1
00:00:01,570 --> 00:00:07,570
[संगीत]

2
00:00:08,600 --> 00:00:12,600
तो सभी को जय श्री राम आज एक विशेष

3
00:00:12,600 --> 00:00:18,600
वार्ता के लिए मैं आपके सामने आया

4
00:00:19,200 --> 00:00:24,120
हूं देखिए एक और ब्रीड तैयार हो रही है

5
00:00:24,120 --> 00:00:28,520
जो सनातन के नाम से ही

6
00:00:28,520 --> 00:00:32,600
और सना को दीमक की तरह खा रही है

7
00:00:32,600 --> 00:00:36,960
सनातन के नाम से सनातन रक्षक के नाम से या सनातन

8
00:00:36,960 --> 00:00:41,400
योद्धाओं के नाम से ब्रीड तैयार हो रही है और यह स्वयं

9
00:00:41,400 --> 00:00:45,680
ही धर्म का नाश करने पर तुली हुई है तो उस ब्रीड

10
00:00:45,680 --> 00:00:50,000
का आज मान लीजिए कि इंट्रोडक्शन है आपके समक्ष उस ब्रीड का नाम है

11
00:00:50,000 --> 00:00:54,200
होंडा हिंदू होडा हिंदू

12
00:00:54,200 --> 00:00:58,400
इस ब्रीड का नाम है और इसमें अभी हम लोग बात करेंगे कि कौन-कौन

13
00:00:58,400 --> 00:01:02,680
किस किस तरह के लोग आते हैं सभी को जय श्री राम जय श्री राम हर जी

14
00:01:02,680 --> 00:01:06,720
तो हम लोग आज इस पर विस्तृत बात करेंगे होंडा हिंदू है क्या अगर मोटे

15
00:01:06,720 --> 00:01:11,120
तौर पर मान लिया जाए एक नास्तिक कौन होता है होंडा

16
00:01:11,120 --> 00:01:15,520
हिंदू को समझने के लिए हम नास्तिक से शुरुआत करते हैं नास्तिक कौन होता है देखिए

17
00:01:15,520 --> 00:01:16,760
नास्तिक ईश्वर को मानता

18
00:01:16,760 --> 00:01:21,120
है या नहीं मानता है उसको मोक्ष चाहिए कि नहीं चाहिए

19
00:01:21,120 --> 00:01:25,240
यह उसका अपना पर्सनल उद्देश्य हो सकता है मगर व हमारे

20
00:01:25,240 --> 00:01:29,280
लिए हानिकारक क्यों होता है धर्म धर्माज लोगों के लिए वो

21
00:01:29,280 --> 00:01:33,560
हानिकारक क्यों होता है क्योंकि जब वो ईश्वर को नहीं मानता है तो वह नियमों

22
00:01:33,560 --> 00:01:38,000
को मानना बंद कर देता है उसकी उसके पास निश्चित

23
00:01:38,000 --> 00:01:42,200
नियमावली नहीं होती है नास्तिकों के पास

24
00:01:42,200 --> 00:01:46,280
जीवन को जीने के लिए कोई आधार नहीं होता है तेरे लिए कर्तव्य और अ

25
00:01:46,280 --> 00:01:50,320
कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है यह धर्म

26
00:01:50,320 --> 00:01:54,840
पर चलने वाले का होगा है ना कि मैं यह करूंगा ये नहीं करूंगा

27
00:01:54,840 --> 00:01:59,000
और अगर वो नहीं करता है शास्त्र को जिस जगह वो विरोध करता है तो वो वहां

28
00:01:59,000 --> 00:02:03,080
पर अपराधी माना जाएगा उस दृष्टि से तो जो

29
00:02:03,080 --> 00:02:07,560
नास्तिक होता है उसके पास ऐसी कोई निश्चित नियमावली नहीं होती है जिसके

30
00:02:07,560 --> 00:02:11,960
आधार पर उसे किसी भी चीज के लिए बाउंड किया जा सके नहीं होती

31
00:02:11,960 --> 00:02:16,000
है अपनी भी कोई नियमावली नहीं लिखी होती मैं यह करूंगा यह नहीं

32
00:02:16,000 --> 00:02:20,200
करूंगा यह होता है नास्तिक तो इस कारण से नास्तिक आपके लिए

33
00:02:20,200 --> 00:02:24,280
हमारे समाज सामाजिक दृष्टिकोण से इस कारण से नास्तिक जो है हमारे लिए

34
00:02:24,280 --> 00:02:28,920
हानिकारक होता है अब यह होंडा हिंदू कौन है

35
00:02:28,920 --> 00:02:31,920
होंडा वो है

36
00:02:31,920 --> 00:02:36,160
जो न केन प्रकार वो यह सोचता है कि मैं

37
00:02:36,160 --> 00:02:40,520
सनातनी हूं मैं हिंदू हूं और

38
00:02:40,520 --> 00:02:44,600
मैं जो है धर्म की रक्षा कर रहा हूं हो सकता है धर्म की रक्षा ना करने वाले लोग भी हो मगर

39
00:02:44,600 --> 00:02:48,800
डा हिंदू है यह हिंदू वो है जिनके

40
00:02:48,800 --> 00:02:53,280
पास भी फिक्स निश्चित नियमावली जिनकी नहीं है

41
00:02:53,280 --> 00:02:57,440
तो क्या अंतर र नास्तिक में जिस प्रकार से नास्तिक आपके लिए

42
00:02:57,440 --> 00:03:02,280
हानिकारक है उसी प्रकार से ा हिंदू भी आपके लिए ना हानिकारक

43
00:03:02,280 --> 00:03:06,400
यह आपको यह बताते रहेंगे कि

44
00:03:06,400 --> 00:03:10,480
देखिए शंकराचार्य ने यह लिखा रामानुजाचार्य ने

45
00:03:10,480 --> 00:03:14,840
यह लिखा जहां जहां जिसकी जिसकी जो जो बात जो इनके लिए मान्य होगी

46
00:03:14,840 --> 00:03:19,400
जो इनके फेवर में हो रही होगी यानी कि इनकी अपनी जो मनोवृति

47
00:03:19,400 --> 00:03:23,560
है उससे जो मैच खा रही होगी उन मनोवृति के पोषण

48
00:03:23,560 --> 00:03:28,240
के लिए इनको जहां जहां से जिसके जिसके शब्द मिल जाएंगे उन

49
00:03:28,240 --> 00:03:32,440
शब्दों कोय प्रमाण के रूप में उपलब्ध करा देंगे

50
00:03:32,440 --> 00:03:36,960
मगर जब इनसे जिनको इन्होंने प्रमाण के रूप में

51
00:03:36,960 --> 00:03:41,160
प्रस्तुत किया है उन्हीं की दूसरी चीजों को आप पूछने लगेंगे तो व कहे

52
00:03:41,160 --> 00:03:45,320
नहीं नहीं मैं कोई शंकराचार्य शंकर परंपरा का थोड़ी ना जो मैं इनकी

53
00:03:45,320 --> 00:03:47,080
हर बात मान ल मुझे उनकी बात अच्छी लगी

54
00:03:47,080 --> 00:03:51,280
इसलिए मानली य क्या है य होंडा हिंदू क्योंकि

55
00:03:51,280 --> 00:03:55,400
जब ऐसा होगा तो आप किसी भी शास्त्र के आधार पर उसको आप बाउंड

56
00:03:55,400 --> 00:03:59,840
नहीं कर सकते कि भाई देख बहन से विवाह नहीं करना है

57
00:03:59,840 --> 00:04:04,040
क्यों मनुस्मृति में लिखा है अरे भाई मनुस्मृति में तो कई श्लोक प्रक्षिप्त है

58
00:04:04,040 --> 00:04:08,200
चलो ठीक है आर समाज वाली मनुस्मृति दिखा द तुम आर समाज को मानते हो आर समाज

59
00:04:08,200 --> 00:04:12,400
वाली मनुस्मृति दिखा द नहीं नहीं मैं दयानंद जी को भी कहीं कहीं पर नहीं मानता

60
00:04:12,400 --> 00:04:16,440
हूं क्योंकि मैं होडा हिंदू हूं मेरा कोई धर्म

61
00:04:16,440 --> 00:04:20,840
नहीं है मैं धर्म से बाहर हूं

62
00:04:20,840 --> 00:04:25,080
यह है होंडा हिंदू जो कि वक्त आने पर हर

63
00:04:25,080 --> 00:04:29,240
किसी भी नियम जो भी नियम उसकी उसके द्वारा स्वीकार जो

64
00:04:29,240 --> 00:04:33,280
उस समय की स्थिति है कार्य है उसके द्वारा स्वीकार कार्य के विरुद्ध जा

65
00:04:33,280 --> 00:04:38,160
रहा होगा वो उसको नकार सकता है क्यों क्योंकि मैं आर्थ समाज थोड़ी रहा

66
00:04:38,160 --> 00:04:42,200
हूं तो ऐसे ही अभी दो तीन उदाहरण में आपको दे रहा

67
00:04:42,200 --> 00:04:46,240
हूं जैसे जिस पर आज हम पूरी विस्तृत बात करने आया वो तो है

68
00:04:46,240 --> 00:04:50,320
रियल इंटेंशन यह भी समय आने पर कह देता है भाई मैं इसको भी मानता हूं

69
00:04:50,320 --> 00:04:54,480
इसको भी मानता हूं और जो है शंकराचार्य की जी की भी जय

70
00:04:54,480 --> 00:04:58,480
और जो है वो दयानंद सरस्वती की भी जय सबकी जय अरे

71
00:04:58,480 --> 00:05:03,040
क्या मतलब है जय का भाई अर्थ पूर्ण जय है कि

72
00:05:03,040 --> 00:05:06,480
कि यह पाखंड है

73
00:05:06,480 --> 00:05:10,880
तुम्हारा क्या है जय का मतलब जब शंकराचार्य

74
00:05:10,880 --> 00:05:14,920
अपने भाष्य में लिख रहे हैं कि संप्रदाय हीन जो व्यक्ति होता

75
00:05:14,920 --> 00:05:19,080
है वह गुरु के रूप में स्वीकार नहीं होता है

76
00:05:19,080 --> 00:05:23,080
तुम कर रहे हो उनकी जय फिर संप्रदाय हीन व्यक्ति को भी गुरु के रूप

77
00:05:23,080 --> 00:05:27,280
में स्वीकार कर रहे हो हालांकि उसको भी पूर्णतया नहीं कर रहे हो तो

78
00:05:27,280 --> 00:05:32,000
ये क्या है यह है दोगलापन तो इस जो डगले हिंदू है

79
00:05:32,000 --> 00:05:36,120
वह सबसे प्राथमिक स्तर पर हानिकारक है क्यों क्योंकि उनको य लगता

80
00:05:36,120 --> 00:05:40,280
रहता है कि हम जो है सनातन भाई आर समाजी हो या

81
00:05:40,280 --> 00:05:44,680
स्कोन वाले हो या क्या कहते हैं रामपाल

82
00:05:44,680 --> 00:05:49,240
वाले हो कम से कम इनके पास कोई बुक तो होती है

83
00:05:49,240 --> 00:05:53,360
कि मैं इस बुक में जो लिखा है चलो ठीक है रामपाल है

84
00:05:53,360 --> 00:05:57,360
सपोज ट रामपाल क्या करता है कि वो इस पुराण से

85
00:05:57,360 --> 00:06:01,480
यहां से यह बात लेगा वहां से वो बात ली जा जाएगी फिर ऐसे कर कर के

86
00:06:01,480 --> 00:06:05,560
एक अपनी बुक निकाल लेंगे भ हम सारे पुराणों को पूरा का पूरा नहीं मानते इतना

87
00:06:05,560 --> 00:06:09,760
इतना मानते हैं मगर वो बुक तो कम से कम उनकी नियमावली है

88
00:06:09,760 --> 00:06:14,080
धर्म और अधर्म का निर्णय करने वाली है इनके पास वो भी नहीं होता है

89
00:06:14,080 --> 00:06:18,200
तो इनका धर्म है क्या तो वक्त आने पर जो लोग यह कह

90
00:06:18,200 --> 00:06:22,760
देते हैं आर्य समाज का पक्ष लेने आएंगे और

91
00:06:22,760 --> 00:06:26,880
या अ अन्य संप्रदायों का पक्ष लेने आएंगे या अन्य परंपराओं

92
00:06:26,880 --> 00:06:31,000
का पक्ष लेने आएंगे मगर वक्त आने पर कह देंगे नहीं नहीं मैं किसी संप्रदाय को नहीं

93
00:06:31,000 --> 00:06:35,160
मानता मैं मैं आर समाजी थोड़ी र हूं मैं आर समाजी नहीं हूं यह कर देते

94
00:06:35,160 --> 00:06:39,200
हैं तो क्या होता है कि आप किसी भी नियम के लिए किसी भी

95
00:06:39,200 --> 00:06:43,360
आधार को लेकर के इनसे बात ही नहीं कर सकते क्योंकि ये तुरंत उससे फुदक के बाहर चले जाएंगे

96
00:06:43,360 --> 00:06:47,440
मैं आर समाजी थोड़ी मुझे बात मान लू तो एक दिन ऐसा आएगा जब इनसे

97
00:06:47,440 --> 00:06:51,560
यह कह रहे होंग आप कि भाई माताओं और बहनों से विवाह मत करो आर समाज ने

98
00:06:51,560 --> 00:06:55,600
भी इतनी बात मानी है नहीं नहीं मैं आर समाजी नहीं मैं तो करूंगा

99
00:06:55,600 --> 00:06:59,640
तो ये जो जिनके पास निश्चित नियमावली नहीं होती

100
00:06:59,640 --> 00:07:03,640
है वो नास्तिक होते हैं सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता

101
00:07:03,640 --> 00:07:07,800
है कौन बहन है कौन पत्नी है मैं धर्म बताता है मगर धर्म की जब निश्चित

102
00:07:07,800 --> 00:07:12,120
नियमावली है ही नहीं हमारे पास क्योंकि हम जिसको फॉलो कर रहे हैं दयानंद

103
00:07:12,120 --> 00:07:16,320
जी को फॉलो कर रहे हैं तो उनसे भी हम समय समय पर डिनायर जाएंगे जैसे

104
00:07:16,320 --> 00:07:20,440
आर्य वरा आर्य वरा क्या कहती है कि भाई मैं जो है

105
00:07:20,440 --> 00:07:24,480
मैं आर समाजी नहीं हूं सब बातें उनकी रख लेंगी दयानंद जी की उसके बाद

106
00:07:24,480 --> 00:07:29,040
कहेंगी मैं आर समाजी नहीं हूं तो इनका धर्म और अधर्म का निर्णय कहां से होगा

107
00:07:29,040 --> 00:07:33,280
भाई तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में

108
00:07:33,280 --> 00:07:37,880
एक मात्र शास्त्र प्रमाण है इनका शास्त्र है

109
00:07:37,880 --> 00:07:42,200
क्या अच्छा इन्होंने क्या अपने स्वयं वेदों का भाष्य

110
00:07:42,200 --> 00:07:46,320
कर रखा है तो कम से कम उसे ले आए कि यह

111
00:07:46,320 --> 00:07:50,440
मेरा धर्म है इन्होंने अपने अपने अपने उससे मनुस्मृति

112
00:07:50,440 --> 00:07:54,520
के श्लोकों को छाट के बना रखा हो कुछ तो वो ले आए मर ऐसा

113
00:07:54,520 --> 00:07:58,600
इन हंडा हिंदुओ ने नहीं किया है उसके लिए बहुत साहस चाहिए बहुत परिश्रम चाहिए वो

114
00:07:58,600 --> 00:08:02,800
तो दूर की बा भाई बहुत बड़े-बड़े विद्वान होते हैं जो ये सब कार्य कर पाते

115
00:08:02,800 --> 00:08:07,720
हैं यह भाष्य कर दे नियमावली बना दे चलो ठीक है

116
00:08:07,720 --> 00:08:11,760
कि बना दी वो वेद भाष्य अलग है कि नहीं है वोह बात बात

117
00:08:11,760 --> 00:08:15,880
की बात है कि वो मैच नहीं खा रहे मगर हर समाज यों के पास

118
00:08:15,880 --> 00:08:20,080
भी कम से कम कुछ सिद्धांत तो है मेरा यह सिद्धांत है और यह सिद्धांत

119
00:08:20,080 --> 00:08:24,360
मेरा नहीं है मगर होंडा हिंदू कौन है होंडा हिंदू वो है जो दोगला

120
00:08:24,360 --> 00:08:28,640
है जिसका कोई सिद्धांत नहीं है वो है होडा हिंदू बस

121
00:08:28,640 --> 00:08:32,720
इतनी बात है वो ईश्वर को स्वीकार किए हुए हैं और जो दूसरा व्यक्ति है

122
00:08:32,720 --> 00:08:36,800
उसने ईश्वर को स्वीकार नहीं किया है मगर वक्त आने पर वो उस चीज से भी मुक सकता है

123
00:08:36,800 --> 00:08:40,800
क्योंकि वो तो आर समाजी नहीं है वो तो रामपाल वाला नहीं है वो तो व

124
00:08:40,800 --> 00:08:44,880
तो स्नस नहीं है वो क्या है नहीं पता है

125
00:08:44,880 --> 00:08:48,800
ना जैसे यह जो मोहित गौड़

126
00:08:48,800 --> 00:08:53,800
मोहित गड़ भी अपने जगह जगह पर य कह देते हैं मोहित गड़ यानी वो विज्ञान

127
00:08:53,800 --> 00:08:57,800
दर्शन विज्ञान दर्शन वो व्यक्ति जो मुझसे कभी मेरे फोन

128
00:08:57,800 --> 00:09:02,120
को मिला कर के बात करने में समर्थ रहा और उसने मेरे

129
00:09:02,120 --> 00:09:06,360
बिना स्पष्ट बात किए हीय डिक्लेयर कर दिया कि भय

130
00:09:06,360 --> 00:09:10,360
शिवांश नारायण द्विवेदी जो है हमसे डरते हैं अच्छी बात है मुंगेरी लाल

131
00:09:10,360 --> 00:09:14,480
के हसीन सपनों की दुनिया में खोए रहने के लिए स्वतंत्र है आप प्रत्यक्ष वार्ता

132
00:09:14,480 --> 00:09:19,320
होगी कभी वैसे आपने ऐसा अपने आप को छोड़ा नहीं कि प्रत्यक्ष वार्ता आपसे की

133
00:09:19,320 --> 00:09:23,520
जाए मगर जब होगी तो दृश्य बदल जाएगा

134
00:09:23,520 --> 00:09:26,960
ु का सुनिए

135
00:09:26,960 --> 00:09:30,960
थोड़ा विचारधारा से भीभी पूरी तरी से नहीं जुड़े जैसे अभी कलयुग योगी जी

136
00:09:30,960 --> 00:09:35,320
है तो वो ये सब चीजें अभी जान रहे हैं व पूरा हरे समाज से वैसा कुछ भी इंट्रोड्यूस

137
00:09:35,320 --> 00:09:39,360
नहीं है रियल इंटेंशन को आप लीजिए तो

138
00:09:39,360 --> 00:09:45,360
ऐसा कुछ नहीं है यहां पर निष्पक्ष रूप से बुद्धि को खोल

139
00:09:46,760 --> 00:09:50,760
हम निष्पक्ष रूप से बुद्धि को खोल रहे हैं अभी य आर्य समाज को इन्होंने

140
00:09:50,760 --> 00:09:55,560
पूरा का पूरा स्वीकार नहीं किया है अर्थात ये है कि अभी उनके पास धर्म है ही नहीं

141
00:09:55,560 --> 00:09:59,880
तो क्या है ये जिसके पास धर्म नहीं है वो कौन हुआ अधर्मी अधर्मी

142
00:09:59,880 --> 00:10:03,920
कौन हुआ जिसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में

143
00:10:03,920 --> 00:10:08,040
कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है यह चुनाव करने का निर्णय

144
00:10:08,040 --> 00:10:12,040
नहीं होता है भाई तुमने अपने आप मनुस्मृति का अर्थ किया नहीं

145
00:10:12,040 --> 00:10:16,280
तुमने अपने आप वेद भाष्य किए नहीं है और जिनके वेद भाष्य तुम पढ़ रहे हो

146
00:10:16,280 --> 00:10:20,400
जिनको तुम प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो उन्हीं के वेद भाष्य पर अभी

147
00:10:20,400 --> 00:10:25,120
भी तुम्हें डाउट है उन्हीं की चीजों पर अभी भी तुम्हें डाउट है तो इसका अर्थ क्या

148
00:10:25,120 --> 00:10:29,320
हुआ इसका अर्थ क्या हुआ कि तुम्हारे पास जीवन को जीने के लिए

149
00:10:29,320 --> 00:10:33,400
निश्चित नियमावली नहीं है इसी को कहते हैं हुंडा हिंदू फिर वो भले ही

150
00:10:33,400 --> 00:10:37,600
रियल इंटेंशन हो व फिर भले हीय जिसका नाम लिया

151
00:10:37,600 --> 00:10:41,840
कलयुग का योगी हो या फिर य आपके विज्ञान दर्शन वाले हो यह

152
00:10:41,840 --> 00:10:43,200
दोगलापन

153
00:10:43,200 --> 00:10:47,240
है आर्य समाज आर्य समाज दयानंद दयानंद जी करते

154
00:10:47,240 --> 00:10:51,320
करते भी आप उनके भी सगे नहीं हो रहे हैं क्योंकि कहीं ऐसा ना हो जाए कि

155
00:10:51,320 --> 00:10:55,680
किसी दिन य मुझको बहन से विवाह करने के लिए मना कर दे नहीं तो बताइए

156
00:10:55,680 --> 00:10:59,920
कौन सी निश्चित नियमावली आपके धर्म और अधर्म के लिए य और

157
00:10:59,920 --> 00:11:04,160
धर्म जब आप आर्य समाज का पक्ष रखने वाला

158
00:11:04,160 --> 00:11:08,360
होते हुए भी आप कह रहे हैं कि हमें उस पर भी अभी

159
00:11:08,360 --> 00:11:12,440
पूरी तरीके से भरोसा नहीं किया है तो आपका सनातन सिद्धांत क्या

160
00:11:12,440 --> 00:11:16,760
है फिर नहीं है अभाव है यह है होंडा

161
00:11:16,760 --> 00:11:20,840
हिंदू इसी ब्रीड से आज हम आपको इंट्रोड्यूस कराने आए हैं उसका जो एक व्यक्ति

162
00:11:20,840 --> 00:11:25,000
है जो रियल इंटेंशन है इसके बारे

163
00:11:25,000 --> 00:11:29,320
में आज हम बात करेंगे रियल इंटेंशन वो व्यक्ति है जो

164
00:11:29,320 --> 00:11:33,680
सम समय पर आकर के यह कहता

165
00:11:33,680 --> 00:11:38,280
है जो समय समय पर आकर के यह कहता है भाई आपस में मत लड़ो

166
00:11:38,280 --> 00:11:42,520
तो आज हम इसके ये जो सारे दोगले पन है इनको

167
00:11:42,520 --> 00:11:47,000
देखेंगे उसने क्या क्या किया है और क्या क्या आक्षेप लगाए हमारे ऊपर

168
00:11:47,000 --> 00:11:51,000
इन पर बातें करेंगे जैसे मैंने कई बार

169
00:11:51,000 --> 00:11:55,120
ऐसी कहानियां देखी और सुनी ऐसा नहीं

170
00:11:55,120 --> 00:11:59,120
है मैं ये नहीं कहूंगा कि मैंने अब तक अपनी जीवन में कोई फिल्म नहीं देखी हालाकि फिल्मों

171
00:11:59,120 --> 00:12:03,240
को को देखने के पक्ष में नहीं हूं मगर जब दिशाहीन थे तो देखी भाई तो

172
00:12:03,240 --> 00:12:07,520
मैं कभी-कभी ऐसी कुछ चलचित्र भी देखे

173
00:12:07,520 --> 00:12:12,520
कि जिसमें कि क्या होता था कि एक व्यक्ति होता था

174
00:12:12,520 --> 00:12:16,720
और उसमें वो मतलब कुछ ऐसा व्यक्ति जिसको

175
00:12:16,720 --> 00:12:21,640
की जनता मानती हो या सुनती हो वो व्यक्ति

176
00:12:21,640 --> 00:12:25,720
जब देखा जाता था तो उसकी अपनी ही लड़ाई में पूरी

177
00:12:25,720 --> 00:12:30,360
वो जो कहानी है निकल जाती थी ऐसी कई फिल्में है ऐसी कई

178
00:12:30,360 --> 00:12:35,080
कहानियां है जैसे कि कोई मान लीजिए शक्तिमान है या

179
00:12:35,080 --> 00:12:39,320
स्पाइडरमैन है तो इनका कभी कभी कोई कोई ऐसा भाग बना

180
00:12:39,320 --> 00:12:43,520
इनकी कहानियों का जिसमें उनकी पर्सनल लड़ाई में ही पूरी

181
00:12:43,520 --> 00:12:48,040
कहानी निकल गई जैसे श्री राम श्री राम जी क्या थे

182
00:12:48,040 --> 00:12:48,720
कि अगर देखा

183
00:12:48,720 --> 00:12:52,880
जाए तो रामायण को उस पर्सपेक्टिव से देखे तो सीता माता का हरण हुआ उन्होने

184
00:12:52,880 --> 00:12:56,920
सीता माता को छोड़ा अगर इतने पार्ट की अगर वो कथा कही जाए तो

185
00:12:56,920 --> 00:13:01,040
क्या हुआ उनकी पर्सनल जो एक समस्या थी उसी

186
00:13:01,040 --> 00:13:05,280
में ही पूरी कहानी निकल गई तो मैं ये ऐसी कहानियों से थोड़ा

187
00:13:05,280 --> 00:13:09,600
सा दूर हटता था कि यह क्या बात है भाई उस कहानी को दिखाओ उसको महानायक

188
00:13:09,600 --> 00:13:13,640
के रूप में प्रस्तुत करो जो जिसकी पर्सनल कहानी ना हो जो समाज के

189
00:13:13,640 --> 00:13:18,160
लिए लड़ रहा हो उसकी पर्सनल उसकी कथा को आप लोगों को समाज तक पहुंचाए

190
00:13:18,160 --> 00:13:22,480
ये कैसी कहानियां है हालांकि श्री राम की वो बात अलग थी

191
00:13:22,480 --> 00:13:26,520
मगर जो और जो इस तरह की मैं कहानियां सुनता देखता था तो मेरे मन में

192
00:13:26,520 --> 00:13:30,600
ये भावना आती थी भाई इसकी जो ये जो पर्सनल कहानी इसको क्यों

193
00:13:30,600 --> 00:13:35,120
इतना बड़ा महानायक बता रहे इसने किया क्या इस पर जिसने वार किया उसको इसने जवाब

194
00:13:35,120 --> 00:13:39,200
दिया मगर उसके पीछे छुपा हुआ

195
00:13:39,200 --> 00:13:43,280
जो अर्थ था वह मैं ध्यान नहीं दे पाता था कि इस पर वार इसलिए हो रहा है

196
00:13:43,280 --> 00:13:47,320
क्योंकि यह लड़ रहा है क्योंकि यह समाज के लिए

197
00:13:47,320 --> 00:13:51,360
लड़ रहा है इस पर वार इसलिए हो रहे हैं इसकी जो पर्सनल कहानी

198
00:13:51,360 --> 00:13:55,520
है वो इसलिए इस रूप में आई है क्योंकि इसने समाज

199
00:13:55,520 --> 00:13:59,800
के लिए आवाज उठाई धर्म के लिए इसने आवाज उठाई इस उस पर पर्सनल

200
00:13:59,800 --> 00:14:03,880
अटैक चालू हुए और आज मैं भी तुच्छ सा व्यक्ति उसी

201
00:14:03,880 --> 00:14:08,120
स्टेज पर आकर के खड़ा हो गया क्या हुआ मैं पूछता

202
00:14:08,120 --> 00:14:12,240
था लोगों से जाकर के ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं वेद

203
00:14:12,240 --> 00:14:16,320
मंत्र कैसे आए क्यों क्योंकि जब आप ऐसा अर्थ दे रहे हो

204
00:14:16,320 --> 00:14:20,720
जिसम जिसका अर्थ अकाट्य नहीं है मगर उसको वेदों के प्रमाण की आड़ में आप लोगों

205
00:14:20,720 --> 00:14:24,840
को थोपना चाहते हो तब पूछना पड़ा कि भाई ये जो अर्थ आपके

206
00:14:24,840 --> 00:14:29,200
पास आए उसी परंपरा से आए जहां से वेद आए कि नहीं किसी को नीम

207
00:14:29,200 --> 00:14:33,280
निम्न या हीन भावना दिखाने के लिए नहीं मैं पूछता था क्या परम स्वतंत्र मोक्ष

208
00:14:33,280 --> 00:14:37,600
है तो यह एक जो भावना थी कि हम उन सिद्धांतों

209
00:14:37,600 --> 00:14:41,640
का प्रचार प्रसार कर दे समाज में जिसको कोई काट ना सके

210
00:14:41,640 --> 00:14:45,920
उन सिद्धांतों के नीचे हमारा समाज एक हो जाएगा और हम जो विधर्मी सनातन

211
00:14:45,920 --> 00:14:49,920
को नष्ट करने पर तुले हुए हैं पूरी दुनिया में जो खेल चल रहा है

212
00:14:49,920 --> 00:14:54,000
सनातन से लड़ाई का उसमें हम सशक्ति के साथ हम सब एक होक के लड़ सके

213
00:14:54,000 --> 00:14:58,200
तो क्या हुआ कि समाज के लिए गिलहरी वाला प्रयास जब करना हमने

214
00:14:58,200 --> 00:15:02,480
शुरू किया तो हमारी एक पर्सनल पर्सनल

215
00:15:02,480 --> 00:15:06,480
अटैक्स हम पर होने लगे जिनका जवाब हमें देना पड़ रहा है अब जो व्यक्ति आज य जवाब

216
00:15:06,480 --> 00:15:10,640
देते हुए में देखेगा व यही सोचेगा भाई तुम कर क्या रहे हो समाज

217
00:15:10,640 --> 00:15:14,680
के लिए क्या कर रहे हो तुम समाज के लिए तुमने क्या किया कुछ नहीं तुम तो

218
00:15:14,680 --> 00:15:18,920
अपने जो तुम पर पर्सनल टैक्स कर रहा है व उसका तुम जवाब दे रहे हो

219
00:15:18,920 --> 00:15:23,360
उसका तुम उत्तर दे रहे हो तो ये स्थिति क्यों आई

220
00:15:23,360 --> 00:15:27,600
क्योंकि हमने समाज के लिए कुछ करने का सोचा कि नहीं भाई

221
00:15:27,600 --> 00:15:31,680
मैं जब पार्क में जाता था था तो वहा रामपाल की स्टॉल्स लगे

222
00:15:31,680 --> 00:15:35,680
रहते थे दुर्गा माता को बुरा भला कहने वाले लोग खड़े रहते थे

223
00:15:35,680 --> 00:15:39,680
मुझे नहीं सहन हुआ नहीं सहन हुआ तो मैंने आवाज

224
00:15:39,680 --> 00:15:43,960
उठाई तो आज आवाज उठाई है तो पर्सनल टैक्स तो झेलने पड़ेंगे मेरी अपनी लड़ाई है

225
00:15:43,960 --> 00:15:48,320
भाई सबको मतलब नहीं होना चाहिए इससे मेरी अपनी लड़ाई हो गई अ

226
00:15:48,320 --> 00:15:52,400
अब ये सामाजिक कहां रहा तो आज मुझे वो चीज समझ

227
00:15:52,400 --> 00:15:56,440
में आई कि वो जो महानायक होते हैं या नायक होते हैं

228
00:15:56,440 --> 00:16:00,640
काल्पनिक होते हैं या श्री रामचंद्र जीसे होते हैं इनकी पर्सनल

229
00:16:00,640 --> 00:16:04,680
लड़ाइयां पर्सनल नहीं होती है इनकी पर्सनल लड़ाइयां भी सामाजिक समाज

230
00:16:04,680 --> 00:16:10,680
के लिए होती है धर्म संस्थापन के लिए होती

231
00:16:11,040 --> 00:16:13,960
है

232
00:16:13,960 --> 00:16:18,200
तो एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि दयानंद का भगवान क्या होता

233
00:16:18,200 --> 00:16:23,080
है ईश्वर तो सभी के हैं हां दयानंद

234
00:16:23,080 --> 00:16:27,280
जी के भगवान से अर्थ है कि दयानंद जी के द्वारा जो ईश्वर

235
00:16:27,280 --> 00:16:31,560
की परिभाषा दी जाती है वो परिभाषा के अनुसार वह

236
00:16:31,560 --> 00:16:37,480
सर्वशक्तिमान है या नहीं ठीक है लोरेंस

237
00:16:37,480 --> 00:16:41,600
जी तो अब एक आगे इन्होंने अब इन्होंने रियल

238
00:16:41,600 --> 00:16:45,960
इंटेंशन वालों ने हमसे हमारे बारे में खूब अनाप सनाप जो मन में आया बका

239
00:16:45,960 --> 00:16:49,960
और यह व्यक्ति हि हिले बिना बात नहीं कर पाता ऐसे ऐसे करके

240
00:16:49,960 --> 00:16:54,080
ही बात करता है वो उसको जेनेटिक मिला है या फिर वो

241
00:16:54,080 --> 00:16:58,080
कुछ हल्का फुल्का कुछ अधी पौआ का ले लेता है

242
00:16:58,080 --> 00:17:02,280
आने से पहले तो पता नहीं मगर ऐसे ही बात करता है मेरे भाई मेरे भाई

243
00:17:02,280 --> 00:17:07,280
तो आज बात करते हैं मेरे भाई से तो

244
00:17:07,280 --> 00:17:11,520
अब सबसे पहली बात ये आती है क्लेम करता है कि भाई स्त्री और

245
00:17:11,520 --> 00:17:15,600
जो शूद्र है इस विषय में आप कहते हो कि तुमको अधिकार नहीं है यह

246
00:17:15,600 --> 00:17:19,760
वो तो सबसे पहले तो इनका य दोगलापन दिखा दूं मेरा एक वक्तव्य

247
00:17:19,760 --> 00:17:23,880
दिखा दीजिए जहां मैंने कहा हो कि इनको अधिकार नहीं है तुम नीच हो

248
00:17:23,880 --> 00:17:26,080
इसने अपनी वीडियो में कहा है कि

249
00:17:26,080 --> 00:17:30,360
तुमको अधिकार नहीं है तुम नीच हो मैं कहता हूं इनके लिए

250
00:17:30,360 --> 00:17:34,600
मैंने अगर यह कहा हो मैं उसी क्षण अपना चैनल डिलीट कर दूंगा

251
00:17:34,600 --> 00:17:38,840
कि तुमको अधिकार नहीं है तुम नीच हो क्या है वर्ड्स को ट्विस्ट

252
00:17:38,840 --> 00:17:42,920
करके प्रस्तुत करने की कला आनी चाहिए आपको आपको कैसे सामने वाले

253
00:17:42,920 --> 00:17:47,000
को बुरा साबित करना है वो आना चाहिए तो इन्होंने अपने उस

254
00:17:47,000 --> 00:17:51,000
वीडियो में कुछ भी ऐसा तर्क और प्रमाण सहित कुछ नहीं कहा बस केवल

255
00:17:51,000 --> 00:17:55,000
लोगों की भावनाओं से खेला है लोगों की भावनाओ से खेलने का अर्थ जानते

256
00:17:55,000 --> 00:17:59,320
हैं ना क्या होता है मैंने एकद बार अपने वीडियो में बताया है

257
00:17:59,320 --> 00:18:03,480
कि जब मैं छोटा था अपने मित्रों के साथ ऐसा मजाक कर देता था सिर्फ

258
00:18:03,480 --> 00:18:07,480
इतना कह देता था कि तुम्हारे चेहरे पर जो मुस्कान दिखती है

259
00:18:07,480 --> 00:18:11,600
वह खोखली है तुम अंदर से बहुत दुखी हो लगभग 90 पर

