1
00:00:01,780 --> 00:00:07,780
[संगीत]

2
00:00:08,760 --> 00:00:11,640
सभी को जय श्री

3
00:00:11,640 --> 00:00:15,760
राम आज की हमारी जो चर्चा है बहुत ही महत्त्वपूर्ण

4
00:00:15,760 --> 00:00:19,960
विषय पर

5
00:00:19,960 --> 00:00:25,120
है वर्णाश्रम व्यवस्था को

6
00:00:25,120 --> 00:00:29,120
त्यागने की लोग बात कर रहे हैं पहली बात तो यह है कि लोगों के मन

7
00:00:29,120 --> 00:00:33,360
में भ्रम है कि जाति व्यवस्था और वर्णाश्रम व्यवस्था

8
00:00:33,360 --> 00:00:37,560
जो है वोह दोनों अलग अलग है अच्छा

9
00:00:37,560 --> 00:00:41,880
वर्णाश्रम व्यवस्था में जब ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र है

10
00:00:41,880 --> 00:00:45,880
और जाति व्यवस्था में भी यही बात बोली जा रही है कि कोई ब्राह्मण नहीं कोई क्षत्रिय नहीं

11
00:00:45,880 --> 00:00:49,880
सब सभी है तो फिर दोनों में

12
00:00:49,880 --> 00:00:54,120
अंतर क्या मान रहा है व्यक्ति किस बात का अंतर मान रहा है

13
00:00:54,120 --> 00:01:00,120
पहला प्रश्न य आ जाता है दूसरी बात य आ जाती है कि हम

14
00:01:00,400 --> 00:01:04,760
जो बागेश्वर वाले हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी

15
00:01:04,760 --> 00:01:09,160
उनका सम्मान भी करते हैं और उन्होंने

16
00:01:09,160 --> 00:01:13,320
उनको उन्होंने जो वक्तव्य दिए हैं उसके कुछ ऐसे अर्थ हम निकाल सकते थे

17
00:01:13,320 --> 00:01:17,080
कि वह जो है हिंदुओं को एक ही करने

18
00:01:17,080 --> 00:01:21,440
के मकसद से ऐसा बोल रहे हैं कि जाति के नाम पर जो भेदभाव होता

19
00:01:21,440 --> 00:01:25,480
है जो गलत चीजें होती है जाति के नाम पर

20
00:01:25,480 --> 00:01:29,480
कि मैं बड़ा हूं तू छोटा है या घणा मूलक जो

21
00:01:29,480 --> 00:01:34,040
जाति का एक पेश किया जाता है किसी के भी द्वारा अमूमन

22
00:01:34,040 --> 00:01:38,080
ऐसा होता नहीं है मगर एक पिक्चर बनाई जाती है लोगों के मन में उस पर हम बात करेंगे

23
00:01:38,080 --> 00:01:42,520
डिटेल में

24
00:01:42,520 --> 00:01:46,600
तो हमारे साथ कुछ विश्लेषक और है इन विषयों

25
00:01:46,600 --> 00:01:50,720
के मर्मज्ञ वो भी आएंगे और बात करेंगे अलग

26
00:01:50,720 --> 00:01:54,760
तरीके से केवल शास्त्र और प्रमाण के

27
00:01:54,760 --> 00:01:58,920
आधार पर भी तर्क के आधार पर भी और जो प्रासंगिक जो प्रासंगिक वातावरण

28
00:01:58,920 --> 00:02:02,920
बना हुआ है उसके आधार पर हम मैं जो बात कर रहा था कि हम

29
00:02:02,920 --> 00:02:08,000
जो धीरें कृष्ण शास्त्री जी उनका सम्मान करते हैं और

30
00:02:08,000 --> 00:02:12,600
उनको हम एक दे सकते थे इस बात का

31
00:02:12,600 --> 00:02:16,880
क्या कहते हैं उसको शब्द नहीं आ रहा है

32
00:02:16,880 --> 00:02:20,880
मतलब एक प्लस पॉइंट था कि उनकी बातों का य अर्थ हम निकाल सकते थे कि

33
00:02:20,880 --> 00:02:25,720
भाई ऐसे जात पात की विदाई करो जैसा कि आपने नरेट देखा है

34
00:02:25,720 --> 00:02:29,960
ऐसे जात पात की विदाई करो जिसमें की घणा मूलक

35
00:02:29,960 --> 00:02:32,600
उसका रूप जो है अगर कहीं पर है

36
00:02:32,600 --> 00:02:36,640
तो उसकी विदाई करो तो तो ठीक है मगर जब व्यवस्था को ही चरमरा

37
00:02:36,640 --> 00:02:40,680
देंगे तो फिर आप रक्षा किस धर्म की करने की बात कर

38
00:02:40,680 --> 00:02:44,880
रहे हैं प्रश्न ये उठ जाता है जैसे जात पात की करो

39
00:02:44,880 --> 00:02:48,880
विदाई भाई ये बौद्ध ने भी तो यही कहा था जैन ने

40
00:02:48,880 --> 00:02:53,080
भी तो यही कहा था और आज भी जो बहुत सारे ऐसे तंत्र

41
00:02:53,080 --> 00:02:57,240
चल रहे हैं ब्रह्मा कुमारी हो या आर्य समाज हो या

42
00:02:57,240 --> 00:03:01,240
वो भी ये जो वर्ण व्यवस्था का वो है वो कर्म के आधार पर वही करने

43
00:03:01,240 --> 00:03:05,240
की कोशिश करता है कि यह जो वर्गीकरण के द्वारा

44
00:03:05,240 --> 00:03:09,240
जो एक व्यवस्था बनाई जा रही है समाज में उसको हटा दो उसको त्याग कर

45
00:03:09,240 --> 00:03:13,480
दो तो आप एक बात बताइए कि आज क्या

46
00:03:13,480 --> 00:03:17,960
वर्ण व्यवस्था लागू है जो कि बाधक

47
00:03:17,960 --> 00:03:22,120
बन रही है सनातन धर्म की स्थापना में क्या व वर्ण व्यवस्था

