1
00:00:01,960 --> 00:00:07,960
[संगीत]

2
00:00:08,400 --> 00:00:12,480
सभी को जय श्री राम और अचानक से हमको जो

3
00:00:12,480 --> 00:00:17,200
है आना पड़ा कुछ बात करने के लिए आपसे अभी

4
00:00:17,200 --> 00:00:21,360
सुबह हमको एक तीसरा नहीं चौथा

5
00:00:21,360 --> 00:00:26,160
लेटर हमें प्राप्त हुआ आर्य समाज की ओर से

6
00:00:26,160 --> 00:00:30,760
उसमें क्या लिखा है और क्या-क्या चीजें हैं उसी पर हम आज

7
00:00:30,760 --> 00:00:36,440
बात करने वाले हैं और बहुत ही विशेष और आवश्यक

8
00:00:36,440 --> 00:00:40,480
और कहूंगा कि हर व्यक्ति के जानने योग्य बातें

9
00:00:40,480 --> 00:00:46,480
हैं तो सभी लोग ध्यान से जुड़े और ध्यान से चीजों को सुने

10
00:01:09,800 --> 00:01:14,680
तो कुछ दिनों पूर्व हमें

11
00:01:14,680 --> 00:01:19,560
इग्राम स्टोरी पर शुरू से शुरू करता

12
00:01:19,560 --> 00:01:23,600
हूं अगस्त मा में शायद दो अगस्त को एक लेटर हमारे नाम

13
00:01:23,600 --> 00:01:27,800
से निकला कि भाई ये

14
00:01:27,800 --> 00:01:32,160
आपको शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी जाती है और आप आकर के माउं

15
00:01:32,160 --> 00:01:36,880
आबू पर्वत में हमारा आर् गुरुकुल है यहां पर आकर के आप जो है

16
00:01:36,880 --> 00:01:42,360
शास्त्रार्थ करें और शास्त्रार्थ का विषय था वहां पर किसकी परंपरा

17
00:01:42,360 --> 00:01:46,760
आश हमने इस बात का उत्तर वीडियो बना कर के दे दिया था

18
00:01:46,760 --> 00:01:50,920
और उसी एक दो दिन दो चार दिन के अंतराल में वीडियो बना

19
00:01:50,920 --> 00:01:55,080
कर के इस बात का उत्तर दे दिया था कि जिसको भी चर्चा करनी है

20
00:01:55,080 --> 00:01:59,080
व लखनऊ आकर के चर्चा करे हमारे पास इतना समय

21
00:01:59,080 --> 00:02:03,120
नहीं है कि हम जगह जा कर के घूमे आप अपने उसको देख लीजिए आपको जैसा

22
00:02:03,120 --> 00:02:07,400
सहज लगे यदि आपको लगता है कि हमसे चर्चा करना आपका आवश्यक है तो आप लखनऊ

23
00:02:07,400 --> 00:02:11,920
आ जाइए इस प्रकार का हमने उत्तर दे दिया था जिसको भी चर्चा करनी है यदि

24
00:02:11,920 --> 00:02:15,920
वह एक कोई भगौड़ा नहीं है अंडर कवर्ड

25
00:02:15,920 --> 00:02:20,320
गुंडा नहीं है अलंकार समाज के द्वारा पाला हुआ

26
00:02:20,320 --> 00:02:24,440
है ना तो हमने उत्तर तभी दे दिया था

27
00:02:24,440 --> 00:02:24,940
तब से

28
00:02:24,840 --> 00:02:30,840
लेकर के अभी तक उस उत्तर को लेकर के कोई प्रतिक्रिया हमें प्राप्त नहीं हुई

29
00:02:31,560 --> 00:02:35,680
इसके बाद अभी कुछ दिनों पूर्व हमको उसी लेटर को लेकर के शायद किसी ने

30
00:02:35,680 --> 00:02:39,760
इग्राम पर स्टोरी लगा कर के टैग कर दिया हमने उसका फिर से वही उत्तर

31
00:02:39,760 --> 00:02:44,000
दे दिया भाई जिसको भीय ऐसी इस प्रकार की कोई चर्चा

32
00:02:44,000 --> 00:02:48,120
करनी है तो वो जो है लखनऊ आ सकता है

33
00:02:48,120 --> 00:02:52,160
जब हमने ये उत्तर इग्रा की स्टोरी पर दिया अभी भी हमने कोई लिखित उत्तर नहीं दिया है ध्यान

34
00:02:52,160 --> 00:02:56,640
रखिए इग्रा की स्टोरी पर हमने वो लेटर वो उत्तर दिया

35
00:02:56,640 --> 00:03:00,840
अब हमारे पास एक लेटर दोबारा से आता है और इस ये जो आबू पर्वत

36
00:03:00,840 --> 00:03:04,960
वाले जो आर्य समाज का जो केंद्र है वहां सेय

37
00:03:04,960 --> 00:03:09,200
लोग सक्रिय हो जाते हैं और फिर हमें जो है भेजते कि आपने हमारा निमंत्रण

38
00:03:09,200 --> 00:03:13,600
स्वीकार कर लिया और आपने तीन महीने बाद जवाब दिया है अमुक अमुक ये वो सब करते हैं

39
00:03:13,600 --> 00:03:17,640
भाई हमने तीन महीने बाद जवाब नहीं दिया है हमने जवाब उसी समय

40
00:03:17,640 --> 00:03:21,640
दे दिया था जिस समय आपने लेटर भेजा था आप अगर

41
00:03:21,640 --> 00:03:25,920
यह कहे कि आपने लिखित में दिया था तो आपको लिखित चाहिए तो हमने तो लिखित से आपसे संपर्क

42
00:03:25,920 --> 00:03:30,120
ही नहीं किया था आपको हमारे बारे में मालूम कैसे पड़ा के

43
00:03:30,120 --> 00:03:34,400
माध्यम सेय के माध्यम से तो य के माध्यम से हमने पर्याप्त सामग्री

44
00:03:34,400 --> 00:03:38,480
हमसे संपर्क करने की उपलब्ध करा रखी है आपने तो हमें व

45
00:03:38,480 --> 00:03:40,760
इत्यादि पर नहीं भेजा था

46
00:03:40,760 --> 00:03:44,880
और अगर भेजा भी था तो अगर आप हमें य से जानने वाले हैं तो अपने संपर्क

47
00:03:44,880 --> 00:03:49,080
अपने संदेशों को टब के माध्यम से भेज सकते हैं

48
00:03:49,080 --> 00:03:53,120
है ना क्योंकि हमें उस समय बहुत सी जगह से डेली एक ना एक

49
00:03:53,120 --> 00:03:57,240
लेटर आ जाता था तो हमें याद नहीं है कि आपने हमारे पर्सनल ट नंबर पर वो

50
00:03:57,240 --> 00:04:01,440
लेटर भेजा था या नहीं भेजा था ठीक है मगर हमने आपका उत्तर अपने

51
00:04:01,440 --> 00:04:05,800
वीडियो के माध्यम से दे दिया आप चेक करिएगा जो आधुनिक

52
00:04:05,800 --> 00:04:09,800
गार्गी के नाम से एक वीडियो बनाया था कि

53
00:04:09,800 --> 00:04:13,800
यह जो झूठ प्रलाप क्यों हो रहा है उसी में आपका उत्तर भी दिया था वो उन्ही दिनों

54
00:04:13,800 --> 00:04:17,840
की बात है कुछ दो चार दिन अब क्या हुआ कि इनका

55
00:04:17,840 --> 00:04:22,600
लेटर हमें दोबारा आता है कि आप ठीक है हम लखनऊ आने के लिए तैयार हैं और

56
00:04:22,600 --> 00:04:26,600
आप हमारी ओर से फला फला जगह जो है इनका जो आर्थ समाज

57
00:04:26,600 --> 00:04:30,640
का मंदिर है जहां पर निष्ठा विद्या

58
00:04:30,640 --> 00:04:34,640
अलंकार जो इनकी आधुनिक ग गार्गी जी है उनके साथ जहां पर

59
00:04:34,640 --> 00:04:39,600
चर्चा हुई थी उसी जगह को इन्होंने बता दिया कि यहां पर हम लोग चर्चा करेंगे

60
00:04:39,600 --> 00:04:43,800
अब दोबारा से हमको जो है इनका लिखित

61
00:04:43,800 --> 00:04:47,960
क्योंकि ये अब लिख के भेज रहे तो हमने कहा चलो इनको अब लिख के दे दिया जाए उत्तर

62
00:04:47,960 --> 00:04:51,960
तो हमको समय लग रहा था हम लोग फ्री नहीं बैठे रहते हैं आप भी

63
00:04:51,960 --> 00:04:55,800
कार्य करते होंगे हम भी कार्य करते तो कार्य कर रहे हैं उसमें

64
00:04:55,800 --> 00:04:59,800
नहीं समय मिल रहा है समय मिला लिखा उस बीच में इनका

65
00:04:59,800 --> 00:05:03,960
लेटर और प्राप्त हो गया कि आपका जो है लिखित में उत्तर प्राप्त नहीं हुआ

66
00:05:03,960 --> 00:05:08,200
है और आप इन विषयों में से कोई भी एक विषय चुन सकते हैं

67
00:05:08,200 --> 00:05:12,280
तो वो लेटर जरा इनको दिखा दीजिए जो इनका दूसरा

68
00:05:12,280 --> 00:05:16,320
अभी का जो लेटर दूसरा वाला जिसमें उन्होंने विषय बताए तो इन्होंने उसमें

69
00:05:16,320 --> 00:05:20,600
विषय बता दिए आप ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं मूर्ति पूजा

70
00:05:20,600 --> 00:05:24,600
और गायत्री मंत्र स्त्रिया जप सकती

71
00:05:24,600 --> 00:05:28,800
है कि नहीं या जने का जो मामला है शायन भाष्य महिदर भाष्य

72
00:05:28,800 --> 00:05:33,000
यन भाष्य पात्री भाष्य यह जो इन्होंने दूसरा लेटर दिया

73
00:05:33,000 --> 00:05:37,000
है इसको आप देख लीजिए पहले इनका जो इनका शीर्षक

74
00:05:37,000 --> 00:05:41,880
है वो दिखा दीजिए ऊपर का आर समाज जो गुरुकुल य बताते हैं यह

75
00:05:41,880 --> 00:05:45,880
यह इन्होंने लेटर दे दिया

76
00:05:45,880 --> 00:05:50,760
अब इसमें इन्होंने देखिए हमें ऑप्शन दिए हैं कि आप जो है

77
00:05:50,760 --> 00:05:54,760
इन इन विषयों पर चर्चा कर सकते हैं इनमें विषय नंबर सबसे पहला विषय ईश्वर

78
00:05:54,760 --> 00:05:59,800
का स्वरूप उसके बाद आचार्य शाय महिदर

79
00:05:59,800 --> 00:06:05,400
बट कपाती जी और महा ऋषि दयानंद

80
00:06:05,400 --> 00:06:09,760
के वेद भाष्य में किस की प्रामाणिकता

81
00:06:09,760 --> 00:06:11,240
ठीक है अभी

82
00:06:11,240 --> 00:06:15,800
शब्दों पर भी ध्यान दीजिए की प्रामाणिकता ये ठीक

83
00:06:15,800 --> 00:06:19,960
अब हिंदू शब्द की प्रामाणिकता और क्या है

84
00:06:19,960 --> 00:06:24,160
स्त्री वेदा अध्यन अधिकार अवतारवाद मूर्ति पूजा

85
00:06:24,160 --> 00:06:28,400
अच्छा इसमें जो और किसकी परंपरा

86
00:06:28,400 --> 00:06:32,400
आ यहां पर ने फिर से दे दिया किसकी परंपरा आर

87
00:06:32,400 --> 00:06:36,520
स्वामी शंकराचार्य और स्वामी और महा ऋषि दयानंद ठीक

88
00:06:36,520 --> 00:06:40,680
है किसकी परंपरा अर्श तो इनमें से किसी

89
00:06:40,680 --> 00:06:44,760
एक विषय को आप चुनिए तो यह विषय हम जो है यह

90
00:06:44,760 --> 00:06:48,800
हमें विषय उनके प्राप्त हो गए अब जब यह विषय हमको प्राप्त हो गए तो

91
00:06:48,800 --> 00:06:52,800
हमारा यही कहना था सबसे पहला कहना तो यही था हमने इनका

92
00:06:52,800 --> 00:06:56,840
उत्तर दे दिया कि भाई ठीक है हटा लीजिए इसको हटा लीजिए अब हमने दिखा

93
00:06:56,840 --> 00:07:01,320
दिया हटा अब हमने को उत्तर दे दिया कि ठीक है भाई

94
00:07:01,320 --> 00:07:05,360
हम जो है आपसे ईश्वर का स्वरूप

95
00:07:05,360 --> 00:07:09,480
सर्वशक्तिमान ईश्वर पर चर्चा करना चाहते हैं और इसमें इन्होंने

96
00:07:09,480 --> 00:07:13,640
जितने भी विकल्प दिए हैं

97
00:07:13,640 --> 00:07:18,600
कि क्या कहते हैं ये मूर्ति पूजा अवतार

98
00:07:18,600 --> 00:07:22,960
और ईश्वर का स्वरूप यह लगभग एक ही एक ही विषय

99
00:07:22,960 --> 00:07:26,440
है भाई ईश्वर का स्वरूप ईश्वर सर्वशक्तिमान है

100
00:07:26,440 --> 00:07:30,440
कि नहीं अवतार ले सकता है कि नहीं अवतार ले लेगा तो मूर्ति पूजा तो ये सब इंटर

101
00:07:30,440 --> 00:07:34,440
कनेक्टेड है इनको अलग अलग स्पेसिफिक नाम देने की भी बहुत ज्यादा

102
00:07:34,440 --> 00:07:38,560
आवश्यकता नहीं है खर आपने यह सब दिया तो इनका कुल मिलाकर के

103
00:07:38,560 --> 00:07:42,600
एक निचोड़ निकला ईश्वर का स्वरूप हमने इधर से इनको उत्तर दे दिया कि ईश्वर

104
00:07:42,600 --> 00:07:47,080
के स्वरूप पर आप आ जाइए चर्चा कर लीजिए आ अच्छा

105
00:07:47,080 --> 00:07:51,360
अब इनका एक अंतिम लेटर आता है और वह इतना हास्यास्पद

106
00:07:51,360 --> 00:07:55,400
है और मैं कहूंगा कि आर समाज को जो फॉलो करने

107
00:07:55,400 --> 00:07:59,600
वाले लोग होंगे उनकी निष्ठा को भी ठेस पहुंच सकती है

108
00:07:59,600 --> 00:08:04,000
वो उनके लिए भी आश्चर्य चकित कर देने वाला इनका लेटर है

109
00:08:04,000 --> 00:08:08,040
क्योंकि अब यह अपनी ये जो विकल्प दिए है ना हमको इस विकल्प से

110
00:08:08,040 --> 00:08:12,040
अभ मुकर गए हो गया इनका अब इन

111
00:08:12,040 --> 00:08:16,080
विकल्पों में से इन्होंने जो ईश्वर का स्वरूप वाला विकल्प ता हटा दिया

112
00:08:16,080 --> 00:08:20,680
एक साइड कर दिया और इन्होंने कहा कि आप यदि परंपरा

113
00:08:20,680 --> 00:08:25,240
की बात करना चाहते हैं तो आप परंपरा पर आप उसे बात कर लीजिए

114
00:08:25,240 --> 00:08:29,520
क्योंकि आपने कहा कि आर्य समाज ने परंपरा नहीं दिखाई

115
00:08:29,520 --> 00:08:33,720
जबकि आर्य समाज के विद्वानों ने आपको परंपरा के विषय में उचित उत्तर

116
00:08:33,720 --> 00:08:37,800
दिया है और आपने उनको संतुष्टि जनक रूप से अपनी परंपरा

117
00:08:37,800 --> 00:08:41,480
के बारे में नहीं बताया फिर भी यदि आपको परंपरा के विषय में बात करनी है

118
00:08:41,480 --> 00:08:45,520
तो आप आ कर के कर सकते हैं ठीक है तो सबसे पहले

119
00:08:45,520 --> 00:08:49,840
तो इसी बात पर बात करते हैं आपने कहा कि आपके विद्वानों ने

120
00:08:49,840 --> 00:08:53,960
परंपरा के विषय में हमें उचित उत्तर दिया है वो कौन विद्वान

121
00:08:53,960 --> 00:08:58,120
है कौन विद्वान है कहीं अंडर कवर्ड

122
00:08:58,120 --> 00:09:02,280
वो भगोड़ा वो गुंडा तो नहीं है जिसको आर्य समाज की

123
00:09:02,280 --> 00:09:06,320
संस्था नकार देती है यह कह देती है कि हम नहीं जानते इस नाम के

124
00:09:06,320 --> 00:09:10,640
व्यक्ति को कौन विद्वान है आर समाज का जिसने हमें उत्तर दिया और उत्तर

125
00:09:10,640 --> 00:09:15,040
क्या था हमने आपसे आपका नाम पूछा तो

126
00:09:15,040 --> 00:09:19,440
उस नाम नाम बताने की बजाय आप हमको यह कह रहे हो कि आपका नाम क्या है

127
00:09:19,440 --> 00:09:23,520
यह उत्तर है अच्छा दूसरी बात यह है कि

128
00:09:23,520 --> 00:09:27,640
किसकी परंपरा आर इस विषय में कोई भी बात तब हो सकती

129
00:09:27,640 --> 00:09:31,760
है आपने कहा कि हमें आपकी परंपरा वो जो आपका उत्तर था कोई भी आपने संतुष्टि जनक

130
00:09:31,760 --> 00:09:36,240
उत्तर नहीं दिया भैया हमने उत्तर दिया है आपको संतुष्टि

131
00:09:36,240 --> 00:09:40,280
हुई है कि नहीं हुई है यह तो शास्त्रार्थ का विषय है चर्चा का विषय

132
00:09:40,280 --> 00:09:44,600
है आपके अनुसार शास्त्रार्थ हमारे अनुसार चर्चा का विषय

133
00:09:44,600 --> 00:09:48,640
आप उसे साथ करिए हमारे अनुसार तो चर्चा

134
00:09:48,640 --> 00:09:52,800
का विषय हम तो चर्चा ही कह करके गए हैं कहीं भी ना तो यह तो चर्चा का विषय

135
00:09:52,800 --> 00:09:56,480
है कि आप हमारे उस उत्तर से संतुष्ट है कि नहीं यह

136
00:09:56,480 --> 00:10:00,560
हमारी गुरु परंपरा को बताने वाली ग्रंथ है

137
00:10:00,560 --> 00:10:04,560
और सार्वजनिक है वेबसाइट पर अवेलेबल है जाके पढ़िए

138
00:10:04,560 --> 00:10:08,560
किसका गुरु कौन आर्य समाज का कौन सा ग्रंथ अभी तक ऐसा छपा

139
00:10:08,560 --> 00:10:12,600
है जिसमें विरजानंद का गुरु पूर्णानंद और पूर्णानंद के गुरु का नाम बताया गया

140
00:10:12,600 --> 00:10:16,760
फिर उनके गुरु का नाम बताया गया गुरु परंपरा बताई गई हो आपके व्यक्ति ने

141
00:10:16,760 --> 00:10:21,440
आर्य समाज के मंदिर में बैठ कर के कहा कि आर्य समाज गुरु डम परंपरा को नहीं

142
00:10:21,440 --> 00:10:25,560
मानता क्या करें उसका आप तो स्वयं खंडन

143
00:10:25,560 --> 00:10:29,640
कर रहे हैं और फिर कह रहे हैं किसकी परंपरा पहले अपनी परंपरा को मानिए कि हम

144
00:10:29,640 --> 00:10:33,760
भी परंपरा को मानने वाले हैं पहला पहली नंबर फिर उसके बाद यह

145
00:10:33,760 --> 00:10:37,840
बताइए कि आपकी परंपरा क्या है और दिखाइए

146
00:10:37,840 --> 00:10:41,880
वो कहां पर आपके जो जिनके द्वारा जो प्रवर्तक है उनके द्वारा

