1
00:00:01,390 --> 00:00:07,390
[संगीत]

2
00:00:08,160 --> 00:00:12,160
सभी को जय श्री राम आशा करते हैं

3
00:00:12,160 --> 00:00:16,240
आप सभी कुशल मंगल होंगे और जैसा

4
00:00:16,240 --> 00:00:21,160
कि आज आपने देख ही लिया है [संगीत]

5
00:00:21,160 --> 00:00:25,800
कि यह जो महोत्सव है

6
00:00:25,800 --> 00:00:29,960
उसमें रामपाल दास के नाम से दोबारा व

7
00:00:29,960 --> 00:00:34,120
लोक आश्रम वाला स्टॉल लगा हुआ

8
00:00:34,120 --> 00:00:38,320
था जहां पर हम आज गए हमने विरोध प्रकट किया और यथोचित

9
00:00:38,320 --> 00:00:42,560
कारवाया व ई जिसके संबंध में विस्तृत वीडियो आपको

10
00:00:42,560 --> 00:00:46,640
जल्द ही देखने को मिल जाएगा पर इस सब के

11
00:00:46,640 --> 00:00:51,360
साथ में मैं एक बात कहूंगा हम तो अपना कार्य जो करना है वह कर ही रहे हैं

12
00:00:51,360 --> 00:00:55,400
और करेंगे जब तक अंतिम सांस

13
00:00:55,400 --> 00:00:58,160
है तब तक

14
00:00:58,160 --> 00:01:02,440
करेंगे पर आप जानते हैं

15
00:01:02,440 --> 00:01:06,520
कि हमने हर जगह मोर्चा खोल रखा है ऐसा तो है

16
00:01:06,520 --> 00:01:10,720
नहीं कि केवल रामपाल या केवल

17
00:01:10,720 --> 00:01:14,720
इकन या केवल नास्तिक या केवल

18
00:01:14,720 --> 00:01:16,720
मुसलमान या केवल

19
00:01:16,720 --> 00:01:20,840
आर्य समाज हर जगह मोर्चा खुला हुआ है तो

20
00:01:20,840 --> 00:01:26,040
ऐसे में क्या है कि बहुत सारे एक साथ में विरोध विरोधी

21
00:01:26,040 --> 00:01:30,720
है जो समय आने पर हो सकता है एकजुट होकर के भी

22
00:01:30,720 --> 00:01:36,720
प्रयास करें हमारे इस अभियान को नष्ट करने

23
00:01:37,400 --> 00:01:42,120
का इस बारे में आपको पहले से पता होगा

24
00:01:42,120 --> 00:01:46,560
हमने एक वीडियो डाला था जाकिर नायक के ऊपर

25
00:01:46,560 --> 00:01:50,800
काफी पहले वह वीडियो डिलीट करवा दिया गया

26
00:01:50,800 --> 00:01:54,680
विरोधियों के द्वारा

27
00:01:54,680 --> 00:02:00,640
और अभी हाल ही में हमारा एक वीडियो और डिलीट हुआ है

28
00:02:00,640 --> 00:02:04,840
जिसमें हमने कोई अभद्र भाषा का उपयोग हम करते नहीं है ना ही अपने कमेंट्स में ना ही उसमें

29
00:02:04,840 --> 00:02:08,880
मगर वो भी डिलीट हुआ तो यह चैनल

30
00:02:08,880 --> 00:02:13,600
को रोकने की चैनल के द्वारा प्रसारित प्रसारित होने वाले मुख्य रूप से

31
00:02:13,600 --> 00:02:18,360
सर्वशक्तिमान ईश्वर के बारे में जो संदेश है

32
00:02:18,360 --> 00:02:22,640
उसको रोकने की जिसमें जितनी तथा है वह हर संभव

33
00:02:22,640 --> 00:02:27,080
प्रयास कर रहा है तो

34
00:02:27,080 --> 00:02:31,120
इसके साथ ही साथ और देख लीजिए हमको आए दिन धमकियां आती रहती हैं

35
00:02:31,120 --> 00:02:31,880
वह जो वार्निंग

36
00:02:31,880 --> 00:02:36,640
होती है वह आती रहती हैं कि आपने गलत कमेंट क्यों किया है

37
00:02:36,640 --> 00:02:40,760
जबकि हमारा जो कमेंट होता है हमारे बात करने की जो शैली है वह सदैव

38
00:02:40,760 --> 00:02:45,600
मर्यादित होती है फिर भी आती है

39
00:02:45,600 --> 00:02:49,880
इसका कारण क्या है कि जो विरोधी पक्ष है

40
00:02:49,880 --> 00:02:53,880
वह संख्या में बहुत ज्यादा है और हम

41
00:02:53,880 --> 00:02:58,000
संख्या में बहुत कम है ऐसा नहीं है कि हम डर रहे हैं मगर जो

42
00:02:58,000 --> 00:03:04,000
स्थिति है उसको यथावत रखना भी आवश्यक होता

43
00:03:05,520 --> 00:03:09,760
है इसके साथ ही साथ अगर यूट्यूब से हट के देखें

44
00:03:09,760 --> 00:03:13,840
तो जैसे आज हमने यहां पर यह जो विरोध प्रकट किया वहां पर हमने जाकर

45
00:03:13,840 --> 00:03:17,880
के कहा कि तुम कैसे इतनी नीचता भरी यह सब बातें क्यों कर रहे हो

46
00:03:17,880 --> 00:03:22,080
हमारी माता के बारे में तो अब हमें धमकी

47
00:03:22,080 --> 00:03:26,760
आना शुरू होंगी कोर्ट केस की धमकी होगी

48
00:03:26,760 --> 00:03:32,760
तरह तरह के धमका के प्रयोग किए

49
00:03:33,080 --> 00:03:37,080
जाएंगे है ना यह सब

50
00:03:37,080 --> 00:03:42,480
इसलिए हो रहा है क्योंकि

51
00:03:42,480 --> 00:03:46,640
हमने समर्पित कर दिया है स्वयं को कि

52
00:03:46,640 --> 00:03:50,760
हम धर्म की रक्षा जो धर्म के बारे में जो उन्मादी बातें बताने

53
00:03:50,760 --> 00:03:54,800
वाले लोग हैं या जो धर्म के बारे में जो विवाद आसपास शिक्षाएं हैं

54
00:03:54,800 --> 00:03:58,800
जिसके कारण हमारा धर्म बट रहा है उसको

55
00:03:58,800 --> 00:04:02,160
हम

56
00:04:02,160 --> 00:04:06,320
रोकेंगे जब तक हमारे अंदर सामर्थ्य

57
00:04:06,320 --> 00:04:11,760
है तब तक हम उसे

58
00:04:11,760 --> 00:04:15,760
रोकेंगे तो फैसला आप लोगों का है कि

59
00:04:15,760 --> 00:04:20,120
आपको क्या करना है आपको किस तरीके

60
00:04:20,120 --> 00:04:24,160
से कैसे हमारा साथ देना है कैसे खड़े होना

61
00:04:24,160 --> 00:04:28,200
है क्योंकि हम तो भाई अपनी मां के लिए लड़

62
00:04:28,200 --> 00:04:32,280
रहे हैं अब मुझे नहीं पता वो आपकी भी मां है कि नहीं है

63
00:04:32,280 --> 00:04:36,280
वो आप लोगों के ऊपर है आपकी भी मां है आपका

64
00:04:36,280 --> 00:04:40,560
भी धर्म है तो लड़ साथ निभाए

65
00:04:40,560 --> 00:04:45,080
जो कर सकते हैं वह करिए

66
00:04:45,080 --> 00:04:49,600
और नहीं भी कर सकते तो मन से प्रार्थनाएं

67
00:04:49,600 --> 00:04:55,120
करिए हम तो कर र कर ही रहे

68
00:04:55,120 --> 00:04:59,120
हैं अभी कुछ ही दिन पहले मुझे

69
00:04:59,120 --> 00:05:03,880
वार्निंग मिली थी मेरे कमेंट्स के लिए भाई आपके कमेंट जो है आप जो है

70
00:05:03,880 --> 00:05:07,920
य की गाइडलाइंस के विरुद्ध जाकर के कर रहे हो यह तो कोई विरोधी पक्ष

71
00:05:07,920 --> 00:05:13,920
वाला भी जो है व सामने आकर के य नहीं कह सकता कि हमारे कमेंट्स जो होते

72
00:05:14,000 --> 00:05:18,400
हैं हां एक बैकअप चैनल पर काम चल रहा है

73
00:05:18,400 --> 00:05:22,840
एक हमारा चैनल है सर्वशक्तिमान नाम से

74
00:05:22,840 --> 00:05:28,840
सर्वशक्तिमान चैनल को आप लोग फॉलो करिए

75
00:05:30,280 --> 00:05:34,280
सर्वशक्तिमान चैनल को आप फॉलो करिए वह चैनल हमने बनाया बैकअप के लिए अभी

76
00:05:34,280 --> 00:05:38,360
उस पर हम लोगों ने वीडियोस नहीं डाले हैं आप लोग उसको फॉलो करिए

77
00:05:38,360 --> 00:05:42,400
हम लोग जल्द से जल्द जो है वहां पर थोड़ा सा सक्रिय होंगे और कुछ चीजें

78
00:05:42,400 --> 00:05:44,880
वहां पर भी

79
00:05:44,880 --> 00:05:49,640
करेंगे अभी बात यह हो रही है कि यह हमारे ऊपर

80
00:05:49,640 --> 00:05:53,800
किस तरह से प्रभाव डालने का कार्य किया

81
00:05:53,800 --> 00:05:59,800
जा रहा है एक मिनट में जरा

82
00:06:05,110 --> 00:06:11,110
[संगीत]

83
00:06:12,040 --> 00:06:16,880
तो खैर आज आपके लिए एक अच्छी सूचना यह भी है कि

84
00:06:16,880 --> 00:06:20,960
एक जगह से गलत शिक्षा सनातन धर्म का नाम लेकर के सनातन

85
00:06:20,960 --> 00:06:25,160
धर्म के विरोध में शिक्षा परोसी जा रही थी जिसको हमने यथावत रूप से

86
00:06:25,160 --> 00:06:30,240
वहां पर प्रतिकार करते हुए बाद किया उसे

87
00:06:30,240 --> 00:06:34,400
और अब उनकी ओर से भी हमें धमकी आने लगी तुरंत है ना

88
00:06:34,400 --> 00:06:38,600
तो आप लोगों का कर्तव्य ये है कि कम से कम अगर कुछ

89
00:06:38,600 --> 00:06:44,600
भी नहीं कर पा रहे तो मोरल सपोर्ट जरूर एक

90
00:06:44,960 --> 00:06:49,080
जो हम जल्द ही अगर अभी चैनल का नाम

91
00:06:49,080 --> 00:06:53,640
भी सुनिश्चित नहीं है निश्चित नहीं है अगर हम जल्द ही वह जो चैनल है

92
00:06:53,640 --> 00:06:57,880
जो बैकअप के लिए बनाया है तो उस चैनल को जल्दी

93
00:06:57,880 --> 00:07:01,240
उसका लिंक वगैरह भी शेयर कर देंगे

94
00:07:01,240 --> 00:07:05,720
और अगर नाम बदलेगा तो नाम भी बदल दिया जाएगा उसमें अभी उसका

95
00:07:05,720 --> 00:07:10,240
चीजें भी सुनिश्चित नहीं पर काम चल रहा

96
00:07:10,240 --> 00:07:15,240
है तो

97
00:07:15,240 --> 00:07:19,320
अ अभी क्या हो रहा है कि जैसे हमारी लाइव चलती है तो उसमें आर्य

98
00:07:19,320 --> 00:07:23,360
समाज वाले लोग आते हैं रामपाल के नाम से रामपाल वाले लोग आते हैं आर्य समाज के

99
00:07:23,360 --> 00:07:27,400
नाम से अभी आपने कुछ दिन पहले एक बंगाल में

100
00:07:27,400 --> 00:07:31,320
रहने वाले आर्य समाजी का वीडियो देखा होगा

101
00:07:31,320 --> 00:07:36,480
उसमें वह हमारा विरोध करते

102
00:07:36,480 --> 00:07:40,680
समय उस उन राम पालियो का समर्थन लेने का प्रयास

103
00:07:40,680 --> 00:07:44,680
करता दिखाई देगा आपको जिन राम पालियो के सरगना यानी रामपाल को

104
00:07:44,680 --> 00:07:48,800
जेल में पहुंचाने वाला आर्य समाज ही है तो आप यह सोच

105
00:07:48,800 --> 00:07:53,040
के देखिए कि अपने मत की रक्षा करने के लिए व्यक्ति कहां तक जा रहा

106
00:07:53,040 --> 00:07:57,080
है क्या जब हम वहां पर लड़ रहे हैं हम चिल्ला चिल्लाकर

107
00:07:57,080 --> 00:08:01,400
जब यह कह रहे हैं किय रामपाल ब्रह्मा विष्णु महेश की बुराई

108
00:08:01,400 --> 00:08:06,000
करते हैं तो वह विष्णु जो है वह क्या स्कोन वाले स्कन के विष्णु नहीं

109
00:08:06,000 --> 00:08:10,680
है है मगर स्कोन वाले साथ क्यों नहीं

110
00:08:10,680 --> 00:08:14,760
आएंगे क्योंकि वह तभी एक्टिव होते हैं जब उनके

111
00:08:14,760 --> 00:08:19,000
पर्टिकुलर विष्णु तत्व पर नहीं जब पर्टिकुलर उनकी

112
00:08:19,000 --> 00:08:24,120
जो चीजें हैं उसी परिवार होता है तभी वह एक्टिव होते हैं

113
00:08:24,120 --> 00:08:30,120
जैसे सनातन पर बात की उसमें

114
00:08:30,200 --> 00:08:34,280
सनातन डेंगू है यह है वो तो तो एक्टिव नहीं हुए मगर किसी ने स्कोन के खिलाफ

115
00:08:34,280 --> 00:08:38,960
कुछ बोल दिया था मुकदमा लिखवा दिया अरे भाई रामपाल कर तो रहा है

116
00:08:38,960 --> 00:08:43,160
इतनी सारी चीजें कर रहा है विष्णु भगवान के बारे में

117
00:08:43,160 --> 00:08:49,160
रामपाल की बुक दिखाता हूं मैं आपको

118
00:09:05,920 --> 00:09:08,480
ब

119
00:09:08,480 --> 00:09:13,240
करो माता पार्वती है रामचंद्र जी की

120
00:09:13,240 --> 00:09:15,680
र्म

121
00:09:15,680 --> 00:09:21,680
भावना कर रहा जो आपने किया है बत जंडा काम किया है

122
00:09:28,360 --> 00:09:34,360
कर आप क्यों कर

123
00:09:35,480 --> 00:09:39,200
रहे

124
00:09:39,200 --> 00:09:44,680
मा नहीं है रा ये है जेल

125
00:09:44,680 --> 00:09:49,600
में हर पेट प र पेट प गाली द इन लोगों ने

126
00:09:49,600 --> 00:09:53,800
हिंदू धर्म के माता की पूजा करने

127
00:09:53,800 --> 00:09:57,960
वाले मूर्ख है अरे चला

128
00:09:57,960 --> 00:10:02,720
चिलाए नहीं

129
00:10:02,720 --> 00:10:08,720
दुर्गा माता के साथ बलात्कार हो रहा

130
00:10:16,800 --> 00:10:20,800
है वीडियो हमारी जो डिलीट हुई है अभी हाल ही में वही है

131
00:10:20,800 --> 00:10:24,880
जिसमें हमने किसी अंडर कवर्ड गुंडे का पर्दा फाश किया था

132
00:10:24,880 --> 00:10:28,960
कि वह अलंकार समाज ने उसे जो है लात मारी हुई है उसको पहचानने

133
00:10:28,960 --> 00:10:33,240
से मना कर दिया उस वीडियो को डिलीट करवा दिया गया

134
00:10:33,240 --> 00:10:37,360
और जैसे कि मैं अभी बात कर रहा था कि हम जब वहां पर विष्णु

135
00:10:37,360 --> 00:10:41,400
की विष्णु भगवान के सम्मान की बात कर रहे हैं तो क्या वह

136
00:10:41,400 --> 00:10:45,400
विष्णु भगवान क्या स्कोन के नहीं है क्या इकोन

137
00:10:45,400 --> 00:10:49,600
उस पर पर्टिकुलर उस पर जब कोई प्रहार होता है तो वह

138
00:10:49,600 --> 00:10:53,720
एफआईआर करवाता है वह यह करता है तो क्या इसकन इस पर एफआईआर

139
00:10:53,720 --> 00:10:54,640
नहीं करवा सकता

140
00:10:54,640 --> 00:10:58,760
है करवा सकता है मगर

141
00:10:58,760 --> 00:11:02,800
यह वो चीज हैं जो तभी यह वह संस्थाएं जो अपने मत की

142
00:11:02,800 --> 00:11:06,840
रक्षा कर रही है मगर प्रॉब्लम यह है कि हम अपने केवल अपने मत

143
00:11:06,840 --> 00:11:10,840
की रक्षा नहीं कर रहे हैं हम रक्षा कर रहे

144
00:11:10,840 --> 00:11:15,560
हैं सार्वभौम सनातन सिद्धांतों की उनकी रक्षा करते समय

145
00:11:15,560 --> 00:11:19,640
जो भी कोई सामने आएगा तो उससे हमें उसका हमें

146
00:11:19,640 --> 00:11:23,960
प्रतिकार करना पड़ रहा है और नतीजतन क्या हो रहा है

147
00:11:23,960 --> 00:11:27,240
व्यक्तिगत रूप से हरेसमेंट

148
00:11:27,240 --> 00:11:31,280
कोर्ट केस की धमकी इत्यादि अभी आपने कुछ दिन पहले देखा

149
00:11:31,280 --> 00:11:35,280
होगा अंडर कवर्ड गुंडा बोल रहा था अपना कोट वो दिखाओ यह दिखाओ वरना हम

150
00:11:35,280 --> 00:11:39,680
यह करेंगे वो करेंगे है ना तो

151
00:11:39,680 --> 00:11:43,840
यह सारी चीजें चल रही है अब इसमें आप लोगों को यह

152
00:11:43,840 --> 00:11:48,120
देखना है कि आप लोगों आप लोग क्या कर सकते हो हम अपना कार्य

153
00:11:48,120 --> 00:11:52,640
कर रहे हैं कर रहे थे कर रहे हैं करते रहेंगे

154
00:11:52,640 --> 00:11:57,480
आप लोगों को किस रूप में कैसे खड़े होना है हमारे साथ

155
00:11:57,480 --> 00:12:00,320
यह कोई

156
00:12:00,320 --> 00:12:04,320
खेल नहीं है जो हम लोग केवल मौज मजा मनोरंजन

157
00:12:04,320 --> 00:12:09,280
के लिए खेल रहे हैं यह एक युद्ध

158
00:12:09,280 --> 00:12:12,880
है जो हमें जीतना

159
00:12:12,880 --> 00:12:14,240
है और

160
00:12:14,240 --> 00:12:18,640
युद्ध जीतने के लिए टीम वर्क चाहिए होता है

161
00:12:18,640 --> 00:12:20,920
तो

162
00:12:20,920 --> 00:12:25,120
इसलिए आप लोग देखिए कि आप लोगों का क्या कर्तव्य बनता

163
00:12:25,120 --> 00:12:31,120
है

164
00:12:37,520 --> 00:12:43,520
यह वीडियो डिलीट हुआ है

165
00:13:02,640 --> 00:13:06,240
यह

166
00:13:06,240 --> 00:13:11,520
देखि अरे किसी बात पर तो खून खोलेगा किसी

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00:13:11,520 --> 00:13:15,840
का दिख रहा है

168
00:13:15,840 --> 00:13:20,360
यह विष्णु क्या केवल मेरे विष्णु है हा

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00:13:20,360 --> 00:13:24,120
हो सकता

170
00:13:24,120 --> 00:13:28,120
है क्योंकि हमारे विष्णु सर्वशक्तिमान है ना हो

171
00:13:28,120 --> 00:13:34,120
सकता है कि उसके ना हो जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान नहीं

172
00:13:34,760 --> 00:13:40,760
मानता ये यह भगवान शिव क्या मेरे शिव है

173
00:13:41,320 --> 00:13:47,320
[संगीत]

174
00:13:52,640 --> 00:13:58,640
केवल यह माता पार्वती के लिए क्या लिखा है

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00:13:59,280 --> 00:14:02,920
दिख रहा है

176
00:14:02,920 --> 00:14:07,520
बलात्कार ये केवल मेरी माता

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00:14:07,520 --> 00:14:12,880
है आप सबकी नहीं

178
00:14:12,880 --> 00:14:18,880
है और नहीं है तो कौन कह रहा है फिर अपने आपको को सनातनी

179
00:14:26,920 --> 00:14:31,560
हिंदू ये माता सीता माता पार्वती मेरी माता है केवल

180
00:14:31,560 --> 00:14:35,800
जो सीता के रूप में श्री राम के पास जा रही है कि श्री राम उन्हें

181
00:14:35,800 --> 00:14:41,800
प्यार करें संतुष्ट

182
00:14:45,280 --> 00:14:47,400
करें

183
00:14:47,400 --> 00:14:51,520
इतना ही सहिष्णु मत बनिए

184
00:14:51,520 --> 00:14:55,920
वो उदारता जो आपके अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो जाए व

185
00:14:55,920 --> 00:15:01,920
उदारता नहीं कायरता होती है

186
00:15:05,000 --> 00:15:09,240
तो देखिए प्रहार तो हो ही रहा है

187
00:15:09,240 --> 00:15:13,240
आप लोगों के साथ की आवश्यकता है लिंक दे दीजिए भाई कोई आना चाहता

188
00:15:13,240 --> 00:15:17,320
है तो चर्चा के लिए व जो एक मातृ शक्ति आई थी

189
00:15:17,320 --> 00:15:21,520
जो अचानक से चली गई थी बिल्कुल एंडिंग मोमेंट में उनसे

190
00:15:21,520 --> 00:15:26,120
बातें हो रही थी जो यह पूछ रही थी कि मुझे क्या करना चाहिए

191
00:15:26,120 --> 00:15:29,680
उन्होंने हमसे संपर्क किया था

192
00:15:29,680 --> 00:15:33,680
और जो बातें उस दिन हमने उनसे कही थी उनसे व सहमत भी

193
00:15:33,680 --> 00:15:38,320
थी रामपाल की जो फॉलोअर थी और उन्होंने बताया था

194
00:15:38,320 --> 00:15:42,440
कि उनका विवाह होने वाला है जिसके साथ वह प्रेमानंद

195
00:15:42,440 --> 00:15:48,440
जी महाराज के फॉलोअर है तो दे दो भाई

196
00:15:57,560 --> 00:16:02,040
इनको जो चर्चा करना चाहता है व आ सकता

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00:16:02,040 --> 00:16:06,120
है वैचारिक मतभेद के निमित्त यह ध्यान

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00:16:06,120 --> 00:16:11,440
रखिएगा जिज्ञासु हो तो क्लास में

199
00:16:11,440 --> 00:16:15,480
आइए यदि कोई अपनी आईडियोलॉजी है

200
00:16:15,480 --> 00:16:21,480
जो हमारे विरोध में

201
00:16:27,920 --> 00:16:32,280
है आवान ऐसा क्या था उस वीडियो में वाच वाला जो एक्सपोज

202
00:16:32,280 --> 00:16:37,120
करा था एक्सपोज यह किया था कि

203
00:16:37,120 --> 00:16:41,880
किस प्रकार से अलंकार समाज यों ने हाथ खड़े कर दिए हैं

204
00:16:41,880 --> 00:16:46,400
पहले कहते हैं कि हम ऋषि वाद जो है वह हमारा ही चैनल है

205
00:16:46,400 --> 00:16:50,440
उस चैनल को ऑपरेट करने वाला जो मुख्य वक्ता है वह कृते

206
00:16:50,440 --> 00:16:54,520
पटेल नाम का कोई है और वह हमारे यहां की संस्था के पदाधिकारी

207
00:16:54,520 --> 00:16:58,680
हैं उसके बाद हम जब उसके बारे में कुछ ऐसी चीजें देते

208
00:16:58,680 --> 00:17:02,880
हैं आपत्ति जनक है तो पत्र में वो लिखित में यह दे देते हैं कि

209
00:17:02,880 --> 00:17:07,360
हम ऋषि वाच को नहीं जानते

210
00:17:07,360 --> 00:17:12,960
राकेश

211
00:17:12,960 --> 00:17:18,320
कुमार आपने कहा कि शिवांश पाखंडी

212
00:17:18,320 --> 00:17:23,040
है रामपाल दास का पाखंड देखेंगे क्या

213
00:17:23,040 --> 00:17:27,160
बहुत पाखंड है देखो अभी पूरा नहीं है

214
00:17:27,160 --> 00:17:31,000
मगर काफी है

215
00:17:31,000 --> 00:17:35,400
तो पाखंड आपको अपने रामपाल

216
00:17:35,400 --> 00:17:39,680
दास का ओपन करवाना है संदीप आर्य

217
00:17:39,680 --> 00:17:44,960
करके कोई आया

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00:17:44,960 --> 00:17:49,000
है हां जी बोलिए संदी जय

219
00:17:49,000 --> 00:17:53,080
श्री राम सर जीय जो आप हमें

220
00:17:53,080 --> 00:17:57,840
बता रहे हैं वोह हमने भी सुना है बहुत बाकी है

221
00:17:57,840 --> 00:18:02,120
ना मुझे ये अच्छा नहीं लगता है

222
00:18:02,120 --> 00:18:06,680
मेरे साथ में ये आती है क्योंकि

223
00:18:06,680 --> 00:18:10,840
मैंने मैंने माता पिता मान रखे हैं महादेव और

224
00:18:10,840 --> 00:18:13,080
पार्वती

225
00:18:13,080 --> 00:18:18,840
को और मैंने दर्शन भी करे हैं महादेव

226
00:18:18,840 --> 00:18:23,200
के गुस्सा बहुत आता मेरे को

227
00:18:23,200 --> 00:18:27,280
तु मैं नहीं चाहता कि यह जो चीज चला रहे हैं य

228
00:18:27,280 --> 00:18:31,120
चले

229
00:18:31,120 --> 00:18:35,360
उसके लिए कुछ भी कर सता तो आप

230
00:18:35,360 --> 00:18:39,400
देखिए बहुत सारी चीज है तो सारी यहा पर डिकस नहीं की जा सकती मगर यदि

231
00:18:39,400 --> 00:18:43,800
आप वाकई में इन चीजों से लड़ना चाहते हैं

232
00:18:43,800 --> 00:18:49,000
तो आप हमसे धरातल पर संपर्क कर

233
00:18:49,000 --> 00:18:53,280
बिल्कुल सर आपका नंबर भी है मेरे पास में और ब

234
00:18:53,280 --> 00:18:55,920
बाकी मैं

235
00:18:55,920 --> 00:19:00,160
आपसे हट रहा था क्योंकि कुछ बड़ी बातें है जो अभी हुई

236
00:19:00,160 --> 00:19:02,600
नहीं

237
00:19:02,600 --> 00:19:05,000
है

238
00:19:05,000 --> 00:19:11,000
अच्छा जो विदेशों में चल रही

239
00:19:11,160 --> 00:19:15,200
है अपने आप जैसे जैसे जैसे जैसे अपने

240
00:19:15,200 --> 00:19:19,240
आप को हम लोग सक्षम बनाएंगे वैसे वैसे हम लोग और

241
00:19:19,240 --> 00:19:23,560
बड़ी शक्तियों से लड़ने के योग्य बन

242
00:19:23,560 --> 00:19:28,880
पाएंगे जब हमारे भाइयों को जि हमारे साथ मिलकर के लड़ना होगा

243
00:19:28,880 --> 00:19:33,160
भाइयों को यहां से ले जाए जाएगा ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा क्यों कर रहा है

244
00:19:33,160 --> 00:19:37,280
माता दुर्गा के साथ तो यह हुआ था काल तो यह है काल तो वो

245
00:19:37,280 --> 00:19:41,320
है गीता बोलने वाले की जो भक्ति करते हैं वो लोग नरक

246
00:19:41,320 --> 00:19:44,560
में जाते

247
00:19:44,560 --> 00:19:48,720
हैं यह सब चीजें जब बोली बताई

248
00:19:48,720 --> 00:19:52,680
जाएंगी तो हमारा कौन सा भाई हमारे साथ खड़ा

249
00:19:52,680 --> 00:19:56,760
होगा हम आखरी तक खड़े हुए हम

250
00:19:56,760 --> 00:20:00,800
हा आपको व्यवहारिक रूप से साथ निभाना है आप

251
00:20:00,800 --> 00:20:05,080
उसम संपर्क करिए हम लोग योजनाए बना रहे हैं कई तरह से और

252
00:20:05,080 --> 00:20:10,040
कई तरह की योजनाए है तो कोई ना कोई योजना किसी ना किसी को सूट करी जाती

253
00:20:10,040 --> 00:20:14,080
है जैसे हम लोग इतने तरीके से कार्य कर रहे हैं तो

254
00:20:14,080 --> 00:20:18,960
उसम हर व्यक्ति कहीं ना कहीं एडजस्ट हो जाता है आपकी ओर से

255
00:20:18,960 --> 00:20:24,960
साउंड आ रहा है आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाए

256
00:20:26,640 --> 00:20:30,640
हा जी पहाड़ी जी हर महादेव जय श्री राम हर हर

257
00:20:30,640 --> 00:20:34,880
महादेव भाई जय श्री राम आज का एक

258
00:20:34,880 --> 00:20:40,040
शट देखा आपका बहुत अच्छा लगा

259
00:20:40,040 --> 00:20:44,080
और प्रहार भी किया जा रहा है आपके चैनल के ऊपर य कायरता

260
00:20:44,080 --> 00:20:48,400
है एक तरफ से कहा जाए तो हा शा

261
00:20:48,400 --> 00:20:52,840
समत जवाब नहीं है ना इसलिए इस तरह से प्रहार कर रहे रोकने का प्रयास कर रहे

262
00:20:52,840 --> 00:20:56,880
हैं बिल्कुल जो आपत्ति जनक सामग्री थी

263
00:20:56,880 --> 00:21:00,960
उसको चौराहे पर बी चौराहे पर जलाया भी गया है वो वीडियो भी आपको

264
00:21:00,960 --> 00:21:05,080
बहुत जल्द प्राप्त होंगे एक दो में डाल दिए जाए जय

265
00:21:05,080 --> 00:21:09,160
श्री राम जी जय श्री राम जय श्री राम हम

266
00:21:09,160 --> 00:21:13,520
केवल वो नहीं है ना इंटरनेट योद्धा सोशल मीडिया वरियर

267
00:21:13,520 --> 00:21:17,600
कैसे हो प्रभु जी बस बस कृपा

268
00:21:17,600 --> 00:21:21,640
है आप बताए बहुत बढ़िया सर आपका

269
00:21:21,640 --> 00:21:25,960
काम तो बहुत सरानी आपने जो आज किया है ना यह देख के मतलब मलब

270
00:21:25,960 --> 00:21:30,080
जब भी यहां पर हम लोग करेंगे ना य हम लोग करेंगे जैसे आप आप

271
00:21:30,080 --> 00:21:34,160
फलो करेंगे इन चीजों में जी धीरे धीरे

272
00:21:34,160 --> 00:21:38,160
मेंबर्स जोड़ रहे हैं हम लोग भी यहां पर ना अपने एरिया में मेंबर जोड़ रहे हैं फिर

273
00:21:38,160 --> 00:21:41,880
उनको य इसी टाइप से सेटअप बनाएंगे फिर ना क्योंकि इनके लिए

274
00:21:41,880 --> 00:21:45,960
बहुत जरूरी हो गया है कारण क्या है इन इन्होने अपनी सीमाए ला लांग द है

275
00:21:45,960 --> 00:21:50,080
बहुत ज्यादा जी इनकी जो हरकत दिख

276
00:21:50,080 --> 00:21:54,160
रही है मतलब सारी सनातन विरोधी हरकत इनकी सारी की सारी

