1
00:00:01,140 --> 00:00:07,140
[संगीत]

2
00:00:09,360 --> 00:00:13,240
जय श्री राम सभी को

3
00:00:13,240 --> 00:00:17,520
और आशा करते हैं आप सभी कुशल मंगल

4
00:00:17,520 --> 00:00:23,520
होंगे आज का टॉपिक आप जानते ही

5
00:00:24,240 --> 00:00:28,960
हैं और मुख्य विषय पर आने से

6
00:00:28,960 --> 00:00:34,960
पहले कुछ उथल-पुथल हो रही है

7
00:00:35,040 --> 00:00:39,320
कुछ असहनीय समाचार प्राप्त हो रहे हैं बांग्लादेश

8
00:00:39,320 --> 00:00:43,480
से और हम बिल्कुल भी वहां पर जो अत्याचार हो रहा है जो

9
00:00:43,480 --> 00:00:47,480
हिंदू हैं हिंदुओं के ऊपर जो अत्याचार हो रहा है वो भले

10
00:00:47,480 --> 00:00:51,560
इस कौन से जुड़े हैं किससे जुड़े हैं स्वयं को हिंदू कहते हैं वेद

11
00:00:51,560 --> 00:00:55,560
प्रमाण बुद्धि है तो ऐसी सिचुएशन में हम उनके

12
00:00:55,560 --> 00:01:00,040
साथ हैं और हमें कई बार ये प्रश्न हो रहे हैं कि

13
00:01:00,040 --> 00:01:04,200
क्या हमें अ उनका समर्थन करना चाहिए

14
00:01:04,200 --> 00:01:08,320
इस तरह के प्रश्न आ रहे हैं ा इत्यादि पर

15
00:01:08,320 --> 00:01:12,600
तो मैं उन लोगों को यह बताना चाहता हूं कि भाई हमारे जो भी वैचारिक

16
00:01:12,600 --> 00:01:16,560
मतभेद हैं वेदों में परमाण बुद्धि रखने वालों के

17
00:01:16,560 --> 00:01:20,640
वो हमारे आंतरिक मामले हैं मगर

18
00:01:20,640 --> 00:01:24,800
जब बात ऐसी आएगी कि कोई हिंदू होने के नाम पर मंदिर जाने वाले के नाम

19
00:01:24,800 --> 00:01:29,440
पर वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले के नाम पर

20
00:01:29,440 --> 00:01:33,480
आपको को क्षति पहुंचाना चाहता है या आपके

21
00:01:33,480 --> 00:01:37,480
उस व्यक्ति को क्षति पहुंचाना चाहता है

22
00:01:37,480 --> 00:01:41,480
जो वेदों में प्रमाण बुद्धि रखता है मगर वेदों के अर्थ को लेकर के आपका उससे

23
00:01:41,480 --> 00:01:45,520
वैचारिक मतभेद तो क्ति पहुंचाने

24
00:01:45,520 --> 00:01:49,560
पहुंचाने देते समय यदि आप चुप है ये ध्यान रखिए कि अगली बारी

25
00:01:49,560 --> 00:01:53,600
आपकी है तो आपको उनकी रक्षा के बारे में सोचना

26
00:01:53,600 --> 00:01:58,280
चाहिए और यथा सामर्थ्य प्रयास करना चाहिए और

27
00:01:58,280 --> 00:02:02,320
संदेश है हम लोगों का भी यदि इस बारे में किसी प्रकार से हम कहीं

28
00:02:02,320 --> 00:02:07,800
पर निमित्त बन सकते हैं तो हमें

29
00:02:07,800 --> 00:02:12,040
बहुत स्वयं को सौभाग्यशाली समझेंगे

30
00:02:12,040 --> 00:02:16,520
तो हमारी प्रार्थना है ईश्वर से कि वहां पर

31
00:02:16,520 --> 00:02:20,520
जो इन स्थितियों का सामना कर रहे हैं

32
00:02:20,520 --> 00:02:25,880
उनको भगवान व बल दे शक्ति दे जिससे कि

33
00:02:25,880 --> 00:02:28,200
वो

34
00:02:28,200 --> 00:02:34,200
उनका सामना कर स उन स्थितियों

35
00:02:40,800 --> 00:02:45,000
और एक और विषय था कि इन लोगों

36
00:02:45,000 --> 00:02:49,440
ने एक वो जो अंडर कवर्ड एजेंट है गुंडा है

37
00:02:49,440 --> 00:02:53,520
जो उसने भी एक लाइव की उसमें कुछ फिर से कुतर किए

38
00:02:53,520 --> 00:02:58,480
संभवतः जो हमारा अंतिम जो

39
00:02:58,480 --> 00:03:02,480
लाइव जो रामपाल को लेकर के ही एक लाइव थी उसमें हमने

40
00:03:02,480 --> 00:03:06,880
उत्तर दिया था कि भाई उनका जो अंतिम संदेश है उसमें उन्होंने क्या लिखा है क्या नहीं लिखा

41
00:03:06,880 --> 00:03:10,920
है तो उसके कुछ आंशिक वो जो उनको

42
00:03:10,920 --> 00:03:14,960
मालूम नहीं है कि हम उत्तर दिया भी है उनका जो अंतिम पत्र है उसका भी हमने

43
00:03:14,960 --> 00:03:19,520
उत्तर दिया है यह बात उस गुंडे को नहीं मालूम है जो अलंकार समाज का एक

44
00:03:19,520 --> 00:03:23,280
अनऑफिशियल गुंडा है जिसको वक्त आने पर

45
00:03:23,280 --> 00:03:27,400
स्वयं को आर्य समाज कहने वाली जो संस्थाएं हैं वह अपना

46
00:03:27,400 --> 00:03:31,960
मानने से मना कर देती है

47
00:03:31,960 --> 00:03:36,520
खैर उसने जो लाइव की उसमें कुछ छोटे मोटे कुतर्क थे

48
00:03:36,520 --> 00:03:39,720
उनमें से एक कुतर्क था

49
00:03:39,720 --> 00:03:45,280
कि स्वामी जी ने हमको ट

50
00:03:45,280 --> 00:03:49,840
पर सबसे पहले तो मैं यह बता दूं कि र

51
00:03:49,840 --> 00:03:53,840
पर स्वामी जी हमको मैसेज भेजते हैं उससे पहले

52
00:03:53,840 --> 00:03:57,840
हमको पता चले उसे हमें पता नहीं चलता क्योंकि हम उतना सक्रिय नहीं है यह बात हमने

53
00:03:57,840 --> 00:04:01,840
वहां लिखी भी है स्वामी जीी को अपने पत्रों में बताई भी है जो

54
00:04:01,840 --> 00:04:05,960
अलंकार समाज की ओर से हमें पत्र भेज रहे थे तो उनको ये बातें

55
00:04:05,960 --> 00:04:11,960
हमने बताई भी है कि हम

56
00:04:29,840 --> 00:04:33,960
लिया होगा ये अनाथ जिसका

57
00:04:33,960 --> 00:04:38,280
पिता कौन है य पता नहीं है ये जो अनऑफिशियल गुंडा है

58
00:04:38,280 --> 00:04:42,360
तो उसका नाम भी क्या है य भी किसी को नहीं पता है

59
00:04:42,360 --> 00:04:46,640
बेनाम बादशाह तो उसने

60
00:04:46,640 --> 00:04:50,640
हमारी वो स्टोरी जो है ले ली वहां से स्क्रीनशॉट

61
00:04:50,640 --> 00:04:54,920
ले लिया और फिर स्क्रीनशॉट लेकर

62
00:04:54,920 --> 00:04:59,120
के और अपनी वहां पर दिखा

63
00:04:59,120 --> 00:05:03,280
रहा है वीडियो पर कि यह देखो स्क्रीनशॉट इसमें ये कह रहा है

64
00:05:03,280 --> 00:05:09,280
कि स्वामी जी मुझे सबसे पहले बताते हैं जबकि मुझे तो उनके twittersignin.com

65
00:05:29,800 --> 00:05:34,640
जो तुमको मिल गई स्वामी जी का कहना है कि

66
00:05:34,640 --> 00:05:38,680
कुछ लोग कहते हैं कि यह आएगा नहीं यह जो है भाग जाएगा यह है वो है

67
00:05:38,680 --> 00:05:43,120
वो वो व्यक्ति कौन है स्वामी जी का वो आप ही हो तुम ही

68
00:05:43,120 --> 00:05:47,240
हो तुम्हारे झूठ तो कितनी बार साफसाफ पकड़े

69
00:05:47,240 --> 00:05:51,400
जा चुके हैं तुम्हारी संस्था के व्यक्ति

70
00:05:51,400 --> 00:05:55,560
ने हमसे यह कहा कि वो जो ऋषि उवा

71
00:05:55,560 --> 00:05:59,680
चैनल है वो हम ही चलाते हैं उसके बाद पत्र में यह लिख दिया कि हम

72
00:05:59,680 --> 00:06:03,680
हम जानते ही नहीं ऋषि वाज को कौन है झूठा कौन

73
00:06:03,680 --> 00:06:07,680
है दोगला भाई इन सब बातों को छुपा लोगे क्या

74
00:06:07,680 --> 00:06:11,760
और तुम अनदेखा कर सकते हो तुम्हारे जो अंध भक्त है वो अं अनदेखा

75
00:06:11,760 --> 00:06:15,760
कर सकते हैं हम लोग थोड़ी ना करेंगे

76
00:06:15,760 --> 00:06:19,840
तो एक तरफ तुम कह रहे हो कि स्वामी जी से तुम्हारे को सामग्री डायरेक्ट

77
00:06:19,840 --> 00:06:24,160
प्राप्त नहीं होती फिर दूसरी ओर तुम हमारी और स्वामी जी की ट चैट

78
00:06:24,160 --> 00:06:28,240
की जो स्क्रीन रिकॉर्डिंग है वो दिखा रहे हो लोगों को ये क्या है है

79
00:06:28,240 --> 00:06:32,440
ना और तुम शिष्टाचार के लिए शिष्टाचार के ऊपर जो है लाइव

80
00:06:32,440 --> 00:06:38,280
करते हो शिष्टाचार तुम शुरुआत कौन करने वाला है शिष्टाचार को तोड़ने

81
00:06:38,280 --> 00:06:42,400
वाला तुम्हारा यह कहना है कि हमारे जो श्री कृष्ण ऐसे

82
00:06:42,400 --> 00:06:44,840
हैं ऐसे हैं उनको तुम ऐसा बताते हो भाई मान लो

83
00:06:44,840 --> 00:06:48,840
ना कि जो श्री कृष्ण जिसको तुम मानते हो वो हमारे अलग है तुम्हारे अलग है यही

84
00:06:48,840 --> 00:06:52,960
मान लो मगर अपमान

85
00:06:52,960 --> 00:06:57,080
करना आवश्यक है तिरस्कार करना आवश्यक है क्योंकि हमारा

86
00:06:57,080 --> 00:07:02,200
जो अस्तित्व पान सेही है अपमान करके ही काम चलेगा

87
00:07:02,200 --> 00:07:06,320
ना अपमान करने के लिए ही तो तुम्हारी जो यह प्रकाश

88
00:07:06,320 --> 00:07:10,880
नाम की किताब है जिसमें सिर्फ अंधेरा और कुछ

89
00:07:10,880 --> 00:07:14,920
नहीं उसमें सिर्फ अंधेरा और कुछ नहीं

90
00:07:14,920 --> 00:07:19,080
है परमेश्वर है नहीं पूर्णेश्वर है नहीं

91
00:07:19,080 --> 00:07:23,200
दयालु है नहीं न न्याय कारी है नहीं कुछ तो कुछ तो सिद्ध हो नहीं

92
00:07:23,200 --> 00:07:27,280
रहा अरे तुम तो गायत्री मंत्र का भी वो नहीं बता पाओगे गायत्री

93
00:07:27,280 --> 00:07:32,080
मंत्र का उपयोग है कि नहीं तुम्हारे यहां जिसके नाम पर तुम अपने सीधी भर्ती करते हो

94
00:07:32,080 --> 00:07:36,800
बचपन में वो नेवी फोर्स इत्यादि के कुछ फॉर्म आते थे

95
00:07:36,800 --> 00:07:41,000
उसमें लिखा रता ऊपर सीधी भर्ती है ना

96
00:07:41,000 --> 00:07:45,400
तो इनके यहां भी सीधी भर्ती होती है अलंकार समाज में गायत्री मंत्र और उपनयन

97
00:07:45,400 --> 00:07:49,800
के आधार पर सीधी भर्ती तो

98
00:07:49,800 --> 00:07:55,720
यह सारी चीजें हैं उसमें अंधेरा है और कुछ नहीं है

99
00:07:55,720 --> 00:08:00,160
तो कितना तुम्हारे अंदर शिष्टाचार है कितना तुम पंडे

100
00:08:00,160 --> 00:08:04,200
पाखंड ये सब जो बोला करते हो सब नहीं सोचते किसको बोल रहा

101
00:08:04,200 --> 00:08:08,360
हूं है ना तो शिष्टाचार की बात

102
00:08:08,360 --> 00:08:12,440
आप हमें मत सिखाइए आपके आपका ना तो आप सत्यवादी

103
00:08:12,440 --> 00:08:18,440
है ना ही आप शिष्ट व्यक्ति है

104
00:08:19,040 --> 00:08:23,160
अच्छा एक बात और है हां तुम्हारे चैनलों पर तुम क्याक करते हो जो

105
00:08:23,160 --> 00:08:27,240
वहां पर वो जो वो जो बंगाली भाई साहब बैठे हैं आपके

106
00:08:27,240 --> 00:08:31,640
साथ गपशप करने के लिए बंगाली भाई साहब भी वहां पर बता

107
00:08:31,640 --> 00:08:35,720
बात बड़ी शिष्टाचार की कर रहे भाई तुम अपने चैनल जो आपने जो टेलीग्राम ग्रुप

108
00:08:35,720 --> 00:08:39,840
बना रखे हैं ना उस पर कौन-कौन सी कस किस किस प्रकार की किसकिस

109
00:08:39,840 --> 00:08:44,240
के लिए कब कब भाषा का उपयोग करते हो सब पता है

110
00:08:44,240 --> 00:08:48,440
बस हम उन बातों को उन बातों पर बात करने वाले व्यक्ति नहीं