147
00:10:41,880 --> 00:10:45,960
कहां स्वीकार किया गया परंपरा को कहां पर उनके द्वारा उल्लेख किया गया तब

148
00:10:45,960 --> 00:10:50,160
हम लोग इस बात पर बात कर सकते हैं कि आपकी परंपरा प्रामाणिक है कि नहीं या हमारे द्वारा

149
00:10:50,160 --> 00:10:56,160
बताए जाने वाले जो गुरुओं के नाम है वो प्रामाणिक है कि नहीं

150
00:10:56,200 --> 00:11:00,200
हा तो आप कहते हैं कि हमें संतुष्टि नहीं भाई तो चर्चा

151
00:11:00,200 --> 00:11:04,200
का विषय है और चर्चा क्यों हो रही है और आप तो

152
00:11:04,200 --> 00:11:08,800
कभी संतुष्ट होंगे नहीं ना व जनता देखेगी किसकी बात में दम

153
00:11:08,800 --> 00:11:11,560
है जनता देखेगी आप कभी संतुष्ट

154
00:11:11,560 --> 00:11:15,600
हो सकते हैं क्या नहीं हो सकते क्या उत्तर दिए नहीं

155
00:11:15,600 --> 00:11:19,640
गए खब दिए गए अब कोई संतुष्टि जनक उत्तर नहीं

156
00:11:19,640 --> 00:11:23,680
दिया तो इसलिए जो आप संतुष्ट नहीं तो इसमें हम क्या करें भाई उत्तर दिया गया आपकी

157
00:11:23,680 --> 00:11:28,240
तरफ से कोई ग्रंथ कोई लेख इस बारे में हो

158
00:11:28,240 --> 00:11:32,400
प्रामाणिक दयानंद जी के द्वारा स्वीकार किया गया अरे वो छोड़ दो पहले तो य

159
00:11:32,400 --> 00:11:36,440
ये तो दिखाओ कि है कोई किताब है कुछ है सामग्री आपके पास आपकी गुरुओं की

160
00:11:36,440 --> 00:11:40,560
वंशावली है परंपरा है आपकी कुछ दिखाओ

161
00:11:40,560 --> 00:11:44,800
उसके बाद तो बात करें कि वो परंपरा आर्ष है कि नहीं

162
00:11:44,800 --> 00:11:49,080
पहली बात दूसरी बात यह है

163
00:11:49,080 --> 00:11:53,440
कि इन्होंने फिर वहां पर जो अपना अंतिम लेटर दिया उसम परंपरा

164
00:11:53,440 --> 00:11:57,560
के बारे में विकल्प में आ गए वो ईश्वर सर्व शक्तिमान को छोड़ दिया उसको मैं थोड़ा बाद

165
00:11:57,560 --> 00:12:01,760
में लूंगा और इन्होंने कहा क्या कि देखिए ईश्वर

166
00:12:01,760 --> 00:12:06,400
सर्वशक्तिमान है मतलब ईश्वर के विषय में आपकी चर्चा आर्थ

167
00:12:06,400 --> 00:12:10,560
समाज के कई विद्वानों से कई बार हो चुकी है इसलिए हमें उचित नहीं लगता

168
00:12:10,560 --> 00:12:15,200
इस विषय पर बात करना आप पहले या तो क्या कहते हैं

169
00:12:15,200 --> 00:12:19,960
यह परंपरा के विषय को तो रख ही दिया था उन्होंने और दूसरा उन्होंने रखा कि

170
00:12:19,960 --> 00:12:24,440
क्या कहते हैं यह हिंदू शब्द की प्रामाणिकता या जो आचार्य

171
00:12:24,440 --> 00:12:29,680
शायन है करपात्री जी है इनके भाष्य

172
00:12:29,680 --> 00:12:34,200
सनातन धर्म के अनुकूल है कि नहीं अब देखिए यहां क्या शब्द आया

173
00:12:34,200 --> 00:12:38,240
सनातन धर्म के अनुकूल है कि नहीं भाई वेद वेद से प्रतिपादित होता है

174
00:12:38,240 --> 00:12:42,440
जब सनातन धर्म और वेद की प्रमाणिकता कोई वेद के भाष्य

175
00:12:42,440 --> 00:12:46,520
कोई हम जांचने निकले हैं तो फिर सनातन धर्म अलग से कहां से आएगा

176
00:12:46,520 --> 00:12:49,800
जो वेरिफिकेशन

177
00:12:49,800 --> 00:12:54,240
करेगा पहली बात दूसरी बात य है अगर सनातन धर्म के अनुसार

178
00:12:54,240 --> 00:12:58,560
सनातन नाम हम पकड़ते हैं कि उसके अनुसार वेद के भाष्य होने चाहिए

179
00:12:58,560 --> 00:13:03,120
तो सनातन ईश्वर होना चाहिए ना वेद का ईश्वर सनातन होना चाहिए ना सनातन

180
00:13:03,120 --> 00:13:07,160
सर्व शक्तिमान समर्थ सर्व सामर्थ वान होना चाहिए ना और उसी

181
00:13:07,160 --> 00:13:11,280
विषय पर हम बात कर रहे कि आपके वेद भाष्य के द्वारा आपकी

182
00:13:11,280 --> 00:13:15,320
मान्यताओं के द्वारा आपकी विचारधारा के द्वारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है

183
00:13:15,320 --> 00:13:20,160
कि नहीं सर्व सामर्थ वान है कि नहीं

184
00:13:20,160 --> 00:13:24,440
उसी में तो बात कर रहे हैं तो उससे आप पीछे हट रहे हो अपनी

185
00:13:24,440 --> 00:13:28,480
ही कही हुई बात से आप कैसे बहानेबाजी कर कर के पीछे हट सकते हैं

186
00:13:28,480 --> 00:13:34,160
कहां से सीखा धर्म की कौन सी व्याख्या है यह सारी बातें विचारणीय

187
00:13:34,160 --> 00:13:38,160
है अरे भाई आपने जब हमको विकल्प दिया है ठोक

188
00:13:38,160 --> 00:13:42,200
करके ईश्वर का स्वरूप अब हम उस पर चर्चा करने जा रहे हैं तो

189
00:13:42,200 --> 00:13:44,920
आप उसको पीछे क्यों कर रहे हैं दूसरे विषयों

190
00:13:44,920 --> 00:13:49,520
को आगे क्यों कर रहे हैं क्योंकि इसमें झोल है

191
00:13:49,520 --> 00:13:53,520
क्योंकि उसमें भय है क्योंकि वह सर्वशक्तिमान नहीं

192
00:13:53,520 --> 00:13:58,400
है क्योंकि उस पर आपको गर्व नहीं है उस पर आपको डाउट है

193
00:13:58,400 --> 00:14:02,800
हमने अपनी चर्चाओं में सदैव क्या कहा हिंदू शब्द की प्रमाणिकता

194
00:14:02,800 --> 00:14:06,800
पर आप लोग बात करते हैं हिंदू शब्द की प्रमाणिकता क्या हम लोग हिंदू शब्द की प्रमाणिकता को

195
00:14:06,800 --> 00:14:10,920
लेकर के फिरते हैं क्या मैं अपनी हर वीडियो के एंड में कहता हूं कि अगर

196
00:14:10,920 --> 00:14:15,440
हमें अगर हमें सनातन को एक करना है सिर्फ तीन खंबे पकड़िए

197
00:14:15,440 --> 00:14:20,320
सिर्फ तीन खंबे सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत

198
00:14:20,320 --> 00:14:24,520
धर्म अगर आप लोग हिंदू शब्द नहीं बोलना चाहते मत

199
00:14:24,520 --> 00:14:29,720
बोलो हमारा विषय तो इतना होता है कि उसको बुरा भी मत बोलो बस

200
00:14:29,720 --> 00:14:33,760
और वो तो बातें बाद की है ना जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान होगा जिसके वेद

201
00:14:33,760 --> 00:14:38,920
भाष्य जो है सनातन ईश्वर को प्रतिपादित करेंगे उसके अनुसार मान लिया

202
00:14:38,920 --> 00:14:44,400
जाएगा हिंदू शब्द प्रमाणिक है कि

203
00:14:44,400 --> 00:14:48,520
नहीं अरे भाई हम लोग तो स्वयं को सनातन वैदिक

204
00:14:48,520 --> 00:14:52,800
आर्य हिंदू कहते ही है और आपके भी बहुत सारे भगोड़े विद्वान

205
00:14:52,800 --> 00:14:57,200
नहीं आपके द्वारा जिनको सम्मान प्राप्त है वो विद्वान मंचों पर

206
00:14:57,200 --> 00:15:01,400
अपनी बात रखते समय कई बार हिंदू बोलते हिंदू शब्द का उपयोग करते तो

207
00:15:01,400 --> 00:15:05,800
इसको लेकर के हमारे बीच में कोई बड़ा अलगाव नहीं है यह तो बाय

208
00:15:05,800 --> 00:15:10,080
प्रोडक्ट है जड़ में क्या है

209
00:15:10,080 --> 00:15:14,200
यह बाय प्रोडक्ट है इन पर अगर बात होगी भी या

210
00:15:14,200 --> 00:15:19,560
नहीं भी होगी अगर जड़ को हम लोग बात कर लेंगे तो यह सब कुछ अपने आप क्लियर हो

211
00:15:19,560 --> 00:15:23,640
जाएगा और अगर बात यह है कि ईश्वर के

212
00:15:23,640 --> 00:15:27,880
विषय पर बात कई बार हो चुकी है तो इन पर भी हमने बहुत सारे वीडियोस बनाए हैं अगर

213
00:15:27,880 --> 00:15:31,920
आपका कहना यह है कि को देख कर के जनता अपना निर्णय ले रही है तो इन

214
00:15:31,920 --> 00:15:35,960
पर इनको देखकर भी जनता अपना निर्णय ले लेगी फिर आप क्यों परेशान

215
00:15:35,960 --> 00:15:40,040
आपने मूर्ति पूजा का विषय हटा दिया आपने अवतार का विषय हटा दिया

216
00:15:40,040 --> 00:15:44,200
आपने ईश्वर ईश्वर के स्वरूप का विषय तीनों विषय हटा दिए इनका जो आखिरी लेटर

217
00:15:44,200 --> 00:15:48,560
आया है इनका आखिरी लेटर दिखा

218
00:15:48,560 --> 00:15:52,560
दीजिए तो यह है आर समाज का

219
00:15:52,560 --> 00:15:56,720
एक क्या कहे इसको अपनी बात से मुकर जाने

220
00:15:56,720 --> 00:16:00,720
वाला क्रिया चरित्र दोहरा

221
00:16:00,720 --> 00:16:04,880
चरित पहले बहुत शन के साथ

222
00:16:04,880 --> 00:16:09,160
कहते हैं भाई आ जाओ आप इसमें से अपना अपना विकल्प चुन लीजिए

223
00:16:09,160 --> 00:16:13,160
ईश्वर सर्वशक्तिमान और यह मूर्ति पूजा और

224
00:16:13,160 --> 00:16:17,360
यह अवतारवाद चुन लीजिए और उसके बाद जब हम चुन लेते

225
00:16:17,360 --> 00:16:21,640
हैं पकड़ लेते हैं पक्के वाले खंबे को एक

226
00:16:21,640 --> 00:16:25,680
ही खंबा ऐसा है जिसको हर सनातनी अगर पकड़ लेगा

227
00:16:25,680 --> 00:16:29,840
हम सब एक हो जाएंगे कुछ नहीं परेशान होने की आवश्यकता होगी

228
00:16:29,840 --> 00:16:33,960
एक ही खंबा ईश्वर सर्वशक्तिमान

229
00:16:33,960 --> 00:16:38,400
है कि नहीं बस जो भी आपको भटका है वो भले ही

230
00:16:38,400 --> 00:16:42,480
स्वयं को सनातनी कहता हो या स्वयं को सनातनी ना कहता

231
00:16:42,480 --> 00:16:47,280
हो केवल एक बात पकड़ो आपके धर्म और अधर्म का निर्णय हो जाएगा

232
00:16:47,280 --> 00:16:51,520
केवल एक बात जो ईश्वर है व बाधित ना हो अवाद ईश्वर

233
00:16:51,520 --> 00:16:55,600
सर्वशक्तिमान ईश्वर दिखाइए भैया लेटर वो

234
00:16:55,600 --> 00:16:59,600
तीसरा वाला इ ने पहले क्या

235
00:16:59,600 --> 00:17:03,560
किया हमको ऑप्शन दिए कि आप चुन लीजिए अपना कौन

236
00:17:03,560 --> 00:17:07,680
सा विकल्प आपको चुनना है और फिर लास्ट में कह दिया नहीं नहीं इन पर तो

237
00:17:07,680 --> 00:17:12,000
बातें हो चुकी है अच्छा बातें हो चुकी है यह क्या आपको तब मालूम नहीं था जब आप विकल्प

238
00:17:12,000 --> 00:17:18,000
दे रहे थे किसी और ने लिख दिया था वह

239
00:17:26,840 --> 00:17:31,320
विकल्प वो पांच सिद्धांत शिक्षा के उससे हैं

240
00:17:31,320 --> 00:17:35,560
उन पांचों सिद्धांतों के मूल में यही तीन सिद्धांत

241
00:17:35,560 --> 00:17:39,800
जैसे धर्म शाश्वत की बात करेंगे तो प्रामाणिक आचार्य आ

242
00:17:39,800 --> 00:17:43,840
जाएगा और सरलता से जानने योग राम

243
00:17:43,840 --> 00:17:48,440
आ जाएंगे है ना उन वो पांच

244
00:17:48,440 --> 00:17:52,960
इन्ही तीन सिद्धांतों का और एक्सप्लोर कर देंगे तो व पांच हो जाएंगे

245
00:17:52,960 --> 00:17:56,960
वो समझाने के उससे हैं जब किसी को आप समझाएंगे मगर आप जब किसी

246
00:17:56,960 --> 00:18:01,000
से वैचारिक मतभेद मिटाने के निमित्त बात करेंगे

247
00:18:01,000 --> 00:18:05,040
तो केवल तीन चीजें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र

248
00:18:05,040 --> 00:18:07,280
मोक्ष

249
00:18:07,280 --> 00:18:11,720
और परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म

250
00:18:11,720 --> 00:18:16,800
तो एक बार और दिखाइए एक बार और दिखा दीजिए इनको थोड़ा सा मैं बता दूं दर्शको

251
00:18:16,800 --> 00:18:18,600
को इस बात से

252
00:18:18,600 --> 00:18:22,800
हम असहमत है कि आर्य समाज नीचे वाला

253
00:18:22,800 --> 00:18:28,800
आइए नीचे वाला

254
00:18:30,480 --> 00:18:34,680
शास्त्र चर्चा के लिए हमने अच्छा इनका एक यह वाला

255
00:18:34,680 --> 00:18:39,000
मामला है कि शास्त्र चर्चा के लिए इन्होंने स्थान

256
00:18:39,000 --> 00:18:43,280
का वह दिया था तो ठीक है हमें स्थान से कोई आपत्ति नहीं है ठीक है आपके

257
00:18:43,280 --> 00:18:47,320
यहां पर शास्त्र चर्चा होनी है वहां कर लेंगे लखनऊ में होनी है आपके

258
00:18:47,320 --> 00:18:51,400
वाले आपके वहां पर होनी है कर लेंगे आर समाज मंदिर में उससे हमें कोई दिक्कत नहीं है

259
00:18:51,400 --> 00:18:55,520
हमने तो अपना विकल्प दिया था कि आप इस मंदिर में आ सकते हैं कि नहीं आ सकते मगर

260
00:18:55,520 --> 00:18:59,680
आपने कह दिया कि आप नहीं आप वहीं पर वहीं

261
00:18:59,680 --> 00:19:03,720
पर आपको जो है सहज प्रतीत हो रहा है तो ठीक है मैं उसमें कोई

262
00:19:03,720 --> 00:19:08,280
आपत्ति नहीं वो वाला दिखाइए जिसमें इन्होंने मना किया है सर्वशक्तिमान

263
00:19:08,280 --> 00:19:14,280
ईश्वर के बारे में चर्चा करने से यह

264
00:19:16,960 --> 00:19:21,600
देखिए हां हां सर्वशक्तिमान

265
00:19:21,600 --> 00:19:25,800
सर्वशक्तिमान ईश्वर पर आप अन्य आर्य विद्वानों से चर्चा

266
00:19:25,800 --> 00:19:29,920
कर ही चुके हैं इस विषय पर आप की और आर समाज

267
00:19:29,920 --> 00:19:34,360
की जो जो मान्यता है उस पर पर्याप्त सामग्री सर्वज्ञ उपलब्ध है

268
00:19:34,360 --> 00:19:38,000
और निष्पक्ष लोग उसे देखकर निर्णय ले सकते

269
00:19:38,000 --> 00:19:42,360
हैं इसलिए एक ही विषय पर बार-बार चर्चा करने का कोई औचित्य

270
00:19:42,360 --> 00:19:46,520
नहीं है अरे मेरे भाई जितनी बार हमने सर्वशक्तिमान

271
00:19:46,520 --> 00:19:50,840
ईश्वर पर चर्चा की है उतनी बार हमने

272
00:19:50,840 --> 00:19:54,880
परंपरा पर भी चर्चा की है एक भी चर्चा ऐसी नहीं है

273
00:19:54,880 --> 00:19:59,080
जहां पर हमने सर्वशक्तिमान की बात की हो मगर परंपरा की बात नहीं हो क्यों क्योंकि

274
00:19:59,080 --> 00:20:03,240
आपके पास जब तर्क नहीं होते हैं तो आप अपने अनुसार अर्थ किया हुआ प्रमाण उपलब्ध कराते

275
00:20:03,240 --> 00:20:07,640
हैं और जब प्रमाण उपलब्ध कराते तो हम पूछते हैं कि वेद मंत्र कहां से है आपके

276
00:20:07,640 --> 00:20:12,040
पास तो परंपरा और सर्वशक्तिमान ईश्वर साथ में ही चले

277
00:20:12,040 --> 00:20:16,040
हैं बल्कि परंपरा पीछे रही है सर्वशक्तिमान ईश्वर आगे रहा

278
00:20:16,040 --> 00:20:20,440
है और परंपरा पर जाकर के हर हर चर्चा संपन्न हुई

279
00:20:20,440 --> 00:20:25,280
है जिसका उत्तर नहीं दिया गया एक भी आर्य विद्वान ने

280
00:20:25,280 --> 00:20:29,400
और जिसके जिसकी आड़ में आप बचने का प्रयास कर रहे हैं वो तो खुद को स्व भगोड़े कहते

281
00:20:29,400 --> 00:20:33,880
हैं कौन कौन सा आर विद्वान है जिसने उत्तर दिया है परंपरा के संबंध में कोई

282
00:20:33,880 --> 00:20:38,160
नहीं तो यह बात यह आपका जो कथन है गलत है कि ईश्वर

283
00:20:38,160 --> 00:20:42,400
विषयक चर्चा कई बार हो चुकी है मगर दूसरे विषयों पर चर्चा नहीं हुई है क्योंकि

284
00:20:42,400 --> 00:20:46,400
दूसरे विषय जो आपने परंपरा का विषय पकड़ा था उस पर भी हर बार जहां पर

285
00:20:46,400 --> 00:20:50,440
ईश्वर के ऊपर चर्चा हुई वहां पर परंपरा पर भी हुई और सबसे बड़ी

286
00:20:50,440 --> 00:20:53,080
बात है कि यदि आपको कोई गलत फहमी हो भी रही है

287
00:20:53,080 --> 00:20:57,160
कि परंपरा पर चर्चा नहीं हुई है या जो भी है और ईश्वर विषय पर हो चुकी

288
00:20:57,160 --> 00:21:01,600
है तो आप जब हमें विकल्प दे रहे थे कि आप इनमें से अपना चुन लीजिए

