1
00:00:02,400 --> 00:00:06,440
तो सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप

2
00:00:06,440 --> 00:00:10,600
सभी कुशल मंगल होंगे आज का विषय

3
00:00:10,600 --> 00:00:15,840
आपने देख लिया है आज

4
00:00:15,840 --> 00:00:19,960
दो महानुभाव आने वाले हैं रामपाल जी

5
00:00:19,960 --> 00:00:24,000
को मानने वाले और हमें उनकी तरफ से एक

6
00:00:24,000 --> 00:00:28,000
प्रस्ताव आया था कि भाई हम आएंगे और

7
00:00:28,000 --> 00:00:32,440
आपके वहां पर होगा हम लोग दो लोग आए और

8
00:00:32,440 --> 00:00:36,680
मैं और बाबूराम यादव आपने देखा होगा बाबूराम को पिछले

9
00:00:36,680 --> 00:00:40,680
कुछ दिनों में हम लोग एक सीरीज बना रहे हैं बाबूराम की

10
00:00:40,680 --> 00:00:45,000
स्पेशल वो बाबूराम कॉमेडी कॉमेडी कॉमेडी

11
00:00:45,000 --> 00:00:49,040
नाइट्स विथ बाबूराम यादव इस तरह से उसमें बाबूराम

12
00:00:49,040 --> 00:00:53,280
की जितनी भी गतिविधियां है इस प्रकार की वह सब आपको देखने को मिलने

13
00:00:53,280 --> 00:00:58,120
वाली है है ना

14
00:00:58,120 --> 00:01:02,360
तो और और जो अमित दास जी है वो आने वाले

15
00:01:02,360 --> 00:01:08,360
हैं

16
00:01:08,920 --> 00:01:12,960
जो जिनके बारे जि जिन्होंने अपने एक लाइव स्ट्रीम में

17
00:01:12,960 --> 00:01:15,520
य कहा था

18
00:01:15,520 --> 00:01:20,000
कि क्या कहते हैं धर्म सनातन कोई धर्म नहीं है यह है वह है

19
00:01:20,000 --> 00:01:24,000
तो आने वाले हैं कुछ उन्होंने शायद सभी को

20
00:01:24,000 --> 00:01:28,280
जय श्री राम सभी को आशीर्वाद ढेर सारा

21
00:01:28,280 --> 00:01:31,440
और

22
00:01:31,440 --> 00:01:35,840
इसके साथ ही साथ आपको जैसा कि न्यूज मिला हो

23
00:01:35,840 --> 00:01:40,360
एक शास्त्रार्थ हुआ यहां पर यह

24
00:01:40,360 --> 00:01:44,600
शायद प्रयागराज में और शास्त्रार्थ में

25
00:01:44,600 --> 00:01:48,600
जो करपात्री जी को मानने वाला जो पक्ष था वह

26
00:01:48,600 --> 00:01:52,760
विजय हुआ और ईश्वर के अवतार को ना मानने वाला

27
00:01:52,760 --> 00:01:56,920
पक्ष हार गया जो कि अल जो आर्य समाज था वह पराजित हुआ

28
00:01:56,920 --> 00:02:02,920
है और

29
00:02:06,480 --> 00:02:10,720
इसके साथ ही साथ हम मैं बाद में भूल जाऊ तो एक बार याद दिला

30
00:02:10,720 --> 00:02:15,080
दीजिएगा दोबारा से इस अनाउंसमेंट को करने के लिए विग्रहवां

31
00:02:15,080 --> 00:02:19,360
धर्मः विग्रहवां धर्म नाम से हमारा दूसरा

32
00:02:19,360 --> 00:02:23,360
चैनल है जो हम कुछ आने वाले वीडियोस वगैरह और लाइव चर्चा

33
00:02:23,360 --> 00:02:29,360
वगैरह उस पर करेंगे विग्रह वान धर्म और

34
00:02:31,720 --> 00:02:35,720
उस पर आपको लगभग 79000 के आसपास सब्सक्राइबर

35
00:02:35,720 --> 00:02:39,800
मिलेंगे वह काफी दिन से डीएक्टिव है मतलब हम लोग उस पर काम नहीं कर रहे

36
00:02:39,800 --> 00:02:44,480
थे किनी कारणवश पर उस पर आपको जो है

37
00:02:44,480 --> 00:02:48,480
79000 के आसपास 80000 के आसपास सब्सक्राइबर्स है उस पर

38
00:02:48,480 --> 00:02:52,720
आप उसको सर्च कर सकते हैं विग्रहवां धर्म तो

39
00:02:52,720 --> 00:02:56,960
वहां पर उसको हमने अपने बैकअप चैनल के रूप में खड़ा

40
00:02:56,960 --> 00:03:01,440
करना है तो आप लोग वहां पर भी अपनी सक्रियता दिखाए उसको भी

41
00:03:01,440 --> 00:03:05,520
आप फॉलो कर ले क्योंकि दिन

42
00:03:05,520 --> 00:03:09,760
प्रतिदिन इस चैनल पर आक्रमण होता जा रहा है

43
00:03:09,760 --> 00:03:14,040
चैनल बंद नहीं हो रहा है मगर आक्रमण हो रहे हैं तो इसलिए

44
00:03:14,040 --> 00:03:18,440
एक दूसरा चैनल भी होना चाहिए इसलिए

45
00:03:18,440 --> 00:03:21,640
और अद्वैत वेदांत जी का कहना

46
00:03:21,640 --> 00:03:25,640
है कि आप स्पॉन पर वीडियोस क्यों नहीं बना रहे हैं

47
00:03:25,640 --> 00:03:29,880
ऐसा कुछ नहीं है कि कोई विशेष रूप से नहीं बना रहे हैं

48
00:03:29,880 --> 00:03:33,880
फिलहाल इकन भी दूसरी गतिविधियों में इकन जो है उलझा हुआ है

49
00:03:33,880 --> 00:03:38,040
बांग्लादेश में जो उनके लोग हैं उनके साथ चल रहा है इधर हम

50
00:03:38,040 --> 00:03:42,040
रामपाल में व्यस्त हो गए हैं बीच में आर समाज का भी है

51
00:03:42,040 --> 00:03:46,840
तो किसी भी कार्य को जब शुरू करें तो फिर उसको पूर्ण करके ही

52
00:03:46,840 --> 00:03:51,040
अब एक लय बन चुकी है तो हम लोग देख रहे हैं और

53
00:03:51,040 --> 00:03:55,240
ऐसा नहीं है कि कोई ऐसा सोच लिया कि इस कौन के बारे में

54
00:03:55,240 --> 00:03:59,240
नहीं बताना कोई बात आएगी वो अच्छी हो तो अच्छे रूप में और ठीक

55
00:03:59,240 --> 00:04:03,440
नहीं है तो ठीक नहीं वाले रूप में यहां से प्रेषित अवश्य किया जाएगा

56
00:04:03,440 --> 00:04:07,480
पहाड़ी जी हमारे साथ हैं जो आज एक तरीके से मॉडरेटर का रोल

57
00:04:07,480 --> 00:04:11,480
निभाने वाले पाड़ी जी स्वागत है आपका जय श्री राम जय श्री

58
00:04:11,480 --> 00:04:17,480
राम हर हर महादेव सभी लोगों को हर हर बिल्कुल

59
00:04:18,600 --> 00:04:23,320
आज लाइव चर्चा में पहले हम लोग उन्हीं दोनों को ही लेंगे

60
00:04:23,320 --> 00:04:27,400
और उन दोनों को लेने के बाद ही हम जो है किसी और

61
00:04:27,400 --> 00:04:31,720
के लिए जो अ क्या कहते हैं ये

62
00:04:31,720 --> 00:04:35,920
जो लिंक है उसको पब्लिक करेंगे तब तक आप चर्चा का आनंद लीजिए

63
00:04:35,920 --> 00:04:39,920
अच्छा इनकी अभी मैंने पहाड़ी जी एक थोड़ी सी कॉमेडी वाली चर्चा इन दोनों

64
00:04:39,920 --> 00:04:44,000
की देखी थी दोनों लोग हालाकि दोनों

65
00:04:44,000 --> 00:04:48,080
लोग ठंड तो पड़ी रही है इसमें तो कोई माइनिंग मतलब वो नहीं है म दोनों

66
00:04:48,080 --> 00:04:52,840
लोग एकदम एक टोपा पहन करके बांध करके आपस में चर्चा कर रहे

67
00:04:52,840 --> 00:04:57,800
थे तो उसमें जो है

68
00:04:57,800 --> 00:05:01,840
बाबूराम के सामने ने हमसे बात करते समय एक

69
00:05:01,840 --> 00:05:06,320
बात कही थी ना अमित दास ने अमित दास ने कहा था

70
00:05:06,320 --> 00:05:10,760
कि काल जो है वो जीवात्मा को खाता है

71
00:05:10,760 --> 00:05:15,120
बिल्कुल और जीवात्मा अलग है आत्मा अलग है अच्छा

72
00:05:15,120 --> 00:05:19,160
तो जब जब इस मामले पर जो है वहां चर्चा

73
00:05:19,160 --> 00:05:23,200
हो रही थी तो वो दृश्य देखने लायक था जो बाबू भाई

74
00:05:23,200 --> 00:05:27,320
तत्वदर्शी है आजकल के तत्वदर्शी बाबू भाई है वो बोले नहीं

75
00:05:27,320 --> 00:05:31,600
नहीं भगत जी भगत जी वो जो जीवात्मा

76
00:05:31,600 --> 00:05:33,640
और आत्मा एक है अमित दास

77
00:05:33,640 --> 00:05:37,880
बोले नहीं दो है ये क्या कह रहे हो भगत जी आप गलत बोल रहे

78
00:05:37,880 --> 00:05:42,440
हो य दृश्य देखने वाला था मॉडरेटर

79
00:05:42,440 --> 00:05:46,640
जी आप जो है अगर हो सके तो दृश्य दिखा दीजिए मैंने आपको भेजा

80
00:05:46,640 --> 00:05:50,720
हुआ है जब तक वो लोग नहीं आ रहे तब

81
00:05:50,720 --> 00:05:55,240
तक थोड़ा सा दर्शक उसे देख ले

82
00:05:55,240 --> 00:06:00,160
मतलब कि खुद के ज्ञान के पर खुद ही फस गए

83
00:06:00,160 --> 00:06:04,160
हां एक कह रहा है कि नहीं जीवात्मा और आत्मा एक है व ठीक कह रहा

84
00:06:04,160 --> 00:06:08,240
है मगर दूसरा कह रहा है अरे क्या भगत जी आप गलत

85
00:06:08,240 --> 00:06:13,600
बोल रहे हो जीवात्मा और आत्मा दो है अलग अलग

86
00:06:13,600 --> 00:06:17,400
है और

87
00:06:17,400 --> 00:06:21,560
ये जो चैनल है हमारे चैनल पर एक गरिमा

88
00:06:21,560 --> 00:06:25,880
मैंने देखी है कि हम किसी को ऐसे ही सर्टिफिकेट किसी को नहीं देते

89
00:06:25,880 --> 00:06:30,000
हैं जैसे उनके चैनल पर जाओगे तो उनके चैनल देखना कि

90
00:06:30,000 --> 00:06:34,480
शुरू से लेकर सर्टिफिकेट देना शुरू कर देते हैं यह पाखंडी वो धूर्त

91
00:06:34,480 --> 00:06:38,560
वो नकली धर्म गुरु यह गुंडा

92
00:06:38,560 --> 00:06:42,600
यह वो मतलब की सर्टिफिकेट देना शुरू कर देते हैं लाइव

93
00:06:42,600 --> 00:06:46,920
आते ही और उनका टाइटल भी उसी प्रकार से

94
00:06:46,920 --> 00:06:50,960
होगा गालिया गालियों से शुरू होगा गालियों से शुरू होगा और गालियों

95
00:06:50,960 --> 00:06:54,960
प खत्म होगा और बोलते हैं कि हमारे गुरु जी ने हमको संस्कार दिए

96
00:06:54,960 --> 00:06:59,120
हमें किसी से लड़ना नहीं सिखाया

97
00:06:59,120 --> 00:07:03,160
ये देख रोक लीजिए क रहे है

98
00:07:03,160 --> 00:07:07,280
कि आत्मा और जीवात्मा दोनों एक होती है भगत जी जो

99
00:07:07,280 --> 00:07:11,520
आत्मा है उसी को जीवात्मा भी कहते हैं और यह आत्मा

100
00:07:11,520 --> 00:07:15,680
जब य से लिकन करके जाती हैय इसका मेरे पास प्रमाण है इसके पास

101
00:07:15,680 --> 00:07:19,840
सबूत है गरु पुण में आत्मा का सूक्ष्म शरीर होता है जो इन आंखों से देखा

102
00:07:19,840 --> 00:07:23,960
नहीं जा सकता ये मेरे पास इस गरु पुराण में सबूत है कभी भी करके

103
00:07:23,960 --> 00:07:27,290
हमारे से प्रमाण देख सकते

104
00:07:27,290 --> 00:07:31,360
[संगीत] हैमा सक्ती है भगत जी भगत

105
00:07:31,360 --> 00:07:33,080
जी उसी को

106
00:07:33,080 --> 00:07:37,200
उस भगवत गीता में दोनों की व्याख्या अलग अलग की गई है आप

107
00:07:37,200 --> 00:07:41,440
क्या गलत बता रहे हो कैसे भगवत

108
00:07:41,440 --> 00:07:45,840
गीता में दोनों की व्याख्या अलग-अलग की गई है

109
00:07:45,840 --> 00:07:51,840
आपने पढ़ा नहीं गीता अध्याय 15 का

110
00:07:52,560 --> 00:07:57,560
आठ अभी तो पढ़ा था पढ़

111
00:07:57,560 --> 00:08:03,560
जी का आ प वो हॉलीवुड लगता [संगीत]

112
00:08:14,840 --> 00:08:19,080
है ग को वायु गंध के स्थान

113
00:08:19,080 --> 00:08:23,240
से ग को जैसे ग्रह करके ले जाता है वैसे ही देदी का

114
00:08:23,240 --> 00:08:27,520
स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीर का त्याग करता है

115
00:08:27,520 --> 00:08:31,880
उससे इन मन सही इंद्रियों को ग्रह करके

116
00:08:31,880 --> 00:08:36,000
फिर जिस शरीर को प्राप्त उसम जाता है

117
00:08:36,000 --> 00:08:40,160
जीवात्मा जीवात्मा गंध को ग्रहण कर रही है आत्मा

118
00:08:40,160 --> 00:08:44,160
गंध को ग्रहण नहीं करती आत्मा किसी भी चीज को ग्रहण नहीं

119
00:08:44,160 --> 00:08:48,480
करती जी बता बता व जो आत्मा

120
00:08:48,480 --> 00:08:52,560
है आत्मा को जीवामा कते उसको क्या

121
00:08:52,560 --> 00:08:56,800
है कि य जो मन है मन को अपने साथ में लेकर के जाती है और

122
00:08:56,800 --> 00:09:00,840
उसके जो इंद्रिया है इंद्रियो को भी साथ में लेकर

123
00:09:00,840 --> 00:09:05,000
के जाती है बस इतनी सी बात है और

124
00:09:05,000 --> 00:09:09,000
वो जब जाएगी तो दूसरे पु इनको प्रवेश कर लेगी इंद्रियो को

125
00:09:09,000 --> 00:09:13,160
और मन

126
00:09:13,160 --> 00:09:18,800
को सुना

127
00:09:18,800 --> 00:09:23,560
आपने तो एक मत नहीं है तो य कैसे जन च

128
00:09:23,560 --> 00:09:29,560
इनम से तत्वदर्शी का शिष्य कौन है पहले य तय करलो

129
00:09:29,600 --> 00:09:33,680
तभी मालूम पड़ेगा आपकी तत्वदर्शी मुझे लग रहा बा

130
00:09:33,680 --> 00:09:39,680
बाबू राम यादव तर्शी के श मगर ये त के श नहीं

131
00:09:40,880 --> 00:09:45,800
है आपस में जब विरोध होता ऐसा ही होता है जब

132
00:09:45,800 --> 00:09:49,800
जीवात्मा जीवात्मा जब नाम ही जीवात्मा कहा गया उसका तो

133
00:09:49,800 --> 00:09:54,720
जीव को अलग आत्मा को अलग कैसे कर रहे हैं

134
00:09:54,720 --> 00:09:59,440
जीव भाव को प्राप्त हो चुकी आत्मा

135
00:09:59,440 --> 00:10:03,800
जीव भाव को प्राप्त हो चुकी आत्मा बिल्कुल गीता

136
00:10:03,800 --> 00:10:08,480
में तो क्षेत्र और क्षेत्र ज्ञ भी कहा गया है क्षेत्र शरीर को कहा गया क्षेत्र

137
00:10:08,480 --> 00:10:13,040
ज्ञ आत्मा को सौर कंसाना जी है सौरव कंसाना

138
00:10:13,040 --> 00:10:18,200
जी राम पालियो से तो आपको भी दिक्कत है

139
00:10:18,200 --> 00:10:22,200
हा इतने ज्यादा अवैध है ये लोग

140
00:10:22,200 --> 00:10:26,360
कम से कम इस विषय में तो आपको हमारे साथ होना

141
00:10:26,360 --> 00:10:30,400
चाहिए हा कंसाना जी और आप

142
00:10:30,400 --> 00:10:34,520
दूसरे से पूछ रहे हैं कि कभी नहाता नहीं है और

143
00:10:34,520 --> 00:10:38,720
स्वयं को देखिए आपने डीपी में क्या लगा रखा है आप कभी उप वस्त्र

144
00:10:38,720 --> 00:10:44,600
नहीं धारण करते क्या ऐसे ही रहते हैं क्या सदा

145
00:10:44,600 --> 00:10:45,600
सर्वदा

146
00:10:45,600 --> 00:10:49,760
यह तो दूसरे को सर्टिफिकेट बहुत जल्दी दे देते हैं ये ये

147
00:10:49,760 --> 00:10:53,840
यह वो राम पाली नहीं है य अलंकार

148
00:10:53,840 --> 00:10:57,960
मुझे लगता है इसलिए बलाए है क्योंकि वो शास्त्रार्थ वाला नीर

149
00:10:57,960 --> 00:11:02,080
डाला है ना हमने अच्छा अच्छा आर्य समाज

150
00:11:02,080 --> 00:11:06,520
को हमारे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है डॉक्टर ज्ञानेंद्र शर्मा

151
00:11:06,520 --> 00:11:10,840
उन्होंने पराजित किया अखबारों में आया वही सर्वशक्तिमान

152
00:11:10,840 --> 00:11:13,400
वाला विषय

153
00:11:13,400 --> 00:11:18,040
था उन्होंने बोला कि जो सर्वव्यापी

154
00:11:18,040 --> 00:11:22,160
है सर्वशक्तिमान है वो एक मूर्ति में कैसे आ सकता है और

155
00:11:22,160 --> 00:11:26,160
आ जाएगा तो छोटा हो जाएगा अरे भाई

156
00:11:26,160 --> 00:11:30,440
जो सदा सर्वदा एक रस रहने वाला है वह अपनी

157
00:11:30,440 --> 00:11:34,640
शक्ति को नियंत्रित करके कम ज्यादा करके पृथ्वी इत्यादि का निर्माण करता

158
00:11:34,640 --> 00:11:38,640
है कि नहीं करता है बिल्कुल बिल्कुल जैसे मैं कोई कार्य

159
00:11:38,640 --> 00:11:43,040
कर पा रहा हूं जैसे मैं मुझे मुझे जो है यह

160
00:11:43,040 --> 00:11:47,120
येय पेन उठाना है तोय पेन उठाने मैं इसलिए उठा सका

161
00:11:47,120 --> 00:11:51,400
क्योंकि क्योंकि मेरे हाथ जो है ना वह मेरे सर से अलग

162
00:11:51,400 --> 00:11:55,520
है अगर मैं पूरा एक जैसा होता तो मैं पेन नहीं उठा सकता

163
00:11:55,520 --> 00:11:59,560
था क्योंकि जब भी मैं कोई काम करूंगा जब भी मैं म करूंगा

164
00:11:59,560 --> 00:12:00,680
तो मेरी पूरी बॉडी एक साथ

165
00:12:00,680 --> 00:12:04,800
मूव करेगी ना तो बक वो सदा सर्वदा जो एक

166
00:12:04,800 --> 00:12:08,960
रस है हर जगह वो एक बराबर है जिसके वो हाथ प नहीं

167
00:12:08,960 --> 00:12:13,000
वो अपने आप को नियंत्रित करता है कम ज्यादा के फॉर्म में आता है अब अगर ये

168
00:12:13,000 --> 00:12:17,160
कहेंगे कि उसने अपने आप को ही नियंत्रित कर लिया तो उसके एक रस

169
00:12:17,160 --> 00:12:21,840
का भंग हो जाएगा उसकी जो एक रसता है भंग हो जाएगी तो उस मानना पड़ेगा

170
00:12:21,840 --> 00:12:25,840
कि एक रस होते हुए भी न्यून और अधिक वाले रूप में

171
00:12:25,840 --> 00:12:30,080
यानी सगुण निराकार अभी भी है मगर सगुण निराकार व अवतरित

172
00:12:30,080 --> 00:12:34,160
होता है उसका व रूप खत्म नहीं हो जाता इसी प्रकार से ईश्वर

173
00:12:34,160 --> 00:12:38,680
जो सब जगह है उसके रहते हुए भी वह व जो अवतार

174
00:12:38,680 --> 00:12:43,040
है उसम वह प्रकट होता है ऐसा नहीं है कि उसका वो वाला जो रूप है

175
00:12:43,040 --> 00:12:47,040
वो अलग हो गया खत्म हो गया ऐसा नहीं है होते हुए

176
00:12:47,040 --> 00:12:51,720
भी तो क्या मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी

177
00:12:51,720 --> 00:12:56,560
सभी प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी

178
00:12:56,560 --> 00:13:00,600
योग माया को अधीन करके प्रकट हो ह इसी का तो

179
00:13:00,600 --> 00:13:05,040
उत्तर दिया है हा फिर सातव सिरजा महम को बोला ना सिरजा

180
00:13:05,040 --> 00:13:09,520
खुद को सजन करता हूं हा यदि ईश्वर

181
00:13:09,520 --> 00:13:13,600
स्वयं को नियंत्रित नहीं कर पाएगा कम ज्यादा न्यून अधिक वगैरा

182
00:13:13,600 --> 00:13:15,800
वाले उसम रूप में नहीं आएगा तो सृष्टि की रचना

183
00:13:15,800 --> 00:13:19,840
ही नहीं होगी अच्छा ये मान लिया जाए कि ये मान लिया जाए कि

184
00:13:19,840 --> 00:13:24,040
ईश्वर जो है केवल अपने मन में सोचता है और हो जाता है सही

185
00:13:24,040 --> 00:13:28,360
बात है पहली बात तो ये जो मन में सोचने वाली बात है ये जो है अद्वैत

186
00:13:28,360 --> 00:13:32,520
मत का वो करती है ब ठीक है वह केवल अपने मन में सोचता है

187
00:13:32,520 --> 00:13:36,720
मगर यह ईश्वरीय बात है हमको तो कोई ना कोई शक्ति

188
00:13:36,720 --> 00:13:41,360
काम करती हुई भौतिक रूप से अनुभव होगी ना

189
00:13:41,360 --> 00:13:45,680
बिल्कुल है ना हमको तो इधर इधर

190
00:13:45,680 --> 00:13:50,360
जो हम जो देख रहे हैं कि भाई कोई शक्ति प्रकट हो रही है जैसे

191
00:13:50,360 --> 00:13:54,640
यदा यदाई धर्मस्य का अर्थ करते हुए यह कह दिया कुछ भाष्य

192
00:13:54,640 --> 00:13:58,800
का ने इनके आगे कि कुछ भी हो वो अवतार ले सकता हो

193
00:13:58,800 --> 00:14:02,880
या ले सकता हो मगर जब जब कोई धर्म पर बात आती है

194
00:14:02,880 --> 00:14:07,080
तो कोई ना कोई शक्ति प्रकट होती है अब ये कैसे प्रकट हो रही है यह तो सब जगह

195
00:14:07,080 --> 00:14:11,240
एक एक सी है कम ज्यादा है ही नहीं तो प्रकट कैसे हो रही है प्रकट होने

196
00:14:11,240 --> 00:14:15,800
का शक्ति प्रकट होने का आपने मान लिया तो आपने सगुण ईश्वर को तो मान ही लिया ना

197
00:14:15,800 --> 00:14:19,880
अब ईश्वर जब सगुण निराकार हो रहा है निर्गुण निराकार से तो क्या निर्गुण

198
00:14:19,880 --> 00:14:24,240
निराकार खत्म हो गया नहीं जब सगुण

199
00:14:24,240 --> 00:14:28,520
हो रहा है तो क्या निर्गुण खत्म हो गया तो आपको मानना पड़ेगा दो रूप आपको मानने पड़ेंगे निर्गुण

200
00:14:28,520 --> 00:14:31,000
निराकार होते हुए भी वो सगुण

201
00:14:31,000 --> 00:14:35,160
निराकार में अपना सृजन कर लिया उसने इसी

202
00:14:35,160 --> 00:14:39,720
प्रकार से सगुण निराकार होते हुए भी वो सगुण साकार में भी सृजन

203
00:14:39,720 --> 00:14:44,040
कर लेता है भाई यही बात

204
00:14:44,040 --> 00:14:48,160
ईश्वर जो है वो अभी सर्वत्र व्याप्त है

205
00:14:48,160 --> 00:14:52,720
मगर केवल ये हमें शास्त्रों से गुरुओं से

206
00:14:52,720 --> 00:14:57,000
और जो उसका प्रतिभास सत्ता है कि हमें महसूस हो रहा है कोई शक्ति

207
00:14:57,000 --> 00:15:02,040
तो है बिल्कुल बकुल अभी भौतिक इंद्रियों का विषय नहीं है

208
00:15:02,040 --> 00:15:06,280
रे हम चाहे तो उसको नकार सकते हैं अपने उस प्रासिक अनुमान

209
00:15:06,280 --> 00:15:10,680
को हटाकर एक तरफ ठीक है मगर ईश्वर किसी

210
00:15:10,680 --> 00:15:14,680
एक देश में स्वयं को इंद्रियों का विषय

211
00:15:14,680 --> 00:15:18,760
बना देता है बिल्कुल वही

212
00:15:18,760 --> 00:15:22,880
अवतार है य तो गीता में भी साफ साफ कह रखा

213
00:15:22,880 --> 00:15:26,960
जब 11 अध्याय में विराट स्वरूप दिखाने के बाद जब अर्जुन ने चतुर्भुज देखने

214
00:15:26,960 --> 00:15:31,040
की अभिलाषा जाहिर की तो चतुर्भुज रूप में जब

215
00:15:31,040 --> 00:15:35,120
व आए तो तब उन्होने बवे अध्याय में अर्जुन ने पूछा

216
00:15:35,120 --> 00:15:39,280
कि कि आप सगुण की जो सगुण की जो

217
00:15:39,280 --> 00:15:43,440
भक्ति है और जो निर्गुण की भक्ति है इसमें कौन सा श्रेष्ठ

218
00:15:43,440 --> 00:15:46,120
है तो श्री कृष्ण

219
00:15:46,120 --> 00:15:50,120
भगवान ने बोला कि सगुण की सबसे मेरे हिसाब से सबसे अच्छी

220
00:15:50,120 --> 00:15:54,320
सगुण की है वो भी को मेरे को प्राप्त होते है निर्गुण

221
00:15:54,320 --> 00:15:58,600
की भी भक्ति ठीक है पर वो बड़ी कठना से होती है क्योंकि

222
00:15:58,600 --> 00:16:02,720
व व्यक्त है ऐसा है भागवत में सीधे कह दिया है जब

223
00:16:02,720 --> 00:16:07,160
तक आपको ईश्व ईश्वर हर जगह ना दिखने लगे जैसे चार

224
00:16:07,160 --> 00:16:11,480
च 35 में क्या क्या कहा गया कि वो ज्ञान जिस जिसके

225
00:16:11,480 --> 00:16:15,560
कारण तू सब लोगों में मुझको स्वयं को पहले और फिर

226
00:16:15,560 --> 00:16:19,680
मुझको देखेगा हम सब में मुझको देखेगा

227
00:16:19,680 --> 00:16:24,040
ऐसे ही 13 अध्याय में भी कहा है 29

228
00:16:24,040 --> 00:16:28,040
या 30 में कहा है कि तू पूरी दुनिया को मुझ में

229
00:16:28,040 --> 00:16:32,240
एक मुझ में स्थित देखने लग तो भागवत में आया है कि जब तक

230
00:16:32,240 --> 00:16:36,400
तुमको ये स्थिति प्राप्त नहीं हो जाती है तब तक मूर्ति

231
00:16:36,400 --> 00:16:40,560
पूजा करते रहो व उसी

232
00:16:40,560 --> 00:16:45,200
उसी से ही वो स्थिति प्राप्त होगी आपको

233
00:16:45,200 --> 00:16:49,320
ये श्रीमद भागवत में कहा गया कि जब तक तुम्हें ब्रह्म ज्ञान का प्राप्त

234
00:16:49,320 --> 00:16:53,320
नहीं हो जाता तब तक मेरी मूर्ति में आपने पूजन करना चाहिए तब तक पूजन

235
00:16:53,320 --> 00:16:57,600
करिए बिल्कुल यही गरु पुराण में भी कह रखा है सवे अध्याय

236
00:16:57,600 --> 00:17:01,800
में कि जब तक आपको यह ज्ञात ना हो जाए कि अहम ब्रह्माम

237
00:17:01,800 --> 00:17:06,200
मैं ब्रह्म हूं तब तक आप ये व्रत जप तप तीर्थों में ये

238
00:17:06,200 --> 00:17:10,200
प्रयत्न करना चाहिए मुक्ति के लिए जी अच्छा

239
00:17:10,200 --> 00:17:14,360
चलिए ठीक है थोड़ा सा पॉइंट पर आते हैं कुछ बातें कर लेते हैं तब तक

240
00:17:14,360 --> 00:17:20,360
जब तक वो लोग नहीं आ रहे हैं जैसे कि यह लोग कहते हैं कि

241
00:17:20,480 --> 00:17:25,200
भाई यह लोग इस तरह से बात मतलब कहते कि हम

242
00:17:25,200 --> 00:17:29,720
भाषा जो है हमारी जो है मर्यादा भूल रहे हैं ऐसे किसी ने वीडियो बनाया

243
00:17:29,720 --> 00:17:34,840
अब इनकी भाषा देखिए क्या

244
00:17:34,840 --> 00:17:39,440
है दिख रहा है हेडिंग देखिए खाली

245
00:17:39,440 --> 00:17:43,720
्र इंद्र गधा बनता है

246
00:17:43,720 --> 00:17:48,000
अब ये इनकी भाषा है इंद्र भी इंद्र भी गदा

247
00:17:48,000 --> 00:17:52,240
बनता है ये इनकी भाषा है है ना

248
00:17:52,240 --> 00:17:56,520
और देखिए ऐसा है अभी

249
00:17:56,520 --> 00:18:00,520
एक लाइव और होगा अब वो वाला लाइव हम लोग अपने नए उस पर करेंगे जो

250
00:18:00,520 --> 00:18:05,080
नया चैनल है विग्रहवां धर्म उस पर हम लाइव करेंगे इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन

251
00:18:05,080 --> 00:18:09,160
में उसका नए चैनल का लिंक दे देंगे और उसमें एक बहुत इंपॉर्टेंट

252
00:18:09,160 --> 00:18:13,440
शक्स आ रहा है पता है कौन आ रहा है जो रामपाल को गुरु

253
00:18:13,440 --> 00:18:18,320
तो मानता है पर इन सारी किताबों का खंडन करता है वो

254
00:18:18,320 --> 00:18:22,640
वो कहता है रामपाल के जेल जाने के बाद छापी जा रही है इनको छापने

255
00:18:22,640 --> 00:18:26,840
वाला कोई पता नहीं है कौन है क्योंकि रामपाल ने

256
00:18:26,840 --> 00:18:31,040
इतनी ज्यादा घटिया पन की भाषा यूज नहीं की है अपने ग्रंथों

257
00:18:31,040 --> 00:18:35,200
में उसके पास कुछ सबूत भी है पुरानी वाली ज्ञान गंगा भी है उसके पास

258
00:18:35,200 --> 00:18:39,280
और वो पेज नंबर के साथ बता रहा है कि ये देखिए यहां पर ये बदल दिया

259
00:18:39,280 --> 00:18:43,400
गया जैसे पुरानी ज्ञान गंगा में ये लाइन नहीं लिखी है रामपाल

260
00:18:43,400 --> 00:18:48,240
ने कि उसको जो है लोग जेल में डाल देंगे

261
00:18:48,240 --> 00:18:50,240
बिल्कुल मुकदमा चलाएंगे मगर

262
00:18:50,240 --> 00:18:55,200
नई ज्ञान गंगा में वो मुकदमा चलाने वाली बात ऐड कर दी

263
00:18:55,200 --> 00:18:59,480
गई तत्वदर्शी के लिए हां अच्छा

264
00:18:59,480 --> 00:19:03,680
यह सब है वो आएंगे तो वही बताएंगे वो हम अपने नए चैनल

265
00:19:03,680 --> 00:19:08,000
पर वो लाइव करेंगे विग्रहवां धर्म उसका लिंक डिस्क्रिप्शन

266
00:19:08,000 --> 00:19:10,560
में दे देंगे

267
00:19:10,560 --> 00:19:14,680
तो इनकी भाषा देखिए कितनी वो य वो खुद इस बात

268
00:19:14,680 --> 00:19:18,720
से बहुत चिढ़ा हुआ है कि रामपाल के नाम पर यह गंदगी क्यों फैलाई

269
00:19:18,720 --> 00:19:23,040
जा रही है उसका उसका उद्देश्य ये है मैं ये अभी मैं उसका समर्थन

270
00:19:23,040 --> 00:19:27,200
नहीं कर रहा हूं कि रामपाल की बाकी बातें है कि नहीं मगर इतने अंश में वो

271
00:19:27,200 --> 00:19:31,240
हमारे साथ है कि जो अपमा किया जा रहा है हिंदू देवी देवताओं का हिंदू

272
00:19:31,240 --> 00:19:35,920
भगवानों का वो नहीं करना चाहिए ये

273
00:19:35,920 --> 00:19:40,000
देखो अब इनकी भाषा देखिए क्या है ये पढ़िए

274
00:19:40,000 --> 00:19:44,080
जरा तू च खसम

275
00:19:44,080 --> 00:19:48,480
ये कौन सी भाषा है तू 14 खसम करेगी

276
00:19:48,480 --> 00:19:53,200
यानी 14 पुरुषों को पति बनाएगी यह भाषा है इनकी

277
00:19:53,200 --> 00:19:57,400
और यह यूज कर रहे हैं कि ऋषि ने किसी अप्सरा को कहा क्या

278
00:19:57,400 --> 00:20:01,880
इस तरह से बात होती है हमारे शास्त्रों में यह एक

279
00:20:01,880 --> 00:20:06,200
संत की वाणी है तू 14 कसम करेगी यह तो हमारे यहां

280
00:20:06,200 --> 00:20:10,400
मैंने देखा निम्न स्तर के जो लोग होते हैं अनपढ

281
00:20:10,400 --> 00:20:14,440
गवार चे टाइप के लोग वह आपस में जब गाली गलोज कर रहे

282
00:20:14,440 --> 00:20:18,480
होते हैं हैं कटाक्ष कर रहे होते हैं पढ़े लिखे लोग नहीं पढ़े लिखे

283
00:20:18,480 --> 00:20:22,640
लोग और बुद्धिजीवी कटाक्ष भी करते तो मर्यादित

284
00:20:22,640 --> 00:20:27,400
भाषा में करते कटाक्ष मगर यह कटाक्ष क्या नीचता वाला

285
00:20:27,400 --> 00:20:32,280
खसम शब्द तो हिंदी का है ही नहीं ये तो उर्दू का है शायद

286
00:20:32,280 --> 00:20:36,480
ये मरने के पश्चात गधी बनेगी इंद्र गधा बनता

287
00:20:36,480 --> 00:20:40,480
है है ना

288
00:20:40,480 --> 00:20:44,640
ये इनके काम है अच्छा एक

289
00:20:44,640 --> 00:20:48,280
चीज और मैं बोल रहा था

290
00:20:48,280 --> 00:20:52,760
कि ये कहते हैं कि

291
00:20:52,760 --> 00:20:56,800
जो काल ने अपना मत दे दिया है कहीं कहीं वो मानने

292
00:20:56,800 --> 00:21:00,840
लायक नहीं है है ना काल

293
00:21:00,840 --> 00:21:05,360
ने जो अपना मत दे दिया है कहीं कहीं वोह मानने लायक

294
00:21:05,360 --> 00:21:10,640
नहीं है मगर आप देखिए

295
00:21:10,640 --> 00:21:15,480
इन्होंने काल के मत को भी माना है यह देखिए

296
00:21:15,480 --> 00:21:20,440
ज्ञान गरमा गीता की और इसको पढ़ लीजिए आप

297
00:21:20,440 --> 00:21:22,760
दिख रहा है आपको

298
00:21:22,760 --> 00:21:25,800
पूरा पढ़िए

299
00:21:25,800 --> 00:21:29,840
जो ऊपर लिखे मेरे मत के अनुसार करते हैं

300
00:21:29,840 --> 00:21:33,920
वह मुझे कर्मों से बच जाते हैं जो

301
00:21:33,920 --> 00:21:34,420
ऐसा

302
00:21:34,240 --> 00:21:38,680
नहीं करते हैं वे मूर्ख अज्ञानी है हा

303
00:21:38,680 --> 00:21:44,280
तो क्या हुआ काल का मत भी माना जा रहा है अब लो

304
00:21:44,280 --> 00:21:48,280
भाई काल का मत भी मान लिया और आपको एक बहुत कॉमेडी

305
00:21:48,280 --> 00:21:52,520
वाली बात बताऊ यह लोग कहते ना तत्वदर्शी अरे भाई तत्वदर्शी तो कोई

306
00:21:52,520 --> 00:21:56,840
तात्विक बात तो बताए चलो मैंने सारी कहानी

307
00:21:56,840 --> 00:22:01,240
मान ली सारी कहानी माली ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे कर कर करके

308
00:22:01,240 --> 00:22:05,360
हमको तुमसे ज्ञान लेना है तो ज्ञान तो दो अंत में

309
00:22:05,360 --> 00:22:09,880
ज्ञान तो दो क्या ज्ञान दे रहे हो

310
00:22:09,880 --> 00:22:14,280
देखो ज्ञान क्या मिल रहा है साहब मेरी

311
00:22:14,280 --> 00:22:18,280
वाली परम गति कुछ समय के लिए अमर अब ये बताओ

312
00:22:18,280 --> 00:22:23,000
मतलब जो काल की भक्ति करेगा वो कुछ समय के लिए अमर हो जाएगा

