1
00:00:01,680 --> 00:00:07,680
[संगीत]

2
00:00:07,760 --> 00:00:13,760
सभी को जय श्री

3
00:00:14,080 --> 00:00:18,440
राम आपने देखा

4
00:00:18,440 --> 00:00:23,640
होगा एक हमारी वार्ता हुई

5
00:00:23,640 --> 00:00:27,840
थी एक रामपाल के फॉलोअर के

6
00:00:27,840 --> 00:00:31,840
साथ और वह इस संदर्भ में थी

7
00:00:31,840 --> 00:00:36,680
वह वार्ता कि उसने कहीं पर टिप्पणी की है

8
00:00:36,680 --> 00:00:40,800
कि सनातन कोई धर्म नहीं है अब ये लोग एक जगह

9
00:00:40,800 --> 00:00:44,840
एक तरफ तो कहते हैं कि नहीं सनातन ही धर्म है पहले बात पहले तो शुरू करते

10
00:00:44,840 --> 00:00:49,760
हैं कि हिंदू मुसलिम सिख ईसाई कोई धर्म नहीं है न्यारा

11
00:00:49,760 --> 00:00:53,840
केवल एक मानव धर्म है उस अब उस मानव धर्म

12
00:00:53,840 --> 00:00:58,640
की क्या पहचान है वो इनको पता नहीं है

13
00:00:58,640 --> 00:01:02,680
फिर जब अच्छा एक तरफ यह भी दिखावा करते कि

14
00:01:02,680 --> 00:01:06,960
देखो देखो हम बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ खड़े हैं वो नाटक करते हैं वो पोस्टर उस्टर

15
00:01:06,960 --> 00:01:10,960
लगा कर के वो सोशल मीडिया पर दिखावा करते

16
00:01:10,960 --> 00:01:15,080
हैं और उसके बाद एक समय ऐसा आ जाता है जब

17
00:01:15,080 --> 00:01:16,800
यह भी कहने लगते कि सनातन कोई धर्म

18
00:01:16,800 --> 00:01:21,400
नहीं है बटो तो कटो सबका

19
00:01:21,400 --> 00:01:25,480
रायता बना देते हैं सब एक एक कढ़ाई में सब चीजें डाल दी भोगे तो कटो मान

20
00:01:25,480 --> 00:01:29,480
हिंदू मुस्लिम सिख साई कोई धर्म नहीं है न्यारा सनातन कोई धर्म नहीं है हिंदू कोई धर्म नहीं

21
00:01:29,480 --> 00:01:33,720
है अरे कहना क्या चाहते हो वो नहीं पता कहना

22
00:01:33,720 --> 00:01:37,760
क्या चाहते हैं वो पता नहीं तो ज्यादातर जो फॉलोअर्स है उनका

23
00:01:37,760 --> 00:01:41,840
जो दिमाग है ना व बिल्कुल जा चुका है खुद ही

24
00:01:41,840 --> 00:01:45,960
ऐसी बातें करते हैं कि अगर जो इस तरह की चर्चाएं होती

25
00:01:45,960 --> 00:01:50,080
है ना कि अगर पब्लिक के बीच में हो तो पब्लिक वहां हसे और या फिर थोड़ी

26
00:01:50,080 --> 00:01:54,080
देर बाद उनको लोगों को पीटने लगे हां ये भी

27
00:01:54,080 --> 00:01:58,840
बिल्कुल सही बात ऐसी ऐसी बातें कर देंगे वो कि पब्लिक के अंदर

28
00:01:58,840 --> 00:02:02,880
इतना क्रोध आ जाए पब्लिक उतना संयमी तो होती नहीं है तो

29
00:02:02,880 --> 00:02:07,160
वह इनको पीट दे ऐसी बातें य लोग करते

30
00:02:07,160 --> 00:02:11,560
हैं तो अब इ इनका कहना है कि सनातन कोई धर्म नहीं

31
00:02:11,560 --> 00:02:15,640
है अच्छा एक लोग हैं हमारे साथ जुड़े हुए ठाकुर

32
00:02:15,640 --> 00:02:20,000
यादव जी करके हैं यादव जी आप अपनी अगर अपना चेहरा

33
00:02:20,000 --> 00:02:26,000
अगर दिखाए तो आपको लिया जाए अन्यथा आप जा सकते

34
00:02:26,000 --> 00:02:30,320
हैं ठीक है तब तक हम अपनी बात करते हैं जब

35
00:02:30,320 --> 00:02:32,000
यादव जी अगर अपना चेहरा दिखा

36
00:02:32,000 --> 00:02:36,120
दें दिखाने के लिए तैयार हो जाए तो फिर उनको

37
00:02:36,120 --> 00:02:40,480
ले लिया जाएगा है ना यादव जी

38
00:02:40,480 --> 00:02:44,920
ठाकुर यादव जी अगर आप सुन रहे हैं देख रहे हैं तो अपना चेहरा दिखाएं अन्यथा

39
00:02:44,920 --> 00:02:50,040
आप जा सकते

40
00:02:50,040 --> 00:02:54,880
हैं यह चैनल बंद करवाना चाहता है

41
00:02:54,880 --> 00:02:59,840
सुभाष द्विवेदी अरे भाई पहले नाम तो सही से जान लो

42
00:02:59,840 --> 00:03:05,840
शिवांश नारायण द्विवेदी नाम है सुभाष द्विवेदी

43
00:03:06,040 --> 00:03:10,840
नहीं लिंक दिया ही नहीं गया नहीं लिंक दिया गया है

44
00:03:10,840 --> 00:03:14,840
किसी को पर्सनल भेजा था लिंक शायद वही है मगर उनको शायद यह

45
00:03:14,840 --> 00:03:19,160
पता नहीं है कि यहां का एक सिद्धांत है कि वैचारिक मतभेद

46
00:03:19,160 --> 00:03:23,280
के निमित्त जो चर्चा होती है वह

47
00:03:23,280 --> 00:03:27,360
तभी होती है जब व्यक्ति अपने

48
00:03:27,360 --> 00:03:31,520
फेस के साथ में है तब तक हम बात कर लेते हैं सनातन कोई धर्म

49
00:03:31,520 --> 00:03:35,720
नहीं है तो पहली बात ये है कि ऐसा नहीं है कि धर्म को सनातन

50
00:03:35,720 --> 00:03:39,800
कहीं शास्त्रों में कहा नहीं गया है ठीक है

51
00:03:39,800 --> 00:03:43,840
तो वो गुण भी है और क्योंकि वो गुण उसमें

52
00:03:43,840 --> 00:03:47,040
पाया जाता है तो धर्म का नाम वो जो एडजेक्टिव है

53
00:03:47,040 --> 00:03:51,120
विशेषण वो लग जाता है उसके साथ हमारे धर्म के साथ सनातन

54
00:03:51,120 --> 00:03:55,120
अब वो गुण क्या है कि हमारा वो धर्म है

55
00:03:55,120 --> 00:03:59,120
जो किसी देश काल परिस्थिति वश बदलता नहीं है उसका नाम

56
00:03:59,120 --> 00:04:03,320
सनातन तो जो धर्म दिया गया

57
00:04:03,320 --> 00:04:07,360
जो शति परंपरा के द्वारा चला

58
00:04:07,360 --> 00:04:11,440
वही आज भी जो अपने मूल रूप में जहां जहां पर है वह धर्म

59
00:04:11,440 --> 00:04:16,120
जो है वह सनातन है इसीलिए जब कोई उस परंपरा

60
00:04:16,120 --> 00:04:20,400
गत रूप से प्राप्त होने वाले धर्म का खंडन करते हुए स्वयं को वैदिक

61
00:04:20,400 --> 00:04:24,400
या सनातनी कहता है तो वह क्वेश्चनेबल हो जाता है क्योंकि वो परंपरा का

62
00:04:24,400 --> 00:04:28,520
खंडन हो रहा खंडन कर रहा है परंपरा से ही वह धर्म यहां तक आया है

63
00:04:28,520 --> 00:04:33,160
अगर वह खुद के विचार विर को ऊपर रख रहा है परंपरा प्राप्त सिद्धांतों के आगे

64
00:04:33,160 --> 00:04:37,480
तो उसके वो विचारों का उसके उन विचारों का अस्तित्व वो परंपरा

65
00:04:37,480 --> 00:04:41,600
से नहीं मिल रहा है वह अपने उसके खुद के विचार है तो पहली बात

66
00:04:41,600 --> 00:04:45,840
तो यह हो गया कि सनातन हमारे धर्म का गुण भी है

67
00:04:45,840 --> 00:04:49,960
और क्योंकि वह गुण उसमें है इसलिए हमारे धर्म का नाम हमारे धर्म का विशेषण

68
00:04:49,960 --> 00:04:54,440
सनातन भी है दूसरी बात अब ये आती है

69
00:04:54,440 --> 00:04:58,640
कि अब ये विशेषण लगाना क्यों पड़ता है क्या केवल धर्म कहने से काम नहीं

70
00:04:58,640 --> 00:05:02,200
चलेगा चल सकता है मगर जब धर्म के नाम

71
00:05:02,200 --> 00:05:06,400
से कई सारे धर्मा भास भी प्रचलित हो जाएं

72
00:05:06,400 --> 00:05:10,680
तो हमें फिर एक एडजेक्टिव लगाना

73
00:05:10,680 --> 00:05:14,800
पड़ता है कि भैया कौन सा धर्म कि सनातन धर्म है ना जिस

74
00:05:14,800 --> 00:05:18,920
धर्म को बारबार सनातन कहा गया हम उस धर्म की बात कर रहे हैं अब

75
00:05:18,920 --> 00:05:22,960
वो उसका गुण भी है सनातन शाश्वत जाति

76
00:05:22,960 --> 00:05:27,240
धर्म कुल धर्म शाश्वत है ना तो वो उसका गुण भी है धर्म

77
00:05:27,240 --> 00:05:30,200
का और वो

78
00:05:30,200 --> 00:05:34,360
यह बताने के लिए कि जब हम धर्म की बात कर रहे तो हम किस धर्म

79
00:05:34,360 --> 00:05:38,400
में आस्था रखते हैं तो वह सनातन जिसका गुण सनातन

80
00:05:38,400 --> 00:05:41,360
है और

81
00:05:41,360 --> 00:05:45,680
जिसका गुण होने के कारण उसका नाम भी सनातन

82
00:05:45,680 --> 00:05:50,000
है जैसे कि भगवान

83
00:05:50,000 --> 00:05:54,000
विष्णु इनका गुण भी विष्णु विष्णु का अर्थ होता है

84
00:05:54,000 --> 00:05:58,640
गुण भी है और उनका नाम भी है ठीक है

85
00:05:58,640 --> 00:06:02,720
तो ये हो गई कि हम अब हमें एडजेक्टिव लगा क्यों रहे

86
00:06:02,720 --> 00:06:06,760
ये आवश्यक क्यों है सनातन धर्म कहना क्योंकि धर्म के नाम से कई सारे

87
00:06:06,760 --> 00:06:10,760
धर्मा भास आ गए लोग उसमें कंफ्यूज ना हो इसलिए

88
00:06:10,760 --> 00:06:15,040
हम बता देते हैं भा हम यह बात जो कर रहे हैं सनातन धर्म की बात कर रहे हैं हम सनातन

89
00:06:15,040 --> 00:06:17,360
धर्मावलंबी है अगर हम धर्म कह

90
00:06:17,360 --> 00:06:21,360
देंगे केवल तो हो सकता है कुछ बुद्धिजीवी

91
00:06:21,360 --> 00:06:26,040
समझ जाए जिनको धर्म और अधर्म की व्याख्या का अंतर पता हो

92
00:06:26,040 --> 00:06:30,280
कि धर्म क्या है और अधर्म क्या है म

93
00:06:30,280 --> 00:06:34,360
जिनको नहीं पता वो नहीं समझ पाएंगे तो एडजेक्टिव लगाना पड़ता है अब इसका एक उदाहरण

94
00:06:34,360 --> 00:06:38,960
ले लीजिए एडजेक्टिव क्यों लगाना पड़ता है जब

95
00:06:38,960 --> 00:06:43,200
हम पहले केवल एक घी था

96
00:06:43,200 --> 00:06:47,640
पहले अस्तित्व में पहले केवल घी था उसके बाद डालडा

97
00:06:47,640 --> 00:06:51,680
भी आ गया अमुक अमुक घी के स्थान पर यूज में आने वाले और भी कई

98
00:06:51,680 --> 00:06:56,080
प्रकार के पदार्थ आ गए इसलिए अब जो है

99
00:06:56,080 --> 00:07:00,840
जाकर के कहना पड़ता है कि शुद्ध देसी दे दो भैया

100
00:07:00,840 --> 00:07:05,280
यह शुद्ध देसी क्या है एडजेक्टिव चाहिए हमको केवल घी

101
00:07:05,280 --> 00:07:09,680
मगर घी के नाम पर डालडा भी है तो क्या करोगे एडजेक्टिव बताना

102
00:07:09,680 --> 00:07:13,760
पड़ेगा उसी प्रकार से सनातन धर्म कहना

103
00:07:13,760 --> 00:07:18,000
इसलिए आवश्यक है क्योंकि धर्म के नाम पर इस्लाम भी है

104
00:07:18,000 --> 00:07:22,080
जैन बौद्ध ये भी है इसलिए

105
00:07:22,080 --> 00:07:26,320
एडजेक्टिव लगाना पड़ता है कि हम जब बात कर रहे हैं धर्म की तो वो कौन सा सनातन

106
00:07:26,320 --> 00:07:30,400
धर्म अब दूसरी बात है हमारे शास्त्रों में अनेक अनेक जगह

107
00:07:30,400 --> 00:07:33,480
कहा गया है इस

108
00:07:33,480 --> 00:07:38,080
निर् बुद्धि व्यक्ति को पता नहीं है कहां कहा गया है कि नहीं कहा गया

109
00:07:38,080 --> 00:07:44,080
है एक जगह हम दिखाई देते हैं

110
00:07:46,540 --> 00:07:52,540
[संगीत]

111
00:08:02,960 --> 00:08:07,680
तो कई जगह कहा गया है हम एक जगह दिखा देते हैं महाभारत

112
00:08:07,680 --> 00:08:11,880
शांति पर्व 162 वा अध्याय और

113
00:08:11,880 --> 00:08:15,960
21वां श्लोक यह जो है आप देख

114
00:08:15,960 --> 00:08:18,360
सकते

115
00:08:18,360 --> 00:08:24,360
हैं आपको दिख रहा होगा धर्म

116
00:08:24,400 --> 00:08:28,440
सनातन दिख रहा है आपको धर्म

117
00:08:28,440 --> 00:08:32,440
सनातन और इसकी हिंदी भी देख लीजिए कुछ वहां पर वर्णन किया गया

118
00:08:32,440 --> 00:08:36,480
है सनातन धर्म के कुछ लक्षण बताए गए हैं तो धर्म को कई

119
00:08:36,480 --> 00:08:40,680
जगह हमारे शास्त्रों में सनातन कहा गया है गुण से भी है और

120
00:08:40,680 --> 00:08:44,800
गुण होने के कारण नाम भी है गुण और क्या-क्या है

121
00:08:44,800 --> 00:08:48,840
सबसे पहली बात तो यही कि जो किसी भी देशकाल परिस्थिति में ना बदले

122
00:08:48,840 --> 00:08:53,120
अब सनातन ईश्वर क्यों क्योंकि वो ईश्वर ऐसा है जो बदलता

123
00:08:53,120 --> 00:08:57,200
नहीं है जो जैसा है वैसा ही रहता सनातन क्यों क्योंकि

124
00:08:57,200 --> 00:09:01,280
वो यहां भी है वहां भी है दूसरी स्थिति में

125
00:09:01,280 --> 00:09:05,400
जाकर के ये नहीं कह सकते वहां पर ईश्वर नहीं है मगर इस्लाम का जो ईश्वर है वह सब

126
00:09:05,400 --> 00:09:09,480
जगह नहीं है उसकी शक्ति सब जगह है व बात और है कि जब उनसे

127
00:09:09,480 --> 00:09:13,480
मंत्रणा की जाए तो उनके पास जवाब नहीं होता है जैसे आपने क्रिश्चन के साथ एक

128
00:09:13,480 --> 00:09:17,520
बात हुई थी तो आपने देखा था उसके पास जवाब नहीं तो उनका जो ईश्वर

129
00:09:17,520 --> 00:09:21,600
है सनातन नहीं है तो जिस विचारधारा में या

130
00:09:21,600 --> 00:09:26,080
जिस मान्यता में ईश्वर को सनातन नहीं माना जा रहा है

131
00:09:26,080 --> 00:09:30,160
जो दे देह धारी है जो भी तत्व उसको आप आत्मा

132
00:09:30,160 --> 00:09:34,520
कहते हो जो भी कहते हो वोह सनातन नहीं है ईश्वर सनातन

133
00:09:34,520 --> 00:09:39,440
नहीं है और साथ ही साथ यह जो देह धारी हो गया है

134
00:09:39,440 --> 00:09:43,640
यह ईश्वर को प्राप्त कैसे करेगा इसको प्राप्त करने के लिए जो विधि बताई

135
00:09:43,640 --> 00:09:47,640
गई है कि इस स्त्री को तुम माता समझना इस स्त्री को तुम पत्नी

136
00:09:47,640 --> 00:09:52,600
समझना इस स्त्री को तुम बहन समझना इसी तरीके से बहुत सारी विधियां नियम

137
00:09:52,600 --> 00:09:56,680
जो बताए गए हैं ना तो ईश्वर सनातन है ना

138
00:09:56,680 --> 00:10:00,760
ही जो जीव तत्व है जिसने देह को धारण किया हुआ है वो सनातन है और

139
00:10:00,760 --> 00:10:05,160
ना ही इस देह धारी जीव द्वारा जो

140
00:10:05,160 --> 00:10:09,320
ईश्वर तत्व उसको प्राप्त करने के लिए जो विधि बताई गई है वह सनातन ये तीनों

141
00:10:09,320 --> 00:10:13,560
ही सनातन वहां पर नहीं है इसलिए वह सनातन धर्म नहीं है

142
00:10:13,560 --> 00:10:18,320
और यह सनातन धर्म है तो नाम भी हो गया और गुण भी हो

143
00:10:18,320 --> 00:10:22,640
गया है ना तो यह

144
00:10:22,640 --> 00:10:26,680
अमित दास को समझना चाहिए अमित दास ने भी अपनी लाइफ में

145
00:10:26,680 --> 00:10:30,760
ऐसी कुछ बातें बोली है खैर बुद्धि है नहीं

146
00:10:30,760 --> 00:10:35,000
उसके अंदर अच्छा दूसरी उसने एक बात और बोली वहां पर

147
00:10:35,000 --> 00:10:39,080
क्या बोला जब हमने उससे पूछा कि जब तुम

148
00:10:39,080 --> 00:10:43,080
यह खुद कह रहे हो कि जो

149
00:10:43,080 --> 00:10:47,120
शरीर में रहने वाली आत्मा है सनातन है और गीता में भी कहा

150
00:10:47,120 --> 00:10:51,200
गया है कई जगह वह बात और है कि जब काल हमारा बुरा चाहता है तो

151
00:10:51,200 --> 00:10:54,560
हम काल की बात क्यों माने जब काल हमारा

152
00:10:54,560 --> 00:10:59,280
बुरा चाहता है तो हम काल की कोई भी बात क्यों माने भाई

153
00:10:59,280 --> 00:11:03,360
उसका कोई जवाब नहीं है क्यों माने वो उस पर अभी

154
00:11:03,360 --> 00:11:09,360
हम बात करेंगे काल की बात क्यों माने ध्यान

155
00:11:10,000 --> 00:11:14,040
दिलाइमा आए थे वो है कि गए वो चले गए उनको अपना चेहरा

156
00:11:14,040 --> 00:11:18,160
दिखाने में भय है तो चेहरा दिखाने में भय

157
00:11:18,160 --> 00:11:22,320
किसे होता है जिसको या तो

158
00:11:22,320 --> 00:11:26,360
जीत का लालच हो या हार का भय हो

159
00:11:26,360 --> 00:11:30,480
है ना तो हार का भय किसे होता है जिसे अपने सिद्धांतों पर

160
00:11:30,480 --> 00:11:34,920
विश्वास ना हो उसको हार का भय होता है

161
00:11:34,920 --> 00:11:39,200
जो अपने सिद्धांतों के लिए मृत्यु को भी आलन करने की भावना रखता

162
00:11:39,200 --> 00:11:43,840
है वह आता है चेहरा लेकर के सामने

163
00:11:43,840 --> 00:11:48,280
जो अपने धर्म के लिए कुछ भी कर सकने की भावना रखता है

164
00:11:48,280 --> 00:11:52,320
वह आता है चेहरा लेकर के सामने है ना

165
00:11:52,320 --> 00:11:56,200
खैर बैक टू द

166
00:11:56,200 --> 00:12:00,880
पॉइंट तो अब इसका कहना जब हमने इससे पूछा व्यक्ति

167
00:12:00,880 --> 00:12:05,120
से जिससे हमारी फोन पर चर्चा हो रही थी उससे हमने जब यह पूछा

168
00:12:05,120 --> 00:12:09,320
कि भाई तुम यह मान रहे हो कि जीव सनातन है यानी जीवात्मा

169
00:12:09,320 --> 00:12:10,280
सनातन

170
00:12:10,280 --> 00:12:14,480
है तो फिर तुम्हारा जो तथाकथित एक राक्षस

171
00:12:14,480 --> 00:12:18,640
है जो लोगों को फसाने के लिए आया है

172
00:12:18,640 --> 00:12:22,640
वह राक्षस खाता किसको है और जिसको वह

173
00:12:22,640 --> 00:12:26,960
खा रहा है वो सनातन है तो वो उसके दांतों से पिस कैसे जाती है इसका

174
00:12:26,960 --> 00:12:31,480
कोई उत्तर नहीं है क्या बोल रहा है मालूम है

175
00:12:31,480 --> 00:12:35,680
आत्मा अलग है जीवात्मा अलग है ईश्वर अलग हो

176
00:12:35,680 --> 00:12:39,680
गया और जीवात्मा अलग होई काल अलग हो गया और अब

177
00:12:39,680 --> 00:12:43,800
जी और आत्मा अलग है अब वो ये बोल रहा है आत्मा अलग

178
00:12:43,800 --> 00:12:47,840
है और जीवात्मा अलग है तो अब मैंने पूछा कि भाई

179
00:12:47,840 --> 00:12:52,200
क्या हमारे शरीर में दो तत्व है एक आत्मा एक जीवात्मा है

180
00:12:52,200 --> 00:12:56,720
तो बोला आप यहां आ जाओ वहां आ जाओ यह है वो है

181
00:12:56,720 --> 00:13:01,000
और वही जो इनका एक जो विद्रोही

182
00:13:01,000 --> 00:13:05,240
हो गया ना पवन दास बोलता है बंदर जैसा मुंह लेक बैठ जाते हो

183
00:13:05,240 --> 00:13:09,240
तो वही हाल है फिर और कोई इनका इनके पास उत्तर नहीं

184
00:13:09,240 --> 00:13:13,320
भाई आत्मा को जब कोई काट नहीं सकता वायु सुखा नहीं

185
00:13:13,320 --> 00:13:17,520
सकती जल डुबो नहीं सकता तो उसको तुम्हारा काल दांतों में पीस

186
00:13:17,520 --> 00:13:20,360
कैसे रहा

187
00:13:20,360 --> 00:13:24,440
है तो यह सब

188
00:13:24,440 --> 00:13:25,400
बिना सोचे

189
00:13:25,400 --> 00:13:29,400
समझे जो हमने मान लिया है उसके पक्ष में जो हमको समझ में

190
00:13:29,400 --> 00:13:33,440
आया बस वो बोलना है मुंह चलाते रहना है कोई मतलब नहीं है

191
00:13:33,440 --> 00:13:39,440
कि वो तार्किक या प्रामाणिक है कि

192
00:13:43,800 --> 00:13:47,920
नहीं कभी कभी भावनाओं में बह जाते हैं ये पाखंड

193
00:13:47,920 --> 00:13:52,080
का खंडन जी बोल रहे हैं कि आप

194
00:13:52,080 --> 00:13:56,080
इतने प्यार से क्यों बात करते हैं कभी-कभी भावनाओं में बह जाते हैं

195
00:13:56,080 --> 00:14:00,360
भाई हम भी मनुष्य हैं तो हमारा छोटा भाई जैसा कोई व्यक्ति

196
00:14:00,360 --> 00:14:04,400
है वो अचानक से कह देता है मुझे एक प्रश्न का जवाब दे दो अच्छा ये

197
00:14:04,400 --> 00:14:09,000
एक टेक्नीक है इनकी जब बिल्कुल फस जाए

198
00:14:09,000 --> 00:14:13,000
तो मुझे एक प्रश्न का उत्तर दे दो मैं आपका हो जाऊंगा तो

199
00:14:13,000 --> 00:14:17,000
लगता है कोई भटका हुआ भाई वापस आ जाए अपनी सही मार्ग पर

200
00:14:17,000 --> 00:14:21,320
तो जो विषय होता है विषयात देखो कभी भी कोई चर्चा होती है

201
00:14:21,320 --> 00:14:25,600
ना उसमें विषयात एक बहुत बड़ा पार्ट है

202
00:14:25,600 --> 00:14:29,680
यह मेरा मैंने अभी जो व्यक्तिगत मेरा अनुभव है वो बता रहा हूं

203
00:14:29,680 --> 00:14:33,920
विषयात किसी भी चर्चा का एक बहुत बड़ा पार्ट

204
00:14:33,920 --> 00:14:38,040
है क्यों है क्योंकि जब भी कहीं पर

205
00:14:38,040 --> 00:14:40,400
वार्ता का किसी का निष्कर्ष निकलना होता

206
00:14:40,400 --> 00:14:45,320
है तो वह विषयात से हो सकता है बाधित हो जाए

207
00:14:45,320 --> 00:14:49,920
इसलिए आपने हमारी जो चर्चाएं देखी होंगी उसमें कई बार

208
00:14:49,920 --> 00:14:53,960
ऐसी बातें भी हुई होंगी चर्चा में जिनका हम प्रतिकार कर सकते थे

209
00:14:53,960 --> 00:14:58,120
हमें करना चाहिए था मगर सिद्धांत की रक्षा के लिए निष्कर्ष

210
00:14:58,120 --> 00:15:02,320
तक पहुंचने के लिए विषयात ना होने देने के लिए हमने उन बातों को नहीं

211
00:15:02,320 --> 00:15:06,560
पकड़ा उनका जवाब नहीं दिया सुन के रह गए जैसे अभी आपने आर

212
00:15:06,560 --> 00:15:10,560
समाज के जो आचार्य जी थे उनके साथ बहुत सारी चर्चाएं हुई

213
00:15:10,560 --> 00:15:15,440
उन्होंने एक सवाल का जवाब जो पूछा नहीं गया था उसका भी उन्होंने उत्तर

214
00:15:15,440 --> 00:15:19,480
दिया तीन तीन प्रश्नों के उत्तर दे दिए पूछा येय गया था कि वो

215
00:15:19,480 --> 00:15:23,760
सब कुछ कर सकता है कि नहीं अनंत सामर्थ्य वान है कि नहीं उन्होंने

216
00:15:23,760 --> 00:15:27,760
ये भी इसका तो जो भी बोल सकते थे बोला उन्होंने अनंत

217
00:15:27,760 --> 00:15:31,840
सामर्थ्य वान है कि नहीं मगर साथ में उन्होंने दो और बोल दिए लेता नहीं

218
00:15:31,840 --> 00:15:36,040
है यानी प्रमाण है हमारे पास ना लेने के और लिया नहीं है इस बारे में हमारे

219
00:15:36,040 --> 00:15:40,200
पास हिस्ट्री है ठीक है तो हम

220
00:15:40,200 --> 00:15:44,360
अपने विषय से भटक ना जाए इस कारण से

221
00:15:44,360 --> 00:15:48,520
उस विषयात विषयात ना हो जाए उसी में सारा टाइम ना निकल जाए फिर आचार्य

222
00:15:48,520 --> 00:15:52,680
जी ये ना कह दे बस हमारे पास इतना ही समय है तो इस

223
00:15:52,680 --> 00:15:55,560
कारण से उनकी सभी बातों का हमने वहां पर उत्तर

224
00:15:55,560 --> 00:16:01,440
नहीं दिया तो यह भी एक बहुत महत्त्वपूर्ण

225
00:16:01,440 --> 00:16:05,480
टॉपिक है किसी भी होने वाली चर्चा का कि

226
00:16:05,480 --> 00:16:09,840
विषयात को हमें रोकना होता है विषयात नहीं होना चाहिए और

227
00:16:09,840 --> 00:16:14,280
जो हम लोग यहां पर कई बार ऐसा आक्षेप लगता है कि भाई विषय

