1
00:00:01,220 --> 00:00:07,220
[संगीत]

2
00:00:08,080 --> 00:00:12,360
सभी को जय श्री राम जय श्री राम सभी

3
00:00:12,360 --> 00:00:18,320
को और शीर्षक आपने देख ही लिया है

4
00:00:18,320 --> 00:00:22,520
टॉपिक कहूंगा कि बहुत हास्यप्रद

5
00:00:22,520 --> 00:00:26,560
है और अब थक गए

6
00:00:26,560 --> 00:00:31,160
एक ही बात पर बार बार बार बार बार बार बात करते करते

7
00:00:31,160 --> 00:00:35,280
कारण क्या है जिन लोगों को पूरी कहानी नहीं मालूम उनके लिए

8
00:00:35,280 --> 00:00:39,440
बता दूं मैं अगस्त में

9
00:00:39,440 --> 00:00:43,520
कुछ दिनांक हमें याद नहीं है हमको आबू पर्वत उस

10
00:00:43,520 --> 00:00:47,800
समय हमको कई जगह से आ रहा था कि हमसे शास्त्र कर लो हमसे शा कर लो

11
00:00:47,800 --> 00:00:51,880
तो इसी क्रम में आबू पर्वत से भी आबू पर्वत

12
00:00:51,880 --> 00:00:55,880
पर अलंकार समाज का कोई केंद्र है जहां

13
00:00:55,880 --> 00:01:00,080
से हमको जो है इसके

14
00:01:00,080 --> 00:01:04,080
बुलाया गया शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी गई

15
00:01:04,080 --> 00:01:08,240
चुनौती तो उसका उत्तर हमने वीडियो के माध्यम

16
00:01:08,240 --> 00:01:12,520
से दे दिया था तुरंत उसके एक दो दिन में ही

17
00:01:12,520 --> 00:01:16,880
अच्छा जो व्यक्ति हमको वीडियो के माध्यम से जानता है

18
00:01:16,880 --> 00:01:21,000
तभी उसने हमें कोई चुनौती दी ना तो उसको हमारा वीडियो के माध्यम

19
00:01:21,000 --> 00:01:25,280
से दिया हुआ उत्तर भी प्राप्त हो जाना चाहिए था भा यदि वो हमको

20
00:01:25,280 --> 00:01:29,400
डायरेक्ट वीडियो देख देख करके लेटर भेज रहा है और कोई तो हमारी उसके

21
00:01:29,400 --> 00:01:33,440
नजर में पहचान है नहीं तल तो वो हमको जानता नहीं है वो वीडियो के माध्यम

22
00:01:33,440 --> 00:01:37,440
से हमसे जानता है हमें जानता है और अगर वीडियो के माध्यम से हमने उसे उत्तर दे दिया

23
00:01:37,440 --> 00:01:41,520
तो उससे फिर उसको वो उत्तर प्राप्त हो जाना चाहिए था मगर उसका यह कहना है कि आपने

24
00:01:41,520 --> 00:01:46,400
तीन महीने बाद हमको उत्तर दिया हमने आपको तीन महीने बाद भी उत्तर नहीं दिया

25
00:01:46,400 --> 00:01:50,400
था उसी लेटर को शायद तीन महीने बाद किसी उनके फॉलोअर ने

26
00:01:50,400 --> 00:01:54,400
एक स्टोरी पर हमें टैग करते हुए लगा दिया तो हमने जो उत्तर पहले

27
00:01:54,400 --> 00:01:59,000
हम दे चुके हैं वीडियो के माध्यम से वही उत्तर हमने वहां पर दे दिए

28
00:01:59,000 --> 00:02:03,080
तो इनको य लगा कि इन्होंने आपने हमारे उसका जो उत्तर है

29
00:02:03,080 --> 00:02:07,080
वो तीन महीने बाद दिया है देखो देखो इसमें भी बड़ बत्ती है

30
00:02:07,080 --> 00:02:11,640
तो ये अपनी जानकारी का आपकी अभाव है हमने आपको उत्तर पहले ही दे दिया था

31
00:02:11,640 --> 00:02:16,200
तो यहां से कहानी शुरू होती है फिर अब ये कहते हैं कि ठीक है हमने उसमें

32
00:02:16,200 --> 00:02:20,680
उसमें उत्तर हमने ये दिया था कि हम आबू पर्वत आने का हमारे पास समय नहीं है

33
00:02:20,680 --> 00:02:24,880
आप जो है अ लखनऊ आकर

34
00:02:24,880 --> 00:02:29,080
के हमसे चर्चा कर सकते हैं जब लखनऊ आना हो तो उस बारे में आप बातचीत कर सकते हैं

35
00:02:29,080 --> 00:02:32,000
इन्होंने जो है कहा ठीक है लखनऊ हम आ जाएंगे लखनऊ आक

36
00:02:32,000 --> 00:02:36,440
के बात कर लेंगे लखनऊ आकर के जब बात करने के लिए बात हुई

37
00:02:36,440 --> 00:02:40,600
तो इन्होंने एक लेटर भेजा कि हम लखनऊ आ जाएंगे और जो है आप जो है अपनी

38
00:02:40,600 --> 00:02:44,800
स्वीकृति प्रदान करें तो हमने फिर और इसमें

39
00:02:44,800 --> 00:02:49,000
उन्होंने फिर अपना एक लेटर और भेजा जिसम की यह भी लिख दिया कि आप कौन-कौन से

40
00:02:49,000 --> 00:02:53,080
विषय जो है चुन सकते हैं तो उसमें कुछ विषय मैं आपको पढ़ के बता दूं

41
00:02:53,080 --> 00:02:57,200
कौन-कौन से थे स्क्रीन पर भी दिखा दीजिए भाई इनके

42
00:02:57,200 --> 00:03:01,320
जो विषय थे इन्होंने कहा आप निम्नलिखित में में

43
00:03:01,320 --> 00:03:05,720
से और इन्होंने अपना लखनऊ

44
00:03:05,720 --> 00:03:10,160
में जो इनका केंद्र है आर्य समाज का उसको चुना कि वहां पर होगी

45
00:03:10,160 --> 00:03:14,320
बात तो उसमें इन्होंने लिखा अगर आप शास्त्रार्थ

46
00:03:14,320 --> 00:03:18,640
को स्वीकार करते हैं तो हम जो आपकी जो

47
00:03:18,640 --> 00:03:23,000
इन्होंने तारीखें भी दी कि हम इस तारीख से इस तारीख के बीच आ सकते हैं ठीक है भाई

48
00:03:23,000 --> 00:03:27,120
आप कब आ सकते हो तो आप भी देख सकते हो तो हमने

49
00:03:27,120 --> 00:03:31,280
उसमें तारीखों में स्वीकृति दे दी और उन्होंने स्थल के लिए बता दिया कि

50
00:03:31,280 --> 00:03:35,360
जो स्थल है वो यह रहेगा और इसमें आकर के आपको चर्चा करनी होगी

51
00:03:35,360 --> 00:03:39,480
यह भी उन्हीं का केंद्र है तो हमने इसमें न किया ठीक है

52
00:03:39,480 --> 00:03:43,680
अब इसमें इन्होने हमें उत्तर व जो ऑप्शन थे वो दिए

53
00:03:43,680 --> 00:03:47,040
ईश्वर का स्वरूप आचार्य यण

54
00:03:47,040 --> 00:03:51,160
आचार्य महिदर आचार्य उबट स्वामी करपात्री जी

55
00:03:51,160 --> 00:03:55,440
तथा महर्षि दयानंद के वेद भाषियों की

56
00:03:55,440 --> 00:03:59,440
प्रामाणिकता यह बहुत जरूरी चीज है जो भी याद रखनी है इस लाइव

57
00:03:59,440 --> 00:04:03,760
को अगर आपको आगे समझना है ध्यान से सुनिए इन्होंने हमें ऑप्शन क्याक

58
00:04:03,760 --> 00:04:07,760
दिया ईश्वर का स्वरूप आचार्य यण

59
00:04:07,760 --> 00:04:12,120
आचार्य महिदर ईश्वर का स्वरूप एक ऑप्शन हो गया दूसरा ऑप्शन है आचार्य

60
00:04:12,120 --> 00:04:16,120
यण और ये ये जो आचार्य है तीन

61
00:04:16,120 --> 00:04:20,360
और स्वामी कपाती जी महाराज और दयानंद के वेद भाष्य

62
00:04:20,360 --> 00:04:25,000
की प्रमाणिकता ठीक है हिंदू शब्द की प्रमाणिकता

63
00:04:25,000 --> 00:04:29,000
स्त्री वेदा अध्यन अधिकार अवतारवाद मूर्ति पूजा किसकी

64
00:04:29,000 --> 00:04:33,480
परंपरा स्वामी शंकराचार्य और महर्षि

65
00:04:33,480 --> 00:04:38,160
दयानंद ठीक है ये उन्होंने हमें ऑप्शन दे

66
00:04:38,160 --> 00:04:42,920
अब इन सबके बाद हमारा इनको लेटर पहुंचता है कि भाई

67
00:04:42,920 --> 00:04:47,320
इनका जो प्राथमिकता से जो वो था

68
00:04:47,320 --> 00:04:51,440
विषय वो था किसकी परंपरा आ स्वामी शंकराचार्य

69
00:04:51,440 --> 00:04:55,600
या फिर महर्षी महर्षी

70
00:04:55,600 --> 00:05:00,760
दयानंद जो ये लिखते हैं उनके लिए जो भी तो

71
00:05:00,760 --> 00:05:02,240
हमने उसमें इनको

72
00:05:02,240 --> 00:05:06,240
जब लेटर दिया तो उसमें इनको यह बताया कि इनका जो प्राथमिकता से जो इनका विषय

73
00:05:06,240 --> 00:05:10,320
था वो था परम किसकी परंपरा आर्ष तो हमने इनको उसम यह कहा

74
00:05:10,320 --> 00:05:14,440
कि भाई हमारी जो परंपरा है वोह आर्ष है कि

75
00:05:14,440 --> 00:05:18,800
नहीं है यह बाद का विषय है हमारी एक परंपरा

76
00:05:18,800 --> 00:05:22,840
है जिसको हमने सार्वजनिक कर रखा है ग्रंथों के

77
00:05:22,840 --> 00:05:26,960
माध्यम से एवं इवन वेबसाइट के माध्यम से भी आप जाकर

78
00:05:26,960 --> 00:05:31,080
के अगर गुरु परंपरा देखेंगे तो आपको जो री मट की वेबसाइट होगी

79
00:05:31,080 --> 00:05:35,080
गोवर्धन मट की वेबसाइट होगी सब पर आपको गुरु परंपरा मिल जाएगी और नहीं होगी

80
00:05:35,080 --> 00:05:39,520
तो बुक के माध्यम से आपको मिल जाएगी तो किसकी परंपरा आर्

81
00:05:39,520 --> 00:05:43,760
यह तब आता है जब आपने अपनी परंपरा बताई हो कि हमारे

82
00:05:43,760 --> 00:05:47,840
दयानंद जी के गुरु ये थे उनके गुरु ये थे उनके गुरु ये थे उनके गुरु

83
00:05:47,840 --> 00:05:52,120
ये थे यह हमारी परंपरा है इस तरीके से ऋषियों का जो ज्ञान है व हम तक पहुंचा

84
00:05:52,120 --> 00:05:56,280
है कुछ भी वो बाद की बात है कि वो आर्ष है कि नहीं तो हमने

85
00:05:56,280 --> 00:06:00,480
इनको उत्तर दिया किसकी परंपरा आर् इस विषय पर चर्चा तब हो स जब आप अपनी

86
00:06:00,480 --> 00:06:05,080
परंपरा बताए तब उसमें कंपेरिजन हो सकता है

87
00:06:05,080 --> 00:06:09,800
तो ऐसा ऐसा कोई ग्रंथ ऐसी कोई जानकारी तो हमें प्राप्त है नहीं

88
00:06:09,800 --> 00:06:14,200
अलंकार समाज की ओर से तो हमने कहा इसलिए

89
00:06:14,200 --> 00:06:17,240
इस विषय पर कोई इस इस विषय को प्राथमिकता

90
00:06:17,240 --> 00:06:21,360
से और मुख्य विषय बनाते हुए चर्चा कैसे हो सकती है भाई पहले

91
00:06:21,360 --> 00:06:25,600
आप अपनी परंपरा बताए और फिर उस परंपरा पर कोई हम

92
00:06:25,600 --> 00:06:29,600
टिप्पणी करें कि भाई आपकी परंपरा में य दोष है

93
00:06:29,600 --> 00:06:33,640
तब ये होगा ना कि हां आपने टिप्पणी कैसे की आ जाओ आपकी परंपरा

94
00:06:33,640 --> 00:06:37,840
आर् से है कि हमारी परंपरा आर् तब ये बात होती है हमने टिप्पणी की है आपके

95
00:06:37,840 --> 00:06:42,160
ईश्वर पर आर समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर पर हमने टिप्पणी

96
00:06:42,160 --> 00:06:46,200
की है कि वो बाधित है वो सर्वशक्तिमान नहीं है आप

97
00:06:46,200 --> 00:06:50,440
अगर यह कहना चाहते हो कि ईश्वर जो है बाधित ही होता है मगर वो ईश्वर

98
00:06:50,440 --> 00:06:54,800
है तो वो बात की बात है मगर पहले अपने ईश्वर के सामने से सर्वशक्तिमान और

99
00:06:54,800 --> 00:06:58,800
अनंत सामर्थ्य मान इत्यादि जो आपने शब्द लगा रखे हैं ब्राह्मण उनको

100
00:06:58,800 --> 00:07:03,000
हटा दो वो बात की बात है कि जनता फिर आपके उस ईश्वर को ईश्वर

101
00:07:03,000 --> 00:07:07,040
के रूप में एक्सेप्ट करेगी कि नहीं करेगी हम करेंगे कि नहीं करेंगे ये तो बाद की बात

102
00:07:07,040 --> 00:07:11,240
है तो हमने ये उत्तर इन्ह दिया था अब होता

103
00:07:11,240 --> 00:07:15,240
क्या है कि जब हम इनको यह उत्तर दे देते हैं तो यह

104
00:07:15,240 --> 00:07:20,440
अपनी बात से मुकर जाते हैं और इनका जो तीसरा लेटर हमें प्राप्त होता

105
00:07:20,440 --> 00:07:24,480
है सर्वशक्तिमान ईश्वर हम लिख देते हैं कि भाई

106
00:07:24,480 --> 00:07:28,520
परंपरा किसकी परंपरा आर्स है यह विषय कुछ सटीक लग

107
00:07:28,520 --> 00:07:32,280
नहीं रहा है चर्चा के लिए और जो है आप ईश्वर विषय पर चर्चा करिए

108
00:07:32,280 --> 00:07:36,800
और इन्होंने ऑप्शन भी दिया था ईश्वर का स्वरूप तो

109
00:07:36,800 --> 00:07:42,800
यह तुरंत कहते हैं अपने अगले ही लेटर में और इनको

110
00:07:42,880 --> 00:07:47,120
जैसे व्यक्तिगत हो जाएगा य मगर इनको थोड़ा सा लेटर लिखने का तुरंत

111
00:07:47,120 --> 00:07:51,200
टाइम भी रहता है तुरंत पेन कॉपी उठा कर के लिख देते हैं और इतना

112
00:07:51,200 --> 00:07:55,200
टाइम भा हमारे पास नहीं है इसीलिए हमने कहा था कि हमसे लेटर्स की अपेक्षा ना

113
00:07:55,200 --> 00:07:59,680
रखें तो फिर ये लेटर लिख कर के कहते कि नहीं नहीं

114
00:07:59,680 --> 00:08:05,680
के विषय में इनका वो लेटर कहां गया

115
00:08:09,280 --> 00:08:13,600
येहा हम इस बात से असहमत है कि आर समाज के द्वारा

116
00:08:13,600 --> 00:08:17,680
स्वयं की परंपरा यह वो शंकराचार्य की

117
00:08:17,680 --> 00:08:22,000
परंपरा कुछ प्रश्न पूछे गए थे इसका निराकरण हमने अपने पिछले ये जो पैराग्राफ

118
00:08:22,000 --> 00:08:26,040
में जो बातें चल रही है इसका इस बारे में हमने पिछले लाइव में बात की है

119
00:08:26,040 --> 00:08:32,040
मगर इसमें जो मुख्य बात है वो इन्होंने क्या कही कि

120
00:08:34,480 --> 00:08:38,600
सर्वशक्तिमान ईश्वर पर आप अन्य आर्य विद्वानों से चर्चा

121
00:08:38,600 --> 00:08:42,640
कर चुके हैं इस विषय पर आपकी और आर्य समाज की जो जो

122
00:08:42,640 --> 00:08:46,640
मान्यता है उस पर पर्याप्त सा सामग्री सर्वत्र उपलब्ध

123
00:08:46,640 --> 00:08:51,120
है और निष्पक्ष लोग उसे देखकर निर्णय ले सकते हैं तो हमने

124
00:08:51,120 --> 00:08:55,200
तो हमने ये बताया था भाई परंपरा पर भी हमारी

125
00:08:55,200 --> 00:09:00,640
आर्य समाज के कई लोगों के साथ बहुत सी बातें हो चुकी हैं और

126
00:09:00,640 --> 00:09:04,680
उसकी बहुत सारी सामग्री उपलब्ध है और जो निष्पक्ष लोग होंगे व उन सामग्रियों

127
00:09:04,680 --> 00:09:08,760
को देख कर के अपना निर्णय ले लेंगे फिर परंपरा पर क्यों आप बात करना चाह रहे

128
00:09:08,760 --> 00:09:12,800
हो अच्छा सबसे बड़ी बात यह है कि जैसे हम लोग यह कहते हैं कि पहले आप अपनी

129
00:09:12,800 --> 00:09:16,880
परंपरा बताइए भाई बताना तो दूर की बात है आपके लोगों

130
00:09:16,880 --> 00:09:21,040
ने तो यह तक कहा है कि हमारे यहां पर गुरु परंपरा नहीं मानी जाती

131
00:09:21,040 --> 00:09:24,400
गुरुम परंपरा नहीं चलती और उसका

132
00:09:24,400 --> 00:09:28,520
आउटपुट भी है ऐसा नहीं है कि लोगों ने कहा वो जो

133
00:09:28,520 --> 00:09:32,600
समाज का प्रमाणिक नहीं था मंदिर में बैठ कर के बोल रहा है आपके द्वारा नियुक्त

134
00:09:32,600 --> 00:09:36,720
है वो कह रहा है कि आ समाज में गुरुम परंपरा नहीं चलेगी हमें तो नहीं सत्यार्थ प्रकाश

135
00:09:36,720 --> 00:09:40,840
में कहीं मिला गुरुम परंपरा के बारे में अपनी गुरुम परंपरा के बारे में आपने

136
00:09:40,840 --> 00:09:45,000
बात की हो आपके जो दयानंद जी

137
00:09:45,000 --> 00:09:49,320
उन्होंने और जब हमें यह नहीं मिला

138
00:09:49,320 --> 00:09:53,360
और व्यक्ति आपका यह कह रहा है कि हमारे य गुरुम परंपरा है ही नहीं तो हम किसकी बात को

139
00:09:53,360 --> 00:09:57,440
सच माने जो इस बात पर आपसे हम चर्चा करें आपके लोग कह रहे

140
00:09:57,440 --> 00:10:01,440
हैं हमें पता ही नहीं है कहीं ना कहीं लिखा हो आज तक नहीं फोन आया हमने तो यह तक

141
00:10:01,440 --> 00:10:05,480
कहा था पता चल जाए तो बताना आपकी परंपरा क्या है वो कौन से बीच

142
00:10:05,480 --> 00:10:09,600
के आचार्य जिनसे आप तक आया ज्ञान जो ज्ञान आज आप सनातन के नाम

143
00:10:09,600 --> 00:10:13,720
पर सनातन का ठप्पा लगा कर के सत्या प्रकाश की बिक्री के तहत लोगों

144
00:10:13,720 --> 00:10:17,840
तक पहुंचा रहे हो है ना

145
00:10:17,840 --> 00:10:22,000
तो इनका जवाब य आया इस विषय पर आपकी बहुत बार बात हो चुकी तो भाई

146
00:10:22,000 --> 00:10:26,080
हमारी जो है परंपरा पर भी बहुत बार बात हो चुकी तो परंपरा पर क्यों आप चर्चा

147
00:10:26,080 --> 00:10:30,800
करना चाह रहे हालाकि ऐसा मत समझना कि उस पर बात कर नहीं चाहते

148
00:10:30,800 --> 00:10:35,120
या उसमें कोई कमजोरी है उससे बात वो मुख्य विषय नहीं है

149
00:10:35,120 --> 00:10:39,400
मुख्य विषय क्या है हमने अपने वीडियोस में कई बार बताया है

150
00:10:39,400 --> 00:10:43,440
सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ये तीन चीजों में हमें

151
00:10:43,440 --> 00:10:48,120
संतुष्ट कर दीजिए अपने साथ ले चलिए कितने वीडियोस में हम बोल चुके हैं

152
00:10:48,120 --> 00:10:52,360
अगर इन विषयों से हटकर आप हमें गलत साबित करने के लिए या फिर यह दिखाने

153
00:10:52,360 --> 00:10:56,600
के लिए नहीं इसने यहां पर यह बात गलत बोली है अगर आप भी रहे हैं तो इसका मतलब आपका

154
00:10:56,600 --> 00:11:01,040
उद्देश्य धर्म संस्थापन नहीं है ू समाज का एकत्व नहीं है

155
00:11:01,040 --> 00:11:05,160
संगठन करना नहीं है आपका उद्देश्य यह है कि किस तरीके से

156
00:11:05,160 --> 00:11:09,680
इसको गलत साबित किया जाए हमारा उद्देश्य नहीं है कि किसी को गलत साबित करना है

157
00:11:09,680 --> 00:11:13,800
हमारा उद्देश्य है कि उन सार्वभौम सिद्धांतों को बाहर लाना

158
00:11:13,800 --> 00:11:18,200
जिनके क्षत्र में जिसके नीचे एक छत्र हो सके सनातन समाज

159
00:11:18,200 --> 00:11:22,600
जो बटा हुआ है है ना यह दोनों के उद्देश्य में अंतर है

160
00:11:22,600 --> 00:11:26,600
अच्छा इस पर अभी हम बात करेंगे तो हमने

161
00:11:26,600 --> 00:11:30,840
यह कहा था इनसे कि चर्चा तो उ पर भी हो चुकी

162
00:11:30,840 --> 00:11:34,880
है तो इस सबके बाद

163
00:11:34,880 --> 00:11:38,880
हमने यह कह दिया कि भाई देखिए अच्छा इसमें एक उन्होने और कॉमेडी वाली बात भी

164
00:11:38,880 --> 00:11:42,960
की थी कि नहीं नहीं आपको हमारे वाले में आना पड़ेगा हमारे

165
00:11:42,960 --> 00:11:47,760
केंद्र में आना पड़ेगा और कैमरा सिर्फ हमारा चलेगा और किसी को रिकॉर्ड करने की वो नहीं

166
00:11:47,760 --> 00:11:51,800
होगी तो यह भी कॉमेडी है भाई हम क्या वहां पर आकर के परतंत्र