277
00:21:54,160 --> 00:21:58,600
इनकी मब सनातन काम वही कर रहे हैं सनातनी वाले लेकिन विरोध

278
00:21:58,600 --> 00:22:02,840
हमारा ही करना है वही चप्पल पूज रहे हैं वही य वही ये फोटो

279
00:22:02,840 --> 00:22:07,040
भी पूज रहे हैं वही ये कच्छे भी पूज रहे हैं लेकिन प्रॉब्लम मूर्ति पूजा से

280
00:22:07,040 --> 00:22:11,120
ये देखो आप मतलब इन्होने बेशर्मी

281
00:22:11,120 --> 00:22:15,200
की सारी हद पार कर रखी है मतलब इनको इतनी शर्म नहीं आती तुम लोग कर क्या रहे हो भी

282
00:22:15,200 --> 00:22:19,300
जिस शाक पर बैठे हो उसी को काटने प लगे हुए हो इतनी शर्म नहीं है इन लोगों

283
00:22:19,300 --> 00:22:21,560
[संगीत]

284
00:22:21,560 --> 00:22:25,760
को और अगर कोई इंसान

285
00:22:25,760 --> 00:22:29,760
को इंसान को पैसे के लिए इतना नहीं गिरना चाहिए जितने यह रामपाल

286
00:22:29,760 --> 00:22:34,080
और इसके चेले गिर चुके हैं भाई पैसा सब कुछ नहीं होता इनके दिमाग

287
00:22:34,080 --> 00:22:38,320
के अंदर बस वो पैसा इनको कहने का भाव य है पैसे के लिए ये कुछ भी करवाने को तैयार

288
00:22:38,320 --> 00:22:42,320
हो जाए कुछ भी मतलब कुछ भी ये अपनी मां बहनों का सौदा तक भी करवा

289
00:22:42,320 --> 00:22:47,320
देंगे मतलब जो इन्होंने सिचुएशन अपनी क्रिएट कर रखी मैं

290
00:22:47,320 --> 00:22:51,320
देरा दिल मदा आप मर्यादा में छोड़ा रहेर आप

291
00:22:51,320 --> 00:22:56,040
बात सही कह रहे हो लेकिन मुझे ये लग रहा है कि ये अंदर से जो इनकी हरकत म ये कैसी

292
00:22:56,040 --> 00:22:57,080
हरकत म

293
00:22:57,080 --> 00:23:01,080
अंदर दिल क चोड़ता है मेरा इन बातों से इनका देख के भाई

294
00:23:01,080 --> 00:23:05,400
क्या कोई मतलब अपने पिता को पिता को गालियां दे सकता है क्या हमारे श्री कृष्ण

295
00:23:05,400 --> 00:23:09,600
जी श्री विष्णु जी एक ही बात है तो उनको गालियां मतलब

296
00:23:09,600 --> 00:23:13,720
अपने पिता हमारे पिता मतलब परम पिता है वो उनको गालिया दे रहे हैं देखो

297
00:23:13,720 --> 00:23:17,760
सोचने ली बात है जिन्होने संसार को बनाया

298
00:23:17,760 --> 00:23:23,760
मोहम्मद आरिफ हुसैन जी आप अपना चेहरा

299
00:23:26,880 --> 00:23:31,640
दिखाएं सर ये चेहरा नहीं दिखाते ना इनको तो बिल्कुल आप लाइन प लि ही मत

300
00:23:31,640 --> 00:23:37,000
करो हुसन जी

301
00:23:37,000 --> 00:23:41,520
बताइए आपकी आवाज नहीं आ

302
00:23:41,520 --> 00:23:46,680
रही मैं बांग्लादेश से हूं जी

303
00:23:46,680 --> 00:23:50,680
बोलिए मैं आया था व आपको वीडियो देख रहा

304
00:23:50,680 --> 00:23:55,320
हूं क कई दिनों से वो जोकन वाले है ना

305
00:23:55,320 --> 00:23:59,680
वो जो कहते हैं जी अल्ला ही या

306
00:23:59,680 --> 00:24:05,680
कृष्ण है वो माने झूठ

307
00:24:09,760 --> 00:24:15,760
झूठ क्या हुआ उनको बात रखने दीजिए ना

308
00:24:16,520 --> 00:24:20,560
अपनी जी

309
00:24:20,560 --> 00:24:24,600
बोलिए वो इस्लाम की इस्लाम के अल्लाह के बारे में

310
00:24:24,600 --> 00:24:29,000
नहीं जानता है डिटेल्स इसका व्याख्या क्या है

311
00:24:29,000 --> 00:24:33,200
तो आप यहां क्यों आए हैं आपको उनसे शिकायत हैना वहा

312
00:24:33,200 --> 00:24:39,160
जाना

313
00:24:39,160 --> 00:24:44,080
चाहिए इस मैं तो अभी देखा के बारे में

314
00:24:44,080 --> 00:24:49,800
कन की बुराई हम आपके साथ बैठ कर के करने के लिए य नहीं बैठे

315
00:24:49,800 --> 00:24:54,040
हैं बात चल रही है यहां पर नहीं विषय

316
00:24:54,040 --> 00:24:58,080
कोई भी हो मतलब आप यह चीज हमको मत बताइए कि कौन वाले क्या गलत कर रहे हैं

317
00:24:58,080 --> 00:25:02,320
क्या सही कर रहे हैं वो हमारा आपस का मामला है वो हम देख लेंगे

318
00:25:02,320 --> 00:25:06,360
हां आप अगर ईश्वर आपका जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित

319
00:25:06,360 --> 00:25:10,600
होने आप मानते हैं कुरान जो है वो ईश्वर है कुरान के अंदर ये वो सब

320
00:25:10,600 --> 00:25:15,080
मानते हैं आप है है यस

321
00:25:15,080 --> 00:25:19,360
कुरान का ईश्वर ईश्वर है हम

322
00:25:19,360 --> 00:25:23,800
कुरान का धर्म जो है वो धर्म है है

323
00:25:23,800 --> 00:25:27,960
है अच्छा आपकी जानकारी में धर्म की परिभाषा

324
00:25:27,960 --> 00:25:33,960
क्या है

325
00:25:34,040 --> 00:25:38,160
धर्म की परिभाषा में जो आते है आपके तरफ से

326
00:25:38,160 --> 00:25:41,000
क्या

327
00:25:41,000 --> 00:25:45,240
है मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या परिभाषा हैकी मेरे तरफ

328
00:25:45,240 --> 00:25:49,240
से धर्म की परिभाषा यह तो है धर्म संस्कृत

329
00:25:49,240 --> 00:25:53,480
शब्द है बांगलादेश बांगला भाषा में भी धर्म कहती है

330
00:25:53,480 --> 00:25:58,920
लेकिन अरबी भाषा में धर्म नहीं कहती है क्या

331
00:25:58,920 --> 00:26:02,600
दन कहती है

332
00:26:02,600 --> 00:26:06,600
दनन की परिभाषा क्या है धर्म में समझती

333
00:26:06,600 --> 00:26:11,160
हो जो अल्लाह की दया विधि

334
00:26:11,160 --> 00:26:15,200
जो उसने कही है करने के लिए वह करो

335
00:26:15,200 --> 00:26:19,240
ज जो निषद किया है उसको ना करो

336
00:26:19,240 --> 00:26:23,240
यानी कि अच्छाई और बुराई के बीच अंतर बताने वाली जो नियमावली है उसी

337
00:26:23,240 --> 00:26:28,800
का नाम आपको दन है नहीं नहीं नहीं

338
00:26:28,800 --> 00:26:33,000
मैं कहती हूं जो अल्लाह को मानना उसके उसके

339
00:26:33,000 --> 00:26:37,120
आदेश निषद में चलना जो

340
00:26:37,120 --> 00:26:41,480
वही बात है आप समझ नहीं रहे मेलिए ठीक है क्या कुरान

341
00:26:41,480 --> 00:26:47,480
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है व सर्वशक्तिमान

342
00:26:50,600 --> 00:26:56,480
है ये यह यह जो क्वेश्चन है

343
00:26:56,480 --> 00:27:00,520
हेलो ये जो क्वेश्चन है यह क्वेश्चन नास्तिक

344
00:27:00,520 --> 00:27:05,360
नास्तिक से आती है

345
00:27:05,360 --> 00:27:10,000
तो पहले मैं आपको एक बात क्लियर कर दूं नास्तिक

346
00:27:10,000 --> 00:27:14,200
और साधारण जो आस्तिक होते हैं उनके बीच बहुत सी समानताएं

347
00:27:14,200 --> 00:27:18,440
है जो आस्तिक है वह भी पैरों से चलते हैं नास्तिक भी पैरों

348
00:27:18,440 --> 00:27:22,720
से चलते हैं आस्तिक है दांतों से चबा के खाना खाते हैं नास्तिक भी दांतो

349
00:27:22,720 --> 00:27:27,000
से चबा के खाना खाते हैं अगर कुछ चीज मिल रही है तो आप यह टोपा

350
00:27:27,000 --> 00:27:32,160
नहीं पहना सकते कि ये नास्तिकों का सवाल है भाई

351
00:27:32,160 --> 00:27:36,240
मैं आपको बताती हूं मैं आपसे ये जानना चाहती हूं

352
00:27:36,240 --> 00:27:40,240
मैंने एक सवाल पूछा है क्या आप जिस ईश्वर को ईश्वर कह रहे हैं

353
00:27:40,240 --> 00:27:44,400
वह सर्वशक्तिमान है या नहीं आप ईश्वर को मानते

354
00:27:44,400 --> 00:27:48,680
हैं आप भाई साहब अगर ईश्वर

355
00:27:48,680 --> 00:27:52,840
को ना नहीं मानते आपको यह पता नहीं है हम मानते हैं कि नहीं मानते ना

356
00:27:52,840 --> 00:27:57,160
ना आप आप मानते हैं कि क्या आप मानते हैं क्या आप सवाल

357
00:27:57,160 --> 00:28:01,160
के जवा आप सवा बच क्यों रहे सिपल

358
00:28:01,160 --> 00:28:05,360
क्वे पूछ गया है आपके द्वारा माना जाने

359
00:28:05,360 --> 00:28:05,860
वाला

360
00:28:05,720 --> 00:28:10,200
पूजित होने वाला जो अल्लाह है जिसको आप ईश्वर कहते हैं वह सर्वशक्तिमान

361
00:28:10,200 --> 00:28:14,480
है या नहीं ले चलिए

362
00:28:14,480 --> 00:28:19,360
सर्वशक्ति का मान का मतलब क्या है आप क्या जानते

363
00:28:19,360 --> 00:28:25,040
हैं आप क्या जानते हैं उसके अनुसार मुझे बता

364
00:28:25,040 --> 00:28:29,040
दीजिए मैंने सर्वशक्ति का मतलब क्या जो

365
00:28:29,040 --> 00:28:33,160
सब चते श्रेष्ठ हो जिसको कहते हैं वो कुछ

366
00:28:33,160 --> 00:28:37,160
भी कर सकता है ये कुछ भी कर सकता है और दूसरी

367
00:28:37,160 --> 00:28:41,200
बात ये है सर्वशक्तिमान का एक अर्थ ले कि उसने ही सभी नियमों को बनाया

368
00:28:41,200 --> 00:28:45,240
है संसार को उसी ने बनाया है वह सभी नियमों को बनाने

369
00:28:45,240 --> 00:28:50,040
वाला सर्व नियामक है उसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं

370
00:28:50,040 --> 00:28:54,040
होता सब कुछ कर सकता है उसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं

371
00:28:54,040 --> 00:28:58,320
होता वो कुछ भी कर सकता है

372
00:28:58,320 --> 00:29:04,000
आप थोड़ा ऐसे बैठ के बात करें थोड़ा आपका फेस दिखाई दे आपका फेस दिख नहीं रहा ठीक से

373
00:29:04,000 --> 00:29:08,120
थोड़ा जी बांगला समझ में बांगला बांगला बांगला बांगला

374
00:29:08,120 --> 00:29:12,200
समझ में आएगा बांगला में बोलने के बांगला समझ में नहीं आएगा आप यहां पर

375
00:29:12,200 --> 00:29:17,040
आए हिंदी भाषी चैनल है आप हिंदी में बात करें जो

376
00:29:17,040 --> 00:29:21,240
अल्लाह अल्लाह है अल्लाह काज करेगा उसके

377
00:29:21,240 --> 00:29:25,560
नियम [संगीत]

378
00:29:25,560 --> 00:29:30,400
से अल्लाह के जो नियम है उसके नीचे दबा हुआ है

379
00:29:30,400 --> 00:29:34,440
अल्लाह उन नियमों को नहीं तोड़ सकता इस

380
00:29:34,440 --> 00:29:38,440
तरफ ये बात जोद एग्री करते है तो आपकी ईश्वर भी

381
00:29:38,440 --> 00:29:42,480
नहीं कर पाएगा देखिए वो बाद की बातें हैं कोई

382
00:29:42,480 --> 00:29:47,040
हमारे गलत सुनिए हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता

383
00:29:47,040 --> 00:29:51,160
है हमारे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है आप अपनी

384
00:29:51,160 --> 00:29:56,080
बात करिए फिलहाल जब आपकी बात चल रही है

385
00:29:56,080 --> 00:30:00,320
तो समझ रहे हैं ना हम अपने आप को सही कर लेंगे

386
00:30:00,320 --> 00:30:04,400
जब हमारी बारी आएगी अभी आप अपनी बात बताइए

387
00:30:04,400 --> 00:30:08,640
अब होगा क्या जब मैं अपने जब मैं अपने आपको को बताने लगूंगा तो उस क्वेश्चन प क्वेश्चन

388
00:30:08,640 --> 00:30:12,920
क्वेश्चन प क्वेश्चन होते चले जाएंगे तो यह हिसा छूट ही जाएगा कि इस्लाम का ईश्वर

389
00:30:12,920 --> 00:30:16,960
सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो अब जब एक चैप्टर खुला हुआ है तो उसको बंद किए

390
00:30:16,960 --> 00:30:21,400
बिना दूसरे चैप्टर को मत खोलिए अब यह चल रहा है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान

391
00:30:21,400 --> 00:30:27,400
है कि नहीं तो आप अल्लाह को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए

392
00:30:28,440 --> 00:30:32,520
तो मैंने आपसे पूछा आपने कहा कि सर्वशक्तिमान है और वह सब

393
00:30:32,520 --> 00:30:36,600
कुछ कर सकता है वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है मगर अभी आप बता

394
00:30:36,600 --> 00:30:40,680
रहे हैं वो अपने ही नियमों के नीचे

395
00:30:40,680 --> 00:30:45,040
है नहीं यह तो मैं एक

396
00:30:45,040 --> 00:30:50,440
एक उत्तर दिया हूं अल्लाह उसकी मर्जी

397
00:30:50,440 --> 00:30:54,440
के अल्लाह अल्लाह की मत काज करेगा

398
00:30:54,440 --> 00:30:59,120
काम करेगा हमारी या से नहीं चलेगा

399
00:30:59,120 --> 00:31:01,720
एक मिसाल

400
00:31:01,720 --> 00:31:05,880
देता हिंदी बोल में हिंदी हिंदी बोलने

401
00:31:05,880 --> 00:31:11,440
में आप किसी हिंदी भाषी को भेजिए भाई

402
00:31:11,440 --> 00:31:15,520
साहब बांगला बोला जावेना

403
00:31:15,520 --> 00:31:19,600
बांगला ठीक है इनको हटाइए भैया ठीक है आप

404
00:31:19,600 --> 00:31:23,720
किसी हिंदी भाषी को भेजिएगा अरे यह बोल

405
00:31:23,720 --> 00:31:28,840
ने कि जो अल्लाह है वो अपनी मर्जी से काम करेगा हमारी मर्जी से काम नहीं करेगा

406
00:31:28,840 --> 00:31:33,800
वो समझ रहा हूं मैं वो बोल ही नहीं पा रहे कर रहे तो ठीक नहीं है

407
00:31:33,800 --> 00:31:37,920
हिंदी का प्रॉब्लम है भाषा का प्रॉब्लम है थोड़ी समस्या है

408
00:31:37,920 --> 00:31:42,480
ऐसे में नहीं हो पाता कुछ चीज समझ में आएगी कुछ चीज समझ में नहीं आएगी ली कन्फ्यूजन

409
00:31:42,480 --> 00:31:46,560
क्रिएट होगी कल योगी योगी जी आपने

410
00:31:46,560 --> 00:31:50,600
वह वीडियो पूरा देख लिया है क्या जिसके बारे में आप कह रहे थे कि मुझे पता नहीं

411
00:31:50,600 --> 00:31:55,120
है मैंने अभी वीडियो देखा नहीं है कौन सा

412
00:31:55,120 --> 00:31:59,040
आर्य वरा वाला

413
00:31:59,040 --> 00:32:03,200
तो आपकी राय क्या है उस राय वो राय बताइए आकर

414
00:32:03,200 --> 00:32:07,200
के हां बोलिए पहली बात

415
00:32:07,200 --> 00:32:11,960
तो मैंने पूरी वीडियो देख ली है उसमें आपकी

416
00:32:11,960 --> 00:32:16,400
वाइफ को की फोटो दिखाई गई उ ब्लर कर दिया गया वहां पे ठीक है

417
00:32:16,400 --> 00:32:20,800
उसमें आपके भाई के ऊपर ही बात हुई है ठीक है

418
00:32:20,800 --> 00:32:24,920
तो मैं पूर्णता निंदा करता हूं फैमिली के ऊपर नहीं जाना चाहिए ता साफ सी बात

419
00:32:24,920 --> 00:32:29,000
एक वीडियो आपने भी मेरे ऊपर बनाई है वीडियो नि

420
00:32:29,000 --> 00:32:33,240
वीडियो की आप निंदा करते हैं पूरी निंदा करता हूं थोड़ा नाम माम

421
00:32:33,240 --> 00:32:38,360
ले चैनल का नाम नाम लेके थोड़ा बोलिए थोड़ा चैनल का एक बार आप आप नाम

422
00:32:38,360 --> 00:32:42,360
बताइए चैनल का नाम आप बताइए आपको नहीं पता है जिस चैनल

423
00:32:42,360 --> 00:32:46,520
पे आप गए थे आप नाम बता दीजिए आपने नाम बोला बो

424
00:32:46,520 --> 00:32:50,520
प देखिए ू के ऊपर बात नहीं होती है आपको नाम नहीं पता

425
00:32:50,520 --> 00:32:54,680
है मुझे अभी रिमेंबर नहीं हो रहा है आपने नाम बोला था मुझे पता है लेकिन अभी

426
00:32:54,680 --> 00:32:59,040
रिकॉल नहीं हो रहा है तो आप एक बार बोल दीजिए नाम आर वरा आर्य

427
00:32:59,040 --> 00:33:03,120
वरा के चैनल में जो आपकी डिबेट जो आपके बारे में कहा गया फैमिली के ऊपर नहीं

428
00:33:03,120 --> 00:33:07,280
जाना चाहिए सिद्धांतों के ऊपर बात रखनी चाहिए पूर्णत में उसका खंडन करता हूं

429
00:33:07,280 --> 00:33:11,680
चलिए ये हो गया खत्म और उस वीडियो को हटा देना चाहिए

430
00:33:11,680 --> 00:33:14,040
उस वीडियो को हटा देना चाहिए फैमिली के ऊपर नहीं जाना

431
00:33:14,040 --> 00:33:18,120
चाहिए बात होनी चाहिए सिद्धांतों के ऊपर आपने

432
00:33:18,120 --> 00:33:22,360
जब पिछली बार आए थे वाकई में वो नहीं देखा था

433
00:33:22,360 --> 00:33:26,480
मैं उसमें था लेकिन मुझे सची में याद नहीं पूरा तो नहीं देखा था मैं ए बीच

434
00:33:26,480 --> 00:33:30,680
में बीच में जुड़ा था ने पूरा नहीं देखा था इसलिए मैं नहीं बोल सकता था उसमें

435
00:33:30,680 --> 00:33:34,800
लेकिन जब मैंने देखा तो मैं बोलता हूं मैंने स्त भी कहा था कि फैमिली के ऊपर कोई

436
00:33:34,800 --> 00:33:39,520
जाए कोई बात हो नहीं लेके आना चाहिए वैसे ही जैसे कि आपने एक

437
00:33:39,520 --> 00:33:43,840
स्टोरी डाली थी मेरे ऊपर और मेरे लिए कहा था आपके ऊपर नहीं डाली थी कलयुग

438
00:33:43,840 --> 00:33:48,000
के एक नीच योगी के लिए डाली थी हां तो वो जो आपने नीच शब्द का प्रयोग

439
00:33:48,000 --> 00:33:52,160
किया कलयुग का योगी वो मेरे ही चैनल का नाम है आपने कहा कि इसने अपने माता

440
00:33:52,160 --> 00:33:56,360
और बहन के साथ संभोग किया होगा करके देख लिया होगा सबूत चाहिए

441
00:33:56,360 --> 00:34:02,160
तो सबूत भी दे दिया जाएगा ठीक है चलो इस विषय को छोड़

442
00:34:02,160 --> 00:34:06,200
ने मैंने य कहा है

443
00:34:06,200 --> 00:34:10,800
हा मैंने ऐसा कुछ अगा

444
00:34:10,800 --> 00:34:15,360
मैंने उसम कहा है कि जो ऐसी शिक्षा देता है

445
00:34:15,360 --> 00:34:19,640
संभवत उसने ऐसा किया भी होगा जो कैसी

446
00:34:19,640 --> 00:34:24,160
शि जो कैसी शिक्षा देता है कैसी

447
00:34:24,160 --> 00:34:28,880
धर्म को समय समय पर बदलने की धर्म नहीं धर्म के नियम

448
00:34:28,880 --> 00:34:33,640
नियम बोला था वो अलग बात आपने गलत सुन लिया होगा धर्म क्या है

449
00:34:33,640 --> 00:34:38,480
धार धर्म जो धारण करने योग है वो धर्म है बस

450
00:34:38,480 --> 00:34:42,680
और भी धर्म मोक्ष को पाने

451
00:34:42,680 --> 00:34:46,800
के लिए अरे क्या है वो उसका अपना स्वरूप

452
00:34:46,800 --> 00:34:51,320
क्या है ये तो सब एक सेकंड

453
00:34:51,320 --> 00:34:55,320
एक सेकंड पिछली बार क्या हुआ था कि हमारी चर्चा करते करते आप गुरु परंपरा में चले गए थे इस

454
00:34:55,320 --> 00:34:59,320
बार चर्चा सर्वशक्तिमान ईश्वर के वही रहेगी

455
00:34:59,320 --> 00:35:03,320
आप ही तो शुरू कर रहे हो दूसरी चीजों पर नहीं नहीं अब चर्चा ही

456
00:35:03,320 --> 00:35:08,040
रहेगी पिछली बार तो चर्चा बदल दी गई थी अगर जो लोग देख रहे देख चने

457
00:35:08,040 --> 00:35:12,720
बदली गुरु के ऊपर आप गए थे उसके बाद मैंने बोला

458
00:35:12,720 --> 00:35:17,240
गुने चर्चा वीडियो देख

459
00:35:17,240 --> 00:35:21,360
लीभी विय दोबारा दोबारा विषय के ऊपर

460
00:35:21,360 --> 00:35:25,400
मैं देख लेता हूं मैं देख लेता हूं दोबारा विषय पर आ जा मैं अभी आपको एक क्लियर कर

461
00:35:25,400 --> 00:35:29,720
दूं आपने बोला था अवतार बाद के सं में हमारी बहुत अच्छी

462
00:35:29,720 --> 00:35:33,920
चर्चा हो चुकी है आपने यह कह के अगला

463
00:35:33,920 --> 00:35:38,080
अगला चैप्टर खोला था क्योंकि क्योंकि सुनिए पले

464
00:35:38,080 --> 00:35:42,240
मैं तो बहुत प्रेम से था आप जब आपद पा मिनट ी आपने

465
00:35:42,240 --> 00:35:46,240
जा कर के वहा वीडियो कट करके डाला था पा मिनट पाच मिनट तक जब

466
00:35:46,240 --> 00:35:50,600
आप गुरु परंपरा की र चले गए

467
00:35:50,600 --> 00:35:54,640
आप प्रेम से थे तभी आपने वीडियो कट कर न्याय दर्शन के

468
00:35:54,640 --> 00:35:58,760
अनुसार वाघ छल बोलते है कि शब्द के अनुसार मैंने भाई साहब

469
00:35:58,760 --> 00:36:02,960
देखिए आप अगर यहां पर अपनी कुछ भरी हुई चीज कुछ भरी

470
00:36:02,960 --> 00:36:07,240
हुई चीजें बोलने आए हैं तो उसका मौका देने के लिए नहीं है च चर

471
00:36:07,240 --> 00:36:11,240
बदलने वाला कौन था आपके चर्चा से बिना अगर

472
00:36:11,240 --> 00:36:15,240
आपकी कोई बात असंतुष्ट पूर्ण थी तो चर्चा से बिना बताए

473
00:36:15,240 --> 00:36:19,560
जाने वाला कौन था आप थे

474
00:36:19,560 --> 00:36:23,680
उस चर्चा को अपना शीर्षक देख कर के अपने चैनल पर अपलोड करने

475
00:36:23,680 --> 00:36:27,880
वाला कौन था आप थे कर प्रॉब्लम पहली बात हमसे

476
00:36:27,880 --> 00:36:32,040
कह रहे हैं कि वाक चल है वो वो जिसने देखे वो जाइए और वीडियो को देखिए

477
00:36:32,040 --> 00:36:32,540
कि किस

478
00:36:32,320 --> 00:36:35,840
प्रकार से अपवाद से बात

479
00:36:35,840 --> 00:36:40,040
करते चलिए आपने एक तर्क दिया कि व्यवहारिक सत्ता में ईश्वर

480
00:36:40,040 --> 00:36:44,920
हो सकता है क्या व्यवहारिक सत्ता सत्य है शंकराचार्य की दृष्टिकोण

481
00:36:44,920 --> 00:36:49,400
से देखिए आप शंकराचार्य जी ने क्या समझाया

482
00:36:49,400 --> 00:36:53,880
है और क्या नहीं समझाया है चले गए

483
00:36:53,880 --> 00:36:58,080
नहीं नहीं य पे लाइट हां बोलिए बोलिए शंकराचार्य

484
00:36:58,080 --> 00:37:02,200
ने क्या समझाया है और क्या नहीं समझाया है अगर इस परे

485
00:37:02,200 --> 00:37:06,280
आप बात करेंगे तो हमारी चर्चा का विषय फिर बदल जाएगा नहीं नहीं

486
00:37:06,280 --> 00:37:10,280
व्यवहारिक सत्ता सत्य नहीं है ना शंकराचार्य ने क्या बताया क्या नहीं

487
00:37:10,280 --> 00:37:14,640
बताया इस टॉपिक को अगर आप लाएंगे तो फिर बदलेगा फिर गुरु परंपरा पे आएगा

488
00:37:14,640 --> 00:37:18,720
फिर इस पे आएगा कि आपको कैसे पता शंकराचार्य ने क्या बताया क्या नहीं बताया मैं

489
00:37:18,720 --> 00:37:23,080
कह रहा ह अगर अगर आप शंकराचार्य को मानते हो तो फ

490
00:37:23,080 --> 00:37:27,240
बात करनी है अगर आपको इसम बात करनी है शंकराचार्य ने क्या बताया है देख

491
00:37:27,240 --> 00:37:31,440
देखिए देखि देखि देखिए क्या आपने अपने पॉइंट को रखने के लिए

492
00:37:31,440 --> 00:37:35,880
बोला ना क्या शंकराचार्य ने बताया

493
00:37:35,880 --> 00:37:40,000
है उर जाना पड़ेगा

494
00:37:40,000 --> 00:37:44,200
शंकराचार्य क्या कहते हैं कैसे जन

495
00:37:44,200 --> 00:37:48,200
जो व्यक्ति जिस सिद्धांत को मानता है उसी के अनुसार अगर खंडन हो

496
00:37:48,200 --> 00:37:52,520
रहा है तो फिर मुझे अपनी बात कर आपने शंकराचार्य

497
00:37:52,520 --> 00:37:57,560
की शिक्षा कहां से ली है य बताइए शकरा

498
00:37:57,560 --> 00:38:03,560
मैंने पूछा शंकराचार्य की शिक्षा कहां से लीरा

499
00:38:04,640 --> 00:38:10,640
श से कुछ नहीं होगा चिल्लाने से कुछ नहीं होगा

500
00:38:20,200 --> 00:38:25,080
ट जी

501
00:38:25,080 --> 00:38:29,560
पा बताइए आर समाज से आए

502
00:38:29,560 --> 00:38:33,880
साब चलिए जय सिया राम भाई जय सियाराम

503
00:38:33,880 --> 00:38:38,160
जय श्री राम बताइए

504
00:38:38,160 --> 00:38:42,560
मैं आपसे ये कह रहा था आपने जो मेरा वीडियो डाला

505
00:38:42,560 --> 00:38:46,600
है सब परेशान मेरा वडियो डाला

506
00:38:46,600 --> 00:38:50,720
आ अरे मैं वीडियो डालने से परेशान नहीं भाई जी पर आप

507
00:38:50,720 --> 00:38:55,360
आधी अधूरी बात करते हो क्या आधी अधूरी बात की बताइए आप आधी

508
00:38:55,360 --> 00:38:59,520
अधूरी क्या आपने ये कहा ग ये अ

509
00:38:59,520 --> 00:39:04,080
वो सर्वशक्तिमान ये हुआ वो हुआ पता नहीं क्या क्या उसम क डाल दिया

510
00:39:04,080 --> 00:39:08,240
आप ये बताइए आपने कहा था वह सर्वशक्तिमान वाली जो बात है वह आपके

511
00:39:08,240 --> 00:39:12,400
गुरु जी उसका उत्तर देंगे वो ले आए आप बात हां

512
00:39:12,400 --> 00:39:16,480
वो लेके आया मेरे जो मेरे गुरु उन्होने वीडियो डलवा दिया

513
00:39:16,480 --> 00:39:20,640
है ना पर आप जवाब ले आ डलवा दिया है ना वीडियो

514
00:39:20,640 --> 00:39:24,720
किसने मैं तो बता तो रहा हूं आपसे उन्होंने वीडियो डलवा

515
00:39:24,720 --> 00:39:29,560
दिया है नहीं आप जवाब लाए

516
00:39:29,560 --> 00:39:33,640
आप जवाब ला पास गया ही नहीं आप गए

517
00:39:33,640 --> 00:39:37,720
नहीं लो मैं गया ही नहीं जवाब सुनो तो स मैं बता तो रहा हूं उसका

518
00:39:37,720 --> 00:39:43,720
वीडियो उन्होने बनवा के डाल दिया चैनल बना हुआ है आपने वो वीडियो देखा

519
00:39:43,800 --> 00:39:47,920
है कौन सा जो दो सर्वशक्तिमान वाला

520
00:39:47,920 --> 00:39:52,280
हा देख तभी तो बता रहा हूं वीडियो देखा है तभी तो

521
00:39:52,280 --> 00:39:57,560
देखा है तो आप समझ गए

522
00:39:57,560 --> 00:40:03,560
और क्या और आप देख लेना आप अच्छी तरह से समझ

523
00:40:05,360 --> 00:40:09,880
जाओगे तो आपने देखा है तो इसका मतलब अब आप समझ गए होंगे कि

524
00:40:09,880 --> 00:40:13,880
आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह

525
00:40:13,880 --> 00:40:17,880
सर्वशक्तिमान है कि नहीं हा जी हा

526
00:40:17,880 --> 00:40:21,920
है तो सही है पका आज तो

527
00:40:21,920 --> 00:40:27,480
यह नहीं कहेंगे कि गुरुजी इसका जवाब देंगे पक्का है ना

528
00:40:27,480 --> 00:40:32,120
जवाब क्या उन्होने दे रखा है ना वीडियो देख लेना पड़े भाई साहब साहब मैं तो आपसे

529
00:40:32,120 --> 00:40:36,200
पूछा आप मैं वीडियो क्यों देखू मैं कह दे रहा हूं आप जाकर के शंकराचार्य

