1
00:00:01,460 --> 00:00:07,460
[संगीत]

2
00:00:08,160 --> 00:00:12,760
सभी को जय श्री राम तो

3
00:00:12,760 --> 00:00:18,720
आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

4
00:00:18,720 --> 00:00:24,720
और भगवान की भक्ति में अपना मन लगा पा रहे

5
00:00:26,240 --> 00:00:31,280
होंगे आज एक सामान्य चर्चा का विषय रखा

6
00:00:31,280 --> 00:00:35,400
यदि कोई भी हमारे कार्यों से

7
00:00:35,400 --> 00:00:39,920
संतुष्ट है हमारे अभियान से संतुष्ट है तो उनको

8
00:00:39,920 --> 00:00:45,920
लिया जाएगा सभी लोगों को और वह अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं आ कर

9
00:00:46,520 --> 00:00:49,480
के

10
00:00:49,480 --> 00:00:54,080
तो इसके साथ ही साथ कुछ चीजों पर हम लोग एक बात करेंगे

11
00:00:54,080 --> 00:00:58,920
जैसे आज आपने वो वीडियो देखा होगा जो

12
00:00:58,920 --> 00:01:02,920
हमारी की बहन है उसने किस तरह से

13
00:01:02,920 --> 00:01:07,240
अपने घर में क्रांति लाई और वो आपके सामने है

14
00:01:07,240 --> 00:01:11,360
संभवत आपने उनके घर का वो मंदिर भी देखा होगा उस मंदिर को देख

15
00:01:11,360 --> 00:01:15,800
के ऐसा लगता है कि जैसे हमारा जीवन सार्थक हो

16
00:01:15,800 --> 00:01:19,800
गया क्योंकि उसमें एक मंदिर में पहले

17
00:01:19,800 --> 00:01:22,600
क्या है

18
00:01:22,600 --> 00:01:26,880
रामपाल जेल धाम निवासी रामपाल

19
00:01:26,880 --> 00:01:32,880
के सामने बुझा हुआ दिया है यह भी ध्यान रखने हो गया कि संयोग

20
00:01:33,000 --> 00:01:37,000
से छोटी बहना ने जब अपने मंदिर का वो दृश्य में

21
00:01:37,000 --> 00:01:41,640
दिखाया कि भाई हमारे यहां पर रामपाल की पूजा होती है

22
00:01:41,640 --> 00:01:45,640
तो उस समय दिया भुजा हुआ है मगर जब संयोग है

23
00:01:45,640 --> 00:01:50,280
मात्र जा यह सोच समझ के किया गया कार्य नहीं है मगर जिस

24
00:01:50,280 --> 00:01:54,480
समय उसने बाद में भ भगवान की जब पूजा होने लगी तब वहां का चित्र

25
00:01:54,480 --> 00:01:58,920
जब उसने लिया अपने तो संयोग से वहां पर दिया जल रहा

26
00:01:58,920 --> 00:02:01,520
तो यह मतलब ऐसी

27
00:02:01,520 --> 00:02:05,640
इन चीजों को देख कर के इतनी खुशी मिलती है ना कि भाई कोई ऋषि

28
00:02:05,640 --> 00:02:09,720
उवाच नाम का गुंडा आप क्रिटिसाइज कर रहा है

29
00:02:09,720 --> 00:02:13,840
यह आप देख सकते हैं आपके सामने उनके घर का मंदिर है यह दिया

30
00:02:13,840 --> 00:02:16,760
जलता हुआ

31
00:02:16,760 --> 00:02:21,040
और जब रामपाल है वहां पर तो एक

32
00:02:21,040 --> 00:02:25,160
दिया बुझा हुआ यह संयोग इसको प्री प्लान ना

33
00:02:25,160 --> 00:02:30,040
समझिए आप लोग तो जब यह देख लेते हैं ना

34
00:02:30,040 --> 00:02:34,040
तो फिर यह लगता है कि फिर यह

35
00:02:34,040 --> 00:02:36,880
ऋषि वाद

36
00:02:36,880 --> 00:02:41,320
जैसे बेनाम बादशाह या जितने भी विरोधी

37
00:02:41,320 --> 00:02:45,320
हैं उन सब विरोध को झेलते हुए भी एक इस तरह की चीज

38
00:02:45,320 --> 00:02:50,200
सामने जब आ जाती है तो संतुष्टि मिल जाती है नींद अच्छी आ जाती

39
00:02:50,200 --> 00:02:54,400
है जब अमित दास जैसा कोई व्यक्ति दोगला

40
00:02:54,400 --> 00:02:58,800
जो यहां आकर के पहले तारीफ करता है थैंक यू कहता है माफी मांगता है

41
00:02:58,800 --> 00:03:02,800
और फिर उसके बाद जैसे ही उसका पक्ष ढीला पड़ने लगता है फिर कमजोर हो जाता है फिर

42
00:03:02,800 --> 00:03:06,840
अपने चैनल पर जा करके लाइव करता है फिर कुत करता है यह सब

43
00:03:06,840 --> 00:03:10,920
जब धर्म संस्थापन से संबंधित जब दृश्य देख लेते

44
00:03:10,920 --> 00:03:14,920
हैं तो ऐसा लगता है कि गुरुदेव की व वाणी है जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र की

45
00:03:14,920 --> 00:03:16,600
जो वाणी है जो

46
00:03:16,600 --> 00:03:20,600
अर्जुन को कहा था तु मत बन निमित तू

47
00:03:20,600 --> 00:03:24,680
अगर नहीं भी चाहेगा तब भी तेरे जन्म का जो प्रयोजन होगा ना

48
00:03:24,680 --> 00:03:28,840
वो तुझसे करवा लिया जाए तो ऐसा लगता है बस

49
00:03:28,840 --> 00:03:33,200
इतनी सार्थकता हो ग और ऐसा नहीं है कि अकेला चेंज है

50
00:03:33,200 --> 00:03:37,320
बहुत सारे हमारे पास फोन कॉल्स आ रहे हैं कि हमारे यहां ये हो गया हमारे य

51
00:03:37,320 --> 00:03:41,600
चेंज हुआ स्कन को लेकर के बहुत सारे फोन कॉल्स आ रहे हैं

52
00:03:41,600 --> 00:03:46,440
वो लोग आकर के अपने विचार व्यक्त करना चाहते हैं समय के साथ साथ उनको भी दिखाया

53
00:03:46,440 --> 00:03:50,440
जाएगा अलंकार समाज से लोग सवाल कर रहे हैं जाकर के हम देख

54
00:03:50,440 --> 00:03:54,520
रहे हैं कि उनके वीडियोस चल रहे हैं वहां पर नीचे लोग पूछ रहे हैं तुम्हारा ईश्वर सर्व शक्तिमान

55
00:03:54,520 --> 00:03:58,560
क्यों नहीं ये यह हमारी यह अचीवमेंट

56
00:03:58,560 --> 00:04:02,760
है जब लोग वहां जाकर के पूछ रहे हैं तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान

57
00:04:02,760 --> 00:04:06,840
क्यों नहीं है एक न्यूट्रल हिंदू एक सामान्य हिंदू उसको इतनी

58
00:04:06,840 --> 00:04:11,080
बात पता लग गई है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है व पूछ रहे हैं वाचन

59
00:04:11,080 --> 00:04:15,280
उनका जवाब नहीं दिया जा रहा पूछ रहे हैं जा जा कर के लोग उनके

60
00:04:15,280 --> 00:04:19,400
चरणों हमें नहीं जाना पड़ रहा हमने नहीं भेजा मगर वहां लोग

61
00:04:19,400 --> 00:04:23,480
पूछ रहे हैं तुम्हारे पास वेद मंत्र कैसे आए कैसे

62
00:04:23,480 --> 00:04:27,640
आए वेद मंत्र हमारी

63
00:04:27,640 --> 00:04:31,640
चीजें जो अन्य सामान ऐसे लोग है

64
00:04:31,640 --> 00:04:35,640
जो ना उधर के ना इधर के हैं मगर वो जाकर के उन चीजों को रख रहे

65
00:04:35,640 --> 00:04:39,920
हैं और यही हमारा जो है उद्देश्य हमारा उद्देश्य

66
00:04:39,920 --> 00:04:44,280
य नहीं है हमने कई बार बताया कि हमको शंकराचार्य को जिताना है शंकर

67
00:04:44,280 --> 00:04:48,440
परंपरा को जिताना है हमें हिंदू धर्म को जिताना हमें

68
00:04:48,440 --> 00:04:52,840
सनातन धर्म को जिताना है और वह जीतेगा तभी जब वैचारिक

69
00:04:52,840 --> 00:04:57,560
क्रांति आएगी स्वस्थ क्रांति आएगी जब

70
00:04:57,560 --> 00:05:01,560
हमें हमारे सार्वभौम सिद्धांत पता होंगे जब

71
00:05:01,560 --> 00:05:06,440
हमें हमारे ही धर्म को लेकर के संशय नहीं

72
00:05:06,440 --> 00:05:10,720
होगा जब आर्य समाज के द्वारा

73
00:05:10,720 --> 00:05:15,280
खड़ा हुआ एक आचार्य स्वयं यह नहीं कह रहा होगा कि मैं आर्य समाज के

74
00:05:15,280 --> 00:05:20,360
मोक्ष से संतुष्ट नहीं हो है

75
00:05:20,360 --> 00:05:24,360
ना जब यह नहीं हो रहा होगा ऐसा नहीं सोच

76
00:05:24,360 --> 00:05:28,520
रहा होगा व्यक्ति अपने मोक्ष को लेकर के अपने ईश्वर को लेकर के व्यक्ति के थॉट्स

77
00:05:28,520 --> 00:05:32,520
जो होते हैं वो क्लियर नहीं होंगी जब यह

78
00:05:32,520 --> 00:05:36,680
चीजें नहीं होंगी तब आएगी वैचारिक क्रांति लोगों

79
00:05:36,680 --> 00:05:41,600
को लगता है कि हम लोग यह कर रहे हैं कई बार ऐसा भी आता है कि आप लोग

80
00:05:41,600 --> 00:05:45,800
क्या कहते हैं किसी का विरोध क्यों कर रहे हैं आप अपनी लंबी लकीर खींचिए

81
00:05:45,800 --> 00:05:46,760
हम विरोध नहीं कर रहे

82
00:05:46,760 --> 00:05:51,320
हैं शोधन कर रहे हैं और

83
00:05:51,320 --> 00:05:55,320
अगर हम वह चीज नहीं देख पा रहे जो आपके पास है वो

84
00:05:55,320 --> 00:06:00,800
हमें दिखाइए तो वो भी नहीं है

85
00:06:00,800 --> 00:06:04,960
वो भी नहीं है कोई बताता ही नहीं है भाई हम आपकी परंपरा

86
00:06:04,960 --> 00:06:09,080
नहीं देख पा रहे आप अपनी परंपरा दिखा दीजिए दिखाओगे

87
00:06:09,080 --> 00:06:13,680
नहीं लड़ो हाउ डेयर यू तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमसे पूछने की

88
00:06:13,680 --> 00:06:19,680
कि परंपरा क्या है अब हम नहीं पूछ रहे कमेंट्स में जा जाक लोग पूछ रहे

89
00:06:19,840 --> 00:06:24,240
हैं तो यह जब देख लेते हैं तो फिर लगता है कि

90
00:06:24,240 --> 00:06:28,360
लोग गाली दे रहे हैं क्रिटिसाइज कर रहे हैं फोन कर रहे हैं हरेसमेंट

91
00:06:28,360 --> 00:06:32,520
कर रहे हैं ठीक है करने दो परिवार तक पहुंच

92
00:06:32,520 --> 00:06:38,520
गए ठीक है भाई जाने दो

93
00:06:39,800 --> 00:06:43,880
मगर कर्मन निवादी का रस्ते मा फले सुराज जब

94
00:06:43,880 --> 00:06:48,000
तक नौका डूबती नहीं लोग आएंगे तुमसे

95
00:06:48,000 --> 00:06:52,280
कहेंगे कलयुग है कुछ नहीं होने वाला किसी

96
00:06:52,280 --> 00:06:56,360
की बात मत सुनना बीज की रक्षा भगवान को अभीष्ट

97
00:06:56,360 --> 00:07:02,360
है धर्म की रक्षा भगवान को अभीष्ट है करते रहना

98
00:07:02,920 --> 00:07:07,290
तो वही कर रहे

99
00:07:07,290 --> 00:07:12,440
[संगीत] हैं

100
00:07:12,440 --> 00:07:15,240
र

101
00:07:15,240 --> 00:07:19,320
अ भैया ईसाई भी बहुत उछल रहे हैं एक

102
00:07:19,320 --> 00:07:24,720
ईसाई ने आज कांटेक्ट किया तो हमसे उड़ीसा का है कोई हमने उसको लिंक दिया

103
00:07:24,720 --> 00:07:28,880
है अगर वह आना चाहे तो आ सकता है उसने

104
00:07:28,880 --> 00:07:33,640
कमेंट्स में भी हमको जो आज जो वीडियो आया शायद उसके कमेंट्स में भी कहा है नहीं

105
00:07:33,640 --> 00:07:39,280
वो जो एक एक बार एक लड़का आया था ना छोटा था वो

106
00:07:39,280 --> 00:07:43,760
अ वो लड़का आया था जो उसका जो हमने

107
00:07:43,760 --> 00:07:48,080
एक शॉर्ट वीडियो बना के डाला था तो

108
00:07:48,080 --> 00:07:52,080
वह उस शॉर्ट वीडियो में उसने कमेंट किया कि मैं आपके साथ लाइव

109
00:07:52,080 --> 00:07:58,080
आना चाहता हूं तो हमने उसको लिंक दिया है शायद वो आ जाए

110
00:08:02,360 --> 00:08:06,360
अच्छा अब आज का मेरा एक सामान्य टॉपिक

111
00:08:06,360 --> 00:08:10,360
है हालाकि और उसी पर बात करने के बाद उस पर विवेचना करने के बाद हम

112
00:08:10,360 --> 00:08:16,360
लोग थोड़ा सा आगे बात करेंगे

113
00:08:16,800 --> 00:08:21,000
तो इनके य पर बताया गया है

114
00:08:21,000 --> 00:08:25,040
रामपाल एंड कंपनी के द्वारा बताया जाता है इनकी ज्ञान गंगा में

115
00:08:25,040 --> 00:08:31,040
य गीता तेरा ज्ञान अमृत क्या बताते हैं कि

116
00:08:32,240 --> 00:08:36,840
7 हज शंकर की मृत्यु के पश्चात

117
00:08:36,840 --> 00:08:41,360
एक ब्रह्म की मृत्यु होती है अर्थात क्षर पुरुष की मृत्यु होती

118
00:08:41,360 --> 00:08:45,440
है अब ये इन्होंने आज

119
00:08:45,440 --> 00:08:49,440
तक सर्व अनुवाद कर्ताओं ने उचित अनुवाद नहीं किया है

120
00:08:49,440 --> 00:08:53,480
आठ 17 में सबने ब्रह्मा का 1000 चतुर योगी लिखा है यह गलत

121
00:08:53,480 --> 00:08:57,760
है देखें जो भी है 7 हज वर्षों के बाद

122
00:08:57,760 --> 00:09:02,000
एक ब्रह्म की मृत्यु होती है अब सवाल यह खड़ा

123
00:09:02,000 --> 00:09:06,160
होता है यहां से यह जो काल ब्रह्म है यदि यह

124
00:09:06,160 --> 00:09:10,280
मरता है तो जिस समय य मरता है

125
00:09:10,280 --> 00:09:14,920
उस समय क्या होता है प्रलय हो जाती है लोग वापस

126
00:09:14,920 --> 00:09:17,600
जहां से आए हैं वहां पहुंच जाते हैं क्योंकि इसके ही लोक

127
00:09:17,600 --> 00:09:21,680
में फसे हुए हो ना तो जब काल ब्रह्म मर जाता है 70 हज

128
00:09:21,680 --> 00:09:25,920
वर्ष के बाद तो उस समय की जो आत्माएं हैं जो काल

129
00:09:25,920 --> 00:09:29,960
के लोक में फसी होती है उनका क्या होता है वो मुक्त हो चुकी होती है

130
00:09:29,960 --> 00:09:34,160
या मुक्त नहीं हुई होती है यह सवाल फसता है क्योंकि आपने

131
00:09:34,160 --> 00:09:38,840
काल को नाशवान माना है तो काल को मारना पड़ रहा है आपको

132
00:09:38,840 --> 00:09:42,920
वो बात अलग है कि जीवात्मा तक अविनाशी है मगर जिसको

133
00:09:42,920 --> 00:09:48,720
वो जीवात्मा भगवान कह रही है वो अविनाशी नहीं है वो उत्पन्न होता है

134
00:09:48,720 --> 00:09:52,760
खैर क्योंकि अगर जिस तरह से काल उत्पन्न हुआ उस तरह से

135
00:09:52,760 --> 00:09:56,920
उत्पन्न होना माना जाएगा तो फिर जीवात्मा भी अविनाशी नहीं है जीव भी अविनाशी

136
00:09:56,920 --> 00:10:00,920
नहीं है तो ये तो एक बात रही मगर अभी हम फोकस कर

137
00:10:00,920 --> 00:10:05,200
रहे हैं कि काल भी मरता है 7 हज वर्ष के बाद तो

138
00:10:05,200 --> 00:10:09,840
70 हज वर्ष के समय जब काल मरेगा तो उस समय जो फंसी हुई

139
00:10:09,840 --> 00:10:13,840
पुण्या आत्माएं हैं जो इनकी जो शरणागत हो

140
00:10:13,840 --> 00:10:17,920
जाती हैं रामपाल के तो उन पुण्या आत्माओं का क्या होगा उस समय

141
00:10:17,920 --> 00:10:22,800
वो ऑटोमेटिक मुक्त हो जाएंगी ये मरने के बाद या क्या हो

142
00:10:22,800 --> 00:10:26,800
अच्छा वो अगर मुक्त हो गई अगर नहीं मुक्त

143
00:10:26,800 --> 00:10:30,840
हुई तो उनको फिर कौन फसा करके रखा है काल तो मर गया तो हमें मानना

144
00:10:30,840 --> 00:10:32,800
पड़ेगा कि भाई

145
00:10:32,800 --> 00:10:36,800
या तो काल के मरने से पहले या जो भी है वो जो आत्माएं है वो मुक्त हो

146
00:10:36,800 --> 00:10:40,880
जाती है अब जब वो मुक्त हो जाती है तो क्योंकि

147
00:10:40,880 --> 00:10:44,920
इनका जो काल है वो फिर से उत्पन्न होता है तेरे और मेरे

148
00:10:44,920 --> 00:10:49,160
कई जन्म हो चुके हैं यानी दोबारा जन्म लेता है तो जो आत्मा

149
00:10:49,160 --> 00:10:53,240
मुक्त हो चुकी है सतलोक में जा चुकी है जाहिर सी बात

150
00:10:53,240 --> 00:10:57,720
है जब काल नहीं रहा तो सारी आत्माएं कहां आ गई मुक्त हो कर के सतलोक में आ गई

151
00:10:57,720 --> 00:11:01,840
तो फिर जब ये दोबारा जन्म लेता है पहली बात तो यह है कि कबीर को मालूम

152
00:11:01,840 --> 00:11:05,880
होता है इसने अपने पिछले जन्म में क्या किया था तो कबीर फिर भी इसको बनाता है

153
00:11:05,880 --> 00:11:10,240
बनने देता है कबीर जो है सब कुछ जानते हुए भी इसको बनने

154
00:11:10,240 --> 00:11:15,160
देता है और बनने देते हुए फिर वह

155
00:11:15,160 --> 00:11:19,320
जब यह काल दोबारा बन जाता है तो वही आत्माएं जो पुण्य

156
00:11:19,320 --> 00:11:23,920
को मोक्ष को प्राप्त कर चुकी है उन्हें दोबारा आना पड़ता है

157
00:11:23,920 --> 00:11:28,240
तो फिर वह कौन सा परम धाम है जहां जाकर के आत्मा

158
00:11:28,240 --> 00:11:32,440
को लौटना नहीं पड़ेगा ये रामपाल की कहानी

159
00:11:32,440 --> 00:11:36,440
से बता रहे हैं क्योंकि इसका रामपाल

160
00:11:36,440 --> 00:11:40,640
में कहा जा रहा है यह जो काल है यह

161
00:11:40,640 --> 00:11:44,760
अविनाशी यूं ही कहा गया है गीता कहने वाला इनका

162
00:11:44,760 --> 00:11:47,960
काल है उसको अविनाशी यूं ही कहा गया है

163
00:11:47,960 --> 00:11:52,920
बाकी तो वह 70 हजार वर्ष के बाद मर

164
00:11:52,920 --> 00:11:56,960
जाता 7 हज वर्ष नहीं 7 हज शंकर

165
00:11:56,960 --> 00:12:01,040
की मृत्यु के पश्चात एक बार के ब्रह्म की अर्थात क्षर

166
00:12:01,040 --> 00:12:05,160
पुरुष की मृत्यु होती है तो फिर यदि क्षर पुरुष की मृत्यु

167
00:12:05,160 --> 00:12:09,920
होती है इनके काल की मृत्यु होती है जो इन्होंने नाटक किया है काल के रूप में

168
00:12:09,920 --> 00:12:14,320
तो जब उसकी मृत्यु होती है तो फिर

169
00:12:14,320 --> 00:12:18,360
मृत्यु होने होते समय वो लोग मुक्त हो गए उसके काल के लोग से मुक्त हो गए भाई अब

170
00:12:18,360 --> 00:12:22,480
उसको कौन देखरेख कर रहा है कौन फसा रहा है कोई नहीं या फिर कोई

171
00:12:22,480 --> 00:12:26,520
और फसा रहा है तो जो मुक्त हो गए उसके बाद काल

172
00:12:26,520 --> 00:12:30,520
दोबारा जन्म लेगा अच्छा जन्म लेते समय वो कहां से

173
00:12:30,520 --> 00:12:34,760
लाएगा आत्मा जब वो दोबारा जन्म लेगा तो लाएगा तो सतलोक से ही

174
00:12:34,760 --> 00:12:38,760
सतलोक से ही लाएगा ना आत्मा अपने साथ तो सतलोक में वोह आत्माएं

175
00:12:38,760 --> 00:12:43,160
हैं जो मुक्त हो कर के भी पहुंची है वो भी है इसका तो कोई विवरण

176
00:12:43,160 --> 00:12:47,240
है नहीं तो फिर क्या हुआ इसका

177
00:12:47,240 --> 00:12:51,560
मतलब यह हुआ कि कोई परम धाम नहीं है

178
00:12:51,560 --> 00:12:55,600
जहां से व्यक्ति वापस नहीं आता क्योंकि काल

179
00:12:55,600 --> 00:12:59,760
फिर से जन्म लेगा फिर से व तपस्या करेगा फिर से वहां

180
00:12:59,760 --> 00:13:03,400
सतलोक के आश्रम सारा सुख ऐश्वर्य होने के बावजूद काल की ओर अट्रैक्ट

181
00:13:03,400 --> 00:13:09,360
होंगे वो नीचे आएंगे तो कोई परमधाम

182
00:13:09,360 --> 00:13:13,520
नहीं तो यह यदि आप यह मानोगे कि

183
00:13:13,520 --> 00:13:17,560
काल के कई जन्म हो चुके हैं तो यह आपका टोपा आपके ऊपर

184
00:13:17,560 --> 00:13:21,680
मर जाएगा कि आपके पास मुक्ति है ही नहीं जिस मुक्ति की आप

185
00:13:21,680 --> 00:13:25,680
बात करते हैं अच्छा दूसरी एक बात यह

186
00:13:25,680 --> 00:13:30,040
है कि कल हमने एक फोटो दिखाई थी अगर

187
00:13:30,040 --> 00:13:34,320
ऑपरेटर महोदय व फोटो दिखा पाए दोबारा तो दिखा दीजिए जिसमें

188
00:13:34,320 --> 00:13:38,800
कि यह कहा जा रहा है कि कबीर

189
00:13:38,800 --> 00:13:43,160
सागर भी उसके योग्य नहीं है

190
00:13:43,160 --> 00:13:47,160
मोक्ष कबीर सागर से भी मोक्ष नहीं होगा कबीर सागर में

191
00:13:47,160 --> 00:13:51,480
भी मोक्ष का ज्ञान नहीं है तो

192
00:13:51,480 --> 00:13:55,560
अब इसमें बात यह फसती है जब हम यह कह देते हैं कबीर सागर में भी मोक्ष का ज्ञान नहीं

193
00:13:55,560 --> 00:14:01,560
है लाइव के लिए हमने य दे दिया है किसी को अगर जुड़ना है तो सकता

194
00:14:03,680 --> 00:14:08,280
है अगर कोई आकर के इन सवालों का जवाब दे सकता है

195
00:14:08,280 --> 00:14:12,320
रामपाल की ओर से तो व दे जो यहां पर इस समय पूछे

196
00:14:12,320 --> 00:14:16,520
जा रहे हैं यह लिंक दे दिया गया है और कोई अगर अपने

197
00:14:16,520 --> 00:14:21,440
विचार प्रकट करना चाहता है तो विचार प्रकट कर सकता है

198
00:14:21,440 --> 00:14:27,440
तो अब दूसरी एक बात यह आती है कि

199
00:14:29,360 --> 00:14:33,480
यह देखिए इसमें क्या कहा जा रहा है कि कबीर सागर पढ़ने से भी मोक्ष

200
00:14:33,480 --> 00:14:37,720
नहीं है मोक्ष मिलेगा गुरु की शरण

201
00:14:37,720 --> 00:14:40,400
में जाने

202
00:14:40,400 --> 00:14:44,440
से तो जिस समय कबीर यह बुक लिख

203
00:14:44,440 --> 00:14:48,440
रहे हैं कबीर वाणी बोल रहे हैं तो जाहिर सी बात है

204
00:14:48,440 --> 00:14:52,480
उस कबीर वाणी में भी यह छिपा हुआ है कि तुम्हें इस वाणी को मेरे

205
00:14:52,480 --> 00:14:57,440
को सुन कर के मोक्ष नहीं मिलेगा तुम्हें गुरु के पास जाना ही पड़ेगा

206
00:14:57,440 --> 00:15:01,640
अब अगर ये कहते हैं कि कोई भी ज्ञान कितना भी ले लो किसी ग्रंथ से फिर भी गुरु

207
00:15:01,640 --> 00:15:05,840
के पास जाना ही पड़ता है यह बात कही गई है ऐसा नहीं है कि कबीर

208
00:15:05,840 --> 00:15:10,160
सागर में मोक्ष की बात नहीं है तो यह बात गीता पर लागू क्यों नहीं होगी

209
00:15:10,160 --> 00:15:14,320
भाई यही बात तो वो कह रहे हैं कि तुम्हे अंत तो गवा गुरु के पास भी जाना पड़ेगा जहां

210
00:15:14,320 --> 00:15:18,560
पर कबीर साहब स्वयं नहीं होंगे यानी कि गीता के अनुसार जहां पर कृष्ण जी स्वयं

211
00:15:18,560 --> 00:15:19,060
नहीं

212
00:15:18,720 --> 00:15:23,080
होंगे तो वहां पर उनके द्वारा कही गई वाणी और उस वाणी के द्वारा प्राप्त

213
00:15:23,080 --> 00:15:27,720
होने वाले भगवान की पूजा कैसे करनी है यह तुम्हें तत्व ज्ञानी तत्वदर्शी गुरु

214
00:15:27,720 --> 00:15:31,880
से पता करना पड़ेगा तो यदि कबीर सागर

215
00:15:31,880 --> 00:15:36,120
को पढ़ने के बाद भी तुम्हें गुरु की आवश्यकता पड़ रही है यानी कि कबीर से इतर

216
00:15:36,120 --> 00:15:40,240
भी कोई ज्यादा ज्ञानवान है और यदि आप यह

217
00:15:40,240 --> 00:15:44,240
मानोगे कि कबीर सागर से आपको सब कुछ मिल जाएगा मगर वो जो नाम

218
00:15:44,240 --> 00:15:48,440
देने का वो है केवल उस नाम के लिए और

219
00:15:48,440 --> 00:15:52,560
जो अधिकार प्राप्त जो पीछे से जो शिक्षा है उसके लिए

220
00:15:52,560 --> 00:15:56,800
तुम्हे गुरु के पास जाना ही पड़ेगा परंपरा प्राप्त चीजों के लिए तो वही चीज

221
00:15:56,800 --> 00:16:01,560
वहां प वो कह रहे हैं वो ये नहीं कह रहे तू मेरी बात मत मान गुरु के पास चला जा

222
00:16:01,560 --> 00:16:05,560
जिस प्रकार कबीर सागर होते हुए भी

223
00:16:05,560 --> 00:16:09,600
हम लोग किसी गुरु के पास जा रहे हैं इनके ही अनुसार

224
00:16:09,600 --> 00:16:13,720
कबीर सागर होते हुए भी हम किसी गुरु के पास

225
00:16:13,720 --> 00:16:17,720
जा रहे

226
00:16:17,720 --> 00:16:21,760
हैं है ना तो या तो ये

227
00:16:21,760 --> 00:16:25,840
मानोगे कबीर बोलने वाला ज्ञानी है तभी तो गुरु के पास जाना पड़ रहा है और

228
00:16:25,840 --> 00:16:29,840
यदि कबीर को बोलने वाला अज्ञानी नहीं है फिर भी गुरु के पास जाना पड़ रहा है यानी कि गुरु

229
00:16:29,840 --> 00:16:34,040
के पास जाने वा जाते जाने पर भी कबीर को अज्ञानी नहीं माना

230
00:16:34,040 --> 00:16:38,040
जा रहा है तो फिर गुरु के पास जाने की बात कहने के

231
00:16:38,040 --> 00:16:42,160
अनुसार गुरु गुरु के पास जाने की बात होने के अनुसार यह क्यों मान रहे हो कि नहीं अगर

232
00:16:42,160 --> 00:16:46,200
वो कृष्ण जी के पास सारा ज्ञान होता या काल के पास सारा गीता बोलने वाले के पास सारा

233
00:16:46,200 --> 00:16:50,200
ज्ञान होता तो गुरु पास जाने को क्यों कहते तो ऐसे तो फिर

234
00:16:50,200 --> 00:16:54,280
यह बात कबीर पर भी लागू हो गई क्योंकि कबीर सागर होते हुए भी तुम लिख रहे हो

235
00:16:54,280 --> 00:16:59,040
कि नहीं गुरु के पास जाना ही पड़ेगा गुरु पास जाने के लिए यही है

236
00:16:59,040 --> 00:17:03,520
नियम दिया गया कि आपको चीजों को समझने के लिए जाना

237
00:17:03,520 --> 00:17:07,760
पड़ेगा वो नियम आपको समझाया जब

238
00:17:07,760 --> 00:17:12,120
कृष्ण स्वयं नहीं होंगे तो उनकी वाणी आपको सही से कौन बताएगा

239
00:17:12,120 --> 00:17:16,680
तत्वदर्शी यह सिद्धांत दिया गया इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है

240
00:17:16,680 --> 00:17:21,240
कि जब उन्होंने य कहा कि तु तत्वदर्शी के पास जाना चाहिए ज्ञान का य

241
00:17:21,240 --> 00:17:25,480
यज्ञ का ज्ञान लेने के लिए तो ऐसा नहीं है कि वो रथ से उतरे और चले गए ज्ञान

242
00:17:25,480 --> 00:17:29,600
कौन देते रहे जगत यानी कि उन्होंने वहा दिया गुरु

243
00:17:29,600 --> 00:17:32,760
के पास जाने का वैसा ही सिद्धांत जोय अपने लिए

244
00:17:32,760 --> 00:17:36,840
तो मानते हैं मगर जब उसी को वहां आता तो उसके आधार पर खंडनी करने लगते गीता

245
00:17:36,840 --> 00:17:40,880
ज्ञान दाता के पास ज्ञान था गुरु पास जाने को क्या कह रहा तो कबीर वाणी में अगर ज्ञान

246
00:17:40,880 --> 00:17:45,200
है तो गुरु पास जाने को क्यों कह रहा है या कबीर वाणी में ज्ञान नहीं है

247
00:17:45,200 --> 00:17:49,520
यानी कबीर को कबीर वाणी को कहने वाला भी अधूरा है अपूर्ण

248
00:17:49,520 --> 00:17:53,520
है जगतगुरु नहीं है जगतगुरु नहीं है तो फिर उसके अवतार में

249
00:17:53,520 --> 00:17:57,800
आने वाला जगतगुरु कहां से हो गया य भी बात है

250
00:17:57,800 --> 00:18:02,000
और भैया कृष्ण के लिए तो लिख के आया है शास्त्रों में कृष्णम

251
00:18:02,000 --> 00:18:08,000
वंदे जगतगुरु कहां लिखा है रामपाल वंदे

252
00:18:08,120 --> 00:18:12,320
जगत शिव भगवान के लिए भी आया जगतगुरु विष्णु भगवान

253
00:18:12,320 --> 00:18:16,440
के लिए भी आया जगतगुरु संभवत राम जी के लिए भी आया जगतगुरु

254
00:18:16,440 --> 00:18:20,480
कहां आया रामपाल के लिए तो शास्त्र समत भक्ति

255
00:18:20,480 --> 00:18:24,920
नहीं है आप लोगों की शास्त्र विरुद्ध भक्ति

256
00:18:24,920 --> 00:18:29,040
है ये तो रही बात हमने

257
00:18:29,040 --> 00:18:33,720
नीचे दे दिया है कोई व्यक्ति अपने विचार व्यक्त करना चाहता

258
00:18:33,720 --> 00:18:38,040
हो अथवा रामपाल के मत को सही सिद्ध

259
00:18:38,040 --> 00:18:43,040
करना चाहता हो तो ऊपर आ जाए और

260
00:18:43,040 --> 00:18:47,040
बताए केवल कमेंट करने से थोड़ी ना

261
00:18:47,040 --> 00:18:51,080
चलेगा सामने आइए सत्य के पक्षधर

262
00:18:51,080 --> 00:18:57,080
है तो सामने आइए

263
00:19:02,240 --> 00:19:06,360
शिवांश बहुत ही मूर्खता जैसी बात यह इन्होंने कॉपी पेस्ट

264
00:19:06,360 --> 00:19:10,480
कर रखा है य वाला शिवास

265
00:19:10,480 --> 00:19:14,480
बहुत ही मूर्खता जैसी बात करता है एक बार बोलता है कि भगवान को मानता हूं एक मूर्ख जैसी