167
00:11:51,800 --> 00:11:54,600
हो जाएंगे गुलाम हो जाएंगे क्या हो जाएंगे कि अगर हम वहां पर आपसे

168
00:11:54,600 --> 00:11:58,840
चर्चा करने आ रहे हैं तो

169
00:11:58,840 --> 00:12:01,360
वहां

170
00:12:01,360 --> 00:12:06,200
पर अगर हम आपसे वहां पर चर्चा करने आ रहे

171
00:12:06,200 --> 00:12:10,360
हैं तो वहां पर हमारे अधिकार कम हो जाएंगे अधिकार छीन लिए

172
00:12:10,360 --> 00:12:14,360
जाएंगे तो यह सारी बातें उसमें हमसे कही

173
00:12:14,360 --> 00:12:19,320
गई कि आप वहां आओगे रिकॉर्डिंग हम करेंगे कैमरा हमारा चलेगा लाइव हम करेंगे

174
00:12:19,320 --> 00:12:23,360
और हमने कह दिया पहली बात हमें आपके स्थान पर आने में

175
00:12:23,360 --> 00:12:27,400
कोई आपत्ति नहीं है दूसरी बात आप अपने कहे हुए वचन

176
00:12:27,400 --> 00:12:31,920
से मुक ए मत आपने विषयक ईश्वर के स्वरूप का वो दिया

177
00:12:31,920 --> 00:12:36,040
था हमें विकल्प दिया था और हम ईश्वर के स्वरूप परसे आपसे

178
00:12:36,040 --> 00:12:40,680
बात करना चाहते उसी ईश्वर के स्वरूप को हमने अपने शब्दों में सर्वशक्तिमान ईश्वर लिख दिया था

179
00:12:40,680 --> 00:12:44,680
ठीक है तो और बार-बार हम

180
00:12:44,680 --> 00:12:48,880
आपसे लेटर बाजी कर नहीं पाएंगे आपके पास समय होगा बारबार लेटर लिखने का रात

181
00:12:48,880 --> 00:12:52,880
में कल 10:30 बजे हमको इनका लेटर प्राप्त हुआ है एक 10:30 बजे

182
00:12:52,880 --> 00:12:57,080
रात में तो यह सब आपके पास समय होगा हमारे पास तना

183
00:12:57,080 --> 00:13:01,200
समय नहीं है कि हम बारबार आपसे पत्राचार के माध्यम से बात करें और आपको उत्तर

184
00:13:01,200 --> 00:13:05,480
देते रहे ठीक है हमने आपको बता दिया कि आप लखनऊ में आएंगे आपके स्थान

185
00:13:05,480 --> 00:13:09,480
पर आने में हमारी हमें कोई आपत्ति नहीं है और कैमरे

186
00:13:09,480 --> 00:13:09,980
दोनों

187
00:13:09,800 --> 00:13:14,160
के चलेंगे और चर्चा उस विषय पर होगी जिस विषय को आपने

188
00:13:14,160 --> 00:13:18,360
पूर्व में हमें दिया था ईश्वर विषयक चर्चा आपने ईश्वर का स्वरूप कहा

189
00:13:18,360 --> 00:13:23,160
हमने उसको सर्वशक्तिमान ईश्वर कहा अब इनका एक

190
00:13:23,160 --> 00:13:27,200
कॉमेडी भरा एक लेटर प्राप्त होता है भाई इनको लेटर दिखाते

191
00:13:27,200 --> 00:13:31,200
जाइए जब मैं लेटर पढ़ूंगा तो

192
00:13:31,200 --> 00:13:35,400
तो अब इसमें ये कहते हैं इसको मैं आपको एक एक पॉइंट को पढ़ के बताऊंगा

193
00:13:35,400 --> 00:13:41,400
और यही विशेष है सबसे

194
00:13:42,120 --> 00:13:46,640
ज्यादा अब इसमें ये कहते हैं कि दिनांक 23 नवंबर 2024

195
00:13:46,640 --> 00:13:50,880
का आपका पत्र में मिला था उसमें आपकी तरफ से ईश्वर के स्वरूप

196
00:13:50,880 --> 00:13:55,360
अब सबसे पहले तो यही इनकी लाइन ठीक नहीं है क्यों नहीं है

197
00:13:55,360 --> 00:13:59,560
क्योंकि आप हमें वीडियोस के माध्यम से भी सुनते समझते हैं

198
00:13:59,560 --> 00:14:04,320
तो केवल लेटर्स के माध्यम से हमें जानने का दिखावा क्यों कर रहे हैं

199
00:14:04,320 --> 00:14:10,320
यह पाखंड है यह दोगलापन

200
00:14:11,040 --> 00:14:15,200
है आप हम लोग वीडियो में भी तो बोल रहे हैं बात और आप

201
00:14:15,200 --> 00:14:19,240
हमें जानते कहां से है कि हमने हिंदू शब्द के लिए क्या कहा है या दयानंद स्वामी जी

202
00:14:19,240 --> 00:14:23,400
के भाष्य के लिए क्या कहा है ये सब तो आप वीडियो से जानते हैं ना तब तो आपने हमें

203
00:14:23,400 --> 00:14:27,520
पत्र भेजा तो फिर आप केवल इस पर ही आधारित हमें क्यों जान

204
00:14:27,520 --> 00:14:31,720
रहे हैं दिखावा कर हमें आपका पत्र मिला था हम बाकी

205
00:14:31,720 --> 00:14:36,080
नहीं जानते अभी बताता हूं तो इन्होंने भी लिखा

206
00:14:36,080 --> 00:14:40,080
कि आपका पत्र हम मिला था उसमें हमें आपकी तरफ से ईश्वर के स्वरूप विषय को

207
00:14:40,080 --> 00:14:44,400
चुनने की कोई बात नहीं लिखी हुई थी आपके पत्र के क्रमांक में चार शब्द

208
00:14:44,400 --> 00:14:48,560
है अत चर्चा का विषय सर्वशक्तिमान ईश्वर ही उचित

209
00:14:48,560 --> 00:14:52,880
है अब सबसे पहली बात तो इनका खेल देख लो भाइयों इनको ईश्वर

210
00:14:52,880 --> 00:14:57,600
के स्वरूप में और सर्वशक्तिमान ईश्वर में अंतर दिख रहा है

211
00:14:57,600 --> 00:15:01,600
दोनों अलग-अलग विषय है यह है सर्वशक्तिमान ईश्वर

212
00:15:01,600 --> 00:15:05,680
की पावर कैसे आदमी भागता है सर्वशक्तिमान का नाम

213
00:15:05,680 --> 00:15:10,000
सुन कर के जितने लोग फॉलो करने वाले अलंकार समाज को वो

214
00:15:10,000 --> 00:15:14,720
और जितने लोग फॉलो करने वाले हैं य जो परंपरा प्राप्त आचार्य गणों को वो आज सुन लो

215
00:15:14,720 --> 00:15:18,920
कैसे सर्वशक्तिमान ईश्वर से शाब्दिक खेल करके बचा जा रहा मगर शाब्दिक

216
00:15:18,920 --> 00:15:23,040
खेल में भी नहीं बचने देंगे क्योंकि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं

217
00:15:23,040 --> 00:15:26,080
टकम शाब्दिक खेल में भी नहीं बचने देंगे तो

218
00:15:26,080 --> 00:15:31,680
तुमने यहां पर हमारे आपने यहां पर हमारे शद को पकड़ लिया कि हमने

219
00:15:31,680 --> 00:15:35,720
आपके विषय को आपके द्वारा दिए गए विषय को हमने नहीं चुना हमने

220
00:15:35,720 --> 00:15:39,720
अपना विषय दिया आगे इन्होंने लिखा है हमारे द्वारा प्रस्तावित विषय ईश्वर

221
00:15:39,720 --> 00:15:43,920
का स्वरूप था ना कि सर्वशक्तिमान ईश्वर ध्यान से देखिए इनके द्वारा

222
00:15:43,920 --> 00:15:47,960
प्रस्तावित जो विषय था वो ईश्वर का स्वरूप था ना कि सर्वशक्तिमान

223
00:15:47,960 --> 00:15:52,000
ईश्वर जब आप हमारे दिए हुए विकल्पों में से किसी एक विकल्प को

224
00:15:52,000 --> 00:15:56,000
का चुनाव नहीं करते हैं एक नया ही विकल्प अपने से देते हैं

225
00:15:56,000 --> 00:16:01,200
तो हमारे द्वारा दिए गए सारे विकल्प स्वत निरस्त हो गए हैं

226
00:16:01,200 --> 00:16:05,600
वाह अपने आप सब कुछ सटर घोट करके अपने आप

227
00:16:05,600 --> 00:16:09,640
अपने आप को भाई इसलिए हम सारे हमारे जो है विकल्प जो

228
00:16:09,640 --> 00:16:13,840
हमने दिए थे आपने उसमें से किसी को नहीं लिया आपने अपना दिया इसलिए अब जो हमारे पुराने विकल्प

229
00:16:13,840 --> 00:16:18,120
है वो निरस्त हो गए हैं ठीक है तो पहली बात तो इनका ये मजाक

230
00:16:18,120 --> 00:16:23,280
आप पकड़ने का प्रयास करिए कि ईश्वर के स्वरूप और

231
00:16:23,280 --> 00:16:27,480
सर्वशक्तिमान ईश्वर में इनको भेद दिख रहा है ठीक है अब

232
00:16:27,480 --> 00:16:31,560
क्या है सबसे पहली बात कि हमने जो इनको सेकंड लेटर

233
00:16:31,560 --> 00:16:36,560
भेजा है ठीक है हमने इनको जो सेकंड लेटर भेजा

234
00:16:36,560 --> 00:16:40,560
है उसमें इनका जो अंतिम लेटर आया

235
00:16:40,560 --> 00:16:41,560
ना

236
00:16:41,560 --> 00:16:45,640
इनका जो अंतिम लेटर हमारे पास आया है उसमें उससे पहले हमारा

237
00:16:45,640 --> 00:16:49,640
लेटर इनके पास पहुंच गया था जिसमें हमने इनके दिए हुए विकल्प को ही चुन

238
00:16:49,640 --> 00:16:53,880
लिया था इनके दिए हुए विकल्प को भी बता दिया था क्या कहा था

239
00:16:53,880 --> 00:16:59,880
कि

240
00:17:00,040 --> 00:17:04,080
इसमें हमने कहा था कि आपके द्वारा आपके द्वारा

241
00:17:04,080 --> 00:17:08,240
दिए गए विकल्पों में से हमने स हमने ईश्वर के स्वरूप

242
00:17:08,240 --> 00:17:12,360
का विकल्प चुना था तो इस बात से भी इनको समझ जाना चाहिए

243
00:17:12,360 --> 00:17:16,560
कि हम ईश्वर के स्वरूप को ही सर्वशक्तिमान कह रहे हैं जब हम यह कह रहे हैं कि हमने आपके

244
00:17:16,560 --> 00:17:20,920
द्वारा विकल्प दिए गए विकल्पों में से सर्वशक्तिमान ईश्वर को ही चुना था

245
00:17:20,920 --> 00:17:25,680
मगर अब ये शाब्दिक लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि आपने एक बार वो

246
00:17:25,680 --> 00:17:29,680
यह कह दिया है ईश्वर के स्वरूप की जगह सर्वशक्तिमान शब्द का उपयोग

247
00:17:29,680 --> 00:17:34,120
कर लिया है इसलिए आपने विषय को बदल दिया इसलिए हमारे द्वारा जो लिस्ट दी गई थी

248
00:17:34,120 --> 00:17:38,480
वह सारी लिस्ट निरस्त हो जाती है अब हम नई लिस्ट देते हैं

249
00:17:38,480 --> 00:17:42,520
अ ये देखिए हमने 23 तारीख को इनको लेटर दिया है जिसमें हमने

250
00:17:42,520 --> 00:17:46,520
इनको क्लियर किया कि हमारा विषय क्या होगा उसके बाद यह कह रहे

251
00:17:46,520 --> 00:17:50,600
हैं कि क्योंकि आपने हमारे द्वारा दिए गए विकल्प में से नहीं

252
00:17:50,600 --> 00:17:52,920
चुना

253
00:17:52,920 --> 00:17:57,040
था यह देखिए यह 23 वाला लेटर है

254
00:17:57,040 --> 00:18:01,280
इसमें हमने सर्वशक्तिमान कहा विषय को और आगे आगे जो लेटर

255
00:18:01,280 --> 00:18:07,280
है उसमें क्या कहा है अगले वाले में दिखा दीजिए इनको जो लास्ट लेटर भेजा

256
00:18:08,720 --> 00:18:14,720
है जो लास्ट लेटर भेजा है

257
00:18:15,480 --> 00:18:19,880
उसमें लास्ट लेटर में हमने इनको क्लियर कर दिया कि जो हमारा ईश्वर

258
00:18:19,880 --> 00:18:23,960
सर्वशक्तिमान वाला विषय है वही हमारा देखिए

259
00:18:23,960 --> 00:18:28,040
आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में से हमने ईश्वर के स्वरूप को चुना था

260
00:18:28,040 --> 00:18:32,160
तो यहां से इन्होने यह लेने की बजाय कि हमारा सर्वशक्तिमान ईश्वर

261
00:18:32,160 --> 00:18:36,240
और ईश्वर का स्वरूप एक ही है बस हम उसे सर्वशक्तिमान ईश्वर के रूप में लिख

262
00:18:36,240 --> 00:18:40,400
रहे हैं तो यहां से इन्होंने ये लेने की बजाय ये ले लिया

263
00:18:40,400 --> 00:18:44,400
कि नहीं नहीं आपने एक बार जो गलती कर दी ना आपने जो है वो यह लिख दिया है

264
00:18:44,400 --> 00:18:48,480
ना कि क्या आपने जो है हमारा हमारा दिया हुआ विकल्प तो चुना नहीं

265
00:18:48,480 --> 00:18:52,760
आपने अपना एक नया विकल्प दे दिया इसलिए अब हमारे जो दिए

266
00:18:52,760 --> 00:18:57,000
गए बात थी वो सब खत्म हो जाती है अब हम नई बात लेकर आने का अधिकार रखने के

267
00:18:57,000 --> 00:19:01,080
उसमें आ गए अब हम नई बात कहने का अधिकार रखते हैं क्योंकि हम एक बात पर रहने

268
00:19:01,080 --> 00:19:05,800
वाले तो है नहीं अरे भाई अगर तुमने नहीं दिया था अगर

269
00:19:05,800 --> 00:19:09,800
अगर आपने नहीं भी दिया था तो आपको अंतिम लेटर लिखने से पहले

270
00:19:09,800 --> 00:19:12,440
तो हमारी भावना मालूम पड़ गई ना कि ईश्वर सर्वशक्तिमान

271
00:19:12,440 --> 00:19:17,120
का मतलब हमारा वही है ईश्वर का विषय और

272
00:19:17,120 --> 00:19:21,280
अगर दुर्जन तोष न्याय से अगर मान लिया जाए तो अब तो आपको पता

273
00:19:21,280 --> 00:19:25,320
चल रहा है कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान का विषय जो है वो वही है ईश्वर का

274
00:19:25,320 --> 00:19:29,360
स्वरूप तो आप अपनी बात से क्यों बदल रहे हो

275
00:19:29,360 --> 00:19:33,360
इसमें ऐसा कौन सा कारण आ जाता है कि अब आपको जो है ईश्वर के स्वरूप से भागना पड़ रहा

276
00:19:33,360 --> 00:19:37,400
है पहली बात अब इनकी य शब्द से पकड़ा

277
00:19:37,400 --> 00:19:41,600
है ना ऐसे ही इनको इन्हीं के लेटर से शब्द से पकड़ेंगे जैसे इन्होंने

278
00:19:41,600 --> 00:19:45,760
कहा कि ये शब्द का भेद हो जाने के कारण आपने जो विषय

279
00:19:45,760 --> 00:19:49,880
को बदल दिया तो अब हम इनका शब्द का भेद दिखाएंगे शब्द का भेद

280
00:19:49,880 --> 00:19:52,680
क्या है

281
00:19:52,680 --> 00:19:57,520
देखिए इन्होंने जो हमको दूसरा लेटर दिया है उसमें जो

282
00:19:57,520 --> 00:20:01,600
ऑप्शंस दिए हैं उसमें ऑप्शंस

283
00:20:01,600 --> 00:20:05,640
है नहीं तीसरा लेटर जब जब हमने यह कह दिया कि

284
00:20:05,640 --> 00:20:09,640
सर्वशक्तिमान ईश्वर में बात होगी तो इन्होंने हमें तीसरा लेटर दिया नहीं

285
00:20:09,640 --> 00:20:13,760
नहीं सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं आप तो इस पर बात करो हिंदू शब्द की प्रामाणिकता

286
00:20:13,760 --> 00:20:18,600
या फिर किसके वेद भाष्य सनातन मान्यता के अनुकूल

287
00:20:18,600 --> 00:20:23,960
यह इन्होने ऑप्शन दिया एक ऑप्शन और दिया था इन्होने

288
00:20:23,960 --> 00:20:29,960
इन्होंने उसमें एक ऑप्शन और दिया था

289
00:20:33,840 --> 00:20:37,840
हिंदू शब्द की प्रमाणिकता किसके वेद भाष्य सनातन धर्म की

290
00:20:37,840 --> 00:20:42,080
मान्यता के अनुकूल यह दो ऑप्शन उन्होंने दिए हैं

291
00:20:42,080 --> 00:20:46,360
ठीक है सिर्फ दो ऑप्शन है हिंदू शब्द की प्रमाणिकता

292
00:20:46,360 --> 00:20:50,640
और किसके वेद किसके वेद भाष्य सनातन धर्म के अनुकूल सनातन

293
00:20:50,640 --> 00:20:55,160
धर्म की मान्यता के अनुकूल ये दो ऑप्शन दिए अब

294
00:20:55,160 --> 00:20:59,640
देखिए अब इन्होंने हमारे ईश्वर के स्वरूप को सर्वशक्तिमान

295
00:20:59,640 --> 00:21:03,840
ईश्वर कहने पर यह कह दिया कि आपने विषय बदल दिया ठीक है शाब्दिक भेद

296
00:21:03,840 --> 00:21:08,000
से विषय बदल गया अब हम इनका शाब्दिक भेद दिखाते हैं ऐसे

297
00:21:08,000 --> 00:21:14,000
थोड़ी ना होगा भाई खाते

298
00:21:14,440 --> 00:21:19,240
हैं ये हटा दो इसको पकड़ो

299
00:21:19,240 --> 00:21:23,280
अब देखिए इसी प्रकार आपने अनेक

300
00:21:23,280 --> 00:21:27,480
बार यह प्रश्न उठाए कि महा ऋषि ध्यान ने पौराणिक

301
00:21:27,480 --> 00:21:32,000
आचार्यों का अनुसरण नहीं किया ये बात इन बातों पर मैं आऊंगा पौराणिक क्यों कह रहे हो आप

302
00:21:32,000 --> 00:21:36,040
जब य वीडियो में ये प्रश्न आप पूछ सकते हैं तो विद्वानों के

303
00:21:36,040 --> 00:21:40,360
समक्ष आकर पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और महर्षि

304
00:21:40,360 --> 00:21:44,640
दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा क्यों नहीं कर सकते अब यह बताओ

305
00:21:44,640 --> 00:21:48,760
अगर हमारा ईश्वर के स्वरूप को सर्वशक्तिमान कह देना गलत है

306
00:21:48,760 --> 00:21:53,680
जो कि आप जनता है आप खुद समझिए कौन

307
00:21:53,680 --> 00:21:57,840
केवल ये पत्राचार खेल खेल करके ही दम भर रहा है किसको भागना

308
00:21:57,840 --> 00:22:01,880
है वास्तविकता कौन कायर है यह आप निर्णय लीजिए अब

309
00:22:01,880 --> 00:22:06,560
इन्होंने यहां पर क्या इन्होंने चर्चा का विषय क्या कर दिया है पौराणिक

310
00:22:06,560 --> 00:22:10,560
आचार्य के वेदार्थ और महा महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर

311
00:22:10,560 --> 00:22:14,880
आप चर्चा यानी चर्चा का विषय क्या है पौराणिक आचार्य के वेदार्थ

312
00:22:14,880 --> 00:22:18,920
और महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ मगर इन्होंने अपने तीसरे लेटर में क्या लिखा

313
00:22:18,920 --> 00:22:23,080
है चर्चा का विषय किसके वेद भाष्य

314
00:22:23,080 --> 00:22:27,440
सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है स्वामी

315
00:22:27,440 --> 00:22:29,560
करपात्री जी आचार यण मदर

316
00:22:29,560 --> 00:22:33,640
और महर्षि दयानंद में से किसके वेद भास सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल है

317
00:22:33,640 --> 00:22:37,840
आप तो खुद ही अपने द्वारा दिया गया जो है बदल रहे हो

318
00:22:37,840 --> 00:22:42,440
दिखा दो इनको वो वाला दिखाइए

319
00:22:42,440 --> 00:22:48,040
जो इससे जस्ट पहले वाला लेटर है उसका सेकंड पेज

320
00:22:48,040 --> 00:22:52,080
दिखाइए है ना आपने अपने खुद के

321
00:22:52,080 --> 00:22:56,160
पत्र में दिया गया जो अगर शाब्दिक भेद की बात है ना तो हम भी पकड़

322
00:22:56,160 --> 00:23:00,160
लेंगे आपकी अगर यह जो ईश्वर के स्वरूप से

323
00:23:00,160 --> 00:23:04,240
सर्वशक्तिमान ईश्वर जो कह दिया गया है इसको आप यह पकड़ रहे

324
00:23:04,240 --> 00:23:08,680
हो कि आपने जो है पॉइंट को विषय को बदल दिया आप यहां क्या कर रहे हो

325
00:23:08,680 --> 00:23:14,680
आपने तो यहां पर यह इसको कहते दोगले पन की पराकाष्ठा

326
00:23:14,680 --> 00:23:19,360
इसको कहते हैं दोगले पन की पराकाष्ठा इससे पहले वाला पेज प जाइए

327
00:23:19,360 --> 00:23:23,360
सेकंड पेज प यहां क्या कर रहे हो आप

328
00:23:23,360 --> 00:23:27,360
हमारे द्वारा ईश्वर ईश्वर शब्द तब भी आ रहा है हमारे में और

329
00:23:27,360 --> 00:23:31,680
आपका एक कितना चौ शब्द बदल गए देखिए आप कह रहे

330
00:23:31,680 --> 00:23:35,840
हो स्वामी करपात्री आचार्य यण महिदर और

331
00:23:35,840 --> 00:23:40,080
मर्ष दयानंद में से किसके वेद भाष्य सनातन धर्म की मान्यता के अनुकूल

332
00:23:40,080 --> 00:23:46,080
है यह चर्चा का विषय है अब देखो शब्द कितने

333
00:23:46,960 --> 00:23:52,240
बदले शब्द कितने बदले इनके देखिए आप

334
00:23:52,240 --> 00:23:56,280
क्या है शब्द पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और

335
00:23:56,280 --> 00:24:00,480
मर्ष दयानंद के वेदार्थ अरे भैया अगर शाब्दिक भेद को ही

336
00:24:00,480 --> 00:24:04,880
देखोगे तो तुम तो खुद ही अपने द्वारा दिए गए विकल्पों को छोड़ रहे हो