48
00:03:22,120 --> 00:03:26,280
लागू है अगर आप अनटचेबिलिटी की करते हो छुआछूत की करते हो

49
00:03:26,280 --> 00:03:30,600
तो क्या आज एक आम नागरिक गोलगप्पे की दुकान पर गोलगप्पे

50
00:03:30,600 --> 00:03:34,760
खाते समय यह चेक करता है कि जो गोलगप्पे खिला रहा है वो

51
00:03:34,760 --> 00:03:39,560
कौन है शूद्र है ब्राह्मण है वैश्य है क्षत्रिय है कौन है नहीं

52
00:03:39,560 --> 00:03:44,040
इसका अर्थ क्या है कि पिछले 200 सालों से

53
00:03:44,040 --> 00:03:47,720
लगभग जब से ये अंग्रेजी सरकार

54
00:03:47,720 --> 00:03:51,960
आई अंग्रेजों ने हमारे ऊपर राज किया तब से वर्णाश्रम

55
00:03:51,960 --> 00:03:56,000
धर्म को बिल्कुल हमारे समाज से वो वर्णाश्रम नाम करह गया

56
00:03:56,000 --> 00:04:00,040
शास्त्रों में रह गया है और जो कुछ अ

57
00:04:00,040 --> 00:04:04,720
जो ढो के ला रहे हैं ना हमारे धर्म को पीछे से परंपरा प्राप्त आचार्य गण

58
00:04:04,720 --> 00:04:08,800
उनके पास रह गया वस्तु स्थिति यह है कि आज

59
00:04:08,800 --> 00:04:12,840
समाज में कहीं पर भी वर्ण व्यवस्था लागू है ही नहीं

60
00:04:12,840 --> 00:04:16,920
तो जब वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है तो आप

61
00:04:16,920 --> 00:04:21,120
समाज के पतन का जो टोपा है वह वर्ण

62
00:04:21,120 --> 00:04:25,680
व्यवस्था के सर पर कैसे पहना रहे हो कि हिंदू जो

63
00:04:25,680 --> 00:04:30,040
विफल हो रहा है वो बट के हो रहा है वो वर्ण व्यवस्था के कारण हो रहा है भाई वण

64
00:04:30,040 --> 00:04:34,280
लागू कहां पर है कौन से क्षेत्र में ऐसा है कौन सा हमारी

65
00:04:34,280 --> 00:04:38,600
ची जहां पर जन्म से जो वो होगा ब्राह्मण वही

66
00:04:38,600 --> 00:04:43,320
ब्राह्मण का कार्य कर रहा होगा बहुत कम रह गया ऐसा

67
00:04:43,320 --> 00:04:48,240
तो यह ऐसा दिखाई दे रहा है जैसे कि आप

68
00:04:48,240 --> 00:04:52,280
जो समस्या नहीं है उसको

69
00:04:52,280 --> 00:04:56,720
जो समस्या है उससे उत्पन्न होने वाले जो उत्पाद

70
00:04:56,720 --> 00:05:01,000
है समस्या से उत्पन्न होने वाले उत्पादों का टोपा

71
00:05:01,000 --> 00:05:02,920
जो समस्या है ही नहीं जो अस्तित्व

72
00:05:02,920 --> 00:05:07,000
में ही नहीं है उसको पहना करके और आप जो है अपनी

73
00:05:07,000 --> 00:05:11,080
किसी तरीके के मंतव्य की पूर्ति करना चाहते हो यही तो दिखाई दे रहा

74
00:05:11,080 --> 00:05:15,120
है भाई वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है तो फिर सनातन समाज के पतन

75
00:05:15,120 --> 00:05:19,120
का कारण कहां से है जब वर्ण व्यवस्था लागू थी तब तो हमें राम

76
00:05:19,120 --> 00:05:23,240
राज्य मिलता था सोने की चिड़िया कहा जाता था देश जैसे

77
00:05:23,240 --> 00:05:27,840
जैसे वर्ण व्यवस्था का हास हुआ है भले ही वो बौद्धों के समय से हो

78
00:05:27,840 --> 00:05:32,200
जहां जहां जैसे जैसे कुटा आत होना शुरू हुआ राजा राम

79
00:05:32,200 --> 00:05:36,440
राजा राम मोहन राय इत्यादि इत्यादि के द्वारा वर्ण व्यवस्था

80
00:05:36,440 --> 00:05:40,440
पर जैसे जैसे दयानंद जी के द्वारा तो जैसे जैसे कोटा घात हो रहा

81
00:05:40,440 --> 00:05:44,960
है वर्ण व्यवस्था इत्यादि पर तब ये पिछले 200 साल में आपको देखने को मिल रहा है ना

82
00:05:44,960 --> 00:05:49,440
हमारे देश का जो बंटवारा पिछले 200 साल में हुआ है

83
00:05:49,440 --> 00:05:53,600
वो उससे पहले था क्या ये सब बातें

84
00:05:53,600 --> 00:05:57,600
सोचने की है अ जो हमारे आज के

85
00:05:57,600 --> 00:06:02,160
आगंतुक हैं अतिथि हैं राघव जी

86
00:06:02,160 --> 00:06:07,000
तो आ गए हैं राघव जी तो पहुंच गए

87
00:06:07,000 --> 00:06:11,400
जी राघव जी जय श्री

88
00:06:11,400 --> 00:06:15,680
राम तो मेरा कहने का पहला सूत्रा क्मक शैली में मैं आपको

89
00:06:15,680 --> 00:06:19,960
बता दूं कि जब वर्ण व्यवस्था आज की डेट में लागू नहीं है तो उसको आप

90
00:06:19,960 --> 00:06:24,040
दोष कैसे दे रहे हो कि वह समाज के पतन का कारण है जिस उसको