313
00:22:23,000 --> 00:22:27,760
जो वेद और गीता के अनुसार चलेगा वो कुछ समय के लिए अमर हो जाएगा

314
00:22:27,760 --> 00:22:32,200
ठीक है अब ये बताइए कुछ समय के लिए अमर क्या होता है

315
00:22:32,200 --> 00:22:36,240
यही मेरे समझ में नहीं आया इसका तत्व दर्शन होना चाहिए

316
00:22:36,240 --> 00:22:40,440
ना र् संत य कह रहा है कुछ समय के लिए अमर अमर

317
00:22:40,440 --> 00:22:44,560
का मतलब है जो मरता नहीं है तो कुछ समय के लिए अमर क्या है जो

318
00:22:44,560 --> 00:22:48,880
मर नहीं रहा वो अमर है तो इस समय मैं भी अमर हूं आप भी अमर है

319
00:22:48,880 --> 00:22:49,380
बिना

320
00:22:49,240 --> 00:22:53,400
वेद गीता का अनुसरण किए जितनी जनता इसको देख रही है

321
00:22:53,400 --> 00:22:57,440
वो अभी बहुत ज्यादा इस पद नहीं उसने वो

322
00:22:57,440 --> 00:23:02,280
बिल्कुल से सब कर लिया है तो सब अमर

323
00:23:02,280 --> 00:23:06,360
है कुछ समय के लिए अमर क्या है ये क्वेश्चन मैंने

324
00:23:06,360 --> 00:23:10,440
पूछा था य अविनाशी और अ अजन्मा इसका अर्थ क्या है व

325
00:23:10,440 --> 00:23:14,480
उसका अ इनका इसका अर्थ तो यह हुआ कि अविनाशी मतलब

326
00:23:14,480 --> 00:23:18,640
जो मरता नहीं है और अ का अय हुआ जन्म नहीं लेता है तो य

327
00:23:18,640 --> 00:23:23,000
चार के पाच बोल रहे ऐसा तोय जवाब बहुत

328
00:23:23,000 --> 00:23:28,960
सालों बाद बहुत समय बाद इसकी जन्म मत्य होती तभी ऐसा लिखा गया है य पर

329
00:23:28,960 --> 00:23:32,960
उत्तर इनका उत्तर इस अच्छा तो जिसकी मृत्यु कभी नहीं होती है उसको

330
00:23:32,960 --> 00:23:37,200
क्या कहेंगे अगर बहुत सालों बाद जिसकी मृत्यु होती है उसको भी अमर

331
00:23:37,200 --> 00:23:41,440
कहोगे तो जिसकी मृत्य होती नहीं है उसको क्या कहोगे भैया नई

332
00:23:41,440 --> 00:23:45,440
नई डिक्शनरी बना लो अपने हिसाब से पूरी थ्योरी चेंज कर

333
00:23:45,440 --> 00:23:49,440
दी अविनाशी और अजन्मा मैं फिर बता रहा

334
00:23:49,440 --> 00:23:53,680
हूं एक बहुत इंपोर्टेंट लाइव स्ट्रीम हम लोग करने वाले हैं जिसमें बहुत

335
00:23:53,680 --> 00:23:58,080
सारे राज खुलने वाले हैं प्रासंगिक शास्त्रोक्त

336
00:23:58,080 --> 00:24:02,400
तो बात हमने रामपाल के विषय में बहुत कर ली है अब जो प्रसंग

337
00:24:02,400 --> 00:24:04,360
जो वैसी व्यवहारिक बातें है

338
00:24:04,360 --> 00:24:08,720
कि क्या हो रहा है कैसे चल रहा है इनका तंत्र कैसे आप देखो

339
00:24:08,720 --> 00:24:12,880
इनके खिलाफ इतनी चीजें हो रही है कहीं पर मुकदमा वगैरह दर्ज

340
00:24:12,880 --> 00:24:16,960
नहीं करा रहे य लोग क्यों नहीं करा रहे कराएंगे तो जो इनके

341
00:24:16,960 --> 00:24:21,600
ऊपर डायरेक्ट हानि होगी ना इनके शरीर पर उस पर करा सकते हैं

342
00:24:21,600 --> 00:24:26,360
यह किताबों के आधार पर ये कोई मुकदमा क्यों नहीं दर्ज करा सकते पता है

343
00:24:26,360 --> 00:24:30,360
क्योंकि इनको छापने वाले का पता ही नहीं है है प्रश्न तो ये आएगा ना कोर्ट

344
00:24:30,360 --> 00:24:34,640
में कि इन किताबों को छापा किसने

345
00:24:34,640 --> 00:24:38,720
कौन जाए को अच्छा आप इनकी किताबें मंगाने के लिए फोन भी करोगे तो आपको

346
00:24:38,720 --> 00:24:42,840
बाकायदा मेंबरशिप की तरीके से मेंबर बनना होगा तब आपकी आपको इनकी किताबें

347
00:24:42,840 --> 00:24:47,000
मिलती है फोन ऑन करो आप ऐसे नहीं मिलती कि मैं कुरियर करवा

348
00:24:47,000 --> 00:24:51,240
दो वहां से ले लू दुकान लगी हो ऐसे नहीं है ठीक है

349
00:24:51,240 --> 00:24:55,560
तो मेंबरशिप टाइप से ही आपको जैसे ये नेटवर्क मार्केटिंग

350
00:24:55,560 --> 00:24:59,600
होती है ना कुछ ऐसी कंपनी है जो अपनी डायरेक्ट सेल

351
00:24:59,600 --> 00:25:04,400
नहीं करती नेटवर्क मार्केटिंग के द्वारा ही आप उस परचेस कर सकते हो जैसे हर्बालाइफ हर्बालाइफ

352
00:25:04,400 --> 00:25:09,160
का नियम है है ना वैसे ही ये लोग अपनी किताब देते हैं

353
00:25:09,160 --> 00:25:13,360
डायरेक्ट इनकी कहीं पर दुकान सीधे स्टॉक नहीं लगा

354
00:25:13,360 --> 00:25:17,480
होगा और लगा होगा तो मेंबरशिप बनाने के रूप में ही लगा

355
00:25:17,480 --> 00:25:19,440
होगा बिल्कुल ऐसे

356
00:25:19,440 --> 00:25:23,760
कोई इनकी किताब खरीद के थोक के बाब में नहीं बेच सकता है भाई

357
00:25:23,760 --> 00:25:28,000
गीता प्रेस की आप किताबें ले आओ बेचो तो सबसे

358
00:25:28,000 --> 00:25:32,000
पहले तो इसी पर एक लगाम है कि तुम हमारी जो ग्रंथ है उनको कभी भी कहीं से

359
00:25:32,000 --> 00:25:36,120
भी खरीद सकते हो और उसमें तीन 13 चार दो ये सब कर लेते

360
00:25:36,120 --> 00:25:40,160
हो और अपनी किताबों को तुमने रहस्य मेंही बना रखा है

361
00:25:40,160 --> 00:25:44,200
तुम्हारी प्रिंटिंग प्रेस गायब है वो बबाना की प्रिंटिंग प्रेस अभी तक

362
00:25:44,200 --> 00:25:48,280
मिली नहीं तो हम लोग इन सब मामलों के संबंध में एक लाइव

363
00:25:48,280 --> 00:25:52,560
स्ट्रीम करने वाले हैं अपने नए चैनल विग्रहवां धर्म

364
00:25:52,560 --> 00:25:56,840
नाम से वो चैनल है आप लोग सर्च कर ले हम लोग इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन

365
00:25:56,840 --> 00:26:02,840
में उसको डाल देंगे लिंक को तो आप लोग वहां पर अपना सपोर्ट

366
00:26:03,440 --> 00:26:07,880
करें बिल्कुल एक भाई साहब कह रहे हैं संत रामपाल

367
00:26:07,880 --> 00:26:12,360
की फोटो लगी है इससे बड़ा प्रूफ क्या है

368
00:26:12,360 --> 00:26:16,520
तुमने भी सुनो इसका जवाब मैं दे दूं तुमने भी

369
00:26:16,520 --> 00:26:20,960
अपनी डीपी पर फोटो लगाई है कृष्ण और उनकी जो संगिनी

370
00:26:20,960 --> 00:26:25,840
है उनकी पूजा करने वाले के रूप में तो क्या तुम हो गए क्या कृष्ण के भक्त

371
00:26:25,840 --> 00:26:30,600
दिखाऊं क्या रामपाल को मानने वाले लोग क्या सोचते सोचते हैं

372
00:26:30,600 --> 00:26:36,600
प्रश्न के बारे में कथनी और करनी में

373
00:26:37,240 --> 00:26:42,400
अंतर कितनी बुरी बुरी बातें करते हैं

374
00:26:42,400 --> 00:26:46,480
अच्छा एक सिद्धांत इनका मुझे नहीं समझ में आता है

375
00:26:46,480 --> 00:26:50,640
हटा दीजिए भैया इसको हटा दीजिए कमेंट एक सिद्धांत य नहीं समझ में आता

376
00:26:50,640 --> 00:26:54,240
है मुझे

377
00:26:54,240 --> 00:26:58,640
कि एक यह सिद्धांत नहीं समझ में आता है मुझे

378
00:26:58,640 --> 00:27:02,680
यह कहां का सिद्धांत है कि जब तुम्हे पूर्ण ब्रह्म के बारे में जानकारी जो सबका

379
00:27:02,680 --> 00:27:06,840
बॉस है फिर भी तुमको इनकी नीचे वालों की भक्ति करनी है जो

380
00:27:06,840 --> 00:27:11,480
तु जो बुरे हैं जिन्होंने तुम्ह फसा रखा है

381
00:27:11,480 --> 00:27:17,200
यह कौन सा सिद्धांत है कर्जा देना है

382
00:27:17,200 --> 00:27:21,240
कर्जा इनने कर्जा ले रखा है इनसे इनके लोक में रह रहे हैं तो

383
00:27:21,240 --> 00:27:26,160
कर्जा ले रखा तो इनका कर्जा देके जाएंगे बोलते हैं य

384
00:27:26,160 --> 00:27:30,480
तो फिर कर्जा पि क्यों नहीं मानते हो

385
00:27:30,480 --> 00:27:35,400
पितरों का भी मान लो कर्जा हा

386
00:27:35,400 --> 00:27:39,440
पितरों का कर्जा नहीं मानेंगे

387
00:27:39,440 --> 00:27:43,600
भाई पित्रों से भी तो कर्जा लिया है उनके

388
00:27:43,600 --> 00:27:48,280
द्वारा शरीर तो प्राप्त हुआ है ना बिल्कुल वो

389
00:27:48,280 --> 00:27:52,600
कुल मिलाकर हिंदू धर्म से जुड़ी हुई हर मान्यता पर उनको आघात करना

390
00:27:52,600 --> 00:27:57,280
है नाम से मानव धर्म और काम से मुस्लिम

391
00:27:57,280 --> 00:28:01,400
समाज तैयार करना है तो अभी तक ये दोनों

392
00:28:01,400 --> 00:28:05,480
आ नहीं रहे हैं ये लोग बोल रहे हैं

393
00:28:05,480 --> 00:28:09,680
कि बोलते हैं कि हम भी यज्ञ करते हैं पर यज्ञ तो तभी पूर्ण होगा

394
00:28:09,680 --> 00:28:14,640
जब वेदों के मंत्रों का उच्चारण होगा हम

395
00:28:14,640 --> 00:28:18,880
ये तो वेदों में भी लिखा गया है तो कौन सा यज्ञ कर रहे हैं

396
00:28:18,880 --> 00:28:23,000
शास्त्रों से जो इनकी भक्ति चल रही है कहां चल रही है इनकी सीधे बोलो

397
00:28:23,000 --> 00:28:27,000
ना कबीर वाणी जो हमारी है उससे हम भक्ति कर रहे हैं बाकी का तो आलंबन

398
00:28:27,000 --> 00:28:32,000
हम इसलिए ले रहे हैं कि हमने कैसे इनको नहीं मानना

399
00:28:32,000 --> 00:28:38,000
है यही तो ल यही तो कर रहे

400
00:28:38,200 --> 00:28:42,360
हैं अध्याय चार के 34 से सीधे 15 के एक में पहुंच जाते

401
00:28:42,360 --> 00:28:47,160
हैं ये बीच की इतनी सारी बातें छोड़ दी

402
00:28:47,160 --> 00:28:51,560
जी वेदों के जानने वाला तत्वदर्शी है बोला

403
00:28:51,560 --> 00:28:56,560
तो वेद 15 के 15 में बोला है कि वेदों से जानने योग्य मैं

404
00:28:56,560 --> 00:29:00,680
हूं वेद य देखिए पूरी बुराई

405
00:29:00,680 --> 00:29:05,400
कर रखी है इस पेज पर भगवान श्री कृष्ण की जिसका उन्होने फोटो लगा रखा है

406
00:29:05,400 --> 00:29:09,400
तो फोटो लगाने से सिद्ध नहीं होता है कि आप उस पक्ष के व्यक्ति

407
00:29:09,400 --> 00:29:13,400
हो गए उसी प्रकार से अगर इन किताबों पर रामपाल दास का

408
00:29:13,400 --> 00:29:17,680
फोटो है तो इससे सिद्ध नहीं हो जाएगा कि वो रामपाल जो है रामपाल के द्वारा जानकारी

409
00:29:17,680 --> 00:29:21,840
में छप रही है किताब तो ये होने वाला है लाइव उसम

410
00:29:21,840 --> 00:29:27,840
देखिए हा कोई आया

411
00:29:28,840 --> 00:29:33,120
अमित दास बताइए कैसे हैं आप सबब बढ़िया

412
00:29:33,120 --> 00:29:37,280
सतगुरु देव जी की जय जय श्री राम

413
00:29:37,280 --> 00:29:41,560
आपके वो नहीं आए आरहे आ

414
00:29:41,560 --> 00:29:45,840
रहे अच्छा मैं आपने हमसे एक बात कही थी कि हम आपको बोलने

415
00:29:45,840 --> 00:29:49,880
देंगे और आपकी अनुमति के बिना दो घंटे से पहले हटाएंगे नहीं है

416
00:29:49,880 --> 00:29:53,280
ना मैंने

417
00:29:53,280 --> 00:29:57,360
कहा पर वचन जा वो ठीक है हम मानेंगे आप भी हमें एक

418
00:29:57,360 --> 00:30:01,400
वचन दे दीजिए इस बात को शुरू में ही कि बात अटक

419
00:30:01,400 --> 00:30:07,400
जाने पर बिना बोले यहां से भागेंगे नहीं

420
00:30:07,440 --> 00:30:11,600
बक जो चीज गलत होगी उसे माना जाएगा

421
00:30:11,600 --> 00:30:15,880
नहीं वो माना नहीं आप य से भागेंगे नहीं रिमूव हो गए बस य

422
00:30:15,880 --> 00:30:19,880
से ऐसा आपने किया है ना क बार अच्छा ऐसा

423
00:30:19,880 --> 00:30:24,320
मैंने कभी नहीं किया है आपने अपनी तरफ से हर बार हटाया है आपने किया

424
00:30:24,320 --> 00:30:28,440
चलो ठीक है इस बात पर हम रील बना देंगे बार बोल दीजिए

425
00:30:28,440 --> 00:30:32,680
आप अपनी तरफ से कभी नहीं हटे यहां से बोलज

426
00:30:32,680 --> 00:30:36,680
आप अपनी तरफ हम अपनी तरफ से अब अब अब इन बातों

427
00:30:36,680 --> 00:30:41,640
को छोड़िए अब नई शरी से डिबेट चालू हो रही है ना उस पर चर्चा कीजिए

428
00:30:41,640 --> 00:30:45,680
बाबूराम जी चेहरा दिखाए कोई दिक्कत नहीं मैं दिखा

429
00:30:45,680 --> 00:30:50,200
रहा हूं बाबूराम दिखा रहे बात एक ही है ना अमित भाई कैसे हो

430
00:30:50,200 --> 00:30:55,120
बढ़िया बढ़िया बढ़िया बाबूराम जी कैसे हो

431
00:30:55,120 --> 00:30:59,240
मस्त है अच्छा थोड़ा से मैं

432
00:30:59,240 --> 00:31:03,360
थोड़े से छोटे छोटे नियम है उसे मैं तय कर लू फिर उसके बाद अपनी ज्ञान

433
00:31:03,360 --> 00:31:07,360
चर्चा बढ़ा लेते हैं बोलिए पहला पहला जो नियम

434
00:31:07,360 --> 00:31:11,800
है कि आप अपनी तरफ से हमें रिमूव नहीं करोगे दूसरा

435
00:31:11,800 --> 00:31:15,800
जो नियम दूसरा जो नियम है जब तक मेरे सवाल पूरे

436
00:31:15,800 --> 00:31:19,880
ना हो जाए तब तक आप बीच में नहीं बोलोगे

437
00:31:19,880 --> 00:31:22,560
जब तक आपका आपकी बात पूरी ना हो जाए

438
00:31:22,560 --> 00:31:27,120
या सवाल पूरे ना हो जाए बात या सवाल दोनों एक

439
00:31:27,120 --> 00:31:31,320
सवा सवाल आप लिख के लाए हो कितने सवाल है आपके कोई

440
00:31:31,320 --> 00:31:35,520
सवाल कुछ लिखा नहीं हुआ है मैं मैं बस शास्त्रों से ही बोलूंगा अरे

441
00:31:35,520 --> 00:31:39,520
भाई कोई लिमिट होती है ना आपके तो 1000 सवाल हो सकते हैं तो हम रुके

442
00:31:39,520 --> 00:31:43,640
रहे तब तक भैया दो घंटे तक चलेगी आपके कुछ

443
00:31:43,640 --> 00:31:48,120
सवाल होंगे जब तक आपकी बात पूरी ना हो जाए तब तक हम बीच में नहीं बोलेंगे

444
00:31:48,120 --> 00:31:52,160
जब तकरी बात पू अगर कोई किसी की बात को काट रहा होगा तो

445
00:31:52,160 --> 00:31:56,280
आप याद दिला दीजिए जो अगर सही लगेगा तो वहां पर चुप हो जाएगा आदमी जैसे हम आपको

446
00:31:56,280 --> 00:32:00,320
याद दिलाएंगे आप हमें याद दिलाएगा ठीक है मेरा मेरा कहने

447
00:32:00,320 --> 00:32:04,480
का मतलब यह है कि जैसे कि मैं कुछ बता रहा हूं

448
00:32:04,480 --> 00:32:08,560
आपको या पूछ रहा हूं आपसे आप फिर उस बात को काट के बीच में

449
00:32:08,560 --> 00:32:12,640
से फिर बोलोगे तो ना तो ऑडियंस को सुनने में मजा आएगा और

450
00:32:12,640 --> 00:32:16,640
ना हमें आपसे सवाल आएगा ठीक है ठीक है अब

451
00:32:16,640 --> 00:32:21,360
आपने दो बातें कही है दो बातें हमारी सुन लीजिए आप बिना बताए भागेंगे नहीं

452
00:32:21,360 --> 00:32:25,440
भैया कितनी बार बोले नहीं भागेंगे अरे तो बोल तो हमने भी

453
00:32:25,440 --> 00:32:29,640
दिया था कि हम आपको रिमूव नहीं करेंगे दोबारा आपने हम अपने

454
00:32:29,640 --> 00:32:34,080
गुरु के चरणों की सौगंध खाते हैं कि हम भागेंगे नहीं

455
00:32:34,080 --> 00:32:37,680
हां और दूसरा ये दूसरा दूसरा नियम

456
00:32:37,680 --> 00:32:42,320
यह है कि विषय प ही बात होगी विषयात नहीं करेंगे

457
00:32:42,320 --> 00:32:46,480
मैं मैं ओनली फॉर गुरु पर बात करूंगा और ऐसा है कि जब

458
00:32:46,480 --> 00:32:50,880
गुरु पर बात करूंगा कोई टॉपिक अगर मैं पूछूंगा

459
00:32:50,880 --> 00:32:54,880
तो व गुरु से संबंधित होगा आप ऐसा करिए आप ऐसा करिए टॉपिक आप

460
00:32:54,880 --> 00:32:59,440
कोई भी पूछेगा मगर आप जब मैं पूछू कि इसका इस बात से क्या संबंध है तो बता

461
00:32:59,440 --> 00:33:03,640
दीजिएगा नहीं मैं जो भी मैं क्या कह रहा हूं मैं जो भी

462
00:33:03,640 --> 00:33:07,640
टोटली कुछ भी अगर बोल रहा मुह से तो वो गुरु से संबंधित

463
00:33:07,640 --> 00:33:11,640
संबंधित ही होगा मैं वही कह रहा हूं अगर

464
00:33:11,640 --> 00:33:15,680
मुझे डाउट हो जाए कि उससे संबंधित नहीं है तो आप

465
00:33:15,680 --> 00:33:19,720
जो है मुझे वो संबंध बता दीजिएगा ठीक है ठीक ठीक

466
00:33:19,720 --> 00:33:23,120
है ठीक है

467
00:33:23,120 --> 00:33:29,120
अच्छा अब गुरु पर बात होनी है आप शुरू कर रहे हैं कि मैं शुरू करूं

468
00:33:29,840 --> 00:33:34,800
मैं ही शुरू कर लेता हूं हां

469
00:33:34,800 --> 00:33:38,840
बोलिए अच्छा मेरा यह सवाल है आपसे कि क्या

470
00:33:38,840 --> 00:33:43,760
आप तत्वदर्शी को महज एक

471
00:33:43,760 --> 00:33:48,160
संत के रूप में मानते हैं या तत्वदर्शी

472
00:33:48,160 --> 00:33:52,240
वाकई कोई एक संत होता है जिसके शरण में

473
00:33:52,240 --> 00:33:56,600
जाने से मोक्ष हो जाता है या इस समय धरती पर कोई तत्वदर्शी संत

474
00:33:56,600 --> 00:33:59,320
है

475
00:33:59,320 --> 00:34:03,360
ऐसा है कि मेरे मानने या ना मानने से

476
00:34:03,360 --> 00:34:07,880
कुछ नहीं होता जो शास्त्रों में जो शास्त्रों

477
00:34:07,880 --> 00:34:12,120
में आचार्य और गुरु होने

478
00:34:12,120 --> 00:34:16,400
के संबंध में लक्षण बताए गए हैं

479
00:34:16,400 --> 00:34:20,680
उनको फॉलो करने के अनुसार जो तत्वदर्शी है वो तत्वदर्शी है

480
00:34:20,680 --> 00:34:24,760
वो कुछ चार पांच है सुन लीजिए वो कुछ चार पाच

481
00:34:24,760 --> 00:34:28,760
है पहला की वो सन्यासी

482
00:34:28,760 --> 00:34:32,880
ब्रह्मचारी होना चाहिए अवेद 11 पा

483
00:34:32,880 --> 00:34:37,320
16 मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114

484
00:34:37,320 --> 00:34:41,400
इसके अलावा गीता में अनेका अनेक जगह कहा गया है कि वही उस

485
00:34:41,400 --> 00:34:45,880
संसार रूपी पेड़ को काट सकता है जिसके पास वैराग्य

486
00:34:45,880 --> 00:34:49,920
हो योगी के पास वैराग्य होना चाहिए ठव अध्याय

487
00:34:49,920 --> 00:34:54,240
में ठीक है तो पहला लक्षण आ गया कि तत्वदर्शी संत

488
00:34:54,240 --> 00:34:59,000
कौन होगा प्रामाणिक आचार्य गुरु कौन होगा

489
00:34:59,000 --> 00:35:03,520
जो वैरागी हो वैराग्य हो जिसके पास अंतिम निर्णायक ठीक

490
00:35:03,520 --> 00:35:07,840
अच्छा जोय किसी के पास से आवाज आ रही है कुछ अजीब

491
00:35:07,840 --> 00:35:11,920
सी बीच बीच

492
00:35:11,920 --> 00:35:16,320
में इसके पीछे से आही बाबू जी आप अपना म्यूट कर

493
00:35:16,320 --> 00:35:20,720
आप अपना म्यूट किया है क्या आपने बाबू जी हा अब म्यूट

494
00:35:20,720 --> 00:35:26,000
है आही आपसे ही आ रही

495
00:35:26,000 --> 00:35:30,160
है मेरे पीछे आप क जंगल मंगल में बैठे हैं क्या

496
00:35:30,160 --> 00:35:34,360
नहीं जंगल में नहीं मैं अपने घर पर ही हूं लेकिन कहीं

497
00:35:34,360 --> 00:35:38,360
शादी ब्याह के कारण कहीं साउंड बज रहा है अच्छा चलिए ठीक

498
00:35:38,360 --> 00:35:42,360
है तो पहला लक्षण प्राप्त हुआ वैराग्य होना चाहिए

499
00:35:42,360 --> 00:35:47,960
दूसरा लक्षण प्राप्त हुआ कि परंपरा प्राप्त होना

500
00:35:47,960 --> 00:35:52,040
चाहिए ब्रा पर उतर देने

501
00:35:52,040 --> 00:35:56,040
दीजिए परंपरा प्राप्त होना चाहिए गुरु क्योंकि जब हम

502
00:35:56,040 --> 00:36:00,440
बात करते हैं कि हमारी भक्ति शास्त्र सम्मत है तो शास्त्र

503
00:36:00,440 --> 00:36:01,240
हमारे पास

504
00:36:01,240 --> 00:36:06,000
ऐसे नहीं आए हैं शास्त्र हमारे पास परंपरा से

505
00:36:06,000 --> 00:36:10,080
तो यदि परंपरा से आने वाले हमें उन

506
00:36:10,080 --> 00:36:14,320
शास्त्रों पर उन वचनों पर उन मंत्रों पर विश्वास है तो

507
00:36:14,320 --> 00:36:18,400
जिससे वो मंत्र जिससे वो शास्त्र में प्राप्त हो रहे हैं

508
00:36:18,400 --> 00:36:22,400
उस पर भी विश्वास होना आवश्यक है और यदि उनसे

509
00:36:22,400 --> 00:36:26,640
आने वाले शास्त्रों पर और यदि उस पर विश्वास

510
00:36:26,640 --> 00:36:31,080
नहीं है तो के द्वारा प्राप्त होने वाले शास्त्रों पर विश्वास

511
00:36:31,080 --> 00:36:35,520
होना भी उचित सिद्ध नहीं होता है इसका प्रमाण है मुंडकोपनिषद

512
00:36:35,520 --> 00:36:39,600
और क्या कहते भगवत गीता में आपको बताया ही है कई बार और

513
00:36:39,600 --> 00:36:43,640
अनेका अनेक जगह कि गुरु परंपरा से जो

514
00:36:43,640 --> 00:36:47,960
आपको प्राप्त हो रहा है ज्ञान वही ज्ञान प्रमाणित तो पहला लक्षण वैराग्य

515
00:36:47,960 --> 00:36:51,960
और दूसरा लक्षण गुरु परंपरा तीसरा लक्षण सुन

516
00:36:51,960 --> 00:36:56,160
लो शास्त्रों में कई जगह भ्रमित कर देने वाली बातें

517
00:36:56,160 --> 00:37:00,520
आ जाती है ऐसा लगता यहां तो ये कह रहे हैं यहां तो ये कह रहे हैं

518
00:37:00,520 --> 00:37:04,800
अब अगर हम ये मान ले इसको छोड़ दो इसको पकड़ लो तो जिस शास्त्र

519
00:37:04,800 --> 00:37:09,360
को हम प्रमाण मान रहे हैं उसी की एक बात को हमने खंडन कर दिया

520
00:37:09,360 --> 00:37:13,440
और जब किसी शास्त्री को एक बात हमने यह कह दीय मानने लायक नहीं

521
00:37:13,440 --> 00:37:16,320
है तो इसका मतलब हमारे धर्म और

522
00:37:16,320 --> 00:37:20,440
अधर्म का फैसला वो शास्त्र नहीं कर रहा है कुछ और है जिसके आधार

523
00:37:20,440 --> 00:37:24,640
पर हम उसको चेक कर रहे हैं इसमें क्या सही है क्या गलत है और वो हमारे धर्म

524
00:37:24,640 --> 00:37:29,200
और अधर्म का फैसला कर रहा है तो इसलिए म पुराण में दिया गया 145

525
00:37:29,200 --> 00:37:33,520
में अध्याय 5वा श्लोक कि समस्त स्तुति स्मति शत स्मार्थ

526
00:37:33,520 --> 00:37:37,600
धर्म का अनुगमन कराने वाली शिक्षा ही साधु सम्मत शिक्षा है

527
00:37:37,600 --> 00:37:41,920
तो क्या हुआ अर्ध कुट न्याय नहीं होना चाहिए जैसे कि मान

528
00:37:41,920 --> 00:37:46,200
लीजिए रामपाल जी की बात कर लेता हूं रामपाल दास

529
00:37:46,200 --> 00:37:50,600
जी ने एक जगह अपनी गरिमा गीता की पुस्तक में ब्रज

530
00:37:50,600 --> 00:37:54,760
का अर्थ जो है वो लिया है आना

531
00:37:54,760 --> 00:37:59,240
जाना नहीं लिया है अब मैं केवल उन उतनी बात पकड़ लू

532
00:37:59,240 --> 00:38:03,320
पीछे उन्होंने कहा है कि यन का अर्थ है मेरा अर्थ नहीं है

533
00:38:03,320 --> 00:38:07,320
उस बात को छोड़ दू तो मैं इस बात को क्लेम कर सकता हूं

534
00:38:07,320 --> 00:38:11,320
कि देखो देखो क्या कहते हैं य जो रामपाल भी

535
00:38:11,320 --> 00:38:16,640
व भी ब्रज का अर्थ आना कर रहे हैं देखो दिखाता

536
00:38:16,640 --> 00:38:20,720
हूं हमने अपने में दिखाया दिखाया है इसका

537
00:38:20,720 --> 00:38:24,800
मतलब क्या है म सुनलो

538
00:38:24,800 --> 00:38:29,240
सुनलो समस्त श में सामंजस

539
00:38:29,240 --> 00:38:31,440
की शिक्षा होनी चाहिए एक भी लाइन

540
00:38:31,440 --> 00:38:36,080
को हम कट नहीं कर सकते कि यह मानना है यह नहीं मानना

541
00:38:36,080 --> 00:38:40,240
जैसे ही कट करेंगे तो हमारा उस पूरे शास्त्र पर विश्वास ना

542
00:38:40,240 --> 00:38:44,320
होना सिद्ध हो जाएगा तो पहला वैराग्य होना

543
00:38:44,320 --> 00:38:48,360
चाहिए दूसरा परंपरा प्राप्त होना चाहिए तीसरा

544
00:38:48,360 --> 00:38:52,400
समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा देने वाला होना

545
00:38:52,400 --> 00:38:58,240
चाहिए और चौथा और सबसे इंपोर्टेंट पॉइंट

546
00:38:58,240 --> 00:39:02,920
गुरु वही गुरु का मतलब क्या है क्या है गुरु का मतलब

547
00:39:02,920 --> 00:39:07,880
गुरु का मतलब जो है कि जो परमात्मा से मिला दे अंधकार से

548
00:39:07,880 --> 00:39:12,000
हा का मतलब अंधकार का मतलब अंधकार और र

549
00:39:12,000 --> 00:39:16,200
का मतलब निकालने वाला इसका मतलब गुरु कौन है जो

550
00:39:16,200 --> 00:39:20,760
अपने शिष्य को अंधकार रूपी अज्ञानता से बाहर निकाल

551
00:39:20,760 --> 00:39:24,920
दे तो अंत गवा गुरु आपको

552
00:39:24,920 --> 00:39:28,920
जो ज्ञान है ना अंधकार रूपी से अंधकार रूपी

553
00:39:28,920 --> 00:39:33,280
अज्ञानता से निकाल वो ज्ञान देने वाला होना चाहिए जैसे की कई सवाल

554
00:39:33,280 --> 00:39:37,480
खड़े हो जाते हैं कि यदि कबीर स शरीर है

555
00:39:37,480 --> 00:39:41,520
तो उसके आसपास की दुनिया को उसने नहीं बनाया क्या कभी कोई आज तक

556
00:39:41,520 --> 00:39:45,840
रामपाल वाला व्यक्ति इस पर नहीं टिक सका अगर उसका शरीर अविनाशी

557
00:39:45,840 --> 00:39:46,720
है तो बदल

558
00:39:46,720 --> 00:39:50,840
कैसे रहा है बताऊंगा मैं बताऊंगा अच्छा थोड़ा

559
00:39:50,840 --> 00:39:55,440
सा मैं य कह रहा हूं थोड़ा श और

560
00:39:55,440 --> 00:39:59,960
आप थोड़ा सा उस तरीके से बोलिए जिसे हमें कभी कोई रामपाल

561
00:39:59,960 --> 00:40:04,080
का शिष्य है जो आज तक इन बातों पर बात ही नहीं करता है

562
00:40:04,080 --> 00:40:08,360
कि ईश्वर सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष

563
00:40:08,360 --> 00:40:12,640
शाश्वत इन पर बात नहीं करता कभी कोई यही तो मेन ज्ञान है जो होना चाहिए

564
00:40:12,640 --> 00:40:16,680
भाई उस बात होगी अभी आज गुरु से फिर

565
00:40:16,680 --> 00:40:20,680
कल होगा आपने पूछ गुरु किसे

566
00:40:20,680 --> 00:40:24,720
मानते हो गुरु किसे मानते हो तो गुरु जब हमने गुरु

567
00:40:24,720 --> 00:40:28,720
किसी को कह रहे तो वो हमारे गु का मतलब और रू

568
00:40:28,720 --> 00:40:33,040
का मतलब निकालने हमें वो गुरु है हमारा जो हमें अंधकार रूपी अज्ञानता

569
00:40:33,040 --> 00:40:37,200
से बाहर निकाले मगर य तो रामपाल दास जी का कोई भी ऐसा शिष्य

570
00:40:37,200 --> 00:40:41,280
आज तक नहीं आया जिसने हमसे सर्वशक्तिमान शाश्वत धर्म

571
00:40:41,280 --> 00:40:45,520
परम स्वतंत्र मोक्ष इन सब विषयों पर बात की नास्तिक को भी खंडन

572
00:40:45,520 --> 00:40:49,600
नहीं कर पाता व वो केवल प्रमाण रट के आ जाता है वो

573
00:40:49,600 --> 00:40:54,360
केवल प्रमाण तो रट के आता है मगर व इन बातो पर कभी बात नहीं करता तो

574
00:40:54,360 --> 00:40:58,400
अच्छा जैसे जैसे एक उदाहरण और द आपको अमर

575
00:40:58,400 --> 00:41:01,800
का मतलब आप क्या मानते हैं अमर

576
00:41:01,800 --> 00:41:05,840
का मतलब जो जन्म मृत्यु में ना आए जिसकी मृत्यु नहीं

577
00:41:05,840 --> 00:41:10,520
हो सकती जी वही है ना अमर

578
00:41:10,520 --> 00:41:14,600
अच्छा अमर का मतलब वो है अब ये अपनी किताब में कह रहे

579
00:41:14,600 --> 00:41:19,920
हैं कुछ समय के लिए अमर इसका मतलब क्या है

580
00:41:19,920 --> 00:41:24,520
अस्थाई भाई आप ये टॉपिक थोड़ा सा कहीं अंत जा रहा है

581
00:41:24,520 --> 00:41:28,520
आप मैं आपको एक बात बता रहा हूं जैसे कि अमर का

582
00:41:28,520 --> 00:41:32,520
मतलब आपने बहुत आसानी से बता दिया जिसकी मृत्यु नहीं होती मृत्यु विहीन

583
00:41:32,520 --> 00:41:36,680
है मगर इन्होंने कहा कुछ समय के लिए अमर तो कुछ समय के लिए

584
00:41:36,680 --> 00:41:40,800
जो अमर है वो कौन होता है अगर उसकी मृत्यु है तो

585
00:41:40,800 --> 00:41:44,920
अमर नहीं है कभी भी हो दो लाख वर्ष के बाद मगर वो अमर

586
00:41:44,920 --> 00:41:49,240
नहीं है क्योंकि उसकी म होगी मैं उसी

587
00:41:49,240 --> 00:41:53,320
मेन पॉइंट प आ रहा हूं मेन मुद्दे प कुल मिलाकर

588
00:41:53,320 --> 00:41:57,760
के आपने मुझसे गुरु की पहचान पूछी थी शास्त्र सम्मत जो है

589
00:41:57,760 --> 00:42:02,120
वो है पहला सन्यासी ब्रह्मचारी वैरागी दूसरा

590
00:42:02,120 --> 00:42:06,200
परंपरा प्राप्त तीसरा समस्त सुट स्मति शास्त्रों

591
00:42:06,200 --> 00:42:10,600
में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला और चौथा अपने

592
00:42:10,600 --> 00:42:14,600
शिष्य का संशय दूर कर देने वाला

593
00:42:14,600 --> 00:42:17,280
मतलब सं कुल मिलाकर यही है सर्वशक्तिमान

594
00:42:17,280 --> 00:42:23,280
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म

595
00:42:23,480 --> 00:42:27,960
अ संशय की बात को जो तो

596
00:42:27,960 --> 00:42:33,480
भगवत गीता 44 है उसमें भी कहा गया है त्मा

597
00:42:33,480 --> 00:42:37,720
विनती क्या कहा है जिसके मन में संचय है दुविधा

598
00:42:37,720 --> 00:42:43,560
है वो ना तो इस लोक में सुखी रह पाएगा ना परलोक की तो बात दूर

599
00:42:43,560 --> 00:42:48,920
है चलो स दर्शी संत की थोड़ी सी बात कर

600
00:42:48,920 --> 00:42:52,920
ले शिव पुराण में एक जगह ये आया है कि

601
00:42:52,920 --> 00:42:57,160
केवल तत्वदर्शी संत ही मोक्ष देगा बाकी की

602
00:42:57,160 --> 00:43:02,520
मोक्ष कहने सुनने की बातें होती है तो

603
00:43:02,520 --> 00:43:06,640
तो क्या करें सही बात है गुरु ही है जो आपका

604
00:43:06,640 --> 00:43:10,640
अंधकार मिटाएगा मैं बात तत्वदर्शी की कह रहा

605
00:43:10,640 --> 00:43:14,880
हूं तत्वदर्शी गुरु और आचार्य

606
00:43:14,880 --> 00:43:19,120
में कोई अंतर नहीं है तो यानी किने आपने

607
00:43:19,120 --> 00:43:23,520
जिस गुरु से शिक्षा ग्रहण कीी थी वो तत्वदर्शी है और

608
00:43:23,520 --> 00:43:27,600
कुछ वहां से आपसे शिक्षा ले आप उनसे शि लेने

609
00:43:27,600 --> 00:43:31,760
के कारण आप में भी वही शिक्षा होगी और जिससे मैं

610
00:43:31,760 --> 00:43:32,560
आपसे प्रश्न

611
00:43:32,560 --> 00:43:36,760
पूछूंगा तो मुझे ठीक ठीक आपसे उत्तर मिल देखिए पहली बात तो य है