337
00:24:04,880 --> 00:24:08,960
ऐसे दोगलो से किस प्रकार से बात की जाए कैसे सोचा जाए कि हम जहां

338
00:24:08,960 --> 00:24:12,960
जाएंगे वहा सुरक्षित होंगे और फिर आप गारंटी ले रहे हो हमा

339
00:24:12,960 --> 00:24:17,160
रिकॉर्डिंग करेंगे हम आपको दे देंगे आपको लिंक दे देंगे हा कैसे

340
00:24:17,160 --> 00:24:21,240
विश्वास किया जाए जो पलपल में अपनी बात बदल रहा है पहली बात तो यह यह

341
00:24:21,240 --> 00:24:25,840
ज जाहिर बात है कि ईश्वर का स्वरूप और सर्वशक्तिमान ईश्वर में कोई अंतर नहीं है

342
00:24:25,840 --> 00:24:30,000
और दूसरी बात हमने चलो अगर तुम्हे अंतर दिख भी रहा तो हमने अगले लेटर

343
00:24:30,000 --> 00:24:34,280
में आपके द्वारा यह बात आने से पहले कि आपने ईश्वर के वि ईश्वर

344
00:24:34,280 --> 00:24:38,320
के स्वरूप पर बात करने को नहीं कहा था उससे पहले हमने आपको अपनी भावना क्लियर कर दी

345
00:24:38,320 --> 00:24:42,360
कि हमने ईश्वर के स्वरूप पर ही बात की है तो आप हमारी बात को

346
00:24:42,360 --> 00:24:46,520
निकाल रहे हो कि भाई शब्द अलग अलग तो अगर ये शब्दों का भेद हो जाने से व

347
00:24:46,520 --> 00:24:50,760
टॉपिक बदल गया है तो टॉपिक तो तुम भी बदल रहे हो तुम खुद

348
00:24:50,760 --> 00:24:55,040
के ही टॉपिक को बदल रहे हो हमने तो तब भी तुम्हारे टॉपिक को बदला वो भी तुम्हारे

349
00:24:55,040 --> 00:24:59,400
अनुसार हमने बदला ही नहीं है कुछ पर टॉपिक को तो आप बदल रहे हो

350
00:24:59,400 --> 00:25:02,000
क्या लिख रहे हो वहां पे कि किसके

351
00:25:02,000 --> 00:25:06,080
वेद भाष्य सनातन मान्यता के अनुकूल और यहां पर कह रहे हो पौराणिक आचार्य

352
00:25:06,080 --> 00:25:10,800
के वेदार्थ और महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा करो

353
00:25:10,800 --> 00:25:16,280
हम ऐसे थोड़ी ना बचोगे इतना आसान नहीं है

354
00:25:16,280 --> 00:25:20,560
ना हां ठीक है अब जरा क्रमानुसार चलते

355
00:25:20,560 --> 00:25:24,560
हैं अब आप लोगों के इनकी ये लेपन की बात

356
00:25:24,560 --> 00:25:29,200
समझ में आ गई कि कोई व्यक्ति ईश्वर के स्वरूप को अगर एक बार

357
00:25:29,200 --> 00:25:33,360
सर्वशक्तिमान कह देगा तो वह विषय को बदल रहा है भले ही वह बाद में यह भी कह

358
00:25:33,360 --> 00:25:37,480
दे कि भाई ईश्वर का स्वरूप ही है हमारा विषय यह देखिए

359
00:25:37,480 --> 00:25:42,640
इसमें देखिए इनकी लाइन बड़ा करिए

360
00:25:42,640 --> 00:25:46,880
थोड़ा इन्होंने खुद खुद के द्वारा दिए गए विकल्प को बदला

361
00:25:46,880 --> 00:25:51,200
है इन्होंने विकल्प में क्या दिया है कि स्वामी

362
00:25:51,200 --> 00:25:55,600
करपात्री जी आचार्य यण

363
00:25:55,600 --> 00:25:59,760
महिदर और महर्षी दयानंद में से किस वेद भाष्य सनातन धर्म

364
00:25:59,760 --> 00:26:04,400
की मान्यता के अनुकूल है और लास्ट लेटर में क्या लिखा

365
00:26:04,400 --> 00:26:08,800
है कि पौराणिक आचार्य मषि दयानंद में से

366
00:26:08,800 --> 00:26:14,400
किसके वेद भाष्य किसके वेदार्थ पौराणिक

367
00:26:14,400 --> 00:26:18,480
वेदार्थ हा पौराणिक आचार्यों के वेदार्थ और

368
00:26:18,480 --> 00:26:22,640
महा ऋषि दयानंद के वेदार्थ पर आप चर्चा क्यों नहीं कर रहे अरे भाई ये विकल्प आपने

369
00:26:22,640 --> 00:26:26,640
दिया ही कब हमें आपकी भाषा में अगर बात करें तो यह कैसे लिख दिया

370
00:26:26,640 --> 00:26:30,880
कि हम चर्चा नहीं कर रहे हैं यह विकल्प आपने दिया कब ता हमें और

371
00:26:30,880 --> 00:26:35,160
वो आप विकल्प देने वाले होते कौन हो यह सब बातें

372
00:26:35,160 --> 00:26:39,400
भी क्रम में आएंगी ठीक है इसको कहते दोगले

373
00:26:39,400 --> 00:26:45,160
पन की पराकाष्ठा इसको ध्यान से

374
00:26:45,160 --> 00:26:49,200
देखिए अब चलते हैं जरा क्रम से तो

375
00:26:49,200 --> 00:26:54,080
यह तो हो गया

376
00:26:54,080 --> 00:26:58,920
भाई अब इन्होंने आगे बहुत बड़ बत्ती

377
00:26:58,920 --> 00:27:03,520
की है उस बड़ती पर भी हम लोग बात करेंगे क्या कहा है

378
00:27:03,520 --> 00:27:08,360
कि हमारी पूर्ण इच्छा है कि शास्त्रार्थ हो शास्त्र चर्चा हो

379
00:27:08,360 --> 00:27:12,360
इसलिए आपके द्वारा जो जो मांग रखी गई है हमने वह स्वीकार

380
00:27:12,360 --> 00:27:16,760
कर लिए कुछ उदाहरण देते हैं हमने शास्त्रार्थ को आबू

381
00:27:16,760 --> 00:27:21,360
पर्वत आबू में आबू में ना करते हुए लखनऊ में करना स्वीकार किया

382
00:27:21,360 --> 00:27:25,760
अरे भाई आपने हमसे पूछ कर के शास्त्रार्थ को होना

383
00:27:25,760 --> 00:27:29,920
सुनिश्चित किया था हम आपके पास आए थे क्या कि हमसे साथ साथ कर लो हम मरे जा रहे

384
00:27:29,920 --> 00:27:34,040
हैं क्या हम मरे जा रहे हैं क्या आप आए थे

385
00:27:34,040 --> 00:27:38,120
हमारे पास तो आपको हमारी चीजें तो देखनी पड़ेंगी ना हमें कोई जरूरत

386
00:27:38,120 --> 00:27:42,320
नहीं है आपसे बात करने की आप ऐसे व्यक्ति नहीं है

387
00:27:42,320 --> 00:27:46,440
हमें जब लगेगा तो हम उसके पास स्वयं जाएंगे आप अगर हमारे

388
00:27:46,440 --> 00:27:50,720
पास आ रहे हो कि हमसे शास्त्रार्थ कर लो तो हमसे आपको टाइम और जगह मांगनी पड़ेगी

389
00:27:50,720 --> 00:27:54,760
ना आप आए हो विनती करने और दिखाय रहे

390
00:27:54,760 --> 00:27:58,760
हो कि हम आपसे विनती कर रहे हैं इसको कहते ऐसे

391
00:27:58,760 --> 00:28:00,320
ही इन्होने य सब चीज फैलाई

392
00:28:00,320 --> 00:28:04,400
है युधिष्ठिर मी मांस ने हरा दिया प्रोपेगेंडा सब यह सब ऐसे ही

393
00:28:04,400 --> 00:28:08,720
फैलाते हैं यह वास्तविकता में इनका लक्ष्य नहीं है धर्म संस्थापन

394
00:28:08,720 --> 00:28:12,880
वगैरा सुन लो इनका लक्ष्य यही है आर्य समाज ने शास्त्र

395
00:28:12,880 --> 00:28:17,360
में किसको हला दिया यह है इनका लक्ष्य और कैसे हराया

396
00:28:17,360 --> 00:28:21,520
व आपके सामने तो हमने आपकी बहुत डिमांड मानी है जैसे

397
00:28:21,520 --> 00:28:25,520
हम इनके पास भीख मांगने गए थे भैया हमसे सा कर लगा हमने बहुत आपकी

398
00:28:25,520 --> 00:28:29,120
जो है डिमांड मानली

399
00:28:29,120 --> 00:28:33,280
तो इन्होंने क्या कहा हमने चर्चा को आबू में ना करते हुए लखनऊ

400
00:28:33,280 --> 00:28:37,280
में करना स्वीकार किया जैसे इन्होंने हम हम पर रहम कर दिया

401
00:28:37,280 --> 00:28:41,480
है ये हमसे जो बात करने आ रहे हैं चर्चा करने आ इन्होने र

402
00:28:41,480 --> 00:28:45,920
हमने आपको शास्त्र की चुनौती दी थी जिसे आपने शास्त्रार्थ शास्त्र

403
00:28:45,920 --> 00:28:50,080
चर्चा में बदलने की विनती की भाई

404
00:28:50,080 --> 00:28:54,280
हम जिनसे विनती करते हैं उनसे रोज करते हैं आप जैसों से हमें विनती

405
00:28:54,280 --> 00:28:58,320
करने की कोई आवश्यकता नहीं है भ्रम निकाल देना हमने

406
00:28:58,320 --> 00:29:02,720
आपसे विनती की हमने आपको अपनी बात बताई है

407
00:29:02,720 --> 00:29:06,920
आपने हमें कहां पर स्वयं को शास्त्रार्थ के रूप में ख्या पित करने वाला

408
00:29:06,920 --> 00:29:11,040
देखा वो बताइए हमें उसके बाद हमसे शास्त्रार्थ की अपेक्षा

409
00:29:11,040 --> 00:29:15,280
रखिए मुंह उठा के चल आपने लेटर भेजा मुह उठा के आपने जो

410
00:29:15,280 --> 00:29:15,780
हमसे

411
00:29:15,520 --> 00:29:20,680
कहा कि हमें आपसे शास्त्रार्थ करना है हमने आपको बता दिया हम शास्त्रार्थ है ही

412
00:29:20,680 --> 00:29:24,720
नहीं स घोषित विजेता स्वघोषित

413
00:29:24,720 --> 00:29:28,960
और हमने विनती भी कर ली उन्होंने विनती स्वीकार भी कर ली हमें पता

414
00:29:28,960 --> 00:29:33,040
लगा वही वाली बात है ना हमने इनसे विनती

415
00:29:33,040 --> 00:29:37,320
भी कर ली इन्होंने विनती स्वीकार कर ली हम पर रहम कर दिया हम पर करुणा

416
00:29:37,320 --> 00:29:41,680
बरसा दी अपनी और जो हमें पता ही नहीं लगा

417
00:29:41,680 --> 00:29:47,680
कितना भाई पराकाष्ठा है पराकाष्ठा विनती

418
00:29:48,120 --> 00:29:52,320
अच्छा अगर इसमें आगे चले तो इसमें

419
00:29:52,320 --> 00:29:56,600
आगे और क्या लिखा है हमने मूल विषय जिस पर चुनौती दी गई थी वह था

420
00:29:56,600 --> 00:30:00,600
किसकी परंपरा भाई पहली बात तो यह समझिए कि

421
00:30:00,600 --> 00:30:04,720
हम एहसान कर रहे हैं आपको समय देकर के अगर एहसान की बात है

422
00:30:04,720 --> 00:30:08,720
आपकी विनती है कि हमसे चर्चा कर लो एहसान

423
00:30:08,720 --> 00:30:13,120
हम कर रहे हैं अगर ऐसी बात करोगे तो

424
00:30:13,120 --> 00:30:17,560
कि आपने विनती की थी तो हमने स्वीकार कर ली अपनी भाषा पर जरा ध्यान दीजिए

425
00:30:17,560 --> 00:30:21,640
मैच्योर पर्सन है फिर हम जब जब उसका

426
00:30:21,640 --> 00:30:26,640
प्रतिकार करेंगे तो आपको लगेगा कि यह क्या हो रहा है तांडव हो रहा है ये

427
00:30:26,640 --> 00:30:30,720
तो तो फिर क्या है अभय आगे लिख रहे हैं हमने मूल विषय जिस

428
00:30:30,720 --> 00:30:35,160
पर चुनौती दी थी वह था किसकी परंपरा आ और

429
00:30:35,160 --> 00:30:40,120
दोनों में से किसकी परंपरा इस विषय को बदलने की आपने मांग की मांग नहीं की

430
00:30:40,120 --> 00:30:44,480
आदेश दिया और सुन लो निर्णय दिया आप

431
00:30:44,480 --> 00:30:48,680
हमें तार्किक रूप से बताइए तो आपकी परंपरा है क्या तब

432
00:30:48,680 --> 00:30:53,240
तो य हम पूछेंगे किसकी परंपरा आ आपकी परंपरा है ही नहीं

433
00:30:53,240 --> 00:30:58,960
कुछ तो यह विषय कहां से आ जाता है किसकी परंपरा

434
00:30:58,960 --> 00:31:03,840
हमने नहीं छोड़ा है आप अपनी परंपरा बता दीजिए यह लिस्ट है हमारे गुरुओं की

435
00:31:03,840 --> 00:31:07,920
और फिर आ जाइए बात कर लेंगे लिस्ट बताइए आपकी क्या

436
00:31:07,920 --> 00:31:12,040
है कहां से आए वेद मंत्र आज तक कोई नहीं बता पाया बल्कि यह कहने

437
00:31:12,040 --> 00:31:16,400
वाले लोग है कि हमारे यहां गुरु परंपरा को नहीं मानते और उसका उदाहरण

438
00:31:16,400 --> 00:31:20,840
है आपके यहां कोई भी यह नहीं कह सकता मैं आर्य समाज की ओर से प्रामाणिक

439
00:31:20,840 --> 00:31:24,840
व्यक्ति हूं यही कहोगे हम फलानी आर समाज संस्था

440
00:31:24,840 --> 00:31:28,960
की ओर से प्रमाणिक व्यक्ति है मगर आपके के यहां कोई ऐसी गद्दी

441
00:31:28,960 --> 00:31:33,080
सुरक्षित नहीं है जिसको प्रामाणिक माना जाए सार्वभौम रूप से आर समाज की ओर

442
00:31:33,080 --> 00:31:37,160
से प्रमाणिक मान लिया जाए कोई ऐसी गद्दी नहीं है इससे ही यह

443
00:31:37,160 --> 00:31:43,160
पता चलता है कि आपके य परंपरा का कोई मान नहीं

444
00:31:46,200 --> 00:31:50,480
है अच्छा अब आगे चलते हैं

445
00:31:50,480 --> 00:31:54,640
तो पहली बात आपने अपनी मूल हमने परंपरा

446
00:31:54,640 --> 00:31:58,640
विषय से चर्चा करने के लिए मना नहीं किया है

447
00:31:58,640 --> 00:32:02,720
मगर परंपरा विषय पर चर्चा होने के लिए किसकी परंपरा आर्स इस

448
00:32:02,720 --> 00:32:06,720
पर चर्चा करने के लिए यह आवश्यक है कि आपकी च

449
00:32:06,720 --> 00:32:10,760
परंपरा का कोई अस्तित्व हो अस्तित्व है नहीं अभी मैं दिखा

450
00:32:10,760 --> 00:32:14,920
दूंगा आपका ही व्यक्ति है जो बोल रहा है कि गुरुरम परंपरा को आर समाज

451
00:32:14,920 --> 00:32:19,280
में नहीं माना जाता तो आप क्या कहोगे उसको य प्रामाणिक व्यक्ति है यही तो दिक्कत है

452
00:32:19,280 --> 00:32:23,440
जिसके यहां परंपरा नहीं है उसके यहां किसकी बात को प्रामाणिक माना जाए किसकी बात को ना माना

453
00:32:23,440 --> 00:32:27,560
जाए इसका पता ही नहीं लगा सकते आप आ जीवन भर आप बार-बार किसी ना किसी

454
00:32:27,560 --> 00:32:31,960
को निरुत्तर करते रहो निराधार सिद्ध करते रहो उसको आउट करते

455
00:32:31,960 --> 00:32:36,200
रहेंगे यही तो दिक्कत है ना अभी हम उसका वीडियो दिखा देंगे

456
00:32:36,200 --> 00:32:40,640
तो उस व्यक्ति को आप नौकरी से निकालने की धमकी दोगे वो हमारे पास फोन करता है

457
00:32:40,640 --> 00:32:44,760
कि भैया वो हमें नौकरी से निकाल रहे मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं क्यों नौकरी से निकलवा

458
00:32:44,760 --> 00:32:48,760
रहे हो वो वीडियो हटा दो बताओ यह देख लीजिए

459
00:32:48,760 --> 00:32:53,000
यह वास्तविकता है जो सबसे पहले वो जो सूरज

460
00:32:53,000 --> 00:32:57,120
आर्य था उनका फोन आया मेरे पास फोन करके मुझे कह रहे हैं भैया

461
00:32:57,120 --> 00:33:01,240
मेरे छोटे-छोटे बच्चे हमारा वो वाला वीडियो हटा दीजिए मैंने कहा क्यों आपने

462
00:33:01,240 --> 00:33:05,320
क्या कुछ ऐसा कह दिया है जो उचित नहीं है जो सच नहीं

463
00:33:05,320 --> 00:33:09,400
है नहीं नहीं वो सब तो है मगर भैया क्या बताए हमें हटाने धमकी दी जा रही

464
00:33:09,400 --> 00:33:13,440
है नौकरी से हटाने की धमकी दे रहे हैं लोग उन्हें अब

465
00:33:13,440 --> 00:33:17,560
वो आदमी अपना 40 45 वर्ष का जो जीवन निकाल चुका है

466
00:33:17,560 --> 00:33:21,840
आर्य समाज को दे चुका है और उसमें रह कर के अपना पालन पोषण

467
00:33:21,840 --> 00:33:26,080
कर रहा है जो बच्चों का उस आदमी को विवश होना पड़ा जो उनकी मान्यता

468
00:33:26,080 --> 00:33:30,840
को नहीं मानता है उसके पास गिड़गिड़ाना पड़ा फोन करके

469
00:33:30,840 --> 00:33:35,080
ये है इनकी अलंकार हों की

470
00:33:35,080 --> 00:33:41,080
वास्तविकता समय आने पर य अपने सगे के भी सगे नहीं होते हैं देख

471
00:33:42,000 --> 00:33:46,000
लो उसको धमका रहे हैं कि तुमने ये क्यों कह दिया कि गुरुम

472
00:33:46,000 --> 00:33:50,000
परंपरा नहीं है अरे भाई तब तक नहीं थी आज आप लोग अ ये तानाबाना

473
00:33:50,000 --> 00:33:54,280
बुनने लगे हो अभी आगे बात होगी जब से हम लोगों ने से सवाल उठाया

474
00:33:54,280 --> 00:33:58,320
है आप ये भी आपके व्यक्ति ने कहा है हां हमने

475
00:33:58,320 --> 00:34:02,480
हमसे पहले किसी ने सवाल नहीं उठाया यह भी आपके व्यक्ति ने कहा है कि यह

476
00:34:02,480 --> 00:34:06,640
सवाल आज आप पहली बार कर रहे हैं आपसे पहले किसी ने सवाल

477
00:34:06,640 --> 00:34:10,760
किया नहीं कि वेद मंत्र आए कैसे यह

478
00:34:10,760 --> 00:34:14,880
भी हम अपने मन से नहीं बोल रहे उसको भी नौकरी से निकालने का धमकी देना है पद से हटाने की धमकी

479
00:34:14,880 --> 00:34:19,600
देना व सामर्थ मान व्यक्ति अपना स्कूल चला रहा है उसको भी धमकी दे देना

480
00:34:19,600 --> 00:34:23,800
य तुमने य बात कैसे कही शिवांश नारायण द्वेदी से पहले य बात किसी ने पूछी नहीं

481
00:34:23,800 --> 00:34:28,160
है हर वो व्यक्ति जो आपके सिद्धांतों को जैसा आपने टाया

482
00:34:28,160 --> 00:34:32,400
है वैसा का वैसा जब बताने लगे और वो आपके दिक्कत आने लगे तो आप उस व्यक्ति

483
00:34:32,400 --> 00:34:38,400
को सजा देने लगो

484
00:34:50,530 --> 00:34:56,530
[संगीत]

485
00:35:12,880 --> 00:35:18,880
तो थोड़ा सा बाधा आ गई थी नेटवर्क वगर में अच्छा

486
00:35:19,200 --> 00:35:23,320
तो उस व्यक्ति को य लोग डरा दमका रहे हैं तो कुल मिलाकर के आपकी

487
00:35:23,320 --> 00:35:27,840
परंपरा का अस्तित्व है ही नहीं तो फिर यह जो विषय है कहां से बनता है

488
00:35:27,840 --> 00:35:31,920
पर कोई बात तो बताइए तो कहने का मतलब तो यह है हमारी

489
00:35:31,920 --> 00:35:36,080
लाइव भैया आए दिन आती रहती है इस पर ही आ जाना पहले ये सेट कर लो आ कर के

490
00:35:36,080 --> 00:35:40,480
कि कौन प्रामाणिक होगा आर्य समाज की ओर से अलंकार समाज की ओर से और

491
00:35:40,480 --> 00:35:44,920
उसमें भी फिर यह तय कर लो कि चर्चा का विषय होगा क्या उसके बाद आप लखनऊ आओ

492
00:35:44,920 --> 00:35:48,920
लाइव आते रहते हैं उसमें आ जाओ और यह तय करो कि चर्चा का विषय होगा

493
00:35:48,920 --> 00:35:53,240
क्या

494
00:35:53,240 --> 00:35:57,760
अच्छा आप जिस विषय पर वीडियो बनाते हैं उस विषय पर विद्वानों के साथ बैठकर

495
00:35:57,760 --> 00:36:01,760
चर्चा करने में क्या समस्या है कोई समस्या नहीं है जैसे

496
00:36:01,760 --> 00:36:06,040
आप ये कह रहे हैं कि आपको ईश्वर पर चर्चा करने से कोई समस्या

497
00:36:06,040 --> 00:36:10,080
नहीं है वैसे ही हमें भी हिंदू शब्द पर और ये जो आपने जो अगला टॉपिक

498
00:36:10,080 --> 00:36:14,120
दिया कि पौराणिक किसके किसके वेद भाष्य मान्य है इन

499
00:36:14,120 --> 00:36:18,160
पर हमें भी कोई चर्चा करने से आपत्ति नहीं है बात है न्याय की

500
00:36:18,160 --> 00:36:22,840
पहली बात जो आपने विकल्प दिया उसी को हमने चुना और अगर वेद

501
00:36:22,840 --> 00:36:26,960
और अगर शाब्दिक भेद से आप जो है टॉपिक का बदलना मान रहे हो तो टॉपिक तुम भी बदल रहे हो