228
00:16:14,280 --> 00:16:18,600
आप जो है कोई बोलने लगता है तो उसको हटा देते हो विषयात को बचाने के

229
00:16:18,600 --> 00:16:23,080
लिए विषयात ना हो इस कारण से और

230
00:16:23,080 --> 00:16:27,120
कई बार सुनके भी अपनी उसी बात पर आना पड़ता है सुन ली बहुत सारी

231
00:16:27,120 --> 00:16:31,200
बातें उन्होंने कहीं बहुत आक्षेप लगाए मगर हमने बात कौन सी कुरे दी

232
00:16:31,200 --> 00:16:35,360
यदि वो कहीं पर भी एक जगह उसकी सामर्थ्य का अंत

233
00:16:35,360 --> 00:16:39,400
हो रहा है तो वह अनंत कैसे है ना

234
00:16:39,400 --> 00:16:43,480
तो इस व्यक्ति ने विषयात करने के लिए फिर वो एक दूसरी कहानी के हम सबसे पहले

235
00:16:43,480 --> 00:16:48,160
कहां आए वो हमारे साथ क्या कर रहा है इस बारे में हमने वीडियोस बना दिए हैं

236
00:16:48,160 --> 00:16:52,280
और सनातन सिद्धांत नाम की एक सीरीज है उसमें ईश्वर सृष्टि की रचना क्यों

237
00:16:52,280 --> 00:16:56,840
करते हैं अच्छा एक बात हम यह कहे कि ईश्वर

238
00:16:56,840 --> 00:17:01,440
सृष्टि की रचना यूं ही करते हैं उनको कोई आवश्यकता नहीं होती है

239
00:17:01,440 --> 00:17:05,760
जैसे हम बैठे बैठे पेन चला देते हैं हाथ हिला

240
00:17:05,760 --> 00:17:09,880
देते हैं जैसे अभी मैंने बोला ये यह किया अब यह जो मैंने किया

241
00:17:09,880 --> 00:17:10,720
ना इसकी

242
00:17:10,720 --> 00:17:15,200
मुझे आवश्यकता नहीं थी यूं ही किया है यूं ही

243
00:17:15,200 --> 00:17:19,240
तो ऐसी बहुत सी चीजें हम जो यूं ही करते हैं क्यों क्योंकि हमारे अंदर वह

244
00:17:19,240 --> 00:17:23,440
चीजें करने की सामर्थ है आंख देखती क्यों है क्योंकि

245
00:17:23,440 --> 00:17:27,840
आंख के अंदर देखने की सामर्थ है यूं ही देखती है आंख

246
00:17:27,840 --> 00:17:32,280
आख जैसे आपकी पलके खुलेगी आख देखना शुरू कर देगी तो आंख

247
00:17:32,280 --> 00:17:36,840
यूं ही देखती है ऐसे ही ईश्वर सृष्टि की रचना यूं ही करते

248
00:17:36,840 --> 00:17:41,040
हैं उनको कोई आवश्यकता नहीं है अगर हम जैसे ही ईश्वर को आवश्यकता

249
00:17:41,040 --> 00:17:45,080
डाल देंगे ईश्वर पर हमने आवश्यकता को

250
00:17:45,080 --> 00:17:49,800
मर दिया तो इसका मतलब हमें मानना पड़ेगा

251
00:17:49,800 --> 00:17:53,800
कि उनमें किसी बात का अभाव था उनमें आनंद का अभाव

252
00:17:53,800 --> 00:17:59,600
था तो वो सच्चिदानंद नहीं रहेंगे

253
00:17:59,600 --> 00:18:03,600
लीला रूप में उनकी इच्छा हो सकती है विभिन्न

254
00:18:03,600 --> 00:18:07,960
प्रकार की लीलाएं कर रहे हैं यह कर रहे वो कर रहे हैं व्यवहार की दृष्टि से

255
00:18:07,960 --> 00:18:12,240
उनका इच्छा करने वाला स्वरूप माना जा सकता है मगर

256
00:18:12,240 --> 00:18:16,440
अंततोगत्वा जो परम तत्व है ईश्वर है उनको हम

257
00:18:16,440 --> 00:18:20,480
इच्छा करने ये किसी कारण से सृष्टि की रचना करने

258
00:18:20,480 --> 00:18:24,760
वाला नहीं मान सकते अगर कारण मान लिया तो हम उनको हमें उनका अभाव

259
00:18:24,760 --> 00:18:29,120
मानना पड़ेगा तो उनकी सर्व शक्ति मत्ता खत्म हो जाएगी

260
00:18:29,120 --> 00:18:33,160
ईश्वर को यदि सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है आपको ईश्वर को

261
00:18:33,160 --> 00:18:37,400
यदि सर्वशक्तिमान मानना है तो आपको इन

262
00:18:37,400 --> 00:18:41,840
चीजों को मानना पड़ेगा यही तो हम भी कह रहे हैं आप मानो कबीर को

263
00:18:41,840 --> 00:18:46,000
कबीर को ही मानो बस दो चीजें मत करो जिनको हम मान रहे उनका

264
00:18:46,000 --> 00:18:50,440
अनादर मत करो और ईश्वर को बाधित मत करो क्योंकि क्या होगा

265
00:18:50,440 --> 00:18:54,440
कि आपका जो ईश्वर है बाधित है तो अंततोगत्वा आपकी धारणा

266
00:18:54,440 --> 00:18:58,800
में व्यक्ति की उतनी वो जो गति है वो नहीं होगी और वो व्यक्ति

267
00:18:58,800 --> 00:19:03,000
अपने धर्म से भटके और धर्म से भटके का तो सामाजिक क्षति

268
00:19:03,000 --> 00:19:07,360
होगी कोई दिक्कत नहीं है कोई कबीर को पूछ रहा है कोई किसको पूछ रहा है

269
00:19:07,360 --> 00:19:11,840
बस आप उन सिद्धांतों का प्रतिपादन करिए जो सार्वभौम हो जो अकाट्य

270
00:19:11,840 --> 00:19:15,680
हो काटे ना जा सकते

271
00:19:15,680 --> 00:19:20,000
हो हां तो

272
00:19:20,000 --> 00:19:24,120
फिर भाई वो बदल बदला गया उसको समझाने का प्रयास किया तो उसने अपनी बातें

273
00:19:24,120 --> 00:19:28,160
ये क्यों किया वो क्यों किया अपनी बातें फिर अच्छा उसने कहा क्या था एक प्रश्न का

274
00:19:28,160 --> 00:19:32,320
जवाब दे एक प्रश्न का जवाब तो दे दिया मगर उस पर तुरंत उसने दूसरा प्रश्न

275
00:19:32,320 --> 00:19:36,560
तो क्या हुआ उसने झूट बात बोली थी कि एक प्रश्न का जवाब दे दो तो मैं तुम्हारा

276
00:19:36,560 --> 00:19:40,560
हो जाऊ इसके बाद फिर वो

277
00:19:40,560 --> 00:19:45,280
और भी बहुत सी चीजें थी जिनका उसके पास कोई जवाब नहीं था कि

278
00:19:45,280 --> 00:19:49,480
जैसे कि उसका य इनके य कहा जाता है कि भाई काल

279
00:19:49,480 --> 00:19:53,680
जो है वह दांतों से चबा रहा है और

280
00:19:53,680 --> 00:19:58,000
वोह यह कर रहा है वो धृतराष्ट्र को चबा रहा है वो द्रोणाचार्य

281
00:19:58,000 --> 00:20:02,040
जी को च रहा है प्रश्न ये बनता है कि उसके बाद फिर कौन

282
00:20:02,040 --> 00:20:07,000
लड़े अर्जुन से अब यह कह देते हैं कि वो भविष्य दिखाया

283
00:20:07,000 --> 00:20:11,880
था पहली बात तो यह कहां लिखा है भविष्य दिखाया था

284
00:20:11,880 --> 00:20:15,920
दूसरी बात इसका मतलब वह जो चित्र था जिसको तुम प्रमाण के

285
00:20:15,920 --> 00:20:20,120
रूप में स्वीकार करते हो वह चित्र माया

286
00:20:20,120 --> 00:20:24,160
था यह सब तुम्हें बताना पड़ेगा ना शास्त्रों से कहां हो रहा

287
00:20:24,160 --> 00:20:28,360
है जब तुम अपने प्रमाणों पर चलते हो तो तो

288
00:20:28,360 --> 00:20:30,920
ये अच्छा एक बात और इसने कही

289
00:20:30,920 --> 00:20:35,200
अव्वल दर्जे की बेवकूफी बेवकूफी की पराकाष्ठा मूर्खता की पराकाष्ठा

290
00:20:35,200 --> 00:20:39,640
कि हम गीता को मानते हैं महाभारत को नहीं

291
00:20:39,640 --> 00:20:43,720
मानते वैसे इस पराकाष्ठा में वह जेल कट्टू भी शामिल है वो कैसे

292
00:20:43,720 --> 00:20:47,800
होगा व भी हम बताएंगे आगे मगर फिलहाल गीता

293
00:20:47,800 --> 00:20:52,080
को मानते हैं महाभारत को नहीं मानते गीता कहां से आई सीधे लपक

294
00:20:52,080 --> 00:20:56,280
ली कैच आया महाभारत रूपी ग्रंथ में आई

295
00:20:56,280 --> 00:21:00,800
अच्छा कि उसमें परमात्मा ज्ञान दिया गया इसलिए उसको अरे भाई परमात्मा

296
00:21:00,800 --> 00:21:05,280
ज्ञान महत्त्वपूर्ण हो सकता है मगर इस कारण से

297
00:21:05,280 --> 00:21:10,880
जो महाभारत का शेष भाग है व असत्य तो नहीं हो सकता

298
00:21:10,880 --> 00:21:14,880
ना कि गीता में परमात्मा ज्ञान है इसलिए इसके अलावा

299
00:21:14,880 --> 00:21:18,840
सब कुछ असत्य है यह कहां की परिभाषा

300
00:21:18,840 --> 00:21:23,040
है और जब समय आएगा तो गीता जी को भी नहीं मानेंगे हालांकि मानने लायक

301
00:21:23,040 --> 00:21:27,520
छोड़ा भी नहीं है क्योंकि गीता से मुक्ति नहीं है गीता कहने वाला काल है शैतान

302
00:21:27,520 --> 00:21:31,600
है तो शैतान जब हमारा बुरा ही चाहता है

303
00:21:31,600 --> 00:21:37,600
खाना चाहता है तो फिर व हमें सही बातें क्यों बताएगा क्यों विश्वास कर ले आपके

304
00:21:38,000 --> 00:21:42,040
अकॉर्डिंग तो अब भाई साहब बोलते कि वो जो

305
00:21:42,040 --> 00:21:46,520
है महाभारत नहीं मानेंगे गीता मानेंगे फिर अपने ही लाइव

306
00:21:46,520 --> 00:21:50,800
में उदाहरण देते हैं गरुण पुराण का क्यों चार

307
00:21:50,800 --> 00:21:54,880
वेद और गीता के अलावा पुराण कहां से आ गया तुम्हारा अपनी बात को रखना

308
00:21:54,880 --> 00:21:58,880
है सारे वो दे देंगे जैसे जेल कट्टू ने अपने

309
00:21:58,880 --> 00:22:03,720
उसमें दिया प्रमाण क्या प्रमाण दिया

310
00:22:03,720 --> 00:22:07,840
अगर महाभारत को पढ़ना ही नहीं है मानना ही नहीं है तो यह

311
00:22:07,840 --> 00:22:12,080
प्रमाण क्यों दे रहे हो गर्मा गीता की में कि महाभारत का युद्ध

312
00:22:12,080 --> 00:22:16,280
रुकने वाला था श्री कृष्ण जी वहां पर गए थे युद्ध को रुकवाने के लिए

313
00:22:16,280 --> 00:22:20,320
कौरवों को उन्होंने अपना चतुर्भुजी रूप दिखाया सब दिखाया है कि नहीं

314
00:22:20,320 --> 00:22:25,440
गर्मा गीता की में तो तुम्हारे जो तथाकथित

315
00:22:25,440 --> 00:22:29,440
तत्वदर्शी है वो तो मान रहे व तो पढ़ रहे महाभारत को

316
00:22:29,440 --> 00:22:34,600
तुमको भी पढ़ा रहे हैं जो उनका जो जो

317
00:22:34,600 --> 00:22:38,720
अंश वो तुम्हें पढ़ाना चाहते हैं

318
00:22:38,720 --> 00:22:42,880
वह तुम्हें पढ़ा रहे हैं है ना चतुर्भुजी

319
00:22:42,880 --> 00:22:47,080
रूप दिखाया यह किया वो किया इसमें ही है गमा

320
00:22:47,080 --> 00:22:53,080
गीता की में चतुर्भुज रूप वाला मामला महाभारत के युद्ध वाला

321
00:22:53,160 --> 00:22:57,560
मामला तो क्यों इसमें लिख रहे हैं महाभारत

322
00:22:57,560 --> 00:23:01,640
की बातें नहीं उत्तर है फिर वो शांत हो गया

323
00:23:01,640 --> 00:23:05,920
व्यक्ति तो सबसे पहली बात है कि अगर हम महाभारत

324
00:23:05,920 --> 00:23:10,240
के किसी अंश को गीता के रूप में स्वीकार करते हुए प्रमाण मान रहे हैं थोड़ी देर के लिए

325
00:23:10,240 --> 00:23:14,280
तो महाभारत को मना नहीं कर सकते और यह जो सनातन शब्द

326
00:23:14,280 --> 00:23:18,360
है वो धर्म के लिए एक बार नहीं आया है वो हमने उदाहरणार्थ दिखाया है

327
00:23:18,360 --> 00:23:22,640
बहुत बार आया है तो खैर कुल मिलाकर के कोई भी तार्किक उसका उसकी

328
00:23:22,640 --> 00:23:26,640
कोई बात नहीं थी वो उसको जाना पड़ा व उन्हो से

329
00:23:26,640 --> 00:23:29,720
उसको विदा लेनी पड़ी

330
00:23:29,720 --> 00:23:34,680
मगर एक ये जो बात है इसका मैंने जो एक निचोड़ निकाला है

331
00:23:34,680 --> 00:23:38,720
इनसे आज तक पूछा गया कितनी बार कि भाई वह 35 श्लोक कौन से

332
00:23:38,720 --> 00:23:43,000
हैं 5 परट जो काल ने अपने मन से बोले हैं जबक

333
00:23:43,000 --> 00:23:47,360
देखा जाएगा तो जब य मना करने पर आते हैं तो कई श्लोकों को इन्ह मना करना

334
00:23:47,360 --> 00:23:51,360
पड़ेगा कई श्लोकों को इन्ह काटना पड़ेगा दूसरी बात

335
00:23:51,360 --> 00:23:55,560
काल यदि बुरा है तो कहां पर वो सच बोला है कहां पर वो सच नहीं बोला

336
00:23:55,560 --> 00:23:59,560
है इसका आधार क्या है अ कहेंगे वेद से मैच ना चाहिए अरे वेद भी तो

337
00:23:59,560 --> 00:24:04,000
काल नहीं बोला है वेद को भी कहने वाला काल है

338
00:24:04,000 --> 00:24:08,920
तो काल जब बुरा व्यक्ति है तो उसकी गलत और सही

339
00:24:08,920 --> 00:24:13,040
का आधार क्या है तो उसका आधार मैंने

340
00:24:13,040 --> 00:24:16,640
देखा उसका आधार केवल और केवल एक है जैसे ये

341
00:24:16,640 --> 00:24:21,440
ये भी मान लेते हैं कि कबीर सागर में भी मिलावट हो गई है

342
00:24:21,440 --> 00:24:25,520
गरीब दास जी की वाणी में मिलावट हो गई है और कुल

343
00:24:25,520 --> 00:24:29,560
मिलाकर के इनकी कही हुई बा इनके द्वारा ग्रंथों के जो

344
00:24:29,560 --> 00:24:34,440
श्लोक स्वीकार किए जाने हैं वह वही स्वीकार किए जाने हैं जो रामपाल

345
00:24:34,440 --> 00:24:38,600
कहे और रामपाल को इसलिए नहीं मानना है कि वह

346
00:24:38,600 --> 00:24:42,800
गीता के अनुसार तत्वदर्शी क्योंकि गीता की प्रमाणिकता को प्रमाणित कर रहे हैं

347
00:24:42,800 --> 00:24:46,880
रामपाल गीता में क्या स क्या सच्चा है क्या झूठा है

348
00:24:46,880 --> 00:24:51,200
इसको रामपाल तय कर रहे हैं कबीर सागर में क्या सच्चा है क्या झूठा

349
00:24:51,200 --> 00:24:55,360
है इसको रामपाल तय कर रहे हैं कबीर सागर की बातें ही ले ले तो कबीर सागर

350
00:24:55,360 --> 00:24:59,440
की कई बातों को य नहीं मानते मगर पर दुर्गा माता के

351
00:24:59,440 --> 00:25:03,440
साथ दुराचार की बात हो रही है वो इन्होने मान ली वहां पर

352
00:25:03,440 --> 00:25:07,440
इनको यह नहीं लगेगा कि हो सकता है मिलावट लिख दी गई है मिलावट कर दी गई व इनको नहीं

353
00:25:07,440 --> 00:25:11,560
लगे क्योंकि अपमान हो रहा है ना माता का और इनको चाहिए अपमान इनको

354
00:25:11,560 --> 00:25:15,560
अपमान करना है तो इसलिए यह कबीर

355
00:25:15,560 --> 00:25:19,760
सागर में जो मिलावट है वह

356
00:25:19,760 --> 00:25:23,840
अपने अनुसार चयन करेंगे कि भाई कहां मिलावट है कहां नहीं महाभारत में कहां मिलावट

357
00:25:23,840 --> 00:25:27,880
है कहा नहीं कौन तय करेगा रामपाल गीता में कहां मिलावट है कहा नहीं यह

358
00:25:27,880 --> 00:25:31,680
कौन तय करेगा रामपाल कोई भी ग्रंथ हो

359
00:25:31,680 --> 00:25:35,720
वेद में भी कहां मिलावट है कहां नहीं क्यों क्योंकि वेद में कई जगह भगवान को विष्णु कहा

360
00:25:35,720 --> 00:25:39,720
गया विष्णु भगवान वामन के वामन के वामन भगवान के रूप में आ

361
00:25:39,720 --> 00:25:44,040
सब बातें है वहां पर तो वेदों में भी कहां मिलावट

362
00:25:44,040 --> 00:25:48,200
है कहा नहीं यह भी रामपाल तय करेगा तो कुल मिलाकर के और यह

363
00:25:48,200 --> 00:25:52,240
तो कुल मिलाकर के रामपाल को आपको इसलिए नहीं मानना कि वेदों ने कहा है गीता ने कहा

364
00:25:52,240 --> 00:25:56,360
है क्यों मानना है वो बात है वो कौन सी बात है क्यों मानना है

365
00:25:56,360 --> 00:25:59,160
वो समझ लीजिए

366
00:25:59,160 --> 00:26:03,440
क्यों मानना है रामपाल क्योंकि आपको

367
00:26:03,440 --> 00:26:08,720
उसकी एक बात पर भरोसा करना पड़ेगा कि रामपाल भगवान का अवतार

368
00:26:08,720 --> 00:26:13,080
है ठीक है रामपाल

369
00:26:13,080 --> 00:26:17,240
को आपको इसलिए मानना है क्योंकि आपको

370
00:26:17,240 --> 00:26:21,280
उसकी एक बात पर आंख बंद करके भरोसा करना होगा कि रामपाल

371
00:26:21,280 --> 00:26:25,480
अवतार है अब यहां से मैं जो बोलूंगा वोह सही और

372
00:26:25,480 --> 00:26:28,600
जो मैं बोलूंगा वो गलत

373
00:26:28,600 --> 00:26:32,720
रामपाल को और कोई ग्रंथ वेरीफाई नहीं कर सकता क्योंकि रामपाल

374
00:26:32,720 --> 00:26:36,800
ग्रंथों को वेरीफाई कर रहे हैं तो रामपाल का

375
00:26:36,800 --> 00:26:40,840
वेरिफिकेशन एक ही है कि रामपाल की इस बात पर विश्वास कर लिया जाए

376
00:26:40,840 --> 00:26:44,840
कि वह परमात्मा का अवतार है व बात और है कि हमारे पास तार्किक रूप

377
00:26:44,840 --> 00:26:47,120
से उस बात का भी खंडन

378
00:26:47,120 --> 00:26:51,760
है क्योंकि ईश्वर ने सब कुछ बनाया वो अलग है मगर

379
00:26:51,760 --> 00:26:55,840
चमत वो भगवान के रूप होने के कारण उस पर विश्वास

380
00:26:55,840 --> 00:27:00,200
कर लो यह है रामपाल का

381
00:27:00,200 --> 00:27:04,280
ठीक है कुरान पर विश्वास क्यों है क्योंकि हमें यह विश्वास करना

382
00:27:04,280 --> 00:27:09,080
पड़ेगा कि मोहम्मद के पास जिब्राइल आया

383
00:27:09,080 --> 00:27:13,400
था ऐसे ही रामपाल की बातों पर विश्वास

384
00:27:13,400 --> 00:27:17,760
क्यों है क्योंकि रामपाल स्वयं एक बात हमें

385
00:27:17,760 --> 00:27:21,880
एक बात है जिस पर हमें शुरुआत में विश्वास करना होगा सब कुछ हमारे लिए सरल हो

386
00:27:21,880 --> 00:27:26,480
जाए वो क्या है रामपाल भगवान का अवतार है

387
00:27:26,480 --> 00:27:30,640
जो लोग इस बात को बिना किसी और प्रमाण के सीधे स्वीकार कर ले

388
00:27:30,640 --> 00:27:34,800
बिना किसी ग्रंथ के क्योंकि ग्रंथों की प्रामाणिकता पर तो खुद ही प्रश्न

389
00:27:34,800 --> 00:27:39,000
चिन्ह लगा रहा है ना रामपाल तो जो लोग बिना सोचे समझे

390
00:27:39,000 --> 00:27:43,200
यह मान ले कि रामपाल भगवान का अवतार है उनके

391
00:27:43,200 --> 00:27:47,240
लिए उसके द्वारा बताई जाने वाली सारी कहानी सही हो जाएगी वो बात अलग है कि

392
00:27:47,240 --> 00:27:51,520
उसमें भी फिर तार्किक रूप से बहुत बहुत सारी उसकी त्रुटियां है वो

393
00:27:51,520 --> 00:27:56,440
कहीं से भी तत्वदर्शी वगैरह सिद्ध नहीं होता है उसने खुद ही अपनी

394
00:27:56,440 --> 00:28:02,440
चीजों को मटिया मेट कर रखा है

395
00:28:05,360 --> 00:28:09,960
तो नीरज दास कोई बात करना चाहते हैं नीरज दास

396
00:28:09,960 --> 00:28:14,560
माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो ऊपर आकर बात करिए लाइव में

397
00:28:14,560 --> 00:28:18,560
ठीक है रामपाल को तत्वदर्शी सिद्ध करिए कबीर को भगवान

398
00:28:18,560 --> 00:28:22,600
सिद्ध करिए गीता बोलने वाले को कृष्ण से अलग कोई काल सिद्ध

399
00:28:22,600 --> 00:28:26,800
करिए और यह जो व्रत उपवास है ना इन सबका

400
00:28:26,800 --> 00:28:31,200
हम दे चुके हैं पुराने लाइव जाक के देखिए जो आप बोल रहे हो

401
00:28:31,200 --> 00:28:36,040
ठीक

402
00:28:36,040 --> 00:28:40,240
है अपनी बात निकाल लो और बाकी

403
00:28:40,240 --> 00:28:44,240
बातें रहने दो उसी गरुण पुराण में ही व्रत से पितृ पूजन

404
00:28:44,240 --> 00:28:48,320
से मोक्ष मिलता है दिखा देंगे आपको है ना तो

405
00:28:48,320 --> 00:28:52,360
कुल मिलाकर के इनका जो ताना बाना है वह इस एक पंक्ति

406
00:28:52,360 --> 00:28:56,560
पर टिका हुआ है कि रामपाल भगवान का अवतार है अब

407
00:28:56,560 --> 00:29:00,680
जो बिना किसी सबूत इत्यादि के कोई तर्क नहीं

408
00:29:00,680 --> 00:29:04,840
कोई बात नहीं यह भी तर्क नहीं कि रामपाल यदि भगवान

409
00:29:04,840 --> 00:29:08,920
का अवतार है तो उसको कष्ट कैसे हो रहा है उसको अफसोस कैसे हो रहा

410
00:29:08,920 --> 00:29:13,120
है वो बेल के लिए एप्लीकेशन क्यों लगा रहा है न्यायालय में

411
00:29:13,120 --> 00:29:17,200
वो कुछ ऐसा करेगे वो अपने आप ही उसकी सलाखें जो है टूट जाए और बाहर आ

412
00:29:17,200 --> 00:29:20,840
जाए वो सब कुछ नहीं वो तर्क वगर वगैरह सब गए बाहर

413
00:29:20,840 --> 00:29:25,040
पड़ में तो क्या है यह सब तर्क नहीं आप सीधे

414
00:29:25,040 --> 00:29:29,480
आंख बंद करके ये विश्वास कर लीजिए कि राम पा इ गॉड

415
00:29:29,480 --> 00:29:33,920
उसके बाद गॉड का कहा हुआ हर वचन हालांकि तार्किक

416
00:29:33,920 --> 00:29:37,920
प्रतिकार उस बात का भी हो सकता है कि भगवान जो कह रहे वो उसकी

417
00:29:37,920 --> 00:29:42,320
बात ही माननी है कि नहीं माननी वो भी है मगर एक शुरुआती

418
00:29:42,320 --> 00:29:46,320
लेवल पर यदि आपने रामपाल को भगवान मान लिया तो उसके द्वारा

419
00:29:46,320 --> 00:29:50,400
सभी बातें सही और जो भी उसके विरोध में सब बातें

420
00:29:50,400 --> 00:29:53,560
गलत

421
00:29:53,560 --> 00:29:58,320
अब इन्होंने एक बात आपको

422
00:29:58,320 --> 00:30:02,680
सोचने की है एक दूसरा विषय और है लिंक दे

423
00:30:02,680 --> 00:30:08,440
दीजिए लिंक डाल दीजिए जिसको आना है वो आ सकता

424
00:30:08,440 --> 00:30:12,440
है इसका अर्थ क्या हुआ कि मैं कल को सुबह

425
00:30:12,440 --> 00:30:17,080
उठ कर केय कह दूं कि भाई मैं भगवान हूं आज से मैं जो बताऊंगा वह

426
00:30:17,080 --> 00:30:21,200
सही तो रामपाल को मानने और ना मानने का आधार बस

427
00:30:21,200 --> 00:30:25,480
इतना ही है कि उसकी इस बात पर विश्वास करना है कि नहीं करना है और उसका

428
00:30:25,480 --> 00:30:29,800
कुछ भी तार्किक नहीं है प्रमाणिक नहीं है केवल इस बात

429
00:30:29,800 --> 00:30:33,920
इस बात का ही आधार है कि वह भगवान है

430
00:30:33,920 --> 00:30:38,400
कि नहीं है यही एक आधार है रामपाल का तो मान लो

431
00:30:38,400 --> 00:30:42,440
बिना किसी प्रमाण के बिना किसी उसके यह मान लो कि

432
00:30:42,440 --> 00:30:46,640
तुम जो रामपाल जो है वह ईश्वर है आरजे

433
00:30:46,640 --> 00:30:52,440
50 आप चेहरा

434
00:30:52,440 --> 00:30:58,200
दिखाए ठीक है

435
00:30:58,200 --> 00:31:02,400
तो अब जैसे मैंने एक वह मातृ शक्ति देखी है जो

436
00:31:02,400 --> 00:31:06,560
दुर्गा शत्रु ठाकुर है कोई दुर्गा शत्रु

437
00:31:06,560 --> 00:31:10,560
है है ना अब वह क्या है वह

438
00:31:10,560 --> 00:31:14,560
वो दिखाती है कि मैं भाई बहुत परम गुरु भक्त हूं और

439
00:31:14,560 --> 00:31:18,640
मैं हर बात का जवाब दूंगी और वही अपने वीडियोस

440
00:31:18,640 --> 00:31:22,720
में कहीं बाली पहने दिखाई देगी कहीं टीका लगाए दिखाई

441
00:31:22,720 --> 00:31:27,000
देगी तो गुरु विरोध तो खुद ही और

442
00:31:27,000 --> 00:31:31,880
गुरु का विरोध कर ने वाले कहां जाते हैं रामपाल के द्वारा ही समझ लो

443
00:31:31,880 --> 00:31:36,600
हम तो बाद में आपको प्रमाण

444
00:31:36,600 --> 00:31:41,000
देंगे तो यह अब बात य आती है कि दुर्गा शत्रु

445
00:31:41,000 --> 00:31:45,040
अपने आप को ठाकुर क्यों लिख रही है य लोग तो दास होते हैं आपने वकील के