530
00:40:36,200 --> 00:40:40,520
की किताब पढ़ लेना य मत आओ जाओ पढ़ लो

531
00:40:40,520 --> 00:40:44,880
बता दूं ना पढ़ लो ब्रह्मसूत्र प ब्रह्मसूत्र

532
00:40:44,880 --> 00:40:48,920
पढ़ लो जाकर के तो उन्होने भी तो उसम

533
00:40:48,920 --> 00:40:53,160
ब्रह्मसूत्र से व दिया भाई साहब

534
00:40:53,160 --> 00:40:57,400
अगर आपको कोई ऐसी बात मुझे कहनी है कि आप वो वीडियो देख लो तो मैं भी आपको

535
00:40:57,400 --> 00:41:01,800
कह दूंगा शंकर परंपरा के आचार्य

536
00:41:01,800 --> 00:41:05,920
इतने हो चुके हैं इतने हो चुके हैं इतने नाम इतने ग्रंथ लिख चुके हैं आपका

537
00:41:05,920 --> 00:41:10,280
जीवन निकल जाएगा आप शायद पढ़ भी ना पाओ पूरे ग्रंथ

538
00:41:10,280 --> 00:41:14,320
तो ये कोई बात नहीं है कि आप जाकर के वीडियो देख लेना आपको वो वीडियो देख

539
00:41:14,320 --> 00:41:18,520
कर के समझ में आ गया कि नहीं आया कि आर समाज का ईश्वर सर्वशक्तिमान

540
00:41:18,520 --> 00:41:20,520
है या नहीं

541
00:41:20,520 --> 00:41:24,720
मेरे तो समझ में आ गया जब ये बताओ अवतार ले लेगा

542
00:41:24,720 --> 00:41:29,040
सुनो भाई साहब अगर जन्म ले आगे मत चलो एक

543
00:41:29,040 --> 00:41:33,320
एक करके चलेंगे आगे मत चलो क्या वो सभी नियमों

544
00:41:33,320 --> 00:41:36,840
को बनाने वाला सर्व नियामक

545
00:41:36,840 --> 00:41:41,200
है और क्या अच्छा

546
00:41:41,200 --> 00:41:45,200
सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक

547
00:41:45,200 --> 00:41:51,200
है हम उस पर तो कोई नियम लागू नहीं

548
00:41:51,720 --> 00:41:55,800
होता भाई जो परमात्मा के जो नियम है वो वही तो करेगा

549
00:41:55,800 --> 00:42:00,200
यह थोड़ी नहीं है कि तुम कहो भाई गेट के पास खड़ा हो जा परमात्मा ये तो करेगा नहीं परमात्मा

550
00:42:00,200 --> 00:42:04,400
नहीं तो हम कहां कह रहे हैं हम कह रहे हैं हम ये कह रहे हैं वो कर सकता

551
00:42:04,400 --> 00:42:08,680
है कि नहीं हमारे कहने पर करेगा कि नहीं यह अलग बात है

552
00:42:08,680 --> 00:42:13,360
उसके अंदर क्षमता है कि नहीं यह अलग बात है हां

553
00:42:13,360 --> 00:42:17,480
क्षमता सब कुछ है पर अवतार लेने की जरूरत नहीं है अवतार

554
00:42:17,480 --> 00:42:21,920
लेने की क्षमता है सब कुछ है

555
00:42:21,920 --> 00:42:25,960
पर अवतार लेने की जरूरत नहीं आप मुझे थोड़ा क्लियर करिए आर्य समाज के

556
00:42:25,960 --> 00:42:29,920
ईश्वर में अवतार लेने की क्षमता

557
00:42:29,920 --> 00:42:34,360
है क्षमता सब कुछ है पर लेने की जरूरत ही नहीं है

558
00:42:34,360 --> 00:42:36,640
अवतार

559
00:42:36,640 --> 00:42:40,760
हा यानी कि आर्य समाज का ईश्वर भी आर्य

560
00:42:40,760 --> 00:42:44,960
समाज का ईश्वर अवतार ले सकता है ले

561
00:42:44,960 --> 00:42:49,160
सकता पर लेता नहीं है ना जरूरत ही नहीं है ने की अरे एक बात

562
00:42:49,160 --> 00:42:53,200
क्लियर कहो वो आगे की बात जब मैं पूछू कि वो लेता है कि नहीं लेता

563
00:42:53,200 --> 00:42:57,440
तब आप बताइए अपनी बात को ठीक से कह पाने में

564
00:42:57,440 --> 00:43:01,520
जो प्रश्न किया है उसको नीट एंड क्लियर कह पाने में दिक्कत हो रही है क्या

565
00:43:01,520 --> 00:43:05,920
मैं आपसे पूछ रहा हूं व अवतार ले सकता है या नहीं आर समाज का

566
00:43:05,920 --> 00:43:09,920
ईश्वर नहीं लेता है अवतार देखो मैंने क्या

567
00:43:09,920 --> 00:43:15,240
पूछा ले सकता है कि नहीं ताकत है कि

568
00:43:15,240 --> 00:43:19,520
नहीं ताकत है ना सब कुछ सब कुछ कर सकता है ईश्वर तो

569
00:43:19,520 --> 00:43:23,800
तो आप एक बार बोल दो ना हा आर्य समाज का ईश्वर अवतार ले सकता

570
00:43:23,800 --> 00:43:27,920
है क्या दिक्कत है बो लेता नहीं है मैं कहां कह

571
00:43:27,920 --> 00:43:32,160
रहा हूं मैं पूछ रहा हूं लेता है कि नहीं लेता

572
00:43:32,160 --> 00:43:36,680
भाई मैं यहां से उठकर जो है और

573
00:43:36,680 --> 00:43:40,680
चाइना जा सकता हूं जापान जा सकता हूं जाता हूं कि

574
00:43:40,680 --> 00:43:44,680
नहीं नहीं जाता यह तो बाद की बात है जा सकता हूं कि नहीं यह अलग

575
00:43:44,680 --> 00:43:48,720
बात है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आर्य समाज का

576
00:43:48,720 --> 00:43:51,640
ईश्वर आर्य समाज का ईश्वर अवतार ले

577
00:43:51,640 --> 00:43:54,400
सकता है कि

578
00:43:54,400 --> 00:43:58,360
नहीं नहीं लेता अवतार

579
00:43:58,360 --> 00:44:02,640
अरे सवाल ही बदल दे रहे सवाल

580
00:44:02,640 --> 00:44:07,160
नहीं बदल रहा बड़े भाई साब मैंने आपसे पूछा वो सवाल

581
00:44:07,160 --> 00:44:11,440
वो जन्म लेता है कि नहीं अवतार लेता है मैंने पूछा क्या मैंने

582
00:44:11,440 --> 00:44:15,440
पूछा क्या मुझे पता है आप बातो में घुमा के

583
00:44:15,440 --> 00:44:19,560
ना य यही सिद्ध कर दो देख आ समा ने पता

584
00:44:19,560 --> 00:44:23,680
है तो फिर आप क्यों आते हैं जब आपको पता है कि

585
00:44:23,680 --> 00:44:28,120
मैं बातों को घुमा सकता हूं तो आप आते क्यों है मुझे

586
00:44:28,120 --> 00:44:32,200
पता है ना आपकी बात तो फिर क्यों आए मैं तो

587
00:44:32,200 --> 00:44:37,960
एक्सपर्ट हूं और आप छोटे बच्चे हो मैं बात घुमाऊंगा आप घूम

588
00:44:37,960 --> 00:44:42,280
जाओगे जैसे जैसे माता पिता अपने बच्चों को समझाते

589
00:44:42,280 --> 00:44:46,320
हैं ना घर में बेटा बाहर मत जाना वो झोली बाबा आएगा वो तुमको ले

590
00:44:46,320 --> 00:44:50,400
जाएगा ऐसे ही आप लोगों को समझाया जाता है बेटा उसके चैनल पर मत

591
00:44:50,400 --> 00:44:54,680
जाना वो बातों को ऐसा घुमाएगा तुमको ले जाएगा

592
00:44:54,680 --> 00:44:59,560
कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं झोली पकड़ने वालो को पकड़ लेते

593
00:44:59,560 --> 00:45:03,880
हैं ठीक है आप मुझे पकड़ लो

594
00:45:03,880 --> 00:45:06,640
आप मुझे पकड़ लो बड़े भाई मैं चाहता हूं कि मुझे

595
00:45:06,640 --> 00:45:10,680
पकड़ा जाए नहीं देखो मैं बताऊ आपकी मुझे देखो एक बात

596
00:45:10,680 --> 00:45:14,760
पसंद आती है फिहाल करने का अ लगता

597
00:45:14,760 --> 00:45:19,720
एक मिनट फिलहाल मैं एक बात कर दूं वो जो कलयुगी योगी जो अभी गया है

598
00:45:19,720 --> 00:45:23,880
हां जी वो प्रमाण को आगे नहीं रखता है तर्क को आगे

599
00:45:23,880 --> 00:45:28,040
रखता है पर हमसे जब बात करने तो प्रमाण को आगे

600
00:45:28,040 --> 00:45:32,200
रखा है कि भाई शंकराचार्य ने माना है क्या उसका उत्तर

601
00:45:32,200 --> 00:45:36,440
यह है उसकी बात का उत्तर कि शंकराचार्य ने व्यवहार को सत्य माना है क्या

602
00:45:36,440 --> 00:45:40,840
नहीं माना है व्यवहार को सत्य नहीं माना ये सत्य है मगर उस व्यवहार

603
00:45:40,840 --> 00:45:45,440
में माता भी आती है बहन भी आती है यानी कि

604
00:45:45,440 --> 00:45:49,760
व्यवहारिक सत्य सत्य है ही नहीं मगर तब तक

605
00:45:49,760 --> 00:45:53,920
आपके लिए व्यवहारिक सत्य सत्य है जब तक आपके लिए माता माता है बहन बहन

606
00:45:53,920 --> 00:45:58,600
है हमने अपनी वीडियो में कितनी बार बता दीय बात मगर उसके भेजे में घुसने नहीं है

607
00:45:58,600 --> 00:46:02,640
और दूसरी बात ईश्वर के अवतार को स्पष्ट रूप

608
00:46:02,640 --> 00:46:06,880
से माना है कि भगवान लीला करते हैं भगवान यह करते हैं

609
00:46:06,880 --> 00:46:10,880
व्यवहारिक सत्य अलग है पार मर्थक सत्य अलग है कितनी जगह माना है शता

610
00:46:10,880 --> 00:46:15,040
सत्रप निषद में माना है इतने सारे हमने वीडियो बना रखे हैं अब वो आ कर के पूछ रहा

611
00:46:15,040 --> 00:46:19,200
है उसने माना अब प्रॉब्लम क्या है प्रॉब्लम क्या है जब उसने नाम लिया शंकराचार्य

612
00:46:19,200 --> 00:46:21,680
ने माना है क्या अब मैं दिखाऊंगा शंकराचार्य ने

613
00:46:21,680 --> 00:46:25,680
ये लिखा है वो कहेगा यहां ये लिखा है तो टॉपिक क्या हुआ चेंज हुआ

614
00:46:25,680 --> 00:46:29,720
टॉपिक चल रहा था शक्तिमान ईश्वर है तो यह कर सकता है कि नहीं यह कर सकता है

615
00:46:29,720 --> 00:46:33,840
कि नहीं और फिर क्या हुआ फिर

616
00:46:33,840 --> 00:46:37,920
टॉपिक इस पर आ गया कि शंकराचार्य ने क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है फिर टॉपिक इस पर आएगा

617
00:46:37,920 --> 00:46:42,120
भैया तु तुम्हारे पास शंकराचार्य की किताबें आई कहां से शंकराचार्य

618
00:46:42,120 --> 00:46:47,320
खुद अपने भगवत गीता के भाष्य में 13 अध्याय के दूसरे श्लोक में लिख रहे हैं

619
00:46:47,320 --> 00:46:51,640
कि संप्रदाय हीन व्यक्ति परंपरा से हीन व्यक्ति से शिक्षा

620
00:46:51,640 --> 00:46:55,720
नहीं लेनी चाहिए वो कितना भी बड़ा विद्वान हो त्याग देना

621
00:46:55,720 --> 00:46:59,720
चाहिए जब वह खुद परंपरा की बात कर रहे हैं परंपरा

622
00:46:59,720 --> 00:47:03,720
से शिक्षा लेनी चाहिए तो उनकी शिक्षा कम से कम परंपरा से

623
00:47:03,720 --> 00:47:07,880
ले लो मेरे भाई क्यों आए हो बिना उनकी परंपरा से ज्ञान

624
00:47:07,880 --> 00:47:12,160
नहीं लिया शंकराचार्य ने क्या कहा क्या नहीं कहा तुम हमें बताओगे

625
00:47:12,160 --> 00:47:16,640
जिनके द्वारा तुम्हारे पास शंकराचार्य की ग्रंथ आ रहे वह नहीं बताएंगे तुम

626
00:47:16,640 --> 00:47:22,000
बताओगे हमें कि शंकराचार्य ने क्या कहा क्या नहीं कहा सोचने वाली बात

627
00:47:22,000 --> 00:47:26,120
है जो लिख रहा है मेरे द्वारा स्थापित पीठ

628
00:47:26,120 --> 00:47:30,920
पर आरू वाला सन्यासी मुझ शिव का स्वरूप ही मान्य होगा

629
00:47:30,920 --> 00:47:34,960
वह सन्यासी नहीं बताएगा शंकराचार्य ने क्या लिखा है

630
00:47:34,960 --> 00:47:38,640
यह बताएंगे

631
00:47:38,640 --> 00:47:43,040
ट को चज करना है सर्वशक्तिमान ईश्वर बात करनी मगर

632
00:47:43,040 --> 00:47:47,120
शंकराचार्य ने क्या कहा है क्या नहीं कहा इस टॉपिक को ले आ बीच में तो टॉपिक को तो तुम

633
00:47:47,120 --> 00:47:51,440
ला रहे बीच में हा

634
00:47:51,440 --> 00:47:55,720
बता अब मैं आपसे दोबारा नर्मल आ जाता हूं पॉट

635
00:47:55,720 --> 00:47:59,880
टू द पॉइंट क्या आर्य समाज आप कुछ कह रहे थे कि आपको हमारी

636
00:47:59,880 --> 00:48:04,080
कोई बात अच्छी लगती है व बता दीजिए क्योंकि ऐसा सुनने को कम मिलता है अच्छी लगती है

637
00:48:04,080 --> 00:48:08,160
बात मैं बताऊ मैं वो आदमी सही को सही बताता हूं मेरे अंदर

638
00:48:08,160 --> 00:48:12,320
य खासियत है मुझे आपकी जो बात करने का तरीका है ना मुझे बहुत अच्छा

639
00:48:12,320 --> 00:48:16,400
लगता है अच्छा मैं आपकी वीडियो बहुत

640
00:48:16,400 --> 00:48:20,640
ज्यादा देखता हूं और मुझे आपकी बात करने का तरीका बहुत अच्छा लगता है कुछ अच्छा लगे

641
00:48:20,640 --> 00:48:24,800
या ना लगे बत अलग चीज विचार अच्छे लगे बात करने का तरीका बहुत

642
00:48:24,800 --> 00:48:28,680
अच्छा लगता है आपका

643
00:48:28,680 --> 00:48:32,880
हम जी और मैं आपसे ये कह रहा था मेरे जानने

644
00:48:32,880 --> 00:48:36,960
वाले हैं हां जी बोलिए मैं ये कह रहा

645
00:48:36,960 --> 00:48:41,280
था साहब सिंह जी आपके अनुसार धर्म की परिभाषा

646
00:48:41,280 --> 00:48:46,280
क्या है मेरे अनुसार

647
00:48:46,280 --> 00:48:50,480
मैं आपको बताता हूं मैं मानता हूं धर्म की परवा वही

648
00:48:50,480 --> 00:48:54,720
है जो धर्म को धारण करते हैं धर्म जो धारण करने योग्य वही धर्म

649
00:48:54,720 --> 00:48:58,880
है मैं ये मानता हूं जी धारण तो आप

650
00:48:58,880 --> 00:49:03,080
र् मैं पूछ रहा हूं धारण तो आपने टीशर्ट भी की है

651
00:49:03,080 --> 00:49:07,080
ना [संगीत] सत्य

652
00:49:07,080 --> 00:49:11,200
सत्य सत्य ही सनातन है ना हा स सनातन सनातन

653
00:49:11,200 --> 00:49:15,920
ही विज्ञान हा ये धर्म की परिभाषा

654
00:49:15,920 --> 00:49:20,320
ये धर्म की परिभाषा है इसको थोड़ा प्रैक्टिकली एमप्लीफाई करिए

655
00:49:20,320 --> 00:49:24,840
इसको प्रायोगिक करिए कि इसको आप यूज में कैसे लेंगे इस परिभाषा को

656
00:49:24,840 --> 00:49:29,880
और अगर यूज में लेने वाली परिभाषा कोई और है तो वो परिभाषा बताइए

657
00:49:29,880 --> 00:49:33,960
जैसे मनुस्मृति में दिया तो गया है धर्म के द लक्षण दिए गए हैं

658
00:49:33,960 --> 00:49:38,200
उसमें धर्म के वो लक्षण है हा धर्म

659
00:49:38,200 --> 00:49:44,200
की उपयोगिता क्या है आपके जीवन में क्यों चाहिए आपको

660
00:49:45,640 --> 00:49:50,040
धर्म धर्म क्यों चाहिए

661
00:49:50,040 --> 00:49:54,200
हां सही गलत के लिए धर्म होगा तभी अगर

662
00:49:54,200 --> 00:49:58,360
हम धर्म पर चलेंगे जभी तो हमें सही गलत का ज्ञान होगा यानी आपको

663
00:49:58,360 --> 00:50:02,440
सही गलत पर चलने के लिए धर्म चाहिए जबकि हम लोग ये

664
00:50:02,440 --> 00:50:07,320
समझते थे कि धर्म से हमें सही गलत का पता चलता है

665
00:50:07,320 --> 00:50:12,280
हां धर्म से हमें सही गलत का पता चलता है

666
00:50:12,280 --> 00:50:17,360
और क्या और सही और सही गलत का पता चलने से क्या

667
00:50:17,360 --> 00:50:21,520
होगा तभी तो परमात्मा के बारे में पता चलेगा जब धर्म की जानकारी

668
00:50:21,520 --> 00:50:25,520
होगी और सही गलत की जानकारी होगी ी तो परमात्मा का पता चलेगा परमात्मा कैसा

669
00:50:25,520 --> 00:50:30,440
स्वर कैसा नहीं है और कैसे प्राप्त होगा

670
00:50:30,440 --> 00:50:34,440
और क्या तो धर्म की जो जो उपयोग में

671
00:50:34,440 --> 00:50:38,560
आने वाली वो है परिभाषा वो क्या है कि जीव की चाह

672
00:50:38,560 --> 00:50:42,680
का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर

673
00:50:42,680 --> 00:50:46,680
सकने वाले वेदा आदि सनातन शास्त्रों द्वारा

674
00:50:46,680 --> 00:50:50,920
बताई गई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने वाली विधि का नाम

675
00:50:50,920 --> 00:50:53,240
धर्म

676
00:50:53,240 --> 00:50:57,240
है इसीलिए भगवान ने कहा ना तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य

677
00:50:57,240 --> 00:51:00,720
के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है

678
00:51:00,720 --> 00:51:04,920
हां जी ठीक है तो आपका जो धर्म है

679
00:51:04,920 --> 00:51:09,520
वो इस बात पर टिका हुआ है आपका जो धर्म है वो इस बात पर टिका है

680
00:51:09,520 --> 00:51:13,840
कि वो जो धर्म है वो आपको ईश्वर तक पहुंचा रहा है कि नहीं

681
00:51:13,840 --> 00:51:18,040
आपकी जीव आपकी जो अंतिम इच्छा है उस इच्छा को

682
00:51:18,040 --> 00:51:22,120
पूरी करवा रहा है कि नहीं जो मूल आपका है

683
00:51:22,120 --> 00:51:26,120
ना मूल इच्छा वो उस इच्छा को पूरी करवा रहा है या

684
00:51:26,120 --> 00:51:30,800
नहीं सही बात है आपकी

685
00:51:30,800 --> 00:51:34,840
है ना हां तो आपकी जो जीव की जो

686
00:51:34,840 --> 00:51:38,840
मूल इच्छा है जो एक नास्तिक

687
00:51:38,840 --> 00:51:43,640
के अंदर भी है वो क्या

688
00:51:43,640 --> 00:51:47,840
है मैं आपकी बात समझा र नास्तिक के अंदर क्या स्पष्ट

689
00:51:47,840 --> 00:51:50,000
बताओ

690
00:51:50,000 --> 00:51:54,120
थोड़ा दुनिया के प्रत्येक नास्तिक में भी सत

691
00:51:54,120 --> 00:51:58,520
चित आनंद की चाह विद्यमान है चा

692
00:51:58,520 --> 00:52:02,520
हा सच को जानने की चाह सत चितता आनंद सच को

693
00:52:02,520 --> 00:52:06,800
जानने की नहीं सत चित आनंद

694
00:52:06,800 --> 00:52:10,840
को प्राप्त करने की चाह विद्यमान है मृत्यु विहीन जीवन

695
00:52:10,840 --> 00:52:15,120
की चाह विद्यमान है जड़ता रहित जीवन की जड़ता

696
00:52:15,120 --> 00:52:19,560
रहित जीवन की चा विद्यमान

697
00:52:19,560 --> 00:52:25,520
है असतो मा सद गम तमस माया

698
00:52:25,520 --> 00:52:30,280
मतया इनकी चा विद्यमान है दुनिया के प्रत्येक जीव में

699
00:52:30,280 --> 00:52:34,640
चाहे वो वो नास्तिक क्यों ना हो जानवर क्यों ना हो

700
00:52:34,640 --> 00:52:39,080
वो भी चाहता है सदा मृत्यु से दूर रहना सदा आनंदित

701
00:52:39,080 --> 00:52:43,720
रहना सब कुछ जान लेना वो भी चाहता है ठीक है

702
00:52:43,720 --> 00:52:47,760
इन चाह ये जो चाह है ना इनको निचोड़ निकालो

703
00:52:47,760 --> 00:52:51,920
तो वो सच्चिदानंद होना चाहता है क्या

704
00:52:51,920 --> 00:52:57,160
होना चाहता है सच्चिदानंद हां

705
00:52:57,160 --> 00:53:01,400
तो यानी कि इस सच्चिदानंद को प्राप्त कराने वाले जो नियम

706
00:53:01,400 --> 00:53:05,480
है कि यह नियम प्राप्त कराएंगे और यह नियम यह करोगे

707
00:53:05,480 --> 00:53:09,600
तो प्राप्त होगा यह करोगे तो प्राप्त नहीं होगा यह जो नियम है इसी

708
00:53:09,600 --> 00:53:14,600
का नाम धर्म

709
00:53:14,600 --> 00:53:19,960
है तो मैंने भी तो वही बताया

710
00:53:19,960 --> 00:53:24,120
था तो जब इसका नाम धर्म है तो इसका मतलब है

711
00:53:24,120 --> 00:53:28,120
कि आप जिन नियमों को मान रहे हो के धर्म है उनके द्वारा

712
00:53:28,120 --> 00:53:32,880
जो मिलने वाला मोक्ष है मिलने वाला ईश्वर है वो सच्चिदानंद होना

713
00:53:32,880 --> 00:53:37,480
चाहिए और क्या है ना

714
00:53:37,480 --> 00:53:41,600
हां जी अब यह बताओ कि आर्य समाज के अनुसार

715
00:53:41,600 --> 00:53:44,720
मुक्ति क्या

716
00:53:44,720 --> 00:53:48,960
है बंधनों से मुक्त होना ही मुक्ति है

717
00:53:48,960 --> 00:53:53,160
नहीं आर्य समाज के अनुसार जीव कुछ काल

718
00:53:53,160 --> 00:53:57,200
के लिए मुक्त होता है उसमें कुछ गणना है लंबी

719
00:53:57,200 --> 00:54:01,800
चौड़ी कुछ लाख वर्षों के लिए मुक्त होता है उसके बाद वापस आ जाता है

720
00:54:01,800 --> 00:54:06,000
फिर बंद जाता है यह आर समाज के अनुसार मुक्ति है

721
00:54:06,000 --> 00:54:10,240
क्या यह जीव की चाह वाली मुक्ति है

722
00:54:10,240 --> 00:54:14,320
दिखा दू लिखा हुआ किसम लिखा मेरे

723
00:54:14,320 --> 00:54:18,320
को बता दो मैं भी चेक कर लूगा ब भाई साब मैं भी चेक कर लू

724
00:54:18,320 --> 00:54:24,320
क लिखा हुआ एक बार दिखा दो

725
00:54:48,800 --> 00:54:54,800
दो समथिंग पने पर था

726
00:55:06,440 --> 00:55:10,440
इसमें लिखा है मुक्त जीव मुक्ति में प्राप्त होकर ब्रह्म में आनंद को

727
00:55:10,440 --> 00:55:14,440
तब तक भोग के पुनः महाकल्प के पश्चात मुक्ति सुख को

728
00:55:14,440 --> 00:55:20,440
छोड़कर संसार में आते हैं यह देख

729
00:55:20,440 --> 00:55:24,720
लो

730
00:55:24,720 --> 00:55:27,840
सत्या सत्या

731
00:55:27,840 --> 00:55:32,720
प्रकाश और इसमें कौन पेज है

732
00:55:32,720 --> 00:55:36,720
संसार में वापस आते हैं यह तो मुझे

733
00:55:36,720 --> 00:55:40,800
पता है लिखा हो कौन सा पे पेज नंबर बता दो चेक कर लूंगा जाके अभी तो मैं कहीं

734
00:55:40,800 --> 00:55:45,080
और हूं अभी तो नहीं ठीक है पेज नंबर 199

735
00:55:45,080 --> 00:55:49,680
है चेक कर लीजिएगा तो य कहा जा रहा

736
00:55:49,680 --> 00:55:53,720
है यहां पर कहा जा रहा है कि जो जीव है वो मुक्त होने

737
00:55:53,720 --> 00:55:57,760
के बाद वापस वापस आएगा तो क्या जीव

738
00:55:57,760 --> 00:56:01,240
को मुक्ति मिल रही

739
00:56:01,240 --> 00:56:05,720
है क्या जीव को मुक्ति मिल रही है

740
00:56:05,720 --> 00:56:10,360
इसके बारे में मैं पढ़ के जब बताऊंगा पूरा डिटेल क्या लिखा हुआ है

741
00:56:10,360 --> 00:56:13,480
आपने ईश्वर के बारे

742
00:56:13,480 --> 00:56:17,640
में हा पढ़ लिवर के बारे में पढ़

743
00:56:17,640 --> 00:56:21,080
लिया हा

744
00:56:21,080 --> 00:56:25,320
जी तो आप ईश्वर की बात ही बता दीजिए मुझको ईश्वर

745
00:56:25,320 --> 00:56:29,720
सर्वशक्तिमान है कैसे क्या बता सर्वशक्तिमान

746
00:56:29,720 --> 00:56:33,760
है तो बता हां क्या

747
00:56:33,760 --> 00:56:37,960
चीज अवतार अवतार ले सकता है या

748
00:56:37,960 --> 00:56:39,920
नहीं अब नहीं लेने

749
00:56:39,920 --> 00:56:44,080
की जरूरत ही नहीं अवतार नहीं लेता अरे मैंने सवाल य

750
00:56:44,080 --> 00:56:48,120
पूछा देखिए साहब सिंह जी यहां आपकी चोरी है थोड़ी सी

751
00:56:48,120 --> 00:56:52,120
अगर आप सत्यवादी है ना तो सीना सीना तान के सत्य

752
00:56:52,120 --> 00:56:54,680
बोलना

753
00:56:54,680 --> 00:56:59,360
सीखिए अपने नाम साहब सिंह लगाते हैं शेर

754
00:56:59,360 --> 00:57:03,840
शेर लगाते हैं अपने नाम में कितनी बार आप उस सवाल से बच रहे

755
00:57:03,840 --> 00:57:08,000
हैं मैं सवाल कर

756
00:57:08,000 --> 00:57:12,240
आप जानते हैं कि आप क्या कर रहे हैं मैंने आपसे सवाल पूछा है एक सरल भाषा

757
00:57:12,240 --> 00:57:16,320
में हिंदी में क्या ईश्वर अवतार ले सकता है या नहीं तो आप ये बोलते वो

758
00:57:16,320 --> 00:57:22,320
लेता नहीं है आप इसका जवाब दो ले सकता है कि

759
00:57:24,000 --> 00:57:29,960
नहीं ये कौन सी बड़े भाई बात

760
00:57:29,960 --> 00:57:34,000
आप क्लास में आइए अच्छा वो आप कह रहे हो उसको जरूरत

761
00:57:34,000 --> 00:57:38,320
नहीं है ठीक आ जाएंगे बड़े नहीं नहीं रुको आप कह रहे हो उसे जरूरत नहीं

762
00:57:38,320 --> 00:57:44,160
है वेदों में जगह जगह पर अलंकार लगाया गया है मंत्रों

763
00:57:44,160 --> 00:57:48,160
में जहां जहां पर जहां जहां पर अवतार

764
00:57:48,160 --> 00:57:53,280
विषयक बातें हुई है ईश्वर के स्वरूप विषयक बातें हुई है वहा सब

765
00:57:53,280 --> 00:57:57,400
जगह ये दयानंद जी ने कह दिया समाज ने बोल

766
00:57:57,400 --> 00:58:01,760
देता है कि अलंकार लगा है यहां पर यहां ईश्वर वास्तव में अवतरित

767
00:58:01,760 --> 00:58:06,040
नहीं हो रहे हैं वास्तव में उनका स्वरूप नहीं है ये अलंकार है उपमा अलंकार है ये अलंकार

768
00:58:06,040 --> 00:58:12,040
है वो अलंकार है अच्छा जी

769
00:58:13,960 --> 00:58:19,320
हम तो अलंकार लगाने की क्या आवश्यकता है ईश्वर

770
00:58:19,320 --> 00:58:23,640
को ये तो देखो विद्वान बताएंगे जो व्याकरण आचार्य

771
00:58:23,640 --> 00:58:27,720
है इस पर तो आप चर्चा कर सकते हो ना वेद भाष्य कौन सही है कौन गलत

772
00:58:27,720 --> 00:58:31,800
है भाई साहब मैंने आपसे पूछा अलंकार लगाने की आवश्यकता क्या

773
00:58:31,800 --> 00:58:36,760
है अलंकार होता है सुंदरता के

774
00:58:36,760 --> 00:58:40,880
लिए वो कोई प्रतीक भी तो हो सकता है समझाने के लिए बताया गया

775
00:58:40,880 --> 00:58:45,000
हो समझाने के लिए यानी कि किसी बात को सरलता

776
00:58:45,000 --> 00:58:51,000
से समझाने के लिए ईश्वर अलंकार लगा सकता

777
00:58:51,800 --> 00:58:56,320
है चलिए ठीक है आप जो है

778
00:58:56,320 --> 00:59:00,400
आप आपसे बेकार मगजमारी करना ठीक नहीं है आप क्लासेस जवाइन

779
00:59:00,400 --> 00:59:04,480
करिए आपको बहुत अभी आप इस योग्य

780
00:59:04,480 --> 00:59:10,480
नहीं है कि आपसे इतनी देर तक बात की जाए ठीक

781
00:59:13,120 --> 00:59:17,480
है यह सवाल से सब लोग क्यों भागते

782
00:59:17,480 --> 00:59:21,720
हैं जैसे रामपाल जी वाले भी भागते

783
00:59:21,720 --> 00:59:25,840
हैं ये लोग भी भागते हैं बस मैं आपको जाते जाते ये कहूंगा कि कुमार