502
00:36:26,960 --> 00:36:31,880
क्यों बदला रामो दुर भी भाषित धर्म है कहां कहां है धर्म

503
00:36:31,880 --> 00:36:36,200
टॉपिक तुम बदल रहे हो जब तुम एक जगह दूसरे शब्दों

504
00:36:36,200 --> 00:36:40,240
का मिलता जुलता टॉपिक तो है मगर टॉपिक तो तुमने

505
00:36:40,240 --> 00:36:44,440
भी बदला ना अगर शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदलना मानते हो तो और दूसरी बात यह

506
00:36:44,440 --> 00:36:48,640
है कि हमारा उद्देश्य किसी संस्था

507
00:36:48,640 --> 00:36:52,720
अथवा व्यक्ति को नीचा दिखाना नहीं है यह आपको लगता है

508
00:36:52,720 --> 00:36:55,640
हम अपने कितने वीडियोस में यह बात कह चुके हैं

509
00:36:55,640 --> 00:36:59,880
कि हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्त मोक्ष और शाश्वत धर्म दो हम आपके हो जाएंगे

510
00:36:59,880 --> 00:37:03,960
कितने वीडियो में कह चुके हैं ले चलो अपने साथ हम व्यक्तिगत रूप से कोई

511
00:37:03,960 --> 00:37:08,320
भी मान्यता रखे अगर आपने अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान बता

512
00:37:08,320 --> 00:37:12,360
दिया सिद्ध कर दिया तो हम आपके साथ खड़े हो जाएंगे हम और आप एक हो

513
00:37:12,360 --> 00:37:16,400
जाएंगे हमें इससे मतलब नहीं है कि वो जो वो

514
00:37:16,400 --> 00:37:20,680
जो प्रचार हो रहा होगा सनातन धर्म का वो आर समाज के माध्यम से हो रहा होगा

515
00:37:20,680 --> 00:37:25,040
या फिर इकोन के माध्यम से हो रहा होगा या रामपाल के माध्यम से हो रहा होगा

516
00:37:25,040 --> 00:37:29,760
हमें मतलब इससे कि वो सार्वभौम ऐसे

517
00:37:29,760 --> 00:37:33,920
ऐसे शिक्षाओं का प्रचार प्रसार किया जाए जो अकाट्य हो नास्तिक

518
00:37:33,920 --> 00:37:38,320
आ कर के उसमें टिक ना पाए अब होगी धर्म की संस्थापन

519
00:37:38,320 --> 00:37:42,720
यह सब आपके नहीं आएगा आपकी बुद्धि क्योंकि संकीर्ण हो चुकी है आपको

520
00:37:42,720 --> 00:37:47,280
मतलब इससे है कि किस टॉपिक पर इसको गलत सिद्ध किया जाए अगर ये सर्वशक्तिमान

521
00:37:47,280 --> 00:37:51,320
ईश्वर की तरफ जा रहा है तो इसका मतलब है ये कहीं ना कहीं उसमें थोड़ा कच्चा है तो उसी को

522
00:37:51,320 --> 00:37:55,520
पकड़ो जिससे हट रहा है श शब्दों का खेल खेल हम उसको

523
00:37:55,520 --> 00:37:59,520
क्यों पीछे रख रहे हैं हमें उसम बात करने में कोई आपत्ति नहीं है मगर अगर

524
00:37:59,520 --> 00:38:04,000
हिंदू शब्द में निराकरण प्राप्त भी हो गया तो उससे क्या हो जाएगा

525
00:38:04,000 --> 00:38:08,240
सनातन समाज एक हो जाएगा हिंदू शब्द की प्रमाणिकता प्रमाणिकता पर

526
00:38:08,240 --> 00:38:12,560
नहीं केवल जीत और हार होगी सर्वशक्तिमान

527
00:38:12,560 --> 00:38:15,360
ईश्वर से समाज एक होगा हां

528
00:38:15,360 --> 00:38:19,560
जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान उसके साथ पूरी जनता

529
00:38:19,560 --> 00:38:23,800
उससे एक होगा इसलिए उसको हम प्राथमिकता से रख रहे हैं और दूसरी

530
00:38:23,800 --> 00:38:27,880
बात हमने मना नहीं किया जैसे आप मना नहीं कर रहे ईश्वर स शक्तिमान पर

531
00:38:27,880 --> 00:38:32,040
बात करने से हमने तो मना नहीं किया इस पर भी हम अभी आगे

532
00:38:32,040 --> 00:38:36,080
क्रम से बात कर लेंगे कि हमने मना किया आपने मना किया उस टॉपिक पर बात

533
00:38:36,080 --> 00:38:40,480
करने से अच्छा अब इनका अगला पॉइंट आता है कि ये

534
00:38:40,480 --> 00:38:44,760
आपके अगला अगला अगला पेज दिखाइए अब इनका अगला पॉइंट

535
00:38:44,760 --> 00:38:48,840
आता है कि आपके चैनल पर हिंदू शब्द को नकारने वाले वेद विरोधी आप हिंदू

536
00:38:48,840 --> 00:38:52,880
शब्द को नकारने वालों को वेद विरोधी कह रहे हो एक तरफ आप कहते हैं कि आप

537
00:38:52,880 --> 00:38:57,120
आचार्य नहीं है इसलिए शास्त्रार्थ नहीं कर सकते और दूसरी तरफ आप हिंदू शब्द को नकारने

538
00:38:57,120 --> 00:39:01,120
वालों को वेद विरोधी घोषित करते हो कर देते हो यह अधिकार

539
00:39:01,120 --> 00:39:05,720
आपको कैसे प्राप्त हुआ जब सनातन धर्म आधारित शास्त्र पर हिंदू शब्द प्रमाणिक

540
00:39:05,720 --> 00:39:09,760
है कि नहीं इस विषय का ज्ञान नहीं था तो आपने हिंदू शब्द को नकारने वालों

541
00:39:09,760 --> 00:39:14,080
को वेद विरुद्ध घोषित कैसे किया इस विषय का

542
00:39:14,080 --> 00:39:18,320
ज्ञान और अगर इस विषय पर आपको ज्ञान है तो शास्त्र चर्चा करने हेतु

543
00:39:18,320 --> 00:39:22,360
आप क्यों तैयार नहीं हो रहे हैं हमने पहली बात तो हमने बता दिया जैसे

544
00:39:22,360 --> 00:39:26,400
आप कह रहे हैं ना कि हम ईश्वर विषय पर चर्चा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं मगर उसको बाद में

545
00:39:26,400 --> 00:39:30,400
करेंगे ऐसे हम हिंदू शब्द पर पीछे नहीं हट रहे हैं मगर उसको हम बाद के

546
00:39:30,400 --> 00:39:34,400
लिए इसलिए रखना चाह रहे हैं क्योंकि अगर एक चर्चा शुरू होती

547
00:39:34,400 --> 00:39:38,520
है तो आपको क्या लगता है निर्णय हो जाता है अधूरे पन

548
00:39:38,520 --> 00:39:42,800
के साथ ही वह बात खत्म होगी जनता निर्णय लेगी कि किसने सही काहा किसने गलत कहा

549
00:39:42,800 --> 00:39:47,000
आप उसको अंत मानेंगे और अंत मानने का आधार

550
00:39:47,000 --> 00:39:51,040
क्या होगा चर्चा में कैसे डिसाइड होगा कि चर्चा पूरी हो गई तो अब

551
00:39:51,040 --> 00:39:55,200
हिंदू पर करें चर्चा कैसे डिसाइड होगा कि चर्चा पूरी

552
00:39:55,200 --> 00:39:59,400
हो गई तो अब सर्वशक्तिमान पर करें चर्चा कितने दिन के लिए आ रहे हो तीन दिन चलेगा

553
00:39:59,400 --> 00:40:03,400
क्या शास्त्रार्थ तीन दिन चलेगी चर्चा यह

554
00:40:03,400 --> 00:40:07,640
सब नाटक वाली बातें हैं यह सब यह बात है कि हिंदू शब्द परही घोल मोल

555
00:40:07,640 --> 00:40:11,800
करके और कुछ ऐसा दिखा दिया जाए कि जो मूल विषय है उस पर बात आए

556
00:40:11,800 --> 00:40:16,120
ना जिसमें हम लोग हम लोगों के पास कुछ बोलने के लिए है नहीं

557
00:40:16,120 --> 00:40:20,240
तो हमें ऐसा व्यर्थ का प्रयास नहीं करना है ठीक है

558
00:40:20,240 --> 00:40:24,320
अगर इस तरह से सुनियोजित चर्चा होगी तो सर्वशक्तिमान ईश्वर पर करिए

559
00:40:24,320 --> 00:40:28,360
ना और दूसरी बात य न्याय आप ने जब खुद अपना विषय

560
00:40:28,360 --> 00:40:32,560
दिया है ईश्वर का विषय सबसे पहला ईश्वर का स्वरूप

561
00:40:32,560 --> 00:40:36,960
तो उससे क्यों मुक रहे हो अगर हमने शाब्दिक

562
00:40:36,960 --> 00:40:41,120
भेद से उसको लिख भी दिया था तो हमने अपने दूसरे पत्र में उसको सही भी कर दिया

563
00:40:41,120 --> 00:40:45,280
कि हमने ईश्वर सर्वशक्तिमान ईश्वर के रूपने हमने आपका जो विकल्प

564
00:40:45,280 --> 00:40:45,780
था

565
00:40:45,440 --> 00:40:49,920
ईश्वर विषय उसको ही स्वीकार किया है क्यों मुक रहे हो और मुकने

566
00:40:49,920 --> 00:40:54,040
वालों के साथ क्यों बात की जाए उनके एरिया में जाकर के उनका वो उनके गढ़ में जाकर के उनके

567
00:40:54,040 --> 00:41:00,040
केंद्र में जाकर के और तो और

568
00:41:01,400 --> 00:41:05,480
अब आपने कहा कि जब आपको आप कहते

569
00:41:05,480 --> 00:41:10,120
हो कि आप श आप आचार्य नहीं हो अच्छा पहली बात तो

570
00:41:10,120 --> 00:41:14,400
यह बताइए कि जब आपके धर्म का खंडन

571
00:41:14,400 --> 00:41:18,720
हो रहा हो तो वहां पर उस बात का प्रतिकार करने के लिए क्या आचार्य

572
00:41:18,720 --> 00:41:22,760
होना आवश्यक है जब आपके धर्म का कहीं पर

573
00:41:22,760 --> 00:41:27,000
खंडन हो रहा हो तो क्या वहां पर प्रतिकार

574
00:41:27,000 --> 00:41:31,240
कर ने के लिए आचार उने आवश्यक है बाली ने जब यह कहा था

575
00:41:31,240 --> 00:41:35,280
कि अमुक अमुक तरीके से आपने मेरा वध गलत किया है तो प्रभु श्री राम ने

576
00:41:35,280 --> 00:41:40,000
वहां पर मनुस्मृति का श्लोक देते हुए वहां पर उसका प्रतिकार किया था

577
00:41:40,000 --> 00:41:44,080
तो वो आचार्य थे क्या आचार्य

578
00:41:44,080 --> 00:41:48,640
तो नहीं थे वो वो तो क्षत्रिय थे

579
00:41:48,640 --> 00:41:52,680
अब आप ही तो कहते हैं ना कि ब्राह्मण का कार्य होता है वो कर्म कर्म से मानते

580
00:41:52,680 --> 00:41:57,360
हो ना क्षत्रिय थे आचार तो नहीं थे वो

581
00:41:57,360 --> 00:42:01,360
वो जन्म और कर्म दोनों से

582
00:42:01,360 --> 00:42:05,360
थे तो इसका अर्थ यह है कि आपके

583
00:42:05,360 --> 00:42:09,760
धर्म का यदि कहीं पर खंडन हो रहा है तो उसके लिए आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति का आचार्य

584
00:42:09,760 --> 00:42:13,760
होना आवश्यक हो फिर भी आपने अगली लाइन

585
00:42:13,760 --> 00:42:18,240
क्या लिखी है यह अधिकार आपको कहां से कैसे प्राप्त हुआ

586
00:42:18,240 --> 00:42:22,320
यानी कि आप अधिकार किसी से किसी तरीके से प्राप्त होना

587
00:42:22,320 --> 00:42:26,400
स्वीकार करते हैं स्वयं को अधिकार स्वयं को अधिकार

588
00:42:26,400 --> 00:42:30,520
देने वाला नहीं घोषित करते हैं कहीं से प्राप्त होना स्वीकार करते हैं

589
00:42:30,520 --> 00:42:34,640
कैसे प्राप्त हुआ है ना यानी कि आप भी

590
00:42:34,640 --> 00:42:38,920
ये स्वीकार करते हैं कि धर्म के बारे में निर्णय देने के लिए कहीं से प्राप्त

591
00:42:38,920 --> 00:42:43,440
होना अधिकार आवश्यक है उसी को परंपरा कहते हैं उसी को परंपरा

592
00:42:43,440 --> 00:42:47,720
कहते हैं कि धर्म के बारे में निर्णय

593
00:42:47,720 --> 00:42:51,920
देने के लिए अधिकार कैसे प्राप्त हुआ इसी को परंपरा कहते हैं तो आपको कहां

594
00:42:51,920 --> 00:42:56,200
से प्राप्त हुआ जो आप मनमुक व्याख्या करते घूम रहे हैं

595
00:42:56,200 --> 00:43:00,200
जहां पर भगवान के विराट स्वरूप की बात की जा रही है वहां पर भी उसको निराकार सिद्ध कर रहे

596
00:43:00,200 --> 00:43:04,280
हैं अलंकार कह देते हैं कहीं पर भी अपने मन से

597
00:43:04,280 --> 00:43:08,280
कहां से अधिकार प्राप्त हुआ आपको बताइए कैसे प्राप्त हुआ आपको

598
00:43:08,280 --> 00:43:12,480
य अधिकार अधिकार का प्राप्त होना आप स्वीकार कर रहे हैं

599
00:43:12,480 --> 00:43:16,400
स्वयंभू नहीं हो सकते आप आपने स्वीकार किया आपको प्राप्त करना पड़ता

600
00:43:16,400 --> 00:43:20,600
है कहीं से लाना पड़ता है अधिकार वो अधिकार आपको कहां से मिला

601
00:43:20,600 --> 00:43:24,800
मैंने जो बात कही है वो उस आचार्य के द्वारा बताई

602
00:43:24,800 --> 00:43:29,040
गई बात है जिसको कहीं से इसी प्रक्रिया के द्वारा वह अधिकार प्राप्त

603
00:43:29,040 --> 00:43:33,560
हुआ धर्म के संबंध में निर्णय देने का आप बताए

604
00:43:33,560 --> 00:43:37,600
दयानंद जी को अथवा उनके गुरु को अथवा उनके गुरु को कहां से

605
00:43:37,600 --> 00:43:41,840
वो अधिकार प्राप्त हुआ था निर्णय देने का बताइए फस

606
00:43:41,840 --> 00:43:46,040
गए ना ऐसे ही बाल की खाल निकाली ना जो ईश्वर के स्वरूप को हमने

607
00:43:46,040 --> 00:43:52,040
सर्वशक्तिमान ईश्वर कह दिया लो

608
00:44:02,000 --> 00:44:06,680
हमने कहा बोली विषय बदल दिया अच्छा

609
00:44:06,680 --> 00:44:10,720
और हमने फिर मैं आपको याद दिला दूं कि हिंदू शब्द पर बात करने

610
00:44:10,720 --> 00:44:14,880
से हमने कोई मना नहीं किया है मगर हम यह चाहते हैं कि य चर्चा जीत और हार

611
00:44:14,880 --> 00:44:19,000
के लिए ना हो यह चर्चा हो सनातन की एकता के लिए धर्म

612
00:44:19,000 --> 00:44:23,160
की स्थापना के लिए इसलिए हिंदू शब्द की प्रामाणिकता और अपमा

613
00:44:23,160 --> 00:44:27,240
कता से ऐसा कोई परिवर्तन नहीं आ जाएगा सिद्ध

614
00:44:27,240 --> 00:44:31,520
जाने अथवा ना हो जाने से जो ईश्वर के सिद्ध होने से आएगा

615
00:44:31,520 --> 00:44:35,640
ईश्वर सर्वशक्तिमान क्यों वो सिद्ध करो ना क्यों

616
00:44:35,640 --> 00:44:39,680
भाग रहे हो सर्वशक्ति मत्ता से ईश्वर की नहीं है ना बोल दो ना

617
00:44:39,680 --> 00:44:43,680
नहीं हमारा ईश्वर स ईश्वर ऐसा ही होता है जो बाधित होता है बोल दो

618
00:44:43,680 --> 00:44:47,720
ना दिक्कत है बोलने में वो यह नहीं कर

619
00:44:47,720 --> 00:44:52,120
सकता वो वो नहीं कर सकता मगर बाधित नहीं है व अबद दिक्कत है बोलने सच्चाई

620
00:44:52,120 --> 00:44:57,520
बोलने में दिक्कत है क्योंकि व्यक्ति फिर दूर हटने लगेगा

621
00:44:57,520 --> 00:45:01,760
दुनिया में धर्म और अधर्म की जो लड़ाई है वह इस बात पर टिकी हुई है कि

622
00:45:01,760 --> 00:45:05,760
ईश्वर सर्वशक्तिमान है और दूसरी ओर नहीं है ईश्वर बाधित

623
00:45:05,760 --> 00:45:09,760
है इधर का इधर ईश्वर अवाद अद बस

624
00:45:09,760 --> 00:45:13,880
इसी पर है पूरी व्याख्या परम स्वतंत्र मोक्ष है और इधर बाधित

625
00:45:13,880 --> 00:45:18,040
मोक्ष

626
00:45:18,040 --> 00:45:23,720
है चलिए आगे देखते हैं उन्होने क्या लिखा

627
00:45:23,720 --> 00:45:27,720
है इसी प्रकार आपने अनेक बार यह प्रश्न उठाए दयानंद ने

628
00:45:27,720 --> 00:45:31,720
वेदों में पौराणिक आचार्यों का अनुसरण क्यों नहीं किया अब देखिए जब

629
00:45:31,720 --> 00:45:35,720
आप स्वयं को वेद वैदिक रूप में प्रस्तुत करते हुए सामने

630
00:45:35,720 --> 00:45:39,760
वाले को पौराणिक कहते हैं तो इसीलिए फिर जब अलंकारी अलंकारी कहते

631
00:45:39,760 --> 00:45:43,920
तो बुरा नहीं मानना चाहिए है ना फ फिर वहां

632
00:45:43,920 --> 00:45:49,400
पर रोना नहीं हमको अलंकारी कह दिया ये नहीं करना चाहिए य आपने कैसे कहा

633
00:45:49,400 --> 00:45:53,440
पचार किसने स्वयं को लिखा है किसी

634
00:45:53,440 --> 00:45:57,480
अन्य को वैदिक मानते हुए स्वयं को पौराणिक आचार्य किसने का किया

635
00:45:57,480 --> 00:46:02,200
है सनातन वैदिक आर्य हिंदू है परंपरा प्राप्त सनातनी है ये सब

636
00:46:02,200 --> 00:46:06,600
लिखो मगर अपना प्रोपेगेंडा अपना जो वो एक वो

637
00:46:06,600 --> 00:46:12,600
सुपीरियर

638
00:46:24,120 --> 00:46:28,480
कॉम्प्लेक्शन कैच हवाई फायर यह

639
00:46:28,480 --> 00:46:32,520
भी नहीं कह सकते वह जो आपका जो अनऑफिशियल गुंडा है ना वो जो कहता फिर रहा है

640
00:46:32,520 --> 00:46:37,240
आजकल जो आपके पत्र को हम तक पहुंचने से पहले अपने उस पर डाल देता

641
00:46:37,240 --> 00:46:41,680
है चैनल पर वह जो आजकल आजकल

642
00:46:41,680 --> 00:46:45,800
कहता घूम रहा है कि क्या

643
00:46:45,800 --> 00:46:50,280
कहते हैं वो हमें वो जो है वो

644
00:46:50,280 --> 00:46:54,280
क्या कहते साक्षात्कार किया अर्थ

645
00:46:54,280 --> 00:47:00,280
का साक्षात्कार किया स्वयं ईश्वर से ना इस विषय को लेकर

646
00:47:00,640 --> 00:47:05,360
के तभी लाइव आ जाओ पता चल जाएगा साक्षात्कार

647
00:47:05,360 --> 00:47:09,440
किया उसको कंफर्म कहां से कराया

648
00:47:09,440 --> 00:47:13,560
भाई अगर गुरु जो गुरु परंपरा है वो कुछ कह रही है और आप साक्षात्कार करके

649
00:47:13,560 --> 00:47:17,800
कुछ आ रहे हो सकता है आपकी इंद्रियों का प्रतिबिंब हो जो साक्षात्कार कर रहे उसको

650
00:47:17,800 --> 00:47:21,800
वेरीफाई करोगे ना परंपरा प्राप्त शास्त्रों से तो

651
00:47:21,800 --> 00:47:26,080
शास्त्रों के आधार पर अगर आपने वेरीफाई कर लिया तो हो गए गुरु वो

652
00:47:26,080 --> 00:47:30,080
जिसके आधार पर आप वेरीफाई कर रहे हो अपने सपने में आने वाले

653
00:47:30,080 --> 00:47:34,120
जो भी आपका ईश्वर है उसके द्वारा दिए गए ज्ञान का वेरिफिकेशन अगर

654
00:47:34,120 --> 00:47:38,240
आप कर रहे हो परंपरा प्राप्त शास्त्रों के आधार पर हो गए गुरु

655
00:47:38,240 --> 00:47:42,720
आपके आपको प्रदान करने वाले

656
00:47:42,720 --> 00:47:47,240
तो ऐसे बच नहीं पाओगे ठीक है अच्छा

657
00:47:47,240 --> 00:47:51,760
तो इन्होंने क्या किया सबसे पहले तो नाम बदल दिया पौराणिक आचार्य हो गया

658
00:47:51,760 --> 00:47:56,280
उसके बाद जब ट में ये प्रश्न आप पूछ सकते हो तो विद्वानों के समक्ष आकर आपको

659
00:47:56,280 --> 00:48:00,360
पौराणिक आचार्य के वेदार्थ और मषि दयानंद के वेदार्थ पर आपको चर्चा करने

660
00:48:00,360 --> 00:48:04,480
में क्यों आपत्ति हो रही है अरे भाई आपके वो वृद्ध जन है जिन्होंने अपनी मट्टी

661
00:48:04,480 --> 00:48:08,680
कुटाई थी अभी कुछ दिन पहले वो भी तो यब पर बैठ कर के चर्चा कर रहे हैं

662
00:48:08,680 --> 00:48:13,080
अंडर कवर्ड गुंडे के साथ जिसको जब मन चाहे

663
00:48:13,080 --> 00:48:15,840
आर समाज की संस्थाए लात मार देती है हम इसे नहीं जानते

664
00:48:15,840 --> 00:48:19,960
कौन वाच उसके साथ चर्चाएं कर रहे हैं य

665
00:48:19,960 --> 00:48:24,120
पर बैठ के वो आ जाए सर्वशक्तिमान के विषय में चर्चा की है उन्होंने आ जाए

666
00:48:24,120 --> 00:48:28,560
क्यों नहीं आ रहे भेज दो उनको

667
00:48:28,560 --> 00:48:32,720
जब आप लोगों को पढ़ा सकते हो कि ईश्वर अवतार नहीं लेता अपने