289
00:21:01,600 --> 00:21:05,640
तब आपको ये ध्यान नहीं रहा था क्या ईश्वर के विषय पर चर्चा हो चुकी है तो हम मूर्ति पूजा

290
00:21:05,640 --> 00:21:09,960
ना लिखे तो हम अवतारवाद ना लिखे ईश्वर के स्वरूप का विकल्प ना दे

291
00:21:09,960 --> 00:21:15,440
ये कैसा दोहरा चरित्र है भाई कैसा दोगलापन है

292
00:21:15,440 --> 00:21:19,520
ये और फिर कहते हैं हम धर्म की स्थापना कराने वाले हैं धर्म की रक्षा

293
00:21:19,520 --> 00:21:23,520
करने वाले हैं यह धर्म है लिखित में कही हुई बातों को

294
00:21:23,520 --> 00:21:27,520
बदल दिया जाए यह धर्म है यह धर्म के देवता के

295
00:21:27,520 --> 00:21:31,680
धर्म धार्मिक केंद्र संचालक है अच्छा

296
00:21:31,680 --> 00:21:35,720
एक चीज और है इनके पत्र में बहुत गजब की वो देखिए वो वाला

297
00:21:35,720 --> 00:21:41,720
दिखाइए जरा कि चर्चा जो है लाइव रिकॉर्ड की

298
00:21:42,520 --> 00:21:46,600
जाएगी हां चर्चा की लाइव स्ट्रीमिंग

299
00:21:46,600 --> 00:21:50,960
करने की व्यवस्था आर्य समाज के द्वारा की जाएगी अन्य किसी को रिकॉर्ड

300
00:21:50,960 --> 00:21:55,120
करने की छूट नहीं है यह यह मेरे भाई ऐसे आप लोग कथन कह

301
00:21:55,120 --> 00:21:59,920
रहे हैं कि आप लोग ही नहीं चाहते हैं कि अभी चर्चा हो क्यों भा

302
00:21:59,920 --> 00:22:04,040
हम परतंत्र हो गए क्या जो हम आपसे चर्चा करने आ रहे हैं तो आपने

303
00:22:04,040 --> 00:22:08,120
हम पर एहसान कर दिया कि हमें चर्चा का अवसर देक के आप लाइव

304
00:22:08,120 --> 00:22:13,120
स्ट्रीम करोगे आपको चर्चा पसंद नहीं आई आपने लाइव स्ट्रीम हटा दी तो हम क्या

305
00:22:13,120 --> 00:22:17,440
करेंगे भाई एक दूसरे पर भरोसा नहीं है इसीलिए तो हम आमने

306
00:22:17,440 --> 00:22:21,440
सामने हैं चर्चा में तो फिर आप

307
00:22:21,440 --> 00:22:25,520
इस भरोसे की उम्मीद क्यों कर रहे हैं हमसे कि

308
00:22:25,520 --> 00:22:29,640
लाइव स्ट्रीम आप डालेंगे हम रिकॉर्ड भी नहीं कर सकते वाह

309
00:22:29,640 --> 00:22:34,240
क्या बात है अजीब तानाशाही है भाई

310
00:22:34,240 --> 00:22:38,400
यह देख रहे हैं आप लोग यह देखिए यह

311
00:22:38,400 --> 00:22:42,880
हाल है आबू पर्वत के आर्स गुरुकुल के संचालक है यह

312
00:22:42,880 --> 00:22:46,960
और यह बोल रहे हैं कि भैया रिकॉर्ड करने की अनुमति और किसी की नहीं होगी क्यों नहीं

313
00:22:46,960 --> 00:22:51,040
होगी क्यों नहीं होगी रिकॉर्ड करने की अनुमति भाई जितना

314
00:22:51,040 --> 00:22:55,880
अधिकार आपका है उस चर्चा पर उतना ही अधिकार हमारा भी है

315
00:22:55,880 --> 00:22:57,640
अजीब नहीं अरे

316
00:22:57,640 --> 00:23:01,640
भाई नियमों के साथ तुम्हारे साथ कौन बैठेगा चर्चा करने अभी

317
00:23:01,640 --> 00:23:05,680
तुम कह दोगे कि चर्चा में बैठने की अनुमति केवल हमारे विद्वान कोगी आप खड़े

318
00:23:05,680 --> 00:23:09,880
रहोगे तो क्यों जाए तुम्हारे द्वारे परतंत्र

319
00:23:09,880 --> 00:23:13,840
हो गए क्या

320
00:23:13,840 --> 00:23:18,760
तुम्हारे अजीब बात है चर्चा रिकॉर्ड करने की अनुमति

321
00:23:18,760 --> 00:23:22,800
केवल हमारे विद्वान की होगी अच्छा

322
00:23:22,800 --> 00:23:26,800
अब इसमें आगे चलते हैं तो इन्होंने हिंदू शब्द की

323
00:23:26,800 --> 00:23:31,160
अब जब ये ये कह रहे हैं कि अन ईश्वर विषय पर बात हो चुकी उसके ऊपर जो

324
00:23:31,160 --> 00:23:37,040
वो लोग है वो निर्णय ले रहे हैं

325
00:23:37,040 --> 00:23:41,040
तो हां अब इसमें य यह

326
00:23:41,040 --> 00:23:44,480
कहते हैं कि

327
00:23:44,480 --> 00:23:49,040
जो हमारी जो चर्चा होगी वह सबसे पहले क्या होगी

328
00:23:49,040 --> 00:23:53,040
या तो इस पर हो कि सनातन के अनुकूल है कि नहीं करपात्री जी का

329
00:23:53,040 --> 00:23:57,560
भाष्य अगर सनातन के अनुकूल आप लिख रहे हैं पहली बात तो सनातन कोई अलग से नहीं है

330
00:23:57,560 --> 00:24:01,720
जब वेद का भाग होगा वही से सनातन प्रतिपादित होगा तो यह आपकी भूल

331
00:24:01,720 --> 00:24:06,440
है अलग से कोई स्ट्रक्चर है कोई बॉडी है जहां जिसके अकॉर्डिंग

332
00:24:06,440 --> 00:24:10,640
हमें वेद भाष्य करना है अलग से कोई स्ट्रक्चर नहीं हा आपने अपने मन

333
00:24:10,640 --> 00:24:14,720
का स्ट्रक्चर को नाम दे रखा है सनातन का यह बात है कई बार

334
00:24:14,720 --> 00:24:18,800
अपने मन के अनुसार आप ईश्वर ऐसा कैसे कर सकता है ईश्वर पर प्रतिबंध लगा

335
00:24:18,800 --> 00:24:22,880
देते हो अपने मन के अनुसार बनाए हुए ताने बाने के अनुसार आप जो

336
00:24:22,880 --> 00:24:27,440
है ईश्वर पर प्रतिबंध लगा देते हो और उसको आप सनातन का नाम देते हो ठीक है

337
00:24:27,440 --> 00:24:31,600
तो वो सनातन नहीं सनातन को सिद्ध करिए आप तो

338
00:24:31,600 --> 00:24:35,680
वेद भाष्य के जिस वेद भाष्य का ईश्वर सनातन साबित हो जाएगा

339
00:24:35,680 --> 00:24:39,720
सर्वशक्तिमान सर्व सामर्थ वाद सिद्ध हो जाएगा वही ईश्वर वही

340
00:24:39,720 --> 00:24:43,760
वेदवा प्रमाणिक सिद्ध हो जाएगा तो आपकी बात से इससे भी निकल रहा है कि ईश्वर के स्वरूप पर हम

341
00:24:43,760 --> 00:24:47,960
चर्चा कर सकते हैं दूसरी एक बात यह है कि

342
00:24:47,960 --> 00:24:52,040
इन्होंने यह ऑप्शन फिर हमें दिया कि पहले आप या तो इस पर

343
00:24:52,040 --> 00:24:56,240
बात कर लीजिए हिंदू शब्द की प्रामाणिकता

344
00:24:56,240 --> 00:25:00,360
या फिर ये पात्री जी और सायन

345
00:25:00,360 --> 00:25:04,640
की सनातन के अनुकूल प्रामाणिकता पर और यदि

346
00:25:04,640 --> 00:25:08,720
उसके बाद आपको लगता है तो हमारे विद्वान हम उपलब्ध करा देंगे और आप जो

347
00:25:08,720 --> 00:25:13,480
है फिर आप सर्वशक्तिमान ईश्वर पर चर्चा कर लीजिएगा तो ये

348
00:25:13,480 --> 00:25:17,560
जो विकल्प इन्होंने सबसे पहले दिया था पहले तो उसको

349
00:25:17,560 --> 00:25:21,960
नकार ही दिया कि हमारे हमारी समझ से वो उचित है ही नहीं और नकारते

350
00:25:21,960 --> 00:25:26,040
हुए उसको सबसे पीछे कर दिया क्यों भाई जब आप आप

351
00:25:26,040 --> 00:25:30,080
अपनी जबान के पक्के रहिए ना भाई आपने कहा आप इसमें से कोई

352
00:25:30,080 --> 00:25:34,120
भी विकल्प चुन लीजिए हमने चुन लिया तो अब आप क्यों

353
00:25:34,120 --> 00:25:38,120
पीछे हट रहे हैं कि नहीं नहीं इनमें से चुनिए अब आप और वह विकल्प पीछे

354
00:25:38,120 --> 00:25:42,120
रखिए यह दोगलापन है यह दोहरा चरित्र है

355
00:25:42,120 --> 00:25:46,160
इससे बचिए और जो ऑप्शन आप दे रहे हैं उनमें से

356
00:25:46,160 --> 00:25:50,840
भी ईश्वर के स्वरूप का अर्थ निकल रहा है

357
00:25:50,840 --> 00:25:55,120
और एक ऑप्शन की हमने बात बता दी हिंदू शब्द की प्रमाणिकता

358
00:25:55,120 --> 00:25:59,240
और अगर यही बात है कि इन पर तो चर्चा हो तो मूर्ति पूजा

359
00:25:59,240 --> 00:26:03,240
पर भी खूब बातें हो चुकी है यह बात आप लोग ही नहीं कहते मुसलमान भी कहते हैं

360
00:26:03,240 --> 00:26:07,040
मूर्ति पूजा के बारे में खूब राम मंदिर के विषय में खूब ये बात ठी है कि मूर्ति

361
00:26:07,040 --> 00:26:11,240
पूजा प्रमाणिक है कि नहीं है वैदिक है कि नहीं है और

362
00:26:11,240 --> 00:26:15,240
कोर्ट के ऑर्डर्स में समरी में लिखा हुआ है कि मूर्ति पूजा जो है मूर्ति

363
00:26:15,240 --> 00:26:19,560
पूजा वि भेदों से सिद्ध है कोर्ट ने माना

364
00:26:19,560 --> 00:26:23,800
वो बात और है कि वो संविधान हमारा लौकिक संविधान के अनुसार

365
00:26:23,800 --> 00:26:28,000
वो कोर्ट है मगर आप तो लौकिक संविधान के अनुसार चलते हैं वो मैं अभी बताऊंगा

366
00:26:28,000 --> 00:26:32,040
कसे से चलते हैं बताऊंगा मैं सनातन संविधान कब

367
00:26:32,040 --> 00:26:36,080
लागू आपके यहां लौकिक संविधान का आलंबन लेते

368
00:26:36,080 --> 00:26:40,920
हैं धार्मिक तंत्र होने के बावजूद भी आपका जो आधार है

369
00:26:40,920 --> 00:26:45,040
धार्मिक निर्णय लेने का वो लौकिक संविधान प्रतीत

370
00:26:45,040 --> 00:26:49,480
होता है आगे आपके पास इस विषय में कोई उत्तर हो तो दीजिएगा

371
00:26:49,480 --> 00:26:53,640
खैर तो इन्होंने पहली बात क्या आई परंपरा किसकी

372
00:26:53,640 --> 00:26:57,840
आर्ष तो परंपरा किसकी आर्ष पर तब बात हो सकती है जब आप अपनी पूर्व परंपरा

373
00:26:57,840 --> 00:27:01,840
बताएं दूसरी बात ये आई हिंदू शब्द की प्रामाणिकता तो

374
00:27:01,840 --> 00:27:05,880
अगर आपको लगता है कि ईश्वर विषय पर चर्चा हो चुकी है तो हिंदू शब्द पर भी बहुत सारे

375
00:27:05,880 --> 00:27:09,920
वीडियो से जनता अपना निर्णय ले ही रही है दूसरी बात ये है कि हिंदू शब्द को

376
00:27:09,920 --> 00:27:14,200
लेकर के ऐसा कोई बहुत ज्यादा बड़ा हमारे बीच में कोई द्वंद नहीं है

377
00:27:14,200 --> 00:27:18,360
क्यों क्योंकि हिंदू शब्द हम भी स्वयं को आर्य कहते हैं और आप भी

378
00:27:18,360 --> 00:27:22,920
आपके भी विद्वान स्वयं को हिंदू कहते रहते हैं

379
00:27:22,920 --> 00:27:27,160
यह देखिए इनका पांचवा जो पॉइंट है जिन विषयों पर दोनों पक्ष में अभी तक चर्चा

380
00:27:27,160 --> 00:27:31,240
नहीं हुई है जिनमें दोनों मत अलग-अलग हैं

381
00:27:31,240 --> 00:27:35,600
उन विषयों पर चर्चा करने से सबका लाभ होगा

382
00:27:35,600 --> 00:27:39,960
हम आपको यह फलाने फलाने विषय के लिए आमंत्रित करते

383
00:27:39,960 --> 00:27:44,080
हैं हिंदू शब्द की प्रमाणिकता तथा स्वामी करपात्री आचार्य ण

384
00:27:44,080 --> 00:27:48,440
मदर और मर्ष दयानंद में से किसके वेद भाष्य सनातन धर्म के मान्यता

385
00:27:48,440 --> 00:27:52,600
के अनुकूल है अब सनातन धर्म की मान्यता अलग से है वेद

386
00:27:52,600 --> 00:27:56,640
भाष्य को वेद भाष्य को

387
00:27:56,640 --> 00:28:00,760
चेक किया जाएगा किसी की मान्यता के अनुसार वो कौन व्यक्ति होगा जिसकी

388
00:28:00,760 --> 00:28:05,640
मान्यता मानी जाएगी ये सनातन की मान्यता है यह सोचने वाली बात है

389
00:28:05,640 --> 00:28:09,720
अजीब तर्क है फिर भी अगर आपका आग्रह है कि सर्वशक्तिमान ईश्वर

390
00:28:09,720 --> 00:28:13,720
पर आपको पुनः चर्चा करनी है तो उपरोक्त दोनों विषयों पर चर्चा करने के बाद

391
00:28:13,720 --> 00:28:18,360
आप आग्रह आपके आग्रह का सम्मान रखते हुए सर्वशक्तिमान

392
00:28:18,360 --> 00:28:22,360
ईश्वर के विषय पर भी फिर से चर्चा करने के लिए हमारे विद्वान उपलब्ध रहेंगे

393
00:28:22,360 --> 00:28:26,400
ये है ठीक है

394
00:28:26,400 --> 00:28:32,040
तो ये अपनी बात इस तरह से पलट गए

395
00:28:32,040 --> 00:28:36,360
अच्छा अगर ऐसी ही बात थी तो इनको यह जो विकल्प इन्होंने पहले

396
00:28:36,360 --> 00:28:37,920
दिए थे उसमें लिख देना चाहिए

397
00:28:37,920 --> 00:28:41,960
था कि ईश्वर विषय पर भी चर्चा कर सकते हैं मगर व बाद में पहले इन विषयों पर आप

398
00:28:41,960 --> 00:28:46,080
चर्चा हम देख लेते अच्छा अब दूसरी

399
00:28:46,080 --> 00:28:52,080
एक बात है

400
00:28:54,160 --> 00:28:59,720
कि इनका जो लेटर है उसमें हमें क्या मिला था

401
00:28:59,720 --> 00:29:03,720
हम एक इनकी कमजोर कड़ी

402
00:29:03,720 --> 00:29:07,800
है अच्छा यह जो बातें है ना मूर्ति पूजा स्त्री जनेऊ

403
00:29:07,800 --> 00:29:12,120
ये सब में ये इन्होंने पिछले लेटर में जो ऑप्शन दिए थे वो सब गायब हो गए वैसे तो

404
00:29:12,120 --> 00:29:16,120
अब आ गया कि वेद भाष किसके सनातन के अनुकूल और हिंदू शब्द की प्रमाणिकता दो

405
00:29:16,120 --> 00:29:20,520
बचे वो सारे विकल्प कट गए मगर उन्होंने जो पहले

406
00:29:20,520 --> 00:29:24,560
जो विकल्प दिए थे उनमें वो उन विकल्पों पर भी कई बार बातें हो

407
00:29:24,560 --> 00:29:28,680
चुकी है है ना जैसे स्त्रियों शूद्रों

408
00:29:28,680 --> 00:29:32,840
का अधिकार इस पर हमारी बात हुई थी जो निष्ठा विद्या अलंकार जी है जो आधुनिक

409
00:29:32,840 --> 00:29:37,040
गारगी है उनसे बात हुई थी तो

410
00:29:37,040 --> 00:29:41,080
अगर सनातन मान्यता के अनुकूल होने चाहिए तो यह व सोर्स बताए कि

411
00:29:41,080 --> 00:29:45,280
सनातन मान्यता के सोर्स क्या है जब वेद भाष्य को हम चेक करेंगे सनातन मान्यता

412
00:29:45,280 --> 00:29:49,360
के अनुसार तो आपका सनातन मान्यता का सोर्स भी तो होगा

413
00:29:49,360 --> 00:29:54,560
व तो नहीं है थियोसोफिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ऐसा

414
00:29:54,560 --> 00:29:58,640
कुछ तो यह तो ये रही बात अब ने इनकी

415
00:29:58,640 --> 00:30:02,720
एक बात और है कि आप जब चर्चा का वो जब

416
00:30:02,720 --> 00:30:06,760
समय बता देंगे जब आप हां कर देंगे उसके बाद हम विद्वान सेट करेंगे

417
00:30:06,760 --> 00:30:11,320
आपके लिए तो भाई जैसे हमारा नाम आपको सेट है

418
00:30:11,320 --> 00:30:15,320
जैसे आपको पता है कि हम किससे चर्चा करने जा रहे हैं आज करें या 10 दिन

419
00:30:15,320 --> 00:30:19,400
बाद करें या जो आप अपने व्यक्ति को सामने रखिए और फिर दोनों

420
00:30:19,400 --> 00:30:23,400
दोनों के सामंजस्य से समय निर्धारित किया जाएगा आप हमसे

421
00:30:23,400 --> 00:30:27,400
समय पहले क्यों फिक्स करवाना चाह रहे हैं अपने व्यक्ति को भी तो

422
00:30:27,400 --> 00:30:31,760
फिक्स कर ली कौन है वो सर्वशक्तिमान ईश्वर पर बात कर पाएगा कि नहीं कर पाएगा

423
00:30:31,760 --> 00:30:36,400
ऐसा तो नहीं कि व्यक्ति आपको मिल नहीं रहा है सर्वशक्तिमान ईश्वर के लिए

424
00:30:36,400 --> 00:30:40,400
जिसके कारण आपको सर्वशक्तिमान विषय को पीछे किसका ना पड़ा सबसे आगे से

425
00:30:40,400 --> 00:30:46,080
पीछे लास्ट

426
00:30:46,080 --> 00:30:50,200
हा नहीं मुझे नहीं पता है मैंने अभी एक कमेंट पढ़ा था तो उसमें से

427
00:30:50,200 --> 00:30:52,560
लिया

428
00:30:52,560 --> 00:30:55,000
था

429
00:30:55,000 --> 00:30:59,480
तो ये अब लास्ट में एक बात और

430
00:30:59,480 --> 00:31:03,600
है कि इनकी ओर से हमने एक प्रश्न

431
00:31:03,600 --> 00:31:07,880
किया था कि आपको आर्य समाज का माना जाए इसकी

432
00:31:07,880 --> 00:31:11,960
निश्चित नियमावली क्या है तो इन्होंने कह दिया कि जो

