1
00:00:01,690 --> 00:00:07,520
[संगीत]

2
00:00:07,520 --> 00:00:11,680
जय श्री राम सभी लोगों को। अब

3
00:00:11,680 --> 00:00:15,920
देखिए कुछ पिछली बार से मैं ऐसा कर पा रहा हूं कि ज्यादा

4
00:00:15,920 --> 00:00:21,520
लेट नहीं हो रहा हूं निर्धारित दिए गए समय से।

5
00:00:21,520 --> 00:00:26,960
अ आज एक गंभीर विषय पर हम लोग चर्चा करने वाले हैं।

6
00:00:26,960 --> 00:00:29,680
अ

7
00:00:29,680 --> 00:00:33,680
एक परिवार है जो हमारे

8
00:00:33,680 --> 00:00:38,000
वीडियोस देख रहा था कुछ दिनों से और वो अपने

9
00:00:38,000 --> 00:00:42,240
समाज में अपने घर में जागरूकता फैलाने का प्रयास भी कर रहा था। पर

10
00:00:42,240 --> 00:00:48,080
उसके ही घर के जो लोग रामपाल से प्रभावित थे

11
00:00:48,080 --> 00:00:52,480
उन लोगों ने बलपूक उनके साथ मतलब

12
00:00:52,480 --> 00:00:56,560
कहेंगे कि दुराचार किया है, दुराचरण किया

13
00:00:56,560 --> 00:01:02,000
है तो वो क्या है क्या नहीं है? तो वह भी आके आपको बताएंगे

14
00:01:02,000 --> 00:01:06,800
और इससे हमें पता लगेगा कि किस तरह से डर

15
00:01:06,800 --> 00:01:10,960
का वातावरण बना करके जैसे आपने

16
00:01:10,960 --> 00:01:15,120
अभी पिछली बार जो वो छोटी प्यारी बहना

17
00:01:15,120 --> 00:01:20,160
है जो उसने आकर के बताया था कि

18
00:01:20,160 --> 00:01:24,160
जब उसका एक्सीडेंट हो गया था तो जो लोग रामपाल से प्रभावित थे

19
00:01:24,160 --> 00:01:28,560
वह घर के ही लोग वो उसका इलाज नहीं करवा रहे थे।

20
00:01:28,560 --> 00:01:32,640
और उसको फिर डराया गया, धमकाया गया कि

21
00:01:32,640 --> 00:01:36,800
तेरे साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि तू सद्भक्ति नहीं कर रही है। यह है वो है।

22
00:01:36,800 --> 00:01:40,800
ये सब उसको डराया धमकाया गया और उसने उन चीजों को मान लिया

23
00:01:40,800 --> 00:01:44,560
और

24
00:01:44,560 --> 00:01:48,720
इन चीजों को मान करके वो जो बहना थी वो भी

25
00:01:48,720 --> 00:01:53,440
थोड़ी बहुत देर के लिए मजबूरी में हर हर महादेव। हर हर हर महादेव। हर हर शंकर

26
00:01:53,440 --> 00:01:57,440
और मजबूरी में उसने जो है फिर

27
00:01:57,440 --> 00:02:01,520
रामपाल का जो है आलंबन लेना शुरू किया मगर उसके

28
00:02:01,520 --> 00:02:05,680
अंदर से उसकी आत्मा जो है कचोटती रही और फिर हमारे वीडियो

29
00:02:05,680 --> 00:02:10,720
उसके सामने आए तो ये सब मगर यहां पर हम बात कर रहे थे कि बलपूर्वक

30
00:02:10,720 --> 00:02:14,720
तो ये लोग बलपूक भी कार्य करते हैं और बलपूर्वक

31
00:02:14,720 --> 00:02:18,800
कार्य करने में अगर कोई इनके अनुसार नहीं चल रहा है तो इन्होंने क्या

32
00:02:18,800 --> 00:02:22,880
किया वहां पर कि उनके साथ बल का प्रयोग किया,

33
00:02:22,880 --> 00:02:28,320
क्षति पहुंचाई, अवमानना की।

34
00:02:28,320 --> 00:02:32,480
जब तक मातृशक्ति नहीं जुड़ रही है, मातृशक्ति भी हैं और उनके साथ शायद

35
00:02:32,480 --> 00:02:36,640
उनके हस्बैंड भी होंगे। वो लोग वो दंपत्ति जब

36
00:02:36,640 --> 00:02:40,640
तक नहीं जुड़ पा रही है तब तक आप कोई अपने प्रश्न हो तो

37
00:02:40,640 --> 00:02:45,040
वो कर सकते हैं। अच्छा एक बात मैं और बता दूं।

38
00:02:45,040 --> 00:02:49,520
सभी को आशीर्वाद छोटे जितने भी हैं सबको ढेर सारा आशीर्वाद।

39
00:02:49,520 --> 00:02:52,960
जितने भी

40
00:02:52,960 --> 00:02:57,920
साथ वाले हैं उन सबको यथोचित अभिवादन बड़ों को सम्मान

41
00:02:57,920 --> 00:03:00,960
सभी को जय श्री राम।

42
00:03:00,960 --> 00:03:06,240
तो अच्छा हो सकता है निकट भविष्य में आपको हमारी एक

43
00:03:06,240 --> 00:03:09,520
इस्लामिक

44
00:03:09,520 --> 00:03:13,520
इनफ्लुएंसर्स या कहें विद्वानों के साथ या पता नहीं जो भी आएंगे तो उनके साथ

45
00:03:13,520 --> 00:03:19,520
एक चर्चा देखने को मिल जाए बहुत जल्दी क्योंकि

46
00:03:20,960 --> 00:03:25,600
क्योंकि हमसे संपर्क किया Instagram के द्वारा कुछ

47
00:03:25,600 --> 00:03:29,680
इस्लामिक लोगों ने कि भाई आपका हमें नाम रिकमेंड किया

48
00:03:29,680 --> 00:03:33,840
जाता है। कहीं पर भी कोई बात होती है तो हमें कहा जाता है कि आहान से

49
00:03:33,840 --> 00:03:38,080
आप जो है बात करके देखिए। तो बहुत जल्दी आपको एक अच्छी

50
00:03:38,080 --> 00:03:42,400
सी वार्ता देखने को मिल सकती है क्योंकि

51
00:03:42,400 --> 00:03:46,640
जो मातृशक्ति आई थी जो इस्लाम को मानने वाली थी पिछली बार

52
00:03:46,640 --> 00:03:50,720
उन्होंने बहुत ज्यादा समय नहीं लिया था तो शुरू होने से पहले

53
00:03:50,720 --> 00:03:54,800
ही बात जो है खत्म हो गई थी मगर

54
00:03:54,800 --> 00:03:58,960
अभी मूल रूप से जहां पर हमें पहुंचना

55
00:03:58,960 --> 00:04:03,280
था वह समय आने वाला क्योंकि आर्य

56
00:04:03,280 --> 00:04:07,440
समाज इस या रामपाल या जो

57
00:04:07,440 --> 00:04:11,520
भी तथाकथित सनातनी है मान लीजिए चोला ही

58
00:04:11,520 --> 00:04:15,520
पहन रहे हैं सनातनी होने का उसमें रामपाल तो चोला भी

59
00:04:15,520 --> 00:04:20,400
नहीं पहन रहे वो तो खुद कह रहे हैं कि नहीं हिंदू मुस्लिम एक हैं

60
00:04:20,400 --> 00:04:24,400
है ना तो रामपाल की तो

61
00:04:24,400 --> 00:04:24,900
बात

62
00:04:24,560 --> 00:04:29,280
अलग है। खैर फिर भी यह सब तो एक मान

63
00:04:29,280 --> 00:04:32,480
लीजिए कि बहाना है।

64
00:04:32,480 --> 00:04:36,480
वास्तविकता तो यह है कि हमें इस्लामिक लोगों से पूछना है

65
00:04:36,480 --> 00:04:40,880
कि जिस ईश्वर को प्राप्त करने के लिए दिए गए आचरणों

66
00:04:40,880 --> 00:04:44,880
को मजहब के रूप में आप स्वीकार कर रहे

67
00:04:44,880 --> 00:04:49,280
हैं क्या वो ईश्वर वही ईश्वर है जिसकी

68
00:04:49,280 --> 00:04:52,640
आपके मन में चाह है

69
00:04:52,640 --> 00:04:58,640
जो आपकी मुक्ति का हेतु है

70
00:04:58,880 --> 00:05:03,200
नहीं इस्लामिक अवेकनिंग नहीं है आवाज हक भी नहीं है आवाज

71
00:05:03,200 --> 00:05:07,360
ऐसे से हम चर्चा नहीं करेंगे जो अपने चेहरा ना दिखाए चर्चा

72
00:05:07,360 --> 00:05:12,480
हम उसी से करेंगे जो चेहरा दिखाएगा

73
00:05:12,480 --> 00:05:16,560
एक दिन इस पाखंडियों शिवश को क्या बहुत सारे शिवांश हो गए

74
00:05:16,560 --> 00:05:20,800
हैं क्या भाई साहब कह रहे हैं कि एक दिन इस पाखंडियों शिवश को बहुत सारे शिवांश

75
00:05:20,800 --> 00:05:24,880
हो गए तो अच्छी बात है छुपने की जगह नहीं

76
00:05:24,880 --> 00:05:27,600
मिलेगी

77
00:05:27,600 --> 00:05:33,120
क्या हुआ मेरे ऊपर आपके तत्वदर्शी का जादू नहीं चल रहा है क्या

78
00:05:33,120 --> 00:05:39,120
तो लाइव चर्चा चर्चा के लिए ललकारा है।

79
00:05:39,680 --> 00:05:43,760
कलयुगी योगी ने हमको लाइव चर्चा के लिए ललकारा

80
00:05:43,760 --> 00:05:47,920
है। तो भाई कलयुगी

81
00:05:47,920 --> 00:05:53,120
योगी जैसे नहीं बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो हमें चर्चा के लिए ललकारते हैं।

82
00:05:53,120 --> 00:05:57,600
तो हमारा उनसे यह कहना है कि वह कुछ ऐसा करें। अभी कलयुगी

83
00:05:57,600 --> 00:06:01,840
योगी इत्यादि जो है यह हमारे लिए नगण्य है। नगन

84
00:06:01,840 --> 00:06:05,920
नथिंग कुछ नहीं हो तो आप कुछ ऐसा करिए कि हम विवश हो

85
00:06:05,920 --> 00:06:10,000
जाए आपका प्रतिकार करने के लिए आपको उत्तर देने के लिए हमें लगे कि

86
00:06:10,000 --> 00:06:14,080
आपकी आपको उत्तर देने के लिए आपकी चर्चा में भी जाना पड़ जाए तो जाएंगे

87
00:06:14,080 --> 00:06:18,080
तो हम आएंगे है ना अब जैसे हमें आवश्यक

88
00:06:18,080 --> 00:06:22,160
लगता है कि भाई इस की बातें सामने लाना है तो हम उनके मंदिर

89
00:06:22,160 --> 00:06:26,240
चले जाते हैं कि नहीं चले जाते तो आप कुछ ऐसा करो स्वयं

90
00:06:26,240 --> 00:06:30,320
को ऐसा बनाओ कि हम विवश हो जाए आपसे आपके साथ चर्चा चर्चा

91
00:06:30,320 --> 00:06:34,480
करने के लिए हमने कुछ ऐसा किया है कि आप विवश हो गए आपको

92
00:06:34,480 --> 00:06:39,920
आना पड़ गया आया ना हम तो ऐसे करके दिखाओ तो

93
00:06:39,920 --> 00:06:42,800
हम

94
00:06:42,800 --> 00:06:45,040
तो

95
00:06:45,040 --> 00:06:49,120
जाकिर नायक तो अब ओल्ड फैशन हो गया है। ये जो नए-नए फदक

96
00:06:49,120 --> 00:06:55,120
रहे हैं इन लोगों से बात करेंगे तो

97
00:06:56,960 --> 00:07:00,960
आर्य समाज वाले वो तो कैंसिल हो गया ना वो पीछे हट

98
00:07:00,960 --> 00:07:05,040
गए ना दो बहाने लेकर के वो पीछे इसलिए

99
00:07:05,040 --> 00:07:09,200
वो दो बहाने थे उनके पास कि भाई चर्चा का विषय जो है सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं होगा

100
00:07:09,200 --> 00:07:14,160
क्यों नहीं होगा पता नहीं अच्छा वो

101
00:07:14,160 --> 00:07:18,960
क्या कहते हैं अ एक और था

102
00:07:18,960 --> 00:07:23,440
कि कैमरा केवल हम चलाएंगे। क्यों भाई?

103
00:07:23,440 --> 00:07:27,040
क्यों चलाओगे?

104
00:07:27,040 --> 00:07:31,600
ये बात है। वो तो कैंसिल हो गया। तो

105
00:07:31,600 --> 00:07:35,600
कलयुगी योगी को मेरा संदेश है कि आप ऐसे बनो कि आप जब

106
00:07:35,600 --> 00:07:40,960
ललकारे हैं तो हम आ जाए। हमें लगेगा तो हम आ जाएंगे। है ना?

107
00:07:40,960 --> 00:07:43,120
हां।

108
00:07:43,120 --> 00:07:47,280
और नहीं आना होगा। हमें आपके ऊपर डाउट होगा तो हम कोई

109
00:07:47,280 --> 00:07:51,280
बीच का मध्यस्थ चैनल ढूंढेंगे। जैसे कि कई बार ऐसा हुआ कि हमने लोगों जैसे फैक्ट

110
00:07:51,280 --> 00:07:55,280
बाय अभिषेक है। अब वो अगर हमसे चर्चा करने आता है उसने

111
00:07:55,280 --> 00:07:59,600
अपने आप को ऐसा बना रखा है कि यदि वो हमसे संपर्क करेगा रामपाल का

112
00:07:59,600 --> 00:08:04,560
जो नुमाइंदा है फैक्ट बाय अभिषेक कि भैया हमसे चर्चा करो तो हम उसके लिए समय निकालेंगे

113
00:08:04,560 --> 00:08:08,720
क्योंकि उससे बात करने पर उसके 35,000 फॉलोवरर्स हैं। वो प्रभाव

114
00:08:08,720 --> 00:08:13,120
पड़ेगा। यू आर नथिंग। तुम कुछ नहीं हो तो तुम्हारे लिए हम

115
00:08:13,120 --> 00:08:17,280
एक्स्ट्रा एफर्ट्स क्यों डाले? हां, हमारी चलती लाइफ में तुम आ गए। हमने तुम्हारा निराकरण

116
00:08:17,280 --> 00:08:22,000
कर दिया। क्यों तुम वहां पर ऐसेसे करते रहे?

117
00:08:22,000 --> 00:08:26,000
अब बोलते नहीं आना जाना सिद्ध नहीं होता है। इससे ये सिद्ध नहीं होता। तब तो बिल्कुल

118
00:08:26,000 --> 00:08:30,560
बिल्कुल हां हां ये सब करते रहे। फिर आप जाकर के दूसरी चीजें कर रहे हो। तो

119
00:08:30,560 --> 00:08:35,280
ये चीज है। तो फैक्ट बाय अभिषेक अगर हमसे संपर्क करता है।

120
00:08:35,280 --> 00:08:39,840
है ना? या यह जैसे अभी हमने फोन लगाया था कुछ दिनों पूर्व

121
00:08:39,840 --> 00:08:42,080
सच्चिदानंद स्वामी को

122
00:08:42,080 --> 00:08:46,320
तो वह अगर हमें कहते हैं कि हमसे चर्चा करो तो हां हम उनसे

123
00:08:46,320 --> 00:08:50,400
चर्चा करने आएंगे। हो सकता है कोई मध्यस्थ चैनल ढूंढे या हो सकता है अगर

124
00:08:50,400 --> 00:08:55,280
वो अपने ही चैनल पर आने का सुझाव दे तो उसमें भी हो सकता है हम तैयार हो जाए।

125
00:08:55,280 --> 00:08:59,600
भाई मैं भी परेशान हूं रामपाल के चक्कर में। आप अभी लिंक

126
00:08:59,600 --> 00:09:04,480
दिया जाएगा तो आप जुड़ जाइएगा। आप अपनी चीजें यहां रख सकते हैं।

127
00:09:04,480 --> 00:09:10,320
है ना? और

128
00:09:10,320 --> 00:09:15,920
क्या कहते हैं यह

129
00:09:15,920 --> 00:09:20,240
इस के मंदिरों में हम गए हैं कई बार चर्चा करने तो आप अपने आप को

130
00:09:20,240 --> 00:09:24,480
बनाइए कुछ ऐसा करिए कि हमको दिक्कत हो आपसे अभी हमें कोई परेशानी

131
00:09:24,480 --> 00:09:28,480
नहीं आप अकेले थोड़ी ना है ये सब करने वाले बहुत

132
00:09:28,480 --> 00:09:32,480
लोग हैं बोल रहे हैं रोज हमें टैग किया जाता है रोज हमें मेंशन किया

133
00:09:32,480 --> 00:09:36,640
जाता है आप अकेले हो क्या बहुत बहुत लोग मेंशन कर रहे हैं। आप

134
00:09:36,640 --> 00:09:40,880
चिंता मत करो। आप तो करते रहो, करते रहो। जब हमें लगेगा कि नहीं नहीं

135
00:09:40,880 --> 00:09:45,360
अब आपको रोकना आवश्यक है तो रोकेंगे आकर के। है ना? तूफान

136
00:09:45,360 --> 00:09:49,360
ही फैसला करेगा रोशनी का। दिया वो जलेगा जिसमें

137
00:09:49,360 --> 00:09:55,360
दम हो। ठीक है।

138
00:09:58,720 --> 00:10:02,880
मोहान कौन है भाई? मोहान। तो मातृ शक्ति जुड़ नहीं

139
00:10:02,880 --> 00:10:07,120
रही है। मैं ऑपरेटर महोदय को कहूंगा कि मातृ शक्ति से संपर्क करें और उन्हें

140
00:10:07,120 --> 00:10:11,120
जुड़ने को कहें।

141
00:10:11,120 --> 00:10:15,200
देखिए आप लोग एक चीज पर ध्यान नहीं देते हो। आपको बरगलाया अवश्य गया

142
00:10:15,200 --> 00:10:19,200
है। ईश्वर को सर्वशक्तिमान

143
00:10:19,200 --> 00:10:24,320
सिद्ध करना है तो आपको शंकराचार्य के सिद्धांत को मानना पड़ेगा।

144
00:10:24,320 --> 00:10:29,840
ठीक है? या तो आप यह मान लो कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है।

145
00:10:29,840 --> 00:10:33,920
यह आपको मानना पड़ेगा। कहीं कुछ जा नहीं सकते।

146
00:10:33,920 --> 00:10:38,000
अभी देखा था ना कलयुगी योगी भाई वो वो उसका कहना है मैं

147
00:10:38,000 --> 00:10:42,000
आर्य समाजी नहीं हूं। तो आर्य समाजियों को क्यों सपोर्ट कर रहे हो भाई?

148
00:10:42,000 --> 00:10:46,000
तुम तो सपोर्ट नहीं कर रहे आर्य समाजियों को उनके उनके सिद्धांतों को आप लड़

149
00:10:46,000 --> 00:10:50,160
रहे हो उनकी तरफ से। आप आ रहे हो कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। आप

150
00:10:50,160 --> 00:10:54,240
अद्वैती हो। क्या हो? उपनिषदों को पढ़ा है। कहां से पढ़ा है? क्या कहां

151
00:10:54,240 --> 00:10:59,040
से नहीं पढ़ा आप शंकराचार्य का बात बता रहे हैं। शंकराचार्य ने अपने

152
00:10:59,040 --> 00:11:03,120
गीता भाष्य में उपनिषदों के भाष्य में कितनी जगह

153
00:11:03,120 --> 00:11:07,360
पुराणों का आलंबन लिया है। जानते क्या हो शंकराचार्य के बारे में?

154
00:11:07,360 --> 00:11:11,360
शंकराचार्य के लिखे हुए ग्रंथ तुम तक पहुंचे कैसे हैं? पहले ये तो

155
00:11:11,360 --> 00:11:13,840
सोचो कि एक तरफ कहते हो

156
00:11:13,840 --> 00:11:17,920
चमत्कार को मानते नहीं हम क्योंकि हम आधे आर समाजी हुंडा हिंदू हैं।

157
00:11:17,920 --> 00:11:21,600
दूसरी तरफ कहते हो कि

158
00:11:21,600 --> 00:11:25,600
क्या कहते हैं यह? हमारे पास आ गए बस गीता प्रेस के पास

159
00:11:25,600 --> 00:11:29,760
आ गए बस कहां से आए भाई रामायण में उनको भगवान कहा

160
00:11:29,760 --> 00:11:33,840
गया है विश्वामित्र जी को तो क्या कहा था अब तुम गीता

161
00:11:33,840 --> 00:11:38,320
प्रेस की रामायण जब मान रहे हो तो पुराणों को मानने वाले हो गए ना

162
00:11:38,320 --> 00:11:42,640
क्या कहा था कि भगवान शब्द

163
00:11:42,640 --> 00:11:46,960
का प्रयोग जो परमात्मा है

164
00:11:46,960 --> 00:11:51,440
उसके लिए मुख्य रूप से है और अन्यों के लिए गौण रूप से है पूज्य पदार्थों

165
00:11:51,440 --> 00:11:55,680
के निमित अगर कोई पूज्य है तो उसके लिए भी

166
00:11:55,680 --> 00:12:00,000
भगवान शब्द का उपयोग हो जाता है। पर मुख्य रूप से उसका उपयोग परमात्मा

167
00:12:00,000 --> 00:12:04,960
के लिए तो वह जो गौण उपयोग है उनका उसमें

168
00:12:04,960 --> 00:12:08,960
यह जो हमारे महापुरुष हैं इनको लिया जाता

169
00:12:08,960 --> 00:12:14,960
है।

170
00:12:18,800 --> 00:12:22,960
और मैंने कुछ और भी नई बातें

171
00:12:22,960 --> 00:12:27,200
सुनने में आ रही हैं कि रामपाल का कोई उत्तराधिकारी है जो 20 वर्ष का हो गया

172
00:12:27,200 --> 00:12:31,200
है और अब यहां से आगे उसके अंदर वो

173
00:12:31,200 --> 00:12:35,680
आत्मा आ जाएगी और वो जो है सिंहासन संभालेगा।

174
00:12:35,680 --> 00:12:38,640
तो अब क्या हुआ

175
00:12:38,640 --> 00:12:43,280
कि वैसे ये लोग वंशवाद को नहीं मानते

176
00:12:43,280 --> 00:12:47,600
मगर अपना पारिवारिक धंधा बनाए

177
00:12:47,600 --> 00:12:53,600
रखने के लिए वंश के अनुसार ही उत्तराधिकारी चुन लिया गया।

178
00:12:55,600 --> 00:13:00,000
हां यह बात आपने सही कही है कि इस समय जो है इनके

179
00:13:00,000 --> 00:13:04,080
जितने भी आश्रम है वहां एक नाम सबको पता चल चुका होगा

180
00:13:04,080 --> 00:13:07,840
आहान या फिर

181
00:13:07,840 --> 00:13:13,840
शिवश नारायण द्विवेदी

182
00:13:15,040 --> 00:13:21,040
ये लोग एक दो तीन दिन भंडारा करा देते हैं तो उसका बड़ा गान करते हैं।

183
00:13:27,680 --> 00:13:32,000
और यह नहीं देखते कि वाराणसी में अन्नपूर्णा

184
00:13:32,000 --> 00:13:36,160
माता के मंदिर में सदैव भंडारा चला करता है। बड़ा

185
00:13:36,160 --> 00:13:41,760
बढ़िया वहां पे मिलता है। इडली और डोसा भी मिलता है।

186
00:13:41,760 --> 00:13:47,760
और भी मिलता होगा। तो मैंने वही लिया था इडली और वो

187
00:13:48,160 --> 00:13:54,160
तो जाइए आप लोग कभी वाराणसी में अन्नपूर्णा माता का प्रसाद भी ग्रहण करिए

188
00:13:56,880 --> 00:14:01,040
वो जो मातृ शक्तियां आने वाली है कुछ ही समय में सूचना

189
00:14:01,040 --> 00:14:05,200
प्राप्त हो गई है गीता में जो ट्री वाला कांसेप्ट रामपाल

190
00:14:05,200 --> 00:14:09,760
ने बताकर दिमाग खराब किया है उसमें

191
00:14:09,760 --> 00:14:14,480
कुछ है ही नहीं भाई ट्री वाला कांसेप्ट अरे भाई भाई

192
00:14:14,480 --> 00:14:19,120
संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी है। तो

193
00:14:19,120 --> 00:14:24,880
उल्टे वृक्ष की व्याख्या तुम ही ने की है। ये क्यों मान लिया जाए?

194
00:14:24,880 --> 00:14:29,520
अभी कमेंट करने वालों में से कोई कर देगा वो भी तत्वदर्शी हो जाएगा।

195
00:14:29,520 --> 00:14:33,600
तो अगर इस पहचान को यह प्रमाण मान भी लिया जाए कि यह तत्वदर्शी की

196
00:14:33,600 --> 00:14:38,080
बात हो रही है तब भी हमें अन्य कई चीजों की आवश्यकता पड़ जाएगी

197
00:14:38,080 --> 00:14:44,080
यह सिद्ध करने के लिए कि जिसको हम कह रहे हैं तत्वदर्शी वही तत्वदर्शी है।

198
00:14:44,320 --> 00:14:49,200
तो यह लिंक दे दिया गया है। जो जुड़ना चाहता है वो जुड़ सकता है। फेस के साथ

199
00:14:49,200 --> 00:14:53,840
यदि वैचारिक मतभेद के निमित्त आ रहा है तो फेस के साथ

200
00:14:53,840 --> 00:14:59,840
आ सकता है।

201
00:15:04,720 --> 00:15:08,720
हिंदू धर्म मोहान तुम्हारी तो ज्ञान गंगा इत्यादि

202
00:15:08,720 --> 00:15:13,120
में पहले ही पेज पर लिखा रहता है कि हिंदू

203
00:15:13,120 --> 00:15:18,160
मुस्लिम सिख कोई धर्म नहीं है न्यारा तुम आ जाओ

204
00:15:18,160 --> 00:15:22,240
आ जाओ ना डर लगता है यह डर अच्छा है डर

205
00:15:22,240 --> 00:15:28,240
लगना चाहिए डर लगता है

206
00:15:28,800 --> 00:15:33,120
तो ब्रह्म से बनी माया अज्ञान या

207
00:15:33,120 --> 00:15:36,160
मिथ्या है

208
00:15:36,160 --> 00:15:40,000
आपको पर्सपेक्टिव समझना पड़ेगा।

209
00:15:40,000 --> 00:15:42,960
यह भगवान

210
00:15:42,960 --> 00:15:47,600
अलग हैं। आप अलग हो। यह माया नहीं है। संसार

211
00:15:47,600 --> 00:15:51,440
यह कब तक है? जब तक आप

212
00:15:51,440 --> 00:15:55,600
अपने व्यवहार में कुछ देख रहे हैं। जैसे मैंने

213
00:15:55,600 --> 00:16:00,240
अभी बताया पिछला लाइव हुआ था जो ये कलयुगी योगी के साथ

214
00:16:00,240 --> 00:16:04,320
उसमें मैंने बताया कि जब

215
00:16:04,320 --> 00:16:08,560
तक आपको भेद बुद्धि प्राप्त है आप

216
00:16:08,560 --> 00:16:12,560
माता बहन और पत्नी के साथ एक जैसा व्यवहार कर सकते हैं।

217
00:16:12,560 --> 00:16:16,640
पिता पुत्र के साथ एक जैसा व्यवहार कर सकते हैं। नहीं कर सकते। तो जब

218
00:16:16,640 --> 00:16:20,320
तक आप लोगों को भेद बुद्धि प्राप्त है।

219
00:16:20,320 --> 00:16:24,320
हां इंद्रजीत दास जी ये आपने बिल्कुल सही बात कही है। आप

220
00:16:24,320 --> 00:16:28,400
जो है आदि तत्वदर्शी हैं और एक आध अभी और

221
00:16:28,400 --> 00:16:32,880
बनाएंगे अपने किसी भाई को तो वो परम आदि परम आदि तत्वदर्शी

222
00:16:32,880 --> 00:16:37,120
हो जाएगा। एडजेक्टिव लगाते जाओ। अपनी दुकान खोलते जाओ।

223
00:16:37,120 --> 00:16:41,280
एडजेक्टिव से ही दुकानें चल रही है।

224
00:16:41,280 --> 00:16:45,920
ब्रह्म पे जाकर के वेदव्यास जी स्टॉप हो जाते हैं। ब्रह्म सूत्र हो गया।

225
00:16:45,920 --> 00:16:51,920
परम ब्रह्म परम ब्रह्म

226
00:16:54,720 --> 00:17:00,720
हम

227
00:17:00,960 --> 00:17:05,120
तो जब तक आपको भेद बुद्धि प्राप्त है तब तक यह सब सत्य है

228
00:17:05,120 --> 00:17:09,440
और भेद बुद्धि जब प्राप्त नहीं है तो फिर आपको यह जानने

229
00:17:09,440 --> 00:17:13,520
की आवश्यकता ही नहीं है कि क्या माया है क्या नहीं है। आपको यह

230
00:17:13,520 --> 00:17:17,520
पता चल जाना कि ये माया है। यही मुक्ति है। ये

231
00:17:17,520 --> 00:17:22,800
अज्ञानता मिट जाना। अच्छा एक दिक्कत और आती है कि भाई जैसे

232
00:17:22,800 --> 00:17:26,800
अ जो पारमार्थिक स्वरूप है और व्यवहारिक स्वरूप है

233
00:17:26,800 --> 00:17:32,800
इसको कभी-कभी लोग समझ नहीं पाते हैं। संभवत हमारी जो

234
00:17:36,400 --> 00:17:42,400
बहन है वह आने वाली है। अभी नहीं आई है। यह मार्कस नाम का कौन व्यक्ति भाई?

235
00:17:43,520 --> 00:17:47,520
चेहरा दिखाएं मार्कस जी हर हर महादेव हर हर महादेव कैसे

236
00:17:47,520 --> 00:17:51,600
हैं पाणी जी बिल्कुल बढ़िया मस्त है बिल्कुल

237
00:17:51,600 --> 00:17:55,840
प्रभु राम की कृपा है जी जी जी जी उन्हीं की कृपा

238
00:17:55,840 --> 00:17:59,600
से बस सब कुछ है

239
00:17:59,600 --> 00:18:03,760
रामपाल जी का भंडारा प्रसाद कोई ना खाए क्योंकि उस प्रसाद में

240
00:18:03,760 --> 00:18:09,040
थूक मिलाया जाता है तो खैर

241
00:18:09,040 --> 00:18:13,440
भाई वह सब हम नहीं जानते क्या किया जाता

242
00:18:13,440 --> 00:18:19,120
अवतारवाद के लिए आर्गुममेंट नहीं दिया। दिया तो था।

243
00:18:19,120 --> 00:18:23,280
हमने आर्गुममेंट दिया था मगर उस व्यक्ति ने क्या किया? जब काउंटर

244
00:18:23,280 --> 00:18:27,360
नहीं किया तो हम और आगे बढ़े नहीं। मैंने कहा ये संतुष्ट हो गया। आना जाना सिद्ध

245
00:18:27,360 --> 00:18:31,440
हो गया। हमने कहा वो शांत रहा मुंडी लाता रहा। हम संतुष्ट हो गए। अगर वो काउंटर

246
00:18:31,440 --> 00:18:35,520
करता कुछ कहता ये फलानी चीज कैसे आना जाना सिद्ध हो गया तो हम

247
00:18:35,520 --> 00:18:40,560
आगे आर्गुममेंट रखते। हमने दिया था। अब उसके बाद हमने वीडियो बना के आर्गुममेंट दे दिया।

248
00:18:40,560 --> 00:18:44,800
अगर उसको समझ में नहीं आया तो तो क्या है कि यह जो परमार्थ

249
00:18:44,800 --> 00:18:48,960
और व्यवहार की बात है यह परमार्थ में ईश्वर

250
00:18:48,960 --> 00:18:53,920
है। यह हमें प्रातिभाषिक अनुभव होता है

251
00:18:53,920 --> 00:18:58,240
और उसको हम नकार सकते हैं। है ना?

252
00:18:58,240 --> 00:19:02,400
तो वो हमारी जो भौतिक इंद्रियां हैं उनका विषय

253
00:19:02,400 --> 00:19:06,800
नहीं होता है। तो जब तक वो उनका विषय नहीं है तो उसका वो पारमार्थिक

254
00:19:06,800 --> 00:19:10,880
प्रातिभाषिक स्वरूप हो गया। और जब वह हमारी यह जो भौतिक

255
00:19:10,880 --> 00:19:14,880
इंद्रियां होती हैं इनका विषय बन गया आंखों से देख सकते हैं,

256
00:19:14,880 --> 00:19:18,880
कानों से सुन सकते हैं, हाथों से छू सकते हैं। तो यह हो गया

257
00:19:18,880 --> 00:19:24,320
सगुण साकार स्वरूप यानी व्यवहारिक स्वरूप। है ना? तो

258
00:19:24,320 --> 00:19:28,480
जब हम कहते हैं कि बहुत सी ऐसी चीजें

259
00:19:28,480 --> 00:19:33,120
हैं जैसे वही वाली बात कि जो मंत्रों के दृष्टा बने

260
00:19:33,120 --> 00:19:37,280
ऋषि तो मंत्रों के दृष्टा बने। मंत्र मंत्र जो थे पहले भी थे

261
00:19:37,280 --> 00:19:41,360
ईश्वर के ईश्वर के रूप में ज्ञान ईश्वरीय ज्ञान के रूप में

262
00:19:41,360 --> 00:19:45,520
मंत्र उनके पहले भी थे मगर फिर वो इंद्रियों का विषय

263
00:19:45,520 --> 00:19:49,680
बन गए वही मंत्र तो उसको कह दिया व्यवहारिक हो गए तो

264
00:19:49,680 --> 00:19:53,760
यदि आप यह कह सकते हो कि जब आप यह कहने

265
00:19:53,760 --> 00:19:57,760
से नहीं चूक रहे कि किसी देश काल परिस्थिति में ऋषि गण जो है वह मंत्रों के

266
00:19:57,760 --> 00:20:02,640
दृष्टा बनते हैं क्योंकि वो मंत्र उनकी इंद्रियों का विषय बन गए।

267
00:20:02,640 --> 00:20:06,800
तो जब यह आप कह सकते हो कि जब पहले से ही मंत्र थे उनके

268
00:20:06,800 --> 00:20:10,880
माइंड में फिर भी उनका आना जाना आप स्वीकार कर रहे हो

269
00:20:10,880 --> 00:20:15,440
मंत्रों का दृष्टा बनना स्वीकार कर रहे हो तो इसी प्रकार से पहले से ही व्याप्त

270
00:20:15,440 --> 00:20:18,480
ईश्वर जितने

271
00:20:18,480 --> 00:20:22,800
अंश में वो सब सर्वत्र व्याप्त है मगर जितना अपना अंश वो

272
00:20:22,800 --> 00:20:26,800
ऐसा बना देता है जो आपकी इंद्रियों का विषय बन जाए भौतिक इंद्रियों का तो

273
00:20:26,800 --> 00:20:30,800
वो सगुण साकार हो जाता है व्यवहारिक हो जाता है यही अंतर है व्यवहार और परमार्थ

274
00:20:30,800 --> 00:20:35,200
में मंत्र मंत्र ऋषियों के मस्तिष्क में पहले भी थे मगर वो

275
00:20:35,200 --> 00:20:39,200
इंद्रियों का विषय नहीं थे। व्यवहारिक नहीं थे। फिर

276
00:20:39,200 --> 00:20:43,600
इसी माध्यम से वो इंद्रियों का विषय बन गए। तो वो व्यवहारिक

277
00:20:43,600 --> 00:20:47,680
हो गए। तो इसको आपने कह दिया हां आना जाना सिद्ध होता है।

278
00:20:47,680 --> 00:20:51,760
तो जब मंत्रों का प्रकट होना, दृष्टा होना, मंत्रों का और भी बहुत

279
00:20:51,760 --> 00:20:55,840
सारे ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे। ये तो एक उदाहरण है। तो जब यह सब सिद्ध

280
00:20:55,840 --> 00:20:59,920
होता है तो बाकी चीजें भी फिर आपको ईश्वर का

281
00:20:59,920 --> 00:21:04,000
आना जाना भी स्वीकार करना पड़ेगा। और यदि आप ईश्वर

282
00:21:04,000 --> 00:21:08,080
का आना जाना स्वीकार नहीं कर सकते तो शास्त्रों के वो सारी जगह

283
00:21:08,080 --> 00:21:12,560
मिटा दो जहां पर इस तरीके से व्यवहारिक सत्ता की बात हो रही है। शास्त्रों

284
00:21:12,560 --> 00:21:16,720
में दोनों प्रकार से ज्ञान दोनों प्रकार का ज्ञान दिया

285
00:21:16,720 --> 00:21:20,800
गया है। एक पारमार्थिक रूप से क्या है और एक व्यवहारिक रूप

286
00:21:20,800 --> 00:21:25,200
से क्या है? अब जैसे पारमार्थिक रूप से क्या है? जैसे वह सर्वत्र

287
00:21:25,200 --> 00:21:29,360
व्याप्त है। वह सर्वव्यापी है। वह यह है, वह है। वो निराकार है। उसका कोई आकार

288
00:21:29,360 --> 00:21:33,360
नहीं। यह भी कहा गया है। मगर फिर यह भी कहा गया कि उसके इतने मुख है वो ऐसा

289
00:21:33,360 --> 00:21:37,440
है, वो वैसा है। है ना? पारमार्थिक रूप के लिए क्या कह दिया

290
00:21:37,440 --> 00:21:41,440
गया? वह जो जानने में आ सकने वाला नहीं है। व्यवहार में आ सकने वाला नहीं

291
00:21:41,440 --> 00:21:45,440
है। ले लो। सीधे लिख दिया। व्यवहार में नहीं आ सकता। तो व्यवहारिक नहीं है तो क्या है?

292
00:21:45,440 --> 00:21:49,840
पारमार्थिक है। तो मांडकोपनिषद में सात में यह बात दी गई है।

293
00:21:49,840 --> 00:21:54,080
तो भगवान के दोनों पर्सपेक्टिव से जो उनकी

294
00:21:54,080 --> 00:21:58,480
उनके बारे में ज्ञान है वो दोनों ज्ञान दिया गया। एक व्यवहार में नहीं आ सकता। ये पारमार्थिक

295
00:21:58,480 --> 00:21:58,980
हो

296
00:21:58,640 --> 00:22:01,440
गया। हम

297
00:22:01,440 --> 00:22:05,520
दूसरा अब जैसे श्री कृष्ण कह रहे हैं तेरे और मेरे बहुत से जन्म

298
00:22:05,520 --> 00:22:09,600
हो चुके हैं। ये तू नहीं जानता मैं

299
00:22:09,600 --> 00:22:14,800
जानता हूं। तो ये क्या है? वो अपना इस समय वो दे रहे हैं व्यवहारिक

300
00:22:14,800 --> 00:22:18,800
कि जन्म हो चुके हैं तो ये क्या व्यवहार है ये ईश्वर का जन्म नहीं होता वो

301
00:22:18,800 --> 00:22:22,880
अजन्मा है मगर वो अपने व्यवहारिक स्वरूप का बोध करा

302
00:22:22,880 --> 00:22:26,880
रहे हैं अब जैसे अजन्मा कह दिया ईश्वर को वो

303
00:22:26,880 --> 00:22:30,960
अजन्मा है अविनाशी है अजन्मा है तो आपने कह दिया भाई ईश्वर

304
00:22:30,960 --> 00:22:35,120
का जन्म नहीं हो सकता ईश्वर का जन्म होना व्यवहारिक सत्य है और

305
00:22:35,120 --> 00:22:39,120
पारमार्थिक सत्य है कि वो अजन्मा है तो क्या है अब

306
00:22:39,120 --> 00:22:43,280
आप यह देखो कि आप आत्मा हो। आपकी सच्चाई है जीवात्मा। मगर

307
00:22:43,280 --> 00:22:47,360
आप अपना जन्म होना कहते हो ना हैप्पी बर्थडे टू यू। क्यों मनाते हो?

308
00:22:47,360 --> 00:22:51,600
आपका तो कभी जन्म हुआ ही नहीं। तो जब तक आप मनुष्य हैं,

309
00:22:51,600 --> 00:22:56,320
मनुष्य के अनुसार जीवन को जी रहे हैं और वो जीना पड़ेगा।

310
00:22:56,320 --> 00:23:00,480
जब तक आप मुक्त नहीं हो जाओगे तब तक आप भेद बुद्धि को प्राप्त

311
00:23:00,480 --> 00:23:04,480
रहोगे। एनी हाउ तो तब तक आपको यह

312
00:23:04,480 --> 00:23:08,720
मानना पड़ेगा यदि आप अपने जन्म को स्वीकार कर रहे हो किसी देश

313
00:23:08,720 --> 00:23:12,720
काल परिस्थिति में स्वयं को प्रकट होने वाला मान रहे हो तो फिर

314
00:23:12,720 --> 00:23:13,680
भगवान के अवतार से

315
00:23:13,680 --> 00:23:18,560
आपको क्या दिक्कत ठीक है

316
00:23:18,560 --> 00:23:22,720
तो ये है हमने अवतार पर आर्गुममेंट दिया अब उसने काउंटर नहीं किया

317
00:23:22,720 --> 00:23:26,880
और वो क्या कर रहा था कि हमने जब बात अपनी बताई

318
00:23:26,880 --> 00:23:30,880
तो उस पर काउंटर ना करके वो विषय को बदल दे रहा था जैसे वो आर्य समाधि से

319
00:23:30,880 --> 00:23:34,960
हो गया तुरंत अद्वैती कि ए तो

320
00:23:34,960 --> 00:23:38,960
ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है। भाई वो कहता कि अभी भी मुझे बताओ कि वो

321
00:23:38,960 --> 00:23:43,760
जो श्री कृष्ण राम कृष्ण आदि के रूप में जो अवतार होता है वो वो कैसे?