668
00:48:32,720 --> 00:48:37,000
गुरुकुल में आर्स गुरुकुल में लोगों के कूट कूट के जैसे वो मिर्ची कूटी जाती

669
00:48:37,000 --> 00:48:41,000
वैसे भर सकते हो उनके मन में कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता तो आकर के यहां

670
00:48:41,000 --> 00:48:45,200
पर एक अल्पज्ञ शिष्य से शंकराचार्य के अल्पज्ञ शिष्य के साथ चर्चा

671
00:48:45,200 --> 00:48:49,320
करने में क्यों डर है क्यों भाग रहे हो उस विषय से तरकीब

672
00:48:49,320 --> 00:48:53,520
निकाल रहे हो कि कैसे इसको शब्दों के जाल में फसा कर के इसको ये सिद्ध किया जाए इसका विषय जो है

673
00:48:53,520 --> 00:48:57,720
निरस्त हो जाता है अपने आप नियम बना लिया निरस्त हो जाता है और

674
00:48:57,720 --> 00:49:03,720
फिर खुद के शब्द बदल गए तो पकड़े

675
00:49:04,920 --> 00:49:09,720
गए इतनी दो मतलब परा मतलब कोई हद होती है

676
00:49:09,720 --> 00:49:13,760
मतलब झूठ भी बोलने में शर्म नहीं आ रही है बात को बदलने में शर्म नहीं आ रही

677
00:49:13,760 --> 00:49:18,600
है निरंकुश शासक स्वयं को तुम सिद्ध कर रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आ रही

678
00:49:18,600 --> 00:49:22,840
है अपने आप तुम विनती सुनने वाला स्वयं को सिद्ध कर रहे हो मगर शर्म

679
00:49:22,840 --> 00:49:26,880
नहीं आ रही है तुम्हे अपनी बातों से तुम मुकर रहे हो मगर शर्म नहीं

680
00:49:26,880 --> 00:49:30,960
आ रही अपने सिद्धांतों से यही की यही लेटर में तुम

681
00:49:30,960 --> 00:49:36,960
बदल रहे होगर तुम्ह शर्म नहीं आ रही है हद होती है बेशर्मी

682
00:49:42,320 --> 00:49:46,320
की अगर शाब्दिक भेद से विषय का बदलना माना जाएगा तो

683
00:49:46,320 --> 00:49:52,320
आपने भी शाब्दिक भेद के अनुसार अपना विषय क्यों बदला अंतिम लेटर

684
00:49:52,400 --> 00:49:58,400
में फस गए

685
00:49:58,640 --> 00:50:02,720
स्वयं को विनती सुनने वाला मान लिया हमने आपकी विनती सुन ली हमने आपकी मांगे सुन ली

686
00:50:02,720 --> 00:50:07,400
जैसे हम मरे जा रहे थे आपसे चर्चा करने के लिए

687
00:50:07,400 --> 00:50:11,600
जिन लोगों से चर्चा की है उन लोगों के पास

688
00:50:11,600 --> 00:50:15,720
से हम गुजर रहे थे तो चर्चा कर ली और एक

689
00:50:15,720 --> 00:50:19,880
दो तो ऐसे हैं जिनको धन राशि भी प्रदान करके आए हैं यह लो जो आपने

690
00:50:19,880 --> 00:50:24,360
हमको अपना कीमती समय दिया उसका पैसा

691
00:50:24,360 --> 00:50:30,360
लो फ लोग कहेंगे हम अमर्यादित हो

692
00:50:35,120 --> 00:50:39,360
गया इसलिए मेरा आपसे पुनः आग्रह है ईश्वर

693
00:50:39,360 --> 00:50:43,600
के स्वरूप पर भी अगर आपको चर्चा करनी है तो उपरोक्त दो विषयों के बाद उस पर भी चर्चा कर ली जाएगी

694
00:50:43,600 --> 00:50:48,160
यह पॉइंट बहुत जरूरी है यह पॉइंट बहुत जरूरी

695
00:50:48,160 --> 00:50:52,360
है क्यों जरूरी है यह पॉइंट

696
00:50:52,360 --> 00:50:56,400
कि भाई पहली बात ये बताओ आपको क्या लगता है कि हम

697
00:50:56,400 --> 00:51:00,440
लोग लोग जब किसी एक विषय पर अटक तो क्या उसका बहुत अच्छे से हा

698
00:51:00,440 --> 00:51:04,680
ठीक है हम हार गए आप जीत गए या फिर हा यह चर्चा समाप्त हुई ऐसे होगा

699
00:51:04,680 --> 00:51:08,800
क्या चर्चा हम लोगों का जो मनोभाव होगा

700
00:51:08,800 --> 00:51:12,800
वो यही होगा कि चर्चा अधूरी है कुछ निर्णय नहीं निकला आप अपने

701
00:51:12,800 --> 00:51:17,040
घर हम अपने घर यह निर्णय होगा

702
00:51:17,040 --> 00:51:21,080
तो हम ऐसे विषय पर बात क्यों करें जिस विषय पर हम लोग मेहनत करने

703
00:51:21,080 --> 00:51:25,160
के बाद भी और जो है कोई उसका फल ना मिले जनता

704
00:51:25,160 --> 00:51:29,400
जब उसको देख ठीक है हिंदू शब्द सिद्ध नहीं हो पाया भैया ठीक है अभी

705
00:51:29,400 --> 00:51:34,440
भी हम अलंकारी और हम जो है सनातन परंपरा प्राप्त

706
00:51:34,440 --> 00:51:36,920
हिंदू

707
00:51:36,920 --> 00:51:39,400
हम और हम मना कहां कर रहे हैं

708
00:51:39,400 --> 00:51:43,520
जैसे आप कह रहे हो कि इस विषय को हम बाद में रख लेंगे आप रख लो

709
00:51:43,520 --> 00:51:48,080
बाद में आप रख लो बाद में हिंदू शब्द की प्रमाणिकता

710
00:51:48,080 --> 00:51:52,400
को बाद में रख लो अपनी किसके वेद भाष्य अनुकूल इसको बाद में रख लो ईश्वर

711
00:51:52,400 --> 00:51:56,560
सर्व ईश्वर ईश्वर का स्वरूप इसको पहले रख लो आप हीने

712
00:51:56,560 --> 00:52:00,600
य सबसे पहला विकल्प है आपका ईश्वर का स्वरूप और हम जब कह

713
00:52:00,600 --> 00:52:04,880
रहे हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान तो उसका यही मतलब है ईश्वर का स्वरूप

714
00:52:04,880 --> 00:52:09,080
और अगर शाब्दिक भेद से बदलाव होता है तो फिर पता चल गया ना

715
00:52:09,080 --> 00:52:15,080
आपकी ही लेखनी से आपका

716
00:52:15,160 --> 00:52:19,200
खंडन तो सबको लाभ होगा आपका उद्देश्य मैं फिर याद दिला

717
00:52:19,200 --> 00:52:23,240
दूं आप कह रहे हो कि उपरोक्त तीन विषय पर आपसे चर्चा करके सबको लाभ होगा

718
00:52:23,240 --> 00:52:27,240
आपका उद्देश्य सबको लाभ का नहीं है आपका उद्देश्य है कि शिवांश

719
00:52:27,240 --> 00:52:31,480
नारायण द्विवेदी अगर कुछ बोल रहा है तो उसको गलत सिद्ध करना है उसको हिंदू शब्द

720
00:52:31,480 --> 00:52:35,680
पर खींच लो हिंदू शब्द पर जो है परेशान कर लो और उस चर्चा

721
00:52:35,680 --> 00:52:39,680
में दिखा दो आपको ऐसा लग रहा है कि वो परेशान हो जाएगा परेशान नहीं होा मगर

722
00:52:39,680 --> 00:52:43,680
अगर उसमें मैं तार्किक रूप से प्रामाणिक रूप से सही भी सिद्ध हुआ

723
00:52:43,680 --> 00:52:48,440
मगर उससे हमारे समाज को कोई ऐसा खास लाभ नहीं मिलने वाला है

724
00:52:48,440 --> 00:52:52,680
लाभ मिलेगा तीन चीजों से सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र

725
00:52:52,680 --> 00:52:58,240
मोक्ष शाश्वत धर्म इनसे मिलेगा लाभ

726
00:52:58,240 --> 00:53:02,280
यह दे दो हमें बिना मत करो चर्चा यह दे

727
00:53:02,280 --> 00:53:08,200
दो तीनों चीजें अपने कोई ऐसा वीडियो बनाओ संतुष्ट हो जाए

728
00:53:08,200 --> 00:53:12,400
व्यक्ति दे दो हम आपकी सत्यार्थ प्रकाश को बेचेंगे

729
00:53:12,400 --> 00:53:16,400
जैसे आजकल व जो आपके जो प्रतिनिधि अपमा

730
00:53:16,400 --> 00:53:21,000
प्रतिनिधि या करते हैं सत्यार्थ प्रकाश पढ़ सत हम भी करेंगे सत्यार्थ प्रकाश पढ़ो

731
00:53:21,000 --> 00:53:25,240
भाई अरे आप लोग खुद ही कहते हो शोध का विषय है उसमें

732
00:53:25,240 --> 00:53:29,600
बदलाव होना है ये वो है फिर क्यों उसके पीछे लड़ रहे हो शोध

733
00:53:29,600 --> 00:53:31,000
का विषय है

734
00:53:31,000 --> 00:53:35,040
तो जब उसमें बदलाव को स्वीकार कर रहे हो तो एक दिन आगे चल कर के आपको

735
00:53:35,040 --> 00:53:39,160
बदलाव ये भी करना है स्वीकार कर लो कि नहीं नहीं ईश्वर जन्म ले

736
00:53:39,160 --> 00:53:45,160
सकता है भाई ईश्वर अवतार ले सकता है कर लो स्वीकार शोध का विषय है ना वो

737
00:53:48,800 --> 00:53:52,960
तो भाई जो जीव है वो अज्ञानी है ना उसको वो दिखा

738
00:53:52,960 --> 00:53:56,960
रहे हो ना जो नहीं है मगर इस दुनिया के लिए वो सच्चा ही है उसके लिए उसी

739
00:53:56,960 --> 00:54:01,000
तरीके से ईश्वर का जन् भी दिखाई देने लगेगा उसको इस दुनिया के

740
00:54:01,000 --> 00:54:06,240
अनुसार वो सच्चाई होगी

741
00:54:06,240 --> 00:54:10,400
सिंपल आगे चलते हैं आप देखिए

742
00:54:10,400 --> 00:54:15,000
इसमें वोह हास्यास्पद बात आ

743
00:54:15,000 --> 00:54:19,160
गई हमें विश्वास है कि जिस जिन पर आप वीडियो बना रहे उन विषयों

744
00:54:19,160 --> 00:54:23,320
पर आपको चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं होगी अभी बताएंगे बाद में अभी रुको

745
00:54:23,320 --> 00:54:27,400
जरा इस पर अभी देखेंगे ठीक है ऐसा नहीं है कोई भी एक

746
00:54:27,400 --> 00:54:32,360
पंक्ति भी खाली नहीं जाने देंगे तो

747
00:54:32,360 --> 00:54:36,360
हमें भी विश्वास है कि जो आप विकल्प दे रहे हैं उन्हीं विकल्पों

748
00:54:36,360 --> 00:54:40,760
में से एक विकल्प पर चर्चा करने में आपको कोई आपत्ति नहीं होगी हमें भी विश्वास है कि जिन

749
00:54:40,760 --> 00:54:45,120
जिन विषयों पर आप लोग मंचों पर चिल्ला रहे हैं जिनको आप अपने और गुरुकुल

750
00:54:45,120 --> 00:54:49,440
में पढ़ा रहे हैं उन पर चर्चा करने में आपको कोई आपत्ति नहीं होगी है ना हमें भी विश्वास

751
00:54:49,440 --> 00:54:53,720
है हमें भी विश्वास है कि आप अपने दोगले पन को हटाओ अपनी कायरता को हटाओ

752
00:54:53,720 --> 00:54:58,600
और आप जो है अपनी बात पर कायम रहोगे हमें विश्वास

753
00:54:58,600 --> 00:55:03,280
रामो दुर भी भाषित कहां है राम कहां है

754
00:55:03,280 --> 00:55:08,000
अपने ही कहे हुए वचनों से मुकर जाते हो

755
00:55:08,000 --> 00:55:12,240
अजीब डोला पन है भाई ठीक है आगे

756
00:55:12,240 --> 00:55:16,280
चलिए अब इसलिए मेरा आपसे पुनः आग्रह है कि श शास्त्र

757
00:55:16,280 --> 00:55:20,280
चर्चा के लिए अवश्य पधारिए उपरोक्त तीन विषय पर आपसे चर्चा करके

758
00:55:20,280 --> 00:55:21,280
सबको लाभ होगा उस

759
00:55:21,280 --> 00:55:25,360
लाइव जब लाइव हो रहा है तो रिकॉर्डिंग का कोई औ चित नहीं है यहां पर भी इन्होंने

760
00:55:25,360 --> 00:55:29,400
हमारी उस बात को माना नहीं है कि रिकॉर्डिंग हम कर सकते

761
00:55:29,400 --> 00:55:33,480
हैं कि नहीं क्यों हम कोई गुलाम है

762
00:55:33,480 --> 00:55:38,000
क्या भाई कि आप जो है हमसे चर्चा करने के लिए कहे

763
00:55:38,000 --> 00:55:42,160
हम आपको कहे ठीक है हम आपके लिए समय निकाल लेंगे उसके बाद आप कहे नहीं ऐसे नहीं ऐसे होगा ऐसे

764
00:55:42,160 --> 00:55:46,160
नहीं ऐसे होगा ऐसे नहीं ऐसे होगा और हम सारी बातें आपकी अगर नहीं मानते

765
00:55:46,160 --> 00:55:50,400
हैं तो हम भगोड़े सिद्ध हो जाएंगे जो कि आपने आगे हमको दिखाया है कहने

766
00:55:50,400 --> 00:55:54,000
का प्रयास किया अभी उसको भी बताएंगे

767
00:55:54,000 --> 00:55:58,040
तो सबसे पहली बात है आपने कहा कि लिंक जो है वो हम

768
00:55:58,040 --> 00:56:02,840
आपको दे देंगे इसमें आप संशय ना रखिए क्यों भाई

769
00:56:02,840 --> 00:56:06,880
जो व्यक्ति अपने पत्रों में अपनी बात से बार-बार बदल रहा है वो अपनी बात पर

770
00:56:06,880 --> 00:56:10,960
कायम रहेगा हमय विश्वास क्यों रखें आपने कहा जब लाइव होगा तो फिर

771
00:56:10,960 --> 00:56:15,280
रिकॉर्डिंग की कोई आवश्यकता नहीं है आप हमें लिंक दे देंगे कंट्रोल

772
00:56:15,280 --> 00:56:19,480
तो सारा उसका आपके हाथ में होगा ना कल को बदल दोगे फिर

773
00:56:19,480 --> 00:56:23,520
कहोगे युधिस्टर मीमांसा जीत गया था शास्त्रार्थ में करपात्री जी

774
00:56:23,520 --> 00:56:27,680
से अपना वो जैसे जलेबी नहीं बना बनाते हो जलेबी

775
00:56:27,680 --> 00:56:32,080
वही बनाने लगोगे जैसे अभी यहां पर भी शुरू में हमको विनती

776
00:56:32,080 --> 00:56:36,360
करने वाला बोल दिया अपने लेटर में कि हमसे विनती की थी

777
00:56:36,360 --> 00:56:40,480
आपने यह सब क्या है बातों की जलेबी हमें ये सब नहीं आती सीधी बात

778
00:56:40,480 --> 00:56:44,600
करते हैं सीधी बात नो बकवास स्प्राइट नहीं पीते पर बात सीधी

779
00:56:44,600 --> 00:56:47,920
करते

780
00:56:47,920 --> 00:56:52,800
हैं कंट्रोल आपके कंट्रोल पूरा अपने हाथ में रखोगे

781
00:56:52,800 --> 00:56:57,080
और फिर अगर तुमने हटा दिया बदल दिया हम क्या करेंगे

782
00:56:57,080 --> 00:57:01,480
फर हा फिर आप लोग यह सब चिल्लाने लगे अरे

783
00:57:01,480 --> 00:57:05,640
हम लोग हमने हरा दिया य व लिख दोगे किताबे लिख दोगे ग्रंथ लिख दोगे उस पर भैया

784
00:57:05,640 --> 00:57:10,160
तुम्हारे पास तो टाइम है रात के 10:30 बजे तुम लेटर भेज देते हो

785
00:57:10,160 --> 00:57:14,280
आपके पास तो टाइम ही टाइम है लिख दोगे आप एक ग्रंथ फल्स

786
00:57:14,280 --> 00:57:18,320
प्रोपेगेंडा वाला हम यहां काशी में जीत गए हमने

787
00:57:18,320 --> 00:57:22,320
यह कर दिया हमने वोह कर दिया ताना बाना भाई

788
00:57:22,320 --> 00:57:28,320
कौवा कान ले गया कान ले गया लोग इस पर ध्यान देना भूल ही जाएंगे

789
00:57:28,440 --> 00:57:32,800
कि हमारा कान तो हमारे पास ही है

790
00:57:32,800 --> 00:57:37,080
इतना चिल्लाओ ग इतना चिल्लाओ ग कि लोग ये भूल ही जाएंगे भाई ये वास्तविक

791
00:57:37,080 --> 00:57:41,760
है कि नहीं जो कहानी में पढ़ रहा हूं हम

792
00:57:41,760 --> 00:57:45,840
और हम क्या गुलाम हो जाएंगे क्या वहां पर आएंगे हमने आपके साथ जो चर्चा कर

793
00:57:45,840 --> 00:57:49,840
ली है तो क्या आपने कोई बहुत बड़ा एहसान कर दिया है क्या जो

794
00:57:49,840 --> 00:57:53,880
हम वहां पर आना स्वीकार करें आपकी ये सब ऊट पटांग चीजें स्वीकार करें आपका

795
00:57:53,880 --> 00:57:58,160
दोगलापन स्वीकार करें उसके बाद आप जो है कहोगे कि नहीं नहीं रिकॉर्डिंग

796
00:57:58,160 --> 00:58:02,280
केवल हम करेंगे कैमरा केवल हमारा चलेगा कुल मिला के ये कहो आपको शास्त्रार्थ

797
00:58:02,280 --> 00:58:07,040
में जिसको आप शास्त्रार्थ कह रहे हो चर्चा में आपको आना नहीं है

798
00:58:07,040 --> 00:58:11,520
यह कहो आपको पता नहीं था कि ओके कर देगा

799
00:58:11,520 --> 00:58:15,960
आने के लिए दिक्कत ये है आपको किसी ने उकसाया

800
00:58:15,960 --> 00:58:20,320
किसी कुख्यात आतंकवादी टाइप के व्यक्ति ने हो सकता है इधर

801
00:58:20,320 --> 00:58:26,320
उधर अपनी सोशल मीडिया पर चीजें डाली हो जिससे आप हो सकता है प्रभावित हो गए हो

802
00:58:26,560 --> 00:58:30,680
और उसके यह जो वो जो अनऑफिशियल हरकत

803
00:58:30,680 --> 00:58:34,800
करा करता है और वो जो ये हो गया कृ

804
00:58:34,800 --> 00:58:39,000
पात्री जी पाखंडी है ये है वो है ये सब जो अनाप सनाप

805
00:58:39,000 --> 00:58:43,040
बे सिर पैर की बातें जो किया करता है ऐसे किसी व्यक्ति की चीजों से आप

806
00:58:43,040 --> 00:58:47,240
प्रभावित हो गए और सोचा कि चलो वो एक वो क्योंकि वो ये कहता

807
00:58:47,240 --> 00:58:51,320
घूम रहा है अपनी चीजों में क्या कि ये जो है इसको अगर

808
00:58:51,320 --> 00:58:55,480
आप लोग यह कहोगे ना कि आ जाओ चर्चा के लिए आ जाओ तो ये आएगा

809
00:58:55,480 --> 00:58:59,680
नहीं देखना उसने ऐसे उकसा दिया अब वो वो नहीं पता

810
00:58:59,680 --> 00:59:04,280
कि आपका व्यक्तिगत संपर्क है कि आपने कहीं उसका वीडियो देखा आपने उसकी कहीं पोस्ट देखी

811
00:59:04,280 --> 00:59:08,360
हो स मुझे तो ऐसा ही लग रहा है व्यक्तिगत संपर्क होगा जिसम की उसने आपको बताया

812
00:59:08,360 --> 00:59:12,800
होगा नहीं नहीं आप इसको लेटर लिख के दे दोय आएगा नहीं देखना 100% कोई डरने की आवश्यकता

813
00:59:12,800 --> 00:59:16,800
नहीं है आप चिंता मत करो मुझे मालूम है आप सर्वशक्तिमान ईश्वर को सिद्ध नहीं कर

814
00:59:16,800 --> 00:59:21,000
पाओगे आप दे दो अब दे तो दिया हमने इधर स्वीकार कर लिया

815
00:59:21,000 --> 00:59:25,000
उसकी बात हो गई गलत तोब फस गए इसलिए अब किसी

816
00:59:25,000 --> 00:59:29,440
तरीके से ऐसी चीज करो कि मौका आए ही नहीं

817
00:59:29,440 --> 00:59:33,600
ऐसी चीजें करो कि सामने वाला खुद ही कह दे नहीं नहीं इन शर्तों

818
00:59:33,600 --> 00:59:37,680
के आधार पर हम चर्चा आपसे नहीं करेंगे और फिर चीज चिल्लाओ हम जीत गए जीत गए

819
00:59:37,680 --> 00:59:41,640
जीत गए जीत गए बगड़ बड़ बताऊ मगर हम ऐसे व्यक्ति

820
00:59:41,640 --> 00:59:45,760
नहीं है हम वो व्यक्ति नहीं है जो अपने मुंह से कहेंगे कि नहीं नहीं

821
00:59:45,760 --> 00:59:50,080
हम इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे अभी बताता हूं तो अगला

822
00:59:50,080 --> 00:59:54,240
क्या लिखा आपने लास्ट लास्ट वाला पैराग्राफ दिखा

823
00:59:54,240 --> 00:59:58,400
दीजिए हमें अनेक व्यक्तियों ने कहा था कि आप शास्त्र

824
00:59:58,400 --> 01:00:02,400
चर्चा में नहीं आएंगे देखा वही बात जो मैं कह

825
01:00:02,400 --> 01:00:06,520
रहा हूं यही है इसी उकसाने के नाम पर आपसे

826
01:00:06,520 --> 01:00:10,520
गलती हो गई है इसी उकसाने के नाम पर आपसे

827
01:00:10,520 --> 01:00:14,600
गलती हो गई है हमको य लेटर बेज करके और कुछ नहीं है अब उसको धीरे धीरे आप

828
01:00:14,600 --> 01:00:19,080
जो है पलस्तर कर रहे हो और कुछ नहीं है तो क्या हुआ

829
01:00:19,080 --> 01:00:23,320
कि हमें अनेक व्यक्तियों ने वो अनेक व्यक्ति वही है