91
00:06:24,040 --> 00:06:28,240
जिसको कि आपको दूर कर देना है भाई वास्तविकता यह है कि वर्ण

92
00:06:28,240 --> 00:06:32,360
व्यवस्था लागू नहीं है यह समाज के पतन का कारण है और इसको

93
00:06:32,360 --> 00:06:37,080
आपको दूर करना है और इसमें भी एक फैक्ट फुल बात बता दूं

94
00:06:37,080 --> 00:06:41,440
कि एक लाइन हमारे सुनने में आ रही है कि भाई हिंदू को हिंदू

95
00:06:41,440 --> 00:06:45,640
बनाना है तो ऐसा करना है तो जिनको आप हिंदू बना रहे हो यह

96
00:06:45,640 --> 00:06:49,800
जो जात पात मिटा करके जात पात की व्यवस्था को चरमरा करके जिनको आप हिंदू

97
00:06:49,800 --> 00:06:54,600
बना रहे हो वह हिंदू नहीं है क्या जो उनको हिंदू बना रहे हो आप

98
00:06:54,600 --> 00:06:58,960
क्या बना रहे हो उनको इसका अर्थ यह है कि आप जो हिंदू

99
00:06:58,960 --> 00:07:03,840
परंपरा से चला आ रहा है जो पुराण को मानता है भगवान की रास लीलाओं को मानता है

100
00:07:03,840 --> 00:07:08,280
भगवान श्री कृष्ण वो जो हिंदू है जो परंपरा प्राप्त पुराण वेद उपनिषद

101
00:07:08,280 --> 00:07:12,320
सबको समग्र जो चीजें हमें परंपरा से प्राप्त है सबको मानने वाला जो

102
00:07:12,320 --> 00:07:16,360
हिंदू है उस हिंदू से बचाते हुए आप उसे उस हिंदू

103
00:07:16,360 --> 00:07:21,200
की ओर ले जा रहे हो समाज को जो इन चीजों को नहीं मानता

104
00:07:21,200 --> 00:07:25,360
यही तो कह रहे हो आप तो इसका

105
00:07:25,360 --> 00:07:26,640
अर्थ क्या हुआ

106
00:07:26,640 --> 00:07:30,840
कि आपकी परेशानी है यह वर्ण व्यवस्था है ही नहीं

107
00:07:30,840 --> 00:07:35,200
क्योंकि आर्य समाज भी ऐसी व्यवस्था देता है जो पुराणों

108
00:07:35,200 --> 00:07:39,200
को नहीं मानता है कृष्ण को नहीं मानता है रासलीला को नहीं मानता है भगवान की

109
00:07:39,200 --> 00:07:43,440
बहुत सी चीज जो पुराणों की जो व्याख्या गलत तरीके से करता है और गलत

110
00:07:43,440 --> 00:07:47,560
अर्थ बता कर के पेश कर प्रस्तुत करता है समाज के सामने और एक

111
00:07:47,560 --> 00:07:51,720
नफरत एक द्वेष का भाव उत्पन्न कर देता है समाज के

112
00:07:51,720 --> 00:07:56,040
समाज के अंदर तो आप जो परंपरा से आ रही

113
00:07:56,040 --> 00:08:00,120
जो चीजें हैं व्यक्ति को उनसे बचा

114
00:08:00,120 --> 00:08:04,320
इस नाम पर कि हम जात पात को मिटा रहे हैं जात पात तो मिटी हुई है ऑलरेडी

115
00:08:04,320 --> 00:08:08,600
मिटी हुई है मेरे घर के पास में मंदिर है

116
00:08:08,600 --> 00:08:12,880
हनुमान जी का वहां का जो पुजारी है वह ब्राह्मण

117
00:08:12,880 --> 00:08:15,760
नहीं

118
00:08:15,760 --> 00:08:20,080
है और क्या ही बताऊ मैं आपको

119
00:08:20,080 --> 00:08:24,480
तो जो चीज मिटी हुई है उसको आप उस चीज के मिटे

120
00:08:24,480 --> 00:08:28,680
होने के कारण जो समस्या उत्पन्न हो रही है उन समस्याओं का दोष उस मिटी

121
00:08:28,680 --> 00:08:33,560
हुई चीज को आप दे रहे हो जिसको जीवंत करने का प्रयास हम लोग कर रहे हैं

122
00:08:33,560 --> 00:08:39,240
समाज को बचाने के लिए धर्म को बचाने के

123
00:08:39,240 --> 00:08:45,240
लिए तब तक हम कुछ बातें कर लेते

124
00:08:45,840 --> 00:08:49,960
हैं दोनों पर एक हमसे दूर है और एक

125
00:08:49,960 --> 00:08:54,440
साथ उसके साथ कैसे रहे जिसने गाली दी

126
00:08:54,440 --> 00:08:58,680
और पता नहीं कौन सा कहां से प्रत्याशित

127
00:08:58,680 --> 00:09:04,680
कर लिया

128
00:09:05,280 --> 00:09:09,480
तो सबसे पहली बात तो यह हो गई कि जिस वर्ण व्यवस्था से आप मुक्त

129
00:09:09,480 --> 00:09:13,880
करने का समाज को कह रहे हैं कि हम मुक्त कराएंगे समाज को

130
00:09:13,880 --> 00:09:17,680
उससे ऑलरेडी समाज मुक्त

131
00:09:17,680 --> 00:09:21,920
है तो उसके मुक्त होने के कारण

132
00:09:21,920 --> 00:09:25,960
जो विकृति उत्पन्न हो रही है समाज का उससे जो मुक्त होने के कारण जो

133
00:09:25,960 --> 00:09:30,040
समाज में जो विकृति उत्पन्न हो रही है उन विकृतियों का भी

134
00:09:30,040 --> 00:09:34,880
टोपा जो है पहना रहे हो आप वर्ण व्यवस्था के ऊपर जाति व्यवस्था के