322
00:23:43,760 --> 00:23:47,920
मैं बताता वो कह दिया हां यहां तक मेरी बात सही यहां तक मैं बात को समझ गया हूं। अब

323
00:23:47,920 --> 00:23:52,000
मुझे आप ये बताइए ए ईश्वर कैसे बी ईश्वर क्यों नहीं? या उसके बाद मूर्ति

324
00:23:52,000 --> 00:23:56,080
पूजा क्या वेदों में है? जब हमने सारी बात बता रहे मूर्ति पूजा को तू मान

325
00:23:56,080 --> 00:24:00,080
रहा है तो फिर वहां बोलना कि नहीं कैसे आंखों का विषय कैसे हो रहा

326
00:24:00,080 --> 00:24:05,200
है ईश्वर

327
00:24:05,200 --> 00:24:09,360
इंद्रजीत दास जी कह रहे हैं जय हो परम आदि तत्वदर्शी श्री

328
00:24:09,360 --> 00:24:13,840
पहाड़ी जी महाराज

329
00:24:13,840 --> 00:24:18,480
नहीं मार्केट में एक बहुत बड़े बंदी छोड़ परम तत्वदर्शी

330
00:24:18,480 --> 00:24:22,640
जगतगुरु आ चुके हैं एक

331
00:24:22,640 --> 00:24:27,520
हां दुष्यंत ठाकुर जी

332
00:24:27,520 --> 00:24:31,840
हां जी भैया

333
00:24:31,840 --> 00:24:37,840
ठाकुर जी जय श्री राम जय जय श्री राम

334
00:24:39,760 --> 00:24:45,120
चरण स्पर्श आशीर्वाद आपको ढेर सारा

335
00:24:45,120 --> 00:24:49,440
प्रभु श्री राम की कृपा सदैव बनी रहे वो

336
00:24:49,440 --> 00:24:54,880
तो आप लोगों के आशीर्वाद से बनी है बनी रहेगी

337
00:24:54,880 --> 00:25:00,640
रामपाल के पाखंड का खंडन चल रहा है।

338
00:25:00,640 --> 00:25:04,720
नहीं उनका कोई ऐसी बात है ही नहीं जिसका खंडन हमें करना पड़े।

339
00:25:04,720 --> 00:25:10,720
उन्होंने ही स्वयं कर व्यवस्था की है इसकी। हमने

340
00:25:10,880 --> 00:25:15,040
उन्होंने ऐसी व्यवस्था की है और कुछ जो उनके अज्ञानी

341
00:25:15,040 --> 00:25:18,160
चेले आ जाते हैं

342
00:25:18,160 --> 00:25:22,480
कुछ चेले आ जाते हैं थोड़ा सा थोड़ा सा उसका ध्यान रखें

343
00:25:22,480 --> 00:25:26,480
वर्तनी ऐसी हो कि मतलब जो हम

344
00:25:26,480 --> 00:25:30,640
लोग यहां पर प्रेजेंट करते हैं ना कि हम अल्पज्ञ ही सही

345
00:25:30,640 --> 00:25:35,440
मगर शंकराचार्य परंपरा से जुड़े हुए हैं तो हम लोगों का जो

346
00:25:35,440 --> 00:25:39,440
ऐसा हो व्यवहार जो यह बताएं कि हां यह लोग शंकराचार्य के

347
00:25:39,440 --> 00:25:45,200
लोग हैं। है ना? शंकराचार्य को फॉलो करते हैं दूर से।

348
00:25:45,200 --> 00:25:48,720
जी

349
00:25:48,720 --> 00:25:52,880
नहीं उन्होंने एक वीडियो चलाई थी। यहां से जाने के बाद उन्होंने एक लाइव

350
00:25:52,880 --> 00:25:56,880
चलाई थी। आपने देखी होगी। तो मैंने नीचे एक कमेंट्स किया था।

351
00:25:56,880 --> 00:26:00,880
अभी आप यहां वीडियो आप कंटेंट चला रहे हैं। तो जब आप लाइव

352
00:26:00,880 --> 00:26:04,880
में थे तो यह क्वेश्चन आपने पूछना था ना शिवशी जी से शिवशी भाई

353
00:26:04,880 --> 00:26:09,280
से पूछना था। आप संतुष्ट नहीं थे तो उसके बारे में बताना था आपने वहां

354
00:26:09,280 --> 00:26:13,520
अब यहां आके वीडियो बना रहे हो आप बोला वहां मुझे बोलने

355
00:26:13,520 --> 00:26:16,480
का मौका

356
00:26:16,480 --> 00:26:20,560
ये बात कि वहां मुझे बोलने का मौका नहीं मिला बोले लाइव वीडियो तो

357
00:26:20,560 --> 00:26:25,280
हम भी देख रहे थे बराबर तो बोलने का मौका सभी को मिल रहा था

358
00:26:25,280 --> 00:26:29,360
भाई आप अपने क्वेश्चंस को छोड़ के दूसरे क्वेश्चन कर रहे हो और

359
00:26:29,360 --> 00:26:33,360
कह रहे हो कि बोलने का मौका नहीं मिला। आप ए और बी पर क्यों आ

360
00:26:33,360 --> 00:26:37,600
गए जब आपका अवतार सिद्ध नहीं हुआ तो क्यों क्यों आए ए

361
00:26:37,600 --> 00:26:42,080
ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है आप लोगों ने अगर देखा हो तो आपको ध्यान होगा

362
00:26:42,080 --> 00:26:46,080
कि वह व्यक्ति इस प्रश्न को छोड़ के कि उसका आना जाना कैसे सिद्ध होता है इस

363
00:26:46,080 --> 00:26:50,240
पर उसने बिल्कुल बिल्कुल करके बोला और फिर वो आगे बढ़ा उसके बाद उसका अगला

364
00:26:50,240 --> 00:26:54,560
प्रश्न था कि नहीं वाल्मीकि जी भी तो है उनके लिए तो भगवान कहा गया तो रामकृष्ण

365
00:26:54,560 --> 00:26:58,880
को ही भगवान क्यों माना गया रामचरितमानस में मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया मैं इस

366
00:26:58,880 --> 00:27:00,240
पे इस पे इसका उत्तर

367
00:27:00,240 --> 00:27:04,400
इस प्रकार से दिया जो हमारे शास्त्र जिसको परम ब्रह्म का अवतार कहेंगे हम उसको

368
00:27:04,400 --> 00:27:08,800
अवतार मानेंगे। शास्त्र जिनको नहीं कहेंगे हम उसको नहीं मानेंगे।

369
00:27:08,800 --> 00:27:12,880
शास्त्र ने कहा कि कृष्ण भगवान जो कृष्ण जो है स्वयं परम ब्रह्म

370
00:27:12,880 --> 00:27:18,400
है। कृष्णस्तु भगवान स्वयं तो वो हैं। अच्छा उन्होंने कहा

371
00:27:18,400 --> 00:27:22,400
क्या उनके लिए रामस्तु स्वयं प्रभु ऐसे

372
00:27:22,400 --> 00:27:26,800
करके आया उसमें रामायण स्वयं प्रभु है

373
00:27:26,800 --> 00:27:30,800
ना तो हम उसे मानेंगे ना। अच्छा उनके लिए

374
00:27:30,800 --> 00:27:34,880
जो भगवान आया है विश्वामित्र इत्यादि के लिए तो भगवान शब्द अगर

375
00:27:34,880 --> 00:27:39,040
उनके लिए आया है बिल्कुल भगवान के तुल्य है भगवान के समान उनका

376
00:27:39,040 --> 00:27:43,120
महत्व है क्योंकि वो गुरु है और गुरु और भगवान में अंतर नहीं

377
00:27:43,120 --> 00:27:47,360
करना है तो भगवान के समान महत्व का बोध

378
00:27:47,360 --> 00:27:53,360
कराने के लिए उनके लिए भगवान शब्द का उपयोग किया है

379
00:27:54,480 --> 00:27:58,640
नहीं ये अवतारवाद का बात तो हमारे वेदों में भी आती है वामन

380
00:27:58,640 --> 00:28:02,640
अवतार के बारे में बता बताया गया है वेदों में बिल्कुल बिल्कुल अरे

381
00:28:02,640 --> 00:28:06,960
अरे सबके कई कई अवतारों के बारे में बताया गया है इस पर वीडियो है हमारा

382
00:28:06,960 --> 00:28:11,040
बहुत अवतारों के बारे में बताया गया यजुर्वेद के 32 वे

383
00:28:11,040 --> 00:28:15,200
अध्याय का एक मंत्र आता है उसमें तो कह रहा है हे प्रजापति तुम बहुत से

384
00:28:15,200 --> 00:28:19,680
रूपों में प्रकट होते हो आप लोग एक ये पुराण दिग्दर्शन

385
00:28:19,680 --> 00:28:24,000
खरीद लो इसमें आपको जो है

386
00:28:24,000 --> 00:28:28,000
ये जो अवतार है ना अवतारों की बात वेदों में कहां कहांहां की गई है

387
00:28:28,000 --> 00:28:32,000
वो सब दिया पुराणों का भी कैसे कंटेंट मिलता

388
00:28:32,000 --> 00:28:36,240
है वेदों में वह सब है इसमें जी और बहुत

389
00:28:36,240 --> 00:28:40,320
सी जो कथाएं हैं कुजा के साथ समागम ये जो जिस उछलते रहते

390
00:28:40,320 --> 00:28:44,320
हैं राधा कृष्ण का जो वो है वो सब भी है मतलब बहुत एक

391
00:28:44,320 --> 00:28:48,480
संक्षिप्त में आपको सब कुछ मिल जाएगा कुंजी है ये बात कोई ये

392
00:28:48,480 --> 00:28:53,200
नए नए है ये ये सब जो बातें उठाते हैं ये

393
00:28:53,200 --> 00:28:57,360
भाई हमारे आचार्य गण बहुत सालों से लड़ रहे हैं इन लोगों से ऐसा नहीं है धर्म

394
00:28:57,360 --> 00:29:01,760
की रक्षा ऐसे नहीं होती है। ये आज ये नए हैं।

395
00:29:01,760 --> 00:29:05,840
ये राम श्री राम के ऊपर सवाल उठाने वाले रामपाल अपने आप को नए

396
00:29:05,840 --> 00:29:09,920
समझते हैं। ये तो कॉपी कर रहे हैं पुराने लोगों को। जैन बुलके

397
00:29:09,920 --> 00:29:14,000
ये सब उठा चुके हैं राम जी के ऊपर। उत्तरकांड को प्रक्षिप्त कह चुके

398
00:29:14,000 --> 00:29:18,640
हैं। और हमारे आचार्य गण लड़े हैं सदियों से।

399
00:29:18,640 --> 00:29:23,360
सब नई बातें हैं।

400
00:29:23,360 --> 00:29:27,840
शिव दर्शन जी

401
00:29:27,840 --> 00:29:32,000
इस कान में भी मतलब जो भगवान शिव और विष्णु में भेद करते हैं उनका

402
00:29:32,000 --> 00:29:36,640
भी सिस्टम बड़ा खराब है। जी

403
00:29:36,640 --> 00:29:41,440
हरिहर में भेद जो करते हैं

404
00:29:41,440 --> 00:29:47,120
से मुझे एक बात याद वो आई है। ये देखिए इसमें

405
00:29:47,120 --> 00:29:52,000
इसमें वो चैप्टर मैं आपको दिखाऊं जहां पे

406
00:29:52,000 --> 00:29:56,400
वेदों में पुराणों का एक चैप्टर है। वेदों में पुराणों का

407
00:29:56,400 --> 00:30:00,880
वो है जिक्र।

408
00:30:00,880 --> 00:30:03,920
जी।

409
00:30:03,920 --> 00:30:08,880
इस से मुझे एक बात याद आई है कि

410
00:30:08,880 --> 00:30:12,400
यह जो

411
00:30:12,400 --> 00:30:16,400
वहां पर चल रहा है जो हमारे हिंदू भाई के ऊपर जो है एक ये सब चीजें

412
00:30:16,400 --> 00:30:20,400
हो रही है अटेमप्ट किए जा रहे हैं। तो इसके लिए कुछ

413
00:30:20,400 --> 00:30:24,560
अंदर से कूटनीत कूटनीति का सहारा लेते हुए कुछ स्कॉन

414
00:30:24,560 --> 00:30:28,560
भी कर रहा है। ऐसा नहीं है कि उसने सीधे-सीधे सपोर्ट हटा दिया है।

415
00:30:28,560 --> 00:30:32,960
तो उनको करने दें कूटनीति का उपयोग जिससे कि जो हमारे हिंदू

416
00:30:32,960 --> 00:30:37,120
भाई हैं देखिए कई बार लोग यह सोचने लगते हैं कि भाई ये एक तरफ

417
00:30:37,120 --> 00:30:41,200
तो इस के बारे में इस की शिक्षाओं पर ये हम इस

418
00:30:41,200 --> 00:30:45,280
की शिक्षाओं के विरुद्ध जरूर हैं मगर उनसे अलग

419
00:30:45,280 --> 00:30:48,640
नहीं है क्योंकि अंततवा

420
00:30:48,640 --> 00:30:53,200
वेदों में प्रमाण्य बुद्धि जिसमें है वो एक हिंदू है।

421
00:30:53,200 --> 00:30:57,440
जिसकी वेदों में प्रमाण्य बुद्धि है वो हिंदू है। वो हमारा अपना

422
00:30:57,440 --> 00:31:01,440
है। हमारे बीच की उनकी आपस की चीजें हैं कि भाई

423
00:31:01,440 --> 00:31:02,480
उनकी यह शिक्षाएं

424
00:31:02,480 --> 00:31:07,360
जो है कैसे अधर्म को प्रतिपादित कर रही है वह सब बाद का विषय है।

425
00:31:07,360 --> 00:31:09,520
मगर

426
00:31:09,520 --> 00:31:13,680
सबसे पहले क्या आवश्यक है कि अगर वेदों में प्रमाण बुद्धि है और कोई बाहर

427
00:31:13,680 --> 00:31:17,840
का व्यक्ति आकर के हमारे किसी भी भाई जिसकी वेदों में प्रमाण

428
00:31:17,840 --> 00:31:22,160
बुद्धि है और क्योंकि उससे किसी की शत्रुता

429
00:31:22,160 --> 00:31:26,480
ही इस बात पर है कि इसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि क्यों नहीं है? कुरान में

430
00:31:26,480 --> 00:31:30,560
वेदों में प्रमाण बुद्धि क्यों है? कुरान में क्यों नहीं है? बाइबल में क्यों नहीं है?

431
00:31:30,560 --> 00:31:36,160
तो उस समय हम अपने भाई के साथ खड़े होंगे ना। वो बात की बातें हैं।

432
00:31:36,160 --> 00:31:40,640
वो बाद की बातें हैं कि हरियर में भेद कर रहे हैं तो हम

433
00:31:40,640 --> 00:31:45,120
देख लेंगे। अपना आपस का मामला है। हमने एक

434
00:31:45,120 --> 00:31:50,160
निश्चल जी महाभाग का एक वीडियो देखा था।

435
00:31:50,160 --> 00:31:54,480
हमारे मन में भी पहले मतलब बहुत बहुत ये था कि मतलब वो भगवान छोटे

436
00:31:54,480 --> 00:31:58,880
गणेश पुराण पढ़ो तो गणेश बड़े विष्णु पुराण पढ़ो तो विष्णु पुराण

437
00:31:58,880 --> 00:32:02,960
विष्णु बड़े शिव पुराण पढ़ो तो शिव पुराण बड़े तो हमने

438
00:32:02,960 --> 00:32:07,120
शिव स्वरूप निशानंद जी महाभाग का एक वीडियो देखा था उनकी

439
00:32:07,120 --> 00:32:11,200
एक बात हमें बहुत अच्छी लगी और हमारा मतलब चित्त का भी शुद्धिकरण हो

440
00:32:11,200 --> 00:32:15,520
गया उन्होंने जब कहा था एक ही ब्रह्म पांच रूपों में विभक्त

441
00:32:15,520 --> 00:32:17,760
होते हैं। वही भगवान

442
00:32:17,760 --> 00:32:21,840
उपासक बनते हैं। वही उपासक बन जाते हैं। तो

443
00:32:21,840 --> 00:32:25,840
मतलब अगर बनते अगर ना बनते तो हम

444
00:32:25,840 --> 00:32:30,240
ये नहीं कह सकते थे कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। क्यों?

445
00:32:30,240 --> 00:32:34,400
कर सकता है। भगवान क्या भगवान क्या उपासक नहीं बन सकते? बन सकते हैं।

446
00:32:34,400 --> 00:32:37,760
लोग बन गए उपासक

447
00:32:37,760 --> 00:32:43,120
जी। उनकी मतलब उसी बात से हमको समझ भगवान स्वयं

448
00:32:43,120 --> 00:32:46,400
उपा बन जाते हैं।

449
00:32:46,400 --> 00:32:50,880
जी और एक एक ही को समझना ये हमारे हिसाब से मूर्खता

450
00:32:50,880 --> 00:32:54,960
का विषय है। ब्रह्मा विष्णु महेश गौरी

451
00:32:54,960 --> 00:32:59,280
और गणेश इनमें मतलब भेद बुद्धि करनी ही नहीं चाहिए।

452
00:32:59,280 --> 00:33:01,920
जी

453
00:33:01,920 --> 00:33:06,000
ये एक ही है। पहले हमारा भी बहुत मतलब

454
00:33:06,000 --> 00:33:10,000
ये था लेकिन अब जब से निशान

455
00:33:10,000 --> 00:33:14,400
जी महाभाग का हमने थोड़ा सा प्रवचन सुना एक

456
00:33:14,400 --> 00:33:18,560
भाई साहब कह रहे हैं कि एक भाई साहब कह

457
00:33:18,560 --> 00:33:22,560
रहे हैं कि भाई आर्य समाज का कोई तोड़ नहीं है। बिल्कुल अच्छी बात है।

458
00:33:22,560 --> 00:33:26,720
कोई तोड़ होना भी नहीं चाहिए। हमारे हिंदू है वो वो भी हिंदू ही

459
00:33:26,720 --> 00:33:30,720
हैं। बस ये है कि उनका ईश्वर जो

460
00:33:30,720 --> 00:33:33,120
है वो सर्वशक्तिमान नहीं है।

461
00:33:33,120 --> 00:33:38,000
वो जीव की चाह का विषय नहीं है। इस कारण से व्यक्ति

462
00:33:38,000 --> 00:33:42,160
उनके यहां पर रहते हुए धर्म के प्रति

463
00:33:42,160 --> 00:33:46,400
प्रतिबद्ध नहीं रह पाएगा। क्योंकि उनका ईश्वर पूर्ण

464
00:33:46,400 --> 00:33:49,200
नहीं है।

465
00:33:49,200 --> 00:33:53,280
ईश्वर पूर्ण होने की आवश्यकता है। ईश्वर पूर्ण है वही

466
00:33:53,280 --> 00:33:57,360
ईश्वर हो सकता है। तो इसमें थोड़ा सा उनको चेंज करना चाहिए।

467
00:33:57,360 --> 00:34:01,520
बाकी जब ईश्वर पूर्ण होगा तो उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला

468
00:34:01,520 --> 00:34:05,600
जो धर्म है वो भी शाश्वत हो जाएगा और मिलने वाला जो मोक्ष है वह

469
00:34:05,600 --> 00:34:11,200
भी परम स्वतंत्र हो जाएगा। जी पाड़ी जी

470
00:34:11,200 --> 00:34:14,240
बिल्कुल

471
00:34:14,240 --> 00:34:19,040
तो आज जो बहन आने वाले थे वह आए नहीं अभी।

472
00:34:19,040 --> 00:34:23,120
हां अभी तक नहीं आए। मैं ऑपरेटर महोदय से कहूंगा और उनको एक बार संपर्क

473
00:34:23,120 --> 00:34:27,160
कर लीजिए। बिल्कुल।

474
00:34:27,160 --> 00:34:29,280
[संगीत]

475
00:34:29,280 --> 00:34:33,440
ये तो गलत है। हम अपनी आस्था किसी के ऊपर

476
00:34:33,440 --> 00:34:37,520
थोप नहीं सकते। जी ना मैं ये मान रहा हूं तो

477
00:34:37,520 --> 00:34:41,520
आप भी यही मानिए। और दूसरे की चीज को गलत ठहराना तो यह तो

478
00:34:41,520 --> 00:34:45,520
बहुत गलत है ना कि अगर अगर जैसे मेरे को

479
00:34:45,520 --> 00:34:49,600
रेड कलर पसंद है सामने वाले को ब्लू कलर पसंद है। ये नहीं कह सकता

480
00:34:49,600 --> 00:34:54,240
ना आपकी जो आपकी चॉइस है वो गलत है।

481
00:34:54,240 --> 00:34:58,240
नहीं मार के नहीं। आप अपनी बात को तर्क और प्रमाण के साथ रखो

482
00:34:58,240 --> 00:35:02,320
सामने या बल बल का प्रयोग करना कि निकल जाओ यहां

483
00:35:02,320 --> 00:35:06,320
से और जो है तुमने यह वीडियो कैसे सुना। वो वीडियो जो कि तर्क और प्रमाण

484
00:35:06,320 --> 00:35:11,200
प्रस्तुत कर रहा है जो हम मान रहे हैं वो गलत है। ये तो गलत बात है।

485
00:35:11,200 --> 00:35:16,400
तो यह देखिए इसमें वो चैप्टर है वैदिक अवतारवाद।

486
00:35:16,400 --> 00:35:19,120
देख रहे हैं

487
00:35:19,120 --> 00:35:23,440
वैदिक अवतारवाद। इसमें आपको जो हमारे अवतार हैं

488
00:35:23,440 --> 00:35:27,680
ज्यादातर उनका जिक्र मिलेगा लाइन

489
00:35:27,680 --> 00:35:29,520
से। श्री रामचंद्र जी का अवतार

490
00:35:29,520 --> 00:35:33,840
का वर्णन श्रुति श्रुति शास्त्रों में कहां-कहां और वराह

491
00:35:33,840 --> 00:35:39,840
का कुर का नरसिंह का वामन का परशुराम का

492
00:35:40,320 --> 00:35:44,640
श्री राम भगवान के बारे में जब जिक्र आता है तो अयोध्या का सरयू नदी का महाराजा

493
00:35:44,640 --> 00:35:48,880
दशरथ का शक्ति शक्ति रूप सीता की वंदना

494
00:35:48,880 --> 00:35:53,360
राम विवाह विश्वामित्र यज्ञ रक्षा यह सब वहां पर

495
00:35:53,360 --> 00:35:58,160
वैदिक भाषा में वहां पर आपको मिलेगा कृष्णा अवतार भी मिलेगा

496
00:35:58,160 --> 00:36:02,160
तो ऐसे ही नहीं है हमारे भाई परंपरा प्राप्त आचार्य है उनकी

497
00:36:02,160 --> 00:36:06,160
शरण में हम ऐसे ही नहीं है गुरु गोविंद ग्रंथ की शरण में

498
00:36:06,160 --> 00:36:10,240
है केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं गुरु

499
00:36:10,240 --> 00:36:14,880
गोविंद और ग्रंथ एम थ्री जी तो

500
00:36:14,880 --> 00:36:18,960
इसीलिए तो कहता हूं मैं देखिए ये जो विश्वास है

501
00:36:18,960 --> 00:36:23,040
ना ये घमंड नहीं है ये विश्वास धर्म से आता है। ईश्वर से

502
00:36:23,040 --> 00:36:25,440
आता है।

503
00:36:25,440 --> 00:36:29,520
ईश्वर ईश्वर में इतना जो अिग विश्वास है वह यह बुलवाता

504
00:36:29,520 --> 00:36:33,680
है कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में अपने ऊपर कोई घमंड नहीं है ईश्वर के

505
00:36:33,680 --> 00:36:39,680
ऊपर घमंड है कर्म के ऊपर घमंड है अब क्या नहीं होना चाहिए

506
00:36:40,160 --> 00:36:44,720
तो ये बातें हैं जब आप

507
00:36:44,720 --> 00:36:48,800
जब आप शुरू में आप ये बता रहे थे कि एक जो मातृशक्ति

508
00:36:48,800 --> 00:36:52,800
है उनको परेशान किया जा रहा है इस कारण से

509
00:36:52,800 --> 00:36:56,960
तो एक नीचे मैं कमेंट्स पढ़ रहा था तो एक बोल रहे थे कि

510
00:36:56,960 --> 00:37:01,200
संत रामपाल जी महाराज को फंसाने के लिए उनको बदनाम करने के लिए यह नाटक

511
00:37:01,200 --> 00:37:05,440
रचा जा रहा है। हम इसके बारे में क्या कहना चाहोगे

512
00:37:05,440 --> 00:37:09,520
आप? अरे इनके नाटक नहीं देखे आपने

513
00:37:09,520 --> 00:37:15,120
क्या-क्या नाटक करते हैं ये लोग? अपने नाटकों को भूल जाते हो क्या?

514
00:37:15,120 --> 00:37:19,200
अरे वो यहां ऐसा हो गया वैसा हो गया। न्यूज़ चैनल बना दिया

515
00:37:19,200 --> 00:37:23,200
और यह कर दिया वो कर दिया। हमारा मुंह मत खुलवाओ। नाटक तो आप

516
00:37:23,200 --> 00:37:27,280
लोग करते हो। हमारा अगर नाटक होता तो अब

517
00:37:27,280 --> 00:37:32,560
टाइम पर आती मातृशक्ति क्योंकि नाटक तो फिक्स होता है। प्रीप्ल होता है

518
00:37:32,560 --> 00:37:38,560
ये अगर नाटक होता तो वो तो टाइम पे अब तक आ चुकी होती

519
00:37:39,120 --> 00:37:43,360
बिल्कुल बिल्कुल यही मैं कहना चाहता हूं ना वो बोल रहे हैं कि स्क्रिप्टेड है।

520
00:37:43,360 --> 00:37:49,360
हम यह स्क्रिप्टेड है कि लेट आना तुम

521
00:37:49,680 --> 00:37:53,680
जैसे ये लोग बनाते रहते हैं स्क्रिप्टेड ये आश्रम

522
00:37:53,680 --> 00:37:58,000
में बंद है कमरे में जैसे ग्रंथ का वही

523
00:37:58,000 --> 00:38:03,040
है हर्ष झा जी पूछ रहे हैं भैया ग्रंथ का पीडीएफ मिल जाएगा हां मिल जाएगा

524
00:38:03,040 --> 00:38:07,360
ये मिल जाएगा आपको पीडीएफ ये देखिए आ रहा है

525
00:38:07,360 --> 00:38:11,920
पुराण दिग दर्शन ठीक है ना

526
00:38:11,920 --> 00:38:16,080
और ये कोई नई यही बात नहीं है। उत्तरकांड पर आक्षेप लगाना, रामायण

527
00:38:16,080 --> 00:38:19,120
मीमांसा ग्रंथ पढ़िए।

528
00:38:19,120 --> 00:38:23,120
राम भगवान के ऊपर उठे हुए सभी प्रश्नों का उत्तर मिलेगा।

529
00:38:23,120 --> 00:38:27,280
बस ये है कि आजकल लोगों के पास टाइम नहीं है तो वो पढ़ते नहीं है। रामायण

530
00:38:27,280 --> 00:38:31,600
मीमांसा ग्रंथ है। ये देखिए बताता हूं। ये

531
00:38:31,600 --> 00:38:35,600
पीछे ही रखा है। ये रामायण मीमांसा क्यों

532
00:38:35,600 --> 00:38:39,600
है मेरे पास? क्योंकि जब मैं थोड़ा सा होश में आया था तो

533
00:38:39,600 --> 00:38:43,600
मैं सुनता था कि राम भगवान के ऊपर आक्षेप लगा करते हैं। अब मेरे

534
00:38:43,600 --> 00:38:47,840
पास दो ही ऑप्शन थे। या तो राम भगवान के बारे में मैं खुद कोई

535
00:38:47,840 --> 00:38:51,920
सारी जानकारियां एकत्रित कर लूं। वो भी प्रामाणिक होंगी कि

536
00:38:51,920 --> 00:38:56,240
नहीं ये नहीं पता। परंपरा प्राप्त होंगी कि नहीं ये नहीं पता। तब ये ग्रंथ

537
00:38:56,240 --> 00:39:00,480
मेरे को मिला। महान करपात्री जी महाराज के द्वारा

538
00:39:00,480 --> 00:39:06,320
रचित ग्रंथ तर्क और प्रमाण की पराकाष्ठा

539
00:39:06,320 --> 00:39:10,720
राघवाचार्य जी का आपने सुना हो एक कथन कि पिछले

540
00:39:10,720 --> 00:39:14,800
10,000 वर्ष में जो नास्तिक पैदा हुए थे और आने वाले हजारों वर्ष तक

541
00:39:14,800 --> 00:39:18,880
जो पैदा होंगे वो ईश्वर को नकारने के लिए जो जो

542
00:39:18,880 --> 00:39:23,200
तर्क और कुछ भी कह सकते होंगे उन सारी चीजों का उत्तर

543
00:39:23,200 --> 00:39:27,360
करपात्री जी महाराज ने पहले ही लिख दिया है। वो है कर्पात्री जी

544
00:39:27,360 --> 00:39:31,440
महाराज। तो ऐसे ही ये रामायण ये अब

545
00:39:31,440 --> 00:39:35,520
ये सोचो आप ये जैन बुलके आज के थोड़ी ना ये ये नए हैं

546
00:39:35,520 --> 00:39:39,520
ये मार्केट में नए है ये तो कॉपी पेस्ट कर रहे हैं ये कॉपी

547
00:39:39,520 --> 00:39:44,000
पेस्ट है रामपाल वगैरह जो किया करते हैं इनके

548
00:39:44,000 --> 00:39:48,160
पहले से ही बहुत है रामपाल के

549
00:39:48,160 --> 00:39:52,480
चेलों से बात करने के लिए पीडीएफ चाहिए भाई डिफेंस वाली पीडीएफ

550
00:39:52,480 --> 00:39:56,480
आपको उपलब्ध हो जाएगी जो हमने छह वीडियोस बनाए हैं। एक प्लेलिस्ट है छह

551
00:39:56,480 --> 00:40:00,640
वीडियोस की उस प्लेलिस्ट में जो लास्ट वाला वीडियो

552
00:40:00,640 --> 00:40:04,800
है छठवा वीडियो है जो उसके डिस्क्रिप्शन में वो पीडीएफ है

553
00:40:04,800 --> 00:40:08,960
डिफेंस की है अटैक की नहीं है अटैक की पीडीएफ अभी

554
00:40:08,960 --> 00:40:13,040
बनाई जा रही है डिफेंस का मतलब जितने वो क्वेश्चन

555
00:40:13,040 --> 00:40:17,120
करते हैं मोटे-मोटे उन सबका हमारे शास्त्रों में क्या जवाब लिखा है

556
00:40:17,120 --> 00:40:21,200
वह सब है। अब अटैक की क्या है? काउंटर क्या है?

557
00:40:21,200 --> 00:40:21,700
कि

558
00:40:21,440 --> 00:40:25,760
अब जो वह कहते हैं उस पर काउंटर करने वाली बातें उसके लिए नई पीडीएफ

559
00:40:25,760 --> 00:40:28,640
बन रही है।

560
00:40:28,640 --> 00:40:32,720
अब जैसे वह कहते हैं कि भैया बिना तत्वदर्शी के मोक्ष नहीं मिलेगा। मगर उनहीं की किताब

561
00:40:32,720 --> 00:40:36,960
में लिखा हुआ है कि अर्जुन को मोक्ष मिल गया। इसका क्या जवाब देंगे वो?

562
00:40:36,960 --> 00:40:42,480
तत्वदर्शी से गलती हो गई।

563
00:40:42,480 --> 00:40:45,920
गलती हो गई।

564
00:40:45,920 --> 00:40:50,320
एक अलग ही दुनिया में जी रहे हैं। हम

565
00:40:50,320 --> 00:40:54,480
तो इसमें इसमें देखिए इसकी भूमिका ही इतनी अपनी

566
00:40:54,480 --> 00:40:58,640
लंबी है। बहुत लंबी तो इसकी भूमिका ही है। आप भूमिका

567
00:40:58,640 --> 00:41:02,960
ही पढ़ लेंगे तो बहुत सारे जो इसकी रामायण मीमांसा की

568
00:41:02,960 --> 00:41:08,320
इसकी आप भूमिका भी पढ़ लेंगे तो काफी सारी आपकी चीजें जो हैं

569
00:41:08,320 --> 00:41:14,080
वो दूर हो जाएंगी। जो भ्रम होंगे दूर हो जाएंगे।

570
00:41:14,080 --> 00:41:18,720
तो बहुत अच्छे बुक है।

571
00:41:18,720 --> 00:41:22,800
ये गीता पे सवाल ये उठाया अभी इन लोगों ने अभी

572
00:41:22,800 --> 00:41:27,840
इनका एक चला था ना स्क्रिप्टेड जगत और भगत वाला

573
00:41:27,840 --> 00:41:31,920
उसमें ये सवाल उठाया कि अगर भगवान श्री कृष्ण ने यह गीता

574
00:41:31,920 --> 00:41:35,920
का ज्ञान दिया तो या खुद वो परमात्मा है तो हर एक जगह

575
00:41:35,920 --> 00:41:40,480
उसकी उधर इसका

576
00:41:40,480 --> 00:41:44,640
यह शब्द क्यों बोल रहे हैं अब क्योंकि दो

577
00:41:44,640 --> 00:41:48,640
पर्सेक्टिव है ना उनके दो रूप है। जब कोई व्यक्ति से हम बात कर

578
00:41:48,640 --> 00:41:52,800
रहे होते हैं उस व्यक्ति को यह नहीं मालूम होता है कि मैं ही हूं वो व्यक्ति सामने

579
00:41:52,800 --> 00:41:56,880
वाले को नहीं मालूम होता है कि मैं ही वो व्यक्ति हूं। तो वो ऐसे बात करता

580
00:41:56,880 --> 00:42:00,960
है दीप भैया मैं उसको ढूंढ रहा हूं। अच्छा अच्छा उसको ढूंढ रहे हो। जैसे एक बार क्या हुआ

581
00:42:00,960 --> 00:42:04,960
था गुरुदेव पहले बहुत समय पहले की बात है कि गुरुदेव अपने

582
00:42:04,960 --> 00:42:09,120
आश्रम में ही वो बताते हैं वो सफाई कर रहे थे तो वो गेट पर

583
00:42:09,120 --> 00:42:13,360
थे तो कोई आया मिलने के लिए कि मुझे शंकराचार्य जी से मिलना

584
00:42:13,360 --> 00:42:17,440
है तो अब गुरुदेव जो है उस समय सफाई कर रहे हैं क्योंकि

585
00:42:17,440 --> 00:42:21,520
उस समय इतना नहीं था संसाधन तो जब गुरुदेव सफाई कर रहे

586
00:42:21,520 --> 00:42:25,840
थे तो गुरुदेव ने कहा हां अंदर बैठे होंगे मिल लीजिए जाके तो जब सामने

587
00:42:25,840 --> 00:42:29,200
वाला आपको पहचान नहीं रहा है तो उस समय आवश्यक नहीं है कि

588
00:42:29,200 --> 00:42:33,200
आप उसी समय कह दे कि मैं ही वो हूं। आपने भेज दिया अंदर फिर

589
00:42:33,200 --> 00:42:37,680
अंदर खुद ही अच्छे वो जिस रूप में शंकराचार्य को मिलना चाहिए

590
00:42:37,680 --> 00:42:41,760
अपने श्रोता से या आगंतुक से तो उस रूप में फिर वो आ

591
00:42:41,760 --> 00:42:46,000
गए हां भाई बताइए मैं ही शंकराचार्य बिल्कुल यही

592
00:42:46,000 --> 00:42:50,000
बात मैं समझाना चाह रहा था जी तो

593
00:42:50,000 --> 00:42:54,320
और ऐसा नहीं है कि इनके जो तत्वदर्शी उन्होंने ये सब बातें की नहीं है

594
00:42:54,320 --> 00:42:58,480
हमने दिखा दिया अब इनके पास कोई जवाब नहीं हैदशी

595
00:42:58,480 --> 00:43:02,960
हमारी बहन आ चुकी है आपको हमारा

596
00:43:02,960 --> 00:43:07,840
जय श्री राम आपको जय श्री राम भैया सुभाष भाई

597
00:43:07,840 --> 00:43:11,120
जी

598
00:43:11,120 --> 00:43:15,520
मेरी सास जी मेरी सासू मां रामपाल

599
00:43:15,520 --> 00:43:19,520
थोड़ी हुई है जी मतलब वो ना

600
00:43:19,520 --> 00:43:23,680
तो भगवान को मानती है जी ना पूजा

601
00:43:23,680 --> 00:43:28,560
पाठ में मतलब पूजा पाठ जो हम लोग कहते हैं ना प्रसाद पाती है

602
00:43:28,560 --> 00:43:31,520
अच्छा प्रसाद

603
00:43:31,520 --> 00:43:35,600
ये कोई त्यौहार है त्यौहार पे हम लोग मनाते हैं तो वो कहते हैं पहले हमें

604
00:43:35,600 --> 00:43:39,680
निकाल दो फिर भगवान को भोग लगाओ जी और ये

605
00:43:39,680 --> 00:43:44,480
लोग मतलब ये लोग झूठ भी बहुत ज्यादा बोलते हैं

606
00:43:44,480 --> 00:43:48,480
हमारी सासू मां को हां

607
00:43:48,480 --> 00:43:52,720
हमारी सासू मां को डाट मतलब ये दांतों में मसूड़े नहीं फूल जाते

608
00:43:52,720 --> 00:43:56,960
हैं तो पहले ये मसूड़े फूलते थे तो कहने लगी

609
00:43:56,960 --> 00:44:01,120
हमें कैंसर था और गुरुदेव की दीक्षा ली तो हमारा कैंसर

610
00:44:01,120 --> 00:44:06,080
ठीक हो गया है। अच्छा हां

611
00:44:06,080 --> 00:44:10,080
मतलब दांत मसूड़े फूल गए तो मसूड़े में वो पानी

612
00:44:10,080 --> 00:44:14,160
से नहीं निकलता है। जी कह रही थी हमें कैंसर

613
00:44:14,160 --> 00:44:18,240
होगा तो गुरु जी की दीक्षा जब से हम ठीक हो गए। अच्छा

614
00:44:18,240 --> 00:44:22,560
तो ये लोग एक दावा करते हैं बहन जी कि भाई जो भी रामपाल की शरण

615
00:44:22,560 --> 00:44:26,880
में जाता है उसके आचरण बहुत अच्छे हो जाते हैं।

616
00:44:26,880 --> 00:44:31,280
तो ये जो धर्म के जो धर्म के जो लक्षण है जैसे सत्यवादिता

617
00:44:31,280 --> 00:44:35,520
इत्यादि तो आप कह रही है कि ये लोग झूठ बोलने में एक्सपर्ट हैं।

618
00:44:35,520 --> 00:44:39,600
हां बिल्कुल सही। और ये लोग भाई नहाते भी नहीं है मतलब

619
00:44:39,600 --> 00:44:43,680
हमारी माताजी नहीं नहाती और पूजा कर लेती हैं। नहाते

620
00:44:43,680 --> 00:44:47,760
नहीं है? हां नहाए नहीं मतलब दो दिन तक दो दिन तक

621
00:44:47,760 --> 00:44:51,760
नहाएंगे नहीं और आएंगे तो बस शायद में नहाएंगे नहीं और आके

622
00:44:51,760 --> 00:44:55,920
पूजा कर लेंगे। ओ हो हो गोपाल जी

623
00:44:55,920 --> 00:45:00,560
जो जला देंगी। और

624
00:45:00,560 --> 00:45:04,960
हमारी मौसी सास को बुआ सास को ले गई थी

625
00:45:04,960 --> 00:45:09,120
आश्रम अभी मैं एक एक बात ये पूछ रहा था ये लोग ये कहते

626
00:45:09,120 --> 00:45:13,120
हैं कि हम लोग जो है रामपाल के जो भगत हैं वो

627
00:45:13,120 --> 00:45:17,200
पान सुपारी बीड़ी गुटखा ये सब दुर्वसन में नहीं पढ़ते मगर आप बता रही

628
00:45:17,200 --> 00:45:21,520
है कि वो नहाते नहीं है नित्य प्रति हां सत्य बात है बिल्कुल

629
00:45:21,520 --> 00:45:25,680
हम तो रहते हैं ना उनके साथ में तो ये आपकी जो ये माता

630
00:45:25,680 --> 00:45:29,760
जी है ये कब से जो मतलब ये रामपाल

631
00:45:29,760 --> 00:45:35,760
को कब कितने दिन हो गए? 2014

632
00:45:37,760 --> 00:45:41,760
अब ये 2014 से 24 तक की अगर आप बात कर रहे हैं तो

633
00:45:41,760 --> 00:45:45,840
मतलब 10 साल हो गए तो ये भी नहीं कह सकते नहीं भाई वो भगत नहीं

634
00:45:45,840 --> 00:45:50,080
है तो नहा नहीं रहे तो ये अच्छा ये ना नहाने की बात

635
00:45:50,080 --> 00:45:54,240
कुछ ऐसा है कि और भी आपने भगतों को देखा हो जो नहीं नहाते या गंदे रहते हैं इस

636
00:45:54,240 --> 00:45:58,240
तरह से ऐसा कुछ में दो दो लेडीज है

637
00:45:58,240 --> 00:46:02,240
हमारी अम्मा है और एक जने और है इनका यही काम होता है

638
00:46:02,240 --> 00:46:06,640
सर्दियों में यही काम होता है नहाए बिना रह लेती है

639
00:46:06,640 --> 00:46:10,720
हां बिना नहाए बिना रह लेती है फ्रेश होके आई हाथ

640
00:46:10,720 --> 00:46:15,440
पांव धोए और जोत बत्ती कर देती है ओ हो हो हो

641
00:46:15,440 --> 00:46:19,520
तो हम लोग विरोध करते हैं तो लड़ाई झगड़ा भी करती हैं और मतलब

642
00:46:19,520 --> 00:46:23,520
हम उनसे बहुत ज्यादा प्रयास करती हैं कि बरवाला चलो गुरु जी के आश्रम में तुम

643
00:46:23,520 --> 00:46:27,840
वहां दीक्षा लो हमारे पति है। उन्होंने

644
00:46:27,840 --> 00:46:31,840
अभी तक रामपाल के जो शिष्य थे उन्होंने दो लोगों की दीक्षा छुड़वा

645
00:46:31,840 --> 00:46:36,000
दी है। अच्छा क्या बात है। बहुत

646
00:46:36,000 --> 00:46:40,160
बढ़िया। वो हमसे कह रही थी कि तुम मतलब मना करो भैया को के

647
00:46:40,160 --> 00:46:45,120
मतलब तुम्हें पाप लगे। तुम दीक्षा छुड़वा रही।

648
00:46:45,120 --> 00:46:50,560
तो वे कह कि हम सही रास्ता बता रहे तो इ कौन सी गलत बात है?

