520
और बहुत सारी चीजें हैं

4
00:00:14,520 --> 00:00:20,520
जो आपको काफी सारी चीजें पताई होंगी वैसे आपको

5
00:00:21,960 --> 00:00:25,960
एक न्यूज दे दे हमने जो

6
00:00:25,960 --> 00:00:30,000
पीला पर्चा होता है आश्रम वालों का

7
00:00:30,000 --> 00:00:34,520
उस पर कॉल करके पूछा था तीन

8
00:00:34,520 --> 00:00:37,280
चीजें

9
00:00:37,280 --> 00:00:43,200
कि

10
00:00:43,200 --> 00:00:49,200
यदि एक

11
00:00:52,120 --> 00:00:55,320
मिनट

12
00:00:55,320 --> 00:01:01,320
हमने कॉल करके पूछा था कि यदि

13
00:01:01,600 --> 00:01:05,640
आपके वो न्यूज चैनल पर यह बताया गया है कि भाई

14
00:01:05,640 --> 00:01:10,040
हमने शिवांश नारायण द्विवेदी को चर्चा के लिए बुलाया पर वोह आया

15
00:01:10,040 --> 00:01:14,120
नहीं तो हमने वहां पर यह पूछा कि आपने हमें चर्चा के लिए

16
00:01:14,120 --> 00:01:19,600
कब बुलाया है

17
00:01:19,600 --> 00:01:24,040
ना पहला बात पहली बात दूसरी बात मतलब

18
00:01:24,040 --> 00:01:28,120
वो कौन सा माध्यम था वो कौन सा मोड था कौन सा संसाधन था किसका

19
00:01:28,120 --> 00:01:32,120
आलंबन लेकर के आपने हमें चर्चा की लिए बुलाया दूसरी बात यह

20
00:01:32,120 --> 00:01:36,400
है कि यदि कोई ऐसा आपके पास एविडेंस था

21
00:01:36,400 --> 00:01:41,200
जिससे कि आप यह बता सके कि आपने हमें चर्चा के लिए बुलाया

22
00:01:41,200 --> 00:01:45,520
तो वह एविडेंस आपने वीडियो में दिखाया क्यों नहीं दर्शकों

23
00:01:45,520 --> 00:01:49,560
को कि यह देखिए हमने इस तरह से शिवांश नारायण द्विवेदी को चर्चा के

24
00:01:49,560 --> 00:01:55,240
लिए बुलाया

25
00:01:55,240 --> 00:01:59,520
और क्योंकि आपके जो जेल धाम निवासी

26
00:01:59,520 --> 00:02:03,760
जी है उन्होंने तो जब चर्चा के लिए बुलाया था जैसा कि उनका कहना है कि हमने बुलाया

27
00:02:03,760 --> 00:02:07,920
तो उन्होंने जिस माध्यम से बुलाया था वो रजिस्टर डाक के द्वारा वो

28
00:02:07,920 --> 00:02:11,960
तो वीडियो उसका डाला गया था पब्लिक को दिखाने के

29
00:02:11,960 --> 00:02:16,280
लिए शो करने के लिए तो फिर आपने जब मुझे चर्चा के लिए अगर बुलाया

30
00:02:16,280 --> 00:02:20,680
है ऐसा कोई आपके पास एविडेंस है वो

31
00:02:20,680 --> 00:02:24,720
एविडेंस आपने लोगों को क्यों नहीं क्यों नहीं दिखाया तो पहला सवाल कि

32
00:02:24,720 --> 00:02:29,280
आपने चर्चा के लिए बुलाया इसका एविडेंस क्या है दूसरा सवाल

33
00:02:29,280 --> 00:02:33,360
कि वह एविडेंस आपने अपनी वीडियो में क्यों नहीं दिखाया तीसरा

34
00:02:33,360 --> 00:02:37,360
सवाल कि इन दोनों को एक साइड कर दो अब बता दो

35
00:02:37,360 --> 00:02:41,680
कि चर्चा के लिए कब कहां किससे

36
00:02:41,680 --> 00:02:45,760
बात करनी है तो वह जो पीले पर्चे वाले

37
00:02:45,760 --> 00:02:50,120
भाई साहब है जो उसमें दो नंबर होते हैं पीले पर्चे में उसमें से दूसरा नंबर जो

38
00:02:50,120 --> 00:02:54,120
है पहले नंबर वाले तो बोले कि मैं बताता हूं बताता हूं उसके बाद उनका नॉट

39
00:02:54,120 --> 00:02:58,120
चेबल हो गया और दूसरे नंबर वाले बोले कि मैं बताता हूं आपको सभी सवालों का

40
00:02:58,120 --> 00:03:02,320
उत्तर मिलेगा आपको और मैं आज शाम तक ही दे दूंगा

41
00:03:02,320 --> 00:03:06,640
अभी शाम से रात्रि तो हो गई अभी तक तो आया नहीं है कोई देखिए

42
00:03:06,640 --> 00:03:10,440
एक दो दिन में आता है कि नहीं नहीं आएगा तो वह जो हम जरूर उस एविडेंस

43
00:03:10,440 --> 00:03:14,800
को य प्रस्तुत करेंगे क्योंकि आखिरकार कोई तो वजह होगी ना जो हमारा नाम शिवांश

44
00:03:14,800 --> 00:03:18,920
नारायण द्विवेदी है हम श्री राम के भक्त हैं प्रभु श्री राम

45
00:03:18,920 --> 00:03:23,320
की भक्ति करते हैं श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य के

46
00:03:23,320 --> 00:03:27,480
अल्पज्ञ शिष्य है है ना तो हम उसको जरूर आपको यहां पर

47
00:03:27,480 --> 00:03:31,880
दिखाएंगे कि उनका क्या जवाब आता है या

48
00:03:31,880 --> 00:03:35,920
क्या नहीं तो आज हमारे साथ में आने वाले एक भाई साहब हैं जो

49
00:03:35,920 --> 00:03:40,520
बाड़मेर से हैं और वह सतलोक मैनेजमेंट

50
00:03:40,520 --> 00:03:44,520
के फॉलोअर है कि नहीं यह नहीं पता मगर वो रामपाल जी के फॉलोअर है और

51
00:03:44,520 --> 00:03:48,560
रामपाल दास के फॉलोअर होने के रूप में वह रामपाल दास के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

52
00:03:48,560 --> 00:03:52,640
जो धर्म और ब्रह्म है उसके लिए वह आज आने

53
00:03:52,640 --> 00:03:56,880
वाले हैं तो उन्हीं

54
00:03:56,880 --> 00:04:01,080
का हम वेट कर रहे हैं इस समय

55
00:04:01,080 --> 00:04:07,080
नरेंद्र जी बाड़मेर से जुड़ने वाले हैं हमारे

56
00:04:09,000 --> 00:04:15,000
साथ मैं एक बार देख लेता हूं आप लोग तब तक वेट

57
00:05:55,080 --> 00:05:56,080
जी

58
00:05:56,080 --> 00:06:01,880
हां

59
00:06:01,880 --> 00:06:04,600
[संगीत]

60
00:06:04,600 --> 00:06:10,600
तो संभवत आ गए हैं नरेंद जी अपना कैमरा ऑन कर

61
00:06:13,360 --> 00:06:18,520
लीजिए नरेंद जी आपका कैमरा ऑन कर लीजिए

62
00:06:18,520 --> 00:06:24,520
ऑपरेटर महोदय इनको जोड़ दीजिए लाइव में

63
00:06:30,960 --> 00:06:34,920
नरेंद्र जी आपका कैमरा ऑन

64
00:06:34,920 --> 00:06:40,920
करिए ऑपरेटर जी इनको आप जोर दीजिए लाइव

65
00:06:40,920 --> 00:06:45,840
में कोई परेशानी है

66
00:06:45,840 --> 00:06:49,920
अच्छा तो देखिए जो भी है तब

67
00:06:49,920 --> 00:06:55,920
तक मैं कुछ चीज बता देता हूं

68
00:06:59,840 --> 00:07:03,880
तो जैसा कि हमने अपनी पिछली वाली लाइव में

69
00:07:03,880 --> 00:07:07,920
कुछ बातें बताई थी कुछ तर्क थे इनके वो काटे थे अच्छा

70
00:07:07,920 --> 00:07:11,920
एक बात और है एक आपने हमारी एक

71
00:07:11,920 --> 00:07:17,560
चर्चा सुनी होगी य रामपाल दास का फॉलोअर है

72
00:07:17,560 --> 00:07:21,960
रामपाल पवन दास उससे हमारी चर्चा हुई थी

73
00:07:21,960 --> 00:07:27,240
हालांकि उसने वीडियो बनाया था कि भा मैं रामपाल

74
00:07:27,240 --> 00:07:31,240
दास के रामपाल जी के जो सिद्धांत है उनको

75
00:07:31,240 --> 00:07:35,400
सिद्ध करने के लिए तैयार हूं ऐसा वीडियो बनाया था और

76
00:07:35,400 --> 00:07:39,480
मेरे ख्याल से उसने हमें पॉइंट में रख के नहीं बनाया था शायद उसने

77
00:07:39,480 --> 00:07:43,600
किसी न्यूज चैनल वाले के लिए बनाया था मगर उसके जो फॉलोअर्स है वह मुझे

78
00:07:43,600 --> 00:07:47,640
भेजने लगे तो मुझे लगा कि भाई मेरे लिए बनाया गया होगा मतलब मेरे लिए मैं भी

79
00:07:47,640 --> 00:07:50,120
उनमें से एक हूं जिनके समक्ष वह

80
00:07:50,120 --> 00:07:54,360
रामपाल के सिद्धांतों को सिद्ध करना चाहता तो मैंने फोन

81
00:07:54,360 --> 00:07:58,440
किया और वो फोन रिकॉर्डिंग आपने सुनी होगी

82
00:07:58,440 --> 00:08:02,720
उसमें वो शास्त्रों से सिद्ध नहीं करना चाहता है वो ये सिद्ध

83
00:08:02,720 --> 00:08:06,760
करना चाहता है कि जिसका भगवान सत्य होगा वो अपने भक्त को बचाने के लिए

84
00:08:06,760 --> 00:08:12,760
आ जाएगा नरेंद्र जी आप अपने कैमरे को ऑन करके जुड़े

85
00:08:12,920 --> 00:08:16,920
और कैमरे के साथ आए तो पहली

86
00:08:16,920 --> 00:08:21,120
बात तो ये कि जितने हमने शास्त्रोक्त तर्क और युक्ति से जब बात की तर्क

87
00:08:21,120 --> 00:08:25,320
प्रमाण और युक्ति से तो उसने उन सवालों का जवाब नहीं दिया जैसे

88
00:08:25,320 --> 00:08:30,400
कि जब हमने यह कहा कि भाई जब आपके यहां पर काल को मन कहा गया है

89
00:08:30,400 --> 00:08:34,880
तो फिर आप यह कैसे कह रहे हो कि मन किसी विशेष देश काल परिस्थिति में

90
00:08:34,880 --> 00:08:39,120
श्री कृष्ण के अंदर प्रवेश हुआ श्री कृष्ण के पास मन था तो वह पहले

91
00:08:39,120 --> 00:08:43,120
से ही था काल अगर मन काल है तो फिर

92
00:08:43,120 --> 00:08:47,920
मन को आप एक अलग से राक्षस बना कर के कैसे दिखा रहे हैं वह सब बात

93
00:08:47,920 --> 00:08:52,200
दूसरी बात

94
00:08:52,200 --> 00:08:56,680
कि मैंने उनसे पूछा कि

95
00:08:56,680 --> 00:09:00,760
अगर आपका ईश्वर जो है ईश्वर के विषय में आपके स त क्लियर है आपको

96
00:09:00,760 --> 00:09:04,760
आपके तत्व दर्शी ने तत्व बता दिया है तो बताइए कि भाई जब

97
00:09:04,760 --> 00:09:09,480
ईश्वर शरीर है तो जहां पर उसका शरीर है

98
00:09:09,480 --> 00:09:13,640
शरीर तभी हो सकता है जब उसके शरीर के अलावा भी खाली स्पेस

99
00:09:13,640 --> 00:09:17,680
हो तो यदि उसका शरीर है तो

100
00:09:17,680 --> 00:09:21,800
वो जो खाली स्पेस है उसका

101
00:09:21,800 --> 00:09:25,840
कबीर के द्वारा बनाया जाना सिद्ध नहीं होता ऐसे में जो ईश्वर है व अब्राम हो

102
00:09:25,840 --> 00:09:30,160
गया जो एक मिट्टी लेकर जो है घड़ा बनाता है ना कुमार

103
00:09:30,160 --> 00:09:34,240
ब्रिक ईश्वर क्या है जो मिट्टी लेकर घड़ा बनाता है मिट्टी को

104
00:09:34,240 --> 00:09:39,400
उसने नहीं बनाया वह मिट्टी को शेप देता है घड़े की यह हो गया

105
00:09:39,400 --> 00:09:43,440
ब्राहमम तो इसलिए घड़े में वो नहीं है कण

106
00:09:43,440 --> 00:09:47,520
कण में वो नहीं है अच्छा दूसरी बात य है इस बात

107
00:09:47,520 --> 00:09:52,040
हुई और फिर अंत में उसने कहा कि भाई

108
00:09:52,040 --> 00:09:56,480
जिसको भगवान का नाम मिल गया है अगर मान लो

109
00:09:56,480 --> 00:10:00,800
कि वो मोबाइल है मोबाइल अगर आप को नहीं पता है कि मोबाइल

110
00:10:00,800 --> 00:10:04,800
से क्या होता है क्या नहीं होता है या मोबाइल कैसे बनता है फिर

111
00:10:04,800 --> 00:10:07,360
भी मोबाइल से जो फायदा होना है वो

112
00:10:07,360 --> 00:10:11,360
आपको हो ही जाता है सही बात है सही कह रहे मगर मोबाइल में

113
00:10:11,360 --> 00:10:15,400
और भगवान में अंतर है भगवान को आप को प्राप्त करना है भगवान को ही

114
00:10:15,400 --> 00:10:19,440
आपको जानना जैसे कि बुक जैसे हमने बताया दूसरी बात यह है

115
00:10:19,440 --> 00:10:23,600
कि जो व्यक्ति ये कह रहा है कि मुझे भगवान का नाम

116
00:10:23,600 --> 00:10:27,640
मिल गया है उसके नाम पर ही तो डाउट है कि उसको भगवान का नाम ही मिला है

117
00:10:27,640 --> 00:10:31,640
कि नहीं मिला है और दूसरी बात यदि उसको कोई मतलब नहीं

118
00:10:31,640 --> 00:10:35,680
है कि उसको नाम मिल गया और उसको भगवान प्राप्त हो जाएगा तो वह आया

119
00:10:35,680 --> 00:10:39,880
है ना यह कहने कि मैं भाई मुझे जो नाम मिला है वह सही है और मैं आपके

120
00:10:39,880 --> 00:10:43,920
समक्ष इसको सिद्ध भी कर सकता हूं कहने का मतलब यह है कि

121
00:10:43,920 --> 00:10:48,080
अगर नाम का जो आलंबन है वह इसलिए है कि मैं नाम

122
00:10:48,080 --> 00:10:52,120
मुझे नाम प्राप्त हो गया मुझे तो मोक्ष प्राप्त हो जाएगा तो उस संदर्भ में अगर

123
00:10:52,120 --> 00:10:56,280
उसको मान भी लिया जाए दुर्जन तोष न्याय से तब भी जो वो

124
00:10:56,280 --> 00:11:00,360
वहां आकर के मुझसे बात कर रहा है वो व्यक्ति वो वहां पर इसलिए नहीं

125
00:11:00,360 --> 00:11:04,360
आया कि उसको मोक्ष मिल जाए वो वहां पर इसलिए आया कि मेरे को मैं जो नाम जप रहा हूं वो

126
00:11:04,360 --> 00:11:08,720
नाम सही है और उससे मोक्ष मिलता है वो इसलिए आया वहा पर

127
00:11:08,720 --> 00:11:12,720
तो जब वह उस नाम का उपयोग इस संदर्भ में भी कर रहा है कि मुझे अपने

128
00:11:12,720 --> 00:11:16,760
नाम को सही सिद्ध करना है तो उस संदर्भ में

129
00:11:16,760 --> 00:11:21,000
उसको नाम की व्याख्या करनी पड़ेगी और अगर वह नहीं करेगा तो मूर्ख कहलाएगा

130
00:11:21,000 --> 00:11:23,280
इलॉजिकल कहलाएगा

131
00:11:23,280 --> 00:11:27,800
और जैसा कि मैंने बताया कि जैसे मोबाइल होता है मोबाइल अगर

132
00:11:27,800 --> 00:11:31,920
एक साधन है तो मोबाइल के द्वारा जो साध्य है

133
00:11:31,920 --> 00:11:36,040
वह मोबाइल नहीं है साध्य क्या है कम्युनिकेशन वह

134
00:11:36,040 --> 00:11:40,160
साध्य है मोबाइल साधन है और कम्युनिकेशन यानी किसी

135
00:11:40,160 --> 00:11:44,880
से संपर्क करना किसी से वार्ता करना वह साधन है मगर

136
00:11:44,880 --> 00:11:49,200
कुछ चीजें ऐसी होती है साधन भी होती है और साध्य भी होती है जैसे कि

137
00:11:49,200 --> 00:11:53,240
बुक साधन भी है और साध्य भी है साध्य क्या है वहां पर बुक

138
00:11:53,240 --> 00:11:57,440
के अंदर का ज्ञान साधन क्या है बुक के रूप में वो जो हमें मिला है

139
00:11:57,440 --> 00:12:01,680
है ना तो इसी तरीके से से जो

140
00:12:01,680 --> 00:12:05,800
भगवान का विषय है वो हमारे मोक्ष

141
00:12:05,800 --> 00:12:10,080
प्राप्ति का तो है मगर साथ ही साथ साधन भी है तो साधन

142
00:12:10,080 --> 00:12:14,200
के रूप में मोक्ष प्राप्ति है और साध्य के रूप में हमें उसे जानना भी है इसीलिए कहा

143
00:12:14,200 --> 00:12:18,400
गया संशय आत्मा विनश्यति तो

144
00:12:18,400 --> 00:12:22,600
यह बात यह बात सही है कि कोई व्यक्ति अगर अनजाने

145
00:12:22,600 --> 00:12:26,720
में भी और उसको पता नहीं होगा तब भी वो

146
00:12:26,720 --> 00:12:31,520
नाम भजे अगर भगवान का तो बिल्कुल उसको मुक्ति मिल जाएगी

147
00:12:31,520 --> 00:12:35,520
मगर मगर काउंटर कहां पर है काउंटर है कि वो नाम भज रहा

148
00:12:35,520 --> 00:12:38,400
है कि नहीं भगवान का भगवान ने कहा

149
00:12:38,400 --> 00:12:42,480
वो लोग जो गलत विधि से मेरी पूजा भक्ति करते हैं वो

150
00:12:42,480 --> 00:12:46,600
लोग भी ढूंढ तो मुझे ही रहे होते हैं मगर अविधवा होने के कारण उनको

151
00:12:46,600 --> 00:12:50,720
मोक्ष नहीं मिलता तो जिसको आप नाम समझ रहे हो वो नाम

152
00:12:50,720 --> 00:12:54,960
नाम है कि नहीं बात तो इसी पर हो रही है ना अब अगर उनको नहीं मालूम

153
00:12:54,960 --> 00:12:59,200
है और आपको ऐसा लगता है कि उनको मोक्ष मिल जाएगा तो ठीक है अच्छी बात है आप मानते रहो

154
00:12:59,200 --> 00:13:03,680
उनको मोक्ष मिल जाए मगर उनको आना नहीं चाहिए अगर वह

155
00:13:03,680 --> 00:13:08,000
यह चीज प्रूफ नहीं कर सकते हैं कि वह जो नाम भज रहे हैं या वह जो नाम जिसका

156
00:13:08,000 --> 00:13:12,080
प्रचार कर रहे हैं या जिस नाम के प्रचार के नाम पर वह हमारे नामों

157
00:13:12,080 --> 00:13:16,160
का उल्लंघन कर रहे हैं हमारे नामों का जो है प्रतिकार कर

158
00:13:16,160 --> 00:13:20,440
रहे हैं या उनकी अवमानना कर रहे हैं वो भी वेदों

159
00:13:20,440 --> 00:13:25,040
के आधार पर पुराणों के आधार पर भगवत गीता के आधार पर

160
00:13:25,040 --> 00:13:29,480
तो उन्हें फिर यहां पर आना नहीं चाहिए य सब सिद्ध

161
00:13:29,480 --> 00:13:33,640
करने और ये हमारे पास एक इनकी ये

162
00:13:33,640 --> 00:13:39,640
फर्जी बुक और आई है और इसमें मैं आपको

163
00:13:52,360 --> 00:13:56,760
दिखाऊं ऑपरेटर महोदय उनसे संपर्क हुआ है

164
00:13:56,760 --> 00:14:01,450
क्या व इत्यादि के द्वारा

165
00:14:01,450 --> 00:14:06,880
[संगीत] क्या बोल रहे हैं वो आ पाएंगे या नहीं आ

166
00:14:06,880 --> 00:14:12,880
पाएंगे हां [संगीत]

167
00:14:22,560 --> 00:14:25,120
जी

168
00:14:25,120 --> 00:14:31,120
600 13 काल निरंजन की प्रतिज्ञा 612

169
00:14:32,200 --> 00:14:37,160
ये लोग जो कहते हैं ना कि अरे कहां लिखा है यह लिखा है वो लिखा है

170
00:14:37,160 --> 00:14:43,160
यह देखिए यह आप लोग पढ़ सकते

171
00:14:45,020 --> 00:14:48,560
[संगीत]

172
00:14:48,560 --> 00:14:51,000
हैं

173
00:14:51,000 --> 00:14:55,120
जब यहां से पढ़िए जब

174
00:14:55,120 --> 00:15:01,000
काल ने दुर्गा जी

175
00:15:01,000 --> 00:15:05,320
और इसके बाद फिर

176
00:15:05,320 --> 00:15:11,320
इसके बाद फिर ये

177
00:15:11,480 --> 00:15:15,760
का हाथ बाजू से पकड़ा तो

178
00:15:15,760 --> 00:15:19,840
देवी में भी यह

179
00:15:19,840 --> 00:15:23,240
आप लोग स्वयं

180
00:15:23,240 --> 00:15:29,240
पढ़िए है ना

181
00:15:33,120 --> 00:15:36,280
तो

182
00:15:36,280 --> 00:15:40,760
ये इनकी चीज

183
00:15:40,760 --> 00:15:44,840
है तो चलिए ठीक है मैं काम करता

184
00:15:44,840 --> 00:15:50,840
हूं मुझे लगता है कि वह जो आने वाले थे रामपाल जी

185
00:15:52,040 --> 00:15:56,360
के अच्छा एक चीज और है जैसे होता है ना कि जो

186
00:15:56,360 --> 00:16:00,440
पुराणों में जिस बात को रमण कहा गया है उसका दूसरा अर्थ भी है तो

187
00:16:00,440 --> 00:16:06,440
यहां पर ये जो लिखने वाला है वो चाहता है कि यह कहीं भी गलती

188
00:16:06,520 --> 00:16:11,640
से क्या कहते हैं ये गलती से भी जो है

189
00:16:11,640 --> 00:16:16,240
यह ऐसा ना समझ ले कि इस यहां पर जो रमण शब्द है इसका कुछ और

190
00:16:16,240 --> 00:16:20,360
अर्थ एक बार में एक बार अलंकार समाज इस बात पर शास्त्रार्थ

191
00:16:20,360 --> 00:16:25,400
हार गया था जो वैष्णव

192
00:16:25,400 --> 00:16:29,720
वैष्णवास्त्र जी उनसे उसमें क्या क्या हुआ था कि

193
00:16:29,720 --> 00:16:33,760
वो लोग रमण रमण की बात आ गई थी तो उन्होंने वहां सिद्ध करके दिखाया था कि

194
00:16:33,760 --> 00:16:37,920
रमण का अर्थ केवल यही नहीं होता है जो मैथुन क्रिया यही

195
00:16:37,920 --> 00:16:41,960
नहीं होती है और इसमें भी जो अलंकार समाज के द्वारा ही

196
00:16:41,960 --> 00:16:46,400
वेद भाष्य है जो स्वामी दयानंद जी ने किया है

197
00:16:46,400 --> 00:16:50,480
उस उनके ही वहां से निकाल कर के उन्होंने लिखा देखो यहां पर रमण का

198
00:16:50,480 --> 00:16:54,840
अर्थ दूसरा है तो यह जो लिखने वाला है यह

199
00:16:54,840 --> 00:16:59,840
रमण यह चाहता है कि आप इनके बारे में दुर्गा मां के बारे में गलत सोच

200
00:16:59,840 --> 00:17:03,920
गलत छवि आपके मन में बने इसलिए वहां पर जब इस तरह की व्याख्या उसको