111
00:08:48,440 --> 00:08:53,000
है हमें सिद्धांतों पर बात करनी है जिससे कि समाज में बदलाव

112
00:08:53,000 --> 00:08:57,440
आए हमें उसमें वो नहीं है

113
00:08:57,440 --> 00:09:01,440
आसक्ति कि भैया हमने अपने आप को जिता हमने सामने वाले गलत

114
00:09:01,440 --> 00:09:05,600
साबित कर दिया उसमें आसक्ति नहीं है अच्छा एक चीज

115
00:09:05,600 --> 00:09:11,600
और थी छोटी सी

116
00:09:11,800 --> 00:09:16,360
कि एक छोटी सी चीज और थी कि इन्होंने कहा था

117
00:09:16,360 --> 00:09:20,440
कि हां हमने वहां पर यह कहा स्वामी

118
00:09:20,440 --> 00:09:24,560
जी से चैट में कि भाई स्वामी जी

119
00:09:24,560 --> 00:09:28,600
जब आप हमसे ट पर संपर्क कर रहे हैं डायरेक्टली तो आप

120
00:09:28,600 --> 00:09:33,320
सबसे पहले अपना पीडीएफ जो है लेटर का वो हमें भेजा करिए आप आप ये

121
00:09:33,320 --> 00:09:37,480
वहा र पर क्यों डालते हैं पहले पहले अन्यों को पता चलता है बाद में हमें पता चलता है जबक

122
00:09:37,480 --> 00:09:41,480
आपसे यहां पर हम डायरेक्ट टच में है तो स्वामी जी ने पहले का कोई

123
00:09:41,480 --> 00:09:45,960
भेजा हुआ लेटर को टैक करके हमें दिखा दिया है ना

124
00:09:45,960 --> 00:09:50,080
टैक करके स्वामी जी ने हमें दिखा दिया अच्छा यह सारी चीजें भी सुनियोजित

125
00:09:50,080 --> 00:09:54,200
थी जो उनको गाइड किया होगा कि भाई ऐसे ऐसे करते रहे ना तो

126
00:09:54,200 --> 00:09:58,240
उन्होंने पहले का दिया हुआ लेटर में टैक करके दिखा दिया हमने वहां

127
00:09:58,240 --> 00:10:02,280
पर उस जो उने टैग करके हमें जो दिखाया हमने वहां

128
00:10:02,280 --> 00:10:06,320
पर उस टैग किए हुए संदेश

129
00:10:06,320 --> 00:10:10,480
के लिए क्वेश्चन मार्क भेजा कि ये हमें क्यों दिखा रहे हो स्वामी जी उससे प्रूव

130
00:10:10,480 --> 00:10:14,880
करना चाह रहे होंगे कि देखो देखो हमने तुम्हें यहां पर दिया तो था

131
00:10:14,880 --> 00:10:20,880
अंतिम लेटर मान लीजिए फोर्थ नंबर का लेटर हमें स्वामी जी ने सीधे twittersignin.com

132
00:10:29,560 --> 00:10:33,760
तो स्वामी जी ने क्या किया पहले का पड़ा हुआ चैट में कोई लेटर था उसको टैक करके देखो

133
00:10:33,760 --> 00:10:37,760
यह दिखाने के लिए देखो हमने तुम्ह लेटर यहां भी दिया है जबकि वो लेटर वो वाला

134
00:10:37,760 --> 00:10:42,000
था ही नहीं वो थर्ड लेटर को ही दिखा रहे देखो हमने वो फोर्थ लेटर

135
00:10:42,000 --> 00:10:46,120
थर्ड लेटर को ही दिखा रहे देखो हमने तुम्हे यही पर दिया है और मैं वहां

136
00:10:46,120 --> 00:10:50,200
पर जब उन्होंने वो टैक किया तो मैं उसम प्रश्न कर रहा हूं यह क्यों दिखा रहे

137
00:10:50,200 --> 00:10:54,320
हो मुझे थर्ड लेटर तो उसका कोई जवाब नहीं आया अब

138
00:10:54,320 --> 00:10:58,680
मैं उस चीज पर अटका नहीं दूसरी बातें चलने लगी तो इस बात को ये जो

139
00:10:58,680 --> 00:11:02,720
बना बादशाह है वो कह

140
00:11:02,720 --> 00:11:07,400
रहा है देखो इसने स्वामी जी से एक बात और घुमाने की कोशिश की

141
00:11:07,400 --> 00:11:11,640
वो क्या कि भाई जब इसने

142
00:11:11,640 --> 00:11:15,720
कहा कि भाई मुझे यहां पर आप क्यों नहीं दे रहे हो तो स्वामी जी ने वहां पर उसको फोर्थ

143
00:11:15,720 --> 00:11:20,000
लेटर का टैक करके संदेश थर्ड का नहीं फोर्थ लेटर का टैक करके मतलब

144
00:11:20,000 --> 00:11:25,000
अंतिम लेटर को जिस लेटर के बारे में सवाल उठा रहा हूं उसी लेटर को टैक कर करके

145
00:11:25,000 --> 00:11:29,320
दिखाया और देखो इसने तुरंत बात बदल दी और दूसरी बातें करने लगा मैंने

146
00:11:29,320 --> 00:11:33,520
बात नहीं बदली तुमने अपनी लाइव स्ट्रीम में यह नहीं दिखाया कि जब उन्होंने

147
00:11:33,520 --> 00:11:37,600
वो गलत चीज को टैक करके मुझे जवाब देने का प्रयास किया तो मैंने वहां

148
00:11:37,600 --> 00:11:41,880
एक क्वेश्चन मार्क भी दिया था है ना तुमने वो नहीं दिखाया

149
00:11:41,880 --> 00:11:44,680
तुम तो तुम तुम अपनी अत आत्मा में झांक

150
00:11:44,680 --> 00:11:48,920
के देखो ऋषि उवाच जिस नाम से तुम जाने

151
00:11:48,920 --> 00:11:53,160
जाते हो अपनी अंतर आत्मा में झांक के देखो तुम्हें हमसे जीतने

152
00:11:53,160 --> 00:11:57,360
के लिए तुम्हारी नजरों में जीतना है तुम्हें हमसे जीतने के लिए

153
00:11:57,360 --> 00:12:01,800
झूठ का सहारा लेना पड़ रहा है और कितना नीचे

154
00:12:01,800 --> 00:12:05,920
गिरोगे अरे अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए तुम झूठ बोलना पड़

155
00:12:05,920 --> 00:12:10,280
रहा है कैसे सिद्धांत है

156
00:12:10,280 --> 00:12:15,080
तुम्हारे नीच कहीं

157
00:12:15,080 --> 00:12:19,280
के चलिए मुख्य विषय पर आते हैं आज

158
00:12:19,280 --> 00:12:23,440
हमारे पास इनकी एक हाथ लगी है गीता तेरा

159
00:12:23,440 --> 00:12:27,640
ज्ञान अमृत ये लोग आपने देखा होगा जो वीडियो वगैरह बनाते हैं ना इस तरह चिट लगाते

160
00:12:27,640 --> 00:12:33,040
रहते हैं तो हमने सो क्यों ना हम भी अब चेट लगाए हा

161
00:12:33,040 --> 00:12:37,040
तो कुछ मुख्य मुख्य बातें आज आपको पता चलने वाली है इंटरेस्टिंग

162
00:12:37,040 --> 00:12:41,200
है जो काफी तो सबसे पहले इनकी ओर से क्लेम किया

163
00:12:41,200 --> 00:12:45,440
जाता है कि जो कबीर है अभी कुछ देर पहले भी इनका

164
00:12:45,440 --> 00:12:50,120
एक कसन नाम का व्यक्ति है वह गोरखपुर

165
00:12:50,120 --> 00:12:54,480
जो गोरखनाथ जी महाराज है उनका चित्र अपने

166
00:12:54,480 --> 00:12:58,640
उसमें लगाता है प्रोफाइल में और उनका

167
00:12:58,640 --> 00:12:59,680
चित्र गा कर के

168
00:12:59,680 --> 00:13:03,800
कमेंट करता है कबीर के पक्ष के ये जो राम पाली है इनके पक्ष

169
00:13:03,800 --> 00:13:07,800
का व कमेंट करता रहता उसका ही अभी मुझे एक कमेंट प्राप्त

170
00:13:07,800 --> 00:13:11,920
हुआ थोड़ी देर पहले जो दिन में ईश्वर स शक्तिमान वाला वीडियो आया ना

171
00:13:11,920 --> 00:13:16,120
जो जिसमें साहब सिंह की पोल खुली है तो उसमें ही

172
00:13:16,120 --> 00:13:20,440
इसने कमेंट किया है कि भगवान जो है गर्भ में नहीं आ सकता

173
00:13:20,440 --> 00:13:24,440
इसके पक्ष में अपनी बात रखी है व तो भगवान गर्भ में नहीं

174
00:13:24,440 --> 00:13:29,680
आ सकता आज यही से शुरू करेंगे भगवान गर्भ में आ सकता है कि नहीं

175
00:13:29,680 --> 00:13:34,120
तो इनका कहना है कि भगवान जो ईश्वर

176
00:13:34,120 --> 00:13:40,000
है परमात्मा व गर्भ गर्भ गर्भ में नहीं आ सकता

177
00:13:40,000 --> 00:13:45,080
अच्छा तो सबसे पहले तो

178
00:13:45,080 --> 00:13:49,320
यह बात करते हैं कि चार उनके रूप में आते हैं

179
00:13:49,320 --> 00:13:54,200
संतों के रूप में समय समय पर व पेज दिखा दीजिए भैया संतों

180
00:13:54,200 --> 00:14:00,200
वाला चार संतों के रूप में य आते हैं

181
00:14:00,560 --> 00:14:03,840
जो कबीर

182
00:14:03,840 --> 00:14:08,520
है चार संतों के रूप में आते हैं जितने भी संतों के रूप में आते हैं

183
00:14:08,520 --> 00:14:12,720
मगर आते हैं तो सुकृत ऋषि के उसमें आते हैं रूप

184
00:14:12,720 --> 00:14:15,680
में आते हैं

185
00:14:15,680 --> 00:14:20,600
और और भी कुछ संतों का नाम है जिनके रूप में वह

186
00:14:20,600 --> 00:14:26,600
आते हैं

187
00:14:30,920 --> 00:14:35,000
अब जब आते हैं अगर सुकृत ऋषि वाली बात कर

188
00:14:35,000 --> 00:14:37,720
ले

189
00:14:37,720 --> 00:14:41,760
तो सुकृत ऋषि के रूप में आते

190
00:14:41,760 --> 00:14:46,000
हैं और वह वामदेव जी उनका नाम रखा जाता है तो वामदेव जी का नाम

191
00:14:46,000 --> 00:14:50,160
जहां से प्रकरण लेते हैं वहीं पर लिखा है कि वामदेव

192
00:14:50,160 --> 00:14:54,880
जी माता के गर्भ से उत्पन्न होते हैं दिखा दीजिए इनको व पेज

193
00:14:54,880 --> 00:15:00,880
वामदेव जी माता के गर्भ से उत्पन्न होते हैं

194
00:15:03,240 --> 00:15:07,880
बंदी छोड़ किसे कहते हैं जिसका ब्रेक अप हुआ हो अरे

195
00:15:07,880 --> 00:15:10,880
यह क्या बात बंदी

196
00:15:10,880 --> 00:15:15,400
छोड़ने से इनका मतलब होता है कि

197
00:15:15,400 --> 00:15:18,200
भाई

198
00:15:18,200 --> 00:15:22,720
देखिए सद ग्रंथों को वेदों को गीता जी को समझ नहीं

199
00:15:22,720 --> 00:15:28,720
सके पुणा आत्माओ पवित्र चारों वेद और प

200
00:15:31,280 --> 00:15:35,600
वह प्रमाण दिखा दीजिए जो शिव पुराण का एक फोटो

201
00:15:35,600 --> 00:15:39,840
है जिसमें की जहां पर यह बता रहे हैं कि वामदेव आए थे उनका

202
00:15:39,840 --> 00:15:44,080
जो शास्त्रार्थ हुआ था मनु महाराज से और फिर वह जो है

203
00:15:44,080 --> 00:15:48,120
वो तो वामदेव को यह बता रहे हैं कि जो वामदेव आए थे

204
00:15:48,120 --> 00:15:52,120
ये सत सुकृत ऋषि थे सत

205
00:15:52,120 --> 00:15:56,320
सुकृत थे जो कबीर ही थे जो आए थे उनके रूप में तो आप

206
00:15:56,320 --> 00:16:00,320
देखिए कि परमात्मा इनका जो है गर्भ से उत्पन्न

207
00:16:00,320 --> 00:16:04,600
होता है और चार वो भी थे

208
00:16:04,600 --> 00:16:08,800
चार नाम बताए गए हैं

209
00:16:08,800 --> 00:16:13,080
जो गर्भ से उत्पन्न होने के संबंध में

210
00:16:13,080 --> 00:16:17,320
चार पांच संतों के रूप में आते हैं इनके परमात्मा और वह सारे संत

211
00:16:17,320 --> 00:16:21,720
गर्भ से उत्पन्न होते हैं और फिर वह मृत्यु को भी प्राप्त होते हैं

212
00:16:21,720 --> 00:16:24,920
तो यह वामदेव जी

213
00:16:24,920 --> 00:16:25,920
का

214
00:16:25,920 --> 00:16:29,160
जो प्रमाण है

215
00:16:29,160 --> 00:16:35,160
वो आपको अभी यहां पर हम दिखा रहे हैं

216
00:16:59,960 --> 00:17:03,040
क्या हुआ भाई नहीं दिखाएंगे

217
00:17:03,040 --> 00:17:08,880
क्या मुझे ही पुराण खोलना

218
00:17:08,880 --> 00:17:14,520
पड़ेगा कहां चले गए ऑपरेटर

219
00:17:14,520 --> 00:17:18,680
जी र एक वीडियो है जिसमें कि

220
00:17:18,680 --> 00:17:22,720
यह बात करते हैं कि बताते हैं वामदेव

221
00:17:22,720 --> 00:17:26,760
के बारे में उसी में बताते हैं और उसी में ही लिखा है इवन