266
00:19:14,480 --> 00:19:18,720
बात एक बार बोलता है माता दुर्गा का पति शंकर दूसरी तरफ बोलता है ब्रह्मा विष्णु

267
00:19:18,720 --> 00:19:23,200
और शंकर क्या बोल रहे हो यार खैर

268
00:19:23,200 --> 00:19:27,360
तुम्हारी मूर्खता दिखाता हूं इनको पेज नंबर दिखाइए जरा

269
00:19:27,360 --> 00:19:32,320
वो वाला गरिमा गीता

270
00:19:32,320 --> 00:19:36,320
की तुम्हारी मूर्खता नहीं तुम्हारे तिरछे दर्शी की

271
00:19:36,320 --> 00:19:40,480
मूर्खता आप लोग जितने अपशब्द यहां उपयोग करोगे उतना

272
00:19:40,480 --> 00:19:44,480
ही वह सारे अपशब्द कहां जाएंगे पता है आपके

273
00:19:44,480 --> 00:19:48,680
तथाकथित ष दर्शी के पास गरमा

274
00:19:48,680 --> 00:19:53,240
गीता की का वो पेज निकालिए जरा व वाला जिसमें इन्होंने

275
00:19:53,240 --> 00:19:59,240
सा 24 में ऊपर लिखा है

276
00:20:02,160 --> 00:20:06,280
एक एक जगह लिखा है 724 में तुच्छ फिर

277
00:20:06,280 --> 00:20:12,280
लिखा है प्रभु यह है पेज नंबर

278
00:20:12,360 --> 00:20:17,480
199 है ना शेर का बच्चा एक ही

279
00:20:17,480 --> 00:20:22,280
अच्छा शिवांश तर्क वितर्क करो बहुत अच्छी बात है

280
00:20:22,280 --> 00:20:26,680
पर मर्यादा में रहकर हां मर्यादा में रह के ही कर रहे

281
00:20:26,680 --> 00:20:30,760
हैं मर्यादा में रहकर कर रहे तर्क वितर्क आप आ

282
00:20:30,760 --> 00:20:34,760
जाइए आपको कोई चीज अगर गलत लग रही आप बताइए कहां पर मर्यादा भंग हुई

283
00:20:34,760 --> 00:20:39,000
है 199 और इसके अनुसार पीडीएफ

284
00:20:39,000 --> 00:20:43,280
के अनुसार 179 बस बस बस ज्यादा नीचे नहीं है बड़ा

285
00:20:43,280 --> 00:20:46,880
करिए बड़ा

286
00:20:46,880 --> 00:20:51,040
करिए यह देखो भाई मूर्ख पन गरमा

287
00:20:51,040 --> 00:20:55,160
गीता की देखिए भाई कौन है इसको लिखने

288
00:20:55,160 --> 00:20:59,760
वाला मूर्ख ही है ना जो लिख रहा है कि मूर्ख जन

289
00:20:59,760 --> 00:21:04,000
मुझको मनुष्य शरीर धारण करने

290
00:21:04,000 --> 00:21:08,040
वाला तुच्छ जानते हैं क्या जानते हैं

291
00:21:08,040 --> 00:21:12,040
तुच्छ ये मूर्ख है कौन है भाई मुझे आप बताइए नीचे

292
00:21:12,040 --> 00:21:16,960
लाइन देखो भावार्थ में क्या लिख रहे

293
00:21:16,960 --> 00:21:21,120
हैं मूर्ख वो है जो गीता बोलने वाले को तुच्छ

294
00:21:21,120 --> 00:21:25,600
मानता है और नीचे क्या लिख रहे हैं मूर्ख वो है

295
00:21:25,600 --> 00:21:30,000
जो गीता बोलने वाले को प्रभु मानता है

296
00:21:30,000 --> 00:21:35,240
कौन है भाई जितनी बार बोलोगे

297
00:21:35,240 --> 00:21:39,480
मूर्ख यहां कमेंट में तुम्हारे आगे पीछे शायद एक दो लोग और मैं

298
00:21:39,480 --> 00:21:43,800
देखूंगा और मैं जब बोलूंगा तो आने वाले

299
00:21:43,800 --> 00:21:48,080
टाइम में 20 हज लोग यह चीज देखेंगे बोलो मूर्ख

300
00:21:48,080 --> 00:21:52,640
दोबारा बोलो खैर तुम्हें उससे फर्क भी नहीं पड़ता है

301
00:21:52,640 --> 00:21:57,280
तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हा जो तुम मूर्ख बोलो और वो मूर्खता कहां तक जाएगी

302
00:21:57,280 --> 00:22:01,560
जेल धाम तक है ना बोलो मूर्ख

303
00:22:01,560 --> 00:22:05,840
कहां गए कहां गए भाई मूर्ख

304
00:22:05,840 --> 00:22:10,400
बोलो और मूर्खता दिखाऊंगा फिर

305
00:22:10,400 --> 00:22:14,840
तुम्हें मजा आता है ना तो ऐसे ही ऐसे ही सही

306
00:22:14,840 --> 00:22:20,840
कहां गए

307
00:22:22,800 --> 00:22:27,520
भाई वो वाला कमेंट कहां गया किसने किया

308
00:22:27,520 --> 00:22:31,920
था ये देखो य ये बोल

309
00:22:31,920 --> 00:22:35,960
भाई सत ज्ञान के सत ज्ञान तथा कति

310
00:22:35,960 --> 00:22:40,600
रामपाल जी के चेले मूर्ख बोलिए

311
00:22:40,600 --> 00:22:44,600
बोलिए दोबारा अब नहीं बोलोगे क्या

312
00:22:44,600 --> 00:22:48,720
क्या हुआ मूर्ख शब्द बोलो ना फिर से एक मूर्खता

313
00:22:48,720 --> 00:22:52,800
दिखाऊंगा फिर से एक मूर्खता दिखाऊंगा बोलो

314
00:22:52,800 --> 00:22:58,800
एक बार और बोलो एक मूर्ता और दिखाऊ बोलो बोलो

315
00:22:59,960 --> 00:23:04,520
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में

316
00:23:04,520 --> 00:23:09,080
कोई नहीं है टक्कर में अब लोगों को इस

317
00:23:09,080 --> 00:23:13,360
उद्घोष से दिक्कत होने लगी चिड़ने लगे हैं लोग गूंज

318
00:23:13,360 --> 00:23:18,160
रहा है गीता बोलने वाला काल है भाई

319
00:23:18,160 --> 00:23:23,080
मूर्ख नहीं बोलोगे क्या भाषा बदल गई

320
00:23:23,080 --> 00:23:27,080
तुम्हारी कुछ रहा नहीं है ना तुम्हारे पास जल बन मछली की तरह तड़प रहे

321
00:23:27,080 --> 00:23:31,240
हो राजेश कुमार प्रूफ दो गीता किसने बोली है प्रूफ दो भाई

322
00:23:31,240 --> 00:23:36,800
इनको प्रूफ दे दो मैं देता हूं प्रूफ गीता किसने बोली

323
00:23:36,800 --> 00:23:40,880
है कितनी बार कहा है मत करो कुछ भी उल्टा

324
00:23:40,880 --> 00:23:45,720
सीधा करोगे तो तुम्हारे जेल दाम में बैठे तिरछे दर्शी को तकलीफ

325
00:23:45,720 --> 00:23:49,760
होगी मत करो उल्टा सीधा ये दे लो

326
00:23:49,760 --> 00:23:52,040
भाई

327
00:23:52,040 --> 00:23:56,240
प्रमाण जय श्री राम चक्र पाण

328
00:23:56,240 --> 00:24:00,440
जी जय श्री राम जय श्री राम

329
00:24:00,440 --> 00:24:04,880
इनका सब खत्म हो गया अब कुछ बचा नहीं बकुल

330
00:24:04,880 --> 00:24:10,800
कुछ बचा नहीं है बिल्कुल पोस्टमार्टम चालू

331
00:24:10,800 --> 00:24:15,000
है तो भैया गीता का ज्ञान किसने बोला

332
00:24:15,000 --> 00:24:21,000
है इसका प्रमाण ले

333
00:24:21,560 --> 00:24:26,000
लो गीता तेरा ज्ञान अमृत शंका समाधान वाला

334
00:24:26,000 --> 00:24:30,800
चैप्टर और पीडीएफ के हिसाब से से पृष्ठ संख्या

335
00:24:30,800 --> 00:24:34,920
51 दिखाओ भा इनको प्रमाण

336
00:24:34,920 --> 00:24:38,960
किसने पूछा था प्रमाण दिखाओ गीता ज्ञान

337
00:24:38,960 --> 00:24:43,080
किसने दिया है गीता ज्ञान बोलने

338
00:24:43,080 --> 00:24:47,120
वाला काल है और यह बोलने वाला ये जो रामपाल जी के नाम से आ रहा है

339
00:24:47,120 --> 00:24:52,320
मूर्ख है है

340
00:24:52,320 --> 00:24:56,400
ना ये देखो ये राजेश कुमार

341
00:24:56,400 --> 00:25:00,720
प्रूफ दो गीता किसने कही है प्रूफ लो गीता

342
00:25:00,720 --> 00:25:05,440
भगवान श्री कृष्ण ने कही है कौन बोल रहा है पता है कबीर

343
00:25:05,440 --> 00:25:11,440
32 वा 32 वा प्रश्न निकालिए 32 वा 32 नंबर का

344
00:25:14,720 --> 00:25:18,840
प्रश्न थोड़ा सा और आगे बस

345
00:25:18,840 --> 00:25:24,360
बस ब जिंदा बाबा यह कौन सा है धर्मदास ने

346
00:25:24,360 --> 00:25:30,360
कहा ज्यादा आगे आ गए क्या

347
00:25:31,560 --> 00:25:36,000
ये 37 प आ गए 37 हो गए पीछे

348
00:25:36,000 --> 00:25:40,240
चलिए चक्र पानी जी आप हां कैमरा सीधा कर लीजिए बस

349
00:25:40,240 --> 00:25:44,400
थोड़ा सा और थोड़ा सा और बस बस बस बस

350
00:25:44,400 --> 00:25:48,480
बस बस बस ज्यादा पीछे हो गए 35 और पीछे और पीछे

351
00:25:48,480 --> 00:25:52,800
और

352
00:25:52,800 --> 00:25:56,800
पीछे हमें तो इनसे बातें करने के लिए अपने

353
00:25:56,800 --> 00:26:01,280
ग्रंथ खोलने की आवश्यकता नहीं

354
00:26:01,280 --> 00:26:05,400
हां भाई ये आ गया 3 तो कबीर दास

355
00:26:05,400 --> 00:26:06,440
जी कह रहे हैं

356
00:26:06,440 --> 00:26:11,000
हे धर्मदास गीता शास्त्र आपके परमपिता

357
00:26:11,000 --> 00:26:15,560
भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु जी का अनुभव तथा आपको आदेश

358
00:26:15,560 --> 00:26:18,360
है इस गीता शास्त्र में लिखे

359
00:26:18,360 --> 00:26:22,600
व क्या आदेश है किसका आदेश है भगवान

360
00:26:22,600 --> 00:26:27,040
कृष्ण विष्णु जी इनका आदेश है इस

361
00:26:27,040 --> 00:26:31,080
गीता शास्त्र में लिख मेरे अनुभव को पढ़कर इसके अनुसार भक्ति करोगे तो

362
00:26:31,080 --> 00:26:35,200
मोक्ष को प्राप्त करोगे भक्ति किसके अनुसार करनी है गीता

363
00:26:35,200 --> 00:26:39,720
के अनुसार आदेश किसका है

364
00:26:39,720 --> 00:26:43,760
अब भैया या तो यह मान लो कि यहां पर तुम्हारे तिरछे दर्शी से गलती हो

365
00:26:43,760 --> 00:26:47,920
गई व तत्व ज्ञानी नहीं है क्या करोगे राजेश

366
00:26:47,920 --> 00:26:53,840
जी को ऊपर आओगे क्या कहीं का नहीं छोड़ा ना

367
00:26:53,840 --> 00:26:58,080
तुमको यह देखो वो कहते तुमको कहीं का छोड़ा

368
00:26:58,080 --> 00:27:02,320
नहीं ना वो वीडियो भी दिखा दो कुछ इफ एंड बट हो य परमात्मा

369
00:27:02,320 --> 00:27:08,320
का ज्ञान है कि नहीं गीता

370
00:27:13,400 --> 00:27:17,400
का अरे भाई तुम यह बताओ तुम जो बोल रहे

371
00:27:17,400 --> 00:27:22,320
हो ठीक है यहां पर क्या हुआ कबीर गलत बोल रहा है रामपाल गलत बोल रहा है यह तो बताओ

372
00:27:22,320 --> 00:27:26,360
इसका क्या करें तुम हमारी चीजें मानोगे

373
00:27:26,360 --> 00:27:30,440
नहीं हमारा विश्लेषण मानोगे नहीं रामपाल तो मानोगे या नहीं मानोगे तो कह

374
00:27:30,440 --> 00:27:34,520
दो कि यहां पर रामपाल जी महाराज से गलती हो गई इतना बोल दो इतना

375
00:27:34,520 --> 00:27:38,680
तो बोलो तत्वदर्शी से गलती हुई

376
00:27:38,680 --> 00:27:41,880
भगवान से गलती हुई पुमा पवित्र

377
00:27:41,880 --> 00:27:45,920
चारों वेद और पवित्र श्रीमद भगवत गीता यह गड गिवन

378
00:27:45,920 --> 00:27:49,960
स्पिरिचुअल नॉलेज है यह परमात्मा का दिया हुआ

379
00:27:49,960 --> 00:27:53,240
आध्यात्मिक ज्ञान

380
00:27:53,240 --> 00:27:55,080
है किसका दिया हुआ

381
00:27:55,080 --> 00:27:59,280
है आत्मिक ज्ञान हैमा का दि आध्यात्मिक

382
00:27:59,280 --> 00:28:05,280
ज्ञान है स्पिरिचुअल नॉलेज है बस बस ठीक

383
00:28:06,320 --> 00:28:09,640
हैमा

384
00:28:09,640 --> 00:28:15,640
राजेश चेहरा दिखाइए राजेश जी

385
00:28:16,040 --> 00:28:20,240
जी जय श्री राम जय श्री राम

386
00:28:20,240 --> 00:28:23,600
जी जी बोलिए

387
00:28:23,600 --> 00:28:29,600
रा मैं एक्चुअली यह बात करनी थी मैंने आपसे

388
00:28:30,120 --> 00:28:34,360
छोटा सा था ना 12 1 साल का तो मैं रामपाल जी की

389
00:28:34,360 --> 00:28:38,720
वीडियो छोटे थे आप छोटा था जब

390
00:28:38,720 --> 00:28:44,200
तो टीवी में रामपाल जी की वीडियो आती ी मैं देखता होता था तो

391
00:28:44,200 --> 00:28:48,200
मेरे घर वाले बोलते क्या देख रहे है मैंने कहा जी पता नहीं है

392
00:28:48,200 --> 00:28:52,400
कुछ ना बुक्स वगैरह खोल के दिखाते हैं अपने ग्रंथ में कुछ गलतियां

393
00:28:52,400 --> 00:28:56,560
लती कुछ ऐसा मेरे को पता था नहीं कुछ तो उसके बाद क्या हुआ

394
00:28:56,560 --> 00:29:00,760
जी टाइम बता गया बीतता गया इनके वीडियोस

395
00:29:00,760 --> 00:29:04,920
देखी फिर मैंने ना वो श्री कृष्णा रामानंद सागर वाला वो देखा

396
00:29:04,920 --> 00:29:09,000
तो उसम श्री कृष्ण कुछ मुक्ति के बारे में बात करते हैं मैंने

397
00:29:09,000 --> 00:29:13,080
कहा ये मुक्ति क्या चीज होती है गुरु के बारे में बात करते हैं फिर मैंने

398
00:29:13,080 --> 00:29:17,360
गीता देखी अच्छा रामपाल जी के जो परिवन सुने वो जैसे य

399
00:29:17,360 --> 00:29:21,560
प आने लग गए तो मैंने कहा ये मुक्ति की बात

400
00:29:21,560 --> 00:29:25,560
और कोई करता नहीं रामपाल जी कर रहे हैं क्या स्टोरी है इसके पीछे मुझे

401
00:29:25,560 --> 00:29:29,640
कुछ समझ नहीं आया तो मैं काफी इनको फॉलो करने

402
00:29:29,640 --> 00:29:34,240
ल था तो मेरे को एक्चुअली

403
00:29:34,240 --> 00:29:38,960
एक वीडियो में मैंने देखा इन्होने बोला कि गरुड़ पुराण मरे पर दिखा

404
00:29:38,960 --> 00:29:43,800
पते हैं अगर जिंदा बंदे को पढ़ा दिया होता तो उसकी मुक्ति हो

405
00:29:43,800 --> 00:29:45,160
जाती मैंने

406
00:29:45,160 --> 00:29:49,600
कहा अच्छा मैं जार गया गरुड़ प्रण ले आया मैंने

407
00:29:49,600 --> 00:29:54,040
क देखते हैं क्या चीज ऐसी उसम देखा तो वो तो स्टार्ट

408
00:29:54,040 --> 00:29:58,400
हो है विष्णु जी की सरस्वती की साधना बहुत सारी साधना

409
00:29:58,400 --> 00:30:02,800
हुई है अच्छा तो कुछ हुआ नहीं हुआ मेरी नॉलेज बहुत बढ़ गई उससे गरु

410
00:30:02,800 --> 00:30:06,800
पुराण फिर श्री देवी भागवत का दिया तो मैं वोया

411
00:30:06,800 --> 00:30:11,120
मैंने वो पूरा पढ़ा अब इनकी बातें कहीं मैच नहीं कर रही

412
00:30:11,120 --> 00:30:15,200
प्रॉब्लम यह थी रामपाल जी बात तो करते हैं ग्रंथों की पर

413
00:30:15,200 --> 00:30:19,320
ग्रंथों से बात कोई मैच नहीं कर रही अब मैं क्या करूं अच्छा उस टाइम मुझे

414
00:30:19,320 --> 00:30:23,600
यह भी नहीं पता गुरु कोई चीज होती है गुरु दीक्षा भी कोई चीज होती है आज से सात

415
00:30:23,600 --> 00:30:28,520
आ साल पहले की बात है यानी कि 12 1 साल वीडियो देखने लगा

416
00:30:28,520 --> 00:30:32,560
29 साल की उम्र में मैंने गुरु दीक्षा ली पहली बार

417
00:30:32,560 --> 00:30:36,880
37 क मैं तो अच्छा फिर

418
00:30:36,880 --> 00:30:40,920
मैंने फिर उसके बाद भी मैं इनको फॉलो करता रहा मेरे

419
00:30:40,920 --> 00:30:45,080
घर पर एक इलेक्ट्रिशियन आयारे मंदिर में उसने लाइट लगाई

420
00:30:45,080 --> 00:30:49,240
घर के मंदिर में मुझे बोला जी ये गीता पढ़ी है आपके पास आपने

421
00:30:49,240 --> 00:30:53,320
कभी पढ़ी है ध्यान से मैंने कहा ध्यान से ध्यान से कैसे

422
00:30:53,320 --> 00:30:57,400
पढ़ते हैं भाई बोले नहीं इसको अच्छे से पढ़ो परमात्मा ऐसे

423
00:30:57,400 --> 00:31:00,400
होते हैं सकार होते हैं फलाना होते हैं

424
00:31:00,400 --> 00:31:04,800
मे मेरे को उसकी बात समझ नहीं आई मैंने किसी से शेयर करी मैंने कहा घर में ऐ

425
00:31:04,800 --> 00:31:08,880
आया था बहुत सारी बातें कर रहा था इलेक्ट्रिशियन और पता नहीं इतनी नॉलेज कहां

426
00:31:08,880 --> 00:31:13,400
उसके पास वो बो यार वो तो रामपाल के चेले होंगे मैंने

427
00:31:13,400 --> 00:31:17,480
कहा अच्छा फिर मैंने उसकी बात करी रामपाल जी से फिर मैंने

428
00:31:17,480 --> 00:31:21,800
गीता को जैसे उसने बोला मैंने पढ़ा पर मेरे को तो वैसा कुछ

429
00:31:21,800 --> 00:31:26,120
नहीं मैंने कहा सारा वो चल रहा है सारी स्टोरी

430
00:31:26,120 --> 00:31:30,160
वो इलेक्ट्रिशियन मेरे को दोबारा मिला मैंने कहा भाई साब आपने पढ़ा ध्यान से जो जो ग्रंथों का आप

431
00:31:30,160 --> 00:31:34,360
नाम ले रहे थे आपने पढ़ा हो वो बोला हां मैंने पढ़ा है

432
00:31:34,360 --> 00:31:38,960
मैंने कहा नहीं पढ़ा फिर आप एक बार ध्यान से आप मेरे को क्यों पाग रहे हो

433
00:31:38,960 --> 00:31:43,000
मैंने स्टोरी बने के लिए काफी दिन से मैं ट्राई कर रहा था कि मैं आऊ आऊ फिर मैंने कहा

434
00:31:43,000 --> 00:31:47,040
चलो थोड़ा इ क रि मैं तो सोच

435
00:31:47,040 --> 00:31:51,120
रहा था कि नहीं नहीं बहुत अच्छा किया आपने

436
00:31:51,120 --> 00:31:55,280
हां जी हा जी तो इनकी बातें

437
00:31:55,280 --> 00:31:59,800
ना कहीं मैच नहीं करती ग्रंथों सेय बस बोल

438
00:31:59,800 --> 00:32:03,960
टोटल गोल म हा बस वो दो लाइन पढ़ लेते हैं गरुड़

439
00:32:03,960 --> 00:32:08,080
पुराण में तो बहुत कुछ है जी गरु प्राण जिसने तो सच में

440
00:32:08,080 --> 00:32:13,240
वो बहुत आगे निकल जाएगा जी

441
00:32:13,240 --> 00:32:16,200
उनकाल गल है

442
00:32:16,200 --> 00:32:20,240
हाज कोई हद नहीं है गोलमाल की हा हा कोई हद नहीं है

443
00:32:20,240 --> 00:32:26,240
बकुल बहुत ज्यादा गोल

444
00:32:29,160 --> 00:32:33,440
अब अब वो व्यक्ति मूर्ख बोलना बंद कर दिए देख लो

445
00:32:33,440 --> 00:32:38,040
फिर देखो पाखंडी बोलोगे फिर मैं खोल दूंगा कोई चैप्टर

446
00:32:38,040 --> 00:32:42,280
पाखंडी बोलोगे मैं फिर खोल दूंगा बोलो बोलोगे अब

447
00:32:42,280 --> 00:32:46,520
मनी मन कान पकड़ लो अब मत बोलना

448
00:32:46,520 --> 00:32:51,280
मन कान पकड़ लो अब बोलना मत पाखंडी मत बोलना तुमको मैं ध्यान दूंगा

449
00:32:51,280 --> 00:32:55,400
एक भी गलत शब्द बोलोगे तो तुम्हारे तिरछे दर्शी की कोई ना कोई मैं ऐसी

450
00:32:55,400 --> 00:33:00,200
बात बोलूंगा यहां पर कि उस तक बात जाएगी उसकी अ मानना होगी अब सोच

451
00:33:00,200 --> 00:33:04,280
लो तुम बोलोगे मैं देखूंगा तुम बोलोगे य दो चार

452
00:33:04,280 --> 00:33:09,040
लोग तुम्हारा कमेंट पढ़ लेंगे मैं बोलूंगा यहां पर 10 20 हजार लोग देखेंगे

453
00:33:09,040 --> 00:33:13,120
और मैं खुद मुह से नहीं बोलूंगा पूछूंगा ये मूर्खता

454
00:33:13,120 --> 00:33:17,120
है कि नहीं क्या कहते हो यह पाखंड है कि नहीं क्या कहते

455
00:33:17,120 --> 00:33:21,280
हो अगर व्यक्ति तत्वदर्शी नहीं

456
00:33:21,280 --> 00:33:25,400
है उसको नहीं मालूम है कि प्रभु है कि तुच्छ है मालूम है तो वो

457
00:33:25,400 --> 00:33:29,680
झूठ लिख रहा है वो झूठ है यह मैं पूछूंगा मैं बोलूंगा नहीं तुम्हारे

458
00:33:29,680 --> 00:33:31,200
लोग बोलते होंगे कि

459
00:33:31,200 --> 00:33:36,160
पाखंडी है मैं ये नहीं बोलूंगा पाखंडी मैं पूछूंगा

460
00:33:36,160 --> 00:33:40,240
तो अब अगर तुमने पाखंडी शब्द का उपयोग किया तो फिर पूछूंगा मुझे आनंद आएगा

461
00:33:40,240 --> 00:33:44,520
पूछने में फिर एक तुम्हारे तत्वदर्शी के मैं

462
00:33:44,520 --> 00:33:49,240
पल खोलूंगा तो मनी मन कान पकड़ो शांत हो जाओ

463
00:33:49,240 --> 00:33:54,960
ठीक है अच्छे बच्चों की

464
00:33:54,960 --> 00:34:00,960
तरह जी चक्रण मिश्रा जी आप

465
00:34:01,520 --> 00:34:05,600
बताए बस सुन रहा था बीच में अभी

466
00:34:05,600 --> 00:34:10,600
जी 15 20 दिन से काफी व्यस्तता थी जय श्री राम आपके वीडियो वगैरह चल रहे

467
00:34:10,600 --> 00:34:15,760
थे जी जी

468
00:34:15,760 --> 00:34:19,800
जी तो इस बीच आपने देखा होगा इस बीच

469
00:34:19,800 --> 00:34:23,920
आपने देखा होगा कि लगभग इनके द्वारा खड़ा किया गया हर एक हमने पकड़ा

470
00:34:23,920 --> 00:34:28,080
है कुछ रह गया हो तो उसको हम लोग हमको बताएंगे

471
00:34:28,080 --> 00:34:34,080
आप लोग जो बताए कुछ रह गया हो तो उसको भी हम पकड़ के लाएंगे क्या

472
00:34:35,200 --> 00:34:38,560
है जी

473
00:34:38,560 --> 00:34:42,800
गोपाल जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

474
00:34:42,800 --> 00:34:47,040
राम मैं राजस्थान आया हू अभी पहुंच गया आज ही पहुंचा हूं

475
00:34:47,040 --> 00:34:51,400
और ज्ञान चर्चा करने वाले थे इन लोगों से मैंने बात की

476
00:34:51,400 --> 00:34:55,440
और इनका नामदान सेंटर शिखर में उससे भी बात की तो

477
00:34:55,440 --> 00:35:00,760
व अभी सब पलटी मार रहे हैं हमें नहीं करना

478
00:35:00,760 --> 00:35:04,800
कर बना बना रहे सब अपना अपना अलग अलग बना बना रहे हैं

479
00:35:04,800 --> 00:35:08,800
कि हमारे पास इतनी जगह नहीं है मैं बोला मेरा फार्म हाउस पड़ा आ जाओ यहां

480
00:35:08,800 --> 00:35:13,160
पर आ जाओ आप जहां बोलो जहां जगह वहां चलते हैं और इनका

481
00:35:13,160 --> 00:35:17,280
ऐसे न्यूज राजस्थान उनसे भी बात हुई है वो बोल रहे मेरी टीम

482
00:35:17,280 --> 00:35:21,280
आ जाएगी इनकी टीम को भी बुला रहा हूं और अपना न्यूज चैनल वाले को

483
00:35:21,280 --> 00:35:25,360
भी बुलाता हूं लाइव चलाइए दूध

484
00:35:25,360 --> 00:35:30,080
का दूध पानी का पानी हो जाएगा बिल्कुल बकुल मैं तो सारे

485
00:35:30,080 --> 00:35:30,880
बिल्कुल पुराण

486
00:35:30,880 --> 00:35:35,120
वगैरा गीता जीय ग्रंथ में लेकर आया हूं अरे मेरा बस चलता

487
00:35:35,120 --> 00:35:39,440
तो बना रहे हा अच्छा

488
00:35:39,440 --> 00:35:43,440
इनकी गारंटी नहीं है ना गारंटी नहीं है अभी भी तो अभी भी

489
00:35:43,440 --> 00:35:47,720
इनको बोला हूं आप लोग फाइनल कर लो कहां चर्चा करनी है वहा आने को तैयार हूं

490
00:35:47,720 --> 00:35:51,760
अब आश्रम का बोल रहे कि आश्रम चलो भाई तुम लोग जगा

491
00:35:51,760 --> 00:35:56,000
जुबान है कि नहीं तुम लोगों

492
00:35:56,000 --> 00:35:59,400
में ऐसा है

493
00:35:59,400 --> 00:36:03,480
पहले तो बहुत बोल रहे थे इनकी सबकी रिकॉर्डिंग है पास सबकी गोपाल

494
00:36:03,480 --> 00:36:07,840
राज जी के बारे में मैं थोड़ा सा बता दूं ये राजस्थान से हैं

495
00:36:07,840 --> 00:36:12,600
वैसे रहते इस समय दिल्ली में है ना महाराष्ट्र में कोल्हापुर

496
00:36:12,600 --> 00:36:16,760
महाराष्ट्र में तो ये इन्होंने जो एसे न्यूज

497
00:36:16,760 --> 00:36:21,040
चैनल नाम का कोई पोर्टल है इनका रामपाल वालों का वहां संपर्क

498
00:36:21,040 --> 00:36:25,240
किया और उनका सीकर में नामदान केंद्र है

499
00:36:25,240 --> 00:36:29,880
इन्होंने कहा कि भाई हमसे ज्ञान चर्चा कर लो

500
00:36:29,880 --> 00:36:33,960
तो दो तारीख के दिन ये चर्चा होनी थी दु

501
00:36:33,960 --> 00:36:38,400
कुछ ऐसा था कि दो तारीख के दिन हमारा यहां प एक कार्यक्रम है

502
00:36:38,400 --> 00:36:43,000
नहीं तो मैं भी वहां जाने का इच्छुक था राजस्थान में ज्ञान चर्चा के लिए इनसे

503
00:36:43,000 --> 00:36:45,880
भाई ज्ञान चर्चा नहीं है मुझे लगता है वो

504
00:36:45,880 --> 00:36:50,560
आनंद चर्चा हैको ज्ञान चर्चा नहीं

505
00:36:50,560 --> 00:36:54,560
कहेंगे वो आनंद चर्चा ज्ञान चर्चा तो नहीं कह

506
00:36:54,560 --> 00:36:58,800
सकते उ खैर तो उनसे

507
00:36:58,800 --> 00:37:02,920
बात हुई भाई कि आ जाओ वो आने को तैयार हुए मैं तो नहीं आ पा रहा था इनकी चर्चा

508
00:37:02,920 --> 00:37:07,440
होनी थी मगर अभी यह बता रहे कि वो लोग पीछे हट रहे हैं

509
00:37:07,440 --> 00:37:11,280
तो कोई आए

510
00:37:11,280 --> 00:37:16,760
भाई ऐसा जो यह बता सके

511
00:37:16,760 --> 00:37:20,840
कि जो कबीर वाणी से मुक्ति है कि

512
00:37:20,840 --> 00:37:25,120
नहीं है रामपाल तत्वदर्शी

513
00:37:25,120 --> 00:37:28,520
है कि नहीं है

514
00:37:28,520 --> 00:37:32,960
यह सब चीजें थोड़ा सा बताए और गीता ज्ञान दाता कौन है य

515
00:37:32,960 --> 00:37:37,440
सब क्या हो रहा

516
00:37:37,440 --> 00:37:41,600
है पाखंडी है रामपाल जी

517
00:37:41,600 --> 00:37:45,680
पछ ह धीरे धीरे धीरे धीरे उनको

518
00:37:45,680 --> 00:37:50,280
देखो वो व्यक्ति जो है व पहले मूर्ख बोल रहा था पाखंडी बो देखो

519
00:37:50,280 --> 00:37:54,320
यह सच्चाई डर अब देखो उस व्यक्ति ने

520
00:37:54,320 --> 00:37:58,520
बोलना बंद कर दिया चला गया व

521
00:37:58,520 --> 00:38:02,720
चला ही गया बताइए इसको कहते मत प चक्कर

522
00:38:02,720 --> 00:38:06,880
में इसको इसको कहते ब प्रत्यक्ष सबूत मत पढ़ो चक्कर में कोई

523
00:38:06,880 --> 00:38:11,640
नहीं है टक्कर में इसको प्रत्यक्ष सबूत कहते हैं

524
00:38:11,640 --> 00:38:16,000
य सामने से बताकर सोचिए बताकर हम

525
00:38:16,000 --> 00:38:20,000
तुम्ह बता रहे हम ऐसा करेंगे बोलो बोल के दिखाओ तो व्यक्ति

526
00:38:20,000 --> 00:38:24,160
हम नहीं बोलेंगे जी आर कुशवा जीी बोलिए जय श्री

527
00:38:24,160 --> 00:38:28,320
राम जय श्री राम तो मैं अपना बताना चाहूंगा

528
00:38:28,320 --> 00:38:32,440
तो अभी मैं कॉलेज में हूं तो मैंने एक बार इंस्टा पर स्टोरी डाली थी

529
00:38:32,440 --> 00:38:36,840
भगवान श्री कृष्ण की जिसमें बोल रहे थे कि मैं ही परमात्मा

530
00:38:36,840 --> 00:38:41,240
हूं तो उस उस समय मेरे दोस्त का एक मैसेज आता है इं पर

531
00:38:41,240 --> 00:38:45,240
वो दोस्त राम पाली था तब मेरे को कुछ नहीं पता था कि रामपाल कौन है क्या ऐसा कुछ होता

532
00:38:45,240 --> 00:38:49,480
है तो वो भेजता है मेरे को कि गीता

533
00:38:49,480 --> 00:38:52,440
काल ने बोली है तो मेरे को लगाय क्या मतलब बोल रहा है

534
00:38:52,440 --> 00:38:56,480
काल कौन है गीता कौन है तब मैंने थोड़ा एक्सप्लोर करना स्टार्ट किया था

535
00:38:56,480 --> 00:39:00,480
कि राम पाली है यह काल है और जब मैंने

536
00:39:00,480 --> 00:39:04,800
मेरी उससे बात हुई तो कुछ दो तीन चीजें उसे रटी हुई थी कि भगवान

537
00:39:04,800 --> 00:39:08,880
आपस में लड़ते हैं भगवान अलग-अलग क्यों है शिव है विष्णु है तो

538
00:39:08,880 --> 00:39:13,440
इनको बस तीन चार बातें रटी हुई है वही यह करते हैं