201
00:17:03,920 --> 00:17:09,480
करनी भी तो वहा कोषक में लिखता है एसई

202
00:17:09,480 --> 00:17:13,760
एक्स सेक्स वह चाहता है

203
00:17:13,760 --> 00:17:19,760
व क्रिमिनल माइंड का है तो व यह चाहता है कि आप ऐसा

204
00:17:22,640 --> 00:17:26,880
सोचे र मैं एक कमेंट कर देता हूं यहां पर

205
00:17:26,880 --> 00:17:31,000
कमेंट ऑपरेटर जी आप य इसमें कमेंट कर दीजिए वो

206
00:17:31,000 --> 00:17:35,760
लाइव एक दो अगर बातें करनी हो तो हम कर सकते हैं

207
00:17:35,760 --> 00:17:41,280
और या फिर कोई है जो

208
00:17:41,280 --> 00:17:45,320
अ रामपाल जी के मत को सिद्ध करना चाहे तो

209
00:17:45,320 --> 00:17:49,520
वह आ सकता है यह लाइव

210
00:17:49,520 --> 00:17:55,520
स्ट्रीम का लिंक दे दिया गया है आप में से कोई आना चाहे तो आ सकता है

211
00:17:55,660 --> 00:18:01,660
[संगीत]

212
00:18:03,920 --> 00:18:08,720
क्या आपकी जो वीडियो प्राइवेट हुई है वह वापस नहीं आ सकते

213
00:18:08,720 --> 00:18:13,040
नहीं आएंगे उसमें कुछ टेक्निकल चीजें देख रहे हैं आएंगी जल्दी

214
00:18:13,040 --> 00:18:19,040
आएंगे

215
00:18:19,360 --> 00:18:21,800
और

216
00:18:21,800 --> 00:18:26,320
कोई कोई राम पाली हो जो आ सकता है जो जिसको लगता है कि

217
00:18:26,320 --> 00:18:30,800
माता जी ने निष्ठा पूर्वक कराया था उसको

218
00:18:30,800 --> 00:18:35,240
पान तो वो आ सकता है और

219
00:18:35,240 --> 00:18:39,400
अन्यथा आज लाइव आने का कोई ऐसा शेड्यूल नहीं था उन्होंने ही आग्रह

220
00:18:39,400 --> 00:18:43,920
किया था कि वो आना चाहते हैं बाड़मेर

221
00:18:43,920 --> 00:18:48,520
से हैं नरेंद्र जी मगर वो आए नहीं संभवत

222
00:18:48,520 --> 00:18:52,600
उनके यहां कुछ नेटवर्क या टेक्निकल इशू होगा क्योंकि वो किसी ऐसे क्षेत्र में थे

223
00:18:52,600 --> 00:18:57,520
जहां पर बत्ती कट रही थी जब हमने लास्ट टाइम उनसे बात की थी

224
00:18:57,520 --> 00:19:01,480
वत्सल भट्ट

225
00:19:01,480 --> 00:19:07,480
जी वत्सल भट्ट जी आप अपना कैमरा ऑन

226
00:19:13,440 --> 00:19:19,080
करें जी सुरेश जी जय श्री

227
00:19:19,080 --> 00:19:23,720
राम

228
00:19:23,720 --> 00:19:29,280
बताइए आवाज नहीं आ रही है [संगीत]

229
00:19:29,280 --> 00:19:33,320
जी बोलिए उनको बताया तो था हमने भाई ऐसे

230
00:19:33,320 --> 00:19:39,320
से जुड़ना है फिर भी क्या पता

231
00:19:39,880 --> 00:19:44,000
उ कोशिश कर रहे अभी तक व उनसे क्या पता क्या डिस्टर्ब हो रहा

232
00:19:44,000 --> 00:19:48,040
हम र उदयपुर में वो र बाड़मेर में सब अलग उनके पास

233
00:19:48,040 --> 00:19:52,120
ऐसा कोई जानकार नहीं है ना जानकार आदमी उनको मोबाइल फोन की दुकान

234
00:19:52,120 --> 00:19:56,160
पर जाना चाहिए ना ऐसे में वो गाव में

235
00:19:56,160 --> 00:20:00,360
रहते गाव में दुकान भी श दूर हो सकता है

236
00:20:00,360 --> 00:20:04,360
मेरे भाई व्यक्ति ट्रेन पकड़ता है बस पकड़ता है

237
00:20:04,360 --> 00:20:08,440
फिर शहर जाता है फिर शहर में किसी दुकान पर जाता है चूल्हे

238
00:20:08,440 --> 00:20:12,560
से रोटी निकालने के लिए चिमटे को अपना मुह जलाना पड़ता है हम भी तो गए

239
00:20:12,560 --> 00:20:16,800
ना अपना घर कोश कर आपको आप य बताओ

240
00:20:16,800 --> 00:20:21,000
हमें क्या पड़ी थी दिल्ली जाने की बवाना जाने की हम भी तो गए

241
00:20:21,000 --> 00:20:25,040
थे ना क्या मिला हमको वहां जा सोना चांदी तो मिल

242
00:20:25,040 --> 00:20:29,480
नहीं गया सच्चाई के लिए गए थे ना लिए

243
00:20:29,480 --> 00:20:33,560
करना पड़ता है हां करना पड़ता है

244
00:20:33,560 --> 00:20:37,840
आपको करना पड़ेगा आपको घर से बाहर निकलना पड़ेगा आपका जो कंफर्ट जोन है

245
00:20:37,840 --> 00:20:41,840
कई लोग मुझे फोन करते हैं कई लोग मुझे फोन करते हैं मैं करना चाहता

246
00:20:41,840 --> 00:20:46,200
हूं मैं करना चाहता हूं मगर जब करने की बारी आती तो उनकी जो जो डेली यूजुअल

247
00:20:46,200 --> 00:20:50,360
लाइफ है जो वो डेली जी रहे हैं वो

248
00:20:50,360 --> 00:20:54,360
प्रभावित होने लगती है तो इसलिए वह पीछे हट जाते हैं वो तभी तक कुछ

249
00:20:54,360 --> 00:20:54,880
कर सकते हैं

250
00:20:54,880 --> 00:20:58,880
जब तक उनकी सामान्य जीवन शैली प्रभावित ना हो और संघर्ष

251
00:20:58,880 --> 00:21:03,800
खून मांगता है तो इसलिए

252
00:21:03,800 --> 00:21:07,920
कुछ लोग ऐसे भी है जो यह कहेंगे कि भाई मैं आपका

253
00:21:07,920 --> 00:21:12,840
साथ दे देना चाहता हूं मगर मुझे कोई आप पद मत दीजिए कोई जैसे कई बार होता है ना कि

254
00:21:12,840 --> 00:21:16,960
कोई अगर संस्था है तो उसमें कहते हैं कि मैं मैं कार्य

255
00:21:16,960 --> 00:21:21,760
करूंगा मगर मैं कोई पद नहीं लूंगा क्यों नहीं लेंगे

256
00:21:21,760 --> 00:21:25,800
पद क्यों नहीं लेना चाहता व्यक्ति ऑफिशियल क्यों नहीं जुड़ना

257
00:21:25,800 --> 00:21:29,960
चाहता है इसलिए नहीं जुड़ना चाहता है कि मैं तब तक करूं जब तक मेरा मन

258
00:21:29,960 --> 00:21:34,000
कह रहा है जिस दिन मेरा मन ना कहे मेरे आराम के मेरे

259
00:21:34,000 --> 00:21:38,080
सहजता के विपरीत होगा कार्य तो मैं वहां पर उत्तर दायित्व नहीं होगा

260
00:21:38,080 --> 00:21:42,720
मेरा कि मुझे उत्तर देना है मैं क्यों नहीं कर रहा हूं जैसे कि

261
00:21:42,720 --> 00:21:46,880
लोग जिस आयु में विवाह नहीं करना

262
00:21:46,880 --> 00:21:51,240
चाहते हैं जिस आयु में लोग

263
00:21:51,240 --> 00:21:55,680
विवाह नहीं करना चाहते हैं उसी आयु में

264
00:21:55,680 --> 00:21:59,960
लोग आजकल कम कम आयु में ये गर्लफ्रेंड

265
00:21:59,960 --> 00:22:04,240
ये बॉयफ्रेंड ये सब चीजें हो रही है कि नहीं हो रही मतलब 18 18

266
00:22:04,240 --> 00:22:08,360
साल से भी पहले 18 साल तो बहुत हो गया 18 साल से भी

267
00:22:08,360 --> 00:22:10,280
पहले लोग गर्लफ्रेंड

268
00:22:10,280 --> 00:22:14,480
बॉयफ्रेंड इस तरह की चीजें करते हैं है ना उसी आयु में उनसे

269
00:22:14,480 --> 00:22:18,520
कह दे कि विवाह कर लो तो वो कहते हैं नहीं नहीं बाल विवाह हम नहीं करेंगे विवाह तो हम

270
00:22:18,520 --> 00:22:22,840
करेंगे जब बड़े हो जाएंगे तो जिस आयु में आपको ऑफिशियल जीवन

271
00:22:22,840 --> 00:22:27,640
साथी नहीं चाहिए उसी आयु में आपको अनऑफिशियल जीवन साथी क्यों चाहिए

272
00:22:27,640 --> 00:22:31,720
जिससे कि आपका जब तक मन है तब तक आप वहां पर

273
00:22:31,720 --> 00:22:36,040
अपना चीजें करें और उसके बाद समय आने पर जब आपका सहजता

274
00:22:36,040 --> 00:22:40,120
से बाहर हो जाए तो आपके पास एक स्पेस रहे कि भाई मैं जब चाहूं तब

275
00:22:40,120 --> 00:22:44,480
इससे अलग हो सकता हूं उसी तरीके से जो यह लोग होते हैं कि मैं

276
00:22:44,480 --> 00:22:48,720
मदद मैं कार्य तो करना चाहता हूं मैं कार्य मैं मदद करना चाहता

277
00:22:48,720 --> 00:22:52,880
हूं मैं फ्रीलांस होके करना चाहता हूं मैं कोई पद प्राप्त करके उस पद

278
00:22:52,880 --> 00:22:56,880
पर नियुक्त हो कर के कार्य नहीं करना चाहता हूं यह भी वही भावना होती है कि अगर

279
00:22:56,880 --> 00:23:01,000
मैं पद ले लूंगा तो एक दिन मेरे पूछा जाएगा कि आप यहां के महामंत्री है आप

280
00:23:01,000 --> 00:23:05,640
जिला अध्यक्ष है या जो भी है आपका यह दायित्व है आपने क्यों नहीं

281
00:23:05,640 --> 00:23:09,880
किया इसलिए भी तो चूहे से रोटी निकालने के लिए

282
00:23:09,880 --> 00:23:14,600
चिमटे को अना जलाना पड़ता है उनको अगर लगता है कि व सत्य के पक्षधर है

283
00:23:14,600 --> 00:23:19,440
तो अगर उन्होंने हमको समय दिया है तो उनको आना चाहिए

284
00:23:19,440 --> 00:23:24,320
बिल्कुल अभी वो जोधपुर

285
00:23:24,320 --> 00:23:25,480
अपना फेस

286
00:23:25,480 --> 00:23:29,720
दिखाए और ऑपरेटर जी इनका फेस इनका ऐड करने का ऑप्शन

287
00:23:29,720 --> 00:23:34,120
नहीं आ रहा है वत्सल भट्ट जी का वो थोड़ा सा देख लीजिए

288
00:23:34,120 --> 00:23:38,200
ऑप्शन क्यों नहीं आ रहा है जी सुरेश

289
00:23:38,200 --> 00:23:42,520
कुमार जी जय श्री राम जय श्री राम मेरा नाम ताजा

290
00:23:42,520 --> 00:23:46,560
राम है व मेरे बच्चे के नाम से है आईडी अच्छा अच्छा राजाराम

291
00:23:46,560 --> 00:23:50,960
जी बताइए नहीं ताजा राम राजाराम

292
00:23:50,960 --> 00:23:55,000
ना नहीं नहीं टी ए ताजा राम ताजा

293
00:23:55,000 --> 00:23:59,080
राम जी बताइए ताजा राम मैं भी बा में

294
00:23:59,080 --> 00:24:03,320
आज पता नहीं सब राजस्थान वाले जुड़े है आपसे अच्छा

295
00:24:03,320 --> 00:24:08,080
उदयपुर बाड़मेर

296
00:24:08,080 --> 00:24:12,600
बाड़मेर मेरे को तो यही पूछना था की मनुस्मृति

297
00:24:12,600 --> 00:24:16,920
हिंदी अनुवाद प्रमाणिक कौन सा है जो मुझे या पना कुलुक

298
00:24:16,920 --> 00:24:20,920
भट्ट का पढ़िए ना अभी बताया तो आपको ऑपरेटर महोदय ने नीचे कमेंट्स में

299
00:24:20,920 --> 00:24:25,560
कुलुक भट्ट का चौखंबा प्रकाशन से मिलता है कुक

300
00:24:25,560 --> 00:24:29,200
भ नलाइन

301
00:24:29,200 --> 00:24:33,480
चौखंबा से संपर्क कर लीजिए ऑनलाइन भी अवेलेबल होगा डायरेक्ट

302
00:24:33,480 --> 00:24:37,560
चौखंबा डालेंगे ना चौखंबा पके डालिए गल में

303
00:24:37,560 --> 00:24:41,680
उनका नंबर मिल जाएगा व से ठीक है और ऐसा

304
00:24:41,680 --> 00:24:45,720
करिएगा आप जो है यहां पर अभी चौ कंबा का नंबर अभी दिलवा देते

305
00:24:45,720 --> 00:24:49,720
हैं आपको ठीक है ठीक है ठीक है उसी

306
00:24:49,720 --> 00:24:54,160
के लिए यह भैया मैं

307
00:24:54,160 --> 00:24:58,360
करना कैमरा ऑन लेकिन मैं ब्राउजर सेटिंग्स कैसे चेंज करते हैं व

308
00:24:58,360 --> 00:25:02,520
थोड़ा बता दे तो आसानी रहेगी अब ये तो ऑपरेटर महोदय

309
00:25:02,520 --> 00:25:07,000
बता सकते हैं जी सुरेश जी आप ऐसा करिए उनसे संपर्क करिए

310
00:25:07,000 --> 00:25:11,840
और हम लोग फिर दोबारा किसी दिन लाइव आते हैं

311
00:25:11,840 --> 00:25:15,920
कोई दास जी करके आए हैं दास जी अपना कैमरा ऑन

312
00:25:15,920 --> 00:25:21,920
करने दास जी को आप ले लीजिए मुझे आप हटा दीजिए

313
00:25:25,960 --> 00:25:30,040
जी दास जी कैमरा ऑन ये मुझे ऐसा लग रहा है

314
00:25:30,040 --> 00:25:34,440
जो भी व्यक्ति कैमरा ऑन करके नहीं आ रहा है वो जुड़ नहीं पा रहा है

315
00:25:34,440 --> 00:25:38,480
हां यही प्रॉब्लम है कैमरा ऑन

316
00:25:38,480 --> 00:25:42,560
करके आए तो जुड़े या हमारी सेटिंग में

317
00:25:42,560 --> 00:25:48,160
कोई दिक्कत है क्या ऑपरेटर महोदय

318
00:25:48,160 --> 00:25:53,680
हा आप ऐसा करिए आप आ जाइए ना तो पता

319
00:25:53,680 --> 00:25:57,840
चलेगा आज हमारे विशेष अतिथि है जो ऑपरेटर ऑपरेटर बने हुए

320
00:25:57,840 --> 00:26:03,840
हैं

321
00:26:06,720 --> 00:26:10,840
आज मुझे लगता था एक अच्छी चर्चा देखने को मिलेगी क्योंकि कोई समझदार व्यक्ति मुझे लग रहा

322
00:26:10,840 --> 00:26:15,560
था ठहराव वाला व्यक्ति आने वाला था नरेंद्र जी के रूप में

323
00:26:15,560 --> 00:26:20,040
क्योंकि ज्यादातर आप लोगों ने देखा ही होगा किस तरह के लोग आते हैं

324
00:26:20,040 --> 00:26:24,400
रामपाल जी की ओर से अभी तक कोई मतलब मैंने देखा

325
00:26:24,400 --> 00:26:28,440
कि कुछ ठीक ठाक एक व्यक्ति य पवन दास थोड़ा मतलब

326
00:26:28,440 --> 00:26:32,520
ठहराव था थोड़ी मैच्योरिटी थी बातों में और यह जो

327
00:26:32,520 --> 00:26:36,080
आते हैं यह लोग जो

328
00:26:36,080 --> 00:26:41,000
ये देखा है एपीर वाइट चिंगम का ऐड करते हैं जो

329
00:26:41,000 --> 00:26:45,280
क्या नाम है क्या नाम बाबू

330
00:26:45,280 --> 00:26:49,280
राम हा बाबूराम देख उसको देख के

331
00:26:49,280 --> 00:26:53,320
एडेंट वाइट चिंगम की याद आती है और फिर वो एक

332
00:26:53,320 --> 00:26:57,520
आ जाते हैं वो तेल वाले अमित दास

333
00:26:57,520 --> 00:27:01,560
और बीच में में तो ना जाने एक से बढ़ के एक आ के गए हैं

334
00:27:01,560 --> 00:27:05,840
ऐसे ही शिष्य तैयार किए सभी के सभी दास

335
00:27:05,840 --> 00:27:10,120
जी आप कैमरा ऑन करें ऊपर आए और य जो यमराज

336
00:27:10,120 --> 00:27:16,120
जी हैं आप कैमरा ऑन करें

337
00:27:17,760 --> 00:27:21,960
भाई एम डी

338
00:27:21,960 --> 00:27:26,280
डिगाम

339
00:27:26,280 --> 00:27:30,920
डेगाना आइए ज से है

340
00:27:30,920 --> 00:27:35,160
जी देना जी राम राम जी जय श्री राम जय श्री

341
00:27:35,160 --> 00:27:39,320
राम जय श्री राम अरे सर जी हम तो कब से उनको आज

342
00:27:39,320 --> 00:27:43,680
कितनी बार हम बताए पर उनको समझ में नहीं आ रहा क्या करें कोई समझ में नहीं आ रहा

343
00:27:43,680 --> 00:27:47,680
सर अब क्या बताएं वो अच्छा आप लोग बता

344
00:27:47,680 --> 00:27:52,360
रहे थे कि वो जो रामपाल जी का वास्तविक उत्तराधिकारी वही है

345
00:27:52,360 --> 00:27:56,600
जी जी जी जी जी जी अच्छा

346
00:27:56,600 --> 00:28:00,680
ये भी एक नया टस्ट है का क्या वो बहुत

347
00:28:00,680 --> 00:28:04,720
चिस्ट क्या अब जब आए जब भी तो मजा आए ना

348
00:28:04,720 --> 00:28:08,800
जी जय श्री राम पर अगर अबकी

349
00:28:08,800 --> 00:28:13,520
बार मैं कह रहा हूं बार ऐसा होगा ना तो

350
00:28:13,520 --> 00:28:17,520
कर पा रहे हैं पूरी कोशिश करली हमने इधर मैं अभी कॉल प ही थे

351
00:28:17,520 --> 00:28:21,840
उनके साथ उने गलती से ना अपने माइक्रोफोन की और कैमरे

352
00:28:21,840 --> 00:28:25,920
की सेटिंग ब्लॉक कर दी है जिसकी वजह से क्या

353
00:28:25,920 --> 00:28:29,920
है हां ये प्रॉब्लम आ रही है यही प्रॉब्लम

354
00:28:29,920 --> 00:28:33,040
आ रही है मैं अभी कॉल प था उनके साथ बट

355
00:28:33,040 --> 00:28:37,040
मुझे लगता नहीं कि वो हो पा रहा पूरी कोशिश कर लिए नहीं हो पा रहा

356
00:28:37,040 --> 00:28:41,120
है उनको किसी से करवाना पड़ेगा वहां पर तभी कर पाएंगे

357
00:28:41,120 --> 00:28:45,240
ठीक है आप एक बार लिंक और दे दीजिए

358
00:28:45,240 --> 00:28:49,440
कोई और आना चाहे तो आ सकता है ठीक है आप लोग फिर जाइए अभी तो फिलहाल आपका कोई काम

359
00:28:49,440 --> 00:28:54,680
नहीं है और फिर बनाते हैं किसी दिन

360
00:28:54,680 --> 00:28:59,360
इंतजाम अबकी बार अगर बनाएंगे ना अपन तो

361
00:28:59,360 --> 00:29:03,680
आप में से कोई एकरी बात सुनि

362
00:29:03,680 --> 00:29:08,360
वही कहना चाह रहा आपको ही कना चाह रहा

363
00:29:08,360 --> 00:29:12,480
हूं वही मैं कहना चाह रहा अब टाइम निकालेंगे

364
00:29:12,480 --> 00:29:16,640
तो एक बोलो बो आप

365
00:29:16,640 --> 00:29:21,080
में से कोई एक व्यक्ति छुक छुक गाड़ी पकड़ के उनके पास चले

366
00:29:21,080 --> 00:29:25,080
जाएगी बिल्कुल नहीं उनको अबकी बार 100 पर

367
00:29:25,080 --> 00:29:30,480
ऐसा ही करना पड़ेगा उनको समझ में नहीं आएगा या उनको अपने पास बुला

368
00:29:30,480 --> 00:29:35,480
लीजिए दोनों में से एक काम करना पड़ेगा हां

369
00:29:35,480 --> 00:29:40,360
हां क्योंकि यह बहुत बड़ा ट्विस्ट है और बहुत बड़ा मतलब

370
00:29:40,360 --> 00:29:45,840
समझने की बात है क्या करें हम बहुत इच्छा तो बहुत हो रही है पर अब समय की बात

371
00:29:45,840 --> 00:29:48,200
है आज लग रहा है परमात्मा

372
00:29:48,200 --> 00:29:52,400
को इच्छा नहीं है वत्सल भट जी वत्सल भट्ट जी को ऐड करने का ऑप्शन

373
00:29:52,400 --> 00:29:56,400
ही नहीं आ रहा है मेरे पास कैसे ऐड करूं केवल तीन ऑप्शन आ रहे हैं

374
00:29:56,400 --> 00:30:00,480
उनके साथ भी यही समस्या है कि उन्होंने अपना डिवाइस कनेक्ट नहीं किया है तो जब तक

375
00:30:00,480 --> 00:30:04,840
वो अपना माइक और माइक्रोफोन या दोनों में से कोई एक नहीं देंगे एक्सेस

376
00:30:04,840 --> 00:30:08,840
तब तक हम उन्हें ऐड नहीं कर सकते ऊपर वत्सल भट्ट जी आपने शायद वो

377
00:30:08,840 --> 00:30:13,320
जब आपसे परमिशन मांगी गई होगी ना तो नॉट अलाउड कर दिया होगा आपने

378
00:30:13,320 --> 00:30:17,600
हां यही सब यही कर रहे हैं जबक इसको मीडियम वाला बीच वाला दबाना चाहिए

379
00:30:17,600 --> 00:30:21,880
इनको जी यहां पर यही समस्या आ रही है

380
00:30:21,880 --> 00:30:26,320
मैंने इनको बोला भी था पहले मैं इनको स्क्रीनशॉट स्कन स्क्रीनशॉट

381
00:30:26,320 --> 00:30:31,400
मार के भेजा था मैंने इसमें बीच वाला दबाना और कोई सा मत दबाना

382
00:30:31,400 --> 00:30:37,400
जी दीपक शुक्ला जी मोहित शर्मा जी जय श्री

383
00:30:38,960 --> 00:30:43,920
रामम टर हमारे चेहरे बड़े बड़े कर दीजिए

384
00:30:43,920 --> 00:30:49,920
जी उन्होने जो बलक कर दिया हुआ है ना अपना माइक और

385
00:30:51,000 --> 00:30:55,880
कैमरा है आप उनसे कौन सा ब्राउजर यू कर रहे

386
00:30:55,880 --> 00:30:58,520
आरही

387
00:30:58,520 --> 00:31:00,760
जी

388
00:31:00,760 --> 00:31:05,680
आप मिनट मिन जी मिनट शर्मा जी आप

389
00:31:05,680 --> 00:31:09,960
उनको जानते हैं क्या आपको प्रॉब्लम

390
00:31:09,960 --> 00:31:14,000
का सल में उन्होने कभी य सब चीज चलाई नहीं तो उनको

391
00:31:14,000 --> 00:31:18,320
फोन पर इस तरह से गाइड पर कर पाना बहुत टफ

392
00:31:18,320 --> 00:31:24,320
है बताता कसे करना होता है जी

393
00:31:24,800 --> 00:31:28,960
नहीं इस समय पॉसिबल नहीं है अब मोहित जी उनको

394
00:31:28,960 --> 00:31:33,760
सब बता दिया है सारे िक अपना लिए हमने जीली

395
00:31:33,760 --> 00:31:37,800
भी उनको एक्सेस दिला दिया हैम से बर यूज

396
00:31:37,800 --> 00:31:43,800
कर रहे हैं लेकिन व नहीं

397
00:31:45,080 --> 00:31:50,000
होराम जय श्री राम ज श्रीराम

398
00:31:50,000 --> 00:31:56,000
गुरुदेव मोहित जी मोहित जी एक मिनट शुक्ला जी से बात कर रहे जी शुक्ला