222
00:17:26,760 --> 00:17:31,800
य बोलते भी है अपने मुख से ही कि जो

223
00:17:31,800 --> 00:17:35,920
परमात्मा है वह अलग-अलग रूपों में आया है और उनमें से एक वो सुकृत

224
00:17:35,920 --> 00:17:40,160
ऋषि का है रूप शायद गुरु नानक भी है उसी में तो यह सभी

225
00:17:40,160 --> 00:17:44,280
शायद गरीब दास जी भी है उसी में से एक तो यह सभी वही

226
00:17:44,280 --> 00:17:50,280
लोग हैं जो क्या कहते हैं मैं एक मिनट देख ही लेता हूं

227
00:19:01,720 --> 00:19:06,160
तो चलिए तब तक जब तक वो प्राप्त हो रहा है

228
00:19:06,160 --> 00:19:10,280
तब तक हम लोग और भी चीज देख ले एक चीज सामने आई

229
00:19:10,280 --> 00:19:14,440
थी मेरे विष्णु सहस्त्र नाम

230
00:19:14,440 --> 00:19:18,960
विष्णु जी का नाम काल भी है है ना महाभारत

231
00:19:18,960 --> 00:19:23,160
से है य विष्णु सहस्त्र नाम और विष्णु जी का नाम काल

232
00:19:23,160 --> 00:19:27,440
भी है मैं अभी थोड़ी देर में दिखा दूंगा तो आदरणीय

233
00:19:27,440 --> 00:19:31,480
धर्मदास जी आदरणीय मलूक दास जी आदरणीय नानक

234
00:19:31,480 --> 00:19:35,520
देव साहब जी आदरणीय दादू साहब जी आदरणीय गरीब

235
00:19:35,520 --> 00:19:41,000
दास साहेब जी

236
00:19:41,000 --> 00:19:44,840
और यह सब अवतार

237
00:19:44,840 --> 00:19:49,000
है झज्जर वाले तथा आदरणीय घीसा दास

238
00:19:49,000 --> 00:19:53,280
साहब जी गांव येव और यह सब परम अक्षर

239
00:19:53,280 --> 00:19:57,880
ब्रह्म सत्पुरुष के अवतार थे अब भाई

240
00:19:57,880 --> 00:20:02,840
यह सभी लोग लगभग लगभग इनकी जानकारी प्राप्त है

241
00:20:02,840 --> 00:20:07,600
यह सब माता के गर्भ से उत्पन्न होने वाले थे परम अक्षर

242
00:20:07,600 --> 00:20:11,760
ब्रह्म सत्य पुरुष के अवतारों की जानकारी यानी कि य

243
00:20:11,760 --> 00:20:15,920
गर्भ में आता है गर्भ से उत्पन्न होता है अवतार

244
00:20:15,920 --> 00:20:20,000
लेता है ठीक है माता के गर्भ अब एकदम वो वाला

245
00:20:20,000 --> 00:20:24,560
वो दिखा दीजिए जरा जो शिव पुराण में जोय वामदेव का

246
00:20:24,560 --> 00:20:29,800
वो दिखा रहे हैं जो प्रकट

247
00:20:29,800 --> 00:20:34,560
ये देखिए माता के गर्भ से बाहर निकलते हैं

248
00:20:34,560 --> 00:20:38,640
कहां से आते हैं माता के

249
00:20:38,640 --> 00:20:42,760
गर्भ से बाहर नि कबीर जी को उस सत सुकृत

250
00:20:42,760 --> 00:20:47,040
रूप में प्रकट सत सुकृत नाम से प्रगट परमेश्वर को

251
00:20:47,040 --> 00:20:51,680
वाम देव कहने लाग उनका त्मक

252
00:20:51,680 --> 00:20:56,440
नाम वामदेव रख दिया पूर्व काल में

253
00:20:56,440 --> 00:21:00,120
कल्प में महामुनि वामदेव

254
00:21:00,120 --> 00:21:05,360
माता के गर्भ से बाहर निकलते ही सेवता के

255
00:21:05,360 --> 00:21:11,360
ठीक है बस इतना काफी

256
00:21:12,160 --> 00:21:16,240
तो क्या क्या अर्थ निकला इनकी ल कोई

257
00:21:16,240 --> 00:21:20,880
एक बात ही नहीं है जो सत्य सिद्ध हो जाए इनकी

258
00:21:20,880 --> 00:21:25,040
कोई भी ऐसी बात नहीं होती है लगभग लगभग हर बात ये झूठ ही बोलते

259
00:21:25,040 --> 00:21:29,560
हैं हर बात झूठ बोलते हैं अब ऐसी

260
00:21:29,560 --> 00:21:33,760
श्रंखला में हम लोग एक बात करते हैं

261
00:21:33,760 --> 00:21:36,720
कि

262
00:21:36,720 --> 00:21:40,920
अ आज हम इनकी ये ऐसे ही दिखते हैं ना

263
00:21:40,920 --> 00:21:45,240
आपको तो हमने भी इनकी किताबों में ही चिर चिपकाना

264
00:21:45,240 --> 00:21:49,480
शुरू कर दिया है ना टट फॉर टेट

265
00:21:49,480 --> 00:21:53,600
तो इनकी यह जो गीता तेरा ज्ञान अमृत

266
00:21:53,600 --> 00:21:57,600
है इससे हमें एक बहुत मजे की बात पता चली है आनंद लीजिए अब इसमें कुछ

267
00:21:57,600 --> 00:22:01,800
वैसा ऐसा नहीं है कि आपको कोई ब्रह्म ज्ञान प्राप्त होना जिसको

268
00:22:01,800 --> 00:22:05,960
एंटरटेनमेंट करना हो वो वो एंटरटेनिंग पार्ट है पता

269
00:22:05,960 --> 00:22:10,040
करते रहिए सब चीज हमने पहले ही खोल के दिखा द है बस आनंद

270
00:22:10,040 --> 00:22:14,240
प्राप्त करिए तो क्या है क्या आनंद

271
00:22:14,240 --> 00:22:18,280
है भाई इनके ही अनुसार इनके

272
00:22:18,280 --> 00:22:23,080
ही अनुसार परमात्मा इनका जो कबीर है

273
00:22:23,080 --> 00:22:27,440
वो यह बोल रहा है कि गीता का ज्ञान किसने दिया है परमात्मा

274
00:22:27,440 --> 00:22:31,760
विष्णु ने हां परमात्मा कृष्ण ने

275
00:22:31,760 --> 00:22:36,000
कौन बोल रहा है इनका कबीर कहां पर बोल रहा है इनकी किताब

276
00:22:36,000 --> 00:22:41,520
में इनकी किताब को किसने लिखा इन्होंने ठीक

277
00:22:41,520 --> 00:22:46,000
है तो इससे ज्यादा

278
00:22:46,000 --> 00:22:50,080
बड़ा तमाचा भरा प्रमाण और

279
00:22:50,080 --> 00:22:54,160
कौन सा मिलेगा इनके लिए तो भैया इनको गीता तेरा

280
00:22:54,160 --> 00:23:00,160
ज्ञान अमृत का पेज दिखाइए

281
00:23:04,280 --> 00:23:09,360
52 बुक के हिसाब से इसमें

282
00:23:09,360 --> 00:23:15,360
प्रश्न नंबर 32

283
00:23:17,800 --> 00:23:21,840
है प्रश्न नंबर जो प्रश्न दिख रहे हो ना उनमें 32 नंबर प्रश्न पर

284
00:23:21,840 --> 00:23:27,840
आ जाइए

285
00:23:28,640 --> 00:23:34,640
यह कबीर कह रहे हैं धर्मदास से प्रश्न नंबर

286
00:23:41,200 --> 00:23:45,400
32 प्रश्न नंबर 32 है क्या पेज थोड़ा

287
00:23:45,400 --> 00:23:51,400
सा आगे पीछे होगा आपका और मेरा प्रश्न प्रश्न चेक कर

288
00:23:54,520 --> 00:24:00,520
लीजिए 32 प्रश्न है

289
00:24:05,760 --> 00:24:09,880
प्रश्न

290
00:24:09,880 --> 00:24:14,080
नंबर यह धर्मदास जी और कबीर दास जी के बीच में बातें

291
00:24:14,080 --> 00:24:18,280
हो रही है गी नहीं आप किसम

292
00:24:18,280 --> 00:24:24,280
है गीता तेरा ज्ञान अमृत में किसम

293
00:24:24,600 --> 00:24:26,920
है

294
00:24:26,920 --> 00:24:31,400
हम तो प्रश्न नंबर हां ठीक है

295
00:24:31,400 --> 00:24:35,920
इसमें लगभग पहुंच है ये शंका समाधान में जो प्रश्न नंबर 32

296
00:24:35,920 --> 00:24:40,120
है ना उस वहां पहुंचना है हमें और

297
00:24:40,120 --> 00:24:45,560
आगे चलिए हां ये तो ज्यादा आगे आ गए क्या

298
00:24:45,560 --> 00:24:50,440
83 पीछे है

299
00:24:50,440 --> 00:24:56,440
पीछे पीछे जाइए

300
00:24:59,320 --> 00:25:03,360
हां भाई फैक्ट भाई अरुण प्रश्न 47 पर

301
00:25:03,360 --> 00:25:07,400
आ गए आ जाओ भाई थोड़ा बता दो गीता का ज्ञान किसने

302
00:25:07,400 --> 00:25:13,400
दिया

303
00:25:15,960 --> 00:25:20,760
है आज नहीं आएंगे अब इनकी बोलती बंद होने लगी

304
00:25:20,760 --> 00:25:24,920
ना क्या हुआ बोल तो रहा हूं

305
00:25:24,920 --> 00:25:29,160
32 32 नंबर प्रश्न पर जाइए 32 यह

306
00:25:29,160 --> 00:25:35,160
21 हैय 32 पर

307
00:25:43,080 --> 00:25:48,200
जाइए धीरे-धीरे चलिए नहीं निकल जाएगा

308
00:25:48,200 --> 00:25:52,240
गीता तेरा ज्ञान अमृत का 5 पर नहीं 100

309
00:25:52,240 --> 00:25:58,240
पर ज्ञान काल नहीं दिया है

310
00:26:01,400 --> 00:26:05,600
यह बात अपने लिए भी तो सोचनी चाहिए भाई जब तुम हमारी ग्रंथों को पढ़

311
00:26:05,600 --> 00:26:10,000
पढ़ के बताते हो हम भी तो कह सकते हैं कि तुम गलत पढ़ के बता रहे

312
00:26:10,000 --> 00:26:14,360
हो तब नहीं सोचते न्याय नहीं है अन्याय

313
00:26:14,360 --> 00:26:18,800
है हां भाई यह देखिए जिंदा बाबा के रूप में भगवान

314
00:26:18,800 --> 00:26:23,120
जी का इनको पीछे से दिखा दो जिंदा बाबा कौन है जरा

315
00:26:23,120 --> 00:26:29,120
पीछे 29 नंबर में लिखा है कबीर जी जिंदा रूप में

316
00:26:29,320 --> 00:26:34,240
पीछे 31 वा दिखा दो जिंदा जिंदा बाबा के रूप में परमात्मा का ब्रैकेट

317
00:26:34,240 --> 00:26:38,320
ऊपर दिखाओ थोड़ा सा पीछे जाओ हल्का सा ज्यादा पीछे

318
00:26:38,320 --> 00:26:43,480
चले गए हल्का सा पीछे जाना था वापस

319
00:26:43,480 --> 00:26:47,600
आइए परमात्मा जिंदा वेश में नहीं वो तो ठीक

320
00:26:47,600 --> 00:26:51,800
है बिल्कुल 31 वो 31 नंबर जब प्रश्न शुरू

321
00:26:51,800 --> 00:26:56,000
हो रहा है ना तो वहीं पर ब्रैकेट में लिखा है हा ये जिंदा बाबा

322
00:26:56,000 --> 00:26:58,600
रूप में परमात्मा ठीक है

323
00:26:58,600 --> 00:27:02,920
तो यह जिंदा बाबा रूप में परमात्मा है तो 32 में क्या कह रहे परमात्मा देखिए

324
00:27:02,920 --> 00:27:07,880
ध्यान से गीता का ज्ञान किसने दिया

325
00:27:07,880 --> 00:27:12,720
है राम पाली फॉलोअर्स ध्यान से देखें हे

326
00:27:12,720 --> 00:27:16,720
धर्मदास गीता शास्त्र आपके परमपिता

327
00:27:16,720 --> 00:27:20,920
भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु जी का अनुभव तथा

328
00:27:20,920 --> 00:27:25,160
आपको आदेश है कि इस गीता शास्त्र

329
00:27:25,160 --> 00:27:29,160
में लिखे मेरे अनुभव को पढ़कर इसे इसके भक्ति करोगे

330
00:27:29,160 --> 00:27:33,800
तो मोक्ष प्राप्त होगा किसका आदेश है भाई कृष्ण का

331
00:27:33,800 --> 00:27:37,880
विष्णु का गीता शास्त्र वह भी

332
00:27:37,880 --> 00:27:42,800
परमपिता भगवान है क्या कर रहे हो यह

333
00:27:42,800 --> 00:27:46,880
ऐसे नहीं करना चाहिए था तीर दर्शी जी कितना गलत लिख दिया

334
00:27:46,880 --> 00:27:51,120
आपने ऐसे नहीं करना चाहिए खैर होगा

335
00:27:51,120 --> 00:27:55,560
कोई माइका लाल जो आ कर के जवाब देगा इन बातों का य क्या लिखा

336
00:27:55,560 --> 00:27:59,720
है तो गीता का ज्ञान किसने

337
00:27:59,720 --> 00:28:04,240
दिया परमात्मा ने परमपिता परमपिता

338
00:28:04,240 --> 00:28:08,560
विष्णु कृष्ण ने दिया उनका आदेश है

339
00:28:08,560 --> 00:28:12,720
कि इसके अनुसार तुम्हें चलना है ठीक है तो ये

340
00:28:12,720 --> 00:28:13,640
रामपाल ही

341
00:28:13,640 --> 00:28:17,640
अपनी जिस डाल पर बैठे हैं ज्ञान गंगा की डाल प

342
00:28:17,640 --> 00:28:21,720
गीता तेरा ज्ञान अमृत की डाल प जिस डाल पर वो बैठे हैं उसी डाल को वो स्वयं