649
00:46:50,560 --> 00:46:53,360
नहीं मतलब ऐसा है कि यह कोई

650
00:46:53,360 --> 00:46:57,360
ऐसा नहीं है कि रामपाल के द्वारा ही सिखाया जाता हो कि नहाओ मत कभी-कभी।

651
00:46:57,360 --> 00:47:01,360
मगर बात ये आती है कि जो इतना निष्ठावान भगत हो

652
00:47:01,360 --> 00:47:05,440
गया है उसका आचरण ये लोग ये दावा करते हैं ना कि हमारे जो भगत

653
00:47:05,440 --> 00:47:09,600
होते हैं रामपाल के वो जो है बहुत ज्यादा क्या कहते

654
00:47:09,600 --> 00:47:13,920
हैं आचरण उनके बहुत शुद्ध हो जाते हैं और हमने देखा है

655
00:47:13,920 --> 00:47:18,000
यहां पर आने वाले ज्यादातर लोग जो है 90% जो रामपाल का फेवर करने

656
00:47:18,000 --> 00:47:22,160
आते हैं वो किस में दिख रहे होते हैं ये आप लोग खुद ही तय

657
00:47:22,160 --> 00:47:26,960
कर सकते हो है ना किस तरह से वो दिख रहे होते हैं

658
00:47:26,960 --> 00:47:31,840
हमारे साथ में रहती हमें पता है। हम तो ज्यादा पहचानते हैं उनको

659
00:47:31,840 --> 00:47:36,240
और ये लोग क्या कहते हैं जी आपने कभी

660
00:47:36,240 --> 00:47:40,880
से पूछा नहीं कि आप माता जी नहाए बिना कैसे बत्ती कर दे रही हो?

661
00:47:40,880 --> 00:47:45,440
तो पूछा तो वो कहते हम लोग तो शुद्ध रहते हैं। अच्छा

662
00:47:45,440 --> 00:47:50,400
हम लोग आत्मा शुद्ध है हम लोगों की। हां

663
00:47:50,400 --> 00:47:54,960
वो व्यवहार और परमार्थ वाली वही वाली बात है। ये

664
00:47:54,960 --> 00:47:59,200
बात भी ध्यान रखिएगा जो लोग जो लोग ये कहते हैं ना कि अवतार अवतार

665
00:47:59,200 --> 00:48:03,360
वो भगवान का आना जाना सिद्ध नहीं होता है तो उनके लिए नहाना

666
00:48:03,360 --> 00:48:07,360
नहाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वो आत्मा है। वो तो गीली नहीं होती

667
00:48:07,360 --> 00:48:09,040
ना।

668
00:48:09,040 --> 00:48:13,040
हां हां और वो जा भी कहने लगती मतलब जो

669
00:48:13,040 --> 00:48:17,120
हमारे गुरु जी है जेल में भली है और उनके अवतार में 20

670
00:48:17,120 --> 00:48:21,120
साल का लड़का हो गया है वो उनके ह्रदय में हमारे रामपाल

671
00:48:21,120 --> 00:48:25,200
जी की आत्मा आएगी गुरु जी की कौन ये ये मैं

672
00:48:25,200 --> 00:48:29,520
समझा नहीं क्या क्या बोल रहे है दोबारा बताइए एक

673
00:48:29,520 --> 00:48:33,840
मतलब कह रही थी हमारे गुरु जी की आत्मा एक लड़का हो गया 20 साल का

674
00:48:33,840 --> 00:48:37,840
उनकी गद्दी पर वही बैठेगा अच्छा वो

675
00:48:37,840 --> 00:48:42,640
लड़का उन्हीं का लड़का है कोई और है वो अब ये नहीं बताया उन्होंने

676
00:48:42,640 --> 00:48:47,520
कह रही थी उनकी आत्मा गुरु जी की आत्मा उनमें ट्रांसफर हो जाएगी

677
00:48:47,520 --> 00:48:51,760
बस बस वो वो उनका नहीं भी हो भाई शुरू में मैंने कह दिया था कि वंशवाद

678
00:48:51,760 --> 00:48:55,920
को अपना रहे हैं वो है क्या मैं मेरे को एक जानकारी ऐसी कुछ है कि

679
00:48:55,920 --> 00:48:59,920
रामपाल जो है नहीं चाहते कि अब उनके नाम से ये सब हो और

680
00:48:59,920 --> 00:49:04,720
उनके नाम से ऐसा हो रहा है। मैं इसमें पक्का नहीं हूं। मगर जो

681
00:49:04,720 --> 00:49:08,800
ये जो एक नया व्यक्ति तैयार किया जा रहा है ये आप भगत

682
00:49:08,800 --> 00:49:12,880
लोगों को जाकर पूछना चाहिए अपने गुरु से क्या ऐसा है कि आपकी

683
00:49:12,880 --> 00:49:16,560
आत्मा उसमें आने वाली है

684
00:49:16,560 --> 00:49:21,120
और मतलब वे लोग इतना भी तैयार रहते हैं कि अपना किराया लगा के

685
00:49:21,120 --> 00:49:24,400
और वहां पर लेके जाते हैं

686
00:49:24,400 --> 00:49:28,400
हमारी माता जी अपना खुद का किराया लगा के वहां पे लेके जाती

687
00:49:28,400 --> 00:49:32,720
हैं। अभी दीपावली के पहले इन लोगों का भंडारा था ना तो हमारी

688
00:49:32,720 --> 00:49:36,800
मौसी बुआ सास को ले गई थी तो

689
00:49:36,800 --> 00:49:40,800
दीपावली लोग गए हां तो जुड़ो आप कैसे

690
00:49:40,800 --> 00:49:45,120
कैसे भी जुड़ो लेकिन जुड़ो इनसे तो मतलब उन लोगों का भी विश्वास

691
00:49:45,120 --> 00:49:49,760
गुरु जी पे आने लगा था रामपाल आप अपनी माता जी से मेरा संपर्क कराइएगा

692
00:49:49,760 --> 00:49:54,000
मेरे को करीबन 200 लोगों को लेके जाना है तो वो कुछ

693
00:49:54,000 --> 00:49:58,880
आने जाने का ट्रेन का भाड़ा पहुंचा दे तो अच्छा रहेगा क्यों पाणी जी

694
00:49:58,880 --> 00:50:04,480
हां सही बात है। नहीं मतलब

695
00:50:04,480 --> 00:50:08,560
सही बात है। सुश भाई और मतलब तो हम लोग मतलब बेवफ बुआ और

696
00:50:08,560 --> 00:50:13,120
सास मौसी सा दोनों प्रतार तो होने लगी थी कि हम हां दीक्षा ले लेंगे। दीपावली

697
00:50:13,120 --> 00:50:17,360
पे हम लोग गए हमने आपकी डिबेट सुनाई। तो मतलब

698
00:50:17,360 --> 00:50:21,360
हमारी अम्मा को इतना गुस्सा आया, इतना गुस्सा आया कि हम लोगों को घर से बाहर निकाल

699
00:50:21,360 --> 00:50:26,800
दिया। कह दिया अब हमारे यहां पर मत आना। अच्छा

700
00:50:26,800 --> 00:50:30,800
हां संत रामपाल जी महाराज एक मिनट

701
00:50:30,800 --> 00:50:34,880
एक मिनट मैं बोलना चाहूंगा कुछ ये रामपाल जी के जितने अनुयाई हैं और

702
00:50:34,880 --> 00:50:38,880
रामपाल जी ये तो कहते हैं कि रामपाल के कबीर दास जी की भक्ति करने से सब

703
00:50:38,880 --> 00:50:39,440
एक हो जा

704
00:50:39,440 --> 00:50:43,520
रहे हैं इसमें कोई झगड़ा नहीं हो रहा है वो एक कर रहे हैं यहां तो अलग करने की बात

705
00:50:43,520 --> 00:50:47,600
हो रही है फिर अरे बहुत ज्यादा झगड़ा कर

706
00:50:47,600 --> 00:50:51,840
जब से उन्होंने दीक्षा ले ली जब से उनका दिमाग जाने की ऐसा हो गया है पहले बिल्कुल झगड़ा

707
00:50:51,840 --> 00:50:55,920
नहीं करती थी अब तो बस वो जनक कौन टाइप की हो

708
00:50:55,920 --> 00:50:59,920
गई है किसी को नहीं समझती कि हमारे बच्चे हैं,

709
00:50:59,920 --> 00:51:04,080
बहू है, बेटा है, किसी से कोई मतलब नहीं है। अपने से मतलब

710
00:51:04,080 --> 00:51:08,480
है। गलत चीज गलत दिखाई।

711
00:51:08,480 --> 00:51:12,560
और इनका विरोध हम लोग बहुत ज्यादा करते हैं। एक बार हमारे यहां पर आए थे।

712
00:51:12,560 --> 00:51:16,880
मॉम ने बुलाया था। चार पांच लोग थे। चार पांच जने थे पुस्तक सेवा

713
00:51:16,880 --> 00:51:21,360
के लिए। तो हमारे पति और हमारे देवर ने कुछ उन्होंने से पूछा।

714
00:51:21,360 --> 00:51:25,440
उन्होंने जवाब नहीं दे पाए। तो फिर हमारे देवर ने लाठी उठाई

715
00:51:25,440 --> 00:51:31,440
और भगाया। अच्छा खदे

716
00:51:32,880 --> 00:51:36,400
तो भाग गए थे।

717
00:51:36,400 --> 00:51:42,400
मतलब कोई भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए थे। हम

718
00:51:45,520 --> 00:51:49,520
अपनी कहते हैं तो किसी बात कोई भी बात कहेंगे तो अपनी पर जाएंगे।

719
00:51:49,520 --> 00:51:53,520
बस वो जो करेंगे वैसे ही जी और हमारे जो

720
00:51:53,520 --> 00:51:57,680
ससुर थे ना आज ये लोग कहते हैं कि मतलब कितना दान करेंगे

721
00:51:57,680 --> 00:52:03,680
कितना पुण्य करेंगे हमारे चाचा ससुर लाख दान करके गए यहां पर

722
00:52:03,760 --> 00:52:07,920
लाख दान करके गए और आप लोगों की अपनी आर्थिक स्थिति कैसी

723
00:52:07,920 --> 00:52:11,440
है बहन जी

724
00:52:11,440 --> 00:52:15,600
आपके पति क्या करते हैं हमारे पति शॉप है उनकी

725
00:52:15,600 --> 00:52:20,400
मोबाइल टीवी की रिपेयरिंग की बताइए

726
00:52:20,400 --> 00:52:24,480
मोबाइल टीवी रिपेयरिंग की जिनकी शॉप है उनके घर से लाख

727
00:52:24,480 --> 00:52:28,480
दान किए जाते हैं। वहां जहां जाने वाला आदमी ये तक

728
00:52:28,480 --> 00:52:32,560
जहां जाने वाला आदमी ये तक नहीं सीख पा रहा है कि मुझे डेली नहाना है। झूठ

729
00:52:32,560 --> 00:52:36,720
नहीं बोलना है। अच्छा ये पान तंबाकू बीड़ी सिगरेट वगैरह भी

730
00:52:36,720 --> 00:52:42,320
यूज़ करते हैं क्या? ये रामपाल के भगत जो होते हैं नहीं ये नहीं कहते हैं

731
00:52:42,320 --> 00:52:47,440
जी ये हमारी मतलब जो हमारी अम्मा है ये चीज नहीं कहती है

732
00:52:47,440 --> 00:52:51,440
अम्मा नहीं करती वैसे जब अम्मा से आपके आपका संपर्क है तो फिर थोड़े

733
00:52:51,440 --> 00:52:55,760
बहुत भगत को जानते होंगे तो क्या पान बीड़ी ये सब करते हैं कि नहीं भगत

734
00:52:55,760 --> 00:52:59,920
लोग अन्य भगत हमारे मोहल्ला में दो ही

735
00:52:59,920 --> 00:53:04,400
लोग हैं अच्छा आप और किसी को जानते नहीं है

736
00:53:04,400 --> 00:53:08,640
हां किसी और को नहीं जानते हैं जिसकी मतलब हमारे पति पति ने जिसकी दीक्षा छुड़वाई

737
00:53:08,640 --> 00:53:12,960
है और वो भी करते थे। हां वो करते थे। नहीं

738
00:53:12,960 --> 00:53:16,960
करते थे। नहीं वो तो पहले से नहीं करते थे। वो पहले से ही

739
00:53:16,960 --> 00:53:21,040
नहीं करते थे। अच्छा कोई हमको ले

740
00:53:21,040 --> 00:53:25,120
गया दीक्षा दिलवा। भाई और एक बात ये लोग ये भी दावा करते

741
00:53:25,120 --> 00:53:26,480
हैं जो चाचा खत्म

742
00:53:26,480 --> 00:53:31,440
हो गए थे ना अभी करंट से। ये लोग आए थे

743
00:53:31,440 --> 00:53:35,760
बिजली के करंट लगने से। सो ये लोग आए थे। जी ये लोग कह रहे थे कि इनकी

744
00:53:35,760 --> 00:53:40,160
जो सब है ना हमें दे दो हम जो संपत्ति

745
00:53:40,160 --> 00:53:44,560
है रामपाल के नाम करो आश्रम के नाम तो

746
00:53:44,560 --> 00:53:48,560
मतलब हम सब भी हमें दो तो मोहल्ला के जो

747
00:53:48,560 --> 00:53:53,840
हमारे थे ना फिर उन्होंने खदेड़ा उन लोगों को

748
00:53:53,840 --> 00:53:59,840
जी कि हम क्यों आपको सब जी उनके

749
00:54:00,800 --> 00:54:05,040
चिया आपके चिया ससुर के घर से दान गया था ना वो लाख

750
00:54:05,040 --> 00:54:11,040
का चाची ससुर की

751
00:54:11,600 --> 00:54:16,560
किसी को भी पता नहीं चला उनके मरने के बाद पता लगा ओ हो

752
00:54:16,560 --> 00:54:20,800
वो सफाई हुई सीधेसीधे निकली जब पता लगा एक

753
00:54:20,800 --> 00:54:25,760
बहन कह रही है कि मेरी मम्मा एंड पापा ने भी तीन साल में

754
00:54:25,760 --> 00:54:30,080
तीन से चार लाख दान किए। ओ अच्छा

755
00:54:30,080 --> 00:54:36,080
नहीं और ये बोलते हैं कि ये जितने भी ब्राह्मण है ये लूट रहे हैं।

756
00:54:36,400 --> 00:54:40,800
हां आरोप इस तरीके से लगा रहे हैं। अच्छा मैंने एक बात सुनी थी

757
00:54:40,800 --> 00:54:45,040
कि जब वहां से नाम दान लेते हैं तो उनका एक ये रहता है कि आप

758
00:54:45,040 --> 00:54:51,040
अपने आय का 10% वहां दान करना है। क्या बात सच है?

759
00:54:51,040 --> 00:54:55,200
और ये लोग पहाड़ी जी ये लोग ये भी कहते हैं जो ज्यादा दान

760
00:54:55,200 --> 00:54:59,520
करेगा वो सतलोक में जाएगा। सतलोक इसका मतलब सतलोक में प्लॉट

761
00:54:59,520 --> 00:55:02,480
बांटे जा रहे हैं।

762
00:55:02,480 --> 00:55:07,600
हां मतलब ये लोग कह रहे

763
00:55:07,600 --> 00:55:11,440
नहीं

764
00:55:11,440 --> 00:55:15,440
उनकी मैंने सुनी है कि दान किसी को नहीं देना है तो यहां दान क्यों

765
00:55:15,440 --> 00:55:19,600
देना है फिर सतलोक के लिए अच्छा

766
00:55:19,600 --> 00:55:23,680
सतलोक के लिए सतलोक में अच्छा भाई साहब मैं ये कह

767
00:55:23,680 --> 00:55:28,240
रहा था बहन जी आपके जो हमारे पतिदेव

768
00:55:28,240 --> 00:55:32,480
है जो आपके पतिदेव है उनसे कहिए वो वो बातें स्वयं करें

769
00:55:32,480 --> 00:55:36,800
ना नहीं तो ये लोग ऐसे कहने लगेंगे कोई उन्हें समझा रहा था

770
00:55:36,800 --> 00:55:41,520
तो वो बातें स्वयं बोल देवा भाई बात

771
00:55:41,520 --> 00:55:46,320
जी भाई नमस्कार नमस्कार जय श्री राम

772
00:55:46,320 --> 00:55:50,640
जय श्री राम

773
00:55:50,640 --> 00:55:53,760
जी

774
00:55:53,760 --> 00:55:57,200
बताएं

775
00:55:57,200 --> 00:56:01,440
अच्छा वो एक व्यक्ति थे जिनोंने दान नाम दान लिया था इनका

776
00:56:01,440 --> 00:56:05,520
रामपाल जी का जी तो उन लोगों को मैंने

777
00:56:05,520 --> 00:56:09,680
समझाया वो दुकान पे आते थे हमारे तो वही

778
00:56:09,680 --> 00:56:13,920
रामपाल ही रामपाल की बात करते थे वहां से ये हो जाता है वहां से कैंसर सही हो गया

779
00:56:13,920 --> 00:56:18,560
ये हो गया वो हो गया बहुत सारी बातें करते थे वो लोग

780
00:56:18,560 --> 00:56:22,560
सही समझाया मैंने अच्छी तरह से ये बताओ पहले तो ग्रंथों को जैसे उन्होंने जो

781
00:56:22,560 --> 00:56:26,560
पुस्तक लिख दी है वो तुमने पढ़ ली अब उसका तुम

782
00:56:26,560 --> 00:56:30,720
देखो तो अच्छी तरह से ग्रंथों में वो ग्रंथों में माहिर है। उसने

783
00:56:30,720 --> 00:56:35,680
मिलान किया कुछ गड़बड़ मिला उसे उसने छोड़ दी। अच्छा

784
00:56:35,680 --> 00:56:39,680
हां बहुत आसान है अरे मैं तो सोच मैं तो ये

785
00:56:39,680 --> 00:56:43,680
सोचता हूं इनके ही ग्रंथों के जो सिद्धांत है आप नोट

786
00:56:43,680 --> 00:56:46,960
कर लो बस एक जगह।

787
00:56:46,960 --> 00:56:51,280
आप ये जो चीजें बोल रहे हैं ना उनको एक जगह नोट कर लो। फिर इनके ही किताबें

788
00:56:51,280 --> 00:56:55,360
जब पढ़ोगे ना तो उन सारे सिद्धांतों का खंडन इनकी ही किताबों

789
00:56:55,360 --> 00:56:59,600
में मिल जाएगा। अपनी किताब नहीं खोलनी पड़ेगी।

790
00:56:59,600 --> 00:57:05,600
आप लिख लो बस ये क्या बोल रहे हैं उनको लिख लो।

791
00:57:05,920 --> 00:57:10,800
तो नहीं ये लोग बहुत जिद्दी है जिद बहुत किसी की बात मानते नहीं है कुछ

792
00:57:10,800 --> 00:57:14,880
वो कहेंगे नहीं वही सही है वो तो जो ये कहे वो सही

793
00:57:14,880 --> 00:57:20,090
है अपन लोग कुछ भी कह दे ना वो हम

794
00:57:20,090 --> 00:57:26,090
[संगीत]

795
00:57:26,320 --> 00:57:32,320
जब सामने वाले की बात माननी नहीं है तो परमाण

796
00:57:32,960 --> 00:57:37,280
कोई मतलब नहीं रहता उनको किसी की बात मानते ही नहीं है। हमारी माता जी तो ऐसी है

797
00:57:37,280 --> 00:57:41,280
कि वो जो बातें कह देंग उसमें जो उन्होंने कह दिया जो

798
00:57:41,280 --> 00:57:46,240
उनके वो होते हैं वो क्या होते गुरु जी नहीं

799
00:57:46,240 --> 00:57:51,040
इन्ह क्या कुछ इन्होंने सत्संग

800
00:57:51,040 --> 00:57:55,200
होते हैं सत्संग में कुछ बातें होती है तो सत्संग में कोई बातें

801
00:57:55,200 --> 00:57:59,600
पढ़ी पढ़ी लिखी तो है नहीं सत्संग में जो उन्होंने किसी ने

802
00:57:59,600 --> 00:58:03,600
उनके जो होते हैं गुरु उन्होंने कुछ कह दिया कि जे सही जे जो बस

803
00:58:03,600 --> 00:58:09,360
वही कहते रहेंग उनको सही प्रमाण भी दो फिर भी नहीं मानती है वो

804
00:58:09,360 --> 00:58:14,320
बिल्कुल पता है जितना वहां उनको पढ़ाया गया है

805
00:58:14,320 --> 00:58:18,640
उसके आगे पीछे का बिल्कुल नहीं पढ़ाया गया देखो आधी अधूरी बात से जानकारी

806
00:58:18,640 --> 00:58:21,040
पूरी नहीं मिलती है

807
00:58:21,040 --> 00:58:25,200
यही है कि भैंस की पूंछ दिखा के रामपाल जी ने ये कह दिया कि ये

808
00:58:25,200 --> 00:58:29,360
देखो ये हाथी की पूंछ है मेरे पास हाथी है

809
00:58:29,360 --> 00:58:33,680
पर उसका पूरा शरीर दिखाया नहीं हां हां

810
00:58:33,680 --> 00:58:37,840
और इसे भ्रमित करना कहते हैं। जैसे

811
00:58:37,840 --> 00:58:40,480
एक जगह

812
00:58:40,480 --> 00:58:44,640
बहुत से जगह में इन्होंने जैसे शिव पुराण का एक एग्जांपल ले लेते हैं। सदा शिव

813
00:58:44,640 --> 00:58:48,640
को काल कह दिया इन लोगों ने कहीं पर शिव को भी काल कह दिया। अब

814
00:58:48,640 --> 00:58:53,440
इनसे प्रमाण मांगो तो बोलते है की यही सदा शिव

815
00:58:53,440 --> 00:58:57,600
काल रूपी लिखा है यहां पर। पर जस्ट उसके नीचे

816
00:58:57,600 --> 00:59:01,920
ही एक लाइन और लिखी कि जो सदा शिव है वही शिव है वही ब्रह वही शंभू

817
00:59:01,920 --> 00:59:06,640
है वही महेश है वही रुद्र है

818
00:59:06,640 --> 00:59:10,720
अब ये नहीं पढ़ा के वो आगे निकल जाते हैं ये तो अधूरा ज्ञान हो गया ना

819
00:59:10,720 --> 00:59:15,120
जब ज्ञान दे रहे हो तो पूरा ज्ञान दो सामने वालों को अच्छा

820
00:59:15,120 --> 00:59:19,600
कभी आप नहीं नहीं इसमें मैं एक बात कहना चाहूंगा

821
00:59:19,600 --> 00:59:23,760
जब इनकी किताब पढ़ी जाएगी तो उसमें जरूर बीच

822
00:59:23,760 --> 00:59:27,520
ये भी लिखा है वो भी लिखा है ये नहीं पढ़ा

823
00:59:27,520 --> 00:59:32,480
आपको याद है हमने एक ये ट्रिक खेली थी एक बार कि

824
00:59:32,480 --> 00:59:36,560
इनकी ही गरिमा गीता की में लिखा है शायद कि

825
00:59:36,560 --> 00:59:40,560
ब्रज का अर्थ आना होता है। हालांकि वो बात सही

826
00:59:40,560 --> 00:59:44,640
है कि उससे जस्ट पहले रामपाल जी ने ये लिखा है वहां पर कि हम जो

827
00:59:44,640 --> 00:59:48,720
है यहां पर इस की गीता दिखा रहे हैं। हम अगर यह बात ना पढ़े

828
00:59:48,720 --> 00:59:54,720
उनकी हम इस की गीता दिखा रहे हैं तो इनकी गीता में भी लिखा है ब्रजकार ताना

829
00:59:55,200 --> 00:59:59,360
तो अगर हमको केवल अपने मतलब की बात निकालनी है तो हम क्यों पढ़े? रामपाल

830
00:59:59,360 --> 01:00:03,680
की लिखी हुई वो बात जहां पर ये लिखा है कि इस की गीता का वो है अंश।

831
01:00:03,680 --> 01:00:08,000
समझ रहे हैं ना आप मेरी बात? सही है। इनकी किताब पढ़ो

832
01:00:08,000 --> 01:00:12,240
तो पूरी पढ़ो। और हमारी

833
01:00:12,240 --> 01:00:18,000
ग्रंथ जो पढ़े जाएंगे वो अधूरे पढ़े जाएंगे। वाह।

834
01:00:18,000 --> 01:00:22,080
यह वो ये वो बोलते हैं कि हमें उतना ही लेना है यहां से जितना

835
01:00:22,080 --> 01:00:26,960
हमें जरूरत है। और एग्जांपल फॉर क्या बोलते हैं? जैसे हम

836
01:00:26,960 --> 01:00:31,040
उसी मेडिकल स्टोर में गए तो हमें जो बीमारी है हम उसी

837
01:00:31,040 --> 01:00:35,200
की दवाई लेंगे। बाकी की दवाई पूरी मेडिकल स्टोर नहीं उठा लाएंगे।

838
01:00:35,200 --> 01:00:39,360
पर हम यह भी तो नहीं कह सकते कि बाकी की जो दवाइयां रखी है वो बेकार है। वो

839
01:00:39,360 --> 01:00:42,800
किसी काम की नहीं है।

840
01:00:42,800 --> 01:00:47,040
वहां घास तो रखा नहीं होगा। दवाइयां रखी होगी। नहीं नहीं

841
01:00:47,040 --> 01:00:51,040
इसमें मैं और ज्यादा तार्किक उत्तर देता हूं

842
01:00:51,040 --> 01:00:55,200
कि मेडिकल स्टोर में कौन सी दवाई आपके काम की है कौन सी नहीं

843
01:00:55,200 --> 01:00:59,680
काम की है ये तब तय हो सकता है जब आप डॉक्टर हो

844
01:00:59,680 --> 01:01:04,080
आप डॉक्टर नहीं हो ना हां हां आप

845
01:01:04,080 --> 01:01:08,400
डॉक्टर नहीं हो सही बात है बल्कि आपको डॉक्टर कौन है इसको

846
01:01:08,400 --> 01:01:12,640
उस मेडिकल स्टोर में जाकर के आप सिद्ध करना ये दवाई इस डॉक्टर ने अगर लिखी

847
01:01:12,640 --> 01:01:18,640
है जो डॉक्टर ये दवाई लिखेगा वही डॉक्टर असली डॉक्टर है। वाह।

848
01:01:18,960 --> 01:01:24,960
अच्छा मैं ये आपका अपना बात है ना

849
01:01:25,120 --> 01:01:28,400
सुधा महाराज और

850
01:01:28,400 --> 01:01:33,600
अच्छा ये लोग इनके चैन छे चलो ठीक है।

851
01:01:33,600 --> 01:01:39,360
ठीक है। मैं एक बात पूछना चाहूंगा। आप लोग कभी आश्रम गए हो इनके?

852
01:01:39,360 --> 01:01:43,360
नहीं मैं नहीं गया था। अच्छा मतलब संत रामपाल

853
01:01:43,360 --> 01:01:48,800
जी महाराज से जुड़ने से पहले कैसा व्यवहार था और जुड़ने के बाद कैसा व्यवहार रहा उनका?

854
01:01:48,800 --> 01:01:52,800
जुड़ने के पहले उनका बहुत अच्छा व्यवहार था। सबके साथ बैठती थी। खाना पीना खाती

855
01:01:52,800 --> 01:01:56,880
थी। जब से उनका है जो रामपाल जी जुड़ गई है तब तो

856
01:01:56,880 --> 01:02:01,440
सबसे अलग सी रहती है। बिल्कुल इससे कोई मतलब नहीं है ज्यादातर।

857
01:02:01,440 --> 01:02:05,520
अह और घर में कोई पूजा हो तो उनका

858
01:02:05,520 --> 01:02:09,760
खाना पहले निकाल दिया जाता है। पूजा के पूजा में बाद में।

859
01:02:09,760 --> 01:02:14,720
अच्छा अच्छा ये भोग भी लगाते हैं क्या उनको?

860
01:02:14,720 --> 01:02:18,960
हां वही से मिलते हैं। कोई प्रसाद मिलता है वो भोग लगाती है। नहीं नहीं नहीं

861
01:02:18,960 --> 01:02:23,040
मैं घर की बात कर रहा हूं। जैसे घर में खाना भोजन करने से पहले जैसे

862
01:02:23,040 --> 01:02:27,600
हम लोग ईश्वर को जो भी है

863
01:02:27,600 --> 01:02:31,600
भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाते हैं। जैसे बहुत से लोग तो ये भी भोग लगाते

864
01:02:31,600 --> 01:02:35,600
हैं क्या घर में? नहीं थाली में नहीं लगाते। अपनी जो खाने

865
01:02:35,600 --> 01:02:41,600
की थाली होती है ना उसी में एक को डोल का रख देती उसी में लगा

866
01:02:44,160 --> 01:02:48,560
क्योंकि इन्होंने इन्होंने बहुत जगह इसका खंडन

867
01:02:48,560 --> 01:02:52,560
किया हुआ है कि क्या ईश्वर के आगे थाल रखने से ईश्वर को भोजन करने

868
01:02:52,560 --> 01:02:58,400
से क्या ईश्वर खा लेगी क्या मूर्ति नहीं लगाती हूं

869
01:02:58,400 --> 01:03:02,480
क्यों लगाती हो भाई वो तो बेचारे जेल में रोटी तोड़

870
01:03:02,480 --> 01:03:06,720
रहे हैं जेल वाली बहुत निकृष्ट स्तर

871
01:03:06,720 --> 01:03:12,720
की रोटियां होती है वहां पर

872
01:03:12,960 --> 01:03:17,120
यहां पे गांव का देसी यहां पे गांव का देसी खाना उनकी फोटो

873
01:03:17,120 --> 01:03:21,120
को परोसा जा रहा है क्या बात है भाई

874
01:03:21,120 --> 01:03:27,120
भाई उनके कहने के मुताबिक तो वो लीला कर रहे हैं

875
01:03:28,800 --> 01:03:32,960
लीला कष्ट में सह के नहीं करी जाती है लीला जो है अगर लीला

876
01:03:32,960 --> 01:03:37,440
ही कर रहे होते तो नौ नौ वकील नहीं लगाए होते अपने बेल के लिए अपने

877
01:03:37,440 --> 01:03:41,440
इसके लिए अरे लीला कर रहे होते तो यह थोड़ी ना कहते कि

878
01:03:41,440 --> 01:03:46,480
भैया मैं बीमार था अभी सही हो गया हूं बिल्कुल

879
01:03:46,480 --> 01:03:50,560
गुमराह कर रहे और आपकी जो है वो हो रही है चश्मा

880
01:03:50,560 --> 01:03:54,800
लगाना पड़ रहा है आपको क्यों लगाना पड़ रहा है भाई आप तो 16 बरस

881
01:03:54,800 --> 01:04:00,800
के बने रहो ना हां सही बात है ये तो

882
01:04:01,600 --> 01:04:05,600
ये तो सही बात है जो जो ईश्वर होता है उतना तो बूढ़ा होता है

883
01:04:05,600 --> 01:04:09,600
वो उसको है अभी आप देख लो रामपाल की

884
01:04:09,600 --> 01:04:15,360
पुरानी फोटो देखो आज की फोटो देखो बुढ़ापा दिख जाएगा आपको

885
01:04:15,360 --> 01:04:19,680
शिवांश भैया मुझे सतलोक में मस्त सस्ते फ्लैट

886
01:04:19,680 --> 01:04:23,680
चाहिए आपका तो संपर्क है कुछ कुछ शूट करा देंगे

887
01:04:23,680 --> 01:04:28,480
शूट नहीं हमारा नाम ले लोगे सतलोक में तो एंट्री नहीं मिलेगी

888
01:04:28,480 --> 01:04:33,200
बादाम काजू बंद हो जाएगा आवान का नाम ले लिया तो बस वहां

889
01:04:33,200 --> 01:04:37,520
कट चाहे जितनी तुमने भक्ति करी हो जो भी पैसा रहता है

890
01:04:37,520 --> 01:04:41,920
मां वहां प्रदान करती है जो भी ये क्या हुआ

891
01:04:41,920 --> 01:04:45,920
दिवाली अभी पहले तो मैं ये पूछूंगा आपसे कि अभी आपके पास रहने की

892
01:04:45,920 --> 01:04:50,960
व्यवस्था तो है ना नहीं तो हम लोग कुछ ना कुछ व्यवस्था

893
01:04:50,960 --> 01:04:55,040
है कुछ नहीं वो तो व्यवस्था तो

894
01:04:55,040 --> 01:04:59,360
है रहने की हम उन्होंने तो उन्होंने क्योंकि

895
01:04:59,360 --> 01:05:03,440
आपको निकाल ही दिया घर से दिया घर पर नहीं

896
01:05:03,440 --> 01:05:07,840
आना। जी जी। अच्छा

897
01:05:07,840 --> 01:05:13,840
और एक चीज और पूछ रहा था कि ये

898
01:05:14,400 --> 01:05:18,800
जो आप उस दिन एक्सैक्ट क्या हुआ था? थोड़ा सा उस वृतांत को थोड़ा क्लियर बताएंगी

899
01:05:18,800 --> 01:05:22,800
कि क्या हुआ था जो उनको आपको इतना वो गुस्सा आ गया जो उन्होंने आपको

900
01:05:22,800 --> 01:05:26,960
निकाल दिया। अरे हुआ ये था कि मतलब हमारे चाचा

901
01:05:26,960 --> 01:05:31,120
ससुर थे ना तो उनको लगा करंट। करंट से उनकी मौत

902
01:05:31,120 --> 01:05:35,520
हो गई। वो भी दीक्षा लिए हुए थे। तो हमने उनसे

903
01:05:35,520 --> 01:05:39,840
हमने उनसे कहा अगर मतलब हमारे उनसे नन्हा कहा जाता नन्ना

904
01:05:39,840 --> 01:05:43,920
अगर रामपाल की दीक्षा ली हुई थी और वो भगवान है तो

905
01:05:43,920 --> 01:05:47,920
दो मिनट के लिए लाइट चली जाती। वो अपने भक्त की

906
01:05:47,920 --> 01:05:52,000
कह सकते हैं ना। आपको एक बात बताऊं मैं इस

907
01:05:52,000 --> 01:05:56,160
बात में रामायण में यह लिखा हुआ है

908
01:05:56,160 --> 01:06:00,480
कि आपके आसपास यदि किसी की अकाल मृत्यु होती है

909
01:06:00,480 --> 01:06:04,800
तो समझ जाइए कि गलत तरीके से पूजा पाठ हो रहा है।

910
01:06:04,800 --> 01:06:08,800
हां हां हां और ये रामायण में लिखा हुआ

911
01:06:08,800 --> 01:06:13,120
है जी हमारी माता मृत्यु हुई थी उनकी

912
01:06:13,120 --> 01:06:16,240
अकाल मृत्यु

913
01:06:16,240 --> 01:06:20,560
वही पांच लाख दान करके आए थे हमारे

914
01:06:20,560 --> 01:06:24,560
नन्हा एक लाख दान करके आए थे। इसके बाद उनको करंट लग गया

915
01:06:24,560 --> 01:06:29,200
तो वो खत्म हो गए। और फिर हमारी जैसे हमारी अम्मा

916
01:06:29,200 --> 01:06:29,700
हमारी

917
01:06:29,520 --> 01:06:34,080
मौसी सास को बुआ सास को ले गई थी धनाना आश्रम दीपावली

918
01:06:34,080 --> 01:06:38,320
के पहले कोई भंडारा था इन लोगों का तो जी

919
01:06:38,320 --> 01:06:42,560
लेके गई तो फिर मतलब उसी टाइम पे हम लोग भी पहुंच गए तो ऐसी बातें

920
01:06:42,560 --> 01:06:46,720
हो रही थी चार छह जनी औरतें भी बैठी थी बाहर तो हमारी

921
01:06:46,720 --> 01:06:50,960
सासू मां मतलब उनका माइंड वाश कर रही थी बुआ

922
01:06:50,960 --> 01:06:55,440
का और मौसी का तो ऐसी बातें होने लगी तो हमने आपकी डिबेट लगा दी

923
01:06:55,440 --> 01:06:59,760
हमने अब सुनो ये तो मतलब उनको आपकी

924
01:06:59,760 --> 01:07:04,000
बात में सच्चाई लगी बोली अब हम नहीं लेंगे दीक्षा तो

925
01:07:04,000 --> 01:07:08,560
हमारी अम्मा तो इतनी वो नाराज हो गई उनकी बात

926
01:07:08,560 --> 01:07:14,560
हमारी अम्मा तो इतनी लाल पीली हो गई के हद से ज्यादा

927
01:07:15,040 --> 01:07:19,200
वो झगड़ा किया बस बोली अब हमारे यहां यहां पर मत आना।

928
01:07:19,200 --> 01:07:23,280
इनसे बोली जाओ फलाने और हमारे घर पर मत आना। हटो यहां से

929
01:07:23,280 --> 01:07:27,440
बैग हटा दिया। चलो भैया मां है क्या कह सकते हैं?