446
00:31:45,040 --> 00:31:49,200
साथ वार्ता में भी सुना होगा यह तो दास

447
00:31:49,200 --> 00:31:51,800
होते हैं

448
00:31:51,800 --> 00:31:56,400
ना आरजे भैया इनको हटा दीजिए चेहरा नहीं दिखा पा रहे हैं

449
00:31:56,400 --> 00:32:00,000
हटा दीजिए

450
00:32:00,000 --> 00:32:04,560
तो ये तो दास होते हैं तो ये अपने आप को ठाकुर

451
00:32:04,560 --> 00:32:08,640
तिवारी यह सब क्यों लिख रहे हैं क्योंकि झूठे

452
00:32:08,640 --> 00:32:12,720
हैं डगले हैं यह दिखाने

453
00:32:12,720 --> 00:32:17,520
के लिए कि देखिए ब्राह्मण भी देखिए इनकी बातों में आता है

454
00:32:17,520 --> 00:32:21,600
यह दिखाने के लिए देखिए ठाकुर भी इनकी बातों में आता है इसीलिए

455
00:32:21,600 --> 00:32:25,600
तो लिख रहे हो ठाकुर भाई आपके गुरु आपके यहां तो जो भी है वो दास हो जाता

456
00:32:25,600 --> 00:32:30,040
है तोय तिवारी ठाकुर क आ

457
00:32:30,040 --> 00:32:34,040
रहे या छोड़ा नहीं जा रहा अपना जो परंपरा प्राप्त धर्म

458
00:32:34,040 --> 00:32:38,240
है उसका कहीं ना कहीं बिंदी के रूप में बाली के रूप में उससे मुक्त

459
00:32:38,240 --> 00:32:41,120
नहीं हो पा रहे

460
00:32:41,120 --> 00:32:43,520
हो

461
00:32:43,520 --> 00:32:47,720
गीता भाई चेहरा दिखाइए जिसको भी आना है वह चेहरा दिखाए

462
00:32:47,720 --> 00:32:53,320
बिना चेहरे के हम नहीं लेंगे लाइव

463
00:32:53,320 --> 00:32:59,320
में ठीक है

464
00:33:01,160 --> 00:33:05,240
तो ये बात हो गई ये लोग अपना ठाकुर चौहान ये

465
00:33:05,240 --> 00:33:09,360
सब क्यों रखते हैं नाम ये आप समझो स्ट्रेटजी कि

466
00:33:09,360 --> 00:33:13,520
आपको लगेगा देखो भाई हम में से एक तो जा रहा है पता नहीं लगेगा कि भाई

467
00:33:13,520 --> 00:33:18,840
पिछड़ा वर्ग जा रहा है कि बिना पढ़ा लिखा वर्ग जा रहा है कि कौन सा वर्ग जा रहा

468
00:33:18,840 --> 00:33:23,120
है गीता उपदेश हां

469
00:33:23,120 --> 00:33:27,200
जी बताइए जय श्री राम जय श्री राम

470
00:33:27,200 --> 00:33:31,400
भैया जी जी हम आपकी

471
00:33:31,400 --> 00:33:35,920
आपकी चर्चा सुन रहे थे भैया

472
00:33:35,920 --> 00:33:40,040
जी हा बोलिए तो उसम वो बोल रहा था कि आत्मा और

473
00:33:40,040 --> 00:33:44,160
जीवात्मा अलग अलग है और

474
00:33:44,160 --> 00:33:48,160
जीवात्मा को काल खा जाता है तो यह पता

475
00:33:48,160 --> 00:33:52,240
नहीं चलता फिर जीवात्मा को अगर काल खा गया तो आत्मा का

476
00:33:52,240 --> 00:33:56,320
क्या हुआ फिर ई दो चीज है उनमें से एक को

477
00:33:56,320 --> 00:34:00,440
खा गया तो एक का क्या होगा फिर अब वो वही बंदर बता सकता है

478
00:34:00,440 --> 00:34:04,560
जो था वार्ता में हम क्या बताए उसको

479
00:34:04,560 --> 00:34:08,720
कहता है कि हमें सम्मान करो अरे भाई पहली बात

480
00:34:08,720 --> 00:34:13,120
तो यह है कि आपने

481
00:34:13,120 --> 00:34:17,200
हमारी माताओं का सम्मान नहीं किया आपको कबीर की भक्ति करनी

482
00:34:17,200 --> 00:34:21,400
है करो आपको को शास्त्रों की चीज अपनी किताबों

483
00:34:21,400 --> 00:34:26,240
में लिखनी है लिखो मगर वैसे ही लिखो जैसे लिखी है

484
00:34:26,240 --> 00:34:30,520
वैसे ही लिखो जैसे लिखी ट तोड़ मरोड़

485
00:34:30,520 --> 00:34:34,760
अपनी बात क्यों मिला रहे हो उसमें तुम मानते हो रामपाल को भगवान

486
00:34:34,760 --> 00:34:39,240
हम नहीं मानते अगर लिखोगे तो सुनोगे

487
00:34:39,240 --> 00:34:45,200
और मिलोगे तो

488
00:34:45,200 --> 00:34:50,960
पटोत की अमानना नहीं सुनेंगे हम ना

489
00:34:50,960 --> 00:34:55,240
अच्छा जय श्री राम हर हर महादेव पाड़ी जी हर हर महादेव

490
00:34:55,240 --> 00:34:58,360
जय श्री राम

491
00:34:58,360 --> 00:35:02,800
आपने जो कार्य किया ना वह अभी तक असर है उन उनके ऊपर

492
00:35:02,800 --> 00:35:07,000
भूत उतर नहीं रहा जहां लाइव देखा जाए आपका नाम जरूर आता

493
00:35:07,000 --> 00:35:11,760
है उधर खौफ इस कदर बैठा पड़ा [संगीत]

494
00:35:11,760 --> 00:35:16,080
है नहीं उन्होंने सोचा ना सिर्फ य हम मुंह से बोलते हैं पर हम धरातल

495
00:35:16,080 --> 00:35:20,280
पर भी काम करते हैं यह पता नहीं है

496
00:35:20,280 --> 00:35:24,320
उनको मैंने उनको ये नहीं पता उनको लगा था सोशल मीडिया

497
00:35:24,320 --> 00:35:28,000
पर ही है ठीक है

498
00:35:28,000 --> 00:35:32,000
उनको यह नहीं पता है कि हम वह सैनिक

499
00:35:32,000 --> 00:35:36,640
है भगवत गीता के प्राथमिक अध्याय को आप पढ़े

500
00:35:36,640 --> 00:35:41,000
जो युद्ध में अपने प्राणों का मुह त्याग के जाते हैं

501
00:35:41,000 --> 00:35:45,120
खतम बक ऐसे ही नहीं जाते हैं बिल्कुल

502
00:35:45,120 --> 00:35:49,520
कुछ लोग और स सच्चाई भी यही है गुरुदेव का एक वाक्य

503
00:35:49,520 --> 00:35:54,200
है जिसको आत्मा का ज्ञान हो जाता है वाकई में ये सब पता चलता है

504
00:35:54,200 --> 00:35:58,240
तो उसके अंदर जो जीवन का मोह है वो बहुत कम हो जाता

505
00:35:58,240 --> 00:36:02,440
है और जिसके कारण भय बहुत कम हो जाता है बहुत कम

506
00:36:02,440 --> 00:36:04,760
बिल्कुल

507
00:36:04,760 --> 00:36:08,760
बहुत लोग यह बोलते हैं कि मैं अंधेरे में बैठता हूं अरे शक्ल तो दिख रही है

508
00:36:08,760 --> 00:36:13,240
तुम पर तो इतनी हिम्मत भी नहीं कि तुम लाइव में आके अपना पक्ष रख सको

509
00:36:13,240 --> 00:36:17,760
अपने जो गुरु है उनका गरिमा को बचा सको

510
00:36:17,760 --> 00:36:21,840
इतनी भी हिम्मत नहीं है कल एमपी खबर फास्ट वाले लब चला रहे

511
00:36:21,840 --> 00:36:26,040
थे नीचे सनातनी भाई बोले थे लिंक दो पर लास्ट तक लिंक नहीं दिया

512
00:36:26,040 --> 00:36:30,200
उन्होंने हम तो लिंक डाल रखा आओ ना अब

513
00:36:30,200 --> 00:36:34,440
देखो इन्होंने अपनी एक उसमें हामी भर दी है कि सनातन कोई धर्म

514
00:36:34,440 --> 00:36:35,320
नहीं है तो अभ अपने

515
00:36:35,320 --> 00:36:38,760
आप को सनातन भी नहीं कह सकते

516
00:36:38,760 --> 00:36:44,760
हैं उसके आगे आदि लगाएंगे ये लोग आदि

517
00:36:44,960 --> 00:36:49,000
सनातन अच्छा मैं एक बात कह रहा था वो जो माता

518
00:36:49,000 --> 00:36:53,160
का पान से मुझे बात याद आई पहले तो वो खत्म कर लू अपनी बात जो ब्राह्मण क्त्र

519
00:36:53,160 --> 00:36:57,720
वै शूद्र वाली बात है ये लोग जब दास हो चुके

520
00:36:57,720 --> 00:37:01,760
तो अपने आपको को ठाकुर तिवारी यश गुप्ता यह सब

521
00:37:01,760 --> 00:37:06,040
क्यों दिखाते हैं क्यों है

522
00:37:06,040 --> 00:37:10,440
ना तो अपना वो जो भम जाल है ना उसके लिए दिखाते हैं

523
00:37:10,440 --> 00:37:14,760
आज वैसे एक बहुत जरूरी बात भी आपको बताने वाला हूं बहुत ज्यादा रोचक

524
00:37:14,760 --> 00:37:18,920
है तो लाइव से जुड़े रहिएगा बहुत एक अलग ही टाइप

525
00:37:18,920 --> 00:37:23,880
का टस्ट आने वाला है आज एक ऐसी जानकारी आपको मिलने वाली

526
00:37:23,880 --> 00:37:27,920
है अब दूसरी बात यह है कि ये लोग ब्राह्मणवादी सोचते

527
00:37:27,920 --> 00:37:32,360
हैं मगर सच्चाई यह है कि अगर कोई ब्राह्मण अपने ब्राह्मण उचित कर्तव्य

528
00:37:32,360 --> 00:37:36,360
का पालन नहीं करता है और बल्कि विरुद्ध कार्य करता है

529
00:37:36,360 --> 00:37:40,640
नहीं करता है वह भी निम्न कोटि का हो जाएगा जो विरुद्ध करेगा वह पतित

530
00:37:40,640 --> 00:37:44,760
माना जाएगा पतित ब्राह्मण और पतित ब्राह्मण जो होता

531
00:37:44,760 --> 00:37:48,880
है वह अपने स्वधर्म का पालन करने वाले शूद्र

532
00:37:48,880 --> 00:37:50,400
से भी गया विता होता है

533
00:37:50,400 --> 00:37:54,600
महत्व में मान सम्मान में उसका वो जन्म से उसको कुल

534
00:37:54,600 --> 00:37:58,680
वंश प्राप्त हुआ है ब्राह्मण उससे मतलब नहीं है मर उसका

535
00:37:58,680 --> 00:38:03,600
जो क्या कहते हैं उसकी जो महता है उसका जो

536
00:38:03,600 --> 00:38:07,720
उसके प्रति जो व्यवहार है वो प्रभावित हो जाएगा वह स्वधर्म का पालन

537
00:38:07,720 --> 00:38:12,240
करने वाले शूद्र से भी कहीं ज्यादा निम्न हो जाता है क्यों

538
00:38:12,240 --> 00:38:16,480
आप विदुर जी को देख लो जी और उधर

539
00:38:16,480 --> 00:38:20,480
रावण को देख लो रावण ब्राह्मण था मारा गया

540
00:38:20,480 --> 00:38:25,320
विदुर जी का सम्मान है कि नहीं

541
00:38:25,320 --> 00:38:27,640
तोय

542
00:38:27,640 --> 00:38:30,320
सारी बातें

543
00:38:30,320 --> 00:38:33,160
हैं

544
00:38:33,160 --> 00:38:37,520
एक पॉइंट की बात में आज बता रहा था आपको कि इन्होंने चार

545
00:38:37,520 --> 00:38:41,720
32 में जो ब्रा वो ब्रह्म का अर्थ

546
00:38:41,720 --> 00:38:46,800
भाष्य का ने वेद लिया है वहां पर संदर्भ के

547
00:38:46,800 --> 00:38:52,160
अकॉर्डिंग तो मैं उस संबंध में

548
00:38:52,160 --> 00:38:56,200
प्रमा संस्कृत शब्द कोश में देखोगे कि भ्रम का अर्थ वेद भी

549
00:38:56,200 --> 00:39:00,280
है परमात्मा भी है ब्रा श शब्द कोश में

550
00:39:00,280 --> 00:39:04,680
नहीं देखेंगे वो शब्द कोश भी जहां से आया वहां देखेंगे

551
00:39:04,680 --> 00:39:08,920
ये देखिए वह शब्द कोश भी जहां

552
00:39:08,920 --> 00:39:13,720
से आया है जो वैदिक डिक्शनरी है वहा देखेंगे ना सीधे ब्रह्म कार्थ

553
00:39:13,720 --> 00:39:17,000
तो

554
00:39:17,000 --> 00:39:21,000
ब तो इन्होंने जो ब्रत शब्द का अर्थ ढूंढने के लिए य

555
00:39:21,000 --> 00:39:25,640
उधर क्यों भागे ये डिनरी की तरफ हा

556
00:39:25,640 --> 00:39:28,360
ये देखिए

557
00:39:28,360 --> 00:39:32,920
ब्रह्म शब्द का अर्थ देख लीजिए किस किस के लिए यूज होता है

558
00:39:32,920 --> 00:39:38,600
बड़ा कर दो इसको स्क्रीन स्क्रीन बड़ी कर

559
00:39:38,600 --> 00:39:42,760
दीजिए नहीं हो रही क्या

560
00:39:42,760 --> 00:39:48,760
परमात्मा अथवा वेद को भी ब्रह्म कहा जाता

561
00:39:49,920 --> 00:39:54,360
है निरुक्त में य लिखा हुआ है और

562
00:39:54,360 --> 00:39:58,480
जगह भी बता देता हूं जिसको भी प्रमाण नोट करना हो नोट कर भाई

563
00:39:58,480 --> 00:40:04,480
हमारी लाइव में जो है ना पेन और कॉपी लेकर बैठा

564
00:40:05,560 --> 00:40:11,560
करें यह प्रथम अध्याय है

565
00:40:14,120 --> 00:40:20,120
और द्वितीय पाद है प्रथम अध्याय

566
00:40:27,440 --> 00:40:32,160
द्वितीय प्रथम पाद है इसको देखने में समय लग

567
00:40:32,160 --> 00:40:36,240
जाएगा ठीक है इसमें य लिखा

568
00:40:36,240 --> 00:40:38,560
हुआ

569
00:40:38,560 --> 00:40:42,680
है और भी कई सारे तथ्य है आज मगर हम लोग एक बात

570
00:40:42,680 --> 00:40:48,680
करने जा रहे हैं अर्पित गुप्ता जी जय श्री

571
00:40:52,640 --> 00:40:57,320
राम हर्षित दुबे ये कौन है

572
00:40:57,320 --> 00:41:00,880
लिख

573
00:41:00,880 --> 00:41:04,840
राम जी अर्पित जी

574
00:41:04,840 --> 00:41:08,920
बोले जय श्री राम अरप जी जय श्री राम

575
00:41:08,920 --> 00:41:14,160
भैया [संगीत] आवाज

576
00:41:14,160 --> 00:41:16,760
जी

577
00:41:16,760 --> 00:41:21,400
बोलिए अच्छा हर्षित जी आप बोले जय श्री राम

578
00:41:21,400 --> 00:41:25,680
जय श्री राम भैया सीताराम सीताराम सीताराम आप

579
00:41:25,680 --> 00:41:29,800
हमारे अग्रज गुरु भाई है हमने मैसेज

580
00:41:29,800 --> 00:41:34,360
भी दिया था जी सीताराम कल कल या

581
00:41:34,360 --> 00:41:38,760
परसों एक्चुअली दो दिन गुरुदेव के दर्शन हुए थे यहां पे करुणावती

582
00:41:38,760 --> 00:41:42,800
में गुजरात अच्छा गुजरात में आप

583
00:41:42,800 --> 00:41:46,920
से बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और बहुत बहुत अच्छा

584
00:41:46,920 --> 00:41:51,440
लगता है और जो विरोधी है जो विधर्मी है

585
00:41:51,440 --> 00:41:55,600
उनका सुनके कभी कभार बड़ा बड़ा अजीब लगता है कि कैसे लोग हो सकते हैं ये

586
00:41:55,600 --> 00:41:59,640
मतलब इतनी सारी वस्तुएं आप बता रहे हैं और

587
00:41:59,640 --> 00:42:04,000
सहज रूप से बता रहे हैं अच्छे से बता रहे हैं कोई मार काट तो कर नहीं रहे

588
00:42:04,000 --> 00:42:07,720
अच्छे से बता रहे हैं फिर भी उसमें भी उद्दंडता ये लोग करते हैं ये

589
00:42:07,720 --> 00:42:11,720
सब देख के थोड़ा बहुत निराशा होती है परंतु सबके नियामक वही भगवान ही

590
00:42:11,720 --> 00:42:17,000
है सबको ठीक करेंगे ठीक है भैया क मवादी

591
00:42:17,000 --> 00:42:22,040
का इसमें एक बात है ना जिसने मन में ठान लिया कि मैंने नहीं मानना

592
00:42:22,040 --> 00:42:26,440
है अगर के दिखा दो नहीं मानेगा वो जमीर

593
00:42:26,440 --> 00:42:29,720
बेच चुके

594
00:42:29,720 --> 00:42:33,720
अपना सामने वाला कुछ दिखा रहा उसको नहीं मानना अगर उनका

595
00:42:33,720 --> 00:42:38,720
गुरु कुछ दिखा रहा तो उसको स्वीकार करना है मनगण कहानियों को स्वीकार करना है

596
00:42:38,720 --> 00:42:42,800
क्योंकि सब चीजों से पहले उस व्यक्ति को य मानना

597
00:42:42,800 --> 00:42:46,920
पड़ेगा कि रामपाल भगवान 100 की सीधी एक

598
00:42:46,920 --> 00:42:51,280
बत सारी कहानी इस पर टिकी है भाई काल अगर गलत है

599
00:42:51,280 --> 00:42:55,480
तो उसका वेद क्यों माने उसकी गीता क्यों माने अगर गीता

600
00:42:55,480 --> 00:42:59,640
में उसने अपना मत भी दिया तो हमें क्या क्या पता कि कहां कहा पर गलत

601
00:42:59,640 --> 00:43:03,640
चीज दे दी हो वो वाले श्लोक क्यों मान लिए जाए वो वाले

602
00:43:03,640 --> 00:43:07,840
श्लोक क्यों माने जाए जिनम उसका मतलब सिद्ध हो रहा है तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा

603
00:43:07,840 --> 00:43:12,000
है करुण पुराण यह सब चीजें काल नहीं दी

604
00:43:12,000 --> 00:43:16,040
है तुमको कबीर कबीर सागर

605
00:43:16,040 --> 00:43:20,200
में भी मिलावट हो चुकी है गरीब दास वाला जो ग्रंथ है उसमें भी मिलावट

606
00:43:20,200 --> 00:43:22,760
हो चुकी है तो अगर मिलावट हो चुकी

607
00:43:22,760 --> 00:43:28,160
है तो कौन सी चीज सही है कौन सी चीज गलत है इसका आधार क्या बचा

608
00:43:28,160 --> 00:43:32,320
उसका आधार यह बचा कि जो हमारे लिए सही बैठेगा जो हमारे मत

609
00:43:32,320 --> 00:43:36,400
में होगा उसको हम सही मानेंगे बाकी हम उस आधार यही बचा कि भाई

610
00:43:36,400 --> 00:43:40,480
सबसे पहले तुम ग्रंथों वगैरा को मत देखो कि ग्रंथ प्रमाणित कर रहे कि

611
00:43:40,480 --> 00:43:44,680
रामपाल भगवान है यह मत देखो पहले यह देखो कि रामपाल भगवान

612
00:43:44,680 --> 00:43:50,240
है फिर व बताएगा कि ग्रंथ की कौन सी बात माननी कौन सी नहीं

613
00:43:50,240 --> 00:43:54,400
माननी एमपी खबर फास्ट में एक बात कह रहे थे कि हमारे

614
00:43:54,400 --> 00:43:58,400
किताबों में जो ज्ञान गंगा है याय किताब शिवांश

615
00:43:58,400 --> 00:44:02,520
जी ने यही चीज क्यों देखी उसमें अच्छी अच्छी चीज भी तो लिख रखी वो चीज क्यों नहीं देखी यही

616
00:44:02,520 --> 00:44:06,640
क्वेश्चन हम उनसे पूछ रहे हैं कि हमारे पुराणों में हमारे वेदों में हमारे

617
00:44:06,640 --> 00:44:10,960
गीता में बहुत अच्छी अच्छी बातें लिख रखी है वो क्यों नहीं दे

618
00:44:10,960 --> 00:44:15,040
ये मैं भी मेरे मन में भी यह वाला चीज है किसी दिन अच्छे टाइम पर

619
00:44:15,040 --> 00:44:19,240
इसको बोलूंगा भी जैसे वो कहते तुमने तो अपने हिसाब से

620
00:44:19,240 --> 00:44:23,280
चुन चुन कर रख रखा है अरे भाई वही तो तुमने किया है आज टट फॉर टट

621
00:44:23,280 --> 00:44:27,480
हो रहा था तुम्ह बुरा लग रहा है और फिर तुम्हारा तो तत्व दर्

622
00:44:27,480 --> 00:44:31,800
है ना एक भी बात गलत कैसे लिख रहा है भगवान होते हुए

623
00:44:31,800 --> 00:44:37,800
वो मालूम नहीं था क्या ये गलत बात है जो मैं लिख रहा

624
00:44:38,880 --> 00:44:43,160
हूं तो कोई जवाब नहीं शिव को भी

625
00:44:43,160 --> 00:44:47,520
काल सदाशिव को भी काल कह रहे हैं ये

626
00:44:47,520 --> 00:44:51,800
मन को काल कहा है भाई मन को मन को काल कहा

627
00:44:51,800 --> 00:44:56,440
है अब वही वाली बात वो व्यक्ति जो बोल रहे हैं

628
00:44:56,440 --> 00:45:00,480
जो कह रहे कि काल एक राक्षस जैसा

629
00:45:00,480 --> 00:45:05,440
कोई है है ना कृष्ण से अलग अब

630
00:45:05,440 --> 00:45:09,840
वही यह बात बोल रहे हैं कि दुर्गा माता के साथ य हुआ था बलात्कार

631
00:45:09,840 --> 00:45:13,880
शब्द लिखा है वही लोग मुझे वही

632
00:45:13,880 --> 00:45:17,960
लोग मेरे लिए भी व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हैं भवा इत्यादि भी बोला है

633
00:45:17,960 --> 00:45:22,240
मैंने सुना है मे बिल्कुल अब उनसे

634
00:45:22,240 --> 00:45:26,320
पूछा जाए अब वो जो ये आपका जो य है बंद

635
00:45:26,320 --> 00:45:30,520
कमरे में बात करने वाला क्या फैक्ट फुल डिबेट वो

636
00:45:30,520 --> 00:45:34,560
भी कुछ आपत्ति जनक टिप्पणियां कर रहा है कि ऐसा है

637
00:45:34,560 --> 00:45:39,160
वैसा है गुरु गुरुदेव पर भी कर रहा है उससे पूछा जाए

638
00:45:39,160 --> 00:45:43,160
कि भाई जब तुम्हारी जन्म की प्रक्रिया हो रही थी तो क्या मन वहां

639
00:45:43,160 --> 00:45:48,000
पर था कि नहीं था

640
00:45:48,000 --> 00:45:52,080
तो फिर किसके जने हो तुम काल नामक

641
00:45:52,080 --> 00:45:54,400
शैतान के

642
00:45:54,400 --> 00:45:58,600
या किसी और के य सोचने वाली बात

643
00:45:58,600 --> 00:46:03,360
है मन था ना वहां पर मन काल है देखो

644
00:46:03,360 --> 00:46:08,000
कल जो व्यक्ति कह रहा था दुर्गा के पति काल है वो जो

645
00:46:08,000 --> 00:46:12,000
फलाने जगह पर होता है तो देवी भागवत का वो दे

646
00:46:12,000 --> 00:46:16,040
रहा था प्रमाण शिवांश भाई आपने जब यह ये बलात्कार

647
00:46:16,040 --> 00:46:20,040
वाला जो आपने दिखाया ना जस्ट उसके ऊपर भी एक बहुत आपत्ति जनक बातें लिखी है

648
00:46:20,040 --> 00:46:24,560
आपको पता है दु दुर्गा जी के बारे में

649
00:46:24,560 --> 00:46:28,640
कि ये लिख रखा है कि काल ने देवी दुर्गा का

650
00:46:28,640 --> 00:46:32,960
भग जो प्राइवेट पार्ट होता है वो लगाया

651
00:46:32,960 --> 00:46:35,720
जस्ट ऊपर लिखा

652
00:46:35,720 --> 00:46:39,720
है अरे यह भी तो है कि फिर देवी देवी दुर्गा

653
00:46:39,720 --> 00:46:43,720
भी आनंदित होने लगी ये भी लिखा है

654
00:46:43,720 --> 00:46:47,840
ना पराकाष्ठा है नीचता की

655
00:46:47,840 --> 00:46:51,920
एकदम सुनने में बताइए

656
00:46:51,920 --> 00:46:55,960
कितनी नीचता इतनी नीचता फिर उनको भी आनंद आने लगा फिर वो साथ देने

657
00:46:55,960 --> 00:46:59,200
लगी काल का

658
00:46:59,200 --> 00:47:05,200
हद होती है डिफाइन कर रहे हैं उसको ना कि हम झूठ

659
00:47:06,760 --> 00:47:10,800
बोलने और उनके द्वारा दिया जाने वाला समाधान का क्या मतलब

660
00:47:10,800 --> 00:47:14,960
है पता है उनके द्वारा दिया जाने

661
00:47:14,960 --> 00:47:19,480
वाला जो संधान है वह इतना है

662
00:47:19,480 --> 00:47:24,320
कि जो चीज वहां लिखी है उसको हमने पढ़ दिया हमने शिवांश नारायण द्विवेदी को जवाब दे

663
00:47:24,320 --> 00:47:28,600
दिया जो चीज इस किताब में लिखी है उसी को हमने अपने वीडियो

664
00:47:28,600 --> 00:47:32,600
बनाते हुए ये देखो इसमें तो ये लिखा है सुभ नारायण द्विवेदी

665
00:47:32,600 --> 00:47:36,720
कुछ और बोल रहा है हमने वही की वही लाइन पढ़ दी कोई समाधान नहीं दिया

666
00:47:36,720 --> 00:47:42,720
वही की वही लाइन पढ़ दी जिस पर आपत्ति

667
00:47:49,240 --> 00:47:53,440
है मुह में राम राम बगल में चोरी वाला हिसाब है हम भक्ति

668
00:47:53,440 --> 00:47:59,440
कराते हैं पर अंदर भर भर के उसमें गंदगी लिख रखी है

669
00:48:02,560 --> 00:48:06,720
कमेंट्स में देखने को पता चलता है और क्या बहुत बुरा बुरा

670
00:48:06,720 --> 00:48:10,760
बोलते हैं किस प्रकार से

671
00:48:10,760 --> 00:48:14,800
एक ये जैसे वो मछली पकड़ने के लिए कांटे में वह कुछ

672
00:48:14,800 --> 00:48:19,200
थोड़ा सा कुछ आटा कुछ लगाया जाता है ना उसी प्रकार यह बोला

673
00:48:19,200 --> 00:48:24,480
हम देवी देवताओं की भक्ति कराते हैं लोगों को रिझाने के

674
00:48:24,480 --> 00:48:29,880
लिए यह देखिए

675
00:48:29,880 --> 00:48:35,880
काल मन है बड़ा कर दो

676
00:48:40,720 --> 00:48:45,560
भाई यह देखो भाई तो राम पालियो सुनो

677
00:48:45,560 --> 00:48:50,240
काल अलग से राक्षस है और काल मन भी है तो आप

678
00:48:50,240 --> 00:48:54,320
पूछो माता जी से जाकर के जो

679
00:48:54,320 --> 00:48:59,560
जो गाली दे रहे हैं मुझको कम से कम

680
00:48:59,560 --> 00:49:04,000
पूछे कि कौन है आपका

681
00:49:04,000 --> 00:49:08,000
जन्म देने वाला कारक हेतु काल है काल से जन्मे

682
00:49:08,000 --> 00:49:12,000
हो वो काल राक्षस से है ना या किससे अच्छा

683
00:49:12,000 --> 00:49:16,560
एक बात और करते हैं वह सीता जी वाली बात को बारबार बदलने का प्रयास करते कि सीता