612
00:43:36,760 --> 00:43:41,240
कि यह कोई क्लास नहीं है जो सिर्फ आप प्रश्न पूछेंगे

613
00:43:41,240 --> 00:43:46,040
आप पूछिए आपको आजादी है प्रश्न जब मैंने अभी पूछा

614
00:43:46,040 --> 00:43:50,680
कि अमर का मतलब क्या है तो आपने कहा बात कहीं और जा रही

615
00:43:50,680 --> 00:43:54,760
है ओनली गुरु पर बात होगी गुरु से

616
00:43:54,760 --> 00:43:58,800
संबधित तो बात है आपस कह रहे वो यह बात बता रहा

617
00:43:58,800 --> 00:44:03,120
है कुछ समय के लिए अमर गुरु से संबंधित

618
00:44:03,120 --> 00:44:07,640
ही तो बात है ये क्या है कुछ समय के लिए अर बताइए ठीक

619
00:44:07,640 --> 00:44:11,640
है मेरा जो पहला प्रश्न है आपसे आपके पास जवाब

620
00:44:11,640 --> 00:44:16,560
नहीं है इस बात का कुछ समय के लिए रहे

621
00:44:16,560 --> 00:44:20,600
बाबूराम बाबूराम

622
00:44:20,600 --> 00:44:24,680
दिखा बता रहा लिए होता

623
00:44:24,680 --> 00:44:28,680
है हमेशा के लिए कुछ समय का अमर

624
00:44:28,680 --> 00:44:33,320
का मतलब होता है अस्थाई और हमेशा के लिए अमर होता है अस्थाई

625
00:44:33,320 --> 00:44:37,360
भाई साहब अमर का मतलब क्या है अमर का

626
00:44:37,360 --> 00:44:41,480
मतलब जिसका मृत्यु ना हो जिसका मृत्यु ना हो तो कुछ

627
00:44:41,480 --> 00:44:45,560
समय के लिए जिसकी मृत्यु नहीं हो रही है वो तो मैं भी हूं आप भी हो

628
00:44:45,560 --> 00:44:50,400
तो हम लोग अमर है क्या कुछ समय के समय अमर है क्या

629
00:44:50,400 --> 00:44:54,520
हम लोग अमर वहां प कौन सी बात चल रही है पहले

630
00:44:54,520 --> 00:44:59,120
ये तो भी ये भी तो देखा जाएगा बात चल रही है देखो

631
00:44:59,120 --> 00:45:02,720
किस विषय केपर बात चल रही

632
00:45:02,720 --> 00:45:06,800
है रहा कौन से विषय पर बात चल रही है कौन सा पेज है आप मुझे बताइए

633
00:45:06,800 --> 00:45:11,440
मैं निकालता

634
00:45:11,440 --> 00:45:15,880
हूं गरिमा गीता

635
00:45:15,880 --> 00:45:19,920
बताइए गरिमा गीता पेज नंबर बात चल रही है

636
00:45:19,920 --> 00:45:24,000
उस पर बताएंगे तब पलो पढ़ लो

637
00:45:24,000 --> 00:45:28,080
बताओ कौन सा 39 है क्या

638
00:45:28,080 --> 00:45:32,640
हा 39 कौन सा बुक

639
00:45:32,640 --> 00:45:36,680
गरिमा गीता

640
00:45:36,680 --> 00:45:40,680
की अरे जहां अमर और अविनाशी जैसे शब्द आ गए

641
00:45:40,680 --> 00:45:44,680
वहा तो सीदास का अर्थ हो गया ना जिसकी मृत्यु नहीं होती है फ

642
00:45:44,680 --> 00:45:49,440
प्रसंग कोई भी चल रहा

643
00:45:49,440 --> 00:45:54,080
हो गरिमा गीता की में कौन सा उसम

644
00:45:54,080 --> 00:45:58,240
आप थोड़ा सा दिखाना कौन सी जगह लिखा हुआ है परमा गीता की पेज

645
00:45:58,240 --> 00:46:02,840
नंबर 39 हां वह कौन से

646
00:46:02,840 --> 00:46:06,840
प्रश्न है कौन से प्रश्न प्रश्न दिखा दीजिए

647
00:46:06,840 --> 00:46:11,160
अरे प्रश्न दिखा तो दिया ये देखो यहां मेरी वाली परम गति

648
00:46:11,160 --> 00:46:16,560
दिख रहा है बड़ा करो भैया मेरा जरा

649
00:46:16,560 --> 00:46:20,840
और ये मेरी उंगली ये

650
00:46:20,840 --> 00:46:25,120
वाली ये कुछ समय के लिए अमर दिख

651
00:46:25,120 --> 00:46:29,280
रहा है हम क्या है एक सेकंड

652
00:46:29,280 --> 00:46:33,440
मैं देख रहा हूं ओम नाम

653
00:46:33,440 --> 00:46:37,840
का जाप का कार्य करके विशेष आस्था

654
00:46:37,840 --> 00:46:42,760
के साथ स्मरण करते हुए इसका उत्तर बता

655
00:46:42,760 --> 00:46:47,400
देम आप पहले आपस में त कर लो कौन बोलेगा फिर बताना

656
00:46:47,400 --> 00:46:51,560
हम दोनों ही बोलेंगे नहीं नहीं एक साथ बोलोगे तो समझ

657
00:46:51,560 --> 00:46:55,760
में नहीं आएगा हा एक एक उत्तर एक ही आदमी बता जो उत्तर

658
00:46:55,760 --> 00:46:59,760
बताना है आप बता दो बताओ देख इसको

659
00:46:59,760 --> 00:47:03,760
एक बार पढ़ देता हूं बाबूजी बाबू जी मैं आपको बताऊ

660
00:47:03,760 --> 00:47:04,440
इसमें ये आया

661
00:47:04,440 --> 00:47:08,480
है कि ओम नाम का जाप करते हुए जो ओम तक की

662
00:47:08,480 --> 00:47:13,160
जो साधना करेगा वो कुछ समय के लिए अ हो जाए य बताइए थोड़ा

663
00:47:13,160 --> 00:47:17,400
मेरे पास उत्तर है उत्तर है मेरे पास प इसको पढ़ जनता भी देखेगी

664
00:47:17,400 --> 00:47:21,560
पढ़ इसको जैसे य पर ण

665
00:47:21,560 --> 00:47:26,280
परमात्मा की पूरी जानकारी धीरा नाम अर्थात तत्वदर्शी संतो से सुनो

666
00:47:26,280 --> 00:47:30,320
मैं ज्ञान देने वाला ब्रम भी नहीं जानता

667
00:47:30,320 --> 00:47:34,520
फिर भी अपनी भक्ति विधि को बताते हुए अध्याय 40 शलोक

668
00:47:34,520 --> 00:47:38,640
नंबर 15 में कहा है कि मेरी साधना ओम नाम का जाप कार

669
00:47:38,640 --> 00:47:42,960
करते करते विशेष आस्था के साथ सुमर कर तथा मनुष्य जीवन

670
00:47:42,960 --> 00:47:47,120
का मुख्य कर्तव्य जानकर सुमर कर इसे मृत्यु उपरांत अर्थात

671
00:47:47,120 --> 00:47:53,120
शरी

672
00:47:59,840 --> 00:48:04,120
बाहु दस जी आपकी आवाज नहीं आ रही

673
00:48:04,120 --> 00:48:08,320
हैय क रहे है इस बताया है कि मुझ ब्रह्म लोक

674
00:48:08,320 --> 00:48:12,360
को प्राप्त हो जाता है तो गीता अध्याय आ लोक नंबर 16

675
00:48:12,360 --> 00:48:18,280
बताया है कि ब्रह्मलोक में गया हुआ प्राणी पुनर्जन्म में वापस आता

676
00:48:18,280 --> 00:48:22,480
है पुनर्जन्म से वापस आना ठीक है कुछ समय

677
00:48:22,480 --> 00:48:27,040
के लिए अमर का मतलब क्या है वो समझाइए

678
00:48:27,040 --> 00:48:31,240
य कुछ समय के लिए स्वर्ग चला जाएगा ब्र महा स्वर्ग चला जाएगा

679
00:48:31,240 --> 00:48:35,880
इसके बाद अमर का मतलब क्या है मेरे भाई बाबू

680
00:48:35,880 --> 00:48:40,280
बता रहे बता रहे जैसे की यहां पर हमने ओ मंत्र की जाप किया

681
00:48:40,280 --> 00:48:45,040
तो ओ मत्र जाता पूछ रहा अमर का मतलब क्या है बाबू

682
00:48:45,040 --> 00:48:49,120
अमर मरता नहीं है

683
00:48:49,120 --> 00:48:53,280
कुछ समय के लिए अमर कह रहा है कुछ समय के लिए कुछ समय के लिए अमर को जरा

684
00:48:53,280 --> 00:48:58,440
प्रैक्टिकली मुझे बताओ कुछ समय के लिए अमर का मतलब क्या है

685
00:48:58,440 --> 00:49:03,400
जरा

686
00:49:03,400 --> 00:49:07,560
सम अमर कुछ समय के लिए अमर मतलब कुछ समय के लिए मरेगा

687
00:49:07,560 --> 00:49:11,640
नहीं मैं प्रैक्टिकली आपको बताऊ

688
00:49:11,640 --> 00:49:15,720
अर है मैं आपको प्रैक्टिकली बता नहीं मने वाले अभी दो

689
00:49:15,720 --> 00:49:20,200
मिनट तो जिंदा शवा आपको प्रैक्टिकली बता

690
00:49:20,200 --> 00:49:24,760
हम लोग की आई हैम है कुछ समय के लिए इसके बाद

691
00:49:24,760 --> 00:49:28,880
तो कुछ समय के लिए भाई मेरे देखो कुछ समय

692
00:49:28,880 --> 00:49:32,880
जो अमर है वो कुछ समय के लिए नहीं हो सकता और

693
00:49:32,880 --> 00:49:37,000
जो कुछ समय के लिए वो अमर नहीं हो सकता ये दोनों चीज साथ में आने

694
00:49:37,000 --> 00:49:41,120
वाली नहीं जैसे जो शाश्वत है वो बदल नहीं सकता और जो बदल

695
00:49:41,120 --> 00:49:45,120
सकता है वो शाश्वत नहीं है सिंपल भाई इसम ये बता

696
00:49:45,120 --> 00:49:49,560
दिया कि ओ मंत्र का जाप करेगा ब्रह्मलोक वो आप

697
00:49:49,560 --> 00:49:53,560
रखिए बा सुनो वो आप उनका

698
00:49:53,560 --> 00:49:57,800
जो भाव ले रहे हो वो भा बात अभी

699
00:49:57,800 --> 00:50:02,320
मैं आपको ये पूछ रहा हूं य कुछ समय के लिए अमर क्या बताया आपके गुरुजी ने

700
00:50:02,320 --> 00:50:06,480
ये कुछ समय के लिए अमर क्या है मैं बता या तो देखिए अगर वो

701
00:50:06,480 --> 00:50:10,480
कुछ समय के लिए जिंदा कुछ समय के लिए अर आप ये कह रहे हो कि वो कुछ समय

702
00:50:10,480 --> 00:50:14,600
के लिए ऐसी स्थिति में है कि वो मरेगा नहीं यानी एक घंटे

703
00:50:14,600 --> 00:50:18,920
जी लेगा दो घंटे जी लेगा 100 साल जी लेगा 100 लाख साल जी लेगा

704
00:50:18,920 --> 00:50:23,160
मरेगा नहीं तो फिर उस तो फिर कुछ समय के लिए जो मरेगा नहीं

705
00:50:23,160 --> 00:50:27,200
तो हम और आप भी अमर हो गए उस हिसाब से अरे

706
00:50:27,200 --> 00:50:33,200
मेरा उत्तर सुन

707
00:50:34,080 --> 00:50:38,400
लोगे जा अमित जी बोलेंगे बोलिए अम

708
00:50:38,400 --> 00:50:42,680
जैसे मार्केट में मार्केट में हम मोबाइल खरीदने जाते हैं

709
00:50:42,680 --> 00:50:46,800
जी तो वहां पर एक गारंटी कार्ड मिलता है व वहा गारंटी लिख

710
00:50:46,800 --> 00:50:51,000
के देते हैं कि आपका यह मोबाइल एक साल तक

711
00:50:51,000 --> 00:50:55,240
खराब नहीं होगा ठीक है जी वहा गारंटी दी एक साल तक खराब

712
00:50:55,240 --> 00:50:59,240
नहीं होगा यानी कि एक साल इसम कोई खराबी नहीं आएगी तो

713
00:50:59,240 --> 00:51:03,280
हम हम उसको यह समझे कि अब इसकी जिंदगी भर खराबी

714
00:51:03,280 --> 00:51:07,320
नहीं आएगी तो वहा वो कह रहा है ना वहा वहा वो उसको

715
00:51:07,320 --> 00:51:11,400
नष्ट होने वो कह रहा है य एक साल तक खराब नहीं होगा होगा तो हम

716
00:51:11,400 --> 00:51:16,840
गारंटी ले रहे हैं

717
00:51:16,840 --> 00:51:21,160
कहा उसका जवाब ठीक उसी प्रकार कह रहे हैं

718
00:51:21,160 --> 00:51:25,200
कि एक साल तक तुम अमर हो उसके बाद में आपकी मृत्यु

719
00:51:25,200 --> 00:51:29,400
हो जाएगी आप धरती लो जाओगे भाई साहब मैंने आपसे क्या कहा

720
00:51:29,400 --> 00:51:33,880
कि वो ये नहीं कहता है कि यह नाशवान नहीं है मोबाइल

721
00:51:33,880 --> 00:51:38,160
वो कहता है क्या वारंटी वाला वो कहता है क्या ये मोबाइल

722
00:51:38,160 --> 00:51:42,200
नाशवान नहीं है मोबाइल नाशवान नहीं है वहां पर

723
00:51:42,200 --> 00:51:46,480
बोला गया है ना कि वारंटी में वारंटी तो आप वारंटी लिखो

724
00:51:46,480 --> 00:51:50,560
ना आप कह रहे हो कुछ समय के लिए अमर ये क्या बात हुई

725
00:51:50,560 --> 00:51:54,880
भाई वारंटी अगर कुछ अगर कुछ समय

726
00:51:54,880 --> 00:51:58,960
तक एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट अगर कुछ

727
00:51:58,960 --> 00:52:03,080
समय तक नष्ट ना होने वाली चीज को भी अविनाशी

728
00:52:03,080 --> 00:52:07,360
कहा जा सकता है अमर कहा जा सकता है तो इस समय मैं अमर

729
00:52:07,360 --> 00:52:11,400
हूं बाबू अमर है और ये ये बाड़ी जी अमर है और

730
00:52:11,400 --> 00:52:14,880
अमित दास भी अमर

731
00:52:14,880 --> 00:52:19,000
है अगर कुछ समय तक नष्ट ना होने वाली चीज को

732
00:52:19,000 --> 00:52:23,640
भी अमर कहा जा सकता है तो इस समय हम चारों अर है

733
00:52:23,640 --> 00:52:27,720
जी हम लोग कुछ समय के लिए है कुछ समय के लिए यानी अभी हम लोग

734
00:52:27,720 --> 00:52:31,800
अमर है यानी हम चारों अमर है जी कुछ समय के लिए

735
00:52:31,800 --> 00:52:35,880
अमर है हर वो व्यक्ति जो मर नहीं रहा

736
00:52:35,880 --> 00:52:40,560
है वो अर है भाई इस समय जो भी जो भी दुनिया में इस समय सांस ले रहे हैं

737
00:52:40,560 --> 00:52:45,080
जितने भी प्राणी है दुनिया में वो सब इस समय हमारे भाई ये

738
00:52:45,080 --> 00:52:49,120
हैन वहा कुछ समय लगाइए वहा लिखा कुछ समय कुछ समय लगा

739
00:52:49,120 --> 00:52:53,840
लीजिए कुछ अरे भाई कुछ समय अभी

740
00:52:53,840 --> 00:52:58,440
मेरे को पता है कुछ समय के लिए मगर अमर तो हूं ना जी जी

741
00:52:58,440 --> 00:53:02,800
अच्छा अब दुनिया में जितने भी प्राणी इस समय सांस

742
00:53:02,800 --> 00:53:08,240
ले रहे हैं वो सब अमर है इस समय

743
00:53:08,240 --> 00:53:12,480
जी ठीक अब ये बताइए कि जो

744
00:53:12,480 --> 00:53:17,080
कभी नहीं मरेगा उसको क्या कहेंगे वो अविनाशी

745
00:53:17,080 --> 00:53:21,080
है अरे आप कुछ समय के लिए अविनाशी

746
00:53:21,080 --> 00:53:25,160
तो इसको भी मान रहे हो ना जो कभी नहीं मरेगा

747
00:53:25,160 --> 00:53:29,480
उसको अविनाशी माना जाएगा जो मरता है वो कुछ समय के लिए मर है

748
00:53:29,480 --> 00:53:30,200
अरे भाई

749
00:53:30,200 --> 00:53:34,280
एक शब्द है क्या कभी ना मरने वाले के लिए लगता है इस प्रकार

750
00:53:34,280 --> 00:53:38,400
आप एक ही प्रश्न में उलझे रह जाएंगे आगे डिबेट बढ़ेगी नहीं तो

751
00:53:38,400 --> 00:53:42,440
फिर आप कह दो इसका जवाब नहीं है हम लोग आगे चलते हैं जवाब

752
00:53:42,440 --> 00:53:48,440
है बोल तो दिया आपको कितनी बार बोले आपको बोल तो दिया कुछ समय के लिए

753
00:53:50,480 --> 00:53:54,480
मतलब है साल तक की आप यहां पर गलत

754
00:53:54,480 --> 00:53:58,680
बोल रहे हो जो अमर है जो मर नहीं सकता वो कुछ

755
00:53:58,680 --> 00:54:02,800
समय के लिए मर नहीं सकता कोई डेफिनेशन सूट नहीं कर रही और जो

756
00:54:02,800 --> 00:54:06,800
मर सकता है उसको अमर नहीं कह सकते वो जो वारंटी

757
00:54:06,800 --> 00:54:10,880
देता है वो वारंटी देता है वो जो वारंटी देता है वो ये नहीं कहता है

758
00:54:10,880 --> 00:54:15,520
य फोन अविनाशी है एक साल के लिए

759
00:54:15,520 --> 00:54:19,560
कहता है अगर ये खराब हो गया तो मैं इसको सही करूंगा या

760
00:54:19,560 --> 00:54:24,120
बदल के दूंगा एक मिनट एक मिनट शिवांश जी जिस प्रकार

761
00:54:24,120 --> 00:54:28,160
वहां टाइम फिक्स हो रहा है एक टाइम फिक्स हो रहा है

762
00:54:28,160 --> 00:54:32,600
कि भाई हम एक साल तक के लिए आपको यह हमारी जिम्मेदारी

763
00:54:32,600 --> 00:54:36,600
है कि एक साल तक आपको इसके बीच में कुछ

764
00:54:36,600 --> 00:54:40,960
नहीं होने देंगे यह हमारी जिम्मेदारी है उसके बाद में हमारी जिम्मेदारी

765
00:54:40,960 --> 00:54:46,440
खत्म हो जाती ठीक उसी प्रकार भगवान ये कह रहे हैं कि ओम से मिलने वाली

766
00:54:46,440 --> 00:54:50,520
गति आपको आपने जितनी भक्ति अर्जित की है उतनी

767
00:54:50,520 --> 00:54:54,680
भक्ति के अनुसार आपको ब्रह्मलोक में रखा जाएगा और ब्रह्म लोक पर्यंत

768
00:54:54,680 --> 00:54:58,800
पुनरावृति में आ जाएंगे मैं आपको यह कह रहा हूं कि

769
00:54:58,800 --> 00:55:02,960
जो कुछ समय के लिए अमर होते हैं इनके लिए कोई

770
00:55:02,960 --> 00:55:07,040
एक शब्द है क्या एक

771
00:55:07,040 --> 00:55:11,120
शब्द जैसे कि जो परम पिता परमेश्वर है उसके लिए एक

772
00:55:11,120 --> 00:55:15,840
शब्द है परमात्मा ठीक है ऐसे ही

773
00:55:15,840 --> 00:55:20,400
यह जो आप कह रहे हो ना परिभाषा के साथ समझ रहे हो मेरी बात

774
00:55:20,400 --> 00:55:24,440
समास पढ़ा है आपने समास बहु समास वगैरह पढ़ा है

775
00:55:24,440 --> 00:55:28,760
आपने लंबा है जिसका लंबोदर

776
00:55:28,760 --> 00:55:33,000
ठीक है तो यह हमने पढ़ी परिभाषा और उसका आंसर

777
00:55:33,000 --> 00:55:37,160
क्या आया लंबोदर पीला है पत्र जिसका

778
00:55:37,160 --> 00:55:41,320
पीतांबर तो ये हमने पढी

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00:55:41,320 --> 00:55:45,560
परिभाषा एक मिनट अब आपने कहा कि जो

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00:55:45,560 --> 00:55:50,160
कुछ समय के लिए जिंदा है वो कुछ समय के लिए अमर है

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00:55:50,160 --> 00:55:54,240
य बाबू भैया ने कहा ठीक है अब मैं जब

782
00:55:54,240 --> 00:55:58,640
ये पूछ रहा हूं कि जो कभी नहीं मरता फिर उसको क्या कहा जाएगा

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00:55:58,640 --> 00:56:01,640
जो कभी नाश नहीं होता उसको क्या कहा जाएगा जब

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00:56:01,640 --> 00:56:05,640
इसको भी आपने अमर मान लिया अभी के टाइम हम चारों को

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00:56:05,640 --> 00:56:10,040
दुनिया को आपने अमर मान लिया जो सांस ले रहा है वो अमर है तो जो

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00:56:10,040 --> 00:56:14,080
कभी नहीं मरता कभी भी नहीं मरेगा अविनाशी है उसके लिए एक शब्द

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00:56:14,080 --> 00:56:18,400
क्या है परिभाषा नहीं अब एक शब्द बताइए तो बोल तो दिया

788
00:56:18,400 --> 00:56:22,440
अविनाशी अशी अविनाशी तो आपने इसको भी बोला ना

789
00:56:22,440 --> 00:56:25,240
किसको

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00:56:25,240 --> 00:56:29,360
नहीं उसको अविनाशी नहीं होला उसका उसका मोक्ष

791
00:56:29,360 --> 00:56:34,280
नहीं हुआ उसका फिक्स टाइम है वो सीमित है भाई साब

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00:56:34,280 --> 00:56:38,280
सीमा में है क्या सीमा में ब जैसे आप

793
00:56:38,280 --> 00:56:42,480
इंगलिश में पढ़ेंगे मैं आपको उदाहरण कितना बढ़िया दे रहा हूं जैसे कि आप

794
00:56:42,480 --> 00:56:46,520
हम हम गाड़ी लेने जाए या कुछ भी चीज लेने जाए तो वहां

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00:56:46,520 --> 00:56:50,760
का मालिक एक सीमा के अनुसार वो कहता है कि एक साल तक

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00:56:50,760 --> 00:56:55,120
हमारी जिम्मेदारी है इसको ना ना बुखार आने देंगे ना खासी

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00:56:55,120 --> 00:56:59,640
आने देंगे कुछ भी हो तो हमारे पास ले आना हम ठीक करके देंगे

798
00:56:59,640 --> 00:57:04,240
तो व एक साल की एक सीमा बन गई उसकी उसके बाद में ब्रह्मलोक पर्यंत पुनरावृति

799
00:57:04,240 --> 00:57:08,400
में भाई साहब जो ठीक है आपने

800
00:57:08,400 --> 00:57:12,400
बात बताई हमारे पास ले आना बज पहली बात तो ये कि

801
00:57:12,400 --> 00:57:16,640
वो लोग अपनी जो चीज देते हैं जिसकी वो वारंटी दे रहे हैं वो व

802
00:57:16,640 --> 00:57:21,200
वारंटी देते समय यह नहीं कहते यह फोन जो है कभी खराब नहीं होगा

803
00:57:21,200 --> 00:57:25,280
बीमार होने में और मरने में अंतर है

804
00:57:25,280 --> 00:57:29,400
वो ये नहीं कह व बीमार होगा ही नहीं आप यह कह रहे हो वो मरेगा

805
00:57:29,400 --> 00:57:33,480
ही नहीं दूसरी बात अमर का अर्थ

806
00:57:33,480 --> 00:57:37,680
में ऐसा कोई डिक्शनरी ऐसी कोई शास्त्रोक्त

807
00:57:37,680 --> 00:57:41,840
बात हमें आप दिखा दीजिए कि कुछ समय तक की गारंटी जिसकी ली

808
00:57:41,840 --> 00:57:46,560
जाए उसको हम लोग अमर कह सकते हैं है कोई

809
00:57:46,560 --> 00:57:50,560
प्रमाण जिस प्रकार जैसे की स्वर्ग जाने के

810
00:57:50,560 --> 00:57:54,840
बाद में किसी का मोक्ष होता है स्वर्ग

811
00:57:54,840 --> 00:57:58,880
जाने के बाद में किसी का म होता है नहीं होता

812
00:57:58,880 --> 00:58:03,760
वापस आते हैं तो वो लिमिट में है ना हा लिमिट में

813
00:58:03,760 --> 00:58:07,760
ट में तो ऐसे देवताओं की

814
00:58:07,760 --> 00:58:11,800
जो जन्म मृत्यु होती है तो फिर उन्हें अमर क्यों कहा जाता

815
00:58:11,800 --> 00:58:16,560
है क्योंकि जो संसार के सभी तत्व वो तो अविनाशी है

816
00:58:16,560 --> 00:58:20,680
जीव और ब्रह्म सब अविनाशी है मैं ये पूछ रहा हूं

817
00:58:20,680 --> 00:58:24,960
जैसे कि एक चरण के अनुसार

818
00:58:24,960 --> 00:58:29,120
देवताओं को कहा जाता व अमर हो चुके लेकिन वो जन्म

819
00:58:29,120 --> 00:58:31,720
मृत्यु में आते हैं वो स्वर्ग में रह रहे हैं और

820
00:58:31,720 --> 00:58:36,440
जन्म मृत्यु में आते हैं वापस उ धरती लोक पर आना पता व

821
00:58:36,440 --> 00:58:41,320
ला व तो लीला है मतलब आप

822
00:58:41,320 --> 00:58:46,000
और हम करे तो गलती अरे भाई मैंने क मैं तो आपके

823
00:58:46,000 --> 00:58:51,120
अमर शब्द जो आपने तत्वदर्शी ने लिखा है

824
00:58:51,120 --> 00:58:55,200
ना नहीं बता रहे दूसरी को ला रहे उसे कोई मतलब ही नहीं है जो आप बता

825
00:58:55,200 --> 00:58:59,000
रहे

826
00:58:59,000 --> 00:59:03,120
आपको मिल चुका है आप विषय को देखो देखो आपको लग

827
00:59:03,120 --> 00:59:07,320
रहा है ऐसा आपको ऐसा लग रहा है मैंने आपको पूछा है कि

828
00:59:07,320 --> 00:59:11,360
यदि कभी ना मरने वाले को

829
00:59:11,360 --> 00:59:15,360
आपने कहा एक साल तक की जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा

830
00:59:15,360 --> 00:59:19,400
सकता है ठीक है आप कहां चले गए अमित दास

831
00:59:19,400 --> 00:59:24,640
जी बाबूराम जी तब तक आप बात करें

832
00:59:24,640 --> 00:59:28,640
आपने आपने जिसकी एक वर्ष की गारंटी ले ली उसको

833
00:59:28,640 --> 00:59:33,120
भी अमर कहा जा सकता है कुछ समय के

834
00:59:33,120 --> 00:59:37,120
लिए उसमें टाइम फिक्स कर दिया है कितने समय के लिए तो

835
00:59:37,120 --> 00:59:41,160
यह जो कुछ समय के लिए जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर

836
00:59:41,160 --> 00:59:45,280
कहा जा सकता है यह कहीं पर प्रमाण है

837
00:59:45,280 --> 00:59:46,880
उसमें यह प्रमाण है

838
00:59:46,880 --> 00:59:51,080
कुछ समय के लिए य अमर है इसके बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी नहीं नहीं नहीं कुछ

839
00:59:51,080 --> 00:59:55,480
समय के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता जिसकी गारंटी ले ली जाए

840
00:59:55,480 --> 01:00:01,480
उसको अमर कहा जा सकता है कोई डिक्शनरी है शब्दकोश

841
01:00:01,800 --> 01:00:05,920
है इसका जैसे कि आयु होती है किसी किसी व्यक्ति का या

842
01:00:05,920 --> 01:00:10,000
किसी का भी उसका आयु देखिए बाबू भाई इसीलिए

843
01:00:10,000 --> 01:00:14,200
बस बुरा लगता है मैंने आपसे पूछा कोई प्रमाण है कि

844
01:00:14,200 --> 01:00:18,520
जो कुछ समय तक जिसको मारा ना जा सके आप कह रहे हो गारंटी ले ली

845
01:00:18,520 --> 01:00:22,840
मैंने आपसे पूछा है कि इसम कोई शास्त्रोक्त प्रमाण है आपके

846
01:00:22,840 --> 01:00:26,280
पास

847
01:00:26,280 --> 01:00:30,520
इसका उत्तर दीजिए इसका उत्तर यही

848
01:00:30,520 --> 01:00:34,600
है कि य कुछ समय के लिए देख देखा मैं पूछ रहा

849
01:00:34,600 --> 01:00:38,280
हूं शास्त्रो प्रमाण

850
01:00:38,280 --> 01:00:42,720
है शास्त्रों का प्रमाण अविनाशी के लिए दे

851
01:00:42,720 --> 01:00:46,840
अमा है मैंने आपसे यह पूछा है कि जिसको कुछ

852
01:00:46,840 --> 01:00:51,080
समय तक की गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध

853
01:00:51,080 --> 01:00:56,600
में शास्त्रों का प्रमाण है

854
01:00:56,600 --> 01:01:01,120
इसका प्रमाण बता रहे हैं

855
01:01:01,120 --> 01:01:05,240
बताओ क्या प्रश्न था क्या प्रश्न था कुछ समय

856
01:01:05,240 --> 01:01:09,400
के लिए जिसकी गारंटी ले ली जाए उसको भी अमर कहा जा सकता है

857
01:01:09,400 --> 01:01:13,480
इस संबंध में आपके पास कोई प्रमाण है जी

858
01:01:13,480 --> 01:01:17,800
इसका प्रमाण है इसका प्रमाण य है इसका प्रमाण

859
01:01:17,800 --> 01:01:22,440
है कि जो उसकी उन्होने कमाई करेगा स्वर्ग में जाएगा स्वर्ग में भोगे

860
01:01:22,440 --> 01:01:26,720
जैसे ही उस उसको हम अमर नहीं कहते हमारे

861
01:01:26,720 --> 01:01:30,920
जो तत्वदर्शी है हमारे जो संत हमारे जो आचार्य उसको अमर नहीं

862
01:01:30,920 --> 01:01:35,080
कहते जी तो फिर देवताओं को अमर क्यों कहा

863
01:01:35,080 --> 01:01:39,320
जा रहा है क्योंकि व अमर है व अमर

864
01:01:39,320 --> 01:01:42,440
नहीं है जन्म मृत्यु में आते हैं

865
01:01:42,440 --> 01:01:47,400
व जन्म मृत्यु में लीला पूर्वक आते हैं

866
01:01:47,400 --> 01:01:51,720
देख आप जो कहे ला बता तो रहा

867
01:01:51,720 --> 01:01:55,880
आप लीला सुनलो जो तुम्हारे र् है

868
01:01:55,880 --> 01:02:01,520
परमात्मा के पूर्ण अवतार है कि नहीं है

869
01:02:01,520 --> 01:02:05,880
देखिए एक ही परमात्मा है जो अविनाश है इसके अलावा चाहे

870
01:02:05,880 --> 01:02:09,880
कोई देवता हो चाहे कोई अन्य हो सब जन्म मृत्यु में आप इसको नहीं

871
01:02:09,880 --> 01:02:14,200
कह सकते कि अमर है इसका आपके पास परमात्मा

872
01:02:14,200 --> 01:02:18,520
के कोई भी अविनाशी नहीं है कोई नहीं है

873
01:02:18,520 --> 01:02:24,520
कोई अविनाशी नहीं है पक्का पक्का कोई अविनाशी नहीं है

874
01:02:24,840 --> 01:02:28,840
तो आत्मा अविनाशी नहीं है आत्मा

875
01:02:28,840 --> 01:02:33,400
परमात्मा का अंश है आत्मा तो परमात्मा का अंश है ना

876
01:02:33,400 --> 01:02:37,400
लेकिन तो आत्मा तो जन्म मृत्यु में आ रही है यहां पर तो वही तो मैं

877
01:02:37,400 --> 01:02:41,560
कह रहा हूं इसी उसी तरीके से आत्मा जन्म मृत्यु में आने वाली होते

878
01:02:41,560 --> 01:02:45,600
हुए भी अविनाशी है उसी तरीके से देवता भी जन्म मृत्यु में आने वाले होते हुए

879
01:02:45,600 --> 01:02:50,200
भी अविनाशी है जितने भी शरीर धारण करेंगे

880
01:02:50,200 --> 01:02:54,400
वो सब की जन्म मृत्यु होगी भाई अ

881
01:02:54,400 --> 01:02:58,480
एक परमात्मा है आप अगर प्रमाण है तो दिखा दो नहीं

882
01:02:58,480 --> 01:03:02,600
है तो हम लोग आगे चलते हैं प्रमाण है

883
01:03:02,600 --> 01:03:06,680
कि कुछ समय के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता उसको भी अमर

884
01:03:06,680 --> 01:03:12,120
कहा जा सकता है इस संबंध में कोई प्रमाण है

885
01:03:12,120 --> 01:03:16,560
इस संबंध में प्रमाण का वही प्रमाण है जो बता दिया व अनिश्चित

886
01:03:16,560 --> 01:03:21,000
है उसका निश्चित नहीं मृत्यु होना ही होना है उसका

887
01:03:21,000 --> 01:03:25,200
जितने पूछ प्रमाण है कि जिसको थोड़ी देर के लिए मारा

888
01:03:25,200 --> 01:03:29,240
नहीं जा सकता कुछ नहीं किया जा सकता थोड़ी देर के लिए उसको

889
01:03:29,240 --> 01:03:35,240
भी अमर कह सकते हैं प्रमाण

890
01:03:36,800 --> 01:03:40,840
हैब फसते हो अच्छा दोबारा एक बार बोल दो मैं बोल रहा

891
01:03:40,840 --> 01:03:46,840
था सुनाई नहीं दिया एक बार दोबारा बोल प्रमाण

892
01:03:47,280 --> 01:03:51,440
है किस चीज का प्रमाण मैंने

893
01:03:51,440 --> 01:03:55,440
बोला जिसको थोड़ी देर के लिए हम जिसकी गारंटी ले ले कि उसको

894
01:03:55,440 --> 01:03:59,520
कोई मार नहीं सकता क्या उसको अमर कहा जा सकता है इस संबंध में

895
01:03:59,520 --> 01:04:03,560
कोई प्रमाण है शास्त्र का डिक्शनरी का पाणिनी सूत्र

896
01:04:03,560 --> 01:04:08,120
का अध्याय का या आपका शिवराम आपटे का वो जो उसम है

897
01:04:08,120 --> 01:04:14,120
कुछ समय के लिए जिसको मारा ना जा सके उसको भी अमर कहा जा सकता

898
01:04:16,240 --> 01:04:22,240
है प्रमाण रुक जा दिखा रहे आपको बताइए

899
01:04:42,160 --> 01:04:46,240
एक गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर 16 में बताया है कि

900
01:04:46,240 --> 01:04:50,480
जो अक्षर पुरुष है जो अविनाशी है इन दोनों

901
01:04:50,480 --> 01:04:54,520
से जो श्रेष्ठ परमात्मा है वो तो अन ही है तो

902
01:04:54,520 --> 01:04:58,720
यहां पर क्या है कि अविनाशी होते हुए देखिए इसको अश्र

903
01:04:58,720 --> 01:05:04,520
माना गया है जो उत्तम पुरुष है जो अनही है

904
01:05:04,520 --> 01:05:08,800
जब क्या बता रहे मैंने पूछा ये देखो बाबू तुम बात को

905
01:05:08,800 --> 01:05:12,920
बदल रहे हो देखो ऐसे मत करो बीच में काटना पड़ेगा कितने अच्छे से बात

906
01:05:12,920 --> 01:05:17,080
हो रही है और बात आगे बहुत देर तक चलेगी यह गलत बात

907
01:05:17,080 --> 01:05:21,200
मत करो मैंने पूछा है कि जिसको कुछ समय

908
01:05:21,200 --> 01:05:25,320
के लिए मारा नहीं जा सकता उसको भी अमर कह सकते हैं इस संबंध में

909
01:05:25,320 --> 01:05:29,320
कोई प्रमाण है उसी को तो बता रहे

910
01:05:29,320 --> 01:05:31,360
हैं कि एक ऐसी भी है जो अविनाशी

911
01:05:31,360 --> 01:05:35,480
होते हुए भी आपने जो बताया वो मैं बता दूं आप क्या बता रहे हो कि

912
01:05:35,480 --> 01:05:39,920
जो अविनाशी जो मारा जा सकता है उसको भी जो अश्र

913
01:05:39,920 --> 01:05:44,040
है वो भी अविनाशी है आप ये बता रहे हो मैं पूछ कुछ रहा

914
01:05:44,040 --> 01:05:48,080
हूं आप जबरदस्ती मिला रहे हो उसमें जो अश्र है वो अश्र वाली बात

915
01:05:48,080 --> 01:05:52,280
आएगी अनुत्तम वाली बात खुल जाएगी फिर मैं सिटे की डिक्शनरी निकालू विषय बदल

916
01:05:52,280 --> 01:05:56,320
जाएगा मैं नहीं चाहता हूं विषय बदले हमारी चर्चा एक फ्लो में आ ग बढ़े

917
01:05:56,320 --> 01:06:00,520
जिससे की हम बहुत सारे जो तथ है उनको निकाल सके तो

918
01:06:00,520 --> 01:06:04,960
आप मुझे य बता दीजिए आप ये ऐसे बोल सकते हैं आपकी जानकारी

919
01:06:04,960 --> 01:06:09,080
में वह प्रमाण नहीं है आगे कभी आप लाएंगे ऐसे भी बोल सकते हैं अभी

920
01:06:09,080 --> 01:06:13,120
नहीं है कोई बात नहीं आ इसके बारे में विचार करेंगे इसका उत्तर

921
01:06:13,120 --> 01:06:17,360
क्या होता है आपके पास अभी उत्तर नहीं है जी हमारे

922
01:06:17,360 --> 01:06:21,840
पास उत्तर अभी तल उत्तर बता दिया हमारे पास य उत्तर