784
00:59:25,840 --> 00:59:30,520
एक महान जाति है हमारे कुमार भाई महान है

785
00:59:30,520 --> 00:59:35,400
यह ध्यान रखिएगा जी विशाल भाटिया जी जय श्री राम

786
00:59:35,400 --> 00:59:39,680
जय श्री राम और बताइए

787
00:59:39,680 --> 00:59:43,880
नमस्कार नमस्कार सभी को नमस्कार

788
00:59:43,880 --> 00:59:48,600
नमस्कार आज आप मेरी थोड़ी सी शंकाओं का समाधान कर देंगे

789
00:59:48,600 --> 00:59:52,960
शंकाओं का समाधान आप पर्सनली मुझसे बात करिए वहां पर करेंगे नहीं नहीं रामायण

790
00:59:52,960 --> 00:59:57,720
पर कुछ ट है बस एक दो बस वाल्मीकि रामायण

791
00:59:57,720 --> 01:00:01,720
ठीक है बोलिए

792
01:00:01,720 --> 01:00:05,840
अभी एक य पर वाल्मीकि रामायण पर एक चैनल आता है

793
01:00:05,840 --> 01:00:06,800
21 नोट्स के

794
01:00:06,800 --> 01:00:10,800
नाम से व जिसम वाल्मीकि रामायण के ऊपर वो दिखाया

795
01:00:10,800 --> 01:00:15,080
जाता है उनमें मतलब दो तीन चीज उसम ऐसी दिखाई जाए जो मतलब मुझको

796
01:00:15,080 --> 01:00:19,280
पर्सनली मतलब दिमाग के बा की चीज है वो

797
01:00:19,280 --> 01:00:23,400
जैसे यह है आप व्यक्तिगत व्यक्तिगत संपर्क कर लीजिएगा वहां

798
01:00:23,400 --> 01:00:29,400
पर हम लोग बात करेंगे इ बातो ठीक है [संगीत]

799
01:00:31,280 --> 01:00:35,320
बक नमस्कार शिवांश भैया नमस्कार पहाड़ी जी

800
01:00:35,320 --> 01:00:40,000
नमस्कार जय श्री राम ज श्रीम आज की चर्चा का विषय क्या

801
01:00:40,000 --> 01:00:44,160
है देखिए मुख्य विषय तो यह था कि हमको जो है जो ट

802
01:00:44,160 --> 01:00:48,400
दिए जा रहे हैं चैनल को बैन कराने के पीछे लगे हुए हैं सब लोग हमारे

803
01:00:48,400 --> 01:00:52,480
एक रील पूर्व में जाकिर नायक वाली डिलीट कर दी गई थी उसके

804
01:00:52,480 --> 01:00:56,640
बाद अभी बीच में हमारे कमेंट्स पर जो है प्रहार हो रहा था वानिंग

805
01:00:56,640 --> 01:01:00,720
आ रही थीय से और अभी एक रिसेंटली एक वीडियो और डिलीट कर

806
01:01:00,720 --> 01:01:04,800
दिया गया है और इनकी तरफ से थट तो आते ही रहते हैं कॉल्स आते

807
01:01:04,800 --> 01:01:09,040
रहते हैं य सब चीज है वही चर्चा

808
01:01:09,040 --> 01:01:13,160
का विषय हा क्या

809
01:01:13,160 --> 01:01:17,880
मैंने आपको रीसेंट का वीडियो देखा बहुत अच्छा लगा देख एकदम बहुत

810
01:01:17,880 --> 01:01:21,800
सरा अच्छा

811
01:01:21,800 --> 01:01:25,920
लगा सराह वयो है और किसी

812
01:01:25,920 --> 01:01:30,080
मतलब पर्सनल अटैक ये नहीं करते हैं और ना ही इनका कोई पर्सनल कुछ

813
01:01:30,080 --> 01:01:34,080
वो है बस आइडल जीी जो विकृत आइडल जीी है जो आगे चलकर घातक

814
01:01:34,080 --> 01:01:38,240
हो सकती है जिन्होंने हिंदू समाज को अपंग बना दिया है अलग-अलग

815
01:01:38,240 --> 01:01:42,520
मत मता तरों में जो बढ़ गए हैं हमारे मूल जो चीजें हैं

816
01:01:42,520 --> 01:01:47,200
जो नहीं समझ पा रहे हैं जैसे वर्णाश्रम व्यवस्था हो गई ये सब चीजें हो गई

817
01:01:47,200 --> 01:01:51,280
इसके कारण जो आगामी गलत परिणाम होंगे उसका ही

818
01:01:51,280 --> 01:01:55,560
ये विरोध किया जा रहा है इस चैनल के माध्यम से लेकिन ये लोग नहीं समझ के उसको पर्सनल अटैक समझते

819
01:01:55,560 --> 01:01:59,560
हैं और शायद मास रिपोर्ट करवाते होंगे आपकी वीडियो को

820
01:01:59,560 --> 01:02:05,560
जिसके कारण वो सब वीडियो हटा दी जाती है यह

821
01:02:06,040 --> 01:02:10,080
वाली कुछ कमेंट कर रहे हैं शिवांश की दुकान बंद हो रही

822
01:02:10,080 --> 01:02:14,760
है इसलिए घुमा रहा

823
01:02:14,760 --> 01:02:18,800
है अभी दुकान बंद करवा के आ रहे हैं देख लीजिए सबूत

824
01:02:18,800 --> 01:02:23,080
सबूत भी है बहुत

825
01:02:23,080 --> 01:02:29,080
बंदर चला सब एक बार देखेंगे हम फिर

826
01:02:29,200 --> 01:02:33,280
से बहुत सरानी कार्य है आपके क्षेत्र में

827
01:02:33,280 --> 01:02:39,280
आपने किने बत काम किया

828
01:02:56,320 --> 01:03:02,320
नहीं है रा

829
01:03:02,960 --> 01:03:08,160
येर दि इन लोगों ने ू धर्म के

830
01:03:08,160 --> 01:03:14,160
मा की पूजा करने वाले मूर्ख

831
01:03:18,200 --> 01:03:24,200
है माता के सा बलात्कार हो रहा हैम

832
01:03:35,120 --> 01:03:39,760
ब आ बस करो बस करो

833
01:03:39,760 --> 01:03:43,920
आर्य आयुष जी कह रहे हैं कि इजी टॉपिक पर हर बार क्यों

834
01:03:43,920 --> 01:03:48,040
आते हो तो आर्य आ जी क्या कमेंट्स के

835
01:03:48,040 --> 01:03:52,200
माध्यम से अपने पक्ष को रखते रहना यह इजी नहीं है

836
01:03:52,200 --> 01:03:58,000
क्या सामने आकर के बात करने से तराना यह कायरता नहीं है

837
01:03:58,000 --> 01:04:02,760
आपका सिद्धांत आप पर लागू नहीं होता दूसरों के लिए

838
01:04:02,760 --> 01:04:08,120
केवल संदीप जी

839
01:04:08,120 --> 01:04:13,320
बताइए संदीप जी चेहरा दिखाएं बात

840
01:04:13,320 --> 01:04:19,040
करें चले गए संदीप जी चेहरा

841
01:04:19,040 --> 01:04:23,880
दिखाएं हां जी बोलिए

842
01:04:23,880 --> 01:04:26,400
अब

843
01:04:26,400 --> 01:04:30,480
जो साधारण व्यक्ति है ना उसकी बात ऐसी हो गई है कि बस वो चला जा रहा है

844
01:04:30,480 --> 01:04:34,400
उसको पता ही नहीं है वो कहां चला जा रहा

845
01:04:34,400 --> 01:04:38,880
है अब जैसे साहब सिंह जी है ये जो है इसलिए

846
01:04:38,880 --> 01:04:43,000
देखिए वो मैंने बताया ना कि फसाया कैसे जाता है व्यक्ति को

847
01:04:43,000 --> 01:04:47,360
उसकी जो कमजोर न होती है ना उस पर वार किया जाता है गायत्री मंत्र गायत्री

848
01:04:47,360 --> 01:04:51,560
मंत्र गायत्री मंत्र अरे देख वो तुझे गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देते क्यों क्योंकि

849
01:04:51,560 --> 01:04:55,680
वो तुझे नीट समझते हैं तू शूद्र है हमारे साथ आज हम तेरा

850
01:04:55,680 --> 01:05:00,000
जने कराएंगे हमारे यहां जो है कर्म से माना जाता है ऐसे ऐसे करके अपने साथ

851
01:05:00,000 --> 01:05:04,120
भर लिया अब साहब सिंह को ये नहीं बता पाए कि भैया हमारे द्वारा पूजित होने

852
01:05:04,120 --> 01:05:08,120
वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है हम तो केवल भीड़ बटोर

853
01:05:08,120 --> 01:05:12,280
रहे हैं हमारे हमारे द्वारा जो मिलने वाली

854
01:05:12,280 --> 01:05:16,640
मुक्ति है मुक्ति वो मुक्ति नहीं है जो जीव की चाह का वास्तविक

855
01:05:16,640 --> 01:05:20,680
विषय है अब ये लोग कहते हैं नहीं नहीं ऐसा नहीं है वो जो है मुक्त

856
01:05:20,680 --> 01:05:23,280
हो जाता है उसके बाद मुक्ति के बाद वो वापस आना

857
01:05:23,280 --> 01:05:29,000
वापस आना पड़ेगा इसमें आगे तर्क भी उन्होने उन्होंने

858
01:05:29,000 --> 01:05:33,000
अपने सही अपने ग्रंथ उन्होने सही से नहीं पढ़े और यहां तर्क

859
01:05:33,000 --> 01:05:37,080
करने आ गए उनको यही नहीं पता था इसम उन्होने जो है तर्क

860
01:05:37,080 --> 01:05:41,240
भी दिया है इसमें उन्होने तर्क क्या दिया

861
01:05:41,240 --> 01:05:43,520
है

862
01:05:43,520 --> 01:05:47,880
कि अगर व्यक्ति वापस नहीं आएगा तो मुक्ति से बोर हो जाएगा

863
01:05:47,880 --> 01:05:52,120
बताइए यह तर्क है इसका मतलब

864
01:05:52,120 --> 01:05:56,960
सबसे बड़ा बोर तो ईश्वर होना चाहिए जो हमेशा मुक्त है वो बोर नहीं हुआ अपनी मुक्ति

865
01:05:56,960 --> 01:06:01,200
से कुछ भी बोल देते हैं अच्छा दूसरी

866
01:06:01,200 --> 01:06:05,520
एक दूसरी एक बात और है कि चलो मान लिया कि इनका फंडा सही

867
01:06:05,520 --> 01:06:09,520
है मगर मुक्त तो वो सभी तरीके की चीजों से होना चाहिए

868
01:06:09,520 --> 01:06:13,720
ना उस 36 लाख कितने लाख वर्ष है 33 लाख 20

869
01:06:13,720 --> 01:06:17,800
सहस्त्र वर्षों की एक चतुर्य गी दो सहस्त्र चतुर युग यों

870
01:06:17,800 --> 01:06:22,040
का एक अहोरात्र ऐसे 30 अहोरात्र का एक महीना

871
01:06:22,040 --> 01:06:26,120
ऐसे 12 महीनों का एक वर्ष ऐसे शत वर्षों का प्रांत

872
01:06:26,120 --> 01:06:30,200
काल होता है तो इनका ये जो मुक्ति का काल है ये है इतना लंबा है

873
01:06:30,200 --> 01:06:35,040
ठीक है मगर क्या इस बीच वो पूर्णतया मुक्त

874
01:06:35,040 --> 01:06:38,440
रहा सोचने वाली बात है नहीं क्यों क्योंकि

875
01:06:38,440 --> 01:06:43,560
उसको एक दुख था क्या दुख था उसको

876
01:06:43,560 --> 01:06:48,040
कि मुझे वापस जाना है यह तो था

877
01:06:48,040 --> 01:06:52,280
यह दुख तो चिपका है ना इसका क्या करोगे

878
01:06:52,280 --> 01:06:56,440
वो पूरे प्रांत काल में ये जानता है कि मुझे अभी वहां दुख भोगने

879
01:06:56,440 --> 01:07:00,480
कष्ट भोगने दोबारा वहां जाना

880
01:07:00,480 --> 01:07:04,680
है बिल्कुल जैसे कि आप अगर एक

881
01:07:04,680 --> 01:07:08,760
सामान्य व्यक्ति की बात करें वो कहीं पर घूमने जाता है

882
01:07:08,760 --> 01:07:12,840
अपनी जो आम जो दिनचर्या होती है

883
01:07:12,840 --> 01:07:17,120
उससे समय निकाल कर के वो घूमने जाता है कुछ करने जाता है छुट्टी मनाने

884
01:07:17,120 --> 01:07:21,120
जाता है जितनी बार उसको याद आता है ना कि अभी मुझे वापस अपने

885
01:07:21,120 --> 01:07:25,240
उसी काम पर लगना है तो उसके मन में संकीर्णता आती है कि नहीं आती

886
01:07:25,240 --> 01:07:29,240
है बिल्कुल आती है बच्चों की गर्मियों की

887
01:07:29,240 --> 01:07:33,320
छुट्टियां होती थी सबको याद होगा ना गर्मियों की छुट्टियां होती थी पहले

888
01:07:33,320 --> 01:07:37,320
दो महीने की पूरे जो क्या कहते हैं वो

889
01:07:37,320 --> 01:07:41,600
मई और जून पूरा होता था वो पूरे में हम लोग खेलते थे कोई दिक्कत

890
01:07:41,600 --> 01:07:46,080
नहीं है मगर जितनी बार ये याद आता था ना एक तारीख को स्कूल खुलने वाला है

891
01:07:46,080 --> 01:07:50,600
उतनी बार अरे ऐसा ही नहीं रहेगा बदल जाएगा

892
01:07:50,600 --> 01:07:53,520
तो हम तो आनंद चाहते हैं ना

893
01:07:53,520 --> 01:07:57,680
अनंत आनंद अनंत ये कैसा अनंत आनंद है भाई जिसमें कहा

894
01:07:57,680 --> 01:08:00,640
जा रहा है वापस जाना

895
01:08:00,640 --> 01:08:05,400
है मैंने ना अब एक निर्णय लिया भैया हां

896
01:08:05,400 --> 01:08:09,480
बोलिए मैंने निर्णय यह लिया कि अब मैं भी अ ग्रंथों से इनका खंडन

897
01:08:09,480 --> 01:08:13,520
ज्यादा करूंगा नहीं क्योंकि जब मैंने बताया था अमि दस जी के चैनल पर गया था तो एक

898
01:08:13,520 --> 01:08:17,560
व्यक्ति ने बोला था हम उन्हीं को मानते हैं कि जो हमको अनुकूल होते हैं तो अब जो खुद

899
01:08:17,560 --> 01:08:21,640
ही कह रहे हैं कि हम वो चीज मानते जो हमको अच्छी लगती है ग से तो हम क्या उनका

900
01:08:21,640 --> 01:08:25,880
खंडन करें फिर वही तो नहीं

901
01:08:25,880 --> 01:08:30,120
नहीं अब उनका अब उनका खंडन उन्ही किताबों

902
01:08:30,120 --> 01:08:34,200
से होगा बक

903
01:08:34,200 --> 01:08:38,240
ऐसा सतलोक है जहां से लौट के आना पड़ता है

904
01:08:38,240 --> 01:08:42,800
जी का साथ ला सकते हैं जी

905
01:08:42,800 --> 01:08:47,520
जी जय श्री राम बोलिए जय श्री राम

906
01:08:47,520 --> 01:08:51,840
जी हा जीी आपसे बात हुई थी उस दिन एक्चु

907
01:08:51,840 --> 01:08:56,000
मेरा रिचार्ज जो है व खत्म हो गया था अच्छ जी

908
01:08:56,000 --> 01:09:00,120
हा तो को कंटिन्यू नहीं करना पड़ा तो मेरे

909
01:09:00,120 --> 01:09:05,800
को बहुत सारे क्वे जैसे आपने मेरे से बोला था

910
01:09:05,800 --> 01:09:08,720
के मतलब हम

911
01:09:08,720 --> 01:09:12,840
जो है हम उसको नहीं मानते हैं कबीर सागर को कबीर भीज को नहीं मानते

912
01:09:12,840 --> 01:09:16,840
हैं मतलब जो चीज कांट्रडिक्ट्री है जो वेद विरुद्ध

913
01:09:16,840 --> 01:09:20,840
है वो नहीं माना जा सकता जीी हा जीी तो को

914
01:09:20,840 --> 01:09:25,640
य बोलना था उनमें और आप में क्या फर्क र गया

915
01:09:25,640 --> 01:09:29,880
मैं बता देता हूं फर्क क्या है जी देखिए इसको

916
01:09:29,880 --> 01:09:33,960
स्टोरी को फिर से वहीं से शुरू करना पड़ेगा सबसे पहली बात य समझ लीजिए कि

917
01:09:33,960 --> 01:09:38,920
जीव की वास्तविक चाह क्या है सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना

918
01:09:38,920 --> 01:09:43,000
सत चित आनंद को प्राप्त करना दुनिया में ऐसा कुछ ना हो

919
01:09:43,000 --> 01:09:47,160
जिसे मैं ना जानता हूं मेरे मुझे जो प्राप्त होने वाला सुख

920
01:09:47,160 --> 01:09:51,440
है वह कभी खत्म ना हो और मैं सदा सत

921
01:09:51,440 --> 01:09:56,160
होकर रहूं सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना जी

922
01:09:56,160 --> 01:10:00,280
तो अब इसमें एक बात आती है कि हमारी

923
01:10:00,280 --> 01:10:04,680
इस चाह की पूर्ति कौन कर सकता है जो स्वयं सच्चिदानंद

924
01:10:04,680 --> 01:10:09,560
स्वरूप हो ये हमने उस दिन कर लिया था ना क्लियर इतना तो क्लियर है आपको

925
01:10:09,560 --> 01:10:13,680
जी जी ठीक है तो हमारी इस चाह

926
01:10:13,680 --> 01:10:18,360
की पूर्ति कौन कर सकता है जो स्वयं सच्चिदानंद स्वरूप हो अब उसको अगर

927
01:10:18,360 --> 01:10:22,600
हम सिंपली सिंपल भाषा में कह ले तो वो ईश्वर

928
01:10:22,600 --> 01:10:23,840
जो किसी भी प्रकार के

929
01:10:23,840 --> 01:10:28,280
नियम के नीचे नहीं है बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है

930
01:10:28,280 --> 01:10:32,360
ठीक है जी हा

931
01:10:32,360 --> 01:10:36,400
तो इसका अ यह है कि हमारी चाह का वास्तविक

932
01:10:36,400 --> 01:10:40,560
विषय वह ईश्वर है जिस पर कोई नियम लागू नहीं होता यहां तक क्लियर

933
01:10:40,560 --> 01:10:44,560
है आपको जी हा तो अब जब

934
01:10:44,560 --> 01:10:48,760
उस पर कोई नियम लागू नहीं होता है तो दूसरा क्वेश्चन यह बनता

935
01:10:48,760 --> 01:10:53,520
है कि जब उस पर कोई नियम लागू नहीं है

936
01:10:53,520 --> 01:10:57,760
और वही सब कुछ बनाने वा सर्व नियामक है सर्व

937
01:10:57,760 --> 01:11:02,400
नियंता है सब कुछ उसी ने बनाया है

938
01:11:02,400 --> 01:11:06,800
तो फिर यह कैसे पता किया जाएगा कि जो उसने हमें ग्रंथ दिए

939
01:11:06,800 --> 01:11:12,280
हैं वह हमारे हित के लिए हैं या अहित के लिए

940
01:11:12,280 --> 01:11:16,480
हैं जी जी एक तो मैं जब वह सर्व

941
01:11:16,480 --> 01:11:20,520
नियामक है जैसे कि आपकी बात कर ले जैसे जैसे आपने कबीर

942
01:11:20,520 --> 01:11:24,800
को भगवान माना तो कुछ अंशों में कबीर को भी लीला

943
01:11:24,800 --> 01:11:28,840
करने वा माना गया कि नहीं माना गया

944
01:11:28,840 --> 01:11:32,960
जी जी माना गया लीला का मतलब कि ऐसा

945
01:11:32,960 --> 01:11:37,320
कुछ दिखाना जो वास्तविक नहीं है जी

946
01:11:37,320 --> 01:11:39,560
है ना जैसे कि आपके

947
01:11:39,560 --> 01:11:43,840
ये रामपाल जी के अनुसार कबीर जो है वह भगवान है

948
01:11:43,840 --> 01:11:48,560
और भगवान को आवश्यकता तो है नहीं किसी को गुरु बनाने

949
01:11:48,560 --> 01:11:53,520
की हां जी हां जीी मगर उन्होंने गुरु बनाया

950
01:11:53,520 --> 01:11:57,520
आप मेरे को पाच मिनट दे रियली सॉरी अब मेरे को पा मिनट

951
01:11:57,520 --> 01:12:02,080
दे सकते हैं मेरे को जाना पड़ेगा ठीक है आप आइए

952
01:12:02,080 --> 01:12:05,120
ठीक

953
01:12:05,120 --> 01:12:11,120
है जी चक्र पाणी जी

954
01:12:12,640 --> 01:12:18,640
बोलिए जय श्री राम चक्र पानी जी कैसे हैं आप ज श्री

955
01:12:19,040 --> 01:12:25,040
राम ज बढ़िया है जी

956
01:12:25,960 --> 01:12:31,960
वीडियो मिला आज

957
01:12:32,600 --> 01:12:37,000
का फ वाला जी वो

958
01:12:37,000 --> 01:12:41,240
व इस पर भी डाला गया है य पर भी

959
01:12:41,240 --> 01:12:45,320
है अच्छा हा एक शोध

960
01:12:45,320 --> 01:12:50,200
करता आए शोधकर्ता जी आप अपना चेहरा दिखाए फिर बात करें

961
01:12:50,200 --> 01:12:54,240
और अब यह कलयुगी योगी को लीजिएगा नहीं वो केवल बात को

962
01:12:54,240 --> 01:13:00,240
बतंगड़ बनाने लिए आते किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए नहीं

963
01:13:01,120 --> 01:13:05,120
आते वो कंटेंट लेने आया था केवल जैसे अमित दास नहीं

964
01:13:05,120 --> 01:13:09,200
आने लगा था बीच में थोड़ हर दो तीन दिन में कोई बात लेकर आ जाता फिर

965
01:13:09,200 --> 01:13:12,840
यहां से व उठा कर के वहां

966
01:13:12,840 --> 01:13:16,920
भेजेगा जो अभी बहन आए थी नाम भी उसी हिसाब से रख

967
01:13:16,920 --> 01:13:20,960
रखा है उन्होने अच्छा अकेलापन सॉलिट्यूड

968
01:13:20,960 --> 01:13:25,120
कार्थ एकांत जो जि

969
01:13:25,120 --> 01:13:29,120
म जिसमें दिल और दिमाग अलग थलग हो जाता है उस

970
01:13:29,120 --> 01:13:33,240
स्थिति को बोला जाता हैय अच्छा

971
01:13:33,240 --> 01:13:36,600
समझ में है

972
01:13:36,600 --> 01:13:40,600
ये सॉलिट्यूड का जी शिवांश

973
01:13:40,600 --> 01:13:44,600
भैया नमस्ते मैं कह रहा था कि आज की चर्चा में आते हैं मैं कह

974
01:13:44,600 --> 01:13:48,600
रहा था कि आज की चर्चा का मुख्य विषय यह है कि आपको जो थ्रेट

975
01:13:48,600 --> 01:13:52,640
आ रहे हैं वो इसलिए आ रहे है क्योंकि कई सारे लोग हमारा वक्तव्य

976
01:13:52,640 --> 01:13:56,680
या आपका वक्तव्य नहीं समझ पा रहे हैं आपकी जो रियल

977
01:13:56,680 --> 01:14:00,680
इंटेंशन है जो आप जिस तरीके जिस लिए

978
01:14:00,680 --> 01:14:04,720
आप ये सब चीजें कर रहे हो हिंदुओं को एक करने के लिए और

979
01:14:04,720 --> 01:14:09,000
मूल जो हमारे सिद्धांत है उसकी रक्षा के लिए कि जो हमारे

980
01:14:09,000 --> 01:14:13,000
मूल सिद्धांत है उसको सब लोग मान के एकजुट हो जो खंड खंड

981
01:14:13,000 --> 01:14:17,120
और संस्थाओं में अलग-अलग ग्रुपों में जो हिंदुइज्म बट

982
01:14:17,120 --> 01:14:21,320
गया है तो खतरे के समय में यह एक हो पाए क् कुछ सार्वभौम

983
01:14:21,320 --> 01:14:25,320
सिद्धांत है जो सबको मान्य होने चाहिए आप इसके लिए कर रहे हो पर

984
01:14:25,320 --> 01:14:29,520
इसके लिए भी इंटेलेक्चुअल जो कैपेसिटी है होनी चाहिए ना

985
01:14:29,520 --> 01:14:33,600
तो बहुत सारे लोग वो नहीं समझ पा रहे हैं और वो सोच रहे हैं कि

986
01:14:33,600 --> 01:14:38,240
आप उनसे प पर्सनल दुश्मनी कर रहे हो जिसकी वजह से वो क्या कर रहे हैं

987
01:14:38,240 --> 01:14:42,280
आपके वीडियो को डिलीट कराने के षड्यंत्र हो रहे हैं गलत गलत कमेंट

988
01:14:42,280 --> 01:14:46,800
करते हैं जैसे आप बता रहेते थ्रेड्स भी आ रहे हैं तो ऐसे लोगों

989
01:14:46,800 --> 01:14:50,840
पे अगर हम समय बर्बाद ना करके अपने

990
01:14:50,840 --> 01:14:51,840
समान

991
01:14:51,840 --> 01:14:56,000
जो हमारे चीजों को समझते हैं या हमारे विचारों को जो महत्व

992
01:14:56,000 --> 01:15:00,240
देते हैं उनसे ही अगर हम संपर्क करें और उनके

993
01:15:00,240 --> 01:15:04,320
द्वारा अगर होना होगा तो वह लोग भी समझ जाएंगे जैसे अभी जब मैंने जवाइन किया

994
01:15:04,320 --> 01:15:08,520
था तो इससे पहले आपके साथ एक महानुभाव चर्चा में थे उनको

995
01:15:08,520 --> 01:15:12,640
जितना भी समझा समझा दो मुझे लग रहा है वो समझना ही नहीं चाहते हैं

996
01:15:12,640 --> 01:15:16,680
और अगर उनको यह भी पता लग जाए कि सामने वाला सही बोल रहा है

997
01:15:16,680 --> 01:15:21,040
फिर भी वह कुछ ना कुछ अड़ंगा डालेंगे सबसे पहली बात यह है कि हम जिस

998
01:15:21,040 --> 01:15:25,160
विचारधारा को मानते हैं उसके ग्रंथ तो हमें पड़े होने चाहिए

999
01:15:25,160 --> 01:15:29,280
और उसका हमें अच्छा नॉलेज होना चाहिए जब आपने उनके ग्रंथों को कोट किया

1000
01:15:29,280 --> 01:15:33,320
तो वह खुद नहीं जानते थे कि उनके ग्रंथों में यह लिखा है तो इसी से हमें पता

1001
01:15:33,320 --> 01:15:37,720
लग जाना चाहिए कि इन पर हमें समय व्यर्थ नहीं करना है

1002
01:15:37,720 --> 01:15:42,560
तो अब एक मैं आपको श्लोक प्रस्तुत करूंगा

1003
01:15:42,560 --> 01:15:46,720
श्लोक यह है कि जो आपने बोला था कि इनके जो समाधि

1004
01:15:46,720 --> 01:15:50,800
जो इनका जो लक्ष्य होता है आर्य समाज

1005
01:15:50,800 --> 01:15:55,040
का कि हमें इतने वर्ष तक समाधि प्राप्त करनी है उसके बाद हम वापस

1006
01:15:55,040 --> 01:15:59,520
आ जाएंगे लेकिन हमारी जो परंपरा है सनातन परंपरा

1007
01:15:59,520 --> 01:16:03,600
उसमें क्या लक्ष्य है मनुष्य का वह बताया

1008
01:16:03,600 --> 01:16:06,840
गया है जैसे आपने बोला था एक श्लोक आप अर्थ बताते हो बहुत

1009
01:16:06,840 --> 01:16:11,080
सरल भाषा में कि असतो मा सद्गमय तमसो मा

1010
01:16:11,080 --> 01:16:15,200
ज्योतिर गमय मृत्योर मा अमृतम गमय इसी

1011
01:16:15,200 --> 01:16:19,520
से पता लग जाता है कि यह वैदिक मंत्र है कि

1012
01:16:19,520 --> 01:16:23,560
असतो मा सद्गमय सार्वभौम मंत्र यह है कि

1013
01:16:23,560 --> 01:16:27,680
हर व्यक्ति असत्य सत्य की ओर बढ़ना चाह रहा है असतो मा सद

1014
01:16:27,680 --> 01:16:32,000
गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय अंधेरे से

1015
01:16:32,000 --> 01:16:36,000
प्रकाश की तरफ बढ़ना चाह रहा है और मृत्य मा अमृत मतलब हर व्यक्ति के

1016
01:16:36,000 --> 01:16:40,640
अंदर जो ऐसा ढोंग करते हैं आजकल की डेट में बड़े-बड़े कथावाचक और बड़े-बड़े

1017
01:16:40,640 --> 01:16:44,880
स्पिरिचुअलिस्ट की अहम ब्रह्मास्मि

1018
01:16:44,880 --> 01:16:49,000
शिवोहम अगर उनकी तरफ भी कोई चाकू लेकर दौड़ेगा तो वो

1019
01:16:49,000 --> 01:16:53,120
अपनी सुरक्षा करने के लिए क्या करेंगे बचाव करेंगे हालांकि वो एक्टिंग करते

1020
01:16:53,120 --> 01:16:57,240
हैं सबके सामने की शिवो हम मा स्मी मैं आत्मा हूं ऐसा बोलते हैं

1021
01:16:57,240 --> 01:17:01,320
पर अगर भी अगर उनके ऊपर भी कोई चाकू लेकर दौड़ेगा उनको

1022
01:17:01,320 --> 01:17:05,560
मारने के लिए तो वो क्या करेंगे अपनी सुरक्षा के लिए अपने शरीर को बचाएंगे

1023
01:17:05,560 --> 01:17:09,600
तो मतलब एक सुरक्षा का भाव एक

1024
01:17:09,600 --> 01:17:14,000
अमरत्व प्राप्त करने का भाव उनके अंदर

1025
01:17:14,000 --> 01:17:18,000
बहुत ही डेप्थ में है हर व्यक्ति के अंदर जो वो

1026
01:17:18,000 --> 01:17:21,880
फिलोसोफी नहीं भी मान रहा है तो इसका मतलब अमरत्व का भाव है

1027
01:17:21,880 --> 01:17:26,080
तो अस्तो सद्ग तमस मित्य अमृतम गम आप

1028
01:17:26,080 --> 01:17:30,200
अमृत मृत्यु से अमृता की तरफ जाने की चाह है

1029
01:17:30,200 --> 01:17:34,520
आनंद की चाह है ठीक है दूसरा क्या था असतो मा स

1030
01:17:34,520 --> 01:17:38,600
गमय आपने बोला था कि हर व्यक्ति सब

1031
01:17:38,600 --> 01:17:42,600
कुछ जान लेना चाहता है जैसे मेरी एक गवर्नमेंट जॉब लगी कुछ दिनों

1032
01:17:42,600 --> 01:17:46,680
बाद मेरी लाइफ मोनोटोन हो जाएगी और मैं चाहूंगा या इससे कुछ और

1033
01:17:46,680 --> 01:17:50,800
अच्छा होना चाहिए था जैसे बूढ़े बुजुर्ग लोग की मेंटालिटी हो जाती है

1034
01:17:50,800 --> 01:17:54,840
कि जो हमने पाना था वो तो हम अभी कर ही रहे जो हमने सोचा था यंग एज में

1035
01:17:54,840 --> 01:17:58,960
लेकिन फिर भी हम कुछ और पाना चाह रहे हैं तो यह चीज पूरे जीवन

1036
01:17:58,960 --> 01:18:03,440
भर चलती है वो चीज पूरी नहीं हो रही है सब कु जानने की इच्छा वो क्या