343
00:28:21,720 --> 00:28:25,720
ही काट के गए हैं जगह-जगह से वैसे काटना होता है

344
00:28:25,720 --> 00:28:29,800
वैराग्य रूपी शस्त्र द्वारा वो माया रूपी

345
00:28:29,800 --> 00:28:33,840
जो वृक्ष है संसार का उसके मूल को काटना होता है मगर यहां व उस पर तो जा

346
00:28:33,840 --> 00:28:39,440
नहीं पाए वैराग वगैरह तो है नहीं तोय अपने को ही काट के गए हैं जगह

347
00:28:39,440 --> 00:28:43,560
जगह अरे भाई यह क्यों ना खोले फैक्ट बाई

348
00:28:43,560 --> 00:28:48,280
अरुण यह यह क्या गलत लिखा है तुम्हारे तत्वदर्शी ने

349
00:28:48,280 --> 00:28:52,280
इसका क्या करें वो भी तत्वदर्शी अपनी ओर से नहीं

350
00:28:52,280 --> 00:28:56,320
बोल रहा है परमेश्वर की ओर से बोल रहा है कि परमेश्वर ने बोला कि

351
00:28:56,320 --> 00:29:00,320
गीता जो है परमपिता विष्णु कृष्ण द्वारा दिया

352
00:29:00,320 --> 00:29:04,840
गया आदेश है क्या करोगे इसका बहुत

353
00:29:04,840 --> 00:29:10,840
बहुत

354
00:29:10,920 --> 00:29:13,120
ज्यादा

355
00:29:13,120 --> 00:29:17,200
हा तुम तुम बड़ा व्यवस्थित रूप से पढ़ते हो ना पुराण

356
00:29:17,200 --> 00:29:22,080
को शुरू से लेकर अंत तक है ना टीवी चैनल्स

357
00:29:22,080 --> 00:29:26,240
पर अच्छा जाने से पहले एक वो इनको वीडियो और दिखा

358
00:29:26,240 --> 00:29:29,520
दीजिए इसी बात पर

359
00:29:29,520 --> 00:29:34,480
इसी बात पर एक वीडियो और दिखा दीजिए भाई इनको वो क्या वीडियो

360
00:29:34,480 --> 00:29:38,960
है जिसमें कोई डाउट ना रह जाए कि गीता

361
00:29:38,960 --> 00:29:43,600
जो ज्ञान है वह परमात्मा नेही दिया है वो वीडियो दिखा दीजिए इनको

362
00:29:43,600 --> 00:29:47,640
ज्ञान है ऐसी बातें नहीं करते कच्ची गोलिया नहीं खेलते हम

363
00:29:47,640 --> 00:29:52,080
आत्मा पवित्र चारों वेद और पवित्र श्रीमद् भगवत गीता ये गड

364
00:29:52,080 --> 00:29:56,200
गिवन स्पिरिचुअल नॉलेज है ये परमात्मा का

365
00:29:56,200 --> 00:30:01,920
दिया हुआ आध्यात्मिक ज्ञान है

366
00:30:01,920 --> 00:30:06,800
किसका दिया हुआ ज्ञान है भैया हेलो

367
00:30:06,800 --> 00:30:12,080
ू स्टॉप द ट्रेन पुल द

368
00:30:12,080 --> 00:30:17,200
चैन अब क्या करें तत्वदर्शी झूठ बोल रहा

369
00:30:17,200 --> 00:30:23,200
है

370
00:30:24,760 --> 00:30:30,760
हा तो

371
00:30:32,960 --> 00:30:37,000
तो ठीक है भाई अब इनका एक नया मामला आ गया है कि

372
00:30:37,000 --> 00:30:41,320
अब इनको इससे मतलब नहीं है कि इनका तिरछा दर्शी स्वयं बोल रहा है कि यह परमात्मा

373
00:30:41,320 --> 00:30:45,400
का दिया हुआ ज्ञान है इनका तिरछा दर्शी स्वयं लिख रहा है कि

374
00:30:45,400 --> 00:30:49,520
भाई कबीर ने कहा कि जो गीता का ज्ञान

375
00:30:49,520 --> 00:30:53,680
है वह जो है विष्णु ने कृष्ण ने बोला अब इसको

376
00:30:53,680 --> 00:30:57,680
दूसरी बातों से मतलब है ये इतनी टाइम लगती है क्या तेरे

377
00:30:57,680 --> 00:31:01,720
को क्या पेज निकालने में कहां का ज्ञानी यह सब

378
00:31:01,720 --> 00:31:05,880
इनके पास रह गया है विषय से हटकर बातें हैं इनके

379
00:31:05,880 --> 00:31:10,800
पास बस चलिए दूसरा कुछ निकालते हैं है

380
00:31:10,800 --> 00:31:15,280
ना दूसरा क्या निकालते हैं

381
00:31:15,280 --> 00:31:17,160
इनकी इनकी इन किताबों

382
00:31:17,160 --> 00:31:20,000
में ही बहुत सारा

383
00:31:20,000 --> 00:31:24,080
ऐसा ज्ञान है बहुत ही उत्कृष्ट स्तर

384
00:31:24,080 --> 00:31:28,960
का जिसको आप अच्छा

385
00:31:28,960 --> 00:31:33,640
अब देखिए गीता तेरा ज्ञान अमृत पृष्ठ

386
00:31:33,640 --> 00:31:37,720
संख्या है मेरे पास जो इनकी छपी हुई है पुरानी है शायद थोड़ा

387
00:31:37,720 --> 00:31:41,880
बहुत पष्ट संख्या में आगे पीछे होगा पर प्रश्न नंबर

388
00:31:41,880 --> 00:31:47,880
ये 34 है जिसमें कि इन्होंने माना है

389
00:31:48,240 --> 00:31:52,240
कि गीता अध्याय

390
00:31:52,240 --> 00:31:56,520
17 श्लोक 23 [प्रशंसा] में

391
00:31:56,520 --> 00:32:01,120
यह कहा गया है कि

392
00:32:01,120 --> 00:32:05,160
सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की

393
00:32:05,160 --> 00:32:09,200
प्राप्ति के लिए ओम तत्सत इस मंत्र

394
00:32:09,200 --> 00:32:13,440
का निर्देश है इसके इसके

395
00:32:13,440 --> 00:32:17,560
स्मरण की विधि तीन प्रकार से है

396
00:32:17,560 --> 00:32:22,240
तो परम अक्षर ब्रह्म प्राप्ति के लिए क्या बताया है

397
00:32:22,240 --> 00:32:26,760
ओम तत्सत और यह गीता अध्याय 17

398
00:32:26,760 --> 00:32:30,800
2 के हिसाब से ठीक है तो यह कहा गया

399
00:32:30,800 --> 00:32:34,880
है 17 2 में अब 17 को

400
00:32:34,880 --> 00:32:38,920
आप छोड़ तो सकते नहीं हो गलत तो है नहीं वह तो यह परम

401
00:32:38,920 --> 00:32:43,280
अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए है यह मान लिया तो क्या हुआ

402
00:32:43,280 --> 00:32:47,720
यानी कि व जो प्रणव तत्सत वाला मंत्र है वह

403
00:32:47,720 --> 00:32:52,240
लेना है कि नहीं लेना है व हमने अपनी उसम व्याख्या में भी कहा कि भाई

404
00:32:52,240 --> 00:32:56,240
ठीक है अगर वो ले भी लिया तो उस पर बहुत सी बातें हैं मगर यह

405
00:32:56,240 --> 00:33:00,640
यही बोल रहे हैं कि गीता में परम ब्रह्म की प्राप्ति के लिए

406
00:33:00,640 --> 00:33:04,680
मंत्र ज्ञान दिया गया है तो इनकी व वाली बातें सब गलत हो जाती है कि

407
00:33:04,680 --> 00:33:09,480
गीता में जो भक्ति बताई गई है वह केवल ब्रह्म तक की है

408
00:33:09,480 --> 00:33:13,800
ठीक है क्योंकि यह खुद मान रहे हैं कि गीता में कहा

409
00:33:13,800 --> 00:33:16,120
गया है कि परम अक्षर

410
00:33:16,120 --> 00:33:20,320
ब्रह्म की प्राप्ति के लिए फलाना फलाना मंत्र का निर्देश है यह गीता

411
00:33:20,320 --> 00:33:26,320
में कहा गया है यह उन्होने खुद मान लिया देखो

412
00:33:28,640 --> 00:33:31,120
यह

413
00:33:31,120 --> 00:33:35,760
देखो कहा गया है कि है ना

414
00:33:35,760 --> 00:33:39,480
और फिर आ जाओ इधर

415
00:33:39,480 --> 00:33:43,760
अर्थात ये घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर

416
00:33:43,760 --> 00:33:49,080
ब्रह्म की प्राप्ति के लिए

417
00:33:49,080 --> 00:33:53,280
है यानी परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए गीता

418
00:33:53,280 --> 00:33:57,360
ज्ञान देने का दावा करती है भले ही उसको मानते हैं कि

419
00:33:57,360 --> 00:34:01,400
नहीं मानते वो बात एक अलग है मगर वोह दावा करती वो यह नहीं कहती

420
00:34:01,400 --> 00:34:05,440
कि उस उसको प्राप्त करने की विधि मेरे पास नहीं है ये इन्हीं की बात से कट रही

421
00:34:05,440 --> 00:34:09,480
है क्योंकि 17 2 में कह रहे हैं कि भाई परम अक्षर ब्रह्म

422
00:34:09,480 --> 00:34:15,480
की प्राप्ति के लिए है यह खुद ही लिख रहे हैं और

423
00:34:17,480 --> 00:34:22,160
देखिए क्या नाम रखे इनकी इस

424
00:34:22,160 --> 00:34:27,040
हम दिखा दीजिए इनको ये प्रश्न ठीक से देख लेंगे

425
00:34:27,040 --> 00:34:31,560
ये है पृष्ठ संख्या 56 के आसपास है

426
00:34:31,560 --> 00:34:35,560
56 55 के आसपास और इसमें प्रश्न नंबर 34

427
00:34:35,560 --> 00:34:41,560
का उत्तर दे रहे हैं कबीर साहब वहां पर

428
00:34:42,240 --> 00:34:48,240
है प्रश्न नंबर 34

429
00:34:49,320 --> 00:34:55,320
का प्रश्न 34 ढूंढ लीजिए बस

430
00:35:05,120 --> 00:35:09,280
अभी कौन सा चल रहा है हां

431
00:35:09,280 --> 00:35:13,440
प्रश्न 34 ये देखिए ये आ गया तो क्या

432
00:35:13,440 --> 00:35:17,720
कहा गया है गीता अध्याय 17 श्लोक

433
00:35:17,720 --> 00:35:22,080
23 में कहा गया है कि सच्चिदानंद गन

434
00:35:22,080 --> 00:35:26,480
ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए फलाना फलाना

435
00:35:26,480 --> 00:35:30,600
मंत्र का निर्देश है यानी गीता यह दावा कर रही है कि हमारे

436
00:35:30,600 --> 00:35:35,320
पास उसकी पूर्ण भक्ति का ज्ञान है अब तुम नहीं मान रहे हो तो बात अलग है

437
00:35:35,320 --> 00:35:39,320
मगर गीता य दावा कर रही है तो तुम जो कर रहे हो या

438
00:35:39,320 --> 00:35:43,600
कह रहे हो व गीता के विरुद्ध कर रहे हो क्योंकि गीता तुम्हारे

439
00:35:43,600 --> 00:35:48,240
हिसाब से कह रही है कि परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति का ज्ञान यह है

440
00:35:48,240 --> 00:35:54,240
ठीक है यह भी तुम्हारी बात गलत हो

441
00:35:55,760 --> 00:36:01,760
गई अच्छा और देखते हैं और क्या है इनके

442
00:36:03,360 --> 00:36:09,360
मामले इनकी बहुत सी चीजें पकड़ में आई है एक एक करके चलते

443
00:36:09,560 --> 00:36:13,600
हैं यह लोग बहुत रामायण इत्यादि

444
00:36:13,600 --> 00:36:17,640
पर बात करते हैं अच्छा ब्रह्म

445
00:36:17,640 --> 00:36:22,320
काल की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा है सा ठीक है

446
00:36:22,320 --> 00:36:26,440
और यह है भी कि ब्रह्म काल किसी को प्राप्त नहीं होता वह सदैव अव्यक्त रहता

447
00:36:26,440 --> 00:36:31,200
है व अपने वास्तविक रूप में किसी के पास किसी के सामने आता नहीं

448
00:36:31,200 --> 00:36:34,240
है

449
00:36:34,240 --> 00:36:38,240
तो नीरज दास महेंद्रजीत जी मैं

450
00:36:38,240 --> 00:36:43,560
आ तो जाऊंगा पर इनको इनके शास्त्र से समझाना पड़ेगा मेरे पास गरुण पुराण

451
00:36:43,560 --> 00:36:47,760
है भाई आप कुछ भी बात लेकर के आइए आप कुछ भी सिद्ध

452
00:36:47,760 --> 00:36:52,720
नहीं कर पाएंगे आप ले आइए गरुण पुराण ले आइए आप शास्त्र नाम

453
00:36:52,720 --> 00:36:57,000
बताइए अब इसमें य कह रहा है कि ब्रह्म काल जो है वो स्वयं

454
00:36:57,000 --> 00:37:01,280
यह कह रहा कि मैं अव्यक्त रहूंगा मैं कभी प्रकट नहीं होऊंगा

455
00:37:01,280 --> 00:37:05,680
और यह है वह है मगर गीता

456
00:37:05,680 --> 00:37:10,920
अध्याय 11 श्लोक 47 तथा 48 में यह मेरा वास्तविक काल रूप

457
00:37:10,920 --> 00:37:15,240
है ठीक है तो यह अर्जुन

458
00:37:15,240 --> 00:37:19,680
को उसने प्रकट कर दिया तो पहली बात तो य झूठ बोलता है काल क्यों