433
00:31:11,960 --> 00:31:16,000
चर्चा हो रही है वो आर्य समाज में हो रही है जो क्या कहते हैं जो

434
00:31:16,000 --> 00:31:20,280
व्यक्ति आ रहा है व आर समाज से आ रहा है ये है वो इन्होंने हमको निश्चित नियमावली नहीं

435
00:31:20,280 --> 00:31:24,360
बताई है नियमावली कहां पर लिखी

436
00:31:24,360 --> 00:31:28,720
हुई है कि कोई व्यक्ति आ समाज की ओर से प्रामाणिक हो पाएगा हमारी नियमावली

437
00:31:28,720 --> 00:31:32,920
बिल्कुल फिक्स है हमको आप शंकराचार्य जी का प्रतिनिधि मत मानिए

438
00:31:32,920 --> 00:31:37,400
हमने कहीं पर लिखा है क्या कि हम शंकराचार्य जी के प्रतिनिधि है

439
00:31:37,400 --> 00:31:41,480
जो शंकराचार्य के पद पर नियुक्त होगा परंपरा से वह

440
00:31:41,480 --> 00:31:45,640
निर्णय देगा हमारा प्रतिनिधि कौन है कौन नहीं है ये हमारी नियमावली फिक्स है

441
00:31:45,640 --> 00:31:49,680
लिखित में भी दिखा दे शंकराचार्य की भाष में लिखा है कई जगह आपकी निश्चित

442
00:31:49,680 --> 00:31:53,880
नियमावली क्या है कि हम किसको आर्य समाज का माने किसको नहीं माने

443
00:31:53,880 --> 00:31:58,000
अगर मैं कल को बोर्ड लगा लू आर्य समाज का और अपने यहां चर्चा करा लू तो

444
00:31:58,000 --> 00:32:01,280
मेरे को आर समाज का व्यक्ति माना जाएगा और मैं कुछ भी कह सकता

445
00:32:01,280 --> 00:32:05,440
हूं आप ऐसा तो नहीं कहेंगे व्यक्ति आर समाज का ही नहीं है तो यह बहुत

446
00:32:05,440 --> 00:32:10,080
ही कमजोर पॉइंट है कि आप अपने आप को आर समाज का ही साबित नहीं कर पा रहे हैं

447
00:32:10,080 --> 00:32:14,280
लौकिक संविधान का सहारा आपको लेना पड़ रहा है

448
00:32:14,280 --> 00:32:18,280
भाई आपका धार्मिक आपका सनातन संविधान कहां है चलो वो नहीं है तो

449
00:32:18,280 --> 00:32:22,280
दयानंद जी के द्वारा लिखी गई कोई नियमावली हो उसको मान लिया

450
00:32:22,280 --> 00:32:26,480
जाए कि इस नियमावली के आधार पर य तय होगा कि यह व्यक्ति अधिकृत

451
00:32:26,480 --> 00:32:29,360
प्रतिनिधि है

452
00:32:29,360 --> 00:32:34,400
अब यह बताते हुए उन्होंने लास्ट में क्या कहा

453
00:32:34,400 --> 00:32:38,560
यह बताते हुए लास्ट में इन्होंने यह कह दिया कि भाई इस चर्चा को दो

454
00:32:38,560 --> 00:32:42,760
विचारधाराओं के बीच की चर्चा नहीं दो विचारधाराओं को मानने वाले के बीच की चर्चा

455
00:32:42,760 --> 00:32:46,920
रखिए इसका मतलब इन्होंने मान लिया कि हम आर्य समाज

456
00:32:46,920 --> 00:32:50,920
नहीं है हमको आप एक स्वतंत्र व्यक्ति देखिए

457
00:32:50,920 --> 00:32:55,080
जो आर्य समाज को मानता है मर आर्य समाज नहीं है यह

458
00:32:55,080 --> 00:32:59,120
चर्चा करने वाला तो क्या आप वीडियो बना कर के पत्र लिख कर के

459
00:32:59,120 --> 00:33:03,480
उन चैनलों को उन सोशल मीडिया हैंडल्स को क्रिटिसाइज करेंगे उनकी आलोचना

460
00:33:03,480 --> 00:33:07,520
करेंगे जो यह कह रहे हैं कि आर समाज ने इसको ललकारा आर्य

461
00:33:07,520 --> 00:33:11,600
समाज की ओर से इसने इसको ललकारा उनको क्रिटिसाइज करेंगे

462
00:33:11,600 --> 00:33:16,000
है आप में इतनी सत्यता है आप इतने सत्य प्रतिज्ञ

463
00:33:16,000 --> 00:33:16,920
आपकी

464
00:33:16,920 --> 00:33:21,120
लाचारी देखिए यहीं से आपकी जो परंपरा है ना वो खंडित होती हुई दिखाई

465
00:33:21,120 --> 00:33:26,080
देती है यहीं से आपके यहां पर परंपरा

466
00:33:26,080 --> 00:33:30,360
जो जो विधि है परंपरा प्राप्त आचार्यों

467
00:33:30,360 --> 00:33:34,840
का जो सिस्टम है उसका अभाव दिखाई देता है क्यों

468
00:33:34,840 --> 00:33:38,920
क्योंकि आज एक आर्ष गुरुकुल को चलाने वाला व्यक्ति भी यह नहीं

469
00:33:38,920 --> 00:33:43,120
कह पा रहा है कि कौन आर समाज से और कौन नहीं है वह नहीं बता

470
00:33:43,120 --> 00:33:47,800
पा रहा है यह है परंपरा का पावर

471
00:33:47,800 --> 00:33:51,960
जिसका अभाव है आपके य गद्दी सुरक्षित नहीं है

472
00:33:51,960 --> 00:33:56,200
गद्दी की व्यवस्था नहीं है गुरु गद्दी की कौन बताए वोट

473
00:33:56,200 --> 00:34:00,440
डालेंगे डाले जाएंगे यह है सनातन

474
00:34:00,440 --> 00:34:04,520
व्यवस्था नहीं है दिखाइए कौन से ग्रंथ में माना है इस

475
00:34:04,520 --> 00:34:10,040
व्यवस्था

476
00:34:10,040 --> 00:34:14,280
को हा तो यह सारी सच्चाई

477
00:34:14,280 --> 00:34:18,800
थी हमने थोड़ा सा एक समरा कर ले अब

478
00:34:18,800 --> 00:34:23,160
हमसे कह रहे हैं लेटर में हमसे भी देखिए हद होती है

479
00:34:23,160 --> 00:34:27,240
य मैंने कहा था हास्यास्पद है अब हमसे कह रहे कि आप अपनी प्रमाणिकता बताइए

480
00:34:27,240 --> 00:34:31,480
भाई आप हमसे चर्चा करने आए आपने क्यों चुना हमको

481
00:34:31,480 --> 00:34:35,800
हमने तो नहीं कहा था कि हम शंकराचार्य की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि है हम उनके

482
00:34:35,800 --> 00:34:39,800
शिष्य हैं उनको फॉलो करते हैं उनके अनुगामी है उनके

483
00:34:39,800 --> 00:34:44,000
अधिकृत प्रतिनिधि नहीं है हमने कभी नहीं कहा हमने

484
00:34:44,000 --> 00:34:48,040
तो यह तक कहा है कि अगर हमारा कोई वचन कोई वक्तव्य अगर जो मान्य

485
00:34:48,040 --> 00:34:52,360
जगतगुरु है इस समय सार्वभौम आचार्य उनके

486
00:34:52,360 --> 00:34:56,360
विरुद्ध अगर हो जाता है उनकी वाणी का कोई विरोध हो जाता है तो उसको तुरंत वहीं पर निरस्त

487
00:34:56,360 --> 00:35:01,800
माना जाए क्योंकि ऐसा हो सकता है

488
00:35:01,800 --> 00:35:06,040
हमने तो नहीं कहा आपने हमारा चयन किया है और हमने आपसे यह बात इसलिए

489
00:35:06,040 --> 00:35:10,240
पूछी है कि आपको आर्य समाज का क्यों माना जाए क्योंकि

490
00:35:10,240 --> 00:35:14,240
आपको बाकी आर्य समाज यों के साथ होने वाली जो हमारी चर्चाएं है

491
00:35:14,240 --> 00:35:18,400
उनसे आपको संतुष्टि नहीं मिली इसीलिए तो आप आए हैं चर्चा

492
00:35:18,400 --> 00:35:22,440
करने और अगर यूं ही आए हैं तो फिर हम आपके साथ चर्चा क्यों करें हमारा

493
00:35:22,440 --> 00:35:25,080
यही काम है क्या जो डेली दिन भर आता रहे उसके साथ हम

494
00:35:25,080 --> 00:35:29,120
वो आबू से बुला ले वो कन्याकुमारी से बुला ले पडि री से बुला ले हम बस उनके

495
00:35:29,120 --> 00:35:33,400
साथ जो है चर्चा करने जाते तो एक कोई वो होना चाहिए ना सिस्टम

496
00:35:33,400 --> 00:35:37,760
कि भाई यह व्यक्ति प्रमाणिक है इस आधार पर ये प्रमाणिक है आप लौकिक

497
00:35:37,760 --> 00:35:41,760
सिद्धांत के आधार पर बता रहे हैं किय जो है आर्य समाज के अनुसार जो है ये

498
00:35:41,760 --> 00:35:45,760
इसमें बैठ के चर्चा होगी इसलिए आपकी चर्चा आर समाज से हो रही है

499
00:35:45,760 --> 00:35:49,840
आपके कहां है आपके दयानंद जी के कोई सिद्धांत तो वो बता देते तो

500
00:35:49,840 --> 00:35:54,200
कुल मिलाकर के समरा क्या है परंपरा किसकी

501
00:35:54,200 --> 00:35:58,240
आरस इस बात पर निर्णय तब हो जब आप अपनी परंपरा बताए

502
00:35:58,240 --> 00:36:02,280
हमारी परंपरा सर्व विधित है पढ़

503
00:36:02,280 --> 00:36:06,800
के बता दूं इसमें दो स नाम है मेरे पास अभी पीढ़ी के हमारी और

504
00:36:06,800 --> 00:36:11,040
सुनो इनके जो लोग हैं जो व अंडर कवर्ड

505
00:36:11,040 --> 00:36:15,240
वाले वह वेबसाइट पर जाकर के अपने मतलब की आधी

506
00:36:15,240 --> 00:36:19,440
अधूरी बात तो निकाल लाते हैं टीपू सुल्तान का इतिहास तो निकाल लाते हैं वो बात और है

507
00:36:19,440 --> 00:36:24,160
उनके पास अपना इतिहास नहीं है सनातन का शुद्ध इतिहास हम सबको बताएंगे

508
00:36:24,160 --> 00:36:28,480
हमारा इतिहास क्या है नहीं पता वो

509
00:36:28,480 --> 00:36:32,600
लोग जाकर के जिस वेबसाइट से जाकर के वो टीपू सुल्तान इत्यादि की आधी दूरी

510
00:36:32,600 --> 00:36:36,640
कट करके जानकारी लाते हैं वहीं पर परंपरा है तो

511
00:36:36,640 --> 00:36:40,120
हमने हमारी परंपरा प्रामाणिक है कि नहीं आर्ष है कि नहीं

512
00:36:40,120 --> 00:36:44,400
वो बात बाद की है उस पर तो चर्चा होगी हमने अपनी परंपरा बताई

513
00:36:44,400 --> 00:36:48,560
है आपने अपनी परंपरा नहीं बताई है अगर बताई है तो हमें बताइ है कहां

514
00:36:48,560 --> 00:36:52,560
है वो कहां मेंशन है आपके गुरुओं के नाम गुरु वंश

515
00:36:52,560 --> 00:36:56,560
के नाम वो बताए और इस बात का खंडन

516
00:36:56,560 --> 00:36:59,400
और हो जाता है

517
00:36:59,400 --> 00:37:03,480
जब इस बात का खंडन और हो जाता है जब आपका

518
00:37:03,480 --> 00:37:08,320
ही व्यक्ति आर समाज के मंदिर में बैठ कर के यह बोल देता है कि

519
00:37:08,320 --> 00:37:12,360
आर्य समाज में गुरुम परंपरा नहीं चलती देख लीजिए जाके हमारे ऑफिशियल

520
00:37:12,360 --> 00:37:16,400
चैनल पर लिखा हुआ है तो क्या करें किसकी बात माने अब

521
00:37:16,400 --> 00:37:20,680
आप कह दोगे वो भी प्रमाणिक नहीं है इसीलिए मैंने पूछा आपसे कि आर्य

522
00:37:20,680 --> 00:37:24,760
समाज में किसी को प्रामाणिक किस आधार पर माना जाए अगर आर समाज

523
00:37:24,760 --> 00:37:28,880
मंदिर में बैठ कर के या मंदिर का संचालक कोई बात कह रहा है तो वो भी तो मंदिर में बैठ

524
00:37:28,880 --> 00:37:33,360
कर के बोला था तो उसकी परंपरा उसकी बात क्यों ना मानी जाए

525
00:37:33,360 --> 00:37:37,640
कि आर्य समाज में गुरुम परंपरा नहीं चलती यह परंपरा का

526
00:37:37,640 --> 00:37:41,960
जो चोला अभी ओड़ा गया ना यह हमारे प्रश्न पूछने के बाद ओड़ा

527
00:37:41,960 --> 00:37:46,360
गया है वरना सदैव परंपरा का नाम आते ही बुरा भला बोलना

528
00:37:46,360 --> 00:37:50,480
आज आप लोग कर रहे हैं य सब कि हमारी भी परंपरा हमारी ऋषियों की परंपरा

529
00:37:50,480 --> 00:37:55,480
है ये अब चालू हुआ कहां आपने परंपरा को सम्मान दे

530
00:37:55,480 --> 00:37:59,600
दिया सद परंपरा के प्रति अनादर क्योंकि उसी

531
00:37:59,600 --> 00:38:04,880
से ही तो हमारे हमारा अस्तित्व है परंपरा का अनादर

532
00:38:04,880 --> 00:38:09,040
करके तो अगर सूत्रा क्मक शैली में हम बोले

533
00:38:09,040 --> 00:38:13,240
आज तो क्या क्या है परंपरा किसकी आर

534
00:38:13,240 --> 00:38:17,320
से है इस पर बात तब होगी जब सामने वाला अपनी परंपरा

535
00:38:17,320 --> 00:38:21,680
दिखाए हिंदू शब्द को लेकर के कोई ऐसी बात नहीं है जिसके प्रति

536
00:38:21,680 --> 00:38:25,880
जो है आर या पार का चर्चा की जाए जिके लिए आप हमें चुनौती शास्त्र

537
00:38:25,880 --> 00:38:30,520
की चुनौती हालाकि उस पर भी बात हो जाएगी मगर मुख्य बातें क्या

538
00:38:30,520 --> 00:38:34,560
है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत

539
00:38:34,560 --> 00:38:39,080
धर्म जो परंपरा वाला पार्ट है वो तीनों में आ जाता है

540
00:38:39,080 --> 00:38:43,160
क्योंकि जब आप अपनी बात को बल देने का प्रयास करते हैं प्रमाण के

541
00:38:43,160 --> 00:38:47,520
आधार पर तो वहां पर फिर परंपरा का परंपरा की बात खुल जाती

542
00:38:47,520 --> 00:38:51,520
है और तर्क तो है नहीं

543
00:38:51,520 --> 00:38:55,720
तर्क तो न्य हुआ जा रहा है ना इसीलिए प्रमाण

544
00:38:55,720 --> 00:38:59,920
को अपने अनुसार तोड़ मरोड़ करके पेश करना है इसीलिए पूछना पड़ता

545
00:38:59,920 --> 00:39:03,960
है परंपरा जिससे कि परम प्रमाण का दुरुपयोग ना हो जाए

546
00:39:03,960 --> 00:39:08,920
तो दूसरा क्या रहा कि भाई दूसरी बात यह रही

547
00:39:08,920 --> 00:39:10,480
कि यह चाहते

548
00:39:10,480 --> 00:39:14,800
हैं कि इनके स्थल पर जाकर के यह चर्चा हो

549
00:39:14,800 --> 00:39:19,040
और उस चर्चा को यह लाइव रिकॉर्ड अपने में डाले अपने चैनल पर दिखाए

550
00:39:19,040 --> 00:39:23,120
मगर हमें कोई अनुमति नहीं है हमें इतना अधिकार नहीं है कि उसको हम रिकॉर्ड

551
00:39:23,120 --> 00:39:27,360
तक कर ले है ना दो

552
00:39:27,360 --> 00:39:31,840
रा क्या है कि इनके द्वारा जब पहला विकल्प दे दिया गया मूर्ति पूजा अवतार

553
00:39:31,840 --> 00:39:36,000
और क्या कहते ईश्वर का स्वरूप और उसके साथ में अन्य ऑप्शन भी हमको

554
00:39:36,000 --> 00:39:40,120
दिए गए कि आप इनमें से अपना चुन लीजिए तो फिर बाद में क्यों

555
00:39:40,120 --> 00:39:44,120
दोगलापन दिखाया गया कि नहीं नहीं यह ऑप्शन पीछे करो यह वाले प्रमुख रूप से

556
00:39:44,120 --> 00:39:48,120
लो क्यों क्यों बात से बदल रहे हो क्या

557
00:39:48,120 --> 00:39:52,880
वजह है इसकी अपने ईश्वर पर गर्व नहीं है क्या

558
00:39:52,880 --> 00:39:56,920
विश्वास नहीं है क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित

559
00:39:56,920 --> 00:40:01,280
होने वा ईश्वर पर विश्वास नहीं है क्या क्या वास्तव में वह सर्वशक्तिमान

560
00:40:01,280 --> 00:40:05,360
नहीं है क्या क्या वास्तव में भय लग रहा है क्या ईश्वर

561
00:40:05,360 --> 00:40:09,720
विषय पर चर्चा करने के लिए और

562
00:40:09,720 --> 00:40:14,720
अपने आप को आप आर्य समाज का प्रामाणिक व्यक्ति तक सिद्ध नहीं कर पा रहे हो क्या करोगे

563
00:40:14,720 --> 00:40:18,840
आप क्या करोगे वरना

564
00:40:18,840 --> 00:40:23,400
वह नियमावली बताइए किस आधार पर किसको प्रमाणिक माना जाए और किसको ना माना जाए

565
00:40:23,400 --> 00:40:25,520
रजिस्ट्रेशन अगर आ समाज के नाम से कराना

566
00:40:25,520 --> 00:40:29,920
है तो वो आप भी जानते िक संविधान है आप सनातन संविधान

567
00:40:29,920 --> 00:40:34,240
या फिर दयानंद ऋषि जी जो आपके जो दयानंद

568
00:40:34,240 --> 00:40:38,400
जी है उनके द्वारा आप बताए कि किस आधार पर किसी को प्रमाणिक

569
00:40:38,400 --> 00:40:42,760
माना जाएगा वह नियमावली

570
00:40:42,760 --> 00:40:46,800
बताए अच्छा दूसरी बात एक जानने को

571
00:40:46,800 --> 00:40:50,880
मिली कि इनके द्वारा जो ऑप्शन दिया गया एक

572
00:40:50,880 --> 00:40:55,280
ऑप्शन इनके द्वारा दिया गया हिंदू शब्द की प्रमाणिकता हिंदू शब्द

573
00:40:55,280 --> 00:40:59,480
की हिंदू शब्द की णता पर हम

574
00:40:59,480 --> 00:41:04,320
बात हो गई कि वह इतना महत्त्वपूर्ण विषय नहीं है

575
00:41:04,320 --> 00:41:08,600
जब हमारा सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

576
00:41:08,600 --> 00:41:13,000
और शाश्वत धर्म यदि आप समाज को दे रहे हैं

577
00:41:13,000 --> 00:41:17,000
तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी कि आप हिंदू शब्द का उपयोग करें