260
00:18:11,600 --> 00:18:15,760
लोगों से मैंने यह बात कही और उन्होंने कहा अरे वाह आपने तो

261
00:18:15,760 --> 00:18:19,800
मेरे दिल की बात छीन ली और मैं एक लाइन और कह देता था कि आपको सबने

262
00:18:19,800 --> 00:18:24,480
धोखा दिया पर आपने सबके साथ जो है वो किया

263
00:18:24,480 --> 00:18:29,200
आपने सबका आपने सबके साथ किसी के साथ विश्वास घात नहीं किया पर सबने आपके साथ विश्वास

264
00:18:29,200 --> 00:18:33,440
इतनी एक दो बातें में उनसे कह देता था तो क्या होता था

265
00:18:33,440 --> 00:18:37,560
वो व्यक्ति तुरंत अरे वाह इसने हमारी ओो ने भी यही काम किया आचार्य

266
00:18:37,560 --> 00:18:41,240
प्रशांत भी यही काम करते हैं जो तथाकथित है यही

267
00:18:41,240 --> 00:18:45,240
काम करते हैं क्या काम करते हैं कि जब

268
00:18:45,240 --> 00:18:49,880
उनके पास युक्ति और प्रमाण नहीं होता है तो प्रोपेगेंडा फैलाते

269
00:18:49,880 --> 00:18:54,120
हैं ऐसी बातें बोलते जिससे व्यक्ति कनेक्ट हो जाए उनका कोई

270
00:18:54,120 --> 00:18:58,120
सिर पैर नहीं होता है अच्छा अब यह कहते हैं कि स्त्रियों

271
00:18:58,120 --> 00:19:02,320
का अप ना होना जो है स्त्रियों का जो वेद

272
00:19:02,320 --> 00:19:07,120
अध्ययन है उसके बारे में शास्त्र क्या कहते हैं परंपरा प्राप्त

273
00:19:07,120 --> 00:19:11,120
यह बताना जो है स्त्रियों का अपमान है है ना ये कहां के सनातन

274
00:19:11,120 --> 00:19:15,680
सिद्धांत है माता का अपमान है

275
00:19:15,680 --> 00:19:19,680
तो अब सबसे पहली बात है इन्होंने कहा कि हमने कहा है कि स्त्रियों को

276
00:19:19,680 --> 00:19:23,880
घर के अंदर रहना चाहिए नहीं पूज्य गुरुदेव ने क्या कहा जब स्त्रियों

277
00:19:23,880 --> 00:19:28,240
की बात आई उनसे पूछा गया स्त्रियों के लिए कैसा जीवनयापन कि अपने शील

278
00:19:28,240 --> 00:19:32,320
की सुरक्षा भंग ना हो अपने शील की गरमा

279
00:19:32,320 --> 00:19:37,040
भंग ना हो इस दायरे में रहते हुए आप खूब उड़ान भरिए

280
00:19:37,040 --> 00:19:41,320
धर्म कहता है शास्त्र कहते हैं और परंपरा प्राप्त आचार्य कहते हैं मगर इसने

281
00:19:41,320 --> 00:19:45,520
क्या किया इस व्यक्ति ने वर्ड्स को ट्विस्ट किया जो शास्त्रों

282
00:19:45,520 --> 00:19:49,520
की जो परंपरा प्राप्त शास्त्रों की जो मर्यादा है व अगर हमने बता दी तो

283
00:19:49,520 --> 00:19:53,880
हमने यह कहा कि भाई स्त्रियां नीच है या शूद्र नीच

284
00:19:53,880 --> 00:19:56,400
इसने ऐसे प्रस्तुत कर दिया मैं

285
00:19:56,400 --> 00:20:00,400
इसको एक निमंत्रण दे रहा हूं यह व्यक्ति आकर के मुझे

286
00:20:00,400 --> 00:20:04,480
दिखा दे कि मैंने कहां यह बात कही है कि स्त्रियां नीच है

287
00:20:04,480 --> 00:20:08,880
इसलिए उन्हें अधिकार नहीं है जो इसने अपने वीडियो में 15 बार बोला है कम से कम वही

288
00:20:08,880 --> 00:20:13,160
भावनात्मक खेल वही कि तुम्हारे साथ धोखा हुआ वही माइंड

289
00:20:13,160 --> 00:20:17,440
से कनेक्ट करने वाली बातें तुरंत व्यक्ति धोखा हुआ हो या ना हुआ हो तुरंत

290
00:20:17,440 --> 00:20:21,880
भाव हो जाएगा वही बात है य ये कोई

291
00:20:21,880 --> 00:20:26,120
बातें बेसिर पैर वाली है जो तुमने अपने पूरे वीडियो में की है

292
00:20:26,120 --> 00:20:30,160
बाकी अभी रियल इंटेंशन की रियल जो उनका इंटेंशन है

293
00:20:30,160 --> 00:20:34,160
क्या हमने हुंडा इंदू के अर्थ में जाना और अभी सनेह सने और

294
00:20:34,160 --> 00:20:36,960
जानेंगे

295
00:20:36,960 --> 00:20:41,200
तो अच्छा दूसरी बात अब यह आती है कि ऐसा

296
00:20:41,200 --> 00:20:45,520
तो है नहीं कि सभी जो स्त्रियां हैं उनका

297
00:20:45,520 --> 00:20:50,120
जो यज्ञ पवित है वो हो रहा है अब इनके अनुसार जो है

298
00:20:50,120 --> 00:20:54,400
यज्ञ पवित से ही स्त्री जो है सुलक्षणा मानी जाएगी इनके

299
00:20:54,400 --> 00:20:58,640
इनके कथानक के अनुसार यही है तो इसका मतलब इस देश में जितनी

300
00:20:58,640 --> 00:21:02,920
स्त्रिया है वो सब नीच है इनके अनुसार

301
00:21:02,920 --> 00:21:06,920
क्योंकि उनका यज्ञ पवित नहीं हुआ और यज्ञ पवित से रोकने वाला व्यक्ति यह

302
00:21:06,920 --> 00:21:11,080
कह रहा है कि तुम नीच हो इसलिए नहीं होगा तो यानी कि जिनका यज पवित

303
00:21:11,080 --> 00:21:15,160
नहीं हुआ है जिन स्त्रियों का उसको तुम नीच कह रहे हो

304
00:21:15,160 --> 00:21:19,240
यह होता है तक अभी चलते हैं

305
00:21:19,240 --> 00:21:23,280
और और आगे चलते हैं ठीक है अच्छा वैसे

306
00:21:23,280 --> 00:21:28,640
एक बात बता दूं कि तुम्हारे जो जिस मत को

307
00:21:28,640 --> 00:21:32,800
क्या कहूं मैं तुम्हारे बारे में तुम्हारे बारे में तो कुछ बोली बोला भी नहीं जा सकता ना कि भाई तुम आर समाज

308
00:21:32,800 --> 00:21:37,400
को मानते हो खट से मना कर दोगे तुम हो क्या तुम्हारा अस्तित्व क्या है

309
00:21:37,400 --> 00:21:41,800
भाई तुमने किसके वेद भाष्य को स्वीकार किया है

310
00:21:41,800 --> 00:21:46,040
वह तुम्हारा धर्म है वेद धर्म है ना मगर तुमरे

311
00:21:46,040 --> 00:21:50,160
समाज को मानते नहीं हो दयानंद जी को पूरा मानते नहीं हो इसका मतलब दयानंद जी

312
00:21:50,160 --> 00:21:51,960
पर विश्वास थोड़ा सा डाउट है

313
00:21:51,960 --> 00:21:56,160
इसका मतलब कि जिसके तुम जो तुम वेद भाष्य पढ़ रहे हो उस पर थोड़ा डाउट है इसका

314
00:21:56,160 --> 00:22:00,360
मतलब तुम्हें मालूम नहीं कि मेरा धर्म क्या है

315
00:22:00,360 --> 00:22:04,520
तुम पक्के नहीं हो अपने धर्म के वरना पूछो शीशे में खड़े

316
00:22:04,520 --> 00:22:08,920
होकर के पूछो कि तुम्हारा धर्म है क्या इसको कहते हैं होडा हिंदू

317
00:22:08,920 --> 00:22:13,040
ठीक है तो फिर अब तुम्हे पहले एक बात बता दूं ठीक है आंशिक

318
00:22:13,040 --> 00:22:17,160
रूप से ही सही तुमने अगर मनुष्य ये आर्य समाज को स्वीकार

319
00:22:17,160 --> 00:22:21,240
किया है हिलने वाले प्राणी तो आर्य

320
00:22:21,240 --> 00:22:25,360
समाज मैं जितनी स्त्रियां है ना जिन्होंने यज्ञ पवित धारण

321
00:22:25,360 --> 00:22:29,360
कर लिया और जो एक दो इस तरह के मत है परिवार इत्यादि

322
00:22:29,360 --> 00:22:33,840
जिन्होंने यज्ञ पवित धारण कर लिया है ठीक है

323
00:22:33,840 --> 00:22:37,920
उनसे कई गुना ज्यादा कई गुना ज्यादा

324
00:22:37,920 --> 00:22:42,200
उन परंपराओं की शिष्या हैं स्त्रियां

325
00:22:42,200 --> 00:22:46,680
जो ये कहती है कि स्त्रियों को यज्ञ पवित नहीं कराने की आवश्यकता है नहीं कराना चाहिए

326
00:22:46,680 --> 00:22:50,880
अमुक अमुक कारण है अमुक अमुक शास्त्रों में दिया गया है

327
00:22:50,880 --> 00:22:55,200
तो वो सब संतुष्ट है खुश है प्रसन्न है

328
00:22:55,200 --> 00:22:59,680
और साथ ही साथ आपके अनुसार क्या है वो सब

329
00:22:59,680 --> 00:23:04,120
नीच नीच है ना नीच शब्द को याद रखना

330
00:23:04,120 --> 00:23:09,920
बारबार काम आएगा आगे चलते

331
00:23:09,920 --> 00:23:14,000
हैं अब इनका कहना है कि

332
00:23:14,000 --> 00:23:18,520
क्या जिनका यज्ञ पवित नहीं होता है

333
00:23:18,520 --> 00:23:22,720
जिनका ये भले ही शूद्र की बात कर लो जिनको

334
00:23:22,720 --> 00:23:27,120
अधिकार नहीं है शुद्ध का अर्थ ही है जो चतुर्थ वर्ण है

335
00:23:27,120 --> 00:23:31,320
तो इनका कहना है जो बाकी के तीन वर्ण है जिन्ह

336
00:23:31,320 --> 00:23:35,480
द्विज कहा जाता है दज तब जब उनका दूसरा मतलब पवित्र हो जाए

337
00:23:35,480 --> 00:23:38,880
तब उन्हें द्विज कहा जाता है

338
00:23:38,880 --> 00:23:43,080
तो जो दज की बात है कि आपका

339
00:23:43,080 --> 00:23:49,080
कहने का अर्थ है कि यदि आपका

340
00:23:50,360 --> 00:23:56,360
यह हा

341
00:24:01,040 --> 00:24:05,360
हां हां बहुत सारा मटेरियल था तो

342
00:24:05,360 --> 00:24:10,120
एकदम से गायब हो गया था ठीक है अब बात ये आती है

343
00:24:10,120 --> 00:24:14,440
कि इन्होंने एक बात कही कि क्या भाई जिस क्या भाई यह जो जिनका

344
00:24:14,440 --> 00:24:19,360
तुम यज्ञ पवित ना कराने की बात कर रहे हो क्या वह उनके चेतना नहीं होती

345
00:24:19,360 --> 00:24:23,440
इसका मतलब पहली बात तो यह है कि जितनी महिलाओं ने संसार में जितने

346
00:24:23,440 --> 00:24:27,480
महिलाओं पुरुषों ने यज्ञ पवित नहीं कराया है वो चेतना

347
00:24:27,480 --> 00:24:31,680
हीन है तुम्हारे अनुसार अरे मेरे भाई तुम जिनके साथ बैठे हो

348
00:24:31,680 --> 00:24:35,960
ना तुम जिनके साथ खा पी रहे हो तुम जिनके साथ उठ

349
00:24:35,960 --> 00:24:40,080
बैठ रहे हो तुम जो तुम्हारी जो टीम है तथाकथित हुंडा हिंदुओ की टीम भी बन

350
00:24:40,080 --> 00:24:44,480
गई है पता नहीं आप लोगों को अभी आगे बात करूंगा टीम के बारे में डा

351
00:24:44,480 --> 00:24:48,480
हिंदुओ की टीम है इनमें से ही कई लोगों का यज्ञ पवित नहीं

352
00:24:48,480 --> 00:24:52,760
हुआ होगा तो ये सब लोग क्या है चेतना हीन और नीच है

353
00:24:52,760 --> 00:24:56,840
ना और तो और ये लोग यज्ञोपवित होता क्यों है

354
00:24:56,840 --> 00:25:00,880
यज्ञ पवित इसलिए होता है कि जिससे

355
00:25:00,880 --> 00:25:05,160
व्यक्ति वेद अध्ययन में अधिकार प्राप्त कर सके मगर इनकी जो टीम है इतनी

356
00:25:05,160 --> 00:25:05,660
बात

357
00:25:05,360 --> 00:25:09,480
तो आर समाज भी मानता है मगर यहां पर नहीं मानेगा इनकी जो टीम है

358
00:25:09,480 --> 00:25:13,480
उस टीम में जाने कितने लोग हैं जो बिना यज्ञ पवित के ही वेद अध्ययन कर रहे

359
00:25:13,480 --> 00:25:17,600
हैं और वेद की बातें आपको यहां करते हुए मिल जाएंगे टीवी

360
00:25:17,600 --> 00:25:21,840
पर टब पर तो क्या हुआ कि अब

361
00:25:21,840 --> 00:25:25,880
यह जो भाई साहब है इन्होंने लिखा है

362
00:25:25,880 --> 00:25:29,920
इन्होंने यह कहा कि

363
00:25:29,920 --> 00:25:34,840
अगर तुम इनको वेदा अध्ययन की बात करते हो सबसे पहली बात तो यह है

364
00:25:34,840 --> 00:25:38,920
कि वेद अध्ययन का मतलब यह नहीं होता है कि व्यक्ति को उसको जो विकास है या

365
00:25:38,920 --> 00:25:42,960
मुक्ति का जो प्रबंध है वो छीन लेना उसका जो मुक्ति का प्रबंध है

366
00:25:42,960 --> 00:25:47,080
दूसरे तरीके से होगा और इनका जो

367
00:25:47,080 --> 00:25:51,120
जो वेदा अध्ययन वाली बात है इनका मुक्ति का प्रबंधन अलग तरीके से होगा इनका भौतिक जीवन

368
00:25:51,120 --> 00:25:55,320
अलग तरीके से निकलेगा दूसरे का अलग तरीके से उनको शिक्षा से वंचित करने के लिए

369
00:25:55,320 --> 00:25:59,320
नहीं कहा जा रहा है कि तुम नीच हो तुम ये हो तुम वो हो ये सब के अपने चुनाव

370
00:25:59,320 --> 00:26:03,440
वाले डायलॉग है ना तो खैर तुम्हारी बात

371
00:26:03,440 --> 00:26:07,600
देख लेते हैं अगर विधि निषेध को बताना अगर किसी

372
00:26:07,600 --> 00:26:11,600
व्यक्ति के संबंध में विधि निषेध को बताना यह घोषित करना

373
00:26:11,600 --> 00:26:16,240
है कि जिसके लिए हम विधि निषेध बता रहे हैं मतलब तुम यह काम नहीं करोगे

374
00:26:16,240 --> 00:26:20,280
अगर यह घोषित करना सामने वाले को नीच सिद्ध करता

375
00:26:20,280 --> 00:26:20,780
है

376
00:26:20,480 --> 00:26:25,800
तो यह तुम्हारी सत्यार्थ प्रकाश इसमें यहां पर

377
00:26:25,800 --> 00:26:30,280
ये आपके जिनको आप मानते मेंटर हल्का फुल्का

378
00:26:30,280 --> 00:26:34,560
उनको भी समय समय पर आप दे देते हैं नहीं मानते हल्का

379
00:26:34,560 --> 00:26:39,440
फुल्का मानते हैं तो वहीं पर यह कह रहे हैं रजस

380
00:26:39,440 --> 00:26:43,600
स्ला शास्त्रों में रजस स्ला आदि स्त्रियों का स्पर्श करने

381
00:26:43,600 --> 00:26:47,640
का निषेध है अब ये विधि बता दी ग र स्त्री के लिए तो

382
00:26:47,640 --> 00:26:53,640
क्या नीच हैय क्या इसके चेतना नहीं है ये क्या करोगे

383
00:26:54,520 --> 00:26:59,040
इसका मैं देखो भाई कमिया सबके अंदर है ये भाई साब य भी क

384
00:26:59,040 --> 00:27:03,240
आप सोचिए य सनातन धर्म की रक्षा की बात करते हैं और यह भी कहते

385
00:27:03,240 --> 00:27:07,280
हैं देखो कमिया सबके अंदर भाई दयानंद में कमी है तेरे हिसाब

386
00:27:07,280 --> 00:27:11,360
से शंकराचार्य में कमी है तेरे हिसाब से राघवाचार्य में कमी

387
00:27:11,360 --> 00:27:16,080
है तेरे हिसाब से सब में कमी है रक्षा क्यों कर रहे हो

388
00:27:16,080 --> 00:27:20,760
अरे भाई अपने सनातन धर्म पर तुम्हें गर्व नहीं है क्यों रक्षा कर रहे

389
00:27:20,760 --> 00:27:25,320
हो मेरे सनातन धर्म में कोई कमी नहीं है

390
00:27:25,320 --> 00:27:28,840
वो धर्म है

391
00:27:28,840 --> 00:27:32,920
इतने दोगले लोग हो मतलब

392
00:27:32,920 --> 00:27:37,440
तुम सामने वाले से इसलिए लड़ रहे हो कि चीज तो मेरी भी गलत

393
00:27:37,440 --> 00:27:41,640
है मगर क्योंकि मैंने उसको स्वीकार किया इसलिए मैं उसकी रक्षा

394
00:27:41,640 --> 00:27:47,640
कर रहा हूं बस यह लड़ाई धर्म की नहीं तुम्हारी वर्चस्व की

395
00:27:50,320 --> 00:27:54,560
है समय समय आने पर कह दोगे सब में कमी है अरे भाई तुम

396
00:27:54,560 --> 00:27:58,720
तुम फिर रक्षा क्यों कर रहे हो क्यों मरने मरने मारने की बातें कर रहे हो फिर अपना

397
00:27:58,720 --> 00:28:02,840
लो उसका धर्म क्यों रक्षा कर रहे हो जब तुम्हारे धर्म में कमी

398
00:28:02,840 --> 00:28:06,880
है तो क्योंकि तुमने तो कोई ऐसी चीज दी नहीं ना जिसमें कमी ना हो दे दो वही

399
00:28:06,880 --> 00:28:11,720
मान ले होंडा हिंदुओं की निश्चित नियमावली दे दो हमें

400
00:28:11,720 --> 00:28:15,080
चलो नहीं दे

401
00:28:15,080 --> 00:28:19,360
पाओगे क्योंकि तुम्हें धर्म से कोई मतलब नहीं है अपने चैनलों से मतलब

402
00:28:19,360 --> 00:28:23,600
है ये हिल हिल के बातें करने से मतलब है तुम्हें अदी पवे

403
00:28:23,600 --> 00:28:25,800
के नशे

404
00:28:25,800 --> 00:28:31,800
में इसी तरह बात करते हो ना

405
00:28:32,480 --> 00:28:36,680
समय आने पर अपने धर्म पर उंगली उठा दोगे आर समाज पर उंगली उठा दोगे दयानंद

406
00:28:36,680 --> 00:28:40,840
जी पर उंगली उठा दोगे शंकराचार्य पर उंगली उठा दोगे अरे तो तुम्हारा धर्म

407
00:28:40,840 --> 00:28:45,160
आ कहां से रहा है कौन सा धर्म है तुम्हारा धर्म

408
00:28:45,160 --> 00:28:49,200
को ही प्रस्तुत करने वाले अलग-अलग चेहरे हैं ये अगर इनमें

409
00:28:49,200 --> 00:28:55,200
से सब लोग गलत है तो धर्म गलत है ना तुम्हारा

410
00:28:56,480 --> 00:29:02,480
फिर या तुम्हारा धर्म से पैसा है अर्थ

411
00:29:05,680 --> 00:29:09,680
है तो क्या क्या देखा हमने कि विधि

412
00:29:09,680 --> 00:29:13,760
निषेध बताने से यदि नीचता सिद्ध हो रही है कहां का सिद्धांत है ये कि

413
00:29:13,760 --> 00:29:17,800
अगर हमने किसी को बता दिया कि तुम यह काम नहीं करना चाहिए शास्त्रों में य चीज

414
00:29:17,800 --> 00:29:23,280
दी हुई है तो हमने उसे नीच कह दिया वो भी घृणा

415
00:29:23,280 --> 00:29:28,320
तुल्य घणा मूलक नीच

416
00:29:28,320 --> 00:29:32,440
कब कह दिया और यदि है तो यहां पर ये क्या कहा जा रहा है रजस्वला स्त्री

417
00:29:32,440 --> 00:29:36,440
का स्पर्श नहीं होना चाहिए नीच होती है क्या वो तुम्हारी माता नीच हो जाती

418
00:29:36,440 --> 00:29:41,400
है क्या जाओ पूछना बताना अपनी मां को जा कर

419
00:29:41,400 --> 00:29:45,400
के रजला की स्थिति में तुम नीच होती हो

420
00:29:45,400 --> 00:29:49,520
क्योंकि अगर स्पर्श का विधि निषेध बताया है शास्त्रों में तो उसके अनुसार फर तुम

421
00:29:49,520 --> 00:29:53,440
नीच

422
00:29:53,440 --> 00:29:57,440
हो सही कहा था मत पढ़ो चक्कर में कोई है

423
00:29:57,440 --> 00:30:02,920
नहीं टक्कर में सुनो अब

424
00:30:02,920 --> 00:30:05,200
आगे

425
00:30:05,200 --> 00:30:10,000
हम आगे क्या है

426
00:30:10,000 --> 00:30:14,080
भाई अब भाई संस्कार

427
00:30:14,080 --> 00:30:18,280
विधि में यह कहा गया है कि जिसको अपने माता पिता जिन माता-पिता

428
00:30:18,280 --> 00:30:22,360
को अपने बच्चे को मूर्ख बनाना होता है वह

429
00:30:22,360 --> 00:30:26,400
उसको जो है शूद्र शूद्र का नाम दे या जो भी है इस तरह की कुछ बात है मैं

430
00:30:26,400 --> 00:30:30,640
यहां पर बता देता हूं मूर्ख के लिए शूद्र का उपयोग

431
00:30:30,640 --> 00:30:34,680
होता है मूर्ख के लिए शूद्र का उपयोग होता है शूद्र

432
00:30:34,680 --> 00:30:39,040
कौन है जो चतुर्थ वर्ण है जिसका जनव

433
00:30:39,040 --> 00:30:43,280
नहीं होता तो मूर्ख जो है वो शूद्र है

434
00:30:43,280 --> 00:30:47,480
तो मूर्ख के चेतना नहीं होती क्या वो इंसान नहीं होता

435
00:30:47,480 --> 00:30:51,680
मनुष्य नहीं होता हो गया विधि निषेध तो नीच

436
00:30:51,680 --> 00:30:55,720
है फिर है

437
00:30:55,720 --> 00:30:59,800
हां इसीलिए कहता हूं हमारा ये जो नैरेटिव है

438
00:30:59,800 --> 00:31:05,800
ना मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में अभी लोगों के चुभने लगा है अच्छी बात है चुभना

439
00:31:05,920 --> 00:31:11,920
चाहिए आप लोगों से भी कहूंगा अभी इसका उपयोग करना शुरू करो आप

440
00:31:13,680 --> 00:31:18,120
लोग शूद्र का अर्थ ही कर दिया मूर्ख इसका मतलब

441
00:31:18,120 --> 00:31:22,320
आज दुनिया में जितने भी तुम्हारी टोपी तुम्हारे ही सर आज

442
00:31:22,320 --> 00:31:26,560
दुनिया में जितने भी सर्विस डिपार्टमेंट में काम करने वाले लोग हैं वो मूर्ख

443
00:31:26,560 --> 00:31:30,800
है बताओ अपने चैनल पर जाकर के चिल्लाओ

444
00:31:30,800 --> 00:31:34,920
मूर्ख है वो सब लोग शास्त्रों के मर्ग को तो समझना नहीं है

445
00:31:34,920 --> 00:31:40,920
ना हवाई हवाई बात करनी है

446
00:31:41,800 --> 00:31:46,120
करो हमसे कह रहे हैं कि भाई तुम्हारी मां पागल है उसके

447
00:31:46,120 --> 00:31:50,200
बुद्धि घुटनों में है उसको जो है वो नहीं है है

448
00:31:50,200 --> 00:31:54,200
ना यह हमसे कह रहे हैं तुम कह दो अपनी मां से जाकर के तु नीच

449
00:31:54,200 --> 00:31:58,200
हो जाती हो और महीने हम नहीं मानते कहां लिखा है सनातन सिद्धांत अगर

450
00:31:58,200 --> 00:32:02,240
कोई वेद नहीं पढ़ेगा तो वो नीच हो जाएगा कोई वेद नहीं पढ़ेगा तो वो जो

451
00:32:02,240 --> 00:32:06,440
है वो कहलाएगा पागल कहलाएगा कहां

452
00:32:06,440 --> 00:32:10,760
का सनातन सिद्धांत है तुम्हारा

453
00:32:10,760 --> 00:32:14,920
अपना तुम्हारा अपना सिद्धांत है सनातन सिद्धांत

454
00:32:14,920 --> 00:32:19,080
नहीं तुम्हारा कोई सिद्धांत ही नहीं है तुम तो समय आने पर वो मनुस्मृति को श्लोक

455
00:32:19,080 --> 00:32:23,480
को भी मना कर दोगे तुम्हारा मन चल गया मन चले हो तुम तो मन

456
00:32:23,480 --> 00:32:27,600
चले हो मनुस्मृति का श्लोक है या कहीं और भी धर्म की व्याख्या हो रही

457
00:32:27,600 --> 00:32:31,600
है माताओं बहनों से विवाह मत करो तो तुम उन लोगों में से हो

458
00:32:31,600 --> 00:32:35,880
य होडा हिंदू उन लोगों में से हैं जहा अगर इनका मन चल गया तो ऐसे श्लोकों

459
00:32:35,880 --> 00:32:40,240
को भी नकार देंगे हम नहीं मानते कहां से आ रहा है शंकराचार्य परंपरा हम शंकराचार्य परंपरा

460
00:32:40,240 --> 00:32:44,240
को थोड़ी ना मानते कहा से आ रहा है दयानंद जी सेमा जी थोड़ी ना कहां से आ रहा

461
00:32:44,240 --> 00:32:48,600
राघवाचार्य से मैं वैष्ण वैष्णव परंपरा से थोड़ी ना ह

462
00:32:48,600 --> 00:32:52,680
मेरा तो धर्म मेरा है मनम धर्म है मेरा मेरे पास शास्त्र नहीं है

463
00:32:52,680 --> 00:32:55,720
मन चलाऊ

464
00:32:55,720 --> 00:32:59,720
मैं और यह मन चला होना भी तुम्हारी सत्यार्थ प्रकाश

465
00:32:59,720 --> 00:33:04,320
से ही दिखा दूंगा कि मन भटकता है ठीक

466
00:33:04,320 --> 00:33:08,320
है तो हमारी मां पागल नहीं है हां आप

467
00:33:08,320 --> 00:33:12,440
जरूर बताना अपनी माता जी को कि आपके अनुसार जो सिद्धांत है उससे यही

468
00:33:12,440 --> 00:33:16,680
सिद्ध हो रहा है और आगे भी ऐसी कुछ बातें

469
00:33:16,680 --> 00:33:21,120
आएंगी तो अपने हृदय को पक्का करके चलो

470
00:33:21,120 --> 00:33:26,160
पहले भी बहुत सी बातें की है भाई साहब ने तो हमने कभी जो

471
00:33:26,160 --> 00:33:30,360
है बात नहीं की मैंने कहा कि ठीक है करने दो भाई वैसे

472
00:33:30,360 --> 00:33:34,480
भी वही वाली बात कि हम अपनी लड़ाई तब तक लड़ते रहे भाई हम लोग

473
00:33:34,480 --> 00:33:38,480
समाज के लिए निकले धर्म के लिए निकले हैं हम लोग

474
00:33:38,480 --> 00:33:42,760
इसलिए नहीं निकले कि किसी ने मुझको व्यक्तिगत आक्षेप कर दिया बस उसी का निराकरण प्रस्तुत

475
00:33:42,760 --> 00:33:47,360
करता रहू है ना इसके लिए नहीं निकले मगर

476
00:33:47,360 --> 00:33:51,440
क्योंकि लोग यहां पर दी जाने

477
00:33:51,440 --> 00:33:55,680
वाली जानकारियां प्राप्त करते हैं तो फिर अगर इन जानकारियों पर आक्षेप

478
00:33:55,680 --> 00:33:58,280
लगता है

479
00:33:58,280 --> 00:34:04,280
तो फिर कभी-कभी उसका निराकरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी दिखाई देती

480
00:34:06,600 --> 00:34:10,760
है अब आगे वही वाली बात फिर से इन्होंने क्या किया भाई प्रोपेगेंडा को

481
00:34:10,760 --> 00:34:15,440
दोहराया है शूद्र यज्ञ पवित स्त्री यज्ञ पवित वही इर्दगिर्द क्योंकि

482
00:34:15,440 --> 00:34:19,680
इन्होंने क्या किया है ना कि इसके नाम पर ही इनका जो सेक्ट है

483
00:34:19,680 --> 00:34:24,000
जिसके पक्षधर बनते हैं हालांकि उसके भी समय समय पर विरोधी बन जाते हैं

484
00:34:24,000 --> 00:34:28,280
अपनी दुकान के लिए पक्षधर किसके हैं ये अपने आप के पक्षधर

485
00:34:28,280 --> 00:34:32,440
किसके हैं इनके नियम क्या है वो जो रियल इंटेंशन बताएगा धर्म क्या है वो

486
00:34:32,440 --> 00:34:37,120
जो रियल इंटेंशन कहेगा मैं आर्यवीर दीदी की भी बात नहीं मानूंगा

487
00:34:37,120 --> 00:34:41,120
मैं कोई आ आर्यवीर समाज से नहीं हूं हा

488
00:34:41,120 --> 00:34:45,400
मैं मोहित गड़ की भी बात नहीं मानूंगा किसी दिन मैं कोई उसका वो थोड़ी ना

489
00:34:45,400 --> 00:34:50,240
मैं कौन किसकी बात मानूंगा मैं किसी के अनुग हो कर के नहीं रह सकता

490
00:34:50,240 --> 00:34:54,240
पड़ में जाए गीता का वो श्लोक जहां कहा हो कि तेरे लिए कर्तव्य

491
00:34:54,240 --> 00:34:59,720
कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है प में जाएगी भगवान श्री

492
00:34:59,720 --> 00:35:03,760
मैं तो अपने अनुग रहूंगा मेरी इंद्रिया मेरा काम मेरा विषय

493
00:35:03,760 --> 00:35:07,800
जो कहेगा मैं वो करूंगा उसके लिए जिसकी जिस पंक्ति की आड़ लेनी होगी मैं वो

494
00:35:07,800 --> 00:35:12,840
करूंगा मेरा नाम है होंडा हिंदू मैं हूं होंडा ू

495
00:35:12,840 --> 00:35:18,840
मैं हूं होंडा

496
00:35:19,720 --> 00:35:24,240
हिंदु अब इन्होंने फिर बात कही कि तुम्हारा पिछला जीवन क्या था तुम

497
00:35:24,240 --> 00:35:28,680
तुम जो है ये मानते हो जन्म है वो है ये है वो है जो

498
00:35:28,680 --> 00:35:33,280
है फिर से हमारे पिछले जीवन के कुछ जो चित्र को प्राप्त हो गए हैं

499
00:35:33,280 --> 00:35:37,360
उस पर बात कर दी अरे भाई हमने

500
00:35:37,360 --> 00:35:41,360
कभी अपने वीडियोस में इन इन बातों

501
00:35:41,360 --> 00:35:45,400
को लेकर कोई वीडियो बनाया है क्या कि दयानंद जी का पिछला जीवन कैसा

502
00:35:45,400 --> 00:35:51,120
था सन जी का पिछला जीवन कैसा

503
00:35:51,120 --> 00:35:55,760
था बनाया है भाई

504
00:35:55,760 --> 00:35:59,880
हम कभी भी उन बातों पर बात नहीं कर रहे हैं जिन

505
00:35:59,880 --> 00:36:04,160
बातों से समाज का हित ना हो ऐसी बातों

506
00:36:04,160 --> 00:36:08,360
पर बात नहीं करते हम लोग कि इसकन के मंदिरों में क्या हो रहा

507
00:36:08,360 --> 00:36:12,440
है इससे कुछ नहीं बदल जाएगा केवल

508
00:36:12,440 --> 00:36:18,200
सिद्धांतों की बात कर रहे हैं मेरे भाई समझ क्यों नहीं रहे हो अकाट्य

509
00:36:18,200 --> 00:36:22,240
सिद्धांत अगर ईश्वर अनंत सामर्थ वान है तो फिर

510
00:36:22,240 --> 00:36:26,480
उसमें बाधा क्यों है अवतार लेने में यही

511
00:36:26,480 --> 00:36:30,520
बातें हैं जो हमें धर्मिंदर जिता सकती है इसको क्यों

512
00:36:30,520 --> 00:36:36,520
नहीं भेद में डाल पा रहे

513
00:36:38,000 --> 00:36:42,000
हो फर हमने गलती कर दी भा

514
00:36:42,000 --> 00:36:46,080
अकाट्य सिद्धांतों के प्रचार प्रसार में निकल गए हमने कहा कि हम शंकराचार्य का

515
00:36:46,080 --> 00:36:50,840
ही वो करेंगे हमने कितनी बार कहा हमारे वीडियोस में आप

516
00:36:50,840 --> 00:36:54,840
अपने क्या कहते हैं हमें केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर परम

517
00:36:54,840 --> 00:36:58,920
स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे दो हमने तो नहीं कहा कि दयानंद जी का बैकग्राउंड

518
00:36:58,920 --> 00:37:03,680
कैसा था श्रद्धानंद जी का बैकग्राउंड कैसा था हमने कहा क्याय सब बातें

519
00:37:03,680 --> 00:37:09,680
जो लोग कहते हैं जोय नीचता करते

520
00:37:13,080 --> 00:37:18,160
हैं हा चिन्म स्वामी जी दास दास जी के

521
00:37:18,160 --> 00:37:22,160
लिए हमें खेद है इस बात का वहां पर जो हो रहा है

522
00:37:22,160 --> 00:37:26,520
और इस बात का भी खेद है कि स्कोन ने जो है अपने हाथ खींच लिए अनऑफिशियल

523
00:37:26,520 --> 00:37:31,160
कर दिया उने व बहुत सारी एक्टिविटीज में काम करते हुए दिखाई देते

524
00:37:31,160 --> 00:37:36,920
थे और इस बारे में हम बात कर चुके पहले

525
00:37:36,920 --> 00:37:40,600
र

526
00:37:40,600 --> 00:37:44,680
तो अभी कुछ दिनों पूर्व यह जो फैक्ट बाई अभिषेक

527
00:37:44,680 --> 00:37:48,720
है रामपाल का फॉलोअर उसने कितनी घृणित तरीके से बात की दयानंद जी

528
00:37:48,720 --> 00:37:52,960
के लिए हम तो वीडियो बना चुके हैं कि दयानंद जी के बारे में अपशब्द ना बोला

529
00:37:52,960 --> 00:37:57,520
करें मगर उसने जब ग्रहण तरीके से बात की हमने कभी भी

530
00:37:57,520 --> 00:38:01,600
इन चीजों का मिसयूज करने की कोशिश नहीं की आर्य समाज पर आक्षेप लगाओ