399
00:31:56,840 --> 00:32:02,480
जी और बात तो ये

400
00:32:02,480 --> 00:32:08,480
नोटिफ आवाज कट रही है

401
00:32:10,160 --> 00:32:15,000
आपकी आपकी आवाज कट रही है हेलो

402
00:32:15,000 --> 00:32:19,200
जी जी

403
00:32:19,200 --> 00:32:24,000
बोलिए आपका नेटवर्क ठीक नहीं है लग रहा है रहे हैं

404
00:32:24,000 --> 00:32:30,000
आपका नेटवर्क ची नहीं कट रही है नेटवक होगा जी

405
00:32:37,880 --> 00:32:42,000
बोलिए नोटिफिकेशन जो है आपका तो सब्सक्राइब किए

406
00:32:42,000 --> 00:32:46,040
हुए हैं लेकिन नोटिफिकेशन नहीं आ पाता है इसलिए जो है हम भी थोड़ा सा

407
00:32:46,040 --> 00:32:49,600
ये सोचते हैं कि तैयारी

408
00:32:49,600 --> 00:32:53,680
से हां बोले आप ही बोलिए बोलिए बोलिए

409
00:32:53,680 --> 00:32:58,400
हा नोटिफिकेशन नहीं आ तो

410
00:32:58,400 --> 00:33:02,480
जैसे य होता कि थोड़ा सा अपना

411
00:33:02,480 --> 00:33:06,880
प्रमाण लेकर के आता है जुटता है तो थोड़ा सा हम अपना कपी

412
00:33:06,880 --> 00:33:11,120
बनाए हुए हैं इनके जो है उस जो है

413
00:33:11,120 --> 00:33:15,200
प्रमाण के लिए तो अब राता तो जैसे इनका हम बहुत सा

414
00:33:15,200 --> 00:33:19,880
प्रमाण रखे हुए हैं लेकिन जो है नोटिफिकेशन नहीं हो पाता है तो इसलिए जो

415
00:33:19,880 --> 00:33:23,960
है किसकी तरफ से नहीं पाते हैं किसके

416
00:33:23,960 --> 00:33:29,040
पक्ष से प्रमाण किसके पक्ष से

417
00:33:29,040 --> 00:33:33,480
प्रमाण तो उनके खिलाफ अपना र है रामपाल

418
00:33:33,480 --> 00:33:38,360
के अच्छा तो वो वो तो ठीक है मगर

419
00:33:38,360 --> 00:33:42,520
जो नोटिफिकेशन वाली बात है वो य इसमें अभी उतना सक्रिय

420
00:33:42,520 --> 00:33:46,640
नहीं है आपको जरूरी नहीं है कि बिल्कुल तुरंत नोटिफिकेशन

421
00:33:46,640 --> 00:33:51,160
आए कभी डिले आती है कभी बाद आती आगे पीछे आती

422
00:33:51,160 --> 00:33:55,880
है हा अभी हम जो है वो जो है अभी

423
00:33:55,880 --> 00:34:00,040
खोले हैं तो आपका जो है लाइव चल रहा था तो जुड़े थोड़ा

424
00:34:00,040 --> 00:34:04,040
सा वो आप हमें ना वहा शेयर कर दीजिएगा व इत्यादि पर

425
00:34:04,040 --> 00:34:09,370
जो भी आपको लगता है कि आवश्यक है जी

426
00:34:09,370 --> 00:34:12,080
[संगीत]

427
00:34:12,080 --> 00:34:18,080
जी होता है जो है आपकी

428
00:34:20,360 --> 00:34:24,360
आवाज अभी आपकी आवाज आपकी आवाज जो है ठीक से नहीं आ रही है

429
00:34:24,360 --> 00:34:28,440
आप जाए और एक बार फिर नेटवर्क में जब आ जाए तब आप वापस आए

430
00:34:28,440 --> 00:34:31,040
है

431
00:34:31,040 --> 00:34:35,120
ना तो भाई ठीक है मेरे ख्याल से आज आना व्यर्थ ही

432
00:34:35,120 --> 00:34:39,120
रहा क्योंकि कोई जो आने वाले थे वह आ नहीं पा रहे हैं और अब

433
00:34:39,120 --> 00:34:43,160
कोई मुझे लगता है माई का लाल ऐसा बचा नहीं है

434
00:34:43,160 --> 00:34:47,160
जो रामपाल के सिद्धांतों को यहां पर आकर के प्रूफ कर दे आपने

435
00:34:47,160 --> 00:34:51,280
पवन दास के साथ हमारी बातचीत देख ही ली है सतलोक आश्रम वाले

436
00:34:51,280 --> 00:34:55,320
जो है मारे मारे फिर रहे हैं उनके पास तो कोई ऐसा है नहीं पवन दास उनसे

437
00:34:55,320 --> 00:34:59,440
तो ठीक ही है सतलोक आश्रम में मुझे नहीं लगता कि कोई है ऐसा जो

438
00:34:59,440 --> 00:35:04,120
आ सके सतलोक आश्रम से तो

439
00:35:04,120 --> 00:35:08,480
बाकी पवन दास का भी अंत में यही रहा कि भाई मेरे को अपने गुरु के बराबर नहीं पता है

440
00:35:08,480 --> 00:35:12,560
तो गुरु से पूछ लो ना पूछ लो जहां पर कबीर खड़े हैं वहां पर

441
00:35:12,560 --> 00:35:16,600
खाली जगह है क्या है वो पूछ लो कबीर सब सर्वशक्तिमान है

442
00:35:16,600 --> 00:35:22,600
कि नहीं पूछ लो गुरु से पूछ के आओ फिर

443
00:35:23,120 --> 00:35:28,240
आओ कास्टिंग करवा लो किससे

444
00:35:28,240 --> 00:35:33,640
जेल से ब्रॉडकास्टिंग करवा लो वायरलेस

445
00:35:33,640 --> 00:35:37,640
वो सारा अच्छा एक बात बताओ यह लोग इतना मैं माइक कैमरा

446
00:35:37,640 --> 00:35:41,800
लिए लिए शास्त्रार्थ दिखाते रहते हैं नाटक कंपनी खोल के

447
00:35:41,800 --> 00:35:46,080
इन्होने रामपाल के साथ किसी इन्होंने रामपाल के साथ किसी का शास्त्रार्थ क्यों

448
00:35:46,080 --> 00:35:50,160
नहीं दिखाया क्यों नहीं दिखाया रामपाल

449
00:35:50,160 --> 00:35:54,200
क्यों नहीं चले गए किसी रामपाल क्यों नहीं चलेगा किसी सभा चलती सभा

450
00:35:54,200 --> 00:35:59,160
में मैं आया हूं तुम्हारी बातों का उत्तर देने गए हम गए

451
00:35:59,160 --> 00:36:03,200
हम गए तुम शंकराचार्य की बात करते हो शंकराचार्य से जुड़ा हुआ एक

452
00:36:03,200 --> 00:36:07,280
छोटा सा एक अल्पज्ञ शिष्य गया उसने छाती ठोक के तुम

453
00:36:07,280 --> 00:36:11,360
लोगों को ललकारा तुम लोग क्यों नहीं चले गए तुम्हारे

454
00:36:11,360 --> 00:36:15,520
रामपाल क्यों नहीं गए थे मैं आया हूं मैं बातों

455
00:36:15,520 --> 00:36:20,240
का उत्तर देने या इनके आश्रम का कोई चला जाता

456
00:36:20,240 --> 00:36:23,880
उनके बस की नहीं है

457
00:36:23,880 --> 00:36:28,200
हां हा तो अगर उनसे अगर दोबारा संपर्क होए तो से कहिए

458
00:36:28,200 --> 00:36:32,840
कि आपके जो कम की सेटिंग है उसम साइड सेटिंग में जाइए अरे भाई

459
00:36:32,840 --> 00:36:36,840
वो ऐसे नहीं है कि आपने सेटिंग बोल दिया सेटिंग पर जाने लगे आप रहने

460
00:36:36,840 --> 00:36:38,640
दो व कर रहे हैं

461
00:36:38,640 --> 00:36:42,840
वो हम सेटिंग बोलेंगे े कहां है सेटिंग सेटिंग

462
00:36:42,840 --> 00:36:47,040
कहां है वो ऐसे नहीं है ना अपनी तरह समझ रहे हो उ

463
00:36:47,040 --> 00:36:51,240
मोहित श्रीपाल जी बोलिए मत श्रीपाल

464
00:36:51,240 --> 00:36:57,240
जी जय श्री राम राधे राधे

465
00:36:57,960 --> 00:37:00,640
आभार आपका

466
00:37:00,640 --> 00:37:06,320
आभार

467
00:37:06,320 --> 00:37:12,320
जी द जी करके कोई बारबार आ रहे

468
00:37:13,200 --> 00:37:17,360
हैं ये कोई है देखिए क्या कह रहे हैं मैं आपको दीन की दावत

469
00:37:17,360 --> 00:37:21,560
देने आया हूं तो भाई

470
00:37:21,560 --> 00:37:24,240
देसी मुर्गी

471
00:37:24,240 --> 00:37:29,000
जी क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है

472
00:37:29,000 --> 00:37:33,120
अगर है तो मैं आपकी दावत ले लूंगा आ जाऊंगा

473
00:37:33,120 --> 00:37:37,640
ईश्वर को सर्वशक्तिमान बता दीजिए बस कुरान के द्वारा प्रतिपादित

474
00:37:37,640 --> 00:37:42,000
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है वह बाधित है

475
00:37:42,000 --> 00:37:46,000
सर्वशक्तिमान नहीं है और जो सर्वशक्तिमान नहीं है वह ईश्वर ईश्वर नहीं

476
00:37:46,000 --> 00:37:50,400
है पॉइंट टू बी नोटे जाओ पता करके आओ पहले तुम्हारा

477
00:37:50,400 --> 00:37:56,400
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं फिर आना दावत देने

478
00:37:59,200 --> 00:38:03,400
दीपक शुक्ल जी आ गए जी दीपक शुक्ल

479
00:38:03,400 --> 00:38:07,640
जी थोड़ा सा य एक वीडियो हम देख रहे थे

480
00:38:07,640 --> 00:38:10,640
जो

481
00:38:10,640 --> 00:38:13,440
आप

482
00:38:13,440 --> 00:38:19,440
तो हा उसम समान

483
00:38:20,720 --> 00:38:26,720
केपर जी हो जा जी को मूट कर थ

484
00:38:27,640 --> 00:38:32,000
शंकराचार्य जी का एक जो है अनुवाद दिखा रहा था गीता का एक मिनट

485
00:38:32,000 --> 00:38:36,880
मिनट मोहित जी आप म्यूट हो जाइए

486
00:38:36,880 --> 00:38:41,160
जी बोलिए हा तो शंकराचार्य

487
00:38:41,160 --> 00:38:45,480
जी का गीता भाष्य दिखा रहा था तो उसमें जो है वो

488
00:38:45,480 --> 00:38:50,360
लिखा था कि जो है ईश्वर जो है

489
00:38:50,360 --> 00:38:54,400
नष्ट नहीं मतलब कर सकता है अपने आप को ऐसा दिखाया था तो ये जो

490
00:38:54,400 --> 00:39:00,400
है आप बोले थे कि शरीर जो है

491
00:39:00,520 --> 00:39:04,560
अरे भाई वह सब लोग देखिए सांप और बिच्छू शेरों को

492
00:39:04,560 --> 00:39:08,760
काटा नहीं करते दूर दूर से रंगते रहते हैं तो ये

493
00:39:08,760 --> 00:39:12,760
सांप और बिछु वाली बात है अरे भाई सामने आके बोल दो ना यही बात

494
00:39:12,760 --> 00:39:17,440
तुमको बताते हैं आ रहे हैं वो आ रहे हैं आ रहे

495
00:39:17,440 --> 00:39:21,480
हैं तो उसम हा उसमें हा

496
00:39:21,480 --> 00:39:25,760
तो उसमें ये था कि आप बोले थे कि शरीर का जो है वो लीला

497
00:39:25,760 --> 00:39:29,760
पूर्वक नाश करता है ऐसा आप बो लेकिन वो कहता कि शंकराचार्य जी

498
00:39:29,760 --> 00:39:33,800
लिख रहे है वो नष्ट नहीं कर सकता था जबक और उसके नीचे एक बात और लिखा था

499
00:39:33,800 --> 00:39:38,040
जो वो नहीं बता रहा था लिखा था प्राण प्राण

500
00:39:38,040 --> 00:39:42,040
को ब्रह्म लिखा था नीचे तो अगर प्राण ब्रह्म है और ब्रह्म

501
00:39:42,040 --> 00:39:46,080
काल है ठीक है तो ब जब काल

502
00:39:46,080 --> 00:39:50,680
है तो सबके अंदर प्राण है तो सब जो है अपने आप को काल है

503
00:39:50,680 --> 00:39:55,760
ठीक है उसको नहीं दिखा रहा था उसको नहीं पढ़ रहा था

504
00:39:55,760 --> 00:39:59,880
जी चलिए नरेंद्र जी के साथ

505
00:39:59,880 --> 00:40:04,760
आज चालू कर देता हूं जय श्री

506
00:40:04,760 --> 00:40:10,760
राम आ गए हैं नरेंद्र जी

507
00:40:17,640 --> 00:40:21,760
और कुछ चीज जी जी

508
00:40:21,760 --> 00:40:25,680
जी दीपक

509
00:40:25,680 --> 00:40:29,880
तो नरेंद्र जी जी जय श्री राम जय श्री राम जय

510
00:40:29,880 --> 00:40:33,880
श्री राम आपको आपके सभी चैनल पर सभी दर्शकों को मेरा जय

511
00:40:33,880 --> 00:40:37,920
श्री राम जी तो

512
00:40:37,920 --> 00:40:41,920
सबसे पहले तो आप मुझे वो एक अभी हमने एक ट्विस्ट सुना

513
00:40:41,920 --> 00:40:45,920
था कि रामपाल जी की ओर से जो

514
00:40:45,920 --> 00:40:49,920
उत्तराधिकारी है वह आप हैं तो आप थोड़ा सा

515
00:40:49,920 --> 00:40:54,080
अपने बारे में बताइए पहले जिससे कि हमारे दर्शक थोड़ा सा जान सके

516
00:40:54,080 --> 00:41:00,080
क्या मामला है जी

517
00:41:00,480 --> 00:41:04,520
अब देखो वो तो ये तो

518
00:41:04,520 --> 00:41:08,960
आगे का विषय है अभी तो मैं मतलब वो शुरुआत

519
00:41:08,960 --> 00:41:13,360
आप ही से करता हूं मतलब

520
00:41:13,360 --> 00:41:17,800
मतलब जो विषय जो विषय है तत्वदर्शी और सर्वशक्तिमान ईश्वर

521
00:41:17,800 --> 00:41:22,040
उसके लिए हा जी अच्छा तत्वदर्शी

522
00:41:22,040 --> 00:41:26,520
तत्वदर्शी का मतलब होता है भाई इस आध्यात्मिक

523
00:41:26,520 --> 00:41:30,520
जगत में और अध्यात्म में आत्म तत्व और पर परमात्मा तत्व ये

524
00:41:30,520 --> 00:41:34,840
दो ही मतलब तत्व बताए गए हैं तो जिसको आत्म तत्व

525
00:41:34,840 --> 00:41:39,600
और परमात्मा तत्व का दर्शन हो गया वो तत्वदर्शी संत

526
00:41:39,600 --> 00:41:43,640
है हम तो

527
00:41:43,640 --> 00:41:47,680
अब ये तत्वदर्शी तत्वदर्शी की मतलब संत भाषा में

528
00:41:47,680 --> 00:41:53,680
ये मतलब संत वाणि में ऐसा है और

529
00:41:54,160 --> 00:42:00,160
आप व्यास गदी से दीक्षित है

530
00:42:00,160 --> 00:42:02,320
जी

531
00:42:02,320 --> 00:42:06,320
तो व्यास गदी से आप दक्षित है तो व्यास

532
00:42:06,320 --> 00:42:11,400
जी से जो परंपरा चली है वह आगे भी वैसे की वैसे ही

533
00:42:11,400 --> 00:42:15,640
चलेगी हा व्यास जी ने जोय मतलब

534
00:42:15,640 --> 00:42:20,760
आगे अपना जो उत्तराधिकारी बनाया था वो किसको बनाया

535
00:42:20,760 --> 00:42:25,120
था व्यास जी से ज्ञान लिया

536
00:42:25,120 --> 00:42:31,120
था सुखदेव जी ने

537
00:42:32,600 --> 00:42:36,720
सुखदेव जी से होगा

538
00:42:36,720 --> 00:42:41,200
सुखद जी उनके पुत्र है य बात बराबर है लेकिन

539
00:42:41,200 --> 00:42:45,680
व्यास जी ने अपनी गुरु गदी किसको सौपी थी

540
00:42:45,680 --> 00:42:50,600
नहीं गुरु गद्दी सौंपने से अर्थ है कि उनका शिष्य कौन बना

541
00:42:50,600 --> 00:42:56,120
किसने किससे ज्ञान लिया हा

542
00:42:56,120 --> 00:43:01,080
जी तो मैं यही बात रहा हूं ना ज्ञान दिया था तो यह मतलब

543
00:43:01,080 --> 00:43:05,120
शास्त्रों में यह क कि भाई सुखदेव जी को मतलब यह सारा कार्य बार सौपा

544
00:43:05,120 --> 00:43:09,280
था हम वैसे ज्ञान तो सभी ऋषि लेते थे व्यास जी तो

545
00:43:09,280 --> 00:43:15,280
88000 ऋषि भी उनसे मतलब सारा ज्ञान तो वो सुनही रहे थे

546
00:43:15,840 --> 00:43:19,840
हां हम तो मैं ये जाना रहा चाता व्यास जी की

547
00:43:19,840 --> 00:43:24,240
जो गदी का जो मतलब आगे जो ये कार्य मतलब है ना

548
00:43:24,240 --> 00:43:29,360
व्यास जी ने किसको सौंपा ये मतलब मैं आपसे जानता

549
00:43:29,360 --> 00:43:33,600
जब उनके जो प्रामाणिक शिष्य है जिन देखिए बात ऐ

550
00:43:33,600 --> 00:43:37,840
बात ऐसी है कि जिनसे हमें शास्त्र प्राप्त हुए

551
00:43:37,840 --> 00:43:42,040
हैं यदि हमें शास्त्रों पर भरोसा है

552
00:43:42,040 --> 00:43:46,040
यह शास्त्रों में जो कुछ लिखा है वह सत्य है तो हमें लिखने वाले

553
00:43:46,040 --> 00:43:50,120
पर भी भरोसा करना होगा बिल्कुल जी कर रहे ना

554
00:43:50,120 --> 00:43:54,240
करेंगे हां तो यदि सुखदेव जी यह कह रहे

555
00:43:54,240 --> 00:43:58,320
हैं कि मैं व्यास जी से मैंने ज्ञान लिया तो हम बात मान होगी

556
00:43:58,320 --> 00:44:02,480
नहीं तो सुखदेव जी द्वारा रचित जो शास्त्र होंगे जो कही गई बातें होंगी या

557
00:44:02,480 --> 00:44:07,280
मिलने वाले जो शास्त्र होंगे उन पर हमारा विश्वास होना सिद्ध नहीं होता

558
00:44:07,280 --> 00:44:11,560
हम लोग एक बार पहले एक बार पहले हम लोग यह तय कर ले कि हमारा

559
00:44:11,560 --> 00:44:16,200
टॉपिक क्या है ठीक है एक एक करके हम लोग टॉपिक खोलते

560
00:44:16,200 --> 00:44:20,320
हैं ठीक है तो सबसे पहले हमारे

561
00:44:20,320 --> 00:44:24,680
दो टॉपिक है क्या रामपाल

562
00:44:24,680 --> 00:44:28,680
जी के द्वारा प्रतिपादित होने वा जो ईश्वर है

563
00:44:28,680 --> 00:44:31,880
वह सर्वशक्तिमान है या

564
00:44:31,880 --> 00:44:36,360
नहीं और दूसरा क्या रामपाल

565
00:44:36,360 --> 00:44:41,520
दास हमारे जो सनातन धर्म शास्त्र है उनके

566
00:44:41,520 --> 00:44:46,280
द्वारा तत्वदर्शी सिद्ध होते हैं या नहीं

567
00:44:46,280 --> 00:44:50,480
तो इसी विषय पर जाते हैं ना यहां से शुरुआत करेंगे तो वहां तक हम पहुंचेंगे ना यही तो यही

568
00:44:50,480 --> 00:44:54,840
से प्रारंभ अपने यही से किया ना

569
00:44:54,840 --> 00:44:58,840
बोलिए लोमस ऋषि जी के ब में आपका क्या मतलब विचार

570
00:44:58,840 --> 00:45:03,280
मतलब आप क्या बता सकते हैं मुझे शास्त्रों के अनुसार

571
00:45:03,280 --> 00:45:07,440
नहीं ऐसे बहुत सी चीज शास्त्रों में जो मैंने पूरे शास्त्र नहीं पढ़े हैं तो वस्तुनिष्ठता

572
00:45:07,440 --> 00:45:12,560
वाला प्रश्न आएगा तो मैं हाथ खड़े

573
00:45:12,560 --> 00:45:16,680
करूंगा ऐसी बात है लोमस ऋषि जी व्यास जी

574
00:45:16,680 --> 00:45:20,920
से दक्षित है और व्यास जी का ज्ञान आगे मज ऋषियों को मतलब ज्ञान

575
00:45:20,920 --> 00:45:25,160
सुनाने का उनके पास में व्यास जी का मतलब रिटी है उनको

576
00:45:25,160 --> 00:45:29,200
ठीक आगे जो परंपरा च थी व्यास जी ने मतलब लोमस ऋषि

577
00:45:29,200 --> 00:45:33,040
जी को यह सुपुर्द किया था

578
00:45:33,040 --> 00:45:37,080
काम ठीक है अब इससे आप कहना क्या चाह रहे

579
00:45:37,080 --> 00:45:41,360
हैं जी मैं ये कह रहा व्यास गादी है व्यास

580
00:45:41,360 --> 00:45:45,800
गदी है ना व्यास गदी ने व्यास जी ने जिसको मतलब यह कार्य बार स

581
00:45:45,800 --> 00:45:49,920
सौंपा था उनकी ओर से मुझे वरदान प्राप्त

582
00:45:49,920 --> 00:45:54,120
है कि मेरी तुम्हें किसी भी जन्म में चाहे कितने ही जन्म

583
00:45:54,120 --> 00:45:58,400
क्यों ना हो मेरी याद बनी रहेगी और आज वो

584
00:45:58,400 --> 00:46:03,560
पर विमान किसकी याद बनी

585
00:46:03,560 --> 00:46:08,000
रहेगी व्यास जी ने मतलब ये अपनी

586
00:46:08,000 --> 00:46:12,200
कार्य भार सौपा लोमस ऋषि जी को हां

587
00:46:12,200 --> 00:46:16,800
ठीक है और लोमस ऋषि जी लोमस ऋषि जी

588
00:46:16,800 --> 00:46:21,440
का एक बार सवाद हुआ एक ब्राह्मण था किसी कलयुग में

589
00:46:21,440 --> 00:46:26,240
वो आत्मा से उनका स्वाद हुआ

590
00:46:26,240 --> 00:46:27,640
तो वो

591
00:46:27,640 --> 00:46:31,960
ऋषि जी का और उनमें आपस में मतलब सवाद हुआ तो उन्होंने शराप

592
00:46:31,960 --> 00:46:37,720
दे दिया उसको चंडाल योनि मतलब

593
00:46:37,720 --> 00:46:40,360
मिली

594
00:46:40,360 --> 00:46:44,480
आपरी करूंगा पहले आप अपना क्लेम बता दीजिए हम लोग यह बातें कर

595
00:46:44,480 --> 00:46:48,920
क्यों रहे हैं अपना क्लेम सेट करिए पहले हा

596
00:46:48,920 --> 00:46:53,000
जी उस तत्वदर्शी संत तक अपन पहुंच रहे नहीं नहीं

597
00:46:53,000 --> 00:46:57,160
आप यह क्लेम बताइए कि आप संत रामपाल को त

598
00:46:57,160 --> 00:47:01,240
सिद्ध करना चाहते हैं हां जी तो आप यह

599
00:47:01,240 --> 00:47:05,400
सिद्ध कर रहे हैं कि कबीर के पास जो मतलब कबीर कबीर दास

600
00:47:05,400 --> 00:47:09,600
से पहले जो व्यास जी हैं उनसे ही होते हुए जो ज्ञान है वह कबीर

601
00:47:09,600 --> 00:47:13,880
दास तक आया यह बता रहे हैं कबीर

602
00:47:13,880 --> 00:47:17,880
दास जी की बात आ ग है अभी तो अपन य सनातन जो ऋषि है