684
00:49:16,560 --> 00:49:20,560
जी के लिए जो है व वहां पर वो नहीं आया है हमने जब इसके

685
00:49:20,560 --> 00:49:24,760
बारे में बोला भी कि भाई मुझको सीता

686
00:49:24,760 --> 00:49:28,960
जानकर प्यार करेगा यह तो ठीक है परीक्षा लेने आई है कि मुझको

687
00:49:28,960 --> 00:49:32,960
सीता जानकर प्यार करेगा हालाकि शब्दावली वो भी बिगड़ रही है मगर ठीक

688
00:49:32,960 --> 00:49:37,720
है चलो स्वीकार कर लि आगे क्या लिखा है संतोष करेगा

689
00:49:37,720 --> 00:49:41,880
तो यदि राम संतोष करेंगे यह गलत राम को संतोष नहीं होना

690
00:49:41,880 --> 00:49:45,000
चाहिए सीता माता वो पार्वती माता का उद्देश्य

691
00:49:45,000 --> 00:49:49,000
वहां परीक्षा लेने जाने का यह नहीं था कि राम को संतोष मिल जाए मतलब

692
00:49:49,000 --> 00:49:53,040
कोई अपनी पत्नी के लिए विचलित है तो वोव

693
00:49:53,040 --> 00:49:57,160
संतोष कर ले और वो बैठ जाए अब ना ढूंढे और या

694
00:49:57,160 --> 00:50:01,360
फिर वो उसको वैसा वाला संतोष देने जा रही थी कि

695
00:50:01,360 --> 00:50:05,480
पाच मिनट का संतोष हुआ उसके बाद जो है दोबारा से परेशान

696
00:50:05,480 --> 00:50:09,840
हो जा है ना और या फिर

697
00:50:09,840 --> 00:50:15,080
वो मुझे प्यार करेगा संतोष करेगा किसको संतोष

698
00:50:15,080 --> 00:50:19,200
करेगा संतोष कहां से आ जाएगा कौन सा संतोष

699
00:50:19,200 --> 00:50:25,200
है ये

700
00:50:27,720 --> 00:50:33,720
बोलिए दुबे

701
00:50:33,920 --> 00:50:36,520
जी

702
00:50:36,520 --> 00:50:40,560
भैया जय श्री राम जय श्री

703
00:50:40,560 --> 00:50:45,480
राम अर्पित अर्पित जी जय श्री राम बोलिए आप बोल नहीं पाए

704
00:50:45,480 --> 00:50:49,680
ज श रामया भाई क कि इनके

705
00:50:49,680 --> 00:50:53,760
द्वारा दिए गए एक भी इसमें तर्क नहीं होता केवल शास्त्र कोलेट

706
00:50:53,760 --> 00:50:58,520
करके जैसी मनम खते अरे सीधे कह दो ना

707
00:50:58,520 --> 00:51:02,560
सीधे कह दो ना रामपाल भगवान है जो बोलेगा वो करो हा वही बात है

708
00:51:02,560 --> 00:51:06,840
ना कि आप वेदों का पुराणों का नाम किस लिए ले रहे आप अपने मत कादन

709
00:51:06,840 --> 00:51:11,120
कीजिए आप जिसको पूजते आप उसको पूजिए हमें क्या मतलब लेकिन आप जब वेदों

710
00:51:11,120 --> 00:51:15,520
का नाम ले लेते हैं पुराणों का आप ले लेते हैं हमारे इको

711
00:51:15,520 --> 00:51:21,520
का अपमान करते

712
00:51:21,800 --> 00:51:25,960
हैं मयंक दास करके कोई आए हैं उनको

713
00:51:25,960 --> 00:51:31,960
हम कहेंगे अपना चेहरा दिखाए और लाइव में आकर के चर्चा

714
00:51:37,520 --> 00:51:43,520
करें

715
00:51:46,160 --> 00:51:51,160
जी जय श्री राम रंजीत

716
00:51:51,160 --> 00:51:55,160
जी जय श्री राम भाई जिनसे बात

717
00:51:55,160 --> 00:51:59,560
नहीं हो रही है वो अपना म्यूट कर ले अरे सुनो सुनो हम एक

718
00:51:59,560 --> 00:52:03,560
वो रामायनी इनका पढ़ने जा रहे हैं सब लोग सुने और रामपाल जी के जो

719
00:52:03,560 --> 00:52:07,560
फॉलोअर है ना रामपाल के वो भी ध्यान से सुने और उसके बाद

720
00:52:07,560 --> 00:52:11,960
यह बताएं कि रामपाल कितने सच्चे हैं और कबीर कितने सच्चे हैं

721
00:52:11,960 --> 00:52:16,000
अगर कबीर की बातें कबीर सागर से मिल रही

722
00:52:16,000 --> 00:52:20,520
है तो ये क्या है जरा सुनो उसको ध्यान से जीव रूप एक अंतर

723
00:52:20,520 --> 00:52:24,920
भाषा अंतर ज्योति कीन प्रकासा इच्छा रूप

724
00:52:24,920 --> 00:52:29,320
नारी अवतारी तासु नाम गायत्री धारी तेही

725
00:52:29,320 --> 00:52:34,000
नारी के पुत्र तीनी भय ब्रह्मा विष्णु महेश्वर नाऊ

726
00:52:34,000 --> 00:52:36,800
फिर ब्रह्म पूछ महतारी ब्रह्मा जी फिर पूछ रहे

727
00:52:36,800 --> 00:52:40,920
हैं अपने माता से को तो पुरुष के करी तुम नारी

728
00:52:40,920 --> 00:52:45,040
तुम्हारा पुरुष कौन है तुम्हारा पति कौन है और तुम किसकी पत्नी हो फिर इसके

729
00:52:45,040 --> 00:52:49,360
बाद माता का उत्तर आ रहा है देखो तुम हम हम तुम और न कोई

730
00:52:49,360 --> 00:52:53,400
माता कह रही है कि तुम हम और हम तुम कोई और नहीं है तुम ही से

731
00:52:53,400 --> 00:52:57,600
पुरुष हमें तोरी जोई तुम ही मेरे पुरुष हो और मैंने ही तुम्हें जन्म

732
00:52:57,600 --> 00:53:01,760
दिया है अब इसके आगे साखी है

733
00:53:01,760 --> 00:53:06,120
कबीर दास जी का सुनो बाप पूत की एक नारी

734
00:53:06,120 --> 00:53:10,240
यह कबीर दास जी लिखे हैं हम नहीं बोल रहे हैं रामपाल जी से जरा पूछना

735
00:53:10,240 --> 00:53:14,560
जाकर के तुम लोग रामपाल से अगर मिल जाए जेल से बाहर अगर आ जाए तो उनसे

736
00:53:14,560 --> 00:53:18,600
पूछना कि बाप पूत की एक नारी एक माय ब

737
00:53:18,600 --> 00:53:23,640
आय ऐसा पूत सपूत न देखा जो बाप ही चिन्ह

738
00:53:23,640 --> 00:53:29,640
धाय इसका कुछ मतलब समझ में आ रहा है

739
00:53:29,800 --> 00:53:34,040
मतलब अत वहा मतलब सुनो सुनो इसका

740
00:53:34,040 --> 00:53:38,080
वहां पर भी अद्वैत की ही बात है वही पिता के रूप

741
00:53:38,080 --> 00:53:42,160
में प्रकट हो रहे हैं वही पुत्र के रूप में प्रकट होकर के लीला कर रहे है लेकिन ई सब

742
00:53:42,160 --> 00:53:46,520
का सतलोक और इसके बाद कबीर जी का एक सतलोक अच्छा एक चीज

743
00:53:46,520 --> 00:53:50,720
बताओ शाश्वत स्थान सतलोक कौन जाएगा

744
00:53:50,720 --> 00:53:54,840
किसको जाने की जरूरत है आत्मा क्या कोई वस्तु है क्या जो

745
00:53:54,840 --> 00:53:59,160
यहां से उड़ कर के जाएगा उड़ने का काम या फ्लाइंग ऑब्जेक्ट

746
00:53:59,160 --> 00:54:03,400
तो कोई आत्मा है नहीं कि फ्लाइंग करना है उसको आत्मा ना तो कोई

747
00:54:03,400 --> 00:54:07,960
वस्तु है अगर वस्तु होता तो अंग न अनुसार इनके अनुसार

748
00:54:07,960 --> 00:54:12,280
वो लोक ही है जो इस दुनिया से अलग है ओके

749
00:54:12,280 --> 00:54:16,600
बात अल हैसे पूछा जाएगा कि सीधे उड़ते चले जाओगे

750
00:54:16,600 --> 00:54:22,280
या फिर कोई या फिर इस दुनिया से दूसरी दुनिया में जाने का कोई गेट खुलेगा

751
00:54:22,280 --> 00:54:26,360
आकाश भी तत्व ज्ञानी है बहुत तो हमसे हमसे आपसे ज्यादा

752
00:54:26,360 --> 00:54:30,600
नी इनको हम कुछ बताना चाहते हैं कि इतने तत्व ज्ञानी है इनको

753
00:54:30,600 --> 00:54:34,760
य नहीं पता कि आत्मा कोई वस्तु नहीं है कोई द्रव्य

754
00:54:34,760 --> 00:54:38,800
नहीं है वह कि कोई पार्टिकल से बनी हुई कोई ऑब्जेक्ट है जो यहां से

755
00:54:38,800 --> 00:54:42,880
उड़कर वहां जाएगी या उसको कोई जगह

756
00:54:42,880 --> 00:54:45,040
की जरूरत उसको सतलोक की जरूरत किस लिए

757
00:54:45,040 --> 00:54:49,240
हमको जरा बताए ये अगर वह कोई वस्तु होती तब तो उसको स्थान

758
00:54:49,240 --> 00:54:53,280
की जरूरत होती आत्मा को स्थान की जरूरत कहां है अब

759
00:54:53,280 --> 00:54:57,280
फिलहाल में बाकी सब छोड़ दो कबीर जी की रमानी हम पढ़ कबीर

760
00:54:57,280 --> 00:55:01,760
जी की रामायनी हमको बता द कबीर सागर से कहां मिल रही

761
00:55:01,760 --> 00:55:06,240
है कबीर साग सुनिए अब हम बता रहे कबीर सागर कबीर जी की

762
00:55:06,240 --> 00:55:10,320
जो बीजक है उसी के जो है एकदम अपोज में लिखी गई है

763
00:55:10,320 --> 00:55:14,320
लेकिन य नहीं मानेंगे बिल्कुल नहीं मानेंगे एकदम मति भ्रष्ट हो चुकी

764
00:55:14,320 --> 00:55:18,960
है इनकी कबीर उस

765
00:55:18,960 --> 00:55:23,320
दिन कबीर कबीर जी की वाणी से एक बात याद

766
00:55:23,320 --> 00:55:27,880
आई इनके भाई साहब जो जेलम उन्होंने

767
00:55:27,880 --> 00:55:32,760
भी कुछ बात लिख रखी है

768
00:55:32,760 --> 00:55:37,120
अपनी वाणी बनाई है कोई इन्होंने और

769
00:55:37,120 --> 00:55:40,480
उसमें इन्होंने

770
00:55:40,480 --> 00:55:44,920
[संगीत] पहली बात तो यह है

771
00:55:44,920 --> 00:55:49,040
कि कबीर दास जी किसको भजते हैं यह इन्होंने लिख रहा

772
00:55:49,040 --> 00:55:53,040
है कबीर पूजे तासु को

773
00:55:53,040 --> 00:55:57,280
जाके भुजा अनंत कबीर उसको जिसके भुजा

774
00:55:57,280 --> 00:56:01,640
अनंत है अच्छा ठी मिनट स्क्रीन

775
00:56:01,640 --> 00:56:04,120
बड़ा कर

776
00:56:04,120 --> 00:56:09,000
दीजिए स्क्रीन थोड़ी बड़ी कर दीजिए भाई साहब

777
00:56:09,000 --> 00:56:13,600
कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा अनंत

778
00:56:13,600 --> 00:56:17,640
कबीर किसको भज रहे हैं और यह लिखा भी किसने शब्द

779
00:56:17,640 --> 00:56:21,680
संत रामपाल जी अच्छा कबीर

780
00:56:21,680 --> 00:56:27,680
के बीज सुनो कबी जरूरी चीज एक जरूरी चीज

781
00:56:28,480 --> 00:56:32,600
यह क्या लिख रहा है वशिष्ठ

782
00:56:32,600 --> 00:56:37,760
मुनि कौन है तत्व

783
00:56:37,760 --> 00:56:41,760
वेता तत्व वेता अर्थात तत्वदर्शी

784
00:56:41,760 --> 00:56:46,080
तत्व ज्ञानी य वशिष्ठ को लिख दिया इन्होने

785
00:56:46,080 --> 00:56:48,920
हो गई जय

786
00:56:48,920 --> 00:56:51,960
जय

787
00:56:51,960 --> 00:56:57,480
बात कोई बोल रहा है क्या मेरी बात

788
00:56:57,480 --> 00:57:03,480
अर्जुन

789
00:57:05,720 --> 00:57:09,800
बोलिए बोले हम आप बोलिए रजीत

790
00:57:09,800 --> 00:57:14,000
जी अरे सुनिए हम बीजक में से आज पूरा प्रमाण इन का पोस्टमार्टम

791
00:57:14,000 --> 00:57:18,440
बीजक उठा कर के लेकर आए हैं बड़ा मुश्किल से मिला है डाउनलोड किया हैं

792
00:57:18,440 --> 00:57:22,760
इसमें देखो बीजक में साखी जो तीसरे नंबर की रमानी में साखी है इसमें

793
00:57:22,760 --> 00:57:26,840
लिखा हुआ है जीव शीष सब प्रगट व ठकुर सब

794
00:57:26,840 --> 00:57:31,480
दास कबीर और जाने नहीं एक राम नाम की

795
00:57:31,480 --> 00:57:35,560
आस य हम नहीं बोल रहे कबीर जी बोलना है

796
00:57:35,560 --> 00:57:39,640
रामपाल जी है कहीं अरे वो तो मिलावट कह देंगे

797
00:57:39,640 --> 00:57:43,880
ना आप समझ नहीं रहे हो रामपाल भगवान है वो जब चाहे त किसी भी शब्द

798
00:57:43,880 --> 00:57:48,080
को कह सकता है मिलावट अरे मेरे भाई मिलावट होगा तो अर्थों

799
00:57:48,080 --> 00:57:52,160
में होगा ना रामायनी में थोड़ी ना ना वो

800
00:57:52,160 --> 00:57:56,240
श्लोक भी मिलावट हो जाएंगे वो दोहे भी मिलावट हो जाएंगे

801
00:57:56,240 --> 00:58:00,520
क्या बात कर रहे हो आप नहीं नहीं ह करते हो या नोस नोस

802
00:58:00,520 --> 00:58:04,760
की चुटिया है उनके पास अरे यार उ साखी

803
00:58:04,760 --> 00:58:08,920
है सुनो ना रामायनी नंबर तीन में ये साखी है जीव

804
00:58:08,920 --> 00:58:13,520
शिव जीव शिव सब प्रगट व ठाकुर सब दास

805
00:58:13,520 --> 00:58:17,720
कबीर और जाने नहीं एक राम नाम की आस अब

806
00:58:17,720 --> 00:58:21,200
ई बोलेंगे कि राम कौन है आदि राम कौन है आद

807
00:58:21,200 --> 00:58:25,360
मयंक दास मयंक दास कौन है मयंक

808
00:58:25,360 --> 00:58:29,560
दास जी को ऊपर म दास जी आइए आप जरा सा कबीर जी के बारे में ज्यादा जानकारी

809
00:58:29,560 --> 00:58:33,560
रखते आइए थोड़ा सा आप हम लोगों को ज्ञान दीजिए यार मक

810
00:58:33,560 --> 00:58:38,440
दास जी को ऊपर ले लीजिए मयंक दास जी आ जाइए भाई

811
00:58:38,440 --> 00:58:42,680
मयंक दास जी को ऊपर ले लीजिए थोड़ा सा अभी एक दुर्गा जी की

812
00:58:42,680 --> 00:58:46,840
दुर्गा करके हैं उनके ब्लॉग पर से हम आ रहे हैं व इतना ज्ञान बांच रही

813
00:58:46,840 --> 00:58:51,280
थी शिवा के बारे में हमने दुर्गा शत्र

814
00:58:51,280 --> 00:58:55,280
ठाकर हां इसी तरह से है उनको मतलब कबीर सागर उठा के

815
00:58:55,280 --> 00:58:59,400
बैठ गई अब उनको उस उन निर् बुद्धि व्यक्ति को कौन

816
00:58:59,400 --> 00:59:04,120
समझाया कि कबीर सागर हिंदू प्रमाणिक ग्रंथ हैय नहीं है वो

817
00:59:04,120 --> 00:59:08,160
वो अपना बनाओ भाई जितनी बातें हमारे वेद से मैच खाएंगे उतनी बातें

818
00:59:08,160 --> 00:59:12,440
हम करेंगे हा जी

819
00:59:12,440 --> 00:59:16,560
निशांत जी को सुनले निशांत जी जय श्री राम जय

820
00:59:16,560 --> 00:59:21,320
श्री राम भया जी बो

821
00:59:21,320 --> 00:59:25,560
पहाड़ी जी जो बोले हैं इतना मतलब अभद्र जो

822
00:59:25,560 --> 00:59:29,560
लिखा उनके पुस्तकों में मतलब मेरा मतलब रक्त लग रहा है खोल

823
00:59:29,560 --> 00:59:33,560
रहा है मतलब समझ रहे हैं भले

824
00:59:33,560 --> 00:59:36,200
माहौल अभी थोड़ा इस टाइप का हो गया थोड़ा मजाकिया

825
00:59:36,200 --> 00:59:40,280
टाइप का लेकिन फिर भी जो य सब इतना गंदा लिखा

826
00:59:40,280 --> 00:59:44,320
है उसका फल भोग भी रहा है आदमी गंदा लिखा उसका तो

827
00:59:44,320 --> 00:59:48,320
भोग ही रहा है लेकिन ये लोग कर देख

828
00:59:48,320 --> 00:59:52,560
देखिए आज आज एक उनके एक शिष्य का मेरे पास फोन आया है

829
00:59:52,560 --> 00:59:57,040
हो सकता है आने वाले दिनों में उसको हम चर्चा में ले वो

830
00:59:57,040 --> 01:00:01,520
बोल रहा है कि उनके नाम पर सब गलत लिखा है किताबों में वो नहीं लिखे हैं

831
01:00:01,520 --> 01:00:05,600
वो ये बोल रहा है अब जो भी हो सच्चाई जो भी

832
01:00:05,600 --> 01:00:09,800
हो मगर वह भी व्यक्ति अपने पीछे जो है सत साहेब सत साहेब य पोस्टर

833
01:00:09,800 --> 01:00:13,800
उस्टर लगा के ही बात कर रहे हैं और वय बता रहे हैं कि कोई है

834
01:00:13,800 --> 01:00:17,800
जो इनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है और वह जेल से बाहर आने

835
01:00:17,800 --> 01:00:21,960
नहीं देना चाहता है उसकी फैमिली बहुत सारी चीजें उसमें किसी दिन हम ले लेंगे

836
01:00:21,960 --> 01:00:26,040
लाइव में और दूसरी बात यह है कि

837
01:00:26,040 --> 01:00:30,560
आपकी जो स्थिति है उसको मैं समझ सकता हूं मगर एक बात ध्यान

838
01:00:30,560 --> 01:00:35,440
रखिए अपने क्रोध को पालना सीखिए

839
01:00:35,440 --> 01:00:39,520
क्रोध को पालिए और उस जगह उसको

840
01:00:39,520 --> 01:00:43,840
डाइवर्ट करिए जिस जगह उसकी उपयोगिता सिद्ध हो

841
01:00:43,840 --> 01:00:48,640
जी तभी उस तभी आपका वो सार्थक हो पाएगी

842
01:00:48,640 --> 01:00:51,560
जी है ना आपका प्रयास

843
01:00:51,560 --> 01:00:55,560
आपकी भक्ति सार्थक हो पाएगी अपने क्रोध को पालो और

844
01:00:55,560 --> 01:00:59,560
पाल करके उस जगह लगाओ उस उससे उत्पन्न होने वाली

845
01:00:59,560 --> 01:01:03,760
जो एनर्जी है उस अग्नि से उस अग्नि का उपयोग करो उस

846
01:01:03,760 --> 01:01:07,800
क्षमता का उपयोग करो और उस जगह

847
01:01:07,800 --> 01:01:12,240
पर लगाओ जहां पर उपयोग करने से कोई निष्कर्ष

848
01:01:12,240 --> 01:01:16,280
निकले परिणाम प्राप्त हो है ना

849
01:01:16,280 --> 01:01:20,640
जी क्रोध को पालना हमें सीखना हो

850
01:01:20,640 --> 01:01:25,240
जैसे मेरे को क्रोध आया ब मेरे को क्रोध आया मैं यहां पर बहुत चिल्लाल

851
01:01:25,240 --> 01:01:29,240
कोई निष्कर्ष तो नहीं निकलेगा मगर उसी क्रोध को पाल

852
01:01:29,240 --> 01:01:33,320
करके धैर्य के साथ भी धैर्य को मिला कर के स्थिर बुद्धि रख

853
01:01:33,320 --> 01:01:37,320
करके और विधवा प्रायोगिक व्यवहारिक रूप से उस पर

854
01:01:37,320 --> 01:01:41,560
जो है कारवाई करने से परिणाम प्राप्त होते हैं

855
01:01:41,560 --> 01:01:45,840
क्रोध को पालना जी मयंक

856
01:01:45,840 --> 01:01:50,360
दास

857
01:01:50,360 --> 01:01:54,400
जी जय श्री राम भैया सत

858
01:01:54,400 --> 01:01:59,000
साब बोलना चाहिए था तो आप भगत बन के आए

859
01:01:59,000 --> 01:02:04,800
झ ड नहीं कर ना तो बारबार मैं नाम चेंज करना पड़ा फिर मेरे

860
01:02:04,800 --> 01:02:08,840
को नहीं बिना फेस के थोड़ी ना हमारा वो भी नहीं है कि हम जो

861
01:02:08,840 --> 01:02:12,960
है उनकी तरह अपने ही आदमी को बनाकर खड़ा कर दे और भैया

862
01:02:12,960 --> 01:02:17,040
ले हमने हरा दिया शंकराचार्य को हमने हरा दिया जो स्कोन को हमने हरा

863
01:02:17,040 --> 01:02:21,600
दिया स्मार्थ को वैष्णव को हमने सबको हरा दिया ज जय जय

864
01:02:21,600 --> 01:02:26,280
जय और बात आ जाएगी सामना करने की तो किसी

865
01:02:26,280 --> 01:02:30,760
किसी की उंगलियों में जो है वो सामर्थ्य नहीं है जो हमारा नंबर तक मिला सके

866
01:02:30,760 --> 01:02:35,280
मैं ता चेहरे के साथ ही रहता हूं मैं

867
01:02:35,280 --> 01:02:39,800
जब भी आता हूं मैं आपको एक बात बताऊ इनके यहां पर जो

868
01:02:39,800 --> 01:02:44,080
वाकई के जो लोग है जो वहा से जुड़े हुए हैं डायरेक्ट आश्रमों से

869
01:02:44,080 --> 01:02:48,160
जुड़े इनको सखत आदेश आए हैं शिवांश नारायण द्विवेदी

870
01:02:48,160 --> 01:02:52,240
के साथ पंगा मत लेना आमने सामने का

871
01:02:52,240 --> 01:02:56,320
ये बात सत्य है

872
01:02:56,320 --> 01:03:02,320
दूर से रहकर कुछ भी बोललो उसके पास मत जाना वरना हमारी नाक कटवा दोगे

873
01:03:03,520 --> 01:03:07,680
सही सुनो ना जहां शिवांश शिव का अंश हो और

874
01:03:07,680 --> 01:03:11,840
जहां नारायण हो वहां भाई रामपाल जीसे लोग

875
01:03:11,840 --> 01:03:16,600
टिक नहीं सकते भाई उसी को होता है जि

876
01:03:16,600 --> 01:03:18,920
को

877
01:03:18,920 --> 01:03:23,040
में इसलिए कोई दावास नहीं ह हमको अब

878
01:03:23,040 --> 01:03:27,280
कुछ नहीं जाना है पता है इसलिए आ इनम से कोई विद्वान

879
01:03:27,280 --> 01:03:31,480
तत्वदर्शी आ कर के हमको कबीर जी के बीजक के मतलब को समझा

880
01:03:31,480 --> 01:03:35,840
दे कि कबीर जी बारबार राम राम क चिल्ला रहे

881
01:03:35,840 --> 01:03:38,120
हैं

882
01:03:38,120 --> 01:03:42,440
ब नहीं नहीं कबीर जी सतलोक इनके सतलोक वाली बात कहे

883
01:03:42,440 --> 01:03:46,640
नहीं कर रहे हैं सुनो ना इनके सतलोक वाली बात कहे नहीं कर रहे कबीर जी बारबार

884
01:03:46,640 --> 01:03:50,640
जो है अद्वैत की बात कहे करने लग रहे हैं अरे उनका एक बहुत

885
01:03:50,640 --> 01:03:54,720
फेमस पंक्ति है ना प्रेम गली अति साकरी जाम दोना समाय नहीं

886
01:03:54,720 --> 01:03:57,320
की है

887
01:03:57,320 --> 01:04:01,920
प्रेम गली अति साकरी जाम दो ना समाए

888
01:04:01,920 --> 01:04:04,960
इन्हीं की है

889
01:04:04,960 --> 01:04:09,160
शायद वो एक कोई है जो अक

890
01:04:09,160 --> 01:04:11,400
पुरुष अगम लोक वाले हैं वह कह

891
01:04:11,400 --> 01:04:15,800
रहे हैं कि लगता है कबीर जी के अंदर काल घुस गया जो अद्वैत

892
01:04:15,800 --> 01:04:21,800
की बात कर रहा है हां यार य हो सकता है

893
01:04:23,840 --> 01:04:28,480
सता कबी कबीर दास जी को काल प्रभावित करता है

894
01:04:28,480 --> 01:04:32,960
यह हम रामपाल के ग्रंथों से सिद्ध कर सकते हैं क्योंकि श्राप

895
01:04:32,960 --> 01:04:37,000
देना कबीर के अंदर काल आकर के अद्वैत वाली बात

896
01:04:37,000 --> 01:04:41,080
लिखवा डाला होगा सब बिल्कुल बिल्कुल क्यों क्योंकि श्राप

897
01:04:41,080 --> 01:04:45,440
देना काल का श्राप दिलवाना यह काल का काम है

898
01:04:45,440 --> 01:04:49,680
जब ब्रह्मा मतलब किसी ने श्राप दिया

899
01:04:49,680 --> 01:04:53,680
है इनके ही इसमें वृतांत है ये किसी ने श्राप दिया है ब्रह्मा जी को

900
01:04:53,680 --> 01:04:57,760
हां हां एक और क्वेश्चन है सुनो एक मिनट वहां लिखा

901
01:04:57,760 --> 01:05:01,960
हुआ है कि वो काल के प्रभाव में आकर के ऐसी गलतियां

902
01:05:01,960 --> 01:05:06,040
कर बैठता है इंसान तो अब अब श्राप देना काल क्या

903
01:05:06,040 --> 01:05:10,760
वशीभूत होकर के हो गया तो इधर कबीर जी ने भी श्राप दिया है

904
01:05:10,760 --> 01:05:15,280
तो कबीर जी भी काल के वशीभूत होक के श्राप देते हैं

905
01:05:15,280 --> 01:05:19,360
अरे एक मिनट क्वे जी पाड़ी जी कु कहना चाह

906
01:05:19,360 --> 01:05:23,720
रहे काफी देर से एक मिनट उनको सुन ल फिर मैं आपके पास आता जी पहाड़ी

907
01:05:23,720 --> 01:05:29,040
जी जय श्री राम बोलिए

908
01:05:29,040 --> 01:05:33,120
मेरा नेट प्रॉब्लम कर रहा है आप लोग बात करिए चलिए

909
01:05:33,120 --> 01:05:37,320
रंजीत जी बोलिए अरे एक क्वेश्चन है यहां कोई तत्वदर्शी हो

910
01:05:37,320 --> 01:05:41,680
तो हमको य समझाए ना कि काल को स्टाप मिला है कि एक लाख जीव को खाएगा