578
00:41:17,000 --> 00:41:22,000
या ना करें वह दूसरे विषय हो जाते

579
00:41:22,000 --> 00:41:26,080
हैं ठीक है वो दूसरे

580
00:41:26,080 --> 00:41:29,920
विषय हो जाते हैं

581
00:41:29,920 --> 00:41:33,960
और एक बात और इन्होंने कही कि वो नाम बताने में इसलिए देरी

582
00:41:33,960 --> 00:41:38,200
होती है कि वो तो भाई आप अपना विद्वान जो है सेट करिए कि हमसे जो चर्चा करेगा

583
00:41:38,200 --> 00:41:43,000
कौन करेगा ठीक

584
00:41:43,000 --> 00:41:47,200
है तो इन सब बातों को जनता देखे कि चर्चा

585
00:41:47,200 --> 00:41:51,280
से कौन पीछे हट रहा है नहीं हट रहा है भाग रहा है नहीं भाग रहा है यह

586
00:41:51,280 --> 00:41:55,600
जनता देखे स्वयं के द्वारा दिए गए विकल्पों को क्यों

587
00:41:55,600 --> 00:41:59,720
पीछे करा जा रहा है क्यों पहले स्वतंत्र किया था इनमें से कोई

588
00:41:59,720 --> 00:42:03,800
भी उसको चुन लो और उसके बाद क्यों उसको हटाया जा रहा है क्यों काट छाट की जा रही

589
00:42:03,800 --> 00:42:07,880
है सब सोचने वाली बात है और हम जब भी आर समाज के मंदिरों में गए

590
00:42:07,880 --> 00:42:11,960
हैं तो हमने सर्वशक्तिमान ईश्वर और परंपरा पर ही बात

591
00:42:11,960 --> 00:42:16,080
हुई है क्योंकि वो इतनी लंबी चर्चा हो जाती है कि उसके बाद जो परम स्वतंत्र मोक्ष है

592
00:42:16,080 --> 00:42:20,440
उस पर बात आ ही नहीं पाती हालांकि शूद्र इत्यादि पर भी हमने बात की है ब्राह्मण

593
00:42:20,440 --> 00:42:24,640
क्षत्रिय वैश शूद्र वर्णाश्रम वर्णाश्रम पर भी हम हमारी बात हुई

594
00:42:24,640 --> 00:42:29,720
है तो कोई इस विषय पर आना चाहता है तो आप लिंक दे

595
00:42:29,720 --> 00:42:32,840
दीजिए बात

596
00:42:32,840 --> 00:42:38,840
करें कुछ था कोई था जो अभी बोल रहा था कि मैं लिक दे

597
00:42:39,440 --> 00:42:45,440
द ना खाता ना बही जो अलंकारी कहे बस वही

598
00:42:46,280 --> 00:42:50,400
सही अजीब कानून है

599
00:42:50,400 --> 00:42:55,080
भाई तो हमारा निर्णय अब यह है कि

600
00:42:55,080 --> 00:42:59,320
हम ईश्वर के स्वरूप पर आपसे चर्चा करेंगे अपना ईश्वर सिद्ध

601
00:42:59,320 --> 00:43:04,000
कर दीजिए आपकी सारी बातें मान्य हो जाएंगी और ऑटोमेटिक

602
00:43:04,000 --> 00:43:08,120
ईश्वर का स्वरूप आप सिद्ध करिए सर्वशक्तिमान और परंपरा पर

603
00:43:08,120 --> 00:43:12,320
बात करनी है यदि आपको तो आपको यह बताना पड़ेगा कि आपकी

604
00:43:12,320 --> 00:43:16,320
परंपरा है क्या ठीक है और दूसरी बात यह

605
00:43:16,320 --> 00:43:20,520
है कि अब हम पत्राचार के माध्यम से कोई बात करने का हमारे पास समय नहीं है हमने अपनी बातें

606
00:43:20,520 --> 00:43:24,600
कह दी है जिसको वहां तक पहुंचाना हो पहुंचाए नहीं पहुंचाना हो ना

607
00:43:24,600 --> 00:43:28,680
पहुंचाए हमने अपना एक बार लिखित में उतर दिया था बड़ा साफ सुथरा था बिल्कुल

608
00:43:28,680 --> 00:43:32,720
उसमें कोई झूठ लाग लपेट ये सब हम

609
00:43:32,720 --> 00:43:37,640
नहीं करते हैं जो कहते हैं उसी पर रहते हैं ठीक है तो

610
00:43:37,640 --> 00:43:41,680
हमने उत्तर आपको दे दिया हमारे पास इतना समय नहीं है कि हम लेटर लिख लिख कर आपको

611
00:43:41,680 --> 00:43:45,840
उत्तर देते रहे ठीक है हमने अभी आपको बता दिया आपका

612
00:43:45,840 --> 00:43:50,160
स्थान हमें स्वीकार रहे आपका समय हमें स्वीकार रहे आपके

613
00:43:50,160 --> 00:43:54,240
द्वारा दिया गया निर्णय स्वीकार नहीं है कि वहां पर रिकॉर्डिंग सिर्फ आप करोगे और अपने

614
00:43:54,240 --> 00:43:54,740
लाइव

615
00:43:54,520 --> 00:43:58,640
पर डालोगे इस पर हम सहमत नहीं है और चर्चा करिए

616
00:43:58,640 --> 00:44:02,800
सर्वशक्तिमान ईश्वर पर अगर सर्वशक्तिमान ईश्वर को आप प्रमाणों के आधार पर

617
00:44:02,800 --> 00:44:06,840
ही सिद्ध करने का प्रयास करेंगे तो आपसे पूछा जाएगा कि वैदिक मंत्र आपके

618
00:44:06,840 --> 00:44:10,840
पास कहां से आए परंपरा आ जाएगी उसमें तो परंपरा और सर्वशक्तिमान ईश्वर का

619
00:44:10,840 --> 00:44:14,880
विषय व साथ में संलग्न हो जाता है और

620
00:44:14,880 --> 00:44:20,120
दूसरी बात यह है कि अगर

621
00:44:20,120 --> 00:44:24,120
हमारे बारे में आपको डाउट है भी उससे सिद्ध नहीं होता है कि

622
00:44:24,120 --> 00:44:28,240
आपकी परंपरा प्रामाणिक है आपके पास वेद भाष्य का आ जाना प्रमाणिक हो जा आपको बताना

623
00:44:28,240 --> 00:44:32,360
होगा आपको अगर विश्वास नहीं है हमारी परंपरा पर तो वो बात

624
00:44:32,360 --> 00:44:36,760
बात की है आपकी परंपरा क्या है वोह तो बताइए

625
00:44:36,760 --> 00:44:40,880
और इसके साथ ही साथ यह हमने निर्णय बता

626
00:44:40,880 --> 00:44:46,880
दिया और कोई आना

627
00:44:48,960 --> 00:44:53,520
चाहे हां रिकॉर्डिंग भी नहीं करने देंगे भाई

628
00:44:53,520 --> 00:44:58,360
रिकॉर्डिंग भी नहीं करने देंगे कोई है क्या आया है क्या कोई ठीक

629
00:44:58,360 --> 00:45:03,160
है कोई आना नहीं है आज के लिए इतना काफी है

630
00:45:03,160 --> 00:45:07,160
इसीलिए हम कहते हैं अपनी चर्चाओं में फिर लोग कहते हैं कि

631
00:45:07,160 --> 00:45:11,200
ये मत बोला करिए अच्छा नहीं लगता है खुद ही तो आते हो हमने

632
00:45:11,200 --> 00:45:15,480
बुलाया था कि आपको वहां से के आओ अरे भाई हम हमें जब जिसके पास जाना होगा

633
00:45:15,480 --> 00:45:19,640
चले जाएंगे जाके बैठ के कर लेंगे आपने वहां से पत्र लिख के आओ आपने

634
00:45:19,640 --> 00:45:23,920
क्यों नहीं चेक किया कि हम प्रमाणिक है कि नहीं हमने कहा कभी कि हम जो शंकराचार्य

635
00:45:23,920 --> 00:45:27,920
की ओर से प्रामाणिक प्रतिनिधि आप कह रहे हो आप ये लोग कह रहे हैं वही

636
00:45:27,920 --> 00:45:32,000
लोग वही लोग जिनको आप कह रहे हो कि हमारे आर विद्वानों ने आपको जो

637
00:45:32,000 --> 00:45:36,120
है परंपरा का उचित उत्तर दिया वही लोग कह रहे हैं आर्य समाज की ओर से इसने

638
00:45:36,120 --> 00:45:40,160
लकारा इसे ये नहीं जाएगा आर्य समाज की ओर से इसने ललकारा इसे

639
00:45:40,160 --> 00:45:44,560
ये नहीं जाएगा हर वो व्यक्ति जो आर्य समाज से आता है बात करने थोड़े दिनों बाद बेगाना

640
00:45:44,560 --> 00:45:48,760
हो जाता है थोड़े दिनों बाद वो आर्य समाज का रहता ही नहीं है आप जिसको विद्वान

641
00:45:48,760 --> 00:45:52,760
कह रहे हो उसी को जिनका आपने अपने उसमें नाम लिया है कि वो आर्य

642
00:45:52,760 --> 00:45:56,960
समाज प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष हैं या कोई पदाधिकारी है उन्होंने अपने

643
00:45:56,960 --> 00:46:01,280
लेटर में लिखा कि हम इन्ह नहीं जानते उन्होंने

644
00:46:01,280 --> 00:46:04,040
ही उसको भगोड़ा अंडर कवर्ड एजेंट

645
00:46:04,040 --> 00:46:08,120
स्वीकार किया कि हम इन्ह नहीं जानते जिनके बारे में आप यह कह रहे हैं कि हमारे

646
00:46:08,120 --> 00:46:12,320
आर्य विद्वानों ने बताया है और आपका जो व्यक्ति

647
00:46:12,320 --> 00:46:16,400
अभी मोहित गौर की बात कर ले मोहित गौर की उससे चर्चा होने जा

648
00:46:16,400 --> 00:46:20,520
रही थी मोहित गौर खुद कह रहा है मैं आर समाज का नहीं हूं तो क्यों कह

649
00:46:20,520 --> 00:46:24,920
रहे हो कि आर समाज की ओर से इसने ललकारा उसने ललकारा क्यों डंग पीट रहे हो

650
00:46:24,920 --> 00:46:30,920
जब कोई आर समाज का है ही नहीं तो समाज का कौन है

651
00:46:31,720 --> 00:46:35,760
बताओगे हम आर समाज के हैं हम आर समाज को फॉलो करते हैं हम ये करते

652
00:46:35,760 --> 00:46:39,920
हैं हम ये करते हैं मगर जब बात आएगी तो हम आर समाज के नहीं है मैं आर समाज का नहीं हूं वो अंकुर

653
00:46:39,920 --> 00:46:43,960
आर भी यही कह देता है मैं आर समाज का नहीं हूं मोहित गौर भी यही कह देता मैं आर समाज

654
00:46:43,960 --> 00:46:48,200
का नहीं हूं आपने भी कह दिया य आर समाज और उसके बीच में नहीं है ये दो उनको

655
00:46:48,200 --> 00:46:52,520
मानने वालों के बीच में है आप आर

656
00:46:52,520 --> 00:46:57,000
समाज के आर् गुरुकुल के संचालक हैं आप

657
00:46:57,000 --> 00:47:01,040
बात कैसे कह रहे हैं आपको सिद्ध करना चाहिए कि आप आर समाज के

658
00:47:01,040 --> 00:47:05,320
किस प्रकार है या जो व्यक्ति सामने बैठेगा व आर समाज का किस प्रकार है

659
00:47:05,320 --> 00:47:09,360
या आपके पास आर समाज का कोई प्रामाणिक व्यक्ति ऐसा नहीं जो सामने बैठ सके इसलिए

660
00:47:09,360 --> 00:47:15,360
आपको अनाधिकृत व्यक्ति को सामने बिठाना पड़ रहा है बहुत सी बातें

661
00:47:21,600 --> 00:47:26,400
हैं हां जी निर्भय जी बताइए

662
00:47:26,400 --> 00:47:31,360
न जी आवाज आ रही है क्लियर आ रही है

663
00:47:31,360 --> 00:47:35,400
कैसे हैं आप बस कृपा है राम

664
00:47:35,400 --> 00:47:39,560
की अच्छी बात है अच्छा बराता जी मेरे को थोड़ी सी जो आप

665
00:47:39,560 --> 00:47:43,800
अभी सर्वशक्तिमान विषय में चर्चा कर रहे थे मतलब बात आपने कई बार कही

666
00:47:43,800 --> 00:47:48,080
इस पर मेरे कुछ प्रश्न थे अगर आप उत्तर दे सकते तो

667
00:47:48,080 --> 00:47:53,040
हम लोग बात करेंगे अभी जो चर्चा का विषय है वो इनके लेटर्स

668
00:47:53,040 --> 00:47:57,080
उस पर आप बात लेटर्स का तो चलिए

669
00:47:57,080 --> 00:48:01,640
जो आपने उत्तर दिया तो उनके जो उत्तर देने का उनके

670
00:48:01,640 --> 00:48:05,680
अधिकारी है तो वही लोग अभी जो लाइव चल रही है ना अभी जो

671
00:48:05,680 --> 00:48:10,240
लाइव का विषय है व लेटर ओके दोबारा आ

672
00:48:10,240 --> 00:48:14,560
क करते चचा कल आ जा ऐसा देखि

673
00:48:14,560 --> 00:48:18,720
पॉसिबल पॉसिबल तो यही होगा कि आज ही हो पाए क्योंकि आज संडे भी है मैं घर परही हूं

674
00:48:18,720 --> 00:48:22,880
तो कोशिश काम करिए इसको स समापन की हो

675
00:48:22,880 --> 00:48:26,920
और अगर

676
00:48:26,920 --> 00:48:30,920
एक घंटे बाद दोबारा चालू कर लीजिए नहीं दूसरा है ना

677
00:48:30,920 --> 00:48:35,120
हिंदू राष्ट्र गो होती है उसम जाना होता है अच्छा खैर

678
00:48:35,120 --> 00:48:39,680
जो भी है एक काम करेंगे ठीक है और नाम

679
00:48:39,680 --> 00:48:44,280
आप अच्छी बात हैम को भी

680
00:48:44,280 --> 00:48:48,280
है अच्छी बात है कि एक काम करते हैं चर्चा करते

681
00:48:48,280 --> 00:48:52,320
हैं सर्वशक्तिमान वाले विषय पर आपने कहा य बहुत भारी भयंकर विषय है

682
00:48:52,320 --> 00:48:56,760
और यही ऐसा विषय जो सबको एक कर सकता है ठीक है तो मेरे हिसाब से भी चर्चा

683
00:48:56,760 --> 00:49:00,800
हो चाहि तो इस विषय पर होनी चाहिए और मेरे हिसाब से जितना जितना मेरी जानकारी

684
00:49:00,800 --> 00:49:04,800
बहुत ही छोटा सा विषय है कोई इसमें भागने की जरूरत नहीं है मुश्किल से पाच

685
00:49:04,800 --> 00:49:08,840
मिनट लगेगा सलूशन करने बहुत इजी विषय है ठीक है मैं चाहूंगा आपके साथ में चर्चा

686
00:49:08,840 --> 00:49:12,840
हो और प्रश्न वगैरह भी मेरे म मन में

687
00:49:12,840 --> 00:49:17,000
सारे प्रश्न है मैं थोड़े से पूछूंगा जानकारी लूंगा तो अगर आज पॉसिबल

688
00:49:17,000 --> 00:49:21,280
नहीं है अगले संडे को चर्चा रखते हैं ठीक है हम कर लेते हैं बात

689
00:49:21,280 --> 00:49:25,360
कोई दिक्कत जी जी बहुत बहुत धन्यवाद ठीक है रेशनल

690
00:49:25,360 --> 00:49:29,440
स्टार नाम से चैनल है उसकी ओर से मैं एक बार शायद बात हो

691
00:49:29,440 --> 00:49:34,120
चुकी है पहले हुई है पहले तो आप

692
00:49:34,120 --> 00:49:38,680
प च पीछे क्या हट गया था आपने आपने कहा था कि शक्ल दिखाओ

693
00:49:38,680 --> 00:49:42,280
तो मैंने उस टाइम फिर शक्ल दिखाने से मना कर दिया था फिर अब अब

694
00:49:42,280 --> 00:49:46,400
क्या है उस टाइम आपका चैनल छोटा सा था आपका कोई चैनल आपको कोई जानता भी नहीं था आप

695
00:49:46,400 --> 00:49:50,640
धीरे धीरे धीरे धीरे फिर आप आरोप प्रत्यारोप करते करते ग्रो कर गए

696
00:49:50,640 --> 00:49:54,640
आपने इसने हां बिल्कुल सही बिल्कुल सही महत्व इसलिए नहीं दिया अब क्या है

697
00:49:54,640 --> 00:49:58,640
कि आप जो धीरे धीरे हैं अब चैनल आरोप प्रत्यारोप करते करते ग्रो कर गए ठीक

698
00:49:58,640 --> 00:50:00,400
है तो इसलिए मेरे को लग रहा है कि हा इस विषय

699
00:50:00,400 --> 00:50:04,520
पर बात करनी चाहिए नहीं आपका कहना प्रत्यारोप करते

700
00:50:04,520 --> 00:50:08,720
हुए ग्रो कर गए हम कहेंगे सत्य बोलते बोलते ग्रो कर गए वो आपकी इच्छा

701
00:50:08,720 --> 00:50:12,760
है मुझे कोई दिक्कत नहीं सही लगे वही बोलू आपको सही लगा बो

702
00:50:12,760 --> 00:50:16,960
आप अगले संडे को आइए अपना फोटो जो है कर दीजिए

703
00:50:16,960 --> 00:50:18,920
बिल्कुल बिल्कुल कोई दिक्कत नहीं

704
00:50:18,920 --> 00:50:23,040
है अगले चचा आ समाज आर्य समाज

705
00:50:23,040 --> 00:50:27,040
आर्य समाजी पुकारो आर्य समाज पुकारो आर्य समाजी समाज

706
00:50:27,040 --> 00:50:31,600
की ओर से प्रामाणिक व्यक्ति आर्य समाज पुकारो

707
00:50:31,600 --> 00:50:35,920
मतलब आप भी आर्य समाज की ओर से प्रामाणिक व्यक्ति नहीं है

708
00:50:35,920 --> 00:50:40,080
मैंने बोला क्या अपनी तरफ से फिर जबरदस्ती वर्ड क्यों घुसे रहे हो मतलब तुम मसाला चाहते

709
00:50:40,080 --> 00:50:44,640
हो इसलिए वर्ड घुसे रहे हो जानबूझ कर पूछ रहा हूं कि आप प्रामाणिक है कि

710
00:50:44,640 --> 00:50:48,640
नहीं मैंने क्या बोला मैंने बोला कि मैं रेशनल आरे नाम से चैनल

711
00:50:48,640 --> 00:50:52,640
है निर्भर हूं उस तरफ से मैं आया हूं ठीक है और आपने पूछा कि आर्य समाज

712
00:50:52,640 --> 00:50:56,680
क्या मैंने आपको मैं आपको सुनिए सुनिए बोलने दीजिए बोलने दीजिए बोलने दीजिए

713
00:50:56,680 --> 00:51:00,720
आपने पूछा मैंने आपको उत्तर दे दिया आर्य समाजी हूं इससे फदर डिस्कस करने का को मतलब तो है

714
00:51:00,720 --> 00:51:04,880
नहीं मेरे खल इ तो आप समझ होगी पता होगा कैसे कर सकते फदर डिस्कस करने

715
00:51:04,880 --> 00:51:08,880
का मतलब है कि नहीं कर लो ना फिर बताओ क्या है मैंने

716
00:51:08,880 --> 00:51:13,200
आपको एक बात पूछी है हम आपको आर्य समाज का प्रमाणिक व्यक्ति समझे

717
00:51:13,200 --> 00:51:17,280
या नहीं समझे मैं आर्य समाज का परमाणिक व्यक्ति किसी संस्था से जुड़ा

718
00:51:17,280 --> 00:51:21,320
हुआ नहीं हूं रेशन सार नाम से चैनल है हां मैं आर्य समाज की