923
01:06:21,840 --> 01:06:25,840
गलत बात नहीं मैंने आपसे पूछा है कि जिसको थोड़ी देर के

924
01:06:25,840 --> 01:06:30,600
लिए मारा ना जा सके उसको भी हम लोग अमर कह सकते हैं

925
01:06:30,600 --> 01:06:36,600
क्या इस संबंध में कोई आपके पास प्रमाण है अब दीजिए

926
01:06:36,600 --> 01:06:40,680
उत्तर मैं आपसे बता तो रहा हूं जिस प्रकार देवताओं को

927
01:06:40,680 --> 01:06:44,440
अमर कह रहे हैं वो

928
01:06:44,440 --> 01:06:46,360
अमर मैं बताऊ आपको

929
01:06:46,360 --> 01:06:50,400
आपकी और मेरी जो ग्रंथों की व्याख्या है उसी को लेकर

930
01:06:50,400 --> 01:06:54,440
के तो आज हम चर्चा कर रहे हैं समझ रहे हो आपकी व्याख्या

931
01:06:54,440 --> 01:06:58,680
ग्रंथों की अलग है मेरी व्याख्या ग्रंथों की अलग है इसलिए हमारा आपस में टकराव

932
01:06:58,680 --> 01:07:02,920
है वैचारिक हाथ पैर से नहीं वैचारिक टकराव

933
01:07:02,920 --> 01:07:07,240
है ना अब हम लोग जब कोई भी बात सिद्धांत मानेंगे

934
01:07:07,240 --> 01:07:11,280
तो हम लोग चेक करेंगे कि भाई ये जो बोल रहे

935
01:07:11,280 --> 01:07:15,360
हैं इसका कोई प्रमाण है कि नहीं जब ऐसी कोई बात जो बिल्कुल ही

936
01:07:15,360 --> 01:07:19,640
उल्टी जा रही है तो थोड़ी देर के लिए

937
01:07:19,640 --> 01:07:23,800
एक मिनट थोड़ी देर के लिए जिसको मारा नहीं जा सकता कोई गारंटी ले

938
01:07:23,800 --> 01:07:28,000
ले जिसको थोड़ी देर के लिए मारा नहीं जा सता उसको भी अमर कहते कह सकते

939
01:07:28,000 --> 01:07:32,200
हैं तो क्या इस बारे में आपके पास कोई शास्त्रोक्त

940
01:07:32,200 --> 01:07:35,640
प्रमाण

941
01:07:35,640 --> 01:07:41,640
है अभी

942
01:07:41,880 --> 01:07:45,920
आपका अभी आपने बोला था देवता अमर

943
01:07:45,920 --> 01:07:49,840
है इसका प्रमाण कहा

944
01:07:49,840 --> 01:07:54,080
है मैं आपको दिखा देता हूं जो अजन्मा विनाशी शता सप निषद

945
01:07:54,080 --> 01:07:58,160
में जो वो है कल्प के प्रारंभ में एक से बहु

946
01:07:58,160 --> 01:08:03,400
श्यामी होता वही देवता बनता है वही सब कुछ बनता है तो

947
01:08:03,400 --> 01:08:07,520
देव अगर वह सब कुछ बनता है तो जन्म मृत में तो आ गया उसको

948
01:08:07,520 --> 01:08:12,120
तो अपना शरीर त्याग रहा है अविनाशी मेरे भाई सुनिए

949
01:08:12,120 --> 01:08:16,240
दो तत्व एक ही है जो जन्म मृत्यु में आकर

950
01:08:16,240 --> 01:08:20,560
जीव भाव को प्राप्त हो गया जिसको मरने से भय होने लगा ठीक है

951
01:08:20,560 --> 01:08:24,600
वोय जीव भाव में आ गया और जिसको यह मालूम है ये

952
01:08:24,600 --> 01:08:28,640
जन्म मृत्यु के दिखावा है वस्तुत मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता वो

953
01:08:28,640 --> 01:08:32,760
मुक्त भाव में आ गया तो भगवान ने कहा ना तेरे और मेरे बहुत से जन्म

954
01:08:32,760 --> 01:08:37,120
हो चुके हैं कहा ना जी मगर तू नहीं जानता

955
01:08:37,120 --> 01:08:41,320
इसलिए तू बध है तू नहीं जानता इसलिए तू मुक्त नहीं है तू इस चीज को जानता

956
01:08:41,320 --> 01:08:45,400
नहीं है कि तू जन्म मृत्यु वाला होते हुए भी अमर है और

957
01:08:45,400 --> 01:08:50,000
भगवान कौन है जो य जान भगवान कौन है जो यह जानता है

958
01:08:50,000 --> 01:08:51,040
कि जन्म मृत्यु

959
01:08:51,040 --> 01:08:55,800
वाली लीला होते हुए भी वो अमर है जो यह जानता है

960
01:08:55,800 --> 01:09:00,080
जी जी भगवान ने वहां पर यह भी बताया है कि अर्जुन अना बाब देखो

961
01:09:00,080 --> 01:09:04,400
हमारी जो चर्चा है वो बदल रही है मैं फिर से पॉइंट पर आ जाता हूं

962
01:09:04,400 --> 01:09:08,760
आपसे मैंने एक सवाल पूछा है आपसे मैंने एक सवाल पूछा है सुनिए

963
01:09:08,760 --> 01:09:13,080
आपसे मैंने एक सवाल पूछा है जो थोड़ी देर के लिए मारा ना जा सके

964
01:09:13,080 --> 01:09:17,400
उसको भी अमर कह सकते हैं क्या इस संबंध में आपके पास कोई प्रमाण

965
01:09:17,400 --> 01:09:21,520
है शास्त्र का मेरे पास जो प्रमाण था बता

966
01:09:21,520 --> 01:09:25,680
दिए इसके अला कोई प्रमाण नहीं है आपके पास क्या प्रमाण है उसम लिखा

967
01:09:25,680 --> 01:09:29,760
है अमर शब्द के बारे में बात हुई है वहां पर मैंने जो पंक्ति

968
01:09:29,760 --> 01:09:34,280
बोली है उससे रिलेटेड कुछ लिखा है क्या वहां पर अमर शब्द लिखा

969
01:09:34,280 --> 01:09:40,280
मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं हां दे दीजिए

970
01:09:40,480 --> 01:09:44,600
अ जैसे कि आप जैसे कि ब्रह्मा

971
01:09:44,600 --> 01:09:48,760
विष्णु महेश अमर अजर अविनाशी है है ना

972
01:09:48,760 --> 01:09:52,920
ये कई ग्रंथों में इसका प्रमाण आता है

973
01:09:52,920 --> 01:09:57,080
उनकी जन्म मृत्यु नहीं होती हां जबक देवी भागवत पुराण

974
01:09:57,080 --> 01:10:01,320
में ये लिखा हुआ है कि ब्रह्मा विष्णु महेश अपना अपना समय आने पर मृत्यु

975
01:10:01,320 --> 01:10:05,320
को प्राप्त हो जाते हैं नष्ट हो जाते हैं हा ठीक जी

976
01:10:05,320 --> 01:10:06,520
तो अब आप

977
01:10:06,520 --> 01:10:10,960
ये कैसे कहेंगे कि वो सदा के लिए अमर है क्योंकि

978
01:10:10,960 --> 01:10:15,560
सदा के लिए अर है और लीला पूर्वक उनका जो है त्र भाव आविर्भाव होता है

979
01:10:15,560 --> 01:10:19,560
लीला मैं त्र भाव की बात नहीं कर रहा मैं ये कह रहा हूं

980
01:10:19,560 --> 01:10:23,680
कि देवी भाव पुराण में ये लिखा हुआ है अपना समय आ

981
01:10:23,680 --> 01:10:26,960
जाने पर

982
01:10:26,960 --> 01:10:31,240
शिवराम आप की डिक्शनरी दिखा दूं आविर्भव तिरोभाव का मतलब जन्म मृत्यु भी है

983
01:10:31,240 --> 01:10:35,240
मैं मैं आविर्भाव तिरोभाव नहीं बात कर रहा मैं ये कह रहा

984
01:10:35,240 --> 01:10:39,920
हूं मैं तो बता रहा हूं ना आ भाव भाव का अर्थ जन्म मृत्य भी लिया जा सकता

985
01:10:39,920 --> 01:10:44,440
है मैं तीसरे स्कंध पर नहीं जा रहा

986
01:10:44,440 --> 01:10:48,760
मैं कहां क आप जा रहे हो आर भाव और रो भाव का अर्थ जन्म मृत्यु

987
01:10:48,760 --> 01:10:52,760
भी होता है ये मैं आपको दिखा देता हूं शिवराम आपटे की डिक्शनरी से जिसमें आप

988
01:10:52,760 --> 01:10:57,880
ब्रज का अर्थ जाना करते हो उसी से दिखा देता हूं

989
01:10:57,880 --> 01:11:02,040
दिखाऊ मैं आपको बता रहा हूं कि मैं उस पेज पर नहीं जा रहा

990
01:11:02,040 --> 01:11:06,120
दूसरे पेज पर ठीक उसके दूसरे पेज पर लिखा हुआ है कि अपनाना समय

991
01:11:06,120 --> 01:11:10,240
आ जाने पर नट हो जाते यह जो मैंने

992
01:11:10,240 --> 01:11:14,400
आपसे सवाल पूछा है कि जिसको क्या कहते थोड़ी

993
01:11:14,400 --> 01:11:18,600
बहुत देर के लिए मारा नहीं जा सकता है उसको भी अमर कह सकते हैं उसको

994
01:11:18,600 --> 01:11:21,520
भी अमर कहा जा सकता है इस संबंध में हमें प्रमाण

995
01:11:21,520 --> 01:11:25,760
दीजिए आप यह संबंध है

996
01:11:25,760 --> 01:11:29,920
जिस जिसको कुछ समय एक साल के लिए कुछ

997
01:11:29,920 --> 01:11:34,160
सम के लिए पहले ही पता था कि वो एक एक एक

998
01:11:34,160 --> 01:11:38,200
पॉइंट से य दूसरे पॉइंट पर जाते ही नहीं तो फिर चर्चा करने

999
01:11:38,200 --> 01:11:42,440
में क्या मजा आएगा मजा आएगा आप कह

1000
01:11:42,440 --> 01:11:46,720
इस प्रश्न का जवाब प्र दे चुके यार देवी देवता

1001
01:11:46,720 --> 01:11:50,960
अर नहीं है फिर भी में आते हैं आपने

1002
01:11:50,960 --> 01:11:55,360
कोई प्र

1003
01:11:55,360 --> 01:11:59,360
आपने कोई प्रमाण मैं आपके प्रमाण ना होने की चीज को

1004
01:11:59,360 --> 01:12:03,960
आपको समझा देता हूं अब मैंने गारंटी ले ली सुनिए

1005
01:12:03,960 --> 01:12:07,960
मैंने गारंटी ले ली पाच मिनट के लिए बाबू भाई को कोई कुछ नहीं कर

1006
01:12:07,960 --> 01:12:12,440
सकता मैं गारंटी ले रहा हूं अगले पाच मिनट की बाबू को अर कहोगे क्या

1007
01:12:12,440 --> 01:12:16,600
अभी मैं गारंटी ले रहा हूं

1008
01:12:16,600 --> 01:12:20,840
बाबू अर हो गया बाबू अमर हो गया

1009
01:12:20,840 --> 01:12:24,840
ऐसे समझोगे आप मेरी बात को ऐसे नहीं समझ पाओगे मैं गारंटी ले रहा हूं

1010
01:12:24,840 --> 01:12:29,000
बाबू अी पा मिनट अगले पा मिनट तक बाबू को कुछ नहीं हो सकता

1011
01:12:29,000 --> 01:12:32,960
पा मिनट तक बाबू अर है क्या इस

1012
01:12:32,960 --> 01:12:37,080
समय थोड़े सम के लिए एक बार बोल दो कि हा मैं पा

1013
01:12:37,080 --> 01:12:41,080
मिनट के लिए अर हं हम दूसरे क्वेश्चन प आ जाएंगे बोल दो बाबू ये आप लोगों

1014
01:12:41,080 --> 01:12:45,160
कीय जो थिंकिंग है जनता देख ले इसको मैं बता

1015
01:12:45,160 --> 01:12:49,280
रहा हूं जी जब वहा ये शब्द आ गया

1016
01:12:49,280 --> 01:12:53,360
थोड़ा समय थोड़ा समय यानी कि एक लिमिट आ गई तो आप अमर

1017
01:12:53,360 --> 01:12:57,480
मत बोलो यही य वहां अगर आप थोड़े समय

1018
01:12:57,480 --> 01:13:01,520
के लिए उसको सुख में भेज रहे हो थोड़े समय के लिए उसको भय मुक्त कर

1019
01:13:01,520 --> 01:13:05,520
रहे हो तो उसको अमर मत बोलो अगर अमर बोलोगे तो मैं

1020
01:13:05,520 --> 01:13:09,600
कह रहा हूं क्या पाच अगले पाच मिनट के लिए बाबू भाई को हम लोग अमर

1021
01:13:09,600 --> 01:13:10,600
कहे

1022
01:13:10,600 --> 01:13:14,640
भाई आप लोग कमेंट कर दो पाच मिनट के लिए मैं गारंटी ले रहा हूं बाबू

1023
01:13:14,640 --> 01:13:19,160
को कुछ नहीं होगा भैया टाइमर दिखाइए जरा एक 13 17

1024
01:13:19,160 --> 01:13:23,280
ठीक है अब 5 मिनट एक 18 18 प हम लोग जब

1025
01:13:23,280 --> 01:13:27,400
देखेंगे पा मिनट के बाद तो तो अब इस पाच मिनट में बाबू को अमर कहा

1026
01:13:27,400 --> 01:13:31,640
जा सकता है कि नहीं बिल्कुल कहा जा सकता है व पर बोलिए

1027
01:13:31,640 --> 01:13:36,160
कुछ समय के लिए बोलिए कमेंट में लोग उतर देंगे मिट के लिए अर है

1028
01:13:36,160 --> 01:13:40,200
बाबू कह दो हा मैं पाच मिनट के लिए अर हूं बोल दो एक बार हम दूसरे प्रश्न प

1029
01:13:40,200 --> 01:13:44,840
चले अमर है भाई कह तो रहा हूं मैं अमर है हा

1030
01:13:44,840 --> 01:13:49,000
देखो भाई ये है तत्व ज्ञान अब और आप आप

1031
01:13:49,000 --> 01:13:53,040
बोलिए बाबू भाई मैं अमर हूं पा मिनट के लिए बाबू भाई कुछ हो

1032
01:13:53,040 --> 01:13:57,360
तो नहीं गया मेरी वाणी नहीं गलत मत कर दे बाबू भाई अरे बाबू

1033
01:13:57,360 --> 01:14:01,640
भाई अरे कहां चले गए एक मिनट रुकिए उसका

1034
01:14:01,640 --> 01:14:05,800
नेटवर्क कट रहा उनका नेटवर्क मुझे डर लग रहा है भाई अच्छा

1035
01:14:05,800 --> 01:14:10,080
ठीक है नेक्स्ट टॉपिक प चला जाए

1036
01:14:10,080 --> 01:14:13,880
चलिए अगला

1037
01:14:13,880 --> 01:14:17,360
टॉपिक

1038
01:14:17,360 --> 01:14:21,360
अगला अग अगला अगला प्रश्न मैं

1039
01:14:21,360 --> 01:14:26,000
ले रहा हूं आपसे अगला प्रश्न मेरा यह है

1040
01:14:26,000 --> 01:14:30,920
कि [संगीत] आपने

1041
01:14:30,920 --> 01:14:35,080
आपने जब वहां पुस्तक सेवा पर पुस्तक रोकी गई थी तो

1042
01:14:35,080 --> 01:14:39,200
एक बात बोली गई थी वहां पर आपके मुख से कि वेद शस्त्र

1043
01:14:39,200 --> 01:14:43,880
पढ़ने से मोक्ष नहीं होता ऐसा संत रामपाल जी महाराज के पुस्तकों में लिखा हुआ

1044
01:14:43,880 --> 01:14:48,120
है ठीक है जी हा बात

1045
01:14:48,120 --> 01:14:52,160
क्या हां वहा गुरु की बात है बिल्कुल गुरु की बात है गुरु वाली

1046
01:14:52,160 --> 01:14:58,160
बात हो गई क्या ये बात गुरु में ही आएगी

1047
01:14:58,200 --> 01:15:03,520
ये गुरु तक ही पहुंचेगी यह बात अच्छा ठीक है

1048
01:15:03,520 --> 01:15:07,840
चलो आप उसका उत्तर दीजिए क्या वेद शास्त्र पढ़ने

1049
01:15:07,840 --> 01:15:10,160
से मोक्ष

1050
01:15:10,160 --> 01:15:14,240
होगा वेद शास्त्र पढ़ने से और पढ़ कर के

1051
01:15:14,240 --> 01:15:18,280
य सचित उस पर अमल अमर करने से उसको समझने से मोक्ष होगा

1052
01:15:18,280 --> 01:15:20,680
बिल्कुल

1053
01:15:20,680 --> 01:15:25,040
होगा आपने वहां यह शब्द बार-बार दोहराए

1054
01:15:25,040 --> 01:15:29,240
कि यह लोग यह कह रहे हैं कि वेद शास्त्र पढ़ने से मोक्ष नहीं होगा

1055
01:15:29,240 --> 01:15:33,240
वेद शास्त्र पढ़ने से मोक्ष नहीं होगा तो आप हमसे पूछोगे

1056
01:15:33,240 --> 01:15:37,560
ना कि हमारा वो कहने का भाव क्या है हां आप हमसे पूछोगे

1057
01:15:37,560 --> 01:15:42,280
ना हम क्या कहना चाह रहे हैं वहां तो हम बता रहे हैं आपको

1058
01:15:42,280 --> 01:15:46,680
कि ये लोग हम जब यह कह रहे हैं ना कि यह

1059
01:15:46,680 --> 01:15:50,880
देखो यह लिखा है यज्ञ

1060
01:15:50,880 --> 01:15:56,320
करने से मुक्ति नहीं है और कौन सा

1061
01:15:56,320 --> 01:16:00,360
कौन सा य पांचवा यज्ञ

1062
01:16:00,360 --> 01:16:04,920
ये देखो पांचवा यज्ञ करने से

1063
01:16:04,920 --> 01:16:09,160
यज्ञ केवल एक नहीं है ज्ञान यज्ञ भी शामिल है ज्ञान

1064
01:16:09,160 --> 01:16:13,200
यज्ञ से भी मुक्ति नहीं है

1065
01:16:13,200 --> 01:16:17,240
पाच यज्ञ है तो

1066
01:16:17,240 --> 01:16:21,320
हम ये कह रहे हैं कि भाई जो वेदों के अनुसार जो पूजा भक्ति है उससे मुक्ति नहीं

1067
01:16:21,320 --> 01:16:26,720
है और यह आपकी किताबों में जगह जगह लिखा हुआ है

1068
01:16:26,720 --> 01:16:30,920
तो आपके भी किताब में तो लिखा हुआ है वेद शास्त्र पढ़ने से मुक्ति नहीं होती

1069
01:16:30,920 --> 01:16:34,960
है वेद शास्त्र के अनुसार आप बात को

1070
01:16:34,960 --> 01:16:39,280
बदल रहे हो वेद शास्त्रों के अनुसार

1071
01:16:39,280 --> 01:16:43,560
जो भक्ति है उससे मुक्ति नहीं है बातों को बदलो मत वेद

1072
01:16:43,560 --> 01:16:44,600
शास्त्रों के अनुसार

1073
01:16:44,600 --> 01:16:49,360
जो भक्ति है उससे मुक्ति नहीं है यह आपके में लिखा हुआ है

1074
01:16:49,360 --> 01:16:53,400
इस पर आप सहमत है कि वेद शास्त्र के अनुसार मुक्ति नहीं है मैं तो कह

1075
01:16:53,400 --> 01:16:57,480
रहा मुक्ति है वेद के अनुसार यदि आप अपने कर्मों को करेंगे वेद

1076
01:16:57,480 --> 01:17:01,600
शास्त्रों के अनुसार चलेंगे तो मुक्ति है आप कह रहे हो वेद शास्त्रों में

1077
01:17:01,600 --> 01:17:05,680
भी मुक्ति की वो नहीं है काल ब्रह्म

1078
01:17:05,680 --> 01:17:09,960
तक की भक्ति है वेद शास्त्रों में दिखाइए कि वे

1079
01:17:09,960 --> 01:17:14,280
शस्त्र शास्त्रों से मुक्ति है

1080
01:17:14,280 --> 01:17:19,120
क्या वे शास्त्रों के अनुसार चलने से मुक्ति है प्रमाण दिखाइए

1081
01:17:19,120 --> 01:17:23,600
वेद शास्त्रों के अनुसार चलने से मुक्ति है प्रमाण दिखाऊ

1082
01:17:23,600 --> 01:17:27,680
जी आप कह रहे हो आप इस बात को स्वीकार कर रहे हो ना कि

1083
01:17:27,680 --> 01:17:32,120
वेद शास्त्र के अनुसार चलने से मुक्ति नहीं है यह कह रहे हो

1084
01:17:32,120 --> 01:17:38,120
ना इसका प्रमाण रखा

1085
01:17:38,240 --> 01:17:43,520
ह उने

1086
01:17:43,520 --> 01:17:47,640
आपने वेदों से मुक्ति नहीं होगी ठीक है

1087
01:17:47,640 --> 01:17:51,760
तो आप भी मान रहे हो वेद से मुक्ति नहीं होगी इसका मतलब

1088
01:17:51,760 --> 01:17:55,760
मेले में गलत नहीं चलाया वो बाद की बात है वेदों से मुक्ति होगी

1089
01:17:55,760 --> 01:17:59,760
कि नहीं होगी व बात सही है कि नहीं है इन्होंने प्रश्न ये किया है

1090
01:17:59,760 --> 01:18:03,760
कि वेदों के मैंने जो मेले में चिलाया था वो निराधार था या आधार

1091
01:18:03,760 --> 01:18:07,960
था तो आपने मेरा जवाब दे दिया व आधार था आपको यही सिखाया गया

1092
01:18:07,960 --> 01:18:13,960
ना कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं होगी आपका ग्रंथ कह रहा

1093
01:18:17,000 --> 01:18:21,080
है रामपाल जी ने अपनी किताबों में सही

1094
01:18:21,080 --> 01:18:25,120
लिखा है कि गलत लिखा बात अलग है अमित दास पूछा

1095
01:18:25,120 --> 01:18:29,240
है कि आपने मेले में चिल्लाया था इसका क्या आधार है मैंने

1096
01:18:29,240 --> 01:18:33,840
चिल्लाया था सही चिल्लाया था

1097
01:18:33,840 --> 01:18:38,120
ना चिलाता मतलब कहने का ये है

1098
01:18:38,120 --> 01:18:42,320
अमित दास एक मिनट अमित दास मैं इनको बात समझा दू बाबूराम बा बाबूराम

1099
01:18:42,320 --> 01:18:46,520
यादव अमित दास का कहना ये है कि ऐसा नहीं है हमारे

1100
01:18:46,520 --> 01:18:50,560
गुरुजी ऐसा नहीं कहते कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है ठीक

1101
01:18:50,560 --> 01:18:54,760
है तो मैंने वहां पर गलत चिल्लाया कि वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है

1102
01:18:54,760 --> 01:18:59,040
मगर आप भी इस बात को एडमिट कर रहे हो कि हा वेदों के अनुसार मुक्ति नहीं है

1103
01:18:59,040 --> 01:19:03,440
वो चर्चा का एक अलग विषय है मैं सिद्ध करूंगा वेदों के अनुसार मुक्ति

1104
01:19:03,440 --> 01:19:08,640
है भाई वेद केसर कहा मुक्ति है प्रमाण दिता

1105
01:19:08,640 --> 01:19:13,360
को मि बाबू भाई आप दो मि

1106
01:19:13,360 --> 01:19:17,600
प्र मेरा य है प्रश्न मेरा य है केवल वेद शस्त्र

1107
01:19:17,600 --> 01:19:21,800
पढ़ने से मुक्ति होगी केवल मैंने वहा पर कहा था

1108
01:19:21,800 --> 01:19:26,080
केवल वेद शस्त्र पढ़ना लिखा है इसम इस समय यह है आपसे

1109
01:19:26,080 --> 01:19:30,560
कि केवल वेद शस्त्र पढ़ने से मुक्ति होगी नहीं

1110
01:19:30,560 --> 01:19:32,080
उनको समझने से

1111
01:19:32,080 --> 01:19:36,080
उनके अनुसार आचरण करने से उस पर चलने से वेदोक्त पथ

1112
01:19:36,080 --> 01:19:40,440
पर तब होगी मुक्ति क्या तप व्रत

1113
01:19:40,440 --> 01:19:44,440
तीर्थ यात्रा जय ओम पूजा वेद

1114
01:19:44,440 --> 01:19:48,440
शास्त्र अगम आदि की कथा करने से मुक्ति

1115
01:19:48,440 --> 01:19:52,920
होगी एक मिनट आप रुक जाइए आपने दो प्रश्न किए है ना अभी

1116
01:19:52,920 --> 01:19:57,520
तक आप पूछिए आप अब हमें भी तो पूछने दो

1117
01:19:57,520 --> 01:20:01,680
पूछ लो हा सबसे पहले

1118
01:20:01,680 --> 01:20:06,200
तो मुझे ये बताओ क्या वजह

1119
01:20:06,200 --> 01:20:10,440
थी जो आपका सतलोक है

1120
01:20:10,440 --> 01:20:14,480
जो आपका सतलोक हैव गुरु पर ही बात होगी गुरु परही

1121
01:20:14,480 --> 01:20:19,520
बात हो रही है भाई गुरु ने आपको सही ज्ञान दिया है कि नहीं दिया वो पूछ रहा

1122
01:20:19,520 --> 01:20:24,760
हूं हा तो आपके गुरु के अनुसार

1123
01:20:24,760 --> 01:20:30,600
जो काल है वो किसको खाता

1124
01:20:30,600 --> 01:20:34,880
है भाई साहब केवल गुरु पर बात होगी

1125
01:20:34,880 --> 01:20:39,320
अरे फिर वही बात केवल गुरु प बात है तो पित पूजा भी कैसे आ गई

1126
01:20:39,320 --> 01:20:43,320
अब यहां पर ये बा गु गुरु से तो जुड़ी हुई है सारी

1127
01:20:43,320 --> 01:20:47,160
बात मैं मैं बता रहा हूं आपको मैं बता रहा

1128
01:20:47,160 --> 01:20:51,240
हूं आपको हा यहां पर आप आंसर देंगे फिर मैं

1129
01:20:51,240 --> 01:20:55,280
आपको बता दूंगा फिर वो परफेक्ट ग्रुप ही ऐड होगी भाई

1130
01:20:55,280 --> 01:20:59,400
साहब मैं भी तो परफेक्ट गुरु पर आ रहा हूं आपके गुरु का ज्ञान सही है कि नहीं सही है

1131
01:20:59,400 --> 01:21:03,720
वो मैं कटाक्ष कर रहा हूं आप उसका उत्तर दीजिए

1132
01:21:03,720 --> 01:21:07,880
तो यहां आप बात ईश्वर पर लेकर आ रहे हैं ईश्वर पर कहा

1133
01:21:07,880 --> 01:21:11,400
है आप

1134
01:21:11,400 --> 01:21:15,400
क ला भी रहा हूं अभी गुरु पर बात हो रही थी आप ब्रह्मा विष्णु महेश पर गए

1135
01:21:15,400 --> 01:21:19,560
थे कि नहीं गए थे वहा आपको प्रमाण देना पड़

1136
01:21:19,560 --> 01:21:24,800
तो बस तो मैं भी गुरु के ज्ञान को ही तो चेक कर रहे भाई मिला

1137
01:21:24,800 --> 01:21:28,960
विषय को बदल रहे सुनिए सुनिए विषय को नहीं बदल रहा हूं आप बदल रहे

1138
01:21:28,960 --> 01:21:34,080
हैं आप चाहते केवल आप क्वेश्चन करें अभी मैं एक छोटा सा क्वेश्चन करर

1139
01:21:34,080 --> 01:21:38,120
हूं छो सा क्वेन करर हूं मैं एक छोटा सा क्वेश्चन कर रहा

1140
01:21:38,120 --> 01:21:42,160
हूं एक मिनट मैं छोटा सा क्वेश्चन कर रहा हूं कि काल ब्रह्म

1141
01:21:42,160 --> 01:21:46,160
है जो वो किसको खाता है एक

1142
01:21:46,160 --> 01:21:50,840
मिनट रुकिए बाबू जी आप रुकिए मुझे बोलने दीजिए जैसे कि

1143
01:21:50,840 --> 01:21:54,920
आपके गुरु ने जो साधना आपको बताई है और व

1144
01:21:54,920 --> 01:21:59,720
आपसे पूछ रहा हूं वो साधना वाकई मोक्ष की दायक है कि

1145
01:21:59,720 --> 01:22:03,000
नहीं आप प्रश्न कर सकते हैं

1146
01:22:03,000 --> 01:22:05,240
गुने

1147
01:22:05,240 --> 01:22:10,080
म आपको अपना गुरु से कनेक्शन बता रहा आपको गुरु से कने

1148
01:22:10,080 --> 01:22:13,600
ड श्वर

1149
01:22:13,600 --> 01:22:17,640
कीने अर्थ बताया है शास्त्र का सही

1150
01:22:17,640 --> 01:22:23,640
है नहीं य जांचने के लिए मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं

1151
01:22:25,720 --> 01:22:30,720
भाई हमारे गुरु की

1152
01:22:30,720 --> 01:22:35,280
साधना जी पा जी य चाहते हैं कि यह जो प्रश्न करे

1153
01:22:35,280 --> 01:22:40,000
यह जिस क्षेत्र य जिस तरह का प्रश्न करे वैसा ही प्रश्न करू य थोड़ी ना

1154
01:22:40,000 --> 01:22:44,880
भाई गुरु से संबंधित आपने भक्ति चुनी हमने ईश्वरीय ज्ञान चुना

1155
01:22:44,880 --> 01:22:49,080
आपने भक्ति का करने का तरीका जानना चाहा और हम ईश्वर

1156
01:22:49,080 --> 01:22:53,920
का स्वरूप जानना चाह रहे आत्मा का स्वरूप जानना चाह रहे हैं य फसाने वालेप

1157
01:22:53,920 --> 01:22:58,320
जानना आमा आत्मा और ईश्वर की बात हम नेक्स्ट डिबेट

1158
01:22:58,320 --> 01:23:02,720
में करेंगे फिलहाल में जो जो जो गुरु के द्वारा मंत्र

1159
01:23:02,720 --> 01:23:07,400
दिए जाते हैं वो किस विधि से किया जाता

1160
01:23:07,400 --> 01:23:12,120
हैट में हम लोग गुरु और भक्ति दोनों की बात कर रहे हैं

1161
01:23:12,120 --> 01:23:16,720
गुरु और वक्ति दोनों की गुरु ली गुरु गुरु

1162
01:23:16,720 --> 01:23:18,040
देखो गुरु अगर कहोगे

1163
01:23:18,040 --> 01:23:22,120
केवल ना तो उसम तो सारी चीजें आ जाएंगी हम पूछ रहे हैं आपसे

1164
01:23:22,120 --> 01:23:27,680
कि काल किसको खाता है आप हमें बता दो आपके गुरु ने क्या

1165
01:23:27,680 --> 01:23:32,560
बताया बाबू भाई जवाब दीजिए

1166
01:23:32,560 --> 01:23:36,240
काल किसको ता

1167
01:23:36,240 --> 01:23:41,240
है काल जो शरीर कार हो है

1168
01:23:41,240 --> 01:23:46,040
अनामा उसको काल वहा ले जा कर के उसको तप

1169
01:23:46,040 --> 01:23:50,600
गर्म करता है ता है तो उसके शरीर से जो दुर्गंध उसको

1170
01:23:50,600 --> 01:23:54,640
खाता अच्छा मतलब की वो मनुष्य नहीं होते को वो

1171
01:23:54,640 --> 01:23:59,160
खाता है मनुष्य तो वो है ना जो शरीर

1172
01:23:59,160 --> 01:24:03,240
में आत्मा का एक सूक्ष्म शरीर होती है अरे तो

1173
01:24:03,240 --> 01:24:07,320
मनुष्य नहीं है ना मनुष्य तो वो है ना जो भूलोक का प्राणी है जो भूलोक पर चर विचर

1174
01:24:07,320 --> 01:24:11,400
रहा है वो है मनुष्य तो मनुष्य को नहीं खाता ना वो जीवात्मा

1175
01:24:11,400 --> 01:24:15,520
के सूक्ष्म शरीर को पीस के जो तत्व निकलता है उसके बाद भी जीवात्मा

1176
01:24:15,520 --> 01:24:19,760
अस्तित्व में रहती है उस मैल खाता है वो गंध निकलती

1177
01:24:19,760 --> 01:24:23,760
वो खाता है ठीक है जी मनुष्यों को

1178
01:24:23,760 --> 01:24:26,280
नहीं खाता है

1179
01:24:26,280 --> 01:24:30,480
वो हा तो तत्वदर्शी जी

1180
01:24:30,480 --> 01:24:33,080
का ज्ञान य है के शरीर को

1181
01:24:33,080 --> 01:24:38,120
नहीं खा रहा वो मनुष्य को बता

1182
01:24:38,120 --> 01:24:42,200
रहा पाच तव वाले शरीर शरीर निकल जाएगी तो

1183
01:24:42,200 --> 01:24:46,640
वो आत्मा सूक्ष्म शरीर में मनुष्य कहलाए कीी क्या क्या कहलाए

1184
01:24:46,640 --> 01:24:51,000
वो नहीं कहलाए दुर्ग को खाता है

1185
01:24:51,000 --> 01:24:55,040
व मनुष्य तो नहीं कहलाए ना या काल मनुष

1186
01:24:55,040 --> 01:24:59,640
को नहीं खाता है काल मनुष्य को नहीं खाता है

1187
01:24:59,640 --> 01:25:03,640
ये तत्व ज्ञान है तत्वदर्शी का ठीक है अब मैं आपसे पूछ

1188
01:25:03,640 --> 01:25:08,080
रहा हूं आप बताए अब अगला प्रश्न अगला प्रश्न हम लोग का है

1189
01:25:08,080 --> 01:25:12,120
अरे भाई अभी मेरा प्रश्न खत्म नहीं हुआ है हा

1190
01:25:12,120 --> 01:25:16,280
तो आप ब ये देखिए काल

1191
01:25:16,280 --> 01:25:20,440
जो है मनुष्य को खाता है पढ़ लीजिए कौन से पेज

1192
01:25:20,440 --> 01:25:25,520
प लिखा हुआ है पहले पढ़ लीजिए फिर बताते हैं बड़ा करो

1193
01:25:25,520 --> 01:25:29,960
भरा बड़ा

1194
01:25:29,960 --> 01:25:34,400
करो बड़ा करो इसको बड़ा करो

1195
01:25:34,400 --> 01:25:38,920
पढ़िए हरा वाला काल ब्रह्म एक

1196
01:25:38,920 --> 01:25:43,080
लाख देह ऋषि मनुष्य देह

1197
01:25:43,080 --> 01:25:47,440
ऋषि शरीर धारी प्राणी ता

1198
01:25:47,440 --> 01:25:51,600
है उसके लिए इससे

1199
01:25:51,600 --> 01:25:57,600
तीनों पुत्र व्यस्त बनाए रखते

1200
01:25:58,760 --> 01:26:03,680
हैं वहा वहा पर क्या होता है

1201
01:26:03,680 --> 01:26:07,720
बाबू भाई आपने कहा वो मनुष्य को नहीं खाता है आपके

1202
01:26:07,720 --> 01:26:11,840
तत्वदर्शी लिख रहे हैं मनुष्य को खाता है बता रहे

1203
01:26:11,840 --> 01:26:16,000
हैं बता रहे य से यहां से जब शरीर

1204
01:26:16,000 --> 01:26:20,080
को लि कानते हैं तो व वह आत्मा

1205
01:26:20,080 --> 01:26:24,600
जैसे मनुष्य शरीर में है जैसे मनुष्य शरीर है उसका एक

1206
01:26:24,600 --> 01:26:28,640
शरीर से ऐसे ही रहेगा आप लोग यार सत्यवादी नहीं हो यार मजा नहीं

1207
01:26:28,640 --> 01:26:32,680
आता आप लोगों से इसीलिए फिर चचन होने लगती है यार कुछ गलत किया है तो

1208
01:26:32,680 --> 01:26:37,080
बोल दो मुझसे गलती हो गई आगे बढ़ो उससे

1209
01:26:37,080 --> 01:26:41,400
तुमको नहीं पता था तुम्हारे तत्वदर्शी ने लिखा है कि मनुष्य को खाता है वो

1210
01:26:41,400 --> 01:26:45,400
पता नहीं उसको ु ल कर लो य

1211
01:26:45,400 --> 01:26:49,440
यहां पर किसी मनुष्य को खाते हुए आप देख रहे हैं क्या अरे भाई यह लिखा

1212
01:26:49,440 --> 01:26:53,720
तो है क्या लिख रहा है क्या लिख रहा है इसम

1213
01:26:53,720 --> 01:26:58,280
अरे उसी चीज को बता रहे है मनुष्य जैसे आकार में सूक्ष्म शरीर होती है

1214
01:26:58,280 --> 01:27:04,280
उसको इस मनुष्य जैसा आकार नहीं लिखा है इसमें मनुष्य लिखा

1215
01:27:04,480 --> 01:27:08,640
है बड़ा करो क्या दिखा रहे हैं यह देखो प्रतिदिन एक

1216
01:27:08,640 --> 01:27:12,760
लाख मानव शरीर

1217
01:27:12,760 --> 01:27:17,360
मानव जब आत्मा शरीर छोड़ देती है तो उसको मानव नहीं कहते

1218
01:27:17,360 --> 01:27:21,640
हैं और अगर कहते हैं तो दिखाओ मुझे कहां कहते हैं

1219
01:27:21,640 --> 01:27:27,640
जो मनुष्य लिग कर जाती है उस आत्मा को

1220
01:27:27,680 --> 01:27:31,800
खा है मनुष्य से जब आत्मा निकल जाएगी उसके बाद उस आत्मा को मनुष्य

1221
01:27:31,800 --> 01:27:36,240
कहा जाएगा गलत बात कर रहे हो या बा

1222
01:27:36,240 --> 01:27:40,280
अरे यार जो वहा परमा बा बाबू तुम कहा

1223
01:27:40,280 --> 01:27:44,480
पर बैठे हो कहा पर बैठे

1224
01:27:44,480 --> 01:27:48,920
मलो े तुम्हारे गुरु की फोटो है

1225
01:27:48,920 --> 01:27:54,440
ना तुम उसी कमरे में थूक रहे हो

1226
01:27:54,440 --> 01:27:58,600
अरे नहीं य पर नहीं थके अभी तुमने थका अरे

1227
01:27:58,600 --> 01:28:04,600
शिवा भाई क्या बात कर रहे हो आप अपने प्रश्नों को