539
00:39:13,440 --> 00:39:17,920
और एक और एक्सपीरियंस है कि जो ये जो रामपाल वाले हैं ये एक विशेष

540
00:39:17,920 --> 00:39:22,280
जो समाज है उनको टारगेट करते हैं उनको बताते हैं कि आपके संग भेदभाव हो रहा है

541
00:39:22,280 --> 00:39:26,480
और आप कन्वर्ट हो जाइए और यह धर्म स्थापना वेदों

542
00:39:26,480 --> 00:39:30,160
और इनको कोई ले

543
00:39:30,160 --> 00:39:34,200
रामपाल को धर्म इत्यादि से भी कोई लेना देना नहीं

544
00:39:34,200 --> 00:39:38,560
है ऐसा सुनने में आया है कि इन्होंने कोर्ट में कोई एप्लीकेशन दी थी

545
00:39:38,560 --> 00:39:42,640
जिसमें इन्होंने यह कहा था कोर्ट से कि हमको एक अलग धर्म घोषित

546
00:39:42,640 --> 00:39:46,840
कर दिया जाए अलग कोई पंथ का स्टेटस मांगा

547
00:39:46,840 --> 00:39:51,000
था संभवत तो यह कहना भी गलत है कि रामपाल बहुत बड़े

548
00:39:51,000 --> 00:39:55,120
धर्म रक्षक झूठ ही परोस रहे

549
00:39:55,120 --> 00:39:59,280
हैं मगर उस झूठ में भी सना की रक्षा नहीं कर रहे वो कह रहे हैं कि हमको

550
00:39:59,280 --> 00:40:05,280
एक अलग नाम दे दो

551
00:40:05,640 --> 00:40:11,640
यह अब जैसे आज मैंने एक एक बुक है बहुत अच्छी

552
00:40:11,760 --> 00:40:17,760
बताऊंगा

553
00:40:23,560 --> 00:40:27,800
य यह बुक आप लोग जरूर लाइए इसमें

554
00:40:27,800 --> 00:40:31,840
क्या है ना एक केवल रामपाल एंड कंपनी के मुंह पर

555
00:40:31,840 --> 00:40:35,840
एक तमाचा है जोड़ का ये

556
00:40:35,840 --> 00:40:39,880
बुक यह क्या है भगवान भगवान के जितने भी जो

557
00:40:39,880 --> 00:40:44,360
मुख्य मुख्य स्वरूप है और जिनका शास्त्रों में सहस्त्र

558
00:40:44,360 --> 00:40:48,520
नामावली दी गई है तो वह सहस्त्र

559
00:40:48,520 --> 00:40:52,680
नाम इसमें है विष्णु सहस्त्रनाम राम सहस्त्रनाम

560
00:40:52,680 --> 00:40:56,960
दुर्गा सहस्त्रनाम शिव सहस्त्रनाम गणेश सहस्त्रनाम वो इसमें है

561
00:40:56,960 --> 00:41:01,640
तो उनका व पुरुषोत्तम परम ब्रह्म काल

562
00:41:01,640 --> 00:41:05,680
यह सब नाम उन सहस्त्र नामों में है म एक

563
00:41:05,680 --> 00:41:09,800
ऑल इन वन है ना अब और कहां

564
00:41:09,800 --> 00:41:14,320
पर दिया गया है वो सहस्त्र नाम वो भी है जैसे

565
00:41:14,320 --> 00:41:18,080
विष्णु सहस्त्रनाम की अगर बात

566
00:41:18,080 --> 00:41:20,720
करें तो देखिए पुरुषोत्तम शब्द

567
00:41:20,720 --> 00:41:22,960
आ

568
00:41:22,960 --> 00:41:27,560
गया है ना विष्णु जी के लिए सहस्त्र नामों में पु

569
00:41:27,560 --> 00:41:31,800
शब्द आ गया कहां पर है ये तो इसमें जहां पर वो

570
00:41:31,800 --> 00:41:36,440
चैप्टर खत्म हो रहा है विष्णु सहस्त्र नाम का वहां पर इन्होने बता दिया कहां कहां पेय

571
00:41:36,440 --> 00:41:40,680
तो कहां है श्री महाभारत

572
00:41:40,680 --> 00:41:45,000
उसका चैप्टर क्रमांक है और किसके किस किसके बीच में यह

573
00:41:45,000 --> 00:41:49,320
संवाद है व दिया गया है ऐसे ही गणेश जी का का कहां पर है सहस्त्र

574
00:41:49,320 --> 00:41:54,240
नाम वो है है ना और

575
00:41:54,240 --> 00:41:58,360
इसी तरीके से आगे फिर दुर्गा जी का का सहस्त्र नाम है

576
00:41:58,360 --> 00:42:02,520
शिव जी का सहस्त्र नाम है राम जी का सहस्त्र नाम है सबके

577
00:42:02,520 --> 00:42:07,040
सहस्त्र नाम उसमें दिए गए और काल भी है इसमें

578
00:42:07,040 --> 00:42:11,200
इसमें जो है काल भी है

579
00:42:11,200 --> 00:42:15,680
हर सहस्त्र नाम में तोहे आपको पुरुषोत्तम परम

580
00:42:15,680 --> 00:42:19,720
ब्रह्म सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ कवि का अर्थ सर्वज्ञ

581
00:42:19,720 --> 00:42:24,520
होता है ना कवि का सर्वज्ञ होता है वो भी है

582
00:42:24,520 --> 00:42:30,520
तो सहस्त्र नाम में सब कुछ है

583
00:42:32,560 --> 00:42:36,920
तो इसी को केवल आप ले लोगे तो यही एक काफी हमारे प्रमाण दिखाने के लिए ले

584
00:42:36,920 --> 00:42:41,720
काल है ले काल ले पुरुषोत्तम ले सच्चिदानंद

585
00:42:41,720 --> 00:42:45,800
परम कुछ नहीं उन ऑल इन वन है ना इसमें

586
00:42:45,800 --> 00:42:49,880
सबके सहस्त्र नाम दिए हैं थोड़ा सा देखने लगोगे आपने

587
00:42:49,880 --> 00:42:54,320
नोट भी नहीं करके रखा है मान लो नोट करके नहीं रखना रखा है

588
00:42:54,320 --> 00:42:58,400
तो भी थोड़ा सा देखने लगो तो कोई ना कोई ऐसा ऐसी मिल जाएगी चीज देखो जैसे मैंने

589
00:42:58,400 --> 00:43:02,560
अभी बीच में से खोला है मुझे नहीं पता था यहां पर यह लिखा है

590
00:43:02,560 --> 00:43:06,840
और यह किसके सहस्त्र नाम चल रहे हैं कृष्ण भगवान के

591
00:43:06,840 --> 00:43:11,560
गोपाल सहस्त्र नाम स्त्रोतम य देखो महाकाल मिल

592
00:43:11,560 --> 00:43:16,200
गया य इतनी अच्छी बुक है है ना

593
00:43:16,200 --> 00:43:22,200
महाकाल मिल गया अब

594
00:43:22,760 --> 00:43:27,440
बोलो ठीक है तोय ऐसे है

595
00:43:27,440 --> 00:43:33,160
इस बुक में जहां भी आप खोल लोगे वहां पर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ रामपाल का तोड़ लिखा

596
00:43:33,160 --> 00:43:37,280
होगा एक बुक य पकड़ लो बस अपना अपने

597
00:43:37,280 --> 00:43:41,640
प्रमाणों के लिए केवल एक एक बुक ले लो और बाकी इनकी

598
00:43:41,640 --> 00:43:45,680
बुक लेकर चलो ज्ञान गंगा ले लो ये जीने की राह इन्हीं को ले लो

599
00:43:45,680 --> 00:43:49,760
बस उतना काफी ज्यादा ज्यादा पीछे से लेने की जरूरत नहीं है पीडीएफ

600
00:43:49,760 --> 00:43:54,080
वगैरह का भी बझ उठाने की जरूरत नहीं है है ना

601
00:43:54,080 --> 00:43:58,280
ये देखो काल शब्द फिर आ गया हनुमान जी के लिए काल आ गया

602
00:43:58,280 --> 00:44:00,800
देख

603
00:44:00,800 --> 00:44:04,880
देखो आ गया ये कहां पर है यह भी

604
00:44:04,880 --> 00:44:09,560
दिया हुआ है इसमें ऐसे नहीं है शास्त्र में कहां पर दिया है

605
00:44:09,560 --> 00:44:14,520
यह भी दिया है मोक्ष दायक

606
00:44:14,520 --> 00:44:19,080
सक्ष सूक्ष्म स्थूल सर्व गति सब कुछ मतलब

607
00:44:19,080 --> 00:44:23,160
सारे इनके नाम आपको मिल जाएंगे हनुमान जी का कहां दिया है राम

608
00:44:23,160 --> 00:44:27,280
जी का कहां दिया है सब मिल जाएगा कितनी अच्छी बुक है

609
00:44:27,280 --> 00:44:31,360
हम लोग वैसे ढूंढने निकलते भा हनुमान जी को परम ब्रह्म कहां कहा कहा गया है तो ढूंढने

610
00:44:31,360 --> 00:44:37,360
निकलेंगे तो बहुत बढ़िया आपके पास

611
00:44:42,600 --> 00:44:48,600
कुंजी

612
00:44:48,880 --> 00:44:53,040
ब्रह्म और फिर इनके कबीर ने तो कह ही

613
00:44:53,040 --> 00:44:57,040
दिया इनके कबीर ने तो कह ही दिया

614
00:44:57,040 --> 00:45:01,160
गीता ज्ञान दाता परमपिता है परमात्मा है

615
00:45:01,160 --> 00:45:05,400
और गीता ज्ञान दाता ही गीता ज्ञान दाता कौन है विष्णु

616
00:45:05,400 --> 00:45:09,520
गीता ज्ञान दाता कौन है कृष्ण इनका कबीर कह

617
00:45:09,520 --> 00:45:13,560
रहा है और वो भी इनकी किताब में कह रहा है जिसको रामपाल ने

618
00:45:13,560 --> 00:45:17,680
लिखा है अब क्या करोगे या तो बोल दो वो तत्वदर्शी नहीं है उसको नहीं वो कहीं

619
00:45:17,680 --> 00:45:22,520
कहीं उससे गलती हो जाती है भाई जगतगुरु नहीं है वो दिक्कत है उसको

620
00:45:22,520 --> 00:45:26,720
पन गलत चल गया उसका अपनी लेखनी में पेन चलाने

621
00:45:26,720 --> 00:45:30,800
की इतनी आदत पड़ गई कि अपनी ही लेखनी में मटिया मेट कर डाला अपने ही सिद्धांतों

622
00:45:30,800 --> 00:45:35,080
का बैंड बजा दिया एक बार हमने आपको

623
00:45:35,080 --> 00:45:39,200
बताया था ना शिवांश भाई कि सहस्त्र नाम नाम स्तोत्र जब पढ़ेंगे

624
00:45:39,200 --> 00:45:43,360
तो उसमें ये नाम आ रहे हैं और

625
00:45:43,360 --> 00:45:47,640
यही चीज हमने बताया था कल हम गए थे अमित दास जी के उस पर डिबेट

626
00:45:47,640 --> 00:45:51,720
पे हमने कहा कि आप हमको कबीर खाली दिखाओ कभी मत दिखाना

627
00:45:51,720 --> 00:45:55,960
अब वो बोल र है कबीर देव हम बोले कबीर देव दिखा दोगे कबीर देव को हम

628
00:45:55,960 --> 00:45:57,600
भगवान मान देंगे कबीर

629
00:45:57,600 --> 00:46:01,880
देव को भगवान मानेंगे क्योंकि कबीर देव का संधि विच्छेद किया गया नीचे कवि देवहा

630
00:46:01,880 --> 00:46:05,920
है और कवि हमारे भगवान है भगवान विष्णु का नाम है विष्णु

631
00:46:05,920 --> 00:46:10,680
सहस्त्र नाम स्तोत्र में जो महाभारत के छठे खंड के

632
00:46:10,680 --> 00:46:14,800
अनुशासन पव में जाएंगे एकवा अध्याय और 27 श्लोक

633
00:46:14,800 --> 00:46:19,040
में भगवान विष्णु का यह नाम है कवि अब जहां जहां

634
00:46:19,040 --> 00:46:23,120
कवि का परमात्मा वि सहनाम विष्णु

635
00:46:23,120 --> 00:46:27,840
सहनाम हा कौन सा शलोक है

636
00:46:27,840 --> 00:46:32,000
27 वा श्लोक है उसम विष्णु सहस्त्र

637
00:46:32,000 --> 00:46:36,640
नाम में हा हा

638
00:46:36,640 --> 00:46:40,760
हां ये लो ये कवि मिल गया भाई और

639
00:46:40,760 --> 00:46:44,880
कवि जहां जहां कवि का परमात्मा से संबोधित किया गया ना वहां वहा विष्णु भगवान

640
00:46:44,880 --> 00:46:49,080
को संबोधित देखलो भैया कवि कौन है वेदों का कवि कौन

641
00:46:49,080 --> 00:46:53,600
है देख लो विष्णु कौन विष्णु

642
00:46:53,600 --> 00:46:57,680
जो कृष्ण है है ना कृष्ण

643
00:46:57,680 --> 00:47:01,840
भी है इसम ऐ मत सोचना आद विष्णु है वही विष्णु

644
00:47:01,840 --> 00:47:06,200
जो राम बनता है वही वि कृष्ण बनता है वो विष्णु है

645
00:47:06,200 --> 00:47:10,280
शास्त्र से दिखा रहे शस्त्र स भक्ति कर रहे हैं

646
00:47:10,280 --> 00:47:13,360
कहां आप लोग श श समत

647
00:47:13,360 --> 00:47:18,560
पूरा सतलोक आश्रम आपका शास्त्र विरुद्ध बना हुआ

648
00:47:18,560 --> 00:47:23,160
है केवल एक ही बुक पकड़ लो केवल एक ही बुक

649
00:47:23,160 --> 00:47:28,160
केवल एक ही बुक पकड़ लो आप इसमें इनका इतना हलवा हो जाए

650
00:47:28,160 --> 00:47:32,560
हर चीज आपको ी मिल जाएगी हनुमान जी को ऊपर प्रश्न उठाते

651
00:47:32,560 --> 00:47:36,760
उनका निवारण मिल जाए राम जी के ऊपर प्रश्न उठाते उसका निवारण मिल जाएगा कहीं

652
00:47:36,760 --> 00:47:41,680
जाने की जरूरत एक बुक खरीद लो सहस्त्र नामावली बस

653
00:47:41,680 --> 00:47:45,880
क्योंकि सबके सहस्त्र नाम है इस हा हमको

654
00:47:45,880 --> 00:47:50,160
ये लोग हमको जानते हो कल हमको ये लोग हमारे पूजा पाठ को निषेध कर रहे थे

655
00:47:50,160 --> 00:47:54,160
आपको आप तो परंपरा जो किसी आचार्य के जो शिष्य

656
00:47:54,160 --> 00:47:59,120
नहीं हो और दूसरी चीज वो बता रहे थे कि आप

657
00:47:59,120 --> 00:48:03,560
क्या शास्त्र विरोधी सुनो ना हम बोले ठीक है परंपरा प्राप्त

658
00:48:03,560 --> 00:48:07,640
नहीं है बट एक चीज आपको पता होगा कि जैसे आप लोग पूजा करते हैं वैसे हम

659
00:48:07,640 --> 00:48:11,800
लोग पूजा करते हैं तो किसी ना किसी जो है वो वेद पाठी

660
00:48:11,800 --> 00:48:16,320
ब्राह्मण हो या पंडित जी हो कर्मकांडी होते हैं वो ऐसे नहीं आते हैं वो तो किसी

661
00:48:16,320 --> 00:48:20,360
परंपरा प्रात तो उनको आचार्य पद पर बैठा कर आचार्य पद प्रदान

662
00:48:20,360 --> 00:48:24,360
करने के बाद ही हम पूजा पर बैठते है ना तो बताओ वो तो हमारे

663
00:48:24,360 --> 00:48:28,880
आचार्य बैठे हुए हैं तो हम कैसे शस्त्र

664
00:48:28,880 --> 00:48:33,400
अच्छा ओम पर बहुत बोल ओम पर भी ओम तसत

665
00:48:33,400 --> 00:48:37,560
इति निर्देश तो उसी में अगले श्लोक में लिखा है कि वेदों में

666
00:48:37,560 --> 00:48:41,560
मतलब जो भी पूजा पाठ यज्ञ विधान किए गए उनमें ओम शब्द से ही

667
00:48:41,560 --> 00:48:46,200
प्रारंभ किया जाता

668
00:48:46,200 --> 00:48:50,320
हैय देख इनको जानते हो

669
00:48:50,320 --> 00:48:54,240
ये श्री राम जी

670
00:48:54,240 --> 00:49:00,240
सच्चिदानंद और श्री राम जी पु

671
00:49:00,360 --> 00:49:04,240
यह देखो

672
00:49:04,240 --> 00:49:08,240
पुरुषोत्तम क्या देखोगे कुछ बचा नहीं है

673
00:49:08,240 --> 00:49:12,880
ऐसा लग रहा है कि सब और बता

674
00:49:12,880 --> 00:49:17,080
विष्णु है विष्णु शिव है इसका भी हमने पढ़ा था शिव

675
00:49:17,080 --> 00:49:21,920
सहस्त्र नाम स्तोत्र में शिव जी का ही नाम विष्णु है

676
00:49:21,920 --> 00:49:26,040
इसमें जितने सहस्त्र नाम आएंगे उसमें आपको विष्णु शिव राम

677
00:49:26,040 --> 00:49:32,040
कृष्ण सब सारे नाम सब में मिलेंगे क्योंकि अंतर नहीं है तत्व

678
00:49:36,160 --> 00:49:40,280
से इनको यार कंफ्यूजन है मोक्ष क्या है मोक्ष जरा इनको बता दो

679
00:49:40,280 --> 00:49:44,880
कुछ लोग आए होंगे अभी तो मोक्ष क्या है जानना चाहते हैं

680
00:49:44,880 --> 00:49:48,880
अरे नीचे आए होंगे ना मतलब लाइव में आए होंगे देखने के लिए

681
00:49:48,880 --> 00:49:53,800
कल मोक्ष कोई आए कोई आए हैं जशवंत जी करके कोई आए हैं

682
00:49:53,800 --> 00:49:57,880
जसवंत राजाव जय श्री राम बताए भाई

683
00:49:57,880 --> 00:50:02,600
जी जय श्री राम जय श्री राम जी बोलिए भाई

684
00:50:02,600 --> 00:50:06,840
एक छोटा सा मेरा प्रश्न है जी

685
00:50:06,840 --> 00:50:10,960
कल इनकी लाका परिचय बता दीजिए पहले जी

686
00:50:10,960 --> 00:50:15,720
मेरा नाम जसवंत सिंह

687
00:50:15,720 --> 00:50:20,000
राजावत और परिचय बताइए जो परिचय पूछ रहे हैं आपसे वह

688
00:50:20,000 --> 00:50:24,120
बताइए हां जी बोलिए आपको पता

689
00:50:24,120 --> 00:50:27,960
है ना हम कौन सा परिचय पूछते हैं

690
00:50:27,960 --> 00:50:32,440
आप परिचय पूछते हो आप किसको मानते हो हां आपका अध्यात्मिक

691
00:50:32,440 --> 00:50:37,640
बैकग्राउंड क्या है अपन राम जी को ही मानते

692
00:50:37,640 --> 00:50:41,760
हैं रामपाल को तो फॉलो नहीं करते नहीं

693
00:50:41,760 --> 00:50:46,080
भैया रामपाल के और पास नहीं भटकते चलिए बताइए

694
00:50:46,080 --> 00:50:50,360
प्रश्न बताइए मैं यह कहना चाहता हूं कल यह भाई साहब थे

695
00:50:50,360 --> 00:50:54,760
यह क्या नाम है इनका अब कल ये उनकी

696
00:50:54,760 --> 00:50:59,040
लाइफ में थे तो मैं भी उधर पहुंच गया अच्छा तो

697
00:50:59,040 --> 00:51:03,160
इन यह प्रश्न कर रहे थे भाई साहब से बोले गीता अध्याय में

698
00:51:03,160 --> 00:51:08,040
श्री कृष्ण भगवान कह रहे हैं कौन सा अध्याय है पता नहीं मेरे को ध्यान भी नहीं रहा

699
00:51:08,040 --> 00:51:12,160
के बोले उसी आद पुरुष नारायण की शरण में हूं मैं भगवान

700
00:51:12,160 --> 00:51:17,280
कृष्ण कह रहे हैं कि उनका इष्ट कोई दूसरा है कृष्ण भगवान अपना इष्ट कोई दूसरा बता रहे

701
00:51:17,280 --> 00:51:21,280
हैं अब इनको यह पूछो ऐसे कबीर जी के

702
00:51:21,280 --> 00:51:25,280
कई दोहा बता दूं मैं जिसमें कबीर जी भी कह रहे हैं कि राम नाम की

703
00:51:25,280 --> 00:51:29,400
लूट है लूट सके लूट तो कबीर जी

704
00:51:29,400 --> 00:51:30,840
भी कह रहे मैं तो कुत्ता राम

705
00:51:30,840 --> 00:51:35,840
का अब वो भी ऐसे

706
00:51:35,840 --> 00:51:39,920
ना नाना ऐसे नहीं करते ऐसे ये गलत बात है ऐसी ऐसी

707
00:51:39,920 --> 00:51:44,200
किताबें मत खोलो जिसम वोय बोल सके य गलत है इन्हीं की किताब खोलेंगे

708
00:51:44,200 --> 00:51:48,360
केवल इनकी किताब ऐसी किताब क्यों खोले जिन पर उंगली

709
00:51:48,360 --> 00:51:52,440
उठा सके तो इनकी किताब खोलते हैं कबीर कहा कह रहे

710
00:51:52,440 --> 00:51:56,560
हैं कि मैं मुझसे अलग कोई भगवान है तो भैया इनको

711
00:51:56,560 --> 00:52:02,560
ज्ञान गंगा का पेज नंबर दिखाए

712
00:52:02,600 --> 00:52:06,920
30 इनको केवल इनकी किताब खोलेंगे और कोई नहीं खोलेंगे क्योंकि

713
00:52:06,920 --> 00:52:11,720
और कोई खोल हमय नहीं मानेंगे तो तव इनके

714
00:52:11,720 --> 00:52:15,960
दर् किताब है केवल वही खोलेंगे सबसे पहली लाइन

715
00:52:15,960 --> 00:52:18,600
है इस पेज

716
00:52:18,600 --> 00:52:22,400
में 30 नंबर

717
00:52:22,400 --> 00:52:26,800
पेज कबीर

718
00:52:26,800 --> 00:52:31,200
नरक द्वार में सब करते फिरता चारों

719
00:52:31,200 --> 00:52:35,520
खान यह 30 नंबर पेज है

720
00:52:35,520 --> 00:52:40,080
क्या अंदर पीडीएफ के हिसाब से आठ नंबर है हा

721
00:52:40,080 --> 00:52:44,560
ये पीडीएफ के हिसाब से आठ पैराग्राफ वन हा

722
00:52:44,560 --> 00:52:48,560
कबीरा सुम तासु को जाके भुजा अनंत

723
00:52:48,560 --> 00:52:53,080
कबीरा हा सुरे तासु को जाके भुजा

724
00:52:53,080 --> 00:52:57,560
अनंत बताइए भैया हेलो हेलो

725
00:52:57,560 --> 00:53:02,800
रामपाल एंड

726
00:53:02,800 --> 00:53:07,560
कंपनी चलिए कोई बात नहीं

727
00:53:07,560 --> 00:53:11,680
तो और को देखो य पर किसी सुनिए भैया किसी भी और

728
00:53:11,680 --> 00:53:16,680
ग्रंथ का नाम लेना अपराध है सिर्फ इनकी किताबें ही खोलेंगे

729
00:53:16,680 --> 00:53:20,680
कोई और ग्र शिवांश भाई

730
00:53:20,680 --> 00:53:24,920
जी एक छोटा सा प्रश्न है मेरा ये प्रश्न है

731
00:53:24,920 --> 00:53:29,160
कबीर जी ये बताते कहीं दादू दयाल को मिले इसको मिले

732
00:53:29,160 --> 00:53:33,320
उन्होंने कभी कबीर जी की भक्ति नहीं की राम की भक्ति की उन्होंने तो फिर उनको

733
00:53:33,320 --> 00:53:37,400
ये क्यों मिले जब उन्होंने इनकी कभी भक्ति ही नहीं

734
00:53:37,400 --> 00:53:41,480
की थी तो उनको मिले क्यों ये हां यह तो बहुत

735
00:53:41,480 --> 00:53:45,640
बढ़िया प्रश्न है भाई क्यों मिले भाई नहीं वो वो

736
00:53:45,640 --> 00:53:49,840
लीला है व लीला कह देंगे इसको तो इसको तो लीला कह देंगे हा

737
00:53:49,840 --> 00:53:54,000
इसको तो लीला कह हम राम का भजन कर रहे तो हमको क्यों

738
00:53:54,000 --> 00:53:58,040
नहीं मिल रहे कबीर जी उनको क्यों मिले वो भी तो तो राम का भजन किए थे किसी को विराट

739
00:53:58,040 --> 00:54:02,040
स्वरूप दिखाया किसी को लोग लेके गए उनको जब विश्वास हुआ तो फिर हम

740
00:54:02,040 --> 00:54:06,000
विश्वास कैसे कर

741
00:54:06,000 --> 00:54:10,080
ले यह तो बहुत बढ़िया बात कही आप क्यों मिले

742
00:54:10,080 --> 00:54:14,840
भाई बताइए कोई है

743
00:54:14,840 --> 00:54:19,240
जवाब उनके दिमाग में काल घुसा हुआ होगा अभी

744
00:54:19,240 --> 00:54:23,280
अब एक चीज और है भाई जी काल नहीं भाई काल तो सिद्ध हो गया वो

745
00:54:23,280 --> 00:54:27,640
तो काल तो वही है हमारे विष्णु भगवान कबीर ने कह दिया

746
00:54:27,640 --> 00:54:32,240
इनके दिमाग में शायद उस प्रताड़ना

747
00:54:32,240 --> 00:54:36,280
का एहसास घुस गया है जो प्रताड़ना जो हमारे जो बाबा जी है

748
00:54:36,280 --> 00:54:42,280
जो इस समय वहां जेल धाम में निवास कर रहे हैं वहा उनको जो

749
00:54:44,520 --> 00:54:50,320
प्रतारक दिमाग में घुस गई जिस कारण से ऐसा हो रहा है

750
00:54:50,320 --> 00:54:54,600
जी एक प्रश्न और है भाई जी छोटा सा

751
00:54:54,600 --> 00:54:58,760
कबीर जी के 64 लाख से

752
00:54:58,760 --> 00:55:02,880
भाई रमेश प्रजापति एक बार और यही वाला कमेंट कर

753
00:55:02,880 --> 00:55:06,960
दो मैं आपके तत्वदर्शी की एक ऐसी पोल खोलूंगा वो सीधे

754
00:55:06,960 --> 00:55:11,720
जो पागल कह रहे हो ना यह वहीं तक बात जाएगी एक बार और कर दो बस

755
00:55:11,720 --> 00:55:15,760
ढेर सारी चीज ढेर सारी चीजें एक बार और कमेंट

756
00:55:15,760 --> 00:55:19,920
करो प्लीज मैं अभी कुछ ऐसा खोल के दिखाता हूं देखिए

757
00:55:19,920 --> 00:55:23,960
आपके जो त्र दर्शी उनका एक पल सामने आएगी

758
00:55:23,960 --> 00:55:28,120
और करिए एक बार तब तक हम लोग

759
00:55:28,120 --> 00:55:32,120
बात सुनते हैं भाई साहब की जी कबीर जी के

760
00:55:32,120 --> 00:55:36,920
64 लाख शिष्य थे इनकी किताब में ही

761
00:55:36,920 --> 00:55:41,080
है जी कबीर सागर में इनकी किताब में कबीर जी के 64

762
00:55:41,080 --> 00:55:45,560
लाख शिष्य थे क्या जब आप जब आपको परमात्मा

763
00:55:45,560 --> 00:55:50,920
जब 64 लाख शिष्यों को उन्होंने ज्ञान दिया

764
00:55:50,920 --> 00:55:55,040
64 लाख शिष्य अगर एक एक दो दो भी चेला बनाते तो 64

765
00:55:55,040 --> 00:55:59,240
लाख के कितने होते करीबन करीबन 64 के दने

766
00:55:59,240 --> 00:55:59,800
नहीं तीन

767
00:55:59,800 --> 00:56:04,040
कर लो कम से कम डेढ़ करोड़ दो करोड़ आदमी तो हो ही जाते

768
00:56:04,040 --> 00:56:08,240
जो अपने घर वालों को तो बताते कि परमात्मा मिले ये परमात्मा तो उनकी पूजा

769
00:56:08,240 --> 00:56:12,320
आज तक क्यों नहीं हो रही थी फिर वो अपने घर पर भी बता के नहीं गए थे कि ये परमात्मा है

770
00:56:12,320 --> 00:56:18,120
कबीर जी बताओ

771
00:56:18,120 --> 00:56:22,280
भैया इसीलिए कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में अब हमारा ये टैग लाइन

772
00:56:22,280 --> 00:56:26,880
हो गई है पाड़ी जी मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

773
00:56:26,880 --> 00:56:31,560
जी जी हर हर महादेव सभी को हर हर महादेवर महादेव ह

774
00:56:31,560 --> 00:56:35,720
हर हर महादेव कल रजीत

775
00:56:35,720 --> 00:56:40,280
सिंह जी शायद वहां गए थे मैंने तो पूरी लाइव देखी नहीं

776
00:56:40,280 --> 00:56:44,640
इतने बड़े ज्ञानी बन रहे थे इनके सामने हो जैसे कि

777
00:56:44,640 --> 00:56:48,920
तत्वदर्शी खुद स्वयं वहां से निकल के इधर आ गए हो इनके सामने

778
00:56:48,920 --> 00:56:53,000
बैठे हो रजीत जी सेही बात हो रही थी कल रजीत

779
00:56:53,000 --> 00:56:58,080
जी से बात हो रही थी जब मैं लाइव में था उनकी में अच्छा

780
00:56:58,080 --> 00:57:01,840
हा जब जब ये 15

781
00:57:01,840 --> 00:57:06,520
का अब उनके पास परंपरा वाली बात आई है

782
00:57:06,520 --> 00:57:10,680
ज्ञान परंपरा से होना चाहिए साक्षात है ना आप भी मानते

783
00:57:10,680 --> 00:57:15,520
हो परमेश्वर साने मेरे घर का एडस पूछा

784
00:57:15,520 --> 00:57:20,240
वहा मेरा यज होगा मेरा प्रयोग होगा

785
00:57:20,240 --> 00:57:26,240
आप सम

786
00:57:26,480 --> 00:57:30,600
या किसी जैसे कि अगर ईश्वर

787
00:57:30,600 --> 00:57:34,880
संत के रूप में या किसी म

788
00:57:34,880 --> 00:57:39,080
संत महंत ऋषि के रूप में आते हैं तो वहां पर

789
00:57:39,080 --> 00:57:43,160
संत के रूप में जब एक संत

790
00:57:43,160 --> 00:57:47,880
ईश्वर की पूरी परिभाषा बताता है एक

791
00:57:47,880 --> 00:57:52,320
सतलोक का पूरा ज्ञान देता है संत तो वहां पर उसका

792
00:57:52,320 --> 00:57:56,520
प्रयोग हो सकता है वहा पर योग

793
00:57:56,520 --> 00:58:01,360
हो सकता है लेकिन स्वयं साक्षात परमेश्वर

794
00:58:01,360 --> 00:58:05,880
आपके हिसाब से स्वयं कृष्ण भगवान वहा साक्षात

795
00:58:05,880 --> 00:58:10,280
वहां अपनी वास्तविकता अर्जुन को बता दी है कि मैं सब कुछ

796
00:58:10,280 --> 00:58:14,320
हूं तो फिर वहां

797
00:58:14,320 --> 00:58:17,040
वह

798
00:58:17,040 --> 00:58:21,120
जब अब ये बताओ इसने ये बात कही है आपके

799
00:58:21,120 --> 00:58:25,120
हिसाब से तो इनके हिसाब से इनका जो कबीर है वो पूर्ण परमात्मा नहीं है

800
00:58:25,120 --> 00:58:27,840
क्या

801
00:58:27,840 --> 00:58:31,920
जय श्री राम ज श्री राम मैं कुछ बातें कहना चाहता हूं

802
00:58:31,920 --> 00:58:35,960
पाच मिनट आपसे बहुत मजा आने वाला है बोलू बताइए बताइए

803
00:58:35,960 --> 00:58:40,240
आपको पता है अभी पिछले रविवार को पहली बार मैं ये अमित दास जी के चैनल

804
00:58:40,240 --> 00:58:44,360
पर मैं गया था मैंने इनको महाभारत से कुछ प्रमाण दिखाए पहली बार

805
00:58:44,360 --> 00:58:48,400
में इन्होंने मेरे को बीच डिबेट से इन्होने मुझे निकाल दिया जब मैंने इनको दो प्रमाण

806
00:58:48,400 --> 00:58:52,560
दिखाए भगवान श्री कृष्ण को लेकर महाभारत से और अभी कल मैं आया

807
00:58:52,560 --> 00:58:56,600
था कल की डिबेट में मैं आया था यह रंजीत सिंह जी भी उस वक्त

808
00:58:56,600 --> 00:59:00,920
जुड़े हुए थे उन्होंने देखा है मेरे को उससे पहले का मैं बताता हूं जब मैं दूसरी

809
00:59:00,920 --> 00:59:04,960
बार जब आया था ना तब टीआर पहाड़ी जी थे मैंने महाभारत से कुछ

810
00:59:04,960 --> 00:59:08,960
गीता को लेके प्रमाण दिखाया कि जो महाभारत के बाद जो लिखा होता है

811
00:59:08,960 --> 00:59:13,240
ना गीता में कि ये 620 शलोक श्री कृष्ण ने बोले इतने उतने श्लोक अर्जुन ने बोले

812
00:59:13,240 --> 00:59:17,240
वो जो एक व्यक्ति था था ना जो आपके सामने बोला था कि वेदों को हम उतना मानते हैं

813
00:59:17,240 --> 00:59:21,440
जितना हमको अच्छा लगता है वो मेरे मुंह प भी अब उस व्यक्ति ने मेरे को बोला कि