531
00:38:01,600 --> 00:38:05,680
वो ऐसे थे वो वैसे थे वो यह करते थे वो ये करते थे इन पर्सनल अटैक

532
00:38:05,680 --> 00:38:09,840
से आप केवल वो बैट बॉल खेलते रहो टेनिस की तरह इनसे समाज

533
00:38:09,840 --> 00:38:13,960
का कोई हित नहीं होना है कि शिवांश नारायण द्विवेदी पहले ऐसा था

534
00:38:13,960 --> 00:38:18,120
देखो देखो अय पाखंड है य वो है अरे भाई शिवास नारायण

535
00:38:18,120 --> 00:38:22,360
द्विवेदी के पिछले जीवन से क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध

536
00:38:22,360 --> 00:38:26,680
हो जा रहा है क्या वो क्यों नहीं सिद्ध कर रहे हो क्या तुम्हारा अशा स्त्रीय

537
00:38:26,680 --> 00:38:30,800
जने का जो जिसके ऊपर हमने प्रश्न किया था व शास्त्रीय सिद्ध हो जा रहा है क्या

538
00:38:30,800 --> 00:38:35,280
वो क्यों नहीं शास्त्रीय सिद्ध कर रहे

539
00:38:35,280 --> 00:38:39,440
हो क्या तुम्हारे वेद मंत्रों की व्याख्या मिल गई क्या कैसे आ तुम्हारे

540
00:38:39,440 --> 00:38:43,640
वो क्यों नहीं दे रहे हो जो प्रश्न तुमसे मूल पूछे गए हैं उनकी बात

541
00:38:43,640 --> 00:38:47,960
ना करके तुम जब यह पर्सनल चीजों पर आते हो तो इसका अर्थ क्या है

542
00:38:47,960 --> 00:38:52,040
तुम्हारे पास उनका उत्तर नहीं है

543
00:38:52,040 --> 00:38:56,240
नहीं बात करोगे कभी सर्वशक्तिमान पर आए थे तुम माउंट आबू वालो

544
00:38:56,240 --> 00:39:00,480
से वाले अभी बात करूंगा आएगा क्रम में है

545
00:39:00,480 --> 00:39:03,120
फिर क्या है

546
00:39:03,120 --> 00:39:07,120
भाई बीच बीच में कहेंगे आदि गुरु शंकराचार्य को बदनाम कर रहे आदि गुरु

547
00:39:07,120 --> 00:39:11,400
शंकराचार्य को बदनाम कर रहे हो अरे कौन है आदि गुरु शंकराचार्य

548
00:39:11,400 --> 00:39:15,520
हवा है क्या कुछ मालूम है ना उनके

549
00:39:15,520 --> 00:39:19,680
बारे में गीता का भाष्य किया उपनिषद का भाष्य किया अद्व

550
00:39:19,680 --> 00:39:23,720
दर्शन की स्थापना की यह सब है ना उनके बारे में जानते हो ना

551
00:39:23,720 --> 00:39:28,320
कैसे पता सपना आया था क्या दिमाग

552
00:39:28,320 --> 00:39:32,320
खराब है वो हिलना हिलने की आदत

553
00:39:32,320 --> 00:39:35,200
जो पड़ गई है

554
00:39:35,200 --> 00:39:41,200
ना उसी कारण दिमाग खराब है अरे

555
00:39:41,640 --> 00:39:45,720
भाई जो आदि शंकराचार्य जी

556
00:39:45,720 --> 00:39:49,720
हैं उनके बारे में जो जानकारियां आपको हैं जिसके कारण आप उनकी

557
00:39:49,720 --> 00:39:50,360
जय करते

558
00:39:50,360 --> 00:39:54,600
हो वो जानकारियां कैसे आई आप तक उनके शास्त्रों के माध्यम

559
00:39:54,600 --> 00:39:59,040
से ना वो शास्त्र आपको किसने दि हाथ में

560
00:39:59,040 --> 00:40:03,360
वो भी कह दो आर समाज से लिए हैं शंकराचार्य की चीजें भी शंकराचार्य

561
00:40:03,360 --> 00:40:08,200
वालों से नहीं आई है वो भी आर समाज से आई है

562
00:40:08,200 --> 00:40:12,720
यही है ना फिर जय शंकराचार्य शंकराचार्य

563
00:40:12,720 --> 00:40:16,800
फिर लिख रहे हैं 13 अध्याय के दूसरे शलोक जाने कितनी बार परंपरा की बात कर रहे

564
00:40:16,800 --> 00:40:20,960
तुम्हारी परंपरा मैं गुरु को नहीं मानता निरुक्त में कह दिया निरुक्त कहां

565
00:40:20,960 --> 00:40:25,200
से आया तुम्हारे पास अरे भाई

566
00:40:25,200 --> 00:40:29,200
अगर आपत्ति काल में जो है जब गुरु नहीं होता है तो तर्क

567
00:40:29,200 --> 00:40:33,280
ही हमारा गुरु होता है य उस समय के लिए है फिर वहां पर आप वेद मंत्रों का भी सहारा

568
00:40:33,280 --> 00:40:38,040
मत लो ना वेद मंत्र लेने के लिए तो गुरु ले लिए ना आपने

569
00:40:38,040 --> 00:40:43,280
केवल तर्क पर खड़े रहो यह है

570
00:40:43,280 --> 00:40:47,280
तर्क फिर वहां बदतमीज

571
00:40:47,280 --> 00:40:51,680
कर रहे हो गाल प पप्पी ये वो

572
00:40:51,680 --> 00:40:55,920
गाल में पप्पी वाली तुमने फोटो डाल रखी है और ये

573
00:40:55,920 --> 00:41:00,280
तुम जो है भूतकाल में थे तो फिर ये ऐसे कैसे हो गए ब्राह्मण अरे तुमने

574
00:41:00,280 --> 00:41:05,120
हमारी परंपरा जो प्राप्त चीजें हैं ये सब जान लिया करके प्रात

575
00:41:05,120 --> 00:41:05,620
दोष

576
00:41:05,440 --> 00:41:09,640
किसे कहते हैं देर से जने होने पर क्या होता है क्या नहीं होता है बस

577
00:41:09,640 --> 00:41:13,840
लगे वही प्रोपेगेंडा फैलाने में और अगर कहीं से तुमको

578
00:41:13,840 --> 00:41:18,320
वह पिक्चर प्राप्त हो भी गई है तो

579
00:41:18,320 --> 00:41:22,640
वह पिक्चर क्या इसलिए है कि उसको उसको लेकर के लोग वहां तर्क

580
00:41:22,640 --> 00:41:26,680
वितर्क करें कि इस पर क्या होना चाहिए क्या मतलब उसका मिसयूज करें

581
00:41:26,680 --> 00:41:30,920
ये हमने ला था अच्छा अगर

582
00:41:30,920 --> 00:41:35,200
तुम्हारे फैमिली की किसी मातृ शक्ति की या किसी की फोटो अगर मिल जाती

583
00:41:35,200 --> 00:41:39,200
है तो हम तर्क वितर्क ना करके उसको एडिट करें कोई हो

584
00:41:39,200 --> 00:41:43,480
हम नहीं करे कोई और करे तो फिर वो तो ऑफेंस नहीं होना चाहिए क्योंकि उसने क्योंकि फसबुक

585
00:41:43,480 --> 00:41:49,480
पर डाली है तो अब उसकी फोटो के साथ कुछ भी किया जा सकता है

586
00:41:49,520 --> 00:41:53,800
चलेगा नहीं किया जा सकता है ना मेरे भाई बात यह

587
00:41:53,800 --> 00:41:57,960
है किस उद्देश्य से किस परिपेक्ष में कहां पर क्या चीज डाली

588
00:41:57,960 --> 00:42:02,600
गई है यह आपको देखना सोचना समझना पड़ेगा ना

589
00:42:02,600 --> 00:42:06,720
वरना तुम ये इजाजत दो कि तुम्हारे रिलेटिव में कहीं पर किसी

590
00:42:06,720 --> 00:42:10,880
मातृशक्ति की कहीं से किसी को फोटो अगर मिल जाए तो वह उसको एडिट

591
00:42:10,880 --> 00:42:15,200
करके कुछ भी बनाए उसका नहीं दे

592
00:42:15,200 --> 00:42:20,960
पाओगे तो अपने ही सिद्धांतों का खनन क्यों कर रहे हो

593
00:42:20,960 --> 00:42:21,960
क्योंकि

594
00:42:21,960 --> 00:42:26,040
अधि पवे का नशा है इसीलिए

595
00:42:26,040 --> 00:42:30,720
कर रहे हो हिले बिना बात नहीं कर पाते ना

596
00:42:30,720 --> 00:42:35,160
अच्छा इसमें एक चीज और कह सकते हो तुम इसमें एक चीज ये कह सकते हो

597
00:42:35,160 --> 00:42:39,440
उंडा हिंदू क्या कह सकते हो कि भई तुमने भी तो बात की

598
00:42:39,440 --> 00:42:43,560
किसी कन्या के वो जने के हमने जने के बारे में बात की उसके पर्सनल

599
00:42:43,560 --> 00:42:47,680
जीवन के बारे में नहीं जो चीज धर्म में आ गई धार्मिक चीजों के रूप

600
00:42:47,680 --> 00:42:52,080
में जब प्रस्तुत कर रहे हो किसी को और धार्मिक सवाल किया हमने निर्णय भी नहीं दिया

601
00:42:52,080 --> 00:42:56,200
यह गलत ही है हमने कहा क्या यह शास्त्रों में लिखा है कपन

602
00:42:56,200 --> 00:43:00,280
मेखला लिखा है यह नहीं लिखा है तो

603
00:43:00,280 --> 00:43:05,880
लिखा दिखाओ कभी नहीं दिखा

604
00:43:05,880 --> 00:43:09,960
पाओगे और अगर कर भी दी चलो दुर्जन तोष न्याय से कर भी दी तो

605
00:43:09,960 --> 00:43:14,160
अब जिस व्यक्ति ने सवाल किया है उसकी दुनिया में जो भी कोई जुड़ा

606
00:43:14,160 --> 00:43:18,280
हुआ होगा उससे रिलेटेड रिलेटेड तुम्हे जो भी चीजें मिल जाए उनका यूज

607
00:43:18,280 --> 00:43:23,520
करोगे और फिर कहोगे यह रियल इंटेंशन वाले हैं

608
00:43:23,520 --> 00:43:27,760
हम अगर कर भी दिया है मैंने तो मुझसे जुड़े हुए जितने भी दुनिया

609
00:43:27,760 --> 00:43:32,000
में जीव होंगे उन्होंने तुमसे सवाल कर लिया कि वेद मंत्र कहां से आए तुमसे सवाल

610
00:43:32,000 --> 00:43:36,040
कर लिया ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं तो तुम अब मेरे से

611
00:43:36,040 --> 00:43:40,160
रिलेटेड जितने भी लोग होंगे उन सबको खींच लाओगे इसमें यही सनातन

612
00:43:40,160 --> 00:43:44,360
सिद्धांत है यही तुम्हारा वो है सत्यवादी सत्यवादी

613
00:43:44,360 --> 00:43:48,920
नहीं हो डोले हो धर्म हीन धर्म हीन कौन होता है मालूम है

614
00:43:48,920 --> 00:43:53,080
शास्त्र में लिखा है हां जिसको सामने

615
00:43:53,080 --> 00:43:57,160
खड़ी हुई हम वो होता है ठीक है और

616
00:43:57,160 --> 00:44:01,200
चलते हैं तभी कुछ ऐसी चीजें आने वाली जो बिल्कुल ही

617
00:44:01,200 --> 00:44:05,480
अन एक्सपेक्टेड होंगी जो लोग देख रहे हैं वो छोड़े ना

618
00:44:05,480 --> 00:44:09,640
तो भाई इसके बाद भी अगर हमारा जीवन कन्वर्ट हुआ है तो क्या कभी हमने

619
00:44:09,640 --> 00:44:13,840
ये कहा है कि हम भैया बहुत मतलब हम जो है ब्राह्मण श्रेष्ठ ब्राह्मण

620
00:44:13,840 --> 00:44:18,560
ये है वो है हमने य कहा है क्या हम सदैव कहते हैं

621
00:44:18,560 --> 00:44:21,080
शंकराचार्य के अल्पज्ञ

622
00:44:21,080 --> 00:44:25,080
शिष्य श्री राम के साधारण भक्त कोई अगर हमें आकर

623
00:44:25,080 --> 00:44:29,200
गुरु कहने लगता है आचार्य कहने लगता है उसको मना कर देते हैं

624
00:44:29,200 --> 00:44:33,200
क्या मैं गुरु मत कहो मैं आचार्य मत कहो इससे पता नहीं

625
00:44:33,200 --> 00:44:37,360
चलता कि हमय खुद कहते हैं कि हम जो है वो ब्राह्मण नहीं है जो ब्राह्मण श्रेष्ठतम

626
00:44:37,360 --> 00:44:41,400
माना जाए हमने तो नहीं कहा कि हम जो यज्ञ कराने के लिए उपयुक्त है

627
00:44:41,400 --> 00:44:45,560
या फिर फलाने फलाने जितने भी वेदोक्त कर्म होते उनके लिए उपयुक्त हमने कहा

628
00:44:45,560 --> 00:44:50,000
है क्या कहीं दिखाओ कहां पर कहा है

629
00:44:50,000 --> 00:44:54,240
यथा सामर्थ प्रयास कर रहे हैं शास्त्रों को जानने के बाद शास्त्रों

630
00:44:54,240 --> 00:44:59,520
के अनुसार चलने का यथा सामर्थ

631
00:44:59,520 --> 00:45:03,640
क्योंकि धर्म को पालन ना करना ना कर पाने में आपकी

632
00:45:03,640 --> 00:45:07,680
व्यवस्था होनी चाहिए चयन नहीं तुम्हारा चयन

633
00:45:07,680 --> 00:45:12,080
है तुम्हारा चयन है धर्म का पालन ना कर पाना

634
00:45:12,080 --> 00:45:16,280
और अगर हमसे कहीं पर हो रही है तो व व्यवस्था है ज ज्ञान नहीं है तो

635
00:45:16,280 --> 00:45:20,280
व्यक्ति ने किया तुम तो जानबूझ के कर रहे हो हमने यही

636
00:45:20,280 --> 00:45:24,400
सवाल किया ना जो जने कर रहे हो गलत विधि से तुमको विधि बताने वाला नहीं

637
00:45:24,400 --> 00:45:28,640
है क्या पता है तुम्हें होता है कि नहीं होता

638
00:45:28,640 --> 00:45:34,080
है चलो खैर आगे चलते

639
00:45:34,080 --> 00:45:38,080
हैं अब इन्होंने इनका कहना है कि भाई

640
00:45:38,080 --> 00:45:42,160
तुमने अपनी घर की वो फोटो डाली क्यों हमने बात की वो तो बाद की बात है

641
00:45:42,160 --> 00:45:46,720
ये वो है सैकड़ों ने डाली है अब वो वाली समष्टि वाली बात आ जाती है

642
00:45:46,720 --> 00:45:51,120
जो मैं कह रहा था ना कि लड़ाई मेरी अपनी अकेले की है तो दुनिया

643
00:45:51,120 --> 00:45:55,600
में पता नहीं कितने ठीक ठाक घर होंगे जो संभ्रांत होंगे

644
00:45:55,600 --> 00:45:59,680
जिनकी गरिमा होगी और उन्होने अपनी पिक्चर्स फेसबुक

645
00:45:59,680 --> 00:46:04,640
पर सोशल मीडिया पर डाली होग और हमने भी आज से पहले

646
00:46:04,640 --> 00:46:08,760
कुछ छ सात साल पहले कुछ डाली ठीक है

647
00:46:08,760 --> 00:46:12,800
अब भाई वो जो छ सात साल पहले की फोटो है

648
00:46:12,800 --> 00:46:16,880
डाली नहीं थी इसको भी लोग कट करके निकाल लेंगे डाली बाद में है फोटो

649
00:46:16,880 --> 00:46:20,880
छ सात साल पहले की है मगर अगर डाली भी है

650
00:46:20,880 --> 00:46:25,000
तो इस तरह से एक सामान्य लोग जो है आजकल जो जिस तरह से उनके ऊपर वातावरण

651
00:46:25,000 --> 00:46:29,240
का वो है प्रभाव तो ना जाने कितने लोग डाल रहे हैं तो इन्होंने उनकी फोटो

652
00:46:29,240 --> 00:46:34,120
उठा कर के प्रश्न क्यों नहीं किया हमारी फोटो उठा कर के प्रश्न क्यों किया

653
00:46:34,120 --> 00:46:38,280
क्यों किया क्योंकि मैं चला गया था इनके मंदिर हां मैंने

654
00:46:38,280 --> 00:46:42,440
पूछ लिया था क्या तुम्हारा ईश्वर ईश्वर है कि ईश्वर के नाम पर ईश्वरा भास

655
00:46:42,440 --> 00:46:46,640
है ये है दिक्कत क्या तुम्हारा धर्म धर्म है धर्म के नाम पर धर्मा आभास

656
00:46:46,640 --> 00:46:49,080
है ये है दिक्कत क्या तुम्हारी मुक्ति

657
00:46:49,080 --> 00:46:53,680
मुक्ति है मुक्ति के नाम पर मुक्ति का आभास है ये है दिक्कत

658
00:46:53,680 --> 00:46:57,800
ये परेशानी है आवान से ये परेशानी है शिवांश से

659
00:46:57,800 --> 00:47:02,040
और फिर इसको शिवांस की पर्सनल लड़ाई बना दो भाई अरे

660
00:47:02,040 --> 00:47:06,320
भाई तुम जवाब क्यों नहीं देते तुम्हारा ईश्वर अनंत सामर्थ वान है कि नहीं

661
00:47:06,320 --> 00:47:09,840
दे दो ना बंद कर दूंगा

662
00:47:09,840 --> 00:47:14,160
चैनल यह बात नहीं करोगे दूसरी बातें

663
00:47:14,160 --> 00:47:18,400
करोगे यह बात नहीं करोगे दे दो तीनों

664
00:47:18,400 --> 00:47:22,920
तुरंत आ समाज का प्रचारक हो जाऊंगा ईश्वर सर्वशक्तिमान परम

665
00:47:22,920 --> 00:47:27,160
स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म तीन चीज दे दो तुरंत आ समाज का

666
00:47:27,160 --> 00:47:31,320
हो जाऊंगा जितने जैसे लोगों कहोगे वही लगा दूंगा तुम्हारे साथ बैठ कर के मैं भी उंडा

667
00:47:31,320 --> 00:47:35,360
हिंदुओ की तरह जिस तरह तुम कहोगे वैसे ही स्ट्रीम करने लगूंगा हालांकि तुम आर

668
00:47:35,360 --> 00:47:41,360
समाजी नहीं हो तो तुम कहोगे हुंडा हिंदू बनो आर समाजी मत बनो ये भी एक दिक्कत

669
00:47:46,560 --> 00:47:50,600
है प्रॉब्लम बस यही थी कि हमने तुम्हारे वो तास के पत्तों

670
00:47:50,600 --> 00:47:54,680
का जो महल तुमने खड़ा किया है ना अपना कपोल कल्पित उनको छू दिया

671
00:47:54,680 --> 00:47:58,800
था इसलिए तुमने हमारे जो बारे

672
00:47:58,800 --> 00:48:03,200
में जो ये सब बातें खोद के निकाली तुम्हारी वह बातें जो सार्वजनिक

673
00:48:03,200 --> 00:48:07,520
है हमने उनका उपयोग नहीं किया क्योंकि हमारा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है

674
00:48:07,520 --> 00:48:11,560
अकाट्य सिद्धांतों को सामने लाना है अकाट्य

675
00:48:11,560 --> 00:48:17,560
जिसको काटा ना जा सके

676
00:48:27,320 --> 00:48:31,480
दोगलापन कि शूद्र को हमने नीचा कहा स्त्रियों को हमने नीचा

677
00:48:31,480 --> 00:48:35,480
कहा पहली बात शास्त्रों में भी यदि कहीं नीच वर्ड आया है नीचा वर्ड आया निम्न

678
00:48:35,480 --> 00:48:40,120
वर्ड आया है तो वह घृणा मूलक नहीं है व्यवस्था मूलक

679
00:48:40,120 --> 00:48:44,320
है अगर मैं जिस भवन में रह रहा हूं मेरा घर सबसे नीचे

680
00:48:44,320 --> 00:48:48,400
के फ्लोर पर है तो उससे ऊपर रहने वाले के लिए मैं नीचे हूं मैं

681
00:48:48,400 --> 00:48:52,480
नीच हूं वहां पर मगर यदि इसको गणा मूलक के रूप में पेश

682
00:48:52,480 --> 00:48:57,480
किया जाएगा तो यह बेवकूफी है यह व्यवस्था मूलक शब्द है

683
00:48:57,480 --> 00:49:01,640
मगर ऐसे शब्द जिनके दो अर्थ निकाले जा सकते हैं उसमें से जो दूसरा

684
00:49:01,640 --> 00:49:06,320
जिससे कि अपना कार्य सिद्ध हो सके अपनी नकारात्मकता फैला सके

685
00:49:06,320 --> 00:49:11,520
उनका उपयोग करके ऐसे लोग जो है टई करते हैं

686
00:49:11,520 --> 00:49:15,840
इसको कहते टई जैसे व जाकिर नायक करता था

687
00:49:15,840 --> 00:49:20,000
मास का अर्थ गुदा भी है मास का अर्थ मास भी है तो कहीं अगर

688
00:49:20,000 --> 00:49:26,000
गुदे का ण आ गया तो मास हो गया

689
00:49:29,360 --> 00:49:34,680
यह है इनके इनका होंडा हिंदुओं का

690
00:49:34,680 --> 00:49:38,760
धर्म आ जाओ ना एक वीडियो कहीं दिखा दो

691
00:49:38,760 --> 00:49:42,880
मुझे कहते हुए कि स्त्रियां नीच है उन्हें अधिकार नहीं है

692
00:49:42,880 --> 00:49:47,120
सदैव सम्मान से बोला है कि कैसे कैसे किसकिस कारण से क्या क्या है

693
00:49:47,120 --> 00:49:51,120
कहीं नहीं मैंने नीचता की बात की मगर क्योंकि इनकी दुकान ही

694
00:49:51,120 --> 00:49:55,360
चलेगी हम जैसों के विरुद्ध नफरत फैलाने से भाई

695
00:49:55,360 --> 00:50:00,080
अकाट्य सिद्धांत आ जाए तो बहुत सारे चैनल्स की क्या जरूरत रह जाएगी

696
00:50:00,080 --> 00:50:04,880
जब बच्चा बच्चा जानने लगेगा ईश्वर सर्वशक्तिमान है

697
00:50:04,880 --> 00:50:09,000
तो दुकानों को कम होना पड़ेगा ना जिनकी दुकाने चल रही है उनको तो दिक्कत होगी

698
00:50:09,000 --> 00:50:13,120
उससे हमारी तो जिंदगी इसी पर निर्भर है जीवन इसी पर निर्भर है

699
00:50:13,120 --> 00:50:17,440
धर्म भाड़ में जाए गीता भाड़ में जाए परंपरा भाड़ में जाए वेद भाड़

700
00:50:17,440 --> 00:50:23,440
में जाए यह है होंडा हिंदुओं की

701
00:50:23,440 --> 00:50:27,600
सच्चाई इन्होंने वहां पर एक जगह पर फिर व हमसे जुड़ी

702
00:50:27,600 --> 00:50:31,720
हुई मात शक्ति है उसके फिर ऐसे क्या

703
00:50:31,720 --> 00:50:35,840
कहते हैं ऐसे अंगों का भी नाम लिया है जि जो कि

704
00:50:35,840 --> 00:50:39,880
काफी आपत्ति जनक है यह इनके घर के संस्कार है

705
00:50:39,880 --> 00:50:43,960
और फिर अपने आप को ब्राह्मण कहते हैं जबकि इनके दयानंद जी के अनुसार ब्राह्मण

706
00:50:43,960 --> 00:50:47,960
तो व है जो सत्कर्म से युक्त हो और तुम वहां पर जो है

707
00:50:47,960 --> 00:50:52,000
ऐसे स्त्री के उन अंग उन अंगों की बात कर रहे हो खुल्लम खुल्ला तुम्हे

708
00:50:52,000 --> 00:50:57,480
कोई हिचक नहीं है

709
00:50:57,480 --> 00:51:01,560
बोलने में शर्म नहीं आई तुम्हे चलो

710
00:51:01,560 --> 00:51:07,360
खैर अभी पूरी होते होते कानों में खून निकल

711
00:51:07,360 --> 00:51:13,360
आएगा देखो तो क्या

712
00:51:13,640 --> 00:51:17,800
हुआ तो भाई यह क्यों हो रहा है हमसे

713
00:51:17,800 --> 00:51:21,840
जुड़ी हुई दूर दराज का भी कोई व्यक्ति है जिसकी सामग्री इनको अगर प्राप्त

714
00:51:21,840 --> 00:51:25,960
हो रही है उसके ऊपर य आपत्ति जनक टिप्पणियां क्यों कर रहे

715
00:51:25,960 --> 00:51:28,440
हैं

716
00:51:28,440 --> 00:51:32,840
क्यों कर रहे हैं क्योंकि मैंने पूछ लिया इनसे

717
00:51:32,840 --> 00:51:37,560
कि क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं

718
00:51:37,560 --> 00:51:41,720
मैंने यह पूछ लिया इसलिए इनको दिक्कत है क्यों पूछा

719
00:51:41,720 --> 00:51:45,760
भाई बट रहा है हिंदू बटने दो मिट रहा

720
00:51:45,760 --> 00:51:49,920
है हिंदू मिटने दो यह सब मत पूछो

721
00:51:49,920 --> 00:51:53,920
केवल अंदी में लड़े रहो धर्म में हमारे भी कमी है हां बहुत कमी है हमारे धर्म

722
00:51:53,920 --> 00:51:58,360
में मेरे सनातन धर्म में कोई कमी नहीं है

723
00:51:58,360 --> 00:52:02,400
वो है सनातन धर्म सीना ठोक के कह रहा हूं बोलो ऐसे सीना

724
00:52:02,400 --> 00:52:07,000
ठोक के जो भी तुम्हारे शास्त्र है उनमें कोई कमी नहीं है नहीं बोलते हो

725
00:52:07,000 --> 00:52:11,000
समय आने पर उन्ही को मना कर देते हो क्या है तुम्हारा धर्म दोगलो

726
00:52:11,000 --> 00:52:15,280
होंडा

727
00:52:15,280 --> 00:52:19,400
हिंदुओ सबसे बड़ी तकलीफ है यह

728
00:52:19,400 --> 00:52:23,000
सनातन समाज के

729
00:52:23,000 --> 00:52:27,320
लिए अरे भाई स्त्रियों का यज्ञ पवित पर अगर प्रश्न

730
00:52:27,320 --> 00:52:31,680
पूछ लिया तो ये अपमान कैसे हो गया तिरस्कार कैसे हो गया

731
00:52:31,680 --> 00:52:35,840
बता दो यह है इस इस तरीके से हो गया

732
00:52:35,840 --> 00:52:40,240
प्रश्न ही तो पूछा है वो भी उससे पूछा है जो नेता बनता है

733
00:52:40,240 --> 00:52:45,040
मंचों पर जा जा करके शंकराचार्य का की बुराई करता

734
00:52:45,040 --> 00:52:49,320
है उससे पूछा है उन आचार्यों

735
00:52:49,320 --> 00:52:53,400
की बुराई करता है जो आचार्य आपको वेद मंत्र पहुंचाते हैं जिनके

736
00:52:53,400 --> 00:52:59,400
आधार परने हम वैदिक है सनातनी है

737
00:53:08,920 --> 00:53:13,760
अब यह बताओ कि तुमने अगर यह मान लिया कि भाई

738
00:53:13,760 --> 00:53:18,080
इसका जने नहीं होगा इसका ऐसा है शास्त्रों ने अगर यह कह दिया है शास्त्रों

739
00:53:18,080 --> 00:53:22,320
का ऐसा अर्थ हम प्रचारित प्रसारित कर रहे तो इसका मतलब है कि वो जो है

740
00:53:22,320 --> 00:53:26,640
क्या कहते हैं वो नीच है हीन है तो तुम

741
00:53:26,640 --> 00:53:31,160
तुम जिन जिन शास्त्रों को आंशिक रूप से स्वीकार कर रहे हो उसम जोय सब बातें है

742
00:53:31,160 --> 00:53:35,200
उसमें जोय सब बातें हो रही है रजत स्ला छूने लायक नहीं होती है जो चमार

743
00:53:35,200 --> 00:53:39,240
होती है जो चमारिन होती है क्या लिखा है उसके बारे में यह

744
00:53:39,240 --> 00:53:43,800
मैं पढ़ के बता देता हूं चमारन के साथ जो है

745
00:53:43,800 --> 00:53:48,720
कुछ बात कही गई है हा यह लिखा हुआ है

746
00:53:48,720 --> 00:53:53,520
जिन नीच स्त्रियों को छूना नहीं मना है छूना भी मना है

747
00:53:53,520 --> 00:53:58,360
उनको भी कइ कर रहे किसी को कोई ऐसा सेक्ट

748
00:53:58,360 --> 00:54:02,760
है सेम का कोई ऐसा सेक्ट है जो कि

749
00:54:02,760 --> 00:54:06,880
इनके हिसाब से जिन नीच स्त्रियों को छूना मना है

750
00:54:06,880 --> 00:54:11,360
छूना भी नहीं है नीच स्त्रिया क्यों उनकी चेतना नहीं होती

751
00:54:11,360 --> 00:54:15,880
क्यों भाई रियल इंटेंशन अदी

752
00:54:15,880 --> 00:54:19,880
पवा इनके चेतना नहीं होती सब समान है तो क्यों कर रहे य

753
00:54:19,880 --> 00:54:24,360
भेद भेद का नाम ही संसार

754
00:54:24,360 --> 00:54:28,400
है पार मार्क रू भेद नहीं है व्यवहारिक रूप

755
00:54:28,400 --> 00:54:32,520
से भेद का निर्वाह करके पार मार् रूप के अभेद की प्राप्ति करना

756
00:54:32,520 --> 00:54:36,520
ही जीवन का उद्देश्य है यह सब नहीं सोचना नहीं पढ़ना नहीं जानना

757
00:54:36,520 --> 00:54:40,800
है दुकान चलानी है रियल इंटेंशन मत पढ़ो इसीलिए

758
00:54:40,800 --> 00:54:44,800
कहा है मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

759
00:54:44,800 --> 00:54:48,520
अभी बाकी है चलते

760
00:54:48,520 --> 00:54:52,640
रहो तो क्या लिखा है यहां पर इन्होने

761
00:54:52,640 --> 00:54:57,400
कि समागम में काशी की यात्रा चमारी

762
00:54:57,400 --> 00:55:01,760
से स समागम यह देखिए चमारी से

763
00:55:01,760 --> 00:55:05,760
समागम करने को मानो ये लोग प्रयाग स्नान मानते हैं

764
00:55:05,760 --> 00:55:09,880
यानी चमारी से समागम मानना जो है वो

765
00:55:09,880 --> 00:55:14,280
प्रयाग स्नान नहीं मानना चाहिए नीच चमारी यह लिख

766
00:55:14,280 --> 00:55:18,480
ये सत्या प्रकाश में लिखा देख लो चमारी

767
00:55:18,480 --> 00:55:22,840
से समागम को देख लो भैया दिख

768
00:55:22,840 --> 00:55:27,480
रहा है मैं नहीं बोल रहा हूं ये तुम्हारे बोल रहे है

769
00:55:27,480 --> 00:55:31,480
बस बात वही है कि जितना इन्होंने मान लिया तो वो वो विधि निषे विधि निषेध

770
00:55:31,480 --> 00:55:35,560
है और दूसरा जब विधि निषेध बताएगा जो कि इनकी सीमा के बाहर

771
00:55:35,560 --> 00:55:39,480
होगा तो वो जो है वो चेतना नहीं है व जो है वो अपमान है स्त्रियों

772
00:55:39,480 --> 00:55:42,880
का व जो है शूद्रों का अपमान

773
00:55:42,880 --> 00:55:47,120
है अभी तर्क की बात भी करेंगे बहुत

774
00:55:47,120 --> 00:55:51,160
बहुत सारी बातें अभी आगे शंकराचार्य

775
00:55:51,160 --> 00:55:55,320
जी के पीछे चिपकर जो है बातें करते हैं फिर वही बात

776
00:55:55,320 --> 00:55:59,480
अरे भाई शकर चार्य जी तो कह रहे व शंकराचार्य जी है

777
00:55:59,480 --> 00:56:03,560
क्या शंकराचार्य जी के शास्त्र है जिससे कि जाना जाता है

778
00:56:03,560 --> 00:56:07,680
ये लिखने वाले शंकराचार्य जी है उनके शास्त्र जो बोल रहे हैं वो बोले कि ना

779
00:56:07,680 --> 00:56:11,680
बोले शंकराचार्य जी के नाम से कोई तर्क पूर्ण बात की है तुमने

780
00:56:11,680 --> 00:56:15,800
अपने वीडियो में जब

781
00:56:15,800 --> 00:56:20,080
आमने सामने बात करने के लिए आया तो तुमने कहा कि इधर आओ उधर आओ अपने चैनल

782
00:56:20,080 --> 00:56:24,960
पर भी नहीं आओगे इतना डर है कि तुम्हारी वो जो

783
00:56:24,960 --> 00:56:29,560
वो वाली पहचान नहीं है सबकी जय जय करता हूं वो कहीं खराब ना हो

784
00:56:29,560 --> 00:56:33,600
जाए उसको चोट ना पहुंच जाए जब तक

785
00:56:33,600 --> 00:56:37,960
दूर हो तभी तक इस तरह से सुरक्षा में हो यह

786
00:56:37,960 --> 00:56:42,480
बिल्कुल बोलती बंद हो जाएगी बोलती बंद सच्चाई है ये

787
00:56:42,480 --> 00:56:48,480
तुम जैसे लोगों की बोलती बंद हो

788
00:56:51,400 --> 00:56:55,480
जाएगी आर्कियोलॉजिकल प्रमाण है

789
00:56:55,480 --> 00:56:59,560
भाई पहली बात तो आर्कियोलॉजिकल प्रमाण है प्रतिमा के रूप में

790
00:56:59,560 --> 00:57:03,760
वो प्रतिमा तो शास्त्र विरुद्ध है तुम्हारे हिसाब से अब यहां प्रमाण हो

791
00:57:03,760 --> 00:57:08,080
गए मंदिरों पर बनी है ना व प्रतिमा नेपाल में ऐसा

792
00:57:08,080 --> 00:57:12,320
आभूषण चलता है जो जने की तरीके से पहना जाता है

793
00:57:12,320 --> 00:57:16,760
मां भगवती जब संसार की रचना करती तो उनके जो

794
00:57:16,760 --> 00:57:21,360
किसी कारणवश उनको भी नाग का जनेऊ लपेटा हुआ दिखाया जाता है

795
00:57:21,360 --> 00:57:25,600
तो उनमें से किसकी मूर्ति है किसने बनवाई है तुम्हारे हिसाब

796
00:57:25,600 --> 00:57:29,720
से तो मूर्ति प्रतिमा जो है वो शास्त्रोक्त है ही नहीं तो उसकी उसको किसी

797
00:57:29,720 --> 00:57:33,960
बात का आधार बना कर के तुम कैसे दिखा रहे हो यह देखो देवी

798
00:57:33,960 --> 00:57:38,040
की प्रतिमा पर जने हुए और स की सीधी

799
00:57:38,040 --> 00:57:42,160
एक बात मेरे भाई कि तुम्हारे पास कहां से आया यह ज्ञान

800
00:57:42,160 --> 00:57:46,160
क्योंकि जहां से आया वहा उसको तो तुम नकार दोगे अरे किसी ना किसी परंपरा को

801
00:57:46,160 --> 00:57:49,160
तो मानोगे

802
00:57:49,160 --> 00:57:53,160
ना अन कहे रूप में यह अलंकार समाज

803
00:57:53,160 --> 00:57:57,160
को भी ये मानना पड़ता है कि हमारे पास जो है परंपरा है ये