1037
01:18:03,440 --> 01:18:07,600
मिले कि वह पूरी हो जाए यह केवल हमारे ग्रंथों में ही बताया गया

1038
01:18:07,600 --> 01:18:11,680
है जब उपनिषदों में शिष्य गुरु के पास जाता है तत् विधि प्रणिपात

1039
01:18:11,680 --> 01:18:15,680
न परि प्रश्ने न सेवया कि इसका मेथड भी भगवत

1040
01:18:15,680 --> 01:18:20,080
गीता में भगवान कृष्ण बताते हैं अर्जुन को कि प्रणिपात करके

1041
01:18:20,080 --> 01:18:24,120
सेवा सुसु सा करके पात्र व्यक्ति को ही

1042
01:18:24,120 --> 01:18:28,160
ज्ञान दिया जाता है यह ज्ञान दिया जाता है यह ज्ञान क्या है यह वह

1043
01:18:28,160 --> 01:18:32,200
ज्ञान है जिसको जानने से कुछ भी जानना शेष नहीं

1044
01:18:32,200 --> 01:18:36,200
रहता है यह पूरे सारे धर्म और मत मता के

1045
01:18:36,200 --> 01:18:37,080
लोगों को चैलेंज

1046
01:18:37,080 --> 01:18:41,160
है कि अपने शास्त्रों में यह वाक्य बता दे कि ऐसी कि शिष्य गुरु से

1047
01:18:41,160 --> 01:18:45,600
पूछ रहा हो कि ऐसा क्या ज्ञान है जिसको जानने से

1048
01:18:45,600 --> 01:18:49,720
कुछ भी जानना शेष नहीं रह जाता है यह हमारे उपनिषदों में ही

1049
01:18:49,720 --> 01:18:54,200
शिष्य गुरु से पूछ रहा है कि मुझे कुछ ऐसा बताइए जिसके जानने

1050
01:18:54,200 --> 01:18:58,640
से जान हा कुछ भी जानना शेष ना रह जाए

1051
01:18:58,640 --> 01:19:02,960
आधार बना के मैं इनको वही बता रहा था जो बहन जी वापस

1052
01:19:02,960 --> 01:19:07,160
आ गई है मैं इनको आप जो बोल रहे हैं ना बिल्कुल सही बोल रहे हैं और वही

1053
01:19:07,160 --> 01:19:12,080
बात मैं इनको बता रहा था जी आप वापस आ गई है बताए आप क्या बात है

1054
01:19:12,080 --> 01:19:16,360
आपकी मेरे को जैसे जो आपने हमसे एक प्रश्न

1055
01:19:16,360 --> 01:19:21,240
पूछा था आपने हमसे एक प्रश्न पूछा था कि फिर आप में और उनमें अंतर क्या है

1056
01:19:21,240 --> 01:19:25,720
तो मैं आपको अंतर बता रहा हूं कि आपकी जो मूल इच्छा

1057
01:19:25,720 --> 01:19:30,120
है वह है सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त

1058
01:19:30,120 --> 01:19:34,120
कर लेने की और उसकी प्राप्ति से जो आपको

1059
01:19:34,120 --> 01:19:38,120
प्राप्त होगा वह है परम स्वतंत्र मोक्ष यह दो इच्छाएं

1060
01:19:38,120 --> 01:19:42,120
हैं आपकी वो आप अपनी अंतरात्मा से पूछ करके देखिए कि है

1061
01:19:42,120 --> 01:19:46,160
कि नहीं हमने तो आपको कई अभी गौरव जी ने भी बहुत अच्छे से

1062
01:19:46,160 --> 01:19:50,200
जस्टिफाई किया क्लेरिफाई किया सॉरी है ना तो

1063
01:19:50,200 --> 01:19:52,280
आप अपने आप से यह पूछ

1064
01:19:52,280 --> 01:19:56,800
करके देखिए क्या यह आपके अंदर इच्छा है नहीं तो आपने

1065
01:19:56,800 --> 01:20:00,920
आप जो यह आपका प्रश्न है ना कि आप हम में और उनमें अंतर

1066
01:20:00,920 --> 01:20:05,320
क्या है क्या वो इस आपकी मूल इच्छा पर बात कर रहे

1067
01:20:05,320 --> 01:20:09,760
हैं नहीं कर रहे क्योंकि मैं आपको

1068
01:20:09,760 --> 01:20:13,800
एक चीज बोलना चाहती हूं एक्चुअली मेरा बिहेवियर जो है व थोड़ा डिबेट वाला नहीं है

1069
01:20:13,800 --> 01:20:17,960
मैं आपको मैं आपसे सिर्फ पूछ सकती हूं मतलब मैं आपसे ऐसे

1070
01:20:17,960 --> 01:20:22,400
नहीं कर पाऊंगी नहीं मैं डिबेट वाले उसम नहीं हूं

1071
01:20:22,400 --> 01:20:26,480
वो मेरी बोलने की शैली ऐसी हो जाती है लोग थोड़ा सा सुन

1072
01:20:26,480 --> 01:20:30,560
मैं थोड़ा स्पष्ट वादी हूं मतलब जो मेरे थॉट्स है और जो मैं मेरे

1073
01:20:30,560 --> 01:20:34,800
वक्तव्य है वो क्लियर होने चाहिए इसलिए थोड़ा सा मैं लाउड रहता हूं बोलते

1074
01:20:34,800 --> 01:20:39,000
टाइम मैं डिबेट वाले उसम नहीं हूं मोड में आप चिंता ना करें मेरे

1075
01:20:39,000 --> 01:20:43,240
वक्तव्य हा पास टाइम बहुत कम है तो इसलिए

1076
01:20:43,240 --> 01:20:47,360
मतलब मैं आपसे क्वेश्चन पूछना चाहती हूं जैसे मैं जो अगर मेरे को कोई

1077
01:20:47,360 --> 01:20:51,440
सुन रहा है मैं हो सकता है मेरा 15 मिनट बा नेट

1078
01:20:51,440 --> 01:20:55,680
खत्म हो जाए तो मैं आपसे बस इतना बोलना चाहती हूं जैसे रामपाल

1079
01:20:55,680 --> 01:20:59,800
जी महाराज का अगर कोई मैं आपके एक प्रश्न का उत्तर दे दूं

1080
01:20:59,800 --> 01:21:03,880
मुझे बस दो मिनट दीजिए फिर आप अपने अगले प्रश्न रख लीजिए ठीक है

1081
01:21:03,880 --> 01:21:07,360
हा तो कारण यह है कि रामपाल

1082
01:21:07,360 --> 01:21:11,720
की चीजों को क्यों ना माना जाए और यह जो सनातन परंपरा

1083
01:21:11,720 --> 01:21:15,720
प्राप्त चीज हैं इनको क्यों माना जाए इसका पहला कारण है

1084
01:21:15,720 --> 01:21:20,040
कि यहां पर आपको वह दिया जा रहा है जो आपको चाहिए

1085
01:21:20,040 --> 01:21:24,720
मतलब कि परम स्वतंत्र मोक्ष यह आपकी अत आत्मा की इच्छा है रामपा

1086
01:21:24,720 --> 01:21:29,000
द्वारा दिया जाने दिया जाने दिया जाने वाला जो मोक्ष है

1087
01:21:29,000 --> 01:21:33,640
वो क्या है कि आप जो है सतलोक पहुंच जाएंगे

1088
01:21:33,640 --> 01:21:37,680
और वहां पर जो बादाम खाएंगे काजू खाएंगे मतलब वहां पर भी व्यवहार

1089
01:21:37,680 --> 01:21:41,720
है व्यवहार है तो वहां पर भी व्यवहार के बीच में आने वाली समय गणना

1090
01:21:41,720 --> 01:21:45,880
है और अगर समय गणना है तो इसका मतलब वहां पर भी आपको मोक्ष

1091
01:21:45,880 --> 01:21:50,040
नहीं है वहां पर भी नित्य सुख नहीं है अनंत सुख नहीं है दूसरी बात

1092
01:21:50,040 --> 01:21:54,280
काल फिर से जन्म लेता है काल कई बार जन्म ले चुका है तो काल फिर से जन्म

1093
01:21:54,280 --> 01:21:59,000
ले फिर से आत्माओ आत्माएं उनकी ओर आकर्षित होंगी और वह नीचे आएंगी

1094
01:21:59,000 --> 01:22:03,240
इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जो जीवात्मा शुरू में नीचे आती

1095
01:22:03,240 --> 01:22:07,400
है वह क्यों आती है वो सतलोक में ही थी वो क्यों आती है क्योंकि उनका उनको

1096
01:22:07,400 --> 01:22:11,760
आकर्षण हुआ काल की ओर ठीक है तो मे

1097
01:22:11,760 --> 01:22:15,880
पास मेरे पास बुक है सॉरी फॉर इंटरप्शन बट

1098
01:22:15,880 --> 01:22:20,120
मेरे को मेरे पास बुक है इनकी तो उसमें इन्होंने लिख

1099
01:22:20,120 --> 01:22:22,360
रखा है मैं उसको ढूंढ के हो सकता है दिखा

1100
01:22:22,360 --> 01:22:26,840
भी दूं आपको भेज द उसम लिखा है कि

1101
01:22:26,840 --> 01:22:30,960
उसमें किसी ने बुक के एंड में है कि क्वेश्चन एंड आंसर जो होते

1102
01:22:30,960 --> 01:22:35,360
हैं शंका एंड समाधान तो उस उन्होंने बोला कि भाई

1103
01:22:35,360 --> 01:22:39,440
हम ऐसी गलती दोबारा कर सकते हैं तो उन्होंने बोला कि

1104
01:22:39,440 --> 01:22:44,400
नहीं हम ऐसी गलती दोबारा नहीं कर सकते क्योंकि मतलब

1105
01:22:44,400 --> 01:22:49,080
जो हम हम धोखा खाए हुए हैं जो दूध का जला होता है व छा भी फूक

1106
01:22:49,080 --> 01:22:53,280
म कहने का मतलब य है उनका अब उन्होने यह कहा है कि हम ऐसी गलती दोबारा

1107
01:22:53,280 --> 01:22:57,440
नहीं कर सकते पर पहली बात तो यह है कि यह सिद्धांत

1108
01:22:57,440 --> 01:23:01,560
क्या कहीं पर शास्त्र में लिखा है क्या कबीर जी ने यह सिद्धांत

1109
01:23:01,560 --> 01:23:05,800
लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति एक बार गलती कर लेगा

1110
01:23:05,800 --> 01:23:10,040
तो उसको फिर से आकर्षण नहीं हो सकता नहीं ऐसा

1111
01:23:10,040 --> 01:23:14,120
तो कुछ नहीं है हा तो इसका मतलब यहां पर शास्त्र का प्रमाण नहीं है

1112
01:23:14,120 --> 01:23:18,240
यहां पर अपने मन की व्याख्या है दूसरी बात मैं ये नहीं कह रहा हूं जब

1113
01:23:18,240 --> 01:23:22,240
काल दोबारा जन्म लेगा क्योंकि काल एक बार नहीं जन्म लिया इन्होंने अपनी बुक

1114
01:23:22,240 --> 01:23:26,360
में लिखा है काल जन्मता और मरता है तो काल दोबारा जन्म

1115
01:23:26,360 --> 01:23:30,920
लेगा तो उसकी ओर आकर्षित होने वाली जीवात्मा कौन सी होंगी

1116
01:23:30,920 --> 01:23:35,040
हां हां मतलब वही सब जो मतलब वो तो उस पर डिपेंड करता है कि

1117
01:23:35,040 --> 01:23:37,480
कौन सी होंगी म

1118
01:23:37,480 --> 01:23:41,480
मतलब यही यही जीवात्मा जो सतलोक में रह रही है वही तो वही तो आकर्षित

1119
01:23:41,480 --> 01:23:45,680
होंगी काल की ओर हां जी दूसरी बात

1120
01:23:45,680 --> 01:23:50,080
दूसरी बात हमने तीन चीजें पकड़ी है आकर्षित होंगे इसका मतलब

1121
01:23:50,080 --> 01:23:54,440
ये है कि उनके अंदर मन है हा मतलब ये हु आकर्षित

1122
01:23:54,440 --> 01:23:58,480
होंगी इसका मतलब कुछ ऐसा है देखिए सबसे बड़ी बात है कि

1123
01:23:58,480 --> 01:24:02,520
आपने कहा कि दोबारा वो आकर्षित नहीं होंगी ये रामपाल ने कहा मगर एक

1124
01:24:02,520 --> 01:24:06,680
फैक्ट फुल बात और है कि वो जो फर्स्ट टाइम फर्स्ट

1125
01:24:06,680 --> 01:24:11,240
टाइम जो वो आकर्षित हुई थी यानी कि कुछ लोग कुछ

1126
01:24:11,240 --> 01:24:15,560
सतलोक में ऐसा था जो उनके पास नहीं था जिसके कारण

1127
01:24:15,560 --> 01:24:20,200
उनको आकर्षित होना पड़ा वो परम सुख नहीं था ना

1128
01:24:20,200 --> 01:24:25,080
तभी तो कुछ बाल बराबर दिक्कत थी जो वो काल की ओर अट्रैक्ट हो गई

1129
01:24:25,080 --> 01:24:29,280
अट्रैक्ट हुई ना यानी कि सतलोक में भी वोह सुख नहीं था जिसको

1130
01:24:29,280 --> 01:24:33,400
प्राप्त करने के बाद व्यक्ति हां उस बुक में ऐसा

1131
01:24:33,400 --> 01:24:37,440
लिखा है कि जैसे आज हम किसी सेलिब्रिटी को

1132
01:24:37,440 --> 01:24:41,480
देख लेते हैं जैसे मान लीजिए एक तरफ कोई धर्म गुरु है और एक तरफ सेलिब्रिटी

1133
01:24:41,480 --> 01:24:45,600
है तो हर कोई ऐसे सोचता है अरे इसने तो ब्रांडेड कपड़े पहने हैं वाओ य

1134
01:24:45,600 --> 01:24:49,640
मतलब वो त्रुटी हम में ही होती है कि हम उस तो यानी कि

1135
01:24:49,640 --> 01:24:52,600
वहां पर वहां पर भी त्रुटि होती है गलतियां है

1136
01:24:52,600 --> 01:24:56,680
पाप है पुण्य है बड़ा छोटा है सब एक जैसे नहीं है जैसा यहां पर

1137
01:24:56,680 --> 01:25:01,080
है वैसा सतलोक में नहीं है मेरे क्वेश्चन

1138
01:25:01,080 --> 01:25:05,840
मतलब थोड़ा मैं आपसे फिर कह द म आपसे डिबेट करने के लिए नहीं

1139
01:25:05,840 --> 01:25:10,640
नहीं मैं आपको डिबेट वाले उसम आंसर नहीं दे रहा हूं मैं जनरल आंसर दे रहा हूं देखिए

1140
01:25:10,640 --> 01:25:14,640
यह जो बड़ा छोटा है कि वह सेलिब्रिटी है मैं सेलिब्रिटी नहीं हूं यह यहां की

1141
01:25:14,640 --> 01:25:19,000
बात है ना जब सतलोक में सबको परम सुख मिल गया परम सुख का मतलब

1142
01:25:19,000 --> 01:25:23,960
एक ही चीज है सबके पास तो कोई सेलिब्रिटी कैसे बन गया

1143
01:25:23,960 --> 01:25:27,960
या या सेलिब्रिटी तो जब कोई बनेगा जब किसी के पास कुछ

1144
01:25:27,960 --> 01:25:32,520
ऐसा हो जो बाकियों के पास ना हो तभी तो सेलिब्रिटी कहलाएगा

1145
01:25:32,520 --> 01:25:36,520
इसका मतलब सतलोक में भी कुछ चीजें जो जीवा आत्माओं

1146
01:25:36,520 --> 01:25:40,720
को मिली मगर फिर भी कुछ चीजें ऐसी थी जो उन्हें नहीं मिली तभी तो कोई सेलिब्रिटी

1147
01:25:40,720 --> 01:25:44,760
है सेलिब्रिटी कोई कैसे बन सकता है सोचिए आप भाई ज्यादा से

1148
01:25:44,760 --> 01:25:48,800
ज्यादा एक ईश्वर हो सकता है सेलिब्रिटी कि चलो ईश्वर है द्वैत को मान लिया तो ईश्वर

1149
01:25:48,800 --> 01:25:52,920
है वहां पर वो सेलिब्रिटी हो सकता है मगर एक काल एक और चीज

1150
01:25:52,920 --> 01:25:57,080
है कोई जो सेलिब्रिटी है यह कैसे हो रहा है यानी कि

1151
01:25:57,080 --> 01:26:01,280
कुछ चीज ऐसी है जो उन आत्माओं के पास नहीं है सतलोक

1152
01:26:01,280 --> 01:26:05,440
में जिसके कारण वो सेलिब्रिटी समझ रहे हैं काल को और फिर काल की ओर अट्रैक्ट

1153
01:26:05,440 --> 01:26:07,720
हो रहे हैं तो शुरुआत तो यही

1154
01:26:07,720 --> 01:26:11,760
से गड़बड़ हो गई आपने उग्र गीता

1155
01:26:11,760 --> 01:26:16,720
पढ़ी है जो यह कबीर साहब ने लिखी थी नहीं

1156
01:26:16,720 --> 01:26:20,800
अच्छा वो मतलब काफी उसे आप एक बार हालाकि

1157
01:26:20,800 --> 01:26:24,360
उस बुक में

1158
01:26:24,360 --> 01:26:28,480
बातें कर लू एक हो गया परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है अभी तक हमने जो बात

1159
01:26:28,480 --> 01:26:32,600
की है अब दूसरी बात आ जाती है सर्वशक्तिमान ईश्वर

1160
01:26:32,600 --> 01:26:36,600
इनका कहना है कि कबीर ही ईश्वर है और वो कबीर ये कबीर

1161
01:26:36,600 --> 01:26:40,960
है जो इनकी किताबों में पहले पन्ने पर हैय

1162
01:26:40,960 --> 01:26:45,120
ये है ना हां जी ये जो है दाढ़ी वाला अब पहली

1163
01:26:45,120 --> 01:26:49,400
बात तो ये है कि अगर ये ये

1164
01:26:49,400 --> 01:26:53,560
ईश्वर का इटरनल स्वरूप है इटरनल का मतलब जो किसी देश काल परिस्थिति

1165
01:26:53,560 --> 01:26:57,560
में बाधित बदलता नहीं है किसी भी कुछ नहीं

1166
01:26:57,560 --> 01:27:01,800
हो सकता इसको अगर ये वो रूप है आप

1167
01:27:01,800 --> 01:27:06,000
ये कहोगे कि वो बूढ़े कैसे हो गए नहीं नहीं मैं बूढ़ नहीं क बूढ़ा

1168
01:27:06,000 --> 01:27:10,480
नहीं कह रहा हूं मैं बूढ़ा नहीं कह रहा हूं अगर यह टर्नल स्वरूप है

1169
01:27:10,480 --> 01:27:14,480
तो यह बदलना नहीं चाहिए और अगर यह बदल नहीं रहा है तो सर्वशक्तिमान

1170
01:27:14,480 --> 01:27:16,800
नहीं

1171
01:27:16,800 --> 01:27:20,960
है एक नियम लागू हो रहा है इसके ऊपर कि वो अपने

1172
01:27:20,960 --> 01:27:24,680
स्वरूप को बदल नहीं सकता है

1173
01:27:24,680 --> 01:27:28,760
जी यह नियम लागू हो रहा है और दूसरी बात यह भी है कि यह जो है शिशु

1174
01:27:28,760 --> 01:27:32,760
के रूप में आते हैं उसके बाद बीच बीच में इन्ही बुक्स में इनका कहीं कहीं

1175
01:27:32,760 --> 01:27:36,960
पर दूसरा चित्र दिया गया है जिसमें य थोड़े यंग दिख रहे हैं फिर

1176
01:27:36,960 --> 01:27:41,080
ये बूढ़े हो रहे तो फसे ऐसे तो कृष्ण जी भी

1177
01:27:41,080 --> 01:27:45,640
मतलब वो भी पैदा हुए उन्होने भी ली

1178
01:27:45,640 --> 01:27:49,800
अपना तो वो वो भगवान का मूल स्वरूप

1179
01:27:49,800 --> 01:27:54,240
नहीं है भगवान जो है वो अवतरित हुए हैं प्रकट हुए हैं

1180
01:27:54,240 --> 01:27:58,400
व्यवहार में नहीं आ सकने वाले ईश्वर थे उन्होंने अपने आप को इंद्रियों

1181
01:27:58,400 --> 01:28:02,440
का विषय बना दिया तब वह श्री कृष्ण के रूप में आपके सामने प्रकट

1182
01:28:02,440 --> 01:28:06,480
हुए हैं मगर यह कह रहे हैं कि यह जो यह जो भगवान है इसका

1183
01:28:06,480 --> 01:28:10,560
व डायरेक्ट वहां से सीधे आ रहा है नीचे तो जब वो डायरेक्ट आ रहा है तो बाधित

1184
01:28:10,560 --> 01:28:14,880
हो जाएगा यही प्रश्न है और भी बहुत सारी चीजें

1185
01:28:14,880 --> 01:28:19,080
है जो ये नहीं कर सकता जैसे कि अगला वो आ जाएगा जैसे

1186
01:28:19,080 --> 01:28:23,240
हमने कहा शाश्वत धर्म मैंने तीन चीजें बताई है एक तो हो गया सर्वशक्तिमान

1187
01:28:23,240 --> 01:28:27,400
ईश्वर एक हो हो परम स्वतंत्र मोक्ष अब तीसरी चीज आती है शाश्वत

1188
01:28:27,400 --> 01:28:31,520
धर्म शाश्वत धर्म की बात है भगवत गीता में यह बात इन्होंने भी

1189
01:28:31,520 --> 01:28:36,040
मानी आपके जो रामपाल है की

1190
01:28:36,040 --> 01:28:39,680
ठवा अध्याय चौथे अध्याय

1191
01:28:39,680 --> 01:28:44,040
में यह चौथा अध्याय इसमें

1192
01:28:44,040 --> 01:28:50,040
जो है कौन सा म कौन सा श्लोक

1193
01:28:52,400 --> 01:28:56,480
था शलोक नंबर 10 से 15 के

1194
01:28:56,480 --> 01:29:01,800
बीच में है व क्या

1195
01:29:01,800 --> 01:29:05,840
है मैं मैं कुछ कहना चाहती हूं

1196
01:29:05,840 --> 01:29:10,160
इसमें इसमें ये कहा गया है मैं बोल दू पूरी बात कि पूर्वजों द्वारा

1197
01:29:10,160 --> 01:29:14,560
की जाने वाली भक्ति का जो अनुसरण अनुक्रम अनुसरण

1198
01:29:14,560 --> 01:29:18,600
और अनुकरण करते हैं वही मोक्ष को प्राप्त करते हैं यह आपके रामपाल दास जी ने

1199
01:29:18,600 --> 01:29:22,760
भी मान लिया है पूर्वजों द्वारा जो किया जा रहा है और इसको हम अपने अन्य

1200
01:29:22,760 --> 01:29:26,920
शास्त्रों से देख ले जो परा क्या चली आ रही है पीछे से करने की वो है दूसरी

1201
01:29:26,920 --> 01:29:31,080
बात ये अगर कहे मैं अपनी बात पूरी कर लूं शाश्वत धर्म

1202
01:29:31,080 --> 01:29:35,160
की बात कर रहा हूं तो शास्त्र तो आपने पूछा ना कि आपकी चीज क्यों मानी

1203
01:29:35,160 --> 01:29:39,320
जाए ऐसे तो आपकी चीज कैसे मान ली जाए पहली बात हमारे पास ईश्वर है वो

1204
01:29:39,320 --> 01:29:43,600
सर्वशक्तिमान है दूसरी बात हमारा जो मोक्ष है वो परम स्वतंत्र मोक्ष है और

1205
01:29:43,600 --> 01:29:48,000
तीसरी और सबसे इंपॉर्टेंट बात वो है कि हमारे

1206
01:29:48,000 --> 01:29:52,080
जो शास्त्र है वो ईश्वर ने रचे नहीं है ईश्वर ने कहे

1207
01:29:52,080 --> 01:29:55,000
नहीं है क्यों किक क्योंकि ईश्वर

1208
01:29:55,000 --> 01:29:59,240
वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर शैतानों का निर्माण

1209
01:29:59,240 --> 01:30:03,400
भी कर सकता है जैसे कि कबीर ने काल का निर्माण किया क्या कबीर

1210
01:30:03,400 --> 01:30:07,560
को नहीं पता था कि काल क्या करेगा अगर नहीं पता था तो वह सर्वज्ञ नहीं हुआ

1211
01:30:07,560 --> 01:30:13,560
भविष्य दे भविष्य जानने वाला नहीं हुआ

1212
01:30:13,800 --> 01:30:18,080
तो तो इस सब के बाद जो परम स्वतंत्र परम

1213
01:30:18,080 --> 01:30:22,800
स्वतंत्र मोक्ष की व्याख्या है जो शाश्वत धर्म की व्याख्या

1214
01:30:22,800 --> 01:30:27,560
उसके अनुसार हमें ये बात भी सोचनी होगी कि

1215
01:30:27,560 --> 01:30:31,760
अगर हम यह देख रहे हैं कि ईश्वर हमको कुछ कह रहा है तो उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता

1216
01:30:31,760 --> 01:30:35,960
क्यों क्योंकि ईश्वर लीला भी कर सकता है ईश्वर काल को भी बना सकता है ईश्वर बुराई

1217
01:30:35,960 --> 01:30:40,240
भी बना सकता है तो हम सनातनी जो परंपरा प्राप्त सनातनी है

1218
01:30:40,240 --> 01:30:44,520
उन शास्त्रों को मानते हैं जिन शास्त्रों को ईश्वर ने भी नहीं रचा

1219
01:30:44,520 --> 01:30:48,680
है बदार उपनिषद दो च 10 के अनुसार जो हमारे

1220
01:30:48,680 --> 01:30:52,800
वेदा दि शास्त्र हैं वो सदैव विद्यमान थे ईश्वर की सांस के रूप

1221
01:30:52,800 --> 01:30:56,800
में उनको कभी भी श् ने लिखा नहीं या कहा नहीं है वो सदैव

1222
01:30:56,800 --> 01:31:00,800
थे जब से ईश्वर है तब से वो है हम उस धर्म को धर्म मानते हैं हम

1223
01:31:00,800 --> 01:31:05,120
उन शास्त्रों को शास्त्र मानते हैं उन शास्त्रों के अनुसार हम अपने धर्म की व्याख्या

1224
01:31:05,120 --> 01:31:09,240
को स्वीकार करते और यह जो चीज है यह खुद कह रहे हैं कि मैंने

1225
01:31:09,240 --> 01:31:10,160
कहा

1226
01:31:10,160 --> 01:31:14,360
और जब ईश्वर कुछ कह देगा तो उसमें उसकी बुद्धि इवॉल्व हो जाएगी

1227
01:31:14,360 --> 01:31:19,040
इसको ऐसे समझ लीजिए कि हम दो प्रकार के कार्य करते हैं एक

1228
01:31:19,040 --> 01:31:23,280
जिसमें कि हम चाहकर कुछ कर रहे हैं और दूसरा बिना

1229
01:31:23,280 --> 01:31:27,320
चाहकर जब हम चाह के कुछ करते हैं तो हमारे सामने ऑप्शन होता है कि

1230
01:31:27,320 --> 01:31:31,480
हम कैसे करें जैसे मान लीजिए मेरे सामने रामपाल दास की दो किताबें हैं

1231
01:31:31,480 --> 01:31:35,600
नहीं एक रामपाल की है और एक सत्यार्थ प्रकाश तो मैं चाहूं

1232
01:31:35,600 --> 01:31:39,640
अगर मैं चाहता हूं कि बुक उठाऊं तो मैं चाहूं तो

1233
01:31:39,640 --> 01:31:43,680
सत्यार्थ प्रकाश उठाऊं और मैं चाहूं तो गरिमा गीता की उठाऊं इसी

1234
01:31:43,680 --> 01:31:47,880
प्रकार से जब ईश्वर कुछ चाहेगा आपको बताना तो वह चाहे तो

1235
01:31:47,880 --> 01:31:52,240
आपको झूठ बताए वो चाहे तो आपको सच बता मगर कुछ कार्य

1236
01:31:52,240 --> 01:31:56,440
हम ऐसे भी करते हैं जो हमारे स्वाभाविक कार्य होते शुद्ध होते हैं

1237
01:31:56,440 --> 01:32:00,680
उसमें हमारी चाह इवॉल्व नहीं होती वो बस करते हैं जैसे कि सांस

1238
01:32:00,680 --> 01:32:04,880
लेना जैसे कि सांस लेना एक बच्चा माता

1239
01:32:04,880 --> 01:32:09,160
के गर्भ से जन्म ले रहा है मगर सांस ले रहा है तो जो वेदा आदि शास्त्र

1240
01:32:09,160 --> 01:32:13,520
है वो ईश्वर की सांस है वो ईश्वर ने कभी रचे नहीं इसलिए

1241
01:32:13,520 --> 01:32:17,560
हम उनको उन शास्त्रों पर विश्वास करते हैं जो यह नहीं कहते कि हमको ईश्वर

1242
01:32:17,560 --> 01:32:21,640
ने रचा ईश्वर ने कहा तो क्या हो गया सर्वशक्तिमान

1243
01:32:21,640 --> 01:32:25,280
ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म और वह हमें परंपरा

1244
01:32:25,280 --> 01:32:29,280
से मिल रहा है जी अब आपनी बा जी मैं

1245
01:32:29,280 --> 01:32:33,400
यह कहना चाहती हूं कि जैसे अगर कोई मेरे को सुन रहा है रामपाल जी महाराज

1246
01:32:33,400 --> 01:32:37,720
का शिष्य तो मैं उनसे यह पूछना चाहती हूं कि जैसे गरीब दास जी महाराज

1247
01:32:37,720 --> 01:32:41,840
है जो उनको मिले तो मेरे को यह है

1248
01:32:41,840 --> 01:32:46,120
कि उन्होंने जैसे वासुदेव का मतलब जो यह है क्या नाम रामपाल

1249
01:32:46,120 --> 01:32:50,560
जी महाराज य बताते हैं कि वासुदेव का मतलब जो है कबीर साहब है

1250
01:32:50,560 --> 01:32:54,720
ठीक है क्योंकि वासुदेव तो कृ के जो है

1251
01:32:54,720 --> 01:32:58,720
वो पिताजी थे ठीक है इसलिए उनकी कोई सेंस नहीं बनता है

1252
01:32:58,720 --> 01:33:03,200
ठीक है लेकिन जो गरीब दस जी महाराज का इतना मोटा ग्रंथ है

1253
01:33:03,200 --> 01:33:08,040
उसमें उन्होंने कृष्ण को ही वासुदेव बताया है

1254
01:33:08,040 --> 01:33:12,280
मैं ज्यादा दूर की बात छोड़ दीजिए ये इन्होंने भी

1255
01:33:12,280 --> 01:33:18,160
कहीं कहीं पर वासुदेव को ही कृष्ण माना है वो आपको दिखा देता हूं इन्होंने

1256
01:33:18,160 --> 01:33:22,320
हा इन्होने भी कहीं कहीं पर आप पुराणों

1257
01:33:22,320 --> 01:33:26,440
को तो बिल्कुल सत्य मानते हैं तो फिर पुराणों में क्यों लिखा हुआ है कि वो जन्मते

1258
01:33:26,440 --> 01:33:30,840
मरते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश लीला पूर्वक लीला

1259
01:33:30,840 --> 01:33:34,960
भाई जैसे एक पूर्ण ज्ञानी कबीर दास जी गुरु बना

1260
01:33:34,960 --> 01:33:39,040
सकते हैं लीला पूर्वक तो भगवान अपनी जन्म और मृत्यु करके दिखा रहे हैं जन्म

1261
01:33:39,040 --> 01:33:40,280
और मृत्यु का

1262
01:33:40,280 --> 01:33:44,440
मतलब सिर्फ इतना है आविर्भव और तिरो भाव वो आपके