814
00:59:21,440 --> 00:59:25,520
ऐसे प्रमाण हमारे गुरु जी ने हमको दे रखे हैं लेकिन हम उन्हीं को मानते हैं जो हमारे मत के

815
00:59:25,520 --> 00:59:29,880
अनुकूल हो ये पहाड़ी जी से पूछे थे वहा उन्होंने भी सुना था

816
00:59:29,880 --> 00:59:32,240
अरे सुनिए ना कल का पूरा डिबेट छोड़

817
00:59:32,240 --> 00:59:36,240
के लास्ट में निकलना निकल आए सुनो एक मिनट कल हम दिवेद छोड़

818
00:59:36,240 --> 00:59:40,520
के निकल आए बट एक चीज उन लोगों ने एक्सेप्ट कर लिया कि वेद जो है उनके कबीर

819
00:59:40,520 --> 00:59:44,640
को नहीं समझा सकते मतलब वेदों में इतनी क्षमता ही नहीं है वेदों में इतना ज्ञान ही

820
00:59:44,640 --> 00:59:48,800
नहीं है कि कबीर को समझाया जा सके इट मींस कि वेदों के अनुसार एक मिनट

821
00:59:48,800 --> 00:59:52,880
मिनट हमको बोलने दो एक मिनट वेदों के अनुसार कबीर परमात्मा

822
00:59:52,880 --> 00:59:57,080
नहीं है वो वेदों के ऊपर कोई और चीज है उसके अनुसार

823
00:59:57,080 --> 01:00:01,600
क परमात्मा

824
01:00:01,600 --> 01:00:06,280
है बत

825
01:00:06,280 --> 01:00:10,280
बिया में प्रमाण कबीर नहीं

826
01:00:10,280 --> 01:00:14,880
भगवान

827
01:00:14,880 --> 01:00:19,160
है एक मिनट रजीत सिंह जी की बात सुनले जरा

828
01:00:19,160 --> 01:00:23,160
सुनलो वहा पर इतना तो हमने क्लियर कर दिया की वेदों में आप हमको

829
01:00:23,160 --> 01:00:27,320
कभ मत दिखाना कबीर दिखा देना हम लेंगे हम कबीर

830
01:00:27,320 --> 01:00:31,320
जी के दास बन जाएंगे चेला बन जाएंगे लेकिन वो हमको बारबार

831
01:00:31,320 --> 01:00:35,400
वही कवि कवि हम बोले भाई कवि तो हमारे विष्णु भगवान है विष्णु सहस्त्र नाम

832
01:00:35,400 --> 01:00:39,520
स्तोत्र आप पढ़ो 27 शलोक में भगवान विष्णु का ही नाम कवि

833
01:00:39,520 --> 01:00:43,520
है अच्छा हमने उनसे कहा कि मंत्र कौन सा है आपका चलो

834
01:00:43,520 --> 01:00:47,920
आप ही बता दो ओम तत्सत चलो ओम तत्सत हम

835
01:00:47,920 --> 01:00:52,400
बोले चलो ये एक्से करते ये कहा कबीर है इस में

836
01:00:52,400 --> 01:00:56,600
इस मंत्र में कहा कबीर है तो बो आपके हिसाब से चाहे जिसम

837
01:00:56,600 --> 01:01:00,640
भी जा रहा हो य जिसको भी जा रहा हो यह मंत्र हमारे हिसाब से तो हमारे कबीर

838
01:01:00,640 --> 01:01:04,680
परमात्मा को जा रहा है हम बोले चलिए ठीक है तो आपके कबी

839
01:01:04,680 --> 01:01:08,680
मतलब कुल मिला के इनकी जो बातें है वो मनमुक हो गई शास्त्र से

840
01:01:08,680 --> 01:01:12,680
नहीं रही बिल्कुल नहीं रही हम बता रहे हैं कहां

841
01:01:12,680 --> 01:01:17,040
से रही केवल कबीर सागर से कबीर कबीर सागर

842
01:01:17,040 --> 01:01:22,640
से कबीर सागर से भी तो लिख रहे हैं कबीर सागर से मुक्ति नहीं

843
01:01:22,640 --> 01:01:26,680
है हिब से हमने पहले क दिया कबीर सागर को

844
01:01:26,680 --> 01:01:30,680
हम एक्सेप्ट नहीं कर हम केवल

845
01:01:30,680 --> 01:01:34,760
वो बात की बात है ये खुद लिख रहे हैं कि कबीर सागर से भी मुक्ति

846
01:01:34,760 --> 01:01:39,800
नहीं है कुल मिलाकर सारी किताबों को आग लगा दो मेरे पास आ जाओ जेल

847
01:01:39,800 --> 01:01:45,040
धाम दिखाइए इसको इसको दिखाइ जरा बड़ा

848
01:01:45,040 --> 01:01:49,360
करिए इसमें कह रहे भाई देखो शास्त्रों में

849
01:01:49,360 --> 01:01:53,520
इधर राइट जाइए राइट राइट राइट जाइए प राइट

850
01:01:53,520 --> 01:01:58,480
कबीर साहब की वाणी

851
01:01:58,480 --> 01:02:02,480
वेद गीता पुराण कुराण धर्मदास सावादी

852
01:02:02,480 --> 01:02:06,560
संतों की वाणी इनसे मुक्ति

853
01:02:06,560 --> 01:02:10,560
नहीं होगी और इन सबको छोड़

854
01:02:10,560 --> 01:02:14,960
केर कहां जाना पड़ेगा उसका जो वो है

855
01:02:14,960 --> 01:02:17,400
ना

856
01:02:17,400 --> 01:02:21,560
रिप्रेजेंटेटिव हा व कबीर साहब का जेल जाना होगा जेल

857
01:02:21,560 --> 01:02:26,640
जाना उनके पास जाना तो जेल जाइए भैया सीधे

858
01:02:26,640 --> 01:02:30,400
चलो यार हम

859
01:02:30,400 --> 01:02:34,680
जा देखिए रमेश प्रजापति का देखिए चलती लाइव

860
01:02:34,680 --> 01:02:38,800
में रमेश प्रजापति जी का जो है हमने परिवर्तन किया आचार

861
01:02:38,800 --> 01:02:43,400
विचार में देखिए उनका जो अभी जो उल्टा सीधा लिख रहे थे पागल

862
01:02:43,400 --> 01:02:48,240
इससे पहले किसी ने मूर्ख लिखा था बदल गया देखिए इसको कहते हैं

863
01:02:48,240 --> 01:02:51,440
शेर का बच्चा एक ही

864
01:02:51,440 --> 01:02:56,280
अच्छा देखिए इन्होने पागल शब्द का उपयोग नहीं किया है

865
01:02:56,280 --> 01:03:00,800
यह तो करेंगे यह नहीं मानेंगे नहीं

866
01:03:00,800 --> 01:03:05,360
चलो थोड़ा बहुत तो परिवर्तन देखने को मिल रहा है

867
01:03:05,360 --> 01:03:09,560
जी आपका एक प्रश्न था बताइए आपका एक प्रश्न

868
01:03:09,560 --> 01:03:13,760
हा यह प्रश्न है मेरा कबीर सागर से हम पूछ रहे हैं

869
01:03:13,760 --> 01:03:18,400
जैसे काल को श्राप लगा हुआ था

870
01:03:18,400 --> 01:03:22,920
एक लाख जीवों को खाएगा सवा लाख पैदा

871
01:03:22,920 --> 01:03:27,840
करेगा ये बहुत बढ़िया है शरीर धारी

872
01:03:27,840 --> 01:03:31,840
आज की तारीख में अगर जनगणना के हिसाब से भी देखें करीबन

873
01:03:31,840 --> 01:03:35,880
करीबन न लाख से ज्यादा तो रोज आदमी मरता है आदमी आदमी की बात

874
01:03:35,880 --> 01:03:40,320
कर रहा हूं मैं और दूसरे जीव की भी बात नहीं कर रहा हूं उसमें तो जीव

875
01:03:40,320 --> 01:03:44,880
है उसमें तो जीव है और सवा लाख पैदा हो रहे है जनगणना

876
01:03:44,880 --> 01:03:45,520
के हिसाब से

877
01:03:45,520 --> 01:03:49,600
करीबन करीबन 4 लाख के करीबन पैदा हो रहे रोज के तो फिर इसके हिसाब

878
01:03:49,600 --> 01:03:55,600
से तो कबीर जी का व वरदान और शराप दोनों ही झूठा हो गया

879
01:03:56,960 --> 01:04:00,960
नहीं इसका तो जवाब दिया जा सकता है कि जो ज्यादा हो

880
01:04:00,960 --> 01:04:05,280
रहे हैं ना जो ज्यादा मर रहे हैं उनका पुनर्जन्म

881
01:04:05,280 --> 01:04:09,920
हो जाता है किसी और यनि में उनको खाता नहीं

882
01:04:09,920 --> 01:04:14,080
है अच्छा खाता नहीं है उनको छोड़ता है

883
01:04:14,080 --> 01:04:18,280
उनको पुनर्जन्म कर देता वो कुछ और सिस्टम है वो जानना

884
01:04:18,280 --> 01:04:22,400
पड़ेगा अच्छा यह क्या है देखिए कबीर सागर को भी नहीं मानते

885
01:04:22,400 --> 01:04:26,640
रामपाल यह देखिए ताजा खबर कबीर

886
01:04:26,640 --> 01:04:31,040
सागर को भी नहीं मानते रामपाल क्यों नहीं मानते कबीर

887
01:04:31,040 --> 01:04:35,280
सागर में ज्ञान हीन महंतों ने कुछ मिलावट

888
01:04:35,280 --> 01:04:39,680
या काट छाट की है वह उसका अपना अज्ञान अनुभव

889
01:04:39,680 --> 01:04:43,800
था लो अब कबीर सागर भी प्रमाण नहीं प्रमाण है क्या

890
01:04:43,800 --> 01:04:47,840
प्रमाण है तत्वदर्शी तत्वदर्शी क्यों क्योंकि शास्त्रों में

891
01:04:47,840 --> 01:04:52,000
लिखा है शास्त्र क्यों प्रमाण तो मिलावट है नहीं शास्त्रों

892
01:04:52,000 --> 01:04:57,160
में जहां से तत्वदर्शी शब्द आ जाए बस वो मिलावट नहीं है बाकी सब

893
01:04:57,160 --> 01:05:00,920
मिलावट मिलावट तो सब कुछ ही है बगर मंत्र के भगवान

894
01:05:00,920 --> 01:05:04,920
नहीं मिलता है बगर मंत्र के जाप के जो शास्त्रों में

895
01:05:04,920 --> 01:05:09,080
मंत्र उनसे मिलता है उन्होंने कब शास्त्र के मंत्र के जाप किए थे जिनको मिले थे परमात्मा

896
01:05:09,080 --> 01:05:13,560
धरती पर आके उन्होंने तो राम की भक्ति की उनको सत्य मार्ग दिया तो क्यों दिखाया

897
01:05:13,560 --> 01:05:17,600
उनको अरे मैं तो आपको देखो हम क्या कहते हैं गलत बात

898
01:05:17,600 --> 01:05:21,680
बिल्कुल नहीं दूसरी ग्रंथ खुल नहीं इनकी गरमा गीता

899
01:05:21,680 --> 01:05:26,000
की खोलिए पेज नंबर 99

900
01:05:26,000 --> 01:05:30,360
अर्जुन ने तो कभी कबीर की भक्ति नहीं की ना ही उसको कोई तत्वदर्शी

901
01:05:30,360 --> 01:05:34,680
मिला भैया उसको ज्ञान देने वाले तो कृष्णम वंदे जगतगुरु तो गलत है जगतगुरु

902
01:05:34,680 --> 01:05:38,720
है नहीं उनको ज्ञान नहीं था तो अर्जुन को मोक्ष मिल रहा है व

903
01:05:38,720 --> 01:05:44,720
भी गरिमा गीता की में ये देखिए ताजा

904
01:05:45,520 --> 01:05:49,240
खबर अर्जुन को

905
01:05:49,240 --> 01:05:53,800
मोक्ष 99 पेज नंबर

906
01:05:53,800 --> 01:05:57,960
हा इसमें नीचे नीचे चलिए हां ये एक

907
01:05:57,960 --> 01:06:03,960
मिनट मैं निकाल लू अर्जुन को मोक्ष कहां पर लिखा है

908
01:06:04,080 --> 01:06:08,160
मैंने इनकी जो ग्रंथ मैंने थोड़े से टटोल लिए हैं उससे

909
01:06:08,160 --> 01:06:12,720
इतना वो हो गया कि सब सब चीजें वो हो गई फिर कुछ बचा

910
01:06:12,720 --> 01:06:17,200
नहीं ऐसा कुछ बचा नहीं जो फिर वो नहीं

911
01:06:17,200 --> 01:06:22,920
ये वो ज्ञान है जिसको जानने के बाद कुछ और जानना शेष नहीं रह

912
01:06:22,920 --> 01:06:26,840
जाता इनका

913
01:06:26,840 --> 01:06:31,920
अंतिम ज्ञान है ये अंतिम ज्ञान हा ये अंतिम ज्ञान मिल

914
01:06:31,920 --> 01:06:37,480
गया पहला पैराग्राफ में ही लिखा है क्या लिखा

915
01:06:37,480 --> 01:06:42,000
है 99 है ना ये

916
01:06:42,000 --> 01:06:45,000
फर्स्ट

917
01:06:45,000 --> 01:06:50,320
पैराग्राफ अच्छा पेज नंबर 99 है

918
01:06:50,320 --> 01:06:54,640
ड़ था आदेश मिला उपरोक्त करता है परमात्मा कबीर

919
01:06:54,640 --> 01:06:58,760
देव यहां तो नहीं दिख रहा यही पर

920
01:06:58,760 --> 01:07:03,000
तो था ये गरमा गीता की है ना

921
01:07:03,000 --> 01:07:07,480
ये हां हां इसका पहला पैराग्राफ

922
01:07:07,480 --> 01:07:09,680
हां ये देखिए

923
01:07:09,680 --> 01:07:13,800
अर्जुन यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को

924
01:07:13,800 --> 01:07:17,880
ईष्ट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञ के

925
01:07:17,880 --> 01:07:22,160
साथ-साथ वास्तविक नाम का स्मरण करके पूर्ण मोक्ष

926
01:07:22,160 --> 01:07:26,320
रूपी अवंत को प्राप्त हो जाता अर्थात

927
01:07:26,320 --> 01:07:27,920
पूर्ण परमात्मा को प्राप्त हो

928
01:07:27,920 --> 01:07:32,040
जाता है ओ इसको ज्ञान किसने दे दिया

929
01:07:32,040 --> 01:07:36,640
ओए इसको ज्ञान किसने दे दिया भाई ति

930
01:07:36,640 --> 01:07:40,920
दर्सी ने दे दिया होगा ति

931
01:07:40,920 --> 01:07:43,080
दर्शी

932
01:07:43,080 --> 01:07:47,280
य जो आप आप बताते हैं ना थोड़ा इसका

933
01:07:47,280 --> 01:07:51,560
स्क्रीनशॉट ऐसा रख लिया करिए तो बीच-बीच में जैसे ा

934
01:07:51,560 --> 01:07:56,160
है अन्य चीजों फेसबुक इसमें थोड़ा सा डाल दिया करिए और अच्छा

935
01:07:56,160 --> 01:08:00,160
किस बुक से किस बुक से रिफरेंस है ये थोड़ा सा कोने में एडिट

936
01:08:00,160 --> 01:08:04,200
करके तो ये बहुत अच्छा है क्योंकि ये चीजें फिर हट

937
01:08:04,200 --> 01:08:08,280
जाएंगी जी जी जी जी लंबी ल जी जी क्योंकि डेढ़ दो घंटे की वीडियो

938
01:08:08,280 --> 01:08:12,320
है इतना कौन सुनेगा वो बहुत अच्छा नहीं हम लोग एक टीम तैयार कर रहे

939
01:08:12,320 --> 01:08:16,360
हैं कि छोटी-छोटी शॉर्ट बनाई जाए जो ये लंबी लंबी दो दो घंटे की

940
01:08:16,360 --> 01:08:20,880
है इनका जरा जरा सा पार्ट निकाला जाए उसको जो है डाला जाए

941
01:08:20,880 --> 01:08:24,920
जैसे ये लोग जो है ना छोटा-छोटा वीडियो जो है एक-एक लाइन का दोदो लाइन

942
01:08:24,920 --> 01:08:28,920
का जैसे किताब का रिफरेंस लेकर के यह देते हैं इसी तरह इनके

943
01:08:28,920 --> 01:08:32,960
किताब का रिफरेंस देकर के ये लोग ऐसी ऐसे हमारे ग्रंथों में चिप चिपका

944
01:08:32,960 --> 01:08:38,960
के जाते हैं जी जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल

945
01:08:39,600 --> 01:08:43,680
बिल्कुल बिल्कुल कुछ नहीं इनकी मनोगत कहानी

946
01:08:43,680 --> 01:08:47,680
है सब और कुछ जसवंत जी मुझे

947
01:08:47,680 --> 01:08:52,120
ऐसा लगता है आपके हृदय को बहुत आहत हुए हैं आप इन लोगों की वजह से क्योंकि आप

948
01:08:52,120 --> 01:08:57,920
बहुत मुझे अंदर से वो लग टूटे हुए मतलब

949
01:08:57,920 --> 01:09:01,920
भाई जी मैं अगर सत्य बताऊं तो मैं करीबन आठवी क्लास

950
01:09:01,920 --> 01:09:06,280
में पढ़ता था आज मेरी उम्र कम से कम 40

951
01:09:06,280 --> 01:09:10,280
साल की है तो मैंने बचपन से ही भक्ति की

952
01:09:10,280 --> 01:09:14,400
थी मंदिर अंदिर पर झाड़ू आड़ू लगाना थोड़ा भजन भी करना रामायण में

953
01:09:14,400 --> 01:09:18,960
गीता में सब पढ़ना अभी सब किताब भी रखी है रामायण

954
01:09:18,960 --> 01:09:23,040
गीता तो मेरा भी एक दिन ऐसा ही हाल हुआ था इन लोगों की तरह

955
01:09:23,040 --> 01:09:27,280
तो मैं बड़ा परेशान था लेकिन सत्य कह रहा हूं इस टाइम शाम का वक्त हो रहा है वैसे इन चीजों

956
01:09:27,280 --> 01:09:31,360
को नहीं कहना चाहिए के एक दिन साक्षात मां दुर्गा

957
01:09:31,360 --> 01:09:35,600
अपने ही डायरेक्ट स्वरूप में आकर मुझे बताया था सब कुछ उस दिन मेरा दिमाग फ्रेश

958
01:09:35,600 --> 01:09:39,680
हुआ कि अब किसी के चक्कर में नहीं पड़ना मैं वैसे बोलना नहीं चाहता था

959
01:09:39,680 --> 01:09:43,720
पर ये आज मजबूरी बोलना पड़ा है नहीं नहीं मत बोला करिए यह सब बातें अपनी

960
01:09:43,720 --> 01:09:48,000
निजी होती है भगवान के साथ में हमारा संबंध जो है व बोला

961
01:09:48,000 --> 01:09:52,040
बोलते नहीं खैर आपने बोला वो जन जागरुकता के लिए है और आपका

962
01:09:52,040 --> 01:09:54,800
प्रारब्ध है कि आप आपका प्रारब्ध

963
01:09:54,800 --> 01:09:59,000
है कि आप जो है बचपन से ऐसा व मिल गया भाव क्योंकि

964
01:09:59,000 --> 01:10:03,160
भगवान की भक्ति भी प्राप्त हो जाना बहुत बड़ी चीज होती है जो प्राप्त हो जाती

965
01:10:03,160 --> 01:10:07,160
है और इसी कारण से माता ने स्वयं माता ने

966
01:10:07,160 --> 01:10:12,000
स्वयं प्रकट होकर के इसीलिए आपको जो है सही दिशा दे दी

967
01:10:12,000 --> 01:10:16,280
हां मैं भी य नहीं के चक्कर में था मुझे बहुत पहली बात तो मेरे ऊपर

968
01:10:16,280 --> 01:10:20,760
बहुत गुस्सा हुई पहले तो इन चीजों के चक्कर में बहुत गुस्सा

969
01:10:20,760 --> 01:10:25,320
समझ रं आपका जो आप जिस तरह से सीरियस है ना इस

970
01:10:25,320 --> 01:10:29,520
आनंदमय वातावरण में भी आप जो सीरियस है इसलिए दिख रहा है कि आपके

971
01:10:29,520 --> 01:10:32,280
अंदर रोश

972
01:10:32,280 --> 01:10:36,680
है अब रोस क्या भाई ब्रह्मा भी अज्ञानी

973
01:10:36,680 --> 01:10:42,680
है विष्णु जी भी अज्ञानी है यह अकेले सय क्या बोलते एक चीज और

974
01:10:47,200 --> 01:10:51,200
है आपका रुक गया कैमरा रुक गया आपका

975
01:10:51,200 --> 01:10:55,600
अब देखिए ये देखिए राम पालियो का वो देखिए कि बिल्कुल

976
01:10:55,600 --> 01:11:01,160
थोड़ा तरीके में आ गए कमेंट करने वाले कल पता है

977
01:11:01,160 --> 01:11:05,240
कल सुनो एक मिनट कल कहीं नहीं बात बनी तो

978
01:11:05,240 --> 01:11:09,240
लास्ट में आकर के मोक्ष पर आ गए मोक्ष कहां है कैसे जाएगा अरे यार मोक्ष

979
01:11:09,240 --> 01:11:13,280
का मतलब उनको ना पता है मोक्ष का मतलब है मक्ष अगर सतलोक में

980
01:11:13,280 --> 01:11:17,800
जाक आत्मा ट गई तो मोक्ष है हद होती है एकदम

981
01:11:17,800 --> 01:11:22,560
अरे किसी दिन आ जाने दो किसी को तब इनका मोक्ष निकालू

982
01:11:22,560 --> 01:11:25,720
मैं नहीं

983
01:11:25,720 --> 01:11:29,760
भाई जी मैं आपको ये बात सत्य कह रहा हूं एक मिनट रजीत

984
01:11:29,760 --> 01:11:33,880
जी की बात हो जाए त बोलिए आत्मा को

985
01:11:33,880 --> 01:11:38,000
ये कोई तत्व ऑब्जेक्ट मान के रखे हैं क्या कि वो उड़ के जाएगा आत्मा कोई ऑब्जेक्ट

986
01:11:38,000 --> 01:11:42,200
है ये बताओ जो शून्य है जो निराकार

987
01:11:42,200 --> 01:11:46,360
है जिसकी कोई मतलब आदि ना है ना तो अंत है उस चीज को भी

988
01:11:46,360 --> 01:11:50,440
ये जो है मान के चलना है वो भी कहीं जाएगा उसको कहां जाने की जरूरत

989
01:11:50,440 --> 01:11:54,560
है हमको ये बताओ अब मेरे इस जीवन से अब उसके लिए

990
01:11:54,560 --> 01:11:58,680
प्रमाण चाहिए तब कहा बेटा इस शरीर से तुम पार नहीं हो सकोगे अब मेरे इस

991
01:11:58,680 --> 01:12:03,040
जीवन से ये देखो भाई कबीर से भी मोक्ष नहीं

992
01:12:03,040 --> 01:12:07,480
है नहीं हो सकोगे अब मेरे इस जीवन से

993
01:12:07,480 --> 01:12:12,480
कबीर से भी मोक्ष नहीं है सुन लो रामपाल एंड

994
01:12:12,480 --> 01:12:16,800
कंपनी कबीर से भी मोक्ष नहीं है

995
01:12:16,800 --> 01:12:21,240
उनको ये उनको अभी तक उनका एक क्वेश्चन था हमसे व बारबार हमसे पूछना

996
01:12:21,240 --> 01:12:25,400
बताइए किसकी भक्ति करें अब ये थोड़ा सा क्लियर बता दिया जाए हम

997
01:12:25,400 --> 01:12:29,400
जो है वो परंपरा प्राप्त आचार्यों से जो है दीक्षा लिए नहीं है इसलिए

998
01:12:29,400 --> 01:12:33,560
वो काहे माने हमारी बात उन्होंने कहा हम क्यों माने आपकी

999
01:12:33,560 --> 01:12:37,760
बात कि किसकी भक्ति करनी चाहिए चलो चलो इतना

1000
01:12:37,760 --> 01:12:41,760
सुधार तो आया कि अब उन लोगों ने परंपरा बोलना शुरू किया है

1001
01:12:41,760 --> 01:12:45,920
ये बहुत अच्छी बात है अभी थोड़े दिनों में देखना धीरे-धीरे ब्रह्मा विष्णु

1002
01:12:45,920 --> 01:12:49,920
महेश भगवती गणेश प आ जाएंगे अरे पता है कल काल हमारे अंदर

1003
01:12:49,920 --> 01:12:53,920
आ गया था समझो बात को कल काल हमारे अंदर आ गया था तब जाकर हम वहां

1004
01:12:53,920 --> 01:12:58,000
गीता वाचन शुरू किए ते हैं इससे पहले हमर

1005
01:12:58,000 --> 01:13:02,280
हम कहा गीता पढ़ने जाएंगे कल काल हमारे अंदर आ

1006
01:13:02,280 --> 01:13:06,280
गया भाई लिंक दे दो

1007
01:13:06,280 --> 01:13:10,600
किसी कोई अगर आना चाहता है कि कबीर के द्वारा मोक्ष है

1008
01:13:10,600 --> 01:13:16,600
तो वो आ जाए आज मोक्ष पर हम लोग बात

1009
01:13:17,000 --> 01:13:21,000
करेंगे आ जाए भैया चर्चा हुई होती ना

1010
01:13:21,000 --> 01:13:26,880
तो काल का विरा जाता एक चीज और

1011
01:13:26,880 --> 01:13:30,960
लोग बोलते हैं जो गुरु की रामपाल जी की निंदा करेगा ये हो जाएगा

1012
01:13:30,960 --> 01:13:36,960
उसका वो हो जाएगा मैं सत्य कह रहा हूं मैं 20110 से इनकी बरी तरह निंदा कर रहा हूं 2010

1013
01:13:37,600 --> 01:13:42,000
से 15 साल हो गई

1014
01:13:42,000 --> 01:13:46,120
ठीक है कहीं कुछ नहीं है और इनको ये लोग बोलते हैं हमको फायदा पड़ गई

1015
01:13:46,120 --> 01:13:50,200
हमको फायदा पड़ गई फायदा तो तुमको इसलिए पड़ गई कुछ फायदा थोड़ी बहुत

1016
01:13:50,200 --> 01:13:54,240
पड़ती है जैसे तुमने पहले कुछ भक्ति की होगी थोड़ी बहुत पुण्य धर्म भी किए होंगे

1017
01:13:54,240 --> 01:13:58,720
मंदिर पर जाना तीर्थ पर गिरिराज पर परिक कमा देना

1018
01:13:58,720 --> 01:14:02,800
जब तुम उनको छोड़ के जाओगे तो तुम्हारा कर्जा भी क्यों रखेंगे वो सलो अपना तुरंत

1019
01:14:02,800 --> 01:14:05,480
ले जाओ अपने

1020
01:14:05,480 --> 01:14:09,560
साथ व बुरे कर्म करना शुरू करता है तो उसके पहले अच्छे

1021
01:14:09,560 --> 01:14:14,120
कर्मों का जो प्रारब्ध होता है ना व पहले दे देते हैं जल्दी इसका कम करो

1022
01:14:14,120 --> 01:14:18,360
इसका करो इसका इसको भाई तुमने हमारे पास

1023
01:14:18,360 --> 01:14:24,040
आप य से जा साब करना

1024
01:14:24,040 --> 01:14:28,360
तुम्हारा ये और कुछ नहीं है मोक्ष बताओ कबीर से मोक्ष

1025
01:14:28,360 --> 01:14:32,520
नहीं है तुम क्या है तुमने क्या लिखा है तत्व ज्ञान में

1026
01:14:32,520 --> 01:14:36,800
क्या रायता फैला के गए हो क्या है तुम्हारा तत्व ज्ञान

1027
01:14:36,800 --> 01:14:40,840
भाई एक तरफ उसी को प्रभु कह रहे हो एक तरफ उसी को तुच्छ कह रहे हो

1028
01:14:40,840 --> 01:14:44,960
एक तरफ काल से अच्छे हैं कृष्ण एक तरफ कृष्ण से अच्छा है काल

1029
01:14:44,960 --> 01:14:49,040
एक तरफ काल जो है अविनाशी है फिर अविनाशी नहीं है और फिर जो है वो मरता भी

1030
01:14:49,040 --> 01:14:53,400
है 7 हज 7 हज य वो इसके बाद अच्छा विष्णु

1031
01:14:53,400 --> 01:14:58,040
जी भगवान नहीं है कृष्ण जी भगवान नहीं मगर कबीर कह रहे भगवान क्या लिख के गए हो

1032
01:14:58,040 --> 01:15:02,640
ये अरे कबीर नहीं अगर ये खुद आ करके

1033
01:15:02,640 --> 01:15:06,640
अगर य खुद आ कर के अपनी लिखी हुई किताबों को शुरू से अंत तक पढ़ना शुरू कर

1034
01:15:06,640 --> 01:15:10,760
दे तो पहले तो इनके आंखों में अपने

1035
01:15:10,760 --> 01:15:15,160
आप जो है एसिड उत्पन्न होने लगेगा तेजा उत्पन्न होने लगेगा

1036
01:15:15,160 --> 01:15:21,160
और आखिरी में अपना माथा पीट 10 प बार जो य लिख के गए

1037
01:15:22,360 --> 01:15:26,680
हैं अरे भाई एक न देखो रमेश

1038
01:15:26,680 --> 01:15:30,920
भाई गलत बातें मत करो गलत बातें मत करो गलत बात करोगे

1039
01:15:30,920 --> 01:15:36,160
झूठ बोलोगे तो फिर मुझे कुछ चैप्टर खोलना पड़ेगा

1040
01:15:36,160 --> 01:15:40,160
ज्ञान की बात क्या है तुम्हारे जब तुम्हारा ग्रंथ खोल खोल के दिखा रहा हूं

1041
01:15:40,160 --> 01:15:44,920
तो तुम कह रहे ज्ञान की बात नहीं है इसका मतलब वो तत्व ज्ञान नहीं है क्या तुम्हारे इन ग्रंथों में

1042
01:15:44,920 --> 01:15:49,080
तुम्हारे ग्रंथों को खोल के दिखा रहा हूं क्या इन ग्रंथों में तत्व ज्ञान नहीं है

1043
01:15:49,080 --> 01:15:53,200
बोलो कह दो ये तत्वदर्शी किताबें नहीं है ये झूठे की किताबें

1044
01:15:53,200 --> 01:15:57,400
पाखंडी की किताबें बोल सकते हो क्या ये यह तत्वदर्शी की किताब

1045
01:15:57,400 --> 01:16:01,880
है तुम ही कहते हो तत्वदर्शी है अब तुम कह रहे हो कि मैं ज्ञान की बात नहीं कर रहा हूं

1046
01:16:01,880 --> 01:16:05,960
एक मिनट रंजीत जी एक मिनट अब तुम कह रहे हो कि मैं ज्ञान की बातें नहीं कर रहा

1047
01:16:05,960 --> 01:16:10,200
हूं तो इसका मतलब इसमें क्या भूसा भरा है क्या इसमें

1048
01:16:10,200 --> 01:16:13,400
तत्व ज्ञान नहीं है क्या

1049
01:16:13,400 --> 01:16:18,040
हा जल्दी अपनी बात सही कर दो बोलो

1050
01:16:18,040 --> 01:16:22,160
मैं इसकी बात कर रहा हूं और तुम कह रहे हो ये ज्ञान की बात नहीं है कितना

1051
01:16:22,160 --> 01:16:26,320
बड़ा गुरु अपराध कर रहे हो तुम उनको ऊपर लाओ ऊपर लाओ

1052
01:16:26,320 --> 01:16:30,520
ऊपर आइए भाई आप ऊपर नहीं आएंगे उनके अंदर वो नहीं है वो

1053
01:16:30,520 --> 01:16:35,160
मां का दूध नहीं पिया था बचपन में ऊपर नहीं

1054
01:16:35,160 --> 01:16:37,400
आते रमेश ऊपर आ जाइए

1055
01:16:37,400 --> 01:16:41,480
आप जो बात है आप ऊपर आ कर केफा कर दीजिए

1056
01:16:41,480 --> 01:16:45,960
उसको आना है तो ऊपर आ जाइए

1057
01:16:45,960 --> 01:16:50,320
रमेश प्रजापति अब थोड़े से ठीक हुए अरे शिवांश भाई हम सभी देवताओं

1058
01:16:50,320 --> 01:16:54,400
की भक्ति करते हैं थोड़ा ठीक हो गए देखो तुरंत देखो आप

1059
01:16:54,400 --> 01:16:58,800
फे देखिए चंद्र पाण मिश्रा जी ये हमारी आपकी बहुत बड़ी अचीवमेंट

1060
01:16:58,800 --> 01:17:03,000
है ये बहुत बड़ी हम लोगों को भी करेंगे सुनो ना जितने भ्रमित

1061
01:17:03,000 --> 01:17:07,480
हो ग ना हम लोगों की भी भक्ति करने लगे कुछ दिन बाद

1062
01:17:07,480 --> 01:17:11,480
अगर इसी तरह से इनकी स्थिति रही तो पक्का बताना है अगर ये इसी तरह से

1063
01:17:11,480 --> 01:17:15,560
रामपाल जी के जो है वो क्या कते है ना आडंबर में फसे रहे ना तो

1064
01:17:15,560 --> 01:17:19,600
ये हम लोगों कीति करने लग हां हम इन लोगों का रिस्पेक्ट करते हैं

1065
01:17:19,600 --> 01:17:23,640
रीजन हम बता रहे हैं पब्लिकली इनके सामने बोलना इनका रिस्पेक्ट करते

1066
01:17:23,640 --> 01:17:27,760
हैं क्योंकि कुछ चीज इकी अच्छी लगती हैको जैसे फर एपल

1067
01:17:27,760 --> 01:17:32,120
ये बहुत ही नियम के पंचुल होते है सामाजिक काम अभी देख रहे थे हम

1068
01:17:32,120 --> 01:17:36,200
कोई वो क्या करते भंडारा वगर भी अच्छा से किए उसम शादी विवाह

1069
01:17:36,200 --> 01:17:40,320
वगैरह का प्रोग्राम भी बहुत अच्छे से कराए ये सब ऐसे सामाजिक कार्य