804
00:57:57,160 --> 00:58:03,160
जो सुति स्मति गुरु शिष्य परंपरा है वहां से हमें वेद मंत्र मिले

805
00:58:06,560 --> 00:58:10,720
हैं पूरे वीडियो में इन्होने कुछ बातें दोहराते रहे बस वही स्त्रियों

806
00:58:10,720 --> 00:58:14,720
का अपमान वो वही वाली बात के कैसे कनेक्ट कैसे

807
00:58:14,720 --> 00:58:19,160
हो सामने वाले के मन से हृदय से

808
00:58:19,160 --> 00:58:24,000
स्त्रियों को अपवित्र मानने वाली बात यह सब दोहराते रहे उसम कुछ

809
00:58:24,000 --> 00:58:28,160
कुछ नहीं बेसर प बारबार स्त्रियों का अपमान अरे भाई बताओ तो कहां

810
00:58:28,160 --> 00:58:32,800
लिखा है कि किसी को विधि निषेध का विधि निषेध के बारे में बोल देना

811
00:58:32,800 --> 00:58:37,480
ये जो है स्त्रियों का अपमान है कहां लिखा

812
00:58:37,480 --> 00:58:41,600
है पुरुष को अगर मांग नहीं भरनी है स्त्री को मांग भरनी है पुरुष

813
00:58:41,600 --> 00:58:45,760
को मंगल सूत्र नहीं पहनना है तो ये पुरुष का अपमान है

814
00:58:45,760 --> 00:58:51,160
नीच है पुरुष तुम्हारे हिसाब से हमारे हिसाब से

815
00:58:51,160 --> 00:58:55,280
नहीं अब बोल रहे हैं एलजीबीटी क्यू के बारे में क्यों नहीं बोलते मास फोर

816
00:58:55,280 --> 00:58:59,840
वालो के बारे में क्यों नहीं बोलते एलजीबीटी क्यू ये सब लोग आते कहां से दुनिया

817
00:58:59,840 --> 00:59:03,840
में तुम जैसे लोगों के कारण जब तुम लोग

818
00:59:03,840 --> 00:59:04,340
कहते

819
00:59:04,200 --> 00:59:08,280
हो कि नहीं हमारे समाज को नहीं मानते मगर हम जो दयानंद सरस्वती का प्रचार करते

820
00:59:08,280 --> 00:59:13,160
हैं तब एलजीबीटी क्यों हम क्यों बाउंड हो भाई शास्त्रों पर

821
00:59:13,160 --> 00:59:19,160
ऐसे लोगों को जन्म देने वाले तुम हो रामपाल जैसे लोगों को जन्म देने वाले तुम

822
00:59:23,520 --> 00:59:27,880
हो मैंने कहा ना ये जिनके पास निश्चित

823
00:59:27,880 --> 00:59:31,960
नियमावली नहीं है जो वक्त आने पर कह देते हैं

824
00:59:31,960 --> 00:59:36,000
कि कमी हमारे में भी है सब में है तो क्यों लड़ रहे हो भाई धर्म के

825
00:59:36,000 --> 00:59:40,040
लिए धर्म वो है जो सनातन है धर्म वो है

826
00:59:40,040 --> 00:59:44,120
जो सबके लिए उपयुक्त हो क्या ये कहा है कहीं

827
00:59:44,120 --> 00:59:48,720
कहीं पर दयानंद जी ने कि हमारे सनातन में भी कमियां है थोड़ी मगर चलो नहीं

828
00:59:48,720 --> 00:59:54,720
नहीं कहां से आ ये बात तुम्हारे पास

829
00:59:56,520 --> 01:00:00,600
यह वो लोगों में से हैं ऐसे लोग जो हुंडा हिंदू होते हैं इस तरह के ये उन लोगों

830
01:00:00,600 --> 01:00:04,640
में से होते हैं यह वक्त आने पर वही वो जो माता और बहन वाली

831
01:00:04,640 --> 01:00:08,640
फाउंडेशन है ना कि नहीं विवाह इनसे नहीं करना है इनका मन चल गया तो य उस

832
01:00:08,640 --> 01:00:12,880
श्लोक को भी प्रक्षिप्त बता देंगे अपना काम करने के लिए अपने

833
01:00:12,880 --> 01:00:17,200
मंतव्य की सिद्धि के लिए क्योंकि इनका मन चला होगा तो तब इनको आप आर

834
01:00:17,200 --> 01:00:21,360
समाज से बाउंड नहीं कर पाओगे नहीं नहीं भाई ये तो ये तो दयानंद जी ने भी माना

835
01:00:21,360 --> 01:00:25,440
है नहीं मैं कोई यार समाजी थोड़ी ना हूं मैं तो करूंगा वो

836
01:00:25,440 --> 01:00:29,480
लोग है इसलिए इनकी इनकी कोई निश्चित नियमावली नहीं होती है फिर ये

837
01:00:29,480 --> 01:00:33,520
कहेंगे ताल ठोकेंगे हम सनातनी कहां से हो तुमने वेद भाष्य कर लिया

838
01:00:33,520 --> 01:00:37,760
अपना तुमने मनुस्मृति का अर्थ कर लिया अपना तुमने गीता भाष्य

839
01:00:37,760 --> 01:00:42,040
कर लिया अपना क्या है तुम्हारा शास्त्र क्या है

840
01:00:42,040 --> 01:00:46,120
तुम्हारा कुछ नहीं ठेंगा चैनल है हमारा य

841
01:00:46,120 --> 01:00:51,240
पर वो हमारा धर्म

842
01:00:51,240 --> 01:00:55,240
है तुम कहते हो कि विधि निषेध बताने बताने से ये सिद्ध

843
01:00:55,240 --> 01:00:59,520
होता है कि भाई हम किसी को नीच कह रहे हैं तो इसका मतलब

844
01:00:59,520 --> 01:01:03,640
यह माना जाए कि तुम लोग अपने घर की स्त्रियों का पर

845
01:01:03,640 --> 01:01:07,840
पुरुष से स्पर्श या उससे आगे की चीजें नहीं होने देते

846
01:01:07,840 --> 01:01:12,360
हो तो इसका मतलब यह मानोगे कि वो नीच है

847
01:01:12,360 --> 01:01:16,640
जो पुरुष से आप नहीं होने दे रहे पर पुरुष से ये सब चीज

848
01:01:16,640 --> 01:01:20,680
पप्पी और या फिर क्योंकि तुम इस भावना का विरोध करने वाले

849
01:01:20,680 --> 01:01:24,840
हो कि विधि निषेध मत बताओ क्योंकि विधि निषेध से कोई व्यक्ति नीच सिद्ध होगा

850
01:01:24,840 --> 01:01:28,840
इसलिए विधि निषेध नहीं बतानी चाहिए तो इसका मतलब तुमने अपने अलाउ कर

851
01:01:28,840 --> 01:01:32,880
रखा होगा कि हां भाई चुंबन होने दो हां भाई स्पर्श होने दो

852
01:01:32,880 --> 01:01:37,680
यह सब अलाउ कर रखा है क्या दिन भर यही होता है तुम्हारे यहां

853
01:01:37,680 --> 01:01:42,000
होने दो पर पुरुष के साथ क्योंकि विधि निषेध

854
01:01:42,000 --> 01:01:46,080
के कारण तो वो पुरुष जो है वो नीच सिद्ध हो जाएगा ना नीच हो जाएगा वो तो दिन

855
01:01:46,080 --> 01:01:52,080
भर होता रहता है क्या

856
01:01:56,440 --> 01:02:00,440
शायद संभवत सुबह से शाम तक यही चला करता होगा हा भाई सब कुछ ठीक है हमारे यहां

857
01:02:00,440 --> 01:02:04,440
तो भाई हमने अगर रोका तो वो नीच हो जाएगा इसलिए अतिथि तो वो है

858
01:02:04,440 --> 01:02:08,600
हमारे य तो इसलिए करो भाई यही सब चला करता है

859
01:02:08,600 --> 01:02:12,600
क्या तो पता करना चलता है कि नहीं चलना और अगला

860
01:02:12,600 --> 01:02:16,720
वीडियो अगर बना हो तो बताना कि हमारे यहां होता है कि

861
01:02:16,720 --> 01:02:20,800
नहीं होता और नहीं होता है तो क्या वो व्यक्ति नीच है क्या हमारे घर

862
01:02:20,800 --> 01:02:24,840
की वो स्त्रिया नीच हो गई क्या जिनको स्पर्श नहीं करने दिया जा रहा है वो सब नीच

863
01:02:24,840 --> 01:02:29,480
हो गए क्योंकि तुम्हारे अनुसार विधि निषेध का मतलब ही यही है कि नीच

864
01:02:29,480 --> 01:02:33,560
अपमान तिरस्कार तो तुम्हारे यहां यही चलता होगा कोई

865
01:02:33,560 --> 01:02:39,560
नीच नहीं है क्योंकि किसी को नीच नहीं सिद्ध करना

866
01:02:41,560 --> 01:02:46,320
तुम्हें अब तुम्हारे कुछ उदाहरण दे देते हैं

867
01:02:46,320 --> 01:02:50,320
तुम्हारी आंशिक धर्मावत नहीं

868
01:02:50,320 --> 01:02:54,840
कब कहां इसके भी गद्दार बन जाओ तो

869
01:02:54,840 --> 01:03:00,840
उदाहरण देते हैं कहां से सबसे पहले तो हमने आपको वो दिखाई

870
01:03:02,840 --> 01:03:07,760
दिया आपके अनुसार किसी को विधि निषेध बताना

871
01:03:07,760 --> 01:03:13,760
जिसके लिए बताई जा रही है वो क्या

872
01:03:21,440 --> 01:03:27,440
है पिछले हमारे पिछले समय की बातें करते हो हम

873
01:03:27,720 --> 01:03:31,840
चलिए तो विधि निषेध बताने से कोई व्यक्ति अपमानित हो जाता है

874
01:03:31,840 --> 01:03:36,040
कोई व्यक्ति जो है नीच सिद्ध हो जाता है ठीक है तो

875
01:03:36,040 --> 01:03:40,240
एक काम करते हैं अभी देखते हैं क्या क्या विधि निषेध का किस किस के लिए बताए गए हैं

876
01:03:40,240 --> 01:03:44,360
जो कन्या माता के कुल की अच्छा मुझे यह मनुस्मृति

877
01:03:44,360 --> 01:03:48,520
में भी है मगर य इससे इसलिए पढ़ना पड़ेगा क्योंकि पता नहीं किस श्लोक

878
01:03:48,520 --> 01:03:52,560
को कह देय तो प्रक्षिप्त है यह भी एक दिक्कत है तो वही वाली

879
01:03:52,560 --> 01:03:56,600
बात जैसे रामपाल के रामपाल की चीजों से ही राम रखो सामने

880
01:03:56,600 --> 01:04:00,720
तो ज्यादा अच्छा है तो ऐसे ही इनके द्वारा स्वीकार बुक से ही निकाली जाए बात

881
01:04:00,720 --> 01:04:04,720
तो ज्यादा अच्छा रहे तो देखो भया शलोक तो उन्होने माना है

882
01:04:04,720 --> 01:04:08,840
जो कन्या माता के कुल से छह पीढ़ियों में ना हो और पिता के गोत्र

883
01:04:08,840 --> 01:04:13,200
की ना हो तो उस कन्या से विवाह करना उचित है यानी की

884
01:04:13,200 --> 01:04:17,200
जिसके बारे में बताया जा रहा है वह कन्या उचित है यानी जिनके बारे में मना

885
01:04:17,200 --> 01:04:21,200
किया जा रहा है व सब नीच है क्या अपमानित है क्या

886
01:04:21,200 --> 01:04:23,720
क्या है वो

887
01:04:23,720 --> 01:04:28,160
नीच सब करो अब

888
01:04:28,160 --> 01:04:32,360
हेलो अच्छा तुम कहते हो कि

889
01:04:32,360 --> 01:04:36,440
वो ज जन्म से वो चीजें नहीं होती है तो इसमें

890
01:04:36,440 --> 01:04:40,880
एक बात आई है जो कुल सत्क्रिया से हीन हो मुझे पता नहीं है

891
01:04:40,880 --> 01:04:44,920
मगर होडा हिंदुओ में ऐसे लोग शामिल है आप हो कि नहीं वो वो नहीं पता है

892
01:04:44,920 --> 01:04:49,040
मगर जो यह कहते हैं कि मैं शूद्र कुल से उत्पन्न हूं मगर मेरा यज्ञ पवित्र हो गया

893
01:04:49,040 --> 01:04:53,120
ब्राह्मण मैंने ज्ञान प्राप्त किया और मैंने ब्राह्मण ले लिया ठीक है इसमें

894
01:04:53,120 --> 01:04:57,400
कहा जा रहा है जो कुल सत्क्रिया से हीन हो हो सत पुरुषों से रहित

895
01:04:57,400 --> 01:05:02,040
हो वेद अध्ययन से विमुख हो तो अब यहां पर क्या है कि

896
01:05:02,040 --> 01:05:06,240
यदि कोई यह कह रहा है कि मेरा मैं जिस कुल में जन्मा हूं

897
01:05:06,240 --> 01:05:10,240
वह शूद्र कुल है मैं जिस मैं जिस घर में जन्मा हूं

898
01:05:10,240 --> 01:05:14,240
मैं शूद्र था मगर मैं अब जो वेदा अध्ययन करके और यज्ञ धारण करके मैं

899
01:05:14,240 --> 01:05:18,400
ब्राह्मण हो गया हूं यानी कि य किस कुल में जन्मा था नीच कुल में जन्मा था

900
01:05:18,400 --> 01:05:24,400
क्या क्योंकि यहां पर स्कूल में विवाह करने से मना किया जा रहा है

901
01:05:26,680 --> 01:05:30,920
क्या कहोगे इसे णा मूलक नीच कहोगे यह सत्यार्थ प्रकाश

902
01:05:30,920 --> 01:05:35,960
में लिखा हुआ है पढ़ लो

903
01:05:35,960 --> 01:05:40,160
तो नीच कुल है क्या जो भी व्यक्ति तुम्हारे अनुसार शूद्र से ब्राह्मण

904
01:05:40,160 --> 01:05:44,440
बन रहा है उसका कुल नीच ता क्या बोलो नीच बोलो

905
01:05:44,440 --> 01:05:47,760
चार च

906
01:05:47,760 --> 01:05:53,240
नाम शास्त्रों के मर्म को नहीं समझना है अपनी रोटिया सेकनी

907
01:05:53,240 --> 01:05:57,280
है बोलो नी च उनको तुम लोग नीच

908
01:05:57,280 --> 01:06:01,440
हो बोलना अगर आपके यहां ऐसा हुआ हो तो बोलना

909
01:06:01,440 --> 01:06:06,280
घर पर जाकर के सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार तुम लोग नीच हो

910
01:06:06,280 --> 01:06:10,560
नीच कुल है तुम्हारा अब मैं ब्राह्मण बनाऊ यहां से आगे उत्तम कुल होगा तुम्हारा

911
01:06:10,560 --> 01:06:14,680
नीच कुल है ऐसे बोलना सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार मेरे

912
01:06:14,680 --> 01:06:18,680
अनुसार नहीं सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार

913
01:06:18,680 --> 01:06:22,840
अच्छा आगे क्या कहा जा रहा है ना पीले वर्ण

914
01:06:22,840 --> 01:06:27,040
वाली ना अधिका अर्थात पुरुष से लंबी

915
01:06:27,040 --> 01:06:31,120
चौड़ी अधिक बल वाली ना रोग युक्ता

916
01:06:31,120 --> 01:06:35,560
है ना यह सब क्या नीच है क्या पीले वर्ण वाली पुरुष

917
01:06:35,560 --> 01:06:40,840
से लंबी चौड़ी य सब नीच है क्या इनसे मना किया जा रहा है इनसे विवाह मत

918
01:06:40,840 --> 01:06:41,840
करो

919
01:06:41,840 --> 01:06:45,920
इनसे मना किया जा रहा है यह देख लो ज्यादा लंबी

920
01:06:45,920 --> 01:06:50,440
चौड़ी है व नीच है क्या उसमें चेतना नहीं होती है क्या

921
01:06:50,440 --> 01:06:55,720
नीच समझते हो लंबी लंबी लड़कियों को ी

922
01:06:55,720 --> 01:07:00,640
विरोधी हो गए क्या तुम स्त्री विरोधी

923
01:07:00,640 --> 01:07:06,320
हो नीच हो गए ना लंबी चौड़ी स्त्री है उसके चेतना नहीं

924
01:07:06,320 --> 01:07:10,680
होती और क्या है भाई जिसका नाम गंगा जमुना

925
01:07:10,680 --> 01:07:14,960
हो कोकिला मैना हो काली हो ऐसे

926
01:07:14,960 --> 01:07:20,960
नाम वालियों के साथ भी विवाह नहीं करना चाहिए सब नीच

927
01:07:22,640 --> 01:07:26,840
है अरे शर्म करो थोड़ी बहुत कुतर्क लेकर जो

928
01:07:26,840 --> 01:07:29,600
फिरते

929
01:07:29,600 --> 01:07:33,600
हो अच्छा आप क्या कह रहे हैं आगे जिसके सरल यह देख लो

930
01:07:33,600 --> 01:07:37,760
भैया जिसको डाउट हो गंगा

931
01:07:37,760 --> 01:07:42,000
पार्वती इत्यादि नाम वाली और नीचे

932
01:07:42,000 --> 01:07:46,120
क्या लिखा काली नाम वाली यह सब स्त्रियां जो है

933
01:07:46,120 --> 01:07:52,120
इनसे विवाह नहीं होना चाहिए तो यह सब नीच

934
01:07:52,560 --> 01:07:56,760
है नीच है नीच इस वड को नीच इसी

935
01:07:56,760 --> 01:07:59,840
पर अपनी दुकान चलाओ

936
01:07:59,840 --> 01:08:04,600
नीच इसी पर चल रहा है ना

937
01:08:04,600 --> 01:08:08,960
दुकान इसी पर चल रही है इसलिए नीच शब्द पर हमें

938
01:08:08,960 --> 01:08:13,320
मार्केटिंग करनी है अपनी अभी आऊंगा इस पर भी मार्केटिंग पर भी इसीलिए

939
01:08:13,320 --> 01:08:17,760
कहता हूं मत पड़ो चक्कर में क्यों पड़े हो चक्कर में

940
01:08:17,760 --> 01:08:22,800
कोई है नहीं टक्कर में ऐसे नहीं कहता हूं मत पढो चक्कर में ये नहीं करता

941
01:08:22,800 --> 01:08:27,640
हूं क्योंकि अद पवे का नशा नहीं करते इसलिए

942
01:08:27,640 --> 01:08:31,680
और जो पुराना जीवन है ना वो भी ऐसा ही था

943
01:08:31,680 --> 01:08:37,680
दुर्व्स नहीं थे जो हिलना पड़े

944
01:08:42,360 --> 01:08:47,680
समझे और देखो और क्या लिखा

945
01:08:47,680 --> 01:08:52,560
है और दूसरी बात एक और है

946
01:08:52,560 --> 01:08:58,560
ये जो कुल की बात हो रही है

947
01:09:12,480 --> 01:09:16,840
अब बात यह है कि यह भी आपको जांचने की आवश्यकता

948
01:09:16,840 --> 01:09:21,560
है कि क्या उत्तम कुल से विवाह हुआ था कि

949
01:09:21,560 --> 01:09:25,800
नहीं है ना परस्पर विरुद्ध गुण कर्म स्वभाव वालो का विवाह

950
01:09:25,800 --> 01:09:29,840
कभी नहीं होना चाहिए तो इसका मतलब जो विरुद्ध गुण कर्म वाले होते वो सब नीच

951
01:09:29,840 --> 01:09:33,920
होते हैं क्या नीच होते हैं क्या

952
01:09:33,920 --> 01:09:38,000
और आप अपना भी आप जितने भी होंडा हिंदू है

953
01:09:38,000 --> 01:09:42,080
या जितने भी ये लोग है जो इसका विरोध करते अरे तुम स्त्रियो विरोध करते

954
01:09:42,080 --> 01:09:46,520
हो या तुम जो है पर उसका विरोध करते हो जो है क्या कहते हैं

955
01:09:46,520 --> 01:09:50,760
वेदन इत्यादि का तो वो भी आप जाकर के अपने अपने में चेक करो

956
01:09:50,760 --> 01:09:55,480
क्या तुम लोगों का विवाह उत्तम था कि नहीं नीच विवाह तो नहीं था

957
01:09:55,480 --> 01:09:57,480
इस पर अभी बात करेंगे देखो नीच

958
01:09:57,480 --> 01:10:03,480
विवाद था कि

959
01:10:05,000 --> 01:10:10,120
नहीं इसमें एक जगह कहा गया है कि यदि

960
01:10:10,120 --> 01:10:14,400
जो स्त्री है वह 24 वर्ष

961
01:10:14,400 --> 01:10:18,560
की हो यह सबसे अच्छा मुझे लगा इनकी आंखें

962
01:10:18,560 --> 01:10:23,440
खोलने के लिए कि 24 वर्ष की जो स्त्री

963
01:10:23,440 --> 01:10:27,960
हो और अ 4 वर्ष का जो पुरुष हो वह विवाह उत्तम

964
01:10:27,960 --> 01:10:32,760
है ठीक है यानी कि

965
01:10:32,760 --> 01:10:37,200
स्त्री 24 वर्ष की ना हो पुरुष 48 वर्ष का ना हो ऐसा विवाह

966
01:10:37,200 --> 01:10:41,960
जब हुआ 24 और 48 वाला रेशियो नहीं रहा 16 वाला रहा

967
01:10:41,960 --> 01:10:46,120
या दूसरा रहा इसमें दिया गया वो सब विवाह क्या हो गए अधम हो गए नीच

968
01:10:46,120 --> 01:10:51,080
हो गए तो तुम अपने घर में जाकर पूछना

969
01:10:51,080 --> 01:10:55,360
कि मैं नीच विवाह से उत्पन्न हूं या उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं

970
01:10:55,360 --> 01:11:00,320
ये पूछने को सत्यार्थ प्रकाश कह रही है पूछना

971
01:11:00,320 --> 01:11:04,360
मैं नीच विवाह से उत्पन्न हूं उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं या अधम

972
01:11:04,360 --> 01:11:08,400
विवाह से उत्पन्न ह ये

973
01:11:08,400 --> 01:11:12,680
वाला ठीक है पूछना मैं किस विवाह

974
01:11:12,680 --> 01:11:16,800
से उत्पन्न हूं उत्तम विवाह से सत्या

975
01:11:16,800 --> 01:11:21,040
प्रकाश के अनुसार मैं उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं या नीच विवाह

976
01:11:21,040 --> 01:11:25,760
से उत्पन्न हू पता करना बताना वीडियो बना के हेल हिल के

977
01:11:25,760 --> 01:11:30,240
इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में और

978
01:11:30,240 --> 01:11:34,280
कहता रहूंगा क्योंकि मैं सवाल पूछूंगा ईश्वर

979
01:11:34,280 --> 01:11:40,280
सर्व शक्तिमान है कि नहीं तुम्हारा पूछता रहूंगा

980
01:11:44,040 --> 01:11:48,040
समझे क्या सोचा था ऐसे ही जाने देंगे

981
01:11:48,040 --> 01:11:54,040
तुम हिलेल के कुछ भी कर कहते रहोगे ऐसे ही करते रहेंगे

982
01:11:56,560 --> 01:12:00,600
अब अब एक आगे की बात करते हैं कि तुम लोग यह कहते

983
01:12:00,600 --> 01:12:05,120
हो कि तुमने जो अपना जो

984
01:12:05,120 --> 01:12:09,240
पूरा तंत्र स्थापित किया है उसमें एक बहुत बड़ा नाम है

985
01:12:09,240 --> 01:12:13,640
गायत्री मंत्र जिने गायत्री मंत्र स्त्री सूत्र य

986
01:12:13,640 --> 01:12:18,320
इस पर आपका पूरा तानाबाना बना हुआ है

987
01:12:18,320 --> 01:12:22,360
तुम्हे क्या आवश्यकता है गायत्री मंत्र की क्या आवश्यकता है

988
01:12:22,360 --> 01:12:26,360
तुम गायत्री मंत्र की गायत्री मंत्र में से प्रार्थना की जा रही

989
01:12:26,360 --> 01:12:31,160
है कि हमें सद बुद्धि दो प्रचोदयात आर

990
01:12:31,160 --> 01:12:34,920
समाज का भी यही है हमें प्रेरित

991
01:12:34,920 --> 01:12:39,360
करो प्रार्थना कर रहे हैं ना भगवान से मांग रहे हैं ना

992
01:12:39,360 --> 01:12:43,360
कुछ तुम्हारा तो भगवान नहीं देता हर समाज का ईश्वर नहीं

993
01:12:43,360 --> 01:12:47,560
देता है क्या आवश्यकता है त्री मन निरर्थक

994
01:12:47,560 --> 01:12:51,800
है तुम्हारे हिसाब से भाई आर समाज का ईश्वर है जो

995
01:12:51,800 --> 01:12:55,800
वो मांगने से कुछ नहीं देता है कर्मों का वो वो करेगा जो

996
01:12:55,800 --> 01:13:00,080
आप अच्छे कर्म करोगे पुरुषार्थ करोगे उस पर वह आपको कुछ देगा

997
01:13:00,080 --> 01:13:04,440
व मांगने से कुछ नहीं देगा तो तुम्हारे हिसाब से तो गायत्री मंत्र व्यर्थ है

998
01:13:04,440 --> 01:13:10,160
फिर क्यों मांग रहे हो क्यों उसके नाम पर अपनी दुकाने चला रहे

999
01:13:10,160 --> 01:13:11,760
हो क्योंकि

1000
01:13:11,760 --> 01:13:15,920
जब उसके नाम पर अपनी दुकाने चलेंगी तभी तो शाम को अध पवे का इंतजाम होगा

1001
01:13:15,920 --> 01:13:20,560
तभी तो लेंगे फिर आ

1002
01:13:20,560 --> 01:13:25,160
करके इनका ईश्वर जो है वो

1003
01:13:25,160 --> 01:13:29,320
ये भक्ति करने से नहीं देता है कुछ भक्ति करने से कुछ

1004
01:13:29,320 --> 01:13:33,320
ईश्वर देता नहीं है तो क्यों उससे मांगने वाली भक्ति कर रहे हो मैं कह

1005
01:13:33,320 --> 01:13:37,480
रहा हूं उनका ईश्वर का महिमा मंडन करो मगर मांग क्यों

1006
01:13:37,480 --> 01:13:43,480
रहे हो गायत्री मंत्र में तो मांगा जा रहा है क्यों मांग रहे

1007
01:13:46,880 --> 01:13:51,240
हो क्योंकि गायत्री मंत्र के नाम पर

1008
01:13:51,240 --> 01:13:55,320
अपनी दुकान चलानी है गायत्री मंत्र वेद मंत्रों के नाम पर अपनी

1009
01:13:55,320 --> 01:13:59,400
दुकान चलानी है और जहां चाहो वहां अलंकार फिट कर देना है फिर

1010
01:13:59,400 --> 01:14:03,520
य रोना रोना है कि हम तो तुम्हें पौराणिक कहेंगे हम तो तुम्हे वेद

1011
01:14:03,520 --> 01:14:07,560
विरुद्ध पौराणिक कहेंगे मगर तुम हमको

1012
01:14:07,560 --> 01:14:12,760
वो मत कहना अलंकार ऐसे थोड़ी ना

1013
01:14:12,760 --> 01:14:17,280
चलेगा जब चोट करते हो उस समय सोच लिया करो

1014
01:14:17,280 --> 01:14:21,560
कहां जा रहे हैं किस पर कर रहे हैं है ना सोचा

1015
01:14:21,560 --> 01:14:26,040
करो छोटे हो अभी चचा कह रहे ना

1016
01:14:26,040 --> 01:14:30,200
हां बालक हो बालक बुद्धि हो तो सोचा करो पहले

1017
01:14:30,200 --> 01:14:36,200
कि क्या क्या क्या हो सकता है

1018
01:14:36,360 --> 01:14:40,040
आगे तो क्या है

1019
01:14:40,040 --> 01:14:44,520
भाई एक तरफ गायत्री मंत्र का ढंडोरा पीटते हैं

1020
01:14:44,520 --> 01:14:49,360
एक तरफ जो गायत्री मंत्र के नाम पर

1021
01:14:49,360 --> 01:14:54,280
जय श्री राम जय श्री राम एक तरफ गायत्री मंत्र के नाम पर

1022
01:14:54,280 --> 01:14:58,280
और जो है अपनी दुकाने चलाते हैं फिर दूसरी तरफ कहते

1023
01:14:58,280 --> 01:15:03,320
ईश्वर मांगने से कुछ देता नहीं है तो क्या हुआ गायत्री मंत्र निरर्थक

1024
01:15:03,320 --> 01:15:07,600
कितने बड़े दोगले हो भाई दोगलो पर भी दोगलापन

1025
01:15:07,600 --> 01:15:11,640
चलो ठीक है इसमें दोगलापन है नहीं है बाद की बात

1026
01:15:11,640 --> 01:15:15,720
है मगर जो इसको मानने का दावा कर रहा है वह भी यह कह देता है मैं कोई

1027
01:15:15,720 --> 01:15:21,320
आर समाजी थोड़ी ना अरे हद होती है दोगले पन की

1028
01:15:21,320 --> 01:15:27,320
भाई लेपन की हद होती है

1029
01:15:29,760 --> 01:15:33,760
यह जो रामपाल सेक्ट तैयार हुआ ना यह आर समाज से

1030
01:15:33,760 --> 01:15:37,800
ही निकला है क्योंकि अका सिद्धांत नहीं

1031
01:15:37,800 --> 01:15:43,800
थे तुम्हारे

1032
01:15:45,640 --> 01:15:49,800
पास एक तरफ गायत्री मंत्र को एक तरफ गायत्री मंत्र

1033
01:15:49,800 --> 01:15:53,800
के नाम पर अपना कुनबा भरते हो और दूसरी तरफ गायत्री मंत्र को निरर्थक

1034
01:15:53,800 --> 01:15:57,800
बोलते हो य दोगलापन

1035
01:15:57,800 --> 01:16:01,880
तुम्हारा और क्या तुमने वो बारबार जो नाम लिए थे के वो

1036
01:16:01,880 --> 01:16:06,560
जो है इनके गुरु ऐसे हैं यह बताते वो बताते दो ही नाम क्यों लिए

1037
01:16:06,560 --> 01:16:10,960
सारे नाम क्यों नहीं लिए राघवाचार्य का नाम क्यों नहीं लिया राजेंद्र

1038
01:16:10,960 --> 01:16:15,160
दास जी का नाम क्यों नहीं लिया य सब नाम क्यों नहीं लिए स्त्री

1039
01:16:15,160 --> 01:16:20,000
गायत्री मंत्र की बात बागेश्वर वाले भी करते हैं

1040
01:16:20,000 --> 01:16:24,400
राजेंद्र दास जी भी करते हैं प्रेमानंद जी भी करते हैं

1041
01:16:24,400 --> 01:16:28,480
शंकराचार्य का नाम ही क्यों लिया क्योंकि उनका एक

1042
01:16:28,480 --> 01:16:32,480
अल्प के शिष्य तुमसे यह पूछ रहा है कि तुम्हारा ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि

1043
01:16:32,480 --> 01:16:38,120
नहीं इसलिए लिया

1044
01:16:38,120 --> 01:16:42,480
और बागेश्वर वालों के यह जो राम भद्राचार्य

1045
01:16:42,480 --> 01:16:47,520
जी है इनके पैरों में तुम्हारे गौतम खट्टर बैठे हुए हैं क्यों

1046
01:16:47,520 --> 01:16:52,160
बैठे स्त्री गायत्री मंत्र की बात तो ये लोग भी करते हैं ना

1047
01:16:52,160 --> 01:16:58,160
मीठा मठा गब गब कड़वा कड़वा थू

1048
01:17:05,080 --> 01:17:09,280
डोले पन की हद है हद एक तरफ

1049
01:17:09,280 --> 01:17:13,400
कह रहे हो अरे वह क्या कहते हैं यहां ससुरा लोगों को मुक्ति नहीं मिल

1050
01:17:13,400 --> 01:17:17,640
रही है तो किसने मना किया कि मुक्ति नहीं मिलेगी

1051
01:17:17,640 --> 01:17:22,120
न ब में भगवान कह रहे हैं ना विधियां

1052
01:17:22,120 --> 01:17:26,200
अलग अलग है मुक्ति से किसी को वंचित नहीं किया गया है कौन से

1053
01:17:26,200 --> 01:17:30,360
कौन से हमने अपने वीडियोस में या शंकराचार्य जी ने अपने वीडियो में किस परंपरा प्राप्त

1054
01:17:30,360 --> 01:17:34,760
आचार्य ने अपने वीडियो में कहा कि महिलाओं को और इन फलाने फलाने मूक अमुक

1055
01:17:34,760 --> 01:17:38,720
वर्ग के व्यक्तियों को मुक्ति नहीं

1056
01:17:38,720 --> 01:17:42,800
मिलेगी मगर विधि का आलंबन लेना पड़ेगा ना और अगर नहीं लेना है तो

1057
01:17:42,800 --> 01:17:46,880
यह क्या है इसकी विधि विधि तुम्हारी विधि

1058
01:17:46,880 --> 01:17:51,080
विधि जितना चाहो उसमें खिल्ली उड़ा लो दूसरों की

1059
01:17:51,080 --> 01:17:53,320
जितना चाहो राधा जी की खिल्ली उड़ा लो जितना

1060
01:17:53,320 --> 01:17:57,480
चाहो शिव भगवान की खिल्ली उड़ा लो फिर कह दो हम धर्म के रक्षक है और समय

1061
01:17:57,480 --> 01:18:02,280
आने पर क दो हमारे समाज को भी नहीं मानते हम कौन है हम होंडा हिंदू है होंडा हिंदू का

1062
01:18:02,280 --> 01:18:06,720
मतलब दिखावटी धार्मिक लोग

1063
01:18:06,720 --> 01:18:09,880
दिखावटी

1064
01:18:09,880 --> 01:18:14,000
धार्मिक सब कुछ कृष्ण है तो फिर काहे का स्त्री पुरुष सब

1065
01:18:14,000 --> 01:18:17,840
कुछ कृष्ण है तो काहे की माता और

1066
01:18:17,840 --> 01:18:23,840
बहन सब कुछ कृष्ण है तो क्यों माता बहन और पत्नी

1067
01:18:24,880 --> 01:18:29,280
व्यवहार और परमार्थ सब कुछ कृष्ण है मगर व्यवहारिक

1068
01:18:29,280 --> 01:18:33,440
रूप से नहीं इस व्यवहार में प्राप्त भेद का आलंबन लेकर

1069
01:18:33,440 --> 01:18:37,720
के परमार्थ के अभेद तक पहुंचना

1070
01:18:37,720 --> 01:18:41,800
है सब कुछ अगर कृष्ण है तो कुरान को लिखने वाला गलत क्यों

1071
01:18:41,800 --> 01:18:45,680
हो गया तुम्हारे लिए क्यों लड़ रहे हो उससे जाकर

1072
01:18:45,680 --> 01:18:51,680
के हद होती है अधी पवे

1073
01:18:51,840 --> 01:18:56,720
की कम उपयोग में लिया करो अधि

1074
01:18:56,720 --> 01:19:01,200
पवा आगे चलते हैं भाई अब भाई ये बात करते हैं दार्शनिक

1075
01:19:01,200 --> 01:19:05,240
विचार ने आपको जो है बुलाया था कितना झूठ बोलते हो य

1076
01:19:05,240 --> 01:19:08,520
भी तुम्हारा दोगलापन है गायत्री मंत्र में दोगलापन आर्य समाज

1077
01:19:08,520 --> 01:19:12,600
को मानने वाला होते हुए आर समाज को ना मानने वाला होने का दोगलापन