830
01:00:23,320 --> 01:00:28,680
अ प्रत्यक्ष से वही अनेक व्यक्ति है वो

831
01:00:28,680 --> 01:00:32,880
अनेक व्यक्तियों ने कहा था कि आप शास्त्र चर्चा नहीं करेंगे आप केवल य प्रसिद्धि

832
01:00:32,880 --> 01:00:36,880
के लिए चर्चा या का हंगामा करते हैं इत्यादि किसने कहा हम चर्चा

833
01:00:36,880 --> 01:00:41,160
नहीं करते कितने बार आपके मंदिरों में बैठ कर के चर्चा की है

834
01:00:41,160 --> 01:00:46,080
भाई चार जगह तो हुए और अभी फिर जाएंगे

835
01:00:46,080 --> 01:00:51,840
फिर जाएंगे बार-बार जाएंगे बार-बार बनाएंगे

836
01:00:51,840 --> 01:00:56,000
वीडियो और बताएंगे कि सर्वशक्तिमान

837
01:00:56,000 --> 01:01:00,040
ईश्वर ही ईश्वर है परंपरा प्राप्त आचार्य के

838
01:01:00,040 --> 01:01:04,320
द्वारा प्राप्त होने वाला धर्म ही धर्म है और इस प्रकार

839
01:01:04,320 --> 01:01:10,120
जो बताया जाने वाला जो मोक्ष है वही मोक्ष

840
01:01:10,120 --> 01:01:14,160
है बताएंगे तो

841
01:01:14,160 --> 01:01:18,400
क्या है कि आप जो है सचा केवल वीडियो बनाते हो कहां का

842
01:01:18,400 --> 01:01:22,560
वीडियो तो आप बनाते हो अरे शंकराचार्य के यहां गया था वो अनऑफिशियल

843
01:01:22,560 --> 01:01:26,800
गुंडा वहां जाकर के क्यों नहीं उसने च वो कर ली चर्चा शास्त्रार्थ क्यों

844
01:01:26,800 --> 01:01:31,120
नहीं कर लिया शंकराचार्य से द्वारका पीट गया था ना वो

845
01:01:31,120 --> 01:01:35,320
क्यों नहीं वहा जाकर के उनसे जो स्वामी सदानंद सरस्वती जी उनसे चर्चा कर

846
01:01:35,320 --> 01:01:39,320
ली क्यों कहते हो तुम जो है मा ये विद्या विद्या

847
01:01:39,320 --> 01:01:42,320
यह सब क्या

848
01:01:42,320 --> 01:01:48,320
है व तो हाथ जोड़ के माफी मांग के चले

849
01:01:50,520 --> 01:01:54,600
वापस अच्छा लेकिन जब सच में चर्चा करने

850
01:01:54,600 --> 01:01:58,720
के लिए कोई बुलाता है तो बाना बनाकर भाग जाते हैं हमने ऐसे कोई कथनों पर कोई

851
01:01:58,720 --> 01:02:02,760
विश्वास नहीं किया है अब मैं एक बात बता दूं हमें भी सोशल

852
01:02:02,760 --> 01:02:06,960
मीडिया के माध्यम से और व्यक्तिगत रूप से लोग आपके बारे में क्याक

853
01:02:06,960 --> 01:02:11,080
कहते हैं पता है नमाजी पता नहीं

854
01:02:11,080 --> 01:02:15,560
क्या ऐसे कई शब्द लेते हैं जो कहने लायक भी नहीं है यहां पर सार्वजनिक

855
01:02:15,560 --> 01:02:19,840
रूप से हम भी विश्वास नहीं करते थे

856
01:02:19,840 --> 01:02:23,880
नहीं भाई कोई सभ्य व्यक्ति ने कोई मैच्योर पसन पर्सन ने संपर्क किया ठीक है

857
01:02:23,880 --> 01:02:28,280
इसकी बात का हमें मान रखना चाहिए

858
01:02:28,280 --> 01:02:32,600
हम भी विश्वास नहीं करते थे आपके बारे में क्या क्या कहा लुचे हैं अधर्मी है

859
01:02:32,600 --> 01:02:38,600
पापी है घिना है घिना है यह तक का नाए

860
01:02:39,520 --> 01:02:43,560
है विधर्मी है कलंक है

861
01:02:43,560 --> 01:02:49,040
सनातन समाज के नाम पर यह सबका हमने विश्वास नहीं

862
01:02:49,040 --> 01:02:53,560
किया अब आपका आगे कहना है कि आपने विश्वास नहीं किया

863
01:02:53,560 --> 01:02:57,440
है तो

864
01:02:57,440 --> 01:03:01,600
हमें आपके व्यवहार पर विश्वास है आपको तो है हमारे व्यवहार पर विश्वास मगर

865
01:03:01,600 --> 01:03:05,920
अभी तक आपका जो आचरण है अपने ही लेटर में अपने सिद्धांत को बदलना क्योंकि शाब्दिक

866
01:03:05,920 --> 01:03:10,600
भेद से टॉपिक बदल जाता है तो ये सिद्धांत हो गया शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदलना

867
01:03:10,600 --> 01:03:14,760
तो जब शाब्दिक भेद से टॉपिक का बदल जा टॉपिक बदल जाता है तो फिर

868
01:03:14,760 --> 01:03:18,840
आपने तो अपने ही टॉपिक को बदल लिया तो ऐसे बदलने वाले इंसान के साथ हम कैसे चर्चा

869
01:03:18,840 --> 01:03:22,960
करें कैसे सोचे कि वो लिंक दे देगा हमें और वो हमें परतंत्र क्यों मान

870
01:03:22,960 --> 01:03:27,040
रहा है हमने जब उसके सामने कोई ऐसा गिड़गिड़ा नहीं तो वो क्यों विनती विनती

871
01:03:27,040 --> 01:03:31,200
दिखा रहा है क्यों स्वयं को स्वयंभू बता रहा है वो हमें हमें उस नाम से क्यों पुकार

872
01:03:31,200 --> 01:03:35,320
रहा है जहां पर खुद को वैदिक और हमें पौराणिक क्यों दिखा रहा है हमको वैदिक

873
01:03:35,320 --> 01:03:39,000
पौराणिक दिखाओ

874
01:03:39,000 --> 01:03:43,640
ना सनातन वैदिक आर्य हिंदू दिखाओ ना

875
01:03:43,640 --> 01:03:47,720
ये सब चाले हैं सूक्ष्म चाले अपने नैरेटिव

876
01:03:47,720 --> 01:03:52,000
को फैलाने की क्योंकि आपका जो जो उद्देश्य है वो धर्म

877
01:03:52,000 --> 01:03:56,480
संस्थापन नहीं है आर्य समाज की संस्थापन

878
01:03:56,480 --> 01:04:00,560
व्यक्ति निष्ठ हो संस्था निष्ठ हो

879
01:04:00,560 --> 01:04:06,560
ईश्वर निष्ठ नहीं हो धर्म निष्ठ नहीं

880
01:04:08,960 --> 01:04:13,040
हो हम आशा करते हैं कि आपके आपके

881
01:04:13,040 --> 01:04:17,360
आप प्रस्तावित तीन विषयों पर चर्चा करने के लिए पधार कर आपको भगोड़ा

882
01:04:17,360 --> 01:04:21,360
कहने वालो लोगों का मुंह भी बंद करेंगे कर देंगे परस्पर

883
01:04:21,360 --> 01:04:26,960
द्वेष त्याग कर चर्चा करने का उत्तम अवसर आपके और हमारे हैं हम

884
01:04:26,960 --> 01:04:31,760
अब यहां पर आपने बड़े तरीके से जो है हमको बता दिया कि यदि

885
01:04:31,760 --> 01:04:35,760
हम जो है नहीं करते हैं तो हम भगोड़े शिद्ध होंगे अप्रत्यक्ष रूप से आपने हमें ये

886
01:04:35,760 --> 01:04:39,880
बता दिया ठीक हम भी आपसे आशा करते हैं अब पहली बात तो

887
01:04:39,880 --> 01:04:44,000
ये है सारी शर्तें मंजूर है अब आपसे आपकी भाषा में

888
01:04:44,000 --> 01:04:48,080
आप ये चाहते हो ना चर्चा के लिए हम मना करें यह नहीं करेंगे

889
01:04:48,080 --> 01:04:52,080
अब आपसे आपकी भाषा में बात करेंगे आपका कहना यह है कि आप जो जो चर्ते

890
01:04:52,080 --> 01:04:54,280
बताते जाए उन उन शर्तों को हम

891
01:04:54,280 --> 01:04:58,400
नतमस्तक हो कर के मानते जाए अगर नहीं मानेंगे तो हम भगोड़े कहे

892
01:04:58,400 --> 01:05:03,280
जाएंगे हमारे जो आपके जो लोग हैं उनकी बात सत्य साबित हो जाएगी है ना

893
01:05:03,280 --> 01:05:07,280
तो अब हमारी शर्त सुनिए हम आपकी सारी शर्तें मान

894
01:05:07,280 --> 01:05:11,360
लेते हैं इसको कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में अब

895
01:05:11,360 --> 01:05:15,640
सुनो हम आपकी सारी शर्तें मानेंगे हमें ना लिंक हमें ना रिकॉर्डिंग

896
01:05:15,640 --> 01:05:20,120
करनी है हम ना हम जहां आप कहोगे वहां क्या कहते हैं ये

897
01:05:20,120 --> 01:05:24,320
हम आपके स्थान में आकर के भी चर्चा कर लेंगे आप जो है हिंदू शब्द में प्रमाणिकता

898
01:05:24,320 --> 01:05:28,520
बात करना चाहते हो कर लेंगे ठीक है आपने हमारे सामने ऐसी शर्त

899
01:05:28,520 --> 01:05:32,560
रखी है ना कि हम रिकॉर्डिंग भी नहीं देंगे हम जो है वो हिंदू शब्द

900
01:05:32,560 --> 01:05:36,920
पर पहले बात करेंगे जिससे जीत हार पता चले कौन ज्ञानी है कौन नहीं हमें धर्म सं स्थापना

901
01:05:36,920 --> 01:05:41,040
पर बात नहीं करनी है हमें इस पर बात करनी है है ना

902
01:05:41,040 --> 01:05:45,320
जबकि हमने कहा आपको हिंदू शब्द पर अगर बात भी करनी तो उसको बाद के लिए रखो क्योंकि

903
01:05:45,320 --> 01:05:49,760
अगर बाद के विषय रह भी गए तो मुख्य विषय पर चर्चा हो चुकी होगी

904
01:05:49,760 --> 01:05:54,280
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं ईश्वर का स्वरूप

905
01:05:54,280 --> 01:05:58,440
क्योंकि यह जो बात की चीजें रहेंगी ही महीना भर नहीं रहोगे यहां

906
01:05:58,440 --> 01:06:02,560
पर हमारे साथ चर्चा करने के लिए वो रहेंगी और

907
01:06:02,560 --> 01:06:07,280
हो सकता है उसमें इतनी गरमा गर्मी हो जाए शुरू में ही कि वो बाद की चीजें आने का कोई

908
01:06:07,280 --> 01:06:09,520
स्थान ही ना बाकी रह जाए यह भी

909
01:06:09,520 --> 01:06:15,520
है तो हम क्यों ऐसी चीज से शुरू करें जिसमें मेहनत हमारी व्यर्थ

910
01:06:15,920 --> 01:06:20,120
जाए अगर हम वहां पर सिद्ध भी करते हिंदू शब्द की प्रमाणिकता तो उससे क्या समाज

911
01:06:20,120 --> 01:06:24,280
में एकत्व आएगा भाई ऐसी बहुत सी चीजें

912
01:06:24,280 --> 01:06:28,560
जिन पर बात की जा सकती है क्यों लगाते हैं यह क्यों होता है वो क्यों होता

913
01:06:28,560 --> 01:06:32,880
है मगर इन सब पर हम अगर चर्चा करने बैठेंगे एक तो इतने

914
01:06:32,880 --> 01:06:37,040
इस तरह के टॉपिक्स है जो अनंत काल तक चलते रहे बात करते रहो उस पर

915
01:06:37,040 --> 01:06:41,080
उससे क्या मिलेगा सर समाज को फायदा इसीलिए तो हमने वो तीन टॉपिक पकड़े जिससे

916
01:06:41,080 --> 01:06:47,080
धर्म संस्थापन हो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र

917
01:06:47,840 --> 01:06:51,880
मोक्ष अब बात आती है कि आपका ये दोगलापन

918
01:06:51,880 --> 01:06:55,880
देखते हुए अपने ही सिद्धांतों से मुकर हुए आपका स्वा

919
01:06:55,880 --> 01:06:59,920
विजेता होते हुए स्वघोषित राजाधिराज होते हुए यह सब देखने के

920
01:06:59,920 --> 01:07:03,960
बाद भी आपके व्यवहार पर हमको विश्वास ना

921
01:07:03,960 --> 01:07:08,560
होने के बाद भी हम आपकी सारी शर्तें मान लेते हैं सारी

922
01:07:08,560 --> 01:07:12,800
सारी शर्तें मान लेते हैं आपके स्थान में होगी आपको

923
01:07:12,800 --> 01:07:17,160
लिंक नहीं देना है हमें गुलाम बनाना है ठीक है मत देना लिंक वो

924
01:07:17,160 --> 01:07:21,200
लिंक दे देना रिकॉर्डिंग का हमें मौका मत देना कि हम भी रिकॉर्डिंग कर पाए ठीक

925
01:07:21,200 --> 01:07:25,680
है अच्छा और क्या है कि आपका वो जो टॉपिक है ू

926
01:07:25,680 --> 01:07:29,800
की प्रमाणिकता यह भी मान लिया ठीक अब जब आपने हमें

927
01:07:29,800 --> 01:07:34,160
कुछ ऐसी चीजें दी है जिसको स्वीकार

928
01:07:34,160 --> 01:07:38,840
ना करने की स्थिति में हमें यह कहना पड़े कि हम चर्चा नहीं करेंगे

929
01:07:38,840 --> 01:07:42,920
है ना तो हम भी कुछ ऐसी शर्त आपको दे सकते हैं जिसको ना

930
01:07:42,920 --> 01:07:47,040
स्वीकार करने की स्थिति में आपको कहना पड़ेगा आप चर्चा नहीं करेंगे और जो

931
01:07:47,040 --> 01:07:51,480
चर्चा नहीं करेगा वो आपके हिसाब से क्या है बड़ा तो हम शर्त दे देते हैं

932
01:07:51,480 --> 01:07:55,640
जो व्यक्ति चर्चा के लिए आएगा हमारी शर्त य है वो निर्वस्त्र

933
01:07:55,640 --> 01:07:59,640
केवल कच्छे में होगा और पहले वो शीला की

934
01:07:59,640 --> 01:08:04,040
जवानी पर नृत्य करेगा नाक

935
01:08:04,040 --> 01:08:08,360
रगड़े और जो परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दी गई चीजें

936
01:08:08,360 --> 01:08:12,920
हैं उनके जो मेन मेन स्लोगन है उनको बोलेगा अपने मुख से

937
01:08:12,920 --> 01:08:16,920
और उसके बाद हम आपके द्वारा जो शर्त बताई गई है उनके अनुसार

938
01:08:16,920 --> 01:08:21,680
चर्चा करेंगे ठीक है अब मान लेना इन शर्तों को

939
01:08:21,680 --> 01:08:26,120
क्याय उचित है इस तरह की शर्त देना उचित है

940
01:08:26,120 --> 01:08:30,360
जो सामने वाला स्वीकार ना कर पाए और जब स्वीकार ना कर पाए तो उसको कह दो

941
01:08:30,360 --> 01:08:34,360
कि तुम अपने अपने को भगोड़ा कहने वालों का मुह जरूर मैं भी कह रहा

942
01:08:34,360 --> 01:08:39,040
हूं आप लोगों को लुचा अधर्मी पापी विधर्मी

943
01:08:39,040 --> 01:08:43,120
नमाजी यह सब कहने वालों का आप मुंह जरूर बंद करेंगे इन शर्तों

944
01:08:43,120 --> 01:08:47,280
को मान लीजिए मुझे विश्वास है आप आएंगे भेजेंगे ऐसा विद्वान जो

945
01:08:47,280 --> 01:08:51,480
केवल कच्चे में

946
01:08:51,480 --> 01:08:57,480
आए नाक रगड़े शीला की जवानी पर नृत्य करे

947
01:08:58,040 --> 01:09:02,120
और वो सारी और हम पांच स्लोगन लिख के देंगे उनको बोले अपने मुख से मैं ये

948
01:09:02,120 --> 01:09:06,160
मानता हूं हां मैं ये मानता हूं और

949
01:09:06,160 --> 01:09:10,280
उसके बाद आपके अनुसार चर्चा होगी

950
01:09:10,280 --> 01:09:14,440
ठीक है मान ली आपकी शर्त है हम नहीं भागे हम

951
01:09:14,440 --> 01:09:18,960
आएंगे अब देखो तुम क्या करते हो

952
01:09:18,960 --> 01:09:23,360
और हां यह लेटर बाजी खेल करके हमसे उम्मीद ना अपेक्षा मत

953
01:09:23,360 --> 01:09:29,360
करना लेटर बाजी की

954
01:09:32,720 --> 01:09:36,240
लेटर बाजी की उम्मीद हमसे मत

955
01:09:36,240 --> 01:09:40,800
रखना ठीक है हमने अपना सारा जवाब दे दिया है

956
01:09:40,800 --> 01:09:45,640
यह सब आपके आप वास्तविकता यह है

957
01:09:45,640 --> 01:09:49,680
कि आप संभवत किसी के प्रभाव में आकर या किसी के उकसाने

958
01:09:49,680 --> 01:09:53,840
से आपने लिख दिया हमको लेटर और अब किसी तरीके

959
01:09:53,840 --> 01:09:57,840
से उसको टालने के लिए ऐसी कर रहे हो कि हम यह बोलने के हमें

960
01:09:57,840 --> 01:10:02,640
चर्चा नहीं करनी जिससे कि आप यह बोले कि भगोड़ा भगोड़ा देखो तो नहीं

961
01:10:02,640 --> 01:10:06,760
खेल इस बार भी अच्छा खेला है आपने आदमी गलत चुन लिया

962
01:10:06,760 --> 01:10:12,760
ठीक है मान लो

963
01:10:14,400 --> 01:10:19,000
शर्त अपनी ऐसी शर्त लिख कर के देंगे जो सामने वाला मतलब

964
01:10:19,000 --> 01:10:23,520
सीधे सीधे गुलाम बना लो सामने वाले

965
01:10:23,520 --> 01:10:29,520
को रिकॉर्ड भी नहीं करने दोगे ये है बराबरी का

966
01:10:45,360 --> 01:10:50,840
अवसर

967
01:10:50,840 --> 01:10:54,960
चलिए एक वो रेशन इस्ट आर्य नाम से

968
01:10:54,960 --> 01:10:59,080
है जो व्यक्ति पिछली बार आया था उसको भी मैं उत्तर दे दूं

969
01:10:59,080 --> 01:11:05,080
उसने कोई एक लाइव वगैरह की थी उसमें हमको टैग बैक भी किया

970
01:11:09,000 --> 01:11:13,080
है और हमारे वीडियोस के माध्यम से भी हमने य

971
01:11:13,080 --> 01:11:17,360
बोला था जब हमने आपको लेटर दिया था ना आबू वाले भाई साहब

972
01:11:17,360 --> 01:11:21,600
हमारे वीडियोस के माध्यम से भी हमने आपको उत्तर दिया था कि हमने

973
01:11:21,600 --> 01:11:26,360
आपका जो है ईश्वर विषय वाला ऑप्शन चुना है

974
01:11:26,360 --> 01:11:30,960
आप हमारा वीडियो देख भी रहे हो उस पर आकर के कमेंट भी कर रहे

975
01:11:30,960 --> 01:11:34,960
हो यह भी नहीं कह सकते हमारा वीडियो नहीं देखा और अगर हमारे

976
01:11:34,960 --> 01:11:39,080
वीडियो को नहीं देखा है तो फिर आपका हमारे साथ किसी प्रकार का व्यवहार सिद्ध नहीं होगा

977
01:11:39,080 --> 01:11:45,080
आए क्योंकि वीडियो देख के ही

978
01:11:50,600 --> 01:11:54,600
हो पौराण का आचार आप कुछ भी बोलते रहो

979
01:11:54,600 --> 01:12:00,600
और हम बोल दे तो यह कर दिया भाई यह कैसे कर दिया वो कैसे कर

980
01:12:07,120 --> 01:12:11,400
दिया तो जो रेशनल व्यक्ति आया

981
01:12:11,400 --> 01:12:15,560
था उसने कुछ कुतर्क किए हैं कहीं पर बैठ कर के हमें टैग

982
01:12:15,560 --> 01:12:19,640
बैग भी किया है सबसे पहले उसने हमें कहा है कि

983
01:12:19,640 --> 01:12:23,720
हमने उत्तर दे दिया आपका भाई हमारा एक सिंपल सा प्रश्न था

984
01:12:23,720 --> 01:12:27,720
आपसे आपसे नहीं तुमसे सिंपल

985
01:12:27,720 --> 01:12:31,840
सा प्रश्न था कि क्या आपको आर्य समाज की ओर से प्रामाणिक

986
01:12:31,840 --> 01:12:36,040
व्यक्ति माना जाए या नहीं माना जाए आप सिंपल बोल दो नहीं है हम फॉलोअर है र

987
01:12:36,040 --> 01:12:40,080
समाज के मगर आपको इस प्रश्न से बचना

988
01:12:40,080 --> 01:12:45,160
है कि आर्य समाज की ओर से किसी को भी क्योंकि इसमें पोल है

989
01:12:45,160 --> 01:12:49,840
ना इसमें पोल है आर्य समाज की ओर से किसी को भी प्रमाणिक

990
01:12:49,840 --> 01:12:55,240
कम माना जाए

991
01:12:55,240 --> 01:12:59,240
तो इस गुरु परंपरा के अभाव में इन नियमों का अभाव है तो

992
01:12:59,240 --> 01:13:04,640
आपको इस प्रश्न से बचना था खाना भी खा रहे हो बात करते

993
01:13:04,640 --> 01:13:08,760
करते तो आपने जो अपने उसमें उत्तर दिया उस पर थोड़ी

994
01:13:08,760 --> 01:13:12,800
हाईलाइट देख लेते हैं आपने कहा कि हमारे यहां सब फ्री स्टाइल है कुछ

995
01:13:12,800 --> 01:13:17,080
आर समाजी यह कहते कुछ आर समाजी वो कहते हैं भाई हम कह रहे हैं आपके यहां

996
01:13:17,080 --> 01:13:21,160
की नियमावली क्या है वो नियमावली तो दे दो हमको किसकी बात माननी

997
01:13:21,160 --> 01:13:25,400
है किसकी नहीं माननी है फ्री स्टाइल क्या होता है धर्म फ्री स्टाइल

998
01:13:25,400 --> 01:13:29,640
नहीं है तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र

999
01:13:29,640 --> 01:13:33,960
प्रमाण है कहां है शास्त्र हम तो अपनी नियमावली देते

1000
01:13:33,960 --> 01:13:38,040
हैं ना नियमावली देते हैं

1001
01:13:38,040 --> 01:13:42,040
आपकी नियमावली कहां है लौकिक सिद्धांत संविधान जो बदल जाता है