719
00:51:21,320 --> 00:51:25,440
विचारधारा जरूर मानता हूं मन विचाराधारा को मानते

720
00:51:25,440 --> 00:51:29,480
हैं मगर उनकी तरफ से प्रमाणिक व्यक्ति नहीं है नहीं नहीं मैं किसी संस्था

721
00:51:29,480 --> 00:51:33,680
से नहीं जुड़ा हुआ हूं नहीं संस्था नहीं आर समाज के प्रामाणिक व्यक्ति

722
00:51:33,680 --> 00:51:34,180
है कि

723
00:51:33,960 --> 00:51:38,000
नहीं संस्था नहीं संस्था देखो परमाणिक व्यक्ति वही

724
00:51:38,000 --> 00:51:42,000
माना जाता है जो उसकी संस्था में जुड़ा हुआ हो जिसको उसकी संस्था जो है

725
00:51:42,000 --> 00:51:46,760
वो डिबेट श करने कर आर्य समाज का स्वरूप क्या है

726
00:51:46,760 --> 00:51:50,800
संस्था है ना वो तो समाज सुधार हिंदू सुधार संस्था है आपको नहीं

727
00:51:50,800 --> 00:51:55,240
पता क्या आर समाजिक संस्था है समाज सुधारक

728
00:51:55,240 --> 00:51:59,640
संस्था और आप किस आर्य समाज को मानते हैं

729
00:51:59,640 --> 00:52:04,360
देखो आर्य समाज से जुड़ी बहुत सारी विचारधारा भी है मैं उस विचारधारा को मानता हूं मन

730
00:52:04,360 --> 00:52:09,680
सस्त की विचारधारा को मानता हूं तो यह जो संस्थाएं है उनसे अलग है

731
00:52:09,680 --> 00:52:13,360
क्या मतलब अलग

732
00:52:13,360 --> 00:52:17,520
मतलब वि विचार सुनो अब जैसे अब जैसे मैं बताता हूं

733
00:52:17,520 --> 00:52:21,920
मैं समझाता हूं मैं समझाता हूं आपको थोड़ा टाइम लगे जैसे मान लो आपकी

734
00:52:21,920 --> 00:52:26,160
आपकी संस्था है नहीं है पता मेरे को आवाहन नाम से ठीक है अब कोई व्यक्ति

735
00:52:26,160 --> 00:52:30,440
है अब जो आवाहन वाले जो लोग हैं वो जो भी कोई विचार प्रतिपादित कर रहे हैं कोई थर्ड

736
00:52:30,440 --> 00:52:34,520
पर्सन है वो उस विचार को मान रहा है ठीक है जरूरी नहीं है कि वो

737
00:52:34,520 --> 00:52:38,520
जो व्यक्ति है उसी संस्था से जुड़ा हुआ हो ठीक है भाई मेरे को

738
00:52:38,520 --> 00:52:42,600
विचार ठीक लगे मैंने वो मान लिए तो आप केवल विचार

739
00:52:42,600 --> 00:52:46,840
को मानने वाले हैं वही तो मैं कह रहा हूं मेरे भाई नहीं नहीं

740
00:52:46,840 --> 00:52:49,120
वही तो मैं कह रहा हूं आप सुनिए तो मेरी

741
00:52:49,120 --> 00:52:53,200
बात जब वो व्यक्ति ये कहेगा ना जब उससे पूछा जाएगा कि आप आवान

742
00:52:53,200 --> 00:52:57,560
के प्रामाणिक व्यक्ति है कि नहीं तो वो व्यक्ति ठोक के मैं आवान का प्रामाणिक

743
00:52:57,560 --> 00:53:02,480
व्यक्ति नहीं हूं मगर आप ये कहते थोड़ा कतर रहे आप जब

744
00:53:02,480 --> 00:53:06,720
यम मुझे मेरी बात सुनने दीजिए हा बोलिए जब आपके पास

745
00:53:06,720 --> 00:53:11,120
यह बात उत्तर देने की बारी आती है तो आप यह कहते मैं आर्य समाज की संस्था का प्रमाणिक

746
00:53:11,120 --> 00:53:16,360
व्यक्ति नहीं हूं आप उस बच के निकल जाते सीधे

747
00:53:16,360 --> 00:53:20,600
बोलिए नहीं अब सुनिए

748
00:53:20,600 --> 00:53:24,600
ये मैं बोल चुका हूं पहले भी ठीक है लेकिन आपने य क्या आपने दोबारा

749
00:53:24,600 --> 00:53:28,760
एक प्रश्न पूछा मेरे को बोल आपने दोबारा क्या प्रश्न पूछा

750
00:53:28,760 --> 00:53:32,800
कि क्या आर्य समाज आर्य समाज आपने पूछा आर्य समाज फिर क्या है मैंने कहा भाई आर्य समाज संस्था

751
00:53:32,800 --> 00:53:36,840
है वहां से वो क्लेरिटी मिल गई क्लेरिटी मिल गई ना

752
00:53:36,840 --> 00:53:41,280
नहीं मिली बताइए क्या इसमें क्या दिक्कत है ब आप क्या समझ रहे हो हां

753
00:53:41,280 --> 00:53:45,320
मैं बता रहा हूं आर समाज को अगर संस्था मान लेंगे तो आर समाज संस्था

754
00:53:45,320 --> 00:53:49,560
बहुत है तो अगर हम ये कहेंगे कि मैं आर समाज

755
00:53:49,560 --> 00:53:54,360
का संस्था से जुड़ा हुआ प्रमाणिक व्यक्ति नहीं हूं तो वो जो किसी अन्य

756
00:53:54,360 --> 00:53:58,360
संस्था बहुत है हां आर समाज से सं

757
00:53:58,360 --> 00:54:02,880
बहुत है रस्ट अच्छा नाम बताइए जरा दो चार के नाम बताइए

758
00:54:02,880 --> 00:54:04,200
आप ये देखिए आब वाली

759
00:54:04,200 --> 00:54:09,360
अलग है और यह जो जो य से आया सबका रजिस्ट्रेशन नंबर अलग

760
00:54:09,360 --> 00:54:13,800
है नहीं है जानकारी की कमी है थोड़ी सी आपकी मैं आपको बता देता हूं

761
00:54:13,800 --> 00:54:17,800
जी आर्य समाज का जो हब है पहले लाहौर में था दिल्ली

762
00:54:17,800 --> 00:54:21,960
में ठीक है बाकी जितने आर समाज है वो सारी उनकी ब्रांचेस

763
00:54:21,960 --> 00:54:26,840
है अलग अलग स्थानों पर खुलती रहती है सारी कंट्रोल होती है वो दिल्ली व से कंट्रोल

764
00:54:26,840 --> 00:54:30,960
या कह लो उसका जो हेड क्वार्टर है वो दिल्ली में तो यही तो मैं जानना चाह

765
00:54:30,960 --> 00:54:35,080
रहा हूं यही जानकारी तो मैं जानना चाह रहा हूं यह जो सारी आपको नहीं पता था

766
00:54:35,080 --> 00:54:39,200
इसलिए मैंने आपको बता दिया मेरे को पता है आपको नहीं पता था इसलिए मैंने आपको बता दिया मैं आपको बता रहा हूं

767
00:54:39,200 --> 00:54:43,440
ना उसम भी एक क्वेश्चन उठ जाता है उसम भी क्वेश्चन उठ जाता है कि आर्य

768
00:54:43,440 --> 00:54:47,560
समाज नाम की संस्थाएं बहुत है सबका रजिस्ट्रेशन नंबर तो अलग है ना

769
00:54:47,560 --> 00:54:52,480
इतना तो है हा

770
00:54:52,480 --> 00:54:56,760
रजिस्ट्रेशन नंबर सबका अलग है ना

771
00:54:56,760 --> 00:55:01,240
अब वो आपका कहना है कि वो कंट्रोल सारी दिल्ली से होती है

772
00:55:01,240 --> 00:55:05,240
हेड क्वार्टर जो है वो दिल्ली में है तो इसका आधार क्या है कि

773
00:55:05,240 --> 00:55:09,320
अपने आप में वो रजिस्टर्ड भी है पंजीकृत भी है उनका हेड क्वार्टर दिल्ली

774
00:55:09,320 --> 00:55:13,400
में इसका क्या आधार है क्या वो तो उसे पूछो ना वो तो उनसे

775
00:55:13,400 --> 00:55:16,600
पूछो ना जो कोई आरे

776
00:55:16,600 --> 00:55:20,600
समास भाई मैं क्यों मैं तो लायबल नहीं अगर मैं मा मैं बता भी दूं मेरे को तो

777
00:55:20,600 --> 00:55:24,640
पता तो सारी चीज ठीक है बता द लेकिन मैं बताऊ क्यों अभी तो आप ही बता रहे

778
00:55:24,640 --> 00:55:29,160
थे ना कि आपको जानकारी की कमी और आप ये बता रहे थे बिल्कुल आपको

779
00:55:29,160 --> 00:55:33,280
जानकारी ज आपको छोटी सी चीज ये नहीं पता अब देखो मैं बैठ के क तो पढ़ाऊंगा नहीं आपको

780
00:55:33,280 --> 00:55:37,360
देखो अभी अभी यहां प आपके दो बातें हो गई आपने अभी मुझको वो बात बता दी जो आपको

781
00:55:37,360 --> 00:55:41,360
ठीक लगी अब जब बाकी की बात मैं आपसे आगे की पूछ रहा हूं तो जरूरी है उसमें

782
00:55:41,360 --> 00:55:45,480
आप कह रहे हो भाई मैं कैसे बता दूं मैं लायबल नहीं हूं जरूरी किस परपट से वो समझो

783
00:55:45,480 --> 00:55:49,680
क्या आपकी और मेरी चर्चा के हिसाब से जरूरी है बिल्कुल जरूरी है

784
00:55:49,680 --> 00:55:54,120
क्योंकि जबि करो सि करो इसलिए जरूरी है

785
00:55:54,120 --> 00:55:58,200
कि आप यदि आप यदि ये कहते हैं कि मैं आर समाज की ओर

786
00:55:58,200 --> 00:56:02,200
से आपसे आ रहा हूं बात करने यह चवा उड़ाया जाता है कि आर समाजी की

787
00:56:02,200 --> 00:56:06,440
ओर से आर समाज की ओर से इसने पुकारा मगर जबक आप आर

788
00:56:06,440 --> 00:56:10,840
समाज की ओर से प्रामाणिक कौन है कौन नहीं है इसका कोई आधार ही नहीं है आ समाज

789
00:56:10,840 --> 00:56:11,840
के

790
00:56:11,840 --> 00:56:15,840
अब सुनो देखो एक चीज मैं आपको क्लियर करता हूं जब जो जो

791
00:56:15,840 --> 00:56:19,960
चीज मैंने आपको पहले बोल दी कि भाई मैं कोई मैं आर्य समाजी हूं मैं विचारधारा मानता हूं मैं किसी

792
00:56:19,960 --> 00:56:24,480
संस्था से जुड़ा हुआ नहीं हूं अब सुनो बात पूरी सुनलो ये बात गलता

793
00:56:24,480 --> 00:56:28,760
से जुड़ा हुआ मत बोलो आप ये बो मैं आ समाज का प्रामाणिक प्रतिनिधि नहीं हूं

794
00:56:28,760 --> 00:56:33,000
आप उस का मतलब वही होता है आपको सम आपको दिक्कत इसलिए

795
00:56:33,000 --> 00:56:37,040
क्योंकि आपके समझने में दोष है आपको दिक्कत इसी नहीं आपको शायद बोलने में

796
00:56:37,040 --> 00:56:41,160
दोष है मैं तो बोल रहा हूं ना मैं तो क्लियर कट बोल रहा हूं तो कह रहा किसी संस्था से जुड़ा हुआ

797
00:56:41,160 --> 00:56:45,400
नहीं हूं अरे तो आर्य समाज है क्या फिर जैसे

798
00:56:45,400 --> 00:56:49,720
जैसे बोल दिया आर्य समाज उसके अलावा आर्य समाज क्या है जिस

799
00:56:49,720 --> 00:56:53,800
आप जिससे आप जुड़े हुए हैं मैं तो कह तो रहा मैं विचारधारा मानता हूं

800
00:56:53,800 --> 00:56:57,960
वो आपको समझ में नहीं इ देर से चार बार रिपीट कर लिया मैंने वो विचारधारा कहां

801
00:56:57,960 --> 00:57:02,120
से प्रतिपादित होती है ग्रंथों से पुस्तकों से प्रतिपादित

802
00:57:02,120 --> 00:57:06,200
होती है पुस्तको से आती है

803
00:57:06,200 --> 00:57:10,520
तो पुस्तको से आती है वो तो पुस्तकों से आवाज कम आ रही है क्या मेरी

804
00:57:10,520 --> 00:57:15,320
वो पुस्तक कहां से वो पुस्तक कहां से

805
00:57:15,320 --> 00:57:19,480
प्रमाण मेरी आवाज क्लियर आ रही है वो पुस्तक कहां से

806
00:57:19,480 --> 00:57:21,360
प्रमाणिक होती है

807
00:57:21,360 --> 00:57:25,400
मेरी आवाज क्लियर आ रही है आपको आ रही है आप आपकी तो आ रही है लेकिन आप

808
00:57:25,400 --> 00:57:29,440
बारबार कर रहे डाउट हो क्या पता नहीं आ रही ते प

809
00:57:29,440 --> 00:57:33,640
बात कर रहे मुह चलाते हुए हमारे य बात नहीं करते खाते पते मैं कर लेता हूं

810
00:57:33,640 --> 00:57:36,320
मैं तो कर लेता कोई दिक्कत नहीं

811
00:57:36,320 --> 00:57:42,320
बता खाना खाते हुए बात करने वालो की बातें समझ में नहीं

812
00:57:49,200 --> 00:57:53,720
आती जय श्री राम जी शिवा जी

813
00:57:53,720 --> 00:57:58,280
जय श्री रामम कैसे

814
00:57:58,280 --> 00:58:01,120
इस ब आ

815
00:58:01,120 --> 00:58:05,560
समाज आर्य समाज ने लेटर दिया था ना अब

816
00:58:05,560 --> 00:58:09,680
व्यक्ति से मैंने पूछा भाई तुम प्रमाणिक कैसे हो तो व खाते

817
00:58:09,680 --> 00:58:13,800
खाते चुकी लेते हुए बात कर रहा है और उसकी कोई बात अगर समझ में ना आए तो बोल

818
00:58:13,800 --> 00:58:18,600
रहा है आपको मेरी आवाज सुनाई नहीं दे रही

819
00:58:18,600 --> 00:58:22,720
वो बोल रहा था कि मैं ऐसे ही करता हूं

820
00:58:22,720 --> 00:58:26,680
वो बोल तो रहा था कि मैं ऐसे ही करता हूं

821
00:58:26,680 --> 00:58:32,360
हां तो यह भी हम दिखा देंगे शास्त्रों से कि ऐसे नहीं करना

822
00:58:32,360 --> 00:58:37,200
चाहिए नाब चर्चा में आना

823
00:58:37,200 --> 00:58:41,360
मैं जब तक आता आपने उनको हटा दिया मैं उनसे पूछने वाला था कि आपको

824
00:58:41,360 --> 00:58:45,760
भैया राधा प्रॉब्लम क्यों है अभी वो जो दार्शनिक विचार वाले जो प्रशांत

825
00:58:45,760 --> 00:58:49,880
शर्मा य कौन इन्होने फिर वीडियो बनाई थी मैंने उस वीडियो में अपने दो कमेंट लिखे थे आपको भेजे

826
00:58:49,880 --> 00:58:53,880
भी थी मैं पर डीम करके अपने कमेंट जी हा पंकज जी जय

827
00:58:53,880 --> 00:58:59,880
श्री राम जय श्री राम

828
00:59:00,880 --> 00:59:05,200
इनकी जो है आज लेटर

829
00:59:05,200 --> 00:59:09,280
को लेकर जो बात हो रही थी तो कम से कम अगर गिनती

830
00:59:09,280 --> 00:59:13,520
में काउंट करेंगे तो कम से कमद 50 लोगों से तो चर्चा हो चुकी होगी भया

831
00:59:13,520 --> 00:59:17,680
आपसे ह समाज के व्यक्तियों से वो भी अपने आपको

832
00:59:17,680 --> 00:59:21,680
कते हर व्यक्ति हर व्यक्ति स्वयं को आर समाज से अलग कर लेता

833
00:59:21,680 --> 00:59:27,200
है और फिर ये ड जाता है आ समाज की ओर से ललकारा गया

834
00:59:27,200 --> 00:59:31,640
अ जी हमने अपने किसी भी वीडियो का टाइटल

835
00:59:31,640 --> 00:59:35,680
ऐसा रखा गया कि शंकराचार्य का व्यक्ति की ओर से ललकारा गया शंकराचार्य

836
00:59:35,680 --> 00:59:39,720
के व्यक्ति ने उसको हरा दिया इनके लोगों के द्वारा किया गया तो इनको

837
00:59:39,720 --> 00:59:43,840
उसको क्रिटिसाइज करना चाहिए ना आलोचना करो उसकी जो ऐसा

838
00:59:43,840 --> 00:59:47,880
फैला रहा है आर समाज ने ये कर दिया वो कर दिया

839
00:59:47,880 --> 00:59:52,200
कोई व्यक्ति जाकर के शंकराचार्य से स्वयं शंकराचार्य से उनकी सभा में जाकर

840
00:59:52,200 --> 00:59:56,280
के प्रश्न पूछता है वो उसका यथोचित उत्तर देते हैं उसके बाद व

841
00:59:56,280 --> 01:00:00,400
व्यक्ति वहां पर विघ्न डालने का प्रयास करता है वहां से हटा दिया जाता है उसके

842
01:00:00,400 --> 01:00:04,560
बाद चिल्लाया जाता है समाजी ने शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में हरा

843
01:00:04,560 --> 01:00:09,000
दिया जब इनसे पूछा जाता है किसी व्यक्ति को आर समाज

844
01:00:09,000 --> 01:00:13,280
समाजी कैसे माना जाए तो इनके पास कोई आधार नहीं है ऐसे ही बगले ता

845
01:00:13,280 --> 01:00:19,040
है कि वो उनसे पूछो जाकर के अरे जब उनसे पूछना है तो तुम यहां पर क्यों उत्तर दे रहे हो

846
01:00:19,040 --> 01:00:21,720
उनका

847
01:00:21,720 --> 01:00:25,960
भया य नि कमेंट में चैट बॉक्स में लिख र तुमसे

848
01:00:25,960 --> 01:00:30,080
रे बस का कुछ नहीं है और मेरे लिए वो बोल रहा है कि मेरे को अंदर लो मैं इसको यानी वो

849
01:00:30,080 --> 01:00:34,440
मुझको बताएगा कि हमको राधा जी से दिक्कत क्या है लो भैया हम भी बताएंगे उसको

850
01:00:34,440 --> 01:00:38,800
हमको पूछना है कि प्रॉब्लम क्या है लो उसको ऐसा है चर्चा

851
01:00:38,800 --> 01:00:42,960
चर्चा जो है वो संडे को होगी अगर इनको बिना खाना खाए आना है

852
01:00:42,960 --> 01:00:47,080
मुंह नहीं चलाना आ कर के स्क्रीन पर तो होगी और ये अपने

853
01:00:47,080 --> 01:00:51,240
आपको को बता बताना चाहता है ना ये अपना मुझे बताना चाहता

854
01:00:51,240 --> 01:00:55,520
है ये अपना स्टैंड क्लियर करें र समाज के प्रामाणिक प्रतिनिधि

855
01:00:55,520 --> 01:00:59,680
नहीं है या फिर ये आर समाज की केवल विचारधारा

856
01:00:59,680 --> 01:01:02,920
को फॉलो करते अपना स्टैंड क्लियर करें मेरे

857
01:01:02,920 --> 01:01:07,320
को भैया पता है क्या ल आपने सुनि सुनिए एक सेकंड बस एक