459
00:37:19,680 --> 00:37:23,800
झूठ तो उसका कई बार सिद्ध हो रहा है मगर यहां पर भी

460
00:37:23,800 --> 00:37:27,920
य सिद्ध हो रहा है इसने वो लिया और इनके के

461
00:37:27,920 --> 00:37:31,960
ग्रंथों में कई जगह लिखा है कि काल का वास्तविक स्वरूप कोई देख नहीं

462
00:37:31,960 --> 00:37:36,000
सकता वो तभी देखा जा सकता है जब वो उनको

463
00:37:36,000 --> 00:37:40,200
जीवा आत्माओं को खा रहा होगा वो भी उसकी भक्ति करने वालों

464
00:37:40,200 --> 00:37:44,240
को तब देख सकता है तो यहां पर और एक

465
00:37:44,240 --> 00:37:48,240
जगह ये भी लिखा है कि भक्ति करने वालों को भी काल नहीं मिलता तो उल्टा पुल्टा

466
00:37:48,240 --> 00:37:49,360
खूब लिखा है

467
00:37:49,360 --> 00:37:53,560
मगर फिलहाल क्या है कि काल की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा है ठीक

468
00:37:53,560 --> 00:37:57,600
है मगर काल 1147 में खुद को व्यक्त भी कर रहा है

469
00:37:57,600 --> 00:38:01,880
कि यह मेरा वास्तविक स्वरूप है ये देखो काल

470
00:38:01,880 --> 00:38:07,160
की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा

471
00:38:07,160 --> 00:38:12,680
और 1147 में यह मेरा

472
00:38:12,680 --> 00:38:17,320
वास्तविक काल रूप है पढ़ लिया

473
00:38:17,320 --> 00:38:21,440
पढ़ लिया होगा तब तक आप नीचे लिंक दे

474
00:38:21,440 --> 00:38:27,440
दीजिए कोई आना हो तो आ सकता है

475
00:38:29,280 --> 00:38:32,400
और

476
00:38:32,400 --> 00:38:37,360
सुनिए और क्या-क्या है बहुत सा है

477
00:38:37,360 --> 00:38:41,520
जितना पढ़ते जाएंगे ना इनकी किताबों को उतना ही इनकी किताबों

478
00:38:41,520 --> 00:38:47,520
का इनसे ही मिलता

479
00:38:48,440 --> 00:38:49,440
रहेगा

480
00:38:49,440 --> 00:38:55,440
हम

481
00:39:06,320 --> 00:39:06,880
और

482
00:39:06,880 --> 00:39:11,720
एक चीज और दिखाते हैं इनका 30 मार् खान

483
00:39:11,720 --> 00:39:17,160
पन स्वयं को बहुत बड़ा 30 मार्क हां समझते हैं

484
00:39:17,160 --> 00:39:21,560
तो गीता तेरा ज्ञान अमृत में

485
00:39:21,560 --> 00:39:26,200
जो आपने भेजा था हमको प्रकरण वश अर्थ

486
00:39:26,200 --> 00:39:29,640
उसमें ये लिख रहे हैं

487
00:39:29,640 --> 00:39:34,360
कि ब्रह्म का अर्थ जो है इन्होंने

488
00:39:34,360 --> 00:39:40,360
क्या लिया है देखते

489
00:39:45,000 --> 00:39:49,040
हैं हां यह सत्य है कि अक्षर का अर्थ

490
00:39:49,040 --> 00:39:53,360
अविनाशी होता है परंतु प्रकरण

491
00:39:53,360 --> 00:39:58,360
वर्ष अर्थ अन्य भी होता है यह है

492
00:39:58,360 --> 00:40:02,400
गीता तेरा ज्ञान अमृत

493
00:40:02,400 --> 00:40:08,400
और गीता तेरा ज्ञान अमृत और पृष्ठ संख्या

494
00:40:10,720 --> 00:40:15,160
है 17 16

495
00:40:15,160 --> 00:40:19,880
15 हां यह भी देख

496
00:40:19,880 --> 00:40:23,960
लीजिए यह जो कहते हैं ना कि सूक्ष्म वेद

497
00:40:23,960 --> 00:40:28,720
में मुक्ति का ज्ञान है तो ये कह रहे हैं

498
00:40:28,720 --> 00:40:32,720
ज्ञान गंगा में पृष्ठ संख्या पांच पर की

499
00:40:32,720 --> 00:40:36,880
कबीर साहब की जो वाणी है

500
00:40:36,880 --> 00:40:40,920
वेद गीता पुराण कुराण

501
00:40:40,920 --> 00:40:45,560
धर्मदास साहब जी आदि संतों की वाणी

502
00:40:45,560 --> 00:40:49,560
है ना इनमें भी मुक्ति नहीं है इनका अध्ययन से भी मुक्ति

503
00:40:49,560 --> 00:40:54,360
नहीं होगी इनके अध्ययन से

504
00:40:54,360 --> 00:40:58,920
मुक्ति नहीं होगी

505
00:40:58,920 --> 00:41:03,040
यह भी कह दिया इन्होंने नहीं नहीं बचे हैं कुछ

506
00:41:03,040 --> 00:41:07,600
राम पाली आए हैं आज आज कुछ है कुछ आए हैं भाई साहब

507
00:41:07,600 --> 00:41:13,360
रणजीत सिंह आए हैं कोई और आए तो थे चले गए

508
00:41:13,360 --> 00:41:17,520
क्या रणजीत सिंह जी अपना चेहरा दिखाएं अरे

509
00:41:17,520 --> 00:41:21,560
हम नहीं हम तो यह बोलने आए थे नीरज जी करके कोई थे

510
00:41:21,560 --> 00:41:25,600
उनको ऊपर बुला लो उनको ऊपर बुला लो वो जवाब देते हैं हमने

511
00:41:25,600 --> 00:41:29,920
इनसे पूछा था सुनो सुनो हमने इनसे

512
00:41:29,920 --> 00:41:33,960
हमने इनसे कहा था इनके सामने हमने एक चैलेंज रखा था इन लोगों के सामने

513
00:41:33,960 --> 00:41:38,120
कि हम इनके भक्त बन जाएंगे यार बट ये हमको ना हमारे जो

514
00:41:38,120 --> 00:41:42,400
चार वेद है छह वेदांत हैं और इसके बाद 108

515
00:41:42,400 --> 00:41:46,760
उपनिषद है 18 पुराण इनमें कहीं भी हमको जो है कबीर भगवान परमात्मा

516
00:41:46,760 --> 00:41:51,400
का कोई मंत्र हमको बता

517
00:41:51,400 --> 00:41:55,480
दीए और एक चीज हम बताए अभी बहुत अच्छी न्यूज है

518
00:41:55,480 --> 00:41:59,960
कि तीन हमारे मतलब हमारे एक मित्र थे वो जो है

519
00:41:59,960 --> 00:42:04,200
उनके रामपाल जी के चंगुल से हमारे यहां से भी मुक्त हो गए हैं ये बहुत अच्छी

520
00:42:04,200 --> 00:42:08,600
न्यूज है बहुत बढ़िया काफी दिन से काफी दिन से पगलाए

521
00:42:08,600 --> 00:42:13,040
हुए थे हमारे साथ ही थे वो जी जी थोड़ा सा

522
00:42:13,040 --> 00:42:17,640
मैं कहूंगा कि भाई वो नीरज जी है जो वो आए

523
00:42:17,640 --> 00:42:21,800
और नहीं हम हम देखो हमने एकदम

524
00:42:21,800 --> 00:42:25,800
इनको क्लियर कहा है यार हम आपके जो है आपकी हर बात मानने

525
00:42:25,800 --> 00:42:29,840
के लिए तैयार हैं बट आप कबीर इज गॉड यह हमको

526
00:42:29,840 --> 00:42:34,680
दिखा दो हमारे जो हम जिनको मानते हैं उसमें दिखा दो बस

527
00:42:34,680 --> 00:42:38,880
बाकी आपका ज्ञान गंगा क्या कहता है क्या कता

528
00:42:38,880 --> 00:42:43,480
है रमेश प्रजापति जी हा

529
00:42:43,480 --> 00:42:47,840
इस बात से हमने कभी इंकार नहीं किया कि हा कबीर जी ने अच्छे दोहे लिखे हैं उन्होंने

530
00:42:47,840 --> 00:42:51,880
पाखंड और आडंबर का वि किया है इस बात

531
00:42:51,880 --> 00:42:56,080
बात पूरी कर लू एक बात चल रही थी इन्होंने क्या है गीता तेरा

532
00:42:56,080 --> 00:43:00,120
ज्ञान अमृत में कहा कि अक्षर का अर्थ

533
00:43:00,120 --> 00:43:04,280
अविनाशी होता है परंतु प्रकरण वष

534
00:43:04,280 --> 00:43:06,880
अर्थ अन्य भी होता है

535
00:43:06,880 --> 00:43:10,960
गीता अध्याय 15 16 श्लोक में कहा है कि क्षर और अक्षर

536
00:43:10,960 --> 00:43:15,600
ये दो पुरुष होते हैं ठीक है

537
00:43:15,600 --> 00:43:20,400
और यहां पर इन्होंने

538
00:43:20,400 --> 00:43:24,800
परम ब्रह्म कहा है और अक्षर का अर्थ अविनाशी

539
00:43:24,800 --> 00:43:29,000
है परंतु यहां पर परम अक्षर ब्रह्म कहा जाएगा तो इन्होंने

540
00:43:29,000 --> 00:43:33,240
प्रकरण वष अर्थ अलग मान लिया

541
00:43:33,240 --> 00:43:37,360
अच्छा इसी प्रकार से इन्होंने प्रकरण वश जो अर्थ

542
00:43:37,360 --> 00:43:41,400
है वह क्या अलग माना है

543
00:43:41,400 --> 00:43:45,800
यहां पर जो ब्रह्मण शब्द आया है

544
00:43:45,800 --> 00:43:49,480
ब्रह्मण

545
00:43:49,480 --> 00:43:53,640
ये आठ लोक 17 है ना

546
00:43:53,640 --> 00:43:57,880
इसमें ब्रह्मण शब्द आया है तो उसका

547
00:43:57,880 --> 00:44:02,280
अर्थ इन्होंने ब्रह्मण का अर्थ सच्चिदानंद 17

548
00:44:02,280 --> 00:44:06,280
श्लोक 23 में ब्रह्मण का अर्थ सच्चिदानंद घन ब्रह्म किया

549
00:44:06,280 --> 00:44:10,320
है व अनुवाद कों ने ठीक किया है मगर आठ

550
00:44:10,320 --> 00:44:14,440
श्लोक 17 में ब्रह्मण का अर्थ अक्षर

551
00:44:14,440 --> 00:44:19,080
ब्रह्म बनता है मतलब यह स्वयं तय करेंगे

552
00:44:19,080 --> 00:44:23,440
कि कहां पर कौन सा अर्थ लेना है

553
00:44:23,440 --> 00:44:27,680
प्रकरण वश जो लिया जाता है मगर वहीं पर जब व्यक्ति

554
00:44:27,680 --> 00:44:31,480
प्रकरण

555
00:44:31,480 --> 00:44:35,520
वश इन्होंने ब्रह्मण का अर्थ एक जगह सच्चिदानंद परम

556
00:44:35,520 --> 00:44:39,960
परम ब्रह्म ले लिया और ब्रह्मण का ही अर्थ एक जगह ले लिया अक्षर ब्रह्म

557
00:44:39,960 --> 00:44:44,120
पूर्ण ब्रह्म नहीं लिया तो इन्होंने तय कर लिया यहां पर पूर्ण ब्रह्म नहीं है यहां

558
00:44:44,120 --> 00:44:48,120
पर पूर्ण ब्रह्म है मगर व्यक्ति इसी प्रकार से जब प्रकरण

559
00:44:48,120 --> 00:44:52,240
प्रकरण वश जब चार 32 में ब्रह्म का अर्थ वेद लेता

560
00:44:52,240 --> 00:44:57,160
है जो कि शास्त्रों में भी है ब्रह्म का अर्थ शब्द ब्रह्म कहा गया है वेदों को

561
00:44:57,160 --> 00:45:01,240
तो यह वहां पर कहते हैं नहीं नहीं यह ब्रह्म का अर्थ कैसे ले लिया इन्होंने चार

562
00:45:01,240 --> 00:45:05,120
32 इनको दिखाया

563
00:45:05,120 --> 00:45:09,320
जाए ब्रह्मण का अर्थ अक्षर ब्रह्म बनता है

564
00:45:09,320 --> 00:45:13,920
17 श्लोक 23 में ब्रह्मण का अर्थ सच्चिदानंद स्वरूप है

565
00:45:13,920 --> 00:45:18,640
सांकेतिक है ब्रह्मण का अर्थात सच्चिदानंद ब्रह्म की भक्ति है वो

566
00:45:18,640 --> 00:45:22,680
तो यह अपने मन से ब्रह्म का अर्थ कहीं पर भी सच्चिदानंद घन ब्रह्म ले

567
00:45:22,680 --> 00:45:27,680
सकते हैं और यह अपने अनुसार कहीं पर भी ब्रह्म का अर्थ अक्षर ब्रह्म

568
00:45:27,680 --> 00:45:31,680
ब्रह्म से थोड़ा छोटा वाला है ना वो बात और है कि निरुक्त में अक्षर

569
00:45:31,680 --> 00:45:35,760
ब्रह्म और परमात्मा सबको एक कहा गया है र वह सब

570
00:45:35,760 --> 00:45:40,120
बातें डिफेंड काफी कर चुके मगर फिलहाल जो लोक

571
00:45:40,120 --> 00:45:44,800
432 है उसमें जब

572
00:45:44,800 --> 00:45:49,040
देखिए अब उसमें उन्होंने जब ब्रह्म का अर्थ प्रकरण के अनुसार

573
00:45:49,040 --> 00:45:53,040
वेद किया है तो अनुचित है तो कुल मिलाकर

574
00:45:53,040 --> 00:45:57,040
के इन्होंने अनुचित कई बार कई तरीके से

575
00:45:57,040 --> 00:46:01,200
सिद्ध किया है कि इनका जो करने का प्रयास किया है कि इनका गीता