1228
01:28:04,680 --> 01:28:09,040
रखिए य गुरु के अपमान नहीं है अगर तुम गुरु मानते हो

1229
01:28:09,040 --> 01:28:15,040
जिस कमरे में तुम्हारे

1230
01:28:19,880 --> 01:28:24,320
गुरु चलो आप बात का जवाब दीजिए

1231
01:28:24,320 --> 01:28:28,320
मुझे बताइए कि जब आत्मा शरीर छोड़ देती है मनुष्य

1232
01:28:28,320 --> 01:28:34,320
का उसके बाद भी उसे मनुष्य कहा जाता

1233
01:28:36,560 --> 01:28:40,960
हैर होता है सूक्ष्म शरीर होते है मनुष्य जैसे

1234
01:28:40,960 --> 01:28:45,240
सेम अच्छा बाबू अभी थोड़ी देर पहले तुमने यह कहा था कि मनुष्य

1235
01:28:45,240 --> 01:28:50,440
को नहीं खाता है यहां पर लिखा है मनुष्य को खाता है

1236
01:28:50,440 --> 01:28:54,440
उसका सूक्ष्म शरीर लिखा हुआ है वहा पर सक्षम शरीर को

1237
01:28:54,440 --> 01:28:58,680
मनुष्य को खाता है मानव शरीर को खाता है सूक्ष्म शरीर नहीं लिखा

1238
01:28:58,680 --> 01:29:03,000
है पृ संख्या बताइए मेरे को पृ संख्या पृष्ठ

1239
01:29:03,000 --> 01:29:08,360
संख्या बताइए

1240
01:29:08,360 --> 01:29:12,560
215 अरे बाबू राम भैया जो जो जिस प्रकार

1241
01:29:12,560 --> 01:29:16,560
आप बोले उसी प्रकार से लिखा होना चाहिए ना फिर व तो लिखी नहीं है

1242
01:29:16,560 --> 01:29:20,880
वहा तो मानव धारी शरीर लिख रखा

1243
01:29:20,880 --> 01:29:25,240
है तो तुम अपने जो गुरु है उन्हीं की अलना कर फर इस हिसाब

1244
01:29:25,240 --> 01:29:29,240
से और सबसे बड़ी बात जो तत्वदर्शी है उसकी

1245
01:29:29,240 --> 01:29:33,240
बात को समझने के लिए भी बाबूराम यादव के तत्व दर्शन को सुनना पड़ेगा अब

1246
01:29:33,240 --> 01:29:39,240
उनको छोड़ के इनके शरण में जाना

1247
01:29:39,360 --> 01:29:43,440
पड़ेगा ये भी तो है 15 से 20 मिनट का समय मेरे

1248
01:29:43,440 --> 01:29:47,600
को दीजिएगा एक मिनट रुक जाइए मिल गया इसका उत्तर

1249
01:29:47,600 --> 01:29:51,680
हां आप जो यहां पर बोले थे देखिए कोक में लिखा हुआ मनुष

1250
01:29:51,680 --> 01:29:55,960
देव ऋषि हां जो मनुष्य है जो अपना

1251
01:29:55,960 --> 01:30:00,200
इस शरीर को छोड़ता है तो अगला जो शरीर है उसका देव ऋषि

1252
01:30:00,200 --> 01:30:04,760
शर को वहा पर लिखा हु में

1253
01:30:04,760 --> 01:30:08,800
देखिए देव ऋषि का अथ य होता है अरे मेरे

1254
01:30:08,800 --> 01:30:13,000
भाई तुम कैसे पलस्तर करने लगते हो अपनी बातों में फस जाते हो तो बाबू

1255
01:30:13,000 --> 01:30:17,120
मैंने देखा है हमेशा पलस्तर करते हो एक काम

1256
01:30:17,120 --> 01:30:21,360
करो एक जग लो उसम अपनी सारी बातें डाल दो और एक शरबत बनाक

1257
01:30:21,360 --> 01:30:24,640
हमको पिला दो हम पी लेंगे

1258
01:30:24,640 --> 01:30:29,200
बाबूराम भैया सत्य को स्वीकार करो जो लिखा है उसको पढ़ो ना क्या लिखा है वहां पर

1259
01:30:29,200 --> 01:30:34,480
इसमें ऑप्शन दिए हैं मनुष्य देव अथवा ऋषि को व खाता

1260
01:30:34,480 --> 01:30:38,720
है तो व कह र मनुष्य देव ऋषि और तुम

1261
01:30:38,720 --> 01:30:43,080
चलो यहां तो यह मिल गया तुम्हे अभी मानव शरीर दिखाए थे उसका क्या करें

1262
01:30:43,080 --> 01:30:46,520
मानव

1263
01:30:46,520 --> 01:30:50,960
शरीर रुक जाइए अब हमारा भी प्रश्न

1264
01:30:50,960 --> 01:30:55,400
रहेगा इसके बाद हमारा प्रश्न य

1265
01:30:55,400 --> 01:30:59,400
भाई साब देखिए बाबू भाई आपने दो प्रश्न पूछे थे हमने एक

1266
01:30:59,400 --> 01:31:04,000
प्रश्न पूछा है अभी अभी तक एक ही प्रश्न पूछे हाभ

1267
01:31:04,000 --> 01:31:08,080
अभी तक अभी तक आप एक प्रश्न पूछे अभी तक एक ही

1268
01:31:08,080 --> 01:31:12,160
प्रश्न पूछा है भाई हमने आपने

1269
01:31:12,160 --> 01:31:14,560
दो पूछे

1270
01:31:14,560 --> 01:31:19,120
नाने पहला गुरु था और दूसरा एक और था

1271
01:31:19,120 --> 01:31:23,960
आपने मे में लाइन क्यों कही थी दो

1272
01:31:23,960 --> 01:31:28,000
और अब हमने पूछा कि आपने दो पूछ लिए अब एक हमें पूछ लेने दो हमने पूछा कि

1273
01:31:28,000 --> 01:31:32,040
भाई काल किसको खाता है हमने आपने कहा वो जीवात्मा को खाता है मनुष्य

1274
01:31:32,040 --> 01:31:36,040
को नहीं खाता अब आपके जो गुरु है वो लिख रहे हैं मानव शरीर को खाता है मनुष्य को

1275
01:31:36,040 --> 01:31:40,200
खाता है अब आप उसमें चिल्लम पटी करते रहिए मुझे बताइए कि शरीर

1276
01:31:40,200 --> 01:31:46,200
छोड़ने के बाद भी आत्मा को मनुष्य कैसे कहा जा सकता

1277
01:31:46,960 --> 01:31:51,440
है इसी चीज को लिका रहे प्रश्न रख रहे हैं आपसे

1278
01:31:51,440 --> 01:31:55,440
उत्तर देना है रखे बोलिए बोलिए मेरा प्रश्न

1279
01:31:55,440 --> 01:31:59,480
य है कि आपके गुरुजी मोक्ष के लिए किस विधि से

1280
01:31:59,480 --> 01:32:05,480
मंत्र देते हैं इससे संबंध स्थापित करिए विषय

1281
01:32:05,960 --> 01:32:10,040
का कोई भी संबंध हो उसका हम उसे तो देखना चाहते हैं कि आपके

1282
01:32:10,040 --> 01:32:14,440
गुके गुरुजी इसके उतर अब मैं इसके उत्तर में फिर

1283
01:32:14,440 --> 01:32:19,640
एक सवाल बोल दूं ऐसे तो विषय बदलते

1284
01:32:19,640 --> 01:32:23,880
जाएंगे पूछ रहा सक्तिमान है कि नहीं

1285
01:32:23,880 --> 01:32:27,960
भैया जी अरे मैं पूछ अभी बोल यही खत्म हो

1286
01:32:27,960 --> 01:32:31,960
जाएगी सारी डिबेट अरे भैया जी मैं पूछ रहा हूं पूछ र

1287
01:32:31,960 --> 01:32:36,600
मैं पूछ रहा हूं अरे बाबू बाबूदास मैं पूछ रहा हूं

1288
01:32:36,600 --> 01:32:40,760
उनका पूछने का अर्थ यह है कि जैसे कि हम गुरु की शरण में जाएंगे

1289
01:32:40,760 --> 01:32:44,840
तो वो किस प्रकार हमें मंत्र देगा जिससे हमारी मुक्ति होग साब

1290
01:32:44,840 --> 01:32:49,360
देखो अम अभी बात यह चल रही है कि जब

1291
01:32:49,360 --> 01:32:53,400
मानव धारी की बात हो रही है मनुष्य की बात हो रही है आप कह रहे मनुष्य को नहीं कता

1292
01:32:53,400 --> 01:32:59,280
आपके ख मनुष्य को ही खाता है मानव शरीर को ही खाता

1293
01:32:59,280 --> 01:33:04,000
है तो या तो ये गलत है या बाबू ने गलत बोला

1294
01:33:04,000 --> 01:33:08,160
अा मानव शरीर को लिखा हुआ है क्या व प हा मानव शरीर दिखा दो भैया

1295
01:33:08,160 --> 01:33:12,360
अभी दिखाया था आपने जो मानव शरीर लिखा है सीधे सधे कौन

1296
01:33:12,360 --> 01:33:16,400
से पृष्ठ पर लिखा हुआ है बाबूराम जी आप ही बोल दीजिए आपने तो देखा

1297
01:33:16,400 --> 01:33:21,080
अभी खद निकाल के पेज नंबर पेज नंबर कौन सा है दिखा र दिखा

1298
01:33:21,080 --> 01:33:25,200
रहे बता दीजिए मुझे पेज नंबर तो बताओ

1299
01:33:25,200 --> 01:33:29,280
अभी बताते हैं ना भाई बिल्कुल वर्बल थोड़ी ना रटा हुआ डला है बताते हैं

1300
01:33:29,280 --> 01:33:35,280
आपको अभी मानव शरीर दिखाया था बड़ा बड़ा करके दिखा दीजिए मानव

1301
01:33:42,600 --> 01:33:46,840
शरीर अरे अभी अभी जो दिखाया था आपने दो मिनट पहले वाला प्रमाण

1302
01:33:46,840 --> 01:33:50,880
वो दिखाइए आप मुझे पेज नंबर

1303
01:33:50,880 --> 01:33:54,960
तो बता दो भैया भाई साहब वो मुझे रटा हुआ नहीं है वो मैं देख

1304
01:33:54,960 --> 01:33:59,040
करके आपको बता रहा हूं और जब वो आ

1305
01:33:59,040 --> 01:34:05,040
जाएगा स्क्रीन पर पेज नंबर भी आपको बता दिया जाएगा आप देख लेना बोल

1306
01:34:09,840 --> 01:34:15,840
के हां बड़ा करिए

1307
01:34:17,960 --> 01:34:23,960
इसको यह देखिए मानव शरीर

1308
01:34:26,680 --> 01:34:31,560
पढ़ लिया पेज नंबर बता दो इनको कौन सा है

1309
01:34:31,560 --> 01:34:37,560
क्या है अध्यात्म ज्ञान का गोला तो नहीं है कहीं आध्यात्मिक ज्ञान

1310
01:34:37,640 --> 01:34:43,640
गंगा और पेज नंबर 91 पढ़

1311
01:34:45,280 --> 01:34:49,360
लो मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए

1312
01:34:49,360 --> 01:34:55,360
एक मिनट इस विषय को खत्म हो जाने दो फिर हम आपको उत्तर देते हैं

1313
01:35:15,480 --> 01:35:21,480
इतना सन्नाटा क्यों है भाई

1314
01:35:25,080 --> 01:35:31,080
क्या

1315
01:35:37,200 --> 01:35:42,520
हुआ अरे क्या हुआ अमित जी

1316
01:35:42,520 --> 01:35:47,240
बोलिए अ अमित दास जी कहीं चले गए

1317
01:35:47,240 --> 01:35:51,840
बताइए हम तो बोल तो रहे हैं या तो आप गलत हो या आपकी य त

1318
01:35:51,840 --> 01:35:56,880
किताब गलत है

1319
01:35:56,880 --> 01:36:01,160
हमारे प्रश्न का उत्तर दीजिए जो हमने प्रश्न किया देखा बात को खत्म थोड़ी

1320
01:36:01,160 --> 01:36:05,720
ना करोगे आपने दो प्रश्न कर लिए है तीसरा

1321
01:36:05,720 --> 01:36:10,160
हमने दो नहीं किए हमने पहला किया यह वाला कि आप कह रहे

1322
01:36:10,160 --> 01:36:14,240
वो जो है सूक्ष्म आत्माओं का जो सूक्ष्म शरीर होता है उसकी

1323
01:36:14,240 --> 01:36:18,320
गंध को खाता है य पर मानव शरीर धारी प्राणियों को खाता है जी

1324
01:36:18,320 --> 01:36:22,360
पड़ी जी बोलिए बाबू भैया देखो होता

1325
01:36:22,360 --> 01:36:26,360
क्या है कि जब ज्ञान चर्चा करते इसका एक नियम होता है कि जब तक एक टॉपिक

1326
01:36:26,360 --> 01:36:30,480
खत्म नहीं होता उसका कुछ आधार निकलता नहीं है तब तक उसके हम आगे

1327
01:36:30,480 --> 01:36:34,560
नहीं बढ़ सकते हां यह है कि हम दर्शकों के ऊपर छोड़ सकते हैं कि

1328
01:36:34,560 --> 01:36:38,760
हां यह हमारी वार्ता हुई है आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि य

1329
01:36:38,760 --> 01:36:41,720
क्या सही है क्या गलत

1330
01:36:41,720 --> 01:36:46,040
है मैं आपका इसको 11 के 32 में प्रमाण दूंगा भगवत

1331
01:36:46,040 --> 01:36:50,080
गीता 11 के 32 आप एक बार आप वो चेहरा

1332
01:36:50,080 --> 01:36:56,080
दिखाकर बात करें वो क्योंकि बाद में रील वगैरह बनती है ना तो दिक्कत आती है

1333
01:37:10,280 --> 01:37:14,280
जी फिर चले गए अमित दास जी तब

1334
01:37:14,280 --> 01:37:18,560
तक क्वेश्चन रखे रहिए कुछ बाबूराम

1335
01:37:18,560 --> 01:37:22,600
बाबू हा बाबू बाबू जी से आप बात कर लीजिए ठीक है

1336
01:37:22,600 --> 01:37:26,880
अब मैं कुछ क्वेश्चन ठीक है गीता से ही पूछे जाएंगे

1337
01:37:26,880 --> 01:37:31,800
आपके लिए ठीक

1338
01:37:31,800 --> 01:37:36,120
है देंगे उसका देंगे उसका शिवांश

1339
01:37:36,120 --> 01:37:40,160
जी देंगे सुनिए सुनिए बा बाबू भाई थोड़ा होपलेस हो रहे हैं एक बार

1340
01:37:40,160 --> 01:37:45,280
इनको अप अपना प्रश्न करने दीजिए बोलिए बाब

1341
01:37:45,280 --> 01:37:50,040
भाई आपके गुरुजी मक्ष के लिए मंत्र देते

1342
01:37:50,040 --> 01:37:56,040
गायत्री मंत्र विधि बताइए

1343
01:37:57,080 --> 01:38:02,240
काय मोक्ष के लिए मंत्र क्या मंत्र

1344
01:38:02,240 --> 01:38:07,680
सम जो मंत्र देते हैं गायत्री मंत्र उसको किस विधि से जाप

1345
01:38:07,680 --> 01:38:12,000
करना किस विधि से जाप करते हैं जी अब

1346
01:38:12,000 --> 01:38:17,400
मैं आपको यहां पर एक उत्तर दे दूं आपको विधि नहीं पसंद है आपकी विधि अलग है

1347
01:38:17,400 --> 01:38:21,440
क्या भाई उसी को तो पकड़ेंगे कि भाई आपके गुरुजी

1348
01:38:21,440 --> 01:38:25,560
किस विधि से देते हैं आप ठीक है आपकी विधि

1349
01:38:25,560 --> 01:38:30,840
अलग है आपको लगता है हमारे गुरु जी गलत विधि से देते हैं ऐसा है क्या

1350
01:38:30,840 --> 01:38:34,920
हैं भई आप तो हर पॉइंट प कमी लि कान रहे हैं किसी को देखना चाहते आप

1351
01:38:34,920 --> 01:38:39,080
समझ नहीं रहे हो मेरी बात हमारे और आपके बीच में मैं आपको एक बात

1352
01:38:39,080 --> 01:38:43,120
क्लियर करूं हमारे और आपके बीच में जो दूरियां है वो इन

1353
01:38:43,120 --> 01:38:47,280
बातों को लेकर नहीं है कि हमारी विधि गायत्री मंत्र को जपने की क्या है और आपकी गायत्री

1354
01:38:47,280 --> 01:38:51,280
मंत्र को जपने की क्या विधि है इस बात को लेकर दूरी है

1355
01:38:51,280 --> 01:38:55,640
मत मत मत मानो हमारी विधि को अपनी लगा लो जाओ मर ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान

1356
01:38:55,640 --> 01:39:00,360
ना मानना कबीर को भगवान मानना वेदों के अनुसार और

1357
01:39:00,360 --> 01:39:04,360
यह क्या कहते संत रामपाल को तत्वदर्शी मानना यह सब बंद करो अपनी

1358
01:39:04,360 --> 01:39:08,400
विधि जो तुम्ह पसंद है वो बनाओ कोई दिक्कत नहीं जाओ मान लो

1359
01:39:08,400 --> 01:39:12,240
हमा ग उतर देने

1360
01:39:12,240 --> 01:39:16,320
मतलब यने देखो ऐसा है कि अगर हम ऐसे विषय निकालेंगे

1361
01:39:16,320 --> 01:39:20,320
ना एक लाख विषय आ जाएंगे और उनको साबित करते

1362
01:39:20,320 --> 01:39:24,960
र कभी चर्चा हमारे बीच में दूरी किस बात को लेकर है दूरी

1363
01:39:24,960 --> 01:39:29,360
शिवा

1364
01:39:29,360 --> 01:39:33,480
जी अमित अम आपको हमारे अनुसार

1365
01:39:33,480 --> 01:39:39,480
गायत्री मंत्र नहीं जपना है अपने अनुसार जपना है तो जप लो

1366
01:39:41,440 --> 01:39:45,880
जाओं भाई हम शास्त्रों के अनुसार मत्र

1367
01:39:45,880 --> 01:39:49,960
जपेंगे शास्त्रों शास्त्रों के अनुसार मंत्र जपोगे वो

1368
01:39:49,960 --> 01:39:54,000
ठीक है मगर अगर तुमको हमारी चीज उस मामले में समझ में नहीं

1369
01:39:54,000 --> 01:39:58,000
आ रही है तो हम नहीं तुम्ह कह रहे गलत बोल रहे हैं हम नहीं

1370
01:39:58,000 --> 01:40:04,000
कह रहे जाओ जपो जा कर

1371
01:40:04,560 --> 01:40:08,760
के हमारा प्रश्न ये है क्या प्रश्न

1372
01:40:08,760 --> 01:40:13,400
का उत्तर लेने गए थे अमित दस व ले आए कि नहीं ले आए या उसको छोड़ दे

1373
01:40:13,400 --> 01:40:17,560
एक्चुअली ऐसा था कि मेरा फोन जो सेम सेम का है वो अचानक बीच

1374
01:40:17,560 --> 01:40:21,560
में स् हो जाता है अच्छा इस वजह

1375
01:40:21,560 --> 01:40:25,800
से फिर मुझे आ रही है सेम सेम के मोबाइल है

1376
01:40:25,800 --> 01:40:30,520
तो अच्छा एक्चुअली जो प्रश्न हमारा ये था

1377
01:40:30,520 --> 01:40:34,520
कि क्या आपके गुरुदेव हा जो मंत्र देते हैं वो

1378
01:40:34,520 --> 01:40:39,080
माला से जपने के लिए देते हैं या या माला से बोलकर बो

1379
01:40:39,080 --> 01:40:43,400
जपा जाता है या मन में बोला जाता है वो किस प्रकार

1380
01:40:43,400 --> 01:40:47,680
उच्चारण किया जाता है हमारा प्रश्न यह है देखो प्रश्न

1381
01:40:47,680 --> 01:40:52,320
आपका यह है ऐसा नहीं है कि इसमें विधि शास्त्रोक्त नहीं है

1382
01:40:52,320 --> 01:40:56,440
मगर मैं आपको य बता रहा हूं कि अगर आपको उससे दिक्कत है आप वो

1383
01:40:56,440 --> 01:41:00,560
वाली विधि मत अपनाओ जो आपको सही लग रही है वो अपनाओ हमारे बीच में दूरी किस

1384
01:41:00,560 --> 01:41:04,880
बात को लेकर है कि गीता का ज्ञान देने वाला कृष्ण से अलग

1385
01:41:04,880 --> 01:41:09,320
कोई काल है इस बात को लेकर दूरी है जो व्यक्ति

1386
01:41:09,320 --> 01:41:14,240
अपनी दो दो चार चार तरह की बातें लिख रहा है उसको आप

1387
01:41:14,240 --> 01:41:18,240
में बैठे हुए को परंपरा को आप नहीं मान रहे हो इस

1388
01:41:18,240 --> 01:41:19,840
बात को लेकर के दूरी है

1389
01:41:19,840 --> 01:41:24,040
तो इन बातों को लेकर के कपूर को जलाया सुनो सुनरी बा

1390
01:41:24,040 --> 01:41:28,240
कपूर क्यों जलाया अगर वो ती क्यों जलाई ये क्यों किया वो

1391
01:41:28,240 --> 01:41:33,240
क ऐसे करते रहेंगे हम लोग एक लाख प्रश्न एक लाख उससे भी

1392
01:41:33,240 --> 01:41:37,280
ज्यादा शिवांश भाई उस विषय प हम ईश्वर के ईश्वर वाले

1393
01:41:37,280 --> 01:41:41,280
विषय पर डिबेट होगी ईश्वर वाले विषय

1394
01:41:41,280 --> 01:41:45,520
प डिबेट नहीं है ईश्वर वाले विषय प डिबेट नहीं है डिबेट है गुरु

1395
01:41:45,520 --> 01:41:49,520
प गुरु प है ट और गुरु सेही संबंधित प्रश् चल

1396
01:41:49,520 --> 01:41:53,680
रहे जिस प्रकार हमारे गुरुदेव मंत्र देते हैं वो शास्त्र

1397
01:41:53,680 --> 01:41:57,800
में प्रमाणित है आपरा शस्त्र में प्रमाणित है देवी भागवत से दिखा

1398
01:41:57,800 --> 01:42:01,920
देता हूं आपको गायत्री मंत्र काप प्रण के साथ हां तो वही मैं

1399
01:42:01,920 --> 01:42:06,040
पूछ रहा हूं जो मंत्र आपको दिया जाता है वो मंत्र क्या

1400
01:42:06,040 --> 01:42:10,040
मुख से जप किया जाता है माला से या मन में

1401
01:42:10,040 --> 01:42:14,680
मन उस मंत्र का उच्चारण किया जाता है सबसे परम

1402
01:42:14,680 --> 01:42:18,800
तरीका है मन का कि मन में जप करो और

1403
01:42:18,800 --> 01:42:23,240
शुरुआत में जो सबसे उत्तम होता है कि मन में जप करो

1404
01:42:23,240 --> 01:42:27,560
और मध्यम होता है कि बुदबुदा के करो और शुरुआती

1405
01:42:27,560 --> 01:42:32,280
होता है कि आप जो है इतना बोलो कि केवल खुद ही सुन पाओ

1406
01:42:32,280 --> 01:42:35,640
चिल्ला के तो करना ही नहीं चाहिए मंत्र का जाप

1407
01:42:35,640 --> 01:42:41,640
ठीक है अब बाबूदास जी इसका थोड़ा प्रमाण

1408
01:42:42,480 --> 01:42:48,480
बताइए इसका प्रमाण य

1409
01:42:50,280 --> 01:42:54,320
है मंत्रों को किस प्रकार जपे

1410
01:42:54,320 --> 01:43:00,320
तब पूर्ण मोक्ष को प्राप्त होंगे

1411
01:43:01,640 --> 01:43:05,960
बता इसमें बताया है कि

1412
01:43:05,960 --> 01:43:10,160
मनुष्य के शरीर में चक्र पाए जाते हैं चक्र में

1413
01:43:10,160 --> 01:43:13,560
का होता

1414
01:43:13,560 --> 01:43:17,720
है चक्र की बात बाबूदास चक्रों

1415
01:43:17,720 --> 01:43:21,960
की बात नहीं मंत्र किस तरह जाप किया जाता है

1416
01:43:21,960 --> 01:43:26,000
मंत्र की जा बताया शवास सेको

1417
01:43:26,000 --> 01:43:31,040
बोला है कि अजबा जाप होता है शवास अंदर और बाहर

1418
01:43:31,040 --> 01:43:35,360
ते देखो भाई इसमें तो मैं आपको यही कहूंगा

1419
01:43:35,360 --> 01:43:39,520
कि आपने पुराण पढ़े कहां से पाड़ जी आप कु कहना चाहेंगे इनको

1420
01:43:39,520 --> 01:43:43,800
इस बात प शिवांश भाई वहां ये लिखा हुआ है कि केवल

1421
01:43:43,800 --> 01:43:48,600
उसको तत्वदर्शी संत देगा और उसी से ही पूर्ण मोक्ष होगाय

1422
01:43:48,600 --> 01:43:52,600
बस आप अपने गुरु को तत्वदर्शी सिद्ध कर दो हम आपके अपने गुरु को तत्वदर्शी सिद्ध कर रहे

1423
01:43:52,600 --> 01:43:56,600
हैं तो हमारे गुरुदेव तो सासों वाला मंत्र देते हैं ना तो

1424
01:43:56,600 --> 01:44:01,080
हमारे गुरुदेव भी तो देते हैं ना आपने अभी कहा कि मन में

1425
01:44:01,080 --> 01:44:05,720
जभी तो मैंने आपसे पहले प्रश्न किया था कि आपने कहा मन में जपना चाहिए

1426
01:44:05,720 --> 01:44:09,840
अरे मेरे भाई आप ये बताओ कि जब आप मन से जप

1427
01:44:09,840 --> 01:44:14,160
रहे हो तो व सास के साथ जपा जा रहा है कि नहीं जपा जा रहा है मन में कुछ नहीं चल रहा

1428
01:44:14,160 --> 01:44:18,360
है अब अजपा जाप का मतलब बताइए

1429
01:44:18,360 --> 01:44:23,600
बाबूदास अजज कैसे होता है बास प बता

1430
01:44:23,600 --> 01:44:27,600
अ जाप कैसे होता है अजबा जाप का मतलब होता

1431
01:44:27,600 --> 01:44:28,960
है कि एक मंत्र को

1432
01:44:28,960 --> 01:44:33,160
सांस के द्वारा अंदर लेंगे और एक मंत्र को बा अरे मेरे भाई

1433
01:44:33,160 --> 01:44:38,000
उस समय तुम्हारा मन काम कर रहा होता है कि नहीं कर रहा होता है यह बताओ

1434
01:44:38,000 --> 01:44:42,080
आपका ग्र कहा भाई एक सांस के अंदर एक सांस के बाहर एक

1435
01:44:42,080 --> 01:44:46,680
मंत्र लेंगे दूसरी सांस के अंदर और दूसरे मंत्र को लिया जाएगा

1436
01:44:46,680 --> 01:44:50,880
उसको बोलते पूछ रहा हूं आपका मन उस समय एक्टिव होता है

1437
01:44:50,880 --> 01:44:54,960
या निष्क्रिय होता है उसम मन मन मन में मंत्र नहीं

1438
01:44:54,960 --> 01:44:59,360
चल रहा होता है जब सास के द्वारा वो जाप कर रहे हो जब

1439
01:44:59,360 --> 01:45:03,520
जब सास के द्वारा जाप करते हैं उस मंत्र को हमें

1440
01:45:03,520 --> 01:45:08,000
ध्यान में रखा जाता है और वो मंत्र

1441
01:45:08,000 --> 01:45:12,120
वो ध्यान हो रहा होता है मंत्र के ऊपर अरे

1442
01:45:12,120 --> 01:45:17,040
कहां पर होता है कौन सी इंद्री में ध्यान होता है वो ध्यान की कौन सी इंद्री

1443
01:45:17,040 --> 01:45:21,240
है भैया जिस मंत्र को हम जाप करते हैं

1444
01:45:21,240 --> 01:45:25,960
उस मंत्र के ऊपर ध्यान होता है जैसे हमने कोई मत्र

1445
01:45:25,960 --> 01:45:30,040
न मन सेही तो लगाओगे कान से लगाओगे से लगाओगे सा

1446
01:45:30,040 --> 01:45:35,440
से लगाओगे व ध्यान मन सेही तो लगाओगे

1447
01:45:35,440 --> 01:45:39,600
ब मन के बिना जाप कर लोगे चलो तुम य कह रहे हो तुम मन के बिना जाप

1448
01:45:39,600 --> 01:45:44,280
करते हो हा बोलिए

1449
01:45:44,280 --> 01:45:48,360
इनके गुरुजी जाप नहीं देते हैं

1450
01:45:48,360 --> 01:45:53,160
बाबूराम बाबूराम देखो ज्यादा स्वयं को

1451
01:45:53,160 --> 01:45:57,640
बनने का प्रयास मत करो मैंने अभी क्या पूछा है कि

1452
01:45:57,640 --> 01:46:02,520
आप जो है मन के बिना जाप करते हैं

1453
01:46:02,520 --> 01:46:06,920
हम स्सों वाला मंत्र बात कर रहे हैं मन वाला मत्र बात पू

1454
01:46:06,920 --> 01:46:11,200
क्या मन के बिना जाप करते हैं ध्यान

1455
01:46:11,200 --> 01:46:15,280
लगाया जाता है मंत्र पर मैंने आपसे पूछा क्या आप मन के बिना

1456
01:46:15,280 --> 01:46:19,880
जाप करते हैं बिल्कुल नहीं

1457
01:46:19,880 --> 01:46:23,720
अपना कैमरा ऑन कर लीजिए

1458
01:46:23,720 --> 01:46:28,200
बोलिए तो आप भी मन से ही जाप करते हैं ना सास के

1459
01:46:28,200 --> 01:46:32,200
साथ मन सास के साथ मन के मन से

1460
01:46:32,200 --> 01:46:36,840
जाप किया जाता है हमने अगर सास नहीं बोला

1461
01:46:36,840 --> 01:46:40,920
तो आपने बोला तो सही हो गया हमारा गलत हो गया बिल्कुल गलत है

1462
01:46:40,920 --> 01:46:45,240
आप अगर शवास के साथ नहीं ले रहे हो उसको एक मंत्र शवास से छोड़ा जाता

1463
01:46:45,240 --> 01:46:49,400
है तुमने अगर कहीं से एक जगह से डेफिनेशन य पकड़ ली

1464
01:46:49,400 --> 01:46:53,880
है कि सांस वाली है तो मन वाली गलत कहां हुई उसम ड हुआ

1465
01:46:53,880 --> 01:46:57,880
ना उसमें ऐड हुआ है ना मन गलत हमारा तब होगा

1466
01:46:57,880 --> 01:47:02,640
जब आप यह कह दो कि हम मन के बिना जाप करते

1467
01:47:02,640 --> 01:47:06,720
हैं हमारे गुरु भी यही कहते हैं कि जो आपका जो मंत्र जाप है वो

1468
01:47:06,720 --> 01:47:10,800
सांसों के साथ आना जाना चाहिए बिल्कुल सही है मगर जो

1469
01:47:10,800 --> 01:47:14,840
उत्तम सब सबसे सर्वोत्तम जाप होता है व मन में होता है अ उसको आप

1470
01:47:14,840 --> 01:47:20,840
बुदबुदा भी नहीं सकते किलाना तो दूर की बात

1471
01:47:21,040 --> 01:47:25,200
है और

1472
01:47:25,200 --> 01:47:31,200
बाबूराम भैया जो मंत्रों का जाप किया जाता है ना व ऐसे ही किया जाता है

1473
01:47:31,520 --> 01:47:37,460
इ ऐसे किया जाता है यह कोई न बात नहीं है जो आप हमको बता

1474
01:47:37,460 --> 01:47:41,920
[संगीत] रहे बाबू बाबूराम ने

1475
01:47:41,920 --> 01:47:46,720
बाबू राम ने गरु

1476
01:47:46,720 --> 01:47:52,720
पुरा को नहीं 20 मिनट का मुझे समय दीजिए

1477
01:47:57,640 --> 01:48:03,160
कुछ क्वेश्चन जो बाबू भाई जीत्मा है य किसका अंस

1478
01:48:03,160 --> 01:48:07,600
है क्या बो पा पाड़ जी गुरु के ऊपर बात होगी

1479
01:48:07,600 --> 01:48:11,920
केवल गुरु के गुरु के बात कर मिनट एक मिनट

1480
01:48:11,920 --> 01:48:16,040
गुरु से ही रिलेटेड नाय बात हर बात गुरु से रिलेटेड है गुरु सही बात

1481
01:48:16,040 --> 01:48:19,480
बता रहा है

1482
01:48:19,480 --> 01:48:23,480
नहीं र अपना भक्ति बता ही नहीं तो

1483
01:48:23,480 --> 01:48:27,600
हम पूछ रहे कि वो ज्ञान बता रहे वो सही है कि नहीं आप अपनी लिमिटेशन लगा

1484
01:48:27,600 --> 01:48:31,600
देते हो हर बात और अप भी पूछ सकते हो और उसम

1485
01:48:31,600 --> 01:48:36,680
भी जवाब नहीं होता है ठीक है गुरु

1486
01:48:36,680 --> 01:48:41,280
के वही पूछिए जो पूछ रहे थे आप वही पूछिए जो पूछ रहे

1487
01:48:41,280 --> 01:48:46,040
अच्छा जीवात्मा किसका अंश है ये

1488
01:48:46,040 --> 01:48:50,280
ये परमात्मा की अमित जी आप अपना कैमरा ऑन रखिए

1489
01:48:50,280 --> 01:48:53,080
प्लीज

1490
01:48:53,080 --> 01:48:57,280
तरफ है ना वो चेहरा थोड़ा साफ नहीं आ रहा इसलिए मैंने ऑफ कर रखा है कोई दिक्कत नहीं है चेहरा

1491
01:48:57,280 --> 01:49:01,320
आने दीजिए असाफ आने दीजिए अनुत्तम आने दीजिए अ श्रेष्ठ

1492
01:49:01,320 --> 01:49:05,440
आने दीजिए पर आने दीजिए कौन से परमात्मा य तो बता दीजिए

1493
01:49:05,440 --> 01:49:09,480
एक बार परम अच्छर ब्रह्म कौन कबीर

1494
01:49:09,480 --> 01:49:13,720
देव जी अरे गीता में परम अक्षर ब्रम लिखा हुआ

1495
01:49:13,720 --> 01:49:18,360
है कौन कौन ये परम अक्षर ब्रम कबीर देव जी है

1496
01:49:18,360 --> 01:49:22,920
ना गीता के अनुसार हम बात कर रहे हैं गीता परर बात कर गीता

1497
01:49:22,920 --> 01:49:27,080
करेंगे तो परम अक्षा ब्रम कौन नाम तो बता दीजिए उसका परम

1498
01:49:27,080 --> 01:49:31,920
अक्ष ब्रम पूर्व परमात्मा को बोला गया है आदि पुरुष को स

1499
01:49:31,920 --> 01:49:36,160
अच्छा ठीक है ओके 15 का सात निकालो बार पढ़ो

1500
01:49:36,160 --> 01:49:40,280
तो गीता अध्याय 15 का सात निकालो एक बार अमित

1501
01:49:40,280 --> 01:49:45,310
जी आप अपनी यह ऑन कर लीजिए स्क्रीन प्लीज

1502
01:49:45,310 --> 01:49:51,310
[संगीत]

1503
01:50:03,000 --> 01:50:05,890
जोर से पढ़िए

1504
01:50:05,890 --> 01:50:09,280
[संगीत]

1505
01:50:09,280 --> 01:50:13,520
थोड़ा पढ़िए पढ़ जोर से पढ़िए थोड़ा

1506
01:50:13,520 --> 01:50:19,520
दर्शक भी सुने

1507
01:50:36,160 --> 01:50:39,360
नहीं

1508
01:50:39,360 --> 01:50:44,600
निकला जी जी लिखन रहा लिखन रहा है पढ़िए

1509
01:50:44,600 --> 01:50:49,160
वो मुझे लगता है पहले आश्वास सो रहे हैं इसमें कोई बम तो नहीं है

1510
01:50:49,160 --> 01:50:55,160
तो पहले एक बार मैं पढ़ लू मन में उसके बाद पढ़ूंगा बोल के

1511
01:51:01,840 --> 01:51:05,720
ऐसा कोई बात नहीं

1512
01:51:05,720 --> 01:51:09,880
है आप ही पढ़ के बता दीजिए

1513
01:51:09,880 --> 01:51:14,080
पढ आप पढ़ एक

1514
01:51:14,080 --> 01:51:18,320
बार सातवा का लिखा हुआ है

1515
01:51:18,320 --> 01:51:24,320
हा सतवा में लिखा हुआ है यह देह में

1516
01:51:25,120 --> 01:51:29,440
दे में जीवात्मा मेरा ही अंश और

1517
01:51:29,440 --> 01:51:33,600
वही इन प्रकृति में मन और पांचों इंद्रियों

1518
01:51:33,600 --> 01:51:37,840
को आकर्षण करता है तो यह तो काल का अंश

1519
01:51:37,840 --> 01:51:42,040
हो गया सनातन अं हो गया काल का आत्मा तो यह कहां हो गया व

1520
01:51:42,040 --> 01:51:46,120
परम पिता परमेश्वर परम अक्षर ब्रम का तो परम अक्षर ब्रम का हो गया ना परम

1521
01:51:46,120 --> 01:51:50,440
अक्षर ब्रम कौन है काल नहीं है

1522
01:51:50,440 --> 01:51:55,840
मान य लोग को हटा देते

1523
01:51:55,840 --> 01:52:00,800
हटा दीजिए ह र

1524
01:52:00,800 --> 01:52:05,040
इस विषय पर चर्चा हो रही थी आप विषय क्यों चेंज कर रहे

1525
01:52:05,040 --> 01:52:11,040
चलो ठीक है गुरु के विषय पर जाते चलो ठीक है 15 का

1526
01:52:12,040 --> 01:52:16,040
एक ब्र की मृत्यु दिखा देंगे फिर आप क्या मिनट

1527
01:52:16,040 --> 01:52:20,560
अमित दस जी ब की म दिखा आपको अमित दास जी

1528
01:52:20,560 --> 01:52:24,560
अभी आप दास जी अभी आप एक समय चले

1529
01:52:24,560 --> 01:52:28,840
गए थे प्रश्न चल रहा था वो मानव शरीर को खाता है