858
01:01:07,320 --> 01:01:11,400
सेकंड क्या लगता है मुझे भैया क्या

859
01:01:11,400 --> 01:01:15,440
लगता है कि जैसे आप स्न के मतलब प्रेसिडेंट के पास आप बात करते हो लखनऊ

860
01:01:15,440 --> 01:01:19,480
में और ऐसी राम पालियो की भी आपने उससे बात की जैसे मेले में आप

861
01:01:19,480 --> 01:01:23,560
गए उनसे बात की तो अब ये जो आय समाज आय समाज का एक है

862
01:01:23,560 --> 01:01:27,800
एक वो एक है वो क्या नाम है उनका स्वामी स चिदानंद आपने सुना होगा उनको

863
01:01:27,800 --> 01:01:31,800
बुला लो उनसे मजा आएगा शास्त करने में और एक चीज तो बहुत अच्छी है

864
01:01:31,800 --> 01:01:35,920
कि इकन वालों के सामने आय समाज के सामने दिमाग लगाना पड़ता है कबीर वालों के सामने दिमाग

865
01:01:35,920 --> 01:01:40,320
की जरूरत नहीं पड़ती है विशाल जी पहली बात हम शास्त्रार्थ

866
01:01:40,320 --> 01:01:45,320
नहीं करते और दूसरी बात यह है

867
01:01:45,320 --> 01:01:49,520
कि यह रित्विक नाम से पहले आ चुका है क्या

868
01:01:49,520 --> 01:01:53,600
यह व्यक्ति आ चुका है शायद ना है ना ये

869
01:01:53,600 --> 01:01:57,640
अबकी बार नाम चेंज करके आया है पहले चेहरा नहीं दिखाया था डर के भाग

870
01:01:57,640 --> 01:02:02,160
गया था और इसने जो है अपना चैनल नया बनाया शायद 10 50 सब्सक्राइबर

871
01:02:02,160 --> 01:02:06,240
इसके हो गए आज हमारे ऊपर आके आ लगाने आ गए हम जो है ना आपने उसको

872
01:02:06,240 --> 01:02:10,280
तुरंत ही तुरंत उसको टोका तुरंत ही एक्शन का रिएक्शन वाली

873
01:02:10,280 --> 01:02:14,360
बात आती है तो तुरंत ही बोला गया था कि हम जो है ना सत्य को लेकर

874
01:02:14,360 --> 01:02:18,160
आ इसलिए ग्रो कर रहे हैं और हमारा य उद्देश्य आधुनिकता

875
01:02:18,160 --> 01:02:22,280
में आकर के केवल चैनल पर जो है ना सब्सक्राइबर बढ़ाने का नहीं है ये बात

876
01:02:22,280 --> 01:02:26,480
तो सबको भी थे और विशाल जी भैया मैं आपको एक बात बताना

877
01:02:26,480 --> 01:02:31,160
यहां पर किसी भी आर समाज के व्यक्ति का नाम लेकर आप ना पुकार

878
01:02:31,160 --> 01:02:35,320
गुरुदेव बहुत अच्छी बात कही है गांधी जी को लेके कही

879
01:02:35,320 --> 01:02:39,480
थी ना इस देश का जितना नुकसान हुआ

880
01:02:39,480 --> 01:02:44,040
अगर गड से जो है गांधी जी को नहीं मारते तो य

881
01:02:44,040 --> 01:02:48,280
इतना बड़ा विपलव जो स्थितियां हुई थी वो नहीं होती आप इनका

882
01:02:48,280 --> 01:02:52,640
नाम लेकर के इनको अपने चैनल से ही किसी भी ऑफलाइन में आपके

883
01:02:52,640 --> 01:02:56,840
भी आप लोगों के बीच में बैठ इनको प्रमोट ना करिए क्योंकि इनका

884
01:02:56,840 --> 01:02:59,760
फट में

885
01:02:59,760 --> 01:03:03,920
इनको धर्म क्या है इनके धर्म धर्म का निर्णय क्या होता है य बताया

886
01:03:03,920 --> 01:03:08,760
जा रहा है रियल इंटेंशन के चैनल पर जने कराते हुए

887
01:03:08,760 --> 01:03:13,640
इनका वीडियो पड़ा हुआ है आर्य समाजी हाय क रहे

888
01:03:13,640 --> 01:03:18,280
विचारधारा को मानता हूं आर समाज की अब अगर विचारधारा को मानते

889
01:03:18,280 --> 01:03:22,600
सुनिए तो बा अग विचारधारा से नहीं जुड़े हुए

890
01:03:22,600 --> 01:03:26,720
अच्छा ठीक है किताबों के आ जा मानते

891
01:03:26,720 --> 01:03:31,120
हैं वो किताबें कौन छाप रहा है वही संस्थाए और उन संस्थाओं

892
01:03:31,120 --> 01:03:33,320
को तु कर रहे हो कि मैं उनसे नहीं जुड़ा

893
01:03:33,320 --> 01:03:37,720
हुआ तुम खुल के कहो ना कि मैं आर समाज का प्रामाणिक प्रतिनिधि

894
01:03:37,720 --> 01:03:41,840
नहीं हूं क्या दिक्कत है कहने में मैं किसी संस्था से नहीं

895
01:03:41,840 --> 01:03:46,160
जुड़ा हुआ हूं अरे भैया उसी संस्था की किताब के आधार पर तो तुम स्वयं को आर

896
01:03:46,160 --> 01:03:50,240
समाजी कह रहे हो या तो यह कहो मैं प्रमाणिक प्रतिनिधि

897
01:03:50,240 --> 01:03:54,440
नहीं हूं और या फिर ये कहो कि हूं यह

898
01:03:54,440 --> 01:03:58,600
बीच की दोहरी बात इ याद आई

899
01:03:58,600 --> 01:04:02,640
है इनका देखिए इनका धर्म और धर्म का निर्णय देखिए ये मुह

900
01:04:02,640 --> 01:04:06,920
चलाते हुए आते हैं बात करने यह तो इनका आचरण

901
01:04:06,920 --> 01:04:11,440
है मुह चलाते हुए बात करना खाना खाते हुए बात करना बोलते

902
01:04:11,440 --> 01:04:15,440
है ना और दूसरी बात क्या है कि अपनी बात से मुकर जाना

903
01:04:15,440 --> 01:04:19,440
पहले बताएंगे कि भाई वो आर समाज की जो संस्था है वहां से ऑपरेट होती

904
01:04:19,440 --> 01:04:23,480
है आपको जानकारी कम है जब उसकी प्रमाणिकता पूछी जाती है

905
01:04:23,480 --> 01:04:27,520
तो फिर कहते तो आप उनसे जाकर पूछिए तब उनकी जानकारी का

906
01:04:27,520 --> 01:04:31,560
अभाव हो जाता है मैं बता सकता हूं मगर इसलिए नहीं बता रहा हूं कि उनका लायबल थोड़ी

907
01:04:31,560 --> 01:04:36,800
ना उनकी तरफ से अरे तो फिर ये क्यों बता रहे हो वहां से ऑपरेट होती

908
01:04:36,800 --> 01:04:41,200
है व्यक्ति को अम अमंड

909
01:04:41,200 --> 01:04:45,360
र इस व्यक्ति का न तीन बार खंडन हो गया ये व्यक्ति पहले चेहरा छुपा

910
01:04:45,360 --> 01:04:48,400
के आया िक के नाम से ठीक है यहां पर

911
01:04:48,400 --> 01:04:52,520
आक के सर समय होगा दो तीन महीने

912
01:04:52,520 --> 01:04:56,520
पहले अपना लाइव चल रहा था शायद रामपाल को लेकर के दो महीने पुरानी बात

913
01:04:56,520 --> 01:05:01,280
है तय आया ीच में दो बार आ चुका है और हर बार य रा नहीं दिखाता

914
01:05:01,280 --> 01:05:05,760
के नाम से आया था उस समय इसने मना कर दिया तीसरी बार जो है

915
01:05:05,760 --> 01:05:10,280
अपने आप कह रहा संस्था से नहीं जड़ा हुआं चलो संस्था की बात कर ले

916
01:05:10,280 --> 01:05:14,960
सारा कुछ है इसब ला था

917
01:05:14,960 --> 01:05:19,200
वहा ची मिल जाए ग्रंथ की तुम बात कर रहे हो पुस्तको

918
01:05:19,200 --> 01:05:23,360
की बात कर रहे ले रहे अरे भाई

919
01:05:23,360 --> 01:05:27,360
संस्था अगर आर समाज नहीं है तो समाज का अस्तित्व है क्या फिर

920
01:05:27,360 --> 01:05:31,480
वही संस्था ही तो आर समाज है जिसको तुम

921
01:05:31,480 --> 01:05:35,840
ऑपरेट करना बता रहे हो दिल्ली से

922
01:05:35,840 --> 01:05:39,960
चलिए हा हा अब जैसे

923
01:05:39,960 --> 01:05:44,160
अब जो बागेश्वर धाम की शास्त्र जी वो हिंदू पदयात्रा निकाल अच्छी बात है वो जो जाति

924
01:05:44,160 --> 01:05:48,280
पाति का जो कुछ बोला उसमें शंकराचार्य जी तो विरोध किया इसमें आर्य समाधि

925
01:05:48,280 --> 01:05:52,720
को फायदा दिख रहा है इसमें वो उसको सही मान रहे हैं अब मुझे लगता है ने

926
01:05:52,720 --> 01:05:56,880
शायद इसलिए कहा क्योंकि श्री राम जी ने शबरी के झूठे खा या केवट की वो नाव

927
01:05:56,880 --> 01:06:01,880
में बैठे हो तो इसलिए जब राम जी ने कुछ भेज नहीं किया तो हम क्यों करें वो शायद उनका मंतव्य

928
01:06:01,880 --> 01:06:04,760
होगा देखिए

929
01:06:04,760 --> 01:06:09,040
चया कल चर्चा हो चुकी

930
01:06:09,040 --> 01:06:13,840
फायदा दिख रहा है वो ठीक है सालो से दिख रहा है

931
01:06:13,840 --> 01:06:18,320
सालो सेख रहा है आज जो है तीन चार बातें मैं क्लियर कर दूं

932
01:06:18,320 --> 01:06:22,440
आपने कहा कि परंपरा पर बात कर सकते हैं पहले अपनी परंपरा

933
01:06:22,440 --> 01:06:26,600
प्रदर्शित करें दूसरी बात मैं आपको बता दूं कि

934
01:06:26,600 --> 01:06:30,880
आपकी तरफ से कौन प्रमाणिक है कौन प्रमाणिक नहीं है इस विषय में इस विषय

935
01:06:30,880 --> 01:06:34,960
में आपकी ओर से कोई ठोस सामग्री नहीं दी गई अगर है

936
01:06:34,960 --> 01:06:39,440
तो उपलब्ध कराए तीसरी बात यह है कि आपका यह बिल्कुल निराधार

937
01:06:39,440 --> 01:06:43,680
है यह कहना कि चर्चा हमारे यहां होगी और वो भी रिकॉर्ड केवल हम करेंगे

938
01:06:43,680 --> 01:06:48,320
और कोई नहीं करेगा यह आप कोई तानाशाह नहीं है और हम आपके गुलाम नहीं है

939
01:06:48,320 --> 01:06:52,440
चौथी बात यह है कि अपने दिए हुए वक्तव्य से क्यों पलट रहे हो सर्वशक्तिमान ईश्वर

940
01:06:52,440 --> 01:06:56,440
नहीं है क्या तुम्हारा जो उससे भाग रहे हो उसको प पीछे

941
01:06:56,440 --> 01:07:00,480
कर अगर और अगर तुम्हारे को अगर आपको यह पता

942
01:07:00,480 --> 01:07:04,560
था कि उस पर चर्चा पहले बहुत बार हो चुकी है तो फिर आपने उसको विकल्प में पहले दिया

943
01:07:04,560 --> 01:07:08,680
क्यों था और अगर जिन विषयों पर चर्चा

944
01:07:08,680 --> 01:07:12,960
कई बार हो चुकी है तो जितने भी विषय आपने दिए उन सब विषयों पर चर्चा हो चुकी है

945
01:07:12,960 --> 01:07:17,000
दर्शक अपना देख कर के निर्णय ले लेंगे और चौथी बात ये है कि आपने जो अंत में

946
01:07:17,000 --> 01:07:19,920
विकल्प दिया भी है कि सनातन मान्यताओं के अनुकूल

947
01:07:19,920 --> 01:07:24,080
पहली बात तो ये बात ही गलत है कि वेद भाष्य वेद का अर्थ उससे

948
01:07:24,080 --> 01:07:28,120
भिन्न कोई सनातन मान्यता है जिससे य पता चलेगा कि य भेद भाष्य उसके अनुकूल

949
01:07:28,120 --> 01:07:32,800
है कि नहीं तो ये बिल्कुल निराधार बात है आपकी तर्क पूर्ण नहीं है दूसरी

950
01:07:32,800 --> 01:07:36,920
बात कि अगर सनातन को ढूंढना है वेद भाष्य में तो

951
01:07:36,920 --> 01:07:41,280
सिंपल ईश्वर सर्वशक्तिमान सनातन सिद्ध करो सनातन सर्वशक्तिमान

952
01:07:41,280 --> 01:07:45,280
ईश्वर सिद्ध करो और वैदिक भाष को प्रमाणित कर लो और ये

953
01:07:45,280 --> 01:07:49,360
हिंदू शब्द वगैरह सब मान लिए जाएंगे उसी में जिसका ईश्वर स शक्तिमान उसका

954
01:07:49,360 --> 01:07:53,440
य धर्म सब मान लिया जाएगा ठीक है

955
01:07:53,440 --> 01:07:57,720
गीता के 4 प स में पढ़े क्या बोला है

956
01:07:57,720 --> 01:08:02,080
इसके अलावा में कुछ भूल तो नहीं

957
01:08:02,080 --> 01:08:06,400
आ ये लास्ट में बंदा आया था जो खाना खाते हुए बात कर रहा था

958
01:08:06,400 --> 01:08:10,440
भाई सुन ले मुह चलाए बिना आना तो यहां पर बात

959
01:08:10,440 --> 01:08:14,800
करना खाना खाते हुए बात मत करना यहां पर आकर के

960
01:08:14,800 --> 01:08:18,960
और दूसरी बात यह है कि अपना स्टैंड क्लियर करके आना कि तू

961
01:08:18,960 --> 01:08:23,080
है कौन आर समाज का प्रामाणिक प्रतिनिधि है या

962
01:08:23,080 --> 01:08:27,240
केवल आर समाज का फॉलो जानने का मतलब आप यह है कि जब

963
01:08:27,240 --> 01:08:31,800
हमें यह सिखाया जाए ये देखिए तिक के नाम से आया है

964
01:08:31,800 --> 01:08:35,920
पहले चेहरा नहीं दिखा ररा चेहरा दिखा दिया और गर्व से कहो हिंदू है

965
01:08:35,920 --> 01:08:40,360
यह आपको गोवर्धन की जो वेबसाइट है जो स्वस्ती प्रकाशन

966
01:08:40,360 --> 01:08:44,440
है वहां से मिलेगा गोवर्धन मठ से और बाकी के तीनों

967
01:08:44,440 --> 01:08:48,640
ग्रंथ आपको जिज्ञासु बन के आ जिज्ञासु

968
01:08:48,640 --> 01:08:52,520
जो भी

969
01:08:52,520 --> 01:08:57,960
प्रश्न जो भी शंका आए उसको उसम नोट कर

970
01:08:57,960 --> 01:09:02,200
लीजिए क्या पूछा क्या था इसने

971
01:09:02,200 --> 01:09:06,320
अरे उनको प्रश्नों की थी हम किसी विचारधारा को नहीं मानते

972
01:09:06,320 --> 01:09:10,400
हैं कुछ नहीं है बस हमें धर्म की ज्ञान जो है आपसे चाहिए तो आपने ये बोला था कि

973
01:09:10,400 --> 01:09:14,600
जो है ना ऐसा ऐसा है आप ऐसा ऐसा करना आप बढ़िया आराम कोई दिक्कत नहीं किसी प्रकार

974
01:09:14,600 --> 01:09:18,640
क्लासे जरूरत है तो आप क्लासेस में आइए चर्चा के लिए बीच में

975
01:09:18,640 --> 01:09:21,880
आ गए थे

976
01:09:21,880 --> 01:09:26,000
लाइव आदमी को व्यक्ति को अपना अस्तित्व छिपाना क्यों

977
01:09:26,000 --> 01:09:32,000
सोचने वाली बात है क्यों छिपाना पड़ रहा

978
01:09:32,600 --> 01:09:38,600
है करने वाले हो तो को

979
01:09:40,120 --> 01:09:44,800
र्म नहीं वही तो बता रहा है परमार्थिक उस

980
01:09:44,800 --> 01:09:48,560
देख इसम क्या होता

981
01:09:48,560 --> 01:09:52,600
है बात ऐसी है अगर आपने किसी को व्यवहार में ईश्वर

982
01:09:52,600 --> 01:09:57,120
अपना लिया जी अगर ने उसे ईश्वर मान लिया

983
01:09:57,120 --> 01:10:01,680
तो जब ईश्वर मान लिया तो उसके अनुसार उसकी परमार्थ की सिद्धि हो गई

984
01:10:01,680 --> 01:10:05,440
क्योंकि परमार्थ का जो लक्षण

985
01:10:05,440 --> 01:10:09,720
आप ये भैया आने को है एक

986
01:10:09,720 --> 01:10:13,800
ही अरे वही वाली बात है बस करिए ठीक है मैं समझ गया

987
01:10:13,800 --> 01:10:17,880
ये वो वाली बात क रहे कि परमार्थिक ईश्वर की सिद्धि हो सकती

988
01:10:17,880 --> 01:10:21,960
है कि नहीं सिद्ध हो सकते है नहीं तो परमार्थिक ईश्वर तो वाणी

989
01:10:21,960 --> 01:10:26,160
का विषय है ही नहीं व्यवहार का विषय है ही नहीं परमार्थ में ईवर है यह आपको

990
01:10:26,160 --> 01:10:31,200
मालूम कैसे पड़ा जब किसी को आपने व्यवहार में ईश्वर मान

991
01:10:31,200 --> 01:10:35,280
लिया यह आपको तभी मालूम पड़ा तो जब मान लिया है तो

992
01:10:35,280 --> 01:10:39,360
नकार नहीं सकते परमार्थ वो सिद्ध होता है कि नहीं होता है जब

993
01:10:39,360 --> 01:10:43,480
मान लिया तो नकार नहीं सकते अगर नकार दिया तो फिर व्यवहार में आपका ईश्वर

994
01:10:43,480 --> 01:10:47,520
नहीं बचा जब ईश्वर नहीं बचा तो उसके द्वारा परमार्थिक ईश्वर की प्राप्ति

995
01:10:47,520 --> 01:10:51,640
नहीं हो सकती है ना वो इनको जिज्ञास

996
01:10:51,640 --> 01:10:56,200
समझ के हमने कह दिया होगा कि आप जो है जाकर के क्लासेस जन

997
01:10:56,200 --> 01:11:00,400
फ आज जो है अपने मुझे लगता है इनकी इंद्रियो इंद्रियों

998
01:11:00,400 --> 01:11:04,640
ने मजबूर कर दिया कि आज जो है बहुत बोल रहा है और जाना ही पड़ेगा क्योंकि इनके

999
01:11:04,640 --> 01:11:07,800
आर समाज की पोल खुल गई

1000
01:11:07,800 --> 01:11:12,440
आज का समाधान करेंगे आज अभी

1001
01:11:12,440 --> 01:11:17,080
नहीं का विल हो

1002
01:11:17,080 --> 01:11:21,560
चुका मेरा नहीं आप

1003
01:11:21,560 --> 01:11:25,560
फिर करेंगे क्यक जय श्री राम जय श्री

1004
01:11:25,560 --> 01:11:29,680
राम भैया जय श्री राम कैसे हो आप जय श्री राम बस मैं कुशल मंगल आप