1070
01:17:40,320 --> 01:17:44,440
है जिसकी जो है सभी स्वागत करका सब स्वागत करते हैं

1071
01:17:44,440 --> 01:17:49,080
आडंबर विरोधी व्यक्ति को होना चाहिए ना कि परंपरा विरोधी होना चाहिए

1072
01:17:49,080 --> 01:17:52,760
और ये क्या परंपरा विरोधी होने लग र है य दिक्कत है

1073
01:17:52,760 --> 01:17:57,160
आप आडंबर विरोधी बनिए हम स्वागत करेंगे भटकाव

1074
01:17:57,160 --> 01:18:03,160
तभी तो हो रहा है हम विरोध जब हम जाते हैं

1075
01:18:04,360 --> 01:18:08,720
ते जो जो हिंदू है

1076
01:18:08,720 --> 01:18:13,000
एक मिनट रजीत जी एक मिनट बोल जो हिंदू है वह स्वयं

1077
01:18:13,000 --> 01:18:17,320
को हिंदू कह रहा है मगर वह यह नहीं सोच रहा है मेरे पास जो हिंदू तत्व है

1078
01:18:17,320 --> 01:18:21,640
यह आया कैसे यह परंपरा से आया है तो यदि आप परंपरा

1079
01:18:21,640 --> 01:18:25,760
प्राप्त आचार्य को छोड़ के अपने आप को हिंदू कह रहे रोध कर रहे हो

1080
01:18:25,760 --> 01:18:29,800
तो आपका वो जो हिंदुत्व है वो नकली हो जाएगा खोकला

1081
01:18:29,800 --> 01:18:33,960
हो जाएगा ये लोग ये नहीं समझते हैं

1082
01:18:33,960 --> 01:18:38,160
जो दिशाहीन हिंदू कहूंगा मैं वो परंपरा को भूल चुके

1083
01:18:38,160 --> 01:18:42,200
हैं कि वेद कैसे आए हम तक आज हम खुद को डंका बजाते हैं वैदिक है हम

1084
01:18:42,200 --> 01:18:46,280
सनातनी है मगर सनातनी वो मंत्र कहां से आए जिनको हम वेद

1085
01:18:46,280 --> 01:18:50,560
कहते हैं कहां से आए इस बात का जवाब नहीं देते तो

1086
01:18:50,560 --> 01:18:54,880
जब ऐसा होगा जब हम जब जो कुछ इंटेलेक्चुअल

1087
01:18:54,880 --> 01:18:59,080
वर्ग होता है वह एक मौका देता है परंपरा प्राप्त

1088
01:18:59,080 --> 01:19:03,920
आचार्यों का विरोध करके ऐसे ऐसे

1089
01:19:03,920 --> 01:19:07,960
तंत्र जाल चलाने वालों को मौका देता है कि चलो अब इंटेलेक्चुअल पर्सन

1090
01:19:07,960 --> 01:19:12,120
ने तो कह ही दिया हम नहीं मानते परंपरा प्राप्त ज्ञान उसके बाद फिर खड़ा

1091
01:19:12,120 --> 01:19:16,120
होता है रामपाल फिर खड़ा होता है ब्रह्मा कुमारी फिर खड़ा होता है स्वामी नारायण

1092
01:19:16,120 --> 01:19:20,120
मत फिर खड़ा होता है स्कन फिर खड़ा होता है वो राधा स्वामी सत्संग

1093
01:19:20,120 --> 01:19:24,360
आज देखिए एक पीड़िता मुझे फोन करती है ब्रह्मा कुमारी

1094
01:19:24,360 --> 01:19:28,520
का कोई कोई व्यक्ति है जो उसी उसी से पार्ट है निकला हुआ

1095
01:19:28,520 --> 01:19:32,880
और उसने अब अपना नया संस्था खोल लिया है और वो जो है अपनी

1096
01:19:32,880 --> 01:19:37,280
चीजों में लोगों को वो भी भटका रहा है और बेटी अपने

1097
01:19:37,280 --> 01:19:41,480
अपनी बेटी है वो अपनी माता जी को छोड़कर चली गई है उसकी

1098
01:19:41,480 --> 01:19:45,960
माता जी ने हमारा चैनल देखा वो हमसे संपर्क करके बोल रही है कि उसने हमारा

1099
01:19:45,960 --> 01:19:50,000
आप कर सकते हो मैंने आपका चैनल देखा है आप ही यह कार्य कर सकते

1100
01:19:50,000 --> 01:19:54,280
हो मेरी बेटी को वापस ला दो ऐसे रो रही और बेटी

1101
01:19:54,280 --> 01:19:58,280
कितने साल की है 18 साल की चली गई अपनी माता

1102
01:19:58,280 --> 01:20:02,800
जी को छोड़ क्यों क्योंकि हमने जो नियम थे

1103
01:20:02,800 --> 01:20:07,080
उनको हम ही ने तोड़ दिया यह मैं इसमें कहूंगा कि भाई इसमें

1104
01:20:07,080 --> 01:20:11,560
जो है जो प्रायोरिटी से जो व है वो आर्य

1105
01:20:11,560 --> 01:20:15,640
समाज उसने शुरुआत की परंपरा प्राप्त ज्ञान विज्ञान को ठुकराने

1106
01:20:15,640 --> 01:20:19,680
की तब यह मौका इन लोगों को मिला य आज इतने सारे आप

1107
01:20:19,680 --> 01:20:23,200
धर्म के नाम पर चलने वाली संस्थाए देख रहे हैं ना इनके

1108
01:20:23,200 --> 01:20:27,520
मूल में आर समाज वो मान सकते हैं

1109
01:20:27,520 --> 01:20:31,720
कितने सारे सेक्टस है उनको मौका मिला जब आर समाज ने परंपरा का खंडन

1110
01:20:31,720 --> 01:20:35,800
किया जी इनके अंदर कट्टरता

1111
01:20:35,800 --> 01:20:39,880
इतनी ज्यादा है हमारे एक मित्र है हम लोग सेम कैटेगरी के है और

1112
01:20:39,880 --> 01:20:44,080
उनके यहां बता देना है आपको कि पूजा पाठ एकदम वर्जित हो चुका था

1113
01:20:44,080 --> 01:20:48,080
काफी दिन से मतलब दो तीन चार दिन से हमने उनको लास्टली उनकी वाइफ हमारे

1114
01:20:48,080 --> 01:20:52,240
मित्र की वाइफ बोली तो आज जाकर के वो मंदिर में कथा सुने

1115
01:20:52,240 --> 01:20:56,240
वो लोग फैमिली वाले मान ही नहीं रहे हैं घर में हमने कोई इश नहीं है मंदिर

1116
01:20:56,240 --> 01:21:00,240
में पूज मतलब घर मेंज भगवान की पूजा शुरू कीजिए

1117
01:21:00,240 --> 01:21:04,280
असर दिखेगा इतना ब्रेन वश

1118
01:21:04,280 --> 01:21:08,280
कर दिया गया है इन लोगों का मैं आपको

1119
01:21:08,280 --> 01:21:12,400
एक बात बता व लिखा है वहां लिखा है कवि

1120
01:21:12,400 --> 01:21:16,520
कवि शब्द लिखा है कवि का मतलब हम दिखा कवि कहां से लिया गया दिखाना है बट

1121
01:21:16,520 --> 01:21:22,360
फिर भी ये एक्सेप्ट नहीं कर रहा है

1122
01:21:22,360 --> 01:21:26,760
उसको परमेश्वर कबीर जी तो अंतर्यामी है तथा आत्मा के आधार

1123
01:21:26,760 --> 01:21:30,880
में आत्मा के वास्तविक पिता है अपनी प्यारी आत्माओ को ढूंढते

1124
01:21:30,880 --> 01:21:35,240
रहते हैं श्री नानक जी को राम राम कहा किनारे

1125
01:21:35,240 --> 01:21:39,680
पहुंचकर राम राम कहा नानक जी को दिखाई दे रहे थे

1126
01:21:39,680 --> 01:21:43,680
यह देखिए कबीर जी किसी और भगवान के बारे में बात कर रहे हैं कबीर जी ने कहा

1127
01:21:43,680 --> 01:21:47,840
कि आप मेरी बात पर विश्वास करो एक पूर्ण परमात्मा है

1128
01:21:47,840 --> 01:21:52,120
तथा उसका सतलोक स्थान है उसका अभी पूर्ण

1129
01:21:52,120 --> 01:21:56,200
परमात्मा स्वयं है तो उससे कौन पूर्ण परमात्मा जिसके लिए

1130
01:21:56,200 --> 01:22:00,560
उस शब्द का उपयोग हो रहा है यही यही यही चीज

1131
01:22:00,560 --> 01:22:05,040
करते हैं इनको समझ नहीं आता

1132
01:22:05,040 --> 01:22:10,560
कुछ भैया जय श्री राम जय श्री

1133
01:22:10,560 --> 01:22:15,960
राम जय श्री राम शिवांस भाई जी

1134
01:22:15,960 --> 01:22:18,960
बहुत

1135
01:22:18,960 --> 01:22:23,080
सुंदर प को हम भी बधाई देना चाहेंगे

1136
01:22:23,080 --> 01:22:27,280
कि परिवार जो है घर वापसी हो चुकी है ऐसी आशा

1137
01:22:27,280 --> 01:22:31,720
है कि प्रत्येक सनातन अपने मान बिंद पर सकारात्मक

1138
01:22:31,720 --> 01:22:35,720
ढंग से खड़े उतर कर पुन ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश की

1139
01:22:35,720 --> 01:22:39,840
आराधना में शामिल हो भारत अखंड हो बहुत

1140
01:22:39,840 --> 01:22:44,560
बढ़िया बहुत बढ़िया बहुत

1141
01:22:44,560 --> 01:22:48,800
बढ़िया सवाल है एक दो लोगों का मेरे पास फोन

1142
01:22:48,800 --> 01:22:52,880
आया था तो प्रभावित हुए वीडियो देख

1143
01:22:52,880 --> 01:22:56,920
के आपकी य वो वो चीज पिछले

1144
01:22:56,920 --> 01:23:01,080
सात साल आठ सालों से उने नामदान ले रखा है

1145
01:23:01,080 --> 01:23:05,080
तो वह यह बोल रहे हैं कि अपना नाम गुप्त क्यों

1146
01:23:05,080 --> 01:23:09,520
रखना चाहते हैं अगर य छोड़ना चाहते हैं तो कुछ

1147
01:23:09,520 --> 01:23:13,800
लोग कोई भ है वो कंट्रोवर्सी में नहीं पढना

1148
01:23:13,800 --> 01:23:18,040
चाहते व डर होता है कि कंट्रोवर्सी में कौन पड़े अपना

1149
01:23:18,040 --> 01:23:24,040
सामान्य जीवन जी रहे हैं तो क्या दिक्कत है रख अपना नाम

1150
01:23:26,960 --> 01:23:31,920
र जी आपको लाइव से क्यों हटाया गया

1151
01:23:31,920 --> 01:23:35,040
था

1152
01:23:35,040 --> 01:23:37,240
कब

1153
01:23:37,240 --> 01:23:41,280
टाइम अरे हम बता हम हम आए वहा पर एक चाचा जी

1154
01:23:41,280 --> 01:23:46,200
थे यार पहाड़ी जी जिनसे आपकी बहस हुई थी

1155
01:23:46,200 --> 01:23:50,200
तो उन्होने नहीं हटाया था बाद में अमित दास ने क्लियर कर दिया

1156
01:23:50,200 --> 01:23:54,840
था मैं पहले कह चुका था कि मेरी बैटरी सिर्फ दो पर है मैं

1157
01:23:54,840 --> 01:23:59,280
ऑटोमेटिक य आउट हो जाऊंगा य से तो

1158
01:23:59,280 --> 01:24:04,840
मेरा चला गया था बता चका

1159
01:24:04,840 --> 01:24:08,880
था नहीं अच्छा हमारे बीच कश्चन आ चुके

1160
01:24:08,880 --> 01:24:13,000
हैं तो हम इनको जल्दी से लेले सागर नंदा जी आप अपना

1161
01:24:13,000 --> 01:24:17,080
चेहरा दिखाए और तब तक हम जो दो मेहमान है

1162
01:24:17,080 --> 01:24:21,520
इनको सुनले सीताराम सीताराम

1163
01:24:21,520 --> 01:24:27,520
खल बोलिए

1164
01:24:30,360 --> 01:24:36,360
आप बैठ बैठ के बात करें बैठ के बात करें बैठ के बात

1165
01:24:36,480 --> 01:24:38,960
करें

1166
01:24:38,960 --> 01:24:44,960
जी आवाज नहीं आ रही

1167
01:24:46,000 --> 01:24:50,720
आपकी नहीं आ रही आप लीड हटा

1168
01:24:50,720 --> 01:24:55,240
दीजिए हेलो अभी आ रही हो जी जी आ रही

1169
01:24:55,240 --> 01:24:59,320
है हा जी जय सी राम जी

1170
01:24:59,320 --> 01:25:03,480
जय श्री राम हा जी मैं अभी

1171
01:25:03,480 --> 01:25:08,120
य देख रहा था आपके कमेंट में कुछ रामपाल वाले आए हुए

1172
01:25:08,120 --> 01:25:12,400
थे जी ये कुछ इनका जो वो गीता में जो एक शब्द आया खास

1173
01:25:12,400 --> 01:25:16,560
करके जो ब्रज वाला उसके ऊपर य अड़े हुए हैं जैसे

1174
01:25:16,560 --> 01:25:20,720
उसमें तो आया गीता में जैसे आजा होता उसका लेकिन य उस पर अड़े

1175
01:25:20,720 --> 01:25:24,800
हुए हैं भी जा जा बस भी उसकी शरण में जा उसम

1176
01:25:24,800 --> 01:25:28,960
मम का मतलब आया एक शब्द उसका मतलब होता है

1177
01:25:28,960 --> 01:25:33,000
मेरी ब्रज का मतलब जा लेकिन उसमें आजा बने

1178
01:25:33,000 --> 01:25:37,080
उसका लेकिन य बस संस्कृत इनको शायद आती नहीं है व संस्कृत

1179
01:25:37,080 --> 01:25:41,160
का सलो किया था अच्छा अच्छा वो

1180
01:25:41,160 --> 01:25:45,240
हमने हमने संस्कृत वाला एक दिन पूरा लाइव चलाया था पूरा पार्ट है

1181
01:25:45,240 --> 01:25:45,740
दूसरी

1182
01:25:45,600 --> 01:25:49,880
बात इनका एक वीडियो जी जी इनका एक वीडियोम रामपाल स्वयं

1183
01:25:49,880 --> 01:25:54,320
कह रहे है कि आजा बंदे शरण राम की तो

1184
01:25:54,320 --> 01:25:58,560
आजा कह रहे तो यहां पर आजा मतलब मेरी शरण में ब्रज कहेंगे आवज

1185
01:25:58,560 --> 01:26:02,640
कहेंगे ब्रज आवज दोनों कहेंगे कम दोनों कहेंगे वो समझ में नहीं आ रहा है वो

1186
01:26:02,640 --> 01:26:06,880
यही बताएंगे क तो मैंने नहीं आप मेरी बात सुनिए मैंने इनकी रामपाल

1187
01:26:06,880 --> 01:26:11,040
की सत्संग काफी टाइम पहले काफी टाइम तक फॉलो की थी सुना था काफी

1188
01:26:11,040 --> 01:26:15,080
दिन तक तो उसम मतलब ये म उनके ऊपर कैमरा लगा हुआ होता था जो

1189
01:26:15,080 --> 01:26:19,320
मतलब ये पढ़ते थे तो मैं बता मैं क्या करता जो मतलब

1190
01:26:19,320 --> 01:26:23,640
ऊपर या नीचे थे ना जो ये पढ़ा रहे थे उसको ऊपर या नीचे का पढ़ता था मैं और क्या लिखा

1191
01:26:23,640 --> 01:26:26,440
उसम

1192
01:26:26,440 --> 01:26:30,560
यह बस जो मतलब भी काफी बार मैंने इनको मतलब नोटिस किया था कुछ कुछ चीजें

1193
01:26:30,560 --> 01:26:34,600
पढ़ा रहे उसके ऊपर क्या लिखा है नीचे क्या लिखा है किस बारे में ये लिखा

1194
01:26:34,600 --> 01:26:38,840
गया यह मतलब कुछ दिखाते नहीं थे जो अपने काम

1195
01:26:38,840 --> 01:26:43,000
की बात हो मतलब वही दिखाना जी सिलेक्टिव

1196
01:26:43,000 --> 01:26:47,360
चीज है सिलेक्टिव ची दिखाते हैं जो उनके उनके मत

1197
01:26:47,360 --> 01:26:51,480
जैसे कोई बात चल रही है तो वो किस टॉपिक पर चल रही है हर बात में कुछ ना कुछ शब्द ऐसे

1198
01:26:51,480 --> 01:26:55,520
होते हैं जो मतलब आते हैं वो किस मतलब मैटर पर बात चल रही है उसी पर

1199
01:26:55,520 --> 01:26:59,760
डिपेंड करेगा ना वो तो से नहीं दिखाएंगे बीच से दिखाएंगे जितना

1200
01:26:59,760 --> 01:27:04,280
अपने मतलब निकाल लिया उतना थोड़ी होता है

1201
01:27:04,280 --> 01:27:08,720
और बाकी काफी बार आपके पास आते हैं तो इनको लगभग संस्कृत

1202
01:27:08,720 --> 01:27:12,840
का ज्ञान नहीं है ऐसे तो मुझे नहीं आता संस्कृत लिखी हुई पढ़ लेता हूं मतलब

1203
01:27:12,840 --> 01:27:17,040
मतलब क्या होता है वो मुझे नहीं पता लगभग हिंदी की तरह ही होती है संस्कृत लिखी ई

1204
01:27:17,040 --> 01:27:23,040
पढ़ सकता हूं मतलब नहीं पता क्या होता है

1205
01:27:27,360 --> 01:27:33,360
सो य क्या लिखा व शब् [संगीत]

1206
01:27:33,800 --> 01:27:39,800
व

1207
01:27:50,330 --> 01:27:52,440
[संगीत]

1208
01:27:52,440 --> 01:27:56,480
व आप तो का वो वीडियो दिखा दो आजा वंदे शरण राम

1209
01:27:56,480 --> 01:28:00,560
की हां ये वो है वो ये लोग मानते नहीं वो कहते हैं उपसर्ग लगने के

1210
01:28:00,560 --> 01:28:05,280
बाद आना होगा उपसर्ग लगे बिना आना नहीं होगा वो कहते हैं ऐसा

1211
01:28:05,280 --> 01:28:09,560
अरे वो सैुल जी कहां चले गए जो क्रिश्चियन आए थे अभी नहीं

1212
01:28:09,560 --> 01:28:13,600
इनका वो एक और है ना अगर इन्होंने व्रज का मतलब जाना ही लिया तो अगर कुछ और

1213
01:28:13,600 --> 01:28:17,600
भी जैसे आप उस दिन दिखा रहे थे व्रज का अलग-अलग भावत उसमें अगर मैं कुछ

1214
01:28:17,600 --> 01:28:21,600
बना लू जाने की जगह ब मतलब उसमें एक सड़क शब्द भी आया था ब्रज का

1215
01:28:21,600 --> 01:28:26,520
मतलब सड़क भी होता है तो मैं वहां प जाने आने जाने की सड़क जोड़ द क्या बनेगा

1216
01:28:26,520 --> 01:28:30,520
मैं कोई अलग ब का जो वास्तविक अर्थ है वो है

1217
01:28:30,520 --> 01:28:34,560
गति गति किसी भी दिशा में हो सकती है तू मेरी शरण में गति

1218
01:28:34,560 --> 01:28:38,600
कर हो गया मेरी शरण में गति कर

1219
01:28:38,600 --> 01:28:42,600
अब उसको क्या किया है भाष्य का ने सरल करने

1220
01:28:42,600 --> 01:28:46,720
के लिए लिख दिया है आना सबसे सरलतम क्या है कि

1221
01:28:46,720 --> 01:28:51,000
आजा जो सरलतम बन रहा है क्योंकि वहां पर उस मेरी शरण

1222
01:28:51,000 --> 01:28:55,120
से उसकी उस वो उसका व पर नहीं है

1223
01:28:55,120 --> 01:28:59,800
उसकी शरण में जा है ना हा

1224
01:28:59,800 --> 01:29:03,840
हा अच्छा तो समल जी आए हैं हम इनको

1225
01:29:03,840 --> 01:29:08,480
देख लेते हैं क्या कह रहे हैं समल जी आप अपना चेहरा दिखाए

1226
01:29:08,480 --> 01:29:12,640
तब तक नार श्री राम जी बोले जय श्री राम

1227
01:29:12,640 --> 01:29:16,800
मिनट मिनट किरण दीक्षित जी काफी देर से एक मिनट लेता

1228
01:29:16,800 --> 01:29:21,440
किरण दीक्षित जी बोले जय श्री राम जी जय श्री राम

1229
01:29:21,440 --> 01:29:25,560
गुरुजी जी हेलो जी

1230
01:29:25,560 --> 01:29:30,080
बोलिए जी मेरा मतलब मोक्ष को लेकर ही सवाल

1231
01:29:30,080 --> 01:29:34,760
था आपका परिचय आप आ चुके हैं पहले

1232
01:29:34,760 --> 01:29:38,880
मैं मैं क्लासेस में आता हूं आपके क्लासेस

1233
01:29:38,880 --> 01:29:43,680
में आता क्लासेस में आते तो आप तो क्लासेस में ही सवाल करिए सवाल लेकर के क्यों

1234
01:29:43,680 --> 01:29:48,160
आए नहीं बात करना था ना आपने कहा

1235
01:29:48,160 --> 01:29:53,080
मोक्ष के विषय कल शाम को क्लास होगी उसम आइए आप है ना

1236
01:29:53,080 --> 01:29:55,880
ठीक उसम आइए

1237
01:29:55,880 --> 01:29:58,040
सोनार श्री राम जी बोले

1238
01:29:58,040 --> 01:30:02,640
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जी

1239
01:30:02,640 --> 01:30:07,400
बहुत अच्छा काम कर रहे हो शिवांश जी आप बहुत बहुत आभार

1240
01:30:07,400 --> 01:30:11,680
आपका मैं सोनार शीराम गुजरात

1241
01:30:11,680 --> 01:30:15,800
से सूरत से हूं मैं अच्छा और

1242
01:30:15,800 --> 01:30:19,800
यहां पर है ना इन लोगों ने इनका कुछ यहां पर केंद्र

1243
01:30:19,800 --> 01:30:24,440
बना है यह लोग इस तरह से प्र

1244
01:30:24,440 --> 01:30:29,040
पूरा प्रचार इतना करते हैं कि बहुत बहुत प्रचार करते हैं ये लोग यहां प

1245
01:30:29,040 --> 01:30:34,480
उनकी किताबें बांटते हैं मैंने दो तीन जन से यहां पर मतलब मेरी

1246
01:30:34,480 --> 01:30:38,480
वो बातचीत बहुत ज्यादा हो गई थी मतलब एक झगड़ा बोलते

1247
01:30:38,480 --> 01:30:42,680
ना ऐसे हो गया था उनके साथ मैंने बहुत विरोध

1248
01:30:42,680 --> 01:30:46,800
किया है तो भगवान

1249
01:30:46,800 --> 01:30:50,920
बहुत बुद्धि दे रहा है आपको बत आभारी हूं मैं आपका कि खूब

1250
01:30:50,920 --> 01:30:55,520
अच्छा काम कर रहे हो आप जय श्री राम आप लोगों का

1251
01:30:55,520 --> 01:30:59,640
आप लोगों का पीछे से बस थोड़ा सा एक ऐसे ही समर्थन प्राप्त हो होता रहे

1252
01:30:59,640 --> 01:31:03,800
आगे महादेव की इच्छा जी जी जी जी जी जी जी

1253
01:31:03,800 --> 01:31:08,120
बहुत बहुत अच्छा मतलब ये लोगों ने ना ऐसा मतलब बहुत खराब

1254
01:31:08,120 --> 01:31:12,120
करके रखा है अपने ही भगवान के बारे में ये लोग इतने खराब बोलते

1255
01:31:12,120 --> 01:31:15,120
हैं ना कि पूछो मत

1256
01:31:15,120 --> 01:31:19,520
उनसे जी जी हां

1257
01:31:19,520 --> 01:31:23,560
बहुत खराब लगता है ये जब वो बताते हैं ना अपने को मैं

1258
01:31:23,560 --> 01:31:27,560
अभी पिछली बार उनके साथ खड़ा हुआ था व जो किताब बाट रहे

1259
01:31:27,560 --> 01:31:31,600
थे ना उनके साथ खड़ा हुआ था तो

1260
01:31:31,600 --> 01:31:36,040
वो जो बात बताते ना कि भगवान एक राक्षस

1261
01:31:36,040 --> 01:31:40,360
हो गए हैं अरे मैं बोला जिन्होंने सृष्टि बनाई वो कहां से राक्षस

1262
01:31:40,360 --> 01:31:44,720
हो गए जी

1263
01:31:44,720 --> 01:31:48,720
यह लोग इस तरह से लोगों को मतलब भ्रमित कर देते और इनका

1264
01:31:48,720 --> 01:31:52,800
एक बड़ा एक देखा मैंने यह लोग क्या करते

1265
01:31:52,800 --> 01:31:57,640
हैं यह लोगों का ऐसा है जो आपका कोई गुजर जाता है ना आदमी

1266
01:31:57,640 --> 01:32:01,720
जो कोई अपने घर में कोई जवान आदमी ऑफ

1267
01:32:01,720 --> 01:32:05,920
हो गया होगा कुछ मर जाते है ना वो स तो ये लोग ऐसा

1268
01:32:05,920 --> 01:32:09,120
बोलते है कि उनसे मिलाएंगे

1269
01:32:09,120 --> 01:32:13,160
आपको हां घर का जो अभी

1270
01:32:13,160 --> 01:32:17,160
कोई कोई आदमी होगा कि भाई अच्छी उम्र का

1271
01:32:17,160 --> 01:32:21,640
है तो अगर ऑफ हो गया होगा तो उसको ये लोग ऐसा बोलते हैं

1272
01:32:21,640 --> 01:32:25,680
कि आपसे मिलाएंगे उसको अच्छा तो

1273
01:32:25,680 --> 01:32:31,000
ये बोल के उनके इसमें ये कनेक्ट करवा लेते लोगों को

1274
01:32:31,000 --> 01:32:35,160
हम ये सब ये सब चीज चल रहा है यहां पे मैंने दो

1275
01:32:35,160 --> 01:32:39,160
तीन जन से बात की ना तो मेरा भाई जैसे ऑफ हो गया है

1276
01:32:39,160 --> 01:32:43,840
तो इन्होंने मेरे को ऐसा बताया कि तुम्हारे भाई से हम बात करवाएंगे

1277
01:32:43,840 --> 01:32:48,240
मैंने उनको ऐसा बोला जिनसे व

1278
01:32:48,240 --> 01:32:52,520
उसकी तो वो चले गए अपने स्मशान में उनका

1279
01:32:52,520 --> 01:32:57,560
अग्नि दहन हो गया हो गए वो तो तो आप कहां से मिलाओ

1280
01:32:57,560 --> 01:33:01,640
ग तो बोले बुलाएंगे हम वहा पर बोले उनको ऐसा

1281
01:33:01,640 --> 01:33:05,680
इस तरह से बात करते य लोग और ये ऐसी ऐसी बात बोल

1282
01:33:05,680 --> 01:33:09,920
के य आपका जो कमजोर पक्ष होगा उसको इमोशनल

1283
01:33:09,920 --> 01:33:14,000
कमजोर पक्ष को वो करते हैं जी जी जी जी जी जी जी जी

1284
01:33:14,000 --> 01:33:19,200
सही बात

1285
01:33:19,200 --> 01:33:23,800
हैली इसमें बताना चाहता हूं खाली आपको मैं बता रहा हूं

1286
01:33:23,800 --> 01:33:27,800
मम्मी पापा खुद अटक गए इसमें ओ हो

1287
01:33:27,800 --> 01:33:31,840
हां तो मेरे भाई के वजह

1288
01:33:31,840 --> 01:33:35,840
ले आएंगे उनको भी वापस ले आएंगे नहीं आएंगे नहीं आएंगे

1289
01:33:35,840 --> 01:33:39,880
बहुत खतरनाक कर कोई नहीं कोई नहीं आप ऐसा करिएगा संबंध में

1290
01:33:39,880 --> 01:33:43,920
हमें संपर्क करिए हमारा नंबर ले लीजिए हम लोग अलग से इस बारे

1291
01:33:43,920 --> 01:33:47,200
में चर्चा करेंगे 7408

1292
01:33:47,200 --> 01:33:51,320
30169 जी जी आप हमें करिएगा

1293
01:33:51,320 --> 01:33:55,520
हम आपसे बात करेंगे इस बारे में जी जी

1294
01:33:55,520 --> 01:33:59,520
जी जय श्री राम जय श्री राम ये लोग गुजरात में

1295
01:33:59,520 --> 01:34:03,520
प्रवेश कर गए है जी बहुत गुजरात में तो इतना

1296
01:34:03,520 --> 01:34:07,520
सूरत में तो इतना सारा कर दिया ना उनको यहां पर सूरत स्टेशन प

1297
01:34:07,520 --> 01:34:11,640
पहले था सूरत स्टेशन से उनको वहां प वो

1298
01:34:11,640 --> 01:34:16,360
वहां की पब्लिक ने उनको भगाया वहां से पांडेसरा में आए

1299
01:34:16,360 --> 01:34:21,800
अभी पांडेसरा से भगाया वहां से डिंडोली में आए अभी

1300
01:34:21,800 --> 01:34:25,880
अच्छा हां मतलब वहां की जनता भी

1301
01:34:25,880 --> 01:34:30,960
वहां की जनता भी जानती है कि ये गलत है

1302
01:34:30,960 --> 01:34:34,240
हम जो फिर से फिर से एक

1303
01:34:34,240 --> 01:34:38,480
बार मैं फिर से एक बार बीच में इस ग्रंथ के बारे में बता दूं

1304
01:34:38,480 --> 01:34:42,760
रामपाल के सभी तत्वों सभी पाखंड की पोल खोलने

1305
01:34:42,760 --> 01:34:46,960
के लिए केवल एक एक ग्रंथ पर्याप्त है इसमें भगवान के लगभग

1306
01:34:46,960 --> 01:34:51,160
सभी स्वरूपों के जो सहस्त्र नाम है वो दिए गए हैं आप इसको

1307
01:34:51,160 --> 01:34:55,400
अपने पास लाकर रखें अगर राम कहता है कि पुरुषोत्तम अलग

1308
01:34:55,400 --> 01:35:00,000
है इसमें भगवान विष्णु को कृष्ण को राम को पुरुषोत्तम कहा गया है

1309
01:35:00,000 --> 01:35:04,040
अगर रामपाल कहता है कि काल अलग है तो इसमें भगवान विष्णु को राम

1310
01:35:04,040 --> 01:35:08,040
को शिव को काल कहा गया है अगर रामपाल कहता

1311
01:35:08,040 --> 01:35:12,200
है कि सच्चिदानंद घन ब्रह्म अलग है तो इसमें इन लोगों को वो

1312
01:35:12,200 --> 01:35:16,240
भी कहा गया है अगर वोह कहता है कि कवि परमेश्वर है

1313
01:35:16,240 --> 01:35:20,600
तो इसमें उन लोगों को कभी भी कहा गया है और जहां जहां सेय सारे पाठ

1314
01:35:20,600 --> 01:35:24,760
लिए गए सत्र नामों के वो सारे पा विवरण भी इसम

1315
01:35:24,760 --> 01:35:28,920
दिया गया है बहुत ही अच्छी बुक है सब बातों का एक सब

1316
01:35:28,920 --> 01:35:33,240
बातों की एक दवा सहस्त्र नामावली इसको आप अपने पास रखे

1317
01:35:33,240 --> 01:35:37,400
ला अब जैसे आपने अभी बताया कभी कहा है महाभारत में

1318
01:35:37,400 --> 01:35:41,480
तो तुरंत व मिल गया महाभारत खोलने की आवश्यकता ही नहीं है

1319
01:35:41,480 --> 01:35:45,680
है ना जी मेरे को आपने

1320
01:35:45,680 --> 01:35:49,320
अभी दिखाया बात आपके पास ज्ञान गंगा पुस्तक है ना आपने उसकी

1321
01:35:49,320 --> 01:35:53,360
भूमिका पढ़ी थी क्या ज्ञान गंगा नहीं

1322
01:35:53,360 --> 01:35:58,080
है मेरे पास गम पी थी क्या भूमिका ज्ञान गंगा की भूमिका

1323
01:35:58,080 --> 01:36:02,440
चहा थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत पढ़ लेते कभी कभी भूमिका के बिल्कुल लास्ट

1324
01:36:02,440 --> 01:36:06,680
में रंजीत सिंह जी आप इसकी ना ज्ञान गंगा खोल इसकी भूमिका

1325
01:36:06,680 --> 01:36:10,880
के बिल्कुल लास्ट में लिखा शब्द वही शब्द स्वरूपी राम है

1326
01:36:10,880 --> 01:36:15,080
राम के बारे में रामपाल ने खुद बताया है भूमिका में बिल्कुल लास्ट

1327
01:36:15,080 --> 01:36:19,440
में लिखा है वही सूपी राम है ज जय श्री राम सोनार

1328
01:36:19,440 --> 01:36:25,000
जी आप हमसे संपर्क करिएगा है ना 74836

1329
01:36:25,000 --> 01:36:31,000
गोस्वामी जी जय श्री राम जय श्री

1330
01:36:36,880 --> 01:36:41,480
राम धीरे-धीरे इन लोगों का पैर अब गुजरात में भी घुस रहा

1331
01:36:41,480 --> 01:36:45,520
है अरे भाई अब तो निकलने की बात करिए आप कहां घुसने की

1332
01:36:45,520 --> 01:36:50,400
बात कर रहे हैं तो निकल रहे हैं ये लोग देखो यही लाइव में ही निकले जा रहे हैं

1333
01:36:50,400 --> 01:36:55,200
लाइव में ही देवी देवताओं की पूजा प आ गए लोग बात सही है लेकिन

1334
01:36:55,200 --> 01:36:59,520
आज आज ये भैया ने गुजरात से बात की मैं भी गुजरात से हूं इसलिए

1335
01:36:59,520 --> 01:37:03,520
आपको बात कर रहा हूं जी जी जी गुजरात में आए हैं अभी पंजाब