1263
01:33:44,440 --> 01:33:48,720
सामने प्रकट हो गए तो उनकी जो है आपने जन्म मान लिया

1264
01:33:48,720 --> 01:33:52,800
वो अपने आप को उन्होंने अंतर ध्यान कर लिया आपकी आंखों का विषय थे वो

1265
01:33:52,800 --> 01:33:56,920
नहीं किया ना नष्ट कर दिया उस विषय को तो वो रो भाव हो गया

1266
01:33:56,920 --> 01:34:01,280
उसको मृत्यु का नाम दे दिया वो लीला पूर्वक अच्छा और

1267
01:34:01,280 --> 01:34:05,320
य अनुत्तम का मतलब तो आप भी मानते हो अतम

1268
01:34:05,320 --> 01:34:09,560
का अ आपको उस डिक्शनरी से दिखा देता हूं री

1269
01:34:09,560 --> 01:34:14,640
को आप मेरी बात सुनो एक

1270
01:34:14,640 --> 01:34:18,640
मिनट जो शंकराचार्य जी है हमारे उन्होंने भी इस बात

1271
01:34:18,640 --> 01:34:22,920
को माना मुझे नहीं पता वो कौन से हैं लेकिन उन्होने

1272
01:34:22,920 --> 01:34:27,200
उन्होने माना ना इस बात को कि हां अनुत्तम उत्तम का मतलब बढ़िया

1273
01:34:27,200 --> 01:34:31,520
और अनुत्तम का मतलब घटिया ये उनके वर्ड्स थे मैं कोई इसमें मिलावट नहीं कर रही

1274
01:34:31,520 --> 01:34:35,920
नहीं नहीं नहीं उनके आप सुन लीजिए चारों पीठ के शंकराचार्य देखिए कभी-कभी

1275
01:34:35,920 --> 01:34:40,080
होता क्या है जैसे मैं यहां पर अभी कुछ कह रहा हूं अभी कलयुगी योगी से कोई बात हो रही थी आपसे

1276
01:34:40,080 --> 01:34:44,200
पहले एक व्यक्ति आया था ना कलयुगी योगी अब वो

1277
01:34:44,200 --> 01:34:48,440
यहां से कोई कटिंग निकालेगा अपने वीडियो पर डालेगा अब उसमें मेरी बात को आधी

1278
01:34:48,440 --> 01:34:52,520
इधर से लेगा आधी उधर से लेगा तो आपको यह कंफर्म करना होगा

1279
01:34:52,520 --> 01:34:56,640
कि अगर आपको कोई वीडियो दिखाया गया है कि उसमें शंकराचार्य किस लिए कह रहे हैं

1280
01:34:56,640 --> 01:35:00,640
अब जैसे मैं आपको कहूं कि थोड़ी देर के

1281
01:35:00,640 --> 01:35:04,920
लिए मैं बता दूं आपको जैसे वो कौन सा है वो लास्ट वाला जो

1282
01:35:04,920 --> 01:35:09,200
जा है ना 18 66 मैं आपको आपसे उदाहरण

1283
01:35:09,200 --> 01:35:12,840
देता हूं 18

1284
01:35:12,840 --> 01:35:17,440
66 एक मिनट थोड़ा सा होल्ड करिए बस

1285
01:35:17,440 --> 01:35:21,680
18वां अध्याय और 66 वा श्लोक

1286
01:35:21,680 --> 01:35:25,840
ये देखिए ये रामपाल दास जी की बुक है गरिमा गीता की ठीक

1287
01:35:25,840 --> 01:35:29,840
है जी अब इसमें इन्होंने ब्रज का अर्थ

1288
01:35:29,840 --> 01:35:32,160
क्या किया

1289
01:35:32,160 --> 01:35:36,280
है क्या कि

1290
01:35:36,280 --> 01:35:40,760
है समस्त प्रकार के धर्मों आप पढ़ के बता दो मुझे

1291
01:35:40,760 --> 01:35:44,920
क्या किया है समस्त प्रकार के

1292
01:35:44,920 --> 01:35:49,160
धर्मों का परि त्याग करो और

1293
01:35:49,160 --> 01:35:54,080
मरण में आओ समस्त पा से तुम्हारा उद्धार

1294
01:35:54,080 --> 01:35:58,560
हां तो ब्रज का अर्थ क्या किया इन्होंने यहां पर

1295
01:35:58,560 --> 01:36:02,920
मेरी शरण में आओ मतलब आा आओ आओ जबकि

1296
01:36:02,920 --> 01:36:07,000
प्रचार क्या किया जाता है इनके द्वारा कि जाओ मेरी शरण से जाओ किया जाता

1297
01:36:07,000 --> 01:36:11,400
है ना ब्रज किया जाता है अब इसमें एक फैक्ट

1298
01:36:11,400 --> 01:36:15,800
है इन्होंने इससे जस्ट पहले वाले पेज पर यह लिखा है

1299
01:36:15,800 --> 01:36:20,080
कि देखिए 18 66 का अर्थ जो है लोगों ने गलत किया है

1300
01:36:20,080 --> 01:36:24,160
और इकोन की गीता में गलत अर्थ बताया गया और इन्होने य पर इकन

1301
01:36:24,160 --> 01:36:28,480
की गीता को बोला है यहां पर जो है स्कोन की गीता का उन्होंने प्रस्तुत

1302
01:36:28,480 --> 01:36:33,000
किया है ये उन्होंने कहा नहीं है कि ब्रज का अर्थ आओ है उन्होंने इसकन

1303
01:36:33,000 --> 01:36:37,040
की गीता को बोला है अब यहां से अगर मैं चाहूं तो इस हिस्से

1304
01:36:37,040 --> 01:36:41,080
को उठा लू और ये कहने लगूं कि नहीं नहीं देखो ये रामपाल

1305
01:36:41,080 --> 01:36:45,120
दास जी ने भी ब्रज का अर्थ आओ मान लिया तो ये गलत बात है ना तो

1306
01:36:45,120 --> 01:36:49,240
जो शंकराचार्य जी ने बोला है वो किस कॉन्टेक्स्ट में बोला है ये क्लियर करना

1307
01:36:49,240 --> 01:36:53,320
होगा शंकराचार्य की अपनी ये भगवत गीता भाष्य

1308
01:36:53,320 --> 01:36:57,360
है यदि कोई शंकराचार्य है तो वह इसके विरोध में तो नहीं जा

1309
01:36:57,360 --> 01:37:01,640
सकता ना जब तक वो इसके विरोध में नहीं जाता है तभी तक व शंकराचार्य

1310
01:37:01,640 --> 01:37:05,640
अगर वो इसके विरोध में चला गया तो वो शंकराचार्य

1311
01:37:05,640 --> 01:37:09,840
कैसा फिर वो शंकराचार्य कैसे रह जाएगा तो इसका 18

1312
01:37:09,840 --> 01:37:14,080
66 देख लेते हैं अच्छा इन्होने आओ क्यों

1313
01:37:14,080 --> 01:37:18,200
करा है मतलब आपको क्या लगता है इसके पीछे कि इन्होंने आओ क्यों करा

1314
01:37:18,200 --> 01:37:22,280
है उसका मतलब इन्होने ये रामपाल

1315
01:37:22,280 --> 01:37:26,920
जी महाराज जो है उन्होने इन्होने आओ नहीं किया इन्होंने फॉर एग्जांपल

1316
01:37:26,920 --> 01:37:31,520
यहां पर लिखा है इकोन की गीता को लिखा है फॉर एग्जांपल

1317
01:37:31,520 --> 01:37:35,800
इनका ये नहीं है कि हम मानते हैं कि ब्रज का अर्थ आओ होता है

1318
01:37:35,800 --> 01:37:39,960
इन्होंने यहां पर इकोन की गीता के श्लोक को एज इट इज य एग्जांपल

1319
01:37:39,960 --> 01:37:44,000
के तौर पर लिखा है मगर कोई व्यक्ति इस बात का फायदा उठा सकता

1320
01:37:44,000 --> 01:37:48,040
है कि देखो देखो गरमा गीता की में रामपाल दास जी ने भी व्रज का

1321
01:37:48,040 --> 01:37:52,040
अर्थ आओ लिखा है और वो यह चीज ध्यान नहीं देगा कि जस्ट

1322
01:37:52,040 --> 01:37:56,120
पहले वाले पेज पर रामपाल जी ने क्या कहा है तो शंकराचार्य जी ने

1323
01:37:56,120 --> 01:38:00,160
किस बात किस कांटेक्ट में वो बात कही है इसको हमें क्लेरिफाई करना

1324
01:38:00,160 --> 01:38:04,240
होगा और शंकराचार्य जी की जो क्लेरिफाई बात है वो देखिए 18

1325
01:38:04,240 --> 01:38:10,240
66 यहां से कर लीजिए शंकराचार्य क्या कह रहे हैं 18 66

1326
01:38:12,720 --> 01:38:16,840
में अब मैं चाहूं तो इस बात पर खूब वीडियोस बना

1327
01:38:16,840 --> 01:38:21,000
दूं कि देखो देखो इनकी गीता में ही लिखा है ब्रज का अर्थ आओ

1328
01:38:21,000 --> 01:38:27,000
जैसा कि ये करते हैं ये ऐसा ही करते हैं

1329
01:38:32,000 --> 01:38:37,080
सर एक चीज और मुझे बो जी जी बोलिए

1330
01:38:37,080 --> 01:38:41,160
जैसे यह बताते हैं बताते हैं रामपाल जी महाराज

1331
01:38:41,160 --> 01:38:45,400
के गरीब दास जी जो भी मेरे को सुन रहा है अगर किसी को कंटक्ट करना हो तो भाई

1332
01:38:45,400 --> 01:38:49,560
कर लेना क्योंकि मेरा वो नहीं है क्योंकि मैं भी जानना चाहती

1333
01:38:49,560 --> 01:38:53,560
हूं मेरे अंदर भी य जिज्ञासा है पर मेरे को ये बोलना

1334
01:38:53,560 --> 01:38:57,600
जैसे गरीब दास जी महाराज ने बोला है ऐसे ही मलूक दास जी महाराज भी

1335
01:38:57,600 --> 01:39:01,800
है ठीक है इनको गरीब

1336
01:39:01,800 --> 01:39:05,920
दास जी महाराज ने लिखा है कि जो मलूक दास जी थे उनको

1337
01:39:05,920 --> 01:39:09,920
भी परमात्मा मिले थे जो मलूक दास जी है उने भी लिखा है

1338
01:39:09,920 --> 01:39:13,960
कि हां कबीर साहब परमात्मा है लेकिन उन्होंने श्री

1339
01:39:13,960 --> 01:39:15,400
कृष्ण को भी परमात्मा

1340
01:39:15,400 --> 01:39:20,160
बताया है बिल्कुल बताया

1341
01:39:20,160 --> 01:39:24,240
हा तो मेरे को यह बहुत ज्यादा कांट्रडिक्ट लगता है मे को ऐसे लगता है

1342
01:39:24,240 --> 01:39:28,680
जो मेरा पर्सनल है बिल्कुल मेरे को पर्सनली य लगता है कि

1343
01:39:28,680 --> 01:39:32,680
समाज को सुधारने के लिए एक अच्छा व्यक्तित्व बनाने

1344
01:39:32,680 --> 01:39:36,880
के लिए बुराइयों से बचने के लिए अब चाहे हम इस चीज में उलझे

1345
01:39:36,880 --> 01:39:41,000
हुए हैं लेकिन हमारे पास आप उलझे हुए हो मैं सब मतलब जितने

1346
01:39:41,000 --> 01:39:45,240
भी लोग है क्योंकि हम हमको चा है भगवान की हमारे

1347
01:39:45,240 --> 01:39:49,280
पास इतना फालतू टाइम नहीं है कि हम मतलब मूवी देखें यह करें

1348
01:39:49,280 --> 01:39:53,840
वो करें मुझे यह लगता है पर्सनली के ये

1349
01:39:53,840 --> 01:39:58,360
जो जितने भी संत हुए हैं ये उद्धार करने के लिए हुए

1350
01:39:58,360 --> 01:40:02,600
थे चाहे मतलब बुराइयों से बचाने के लिए हुए थे चाहे वो गरीब

1351
01:40:02,600 --> 01:40:06,800
दास जी हो गए या मलूक दास जी हो गए चाहे उन्होंने कांट्रडिक्ट्री करा

1352
01:40:06,800 --> 01:40:10,920
या कुछ भी करा पर फस्ट एक ह्यूमन ही

1353
01:40:10,920 --> 01:40:15,000
बनना हमको शोभा देता है ऐसे नहीं कि बाहर निकाल दो

1354
01:40:15,000 --> 01:40:19,160
अपनी बहू को नहीं नहीं हम तो मंदिर अपना अलग रख लो कि नहीं

1355
01:40:19,160 --> 01:40:23,360
नहीं हम तो आज से रामपाल जी महाराज के वो हो गए मैं भी

1356
01:40:23,360 --> 01:40:27,400
हू कल को क्या पता मतलब ना मेरा माइंड हो मुझे रखना पड़े तो

1357
01:40:27,400 --> 01:40:31,280
मैं तो यह नहीं कह सकती कि भाई नहीं नहीं मेरे को तो अलग ही मंदिर चाहिए

1358
01:40:31,280 --> 01:40:35,680
नहीं ऐसे नहीं होगा ना तो मेरे को तो

1359
01:40:35,680 --> 01:40:39,400
रिजट नहीं होनी

1360
01:40:39,400 --> 01:40:45,400
चाहिए मैं आपको एक बात बता रहा हूं

1361
01:40:55,960 --> 01:40:58,960
और एक वो ब्रज

1362
01:40:58,960 --> 01:41:03,000
वाला देखिए कहने कोय तत्वदर्शी है मगर ये

1363
01:41:03,000 --> 01:41:07,040
इनकी गीता ज्ञान अमृत है ठीक है और यहां

1364
01:41:07,040 --> 01:41:11,280
पर य क्या लिख रहे हैं यह जो कबीर कबीर

1365
01:41:11,280 --> 01:41:15,440
दास जी है बाबा जिंदा के रूप में ठीक है हा जी

1366
01:41:15,440 --> 01:41:19,960
अब ये यहां पर लिख रहे हैं हे धर्मदास जी

1367
01:41:19,960 --> 01:41:24,120
गीता शास्त्र आपके परमपिता भगवान कृष्ण उर्फ

1368
01:41:24,120 --> 01:41:28,960
विष्णु जी ने आपको आदेश किया है ये देख ली

1369
01:41:28,960 --> 01:41:34,480
जहां मेरी उंगली है आपको आदेश

1370
01:41:34,480 --> 01:41:39,360
और विष्णु जी कृष्ण परमपिता भगवान विष्णु और

1371
01:41:39,360 --> 01:41:43,600
कृष्ण दिख रहा है आपको हा जी दिख रहा है ये रामपाल

1372
01:41:43,600 --> 01:41:47,680
दास जी को लिखना पड़ रहा है और रामपाल दास जी क्या बता रहे हैं कबीर

1373
01:41:47,680 --> 01:41:51,840
दास ने बोला रामपाल दास जी से गलती हो सकती है कबीर

1374
01:41:51,840 --> 01:41:56,080
दास जी ने बोला वो यह बता रहे कबीर दास जी ने बोला

1375
01:41:56,080 --> 01:42:00,080
कि गीता का ज्ञान किसने दिया है परमपिता भगवान कृष्ण

1376
01:42:00,080 --> 01:42:04,160
उर्फ विष्णु इन्होंने दिया उन्होंने आपको

1377
01:42:04,160 --> 01:42:08,520
आदेश कबीर सागर भी है जो उसमें जो श्लोक

1378
01:42:08,520 --> 01:42:12,760
सॉरी जो उग्र गीता है उसके अंदर जो गीता है उसके

1379
01:42:12,760 --> 01:42:16,840
अंदर श्लोक वाइज लिखा हुआ है मतलब यह तो लिखा नहीं है न टूथ फ पर ऐसे

1380
01:42:16,840 --> 01:42:21,040
मतलब सीक्वेंस बना हुआ है तो उसमें जब अर्जुन पूछता है तो अर्जुन

1381
01:42:21,040 --> 01:42:25,040
लिख रखा है और जब श्री कृष्ण बोलते तो श्री कृष्ण

1382
01:42:25,040 --> 01:42:29,120
श्री कृष्ण भगवान ऐसे करके लिखा हुआ है कि उन्होंने इस चीज

1383
01:42:29,120 --> 01:42:33,240
को बोला है कबीर सागर में लिखा बिल्कुल बिल्कुल आप

1384
01:42:33,240 --> 01:42:37,640
कहा तक देखिए वो सच्चाई छुपती नहीं है देखिए होता क्या है

1385
01:42:37,640 --> 01:42:41,640
जब हमें पूरा का पूरा एक इंफ्रास्ट्रक्चर झूठा खड़ा करना है

1386
01:42:41,640 --> 01:42:47,640
तो हमसे फिर चूक होनी शुरू होती है और यह व

1387
01:42:47,760 --> 01:42:51,880
चूके और मेरे को यह लगता है कि कोई

1388
01:42:51,880 --> 01:42:56,080
भी अगर आपकी लाइफ में कोई भी दिक्कत है या कुछ भी है तो मुझे

1389
01:42:56,080 --> 01:43:00,120
नहीं लगता कि आप फिर तो भगवान हमारे किस चीज

1390
01:43:00,120 --> 01:43:04,200
का वो कर रहे हैं जो हम हमसे यह सुनना चाहते हैं कि 000 रप तो

1391
01:43:04,200 --> 01:43:08,920
पाठ करवाने पड़ेंगे यह चीज मेरे को बहुत गलत लगती है

1392
01:43:08,920 --> 01:43:13,440
आप ये देख रही है जो ग्रीन है उसको जरा पढ़ देंगी

1393
01:43:13,440 --> 01:43:17,760
मेरे को जूम नहीं दिख रहा हैय जो वेद

1394
01:43:17,760 --> 01:43:21,760
ज्ञान है वह तो पूर्ण परमात्मा द्वारा दिया गया था

1395
01:43:21,760 --> 01:43:26,360
उसी का वर्णन काल आगे क्या लिखा है काल

1396
01:43:26,360 --> 01:43:30,520
वह ज्योति निरंजन ने किया है यानी कि वेद का ज्ञान

1397
01:43:30,520 --> 01:43:34,600
किसने दिया है पूर्ण परमात्मा का ज्ञान पूर्ण परमात्मा ने दिया था

1398
01:43:34,600 --> 01:43:39,240
वेद का ज्ञान जो आगे ज्योति निरंजन इनके हिसाब से इसमें करता है

1399
01:43:39,240 --> 01:43:44,680
तो वेद का वेद ज्ञान कौन दे रहा है पूर्ण

1400
01:43:44,680 --> 01:43:48,800
परमात्मा फिर भी यह कह रहे हैं कि नहीं वेद

1401
01:43:48,800 --> 01:43:53,320
का ज्ञान पूर्ण परमात्मा से वो मुक्ति का ज्ञान जो है

1402
01:43:53,320 --> 01:43:57,520
से नहीं मिलेगा वो वेद को छोड़ कर के हमें जाना पड़ेगा तत्वदर्शी

1403
01:43:57,520 --> 01:44:01,600
के पास यह जो सारी चीजें बनी है ना ये इनका पता है निचोड़ क्या

1404
01:44:01,600 --> 01:44:05,800
है आपको इनका निचोड़ यह है इसमें आपको यह

1405
01:44:05,800 --> 01:44:09,840
बताया गया है कि जो गीता वेद पुराण है

1406
01:44:09,840 --> 01:44:13,960
वह आपको क्यों नहीं पढ़ने बस इनके अनुसार जो भक्ति

1407
01:44:13,960 --> 01:44:17,960
है वह आपको क्यों नहीं करनी इनमें जो पूजा

1408
01:44:17,960 --> 01:44:22,000
इनम जिनकी पूजा बताई जा रही है उनकी पूजा क्यों नहीं करनी और यह

1409
01:44:22,000 --> 01:44:26,000
सब करते करते एक अपने लिए संकेत छोड़ा गया है कि तत्वदर्शी

1410
01:44:26,000 --> 01:44:30,240
वो तत्वदर्शी भी हालांकि झूठ हो जाता है क्यों कि जब काल एक जगह

1411
01:44:30,240 --> 01:44:34,360
गलत बात बोल सकता है भटकाने के लिए तो दूसरी जगह क्यों नहीं बोल सकता जब

1412
01:44:34,360 --> 01:44:39,280
किसी की कोई एक बात गलत है तो दूसरी बात गलत ऑटोमेटिक हो जाएगी

1413
01:44:39,280 --> 01:44:43,280
हम कैसे विश्वास करें कि अगर काल हमें भटकाने आया है तो जहां पर

1414
01:44:43,280 --> 01:44:47,400
वो कह रहा है ये मेरा मत है वहा वहां पर भटका रहा है और जहां पर वो ये नहीं

1415
01:44:47,400 --> 01:44:51,640
कह रहा है कि मेरा मत है कि नहीं है वहां वो नहीं भटका रहा है आप बताओ

1416
01:44:51,640 --> 01:44:57,640
आपको अगर कोई भटकाने आएगा तो वो क्या बता के भटका हैगा मैं तुझे गलत रास्ता बता रहा

1417
01:44:58,920 --> 01:45:03,400
हूं तो यदि गीता बोलने वाला आपको भटकाने वाला है

1418
01:45:03,400 --> 01:45:07,880
तो फिर उसके द्वारा बताया जाने वाला तत्वदर्शी भी तत्वदर्शी नहीं हो

1419
01:45:07,880 --> 01:45:12,640
सकता मगर तत्वदर्शी मान लेंगे क्योंकि पूरी शास्त्रों

1420
01:45:12,640 --> 01:45:17,080
का जो निचोड़ है इनका वो यह है गीता वेद पुराण आपको

1421
01:45:17,080 --> 01:45:21,240
छोड़ दीजिए और उसमें जो एक पॉइंट पकड़ रखा है तत्वदर्शी वो

1422
01:45:21,240 --> 01:45:25,400
भी सिद्ध नहीं होता उन्हीं की किताबों के अनुसार उसको पकड़ के आप रामपाल के पास

1423
01:45:25,400 --> 01:45:29,480
आ जाइए फिर रामपाल के अनुसार जीवन जीना चालू करिए जिसमें कि

1424
01:45:29,480 --> 01:45:33,600
आपको परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत

1425
01:45:33,600 --> 01:45:38,120
धर्म नहीं मिलेगा चलो एट द एंड सब कुछ य माथा मथ या करके

1426
01:45:38,120 --> 01:45:42,120
और किताबें सब सब कुछ मान भी लो तो अंत में

1427
01:45:42,120 --> 01:45:46,280
आउटपुट क्या है यह भी तो देखो चलो हमने इनपुट ढेर

1428
01:45:46,280 --> 01:45:50,280
सारा ले लिया हमने सब मान लिया मगर एट द एट आ एट

1429
01:45:50,280 --> 01:45:54,400
दी एंड आपको आउटपुट में मिला क्या जो आप घर से निकले थे लेने

1430
01:45:54,400 --> 01:45:59,320
वो मिला क्या आप घर से निकले थे सच्चिदानंद स्वरूप होने

1431
01:45:59,320 --> 01:46:03,440
वो प्राप्त करने आप घर से निकले थे मगर आपको नहीं मिला आपको वो

1432
01:46:03,440 --> 01:46:07,440
सतलोक मिला जहां पर आपको कोई काल सेलिब्रिटी लगता है

1433
01:46:07,440 --> 01:46:11,680
भाई आपको कोई अगर आप सतलोक में हो सतलोक में ऐसा सुख होना चाहिए

1434
01:46:11,680 --> 01:46:14,080
जहां आपको कोई सेलिब्रिटी ना लगे

1435
01:46:14,080 --> 01:46:18,200
क्यों क्योंकि यदि कोई आपको अपने से अधिक लग रहा है इसका मतलब आपको सब

1436
01:46:18,200 --> 01:46:22,600
कुछ प्राप्त नहीं है अनंत सुख नहीं है आपके पास

1437
01:46:22,600 --> 01:46:26,680
जी है ना तो हम लोग ये जो तीन चीजों की

1438
01:46:26,680 --> 01:46:30,880
बात करते हैं वो इसीलिए करते हैं कि चलो इन इन बातों को कोई मान

1439
01:46:30,880 --> 01:46:35,160
पाएगा नहीं मान पाएगा तर्क और प्रमाण हमने रख दिए तब भी है आउटपुट

1440
01:46:35,160 --> 01:46:39,240
पर तो देख लो आपको मिल क्या रहा है जब आपको व

1441
01:46:39,240 --> 01:46:43,840
मिल ही नहीं रहा है तो वह उसको प्राप्त कराने अब जैसे आपको चाहिए पानी

1442
01:46:43,840 --> 01:46:48,080
और आपको पानी की जगह कोई अल्कोहल दे रहा है वाइन दे रहा है

1443
01:46:48,080 --> 01:46:52,440
शराब दे रहा है मदरा दे रहा है मगर पानी नहीं दे रहा है तो उस मदरा

1444
01:46:52,440 --> 01:46:56,560
को प्र करने के लिए क्या आपको उन नियमों का पालन करने की जरूरत है

1445
01:46:56,560 --> 01:47:00,960
जो वहा बताए जा रहे हैं जबक आपको चाहिए पानी आपकी प्यास

1446
01:47:00,960 --> 01:47:05,280
पानी से बुझेगी मद्रा से नहीं जी

1447
01:47:05,280 --> 01:47:09,520
जी जी मेरे को एक चीज और बोलनी है जो

1448
01:47:09,520 --> 01:47:13,680
मतलब मैंने अभी टीवी में देखा था मतलब जो मैंने मैं

1449
01:47:13,680 --> 01:47:17,920
पिछले उसम आई थी तो उसके बाद जो अभी यह थे

1450
01:47:17,920 --> 01:47:21,960
मतलब क्या नाम उनका क्या नाम था टी आर पहाड़ी

1451
01:47:21,960 --> 01:47:26,680
नाम है उनका हा हां जी उन्होंने बोला था

1452
01:47:26,680 --> 01:47:29,640
के जो काल को काल

1453
01:47:29,640 --> 01:47:33,640
को शराब दे रखा है ऐसे करके तो इसम शंका समाधान है मब

1454
01:47:33,640 --> 01:47:37,720
मैं अपना कैमरा ऑन कर सकती हूं मतलब पीछे सेसे दिखाने के लिए करिए

1455
01:47:37,720 --> 01:47:41,040
कर क्यों

1456
01:47:41,040 --> 01:47:45,120
नहीं होगा कैसे ये पीछे

1457
01:47:45,120 --> 01:47:49,120
कैसे जाएगा मेरे को समझ में नहीं आ

1458
01:47:49,120 --> 01:47:53,120
रहा आप पहले लीव करके अपना चेक कर लीजिए

1459
01:47:53,120 --> 01:47:58,800
फिर बताइए जी संदीप जी आप थोड़ा गुस्से पर कंट्रोल किया

1460
01:47:58,800 --> 01:48:03,080
करिए गिरो मगर रने की तरह जो गिलके भी अपनी सुंदरता होने

1461
01:48:03,080 --> 01:48:07,440
नहीं देता जी जी जी कोई बात नहीं ध्यान रखू आ

1462
01:48:07,440 --> 01:48:11,480
देना अभी ना अभी जैसे ये 18 ब 66 की बात कर

1463
01:48:11,480 --> 01:48:15,520
रहे थे ना जैसे ये सवाल कर रहे थे 18 ब 66

1464
01:48:15,520 --> 01:48:20,120
में इसमें ना ये दो तरह से मिसगाइडेड हो जाते हैं

1465
01:48:20,120 --> 01:48:23,320
होता क्या है कि जैसे

1466
01:48:23,320 --> 01:48:27,360
ये कुछ दिखा रही है बताइए जैसे इसमें लिखा है

1467
01:48:27,360 --> 01:48:31,360
आपको दिख रहा है मुझे पढ़ने में नहीं आ रहा

1468
01:48:31,360 --> 01:48:35,720
है थोड़ा और क्लोज ले जाइए काल के किस ब्रहमांड

1469
01:48:35,720 --> 01:48:39,840
में कर्मों का फल कौन सी बुक है ये कौन सी बुक

1470
01:48:39,840 --> 01:48:44,360
है ये है परिभाषा प्रभु की अच्छा

1471
01:48:44,360 --> 01:48:45,000
ये

1472
01:48:45,000 --> 01:48:49,160
नहीं की है काल के किस ब्रह्मांड में काल

1473
01:48:49,160 --> 01:48:53,200
के 21 ब्रह्मांड में कर्मों का फल भोगना पड़ता है प्रश्न पूछा गया है किसी

1474
01:48:53,200 --> 01:48:57,240
के द्वारा तो काल भगवान ने सतलोक

1475
01:48:57,240 --> 01:49:01,480
में बुरा कर्म किया और हम आत्माओं ने अपने पिता से इजाजत

1476
01:49:01,480 --> 01:49:05,480
ली सत्यलोक से इस दुख के सागर में आए काल

1477
01:49:05,480 --> 01:49:09,480
काल भगवान को अपने कर्मों का बल कपल क फल भोगना

1478
01:49:09,480 --> 01:49:13,840
पड़ा और हम भी हमें भी क्योंकि हमने काल को पसंद किया कबीर

1479
01:49:13,840 --> 01:49:17,960
परमात्मा ने काल भगवान को श्राप दिया उन्होंने बोला है

1480
01:49:17,960 --> 01:49:22,280
कि श्रप क्यों दिया है और फिर हमें वही बचाने के लिए क्यों आ रहे हैं

1481
01:49:22,280 --> 01:49:26,440
तो फिर चलो इसका इसका उत्तर मैं आपको दे देता हूं

1482
01:49:26,440 --> 01:49:30,760
आपने जैसे डिफेंड किया है तो मैं आपको एक उत्तर दे देता हूं उसका जो आपने डिफेंड किया

1483
01:49:30,760 --> 01:49:34,920
है आपके पास ज्ञान गंगा है क्या नहीं ज्ञान

1484
01:49:34,920 --> 01:49:40,000
गंगा नहीं है मेरे पास ये गीता तेरा ज्ञान

1485
01:49:40,000 --> 01:49:44,200
अमृत मेरे पास वो भी नहीं मेरे पास सिर्फ दो बुक है परिभाषा प्रभु

1486
01:49:44,200 --> 01:49:49,280
की हां गीता ये है है है मेरे पास

1487
01:49:49,280 --> 01:49:53,440
है गहरी नजर गीता में है मेरे पास नहीं नहीं गहरी

1488
01:49:53,440 --> 01:49:58,400
नजर गीता में नहीं अ क्या कहते हैं वह

1489
01:49:58,400 --> 01:50:00,280
गीता तेरा ज्ञान

1490
01:50:00,280 --> 01:50:04,360
नहीं यही दो बुक है बस मेरे पास गीता तेरा ज्ञान

1491
01:50:04,360 --> 01:50:08,680
अमृत में सृष्टि रचना है दद

1492
01:50:08,680 --> 01:50:11,920
ज्ञान गंगा में है सृष्टि

1493
01:50:11,920 --> 01:50:17,920
रचना तो सृष्टि रचना

1494
01:50:19,760 --> 01:50:23,880
में यह बताया जा रहा है आपकी बात हो रही है षष्टि

1495
01:50:23,880 --> 01:50:28,120
रचना में ठीक है देखिए कैसे चीजें

1496
01:50:28,120 --> 01:50:32,280
बदलती है फेल होती है यहां पर

1497
01:50:32,280 --> 01:50:35,800
एक एक चीज बता रहा हूं मैं आपको

1498
01:50:35,800 --> 01:50:40,560
कि श्राप देना पहली बात गलत बात

1499
01:50:40,560 --> 01:50:44,640
है ठीक है जी और श्राप व्यक्ति

1500
01:50:44,640 --> 01:50:48,640
जो देता है वो किसके कारण देता है काल के प्रभाव

1501
01:50:48,640 --> 01:50:54,480
में आकर अब ये मैं नहीं कह रहा हूं गुस्सा ये मैं नहीं कह रहा हूं