135
00:09:34,880 --> 00:09:38,880
ऊपर तो यह एक ठीक बात

136
00:09:38,880 --> 00:09:42,760
दिखाई नहीं देती

137
00:09:42,760 --> 00:09:47,080
और और भी बातें हैं जो आज हम करने वाले हैं ढेर सारी अभी

138
00:09:47,080 --> 00:09:51,240
मैं आपको एक बात बता दूं कि यहां पर आने से पहले ही कुछ देर

139
00:09:51,240 --> 00:09:54,280
पहले

140
00:09:54,280 --> 00:09:58,280
ही ये मुझे एक रामपाल वाले का

141
00:09:58,280 --> 00:10:03,240
फोन आया रामपाल वाले की तरफ से यह कह रहे हैं जातिवादी शंकराचार्य

142
00:10:03,240 --> 00:10:08,000
जाति धर्म कुल धर्म शाश्वत बोला जा रहा है भगवत गीता में

143
00:10:08,000 --> 00:10:11,640
तो वह भी जातिवादी है अब

144
00:10:11,640 --> 00:10:15,880
हसो है ना एक वार्ता हुई थी एक जगह

145
00:10:15,880 --> 00:10:19,920
हम हिंदू राष्ट्र गोष्ठी के लिए गए थे हाथरस में वहां पर

146
00:10:19,920 --> 00:10:24,080
एक सज्जन थे जो जातिवाद से दिक्कत है तो उनके साथ एक वार्ता हुई

147
00:10:24,080 --> 00:10:28,120
है बहुत कट टू कट टू द पॉइंट वार्ता है और उसको लेखनी के

148
00:10:28,120 --> 00:10:32,240
माध्यम से हुई तो खैर जो उस समय माइक भी लगे

149
00:10:32,240 --> 00:10:36,360
हुए थे तो माइक उस समय काम नहीं

150
00:10:36,360 --> 00:10:41,200
कर पाया जिसकी वजह से रिकॉर्ड नहीं हो पाई तो आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके

151
00:10:41,200 --> 00:10:45,560
मगर उसको रिटन में नोट

152
00:10:45,560 --> 00:10:49,840
किया गया है तो उसकी पीडीएफ प्राप्त है यहां इसके डिस्क्रिप्शन

153
00:10:49,840 --> 00:10:54,120
में वीडियो के डिस्क्रिप्शन में हम उसको डाल देंगे तो आप लोग पढ़िए

154
00:10:54,120 --> 00:10:58,520
टू द पॉइंट है और बहुत ही मतलब सरल भाषा में तो आप आसानी से एक

155
00:10:58,520 --> 00:11:02,560
उसपे पहुच पाएंगे आयुषी गुप्ता जी

156
00:11:02,560 --> 00:11:06,440
क्या प्रश्न है आपका पूछ

157
00:11:06,440 --> 00:11:10,640
लीजिए तब तक मैं ऑपरेटर महोदय से कहूंगा कि राघव जी से संपर्क करते

158
00:11:10,640 --> 00:11:15,080
हुए जो आतिश जी आज आने वाले हैं उनसे संपर्क साधे और

159
00:11:15,080 --> 00:11:18,840
उनको यहां पर

160
00:11:18,840 --> 00:11:24,160
लाए आयुषी गुप्ता जी बताए

161
00:11:24,160 --> 00:11:30,160
क्या क्वेश्चन है आपका

162
00:11:33,680 --> 00:11:38,560
हां यह बात आप सही कह रहे हैं कि धीरें जी ने

163
00:11:38,560 --> 00:11:42,600
हिंदुओं को एक करने के लिए ऐसा बोला है हम लोग भी ऐसा ही अर्थ

164
00:11:42,600 --> 00:11:46,680
निकालना चाहते थे उनकी बात का मगर जब मैंने सर्च किया

165
00:11:46,680 --> 00:11:51,000
तो उनका एक वक्तव्य आया कि पुजारी भी बनेगा

166
00:11:51,000 --> 00:11:55,080
जात पात के आधार पर घृणा जो फैलाई जा रही है

167
00:11:55,080 --> 00:11:59,240
उसको दूर करना तो ठीक है उसकी विदाई करना

168
00:11:59,240 --> 00:12:03,320
करना ठीक है मगर जब आप उसको एज इट इज जो जात

169
00:12:03,320 --> 00:12:07,400
जो वर्ण व्यवस्था है जो जाति धर्म है उसको आप बुलाकर के

170
00:12:07,400 --> 00:12:12,240
आप ही जो परंपरा प्राप्त लोग हैं आप कहते हो कि आप

171
00:12:12,240 --> 00:12:14,280
उनसे जुड़े हुए हो

172
00:12:14,280 --> 00:12:18,400
आप जो हमारा रामानंद संप्रदाय रामचरित

173
00:12:18,400 --> 00:12:22,480
मानस जिन के रचयिता है इसमें तुलसीदास जी हैं क्या ये लोग

174
00:12:22,480 --> 00:12:26,640
जाति जाती धर्म को मिटा देने वाले लोग थे जाति धर्म का को विदाई करने

175
00:12:26,640 --> 00:12:30,800
वाले लोग थे अच्छा एक बहुत सिंपल सी बात है सब लोग

176
00:12:30,800 --> 00:12:35,080
कहते कर्म से कर्म से वो वाली बातें बहुत बार हो चुकी है और धीरे धीरे आज की लाइव

177
00:12:35,080 --> 00:12:39,160
में भी हम लोग करते रहेंगे मगर एक बात बताइए कि

178
00:12:39,160 --> 00:12:43,160
क्या कोई इले देखिए कर्म के आधार पर जब हम सिलेक्शन करेंगे

179
00:12:43,160 --> 00:12:47,160
ना सीधे कर्म के आधार पर तो पहली बात तो व्यवस्था नहीं

180
00:12:47,160 --> 00:12:51,440
रह जाएगी फिर भी मैं कह रहा हूं क्या राम राज्य में

181
00:12:51,440 --> 00:12:55,520
श्री रामचंद्र जी का जो अभिषेक होने जा रहा था उसके लिए