911
01:05:41,680 --> 01:05:45,960
सवा लाख पैदा करेगा जीव कौन जीव आत्मा ना तो आत्मा

912
01:05:45,960 --> 01:05:51,000
क्या पैदा होता है का जी

913
01:05:51,000 --> 01:05:55,320
सवा लाख फिर मतलब एक लाख को जब खाही गया तो सवा लाख पैदा मतलब

914
01:05:55,320 --> 01:05:59,400
2 मान लो एक लाख खाया तो वो आत्मा तो मरी नहीं वो आत्मा फिर से आ गई

915
01:05:59,400 --> 01:06:04,240
य 25000 आत्मा कहां से नई वाली आ गई भाई

916
01:06:04,240 --> 01:06:08,360
अरे वो वो तो गणित में लगाता ही

917
01:06:08,360 --> 01:06:12,840
नहीं वो तो बहुत वो तो

918
01:06:12,840 --> 01:06:17,040
स मैं एक संस्मरण सुनाता हूं जी तो

919
01:06:17,040 --> 01:06:21,280
हुआ ऐसा कि साल डेढ़ साल पहले हमसे बड़े

920
01:06:21,280 --> 01:06:25,360
हैं हमारे गुरु भाई है पुरु शंकराचार्य जी के शिष्य है और उ उन्होंने ही हमें जुड़ा

921
01:06:25,360 --> 01:06:29,440
था तो हुआ ऐसा कि मैं यहां गुजरात में रहता हूं और दो तीन

922
01:06:29,440 --> 01:06:33,560
जन ऐसे रोड पर ये ज्ञान गंगा पुस्तक और एक

923
01:06:33,560 --> 01:06:37,680
गीता वाला वो शायद होगा हमारे लाइब्रेरी

924
01:06:37,680 --> 01:06:41,720
में तो वो दोनों पुस्तक बेच रहे थे हमें थोड़ा बहुत आइडिया

925
01:06:41,720 --> 01:06:44,160
था इनको फॉलो नहीं करना है यह हमें

926
01:06:44,160 --> 01:06:48,160
पता था बट उतना ये जो आप डिटेल आज दे रहे हैं क्योंकि हमने इनकी पुस्तक पढ़ी

927
01:06:48,160 --> 01:06:52,440
भी नहीं तो हमने वो पुस्तकें ले ली कुछ जो

928
01:06:52,440 --> 01:06:56,440
चंद कुछ पैसे थे शायद 50 या 0 रप जो भी होंगे से कम भी हो सकते हैं

929
01:06:56,440 --> 01:07:00,440
एगजैक्टली पता नहीं है तो वो हमने दे दिया जब हमारे उन गुरु

930
01:07:00,440 --> 01:07:04,440
भाई को पता चला उन्होंने हमें इतना डाटा बोले कि इन पर एक रुपए

931
01:07:04,440 --> 01:07:08,440
भी आप क्यों खर्चा कर रहे हैं बहुत डाटा समझ लीजिए

932
01:07:08,440 --> 01:07:13,160
तो अभी ये पुस्तकें हैं हमारे पास तो हम आपको

933
01:07:13,160 --> 01:07:17,200
पर्सनली मैसेज करेंगे भैया तो कुछ जो भी पॉइंट्स होंगे

934
01:07:17,200 --> 01:07:21,240
ना आपके आप हमें बताइएगा तो एक्चुअली क्या है कि अगर लोकलाइज में कोई

935
01:07:21,240 --> 01:07:25,520
हमें मिलते हैं तो बेटर रहेगा है ना उनको समझाने के लिए धरा

936
01:07:25,520 --> 01:07:29,520
मैसेज कर जी भैया एक एक बात

937
01:07:29,520 --> 01:07:33,840
भैया जी एक बात हम भी कहना चाहते हैं सुनिए गुरु

938
01:07:33,840 --> 01:07:38,040
द्रोण के चेले थे अर्जुन भी और एक लव्य

939
01:07:38,040 --> 01:07:42,120
गुरु द्रोण का चेला था लेकिन एक लव्य को उनका अंगूठा क्यों देना

940
01:07:42,120 --> 01:07:46,240
पड़ा क्योंकि उसने विद्या की चोरी की थी यह

941
01:07:46,240 --> 01:07:50,360
भी ऐसा ही कर रहे हैं रामपाल जी तो जेल में है लेकिन उनके नाम

942
01:07:50,360 --> 01:07:54,760
से दीक्षा ले रहे हैं

943
01:07:54,760 --> 01:07:58,880
हम हां तो चोरी करर तो बहुत से टॉपिक

944
01:07:58,880 --> 01:07:59,880
है

945
01:07:59,880 --> 01:08:04,000
जो अधूरे हैं म मयंक दास जी आप भी अपनी बात मयंक कुमार जी आप अपनी बात

946
01:08:04,000 --> 01:08:08,040
पूरी कर लीजिए भैया यह जो बोलते

947
01:08:08,040 --> 01:08:12,440
हैं ना कि समाज सुधार का काम करते हैं यह बोलते हैं ना अपनी वाणि

948
01:08:12,440 --> 01:08:16,480
में तो हमारे यहां के किस्सा बताता हूं मैं एक रामपाल

949
01:08:16,480 --> 01:08:20,920
के परिवार के जुड़े हुए थे व म

950
01:08:20,920 --> 01:08:25,040
थे तो यहां अपने य शादी हो रही थी अ

951
01:08:25,040 --> 01:08:29,240
जो उनकी मिसेस थी ना वो चली गई शादी में और

952
01:08:29,240 --> 01:08:33,240
डीजे बज रहा था डीजे प नाचने लग गई ये बात

953
01:08:33,240 --> 01:08:37,280
जब उसके पति को पता चला ना तो भरे बाजार में ना उसको जूते देते हुए

954
01:08:37,280 --> 01:08:41,560
घर पर लेकर आया था वो मैंने कि ये शिक्षा देते है तुम्हारा गु

955
01:08:41,560 --> 01:08:45,640
बताओ अपनी मिसेज के अपनी पत्नी के भरे बाजार

956
01:08:45,640 --> 01:08:49,840
में जूते मारते हुए घर पर लेक आया था व

957
01:08:49,840 --> 01:08:54,560
बताओ और हमारे पड़ोसी गांव में एक रामपाल ज

958
01:08:54,560 --> 01:08:59,080
के वहां जाता उसका पापा उसके पिताजी खत्म हो गए

959
01:08:59,080 --> 01:09:03,440
अब उसका जो बड़ा भाई था वो रामपाल जी से जुड़ा हुआ नहीं था तो

960
01:09:03,440 --> 01:09:07,440
छोटा वाला बोलता है कि मैं तो है ना मेरे बाप को ना जलाऊंगा नहीं मैं तो है ना

961
01:09:07,440 --> 01:09:11,440
इसको पेड़ पर टाक दूंगा ये जानवर वगैरह खा

962
01:09:11,440 --> 01:09:15,320
लेंगे हकीकत की बात है फिर उसको समा

963
01:09:15,320 --> 01:09:19,400
जो समाज के लोग उसको समझाए ऐसा नहीं होता है जो समाज की रीति रिवाज होते है

964
01:09:19,400 --> 01:09:23,400
सबको निभाना पड़ता है वो नहीं माना फिर उसको कमरे में लेकर गए

965
01:09:23,400 --> 01:09:27,400
उसको ढंग से उसकी धुलाई किए उसको अच्छी

966
01:09:27,400 --> 01:09:31,600
तरह से अंतिम संस्कार किया था फिर उसका

967
01:09:31,600 --> 01:09:35,680
हकीकत की बात है भैया

968
01:09:35,680 --> 01:09:40,000
जी आप बोल रहे

969
01:09:40,000 --> 01:09:45,120
हो कौन बोल रहा था अच्छा वो चले

970
01:09:45,120 --> 01:09:51,120
गए

971
01:09:52,800 --> 01:09:57,040
भैया मैसेज करिएगा

972
01:09:57,040 --> 01:10:01,120
जी गोस्वामी जी जय श्री राम बताइए जय श्री राम

973
01:10:01,120 --> 01:10:06,600
शिवाज भैया पज महादेव हर हर

974
01:10:06,600 --> 01:10:10,680
महादेव अच्छा पहाड़ी एक बात याद आ गई है पहाड़ी जी

975
01:10:10,680 --> 01:10:14,760
का भी चैनल है तो आप लोग वहां पर भी

976
01:10:14,760 --> 01:10:19,480
उसे सब्सक्राइब कर ले पहाड़ी जी भी वहां पर जो है मोर्चा संभाल रहे हैं

977
01:10:19,480 --> 01:10:23,520
और फैक्ट एंड फिगर्स आपको वहां से भी पता चलेंगे काफी सारे तो टी

978
01:10:23,520 --> 01:10:27,680
आर पहाड़ी जी के नाम से ही चैनल है उनका जो लोग भी वहां पर है वहां

979
01:10:27,680 --> 01:10:32,320
जरूर सब्सक्राइब कर ले जी गोस्वामी

980
01:10:32,320 --> 01:10:36,400
जी हां शिवांश भाई अमित दास

981
01:10:36,400 --> 01:10:40,480
जी है वो ऐसे बोल रहे थे कि यह सब लोग अपने

982
01:10:40,480 --> 01:10:44,480
अपने मतलब जो भगवान है ब्रह्मा विष्णु

983
01:10:44,480 --> 01:10:50,160
महेश सब सब सब लोगों की अलग-अलग पूजा

984
01:10:50,160 --> 01:10:54,320
करते तो वो बाद में उसने थोड़ा

985
01:10:54,320 --> 01:10:58,600
अभद्र भाषा में बात की थी वो यहां से डांट

986
01:10:58,600 --> 01:11:03,160
खाके गया था ना अरे

987
01:11:03,160 --> 01:11:07,600
सु वो यहां से डांट खाके गया था

988
01:11:07,600 --> 01:11:11,800
तो हमसे तो कुछ बोल नहीं पाया सर का प्रमाण नहीं है ना

989
01:11:11,800 --> 01:11:15,920
तो शांत होना पड़ा अब वहां पर जाकर के थोड़ा जब अपने साथियों

990
01:11:15,920 --> 01:11:20,080
का माहौल मिला कुछ वातावरण मिला वहां जाकर के थोड़ी गर्जना आई आवाज

991
01:11:20,080 --> 01:11:24,400
में गर्जना नहीं वो वो भी वो भी चूहो के खर्राटे

992
01:11:24,400 --> 01:11:26,800
ही है

993
01:11:26,800 --> 01:11:28,920
और

994
01:11:28,920 --> 01:11:32,960
य बोल रहे थे व अ

995
01:11:32,960 --> 01:11:38,960
फसी होने के बाद में सजा देते हैं ऐसे कुछ बोल रहे

996
01:11:39,080 --> 01:11:45,080
थे मर गया पुरा

997
01:11:50,880 --> 01:11:56,280
अ सतलो जाकर काजू कतली सब खाए लोग

998
01:11:56,280 --> 01:12:00,280
जब उनके कबीर सुनो ना हम बता रहे हैं कबीर सागर को हम कैसे मानले जब

999
01:12:00,280 --> 01:12:04,880
बीजक में कबीर सागर के उल्टी चीजें लिखी

1000
01:12:04,880 --> 01:12:09,640
है अभी देखो रमानी नंबर 17 प

1001
01:12:09,640 --> 01:12:13,680
जिस पर एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों के सूक्ष्म

1002
01:12:13,680 --> 01:12:17,720
शरीर को भूनकर उसमें से गंध निकाल कर खाता

1003
01:12:17,720 --> 01:12:22,520
है ओ

1004
01:12:22,520 --> 01:12:26,640
हो अच्छा और है जो हमारे

1005
01:12:26,640 --> 01:12:30,640
ऊपर वीडियो बना रहा है उसम उसने कहा है कि

1006
01:12:30,640 --> 01:12:34,640
भाई हमने जो वाली बात कही थी ना कि जब आप अपनी माता जी से

1007
01:12:34,640 --> 01:12:38,720
जाकर पूछिए वो इन्होंने काल को

1008
01:12:38,720 --> 01:12:42,840
काम भी कहा है तो उसने कहा देखो काल को काम केवल

1009
01:12:42,840 --> 01:12:47,200
वो नहीं कह रहे हैं काल को काम तो गीता भी कह रही है

1010
01:12:47,200 --> 01:12:51,720
तो गीता तो यह भी कह रही है कि तू मुझको भज

1011
01:12:51,720 --> 01:12:55,760
गीता यह भी कह रही है कि ऐसा मेरा मत है इसको मान जो इस मत नहीं मानते

1012
01:12:55,760 --> 01:12:59,880
हैं वो वो हो जाते हैं उसको क्यों नहीं मान रहे हो और

1013
01:12:59,880 --> 01:13:04,040
दूसरी बात तुम्हारा जो काल है वो राक्षस है शैतान है तो हम पूछ

1014
01:13:04,040 --> 01:13:08,480
ये रहे हैं और जो जो गीता में जो काल वो है कामदेव

1015
01:13:08,480 --> 01:13:12,680
वो परम तत्व है तो तुम तुम्हारा

1016
01:13:12,680 --> 01:13:16,800
वो जो काल है वो राक्षस है तो प्रश्न ये है क्या वो

1017
01:13:16,800 --> 01:13:21,040
राक्षस वहां पर था कि नहीं था परम

1018
01:13:21,040 --> 01:13:25,440
तत्व तो हर जगह है गीता में जो परम

1019
01:13:25,440 --> 01:13:29,600
य कह रहा है कि मैं कामदेव भी हूं वो परम तत्व है वो तो हर जगह

1020
01:13:29,600 --> 01:13:33,680
है ही हम भी मान रहे मगर तुम्हारा जो काल है वो परम तत्व नहीं

1021
01:13:33,680 --> 01:13:37,560
है और पहली बात तो यह कि उसने अपना वीडियो बनाते समय

1022
01:13:37,560 --> 01:13:41,600
सीधे सधे बोल दिया कि रामपाल दास जी महाराज ने सिद्ध कर रखा

1023
01:13:41,600 --> 01:13:45,960
है गीता जो है श्री कृष्ण ने नहीं बोली है काल ने बोली अरे उसी पर तो

1024
01:13:45,960 --> 01:13:50,120
आक्षेप है हम क्यों मान ले तुम्हारी बात रामपाल

1025
01:13:50,120 --> 01:13:54,200
ने बोला मान रामपाल भगवान है कबीर

1026
01:13:54,200 --> 01:13:58,280
दास जी सुनो ना जब कबीर दास जी मान रहे हैं कि भगवान कबीर दास जी

1027
01:13:58,280 --> 01:14:02,360
नहीं उनके अलावा कोई और भगवान है जिसके बारे में कबीर दास जी बोलना है

1028
01:14:02,360 --> 01:14:06,440
बीजक में बो राम की भक्ति करो राम की भक्ति करो अपनी भक्ति क्यों नहीं

1029
01:14:06,440 --> 01:14:10,440
बोल रहे सुनो सुनो रमानी नंबर 17 में बीजक में रम नंबर 17 हम

1030
01:14:10,440 --> 01:14:14,520
पढ़ के सुना रहे सुनो उसमें भी राम का नाम आ रहा है सुनो जस जीव आप मिले

1031
01:14:14,520 --> 01:14:18,680
अस कोई बहुत धर्म सुख हृद होई जासु

1032
01:14:18,680 --> 01:14:22,920
बात राम की कही प्रीत न काह सो निर्ब

1033
01:14:22,920 --> 01:14:26,920
एक भाव सकल जग दे बाहर परे सो

1034
01:14:26,920 --> 01:14:31,280
होए विवेकी विषय मोह के फंद छुड़ाई जहां

1035
01:14:31,280 --> 01:14:35,560
तहां जाए जहां काट कसाई देखो

1036
01:14:35,560 --> 01:14:39,560
कबीर जी खुद अपने जो है बारबार राम राम कर रहे हैं

1037
01:14:39,560 --> 01:14:43,600
बस यह है अंतर देखो उनके पूरे मतलब उसमें पढ़ेंगे तो

1038
01:14:43,600 --> 01:14:49,600
वह निराकार परब्रह्म के बारे में बात कर रहे हैं

1039
01:14:51,080 --> 01:14:55,080
वो उस निराकार परब्रह्म के बारे में वो बात किए हैं और

1040
01:14:55,080 --> 01:14:59,600
और उस निराकार परब्रह्म को उन्होंने प्रत्येक जीव के अंदर बताया है

1041
01:14:59,600 --> 01:15:04,040
इनके तरह सतलोक निवासी नहीं बना दिया

1042
01:15:04,040 --> 01:15:08,080
हा अब जा इनको मिलना है अगर इनको इनके भगवान से तो जाए पहले सतलोक तब

1043
01:15:08,080 --> 01:15:12,120
तो मिलके आएंगे हम तो भैया अपने स्मशान घाट में भी महाकाल के दर्शन कर लेंगे

1044
01:15:12,120 --> 01:15:16,160
जाकर अब मैं एक बहुत बढ़िया चीज बताने जा रहा हूं

1045
01:15:16,160 --> 01:15:19,160
यह लोग जब भी

1046
01:15:19,160 --> 01:15:23,160
कोई बुक दिखाते हैं कि हम फलानी चीज जो है शास्त्र

1047
01:15:23,160 --> 01:15:27,160
से बता रहे हैं तो जब भी कोई बुक दिखाते हैं तो

1048
01:15:27,160 --> 01:15:31,320
उसका मुद्रक प्रिंटर सब बताते हैं कहां से प्रकाशित

1049
01:15:31,320 --> 01:15:36,080
हुई है कहां से क्या है है

1050
01:15:36,080 --> 01:15:40,240
ना और प्रिंटिंग प्रेस कहां पर है यह वाली जो प्रकाशित

1051
01:15:40,240 --> 01:15:44,520
कर रही है ठीक है एक मिनट

1052
01:15:44,520 --> 01:15:50,520
बहुत यह वो बात है जिसके बारे में अभी मैंने शुरू में कहा था ना कि एक बहुत ही

1053
01:15:51,040 --> 01:15:53,400
रोचक

1054
01:15:53,400 --> 01:15:57,520
एक मैंने शुरू में कहा था ना एक बहुत ट्विस्ट वाला जो है

1055
01:15:57,520 --> 01:16:01,520
जानकारी जो है आपको पता चलने वाली है आप

1056
01:16:01,520 --> 01:16:06,720
ये देखिएगा मैं अभी प्रश्न कर रहा हूं आप सब लोग अपने अपने व्यक्तिगत रूप

1057
01:16:06,720 --> 01:16:11,080
से यह चीज जांच हैगा ये बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है

1058
01:16:11,080 --> 01:16:15,280
इसको बड़ा कर दीजिए जरा भैया स्क्रीन को

1059
01:16:15,280 --> 01:16:19,480
जितने भी रामपाल के फॉलोअर्स हैं या हमारे समर्थक

1060
01:16:19,480 --> 01:16:23,480
भी हैं वो इसकी जांच करें ये प्रिंटर्स बताया

1061
01:16:23,480 --> 01:16:27,840
गया है दिल्ली में लिखा है सी 117

1062
01:16:27,840 --> 01:16:32,120
सेक्टर तीन बवाना इंडस्ट्रियल एरिया नई दिल्ली

1063
01:16:32,120 --> 01:16:36,360
क्या यह वहां पर है कोई कबीर प्रिंटर नाम का और इतना

1064
01:16:36,360 --> 01:16:41,280
बड़ा य कबीर प्रिंटर है आप सब लोग अपने अपने मोबाइल में जरा गल सर्च करिए

1065
01:16:41,280 --> 01:16:46,040
क्या कबीर प्रिंटर का इस एड्रेस पर कोई है कबीर प्रिंटिंग

1066
01:16:46,040 --> 01:16:50,200
प्रेस आज के टाइम में अगर आप इन पर कोई

1067
01:16:50,200 --> 01:16:54,440
सवाल करना चाहते हैं इनको पार्टी बनाना चाहते हैं कि हमको

1068
01:16:54,440 --> 01:16:59,120
इस बुक को छापने वाले से सवाल करना है तो नहीं कर सकते

1069
01:16:59,120 --> 01:17:03,280
कारण कारण क्या है कि

1070
01:17:03,280 --> 01:17:07,840
जहां तक है अभी तक की जानकारी में इनकी कोई प्रिंटिंग प्रेस

1071
01:17:07,840 --> 01:17:12,600
सार्वजनिक रूप से सत्यता के साथ कहीं पर भी नहीं

1072
01:17:12,600 --> 01:17:16,720
है अगर है तो बताएं कहां पर है इन किताबों

1073
01:17:16,720 --> 01:17:20,840
की प्रिंटिंग प्रेस कहां है कहां छप रही है किताबें आप लोग

1074
01:17:20,840 --> 01:17:21,840
अपने अपने में ग

1075
01:17:21,840 --> 01:17:26,240
सर्च करिए क्या ग मैप में ये एड्रेस दिखा रहा कबीर प्रिंटर्स का

1076
01:17:26,240 --> 01:17:30,240
कबीर प्रिंटर्स होंगे मगर कबीर प्रिंटर्स किसी ने अपनी दुकान

1077
01:17:30,240 --> 01:17:34,680
का नाम कबीर प्रिंटिंग प्रेस रख लिया होगा कोई भी कबीर पिंटर ऐसा नहीं निकलेगा

1078
01:17:34,680 --> 01:17:38,680
जहां तक है जहां तक जान दिल्ली दिल्ली में इस तरह से कोई भी

1079
01:17:38,680 --> 01:17:42,880
नहीं है अभी मैं सर्च किया हूं यदि कबीर प्रिंटर भी मिलेंगे आपको गुजरात

1080
01:17:42,880 --> 01:17:46,880
में या इधर है दिल्ली में कोई भी नहीं है मैंने सर्च किया था तो छत्तीसगढ़

1081
01:17:46,880 --> 01:17:51,160
दिखा रहा था कबीर प्रिंटर हां गुजरात में भी है लेकिन दिल्ली में नहीं है तुम्हारी

1082
01:17:51,160 --> 01:17:55,240
ये किताबें कहां छप रही है पता है आपको नहीं पता है

1083
01:17:55,240 --> 01:17:59,280
अगर पता है तो बताओ कहां छप रही है एड्रेस बताओ फोन नंबर

1084
01:17:59,280 --> 01:18:03,760
बताओ कहां छप रही है किताब तो यह बहुत बड़ी जानकारी

1085
01:18:03,760 --> 01:18:07,880
है इनकी य सारी जो किताबें छपती है यह सभी

1086
01:18:07,880 --> 01:18:12,120
किताबें कहां पर छप रही है बहुत बड़ा सवाल है

1087
01:18:12,120 --> 01:18:16,320
ये लोग नहीं छाप रहे यह लोग नहीं लिख रहे इसमें हम लोग किताब कहां पर छाप

1088
01:18:16,320 --> 01:18:20,480
रहे सच्चाई झूठ तो लिख रहे हैं देखिए सतलोक आश्रम

1089
01:18:20,480 --> 01:18:24,840
चंडीगढ़ रोड बरवाला यह प्रिंटिंग प्रेस है

1090
01:18:24,840 --> 01:18:28,920
कबीर पिंटरेस्ट सी 117 सेक्टर तीन बवाना इंडस्ट्रियल

1091
01:18:28,920 --> 01:18:33,160
एरिया नई दिल्ली पता करिए कोई दिल्ली में होगा

1092
01:18:33,160 --> 01:18:37,040
पता करो यह किताबे कहां छप रही है

1093
01:18:37,040 --> 01:18:41,280
अरे कितने जगह से धो होगे भाई सुनो कितने जगह से धो होगे

1094
01:18:41,280 --> 01:18:44,440
पूरा धुल गए हैं य

1095
01:18:44,440 --> 01:18:48,600
एकदम आप ये समझ लीजिए अगर इसका कोई एड्रेस आप नहीं बता

1096
01:18:48,600 --> 01:18:52,640
पाते हैं तो ये चोरी से छप रही है किताबें कह

1097
01:18:52,640 --> 01:18:56,680
तो र हर जगह से इनकी झूठ आरही है सामने इनकी मन

1098
01:18:56,680 --> 01:19:00,880
मुखी जो तत्व ज्ञान जो है मनमुक तत्व ज्ञान य दे रहे हैं यह कबीर सागर

1099
01:19:00,880 --> 01:19:05,040
को प्रमाण बना लिए हैंक कबीर सागर में यह चीज लिखी हुई है इसलिए मान

1100
01:19:05,040 --> 01:19:09,120
के लेकिन वही बीजक में इनकी मनमुक ज्ञान की जो है पोल खुल रही

1101
01:19:09,120 --> 01:19:13,560
है हम तो क सब लोग बीजक सुनो बीजक

1102
01:19:13,560 --> 01:19:17,800
की पुस्तक कहीं से मिले ले ले और उसको पढ़े बीजक में इनकी मनमुक

1103
01:19:17,800 --> 01:19:22,000
ज्ञान जो है पूरी की पूरी खुल जाएगी मय जी मय जी आपको

1104
01:19:22,000 --> 01:19:26,800
कुछ मिला ग पर सर्च किया आपने कभी पिट अच्छा ये जगह सर्च की आपने

1105
01:19:26,800 --> 01:19:31,600
हां ग मैप ग मैप प सर्च किया था मुझे

1106
01:19:31,600 --> 01:19:35,680
ये कबीर प्रिंटर दिल्ली में नहीं मिला ये गुजरात

1107
01:19:35,680 --> 01:19:39,880
में जरूर मिला गुजरात है और एक दो जगह और मिली लेकिन दिल्ली में कहीं

1108
01:19:39,880 --> 01:19:44,080
नहीं है मैं दिल्ली लिखा हूं पर नहीं आया वो कोई कभी प्रिंटर नहीं है

1109
01:19:44,080 --> 01:19:48,280
तुम्हारे को ये किताबें पढ़ते पढ़ते 15 साल हो गए

1110
01:19:48,280 --> 01:19:52,120
तुमने वहां तत्वदर्शी कौन है वो उसपे कर लिया

1111
01:19:52,120 --> 01:19:56,200
जगतगुरु तत्वदर्शी कौन है वहां विकिपीडिया तुम ले आए तुम

1112
01:19:56,200 --> 01:20:00,280
अपने प्रिंटिंग पर इसको डाल नहीं पाए ग में अच्छा नहीं डाल पाए

1113
01:20:00,280 --> 01:20:04,400
तो बता देना कोई वीडियो बना के बता देना तुम्हारी किताबें कहां छप रही

1114
01:20:04,400 --> 01:20:08,800
है एक बहुत बड़ी ढोल में पोल है

1115
01:20:08,800 --> 01:20:13,120
इनकी किताबों में इतनी ज्यादा गंदगी है इतना ज्यादा

1116
01:20:13,120 --> 01:20:17,200
झूठ है कि अपनी किताबों पर यह नहीं बता पा रहे हैं ठीक से कि

1117
01:20:17,200 --> 01:20:21,840
हम यह छाप क रहे हैं और बात करते हैं कि हम सद भक्ति बताते हैं

1118
01:20:21,840 --> 01:20:27,840
बताओ कहां छप रही है तुम्हारी किताबें पता है

1119
01:20:27,920 --> 01:20:31,960
पहले बताए सुनो ना पहले वेदों में प्रमाण

1120
01:20:31,960 --> 01:20:36,120
बोलते थे अब वेद जब खोल लिए हम लोग ना तो अब वेदों में प्रमाण नहीं

1121
01:20:36,120 --> 01:20:40,160
अब जो है कबीर सागर में प्रमाण आने लगा कुरान में प्रमाण आने लगा अब बाइबल

1122
01:20:40,160 --> 01:20:44,280
में आने लगा अब वेद से हट गए अब ये लोग वेद छोड़ चुके हैं

1123
01:20:44,280 --> 01:20:48,360
अब कभी यह नहीं बोलते हैं कि वेदों में प्रमाण है कारण कि वेदों में इनके कबीर जी

1124
01:20:48,360 --> 01:20:52,400
को तो हम लोग ढूंढ के नि देखो ये ज्ञान गंगा में तो

1125
01:20:52,400 --> 01:20:56,440
इन्होने लिखा ही नहीं है कौन सी प्रिंटिंग प्रेस है

1126
01:20:56,440 --> 01:21:00,520
इनकी मुझे तो नहीं दिख रहा कहां लिखता है

1127
01:21:00,520 --> 01:21:04,560
भाई कोई प्रिंटिंग प्रेस होती है ना जिससे कि हम उसको क्लेम कर सके जब वो कोई

1128
01:21:04,560 --> 01:21:08,680
गलत जानकारी दे प्रिंटिंग प्रेस अपना एड्रेस देगी

1129
01:21:08,680 --> 01:21:12,800
अपना मोबाइल नंबर देगी सब देगी जिससे की हम क्लेम कर सके

1130
01:21:12,800 --> 01:21:16,920
अच्छा इनका जो यह अगर हम इनके य जो हेल्पलाइन नंबर दिए गए