930
01:07:27,440 --> 01:07:33,440
निकल आए।

931
01:07:34,400 --> 01:07:36,720
बिल्कुल।

932
01:07:36,720 --> 01:07:41,040
उन्होंने बहुत मतलब बहुत हम बहुत प्रतार्थ करती हैं कि चलो आश्रम

933
01:07:41,040 --> 01:07:45,600
तुम बहुत परेशान हो। आश्रम चलो तुम्हारे जो कष्ट दूर हो जाए।

934
01:07:45,600 --> 01:07:49,760
तो हमारे हम लोग ये कह थे अगर मसूड़े फूलने से कैंसर हो गया

935
01:07:49,760 --> 01:07:53,760
था तो हम लोगों को पता ही नहीं चला। अब कैंसर बना

936
01:07:53,760 --> 01:07:57,840
रहा अच्छा उनसे उनसे कहिएगा तुम्हारी कैंसर

937
01:07:57,840 --> 01:08:02,160
की कोई रिपोर्ट है क्या जांच की वो हमें दे दो जरा

938
01:08:02,160 --> 01:08:06,400
अरे भैया कुछ भी नहीं है। हम लोगों ने खुद इलाज कराया है मसूड़ा खोलता

939
01:08:06,400 --> 01:08:12,240
था। हम लोगों ने खुद इलाज कराया है मसूड़े का और वो बता दें कैंसर।

940
01:08:12,240 --> 01:08:16,400
कहीं इनका इंटरव्यू लेकर कहीं वो वीडियो में तो नहीं लगाया कहीं पर मैं देख रहा था

941
01:08:16,400 --> 01:08:20,480
कुछ कुछ वीडियो की मुझे कैंसर था ये था बहुत से और ये

942
01:08:20,480 --> 01:08:24,720
लोग करते हैं ड्रामेबाजी किया करते हैं ये लोग ऐसा वीडियो बनाते रहते

943
01:08:24,720 --> 01:08:28,720
हैं इन लोगों की हम बहुत ज्यादा वीडियो देखते हैं ये बताते हैं

944
01:08:28,720 --> 01:08:30,080
मतलब जेलधाम से

945
01:08:30,080 --> 01:08:34,320
हमारे गुरु जी अस्पताल में आए उन्होंने सही कर दिया ऐसा

946
01:08:34,320 --> 01:08:40,320
वैसा तो हम आपको यही बताना चाहते हैं जो लोग पूरा पूरा झूठ बोलते हैं

947
01:08:40,400 --> 01:08:45,440
जी आज आज एक चीज बात पता चली कि

948
01:08:45,440 --> 01:08:49,440
रामपाल द्वारा जो ईश्वर है उनकी भक्ति करने

949
01:08:49,440 --> 01:08:53,840
से भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि 5 लाख दान करने के बाद भी अकाल

950
01:08:53,840 --> 01:08:58,080
मृत्यु प्राप्त हुई उनको अकाल मृत्यु मर गया और ये रामायण

951
01:08:58,080 --> 01:09:02,160
में लिखा है कि जिस घर में अकाल मृत्यु हो जाए आपके आसपास

952
01:09:02,160 --> 01:09:06,480
यदि अकाल मृत्यु हो रही है आजकल देखिए ये जो विप्लव है क्यों है

953
01:09:06,480 --> 01:09:10,480
आज जो एक विप्लव का माहौल है पूरे उसमें उसमें

954
01:09:10,480 --> 01:09:15,360
क्यों है? क्योंकि गलत तरीके से भी पूजा पाठ अगर करोगे

955
01:09:15,360 --> 01:09:19,600
तो उसका भी परिणाम यही होगा। ना जी लोग मतलब

956
01:09:19,600 --> 01:09:23,600
कोई भाजन आ जाए या हमारी मतलब खुद की बिटियां उनकी हमारी

957
01:09:23,600 --> 01:09:27,680
नंदे आ जाए उनकी बिटियां तो उनको कोई मतलब नहीं है लड़कियों से ना किसी

958
01:09:27,680 --> 01:09:31,680
के पांव छूना कुछ नहीं चाहे बिटियां रोती रहे। लेकिन कोई मतलब इतनी

959
01:09:31,680 --> 01:09:35,920
नष्ट हो जाते हैं जो लोग के हद से ज्यादा। मतलब

960
01:09:35,920 --> 01:09:40,400
हमारी बहन जी ससुर के हैं सात साल के आते हमारे

961
01:09:40,400 --> 01:09:44,800
पतिदेव जब खत्म हो गए थे ससुर तो बहुत निष्टपना

962
01:09:44,800 --> 01:09:47,120
होगा उनमें

963
01:09:47,120 --> 01:09:51,120
जी भाई कोई आना चाहता है लाइव में

964
01:09:51,120 --> 01:09:55,120
तो आ सकता है अपने चेहरे के साथ अपने सिद्धांतों

965
01:09:55,120 --> 01:09:59,360
को वो करने और

966
01:09:59,360 --> 01:10:04,080
वो कमेंट में वो दे दीजिए

967
01:10:04,080 --> 01:10:09,280
अह

968
01:10:09,280 --> 01:10:13,440
तो अभी आप लोगों का जीवन ठीक चल रहा है ना बहन जी कोई

969
01:10:13,440 --> 01:10:17,440
किसी प्रकार की सहायता अथवा आवश्यकता की वो हो आवश्यकता हो

970
01:10:17,440 --> 01:10:21,600
तो हमसे जरूर संपर्क करिएगा आपके बहुत सारे भाई हैं जो

971
01:10:21,600 --> 01:10:25,600
जो भी बन पड़ेगा हम अवश्य करेंगे है ना आप अपने आप को

972
01:10:25,600 --> 01:10:29,680
अकेला ना समझिएगा बालाजी कृपा सबको ठीक

973
01:10:29,680 --> 01:10:34,720
चल रहा है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया

974
01:10:34,720 --> 01:10:39,040
इसीलिए कहते हैं बालाजी के भक्त इसीलिए कहते

975
01:10:39,040 --> 01:10:43,520
हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

976
01:10:43,520 --> 01:10:47,680
में अभी जो हमारे बा धाम की पद यात्रा

977
01:10:47,680 --> 01:10:51,840
गई थी ना तो उन लोगों ने खुद कहा अम्मा चलो पद यात्रा में चार ही कदम चलो

978
01:10:51,840 --> 01:10:55,920
नहीं हम नहीं जाएंगे हमें आदेश नहीं है अच्छा वो

979
01:10:55,920 --> 01:11:00,640
और कह रहा था मैं कि अ

980
01:11:00,640 --> 01:11:02,320
जो आपकी जो छूटी मतलब

981
01:11:02,320 --> 01:11:07,120
उस दिन जो आपने हमारा वीडियो दिखाया था और वीडियो

982
01:11:07,120 --> 01:11:11,200
दिखाने के बाद वो जो उनका मन बदल गया कि नहीं अब मैं नहीं देखूंगी अब मैं नहीं

983
01:11:11,200 --> 01:11:15,360
लूंगी दीक्षा तो वो वीडियो देखने के बाद फिर आपको

984
01:11:15,360 --> 01:11:20,800
जब उन्होंने निकाल दिया तो उसके बाद उनका मन तो नहीं बदल गया कि नहीं मैं ले लेती हूं दीक्षा

985
01:11:20,800 --> 01:11:25,200
ना ना अब नहीं बदला है हम सब कहे रहते हैं बात कहते

986
01:11:25,200 --> 01:11:29,520
अच्छा अच्छा चलिए हमारे वीडियो से कुछ तो

987
01:11:29,520 --> 01:11:34,480
ऐसा हुआ कि भाई कहीं पे कोई व्यक्ति फंसने से बच गया

988
01:11:34,480 --> 01:11:38,560
गया बस बहुत भगवान की कृपा है जी पहाड़ी

989
01:11:38,560 --> 01:11:42,720
जी भगवान की कृपा है कि हमारे वीडियोस कुछ तो काम आए कहीं एक व्यक्ति तो

990
01:11:42,720 --> 01:11:47,840
बचा बिल्कुल जैसे फूल बनाते वक्त

991
01:11:47,840 --> 01:11:51,920
जब श्री राम जी का फूल बन रहा था तो एक गिलहरी थी छोटी सी वो

992
01:11:51,920 --> 01:11:55,920
भी सहायता कर रही थी तो पूछा कि तुम तो छोटी सी हो तुम क्या

993
01:11:55,920 --> 01:12:00,080
सहायता करोगे इस पुल बनाने में तो गिलहरी ने जवाब दिया था ना

994
01:12:00,080 --> 01:12:04,240
कि मेरा नाम तो आएगा ना इधर रामायण में

995
01:12:04,240 --> 01:12:08,560
तो यही काम हम कर रहे हैं। मतलब लोग भोले

996
01:12:08,560 --> 01:12:12,720
बाबा के बारे में हनुमान जी के बारे में बहुत गलत शब्द बोलते हैं तो सहन

997
01:12:12,720 --> 01:12:16,880
नहीं होते। जी जी जी नहीं देखिए

998
01:12:16,880 --> 01:12:17,440
वो ऐसा

999
01:12:17,440 --> 01:12:22,160
है ना कर्म निवादी कारस्ते मा फलेशु गदाचन।

1000
01:12:22,160 --> 01:12:24,560
चलिए

1001
01:12:24,560 --> 01:12:28,880
यह एक भाई साहब आए हैं। जय श्री राम राज नागर जी आपको बताएं अपना

1002
01:12:28,880 --> 01:12:34,480
परिचय। जी जय श्री राम जय श्री राम

1003
01:12:34,480 --> 01:12:39,040
जी राज नागर जी बोले एक

1004
01:12:39,040 --> 01:12:43,040
अरे एक किताब है इनकी जिसमें लिखा हुआ है जैसे इनके क्या तर्क रहते

1005
01:12:43,040 --> 01:12:47,040
हैं ना कि भाई ये ऐसा कर सकते हैं वैसा कर सकते हैं

1006
01:12:47,040 --> 01:12:51,040
उसमें एक जगह लिखा हुआ था कि भ ये क्या है कि किसी कोई कथा थी तो उसमें लिखा

1007
01:12:51,040 --> 01:12:55,040
हुआ था कि भाई इन्होंने क्या किसी की मतलब जैसे दो भाई

1008
01:12:55,040 --> 01:13:00,320
थे तो उनको गोली लगी थी तो गोली आके रामपाल ने रोक ली थी

1009
01:13:00,320 --> 01:13:05,680
अच्छा चक्कर में हां

1010
01:13:05,680 --> 01:13:11,680
भाई वो बोल रहे थे जैसे नहीं आता कि वो आजकल ऐड आते हैं कि

1011
01:13:11,680 --> 01:13:15,920
यहां पर राम प्रकट हुआ फिर उसने गोली रोक ली उस चक्कर में

1012
01:13:15,920 --> 01:13:20,640
यहां पर क्या है प्रोग्राम था कोटा के कोटा के पास में

1013
01:13:20,640 --> 01:13:24,720
वहां पर किसी ने जाके और उसको

1014
01:13:24,720 --> 01:13:29,120
प्रोग्राम में रमे नहीं हो रही थी शादी वहां पर

1015
01:13:29,120 --> 01:13:32,720
वहां पर शादी हो रही थी तो वहां पर लड़ाई झगड़ा हो गया किसी बजरंग

1016
01:13:32,720 --> 01:13:37,680
दल वालों के और इनके तो उन्होंने गोली चला दी

1017
01:13:37,680 --> 01:13:43,680
और उसमें एक आदमी रामपाल जी का भगत खत्म हो गया।

1018
01:13:45,440 --> 01:13:49,440
अब उसने भी बोल दिया कि भाई जब यार मैं तो यह चेक करने आया था कि

1019
01:13:49,440 --> 01:13:53,600
भाई यहां पर जो इसमें लिखा हुआ है कि भाई रामपाल आया

1020
01:13:53,600 --> 01:13:58,080
क्यों नहीं अब तो

1021
01:13:58,080 --> 01:14:02,240
वहां पर यही हुआ है कि भाई रामपाल आया क्यों नहीं जब इस किताब में लिखा

1022
01:14:02,240 --> 01:14:06,400
हुआ है इनकी में कि भाई रामपाल ने आके एक की जान बचा

1023
01:14:06,400 --> 01:14:10,800
ली गोली लगने से तो मैंने भी गोली चलाई थी आज क्यों नहीं आया

1024
01:14:10,800 --> 01:14:16,800
तो इनका तर्क था कि वो भी जेल में है

1025
01:14:17,760 --> 01:14:21,920
नहीं भाई देखिए एक मिनट बहन जी

1026
01:14:21,920 --> 01:14:26,080
एक मिनट भाई साहब अगर आपको कोई समस्या है आप ऊपर आकर के

1027
01:14:26,080 --> 01:14:30,320
बात कर सकते हैं चेहरे के साथ यदि डरपोक है कायर है बचपन

1028
01:14:30,320 --> 01:14:34,400
में माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिया है तो एक बार कर दीजिए

1029
01:14:34,400 --> 01:14:38,400
कमेंट और बार-बार ना करें ठीक है एक बार की छूट है

1030
01:14:38,400 --> 01:14:42,640
एक बार कर दीजिए बार-बार एक ही कमेंट कॉपी पेस्ट ना करें कमेंट

1031
01:14:42,640 --> 01:14:47,120
और जी बहन जी बताएं वीडियो भी

1032
01:14:47,120 --> 01:14:51,600
वीडियो भी भेजूंगा एक तो हमारी अम्मा बताती है इनकी तो मैं नहीं होती है

1033
01:14:51,600 --> 01:14:56,160
सारा एक वीडियो है न्यूज़ चैनल पे

1034
01:14:56,160 --> 01:15:00,240
जी तो लड़का लड़की को एक कमरे में भेज

1035
01:15:00,240 --> 01:15:04,240
देते हैं वहां से एक धागा पहना देता है लड़का और हो गई

1036
01:15:04,240 --> 01:15:08,960
शादी क्या कर देता है एक मिनट दोबारा बताइए जरा

1037
01:15:08,960 --> 01:15:13,600
एक धागा पहना देते हैं गले में और हो गई शादी

1038
01:15:13,600 --> 01:15:17,680
और कुछ नहीं उनका लॉकेट होता है किसी

1039
01:15:17,680 --> 01:15:22,320
के यहां पर मेरा मेरी आवाज रिपीट आ रही है किसी के यहां मोबाइल चल रहा है तो

1040
01:15:22,320 --> 01:15:26,320
एक मिनट एक मिनट किसी के यहां पर मोबाइल चल रहा है इसमें मेरी आवाज

1041
01:15:26,320 --> 01:15:32,240
मुझे वापस सुनाई दे रही है चल रहा है क्या

1042
01:15:32,240 --> 01:15:32,960
ठीक है नहीं

1043
01:15:32,960 --> 01:15:38,160
चल रहा नहीं तो ये मतलब कैसे ये जैसे कोई

1044
01:15:38,160 --> 01:15:42,320
वर पक्ष और वधू पक्ष एकत्रित होता है मंदिर में क्या होता है थोड़ा बताएं डिटेल

1045
01:15:42,320 --> 01:15:46,880
में कैसे होती है वो शादी रमेनी होती है तो मतलब

1046
01:15:46,880 --> 01:15:51,120
इकट्ठा होते हैं तो एक लड़का मतलब जो वर है और वधू

1047
01:15:51,120 --> 01:15:55,120
दोनों को एक कमरे में अंदर कर दिया जाता है और एक धागा पहना दिया

1048
01:15:55,120 --> 01:15:58,480
जाता है बस

1049
01:15:58,480 --> 01:16:02,640
और बाहर निकाल के बस हो गई शादी और ये शास्त्र

1050
01:16:02,640 --> 01:16:06,640
सम्मत कहां लिखा है कि ऐसे होनी है शादी ये कहां लिखा है शास्त्रों

1051
01:16:06,640 --> 01:16:09,280
में

1052
01:16:09,280 --> 01:16:13,440
भाई चलो तुम भक्ति कराओ नाम बताओगे वो सब बातें

1053
01:16:13,440 --> 01:16:19,440
तो अलग है। शादी ऐसे होनी है। यह कहां लिखा है?

1054
01:16:21,440 --> 01:16:25,440
मतलब इनकी शादी जो है शास्त्र नहीं है। जी

1055
01:16:25,440 --> 01:16:31,120
जी जी समझ गया मैं समझ गया।

1056
01:16:31,120 --> 01:16:35,280
ना जी पांव में बिछिया पहनती जी

1057
01:16:35,280 --> 01:16:39,440
जी हां बोलिए बोलिए बोलिए आप बोलिए बहन जी बोलिए ना

1058
01:16:39,440 --> 01:16:43,440
पैरों में बिछिया पहनती है ना गले में मंगलसूत्र पहनती है मतलब ऐसे ही

1059
01:16:43,440 --> 01:16:48,240
रहती है दोद चूड़ी डाल के जी

1060
01:16:48,240 --> 01:16:53,040
कहती है हमें गुरु जी का आदेश नहीं है कुछ पहन मैंने

1061
01:16:53,040 --> 01:16:57,040
देखा है कि जो एक वो क्या नाम से ठाकुर

1062
01:16:57,040 --> 01:17:01,840
नाम को लज्जित करने वाली एक मातृ शक्ति है जो

1063
01:17:01,840 --> 01:17:05,840
हमारे विरोध में डेली वो बना रही है। उस उसको मैंने किसी किसी वीडियो

1064
01:17:05,840 --> 01:17:10,320
में बिंदी लगाए हुए और कानों में कुछ पहने हुए भी देखा है।

1065
01:17:10,320 --> 01:17:14,480
पहाड़ी जी

1066
01:17:14,480 --> 01:17:18,720
जी जी ये कभी ऐसा ऐसा होता है ना कभी-कभी भूल जाते हैं कि हम रामपाल

1067
01:17:18,720 --> 01:17:23,280
जी के शिष्य हैं। कभी-कभी भूल जाते हैं कि हम हम पर रामपाल

1068
01:17:23,280 --> 01:17:29,280
का डाका पड़ चुका है हमारे जीवन में।

1069
01:17:32,480 --> 01:17:36,640
एक सवाल है जो विवाह होता है मतलब कि जो दोनों पक्ष के होते हैं

1070
01:17:36,640 --> 01:17:42,640
वर और पध जो पक्ष के होते हैं सभी ने नाम दान लिया होता है इसका मतलब

1071
01:17:42,800 --> 01:17:46,800
हां वहां पर जो जाते हैं सब नाम दान वाले ही रहते हैं

1072
01:17:46,800 --> 01:17:51,040
एक दूसरे में ही शादी करते हैं वो जात पात नहीं देखते ये

1073
01:17:51,040 --> 01:17:55,200
लाइव स्ट्रीम में पूछा गया था जब ये उधर लाइव स्ट्रीम

1074
01:17:55,200 --> 01:17:59,200
चलाई थी तो हमारे से कोई गए थे तो पूछा था कि क्या मुसलमान से

1075
01:17:59,200 --> 01:18:03,280
तुम अपने बहन बेटियों की शादी कर लोगे? उन्होंने बोला कि हां पहले तो बोला कि हां

1076
01:18:03,280 --> 01:18:07,440
कर लेंगे हम। तो बाद में उनको याद आया कि हमने इसमें कुछ जोड़ना भूल

1077
01:18:07,440 --> 01:18:11,520
गए। बोले क्या जोड़ना भूल गए कि हम शादी उसी से करेंगे जिसने नाम दान

1078
01:18:11,520 --> 01:18:17,520
ले रखा हो उस रामपाल जी से। कोई मुसलमान से बात

1079
01:18:17,520 --> 01:18:21,600
तो ये जातपात की विदाई जो चल रही थी ना आपने एक

1080
01:18:21,600 --> 01:18:25,840
बनाया था आपने वो रखा था उसके उपलक्ष में उन लोगों ने रखा था

1081
01:18:25,840 --> 01:18:29,920
तो फिर आप भी तो यही कर रहे हो ना अपने उधर उसको जोड़ने के बाद ही उससे शादी

1082
01:18:29,920 --> 01:18:34,000
करा रहे हो हां जो रामपाल को मानेगा रामपाल की

1083
01:18:34,000 --> 01:18:38,400
जात का होगा जो जेलधाम जाने वाला होगा उसी से शादी होगी

1084
01:18:38,400 --> 01:18:43,600
हां

1085
01:18:43,600 --> 01:18:47,600
श्याम सुनो जी एक मिनट बहन जी मैं आपसे

1086
01:18:47,600 --> 01:18:51,600
फिर बात करता हूं थोड़ा सा रुक जाइए श्याम स्टूडियो

1087
01:18:51,600 --> 01:18:55,680
श्याम स्टूडियो जी जय श्री राम आवाज नहीं आ रही

1088
01:18:55,680 --> 01:18:59,680
आपकी ये विजय दास विजय दास

1089
01:18:59,680 --> 01:19:03,920
को हटा दीजिए वो अभंत आचरण वाला व्यक्ति है अपर्यादित बातें कर रहा है

1090
01:19:03,920 --> 01:19:07,920
आवाज नहीं आ रही सर अब आ रही है आ रही

1091
01:19:07,920 --> 01:19:12,320
है मैं ग्वालियर से बात कर रहा हूं एमपी प्रदेश से सर ग्वालियर

1092
01:19:12,320 --> 01:19:16,480
से अच्छा क्या बात है मैं आपकी सुनता रहता हूं

1093
01:19:16,480 --> 01:19:20,880
मैं आपसे बहुत सालों से जुड़ा हूं दोनों आपसे अच्छा अच्छा

1094
01:19:20,880 --> 01:19:25,040
बहुत आभार आपने वीडियो बना के डाली थी मेला में आपने उनके खिलाफ

1095
01:19:25,040 --> 01:19:30,000
तब से जुड़ा हूं मैं आपसे अच्छा बहुत आभार

1096
01:19:30,000 --> 01:19:32,880
क्योंकि मुझे बहुत अच्छा लगता है कि कोई खड़ा है हमारे

1097
01:19:32,880 --> 01:19:36,880
लिए कि ऐसे काम कर रहा है क्योंकि हम में इतना सा तो है

1098
01:19:36,880 --> 01:19:40,880
पर इतनी अभी बुद्धि नहीं है कि हम किसी को समझा सके इनको

1099
01:19:40,880 --> 01:19:45,520
जी जी जो कार्य आप कर रहे हैं बहुत अच्छी तरीके से

1100
01:19:45,520 --> 01:19:51,520
जी जी मेरे ससुराल वाले भी जुड़े अच्छा

1101
01:19:52,400 --> 01:19:56,880
2013 से मतलब 2013 में शादी हुई थी तब से जुड़े हैं वो लोग

1102
01:19:56,880 --> 01:20:01,200
तो मैं भी बहुत परेशान हूं उन लोगों से ये देखिए

1103
01:20:01,200 --> 01:20:06,080
एक रामपाल के भक्त की बात करने की मर्यादा देखिए

1104
01:20:06,080 --> 01:20:10,800
आपको दिखाते हैं लोग दावा करते हैं कि रामपाल के भक्त जो होते हैं

1105
01:20:10,800 --> 01:20:14,880
उनका इनका आचरण बहुत हो जाता है। इसको यहां पता है कि यहां पर एक

1106
01:20:14,880 --> 01:20:19,680
मातृशक्ति भी है लाइफ में। मगर इसकी भाषा देखिए क्या है?

1107
01:20:19,680 --> 01:20:23,680
ये है नीचता। यही नीचता सिखाई जाती है क्या आपको आश्रम से

1108
01:20:23,680 --> 01:20:27,680
सतलोक आश्रम से? क्या लिख रहा है? देखो यहां

1109
01:20:27,680 --> 01:20:31,840
मालूम है बीच में एक बहन भी बैठी हुई है। ये बात लिख रहा है।

1110
01:20:31,840 --> 01:20:36,160
ये है रामपाल का रामपाल की शिक्षा।

1111
01:20:36,160 --> 01:20:40,160
है ना? आपको मैं बहुत बढ़िया। नाम रोशन करो

1112
01:20:40,160 --> 01:20:44,400
अपने रामपाल का तत्वदर्शी का नाम रोशन करो और और लिखो तो यहां दिखाएंगे

1113
01:20:44,400 --> 01:20:48,400
फिर से लिखो फिटबॉल जी फिर से लिखो

1114
01:20:48,400 --> 01:20:54,400
फिर यहां दिखाएंगे रामपाल सिखा रहा है खेल धाम से लिखो

1115
01:20:55,120 --> 01:20:59,280
आपको मैं एक रिकॉर्डिंग है ये ये जो लड़का

1116
01:20:59,280 --> 01:21:03,280
है ये ये जो भी है फिट बॉय विराज ये अभी ऊपर आया था उसमें लाइव में

1117
01:21:03,280 --> 01:21:07,360
जुड़ने के लिए और हमारी ये मर्यादा है भाई कि वैचारिक मतभेद के

1118
01:21:07,360 --> 01:21:11,520
निमित्त जो व्यक्ति आएगा आएगा चर्चा करने के लिए वो व्यक्ति चेहरे

1119
01:21:11,520 --> 01:21:15,680
के साथ आएगा। यहां तक कि जितने भी हमसे नॉर्मल बात

1120
01:21:15,680 --> 01:21:19,680
करने भी आते हैं उनका भी चेहरा ही ले ही लेते हैं। मगर मुख्य रूप से वैचारिक

1121
01:21:19,680 --> 01:21:23,760
मतभेद के निमित्त हमने जब भी चर्चा की है तो चेहरे के साथ

1122
01:21:23,760 --> 01:21:27,920
की है। हमने इनको कहा चेहरे दिखाओ तो गंदी गंदी अश्लील बातें कर रहे

1123
01:21:27,920 --> 01:21:32,080
थे इसमें प्राइवेट चैट में। और हटा दिया तो अब ये अश्लील बातें वहां

1124
01:21:32,080 --> 01:21:36,080
से लिख रहे हैं। जबकि इन्हें मालूम है यहां मात्र फिटि बैठी है। अब इससे कोई मतलब नहीं

1125
01:21:36,080 --> 01:21:40,240
है। क्यों? क्यों मतलब नहीं है? क्योंकि धर्म है ही नहीं ना। जहां

1126
01:21:40,240 --> 01:21:44,800
ईश्वर नहीं है वहां धर्म कहां से होगा?

1127
01:21:44,800 --> 01:21:49,440
जी पाणी जी मैं एक आपको एक रिकॉर्डिंग भेजूंगा। उसमें

1128
01:21:49,440 --> 01:21:53,600
15 से 20 मिनट बात हुई है किसी रामपाल जी के शिष्य से और उसमें

1129
01:21:53,600 --> 01:21:57,840
15 से 20 मिनट में सिर्फ दो मिनट शालीनता से बात करी है उन्होंने और 18 मिनट

1130
01:21:57,840 --> 01:22:03,280
पूरी गाली गलौज के साथ पूरी 18 मिनट पूरी गाली गलौज

1131
01:22:03,280 --> 01:22:07,360
और सामने वाला जो सनातनी है वो बिल्कुल उनकी

1132
01:22:07,360 --> 01:22:11,680
बातें शालीनता से सुन रहे हैं और उनके मुंह से एक भी गाली नहीं निकली

1133
01:22:11,680 --> 01:22:14,080
है

1134
01:22:14,080 --> 01:22:18,400
ये सिखाया जाता है वहां

1135
01:22:18,400 --> 01:22:22,560
क्या हुआ बेड बॉय बोला नहीं दोबारा कुछ या हो सकता है कि बोल

1136
01:22:22,560 --> 01:22:27,760
बोलो शायद बिल्कुल मर चुकी हो आत्मा दोबारा बोल पाओ शायद

1137
01:22:27,760 --> 01:22:31,760
नहीं अभी तक तो नहीं बोला हम लोग ये ये सही करते हैं ना चलती लाइफ में

1138
01:22:31,760 --> 01:22:37,760
ही कुछ लोगों को ठीक करते रहते हैं

1139
01:22:38,800 --> 01:22:43,200
अपना परिचय ऐसे ही देते हैं हम

1140
01:22:43,200 --> 01:22:45,600
परिचय

1141
01:22:45,600 --> 01:22:49,680
और भी कोई आया आया है क्या? जी बहन जी

1142
01:22:49,680 --> 01:22:54,320
आप बोले आप कुछ बोलना चाह रही थी तो रुक गए थे। जी

1143
01:22:54,320 --> 01:22:58,880
हम रामपाल के चेलों से ये कहना चाहते हैं पहले तो अपनी शुद्धता करें।

1144
01:22:58,880 --> 01:23:03,120
शुद्ध होकर पूजा करें।

1145
01:23:03,120 --> 01:23:07,440
कम से कम नहा तो लिया करो भाइयों। बहन जी बता रहे हैं कि नहा

1146
01:23:07,440 --> 01:23:10,560
नहाते तक नहीं हो।

1147
01:23:10,560 --> 01:23:14,560
हम्म। अगर आपको पूजा करनी है तो नहा धोकर करो। ऐसे

1148
01:23:14,560 --> 01:23:20,560
मतलब अशुद्ध होकर पूजा करते हो। कहां से भगवान प्राप्त होंगे आपको?

1149
01:23:20,800 --> 01:23:24,960
क्या पता ये आपका ही बनाया हुआ। ओ क्यों शिवश नारायण

1150
01:23:24,960 --> 01:23:29,120
द्विवेदी भाई भाई देखिए बनाया हुआ है कि नहीं है वो ठीक

1151
01:23:29,120 --> 01:23:33,280
है। आप भी बहुत सारी ऐसी बातें बोलते हैं कि बनाया हुआ है। हमारा गोली

1152
01:23:33,280 --> 01:23:37,520
बचा गोली वो हो गई। ये वो ये मत बोला करो फिर ऐसी बातें।

1153
01:23:37,520 --> 01:23:41,600
फिर क्यों बोलते हो कि रामपाल के सारे भगत होते हैं। वो

1154
01:23:41,600 --> 01:23:46,480
गुटखा बीड़ी तंबाकू नहीं खाते। क्या पता वो आपके ही द्वारा बनाया गया मामला हो।

1155
01:23:46,480 --> 01:23:50,480
अच्छा क्या पता अच्छा तुम कह रहे हो कि कबीर जो है माता की कोख से जन्म नहीं

1156
01:23:50,480 --> 01:23:56,160
लिया। क्या पता माता की कोख से जन्म लिया हो। फिर क्यों मान ली वहां बात?

1157
01:23:56,160 --> 01:24:00,240
क्या पता उसने कुंवारी गाय का दूध ना पिया हो।

1158
01:24:00,240 --> 01:24:04,240
क्यों मान ली वो बात? हम भाई

1159
01:24:04,240 --> 01:24:08,320
वो भगवान है इसलिए बात मानी कि बात मान ली इसलिए सिद्ध

1160
01:24:08,320 --> 01:24:12,960
हुआ कि वो भगवान है क्योंकि बात माने बिना तो भगवान सिद्ध नहीं होगा

1161
01:24:12,960 --> 01:24:17,040
तो फिर ये भी नहीं कह सकते भगवान है इसलिए मानी उसकी बात

1162
01:24:17,040 --> 01:24:18,240
है ना पाणी

1163
01:24:18,240 --> 01:24:22,560
जी बिल्कुल भगवान है इसलिए बात नहीं मानी

1164
01:24:22,560 --> 01:24:26,640
क्योंकि उस बात से तो सिद्ध होगा ना कि वो भगवान है कि नहीं तो क्यों मान ली

1165
01:24:26,640 --> 01:24:30,720
उसकी बात क्यों मान ली इनको

1166
01:24:30,720 --> 01:24:35,920
हर एक चीज इसको स्क्रिप्टेट ही लगता है इनको क्योंकि ये खुद स्क्रिप्ट में जीते हैं।

1167
01:24:35,920 --> 01:24:40,960
स्क्रिप्ट में तो खुद जी रहे हैं।

1168
01:24:40,960 --> 01:24:45,120
रामपाल हरि ओम हरि ओम हरि ओम चौधरी जी जय

1169
01:24:45,120 --> 01:24:49,680
श्री राम बताएं।

1170
01:24:49,680 --> 01:24:53,680
हेलो हां जी आवाज जी जय श्री राम जी

1171
01:24:53,680 --> 01:24:59,040
जय श्री राम बताएं राम राम जी सुकी

1172
01:24:59,040 --> 01:25:02,880
कहीं से आवाज रिपीट आ रही है मुझे

1173
01:25:02,880 --> 01:25:05,520
आ रही है

1174
01:25:05,520 --> 01:25:10,960
हां अब नहीं आ रही आ रही है आ रही है

1175
01:25:10,960 --> 01:25:15,040
आवाज क्लियर यहां दो मोबाइल चल रहे है क्या नहीं एक ही

1176
01:25:15,040 --> 01:25:18,240
मोबाइल है मेरे पास तो

1177
01:25:18,240 --> 01:25:24,240
और तो किसी का माइक भी ऑनलाइन है।

1178
01:25:27,280 --> 01:25:32,000
हां जी आवाज आ रही है क्लियर है? नहीं आपकी क्लियर आ रही है।

1179
01:25:32,000 --> 01:25:36,240
अब मेरी भी ठीक आ रही है। जी बोल ना

1180
01:25:36,240 --> 01:25:42,240
फिर आने एक मिनट एक मिनट एक मिनट

1181
01:25:42,800 --> 01:25:46,880
अभी पहाड़ी जी मेरी आवाज ठीक आ रही है आपको? हां ठीक

1182
01:25:46,880 --> 01:25:51,280
आ रही है आपके क्लियर आ रही है। तो हरि ओम चौधरी

1183
01:25:51,280 --> 01:25:55,520
जी आपकी तरफ से कोई दिक्कत है? मैं जो बोल रहा हूं वह रिपीटर

1184
01:25:55,520 --> 01:26:01,520
सुनाई दे रही है हमको।

1185
01:26:10,960 --> 01:26:16,400
हर हर महादेव दोस्तों हर हर महादेव। जय श्री राम। जी

1186
01:26:16,400 --> 01:26:19,520
हर हर महादेव।

1187
01:26:19,520 --> 01:26:23,840
जी रंजीत सिंह जी अरे एक चीज हम पूछना

1188
01:26:23,840 --> 01:26:27,920
चाहते हैं यह जो रामपाल जी के फॉलोअर्स हैं इनसे कि ये किसको मानते

1189
01:26:27,920 --> 01:26:32,080
हैं प्रमाणिक ज्यादा बीजक को मानते हैं जो कि कबीर जी की खुद की रचनाएं हैं

1190
01:26:32,080 --> 01:26:37,760
या धर्मदास जी के लिखे वो कबीर सागर को

1191
01:26:37,760 --> 01:26:42,160
बताइए हरि ओम चौधरी जी आप

1192
01:26:42,160 --> 01:26:48,160
यह बताइए कि बीजक को आप सही मानते हैं या फिर कबीर सागर को

1193
01:26:50,720 --> 01:26:55,600
आवाज आपको अन म्यूट कर दीजिए। अरविंद चौधरी आप

1194
01:26:55,600 --> 01:27:01,600
पहले आप जाके वापस आइए। आपके साथ कुछ दिक्कत है टेक्निकल तो

1195
01:27:01,680 --> 01:27:05,440
आप एक बार दोबारा जुड़िएगा।

1196
01:27:05,440 --> 01:27:09,760
ये कबीर बीजक को नहीं मानते। मुझे तो ये मालूम

1197
01:27:09,760 --> 01:27:15,760
है। अरे किसी चीज को नहीं मानते। जो रामपाल ने अपनी

1198
01:27:15,760 --> 01:27:19,920
इनको इनसे बस यह कंफर्म करना है कि ये मानते किसको हैं कबीर

1199
01:27:19,920 --> 01:27:24,080
जी के लिखे हुए बीजक को या धर्मदास जी के लिखे कबीर सागर को कारण

1200
01:27:24,080 --> 01:27:28,480
हम बता रहे हैं इन्हने इन्होंने ऐसा है रणजीत सिंह जी सुनिए

1201
01:27:28,480 --> 01:27:32,640
इन्होंने अपनी एक बुक में एक जगह ये भी लिख दिया है कि कबीर

1202
01:27:32,640 --> 01:27:36,800
वाणी में भी लोगों ने मिलावट मिलावट कर दी है तो

1203
01:27:36,800 --> 01:27:39,760
ये उसको भी नहीं मानते

1204
01:27:39,760 --> 01:27:44,000
मिलावट किया गया होगा तो हमको ये बताइए मिला मिलावट हुआ होगा। कहां मिलावट हुआ होगा? उसके मीनिंग्स

1205
01:27:44,000 --> 01:27:48,480
में ओरिजिनल जो रचनाएं हैं बीजक जो उनकी कविताएं हैं या जो उसमें रमायनी

1206
01:27:48,480 --> 01:27:52,480
वगैरह उसमें थोड़ी मिलावट होगा। नहीं अभी ये तो चर्चा

1207
01:27:52,480 --> 01:27:56,480
का विषय है मगर इससे कोई फायदा है ही नहीं। वो उनकी किताबों से ही बात हो

1208
01:27:56,480 --> 01:28:00,640
जाती है। उन्हीं की किताब है ना। हमारी किताब तो है नहीं। कबीर जी की रचना

1209
01:28:00,640 --> 01:28:05,040
है। हमने तो किया नहीं। कबीर जी ने खुद लिखा है ना। और कबीर

1210
01:28:05,040 --> 01:28:06,080
जी ने उसमें

1211
01:28:06,080 --> 01:28:10,160
स्पष्ट तौर पर कबीर जी के बीजक को अगर आप पढ़ेंगे तो हम बता रहे हैं कबीर जी

1212
01:28:10,160 --> 01:28:14,160
के बीजक में आप शुरू से लेकर लास्ट तक पढ़ते जाइए। वो निराकार ब्रह्म के

1213
01:28:14,160 --> 01:28:18,160
उपासक रहे हैं। उन्होंने कभी साकार ब्रह्म को माना ही नहीं और ये लोग चिल्ला रहे

1214
01:28:18,160 --> 01:28:22,320
हैं। ईश्वर साकार है। जी ये देखिए साकार

1215
01:28:22,320 --> 01:28:26,560
है। ईश्वर साकार है। ये देखिए रामपाल के जो

1216
01:28:26,560 --> 01:28:31,360
एक मिनट रंजीत जी एक मिनट। रामपाल के जो भगत

1217
01:28:31,360 --> 01:28:35,360
लोग हैं वो कैसे बात करते हैं यहां पे उसका प्रमाण देखिए

1218
01:28:35,360 --> 01:28:41,360
इसको बड़ा करिए जरा भाई साहब

1219
01:28:41,680 --> 01:28:45,680
लाइव में जॉइ करना साले कुत्ते पढ़िए इसको क्या

1220
01:28:45,680 --> 01:28:51,360
लिख रहे हैं ये कहां गए भाई ये वही है

1221
01:28:51,360 --> 01:28:55,440
ये देखिए अरे यार ये अपना मतलब इंट्रोडक्शन दे रहे हैं

1222
01:28:55,440 --> 01:28:59,280
कि इनका यही इनका वो है

1223
01:28:59,280 --> 01:29:03,680
यही इनका धर्म है। रीजन हम बता दे रहे हैं।

1224
01:29:03,680 --> 01:29:07,680
कबीर की रचना है जो बीजक का जो रचनाओं का जो संकलन है

1225
01:29:07,680 --> 01:29:11,680
बीजक उसमें सातवें वाले में कबीर ने स्पष्ट किया है

1226
01:29:11,680 --> 01:29:15,840
कि जिस ब्रह्म की तू खोज कर रहा है वो कोई और नहीं तू ही है। तेरे अंदर

1227
01:29:15,840 --> 01:29:19,920
ही है वो ब्रह्म। और इसके बाद जानते ही नहीं है

1228
01:29:19,920 --> 01:29:23,920
ना। मेरी बात सुनो। और रामपाल के एक वीडियो में यह देखा है कि भाई उन्होंने एक बात

1229
01:29:23,920 --> 01:29:28,160
बोली है कि अगर कबीर खुद आ के भी कह दे आपसे कि मैं कबीर

1230
01:29:28,160 --> 01:29:32,320
हूं और मेरे पूजो तो उन्होंने साफ मना कर रखा है कि नहीं वो कबीर

1231
01:29:32,320 --> 01:29:36,400
नहीं है जो है वो मैं हूं। अच्छा अगर ये बीज

1232
01:29:36,400 --> 01:29:40,480
को पढ़ रहे हैं। हम बता देना कि ये प्रमाणिक है या नहीं है। उस

1233
01:29:40,480 --> 01:29:44,560
दिन रात में अमित नाम के कोई व्यक्ति के साथ टीआर पहाड़ी

1234
01:29:44,560 --> 01:29:48,640
जी की बहुत रात लेट नाइट तक जो है बहस हुई थी। पहाड़ी जी याद

1235
01:29:48,640 --> 01:29:53,440
है ना आपको? परसों शायद आई थिंक परसों

1236
01:29:53,440 --> 01:29:56,800
काफी देर तक वो बंदा जो है वहां

1237
01:29:56,800 --> 01:30:00,960
पर जो है गीता को लेकर के बहस कर रहा है। अरे यार गीता को लेकर बहस

1238
01:30:00,960 --> 01:30:06,080
करने की जरूरत ना है आपको। आप जो है खाली बीजक को पढ़ लो।

1239
01:30:06,080 --> 01:30:10,080
बीजक में शायद 61वें श्लोक में कबीर दास कह

1240
01:30:10,080 --> 01:30:14,160
रहे हैं कि तू मेरे बनाए बताए हुए मार्ग का अनुसरण

1241
01:30:14,160 --> 01:30:18,560
कर। तो मैं तुझे उस निराकार ब्रह्म के दर्शन करा दूंगा जो

1242
01:30:18,560 --> 01:30:22,720
जिसके दर्शन के लिए शिव जो है अपने अंगों में भूत लपेटे हुए जो है समाधि

1243
01:30:22,720 --> 01:30:27,520
लगा के बैठे हैं। विष्णु जिसके दर्शन के लिए जो है

1244
01:30:27,520 --> 01:30:31,760
योग निद्रा का आश्रय लेकर के तपस्या कर रहे हैं। अर्थात कबीर

1245
01:30:31,760 --> 01:30:35,840
बार-बार फोर्सफुली कह रहे हैं कि वो परबह्म जिसकी खोज में जो

1246
01:30:35,840 --> 01:30:40,080
है मनुष्य परेशान है। सभी लोग इधरउधर घूम रहे हैं।

1247
01:30:40,080 --> 01:30:44,960
तमाम तरह के आचरण कर रहे हैं। वह निराकार ब्रह्म है।

1248
01:30:44,960 --> 01:30:49,120
और यह महोदय यह लोग चिल्ला रहे हैं। अब एक चीज हम बता दें जैसे

1249
01:30:49,120 --> 01:30:53,360
हमारे मम्मी है, पापा हैं तो मातृभक्त होते हैं जैसे कुछ लोग तो उनके लिए माता

1250
01:30:53,360 --> 01:30:57,600
का स्थान जो है ईश्वर से बढ़ के होता है। इस चीज को समझने वाली चीज है।

1251
01:30:57,600 --> 01:31:01,600
कोई पितृ भक्त होगा तो उसके लिए पिता का जो स्थान होता है ना वो ईश्वर से ऊपर होता

1252
01:31:01,600 --> 01:31:05,600
है। तो इसी तरह से धर्मदास जी हैं। धर्मदास जी के लिए जो

1253
01:31:05,600 --> 01:31:09,680
है वो परम गुरु भक्त थे। तो वो गुरु का स्थान उन्होंने गुरु का स्थान

1254
01:31:09,680 --> 01:31:11,840
जो है ईश्वर के ऊपर रखा है और

1255
01:31:11,840 --> 01:31:15,840
इसीलिए उन्होंने अपनी रचनाओं में सर्वश्रेष्ठ गुरु को बताया है। तो ये तो

1256
01:31:15,840 --> 01:31:19,840
अंडरस्टुड सी बात है, समझदारी की बात है, विवेक की बात है कि इंसान

1257
01:31:19,840 --> 01:31:24,640
को खुद के विवेक से सोचना चाहिए। जी।

1258
01:31:24,640 --> 01:31:30,480
अच्छा एक बात मैं बता दूं। ये जो लोग भी गाली गलौज कर रहे हैं ऊपर आकर के

1259
01:31:30,480 --> 01:31:34,560
वो अपने मनहूस चेहरे को लेकर

1260
01:31:34,560 --> 01:31:38,800
आ सकते हैं। यदि इतना आपकी माता जी ने इतना दूध पिलाया

1261
01:31:38,800 --> 01:31:42,800
है तो ही आए। यदि आपके पास अपना काला हो चुका

1262
01:31:42,800 --> 01:31:46,880
चेहरा समाज के समक्ष रखने का

1263
01:31:46,880 --> 01:31:50,880
साहस नहीं है तो आपको नहीं आना चाहिए। यहां पर साहस

1264
01:31:50,880 --> 01:31:55,200
गुर्दे गुर्दा होता है ना जिनके पास जैसे हरि ओम चौधरी जी हैं वो भी रामपाल

1265
01:31:55,200 --> 01:31:59,280
जी के फॉलोअ है या कबीर दास को भगवान मानने वाले

1266
01:31:59,280 --> 01:32:04,080
हैं। मगर इनके पास गुर्दा है तभी तो चेहरा ले आए ना।

1267
01:32:04,080 --> 01:32:08,160
तो गुर्दा हो तो आओ। वरना अपनी कायरता का

1268
01:32:08,160 --> 01:32:12,160
पोषण कहीं और जाके करो। जी हरि ओम

1269
01:32:12,160 --> 01:32:16,160
चौधरी जी जय श्री राम। अब आवाज क्लियर आ रही

1270
01:32:16,160 --> 01:32:20,240
है क्या? जी आवाज आ रही है बिल्कुल क्लियर बताइए। हां

1271
01:32:20,240 --> 01:32:24,560
तो ये भाई साहब जो कह रहे थे कि भाई आप बीजक को मानते हो या

1272
01:32:24,560 --> 01:32:26,880
जो है क्या क्वेश्चन

1273
01:32:26,880 --> 01:32:31,440
था इनका? क्या मानते हो? ग्रंथ कौन सा मानते हो? ऐसा कुछ पूछ रहे थे ना।

1274
01:32:31,440 --> 01:32:35,600
कबीर को आप प्रमाणित मानते हो या कबीर सागर को प्रमाणित मानते हो? ये

1275
01:32:35,600 --> 01:32:39,680
पूछ रहे हैं वो। देखो सर एक्चुअली प्रॉब्लम यह है कि जो ग्रंथों की

1276
01:32:39,680 --> 01:32:43,920
अगर हम बात करें ना तो ग्रंथ एक्चुअली

1277
01:32:43,920 --> 01:32:48,000
अगर पूरे पढ़े नहीं है तो फिर वो उसके ऊपर डिबेट करना भी

1278
01:32:48,000 --> 01:32:52,560
एक प्रकार की कोई अच्छी बात तो नहीं है। हम

1279
01:32:52,560 --> 01:32:56,720
पूरा जब तक उसमें कितने 1100 जन

1280
01:32:56,720 --> 01:33:00,880
कितने तो पेज है उसमें जो बीजक और जो ये कबीर सागर है मैं एक बार

1281
01:33:00,880 --> 01:33:04,880
देखा था पूरा मैंने नहीं पढ़ा तो ये कह पाना

1282
01:33:04,880 --> 01:33:09,680
तो बड़ा एक नामुमकिन काम है कि भैया पूरी मेरे को नॉलेज है। ये तो मैं नहीं कहूंगा।

1283
01:33:09,680 --> 01:33:13,840
नहीं नहीं ये नहीं देखिए पूछा ये जा

1284
01:33:13,840 --> 01:33:18,000
रहा है कि जैसे आपको अभी अगर रामपाल दास की कोई

1285
01:33:18,000 --> 01:33:22,560
किताब दी जाए तो क्या आप उसमें प्रमाण

1286
01:33:22,560 --> 01:33:26,560
बुद्धि रखेंगे या ये सोचेंगे कि इसमें भी कोई बात गलत हो

1287
01:33:26,560 --> 01:33:28,960
सकती है?