1078
01:19:12,600 --> 01:19:16,600
तुम्हारा धर्म और सिद्धांत सिद्ध नहीं है

1079
01:19:16,600 --> 01:19:20,760
उसमें दोगलापन हमारे नाम से यह बोलना

1080
01:19:20,760 --> 01:19:25,240
कि भैया हम जो है वो नीच कहते हुए उनका अधिकार जो है छीन लेते

1081
01:19:25,240 --> 01:19:27,720
यह दोगलापन

1082
01:19:27,720 --> 01:19:32,360
झूठ और फिर दोगलापन क्या दोगलापन की

1083
01:19:32,360 --> 01:19:36,440
दार्शनिक विचार ने अपने पास आपको बुलाया था क्यों नहीं

1084
01:19:36,440 --> 01:19:40,440
गए अरे हमने उनको कहा था कि हमें मोहित गौड़

1085
01:19:40,440 --> 01:19:44,680
के साथ बात नहीं करनी है क्योंकि वह उस चर्चा में शामिल था जहां पर य फलानी

1086
01:19:44,680 --> 01:19:48,960
फलानी चीजें हुई अगर तुमने नहीं किया तो उसका सार्वजनिक

1087
01:19:48,960 --> 01:19:54,960
रूप से विरोध कर दो हम कर लेंगे चर्चा तुम्हारे साथ मगर नहीं किया विरोध

1088
01:19:55,800 --> 01:20:00,000
और हमने कहा था उस उसके जवाब में कि अभी भी वहां पर

1089
01:20:00,000 --> 01:20:04,400
कमेंट पोस्ट है और हमने अपनी पोस्ट में भी डाला है कि हम आचार्य प्रशांत

1090
01:20:04,400 --> 01:20:08,440
जी है जो जिन्होंने य हमको प्रस्ताव दिया था हमने कहा कि हम

1091
01:20:08,440 --> 01:20:12,800
आपके साथ चर्चा कर सकते हैं कोई आपत्ति नहीं है तो यहां पर इस जानकारी

1092
01:20:12,800 --> 01:20:17,360
को ट्विस्ट करके बदल करके प्रस्तुत करने वाला कौन हुआ डगला

1093
01:20:17,360 --> 01:20:21,720
क्योंकि आचार्य प्रशांत ने हमें अपने पास बुलाने को बुलाया

1094
01:20:21,720 --> 01:20:25,880
तो हमने उनका वो प्रस्ताव स्वीकार किया हम आ जाएंगे मगर मोहित गौड़ से चर्चा

1095
01:20:25,880 --> 01:20:29,920
नहीं करेंगे हम उसके साथ मंच साझा नहीं करेंगे जिसने जो है कुछ

1096
01:20:29,920 --> 01:20:34,000
आपत्ति जनक चीजों की हो या फिर चीजों के साथ वो जुड़ा हुआ

1097
01:20:34,000 --> 01:20:38,880
हो नहीं करेंगे उसके साथ स्वार्थ पूर्ण

1098
01:20:38,880 --> 01:20:42,960
वार्ता उसके साथ मंच साझा नहीं करेंगे हम आप आप करके हम बात

1099
01:20:42,960 --> 01:20:47,840
नहीं कर पाएंगे उसके साथ जिसने यह सब किया

1100
01:20:47,840 --> 01:20:52,440
हो माफी मांगता हूं अब अब निकल रहा होगा ना खून

1101
01:20:52,440 --> 01:20:56,440
जब पूछोगे जाकर के कि तुम्हारा वि जो है नीच था

1102
01:20:56,440 --> 01:21:00,600
मैं नीच से उत्पन्न हूं कि नीच विवाह से उत्पन्न हूं

1103
01:21:00,600 --> 01:21:05,400
सत्यार्थ प्रकास के अकॉर्डिंग या कौन से विवाह से उत्पन्न ह

1104
01:21:05,400 --> 01:21:09,440
पूछो ऐसे ही होता है ना चुभने वाली बातें ऐसे ही कहते हो ना

1105
01:21:09,440 --> 01:21:12,240
अपने वीडियोस

1106
01:21:12,240 --> 01:21:18,240
में पप्पी पिछवाड़ा यह सब शब्द यूज कर रहे हो ना वहां पर

1107
01:21:23,120 --> 01:21:26,760
करो शरम नहीं

1108
01:21:26,760 --> 01:21:30,920
आई और फिर कह रहे हैं कि क्या

1109
01:21:30,920 --> 01:21:35,120
कहते हैं ये यह आरोप भी लगा रहे हैं फिर दोगलापन

1110
01:21:35,120 --> 01:21:39,240
इनके दोगले पन गिनते जाइए कितने दोगले पन है इसके यह आरोप

1111
01:21:39,240 --> 01:21:43,360
लगा रहा है कि मैंने कहा कि हम अपने घर में चर्चा करेंगे

1112
01:21:43,360 --> 01:21:47,520
नहीं कहा हमारा पत्र देखिए पोस्ट किया हुआ

1113
01:21:47,520 --> 01:21:51,720
जाकर के उसमें लिखा है कि हम आपके यहां पर आ जाएंगे मगर विषय

1114
01:21:51,720 --> 01:21:57,120
होगा सर्वशक्तिमान क्योंकि हम शुरू से उसी विषय को लेकर के चले और आपने

1115
01:21:57,120 --> 01:22:01,800
भी वही विषय हमको दिया था कि ईश्वर के स्वरूप पर बात करेंगे

1116
01:22:01,800 --> 01:22:03,120
और आप होते

1117
01:22:03,120 --> 01:22:07,120
कौन है अगर हमने यह बात तो अभी तक की नहीं है आप ही क्यों य तय करेंगे

1118
01:22:07,120 --> 01:22:11,280
कि क्या विषय होगा बताइए अगर हमने शाब्दिक

1119
01:22:11,280 --> 01:22:15,280
भेद से आपका विषय जो है लिख दिया आपने ईश्वर का स्वरूप दिया हमने ईश्वर

1120
01:22:15,280 --> 01:22:19,520
सर्वशक्तिमान दे दिया तो आपको अपने विषय को बदल देने का अधिकार

1121
01:22:19,520 --> 01:22:23,560
प्राप्त हो गया कहां का सनातन सिद्धांत है और यदि प्राप्त हो

1122
01:22:23,560 --> 01:22:27,600
गया तो फिर हमको ये बताइए कि हम जब ऐन मौके पर आप बदल नहीं देंगे

1123
01:22:27,600 --> 01:22:33,600
विषय को इसका क्या गारंटी है जब आप अभी बदल रहे

1124
01:22:34,680 --> 01:22:38,760
हैं तो ये दोगलापन है ये झूठ है

1125
01:22:38,760 --> 01:22:43,520
कपट है क्योंकि धर्म से मतलब नहीं है क्योंकि धर्म सिखाते हैं राम

1126
01:22:43,520 --> 01:22:47,880
रामो विग्रह मान धर्म तुमको तो सिखाया गया दोगलापन

1127
01:22:47,880 --> 01:22:52,160
तो तुम बोलोगे दोगलापन करोगे दोगलापन छिपा

1128
01:22:52,160 --> 01:22:56,160
के ट्विस्ट करके चीजों को प्रस्तुत करोगे

1129
01:22:56,160 --> 01:23:00,440
स्पष्ट बादिता नहीं है सत्य वादित नहीं है

1130
01:23:00,440 --> 01:23:04,560
झूठ बादिता है असत्य बादिता है थोड़े दिनों में तुम भी राम

1131
01:23:04,560 --> 01:23:10,560
पालियो जैसा एक शक्त तैयार कर दोगे कहां से निकला भाई डा हिंदुओं

1132
01:23:13,040 --> 01:23:17,280
से अपने घर में चर्चा करने को हमने नहीं कहा हमने जैसे उन्होंने

1133
01:23:17,280 --> 01:23:21,360
विकल्प दिया था वैसे ही हमने भी विकल्प दिया था जब उन्होंने कहा नहीं नहीं यही

1134
01:23:21,360 --> 01:23:25,720
होगी तो हमने मान लिया फिर उन्होंने आगे क्या कहा पता है रिकॉर्ड स हम करेंगे

1135
01:23:25,720 --> 01:23:29,760
क्यों गुलाम है क्या

1136
01:23:29,760 --> 01:23:35,760
तुम्हारे गुलाम है

1137
01:23:38,960 --> 01:23:42,960
क्या और यह क्या कहते हैं कि तुमने जो

1138
01:23:42,960 --> 01:23:47,080
है वो अब तक जो चर्चा की है प्रस्तुत करते हैं वो सब नव आर्य समाजी थे नव

1139
01:23:47,080 --> 01:23:51,120
स्निस्ट थे क्या इस कौन ये कहता है क्या आर

1140
01:23:51,120 --> 01:23:55,160
समाज ये कहता है तुम्हारी बात क्यों मानी जाए तु तुम तो खुद कह रहे हो कि

1141
01:23:55,160 --> 01:24:00,200
मैं आर समाजी नहीं हूं मेरा कोई धर्म नहीं है मेरे पास निश्चित नियमावली नहीं

1142
01:24:00,200 --> 01:24:04,880
है तुम्हारा तो कोई धर्म ही नहीं है

1143
01:24:04,880 --> 01:24:10,000
तुम ही विद्वान हो ना

1144
01:24:10,000 --> 01:24:14,800
सबसे तुम हर जगह जाते हो कितनी बार गए हो शंकराचार्य के

1145
01:24:14,800 --> 01:24:19,000
मंचों में राघवाचार्य के मंचों में मैं तो गया हूं तुम्हारे आर समाज के मंदिरों

1146
01:24:19,000 --> 01:24:23,240
में अभी दो चार दिन पहले उनको फोन भी किया था

1147
01:24:23,240 --> 01:24:27,720
तुम्हारे वो सच्चिदानंद जो दिन भर अनाप चना बोला करते

1148
01:24:27,720 --> 01:24:32,560
हैं तुम कितनी बार गए हो शंकराचार्य के यहां

1149
01:24:32,560 --> 01:24:36,640
नहीं जाओगे क्योंकि तुमको सत्य जानने से मतलब नहीं है तुमको दुकान

1150
01:24:36,640 --> 01:24:42,640
चलाने से मतलब है यह यह करने से मतलब है

1151
01:24:44,840 --> 01:24:49,000
तुम हर जगह जाते हो शंकराचार्य से

1152
01:24:49,000 --> 01:24:53,320
जब कोई प्रश्न पूछता है तो पूछता है क्या कि तुम्हारा किस कौन सा वर्ण है

1153
01:24:53,320 --> 01:24:57,600
शिक्षा से और ज्ञान दूर नहीं किया गया है विधि

1154
01:24:57,600 --> 01:25:01,640
है किस विधि के आलंबन द्वारा व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होगा जो

1155
01:25:01,640 --> 01:25:07,640
उसे मोक्ष तक ले जाएगा विधि है ज्ञान से दूर नहीं किया गया

1156
01:25:10,960 --> 01:25:15,000
है कह रहे हो अपनी मां के बारे में सोचना बुद्धि हो तर्क

1157
01:25:15,000 --> 01:25:19,160
करना व्यक्तिगत तर्क मान्य व्यास स्मृति में लिखा

1158
01:25:19,160 --> 01:25:24,560
है मनुस्मृति में लिखा है अमान्य है व्यक्तिगत तक

1159
01:25:24,560 --> 01:25:29,000
जो वेद ब्रह्म सूत्र का भाष्य किया ना उसमें लिखा है व्यक्तिगत तक

1160
01:25:29,000 --> 01:25:33,120
मान्य क्या करोगे मना कर दो ब्रम सूत्र को बन

1161
01:25:33,120 --> 01:25:38,520
जाओ धर्मी खुल के अभी तो होडा हिंदू हो फिर बन जाओ नास्तिक हूं

1162
01:25:38,520 --> 01:25:42,960
मैं व्यक्तिगत तर्क अमान्य कहा है व्यास सस्वती

1163
01:25:42,960 --> 01:25:47,080
में तुम्हारे लोग भी कहते हैं पूछो उनसे जाके व्यक्तिगत तर्क

1164
01:25:47,080 --> 01:25:51,400
मान्य है कि नहीं चले बड़े तर्क तर्क तर्क तर्को

1165
01:25:51,400 --> 01:25:55,480
में भी जीरो तर्क पर आ जाओगे तो

1166
01:25:55,480 --> 01:25:59,800
बिल्कुल ही तुम्हारी बात बहुत जल्दी ध्वस्त हो जाएगी

1167
01:25:59,800 --> 01:26:00,300
वेद

1168
01:26:00,160 --> 01:26:04,480
का सहारा लेकर के थोड़ी बहुत देर टिक भी टिकते भी हो

1169
01:26:04,480 --> 01:26:08,560
परंपरा पूछनी पड़ती है

1170
01:26:08,560 --> 01:26:12,560
फिर फिर वही सच्ची परंपरा की आर में ये लोग झूठे हैं

1171
01:26:12,560 --> 01:26:16,760
अरे भाई कहां से तुमको पता चला है ये आदि शंकराचार्य जी

1172
01:26:16,760 --> 01:26:19,320
के बारे

1173
01:26:19,320 --> 01:26:23,360
में सब की जय आदि शंकराचार्य की जय

1174
01:26:23,360 --> 01:26:27,600
दयानंद की जय तो क्या है धर्म कुछ है ही नहीं

1175
01:26:27,600 --> 01:26:30,560
सबकी

1176
01:26:30,560 --> 01:26:34,680
जय धर्म वो है जो हम मानते हैं क्या है धर्म धर्म कुछ नहीं

1177
01:26:34,680 --> 01:26:39,400
है यही

1178
01:26:39,400 --> 01:26:43,560
धर्म अरे भाई किस बात का डर लगता है तुम्हें अपने

1179
01:26:43,560 --> 01:26:47,680
आप को आर्य समाजी बोलने में किस बात का भय है विश्वास

1180
01:26:47,680 --> 01:26:51,960
नहीं है क्या उन ग्रंथों प जिनका तुम ढंडोरा पीट रहे हो विश्वास

1181
01:26:51,960 --> 01:26:56,000
नहीं है क्या उस जनेऊ पर जो तुम्हारा हुआ है डर

1182
01:26:56,000 --> 01:27:02,000
है क्या कहीं जने गलत ना सिद्ध हो

1183
01:27:02,400 --> 01:27:06,720
जाए अच्छा एक बात बताओ आचार्य प्रशांत

1184
01:27:06,720 --> 01:27:10,880
ने तो किसी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की थी उसके व्यक्तिगत जीवन पर जबक

1185
01:27:10,880 --> 01:27:15,000
उसने यह भी कह दिया कि पहले मैं ऐसा जीवन जी रहा था अब मैं ऐसा हूं उसके जीवन

1186
01:27:15,000 --> 01:27:18,120
पर तुमने आक्षेप क्यों

1187
01:27:18,120 --> 01:27:22,160
उठाया तुम बात करते हो हिंदू एकता की आपस में मत लड़ो मगर

1188
01:27:22,160 --> 01:27:26,200
जब स्कोन और आर समाज के बीच में कुछ होता है तो तुम वीडियो बनाते हो इसकन

1189
01:27:26,200 --> 01:27:29,600
की प पोप

1190
01:27:29,600 --> 01:27:34,320
लीला आए दिन तुम वीडियो बना रहे हो ये

1191
01:27:34,320 --> 01:27:38,480
देखो क्यों बनाया इसके ऊपर वीडियो तुमने

1192
01:27:38,480 --> 01:27:42,480
क्योंकि बात यह नहीं [प्रशंसा] है

1193
01:27:42,480 --> 01:27:46,480
कि किसने तुम्हारे उस पर व्यक्तिगत कटाक्ष कर दिया या

1194
01:27:46,480 --> 01:27:51,520
कौन जो है धर्म अधर्म की बात कर रहा है बात यह है कि उस किसी ने

1195
01:27:51,520 --> 01:27:55,560
उस किसी ने उस मान्यता पर उस विचारधारा पर उस

1196
01:27:55,560 --> 01:27:59,560
नियमावली पर उंगली कैसे उठा दी जिसको मैंने आंशिक रूप

1197
01:27:59,560 --> 01:28:03,560
से स्वीकार किया है उस पर अगर कोई उंगली उठा सकता है वो तो वो सिर्फ

1198
01:28:03,560 --> 01:28:07,840
मैं होऊंगा और कोई मायका लाल ऐसा नहीं है जो उस नियमावली पर उंगली

1199
01:28:07,840 --> 01:28:11,920
उठा सके मैं वो हूं मैं कौन हूं मैं हंडा हिंदू आई एम द

1200
01:28:11,920 --> 01:28:16,000
होंडा हिंदू

1201
01:28:16,000 --> 01:28:20,040
वन यही है ना तुम्हारी सच्चाई तुम नोरा पीटते हो हिंदू एकता

1202
01:28:20,040 --> 01:28:24,240
हिंदू एकता का फिर तुम किसी को छोड़ते नहीं हो क्योंकि उस उसकी

1203
01:28:24,240 --> 01:28:28,400
उसकी कहीं ना कहीं उससे एंटी हो गई है जिस जो तुम्हारा जो जिसकी जिसको

1204
01:28:28,400 --> 01:28:34,400
तुम धर्म के रूप में प्रस्तुत कर रहे

1205
01:28:39,960 --> 01:28:44,400
हो अरे भाई कितने शूद्र बनाए हैं आर

1206
01:28:44,400 --> 01:28:48,920
समाज इसी नाम पर लेता है ना आर समाज में भर्ती होती सीध भर्ती ब्राह्मण भर्ती

1207
01:28:48,920 --> 01:28:54,920
कितने शूद्र बनाए

1208
01:28:55,840 --> 01:28:59,920
इसका मतलब कि जो लोग भी सर्विस डिपार्टमेंट का काम कर रहे हैं वो

1209
01:28:59,920 --> 01:29:02,760
आर समाजी नहीं

1210
01:29:02,760 --> 01:29:07,160
है आर समाजी होंगे तो ब्राह्मण होंगे ब्राह्मण होंगे वर्ण सकता

1211
01:29:07,160 --> 01:29:11,200
कर रहे होंगे फिर वो तुम्हारे अकॉर्डिंग

1212
01:29:11,200 --> 01:29:14,160
ली बात कर रहा

1213
01:29:14,160 --> 01:29:18,520
हूं अगर इस तरीके से प्रसन्न करने वाली बात है ना तुमसे

1214
01:29:18,520 --> 01:29:22,600
तुमसे ज्यादा प्रसन्न तो जो शूद्र वर्ण है जो हमारा चतुर्थ वर्ण

1215
01:29:22,600 --> 01:29:26,600
है वो जो है राम पालो से खुश है वो तो ब्राह्मण भी नहीं बनाते

1216
01:29:26,600 --> 01:29:30,720
वो तो हंस भगवान की भक्ति में डूब जाने वाला हंस

1217
01:29:30,720 --> 01:29:34,880
बताते हैं जैसे एक इन्होंने भी पकड़ा स्कोन वालो वैष्णव बनाते हैं वो व और

1218
01:29:34,880 --> 01:29:40,200
श्रेष्ठ कर देते हैं लो तो तुमसे तो अच्छे ही है मूर्ति पूजक है इकोन

1219
01:29:40,200 --> 01:29:44,240
वाले वेदों में प्रमाण बुद्धि दोनों की है मगर मूर्ति पूजा के

1220
01:29:44,240 --> 01:29:48,360
कम से कम वो बुत परस्ती के विरुद्ध थोड़ी ना है तुम हो

1221
01:29:48,360 --> 01:29:54,360
बुत परस्ती के विरुद्ध बुत परस्ती गलत है ना

1222
01:29:59,800 --> 01:30:04,200
क्या किया तुमने मिलावट बोल दिया रामपाल ने बोल दिया काल नहले

1223
01:30:04,200 --> 01:30:08,440
प ला तुमने मौका दिया तुम जैसे लोगों ने तुम जैसे सेक् ने मौका

1224
01:30:08,440 --> 01:30:12,840
दिया यह तथाकथित जितने भी तंत्र है उनको पनपने का परंपराओं

1225
01:30:12,840 --> 01:30:16,440
का विरोध

1226
01:30:16,440 --> 01:30:21,440
करके अपमान करके पप कह के

1227
01:30:21,440 --> 01:30:27,440
कह के पाखंड कह के तुम जैस लोगों ने इनको जन्म दिया

1228
01:30:30,080 --> 01:30:34,520
है सेवा करने वाला छोटा हो गया निम्न हो गया कहां लिखा

1229
01:30:34,520 --> 01:30:38,640
है कुछ लिखे हुए बातें

1230
01:30:38,640 --> 01:30:42,720
करोगे अपने मन गंत दूसरों की

1231
01:30:42,720 --> 01:30:46,960
सफाई करना अरे भाई दूसरों की सफाई करने करना

1232
01:30:46,960 --> 01:30:51,400
भी एक काम है काम कोई बड़ा छोटा नहीं होता है तुमने

1233
01:30:51,400 --> 01:30:55,480
तुमने उसको नाम दिया है कि अरे वो

1234
01:30:55,480 --> 01:30:59,480
वो नहीं मैंने एक बार बताया वीडियो में क्या किया जाता है अपने सेक् को

1235
01:30:59,480 --> 01:31:04,280
तैयार करने के लिए कि पहले एक प्रॉब्लम को क्रिएट किया गया

1236
01:31:04,280 --> 01:31:08,280
जैसे कि गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है गायत्री मंत्र

1237
01:31:08,280 --> 01:31:12,920
से ही मुक्ति मिल सकती है केवल वेद जिस रूप में है

1238
01:31:12,920 --> 01:31:14,880
उस रूप में पढ़ने पर ही मुक्ति

1239
01:31:14,880 --> 01:31:19,000
मिल सकती है केवल तो यह प्रॉब्लम

1240
01:31:19,000 --> 01:31:23,120
पहले क्रिएट की गई उसके बाद देख वो तुझे वेद नहीं पढ़ने दे रहे हैं देख वो तुझे

1241
01:31:23,120 --> 01:31:27,520
जने नहीं करने रहे देख वो तुझे य नहीं करने दे रहे हैं मुक्ति जाए भाड़ में

1242
01:31:27,520 --> 01:31:33,520
मुक्ति से कोई मतलब नहीं

1243
01:31:38,920 --> 01:31:42,960
है तुमने ये सब टैक चालू किया रे वो तुझे नीच समझते

1244
01:31:42,960 --> 01:31:47,000
हैं व वो ये करते हैं वो करते हैं अरे मैं पूछता हूं तुम लोग ये

1245
01:31:47,000 --> 01:31:51,000
जो अत्याचार का ढंडोरा पीटते हो कहां का इतिहास है कहां पर

1246
01:31:51,000 --> 01:31:55,400
नीच ऊच के नाम पर जो है अत्याचार हुआ 200

1247
01:31:55,400 --> 01:31:59,560
साल पहले तक जब तक वर्ण व्यवस्था मानी जाती थी भारत का दृश्य कुछ और था आज

1248
01:31:59,560 --> 01:32:03,760
अपना दृश्य देखो धर्म अधर्म का क्या

1249
01:32:03,760 --> 01:32:07,840
स्थिति प ला दिया तुमने अब एलजीबीटी क्यू

1250
01:32:07,840 --> 01:32:11,920
वाले खड़े हो रहे तो तुम परंपराओं पर वो कर रहे हो जिनको तुमने मानना

1251
01:32:11,920 --> 01:32:17,920
छुड़वा दिया लोगों

1252
01:32:18,960 --> 01:32:23,080
से गटर का कांसेप्ट भी नहीं था हमारे यहां ये जो

1253
01:32:23,080 --> 01:32:27,080
ये मल सा करने की बातें की जाती है यह भी अंग्रेज है तब से

1254
01:32:27,080 --> 01:32:31,360
हुआ हम तो इसको डिनायर हैं और

1255
01:32:31,360 --> 01:32:37,360
अगर आ गया था तो मशीन का उपयोग क्यों नहीं हुआ उसमें मशीने

1256
01:32:37,760 --> 01:32:42,800
थी हीन भावना का प्रचार प्रसार तुमने

1257
01:32:42,800 --> 01:32:46,920
किया अरे मैं कह रहा हूं क्या आज की डेट में

1258
01:32:46,920 --> 01:32:51,160
ब्राह्मण कुल में जन्मा हुआ कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो चर्म की फैक्ट्री में काम कर रहा होगा

1259
01:32:51,160 --> 01:32:55,280
मैनेजर होगा कुछ भी होगा जो चर्मकार

1260
01:32:55,280 --> 01:32:59,400
जो कारखाने हैं इन सबका मालिक होगा या कुछ भी होगा काम

1261
01:32:59,400 --> 01:33:03,520
कर रहा होगा चर्म को काटने का ब्राह्मण कुल में उत्पन्न व्यक्ति

1262
01:33:03,520 --> 01:33:07,760
भी वो वो कार्य कर रहा है आज की डेट में क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होने वाला व्यक्ति वैश

1263
01:33:07,760 --> 01:33:11,880
कुल में उत्पन्न होने वाला व्यक्ति उन सब वर्गों का काम कर वो सब वर्गों

1264
01:33:11,880 --> 01:33:16,080
का काम कर रहा है जिन वर्गों को शूद्र कहा जाता है इसका

1265
01:33:16,080 --> 01:33:21,640
मतलब क्या हुआ कार्य कोई भी बड़ा छोटा नहीं

1266
01:33:21,640 --> 01:33:25,640
था अगर होता तो ये जो तीन वर्ण के लोग हैं

1267
01:33:25,640 --> 01:33:30,000
ये उसमें क्यों जाते अगर कोई कार्य

1268
01:33:30,000 --> 01:33:34,360
जिससे किसी को भय हो सकता है तो वो था वेद वेदोक्त जीवन

1269
01:33:34,360 --> 01:33:39,400
चर्या और उसी से बचने के लिए आदमी भागता

1270
01:33:39,400 --> 01:33:42,720
है दूसरी

1271
01:33:42,720 --> 01:33:48,720
ओर जो अपने वर्ण और कुल के विरुद्ध जाकर के आचरण करता

1272
01:33:49,120 --> 01:33:53,240
है नहीं तो बताओ अभी मैं तुमको बहुत सारे नाम दे सकता

1273
01:33:53,240 --> 01:33:57,360
हूं जहां ब्राह्मण कुल के लोग जो है ऐसी ऐसी जगह परकार

1274
01:33:57,360 --> 01:34:01,800
उनकी आज को पार्जन का माध्यम यह होगा जिसको शूद्र कहा जाएगा

1275
01:34:01,800 --> 01:34:07,800
तो क्यों चुना उन्होंने वो वो तो नीच कार्य था

1276
01:34:08,200 --> 01:34:12,200
ना अगर कुछ भी कठिन है वह है वेदों को

1277
01:34:12,200 --> 01:34:16,640
धारण करना वह जीवन शैली कठिन है

1278
01:34:16,640 --> 01:34:20,680
इसलिए धीरे धीरे धीरे करके मुक्त किया गया कि तुम्हारा जीवन ऐसा

1279
01:34:20,680 --> 01:34:26,680
होगा तो तुम अगर यह करोगे तो यह मत करना

1280
01:34:27,040 --> 01:34:31,200
एक आस प्रद मुझे वीडियो दिखा था जय भीम वालों का उसम

1281
01:34:31,200 --> 01:34:35,440
वो कह रहा था अपने लोगों को कि तुम अपना सरनेम मत बदलना यह लोग तुमसे तुम्हारा

1282
01:34:35,440 --> 01:34:40,720
काम छीनना चाहते हैं सरनेम बदलवाने के

1283
01:34:40,720 --> 01:34:44,760
उसमें यह लोग और आगे चल कर के वह आरक्षण की बात भी कर रहा

1284
01:34:44,760 --> 01:34:48,880
है आरक्षण बंद करवा देंगे तुम सबका नाम बदल करके कोई

1285
01:34:48,880 --> 01:34:53,120
काम बड़ा छोटा नहीं था य तुम लोगों तुम जैसे लोगों ने अपनी रोटिया सेख है

1286
01:34:53,120 --> 01:34:59,120
बड़ा छ बड़ा छोटा कर कर

1287
01:35:01,520 --> 01:35:06,160
के तुम जैसे लोग जब विकल्प देते हो ना

1288
01:35:06,160 --> 01:35:10,440
तब यह विकृतियां आती है समाज में शास्त्रों के मर्म

1289
01:35:10,440 --> 01:35:14,520
को जानना नहीं है राघवा चार प उंगली उठा दोगे राम की राम

1290
01:35:14,520 --> 01:35:18,520
जी का ऐसा विवाह क्यों हुआ वैसा विवाह क्यों हुआ फिर भले ही तुम्हारे ही नेता लोग

1291
01:35:18,520 --> 01:35:22,640
वहां जाकर के उनके चरणों में बैठते हो बागेश्वर वालों के चरणों

1292
01:35:22,640 --> 01:35:27,520
में राम भद्राचार्य जी के चरणों में क्यों जा रहे

1293
01:35:27,520 --> 01:35:31,840
हो अरे तुम तो वह लोग हो जो ओशो वादियों के यहां भी चले जाते हो

1294
01:35:31,840 --> 01:35:35,920
उनको भी सपोर्ट कर देते हो क्योंकि होंडा हिंदू है ना होडा हिंदू

1295
01:35:35,920 --> 01:35:40,000
है हम हम ओसो के भी है हम आर समाज के भी हैं हम

1296
01:35:40,000 --> 01:35:44,040
सबके हम किसी के नहीं है हम तो नास्तिक है क्योंकि हमें यह नहीं पता है

1297
01:35:44,040 --> 01:35:48,080
सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में आधार किस आधार पर भेद करें शास्त्र

1298
01:35:48,080 --> 01:35:52,320
नहीं है हमारे पास निश्चित नहीं है हमारा धर्म बदलता है किस आधार पर

1299
01:35:52,320 --> 01:35:55,880
मुझे क्या अच्छा लग रहा है आधार हम वो हिंदू है इसको

1300
01:35:55,880 --> 01:36:01,440
कहते हैं होडा

1301
01:36:01,440 --> 01:36:06,400
हिंदू तुमने तो जन्म से वो मान लिया था

1302
01:36:06,400 --> 01:36:10,600
है ना कि जन्म से नहीं वोह कर्म से होता है तो क्यों नहीं आ गए अंबेडकर वगैरह तुम्हारे

1303
01:36:10,600 --> 01:36:14,720
उसम बहकावे में क्योंकि उनको उनको यह पता था

1304
01:36:14,720 --> 01:36:18,920
कि वहां पर भी कुछ रिस्ट्रिक्शन है जो कि उस

1305
01:36:18,920 --> 01:36:23,080
तरह से नहीं है और तुम्हारी जो जो तथाकथित जो

1306
01:36:23,080 --> 01:36:27,440
पुस्तक ना धर्म जिसका तुम आंशिक वो करते हो आलंबन लेते हो

1307
01:36:27,440 --> 01:36:31,600
वो भी 25 30 बार बदलने की चीजें है उसम और अभी भी उसको

1308
01:36:31,600 --> 01:36:35,760
आप शोध ग्रंथ कहते हो वाह अरे भाई शोध ग्रंथ है तो उसमें इसका मतलब आज

1309
01:36:35,760 --> 01:36:39,520
की डेट में सनातन सिद्धांत नहीं है

1310
01:36:39,520 --> 01:36:45,520
ना शोध ग्रंथ है तो सनातन कहां से

1311
01:36:51,840 --> 01:36:56,440
वो अभी मैं जा वाला एक ऐसे व्यक्ति मिले स

1312
01:36:56,440 --> 01:37:00,560
सत्यार्थ प्रकास या जो आर समाज के जो ग्रंथ है ना इसमें कितना कितना

1313
01:37:00,560 --> 01:37:04,960
बदलाव हुआ इसमें कौन-कौन सी चीज ऐसे लोगों के साथ पॉडकास्ट है बहुत निकट

1314
01:37:04,960 --> 01:37:10,960
आने वाले दिनों में पता

1315
01:37:18,000 --> 01:37:24,000
चलेगा जी यही कह रहा हूं

1316
01:37:24,440 --> 01:37:29,480
तो कुल मिलाकर बात यही है कि

1317
01:37:29,480 --> 01:37:33,520
पूछो दोगलापन छोड़ो जो दोगली बातें तुमने अपने उसम

1318
01:37:33,520 --> 01:37:37,680
वीडियो में की है ना बहुत सारी उनको छोड़ो और पूछो अपने घर पर जाकर

1319
01:37:37,680 --> 01:37:42,200
के कि मैं किस तरह के विवाह से उत्पन्न ऊच के नीच पूछो

1320
01:37:42,200 --> 01:37:46,720
सत्या प्रकाश के अनुसार पूछना मेरे अनुसार नहीं है ना

1321
01:37:46,720 --> 01:37:50,800
गायत्री मंत्र का प्रचार बंद करो क्योंकि तुम्हारे सत्या प्रकाश

1322
01:37:50,800 --> 01:37:54,960
के हिसाब से ईश्वर मांगने से कुछ नहीं देता और भागवत का

1323
01:37:54,960 --> 01:37:59,400
खंडन इत्यादि करते हुए कई जगह पर दयानंद जी ने इस बारे में बात की है

1324
01:37:59,400 --> 01:38:04,720
कि जिसका कोई उपयोग उपयोगिता नहीं है वह व्यर्थ के मंत्र इत्यादि नहीं देने

1325
01:38:04,720 --> 01:38:07,160
चाहिए आर्य समाज

1326
01:38:07,160 --> 01:38:11,320
के अनुसार फिर वह सारे मंत्र बेकार है जिसमें की ईश्वर से कुछ मांगा

1327
01:38:11,320 --> 01:38:15,520
जा रहा हो क्योंकि ईश्वर मांगने से नहीं अच्छे कर्मों

1328
01:38:15,520 --> 01:38:19,560
का फल देता है मांगने से कुछ नहीं देता येय लिखा हुआ

1329
01:38:19,560 --> 01:38:25,560
है ईश्वर मांगने से कुछ देता है क्या

1330
01:38:42,840 --> 01:38:47,680
150 क्या स्तुति आदि करने से ईश्वर

1331
01:38:47,680 --> 01:38:52,040
प्रार्थना करने वाले का भला कर देगा तो

1332
01:38:52,040 --> 01:38:55,080
देखिए क्या लिखा है

1333
01:38:55,080 --> 01:38:59,200
नहीं नहीं तो जिस गायत्री मंत्र में कुछ

1334
01:38:59,200 --> 01:39:03,320
मांगा जा रहा है भगवान से सद बुद्धि मांगी जा रही

1335
01:39:03,320 --> 01:39:08,120
है नहीं देगा कर्म करने से देगा

1336
01:39:08,120 --> 01:39:13,000
इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में मत पड़ो

1337
01:39:13,000 --> 01:39:17,040
सर्वशक्तिमान ईश्वर लाओ मैं आपका हो जाऊंगा उंगली पकड़

1338
01:39:17,040 --> 01:39:21,480
के चलूंगा परम स्वतंत्र मोक्ष

1339
01:39:21,480 --> 01:39:22,480
लाओ

1340
01:39:22,480 --> 01:39:26,560
इस पर वीडियो बनाओ वरना मत

1341
01:39:26,560 --> 01:39:32,320
पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

1342
01:39:32,320 --> 01:39:36,400
समझे हम तुमको लगा होगा

1343
01:39:36,400 --> 01:39:42,400
कि कोई होगा हां

1344
01:39:42,640 --> 01:39:48,640
भाई दे दीजिए किसी को कोई बात अपनी रखनी हो तो आ

1345
01:39:50,480 --> 01:39:56,480
जाए लिंक दे दीजिए

1346
01:40:07,040 --> 01:40:13,040
अरे लिंक डाल

1347
01:40:20,320 --> 01:40:24,360
दीजिए लिंक दिया है भाई कोई आ आना चाहता तो आ जाए पा

1348
01:40:24,360 --> 01:40:30,360
मिनट हम लोग वेट

1349
01:40:31,320 --> 01:40:37,320
करेंगे उसके बाद हम इसको ऑफ

1350
01:40:42,320 --> 01:40:46,680
करेंगे ू कौन है जिसकी कोई निश्चित नियमावली

1351
01:40:46,680 --> 01:40:50,680
नहीं है ऐसे लोग कई मिलते रहते हैं मैं किसी को मानता नहीं हूं तुम्हारा