1530
01:52:28,840 --> 01:52:33,640
हम हमने दिखा दिया हम

1531
01:52:33,640 --> 01:52:37,760
इसमें आप क्या कहोगे इस पर मेरी कोई

1532
01:52:37,760 --> 01:52:41,840
प्रतिक्रिया नहीं है म आपको नहीं पता

1533
01:52:41,840 --> 01:52:46,080
किसको खाता है मैं बता तो रहा हूं गीता अध्याय 11

1534
01:52:46,080 --> 01:52:50,200
के श्लोक 32 में स्वयं काल भगवान ये कह र खाते हुए मुझे

1535
01:52:50,200 --> 01:52:54,320
दिख नजर आ रहे हैं तो मुझे वो जो नजर आ रहे हैं

1536
01:52:54,320 --> 01:52:58,680
तो जिस प्रकार हमारे गुरु जी ने शब्दों के अनुसार बताया शब्दों

1537
01:52:58,680 --> 01:53:02,960
से बताया था और काल भगवान

1538
01:53:02,960 --> 01:53:07,000
सूक्ष्म शरीर को खाता है अब वो वहां उन्होंने गलत लिख दिया

1539
01:53:07,000 --> 01:53:11,120
या सही लिख दिया मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता

1540
01:53:11,120 --> 01:53:15,200
ये क्या बात हुई ये क्या बात हुई भाई

1541
01:53:15,200 --> 01:53:19,360
आप या तो ये मानो ये बुक से बुक में प्रिंटिंग में गलत हो गया है क्योंकि

1542
01:53:19,360 --> 01:53:23,440
अगर वो सूक्ष्म शरीर को खाता है तो मानव शरीर को नहीं खाता मनुष्य को

1543
01:53:23,440 --> 01:53:27,480
नहीं खाता है ये क्या बात हुई

1544
01:53:27,480 --> 01:53:31,160
ि पड़ी नहीं

1545
01:53:31,160 --> 01:53:35,840
करूंगा बाराम एक मिनट मेरी बात हो रही है अमित दास

1546
01:53:35,840 --> 01:53:39,880
जी बोलिए तो मैं कह रहा हूं आप लोग कह रहे हो

1547
01:53:39,880 --> 01:53:44,160
वो सूक्ष्म शरीर को खाता है ये कह रहे वो मानव शरीर को खाता है

1548
01:53:44,160 --> 01:53:48,320
अच्छा आप लोग ये भी नहीं कह रहे वो खाता है आप लोग य कह रहे उनको क्या

1549
01:53:48,320 --> 01:53:53,360
वो तपत शिला पर नि चोड़ा जाता है उसकी कोई गं खाता है ुना जाता है

1550
01:53:53,360 --> 01:53:57,400
है ना उसकी गं को सूंघता है गं को खा के सेंगे वो

1551
01:53:57,400 --> 01:54:01,680
तो सूंघता है खाता है वो खाता है भाई गंद

1552
01:54:01,680 --> 01:54:05,680
को खाता है बिल्कुल खाता है वो उस गंद को मतलब क्या

1553
01:54:05,680 --> 01:54:09,720
चबा के खाता है अब वो चबा के खाए कैसे भी खाए

1554
01:54:09,720 --> 01:54:14,320
खा रहा है वो देखिए ये गोल मल बात है नहीं

1555
01:54:14,320 --> 01:54:18,640
स्पष्ट बात करिए देखिए जब हम किसी बिना आकार वाली

1556
01:54:18,640 --> 01:54:22,760
ये वायु ज आप ये विषय क्यों बदलना चाह रहे

1557
01:54:22,760 --> 01:54:27,520
यह विषय का बदल रहा है आप छोड़ के चले गए रनेट

1558
01:54:27,520 --> 01:54:31,520
आपका बा इसलिए हमने बाबूराम से दूसरी बात

1559
01:54:31,520 --> 01:54:35,600
करी थी अभी बात हो गई है पा जी कुछ पूछने

1560
01:54:35,600 --> 01:54:39,920
वाले हैं गुरु के विषय में उससे पहले जो आप अधूरा छोड़ गए थे वहा

1561
01:54:39,920 --> 01:54:42,800
मानव शरीर आपने बोला मानव शरीर लिखा है

1562
01:54:42,800 --> 01:54:46,880
तो क्या लगता है आपको मानव शरीर को खाता है कि नहीं खाता है ये

1563
01:54:46,880 --> 01:54:50,880
बात गुरु पर फिर बैठ रही है बिल्कुल बैठ रही है आपका गुरु सही

1564
01:54:50,880 --> 01:54:55,800
बात बोल रहा है नहीं बोल रहा कही हुई बातो को काट तो नहीं रहा है

1565
01:54:55,800 --> 01:55:00,080
गलया हो रही है नहीं हो रही है मैंने यह पूछा है कि क्या

1566
01:55:00,080 --> 01:55:04,280
तत्वदर्शी गुरु होना चाहिए गुरु कैसा होना चाहिए किस प्रकार वो

1567
01:55:04,280 --> 01:55:08,400
मंत्र दे तब वो सिद्ध हो जन की बात

1568
01:55:08,400 --> 01:55:12,520
देखिए अगर गुरु अमित

1569
01:55:12,520 --> 01:55:16,720
जी देखिए अभी हमारी बहुत अच्छी चर्चा हो रही है आगे मैं भगवान से प्रार्थना करूंगा बारबार

1570
01:55:16,720 --> 01:55:21,040
ऐसी चर्चाएं हो अपने बीच में ठीक है जैसे आप बोल रहे हो जैसे

1571
01:55:21,040 --> 01:55:25,120
आप गुरु की प्रमाणिक बात करते समय गुरु की भक्ति को जांच कर रहे

1572
01:55:25,120 --> 01:55:29,120
हो गुरु की भक्ति को जांच कर रहे हो तो मैं भी गुरु की प्रमाणिकता

1573
01:55:29,120 --> 01:55:33,320
को जानने के लिए गुरु के ज्ञान को जांच कर रहा हूं आप भक्ति का ज्ञान

1574
01:55:33,320 --> 01:55:37,320
जांच कर रहे हो मैं ईश्वर के स्वरूप का ज्ञान जांच कर रहा हूं आत्मा के स्वरूप

1575
01:55:37,320 --> 01:55:41,400
का ज्ञान जांच कर रहा हूं उसके लिए ईश्वर पर डिबेट होगी

1576
01:55:41,400 --> 01:55:45,480
तो मेरे भाई ऐसे तो मैं भी कह सकता हूं आपके सवालों पर भक्ति के विषय पर अलग

1577
01:55:45,480 --> 01:55:49,640
से डिबेट होगी मैंने तो नहीं कहा मैंने आपकी बात का उत्तर दिया

1578
01:55:49,640 --> 01:55:53,680
फिर तो कोई विषय बचा ही नहीं मुझे ऐसा लगता है फिर डिबेट में मजा ही नहीं

1579
01:55:53,680 --> 01:55:58,080
आएगा अरे मजा क्यों नहीं आएगा पहली बात तो यय जो

1580
01:55:58,080 --> 01:56:02,160
ये जो क्या कहते मानव शरीर धारी वाली बात है ये आप

1581
01:56:02,160 --> 01:56:06,360
चलती हुई बात कम से कम 15 मिनट चली थी आप छोड़ के गए थे उसको आप पूरा

1582
01:56:06,360 --> 01:56:10,560
करिए फिर वो गुरु का प्रश्न पूछ रहे पहाड़ी जी यह गुरु से संबंधित है यह

1583
01:56:10,560 --> 01:56:14,560
प्रश्न अरे जैसे आपकी भक्ति गुरु से संबंधित है

1584
01:56:14,560 --> 01:56:19,440
ऐसे ही ईश्वरीय ज्ञान भी गुरु से संबंधित है

1585
01:56:19,440 --> 01:56:23,440
गुरु का बताया गया मंत्र और गुरु से संबंधित मैच हो

1586
01:56:23,440 --> 01:56:29,440
रहा

1587
01:56:30,000 --> 01:56:35,200
हैया का स्वरूप गुरु का बताया हु

1588
01:56:35,200 --> 01:56:39,280
सुन तोलो हा जो गुरु

1589
01:56:39,280 --> 01:56:43,320
की बताई हुई भक्ति से प्रमाणित होगा कि वह गुरु जो मंत्र बता रहा है

1590
01:56:43,320 --> 01:56:47,560
कि सही बता रहा है कि नहीं बता रहा है फिर गुरु जो ईश्वर बता रहा

1591
01:56:47,560 --> 01:56:53,560
है उस पर अलग से बात होगी

1592
01:56:55,040 --> 01:56:59,280
अरे मेरे भाई आपने कहा कि गुरु की बताई हुई भक्ति

1593
01:56:59,280 --> 01:57:03,960
मैं कह रहा हूं गुरु का बताया हुआ आत्मा का स्वरूप

1594
01:57:03,960 --> 01:57:07,960
देखो वो छोड़ दो मैं अलग से कोई विषय तो खोद नहीं रहा हूं यह विषय चल चुका है

1595
01:57:07,960 --> 01:57:11,960
ठीक है इस विषय में बात इस पर आ गई थी मानव शरीर को खाता है

1596
01:57:11,960 --> 01:57:16,360
आप चौक गए थे मानव शरीर लिखा है हमने दिखा दिया मानव शरीर लिखा है

1597
01:57:16,360 --> 01:57:20,360
अब आप हम क्या करें मुझे मुझे यह

1598
01:57:20,360 --> 01:57:24,520
पता है कि आप विषय वो बदलेंगे नहीं उस पर ही रुके रह जाएंगे

1599
01:57:24,520 --> 01:57:28,520
और लगता है एक दो घंटे इसी पर चर्चा होती रहेगी चलो इसी प कंटिन्यू

1600
01:57:28,520 --> 01:57:32,800
करते हैं बोलिए गीता अध्याय 11 के 32 में जब वो स्वयं खाता

1601
01:57:32,800 --> 01:57:37,360
हुआ नजर आ रहा है उसको क्या करें उसे फाड़ दे नहीं फड़ो

1602
01:57:37,360 --> 01:57:41,440
तो नहीं फड़ो तो भगवान वहां पर दिखा रहे

1603
01:57:41,440 --> 01:57:45,680
हैं कि सब जो जितने भी जीव जंतु है उनका लय मुझ में होता है

1604
01:57:45,680 --> 01:57:49,760
इसलिए वो अपना समार वाला रूप दिखा रहे हैं हां तो वो

1605
01:57:49,760 --> 01:57:53,800
सत्य है ना हां है सत्य तो हमारे गुरुदेव

1606
01:57:53,800 --> 01:57:57,840
ने वहां लिख दिया कि वो असत्य है आप कह रहे हो कि

1607
01:57:57,840 --> 01:58:02,120
उसके बाद जो गुरु जैसे मैंने आपको अर्थ बताया ना समझाने

1608
01:58:02,120 --> 01:58:06,160
के लिए वो क्या सीन है जब आप अर्थ बता रहे हो तब भी आप ये कह रहे

1609
01:58:06,160 --> 01:58:10,400
हो कि वो मानव शरीर को खाता है अर्थ में आपको बात को स्पष्ट

1610
01:58:10,400 --> 01:58:14,440
करना है खोलना है बात को आप वहां पर लिख रहे हो मानव शरीर को खाता

1611
01:58:14,440 --> 01:58:18,440
है मानव देह को खाता है मैं वही तो कह रहा हूं गीता अध्याय 11 के

1612
01:58:18,440 --> 01:58:22,600
32 में वो मानव शरीर खाता हुआ दिख रहा है शरीर को ही खा रहा है

1613
01:58:22,600 --> 01:58:28,120
अरे मेरे भाई मैं नहीं दिख रहा

1614
01:58:28,120 --> 01:58:32,240
मैंने नहीं दिख रहा वो शरीर के सहित खाता हुआ दिख रहा है मुझे

1615
01:58:32,240 --> 01:58:36,360
मैंने वहा पर आपको एक बात बोली है अमस जब कोई लोक

1616
01:58:36,360 --> 01:58:40,760
है उसका भावार्थ जब करेगा गुरु तो आपको उसका भावार्थ बताएगा

1617
01:58:40,760 --> 01:58:45,040
ना अब आपने मुझसे पूछा मैंने भावार्थ बता दिया

1618
01:58:45,040 --> 01:58:49,520
मगर आपने जो भावार्थ है उसम लिखा है कि शरीर को खाता है

1619
01:58:49,520 --> 01:58:53,760
व भावार्थ हा वही भावार्थ

1620
01:58:53,760 --> 01:58:58,040
आ रहा दिहारी बात सु आखों

1621
01:58:58,040 --> 01:59:02,280
से दिखने वालीज

1622
01:59:02,280 --> 01:59:07,280
गहा बा ठीक

1623
01:59:07,280 --> 01:59:11,480
ठीक बाब भा रु अ एक बात बताओ जब गीता में लिखा

1624
01:59:11,480 --> 01:59:15,560
हुआ है तो फिर अलग से लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है फिर तो कोई किताब

1625
01:59:15,560 --> 01:59:21,560
जब उसम लि फिर क्यों लिख रहे

1626
01:59:22,440 --> 01:59:26,440
व वहां प लिख दिया तो गलत है अरे मैं बोल तो रहा हूं

1627
01:59:26,440 --> 01:59:31,000
जब आप भावार्थ जब आप समझा रहे हो तब तो आपको असली बात लिखनी होगी ना

1628
01:59:31,000 --> 01:59:35,040
देखो भैया जी मैं वही बता रहा हूं जैसे आंखों से जो चीज दिख रही है

1629
01:59:35,040 --> 01:59:39,160
आप उसे कह रहे हैं कि वो गलत है और जो लिखा जा रहा है उसे कह र है ये भी गलत

1630
01:59:39,160 --> 01:59:43,480
है क्योंकि ये गुरु हमारे क्योंकि गुरु वो है

1631
01:59:43,480 --> 01:59:47,720
जो चीज को हम समझ नहीं पा रहे आंखों से देखते हुए वो हमें तत्व

1632
01:59:47,720 --> 01:59:51,880
दर्शन दिखाएगा वो हमें तत्व दर्शन देगा तत्व ज्ञान देगा क्योंकि आंखों

1633
01:59:51,880 --> 01:59:56,160
से दिखने वाली चीज तो भ्रमित करने वाली है काल हमें ब्रह्म वो आपके अनुसार

1634
01:59:56,160 --> 02:00:00,160
जो काल है वो हमको हर घड़ी बेवकूफ बना रहा है तो तत् दर् वो

1635
02:00:00,160 --> 02:00:04,840
है जो हमें तत्व ज्ञान देगा तो तत्व ज्ञान ये दे रहा है जो हम आखों से रहा है

1636
02:00:04,840 --> 02:00:09,480
अच्छा मुझे मुझे यह बताओ कि वो भ्रमित कैसे कैसे भ्रमित कर रहा है उस समय

1637
02:00:09,480 --> 02:00:13,640
कुल मिलाकर एक मिनट एक मिनट मैं आपकी बात

1638
02:00:13,640 --> 02:00:17,760
का जवाब आपके ही शब्दों में दे दूं मैं आपकी बात समझ गया

1639
02:00:17,760 --> 02:00:22,080
एक तरीके से यहां पर ये बात भी भ्रामक है ये बात भी

1640
02:00:22,080 --> 02:00:26,080
नहीं है हम

1641
02:00:26,080 --> 02:00:30,520
बोलो मैंने यह पूछा है आपसे कि काल ब्रम

1642
02:00:30,520 --> 02:00:34,520
वहां पे अर्जुन को गलत दिख रहा है भीष्म खाते हुए वो गलत दिख रहे हैं

1643
02:00:34,520 --> 02:00:39,040
ऐसे गलत कैसे है आप ये बताइए मैं बोल तो रहा हूं कि उसका वास्तु

1644
02:00:39,040 --> 02:00:43,560
करते है कि भगवान भगवान ये वहां पर दिखा रहे हैं कि मैं ही सब का शृंगार

1645
02:00:43,560 --> 02:00:47,800
करता हूं वहां प वो ये दिखा रहे हैं हम और

1646
02:00:47,800 --> 02:00:51,960
अर्जुन को दिखाई दे रहा है कि बम को आप चबा रहे हैं द्रोणाचार्य को आप जबा रहे हैं

1647
02:00:51,960 --> 02:00:55,960
जबक द्रोणाचार्य के साथ तो बाद में युद्ध हुआ तो अर्जुन को ये

1648
02:00:55,960 --> 02:01:00,120
समझ में आ रहा है उस समय उस समय अर्जुन कोय समझ में आ रहा है कि आपके दांतो में द्रोणाचार्य

1649
02:01:00,120 --> 02:01:04,280
पिस रहे हैं तो अर्जुन को वो लीला जो दिख रही है वो गलत दिख रही

1650
02:01:04,280 --> 02:01:08,360
है उस समय द्रोणाचार्य वास्तव में नहीं पिस रहे थे भगवान ने उसको एक आशय बताया

1651
02:01:08,360 --> 02:01:12,480
था कि सब प्राणियों का जो लय है वो मुझ में होता है

1652
02:01:12,480 --> 02:01:16,600
सबका समार करता मैं हूं अर्जुन को जो दिखाई दिया था

1653
02:01:16,600 --> 02:01:20,920
वो अर्जुन को गलत दिखाई दिया ना क्योंकि उसके बाद द्रोणाचार्य से उसने युद्ध

1654
02:01:20,920 --> 02:01:25,120
किया तो वही पूछना चाह रहा हूं व भगवान अर्जुन

1655
02:01:25,120 --> 02:01:29,320
को गलत क्यों दिखा रहे हैं गलत क्यों दिखा रहे हैं मैं य भगवान

1656
02:01:29,320 --> 02:01:34,600
ने उसको सही दिखाया देखो भगवा अब देखो तुमने

1657
02:01:34,600 --> 02:01:40,600
ब गल सुनो भगवान

1658
02:01:41,240 --> 02:01:45,880
गम इसका उत्तर लेलो भगवान गलत दिखा रहे भगवान

1659
02:01:45,880 --> 02:01:50,280
गलत दिखाने वाले काल को क्यों बना रहे हैं

1660
02:01:50,280 --> 02:01:54,560
बोलिए क्यों बना बताओ वो तो क्या

1661
02:01:54,560 --> 02:01:59,200
दोबारा से पूछना हा दोबारा सुन नहीं पाया

1662
02:01:59,200 --> 02:02:03,520
कबीर ने काल को क्यों बनाया कबीर ने

1663
02:02:03,520 --> 02:02:07,600
आप विषय से क्यों भटक भटका रहे य ब विषय से

1664
02:02:07,600 --> 02:02:13,600
अटक रहे अपना करो क्यों कर रहे भवान कोई

1665
02:02:16,320 --> 02:02:20,840
नहीं ब की उत्पति दिखा द भाई जान आपसे

1666
02:02:20,840 --> 02:02:25,520
पूछ रहा काल को क्यों बना रहे हैं भटकाने के लिए

1667
02:02:25,520 --> 02:02:29,680
वो कैसे बना रहे हैं वो विषय अलग है मैं ब्रह्म की उत्पत्ति दिखा दल

1668
02:02:29,680 --> 02:02:34,120
तो मुझे इसका जवाब दे दो यहां पर जो य बात लिखी है सच है कि झूठ

1669
02:02:34,120 --> 02:02:38,960
है जो सच आंखों से गीता में देखा जा रहा है वो सच है

1670
02:02:38,960 --> 02:02:42,960
तो यानी की जो अर्जुन समझ नहीं पा रहा था यह भी वो बिन समझी

1671
02:02:42,960 --> 02:02:46,960
हुई बात है यह वास्तविक बात नहीं है जनता

1672
02:02:46,960 --> 02:02:51,120
को समझाने के लिए लिखा हुआ है जनता को समने समने

1673
02:02:51,120 --> 02:02:55,560
के लिए क्या समझाने के लिए मेरे हमारे गुरु जी ने

1674
02:02:55,560 --> 02:02:59,600
यह बताया है कि काल ब्रह्म सूक्ष्म

1675
02:02:59,600 --> 02:03:03,600
शरीर को खाता है और आपने वहां यह ले लिया कि

1676
02:03:03,600 --> 02:03:07,840
जो पांच तत्व के शरीर को खा रहा है तो यहां सूक्ष्म

1677
02:03:07,840 --> 02:03:12,160
शरीर लिखा है कि मनुष्य का शरीर लिखा है हा वो बाद में

1678
02:03:12,160 --> 02:03:16,280
गुरु जी ने यह भी उनकी तरफ से यह भी बोला गया था

1679
02:03:16,280 --> 02:03:20,280
कुछ चीज वहा गलत हो चुकी है ये तुम्हारी बात पर भरोसा कैसे

1680
02:03:20,280 --> 02:03:24,680
करें उन्होंने य भी बोला है दरा बोलो क्या बोले क्या बोले

1681
02:03:24,680 --> 02:03:28,960
गरिमा गरिमा गरिमा क्या बोलते कौन सी गीता है

1682
02:03:28,960 --> 02:03:31,680
बादास जी

1683
02:03:31,680 --> 02:03:35,720
गीता गमा नहीं नहीं जो मोटी बुक आती है ना अपनी क्या

1684
02:03:35,720 --> 02:03:39,040
क्या नाम है उसका

1685
02:03:39,040 --> 02:03:43,640
गरी गैरी नज

1686
02:03:43,640 --> 02:03:48,200
हा अभी आपने क्या बोला वो कुछ चीज गलत हो गई है उसम गरमा

1687
02:03:48,200 --> 02:03:50,720
गीता

1688
02:03:50,720 --> 02:03:56,720
की एक एक

1689
02:04:00,600 --> 02:04:05,440
मिनट हेलो चलिए पहाड़ी जी आप

1690
02:04:05,440 --> 02:04:11,440
पूछिए अमित जी आएंगे तो हम अपनी बात कंटिन्यू करेंगे

1691
02:04:12,040 --> 02:04:16,400
हम मैं पूछ लू अमित जी अमित जी वो पहाड़ी

1692
02:04:16,400 --> 02:04:21,720
जी मैं पूछ आपकी आवाज नहीं आ रही पहाड़ी जी

1693
02:04:21,720 --> 02:04:25,840
प्रश्न करना था ओके ओके ठीक

1694
02:04:25,840 --> 02:04:29,920
है गुरु पे क्वेश्चन कर रहे हैं जैसे मैं गीता से मैं इधर उधर नहीं

1695
02:04:29,920 --> 02:04:34,640
जाऊंगा एक बात क्लियर कर दूं जाने से पहले अमित दास ने ये कहा है

1696
02:04:34,640 --> 02:04:39,040
कि जो है कुछ चीजें इसमें गलत गलत हो गई है गरमा

1697
02:04:39,040 --> 02:04:43,280
गीता की में ये कहा है उसने ठीक है हम लोग बात करेंगे अब आप अपनी बात कंटिन्यू

1698
02:04:43,280 --> 02:04:47,440
करिए वो गलत नहीं हुआ है वो जनता को समझाने के लिए लिखा हुआ

1699
02:04:47,440 --> 02:04:51,760
है अरे आपके अमित दास ने बोला है अभी हम लोग बात करेंगे अभी उस

1700
02:04:51,760 --> 02:04:55,920
आप मत सोचो आप उनसे बात करो पहाड़ी 434

1701
02:04:55,920 --> 02:04:59,920
और 15 एक से लेकर चार तक तुम तत्वदर्शी संत सिद्ध सिद्ध करते

1702
02:04:59,920 --> 02:05:04,840
हो किसको रामपाल जी को तो 434 बार पढ़िए

1703
02:05:04,840 --> 02:05:09,240
एक बार आप पढ़िए 434 हा 434

1704
02:05:09,240 --> 02:05:13,600
पढ़िए वही से तो सिद्ध करते हो ना आप उनको तत्वदर्शी आपका

1705
02:05:13,600 --> 02:05:17,760
15 के सात का उत्तर दे दूं पहले हां बोलिए दे दिए

1706
02:05:17,760 --> 02:05:23,760
उत्तर चलो दो

1707
02:05:23,880 --> 02:05:28,680
15 के साथ इस देह में सनातन

1708
02:05:28,680 --> 02:05:32,800
जीवा देह में सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है और

1709
02:05:32,800 --> 02:05:37,840
वही इस प्रकृति में स्थित पाच इंद्रियों को आकर्षण करता

1710
02:05:37,840 --> 02:05:41,960
है यहां पर क्या है कि उसने बोल रहा है कि

1711
02:05:41,960 --> 02:05:44,280
मेरा

1712
02:05:44,280 --> 02:05:48,040
कौन जीत्मा

1713
02:05:48,040 --> 02:05:52,120
यह सनातन जीवात्मा य सनातन

1714
02:05:52,120 --> 02:05:57,120
जीवात्मा मेरा ही अंश है

1715
02:05:57,120 --> 02:06:01,480
और प्रकृति में स्थित मन और पांच इंद्रियों को आकर्षण करता है

1716
02:06:01,480 --> 02:06:05,560
अपने अंदर आकर्षित करता है हा इसने 14

1717
02:06:05,560 --> 02:06:09,560
के तीन चार पा में बताया है कि अर्जुन प्रकृति से उपन

1718
02:06:09,560 --> 02:06:14,080
तीन गुण अविनाशी जीवात्मा को बा र संपूर्ण

1719
02:06:14,080 --> 02:06:18,200
जितने भी जीवधारी है सभी को तुम प्रकृति से उत्पन्न जान और

1720
02:06:18,200 --> 02:06:23,840
प्रकृति गर्भधान करने वाली माता है और मैं बीच को स्थापित करने वाला

1721
02:06:23,840 --> 02:06:28,120
समझ रहे हैं प्रकृति से तो उत्पन्न होते हैं सर सारे जितने भी

1722
02:06:28,120 --> 02:06:32,640
ये जीव प्राणी है जितने भी हम आप जितने भी ये

1723
02:06:32,640 --> 02:06:36,720
फल फ्रूट हैय जितने भी संसार में प्रकृति से उत्पन्न होते हैं इसमें वो

1724
02:06:36,720 --> 02:06:39,080
जीवात्मा का क्या लेना देना

1725
02:06:39,080 --> 02:06:43,120
बता रहे हैं तो यहां क्या है कि यहां पर प्रकृति

1726
02:06:43,120 --> 02:06:47,600
के द्वारा जितने भी जीव सब उत्पन्न हो रहे प्रकृति में

1727
02:06:47,600 --> 02:06:53,200
यहां पर वहां पर वहां पर जी नहीं लिखा है

1728
02:06:53,200 --> 02:06:57,720
आप समझे जीवात्मा जीवात्मा अलग

1729
02:06:57,720 --> 02:07:01,720
है ठीक है शरीर अलग है जी वहा शरीर

1730
02:07:01,720 --> 02:07:05,800
की बात हो रही है भूत प्राणियों की बात हो

1731
02:07:05,800 --> 02:07:10,400
रही है वहा भूत जीव की बात नहीं हो रही व

1732
02:07:10,400 --> 02:07:14,680
भूत माने प्राणी होता है होती है शरीर शरीर

1733
02:07:14,680 --> 02:07:18,720
शरीर की उपरे वो कौन सी बात रह

1734
02:07:18,720 --> 02:07:21,920
गई थी क्या नाम है

1735
02:07:21,920 --> 02:07:25,920
इनकी बात हो जाने दो अमित जी इनकी बात हो जाने दो फिर हम आप बात कर लेंगे और

1736
02:07:25,920 --> 02:07:30,000
आज सेशन आज का समाप्त करेंगे दो ढाई घंटे हो जाएंगे फिर हम अगला

1737
02:07:30,000 --> 02:07:34,080
रखेंगे है ना बाबू भाई आप लोग बात कर लो फिर मैं अमित जी से बात चल

1738
02:07:34,080 --> 02:07:38,080
रही थी कर लूंगा बा हा क्या बोल रहे

1739
02:07:38,080 --> 02:07:42,880
हो बोलो बोलो य [संगीत] बता

1740
02:07:42,880 --> 02:07:47,080
वहा से सतलोक से ज

1741
02:07:47,080 --> 02:07:52,040
प्रकृति को य नि किया गया

1742
02:07:52,040 --> 02:07:58,040
14 के च में 14 के चार में क्या लिखा पहले अच्छे से पढ़ो एक बार क्या लिखा है पढ़ो

1743
02:08:00,400 --> 02:08:04,640
पहले व पर क्या आत्मा लिखा है क्या

1744
02:08:04,640 --> 02:08:10,640
पढ़ रहा

1745
02:08:21,560 --> 02:08:25,960
से पढ़ रहे तीन से बोले थे हम तीन चार पाच तीन से पढ़

1746
02:08:25,960 --> 02:08:30,000
रहे हे अ हे अर्जुन महत्

1747
02:08:30,000 --> 02:08:30,500
ब्रह्मा

1748
02:08:30,400 --> 02:08:34,480
रूप मूल प्रकृति संपूर्ण भूतो की यो है

1749
02:08:34,480 --> 02:08:38,760
अर्थात गर्भधान का स्थान है

1750
02:08:38,760 --> 02:08:42,800
और मैं मैं उस योनि में

1751
02:08:42,800 --> 02:08:46,840
चेतन समुदाय रूप गर्भ को स्थापन करता हूं

1752
02:08:46,840 --> 02:08:49,880
जड़ चेतन जड़ चेतन के संयोग से सब

1753
02:08:49,880 --> 02:08:54,080
भूतो की उत्पत्ति होती है भूत

1754
02:08:54,080 --> 02:08:58,080
भूत प्र सुनिए प्रकृति से भूत उत्पन्न

1755
02:08:58,080 --> 02:09:00,920
हो रहे है आत्मा

1756
02:09:00,920 --> 02:09:03,480
नहीं

1757
02:09:03,480 --> 02:09:07,600
रहे आत्मा प बात हो रही है उनका सवाल आमा य

1758
02:09:07,600 --> 02:09:11,920
बात गुरु पर जा रही है या कहीं और जा रही है बाबूराम जी नेहा

1759
02:09:11,920 --> 02:09:16,200
है य बाबूराम जी ने कहा है व विषय छूट गया था उसको पूरा करना है

1760
02:09:16,200 --> 02:09:21,840
य बाबूराम जी ने कहा है बाबूराम जी बात गुरु पर होना चाहिए

1761
02:09:21,840 --> 02:09:25,880
देखिए चल रही है तो चलने दीजिए नहीं तो आप कह दीजिए तो हटा देते इस बात

1762
02:09:25,880 --> 02:09:28,680
को छोड़

1763
02:09:28,680 --> 02:09:32,960
देते बोलिए छोड़ना है

1764
02:09:32,960 --> 02:09:37,240
अमित दास जी आप चौथा

1765
02:09:37,240 --> 02:09:41,880
पढ़िए उस विषय पर हम कल बात करेंगे टीआर पाड़ी जी

1766
02:09:41,880 --> 02:09:47,160
चलो ठीक है चलो चलो ठीक है श्वर वाले विषय पर खूब चर्चा

1767
02:09:47,160 --> 02:09:51,400
करेंगे जी अमित दास जी आपसे अभी बात हो रही थी आपने कहा था कि

1768
02:09:51,400 --> 02:09:55,880
गीता गरिमा गीता की में कुछ चीजें गलत छप गई है आपके गुरु ने कहा था

1769
02:09:55,880 --> 02:09:59,960
वो वो गलती के वस मुंह से निकल गया होगा लेकिन उसके

1770
02:09:59,960 --> 02:10:05,840
लिए माफी चाहता हूं गलत हो गया मेरे मुख [संगीत]

1771
02:10:05,840 --> 02:10:09,600
से

1772
02:10:09,600 --> 02:10:13,680
मैं जहां पर गुरुदेव ने लिखा है वह बिल्कुल सत्य

1773
02:10:13,680 --> 02:10:18,000
लिखा है इसमें कोई दोराई वाली बात नहीं

1774
02:10:18,000 --> 02:10:22,240
नहीं नहीं यह जो लाइन है यह सच है कि झूठ है व मानव शरीर को खाता

1775
02:10:22,240 --> 02:10:26,440
है कि नहीं खाता है बिल्कुल सूक्ष्म शरीर को खाता

1776
02:10:26,440 --> 02:10:30,680
है वो सूक्ष्म शरीर नहीं मानव शरीर मनुष्य

1777
02:10:30,680 --> 02:10:34,720
देह धारी अब अब एक बात बताइए मुझे गीता

1778
02:10:34,720 --> 02:10:38,800
अध्याय 11 के 32 में जो देदारी शरीर खाते हुए दिख

1779
02:10:38,800 --> 02:10:42,960
रहा है तो उसे मैं सूक्ष्म शरीर समझू या डायरेक्ट शरीर खाते

1780
02:10:42,960 --> 02:10:47,400
हुए समझू कैसा क्या समे आप मुझे एक बात बताइए भाई साहब तत्वदर्शी क्या

1781
02:10:47,400 --> 02:10:51,480
करता है ज्ञान देते हैं तर्शी का आवश्यकता क्या

1782
02:10:51,480 --> 02:10:55,520
है ज्ञान देते हैं ज्ञान तो ये है

1783
02:10:55,520 --> 02:11:01,280
लिखा हुआ है गीता में फिर वो क्या करता है

1784
02:11:01,280 --> 02:11:05,360
वो परमाता तव का ज्ञान देते हैं अरे वो

1785
02:11:05,360 --> 02:11:10,160
भी तो शास्त्र में ही लिखा है अपने मन से देते हैं कि शास्त्र से देते हैं

1786
02:11:10,160 --> 02:11:14,160
बता बता दे रहे हैं जैसे एग्जांपल लेते हैं यहां से हमें

1787
02:11:14,160 --> 02:11:18,320
दिल्ली जाना है तो दिल्ली तक का रास्ता पुस्तक में लिखा है कि ऐसे ऐसे वहां पर चले

1788
02:11:18,320 --> 02:11:22,360
जाओगे लेकिन हो सकता है रास्ते में चोर लगेंगे कोई लूटपाट करने वाला

1789
02:11:22,360 --> 02:11:26,360
लगे कुछ भी लग सकता है तो हमें यहां से एक रास्ते में पार करने

1790
02:11:26,360 --> 02:11:30,680
वाला वहा तक छोड़ने वाला एक व्यक्ति चाहिए तो वह सहायक व्यक्ति हम

1791
02:11:30,680 --> 02:11:34,760
वहा तक लेकर छोड़ देगा तो हम आराम से पहुच जाएंगे मैं

1792
02:11:34,760 --> 02:11:39,120
आपको यह पूछ रहा हूं क्या तत्वदर्शी का काम यह नहीं होता है कि शास्त्रों

1793
02:11:39,120 --> 02:11:43,560
का जो सही अर्थ है वह हमें बताए

1794
02:11:43,560 --> 02:11:48,080
बिल्कुल बिल्कुल होता है बिल्कुल तो इसमें तर्शी

1795
02:11:48,080 --> 02:11:51,680
सही अर्थ बता रहे हैं क्या

1796
02:11:51,680 --> 02:11:55,680
सही अर्थ बता रहे बकल सही अ बिल्कुल

1797
02:11:55,680 --> 02:12:00,640
सही अर्थ बता यानी की ये माना जाए कि वो जो है

1798
02:12:00,640 --> 02:12:05,080
है मानव शरीर प्राणी मानव शरीर को ता है

1799
02:12:05,080 --> 02:12:09,320
मैं एक चीज बीच में बोलूंगा जो बारबार आप हसते तो अच्छी नहीं है बारबार

1800
02:12:09,320 --> 02:12:13,400
हसना मजाक उड़ाना देखिए ये गुरुजी के लिए नहीं हस रहा ह आपकी लीपा पोटी

1801
02:12:13,400 --> 02:12:16,360
के लिए हस रहा हूं अच्छा हमारी

1802
02:12:16,360 --> 02:12:22,360
जैसे वहा लिखा हुआ है शने

1803
02:12:25,480 --> 02:12:30,520
अभी आपने माफी मांगी है मिनट पहले माफी मांगने के तेवर नहीं होते

1804
02:12:30,520 --> 02:12:35,160
हम माफी मांगी किससे मांगी थी माफी

1805
02:12:35,160 --> 02:12:40,120
किस चीज की अभी आपने कहा था मेरे मुंह से गलत निकल गया

1806
02:12:40,120 --> 02:12:44,160
हां तो उस विषय जो विषय मैंने गलत

1807
02:12:44,160 --> 02:12:48,280
बोला था उसके लिए अम दास

1808
02:12:48,280 --> 02:12:52,480
जी मेरे प्यारे भाई मेरे छोटे भाई अभी आपने माफी किससे

1809
02:12:52,480 --> 02:12:57,040
मांगी

1810
02:12:57,040 --> 02:13:01,040
थी उसके लिए किसे

1811
02:13:01,040 --> 02:13:05,040
मांगी ी किससे मांगी थी व बता

1812
02:13:05,040 --> 02:13:09,280
तो र मनुष गीता में जब लिखा हुआ है उसके मुख मेंस

1813
02:13:09,280 --> 02:13:13,280
सबको खा र मनुष जैसे सबको दिख रहे हैं तो उसी का तो अर्थ बताता

1814
02:13:13,280 --> 02:13:19,280
है तत्वदर्शी

1815
02:13:21,080 --> 02:13:25,160
बया है वहां पे शरीर को रहा है सामने

1816
02:13:25,160 --> 02:13:29,240
दिख रहा है हमें पड़ी जी आप इनकी बात से संतुष्ट है क्या यह

1817
02:13:29,240 --> 02:13:33,280
जो बोलना है नहीं

1818
02:13:33,280 --> 02:13:37,720
संतुष्ट इसलिए नहीं होंगे क्योंकि जो अर्जुन को जो चमत्कारी जो आंखें

1819
02:13:37,720 --> 02:13:41,840
दी थी व उसके कारण वो चीजें वो देख पा रहे थे और क्या युद्ध

1820
02:13:41,840 --> 02:13:45,880
होने के बाद क्या जते शरीर थे वो क्या काल ने खा लिए थे

1821
02:13:45,880 --> 02:13:50,040
उस समय यह भी बोला था कि हे अर्जुन मैं इन सबको तो पहले ही मार चुका

1822
02:13:50,040 --> 02:13:54,040
हूं अब तू निमि बन जा हा बस जस्ट ये क्या था

1823
02:13:54,040 --> 02:13:58,160
उनको एक भविष्य दिखाया था किय तेरे बिना भी मारे जाएंगे एक निश्चित समय

1824
02:13:58,160 --> 02:14:03,320
काल के बाद य इनका नष्ट होना जरूरी है नष्ट

1825
02:14:03,320 --> 02:14:08,160
होंगे कर बाब भा को मट कर

1826
02:14:08,160 --> 02:14:12,680
देख चीज है ये हो सकता है किताबों में गलंग

1827
02:14:12,680 --> 02:14:16,800
हो गई हो सुनो अम सुनो अमित दस

1828
02:14:16,800 --> 02:14:21,240
ऐसा हमें भी मालूम पड़ा है कि अभी हम लोग कल परसों में इस लाइव स्ट्रीम करने