1336
01:37:03,520 --> 01:37:07,880
में बहुत है हमारे उ तो कोई नहीं है लेकिन सूरत

1337
01:37:07,880 --> 01:37:12,440
से ये बात जानने को आज मिली तो मालूम पड़ा हुआ

1338
01:37:12,440 --> 01:37:16,560
अरे शिवांश हमसी को सीरियस नहीं देते थे पता

1339
01:37:16,560 --> 01:37:20,880
है जब से आप मिले हो ना तब से थोड़ा इस पर हम डिबेट शुरू किए हैं

1340
01:37:20,880 --> 01:37:25,000
और हमारे बगल में एक गांव है गांव की लगभग 60 पर जो

1341
01:37:25,000 --> 01:37:29,080
कम्युनिटी है वो रामपाल फॉलोअर्स के ग्रुप

1342
01:37:29,080 --> 01:37:33,920
में आ चुकी थी उसमें अब चार पांच फैमिली

1343
01:37:33,920 --> 01:37:38,080
धीरे धीरे मतलब कम की है अभी हटे नहीं है बट कम हुआ उनका

1344
01:37:38,080 --> 01:37:40,160
रुझान अब व वो क्या कहते

1345
01:37:40,160 --> 01:37:44,800
हैं कुछ होता है ना जहा मीटिंग होती है क्या बोलते उस सत्संग

1346
01:37:44,800 --> 01:37:49,600
सत्संग में जाना बंद किए समझ

1347
01:37:49,600 --> 01:37:53,800
लो जी जी स

1348
01:37:53,800 --> 01:37:57,880
नहीं लेते चीजों को लेकर के आपसे मिलने के बाद थोड़ा सा मतलब

1349
01:37:57,880 --> 01:38:02,200
अच्छा लगा हमको और थोड़ा इंटरेस्ट लिए हालाकि पूजा पाठ में तो इस्ट

1350
01:38:02,200 --> 01:38:06,280
है हमारा पूजा पाठ करते है बट जब आपसे मिले आपको देखे

1351
01:38:06,280 --> 01:38:10,360
और करके मुकाबला करते तो हमको लगा की यार एक लड़का

1352
01:38:10,360 --> 01:38:14,560
खड़ा है तो हम लोग खड़ा होने में क्या दिक्कत है बुक्स हमारे पास

1353
01:38:14,560 --> 01:38:19,080
है किताब हमारे पास है नॉलेज हमारे पास है ईश्वर ने हमको ज्ञान

1354
01:38:19,080 --> 01:38:24,000
ग्रहण करने के लिए एक अच्छा मस्तिष्क एक अच्छा बुद्धि दिया है

1355
01:38:24,000 --> 01:38:28,240
हम पढ करके देखें आप सब लोग एक बारने प्राइवेट

1356
01:38:28,240 --> 01:38:32,680
चैट में मैसेज भेजा है कुछ जरूरी जानकारी वो देख लीजिएगा

1357
01:38:32,680 --> 01:38:38,680
आप सब लोग देख लीजिए प्राइवेट चट में जी विशाल जी जय श्री

1358
01:38:39,800 --> 01:38:45,080
राम जी जी बोलिए आप बोलिए रजीत जी मिनट

1359
01:38:45,080 --> 01:38:49,400
हम एक रिक्वेस्ट करेंगे हम जो मतलब इस कम्युनिटी में लोगों को निकालने

1360
01:38:49,400 --> 01:38:53,440
के लिए मतलब संकल्प लोग हम लोग फिहाल ग्रुप

1361
01:38:53,440 --> 01:38:57,480
बनाले जिसम हम एक दूसरे के कम्युनिकेशन में कंटिन्यू रहे और कारण की

1362
01:38:57,480 --> 01:39:01,480
कुछ जगह हम उलझ जाते जैसे हम फस

1363
01:39:01,480 --> 01:39:05,640
ग तो वहा पर हम एक दूसरे से कंसल्ट कर य कहा किस बुक्स

1364
01:39:05,640 --> 01:39:09,800
में मिलेंगे सब रणनीति विय बात

1365
01:39:09,800 --> 01:39:14,520
है रजीत जी ये सब हम लोग पर बात करेंगे

1366
01:39:14,520 --> 01:39:18,600
हा अच्छा एक बात है कि इनका सबसे ज्यादा

1367
01:39:18,600 --> 01:39:22,640
वहां पर क्यों हो रहा है तो पंजाब हरियाणा में देखो वर्णाश्रम

1368
01:39:22,640 --> 01:39:26,920
धर्म नहीं माना परंपरा प्राप्त आचार्य आचार्य को ज्यादा बोल वाला नहीं है

1369
01:39:26,920 --> 01:39:31,560
हरियाणा में अगर पुराना कोई मिलेगा तो आपको मिलेगा आर्य

1370
01:39:31,560 --> 01:39:35,680
समाज हरियाणा पंजाब की तरफ ही आर समाज का धरातल पर आपको प्रारूप

1371
01:39:35,680 --> 01:39:39,960
दिखता है ज्यादा से ज्यादा और ज्यादा कहीं नहीं दिखता है तो इसी

1372
01:39:39,960 --> 01:39:43,960
कारण से देखो वही पर रामपाल है वही पर राम रहीम है वहीं पर सब चीज

1373
01:39:43,960 --> 01:39:48,960
निकल रही है

1374
01:39:48,960 --> 01:39:53,920
र हमारे बीच में आए हैं अर्णव उपाध्याय जी जय श्री राम

1375
01:39:53,920 --> 01:39:58,080
जय शी आराम शवा भया जी भैया जी आपका धन्यवाद दे

1376
01:39:58,080 --> 01:40:02,160
चाहते है आप जो काम कर रहे हैं उसके लिए मेरी मम्मी भी आपका एपिसोड देख

1377
01:40:02,160 --> 01:40:06,280
रही थी कुछ दिन पहले तक तो वो भी बोल रही थी कि बहुत सारे ऐसे अन आंसर्ड क्वेश्चन सब

1378
01:40:06,280 --> 01:40:10,360
थे जैसे आपने बताया कि भौतिक धरातल और आध्यात्मिक धरातल के बीच में

1379
01:40:10,360 --> 01:40:15,000
डिफरेंस आता है तो उसमें फिर डुएलिटीज होता

1380
01:40:15,000 --> 01:40:19,040
है तो ऐसा बहुत सारा चीज सीखने को मिला बहुत बहुत धन्यवाद उके लिए मम्मी

1381
01:40:19,040 --> 01:40:24,320
ने भी धन्यवाद बोला है अरे वाह उनको हमारा

1382
01:40:24,320 --> 01:40:28,440
जी और यहां पर भी शिवांस भैया बहुत सारे ऐसे इंस्टिट्यूशन आए हुए हैं

1383
01:40:28,440 --> 01:40:32,960
चाहे वो या फिर रामपाल के याय हमारे य एक वहा

1384
01:40:32,960 --> 01:40:36,960
जमशेदपुर झारखंड आप लोग मैं कह रहा हूं

1385
01:40:36,960 --> 01:40:41,000
अगर आप लोगों के यहां पर इस तरह का कोई इंस्टिट्यूशन है

1386
01:40:41,000 --> 01:40:45,200
आप लोग यदि वहां पर हमें बैकअप दे सकते हो हमारे गुरु भाई भी

1387
01:40:45,200 --> 01:40:49,280
होंगे हमारे भी लोग होंगे मगर आपके भी आपका भी यदि वहां पर

1388
01:40:49,280 --> 01:40:53,400
कोई बैकअप है आप केवल इंतजाम करिए हम वहां पहुंचेंगे

1389
01:40:53,400 --> 01:40:57,800
आपके आसपास वाले इंस्टिट्यूशन में जाकर डायरेक्ट बात करें

1390
01:40:57,800 --> 01:41:03,080
सीधे कोई दिक्कत ही नहीं है सीधे वो इंस्टीट्यूशन में जाकर बात करो आमने

1391
01:41:03,080 --> 01:41:04,080
सामने

1392
01:41:04,080 --> 01:41:08,200
क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं बस ू स्टॉप

1393
01:41:08,200 --> 01:41:11,680
द ट्रेन

1394
01:41:11,680 --> 01:41:15,880
पुल य य हु एक नवंबर

1395
01:41:15,880 --> 01:41:20,560
में हमारे कुछ दिन पहले वहां पर आए हुए थे लोग रामपाल वाले

1396
01:41:20,560 --> 01:41:24,560
तो वो लोग भी ऐसे ही सबको बाहर में खड़े होक समझा रहे थे हम भी वहा पर खड़े

1397
01:41:24,560 --> 01:41:28,640
थे तो सारा वही वही रिपीटेशन जो आपके वीडियोस में आता है वही

1398
01:41:28,640 --> 01:41:32,840
चीज लोग रिपीट कर रहे हैं कि मतलब यह नहीं है एक्चुअल ईश्वर स सात्विक

1399
01:41:32,840 --> 01:41:36,840
राजसिक तामसिक में बांट दिया और फिर वो अल्टीमेट ईश्वर कैसे हो सकता है ऐसे ऐसे क्वेश्चन पूछ रहे

1400
01:41:36,840 --> 01:41:41,160
थे लोग तो उसी के लिए जी जी

1401
01:41:41,160 --> 01:41:45,480
मैं कहूंगा ना इन विषयों में आपको किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता

1402
01:41:45,480 --> 01:41:49,840
होती तो आप हमसे जो ट हैना उस पर संपर्क करें तो हम रणनीति

1403
01:41:49,840 --> 01:41:53,840
पूर्वक कार्य कर सकते हैं हम धरातल पर जगह जगह जा सकते हैं उन

1404
01:41:53,840 --> 01:41:58,080
इंस्टिट्यूट में जो खोल के अपना बैकअप चला रहे हैं हमें बस वहां पर आने का

1405
01:41:58,080 --> 01:42:02,360
बैकअप चाहिए होगा आपका संघ चाहिए होगा आप हमें वहां पर आमंत्रित करिए

1406
01:42:02,360 --> 01:42:06,920
आपके घर के आसपास का जो इंस्टिट्यूशन है हम लोग जाएंगे वहां सीधे बात करेंगे भैया

1407
01:42:06,920 --> 01:42:11,080
क्या बता रहे हो जो बात हो जाएगी रिकॉर्ड हो जाएगी उसको आप बढ़िया

1408
01:42:11,080 --> 01:42:15,360
सा एक होर्डिंग बनवाए और उनके इंस्टिट्यूशन के आसपास लगवा

1409
01:42:15,360 --> 01:42:19,280
दीजिए ये चर्चा देखिए तो वहां जाते

1410
01:42:19,280 --> 01:42:23,720
समय जो व्यक्ति उस होर्डिंग को देखेगा इंदौर में ऐसा कर दिया लोगों ने

1411
01:42:23,720 --> 01:42:27,880
इंदौर के जो इकन टेंपल से हमारी बातचीत हुई थी उस बातचीत

1412
01:42:27,880 --> 01:42:31,960
को होल्डिंग में लगा कर के वहां लोगों ने लगाना शुरू कर दिया

1413
01:42:31,960 --> 01:42:36,040
हैकन में जो जाने वाले हैं वो इसको देखे इस चर्चा को अब क्या हो

1414
01:42:36,040 --> 01:42:40,080
रहा है कि वहां के जो सबसे बड़े जो अध्यक्ष पीठ पर बैठे वो बारबार यह कह

1415
01:42:40,080 --> 01:42:44,280
रहे हैं कि भैया हमें नहीं पता य सब चीज तो फिर व्यक्ति वहां से फिर खोजना

1416
01:42:44,280 --> 01:42:48,400
शुरू करता है और खोजते खोजते एक दिन व सत्य की रा प आ ही जाता है

1417
01:42:48,400 --> 01:42:52,400
है ना तो हमें ग्राउंड पर वर्क करना ही होगा ग्राउंड पर जो सेंटर्स

1418
01:42:52,400 --> 01:42:56,400
है इनमें जाना ही पड़ेगा इनके सेंटर्स

1419
01:42:56,400 --> 01:43:00,600
में जाना पड़ेगा ग्राउंड में सही बो जी

1420
01:43:00,600 --> 01:43:05,000
गौरव पांडे जी नमस्कार

1421
01:43:05,000 --> 01:43:09,560
नमस्कार जय श्री राम शिवांश जय श्री राम नमस्कार

1422
01:43:09,560 --> 01:43:13,640
मैं बहुत समय से आपके जब चैनल खुला था तो फर्स्ट सेकंड सब्सक्राइबर में

1423
01:43:13,640 --> 01:43:17,640
से एक हूं और बड़ा

1424
01:43:17,640 --> 01:43:21,640
हां बड़ा अच्छा लगा आपसे वार्तालाप करके और आपके नियमित रूप से

1425
01:43:21,640 --> 01:43:25,720
मैं वीडियोस वगैरह देखता हूं और शेयर भी करता

1426
01:43:25,720 --> 01:43:29,880
हूं ा में भी और अपने ने भी मैं कॉलेज में टीचर

1427
01:43:29,880 --> 01:43:35,000
हूं और आजकल युवाओं का जो एक गलत

1428
01:43:35,000 --> 01:43:36,000
फिलोसॉफिकल

1429
01:43:36,000 --> 01:43:40,240
ब्रेन वश या माइंड वश हो रहा है उसके कारण उनको मैं कई बार समझाने

1430
01:43:40,240 --> 01:43:44,560
की कोशिश करता हूं पर वह शब्द और उनके हिसाब से वह हम नहीं व्यक्त

1431
01:43:44,560 --> 01:43:48,600
कर पाते तब आपकी जो रील्स या वीडियोस

1432
01:43:48,600 --> 01:43:52,600
का सहारा है वह लेना पड़ता है लेकिन फिर भी आजकल युवाओं को इतने

1433
01:43:52,600 --> 01:43:56,800
बुरे तरीके से ब्रेन वश कर दिया गया है ऐसी संस्थाओं ने कि

1434
01:43:56,800 --> 01:44:00,880
बहुत ही मुश्किल है हमारा ही समय उनको समझाते हुए पूरा व्यतीत हो जाता

1435
01:44:00,880 --> 01:44:05,560
है पर कुछ समझ पाते हैं कुछ नहीं समझ पाते

1436
01:44:05,560 --> 01:44:09,640
यह है तो बहुत अच्छा लगा आपसे लाइव बात करके और

1437
01:44:09,640 --> 01:44:14,520
मैं चाह रहा था कभी आप आए ऋषिकेश में मैं ऋषिकेश में रहता हूं तोसे

1438
01:44:14,520 --> 01:44:18,640
बहुत सारे संगठन और बहुत सारे फर्जी बाबा यहां पर

1439
01:44:18,640 --> 01:44:23,200
व्याप्त है तो ष में तो बहुत ज्यादा है अभी वो

1440
01:44:23,200 --> 01:44:27,640
मातृशक्ति का वीडियो आपने देखा होगा व आई थी ष केस में है

1441
01:44:27,640 --> 01:44:31,840
वो बता रही थ अगर आपके थ्रू उनसे मेरा

1442
01:44:31,840 --> 01:44:35,840
संपर्क हो सके तो हम यहां पर आदित्य वाहिनी का मजबूत गुट

1443
01:44:35,840 --> 01:44:40,200
खड़ा करना चाह रहे हैं क्यक ब आप हमसे

1444
01:44:40,200 --> 01:44:44,560
हमारे नंबर पर ट करिए आप हैना जी आपके आवान

1445
01:44:44,560 --> 01:44:50,560
ना नास्त्र में जुड़ा हुआ हूं अच्छा

1446
01:44:52,040 --> 01:44:56,400
जुड़े आप एक धर्म रक्षा वाला फॉर्म है आप प्रायोरिटी

1447
01:44:56,400 --> 01:45:00,800
से जरा उसे भर दीजिए मैं आपका नाम प्रायोरिटी से वो कर दूंगा लिस्टेड

1448
01:45:00,800 --> 01:45:05,240
कर दूंगा है ना हमारे यहां बहुत सारे युवा है जो धार्मिक

1449
01:45:05,240 --> 01:45:09,360
भाव के धार्मिक स्वभाव के हैं पर इतने सारे छद्म हिंदुत्ववादी लोगों

1450
01:45:09,360 --> 01:45:13,360
ने जैसे आरएसएस यहां बहुत बड़े स्केल में काम करता है

1451
01:45:13,360 --> 01:45:17,400
हरिद्वार ऋषिकेश में आरएसएस काम करता है आपके इकन संगठन यहां

1452
01:45:17,400 --> 01:45:21,760
बहुत व्याप्त है रामपाल वगैरह इत्यादि तो मैं अभी एक विवाह समारोह

1453
01:45:21,760 --> 01:45:25,840
में गया था अपनी फैमिली फंक्शन में गया था मौसी के लड़के की शादी थी तो

1454
01:45:25,840 --> 01:45:30,400
वहां पहाड़ी फैमिली है कुमावनी फैमिली तो वहां के घर तक भी इनके

1455
01:45:30,400 --> 01:45:34,560
जो पुस्तक है रामपाल जी की जीवन जीने की कला करके ती है वो पहुंच गई थी

1456
01:45:34,560 --> 01:45:38,640
तो मैं तो रामचरित मानस का गुटका लेकर हर जगह जहां भी जाता हूं और एक गीता

1457
01:45:38,640 --> 01:45:42,640
प्रेस की छोटी गीता लेकर जाता हूं अपना नियमित संध्या गायत्री का

1458
01:45:42,640 --> 01:45:46,640
प्रयास करता हूं वरना रामचरित मानस का पाठ या अपना गीता का पाठ

1459
01:45:46,640 --> 01:45:50,680
कर लेता हूं एक अध्याय का जो भी तिथि है उसके अनुसार ठीक है तो

1460
01:45:50,680 --> 01:45:54,680
उस जब मैं वहां गया तो मेरे भैया की मतलब मेरी

1461
01:45:54,680 --> 01:45:58,920
भाभी थी वो तो वो रामपाल जी की पुस्तक उनके घर में मैंने देखी

1462
01:45:58,920 --> 01:46:03,000
जो मात्र 20 रप में और बहुत कई बार फ्री में भी उनको उपलब्ध करा दी जाती

1463
01:46:03,000 --> 01:46:07,200
है और इस तरीके से उसम ब्रेन वश किया रहता है कि कुछ शास्त्रों की चीजें

1464
01:46:07,200 --> 01:46:11,440
लिखी रहेगी और उसके बाद अपना वो रहेगा तो उसमें मैंने

1465
01:46:11,440 --> 01:46:15,800
देखा बहुत सारे शास्त्रों की कथाएं हनुमान जी की कथाए ये कथाए क्योंकि लोग इन चीजों से रिलेट

1466
01:46:15,800 --> 01:46:19,840
करते हैं इन चीजों से रिलेट करके लोग उसको पढ़ते हैं और फिर जब

1467
01:46:19,840 --> 01:46:24,040
वो अपना असली गेम खेलते हैं कि यह सब ब्रह्मा विष्णु

1468
01:46:24,040 --> 01:46:28,480
महेश कबीर के वो मतलब जैसे उन्होंने कर रखा तो मैंने उनसे वो पुस्तक ले ली

1469
01:46:28,480 --> 01:46:32,800
उसके बदले मैंने उनको रामचरित मानस का गुटका जो मैं ले गया था वापस किया और आज ही मैं ऋषिकेश

1470
01:46:32,800 --> 01:46:36,840
जब मैं लौटा काशीपुर में थे वो काशीपुर से जब मैं ऋषिकेश लौटा तो

1471
01:46:36,840 --> 01:46:41,000
आज मैंने गंगाजी में मैंने वीडियो नहीं बनाई जैसे आप बनाते हैं पर मैंने उसको एक एक करके

1472
01:46:41,000 --> 01:46:45,960
फाड़ के गंगा जीी में प्रवाहित किया है आज

1473
01:46:45,960 --> 01:46:50,640
बहुत फड़ते भी नहीं हां ठीक है ठीक है ठीक है अ

1474
01:46:50,640 --> 01:46:55,120
मैं ये कह रहा था कि मैंने क्या किया था पड़ी

1475
01:46:55,120 --> 01:47:00,480
जी कल परसों मैंने अपने किसी मित्र से फोन

1476
01:47:00,480 --> 01:47:04,480
लगवाया और उसने प्रश्न किया कि इन्होंने

1477
01:47:04,480 --> 01:47:09,360
छव अध्याय में न से 15 श्लोक को कह दिया कि वो गलत है

1478
01:47:09,360 --> 01:47:14,920
अच्छा न से 15 श्लोक यह कह रहा है कि अपनी इंद्रियों को वश में करना

1479
01:47:14,920 --> 01:47:19,000
चाहिए और उसका आधार खैर इन्होंने बताया कि वो तीसरे

1480
01:47:19,000 --> 01:47:22,200
अध्याय में पाच से आठ में वो कह रहे हैं कि

1481
01:47:22,200 --> 01:47:26,200
इंद्रियों वश में रख कर के मगर उन्हीं विषयों का चिंतन

1482
01:47:26,200 --> 01:47:30,560
करने वाला पाखंडी है मतलब मैंने अपने को कंट्रोल में तो रखा है किसी मजबूरी

1483
01:47:30,560 --> 01:47:34,600
से मगर मैं चिंतन उसी का कर रहा हूं तो उसम भी मेरी भक्ति जो है सक्सेस

1484
01:47:34,600 --> 01:47:39,120
नहीं हो पाएगी है ना तो वहां प इंद्रियों

1485
01:47:39,120 --> 01:47:43,280
को वश में रखना और मगर उन्हीं इंद्रियों के विषय

1486
01:47:43,280 --> 01:47:47,720
में चिंतन करते रहने को गलत कहा गया है और यहां पे इंद्रियों

1487
01:47:47,720 --> 01:47:51,920
को वश में रखने को कहा जा रहा है ये नहीं कहा जा रहा कि इंद्रियों को वश में रखने के बाद उन्हीं के विषयों

1488
01:47:51,920 --> 01:47:55,960
का चिंतन करते रहो तो विषयों का चिंतन का

1489
01:47:55,960 --> 01:47:59,960
खंडन है न 3.5 से आ में विषयों के चिंतन का

1490
01:47:59,960 --> 01:48:04,000
खंडन है उसका खंडन नहीं है क्या कहते

1491
01:48:04,000 --> 01:48:08,480
हैं यह इंद्रियों पर वश करने का खंडन नहीं मगर इन्होंने इंद्रियों

1492
01:48:08,480 --> 01:48:12,920
के इंद्रियों को वश करने को हट योग कह दिया और यह कहा है कि इंद्रियों

1493
01:48:12,920 --> 01:48:17,080
को वश में करना गलत है ठीक तो मैंने अपने

1494
01:48:17,080 --> 01:48:21,680
मित्र से इनको फोन लगवाया और मैं चाहूंगा कि आप सब जितने लोग

1495
01:48:21,680 --> 01:48:26,120
इस लाइव को देख रहे अपने अपने स्तर से इनके कस्टमर केर पर कॉल

1496
01:48:26,120 --> 01:48:30,360
लगाए उसमें शंका समाधान का भी मैसेज आता है या कोई भी व्यक्ति जो आपसे

1497
01:48:30,360 --> 01:48:34,880
बोले उससे बस ये कहना भाई कि कोई व्यक्ति

1498
01:48:34,880 --> 01:48:37,200
कहीं पर भी जाता है मातृ शक्तियों के

1499
01:48:37,200 --> 01:48:41,440
बीच में जाता है तो क्या उसके अंदर आने वाली अगर

1500
01:48:41,440 --> 01:48:45,880
जो गलत भाव है मातृ शक्तियों के प्रति तो वहां उसको अपनी इंद्रियों

1501
01:48:45,880 --> 01:48:50,520
को कंट्रोल में रखना चाहिए या नहीं रखना चाहिए आप तो कह रहे हो नहीं रखना

1502
01:48:50,520 --> 01:48:54,680
चाहिए ये तो गलत बात है तो यह सब आप लोग फोन

1503
01:48:54,680 --> 01:48:58,920
लगाकर इनसे पूछो मूर्खों से कि इंद्रियों को कंट्रोल

1504
01:48:58,920 --> 01:49:03,520
में रखना चाहिए कि नहीं रखना चाहिए क्योंकि रामपाल कह रहे नहीं रखना चाहिए

1505
01:49:03,520 --> 01:49:07,520
गीता अध्याय छ श्लोक न से 15

1506
01:49:07,520 --> 01:49:11,520
में इन्होंने बोल दिया वो काल ने अपने मन से दे दिया है और

1507
01:49:11,520 --> 01:49:16,000
क्या है इंद्रियों को अरे भाई इंद्रियों को वश में ही तो रखना है वही तो धर्म

1508
01:49:16,000 --> 01:49:20,080
है अब तुम कह रहे हो इंद्रियों को वश में मत करो

1509
01:49:20,080 --> 01:49:25,080
तो वश में नहीं करोगे तो क्या होगा

1510
01:49:25,080 --> 01:49:29,320
पूछो आप लोग इनके कस्टमर केर पर फोन लगा लगा के

1511
01:49:29,320 --> 01:49:33,360
पूछो य गरव जी आपना वो

1512
01:49:33,360 --> 01:49:37,400
जो धर्म रक्षा वाला फॉर्म है वो भी भर दीजिए तो मैं

1513
01:49:37,400 --> 01:49:41,440
प्रायोरिटी से आपको थोड़ा सा वो कर दूंगा है ना

1514
01:49:41,440 --> 01:49:45,560
लिस्टेड कर दूंगा नास्त्र वाले ग्रुप में उससे जुड़ के फॉर्म भर

1515
01:49:45,560 --> 01:49:49,210
दूंगा और फिर आप मुझे उसका

1516
01:49:49,210 --> 01:49:53,720
[संगीत]

1517
01:49:53,720 --> 01:49:58,600
हां ठीक है पहाड़ी जी ब जी चलो ठीक

1518
01:49:58,600 --> 01:50:02,640
बोलिए पहाड़ी जी अच्छा हां जी मैं ये बोल रहा था पहले तो इनसे

1519
01:50:02,640 --> 01:50:06,800
यह पूछ इनको तो यही पता नहीं है कि जो गीता जी में है जो सांख्य

1520
01:50:06,800 --> 01:50:11,240
योग है कर्म योग है ध्यान योग है भक्ति योग है

1521
01:50:11,240 --> 01:50:15,280
इनके बारे में ही पता नहीं है इनको तो आप जिस योग

1522
01:50:15,280 --> 01:50:19,280
की बात कर रहे हो आप ज्ञानेंद्रिय जो सांख्य योग की बात कर

1523
01:50:19,280 --> 01:50:23,640
रहे हैं उनके बारे में पता नहीं है उनको वो तो यो अब

1524
01:50:23,640 --> 01:50:27,840
आप अब आप अब जो आपको मुझसे आपको मुझसे कहना पड़ता है वही मुझे आपसे

1525
01:50:27,840 --> 01:50:32,200
कहना पड़ेगा इतने स्तर पर क्यों चले गए भाई

1526
01:50:32,200 --> 01:50:36,440
य सायो ज्ञान योग क्या बोल रहे हो यह सब बातें वो

1527
01:50:36,440 --> 01:50:40,320
भाषा पढ़ कर के आपको लगता है क्याय लोग ज्ञान शं योग सब य

1528
01:50:40,320 --> 01:50:44,520
सुनने कहने वाले लोग हैं व लिखने वाले की भाषा

1529
01:50:44,520 --> 01:50:48,720
ही पढ़ लीजिए आप उसी से पता चल जाएगा कोई परचून

1530
01:50:48,720 --> 01:50:54,720
की दुकान पर आटा तोलते समय व भाषा उपयोग नहीं करता होगा

1531
01:50:56,560 --> 01:51:01,120
जीने ठीक है बोलिए कौन है हम ू सना

1532
01:51:01,120 --> 01:51:06,480
अभी हमारे बीच में आए थे हर हिंदू सनातनी हो

1533
01:51:06,480 --> 01:51:10,880
जी जय श्री राम हा य यह देख लीजिए एक बार रावण

1534
01:51:10,880 --> 01:51:14,960
और रामचंद्र की उत्पत्ति और उनका जो युद्ध है यह सब

1535
01:51:14,960 --> 01:51:19,080
कबीर के द्वारा ही हुआ है यह

1536
01:51:19,080 --> 01:51:23,120
पढ़ लो और क्या है जिंदा वेधारी

1537
01:51:23,120 --> 01:51:27,280
परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि हे धर्मदास यह

1538
01:51:27,280 --> 01:51:31,920
मैं हूं ठीक है और

1539
01:51:31,920 --> 01:51:35,960
यह इधर उधर की बातें मत करो बस तुम तो सीधे पहले यह बताओ ना भाई कि गीता का

1540
01:51:35,960 --> 01:51:40,640
ज्ञान किसने कहा है यह क्यों नहीं बता रहे हो अब तुम

1541
01:51:40,640 --> 01:51:46,640
मुख्य मुख्य बातें छोड़ दी इधर उधर की बातें लाओगे

1542
01:51:46,880 --> 01:51:51,520
अब हां भाई व हर हिंदू सनातनी हो

1543
01:51:51,520 --> 01:51:56,600
बोले जय श्री

1544
01:51:56,600 --> 01:52:02,600
राम आप अपना चेहरा दिखा दे हर हिंदू सनातनी

1545
01:52:03,120 --> 01:52:07,200
हो हा जी नमस्कार नमस्कार

1546
01:52:07,200 --> 01:52:11,240
जय श्री राम जय श्री राम जी जी तो

1547
01:52:11,240 --> 01:52:15,520
ज्ञान वर्धन के लिए आपकी जो है वीडियो काफी टाइम से

1548
01:52:15,520 --> 01:52:19,920
देखता हूं और गुरुजी हमारे भी और आपके भी

1549
01:52:19,920 --> 01:52:24,160
एक ही है पूरी पीठ के जो शंकराचार्य हमारे

1550
01:52:24,160 --> 01:52:29,120
अच्छा अच्छा अच्छा हा जी तो

1551
01:52:29,120 --> 01:52:33,160
मुझे जो है वैसे तो काफी जो है आपके उससे चर्चा से

1552
01:52:33,160 --> 01:52:37,160
बहुत ज्ञान मिलता रहता है और पर जो भी

1553
01:52:37,160 --> 01:52:41,160
आपने एक फॉर्म की बात की थी जो जैसे जो

1554
01:52:41,160 --> 01:52:45,640
विपरीत राम पाली या दूसरे समाजी हैं वह जो

1555
01:52:45,640 --> 01:52:49,960
जुड़ते रहते हैं उनके तो फॉर्म जैसे आप बताते रहते हैं

1556
01:52:49,960 --> 01:52:53,960
पर एक जो धर्म रक्षा वाला जो बता रहे थे या

1557
01:52:53,960 --> 01:52:58,120
जिसमें हम कुछ नया सीख सकते हैं क्योंकि हम भी अलग-अलग

1558
01:52:58,120 --> 01:53:02,360
ग्रुप में जाते हैं जैसे आज ही मैं एक चर्चा में गया तो

1559
01:53:02,360 --> 01:53:06,360
वहां पर यही बात तो व बड़े कॉलेज में

1560
01:53:06,360 --> 01:53:10,440
भी डू में प्रोफेसर है पर व बोले कि जाति

1561
01:53:10,440 --> 01:53:14,880
और वर्ण यह अलग अलग है और हमें तो जातियों

1562
01:53:14,880 --> 01:53:19,040
को खत्म करना है तो क्योंकि हम भी गुरु जी की वीडियो

1563
01:53:19,040 --> 01:53:23,080
और आप का सुनते रहते हैं तो वहां पर फिर वही

1564
01:53:23,080 --> 01:53:27,600
बात हमने जो है रखी की य दोनों एक ही है और वर्ण व्यवस्था

1565
01:53:27,600 --> 01:53:31,680
जन्म से है तो सारे लोग जैसे चौक गए तो मतलब

1566
01:53:31,680 --> 01:53:35,920
य है ण वस्था जन्म से

1567
01:53:35,920 --> 01:53:40,640
ी से सिद्ध हो जाता है जी

1568
01:53:40,640 --> 01:53:45,480
ये सिद्ध करेंगे वर्ण व्यवस्था जन्म से है है

1569
01:53:45,480 --> 01:53:49,920
ना पंजाब में हरियाणा में जाति से नहीं माना जाता वहा कन्वर्जन

1570
01:53:49,920 --> 01:53:54,400
रेट देखिए आप क्रिश्चन कितना प्रभावी है हालेलुया हालेलुया हो रहा है ना

1571
01:53:54,400 --> 01:53:58,440
हा जी बक पोप भले ही लचेयर पर चले इंग्लैंड में पोप

1572
01:53:58,440 --> 01:54:03,280
भले ही वल चेयर पर चले मगर यहां पर हरियाणा पंजाब में आदमी उठके खड़ा हो जा रहा है ला

1573
01:54:03,280 --> 01:54:08,080
जी जी जी वो फिक्स होता

1574
01:54:08,080 --> 01:54:12,280
हम लोग देखो देखिए

1575
01:54:12,280 --> 01:54:16,840
इसी ये जो ग्रंथ है इसी से सिद्ध होता है कि

1576
01:54:16,840 --> 01:54:17,840
जो

1577
01:54:17,840 --> 01:54:21,880
वर्ण है वो जन्म से है वो कैसे है इन्होंने ही नारा निकाला है ना

1578
01:54:21,880 --> 01:54:24,240
सबसे पहले

1579
01:54:24,240 --> 01:54:27,200
एक मिनट

1580
01:54:27,200 --> 01:54:31,280
बताता हमारे पहाड़ों में चल रहा है

1581
01:54:31,280 --> 01:54:35,280
वाले है य बहुत सारे ग वालियों को और कुमावनी को कन्वर्ट इन्होने

1582
01:54:35,280 --> 01:54:39,400
कर दिया है और अधिकतर य जो आर्थिक रूप से विपन्न

1583
01:54:39,400 --> 01:54:43,520
लोग होते हैं उनको पकड़ते हैं उनकी कमजोरी को उनकी मजबूरी को अपना व

1584
01:54:43,520 --> 01:54:47,960
बनाते हैं हथियार बनाते हैं और इनको जादूगरी वाली चीज दिखा के

1585
01:54:47,960 --> 01:54:52,520
करते हैं देखिए

1586
01:54:52,520 --> 01:54:56,840
ने क्या किया है यहां पर यजुर्वेद का एक मंत्र लिया है 26

1587
01:54:56,840 --> 01:55:00,880
दो यजुर्वेद 26 दो का इन्होने मंत्र लिया है और इस