1352
01:40:50,680 --> 01:40:54,720
हिंदुत्व कहां से डिफाइन हो रहा है

1353
01:40:54,720 --> 01:40:58,920
कहां डेफिनेशन है तुम्हारे हिंदुत्व की धर्म और धर्म की यह है डा

1354
01:40:58,920 --> 01:41:02,960
हिंदू क्योंकि जिसको इन्होंने स्वीकार किया जिसके रक्षक बन रहे उसके भी

1355
01:41:02,960 --> 01:41:07,040
दोगले उसको भी मना करते हैं यह

1356
01:41:07,040 --> 01:41:11,280
तो उनमें से हैं जो यह तक कह देते हैं कि सब में कमियां है इसका

1357
01:41:11,280 --> 01:41:16,320
मतलब सनातन धर्म का अस्तित्व ही नहीं है

1358
01:41:16,320 --> 01:41:20,560
तुम जैसे लोग नाश करवाते हो कहने

1359
01:41:20,560 --> 01:41:22,120
का मौका मिलता है

1360
01:41:22,120 --> 01:41:26,160
कि तुम्हारा येय तो यह कह रहा है मेरी एक चर्चा के बारे में बहुत बात

1361
01:41:26,160 --> 01:41:30,320
होती किसी दिन उस पर बात करेंगे जहां पर व्यक्ति यह कह रहा है बुराई

1362
01:41:30,320 --> 01:41:33,240
को बनाना बुराई नहीं

1363
01:41:33,240 --> 01:41:38,840
है मुस्लिम्स के साथ जो हुई

1364
01:41:38,840 --> 01:41:43,040
थी उसमें वो लोग इतने सारे बोलने लगे कि आर्य समाज

1365
01:41:43,040 --> 01:41:47,520
तो ऐसा मानता है फिर आप कैसे कैसा कह रहे हैं

1366
01:41:47,520 --> 01:41:51,560
तुम्हारे जैसे लोगों की वजह से होता है ना भाई तुम जैसे लोग मौका देते हो ना

1367
01:41:51,560 --> 01:41:55,600
उनको हम जब अपने ईश्वर की सर्व सामर्थ्य सिद्ध कर

1368
01:41:55,600 --> 01:41:59,640
रहे हैं तो वहां पर आर समाज हमें कमजोर करता है ना नहीं नहीं आर समाज तो य मानता

1369
01:41:59,640 --> 01:42:04,400
है व अवतार नहीं ले सकता तो पूछना पड़ेगा ह समान कि भैया हम सर्वशक्तिमान कैसे माने

1370
01:42:04,400 --> 01:42:09,720
कि नहीं नहीं जो अपना अपने कार्य कर लेता है वो सर्वशक्तिमान है तो फिर आत्मनिर्भर कौन

1371
01:42:09,720 --> 01:42:13,880
है और फिर जो अपने कार्य नहीं है उनको भी कर लेता

1372
01:42:13,880 --> 01:42:18,360
उसको क्या कहोगे क्षमता क्षमता है उसके अंदर

1373
01:42:18,360 --> 01:42:22,400
उसको क्या कहोगे परम सर्वशक्तिमान तो

1374
01:42:22,400 --> 01:42:24,920
हमारा वो

1375
01:42:24,920 --> 01:42:28,240
परम सर्वशक्तिमान

1376
01:42:28,240 --> 01:42:32,440
छीन लिया सर्वशक्तिमान का अर्थ बदल दोलो

1377
01:42:32,440 --> 01:42:38,440
यही सबसे बड़ी रुकावट है अलंकार को फैलाने

1378
01:42:41,720 --> 01:42:43,960
में

1379
01:42:43,960 --> 01:42:49,960
चलिए कोई आना नहीं चाह रहा है

1380
01:42:57,400 --> 01:43:01,840
कोई आया है क्या आर्यन कुशवा

1381
01:43:01,840 --> 01:43:07,840
आपका चेहरा

1382
01:43:24,640 --> 01:43:29,200
आप आ सकते हैं लाइव में आपको

1383
01:43:29,200 --> 01:43:33,200
लिंक दिया गया है अपनी बात रख सकते हैं हम लोग समझने का प्रयास करेंगे आप क्या

1384
01:43:33,200 --> 01:43:37,280
कहना चाह रहे हैं हमने

1385
01:43:37,280 --> 01:43:41,400
सदैव सर्द पूर्ण चर्चा का ही आलंबन लेने का प्रयास किया

1386
01:43:41,400 --> 01:43:45,440
मगर आपत्ति जनक शब्दावली हों के कारण हमें

1387
01:43:45,440 --> 01:43:51,440
उसके प्रति उत्तर में वैसा करना पड़ा

1388
01:43:54,360 --> 01:43:58,440
कलयुग का नीच योगी भी आया है क्या चेहरा दिखाओ भाई

1389
01:43:58,440 --> 01:44:02,440
उसके नाम से कोई और तो नहीं आ गया है जय श्री राम शिवा

1390
01:44:02,440 --> 01:44:06,800
भया जय श्री राम हमने अभी कुछ होंडा हिंदुओ

1391
01:44:06,800 --> 01:44:11,200
की बात की थी जिनका धर्म निश्चित नहीं है उनमें से

1392
01:44:11,200 --> 01:44:15,280
एक व्यक्ति की फोटो लगा के आया है व्यक्ति मगर वही है

1393
01:44:15,280 --> 01:44:18,760
कि नहीं यह नहीं

1394
01:44:18,760 --> 01:44:23,320
पता तो चेहरा दिखा दे तो आपको ऊपर लिया जाए तबतक

1395
01:44:23,320 --> 01:44:27,320
अपनी बात रखें आर्य जी हां भैया तो ये

1396
01:44:27,320 --> 01:44:31,320
जितने सारे हैं ना सब सबका जो कांसेप्ट है वो एक ही है चाहे वो

1397
01:44:31,320 --> 01:44:35,440
आर्य समाज हो कहते हैं कि मिलावट हो गई है रामपाल मिलावट की जगह

1398
01:44:35,440 --> 01:44:39,880
काल ले आएंगे और कौन कहते हैं कलयुग है तो कलयुग में मतलब भा स्न

1399
01:44:39,880 --> 01:44:43,880
वालों का है कि कलयुग के नाम पर भाव भाव अच्छा होना चाहिए भाव अच्छा भाव

1400
01:44:43,880 --> 01:44:48,600
के नाम पर कुछ भी कर दो आप नहीं वो अपनी बात मनते हैं भा

1401
01:44:48,600 --> 01:44:52,600
अपनी बातें मनवा लेते हैं अपनी बातें मनवा लेते

1402
01:44:52,600 --> 01:44:57,240
हैं तो धंधा चलाना है

1403
01:44:57,240 --> 01:45:01,240
ना अपनी बातें कैसे बनवाते है देखो जैसे वो

1404
01:45:01,240 --> 01:45:05,360
कहेंगे कि यदि आपने जैसे

1405
01:45:05,360 --> 01:45:09,600
अभी एक बात हुई थी कि वो लोग भगवत गीता को किसी को ऐसे व्यक्ति को भी दे देते

1406
01:45:09,600 --> 01:45:13,760
हैं जो पता नहीं कहां से आ रहा व कह रहा मैंने अभी हाथ गंदे मैंने मीट

1407
01:45:13,760 --> 01:45:17,880
खाया चिकन खाया है तो भगवत गीता को उसको भी फोर्स करते कि आप

1408
01:45:17,880 --> 01:45:21,880
य ले लो ले लो तो इसमें इनका तर्क होता है कि वो व्यक्ति अगर उसको देखने के

1409
01:45:21,880 --> 01:45:25,920
तुरंत बाद मर जाता तो उसको

1410
01:45:25,920 --> 01:45:29,920
मोक्ष मिल जाता क्योंकि उसने लास्ट में भगवान का नाम

1411
01:45:29,920 --> 01:45:33,880
या भगवान का स्मरण कर लिया था ठीक है अब यही

1412
01:45:33,880 --> 01:45:37,880
10 जो अपराध बताते उसमें क्या कहते हैं

1413
01:45:37,880 --> 01:45:41,960
10 अपराध बताते उसमें कहते हैं अगर तुम तुमने फलानी फलानी विधि का आलंबन

1414
01:45:41,960 --> 01:45:46,320
नहीं लिया तो तुम्हें नाम का फायदा नहीं होगा

1415
01:45:46,320 --> 01:45:50,320
तो जो व्यक्ति को आप भगवत गीता दिखा रहे हो उसने वो

1416
01:45:50,320 --> 01:45:56,320
फलाने फलाने नियम उसको मालूम तक नहीं तो उसने क से किया होगा

1417
01:45:56,760 --> 01:46:01,320
बताइए मगर अपने सिद्धांतों को तो यथावत रखना है

1418
01:46:01,320 --> 01:46:05,320
अपने हा तो स्वघोषित सिद्धांत उनको रखना मगर जो पहले से चले आ रहे

1419
01:46:05,320 --> 01:46:09,360
सिद्धांत उनसे दिक्कत अपने सिद्धांतों में

1420
01:46:09,360 --> 01:46:13,360
भी नहींन वाले कहते हैं कि जो शिवजी है व परम वैष्णव

1421
01:46:13,360 --> 01:46:17,720
हैकी बात हमने पढ़ लिया है हम

1422
01:46:17,720 --> 01:46:23,440
हम आमने सामने जा चुके हैं और फिर अवसर मिलेगा जाएंगे

1423
01:46:23,440 --> 01:46:27,560
और आपको कोई बात रखनी है तो आप लाइव में आइए बारबार एक ही कमेंट को कॉपी

1424
01:46:27,560 --> 01:46:30,120
पेस्ट ना

1425
01:46:30,120 --> 01:46:36,120
करिए वरना व स्पैम मान लिया

1426
01:46:41,120 --> 01:46:45,280
जाएगा हां भाई हा शिवांश भया

1427
01:46:45,280 --> 01:46:49,720
स् कन वाले कहते हैं योगी जी आ ग बताइए कलयुग

1428
01:46:49,720 --> 01:46:55,720
के योगी जी बताइए

1429
01:46:56,960 --> 01:47:01,680
तो नमस्कार भाई आपको जय श्री राम नहीं

1430
01:47:01,680 --> 01:47:05,800
आपने एक स्टेटमेंट दिया कि 200 साल पहले कोई भेदभाव नहीं होता था

1431
01:47:05,800 --> 01:47:09,960
किस आधार पर देखिए हम लोग शुरुआत करेंगे ईश्वर

1432
01:47:09,960 --> 01:47:14,040
सर्वशक्तिमान है कि नहीं इस बात प फिर हम बाकी की चीज लेंगे

1433
01:47:14,040 --> 01:47:17,320
कय

1434
01:47:17,320 --> 01:47:21,560
बा सर्वशक्तिमान के ऊपर बात करते आ श्वर

1435
01:47:21,560 --> 01:47:23,800
सर्वशक्तिमान है अवतार

1436
01:47:23,800 --> 01:47:27,880
नहीं ले सकता क्यों

1437
01:47:27,880 --> 01:47:32,200
कैसे समझाइए इसको थो अवतार मतलब अवतार मतलब होता अवत

1438
01:47:32,200 --> 01:47:36,320
होना तो प्रश्न उठता है कि अगर ईश्वर ने अवतार लिया है तो

1439
01:47:36,320 --> 01:47:40,360
पहले वहां पर क्या था अगर सब जगह ईश्व है

1440
01:47:40,360 --> 01:47:45,040
व सर्वव्यापी है तो फिर व अवतार ले कैसे रहा

1441
01:47:45,040 --> 01:47:49,120
है अच्छा एक बात बताइए कि

1442
01:47:49,120 --> 01:47:53,360
आपके अनुसार जो ईश्वर सृष्टि की रचना करता है

1443
01:47:53,360 --> 01:47:59,200
वह केवल मन में सोच लेता है कि बाकायदा फिजिकली फोर्सफुली वो रचना करता

1444
01:47:59,200 --> 01:48:03,240
है संकल्प मात्र से संकल्प मात्र

1445
01:48:03,240 --> 01:48:07,560
से कोई फोर्स काम नहीं करती है फोर्स भी काम करती है कि

1446
01:48:07,560 --> 01:48:09,720
नहीं फोर्स काम करती है उसी की

1447
01:48:09,720 --> 01:48:13,960
फोर्स है उसी की फोर्स काम करती है है ना अब

1448
01:48:13,960 --> 01:48:18,000
एक बात बताइए कि अगर सृष्टि की रचना हो रही है तो जिस समय पृथ्वी बन

1449
01:48:18,000 --> 01:48:22,080
रही है उसी समय सूर्य भी बन रहा है आपने इस पर वीडियो भी बनाया था जिस समय

1450
01:48:22,080 --> 01:48:26,400
पृथ्वी बन रही हर जगह सारी जगह एक साथ

1451
01:48:26,400 --> 01:48:30,920
कार्य हो रहा है ऐसा नहीं क सते मैं समझ रहा हूं मैं समझ रहा हूं कार

1452
01:48:30,920 --> 01:48:35,000
मैं समझ रहा हूं मुझे अपना प्रश्न पूरा कर लेने दीजिए एक साथ सभी जगह सारी

1453
01:48:35,000 --> 01:48:39,880
जगह कार्य हो रहा है तो कहीं पर

1454
01:48:39,880 --> 01:48:43,880
ज्यादा एनर्जी की जरूरत है कि नहीं है जहां जहां पर सूर्य बन रहा

1455
01:48:43,880 --> 01:48:47,920
है वहां पर ज्यादा एनर्जी और जहां पर पृथ्वी बन रही है वहां पर कम

1456
01:48:47,920 --> 01:48:53,440
एनर्जी जरूरत है कि नहीं है पह

1457
01:48:53,440 --> 01:48:56,920
हां पह या

1458
01:48:56,920 --> 01:49:01,720
ईश्वर स्वयं को रेगुलेट करेगा ना कि भाई कहां पर पृथ्वी बनने लायक

1459
01:49:01,720 --> 01:49:06,400
एनर्जी का यूज होना है और कहां पर सूर्य बनने लायक एनर्जी का यूज हो रहा है

1460
01:49:06,400 --> 01:49:10,560
हां तो बिल्कुल सही बोला लेकिन ये नहीं कह सकते कि एक जगह तो कार्य कर रहा

1461
01:49:10,560 --> 01:49:14,600
है लेकिन दूसरी जगह कार्य नहीं कर रहा मैं ये नहीं कह रहा हूं कि एक जगह

1462
01:49:14,600 --> 01:49:18,800
कार्य कर रहा है मैं ये नहीं मेरा कहना ही नहीं वो अपने आप को कम ज्यादा कर रहा

1463
01:49:18,800 --> 01:49:23,600
है जबकि वो समग्र रूप से एक रस होकर के सर्वत्र व्याप्त है

1464
01:49:23,600 --> 01:49:24,100
वो

1465
01:49:23,880 --> 01:49:27,960
अपने आप को सर ऊपर नीचे नहीं कर र वो ऊर्जा को जो अपनी ऊर्जा है

1466
01:49:27,960 --> 01:49:32,040
जो प्राण है उसको वो किसी जगह पर कारण कई परिणाम

1467
01:49:32,040 --> 01:49:36,240
निकलते एक परिणाम अलग है दूसरा परिणाम अलग है उसका कारण है अलग-अलग

1468
01:49:36,240 --> 01:49:40,320
कारणों के कारण अलग-अलग कारण जैसे बीज है तो बीज से

1469
01:49:40,320 --> 01:49:44,600
अगर पेड़ बनेगा तो सिर्फ बीज कारण नहीं होता कारण होता है पानी

1470
01:49:44,600 --> 01:49:48,920
कारण होता है वायु कारण होती है सूर्य तो अलग-अलग कारणों

1471
01:49:48,920 --> 01:49:52,920
से एक परिणाम निकलता है तो सूर्य अग बना है

1472
01:49:52,920 --> 01:49:56,960
परिणाम है आप एक बात बताइए कि आप तत्व कितने मान

1473
01:49:56,960 --> 01:50:01,320
रहे हैं यहां पर पंच भाई एक तो प्रकृति

1474
01:50:01,320 --> 01:50:05,400
तत्व हो गया एक जीव तत्व हो गया एक ईश्वर

1475
01:50:05,400 --> 01:50:09,760
तत्व हो गया तो आप शक्ति जो ईश्वर की है वो उससे अलग कैसे गिन रहे

1476
01:50:09,760 --> 01:50:14,040
हैं मैं तो गिन ही नहीं रहा हूं अलग मैं कह रहा हूं ईश्वर की ही शक्ति

1477
01:50:14,040 --> 01:50:18,120
है ईश्वर ही कार्य कर रहा है ना शक्ति के रूप में

1478
01:50:18,120 --> 01:50:22,240
बिल्कुल बिल्कुल तो जब ईश्वर कार्य कर रहा है तो अपने आप को कम ज्यादा

1479
01:50:22,240 --> 01:50:26,480
कर रहा है कि मैं यहां पर ज्यादा एक्टिव हो वहां पर कम एक्टिव हो वहा पर फोर्स

1480
01:50:26,480 --> 01:50:31,240
ज्यादा लगे यहां पर फोर्स जो है कम लगे

1481
01:50:31,240 --> 01:50:35,440
पहली बात अगर वह सूर्य में कोई कार्य कर रहा है पृथ्वी

1482
01:50:35,440 --> 01:50:39,560
में कोई कार्य कर रहा है मैंने फिर बोला उसका परिणाम अलग अलग है लेकिन आप य कह दो

1483
01:50:39,560 --> 01:50:43,560
कि यहां पर ज्यादा कार्य कर र य पर कम कार्य कर र है यह कोई तर्क संगत

1484
01:50:43,560 --> 01:50:47,640
नहीं रहता कि आप देख लो तक संगत है मान लीजिए मान

1485
01:50:47,640 --> 01:50:51,720
लीजिए कि एक जगह मुझे 100 किलो की बोरी उठानी है

1486
01:50:51,720 --> 01:50:55,840
और एक जगह मुझे जो है 5 किलो की बोरी उठानी है तो जहां

1487
01:50:55,840 --> 01:51:00,120
पर मैं 100 किलो की बोरी उठाऊंगा वहां प फोर्स ज्यादा लगाऊंगा ना फोर्स

1488
01:51:00,120 --> 01:51:04,200
ज्यादा लगेगी ना कंपेरटिवली टू जहां पर मुझे 5 किलो की बोरी उठानी है

1489
01:51:04,200 --> 01:51:08,280
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सही तो यहां पर मैंने अपने आप को रेगुलेट किया ना कम ज्यादा

1490
01:51:08,280 --> 01:51:12,280
कर लिया ना जबकि मैं समान रूप से सब जगह व्याप्त था

1491
01:51:12,280 --> 01:51:16,640
हम बिल्कुल तो रेगुलेट हो गया ना इससे यह सा पहली

1492
01:51:16,640 --> 01:51:21,480
पहली बात चलो ठीक है आपने इससे यह साबित कैसे होता है कि अवतार ले रहे हैं

1493
01:51:21,480 --> 01:51:25,680
इससे इससे अवतरित होना अवतरित अवतरित

1494
01:51:25,680 --> 01:51:30,040
होना सिद्ध हुआ ना कि जो ईश्वर स सर्वव्यापक था

1495
01:51:30,040 --> 01:51:34,240
एक रस था उस कहीं पर भी कम ज्यादा नहीं था अब वोह कम ज्यादा के रूप

1496
01:51:34,240 --> 01:51:38,400
में काम कर रहा है इसको कह दिया अवतरित होना यह वो वाला

1497
01:51:38,400 --> 01:51:42,800
अवतार नहीं है जो जो ये वो वाला अवतार नहीं है अभी भी मैं बताऊंगा

1498
01:51:42,800 --> 01:51:46,240
यह वो वाला अवतार नहीं है अभी भी जो आंखों से दिखाई दे मगर अवतरित

1499
01:51:46,240 --> 01:51:50,480
हुआ ना हुआ ना किसी देश काल परिस्थिति

1500
01:51:50,480 --> 01:51:55,240
में उसने जब सृष्टि की रचना की तो वो अपने आप से अवतरित हुआ

1501
01:51:55,240 --> 01:51:59,360
जो काम मेरी खोपड़ी कर जो काम मेरी खोपड़ी कर सकती है वो काम मेरे

1502
01:51:59,360 --> 01:52:03,400
हाथ नहीं कर सकते और जो काम मेरे हाथ कर सकते हैं वो काम मेरी खोपड़ी नहीं

1503
01:52:03,400 --> 01:52:07,920
कर सकती है ना मगर इसीलिए

1504
01:52:07,920 --> 01:52:11,280
हम लोग एक रस नहीं है हाथ जो कर सकते हैं वो खोपड़ी

1505
01:52:11,280 --> 01:52:15,320
भगवान एक रस है तो एक रस से जब वो सृष्टि का निर्माण करेगा

1506
01:52:15,320 --> 01:52:19,640
तो उसे अवतरित होना उतरना पड़ेगा अवतरित होना पड़ेगा

1507
01:52:19,640 --> 01:52:22,880
तो जो निर्गुण निराकार ईश्वर है वो सगुण निराकार बना

1508
01:52:22,880 --> 01:52:27,000
सगुण हो गया निराकार है निराकार अभी भी है मगर सगुण

1509
01:52:27,000 --> 01:52:31,320
हो गया अवतार ले लिया उसने आपको अपने आपको को क्या किया उसने कस्टमाइज

1510
01:52:31,320 --> 01:52:35,560
किया कि मैं कहां पर कम कम वो हूं एक्टिव और कहां पर ज्यादा

1511
01:52:35,560 --> 01:52:39,800
एक्टिव हूं यहां चर्चा है नहीं कि स सगुण था निराकार

1512
01:52:39,800 --> 01:52:43,000
था मैं कह रहा हूं वो सगुण भी है वो निराकार भी है

1513
01:52:43,000 --> 01:52:47,480
लेकिन यह कह देना कि ए तो ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है य ईश्वर को संकुचित

1514
01:52:47,480 --> 01:52:49,040
करने वाली बात है

1515
01:52:49,040 --> 01:52:53,080
देखिए अभी अभी बात बदल रही है अभी क्या था कि ईश्वर जब सब पहले से

1516
01:52:53,080 --> 01:52:57,160
ही व्याप्त है ईश्वर जब सब जगह पहले से ही व्याप्त है

1517
01:52:57,160 --> 01:53:01,600
तो उसका आना जाना सिद्ध नहीं हो रहा ईश्वर सब जगह पहले से ही व्याप्त है

1518
01:53:01,600 --> 01:53:06,600
मगर ईश्वर के सगुण स्वरूप का आना जाना सिद्ध हो

1519
01:53:06,600 --> 01:53:10,600
गया सगुण रूप अगर ईश्वर ने सगुण रूप लिया

1520
01:53:10,600 --> 01:53:15,000
है तो यह भेद नहीं हो सकता कि आप अलग हो और मैं अलग हूं

1521
01:53:15,000 --> 01:53:19,120
य तोय तो बात की बात ये बात की बात है अभी हम एक तर्क को काट रहे

1522
01:53:19,120 --> 01:53:23,480
हैं केवल अभी ये अगला चरण है ऐसा नहीं है इसका उत्तर नहीं है

1523
01:53:23,480 --> 01:53:28,120
इसका उत्तर नहीं है ऐसा नहीं है मगर अभी हम केवल एक तर्क को पकड़ रहे हैं

1524
01:53:28,120 --> 01:53:32,160
कि जैसे कि आपने तर्क दिया कि जो सब जगह पहले से ही व्याप्त है

1525
01:53:32,160 --> 01:53:36,360
उसका आना जाना कैसे सिद्ध होगा अच्छा आप एक बात बताओ कि भगवान

1526
01:53:36,360 --> 01:53:40,800
सब जगह पहले से व्याप्त है ये तो मानते ही हो ना व्याप्त है

1527
01:53:40,800 --> 01:53:44,920
तो एक बात बताओ कि किसी देश काल

1528
01:53:44,920 --> 01:53:49,080
परिस्थिति में जो इनका जो ये है ऋषियों का

1529
01:53:49,080 --> 01:53:53,440
मस्तिष्क उसमें जो वेद मंत्र है

1530
01:53:53,440 --> 01:53:57,920
वो कैसे प्रकट हो रहे हैं ईश्वर तो पहले से ही था

1531
01:53:57,920 --> 01:54:01,920
कैसे प्रकट हो रहे हैं ठीक है कैसे कैसे प्रकट हो रहे हैं ठीक

1532
01:54:01,920 --> 01:54:05,960
है सिंपल प्रश्न है कैसे प्रकट हो रहे हैं पहली बात वह पुरुष

1533
01:54:05,960 --> 01:54:10,040
है या पुरुष के द्वारा लिखे गए है या ईश्वर के द्वारा आए है इसमें क्या है कि

1534
01:54:10,040 --> 01:54:14,120
वह अभ्यास के द्वारा हो रहे है ऐसे नहीं कि एकदम

1535
01:54:14,120 --> 01:54:18,320
से उतर गया पह व तो भी कहते हैं कि भगवान अभ्यास के द्वारा

1536
01:54:18,320 --> 01:54:22,560
अपना दर्शन दे देते हैं इसी देश काल परिस्थिति में बिल्कुल

1537
01:54:22,560 --> 01:54:26,640
मैंने तो इस को काट रहा हूं मैं इस तर्क को काट रहा हूं जो

1538
01:54:26,640 --> 01:54:30,640
पहले से ही है अगर ईश्वर सबके पास है तो

1539
01:54:30,640 --> 01:54:34,880
ईश्वर के रूप में उसका ज्ञान भी है वेद मंत्र भी है फिर

1540
01:54:34,880 --> 01:54:39,000
किसी देश काल परिस्थिति में कोई उनका दृष्टा क्यों बन रहा है

1541
01:54:39,000 --> 01:54:43,080
इसका मतलब ईश्वर होते हुए भी पार मर्थक रूप से ईश्वर

1542
01:54:43,080 --> 01:54:47,600
होते हुए भी व्यवहारिक रूप से उसका आना जाना सिद्ध होता है

1543
01:54:47,600 --> 01:54:52,360
य बात अजीब लग रही है मुझे एक बात बहुत नता समझाना

1544
01:54:52,360 --> 01:54:56,440
कि वह सर्वव्यापी है अब वो सर्वव्यापी है वो यहां भी है

1545
01:54:56,440 --> 01:54:59,960
यहां भी है अब उसने यहां पर अवतार लिया अरे जब वो

1546
01:54:59,960 --> 01:55:04,160
यहां पर है ही तो अवतरित क्यों हो रहा है मैं बता रहा हूं मैं बता रहा

1547
01:55:04,160 --> 01:55:08,880
हूं वो जहां हर जगह है वो पार मर्थक रूप से आध्यात्मिक

1548
01:55:08,880 --> 01:55:12,880
दृष्टि से है आध्यात्मिक दृष्टि समझते हैं आप जैसे कि कोई मुक्त होता

1549
01:55:12,880 --> 01:55:17,680
है यहां से तो क्या आकाश का कोई गेट खुलता है

1550
01:55:17,680 --> 01:55:21,800
नहीं खुलता ना नहीं तो यानी कि उसका केवल एक डायमेंशन चेंज

1551
01:55:21,800 --> 01:55:26,000
होता है गेट नहीं खुलता है कोई कि आकाश में कोई गेट खुला और

1552
01:55:26,000 --> 01:55:30,080
थोर की तरह इस दुनिया से उस दुनिया में चले गए ये सब नहीं होता है डायमेंशन

1553
01:55:30,080 --> 01:55:34,160
चेंज होता हा तो इसी तरीके से यह जो भगवान हर

1554
01:55:34,160 --> 01:55:38,440
जगह है यह आध्यात्मिक उससे है फिर वो व्यवहारिक रूप में प्रकट

1555
01:55:38,440 --> 01:55:42,880
हो जाता है मतलब कि बिल्कुल ऐसे जैसे कि मक्खन

1556
01:55:42,880 --> 01:55:46,960
दूध में है मगर अभ्यास करने पर मक्खन प्रकट हो जाता है काट

1557
01:55:46,960 --> 01:55:51,000
की लकड़ में तो यह अभ्यास करने से प्रकट हो जाता

1558
01:55:51,000 --> 01:55:56,120
है यूं ही प्रकट होता विष्णु का

1559
01:55:56,120 --> 01:56:00,200
अभी आपने बोला अभ्यास करने से ठीक है तो अभी हम तर्क

1560
01:56:00,200 --> 01:56:04,400
ये वाला काट रहे हैं कि जो पहले से ही व्याप्त है वो उसका आना जाना सिद्ध

1561
01:56:04,400 --> 01:56:08,400
नहीं होता है होता है अभ्यास करने से होता है पर होता है

1562
01:56:08,400 --> 01:56:12,600
आना जाना सिद्ध नहीं होता अब वो जान गया कि वो ईश्वर ही है पहले वो जानता

1563
01:56:12,600 --> 01:56:17,120
नहीं था अरे आप दूसरी जग जा रहे आत्मा

1564
01:56:17,120 --> 01:56:21,520
है हो जाए तो क्या भगवान नहीं है आप जो है अध्यात्म

1565
01:56:21,520 --> 01:56:25,560
को और इसको आध्यात्मिक दुनिया को भौतिक जगत को एक

1566
01:56:25,560 --> 01:56:29,600
करके चल रहे दिक्कत य मैंने अभी आपको बताया कि ईश्वर

1567
01:56:29,600 --> 01:56:33,640
जब सब जगह व्याप्त है तो किसी देश काल परिस्थिति

1568
01:56:33,640 --> 01:56:38,360
में जो ऋषि है वह मंत्रों के दृष्टा कैसे बन रहे हैं बताइए

1569
01:56:38,360 --> 01:56:42,400
इसको ठीक से बताइए मैंने कहा अभ्यास करके

1570
01:56:42,400 --> 01:56:46,400
ध्यान करके अभ्यास करके जो चीज उनके पास पहले से थी उसी का दर्शन कर

1571
01:56:46,400 --> 01:56:50,680
रहे हैं उनके पास तो पहले से थी ना वो चीज वो चीज है ही

1572
01:56:50,680 --> 01:56:54,720
वो चीज है ही कोई नई तो चीज आई नहीं ना मैं ये कह नहीं सकता कि

1573
01:56:54,720 --> 01:56:59,160
परमात्मा परमात्मा है ही अब देखिए अगर मैं

1574
01:56:59,160 --> 01:57:03,640
मैं हूं मैं जीव आत्मा हं जानता नहीं हूं मानता हूं अभ्यास

1575
01:57:03,640 --> 01:57:07,640
करके मुझे अनुभव हुआ कि मैं जीव आत्मा हूं और जीवात्मा मुक्त हो

1576
01:57:07,640 --> 01:57:11,160
गई ठीक आपकी बात समझ गया मैं आपकी बात

1577
01:57:11,160 --> 01:57:15,360
समझ गया इसको ऐसे समझ लीजिए कि हमारे दो तरीके के ट्रुथ

1578
01:57:15,360 --> 01:57:19,720
होते हैं एक होता है बिहेवियरल ट्रुथ

1579
01:57:19,720 --> 01:57:24,080
एक होता है स्पिरिचुअल ट्रुथ जो टनल होता है जैसे की पृथ्वी

1580
01:57:24,080 --> 01:57:28,480
गोल है यह हमको किस दृष्टि से पता है

1581
01:57:28,480 --> 01:57:32,600
सेटेलाइट इत्यादि की दृष्टि से हम देख रहे तो पृथ्वी गोल है मगर पृथ्वी

1582
01:57:32,600 --> 01:57:36,920
हमें दिख कैसी रही है फ्लैट चप फ्लैट

1583
01:57:36,920 --> 01:57:41,080
अब हम व्यवहार कैसा करेंगे फ्लैट

1584
01:57:41,080 --> 01:57:45,520
के अनुसार जब हम फ्लैट के अनुसार व्यवहार करेंगे सैटेलाइट बनाएंगे

1585
01:57:45,520 --> 01:57:49,760
एरोप्लेन बनाएंगे तब हम पृथ्वी की पदी से बाहर निकलेंगे फिर कहेंगे हां

1586
01:57:49,760 --> 01:57:54,120
यह पृथ्वी जो है गोल है इसी तर अभ्यास के माध्यम

1587
01:57:54,120 --> 01:57:58,240
से अरे मेरी बात सुन लो सुन लो ईश्वर का अवतार

1588
01:57:58,240 --> 01:58:02,320
का होना सिद्ध होता है व्यवहारिक रूप से आना

1589
01:58:02,320 --> 01:58:06,760
जाना जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर आता है जाता है तो यह व्यवहारिक

1590
01:58:06,760 --> 01:58:10,880
रूप से है और पार मर्थक रूप से तो ईश्वर सब जगह है ही

1591
01:58:10,880 --> 01:58:15,360
वो तो है ही मगर मगर मगर उसके अनुसार

1592
01:58:15,360 --> 01:58:19,480
मैं अपनी बात पूरी कर लू मगर उसके अनुसार हम लोग बिहेव नहीं कर सकते

1593
01:58:19,480 --> 01:58:23,640
क्यों नहीं कर सकते जैसे कि ईश्वर हर जगह है तो ईश्वर तो माता

1594
01:58:23,640 --> 01:58:26,240
भी है और पत्नी भी है क्या करोगे एक जैसा

1595
01:58:26,240 --> 01:58:30,360
बिहेव करोगे क्या देखिए बिल्कुल

1596
01:58:30,360 --> 01:58:34,560
सही बोला एक जैसा हा अलग अलग बिहेव करे क्योंकि अभी हम भौतिक उसम

1597
01:58:34,560 --> 01:58:39,000
है ठीक है बात लेकिन सूक्ष्म

1598
01:58:39,000 --> 01:58:43,080
दृष्टिकोण से देखा जाएगा तो यह कह देना कि व अवतरित हुआ

1599
01:58:43,080 --> 01:58:47,080
यह एक देखो ऊपरी रूप से तो मैं मानता हूं कि सभी ये बात हम

1600
01:58:47,080 --> 01:58:51,120
भी कह रहे हैं ये बात हम भी कह रहे हैं सूक्ष्म दृष्टिकोण से तो भगवान

1601
01:58:51,120 --> 01:58:55,320
जो है सब जगह पहले से ही सर्वत्र व्याप्त है मगर जो व्यवहारिक

1602
01:58:55,320 --> 01:58:57,320
दृष्टिकोण है उसमें भगवान का आना जाना

1603
01:58:57,320 --> 01:59:01,360
सिद्ध होता है हम भी यही कहते हैं हम कोई अलग नहीं कह रहे

1604
01:59:01,360 --> 01:59:05,600
अगर आप ये बात मानने वाले है जो भेद है

1605
01:59:05,600 --> 01:59:09,880
इसके सूत्रम शैली में समझिए भेद का निर्वाह करके

1606
01:59:09,880 --> 01:59:14,200
अभेद तक पहुंचा जाता है जो अद्वैत है वोह हो गया परमार्थिक

1607
01:59:14,200 --> 01:59:18,240
धरातल पर प्राप्त का विषय तो निर्वाह किसका करेंगे भेद का

1608
01:59:18,240 --> 01:59:22,240
क्योंकि हम लोग अज्ञान से अविद्या से ग्रसित हो गए तो

1609
01:59:22,240 --> 01:59:26,240
अब हो गए तो अब क्या करें अविद्या के अनुसार उस अविद्या

1610
01:59:26,240 --> 01:59:30,600
का पालन करो जो अविद्या तुम्हारी मुक्ति की हेतु बन जाए

1611
01:59:30,600 --> 01:59:34,600
जैसे कि धरती पर गिरा हुआ इंसान धरती का सहारा लेकर उठ

1612
01:59:34,600 --> 01:59:38,680
खड़ा होता है जैसे कि एक एरोप्लेन है उसको यदि धरती से

1613
01:59:38,680 --> 01:59:43,080
मुक्त होना है आकाश में उड़ना है तो पहले धरती पर ही दौड़ता है