603
00:47:17,880 --> 00:47:22,160
ना 88000 ऋषि है

604
00:47:22,160 --> 00:47:26,520
ना आप अगर आप तत्वदर्शी रामपाल

605
00:47:26,520 --> 00:47:30,960
जी को सिद्ध करने के लिए क्या यह सिद्ध करना चाह रहे हैं कि रामपाल

606
00:47:30,960 --> 00:47:35,080
दास जी उस परंपरा में जो प्रामाणिक परंपरा है आचार्यों

607
00:47:35,080 --> 00:47:39,360
की हा ठीक है तो आचार्यों की जब प्रामाणिक परंपरा

608
00:47:39,360 --> 00:47:45,000
है तो परंपरा का अर्थ है कि ज्ञान जो है वह गुरुओं से शिफ्ट हो रहा

609
00:47:45,000 --> 00:47:49,000
है नहीं गुरु गुरु रूप में

610
00:47:49,000 --> 00:47:53,320
परमा गुरु रूप में परमात्मा की प्राप्ति मतलब गुरु परमात्मा

611
00:47:53,320 --> 00:47:57,720
का स्वरूप हु यहीं से तो शुरू हुआ है लोमस ऋषि जी से उन्होंने उनको नहीं

612
00:47:57,720 --> 00:48:02,440
नहीं नहीं देखिए जब परंपरा की जब हम बात करते हैं तो होती क्यों है

613
00:48:02,440 --> 00:48:06,440
परंपरा की बात इसलिए होती है कि मैं जो ये ज्ञान दे रहा हूं मेरे मेरा अपना ज्ञान नहीं

614
00:48:06,440 --> 00:48:10,560
है जो सनातन परंपरा है ज्ञान की वहां से

615
00:48:10,560 --> 00:48:14,840
य ज्ञान आ रहा है इसलिए परंपरा का आलंबन लिया जाता है

616
00:48:14,840 --> 00:48:18,920
जब आप खुद ये क्लेम कर रहे हैं कि यह ज्ञान जो है यह मेरा ज्ञान है यह मेरे

617
00:48:18,920 --> 00:48:22,920
पीछे के गुरुओं का ज्ञान नहीं है तो फिर वहां पर परंपरा सिद्ध करके आप सिद्ध

618
00:48:22,920 --> 00:48:28,400
क्या करना चाहते हैं

619
00:48:28,400 --> 00:48:32,440
मैं यह बताना चाह रहा हूं के जो रामचंद्र

620
00:48:32,440 --> 00:48:36,840
जी भगवान थे वह विष्णु भगवान की आत्मा थी

621
00:48:36,840 --> 00:48:41,080
विष्णु भगवान के अवतार अवतार थे मतलब वही

622
00:48:41,080 --> 00:48:45,880
स्वयं ही थे राम रूप में आए स्वय ही थे अवतार तो स्वयं ही थे ना

623
00:48:45,880 --> 00:48:49,800
भगवान आए तो वही

624
00:48:49,800 --> 00:48:53,840
थे और इसी तरह ये विष्णु भगवान

625
00:48:53,840 --> 00:48:58,040
वाली आत्मा मतलब अगर लोमस ऋषि

626
00:48:58,040 --> 00:49:03,280
के रूप में आए तो क्या आपको कोई मतलब इसमें कोई

627
00:49:03,280 --> 00:49:09,280
अगर शास्त्रों में दिया होगा तो जरूर मान

628
00:49:10,960 --> 00:49:15,600
लेंगे हेलो हां जी जी

629
00:49:15,600 --> 00:49:20,040
हां जी जैसे यह बात है

630
00:49:20,040 --> 00:49:24,080
शास्त्रों में तो यह है के

631
00:49:24,080 --> 00:49:28,080
हर जीव हर जीव

632
00:49:28,080 --> 00:49:32,480
चाहे मैं हूं चाहे आप हो कभी ना कभी अपन

633
00:49:32,480 --> 00:49:37,120
ये मतलब जैसे फिल्म होती है ना फिल्म में पात्र तो वही रहते हैं

634
00:49:37,120 --> 00:49:41,320
पात्रता बदलती रहती है लेकिन रोल वही रहता है तो आप भी कभी ऋषि बने

635
00:49:41,320 --> 00:49:45,480
हम भी कभी ऋषि रहे कभी आप भी राक्षस रहे हम भी राक्षस बने ऐसे ये देखिए

636
00:49:45,480 --> 00:49:49,800
देख देखिए बात ऐसी है कि आप अगर किसी व्यक्ति को हमारे

637
00:49:49,800 --> 00:49:53,920
समक्ष सनातन शास्त्रों के आधार पर प्रामाणिक किसी

638
00:49:53,920 --> 00:49:58,760
पद पर बिठाना चाहेंगे तो आपको सनातन शास्त्रों से प्रमाण देना हो

639
00:49:58,760 --> 00:50:03,000
पहली बात दूसरी बात ये जो हमारी जो चर्चा है ना यह बिल्कुल विषय

640
00:50:03,000 --> 00:50:07,160
से अलग हटके हो रही है हमारा विषय यह है कि क्या रामपाल तत्वदर्शी

641
00:50:07,160 --> 00:50:11,440
है अब तत्वदर्शी के लिए यदि आप रामपाल

642
00:50:11,440 --> 00:50:15,640
जी के लिए यह बता रहे हैं कि वह परंपरा से हैं तो आपका यहां

643
00:50:15,640 --> 00:50:20,040
पर सबसे पहले रामपाल जी के अनुसार दिया गया जो क्लेम है वही

644
00:50:20,040 --> 00:50:24,200
खंडित हो जाएगा क्योंकि उनके अनुसार कबीर जी ने अपना ज्ञान दिया

645
00:50:24,200 --> 00:50:25,960
है पीछे से गुरुओं से आता हुआ

646
00:50:25,960 --> 00:50:30,200
ज्ञान नहीं दिया

647
00:50:30,200 --> 00:50:34,680
मैं तो आत्म अनुभव की बात कर रहा हूं कि अभी ऋषि

648
00:50:34,680 --> 00:50:38,720
लोमस ऋषि जी लोमस ऋषि जी की आयु कितनी है उनकी तो अभी आयु पूरी नहीं

649
00:50:38,720 --> 00:50:43,520
हुई है ना जाने उनके सामने तो कितने ब्रह्मा जी विष्णु जी और महादेव जी आकर च

650
00:50:43,520 --> 00:50:47,720
फर फिर आप ट्रैक से हट रहे हैं हमारा ट्रैक ये नहीं है लोमस ऋषि

651
00:50:47,720 --> 00:50:51,840
कौन है हमारा ट्रैक ये है कि रामपाल जी को रामपाल

652
00:50:51,840 --> 00:50:57,240
जी क्या ये मानते हैं कि परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान ही प्रमाणिक होगा

653
00:50:57,240 --> 00:51:01,240
हां जी बिल्कुल अच्छा तो कबीर दास जो 600

654
00:51:01,240 --> 00:51:05,520
साल पहले जो ज्ञान दिया उन्होंने अपना दिया कि जो परंपरा से आता हुआ ज्ञान

655
00:51:05,520 --> 00:51:09,520
था वो दिया ये ऐसे हैं जी देखो ये विष्णु

656
00:51:09,520 --> 00:51:13,720
भगवान वाली आत्मा है ये धर्मदास जी के घर जो दूसरे चूड़ामण

657
00:51:13,720 --> 00:51:17,760
जी आए थे वो आज 6 600 वर्ष पहले धर्मदास जी को

658
00:51:17,760 --> 00:51:21,760
लिखा गया था और वो जू का त्य आज भी लिखा हुआ है मैं भाई साहब पूछ रहा हूं

659
00:51:21,760 --> 00:51:25,760
कबीर दास जी ने जो ज्ञान दिया पीछे से गुरुओं से आता हुआ ज्ञान दिया या

660
00:51:25,760 --> 00:51:29,840
अपना ज्ञान दिया

661
00:51:29,840 --> 00:51:34,200
अब देखो मेरी बात सुनो के लोमस ऋषि जी थे उनको ने चूड़ा

662
00:51:34,200 --> 00:51:39,480
मतलब काग भूषण जी को यह वरदान दिया था कि मेरे रूप में आपको परमात्मा की प्राप्ति

663
00:51:39,480 --> 00:51:43,480
होगी इस वचन के स्वरूप कबीर साहब है जो उस का भूषण

664
00:51:43,480 --> 00:51:47,680
जी को मिले भाई साहब मैंने आपसे

665
00:51:47,680 --> 00:51:51,680
एक सिंपल सा प्रश्न पूछा है कि जो कबीर दास जी ने

666
00:51:51,680 --> 00:51:55,800
ज्ञान दिया है वो पीछे से आता हुआ गुरुओं के द्वारा प्राप्त ज्ञान दिया है या अपना

667
00:51:55,800 --> 00:52:01,400
ज्ञान दिया है

668
00:52:01,400 --> 00:52:05,560
मैं आपकी बात को समझ नहीं आ रहा समझ नहीं पा रहा हूं जो कबीर

669
00:52:05,560 --> 00:52:09,560
दास जी ने ज्ञान दिया है वह जो जब जब सृष्टि की

670
00:52:09,560 --> 00:52:13,760
उत्पत्ति होती है प्रलय काल से दोबारा सृष्टि बनती है

671
00:52:13,760 --> 00:52:18,240
तो तब जब वेदा आदि शास्त्र जो हमारे ऋषियों के द्वारा उनका

672
00:52:18,240 --> 00:52:20,040
दृष्टा बनते हैं ब्रह्मा

673
00:52:20,040 --> 00:52:24,280
जी से वशिष्ठ जी को प्राप्त होते हैं वशिष्ठ जी से इनको

674
00:52:24,280 --> 00:52:28,280
शक्ति को शक्ति से पारा सर को पारा सर से जो है व्यास जी को

675
00:52:28,280 --> 00:52:31,000
व्यास जी से सुखदेव जी को तो इस

676
00:52:31,000 --> 00:52:35,160
तरह से जो चेन ऑफ नरेशन से चला आ रहा ज्ञान है क्या कबीर

677
00:52:35,160 --> 00:52:39,200
दास जी ने वही ज्ञान दिया है या फिर अपना ज्ञान दिया है पीछे

678
00:52:39,200 --> 00:52:43,680
अपने गुरुओं का खंडन कर दिया

679
00:52:43,680 --> 00:52:47,760
है गुरु परंपरा तो लोमस ऋषि जी तक आगे कोई गुरु परंपरा आई नहीं

680
00:52:47,760 --> 00:52:51,800
लोमस ऋषि जीभ आयु तोब व्यास जी ने उनको दिया तो अभी तक

681
00:52:51,800 --> 00:52:55,960
दूसरा आप कह रहे हो ना ये आप कह रहे हो ना कि लोमस दि तक

682
00:52:55,960 --> 00:53:00,000
आई नहीं आई मैं तो आपसे यह पूछ रहा हूं उन्होंने अपना ज्ञान दिया

683
00:53:00,000 --> 00:53:04,040
या परंपरा से प्राप्त ज्ञान दिया है मैं यह पूछ रहा हूं

684
00:53:04,040 --> 00:53:10,040
अगर नहीं आई है तो आप बोल दो कि नहीं

685
00:53:10,040 --> 00:53:14,320
दिया कबीर साहब ने तो मोक्ष का मार्ग बताया ना तो

686
00:53:14,320 --> 00:53:18,400
मतलब कबीर साहब तो उनको प्राप्ति हुई ना का मोक्ष का मार्ग हम

687
00:53:18,400 --> 00:53:22,440
बात करेंगे इस पर अभी आपने कहा था ना सर्वशक्तिमान पर हम बात करेंगे पहले हम

688
00:53:22,440 --> 00:53:26,800
तत्वदर्शी बात कर रहे हैं अब तत्वदर्शी के लिए आप यह बताना चाहते

689
00:53:26,800 --> 00:53:30,800
रामपाल दास जी भी परंपरा प्राप्त ज्ञान दे रहे हैं तो जो

690
00:53:30,800 --> 00:53:35,400
हमारे ऋषि मुनियों से जो चालू हुआ है वेदा आदि शास्त्रों का ज्ञान

691
00:53:35,400 --> 00:53:39,720
हा जी क्या वही ज्ञान कबीर दास जी ने दिया है अकॉर्डिंग

692
00:53:39,720 --> 00:53:43,960
टू जो ज्ञान रामपाल दास जी देते

693
00:53:43,960 --> 00:53:48,280
हैं देखो इसमें देखो यह आध्यात्मिक मतलब स्टेज

694
00:53:48,280 --> 00:53:52,320
है तो इस पर मतलब वरदान और श्राप का इसमें आपको

695
00:53:52,320 --> 00:53:57,160
शामिल करना होगा तब जाकर यह विषय समझ में आएगा

696
00:53:57,160 --> 00:54:01,200
भी कर े वो भी कर रामल जी त मैं

697
00:54:01,200 --> 00:54:05,480
आपको रामपाल जी तक लेकर आ रहा हूं विष्णु भगवान से रामपाल जी तक लेके आ रहा हूं आपको ठीक है

698
00:54:05,480 --> 00:54:11,480
उसम कबीर जी नहीं है हा जी उसमें कबीर जी नहीं

699
00:54:11,720 --> 00:54:14,440
है

700
00:54:14,440 --> 00:54:18,800
किसम उसमें कबीर जी है जो आप लेके आरहे

701
00:54:18,800 --> 00:54:23,120
हा कबीर जी है कबीर जी ने जो ज्ञान

702
00:54:23,120 --> 00:54:27,120
उनके गुरु देते थे वो ज्ञान दिया है या अपना ज्ञान दिया

703
00:54:27,120 --> 00:54:31,240
है कबीर जी ने दिया आज 600 साल पहले दिया है

704
00:54:31,240 --> 00:54:35,480
ये पहले का प्रसंग हो मैं पूछ रहा हूं अपना दिया है या जो गुरु

705
00:54:35,480 --> 00:54:39,480
पीछे उनके जो चेन ऑफ नरेशन है उसका ज्ञान दिया है नहीं फिर

706
00:54:39,480 --> 00:54:43,640
अपना गुरु अपना दिया है तो फिर परंपरा की बात हमें नहीं करनी

707
00:54:43,640 --> 00:54:47,920
है अब परंपरा खंडित हो गई अपना ज्ञान दिया है तो

708
00:54:47,920 --> 00:54:52,080
या तो आप अपनी परंपरा सिद्ध करिए कबीर दास जी के गुरु थे रामानंदाचार्य

709
00:54:52,080 --> 00:54:58,080
जी रामानंदाचार्य जी का ज्ञान तो है नहीं कबीर जी का ज्ञान

710
00:54:58,080 --> 00:55:02,440
रामानंद जी तो मतलब उन्होंने तो अपने गुरु परंपरा को बनाने के लिए

711
00:55:02,440 --> 00:55:06,440
उनसे मतलब ये शिष्य ग्रहण किया था क्या होता है गुरु

712
00:55:06,440 --> 00:55:10,600
परंपरा को बनाना बताइए जराई

713
00:55:10,600 --> 00:55:14,640
इस सृष्टि में इस सृष्टि में अब देखो आत्मा है अब ये आत्मा

714
00:55:14,640 --> 00:55:18,920
अपने अंदर अपन बोल रहे आत्मा बोल रही है शरीर का तो कोई महत्व नहीं

715
00:55:18,920 --> 00:55:22,960
रहा मेरी बानो आमा जैसे आत्मा

716
00:55:22,960 --> 00:55:27,360
और परमात्मा है ऐसे आप आप और हम कैसे दर्शन कर सकते हैं तो

717
00:55:27,360 --> 00:55:31,440
इस सृष्टि में ये परंपरा बनी लोमस ऋषि जी के द्वारा यह मतलब

718
00:55:31,440 --> 00:55:36,080
हुई कि परमात्मा की प्राप्ति है वो गुरु रूप में होगी आपको

719
00:55:36,080 --> 00:55:41,120
ये काग भूषण जी को वरदान दिया था

720
00:55:41,120 --> 00:55:45,120
देखिए पहली बात तो यह कि आपने अभी एक बात कही ना कि यह बात

721
00:55:45,120 --> 00:55:49,760
उसमें लिखी नहीं है शास्त्र में

722
00:55:49,760 --> 00:55:53,880
शास्त्र में लिखा है ना सद ग्रंथों में सब ये प्रमाण सब बातें लिखी है तभी

723
00:55:53,880 --> 00:55:57,880
तो बता रहा हूं ना लोमस ऋषि से और जो रामपाल दास जी तक आने की

724
00:55:57,880 --> 00:56:02,520
बात कर रहे हैं रामपाल दास तक का वो सब लिखा है शास्त्र में हां

725
00:56:02,520 --> 00:56:07,160
जी बिल्कुल ये तो आत्म अनुभव की बातें है ना आत्म

726
00:56:07,160 --> 00:56:11,240
अब देखो ऐसे बात देख देखिए बात ये है भाई साहब कि आत्म अनुभव की

727
00:56:11,240 --> 00:56:13,560
बात है वो आपके लिए है

728
00:56:13,560 --> 00:56:17,600
अभी जब हम बात करेंगे तो हमें आपका प्रमाण चाहिए होगा आत्म

729
00:56:17,600 --> 00:56:21,720
अनुभव से बात नहीं चलेगी आप जिस पर विश्वास करते होंगे उसकी बात आपके

730
00:56:21,720 --> 00:56:26,040
लिए हो सकता है हमारे लिए आपकी बात वो नहीं है प्रमाण नहीं है हमारे लिए

731
00:56:26,040 --> 00:56:30,080
जो जो आचार्य गण है जो हमारे वेदा दि शास्त्र है जो गुरु

732
00:56:30,080 --> 00:56:34,120
गोविंद ग्रंथ है उनकी बात हमारे लिए प्रमाण है आपकी बात प्रमाण नहीं

733
00:56:34,120 --> 00:56:38,360
है तो इसलिए पहली बात तो यह हो गया कि जो रामपाल

734
00:56:38,360 --> 00:56:42,400
दास जी उनको आप लोम शि से जोड़ रहे उसम आप कह रहे कि वो उसम आत्म अनुभव

735
00:56:42,400 --> 00:56:46,480
है हमने हमें अनुभव नहीं हो रहा है आपको हो रहा होगा हो सकता है

736
00:56:46,480 --> 00:56:50,760
दूसरी बात यह है कि आपका यह कहना है कि कबीर दास जी

737
00:56:50,760 --> 00:56:55,400
ने कबीर दास जी ने भी गुरु परंपरा को बनाने के लिए उनको गुरु बनाया

738
00:56:55,400 --> 00:57:01,240
इस बात को थोड़ थो सा मुझे समझा दीजिए क्या है इसका

739
00:57:01,240 --> 00:57:05,320
मतलब अब ये है देखो पहले तो मेरी बात

740
00:57:05,320 --> 00:57:09,560
सुनो ना मैं आपको आप ये शास्त्रों का बाद में कर लेना मेरे आत्म अनुभव

741
00:57:09,560 --> 00:57:14,160
की मैं बातें रख रहा हूं रामपाल जी को मैं मतलब

742
00:57:14,160 --> 00:57:18,160
विष्णु भगवान की आत्मा से शुरू करता हूं रामपाल जी तक लाता हूं ये मेरी सुन

743
00:57:18,160 --> 00:57:22,320
लो आप फिर बाद में शास्त्रों की बात मैंने शास्त्र नहीं पढ़े मुझे आत्म अनुभव हुआ इसलिए मैं सारी

744
00:57:22,320 --> 00:57:26,480
बातें बता रहा मैं आपको एक बात बताऊ

745
00:57:26,480 --> 00:57:30,760
की बात हम सुनेंगे पहले हम लोग यह क्लियर कर ले कि प्रमाणों

746
00:57:30,760 --> 00:57:35,040
तर्क से रामपाल दास जी क्या है उनके स्टेटमेंट सही है कि नहीं

747
00:57:35,040 --> 00:57:39,440
फिर हम आपकी आत्म अनुभव की बात सुनेंगे पहले उनके स्टेटमेंट

748
00:57:39,440 --> 00:57:43,680
उनके क्लेम है वो सही है कि नहीं पहले हम उन पर बात कर ले कि वो तत्वदर्शी

749
00:57:43,680 --> 00:57:47,960
है जितने भी ब्रह्मा विष्णु महेश है भगवान है हमारे वोह सब अज्ञानी

750
00:57:47,960 --> 00:57:52,120
है वो जो गीता का ज्ञान देने वाला जो काल है वो फसाने के लिए आया

751
00:57:52,120 --> 00:57:56,200
है और व ही एक तत्वदर्शी है ये सब चीजों पर

752
00:57:56,200 --> 00:58:00,440
पहले हम बात कर ल फिर हम आपके आ अनुभव की तत्वदर्शी संत संत भाषा में तत्वदर्शी का

753
00:58:00,440 --> 00:58:04,640
मतलब यही होता है ना जिसको आत्म ज्ञान और परमात्मा ज्ञान हो गया वो तत्वदर्शी संत

754
00:58:04,640 --> 00:58:08,920
है तो मैं कह रहा हूं वो अभी जेल में है मेरी बात सुनो हमारा उनसे कोई

755
00:58:08,920 --> 00:58:13,320
भी मुलाकात नहीं हुई ना हम कभी उनसे मिले हैं और ना वो मुझे पहचानते हैं ना मैं

756
00:58:13,320 --> 00:58:16,280
मतलब ठीक है मैं ये सोशल मीडिया के मार से ना

757
00:58:16,280 --> 00:58:20,960
कभी मैं हरियाणा गया हूं ना बरवाला गया हूं ना कभी मेरा उनसे हम कभी दीक्षित हुए

758
00:58:20,960 --> 00:58:25,120
उनके उनका जो ज्ञान है वो जो मतलब सोशल मीडिया पर आया और उनको

759
00:58:25,120 --> 00:58:29,200
सुना और उनसे हमने जो आत्म अनुभूति हुई है ना वो बता रहे है अब वो जैल

760
00:58:29,200 --> 00:58:33,200
में बैठे हैं नहीं मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं

761
00:58:33,200 --> 00:58:37,480
कि क्या आपके अनुसार वह ज्ञानी है वह तत्वदर्शी है

762
00:58:37,480 --> 00:58:41,480
हां जी बिल्कुल तो है ठीक है अब हम बात करते हैं कि अगर

763
00:58:41,480 --> 00:58:45,480
वो तत्वदर्शी वो ये कहते हैं कि जो

764
00:58:45,480 --> 00:58:49,680
कबीर है वो पहली बात तो यह सिद्ध हो गई ना कि

765
00:58:49,680 --> 00:58:53,680
जो है कबीर दास जी ने पीछे अपने गुरु से लिया हुआ ज्ञान नहीं दिया अपना ज्ञान

766
00:58:53,680 --> 00:58:59,520
दिया ये तो पक्का है ना

767
00:58:59,520 --> 00:59:03,520
कबीर दास जी ने पीछे गुरु से लिया हुआ ज्ञान नहीं

768
00:59:03,520 --> 00:59:07,400
लिया दिया बल्कि अपना ज्ञान

769
00:59:07,400 --> 00:59:11,480
दिया हां पक्का अच्छा ठीक

770
00:59:11,480 --> 00:59:17,480
है तो उन्होंने फिर रामानंदाचार्य जी को गुरु क्यों

771
00:59:20,280 --> 00:59:24,440
कहा उनको मतलब गुरु इसलिए कि गुरु परंपरा उनको

772
00:59:24,440 --> 00:59:28,480
ये मतलब गुरु परंपरा को बनाए बनाने के लिए उन्होंने अपना

773
00:59:28,480 --> 00:59:31,160
यह रोल किया

774
00:59:31,160 --> 00:59:37,120
था मतलब उन्होंने यह झूठ बोला

775
00:59:37,120 --> 00:59:41,280
कैसे जैसे मैं बता रहा हूं गुरु

776
00:59:41,280 --> 00:59:47,200
का मतलब क्या

777
00:59:47,200 --> 00:59:51,400
है गुरु का मतलब तो आध्यात्मिक मतलब जो अपने

778
00:59:51,400 --> 00:59:56,520
को पिता होते हैं वो

779
00:59:56,520 --> 01:00:01,200
जो अपने को मतलब गु का मतलब है गुरु का मतलब है

780
01:00:01,200 --> 01:00:05,280
गुरु का मतलब है अंधकार से निकालने वाला हां तो

781
01:00:05,280 --> 01:00:09,960
वही मार्गदर्शक हो गया ना तो

782
01:00:09,960 --> 01:00:14,000
अब जब वह किसी को अपना गुरु कह रहे हैं तो इसका मतलब वो यह बता रहे हैं कि इसने

783
01:00:14,000 --> 01:00:18,040
मुझे अंधकार से निकाला है मगर यदि हम यह कहते

784
01:00:18,040 --> 01:00:22,320
हैं कि नहीं उसको उन्होंने वास्तविकता में अंधकार से नहीं निकाला था