1005
01:11:29,680 --> 01:11:33,680
अपना जो धार्मिक आध्यात्मिक पक्ष है वो एक बार हमें याद दिला द किसकी ओर

1006
01:11:33,680 --> 01:11:37,720
से हैं आप जी मैं सामान्य हिंदू समझ

1007
01:11:37,720 --> 01:11:41,760
सकते हैं क्योंकि अभी तो मैं वही जानने का प्रयास कर रहा हूं मुझे

1008
01:11:41,760 --> 01:11:45,920
कौन से ग्रंथ पढ़ने चाहिए अध्ययन करने चाहिए सोट की हमें नॉलेज मिल कक

1009
01:11:45,920 --> 01:11:50,160
आप जानते हो कि जो मॉडर्न स्कूल में पढ़े हुए बंदे होते हैं तो हमें उन चीजों की ज्यादा नॉलेज

1010
01:11:50,160 --> 01:11:54,200
नहीं होती बट ये कि हम लोग कक हम लोग बचपन से सुनते आ रहे हैं कथा प्रवचन वगैरह

1011
01:11:54,200 --> 01:11:58,400
देखते आ रहे हैं हमारे दादा लोग या घर परिवार में चीज होती है तो उससे भी कुछ कुछ हमें आईडिया

1012
01:11:58,400 --> 01:12:02,440
लग जाता है बहुत कुछ मिलता है बाकी फिर जैसे आप लोग के चैनल्स हो गए

1013
01:12:02,440 --> 01:12:06,640
और स्वामी जी के प्रवचन हो गए हैं तो पूरी शंकराचार्य

1014
01:12:06,640 --> 01:12:10,760
भगवान जी के तो बहुत कुछ वहां से भी थोड़ा थोड़ा मिलता है तो लेकिन कुछ कुछ डाउट्स

1015
01:12:10,760 --> 01:12:14,960
है जो मैं पूछने वाला था और वो

1016
01:12:14,960 --> 01:12:20,960
जो दोगले

1017
01:12:21,680 --> 01:12:25,760
बास अबकी बार निर् आ लिख के आ रहा है अभी भी कोई कंफर्म

1018
01:12:25,760 --> 01:12:29,920
नहीं निर् आ रही है ये लोग भक्त आने अपना पिता का नाम भी झूठ

1019
01:12:29,920 --> 01:12:34,320
बता देते हैं क्या अब ये तो

1020
01:12:34,320 --> 01:12:38,440
पता नहीं उसके लिए तक गिर सकते हैं तो अब देखो वो

1021
01:12:38,440 --> 01:12:42,640
जब अटक रहा था ना देखो जब तक वो अटक नहीं रहा था क्योंकि किसी भी चीज में

1022
01:12:42,640 --> 01:12:46,680
डेथ में जब जाते तब व्यक्ति अटकता है जब तक वो अटक नहीं रहा था तब तक

1023
01:12:46,680 --> 01:12:50,880
निर्विवाद रूप से बोल रहा था फ जब वो अटकने लगा जब ऐसे प्रश्न आने लगे जो

1024
01:12:50,880 --> 01:12:55,160
उसम उसे दिक्कत हुई तो उसने चर्चा को बिगाड़ा

1025
01:12:55,160 --> 01:12:59,240
चर्चा कैसे बिगाड़ा मेरी आवाज आ रही है क्या क्यों कर रहे हो चर्चा

1026
01:12:59,240 --> 01:13:03,600
को उसने बिगाड़ दिया क्यों बिगाड़ा क्यों बिगाड़ा क्योंकि उसके पास प्रश्न

1027
01:13:03,600 --> 01:13:07,840
जवाब उसने बा कर बचने के लिए

1028
01:13:07,840 --> 01:13:11,960
जी चलिए आने के लिए सभी का जय श्री राम समय देने

1029
01:13:11,960 --> 01:13:16,360
के लिए जय श्री राम जय श्री राम भैया एक

1030
01:13:16,360 --> 01:13:21,400
पंक्ति एक बात कगा भैया बस थोड़ा सा आपसे निवेदन

1031
01:13:21,400 --> 01:13:25,560
है आगे से आगे से जो है एक छोटा

1032
01:13:25,560 --> 01:13:29,600
सा निवेदन है कि जितने भी अलंकार समाज का व्यक्ति

1033
01:13:29,600 --> 01:13:34,000
हो या कोई भी जो लोग यहां पर चर्चा के लिए अपने आ रहा वैचारिक

1034
01:13:34,000 --> 01:13:36,680
मत और अगर नहीं मानते

1035
01:13:36,680 --> 01:13:40,840
मान लीजिए इसके आधार पर हम नहीं मानते

1036
01:13:40,840 --> 01:13:44,960
हैं थोड़ा सा जो है हमें इस बात का थोड़ा सा ध्यान

1037
01:13:44,960 --> 01:13:49,280
रखना है कि इनकी जो नियमावली है ये बताते तो नहीं है लेकिन हमें हर संभव

1038
01:13:49,280 --> 01:13:53,360
ये प्रयास करना है कि जो यहां पर आकर के अपनी नियमावली

1039
01:13:53,360 --> 01:13:57,720
जो है कुछ तो बताए कि यहां पर क्लियर हो जाए उस चीज के लिए

1040
01:13:57,720 --> 01:14:01,760
कि ये व्यक्ति प्रमाणित है ये व्यक्ति य आके कोई अभद्रता नहीं करेगा ये वक्ति

1041
01:14:01,760 --> 01:14:05,880
आ चर्चा को कर इनकी मुझे सबसे बड़ी ढोल में पोल

1042
01:14:05,880 --> 01:14:10,120
यही नजर आ रही है कि कोई भी व्यक्ति यह सिद्धि नहीं कर सकता कि मैं आर समाज हूं क्योंकि

1043
01:14:10,120 --> 01:14:14,200
ये सिस्टम है ही नहीं इनकी य गुरु परंपरा है नहीं इनके य

1044
01:14:14,200 --> 01:14:18,280
गुरु परंपरा के अभाव में कोई एक व्यक्ति ये निर्णय नहीं दे सकता है कि जाओ

1045
01:14:18,280 --> 01:14:22,720
हम इसको जो है निर्णय दे रहे हैं लौकिक सिद्धांत के अनुसार किसी संस्था का

1046
01:14:22,720 --> 01:14:26,760
अध्यक्ष होने के नाते आर समाज के नाम से संस्था है उसके नाते वो

1047
01:14:26,760 --> 01:14:31,120
कह सकता है हमारी आर समाज ये फला फला संस्था का प्रमाणिक व्यक्ति है उसके प्रामाणिकता

1048
01:14:31,120 --> 01:14:36,000
को भी दूसरी आर समाज संस्था का व्यक्ति चैलेंज कर सकता है

1049
01:14:36,000 --> 01:14:40,160
नहीं हम नहीं मानते वो प्रामाणिक है हम उसे विद्वान नहीं

1050
01:14:40,160 --> 01:14:43,880
मानते

1051
01:14:43,880 --> 01:14:48,040
समस्या क्योंकि इनके पास दिनेश

1052
01:14:48,040 --> 01:14:52,080
पांडे जी कौन है विशाल भैया मैं आपसे विशाल एक

1053
01:14:52,080 --> 01:14:56,080
बात कहना चाहता हूं जो आप मां भगवती

1054
01:14:56,080 --> 01:15:00,560
मा भगवती राधा रानी के बारे में य जो भी चीज हो रही है आप इनको

1055
01:15:00,560 --> 01:15:04,720
आक के इस तरीके से नहीं बोलिए इनको पकट में प्रसिद्धि के लिए आते

1056
01:15:04,720 --> 01:15:08,720
हैं क्योंकि इनका मकसद ही वही रहता है कि हमें य आक के अनल

1057
01:15:08,720 --> 01:15:12,800
प करना है हम इनके विरुद्ध बोले तो इनको बहुत सारे मंच बड़े

1058
01:15:12,800 --> 01:15:17,240
बड़े मंच मीडिया जो है ना ये हमारे संतो के बारे में हमारे महापुरुषों

1059
01:15:17,240 --> 01:15:22,040
के बारे में गलत क्यों बोलते हैं क्यक तंत्र है मीडिया तत्र

1060
01:15:22,040 --> 01:15:26,080
मीडिया तंत्र है बुला कर के इनको व लाएगा और

1061
01:15:26,080 --> 01:15:30,360
इनकी प्रसिद्धि हो जाएगी और इनका कोई मकसद है ही नहीं ना

1062
01:15:30,360 --> 01:15:34,680
इनका कोई उस कोई सिस्टम से मतलब ही नहीं है सनातन

1063
01:15:34,680 --> 01:15:38,680
से कोन कोई लेना देना नहीं है दूर दूरत किलोमीटर तक

1064
01:15:38,680 --> 01:15:43,400
केवल नाम का चोला ड़ कर के आएंगे और अप

1065
01:15:43,400 --> 01:15:47,880
आर्स गुरुकुल वाले अपनी बातों से मुकर रहे हैं लिखी हुई बातों से

1066
01:15:47,880 --> 01:15:51,920
आदमी आ रहा है मुह चला रहा है खाना खाते हुए बात कर रहा है तमीज नहीं है बात करने

1067
01:15:51,920 --> 01:15:55,960
की और वो फिर वो भी अपनी बातो से मुकर एक बार आ रहा

1068
01:15:55,960 --> 01:15:59,240
है कह रहा है मैं सामान्य हिंदू हूं पुरी शंकराचार्य जी को भगवान कह रहा है

1069
01:15:59,240 --> 01:16:03,480
कह रहा है कि मैं वो सत्यार्थ प्रकाश की ग्रंथों

1070
01:16:03,480 --> 01:16:07,680
को जो मैं मानने वाला हूं आर समाज के ग्रंथों को उसमें शंकराचार्य

1071
01:16:07,680 --> 01:16:12,120
जी को कहां भगवान कह दिया गया सत्याना

1072
01:16:12,120 --> 01:16:16,440
रामो दुर नावी भाषित राम दो प्रकार की बातें नहीं

1073
01:16:16,440 --> 01:16:20,720
करता ट्रेडिशनल आर्य वो रैशनल

1074
01:16:20,720 --> 01:16:26,720
आर्य रशन भाई

1075
01:16:26,760 --> 01:16:30,760
धर्म का धर्म का प्रचारक बनने से पहले धर्म को धारण

1076
01:16:30,760 --> 01:16:35,320
तो करो थोड़ा बहुत वो नहीं सिखाया क्या माता पिता ने

1077
01:16:35,320 --> 01:16:39,760
चले उठा कर के टा

1078
01:16:39,760 --> 01:16:43,840
टाई इनकी भाषा जो है ना इतनी अवद हो

1079
01:16:43,840 --> 01:16:46,520
चुकी

1080
01:16:46,520 --> 01:16:51,160
हैसे ही फसते तो इनका जो मिजाज होता है बदल जाता है

1081
01:16:51,160 --> 01:16:56,080
नीचता प आ जाते तुरंत जैसे ही फसते हैं तो नीचता प तुरंत

1082
01:16:56,080 --> 01:17:00,080
जाते यहीं पर यही पर वि भया अत

1083
01:17:00,080 --> 01:17:04,160
ही बात वही चीज समझाना चाह रहा हूं धैर्य रखिए हमें हमें धैर

1084
01:17:04,160 --> 01:17:08,520
नहीं खोना है क्योंकि देखो सीधी सी बात है के कमल जो है कीचड़

1085
01:17:08,520 --> 01:17:12,520
में खिलता है ठीक है तो वहां पर कोई पत्थर फेंके कोई कुछ

1086
01:17:12,520 --> 01:17:14,440
करेगा हमारा

1087
01:17:14,440 --> 01:17:18,480
2000 साल तक ये लोग जितने जो भी चीज 2000 साल तक

1088
01:17:18,480 --> 01:17:22,560
हमारे पास कितने हमारे अत्याचार हुए कितना सब कुछ प्रहार हुए हमारे

1089
01:17:22,560 --> 01:17:26,760
ऊपर हमारा अगर ऐसा कुछ होता तोरा अस्तित्व मिट जाता कितने

1090
01:17:26,760 --> 01:17:31,000
प्रयास नहीं किए आ तां ने कितने प्रयास किए तो इनसे

1091
01:17:31,000 --> 01:17:35,160
हमें ना किसी से बस हमें धैर्य रखना है ये बोलते रहे इसको इनको इग्नोर कर

1092
01:17:35,160 --> 01:17:39,600
जहां आवश्यकता पड़े हर विषय पर आक के इनको पकट में प्रसिद्धि के लिए यहां पर

1093
01:17:39,600 --> 01:17:43,760
देखना है बड़ी ये सब चीजों को थोड़ा सा नोट डाउन करके और ये

1094
01:17:43,760 --> 01:17:47,960
सब चीज ध्यान रखना उसका समय हमें अपने उसम लगाना है नाम जप में और इन सब चीजों

1095
01:17:47,960 --> 01:17:52,000
में लगाना है मुझे एक बात याद आई जो इससे रेशनल वाले से मेरी बात

1096
01:17:52,000 --> 01:17:56,040
हुई थी जब हम तो इसने यह तैयार

1097
01:17:56,040 --> 01:18:00,160
हो गया था फेस दिखाने के लिए उसके

1098
01:18:00,160 --> 01:18:05,400
बाद ये फेस दिखा पहले बहुत पहले जब चैनल छोटा

1099
01:18:05,400 --> 01:18:09,640
था जब चैनल बहुत छोटा था तब ये फे दिखाने को तैयार

1100
01:18:09,640 --> 01:18:13,760
हो गया था तब भी ये नहीं आया था क्यों नहीं आया था कि

1101
01:18:13,760 --> 01:18:17,760
इसने केवल धर्म के हम डंका बजाते हैं हम डंका

1102
01:18:17,760 --> 01:18:21,800
डंका पीटते हैं हमारे अंदर धर्म नहीं है हम तो धर्म से बाहर है

1103
01:18:21,800 --> 01:18:26,400
मैं तो ऐसे ही खाता हूं मैं ऐसे ही चढ़ता हूं जानवरों तरह

1104
01:18:26,400 --> 01:18:29,960
मैं तो समय आने पर अपने पिता का नाम भी झूठ बोल देता हूं

1105
01:18:29,960 --> 01:18:34,160
हम सर फिर तो बात बिगड़ते ही

1106
01:18:34,160 --> 01:18:38,160
नीचता उतर आता हूं हम सर फिर बिगड़े हुए

1107
01:18:38,160 --> 01:18:43,160
ना बाब [संगीत] है

1108
01:18:43,160 --> 01:18:47,400
चलिए सभी को जय श्री राम आने के लिए जय श्री राम हर हर महादेव

1109
01:18:47,400 --> 01:18:52,400
और भाई तू सुन ले जो बातें बताई है नंबर है

1110
01:18:52,400 --> 01:18:56,600
74836 उस पर कर और यह जो इस

1111
01:18:56,600 --> 01:19:00,640
तरह से आया है ना मुंह चलाते हुए इस तरह से मत आना और दूसरी बात

1112
01:19:00,640 --> 01:19:04,200
यह

1113
01:19:04,200 --> 01:19:08,360
कि अपना स्टैंड क्लियर करना कि तू प्रमाणिक है कि नहीं

1114
01:19:08,360 --> 01:19:12,600
आर समाज की ओर से या तो लिख के दे मैं प्रामाणिक नहीं हूं

1115
01:19:12,600 --> 01:19:16,680
मैं बस फॉलोअर हूं आ समाज का और या फिर यह क कि

1116
01:19:16,680 --> 01:19:21,640
मैं प्रामाणिक हूं ठीक है दोनों में

1117
01:19:21,640 --> 01:19:25,800
समाज की संस्था का प्रामाणिक व्यक्ति नहीं हूं कैसे बच रहा है

1118
01:19:25,800 --> 01:19:29,960
वति का कोई इस व्यक्ति का कोई मतलब ही नहीं है जिसका तीन तीन

1119
01:19:29,960 --> 01:19:35,960
चार चार बार वो सब नाम बदल के किसी भी तरीके से आ रहा उस व्यक्ति से क्या चर्चा

1120
01:19:36,680 --> 01:19:41,200
करेंगे उसका भ्रम तोड़ने दीजिए ना देखिए

1121
01:19:41,200 --> 01:19:45,720
बन आता है व्यक्ति तो हम उससे उस तरह से बात करते हैं कि

1122
01:19:45,720 --> 01:19:49,720
ऐसे बात करें कि उसको बुरा ना लग जाए ये सब बातें ध्यान रखते हुए बात

1123
01:19:49,720 --> 01:19:53,800
करनी पड़ती है अब व्यक्ति जब अब अपना असलियत उसने सामने दिखाई

1124
01:19:53,800 --> 01:19:58,160
है तो आने दो सामने से है ना क

1125
01:19:58,160 --> 01:20:02,320
यहां पर आके कुछ ऐसे शबद सोचते हम दो चार शब्द अंग्रेजी के बोल देंगे तो

1126
01:20:02,320 --> 01:20:06,360
लोग हो जाए अंग्रेजी हमें भी बहुत अच्छे आती है

1127
01:20:06,360 --> 01:20:10,480
हम उस चीजों को प्र अंग्रेजी की आवश्यकता नहीं है हमारी मात्र

1128
01:20:10,480 --> 01:20:14,480
जो भाषा है की भाषा यहा

1129
01:20:14,480 --> 01:20:18,520
पर आ अपने आप समते हो आज

1130
01:20:18,520 --> 01:20:22,000
शाम को लाइव

1131
01:20:22,000 --> 01:20:26,240
है ये रिदम से जिया तक का जो

1132
01:20:26,240 --> 01:20:30,600
तक की यात्रा एक है एक मात्र शक्ति है जिनके जीवन में बहुत परिवर्तन

1133
01:20:30,600 --> 01:20:34,720
आया है कैसे उनके जीवन में सब परिवर्तन आया गायत्री मंत्र का उच्चारण

1134
01:20:34,720 --> 01:20:38,880
प्रणव का उच्चारण उस पर हम लोग बात करेंगे उनका जीवन कैसा था कैसा

1135
01:20:38,880 --> 01:20:43,080
हो गया ये सारी बातें होने वाली है आप सब लोग आज शाम को जरूर जुड़े

1136
01:20:43,080 --> 01:20:47,080
7:00 बजे है आज बकुल सभी को जय श मेरे को ना जय

1137
01:20:47,080 --> 01:20:51,320
श्री राम एक पंक्ति एक पंक्ति मेरे दिमाग में बनी है भैया

1138
01:20:51,320 --> 01:20:55,680
दो लाइनों की एक पंक्ति मेरे दिमाग में आई है प्रभु की कृपा से बोलू एक पंक्ति हा

1139
01:20:55,680 --> 01:21:00,080
बोलिए मतलब दिमाग में प्र की पास से आ गई है बोल देता हूं

1140
01:21:00,080 --> 01:21:02,960
बोलिए जिनकी शक्ति और भक्ति का कभी

1141
01:21:02,960 --> 01:21:07,440
नहीं लगता अनुमान जिनकी शक्ति और भक्ति का कभी नहीं लगता अनुमान

1142
01:21:07,440 --> 01:21:11,520
राम नाम की जो अलग जगह है उनको कहते हैं हनुमान जिनकी शक्ति और

1143
01:21:11,520 --> 01:21:15,600
भक्ति का कभी नहीं लगता अनुमान राम नाम की जो अलग जगह है उनको कहते हैं

1144
01:21:15,600 --> 01:21:16,800
हनुमान क्या

1145
01:21:16,800 --> 01:21:20,960
बात है क्या बात है बोलो बजरंग बली की जय

1146
01:21:20,960 --> 01:21:25,200
जय जय जय जय जय

1147
01:21:25,200 --> 01:21:29,280
जय जय हनुमान साई कृपा करो गुरुदेव की गुद जय श्री राम

1148
01:21:29,280 --> 01:21:33,960
जय श्री राम हर हर महादेव हर

1149
01:21:33,960 --> 01:21:37,960
[संगीत]