182
00:12:55,520 --> 00:13:01,400
कोई इलेक्शन हुआ था कोई कंपटीशन हुआ था कि नहीं हुआ था

183
00:13:01,400 --> 00:13:06,280
किस आधार पर उनका जो है राज्य अभिषेक होने जा रहा था

184
00:13:06,280 --> 00:13:10,600
वंश परंपरा के आधार पर ना और वह हटे तब भी कोई कंपटीशन

185
00:13:10,600 --> 00:13:15,160
नहीं हुआ जब उन्हें वनवास जाना पड़ गया भरत बने

186
00:13:15,160 --> 00:13:19,400
और वापस आ गए तो फिर वह बने क्यों नहीं वहां एक इलेक्शन

187
00:13:19,400 --> 00:13:24,200
एक कंपटीशन रखा गया कि कर्म के आधार पर चुना जाएगा

188
00:13:24,200 --> 00:13:28,600
भाई तो जन्म से नॉमिनेशन

189
00:13:28,600 --> 00:13:34,600
व्यक्ति का जन्म किस कुल परंपरा में हो रहा है उसके आधार पर उसका नॉमिनेशन

190
00:13:40,480 --> 00:13:44,640
होगा हां जी जी जी सही कह रहे हो आप वह भी हमने

191
00:13:44,640 --> 00:13:48,760
देखा उन्होंने यह भी कहा है कि रोटी रोटी बेटी के बारे

192
00:13:48,760 --> 00:13:54,240
में और उन्होंने यह भी कह दिया कि मंदिरों में पुजारी भी जो है व होने

193
00:13:54,240 --> 00:13:58,440
चाहिए जो अमुक अमुक वर्ग है वो भी बन सकता है तो इन सबसे

194
00:13:58,440 --> 00:14:02,840
बातें उनकी जो बातें हैं वह कुल मिलाकर उधर ही जा रही है

195
00:14:02,840 --> 00:14:07,560
जिधर जाने से हम रोकना चाहते हैं जिधर

196
00:14:07,560 --> 00:14:11,560
जाने से उनकी बातों का अर्थ हम य नहीं निकालना चाहते कि उधर जाती हुई

197
00:14:11,560 --> 00:14:15,720
उनकी बातें हम नहीं निकालना चाहते मगर उन्होंने तो क्लियर कर दिया

198
00:14:15,720 --> 00:14:19,880
जो शास्त्रोक्त शास्त्र सम्मत जो बातें हैं वह

199
00:14:19,880 --> 00:14:24,440
नहीं है उनकी ना अच्छा एक तरफ व कहते हैं मैं उनकी थोड़ा सा प्रकाश

200
00:14:24,440 --> 00:14:29,520
डालूंगा एक तरफ कहते हैं कि शंकराचार्य सनातन धर्म के प्रधानमंत्री है

201
00:14:29,520 --> 00:14:33,640
धर्म क्या होता है तुमको क्या करना है और क्या नहीं

202
00:14:33,640 --> 00:14:38,160
करना यही धर्म है बहुत सरल भाषा में अगर क

203
00:14:38,160 --> 00:14:42,480
धर्म यह है आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है तो जब सनातन

204
00:14:42,480 --> 00:14:46,840
धर्म के प्रधानमंत्री जो हैं वह यह कह रहे हैं कि जो वर्णाश्रम

205
00:14:46,840 --> 00:14:51,120
धर्म है उसी से हमारे हमारा उत्थान हो सकता है उसी से हम बच सकते हैं

206
00:14:51,120 --> 00:14:55,960
तो जब आप स्वयं स्वीकार करते हैं कि व प्रधानमंत्री तो फिर यह अवेल

207
00:14:55,960 --> 00:14:59,960
क्यों क्या कारण है उस अ वेलना का यह सोचने

208
00:14:59,960 --> 00:15:04,040
वाली बात है विचार करने वाली बात क्यों अलना आप एक

209
00:15:04,040 --> 00:15:08,240
तरफ कहते हैं कि भाई वह सनातन धर्म के प्रधानमंत्री है और उनके जैसा

210
00:15:08,240 --> 00:15:12,440
शास्त्र एकदम एकदम शास्त्रोक्त बात निकलती है उनके मुख से

211
00:15:12,440 --> 00:15:16,440
और सबसे ज्यादा पूज्य हमारे लिए प्रधानमंत्री कहते हैं आप अपने

212
00:15:16,440 --> 00:15:20,640
स्वयं इतनी निष्ठा आपकी अपने स्वयं के गुरु को प्रधानमंत्री

213
00:15:20,640 --> 00:15:26,640
नहीं कहते आप आप प्रधानमंत्री शंकराचार्य को कहते हैं

214
00:15:27,960 --> 00:15:32,840
और इस पर भी शंकराचार्य को प्रधानमंत्री आप कहते हैं

215
00:15:32,840 --> 00:15:36,960
फिर भी शंकराचार्य के जो वचन है आपके लिए कोई मान नहीं रखते या आपके

216
00:15:36,960 --> 00:15:42,440
कानों में नहीं पढते चलिए आपने स्वयं उस पर वो नहीं

217
00:15:42,440 --> 00:15:46,560
किया खोजबीन नहीं की कि क्या है क्या नहीं है मगर शंकराचार्य के

218
00:15:46,560 --> 00:15:51,120
वचनों को तो आप मानते हैं ना तो आप कैसे विरुद्ध चले गए

219
00:15:51,120 --> 00:15:55,440
अच्छा दूसरी एक बात यह भी है कि एक तरफ ये कहते हैं

220
00:15:55,440 --> 00:15:59,720
शंकराचार्य जो है प्रधानमंत्री है सनातन धर्म के फिर दूसरी

221
00:15:59,720 --> 00:16:03,800
तरफ इनके पास गौतम खट्टर जी आते हैं गौतम खट्टर

222
00:16:03,800 --> 00:16:08,040
कौन है अच्छा एक तरफ यह भी कहते कि हनुमान जी के लिए ऐसा बोलने वाले गलत