1502
01:50:54,480 --> 01:50:57,680
यह कह रहे हैं आपके रामपाल

1503
01:50:57,680 --> 01:51:02,160
देखिए जब इन्होंने भवानी

1504
01:51:02,160 --> 01:51:06,440
ने गायत्री को श्राप दे दिया तीनों को श्राप दे दिया ब्रह्मा जी को और गायत्री

1505
01:51:06,440 --> 01:51:10,800
को और एक और है उनको तो फिर यहां पर इस प्रकार

1506
01:51:10,800 --> 01:51:14,800
पढ़िए ग्रीन ग्रीन वाला जो है पढ़िए तीनों को

1507
01:51:14,800 --> 01:51:15,400
शराब देकर

1508
01:51:15,400 --> 01:51:19,880
माता भवानी बहुत बथाई इस प्रकार पहले तो

1509
01:51:19,880 --> 01:51:23,960
जीव बिना सोचे मन यानी काल निरंजन प्रभाव से गलत कार्य कर देता

1510
01:51:23,960 --> 01:51:28,000
है परंतु जब जब आत्मा सत्य पुरुष अंश के

1511
01:51:28,000 --> 01:51:32,080
प्रभाव में प्रभाव से उस ज्ञान उसे

1512
01:51:32,080 --> 01:51:36,240
ज्ञान होता है तो पीछे पछताना पड़ता है एगजैक्टली मतलब आप

1513
01:51:36,240 --> 01:51:40,360
मेरी बात को समझो उन्होंने यही लिखा है

1514
01:51:40,360 --> 01:51:44,520
कि क्या बोलते हैं कि उन्होंने श्रप नहीं दिया मतलब उन्होंने

1515
01:51:44,520 --> 01:51:48,520
ऐसे लिखा है कि उन्होंने श्राप नहीं दिया है ये

1516
01:51:48,520 --> 01:51:53,360
तो उन्होने श्राप दिया है ना वहां लिखा है कि उन्होंने श्राप दिया था

1517
01:51:53,360 --> 01:51:57,520
उन्होंने लिखा है ना श्राप दिया था वो क्वेश्चन पूछ

1518
01:51:57,520 --> 01:52:01,560
रहा है नहीं नहीं नहीं वो क्वेन नहीं वो क्वेश्चन नहीं जब

1519
01:52:01,560 --> 01:52:05,560
सृष्टि रचना हम पढ़ते हैं तो भगवान श्राप देते हैं ना कबीर दास

1520
01:52:05,560 --> 01:52:10,120
जी श्राप देते हैं ना काल को श्राप

1521
01:52:10,120 --> 01:52:14,720
लगा हु है हा हा ऐसे बोल श देते तू एक लाख आत्मा रोज

1522
01:52:14,720 --> 01:52:18,760
खाएगा तो श्राप अगर दिया तो सबसे पहली बात तो श्राप तो ऐसा

1523
01:52:18,760 --> 01:52:22,800
कार्य है जो देने वाला पछताएगा पहली बात यानी कबीर दा

1524
01:52:22,800 --> 01:52:26,920
स पछताने वाला कार्य कर रहे हैं वो परमेश्वर है पूर्ण ब्रह्म है इनके

1525
01:52:26,920 --> 01:52:31,240
अनुसार रामपाल के अनुसार और दूसरी बात की

1526
01:52:31,240 --> 01:52:35,640
श्राप देता क्यों है कि काल के प्रभाव में यानी काल के अधीन हो गया

1527
01:52:35,640 --> 01:52:40,040
व्यक्ति यह तत्व ज्ञान नहीं है

1528
01:52:40,040 --> 01:52:44,080
यह तत्व ज्ञान नहीं है क्या इन्होंने कभी आपसे कहा कि

1529
01:52:44,080 --> 01:52:48,440
आपकी आपकी चाह का वास्तविक विषय ईश्वर है सर्वशक्तिमान परम

1530
01:52:48,440 --> 01:52:54,200
स्वतंत्र मक्ष यह तात्विक बातें की आपसे इन्होने कभी

1531
01:52:54,200 --> 01:52:58,240
जी नहीं आपको केवल शास्त्र खोल के दिखाए हैं वह शास्त्र जिन

1532
01:52:58,240 --> 01:53:02,480
पर आपकी श्रद्धा थी उनका तीन पा 13 करके आपको ऐसा व गाइड

1533
01:53:02,480 --> 01:53:06,600
किया कि भैया जो आपके प्रति जिनकी जिनके लिए जिनके लिए

1534
01:53:06,600 --> 01:53:10,800
आप आपके मन में जिनके लिए आपके मन में श्रद्धा है वही

1535
01:53:10,800 --> 01:53:14,800
कह रहे हैं कि तुम मुझे नहीं इनको मानो बस उन्होंने

1536
01:53:14,800 --> 01:53:19,200
इतना आपको डायवर्ट जरूर किया है मगर आपसे कभी यह नहीं पूछा कि अतो

1537
01:53:19,200 --> 01:53:23,240
मा सद गमाया त जतिया मत यह तत्व

1538
01:53:23,240 --> 01:53:27,280
कहां गया जी ऐसा जैसे पुराणों को आप

1539
01:53:27,280 --> 01:53:31,640
बिल्कुल आप यह तो मानते हो कि हा गलत कुछ चीजों में ट्रांसलेशन हुई है एटलीस्ट

1540
01:53:31,640 --> 01:53:35,960
आप इतना तो समझ ही सकते हो देखिए देखिए मैं आपको बताऊ धर्म

1541
01:53:35,960 --> 01:53:40,000
जो प्रतिपादित होता है व केवल ग्रंथ से नहीं होता है गुरु गोविंद

1542
01:53:40,000 --> 01:53:44,360
और ग्रंथ से होता है तो जो भी ऐसे शास्त्र है जो हमें परंपरा

1543
01:53:44,360 --> 01:53:46,360
से प्राप्त है जैसे आज गीता प्रेस गोरखपुर

1544
01:53:46,360 --> 01:53:50,640
शास्त्र छाप रही है हो सकता है कल को उनका जो ओनर है गीता प्रेस

1545
01:53:50,640 --> 01:53:54,680
का बदल जाए उसकी नियत बदल जाए कि मैं सनातन धर्म को नष्ट

1546
01:53:54,680 --> 01:53:58,760
करूंगा कैसे करूंगा रामायण में दो श्लोक बढ़ा दूंगा तो हम कैसे

1547
01:53:58,760 --> 01:54:03,080
पहचानेंगे जिस गुरु ने अपने गुरु से परंपरा

1548
01:54:03,080 --> 01:54:07,640
से उन शास्त्रों का अध्ययन किया होगा वोह देखेगा अरे य शलोक

1549
01:54:07,640 --> 01:54:11,640
यह श्लोक तो हमारे गुरु ने बताया नहीं है य तो एक्स्ट्रा है तो कोई भी हमारे

1550
01:54:11,640 --> 01:54:15,680
धर्म में परिवर्तन नहीं कर सकता अगर होगा अगर कहीं पर होगा तो इसका निर्णय

1551
01:54:15,680 --> 01:54:20,400
कौन करेगा परंपरा प्राप्त आचार्य होगा

1552
01:54:20,400 --> 01:54:25,640
ऐसा नहीं है कोई छाप नहीं सकता आज इन्होने छापा आज इन्होने

1553
01:54:25,640 --> 01:54:29,840
छापा अ आप मेरी बात को समझो जैसे आपने शराब वाली बात कही

1554
01:54:29,840 --> 01:54:34,040
कि मतलब शराप यह बात मैं भी मानती हूं शराप इंसान जब देता है जब गुस्सा आता है

1555
01:54:34,040 --> 01:54:38,040
बिना गुस्से के तो कोई शराब ही नहीं दे सकता तो फिर गुस्सा क्यों आया ठीक है इस बात

1556
01:54:38,040 --> 01:54:42,240
को मैं बहुत अच्छी तरीके से समझ गई लेकिन मुझे यह पूछना है जैसे मैं

1557
01:54:42,240 --> 01:54:46,800
मैं वो पढ़ रही थी श्री भागवत पुराण है

1558
01:54:46,800 --> 01:54:51,200
उसकी गीता प्रेस गोरखपुर की ही है तो उसमें

1559
01:54:51,200 --> 01:54:55,440
ब्रह्मा की ब जी की उत्पत्ति के बारे में लिखा है तो उसम उसमें

1560
01:54:55,440 --> 01:54:59,760
एक वर्ड आता है रजोगुण

1561
01:54:59,760 --> 01:55:01,480
व्यापक मतलब उके

1562
01:55:01,480 --> 01:55:06,080
पास रजोगुण है ठीक है तो जब उनके पास रजोगुण है

1563
01:55:06,080 --> 01:55:10,120
तो फिर हम उन्हें पूजे क्यों वो तो गुणों से बिल्कुल अलग

1564
01:55:10,120 --> 01:55:14,400
है जो पर देखिए मैं बता रहा हूं आपको जो परम

1565
01:55:14,400 --> 01:55:19,080
तत्व है एक रूप है कि उसने सृष्टि की रचना की वो सर्वव्यापक

1566
01:55:19,080 --> 01:55:23,120
सर्व तरीके से हर जगह व्याप्त है फिर वो अपने आपको लीला

1567
01:55:23,120 --> 01:55:27,200
पूर्वक जीव का जो जीव की जो जो मनुष्य की जो इंद्रिया

1568
01:55:27,200 --> 01:55:31,200
होती है उनका वह विषय बना देता है उसमें व अलग अलग प्रकार की लीलाए

1569
01:55:31,200 --> 01:55:35,280
करता है हम उन्हें इसलिए हम उन्हें इसलिए पूछ

1570
01:55:35,280 --> 01:55:39,320
पूजेंगे कि वह पूर्ण है वोय जानते हैं कि मेरा वास्तविक

1571
01:55:39,320 --> 01:55:43,640
स्वरूप क्या है हम नहीं जानते हैं यह अंतर है जैसे

1572
01:55:43,640 --> 01:55:47,680
कि अर्जुन तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तू नहीं जानता मैं जानता

1573
01:55:47,680 --> 01:55:51,880
हूं क्योंकि वो पूर्ण है उनका कंधा

1574
01:55:51,880 --> 01:55:56,160
भी य से शुरू हो रहा है यहां पर खत्म हो रहा है उनका जो स्ट्रक्चर

1575
01:55:56,160 --> 01:56:00,160
है वह सीमित दिखाई दे रहा है मगर हम उन्हें इसलिए पूजते

1576
01:56:00,160 --> 01:56:04,160
हैं क्योंकि वह पूर्ण है वह जानते हैं कि उनका वास्तविक स्वरूप

1577
01:56:04,160 --> 01:56:08,560
क्या है वो अविद्या से कृषित नहीं है हम अविद्या

1578
01:56:08,560 --> 01:56:12,680
से ग्रसित है तो भागवत में ही एक जगह वचन आता है कि

1579
01:56:12,680 --> 01:56:16,680
भगवान इन गुणों को य जो गुण आप बता रही है भगवान इन गुणों

1580
01:56:16,680 --> 01:56:21,200
से परे हैं मगर वो इन गुणों को धारण करते हैं स्वेच्छा

1581
01:56:21,200 --> 01:56:25,440
से जैसे हम हमारे अंदर भी अवगुण है रजोगुण है सतोगुण है या तमोगुण

1582
01:56:25,440 --> 01:56:29,440
है है ना ठीक है मगर हमने इनको स्वेच्छा से धारण

1583
01:56:29,440 --> 01:56:33,640
नहीं किया है हम इनसे प्रभावित है हम इनके अधीन है

1584
01:56:33,640 --> 01:56:37,720
मगर वहां पर ईश्वर अपनी लीला पूर्वक जब अपना रूप धारण करते हैं

1585
01:56:37,720 --> 01:56:41,760
तो वह अपनी स्वेच्छा से इन गुण को धारण करते हैं तब वह आपको लीला करके

1586
01:56:41,760 --> 01:56:46,040
दिखाते हैं जी अब आपकी

1587
01:56:46,040 --> 01:56:50,200
एक बात मुझे बहुत मतलब जिस बात से जो मुझे सबसे ज्यादा हिट

1588
01:56:50,200 --> 01:56:54,200
करी थी बहुत अच्छी जो बात थी वो यह बात थी जैसे आपने बोला था कि

1589
01:56:54,200 --> 01:56:58,600
जो परमात्मा जो है और जीवात्मा जैसे

1590
01:56:58,600 --> 01:57:04,600
परमात्मा उसमें लिखा है कि निराकार है आप उस

1591
01:57:16,360 --> 01:57:20,000
कंटेक्सचर्स

1592
01:57:20,000 --> 01:57:24,240
हुई थी यह बात बिल्कुल सच है इस

1593
01:57:24,240 --> 01:57:29,200
वजह से खा हु ऐसा है कि ईश्वर क्या है

1594
01:57:29,200 --> 01:57:33,320
हम अगर ये मान लेंगे ना कि ईश्वर ये जो इन्होंने रूप बता

1595
01:57:33,320 --> 01:57:37,360
दिया कि ये जो है य यही ईश्वर है अगर हम ये ऐसे

1596
01:57:37,360 --> 01:57:41,560
ईश्वर को मान लेंगे तो यही से ईश्वर की ईश्वर का भंग है अगर

1597
01:57:41,560 --> 01:57:45,800
हमने य मान लिया क्यों क्योंकि यदि ये ईश्वर

1598
01:57:45,800 --> 01:57:49,840
है तो फिर इसने सब कुछ नहीं बनाया है सबसे पहले वो जगह इसने नहीं

1599
01:57:49,840 --> 01:57:54,320
बनाई जहां पर ये इस तरह का शरीर धारण करता है तो क्या है

1600
01:57:54,320 --> 01:57:58,440
कि ईश्वर की जो प्रारंभिक स्थिति है वो है कि

1601
01:57:58,440 --> 01:58:02,760
वो व्यवहार में नहीं आ सकता फिर वह व्यवहार

1602
01:58:02,760 --> 01:58:06,760
में आ सकने वाला रूप लेकर के अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है वह एक

1603
01:58:06,760 --> 01:58:11,560
रूप लेकर के सृष्टि का निर्माण करता है और फिर वो

1604
01:58:11,560 --> 01:58:15,800
व्यवहार में दिखाई दे सकने वाला रूप लेकर के लीलाएं करता है इसको ऐसे समझ

1605
01:58:15,800 --> 01:58:19,840
लीजिए जैसे विद्युत है ना इसका उदाहरण भागवत में

1606
01:58:19,840 --> 01:58:24,080
दिया गया है विद्युत है जो विद्युत सर्वत्र व्याप्त है जमीन

1607
01:58:24,080 --> 01:58:28,200
इत्यादि में जल अगर जल में मान ले जल में तो व्याप्त है ही है ठीक है

1608
01:58:28,200 --> 01:58:31,440
मगर वह सर्वत्र व्याप्त होते हुए भी आपको करंट

1609
01:58:31,440 --> 01:58:35,960
नहीं मारती है आप मान लीजिए कहीं धरती पर खड़े तो करंट मार रही है क्या

1610
01:58:35,960 --> 01:58:40,080
विद्युत नहीं मार रही मगर वह है

1611
01:58:40,080 --> 01:58:44,120
मगर वह क्या है अभी वह एक्टिव नहीं है इसको कहा गया और अभी भी

1612
01:58:44,120 --> 01:58:48,360
वो दिख नहीं रही है इसको कहा गया निर्गुण निराकार ठीक

1613
01:58:48,360 --> 01:58:52,480
अब इसके बाद हम लोग उद्योग करते हैं मेहनत करते हैं और फिर

1614
01:58:52,480 --> 01:58:56,760
वो जो विद्युत है वो बिजली के तारों में दौड़ने लगती है

1615
01:58:56,760 --> 01:59:00,840
अभी भी बिजली के तारों में जो विद्युत दौड़ रही है वो हमें दिख

1616
01:59:00,840 --> 01:59:06,160
नहीं रही है मगर अब अगर उन तारों को हम छू लेंगे तो वो क्या मारेगी

1617
01:59:06,160 --> 01:59:10,200
शौक मारेगी ना झटका मारेगी तो अब क्या हुआ

1618
01:59:10,200 --> 01:59:14,360
निर्गुण निराकार से ईश्वर हो गया विद्युत निर्गुण निराकार थी

1619
01:59:14,360 --> 01:59:18,560
अब विद्युत निर्गुण निराकार से सगुण निराकार हो गई अभी भी निराकार

1620
01:59:18,560 --> 01:59:23,040
है मगर वो सगुण हो गई अब उसमें गुण आ गया सक्रिय एक्टिव हो गई

1621
01:59:23,040 --> 01:59:27,080
ठीक है अब यही विद्युत आपको बल्ब के माध्यम से प्रकाशित हो

1622
01:59:27,080 --> 01:59:31,080
करर के दिखने लगती है जो आपकी आंखों का विषय बन

1623
01:59:31,080 --> 01:59:35,480
जाती है तो अब यह क्या हो गया सगुण

1624
01:59:35,480 --> 01:59:39,480
साकार और यह उदाहरण मैं अपने पास से नहीं दे रहा हूं यह उदाहरण भी भागवत

1625
01:59:39,480 --> 01:59:43,640
में दिया गया है तो यह ईश्वर का रूप है अब जब

1626
01:59:43,640 --> 01:59:46,480
ईश्वर अपना रूप बनाता है तो कुछ भी

1627
01:59:46,480 --> 01:59:50,800
कर सकता है वो हाथी बन सकता है वो शेर बन सकता है वो पहाड़ बन सकता है जंगल

1628
01:59:50,800 --> 01:59:54,880
बन सकता है सब कुछ वही है वो कुछ भी कर सकता है यह है

1629
01:59:54,880 --> 01:59:58,880
अनलिमिटेड ईश्वर और यदि हम यही कह देंगे

1630
01:59:58,880 --> 02:00:04,880
कबीर ही ईश्वर है तो शुरुआत ही गड़बड़ हो

1631
02:00:07,920 --> 02:00:12,440
गई ठीक है तो फिर थैंक यू सो

1632
02:00:12,440 --> 02:00:16,640
मच ओके आशा करते हैं आपके बेहतर भविष्य की

1633
02:00:16,640 --> 02:00:20,800
और भगवान से प्रार्थना करते हैं आप प्रभु श्री राम की कृपा बनी रहे आप आए आपने

1634
02:00:20,800 --> 02:00:24,920
बात की और बहुत सारी बातें सामने आई थैंक यू

1635
02:00:24,920 --> 02:00:29,440
सो मच जय श्री जय श्री

1636
02:00:29,440 --> 02:00:35,440
राम

1637
02:00:38,080 --> 02:00:42,920
री सूरज देव जी आपका वो नहीं आ

1638
02:00:42,920 --> 02:00:47,080
रहा बहुत अच्छी चर्चा थी इसमें एक चीज मैं ऐड करना चाहूंगा

1639
02:00:47,080 --> 02:00:51,320
जैसे उन्होंने बोला कि वासुदेव वासुदेव भगवान

1640
02:00:51,320 --> 02:00:55,400
कृष्ण को इसलिए बोलते क्योंकि व वासुदेव के पुत्र थे इसलिए वासुदेव

1641
02:00:55,400 --> 02:00:59,600
उनका एक नाम ही है तो जो वासुदेव बोला गया है वो भगवान कृष्ण के लिए ही उपयोग

1642
02:00:59,600 --> 02:01:03,960
है उनके पिता जी के उसमें

1643
02:01:03,960 --> 02:01:08,000
वासुदेव और व्याकरण के जो विद्वान होते हैं इसको अलग तरीके से और भी

1644
02:01:08,000 --> 02:01:12,160
तरीके से परिभाषित करते हैं क्योंकि व्याकरण बहुत डेप्थ का विषय है अमर

1645
02:01:12,160 --> 02:01:16,480
कोश नामक ग्रंथ में प्रत्येक शब्द का अलग-अलग प्रकार

1646
02:01:16,480 --> 02:01:20,480
का अर्थ किया गया है एक एक शब्द के तो वासुदेव एक व्यापक

1647
02:01:20,480 --> 02:01:24,920
अर्थ में भी इसका प्रयोग होता है और वैसे देखा जाए तो वासुदेव

1648
02:01:24,920 --> 02:01:28,960
के पुत्र है सिंपल तो वासुदेव इसलिए भी उन्हीं का नाम है भगवान कृष्ण का नाम है

1649
02:01:28,960 --> 02:01:33,000
और काफी अच्छी चर्चा थी और भागवत में जैसे आपने कहा बताया हुआ

1650
02:01:33,000 --> 02:01:37,880
है कि जो ईश्वर है वह

1651
02:01:37,880 --> 02:01:41,920
एक को हम बहु श्याम वह तत्व रूप में सृष्टि के आदि

1652
02:01:41,920 --> 02:01:46,880
काल में अ क्रियाशील रूप में

1653
02:01:46,880 --> 02:01:50,960
था अब लीला पूर्वक उसको क्या करना है जैसे

1654
02:01:50,960 --> 02:01:53,160
एक व्यक्ति को अपनी कंपनी चलानी

1655
02:01:53,160 --> 02:01:57,640
है तो कंपनी चलाने के लिए उसको अपने मेंटालिटी

1656
02:01:57,640 --> 02:02:02,120
के लोग हायर करने पड़ेंगे या अलग-अलग क्रिया

1657
02:02:02,120 --> 02:02:06,160
करने के लिए अलग-अलग रोल्स अदा करने पड़ेंगे अपनी फैक्ट्री को चलाने

1658
02:02:06,160 --> 02:02:10,320
के लिए तो एक को हम बहु श्याम नाम की जब इच्छा उत्पन्न

1659
02:02:10,320 --> 02:02:14,360
हुई तो अलग-अलग गुणों को अलग-अलग

1660
02:02:14,360 --> 02:02:18,760
गुणों को धारण करके सृष्टि स्थिति

1661
02:02:18,760 --> 02:02:23,240
प्रलय अनु ये निग्रह

1662
02:02:23,240 --> 02:02:27,840
हा निग्रह और अनुग्रह करने के लिए सत्व रज और

1663
02:02:27,840 --> 02:02:32,120
तम गुणों के तारतम्य से ही उसने क्या किया अपने स्वरूप

1664
02:02:32,120 --> 02:02:36,120
रचे तो पंच परमेश्वर जो सनातन धर्म में है इनमें

1665
02:02:36,120 --> 02:02:40,360
कोई भेद नहीं है अगर हम इनमें भेद करते हैं तो भेद हमारी बुद्धि में है

1666
02:02:40,360 --> 02:02:44,600
तो ये सभी के सभी ईश्वर कोटि है और जितने भी हमारे देवी देवता है 33

1667
02:02:44,600 --> 02:02:48,800
करोड़ देवी देवता वो सब इन्हीं में कल्मिनेट हो जाते हैं

1668
02:02:48,800 --> 02:02:52,920
सारे देवी देवताओं को पूछते हुए हमें इन पांचों देवता में से जो

1669
02:02:52,920 --> 02:02:56,960
हमारी कुल परंपरा प्राप्त इष्ट देव है कुल देव है या

1670
02:02:56,960 --> 02:03:01,480
आजकल शहरों में इसका लोप हो रहा है लोगों को अपने कुलदेव इष्टदेव नहीं पता है

1671
02:03:01,480 --> 02:03:05,840
तो वह यह कर सकते हैं जैसे गुरुदेव ने बताया हुआ है कि जिस

1672
02:03:05,840 --> 02:03:08,600
पंच देवों में से ही जिसके

1673
02:03:08,600 --> 02:03:14,600
अवतार

1674
02:03:17,000 --> 02:03:21,800
शास्त्रार्थ भाव से प्रार्थना करनी है अच्युत अनंत गोविंद

1675
02:03:21,800 --> 02:03:26,120
करके या उनके नाम से और स्वप्न में या एकांत में हमें ऐसा

1676
02:03:26,120 --> 02:03:30,320
संदेश प्राप्त होता है यह प्रमाणिक है और मैंने

1677
02:03:30,320 --> 02:03:34,520
अपने कई सारे मित्रों को ये चीज जब वीडियो देख के बताई और उनके साथ ये घटना

1678
02:03:34,520 --> 02:03:38,720
घटी इसलिए मैं आपको बता रहा हूं यह मैं ऐसे नहीं बोल रहा हूं तो यह जो गुरुदेव ने बोला

1679
02:03:38,720 --> 02:03:42,960
है यह हुआ है और दूसरा मैं आपके साथ एक और चीज शेयर

1680
02:03:42,960 --> 02:03:47,040
करना चाह रहा हूं कि जैसे आर्य समाज और आरएसएस

1681
02:03:47,040 --> 02:03:51,920
वाले लोग क्या करते हैं महिलाओं को भी

1682
02:03:51,920 --> 02:03:56,040
का जने संस्कार के लिए और यस

1683
02:03:56,040 --> 02:04:00,440
वाले आरएसएस वाले नहीं करते हैं आरएसएस धार्मिक

1684
02:04:00,440 --> 02:04:04,440
संस्था नहीं है मगर उनका

1685
02:04:04,440 --> 02:04:08,680
जो आधार है उनका जो आधार है व आर्य समाजी आधार ही है नहीं

1686
02:04:08,680 --> 02:04:12,680
वह ठीक है मगर आप आर्य समाज की ही बात करें क्योंकि वैचारिक मतभेद तब

1687
02:04:12,680 --> 02:04:16,880
होगा जब विचार हो आरएसएस का इस बारे में कोई अपना

1688
02:04:16,880 --> 02:04:21,800
विचार है ही नहीं रूप सेक्ष

1689
02:04:21,800 --> 02:04:23,640
रूप से कुछ हो पीछे से वो उस पर हम लोग बात

1690
02:04:23,640 --> 02:04:27,760
नहीं करें प्रकट रूप से आरएसएस के धर्म और धर्म की व्याख्या के बारे में अपना

1691
02:04:27,760 --> 02:04:31,880
कोई विचार नहीं है आर्य समाज की अगर बात करें और गायत्री

1692
02:04:31,880 --> 02:04:35,880
परिवार की बात करें ठीक है हालांकि सभी धार्मिक संस्थाओं

1693
02:04:35,880 --> 02:04:40,040
को कुछ ना कुछ वैदिक कुछ ना कुछ वैदिक सिद्धांत

1694
02:04:40,040 --> 02:04:44,080
य फॉलो करते हैं तो उन अंशों में हम इनको प्रणाम करते हैं नतमस्तक होते हैं हम

1695
02:04:44,080 --> 02:04:48,160
इनका उल्लंघन नहीं करेंगे कुछ ना कुछ अंशों में वैदिक सिद्धांतों को वो करते

1696
02:04:48,160 --> 02:04:52,280
हैं लेकिन जो चीज इनकी विकृत है वो बतानी पड़ेगी तो क्या करते हैं

1697
02:04:52,280 --> 02:04:56,280
महिलाओं को भी गायत्री मंत्र का उच्चारण और जनेऊ पहनने

1698
02:04:56,280 --> 02:05:00,600
के लिए कहते हैं तो आज ही मेरी माता जी ने अपना एक संस्मरण मेरे

1699
02:05:00,600 --> 02:05:05,400
से शेयर किया कि बचपन में उनके चाचा वगैरह

1700
02:05:05,400 --> 02:05:09,520
जब क्या करते हैं जने को चेंज करते हैं तो जनेऊ को चेंज करने

1701
02:05:09,520 --> 02:05:14,160
के समय उन्होंने क्या किया था उसको कहीं पर रख दिया और जब अपना जनेऊ

1702
02:05:14,160 --> 02:05:18,360
परिवर्तित किया चेंज किया पूरा विधिवत तो वो वहीं पर पड़ा रह गया तो मेरी

1703
02:05:18,360 --> 02:05:22,400
माताजी लोग क्या थे बहुत छोटी उम्र के थे उस समय उनको ज्ञान नहीं इन सब चीजों

1704
02:05:22,400 --> 02:05:26,680
का तो उन्होंने खेल खेल में क्या किया था वो जनेऊ अपने ऊपर जैसे चाचा

1705
02:05:26,680 --> 02:05:30,680
जी को देखा था वैसे ही डाल लिया और जब उन्होंने वो डाल लिया तो

1706
02:05:30,680 --> 02:05:34,880
विधिवत तरीके से उन्होंने निकाला था और वहां रखा था वहां व भूल गए थे और मेरी

1707
02:05:34,880 --> 02:05:38,960
माता जी के जिन जिन हिस्सों में वह जनेऊ

1708
02:05:38,960 --> 02:05:42,960
टच हुआ वहां वहां पर फफोले पड़ गए और यह माता जी बता रही थी और

1709
02:05:42,960 --> 02:05:47,080
उन्होंने बताया अभी भी वह निशान है तो तब से व इन चीजों को

1710
02:05:47,080 --> 02:05:51,120
एकदम मानती है कि यह जो चीजें बताई गई है यह सच्ची

1711
02:05:51,120 --> 02:05:55,480
में होती है और पहाड़ों और जो धार्मिक जगह है वहां ये आपको प्रत्यक्ष

1712
02:05:55,480 --> 02:05:59,600
देखने को मिलेगी जो लोग आज सोचते हैं कि अगर हम जनेऊ पहन सकते हैं हम गायत्री

1713
02:05:59,600 --> 02:06:03,720
कर सकते हैं तो और क्यों नहीं कर सकते यह उनको बाद में पता लगेगा कि

1714
02:06:03,720 --> 02:06:07,720
इनसे कितनी मानसिक विकृतियां क्या-क्या चीजें हो सकती है तो यह आज ही उनका एक

1715
02:06:07,720 --> 02:06:12,600
था मैंने सोचा आपको आप कभी मिलेंगे आपसे शेयर करेंगे कि महिलाओं

1716
02:06:12,600 --> 02:06:16,600
को कई महिलाओं को ये ऐसा हुआ है मेरी माता जी के साथ तो ऐसा हुआ है कि जनेऊ

1717
02:06:16,600 --> 02:06:20,680
धारण करने में उनको जिन जिन अंगों में वो जनेऊ था वहां वो

1718
02:06:20,680 --> 02:06:24,720
अंगों में फफोले पड़ गए थे और प्रॉब्लम हुई थी तो ये आपके

1719
02:06:24,720 --> 02:06:28,960
साथ शेयर करना था बाकी आप बताइए मैं एक बात कहूंगा

1720
02:06:28,960 --> 02:06:32,960
आर समाज जो कहता है ईश्वर अवतार नहीं लेता उसके बारे में उसके साथ ही हम लोग

1721
02:06:32,960 --> 02:06:37,080
आज की चर्चा को विराम दे देंगे एक सिंपल सी बात है

1722
02:06:37,080 --> 02:06:41,440
एक जगह इन्होंने कहा है कि एक समय ऐसा होता है जब स्थिति जो है तर्क

1723
02:06:41,440 --> 02:06:46,080
में नहीं आ सकती प्रलय के समय इन्होंने वो माना

1724
02:06:46,080 --> 02:06:52,080
है है ना शायद 199 में ही वा

1725
02:06:52,160 --> 02:06:54,120
इन्होंने वहां पर

1726
02:06:54,120 --> 02:06:58,160
तर्क में ना आ सकने वाली स्थिति स्वीकार की है तर्क में नहीं आ सकता

1727
02:06:58,160 --> 02:07:02,320
हालांकि उपनिषद में भी दिया गया है मांड उपनिषद सात में

1728
02:07:02,320 --> 02:07:06,440
जब तर्क में नहीं आ सकता है तो यह जो ईश्वर है जो सृष्टि

1729
02:07:06,440 --> 02:07:10,640
की रचना कर रहा है यह जो ईश्वर है जो जिसके

1730
02:07:10,640 --> 02:07:14,640
बारे में तर्क कर रहे हैं जिसके बारे में यह

1731
02:07:14,640 --> 02:07:18,800
तर्क कर रहे हैं यह कौन सा ईश्वर है जब वो तर्क

1732
02:07:18,800 --> 02:07:22,920
में नहीं आ सकता है एक स्थिति ऐसी होती है तो जो तर्क में

1733
02:07:22,920 --> 02:07:27,040
आ रहा है वो कौन सा ईश्वर है अगर हम कह ब का विषय