1288
01:33:28,960 --> 01:33:32,960
देखो सर जब नाम लेने से पहले मैंने करीब

1289
01:33:32,960 --> 01:33:37,040
2013 से औरत 15 दो साल दो

1290
01:33:37,040 --> 01:33:41,120
साल मैंने इसमें काफी मतलब जो है सोच विचार किया उसके बाद मैंने नाम लिया

1291
01:33:41,120 --> 01:33:41,920
तो उसमें जितने

1292
01:33:41,920 --> 01:33:46,080
भी मैंने देखे मुझे सही लगे भाई साहब मैं पूछ

1293
01:33:46,080 --> 01:33:50,160
रहा हूं आप मेरा सवाल नहीं समझ रहे मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आपने रामपाल

1294
01:33:50,160 --> 01:33:54,160
को क्यों चुना मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे अभी रामपाल

1295
01:33:54,160 --> 01:33:58,240
की कोई किताब आएगी ज्ञान गंगा या ये

1296
01:33:58,240 --> 01:34:02,240
तो इसमें जैसे आपकी प्रमाण बुद्धि है कि नहीं

1297
01:34:02,240 --> 01:34:07,200
इसकी एक एक लाइन बिल्कुल अक्षरस सत्य है। है कि नहीं है? पहले तो ये बताओ।

1298
01:34:07,200 --> 01:34:11,360
देखो मैं आपसे फिर कह रहा हूं कि मैंने पूरे ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया है। मैं इस पर डिबेट

1299
01:34:11,360 --> 01:34:16,240
में आपसे हार जाऊंगा। लेकिन मेरे पास और बहुत सी बातें हैं जो सोचने योग्य है।

1300
01:34:16,240 --> 01:34:20,320
ऐसा नहीं है कि आप आपने जो एक मिनट मतलब आपको

1301
01:34:20,320 --> 01:34:25,680
अभी भी डाउट है कि हो सकता है इसमें कोई गलती निकल आए। तो

1302
01:34:25,680 --> 01:34:29,840
मैं उस चीज में शब्दों पर तो मैं ग्रामर पे संत व्याकरण देखिए मैं आपको

1303
01:34:29,840 --> 01:34:34,080
एक बात बताऊं मैं सनातनी हूं मैं हिंदू

1304
01:34:34,080 --> 01:34:38,560
हूं मैं अब मैं कह रहा हूं मुझे मेरे जो परंपरा

1305
01:34:38,560 --> 01:34:42,800
प्राप्त ग्रंथ हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों के उसके हर शब्द

1306
01:34:42,800 --> 01:34:47,280
पर अक्षरस विश्वास है। क्या आपको विश्वास है रामपाल

1307
01:34:47,280 --> 01:34:50,640
के ग्रंथों पर?

1308
01:34:50,640 --> 01:34:54,640
अब यह क्वेश्चन एक्चुअली सर ऐसा उलझा हुआ है कि इसमें हां ना कहना यह अपने आप में

1309
01:34:54,640 --> 01:34:58,640
ही फंसना है। मतलब आपको डाउट है एक तरीके से। हां ना कहने में डाउट

1310
01:34:58,640 --> 01:35:02,640
है। तो अब इसका क्या जवाब दिया जाए? ये तो क्वेश्चन ही ऐसा

1311
01:35:02,640 --> 01:35:06,880
है कि हां कहेंगे तो मरेंगे और ना कहेंगे तो मरेंगे। ये तो क्वेश्चन ही ऐसा हो गया ना।

1312
01:35:06,880 --> 01:35:10,960
तो अरे क्वेश्चन ऐसा है मुझे आप तर्क और प्रमाण से समझाइए कि

1313
01:35:10,960 --> 01:35:15,040
ये क्वेश्चन गलत क्यों है? बताइए। मैं आपको अपना पर्सनल

1314
01:35:15,040 --> 01:35:19,200
एग्जांपल दे देता हूं। जो जो मैं मतलब जानता है मैंने जो देखा

1315
01:35:19,200 --> 01:35:23,200
है जो मैंने महसूस किया जो वो वो देखिए विषय अलग चल रहा है

1316
01:35:23,200 --> 01:35:27,200
भाई साहब थोड़ा समझने का प्रयास करिए मैं समझ रहा हूं आप बहुत मतलब

1317
01:35:27,200 --> 01:35:31,200
सज्जनता से बात कर रहे हैं और चीजों को समझना चाहते हैं मैं समझ चुका अब तक बात

1318
01:35:31,200 --> 01:35:35,680
करके विषय हमारा ये चल रहा है पूछा ये जा रहा था

1319
01:35:35,680 --> 01:35:40,240
कि क्या आपकी रामपाल में प्रमाण्य

1320
01:35:40,240 --> 01:35:44,240
बुद्धि समझते हैं रामपाल जो कहेगा वो सत्य ही

1321
01:35:44,240 --> 01:35:48,320
होगा प्रमाण्य बुद्धि इसे कहते हैं। तो

1322
01:35:48,320 --> 01:35:52,400
क्या यह ऐसी बुद्धि है रामपाल और उनके द्वारा दी

1323
01:35:52,400 --> 01:35:56,640
जाने वाली शिक्षाओं में या डाउट है कि अगर किसी दिन रामपाल

1324
01:35:56,640 --> 01:36:00,640
ने कोई ऐसी बात कही जो मुझे ठीक नहीं लगेगी तो

1325
01:36:00,640 --> 01:36:04,640
मैं रामपाल को छोड़ दूंगा या फिर रामपाल भी कोई ऐसी

1326
01:36:04,640 --> 01:36:06,160
बात कह सकते हैं

1327
01:36:06,160 --> 01:36:12,160
जो कि हो सकता है सही ना हो। क्या ऐसी बुद्धि है आपकी?

1328
01:36:12,240 --> 01:36:16,720
सर इसके लिए मैं आपसे थोड़ा सा बोलना चाहूंगा दो चार बातें अगर आप सुन लो तो

1329
01:36:16,720 --> 01:36:20,720
बोलिए बोलिए गुरु गुरु जो

1330
01:36:20,720 --> 01:36:24,960
होता है ना उसकी जो आज्ञा होती है वो सर्वधार्य होती है गुरु ने कह दिया ना जो फाइनल

1331
01:36:24,960 --> 01:36:29,040
है आप अगर लॉजिक की बात कर रहे तो नाम में

1332
01:36:29,040 --> 01:36:33,040
लेने से पहले की बात अलग थी लेकिन जब मैंने मेरे भाई साहब मैं

1333
01:36:33,040 --> 01:36:37,360
मैं आपको एक बात कहूंगा आप जो है खींच रहे हैं आप सीधे कह दो हां

1334
01:36:37,360 --> 01:36:41,440
उनकी हर बात मेरे लिए पत्थर की लकीर है हां हां बिल्कुल जो

1335
01:36:41,440 --> 01:36:45,600
उनका आदेश होगा वो हमारे लिए फाइनल होगा। हां तो अब मैं यह पूछ

1336
01:36:45,600 --> 01:36:49,600
रहा हूं जैसे उनकी हर बात आपके लिए फाइनल है।

1337
01:36:49,600 --> 01:36:53,600
क्या ऐसे ही आपके लिए कबीर बीजक या गरीब दास जी

1338
01:36:53,600 --> 01:36:57,760
का जो भी है वो है पत्थर की लकीर या नहीं है?

1339
01:36:57,760 --> 01:37:01,920
हां गरीब दास जी का ग्रंथ है। बिल्कुल फाइनल है। कबीर बीजक

1340
01:37:01,920 --> 01:37:06,000
आपके लिए फाइनल नहीं है। देखो गरीब

1341
01:37:06,000 --> 01:37:10,000
दास जी का भी इतना बड़ा ग्रंथ है। उसमें इतने पेज हैं उसको मतलब मैंने पूरा नहीं पढ़ा और

1342
01:37:10,000 --> 01:37:14,160
ये कबीर जो बीजक है और जो ये है प्रमाण है ये प्रमाण लेकिन

1343
01:37:14,160 --> 01:37:17,440
मैं मानता हूं इनको।

1344
01:37:17,440 --> 01:37:22,080
तो प्रमाण मानते हैं तो उसका एक एक शब्द प्रमाण है ना।

1345
01:37:22,080 --> 01:37:26,080
हां बिल्कुल। तो भैया बताइए क्या पढ़ा आपने कबीर कबीर

1346
01:37:26,080 --> 01:37:30,160
बीजक से रंजीत जी

1347
01:37:30,160 --> 01:37:34,160
कबीर बीजक में तो बार-बार हम बता रहे हैं उसके रमणी

1348
01:37:34,160 --> 01:37:38,240
नंबर सातव में वो एकदम स्पष्ट बता रहे हैं कि तू किसी जिसे ढूंढना

1349
01:37:38,240 --> 01:37:42,320
चाहता है उसे बाहर मत ढूंढ तत्व मसीह वो तेरे

1350
01:37:42,320 --> 01:37:46,560
अंदर ही मिलेगा किसी और जगह नहीं मिलेगा किसी मंदिर में नहीं मिलेगा किसी मस्जिद

1351
01:37:46,560 --> 01:37:50,560
में नहीं मिलेगा किसी मूर्ति में किसी इंसान में नहीं तेरे अंदर मिलेगा इसके बाद

1352
01:37:50,560 --> 01:37:54,720
61व में वो कह रहे हैं कि तू तू मेरे बताए हुए मार्ग का अनुसरण कर। वो

1353
01:37:54,720 --> 01:37:58,880
परम ब्रह्म निराकार है। उसका कोई आकार नहीं है। वो अजन्मा

1354
01:37:58,880 --> 01:38:02,960
मतलब उन्होंने क्लियरली निर्गुण निराकार ब्रह्म की ही साधना उपासना की

1355
01:38:02,960 --> 01:38:07,200
है। और ये लोग चिल्ला रहे हैं। हां भाईजक

1356
01:38:07,200 --> 01:38:11,280
से यहां पे एक बात कह दूं। यहां पर मैं एक बात कह दूं कि निर्गुण

1357
01:38:11,280 --> 01:38:15,360
निराकार ब्रह्म की भक्ति करने का ही समर्थन केवल

1358
01:38:15,360 --> 01:38:19,440
हम नहीं करते हैं। मगर यहां पे बात रखी जा रही है कि कबीर दास जी ने तो यह

1359
01:38:19,440 --> 01:38:23,440
बात कही है तो आपके जो तत्वदर्शी हैं वो ऐसा क्यों कह रहे

1360
01:38:23,440 --> 01:38:27,600
हैं कि नहीं ईश्वर साकार है। जी वो तो गुरु

1361
01:38:27,600 --> 01:38:31,680
ने वेदों में प्रमाण दे रखे हैं। काफी जो देखो सारे प्रमाण में ले नहीं

1362
01:38:31,680 --> 01:38:35,920
मतलब मतलब अगर वेद की बात आ जाएगी तो वहां पर आप कबीर

1363
01:38:35,920 --> 01:38:39,440
जी की बात नहीं मानोगे।

1364
01:38:39,440 --> 01:38:43,440
वेदों की बात आ जाएगी तो कबीर जी की बात नहीं मानेंगे। यह पूछ रहा

1365
01:38:43,440 --> 01:38:47,040
हूं मैं आपसे।

1366
01:38:47,040 --> 01:38:51,040
क्यों नहीं मानेंगे? मानेंगे। तो ये बोल तो रहे हैं कि कबीर

1367
01:38:51,040 --> 01:38:55,280
से कबीर कह रहे हैं फलानी जगह पे ये लिखा हुआ है कि ईश्वर

1368
01:38:55,280 --> 01:38:58,000
निराकार है।

1369
01:38:58,000 --> 01:39:02,240
आप ऐसा करो मेरे को बता दो कौन सा क्या बता रहे हो आप। मैं देख लूंगा उसको।

1370
01:39:02,240 --> 01:39:06,240
फिर नेक्स्ट टाइम पे चर्चा कर लेंगे। लेकिन फिलहाल सुनिए हम हम बता दे रहे

1371
01:39:06,240 --> 01:39:10,720
हैं बीजेक उठाइएगा सुनिए ना बीजेक उठाइए रमायणी नंबर सात में पढ़िए रमायणी

1372
01:39:10,720 --> 01:39:15,280
नंबर 59 में पढ़िए रमायणी नंबर 61 में पढ़िए

1373
01:39:15,280 --> 01:39:19,840
ठीक है उसको अच्छे से पढ़िएगा और इसके बाद फाइनल आप कर लीजिएगा कि ईश्वर निराकार

1374
01:39:19,840 --> 01:39:25,840
है कबीर जी कह रहे हैं और

1375
01:39:25,840 --> 01:39:30,000
नहीं आप बहन जी हमारी चली गई है बहन जी

1376
01:39:30,000 --> 01:39:34,160
आप अपने आप अपने मन से कुछ ना बोल रंजीत जी एक मिनट

1377
01:39:34,160 --> 01:39:38,160
एक मिनट बहन जी हमारी चली गई है वो यहां पर चर्चा गम होने

1378
01:39:38,160 --> 01:39:42,160
लगी थी तो मैं उनको बता दूं बहन जी आप अपने आप को अकेला ना समझे किसी

1379
01:39:42,160 --> 01:39:46,480
भी प्रकार की का कोई कष्ट हो तो आपके बहुत सारे भाई हैं यहां पर

1380
01:39:46,480 --> 01:39:50,560
तो आप संपर्क करें हमसे और आप यथावत रूप

1381
01:39:50,560 --> 01:39:54,560
से जैसे अपने भक्ति मार्ग में आगे बढ़ रहे हैं अपने सनातन धर्म को लेकर के

1382
01:39:54,560 --> 01:39:58,800
वैसे ही आगे बढ़े बालाजी की कृपा भगवान आप पर बनाए रहे दोनों पर

1383
01:39:58,800 --> 01:40:02,960
और आप फूले भले हम ऐसी प्रार्थना करते हैं भगवान से जी अब

1384
01:40:02,960 --> 01:40:07,120
रंजीत जी आप इनसे अपनी बात बोलिए। हम यही पूछना चाहते

1385
01:40:07,120 --> 01:40:11,440
हैं कि आखिरकार में नहीं ये डल्टी वाली बात क्यों? दोहरी

1386
01:40:11,440 --> 01:40:15,600
बात क्यों? कबीर जी जब खुद बोल रहे हैं कि वो ईश्वर निराकार

1387
01:40:15,600 --> 01:40:19,680
है जिसकी तू खोज कर रहा है। उसे कहीं और खोजने की जगह

1388
01:40:19,680 --> 01:40:24,080
तू अपने अंदर ढूंढ। मैं उसे तेरे अंदर ही दिखाऊंगा।

1389
01:40:24,080 --> 01:40:29,520
हां बोलिए। ये ये प्रमाण मैंने नहीं देखा है। मैं देख लूंगा। चलिए लेकिन मैं अभी

1390
01:40:29,520 --> 01:40:33,680
इसका इनके पास इसका जवाब नहीं है। अभी इन्होंने पढ़ा नहीं है। जी

1391
01:40:33,680 --> 01:40:37,680
हरि ओम जी अब आप अभी नहीं अगर अभी कबीर आके ये

1392
01:40:37,680 --> 01:40:40,960
बोल दे कि ये सब मतलब एक तरह से फिर मानोगे या

1393
01:40:40,960 --> 01:40:45,040
नहीं मानोगे एक बार इनसे भी पूछ लेना अगर खुद कबीर आके पूछ बोले

1394
01:40:45,040 --> 01:40:49,520
कि ये सब गलत है तो फिर इन चीजों को मानोगे या नहीं मानोगे?

1395
01:40:49,520 --> 01:40:54,000
भाई ये वीडियो में है ओम चौधरी जी

1396
01:40:54,000 --> 01:40:58,080
कबीर अगर बोलेंगे भी आ जाए तो इन मेरी

1397
01:40:58,080 --> 01:41:02,080
बातें काटने नहीं होगी। अब ये तो सर काल्पनिक

1398
01:41:02,080 --> 01:41:06,080
बात हो गई ना। काल्पनिक हो गई। मतलब खुद उनकी

1399
01:41:06,080 --> 01:41:10,160
वीडियो में बोल रहे हैं रामपाल जी कि अगर खुद कबीर राजा है और वो

1400
01:41:10,160 --> 01:41:14,160
बोले कि मैं कबीर हूं तो भी उनको कबीर नहीं मानना है और

1401
01:41:14,160 --> 01:41:19,680
अपनी बातों पर अटल रहना है। मैं एक वीडियो डाल दूंगा।

1402
01:41:19,680 --> 01:41:23,680
ये वीडियो बहुत अच्छा पॉइंट है। अच्छा संदीप जी आप अपनी

1403
01:41:23,680 --> 01:41:27,680
बात बोले। खुद खुद बोल रहे हैं वो कि भाई अगर खुद कबीर आके भी

1404
01:41:27,680 --> 01:41:32,000
बोले तो भी अपन को जो अभी लिखी हुई पुस्तकें प्रमाणित है

1405
01:41:32,000 --> 01:41:36,400
उन्हीं को मानना है। कबीर की बात को भी नहीं मानना है। जय श्री राम जय श्री राम।

1406
01:41:36,400 --> 01:41:40,480
जय श्री राम जय श्री राम। जी संदीप जी बस बस

1407
01:41:40,480 --> 01:41:45,040
कृपा राम। हरि ओम जी एक बात बताओ। आपने

1408
01:41:45,040 --> 01:41:49,360
हिरण्यकश्यप का नाम सुना है आपने? हिरण्यकश्यप का? हां

1409
01:41:49,360 --> 01:41:54,320
नाम सुना है। अच्छा रावण का नाम सुना है?

1410
01:41:54,320 --> 01:41:56,400
सुना है कंस

1411
01:41:56,400 --> 01:42:01,040
का सुने नाम तो सुना है अच्छा

1412
01:42:01,040 --> 01:42:05,040
ये बताओ कि ये किसका विरोध करते थे ये कौन से परमात्मा

1413
01:42:05,040 --> 01:42:09,200
थे जिसका ये विरोधी थे तीनों के तीनों ये युग तो आपको पता ही होंगे कौन-कौन से

1414
01:42:09,200 --> 01:42:11,840
युग में थे ये

1415
01:42:11,840 --> 01:42:16,080
तीनों तीनों किसके विरोधी थे यह बताओ जरा इन्होने किसका विरोध किया था जिसकी वजह

1416
01:42:16,080 --> 01:42:20,480
से इनको जो है इनकी दुर्गति हुई यह बताओ मेरे को

1417
01:42:20,480 --> 01:42:24,640
कंस ने कृष्ण भगवान का विरोध किया था अच्छा उसके बाद

1418
01:42:24,640 --> 01:42:28,720
हिरण्यकश्यप ने किसका किया था? वो दीवार

1419
01:42:28,720 --> 01:42:32,800
में प्रकट हुए थे। वो नरसिंह नाम से जो थे थे तो विष्णु अवतारी

1420
01:42:32,800 --> 01:42:37,280
कहते हैं। वैसे तो हां सारे विष्णु विष्णु जी के ही अवतार हैं। मतलब

1421
01:42:37,280 --> 01:42:41,600
हिरण्यकश्यप ने भी विष्णु जी का विरोध किया। रावण ने भी विष्णु जी का विरोध

1422
01:42:41,600 --> 01:42:47,120
किया और कंस ने भी सेम काम किया। मानते हो आप ये बात?

1423
01:42:47,120 --> 01:42:51,360
अब देखो जहां तक ये अब इसमें क्या है? इसमें बहुत सारी बातें हैं। एक्चुअली

1424
01:42:51,360 --> 01:42:55,600
अगर इसमें हम इसकी कहानी बहुत लंबी हो जाएगी कि

1425
01:42:55,600 --> 01:42:59,760
भाई क्या क्या आधार है क्या है तो वो एक बहुत आधार सर

1426
01:42:59,760 --> 01:43:03,840
मेरे को ये इनका आधार ना वहां से पता है जब इनको ये श्राप मिला था ना मेरे को वहां से आधार

1427
01:43:03,840 --> 01:43:07,840
है सारा मेरे को पता है किस वजह से कौन-कौन से जन्म में आए थे मुझे सिर्फ ये बताओ कि आप ये

1428
01:43:07,840 --> 01:43:11,520
बात मानते हो कि इन्होंने विष्णु जी का विरोध किया था ये बताओ खाली या

1429
01:43:11,520 --> 01:43:16,800
नहीं किया था ना

1430
01:43:16,800 --> 01:43:20,800
क्या क्या कहते थे विष्णु जी के बारे में क्या बोलते थे ये इनकी पूजा करनी चाहिए

1431
01:43:20,800 --> 01:43:24,080
या नहीं करनी चाहिए

1432
01:43:24,080 --> 01:43:28,160
मना करते थे ना कि भाई मेरी पूजा करो तो कहते थे ये

1433
01:43:28,160 --> 01:43:32,480
तो हां हां तो आज की आज की जो सिचुएशन है आपको रामपाल जी क्या समझाते

1434
01:43:32,480 --> 01:43:38,080
हैं कि आप आप उनकी पूजा विष्णु जी की करो या नहीं करो ये बताओ आप

1435
01:43:38,080 --> 01:43:42,320
नहीं हिरण्यकश्यप रावण कंस के पथ पे चल रहे हो कि नहीं देखो आप

1436
01:43:42,320 --> 01:43:46,480
अपने आपका पर्सपेक्टिव आपका देखने का नजरिया अलग है और मेरा

1437
01:43:46,480 --> 01:43:50,320
थोड़ा अलग है मैंने

1438
01:43:50,320 --> 01:43:54,960
अब आप लोग मुझे बात कर लेने दीजिए। अभी अगले 510 मिनट में आपको निर्णायक

1439
01:43:54,960 --> 01:43:59,120
चीजें प्राप्त होने वाली है। हरि ओम जी हरि

1440
01:43:59,120 --> 01:44:03,360
ओम जी आप ये बताइए हां दे दीजिए इनका जवाब

1441
01:44:03,360 --> 01:44:07,440
दे दीजिए फिर हम लोग बात करते हैं। जी आप बोल रहे थे ना कि यह

1442
01:44:07,440 --> 01:44:11,440
जो उनका विरोध किया था और और क्या बोल रहे थे आप जस्ट अभी

1443
01:44:11,440 --> 01:44:15,520
कि ये जो है गुरु इनकी पूजा करने के लिए बोल रहे ऐसा कुछ बोल रहे थे ना आप

1444
01:44:15,520 --> 01:44:19,600
हमने ये हमने ये बोला कि ये तीनों के तीनों थे जो थे ये रावण जी

1445
01:44:19,600 --> 01:44:23,680
ये तीनों के तीनों विष्णु जी के विरोधी थे और ये मना करते थे ये तीनों

1446
01:44:23,680 --> 01:44:26,560
के भी उनकी पूजा नहीं करनी हमारी पूजा करो क्योंकि हम

1447
01:44:26,560 --> 01:44:30,720
उससे उनसे भी ऊपर है ये मानते हो हां

1448
01:44:30,720 --> 01:44:34,720
ठीक है फिर इनकी गति खराब हुई ये कहना चाहते हो आप नहीं मैं सिर्फ

1449
01:44:34,720 --> 01:44:38,880
ये कहना चाह रहा हूं कि ये विरोधी थे ना मतलब ये श्री विष्णु जी के विरोधी थे कंफर्म

1450
01:44:38,880 --> 01:44:42,960
है ना पहले ये देखो आप तो ये आपने रामपाल

1451
01:44:42,960 --> 01:44:46,960
जी आपने रामपाल जी की आपने रामपाल जी की वो सुनी होंगी उन्होंने कई बार

1452
01:44:46,960 --> 01:44:51,120
ये वाले रेफरेंसेस भी दिए हैं आपको के वो इन्होंने हिरण्यकश्यप

1453
01:44:51,120 --> 01:44:55,120
ने उनका विरोध किया था ये किया था तो आपको ये छोटी सी बात ये आपके

1454
01:44:55,120 --> 01:44:59,120
मतलब माइंड में क्यों नहीं आती कि हम हम लोग भी विष्णु विरोध कर रहे हैं आप लोग भी के

1455
01:44:59,120 --> 01:45:03,200
उनकी पूजा के लिए मना कर रहे हैं मैं ये सिर्फ ये जानना चाहता हूं कि आपके दिमाग में क्या चीज भरी हुई है

1456
01:45:03,200 --> 01:45:07,200
ऐसी बिल्कुल मैं आपको बता रहा हूं। आप बोल रहे हो कि विष्णु जी

1457
01:45:07,200 --> 01:45:11,360
की पूजा नहीं करते तो ऐसा नहीं है। यह मैं आपको क्लियर बता रहा हूं।

1458
01:45:11,360 --> 01:45:15,920
गुरु जी ने जो बताया है ब्रह्मा विष्णु महेश ठीक है।

1459
01:45:15,920 --> 01:45:20,080
ये देवता बताए हैं ऐसा नहीं है कि देवता नहीं है। पहली बात तो ये

1460
01:45:20,080 --> 01:45:24,160
और गुरु जी जो मंत्र देते हैं हमको इन देवी देवताओं को के ही देते हैं। अभी जैसे ये

1461
01:45:24,160 --> 01:45:28,160
बोल रहे थे ना कि उसमें लिखा हुआ है कौन सा ये बीजक का

1462
01:45:28,160 --> 01:45:32,160
बता रहे थे ना कि मैं निराकार हूं और क्या बता रहे थे? आप सर आप

1463
01:45:32,160 --> 01:45:36,160
मुझे सिर्फ मेरी बात मेरी मोटी सी बात समझो आप मैं क्या समझाना चाह रहा हूं आपको पता

1464
01:45:36,160 --> 01:45:40,480
है उनके जन्म क्यों के हुए थे ये जो जन्म हुए थे उनके जो कौन थे ये हिरण्यकश्यप

1465
01:45:40,480 --> 01:45:41,600
कौन था पता है

1466
01:45:41,600 --> 01:45:45,600
आपको इस बात का हिरण्यकश्यप और हिरणाक्ष कहां से आए थे कौन थे ये इनका

1467
01:45:45,600 --> 01:45:49,600
पूर्व जन्म क्या था पता है आपको इसके बारे में देखो ये मुझे

1468
01:45:49,600 --> 01:45:53,680
नहीं पता कोई बात नहीं मैं बताता हूं ये दरअसल थे ये

1469
01:45:53,680 --> 01:45:58,640
विष्णु जी के दरबान थे जय और विजय शायद आपको पता नहीं

1470
01:45:58,640 --> 01:46:02,880
वहां से ये कथा चली थी सनकादिक ऋषियों ने इनको श्राप दिया था। कारण

1471
01:46:02,880 --> 01:46:08,000
क्या था? विष्णु जी के वहां विष्णु जी को मिलने गए थे। सनकादिक ऋषि जो थे। ठीक है?

1472
01:46:08,000 --> 01:46:12,400
तो इन्होंने उनको मिलने के लिए मिलने के लिए थोड़ा सा इनको लेट करवा दिया था। सिर्फ

1473
01:46:12,400 --> 01:46:16,480
मतलब सिर्फ कहते हैं ना कि तीन सेकंड के लिए मतलब इनको रोक लिया

1474
01:46:16,480 --> 01:46:20,720
था खाली। तो इसलिए इन्होंने इनको श्राप दिया कि आप जो है तीन जन्म तक

1475
01:46:20,720 --> 01:46:25,280
राक्षस योनि में जाओगे। हम ठीक है?

1476
01:46:25,280 --> 01:46:29,920
तीनों जो इन्होंने ये फिर आगे आगे इनकी कथा चली। हिरणाक्ष हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप

1477
01:46:29,920 --> 01:46:34,080
उसके बाद यह जैसे रावण और उसके कुंभकरण

1478
01:46:34,080 --> 01:46:38,320
उसके बाद यह शिशु बार दंत वक्र के रूप में आए धरती

1479
01:46:38,320 --> 01:46:42,320
पर लेकिन कहता वहीं पर विष्णु जी ने इनको कमिटमेंट की थी कि मैं ही आपको धरती

1480
01:46:42,320 --> 01:46:46,320
पर आकर मतलब कि आपका जो है उद्धार भी करूंगा मैं।

1481
01:46:46,320 --> 01:46:50,400
ठीक है? यहां पर आपको मिसलीड किया गया है। मिसलीड ये किया गया है कि

1482
01:46:50,400 --> 01:46:55,120
कभी वो कह देते हैं कि वो अपना रावण को जो

1483
01:46:55,120 --> 01:46:56,640
रावण को तीर लगा था वो

1484
01:46:56,640 --> 01:47:00,720
उन्होंने मारा था। कबीर जी ने आकर मार दिया। हिरण्यकश्यप का वध जो है उसने कबीर

1485
01:47:00,720 --> 01:47:04,720
जी ने कर दिया था। ये बेतुकी बातें क्यों होती है? जब आप शास्त्रों से बात मिलान क्यों नहीं करते इन

1486
01:47:04,720 --> 01:47:08,720
चीजों का? मैं ये पूछना चाह रहा हूं आपसे। ऐसा डायरेक्ट नहीं कहा गया

1487
01:47:08,720 --> 01:47:12,880
है। वो उसके पीछे बहुत लंबी कहानी है। वो पूरा वो बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा कौन

1488
01:47:12,880 --> 01:47:16,960
है? कंप्लीट गॉड है। किस रूप में आता है वो हर आप

1489
01:47:16,960 --> 01:47:21,120
ना पूर्ण एक छोटा वर्ड है। संपूर्ण की बात करो। हम तो संपूर्ण परमात्मा को मानते हैं।

1490
01:47:21,120 --> 01:47:25,200
हां वही वो कंप्लीट गड जिसको बोलते हैं सुप्रीम गड जो सारे ब्रह्मांड का जो ये

1491
01:47:25,200 --> 01:47:29,200
इन सभी देवी देवताओं से ऊपर है। डेमी गॉड्स होते हैं। छोटे गॉड्स होते हैं। गुरु जी का

1492
01:47:29,200 --> 01:47:33,200
जो ज्ञान है वो ये कहता है। वो किसी देवी देवता की बुराई नहीं करते। आप जो कह रहे हो

1493
01:47:33,200 --> 01:47:37,200
कि विष्णु जी का आप जो है वो नहीं कर रहे हो। ऐसा नहीं है। हमारे को गुरु

1494
01:47:37,200 --> 01:47:41,280
जी जो मंत्र देते हैं उसमें विष्णु जी का भी नाम आता है। उसमें जो है गणेश जी

1495
01:47:41,280 --> 01:47:45,360
का भी मंत्र दिया जाता है। ये देवी देवताओं के मंत्र संदीप जी अब अब

1496
01:47:45,360 --> 01:47:49,840
मेरी बारी है। अब आप लोग मुझे दे दीजिए। मैं थोड़ा सा इनसे करता हूं।

1497
01:47:49,840 --> 01:47:54,240
पहले तो हरि ओम जी आप अगर कुछ कहना चाहते हैं आए थे आप

1498
01:47:54,240 --> 01:47:58,400
अगर आपका कोई प्रश्न है हमारी किसी बात का विरोध है मैं ये

1499
01:47:58,400 --> 01:48:02,480
डिबेट देख रहा था तो मैं ये इसमें एक अभी ये गुरु जी का कोई

1500
01:48:02,480 --> 01:48:06,640
भगत थे और ये आप बता रहे थे कि ये मतलब जो है मिसगाइड

1501
01:48:06,640 --> 01:48:10,640
हुए हैं और पता नहीं बोल रहे थे कि भाई ये जो है घर से निकाल दिया ऐसा कुछ

1502
01:48:10,640 --> 01:48:12,240
मैं देख रहा था

1503
01:48:12,240 --> 01:48:16,480
हम तो मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं देखो एक तो सभी

1504
01:48:16,480 --> 01:48:20,480
जो गुरु जी के शिष्य है ना जो गुरु जी ने जो बोला है उसमें में मर्यादा भी कोई चीज होती है।

1505
01:48:20,480 --> 01:48:25,280
कई ऐसे भगत हैं जो गले में ऐसे रामपाल जी का लॉकेट डाल लेते हैं। मैं आपको बता दूं

1506
01:48:25,280 --> 01:48:29,280
लॉकेट डालने से आदमी भगत नहीं बन जाता है। गुरु जी ने मर्यादा बताई है। ऐसा

1507
01:48:29,280 --> 01:48:33,360
नहीं कि हमारे कई ऐसे भगत हैं जिन्होंने ठीक है गुरु जी के भगत

1508
01:48:33,360 --> 01:48:37,680
हैं जिन्होंने ऐसे लॉकेट डाल रखा है। लेकिन वो क्या करते? सुनिए मेरी बात सुनिए। आप

1509
01:48:37,680 --> 01:48:41,680
जो बातें बोलने जा रहे हैं कुल मिला के उसका निष्कर्ष ये है

1510
01:48:41,680 --> 01:48:45,920
आपकी बातें बोलने का कि वो जो महिला थी वो झूठ

1511
01:48:45,920 --> 01:48:49,920
बोल रही थी कहीं ना कहीं। ठीक है? नहीं मैं यह नहीं कह रहा हूं झूठ बोल रही थी मेरा

1512
01:48:49,920 --> 01:48:54,000
यह नहीं है कहना वो या तो उस बात को नहीं समझ पाए हैं या फिर वो

1513
01:48:54,000 --> 01:48:58,080
किसी और तो सुनिए मैं इसी बारे में आपको मैं इसी बारे में

1514
01:48:58,080 --> 01:49:02,080
आपको बता रहा हूं जो ये है ये तो एक विश्वास की बात

1515
01:49:02,080 --> 01:49:06,160
है कि हमें उनकी बात कैसी लग रही है आपको उनकी बात कैसी लग रही है फिर

1516
01:49:06,160 --> 01:49:10,160
से वही होने लगा जो अभी आप पिछली बार आए थे ना तो मुझे मेरी आवाज रिपीट सुनाई दे रही थी

1517
01:49:10,160 --> 01:49:12,880
अब फिर से होने लगा

1518
01:49:12,880 --> 01:49:16,960
मैं तो कुछ कर नहीं रहा इसमें अपने आप ही हो रहा हूं तो क्या कहे अभी आ रही है क्या मेरी

1519
01:49:16,960 --> 01:49:21,920
आवाज रिपीट आपको अब नहीं आ रही है। जसवंत जी शायद आपसे आ रही थी।

1520
01:49:21,920 --> 01:49:26,000
तो हमारी यह बात है। अब मुझे थोड़ा

1521
01:49:26,000 --> 01:49:27,280
सा आपने जैसे बताया

1522
01:49:27,280 --> 01:49:31,440
कि आपने बहुत चारों धाम घूम लिए मगर आपको रामपाल जी में सच्चाई नजर आई। तो

1523
01:49:31,440 --> 01:49:35,520
इसलिए आपने रामपाल जी को पकड़ा। ठीक है। मुझे आप यह

1524
01:49:35,520 --> 01:49:40,720
बताइए कि धर्म क्या है?

1525
01:49:40,720 --> 01:49:44,720
देखो सर मैं आपसे एक मेरी रिक्वेस्ट मानू क्या आप? खाली शब्दों के जाल में तो मैं

1526
01:49:44,720 --> 01:49:48,880
देखो नहीं। भाई साहब ये शब्दों का जाल नहीं है। मैंने बहुत साधारण सी

1527
01:49:48,880 --> 01:49:52,880
बात आपसे पूछी है भाई साहब कि आप अगर रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म

1528
01:49:52,880 --> 01:49:58,160
मान रहे हैं तो यू शुड नो कि धर्म होता क्या है?

1529
01:49:58,160 --> 01:50:02,240
रंजीत जी रंजीत जी रंजी एक

1530
01:50:02,240 --> 01:50:08,240
रंजीत जी प्लीज तो अब मुझे आप ये बताइए कि धर्म क्या है?

1531
01:50:08,800 --> 01:50:12,880
अरे सर अब ये वही बात हो गई ना धर्म का वैसे शब्दों में डिफाइन करना ये

1532
01:50:12,880 --> 01:50:16,880
मेरे लिए पॉसिबल नहीं है सर। मैं एक आप जो कहेंगे उस बात पर हां ना कर

1533
01:50:16,880 --> 01:50:20,960
सकता हूं। मेरा यह मैं बता सकता हूं बस। तो आपको इसका मतलब

1534
01:50:20,960 --> 01:50:24,960
यह नहीं पता है कि धर्म है क्या? पता तो है। पता है लेकिन शब्दों का

1535
01:50:24,960 --> 01:50:29,120
इधर उधर हो गया तो उसमें फिर बहुत बड़े प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है। क्या हो जाएगा? गोली

1536
01:50:29,120 --> 01:50:33,200
थोड़ी ना मार दी जाएगी आपको। बात गोली की नहीं है सर। बातों की डिबेट होती है लेकिन

1537
01:50:33,200 --> 01:50:37,280
मैं यहां पर बात वो आ गई ना कि मैं शब्दों के जाल में मिला के कुल मिलाकर

1538
01:50:37,280 --> 01:50:42,080
के आप हमारी सारी बातों को वो करेंगे टेस्टिफाइड

1539
01:50:42,080 --> 01:50:46,240
और उसके बाद जब हम आपसे कोई बात पूछेंगे तो आपके पास एक ही जवाब है कि मैं नौ सिखिया

1540
01:50:46,240 --> 01:50:50,720
हूं मुझे कुछ नहीं आता। ये कौन सी बात है? जब आप नौ सिखिए

1541
01:50:50,720 --> 01:50:54,800
मान लीजिए मान लीजिए कि आप नौ सिखिए। एक मिनट 1 मिनट। मान

1542
01:50:54,800 --> 01:50:58,800
लीजिए कि आप नौ सिखिए मान लिया। तो फिर आप यह दावा कैसे कर रहे हैं कि मैंने

1543
01:50:58,800 --> 01:51:03,040
यह चुनाव किया और वह सही चुनाव है। जब आपको धर्म और अधर्म

1544
01:51:03,040 --> 01:51:07,280
की व्याख्या नहीं पता है तो आपको कैसे पता कि किस आधार पर मैं किसको

1545
01:51:07,280 --> 01:51:11,680
चुनू और किसको ना चुनू?

1546
01:51:11,680 --> 01:51:16,160
हां वो ठीक है आपकी बात क्वेश्चन आपका सही है लेकिन वो शब्दों की बात

1547
01:51:16,160 --> 01:51:20,240
तो सुनिए सुनिए तेरे लिए कर्तव्य

1548
01:51:20,240 --> 01:51:24,320
और अकर्तव्य क्या करना है और क्या नहीं करना

1549
01:51:24,320 --> 01:51:28,960
है इसके लिए शास्त्र प्रमाण है। शास्त्र

1550
01:51:28,960 --> 01:51:33,280
में मन मुखी व्याख्या बिल्कुल नहीं। मनमुखी

1551
01:51:33,280 --> 01:51:37,440
चले मन मुखी व्याख्या बिल्कुल नहीं। तो सबसे

1552
01:51:37,440 --> 01:51:41,600
पहली बात तो ये है कि आपके पास धर्म का अर्थ ही नहीं पता है। मैं आपको बता

1553
01:51:41,600 --> 01:51:45,600
देता हूं क्या है धर्म का अर्थ?

1554
01:51:45,600 --> 01:51:49,760
जीव की चाह का वास्तविक विषय जीव

1555
01:51:49,760 --> 01:51:54,240
कौन है समझ रहे है ना? हां बताओ आप। जीव

1556
01:51:54,240 --> 01:51:58,240
नहीं समझ रहे बोल तो दो भाई आप बात पूरी

1557
01:51:58,240 --> 01:52:02,320
करो ज तो बताऊंगा जीव समझते हैं कि नहीं समझते जीव

1558
01:52:02,320 --> 01:52:06,640
कौन होता है आत्मा को समझता हूं सोल आत्मा को बोलते हैं जीव ठीक है

1559
01:52:06,640 --> 01:52:11,760
जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद

1560
01:52:11,760 --> 01:52:15,840
स्वरूप परमेश्वर जीव की डिमांड क्या है

1561
01:52:15,840 --> 01:52:20,480
वास्तविक जीव की वास्तविक डिमांड है सच्चिदानंद

1562
01:52:20,480 --> 01:52:25,040
स्वरूप परमेश्वर ये जीव की मूल चाह आप खाने में,

1563
01:52:25,040 --> 01:52:27,200
पीने में, सोने में,

1564
01:52:27,200 --> 01:52:31,360
जागते में, ठंडे में, गरम में, हर

1565
01:52:31,360 --> 01:52:36,160
जगह आप किसको ढूंढ रहे हो? किसको ढूंढ रहे हो?