223
00:16:08,040 --> 00:16:11,160
है राधा जी के लिए ऐसा बोलने वाले गलत य भी मानते

224
00:16:11,160 --> 00:16:15,960
हैं मूर्ति पूजा य भी करते हैं मगर एक दिन इनके पास आते गौतम खट्टर जी

225
00:16:15,960 --> 00:16:19,960
गौतम खट्टर जी क्या लेकर चलते हैं अपने हाथ में सत्यार्थ प्रकाश

226
00:16:19,960 --> 00:16:24,240
लोगों को प्रेरित करते हैं सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने के लिए

227
00:16:24,240 --> 00:16:28,440
आप अपने चैनल से उस व्यक्ति को प्रमोट कर रहे हैं जो उस किताब

228
00:16:28,440 --> 00:16:32,640
को बेच ने वाला व्यक्ति है उस किताब का प्रचार

229
00:16:32,640 --> 00:16:36,840
करने वाला व्यक्ति है जिस किताब में लिखा हुआ है कि मूर्ति पूजा करना अधर्म है

230
00:16:36,840 --> 00:16:39,320
पाप

231
00:16:39,320 --> 00:16:43,440
है शिव भगवान के लिए इतनी अनर्गल बातें लिखी हुई

232
00:16:43,440 --> 00:16:48,360
है राधा जी के लिए इतनी बातें लिखी हुई है उसी प्रधानमंत्री के लिए पोप पंडे पाखंडी

233
00:16:48,360 --> 00:16:52,360
यह सब लिखा हुआ है तो ये क्या है

234
00:16:52,360 --> 00:16:57,000
यह दोहरा दोहरी बात नहीं है तो और क्या है

235
00:16:57,000 --> 00:17:00,560
धर्म का रास्ता कठिन होता है

236
00:17:00,560 --> 00:17:04,720
कठिन होता है निर्णय लेना कठिन होता है इसीलिए भगवान ने

237
00:17:04,720 --> 00:17:09,040
कहा था तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण

238
00:17:09,040 --> 00:17:13,160
है तू शास्त्र से मत हिलना बहुत सिचुएशन आएंगी तरह तरह

239
00:17:13,160 --> 00:17:17,360
की इधर उधर की समझ नहीं आएगा क्या करना है इसीलिए

240
00:17:17,360 --> 00:17:23,360
शास्त्र शास्त्र में लिखी बात मान निष्ठा

241
00:17:24,040 --> 00:17:28,200
रखो अब एक बात यह है कि लोग कहते हैं कि अंधविश्वास

242
00:17:28,200 --> 00:17:32,240
नहीं करना चाहिए अध विश्वास नहीं करना चाहिए तो अंध अविश्वास भी तो

243
00:17:32,240 --> 00:17:36,600
नहीं करना चाहिए अगर अंध विश्वास नहीं करना चाहिए

244
00:17:36,600 --> 00:17:42,480
गुरुदेव का वचन है अं अविश्वास भी नहीं करना

245
00:17:42,480 --> 00:17:48,480
चाहिए कई बार हम लोग अलजेब्रा इत्यादि में गणित में

246
00:17:50,240 --> 00:17:54,320
ऐसे प्रॉब्लम को सॉल्व करते तो वहां पर एक्स स्क्वा वा स्क्वा

247
00:17:54,320 --> 00:17:59,400
वगैरह को मानक ले लेते हैं उपाद उपाधि दे कर के चलते हैं

248
00:17:59,400 --> 00:18:03,440
कि माना किय ये है माना कि ये है और उसको लेकर के चलने पर हमारा

249
00:18:03,440 --> 00:18:07,560
जो है परिणाम हमें प्राप्त हो जाता है जो प्रामाणिक होता है जब

250
00:18:07,560 --> 00:18:11,960
छत बन रही होती है ना आरसीसी की तो उसमें एक नकली छत

251
00:18:11,960 --> 00:18:16,200
एक सपोर्ट के लिए नकली दीवारें पहाड़ बांधते हैं ना बनाई

252
00:18:16,200 --> 00:18:20,520
जाती है और उससे वह प्रामाणिक छत प्रामाणिक दीवारें

253
00:18:20,520 --> 00:18:24,680
प्राप्त हो जाती है जो हमें प्राप्त करनी है तो वह क्या

254
00:18:24,680 --> 00:18:29,680
है वहां पर विश्वास

255
00:18:29,680 --> 00:18:33,840
तो इसी प्रकार से विश्वास भी होता है जो आपको उस जगह

256
00:18:33,840 --> 00:18:38,000
तक पहुंचा देता है जहां आप तर्क से नहीं पहुंच पा रहे

257
00:18:38,000 --> 00:18:41,640
है

258
00:18:41,640 --> 00:18:45,800
ना तो एक तरफ यह कहते हैं

259
00:18:45,800 --> 00:18:49,840
शंकराचार्य हमारे लिए पूज्य है परम पूज्य हैं प्रधानमंत्री हैं एक तरफ

260
00:18:49,840 --> 00:18:54,920
यह कहते हैं कि एक तरफ यह उसको क्या कहते

261
00:18:54,920 --> 00:18:59,280
हैं गौतम खट्टर को अपने यहां पर बुलाते हैं और प्रमोट कर

262
00:18:59,280 --> 00:19:03,280
और गौतम कट्टर कौन है जो जिनकी पूजा

263
00:19:03,280 --> 00:19:07,400
य कर रहे हैं उन पूजा हों का खंडन करने वाला जो पूजा यह कर रहे

264
00:19:07,400 --> 00:19:12,040
हैं उन पूजा का खंडन करने वाला गौतम खट्टर

265
00:19:12,040 --> 00:19:16,400
और चलो वह हिस्सा भी हटा दो मगर वह गौतम खट्टर तो बैठ