785
01:00:22,320 --> 01:00:26,960
तो इसका मतलब है कि उन्होंने झूठ कहा ना गुरु

786
01:00:26,960 --> 01:00:31,000
तो अंधकार से क्यों नहीं कहा जब रामानंद जी अपनी मतलब व

787
01:00:31,000 --> 01:00:35,040
कर रहे थे अपनी जो भी उसका मनन जो कर रहे थे जब वहां मतलब उनकी

788
01:00:35,040 --> 01:00:39,120
जो कंठी गले में वो नहीं म पहना पा रहे उनकी साधना

789
01:00:39,120 --> 01:00:43,200
पूरी नहीं हो रही हो रही थी तभी तो उनको मतलब अंतरध्यान

790
01:00:43,200 --> 01:00:47,240
में उनको मतलब यह चीज याद दिलाई कि आप ऐसे करिए तभी तो उन्होंने

791
01:00:47,240 --> 01:00:51,360
कबीर साहब को गुरु माना कि मैं समझ गया हूं यह तो आप कह रहे

792
01:00:51,360 --> 01:00:57,360
हैं कि उन्होंने कबीर को गुरु गुरु माना यह प्रमाण नहीं है यह आप कह रहे हैं

793
01:00:58,040 --> 01:01:03,160
कबीर दास जी को उन्होंने गुरु माना य आप कह रहे हैं

794
01:01:03,160 --> 01:01:07,400
इस बात का कोई प्रमाण नहीं है अब मैं आपसे भी पूछ रहा हूं कबीर

795
01:01:07,400 --> 01:01:12,600
दास जी ने उनको अपना गुरु माना है कि नहीं माना है बोला है कि नहीं बोला

796
01:01:12,600 --> 01:01:16,640
गुरु कबीर दास जी ने गुरु बोला है लेकिन एक

797
01:01:16,640 --> 01:01:20,920
मिनट कु कुछ मैं कुछ तत्व पर आना चाह रहा हूं इसलिए पूछा है

798
01:01:20,920 --> 01:01:25,000
तो कबीर दास जी ने यदि उनको अपना गुरु बोला है यानी कि वो यह कह रहे हैं कि

799
01:01:25,000 --> 01:01:29,520
भाई इसने मुझे अंधकार से निकाला रामानंदाचार्य जी

800
01:01:29,520 --> 01:01:33,880
ने ठीक है हा जी अब हम यह कह सकते हैं कि भाई

801
01:01:33,880 --> 01:01:38,520
यह उन्होंने लीला पूर्वक बोला है वास्तविकता में उनको अंधकार से नहीं निकाला

802
01:01:38,520 --> 01:01:42,600
है अब शवास नारायण जी ऐसी बात है मुझे शास्त्रों का ज्ञान

803
01:01:42,600 --> 01:01:46,640
नहीं है मुझे अन्य किसी बात का मुझे ज्ञान नहीं मुझे तो इतना है कि मुझे इतना वरदान है कि

804
01:01:46,640 --> 01:01:50,800
जो लोमस ऋषि जी है उसकी पहचान कराना उनका वरदान मुझे प्राप्त है वो

805
01:01:50,800 --> 01:01:55,000
मैं भाई साहब देखिए आपके वरदान पर हम लोग बात करेंगे आपके वरदान

806
01:01:55,000 --> 01:01:59,120
पर हम लोग बात करेंगे अभी आपने कहा था ना शास्त्रों में भी लिखा है जब मैंने

807
01:01:59,120 --> 01:02:03,440
पूछा कि शास्त्रों में प्रमाण है तो आपने कहा है अब आप कह रहे मुझे शास्त्रों

808
01:02:03,440 --> 01:02:07,600
पर बात नहीं करनी है शास्त्रों में प्रमाण ऐसी बात है कि हमें जो रामपाल

809
01:02:07,600 --> 01:02:12,040
जी का जो सत्संग है उनसे जितना मिला है व शास्त्र सद ग्रंथ आप तो

810
01:02:12,040 --> 01:02:13,040
मैं रामपाल जी के

811
01:02:13,040 --> 01:02:17,360
सद ग्रंथों की बात कर रहा हूं रामपाल जी के अनुसार जो है वह कबीर भगवान

812
01:02:17,360 --> 01:02:19,840
है

813
01:02:19,840 --> 01:02:23,840
क्या हा जी बिल्कुल कबीर साहब भगवान है कबीर साहब भगवान

814
01:02:23,840 --> 01:02:28,040
है अच्छा ठीक है तो उनकी जो कबीर वाणी है वो

815
01:02:28,040 --> 01:02:32,080
सत्य है या असत्य है कबीर वाणी बिल्कुल

816
01:02:32,080 --> 01:02:36,320
सत्य है बिल्कुल सत्य है और यह जो उन्होंने जोय

817
01:02:36,320 --> 01:02:40,440
बोला है कि गीता में 5 पर काल ने बोला है यह सब है जो

818
01:02:40,440 --> 01:02:45,280
यह भी आप मानते हो कि नहीं गीता

819
01:02:45,280 --> 01:02:50,080
में 5 पर ज्ञान काल ने बोला है

820
01:02:50,080 --> 01:02:53,560
अपने मन

821
01:02:53,560 --> 01:02:57,560
से देखो हमने तो सत्संग में नहीं सुना है अभी तक तो नहीं सुना है अगर

822
01:02:57,560 --> 01:03:02,280
होगा तो फिर देखेंगे आपकी इस बात का हम फिर गौर करेंगे हमने अभी तक नहीं सुना है

823
01:03:02,280 --> 01:03:06,520
5 परने मतलब य बोला मैंने तो नहीं बिल्कुल बिल्कुल बोला

824
01:03:06,520 --> 01:03:10,800
है और ज्ञान गंगा हमने नहीं सुना है ज्ञान गंगा

825
01:03:10,800 --> 01:03:15,680
ज्ञान गंगा को मानते हैं आपकी नहीं ज्ञान गंगा

826
01:03:15,680 --> 01:03:20,000
मैं जो उनके सत्संग से बातें जो उनके मुह से मुखन

827
01:03:20,000 --> 01:03:24,600
उनको जो बोला गया ना वो जो उन बातें वो उसको हम स्वीकार करते हैं बाकी नहीं करते

828
01:03:24,600 --> 01:03:30,600
तो उन्होंने ब्रह्मा महेश को अज्ञानी तो बोला

829
01:03:32,240 --> 01:03:36,440
है अज्ञानी बोला ऐसा मुझे

830
01:03:36,440 --> 01:03:40,480
नहीं समझ में आया नहीं बोला है वीडियो है

831
01:03:40,480 --> 01:03:44,520
हमारे पास वीडियो तो बताइए मैंने नहीं सुना मतलब मैंने

832
01:03:44,520 --> 01:03:48,560
सुना सारे सत्संग नहीं सुन पाए आत्म ज्ञान हो गया

833
01:03:48,560 --> 01:03:52,800
मेरी बात सुनो मैं तो यह कह रहा हूं मैं तो य क रहा हं कबीर साहब

834
01:03:52,800 --> 01:03:56,960
ने कुछ चीज आपको बता दन सारी बात करते हैं

835
01:03:56,960 --> 01:04:01,040
एक मिनट आपने कहा कि कबीर मतलब हमें जो ये जो कबीर

836
01:04:01,040 --> 01:04:06,640
वाणी है इन सबसे ज्यादा मतलब नहीं है है कि नहीं

837
01:04:06,640 --> 01:04:10,760
है मैं ब कबीर साहब की गुरु प्रणाली कैसे है कि हर चारों

838
01:04:10,760 --> 01:04:14,960
युग में कबीर साहब आए है ठीक है कवि साहब ने सतयुग में

839
01:04:14,960 --> 01:04:19,000
क्षमा चाहूंगा मैं क्षमा चाहूंगा मैं थोड़ा सा क्या है ना क्लियर बात करता हूं बहुत

840
01:04:19,000 --> 01:04:23,200
उलझी हुई बात नहीं करना चाहता मैं ये पूछ रहा हूं कि कबीर वाणी से

841
01:04:23,200 --> 01:04:27,200
कबीर वाणी आपका प्रमाण है या नहीं उससे भी आपको कोई मतलब

842
01:04:27,200 --> 01:04:31,200
नहीं है आपका अपना आत्म अनुभव है जो भी है कबीर वाणी

843
01:04:31,200 --> 01:04:35,520
आपके लिए प्रमाण है कि नहीं कबीर वाणी बिल्कुल प्रमाणित है

844
01:04:35,520 --> 01:04:39,560
प्रमाण प्रमाण मैं आपसे पूछना चाह रहा हूं कि उन्होंने

845
01:04:39,560 --> 01:04:43,600
जब रामानंदाचार्य जी को अपना गुरु कहा तो इसका मतलब है उन्होंने गुरु यं

846
01:04:43,600 --> 01:04:49,600
ही कह दिया व जानते सबते उन्होंने गुरु यूं ही कहा

847
01:04:50,520 --> 01:04:54,880
उन्हे देखो ये रामानंद जी का मैटर है मुझे अभी मैं इस पर मैंने

848
01:04:54,880 --> 01:04:58,880
रिसर्च नहीं की क्या है देखो इसको समझे अगले कभी लाइव में इस पर बात करेंगे मैं

849
01:04:58,880 --> 01:05:02,880
तो अभी तत्वदर्शी संत है ना तो मैं गुरु असल में

850
01:05:02,880 --> 01:05:07,200
मैं आपके गुरु मैं मैं ईश्वर की प्रामाणिकता पर ही कह रहा था

851
01:05:07,200 --> 01:05:11,280
कि क्या आपको वेद ऐसी कोई बात

852
01:05:11,280 --> 01:05:15,320
जो वेद प मतलब जो वेद के बाहर जा रही है और जो

853
01:05:15,320 --> 01:05:19,800
कबीर सागर इत्यादि में लिखी है जो वेद के विरुद्ध है तो उस

854
01:05:19,800 --> 01:05:24,000
ये वो रामपाल जी महाराज ने ये बताया कि उसमें

855
01:05:24,000 --> 01:05:28,520
वेदों में कि वेद वेद मेरा भेद है वे

856
01:05:28,520 --> 01:05:32,640
वेद मेरा भेद है मैं वेदन में नाही और जोन वेद

857
01:05:32,640 --> 01:05:36,760
से मैं मिलू वह वेद जानते नहीं यह मतलब कबीर साहब की वाणी

858
01:05:36,760 --> 01:05:40,800
है तो ऐसे इसके बारे में उन्होंने बताया हा तो ये अनुभव की बात

859
01:05:40,800 --> 01:05:45,200
आ गई ना अनुभव मैं एक बात बता

860
01:05:45,200 --> 01:05:49,840
दूं चाहे वो वेद हो चाहे वो रामपाल दास जी हो

861
01:05:49,840 --> 01:05:54,120
चाहे वो किसी की भी वाणी हो वो उनका भेद ही है ईश्वर

862
01:05:54,120 --> 01:05:58,600
का ईश्वर अगर उसम आ जाएगा तो सीमित हो जाएगा

863
01:05:58,600 --> 01:06:02,840
ना जैसे कि मैं आपको उदाहरण देता हूं

864
01:06:02,840 --> 01:06:06,120
जैसे कि नौकरी का जो हम

865
01:06:06,120 --> 01:06:10,120
जैसे थ थ क्लास पास करते हैं हम लोग तो थ क्लास

866
01:06:10,120 --> 01:06:15,400
मेरा भेद है किसी को मान लीजिए

867
01:06:15,400 --> 01:06:19,760
आईएस बनना है पीसीएस बनना है या पुलिस फोर्स में

868
01:06:19,760 --> 01:06:23,880
आर्मी मैन में जाना आर्मी में जाना है तो इन सारी नौकरियों

869
01:06:23,880 --> 01:06:28,120
का भेद किसमें है 10वीं में 12वीं में बीएससी

870
01:06:28,120 --> 01:06:32,120
में बीए में बीकॉम में इनमें इनका भेद है मगर यह

871
01:06:32,120 --> 01:06:36,120
भेद ये उनमें नहीं है यह नौकरियां उनमें नहीं है उनको

872
01:06:36,120 --> 01:06:40,160
पढ़ के नौकरियां मिलेंगी उनको पढ़ के नौकरियां

873
01:06:40,160 --> 01:06:44,200
मिलेंगी मगर वह नौकरियां इसमें नहीं है कि जब हम वो पढ़ रहे हैं तो हम लोग नौकरी वाले

874
01:06:44,200 --> 01:06:48,680
हो गए नहीं उनको पढ़ के हम इस योग्य बनेंगे कि हम उन नौकरियों को प्राप्त कर सके

875
01:06:48,680 --> 01:06:52,840
इसी तरीके से वेद वेद पढ़ने से हम उस योग्य

876
01:06:52,840 --> 01:06:57,400
बनते हैं कि हम जो है भगवान को प्राप्त कर स हां

877
01:06:57,400 --> 01:07:01,600
वेद का खंडन नहीं है वेद का खंडन नहीं किया बिल्कुल नहीं किया हा तो

878
01:07:01,600 --> 01:07:05,920
अब बात ये आती है कि वेद का खंडन

879
01:07:05,920 --> 01:07:10,640
नहीं किया अच्छा किया य बात बोल द आपने तो मैं य मैं बोल रहा था

880
01:07:10,640 --> 01:07:14,680
कि कहीं कहीं पर अगर ऐसी बात आएगी जो कबीर वाणी

881
01:07:14,680 --> 01:07:19,000
या रामपाल जी की वाणी आगे निकल रही है और

882
01:07:19,000 --> 01:07:21,280
वेद का विरोध कर रही है तो उस उस

883
01:07:21,280 --> 01:07:27,280
स्थिति में आप क्या करेंगे किसको मानेंगे रामपाल जी को या वेद को

884
01:07:30,520 --> 01:07:35,320
मतलब रामपाल जी ने अपनी ओर से तो कुछ कहा ही नहीं है

885
01:07:35,320 --> 01:07:39,320
क अगर कोई बात चलिए

886
01:07:39,320 --> 01:07:43,840
मैं बता देता हूं अपनी ओर से देखिए वास्तविकता क्या है

887
01:07:43,840 --> 01:07:47,960
कि ब्रह्म ही फाइनल डेस्टिनी डेस्टिनेशन है मनुष्य

888
01:07:47,960 --> 01:07:51,960
की वेदों के अनुसार ठीक है वेदों

889
01:07:51,960 --> 01:07:56,080
के अनुसार जो परमात्मा पूर्ण ब्रह्म परम ब्रह्म कुछ है व

890
01:07:56,080 --> 01:08:00,080
ब्रह्म है इसीलिए व्यास जी ने भी ब्रह्म

891
01:08:00,080 --> 01:08:04,560
सूत्र लिखा उनको यह नहीं कहना पड़ा पूर्ण ब्रह्म सूत्र

892
01:08:04,560 --> 01:08:08,840
परम ब्रह्म सूत्र मगर हमारे शास्त्रों में पूर्ण ब्रह्म परम ब्रह्म

893
01:08:08,840 --> 01:08:13,480
की बातें आती कब है जब कहीं पर

894
01:08:13,480 --> 01:08:18,320
कंपैरिजन हो रहा होता है तो जो ब्रह्म है

895
01:08:18,320 --> 01:08:22,440
जो वास्तव में परमात्मा है उसी को वहां पर क्या

896
01:08:22,440 --> 01:08:26,560
कहते हैं चिन्हित करने के लिए पर उसके लिए कि जैसे

897
01:08:26,560 --> 01:08:30,600
दूसरा भी उसके जैसा ही लग रहा है तो यह परम ब्रह्म है यह पूर्ण ब्रह्म है ऐसे

898
01:08:30,600 --> 01:08:34,680
शब्दों का उपयोग किया गया मगर एट द एंड

899
01:08:34,680 --> 01:08:36,480
ऐसा नहीं है कि ब्रह्म

900
01:08:36,480 --> 01:08:40,520
से ऊपर भी कोई चीज है वेदों के अनुसार वह

901
01:08:40,520 --> 01:08:44,800
व्यक्ति समझाने में जब ब्रह्म के ही कई रूप हो जाते हैं जिसमें

902
01:08:44,800 --> 01:08:48,880
ब्रह्म ब्रह्म जो है कार्य कारण के भेद से जैसे वो पूर्ण परम

903
01:08:48,880 --> 01:08:52,960
ब्रह्म परमात्मा भी है मगर वो कहीं पर सेवक के भाव में भी दिख रहा है वो कहीं दास

904
01:08:52,960 --> 01:08:57,080
के भाव में भी दिख रहा है तो जब वो दिख रहा है तो उसके मन में आ रहा है कि ये तो यहां पर दास

905
01:08:57,080 --> 01:09:01,160
दिख रहा है तो फिर यह ब्रह्म है क्या तो वहां बताने के लिए

906
01:09:01,160 --> 01:09:05,240
कि यह भी ये भी ब्रह्म मगर यह पूर्ण ब्रह्म है यह परम ब्रह्म है इस

907
01:09:05,240 --> 01:09:09,400
तरीके से बताया गया मगर ब्रह्म से ऊपर की कोई चीज वेदों ने

908
01:09:09,400 --> 01:09:13,520
नहीं बताई है ब्रह्म एंड है जो आपका मोक्ष है वह

909
01:09:13,520 --> 01:09:17,520
ब्रह्म से अब क्या है वही ब्रह्म जो है वही

910
01:09:17,520 --> 01:09:21,920
ब्रह्म जो है जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में अपने आप को

911
01:09:21,920 --> 01:09:25,960
उद् भाषित करता है तो र

912
01:09:25,960 --> 01:09:30,160
अक्षर परम और परम अक्षर यह तीन रूप हो गए

913
01:09:30,160 --> 01:09:34,520
तो उन रूपों में ऊपर नीचे करने के लिए मतलब लीला भेद है

914
01:09:34,520 --> 01:09:39,280
ब्रह्म के ब्रह्म के रूपों में लीला भेद मात्र तो

915
01:09:39,280 --> 01:09:43,280
उसमें करने के लिए यह परम अक्षर अक्षर र है ऐसे किया

916
01:09:43,280 --> 01:09:47,320
गया मगर एक ही ब्रह्म के तीन रूप बताए गए अब क्या

917
01:09:47,320 --> 01:09:51,400
है कि वेद ने कहीं भी

918
01:09:51,400 --> 01:09:51,900
यह

919
01:09:51,640 --> 01:09:55,680
नहीं कहा कि नहीं भाई ब्रह्म से आगे की कोई चीज है जिसको तुमहे प्र

920
01:09:55,680 --> 01:10:00,240
करना है मगर रामपाल जी कहते हैं कि हमें जो है ब्रह्म को

921
01:10:00,240 --> 01:10:04,600
नहीं परम ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म को प्राप्त करना है

922
01:10:04,600 --> 01:10:10,600
य तो वेद के विरोध में हो

923
01:10:13,640 --> 01:10:17,680
गया तो देखो ऐसे है अब आपने जो यह बात

924
01:10:17,680 --> 01:10:22,520
करी इस इस बात को मैं आगे नेक्स्ट मतलब रि करूंगा इस पर

925
01:10:22,520 --> 01:10:26,680
आप जो बता रहे हैं ना ये मैं मतलब अभी मैं तो मेरे आत्म अनुभव

926
01:10:26,680 --> 01:10:31,000
की बात करा जो मुझे प्राप्त हुआ है वो मैं बात कर रहा हूं जैसे आप अब तो

927
01:10:31,000 --> 01:10:35,160
आप और हम आमने सामने है मुझे चेहरे से आप पहचानते हो मैं आपको पहचान रहा हूं

928
01:10:35,160 --> 01:10:39,160
मुझे ये मालूम है कि आप शिवास नारायण जी और मैं नरेंद्र कुमार हूं ठीक है

929
01:10:39,160 --> 01:10:43,400
और आज से 10 दिन पहले आपका हमारा कोई मतलब परिचय

930
01:10:43,400 --> 01:10:47,400
नहीं था ठीक है और आपने वहां अपना परिचय

931
01:10:47,400 --> 01:10:51,400
लिखा दिया कि मेरा नाम शिवास नारायण जी है और मैं यहां बैठा आपको

932
01:10:51,400 --> 01:10:55,560
मेरे से य कोई पूछ लेता है कि आप आपका मैं आपका परिचय दे देता

933
01:10:55,560 --> 01:10:59,560
हूं और आप मेरा यहां परिचय दे देते हो मैं इस आत्म ज्ञान की बात कर

934
01:10:59,560 --> 01:11:03,640
रहा हूं चलिए ठीक है मैं आपका आत्म ज्ञान सुन लेता

935
01:11:03,640 --> 01:11:06,720
हूं बस मुझे थोड़ा सा कबीर के विषय में आपसे कुछ पूछना है उसके बाद

936
01:11:06,720 --> 01:11:10,880
हम लोग कर लेते हैं यह सारे विषय आपसे बाहर के हैं

937
01:11:10,880 --> 01:11:15,240
क्या कबीर जो है वह सर्वशक्तिमान है हां

938
01:11:15,240 --> 01:11:19,360
जी अच्छा तो ईश्वर वही है

939
01:11:19,360 --> 01:11:23,400
जो कुछ भी कर सकता है वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है बल्कि सभी नियमों को

940
01:11:23,400 --> 01:11:28,680
बनाने वाला सर्व नियामक है ठीक है

941
01:11:28,680 --> 01:11:32,280
किसी भी नियम के नीचे नहीं है ना

942
01:11:32,280 --> 01:11:36,560
कबीर कबीर ऐसे नियम नहीं है जैसे सूर्य है

943
01:11:36,560 --> 01:11:40,560
सूर्य से किरणें निकल रही है अब वो सूर्य उस किरणों

944
01:11:40,560 --> 01:11:44,800
से प्रभावित नहीं है लेकिन उसका प्रकाश है वो

945
01:11:44,800 --> 01:11:48,840
मतलब अन्य प पड़ रहा उ किरणों का सूर्य पर तो कोई नहीं है

946
01:11:48,840 --> 01:11:53,760
जैसे दीपक है दीपक का प्रकाश तो अन्य पर प लेकिन खुद प नहीं पड़ इस तरह है

947
01:11:53,760 --> 01:11:58,040
सति मैं पूछ रहा हूं भाई साहब कबीर दास जी

948
01:11:58,040 --> 01:12:02,040
पृथ्वी पर आते हैं तो क्या वो जब वो पृथ्वी पर होते हैं सृष्टि के अंदर

949
01:12:02,040 --> 01:12:07,880
जब वो आते हैं तो तब वो नियमों के नीचे होते हैं या नहीं होते

950
01:12:07,880 --> 01:12:11,880
हैं देखो यह तो अब बात मैं तो यह बात क रहा हूं

951
01:12:11,880 --> 01:12:16,080
मेरी बात सुनो मैं जो बताने आया हूं य आपको मैं तो ये कह रहा हूं कि भा देखो भाई

952
01:12:16,080 --> 01:12:20,920
साहब हम लोग आपकी बात सुनेंगे ना हमारे कुछ चीजें क्लियर हो जाए मैं

953
01:12:20,920 --> 01:12:21,960
आपको अगर नहीं पता

954
01:12:21,960 --> 01:12:26,200
है तो बोल दो मुझे नहीं पता है हम फिर आगे बढ़ते हैं मैंने अभी तो

955
01:12:26,200 --> 01:12:30,280
आप जो बता रहे हैं इन बातों पर मैंने अभी रिसर्च नहीं किया है ये आप सवाल रखिए साल

956
01:12:30,280 --> 01:12:34,280
का जवाब दिए तो फिर हम अपने मतलब बात मतलब हो कभी इस पर

957
01:12:34,280 --> 01:12:38,520
नहीं आ रहे हम हम तो ये बता रहे जैसे मोक्ष है ना मोक्ष का मार्ग

958
01:12:38,520 --> 01:12:42,760
मनुष्य जीवन अति आवश्यक है तो जब भूषण वाली वो ब्राह्मण

959
01:12:42,760 --> 01:12:47,080
की आत्मा थी उसको लोमस ऋषि से जब श्राप मिला एक मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट भाई

960
01:12:47,080 --> 01:12:51,160
भाई साहब एक मिनट लोमस ऋषि प आएंगे क्या है ना ये

961
01:12:51,160 --> 01:12:55,520
जानना क्यों आवश्यक है अब आपके आत्मज्ञान का ही बात कर लेते हैं ठीक है

962
01:12:55,520 --> 01:12:59,840
यह क्यों पूछा मैंने तो यह पता चल जाएगा अभी आपको हा मुझे

963
01:12:59,840 --> 01:13:05,480
बताइए ईश्वर है इस दुनिया में यह कैसे सिद्ध होता

964
01:13:05,480 --> 01:13:09,480
है ईश्वर मतलब इस दुनिया में

965
01:13:09,480 --> 01:13:14,920
है ये कैसे सिद्ध होगा ये बात है

966
01:13:14,920 --> 01:13:19,320
ईश्वर मतलब वो भक्त के माध्यम

967
01:13:19,320 --> 01:13:24,120
से वो मतलब प्राप्त होंगे गुरु के माध्यम से अरे

968
01:13:24,120 --> 01:13:28,200
भाई एक बिल्कुल ऐसा व्यक्ति हूं जिसने आज तक ईश्वर