1566
01:52:36,160 --> 01:52:40,640
भगवान को। सच्चिदानंद को।

1567
01:52:40,640 --> 01:52:44,720
ढूंढ रहे हो ना? मैं सतचित होना चाहता हूं। और ये बात भी

1568
01:52:44,720 --> 01:52:49,200
मैं अपने मन से नहीं बोल रहा। इसको कहते हैं तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र

1569
01:52:49,200 --> 01:52:53,680
प्रमाण है। ये बात कहां से बोल रहा हूं? असतो मा सद्गमया तमसो

1570
01:52:53,680 --> 01:52:57,680
मा ज्योतिरगमया मृत्यु माम गमया सरकारी स्कूलों

1571
01:52:57,680 --> 01:53:01,760
तक में ये लाइन लिखी मिल जाएगी आपको असतो मा सदगमया तमसो

1572
01:53:01,760 --> 01:53:06,160
मा ज्योतिगमया मृत्यम गमया कोई भी जो जीव है

1573
01:53:06,160 --> 01:53:11,200
वो असत से सत की ओर जाना चाहता है ये उसकी मूल इच्छा है

1574
01:53:11,200 --> 01:53:15,360
वो तमसो मा ज्योतिर्गमया अज्ञान से ज्ञान की

1575
01:53:15,360 --> 01:53:19,600
ओर जाना चाहता है ये उसकी मूल इच्छा है मृत्यु माम

1576
01:53:19,600 --> 01:53:23,760
गमया मृत्यु से अमृत्व की ओर आना जाना चाहता है।

1577
01:53:23,760 --> 01:53:27,920
यह उसकी मूल इच्छा है। ठीक है? तो जीव की

1578
01:53:27,920 --> 01:53:32,080
चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप

1579
01:53:32,080 --> 01:53:36,240
परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले जो

1580
01:53:36,240 --> 01:53:41,440
शास्त्र हैं यथासंभव

1581
01:53:41,440 --> 01:53:42,240
उनको कहते हैं

1582
01:53:42,240 --> 01:53:46,800
वेद। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित

1583
01:53:46,800 --> 01:53:50,880
कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप

1584
01:53:50,880 --> 01:53:54,960
परमेश्वर को प्राप्त कराए जाने के निमित्त

1585
01:53:54,960 --> 01:53:59,920
बताई गई विधि का नाम धर्म है। समझ रहे हैं?

1586
01:53:59,920 --> 01:54:04,400
धर्म क्या है? कि उस सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1587
01:54:04,400 --> 01:54:08,560
को प्राप्त कैसे किया जाएगा? वो जो विधि है

1588
01:54:08,560 --> 01:54:12,960
वही धर्म है। यह करना है यह नहीं करना है। सच बोलना

1589
01:54:12,960 --> 01:54:17,760
है, झूठ नहीं बोलना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक जाना है।

1590
01:54:17,760 --> 01:54:23,360
मांस नहीं खाना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक जाना है।

1591
01:54:23,360 --> 01:54:27,360
है ना? व्यभचार नहीं करना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक क्या

1592
01:54:27,360 --> 01:54:31,520
करना है? जाना है। तो धर्म और अधर्म की व्याख्या किसके

1593
01:54:31,520 --> 01:54:35,360
आधार पर है?

1594
01:54:35,360 --> 01:54:39,520
शास्त्र प्रमाण बता रहे हो ना आप? आपको कुछ समझ में नहीं आया।

1595
01:54:39,520 --> 01:54:43,600
हां हां शास्त्र शास्त्र ही प्रमाण है। अभी आपने बताया ना कर्तव्य और अकर्तव्य जो है

1596
01:54:43,600 --> 01:54:48,160
शास्त्र जैसा ठीक है। वो ठीक है। कर्तव्य और अकर्तव्य

1597
01:54:48,160 --> 01:54:52,320
का अस्तित्व इसलिए है क्योंकि हमें भगवान को प्राप्त करना है।

1598
01:54:52,320 --> 01:54:56,400
किसे प्राप्त करना है? भगवान को। भगवत प्राप्ति करनी

1599
01:54:56,400 --> 01:55:00,400
है। मोक्ष प्राप्त करना है। ठीक है? इतना समझ

1600
01:55:00,400 --> 01:55:05,360
में आया आपको? हां वो तो आ गया।

1601
01:55:05,360 --> 01:55:10,000
तो अब मुझे यह बताइए कि आपने बहुत चारों धाम घूमने के बाद

1602
01:55:10,000 --> 01:55:14,480
जो आपने तत्व धरती को पकड़ा है क्या उसके द्वारा प्रतिपादित

1603
01:55:14,480 --> 01:55:18,720
होने वाला जो ईश्वर है वो उसका अस्तित्व सिद्ध होता

1604
01:55:18,720 --> 01:55:22,480
है?

1605
01:55:22,480 --> 01:55:27,520
बिल्कुल होता है। सत बारे में बताया है गुरु जी ने। बताइए

1606
01:55:27,520 --> 01:55:31,680
ईश्वर का अस्तित्व कैसे सिद्ध किया उन्होंने बताइए। ईश्वर

1607
01:55:31,680 --> 01:55:35,920
का अस्तित्व है ना जब हम यहां से शरीर छोड़कर जाएंगे तो गुरु जी के ज्ञान के अकॉर्डिंग

1608
01:55:35,920 --> 01:55:40,080
हमें जो है ऊपर एक सतलोक बताया है

1609
01:55:40,080 --> 01:55:44,080
अरे मेरे भाई ये तो उन्होंने बताया है मैं एक नास्तिक हूं अभी

1610
01:55:44,080 --> 01:55:48,320
आपके सामने अब मेरे सामने आप ईश्वर को सिद्ध करिए कि ईश्वर है इस दुनिया

1611
01:55:48,320 --> 01:55:53,360
में क्या आपके तत्वदर्शी ने नास्तिकों का खंडन किया है

1612
01:55:53,360 --> 01:55:57,600
नास्तिकों का तो खंडन है ना भगवान है हर चीज में बताया है कि बिना भगवान

1613
01:55:57,600 --> 01:56:02,240
के पत्ता भी नहीं हिल सकता कुछ कुछ नहीं हो सकता बिना भगवान के तो भाई अरे

1614
01:56:02,240 --> 01:56:06,240
अरे भाई मेरे सामने वो चीज है। ये बताया

1615
01:56:06,240 --> 01:56:10,400
है कि बिना भगवान के पत्ता नहीं हिल सकता। मगर भगवान है। ये तो सिद्ध

1616
01:56:10,400 --> 01:56:14,480
करो। हां भगवान है ना? बिल्कुल। सिद्ध

1617
01:56:14,480 --> 01:56:17,040
करो।

1618
01:56:17,040 --> 01:56:21,360
सिद्ध अब कैसे करें बताओ। मुझे विश्वास दिलाओ। मुझे

1619
01:56:21,360 --> 01:56:25,440
युक्ति दो। प्रमाण दो कि मैं मान लूं कि हां इस दुनिया में भगवान का अस्तित्व

1620
01:56:25,440 --> 01:56:29,440
है। मैं थोड़ी देर आपके लिए नास्तिक बन गया। अब मुझे विश्वास दिलाइए

1621
01:56:29,440 --> 01:56:33,920
कि भगवान है। क्या दिया है ऐसा ज्ञान तत्वदर्शी

1622
01:56:33,920 --> 01:56:37,760
ने? अगर कोई इंसान नास्तिक है जो भगवान को मानता

1623
01:56:37,760 --> 01:56:41,760
ही नहीं है। हां तो उससे तो बहस

1624
01:56:41,760 --> 01:56:46,240
नहीं की जा सकती। नहीं। हम कर सकते हैं।

1625
01:56:46,240 --> 01:56:50,240
हम कर सकते हैं। हमारे गुरु आपके अनुसार तत्वदर्शी नहीं है। मगर

1626
01:56:50,240 --> 01:56:54,640
हम कर सकते हैं।

1627
01:56:54,640 --> 01:56:58,960
हम कर सकते हैं। हम निरत्तर कर सकते हैं। सामने नास्तिक को

1628
01:56:58,960 --> 01:57:03,280
जो दुनिया से धर्म और एक मिनट जो दुनिया से धर्म को छीनना

1629
01:57:03,280 --> 01:57:07,680
चाहता है। हम उसके मुंह पर टेप लगा सकते हैं। हमारे गुरु आपके अनुसार तत्वदर्शी

1630
01:57:07,680 --> 01:57:11,680
नहीं है ना। हमें मगर यह सिखाया गया कि नास्तिकों का मुंह कैसे बंद करना है।

1631
01:57:11,680 --> 01:57:15,680
क्योंकि नास्तिक वो व्यक्ति है जो सबसे पहले धर्म के रास्ते में रोड़ा

1632
01:57:15,680 --> 01:57:20,080
है। तो आप बताइए आपके तत्वदर्शी ने क्या बताया नास्तिकों

1633
01:57:20,080 --> 01:57:24,160
को रोकने के लिए? देखिए हमारे गुरु जी ने तो बताया भगवान में पावर

1634
01:57:24,160 --> 01:57:28,480
है। उसके नाम में शक्ति है। नाम भगवान अरे मेरे भाई भगवान

1635
01:57:28,480 --> 01:57:33,360
है। ये तो बताओ आप मुझे। कैसे सिद्ध करोगे भगवान का अस्तित्व?

1636
01:57:33,360 --> 01:57:38,080
कहां बताया? कौन सी बुक में लिखा है? भगवान है। प्रूफ

1637
01:57:38,080 --> 01:57:42,240
की बात करें तो गुरुजी ने तो देखो बाइबल में भी दिखा दिया। गुरु ग्रंथ साहिब

1638
01:57:42,240 --> 01:57:46,640
में दिखा दिया। मैं आपसे पूछ रहा हूं कि इस संसार में

1639
01:57:46,640 --> 01:57:50,640
भगवान का अस्तित्व भी है। ये आप मुझे सिद्ध करिए।

1640
01:57:50,640 --> 01:57:52,800
सिद्ध सिद्ध किससे करना

1641
01:57:52,800 --> 01:57:57,120
है? प्रमाण किताबों में दिखाना है या कोई जादू मंत्र दिखाना है। कैसे सिद्ध?

1642
01:57:57,120 --> 01:58:01,200
अरे मेरे भाई कोई मैं किसी प्रमाण को तो किताब को तो

1643
01:58:01,200 --> 01:58:05,280
तब स्वीकार करूंगा ना जब मैं आपके ऊपर विश्वास कर लूं कि हां आप भगवान के बारे में

1644
01:58:05,280 --> 01:58:08,400
बता रहे हो।

1645
01:58:08,400 --> 01:58:12,400
हां तो बिल्कुल अब तो का नास्तिकों

1646
01:58:12,400 --> 01:58:16,800
का मुंह बंद होगा युक्ति से आप मुझे तर्क दीजिए तर्कों से मुझे संतुष्ट

1647
01:58:16,800 --> 01:58:20,800
करिए देखो हमारे हमारे पास अगर खाली

1648
01:58:20,800 --> 01:58:25,040
बातों का तर्क आप ले तो तर्क तो बहुत सारे हैं बताइए तर्क

1649
01:58:25,040 --> 01:58:29,440
नास्तिकों का मुंह बंद हो जाए वो तर्क बताइए हां है ना बिल्कुल

1650
01:58:29,440 --> 01:58:33,920
प्रूफ है लेकिन ऑन द स्पॉट एज ए मैजिक तो अरे प्रूफ की क्या बात है मैं

1651
01:58:33,920 --> 01:58:39,920
प्रूफ जब युक्ति की बात हो रही है तो उसमें उसमें प्रूफ की बात ही नहीं है। कोई

1652
01:58:40,240 --> 01:58:44,240
जब युक्ति की बात हो रही है तो उसमें उसमें तो किसी आपको कोई

1653
01:58:44,240 --> 01:58:48,240
भी संसाधन की आवश्यकता ही नहीं है। आप मुंह खोलिए अपना बस आप

1654
01:58:48,240 --> 01:58:52,400
बताइए आपके तत्वदर्शी ने नास्तिकों का खंडन करने के लिए क्या

1655
01:58:52,400 --> 01:58:56,400
विद्या दी है आपको? बताइए। विद्या यह

1656
01:58:56,400 --> 01:59:00,480
है कि इस संसार में जो कुछ भी हो रहा है, आत्मा आ रही

1657
01:59:00,480 --> 01:59:04,480
है, जा रही है, जो क्रियाविधि हो रही है, कोई ना कोई तो क्रिएटर है उसका और वही

1658
01:59:04,480 --> 01:59:08,880
सुप्रीम गॉड है। कुछ उसमें शक्ति है, पावर है, वही चला रहा है इस संसार को।

1659
01:59:08,880 --> 01:59:13,120
इंसान आते हैं, कुछ बीच में मर जाते हैं, कोई बीमार हो जाते हैं, कोई रोगी

1660
01:59:13,120 --> 01:59:17,360
हो जाते हैं। उनके साथ कई ऐसे भी मैंने तो चमत्कार देखे। आप तो मानोगे

1661
01:59:17,360 --> 01:59:21,360
नहीं इन चीजों को। तो अच्छा मतलब आप चमत्कार से

1662
01:59:21,360 --> 01:59:25,600
ये सिद्ध करना चाहते हैं कि भगवान है। चमत्कार खाली चमत्कार

1663
01:59:25,600 --> 01:59:29,760
भगवान सिद्ध होता है। खाली चमत्कार नहीं पूरा उन्होंने गीता

1664
01:59:29,760 --> 01:59:33,760
दिखाई वेद दिखाया सब कुछ बताया। खाली चमत्कार गीता और वेद की बात तो

1665
01:59:33,760 --> 01:59:39,040
तब आएगी ना जब नास्तिक गीता और वेद को मानता होगा।

1666
01:59:39,040 --> 01:59:43,200
एक ना सुनिए एक एक नास्तिक व्यक्ति है जो

1667
01:59:43,200 --> 01:59:47,280
यह समझना चाहता है कि अगर दुनिया में भगवान है तो मैं कैसे मानू कि

1668
01:59:47,280 --> 01:59:51,360
भगवान है। अब आप जैसे छोटा बच्चा होता है मान लो 10 साल का 15

1669
01:59:51,360 --> 01:59:55,440
साल का उसको अभी गीता वेद पे इतना विश्वास नहीं है कि नहीं नहीं इसमें जो लिखा है

1670
01:59:55,440 --> 01:59:59,520
वो सत्य है। वो अपने पिता से सवाल करता है कि पापा आप भगवान को

1671
01:59:59,520 --> 02:00:03,920
क्यों मानते हैं? भगवान है ये मुझे प्रूफ करके दिखाओ।

1672
02:00:03,920 --> 02:00:08,000
तो आप उसको प्रूफ करेंगे उस बेटे को या छोड़ देंगे

1673
02:00:08,000 --> 02:00:12,240
और यह तत्व ज्ञान आपको मिला है कि नहीं मिला है? हां

1674
02:00:12,240 --> 02:00:16,560
बिल्कुल दिया है। हर चीज के बारे में उदाहरण दिए हैं। हर चीज को बताइए

1675
02:00:16,560 --> 02:00:21,120
बताइए वो उदाहरण बताइए। आप ये मत बताइए कि दिया है। आप वो उदाहरण बताइए।

1676
02:00:21,120 --> 02:00:25,520
जी उदाहरण ये है कि आए हमने जन्म क्यों लिया?

1677
02:00:25,520 --> 02:00:29,520
क्यों मरेंगे? कहां जाएंगे? क्यों आए? भाई ये सब ये

1678
02:00:29,520 --> 02:00:33,520
जन्म मरण क्यों लिया? आप आप नहीं है। आप आत्मा है। ये सब बातें तो

1679
02:00:33,520 --> 02:00:37,520
तब है जब आप यह मान लो कि आप जो है इस इस

1680
02:00:37,520 --> 02:00:41,600
शरीर से अलग भी कोई अस्तित्व है आपका। जब आप ये

1681
02:00:41,600 --> 02:00:46,880
मान लो कि आत्मा भी है दुनिया में। आदमी क्यों माने आत्मा को

1682
02:00:46,880 --> 02:00:51,040
ये सब तर्क तो दो। नहीं मानेगा तो वो अपने कर्म भोगेगा

1683
02:00:51,040 --> 02:00:54,320
अपने हिसाब से। मतलब आपके पास ये तत्व ज्ञान

1684
02:00:54,320 --> 02:00:56,800
नहीं है।

1685
02:00:56,800 --> 02:01:01,040
अब इसका तो क्या कोई नास्तिक है तो उसको तो क्या जवाब दे भाई? अरे

1686
02:01:01,040 --> 02:01:05,120
मेरे भाई अगर कोई समझना चाहता है कि मैं आपकी बातों को समझना चाहता हूं

1687
02:01:05,120 --> 02:01:09,120
मुझे बताइए भगवान है तो कैसे है निराकार है साकार

1688
02:01:09,120 --> 02:01:13,280
है वो कैसे है मुझे बताओ तो मुझे संतुष्ट तो करो तो आप

1689
02:01:13,280 --> 02:01:17,680
कह दोगे नहीं भाई तुम भगवान को नहीं ढूंढ रहे हो तुम जाओ

1690
02:01:17,680 --> 02:01:21,760
यही करोगे सृष्टि रचना बताई गई है पूरी सृष्टि रचना बतानी पड़ेगी

1691
02:01:21,760 --> 02:01:26,080
भैया कैसे कैसे आत्मा आई कैसे कैसे धरती

1692
02:01:26,080 --> 02:01:30,080
है वो वो तो तब की बात है कैसे आत्मा आई जब आदमी आदमी

1693
02:01:30,080 --> 02:01:34,080
ये विश्वास करता हो कि इस दुनिया से अलग भी किसी दुनिया का

1694
02:01:34,080 --> 02:01:40,080
एकिस्टेंस है। वो एकिस्टेंस तो मनवाओ हमको।

1695
02:01:40,560 --> 02:01:45,120
वो सर सामने वाले की बुद्धि पर निर्भर करता है। इसको तो कैसे मनवाएंगे?

1696
02:01:45,120 --> 02:01:49,200
आप ये बताइए आपने कैसे माना कि इस दुनिया में भगवान है।

1697
02:01:49,200 --> 02:01:53,280
आप ही बता दीजिए। कैसे माना? मैं बताता हूं। कैसे माना? मैं ऐसा

1698
02:01:53,280 --> 02:01:57,360
हनुमान जी की संकट मोचन जी का जो ये सुंदरकांड जो पाठ है मैं खूब

1699
02:01:57,360 --> 02:02:01,360
करता था। मैं थोड़ा बीमार भी रहा बीच में पुजारियों का मैंने

1700
02:02:01,360 --> 02:02:05,360
देखा अरे भाई मेरी बात सुन हनुमान जी की पूजा

1701
02:02:05,360 --> 02:02:09,760
क्यों मानी आपने उससे पहले की बात बताओ हमारे पिताजी पिताजी

1702
02:02:09,760 --> 02:02:14,000
ने बताई हमारे गांव में हमने देखा भाई ये सुंदरकांड का पाठ होता है

1703
02:02:14,000 --> 02:02:18,160
करते यानी कि पिताजी के करने से आपने मान लिया कि हां ये

1704
02:02:18,160 --> 02:02:22,160
जो कर रहे हैं तो भगवान है लेकिन पिताजी को इस चीज की नॉलेज थोड़ी

1705
02:02:22,160 --> 02:02:26,160
थी सही है गलत है मैं ये नहीं कह रहा सही गलत आपने पिताजी की बात

1706
02:02:26,160 --> 02:02:30,320
से माना कि दुनिया में कोई भगवान भी है। हां, पिताजी है, गांव

1707
02:02:30,320 --> 02:02:34,400
वाले हैं। इनसे माना। हां। इसका मतलब आपने पिताजी पर

1708
02:02:34,400 --> 02:02:38,960
विश्वास किया कि इस दुनिया में कोई भगवान है। हां।

1709
02:02:38,960 --> 02:02:43,120
है ना? हां हां बिल्कुल। यानी कि आपको भगवान के

1710
02:02:43,120 --> 02:02:47,760
एकिस्टेंस को सिद्ध करने वाले आपके पिताजी हैं। अब

1711
02:02:47,760 --> 02:02:51,920
वो अब पता लग रहा है ना पिताजी नहीं है। अरे आपने

1712
02:02:51,920 --> 02:02:55,840
भगवान का अस्तित्व किसके कहने पर स्वीकारा? अस्तित्व सही

1713
02:02:55,840 --> 02:03:00,000
पूजा गलत पूजा की बात नहीं कर रहा हूं मैं। हम

1714
02:03:00,000 --> 02:03:04,560
पिताजी के कहने पर आपने अस्तित्व स्वीकारा है ना भगवान का।

1715
02:03:04,560 --> 02:03:08,880
उन्होंने तो मुझसे कुछ नहीं कहा। मैंने तो उनको देखा और मैंने उनको

1716
02:03:08,880 --> 02:03:12,880
देख के आपने स्वीकार किया ना। हां देख के स्वीकार किया

1717
02:03:12,880 --> 02:03:16,960
कि भाई यही अच्छी चीज है जब ये कर रहे हैं। तो ठीक है। तो मगर आप ही के

1718
02:03:16,960 --> 02:03:21,040
आचरण से ये पता लग जाता है कि पिता की कही हुई बात से ये सिद्ध

1719
02:03:21,040 --> 02:03:25,680
नहीं होता है कि वो सही बात है। हम है ना?

1720
02:03:25,680 --> 02:03:29,920
सही बात है। तो फिर अब आप मुझे फिर से बताइए कि भगवान

1721
02:03:29,920 --> 02:03:33,920
है यह कैसे सिद्ध हुआ? पिताजी पर तो आपको विश्वास है नहीं क्योंकि पिताजी तो गलत

1722
02:03:33,920 --> 02:03:37,920
बात बता रहे हैं साथ में। तो भगवान है ये कैसे सिद्ध हुआ आपके जीवन

1723
02:03:37,920 --> 02:03:41,920
में? देखो हमारे पिताजी भी है ना भगत थे। खूब गोवर्धन जी

1724
02:03:41,920 --> 02:03:46,080
की परिक्रमा लगाते थे। सारी बातें अचानक एक एक्सीडेंट हुआ और

1725
02:03:46,080 --> 02:03:50,160
मेरे भाई आप लंबी बात खींच रहे हैं। आप अपनी बात बताइए कि

1726
02:03:50,160 --> 02:03:54,560
मेरे को ये विश्वास भगवान है इस दुनिया में। वो कैसे हुआ? ऐसे

1727
02:03:54,560 --> 02:03:58,560
हुआ क्योंकि मैंने ये राधे राधे वाले खूब देखे वृंदावन में मथुरा में देखे

1728
02:03:58,560 --> 02:04:02,560
और हर जगह मैंने भगवान को पहले ढूंढा दो साल में परेशान तो भगवान को ढूंढा

1729
02:04:02,560 --> 02:04:06,640
क्यों भगवान को माना क्यों मैं ये पूछ रहा हूं आपसे आप पता नहीं क्या समझ

1730
02:04:06,640 --> 02:04:10,800
ही नहीं पा रहे हो मुझे समझदार लग रहे थे इन चीजों

1731
02:04:10,800 --> 02:04:11,360
का

1732
02:04:11,360 --> 02:04:16,080
ज्ञान लेने के लिए कि आखिर सही कौन बता रहा है गलत भगवान अरे सही

1733
02:04:16,080 --> 02:04:20,160
भाई साहब कौन सही भगवान के विषय में बता रहा है ये एक

1734
02:04:20,160 --> 02:04:24,480
अलग चैप्टर है भगवान है यह आपने क्यों

1735
02:04:24,480 --> 02:04:28,560
मान लिया? क्योंकि आपके पिताजी तो गलत बात भी बोल सकते हैं तो भगवान

1736
02:04:28,560 --> 02:04:32,640
है। यह आपने क्यों माना? ये इसलिए माना

1737
02:04:32,640 --> 02:04:37,120
क्योंकि मेरी अंतरात्मा कहती है कि भाई भगवान होना चाहिए।

1738
02:04:37,120 --> 02:04:41,120
बस अच्छा इसका मतलब अंतरात्मा जो कहती है वो सही कहती

1739
02:04:41,120 --> 02:04:45,440
है। क्योंकि मैं आस्तिक हूं। मैं नास्तिक नहीं। एक बात

1740
02:04:45,440 --> 02:04:49,520
अरे आस्तिक तो उसे कहते हैं जो भगवान को मानता है। हां तो मानते हैं

1741
02:04:49,520 --> 02:04:53,520
ना लेकिन वो भी तो देखना पड़ेगा कौन सा सही है। आस्तिक सुनिए आस्तिक होने

1742
02:04:53,520 --> 02:04:57,680
की वजह से भगवान को नहीं माना जाता है। भगवान को मानने की वजह से आपको आस्तिक

1743
02:04:57,680 --> 02:05:02,240
कहा जाता है। वांट टू बी नोटेड। समझ रहे हैं? आस्तिक

1744
02:05:02,240 --> 02:05:06,320
होने की वजह से भगवान को नहीं माना जाता है। भगवान को माना जाता है। इसलिए आप

1745
02:05:06,320 --> 02:05:10,560
आस्तिक है। समझ रहे हैं? अब बात आती है कि

1746
02:05:10,560 --> 02:05:14,720
आपने भगवान को माना क्यों? क्या है? क्या उसका तर्क

1747
02:05:14,720 --> 02:05:18,880
है कि मैंने इस कारण से भगवान को माना। आपने आपके पास

1748
02:05:18,880 --> 02:05:23,120
आज आज तक जितने तर्क होंगे भगवान को मानने के मैं सब

1749
02:05:23,120 --> 02:05:26,560
यही के यही काटूंगा। आपके पास कोई आधार

1750
02:05:26,560 --> 02:05:30,800
नहीं है भगवान को मानने का क्योंकि आप गलत गुरु की शरण में है। मैं ये सिद्ध

1751
02:05:30,800 --> 02:05:34,880
करूंगा। नहीं। चलिए भगवान को भगवान हमेशा सुख देता

1752
02:05:34,880 --> 02:05:39,040
है। ऐसा हमारी अंतरात्मा कहती है। अच्छा सुख रुकिए। इसका

1753
02:05:39,040 --> 02:05:44,640
मतलब अंतरात्मा जो कहेगी वो सही कहेगी।

1754
02:05:44,640 --> 02:05:48,720
भगवान के विषय में तो अंतरात्मा सही भाई साहब भाई साहब देखिए थोड़ा

1755
02:05:48,720 --> 02:05:52,720
सा इजी हो जाएगा आपने एक सिद्धांत दिया मेरी अंतरात्मा

1756
02:05:52,720 --> 02:05:58,400
कहती है भगवान है तो अंतरात्मा जो कहेगी वो सही कहेगी

1757
02:05:58,400 --> 02:06:02,400
भगवान के विषय में सही कहेगी सही कहेगी मेरी अंतरात्मा

1758
02:06:02,400 --> 02:06:06,400
कहती है हजारों लाखों लोगों की अंतरात्मा कहती है कि कृष्ण भगवान

1759
02:06:06,400 --> 02:06:10,480
है तो सही है वो बिल्कुल आपको

1760
02:06:10,480 --> 02:06:14,880
ऐसा लगता है तो सही होगा आपके आप बताओ सही है कि नहीं पलटो

1761
02:06:14,880 --> 02:06:19,440
मत बात से आप बताओ सही है कि नहीं अब

1762
02:06:19,440 --> 02:06:23,440
मैं इसका मैं आपको एक जवाब देता हूं अगर इस

1763
02:06:23,440 --> 02:06:27,600
इसका जवाब यह है कि भगवान कोई पत्थर को पूछ रहा है तो जिसकी जो श्रद्धा

1764
02:06:27,600 --> 02:06:31,840
है वो भाई साहब प्रश्न बदल रहा है मैं आपसे पूछ रहा हूं

1765
02:06:31,840 --> 02:06:35,920
कि अंतरात्मा सही कहती है ये आपने

1766
02:06:35,920 --> 02:06:39,920
सिद्धांत दिया अब मैं यहां पर बैठे हुए पांच लोगों से कहलवा

1767
02:06:39,920 --> 02:06:41,840
रहा हूं उनकी अंतरात्मा कहती

1768
02:06:41,840 --> 02:06:45,840
है कि कृष्ण भगवान है, शिव भगवान है तो क्या

1769
02:06:45,840 --> 02:06:49,920
यह सही बात है या गलत बात है? अगर विश्वास सॉलिड है तो

1770
02:06:49,920 --> 02:06:53,920
जो जिसको मान रहा है वो उसी में उसकी श्रद्धा हो जाती है। ऐसा गीता में के साथ सुनिए

1771
02:06:53,920 --> 02:06:58,000
सत्य क्या होता है? उसमें अगर नहीं लगता है। सत्य क्या

1772
02:06:58,000 --> 02:07:02,080
होता है? उसमें अगर नहीं लगता है। आपके जो आपके आपसे

1773
02:07:02,080 --> 02:07:06,560
ही पूछ लेता हूं। आपके जो रामपाल है वो अगर वाले तत्वदर्शी

1774
02:07:06,560 --> 02:07:11,760
है या वास्तव में वास्तव में तत्वदर्शी है?

1775
02:07:11,760 --> 02:07:15,760
इसका मैं आपको थोड़ा सा लंबा हो जाएगा आंसर। बस यह बात है और तो कोई बात

1776
02:07:15,760 --> 02:07:19,760
नहीं है। क्यों आप हर चीज का जवाब ऐसे ही करना लंबा हो जाएगा

1777
02:07:19,760 --> 02:07:23,920
और तो कोई बात नहीं। आपको यही नहीं पता कि आपके जो तत्व वास्तव में तत्व

1778
02:07:23,920 --> 02:07:27,920
है कि नहीं। हर चीज का नहीं। देखो जो जिस

1779
02:07:27,920 --> 02:07:32,080
चीज में बहुत ज्यादा श्रद्धा रखता है ना और अगर भगवान वहां है तो वो उसी

1780
02:07:32,080 --> 02:07:36,160
रूप में उसको दर्शन देता है। फिर फिर फिर भगवान वहां है उसी रूप में

1781
02:07:36,160 --> 02:07:40,320
दर्शन। आपका सिद्धांत क्या कहता है? कृष्ण परमेश्वर

1782
02:07:40,320 --> 02:07:44,480
परमात्मा परम ब्रह्म है कि नहीं? गीता

1783
02:07:44,480 --> 02:07:48,560
को पढ़कर को तो लगता नहीं है। तो इसका मतलब अंतरात्मा

1784
02:07:48,560 --> 02:07:52,000
गलत भी बोल सकती है।

1785
02:07:52,000 --> 02:07:56,560
बोल सकती है ना? अंतरात्मा तो गलत बोल सकती है। हां।

1786
02:07:56,560 --> 02:07:57,060
तो

1787
02:07:56,880 --> 02:08:00,880
इसका मतलब आपका ये तर्क कट गया कि मेरी अंतरात्मा कहती है

1788
02:08:00,880 --> 02:08:05,200
कि भगवान है इसलिए मैं भगवान को मानता हूं। आप कोई दूसरा कारण दीजिए

1789
02:08:05,200 --> 02:08:08,480
भगवान को मानने का।

1790
02:08:08,480 --> 02:08:12,640
भाई भगवान को इसलिए भी मानना चाहिए ना आखिर ज्ञान ज्ञान ज्ञान

1791
02:08:12,640 --> 02:08:16,640
भी होना चाहिए। पहले आप मुझे एक बात बताइए पहले आप मुझे एक बात बताइए

1792
02:08:16,640 --> 02:08:22,480
अंतरात्मा की बात कट गई ना?

1793
02:08:22,480 --> 02:08:26,480
कट गई ना? हर आदमी की अंतरात्मा अलग-अलग विचार इसमें

1794
02:08:26,480 --> 02:08:30,640
तो इसका मतलब ये नहीं माना जा सकता ना कि अंतरात्मा कांटे

1795
02:08:30,640 --> 02:08:34,640
की नोक की बात कहेगी। अंतरात्मा सारी बात सही नहीं

1796
02:08:34,640 --> 02:08:38,800
कह सकती। ये बात सही है। तो इसका मतलब अंतरात्मा के आधार

1797
02:08:38,800 --> 02:08:42,800
पर आप भगवान को नहीं मान सकते। अब मुझे वो कारण बताओ जिसके कारण आपने

1798
02:08:42,800 --> 02:08:47,920
अंतर जिसके कारण आपने भगवान को माना बताओ

1799
02:08:47,920 --> 02:08:52,000
भगवान को पहले मैंने देखा जो भी मेरे आसपास का माहौल है उसको देखा

1800
02:08:52,000 --> 02:08:56,960
जो भगवान को मंदिर में जा रहा है उससे चर्चा की मंदिर के पुजारी के पास गया

1801
02:08:56,960 --> 02:09:01,040
आप आप बाद की बातें बता रहे हैं मैं किस पर विश्वास किया किस पर

1802
02:09:01,040 --> 02:09:05,040
नहीं किया मैं पूछ रहा हूं भगवान है ये आपने

1803
02:09:05,040 --> 02:09:09,840
कब माना क्यों माना वो बताइए

1804
02:09:09,840 --> 02:09:13,840
भगवान भगवान है। जब बीमार आदमी को भगवान जब सही स्वस्थ हो जाता है तो उसको लगता है

1805
02:09:13,840 --> 02:09:18,160
भगवान जैसी शक्ति है। मेरे साथ ऐसा हुआ इसलिए कोई भी

1806
02:09:18,160 --> 02:09:22,720
मतलब दुनिया मतलब दुनिया में कोई भी बीमार आदमी जब स्वस्थ हो जाएगा

1807
02:09:22,720 --> 02:09:26,800
तो उसको अगर लगेगा वो चीज सत्य होगी। ये

1808
02:09:26,800 --> 02:09:30,960
वो बीमारी नहीं है जो डॉक्टर वाली हो। ये कंडीशन

1809
02:09:30,960 --> 02:09:35,040
जब डॉक्टर फेल हो जाते हैं उसके बाद की बात कर रहा हूं जो कि डॉक्टरों

1810
02:09:35,040 --> 02:09:39,520
के एप्रोच से बाहर हो गए। भैया ये हमारे बस की बात नहीं है। ये तो कोई

1811
02:09:39,520 --> 02:09:43,600
जिसको बोलते हैं ना प्रेत वादा आत्मा तो कोई कुछ भी कहो अपने शब्दों में

1812
02:09:43,600 --> 02:09:48,320
लेकिन जब मतलब चमत्कार वो मानो

1813
02:09:48,320 --> 02:09:52,400
डायरेक्टली मैं इस बात मैं समझ गया आप ये कह रहे हैं कि जब साइंस

1814
02:09:52,400 --> 02:09:56,560
काम नहीं कर पाती है और उसको बीमारी को भी कोई सही कर दे

1815
02:09:56,560 --> 02:10:00,560
तो इसका मतलब भगवान है। कुछ उसमें समथिंग इज देयर

1816
02:10:00,560 --> 02:10:04,800
कुछ तो है ना ये तो मानना पड़ेगा ना। अरे समथिंग इज देयर कैसे?

1817
02:10:04,800 --> 02:10:08,960
मैं यह पूछ रहा हूं आपको क्या काल में इतनी ताकत

1818
02:10:08,960 --> 02:10:13,600
है कि नहीं कि वो किसी रोगी को सही कर सके?

1819
02:10:13,600 --> 02:10:17,840
काल में काल में भी है लिमिटेड पावर

1820
02:10:17,840 --> 02:10:21,920
है लेकिन वो मृत्यु को नहीं टाल सकता। ऐसा मैं सर पूछ रहा हूं रोगी को सही

1821
02:10:21,920 --> 02:10:25,040
कर सकता है कि नहीं? कर सकता

1822
02:10:25,040 --> 02:10:30,400
है

1823
02:10:30,400 --> 02:10:34,400
पर वो मरे हुए को जिंदा नहीं कर सकता है। भाई साहब मैं पूछ रहा

1824
02:10:34,400 --> 02:10:38,400
हूं रोगी को सही कर सकता है कि नहीं? रोगी को कर सकता है। एक लिमिट

1825
02:10:38,400 --> 02:10:42,560
तक कर सकता है। रोगी को सही कर सकता है। इसलिए आपने

1826
02:10:42,560 --> 02:10:46,560
माना रोगी को सही कर सकता है। तो इसका मतलब दुनिया में जितने

1827
02:10:46,560 --> 02:10:50,640
भी रोगी ऐसे हैं जो कि क्या

1828
02:10:50,640 --> 02:10:54,880
कहते डॉक्टर्स के द्वारा सही नहीं हो पाए थे। तो उनके

1829
02:10:54,880 --> 02:10:58,960
मन में ये ख्याल आया यदि कि इस दुनिया में कोई भगवान है तो उससे भी सिद्ध

1830
02:10:58,960 --> 02:11:03,040
नहीं होता है कि भगवान है क्योंकि काल भी बुराई भी ऐसे

1831
02:11:03,040 --> 02:11:07,120
चमत्कार कर सकती है। हां बुराई कर सकती

1832
02:11:07,120 --> 02:11:11,120
है लेकिन फिर वो दोबारा फस जाएगा। परमानेंट इलाज नहीं होगा उसका। वो बाद

1833
02:11:11,120 --> 02:11:15,440
की बात है। मैं ये पूछ रहा हूं कि इसका मतलब रोगी

1834
02:11:15,440 --> 02:11:20,560
के ठीक होने से ये नहीं सिद्ध होता है कि दुनिया में भगवान है।

1835
02:11:20,560 --> 02:11:26,560
रोगी के ठीक होने से यह सिद्ध नहीं होता है। भगवान

1836
02:11:31,200 --> 02:11:35,200
अब ये तो है बात सही है और क्या तो अब मुझे बताइए

1837
02:11:35,200 --> 02:11:39,600
कि आपने क्यों माना कि भगवान है? तत्वदर्शी

1838
02:11:39,600 --> 02:11:43,840
के शिष्य है ना आप? हम बताइए। ज्ञान से माना,

1839
02:11:43,840 --> 02:11:47,920
ज्ञान से माना और फिर ये जो बातें जो मैं बता रहा हूं, इनसे माना

1840
02:11:47,920 --> 02:11:53,440
और चमत्कार से कौन सा ज्ञान? ज्ञान

1841
02:11:53,440 --> 02:11:57,600
कौन सी बुक में लिखा है कि भगवान है ऐसे सिद्ध होता है

1842
02:11:57,600 --> 02:12:01,760
बताओ। ये तो गीता हमने काफी जितनी भी

1843
02:12:01,760 --> 02:12:06,000
गुरु जी बताते हैं साधना चैनल पे काफी सारा उसमें सिद्ध कर रखा है।

1844
02:12:06,000 --> 02:12:10,160
तो वो जो सिद्ध किया है वो बताओ ना भाई। वो

1845
02:12:10,160 --> 02:12:14,400
सब बता रखा है। तत्वदर्शी अध्याय चार के 34 में बोल रखा है कि भाई गीता के

1846
02:12:14,400 --> 02:12:18,560
फालतू बात मैं पूछ रहा हूं उस तत्वदर्शी ने जो आपको बताया है आपको

1847
02:12:18,560 --> 02:12:23,040
सिखाया है वो तत्व बताओ तो तो तत्व

1848
02:12:23,040 --> 02:12:27,040
के बात आपकी सही है लेकिन अब वो तत्व है भी तो काफी लें्थी हो जाएगा ना तत्व तो

1849
02:12:27,040 --> 02:12:32,080
काफी पूरी सृष्टि अवस्था बतानी पड़ेगी आपको पता क्या है जो आप यहां पे आए हो

1850
02:12:32,080 --> 02:12:36,080
मैं तो बस ये बताने आया था मैं तो मेरे को भाई वो इंटरव्यू जो आप बता रहे

1851
02:12:36,080 --> 02:12:41,200
थे कि वो जो है इस तरीके से वहां से जाने के बाद यह ढूंढना

1852
02:12:41,200 --> 02:12:45,200
कि भगवान है। यह कैसे सिद्ध होता है। यदि तत्वदर्शी

1853
02:12:45,200 --> 02:12:46,240
से ना मिले तो

1854
02:12:46,240 --> 02:12:50,960
हमारे पास आ जाना। हम बता देंगे। ठीक है। जय श्री राम।

1855
02:12:50,960 --> 02:12:55,680
अब एक दो मेरी बात भी सुन लो थोड़ी सी। अब आपसे

1856
02:12:55,680 --> 02:12:59,840
मजा नहीं आया बात करके। अब आप फिर आप जब ये जान आप ये जान

1857
02:12:59,840 --> 02:13:03,840
के आना किसी दिन दोबारा करेंगे। जान के आना कि भगवान है ये कैसे

1858
02:13:03,840 --> 02:13:07,920
सिद्ध होता है। और तत्वदर्शी ने नहीं। मैं आपसे दोबारा

1859
02:13:07,920 --> 02:13:12,720
मिलूंगा। दोबारा मिलूंगा। लेकिन आप आपने तो अपना मुझे दे दिया।

1860
02:13:12,720 --> 02:13:16,880
हो चुके हैं और लोग भी है लाइन में। आपसे फिर बात करेंगे। आपने

1861
02:13:16,880 --> 02:13:21,040
अपना क्वेश्चन दे दिया। पर मेरा क्वेश्चन भी तो सुनते जाओ। तो क्वेश्चन करने से

1862
02:13:21,040 --> 02:13:25,120
फायदा क्या है? जब हमारे पास अभी जवाब का टाइम नहीं है। आप

1863
02:13:25,120 --> 02:13:29,120
क्वेश्चन कर दोगे और मैं उसके बाद चर्चा को बंद करूंगा। तो

1864
02:13:29,120 --> 02:13:33,280
कहने वाले ये कहेंगे भैया इसने जवाब नहीं दिया। तो आप अपना क्वेश्चन उस दिन

1865
02:13:33,280 --> 02:13:37,280
करना। हो सकता है हम कल करेंगे। कल आ जाना। क्वेश्चन कर लेना क्या दिक्कत

1866
02:13:37,280 --> 02:13:41,600
है? चलो ठीक है। कोई मरा जा रहा है क्या?