266
00:19:16,400 --> 00:19:20,440
मंच पर चढ़ चढ़ के शंकराचार्य को क्रिटिसाइज करता है कि आज

267
00:19:20,440 --> 00:19:24,920
के शंकराचार्य क्या कर रहे हैं यह कर रहे हैं वो कर रहे क्योंकि उनका तो जन्म ही शंकराचार्य

268
00:19:24,920 --> 00:19:29,200
के क्रिटिसाइज करने से ही हुआ है शंकराचार्य

269
00:19:29,200 --> 00:19:33,480
को क्रिटिसाइज करने से ही बहुत सारी संस्थाए जो फली फूली है

270
00:19:33,480 --> 00:19:39,480
बहुत सारी इस कन हर पन्ना खोलो

271
00:19:42,400 --> 00:19:46,440
मायावादी रहे हो ज्ञान गंगा पढ़ो गीता तेरा ज्ञान

272
00:19:46,440 --> 00:19:50,960
अमृत पढ़ो पहले दूसरे तीसरे चौथे पेज पर शंकराचार्य का विरोध

273
00:19:50,960 --> 00:19:55,800
उसको आवश्यकता नहीं पड़ी और किसी आचार्य का नाम लेने की

274
00:19:55,800 --> 00:20:00,280
क्योंकि हिंदू धर्म का अर्थ ही है सनातन धर्म का ही है

275
00:20:00,280 --> 00:20:03,240
शंकराचार्य

276
00:20:03,240 --> 00:20:07,240
मगर ठीक है इन बातों को साइड

277
00:20:07,240 --> 00:20:11,360
रख देते हैं मगर वो जब एक तरफ आप कह रहे हो कि जब

278
00:20:11,360 --> 00:20:15,480
शंकराचार्य मेरे लिए प्रधानमंत्री परम पूज्य हैं ये हैं वो बहुत अच्छी बात है बहुत अच्छी

279
00:20:15,480 --> 00:20:19,480
बात है उसके बाद फिर गौतम खट्टर को आप प्रमोट कर रहे हो जो मूर्ति पूजा का

280
00:20:19,480 --> 00:20:23,720
विरोधी है जो मूर्ति पूजा के को अधर्म कहता है पाप कहता है और वही गौतम

281
00:20:23,720 --> 00:20:27,880
खट्टर उन्हीं शंकराचार्य जी को जो है क्रिटिसाइज करता है मंच से खंडन

282
00:20:27,880 --> 00:20:31,960
करता है उनका निराधार निराधार होता है

283
00:20:31,960 --> 00:20:36,960
तब केवल जैसे यह

284
00:20:36,960 --> 00:20:41,400
जो तर्क रहित बातें करते हैं यह जो नव सवादी

285
00:20:41,400 --> 00:20:45,560
है तथाकथित स्वघोषित आचार्य प्रशांत जैसे

286
00:20:45,560 --> 00:20:49,800
य बे सिर पैर की बातें जो तर्क दिया करते हैं उसी

287
00:20:49,800 --> 00:20:53,840
तरीके के बे सिर पैर के तर्को के आधार पर यह लोग बहुत बाबाई

288
00:20:53,840 --> 00:20:57,560
लूटते हैं शंकराचार्य का खंडन के नाम पर अब फिर आप लास्ट

289
00:20:57,560 --> 00:21:01,640
में कह देते हो कि मैं मैं तोय मैं तो अपने छोटे भाई को देख रहा हूं गौतम

290
00:21:01,640 --> 00:21:05,720
खट्टर के रूप में मैं तो स्वयं को देख रहा हूं गौतम खट्टर के रूप में

291
00:21:05,720 --> 00:21:09,840
यानी कि आप क्या हो आप शंकराचार्य को पूज्य मानने वाले हो शंकराचार्य

292
00:21:09,840 --> 00:21:14,120
को फॉलो करने वाले हो या आप गौतम खट्टर के रूप में शंकराचार्य का विरोध

293
00:21:14,120 --> 00:21:18,760
करने वाले हो ये सोचने वाली बात

294
00:21:18,760 --> 00:21:23,320
है अरे भाई धर्म को बचाने के लिए हम अधर्मी

295
00:21:23,320 --> 00:21:28,200
नहीं बन जाएंगे कुछ चीजें तो पकड़ के चलनी ही पड़ेंगी ना

296
00:21:28,200 --> 00:21:32,280
सब चीजें थोड़ी ना छोड़

297
00:21:32,280 --> 00:21:37,040
दे कुछ चीजें तो पकड़ के चलनी पड़ेंगी ना हा इसको नहीं छोड़ेंगे भाई

298
00:21:37,040 --> 00:21:41,080
ठीक है धर्म रक्षा के लिए इतना कॉम्प्रोमाइज ठीक है इतना कॉम्प्रोमाइज इतना कॉम्प्रोमाइज कुछ

299
00:21:41,080 --> 00:21:45,440
चीजें तो होंगी ना जो पकड़ के रखनी है मां का मतलब

300
00:21:45,440 --> 00:21:49,600
मां बहन का मतलब बहन कि कल को कॉम्प्रोमाइज वो

301
00:21:49,600 --> 00:21:54,320
हिंदू धर्म का नाम बचाने के लिए इनको भी छोड़ दे क्या

302
00:21:54,320 --> 00:21:58,680
नहीं छोड़ सकते ना कुछ चीजें होंगी जिनके लिए हमें प्रतिवाद होना पड़ेगा

303
00:21:58,680 --> 00:22:03,280
नहीं इसमें परिवर्तन नहीं आएगा वो कौन सी चीजें हैं

304
00:22:03,280 --> 00:22:07,320
भाई जिस जिस चीज से आपको दिक्कत लग रही दिखाई दे रही जबक उससे दिक्कत

305
00:22:07,320 --> 00:22:11,360
है नहीं बौद्धों से शुरुआत

306
00:22:11,360 --> 00:22:16,120
होती है जाति व्यवस्था का जाति व्यवस्था को नकारने