969
01:13:28,200 --> 01:13:32,320
के बारे में नहीं सुना अब आप मुझे ईश्वर के बारे में बताइए ठीक

970
01:13:32,320 --> 01:13:37,160
बताइए ईश्वर के बारे में

971
01:13:37,160 --> 01:13:41,720
चलिए इस ब तो मैं आपको बता रहा हूं

972
01:13:41,720 --> 01:13:46,120
कि ये तो शास्त्रों में है क मनुष्य जीवन पूर्ण मनुष

973
01:13:46,120 --> 01:13:50,200
शास्त्र को नहीं मान मैं शास्त्रों को भी नहीं जानता वेस्ट इंडीज का कोई व्यक्ति वेद

974
01:13:50,200 --> 01:13:54,240
नहीं जानता आप पहले ईश्वर को ख्या पित करिए उसके बाद शास्त्रों

975
01:13:54,240 --> 01:13:57,720
पर आइएगा

976
01:13:57,720 --> 01:14:02,800
तो तो मैं आपके सामने ही तो हूं मैं बता रहा हूं ना किई

977
01:14:02,800 --> 01:14:07,160
जब आप मैं आपको उदाहरण उदाहरण क्या दे रहा हूं वास्तविक सही बात है शास्त्रों

978
01:14:07,160 --> 01:14:11,400
की बात है और सही है वो मैं बता रहा हूं ना भाई काक भूषण जी को लोमस

979
01:14:11,400 --> 01:14:16,120
ऋषि नेया ना भा साहब भाई साहब आप मुझे किसके बारे में बता रहे हैं ये बताइए

980
01:14:16,120 --> 01:14:21,000
मैं बता रहा हूं कबीर साहब के बारे में आपको यहां से शुरू कर रहा कबीर साहब तक लेकर जाऊंगा ना

981
01:14:21,000 --> 01:14:25,840
सुनिए तो आप मुझे ईश्वर के बारे में बता रहे हैं ना हां जी

982
01:14:25,840 --> 01:14:30,480
अच्छा ईश्वर कौन है कौन होता है ईश्वर

983
01:14:30,480 --> 01:14:36,480
नाम से नहीं बाय

984
01:14:37,520 --> 01:14:42,400
फीचर्स बाई फीचर्स ईश्वर कौन होता है

985
01:14:42,400 --> 01:14:46,520
गुरु का स्वरूप गुरु के स्वरूप में यहां अपने को मतलब उनकी

986
01:14:46,520 --> 01:14:51,000
मतलब अपना जो ध्यान है व गुरु के स्वरूप में होता है अरे

987
01:14:51,000 --> 01:14:55,240
मेरे भाई मैं भाई साहब ये पूछ रहा हूं आपसे कि ईश्वर का

988
01:14:55,240 --> 01:14:59,280
अस्तित्व है कि नहीं यह आप मुझे बताइए यह कैसे प्रूव होता है इस

989
01:14:59,280 --> 01:15:03,440
दुनिया में कोई असाधारण शक्ति संपन्न कोई सर्व शक्तिमान

990
01:15:03,440 --> 01:15:09,440
सत्ता है यह कैसे प्रूव होता है वो बताइए

991
01:15:09,480 --> 01:15:13,680
मुझे तो उसी के लिए तो आपको यह मतलब दे रहे है ना

992
01:15:13,680 --> 01:15:17,720
लोम का प्रसंग सुना रहे हैं तो व आपको यह मालूम पड़ जाएगा वो शक्ति है

993
01:15:17,720 --> 01:15:21,960
जब तो यह कार्य हुआ ना आ काम मुझे प्रमाणों

994
01:15:21,960 --> 01:15:26,320
की आवश्यकता नहीं है अभी क्योंकि मैं अभी ईश्वर को नहीं मान तो शास्त्र

995
01:15:26,320 --> 01:15:31,480
को क्यों मानूंगा और क्यों मैं लोमस ऋषि को मानूंगा क्यों मैं काग भुंड को

996
01:15:31,480 --> 01:15:35,480
मानूंगा भाई जो व्यक्ति ईश्वर को ही नहीं जानता है वह

997
01:15:35,480 --> 01:15:39,160
शास्त्र को कहां से जानता

998
01:15:39,160 --> 01:15:43,440
है उसकी प्रमाणिकता कैसे हो रही पहले उसकी रुचि तो जगाए

999
01:15:43,440 --> 01:15:47,640
कि भाई तेरी रुचि होनी चाहिए इसमें शास्त्र में तब तो वो उसको शास्त्र को स्वीकार

1000
01:15:47,640 --> 01:15:51,720
करे आप मेरी रुचि तो पैदा करिए है क्योंकि आप आत्म अनुभव

1001
01:15:51,720 --> 01:15:56,000
की बात कर रहे हैं इसलिए मैंने बात बोली क्योंकि आत्म में ईश्वर

1002
01:15:56,000 --> 01:16:00,240
का अस्तित्व और ईश्वर की आवश्यकता और दिन ईश्वर के द्वारा

1003
01:16:00,240 --> 01:16:04,440
मिलने वाला जो मोक्ष है ये तीनों धरा ये तीनों जो

1004
01:16:04,440 --> 01:16:08,560
घटक है वो आते हैं आत्म अनुभव धरातल पर होना चाहिए ना धरातल पर होना

1005
01:16:08,560 --> 01:16:12,800
चाहिए अब मैं आपसे पूछ रहा हूं सबसे पहले आप मुझे यह बताइए

1006
01:16:12,800 --> 01:16:16,920
कि कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है यह कैसे मैं

1007
01:16:16,920 --> 01:16:20,920
मानू मैं क्यों जाऊ ईश्वर को ढूंढने मैं क्यों जाऊं शास्त्रों को पढ़ने

1008
01:16:20,920 --> 01:16:24,600
मैं क्यों जाऊं काग भुशुंडीर या लोमस ऋषि की बातें

1009
01:16:24,600 --> 01:16:28,800
सुनने ने आप मुझे ऐसा कुछ बताइए एक बार मेरा डाटा

1010
01:16:28,800 --> 01:16:33,520
समाप्त हो रहा है 90 प आगे मैं थोड़ा रिचार्ज कर लेता हूं

1011
01:16:33,520 --> 01:16:39,520
जी आप रिचार्ज कर लीजिए हां

1012
01:17:23,750 --> 01:17:29,750
[संगीत]

1013
01:17:30,960 --> 01:17:35,160
पहाड़ी जी आप आएंगे कनेक्ट हो जाइए

1014
01:17:35,160 --> 01:17:40,400
जवाइन कर

1015
01:17:40,400 --> 01:17:46,400
लीजिए उनको बात बिना हमने

1016
01:17:58,600 --> 01:18:02,880
जय श्री राम जय श्री राम मैं कह रहा हूं कि लोमस ऋषि

1017
01:18:02,880 --> 01:18:07,320
की कहानी हम सबको जाननी है बिना जाने उनको भेजिएगा मत

1018
01:18:07,320 --> 01:18:12,320
वो भी सुन हां हा वो जानेंगे जानेंगे

1019
01:18:12,320 --> 01:18:14,560
जानेंगे

1020
01:18:14,560 --> 01:18:18,840
जानेंगे लोमस ऋषि जी के बारे में जानेंगे पहले हम देख ले

1021
01:18:18,840 --> 01:18:23,040
कि भाई इनको जो आत्म अनुभव हुआ उस कितना उसका क्या स्तर है

1022
01:18:23,040 --> 01:18:25,680
क्या बात है

1023
01:18:25,680 --> 01:18:30,120
जी ऐसा चल ऐसा लग रहा था कि कोई वाइवा का एग्जाम चल रहा है

1024
01:18:30,120 --> 01:18:34,960
या आप मैंने आपका कमेंट पढ़ा

1025
01:18:34,960 --> 01:18:40,680
था

1026
01:18:40,680 --> 01:18:44,800
नारायण रिचार्ज मेरे ख्याल से इनका खत्म हो गया तब तक आप

1027
01:18:44,800 --> 01:18:48,960
दे दीजिए लिंक कोई कोई और आना चाहे तो वत्सल जी बहुत दिल

1028
01:18:48,960 --> 01:18:54,960
से परेशान है

1029
01:19:07,040 --> 01:19:12,960
भाई य लिंक दिया है वत्सल जी आप कनेक्ट हो

1030
01:19:12,960 --> 01:19:17,080
जाइए देसी मुर्गी जी ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध

1031
01:19:17,080 --> 01:19:21,240
करिए इसी चैनल से आपका प्रचार शुरू कर देंगे तब तक बातें

1032
01:19:21,240 --> 01:19:27,240
चकनी हो तो कहीं और जाइए

1033
01:19:29,360 --> 01:19:33,440
हां वत्सल जी जय श्री राम जय श्री राम नारायण

1034
01:19:33,440 --> 01:19:37,440
भैया बड़े क्यूट लगते हैं

1035
01:19:37,440 --> 01:19:41,600
आप अरे भैया वो मैं आपको कॉल

1036
01:19:41,600 --> 01:19:46,960
नहीं करता हूं वो मैं ही हूं जानता हूं जानता

1037
01:19:46,960 --> 01:19:51,160
हूं अभी वो सेटिंग सेटिंग्स का

1038
01:19:51,160 --> 01:19:57,160
में देखा मैंने कि कैसे न ऑ फिर किया और अभी आया

1039
01:19:58,840 --> 01:20:03,080
भैया एक प्रश्न था वभी नरेंद्र भैया आ रहे उसके पहले थोड़ा

1040
01:20:03,080 --> 01:20:07,560
पूछ सकता हूं तो बोलिए बोलिए

1041
01:20:07,560 --> 01:20:12,000
अगर बोलिए बोलिए नहीं नहीं आपले

1042
01:20:12,000 --> 01:20:16,520
बोल नहीं नहीं अगर विषय से रिलेटेड ना हो तो आप फोन पर पूछ

1043
01:20:16,520 --> 01:20:18,680
लीजिएगा

1044
01:20:18,680 --> 01:20:23,680
यश अभी विषय से रिलेटेड नहीं है इसलिए हा

1045
01:20:23,680 --> 01:20:28,080
रद जी वास आ गए क्या

1046
01:20:28,080 --> 01:20:34,080
जी कैमरा ऑन कर लीजिए आप

1047
01:20:36,080 --> 01:20:42,080
अपना कैमरा ऑन नहीं हुआ क्या

1048
01:20:46,080 --> 01:20:49,400
ना

1049
01:20:49,400 --> 01:20:55,400
ही एक बार वापस जाकर दोबारा आइए

1050
01:20:58,480 --> 01:21:04,480
राहुल जी जय श्री

1051
01:21:04,800 --> 01:21:09,000
राम जी जय श्री राम जी प्रणाम जय श्री राम

1052
01:21:09,000 --> 01:21:14,920
खुश रहिए

1053
01:21:14,920 --> 01:21:20,920
जी देख रहे थे हम अभी शुरू से जुड़े थे

1054
01:21:22,000 --> 01:21:28,000
आपसे काफी बुद्धिजीवी वक्ति जुड़ते आपसे वैसे चर्चा

1055
01:21:33,640 --> 01:21:39,640
केलिए वत्सल जी की बात कर रहे हैं ना समझ गया

1056
01:21:45,560 --> 01:21:49,560
जी पंडित जी लिंक एक बार और दे दीजिए उसे पिन कर

1057
01:21:49,560 --> 01:21:52,760
दीजिए

1058
01:21:52,760 --> 01:21:57,120
आप आगे क्या दोबारा आए नहीं

1059
01:21:57,120 --> 01:22:01,120
क्या ये भाई बिना कैमरे के आप लोग मत

1060
01:22:01,120 --> 01:22:05,240
जुड़ा करिए व्यर्थ में ही आपको जो है परेशान होते हैं तब

1061
01:22:05,240 --> 01:22:10,800
तक वत्सल जी आपकी कोई और बात हो तो बताइए तब तक आपकी बात सुन

1062
01:22:10,800 --> 01:22:15,320
ले हां

1063
01:22:15,320 --> 01:22:19,080
जी

1064
01:22:19,080 --> 01:22:21,920
बोलिए

1065
01:22:21,920 --> 01:22:26,400
मैं मैं ये जानना चाह रहा था जैसे आप को आत्म अनुभव हुआ है

1066
01:22:26,400 --> 01:22:32,400
तो क्या आपको इस बात का अनुभव है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता

1067
01:22:33,040 --> 01:22:37,000
है चले

1068
01:22:37,000 --> 01:22:41,040
गए वत्सल जी बोलिए भैया

1069
01:22:41,040 --> 01:22:45,880
मतलब वही वाला प्रश्न बोलो ना कि अभी विषय से वो भटके

1070
01:22:45,880 --> 01:22:50,040
नहीं हां वो वो इस चर्चा

1071
01:22:50,040 --> 01:22:54,680
से रिलेटेड है यहां करना आवश्यक है तो करिए फोन पर कर

1072
01:22:54,680 --> 01:22:58,680
मुझे लगता है कि उनका डाटा ही मलब चला गया फोन के डाटा नहीं

1073
01:22:58,680 --> 01:23:03,400
उनका डाटा ही चला गया अभ आ ग आ ग

1074
01:23:03,400 --> 01:23:08,280
नहीं आए नहीं अभी नहीं आए जी श्याम सुंदर जी जय श्री राम

1075
01:23:08,280 --> 01:23:12,720
जय श्री राम राधे राधे महाराज जी

1076
01:23:12,720 --> 01:23:17,160
ध क्या हुआ नरेंद्र

1077
01:23:17,160 --> 01:23:21,640
जी आ गए हैं तो आप लोग थोड़ा सा स्टेज खाली कर दे

1078
01:23:21,640 --> 01:23:25,720
जी क्या है थोड़ा इसम थोड़ा ज्यादा हैना इसलिए फोन थोड़ा लोड ले रहा

1079
01:23:25,720 --> 01:23:29,880
तो वो हो जाता स्क्रीन पसे ही जी मैं ये पूछ

1080
01:23:29,880 --> 01:23:34,440
रहा था कि जैसे आपने कहा आपको आत्म अनुभव हुआ है तो

1081
01:23:34,440 --> 01:23:38,800
जब आपको और आप कह रहे हो कि आप रामपाल जी जो कि तत्वदर्शी हैं

1082
01:23:38,800 --> 01:23:43,640
उनके आप शिष्य है मतलब उत्तराधिकारी है

1083
01:23:43,640 --> 01:23:47,720
हां ये उन्होंने मतलब ये पहले से भविष्यवाणी करी है और

1084
01:23:47,720 --> 01:23:48,220
वो

1085
01:23:48,120 --> 01:23:52,360
मैं ये मतलब वो तो उन्होंने पहले से भविष्यवाणी की उन्होंने अपने से मतलब

1086
01:23:52,360 --> 01:23:56,480
अपने मुख से ना आगे के लिए भविष्यवाणी कर मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आपको कोई प्रमाण

1087
01:23:56,480 --> 01:24:00,560
देना है मैं बस अभी आपका क्लेम जानना चाह रहा हूं हां जी रामपाल

1088
01:24:00,560 --> 01:24:04,800
जी तत्वदर्शी है कबीर भगवान है और आप आत्म ज्ञानी

1089
01:24:04,800 --> 01:24:08,960
है और आप रामपाल जी तत्वदर्शी है जो उनके

1090
01:24:08,960 --> 01:24:13,280
उत्तराधिकारी है यह आपके क्लेम है हा उतराधिकारी अभी बनेंगे

1091
01:24:13,280 --> 01:24:17,480
बनेंगे आगे आने वाले समय में आप उनकी गद्दी

1092
01:24:17,480 --> 01:24:21,800
पर बैठेंगे ठीक है नहीं ग का सवाल ही नहीं रहा गद्दी

1093
01:24:21,800 --> 01:24:26,160
वाला तो उन्होंने बिल्कुल क्लोज कर दिया मामला अरे भाई

1094
01:24:26,160 --> 01:24:30,200
उनके नाम से जाने जाएंगे उनके उत्तराधिकारी कहलाएंगे कुछ भी मान लीजिए

1095
01:24:30,200 --> 01:24:34,440
क्यों शब्द में जा रहे हैं उनके द्वारा जो व्यवस्था होगी उस व्यवस्था

1096
01:24:34,440 --> 01:24:39,000
को संभालने में अभी मैं ये पूछ रहा हूं आपसे

1097
01:24:39,000 --> 01:24:43,080
कि जब आप आत्मज्ञानी है तो आपको यह विषय

1098
01:24:43,080 --> 01:24:47,120
मालूम है कि नहीं कि ईश्वर तत्व जो है वह सिद्ध कैसे

1099
01:24:47,120 --> 01:24:50,640
होता है कि वह

1100
01:24:50,640 --> 01:24:54,800
है तो हो गया ना गुरु के रूप में मुझे परमात्मा की प्राप्ति हुई इसलिए मुझे आत्म

1101
01:24:54,800 --> 01:24:59,360
ज्ञान हुआ ना मैं अपने गुरु की पहचान बता रहा हूं ना आध्यात्मिक

1102
01:24:59,360 --> 01:25:03,480
गुरु कौन है वो भा रामपाल जी

1103
01:25:03,480 --> 01:25:07,480
यह बताइए आप उनका वो संभालेंगे जब तो आपसे अगर कोई नास्तिक

1104
01:25:07,480 --> 01:25:11,680
आ कर के पूछेगा कि मैं क्यों मानू कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है उसको

1105
01:25:11,680 --> 01:25:16,400
क्या बताएंगे

1106
01:25:16,400 --> 01:25:20,480
आप वो तो जो गुरु है जो गुरु

1107
01:25:20,480 --> 01:25:24,600
गुरु ने जो अपनी जो प्रोसेस है अपना विधि है जो सब बता रखा है ना

1108
01:25:24,600 --> 01:25:28,760
वो तुम उनको करना बताइए ना मैं एक नास्तिक हूं आपसे पूछ रहा हूं

1109
01:25:28,760 --> 01:25:32,920
कि मैं क्यों मानू इस दुनिया में कोई ईश्वर है बताइए मुझे जी

1110
01:25:32,920 --> 01:25:36,960
वो तो जब उनका आदेश आएगा तब उसके बारे में अपन बात करेंगे ना उनका आदेश ही नहीं है ना

1111
01:25:36,960 --> 01:25:41,080
अभी तक तो फिर इसके बारे में बात का आदेश नहीं है मतलब अभी

1112
01:25:41,080 --> 01:25:47,080
आपको नहीं मालूम है कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता

1113
01:25:47,760 --> 01:25:51,760
है ईश्वर सिद्ध तो गुरु के रूप में सिद्ध सिद्ध कर रहे हैं

1114
01:25:51,760 --> 01:25:55,840
ना गुरु के रूप में सिद्ध बाद में गुरु के रूप

1115
01:25:55,840 --> 01:25:59,840
में बाद में हम ईश्वर को स्वीकारें पहले ईश्वर तो सिद्ध हो कि हां

1116
01:25:59,840 --> 01:26:04,800
ईश्वर है फिर हम ये कहेंगे ना कि गुरु के रूप में ईश्वर है

1117
01:26:04,800 --> 01:26:08,840
जैसे हमने कहा जो जिस संतान ने अभी तक जन्म नहीं

1118
01:26:08,840 --> 01:26:12,960
लिया बल्कि गर्भा दन भी नहीं हुआ और हम ये कहे कि

1119
01:26:12,960 --> 01:26:16,960
भैया उसका नाम जो है ना रोहन है वही वही वो है संतान अरे

1120
01:26:16,960 --> 01:26:21,000
भाई संतान का गर्भा दन तक नहीं हुआ उसने अभी तक जन्म नहीं लिया और

1121
01:26:21,000 --> 01:26:25,000
हम कह रहे हैं कि संतान कौन है वो रोहन जिसका नाम है ना वही संतान

1122
01:26:25,000 --> 01:26:29,000
किसका नाम है जिसका अभी तक गर्म धारण नहीं हुआ जो अभी तक आया नहीं

1123
01:26:29,000 --> 01:26:34,520
तो पहले आप उसको तो सिद्ध करिए

1124
01:26:34,520 --> 01:26:38,840
तो बेटे की पहचान तो बाप बताएगा ना

1125
01:26:38,840 --> 01:26:43,720
तो मैं मैं पूछ रहा हूं ना आपसे कि आप इस दुनिया में

1126
01:26:43,720 --> 01:26:49,720
कोई ईश्वर है यह मुझे बताइए

1127
01:26:51,040 --> 01:26:55,120
आप ईश्वर है तो ईश्वर की बात ही तो बता बता

1128
01:26:55,120 --> 01:26:59,360
रहे आप आप ये बता रहे हो ईश्वर का नाम क्या है ईश्वर

1129
01:26:59,360 --> 01:27:03,760
कैसा दिखता है ईश्वर ये है वो है मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर

1130
01:27:03,760 --> 01:27:08,680
है यह कैसे सिद्ध होता

1131
01:27:08,680 --> 01:27:12,800
है इस दुनिया में कोई ऐसी सत्ता है

1132
01:27:12,800 --> 01:27:16,840
जो सर्वशक्तिमान है यह कैसे सिद्ध होता है है कोई इस

1133
01:27:16,840 --> 01:27:21,720
दुनिया में अभ

1134
01:27:21,720 --> 01:27:25,720
फिर हेलो जी ये क्या मेरा थोड़ा लोड ले

1135
01:27:25,720 --> 01:27:29,800
रहा है फोन तो वोहा है मैं ये

1136
01:27:29,800 --> 01:27:34,240
कह रहा हूं कि भाई देखो ईश्वर की तो ईश्वर का जो

1137
01:27:34,240 --> 01:27:38,480
मतलब समर्थ है वही तो आपको बता रहे हैं ईश्वर को समझने के लिए समर्थ

1138
01:27:38,480 --> 01:27:42,760
आपको बता रहा हूं लोमस ऋषि जी से का भन को जब मिला

1139
01:27:42,760 --> 01:27:46,840
था वो साब आप ये बता रहे हैं आप ये बता रहे

1140
01:27:46,840 --> 01:27:51,080
हैं आप ये बता रहे हैं कि जो हमारे शास्त्रों में ऋषि अथवा

1141
01:27:51,080 --> 01:27:55,480
ईश्वर के स्वरूप का वर्णन है उनके अनुसार जो भविष्यवाणी जो भी वृतांत है

1142
01:27:55,480 --> 01:28:00,240
उससे कहीं से मेरे रामपाल भी कनेक्ट होते हैं और मेरे मैं भी कनेक्ट होता हूं

1143
01:28:00,240 --> 01:28:04,400
मैं यह पूछ रहा हूं कि इन पुराणों में जिस ईश्वर जिस परम तत्व

1144
01:28:04,400 --> 01:28:06,160
की बात की गई है वह

1145
01:28:06,160 --> 01:28:10,960
परम तत्व एजिस्ट करता है यह बात में क्यों मानू

1146
01:28:10,960 --> 01:28:15,440
मैं यह पूछ रहा हूं यह शास्त्र सच बोल रहे हैं

1147
01:28:15,440 --> 01:28:20,280
यह बात में क्यों मानू मैं यह पूछ रहा हूं

1148
01:28:20,280 --> 01:28:24,320
तब तो मैं इस पर जाऊंगा कि उससे आप कनेक्ट हो कि नहीं हो तब तो मैं मैं

1149
01:28:24,320 --> 01:28:29,240
चेक करूंगा देखो ये मेरा फोन

1150
01:28:29,240 --> 01:28:35,240
एक मिनट ये फोन फिर वापस आ गया

1151
01:28:43,320 --> 01:28:47,440
उर चलिए फिर मुझे लगता नहीं है आज चर्चा

1152
01:28:47,440 --> 01:28:51,880
आप लोग को आनंद आया हां अभी क्या

1153
01:28:51,880 --> 01:28:57,880
सच में अभी तो आनंद ही आ रहा है

1154
01:28:58,880 --> 01:29:01,920
क्या बताऊ

1155
01:29:01,920 --> 01:29:05,920
भैया वो मतलब जो तर्क और उससे जो बात होती है

1156
01:29:05,920 --> 01:29:10,920
व नहीं अभी दिख रही

1157
01:29:10,920 --> 01:29:15,080
है वह कुछ असल में वो अपना अनुभव बताने आए हैं कि उनको

1158
01:29:15,080 --> 01:29:19,240
कोई सपना दिखा या कहीं पर कोई भविष्यवाणी हुई उसके अनुसार उनको यह हुआ उनके

1159
01:29:19,240 --> 01:29:23,400
जीवन में ऐसा हुआ वैसा हुआ यह सब चीजें सिद्ध करती है कि वो आने वाले

1160
01:29:23,400 --> 01:29:27,560
टाइम में पाल जी की पद पर आगे बढ़ेंगे अब इसमें

1161
01:29:27,560 --> 01:29:31,680
बात य आती कि उनकी य कहानी हम तब सुने जब इनकी कुछ