1829
02:14:21,240 --> 02:14:25,440
वाले हैं हमारा जो दूसरा चैनल है विग्रहवां धर्म पर उसका लिंक

1830
02:14:25,440 --> 02:14:29,480
इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में दे दिया जाएगा हम लोग उस पर लाइव स्ट्रीम करेंगे

1831
02:14:29,480 --> 02:14:33,480
उस व्यक्ति के साथ जो यह बताएगा कि रामपाल दास जी के जेल जाने के बाद

1832
02:14:33,480 --> 02:14:37,680
उनकी ज्ञान गंगा की किताब इत्यादि में कौन-कौन से परिवर्तन

1833
02:14:37,680 --> 02:14:41,720
किए जा रहे हैं ठीक है यह बात तो है मगर अभी मैं

1834
02:14:41,720 --> 02:14:45,800
एक बात पूछ रहा हूं देखो एक बहुत साधारण सी बात है कि तत्वदर्शी

1835
02:14:45,800 --> 02:14:49,840
वो है जो हमको जो हमें ज्ञान समझ में नहीं आ

1836
02:14:49,840 --> 02:14:54,760
रहे हैं व वो रियल जो है उसका अर्थ भावार्थ वो हमें बताए

1837
02:14:54,760 --> 02:14:59,040
मगर यदि वो भावार्थ में भी वही लिख देगा जो हमें वहां दिखाई दे रहा है

1838
02:14:59,040 --> 02:15:03,320
तो फिर य तत्वदर्शी की आवश्यकता क्या रही समझ रहे हो मेरी बात

1839
02:15:03,320 --> 02:15:07,360
तो इसको आपको देखना चाहिए कि गलत छप गया है आपकी टीम से गलती हो रही

1840
02:15:07,360 --> 02:15:11,400
है यहां पर और यह एक बार नहीं हुआ है चलो एक जगह हो गया हो कई बार हो

1841
02:15:11,400 --> 02:15:16,000
रहा

1842
02:15:16,000 --> 02:15:21,680
है आप गुरु वाले विषय को क्यों तोड़ना चाहते हैं

1843
02:15:21,680 --> 02:15:25,800
गुरु गुरु के बारे में ही तो बोल रहा हूं कि गुरु अगर वो सक्ष आप देखो

1844
02:15:25,800 --> 02:15:29,960
सबसे पहले चीज क्या है देखो आपकी बातें बता आपने अभी क्षमा मांग ली वो

1845
02:15:29,960 --> 02:15:33,960
ठीक है बाबू भाई ने शुरू में कहा नहीं मनुष्य को नहीं खाता वो मनुष्य को नहीं

1846
02:15:33,960 --> 02:15:38,080
खाता वो उसके बाद हमने दिखा दिया मनुष्य को खा रहे हैं अब आप कह

1847
02:15:38,080 --> 02:15:42,120
रहे हो कि वो चीज सही है गीता में लिखी है अरे भाई गीता

1848
02:15:42,120 --> 02:15:46,240
में लिखी है तो तुम तो ये कहो ना कि अगर वो लिखी है तो ठीक है गीता

1849
02:15:46,240 --> 02:15:50,320
में लिखी है वो गलत हमारा गुरु सही कहता है तुम तो यह कहोगे ना क्योंकि तुम

1850
02:15:50,320 --> 02:15:54,400
तो उस बात को मानते नहीं हो जो चीज तुम्हारे गुरु से मैच नहीं खाती

1851
02:15:54,400 --> 02:15:58,400
तुम तो भले ही तुम तो ये बात मत कहो कि नहीं गीता में लिखा

1852
02:15:58,400 --> 02:16:03,880
तो मानेंगे गीता के कई चीजों को तुम प्रमाण नहीं मानते हो

1853
02:16:03,880 --> 02:16:08,000
हमार इसी हमारे गुरु जी ने सत्संग में कई बार बताए है मानव

1854
02:16:08,000 --> 02:16:12,000
शरीर धारी प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को व दुर्गंध गान कर खाता है

1855
02:16:12,000 --> 02:16:16,000
मैं यह कह रहा हूं यहां क्या गलत बताया उन्होंने ये पूछ

1856
02:16:16,000 --> 02:16:20,280
रहा हूं वो समझाने के लिए वहा पर है

1857
02:16:20,280 --> 02:16:24,480
क्या क्या समना चाहते बताओ एक मिनट

1858
02:16:24,480 --> 02:16:29,080
मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं तो वही वही जो दृष्टि से देखा जा रहा है

1859
02:16:29,080 --> 02:16:31,320
कि वहां काल भगवान जीवों

1860
02:16:31,320 --> 02:16:35,480
को शरीर के सहित खा रहे हैं वो एक घंटे पहले दिखा

1861
02:16:35,480 --> 02:16:39,720
दिया उन्होंने ठीक है जी तो उन्होंने कहा कि मैं इन सबको तो पहले

1862
02:16:39,720 --> 02:16:43,880
ही मार के खा चुका हूं अब तू निमित्त बन

1863
02:16:43,880 --> 02:16:48,080
जा मेरे भाई जो ये गुरु है आपके तत्वदर्शी

1864
02:16:48,080 --> 02:16:52,080
आपको रिजल्ट बता रहे हैं ना निचोड़ क्या है गीता का

1865
02:16:52,080 --> 02:16:56,160
य इसम वही तो बता रहे हैं निचोड़ क्या है गीता में कौन सी बात

1866
02:16:56,160 --> 02:17:00,280
क्या है उसका निचोड़ ये यहां पर वो बता रहे हैं

1867
02:17:00,280 --> 02:17:04,280
और फिर कह रहे हैं कि वही बात कह रहे जो अर्जुन को दिख रहा है जो हम पढ़ रहे

1868
02:17:04,280 --> 02:17:08,280
पर आपको वो सच्चाई क्यों नहीं बता रहे यहां पर कि

1869
02:17:08,280 --> 02:17:12,520
वो आत्माओ के सूक्ष्म शरीर को व पिलाता है

1870
02:17:12,520 --> 02:17:16,560
वो क्या तक्ष शिला है क्या है उस पर भजता है फिर उसकी गं

1871
02:17:16,560 --> 02:17:20,920
को खाता है और एक बात और तुम क गं को खाता है

1872
02:17:20,920 --> 02:17:26,920
ये भी तुम उल्टी बात बोल रहे हो गंद को सुता नहीं है खाता

1873
02:17:26,920 --> 02:17:31,000
है उसको मारो श्रीधारी प्राणी के सूक्ष्म शरीर का अगर इसका प्रमाण अगर

1874
02:17:31,000 --> 02:17:35,080
कहीं से मिल जाए तो आप क्या कर स्वीकार करेंगे भाई साहब मैं ये कह रहा

1875
02:17:35,080 --> 02:17:39,080
हूं यहां तत्वदर्शी से गलती हुई है या किताब वाले छापने वालों से गलती हुई

1876
02:17:39,080 --> 02:17:43,800
है ये बता दीजिए मुझे वहां सही लिखा है किसी से गलती नहीं हुई है

1877
02:17:43,800 --> 02:17:46,360
तो गलती नहीं हुई है तो आप कह रहे हो कि वो सूक्ष्म

1878
02:17:46,360 --> 02:17:52,360
शरीर को खाता है यहां कह रहे मानव शरीर को खाता है मनुष्य को खाता है

1879
02:17:53,520 --> 02:17:57,600
क तुम कह रहे हो वो उसकी गं को ग्रहण करता है

1880
02:17:57,600 --> 02:18:01,640
और फ शिवांश भाई हम उसका प्रमाण दे रहे

1881
02:18:01,640 --> 02:18:05,960
हैं ना में अरे भाई तुम प्रमाण

1882
02:18:05,960 --> 02:18:10,040
यह दे रहे हो जो वहां पर एक चीज जो है समझ में नहीं आ रही है उसी को

1883
02:18:10,040 --> 02:18:14,120
तुम प्रमाण दे रहे हो ऐसे तो मैं बहुत सी बातें कह दूंगा कि य पर तुम्ह

1884
02:18:14,120 --> 02:18:18,200
गीता में दिख रहा है अब एक मिनट एक मिनट अब

1885
02:18:18,200 --> 02:18:22,400
जैसे की मान के चलो एक्स वाई ज मानो कि मान के

1886
02:18:22,400 --> 02:18:27,080
तुम हमारे गुरु ने गलत लिख दिया अब आप उसको कैसे सही करोगे

1887
02:18:27,080 --> 02:18:31,240
आपके गुरु ने हमारे सपोज दैट हमारे गुरु ने

1888
02:18:31,240 --> 02:18:35,400
वहां आपके हिसाब से गलत लिख दिया आपके हिसाब से अब आप

1889
02:18:35,400 --> 02:18:39,680
उसको कैसे सही करोगे आप अपने द्वारा जो चल रही है उन्हें

1890
02:18:39,680 --> 02:18:43,720
कैसे बताओगे उस उस श्लोक

1891
02:18:43,720 --> 02:18:48,240
का सही अर्थ क्या है जो हमें बताया गया है गुरु के द्वारा हा बताइए

1892
02:18:48,240 --> 02:18:52,600
वहां पर भगवान यह बता रहे हैं कि सभी प्राणियों का लय मुझ में है

1893
02:18:52,600 --> 02:18:56,920
इनको मैं पहले भी कई बार मार चुका हूं आगे भी मारूंगा ही तू केवल निमित्त

1894
02:18:56,920 --> 02:19:01,280
बन जा ये उसका अर्थ है कोई काल नहीं खाता पीस पास के

1895
02:19:01,280 --> 02:19:01,780
भगवान

1896
02:19:01,720 --> 02:19:06,320
वहां ये बता रहे हैं कि मैं सबका समार भी करता हूं

1897
02:19:06,320 --> 02:19:10,480
सब प्राणियों को जन्म देने वाला भी मैं ही हूं और उनकी मृत्यु

1898
02:19:10,480 --> 02:19:14,960
का विधान करने वाला भी मैं ही हूं तो तू इस बात की चिंता मत कर

1899
02:19:14,960 --> 02:19:19,240
कि तू किसी को मार रहा है या तू किसी को बचा रहा है

1900
02:19:19,240 --> 02:19:25,240
तो मैं समझ रहे हो

1901
02:19:28,760 --> 02:19:32,760
हो जाती है काल उनको खाता है उस शलोक के आधार पर अब

1902
02:19:32,760 --> 02:19:36,920
दूसरी बात ये है कुल मिलाकर के आप यह बात बताओ क्या यह

1903
02:19:36,920 --> 02:19:41,240
बात गलत है या सही है यह बताओ काल खा

1904
02:19:41,240 --> 02:19:45,480
य पर लिखा है रुक सुना जनता भी देख

1905
02:19:45,480 --> 02:19:49,760
लेगी का शलोक नंबर 27 में य लिखा हु

1906
02:19:49,760 --> 02:19:53,840
सीतरा के पुत्र रजा के समुदाय सहित आप में

1907
02:19:53,840 --> 02:19:58,040
प्रवेश कर रहे हैं और पिता में दर तथा वह

1908
02:19:58,040 --> 02:20:02,080
अवर हमारे पक्ष के सभी प्रधान सहि सब के सब

1909
02:20:02,080 --> 02:20:06,280
आपके दाढ़ के कारण विकराल भयानक मुख में बड़े वेग से दौड़ते

1910
02:20:06,280 --> 02:20:10,400
हुए प्रवेश कर रहे हैं और कई एक हुए

1911
02:20:10,400 --> 02:20:16,400
सरो सहित आपके दांतो के बीच में लगे हुए दिख रहे

1912
02:20:17,880 --> 02:20:23,720
हैं थ सम क्या पूछ रहा समझ में नहीं आ रहा है

1913
02:20:23,720 --> 02:20:27,960
माया आप कहते हो या आपके रामपाल जी कहते हैं कि वो सूक्ष्म शरीर

1914
02:20:27,960 --> 02:20:32,040
को खाता है पर यहां पर किताब में आपकी जो बुक है उसमें लिख रखा है कि

1915
02:20:32,040 --> 02:20:36,960
मानव शरीर को खाता है तो यहां पर भ्रमित क्यों कर रहे हैं ये अरे गीता

1916
02:20:36,960 --> 02:20:40,960
बता देता हूं मैं एक बात और बता देता हूं एक इसको और क्लियर कर देता हूं क्या

1917
02:20:40,960 --> 02:20:45,480
है कि वहां पर भगवान ने जो अपनी माया दिखाई है माया माया के द्वारा

1918
02:20:45,480 --> 02:20:49,480
आगे की कुछ चीजें बताई या पीछे की कुछ चीजें बताई है उसको

1919
02:20:49,480 --> 02:20:53,560
आपने अभी की चीज बना कर के नहीं देखो वो तो काल है भूत है

1920
02:20:53,560 --> 02:20:57,920
राक्षस है वो तो खाता है उसको आपने प्रमाण के रूप में उपयोग में ले लिया है

1921
02:20:57,920 --> 02:21:02,000
तो जब ले लिया है तो आपकी बातें आप उसको काटनी नहीं चाहिए तो जब

1922
02:21:02,000 --> 02:21:06,120
आपने ये ले लिया है कि काल जो है सूक्ष्म शरीर को

1923
02:21:06,120 --> 02:21:10,200
खाता है तो हम आपके तत्व ज्ञानी पर काउंटर कर रहे हैं कि

1924
02:21:10,200 --> 02:21:14,280
जब तुम कह रहे हो वो सूक्ष्म शरीर को खाता है मनुष्य शरीर को

1925
02:21:14,280 --> 02:21:18,440
छोड़ देने के बाद खाता है वो भूज करके जो गंध निकलती

1926
02:21:18,440 --> 02:21:22,600
है उसको सूंघता है तो मानव शरीर को खाने वाला तुमने क्यों

1927
02:21:22,600 --> 02:21:26,760
लिखा हम यहां पर गलत सिद्ध कर रहे हैं तत्व ज्ञानी को कि उसको

1928
02:21:26,760 --> 02:21:30,760
कोई तत्व ज्ञान नहीं है हम यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं आप या तो

1929
02:21:30,760 --> 02:21:33,240
यह बता दो कि इसमें मिस प्रिंट हो गया है

1930
02:21:33,240 --> 02:21:37,360
चार बार पांच बार या तो यह बता दो कि उनकी जानकारी के बाहर छप रही

1931
02:21:37,360 --> 02:21:43,000
है य किताबें या यह बता दो कि उनसे गलती हो गई है तत्व ज्ञानी

1932
02:21:43,000 --> 02:21:45,360
से

1933
02:21:45,360 --> 02:21:50,960
आपने तत्व ज्ञानी को गलत सिद्ध कर रहे हैं और आपने

1934
02:21:50,960 --> 02:21:55,080
देखो बाबू अगर आप यह नहीं मानोगे कि उनकी जानकारी के बाहर छप रही है किताब

1935
02:21:55,080 --> 02:21:59,240
या यह नहीं मानोगे किय प्रिंटर से गलती हो रही है तो फिर य दोष

1936
02:21:59,240 --> 02:22:03,280
जाएगा तव पूरा उत्तर दे रहा उसका पूरा उत्तर

1937
02:22:03,280 --> 02:22:07,520
दे रहा हूं इसके लिए आपको मेरी पा मिनट का समय देना पड़ेगा

1938
02:22:07,520 --> 02:22:09,640
बोलो

1939
02:22:09,640 --> 02:22:13,640
बोलो जैसा कि मैंने आपसे पहले पूछा था कि हमारी

1940
02:22:13,640 --> 02:22:17,920
जो शरीर है परेशानी है हमें नर्क और यह चीजें

1941
02:22:17,920 --> 02:22:21,920
हमारे लिए माया क्यों रची गई तो आप ने उसके उत्तर में ये

1942
02:22:21,920 --> 02:22:25,920
कहा कि हमारे साथ ईश्वर गेम खेल रहा है ठीक

1943
02:22:25,920 --> 02:22:30,080
है जी गेम खेल रहा है उसके बाद में शरीर जब हम हम

1944
02:22:30,080 --> 02:22:34,640
कैसे भी करके भक्ति करके उस निराकार परमात्मा में चले गए

1945
02:22:34,640 --> 02:22:38,800
वहां जाने के बाद में फिर दवारा से वो सृष्टि रचना करेगा और फिर

1946
02:22:38,800 --> 02:22:42,880
से हमें धरती लोक पर उतारे यानी कि वहां गीता में

1947
02:22:42,880 --> 02:22:46,920
भी यही कह रहा है कि मैं सबको मैं ही सबको मारने वाला हूं और मैं ही

1948
02:22:46,920 --> 02:22:48,400
सबको उत्पन्न करने वाला

1949
02:22:48,400 --> 02:22:52,440
हूं तो इस बात से यह सिद्ध हो गया मोक्ष तो कहीं नहीं है इस धरती

1950
02:22:52,440 --> 02:22:56,800
पर दूसरी बात में जब वो खाता हुआ दिख रहा है

1951
02:22:56,800 --> 02:23:01,520
खाता हुआ दिख रहा है तो साथ ही साथ में यह बोला कि हे अर्जुन

1952
02:23:01,520 --> 02:23:05,600
मैं अपना य वास्तविक स्वरूप ना किसी को दिखाता हूं ना आगे में किसी

1953
02:23:05,600 --> 02:23:09,640
को दिखाऊंगा यहां पर यह बातें हो गई

1954
02:23:09,640 --> 02:23:13,680
तो यानी कि जो उसकी वास्तविकता है जो यह

1955
02:23:13,680 --> 02:23:17,880
वास्तविक जो दिख रहा है जो इसकी वास्तविकता है वह छुपा के रखता

1956
02:23:17,880 --> 02:23:21,960
है वह अपनी योग माया से छुपा के इसलिए

1957
02:23:21,960 --> 02:23:26,400
कि ताकि जो मेरी सच्चाई जो सबको अभी दिख रही है कि सबको मैं खा रहा हूं

1958
02:23:26,400 --> 02:23:30,400
यय सच्चाई सबसे छुपी रहे इसके लिए य बोला था

1959
02:23:30,400 --> 02:23:34,480
कि मैं अपनी योग माया से छुपा रहता हूं यह इसका

1960
02:23:34,480 --> 02:23:39,200
पूरा उत्तर है हो गया हा बिल्कुल इसमें

1961
02:23:39,200 --> 02:23:43,440
आपने इस बात का उत्तर कहां दिया है कि काल ब्रह्म

1962
02:23:43,440 --> 02:23:47,560
जो है मानव शरीर को नहीं खाता है बल्कि मानव शरीर से निकलने के बाद जो

1963
02:23:47,560 --> 02:23:51,600
आत्मा का सूक्ष्म शरीर होता है उसको जो गंद निकलती है

1964
02:23:51,600 --> 02:23:56,040
उसको खाता है आपके देखिए मैं ये काउंटर

1965
02:23:56,040 --> 02:24:00,200
नहीं कर रहा हूं बो बोल रहा

1966
02:24:00,200 --> 02:24:03,680
बोल रहा तो मुझे बोलने दीजिए आप मैं यह काउंटर

1967
02:24:03,680 --> 02:24:09,680
नहीं कर रहा हूं कि देखिए अमित दास जी आप बारबार कैमरा ऑफ मत

1968
02:24:09,880 --> 02:24:14,480
करिए अब आप कैमरा ऑफ मत करिएगा प्लीज सुनिए

1969
02:24:14,480 --> 02:24:18,520
जब मैं यह बोल रहा हूं मैं कोई आपके गुरु

1970
02:24:18,520 --> 02:24:22,560
पर अभी काउंटर नहीं कर रहा हूं कि उन्होंने य बात कही कि वो खाता है तो इसका

1971
02:24:22,560 --> 02:24:26,640
प्रमाण क्या है ये नहीं कर रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आप यह

1972
02:24:26,640 --> 02:24:30,680
कह रहे हो कि वो आत्मा शरीर जब छोड़ देती है और वह

1973
02:24:30,680 --> 02:24:34,840
सूक्ष्म शरीर को खाता है बल्कि खाता क्या है वो गं सूखता है वो

1974
02:24:34,840 --> 02:24:38,840
प्रश्न अगला होगा कि वो खाता है कैसे सिद्ध करोगे मगर अभी मैं कह रहा

1975
02:24:38,840 --> 02:24:43,320
हूं कि अगर वो कह रहा है अगर आपके गुरु यह कह रहे हैं कि आत्मा

1976
02:24:43,320 --> 02:24:47,360
जो है ये क्या कहते हैं शरीर छोड़ने के बाद

1977
02:24:47,360 --> 02:24:51,600
सूक्ष्म शरीर जो होता है उसकी गंध को वो ग्रहण करता है

1978
02:24:51,600 --> 02:24:55,600
तो फिर यहां पर आपके जो गुरु है वो ये क्यों लिख रहे हैं

1979
02:24:55,600 --> 02:24:59,720
कि वो खाता है मानव शरीर को क्यों लिख रहे

1980
02:24:59,720 --> 02:25:03,840
हैं क्योंकि वो उसकी वास्तविकता है वह सामने दिख रहा

1981
02:25:03,840 --> 02:25:08,240
है शरीर को ही ता है वो वहा सामने जोय वास्तविकता

1982
02:25:08,240 --> 02:25:12,400
है ये वास्तविकता लिख रहे हैं या ये भ्रमित करने वाला ज्ञान

1983
02:25:12,400 --> 02:25:16,520
लिख रहे हैं बिल्कुल भ्रमित नहीं य वास्तविकता जो काल भगवान

1984
02:25:16,520 --> 02:25:18,760
खाता है अपना वास्तविक चीजें जो

1985
02:25:18,760 --> 02:25:21,840
छुपा के रखता है

1986
02:25:21,840 --> 02:25:25,840
ये वास्तविकता है ठीक है ये वास्तविकता है तो इसका मतलब इसका

1987
02:25:25,840 --> 02:25:29,920
मतलब वो डायरेक्ट इंसानों को खाता है उसके स शरीर को नहीं खाता

1988
02:25:29,920 --> 02:25:34,040
है अच्छा एक मिनट हम पूछ रहे है आप पूछ रहे है कि

1989
02:25:34,040 --> 02:25:38,960
काल खाता है या नहीं खाता है अब हम बता कुछ नहीं खाता

1990
02:25:38,960 --> 02:25:42,960
है नहीं खाता है तो फिर वो लोक गलत है मैं बोल तो

1991
02:25:42,960 --> 02:25:47,120
रहा हूं उसका अर्थ ये है भगवान अपने भगवान

1992
02:25:47,120 --> 02:25:51,120
अपने समार्क रूप को प्रदर्शित कर रहे हैं और सुनो मेरे

1993
02:25:51,120 --> 02:25:55,480
गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता स्वयं को सही सिद्ध

1994
02:25:55,480 --> 02:25:59,840
करो स्वयं को सही सिद्ध करो हम जनता

1995
02:25:59,840 --> 02:26:03,880
कोने रा सही होना सिद्ध नहीं होता प्रश्न ये है कि

1996
02:26:03,880 --> 02:26:07,920
यदि सूक्ष्म शरीर को खाता है आत्मा के तो यह मानव शरीर

1997
02:26:07,920 --> 02:26:12,240
धारी प्राणी को खाता है क्यों लिखा है जनता को डराने के लिए लिखा है

1998
02:26:12,240 --> 02:26:16,720
भय उत्पन्न करने के लिए लिखा है काल के लिए बुराई

1999
02:26:16,720 --> 02:26:20,720
काल से लोग नफरत करें इसलिए लिखा है क्यों लिखा है

2000
02:26:20,720 --> 02:26:25,520
आपने कह दिया की काल नहीं खाता

2001
02:26:25,520 --> 02:26:30,160
है अभी खाने प आ जाऊगा बाबू तो तुम भाग जाओगे

2002
02:26:30,160 --> 02:26:34,400
तुम कह रहे हो भ के सता है अब लोग

2003
02:26:34,400 --> 02:26:40,400
गीता के विरोध में हो ग

2004
02:26:47,160 --> 02:26:51,880
तु बा उतर हा

2005
02:26:51,880 --> 02:26:56,120
जैसे कि आपने कहा कि गुरुदेव ने हमारा इसलिए लिखा है कि लोगों

2006
02:26:56,120 --> 02:27:00,440
को भ्रमित करने के लिए तो हम यह समझे कि गीता में जो

2007
02:27:00,440 --> 02:27:05,760
दर्शाया जा रहा है खा

2008
02:27:05,760 --> 02:27:10,680
हु गीता में अर्जुन को जो दिख रहा है वो

2009
02:27:10,680 --> 02:27:14,720
अन अन वहा पर क्या अर्जुन नहीं डर रहा मैं

2010
02:27:14,720 --> 02:27:19,040
आपसे प्रश्न पूछ रहा हूं क्या व अर्जुन नहीं डर रहा क्या वहा

2011
02:27:19,040 --> 02:27:24,280
नहीं डर रहे क्या अरे उस क्या मतलब है भाई उस

2012
02:27:24,280 --> 02:27:28,360
आपकी पुस्तक में लिखा है वो सही है और हमारी पुस्तक में लिखा है वो गलत है

2013
02:27:28,360 --> 02:27:32,480
सुनो मेरी बात यहां ज्यादा देखो डन डन ग्रीक में जाने से कुछ

2014
02:27:32,480 --> 02:27:36,200
नहीं

2015
02:27:36,200 --> 02:27:40,480
होगा दादा एक्टिंग में मत आओ सुनो मेरी बात सुनो

2016
02:27:40,480 --> 02:27:44,520
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तुम्हारी वो बात सूक्ष्म शरीर की

2017
02:27:44,520 --> 02:27:48,560
बात गीता से प्रमाणित है कि नहीं सवाल ये है कि

2018
02:27:48,560 --> 02:27:52,640
तुम ये कह रहे हो कि वो अब इसी बात कंटिन्यू करना

2019
02:27:52,640 --> 02:27:56,680
है सुनो सवाल ये है सवाल ये है कि

2020
02:27:56,680 --> 02:28:00,800
तुम ये कह रहे हो कि वो सूक्ष्म शरीर

2021
02:28:00,800 --> 02:28:04,880
की गंद सूंघता हैला भुनने के बाद में अभी प्रमाण

2022
02:28:04,880 --> 02:28:08,960
नहीं मांग रहा बाद में मांगूंगा प्रमाण तो बाद में मांगूंगा प्रमाण

2023
02:28:08,960 --> 02:28:13,000
में बाद में मांगूंगा अभी तो मैं य बात कन्यू रखना है आज

2024
02:28:13,000 --> 02:28:17,040
की ट में एक मिनट एक मिनट यह बात मैं

2025
02:28:17,040 --> 02:28:21,000
कह रहा हूं तो पूरी होने दो मैं अभी इस बात का प्रमाण तो मांगी नहीं ला

2026
02:28:21,000 --> 02:28:25,080
भूने का प्रमाण क है उसकी वो गंध संगता है इसका प्रमाण कहां है है ना मैं

2027
02:28:25,080 --> 02:28:29,440
अभी नहीं और मैं ये भीभ पूछ रहा हूं य पूछूंगा कि गं

2028
02:28:29,440 --> 02:28:33,560
को खाता कैसे है यह भी पूछूंगा मगर फिलहाल मैं य कह रहा

2029
02:28:33,560 --> 02:28:37,640
हूं अगर तुम यह कह रहे हो कि वो सूक्ष्म शरीर

2030
02:28:37,640 --> 02:28:41,760
को पीस कर गं सूंघता है सूक्ष्म शरीर को तो यहां पर

2031
02:28:41,760 --> 02:28:46,080
मनुष्य को शरीर धारी प्राणी को खाना क्यों लिखा है मानव शरीर

2032
02:28:46,080 --> 02:28:50,640
को खाना क्यों लिखा है

2033
02:28:50,640 --> 02:28:54,920
हर बार बोल चुके हैं फिर बारबार उसी बात को क्यों दोहरा रहे हैं

2034
02:28:54,920 --> 02:28:58,000
समझ में नहीं

2035
02:28:58,000 --> 02:29:02,080
आ आपको इसी प्रश्न में ही उलझे रहना है या

2036
02:29:02,080 --> 02:29:06,200
आगे ब है बात ये है तुमको जहा पर उत्तर नहीं देना है वहा तुम

2037
02:29:06,200 --> 02:29:10,240
डायलॉग मार दो आपको इसी प्रश्न में उ रहना है अरे कह दो

2038
02:29:10,240 --> 02:29:14,720
नहीं है इसका उत्तर आगे चलो चलते हैं आगे

2039
02:29:14,720 --> 02:29:18,960
आप कह दीजिए कि काल नहीं खाता है आप कह दीजिए

2040
02:29:18,960 --> 02:29:24,160
कि काल नहीं खाता है मेरे भा काल

2041
02:29:24,160 --> 02:29:28,640
ता प्रमाण मा तुमसे काल ता है नहीं

2042
02:29:28,640 --> 02:29:32,160
अलग बात है

2043
02:29:32,160 --> 02:29:37,000
तुमम सक प्रमाण दे रहा स

2044
02:29:37,000 --> 02:29:41,200
स बिल्कुल सक यह जो शरीर है

2045
02:29:41,200 --> 02:29:46,920
इसको आपने क्या बोला शरीर जो

2046
02:29:46,920 --> 02:29:52,760
स मतलब य समझा व शरीर

2047
02:29:52,760 --> 02:29:57,000
उसे शरीर बोला जाएगा और जो सूक्ष्म शरीर है उसे शरीर नहीं बोला

2048
02:29:57,000 --> 02:30:03,000
जाएगा मानव शरीर नहीं बोला जाएगा मनुष्य नहीं बोला

2049
02:30:03,760 --> 02:30:08,320
जाएगा इसका मैंने इस इस बारे में पूछ शुरू में

2050
02:30:08,320 --> 02:30:12,520
सुनो मृत्यु हो जाने के बाद निकली हुई आत्मा के

2051
02:30:12,520 --> 02:30:16,560
शरीर को भी मनुष्य कहा जाएगा मानव शरीर कहा जाएगा इस संबंध में

2052
02:30:16,560 --> 02:30:20,800
प्रमाण दे दो हो गई बात खम प्रमाण दे दो

2053
02:30:20,800 --> 02:30:25,080
डिक्शनरी से दे दो आदमी के मर जाने के बाद जो आत्मा निकल के जाती है उसका सूक्ष्म

2054
02:30:25,080 --> 02:30:29,480
शरीर होता है उसको भी मनुष्य कहते हैं दे दो जैसे

2055
02:30:29,480 --> 02:30:33,640
कि अब मानव जैसा शरीर होगा फिर

2056
02:30:33,640 --> 02:30:38,040
उसी शरीर को तो खाया जाएगा जैसे किन ज नहीं

2057
02:30:38,040 --> 02:30:42,520
मानव जैसा नहीं मानव शरीर देख

2058
02:30:42,520 --> 02:30:46,920
मत करो सुन तो लो

2059
02:30:46,920 --> 02:30:51,080
सुन तो लो उत्तर तो सुन लो भाई जैसे कि

2060
02:30:51,080 --> 02:30:55,160
आपने कहा कि सूक्ष्म मैंने सूक्ष्म शरीर है सूक्ष्म शरीर

2061
02:30:55,160 --> 02:30:59,160
है वो कैसा शरीर है मानव जैसा है या किसी राक्षस जैसा

2062
02:30:59,160 --> 02:31:03,880
है या बंदर जैसा है कैसा शरीर है उसे कैसा बोलेंगे शरीर

2063
02:31:03,880 --> 02:31:08,160
को चलो मैंने तुम्हारी बात मान ली मानव जैसा है और बोलो

2064
02:31:08,160 --> 02:31:12,800
हां हम नहीं तो मानव जैसा है तो उसको क्या बोलेंग क्या दर्शाए

2065
02:31:12,800 --> 02:31:16,840
इसे वहां ऐसे लिखना चाहिए था जो मान

2066
02:31:16,840 --> 02:31:19,240
मानव जैसा लिखेंगे

2067
02:31:19,240 --> 02:31:23,240
वहां ऐसा नहीं आपके हिसाब से वहां ऐसा लिखना चाहिए था कि मानव जैसा

2068
02:31:23,240 --> 02:31:27,440
जो सूक्ष्म शरीर है उसे मानव जैसा दिखाई देने वाला जो सूक्ष्म शरीर

2069
02:31:27,440 --> 02:31:31,520
है उसको ता है जैसे जब जहां जहां प जहां जहां में ब्रह्म को

2070
02:31:31,520 --> 02:31:35,920
प्राप्त होने वाली जो शांति है उसको उन्होंने पूरा लिखा है कि वो

2071
02:31:35,920 --> 02:31:40,080
ब्रह्म को ब्रह्म के ब्रह्म के लोग की जो शांति है परम नहीं

2072
02:31:40,080 --> 02:31:44,200
मगर उस लोग की परम शांति को प्राप्त होता है जैसे उन्होंने अमर अमर

2073
02:31:44,200 --> 02:31:48,840
के लिए लिखा है खोल के लिखा है कुछ देर के लिए अमर हो जाता

2074
02:31:48,840 --> 02:31:53,000
है कुछ देर के लिए अमर हो जाता है ये सब लिखा है ना उन्होने खोल के

2075
02:31:53,000 --> 02:31:57,280
तो इसको खोल के लिखो भाई इसको लिखो कि वो मनुष्य को नहीं खाता

2076
02:31:57,280 --> 02:32:01,520
जो आत्मा छोड़ के निकलती है आत्मा के उसको खाता

2077
02:32:01,520 --> 02:32:05,880
है बात ये आ रही है दिक्कत ये आ रही है अमित क्यों मैं तुम्हारे अब देखो तुम्हारे

2078
02:32:05,880 --> 02:32:11,880
गुरु ने वही कहा है जो तुम कह रहे हो मैं ये बात क्यों

2079
02:32:12,040 --> 02:32:16,040
मानू आप बोल दिया आपने तो

2080
02:32:16,040 --> 02:32:20,360
बोल दिया कि काल खाता भी नहीं है आपने ये चीज बोल दिया

2081
02:32:20,360 --> 02:32:24,360
देखो मेरे देखो बाबू मैं तुम्ह तुम्हारी बातों का एक एक बात का

2082
02:32:24,360 --> 02:32:28,360
जवाब मुह तोड़ बिल्कुल दे सकता हूं मगर विषय ना बदले इसलिए सिर्फ

2083
02:32:28,360 --> 02:32:32,480
एक बात कहूंगा मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं

2084
02:32:32,480 --> 02:32:36,720
होता जब ट्रेन में बिना टिकट एक मिनट जब ट्रेन

2085
02:32:36,720 --> 02:32:40,800
में बिना टिकट पकड़े जाओगे तो यह नहीं कहोगे टीसी से इस ट्रेन में अभी

2086
02:32:40,800 --> 02:32:45,440
तो बहुत सारे बिना टिकट के घूम रहे हैं अपना टिकट दिखाओ

2087
02:32:45,440 --> 02:32:51,440
अपना टिकट नहीं तो चालान होगा दे

2088
02:32:51,640 --> 02:32:54,040
अरे बाबूदास

2089
02:32:54,040 --> 02:32:58,040
बा अब आपसे प्रश्न पूछ एक मिनट हम आपसे प्रश्न

2090
02:32:58,040 --> 02:33:04,040
पूछ ले प्रश्न पूछ लीजिएगा इसका क्या

2091
02:33:04,840 --> 02:33:08,840
करें डिबेट को खत्म कर दे इसको कंटिन्यू करें नहीं

2092
02:33:08,840 --> 02:33:13,320
इसको कंटिन्यू करेंगे अब कल अब अभी आप य बात बता दीजिए इसका क्या करना

2093
02:33:13,320 --> 02:33:17,800
है एक मिनट मैं इसका जवाब दे चुका हूं जैसे कि

2094
02:33:17,800 --> 02:33:21,960
मानव जैसा शरीर होगा व शरीर है तो वहां

2095
02:33:21,960 --> 02:33:26,320
परब आप यहां रामपाल के रामपाल जी के द्वारा

2096
02:33:26,320 --> 02:33:30,320
ये जो लिखा गया है मनुष्य शरीर खाता है य कहीं नहीं लिखा

2097
02:33:30,320 --> 02:33:34,600
है वो सूक्ष्म शरीर खाता है तो मैं क्या करूं इसका य गलत लिखा है

2098
02:33:34,600 --> 02:33:38,640
तो वही चीज तो मैं बोल रहा हूं शरीर को यदि सूक्ष्म

2099
02:33:38,640 --> 02:33:42,640
वाला शरीर है उसे हम सूक्ष्म वाला शरीर शरीर

2100
02:33:42,640 --> 02:33:46,800
नहीं माने शरीर मानो मानव शरीर नहीं मानोगे

2101
02:33:46,800 --> 02:33:51,640
मनुष्य शरीर नहीं मानोगे व का शरीर है

2102
02:33:51,640 --> 02:33:55,720
मानव शरीर नहीं है वो हम मनुष्यों से

2103
02:33:55,720 --> 02:33:59,920
निकली हुई आत्मा का शरीर खाता

2104
02:33:59,920 --> 02:34:04,120
है अरे बाबू भाई य अरे अमित जीय समझो जो हमारा

2105
02:34:04,120 --> 02:34:08,200
जो मनुष्य शरीर है व पंच भूतों से बना है ना क्या जो सर है

2106
02:34:08,200 --> 02:34:12,200
व पांच भूतो से बना है क्या अा वहा पर ये लिखा है कि पंच शरीर

2107
02:34:12,200 --> 02:34:16,320
वाला खाना है मानव शरीर का अर्थ य

2108
02:34:16,320 --> 02:34:20,400
होता है मैं वही तो आपसे प्रमाण मांग रहा हूं मैं आपको मनुष्य

2109
02:34:20,400 --> 02:34:24,720
का अर्थ दिखा देता हूं क्या होता है ठीक है आप मुझे मनुष्य

2110
02:34:24,720 --> 02:34:29,040
के मर जाने के बाद उसके शरीर से निकली हुई जीवात्मा का जो सूक्ष्म

2111
02:34:29,040 --> 02:34:34,760
शरीर है उसको मनुष्य कहा जाएगा ये आप मुझे दिखा

2112
02:34:34,760 --> 02:34:38,880
दो गीता में अर्जुन भी तो नहीं कहा कि सूक्ष्म शरीर को खाता है वो तो डायरेक्ट

2113
02:34:38,880 --> 02:34:42,880
बोल रहा है खा रहा है तो उसको समझाया गया ना और फिर उसको मोक्ष का

2114
02:34:42,880 --> 02:34:47,680
मिला अर्जुन को उसको तो तत्व ज्ञान नहीं था ना तुम्हारे अनुसार

2115
02:34:47,680 --> 02:34:49,920
है

2116
02:34:49,920 --> 02:34:54,040
तुमको है ना तुम्हारे अनुसार तत्वज्ञान जी

2117
02:34:54,040 --> 02:34:58,280
उसको नहीं था ना तो आप अपना तत्वज्ञान बताइए भैया