1002
01:13:42,040 --> 01:13:46,560
बहुमत होने पर यही है आपका सनातन

1003
01:13:46,560 --> 01:13:50,640
फ्री स्टाइल शब्द का यूज किया है बंदे ने कि

1004
01:13:50,640 --> 01:13:54,680
हमारे यहां तो सब फ्री स्टाइल है जिसका जैसा बुद्धि विवेक कहे वो मान ले अरे भाई वो धर्म

1005
01:13:54,680 --> 01:13:58,760
थोड़ी होता है धर्म वो नहीं

1006
01:13:58,760 --> 01:14:02,120
होता है फ्री

1007
01:14:02,120 --> 01:14:06,120
स्टाइल फिर क्या है तो कुल मिलाकर के जो

1008
01:14:06,120 --> 01:14:10,120
निश्चित नियमावली नहीं है इस बारे में कि किसको प्रमाणिक माना जाए किसको ना

1009
01:14:10,120 --> 01:14:10,620
माना

1010
01:14:10,360 --> 01:14:14,560
जाए इस प्रश्न से आपने बचने की कोशिश की जब हमने कहा कि भाई

1011
01:14:14,560 --> 01:14:18,880
आपको प्रमाणिक माना जाए कि नहीं माना जाए सीधे बोलो कि नहीं हम फॉलोअर है को

1012
01:14:18,880 --> 01:14:23,360
हम प्रमाणिक व्यक्ति नहीं है प्रमाणिक वो जो आर्य समाज के नाम से

1013
01:14:23,360 --> 01:14:27,760
इतना ही कह दो लौकिक सिद्धांत के अनुरूप हालांकि उस पर भी बात हो सकती है लौकिक

1014
01:14:27,760 --> 01:14:31,760
सिद्धांत के अनुरूप जो रजिस्टर संस्था है वहां से जब कोई अध्यक्ष के द्वारा पत्र लिखा

1015
01:14:31,760 --> 01:14:35,800
हुआ व्यक्ति होगा उसको प्रमाणिक मा इतना ही कह दो हम प्रमाणिक नहीं है

1016
01:14:35,800 --> 01:14:40,040
मगर नहीं मैं किसी संस्था से नहीं जुड़ा हुआ तो जुड़े कहां से हो

1017
01:14:40,040 --> 01:14:44,960
संस्थाए है जो किताबें छप रही है जो तुम पढ़ रहे

1018
01:14:44,960 --> 01:14:49,320
हो पहली बात आगे क्या

1019
01:14:49,320 --> 01:14:53,320
है कि तुमने हमारे व्यवहार के बारे में वहां

1020
01:14:53,320 --> 01:14:57,880
पर बहुत सी बातें की कि हमने आपको त तड़ाक के बारे तू तड़ाक करते हुए ये किया वो

1021
01:14:57,880 --> 01:15:01,920
किया अपने व्यवहार के बारे में कुछ किया मुंह चलाते

1022
01:15:01,920 --> 01:15:06,160
हुए खाना खाना यह कहां की सभ्यता है दयानंद जी के द्वारा ही बता

1023
01:15:06,160 --> 01:15:10,280
दो खाना खाते हुए बात करना मुह चला चला

1024
01:15:10,280 --> 01:15:14,400
करके बात करना वो भी सार्वजनिक रूप से यह भी नहीं कि व्यक्तिगत दो

1025
01:15:14,400 --> 01:15:18,640
मित्र बात कर रहे हो अपने कमरे में सार्वजनिक रूप से मुंह चलाते चलाते

1026
01:15:18,640 --> 01:15:22,680
बात करना जब हमें कई लोग देखने वाले हो हजारों लोग

1027
01:15:22,680 --> 01:15:26,600
हमें देखने वाले हैं तब

1028
01:15:26,600 --> 01:15:30,840
ये आपने इस व्यवहार पर कोई आपने बात नहीं की हमने हमारे व्यवहार पर बात की

1029
01:15:30,840 --> 01:15:35,160
और जब आपके मुंह चलाने के कारण आपके जो शब्द है वह स्पष्ट

1030
01:15:35,160 --> 01:15:39,200
नहीं हो पा रहे हैं और हमें उस चीज को पकड़ना है जहां पर आप बच के

1031
01:15:39,200 --> 01:15:43,320
जाना चाहते हैं कंफर्म करना है तो चार बार कन्फर्म कर रहे क्या दिक्कत हो रही है चार

1032
01:15:43,320 --> 01:15:47,360
बार कन्फर्म करने से क्योंकि वहां पर कमजोर खड़ी है ना इसलिए

1033
01:15:47,360 --> 01:15:51,400
उससे बच के आगे निकलना चाहते हो और तकलीफ हो गई हमने अगर दो चार बार उसी

1034
01:15:51,400 --> 01:15:57,400
बात को कन्फर्म ठप्पा लगाने के लिए पूछ लिया क्या बोल

1035
01:15:57,960 --> 01:16:02,320
इसलिए हमारे व्यवहार पर आपने उंगली उठा दी आपने य नहीं बताया

1036
01:16:02,320 --> 01:16:06,720
कि मैं वहां पर बदतमीजी से खाना खा खा कर बात कर रहा था

1037
01:16:06,720 --> 01:16:10,720
मेरी आवाज क्लियर आ रही है आपको आ रही है आपकी आपकी तो आ रही है लेकिन आप

1038
01:16:10,720 --> 01:16:14,840
बारबार कर रहे थे मेरे को डाउट हो क्या पता नहीं आ रही हो आवाज आ रही

1039
01:16:14,840 --> 01:16:19,080
बात कर रहे ना मुह चलाते हुए हमारे य बात नहीं करते हैं खा पी मैं कर लेता हूं

1040
01:16:19,080 --> 01:16:23,480
मैं तो कर लेता कोई दिक्कत नहीं मैं तो कर लेता हूं

1041
01:16:23,480 --> 01:16:27,800
तो क्या हुआ इसका मतलब अच्छा इसने वहां पर एक बात कही कि मुंह चलाकर इसलिए

1042
01:16:27,800 --> 01:16:32,080
बात कर रहा था क्योंकि ऐसी ऐसी मेरी सिचुएशन थी बता सकते थे अपनी सिचुएशन

1043
01:16:32,080 --> 01:16:36,960
भैया ऐसी ऐसी बात है नहीं मैं तो कर लेता हूं यानी इसने

1044
01:16:36,960 --> 01:16:41,080
जो अमर्यादित आचरण है अभद्र आचरण है बदतमीजी है उसको अपना धर्म

1045
01:16:41,080 --> 01:16:41,680
बताया और यह

1046
01:16:41,680 --> 01:16:46,320
लोग है धर्म के रक्षक यह लोग है धर्म के

1047
01:16:46,320 --> 01:16:50,640
रक्षक यह लोग टॉयलेट से भी लाइव आ जाएंगे बदतमीजी

1048
01:16:50,640 --> 01:16:55,200
करने के लिए बेशर्मी दिखाने के लिए

1049
01:16:55,200 --> 01:16:59,200
यह धर्म के रक्षक और क्या

1050
01:16:59,200 --> 01:17:03,640
कहा इन्होंने अपनी उस लाइफ में यह तो बताया कि हमने इनको तड़खा

1051
01:17:03,640 --> 01:17:09,640
इन्होंने ये नहीं बताया कि इन्होने मिमिक्री करके

1052
01:17:10,560 --> 01:17:14,960
बताया महाभारत में लिखा है सामने वाले के साथ वही आचरण करो

1053
01:17:14,960 --> 01:17:19,400
जो अपने साथ जो सामने वाले से अपने लिए अपेक्षा करते हो वही धर्म

1054
01:17:19,400 --> 01:17:23,480
उसी धर्म का पालन करो तो इस तरीके से

1055
01:17:23,480 --> 01:17:27,520
कोई आपके जो ठीक ठाक लोग हो उनसे कोई इस तरह से आपसे बात करता

1056
01:17:27,520 --> 01:17:31,520
देखेगा आपको ठीक लगेगा तो क्यों

1057
01:17:31,520 --> 01:17:35,680
किया और अगर कोई कारण था तो वो कारण क्यों नहीं बताया

1058
01:17:35,680 --> 01:17:39,760
अपने धर्म अपने द्वारा मजबूरी में हो जाने वाली चीज को ही

1059
01:17:39,760 --> 01:17:43,800
वहां पर बड़े गर्व के साथ क्यों ठहरा दिया कि मेरा यही धर्म है

1060
01:17:43,800 --> 01:17:47,800
मैं ऐसा ही करता हूं मैं तो कर लेता हूं अब तुम तो पता नहीं क्या क्या

1061
01:17:47,800 --> 01:17:52,120
कर लेते हो भाई तुम तो पता नहीं क्याक कर लेते हो

1062
01:17:52,120 --> 01:17:56,120
क्योंकि जब मैं तो कर लेता हूं पर आते हैं ना जब धर्म को त्याग दे तो उसकी

1063
01:17:56,120 --> 01:17:56,720
फिर कोई

1064
01:17:56,720 --> 01:18:00,800
अंत नहीं होता है एक ऐसा व्यक्ति भी आता है जो यहां बोलता है हां

1065
01:18:00,800 --> 01:18:05,200
भाई माता के साथ गमन करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है तो

1066
01:18:05,200 --> 01:18:09,440
तुम तो पता नहीं क्या क्या कर लेते हो ऐसे लोग भी आते हैं वो

1067
01:18:09,440 --> 01:18:13,800
आया था एक बार कौन था उसका क्या नाम था

1068
01:18:13,800 --> 01:18:18,040
सिरोही उससे मैंने पूछा क्या आप ऐसा कोई सिद्धांत मानते

1069
01:18:18,040 --> 01:18:22,120
हैं जिसमें माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार नहीं करना नहीं नहीं आवश्यकता

1070
01:18:22,120 --> 01:18:26,360
पड़ने पर मैं कर लूंगा तो लोग तो पता नहीं क्याक करते हैं ऐसे

1071
01:18:26,360 --> 01:18:30,400
नहीं होता ना एक मर्यादा होती है और अगर आपकी कोई दिक्कत

1072
01:18:30,400 --> 01:18:34,520
है तो आप मत आओ उस समय मत आओ हम तो फोन नंबर देते रहते

1073
01:18:34,520 --> 01:18:38,680
हैं फोन नंबर से संपर्क करो आपके पास तो है पहले भी चर्चा हो चुकी है क्यों

1074
01:18:38,680 --> 01:18:42,680
आप घबरा रहे हो कि अभी ये लाइव से चले जाएंगे

1075
01:18:42,680 --> 01:18:46,840
इसलिए क्योंकि चोट पहुंच रही है ना हृदय में

1076
01:18:46,840 --> 01:18:50,880
दिक्कत हो रही है उससे कोई मतलब नहीं है जब आप चोट पहुंचाते हैं राधा

1077
01:18:50,880 --> 01:18:55,200
जी के बारे में यह हो रहा है वो हो रहा है इससे तुलना हो रही है उससे तुलना अरे भाई

1078
01:18:55,200 --> 01:18:59,800
किसी की मान्यता है क्यों बोल रहे हो शब्द क्यों बोल रहे हो

1079
01:18:59,800 --> 01:19:04,400
नाना मर्यादित भाषा में कर दो खंडन औरन

1080
01:19:04,400 --> 01:19:10,400
स्टार से कंपेयर करना तुम्हें बुरा नहीं लग

1081
01:19:11,000 --> 01:19:16,080
रहा आएंगे इस पर भी आएंगे चलो आगे चलते

1082
01:19:16,080 --> 01:19:20,080
हैं अब बात क्या हो रहा है कि यह भाई

1083
01:19:20,080 --> 01:19:24,200
साहब अपने मनमर्जी तरीके से बेशर्मी के साथ वहां पर मुंह चला चला

1084
01:19:24,200 --> 01:19:28,840
कर के बातें कर रहे हैं इनके कुछ शब्द हमें समझ में नहीं आए या फिर हमने

1085
01:19:28,840 --> 01:19:32,960
बात को यथावत रूप से जानने के लिए और यथा रूप

1086
01:19:32,960 --> 01:19:37,120
से जानने के लिए वहां पर दो तीन बार क्वेश्चन कर दिया तो अब

1087
01:19:37,120 --> 01:19:41,440
उसका अर्थ क्या निकाला जाए यही निकाला जाए

1088
01:19:41,440 --> 01:19:45,440
कि आप जो है प्रश्न से भागना चाह रहे हैं या फिर

1089
01:19:45,440 --> 01:19:49,600
यह निकाला जाए कि आपके पास उसका उत्तर कुद जो भी निकाला

1090
01:19:49,600 --> 01:19:53,800
जाए मगर कुल मिलाकर के उसी के उपलक्ष में आपने यह बोल

1091
01:19:53,800 --> 01:19:58,560
दिया कि वो जो जो मिमिक्री की थी ड्रामे

1092
01:19:58,560 --> 01:20:02,680
बाजी ये सब जो किया था उसके बाद आप चाहते हैं कि आपसे वही व्यवहार

1093
01:20:02,680 --> 01:20:06,840
हो और भी कई कारण थे जो तू तड़ा की भाषा का उपयोग

1094
01:20:06,840 --> 01:20:11,040
हुआ तो केवल इन्होंने जो अपनी लाइव की है वहां पर ये सब छुपा

1095
01:20:11,040 --> 01:20:15,040
लिया कि भाई वो जो मैंने मिमिक्री की थी सामने वाले

1096
01:20:15,040 --> 01:20:19,480
की है ना छुपा लिया छुपाओ छुपाओ

1097
01:20:19,480 --> 01:20:24,840
तो जहां ईश्वर बाधित होता है वहां से धर्म की अपेक्षा करना

1098
01:20:24,840 --> 01:20:26,000
मूर्खता होती है वो हमने

1099
01:20:26,000 --> 01:20:30,120
यहां भी देखा यहां भी देखा व्यक्ति लेटर लिख लिख

1100
01:20:30,120 --> 01:20:34,760
के लिख लिख के अपने अधर्म का वो दे रहा है

1101
01:20:34,760 --> 01:20:38,840
प्रमाण आगे क्या है कि

1102
01:20:38,840 --> 01:20:42,840
हां जब इनसे पूछा भी जा रहा है तो एक यह नहीं बता रहे वहां

1103
01:20:42,840 --> 01:20:46,880
पर बता रहे मेरी माता जी ने ऐसा कहा था मेरी माता जी ने मुझे अभी अभी खाना परोस के

1104
01:20:46,880 --> 01:20:51,080
दिया था मुझे खाना था वो ठंडा हो रहा था जो भी है इन्होंने वहां पर

1105
01:20:51,080 --> 01:20:55,200
रीजन दिया यहां पर अकड़ में बकती में मैं तो ऐसे ही

1106
01:20:55,200 --> 01:20:59,200
करता हूं क्यों क्योंकि नाक कट रही होगी

1107
01:20:59,200 --> 01:21:03,520
ना है ना सच्चाई वहां जाकर बताओ और तुम्हारी सच्चाई

1108
01:21:03,520 --> 01:21:07,880
को ना जानते हुए जब यहां पर आपके आचरण के अनुसार आदमी व्यवहार करे प्रतिकार

1109
01:21:07,880 --> 01:21:11,920
करे तो वो गलत है क्योंकि उसने उस उस

1110
01:21:11,920 --> 01:21:16,720
सच्चाई के अनुसार काम नहीं किया जो आपने छुपाई थी और कहीं और जाकर बताई

1111
01:21:16,720 --> 01:21:20,720
थी इसीलिए तो गलत है ना क्योंकि यहां तो

1112
01:21:20,720 --> 01:21:25,200
आपने छुपा ली वो सच्चाई मां के द्वारा खाना परोसे जाने की

1113
01:21:25,200 --> 01:21:29,760
छुपा ली ना तो इसलिए क्योंकि आपने वो हमने

1114
01:21:29,760 --> 01:21:34,040
आपकी छुपाई जाने वाली सच्चाई के अनुसार आचरण नहीं किया तो इसलिए हम गलत

1115
01:21:34,040 --> 01:21:38,680
है अरे क्या सोचते हो अपने मन में

1116
01:21:38,680 --> 01:21:43,760
तीन पांच हो जाते हो जब सामना होता है

1117
01:21:43,760 --> 01:21:47,880
तो परतंत्र है लोग तुम्हारे तुम कुछ भी करते रहो सामने

1118
01:21:47,880 --> 01:21:52,000
वाला को उत्तर ना दे और उत्तर दे दे तो मैं यह हूं

1119
01:21:52,000 --> 01:21:56,600
पर्सनल लाइफ में वो हूं मैं एसपी का हूं मैं ये हूं मैं

1120
01:21:56,600 --> 01:22:00,800
मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते नहीं हो तुम अभी क्या जानोगे

1121
01:22:00,800 --> 01:22:05,160
तुम्हें घमंड होगा तुम्हारे व्यक्तिगत उसका कि तुम इसके आईजी

1122
01:22:05,160 --> 01:22:09,920
डीआईजी आईपीएस वो अरे प्रम प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट हो गए

1123
01:22:09,920 --> 01:22:14,760
हमें घमंड है राम का गुरु गोविंद और ग्रंथ का

1124
01:22:14,760 --> 01:22:19,000
हमारे लिए यही पर्याप्त है तुम्हें लगता है तुम्हारे पीछे लॉयर्स है हाई

1125
01:22:19,000 --> 01:22:25,000
कोर्ट है सुप्रीम कोर्ट है प्रेसिडेंट है प्राइम मिनिस्टर है

1126
01:22:25,320 --> 01:22:29,440
तो हमारे पीछे राम है

1127
01:22:29,440 --> 01:22:34,680
राम हमारे पीछे गुरु गोविंद और ग्रंथ है

1128
01:22:34,680 --> 01:22:38,680
हमें उसका घमंड

1129
01:22:38,680 --> 01:22:42,760
है बेकार में भगवत गीता पढ़ते हो यार भगवत गीता में

1130
01:22:42,760 --> 01:22:46,840
कितनी बार कहा है भगवान ने मुझे

1131
01:22:46,840 --> 01:22:52,840
समर्पित कर सब कुछ बावटा कहां है मेरा ये मेरा

1132
01:22:53,440 --> 01:22:57,840
वो केवल धर्म रक्षक होने का

1133
01:22:57,840 --> 01:23:02,080
पाखंड दिमाग पर खुमार चढ़ गया है

1134
01:23:02,080 --> 01:23:08,080
मानसिक रोगी जैसा लक्षण हो गया

1135
01:23:13,560 --> 01:23:17,840
है कोई न्याय प्रियता है ही नहीं तुम लोग जो भी करते रहो

1136
01:23:17,840 --> 01:23:22,000
सामने वाला उसको जो झुक कर के बिल्कुल तोड़ दो उसको उसको इतना मोड़ो इतना मोड़ो

1137
01:23:22,000 --> 01:23:26,120
उसकी री की हड्डी टूट जाए मेरी बात मान

1138
01:23:26,120 --> 01:23:31,040
कोई न्याय प्रियता नहीं है कोई निष्पक्षता नहीं है मेरी बात मान

1139
01:23:31,040 --> 01:23:37,040
मैं जो भी करूं उस पर प्रतिकार मत

1140
01:23:42,320 --> 01:23:46,680
कर यहां तुमने एक वजह बताई कि मैं तो ऐसा ही करता हूं

1141
01:23:46,680 --> 01:23:51,120
वहां तुमने वजह बताई कि क्या कहते वो

1142
01:23:51,120 --> 01:23:55,400
मेरी माता जी ने खाना परोसा था ये क्या है दो प्रकार की बातें है राम

1143
01:23:55,400 --> 01:23:59,400
क्या सिखा रहे हैं रामो दुर भी

1144
01:23:59,400 --> 01:24:04,120
भाते इतना तो तुम्हारे जो अलंकार समाज है व भी मानता है

1145
01:24:04,120 --> 01:24:08,400
भूल गए रामो दुर्वी

1146
01:24:08,400 --> 01:24:14,400
भाष चले धर्म की रक्षा

1147
01:24:15,280 --> 01:24:19,440
करने उस समय भी धर्मिक आचरण नहीं है जब धर्म के लिए तुम कहीं पर धर्म

1148
01:24:19,440 --> 01:24:23,480
को प्रस्तुत करने आ रहे हो अरे कम से चलो अपनी पर्सनल लाइफ में कुछ और हो

1149
01:24:23,480 --> 01:24:27,480
भाई कम से कम जिस समय धर्म को प्रस्तुत करने आ रहे हो उस समय तो

1150
01:24:27,480 --> 01:24:30,600
धर्म का आचरण पकड़

1151
01:24:30,600 --> 01:24:35,200
लो मगर नहीं धर्म से ऊंचा है अपना

1152
01:24:35,200 --> 01:24:39,400
अहंकार राशनलिस्ट आर्य निर्भय

1153
01:24:39,400 --> 01:24:43,720
आर्य यह सब ऊंचा है धर्म नहीं ऊंचा है राम नहीं ऊंचे है

1154
01:24:43,720 --> 01:24:49,040
यह सब ऊंचा

1155
01:24:49,040 --> 01:24:53,120
है अब आप अब आ जाते कि भाई आप जो है भेद लेने आए

1156
01:24:53,120 --> 01:24:58,280
थे भेद ले आए हनुमान जी की

1157
01:24:58,280 --> 01:25:02,480
तरह क्या आपको अपने ईश्वर पर विश्वास नहीं है

1158
01:25:02,480 --> 01:25:06,720
जो उसकी ईश्वर उस ईश्वर की ईश्वर को सिद्ध करने के लिए आपको

1159
01:25:06,720 --> 01:25:10,720
सामने वाले के पास शिक्षा लेने उसका भेद लेने के रूप में उसकी शिक्षा

1160
01:25:10,720 --> 01:25:15,240
प्राप्त करने जाना पड़ रहा है भाई आपका ईश्वर पूर्ण है

1161
01:25:15,240 --> 01:25:19,360
ना सत्यम ज्ञान अतम ब्रह्म है ना

1162
01:25:19,360 --> 01:25:23,400
तो आपको क्या आवश्यकता है किसी के पास जाकर के उसका भेद लेने की शिक्षा लेने की

1163
01:25:23,400 --> 01:25:26,960
उसकी

1164
01:25:26,960 --> 01:25:31,440
पूर्ण है ना नहीं है

1165
01:25:31,440 --> 01:25:35,840
और इसका अर्थ क्या है आपको ईश्वर की सर्वशक्ति

1166
01:25:35,840 --> 01:25:40,320
मत्ता से नहीं ईश्वर की पूर्णता से नहीं आपको जो है

1167
01:25:40,320 --> 01:25:44,360
केवल हराने से मतलब है आर समाज की सिद्धांत

1168
01:25:44,360 --> 01:25:48,440
के ऊपर किसी ने उंगली कैसे उठा दी हमको बस सामने वाले को हराना

1169
01:25:48,440 --> 01:25:54,440
है आपको इससे मतलब

1170
01:25:57,040 --> 01:26:01,240
हमारा उद्देश्य नहीं है हमने कितनी बार कहा है सर्वशक्तिमान ईश्वर

1171
01:26:01,240 --> 01:26:05,360
परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ले चलो अपने साथ हम तो

1172
01:26:05,360 --> 01:26:10,200
आर्य समाज ही कहने लगेंगे अपने आपको को कर दो सर्वशक्तिमान ईश्वर