1614
01:59:43,080 --> 01:59:47,760
उसी प्रकार से हम जब अविद्या में आ गए हैं तो हमारा बिहेव होगा

1615
01:59:47,760 --> 01:59:52,040
किसके अनुसार अविद्या की चीजों के अनुसार

1616
01:59:52,040 --> 01:59:56,280
शास्त्रों में अविद्या अविद्या इनको भी कहा गया वेद को भी अविद्या कहा गया शास्त्रों

1617
01:59:56,280 --> 02:00:01,160
में तो अविद्या यह वो अविद्या है जो हमें मुक्त कराएगी होता

1618
02:00:01,160 --> 02:00:07,160
है ना अविद्या के भी रूप होते हैं तो ये वो

1619
02:00:08,160 --> 02:00:10,800
अविद्या ये वो अविद्या है जो मुक्त कराएगी

1620
02:00:10,800 --> 02:00:14,840
तो व्यवहारिक दृष्टि से माता बहन पत्नी यह सब अलग अलग

1621
02:00:14,840 --> 02:00:19,200
है सूक्ष्म दृष्टि से माता और बहन और पत्नी में कोई अंतर नहीं

1622
02:00:19,200 --> 02:00:23,200
मगर वो मुक्त की दृष्टि से वो ब्रह्म की दृष्टि से मनुष्य

1623
02:00:23,200 --> 02:00:27,320
की दृष्टि से माता अलग है बहन अलग है बेटी अलग है पत्नी अलग

1624
02:00:27,320 --> 02:00:27,880
है

1625
02:00:27,880 --> 02:00:31,880
यह मनुष्य की दृष्टि है जब हम मुक्त हो जाएंगे जब हम मुक्त

1626
02:00:31,880 --> 02:00:35,960
हो जाएंगे तो माता बहन पत्नी एक इसका एक और एग्जांपल है अच्छा लग रहा

1627
02:00:35,960 --> 02:00:39,960
आपसे बात कर बोलिए इसका एक एपल और है नैनम

1628
02:00:39,960 --> 02:00:44,840
छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पावक न चैन क्लेप

1629
02:00:44,840 --> 02:00:48,840
न शति मारुता अब इसमें कह रहे

1630
02:00:48,840 --> 02:00:52,840
हैं कि तुमको ना कोई तुम आत्मा हो और तुमको ना कोई काट सकता है

1631
02:00:52,840 --> 02:00:56,960
ना कोई छीर सकता है ना जला सकता है ये सब चीजें इसमें कही जा रही है मगर

1632
02:00:56,960 --> 02:01:01,520
अभी जब हाथ घुमा देगा मेरी ओर कोई तो पलक झपक जाएगी भय

1633
02:01:01,520 --> 02:01:06,280
क्योंकि थ्योर कली मैंने जान लिया है कि आत्मा मर नहीं सकती

1634
02:01:06,280 --> 02:01:10,880
मगर प्रैक्टिकली अभी मैंने इसको एमप्लीफाई करना नहीं सीखा है

1635
02:01:10,880 --> 02:01:14,960
तो क्या है कि प्रैक्टिकली अभी मुझे जो अज्ञानता का प्राप्त है उसी

1636
02:01:14,960 --> 02:01:19,160
अज्ञानता में से वो अज्ञानता ढूंढनी पड़ेगी जिस अज्ञानता का आलंबन लेकर

1637
02:01:19,160 --> 02:01:23,480
के मैं इस अज्ञानता से मुक्त हो पाऊं उसी का नाम धर्म है उसी का नाम वेद है

1638
02:01:23,480 --> 02:01:24,760
उसी का नाम सनातन

1639
02:01:24,760 --> 02:01:28,960
है तो यह सूक्ष्म दृष्टि की बात है कि ईश्वर सब जगह है मगर

1640
02:01:28,960 --> 02:01:33,120
व्यवहार में ईश्वर का आना जाना सिद्ध होता है जैसे सूक्ष्म दृष्टि

1641
02:01:33,120 --> 02:01:37,360
की बात है कि ईश्वर का ज्ञान सब जगह है मगर व्यवहार में ऋषियों

1642
02:01:37,360 --> 02:01:41,480
द्वारा उसके वेद मंत्रों का दृष्टा होना सिद्ध होता है किसी देश काल

1643
02:01:41,480 --> 02:01:45,680
परिस्थिति में जी ठीक है मैं अपनी बात एक बार ककलेट कर देता हू पू अच्छी तरीके

1644
02:01:45,680 --> 02:01:49,800
से यहां बात मैं ये कह रहा हूं कि अभ्यास के माध्यम

1645
02:01:49,800 --> 02:01:53,880
से जब जीव आत्मा जान जा कि व परमात्मा है तो जीवात्मा

1646
02:01:53,880 --> 02:01:57,880
और परमात्मा में भेद नहीं रहता तो उसी जीवात्मा को अगर भगवान कह

1647
02:01:57,880 --> 02:02:02,000
दिया जाए तो इसमें क्या गलती है पहली बात जब वो जान गई जब

1648
02:02:02,000 --> 02:02:06,120
अभ्यास से जान गई ठीक है तार्किक दृष्टिकोण से मैं ये कह रहा हूं कि

1649
02:02:06,120 --> 02:02:10,400
जब मैं कहूंगा कि वह अवतरित हुआ तो अगर मैं कहू अवतरित हुआ मतलब

1650
02:02:10,400 --> 02:02:14,440
उतरा पर वो पहले भी वही था लेकिन हम मैं ये कह सकता हूं

1651
02:02:14,440 --> 02:02:18,440
कि वो जागा जान गया कि व परमा बकल

1652
02:02:18,440 --> 02:02:22,640
बिल्कुल बिल्कुल वो देखिए मुक्त की दृष्टि ब्रह्म की दृष्टि

1653
02:02:22,640 --> 02:02:26,880
जो है ब्रह्म कौन है मुक्त जो ब्रह्म की दृष्टि है उसके अनुसार

1654
02:02:26,880 --> 02:02:30,880
वो जागा ही है केवल वो ब्रह्म स्वरूप हो गया वो जागा भी नहीं

1655
02:02:30,880 --> 02:02:34,920
कुछ नहीं हुआ उसके उसको अपने स्वरूप का बोध हो गया मगर यहां जो

1656
02:02:34,920 --> 02:02:38,920
खड़ा है ये दो पर्सपेक्टिव है मान लीजिए बीच का हिस्सा है इसके

1657
02:02:38,920 --> 02:02:39,960
इधर ब्रह्म है

1658
02:02:39,960 --> 02:02:43,960
और इधर जो है हम तो ब्रह्म देख रहा है कि एक व्यक्ति जो है

1659
02:02:43,960 --> 02:02:48,040
मुक्त हो गया ब्रह्म स्वरूप हो गया हम देख रहे हैं व्यक्ति जो

1660
02:02:48,040 --> 02:02:52,080
है उसके रूप में ईश्वर जो है अवतरित हो गया इसको मैं एक बात ऐसे कहूंगा

1661
02:02:52,080 --> 02:02:56,400
कि जैसे जो सुखदेव जी का प्रकरण आता है महाभारत में महाभारत

1662
02:02:56,400 --> 02:03:00,520
में सुखदेव जी का प्रकरण आता है सुखदेव जी मुक्त मुक्त हो गए थे ठीक

1663
02:03:00,520 --> 02:03:05,120
है अब जब वो मुक्त हो गए तो उसके बाद उन्होंने ये जो

1664
02:03:05,120 --> 02:03:09,240
हमारी जो गुरु परंपरा है शंकराचार्य की इसमें उनको दर्शन कैसे दे

1665
02:03:09,240 --> 02:03:13,400
दिया जब वो मुक्त हो गए महाभारत में तो व्यवहारिक दृष्टि

1666
02:03:13,400 --> 02:03:17,560
से हमने क्या देखा कि हमारे पास सुखदेव जी आए

1667
02:03:17,560 --> 02:03:21,840
लक्षण साम्य से वस्तु साम्य मानी जाती है हमने उनसे पूछा तुम्हारे पिता

1668
02:03:21,840 --> 02:03:26,040
का नाम क्या उन्होंने बता दिया हमने उनसे गुण से गुण सवाल किए उन्होंने सब बता दिया

1669
02:03:26,040 --> 02:03:30,200
उनके जो तिल था वो भी वही प है सुखदेव जी के तो हमने ये माना

1670
02:03:30,200 --> 02:03:34,240
कि सुखदेव जी ही आए हमें ज्ञान देने मगर वास्तव में कौन आया था

1671
02:03:34,240 --> 02:03:38,320
ब्रह्म में लीन क्योंकि सुखदेव जी तो ब्रह्म स्वरूप हो गए थे मोक्ष तो ब्रह्म ही

1672
02:03:38,320 --> 02:03:42,680
आए थे तो ब्रह्म ही तो है जो आपके हमारे सबके रूप में है मगर यह ब्रह्म

1673
02:03:42,680 --> 02:03:47,160
दृष्टि की सच्चाई है व्यवहारिक सच्चाई क्या है कि आप जो है

1674
02:03:47,160 --> 02:03:51,840
जो आपका नाम होगा वो है मैं जो हूं मैं वो हूं जो मेरा नाम है ये हमारी व्यवहारिक

1675
02:03:51,840 --> 02:03:55,320
चाहिए अब इसका व्यवहार का आलंबन लेकर के

1676
02:03:55,320 --> 02:03:59,320
हम लोग वो जो परमार्थ है उसको सिद्ध करते हैं व्यवहार अब ये धर्म

1677
02:03:59,320 --> 02:04:03,440
की उपयोगिता क्या है अगर अगर हम लोग सब कुछ सूक्ष्म दृष्टि से ही देखने

1678
02:04:03,440 --> 02:04:08,080
लगे तो धर्म की कोई उपयोगिता ही नहीं है धर्म तो वही पर काम करे

1679
02:04:08,080 --> 02:04:12,200
यहां जो हमारा भेद था वो यह था कि यह बात कह नहीं जा रही कि जो

1680
02:04:12,200 --> 02:04:16,480
जागा हुआ व्यक्ति है वही भगवान है क्योंकि अगर जैसे कि आप बाल्मीकि रामायण में पढ़ते हो

1681
02:04:16,480 --> 02:04:20,520
तो वहां पर विश्वामित्र को भी राम भगवान के से संबोधित कर रहे हैं वहां

1682
02:04:20,520 --> 02:04:24,600
वशिष्ठ जी को भी भवान के संबोधित करे लेकिन राम जी को वहा पर भगवान

1683
02:04:24,600 --> 02:04:28,880
बोला रामचरित मानस में जाकर उनको भगवान के रूप में दर्शाया जाता है

1684
02:04:28,880 --> 02:04:33,000
तो इसमें मैं यह कहूंगा जागा हुआ व्यक्ति भी भगवान

1685
02:04:33,000 --> 02:04:37,400
आप वो चीज सही कह रहे परमार्थिक दृष्टि से मगर इसमें बात आ जाएगी

1686
02:04:37,400 --> 02:04:41,600
कि जो हमारे परंपरा प्राप्त वेदा आदि शास्त्र है उसने किस

1687
02:04:41,600 --> 02:04:45,800
किस कौन कौन किस किस व्यक्ति को स्वीकार किया है उसको ही हम मानेंगे

1688
02:04:45,800 --> 02:04:49,920
कि हा यह जागा हुआ है अब मैं कह द मैं जागा हूं तो मुझे थोड़ी ना भगवान

1689
02:04:49,920 --> 02:04:52,000
माना जाएगा क्यों क्योंकि शास्त्र नहीं बोल रहे

1690
02:04:52,000 --> 02:04:56,280
है तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो हम लोग

1691
02:04:56,280 --> 02:05:00,400
जागा हुआ उसे ही मानेंगे जिस जिसको हमारा वेद कहेगा अब ऐसे तो बुद्ध भी

1692
02:05:00,400 --> 02:05:04,520
थे हमारे बीच में भेद यही है एक छोटी सी बात कह ता

1693
02:05:04,520 --> 02:05:08,800
हूं हमारे बीच में भेद यही है कि आप ये कह रहे हो कि जो परंपरावादी

1694
02:05:08,800 --> 02:05:13,160
लोग जो है उन्होंने जो कह दिया कि ये भगवान है तो परंपरावादी

1695
02:05:13,160 --> 02:05:17,400
नहीं परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ

1696
02:05:17,400 --> 02:05:21,880
नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं

1697
02:05:21,880 --> 02:05:26,320
परंपरावादी गुरु अ कभी कभी होता है कि गुरु और गोविंद

1698
02:05:26,320 --> 02:05:30,520
मिलकर के ग्रंथ को वो करते वेरीफाई कभी-कभी

1699
02:05:30,520 --> 02:05:34,680
होता है कि ग्रंथ और गोविंद मिलकर के गुरु को वेरीफाई करते जैसे

1700
02:05:34,680 --> 02:05:38,880
कि गुरु कौन होना चाहिए तो शास्त्र में दिया हुआ है गुरु का परम लक्षण

1701
02:05:38,880 --> 02:05:42,920
जो है सन्यासी है परम लक्षण सन्यासी है शास्त्र में

1702
02:05:42,920 --> 02:05:47,160
दिया है अब दूसरी बात मनुष पति में लिखा है कि

1703
02:05:47,160 --> 02:05:51,680
धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए वही

1704
02:05:51,680 --> 02:05:55,760
छोड़ने त्याग करने विरक्त ता अच्छा भगवत गीता में योगी

1705
02:05:55,760 --> 02:05:59,920
को कई बार वैरागी होना होने वाला माना गया है वैराग्य होना चाहिए उसके

1706
02:05:59,920 --> 02:06:04,280
जीवन में वो 15 प एक है वहां पर तीसरे वाले श्लोक में कहा है कि वैराग्य

1707
02:06:04,280 --> 02:06:07,080
रूपी जो शस्त्र है उससे वो जो

1708
02:06:07,080 --> 02:06:11,600
वृक्ष प्रकृति का उसको काट दो जो माया है उसको काट दो वैराग्य

1709
02:06:11,600 --> 02:06:15,640
परम लक्षण क्या हुआ वैराग्य दूसरा लक्षण क्या हुआ कि

1710
02:06:15,640 --> 02:06:20,200
वो समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे

1711
02:06:20,200 --> 02:06:24,240
ऐसा ना करे कि इसमें य खा है तो ये तो मानूंगा इसमें ये लिखा है ये नहीं

1712
02:06:24,240 --> 02:06:28,280
मानूंगा अब जैसे कि मुंडकोपनिषद में ऋषि गण अपनी परंपरा

1713
02:06:28,280 --> 02:06:32,480
बता रहे हैं तो तीसरा प्रश्न यही है तीसरा जो वो है फैक्ट गुरु

1714
02:06:32,480 --> 02:06:36,600
को जानने का अब शास्त्र से हम गुरु को जान रहे हैं तो क्या हुआ कि उसमें

1715
02:06:36,600 --> 02:06:40,800
दिया गया है कि परंपरा प्राप्त जो सिद्धांत है वही ग्र ग्रहण

1716
02:06:40,800 --> 02:06:44,800
करने योग्य है अपने जो आदि शंकराचार्य जी गीता के भाष्य में ये

1717
02:06:44,800 --> 02:06:49,000
बात कह रहे हैं 13 अध्याय के दूसरे श्लोक में मुंडकोपनिषद में ऋषि

1718
02:06:49,000 --> 02:06:53,240
गण बता रहे अपनी परंपरा एक से लेकर चार तक में चार दो में भगवत गीता भगवान

1719
02:06:53,240 --> 02:06:57,680
श्री कृष्ण कह रहे हैं ज्ञान कैसे आ रहा है परंपरा से आ रहा है और तो और

1720
02:06:57,680 --> 02:07:01,800
यहां तक कि राम जी जो धर्म का साक्षात स्वरूप है वह

1721
02:07:01,800 --> 02:07:05,920
भी गुरु के पास जाते हैं अब जब गुरु के पास गए तो इसका मतलब यह है

1722
02:07:05,920 --> 02:07:10,440
कि उसका वो भी किसी ना किसी गुरु के पास जाए तो यह क्या हो गई परंपरा हम लोग

1723
02:07:10,440 --> 02:07:14,440
नॉर्मली आज की जो भौतिक शिक्षा है उसको प्राप्त करने के लिए यदि किसी के

1724
02:07:14,440 --> 02:07:18,440
पास जाते हैं तो हम लोग चाहते हैं कि वो सर्टिफाइड टीचर हो

1725
02:07:18,440 --> 02:07:22,320
सर्टिफाइड सर्टिफिकेशन क्या बता रहा है कि उस उसने वो अमुक

1726
02:07:22,320 --> 02:07:26,440
अमुक फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ कहां से पढ़ी उसके गुरु का नाम

1727
02:07:26,440 --> 02:07:30,760
क्या है क्या है उसका सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन तो जब वो बता देता है

1728
02:07:30,760 --> 02:07:34,800
तो हम उस पर रिलाई कर कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को सबसे पहले

1729
02:07:34,800 --> 02:07:39,040
सर्टिफाइड टीचर के पास भेजना चाहते हैं तो यह तीसरा पक्ष हो गया कि

1730
02:07:39,040 --> 02:07:43,560
परंपरा से क्यों परंपरा से क्योंकि हमारी श्रुति परंपरा है हमारा धर्म कैसे आया

1731
02:07:43,560 --> 02:07:47,640
परंपरा से आया अगर आज हम कहते कि हम वेदों को मानने वाले हैं तो वेद

1732
02:07:47,640 --> 02:07:51,720
हमारे पास आए कैसे परंपरा से अब यदि हमारे पास हमको पर

1733
02:07:51,720 --> 02:07:56,280
से वेद मिले हैं और हम हमको परंपरा पर विश्वास नहीं है

1734
02:07:56,280 --> 02:08:00,360
तो इसका मतलब यह हुआ हमारा यह विश्वास गलत है कि यह जो शलोक

1735
02:08:00,360 --> 02:08:04,520
मंत्र है यह ईश्वर द द्वारा प्रदत मंत्र ही है

1736
02:08:04,520 --> 02:08:08,840
क्योंकि वो व्यक्ति य हमसे अर्थ में झूठ बोल सकता है तो वह व्यक्ति हमसे

1737
02:08:08,840 --> 02:08:12,880
मंत्र में भी झूठ बोल सकता है हो सकता है ईश्वर ने कोई और मंत्र दिया हो

1738
02:08:12,880 --> 02:08:17,040
अज्ञानता के कारण या फिर द्वेष के कारण लालच के कारण उसने मंत्र

1739
02:08:17,040 --> 02:08:21,520
को बदल दिया होय अ ब

1740
02:08:21,520 --> 02:08:24,800
यदि वो अर्थ बदल

1741
02:08:24,800 --> 02:08:29,040
षय मैं गुरु का लक्षण बता रहा था तीसरा हो गया परंपरा फिर

1742
02:08:29,040 --> 02:08:33,240
एक चौथा और है कि गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे

1743
02:08:33,240 --> 02:08:37,280
गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला असतो मा सगम

1744
02:08:37,280 --> 02:08:37,780
त

1745
02:08:37,760 --> 02:08:41,760
जतिया म मतया तो गुरु वही जो आपका अंधकार दूर कर

1746
02:08:41,760 --> 02:08:45,840
दे तो यह क्या है ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि

1747
02:08:45,840 --> 02:08:50,040
नहीं अब गुरु वही जो सर्व शक्तिमान गुरु वही जो गोविंद

1748
02:08:50,040 --> 02:08:54,160
को गोविंद के रूप में गोविंद और ग्रंथ के द्वारा गुरु डिसाइड हुआ

1749
02:08:54,160 --> 02:08:58,600
कई बार ऐसा होता है जब गुरु और ग्रंथ के द्वारा गोविंद डिसाइड होता है

1750
02:08:58,600 --> 02:09:03,040
तो इसलिए केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद

1751
02:09:03,040 --> 02:09:03,540
नहीं

1752
02:09:03,400 --> 02:09:07,400
हमारे यहां तो यह तक बुद्ध के रूप में अगर आकर के उन्होंने ये कहा कि वेदों का

1753
02:09:07,400 --> 02:09:12,120
मत मानो यज्ञों की रक्षा के लिए तो हमने बुद्ध को ईश्वर का रूप तो माना

1754
02:09:12,120 --> 02:09:16,600
मगर हमने उनकी शिक्षाओं का अनुगमन नहीं किया क्योंकि

1755
02:09:16,600 --> 02:09:21,400
हम सनातनी वो है जो अपौरुषेय

1756
02:09:21,400 --> 02:09:25,640
रखते अपर जिनका जिनकी रचना ईश्वर ने भी नहीं की हम

1757
02:09:25,640 --> 02:09:30,200
उन शास्त्रों को मानते हैं मैंने ये प्रश्न किया था मुसलमानों से

1758
02:09:30,200 --> 02:09:34,240
मैंने प्रश्न किया था ये सब कटिंग नहीं निकालते फस गए थे मैंने कहा

1759
02:09:34,240 --> 02:09:38,360
कि अगर तुम्हारे अल्लाह ने बुराई को भी बनाया है शैतान को भी बनाया

1760
02:09:38,360 --> 02:09:43,840
है तो यह कैसे कहा जाए कि कुरान में बुराई नहीं

1761
02:09:43,840 --> 02:09:48,000
है जब तक आप अपर ग्रंथ की बात य ये तर्क

1762
02:09:48,000 --> 02:09:52,600
की पराकाष्ठा है सनातन में तर्क की पराकाष्ठा

1763
02:09:52,600 --> 02:09:56,800
क्यों पराकाष्ठा है कि भाई क्योंकि ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया

1764
02:09:56,800 --> 02:10:01,080
है तो अगर ईश्वर से प्रकट होने वाले ईश्वर के दिए हुए ग्रंथों को हम मान लेंगे ना

1765
02:10:01,080 --> 02:10:05,320
तो उसकी क्रेडिबिलिटी प भी प्रश्न हो जाएगा तो हम उन ग्रंथों को मानते हैं जिन्हें

1766
02:10:05,320 --> 02:10:09,360
ईश्वर ने भी नहीं रचा वो तो सदैव विद्यमान थे किस रूप में ईश्वर की सांस

1767
02:10:09,360 --> 02:10:13,480
के रूप में तोय ब्रक उपनिषद दो चर 10 में दिया हुआ है ईश्वर की

1768
02:10:13,480 --> 02:10:17,880
सांस के रूप में जो हमारे वेदा शास्त्र में वो सदैव विद्यमान थे

1769
02:10:17,880 --> 02:10:18,400
तो ये

1770
02:10:18,400 --> 02:10:22,560
इतने घटकों के द्वारा जो हमें ये होगा कि भा ये ईश्वर

1771
02:10:22,560 --> 02:10:26,760
का रूप है तो हम उसको मानेंगे क्योंकि हमना अब कोई स्वयं

1772
02:10:26,760 --> 02:10:30,840
को घोषित कर दे व बात अलग है मगर समस्ती के रूप से उसी को धर्म

1773
02:10:30,840 --> 02:10:34,840
माना जाएगा जो हमारे वेद शास्त्रों से उत्पन्न हो रहा होगा उसी को ब्रह्म

1774
02:10:34,840 --> 02:10:40,440
माना जाएगा जैसे कि एक प्रश्न य भी किया गया

1775
02:10:40,440 --> 02:10:44,600
था यह किया गया था अलंकार समाज के किसी व्यक्ति के द्वारा वो कहा

1776
02:10:44,600 --> 02:10:48,640
था उसने कि अगर वो मूर्ति

1777
02:10:48,640 --> 02:10:52,720
में आ जाता है तो फिर वहां क्या कहते हैं फलाना उसने

1778
02:10:52,720 --> 02:10:56,720
उतर था उसका कि फिर तो जीसस की मूर्ति में भगवान मान लो उसकी पूजा

1779
02:10:56,720 --> 02:11:00,920
कर लो जीसस की मूर्ति को भगवान मान लो उसकी पूजा कर लो क्यों नहीं करते

1780
02:11:00,920 --> 02:11:05,080
हम लोग क्योंकि वो वैदिक नहीं है अब इसमें प्रश्न क्या बनता है कि जब सब

1781
02:11:05,080 --> 02:11:09,200
कुछ भगवान है निराकार भगवान सर्वत्र व्याप्त है तो केवल प्रणव

1782
02:11:09,200 --> 02:11:13,280
क्यों प्रणव को मानता है ना आर्य समाज केवल प्रणव क्यों दूसरा

1783
02:11:13,280 --> 02:11:17,320
कोई शब्द उठा लो दो तीन चार कोई भी उठा लो और उसको

1784
02:11:17,320 --> 02:11:21,400
मान लो भगवान नहीं क्यों क्योंकि प्रणव जो है वेद द्वारा

1785
02:11:21,400 --> 02:11:25,600
दत्त है इसलिए हम उसका आलंबन हमने क्या कहा ये वो अविद्या

1786
02:11:25,600 --> 02:11:30,320
है जो हमें अविद्या से मुक्त कराएगी तो वेदों का सहारा इसलिए चाहिए

1787
02:11:30,320 --> 02:11:33,600
किसी को भी ईश्वर के रूप में स्वीकार करने के लिए क्योंकि वेदों

1788
02:11:33,600 --> 02:11:37,920
द्वारा बताई गई वो विद्या अविद्या है जो हमें अविद्या से ही मुक्त कराएगी जैसे

1789
02:11:37,920 --> 02:11:42,040
नाव चलते समय चप्पू चलाते हैं ना तो नदी के पानी

1790
02:11:42,040 --> 02:11:46,880
का ही उपयोग कर रहे हैं आगे नाव को धकेलने के लिए वो चीज जी

1791
02:11:46,880 --> 02:11:51,000
वैसे मेरा विषय परंपरा या इस विषय में मैं बिल्कुल नहीं बोलना चाहूंगा ठीक

1792
02:11:51,000 --> 02:11:55,000
है बात हमारी अवतारवाद के ऊपर थी और हमारी मुझे लगता है बहुत अच्छी

1793
02:11:55,000 --> 02:11:59,200
बात वहां पर हो चुकी है मैं एक चीज आपसे पूछना चाहूंगा जैसे

1794
02:11:59,200 --> 02:12:03,280
मूर्ति पूजा की बात क्या वेदों में मूर्ति पूजा आती है

1795
02:12:03,280 --> 02:12:07,240
बिल्कुल बिल्कुल आती है

1796
02:12:07,240 --> 02:12:13,240
बता देता हूं [संगीत]

1797
02:12:23,920 --> 02:12:29,160
एक दो उदाहरण आपको दे दे रहा

1798
02:12:29,160 --> 02:12:33,280
हूं अथर्ववेद में 5 30

1799
02:12:33,280 --> 02:12:37,560
12 और अथर्ववेद में दो 13

1800
02:12:37,560 --> 02:12:39,960
च दो 1 च में क्या कहा जा

1801
02:12:39,960 --> 02:12:44,120
रहा है तुम आकर इस पाषाण में विराजमान हो जाओ यह

1802
02:12:44,120 --> 02:12:48,240
आपका शरीर बन जावे सैकड़ों वर्ष पर्यंत उसमें आपकी

1803
02:12:48,240 --> 02:12:52,360
विभूति को स्थिर करें और वेद में य 5 30

1804
02:12:52,360 --> 02:12:56,480
12 में क्या कहा जा रहा है मूर्ति को नमस्कार स्ता

1805
02:12:56,480 --> 02:13:00,520
सत्र उपनिषद में मैं आपको दिखा देता हूं हे रुद्र

1806
02:13:00,520 --> 02:13:04,720
आपकी जो मंगलमय शांत पुण्य प्रकाशनी मूर्ति है हे गिरि

1807
02:13:04,720 --> 02:13:09,400
संतु उस पूर्ण आनंदमय रूप के द्वारा आप हमारी ओर देखो

1808
02:13:09,400 --> 02:13:13,520
और जैसे नाथस प्रतिमा स्थ आ रहा है ना प्रतिमा का अर्थ वो नहीं माना है कई

1809
02:13:13,520 --> 02:13:17,600
जगह आर समाज मेंही मगर वहां पर मूर्ति का खंडन करना था तो मान लिया

1810
02:13:17,600 --> 02:13:21,640
आर समाज नेही कुछ कुछ अंशों में कई जगहों पर प्रतिमा का अर्थ

1811
02:13:21,640 --> 02:13:25,680
मूर्ति नहीं माना है प्रतिमा का मतलब किसी के तुल्य प्रतिमान कि मेरे

1812
02:13:25,680 --> 02:13:30,000
समान कोई नहीं है ना तस प्रतिमा मगर एक जगह सस्त प्रतिमा

1813
02:13:30,000 --> 02:13:34,200
स भी आया है फिर क्या करें और स्वेता चतु निषद में तो रुद्र

1814
02:13:34,200 --> 02:13:38,200
की मूर्ति की बात हो ही रही है और ऐसे तमाम जगह पर हुई है अरे भाई सीधे

1815
02:13:38,200 --> 02:13:42,400
सधे ये समझ लीजिए अगर रूप की बात हो रही है कहीं पर

1816
02:13:42,400 --> 02:13:46,440
मैं ऐसे लेकर चलता हूं कि रूप की बात अगर हो रही है कि आपके इतने

1817
02:13:46,440 --> 02:13:50,560
हजार आंखें इतनी हजार हाथ है ये पैर है रूप की बात हो रही तो मूर्ति बन

1818
02:13:50,560 --> 02:13:53,000
सकती है ना फिर क्या दिक्कत अच्छा

1819
02:13:53,000 --> 02:13:57,240
ठीक है मान लो वहां पर भाव ये है कुछ और समझाना चाह रहे हैं

1820
02:13:57,240 --> 02:14:01,320
मगर वेद में लिखा तो है तो आप मजाक क्यों उड़ा रहे हो मूर्ति पूजा का

1821
02:14:01,320 --> 02:14:05,520
आप समझ लो उसका अच्छा अर्थ और अच्छे अर्थ को आप मान लो मगर मूर्ति

1822
02:14:05,520 --> 02:14:09,720
पूजा का मजाक मत उड़ाओ कोई उस अलंकार के सहारे ही पूजा करना

1823
02:14:09,720 --> 02:14:13,760
चाहता है आपके अनुसार व अलंकार है जैसे विराट पुरुष की व्याख्या

1824
02:14:13,760 --> 02:14:17,920
हुई या भगवान की कई जगह पर इतने नेत्र है इतने हाथ है ऐसे व्याख्या

1825
02:14:17,920 --> 02:14:22,000
हुई है वेदों में तो अगर व्यक्ति ने एज इट उसको ले लिया है

1826
02:14:22,000 --> 02:14:26,120
तो आप उसका उपहास क्यों उड़ा रहे हो पप क्यों कह रहे हो पाखंड क्यों कह रहे हो मत

1827
02:14:26,120 --> 02:14:30,160
कहो आपको उस अलंकार का अर्थ पता चल गया आप अलंकार अलंकार के

1828
02:14:30,160 --> 02:14:34,400
अनुसार चल लो मगर मजाक उड़ाना आवश्यक है जगह

1829
02:14:34,400 --> 02:14:38,560
जगह पर मजाक उड़ेगा लेकिन मूर्ति पूजा का उतना विस्तार रूप नहीं था

1830
02:14:38,560 --> 02:14:42,720
जैसे कि हम बाल्मिक रामायण पढ़ते हैं या हम महाभारत महाभारत में शायद

1831
02:14:42,720 --> 02:14:46,880
एक जगह शिवलिंग का वर्णन आता है लेकिन इतना विस्तारित रूप से नहीं बताया गया मंदिरों

1832
02:14:46,880 --> 02:14:51,680
के बारे में इतने विस्तारित रूप से नहीं बताया गया इसके बारे में भी उत्तर है

1833
02:14:51,680 --> 02:14:56,080
सतयुग त्रेता युग द्वापर युग और कलयुग

1834
02:14:56,080 --> 02:15:00,160
यह धीरे-धीरे लोगों की आयु और प्रज्ञा शक्ति घट रही

1835
02:15:00,160 --> 02:15:04,280
है जितना धर्म सतयुग में था उतना त्रेता में नहीं था

1836
02:15:04,280 --> 02:15:08,120
जितना त्रेता में था उतना द्वापर में नहीं था और जितना द्वापर में था उतना

1837
02:15:08,120 --> 02:15:12,160
कलयुग में नहीं है तो जितना ज्यादा कलयुग आता जाएगा तो उतनी ज्यादा

1838
02:15:12,160 --> 02:15:16,440
भगवान की सरलतम प्राप्ति कौन से मार्ग से हो जब व्यक्ति में प्रज्ञा

1839
02:15:16,440 --> 02:15:20,520
नहीं बची तप करने की यज्ञ करने की उतना ज्यादा तो फिर उसके लिए

1840
02:15:20,520 --> 02:15:24,800
वस् की गई कि ज्यादा आज ज्यादा मूर्ति इसीलिए दिख रही है आपको जगह

1841
02:15:24,800 --> 02:15:29,200
जगह क्योंकि प्रज्ञा शक्ति घट चुकी है तो सबसे सरलतम व्याख्या क्या है

1842
02:15:29,200 --> 02:15:33,520
कि तू मेरी शरण में आजा मैं तुझे पापों से मुक्त कर दूंगा

1843
02:15:33,520 --> 02:15:37,720
भक्ति तो जो भक्ति की बात है 18 66 में भगवान ने कहा

1844
02:15:37,720 --> 02:15:41,880
और भी कई न 32 में भगवान ने कहा तू मेरी शरण में इसीलिए उन्होंने क्यों

1845
02:15:41,880 --> 02:15:45,920
कहा क्योंकि व्यक्ति की जो प्रज्ञा शक्ति है वो पतित होती जा रही है कटती

1846
02:15:45,920 --> 02:15:49,960
चली जा रही है तो मूर्ति सबसे सरलतम होता है तो

1847
02:15:49,960 --> 02:15:54,120
इसलिए आज आपको मूर्ति ज्यादा दिख रही है मगर ज्यादा हो या कम है तो

1848
02:15:54,120 --> 02:15:58,360
और ईश्वर के स्वरूप की बहुत सारी जगह में बात हुई स्वरूप की अगर बात करें और विशेष

1849
02:15:58,360 --> 02:16:02,480
तौर पर मूर्ति की बात मैंने आपको बता दिया कहां हो रही है विशेष रूप से और भी

1850
02:16:02,480 --> 02:16:07,040
उदाहरण है मगर उदाहरण मात्र के लिए हमने लिख रखे आप इसको देखिए

1851
02:16:07,040 --> 02:16:11,280
इसमें आप मुझसे संपर्क कर लीजिएगा तो मैं आपको मंत्र भी

1852
02:16:11,280 --> 02:16:15,560
भेज दूंगा जहां पर आंशिक रूप से मंत्र क्योंकि पूरे

1853
02:16:15,560 --> 02:16:19,640
वो यज्ञ पवित के बाद ही धारण कर देखना चाहिए मंत्रों को तो

1854
02:16:19,640 --> 02:16:23,160
आंशिक रूप से मंत्र आपको भेज दूंगा आप उनको देखिएगा और

1855
02:16:23,160 --> 02:16:27,400
अब अब देखिए परंपरा क्यों पूछनी पड़ती है इसीलिए पूछनी पड़ती है

1856
02:16:27,400 --> 02:16:32,120
जैसे मूर्ति की बात हो रही है मगर उसमें बिल्कुल ही व्यक्ति ने उलट कर दिया

1857
02:16:32,120 --> 02:16:36,400
क्योंकि उसको मूर्ति को ठुकराना है मान लो अब इसलिए उसकी प्रमाणिकता पूछनी

1858
02:16:36,400 --> 02:16:40,880
पड़ेगी कि आपने केवल बाजार से जाकर के ग्रंथ खरीद लिया है

1859
02:16:40,880 --> 02:16:45,040
या आपने जहां परंपरा शुटी परंपरा थी ना हमारे य गुरु मंत्र

1860
02:16:45,040 --> 02:16:49,200
को देते थे शिष्य को गुरु शिष्य परंपरा उससे आए मंत्र

1861
02:16:49,200 --> 02:16:53,480
गीता प्रस ने नहीं छाप दिया मंत्र या चौखंबा ने नहीं छाप दिया मंत्र