1734
02:07:27,040 --> 02:07:31,200
ब विषय बना दिया ना तर्क बुद्धि से आता है हा तर्क में आ सकता है तो बुद्धि

1735
02:07:31,200 --> 02:07:35,280
का विषय बना तो क्या हुआ कि वो जो तर्क में ना आ सकने वाला ईश्वर

1736
02:07:35,280 --> 02:07:39,440
था अब वो निराकार है मान लिया निराकार है वो तर्क में आ रहा है

1737
02:07:39,440 --> 02:07:43,640
तर्क में आ रहा है तो क्या हुआ अब या तो यह माने कि जो पहले

1738
02:07:43,640 --> 02:07:47,720
वाला जो ईश्वर का स्वरूप है वो उसने छोड़ दिया अब वो यही

1739
02:07:47,720 --> 02:07:52,000
हो गया तो इसमें मानेंगे तो परिवर्तनशील हो गया

1740
02:07:52,000 --> 02:07:56,160
और मैंने इनका थोड़ा बहुत पढ़ा है या बोलते हैं कि दयालु है ये है वो है तो निर्गुण

1741
02:07:56,160 --> 02:08:00,560
निराकार तो मान ही रहे गुण का तो आरोप कर दिया इन्होंने ना ना वो

1742
02:08:00,560 --> 02:08:04,600
मैं आप एक स्टेप आगे बढ़ गए मैं कह रहा हूं कि अगर

1743
02:08:04,600 --> 02:08:08,640
वो तर्क में आने से ही तर्क में आ सकने वाला बना और

1744
02:08:08,640 --> 02:08:09,240
हमने य मान

1745
02:08:09,240 --> 02:08:13,720
लिया कि वो बदल गया तो व इटरनल ट्रुथ नहीं है शाश्वत

1746
02:08:13,720 --> 02:08:18,120
नहीं रहा वो क्योंकि वो बदल गया हा ईश्वर के लिए नासतो विद्यते

1747
02:08:18,120 --> 02:08:22,760
भावो ना भावो विद्यते सत तीनों परिस्थिति समान है

1748
02:08:22,760 --> 02:08:26,880
अब क्या है जब वो अब अब क्या है कि जब वो तर्क में ना

1749
02:08:26,880 --> 02:08:31,320
आ सकने वाले रूप से तर्क में आ सकने वाले रूप में आया

1750
02:08:31,320 --> 02:08:35,440
तो फिर हम हमको या तो ये मानना पड़ेगा कि वो शाश्वत नहीं है वो खुद बदल

1751
02:08:35,440 --> 02:08:39,880
गया या फिर वो तो वैसा का वैसा ही रहा एक रस

1752
02:08:39,880 --> 02:08:43,920
वो तो वैसा का वैसा ही रहा एक रस फिर भी

1753
02:08:43,920 --> 02:08:47,960
उसने एक और स्वरूप धारण कर लिया यानी कि

1754
02:08:47,960 --> 02:08:52,320
अजन्मा विनाशी तर्क में ना आ सकने वाला होते हुए भी मैंने

1755
02:08:52,320 --> 02:08:56,320
एक और रूप धारण कर लिया तो जब वोह यहां से यहां आ

1756
02:08:56,320 --> 02:09:00,800
रहा है अवतरित हो रहा है तो फिर यहां से यहां क्यों नहीं

1757
02:09:00,800 --> 02:09:05,800
आएगा यहां से यहां तो आ जाएगा यहां से यहां आने में

1758
02:09:05,800 --> 02:09:10,160
दिक्कत अंग्रेजों के प्रभाव से अंग्रेजों के प्रभाव से मूर्ति

1759
02:09:10,160 --> 02:09:14,240
का खंडन किया गया होगा उस समय और इसीलिए अवतारों का भी उन्होंने क्या किया

1760
02:09:14,240 --> 02:09:18,440
खंडन कर दिया है देख बात है किसी समय

1761
02:09:18,440 --> 02:09:22,440
ऐसी आवश्यकता हो सकता है कि भाई मूर्तियों का नाम पर

1762
02:09:22,440 --> 02:09:24,680
कुछ ऐसा हो रहा हो तो आपने लिख लिया

1763
02:09:24,680 --> 02:09:28,680
गुस्से में आकर के या किसी भी सुरक्षा की दृष्टि से मगर वह

1764
02:09:28,680 --> 02:09:32,760
सनातन सिद्धांत नहीं है जैसे कि

1765
02:09:32,760 --> 02:09:36,960
सोशल रिम है सिधांत नहीं है कि हमने

1766
02:09:36,960 --> 02:09:41,040
किसी देश काल परिस्थिति के अनुकूल समस्या को सुलझाने के लिए

1767
02:09:41,040 --> 02:09:45,160
कुछ लिख दिया मगर उसको सनातन व्याख्या मानना यह गलत है दूसरी बात

1768
02:09:45,160 --> 02:09:49,400
ये लोग खुद कहते कि शोध ग्रंथ है ये लोग खुद कहते शोध ग्रंथ है और

1769
02:09:49,400 --> 02:09:53,400
इसमें कई बार बदलाव हो चुका है बदलाव हो चुका है तो इसका मतलब इसमें लिखी

1770
02:09:53,400 --> 02:09:58,440
हुई बातें सनातन सिद्धांत नहीं है सिंपल

1771
02:09:58,440 --> 02:10:02,880
जी संदीप जील सोल रिम

1772
02:10:02,880 --> 02:10:07,120
अध्याय 10 लोक 42 में लिखा हुआ है स्पेशली कि यह संपूर्ण

1773
02:10:07,120 --> 02:10:11,360
जग जो है यह मेरा एक अंश मात्र है सिर्फ इसका अर्थ

1774
02:10:11,360 --> 02:10:15,480
यह हुआ कि जितना भी जितना भी यह सारा सिस्टम चल रहा है ना परमात्मा

1775
02:10:15,480 --> 02:10:21,480
के अंदर ही चलर परमात्मा

1776
02:10:21,720 --> 02:10:26,080
उनके अंदर कई सृष्टि चल रही है ये हम हर चीज तभी इसलिए

1777
02:10:26,080 --> 02:10:30,080
हम लोग कई बार कह तो देते हैं कि ये चीज मल उसको कह देते यह

1778
02:10:30,080 --> 02:10:34,160
मतलब की निष्क्रिय यह सक्रिय म जबक सारी चीज

1779
02:10:34,160 --> 02:10:38,160
सक्रिय है क्योंकि परमात्मा सबके अंदर है यह समझने वाली बात है इन

1780
02:10:38,160 --> 02:10:42,240
चीजों में एक सर छोटी सी बात कर रहे थे जैसे अध्याय 18 श्लोक 66

1781
02:10:42,240 --> 02:10:46,320
की बारबार य बा बात करते हैं ना सर ज्यादा नहीं समय लूंगा इसमें छोटी सा है

1782
02:10:46,320 --> 02:10:50,880
उसम उसमें उन्होंने समझाया क्या हुआ है कि संपूर्ण

1783
02:10:50,880 --> 02:10:54,960
ध को त्याग कर व धर्मों की बात पता क्या मुझे क्या लगता है धर्म

1784
02:10:54,960 --> 02:10:59,000
क्या होता है धर्म बेसिकली जैसे वो संसार जो संसार धर्म हम निभाते हैं ना

1785
02:10:59,000 --> 02:11:03,120
जैसे जैसे माता-पिता के प्रति धर्म है हमारा या पत्नी धर्म है या बच्चों

1786
02:11:03,120 --> 02:11:07,520
के प्रति मतलब संसारी धर्मों को त्याग कर मतलब की उन्होंने कहा कि जितने भी संसार

1787
02:11:07,520 --> 02:11:11,760
के तुम ये कर्म या धर्म कर रहे हो तो यह इन सबको त्याग

1788
02:11:11,760 --> 02:11:16,160
कर मेरी शरण में शरण को ग्रहण करो

1789
02:11:16,160 --> 02:11:21,320
नहीं मैं इसको क्लियर कर देता हूं उन्होने क्या कहा है

1790
02:11:21,320 --> 02:11:25,920
वहां पर संपूर्ण धर्मों को त्यागने से अर्थ है कि मुझे अर्पित

1791
02:11:25,920 --> 02:11:30,040
करो जैसे कि आप जैसे कि आप माता

1792
02:11:30,040 --> 02:11:34,160
की सेवा तो करनी है मगर क्यों करनी है क्योंकि माता

1793
02:11:34,160 --> 02:11:36,880
की सेवा करने से ईश्वर खुश

1794
02:11:36,880 --> 02:11:41,320
होंगे अगर वो कर देता उन्होने बोला है संदीप जी ने तो वो युद्ध ही नहीं करते

1795
02:11:41,320 --> 02:11:45,400
तो वो युद्ध ही नहीं करते कर न

1796
02:11:45,400 --> 02:11:50,240
मैं पूरा कर पर का ये है कि उसको ना आप जो मतलब य

1797
02:11:50,240 --> 02:11:54,240
करो भगवान को अर्पित करके युद्ध करना है वहां अर्जुन को भगवान

1798
02:11:54,240 --> 02:11:58,560
को अब इसका एक उदाहरण दिया है आप आप इसका एक उदाहरण दिया है

1799
02:11:58,560 --> 02:12:02,880
साधक संजीवनी में भी वो उदाहरण है और शायद गीता प्रबोधनी में भी वो उदाहरण

1800
02:12:02,880 --> 02:12:06,920
है उदाहरण यह दिया है कि शुरुआत में एक जगह

1801
02:12:06,920 --> 02:12:11,280
आया है कि जो युद्ध स्थल में जो सैनिक

1802
02:12:11,280 --> 02:12:15,720
खड़े हुए थे वह अपने प्राणों को त्याग कर खड़े हुए थे

1803
02:12:15,720 --> 02:12:20,280
ठीक है अब प्राणों को त्यागने का मतलब क्या हुआ लाश थी

1804
02:12:20,280 --> 02:12:24,280
हां नहीं नहीं ह नि स्वार्थ इसका इसका मतलब

1805
02:12:24,280 --> 02:12:28,560
प्राण से जो आसक्ति होती है उसको त्याग

1806
02:12:28,560 --> 02:12:33,200
करके व खड़े हुए थे इसका मतलब मरेंगे या लड़ेंगे

1807
02:12:33,200 --> 02:12:37,360
प्राणों की जो आसक्ति है प्राण रहेंगे प्राणों की जो आसक्ति

1808
02:12:37,360 --> 02:12:41,480
के प्राण रहेंगे तो मैं जो है यह भोग कर लूंगा मैं वो भोग

1809
02:12:41,480 --> 02:12:45,600
कर लूंगा जो आसक्ति है उसको त्याग करके वहा खड़े तो इसी प्रकार

1810
02:12:45,600 --> 02:12:50,040
से जो धर्म धर्म कार्य हम जो कर रहे हैं इनकी इनसे

1811
02:12:50,040 --> 02:12:51,960
प्राप्त होने वाले में जो

1812
02:12:51,960 --> 02:12:56,080
फ फल के जो भोग है उनके प्रति जो आसक्ति है उसको

1813
02:12:56,080 --> 02:13:00,440
तू त्याग दे परंपरा प्राप्त आचार्य

1814
02:13:00,440 --> 02:13:04,760
की आवश्यकता होती है जैसे वो बहन जी बोल रही थी इससे पहले वाली की मैंने भागवत पढ़ी भागवत

1815
02:13:04,760 --> 02:13:09,160
में यह लिखा था वो लिखा था आप उनको सीधे बोलते परंपरा प्राप्त आचार्य

1816
02:13:09,160 --> 02:13:13,240
के सानिध्य में ग्रंथों को पढ़ो जो हमारे कन्फ्यूजन होते हैं

1817
02:13:13,240 --> 02:13:17,440
वो सब उससे होते खैर वो काफी काफी

1818
02:13:17,440 --> 02:13:22,400
हद तक वो समझ के गई है बाकी अपना परिवर्तन लाएंग

1819
02:13:22,400 --> 02:13:26,640
शंकराचार्य जी इसमें जो शंकराचार्य जी ने जो आंसर दिया है

1820
02:13:26,640 --> 02:13:30,960
उसका भी उनका भी यही आंसर है लगभग सभी परंपरा प्राप्त आचार्यों का 18

1821
02:13:30,960 --> 02:13:35,520
66 का आंसर यही है कि जो इंद्रिय धर्म होते हैं इंद्रिय

1822
02:13:35,520 --> 02:13:39,520
धर्म वो भोग होता है इंद्रिय धर्म क्या है भोग

1823
02:13:39,520 --> 02:13:43,600
तो जो इंद्रिय धर्म है उसको त्याग कर आप मेरी शरण में आओ

1824
02:13:43,600 --> 02:13:47,680
कुल मिलाकर के वो जो आपकी आसक्ति है जो धर्म से अब मान लो

1825
02:13:47,680 --> 02:13:51,680
हम अच्छे कार्य कर रहे तो हमें आसक्ति मैं इतने अच्छे कार्य करता हूं तो मुझे ये मिले मुझे वो

1826
02:13:51,680 --> 02:13:56,120
मिलेगा मुझे भोग मिलेगा तो वो आ उसी को शंकराचार्य

1827
02:13:56,120 --> 02:14:00,480
जी ने कहा इंद्रिय धर्म को त्याग कर मेरी शरण में आओ फिर उन्होने उपनिषद

1828
02:14:00,480 --> 02:14:04,640
का प्रमाण भी दिया है शंकराचार्य जीने तो अब

1829
02:14:04,640 --> 02:14:07,560
कल हमें एक विशेष प्रयोजन से कहीं जाना है

1830
02:14:07,560 --> 02:14:11,640
तो आज की इस लाइव स्ट्रीम को हम लोग बढ़ाएंगे पहाड़ी जी वापस आए तो कुछ कहना हो तो

1831
02:14:11,640 --> 02:14:15,840
कह दीजिए आपकी वार्ता के साथ हम लोग जं भी आगी एकादशी

1832
02:14:15,840 --> 02:14:18,920
में गीता जयंती में

1833
02:14:18,920 --> 02:14:22,040
लाइ जी

1834
02:14:22,040 --> 02:14:27,800
नहीं नहीं मुझे कुछ नहीं कहना है ठीक है आपने कल कहीं जाना है तो ठीक

1835
02:14:27,800 --> 02:14:31,800
हैमा सर देव जी आपने अपना चेहरा नहीं दिखाया आपने अपनी कोई बात भी

1836
02:14:31,800 --> 02:14:34,080
नहीं

1837
02:14:34,080 --> 02:14:38,320
रखी हां सर जी मेरा वॉइस ठीक है

1838
02:14:38,320 --> 02:14:40,840
आपका

1839
02:14:40,840 --> 02:14:46,360
परिचय सर मैं आपका सब्सक्राइबर हूं मैं आपका फॉलोअर ही

1840
02:14:46,360 --> 02:14:50,480
हूं आप मतलब आप मेरा कैसा परिचय मांग रहे हैं थोड़ा बता

1841
02:14:50,480 --> 02:14:54,480
दीजिए तो ये होगा वैचारिक मतभेद के निमित्त

1842
02:14:54,480 --> 02:14:59,320
आए हैं या फिर कोई स्वार्थ पूर्ण वो चर्चा के लिए

1843
02:14:59,320 --> 02:15:03,480
नहीं नहीं मैं मैं आपका फॉलोअर हूं मैं आपसे डिबेट कैसे करूंगा ना और

1844
02:15:03,480 --> 02:15:07,520
मैं आपके लायक भी नहीं हूं मैं आपसे बहुत छोटा हूं ना मैं कैसे आपसे डिबेट

1845
02:15:07,520 --> 02:15:11,640
करूंगा मेरा कुछ डाउट था तो वो आप अगर क्लियर कर देंगे तो इसलिए

1846
02:15:11,640 --> 02:15:16,080
आया के लिए डाउट के लिए मैंने कई बार कहा है आप लोग क्लास में आया

1847
02:15:16,080 --> 02:15:20,520
करिए क्लास के लिए हमारे ट नंबर पर फॉर्म भरिए

1848
02:15:20,520 --> 02:15:22,560
फम प्राप्त करिए और उसको

1849
02:15:22,560 --> 02:15:26,680
फॉर्म भरिए आप क्लास में मिला करिए हर संडे को सुबह 9:00 बजे 8

1850
02:15:26,680 --> 02:15:30,760
बजे क्लास होती है ठीक है सर अगर मेरा एक छोटा सा बात

1851
02:15:30,760 --> 02:15:35,200
था अगर आप थोड़ा निराकरण करते तो अच्छा होता क्या

1852
02:15:35,200 --> 02:15:39,480
है सर मैं और मतलब आजकल

1853
02:15:39,480 --> 02:15:43,560
आप आर्य समाज के भी विरोध कर रहे अच्छा बात है पर इस समय

1854
02:15:43,560 --> 02:15:47,720
बहुत सारे ईसाई लोग भी सनातन धर्म को विभिन्न तरीकों से आक्रमण

1855
02:15:47,720 --> 02:15:51,720
कर रहे हैं ना तो कुछ हिंदू भी इसके प्रति उत्तर देने

1856
02:15:51,720 --> 02:15:55,880
में उठे हैं चैनल भी बनाया है तो मैं भी उस तरीका

1857
02:15:55,880 --> 02:15:59,920
ही प्रयास कर रहा हूं पर एक मेरा डाउट था हालांकि हमने उत्तर

1858
02:15:59,920 --> 02:16:04,240
देने की प्रयास किया है पर बहुत सारी ईसाई देवी भागवत को कोट

1859
02:16:04,240 --> 02:16:08,760
करते हैं और विष्णु जी का साबित करने की कोशिश करते कि विष्णु जी

1860
02:16:08,760 --> 02:16:13,200
देवी से अलग है देवी से भिन्न है और देवी से अलग होने के नाते तो

1861
02:16:13,200 --> 02:16:17,280
जितने भी वैष्णव पुराण है वो असत्य हो गया मतलब सनातन धर्म को तोड़ने

1862
02:16:17,280 --> 02:16:21,360
की कोशिश कर रहे हैं और विष्णु जी को एक विष्णु जी

1863
02:16:21,360 --> 02:16:25,360
जो परम तत्व है उनके जो ईश्वर का है उस पर सवाल उठा रहे

1864
02:16:25,360 --> 02:16:29,880
तो इसके थोड़ा थोड़ा डाउट था प्रमाणिक

1865
02:16:29,880 --> 02:16:34,320
आचार्य कौन है जो शास्त्रों का अर्थ बताएगा

1866
02:16:34,320 --> 02:16:38,120
मैंने कितनी बार अपने वीडियोस में कहा है कि

1867
02:16:38,120 --> 02:16:42,240
संसार के सभी सनातनी हों को संसार भर में रहने वाले जितने भी सनातनी है उन

1868
02:16:42,240 --> 02:16:46,560
सबको शास्त्र का मर्मज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है उन सबको

1869
02:16:46,560 --> 02:16:52,400
केवल इतना मालूम होना चाहिए कि परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य कौन है

1870
02:16:52,400 --> 02:16:56,520
बस अगर कोई भी व्यक्ति कल को कोई भी बुक उठा कर के आपको धर्म

1871
02:16:56,520 --> 02:17:00,640
की व्याख्या करने लगेगा तुम्हारे धर्म में य तो आपका सवाल यह नहीं होना चाहिए नहीं नहीं यय नहीं

1872
02:17:00,640 --> 02:17:04,920
लिखा है आपका सवाल यह होना चाहिए कि आपने य जो अर्थ बोल रहे हो यह कहां

1873
02:17:04,920 --> 02:17:09,400
से प्राप्त किया है अगर आपको कल को कोई भी जीओ

1874
02:17:09,400 --> 02:17:13,640
छोड़ो डीओ डू को डीओ डो कहने लगेगा तो आप उससे पूछोगे

1875
02:17:13,640 --> 02:17:17,400
ना तुमने इंग्लिश की पढ़ाई कहां से की

1876
02:17:17,400 --> 02:17:21,680
है पूछोगे ना तो जब भी कोई व्यक्ति आपके धर्म

1877
02:17:21,680 --> 02:17:25,920
पर आघात करने चलता है शास्त्रों का गलत अर्थ बताते

1878
02:17:25,920 --> 02:17:29,960
हुए तो आवश्यक नहीं है कि आप शास्त्र के मर्मज्ञ बने आपको यह

1879
02:17:29,960 --> 02:17:34,040
मर्मज्ञ बनना होगा कि उससे पूछो तुम किस परंपरा प्राप्त आचार्य के

1880
02:17:34,040 --> 02:17:38,200
शिष्य हो जो तुमने य अर्थ बताया हमको क्या वो सन्यासी

1881
02:17:38,200 --> 02:17:42,360
है क्या उसके दवारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान

1882
02:17:42,360 --> 02:17:46,440
है क्या वो समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा

1883
02:17:46,440 --> 02:17:51,080
देता है अर्ध कुट न्याय तो नहीं करता है

1884
02:17:51,080 --> 02:17:53,360
हां सर मैं थोड़ा बोल लू एक्चुअली

1885
02:17:53,360 --> 02:17:57,520
हमारा जो विरोधी है जो ई लोग मैं देखिए हमें ऐसा नहीं कि हम

1886
02:17:57,520 --> 02:18:01,720
पूरी तरीके से ऐसा करिए आप जो है क्लास

1887
02:18:01,720 --> 02:18:05,920
में आइएगा और आप वहां पर भी लिख के दे सकते हैं टेलीग्राम चैनल पर आपका प्रश्न

1888
02:18:05,920 --> 02:18:09,960
बहुत जटिल नहीं है पर अब समय हो रहा है हम लोगों को जाना है कल

1889
02:18:09,960 --> 02:18:13,360
एक आवश्यक कार्य है

1890
02:18:13,360 --> 02:18:17,520
और हमारे एक आंसर दे देते तो अच्छा होता दो मिनट चाहिए

1891
02:18:17,520 --> 02:18:21,920
था क्या चाहिए था दो मुझे चाहिए

1892
02:18:21,920 --> 02:18:25,920
दो मिनट में दे देते मैंने आपको दिया है

1893
02:18:25,920 --> 02:18:30,040
आवश्यक नहीं है कि मेरे द्वारा दिया जाने वाला निराकरण संतुष्ट

1894
02:18:30,040 --> 02:18:36,040
हो नहीं नहीं मुझे पता है आपका जो निराकरण आप

1895
02:18:37,640 --> 02:18:42,160
दे बोलिए अच्छा

1896
02:18:42,160 --> 02:18:46,240
बोलिए हा मुझे पता है मैंने शिवांग जी का बहुत अच्छा सारा वीडियो भी

1897
02:18:46,240 --> 02:18:50,240
देखा शिवा जी के लिए ही मैं रामपाल वालो की असली चेहरा

1898
02:18:50,240 --> 02:18:54,440
मुझे पता चली वरना मैं जब छोटा था मैं बहुत रामपाल वालों की वीडियो

1899
02:18:54,440 --> 02:18:58,440
भी देखा किया करता था और उससे भी थोड़ा भ्रमित भी हो चुका था तो शिवांग

1900
02:18:58,440 --> 02:19:02,840
जी का तो इसलिए मुझ धन्यवाद देना ही पड़ेगा और एक छोटा सा बात था कि

1901
02:19:02,840 --> 02:19:07,080
दे भागवत सबका सबका भटकाने का ट्रैक वही है

1902
02:19:07,080 --> 02:19:11,160
इनकी वीडियो से आप उनको भी कवर कर सकते हो सबका एक ही ट्रैक है उनका भड़काने का चाहे ये

1903
02:19:11,160 --> 02:19:15,200
रामपाल है चाहे वो है तो उन्हीं के ट्रैक से उसी के ऊपर काम कर सकते हो आपको

1904
02:19:15,200 --> 02:19:19,320
दिक्कत ही नहीं है वही प ठीक है आप बोलिए आपका प्रश्न प्रश्न

1905
02:19:19,320 --> 02:19:23,320
बोलिए आपका देखिए अब देवी भागवत जो

1906
02:19:23,320 --> 02:19:27,440
फोर्थ स्कंद है चतुर्थ स्कंद के आठवे अध्याय में 18

1907
02:19:27,440 --> 02:19:31,640
चैप्टर में भगवान विष्णु खुद को स्वतंत्र नहीं बता रहे भगवान विष्णु कहते

1908
02:19:31,640 --> 02:19:35,840
हैं कि भगवान विष्णु स्वतंत्र नहीं है और भगवान विष्णु जितने भी अवतार लिए हैं

1909
02:19:35,840 --> 02:19:40,000
वह देवी भगवती की इच्छा से ही लिए है और भगवान विष्णु देवी भगवती

1910
02:19:40,000 --> 02:19:44,040
की ही पराधीन है तो वह साधीन ईश्वर नहीं है तो इस अगर

1911
02:19:44,040 --> 02:19:48,720
इस पॉइंट के आप निराकरण कर देते तो मैंने आपको बताया

1912
02:19:48,720 --> 02:19:52,760
तीसरा पॉइंट समस्त शति स्मति शास्त्रों में

1913
02:19:52,760 --> 02:19:56,760
सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है अगर हम यही मान

1914
02:19:56,760 --> 02:20:00,840
लेंगे कि जो विष्णु भगवान है वो स्वतंत्र नहीं है तो देवी

1915
02:20:00,840 --> 02:20:04,880
भागवत मेंही नौवे स्कंध में जो देवी है वो कृष्ण भगवान के विष्णु

1916
02:20:04,880 --> 02:20:08,880
भगवान के अधीन है फिर क्या करोगे देवी भागवत से

1917
02:20:08,880 --> 02:20:13,080
देवी भागवत कट जाएगी तो हमें ये मानना पड़ेगा कि लीला पूर्वक

1918
02:20:13,080 --> 02:20:17,680
भगवान अपनी भक्ति प्रकट कर रहे हैं देवी मां के प्रति तो इतनी अधीनता

1919
02:20:17,680 --> 02:20:21,800
दिखा रहे हैं और सबसे बड़ा पॉइंट यह है आपको एक बात

1920
02:20:21,800 --> 02:20:26,000
याद रखो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो ईश्वर

1921
02:20:26,000 --> 02:20:30,640
भगवान भी है तो ईश्वर भक्त भी है यह बात

1922
02:20:30,640 --> 02:20:34,640
सही ईश्वर भगवान भी हो सकता है ईश्वर भक्त भी हो सकता है क्या

1923
02:20:34,640 --> 02:20:38,960
दिक्कत है ईश्वर हनुमान भी हो सकता है ईश्वर राम भी हो सकता है

1924
02:20:38,960 --> 02:20:43,000
अब राम भगवान शिव जी की पूजा कर रहे वही शिव जी हनुमान के रूप में राम की पूजा

1925
02:20:43,000 --> 02:20:47,720
कर रहे हैं पर इतना ध्यान देना है कि शास्त्रो तो भगवान

1926
02:20:47,720 --> 02:20:52,120
कोई भी नहीं शास्त्रो भगवान जो दुर्गा जी का प्राकट्य

1927
02:20:52,120 --> 02:20:56,400
हुआ था ना पहले तो वो पढ़िए किस लिए हुआ था वो राक्षस को वध

1928
02:20:56,400 --> 02:21:00,400
के लिए हुआ था और हुआ कैसे था वो जितने भी देवी देवता थे ना उनके तेज से

1929
02:21:00,400 --> 02:21:04,480
हुआ था अब आप कहोगे कि व उनके दुर्गा जी उनके नीचे आ गई यह चीज

1930
02:21:04,480 --> 02:21:08,280
नहीं होती वो उनके प्रकट का तरीका होता है अलग अलग होता केव

1931
02:21:08,280 --> 02:21:12,400
केवल वो लीला है कि उस रूप में उन्होने लीला कैसे की बस इतनी सी

1932
02:21:12,400 --> 02:21:16,400
बात है इसी तरीके से विष्णु भगवान ने विष्णु भगवान के रूप में

1933
02:21:16,400 --> 02:21:20,880
उन्होंने वहां यह कह दिया कि मैं जो है स्वतंत्र नहीं हूं मगर दूसरी जग

1934
02:21:20,880 --> 02:21:25,040
शिव भगवान ने कह दिया नहीं नहीं विष्णु जैसा कोई नहीं है तो यह इसलिए

1935
02:21:25,040 --> 02:21:29,040
होता है यह इसलिए होता है कि जिसके प्रति

1936
02:21:29,040 --> 02:21:33,240
आपकी आस्था है मान लीजिए आपकी मां भगवती के प्रति आस्था है तो आपने मां भगवती

1937
02:21:33,240 --> 02:21:37,320
का अध्ययन करना शुरू किया मां भगवती के अध्ययन में जब

1938
02:21:37,320 --> 02:21:41,640
आप उनका अध्ययन कर रहे होगे तो उसमें ऐसी बातें होनी चाहिए जिसके

1939
02:21:41,640 --> 02:21:45,680
कारण आपकी एकाग्रता बन जाए मां भगवती में

1940
02:21:45,680 --> 02:21:49,800
तो ये अन्यता की रक्षा के लिए इस तरह की बातें

1941
02:21:49,800 --> 02:21:53,840
हमारे शास्त्र में होती है अनन्य की रक्षा मतलब

1942
02:21:53,840 --> 02:21:57,920
जैसे कि आप अपनी आप अपनी माता जी है आपने बताया आपकी

1943
02:21:57,920 --> 02:22:02,040
माता जी होंगी आपके घर में आपके पिताजी होंगे आप उनसे कई बार

1944
02:22:02,040 --> 02:22:06,920
ये बात कह देते होंगे कि आप इस संसार के सबसे अच्छे पिता है

1945
02:22:06,920 --> 02:22:10,920
अब ये आपकी अन्यता है या घमंड है या आपको परफेक्ट पता चल

1946
02:22:10,920 --> 02:22:14,960
गया कि उनके जैसा और कोई नहीं है ना

1947
02:22:14,960 --> 02:22:19,560
ये तो मेरा प्रेम है ये आपकी अन्यता है आपका अन्यता

1948
02:22:19,560 --> 02:22:23,400
का भाव है कि आप को अपने पिता के अलावा और कुछ दिख नहीं रहा है इसलिए

1949
02:22:23,400 --> 02:22:27,480
आप कह रहे हो कि आपके जैसा कोई नहीं है आपके आगे सब बेकार है तो ऐसे

1950
02:22:27,480 --> 02:22:31,600
ही भगवान ने वो भाव प्रकट किया है कि भाई मैं जो है स्वतंत्र नहीं

1951
02:22:31,600 --> 02:22:35,840
हूं मैं भी मैं भी इनके अधीन हूं अन्यता का भाव तो उससे भक्त

1952
02:22:35,840 --> 02:22:39,920
की भगवान के प्रति अनन्य के भाव की रक्षा होती है इसलिए इस तरह के आते

1953
02:22:39,920 --> 02:22:44,160
हैं मगर यदि इसी को हम अंतिम सत्य मान लेंगे तो शास्त्र के दूसरे

1954
02:22:44,160 --> 02:22:48,200
वचन खंडित हो जाएंगे तो हमें क्या करना पड़ेगा सब वचनों

1955
02:22:48,200 --> 02:22:52,200
की रक्षा करनी पड़ेगी सामंजस्य तो हमें विष्णु

1956
02:22:52,200 --> 02:22:56,400
वहां पर विष्णु सूक्त है वेदों में सूक्त आया है विराट

1957
02:22:56,400 --> 02:23:00,760
पुरुष का विष्णु भगवान की बातें हो रही है वहा तो वहा खंडन कैसे कर दे उनका तो

1958
02:23:00,760 --> 02:23:05,200
मानना पड़ेगा य भगवान अनंता के भाव की रक्षा कर रहे हैं और यहां पर भगवान

1959
02:23:05,200 --> 02:23:10,280
लीला पूर्वक य बात कर रहे ठीक है अ

1960
02:23:10,280 --> 02:23:16,280
धन्यवाद धन्यवाद थक य जय श्री राम जय श्री राम

1961
02:23:17,240 --> 02:23:22,510
श्रीराम जय श्री राम h

1962
02:23:22,510 --> 02:23:26,510
[संगीत]