1131
01:21:16,920 --> 01:21:21,280
हैं तो यह तो कह देंगे हमने थोड़ी ना छापी वो किताब

1132
01:21:21,280 --> 01:21:25,320
य जो हेल्पलाइन नंबर इन्होने दिए हैं य तो जब प्रिंटर

1133
01:21:25,320 --> 01:21:29,640
का नाम नहीं दे रहे हो कहां छप रही है क्यों चाप रहे हो तुम तो

1134
01:21:29,640 --> 01:21:33,640
एक मैंने वीडियो देखा था जो उसम गुरुकुल गोविंद जी वाले गए थे तो

1135
01:21:33,640 --> 01:21:38,320
पूछ र किसने छापी है ना पाड़ी

1136
01:21:38,320 --> 01:21:42,320
जी लेख कौन लेखक कौन है उसका लेखक कौन है किसने

1137
01:21:42,320 --> 01:21:43,200
छापी अप

1138
01:21:43,200 --> 01:21:47,200
अरे भैया तुम्हारी किताबें कहां छप रही है तुमको इतना सामर्थ नहीं है कि

1139
01:21:47,200 --> 01:21:51,600
तुम लिख पाओ ये तुम्हारी ज्ञान गंगा में कहां छपी है ज्ञान

1140
01:21:51,600 --> 01:21:55,680
गंगा लिखा है तुमने अभी तो लंका जला

1141
01:21:55,680 --> 01:21:59,960
दिए हो सुनो एक हफ्ता हो गया लंका जलाए हुए लंका

1142
01:21:59,960 --> 01:22:04,200
जलने के बाद अभी तक वो बेचारे जल रहे हैं कुछ ठंडा हो जाने दो

1143
01:22:04,200 --> 01:22:08,640
उनको यह देखो यह पहला प्रश् है ज्ञान गंगा का

1144
01:22:08,640 --> 01:22:12,960
उसके बाद में दूसरा प्रश् खोल रहा हूं इसमें

1145
01:22:12,960 --> 01:22:17,800
बताओ कहां पर इसमें प्रिंटिंग प्रेस का नाम लिखा है

1146
01:22:17,800 --> 01:22:21,840
देखो कहां है प्रिंटिंग प्रेस कौन सी प्रिंटिंग

1147
01:22:21,840 --> 01:22:26,960
प्रेस में छप रही है किताबें इसको थोड़ा बड़ा कर दीजिए

1148
01:22:26,960 --> 01:22:32,960
जी दिख रहा है आपको कहीं प्रिंटिंग प्रेस का

1149
01:22:33,920 --> 01:22:39,920
नाम कौन सा संस्करण है क्या है कुछ लिखा है [संगीत]

1150
01:22:40,000 --> 01:22:44,120
इसमें कुछ नहीं लिख इसके बाद से विषय

1151
01:22:44,120 --> 01:22:48,840
सूची चालू है विषय सूची के बाद तो ये लिखा नहीं जाता कौन सी प्रिंटिंग प्रेस है

1152
01:22:48,840 --> 01:22:53,680
तो कहां है प्रिंटिंग प्रेस चोरी

1153
01:22:53,680 --> 01:22:57,720
जेल धाम ो जेल धाम में

1154
01:22:57,720 --> 01:23:01,920
कैसे छपे गी भाई

1155
01:23:01,920 --> 01:23:06,320
अच्छा इनकी किसी किसी बुक में य एड्रेस लिखा हुआ है

1156
01:23:06,320 --> 01:23:10,360
आप लोग सर्च करिए और अगर कोई दिल्ली का रहने वाला है व पता करिए दिल्ली में कोई

1157
01:23:10,360 --> 01:23:14,720
यह जगह है जहां पर कबीर प्रिंटर्स है क्या है

1158
01:23:14,720 --> 01:23:18,720
सी 117 सेक्टर तीन और यह भी ज्ञान गंगा में नहीं लिखा

1159
01:23:18,720 --> 01:23:22,720
है ज्ञान गंगा तो ऐसे ही अनाथ येय इसमें लिखा

1160
01:23:22,720 --> 01:23:26,960
है तो इसमें क्या लिखा है सी 117

1161
01:23:26,960 --> 01:23:31,920
सेक्टर तीन बवाना इंडस्ट्रियल एरिया नई दिल्ली इन्होंने कोरे

1162
01:23:31,920 --> 01:23:35,960
झूठ का एक पहाड़ खड़ा खड़ा कर रखा है पूरा उसका भी सबसे

1163
01:23:35,960 --> 01:23:40,480
बड़ा जो अंश है वो सोशल मीडिया पर है अरे

1164
01:23:40,480 --> 01:23:44,560
जिसके लिए खड़ा किए हैं वह तो खुद राम राम चिल्ला रहे हैं

1165
01:23:44,560 --> 01:23:48,600
जी जिन कबीर जी का नाम लेकर ये कबीर जी को बदनाम कर रहे हैं

1166
01:23:48,600 --> 01:23:49,100
वो कबीर

1167
01:23:49,080 --> 01:23:53,240
जी खुद राम राम चिल्ला रहे हैं अब हम जा रहे हैं बीजक पढ़ने ठीक है हम अब

1168
01:23:53,240 --> 01:23:57,360
वेद पुराण बंद कर दिए बीजक पढ़ र पिछले चार दिनों से उन्हीं

1169
01:23:57,360 --> 01:24:01,840
के ये रमनी के साथ हम चलते हैं उनका एक रमनी सुन लीजिए सब लोग

1170
01:24:01,840 --> 01:24:06,160
सुनने ही बं छे सुन्य ही गाय हाथ छाड़

1171
01:24:06,160 --> 01:24:10,400
बे हाथा भय संशय सावज सकल संसारा काल

1172
01:24:10,400 --> 01:24:14,600
अहेरी सांज सरकारा साखी है इसके बाद सुमिरन

1173
01:24:14,600 --> 01:24:18,720
करहु राम का काल गहे हैं केस ना जानो

1174
01:24:18,720 --> 01:24:22,720
कब मारी है क्या घर क्या परदेश अब चलो

1175
01:24:22,720 --> 01:24:27,240
राम के नाम के साथ हम ते हैं यह कबीर जी का जो है वो रमनी

1176
01:24:27,240 --> 01:24:31,920
था बीजक से जी जी बहुत अच्छा अब

1177
01:24:31,920 --> 01:24:35,920
रामपाल जी से अगर मिल जाए तो यह लोग जाकर पूछ ले थोड़ा जेलल

1178
01:24:35,920 --> 01:24:39,920
में कि कबीर जी बारबार राम को कहे बोल रहे हैं नहीं

1179
01:24:39,920 --> 01:24:44,160
नहीं हफ्ते में सिर्फ आधा घंटा दिया जाता है उनसे मिलने के लिए 15

1180
01:24:44,160 --> 01:24:48,240
मिनट वकील आधा घंटा वकील वहां पर तो बात हो सकता

1181
01:24:48,240 --> 01:24:52,320
है ना वहां पर रामपाल जी देखो तत्वदर्शी है हम आप तत्वदर्शी तो है

1182
01:24:52,320 --> 01:24:56,600
नहीं रामपाल जी तत्वदर्शी है उनसे कभी जी मिलने भी आते हैं या आए होंगे

1183
01:24:56,600 --> 01:25:00,600
हो सकता है कबीर जी के ही अवतारी पुरुष भी कुछ लोगों के मुह से सुने है

1184
01:25:00,600 --> 01:25:04,320
कि है तो इनको पता होगाय पिछले जन्म

1185
01:25:04,320 --> 01:25:08,400
में अगर कबीर थे यह तो काहे राम राम करते थे हर बार

1186
01:25:08,400 --> 01:25:13,040
हर रमनी में हर साखी में राम

1187
01:25:13,040 --> 01:25:17,160
निशां जी कु कनाते कना यही चाहेंगे कि उनको

1188
01:25:17,160 --> 01:25:21,560
भी पता है असली भगवान कौन है बोते

1189
01:25:21,560 --> 01:25:25,880
जेल से वीडियो कॉलिंग करते तोन सुविधा दे कौन रहा है फिर

1190
01:25:25,880 --> 01:25:30,920
नहीं कुछ नहीं ऐसा नहीं ऐसा कुछ नहीं होता है हर

1191
01:25:30,920 --> 01:25:34,920
देखो अगर यह होगा ना तो मिलने के लिए छोड़ दिया जाएगा यह

1192
01:25:34,920 --> 01:25:39,600
वीडियो कॉलिंग और कॉन्फ्रेंसिंग वगैरह जो जेल से नहीं होती

1193
01:25:39,600 --> 01:25:43,800
है उनका अपना एक सिक्योरिटी का अलग पैरामीटर होता हैने टाइम

1194
01:25:43,800 --> 01:25:48,400
हो गया इसकी बेल तक नहीं हो रही है व

1195
01:25:48,400 --> 01:25:52,760
नहीं होता है जेल से सिर्फ तुम जैसे कोई कानूनी

1196
01:25:52,760 --> 01:25:56,840
कारवाई होनी है जैसे अदालत में सुनवाई होनी है व आने में असमर्थ

1197
01:25:56,840 --> 01:26:00,960
है तो जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस हो जाती है पर हां अपने निजी कार्यों के लिए

1198
01:26:00,960 --> 01:26:05,440
यह चीज अलाव नहीं रहती है चाहे मुख्यमंत्री हो चाहे पीएम हो चाहे राष्ट्रपति

1199
01:26:05,440 --> 01:26:09,440
हो किसी भी पद का व्यक्ति हो उसके लिए यह चीज अलाव नहीं रहती है तो

1200
01:26:09,440 --> 01:26:14,760
फय लोग ऐसे यहां प क्यों बोलते हैं

1201
01:26:14,760 --> 01:26:19,520
इनकी बकी हैकी बु

1202
01:26:19,520 --> 01:26:23,720
सुनो एकदम झूठे हैं ये एकदम 100 पर झूठे हैं इनसे

1203
01:26:23,720 --> 01:26:27,760
अगर एक जगह ये बात कर ले तो आप जान लेना अगर इनको आप

1204
01:26:27,760 --> 01:26:31,800
श्रीमद् भागवत गीता में पकड़ने लगोगे ना तो भागेंगे कुरान में कुरान

1205
01:26:31,800 --> 01:26:35,960
में अगर पकड़ोगे तो भागेंगे बाइबल में बाइबल में पकड़ोगे तो भागेंगे गुरु ग्रंथ

1206
01:26:35,960 --> 01:26:40,000
साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब में पकड़ोगे तो भाग के आएंगे जो है श्रीमद

1207
01:26:40,000 --> 01:26:44,520
देवी भागवत में अच्छा पहाड़ी जी डिबेट करते हैं

1208
01:26:44,520 --> 01:26:48,680
पहाड़ी जी डिबेट करते हैं तो पहाड़ी जी के डिबेट में हम देखे हैं ना इनको पहाड़ी

1209
01:26:48,680 --> 01:26:52,680
जी के डिबेट में जब पहाड़ी जी पकड़ेंगे किसी जगह तो भाग भाग करके तुरंत शिव

1210
01:26:52,680 --> 01:26:57,320
महापुराण में कूद जाएंगे वो महापुराण से कूद गरुर पुराण में

1211
01:26:57,320 --> 01:27:01,760
वो एक अंकल जी नहीं आते क्या उनके साथ खूब ट गए है वो पहाड़ी

1212
01:27:01,760 --> 01:27:05,880
जी ने मैं भी देखा हं हम तो हम तो पता है हम तो इनसे बात करने के लिए सोच

1213
01:27:05,880 --> 01:27:10,160
रहे हैं कि अभी मिले हमसे ना तो इनसे हम खाली बीजक पर बात करेंगे हमको कोई

1214
01:27:10,160 --> 01:27:14,240
बात नहीं करनी बीजक पर बीज बात नहीं करेंगे बीजक प

1215
01:27:14,240 --> 01:27:18,360
लिए मना कर रखे हैं ये कि हम बीजक को नहीं मानते हैं अरे हद

1216
01:27:18,360 --> 01:27:22,720
होती है यार य शिवांश भाई ऐसा भी कुछ है क्या कि बीज कोय नहीं मानते

1217
01:27:22,720 --> 01:27:27,560
नहीं मानते हां भाई देखिए कुछ भी मानने की बात ये है रामपाल

1218
01:27:27,560 --> 01:27:31,760
डिसाइड करेंगे क्या मानना है क्या नहीं मानना है अपनी लिखी हुई

1219
01:27:31,760 --> 01:27:35,120
किताबों को भी मना कर सकते हैं मैं भगवान हूं

1220
01:27:35,120 --> 01:27:39,560
मैं कह रहा हूं यह बात गलत है भाई कुरान का क्या मामला है

1221
01:27:39,560 --> 01:27:43,760
कुरान का क्या मामला है कुरान में पहले कह दिया बीच

1222
01:27:43,760 --> 01:27:47,800
के चैप्टर्स में कहने वाले ने कि जब तुम नशे

1223
01:27:47,800 --> 01:27:52,680
की हालत में हो तब तुम मस्जिद में मत जाओ

1224
01:27:52,680 --> 01:27:56,680
मतलब शराब का निषेध नहीं किया बस मस्जिद से

1225
01:27:56,680 --> 01:28:00,720
दूर रहो ठीक है और आखिरी के चैप्टर्स में ये

1226
01:28:00,720 --> 01:28:04,560
कह दिया कि शराब हराम

1227
01:28:04,560 --> 01:28:09,280
है समझ रहे हैं तो ये क्या हुआ अपनी ही बात का खंडन कर दिया

1228
01:28:09,280 --> 01:28:13,680
अच्छा दो 106 में कहा भी है हम अपनी कोई आयत

1229
01:28:13,680 --> 01:28:17,680
बदल देते हैं तो उससे बढ़िया आयत देते हैं तो यह

1230
01:28:17,680 --> 01:28:21,720
क्या है अपनी बात का ही खंडन कर रहे हैं ना जहां मना रहा है जैसा

1231
01:28:21,720 --> 01:28:26,000
बोल रहे हैं तो ये भी वही है शोधन होते रहता है उनके हा

1232
01:28:26,000 --> 01:28:30,200
ये भी वही है सनातन सिद्धांत नहीं है वो आएंगे कह देंगे ये लाइन ग गलत लिखी

1233
01:28:30,200 --> 01:28:34,440
है मैंने गलत है लेकिन एक चीज है कि कबीर जी के बारे में जिस तरीके

1234
01:28:34,440 --> 01:28:38,960
से ये उल्टा सीधा कर रहे है ऐसा कुछ नहीं है कबीर जो है सच्चे सनातनी

1235
01:28:38,960 --> 01:28:43,080
और निराकार ब्रह्म के उपासक थे हम बीजक पढ़ रहे हैं ना और

1236
01:28:43,080 --> 01:28:47,600
बहुत अच्छी अच्छी बातें बीजक में कबीर जी ने लिखी है और

1237
01:28:47,600 --> 01:28:50,360
काफी त सागर में भी अच्छी अच्छी बातें लिखी

1238
01:28:50,360 --> 01:28:54,440
है कबीर सागर में भी अरे ऐसा मत करो यार कबीर सागर

1239
01:28:54,440 --> 01:28:58,480
में तो भ्रष्ट कर दिया है एक चीज बता कभी सागर तो भ्रष्ट किया

1240
01:28:58,480 --> 01:29:02,960
पूरा नहीं उसमें लिखा है बहुत अच्छे से लिखा वो समझने के लिए

1241
01:29:02,960 --> 01:29:07,000
जिसमें जो तमोगुण रजोगुण के जो वकन किया है ना वह अपने शरीर में जो

1242
01:29:07,000 --> 01:29:11,080
तीन गुण होते हैं उसकी बातें बताई गई है और जो गरुड़ बताया गरुड़ वो

1243
01:29:11,080 --> 01:29:15,320
जीव को बताया है और उसमें देखो ये भी लिखा है कंठी

1244
01:29:15,320 --> 01:29:19,760
तिलक का भी लिखा मैं आपको सुनाता हूं कंठी तिलक का बताओ

1245
01:29:19,760 --> 01:29:24,600
श्रवण कंठी तिलक लगावे रूखा फीका करे आहार

1246
01:29:24,600 --> 01:29:28,960
नि दिन सुमर नाम हमारा रा राम का नाम सुमर कंटी

1247
01:29:28,960 --> 01:29:33,160
और तिलक लगाए अरे भाई सुनील सिंह

1248
01:29:33,160 --> 01:29:37,320
चौहान जी य बात कह रहे हैं कि यह एड्रेस है यह एड्रेस लिखा है ज्ञान

1249
01:29:37,320 --> 01:29:41,360
गंगा में नहीं लिखा है लाकी यह गरमा गीता की और उसमें लिखा है

1250
01:29:41,360 --> 01:29:45,480
गीता तेरा ज्ञान अमृत मगर फिर भी य एड्रेस वाकई में वहां

1251
01:29:45,480 --> 01:29:49,640
पर प्रिंटिंग प्रेस है कि नहीं जरा आप फोटो वोटो खींच के डालिए सोशल मीडिया पर हमें

1252
01:29:49,640 --> 01:29:53,800
टैक कर दीजिए डालिए यह एड्रेस है इस एड्रेस पर प्रिंटिंग

1253
01:29:53,800 --> 01:29:58,800
प्रेस

1254
01:29:58,800 --> 01:30:03,000
है ना अगर कोई हो कोई हो या रामपाल जी के तत्वदर्शी शिष्य

1255
01:30:03,000 --> 01:30:07,320
में से तो उनको आदर सहित ऊपर बुलाना थोड़ा

1256
01:30:07,320 --> 01:30:11,360
अच्छा नहीं कल एक खुलासा कर रहा हूं कल जो लाइव डिबेट चलाई

1257
01:30:11,360 --> 01:30:15,640
थी उन्होने एक गरुण पुराण का कुछ अध्याय 16

1258
01:30:15,640 --> 01:30:19,680
का उन्होने बताया था कि व्रत तप जप करने से

1259
01:30:19,680 --> 01:30:23,720
यह मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी अगर तीर्थों में स्नान करने

1260
01:30:23,720 --> 01:30:27,840
से गंगा में स्नान करने से अगर शुद्ध होते पाप नष्ट होते तो मछली

1261
01:30:27,840 --> 01:30:31,960
तो वही रहती है मतलब फलाना फलाना कल वो एक थे व्यक्ति

1262
01:30:31,960 --> 01:30:36,080
उन्होंने पूरा बता दिया उस जो अध्याय है

1263
01:30:36,080 --> 01:30:40,120
उसमें 120 श्लोक है शुरू एक से लेकर

1264
01:30:40,120 --> 01:30:44,200
97 लोक तक क्या है वो उन लोगों के लिए है कि जो

1265
01:30:44,200 --> 01:30:48,400
दंभी होते हैं जो खाली दिखावा करते हैं बाहरी लोग

1266
01:30:48,400 --> 01:30:52,440
उनके लिए ये चीज कही गई है कि वो चीज वो लोग ऐसा करते हैं इससे कोई लाभ नहीं

1267
01:30:52,440 --> 01:30:56,480
होगा फिर से जब शुरू होता है असली ज्ञान बोलते

1268
01:30:56,480 --> 01:31:00,880
हैं कि भगवान विष्णु बोलते ग से की व्रत

1269
01:31:00,880 --> 01:31:05,240
जप तप और जितने भी ये है हमारे

1270
01:31:05,240 --> 01:31:09,440
जो पूजा है वो सब तरह का प्रयास करके

1271
01:31:09,440 --> 01:31:13,880
हमें आत्म तत्व का ज्ञान का अनुभव करना चाहिए इसी से हमको

1272
01:31:13,880 --> 01:31:18,240
मुक्ति मिलेगी और आगे कहा कि कि जितने भी तीर्थ है

1273
01:31:18,240 --> 01:31:22,680
सभी मोक्ष दण है उसमें बकायदा नाम तक लिखा गया उसमें काशी

1274
01:31:22,680 --> 01:31:26,720
मथुरा अयोध्या ये गंगा इन सभी का

1275
01:31:26,720 --> 01:31:31,040
नाम दिया गया है और बोला है कि अंतिम समय पर आने पर अंतिम

1276
01:31:31,040 --> 01:31:35,560
समय आने पर व्यक्ति घर से निकले और एक तीर्थ स्थान

1277
01:31:35,560 --> 01:31:39,880
में स्नान करे और ओम इस एक अक्षर का

1278
01:31:39,880 --> 01:31:44,400
जाप करे वो परम गति को प्राप्त हो जाता है वहां पूरा प्रकरण

1279
01:31:44,400 --> 01:31:48,520
इस प्रकार से है जब 97 से 120 लोक तक पढ़ोगे तो

1280
01:31:48,520 --> 01:31:52,760
आपको समझ में आ जाएगी कि पीछे वो किसके लिए बोला गया है पीछे उ

1281
01:31:52,760 --> 01:31:57,040
बो जो वो दंभी होते हैं जो सिर्फ नाटक करते हैं भरी दिखावा

1282
01:31:57,040 --> 01:32:01,160
करते हैं उन व्यक्ति ने कल जो पढ़ाया उने आधा अधूरा पढ़ाया

1283
01:32:01,160 --> 01:32:05,440
बीच-बीच के कुछ लोक अब जिन्होंने गरुण पुराण पढ़ी नहीं है

1284
01:32:05,440 --> 01:32:10,160
उनको तो बोलेगा उनको तो लगेगा हां बात तो सही लिखी है इसमें

1285
01:32:10,160 --> 01:32:14,280
इसी तरीके से भ्रमित होते हैं एक बात और एक बात ऐड करूंगा पहाड़ी

1286
01:32:14,280 --> 01:32:18,320
जी देखिए इनकी ये समस्या इस तरह की अनंत रूप से

1287
01:32:18,320 --> 01:32:22,520
आती रहेंगी हम लोग ऐसे अगर समाधान करते रहेंगे रोज एक चैप्टर ले आएंगे

1288
01:32:22,520 --> 01:32:26,560
कोई फिर हम समाधान करें इसका समाधान

1289
01:32:26,560 --> 01:32:29,400
एक है इसका समाधान क्या है

1290
01:32:29,400 --> 01:32:33,640
जिसके बाद इनका मुह पर टेप लगे क्या यह वह बात है जिसकी

1291
01:32:33,640 --> 01:32:37,880
वजह से हम और आप दूर है तुमको यह मानना है

1292
01:32:37,880 --> 01:32:42,040
मान लो हमारी दिक्कत क्या है ब्रह्मा विष्णु

1293
01:32:42,040 --> 01:32:46,280
महेश को यह मत कहो कि भगवान नहीं है पहली दिक्कत दूसरी

1294
01:32:46,280 --> 01:32:50,280
दिक्कत क्या है कबीर भगवान तुम कह रहे हो वेदों के अनुसार है

1295
01:32:50,280 --> 01:32:54,920
वो मत कहो गीता को कहने वाला कृष्ण से कोई अलग

1296
01:32:54,920 --> 01:32:59,040
काल है वो मत कहो दुर्गा माता सीता के

1297
01:32:59,040 --> 01:33:03,440
बारे में जो तुमने ग्रंथों से इतर कुछ लिख दिया है वो मत कहो

1298
01:33:03,440 --> 01:33:07,720
तुमको बाद में सब हम लोग डिसाइड करेंगे कि गरुण पुराण में क्या विधि बताई क्योंकि

1299
01:33:07,720 --> 01:33:11,840
ये लोग हर रोज एक नया चैप्टर खोल के ले आएगा बाबूराम यादव जैसा व्यक्ति वो

1300
01:33:11,840 --> 01:33:15,920
मानसिक रूप से थोड़ा डाउन है फिर ले आएगा कुछ ना कुछ

1301
01:33:15,920 --> 01:33:20,240
आप समाधान करते रहो जो मूल तत्व है ईश्वर सर्व शक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष

1302
01:33:20,240 --> 01:33:24,360
शाश्वत धर्म वो गायब उसम बते रहो रो फिर कह

1303
01:33:24,360 --> 01:33:28,480
दे जब आप इसका जवाब देने जाओगे तो अमित दास फिर कह देगा मेरे एक सवाल का जवाब

1304
01:33:28,480 --> 01:33:33,040
दे दो मैं आपका हो जाऊंगा ये होता रहेगा

1305
01:33:33,040 --> 01:33:37,640
इसका जवाब यही है कि भाई तुझे इससे दिक्कत है मत मान

1306
01:33:37,640 --> 01:33:41,880
मत मान तुझे फलानी फलानी चीजों से दिक्कत है मत

1307
01:33:41,880 --> 01:33:44,440
मान तू ब्रह्मा विष्णु महेश का यह मत

1308
01:33:44,440 --> 01:33:48,560
कर कि वो भगवान नहीं है तू वेदों के अनुसार कबीर को भगवान मत क

1309
01:33:48,560 --> 01:33:52,720
गीता का ज्ञान कहने वाला काल कोई कृष्ण से अलग है वो मत क

1310
01:33:52,720 --> 01:33:56,880
और तत्वदर्शी जेल धाम निवासी रामपाल है वो मत के दुर्गा माता

1311
01:33:56,880 --> 01:34:01,240
और अन्य जो भगवानों का अपमान तुमने किया है करीबन 100 से ज्यादा बार इनके ग्रंथों

1312
01:34:01,240 --> 01:34:07,080
में वो सेक्स शब्द इन्होंने लिखा

1313
01:34:07,080 --> 01:34:11,280
है है ना वो ये सब मत करो और जब

1314
01:34:11,280 --> 01:34:15,360
तुम यह सब बात मान लो उसके बाद तुम आ जाओ कौन-कौन सी चीजें तुम्हें समझ में नहीं

1315
01:34:15,360 --> 01:34:19,760
आ रही है हमारे और आपके बीच की दूरी इस बात को लेकर नहीं है

1316
01:34:19,760 --> 01:34:23,880
कि वो गरुण पुराण की जो कहानी आपने बताई वो आपने आधी ूरी हालाकि पढ़ी है वो

1317
01:34:23,880 --> 01:34:28,040
ठीक है मगर हम उसका समाधान नहीं देंगे क् हमें कोई दिक्कत नहीं मान लो तुम

1318
01:34:28,040 --> 01:34:32,160
गण पुराण की वो वाली बात जो आपने बताई मान लो हमें दिक्कत है क्या

1319
01:34:32,160 --> 01:34:36,160
रामपाल तत्वदर्शी है हमें दिक्कत है क्या वेदों के अनुसार कबीर

1320
01:34:36,160 --> 01:34:40,240
भगवान है हमें दिक्कत है क्या जो

1321
01:34:40,240 --> 01:34:44,640
गीता ज्ञान दाता है वो कृष्ण से अलग कोई काल है

1322
01:34:44,640 --> 01:34:48,640
यह सब हमारी हमें दिक्कत है क्या आपका

1323
01:34:48,640 --> 01:34:53,000
जो वो ईश्वर है वो दाढ़ी वाला है जो कि सर्वशक्तिमान नहीं है हमें दिक्कत है

1324
01:34:53,000 --> 01:34:57,640
कि आपके द्वारा जो दी जाने वाली मुक्ति व परम स्वतंत्र नहीं है हमें दिक्कत है

1325
01:34:57,640 --> 01:34:59,640
कि आपके द्वारा दिया जाने वाला धर्म

1326
01:34:59,640 --> 01:35:03,720
है जो परंपरा प्राप्त सनातन नहीं है यह सब दिक्कत है हमारे

1327
01:35:03,720 --> 01:35:08,000
और आपके बीच आप गरुण पुराण ले आओ कोई चीज अरे आज हम गरुण पुराण का समाधान

1328
01:35:08,000 --> 01:35:12,320
देंगे कल को फिर कोई और क्वेश्चन ले आएंगे

1329
01:35:12,320 --> 01:35:17,080
अरे इनके कबीर सागर से ही परम स्वतंत्र मोक्ष इनका नहीं है

1330
01:35:17,080 --> 01:35:21,360
कुछ नहीं इनके कबीर सागर से ने कारण कि मोक्ष कैसा सुनो वो मोक्ष कैसा

1331
01:35:21,360 --> 01:35:25,480
जब आत्मा को परमानंद प्राप्ति के लिए सतलोक में

1332
01:35:25,480 --> 01:35:29,520
स्थिर होना पड़े वह कहां मोक्ष हुआ हमको यह

1333
01:35:29,520 --> 01:35:33,680
बताइए आप लोग अगर मैं कह रहा हूं सतलोक

1334
01:35:33,680 --> 01:35:37,680
में चले भी गए वहां पर अगर तुम्ह बादाम चाहिए काजू

1335
01:35:37,680 --> 01:35:41,880
चाहिए यानी कुछ चाहिए वहां जाने के बाद तो जितनी देर व

1336
01:35:41,880 --> 01:35:46,160
चाहिए और वह नहीं है तोड़ने जा रहे हो फल उतनी देर