1162
01:29:31,680 --> 01:29:36,160
पहली बात तो रामपाल के ही विरोध में रामपाल जी के ही हम उसमें नहीं है

1163
01:29:36,160 --> 01:29:40,280
तो हमें क्या फर्क पड़ता है कि उनकी भविष्यवाणियों से कौन प्रूफ होता है कौन नहीं प्रूव था

1164
01:29:40,280 --> 01:29:44,280
फिर भी यह आए तो इनकी बात हम सुन लेंगे मगर कम से कमय अपना

1165
01:29:44,280 --> 01:29:48,280
आत्मज्ञान अगर ये रामपाल के उत्तराधिकारी आगे भविष्य में होने वाले

1166
01:29:48,280 --> 01:29:54,280
हैं तो कुछ चीज तो इनको अपनी बतानी चाहिए कि हम इतने हम तत्वदर्शी है

1167
01:29:54,560 --> 01:29:59,040
वो भी है पार्थ पाराशर जी जय श्री

1168
01:29:59,040 --> 01:30:03,040
राम ज श्री राम इनका चैनल है पार्थ

1169
01:30:03,040 --> 01:30:07,360
परा सर जी का आप लोग उसे अवश्य आवश्यक रूप से

1170
01:30:07,360 --> 01:30:11,560
फॉलो कर ले धर्म सनातन के नाम से है और यह भी

1171
01:30:11,560 --> 01:30:14,240
हमारा साथ निभाने वाले हैं पाखंड हों के खंडन

1172
01:30:14,240 --> 01:30:18,480
में इस यात्रा में छोटे भाई हमारे

1173
01:30:18,480 --> 01:30:23,440
तो आप लोग इनका भी चैनल फलो कर अभी इनको हमने

1174
01:30:23,440 --> 01:30:27,520
है स्वामी नारायण मत का कारभार इनको सौपा है

1175
01:30:27,520 --> 01:30:31,600
देखते हैं कैसा खरा उतरते हैं कि नहीं उतरते

1176
01:30:31,600 --> 01:30:34,720
हैं

1177
01:30:34,720 --> 01:30:39,120
शूट लाइव स्ट्रीम में जड़

1178
01:30:39,120 --> 01:30:43,240
जाऊ आप एक बार एक बार आउट हो कर के वापस आइए पार जी

1179
01:30:43,240 --> 01:30:48,040
आपका जो वो है ना लिप सिं व मैच नहीं खा रही व

1180
01:30:48,040 --> 01:30:54,040
जी

1181
01:30:55,480 --> 01:30:59,520
स्वामी नारायण वाला जो है ना वो मतलब मतलब हमारे

1182
01:30:59,520 --> 01:31:03,600
घर में भी दो तीन लोग ऐसे जो करते हैं फलो स्वामी

1183
01:31:03,600 --> 01:31:07,880
नारायण के कुछ आपत्ति वीडियो भेजिएगा हम लोग उस भी देखते हैं थोड़ा सा वैसे

1184
01:31:07,880 --> 01:31:12,400
भी अब रामपाल के बारे में बोलने को कुछ बचा नहीं है मलब आप

1185
01:31:12,400 --> 01:31:16,440
जनक वीडियो तो नहीं लेकिन मतलब उन बहुत बहुत क्या बोले

1186
01:31:16,440 --> 01:31:20,840
म बोले ना की बहुत बुरी बुरी म होती

1187
01:31:20,840 --> 01:31:25,520
है वापस आ गया जी जी

1188
01:31:25,520 --> 01:31:29,760
क्या हो जाता है थोड़ा व्यवस्थित रूप

1189
01:31:29,760 --> 01:31:35,360
से आइए किसी और

1190
01:31:35,360 --> 01:31:39,520
दिन हां जी अनुमति हो तो व्यवस्थित रूप

1191
01:31:39,520 --> 01:31:43,920
में मतलब य मैं मेरे आत्म अनुभव की बातें कर रहा हूं मैं अभी

1192
01:31:43,920 --> 01:31:48,360
शास्त्रों से मतलब नहीं मुझे भाई साब मैं शास्त्रों की बात ही नहीं कर रहा

1193
01:31:48,360 --> 01:31:52,360
देखिए हमारे जीवन में आत्म अनुभव आता कहां से है

1194
01:31:52,360 --> 01:31:56,880
अध्यात्म आता कहां से है एक चीज से आता है वो मैं बताता हूं आपको

1195
01:31:56,880 --> 01:32:01,720
असतो मा सद गम तमसो मा जोति

1196
01:32:01,720 --> 01:32:06,480
गमाया मृत मा मतम गमाया

1197
01:32:06,480 --> 01:32:11,360
मुझे असत से सत की ओर ले चलो मुझे

1198
01:32:11,360 --> 01:32:15,400
अंधकार से उजाले की ओर ले चलो मुझे

1199
01:32:15,400 --> 01:32:19,520
मृत्यु से अमृत्व की ओर ले चलो जब इस चीज के बारे

1200
01:32:19,520 --> 01:32:25,520
में हम सोचने लगते हैं तो हमारा आत्म अनुभव अध्यात्म स्टार्ट हो जाता है

1201
01:32:25,960 --> 01:32:30,320
है ना ठीक है ना तो यह

1202
01:32:30,320 --> 01:32:34,640
जो यह जो है ना कि मुझे असत

1203
01:32:34,640 --> 01:32:39,120
से सत की ओर ले चलो यह है सत मुझे

1204
01:32:39,120 --> 01:32:43,520
अंधकार से उजाले की ओर ले चलो यह है

1205
01:32:43,520 --> 01:32:47,640
चि और मुझे मृत्यु विहीन जीवन से अमृत्व की ओर

1206
01:32:47,640 --> 01:32:51,760
ले चलो यह है आनंद तो ईश्वर कौन है सत

1207
01:32:51,760 --> 01:32:55,840
चित आनंद ठीक है

1208
01:32:55,840 --> 01:32:59,960
तो जब हम बात करते हैं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है जब

1209
01:32:59,960 --> 01:33:04,040
हम बात करते हैं कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1210
01:33:04,040 --> 01:33:08,240
है तो हमें किसी को सबसे पहले यह बताना होगा

1211
01:33:08,240 --> 01:33:12,720
और यदि हम यह बात करते हैं कि हम तत्वदर्शी संत हैं

1212
01:33:12,720 --> 01:33:16,760
या हम यह बात करते हैं कि हम लोगों को अज्ञानता से ज्ञान की ओर लाने

1213
01:33:16,760 --> 01:33:21,000
वाले व्यक्ति हैं तो हमें सबसे पहले उसको यह बताना

1214
01:33:21,000 --> 01:33:25,400
होगा कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप

1215
01:33:25,400 --> 01:33:29,760
परमेश्वर है उसके बाद हम बताएंगे कि वह ऐसा है

1216
01:33:29,760 --> 01:33:33,960
उसका नाम यह है वो गुरु के रूप में मिलता है वो यहां होता है वो

1217
01:33:33,960 --> 01:33:38,920
बाद में बताएंगे मगर पहले बताना होगा कि वह

1218
01:33:38,920 --> 01:33:41,000
है अब अब है

1219
01:33:41,000 --> 01:33:45,120
मैं यह बता रहा हूं कि जैसे आप अब शिवांस नारायण जी के रूप

1220
01:33:45,120 --> 01:33:49,280
में आप विराजमान

1221
01:33:49,280 --> 01:33:54,120
है तो आपके पिछले कई अनेको जन्म होंगे

1222
01:33:54,120 --> 01:33:58,200
अनेको जन्म हुए ना उसका ज्ञान नहीं मानता

1223
01:33:58,200 --> 01:34:03,280
मैं नहीं

1224
01:34:03,280 --> 01:34:07,280
मानता भाई साहब देखिए आप आत्मज्ञानी और तत्वदर्शी के

1225
01:34:07,280 --> 01:34:11,280
वो है उत्तराधिकारी आने वाले टाइम के तो आपको मालूम होना

1226
01:34:11,280 --> 01:34:15,560
चाहिए कि ईश्वरीय सत्ता को किसी नास्तिक के समक्ष

1227
01:34:15,560 --> 01:34:20,560
कैसे सिद्ध करें कैसे एक नास्तिक को संतुष्ट

1228
01:34:20,560 --> 01:34:24,880
करें नास्तिक नितर हो जाए

1229
01:34:24,880 --> 01:34:30,880
यह संसार चमत्कार से मानता

1230
01:34:34,320 --> 01:34:38,840
है बता द चमत्कार की बात में आपको बता दूं

1231
01:34:38,840 --> 01:34:42,960
मैं आपको कांच के टुकड़े दे दूंगा या मैं

1232
01:34:42,960 --> 01:34:47,800
आपको प्रॉपर जो आपको संसाधन चाहिए होंगे वह दे दूंगा

1233
01:34:47,800 --> 01:34:53,800
आप मुझे बल्ब बना कर के दिखा दोगे

1234
01:34:58,200 --> 01:35:02,400
मैं आपको लोहा दे दूंगा तांबा दे दूंगा पीतल दे दूंगा रबड़

1235
01:35:02,400 --> 01:35:08,400
दे दूंगा क्या आप एरोप्लेन बना के दिखा

1236
01:35:09,480 --> 01:35:13,560
दोगे अपना मेरी बात सुनो अपना अध्यात्म विय अध्यात्म क्या है आत्मा

1237
01:35:13,560 --> 01:35:17,560
और परमात्मा का ज्ञान ही तो मतलब इसम समत है देखो बाकी सारा विषय

1238
01:35:17,560 --> 01:35:19,680
तो

1239
01:35:19,680 --> 01:35:23,720
सार सुनि आत्मा है परमात्मा है

1240
01:35:23,720 --> 01:35:27,720
मुझे सिद्ध तो करिए इस अस्तित्व के बाहर भी मेरा और कोई

1241
01:35:27,720 --> 01:35:32,240
अस्तित्व है यह मुझे सिद्ध तो करिए मुझे परमात्मा की आवश्यकता

1242
01:35:32,240 --> 01:35:36,480
है यह मुझे सिद्ध तो करिए परमात्मा का कोई अस्तित्व है यह मुझे

1243
01:35:36,480 --> 01:35:40,680
सिद्ध तो करिए मुझे दिख तो रहा नहीं है कुर्सी है टेबल है आप हो

1244
01:35:40,680 --> 01:35:46,680
मनुष्य हो तो मुझे सिद्ध करिए कि परमात्मा

1245
01:35:46,880 --> 01:35:51,080
है तो यही तो मैं सिद्ध कर रहा हूं ना जैसे आप अभी

1246
01:35:51,080 --> 01:35:55,120
आप आप मतलब शवास नारायण जी के रूप में आप

1247
01:35:55,120 --> 01:35:59,200
विराजमान है आपकी आत्मा पीछे अनेको जन्म आपके हुए हैं तो

1248
01:35:59,200 --> 01:36:01,520
उसन

1249
01:36:01,520 --> 01:36:05,760
जो आप पता नहीं क्या कह रहे आप आप मेरी बात

1250
01:36:05,760 --> 01:36:10,120
ही नहीं सु समझ रहे मैं अपने पिछले जन्मों को तब मानूंगा

1251
01:36:10,120 --> 01:36:14,520
जब मैं इस बॉडी के अलावा अपना अस्तित्व स्वीकार करूं आत्मा

1252
01:36:14,520 --> 01:36:20,520
के रूप

1253
01:36:21,160 --> 01:36:25,240
में देखो यह तो गुरु कर सकता है या गुरु के द्वारा

1254
01:36:25,240 --> 01:36:29,280
जो आशीर्वाद प्राप्त है उनकी शक्ति से जो मतलब वोय

1255
01:36:29,280 --> 01:36:34,080
आप जो करे सवाल का जवाब तो वही देंगे गु आपको आ

1256
01:36:34,080 --> 01:36:38,120
में आपको आत्म अनुभव में ये प्राप्त नहीं हुआ है कि ईश्वरीय सत्ता कैसे

1257
01:36:38,120 --> 01:36:42,320
सिद्ध करें मुझे आत्म अनुभव हुआ

1258
01:36:42,320 --> 01:36:46,360
है परमात्मा अनुभव हुआ है तो मुझे इतना ही है मुझे इतना वरदान

1259
01:36:46,360 --> 01:36:50,840
है कि मैं उस गुरु की पहचान करवा

1260
01:36:50,840 --> 01:36:54,840
सकू उनके अनेको जन्मों की कहा मतलब मैं शास्त्रों से साबित

1261
01:36:54,840 --> 01:36:59,080
कर दूं किय बातें है और ये चीज है परमात्मा कौन है भाई

1262
01:36:59,080 --> 01:37:05,080
साहब हा जी परमात्मा कौन होता

1263
01:37:06,600 --> 01:37:10,800
है परमात्मा कौन होता है

1264
01:37:10,800 --> 01:37:15,520
या परमात्मा कौन है नहीं परमात्मा कौन होता है

1265
01:37:15,520 --> 01:37:19,920
परमात्मा कौन होता है परमात्मा

1266
01:37:19,920 --> 01:37:23,920
तो वो होता है संत भाषा में हम संत की भाष में बोल

1267
01:37:23,920 --> 01:37:27,960
रहे हैं कि परमात्मा वो होता है जो सुख ही सुख दे और कभी दुख ना दे वो

1268
01:37:27,960 --> 01:37:32,160
परमात्मा होता है जो परमात्मा वो होता है जो सुख

1269
01:37:32,160 --> 01:37:36,280
ही सुख दे पर सबका मालिक एक ही है ना सबका मालिक तो एक ही है आपका

1270
01:37:36,280 --> 01:37:40,680
और हमारा एक ही दूसरा तो कोई है ही नहीं ना हम एक ही जड़ के जड़ से निकले हुए हैं परमात्मा

1271
01:37:40,680 --> 01:37:44,800
वो होता है जो सुख दे हां सुख ही सुख दे दुख नाम भी कोई

1272
01:37:44,800 --> 01:37:49,040
नहीं जैसे पिता अपने बेटे को मतलब सुख देने की सोचता है कभी भी

1273
01:37:49,040 --> 01:37:53,200
दुख देने की कभी नहीं सोचता एक पिता तो इसी तरह परमात्मा वो है जो सबको सुखी

1274
01:37:53,200 --> 01:37:57,320
सुख कभी दुख ना दे हम तो परमात्मा की ये मतलब समझते

1275
01:37:57,320 --> 01:38:01,560
हैं उनकी मतलब परिभाषा में

1276
01:38:01,560 --> 01:38:05,760
परमात्मा वह है जो केवल सुख ही सुख दे हा यानी

1277
01:38:05,760 --> 01:38:06,320
कि

1278
01:38:06,320 --> 01:38:12,320
जो बुराई है उसको जन्म ना दे परमात्मा वो होता

1279
01:38:13,280 --> 01:38:17,680
है तो फिर क्या परमात्मा से शक्तिशाली और

1280
01:38:17,680 --> 01:38:23,680
भी कोई परमात्मा है जिसने बुराई को बनाया

1281
01:38:30,400 --> 01:38:33,960
परमात्मा से शक्तिशाली कोई

1282
01:38:33,960 --> 01:38:38,120
और मतलब बुराई को बनाया

1283
01:38:38,120 --> 01:38:42,400
मैं आपकी इस बात को म समझ नहीं पा रहा हूं इस दुनिया में बुराई

1284
01:38:42,400 --> 01:38:46,680
एजिस्ट करती है कि नहीं करती है

1285
01:38:46,680 --> 01:38:51,920
इस बुराई भी है और भलाई भी है बुराई है ना

1286
01:38:51,920 --> 01:38:56,680
जी तो परमात्मा तो बुराई को जन्म देता नहीं

1287
01:38:56,680 --> 01:38:58,840
है

1288
01:38:58,840 --> 01:39:02,840
नहीं इसका मतलब वह नहीं चाहता कि दुनिया में बुराई में आए

1289
01:39:02,840 --> 01:39:07,040
एक्जिस्टेंस में आए परमात्मा परमात्मा बुराई जन्म

1290
01:39:07,040 --> 01:39:11,360
नहीं देता परमात्मा तो सबके हित की बात सोचता है ना

1291
01:39:11,360 --> 01:39:15,400
मैं आपसे पूछ रहा हूं उसने नहीं सोचा कि इस दुनिया में बुराई

1292
01:39:15,400 --> 01:39:20,040
हो फिर भी बुराई है ना हा बुराई है

1293
01:39:20,040 --> 01:39:21,480
तो बुराई को बनाने वाला

1294
01:39:21,480 --> 01:39:27,480
कौन है

1295
01:39:34,040 --> 01:39:39,840
बुराई को बनाने वाला कौन है

1296
01:39:39,840 --> 01:39:44,200
हम देखो यह विषय तो मेरा नहीं है

1297
01:39:44,200 --> 01:39:48,360
इस पर आपको भाई साब का आत्म ज्ञान हुआ है कैसा अनुभव हुआ

1298
01:39:48,360 --> 01:39:54,120
आप परमात्मा कर रहे हो मैं परमात्मा की चीज पूछ रहा हूं आप कह रहे हो जो सुख दे वो परमात्मा है

1299
01:39:54,120 --> 01:39:58,800
अब इसमें परमात्मा का क्या लिंगक क्यामा का मतलब है

1300
01:39:58,800 --> 01:40:02,880
सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म जो पूर्ण

1301
01:40:02,880 --> 01:40:06,920
है जिसमें किसी प्रकार का अभाव नहीं है समस्त संसार

1302
01:40:06,920 --> 01:40:12,920
का चराचर प्राणी का हेतु है वह है परमात्मा व है

1303
01:40:13,560 --> 01:40:17,800
परम आप तो केवल सुख का हेतु बता रहे हो उसको तो दुख

1304
01:40:17,800 --> 01:40:23,800
को बनाने वाला और कोई हो गया फ

1305
01:40:26,120 --> 01:40:30,400
दुख तो मतलब जीव अपने कर्मों

1306
01:40:30,400 --> 01:40:34,960
से मत भोग रहा है ना दुख तो अपने कर्मों से ले रहा है

1307
01:40:34,960 --> 01:40:39,160
मालिक थोड़ करो काल को किसने बनाया

1308
01:40:39,160 --> 01:40:44,960
जी काल को किसने

1309
01:40:44,960 --> 01:40:48,960
बनाया काल को काल सब शक्ति से उत्पन्न हुआ

1310
01:40:48,960 --> 01:40:53,360
है किसने बनाया

1311
01:40:53,360 --> 01:40:58,640
सत्पुरुष ने बनवाया सत्पुरुष कौन है परमात्मा

1312
01:40:58,640 --> 01:41:02,680
ना हां जी तो यानी काल नामक

1313
01:41:02,680 --> 01:41:08,680
बुराई को परमात्मा ने बनाया आप कह रहे हो कि परमात्मा केवल सुख देता

1314
01:41:09,880 --> 01:41:14,000
है काल काल की जब उत्पत्ति हुई थी जब

1315
01:41:14,000 --> 01:41:18,760
उसमें नाम नाम मात्र की बुराई नहीं थी अच्छा

1316
01:41:18,760 --> 01:41:24,000
काल को जब उत्पन्न किया गया था अच्छा तो

1317
01:41:24,000 --> 01:41:28,120
तो वो काल की जो उत्पत्ति है ना वो उसम बुराई नहीं थी

1318
01:41:28,120 --> 01:41:32,280
उसम एक मिनट मैं समझ ू थोड़ा मतलब की काल में बुराई नहीं थी

1319
01:41:32,280 --> 01:41:38,280
यानी बुराई काल से बाहर थी मतलब बुराई अपने अस्तित्व में

1320
01:41:38,360 --> 01:41:43,280
थी मगर काल के अंदर नहीं थी

1321
01:41:43,280 --> 01:41:47,920
काल में जब परमात्मा ने काल को उत्पन्न किया ना उसमें बुराई नहीं थी

1322
01:41:47,920 --> 01:41:52,120
अच्छा मुझे य बताइए क्या कबीर को पता था कि नहीं काल आगे चलकर बुराई

1323
01:41:52,120 --> 01:41:54,840
करेगा

1324
01:41:54,840 --> 01:42:00,480
जी क्या कबीर को पता था कि नहीं काल आगे चलकर बुराई

1325
01:42:00,480 --> 01:42:05,080
करेगा अब इस सवाल को आपको पेंडिंग रखना पड़ेगा यह तो देखो

1326
01:42:05,080 --> 01:42:09,160
अगले नेक्स्ट लाइव में फिर इसका इतना बो नहीं कर मैं तो

1327
01:42:09,160 --> 01:42:15,160
अपने आम अनुभव की बात करने रहा हूं तत्वदर्शी संत कौन है

1328
01:42:15,240 --> 01:42:19,800
और बा नरी बात सुनि

1329
01:42:19,800 --> 01:42:23,920
मेरी बात सुनिए ध्यान से ना तो आपने यह बताया आप ना

1330
01:42:23,920 --> 01:42:27,960
तो तत्वदर्शी शास्त्रों से सिद्ध करने चले हैं ना ही

1331
01:42:27,960 --> 01:42:32,000
आप परमात्मा के बारे में कुछ बता पा रहे हैं ना

1332
01:42:32,000 --> 01:42:36,120
ही आप जो है परमात्मा के अस्तित्व को सिद्ध ही कर पा रहे हैं और आप

1333
01:42:36,120 --> 01:42:40,600
यह क्लेम कर रहे हैं कि आप जो इस समय तथाकथित रामपाल

1334
01:42:40,600 --> 01:42:44,840
है जो स्वयं को जगत का गुरु कहता है मैं उसका उत्तराधिकारी

1335
01:42:44,840 --> 01:42:49,280
हूं वोह बात अलग है कि हमें उसी की शिक्षाओं से समर्थन नहीं है मगर फिलहाल

1336
01:42:49,280 --> 01:42:53,400
आप आने वाले टाइम के उसके उत्तराधिकारी हो तो आपको हमें ये

1337
01:42:53,400 --> 01:42:57,400
चीज बतानी होंगी ना कि नास्तिक का कैसे उपाय करेंगे कैसे ईश्वर

1338
01:42:57,400 --> 01:43:01,600
का अस्तित्व सिद्ध करेंगे फिर आप बोल रहे हो कि परमात्मा व होता है जो सुख देता गलत

1339
01:43:01,600 --> 01:43:05,640
डेफिनेशन दे रहे हो आप परमात्मा की परमात्मा व होता है

1340
01:43:05,640 --> 01:43:09,840
व सुख नहीं देता है परमात्मा वह है जो पूर्ण है जिसमें किसी प्रकार

1341
01:43:09,840 --> 01:43:14,160
का अभाव नहीं है वह सत्यम ज्ञानम अतम ब्रह्म है वो

1342
01:43:14,160 --> 01:43:18,200
जीव की चा का जो वास्तविक विषय है सच्चिदानंद व

1343
01:43:18,200 --> 01:43:22,120
स्वरूप परमेश्वर है उसका नाम है

1344
01:43:22,120 --> 01:43:26,280
परमात्मा उसे हम परमात्मा कहते हैं हा तो फिर ये

1345
01:43:26,280 --> 01:43:30,440
हो गया तो फिर सुख सुख को आप क्या परिभाषित करेंगे सुख को कैसे

1346
01:43:30,440 --> 01:43:34,480
परिभाषित करते हैं आप बताओ सुख को परिभाषित

1347
01:43:34,480 --> 01:43:38,840
कैसे करते सुख की परिभाषा बताइए सुख में क्या आता है

1348
01:43:38,840 --> 01:43:42,840
अ मान को सुख की परिभाषा मैंने गलत बताई है मुझे

1349
01:43:42,840 --> 01:43:48,240
भी समझ में आ मैंने आपसे परमात्मा की परिभाषा पूछी थी सुख की

1350
01:43:48,240 --> 01:43:52,440
नहीं तो सुख नहीं तो मैं तो आपने आपसे पूछ

1351
01:43:52,440 --> 01:43:56,520
था मा कौन है आपने बताया जो सुख देता है फिर मैंने यह पूछा

1352
01:43:56,520 --> 01:44:00,560
क्या परमात्मा बुराई को जन्म नहीं देता आपने कहा नहीं देता फिर मैंने आपसे पूछा काल

1353
01:44:00,560 --> 01:44:04,840
को किसने बनाया आपने कहा परमात्मा ने बनाया फिर आप कह रहे हो काल के अंदर बुराई

1354
01:44:04,840 --> 01:44:08,880
बाहर से आई है यानी कि तीन तत्व हो गए परमात्मा काल

1355
01:44:08,880 --> 01:44:13,040
बुराई तीसरा तत्व बुराई अलग हो गया अब काल में बुराई

1356
01:44:13,040 --> 01:44:17,560
आ गई फिर भी बात ये बनती है कि जब उन्होंने काल को बनाया

1357
01:44:17,560 --> 01:44:21,760
तो उसमें बुराई नहीं थी उसके बाद बुराई बुराई बाहर से आ गई तो

1358
01:44:21,760 --> 01:44:24,840
भाई क्या परमात्मा को पता क्या परमात्मा को

1359
01:44:24,840 --> 01:44:28,960
पता नहीं था कि वो काल में बुराई आएगी मैं क्यों बना रहा हूं काल को