1862
02:16:53,480 --> 02:16:57,720
वो तो आया है गुरु शिष्य परंपरा से तो जहां से आपके मंत्र आ रहे हैं वहीं

1863
02:16:57,720 --> 02:17:01,840
से आपने उनका अर्थ लिया है इसलिए पूछना पड़ता है किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं पूछना

1864
02:17:01,840 --> 02:17:06,000
पड़ता है जब वो ऐसे यथावत चीजों का खंडन कर देते जैसे

1865
02:17:06,000 --> 02:17:10,200
रामायण में एक जगह बात आई है अहिल्या को मुक्त किया श्री राम

1866
02:17:10,200 --> 02:17:14,320
ने ठीक है यह बात इनकी विशुद्ध वाली रामायण में भी है हालाकि इन्होने

1867
02:17:14,320 --> 02:17:18,400
छटनी कर दी मगर अहिल्या वाला वो है तो वहा इन्होने सीधे कह

1868
02:17:18,400 --> 02:17:21,880
दिया वो तो अलंकार है

1869
02:17:21,880 --> 02:17:25,920
इनकी जो रामायण पढ़ी आपने ना इनकी नहीं पढ़ी गीता प्रेस की

1870
02:17:25,920 --> 02:17:29,920
पढ इनकी वाली देखिएगा तो इनकी वाली में

1871
02:17:29,920 --> 02:17:34,120
ल्याया का जब पार्ट आता है तो मुझे बहुत समय पहले मैंने इनकी पढ़ी थी

1872
02:17:34,120 --> 02:17:38,200
क्योंकि किसी मुसलमान ने मुझसे कह दिया था कि राम मास खाते थे तो

1873
02:17:38,200 --> 02:17:42,240
इसलिए मैंने सारी रामायण पढ़ना शुरू किया था यात्रा मेरी

1874
02:17:42,240 --> 02:17:46,320
भी विधर्मी हों से लड़ने पर ही शुरू हुई है ऐसा नहीं है कि मुझे हर

1875
02:17:46,320 --> 02:17:51,320
समाज पर आक्षेप लगाने का कोई शौक है मगर धर्मयोद्दा

1876
02:17:51,320 --> 02:17:55,520
जो हमारे सनातन के ऐसे सिद्धांत है जिनको वह तोड़

1877
02:17:55,520 --> 02:17:59,600
नहीं सकते उनको तोड़ने का मौका देने वाले हमारे

1878
02:17:59,600 --> 02:18:03,760
सेक्ट होते हैं जैसे कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है

1879
02:18:03,760 --> 02:18:07,760
मगर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते मगर शिव जी कृष्ण नहीं

1880
02:18:07,760 --> 02:18:11,800
बन सकते अरे भाई जब कृष्ण ही शिव बन रहे हैं तो शिव बनने के बाद

1881
02:18:11,800 --> 02:18:15,560
उनकी पावर कम हो जाएगी

1882
02:18:15,560 --> 02:18:20,080
क्या तो ऐसा नहीं करना चाहिए शिव और कृष्ण में भेद नहीं करना चाहिए

1883
02:18:20,080 --> 02:18:24,200
इससे उ सेक्ट को जो हमारा अहित करना चाहते

1884
02:18:24,200 --> 02:18:28,520
हैं इससे उनको बल मिलता है इसलिए हमें पूछना पड़ता है कि भाई आपकी परंपरा

1885
02:18:28,520 --> 02:18:32,520
क्या देखिए आप कोई अगर इंटरव्यू देख रहे होंगे ना हमारा जो इनके मंदिरों

1886
02:18:32,520 --> 02:18:36,760
में जा जा करके हमने लिया है उसमें आप देखिएगा जो सबसे पहला

1887
02:18:36,760 --> 02:18:41,320
वीडियो आर समाज का उसमें भी क्या हुआ था कि पहले ईश्वर के सर्वशक्तिमान

1888
02:18:41,320 --> 02:18:45,600
के बारे में बात हुई थी ठीक है अब तर्क की बात तो रह नहीं जाती है तो

1889
02:18:45,600 --> 02:18:49,680
फिर आती है बात प्रमाण की तर्क की बात नहीं रह जाती है तो प्रमाण की बात आने

1890
02:18:49,680 --> 02:18:54,400
लगती तो वो उ वेद मंत्रों का अर्थ कुछ और करेंगे जिन वेद मंत्रों से हम

1891
02:18:54,400 --> 02:18:58,560
ईश्वर का जो रूप है उसको सिद्ध कर सकते हैं ठीक है तब हमें पूछना

1892
02:18:58,560 --> 02:19:02,560
पड़ा था कि आपकी परंपरा क्या है कैसे आए वेद मंत्र जिनसे वेद

1893
02:19:02,560 --> 02:19:06,720
मंत्र आए उनसे अर्थ आया है कि अपने मन से अर्थ दे रहे हो अब मान लीजिए कि मैं आपको

1894
02:19:06,720 --> 02:19:10,760
एक बुक दे रहा हूं यह बुक मैंने आपको दे दी ठीक है और

1895
02:19:10,760 --> 02:19:16,000
आप इस बुक पर तो भरोसा कर रहे हो पर मुझ पर नहीं कर रहे हो

1896
02:19:16,000 --> 02:19:20,480
तो इसका अर्थ क्या हो कि आपका इस बुक पर भी भरोसा होना सिद्ध नहीं होता क्योंकि

1897
02:19:20,480 --> 02:19:24,720
ये बुक मैंने आपको दी है यदि आपको मुझ पर भरोसा है तभी मुझसे प्राप्त

1898
02:19:24,720 --> 02:19:28,720
होने वाली बुक पर आपका भरोसा होना सिद्ध होता है यदि मुझ

1899
02:19:28,720 --> 02:19:30,560
पर भरोसा नहीं है तो मैं हो सकता है आपको कोई

1900
02:19:30,560 --> 02:19:34,840
झूठी बुक दे रहा हूं कोई मिलावटी बुक दे रहा हूं मैं क्यों दूंगा आपको सही बुक

1901
02:19:34,840 --> 02:19:38,520
गलत बुक दूंगा यह चीज है

1902
02:19:38,520 --> 02:19:42,560
एक चीज ज ठीक है जी तो मैं आपके दो विषयो के बारे में समझना चाह रहा था मूर्ति पूजा के

1903
02:19:42,560 --> 02:19:45,240
ऊपर अवतारवाद के ऊपर हमने बात कर ली थी मैं

1904
02:19:45,240 --> 02:19:49,320
एक आपसे दरख्वास्त यहां पर करना चाहूंगा अगर आपके पास समय

1905
02:19:49,320 --> 02:19:53,440
हो तो मेरा एक चैनल है उसम हम पॉडकास्ट करते हैं

1906
02:19:53,440 --> 02:19:57,640
कृपया करके अगर मैं यही पर लाइव आपके साथ आ रखा हूं कृपया

1907
02:19:57,640 --> 02:20:01,840
करके उस पॉडकास्ट में जुड़ेगा अगर आपके पास आपके

1908
02:20:01,840 --> 02:20:05,920
चैनल को देखूंगा कि आपका कंटेंट क्या है कैसे है फिर

1909
02:20:05,920 --> 02:20:10,040
मैं आपको सूचित कर द ठीक है दूसरी बात दूसरी बात जो

1910
02:20:10,040 --> 02:20:14,280
आपने कहा कलयुग का नीच योगी तो यहां पर नीच शब्द का प्रयोग क्या

1911
02:20:14,280 --> 02:20:18,640
है नीच शब्द का उपयोग यह है कि आप एक ऐसी वार्ता

1912
02:20:18,640 --> 02:20:22,760
के हिस्सेदार थे जिस वार्ता में शास्त्रोक्त प्रश्न

1913
02:20:22,760 --> 02:20:26,960
का उत्तर शास्त्र से ना देकर के व्यक्तिगत टिप्पणियां की

1914
02:20:26,960 --> 02:20:31,000
गई ऐसा नहीं है कि हमारे पास अवसर नहीं है व्यक्तिगत बातें करने का मैंने अभी अभी

1915
02:20:31,000 --> 02:20:35,120
इसी लाइव में बताया कि लोग अभी एक अभी वो

1916
02:20:35,120 --> 02:20:39,680
जो रामपाल वाले हैं उन्होंने एक हमारे विरुद्ध एक वीडियो बनाया

1917
02:20:39,680 --> 02:20:43,720
उसमें क्या किया एक जगह दयानंद जी को प्रमाण के रूप में ले लिया और

1918
02:20:43,720 --> 02:20:47,720
दूसरी जगह पर दयानंद जी को ही घटिया नसेड़ी कहा है

1919
02:20:47,720 --> 02:20:51,760
हमने कभी कहा है क्या अपने चैनल पर उन के बारे में ऐसे ऐसी

1920
02:20:51,760 --> 02:20:55,800
चीजें प्राप्त है वो तंबाकू का सेवन करते थे ये करते थे वो करते थे मगर हमने कभी भी

1921
02:20:55,800 --> 02:20:59,800
इस तरह की व्यक्तिगत बातें नहीं की हम मूल सिद्धांतों पर हमने बात की क्या

1922
02:20:59,800 --> 02:21:00,760
ईश्वर सर्वशक्तिमान

1923
02:21:00,760 --> 02:21:05,480
परम स्वतंत्र मक्ष शाश्वत धर्म हां तो उसके बाद आपने

1924
02:21:05,480 --> 02:21:09,520
हमने मैं अपनी बात बता रहा हूं आपने प्रश्न किया मैं बता रहा हूं हमने सदैव

1925
02:21:09,520 --> 02:21:14,200
क्या किया यह कहा ये तक कहा मैं शंकराचार्य का प्रचार छोड़ दूंगा

1926
02:21:14,200 --> 02:21:18,240
मुझे कोई दिक्कत नहीं शंकराचार्य के प्रचार को छोड़ने में आप मुझे तीन चीजें दीजिए

1927
02:21:18,240 --> 02:21:22,440
मैं आपका हो जाऊंगा मैंने कितनी बार कहा होगा अपनी लाइफ में बहुत बार कहा है वीडियोस

1928
02:21:22,440 --> 02:21:26,440
में कहा है मगर इससे किसी को कोई मतलब नहीं है मुझे देखिए

1929
02:21:26,440 --> 02:21:30,560
मेरी व्यक्तिगत मान्यता आस्था हो सकती कि मैं शंकराचार्य जी को अपना मेरे गुरु है

1930
02:21:30,560 --> 02:21:34,680
मगर यदि मुझे सार्वभौम सिद्धांत कहीं और से प्राप्त हो रहे हैं और

1931
02:21:34,680 --> 02:21:38,720
उसके कारण समाज में मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित हो रहे हैं हमारे एकत आर है

1932
02:21:38,720 --> 02:21:42,920
तो मैं उसको अपनी व्यक्तिगत मान्यता को अपने तक सीमित रखूंगा प्रचार आर समाज

1933
02:21:42,920 --> 02:21:47,560
का कर दूंगा प्रचारित तो सर्वशक्तिमान ईश्वर हो रहा है ना केरल में

1934
02:21:47,560 --> 02:21:51,680
अगर कोई कहती है कोई कन्या दूसरी कन्या से कि

1935
02:21:51,680 --> 02:21:55,960
भाई यह तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो रो रहा है अपनी पत्नी के विरय में

1936
02:21:55,960 --> 02:21:59,960
अगर उस बिटिया को यह मालूम होता कि ईश्वर वही है जो कुछ भी

1937
02:21:59,960 --> 02:22:04,000
कर सकता है वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वो सभी नियमों

1938
02:22:04,000 --> 02:22:08,080
को बनाने वाला सर्व नियामक है वो पूर्ण है अगर उसको य

1939
02:22:08,080 --> 02:22:12,080
मालूम होता व तपाक से कहती कि तुम्हारा ईश्वर कह रहा है 6101 में मेरी

1940
02:22:12,080 --> 02:22:15,760
संतान नहीं हो सकती मेरा ईश्वर व है जो कुछ भी कर सकता है उसकी कोई

1941
02:22:15,760 --> 02:22:19,760
लिमिट नहीं है यह सिधांत वो है जो एक मिनट में अभी एक

1942
02:22:19,760 --> 02:22:23,800
कुछ दिनों पहले मुस्लिम आई थी पाच मिनट

1943
02:22:23,800 --> 02:22:28,400
केवल लगे पाच मिनट चली गई क्यों जाना पड़ा सिद्धांतही

1944
02:22:28,400 --> 02:22:32,680
ऐसा है कोई उत्तर है ही नहीं इसका तो जो बिना किसी

1945
02:22:32,680 --> 02:22:36,680
बहुत ज्यादा उधेड़ बन के हमको जीत दिला सकता है उन सिद्धांतों को हमने साइड

1946
02:22:36,680 --> 02:22:40,760
में रख दिया है तो हम सदैव जो

1947
02:22:40,760 --> 02:22:45,160
प्रचार करते हैं इसका करते हैं इसी में से एक बात है हमने एक शास्त्रोक्त प्रश्न

1948
02:22:45,160 --> 02:22:49,280
पूछा था कि और बहन कहा था एक हमारी

1949
02:22:49,280 --> 02:22:53,400
बहन और छपरी नहीं कहा यह भी सोच बहन कहा

1950
02:22:53,400 --> 02:22:57,440
था एक हमारी बहन और है जो सलवार सूट पर जने करती है अब

1951
02:22:57,440 --> 02:23:01,680
क्या है आपकी व्यक्तिगत लाइफ कुछ भी हो मगर जब आप एक

1952
02:23:01,680 --> 02:23:05,720
धर्म के इनफ्लुएंसर के रूप में आ गए हैं धार्मिक इनफ्लुएंसर के

1953
02:23:05,720 --> 02:23:10,240
रूप में आ गए फिर अपनी चीज को प्रस्तुत कर रहे हैं तो वहां पर सवाल करने का

1954
02:23:10,240 --> 02:23:14,640
जो है सबको अधिकार प्राप्त हो जाता है क्योंकि उनका धर्म है वहां पर धर्म सनातन

1955
02:23:14,640 --> 02:23:18,880
केवल अकेला उनका नहीं है धर्म सबका है तो यदि आप एक धार्मिक इनफ्लुएंसर

1956
02:23:18,880 --> 02:23:23,040
बन रहे हो उस रूप में किसी को प्रस्तुत कर रहे हो तो उस पर कोई सवाल

1957
02:23:23,040 --> 02:23:27,320
निर्णय नहीं था हमने ये नहीं कहा कि गलत ही है हमने य कहा था क्या शास्त्रों

1958
02:23:27,320 --> 02:23:30,800
में ये लिखा है जिस तरह से आप जने दिखा रहे हो शास्त्रों में

1959
02:23:30,800 --> 02:23:34,960
लिखा है पपीन और मेखला धारण पूर्वक ब्रह्मचारी ब्रह्मचार्य

1960
02:23:34,960 --> 02:23:39,120
धारण करता है तो उसका शास्त्रो जवाब नहीं दिया अब जवाब क्या हुआ

1961
02:23:39,120 --> 02:23:43,360
कि भाई कहीं भूले विसरे हमारी कोई फोटो मिल गई उसमें भी

1962
02:23:43,360 --> 02:23:47,360
हमारे जो जितने भी जानकारी के लोग होंगे छोटा भाई होगा छोटे भाई की

1963
02:23:47,360 --> 02:23:51,400
कोई जानकारी की कोई कन्या होगी वो उसके साथ फोटो सबको घसीट

1964
02:23:51,400 --> 02:23:55,800
लो तो ये क्या आपको न्याय लगता है

1965
02:23:55,800 --> 02:24:00,360
और जब न्याय नहीं लगता तो आपने उसका प्रतिकार नहीं किया आप उससे जुड़े रहे

1966
02:24:00,360 --> 02:24:04,920
मैं यहीं पर प्रतिकार करता हूं कि कहीं भी किसी भी व्यक्ति के निजी

1967
02:24:04,920 --> 02:24:08,920
स्तर में जाया जाए उसमें लाइफ में घुसा जाए यह पूर्णतः गलत है ये यहां पे

1968
02:24:08,920 --> 02:24:13,160
ही बोल देता और मैं इस बात को स्पष्ट कर लेकिन यहां प्रश्न ये है कि आपने बोला कि

1969
02:24:13,160 --> 02:24:17,160
मेरे से तो चर्चा करोगे लेकिन मोहित जी से चर्चा नहीं करोगे तो

1970
02:24:17,160 --> 02:24:21,240
यह क्या पैरामीटर था कि मेरे से तो चर्चा करोगे लेकिन ने दिए हैं

1971
02:24:21,240 --> 02:24:25,440
आपने शायद आपने आपने जो जो प्रश्न किए हैं उन सबके उत्तर हमने

1972
02:24:25,440 --> 02:24:29,720
अपनी लाइव में देते रहे मगर आपने लाइव देखी नहीं है यह दिक्कत है

1973
02:24:29,720 --> 02:24:33,840
हमने आपकी बात का ये उत्तर दिया है कि मोहित गौड़ यदि यहां पर

1974
02:24:33,840 --> 02:24:37,880
आता है तो हम चर्चा कर लेंगे क्योंकि यदि बात बिगड़ रही होगी तो

1975
02:24:37,880 --> 02:24:42,000
हमें आपको सम्मान देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी

1976
02:24:42,000 --> 02:24:45,960
मगर जहां पर वह चर्चा करने के लिए बुला रहे हैं वहां में उस व्यक्ति को सम्मान देना

1977
02:24:45,960 --> 02:24:50,000
पड़ेगा जो व्यक्ति ऐसी चर्चा पर जुड़ा हुआ उसने प्रतिकार नहीं किया

1978
02:24:50,000 --> 02:24:54,720
उस हमें आप आप करके बात करनी पड़ेगी हम आपको नीच बोल चुके हैं ना

1979
02:24:54,720 --> 02:24:58,840
नीच बोल चुके हैं उसके बाद हमने आपको यहां पर लिया है तो हम अपने किए हुए

1980
02:24:58,840 --> 02:25:03,040
संतुष्ट है आपको ले रहे हैं आप नीच सुनने के बावजूद भी आपने गर्स

1981
02:25:03,040 --> 02:25:07,600
दिखाया कि आप चर्चा के लिए आ गए ठीक है तो हमने

1982
02:25:07,600 --> 02:25:11,640
मोहित से चर्चा यहां के लिए स्वीकार नहीं की है वहां के लिए स्वीकार

1983
02:25:11,640 --> 02:25:15,680
की है जहां पर हमने कोई प्रतिकारा क्मक व्यवहार अभी किया नहीं है वहां

1984
02:25:15,680 --> 02:25:20,360
पर भी हमें उसे सम्मान देना पड़ेगा इसलिए हम उस चर्चा में नहीं गए

1985
02:25:20,360 --> 02:25:24,560
क्योंकि हमें उसको आप आप कहना पड़ेगा वो वहां था जब हमारे घर की स्त्री

1986
02:25:24,560 --> 02:25:28,760
की बात हो रही थी जो ये जो ऋषि उज नाम का जो इनका जो अनऑफिशियल

1987
02:25:28,760 --> 02:25:33,040
गुंडा है वो जो है अवद्र अवद्र टिप्पणियां करता है अपने पंडे है पोप

1988
02:25:33,040 --> 02:25:37,240
है ये सब बातें करता है हमने कभी नहीं की इस तरह की बात अ शब्द कभी नहीं बोला बल्कि

1989
02:25:37,240 --> 02:25:41,240
आप अगर लिस्ट में जाओगे ना नीचे तो आपको एक

1990
02:25:41,240 --> 02:25:45,560
वीडियो मिलेगा जिसमें हमने अपने समर्थकों को यह कहा है कि दयानंद

1991
02:25:45,560 --> 02:25:49,920
जी के लिए गलत बात मत बोला करिए हमने

1992
02:25:49,920 --> 02:25:53,920
उस दिन भी प्रतिकार किया था जिस दिन उसने नसेड़ी घटिया बोला था तब भी हमने प्रतिकार किया

1993
02:25:53,920 --> 02:25:58,280
था दयानंद जी की पुण्य तिथि थी तब हमने अपने य लाइव से उनको जो है

1994
02:25:58,280 --> 02:26:01,640
श्रद्धा अर्पण किया था क्योंकि

1995
02:26:01,640 --> 02:26:06,560
हम लोग क्योंकि हम लोग ये सब आंतरिक बातें हैं कि

1996
02:26:06,560 --> 02:26:11,120
क्या कहते हैं कि वो आर्य समाज है य कौन है ये सब हमारी अंदर की बातें हैं

1997
02:26:11,120 --> 02:26:15,480
मगर वेद में अगर प्रमाण बुद्धि है तो जैसे ही कोई आप सामने वाला आएगा

1998
02:26:15,480 --> 02:26:19,720
तो हम लोग एक है हम भाई है एक दिन एक क्रिश्चन

1999
02:26:19,720 --> 02:26:23,720
आया था राम पालियो की बुराई करने आया था हमने उसको मना कर दिया

2000
02:26:23,720 --> 02:26:27,760
था कि तुम य हमारे साथ मिलकर के उनका खंडन मत करो हम लोग आपस में

2001
02:26:27,760 --> 02:26:32,320
देख लेंगे हमारी अपनी बातें तो मोहित गौड़ के साथ

2002
02:26:32,320 --> 02:26:36,400
चर्चा यहां से मना नहीं किया क्योंकि हमने उसको जो सुनाया व सुना लिया है

2003
02:26:36,400 --> 02:26:40,440
हमने उसकी उस चर्चा से मना किया जहां पर हमको अपने ऊपर नियंत्रण रखना

2004
02:26:40,440 --> 02:26:44,560
होगा हमें नहीं रखना अच्छा अब एक बात आती है कुछ लोग ये कहते कि चर्चा

2005
02:26:44,560 --> 02:26:48,600
में जाकर उसका मुंह बंद कर दो अगर उसने ऐसा ऐसा किया है तो कर दो मुह बंद ये कोई

2006
02:26:48,600 --> 02:26:52,720
सनातन सिद्धांत नहीं है कि अगर अगर किसी ने आपको गाली दी है तो उसके साथ आप जो है

2007
02:26:52,720 --> 02:26:56,880
डिबेट करें जाकर के और डिबेट में जाकर के उसका मुह बंद करें अच्छा तो फिर क्या करोगे

2008
02:26:56,880 --> 02:27:01,040
हाथ पैर तोड़ोगे भाई जितना सामर्थ होगा करेंगे देखेंगे मगर

2009
02:27:01,040 --> 02:27:05,040
चर्चा तो नहीं करेंगे बैठ कर के और आप कैसे हैं बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर

2010
02:27:05,040 --> 02:27:09,760
के ये सब तो नहीं करेंगे तो दोगलापन है राम तो सिखाते राम धना भी

2011
02:27:09,760 --> 02:27:13,760
भाष प पहली बात तो किसी और के चैनल में वो आएगा

2012
02:27:13,760 --> 02:27:17,960
भी नहीं तो क्या आप दोनों डिबेट करोगे

2013
02:27:17,960 --> 02:27:22,640
ऑनलाइन किसी और के चैनल पर

2014
02:27:22,640 --> 02:27:26,640
हमने कहा ना जैसे अभी आपने कहा है आप जो खंडन कर रहे हैं उस बात का

2015
02:27:26,640 --> 02:27:31,480
जो आर्य वरा के आप उसमें लाइव में गए थे उसका खंडन कर रहे हैं कि नहीं कर रहे आर्य

2016
02:27:31,480 --> 02:27:35,680
वरा जी की जो लाइव थ मैं ये कह रहा हूं किसी

2017
02:27:35,680 --> 02:27:39,720
भी व्यक्ति की निजी लाइफ ऐसे मत ये डिप्लोमेटिक आंसर ये

2018
02:27:39,720 --> 02:27:43,800
डिप्लोमेटिक आंसर आप स्पष्ट आप अगर खंडन

2019
02:27:43,800 --> 02:27:48,280
कर रहे हैं या नहीं कर रहे आपसे तो मैंने जो कहना था कह दिया कर भी लिया

2020
02:27:48,280 --> 02:27:52,280
मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि वहां प अगर आपके क्योंकि मैं बहुत

2021
02:27:52,280 --> 02:27:56,600
देर में जुड़ हूं अगर आपके किसी चरित्र के बारे में या किसी

2022
02:27:56,600 --> 02:28:01,120
आपके लाइफ के बारे में कुछ कहा जाए तो मैं उसका पूर्णत खंडन करता

2023
02:28:01,120 --> 02:28:05,320
हूं आपने वह वीडियो लाइव पूरी देखी नहीं है क्या अभी

2024
02:28:05,320 --> 02:28:09,360
तक मैं अंत में जुड़ा था और मुझे इतना नहीं पता कि उसमें क्या क्या

2025
02:28:09,360 --> 02:28:13,760
बातें हुई है कहां कहा आप एक बार देख लीजिए उसके बाद आप

2026
02:28:13,760 --> 02:28:18,000
एक बार और आ जाइएगा फिर अपना भाव प्रकट करिएगा तो कुल मिलाकर

2027
02:28:18,000 --> 02:28:22,360
के हमारा कहना यह है कि मोहित ग से चर्चा अब तब हो सकती है

2028
02:28:22,360 --> 02:28:26,440
मंच तब हो सकता है साझा जब मोहित गौड़ भी उसका खंडन

2029
02:28:26,440 --> 02:28:30,760
करें उसके लिए उस ऐसी चर्चा से जुड़े होने के लिए

2030
02:28:30,760 --> 02:28:32,960
पश्चाताप प्रकट करें तब हम

2031
02:28:32,960 --> 02:28:37,120
उनसे चर्चा कर सकते हैं और ऐसा हम भूत पूर्व भी कर चुके

2032
02:28:37,120 --> 02:28:43,120
हैं

2033
02:28:52,000 --> 02:28:56,640
आर्यन जी बोलिए उनका शायद नेट चला

2034
02:28:56,640 --> 02:29:00,640
गया शिवांश लोग एक और करते हैं भगवान श्री

2035
02:29:00,640 --> 02:29:04,640
कृष्ण की जो लीलाए होती है उनको इतना उन बनाएंगे

2036
02:29:04,640 --> 02:29:09,040
राधा जी हा नहीं देखिए लीलाए होती है

2037
02:29:09,040 --> 02:29:13,120
लीलाए जो होती है वो मोतियों की तरह है

2038
02:29:13,120 --> 02:29:17,400
लीलाए अलग-अलग लीला का अलग अलग अर्थ है ऐसे बहुत सारे मोती

2039
02:29:17,400 --> 02:29:21,480
है सब लीलाए मगर इ इन मोतियो में एक सूत्र पिरोया

2040
02:29:21,480 --> 02:29:26,080
गया है जो उसको माला का रूप दे देता है उन मूर्तियों को वो सूत्र क्या है

2041
02:29:26,080 --> 02:29:30,560
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है

2042
02:29:30,560 --> 02:29:35,280
आपको ईश्वर बता रहा है मैं सब कुछ

2043
02:29:35,280 --> 02:29:39,480
हूं मैं कुछ भी कर सकता हूं मैं सभी नियमों

2044
02:29:39,480 --> 02:29:43,520
को नियम मैं सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक हूं मैं किसी भी

2045
02:29:43,520 --> 02:29:47,640
नियम के नीचे नहीं हू तो ईश्वर इस तरह की लीलाओं से

2046
02:29:47,640 --> 02:29:48,160
आपको

2047
02:29:48,160 --> 02:29:52,200
साइंटिफिक स्पिरिचुअल या जो

2048
02:29:52,200 --> 02:29:57,040
आदि दैविक जो सिद्धांत है वो तो बता ही रहे हैं मगर साथ ही साथ

2049
02:29:57,040 --> 02:30:01,400
आपको यह भी सिद्ध कर रहे हैं कि वो ईश्वर है यह जो अविद्या

2050
02:30:01,400 --> 02:30:05,920
संसार अविद्या रूपी संसार के जो नियम है उनके ऊपर लागू नहीं होते हैं

2051
02:30:05,920 --> 02:30:10,440
इसलिए ईश्वर ऐसी लीलाएं करते

2052
02:30:10,440 --> 02:30:14,520
हैं ठीक है सुरेंद्र जी करके कोई आए हैं जिनका

2053
02:30:14,520 --> 02:30:18,680
चेहरा नहीं दिख रहा है अब काफी लंबा हो चुका है ढाई घंटे हो चुके हैं हम लोग

2054
02:30:18,680 --> 02:30:22,760
अब किसी और दिन जुड़ते हैं और बात करते हैं शिवा

2055
02:30:22,760 --> 02:30:27,080
जी एक प्रश्न था योगी योगी जी से बात करके ठीक लगा और

2056
02:30:27,080 --> 02:30:31,080
वह हमारा उनसे आग्रह है कि वह उस लाइव को पूरा

2057
02:30:31,080 --> 02:30:35,400
देख ले और फिर अपने भाव प्रस्तुत कर द कि वो उसका खंडन

2058
02:30:35,400 --> 02:30:39,640
करते हैं कि नहीं और उससे जुड़े होने पर उनको पश्चाताप है कि नहीं

2059
02:30:39,640 --> 02:30:43,640
और अगर दोनों चीजें मोहित गौर करते हैं तो मैं फिर बोल रहा हूं मोहित

2060
02:30:43,640 --> 02:30:49,640
गौर के साथ बात करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है

2061
02:30:54,000 --> 02:30:58,080
शिवा जहां पर पोस्ट डाली गई थी आचार्य प्रशांत

2062
02:30:58,080 --> 02:31:02,280
के चैनल पर जो आर्य समाज वाले आचार्य प्रशांत जहां पर पोस्ट डाली

2063
02:31:02,280 --> 02:31:06,280
गई थी वहां पर आचार्य प्रशांत से मैंने कहा था अगर चर्चा आप करना चाहते तो मैं

2064
02:31:06,280 --> 02:31:10,600
आपके लिए तैयार ह हां जी बोलिए आरन कुशवा

2065
02:31:10,600 --> 02:31:14,720
हा तो यह पूछ रहा था कि जो विष्णु पुराण है उसका अध्ययन किसी बिना

2066
02:31:14,720 --> 02:31:20,320
गुरु के कर सकते हैं मतलब अपने आप गीता प्रेस वाली

2067
02:31:20,320 --> 02:31:24,480
अध्ययन तो स्वा अध्ययन ही होता है मगर किसी ना किसी गुरु से आप आज्ञा

2068
02:31:24,480 --> 02:31:28,640
ले लीजिए अनुमति ले लीजिए अध्ययन तो स्वा अध्ययन ही होता है

2069
02:31:28,640 --> 02:31:32,640
हा ठीक है परंपरा प्राप्त आचार्य से अनुमति ले लीजिए

2070
02:31:32,640 --> 02:31:36,920
वो अच्छा ठीक अगर नहीं है किसी के सानिध्य में

2071
02:31:36,920 --> 02:31:41,200
तो सानिध्य प्राप्त करिए क्योंकि बिना गुरु के जो है मति भ्रष्ट हो जाती

2072
02:31:41,200 --> 02:31:45,280
है फिर वही होगा फिर फिर आगे का प्रश्न य है कि

2073
02:31:45,280 --> 02:31:49,280
वो पूरी शंकराचार्य जी से दीक्षा कैसे ले इसका मतलब प्रक्रिया

2074
02:31:49,280 --> 02:31:51,880
क्या होता है

2075
02:31:51,880 --> 02:31:56,120
पुरी शंकराचार्य जी से दीक्षा दीक्षा कैसे

2076
02:31:56,120 --> 02:32:00,400
ले पुरी शंकराचार्य जी जहां भी आपके आसपास शिविर लगेगा

2077
02:32:00,400 --> 02:32:04,480
उनका तो आप क्या कहते जाइएगा और वहां

2078
02:32:04,480 --> 02:32:09,600
पर एक धोती और एक उपव स्त्र के साथ जाइए

2079
02:32:09,600 --> 02:32:13,680
और उपवत के साथ आप जाइए और वहां जाकर के

2080
02:32:13,680 --> 02:32:18,400
आप अपना नाम लिखवा दीजिए सुबह का जो उनका प्रवचन होता है उसके बाद वो दीक्षा

2081
02:32:18,400 --> 02:32:23,200
देते ठीक है

2082
02:32:23,200 --> 02:32:27,320
ठीक ठीक है सभी को जय श्री राम आने के लिए धन्यवाद

2083
02:32:27,320 --> 02:32:31,600
किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप हमसे

2084
02:32:31,600 --> 02:32:35,160
संपर्क कर सकते

2085
02:32:35,160 --> 02:32:39,440
हैं एक बात रह गई है योगी

2086
02:32:39,440 --> 02:32:43,640
जी की जो सनातन को कुछ चीजों को बदलने की बात करते हैं संभवत

2087
02:32:43,640 --> 02:32:49,640
व किसी और दिन लाइव में आएंगे तो उनसे व बात हो पाएगी तो

2088
02:32:53,920 --> 02:32:59,040
अ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए केवल ट करें

2089
02:32:59,040 --> 02:33:03,360
और जो मैंने शुरू में कहा था कि

2090
02:33:03,360 --> 02:33:08,160
लड़ाई समाज के लिए ही होती है धर्म के लिए होती है परंतु

2091
02:33:08,160 --> 02:33:12,200
वह फिर व्यक्तिगत हो जाती है ऐसे ही हमारी भी हो चुकी है

2092
02:33:12,200 --> 02:33:16,360
अब जो साथ में रहना चाहता है वो रहे और जो यह कहते हुए

2093
02:33:16,360 --> 02:33:20,400
अलग हट जाना चाहता है ये तो शिवांश की लड़ाई है इससे हमें क्या लेना देना वह

2094
02:33:20,400 --> 02:33:26,400
अलग भी हो सकता है जय श्री राम सभी

2095
02:33:32,040 --> 02:33:36,080
को यह पथराज राम का व्यक्ति फिर आया है उसको भी

2096
02:33:36,080 --> 02:33:40,280
मैं जाते जाते बता दूं इस पर भी इन्होंने कटिंग क्लिप निकाल ली है कुछ

2097
02:33:40,280 --> 02:33:44,680
ऐसी जानकारी है कि इसने पहले गुरुदेव

2098
02:33:44,680 --> 02:33:49,160
का क्या कहते हैं चित्र एडिट किया है पथराज

2099
02:33:49,160 --> 02:33:54,120
वही जो रहा मैं जिज्ञासु हूं मैं आर समाजी नहीं हूं

2100
02:33:54,120 --> 02:33:58,800
पहली बात दूसरी बात य है कि वैचारिक मतभेद के निमित्त हम यहां पर चर्चा करते हैं

2101
02:33:58,800 --> 02:34:03,360
हम यहां पर चर्चा जिज्ञासा शांत करने के लिए नहीं करते हैं उसके लिए

2102
02:34:03,360 --> 02:34:07,800
गुरुदेव के सभा स्थल है वहां जाए अथवा हमारी क्लासेस में है

2103
02:34:07,800 --> 02:34:12,040
ठीक है पराज जी आप बहुत बड़े जिज्ञासु है ना इसलिए दूसरी बात य

2104
02:34:12,040 --> 02:34:16,320
कि आपका स्टैंड भी आप क्लियर नहीं करते हैं कि आपको आर्य समाज की कौन सी

2105
02:34:16,320 --> 02:34:20,320
शिक्षा वो समझ में नहीं आई है क्या विरोध

2106
02:34:20,320 --> 02:34:24,360
है तो इन इन कारणों से हमने आपके साथ चर्चा नहीं की जिसको आप अपने

2107
02:34:24,360 --> 02:34:29,400
अनुसार जो भी देना चाहते हैं

2108
02:34:29,400 --> 02:34:33,720
रूप वो दे सकते हैं आप स्वतंत्र उसके लिए मगर वही बात है जब वैचारिक

2109
02:34:33,720 --> 02:34:38,640
मतभेद के निमित्त जब प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा

2110
02:34:38,640 --> 02:34:43,880
दृश्य बदल जाएगा जय श्री

2111
02:34:43,880 --> 02:34:48,640
[संगीत]

2112
02:34:48,640 --> 02:34:52,640
राम m