576
00:46:01,200 --> 00:46:06,440
का ट्रांसलेशन ट्रांसलेशन करने वालों का अर्थ जो है वो गलत है

577
00:46:06,440 --> 00:46:10,440
तो देखिए अगर आप उनको गलत कह

578
00:46:10,440 --> 00:46:14,440
रहे हैं तो आप स्वयं को सबसे पहले संस्कृत ज्ञ तो सिद्ध करिए

579
00:46:14,440 --> 00:46:18,840
आप तो संस्कृत ज्ञ नहीं है तो आप किस

580
00:46:18,840 --> 00:46:20,240
शब्द का कौन सा अर्थ

581
00:46:20,240 --> 00:46:24,320
लेना है कौन सी विभक्ति है कौन सा क्या है वो सब आपको कैसे

582
00:46:24,320 --> 00:46:28,400
पता कि उन्होंने सही किया कि गलत किया भाई

583
00:46:28,400 --> 00:46:32,640
अगर आप किसी के ट्रांसलेशन को गलत कह रहे हैं तो आपको ट्रांसलेशन करना

584
00:46:32,640 --> 00:46:38,640
आना चाहिए तभी तो आप किसी के ट्रांसलेशन को गलत कह सकते हैं

585
00:46:39,160 --> 00:46:43,640
र या फिर आपके पास सही ट्रांसलेशन

586
00:46:43,640 --> 00:46:47,640
हो किसी किसी का आपके पास सही ट्रांसलेशन हो तब

587
00:46:47,640 --> 00:46:52,080
आना चाहिए तो यह इनकी एक पोल है कि अपने मन से

588
00:46:52,080 --> 00:46:56,360
जहां पर भी प्रकरण के अनुसार लेना होगा ले लेंगे और अपने मन से जब

589
00:46:56,360 --> 00:47:00,600
जब कोई दूसरा व्यक्ति प्रकरण के अनुसार जब अर्थ लेगा तो ये कह देंगे अरे ब्रह्म

590
00:47:00,600 --> 00:47:04,640
का अर्थ देखिए वेद ले लिया इन्होंने अरे तुम जब ब्रह्म का अर्थ एक जगह

591
00:47:04,640 --> 00:47:09,000
अक्षर एक जगह परम अक्षर ले रहे हो तो दूसरा व्यक्ति ब्रह्म

592
00:47:09,000 --> 00:47:13,280
का अर्थ शास्त्रों में दिए गए शब्दों के हिसाब से शब्द ब्रह्म नहीं ले सकता

593
00:47:13,280 --> 00:47:17,360
वाह भाई वाह हद है

594
00:47:17,360 --> 00:47:21,480
तो हमने आज क्या क्या जाना कि कबीर माता के गर्भ से जन्म

595
00:47:21,480 --> 00:47:25,640
लेता है और जो वे जो गीता वेद का ज्ञान है व परमात्मा

596
00:47:25,640 --> 00:47:29,760
ने दिया है ठीक है और परमात्मा ने दिया और कबीर जी एक जगह

597
00:47:29,760 --> 00:47:34,520
कह रहे हैं किसने दिया है कृष्ण और विष्णु ने तो इनके

598
00:47:34,520 --> 00:47:35,520
ही

599
00:47:35,520 --> 00:47:39,760
ग्रंथ के द्वारा सिद्ध हो गया कबीर की वाणी है परमात्मा की वाणी परमात्मा

600
00:47:39,760 --> 00:47:45,760
का रूप की वाणी भी नहीं है परमात्मा की वाणी है उसको कैसे मना

601
00:47:46,240 --> 00:47:50,600
करोगे और हमने वो भी दिखा दिया कि वामदेव

602
00:47:50,600 --> 00:47:54,920
के रूप में माता के गर्भ से जन्म लिया अब

603
00:47:54,920 --> 00:47:58,200
एक चीज और दिखा देते हैं

604
00:47:58,200 --> 00:48:02,760
य यह बात करते हैं कि महाभारत में लिखा है वह कोई

605
00:48:02,760 --> 00:48:06,960
ठाकुर लगाती अपने नाम के आगे हालांकि ठाकुर लगाना नहीं चाहिए था क्योंकि

606
00:48:06,960 --> 00:48:11,240
वह तो अब इन चीजों से परे हो गई है मुक्त हो गई है व ठाकुर लगाती

607
00:48:11,240 --> 00:48:15,400
है तो उन्होंने अपने किसी वीडियो में कहा कि अरे

608
00:48:15,400 --> 00:48:19,680
व कृष्ण भगवान जो है वह कह रहे हैं वह मोक्ष नहीं दे सकते या प्रारब्ध

609
00:48:19,680 --> 00:48:24,720
को नहीं बदल सकते तो भैया कबीर भी मोक्ष नहीं दे सकता

610
00:48:24,720 --> 00:48:28,840
है कबीर भी मोक्ष दे सकता है इस

611
00:48:28,840 --> 00:48:33,000
चीज को आप देखिए लगाइए भैया वीडियो

612
00:48:33,000 --> 00:48:36,880
चलाइए जहां पर यह कहा जा रहा है

613
00:48:36,880 --> 00:48:41,600
इनके तथाकथित जेल धाम निवासी तत्वदर्शी के द्वारा

614
00:48:41,600 --> 00:48:46,960
कि कबीर मोक्ष नहीं दे

615
00:48:46,960 --> 00:48:51,320
सकता हर हर महादेव हर हर महादेव

616
00:48:51,320 --> 00:48:57,320
हर दिखाइए भैया जी पहाड़ी जी तब तक आपसे बातें कर लेते

617
00:48:58,360 --> 00:49:02,880
आज मतलब फुल पोस्टमार्टम चल रहा है आज भीय पोस्टमार्टम

618
00:49:02,880 --> 00:49:06,960
क्या है य ऐसा है जैसे इस शरीर से तुम

619
00:49:06,960 --> 00:49:11,160
पार नहीं हो सकोगे अब मेरे इस जीवन से तो मैं य

620
00:49:11,160 --> 00:49:15,400
आया क्योंकि मुझे मालूम है तुम्ह नहीं

621
00:49:15,400 --> 00:49:19,520
तुमर दोष तब कहा बेटा इस

622
00:49:19,520 --> 00:49:23,560
शरीर से तुम पार नहीं हो सकोगे मेरे इस जीवन से तो

623
00:49:23,560 --> 00:49:27,600
मैं य आया इस शरीर से क क नहीं हो सकता

624
00:49:27,600 --> 00:49:32,120
है यह जो वीडियो हमने जहां से लिया है वहां पर दोनों बातें मेरे

625
00:49:32,120 --> 00:49:36,200
इस शरीर से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता

626
00:49:36,200 --> 00:49:40,680
ठीक है भगवान स्वयं परमेश्वर कह रहे हैं कि नहीं हो सकता

627
00:49:40,680 --> 00:49:44,920
तुम्हारा कल्याण मेरे शरीर से दिक्कत है भगवान को

628
00:49:44,920 --> 00:49:48,960
सामने खड़ा है व्यक्ति मेरे शरीर से तुम्हारा कल्याण

629
00:49:48,960 --> 00:49:53,000
नहीं हो सकता अच्छा इसमें दूसरी एक बात भी झलक मार रही

630
00:49:53,000 --> 00:49:57,320
है क्या इसके अलावा भी कोई शरीर है क्या भगवान का य तो वास्तविक

631
00:49:57,320 --> 00:50:01,640
में वो शाश्वत रूप है ये भी एक दिक्कत

632
00:50:01,640 --> 00:50:05,680
है इससे नहीं हो सकता तो किसी से हो सकता है वो अलग है

633
00:50:05,680 --> 00:50:06,440
फिर कोई और

634
00:50:06,440 --> 00:50:10,440
शरीर है वो मेरे इस शरीर से नहीं हो

635
00:50:10,440 --> 00:50:15,520
सकता तो दे दीजिए भैया

636
00:50:15,520 --> 00:50:19,800
इनको अरे अपनी बात को ऊपर रखने

637
00:50:19,800 --> 00:50:24,080
के लिए यहां तक यहां तक कह दिया सामने वाले ने

638
00:50:24,080 --> 00:50:29,280
कि मेरी जो पैदाइश हुई है वो भगवती से हुई

639
00:50:29,280 --> 00:50:34,120
है अच्छा मां जगदंबा से

640
00:50:34,120 --> 00:50:40,120
अच्छा अब देखो कहां तक जाएंगे कहां

641
00:50:40,160 --> 00:50:44,360
तक जहां तक जाएंगे तक जहां तक जाएंगे वहां

642
00:50:44,360 --> 00:50:48,480
तक हम पीछे पीछे आएंगे एक्चुअली बात चल

643
00:50:48,480 --> 00:50:51,040
रही थी गुणों

644
00:50:51,040 --> 00:50:55,920
की और उसमें एक श्लोक हमारे गीता में कि

645
00:50:55,920 --> 00:51:00,040
जो एक गुण है प्रकृति से पैदा होते हैं जड़ जितने भी

646
00:51:00,040 --> 00:51:04,480
यह शरीर है प्रकृति से पैदा होते हैं

647
00:51:04,480 --> 00:51:08,560
वो आप उसकी लाइव में गए थे ना अमित दास की हां

648
00:51:08,560 --> 00:51:12,680
हां हां हा हा तो अमित दास की लाइव में जो है उसने क्या किया कि

649
00:51:12,680 --> 00:51:16,800
कुछ कटिंग टिंग करके हम

650
00:51:16,800 --> 00:51:21,360
आपका कुछ वीडियो बनाकर उसने डाल दिया है

651
00:51:21,360 --> 00:51:22,360
अच्छा

652
00:51:22,360 --> 00:51:26,680
चलिए संपर्क करेंगे हम उनसे कि क्या किस बात का डर है कि आपने

653
00:51:26,680 --> 00:51:30,760
इसमें काट छाट किया अब डर तो नहीं

654
00:51:30,760 --> 00:51:34,760
होता वो यहां से भागा क्यों था पूछा था कि आपने उससे भागा

655
00:51:34,760 --> 00:51:38,920
क्यों तो बिल्कुल काट छाट करने

656
00:51:38,920 --> 00:51:43,120
का मतलब यही हुआ ना कि कुछ तथ्य आप छुपा रहे हैं जिससे भय

657
00:51:43,120 --> 00:51:47,480
है आपको जी या तो सीधा साधा डालिए

658
00:51:47,480 --> 00:51:51,600
जैसे आप शिवांश भाई डालते हैं पूरा का पूरा

659
00:51:51,600 --> 00:51:55,840
वीडियो बिना काटे बिना टे

660
00:51:55,840 --> 00:51:59,880
तो बाद गुणों की उधर अरे भाई ले

661
00:51:59,880 --> 00:52:03,920
आ जाओ ना ऊपर भाई आते क्यों नहीं हो बचपन में माता जी का दूध नहीं पिया

662
00:52:03,920 --> 00:52:08,960
क्या निष्ठा पूर्वक नहीं पिलाया क्या उन्होंने केवल यही के लिए ताकत

663
00:52:08,960 --> 00:52:13,120
है आ जाओ आते क्यों नहीं हो

664
00:52:13,120 --> 00:52:17,160
टी आर पहाड़ी जी ने कल वहां जाकर बहुत अच्छी तरह

665
00:52:17,160 --> 00:52:21,360
से समझाया था राजेश राजेश करके कोई संत था पर

666
00:52:21,360 --> 00:52:25,640
वो भी इतना निकम है व समझने की कोशिश नहीं कर रहा है वो

667
00:52:25,640 --> 00:52:29,640
अरे उन्होने य ये कह दिया अपनी बात ऊपर रखने के लिए मैंने कहा कि आपकी उत्पत्ति

668
00:52:29,640 --> 00:52:33,800
आप कहां से पैदा हुए हो उन्होने ये कह दिया मैंने कहा कि क्या जो भगवती

669
00:52:33,800 --> 00:52:37,800
मा है वहां से पैदा हुई हो वो बोल र हां मैं वहां से पैदा हुआ

670
00:52:37,800 --> 00:52:41,880
हूं कुतर्क है कुतर्क उनसे कहो

671
00:52:41,880 --> 00:52:47,680
तुम्हारे पास बर्थ सर्टिफिकेट वगैरह कुछ

672
00:52:47,680 --> 00:52:51,960
है एक्चुअली जब ये इनका

673
00:52:51,960 --> 00:52:56,000
ये गुण छोड़ने की बात का अर्थ ये क्या लेते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं

674
00:52:56,000 --> 00:53:00,200
करनी है सुनो सुनो एक मिनट देखो ये क्या कुतर कर रहे हैं

675
00:53:00,200 --> 00:53:04,200
नीचे कि आप अंधेरे में क्यों भाई वो अंधेरे में है

676
00:53:04,200 --> 00:53:08,200
कम से कम स्क्रीन पर कुछ तो है उनका तुम तो वो भी

677
00:53:08,200 --> 00:53:12,200
नहीं हो तुम तो उस स्थिति

678
00:53:12,200 --> 00:53:16,200
में भी नहीं हो निर्लज लज्जा नहीं आती तुम लोगों को

679
00:53:16,200 --> 00:53:20,200
इतने कुतर करते हुए इस तरह से तुम अपने जो रामपाल है उनका ही नुकसान

680
00:53:20,200 --> 00:53:23,680
करते हो

681
00:53:23,680 --> 00:53:27,960
खैर अगर कोई आना चाहता है माई का लाल हो

682
00:53:27,960 --> 00:53:32,000
जो आकर के यह चीजें जो

683
00:53:32,000 --> 00:53:36,440
हमने चीजें खोली है आकर के हमसे कबीर को भगवान

684
00:53:36,440 --> 00:53:40,560
और गीता ज्ञान दाता को कृष्ण से अलग और

685
00:53:40,560 --> 00:53:44,840
क्या कहते हैं तुम्हारे रामपाल को तत्वदर्शी सिद्ध कर सके

686
00:53:44,840 --> 00:53:49,840
तो आ जाओ भाई जो कह रहे हैं कबीर इ गॉड ये

687
00:53:49,840 --> 00:53:52,880
वो आ जाओ लोगों के लोगों

688
00:53:52,880 --> 00:53:56,880
के बाल सफेद हो जाते हैं दाढ़ी सफेद हो जाती है मचे सफेद हो जाती पर अकल