1588
01:55:00,880 --> 01:55:05,720
मंत्र का अर्थ लिखते हुए कह रहे हैं कि

1589
01:55:05,720 --> 01:55:09,840
यह जो वेद वाणी है सिंपल इसको अगर कह दे यह जो वेद वाणी

1590
01:55:09,840 --> 01:55:14,200
है ये सब मनुष्यों के लिए है ब्राह्मण क्षत्रिय

1591
01:55:14,200 --> 01:55:18,400
वैश्य शूद्र सबके लिए है ठीक है अब बात

1592
01:55:18,400 --> 01:55:22,720
ये आती है कि यही अपने दूसरी जगह पर यह मानते हैं कि शूद्र

1593
01:55:22,720 --> 01:55:27,000
कौन है जिसका जनेऊ

1594
01:55:27,000 --> 01:55:31,240
भी ना हुआ हो जो जने

1595
01:55:31,240 --> 01:55:33,120
जो संस्कार करा लेगा वो शूद्र

1596
01:55:33,120 --> 01:55:37,480
नहीं रहेगा वो दज बन जाएगा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य बन जाएगा जो संस्कार

1597
01:55:37,480 --> 01:55:41,560
करा लेगा वह ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य बन जाएगा वह जो

1598
01:55:41,560 --> 01:55:45,760
है दज बन जाएगा वो शूद्र नहीं रहेगा मगर यहां

1599
01:55:45,760 --> 01:55:49,960
पर शूद्र के लिए भी वेद वेद

1600
01:55:49,960 --> 01:55:54,080
अच्छा वो जो जो पवित होता हैज

1601
01:55:54,080 --> 01:55:58,160
संस्कार उसी के करण यह लोग यह भी मानते हैं कि संस्कार

1602
01:55:58,160 --> 01:56:02,160
के बाद ही आपको वेदा अध्ययन का अधिकार प्राप्त

1603
01:56:02,160 --> 01:56:06,720
होता है यह भीय मानते हैं संस्कार के बिना नहीं वेधन के अधिकार

1604
01:56:06,720 --> 01:56:11,720
संस्कार के बाद ही होता है तो क्या है कि

1605
01:56:11,720 --> 01:56:15,880
यदि यहां पर भगवान मतलब यहां पर ईश्वर इनके अनुसार

1606
01:56:15,880 --> 01:56:19,960
यह कह रहे हैं कि शूद्र के लिए भी वेदन है तो यहां पर

1607
01:56:19,960 --> 01:56:24,440
इन्होने शूद्र कहां से माना इसको क्योंकि

1608
01:56:24,440 --> 01:56:28,920
क्योंकि कर्म से तो वेदन का अधिकारी है नहीं ना अगर कर्म से माना

1609
01:56:28,920 --> 01:56:33,000
तो तो यहां परने शूद्र को किससे माना जन्म से

1610
01:56:33,000 --> 01:56:37,280
जम से अ समाज ही अपनी पुस्तक में जन्म से मान लिया है

1611
01:56:37,280 --> 01:56:41,440
किसी को कोई ध्यान नहीं देता है इस बात प और कहीं पर जो है गुरुदेव

1612
01:56:41,440 --> 01:56:47,000
जी भी और आपकी भी देख य पर

1613
01:56:47,000 --> 01:56:50,280
देख

1614
01:56:50,280 --> 01:56:54,440
विधि संस्कार विधि ख सरती में दिया आचार

1615
01:56:54,440 --> 01:57:00,440
घोषित करेगा वण

1616
01:57:00,560 --> 01:57:04,600
है य नियम दिया गया मनु हां

1617
01:57:04,600 --> 01:57:08,800
संस्कार विधि में दिया गया है हां संस्कार विधि में दिया गया

1618
01:57:08,800 --> 01:57:12,960
है हा संस्कार विधि में दिया गया है आपने कहा आचार्य त करते

1619
01:57:12,960 --> 01:57:18,960
संस्कार विधि में लिखा हुआ है कि जो अपने बच्चे को बालक बालिका को ब्राह्मण बनाना चाहता है या

1620
01:57:20,840 --> 01:57:25,040
माप तो इसमें कुछ एज का भी डिफरेंस शायद बताते

1621
01:57:25,040 --> 01:57:29,240
हैं ये कि एज का वो है वो है कि किस किस एज में आपका यज्ञ

1622
01:57:29,240 --> 01:57:33,320
पवित्र होना चाहिए मगर नहीं हुआ तो फिर उसका निवारण कैसे होगा वो सब कुछ है

1623
01:57:33,320 --> 01:57:37,360
मगर यहां पर क्या है कि यदि संस्कार होने से

1624
01:57:37,360 --> 01:57:41,640
ही कोई दुज बनता है और वेदा अध्ययन का अधिकारी बनता है तो यहां

1625
01:57:41,640 --> 01:57:46,600
पर इन्होंने शूद्र को कैसे वेद पाठ दे दिया है

1626
01:57:46,600 --> 01:57:50,680
भाई शूद्र तो वो है जिसका जिसका यज्ञ पवित्र हुआ नहीं तो ये कौन

1627
01:57:50,680 --> 01:57:54,760
सा शूद्र है जिसके लिए ये वेद अध्ययन दिया गया है तो यहां पर इन्होंने किस

1628
01:57:54,760 --> 01:57:58,760
शूद्र की बात की है जन्म से शूद्र है तो मान लिया जन्म

1629
01:57:58,760 --> 01:58:02,800
से जन्म से तुम कैसे मान रहे हो जन्म से तो सभी को शूद्र मानो

1630
01:58:02,800 --> 01:58:05,440
फिर ब्राह्मण क्षत्री वैश अलग कैसे हो गए

1631
01:58:05,440 --> 01:58:09,640
क्योंकि ये वो वाला जो होता है ना क्या श्लोक

1632
01:58:09,640 --> 01:58:14,320
है कि अरे वो वाला है जन्मना जाते शूद्र शूद्र

1633
01:58:14,320 --> 01:58:19,120
व ठीक है वो वो छोड़ दो वो तो पुराण का श्लोक है मगर मैं कह रहा हूं

1634
01:58:19,120 --> 01:58:23,680
यदि संस्कार प्राप्त करने पर ही कोई व दज बनता है

1635
01:58:23,680 --> 01:58:27,880
और शूद्र वो है जिसका यज्ञ पवित नहीं होता है तो फिर यहां

1636
01:58:27,880 --> 01:58:32,160
पर किस शूद्र को वेदा अध्यन का अधिकार दिया जा रहा है बताया करके आर

1637
01:58:32,160 --> 01:58:36,240
समाज जी जी जी अब वो इसके लिए क्या कहेंगे

1638
01:58:36,240 --> 01:58:40,520
पता है शास्त्रार्थ कर लो

1639
01:58:40,520 --> 01:58:45,000
हमसे और शास्त्रार्थ कैसे करोगे तुमने हिंदू

1640
01:58:45,000 --> 01:58:49,280
शब्द पर वीडियो बनाया उस पर शास्त्रार्थ करो इस पर नहीं

1641
01:58:49,280 --> 01:58:54,200
हां जीी हांजी आपका पूरा लेटर और फिर जो है वो क्या होगा

1642
01:58:54,200 --> 01:58:59,040
रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे क्योंकि हम तानाशा है बेताज बादशा

1643
01:58:59,040 --> 01:59:03,640
रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे तो हमने भी कह दिया एक काम करो

1644
01:59:03,640 --> 01:59:08,600
आप होगे भैया अपने य के बेताज बादशाह मगर

1645
01:59:08,600 --> 01:59:12,760
आप हमारी भी तीन चार सर्त मान लो सीधे हवाई जहाज से लैंडिंग

1646
01:59:12,760 --> 01:59:17,040
करो उड़ते हुए केवल जो अंतरंग

1647
01:59:17,040 --> 01:59:20,440
वस्त्र होते उनमें और उसके

1648
01:59:20,440 --> 01:59:24,520
बाद जो नृत्य करो और उसके बाद जो है नाक रगड़ो

1649
01:59:24,520 --> 01:59:28,600
उसके बाद हम तुमसे बात कर ये कोई बात है यह कहां की तानाशाही है

1650
01:59:28,600 --> 01:59:33,520
कि रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे कैमरा केवल हमारा चलेगा या लाइव केवल हम करेंगे

1651
01:59:33,520 --> 01:59:37,560
इसी से पता चलता है कि आपको जो है करना ही नहीं है

1652
01:59:37,560 --> 01:59:41,600
हमने अपनी हर डिबेट में क्या कहा है अपनी हर

1653
01:59:41,600 --> 01:59:45,800
जो हमने प्रस्तुत किया है उसमें चिल्ला चिल्ला के कहा है कि हमें

1654
01:59:45,800 --> 01:59:50,000
सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे दो हम आपके

1655
01:59:50,000 --> 01:59:54,120
हो जाएंगे हमने तो नहीं कहा क्या हिंदू शब्द को लेकर के हमें चर्चा में हरा दो हम आपके

1656
01:59:54,120 --> 01:59:59,280
हो जाएंगे मुख्य बिंदुओं से क्यों बचना चाहते हो

1657
01:59:59,280 --> 02:00:03,600
जिससे समाज में बदलाव आ सकता है उस पर बात ना करके इधर

1658
02:00:03,600 --> 02:00:07,880
उधर के साइड की बातें करके आप अपना और मेरा समय व्यर्थ करके और किसी तरीके

1659
02:00:07,880 --> 02:00:12,360
से आप जो है आगे बढ़ जाना चाहते हो और कुछ नहीं है

1660
02:00:12,360 --> 02:00:16,360
और कुछ नहीं है उनसे वर्ण व्यवस्था पर ही मैंने जो है जो लोग

1661
02:00:16,360 --> 02:00:20,400
थे वो बोले कि जो है यह तो बिल्कुल अरे ये तो आपको पता नहीं है यह

1662
02:00:20,400 --> 02:00:24,400
तो कर्म से होता है आप अरे नहीं मैंने कहा खुद गीता में जो है भगवान

1663
02:00:24,400 --> 02:00:28,520
ने कहा है कि चतुर्वर्ण वाला अरे भाई कर्म से होता है

1664
02:00:28,520 --> 02:00:32,560
तो जो अज्ञानी है वो शूद्र है हा जी तो य

1665
02:00:32,560 --> 02:00:35,600
शूद्र को वेदन कैसे दे दिया ईश्वर ने

1666
02:00:35,600 --> 02:00:39,880
मैंने उनसे ये पूछा शूद्र तो वो है ना शूद्र वो है

1667
02:00:39,880 --> 02:00:43,880
जिसका जने नहीं हुआ है वो शूद्र है

1668
02:00:43,880 --> 02:00:48,280
तो बिना जने के यहां पर कैसे दे दिया शूद्र को वो या तो य पर ये

1669
02:00:48,280 --> 02:00:52,280
इसका अर्थ उन्होने गलत किया है और या फिर य य मान लिया से

1670
02:00:52,280 --> 02:00:56,400
बात हो रही है जन्म से ब्राह्मण क्त्र फस गए

1671
02:00:56,400 --> 02:01:00,400
लोग मैंने उनसे वही जो गुरुजी समझाते हैं वही वाली चीज को

1672
02:01:00,400 --> 02:01:04,400
उनसे कहा मैंने कहा चलिए आदमी तो अगर सैनिक है तो आपने कह दिया व

1673
02:01:04,400 --> 02:01:08,480
क्षत्रिय हो गया ब्राह्मण का कार्य कर रहा है तो वो हो गया लेकिन जो स्त्री जो घर

1674
02:01:08,480 --> 02:01:12,680
पर रह रही है वो उसका उसका या बेटी है उसका

1675
02:01:12,680 --> 02:01:16,720
क्या तुम जब शादी ब्याह होगी तो उसका ण कैसे तय करोगे

1676
02:01:16,720 --> 02:01:20,720
इसकी हम शादी कहां करें वो तो जो तुम लोग काम मानते हो

1677
02:01:20,720 --> 02:01:25,160
कि क्त्र है सेवा कर रहा तो शूद्र है लेकिन वो तो घर पर ही है

1678
02:01:25,160 --> 02:01:29,240
आज तो चलिए ऑफिस जा रही है लेकिन पहले तो कभी कहीं नहीं जाती थी घर पर रहती थी तो

1679
02:01:29,240 --> 02:01:33,680
उसकी तुम शादी बया किस आधार पर करोगे उसका वर्ण क्या रखोगे

1680
02:01:33,680 --> 02:01:37,880
तो इन्होने इसमें छुआछूत भी मानी है ये

1681
02:01:37,880 --> 02:01:42,440
देखिए ये प्रश्न संख्या है

1682
02:01:42,440 --> 02:01:46,640
231 ये कुछ इसका अध वगर आप उसको बोल

1683
02:01:46,640 --> 02:01:51,000
देंगे तो वीडियो में प्रकाश पृष्ठ संख्या 231 एकादश

1684
02:01:51,000 --> 02:01:55,160
उल्लास जी इसमें ये बोल रहे हैं किसी

1685
02:01:55,160 --> 02:02:01,160
को क्रिटिसाइज कर रहे हैं कि वो लोग तो ऐसा करते हैं क्या करते हैं

1686
02:02:02,080 --> 02:02:06,160
कि शास्त्रों में रजला आदि स्त्रियों के स्पर्श

1687
02:02:06,160 --> 02:02:10,280
का निषेध है छना मना है जो रसवाला स्त्री

1688
02:02:10,280 --> 02:02:14,320
हो उसको छूना मना है है ना उसको

1689
02:02:14,320 --> 02:02:18,320
भी इन लोगों ने पवित्र मान लिया है तो ये किसी को

1690
02:02:18,320 --> 02:02:23,080
क्रिटिसाइज कर रहे हैं जो रजला स्त्री को पवित्र मान रहा है

1691
02:02:23,080 --> 02:02:27,160
हम पर वीडियो बनाते हैं यह खुद कह रहे हैं अपनी अपनी

1692
02:02:27,160 --> 02:02:31,280
किताब में रजस स्ला स्त्री का स्पर्श निषेध है हमको

1693
02:02:31,280 --> 02:02:35,520
कज कर रहे हैं रला के साथ समागम करने को

1694
02:02:35,520 --> 02:02:39,760
क्रिटिसाइज कर रहे हैं चांड डालनी समागम

1695
02:02:39,760 --> 02:02:43,880
में काशी की अ चांड डालनी कौन होती है चमारी

1696
02:02:43,880 --> 02:02:49,640
चमारी से समागम अबे चमार कौन

1697
02:02:49,640 --> 02:02:54,120
है धोबी की स्त्री के साथ समागम

1698
02:02:54,120 --> 02:02:58,160
तो यह सब जो है मतलब क्रिटिसाइज कर

1699
02:02:58,160 --> 02:03:02,320
रहे हैं कि इनन स्त्रियों के साथ समागम गलत है भैया मैं एक श

1700
02:03:02,320 --> 02:03:06,440
कोट करना चाहता हूं अगर आप आज्ञा दे तो कौन बोल रहा

1701
02:03:06,440 --> 02:03:10,480
है भगवत गीता से गौरव पांडे जी बोल रहे हैं

1702
02:03:10,480 --> 02:03:14,960
हां गौरव पांडे जी

1703
02:03:14,960 --> 02:03:19,040
बोलिए द्विवेदी भैया अगर आप मुझे आज्ञा दे तो मैं एक श्लोक कोट

1704
02:03:19,040 --> 02:03:23,120
करना चाहूंगा इसके समर्थन में भगवत गीता से

1705
02:03:23,120 --> 02:03:27,280
बोलिए हां तो भगवत भगवत गीता सर्वमान्य ग्रंथ है सब

1706
02:03:27,280 --> 02:03:31,800
लोग चाहे आर्य समाज हो चाहे ब्रह्म कुमारी भी इसको दिखा के ही अपना

1707
02:03:31,800 --> 02:03:37,000
अपनी चाल खेल रहे हैं जितने भी क्दुदस ना

1708
02:03:37,000 --> 02:03:41,120
कैसे करके मानते हैं चाहे वह मोल्ड करें चाहे अपने अर्थों

1709
02:03:41,120 --> 02:03:45,600
की व्याख्या करके भगवत गीता को आगे रखे पर गीता एक सर्वमान्य ग्रंथ

1710
02:03:45,600 --> 02:03:49,800
है यह सब लोग कहते हैं जितने क्दुदस है चाहे ब्रह्म कुमारी

1711
02:03:49,800 --> 02:03:53,840
हो गया चाहे आप का ये आर्य समाजी संगठन

1712
02:03:53,840 --> 02:03:57,920
हो गए और जितने भी हिंदुत्व के नाम पर आरएसएस हो गए हिंदुत्व के नाम पर अलग

1713
02:03:57,920 --> 02:04:02,280
फिलॉसफी अपनी मॉडिफाइड फिलॉसफी चला रहे हैं गीता को तो सब मानते ही है

1714
02:04:02,280 --> 02:04:04,720
तो गुरुदेव गीता को मानते हैं मगर ये

1715
02:04:04,720 --> 02:04:08,800
गीता के 70 श्लोकों को प्रमाणिक मानते हैं कुछ है मा

1716
02:04:08,800 --> 02:04:13,040
लेकिन अगर ऐसा कोई तर्क आपके सामने पेश करें तो गुरुदेव

1717
02:04:13,040 --> 02:04:17,040
एक श्लोक बोलते हैं कि गीता के और अध्याय की तो बात आप बाद में कीजिए

1718
02:04:17,040 --> 02:04:21,200
पहले प्रथम अध्याय का ही 43 नंबर का श्लोक आप उनको बता

1719
02:04:21,200 --> 02:04:25,720
दीजिएगा कि इसका अर्थ हम धर्मम शाश्वत हा

1720
02:04:25,720 --> 02:04:29,840
ये है हमारा श्लोक नंबर 43 अध्याय नंबर एक प्रथम

1721
02:04:29,840 --> 02:04:33,840
अध्याय का ही श्लोक आप कोट कर दीजिए आगे तो और ची स्तर की

1722
02:04:33,840 --> 02:04:37,840
बात है प्रथम अध्याय का ही आप उनको श्लोक कोट करके बता दीजिए कि

1723
02:04:37,840 --> 02:04:42,160
इसमें कहा गया है गीता के प्रथम अध्याय के 43 श्लोक में जाति धर्मा

1724
02:04:42,160 --> 02:04:46,280
कुल धर्मास शाश्वता कि जाति धर्म और कुल धर्म

1725
02:04:46,280 --> 02:04:50,280
शाश्वत है सनातन है शाश्वत सनातन का मतलब यह है कि य

1726
02:04:50,280 --> 02:04:54,520
जन्म से ही मान्य होंगे जन्म से ही मान्य होंगे इसीलिए शाश्वत

1727
02:04:54,520 --> 02:04:58,960
और सनातन है अब लोग बोलते हैं कि हम अच्छे कर्म करके और

1728
02:04:58,960 --> 02:05:03,360
अच्छे कुल में या यह हो सकते तो इसका यह निवारण होगा कि आप

1729
02:05:03,360 --> 02:05:07,560
जैसे विदुर है आप महाभारत में विदुर का उदाहरण दीजिए कि विधुर मानते

1730
02:05:07,560 --> 02:05:11,800
थे कि वह शूद्र वर्ण में उत्पन्न हुए हैं लेकिन वह आदरणीय थे

1731
02:05:11,800 --> 02:05:15,840
और राजा महाराजा उस समय उनको अपने दरबार में बुलाकर उनसे सलाह लेते थे

1732
02:05:15,840 --> 02:05:19,920
और बहुत पूजनीय आदरणीय थे स्वयं भगवान कृष्ण उनके घर आकर भोजन

1733
02:05:19,920 --> 02:05:24,120
करते थे ठीक है तो हम जो प्रमाणिक इतिहास है महाभारत

1734
02:05:24,120 --> 02:05:28,440
और रामायण वहां यह द्वेष नहीं है वहां

1735
02:05:28,440 --> 02:05:32,480
द्वेष नहीं है विद्वेष नहीं है लेकिन वर्ण धर्म मानना बहुत आवश्यक

1736
02:05:32,480 --> 02:05:36,840
है अपने कल्याण के लिए अभी नेताओं ने इसको इतना प्रदूषित

1737
02:05:36,840 --> 02:05:40,920
कर दिया है कि हम पब्लिकली इसको बोलते हैं तो हमें रूढ़िवादी

1738
02:05:40,920 --> 02:05:45,080
या एक अलग ही हीन दृष्टि से देखा जाता है लेकिन इसका

1739
02:05:45,080 --> 02:05:49,080
जो मेन एम यह है कि रोटी बेटी को संरक्षित आपका

1740
02:05:49,080 --> 02:05:53,320
जो कर्म है वह संरक्षित हो भटकना ना पड़े आय आपकी जन्म से ही आरक्षित

1741
02:05:53,320 --> 02:05:58,000
हो और संतुलन बना रहे समाज में स्वामी विवेकानंद

1742
02:05:58,000 --> 02:06:02,000
के संगठन से भी मैं जुड़ा था काफी चीजें उनकी भी अब

1743
02:06:02,000 --> 02:06:06,200
मॉडिफाइड कर दी गई है लोगों के द्वारा लेकिन उनके भी विचार इस चीज

1744
02:06:06,200 --> 02:06:10,280
के लिए काफी हद तक मतलब इसका समर्थन

1745
02:06:10,280 --> 02:06:14,360
भी वो किसी किसी टॉक्स में कर रहे हैं किसी किसी में नहीं भी कर रहे तो एक चीज उनकी आप

1746
02:06:14,360 --> 02:06:18,680
ये बता सकते हो जो उनको मानने वाले लोग हैं ईच इज ग्रेट इन हिज ओन प्लेस

1747
02:06:18,680 --> 02:06:23,000
समाज में शास्त्रों के अनुसार जिसको जो ड्यूटी दी गई है वह उसको मान्य

1748
02:06:23,000 --> 02:06:27,320
थी और वह अपने प्लेस में ग्रेट था कोई भी

1749
02:06:27,320 --> 02:06:31,840
हीन नहीं था कोई भी वो नहीं था जिसको जो ड्यूटी दी गई थी वह अपने कल्याणा वो ड्यूटी

1750
02:06:31,840 --> 02:06:35,320
करता था लेकिन अब जितने भी इतिहास आप

1751
02:06:35,320 --> 02:06:39,320
बाद में अंग्रेजों के बाद के पढ़ेंगे उसमें आप देखोगे कि यह छुआछूत

1752
02:06:39,320 --> 02:06:43,680
और जाति भेद वगैरह उन्होंने डाल दिया गया और किसी अंशों में अगर आपको

1753
02:06:43,680 --> 02:06:47,720
समाज में दिख भी रहा होगा तो ढोंग और पाखंड के अलावा कुछ नहीं था

1754
02:06:47,720 --> 02:06:51,840
और जो लोग ये करते थे उनको शास्त्रोक्त कुल परंपरा रीति परंपरा और

1755
02:06:51,840 --> 02:06:56,320
गुरुओ का जो हमारे शोती ब्रह्म निष्ठ गुरु होते हैं उनका

1756
02:06:56,320 --> 02:07:00,320
ज्ञान नहीं था इसलिए सब चीज फैली गई लेकिन प्रथम अध्याय के ही 4 नंबर का

1757
02:07:00,320 --> 02:07:04,320
लोक आप कोट कीजिएगा कि जाति धर्मा कुल धर्माता य

1758
02:07:04,320 --> 02:07:08,360
शाश्वत है यह जन्म से ही मान्य है तभी आप अपने कर्तव्य

1759
02:07:08,360 --> 02:07:12,520
कर्म कर पाएंगे बात कहना चाहूंगा कि जब

1760
02:07:12,520 --> 02:07:16,560
हम किसी को कर्म के आधार पर पुलिस वाला मानते हैं

1761
02:07:16,560 --> 02:07:20,840
तो पुलिस वाला जब अपने दायित्व से मुकरता है यानी कि नौकरी

1762
02:07:20,840 --> 02:07:25,320
को त्याग पत्र दे रहा होता है मान लो जंग खड़ी

1763
02:07:25,320 --> 02:07:30,120
है और वो उसकी जो

1764
02:07:30,120 --> 02:07:34,640
उसके पास ऑप्शन है कि मैं त्याग पत्र दे सकता हूं कहीं जाना है

1765
02:07:34,640 --> 02:07:38,680
तो उसकी मोरालिटी धर्म क्या है कि जो हम लोगों ने जो

1766
02:07:38,680 --> 02:07:43,120
लौकिक कानून बनाया है मान लो उसके इतर भी कोई एक धार्मिक

1767
02:07:43,120 --> 02:07:47,520
दबाव आप पर होना चाहिए ईश्वरीय दवाब धर्म वही है ना

1768
02:07:47,520 --> 02:07:50,520
कि मान लो किसके साथ विवाह होना है किसके साथ

1769
02:07:50,520 --> 02:07:54,680
नहीं होना इसकी ख अगर साइंस नहीं कर रही है कानून

1770
02:07:54,680 --> 02:07:59,160
नहीं कर रहा तो उसकी व्याख्या धर्म ने की है यही तो है ध तो

1771
02:07:59,160 --> 02:08:03,320
अगर कोई पुलिस वाला होते हुए अपने दायित्व का निर्वाह नहीं करेगा

1772
02:08:03,320 --> 02:08:07,440
अगर कोई वैश्य होते हुए अपने दायित्व का निर्वाह नहीं करेगा तो आज की

1773
02:08:07,440 --> 02:08:11,840
तारीख में अगर कर्म के अनुसार हम क्योंकि मानते हैं तो

1774
02:08:11,840 --> 02:08:16,440
अपने दायित्व से मुकने की स्थिति में उसके ऊपर कोई मोरालिटी

1775
02:08:16,440 --> 02:08:20,440
धार्मिक दबाब नहीं होगा नैतिकता का दबाब नहीं होगा

1776
02:08:20,440 --> 02:08:24,440
ईश्वरीय दबाब नहीं है वो केवल लौकिक दबाव है तोव आराम से रेजिग्नेशन

1777
02:08:24,440 --> 02:08:28,920
दे सकता है मैं जा रहा हूं तो एक ऐसा धर्म है

1778
02:08:28,920 --> 02:08:33,080
जो धर्म को त्यागने का विकल्प दे रहा है कि कभी भी त्याग दे

1779
02:08:33,080 --> 02:08:37,200
कभी भी तू आर्मी आर्मी छोड़ कर के तू जो है जाकर के वो बन जा यज्ञशाला

1780
02:08:37,200 --> 02:08:41,600
बैठ के यज्ञ कर जी फिर इसका पसान किसम

1781
02:08:41,600 --> 02:08:45,680
है जब व्यक्ति को अपनी नौकरी त्यागने

1782
02:08:45,680 --> 02:08:49,840
का वो है तो वक्त आने पर कोई पुलिस वाला अपनी नौकरी त्याग सकता है

1783
02:08:49,840 --> 02:08:53,840
उसके ऊपर मोरालिटी का कोई नहीं है आप कानूनी दबाब डाल दो तो बात

1784
02:08:53,840 --> 02:08:58,880
अलग है धार्मिक दबाब तो नहीं है मगर

1785
02:08:58,880 --> 02:09:03,000
मर मगर एक बात है मगर एक बात है मगर

1786
02:09:03,000 --> 02:09:05,840
श्री कृष्ण चंद्र ने उनको क्या लौकिक

1787
02:09:05,840 --> 02:09:10,120
दबाब दिया था हे अर्जुन तू क्षत्रिय तेरा धर्म

1788
02:09:10,120 --> 02:09:15,600
है धर्म युक्त युद्ध करना यह क्या है धार्मिक

1789
02:09:15,600 --> 02:09:19,600
दबाव व्यक्ति के पास भ लौकिक दबाब हो

1790
02:09:19,600 --> 02:09:23,680
ना हो मगर धार्मिक दबाब उसको देख तेरा जन्म हुआ है स्कल में तेरा

1791
02:09:23,680 --> 02:09:27,680
धर्म है चलिए खैर ये जाति वर्ण वाली बात अब किसी और दिन कर लेंगे

1792
02:09:27,680 --> 02:09:31,760
लाइव आजकी बहुत लंबी हो च इस मैं एक और चीज करूंगा छोटी सी ज्यादा समय

1793
02:09:31,760 --> 02:09:35,760
ना लेते हुए कि आज की डेट में अगर आप यह नहीं मानते हो

1794
02:09:35,760 --> 02:09:39,880
तो आपने वैकल्पिक रूप से ये चारों चीजें समाज में बनाई गई है

1795
02:09:39,880 --> 02:09:44,000
जिसमें आपका ज्यादा खर्चा लगा है ज्यादा अभ्यास लगा है ट्रेनिंग लगी है फिर

1796
02:09:44,000 --> 02:09:48,160
भी वह चीज नहीं हो पाएगी जो जन्म गत तरीके से पहले स्थापित

1797
02:09:48,160 --> 02:09:52,840
थी अब एक और इसी चीज में मैं ऐड करूंगा बिना समय लेते हुए कि

1798
02:09:52,840 --> 02:09:57,320
जो जब इन कर्तव्यों का आधार धर्म था

1799
02:09:57,320 --> 02:10:01,600
जब इन सारे कर्तव्यों का आधार धर्म था जैसे सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी

1800
02:10:01,600 --> 02:10:05,680
का आधार जब धर्म हो जाएगा और उसको हम जन्म से ही मानेंगे वह क्षत्रिय

1801
02:10:05,680 --> 02:10:10,120
कुल परंपरा के अनुसार एक सिक्योरिटी गार्ड या आर्मी ऑफिसर है

1802
02:10:10,120 --> 02:10:14,320
तो वह उसका धर्म है अगर देश में कोई अटैक करेगा तो उसके

1803
02:10:14,320 --> 02:10:18,480
पास कोई कारण नहीं है उसके पास कोई कारण नहीं है

1804
02:10:18,480 --> 02:10:21,000
रक्षा ना करने का वो रक्षा करेगा क्योंकि व

1805
02:10:21,000 --> 02:10:25,200
उसका धर्म है वही उसका धर्म है वही उसका कर्तव्य है आधार क्या है धर्म लेकिन

1806
02:10:25,200 --> 02:10:29,680
अगर हम पेड बेसिस में अगर आधार है पैसा जो आजकल के समय में है

1807
02:10:29,680 --> 02:10:33,680
आधार है पैसा सिक्योरिटी गार्ड का आधार पैसा है आर्मी का आधार पैसा है

1808
02:10:33,680 --> 02:10:37,760
आ अगर सरकार उसको तीन महीने सैलरी नहीं देती है पाच महीने

1809
02:10:37,760 --> 02:10:42,160
सैलरी नहीं देती है चार महीने सैलरी नहीं देती है तो क्या आधार जिस ड्यूटी

1810
02:10:42,160 --> 02:10:46,240
का पैसा हो गया वो उसी निष्ठा से अपनी ड्यूटी कर पाएगा तो देश

1811
02:10:46,240 --> 02:10:50,440
में आक्रमण होंगे देश लूटेगा देश पिटेगा जितने भी आप चारों चीजों

1812
02:10:50,440 --> 02:10:54,880
में लगा लो चार व चारों सेवाओं में लगा लो चाहे शिक्षा की सेवा में लगा लो

1813
02:10:54,880 --> 02:10:59,400
आधार धर्म है या पैसा है तो अगर पैसा है तो वो खराब हो जाएगा

1814
02:10:59,400 --> 02:11:03,680
देश की शिक्षा नष्ट भ्रष्ट हो जाएगी ये रक्षा में भी लगा लो आधार क्या है धर्म

1815
02:11:03,680 --> 02:11:08,280
है या पैसा है पैसा है तो रक्षा तंत्र खराब हो जाएगा ऐसे ही वैश्य

1816
02:11:08,280 --> 02:11:12,400
कमर्शियल इजेशन में लगा लो आधार केवल पैसा कमाना ही है या पुण्य या कल्याण

1817
02:11:12,400 --> 02:11:16,680
है तब मिलावट नहीं होगी चोरी नहीं होगी गलत चीजें नहीं होंगी

1818
02:11:16,680 --> 02:11:20,720
और अगर पैसा है तो करेगा वो पैसा कमाने भाई ज्यादा कैसे भी करके मूल उद्देश्य तो

1819
02:11:20,720 --> 02:11:25,160
पैसा ही है ना आधार पैसा ही है तो गलत काम करके भी कमाओ ऐसे ही

1820
02:11:25,160 --> 02:11:29,200
सेवा जाति पर बातचीत मैं थोड़ा सा इंटरप्ट करूंगा जाति

1821
02:11:29,200 --> 02:11:33,360
पर हम एक दिन अलग से अलग से लाइव रख लेंगे प्यारी बहना

1822
02:11:33,360 --> 02:11:36,880
हमारे बीच में है अगर आना चाहे तो एक बार लिंक दे दीजिए

1823
02:11:36,880 --> 02:11:41,120
प्यारी बहना को लिंक दे दीजिए क्योंकि रामपाल विषयक आज का वो था वो थोड़ा सा डाइवर्ट

1824
02:11:41,120 --> 02:11:45,360
हो गए हम लोग तो प्यारी बहना को लिंक दे दीजिए अगर वो आ कर के कुछ कहना चाहे

1825
02:11:45,360 --> 02:11:49,360
तो हम बहुत हमें बहुत हम स्वयं को धन्य समझेंगे आप

1826
02:11:49,360 --> 02:11:54,240
आए ऊपर अपनी बात करें हमें बहुत होगा प्यारी बहना

1827
02:11:54,240 --> 02:11:58,360
अच्छा बिजी थी एक चीज और थी अगर आ

1828
02:11:58,360 --> 02:12:02,400
सकती तो आ जाए एक बार आपने एक हल बताया था कि

1829
02:12:02,400 --> 02:12:06,440
जो य पूछते हैं कि सुखदेव जी जब ब्रह्म में चले

1830
02:12:06,440 --> 02:12:10,920
गए थे मोक्ष में चले गए थे आपने इसका बताया हुआ है पर क्योंकि वीडियोस

1831
02:12:10,920 --> 02:12:15,240
कई है तो मुझे मिल नहीं रहा आप क् से जुड़ जाइए आपने

1832
02:12:15,240 --> 02:12:19,360
शुरू में पूछा भी था कि वो धर्म का फॉर्म है आप हमें ट करिएगा

1833
02:12:19,360 --> 02:12:23,560
तो आपको धर्म रक्षा से ने का फम भी मिलेगा और एक क्लासेस से जुड़ने का फॉर्म

1834
02:12:23,560 --> 02:12:27,680
भी मिलेगा फिलहाल जो आप पूछ रहे हो मैं बता दूं जब कोई ब्रह्म में लीन हो जाता