1173
01:26:10,200 --> 01:26:14,360
को बदल दो ये वाली चीजें संशोधन वो वो तो शोध ग्रंथ

1174
01:26:14,360 --> 01:26:18,440
है ना शोध होने लायक है बदल दो व जो वादत ईश्वर

1175
01:26:18,440 --> 01:26:22,680
है उसको हटा दो हम होंगे हर समाजी

1176
01:26:22,680 --> 01:26:26,720
हमको इससे मतलब नहीं है कि हम किस संप्रदाय के नाम से जाने जाए

1177
01:26:26,720 --> 01:26:31,360
हमको इससे मतलब है कि हमारा सनातन धर्म सुरक्षित

1178
01:26:31,360 --> 01:26:35,600
हो एक छत्र हो

1179
01:26:35,600 --> 01:26:40,400
बदल दो अपनी

1180
01:26:40,400 --> 01:26:44,560
चीजें अगर हमको तुमने गलत कर भी दिया

1181
01:26:44,560 --> 01:26:48,880
तो क्या करोगे ज्यादा से ज्यादा तुमने जो

1182
01:26:48,880 --> 01:26:52,920
दुर्जन तोष न्याय की बात कर रहा हूं तुमने अगर गलत सिद्ध कर भी

1183
01:26:52,920 --> 01:26:57,440
दिया ज्यादा से ज्यादा क्या करोगे सर्वशक्तिमान ईश्वर छीन ग ना दुनिया से

1184
01:26:57,440 --> 01:27:01,720
यही करोगे बस सार्वभौम सिद्धांत अकाट्य

1185
01:27:01,720 --> 01:27:05,720
सिद्धांत नहीं तुम्हारे पास नास्तिक

1186
01:27:05,720 --> 01:27:10,120
बनाओगे दुनिया

1187
01:27:10,120 --> 01:27:14,320
को नहीं तो अपने ईश्वर को अद सिद्ध करो ना क्या भेद लेने जाने

1188
01:27:14,320 --> 01:27:18,880
की जरूरत है और क्या भद ले लिया तुमने दो कोड़ी की बातें थी

1189
01:27:18,880 --> 01:27:24,880
हमने आपको एक जिज्ञासु समझते हुए ज्यादा बात नहीं की दूसरा विषय भी चल रहा था

1190
01:27:25,200 --> 01:27:29,520
भेद ले लिया हम भेद लेने गए ते हनुमान जी की तरह ब्रह्म विद्या में कहां स्वीकार

1191
01:27:29,520 --> 01:27:33,520
किया है इस तरह से भेद लेकर के प्राप्त करो शरणागत हो कर के ब्रह्म विद्या

1192
01:27:33,520 --> 01:27:37,520
जानने को कहा गया है कहां परण सात्विक कार्य में

1193
01:27:37,520 --> 01:27:42,160
आप जो राजसिक नियम को क्यों लागू कर रहे हो रणनीति

1194
01:27:42,160 --> 01:27:46,160
क्षत्रिय विषक कार्य ब्रह्म विद्या का कार्य नहीं है वो हनुमान जी जो भेद

1195
01:27:46,160 --> 01:27:50,320
लेकर आए थे युद्ध को जीतने के लिए लाए थे यह युद्ध है क्या

1196
01:27:50,320 --> 01:27:55,800
तुहे इससे मतलब नहीं धर्म की संस्थापन हो

1197
01:27:55,800 --> 01:27:59,800
हनुमान जी जो भेद लेकर आए थे युद्ध के लिए भेद लेकर के आए थे इनके पास

1198
01:27:59,800 --> 01:28:03,840
कितने शस्त्र अस्त्र यानी कि तुम्हें सत्य से कोई मतलब

1199
01:28:03,840 --> 01:28:07,880
नहीं है तुमने पहले ही सोच रखा है कि इसको इसका मुंह बंद कैसे कराना है इसलिए तुम

1200
01:28:07,880 --> 01:28:13,880
य जानने आए थे इसके पास कौन कन से तर्क

1201
01:28:13,920 --> 01:28:17,920
है और ऐसा कोई उस दिन हमने वाक्य नहीं बोल दिया तुमसे जो

1202
01:28:17,920 --> 01:28:23,920
हमने अपने सेशन में अपने लाइव सेशन में अपने वीडियो में बोला ना हो

1203
01:28:28,240 --> 01:28:32,320
और अगर यह मान भी लो कि तुम भेद

1204
01:28:32,320 --> 01:28:36,360
लेने आ रहे हो तो तुम्हें ये क्यों लगता है कि भेद लेने आने वाली स्थिति में जो बाद में

1205
01:28:36,360 --> 01:28:40,560
होता है वो सौहार्द पूर्व ऐसी चर्चा होगी तुम हमसे भेद लेकर जाओगे अरे वाह ये तो हनुमान

1206
01:28:40,560 --> 01:28:44,560
जी ने किया था इसलिए हम भी वो तुमसे भेद लेके गए उसमें कोई आपत्ति नहीं है और आ जाओ आ

1207
01:28:44,560 --> 01:28:48,600
जाओ हम तुम वो हम तुमसे बात करते हैं चर्चा करते हैं भाई ज भेद लेके आया जाता

1208
01:28:48,600 --> 01:28:52,600
है ना तो सुनियोजित चर्चा नहीं होती है भेद

1209
01:28:52,600 --> 01:28:57,120
लेने जाया जाता है तो सुनियोजित चर्चा नहीं होती है फिर होता है

1210
01:28:57,120 --> 01:29:01,120
युद्ध तो उस भेद लेने जाने को इस भेद से आप मत

1211
01:29:01,120 --> 01:29:05,120
जोड़िए मनुस्मृति 12वां अध्याय 37 वा श्लोक जिन कर्मों को करते

1212
01:29:05,120 --> 01:29:09,160
समय छिपाने का भाव आए वो त्याज है तामसिक

1213
01:29:09,160 --> 01:29:13,240
है क्यों छिपाई तुमने अपनी आइडेंटिटी भगवान शंकराचार्य

1214
01:29:13,240 --> 01:29:18,600
ये वो सब क्यों कहा तुमने स्वयं को

1215
01:29:18,600 --> 01:29:22,680
ब्रह्म विद्या विद्या में इस तरह से भेद लेने की बात हमें बताओ ये तो हार जीत

1216
01:29:22,680 --> 01:29:28,400
का खेल कर रहे हो भाई तुम्हारे लिए हार जीत है हमारे लिए धर्म संस्थापन

1217
01:29:28,400 --> 01:29:29,400
है

1218
01:29:29,400 --> 01:29:35,400
हमें मतलब नहीं है आर समाज जीते कौन

1219
01:29:35,400 --> 01:29:39,600
जीते अब तुमने जब भेद लेने को धर्म मान लिया

1220
01:29:39,600 --> 01:29:44,000
है तो तुम नहीं चाहते कि बराबरी की हो बातचीत तुम्हारे

1221
01:29:44,000 --> 01:29:48,000
हिसाब से अगर भेद लेना धर्म है तो तुम नहीं चाहते कि बातचीत बराबरी की हो

1222
01:29:48,000 --> 01:29:52,160
तुम यह चाहते हो कि तुम्हारे भेद लेने को हम जो है स्वागत करें

1223
01:29:52,160 --> 01:29:56,240
वाह अगर हनुमान जी भेद लेने जाए भी रावण के य तो रावण

1224
01:29:56,240 --> 01:30:01,840
से अपेक्षा करोगे वो स्वागत कर बा तुमने बहुत बढिया धर्म

1225
01:30:01,840 --> 01:30:05,840
निया अरे भाई तुमने भेद लिया है तो हमें भी भेद लेने दो अगर वो धर्म

1226
01:30:05,840 --> 01:30:09,880
है तो भेद लेने से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए अगर तुम कह रहे हो

1227
01:30:09,880 --> 01:30:13,880
कि वो धर्म है तो हमें भेद लेने दो

1228
01:30:13,880 --> 01:30:18,160
क्यों फिर अब तुरंत चर्चा के लिए हुआ जा रहा है

1229
01:30:18,160 --> 01:30:22,240
क्योंकि तुम्हें धर्म संस्था से मतलब नहीं है तुमको केवल अपना नाक

1230
01:30:22,240 --> 01:30:26,600
ऊंची करनी है नाक मैं बहुत बड़ा तुरम खाऊ 30 मार

1231
01:30:26,600 --> 01:30:31,280
खाऊ नाक ऊंची

1232
01:30:31,280 --> 01:30:33,520
करनी

1233
01:30:33,520 --> 01:30:37,520
चोरी जब तुम्हारी चोरी पकड़ी गई तो उसको तुम गर्व के साथ बता

1234
01:30:37,520 --> 01:30:41,640
रहे हो कि भाई व जो है हनुमान जी क भेज लेने

1235
01:30:41,640 --> 01:30:45,720
तुमको अपने ईश्वर की ईश्वर को साबित करने के लिए लोगों के पास जाना पड़ रहा है इससे

1236
01:30:45,720 --> 01:30:50,520
और बेकार बात क्या

1237
01:30:50,520 --> 01:30:54,520
होगी और जिससे तुम शिक्षा लेने जा रहे हो ना उसके तुम

1238
01:30:54,520 --> 01:30:58,600
फिर वो हो रहे हो शरणागत

1239
01:30:58,600 --> 01:31:02,720
नहीं हो रहे उसके इसलिए ब्रह्म विद्या को जानने

1240
01:31:02,720 --> 01:31:06,800
में ब्रह्म विद्या पर चर्चा करना और जो जो युद्ध लड़ना होता है दोनों

1241
01:31:06,800 --> 01:31:10,880
अलग-अलग चीज है उनको एक मत करो हनुमान जी से अपनी तुलना मत करो

1242
01:31:10,880 --> 01:31:15,000
ठीक है और फिर अगर तुमने

1243
01:31:15,000 --> 01:31:19,080
यह स्वीकार कर ही लिया कि हम भेद लेने हनुमान जी भी गए थे तो तुम्हारी इस चीज पर

1244
01:31:19,080 --> 01:31:23,080
तुम ये अपेक्षा मत करो कि सामने वाला बहुत दिल खोल के तुम्हारा जो है हृदय से स्वागत करेगा

1245
01:31:23,080 --> 01:31:29,080
वाह तुमने भे लेकर के बहुत बढ़िया काम किया उस तरह उसके अनुरूप व्यवहार

1246
01:31:29,840 --> 01:31:34,840
होगा और सामने वाले को भी भेद दो अपना

1247
01:31:34,840 --> 01:31:39,200
सब भेद दो जो जो मांगे सारे भेद दे देना अपने मतलब

1248
01:31:39,200 --> 01:31:43,240
व्यक्ति देखो कर क्या रहा है कि उसकी जब चोरी पकड़ी जा रही है तो

1249
01:31:43,240 --> 01:31:49,240
उसके लिए वो कह रहा है मेरी इस चोरी को स्वीकार करो तुम धर्म के रूप

1250
01:31:49,840 --> 01:31:55,320
में हद होती है

1251
01:31:55,320 --> 01:32:00,200
व्यक्तिगत जीवन हमारा बहुत प्रभावशाली है अरे

1252
01:32:00,200 --> 01:32:04,280
होगा लोग कहते हैं अक्सर कहते हैं कि हमारा स्पन इतना

1253
01:32:04,280 --> 01:32:08,320
बड़ा है हरा हमारे पीछे इंटरनेशनल है और जो है रामपाल वाले कहते हैं हमारे

1254
01:32:08,320 --> 01:32:12,440
इतने वो है हम लोग ये करते हैं वो करते हैं हमारा यह चलता है वो चलता है लोग कहते

1255
01:32:12,440 --> 01:32:16,520
हैं आ दिन तुम भी कहो हम आईजी है डीआईजी है हम भगवान

1256
01:32:16,520 --> 01:32:21,320
है धरती के तो ऐसे लोगों से

1257
01:32:21,320 --> 01:32:25,680
कहना कि अगर तुम्हारे पीछे ये सब है ना पूरा तंत्र

1258
01:32:25,680 --> 01:32:31,680
तो हमारे पास हमारे पीछे तो हमारे पीछे राम

1259
01:32:36,440 --> 01:32:41,000
है आज तक क्यों नहीं भेद लेने भेद लेने की बात बताई थी

1260
01:32:41,000 --> 01:32:45,360
मैं भेद लेने गया था एक महीने बाद जब पकड़ा गया

1261
01:32:45,360 --> 01:32:51,360
तब अपने आकाओं को बता रहा है कि मैं भेद लेने गया था हनुमान जी की तरह

1262
01:32:54,080 --> 01:32:58,440
और किसी ने वहां पर चलती हुई स्ट्रीम में से पूछ लिया कि

1263
01:32:58,440 --> 01:33:02,920
यह तो इसके यह रशन कहता है ना स्वयं को रशन आर

1264
01:33:02,920 --> 01:33:07,040
यह इसके तर्क है कि हमारे आर्य समाज में तो फ्री स्टाइल है यह

1265
01:33:07,040 --> 01:33:11,040
धर्म है इनका आर्य समाज का हमारा समाज में तो फ्री

1266
01:33:11,040 --> 01:33:15,280
स्टाइल है नियमावली नहीं है निश्चित तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में

1267
01:33:15,280 --> 01:33:19,400
एक मात्र शास्त्र प्रमाण है यह सब नहीं है इनके

1268
01:33:19,400 --> 01:33:24,600
फ्री स्टाइल है फ्री स्टाइल जैसे फ्री स्टाइल फाइट होती थी पहले दारा

1269
01:33:24,600 --> 01:33:28,600
और इनके जमाने में फ्री स्टाइल फाइट होती थी ये सब है कह रहा है

1270
01:33:28,600 --> 01:33:32,920
वो रेशन हमारे आर समाज में तो फ्री स्टाइल है

1271
01:33:32,920 --> 01:33:36,960
सब फ्री स्टाइल ही तो होता है नास्तिकों का फ्री स्टाइल

1272
01:33:36,960 --> 01:33:41,040
ही तो होता है ये लोग जो जानवरों जैसा आचरण कर रहे हैं ये सब फ्री स्टाइल वाले ही

1273
01:33:41,040 --> 01:33:46,440
है कोई मर्यादा नहीं है तो बोलने से पहले

1274
01:33:46,440 --> 01:33:50,480
सोचो अब किसी ने इनसे चलती हुई उसमें प्रश्न कर दिया कि ये सब करने

1275
01:33:50,480 --> 01:33:52,040
की बजाय जो है आप लोग

1276
01:33:52,040 --> 01:33:56,280
धर्म का प्रचार करो ये सब क्या कर रहे हो तो बोल रहा है कि हमको शिवांश ने विवश किया है मतलब

1277
01:33:56,280 --> 01:34:00,320
शिवांश जो है इनके हिसाब से जो आलोचना करता है तो वो क्यों करता है

1278
01:34:00,320 --> 01:34:04,440
ना करे आलोचना वो अपना काम करे हम अपना काम कर रहे हैं हमें थोड़ी ना पड़ी है कि हम

1279
01:34:04,440 --> 01:34:07,600
ये सब करे खंडन

1280
01:34:07,600 --> 01:34:11,640
मंडन तो आलोचना करना अगर गलत है अगर आपके हिसाब

1281
01:34:11,640 --> 01:34:16,520
सेय आलोचना है पहली बात और वो गलत है तो किसने शुरू किया आलोचना

1282
01:34:16,520 --> 01:34:20,560
किसने शुरू किया भांड कहना किसने शुरू किया राधा जी को गाली

1283
01:34:20,560 --> 01:34:25,040
देना अरे भाई तुम्हारे हिसाब से प्रमाणिक नहीं है बैठो अपना प्रचार

1284
01:34:25,040 --> 01:34:29,200
करो किसने शुरू किया

1285
01:34:29,200 --> 01:34:33,800
पुराणों को गाली देना किसने शुरू किया

1286
01:34:33,800 --> 01:34:38,000
जिसको अपने सर पर लेकर घूमते हो उसी में वह सारी आलोचना

1287
01:34:38,000 --> 01:34:42,120
लिखी है जो कहीं से भी किसी को शुरुआत में ऐसा

1288
01:34:42,120 --> 01:34:46,240
भी करते हैं लोग किसी को जब सत्यार्थ प्रकाश कहते चौथा समुल्लास बाद में पढ़ना पहले चवा

1289
01:34:46,240 --> 01:34:50,360
पढ़ लो बाद में पढ़ना कक उसमें ऐसी ऐसी बातें है ना

1290
01:34:50,360 --> 01:34:56,360
जो व्यक्ति अगर शुरू में पढ़ ले तो व कभी पढ़े ही ना

1291
01:34:58,280 --> 01:35:02,480
तो किसने शुरू किया ये सब अपमान जनक

1292
01:35:02,480 --> 01:35:07,840
आपत्ति जनक वक्तव्य देना फतिया कसना य सब किसने शुरू किया भांड

1293
01:35:07,840 --> 01:35:12,520
कहना प प मूवी से कंपेयर करना

1294
01:35:12,520 --> 01:35:16,840
मर जाए भागवत का मर ही क्यों नहीं जाता वोह

1295
01:35:16,840 --> 01:35:22,200
ये सब कहना क्यों आवश्यकता अपना निराकार ईश्वर को पूछो ना

1296
01:35:22,200 --> 01:35:26,880
नहीं जब तक य सब नहीं करेंगे तब तक हमारे दुकाने कैसे चलेंगी

1297
01:35:26,880 --> 01:35:30,920
और जब इन चीजों का कोई प्रतिकार करे तो हमें विवस कर रहा है आलोचना कर रहा है

1298
01:35:30,920 --> 01:35:35,600
अच्छा यहां पर एक तर्क और आता है हमने तो जो भी बात कही प्रामाणिक कही इसका मतलब

1299
01:35:35,600 --> 01:35:40,040
कि आप जो आज जो ये कर रहे हो बैठ कर के खंडन मंडन उसका कारण

1300
01:35:40,040 --> 01:35:44,040
हमारी हमारे वक्तव्य नहीं है शिवांश नहीं है उसका कारण

1301
01:35:44,040 --> 01:35:48,080
है क्या प्रमाणिक है क्या नहीं है इसलिए आप कर रहे हो तो जो व्यक्ति

1302
01:35:48,080 --> 01:35:52,560
जो बोल रहा है ना पूछ रहा है य सब क्यों कर रहे हो तो उसको सही जवाब दो

1303
01:35:52,560 --> 01:35:56,880
आपके हिसाब से प्रमा णता कारण है तो यह बोलो कि हम जो कर रहे वो प्रामाणिक

1304
01:35:56,880 --> 01:36:01,200
है प्रामाणिक बोल रहे इसलिए हमें करना पड़ रहा है यह मत बोलो शिवास ने विवस किया

1305
01:36:01,200 --> 01:36:05,200
है रामो दना भी भाष दो प्रकार की बातें क्यों कर रहे हो

1306
01:36:05,200 --> 01:36:09,520
पूरा समाज कर रहा है पूरा समाज लगा

1307
01:36:09,520 --> 01:36:13,320
के गुरुकुल के हेड और भले ही वह किताबों के माध्यम

1308
01:36:13,320 --> 01:36:17,320
से उसको फॉलो करने वाला कहां है धर्म या फिर

1309
01:36:17,320 --> 01:36:22,560
वो अंडर कवर्ड

1310
01:36:22,560 --> 01:36:28,560
गुंडा आर्य है ये यही होता है आर्य का

1311
01:36:28,560 --> 01:36:33,120
लक्षण एक एक जगह पर आकर के कहते हैं

1312
01:36:33,120 --> 01:36:37,880
कि हमारी शत्रुता अद्वैत से नहीं है इतनी जितनी हमारी शिवान से हां

1313
01:36:37,880 --> 01:36:42,520
क्योंकि था नहीं ना कोई यह सब बोलने वाला प्रखर हो कर

1314
01:36:42,520 --> 01:36:48,520
के कांटे की तरह चुम रहा है तुम्हे अब

1315
01:36:49,240 --> 01:36:53,600
आवान कह रहे हैं वहां पर कि उसके वीडियोस देख लेना उसमें देख लेना उसके

1316
01:36:53,600 --> 01:36:57,600
होंगे 10000 और उसके लाइक्स होंगे इतने क्योंकि

1317
01:36:57,600 --> 01:37:01,960
लोगों को मसाला चाहिए होता है अरे भाई तुम ही तो अपनी बात का ही खंडन कर रहे हो

1318
01:37:01,960 --> 01:37:06,160
इनके चुबरा ये है कि ये जो जो सशक्तिकरण

1319
01:37:06,160 --> 01:37:10,480
हो रहा है ना इन विचारों का सार्वभौम सिद्धांतों

1320
01:37:10,480 --> 01:37:14,560
का जो सशक्तिकरण हो रहा है इनकी मेन प्रॉब्लम यह है जो वहां पर बैठकर

1321
01:37:14,560 --> 01:37:18,840
चर्चा कर रहे देखना उसके व्यूज इतने हैं उसके हमारे इतने मेरा मेरा देख लेना 5000

1322
01:37:18,840 --> 01:37:22,960
व्यूज और इतने लाइक है भाई

1323
01:37:22,960 --> 01:37:27,360
प्रहलाद के टाइम पर अगर वोटिंग पड़ती ना तो हिरण्य

1324
01:37:27,360 --> 01:37:31,560
कश्यप को सारे वोट जाने थे कौरवों के टाइम पर वोटिंग पड़ती ना तो कौरवों को वोट

1325
01:37:31,560 --> 01:37:35,800
जाने ौर सौरव वाला पक्ष सही तुम खुद ही अपनी चीजों

1326
01:37:35,800 --> 01:37:40,440
को सामने ला रहे हो तुमने बताया हमारे वोट कम

1327
01:37:40,440 --> 01:37:45,520
है और तुम्हारे वोट ज्यादा

1328
01:37:45,520 --> 01:37:50,400
है तो समझ लो तुम किधर जा रहे हो

1329
01:37:50,400 --> 01:37:53,920
जुगनू और उल्लू

1330
01:37:53,920 --> 01:37:58,240
सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते इसमें

1331
01:37:58,240 --> 01:38:02,480
दोष सूर्य के सामर्थ्य का नहीं जुगनू और उल्लू की असमर्थता

1332
01:38:02,480 --> 01:38:07,120
का है निर्णय क्या हुआ प्रकाश के विषय

1333
01:38:07,120 --> 01:38:12,560
में जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते

1334
01:38:12,560 --> 01:38:17,040
समझे और बात अगर यह की जाए ना मसाला चाहिए लोगों को मसाला चाहिए

1335
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तो मसाले से आपकी चीजें चलती है

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आपने इतना निर्लज तरीके से ये सब ना किया होता ये

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राधा जी के बारे में यह कह रहे वो कह रहे ये सब चीज ना चालू की होती कौन

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सुनता यह भड़काऊ भाषण दे दे कर के अपने अस्तित्व में आए

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हो परंपरा प्राप्त आचार्यों को कोप कह के पंडे क के पाखंडी

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कह के जाने कितनी जगह

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भांड यह सब सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है और क्या और किसकी बात

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करें तो मसाला यह है

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मसाले की ओर जाती है

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पब्लिक सभी को जय श्री राम किसी प्रकार का

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वैचारिक मतभेद हो निम चर्चा करनी हो

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तो संपर्क करें 74836

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जय श्री राम

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[संगीत]