1337
01:35:46,160 --> 01:35:50,160
तुम परम स्वतंत्र परम मुक्त नहीं हो

1338
01:35:50,160 --> 01:35:54,840
उतनी देर तुम्हारे अंदर चा बाकी है कि मैं लेने जा रहा हूं बदाम

1339
01:35:54,840 --> 01:35:59,320
और दूसरी बात यद सतलोक में परम सुख है

1340
01:35:59,320 --> 01:36:03,360
परम सुख है सतलोक पहुच ग परम सुख है तो क्यों तुम्हारे काल के

1341
01:36:03,360 --> 01:36:07,520
मन में आ रहा है कि मैं और कुछ 21 ब्रह्मांड बना लू परम सुख है ना वहा तो

1342
01:36:07,520 --> 01:36:11,640
क्यों वहा जीवात्मा को आ रहा है कि मैं वो काल जो है वो सेलिब्रिटी हो

1343
01:36:11,640 --> 01:36:14,880
मैं उसको फॉलो करू क्यों य सब बात आ रही है मब परम

1344
01:36:14,880 --> 01:36:18,920
सुख है ना परम सुख से इतर तो कुछ आना ही नहीं चाहिए ना भाई

1345
01:36:18,920 --> 01:36:24,880
नहीं नहीं काल को देख के ना वो आसक्त हो जाते हैं सब आत्मा

1346
01:36:24,880 --> 01:36:28,920
आज की जो आज की जो सबसे रोचक बात है

1347
01:36:28,920 --> 01:36:32,960
जितने रामपाल के फॉलोअर है वो और जितने

1348
01:36:32,960 --> 01:36:37,400
यहां पर यहां के जो समर्थक है व वो सब अपने अपने स्तर पर ये चेक करें

1349
01:36:37,400 --> 01:36:41,880
रामपाल की बुक्स छप कहां रही है चोरी से छप रही है

1350
01:36:41,880 --> 01:36:46,200
या फिर बाकायदा कहीं पर कोई प्रिंटिंग प्रेस है जी म जी बोलिए

1351
01:36:46,200 --> 01:36:50,400
अभी मैं कमेंट पढ़ रहा था बहुत सारे लोगों ने चेक किया है और

1352
01:36:50,400 --> 01:36:54,960
यही बोल रहे हैं कि हमें इस तरह का कोई मिला ही नहीं है मिल

1353
01:36:54,960 --> 01:36:59,160
रहे हैं ऐसा कुछ भी नहीं है कि दिल्ली में जो बता रहे थे एड्रेस

1354
01:36:59,160 --> 01:37:03,800
दिल्ली में कहीं नहीं है कबीर प्रिंटर के नाम से कुछ भी नहीं है

1355
01:37:03,800 --> 01:37:07,920
ये तो कहीं और कहीं से चपवा रहे हैं ये तो यहां

1356
01:37:07,920 --> 01:37:12,640
भी दो नंबर अरे बाबा जीी दो

1357
01:37:12,640 --> 01:37:16,840
नंबर यहां भी गफला कर रखा है इन लोगों ने किताबों में भी

1358
01:37:16,840 --> 01:37:20,840
अच्छा सरकार को टक्स देका अरे सुनो ना एक लिखी

1359
01:37:20,840 --> 01:37:25,160
राम नागपुरे है जरा वो ऊपर आए यार लिखी राम नागपुरे जरा

1360
01:37:25,160 --> 01:37:29,480
वह आ जाए लाइव में आए व काफी ज्ञानी तत्वदर्शी व भी लग रहे है

1361
01:37:29,480 --> 01:37:30,000
तत्वदर्शी

1362
01:37:30,000 --> 01:37:34,720
जी के शिष्य आइए

1363
01:37:34,720 --> 01:37:39,040
अगर कुछ अपनी सादर आमंत्रित

1364
01:37:39,040 --> 01:37:43,600
है आप हमें कुछ ज्ञान चाहिए हमें थोड़ा न ज्ञान दे दीजिए बीज

1365
01:37:43,600 --> 01:37:48,040
में हमको कुछ दिक्कत भैया को बोहरा

1366
01:37:48,040 --> 01:37:52,080
दिखा कर दीजिए यार नहीं चेहरा ना भी दिखाए तो थोड़ा सा ऊपर तो

1367
01:37:52,080 --> 01:37:54,920
आने दीजिए

1368
01:37:54,920 --> 01:37:59,080
उनके तत्व ज्ञान मिले तो पहले हमें जी चहरे

1369
01:37:59,080 --> 01:38:03,080
के बना बात नहीं हो ले आब

1370
01:38:03,080 --> 01:38:07,280
कोई बात होगी ले आ जा

1371
01:38:07,280 --> 01:38:11,280
एक बार देखा ज्यादातर त बोलते त

1372
01:38:11,280 --> 01:38:15,640
अरे वो ठीक है यार पहाड़ी जी हम व सब समझ जाएंगे

1373
01:38:15,640 --> 01:38:19,920
हमको थोड़ा तत्व ज्ञान चाहिए इन्हीं से तत्व

1374
01:38:19,920 --> 01:38:23,760
ज्ञान अलग होता त जन अलग होता

1375
01:38:23,760 --> 01:38:27,760
चेहरे के साथ क्यों नहीं आ सकते क्या होगा इनके चेहरे में को

1376
01:38:27,760 --> 01:38:32,360
खराबी है कोई कमी रह गई शादी यद पड़ी होगी

1377
01:38:32,360 --> 01:38:36,480
इनकी एक अधूरी बात मेरी जो गरुण पुराण के बारे में बात आई

1378
01:38:36,480 --> 01:38:41,280
की य मरने के बाद क्यों सुनाना जिंदा में क्यों नहीं सुनाते हैं

1379
01:38:41,280 --> 01:38:45,080
भाब पहले जानते य मूर्ख है नहीं

1380
01:38:45,080 --> 01:38:49,440
जानते य गरु एक मिनट रु

1381
01:38:49,440 --> 01:38:53,520
गरुर पुराण जब सुनाई जाती है घर में बगल में उनका जो जिन

1382
01:38:53,520 --> 01:38:57,840
की मृत्य हुई है उनके परिजन भी तो बैठते हैं जो उनके बेटे हैं उनको

1383
01:38:57,840 --> 01:39:01,840
वो भी तो सुनते हैं क्या खाली मुंह में उनके कान में बोली जाती है जो मृत व्यक्ति

1384
01:39:01,840 --> 01:39:05,960
है इतना पता नहीं इन लोगों को जब गरुर पुराण

1385
01:39:05,960 --> 01:39:11,280
का पाठ किया जाता है तो और भी होते हैं घर में वो भी तो सुनते

1386
01:39:11,280 --> 01:39:15,320
हैं तो वो तो ऑलरेडी सुना रहे हैं उनको पहले ही कि गरुड़ पुराण

1387
01:39:15,320 --> 01:39:18,200
में क्याक

1388
01:39:18,200 --> 01:39:22,560
है सभी भाइयों को जय श्री राम इंसान होता है

1389
01:39:22,560 --> 01:39:27,440
श्रीराम ज सुनता कौन है उसके आसपास के लोग

1390
01:39:27,440 --> 01:39:31,480
अभी मैंने पता किया किसी से कि वो प्र कोई भवान में

1391
01:39:31,480 --> 01:39:35,680
कोई प्रिंटिंग प्रेस नहीं है क्योंकि हमारे नजदीक है कोई नहीं है सब झूठ

1392
01:39:35,680 --> 01:39:39,960
है इनका वहा भी झोल कर रखा है बिल्कुल झोल

1393
01:39:39,960 --> 01:39:44,120
कर रखा है कोई नहीं है बोला मैंने अभी पता क्या क्योंकि हमारे जानने वाले अगल बगल

1394
01:39:44,120 --> 01:39:48,120
है बोला हमने तो कभी देखा ही नहीं हम इतने सालों

1395
01:39:48,120 --> 01:39:52,240
से रह रहे बोला यहां पर कोई नहीं है बोला को गुप्त रूप में होगा तो अलग

1396
01:39:52,240 --> 01:39:58,240
बात है से कोई फेमस है ही नहीं बोला सारी झूठी बातें है ये

1397
01:39:59,040 --> 01:40:03,200
बताओ नहीं है बोला नहीं है मना कर रहे हैं नहीं

1398
01:40:03,200 --> 01:40:07,280
खुद की खोली हुई है ना आश्रमों में हो सकता है भगवान

1399
01:40:07,280 --> 01:40:11,520
जाने इसके विषय में तो पता नहीं पर भवाना में कोई नहीं है गुप्त

1400
01:40:11,520 --> 01:40:15,600
रूप से होगी उसका कोई बवाना में को मैं

1401
01:40:15,600 --> 01:40:19,720
एक बात बताऊ कि खुद की खोल

1402
01:40:19,720 --> 01:40:24,000
ली हो बात ठीक है आप उसको लिख क्यों नहीं रहे हो

1403
01:40:24,000 --> 01:40:28,840
सही बात है अगर खुद की खोल ली है उसको लिख दो

1404
01:40:28,840 --> 01:40:33,600
मगर चोर है ना हमारे ऊपर पता नहीं कितने केस रोज दर्ज

1405
01:40:33,600 --> 01:40:37,760
होंगे केस तो होंगे इनके ऊपर दर्ज होंगे कोई बात इनके ऊपर तो अभी

1406
01:40:37,760 --> 01:40:42,280
तो रामपाल जेल में अभी तो इनकी पता नहीं किनकी बारी आएगी व

1407
01:40:42,280 --> 01:40:46,520
हमारी ढील है कि हम इन लोगों के ऊपर कोई जो करते नहीं है इन किताबों के विषय

1408
01:40:46,520 --> 01:40:50,640
में भी कहां से छप रही है कौन इनको प्रिंटिंग कर रहा है कौन ऐसे अपशब्द लिख

1409
01:40:50,640 --> 01:40:54,840
रहा है जी य गरुड़ पुराण

1410
01:40:54,840 --> 01:40:59,240
को बो गरुड़ पुराण पूरा पूरा पढ़िए पूरा देखिए

1411
01:40:59,240 --> 01:41:03,400
16 अध्याय में तत्व का ज्ञान दिया गया है पहले दवा अध्याय पढ़ा उन्होने

1412
01:41:03,400 --> 01:41:07,640
पांचवा पढ़ा छवा पढ़ा खाली व 16 दिखा दिया उनको कुछ ज्ञान

1413
01:41:07,640 --> 01:41:11,800
नहीं कोई पुराणों के बारे में को भ्रमित

1414
01:41:11,800 --> 01:41:14,200
करत आने पर य भी कह देते हैं

1415
01:41:14,200 --> 01:41:18,520
कि हम केवल गीता मानेंगे और वो मानेंगे महाभारत को भी नहीं मानेंगे पुराण

1416
01:41:18,520 --> 01:41:22,760
की तो बात दूर है गीता और वेद मानेंगे फिर वेद

1417
01:41:22,760 --> 01:41:26,800
में दिखा कवियों का कवि जो है गणपति महाराज है तो फिर हम वो भी

1418
01:41:26,800 --> 01:41:32,720
नहीं मानेंगे क्या मानेंगे हम कुछ नहीं मानेंगे हमारे डंडे से पिटाई करो

1419
01:41:32,720 --> 01:41:36,960
रोजका मामला जीरो हैथ पता

1420
01:41:36,960 --> 01:41:41,920
क्या है इनकी स्थिति पता है क्या है मेरे एक

1421
01:41:41,920 --> 01:41:46,680
दूर के मामा जी थे व जेलर

1422
01:41:46,680 --> 01:41:50,680
थे तो एक बार एक किस्सा हुआ कि

1423
01:41:50,680 --> 01:41:54,720
उनके यहां पर दो अपराधी जब पकड़ के जेल में लाए गए

1424
01:41:54,720 --> 01:41:59,240
उन्होंने जो है छलांग लगा दी वो जेल के

1425
01:41:59,240 --> 01:42:03,440
बाहर जेल की जो बाउंड्री होती है ना उसपे

1426
01:42:03,440 --> 01:42:07,720
करंट के तारों की वायरिंग होती है जिससे कोई अगर

1427
01:42:07,720 --> 01:42:12,680
पार करना चाहे किसी तरह से तो उसको जो है करंट का सामना करना पड़े

1428
01:42:12,680 --> 01:42:16,920
तो दो ऐसे व्यक्ति आए

1429
01:42:16,920 --> 01:42:21,120
जो किसी तरीके से अपनी कोई उनका जो जिस बिल्डिंग में वो रहते

1430
01:42:21,120 --> 01:42:25,520
थे क्या क्या कहते हैं उसको बैरिक जिस बैरिक

1431
01:42:25,520 --> 01:42:29,360
में वह रहते थे वह उसकी छत पर पहुंच गए और छत

1432
01:42:29,360 --> 01:42:33,360
पर पहुंच कर के उन्होंने दौड़ लगाई जेल की दीवार को पार कर

1433
01:42:33,360 --> 01:42:37,360
जाए मगर अच्छा करंट में भी थोड़ा वो होता अपनी ओ खींचता है थोड़ा

1434
01:42:37,360 --> 01:42:41,480
सा एक होता है कुछ कुछ भी हो उन्होंने

1435
01:42:41,480 --> 01:42:45,760
जब दौड़ लगाई वो फस गए झटका खाके

1436
01:42:45,760 --> 01:42:49,920
जेल के अंदर ही गिर गए एक की टांग टूट गई और

1437
01:42:49,920 --> 01:42:54,000
एक ठीक ठाक रहा अब जिसके टांग टूटी थी उसके तो पलस्तर बन

1438
01:42:54,000 --> 01:42:58,120
गया जो ठीक ठाक रहा वहां क्या होता था

1439
01:42:58,120 --> 01:43:02,280
पता है जो जेल के ऐसे लोग नहीं होते हैं

1440
01:43:02,280 --> 01:43:06,960
जो जेल प्रशासन के खास होते हैं पुराने

1441
01:43:06,960 --> 01:43:11,480
जेल कट्टू होते हैं जो आते जाते रहते हैं वो

1442
01:43:11,480 --> 01:43:15,560
जेल और घर उनका आना जाना एक होता है

1443
01:43:15,560 --> 01:43:19,720
तो क्या होता था जेल के प्रशासन द्वारा उनको कह दिया गया क्या

1444
01:43:19,720 --> 01:43:23,960
होता था कि वो रोज सुबह उठता था वहा व का वो अंदर

1445
01:43:23,960 --> 01:43:28,680
का ये मान लो कि अंदर का वो एक उपाधि दी जाती है वहां

1446
01:43:28,680 --> 01:43:32,720
नंबरदार नंबरदार मतलब नंबरदार मतलब

1447
01:43:32,720 --> 01:43:37,120
जो जेल के अंदर को वो करते हैं ऑपरेट करते हैं

1448
01:43:37,120 --> 01:43:41,160
अनऑफिशियली ऑफिशियल नियुक्त नहीं है वो उनके द्वारा नियुक्त होते हैं वहां

1449
01:43:41,160 --> 01:43:44,520
के प्रशासन के द्वारा तो उसमें यह होता

1450
01:43:44,520 --> 01:43:48,480
था फिर

1451
01:43:48,480 --> 01:43:52,600
कि जितना रोज सुबह जैसे ही वो व्यक्ति उठे

1452
01:43:52,600 --> 01:43:57,120
जो जिसके चोट नहीं आई है जो बच गया है है ना

1453
01:43:57,120 --> 01:44:01,280
रोज सुबह उठ कर के चाय से भी पहले जाकर के उसके

1454
01:44:01,280 --> 01:44:05,840
50 60 डंडे बिना बात के रोज प्रतिदिन

1455
01:44:05,840 --> 01:44:10,720
बिना बात के ये स्थिति उनकी हो गई

1456
01:44:10,720 --> 01:44:14,920
थी बिना बात के बस रोज सुबह उठे और उठने

1457
01:44:14,920 --> 01:44:19,080
के बाद कुछ जेल में परेड रेड होती है कुछ है

1458
01:44:19,080 --> 01:44:23,880
ना कुछ ऐसा होता है अनुशासनात्मक उसके बाद बस सीधे

1459
01:44:23,880 --> 01:44:28,040
प्रशासन से के द्वारा नियुक्त व्यक्ति रोज सुबह उठे और वो

1460
01:44:28,040 --> 01:44:32,080
जो व्यक्ति है व जेल और

1461
01:44:32,080 --> 01:44:36,080
घर उनका आना जाना मु को पूज्य कबीर परमेश्वर जी का

1462
01:44:36,080 --> 01:44:40,200
भेजा हुआ कुत्ता जाने जो सर्व प्रभु चाहने

1463
01:44:40,200 --> 01:44:44,960
वाले परमात्मा धन के धनि हों को जगाने के लिए भोक रहा है

1464
01:44:44,960 --> 01:44:49,480
ओ स प्रभु चाने

1465
01:44:49,480 --> 01:44:54,280
वा ये इनकी भाषा शैली है किताबों में

1466
01:44:54,280 --> 01:44:58,320
चलो अपने लिए तुम कुछ भी लिख लो कुत्ता लिख लो बाजी

1467
01:44:58,320 --> 01:45:02,480
लिख लो गीदड़ लिख लो कुछ भी लिख लो अपने लिए

1468
01:45:02,480 --> 01:45:06,520
कोई दिक्कत नहीं है हमारी चीजों को आप छोड़ दो भाई अपने लिए

1469
01:45:06,520 --> 01:45:10,600
कुछ भी लिखो तो मैं मैं वो अपनी बात खत्म कर लू तो वहां

1470
01:45:10,600 --> 01:45:15,400
पर उनकी हालत यह हो गई थी अखबारों तक में आ गया था व वो वाला किस्सा

1471
01:45:15,400 --> 01:45:19,480
डेली अंदर प्रशासन जैसे ही लोग उठ जाते 6 सात बजे

1472
01:45:19,480 --> 01:45:23,640
तक और डेली बस चाय से पहले एक आदमी जाएगा उसका ड्यूटी है बिना बा के

1473
01:45:23,640 --> 01:45:27,840
आजा भाई बाहर आजा आज का प्रसाद ले ले तो इनकी हालत वैसी

1474
01:45:27,840 --> 01:45:32,280
हो गई है कि बिना बात के डेली इनके 50 सा ंडे प्रतिदिन लगाए जाए

1475
01:45:32,280 --> 01:45:36,520
जो कुत कुतर करते हैं

1476
01:45:36,520 --> 01:45:40,640
बिना बात के कोई इनको कोई तार्किक बात मत करो प्रमाणिक बात मत करो सीधे

1477
01:45:40,640 --> 01:45:45,920
बस सुबह उठ

1478
01:45:45,920 --> 01:45:48,040
बोत

1479
01:45:48,040 --> 01:45:51,520
रया

1480
01:45:51,520 --> 01:45:55,880
अत इनकी हालत उससे भी परे है तस्त हतो हतो

1481
01:45:55,880 --> 01:46:00,000
अब जिनको आदत बन गई है डेली खाना उनके लिए कोई इज्जत परमत की कोई

1482
01:46:00,000 --> 01:46:04,120
कुछ नहीं रहता उनको डेली पता है उनको 100 बार जूते

1483
01:46:04,120 --> 01:46:08,200
पड़ रहे हैं कोई लेना देना थोड़ी ना है वो तो मुह उठा के

1484
01:46:08,200 --> 01:46:12,200
आ जाते मु उठा के चले जाते हैं तो बेश्रम लोगों का कोई ईमान

1485
01:46:12,200 --> 01:46:16,280
धर्म नहीं है भाई जी अब जिनका बोलो हम तो केस हमारे यहां

1486
01:46:16,280 --> 01:46:20,400
बोलते ना अरे केश होर कितनी बड़ी इज्जत चले गई बोला उनको कोई

1487
01:46:20,400 --> 01:46:24,680
बात नहीं चार दिन जेल में चार दिन रेल में ंडे चा दिन उनके लिए

1488
01:46:24,680 --> 01:46:27,680
आम बात

1489
01:46:27,680 --> 01:46:31,960
है जी श्याम स्टूडियो जी जय श्री राम राधे

1490
01:46:31,960 --> 01:46:36,720
राधे महाराज जी राधे राधे आपने संपर्क नहीं किया

1491
01:46:36,720 --> 01:46:41,000
अरे मैं नंबर आपका निकल ग मेरे से

1492
01:46:41,000 --> 01:46:45,440
थोड़ा नंबर दे दो मैं नोट कर लेता हूं बुक में नंबर

1493
01:46:45,440 --> 01:46:51,440
हर वीडियो के नीचे डिस्क्रिप्शन में लिखा रहता है अच्छा अच्छा

1494
01:46:53,040 --> 01:46:59,040
स्क्रीन पर दिख रहा है नंबर

1495
01:47:02,040 --> 01:47:06,200
74836 ठीक है महाराज नोट कर लि क्योंकि

1496
01:47:06,200 --> 01:47:10,520
अभी सत्संग हुआ था अभी गवालियर में अभी इनका रामपाल महाराज

1497
01:47:10,520 --> 01:47:15,480
जी का जी य पर गवालियर में हुआ

1498
01:47:15,480 --> 01:47:19,760
था अच्छा वहा पर करते रहते

1499
01:47:19,760 --> 01:47:23,440
संडे के संडे करते लोग

1500
01:47:23,440 --> 01:47:27,840
अच्छा तो क्या हमारे तो ससुर साब जुड़े हैं मतलब हमारे तो दो

1501
01:47:27,840 --> 01:47:31,880
से जुड़े हैं हर संडे करते हैं क्या

1502
01:47:31,880 --> 01:47:36,040
हां हर संडे करते हैं लोग तो फिर आप हमसे संपर्क करिए

1503
01:47:36,040 --> 01:47:41,360
फिर एक दिन योजना बनाई जाए एक संडे पहुंचा जाए इनके

1504
01:47:41,360 --> 01:47:44,960
पास भय दिखे समुद्र को भय

1505
01:47:44,960 --> 01:47:49,080
दिखे समुद्र को प्रलय करे वो बाण बन वायु को भी चीर

1506
01:47:49,080 --> 01:47:52,440
दे विशाल सा विमान बन परास्त ना

1507
01:47:52,440 --> 01:47:57,680
हो स के विश्वास चाहिए मुझे तेरा अंतिम वही प्रयास चाहिए

1508
01:47:57,680 --> 01:48:01,800
सुंदर ना चल रही है गवालियर व्यापार मेला लगेगा ना गवार

1509
01:48:01,800 --> 01:48:06,760
का मेला व पर स्टोल लगा स्टोल लगाएंगे ये लोग

1510
01:48:06,760 --> 01:48:10,880
अच्छा जैसे वहा पर स्टोल लगा तो

1511
01:48:10,880 --> 01:48:15,200
जैसे ता है अपना अब आप अब आप

1512
01:48:15,200 --> 01:48:20,000
हमारे संपर्क में रहिए और ग्वालियर के मेले में स्टॉल लगने दीजिए

1513
01:48:20,000 --> 01:48:24,080
मैं बना जैसे लगे आप इपोन करूंगा

1514
01:48:24,080 --> 01:48:28,160
मैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि हमारे तो बगल से ही

1515
01:48:28,160 --> 01:48:32,240
है गवालियर तो मेला गवालियर का मेला बगल में ही लगता है हमा बिल्कुल

1516
01:48:32,240 --> 01:48:35,760
बिल्कुल बिल्कुल

1517
01:48:35,760 --> 01:48:39,760
बकप लिख लिया है मैंने और मेरे आप

1518
01:48:39,760 --> 01:48:44,240
करिएगा और बता दीजिएगा मैं श्याम स्टूडियो से बोल रहा हूं ऐसे बता दीजिए

1519
01:48:44,240 --> 01:48:48,680
ओके और मेरे लिए कुछ कार हो तो बताना क्योंकि मैं सारे कार कर लेता हूं मैं फोटोग्राफर

1520
01:48:48,680 --> 01:48:53,480
हूं एक और वीडियोग्राफी भी है मेरे और कैमरे भी मेरे पास

1521
01:48:53,480 --> 01:48:56,440
मुझे

1522
01:48:56,440 --> 01:49:00,440
बता जी जी

1523
01:49:00,440 --> 01:49:04,640
जी श्याम जी आपने य में कह दिया ना अभी ना अगर

1524
01:49:04,640 --> 01:49:09,120
वहां ग्वालियर में पता चल कि शिवांश जी आ रहे है ना वो दुकान ऑलरेडी पहले हट जाएगी

1525
01:49:09,120 --> 01:49:11,640
वहा

1526
01:49:11,640 --> 01:49:15,760
नहीं नाम हुआ नहीं गवालियर में नहीं हुआ सर

1527
01:49:15,760 --> 01:49:20,160
पहुच गई होगी वहा भी वीडियो नहीं नहीं नहीं अभी नहीं

1528
01:49:20,160 --> 01:49:24,440
पहुची नहीं नाम सु लगने दीजिए प्रेस

1529
01:49:24,440 --> 01:49:28,640
न्यूज पुलिस प्रशासन सब लेकर पहुंचेंगे इस

1530
01:49:28,640 --> 01:49:32,720
बार कोई दिक्कत नहीं लखन मेले में भी लखनऊ

1531
01:49:32,720 --> 01:49:37,240
मेले में भी हम लोग गए थे जो हम लोग कोई ऐसे व्यक्तिगत नहीं गए थे

1532
01:49:37,240 --> 01:49:41,280
साथ में जो क्षेत्र के वो थे पार्षद वो गए मतलब वो भी

1533
01:49:41,280 --> 01:49:45,320
उसमें थे चौराहे की फोटो आई है जहां पर अग्निदेव

1534
01:49:45,320 --> 01:49:49,840
का प्राकट्य हुआ है वहां पर एमएलए खड़े हैं

1535
01:49:49,840 --> 01:49:51,080
रिटायर्ड जो है डीआईजी

1536
01:49:51,080 --> 01:49:55,080
आईजी सब खड़े हैं चले गए थे वो

1537
01:49:55,080 --> 01:49:59,440
एक कोई व्यक्तिगत कारवाई नहीं थी संगठनात्मक

1538
01:49:59,440 --> 01:50:03,800
और जो गणमान्य लोग है उन लोगों के साथ में मिलकर

1539
01:50:03,800 --> 01:50:07,880
के हुआ था ऐसे नहीं था जी तो वहां पर भी

1540
01:50:07,880 --> 01:50:12,160
पहुंचते हैं आप आने दीजिए ग्वालियर का मेला लगने वाला होगा

1541
01:50:12,160 --> 01:50:16,200
सर्दियों में लगता है तारीख के आसपास चालू

1542
01:50:16,200 --> 01:50:20,800
हो जाएगा हा ठीक है आपसे

1543
01:50:20,800 --> 01:50:24,920
धरातल पर संपर्क करिएगा हा मैं आपकी रोजाना वीडियो देखता रहता

1544
01:50:24,920 --> 01:50:29,840
हूं मुझे तो इंतजार रता कि आपका लाइव कब

1545
01:50:29,840 --> 01:50:34,160
आएगा सभी को ता

1546
01:50:34,160 --> 01:50:39,600
क्योंकि मैं कार करता रता बनाता रहता हूं तो आपका देखता रहता

1547
01:50:39,600 --> 01:50:43,800
हूं चलो ठीक है राधे राधेय भाई साहब एक काम

1548
01:50:43,800 --> 01:50:47,840
करिए जरा इसको प्रदर्शित कर दीजिए थोड़ा अंडरलाइन करके स्क्रीनशॉट लेकर

1549
01:50:47,840 --> 01:50:52,080
के इतना भद्र कमेंट किया है किसी ने संत रामपाल जी महाराज

1550
01:50:52,080 --> 01:50:56,880
का होने के नाते व अभद्र कमेंट जरा दिखा दीजिए

1551
01:50:56,880 --> 01:51:02,520
कुछ कुछ चीजें उसकी छिपा

1552
01:51:02,520 --> 01:51:06,600
दीजिएगा अरे कमेंट तो छोड़ो इनके कॉल रिकॉर्डिंग है कितनी गंदी गंदी

1553
01:51:06,600 --> 01:51:11,080
गालिया दी मैंने आपको भेजी है भेजी थी मैंने शिवान जी आपको मैंने अच्छा

1554
01:51:11,080 --> 01:51:15,240
किसी दिन उसको उसको दिखाते हैं हां बोलते

1555
01:51:15,240 --> 01:51:21,240
हैं ना हमारे गुरु य नहीं सिखाते संस्कार ही नीच है इनके

1556
01:51:22,080 --> 01:51:27,200
[संगीत] और ये लोग कहते गुंडा हम

1557
01:51:27,200 --> 01:51:31,240
है हमारी मां के साथ बता करो हमारी मां को गाली

1558
01:51:31,240 --> 01:51:35,280
दो और हम कुछ ना कहे मगर कुछ भी कहा तो

1559
01:51:35,280 --> 01:51:39,720
हम गुंडे हैं और तुम बिना बात के ही

1560
01:51:39,720 --> 01:51:44,560
यह सब करते रहो उसके बाद हमारे करने पर इस तरह की प्रतिक्रिया दो आ करके