1867
02:13:41,600 --> 02:13:45,600
ठीक है। ठीक जय श्री राम। ठीक है जी।

1868
02:13:45,600 --> 02:13:50,720
सत और पूछो अपने तत्वदर्शी से।

1869
02:13:50,720 --> 02:13:55,040
भगवान को सिद्ध कर नहीं पाएंगे। ये सिद्ध करेंगे वो भगवान है। वो भगवान है।

1870
02:13:55,040 --> 02:13:59,120
पर ये तत्वदर्शी फिरते हैं। इनके दिमाग में ना बस एक चीज फिट हुई

1871
02:13:59,120 --> 02:14:03,200
है। उसके अलावा और कुछ नहीं है। वो ये तो आउट ऑफ

1872
02:14:03,200 --> 02:14:07,200
द सिलेबस क्वेश्चन होते हैं ये वाले। मतलब हर बात पे वो

1873
02:14:07,200 --> 02:14:11,440
कह रहे है कि भ मेरे को कुछ पता नहीं है। मुझे कुछ पता नहीं यहां करने क्या आए हो। जय

1874
02:14:11,440 --> 02:14:15,440
श्री राम भैया जी। जय श्री राम जसवंत राजावत जी

1875
02:14:15,440 --> 02:14:19,520
आज आपने बहुत देर इंतजार किया है। मैंने देखा बहुत

1876
02:14:19,520 --> 02:14:23,600
हो गया। जी मैं ये बोलना चाहता हूं। बैठ बैठ के बात करें।

1877
02:14:23,600 --> 02:14:27,840
बैठ के बैठ के बात करें। ठीक है। परेशान हुए। मैं ये बोलना

1878
02:14:27,840 --> 02:14:31,840
चाहता था के मैं इनके लिए बीच में नहीं बोल पाया। मैं

1879
02:14:31,840 --> 02:14:35,840
भी यह बोलना चाहता था कि बरवाला आश्रम में जब रामपाल जी यहीं पर थे

1880
02:14:35,840 --> 02:14:39,920
जब आपने पेपर नहीं पढ़ा होगा तो पेपर में एक लड़के

1881
02:14:39,920 --> 02:14:44,000
की बरवाला आश्रम में ही जो जिनके परमात्मा का स्वयं का

1882
02:14:44,000 --> 02:14:48,160
धाम है सतलोक उसमें करंट से मौत हुई

1883
02:14:48,160 --> 02:14:52,160
थी और एक आदमी ने वहां पर बरवाला

1884
02:14:52,160 --> 02:14:56,160
आश्रम में फांसी लगाई थी अब जब सतलोक में ही ऐसा हो रहा

1885
02:14:56,160 --> 02:15:02,160
है कभी इनसे पूछो पुरानी जानकारी करें

1886
02:15:05,840 --> 02:15:09,840
बिल्कुल यहां पर मैं एक बात बताऊंगा अभी आने वाले दो-तीन दिन में

1887
02:15:09,840 --> 02:15:13,920
ही इसी चैनल पे एक भाई साहब आने वाले हैं जिनके बेटे को

1888
02:15:13,920 --> 02:15:18,000
कैंसर हुआ और सारे डॉक्टर्स ने हाथ खड़ा कर

1889
02:15:18,000 --> 02:15:23,760
दिया। रामपाल के खेमे में पहुंचकर

1890
02:15:23,760 --> 02:15:27,840
रामपाल के खेमे में पहुंच देखिए वहां की वह खबर आपके सामने है। गूगल

1891
02:15:27,840 --> 02:15:32,080
से है यह एक युवक की मौत करंट लगने से

1892
02:15:32,080 --> 02:15:36,560
जो आपने जो खबर अभी बताई है वो है ना

1893
02:15:36,560 --> 02:15:40,640
और आने वाले दो-तीन दिनों में इसको थोड़ा बड़ा बड़ा

1894
02:15:40,640 --> 02:15:44,800
चलिए छोड़िए आने वाले दो-तीन दिनों में एक भाई साहब हमारे चैनल पर आने

1895
02:15:44,800 --> 02:15:48,800
वाले हैं। वो इतनी मार्मिक उनकी कथा है कि पूछिए नहीं। वो अभी

1896
02:15:48,800 --> 02:15:52,960
मुझसे बोल रहे थे। मतलब बताते बताते वो रो रहे थे।

1897
02:15:52,960 --> 02:15:57,360
उनके बेटे को कैंसर था। सभी हॉस्पिटल्स ने हाथ खड़े कर दिए।

1898
02:15:57,360 --> 02:16:01,600
इन भाई साहब को यह रामपाल के खेमे वालों ने बोला

1899
02:16:01,600 --> 02:16:05,840
कि हम आपके बेटे को ठीक कर देंगे। आप यहां आ जाइए ऐसा करिए

1900
02:16:05,840 --> 02:16:10,000
वैसा करिए और पहले 2100 फिर 21000 फिर क्या-क्या

1901
02:16:10,000 --> 02:16:14,320
नहीं वहां पर कराया उनका बेटा उनसे 22 तारीख वो पुष्पा 2 रिलीज

1902
02:16:14,320 --> 02:16:18,480
हुई थी तो वो कहते उसको कुछ बता दिया होगा तो वो कहते

1903
02:16:18,480 --> 02:16:21,040
कहते बेचारा चला गया इस दुनिया से पापा

1904
02:16:21,040 --> 02:16:25,120
पुष्पा 2 बहुत अच्छी पिक्चर आई है बहुत बहुत दुखी

1905
02:16:25,120 --> 02:16:29,840
थे रो रहे थे

1906
02:16:29,840 --> 02:16:34,000
उसको याद कर मतलब व्यक्ति के रोग कैसे

1907
02:16:34,000 --> 02:16:38,320
अपनी चीज करते हैं नाटक कमाई वो आप देखिए

1908
02:16:38,320 --> 02:16:42,480
आएंगे अभी दो तीन दिन में आएंगे यहां पर जी इन लोगों इन लोगों को शर्म

1909
02:16:42,480 --> 02:16:46,640
नहीं है अभी पैसे के पीछे कितने गिर रहे हैं देखो ये एक मतलब रोगी के साथ कितना

1910
02:16:46,640 --> 02:16:50,960
बड़ा मतलब परमात्मा से ही एक तरफ विश्वासघात है ये तो

1911
02:16:50,960 --> 02:16:54,960
वो ये कह रहे थे रोतेरोते कि मेरा बेटा जा तो रहा ही था जाता

1912
02:16:54,960 --> 02:16:59,040
मगर ये जो नाटक हुआ ना उसके साथ जाते टाइम जाते समय

1913
02:16:59,040 --> 02:17:03,040
वो बहुत मुझे मतलब आत्मा को कचोट के चला गया मुझे

1914
02:17:03,040 --> 02:17:07,040
उनकी आवाज सुनके मुझे रोना आ गया उस समय कोई भी

1915
02:17:07,040 --> 02:17:11,040
होगा उसको लगेगा बुरा लगेगा सर है ही बुरा मतलब कीजिए और

1916
02:17:11,040 --> 02:17:15,440
इतनी प्रासंगिक उन्होंने बात बताई ना कि हां वाकई में अभी जो वो पुत्पा

1917
02:17:15,440 --> 02:17:19,680
टू नाम का चलचित्र आया रिलीज हुआ है तो उसी के बारे में बच्चा

1918
02:17:19,680 --> 02:17:23,760
बोल रहा था अभी उसकी मृत्यु हुई है अभी देहांत हुआ है बताओ बताओ

1919
02:17:23,760 --> 02:17:26,160
बताओ

1920
02:17:26,160 --> 02:17:30,160
मतलब डॉक्टरों से भी ऊपर हो गए डॉक्टर भी आजकल यही कर रहे हैं और मरते मरीज से पैसे

1921
02:17:30,160 --> 02:17:36,160
कमाते इन्होंने भी यही काम किया ये उसके भी गुरु शुरू हो रखा है।

1922
02:17:36,320 --> 02:17:40,400
आएंगे वो भाई इनकी बातें सुन ले। फिर हम लोग लाइव को

1923
02:17:40,400 --> 02:17:44,800
बढ़ाते हैं क्योंकि 10:00 बज चुका है। गोस्वामी जी जय श्री राम।

1924
02:17:44,800 --> 02:17:48,880
जय श्री राम। जय श्री राम। शिवास भैया हरि ओम

1925
02:17:48,880 --> 02:17:54,880
जी से बात करके बहुत अच्छा लगा। उसने सही बात पकड़ ली।

1926
02:17:58,640 --> 02:18:02,640
पर ये सब लोग गाली गलौज बहुत करते हैं। कमेंट में बहुत गाली

1927
02:18:02,640 --> 02:18:06,720
बोलते हैं। जी ऐसा नहीं करना चाहिए ना। आपसे

1928
02:18:06,720 --> 02:18:10,960
बात करनी हो तो सही तरह से बात करें। इज्जत से आए। हरि ओम जी से आपने कितना

1929
02:18:10,960 --> 02:18:14,960
अच्छी तरह से बात की। सभी लोगों ने सुना। जी।

1930
02:18:14,960 --> 02:18:20,080
अच्छी तरह से बात करेगा तो उसका भी ज्ञान बढ़ेगा। उसका भी सब

1931
02:18:20,080 --> 02:18:24,560
होगा वो सही होगा। सब लोगों को अच्छा ज्ञान मिलेगा।

1932
02:18:24,560 --> 02:18:28,880
आपका बात सही है। दूसरे की बात भी आप सुनने के सभी

1933
02:18:28,880 --> 02:18:32,000
उत्सुक है सब लोग।

1934
02:18:32,000 --> 02:18:38,000
शुभम उपाध्याय जी जय श्री राम। जय श्री राम भैया।

1935
02:18:41,360 --> 02:18:45,760
मैं ये पूछना चाहता हूं कि जैसे कुछ टाइम पहले जो बागेश्वर

1936
02:18:45,760 --> 02:18:51,760
धाम जो वाले बाबा जी हैं उनके लिए

1937
02:18:52,400 --> 02:18:56,560
मतलब कुछ रील वगैरह आपकी तरफ से आई थी कि जातिवाद

1938
02:18:56,560 --> 02:19:00,640
जो है मतलब उसके ऊपर जो राजेंद्र

1939
02:19:00,640 --> 02:19:05,120
दास जी महाराज ने अभी देखिए परसों तरसों उनको कहा वहां पर बैठे थे बागेश्वर

1940
02:19:05,120 --> 02:19:09,200
वाले जो महाराज जी हैं वहां पर उन्होंने कहा कि वर्णाश्रम धर्म को खत्म

1941
02:19:09,200 --> 02:19:13,360
करने से काम नहीं चलेगा। वर्णाश्रम धर्म के नाम पे जाति के नाम पे

1942
02:19:13,360 --> 02:19:17,360
जो गलत चीजें हो रही हैं जो उसका गलत फायदा उठा रहे हैं। तू ये

1943
02:19:17,360 --> 02:19:21,520
है तू वो है तू उधर बैठ हम ब्राह्मण है। ये सब जो हो रहा है वो नहीं होना चाहिए।

1944
02:19:21,520 --> 02:19:25,760
उसके लिए है मगर उन्होंने राजेंद्र राज जी ने कहा भी और वहां बागेश्वर

1945
02:19:25,760 --> 02:19:29,920
वाले सुन भी रहे हैं बैठ के। वो कह रहे हैं ऐसे खत्म नहीं कर सकते इसको

1946
02:19:29,920 --> 02:19:34,000
क्योंकि जाति धर्म कुल धर्मा शाश्वता और हम लोग आज भी

1947
02:19:34,000 --> 02:19:38,400
अपना अस्तित्व उसी के कारण बचा पाए हैं। उसी

1948
02:19:38,400 --> 02:19:42,480
कारण आज हम लोग अपना अस्तित्व बचा पाए हैं। तो यह तो हो गया

1949
02:19:42,480 --> 02:19:45,840
और भी एक दो लोग हैं।

1950
02:19:45,840 --> 02:19:51,840
देखिए जो वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा है वह तो अब नहीं करेंगे।

1951
02:19:57,200 --> 02:20:01,520
जी बताइए कि आपका

1952
02:20:01,520 --> 02:20:06,000
क्या नाम है? सॉलिट्यूड जी आपका चेहरा नहीं दिखाएंगे आप?

1953
02:20:06,000 --> 02:20:10,000
नो सर मेरे को नहीं दिखाना। मेरा नाम भी मेंशन

1954
02:20:10,000 --> 02:20:14,080
मत करिएगा। जी जी जी मैं

1955
02:20:14,080 --> 02:20:18,320
इनसे रामपाल जी महाराज से सिक्स इयर्स से मतलब मैं

1956
02:20:18,320 --> 02:20:22,480
एक्चुअली कुछ आपको बोल सकती हूं। मैं सिर्फ आप ही से मतलब इंटरेक्ट करना चाहती

1957
02:20:22,480 --> 02:20:27,200
हूं। आई डू नॉट वांट टू सी देम। मतलब इट इज पॉसिबल।

1958
02:20:27,200 --> 02:20:31,280
मतलब मैं समझा नहीं कि आप सिर्फ मेरे से यहां लाइव में बात करना

1959
02:20:31,280 --> 02:20:35,360
चाहते हैं या WhatsApp इत्यादि पर? नहीं मतलब यहीं पे मतलब

1960
02:20:35,360 --> 02:20:39,440
सिर्फ आप ही का फेस दिखे। मतलब ऐसा हो सकता है। मतलब ठीक है। थोड़ी

1961
02:20:39,440 --> 02:20:44,400
देर के लिए

1962
02:20:44,400 --> 02:20:49,920
इनको थोड़ी देर आप लोग वेट कर लीजिए। जी जी जी।

1963
02:20:49,920 --> 02:20:54,000
हां जी। तो मेरे को यह है मैं इनको रामपाल जी

1964
02:20:54,000 --> 02:20:58,720
महाराज को सिक्स इयर्स से फॉलो कर रही हूं। ठीक है। और मेरा

1965
02:20:58,720 --> 02:21:02,720
मतलब मतलब मैं ये समझती हूं बहुत अच्छी तरीके से

1966
02:21:02,720 --> 02:21:07,120
मतलब हर चीज को बहुत अच्छे तरीके से समझती हूं जो आपने मतलब आप भी समझाते

1967
02:21:07,120 --> 02:21:11,280
हो। ये सब मैं मतलब कहीं ना कहीं एक कोने में मेरे अंदर वो चीज है

1968
02:21:11,280 --> 02:21:15,440
कि मतलब हां मतलब ऐसे तो नहीं हो सकता कि

1969
02:21:15,440 --> 02:21:19,520
जैसे अभी भी आपने करंट वाली बात बताई थी ये सब ये सब तो

1970
02:21:19,520 --> 02:21:23,600
नहीं हो सकता तो मतलब कहीं ना कहीं मतलब

1971
02:21:23,600 --> 02:21:27,600
एक तरीके से 90 10 का मेरे अंदर ऐसे दिमाग

1972
02:21:27,600 --> 02:21:32,000
में रहता है तो मेरे भी मन में ऐसे क्वेश्चंस उठते हैं।

1973
02:21:32,000 --> 02:21:36,000
मैं सिक्स इयर्स से उनको फॉलो कर रही हूं। तो मेरे को एक डर रहता है ऐसे पता नहीं

1974
02:21:36,000 --> 02:21:40,160
क्यों कि मतलब अगर मैं छोड़ दूं उन्हें तो पता नहीं कुछ गलत ना हो जाए और ऐसा

1975
02:21:40,160 --> 02:21:44,400
हुआ भी है कि मतलब अगर मैंने वो चीज अगर छोड़ भी दी है मतलब मेरे

1976
02:21:44,400 --> 02:21:49,360
को मैं घर से बाहर नहीं निकल सकती तो

1977
02:21:49,360 --> 02:21:53,360
क्या बोलते हैं मेरे घर वाले अलव नहीं करते बिल्कुल तो मैंने ऑनलाइन ही नाम

1978
02:21:53,360 --> 02:21:57,520
लिया था तो अब वो कहते हैं कि नहीं नहीं आओ यह बात मैं बहुत अच्छे

1979
02:21:57,520 --> 02:21:59,440
तरीके से समझती हूं कि

1980
02:21:59,440 --> 02:22:03,840
एज अ लड़की के घर में ऐसे विरोध नहीं करना चाहिए हमको

1981
02:22:03,840 --> 02:22:07,840
अभी थोड़ी देर पहले आपके उसमें कोई लाइव आया था। उन्होंने बोला था कि

1982
02:22:07,840 --> 02:22:12,000
वो तो नहाती भी नहीं है। ये वो ऐसे करके वो बता रही थी

1983
02:22:12,000 --> 02:22:16,000
घर से बाहर निकाल दिया। ये मैं एज अ ह्यूमन भी हमको ये शोभा नहीं

1984
02:22:16,000 --> 02:22:20,160
देता करना कि जैसे हम किसी से लड़ाई भी करें। मैं तो भक्त कर

1985
02:22:20,160 --> 02:22:24,320
उन सब की तो बहुत दूर की बात है। तो मेरे को अब मेरे को मतलब ये

1986
02:22:24,320 --> 02:22:28,480
जानना है कि कि मतलब मैं मेरे को क्या

1987
02:22:28,480 --> 02:22:32,480
करना चाहिए? मैं आपको बताता हूं। देखिए मैं

1988
02:22:32,480 --> 02:22:37,200
आपको बताता हूं शुरुआत से। देखिए इन्होंने जो ताना-बाना

1989
02:22:37,200 --> 02:22:41,920
बनाया है इसके साथ ही मैं आज का लाइव भी पूरा मानूंगा क्योंकि एक थोड़ा सा

1990
02:22:41,920 --> 02:22:46,960
वृतांत है। ये जो इन्होंने ताना-बाना बनाया है कि

1991
02:22:46,960 --> 02:22:51,120
काल श्री कृष्ण ने ज्ञान नहीं दिया। काल ने दिया है। ठीक है। मान

1992
02:22:51,120 --> 02:22:55,280
लेते हैं। थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं। अच्छा वो वो जो तत्वदर्शी

1993
02:22:55,280 --> 02:22:59,440
है वो कौन है? वो रामपाल है। यह भी मान लेते हैं। मगर यदि

1994
02:22:59,440 --> 02:23:04,720
तत्वदर्शी है तो वह तत्व ज्ञान देगा ना।

1995
02:23:04,720 --> 02:23:08,720
तत्व ज्ञान देगा ना। तो तत्व ज्ञान देने की जब बात

1996
02:23:08,720 --> 02:23:12,720
आती है तो तत्वदर्शी का कोई भी व्यक्ति पांच मिनट

1997
02:23:12,720 --> 02:23:14,880
नहीं बोल सकता है।

1998
02:23:14,880 --> 02:23:18,960
कोई भी व्यक्ति आप कभी भी देखो उनके चैनल्स पर जाकर के

1999
02:23:18,960 --> 02:23:23,040
वो ये प्रूफ तो करने में लगेंगे। यहां ये लिखा है। यहां ये लिखा है। काल ने ये

2000
02:23:23,040 --> 02:23:28,800
बोला काल ने वो बोला। वो मगर जो मूलभूत प्रश्न है

2001
02:23:28,800 --> 02:23:33,040
एक जीवात्मा के वो मूलभूत प्रश्नों का उत्तर

2002
02:23:33,040 --> 02:23:37,440
कभी भी तत्वदर्शी के लोग या तत्वदर्शी आपको देता हुआ नहीं दिखेगा

2003
02:23:37,440 --> 02:23:42,560
क्या कि यदि ईश्वर है

2004
02:23:42,560 --> 02:23:47,120
तो क्या वो सब कुछ कर सकता है क्या वह सर्वशक्तिमान

2005
02:23:47,120 --> 02:23:51,200
है यह है तत्व ईश्वर है तो कैसे सिद्ध होता है कि

2006
02:23:51,200 --> 02:23:55,520
ईश्वर है यह है तत्व अगर ईश्वर ने ही अच्छे

2007
02:23:55,520 --> 02:23:59,680
और बुरे दोनों लोगों को बनाया है तो ईश्वर की लिखी हुई

2008
02:23:59,680 --> 02:24:03,760
किसी किताब पर हम भरोसा कैसे करें कि ये हमारी अच्छाई के लिए है।

2009
02:24:03,760 --> 02:24:07,840
जब काल को भी ईश्वर बना रहा है। जब जीवात्माओं को भी ईश्वर

2010
02:24:07,840 --> 02:24:11,840
बना रहा है। बुराई को भी ईश्वर ही बना रहा है। तो कबीर वाणी कबीर

2011
02:24:11,840 --> 02:24:16,240
बीजक या उसके द्वारा नियुक्त किया हुआ जो तत्वदर्शी है वो बुराई

2012
02:24:16,240 --> 02:24:21,120
करने के लिए नहीं आना आया है। यह हमको कैसे पता चले

2013
02:24:21,120 --> 02:24:25,200
और फल स्वरूप जो मिलने वाला मोक्ष है क्या

2014
02:24:25,200 --> 02:24:29,280
यह वही मोक्ष है जो हम मांग रहे हैं जो हम चाहते

2015
02:24:29,280 --> 02:24:30,400
हैं

2016
02:24:30,400 --> 02:24:34,720
तो इन जो ये चार पांच तात्विक प्रश्न है

2017
02:24:34,720 --> 02:24:38,800
इनहीं का निचोड़ है जो हमारा ब्रदारक उपनिषद एक

2018
02:24:38,800 --> 02:24:42,880
तीन 28 का मंत्र है उसमें ये शब्द आया है क्या

2019
02:24:42,880 --> 02:24:47,360
असुतो मा सद्गमया तमो मागया मृत्यु मम गमया

2020
02:24:47,360 --> 02:24:52,080
ये जो हम ये प्रत्येक जीवात्मा मृत्यु से

2021
02:24:52,080 --> 02:24:56,640
अमरता की ओर जाना चाहती है। प्रत्येक जीवात्मा अज्ञानता

2022
02:24:56,640 --> 02:25:01,280
से ज्ञान की ओर जाना चाहती है। प्रत्येक जीवात्मा

2023
02:25:01,280 --> 02:25:05,280
कभी ना खत्म होने वाला सुख प्राप्त करना चाहती है।

2024
02:25:05,280 --> 02:25:09,520
इनहीं तीन चीजों को प्राप्त करने के निमित्त ईश्वर और धर्म

2025
02:25:09,520 --> 02:25:14,000
की आवश्यकता है। ठीक है? जी।

2026
02:25:14,000 --> 02:25:18,560
पहली बात। दूसरी बात यह है कि आपने कहा कि मुझे डर लगता है

2027
02:25:18,560 --> 02:25:22,640
कि मैं जब कुछ करती हूं तो मेरे साथ कुछ गलत होने लगता है। तो इसका मतलब क्या

2028
02:25:22,640 --> 02:25:26,880
है कि जब आप रामपाल की बातें मान रही हैं तो आपके

2029
02:25:26,880 --> 02:25:31,200
साथ तब अच्छा ही अच्छा हो रहा है। क्या ऐसा है? जी

2030
02:25:31,200 --> 02:25:35,840
क्या ऐसा है कि समस्या अच्छा हो रहा है? मेरे

2031
02:25:35,840 --> 02:25:40,080
को ऐसा लगता है कि मतलब मेरी जिनसे शादी होने वाली है।

2032
02:25:40,080 --> 02:25:44,320
अगर आपको लगता भी है अगर आपको लगता भी है तो इसका

2033
02:25:44,320 --> 02:25:46,400
निराकरण ये है

2034
02:25:46,400 --> 02:25:50,400
कि एक पुत्र माता के साथ भी

2035
02:25:50,400 --> 02:25:54,960
रमण करेगा तो उसको भी सुख की प्राप्ति होगी।

2036
02:25:54,960 --> 02:25:59,600
मगर वो धर्म नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ

2037
02:25:59,600 --> 02:26:03,760
कि सुख जो आपको भौतिक सुख मिल रहा है वो धर्म

2038
02:26:03,760 --> 02:26:08,000
का आधार नहीं है। वह धर्म का निर्णायक नहीं है। धर्म का निर्णायक

2039
02:26:08,000 --> 02:26:12,080
तो क्या है? वैराग्य। आप उसमें पराकाष्ठा में

2040
02:26:12,080 --> 02:26:16,240
जाइए। हमारे सभी शास्त्रों में वैराग्य की स्थिति बताई है। और अगर

2041
02:26:16,240 --> 02:26:20,240
हम अपनी दृष्टि से देखें तो एक वैरागी के जीवन में तो सबसे ज्यादा

2042
02:26:20,240 --> 02:26:24,480
दुख होता है। मगर भगवान ने तो जगह जगह ये कहा है कि वैरागी ही

2043
02:26:24,480 --> 02:26:28,800
है जो सबसे ज्यादा निकट है भगवान के। मेरे साथ

2044
02:26:28,800 --> 02:26:32,960
क्या है? मेरे को बात पता नहीं लंबी हो जाएगी

2045
02:26:32,960 --> 02:26:36,960
या कैसे पर मेरे को ऐसा लगता है कि सब कुछ साइकोलॉजी है। मतलब जैसे अभी

2046
02:26:36,960 --> 02:26:41,120
आपने वैराग्य की बात कही अभी आपने बोला मैं उनसे

2047
02:26:41,120 --> 02:26:45,120
हट के भी अगर आपसे बात कहूं रामपाल जी महाराज से हट के भी बात कहूं मेरे को

2048
02:26:45,120 --> 02:26:49,120
सब कुछ ऐसे लगता है कि सब कुछ साइकोलॉजी

2049
02:26:49,120 --> 02:26:53,200
है। यह तो कुछ नहीं है। अब जैसे वैराग्य की बात पे आप कर लो तो ऐसा लगता

2050
02:26:53,200 --> 02:26:57,680
है कि अच्छा ये बात इसलिए कही गई है क्योंकि

2051
02:26:57,680 --> 02:27:01,520
जो जो दुखी इंसान होगा उसको सेटिस्फाई करने के लिए ये

2052
02:27:01,520 --> 02:27:05,680
बात कही गई है। जिनसे मेरी शादी होने वाली है वो वो मेरे

2053
02:27:05,680 --> 02:27:09,760
को एक बात बोलते हैं कि मतलब वो प्रेमानंद जी

2054
02:27:09,760 --> 02:27:14,000
महाराज को मानते हैं तो उन्होंने मेरे को बोला कि तत्व एक ही है।

2055
02:27:14,000 --> 02:27:18,320
वो चाहे कहीं भी हो वो मतलब तत्व एक ही है। तू उसको कहीं भी पूज

2056
02:27:18,320 --> 02:27:22,640
तुम उसको कहीं भी पूछ लो। तो मैं इस बात से भी बहुत करती हूं।

2057
02:27:22,640 --> 02:27:26,880
समझती हूं इस बात को कि हां मतलब ऐसे भी हो सकता है

2058
02:27:26,880 --> 02:27:30,880
कि आप चाहे उसको कृष्ण कृष्ण करके भज लो या कहीं भी कैसे भी भज

2059
02:27:30,880 --> 02:27:35,840
लो मतलब जानना हम सबको बताता हूं इसमें दिक्कत क्या है

2060
02:27:35,840 --> 02:27:39,920
कि जो आप किसी भी नाम से भजोगे यदि वो हमारे शास्त्रों

2061
02:27:39,920 --> 02:27:44,560
द्वारा प्रमाणित नाम नहीं है तो आपके मन में

2062
02:27:44,560 --> 02:27:48,960
ईश्वर की जो सर्वशक्तिमत्ता है वो सिद्ध नहीं होगी क्योंकि

2063
02:27:48,960 --> 02:27:54,640
ईश्वर का एक दूसरा वर्ड है पूर्ण होना पूर्ण का मतलब मतलब आप समझते हैं

2064
02:27:54,640 --> 02:27:59,680
जी पूर्ण का मतलब जिसमें किसी भी बात का अभाव ना हो।

2065
02:27:59,680 --> 02:28:04,000
पूर्ण जी जी अगर वो चाहे कि मैं पेड़ को उखाड़

2066
02:28:04,000 --> 02:28:08,160
सकूं तो वो उखाड़ सके। अगर वो चाहे कि मैं दिन

2067
02:28:08,160 --> 02:28:12,720
को रात कर सकूं तो वो कर सके। अगर वो संसार

2068
02:28:12,720 --> 02:28:16,720
में ऐसी कोई बात ना हो जो वो ना कर सके। तो

2069
02:28:16,720 --> 02:28:20,720
ऐसा ईश्वर वो एकमात्र सनातन धर्म

2070
02:28:20,720 --> 02:28:24,800
के द्वारा ही प्राप्त होता है। उसके द्वारा दी जाने वाली जो ग्रंथ

2071
02:28:24,800 --> 02:28:28,960
है उनके द्वारा ही प्राप्त होता है। ऐसा ईश्वर जो कुछ

2072
02:28:28,960 --> 02:28:32,960
भी कर सकता है। अब मैं बताऊं कि ऐसा ही ईश्वर

2073
02:28:32,960 --> 02:28:37,360
क्यों होना चाहिए? जो सब कुछ कर सकता है। तो इसके

2074
02:28:37,360 --> 02:28:41,440
लिए पीछे चलते हैं कि ईश्वर है। यह बात

2075
02:28:41,440 --> 02:28:45,760
सिद्ध कैसे होती है? वहीं से पता चल जाएगा।

2076
02:28:45,760 --> 02:28:50,160
एक नास्तिक व्यक्ति जो है ना अब ध्यान से सुनिएगा आप मेरी बात।

2077
02:28:50,160 --> 02:28:54,960
एक नास्तिक व्यक्ति जो है वो भी यह सोचता है

2078
02:28:54,960 --> 02:28:58,960
कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा

2079
02:28:58,960 --> 02:29:03,760
पड़ रही है तो कम हो जाए। सोचता है कि नहीं सोचता है? जी।

2080
02:29:03,760 --> 02:29:07,760
यानी कि एक नास्तिक व्यक्ति जो भगवान को नहीं मानता है,

2081
02:29:07,760 --> 02:29:12,080
साइंस को मानता है। साइंस ने नहीं कहा कि धूप को आप कंट्रोल

2082
02:29:12,080 --> 02:29:16,400
कर सकते हो। फिर भी उसमें धूप को भी कंट्रोल कर लेने की इच्छा

2083
02:29:16,400 --> 02:29:21,280
विद्यमान है। है ना? जी जी।

2084
02:29:21,280 --> 02:29:25,360
एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी यह नहीं चाहता है कि वो मृत्यु को

2085
02:29:25,360 --> 02:29:29,600
प्राप्त हो। मृत्यु का विचार आते ही उसके मन में यह आएगा कि मैं उस बात

2086
02:29:29,600 --> 02:29:33,680
से अपने दिमाग को कहीं और ले जाऊं। तुरंत

2087
02:29:33,680 --> 02:29:39,680
यानी कि साइंस के विरुद्ध जाके एक नास्तिक व्यक्ति भी

2088
02:29:39,840 --> 02:29:44,160
मृत्यु से भाग रहा है। अच्छा कभी-कभी एक नास्तिक

2089
02:29:44,160 --> 02:29:48,160
व्यक्ति के मन में भी आता है कि काश ये जो भविष्य है वो

2090
02:29:48,160 --> 02:29:52,240
मुझे थोड़ी देर पहले पता चल जाता तो मेरा नुकसान ना

2091
02:29:52,240 --> 02:29:56,400
होता। यानी कि एक नास्तिक व्यक्ति भी भविष्य देख

2092
02:29:56,400 --> 02:30:00,480
लेना चाहता है। है ना? जी। तो इसका अर्थ यह है कि

2093
02:30:00,480 --> 02:30:04,480
एक नास्तिक व्यक्ति भी प्रकृति के सारे नियमों

2094
02:30:04,480 --> 02:30:10,400
के विरुद्ध सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है।

2095
02:30:10,400 --> 02:30:15,280
ठीक है। जी जी। अब दूसरी बात आती है

2096
02:30:15,280 --> 02:30:20,320
कि हमारे अंदर जिसज चीज की चाह है

2097
02:30:20,320 --> 02:30:24,560
हमारे अंदर जिस जिसज चीज की चाह है जिसको

2098
02:30:24,560 --> 02:30:29,120
हम अपने से अलग नहीं कर सकते हैं उस उस चाह का अस्तित्व

2099
02:30:29,120 --> 02:30:33,520
इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर भूख

2100
02:30:33,520 --> 02:30:37,680
है तो दुनिया में भोजन है। जी

2101
02:30:37,680 --> 02:30:42,320
हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है।

2102
02:30:42,320 --> 02:30:46,480
हमारे अंदर देखने की हमारे अंदर देखने की इच्छा है तो दुनिया

2103
02:30:46,480 --> 02:30:48,960
में दृश्य है। हमारे

2104
02:30:48,960 --> 02:30:53,200
अंदर सुनने की इच्छा है तो दुनिया में ध्वनि है, स्वर

2105
02:30:53,200 --> 02:30:57,440
है। तो तो क्या है कि

2106
02:30:57,440 --> 02:31:01,760
केवल हमारे अंदर भूख होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में खाने का

2107
02:31:01,760 --> 02:31:06,160
भोजन का अस्तित्व है। हमारे अंदर प्यास होने से ही यह

2108
02:31:06,160 --> 02:31:10,160
सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी का अस्तित्व है। उसी प्रकार

2109
02:31:10,160 --> 02:31:11,520
एक नास्तिक व्यक्ति

2110
02:31:11,520 --> 02:31:15,760
के अंदर भी सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह

2111
02:31:15,760 --> 02:31:19,920
यानी सच्चिदानंद होने की चाह से यह सिद्ध होता

2112
02:31:19,920 --> 02:31:22,640
है कि इस दुनिया में कोई है जो सब कुछ

2113
02:31:22,640 --> 02:31:27,440
कर सकता है। जो सच्चिदानंद है।

2114
02:31:27,440 --> 02:31:31,520
ठीक है? जी जी। हां। तो अभी तो

2115
02:31:31,520 --> 02:31:36,880
अभी हमने यहां से सिद्ध किया कि ईश्वर वही हो सकता है जो

2116
02:31:36,880 --> 02:31:41,040
सब कुछ कर सकता है। ठीक।

2117
02:31:41,040 --> 02:31:45,120
जी। अब जब हमने ये सिद्ध कर लिया। अब जब हमने ये सिद्ध कर

2118
02:31:45,120 --> 02:31:49,120
लिया तो बस इस पैरामीटर पे आप आप जिसकी भी भक्ति कर

2119
02:31:49,120 --> 02:31:53,280
रही है उस पर उसको नाप लीजिए। क्या वो सब कुछ कर सकने वाला है। बात

2120
02:31:53,280 --> 02:31:57,440
करें अगर कबीर की तो कबीर के बारे में यही लोग कहते

2121
02:31:57,440 --> 02:32:01,520
हैं कि कबीर जो है यहां पर आकर के वो अपना रूप

2122
02:32:01,520 --> 02:32:07,520
नहीं बदल सकता क्योंकि उसकी उसका रूप तो शाश्वत है।

2123
02:32:08,480 --> 02:32:12,640
जी तो क्या हुआ? कबीर बाधित हो गया और जो बाधित है

2124
02:32:12,640 --> 02:32:17,200
वह सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है। यानी कि लेकिन मतलब

2125
02:32:17,200 --> 02:32:21,280
मैंने यह भी पढ़ा कि जैसे वेदों में लिखा है कि मतलब

2126
02:32:21,280 --> 02:32:25,360
वो जो होते हैं मतलब जो कबीर परमात्मा मतलब ये शब्द जो लिखा

2127
02:32:25,360 --> 02:32:29,680
है कि वो अपना जो रूप है वो हल्का करके

2128
02:32:29,680 --> 02:32:32,400
आते हैं।

2129
02:32:32,400 --> 02:32:36,400
की बात अलग है। रूप को बदल देने की बात अलग है। पहली बात तो

2130
02:32:36,400 --> 02:32:40,640
यह है कि उन्होंने जब वेदों जब उन्हें संस्कृत नहीं आती

2131
02:32:40,640 --> 02:32:44,640
है तो उनको वेदों का अर्थ करना कैसे आ गया? पहली

2132
02:32:44,640 --> 02:32:48,640
बात तो यह है। दूसरी बात यह है कि चलो उनके वो गलतसलत मान भी

2133
02:32:48,640 --> 02:32:52,640
ले तो वह यह कहते हैं कि वो अपने जो प्रकाश है तेज है

2134
02:32:52,640 --> 02:32:57,040
उसको हल्का करके आते हैं। मगर अगर

2135
02:32:57,040 --> 02:33:01,920
वही रूप शाश्वत है वो बदल शाश्वत का अर्थ समझती हैं।

2136
02:33:01,920 --> 02:33:06,160
जो कभी बदला ना जा सके जो कभी बदल नहीं सकता जो अटल है वो शाश्वत

2137
02:33:06,160 --> 02:33:10,240
सत्य है। ठीक है? तो अगर कबीर ही

2138
02:33:10,240 --> 02:33:14,480
शाश्वत है तो वह अपना रूप नहीं

2139
02:33:14,480 --> 02:33:18,560
बदल सकता। तो यहां पर कबीर बाधित हो गया है।

2140
02:33:18,560 --> 02:33:22,560
कबीर कबीर दास जी है जो अगर वो ईश्वर है तो वो

2141
02:33:22,560 --> 02:33:23,600
अपना रूप नहीं बदल

2142
02:33:23,600 --> 02:33:27,600
सकते क्योंकि यही कह रहे हैं कि वो शाश्वत स्वरूप है। तो जब वो रूप नहीं

2143
02:33:27,600 --> 02:33:32,560
बदल सकते तो फिर वो वहां पे किस चीज की बात हुई है?

2144
02:33:32,560 --> 02:33:37,120
वो वहां पर अलग चीजों की बात हुई है जिसमें इन्होंने अपने मन के अनुसार

2145
02:33:37,120 --> 02:33:41,200
अर्थ ले लिया है।

2146
02:33:41,200 --> 02:33:45,360
हमने अपनी लाइव स्ट्रीम्स अगर आपने हमारी पीछे से देखी होगी

2147
02:33:45,360 --> 02:33:49,360
तो लगभग उनका हर क्लेम जो किया है उन्होंने वो उसको सिद्ध

2148
02:33:49,360 --> 02:33:53,440
किया है कि वो गलत है उनका क्लेम। अगर अभी हम ये बात कर रहे हैं कि

2149
02:33:53,440 --> 02:33:57,680
चलो मान लो उन्होंने जो कहा है वो वेदों में लिखा है तो हम क्या

2150
02:33:57,680 --> 02:34:01,760
उस ईश्वर को इसलिए मानने लगेंगे क्योंकि वो रामपाल

2151
02:34:01,760 --> 02:34:05,920
जी ने उसका जो अर्थ कर दिया है वो हम मानने लगेंगे क्या कि वो ईश्वर

2152
02:34:05,920 --> 02:34:10,400
है भाई आपकी यात्रा कहां से शुरू हुई है वो आपकी यात्रा

2153
02:34:10,400 --> 02:34:14,640
यहां से शुरू हुई है कि मुझे उस ईश्वर को प्राप्त करना है जो

2154
02:34:14,640 --> 02:34:18,720
कुछ भी कर सकता है तो क्या कबीर दास कुछ

2155
02:34:18,720 --> 02:34:22,720
भी कर सकते हैं नहीं कर सकते वह पहाड़ नहीं बन सकते

2156
02:34:22,720 --> 02:34:28,240
क्योंकि यही कह रहे हैं कि वह शाश्वत स्वरूप है।

2157
02:34:28,240 --> 02:34:32,320
अगर वह शाश्वत है तो वो अपना रूप नहीं बदल सकते। अगर वो

2158
02:34:32,320 --> 02:34:36,400
रूप बदल सकते हैं तो इसका मतलब ये जो कबीर का आपको डायग्राम दिख रहा है

2159
02:34:36,400 --> 02:34:39,600
यह शाश्वत स्वरूप नहीं है।

2160
02:34:39,600 --> 02:34:43,600
और जब आपने पूछा कि मुझे क्या करना चाहिए? तो

2161
02:34:43,600 --> 02:34:47,760
आपके एक मनुष्य के जीवन की लगभग हर समस्या का निदान श्रीमद्

2162
02:34:47,760 --> 02:34:51,840
भगवत गीता में दिया गया है। भगवान ने उसमें कहा कि जो लोग

2163
02:34:51,840 --> 02:34:56,080
मुझसे भिन्न किसी देवता की काज को भजते हैं

2164
02:34:56,080 --> 02:35:00,160
वो लोग ढूंढ तो मुझे ही रहे होते हैं मगर अवधि पूर्वक होने के

2165
02:35:00,160 --> 02:35:04,640
कारण उनका कभी कल्याण नहीं होता। तो क्या हुआ इसका अर्थ?