1360
01:44:28,960 --> 01:44:33,200
एक बात मेरी बात सुनो जैसे मुझे पिता ने जन्म लिया

1361
01:44:33,200 --> 01:44:37,360
मुझे जन्म दिया तो मैं किसी का जाके मर्डर करा किसी

1362
01:44:37,360 --> 01:44:41,520
का कर देता हूं तो क्या पिता ने मुझे वो मतलब मेरे अंदर भरा कि आप जाकर

1363
01:44:41,520 --> 01:44:45,720
मडर कर दो भाई साहब इस प्रश्न का जवाब ना सदियों

1364
01:44:45,720 --> 01:44:49,720
से देते आ रहे हैं आचार्य गण पिता ने किसी पुत्र को

1365
01:44:49,720 --> 01:44:53,920
जन्म दिया और पुत्र अगर मर्डर कर देगा तो पिता को

1366
01:44:53,920 --> 01:44:58,160
इसलिए सजा नहीं होगी इसलिए दोष नहीं लगेगा क्योंकि पिता

1367
01:44:58,160 --> 01:45:02,160
को मालूम नहीं था कि यह मर्डर करेगा मगर यह

1368
01:45:02,160 --> 01:45:06,560
परम पिता है यह परमेश्वर है इसको मालूम है मेरा पुत्र

1369
01:45:06,560 --> 01:45:10,640
क्या करेगा मैं किसको बना रहा हूं यह सर्व शक्तिमान

1370
01:45:10,640 --> 01:45:15,440
है भविष्य देख सकता है यह सर्व नियंता है य सब कुछ जानता

1371
01:45:15,440 --> 01:45:21,440
है यह पिता में और उस पिता में अंतर

1372
01:45:21,440 --> 01:45:25,840
है पिता की परिभाषा में तो एक ही समझेंगे ना

1373
01:45:25,840 --> 01:45:29,880
आपने मतलब उनका उसकी

1374
01:45:29,880 --> 01:45:35,200
व्याख्या मैं आपको सरलता से समझा देता हूं सरलता

1375
01:45:35,200 --> 01:45:39,480
से आपका कहना है कि बुरी चीजों

1376
01:45:39,480 --> 01:45:43,640
को कबीर जी नहीं बनाते बल्कि बुरी चीजें स्वतः बन जाती है बिना उनकी

1377
01:45:43,640 --> 01:45:47,230
इच्छा

1378
01:45:47,230 --> 01:45:49,640
[संगीत]

1379
01:45:49,640 --> 01:45:54,040
के उनकी इच्छा से मतलब ये है जहां

1380
01:45:54,040 --> 01:45:58,480
वहां उनका जो उनका क्षेत्र है ना तो उसमें यह चीज म पति

1381
01:45:58,480 --> 01:46:02,600
नहीं है है तो सही विद्यमान है लेकिन

1382
01:46:02,600 --> 01:46:06,960
उसका कोई प्रभाव नहीं है यह बातें है

1383
01:46:06,960 --> 01:46:11,200
भाई मुझे क्लियर कर दीजिए कि आपके अनुसार परमात्मा की डेफिनेशन

1384
01:46:11,200 --> 01:46:15,440
है जो सिर्फ सुख दे वो परमात्मा है ठीक है

1385
01:46:15,440 --> 01:46:19,560
अब आपके हिसाब से इस दुनिया में जो बुराई है

1386
01:46:19,560 --> 01:46:23,560
वो परमात्मा ने नहीं बनाई वो अपने आप एक्जिस्टेंस में आती है अपने आप बिना

1387
01:46:23,560 --> 01:46:27,600
परमात्मा की जो उसकी जो सत्ता है उसके

1388
01:46:27,600 --> 01:46:31,760
बाहर होती है कि बुराई काल में आ गई परमात्मा की सत्ता के अंदर

1389
01:46:31,760 --> 01:46:37,760
नहीं होती है वो

1390
01:46:37,920 --> 01:46:42,440
बुराई देखो यह तो विषय अब लंबा है मैं इसको

1391
01:46:42,440 --> 01:46:46,560
संपूर्ण नहीं कर पाऊंगा मैं तो मैं तो यह बात बता रहा हूं कि देखो

1392
01:46:46,560 --> 01:46:50,680
मुझे जो आत्म ज्ञान हु मैं इतना ही आप लाइ चर्चा में इतना ही बताने आया था

1393
01:46:50,680 --> 01:46:54,920
और उसके संबंधित जो आपकी बातें होंगी ना उसका मैं जवाब

1394
01:46:54,920 --> 01:46:59,040
दूंगा मैं तो क रहा हूं जो रामचंद्र जो विष्णु भगवान जी है भाई

1395
01:46:59,040 --> 01:47:03,040
रामचंद्र जी है क भगवान दूसरा मैं दूसरा पूछ लेता

1396
01:47:03,040 --> 01:47:09,040
हूं क्या जो कबीर दास जी है वह सब कुछ कर सकते

1397
01:47:10,840 --> 01:47:14,840
हैं सर्व सामर्थ वान है अब मैं तो

1398
01:47:14,840 --> 01:47:18,880
एक मैं तो इतना जानता हूं कबीर साहब सब कुछ करते हैं वो रामपाल

1399
01:47:18,880 --> 01:47:22,920
जी इस बात को श करेंगे वो रामपाल जी इस बात को

1400
01:47:22,920 --> 01:47:27,000
एक मिनट रामपाल जी सि करेंगे ठीक है मैं तो

1401
01:47:27,000 --> 01:47:31,000
यह बता रहा हूं मैं तो सिर्फ एक ही बात बता रहा हूं कि लोमस ऋषि

1402
01:47:31,000 --> 01:47:35,240
जी ने का भन कोब हमें आपकी वो बातें नहीं सुननी

1403
01:47:35,240 --> 01:47:39,280
भाई साहब पहले अपने आपको आत्मज्ञानी अनुभवी सिद्ध करें और

1404
01:47:39,280 --> 01:47:43,520
तब हम आपकी लोमस ऋषि की कहानी सुनेंगे तो फिर य आत्म

1405
01:47:43,520 --> 01:47:48,320
अनुभव की बात तो या कर रहे हैं और क्या कर रहे हैं

1406
01:47:48,320 --> 01:47:52,840
आपने आपने उससे बात सु

1407
01:47:52,840 --> 01:47:56,880
आप काट की हम नहीं सुनेंगे बात तो सुनिए तो सही किसी का बात नहीं सुनेंगे तो फिर कैसे बात

1408
01:47:56,880 --> 01:48:01,280
बनेगी भाई आप आए थे तत्वदर्शी और सर्वशक्तिमान पर बात करने

1409
01:48:01,280 --> 01:48:05,480
और आप लोमस ऋषि पर जा रहे हैं अपने को आत्मज्ञानी सिद्ध कर रहे हैं और

1410
01:48:05,480 --> 01:48:09,960
उसका भी काट आपने पहले ही दे रखा है जब मैंने आपसे पूछा क्या आपका संदर्भ

1411
01:48:09,960 --> 01:48:14,080
प्रमाण है जिसको आप मनवाने कह रहे कह रहे सब चीजों का प्रमाण

1412
01:48:14,080 --> 01:48:18,080
नहीं है

1413
01:48:18,080 --> 01:48:22,320
उसमें मैं तो कता जीव का उद्धार कौन कर सकता है मैं

1414
01:48:22,320 --> 01:48:27,120
यछ जीव का उद्धार कौन कर करता है

1415
01:48:27,120 --> 01:48:31,320
ईश्वर की भक्ति ईश्वर की भक्ति करती है ना

1416
01:48:31,320 --> 01:48:35,960
हम तो तो ईश्वर की भक्ति कहां से प्राप्त होगी

1417
01:48:35,960 --> 01:48:40,040
गुरु से गुरु से होगी परंपरा प्रा परंपरा प्राप्त

1418
01:48:40,040 --> 01:48:44,920
गुरु से तो गुरु भगवान होता

1419
01:48:44,920 --> 01:48:48,960
है बिल्कुल भगवत स्वरूप होता है कहां से आएगी मतलब

1420
01:48:48,960 --> 01:48:52,960
गुरु गुरु होगा गुरु की भक्ति कहां से आएगी तो ईश्वर उही से तो आएगी

1421
01:48:52,960 --> 01:48:57,160
उनको ईश्वर की प्राप्ति होगी तभी आ हा इसी

1422
01:48:57,160 --> 01:49:01,320
बात को तो मैं प्रसंग लोम ऋषि के प्रसंग से आपको वहा तक लेकर जा रहा हूं तो

1423
01:49:01,320 --> 01:49:05,480
हम नहीं सुनेंगे तो फिर हम क्या बता पाए बोलो अरे भाई आप जो है

1424
01:49:05,480 --> 01:49:09,680
अपने आप को तत्वदर्शी कह रहे आने वाले टाइम का आप जो है रामपाल

1425
01:49:09,680 --> 01:49:13,960
जी को तत्वदर्शी कह रहे हैं आप जो है रामपाल जी को जो है

1426
01:49:13,960 --> 01:49:18,200
क्या कहते हैं कबीर को भगवान कहने वाला कह रहे भगवान को प्रूफ

1427
01:49:18,200 --> 01:49:22,360
करने वाला कह रहे हैं आप कबीर को भगवान कह रहे हैं आप इनम से किसी भी क्लेम को आप सिद्धि

1428
01:49:22,360 --> 01:49:26,480
नहीं कर जब आप इनमें से किसी को सिद्ध कर ले फिर तो हम सुने

1429
01:49:26,480 --> 01:49:30,720
कि आपका क्या रिश्ता है उससे आप समझ रहे मेरी बात ना तो आप

1430
01:49:30,720 --> 01:49:33,680
कबीर को भगवान सिद्ध कर रहे हैं ना आप कबीर

1431
01:49:33,680 --> 01:49:37,760
ईश्वर का एक्जिस्टेंस सिद्ध कर रहे हैं ना आप रामपाल को तत्वदर्शी सिद्ध

1432
01:49:37,760 --> 01:49:42,040
कर रहे हैं मुझे ये बताइए कि आप किस रूप में सिद्ध करना सिद्ध

1433
01:49:42,040 --> 01:49:46,200
करने करने से मतलब आप हमें इस तरह से सिद्ध कराओ आप तब हम

1434
01:49:46,200 --> 01:49:50,560
मतलब संतुष्ट होते हैं आप बोलो ईश्वर को आप कभी रामपाल

1435
01:49:50,560 --> 01:49:55,280
के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर

1436
01:49:55,280 --> 01:49:59,560
दिए तब हम यह जानना चाहेंगे कि आपका रामपाल से क्या रिश्ता

1437
01:49:59,560 --> 01:50:03,560
है कबीर से क्या रिश्ता है नहीं रामपाल जी के रूप में वो

1438
01:50:03,560 --> 01:50:07,600
करे मतलब उससे संबंधित आप क्या मतलब उसकी क्या गतिविधि से आप मतलब

1439
01:50:07,600 --> 01:50:11,640
संतुष्ट होंगे ये तो बताओ ना कभी यह बात होगी तब हम मानेंगे तो मैंने

1440
01:50:11,640 --> 01:50:17,640
बोला तो क्या आपका ईश्वर जिसको आप ईश्वर कहते हैं वह सब कुछ कर सकता

1441
01:50:18,000 --> 01:50:22,040
है बिल्कुल सब कुछ कर सकता है किसी

1442
01:50:22,040 --> 01:50:26,120
भी अभी जब मैंने पहले आपसे पूछा था तो आपने बात को हटा दिया था अब

1443
01:50:26,120 --> 01:50:30,120
आप बोल रहे कि हां कर सकता है यह दिक्कत है अगर आप वहीं पर बोलते

1444
01:50:30,120 --> 01:50:34,200
कि वो कर सकता है तो हम लोग सुनते आपकी बात आगे वो कर सकता है सब

1445
01:50:34,200 --> 01:50:38,240
कुछ जी वह किसी भी नियम के नीचे तो

1446
01:50:38,240 --> 01:50:41,840
नहीं

1447
01:50:41,840 --> 01:50:46,000
है उनके सबके नियम उनके नियम बनाए हुए सब पर चलते

1448
01:50:46,000 --> 01:50:50,680
उनका नियम किसी पर नहीं चल रहा मैं पूछ रहा हूं

1449
01:50:50,680 --> 01:50:54,720
कबीर यहां जब आते संसार में तो क्या

1450
01:50:54,720 --> 01:51:00,720
व किसी नियम के नीचे होते हैं या नहीं होते

1451
01:51:03,640 --> 01:51:08,280
हैं तो मतलब नियम की बात करें मतलब

1452
01:51:08,280 --> 01:51:12,280
मुझे बात समझ में नहीं आ रही कौन का मतलब य

1453
01:51:12,280 --> 01:51:16,280
होता है कि व कुछ भी कर सकते हैं पहाड़ के साथ कैच कैच खेल सकते

1454
01:51:16,280 --> 01:51:20,720
हैं सूरज को खा सकते हैं पर्वत को तोड़ सकते हैं

1455
01:51:20,720 --> 01:51:25,400
वह कुछ भी कर सकते हैं किसी प्र की लगाम नहीं है वह सर्वशक्तिमान

1456
01:51:25,400 --> 01:51:29,840
है यह होता है

1457
01:51:29,840 --> 01:51:34,280
नियम तो कबीर साहब के बारे में तो ऐसा लिखा है

1458
01:51:34,280 --> 01:51:38,680
के वो तो सिर्फ यहां मुक्ति

1459
01:51:38,680 --> 01:51:42,800
का मार्ग बताने के लिए आए हैं अरे भाई व परमेश्वर

1460
01:51:42,800 --> 01:51:47,080
है कि

1461
01:51:47,080 --> 01:51:51,080
नहीं वो परमेश्वर है कि नहीं तो

1462
01:51:51,080 --> 01:51:55,440
परमेश्वर तो बोल दिया एक बार परमेश्वर तो है परमेश्वर है तो फिर आप

1463
01:51:55,440 --> 01:52:01,440
जब परमेश्वर है तो वो सब कुछ कर सकते हैं कि

1464
01:52:02,020 --> 01:52:08,020
[संगीत]

1465
01:52:08,280 --> 01:52:12,360
नहीं परमेश्वर है सब कुछ कर सकते हैं

1466
01:52:12,360 --> 01:52:16,720
वो हम परमेश्वर है सब कुछ कर सकते हैं लेकिन

1467
01:52:16,720 --> 01:52:21,080
हां लेकिन बात ये है जैसे

1468
01:52:21,080 --> 01:52:27,080
आप और

1469
01:52:29,280 --> 01:52:33,560
हमा बात हो रही है आपने मुझे

1470
01:52:33,560 --> 01:52:38,120
वतन बत कर लिया कि आप प्लीज भाई मेरे बारे

1471
01:52:38,120 --> 01:52:42,320
में परमात्मा प्रतिबंधित वचना अनुसार

1472
01:52:42,320 --> 01:52:46,480
होते

1473
01:52:46,480 --> 01:52:50,520
हैं समझ में आई मेरी बात आपकी आवाज कट

1474
01:52:50,520 --> 01:52:55,320
रही है

1475
01:52:55,320 --> 01:53:01,320
आपकी आवाज जो है वह कट रही

1476
01:53:03,280 --> 01:53:07,360
है मैं कहूंगा सुरेश दास जी से सुरेश दास जी

1477
01:53:07,360 --> 01:53:11,400
आप जो है नरेंद्र जी

1478
01:53:11,400 --> 01:53:16,000
को किसी दिन अच्छे से तैयार करके लाए और दोबारा से हमसे कांटेक्ट करवाए

1479
01:53:16,000 --> 01:53:20,440
किसी दिन अच्छे से तरीके से बात होगी थोड़ा सा उनका वो टेक्निकल एरर भी आ रहा है

1480
01:53:20,440 --> 01:53:24,480
और अब 10 बजने वाले हैं तो ज्यादा देर चर्चा नहीं कर सकते

1481
01:53:24,480 --> 01:53:28,480
उनको किसी और दिन लाए और तैयारी करवाए थोड़ा वो आत्मज्ञानी कह

1482
01:53:28,480 --> 01:53:32,520
रहे हैं स्वयं को तत्वदर्शी कह रहे स्वयं को और वह जो है भगवान

1483
01:53:32,520 --> 01:53:36,560
का अस्तित्व तक नहीं सिद्ध कर पा रहे हैं तो आप नरेंद्र जी अभी

1484
01:53:36,560 --> 01:53:41,200
जाइए आप और आप किसी और दिन आइए फुल नेटवर्क के साथ आइएगा

1485
01:53:41,200 --> 01:53:45,200
और यह चीजें सर्वशक्तिमान जब आप कबीर जी को कह रहे हो

1486
01:53:45,200 --> 01:53:49,400
तो पहले कबीर जी को आप सर्वशक्तिमान स आपकी कहानी भी सुन लेंगे अभी तो र टाइम

1487
01:53:49,400 --> 01:53:53,440
हो गया है 10 बजने वाले हैं आप लेट भी जुड़े थे

1488
01:53:53,440 --> 01:53:58,120
तो आप किसी और दिन आ जाइए हम लोग उस दिन बात करेंगे

1489
01:53:58,120 --> 01:54:02,840
जी जी जी जी जय श्री

1490
01:54:02,840 --> 01:54:07,200
राम ठीक है सुरेश दास जी जय श्री राम

1491
01:54:07,200 --> 01:54:11,280
वत्सल भट जी चक्र पाण जय श्री

1492
01:54:11,280 --> 01:54:15,760
रामय श्री रामम भैया ये जो स्वामिनारायण वाले

1493
01:54:15,760 --> 01:54:20,160
में आप बता रहे थे ना मतलब उसम मुझे थोड़ी सी जानकारी मिली है

1494
01:54:20,160 --> 01:54:24,400
कि वो लोग जो गुरुकुल चलाते हैं ना उनके बड़े बड़े मंदिर कर

1495
01:54:24,400 --> 01:54:28,920
बना रखे उन लोगों ने सब जगह पर उनके

1496
01:54:28,920 --> 01:54:33,560
देखते हैं देखते

1497
01:54:33,560 --> 01:54:37,760
वो तो मैं तो भाई आज थोड़ा सा थक गया हूं चक्र

1498
01:54:37,760 --> 01:54:40,160
पानी

1499
01:54:40,160 --> 01:54:44,760
जी बिल्कुल बिल्कुल ऐसे लोगों से मिलेंगे तो

1500
01:54:44,760 --> 01:54:49,720
थक अब क्या मैं बताऊ ठीक है अरे भ

1501
01:54:49,720 --> 01:54:54,360
मैंने जब वो बोला ना कि मतलब बहुत आन

1502
01:54:54,360 --> 01:54:59,920
कटेस्ट में बोला था मतलब हसी आ रही है मलबसे

1503
01:54:59,920 --> 01:55:03,920
मतलब कोई बात नहीं इनका अभी रह

1504
01:55:03,920 --> 01:55:08,840
गया किसी और दिन देखेंगे क्या क्या है मामला बात य ना

1505
01:55:08,840 --> 01:55:13,520
मुझे ऐसा लग रहा है मैं किसी का खामखा प्रचारक ना बन जाऊ

1506
01:55:13,520 --> 01:55:17,560
कोई व्यक्ति नहीं नहीं भैया

1507
01:55:17,560 --> 01:55:21,680
आप किसी व्यक्ति का अपना मंच दे दू वो अपनी बात

1508
01:55:21,680 --> 01:55:25,720
जो ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता था मतलब व्यर्थ ही उसका

1509
01:55:25,720 --> 01:55:29,760
प्रचारक बन गए तो इस इस कारण से मैं पहले जानना चाह

1510
01:55:29,760 --> 01:55:34,680
रहा हूं कि वो जब यदि वह अपने आप को किसी का उत्तराधिकारी घोषित

1511
01:55:34,680 --> 01:55:39,480
कर रहे हैं तो जिसका उत्तराधिकारी घोषित कर रहे हैं पहले उसको तो प्रमाणिक बताओ

1512
01:55:39,480 --> 01:55:43,600
तब तो ये जानने में इंटरेस्ट लगाएंगे कि आप उनके उत्तराधिकारी कैसे

1513
01:55:43,600 --> 01:55:47,840
हो र किसी और दिन उनकी बात देख लेंगे जी

1514
01:55:47,840 --> 01:55:52,320
मिश्रा जी आपको कुछ विशेष कहना हो तो बताए हा हा वही

1515
01:55:52,320 --> 01:55:57,160
जो आप उस लेवल की कम से कम तैयारी तो बना के रखो आप उस लेवल का ज्ञान तो रखो

1516
01:55:57,160 --> 01:56:01,520
जी आप गद्दी संभालने वाले हो लेकिन आपको ज्ञान ही नहीं कुछ

1517
01:56:01,520 --> 01:56:05,640
हां वो हर चीज में पहले यही कह रहे थे कि इस बारे में तो वही बताएंगे

1518
01:56:05,640 --> 01:56:10,160
वही बताएंगे वही बताएंगे स्प में आएंगे तो बताएंगे

1519
01:56:10,160 --> 01:56:14,440
स्पने में आएंगे वो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे

1520
01:56:14,440 --> 01:56:15,000
उनकी कोई

1521
01:56:15,000 --> 01:56:19,400
अपनी जो कहानी है जो शायद उन्होंने स्वप्न में देखा कुछ

1522
01:56:19,400 --> 01:56:23,800
है आ हा भैया

1523
01:56:23,800 --> 01:56:27,800
यह आपको पता है कि मतलब जो दूसरे दूसरे जो चैनल से ना जब

1524
01:56:27,800 --> 01:56:31,800
से हम आवान से जुड़े ना तब मतलब जो मतलब इन लोगों

1525
01:56:31,800 --> 01:56:36,480
के जो रामपाल के वो जो अलग अलग होते हैं चेले सब वो भी आपके मतलब

1526
01:56:36,480 --> 01:56:41,320
वीडियो बनाते आपके ऊपर आपको अगर ध्यान में हो तो

1527
01:56:41,320 --> 01:56:45,520
जी और वो आधे लोग तो ऐसे भैया मैंने देखा कि उनको आपका

1528
01:56:45,520 --> 01:56:49,520
मतलब पूरा नाम भी नहीं पता है जो शिवांश नारायण द्वेदी है ना उसकी

1529
01:56:49,520 --> 01:56:53,760
जगह पर शिवांश दुबे शिवांश दुबे करके बोलते

1530
01:56:53,760 --> 01:56:57,840
की बोलती बंद कर दी और इतना बड़ा बड़ा बोलते असल में

1531
01:56:57,840 --> 01:57:03,760
वो जानते हैं मगर वो बोल नहीं पाते गवार है

1532
01:57:03,760 --> 01:57:07,840
ज्यादातर भैया व आपका मतलब पूरा व फोटो लगा रहता है

1533
01:57:07,840 --> 01:57:12,360
नीचे शिवांश दुबे लिखा रहता हैसा मैं बोल तो रहा हूं वो जो य बताने

1534
01:57:12,360 --> 01:57:16,520
वाले हैं ज्यादातर गवार है वो

1535
01:57:16,520 --> 01:57:21,400
ठीक से प्रोनंसिएशन नहीं कर पाएंगे शिवांश को व शिवा बोल देंगे

1536
01:57:21,400 --> 01:57:25,800
उनके पूरे म में है हां वो

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01:57:25,800 --> 01:57:29,880
ठीक से प्रोनंसिएशन उनका जो उच्चारण होगा वो भी गलत होगा कोई

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01:57:29,880 --> 01:57:34,240
त्रिवेदी कर देगा कोई दुबे कर देगा कुछ कर देगा कोई शिवांस

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कर देगा कोई सभास कर देगा कोई अरे मेरे पास कमेंट आता

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कोई देवांस कर देता है शिवांस को देवांस तो ज्यादातर

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वो लोग जो बना रहे हैं वो अनपढ गवार टाइप के हैं मैंने एक दिन

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कहा था ना टट पुंज हो अरे

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भैया दे और देसी मुर्गी देसी मुर्गी

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आप जो है ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करें किसी दिन आकर

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आपके जो तथाकथित काल्पनिक ईश्वर है आपका जो उसने

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01:58:03,440 --> 01:58:07,680
यदि आपको सामर्थ्य प्रदान किया और त्पन में माता जी ने निष्ठा

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पूर्वक दूध पिलाया हो तो आप आइए और अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान

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सिद्ध करिए और हमें ले चलिए भया उस

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दिन वो नहीं हुआ लाइव हुआ था व आप वो वाले टॉपिक

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पर बात कर रही थ थोड़े समय के लिए अमर वाला कि थोड़े समय के लिए

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01:58:23,280 --> 01:58:27,560
अमर बहुत मजा आया था उस दिन तो थोड़े

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समय के लिए अमर क्या होता

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है चलिए मिश्रा जी आने के लिए

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आभार जय श्री जय श्री राम जय श्री राम

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जय श्री राम जय श्रीराम