689
00:53:56,880 --> 00:54:02,000
वहीं की वही रहती है कुछ लोगों की

690
00:54:02,000 --> 00:54:06,000
एक्चुअली उन्होंने जो है जो महानुभाव थे

691
00:54:06,000 --> 00:54:10,040
उन्होंने कहा कि काल हमें भ्रमित करता है काल रूप मेंही महा

692
00:54:10,040 --> 00:54:14,400
ब्रह्मा महाविष्णु और महाशिव रहते हैं मैंने कहा कि परमाण दिखाइए आप

693
00:54:14,400 --> 00:54:18,480
हमें कहां लिखा है ये बोले परमाण नहीं है हमारे पास

694
00:54:18,480 --> 00:54:22,480
अभी तो बोल क्यों रहे हो

695
00:54:22,480 --> 00:54:28,480
या ऐसी बात बोलिए ना कि जो काटी ना जा सके

696
00:54:28,480 --> 00:54:32,520
कोई उनका कोई संत आया तो उससे पूछा करो जहां कबीर बैठा

697
00:54:32,520 --> 00:54:36,760
है वो जगह किसने बनाई है ये तो बताओ

698
00:54:36,760 --> 00:54:40,800
यह हाई लेवल के क्वेश्चन हो गए ये वही रुक जाएंगे

699
00:54:40,800 --> 00:54:44,960
नहीं इनको शास्त्रों के अनुसार खुद अपने मुंह से बोल रहे

700
00:54:44,960 --> 00:54:49,000
हैं वह पढ़ के सुना रहे हैं कि यह गुण प्रधान है गुण प्रधान

701
00:54:49,000 --> 00:54:53,560
है यह मैंने कहा गुणन और गुण होने में क्या फर्क है

702
00:54:53,560 --> 00:54:57,760
ये देखो पाल दस जी कह रहे हैं मानोगे नहीं तो क्या करें

703
00:54:57,760 --> 00:55:02,240
तो ऐसे तो हम भी कह सकते कि तुम मानोगे नहीं तो क्या करें ब्रह्मा विष्णु महेश भाई

704
00:55:02,240 --> 00:55:06,280
तर्क और प्रमाण लाओ ना शास्त्र संबध भक्ति करते हो ना लेकर

705
00:55:06,280 --> 00:55:08,080
आओ शास्त्र यहां पर हम तुम्हे तुम्हारे

706
00:55:08,080 --> 00:55:12,480
ही शास्त्रों से दिखाएंगे ये अभी तो कुछ पा

707
00:55:12,480 --> 00:55:16,480
पांच से आठ चिट लगी है इसमें अभी थोड़े दिनों में हमारे

708
00:55:16,480 --> 00:55:20,680
पास आपकी सारी किताबें होंगी उन सब में चिट चिट होंगी आपका

709
00:55:20,680 --> 00:55:24,680
तो कोई भी पेज खोलो उसमें चिट लग जाती है कोई भी पेज खोल

710
00:55:24,680 --> 00:55:28,680
लो इनकी बुक्स का उसम आपको कुछ ना कुछ ऐसा मिल जाएगा जिससे इनकी

711
00:55:28,680 --> 00:55:34,120
ही बात कट रही हो ऐसा हलवा बना के रखा

712
00:55:34,120 --> 00:55:38,320
है कोई नहीं है भैया

713
00:55:38,320 --> 00:55:42,440
कोई है ही नहीं सामने वाले ने

714
00:55:42,440 --> 00:55:46,800
काल को परमात्मा कह दिया हम परमात्मा मानते हैं उनको

715
00:55:46,800 --> 00:55:50,920
अरे पूरी क्वालिटी ईश्वर की बताई है भगवान श्री कृष्ण किसने की

716
00:55:50,920 --> 00:55:55,120
गीता में बहुत से जगह क्वालिटी पूरी ईश्वर

717
00:55:55,120 --> 00:55:59,440
की बताई है सब चीज भगवान श्री कृष्ण जी ने बनाया विष्णु

718
00:55:59,440 --> 00:56:04,640
जी ने बनाया तो कबीर दास जी ने क्या बनाया वो तो बता दो

719
00:56:04,640 --> 00:56:09,120
कबीर दास जी के नाम पर लोगों को उल्लू बनाया गया

720
00:56:09,120 --> 00:56:13,640
है मूर्ख बनाया गया हा

721
00:56:13,640 --> 00:56:18,040
बोले पुराणों को पूरा मानते हैं हम जी

722
00:56:18,040 --> 00:56:22,600
ये लोग पुराणों को पूरा मानते हैं

723
00:56:22,600 --> 00:56:23,240
हा पूरा

724
00:56:23,240 --> 00:56:27,680
मानते हैं उन्होंने बोला कि पुराणों को पूरा मानते हैं तो मैंने बोला

725
00:56:27,680 --> 00:56:32,240
विष्णु पुराण में विष्णु जी से ही सब कुछ उत्पन्न हो रहा है बोले हां मानते हैं

726
00:56:32,240 --> 00:56:36,440
शिव पुराण में शिव जी से सब कुछ उत्पन्न हो रहा है बोले हा मानते हैं देवी पुराण

727
00:56:36,440 --> 00:56:40,800
में देवी जी से सब कुछ उत्पन्न हो रहा है हा मानते हैं तो इसका अर्थ क्या लिया जाए

728
00:56:40,800 --> 00:56:45,240
तो इसका अर्थ यह लिया जाए उनके हिसाब से कि ये काल रूप बोल रहे है

729
00:56:45,240 --> 00:56:49,240
कहां है परमाण एक मिनट काल रूप

730
00:56:49,240 --> 00:56:53,240
बोल रहा है या नहीं बोल रहा है उसको छोड़ो यह बात सत्य

731
00:56:53,240 --> 00:56:58,400
मानते हो कि नहीं मानते तुमने कहा मानते हैं

732
00:56:58,400 --> 00:57:01,320
मानते

733
00:57:01,320 --> 00:57:05,320
हो एक ही क्षण में इस क्षण में बोलने कि हा मैं मानता हूं अगले

734
00:57:05,320 --> 00:57:10,240
क्षण उसका फर खंडन दो बातें

735
00:57:10,240 --> 00:57:14,920
जी जी जी और साम और सामने वाले की बात को बिल्कुल जैसे

736
00:57:14,920 --> 00:57:19,040
भी उसको झूठा साबित करना है यहां तक कह देना कि

737
00:57:19,040 --> 00:57:23,520
मेरी उत्पत्ति मां दुर्गा से हुई है मेरी शरीर

738
00:57:23,520 --> 00:57:27,320
प्रमाण मांगना चाहिए था आपको

739
00:57:27,320 --> 00:57:31,800
अरे परम मागे वो कल दा कल

740
00:57:31,800 --> 00:57:36,080
दूंगा अच्छा ढाई घंटे की डिबेट

741
00:57:36,080 --> 00:57:41,160
खाली देवी भागवत पुराण का कुछ अंश और

742
00:57:41,160 --> 00:57:45,320
नाम महाभारत से है विष्णु सहस्त्र नाम महाभारत

743
00:57:45,320 --> 00:57:49,400
का अंश हैय और इसमें विष्णु भगवान का

744
00:57:49,400 --> 00:57:53,840
एक नाम है काल देख लो इसको कहते शास्त्र

745
00:57:53,840 --> 00:57:58,160
और तर्क

746
00:57:58,160 --> 00:58:02,520
देखा और इन्हीं का एक नाम पुरुषोत्तम भी है

747
00:58:02,520 --> 00:58:06,520
इसमें ठीक है कहां तक जाओगे

748
00:58:06,520 --> 00:58:10,800
भाई इसीलिए कहा था शुरू मेंही मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर

749
00:58:10,800 --> 00:58:15,560
में मगर नहीं हमें तो आना है चक्कर में

750
00:58:15,560 --> 00:58:20,640
तो इसी में एक नाम पुतम भी

751
00:58:20,640 --> 00:58:24,680
है उसको तो मानना पड़ेगा ना नाना

752
00:58:24,680 --> 00:58:27,240
वो

753
00:58:27,240 --> 00:58:31,280
अरे ऐसा है कि जिन लोगों ने कभी शास्त्रों को देखा नहीं

754
00:58:31,280 --> 00:58:35,520
है उनको लपेटे में लेकर के यह जो है

755
00:58:35,520 --> 00:58:39,720
अपने हिसाब से उनको जो अपना समझाना है वह भी अपनी

756
00:58:39,720 --> 00:58:44,200
ऐसी कहानी अपनी ऐसी कहानी

757
00:58:44,200 --> 00:58:48,400
जिस कहानी में वो स्वयं के सिद्धांतों की भी पग पग

758
00:58:48,400 --> 00:58:52,440
में हत्या कर रहे हैं पग

759
00:58:52,440 --> 00:58:56,720
पग वो कहानी चिपका कर चले गए हैं

760
00:58:56,720 --> 00:59:01,280
और अब वहां पर अपनी बंदी छूटने की प्रार्थना कर रहे हैं

761
00:59:01,280 --> 00:59:05,320
और वो बंदी पता नहीं कब छूटेगी कुछ लोग कह रहे हैं कि अभी छूटने वाली

762
00:59:05,320 --> 00:59:09,800
है छूट जाए भाई उन्हीं से बात हो जाएगी डायरेक्ट

763
00:59:09,800 --> 00:59:13,440
क्योंकि इनके तो किसी भी व्यक्ति को अगर

764
00:59:13,440 --> 00:59:18,000
चित्त कर भी देंगे तो फिर इनके मन में रह जाएगा हमारे

765
00:59:18,000 --> 00:59:22,040
उनको करो तब देखें है

766
00:59:22,040 --> 00:59:26,360
ये लो बड़े आसानी से जो धर्म गुरु है जो हमारे

767
00:59:26,360 --> 00:59:30,560
मुनि उनको नकली कह देते हैं किस बेस पर कहते होंगे अभी

768
00:59:30,560 --> 00:59:35,320
तक समझ में नहीं आया मेरे आज तक समझ में नहीं आया

769
00:59:35,320 --> 00:59:39,480
देखिए सावन के अंधे को सब हरा हरा दिखाई देता है

770
00:59:39,480 --> 00:59:43,480
यह उनके जेल धाम प्रवास से जस्ट पहले

771
00:59:43,480 --> 00:59:47,600
अंधे हुए लोग है तो उस समय इनके कानों में

772
00:59:47,600 --> 00:59:52,160
जो बात पड़ी है वही इनके लिए बस हरा हर है सब वही

773
00:59:52,160 --> 00:59:56,400
अच्छा एक एक जो जब मैं लाइव में गया था तो एक बात आई वहां

774
00:59:56,400 --> 01:00:00,440
पर कि उन्होंने मैं उन्होंने कुछ बात कही तो मैंने

775
01:00:00,440 --> 01:00:04,520
कहा कि प्रमाण दिखाइए बिना प्रमाण के कुछ नहीं होता है ऐसे बोल देने से अगर सब कुछ

776
01:00:04,520 --> 01:00:08,680
सही हो जाता तो जो जेल में है एक बार बोल देते

777
01:00:08,680 --> 01:00:12,720
व बाहर आ जाते तो इतने में वो क्रोधित हो गए कि उनके बारे में

778
01:00:12,720 --> 01:00:18,720
कुछ मत बोलिए ये सो कहने लगे मेरे से तो मैंने कहा कि जब आपके गुरु

779
01:00:19,040 --> 01:00:24,000
हमारे यह देख लो भैया विष्णु सहस्त्र नाम पुरुषोत्तम

780
01:00:24,000 --> 01:00:28,000
दिखाओ भैया बड़ी स्क्रीन कर दो जरा

781
01:00:28,000 --> 01:00:30,640
केशव

782
01:00:30,640 --> 01:00:36,640
पुरुषोत्तम

783
01:00:40,440 --> 01:00:45,160
लिया हमारे पास इतने प्रमाण है ना इतने

784
01:00:45,160 --> 01:00:49,240
किय जो है सामना अगर

785
01:00:49,240 --> 01:00:53,760
हो तो रोने ही लग जाए कहो बस करो ऐसे कहने

786
01:00:53,760 --> 01:00:57,960
लगे मुक्ता नाम पर

787
01:00:57,960 --> 01:01:03,960
गति ठीक है परमात्मा लो

788
01:01:04,680 --> 01:01:08,800
परमात्मा और जो परम गति है जिस परम गति की बात कर रहे

789
01:01:08,800 --> 01:01:12,320
हो परम गति में जाने की बात होती है भगवत गीता में

790
01:01:12,320 --> 01:01:18,320
वह परम गति मुक्ता नाम परमा

791
01:01:20,520 --> 01:01:24,600
गति आप बोलिए बात पर नहीं मैं बोल

792
01:01:24,600 --> 01:01:28,640
रहा कि व पर मैंने कोई सत्य बात कह रही थी मैंने उनसे बोला कि क्या मैंने कोई

793
01:01:28,640 --> 01:01:32,680
गलत बात कही कि वो क्या जेल में नहीं है मैंने कोई मैंने तो कोई

794
01:01:32,680 --> 01:01:36,840
असत्य नहीं बोला पर वो जब दूसरों को वो बोलते हैं कि

795
01:01:36,840 --> 01:01:41,360
है पाखंडी है क्या बोले इस बारे में वो वो बोल

796
01:01:41,360 --> 01:01:46,760
उनके बारे में कुछ मत बोलिए बोल रहे हैं मैंने बोला कि जब आपके गुरु

797
01:01:46,760 --> 01:01:51,120
हमारे ऋषि मुनि हमारे धर्म गुरु हमारे देवताओ के बारे

798
01:01:51,120 --> 01:01:55,160
में कौन है कोई आया है पथराज

799
01:01:55,160 --> 01:02:01,160
जी बताइए

800
01:02:01,920 --> 01:02:05,960
हेलो हां बोलिए आप एक बार आए थे यहां

801
01:02:05,960 --> 01:02:10,160
पर जिज्ञासु बन कर के उसके बाद फिर आपने जो है वहां जाकर

802
01:02:10,160 --> 01:02:14,440
के बताया व आप आर्य समाजी है फिर आपका जो वो कटिंग निकाली