1561
01:51:44,560 --> 01:51:48,080
और फिर कह दो कि

1562
01:51:48,080 --> 01:51:52,200
वो मैंने आश्रम की वीडियो भेजी है व लाठी डंडो से पिटाई चल रही

1563
01:51:52,200 --> 01:51:55,720
है वो दिखाई

1564
01:51:55,720 --> 01:51:59,880
आपने एक हा एक बार दिखा चुके लाठी नहीं लाठी डंडे

1565
01:51:59,880 --> 01:52:03,920
वाली नहीं जिसने वो वो दिखाया था आपने ही तो सुनाया था शायद अपने

1566
01:52:03,920 --> 01:52:08,000
से एक लिंक भेजा है पहले भेजा सई

1567
01:52:08,000 --> 01:52:12,200
सबके सामने दिखाए गालिया भी बहुत गंदी गंदी बकरे और व आश्रम

1568
01:52:12,200 --> 01:52:17,600
में और लाठी डंडों से पिटाई कर रहे हैं और सब

1569
01:52:17,600 --> 01:52:21,600
साहिब सब सामने एक दो जगह कहा

1570
01:52:21,600 --> 01:52:23,800
है

1571
01:52:23,800 --> 01:52:28,520
चलिए अभी किसी नेक्स्ट स्ट्रीम में हम लोग लेंगे उसको क्योंकि अभी

1572
01:52:28,520 --> 01:52:32,840
वो पता नहीं वो अवेलेबल हो पाएगी नहीं शायद है

1573
01:52:32,840 --> 01:52:36,920
यह देखिए क्या कमेंट आया है इसको कोई

1574
01:52:36,920 --> 01:52:41,400
और पढ़ दे भाई मेरे अंदर सास नहीं है जो कोई थोड़ा सा और

1575
01:52:41,400 --> 01:52:45,720
थोड़ा हो थोड़ा सा पढ़ने का प्रयास

1576
01:52:45,720 --> 01:52:49,800
करें गुरुदेव का नाम लिखा है उसके बाद यह लिखा है मां

1577
01:52:49,800 --> 01:52:54,240
का यह वो उसके बाद फिर हमारा नाम लिखा है टीआर पहाड़ी

1578
01:52:54,240 --> 01:52:58,440
का और हमारा नाम लिखा है फिर यह देखिए यह व्यक्ति जो

1579
01:52:58,440 --> 01:53:02,480
जुड़ने आया था लाइव चर्चा से राम ये इसका नाम है

1580
01:53:02,480 --> 01:53:06,480
संत रामपाल जी महाराज अब वोह स्वयं

1581
01:53:06,480 --> 01:53:10,520
तो हो नहीं सकते संत रामपाल जी उनके नाम से उनका कोई शिष्य ही होगा जो

1582
01:53:10,520 --> 01:53:11,020
यह लिख

1583
01:53:10,800 --> 01:53:15,160
रहा है यह देख लो भैया तुम्हारे यहां की सद भक्ति का

1584
01:53:15,160 --> 01:53:19,280
परिणाम कितनी नीचता है यही नीचता है इनके आश्रमों

1585
01:53:19,280 --> 01:53:24,200
में यही सिखाया जा रहा है इनको श्रम हैय

1586
01:53:24,200 --> 01:53:28,240
साले हम कब तब कहते हम काबू करो कब तक करें ऐसे

1587
01:53:28,240 --> 01:53:32,680
नीच को तो नी के सा देना बेश्रम के साथ बेश्रम

1588
01:53:32,680 --> 01:53:36,760
बनना पड़ता है इस कलयुग में जता संदीप

1589
01:53:36,760 --> 01:53:41,400
बत्रा जी जय श्री राम जय श्री राम सर कैसे हो

1590
01:53:41,400 --> 01:53:45,560
बस बस कृपा है आपने देखा क्या इनका इंडस्ट्रियल

1591
01:53:45,560 --> 01:53:49,880
एरिया सर इंडस्ट्री मैंने देखा वैसे तो दिल्ली में है बवाना

1592
01:53:49,880 --> 01:53:54,920
जहा कह रहे हो नहीं वो है इनकी प्रिंट प्रेस है वहा पर पता लगवा

1593
01:53:54,920 --> 01:54:00,120
जरा इनकी कोई प्रिंटिंग प्रेस नहीं

1594
01:54:00,120 --> 01:54:05,280
है हमारे लोगों के वहा पर फैक्ट्र है नहीं है

1595
01:54:05,280 --> 01:54:09,360
बोला क्या क रहे श्याम जी खुद की है खुद की

1596
01:54:09,360 --> 01:54:13,480
है इनकी मशीन खुद की है सब कुछ खुद छाप खुद की है मगर खुद की वो

1597
01:54:13,480 --> 01:54:17,680
मशीन प्रिंटिंग वाली कहां लगी है छाप क्यों नहीं रहे क्योंकि जो एड्रेस

1598
01:54:17,680 --> 01:54:22,760
इन्होने दिया है वहा पर ये नहीं है कबीर पिंटर कोई जी

1599
01:54:22,760 --> 01:54:26,840
नहीं है बोला वहा पर कई लोगों की फैक्ट्र हैवाने में मैंने

1600
01:54:26,840 --> 01:54:31,240
पता किया इससे पहले आप नहीं है बोला कोई नहीं है

1601
01:54:31,240 --> 01:54:35,320
कोई बोले गुप्त रूप से होगी तो पंडित जी हम नहीं जानते नहीं तो फेमस

1602
01:54:35,320 --> 01:54:39,640
कोई नहीं है क्योंकि जो एक जो हमारे यजमान है नके

1603
01:54:39,640 --> 01:54:43,760
15 करोड़ एक मिनट इनके 15 करोड़ शिष्य है पूरे विश्व

1604
01:54:43,760 --> 01:54:47,880
में इनका डंका बज रहा है इनकी किताबे कहां छप रही है वो

1605
01:54:47,880 --> 01:54:53,880
इन्होने गल मैप पर क्यों नहीं डाला है इस सवाल का उत्तर दे

1606
01:54:56,240 --> 01:55:00,440
आप एक बार ना एड्रेस मेरे को देना मैं एक बारना वहां पर यार दोस्त है अपना दिल्ली में उससे

1607
01:55:00,440 --> 01:55:04,520
कन्फर्म करता ब जन गंगा है इसमें

1608
01:55:04,520 --> 01:55:08,640
तो इन्होने एड्रेस लिखा ही नहीं है जो इनकी रीड की हड्डी

1609
01:55:08,640 --> 01:55:13,520
है जन गंगा इनकी री है और

1610
01:55:13,520 --> 01:55:17,560
इन दोनों में एड्रेस लिखा है अच्छा एक बात और है एक बात और है

1611
01:55:17,560 --> 01:55:22,720
इनकी किसी किसी किताब में वही एड्रेस जयपुर के नाम से लिखा मिलेगा

1612
01:55:22,720 --> 01:55:27,240
अच्छा अच्छा अा अब इसमें एड्रेस लिखा है

1613
01:55:27,240 --> 01:55:31,320
पी 117 सेक्टर तीन बवाना इंडस्ट्रियल एरिया नई

1614
01:55:31,320 --> 01:55:35,760
दिल्ली और खुब ग सर्च कर लो कुछ नहीं है

1615
01:55:35,760 --> 01:55:40,360
मान लो हमने नोटिस व को भेजना तो वहा पर डायरेक्ट भ सते ना बात आपकी सही है

1616
01:55:40,360 --> 01:55:44,640
कुछ नहीं हो सकता वो कोई नोटिस अगर है अगर है

1617
01:55:44,640 --> 01:55:49,120
तो आप दिखाइए पता करिए भाई आप लोग जी विशाल भाटिया

1618
01:55:49,120 --> 01:55:55,120
जीराम ह को जय

1619
01:55:56,520 --> 01:56:00,960
मैं ये बता पंडित जी ने तो अपने स्तर पर

1620
01:56:00,960 --> 01:56:05,040
अपने जो उनके करीबी है निकटतम व्यक्ति है

1621
01:56:05,040 --> 01:56:09,200
उनसे पता किया पंडित जी ने वो बोल रहे भाई गुप्त रूप से कोई प्रेस चल रही

1622
01:56:09,200 --> 01:56:13,280
हो तो बात अलग हैना में खुद की फैक्ट्रियां है दो

1623
01:56:13,280 --> 01:56:18,800
दो फैक्ट्रियां है अपनी

1624
01:56:18,800 --> 01:56:23,640
अच्छा मैं तीन बातें कहना चाहूंगा

1625
01:56:23,640 --> 01:56:27,720
बोलिए पहली बात पहली बात तो यह है कि अब तो यह लाइव स्ट्रीम जोय

1626
01:56:27,720 --> 01:56:31,840
मेरे लिए एक य मेरे लिए अब एक मैच बन चुका है भैया मैच

1627
01:56:31,840 --> 01:56:35,960
अभ कॉमेडी बन चुकी है मेरे लिए आओ हसी मजाक

1628
01:56:35,960 --> 01:56:41,120
करो अब प्रमाण देने की जरूरत नहीं है इही के पुस्तको से इनका खंडन करो और बस म

1629
01:56:41,120 --> 01:56:45,360
जुड़ा

1630
01:56:45,360 --> 01:56:49,400
सही धन्यवाद दूसरी बात य है अब

1631
01:56:49,400 --> 01:56:53,560
वो जो एमपी खबर फास्ट का हेमंत दास जी जो अंकल है अब

1632
01:56:53,560 --> 01:56:57,840
वो आपके ऊपर वो वीडियो बने दुकान बंद कराने की क कि शिवांश

1633
01:56:57,840 --> 01:57:01,880
शिवांश नारायण द्विवेदी ने अपना राक्षसी चेहरा दिखा दिया गुंडागर्दी

1634
01:57:01,880 --> 01:57:06,160
का जवाब ज्ञान से होता है राक्षसी चेहरा देख आप

1635
01:57:06,160 --> 01:57:10,200
बिल्कुल मेरी मां का अपमान करने वालों के लिए मैं राक्षस

1636
01:57:10,200 --> 01:57:14,280
ही हूं ध्यान रखें ये सब लोग बिल्कुल मा का

1637
01:57:14,280 --> 01:57:18,320
अपमान करेगा वो मुझसे अपेक्षा ना करें कि मैं जो है उनके साथ

1638
01:57:18,320 --> 01:57:22,480
बहुत ज्यादा पर वो क्या कहते हैं उसको बहुत ज्यादा

1639
01:57:22,480 --> 01:57:26,840
जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल होता है उसका निर्वाह करते हुए से दिखाई दूंगा मुझे राक्षस

1640
01:57:26,840 --> 01:57:29,760
समझना अपने लिए

1641
01:57:29,760 --> 01:57:33,760
आपने तीसरी बात विशाल डरे

1642
01:57:33,760 --> 01:57:38,040
पड़े इसलिए बोल रहे इनको म परेशान हो गय

1643
01:57:38,040 --> 01:57:42,080
आप ये समझो उद हो ग पुराने

1644
01:57:42,080 --> 01:57:46,120
जमाने में जो राक्षस होते श्री राम जी से परेशान रहते थे कहते ये गलत बंदा

1645
01:57:46,120 --> 01:57:52,120
है श्री कृ जी पहचान रते अब

1646
01:57:52,360 --> 01:57:56,360
किसलिए परेशान रहते थे उनको पता है कि य सच के साथ है और सनातन के

1647
01:57:56,360 --> 01:58:00,360
साथ है ये होता है अब देखिए शिवांश नारायण दध

1648
01:58:00,360 --> 01:58:04,600
जी आपका यह जो नाम शिवांश नारायण है नारायण नारायण कौन भगवान

1649
01:58:04,600 --> 01:58:09,200
श्री राम शिवांश शिवांश का मतलब शिव कांश वो कौन हनुमान

1650
01:58:09,200 --> 01:58:13,320
ठीक है मैं तीसरी बात अपनी यह कहना चाहता था तीसरी बात थोड़ी लंबी

1651
01:58:13,320 --> 01:58:17,320
है आपको याद होगा मैंने रामचरित महाराज से कुछ प्रमाण दिखाए थे ब्रह्मा

1652
01:58:17,320 --> 01:58:21,440
विष्णु महेश को लेके तो आप सब लोग थे मैं एक चीज पहले

1653
01:58:21,440 --> 01:58:25,680
बता चुका हूं बाकी सबको भी बताना चाहता हूं तब कोई था नहीं आप और मैं ही थे वो ये थी कि आप

1654
01:58:25,680 --> 01:58:29,840
लोग जब रामचरित मानस का बालकांड आप पढ़ेंगे ना उसमें भगवान शिव से माता पार्वती

1655
01:58:29,840 --> 01:58:34,040
ने प्रश्न किया है सब सुनना उसमें भगवान शिव ने माता पार्वती से प्रश्न

1656
01:58:34,040 --> 01:58:38,240
किया कि आप जिन भगवान श्री राम का ध्यान करते हो अब ये लोग राम जी में बहुत भेदभाव

1657
01:58:38,240 --> 01:58:42,400
करते हैं और रामचरित मानस में बहुत कूद रहे हैं उसी रामचरित मानस के बाल कांड

1658
01:58:42,400 --> 01:58:46,520
में माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ जी से प्रश्न किया है कि आप जिन राम

1659
01:58:46,520 --> 01:58:50,680
जी का ध्यान करते हो वो दशरथ पुत्र राम है या कोई और राम है और अगर

1660
01:58:50,680 --> 01:58:54,720
वो दशरथ पुत्र राम ही अगर आपके भगवान है तो व सीता जी के लिए इतना वन वन

1661
01:58:54,720 --> 01:58:58,840
क्यों भटकते फिरे उनको इतना मतलब क्यों रोना बि लखना पड़ा तो भगवान शिव ने

1662
01:58:58,840 --> 01:59:02,960
जो इनके रिप्लाई में इनका जो खंडन किया है ना पूरा उनके ऊपर फिट बैठता है जो आगे

1663
01:59:02,960 --> 01:59:07,080
भगवान शिव ने जवाब दिया है और दूसरा जो मैंने एक प्रसंग आपको बताया था

1664
01:59:07,080 --> 01:59:07,920
राम

1665
01:59:07,920 --> 01:59:12,200
से की जब हनुमान जी रावण की सभा में आते हैं तो जो ब्रह्मा विष्णु महेश की

1666
01:59:12,200 --> 01:59:16,440
आती है जाके बलवीर चसा पाल जसा

1667
01:59:16,440 --> 01:59:20,560
वैसे तो हनुमान जी ने बात रावण के सामने कही अब वैसे

1668
01:59:20,560 --> 01:59:25,040
तो हनुमान जी ने बात रावण के सामने कही लेकिन जो बातें हनुमान जी ने बोली है ना

1669
01:59:25,040 --> 01:59:29,240
वो मतलब इन लोगों पर बहुत बुरा फैक्ट करती है और उसी के आगे हनुमान

1670
01:59:29,240 --> 01:59:33,240
जी ने दो दोहे बोले हैं वो दो दोहे मैं आपको सुनाना चाहता हूं वो इन लोगों के लिए

1671
01:59:33,240 --> 01:59:37,240
तो नसीहत का ही काम करते हैं जो हनुमान जी ने सुंदर कांड में दो दोहे कहे हैं दोहा

1672
01:59:37,240 --> 01:59:42,120
नंबर 21 और 22 मैं पहला दोहा बोल देता हूं प्रणतपाल

1673
01:59:42,120 --> 01:59:46,120
रघुनायक करुणा सिंधु खरारी गए शरण

1674
01:59:46,120 --> 01:59:50,120
प्रभु राख है तब अपराध बसारी

1675
01:59:50,120 --> 01:59:54,120
और दूसरा दूसरा बहुत पावरफुल है मोह मूल

1676
01:59:54,120 --> 01:59:58,200
बहु सूल प्रद त्याग हु तम अभिमान भज

1677
01:59:58,200 --> 02:00:03,240
राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान

1678
02:00:03,240 --> 02:00:07,480
ये ये नसीहत का काम है कर रहे हैं ये दो दोहे हनुमान

1679
02:00:07,480 --> 02:00:12,320
जी के बिल्कुल बहुत

1680
02:00:12,320 --> 02:00:16,560
बढ़िया इस ता हूं दंडकारण्य

1681
02:00:16,560 --> 02:00:20,680
का उस पर शिवजी जब भगवान के वहां गए थे ना कुंभज ऋषि के आश्रम

1682
02:00:20,680 --> 02:00:23,280
में भगवान का तो था कि मैं भी

1683
02:00:23,280 --> 02:00:27,640
देखो भगवान शंकरी बो स्वयं जो है धरती पर आए थे सत्संग

1684
02:00:27,640 --> 02:00:31,640
सुनने के लिए तो कहां थे कुंज ऋषि के यहां जब कुजरी स के आए

1685
02:00:31,640 --> 02:00:35,640
उ संग चली जग जननी भवानी भवानी का क्या दिया संबोधन

1686
02:00:35,640 --> 02:00:39,760
दिया मां सती को अब जब कथा सुनी तो वहां से चलते तो

1687
02:00:39,760 --> 02:00:43,800
दंड कारण में लीला चल रही थी भगवान की लीला तो भगवान

1688
02:00:43,800 --> 02:00:48,320
जा रहे थे उस भी मैंने बात की हुई है ब्रह्मा विष्णु

1689
02:00:48,320 --> 02:00:52,520
महे दो लोगों को सुनले बस और अब आज की जो लाइव उसको

1690
02:00:52,520 --> 02:00:56,880
वो करेंगे और लाइव का एक शेड्यूल बनाया है कोई थोड़ी सी जो व्यक्तिगत

1691
02:00:56,880 --> 02:01:00,960
जीवन शैली वो एडजस्ट नहीं हो पा रही है तो आठ

1692
02:01:00,960 --> 02:01:05,200
से 10 ही करेंगे ज्यादा देर नहीं करेंगे क्योंकि क्या है कि धरातल के कार्य बिगड़

1693
02:01:05,200 --> 02:01:09,400
जाते हैं दूसरा पूरा दिन प्रभावित हो जाता है अनियमितता से अगर उन लोगों

1694
02:01:09,400 --> 02:01:13,600
के साथ उनके पास शैतान है उनके पास अगर शैतान है तो हमारे

1695
02:01:13,600 --> 02:01:18,000
पास हनुमान है क्या बात है क्या बात है

1696
02:01:18,000 --> 02:01:22,200
क्या बात है बहुत सुंदर बहुत सुंदर बहुत सुंदर उनके पास शैतान

1697
02:01:22,200 --> 02:01:26,320
हमारे पास हनुमान है सब सुख ल तुम्हारी शरणा तुम रक्षक

1698
02:01:26,320 --> 02:01:30,360
का कोरना संकट कटे मिटे सब परा

1699
02:01:30,360 --> 02:01:33,600
जो सुमिरे हनुमत

1700
02:01:33,600 --> 02:01:37,880
बलरा राम राम जय श्री राम विशाल जी

1701
02:01:37,880 --> 02:01:38,480
आपने सुना

1702
02:01:38,480 --> 02:01:42,840
है अपना विनु पद चले मिनट जीी

1703
02:01:42,840 --> 02:01:46,880
जी मिनट एक मिनट जय श्री राम

1704
02:01:46,880 --> 02:01:52,000
श्रीराम ज शीम बता बताए

1705
02:01:52,000 --> 02:01:58,000
जो आप पाखंड फैला रहे हैं आपका चेहरा

1706
02:01:58,200 --> 02:02:04,200
दिखाइए रामपली हैई हनुमान जी का ये काल नेमी

1707
02:02:05,320 --> 02:02:09,320
हैको पता नहीं इनको तुम लोगों को पता नहीं है

1708
02:02:09,320 --> 02:02:13,400
देखो राम पालियो जो तुम ये कर रहे हो कि अपना नाम बदल के आओगे फिर जय

1709
02:02:13,400 --> 02:02:17,480
श्री राम यहां पर फिर अभद्र भाषा बोलोगे जो भी बोलोगे पाखंड तो तुम

1710
02:02:17,480 --> 02:02:22,800
लोगों ने फैला रखा धर्म के नाम पर रामपाल के नाम पर रोटी

1711
02:02:22,800 --> 02:02:27,040
मुझे जवाब देने दीजिए मुझे जवाब देने दीजिए देखो ऐसा है आज मंगलवार भी

1712
02:02:27,040 --> 02:02:31,160
है तुमने जो भी खेल खेला था अब तक बहुत बढ़िया चल रहा था

1713
02:02:31,160 --> 02:02:35,240
बहुत बढ़िया चल रहा था एक एक बॉल पर तुम हर बॉल पर दो रन तीन रन चार रन

1714
02:02:35,240 --> 02:02:39,560
छ सिक्स भी मार रहे थे खेल बहुत अच्छा चल रहा था

1715
02:02:39,560 --> 02:02:43,880
तुम्हारा अब पाला गलत आदमी से पड़ गया

1716
02:02:43,880 --> 02:02:48,320
है बात है बहुत बढिया तुमने खेल रचाया

1717
02:02:48,320 --> 02:02:52,440
मैं एक चीज बोलूंगा पिछली बार भी मैंने बोला था तुम्हारी

1718
02:02:52,440 --> 02:02:53,600
भाषा में जवाब देने

1719
02:02:53,600 --> 02:02:58,880
आए हैं सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने

1720
02:02:58,880 --> 02:03:03,120
को बजरंगी भी है हा

1721
02:03:03,120 --> 02:03:07,120
साथ में बजरंगी भी है पूरी राम पूरी राम सेना

1722
02:03:07,120 --> 02:03:11,160
है वान सेना तो कुल मिला के

1723
02:03:11,160 --> 02:03:15,280
बात एकही है खेल तुम्हारा इस बार भी अच्छा है कोई

1724
02:03:15,280 --> 02:03:19,880
ऐसा नहीं है बहुत बढ़िया खेल रहे हो बस आदमी गलत चुन लिया तुमने

1725
02:03:19,880 --> 02:03:24,000
इनको ऊपर आने देते अपने आप चले इनसे वार्ता तो करते थोड़ा नहीं

1726
02:03:24,000 --> 02:03:28,080
नहीं नहीं बिना चेहरे बिना चेहरे के बात नहीं करते चलिए

1727
02:03:28,080 --> 02:03:32,120
अब सभी को जय श्री राम समय देने के लिए शीराम

1728
02:03:32,120 --> 02:03:36,280
जय जय जय हनुमान गसाई कृपा करो गुरुदेव की नाई गुरुदेव की

1729
02:03:36,280 --> 02:03:40,360
शरा दो तीन बड़ी बड़ी मोटी मोटी आवश्यक जानकारी पाई

1730
02:03:40,360 --> 02:03:44,360
है एक ब्रह्म को भी वेद ब्रह्म को वेद भी कहा जाता है

1731
02:03:44,360 --> 02:03:48,360
यह हो गई इनफॉर्मेटिव शास्त्रोक्त बात और दूसरी जो रोचक

1732
02:03:48,360 --> 02:03:52,360
और प्रासंगिक जानकारी है कि इनकी किताबों में इनका

1733
02:03:52,360 --> 02:03:56,520
एड्रेस वास्तविक है या नहीं इसकी जांच हो इस

1734
02:03:56,520 --> 02:04:00,600
बारे में समाधान दे जितने भी

1735
02:04:00,600 --> 02:04:04,720
यह सब है झूठ भाई अभिषेक और एमपी स्लो खबर वाला है

1736
02:04:04,720 --> 02:04:08,600
जो एमपी खबर स्लो

1737
02:04:08,600 --> 02:04:12,680
य सब लोग कर व तो अपने बराबर विद्वान किसी को

1738
02:04:12,680 --> 02:04:16,720
नहीं समझता उसको कुछ ज्ञान ही नहीं है धर्मशास्त्रों का

1739
02:04:16,720 --> 02:04:20,720
तो देखो मैं फिर ही कहूंगा और किसी को भी किसी को

1740
02:04:20,720 --> 02:04:24,800
भी वैचारिक मतभेद के निमित्त कोई चर्चा करनी

1741
02:04:24,800 --> 02:04:28,800
है सम्मान के साथ एक मर्यादा में रहते हुए तोव

1742
02:04:28,800 --> 02:04:32,880
हमसे संपर्क कर सकता है डंके की चोट पर हम आए

1743
02:04:32,880 --> 02:04:37,320
दिन अपना नंबर देते हैं यह जो दुर्गा शत्रु ठाकुर बहन जी हैं

1744
02:04:37,320 --> 02:04:41,600
यह इतना इधर उधर बोला करती है तेरा चैलेंज चैलेंज स्वीकार है ये स्वीकार

1745
02:04:41,600 --> 02:04:45,720
है अरे भाई संपर्क क्यों नहीं करती हो संपर्क करो ना र

1746
02:04:45,720 --> 02:04:51,720
लग रहा है क्या संपर्क करो 74836

1747
02:04:52,280 --> 02:04:56,320
यह नंबर है यह नंबर है राम के भक्त का कबीर के भक्त का

1748
02:04:56,320 --> 02:05:01,120
नहीं है यह राम के भक्त का नंबर है कन करो

1749
02:05:01,120 --> 02:05:05,200
भक्त थे राम [संगीत] के के

1750
02:05:05,200 --> 02:05:09,240
का नंबर नहीं है का नंबर नहीं

1751
02:05:09,240 --> 02:05:13,280
है फोन करो इस पर लता है क्या

1752
02:05:13,280 --> 02:05:17,040
उंगलिया काती है

1753
02:05:17,040 --> 02:05:21,680
क्या भैया मैं सभी सना सेरी प्रार्थना है

1754
02:05:21,680 --> 02:05:25,920
विल जी म महर्षि तुलसीदास जी ने बोला है बिनु

1755
02:05:25,920 --> 02:05:30,600
पद चले सुने बिनु काना कर बिनु कर्म करे विधि नाना

1756
02:05:30,600 --> 02:05:34,680
तो ये उन्होने श्री राम जी के लिए बोला हुआ है

1757
02:05:34,680 --> 02:05:38,720
अरे स्वामी रामत मानस में यहां तक लिखा हुआ है ये

1758
02:05:38,720 --> 02:05:43,000
लोग नाम जप को आजकल उल्टा सीधा बोलने लग ग कि नाम जप से क्या होगा अरे रामचरित

1759
02:05:43,000 --> 02:05:47,200
मास में गोस्वामी तुलसीदास जी ने ये भी लिखा है नहीं कली कर्म भक्ति विवेक राम नाम

1760
02:05:47,200 --> 02:05:52,880
अवलंबन काल नेमी चल कपट निधान नाम सु समत हनुमान

1761
02:05:52,880 --> 02:05:57,080
अरे देखो मैंने मैंने आपको एक सूत्र दिया उसको ध्यान रखो ज्यादा

1762
02:05:57,080 --> 02:06:01,240
इनको अपने शास्त्रों का वो प्रमाण माण दिखाने में मेहनत मत करो हम

1763
02:06:01,240 --> 02:06:05,240
नहीं दिखाए वो करते रहोगे वो अनंत समय तक चलता रहेगा हर

1764
02:06:05,240 --> 02:06:07,440
दिन लेकर के आएंगे मुझको एक सवाल का जवाब

1765
02:06:07,440 --> 02:06:12,160
दे दो मैं तुम्हारा हो जाऊंगा यही करते रहेंगे

1766
02:06:12,160 --> 02:06:16,760
सभी से मेरी एक प्रार्थना है सभी सभी से मेरी प्रार्थना है कि भाई लोग बहनों

1767
02:06:16,760 --> 02:06:20,840
जितने भी हमारे सनातनी भाई बहन है प्लीज इस लंका को भस्म करना है तो सब

1768
02:06:20,840 --> 02:06:25,000
एकजुट हो जाओ इस लंका को जलाने के लिए जितना हो सके उतना हनुमान जी पू जैसा

1769
02:06:25,000 --> 02:06:29,160
लंबे हो जाओ और भस्म कर दो इसे जिन लोगों से बातचीत नहीं

1770
02:06:29,160 --> 02:06:33,280
हो पाई है व हम लोग जब नेक्स्ट लाइव में आएंगे तब उनको लेंगे

1771
02:06:33,280 --> 02:06:37,280
समय के उसकी सीमा की कारण अब यहीं पर रोक रहे लाइव

1772
02:06:37,280 --> 02:06:41,640
को सभी को जय श्री राम आने के लिए आभार

1773
02:06:41,640 --> 02:06:45,720
समने महादेव हर हर महादेव जय

1774
02:06:45,720 --> 02:06:49,720
बजरंग [संगीत]