1835
02:12:27,680 --> 02:12:31,760
है मक्ष जिसको प्राप्त हो जाता है तो भक्ति की प्रवता से

1836
02:12:31,760 --> 02:12:36,120
जब अद्वैत दर्शन क्या है कि ब्रह्म ही सब रूपों में प्रकट हो रहे हैं

1837
02:12:36,120 --> 02:12:40,160
जी भक्ति की प्रवता से पार मार्क दृष्टि से ब्रह्म ही सुखदेव

1838
02:12:40,160 --> 02:12:44,280
के रूप में आते हैं ईश्वर ही सुखदेव जी के रूप पहले कौन

1839
02:12:44,280 --> 02:12:48,360
था सुखदेव ईश्वर ही थे अब भी वो सुखदेव जी के रूप में आ रहे

1840
02:12:48,360 --> 02:12:51,880
व्यवहारिक दृष्टि से क्या है ये वही सुखदेव है जो महाभारत काल

1841
02:12:51,880 --> 02:12:55,960
में थे क्यों क्यों है क्योंकि

1842
02:12:55,960 --> 02:13:00,040
उनके सारे व लक्षण साम्य से वस्तु साम्य नियम है ना उनके सारे

1843
02:13:00,040 --> 02:13:04,360
वो लक्षण जो है उनसे पूछो तुम्हारे पिता का नाम माता का नाम सब बता देंगे पार मर्थक

1844
02:13:04,360 --> 02:13:08,600
दृष्टि से ईश्वर आए हैं और व्यवहारिक दृष्टि से वही सुखदेव है जो सुखदेव

1845
02:13:08,600 --> 02:13:12,640
हम देखते ठीक है ठीक है अब हम पूरी करते

1846
02:13:12,640 --> 02:13:17,120
हैं चर्चा पहाड़ी जी की बात सुन ले बस और फिर पूरी करेंगे

1847
02:13:17,120 --> 02:13:21,120
विशु चक्रवर्ती जी भी है इनकी भी

1848
02:13:21,120 --> 02:13:25,640
थोड़ी बात सुन ले विषणु जी की बा बात एक मिनट सुन ले जरा जी बोलिए विषणु जी जय श्री

1849
02:13:25,640 --> 02:13:29,640
राम जय श्री राम

1850
02:13:29,640 --> 02:13:34,240
भैया आपकी वो कट रही है आवाज

1851
02:13:34,240 --> 02:13:38,480
जय श्री राम जय श्री राम बोलिए

1852
02:13:38,480 --> 02:13:43,000
मैं बांग्लादेश से हूं ज्यादा हिंदी नहीं कहां से बांग्लादेश

1853
02:13:43,000 --> 02:13:49,000
कहां से बांग्लादेश बाश बांगलादेश अच्छा बांग्लादेश से

1854
02:13:49,200 --> 02:13:53,800
अच्छा हिंदी नहीं आता हमारा इधर तो रामपाल नहीं है मैं तो रामपाल

1855
02:13:53,800 --> 02:13:58,000
का बारे में पता ही नहीं था आपका लाइफ में जड़ने की बात पता चली

1856
02:13:58,000 --> 02:14:02,200
जाए कबीर हमारा इधर जो कबीर होता है वो मुसलमान का नाम

1857
02:14:02,200 --> 02:14:06,200
होता है कोई कबी कोई कबीर

1858
02:14:06,200 --> 02:14:06,960
सुनेगा तो व

1859
02:14:06,960 --> 02:14:10,960
सुचे जा तो मुसलमान है मेरे को

1860
02:14:10,960 --> 02:14:15,040
पहले पता चला मेरे को तो लगा वो मुसलमान है फिर पता

1861
02:14:15,040 --> 02:14:19,120
चला परमात्मा है

1862
02:14:19,120 --> 02:14:23,200
कोई ब नहीं कोई नहीं अब कभी अगर भूले भटके पहुंच जाए

1863
02:14:23,200 --> 02:14:27,520
वैसे अब तो लग रहा है कि यहीं प अ से मटने वाला है मगर भूले भटके अगर कोई पहुंच जाए

1864
02:14:27,520 --> 02:14:32,360
तो आपके पास पर्याप्त मटेरियल है तो आप उनको

1865
02:14:32,360 --> 02:14:36,440
बताइएगा कि मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

1866
02:14:36,440 --> 02:14:40,440
अमरा तो बहुत इकन है ज्यादा

1867
02:14:40,440 --> 02:14:44,440
हा स्कोन प हम लोग बात स्कोन प हम लोग बात करेंगे फिर किसी दिन तो

1868
02:14:44,440 --> 02:14:49,120
पहाड़ी जी की बात सुन ले फिर हम लोग पूरा करते हैं पड़ी जी कहां चले

1869
02:14:49,120 --> 02:14:53,200
गए हां पाड़ी जी

1870
02:14:53,200 --> 02:14:59,200
आइए पाड़ी जी को जोड़ दीजिए

1871
02:15:02,360 --> 02:15:07,360
भाई आज की आज की चर्चा भी बड़ी अच्छी रही है

1872
02:15:07,360 --> 02:15:11,560
हालांकि वो जो रोचक वाला वो पार्ट है कॉमेडी वाला शुरू

1873
02:15:11,560 --> 02:15:15,880
में ही था थोड़ा सा मगर काफी लाभप्रद है आज की

1874
02:15:15,880 --> 02:15:21,880
चर्चा अरे एक बात हमारा इधर तो आदि गुरु शकरा

1875
02:15:22,200 --> 02:15:26,200
कोई नहीं जानता अच्छा से किसी को नहीं पता मेरे को भी

1876
02:15:26,200 --> 02:15:30,600
नहीं प्यारी बहना किसी और दिन आएंगी जी विष्णु

1877
02:15:30,600 --> 02:15:34,760
विष्णु चक्रवर्ती जी बोल आदि गुरु शंकराचार्य

1878
02:15:34,760 --> 02:15:40,760
होता है आदि गुरु हम पता नहीं किसी

1879
02:15:41,280 --> 02:15:45,720
को मेरे को पता नहीं चला मेरे को दो साल

1880
02:15:45,720 --> 02:15:50,000
आदि गुरु शंकराचार्य जी है तभी तो भारत आज भी थोड़ा बहुत भारत

1881
02:15:50,000 --> 02:15:54,040
है चार म है बकल ज नहीं

1882
02:15:54,040 --> 02:15:58,240
था वो थोड़ा थोड़ा देखिए नाश हो रहा है ना धीरे धीरे मेरा

1883
02:15:58,240 --> 02:16:02,640
जो आचार्य गुरु उसका पास उनका पास जो मैं गया था

1884
02:16:02,640 --> 02:16:06,640
गुरुकुल नहीं हमारा इधर हमारा गुरुदेव ने कुछ सिखाया

1885
02:16:06,640 --> 02:16:10,760
था उस टाइम पता चला आदि गुरु कौन है आज मेरा नेटवर्क

1886
02:16:10,760 --> 02:16:14,800
काम नहीं कर रहा दूसरे फोन से कनेक्ट होता बहुत

1887
02:16:14,800 --> 02:16:19,040
अच्छा लगा जी आप आए बहुत अच्छा लगा आप आए बहुत

1888
02:16:19,040 --> 02:16:23,480
बढ़िया और आप वडियो देखते रहिए अगर हो सके तो हमसे जो है वहा पर

1889
02:16:23,480 --> 02:16:28,480
धरातल पर जुड़िए नंबर है हमारा उस पर कांटेक्ट करिए हा

1890
02:16:28,480 --> 02:16:32,600
74836 ठीक है जी पाड़ी जी

1891
02:16:32,600 --> 02:16:36,840
जय श्री

1892
02:16:36,840 --> 02:16:42,840
राम पहाड़ी जी का नेटवर्क अटक रहा

1893
02:16:52,080 --> 02:16:56,720
आवाज आ रही है मेरी हा आवाज आ रही है

1894
02:16:56,720 --> 02:17:00,720
प्यारी बहना भी जुड़ गई है इन इनके घर के मंदर दूसरे डिवाइस से कनेक्ट होता

1895
02:17:00,720 --> 02:17:04,920
हूं एक मिनट हा दूसरे से हो जा तब तक हम छोटी बहन का बात सुनते हैं इनके य

1896
02:17:04,920 --> 02:17:09,040
का मंदिर जो है चेंज हो गया है इनके यहां पर पहले रामपाल बैठा हुआ

1897
02:17:09,040 --> 02:17:14,280
था मंदिर में और अब जो भगवान बैठे हुए हैं मंदिर

1898
02:17:14,280 --> 02:17:18,520
में काल किधर से रामपाल जी निकल गए

1899
02:17:18,520 --> 02:17:23,040
य देखिए मंदिर का

1900
02:17:23,040 --> 02:17:27,200
फोटो पता है शिवांश भाई काल किधर से य पहले का फोटो

1901
02:17:27,200 --> 02:17:32,040
है देख ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपर्ट पहले भी थे हम और अब भी एक्सपर्ट है

1902
02:17:32,040 --> 02:17:36,400
पहले फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन करते थे अब जो है आध्यात्मिक ट्रांसफॉर्मेशन

1903
02:17:36,400 --> 02:17:42,400
करते हैं दिया भी बुझा [हंसी]

1904
02:17:45,520 --> 02:17:51,520
हुआ जी छोटी बहन बताइए

1905
02:17:52,080 --> 02:17:56,240
जी भैया मैं जस्ट अभी मैंने फोन चेक किया तो थंबनेल देखा

1906
02:17:56,240 --> 02:18:00,400
फिर लाइव तो अभी नहीं देख पाई मैं पर आपको

1907
02:18:00,400 --> 02:18:04,640
मैं एक सेकंड अभी कैमरा न करके दिखाती हूं कि मेरे रूम

1908
02:18:04,640 --> 02:18:08,720
में मेरा जो यह है एक सेकंड

1909
02:18:08,720 --> 02:18:14,720
य पर रामपाल की कितनी सारी बुक्स रखी है एक सेकंड ज्यादा बोल नहीं

1910
02:18:16,640 --> 02:18:22,640
पांगी पूरा घर इसी से भरा है

1911
02:18:23,200 --> 02:18:27,320
अगर किसी को यकीन नहीं क लोग कहते झूठ बोल रहे कुछ ऐसा तो

1912
02:18:27,320 --> 02:18:30,560
मैं उनको दिखा देती

1913
02:18:30,560 --> 02:18:36,560
[संगीत]

1914
02:18:37,600 --> 02:18:42,240
हू एक दिन ऐसा आएगा की रामपाल

1915
02:18:42,240 --> 02:18:46,280
जी रामपाल अरे रामपाल जी तो अभी भी अभी

1916
02:18:46,280 --> 02:18:52,280
भी पश्चाताप य देखिए इनकी बुक्स है रामपाल की

1917
02:18:54,760 --> 02:18:58,920
नहीं आएंगे उनके फॉलोवर्स भी आएंगे य है थोड़े से ज्यादा ब्रेन वस होने

1918
02:18:58,920 --> 02:19:02,960
की वजह से ना थोड़े से वो जिदी टाइप के हो ग

1919
02:19:02,960 --> 02:19:06,880
जी प्यारी बहना जी बढ़िया आपने दिखा

1920
02:19:06,880 --> 02:19:11,120
दिया मंदिर में जो मतलब ये लोग

1921
02:19:11,120 --> 02:19:15,160
कई सारे कमेंट मैंने देखे थे सब कह रहे थे कि ये स्क्रिप्टेड होता

1922
02:19:15,160 --> 02:19:19,200
है और ये सब तो स्क्रिप्टेड बिल्कुल भी नहीं है ये सारी

1923
02:19:19,200 --> 02:19:23,400
बुक्स जो है वो इनफैक्ट मेरे पेरेंट्स ने सबको देने

1924
02:19:23,400 --> 02:19:27,560
के लिए रखी थी क करने के लिए हा जी

1925
02:19:27,560 --> 02:19:31,840
ये मेरे रूम में इतनी सारी रखी हुई है इसीलिए और

1926
02:19:31,840 --> 02:19:35,840
मुझे फोटो मिल नहीं रही पता नहीं मैंने कहां रख दी हटा के मुझे बहुत गुस्सा आया था

1927
02:19:35,840 --> 02:19:39,920
क्योंकि जब मैंने हटाया तो मुझे बहुत खुशी हुई थी रामफल की जो फोटो मंदिर में लगी

1928
02:19:39,920 --> 02:19:44,040
ई थ व भी दिखाती नहीं ी देखती मिलती है

1929
02:19:44,040 --> 02:19:48,360
तो नहीं नहीं बहुत बढ़िया बहुत अच्छा लगा और गुरुदेव

1930
02:19:48,360 --> 02:19:52,400
का यही वचन था कि यदि हिंदू अपने

1931
02:19:52,400 --> 02:19:52,960
दायित्व

1932
02:19:52,960 --> 02:19:57,240
का निर्वाह यथा सामर्थ्य करने लगे तो जितने भी तंत्र

1933
02:19:57,240 --> 02:20:01,280
है वहां पर प्रहलाद ऐसे खड़े हो जाएंगे जो अपने तंत्रों का शोधन कर

1934
02:20:01,280 --> 02:20:05,320
देंगे और उसका गुरुदेव के वचन को मैं आपके रूप में चरितार्थ

1935
02:20:05,320 --> 02:20:09,600
होते हुए देख रहा हूं तो मैं बहुत आभारी हूं आपका

1936
02:20:09,600 --> 02:20:13,800
हम सब लोग आपकी मतलब आप सबके लिए प्रेरणा है क्योंकि आपकी

1937
02:20:13,800 --> 02:20:17,920
आयु भी बहुत छोटी है और आप एक ऐसी

1938
02:20:17,920 --> 02:20:21,920
जगह पर है जहां पर आपके अलावा कोई नहीं है आप अकेले और फिर भी

1939
02:20:21,920 --> 02:20:26,120
आप जो है प्रलाद की तरीके से वहां पर अपना कार्य कर रही है उसमें सफलता

1940
02:20:26,120 --> 02:20:30,160
भी प्राप्त कर रही है हम सबका प्यार स्नेह अगर बड़े हैं

1941
02:20:30,160 --> 02:20:34,560
तो आशीर्वाद आपके साथ है हमारी प्रार्थना है और

1942
02:20:34,560 --> 02:20:39,880
सबसे अच्छी बात है कि हमारे साथ श्रीनाथ तो किस बात की चिंता

1943
02:20:39,880 --> 02:20:44,160
बक आपको सुनके प्यारी बहने आपको सुनके बहुत लोग प्रभावित

1944
02:20:44,160 --> 02:20:49,000
हो रहे हैं कुछ लोगों के कॉल आए थे मेरे

1945
02:20:49,000 --> 02:20:53,120
पास बहुत अ अच्छा लगा ये तो जान के इसीलिए मैं आई

1946
02:20:53,120 --> 02:20:57,280
थी नहीं तो मतलब काफी रिस्क है इधर आने में मतलब

1947
02:20:57,280 --> 02:21:01,680
क्योंकि सबकी नजर रहती है कि पकड़े जाए तो फिर

1948
02:21:01,680 --> 02:21:06,840
क्योंकि अभी भी मेरे को आश्रम जाना पड़ सकता है पापा के साथ अब

1949
02:21:06,840 --> 02:21:08,000
तो मैं

1950
02:21:08,000 --> 02:21:12,040
ये कह रहा था एक मिनट मैं इंटरप्ट करूंगा ये कह रहा था मैं

1951
02:21:12,040 --> 02:21:16,040
ये एक सवाल आ रहा है ये बुक में क्या लिखा है प्यारी बहना पढ़ के

1952
02:21:16,040 --> 02:21:20,160
सुन दो सुना दो ये कहना चाह रहे हैं तो मैं आपको पढ़ के सुना देता

1953
02:21:20,160 --> 02:21:24,480
हूं भाई साहब आपने जब कही दिया है तो भैया इनकी जरा वो

1954
02:21:24,480 --> 02:21:28,840
खोलो अ इनकी ये खोलिए

1955
02:21:28,840 --> 02:21:32,960
गीता तेरा ज्ञान अमृत और इनको

1956
02:21:32,960 --> 02:21:37,080
पढ़ के सुना दो कबीर क्या कह रहे हैं वो 32 वा

1957
02:21:37,080 --> 02:21:41,320
प्रश्न था ना जो 32 वा

1958
02:21:41,320 --> 02:21:45,200
प्रश्न वो

1959
02:21:45,200 --> 02:21:49,240
शायद हमारा सनातन धर्म है इनका आदि सनातन धर्म है

1960
02:21:49,240 --> 02:21:53,320
व अभी बात करेंगे अभी बात करेंगे

1961
02:21:53,320 --> 02:21:57,480
कर ये ये प्रश् संख्या मेरे पास मेरे

1962
02:21:57,480 --> 02:22:01,800
पास 51 है जरा इनको दिखा दो क्या लिखा है इनकी बुक में हेलो

1963
02:22:01,800 --> 02:22:05,840
हेलो सनातन जी हा

1964
02:22:05,840 --> 02:22:10,280
ये जिंदा बाबा के रूप में आपके कबीर साहब कह रहे हैं

1965
02:22:10,280 --> 02:22:13,600
कि हे धर्मदास गीता का

1966
02:22:13,600 --> 02:22:18,240
गीता शास्त्र आपके परमपिता भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु जी

1967
02:22:18,240 --> 02:22:23,200
का अनुभव और आपको आदेश है

1968
02:22:23,200 --> 02:22:27,440
इस गीता शास्त्र में लिखे मेरे अनुभव को पढ़कर इसके

1969
02:22:27,440 --> 02:22:29,880
अनुसार भक्ति करोगे तो मोक्ष

1970
02:22:29,880 --> 02:22:34,080
को प्राप्त करोगे ठीक है ये आपके

1971
02:22:34,080 --> 02:22:38,400
कबीर साहब कह रहे हैं ठीक है

1972
02:22:38,400 --> 02:22:42,600
अच्छा दूसरी बात एक ये है कि आप पहले सनातन शब्द का अर्थ

1973
02:22:42,600 --> 02:22:47,000
जान ले उसके बाद लिख के आदि सनातन मूर्खों की तरीके से

1974
02:22:47,000 --> 02:22:52,120
कुछ भी लिख देना मैं कहूं परम आदि सनातन फिर क्या करोगे

1975
02:22:52,120 --> 02:22:56,120
फिर कोई आ जा पूर्ण परम आदि सनातन

1976
02:22:56,120 --> 02:23:00,280
लगाते जाओ एडजेक्टिव एडजेक्टिव काही खेल

1977
02:23:00,280 --> 02:23:04,520
खेलना है ना मैं इसीलिए जन्मा ई हूं मुझे अब लगने लगा

1978
02:23:04,520 --> 02:23:08,960
है ये कुतर की लोग है जो हमारे

1979
02:23:08,960 --> 02:23:13,360
इंटेलेक्चुअल जो बहुत तात्विक ज्ञान वाले जो तत्ता है जो हमारे आचार्य

1980
02:23:13,360 --> 02:23:17,360
गण है वो इनके लिए नहीं है ये जो कुतर की लोग है मेरा मुझे

1981
02:23:17,360 --> 02:23:23,080
लगता है जन्म के लिए हुआ है कुतर कियों के लिए हुआ है

1982
02:23:23,080 --> 02:23:27,160
इसीलिए क्यक तुमको व भाषा समझ में नहीं आती आप लोगों को

1983
02:23:27,160 --> 02:23:31,320
शालीनता वाली रामपाल अनार्य नमाज

1984
02:23:31,320 --> 02:23:36,080
अरे क्या बोल रहे हैं

1985
02:23:36,080 --> 02:23:40,400
भाई भावनाओं को अपने नियंत्रण में रखे

1986
02:23:40,400 --> 02:23:45,960
उपाध्याय जी

1987
02:23:45,960 --> 02:23:50,040
जी ठीक है तो अब आज की लाइव हम लोग पूरी करते हैं प्यारी बहना

1988
02:23:50,040 --> 02:23:54,720
भी आ तो एक कंप्लीट फुलफिलस लग रही है आज की लाइव चर्चा की

1989
02:23:54,720 --> 02:23:58,760
और भाई प्यारी बहना जी से हमारे समर्थक अगर कभी कुछ प्रश्न करना चाहे तो

1990
02:23:58,760 --> 02:24:03,120
कर सकते हैं आने वाले टाइम में तोव अपना एक्सपीरियंस आपको शेयर करेंगी

1991
02:24:03,120 --> 02:24:07,120
आपको बताएंगे कौन-कौन से मैंने तर्क दिए मेरी मां से कैसे क्या

1992
02:24:07,120 --> 02:24:11,200
प्रश्न उत्तर हुए वो सब किसी दिन इनके साथ बैठेंगे बात करेंगे है ना

1993
02:24:11,200 --> 02:24:16,040
छोटी बहन जी किसी दिन बताइएगा कौन से त है ना

1994
02:24:16,040 --> 02:24:20,920
किसी दिन कौन कौन से जहा पर

1995
02:24:20,920 --> 02:24:25,000
जिनको लगता है ना हां ये थी मंदिर में

1996
02:24:25,000 --> 02:24:29,040
पहले ये मंदिर में थी भाई देख लो मंदिर से हट चुकी है

1997
02:24:29,040 --> 02:24:33,080
देख लो भाई और मैं

1998
02:24:33,080 --> 02:24:37,480
हल्का सा एक थोड़ा सा पोशन मंदिर का भी दिखा देती हू ता

1999
02:24:37,480 --> 02:24:38,200
एक चीज ध्यान देने

2000
02:24:38,200 --> 02:24:42,320
वाली है इसमें फोटो में एक चीज ध्यान देने वाली है कि कबीर दास जी की

2001
02:24:42,320 --> 02:24:46,440
बाकी जितने भी है उनकी जो तस्वीर है छोटी है और जो रामपाल जी की तस्वीर बड़ी

2002
02:24:46,440 --> 02:24:50,520
है देखो और सेंटर में है जी

2003
02:24:50,520 --> 02:24:54,720
अब वो तो वो सेंट्रल वो जेल वहा की सेंट्रल जेल

2004
02:24:54,720 --> 02:24:58,760
है कि नहीं है य बताओ सेंट्रल नहीं है क्या

2005
02:24:58,760 --> 02:25:04,240
कहां पर है ये यह रामपाल जी कहां

2006
02:25:04,240 --> 02:25:09,000
पर बिहार में जीहा

2007
02:25:09,000 --> 02:25:13,880
सेंट्रल ल है हा जी सेंट्रल है सेंट्रल

2008
02:25:13,880 --> 02:25:18,760
हो सकता है इसी वजह से हो खैर उनका अपना मत है

2009
02:25:18,760 --> 02:25:23,680
कि वो कहां रखे अपने फोटो को अच्छा वो

2010
02:25:23,680 --> 02:25:27,760
ठीक है किसी दिन हम ये शेयर करते हैं कि क्या तर्क वितर्क रहे जो आपके घर

2011
02:25:27,760 --> 02:25:31,960
में वो चेंज आए यह फोटो जो है मंदिर से निकल कर के वहां पहुंची जहा इसको

2012
02:25:31,960 --> 02:25:36,080
पहुंचना चाहिए था और भगवान की फोटो वहां पहुंची जहां उनको होना चाहिए

2013
02:25:36,080 --> 02:25:40,280
था तो हम किसी दिन इन सब बारे में बात करेंगे आपका सबका

2014
02:25:40,280 --> 02:25:44,280
आने का आभार समय देने का आभार जी

2015
02:25:44,280 --> 02:25:48,440
भया मंदिर का पोर्शन भी दिखाऊ थोड़ा सा हल्का सा हा हा थोड़ा मंदिर

2016
02:25:48,440 --> 02:25:52,520
का पोर्शन भी दिखा दीजिए अच्छा मैं म्यूट रहूंगी अभी क्योंकि मैं अपने रूम

2017
02:25:52,520 --> 02:25:53,800
से बाहर जा रही हूं

2018
02:25:53,800 --> 02:25:58,560
तो मूट बिल्कुल बिल्कुल देख

2019
02:25:58,560 --> 02:26:02,640
लीजिए रामपाल जी के शिष्य यहां स्क्रिप्टेड नहीं

2020
02:26:02,640 --> 02:26:06,640
होता है आपके सतलोक की तरह कि वहीं भगत को जगत

2021
02:26:06,640 --> 02:26:10,760
वाला बना दिया और कुछ भगत वाले बन गए य स्क्रिप्टेड

2022
02:26:10,760 --> 02:26:14,920
नहीं होता है क्योंकि हम झूठे नहीं है ना हम सनातन नहीं है

2023
02:26:14,920 --> 02:26:18,920
जी तो इतनी क्षमता नहीं है कि आप एक बार चर्चा करने के लिए

2024
02:26:18,920 --> 02:26:22,080
नहीं आ पा रहे हो

2025
02:26:22,080 --> 02:26:26,440
इनको अब मत लो किसी को बहस उसके लिए चर्चा के लिए मत लो क्योंकि अब बढ़ाना

2026
02:26:26,440 --> 02:26:31,360
है लाइव को हो गया टाइम ये आए हैं

2027
02:26:31,360 --> 02:26:35,720
कुछ यह देखिए भैया मंदिर में चेंज आ चुका है देख

2028
02:26:35,720 --> 02:26:40,560
लो

2029
02:26:40,560 --> 02:26:46,560
हेलो शेर पर सवार मेरी शेरों वाली

2030
02:26:48,160 --> 02:26:52,920
मां अब इसमें एक कैच है

2031
02:26:52,920 --> 02:26:57,000
आपने इतना निरुत्तर कर दिया है कि इनकी अ हिम्मत नहीं आ रही हो रही कि

2032
02:26:57,000 --> 02:27:00,480
आपसे कैसे चर्चा कर करी

2033
02:27:00,480 --> 02:27:04,520
जाए ठीक है आप सभी को समय देने के लिए आभार आप

2034
02:27:04,520 --> 02:27:08,720
सबका मैं कुछ बोलू मैं बस आप लास्ट

2035
02:27:08,720 --> 02:27:13,280
बोल दीजिए बोल दीजिए बोल दीजिए प्यारी बहन को जल्दी से अच्छा सा कुछ बता

2036
02:27:13,280 --> 02:27:17,480
दीजिए प्यारी बहना जी मैं लास्ट टाइम जब मैं आया था

2037
02:27:17,480 --> 02:27:21,880
आपने जैसे बताया कि हनुमान जी को लेकर इन्होने मतलब हनुमान जी की फोटो निकाली

2038
02:27:21,880 --> 02:27:26,000
दीदी आपने बोला था अभी मैं एक हनुमान जी के ऊपर मैंने लास्ट टाइम

2039
02:27:26,000 --> 02:27:30,400
जब आया था मैंने एक पंक श्रीवास जी को सुनाई थी अभी वो भी मैं कुछ सुनाऊंगा लाइने

2040
02:27:30,400 --> 02:27:34,600
इससे पहले मैं बता दूं कि भैया जो उसके पहले की जो लाइव का जो इन्होंने

2041
02:27:34,600 --> 02:27:38,720
अपना वो फ्लैशबैक जो बताया उसको जो वीडियो में आपने डाला था उसके लिए तो अलग

2042
02:27:38,720 --> 02:27:42,960
से धन्यवाद लेकिन उसमें भी जो इनके लोग है फॉलोअर्स है वो ये दीदी

2043
02:27:42,960 --> 02:27:47,000
को मतलब उल्टा सीधा बोल रहे हैं कमेंट्स में मैंने तो पहले ही लिख दिया था कि अगर इतना सब

2044
02:27:47,000 --> 02:27:52,120
कहने सुनने के बाद भी आप ये सब डींगे हागे तो आपको एकदम शर्म आनी चाहिए

2045
02:27:52,120 --> 02:27:55,760
मगर एक बात कहूं मैं आपको जी अगर यहीं पर

2046
02:27:55,760 --> 02:27:59,760
अलंकार समाज होता तो अब तक वह अभद्रता पर उतर

2047
02:27:59,760 --> 02:28:04,000
आता बिल्कुल यह कम से कम मैं ऐसा देख रहा हूं

2048
02:28:04,000 --> 02:28:08,000
रामपाल के जो फॉलोअर्स है यह कहीं ना कहीं इनम

2049
02:28:08,000 --> 02:28:12,200
अभी वो थोड़ा सा जैसे नहीं अ मर्यादा जो आ जाती है वो नहीं करते

2050
02:28:12,200 --> 02:28:16,840
य लोग इसके लिए मैं आप लोगों को आप लोगों की प्रशंसा करूंगा

2051
02:28:16,840 --> 02:28:22,160
कि आप लोगों में इतना एडिक्ट है कि आप आप मतलब एथिकल रहते

2052
02:28:22,160 --> 02:28:26,200
हैं तो ये चीज अच्छी है वो धरातल प कितना ये नहीं पता

2053
02:28:26,200 --> 02:28:30,720
मगर हां आपके जो कमेंट्स होते हैं वो उतने ज्यादा

2054
02:28:30,720 --> 02:28:34,840
मर्यादा के बाहर नहीं जाते हैं ठीक है अगर

2055
02:28:34,840 --> 02:28:39,040
आप लाइफ को एंड कर ना तो तो दीदी

2056
02:28:39,040 --> 02:28:43,160
आप भी सुनिए मैंने लास्ट टाइम जब मैं आया था मैंने हनुमान जी के ऊपर दो लाइने मैंने

2057
02:28:43,160 --> 02:28:47,400
आपको सुनाई थी तो प्रभु की कृपा से मतलब हनुमान जी ने कृपा की है कि वो मतलब

2058
02:28:47,400 --> 02:28:51,400
तीन चार लाइने उसमें और ऐड हो गई आप सबको सुनाऊ मैं हां सुनाइए

2059
02:28:51,400 --> 02:28:55,720
सुनाइए आप सब सुनिए दीदी आप भी सुनिए अच्छा लगेगा आपको

2060
02:28:55,720 --> 02:29:00,080
एक चीज और पूरी फैमिली की घर वापसी हो चुकी है क्या

2061
02:29:00,080 --> 02:29:04,080
जी जी जी हो रही है व स्ना स्थापना तो

2062
02:29:04,080 --> 02:29:08,560
हो ही गई है धीरे धीरे और चेंस आएंगे आप अपनी पंक्ति सुनाइए ठीक

2063
02:29:08,560 --> 02:29:12,000
है आप सब सुनिए दीदी आप

2064
02:29:12,000 --> 02:29:16,280
सुनिए प्रभु ने कृपा कर दी जिनकी शक्ति और भक्ति का कभी

2065
02:29:16,280 --> 02:29:20,280
नहीं लगता अनुमान जिनकी शक्ति और भक्ति का कभी नहीं लगता

2066
02:29:20,280 --> 02:29:24,400
अनुमान राम नाम की जो अलग जगाए उनको कहते हैं हनुमान वो

2067
02:29:24,400 --> 02:29:28,560
जिन्होंने एक छलांग में सागर को है पार किया वो जिन्होंने एक छलांग

2068
02:29:28,560 --> 02:29:32,680
में सागर को है पार किया रघुनंदन की छाया बनकर असरों का संहार

2069
02:29:32,680 --> 02:29:36,800
किया लक्ष्मण को जब शक्ति लगी तब द्रोण गिरी को उठा लाए लक्ष्मण

2070
02:29:36,800 --> 02:29:41,000
को जब शक्ति लगी तब द्रोण गिरी को उठा लाए सियाराम के कष्टों को हरकर

2071
02:29:41,000 --> 02:29:45,640
संकट मोचन कहलाए ऐसे भक्त शिरोमणि के चरणों में बारंबार प्रणाम

2072
02:29:45,640 --> 02:29:49,640
ऐसे भक्त शिरोमणि के चरणों में बारंबार प्रणाम जिनके मुख में हर पल

2073
02:29:49,640 --> 02:29:53,880
रहता बस अपने श्री राम का नाम जिनकी शक्ति और भक्ति का कभी नहीं लगता

2074
02:29:53,880 --> 02:29:58,040
अनुमान राम नाम की जो अलग जगह है उनको कहते हैं

2075
02:29:58,040 --> 02:30:02,040
हनुमान क्या बा जय श्री राम जय हनुमान

2076
02:30:02,040 --> 02:30:07,720
बसे लिखते

2077
02:30:07,720 --> 02:30:11,120
रहि बहुत

2078
02:30:11,120 --> 02:30:15,200
बढ़िया प्रभु ने कृपा की है बहुत अच्छा बहुत

2079
02:30:15,200 --> 02:30:19,960
ज्यादा अच्छा थैंक य

2080
02:30:19,960 --> 02:30:24,000
अनु शेयर कीजिएगा इसी चैनल में डालिए य और लोगों के लिए भी

2081
02:30:24,000 --> 02:30:28,080
अच्छा होगा वो अमित दस ग फिर से हमारे ऊपर

2082
02:30:28,080 --> 02:30:32,160
खिचड़ी पका रहे होंगे लाइव कर रहे होंगे ठीक है तो सभी को आने

2083
02:30:32,160 --> 02:30:36,760
के लिए आभार प्यारी बहना के साथ फिर किसी दिन जुड़ते हैं शश

2084
02:30:36,760 --> 02:30:41,120
भया हा शिवाया कल मेरे को स्कन डेल्ली वालों ने अपनी क्लासेस

2085
02:30:41,120 --> 02:30:45,360
में बुलाया है क्वेश्चन पूछने के लिए तो मैं आपको रिकॉर्डिंग करके

2086
02:30:45,360 --> 02:30:50,760
भेजूंगा ठीक है भ सभी को जय श्री राम

2087
02:30:50,760 --> 02:30:54,920
जय जय हनुमान गसाई कृपा कर गुद गुरुदेव की ई किसी

2088
02:30:54,920 --> 02:30:59,040
भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त हमसे संपर्क करें किसी प्रकार की

2089
02:30:59,040 --> 02:31:03,080
सहायता के निमित्त हमसे संपर्क करें धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए

2090
02:31:03,080 --> 02:31:07,200
हमसे संपर्क करें नामा आस्त्र अभियान में नाम जप करने के लिए हमसे

2091
02:31:07,200 --> 02:31:13,000
जुड़े हमसे संपर्क करें संपर्क करने के लिए 7408

2092
02:31:13,000 --> 02:31:17,200
30169 सभी को जय श्री राम

2093
02:31:17,200 --> 02:31:21,830
रामचंद्र की ज जय आ

2094
02:31:21,830 --> 02:31:25,830
[संगीत]