2166
02:35:04,640 --> 02:35:08,640
कि जब आप यह सोचते हो कि हमारा जो कबीर है वह कृष्ण से अलग

2167
02:35:08,640 --> 02:35:12,800
है वह कृष्ण जो कुछ भी कर सकता है जो पूर्ण है

2168
02:35:12,800 --> 02:35:16,880
सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह असतो मा सद्गमया तमसो

2169
02:35:16,880 --> 02:35:20,960
ज्योतिगम मृत्यु मृतम गमया इसमें जो जीव की डिमांड

2170
02:35:20,960 --> 02:35:25,200
बताई जा रही है जो डिजायर बताई जा रही है उसका जो सब्जेक्ट

2171
02:35:25,200 --> 02:35:29,440
है वो कृष्ण है वो और जब हम कहते हैं कि कबीर कृष्ण नहीं

2172
02:35:29,440 --> 02:35:33,440
है उससे अलग है परमात्मा है तो यह बाधित है तो भगवान ने क्या

2173
02:35:33,440 --> 02:35:37,440
कहा जो मुझ मुझसे भिन्न अगर तुम मेरा ही रूप समझ रहे हो, मुझ में और

2174
02:35:37,440 --> 02:35:41,520
उसमें भेद नहीं कर रहे हो तो कोई बात नहीं है। मगर

2175
02:35:41,520 --> 02:35:45,600
भेद तो आएगा क्योंकि हमारे शास्त्रों में जहां कृष्ण की बात हो रही है,

2176
02:35:45,600 --> 02:35:49,920
उनके साथ में कबीर की बात नहीं हो रही तो आपके मन में भेद आएगा।

2177
02:35:49,920 --> 02:35:54,080
तो इसलिए उनसे भिन्न किसी की भी भक्ति करने पर

2178
02:35:54,080 --> 02:35:54,720
जैसे हम शिव

2179
02:35:54,720 --> 02:35:58,720
की भक्ति कर रहे हैं। तो क्यों नहीं आएगा भेद? क्योंकि शिव और विष्णु को एक

2180
02:35:58,720 --> 02:36:02,880
कहा गया है। मैं जैसे

2181
02:36:02,880 --> 02:36:06,880
मेरे को मेरे अंदर एक और चीज है जैसे मेरी जो मर

2182
02:36:06,880 --> 02:36:11,520
थी उनकी बहुत वो बहुत पूजा पाठ करती थी तो

2183
02:36:11,520 --> 02:36:15,760
उनकी डेथ हो गई 2019 में तो उनका

2184
02:36:15,760 --> 02:36:19,920
पार्किंसन से उनकी डेथ हुई थी। वो बहुत मेहनती और बहुत सेवा करने

2185
02:36:19,920 --> 02:36:23,920
का उनके अंदर बहुत भाव था। लेकिन उनकी ऐसी डेथ हुई

2186
02:36:23,920 --> 02:36:27,920
कि बस बहुत ही बुरा मतलब उनकी बेड रिडन हो गई थी। कमर भी

2187
02:36:27,920 --> 02:36:32,480
उनकी गलने लगी थी। तो मेरे को ये मतलब थोड़ा ऐसा लगता है कि

2188
02:36:32,480 --> 02:36:37,040
मतलब ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि मैं आपको बता रहा हूं ना कि अभी

2189
02:36:37,040 --> 02:36:41,520
रामपाल दास जी के टच में ही अभी एक महिला आई। उन्होंने बताया

2190
02:36:41,520 --> 02:36:45,600
कि जो व्यक्ति थे 5 लाख की डोनेशन दी थी और उनको जो

2191
02:36:45,600 --> 02:36:49,760
है करंट लगने से उनकी मौत हो गई। तो पहली

2192
02:36:49,760 --> 02:36:53,840
बात तो यह है कि जो आपकी जो जो आपकी जानकारी

2193
02:36:53,840 --> 02:36:57,840
में जो मातृ शक्ति आप बता रही हैं वो भक्ति कर रहे थे।

2194
02:36:57,840 --> 02:37:02,000
ये देखिए सतलोक आश्रम में करंट लगने से एक युवक की मौत। ये

2195
02:37:02,000 --> 02:37:06,160
देखिए ये देखिए ये वो नहीं है लाख डोनेशन वाले

2196
02:37:06,160 --> 02:37:09,840
मगर ये युवक की मौत है। अकाल मृत्यु के लिए

2197
02:37:09,840 --> 02:37:14,880
साफ-साफ हमारे रामायण में लिखा हुआ है उत्तरकांड में

2198
02:37:14,880 --> 02:37:19,040
अकाल मृत्यु यदि आपके आसपास हो रही है तो समझ जाइए कि पूजा

2199
02:37:19,040 --> 02:37:23,040
गलत तरीके से हो रही है तो इनके यहां पर गलत तरीके से क्या हो रहा है

2200
02:37:23,040 --> 02:37:27,360
कि भगवान को ना बज के भगवान के दुश्मन को बजा जा रहा है और हमारे

2201
02:37:27,360 --> 02:37:31,360
यहां ये जो आपने जो बताया अब ये देखना पड़ेगा कि उनकी

2202
02:37:31,360 --> 02:37:35,440
शिक्षा दीक्षा क्या थी वही वाली बात है अब जैसे मैंने अभी

2203
02:37:35,440 --> 02:37:39,520
आपको इतनी डिटेलिंग कर दी कि जो सर्वशक्तिमान ईश्वर को भजेगा वही

2204
02:37:39,520 --> 02:37:43,520
मुक्त होगा। अब उनके जानकारी में उनकी शिक्षा पद्धति

2205
02:37:43,520 --> 02:37:47,520
में कौन से परंपरा प्राप्त आचार्य थे? क्या उनके संशय दूर

2206
02:37:47,520 --> 02:37:51,520
हुए थे कि नहीं हुए थे? क्यों? क्योंकि भगवत गीता 440 में लिखा हुआ

2207
02:37:51,520 --> 02:37:54,880
है कि संशयात्मा विनश्यति।

2208
02:37:54,880 --> 02:37:59,040
जिसके मन में संशय है अपने धर्म और ब्रह्म को लेकर

2209
02:37:59,040 --> 02:38:03,120
वो ना तो इस लोक में सुखी रहेगा ना ही परलोक में। ये

2210
02:38:03,120 --> 02:38:07,120
लिखा है भगवत गीता में। तो उनके संशय दूर हो चुके आज

2211
02:38:07,120 --> 02:38:11,120
देखिए आज आपके मन में अभी भी संशय है। क्यों संशय है? क्योंकि आप

2212
02:38:11,120 --> 02:38:15,120
यह बात सही है। जो जो व्यक्ति पूर्ण ईश्वर को नहीं

2213
02:38:15,120 --> 02:38:20,080
मानेगा परंपरा प्राप्त आचार्यों को नहीं जानेगा और

2214
02:38:20,080 --> 02:38:24,240
परम स्वतंत्र मोक्ष को नहीं मानेगा तो उसके मन में निश्चित

2215
02:38:24,240 --> 02:38:25,200
रूप से

2216
02:38:25,200 --> 02:38:29,280
संशय विराजमान होगा। दुनिया का कोई भी

2217
02:38:29,280 --> 02:38:33,360
रामपाल दास का फॉलोअर ऐसा नहीं है जो यहां आकर के यह

2218
02:38:33,360 --> 02:38:39,360
ना कहे इस बात का मुझे संशय नहीं है। अभी आपने देखा

2219
02:38:40,240 --> 02:38:44,320
अब स्वस्थ हो गया मैं पहले बीमार था ये देखिए अब स्वस्थ हो

2220
02:38:44,320 --> 02:38:48,400
गया मैं पहले बीमार था जब रामपाल दास जो

2221
02:38:48,400 --> 02:38:52,560
स्वयं तत्वदर्शी है ये खुद बीमार हो रहे हैं पहले

2222
02:38:52,560 --> 02:38:57,120
बीमार था बस बस करिए

2223
02:38:57,120 --> 02:39:01,200
अब ये खुद स्वयं तत्वदर्शी यदि है तत्वदर्शी है आप तो नहीं

2224
02:39:01,200 --> 02:39:05,200
है मगर ये तो है ये तत्वदर्शी होते हुए बीमार पड़

2225
02:39:05,200 --> 02:39:09,280
रहे हैं जब तो औरों की तो बात ही क्या है? तो आपकी

2226
02:39:09,280 --> 02:39:13,440
जो माताजी है वो ठीक है। उनके साथ जो हुआ सो हुआ। मगर इसमें हम

2227
02:39:13,440 --> 02:39:17,520
केवल एक एंगल ये नहीं ले सकते कि उन्होंने भक्ति की तो वो जो है उनके साथ ऐसा क्यों

2228
02:39:17,520 --> 02:39:21,760
हुआ? बहुत सारे कारण होते हैं। इसका मैं आपको एक उदाहरण दे देता हूं

2229
02:39:21,760 --> 02:39:25,920
कि मान लीजिए किसी को वेट लॉस करना है और वो जिम पहुंचता है। वो कहता

2230
02:39:25,920 --> 02:39:30,160
है कि भाई मैंने यहां पीस दे दी और मैं जिम करने आऊंगा। क्या मेरा वेट लॉस

2231
02:39:30,160 --> 02:39:34,480
हो जाएगा? तो भाई ठीक है वेट लॉस होगा। मगर बाहर जाकर के वो कचौड़ी

2232
02:39:34,480 --> 02:39:38,560
समोसा भी खा रहा है, भटूरे भी खा रहा है। उसको जो डाइट प्लान दिया

2233
02:39:38,560 --> 02:39:40,960
गया है वो फॉलो नहीं कर रहा है।

2234
02:39:40,960 --> 02:39:45,040
ऐसे नहीं होगा। हर चीज पर ध्यान देना होगा। तब रिजल्ट

2235
02:39:45,040 --> 02:39:49,360
मिलता है। ठीक है? और जो आपने एक बात कही थी ना कि

2236
02:39:49,360 --> 02:39:53,440
ये वैराग्य वाली बात केवल उनके उत्तर

2237
02:39:53,440 --> 02:39:57,520
के लिए दे दिया। ऐसा नहीं है। वैराग का मतलब वैराग्य का मतलब समझ लीजिए क्या

2238
02:39:57,520 --> 02:40:02,160
है? जब हमारी भगवान में भक्ति होने लगती है।

2239
02:40:02,160 --> 02:40:05,920
तो धीरे-धीरे जो

2240
02:40:05,920 --> 02:40:10,640
भौतिक प्रेम जो होता है वह हमारा घटता चला जाता है।

2241
02:40:10,640 --> 02:40:14,880
दुनियादारी से जो हमारा प्रेम होता है वो हमारा घटता चला जाता है।

2242
02:40:14,880 --> 02:40:18,960
और इसी को एक और हमारे अंदर उस ज्ञान का विकास होने लगता

2243
02:40:18,960 --> 02:40:23,360
है जिसके कारण मृत्यु भी हमें सरल लगने लगती है।

2244
02:40:23,360 --> 02:40:27,360
वो कौन सा ज्ञान है? नैनती शस्त्राण

2245
02:40:27,360 --> 02:40:32,320
नैन दति पावका ना चैन क्ल

2246
02:40:32,320 --> 02:40:36,400
मारता आत्मा को ना शस्त्र काट

2247
02:40:36,400 --> 02:40:40,560
सकता है ना अग्नि जला सकती है ना वायु सुखा सकती है ना जल डुबो सकता

2248
02:40:40,560 --> 02:40:44,720
है तो ये आत्मा

2249
02:40:44,720 --> 02:40:48,880
का सत्य है। अब जो हमारे जो जगतगुरु शंकराचार्य

2250
02:40:48,880 --> 02:40:53,040
जी हैं उनके पास एक व्यक्ति आया कि भाई मुझे कैंसर है

2251
02:40:53,040 --> 02:40:56,000
मैं क्या करूं तो गुरुदेव ने यह नहीं कहा हम

2252
02:40:56,000 --> 02:41:00,240
तुम्हारा कैंसर ठीक करेंगे। गुरुदेव ने यह कहा

2253
02:41:00,240 --> 02:41:04,320
कि आपको मूल समस्या दुख से है तो

2254
02:41:04,320 --> 02:41:08,400
आपका जो भय है जिसके कारण आपको दुख है वो दूर होता

2255
02:41:08,400 --> 02:41:12,560
है तो क्या कहते हैं जब आपको

2256
02:41:12,560 --> 02:41:16,800
यह वाला ज्ञान मिलता है ना नैन छिन्नती शस्त्राणी तो आपका जो भौतिक प्रेम

2257
02:41:16,800 --> 02:41:20,880
है वो कम होता है जिसके कारण आप भय मुक्त होने लगते हैं

2258
02:41:20,880 --> 02:41:25,040
जिसके कारण आपके जीवन में स्थितियां कैसी भी है मगर

2259
02:41:25,040 --> 02:41:28,320
आप सुखी रहते हैं

2260
02:41:28,320 --> 02:41:32,720
अप एंड डाउन कितने भी चलते रहे मगर आप सुखी रहते हैं। क्यों? मन में संतुष्टि

2261
02:41:32,720 --> 02:41:36,800
होती है। हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात

2262
02:41:36,800 --> 02:41:41,360
की चिंता में वो सुख होता है हमारे मन में। और वो सुख क्यों होता है? रघुनाथ

2263
02:41:41,360 --> 02:41:45,600
से हम किसी भी स्थिति में रघुनाथ से हम कब अपेक्षा

2264
02:41:45,600 --> 02:41:50,080
करेंगे? अभी वही सर्वशक्तिमान वाली बात आ गई। हम भगवान

2265
02:41:50,080 --> 02:41:54,080
से हर समस्या में कब अपेक्षा करेंगे? जब हमारे मन में यह

2266
02:41:54,080 --> 02:41:58,080
बात फिट होगी कि भगवान सब कुछ कर सकते हैं तभी तो

2267
02:41:58,080 --> 02:42:02,160
हम हर स्थिति में उनको याद करके सुखी हो जाएंगे। मगर

2268
02:42:02,160 --> 02:42:06,400
जब हमारा भगवान ही कह देगा मैं ये नहीं कर सकता, मैं वो नहीं कर सकता, मैं फलाना

2269
02:42:06,400 --> 02:42:10,400
नहीं कर सकता तो हम ये सोचेंगे पता नहीं इस समस्या से भगवान लड़ सकते हैं कि

2270
02:42:10,400 --> 02:42:11,440
नहीं लड़ सकते।

2271
02:42:11,440 --> 02:42:15,600
सोचेंगे ना? जी जी। तो ये बात

2272
02:42:15,600 --> 02:42:19,840
है। सर्वशक्तिमान की आप पूजा करें और अगर

2273
02:42:19,840 --> 02:42:24,000
आप जिनको आप तत्वदर्शी मान रही हैं उनको अगर उनको

2274
02:42:24,000 --> 02:42:28,000
तत्व तत्वदर्शी हैं। पहली बात तो उनके जितने भी शास्त्रों के प्रमाण है

2275
02:42:28,000 --> 02:42:32,160
उनकी सबकी धज्जियां उड़ चुकी है। आप पिछले लाइव देखिएगा। मगर

2276
02:42:32,160 --> 02:42:36,240
फिर भी अगर दुर्जन तोष न्याय से थोड़ी देर मान भी ले कि वो तत्वदर्शी है तो

2277
02:42:36,240 --> 02:42:40,480
उनका वो तत्व ज्ञान कुछ नहीं है। बैंगन भी नहीं है। तो

2278
02:42:40,480 --> 02:42:44,640
इसलिए आपको भगवान श्री कृष्ण की वो बात याद करनी चाहिए

2279
02:42:44,640 --> 02:42:48,640
कि मुझसे भिन्न किसी भी देवता को जो लोग भज रहे होते हैं वहां

2280
02:42:48,640 --> 02:42:52,720
पे ये नहीं कहा गया कि उनसे भिन्न शिव को भज रहे होते हैं। क्योंकि शिव और शिव

2281
02:42:52,720 --> 02:42:56,960
और विष्णु भिन्न नहीं है। मगर मुझसे भिन्न मतलब जो कुरान

2282
02:42:56,960 --> 02:43:01,920
के अनुसार जो ईश्वर को भज रहे होते हैं, बाइबल के अनुसार ईश्वर को भज रहे होते हैं। रामपाल

2283
02:43:01,920 --> 02:43:06,400
दास जी के जैसे लोगों के अनुसार जो ईश्वर को भज रहे होते हैं उनका

2284
02:43:06,400 --> 02:43:10,640
ईश्वर कृष्ण से भिन्न होता है और कृष्ण विष्णु से भिन्न ईश्वर

2285
02:43:10,640 --> 02:43:14,960
बाधित होता है। सर्वशक्तिमान नहीं होता है। परम स्वतंत्र मोक्ष

2286
02:43:14,960 --> 02:43:19,280
देने वाला नहीं होता है। शाश्वत धर्म देने वाला भी नहीं होता है।

2287
02:43:19,280 --> 02:43:23,440
जी बताइए। मेरे

2288
02:43:23,440 --> 02:43:27,040
को एक चीज पूछनी थी। आप लोग मतलब जो ये कबीर

2289
02:43:27,040 --> 02:43:31,120
साहब हैं इन मतलब इनकी जो टीचिंग्स हैं या जो लिखा हुआ है जैसे

2290
02:43:31,120 --> 02:43:35,600
कबीर सागर में उस सबको मानते हैं या मतलब मेरे मैं इस चीज से

2291
02:43:35,600 --> 02:43:40,720
मेरे को नहीं पता क्या मानते हैं टीचिंग जितनी टीचिंग्स

2292
02:43:40,720 --> 02:43:44,800
जो परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ हैं

2293
02:43:44,800 --> 02:43:49,360
उनका विरोध नहीं करती हैं उतनी टीचिंग्स मानते हैं। हमारी

2294
02:43:49,360 --> 02:43:53,360
जो सनातनी है हिंदू हैं उनकी जो प्रमाण्य

2295
02:43:53,360 --> 02:43:58,000
बुद्धि है वो वेद में है। वेद के अकॉर्डिंग जितनी चीजें होंगी

2296
02:43:58,000 --> 02:44:02,080
वो सब हमारे लिए मान्य है। वेद के विरोध में होंगी वो सब हमारे

2297
02:44:02,080 --> 02:44:06,080
लिए मान्य नहीं है। अब जैसे कि तत्वदर्शी जो है वो ये कहते हैं

2298
02:44:06,080 --> 02:44:10,080
कि वेद को कहने वाला मूर्ख है। कहते हैं कि नहीं

2299
02:44:10,080 --> 02:44:12,240
कहते?

2300
02:44:12,240 --> 02:44:17,760
अब ये बात नहीं उसमें

2301
02:44:17,760 --> 02:44:22,000
जी महाराज हां ये कहा है कि वेद को कहने वाला काल

2302
02:44:22,000 --> 02:44:26,080
है वेद को कहने वाला काल है ये कहा है उन्होंने वेद को

2303
02:44:26,080 --> 02:44:30,560
कहने वाला कौन है काली है ना

2304
02:44:30,560 --> 02:44:36,560
पुराण को कहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश है इन सबको अज्ञानी कहा

2305
02:44:36,960 --> 02:44:41,200
एक एक मैं यहां पे आके फुल स्टॉप हो जाता है मेरा जिसे

2306
02:44:41,200 --> 02:44:45,200
उन्होंने लिखा है कि गुण तीनों की भक्ति में ये

2307
02:44:45,200 --> 02:44:49,200
बोल पड़ा संसार कहे कबीर निज नाम बिना कैसे उतरो

2308
02:44:49,200 --> 02:44:53,200
पार मतलब ये समझ में नहीं आता मेरे ये ऐसे है यहां गुण की बात

2309
02:44:53,200 --> 02:44:57,520
की है पहली बात क्या ब्रह्मा विष्णु को क्या ब्रह्मा

2310
02:44:57,520 --> 02:45:01,680
विष्णु महेश को आप केवल गुण मानती हैं क्या वो

2311
02:45:01,680 --> 02:45:05,680
केवल गुण है केवल गुण तो नहीं है

2312
02:45:05,680 --> 02:45:10,800
तो वहां तो बात केवल गुण की हो रही है ना

2313
02:45:10,800 --> 02:45:14,880
केवल गुण की बात हो रही है। गुण तीनों की भक्ति का मतलब है जो

2314
02:45:14,880 --> 02:45:19,200
ये गुण से बनी हुई गुणों तीन गुणों से बनी हुई ये जो माया रूपी संसार

2315
02:45:19,200 --> 02:45:23,200
है इसमें जो इनकी जो भक्ति करते हैं हाय मुझे एसी मिल जाए हाय

2316
02:45:23,200 --> 02:45:27,280
मुझे टीवी मिल जाए हाय मुझे पैसा मिल जाए हाय मेरे को वो

2317
02:45:27,280 --> 02:45:31,520
लड़की मिल जाए हाय मेरे को वो लड़का मिल जाए ये है तीन गुणों की भक्ति इसको

2318
02:45:31,520 --> 02:45:35,680
मना किया फिर उसके फिर उसके बिल्कुल नीचे लिखा हुआ है कि

2319
02:45:35,680 --> 02:45:39,760
तीन देव की जो करते भक्ति उनकी कभी ना होवे मुक्ति और एक

2320
02:45:39,760 --> 02:45:43,760
जो वेद के लिए मतलब यह तो देखिए यह अपने मन से

2321
02:45:43,760 --> 02:45:48,080
अगर कोई कुछ लिख देगा तो हमने कहा ना कि हम उसमें प्रमाण बुद्धि नहीं रखते।

2322
02:45:48,080 --> 02:45:52,160
जी जी और एक एक चीज और मतलब जैसे बोलते

2323
02:45:52,160 --> 02:45:56,400
हैं कि वेदों में प्रमाण है। कबीर साहब भगवान है।

2324
02:45:56,400 --> 02:46:00,400
फिर आप कहीं कोई प्रमाण नहीं है। पहली बात तो ये है कि अगर

2325
02:46:00,400 --> 02:46:04,480
पहली बात तो ये है कि अगर आप यह कहेंगे कि वेदों में प्रमाण

2326
02:46:04,480 --> 02:46:08,640
है। कबीर साहब भगवान है तो इसका मतलब आप मानते हैं कि वेद हमारे

2327
02:46:08,640 --> 02:46:12,880
लिए प्रमाण है। मानते हैं कि नहीं? जी जी नहीं आप एक

2328
02:46:12,880 --> 02:46:16,960
मिनट सुनो हां जी मैं मैं ये कहना चाहती हूं

2329
02:46:16,960 --> 02:46:21,280
कि फिर उसमें कबीर साहब ने लिखा है कि अपनी वाणी

2330
02:46:21,280 --> 02:46:25,440
में लिखा है कि वेद मेरा भेद है मैं मिलूं वेदों

2331
02:46:25,440 --> 02:46:26,000
से नहीं

2332
02:46:26,000 --> 02:46:30,160
जॉन वेद से मैं मिलूं वो वेद जानते नहीं तो मतलब इसको भी

2333
02:46:30,160 --> 02:46:34,240
थोड़ा डिफाइन कर दो थोड़ा इसको ऐसे डिफाइन

2334
02:46:34,240 --> 02:46:38,640
करते हैं कि भगवान के दो स्वरूप

2335
02:46:38,640 --> 02:46:42,720
होते हैं एक जिसको प्राप्त किया जा

2336
02:46:42,720 --> 02:46:46,720
सकता है और दूसरा जिसको समझा जा

2337
02:46:46,720 --> 02:46:50,720
सकता है, जिसको देखा जा सकता है, सुना जा सकता है। एक भगवान का

2338
02:46:50,720 --> 02:46:54,880
रूप केवल प्राप्त कर सकते हैं। जैसे कि आपको खाना

2339
02:46:54,880 --> 02:46:59,440
खाना है। आपको भूख लग रही है। ठीक है? तो

2340
02:46:59,440 --> 02:47:03,840
आपको वास्तव में क्या चाहिए? कैलोरी।

2341
02:47:03,840 --> 02:47:07,920
क्या चाहिए? जी। कैलोरी। हां जी। मगर कैलोरी आपको मिलेगी

2342
02:47:07,920 --> 02:47:12,640
कैसे? हवा में हाथ मारने से मिल जाएगी क्या? नहीं।

2343
02:47:12,640 --> 02:47:17,120
नहीं। आपको कैलोरी मिलेगी भोजन से। जी।

2344
02:47:17,120 --> 02:47:21,120
भोजन से मिलेगी ना? तो वेदों में हां। तो

2345
02:47:21,120 --> 02:47:25,200
कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो आपको यह बता दे कि कैलोरी का साइज कैसा

2346
02:47:25,200 --> 02:47:29,280
होता है? वो दिखती कैसी है? या उसको जब हम ग्रहण कर रहे होते

2347
02:47:29,280 --> 02:47:33,520
हैं तो हमारी कौन सी नस दबती है, कौन सी नस फूलती है? ये सब बता

2348
02:47:33,520 --> 02:47:37,120
सकता है क्या कोई?

2349
02:47:37,120 --> 02:47:41,520
कैलोरी के विषय में डॉक्टर डॉक्टर्स ही बता सकते हैं वो तो

2350
02:47:41,520 --> 02:47:45,600
नहीं नहीं यह चीज नहीं बता सकते कि जब कैलोरी को आप ग्रहण

2351
02:47:45,600 --> 02:47:49,680
कर रहे होते हैं तो आपको कैसा फील होता है सिर्फ इतना कह

2352
02:47:49,680 --> 02:47:53,680
सकते हैं कि आप संतुष्टि फील करते हो है ना

2353
02:47:53,680 --> 02:47:57,760
ठीक है तो ये जो कैलोरी के फील करने वाली बात है इसको सिर्फ

2354
02:47:57,760 --> 02:48:02,400
फील किया जा सकता है मगर इसको डिफाइन नहीं किया जा सकता ना

2355
02:48:02,400 --> 02:48:06,800
जी जी मगर वो जो फील करने की स्थिति है।

2356
02:48:06,800 --> 02:48:10,800
उसको किस जगह से प्राप्त करना है यह डिफाइन किया जा सकता है।

2357
02:48:10,800 --> 02:48:16,160
खाना कहां मिलेगा यह आपको बताया जा सकता है।

2358
02:48:16,160 --> 02:48:20,240
जी जी दाल रोटी के रूप में चावल भात के रूप में आपको

2359
02:48:20,240 --> 02:48:24,400
यह बताया जा सकता है कि चावल कहां मिलेगा। तो हमारे जो शास्त्र

2360
02:48:24,400 --> 02:48:29,520
है हमारी जो ये सारी वाणियां है गुरुओं की

2361
02:48:29,520 --> 02:48:33,520
एक मिनट एक मिनट ये प्रमाण आप दोबारा दिखा दीजिएगा। मेरी एक बात पूरी हो

2362
02:48:33,520 --> 02:48:37,920
जाए। तो हमारी जो हमारी जो वाणी जो भगवान

2363
02:48:37,920 --> 02:48:42,080
की जो वाणी है जो वेद है उपनिषद है वह आपको

2364
02:48:42,080 --> 02:48:47,120
उस जगह ले जाते हैं जहां से आपको वो स्थिति प्राप्त हो सकती है।

2365
02:48:47,120 --> 02:48:51,280
इसलिए ये कहा जा सकता है कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं। एक कैलोरी जैसा

2366
02:48:51,280 --> 02:48:52,320
जिसको सिर्फ प्राप्त

2367
02:48:52,320 --> 02:48:56,560
कर सकते हैं। जिसको बताया नहीं जा सकता। सिर्फ व्यक्ति प्राप्त करके

2368
02:48:56,560 --> 02:49:00,080
फील कर सकता है।

2369
02:49:00,080 --> 02:49:04,240
हेलो चली गई और दूसरा दूसरा कैसा रूप

2370
02:49:04,240 --> 02:49:08,560
होता है जिसको बताया जा सकता है। तो श्री कृष्ण चंद्र रामचंद्र इत्यादि

2371
02:49:08,560 --> 02:49:12,800
के रूप में भगवान को डिफाइन किया जाता है। फल स्वरूप

2372
02:49:12,800 --> 02:49:16,960
इनके द्वारा प्राप्त होने वाला जो भगवान का प्राप्तव्य वाला रूप होता है वो हमें

2373
02:49:16,960 --> 02:49:21,120
प्राप्त हो जाता है। ठीक है? मैं आशा करता

2374
02:49:21,120 --> 02:49:25,280
हूं कि आपकी बहुत सारी चीजें दूर हुई हो और बाकी वह जो आप प्रमाण दिखा रहे

2375
02:49:25,280 --> 02:49:31,280
थे वह दिखा दीजिए। संदीप जी को ले लेते हैं।

2376
02:49:33,440 --> 02:49:37,600
ये मेरे को लगता है खाली कंटेंट लेने के लिए आते हैं आपसे और कुछ नहीं है।

2377
02:49:37,600 --> 02:49:42,000
उपरोक्त नहीं हो सकता है। उनकी वास्तविक जिज्ञासा रही हो। ठीक है।

2378
02:49:42,000 --> 02:49:46,080
जय श्री राम भैया जी। सादर प्रणाम। सादर जय

2379
02:49:46,080 --> 02:49:50,640
श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। भैया जी मैं कहना

2380
02:49:50,640 --> 02:49:55,040
एक मिनट ये देखिए यह देखिए कबीर सागर में भी

2381
02:49:55,040 --> 02:49:59,200
यह कह रहे हैं कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है क्योंकि कबीर

2382
02:49:59,200 --> 02:50:04,560
सागर में भी मिलावट हो चुकी है तो इसका मतलब मिलावट

2383
02:50:04,560 --> 02:50:08,720
इसका मतलब क्या हुआ कि कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है तो प्रमाण क्या

2384
02:50:08,720 --> 02:50:12,800
है केवल जो स्वयं को तत्वदर्शी कहता है और तत्वदर्शी वह

2385
02:50:12,800 --> 02:50:18,720
सिद्ध कहां से है कि गीता से कि गीता किसने कही कि मूर्ख ने

2386
02:50:18,720 --> 02:50:22,880
अरे भाई जब मूर्ख ने कही है तो उसकी लिखी हुई बात के आधार पर तुम तत्वदर्शी

2387
02:50:22,880 --> 02:50:27,200
क्यों मान ले रहे हो? जब मूर्ख है तो वो तो कहीं भी मूर्खता

2388
02:50:27,200 --> 02:50:31,440
करेगा ना। और फिर जब उल्टा पेड़ बताने

2389
02:50:31,440 --> 02:50:35,440
वाला तत्वदर्शी है तो उल्टा पेड़ मैं बता दे रहा हूं अभी। ये लो भैया उल्टे पेड़ की

2390
02:50:35,440 --> 02:50:39,680
व्याख्या हो गई। मान लो मुझे तत्वदर्शी और मान लो कृष्ण भगवान

2391
02:50:39,680 --> 02:50:43,840
है। कबीर भगवान नहीं है। हो गया। गीता जी में ये भी गीता जी

2392
02:50:43,840 --> 02:50:48,000
में ये भी लिखा है कि जो बुद्धि देते हैं वो भी गीता ज्ञान दाता ही देते हैं।

2393
02:50:48,000 --> 02:50:48,880
जो बुद्धिमानों

2394
02:50:48,880 --> 02:50:53,520
को बुद्धि देते हैं वही देते हैं। जी जी ठीक

2395
02:50:53,520 --> 02:50:57,520
है हमारी काफी लंबी चर्चा हो गई है। जी पारस अवधिया जी

2396
02:50:57,520 --> 02:51:01,840
जय श्री राम बताइए। जी जी मैं बोल रहा था कि

2397
02:51:01,840 --> 02:51:06,000
ये लोग कबीर दास जी के नाम से जो कबीर सागर और दुनिया

2398
02:51:06,000 --> 02:51:10,080
भर के जो ग्रंथ लिख के बैठे हैं और जबकि कबीर दास जी का

2399
02:51:10,080 --> 02:51:14,480
एक दोहा है मसी कागज क्यों नहीं कलम गई नहीं हाथ

2400
02:51:14,480 --> 02:51:18,560
तो उन्होंने कुछ लिखे तो थे नहीं तो ये लोग कहां से अपने

2401
02:51:18,560 --> 02:51:22,720
कपोल कल्प लिख के बैठे हुए हैं ये ये बहुत विचारणीय

2402
02:51:22,720 --> 02:51:26,800
बात है बिल्कुल बिल्कुल अरे इसमें इतने सारे मैसेजेस

2403
02:51:26,800 --> 02:51:31,120
कैसे आ गए

2404
02:51:31,120 --> 02:51:35,120
विशाल भाटिया जी भी जाइन करना चाहते थे। चले गए।

2405
02:51:35,120 --> 02:51:39,120
अब तो फिर कभी करेंगे क्योंकि 10:30 बजने जा रहे हैं। आप लोग अपना

2406
02:51:39,120 --> 02:51:44,080
वो पहाड़ी जी आप अपना स्टेटमेंट दीजिए। फिर अब बढ़ाया जाए चर्चा को।

2407
02:51:44,080 --> 02:51:47,760
एक बात

2408
02:51:47,760 --> 02:51:51,920
हरि ओम। मैं बस यहां जो अभी मातृ शक्ति आई

2409
02:51:51,920 --> 02:51:56,080
थी उनसे यही कहूंगा कि आप अपने तत्वदर्शी से ये जरूर पूछे।

2410
02:51:56,080 --> 02:52:00,720
क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है? सब कुछ कर सकता है कि नहीं? क्या

2411
02:52:00,720 --> 02:52:04,880
उनके द्वारा दिया जाने वाला जो मोक्ष है, कल्याण है, वो परम स्वतंत्र

2412
02:52:04,880 --> 02:52:08,880
मोक्ष है कि नहीं? दिया जाने वाला जो धर्म है वो शाश्वत है कि नहीं?

2413
02:52:08,880 --> 02:52:13,040
बस हम नहीं मान हम नहीं कह रहे वो गलत बता रहे हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। ये तीन

2414
02:52:13,040 --> 02:52:17,360
चीजें मांगिए। उनसे कहिए। जैसे उन्होंने कहा था उपनिषदों

2415
02:52:17,360 --> 02:52:21,600
में असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया। उनसे

2416
02:52:21,600 --> 02:52:25,760
कहिए अपने गुरु से मुझे ले चलो सत्य से असत से सत की ओर

2417
02:52:25,760 --> 02:52:29,760
मुझे ले चलो अंधकार से उजाले की ओर मुझे ले चलो मृत्यु से अमरता की

2418
02:52:29,760 --> 02:52:33,840
ओर ऐसे कहिए और यदि वो आपको वो सारा ज्ञान वो सारी बातें

2419
02:52:33,840 --> 02:52:37,920
आपको बता पाए दे पाए तो आप उनका अनुसरण करिए और नहीं तो

2420
02:52:37,920 --> 02:52:42,080
परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण लीजिए आपके जो पतिदेव हैं होने वाले

2421
02:52:42,080 --> 02:52:46,320
वो बहुत सही जगह पर है उनके अनुसार आप भक्ति का आलंबन लीजिए वहां

2422
02:52:46,320 --> 02:52:50,800
आपको आपकी अंतरात्मा में संशय नहीं रहेगा वहां आपकी अंतरात्मा

2423
02:52:50,800 --> 02:52:54,880
में यह त्रुटियां नहीं रहेंग। आपके मन में संशय ही सबसे बड़ा दुश्मन

2424
02:52:54,880 --> 02:52:58,880
है आपका। संशयात्मा विनसति भगवत गीता 440 में

2425
02:52:58,880 --> 02:53:04,880
कहा गया है। जी पाणी जी बोले

2426
02:53:05,760 --> 02:53:09,920
लास्ट में एक सवाल छोड़ जाता हूं मैं इनके लिए। बड़ा प्यारा

2427
02:53:09,920 --> 02:53:14,880
सवाल है। शास्त्रों से नहीं है। लॉजिक सा है यह सवाल।

2428
02:53:14,880 --> 02:53:18,880
अगर हम सभी हम सभी जितने भी प्राणी हैं

2429
02:53:18,880 --> 02:53:23,040
हम कबीर दास जी के संतान हैं। वह

2430
02:53:23,040 --> 02:53:27,040
हमारे परमपिता हैं। तो कोई पर जो पिता है जो

2431
02:53:27,040 --> 02:53:31,120
कोई हमारा जो पिता श्री है क्या वो हमको किसी को खाने का आदेश दे सकते हैं

2432
02:53:31,120 --> 02:53:35,760
क्या? जैसे काल को आदेश दे दिया कि तुम इनको खाओ।

2433
02:53:35,760 --> 02:53:39,760
शराब कहो या आदेश कहो। तो वो कैसा ईश्वर है जो

2434
02:53:39,760 --> 02:53:43,920
अपने ही संतान को खाने का आदेश दे दिया। काल को। अच्छा आज मैं

2435
02:53:43,920 --> 02:53:46,960
एक सवाल और करूंगा

2436
02:53:46,960 --> 02:53:51,680
कि यह जो है खाता किसे है काल

2437
02:53:51,680 --> 02:53:55,760
सोचने वाली बात है भाई जिंदा इंसान

2438
02:53:55,760 --> 02:54:00,000
को तो खाता नहीं है मरने के बाद ही खाता है और आत्मा अविनाशी

2439
02:54:00,000 --> 02:54:01,440
है आत्मा

2440
02:54:01,440 --> 02:54:06,560
को कुछ हो नहीं सकता है तो ये खाता किसको है फिर वो

2441
02:54:06,560 --> 02:54:10,560
वो दरअसल ना ये क्यों परेशान है श्री कृष्ण जी ने जब अपना स्वरूप दिखाया था

2442
02:54:10,560 --> 02:54:14,560
ना वो उन्होंने इनका फ्यूचर दिखा दिया था अब इनको यह समझ तो है नहीं है। इसको

2443
02:54:14,560 --> 02:54:19,040
वो काल बना के बैठे हैं। उन्होंने कहा था सारे मेरे ग के अंदर आ जाते हैं।

2444
02:54:19,040 --> 02:54:23,120
अरे भाई वो तो वो तो जाहिर सी बात है क्योंकि जब महाभारत का

2445
02:54:23,120 --> 02:54:27,200
युद्ध हुआ गीता बोलने के बाद तो धृतराष्ट्र ने सुना और क्या कहते

2446
02:54:27,200 --> 02:54:31,520
हैं वो द्रोणाचार्य जो थे जो दांतों में दिख रहे थे द्रोणाचार्य

2447
02:54:31,520 --> 02:54:35,680
के साथ तो वो युद्ध हुआ अर्जुन का तो ये तो बात

2448
02:54:35,680 --> 02:54:40,080
ठीक है मगर इनका काल खा क्या रहा है क्योंकि वो आत्मा तो अविनाशी है

2449
02:54:40,080 --> 02:54:44,240
यही कहते हैं तो ये काल खाता क्या है

2450
02:54:44,240 --> 02:54:46,400
फिर

2451
02:54:46,400 --> 02:54:49,120
कुल मिला के

2452
02:54:49,120 --> 02:54:54,560
वो वो इनकी बुद्धि खा रहा है और कुछ नहीं खा रहा

2453
02:54:54,560 --> 02:54:58,960
आत्मा को भून के खाता है ये देखिए ये कह रहे हैं भाई आत्मा तो अविनाशी

2454
02:54:58,960 --> 02:55:04,960
है उसको तो कुछ हो ही नहीं सकता तो कैसे भून रहे हो

2455
02:55:05,520 --> 02:55:10,560
आना कभी दोबारा तब पता चलेगा अरे

2456
02:55:10,560 --> 02:55:14,560
सवाल का जवाब दीजिए कि बोलो कि हम तो उनके है

2457
02:55:14,560 --> 02:55:18,560
ना संतान हुए ना कबीर कबीर देव जी के कबीर जो ईश्वर है

2458
02:55:18,560 --> 02:55:24,560
माना भी है माना भी है संतान माना भी है

2459
02:55:27,760 --> 02:55:31,760
रामपाल वालों ने रामपाल ने अपनी पुस्तकों में लिखा है कहीं

2460
02:55:31,760 --> 02:55:36,000
पे कि हम उनकी संतान पहाड़ी जी ने इनका तीर इनहीं पे चला

2461
02:55:36,000 --> 02:55:38,640
दिया है

2462
02:55:38,640 --> 02:55:43,040
ये बोलते हैं कि हम सब उन्हीं की संतान है कबीर कबीर देव जी की

2463
02:55:43,040 --> 02:55:47,120
कबीर परमात्मा की हम संतान है। पर कबीर परमात्मा ने भी काल को

2464
02:55:47,120 --> 02:55:51,840
ये आदेश दिया कि तू डेली श्राप दिया या आदेश बोलो

2465
02:55:51,840 --> 02:55:55,840
डेली एक लाख जीवो को तू खाएगा। हमें अपने

2466
02:55:55,840 --> 02:56:00,320
ही बच्चों को खाने का आदेश दे दिया। वो कैसा बाप है? और और

2467
02:56:00,320 --> 02:56:04,400
गलती किसकी थी? काल की। श्राप किसको मिल रहा है? काल को। और

2468
02:56:04,400 --> 02:56:09,920
खा किसको रहा है? बच्चों को। सजा।

2469
02:56:09,920 --> 02:56:14,160
तो चलिए फिर इस प्रश्न के साथ हम जो मातृ शक्ति

2470
02:56:14,160 --> 02:56:18,400
अभी आई थी उनसे अच्छी वार्ता हुई और चाहेंगे

2471
02:56:18,400 --> 02:56:22,640
कि उनके जीवन में प्रभु श्री राम की कृपा आए और उनके जीवन में जो संशय

2472
02:56:22,640 --> 02:56:26,960
रूपी जो उनका शत्रु है सबसे बड़ा उनके हृदय को अंदर से जो कचोट रहा है

2473
02:56:26,960 --> 02:56:31,040
वो संशय उनका दूर हो जाए और जैसा कि उन्होंने बताया निकट भविष्य

2474
02:56:31,040 --> 02:56:35,120
में वो उनकी उनका विवाह संपन्न होने वाला है उसके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं

2475
02:56:35,120 --> 02:56:39,520
और भगवान जल्दी से अपनी शरण में आपको ले लें क्योंकि यह भी बात सही

2476
02:56:39,520 --> 02:56:43,520
संदीप जी कि जिनको भगवान चाहते हैं उनहीं को अपनी शरण में लेते हैं।

2477
02:56:43,520 --> 02:56:47,600
आपको सद्बुद्धि मिले और वो ले ले ऐसा। ठीक है। रावण के

2478
02:56:47,600 --> 02:56:52,240
रावण के वहां शरण में लिए जो भी है

2479
02:56:52,240 --> 02:56:56,320
रिजल्ट अच्छे आ रहे हैं। बोल रहा हूं रावण के वहां विभीषण को अपनी

2480
02:56:56,320 --> 02:57:02,240
शरण में लिया था उन्होंने। जी जी जी जी जी।

2481
02:57:02,240 --> 02:57:06,400
केवल एक बात मेरी है। सारी बातें एक तरफ हो जाती है। तीन

2482
02:57:06,400 --> 02:57:10,800
चीजें पकड़ लीजिए। आप सही मार्ग पर आ जाएंगे। धर्म कौन सा?

2483
02:57:10,800 --> 02:57:14,880
जो शाश्वत हो। शाश्वत मतलब आज माता, कल भी

2484
02:57:14,880 --> 02:57:19,040
माता, परसों भी माता। ऐसा नहीं कि आज माता,

2485
02:57:19,040 --> 02:57:23,280
कल कुछ और कल कुछ और। परफेक्ट परफेक्ट।

2486
02:57:23,280 --> 02:57:25,520
धर्म जो है वो शाश्वत हो।

2487
02:57:25,520 --> 02:57:29,680
मोक्ष जो है वो परम स्वतंत्र हो। ये नहीं कि वहां से फिर आना पड़ेगा। फिर ये

2488
02:57:29,680 --> 02:57:33,920
हो जाएगा। उसके बाद ये हो। मोक्ष जो है वो परम स्वतंत्र हो। और

2489
02:57:33,920 --> 02:57:38,000
ईश्वर कौन सा हो? जो सर्वशक्तिमान हो जो सब

2490
02:57:38,000 --> 02:57:42,160
कुछ कर सकने में सामर्थ्यवान हो कुछ भी कर सकना

2491
02:57:42,160 --> 02:57:46,160
कर सकने वाला जब आप चमत्कार की ही बात कर रहे हो कि रोगों को

2492
02:57:46,160 --> 02:57:50,400
ठीक कर दे तो ईश्वर भी तो ऐसा होना चाहिए जो कुछ भी कर सके

2493
02:57:50,400 --> 02:57:54,960
कि केवल बस रोगों इतनी फिर तो डॉक्टर को भगवान मान लो

2494
02:57:54,960 --> 02:57:59,200
जी हम जी ये बात है ठीक है तो सभी को जय श्री राम

2495
02:57:59,200 --> 02:58:03,280
आने के लिए सबका आभार और आज की चर्चा बड़ी अच्छी रही जय श्री

2496
02:58:03,280 --> 02:58:06,880
राम जय श्री राम

2497
02:58:06,880 --> 02:58:12,880
जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

2498
02:58:13,760 --> 02:58:17,760
[संगीत]