2118
02:34:58,280 --> 02:35:02,360
चार के चार के 19 में बताया गया है पंडित कौन होते हैं फर

2119
02:35:02,360 --> 02:35:07,200
वही बात मैं पूछ रहा हूं ये बात गल है क्या बाबूस

2120
02:35:07,200 --> 02:35:11,360
बाबूदास शिवान जी इसको कंटिन्यू

2121
02:35:11,360 --> 02:35:14,960
करेंगे इसको कंटिन्यू करेंगे आप लोग एक दो दिन

2122
02:35:14,960 --> 02:35:19,320
में फि आइएगा कल हमारी चर्चा संभवत जो विग्रहवां धर्म

2123
02:35:19,320 --> 02:35:23,760
हमारा दूसरा चैनल है उस पर होगी और वो व्यक्ति आएंगे जो ये बताएंगे कि

2124
02:35:23,760 --> 02:35:27,920
रामपाल दास जी के जेल जाने के बाद उनकी किताबों में क्या हेर पेर हुआ

2125
02:35:27,920 --> 02:35:32,000
है वो सब वो लेकर के आएंगे और उनको लाने का प्रयास करेंगे

2126
02:35:32,000 --> 02:35:36,200
और आज की चर्चा बड़ी सटीक हुई काफी हद तक

2127
02:35:36,200 --> 02:35:40,400
और हम लोग इसको कंटिन्यू करेंगे आगे आने वाले आगे

2128
02:35:40,400 --> 02:35:44,720
आने वाले जो बात है ये वाली जो बात है ये सूक्ष्म शरीर को कता है

2129
02:35:44,720 --> 02:35:48,920
यहां से चालू करेंगे और फिर हम लोग ईश्वर के विषय में भी बात करेंगे अगली

2130
02:35:48,920 --> 02:35:53,360
आने वाली च पर अभी मैं आपसे एक प्रश्न ले सकता हूं

2131
02:35:53,360 --> 02:35:57,360
क्या अब भाई साहब दो घंटे 35 मिनट हो चुके हैं हमने दो

2132
02:35:57,360 --> 02:36:01,480
घंटे का समय रखा था चर्चा के लिए तो अब हम लोग

2133
02:36:01,480 --> 02:36:05,600
अगला मतलब इस पहले तो एक दिक्कत वाली

2134
02:36:05,600 --> 02:36:09,760
बात क्या है कि एक विषय एक विषय है जैसे

2135
02:36:09,760 --> 02:36:13,760
मान लो तुम उस विषय को ही नहीं खत्म कर पाते

2136
02:36:13,760 --> 02:36:17,800
तो हम क्या करें जब आप गोल मोल बातें करेंगे तो हम क्या करें बताओ

2137
02:36:17,800 --> 02:36:22,440
आपको आपको लग रहा है गोल मोल ले हमारी आंखों से जो दिख रहा है उसे झूठा

2138
02:36:22,440 --> 02:36:27,120
मानले यानी कि जो यह जो लिखा है यह सच है

2139
02:36:27,120 --> 02:36:30,200
व मानव शरीर को ही खाता है

2140
02:36:30,200 --> 02:36:34,840
हम कितनी बार बोले कितनी बार समझाए आपको

2141
02:36:34,840 --> 02:36:38,560
स मिनट

2142
02:36:38,560 --> 02:36:42,680
मिनट

2143
02:36:42,680 --> 02:36:47,000
लोने मिनट आपने कहा आखों से दिख रहा झूठ मानले अभी आपको

2144
02:36:47,000 --> 02:36:51,880
आंखों से क्या दिख रहा है वो पढ़ो आखों से क्या दिख रहा है क्या दिख रहा है

2145
02:36:51,880 --> 02:36:56,000
बड़ा करो भैया मानव श क्या दिख रहा

2146
02:36:56,000 --> 02:37:02,000
है मानव देव ऋषि मानव देव ऋषि लिखा हुआ है वहा

2147
02:37:02,120 --> 02:37:06,360
प मानव जैसा लिखा है क्या मानव देव ऋषि

2148
02:37:06,360 --> 02:37:11,360
लिखा हुआ है ना मानव जैसा मानव जैसा लिखा है क्या

2149
02:37:11,360 --> 02:37:15,520
मानव जैसा नहीं लिखा हुआ है मानव देव ऋषि लि अच्छा अब इनको मानव शरीर

2150
02:37:15,520 --> 02:37:19,600
वाला भी दिखा दो मानव शरीर वाला भी दिखा दो

2151
02:37:19,600 --> 02:37:24,120
ऐसे नहीं मानोगे पकड़ लेंगे ब अच्छा

2152
02:37:24,120 --> 02:37:28,400
पीडीएफ में अलग लिखा है और आपके बक

2153
02:37:28,400 --> 02:37:33,120
वो बुक अलग हैय गमा गीता की व शायद कोई और बुक है दिखाओ मानव

2154
02:37:33,120 --> 02:37:37,440
शर अगर हम किसी बुक से सुम शरीर वाला दिखा दे या गुरुजी के

2155
02:37:37,440 --> 02:37:41,440
सत्संग से दिखा दे तोय मानेंगे आपके गुरु को

2156
02:37:41,440 --> 02:37:45,640
अपनी बात का ध्यान नहीं रहता है जो उल्टी पलटी बातें करते हैं दो तरह की

2157
02:37:45,640 --> 02:37:49,760
हम यह मानेंगे अच्छा

2158
02:37:49,760 --> 02:37:52,560
और

2159
02:37:52,560 --> 02:37:56,720
क्या जैसे आप लोग सुनो जैसे आप लोग मैं आपको

2160
02:37:56,720 --> 02:38:01,120
जैसे आप लोगों ने देवी भागवत में ब्रह्मा विष्णु महेश को एक जगह विना नाशवान

2161
02:38:01,120 --> 02:38:05,520
मान लिया और मैं उसी देवी भागवत से आपको दिखाऊ कि वो नाशवान

2162
02:38:05,520 --> 02:38:09,720
नहीं है अर हम अना परम तत्व परमात्मा तो आप उसको नहीं मानोगे

2163
02:38:09,720 --> 02:38:15,040
क दोगे गलत है ऐसे ही हम उसको नहीं मानेंगे

2164
02:38:15,040 --> 02:38:20,640
आपकी य किताब गलत है आपका तव दर्शन गलत है

2165
02:38:20,640 --> 02:38:24,840
आप पुराणों को आप पुराणों को गलत कह रहे हो और मैं आज य जो आज

2166
02:38:24,840 --> 02:38:28,880
जो कोई व्यक्ति है जो जेल में बंद है उसके नाम से उसने भी नहीं लिखी उस

2167
02:38:28,880 --> 02:38:32,880
पर डाउट है उसके नाम से जो किताब छप रही है उसको गलत नहीं कह सकता आप

2168
02:38:32,880 --> 02:38:36,880
हमारे पुराणों को गलत कह देंगे उनको लिखने वाले ऋषियों को गलत कह

2169
02:38:36,880 --> 02:38:42,760
देंगे उनको कहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश को गलत कह

2170
02:38:42,760 --> 02:38:48,760
देंगे दिखाओ इनको मानव शरीर वाला दिखाओ

2171
02:38:52,320 --> 02:38:58,320
मानव शरीर वाला दिखा दो

2172
02:38:59,280 --> 02:39:03,440
इनको एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों को खाता

2173
02:39:03,440 --> 02:39:08,000
है आहार करता है लो अब बताओ

2174
02:39:08,000 --> 02:39:11,040
अमित

2175
02:39:11,040 --> 02:39:15,200
दास यह देख लो अब यहां पर ऋषि और देव भी नहीं है मानव

2176
02:39:15,200 --> 02:39:18,360
शरीर

2177
02:39:18,360 --> 02:39:24,360
धारी आंखों से क्या दिख रहा है

2178
02:39:31,880 --> 02:39:36,800
आपको म्यूट अन म्यूट कर

2179
02:39:36,800 --> 02:39:41,480
लो हेलो सुन पा रहे हैं

2180
02:39:41,480 --> 02:39:46,280
आवाज तो

2181
02:39:46,280 --> 02:39:52,280
ज बाबूस को दोबारा बास आवाज नहीं आ रही

2182
02:39:53,880 --> 02:39:59,880
है एक मिनट एक मिनट प

2183
02:40:05,320 --> 02:40:09,400
जी अब मेरी आवाज आ रही है क्या अब ठीक है हा

2184
02:40:09,400 --> 02:40:14,280
अमित दास जी

2185
02:40:14,280 --> 02:40:20,120
बोलिए बाबूराम जी कहां चले गए

2186
02:40:20,120 --> 02:40:26,120
चलिए अब इस चर्चा को एक दो दिन में

2187
02:40:26,160 --> 02:40:30,480
फ कोई बात नहीं इसको हम

2188
02:40:30,480 --> 02:40:34,320
लोगन

2189
02:40:34,320 --> 02:40:38,440
कर मैं आपसे संपर्क मुझे

2190
02:40:38,440 --> 02:40:44,440
लगता है आन और जनता

2191
02:40:46,440 --> 02:40:52,000
को जय श्री रामराम जय

2192
02:40:52,000 --> 02:40:57,000
श्रीम अपने कुछ लोग पंडित जी को जोड़

2193
02:40:57,000 --> 02:41:01,400
लीजिए मेरी आवाज रिपीट सुना देर भाई जय श्री राम

2194
02:41:01,400 --> 02:41:05,480
जय श्री राम मैं ये कह रहा था गायत्री मंत्र के विषय में प्रश्न

2195
02:41:05,480 --> 02:41:10,320
पूछ रही थ तो आपने तो अच्छे से लपेटना था इनको

2196
02:41:10,320 --> 02:41:14,440
ऐसा है ना कभी-कभी विषय को ना मैं इस पर एक

2197
02:41:14,440 --> 02:41:20,440
प्रॉपर वीडियो बनाऊंगा विषयात नाम होगा उसका वो कह रहे थे गायत्री

2198
02:41:20,680 --> 02:41:24,800
मैं उ गा गरुड़ पुराण की आपने पूछ गायत्री कितने

2199
02:41:24,800 --> 02:41:29,280
प्रकार की होती है गायत्री का सा विमुक्त है गायत्री की 24 मुद्राए

2200
02:41:29,280 --> 02:41:33,480
क्या है गायत्री का ब्रम गायत्री का विनियोग क्या है ज कुछ तो पूछते

2201
02:41:33,480 --> 02:41:37,520
उनसे ठंडे हो जाते हो स्स के अजपा जप गलत

2202
02:41:37,520 --> 02:41:41,600
अजपा जप रटन जो बारबार मन में एक ही बार बोलते रहे 24

2203
02:41:41,600 --> 02:41:45,600
घंटे उसे अजपा जप कहते हैं कुछ पता

2204
02:41:45,600 --> 02:41:50,240
आप होता उपांशु बो उपांशु का मतलब मन के द्वारा बिल्कुल ठ

2205
02:41:50,240 --> 02:41:54,240
भी ना हिले वो गायत्री जो है उसी का फल मिलता

2206
02:41:54,240 --> 02:41:58,520
है गायत्री मुह के बाहर तो कभी बोलना ही नहीं चाहिए मन में माला

2207
02:41:58,520 --> 02:42:02,880
के द्वारा माला भी कैसी होनी चाहिए कैसे करना चाहिए उनसे थोड़ा पूछते

2208
02:42:02,880 --> 02:42:07,200
आप कुछ य इनकी हवा टाइट वो सब इसकी मगज

2209
02:42:07,200 --> 02:42:11,320
से बाहर की वस्तु है सब ऐसा है ना सुनिए

2210
02:42:11,320 --> 02:42:15,720
तो ऐसा होता है कि विषय से भटका भटके ना हमको

2211
02:42:15,720 --> 02:42:19,800
हम उनको बोल देते ये देखो शिव पुराण में देखो क्या क्या तरीका है गायत्री मंत्र

2212
02:42:19,800 --> 02:42:25,640
का जाप करने का ये देखो देवी भागवत में क्या क्या तरीका है

2213
02:42:25,640 --> 02:42:29,720
उना पवित्र संस्कार के तो गायत्री मंत्र कैसे बोल देते तुम्हारे गुरु

2214
02:42:29,720 --> 02:42:33,720
जी कौन सा जप देते हैं उनसे जर पूछते प्रमाण

2215
02:42:33,720 --> 02:42:36,320
दिखाते हैं हमर किताब में

2216
02:42:36,320 --> 02:42:41,240
खंडन करने के लिए पास का उचा

2217
02:42:41,240 --> 02:42:45,840
आप गुरु कैसे अरे हमारे गुरुजी शंकराचार्य अद्वैतवाद और

2218
02:42:45,840 --> 02:42:49,920
इतने सुप्रसिद्ध विद्वान जि नासा भी सर्च कर र न की किताबों

2219
02:42:49,920 --> 02:42:53,960
पर अरे तुम्हारे कहां कहां देखो तुलना होती है बराबर की

2220
02:42:53,960 --> 02:42:58,040
वस्तु की कहां कांच का टुकड़ा कहां मणि को कथा को काच और

2221
02:42:58,040 --> 02:43:02,200
मण लोक महान का भागवत में भी कहा तुम कांच का टुकड़ा

2222
02:43:02,200 --> 02:43:06,320
और मणि की तुलना कर हो बता मैं आपको

2223
02:43:06,320 --> 02:43:10,520
एक बात बताऊं ये लोग जो ये प्रश्न करते हैं खाली नित्य कर्म

2224
02:43:10,520 --> 02:43:14,560
पूजा प्रकाश खरीद ले रप की आती है गीता प्रस से उसमें पूरी जो विधि

2225
02:43:14,560 --> 02:43:18,680
दी गई है उसमें हर चीज का उन्होंने प्रमाण भी दिया है हां चीज का प्रमाण

2226
02:43:18,680 --> 02:43:23,280
दिया विन उसम बकुल तो कोई ज्यादा

2227
02:43:23,280 --> 02:43:27,400
कठिन काम थोड़ी ना है मगर प्रॉब्लम क्या है ना की जो

2228
02:43:27,400 --> 02:43:31,440
एक विषय चल रहा था उस विषय को बचाने के लिए भी उस उन

2229
02:43:31,440 --> 02:43:35,800
विषयों पर आओ तो य जो एक अच्छी सी वार्ता देखने को मिली है ना

2230
02:43:35,800 --> 02:43:40,240
वो नहीं मिलती है जैसे मुझे तो हसी आईस

2231
02:43:40,240 --> 02:43:44,520
को अंदर लो शवास को छोड़ो अरे भाई क्या कह मन नहीं होता

2232
02:43:44,520 --> 02:43:49,200
वो कह रहे मन नहीं होता उसम बात

2233
02:43:49,200 --> 02:43:51,440
मूर्ख है मूर्ख है मूर्ख महामूर्ख

2234
02:43:51,440 --> 02:43:55,760
है कहां से आ ऐसे लोग कहां से दुनिया में भगवान

2235
02:43:55,760 --> 02:43:59,840
इनको तो अच्छी पढ़ने की कहीं अच्छे विद्यालय में जाने की जरूरत है

2236
02:43:59,840 --> 02:44:04,120
अच्छे गुरु की जरूरत है यह उन्होंने तो य कोई पढ़े लिखे थोड़ी नहीं है कोई

2237
02:44:04,120 --> 02:44:08,760
य तो उस किताब में से देख देख देख देख करके बस बता

2238
02:44:08,760 --> 02:44:13,760
दिया चलिए दोबारा दोबारा आएंगे दोबारा आएंगे आने

2239
02:44:13,760 --> 02:44:18,120
दो सूत्र आई के द्वारा पाण

2240
02:44:18,120 --> 02:44:22,280
सूत्र से संस्कृत संस्कृत ब प्रश्न करेंगे वह आपके पास कभी

2241
02:44:22,280 --> 02:44:26,720
नहीं आएंगे बिल्कुल तथ्यात्मक भाई इसको आप कैसे सिद्ध कर रहे हो

2242
02:44:26,720 --> 02:44:30,800
कौन सा सूत्र लग रहा है कौन सी विभक्ति लग रही है कौन सा निर्वचन

2243
02:44:30,800 --> 02:44:33,160
हो रहा

2244
02:44:33,160 --> 02:44:37,680
हैक व्याकरण की बातें हो जाएंगे गोस्वामी

2245
02:44:37,680 --> 02:44:41,760
जी गोस्वामी जी व तो पंडित जी कह रहे वही बात है

2246
02:44:41,760 --> 02:44:45,760
कि उसको वो नॉलेज अपने मगज में वो नॉलेज नहीं है ज्ञान

2247
02:44:45,760 --> 02:44:50,320
का उसने रटी रटाई बात बोलने की है जी

2248
02:44:50,320 --> 02:44:54,560
एक कोई राज कुमार जी है उन्होंने आज जो है कहा है अभी

2249
02:44:54,560 --> 02:44:58,760
अभी चलती लाइव स्ट्रीम में कि आज मैंने आज

2250
02:44:58,760 --> 02:45:02,800
मैं रामपाल का परित्याग करता हूं

2251
02:45:02,800 --> 02:45:06,760
समझ गया हूं अब मैं साहब रामपाल अपना मार्केट

2252
02:45:06,760 --> 02:45:11,000
खड़ा कर रहा है और कुछ नहीं है जय श्री राम

2253
02:45:11,000 --> 02:45:15,320
जय श्रीराम बहुत अच्छा लगा

2254
02:45:15,320 --> 02:45:19,320
बहुत रामपाल दास के फलोर की राजकुमार

2255
02:45:19,320 --> 02:45:25,200
स

2256
02:45:25,200 --> 02:45:29,960
की और सर घूम जाएगा इनका

2257
02:45:29,960 --> 02:45:34,080
जो मैंने अपने चैनल पर वीडियो बना रखे हैं वो देखेंगे तो और सर घूम जाएगा

2258
02:45:34,080 --> 02:45:40,080
इनका मैंने आज

2259
02:45:41,320 --> 02:45:45,520
देख एक

2260
02:45:45,520 --> 02:45:49,720
मिनट ऐसा है ना कि ये लोग जो

2261
02:45:49,720 --> 02:45:54,360
बड़े विषय है ना कि रामपाल तत्वदर्शी है कि नहीं

2262
02:45:54,360 --> 02:45:58,400
जो गीता ज्ञान को बोलने वाला काल है अलग श्री कृष्ण से वो है

2263
02:45:58,400 --> 02:46:03,000
कि नहीं या क्या कहते हैं

2264
02:46:03,000 --> 02:46:07,240
ये गीता में दो तरह का ज्ञान है थोड़ा मानने लायक है थोड़ा मानने

2265
02:46:07,240 --> 02:46:11,320
लायक नहीं है कि नहीं वेद को बोलने वाला काल नाम का राक्षस

2266
02:46:11,320 --> 02:46:16,120
है कि नहीं और क्या कहते हैं

2267
02:46:16,120 --> 02:46:20,440
इनका कबीर जो है उसका वेदों में प्रमाण है कि नहीं कबीर भगवान

2268
02:46:20,440 --> 02:46:24,560
है कि नहीं कबीर सर्वशक्तिमान है कि नहीं यह कुछ ऐसे मोटे

2269
02:46:24,560 --> 02:46:28,600
बड़े विषय हैं जिस पर यह कभी बात नहीं करेंगे और खा करेंगे तो मु की खाएंगे

2270
02:46:28,600 --> 02:46:32,680
तो इनको यह क्या करते हैं कि यह समय को

2271
02:46:32,680 --> 02:46:36,720
निकालने के लिए देखिए हमने जो हम पर आरोप लगा रहा था उसका मुंह बंद कराने

2272
02:46:36,720 --> 02:46:41,280
के लिए छोटे छोटे छोटे छोटे छोटे छोटे अलग अलग ऐसे विषय लाएगा

2273
02:46:41,280 --> 02:46:45,360
लाएंगे जिससे कि मेन जो पृष्ठ भूमि है उसका कोई

2274
02:46:45,360 --> 02:46:49,400
मतलब नहीं है भाई करने को तो आप नाम जब भी सकते

2275
02:46:49,400 --> 02:46:53,640
हो नाम जप से भी मुक्ति दिखाई है हमारे शास्त्रों में कलयुग

2276
02:46:53,640 --> 02:46:56,600
में दिखाई है ना तो यह

2277
02:46:56,600 --> 02:47:00,680
ऐसी चीजों को ले अब कहीं तो व्यक्ति को इनको लगता है कहीं व्यक्ति को वो

2278
02:47:00,680 --> 02:47:04,880
चीज नहीं आई हम देख ले देखो मुह बंद कर दिया तो इसलिए वहां पर

2279
02:47:04,880 --> 02:47:09,120
यह करने की बज कि ला मैं तुझे प्रमाण दिखाऊ भाई तुझे गायत्री मंत्र

2280
02:47:09,120 --> 02:47:13,480
की विधि नहीं है समझ में आ रही है हमारी मत कर इस बात को लेकर हम आपत्ति

2281
02:47:13,480 --> 02:47:17,680
नहीं है जा आपत्ति हमें इससे है कि तूने हमारी दुर्गा

2282
02:47:17,680 --> 02:47:22,080
माता का अपमान क्यों किया तूने रामपाल को तत्वदर्शी कैसे

2283
02:47:22,080 --> 02:47:26,120
माना तूने कबीर को वेदों के अनुसार भगवान

2284
02:47:26,120 --> 02:47:30,480
कैसे कहा तूने कबीर को सर्वशक्तिमान कैसे कहा

2285
02:47:30,480 --> 02:47:34,640
तूने मोक्ष जो रामपाल के द्वारा मिल रहा है उसको परम स्वतंत्र

2286
02:47:34,640 --> 02:47:38,640
कैसे कहा इससे आपत्ति है इस पर आओ तुम जाओ

2287
02:47:38,640 --> 02:47:42,640
कर लो अपना मंत्र का जाप अलग से क्योंकि यह

2288
02:47:42,640 --> 02:47:47,280
जो सवाल है ना ये वाले इतने सारे आ जाएंगे अच्छा आप बताओ

2289
02:47:47,280 --> 02:47:51,640
कपूर जलाने से क्या होता अच्छा बताओ धूप जलाने

2290
02:47:51,640 --> 02:47:56,520
से क्या होता है अच्छा बताओ गौ मूत्र से क्या सवाल के जवाब

2291
02:47:56,520 --> 02:48:00,720
सबके सवाल के जवाब सबके हैं मगर यह केवल भटका

2292
02:48:00,720 --> 02:48:05,360
करके आपको जो मूल विषय है उससे दूर ले जाने के लिए है

2293
02:48:05,360 --> 02:48:09,400
जिससे कि कभी आप वो खंबा ना हिला पाओ बोल तेरा वो तत्वदर्शी है

2294
02:48:09,400 --> 02:48:11,640
कि नहीं बोल ईश्वर तेरा

2295
02:48:11,640 --> 02:48:16,560
सर्वशक्तिमान है कि नहीं व वो ना कर पाओ इसलिए अभी आर समा ने क्या करा था

2296
02:48:16,560 --> 02:48:21,400
कि हिंदू शब्द प्रामाणिक है कि नहीं इस पर बात करेंगे

2297
02:48:21,400 --> 02:48:25,720
अरे मत मत कहो अपने आप को हिंदू तुम ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो

2298
02:48:25,720 --> 02:48:29,840
हम भी कहने लगेंगे हिंदू शब्द जो है अप्र माणिक है हम भी कह देंगे कर

2299
02:48:29,840 --> 02:48:34,000
दो अपना ईश्वर सर्व शक्तिमान सिद्ध कर दो हम कहेंगे ू

2300
02:48:34,000 --> 02:48:38,320
हिंदू शब्द अप्राम के लो तो हमारे आपके बीच

2301
02:48:38,320 --> 02:48:42,320
की मुख्य दूरी हिंदू शब्द को लेकर नहीं है मगर वह मुख्य विषय जो

2302
02:48:42,320 --> 02:48:46,880
वो जानते कि हम कभी नहीं कर पाएंगे ईश्वर को सर्वशक्तिमान परंपरा

2303
02:48:46,880 --> 02:48:51,120
प्राप्त आचार्य सब नहीं कर पाएंगे हम लोग तो इसलिए ऐसे कुछ इधर उधर की बातें

2304
02:48:51,120 --> 02:48:56,080
करते रहो उसमें टाइम पास होता रहेगा हमारा जो चल रहा है व तंत्र वो चलता

2305
02:48:56,080 --> 02:49:00,240
रहेगा तो इसलिए विषय मूल विषय

2306
02:49:00,240 --> 02:49:04,320
को पकड़े रखने के लिए थोड़ा सा इस वहां पर भी मैं आर समाज

2307
02:49:04,320 --> 02:49:08,360
के यहां पर गया था तो उन्होंने ऐसी ऐसी बातें बातों के

2308
02:49:08,360 --> 02:49:12,480
उत्तर मुझे दे दिए जिन बातों को मैंने पूछा ही नहीं था मगर

2309
02:49:12,480 --> 02:49:16,520
फिर भी दे दिए अब अगर मैं उनका जवाब देने बैठूं तो मेरा मूल विषय

2310
02:49:16,520 --> 02:49:20,960
रह जाए फिर हो जाए रात हो गई अब चलते जय श्री राम

2311
02:49:20,960 --> 02:49:25,080
तो मैंने जानबूझ के उन विषयों पर शांत रहा जिन विषयों

2312
02:49:25,080 --> 02:49:26,800
से मेरा मूल विषय प्रभावित

2313
02:49:26,800 --> 02:49:30,920
नहीं हो रहा था मैं उसको पकड़े रहा तो कई मेरे अपने हैं उन्होंने मुझसे कहा भैया

2314
02:49:30,920 --> 02:49:35,720
आपने उसको इतना कैसे बोलने दिया आपने उसको य क्यों बोलने दिया कमेंट आते

2315
02:49:35,720 --> 02:49:39,720
तो मैंने कहा अगर मैं वो उसको खंडन करने लगता उन बातों को तो मैं

2316
02:49:39,720 --> 02:49:44,400
इस पर ना आ पाता कि उन्होंने ही एक जगह माना कि अवतार ले सकता है

2317
02:49:44,400 --> 02:49:48,920
उन्होंने एक जगह माना कि नहीं परम वो जो है जो वर्ण व्यवस्था है वो

2318
02:49:48,920 --> 02:49:52,920
से शुरू होती है उन्होंने मान लिया अगर मैं उनके उन चीजों

2319
02:49:52,920 --> 02:49:57,040
का खंडन करने लगू तो यह चीजें बड़ी वाली जो चीज जिन पर

2320
02:49:57,040 --> 02:50:01,360
हार सुनिश्चित है वो जो है खंडित हो जाती है खर इनको

2321
02:50:01,360 --> 02:50:06,000
अभी अगली बार य गाय म पड़ी

2322
02:50:06,000 --> 02:50:10,040
जी मैं सोच रहा हूं एक बार आप जाकर वापस आ जाइए मेरी बात रिपीट सुनाई दी जाती है आप जब ऑन

2323
02:50:10,040 --> 02:50:15,760
करते हैं म्यूट करते हैं अपने

2324
02:50:15,760 --> 02:50:21,600
आप तो ठीक है आज की चर्चा दो घंटे 50 मिनट की हो गई

2325
02:50:21,600 --> 02:50:25,680
है बहुत सुंदर रहा बहुत बढ़िया आपने बहुत अच्छे से लपेटा ऐसी

2326
02:50:25,680 --> 02:50:29,840
कोई व नहीं भगवान आपको शक्ति देता देते रहे ऐसे प्रभु

2327
02:50:29,840 --> 02:50:33,960
से प्रार्थना करते हैं और इन लोगों का भगवान जो भी गलत रास्ते

2328
02:50:33,960 --> 02:50:38,000
पर है इनको मैं यही कहूंगा भगवान सद बुद्धि दे ये लोग जो है कि

2329
02:50:38,000 --> 02:50:41,960
सच्चाई को स्वीकार

2330
02:50:41,960 --> 02:50:46,240
करें बस बस इनको ये कहना आता है

2331
02:50:46,240 --> 02:50:50,800
यह देखो एक व्यक्ति क्या कह रहा है संत रामपाल

2332
02:50:50,800 --> 02:50:54,680
जी नहीं नहीं वो

2333
02:50:54,680 --> 02:51:00,680
तो यह क्या कह रहे हैं मेरी 20 पर

2334
02:51:08,040 --> 02:51:12,560
है यह कोई मजाक कर रहा है यह

2335
02:51:12,560 --> 02:51:16,600
र जो भी करे उसमें कोई व नहीं जो गलत है तो गलत

2336
02:51:16,600 --> 02:51:21,560
है बिल्कुल सनातन ही सत्य है पाखंड है गुरु

2337
02:51:21,560 --> 02:51:27,560
परम पूज्य राघवाचार्य जी भी कहते हैं

2338
02:51:27,920 --> 02:51:32,280
जदा रहने दीजिए रने मैं ये कह रहा हं देखिए

2339
02:51:32,280 --> 02:51:36,360
देखिए ये कुछ लोग होते हैं देखिए अंधे

2340
02:51:36,360 --> 02:51:40,400
ब्लाइंड लोग इनको यही बोलना आता है संत रामपाल

2341
02:51:40,400 --> 02:51:44,520
जी महाराज का ज्ञान फला फला पूरा विश्व ये वो अभी

2342
02:51:44,520 --> 02:51:50,520
इनसे पूछ ले संत रामपाल जी का ज्ञान क्या है तो बस

2343
02:51:51,440 --> 02:51:55,640
दो आ ग जी पाड़ी जी आप अपना

2344
02:51:55,640 --> 02:52:01,640
वक्तव्य दीजिए फिर इसको जो है आगे पोस्टपोन किया जाए इसको चर्चा

2345
02:52:02,720 --> 02:52:07,160
को जी पाड़ी

2346
02:52:07,160 --> 02:52:11,160
जी म्यूट है उनका म्यूट है म्यूट भी है

2347
02:52:11,160 --> 02:52:15,000
और कुछ मुझे लग रहा है नेटवर्क

2348
02:52:15,000 --> 02:52:19,240
एरर आप इसको निरंतर रखिए निरंतर इसको निरंतर चलने

2349
02:52:19,240 --> 02:52:23,240
दीजिए चर्चाओं को देख काफी लोगों

2350
02:52:23,240 --> 02:52:28,000
को सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है ऐसी बात नहीं है

2351
02:52:28,000 --> 02:52:34,000
अक्षय जी हमारा नंबर नोट कर लीजिए

2352
02:52:34,480 --> 02:52:38,480
74836 इस पर आप ट करिएगा मैसेज मत

2353
02:52:38,480 --> 02:52:42,720
करिएगा इनके अंदर एक चीज और है मुझे यं ही वीडियो आया करते वीडियो

2354
02:52:42,720 --> 02:52:46,760
लो संत रामपाल के वीडियो अरे भैया आपको अगर चर्चा करनी है

2355
02:52:46,760 --> 02:52:51,520
उसके लिए करो अपने वीडियो अपने पास

2356
02:52:51,520 --> 02:52:55,640
रखो मैंने भज जहां पर मुझे बुरा लग रहा था मैंने कहा आप इसको देखिए

2357
02:52:55,640 --> 02:52:59,720
फिर इसको देख कर के इनको उत्तर दीजिए मैंने आपको एक वीडियो भेजा था पर मैंने उसको

2358
02:52:59,720 --> 02:53:03,840
देखा नहीं उसमें कुछ लिखा था उन्होंने अप शब्द ही लिखा था

2359
02:53:03,840 --> 02:53:08,280
हां बहुत सारा मैं मैं भी नहीं देखता हूं

2360
02:53:08,280 --> 02:53:12,280
इनके वीडियो पूरे पूरे नहीं देखता हूं विशाल भाटिया

2361
02:53:12,280 --> 02:53:18,280
जीरू

2362
02:53:18,720 --> 02:53:23,120
की चर्चा करते हैं अरे वेद तुम्हारे समझ में वेदों के समझ

2363
02:53:23,120 --> 02:53:27,800
से कितने परे हैं तुम लोग कहां वेदों को समझेंगे पहाड़ी

2364
02:53:27,800 --> 02:53:31,040
जी आ नहीं रहे हैं क्या बात

2365
02:53:31,040 --> 02:53:35,840
है चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम अगली लाइन

2366
02:53:35,840 --> 02:53:40,240
आ जी आ गए

2367
02:53:40,240 --> 02:53:44,840
संक्षिप्त सुन लेते हैं उनका उपसर ले लेते हैं

2368
02:53:44,840 --> 02:53:50,840
उसने वीडियो बनाय में उसने वीडियो बनाया उसके बारे में बात करने

2369
02:53:51,040 --> 02:53:55,240
मैंने नहीं एक चीज और है फिर से मैं बता दूं हम लोगों

2370
02:53:55,240 --> 02:53:59,400
का दूसरा चैनल है विग्रहवां धर्म उस पर हम लोग आने वाले

2371
02:53:59,400 --> 02:54:03,560
हैं उसको आप लोग फॉलो

2372
02:54:03,560 --> 02:54:08,520
करिए उसका लिंक के डिक्र में उसका लिक ाल

2373
02:54:08,520 --> 02:54:12,880
देका आप लिंक भेज दीजिए मुझे कांटेक्ट

2374
02:54:12,880 --> 02:54:18,880
नंबर दे दिया है 74036

2375
02:54:19,600 --> 02:54:23,960
जी एक नीचे कोई कमेंट कर रहे थे कि जो मनमाना आचरण

2376
02:54:23,960 --> 02:54:28,120
करता है ना उसकी मुक्ति होती है य गीता से बोलले अध्याय

2377
02:54:28,120 --> 02:54:32,200
16 का 23 और 24 आचरण का अर्थ बता दूं आचरण

2378
02:54:32,200 --> 02:54:36,200
का अर्थ होता है बहे आपका बिहेव कैसा होना चाहिए जब आप 21 लोक

2379
02:54:36,200 --> 02:54:40,600
से जब पढ़ोगे वो 20 श्लोक से जब पढ़ोगे वहा तीन आचरण की बात कर रखी काम

2380
02:54:40,600 --> 02:54:45,200
काम क्रोध और लोभ ये तीन आचरण है जो मुक्ति

2381
02:54:45,200 --> 02:54:50,080
मुक्ति में बाधा डालते हैं तो इन् तीन आचरण का त्याग देना

2382
02:54:50,080 --> 02:54:54,080
चाहिए मलो सब नाथ नरक के पंथ

2383
02:54:54,080 --> 02:54:58,640
ये तुलसीदास जी ने भी कह दिया ये नरक के रास्ते है तीनों के तीनों

2384
02:54:58,640 --> 02:55:02,680
में बोला कि शास्त्र ही प्रमाणित है तेरे लिए जो आचरण की बात करी है

2385
02:55:02,680 --> 02:55:06,240
तीन आचरण को त्यागने की बात कर रखी वहां पर कि काम

2386
02:55:06,240 --> 02:55:10,240
क्रोध और लोभ को त्याग कर जो तुम्हारे जो दान रूप

2387
02:55:10,240 --> 02:55:14,480
क्रियाए है तप रूप क्रियाए भक्ति रूप क्रियाए है इन क्रियाओं का

2388
02:55:14,480 --> 02:55:18,720
क्रियाए करनी चाहिए इन तीन आचरण को त्याग के ये तीनों आचरण नरक का द्वार

2389
02:55:18,720 --> 02:55:22,720
खोलती है जब आप 16 से 20 श्लोक से

2390
02:55:22,720 --> 02:55:26,760
पढ़ोगे इसलिए कहता हूं ज्ञान पूरा लीजिए कि

2391
02:55:26,760 --> 02:55:30,840
अगर किसी बड़े स्टेज में आप बैठोगे तो वहां यह चीज बताई जाएगी कि ज्ञान

2392
02:55:30,840 --> 02:55:35,280
पूरा लेना पड़ता है बीच बीच के श्लोक आप पढ़ ले हो अध्याय

2393
02:55:35,280 --> 02:55:39,280
चार का 34 श्लोक पढ़ लिया अध्याय 15 का एक शलोक एक से चार पढ़

2394
02:55:39,280 --> 02:55:44,760
लिया फिर सीधे 18 में चले गए अभी

2395
02:55:44,760 --> 02:55:48,840
ये लिंक है हमारे चैनल का बिल्कुल बकुल

2396
02:55:48,840 --> 02:55:52,840
आप इस लिंक के द्वारा जो है उसको सब्सक्राइब कर

2397
02:55:52,840 --> 02:55:56,960
लीजिए चैनल को फॉलो कर लीजिए तो सवाने पूरी

2398
02:55:56,960 --> 02:56:00,960
स्ट्रीम में इनसे एक सवाल पूछा

2399
02:56:00,960 --> 02:56:05,520
कि जीवात्मा किसका अंश है य बो परम पिता परमेश्वर परम अक्ष बत बढ़िया

2400
02:56:05,520 --> 02:56:11,520
बहुत बढ़िया सवाल है आपका बहुत बढ़िया तो मैंने

2401
02:56:12,120 --> 02:56:18,120
बोला 15 का सातवा पढ़ लीजिए वहा तो काल बो

2402
02:56:19,280 --> 02:56:23,360
मैं बाहर गया था पर मैं आज पूरी डिबेट देखूंगा मैं

2403
02:56:23,360 --> 02:56:27,480
मुझे नींद बहुत आ रही थी वैसे कितने में फ गए तो

2404
02:56:27,480 --> 02:56:33,000
गीता पढ़ी नहीं ना इने जी

2405
02:56:33,000 --> 02:56:37,080
जी चलो खैर और भी क्वेश्चन थे मेरे इनको

2406
02:56:37,080 --> 02:56:41,320
बोलो जरा पांचवा अध्याय का आठवा श्लोक पढ़िए प्रेशन वाला जरा वही नहीं पढ़ पाएंगे

2407
02:56:41,320 --> 02:56:45,920
उनको जरा पूछ उस श्लोक के बारे में आएंगे

2408
02:56:45,920 --> 02:56:50,640
दोबारा एक दो दिन में आएंगे तब करते हैं है ना इनकी ऐसी क्लास

2409
02:56:50,640 --> 02:56:55,560
लगाओ ये बिचारे अभी क्लास

2410
02:56:55,560 --> 02:56:59,800
अभी क्लास मजेदार नहीं थी क्या आज तो बहुत अच्छी बहुत अच्छी रही

2411
02:56:59,800 --> 02:57:03,720
बिल्कुल बहुत बढ़िया बहुत सुंदर

2412
02:57:03,720 --> 02:57:07,880
को चलिए सभी को जय श्री राम हर ह

2413
02:57:07,880 --> 02:57:12,200
महादेव भवानी दने सन्मुख रहे गणेश

2414
02:57:12,200 --> 02:57:18,200
पंच देव रक्षा करें स ब्रह्मा विष्णु महे

2415
02:57:19,440 --> 02:57:23,440
चलिए