803
01:02:14,440 --> 01:02:18,680
गई फिर वो कटिंग करके शॉर्ट बनाया गया वही है ना

804
01:02:18,680 --> 01:02:22,760
नहीं उससे मेरा क्या संबध उन्होने आपकी स्ट्रीम देखी उनको बनके

805
01:02:22,760 --> 01:02:27,640
आए थे ना तो आप समाजी नहीं है

806
01:02:27,640 --> 01:02:31,720
नहीं मैं जिज्ञासु हूं मैं पढ़ता हूं सत्यार्थ प्रकाश की सत्यार्थ

807
01:02:31,720 --> 01:02:37,080
प्रकाश की सौगंध खाइए जिज्ञासु है आर्य समाज को मानने वाले नहीं है

808
01:02:37,080 --> 01:02:42,000
हम ये रही मेरे सामने य सतार प्रकाश हांकी

809
01:02:42,000 --> 01:02:46,520
सौगं खाते बोलता हूं कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं आर्य समाजी विचारधारा

810
01:02:46,520 --> 01:02:50,560
को मैं नहीं जानता मैं अभी भी जिज्ञासा जानते नहीं

811
01:02:50,560 --> 01:02:54,560
जानते नहीं जानता मतलब मैं अभी भी आर्य समाजी नहीं हूं मैं

812
01:02:54,560 --> 01:02:58,640
सत्य के संन में ह होने का मतलब क्या है व आप

813
01:02:58,640 --> 01:03:02,960
बताइए ना आप पूछ रहे हैं मुझसे आरस जीी संगठन से नहीं जुड़ा मैं ना ही

814
01:03:02,960 --> 01:03:07,240
मैं संगठन से जुड़ने की बात नहीं है उनके सिद्धांतों को एक्सेप्ट

815
01:03:07,240 --> 01:03:11,440
किया है कि नहीं किया है थोरा किया है थोड़ा नहीं किया

816
01:03:11,440 --> 01:03:15,560
कितना किया है कितना क्या परसेंटेज तो नहीं ना मा पाया

817
01:03:15,560 --> 01:03:17,320
मैंने

818
01:03:17,320 --> 01:03:21,480
अभी आपने यहां आकर के जो यह बोला कि मैं

819
01:03:21,480 --> 01:03:25,840
जो है जिज्ञासु हूं मैं आर समाज को मानने वाला नहीं हूं यह बात आपकी गलत

820
01:03:25,840 --> 01:03:29,880
नहीं है झूठ नहीं है बिल्कुल नहीं है तो

821
01:03:29,880 --> 01:03:34,200
आप क्या है मैं जिज्ञास आपने बोला ना मैं जिज्ञासु

822
01:03:34,200 --> 01:03:38,240
बन केया था हा तो मतलब जो

823
01:03:38,240 --> 01:03:42,280
आप सत्यार्थ प्रकाश के सभी सिद्धांतों को

824
01:03:42,280 --> 01:03:46,360
एक्सेप्ट नहीं करते कुछ कुछ सिद्धांतों को एक्सेप्ट करते हैं कुछ में मेरी

825
01:03:46,360 --> 01:03:50,720
समीक्षा है कुछ में मेरे प्रश्न है वो मैं आरमा से क्लियर

826
01:03:50,720 --> 01:03:55,040
कर प्रश्न है नहीं विरोध जो आप मानते ना हो

827
01:03:55,040 --> 01:03:59,160
जो मुझे समझ उसका विरोध कैसे करू मुझे

828
01:03:59,160 --> 01:04:03,160
कुछ समझ आएगा मैं अगर विरोधाभास तब आएगा ना

829
01:04:03,160 --> 01:04:07,240
जब मैं समझ आ जाऊगा मैं कह रहा हूं ना ही मैं आ जी हूं ना ही मैं उनके

830
01:04:07,240 --> 01:04:11,480
सिद्धांत को पूर्णता मानता हूं मैं थोड़ा बहुत मानता हूं थोड़ा बहुत नहीं मानता कुछ जो मुझे

831
01:04:11,480 --> 01:04:15,680
नहीं समझता मैं व नहीं मानता क्या नहीं समझ

832
01:04:15,680 --> 01:04:20,000
में आया जो आप नहीं मानते वो मैं आपको क्यों बता आप अती

833
01:04:20,000 --> 01:04:24,080
है आप तो क जी के आपको अपनी बात को यथावत रखना

834
01:04:24,080 --> 01:04:28,200
होगा ना आपको अपनी बात को यथावत रखने में शर्म आती

835
01:04:28,200 --> 01:04:30,720
है

836
01:04:30,720 --> 01:04:32,400
क्या इनको जोड़ो

837
01:04:32,400 --> 01:04:36,720
जोड़ो इनको जोड़ो आप नीचे क्यों कर रहे हो

838
01:04:36,720 --> 01:04:42,720
मैंने नहीं किया वो ऑपरेटर है जब कोई गलत बात होने लगती है कर दिया जाता इनको जोड़ो एक

839
01:04:46,120 --> 01:04:50,520
मिनट अपनी जो यथार्थ स्थिति

840
01:04:50,520 --> 01:04:54,920
है वो इनको बताने में शर्म आती है

841
01:04:54,920 --> 01:04:59,600
यह तभी अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए आगे आ सकते हैं

842
01:04:59,600 --> 01:05:04,160
जब य अपनी स्थिति को ना बताए मैं कौन हूं

843
01:05:04,160 --> 01:05:08,360
है ना झूठ बोलकर ही अपने सिद्धांतों की रक्षा

844
01:05:08,360 --> 01:05:14,360
कर सकते

845
01:05:15,280 --> 01:05:19,840
हैं

846
01:05:19,840 --> 01:05:25,840
ब तो थोड़ा बहुत बोल रहा पढ़ाई कादा उठ

847
01:05:26,120 --> 01:05:31,120
आना क्यों पड़ता है पता पता है आपको क्यों आना पड़ता है स्थिति

848
01:05:31,120 --> 01:05:37,120
त इ इस स्थिति तक आना इसलिए पड़ता

849
01:05:41,640 --> 01:05:45,640
है क्योंकि हम यहां से जब ऐसे सिद्धांत देते

850
01:05:45,640 --> 01:05:49,960
हैं ना तो इनकी बिल्कुल आत्मा कचोट जाती है कि क्या करें कैसे जाकर कुछ उद्दंडता

851
01:05:49,960 --> 01:05:54,080
करें और कुछ ऐसा कर दे जिससे कि जो

852
01:05:54,080 --> 01:05:58,960
है कहीं से कुछ जैसे वो समथिंग इज बेटर देन

853
01:05:58,960 --> 01:06:03,040
नथिंग बिल्कुल

854
01:06:03,040 --> 01:06:07,240
तो शिवांश जी आप थोड़ा मेरा कार्य है आप लाइव जारी

855
01:06:07,240 --> 01:06:13,240
रखिए मैं बाद में आता हूं

856
01:06:13,240 --> 01:06:17,320
ठीक हर हर महादेव जिज्ञासु बन के आते हैं फिर

857
01:06:17,320 --> 01:06:21,760
वो क्लिप निकाल करके अपनी बातें करते हैं

858
01:06:21,760 --> 01:06:25,880
और उसका बात का कुछ और ही स्वरूप बना कर के प्रस्तुत

859
01:06:25,880 --> 01:06:29,960
कर देते यह देखो हम वहां गए थे यह हो गया वो हो गया क्यों क्योंकि कुल

860
01:06:29,960 --> 01:06:34,880
मिलाकर जो मुख्य प्रश्न है उसका उत्तर नहीं है

861
01:06:34,880 --> 01:06:39,720
क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं

862
01:06:39,720 --> 01:06:44,120
अभी हम कल एक लाइव करेंगे इस बारे में संडे के

863
01:06:44,120 --> 01:06:50,120
दिन संदीप जी आप अपना चेहरा दिखाए

864
01:07:01,400 --> 01:07:07,400
संदीप जी अपना चेहरा

865
01:07:16,040 --> 01:07:20,520
दिखाएंगे तो चलिए ठीक है फिर आज हमने काफी रोचक बातें जानी

866
01:07:20,520 --> 01:07:24,520
फिर हम किसी दिन जुड़ेंगे लाइव और इससे आगे की चर्चाएं

867
01:07:24,520 --> 01:07:28,880
होंगी और कल हम आएंगे जो आर्य

868
01:07:28,880 --> 01:07:33,200
समाज के संबंध में एक विस्तृत एक लाइव लेकर के आएंगे आप लोग उससे

869
01:07:33,200 --> 01:07:38,160
जुड़िए और हम लोग एक अपना चैनल भी अ

870
01:07:38,160 --> 01:07:44,160
स्टार्ट करने वाले हैं बैकअप के लिए भी है वह चैनल

871
01:07:45,440 --> 01:07:50,520
और वह चैनल बैकअप के लिए भी है और साथ ही

872
01:07:50,520 --> 01:07:54,520
साथ अ कुछ ऐसी चीजें जो

873
01:07:54,520 --> 01:07:58,760
हम यहां नहीं डालते तो उनको वहां डालेंगे चैनल का लिंक जो है

874
01:07:58,760 --> 01:08:01,920
डिस्क्रिप्शन में दे दिया

875
01:08:01,920 --> 01:08:07,920
जाएगा

876
01:08:14,200 --> 01:08:17,040
हां

877
01:08:17,040 --> 01:08:21,240
हम तो इसके अलावा अगर कोई अगर

878
01:08:21,240 --> 01:08:25,640
आना चाहता है तो वह आ सकता है आप मुर्गन जी

879
01:08:25,640 --> 01:08:29,800
स्थिति ठीक करके आइए तब आपसे बात करेंगे अगर जिज्ञासु है तो आप क्लासेस

880
01:08:29,800 --> 01:08:33,240
में आइए ठीक

881
01:08:33,240 --> 01:08:37,880
है क्यों झूठ बोलना पड़ रहा है भाई आपको

882
01:08:37,880 --> 01:08:40,880
जिज्ञासु है

883
01:08:40,880 --> 01:08:44,880
तो आपको फिर सभी के पक्षों को सुनना समझना है सभी

884
01:08:44,880 --> 01:08:49,120
की बुक्स रखनी है पढ़नी है आर

885
01:08:49,120 --> 01:08:53,600
समाजी की हालत ये है कि वह अपने आप को आर समाजी बताने में शर्माता है

886
01:08:53,600 --> 01:08:58,080
अंकुर आर्य का वीडियो देख लीजिए वो एक जगह बोल रहा है मैं आर समाजी नहीं हूं

887
01:08:58,080 --> 01:09:02,440
जो इनका जो एक बहुत बड़ा ब्रांड एंबेसडर बन के चल रहा है

888
01:09:02,440 --> 01:09:06,520
आजकल विज्ञान दर्शन वो वो बोल रहा है मैं आर्य समाजी नहीं हूं

889
01:09:06,520 --> 01:09:10,800
आर्य समाजी कोई है नहीं और सब आर्य समाजी

890
01:09:10,800 --> 01:09:14,800
है तो यह स्थिति है इनके सिद्धांत की कि वह इतना कमजोर

891
01:09:14,800 --> 01:09:18,800
है कि खुल करके व्यक्ति कोय बताने में दिक्कत आ रही है कि मैं आर समाज का हूं

892
01:09:18,800 --> 01:09:24,800
और कितनी शर्म की बात है इससे और कितना नीचे गिरोगे

893
01:09:26,440 --> 01:09:30,560
भाई यह लिंक दिया जा रहा है

894
01:09:30,560 --> 01:09:35,440
रामपाल एंड कंपनी का कोई व्यक्ति है जो रामपाल को

895
01:09:35,440 --> 01:09:39,520
तत्वदर्शी कबीर को भगवान और

896
01:09:39,520 --> 01:09:44,280
गीता ज्ञान दाता को श्री कृष्ण से अलग बता दे आकर

897
01:09:44,280 --> 01:09:50,280
के

898
01:09:53,240 --> 01:09:58,640
तो आप पढ़ सकते हैं विवेक चूड़ामणि पढ़ सकते

899
01:09:58,640 --> 01:10:02,640
हैं और यदि वाकई में आप जिज्ञासु हैं

900
01:10:02,640 --> 01:10:06,640
तो आप क्लासेस जवाइन करिए वहां आइए आप वैसे आप जिज्ञासु नहीं

901
01:10:06,640 --> 01:10:11,400
है य आप स्क्रीन टाइम के लिए आए थे और उसके बाद फिर

902
01:10:11,400 --> 01:10:15,640
आपके बारे में बातें भी हुई थी कि हमारा एक व्यक्ति वहां गया था यह वो और

903
01:10:15,640 --> 01:10:20,360
उसने सवाल पूछा हटा

904
01:10:20,360 --> 01:10:25,320
दिया पर जो आपको शुरुआत करनी है अध्ययन की तो आप गीता

905
01:10:25,320 --> 01:10:29,840
ज्ञानेश्वरी गीता रामचरित मानस

906
01:10:29,840 --> 01:10:33,880
और दास बोध छत्रपति शिवाजी

907
01:10:33,880 --> 01:10:38,240
ल के गुरु जी है जो ये तीन प्रमुख और फिर साथ में

908
01:10:38,240 --> 01:10:42,560
गर्व से कहे हम हिंदू हैं और पांचवी है भक्ति

909
01:10:42,560 --> 01:10:46,840
सुदा ये कोर्स मान लीजिए इसको सनातन धर्म का

910
01:10:46,840 --> 01:10:50,000
कमप

911
01:10:50,000 --> 01:10:54,120
हम और भी बहुत सारी चीजें है जो हम लोगों को जानने मिलेंगी ठीक

912
01:10:54,120 --> 01:10:58,160
है फिर हम और किसी दिन आते हैं किसी भी प्रकार

913
01:10:58,160 --> 01:11:04,040
के वैचारिक मतभेद के लिए आप

914
01:11:04,040 --> 01:11:10,040
लोग संपर्क कर सकते हैं व कर सकते हैं 7483

915
01:11:28,560 --> 01:11:34,560
ठीक है सभी को जय श्री राम

916
01:11:36,710 --> 01:11:40,710
[संगीत]