307
00:22:16,120 --> 00:22:20,280
की और जैसे ही शुरुआत होती वहीं से हमारे यह जो भारत

308
00:22:20,280 --> 00:22:24,400
भारतवर्ष है इसपे संकट

309
00:22:24,400 --> 00:22:28,520
है आपसी युद्ध होते थे

310
00:22:28,520 --> 00:22:33,240
अगर ऐसा युद्ध नहीं होता था

311
00:22:33,240 --> 00:22:37,400
बाहे मेरे ख्याल से उनको आने में कोई समस्या हो रही

312
00:22:37,400 --> 00:22:43,400
जिससे कि वह आ नहीं पा

313
00:22:48,400 --> 00:22:52,560
रहे तो राघव जी आ चुके हैं

314
00:22:52,560 --> 00:22:56,040
राघव जी आप

315
00:22:56,040 --> 00:23:02,040
बोले जी राघव जी

316
00:23:07,840 --> 00:23:13,840
राघव जी

317
00:23:16,040 --> 00:23:22,040
बोले जी जय श्री राम आवाज आ रही आवाज आ रहीम

318
00:23:23,000 --> 00:23:27,040
जी जी बोलिए हां

319
00:23:27,040 --> 00:23:31,120
तो मैं जी मैं कहना चाहता हूं कि श्रीमान धीरेन

320
00:23:31,120 --> 00:23:35,480
कृष्ण शास्त्री जी यदि अभी उन्होंने हाल ही में जो वक्तव्य

321
00:23:35,480 --> 00:23:40,360
दिया कि मंदिरों में अब ब्राह्मण पुजारी भी होना चाहिए

322
00:23:40,360 --> 00:23:44,480
अब वह जात की भी करवा रहे हैं तो यदि जात

323
00:23:44,480 --> 00:23:48,840
पात की वे विदाई करवा रहे हैं और सभी को

324
00:23:48,840 --> 00:23:52,880
पंडित बनाने की बात कर रहे तो क्या यह एक इनके

325
00:23:52,880 --> 00:23:57,440
हिसाब से नवीन जातिवाद को पैदा करने वाली बात तो नहीं हो रही

326
00:23:57,440 --> 00:24:01,840
क्योंकि जातिवाद बाद तो कैसे आपके इन लोगों के नजरिए

327
00:24:01,840 --> 00:24:06,000
में कैसे पनक पाए कार्य विशेष को लेकर के तो

328
00:24:06,000 --> 00:24:10,080
आप यदि कार्य विशेष में दूसरों की सह भागीदारी कर रहे हैं

329
00:24:10,080 --> 00:24:11,240
पंडितों की कार्य

330
00:24:11,240 --> 00:24:15,240
में तो फिर क्या करना चाहते हैं आप कि पंडित उनके काम

331
00:24:15,240 --> 00:24:19,240
करें यदि पंडित उनके काम करें तो जो ऑलरेडी सब

332
00:24:19,240 --> 00:24:23,360
अपने अपने काम कर रहे हैं उस व्यवस्था को आप बिगाड़ना क्यों चाहते इसकी

333
00:24:23,360 --> 00:24:27,480
स्पष्टता उन्होंने करनी चाहिए और अभी दो तीन दिन दो

334
00:24:27,480 --> 00:24:31,640
तीन महीने पहले उन्होंने शंकराचार्य जी को जब बुलाया था और

335
00:24:31,640 --> 00:24:35,920
उन्होंने उद्घोष किया था कि हमने हिंदू राष्ट्र बनाने की प्रेरणा

336
00:24:35,920 --> 00:24:39,920
इनके बयान इनके वक्तव्य से ही ली है

337
00:24:39,920 --> 00:24:44,440
तो फिर क्या उन्होंने शंकराचार्य जी के वचनों को नहीं सुना

338
00:24:44,440 --> 00:24:48,600
यदि नहीं सुना तो फिर यह ऐसा क्यों कर रहे हैं यह कुछ समझ

339
00:24:48,600 --> 00:24:52,600
में नहीं आता और यह कह रहे हैं कि गौतम खट्टर

340
00:24:52,600 --> 00:24:56,600
जी इनकी फोटोकॉपी है जबकि जिनकी कथा यह सुनाते हैं

341
00:24:56,600 --> 00:25:01,000
गौतम खट्टर जी इन्हीं के मंचों पर करके उन अवतारों का खंडन कर जाते

342
00:25:01,000 --> 00:25:05,520
हैं तो इसका मतलब यह धार्मिक है

343
00:25:05,520 --> 00:25:09,600
यह रामानंद संप्रदाय से जुड़े हैं इसी परंपरा प्राप्त गुरु के शिष्य

344
00:25:09,600 --> 00:25:13,760
हैं यह मनमुक व्याख्या करने वालों के चेले बनकर घूम रहे हैं

345
00:25:13,760 --> 00:25:18,480
यह स्पष्ट भी उनको कर देना चाहिए मेरी आवाज आ रही है

346
00:25:18,480 --> 00:25:21,720
जी बिल्कुल

347
00:25:21,720 --> 00:25:26,120
आ इसी क्रम में जैसे पूर्व में अपनी बात हुई थी

348
00:25:26,120 --> 00:25:30,600
कि आज आज समाज में में बहुत कुछ

349
00:25:30,600 --> 00:25:34,840
भारत का समाज झेल रहा है अब वो जब झेल रहा है

350
00:25:34,840 --> 00:25:39,800
तो अपने अपने तरीके से अव्यवस्थाओं कु व्यवस्थाओं का रोना रोता है

351
00:25:39,800 --> 00:25:43,880
लेकिन जैसा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी और अन्य चाहते हैं जात

352
00:25:43,880 --> 00:25:48,840
पात की विदाई वाली बात तो भारतीय समाज

353
00:25:48,840 --> 00:25:54,520
जात पात की विदाई हो चुकी है

354
00:25:54,520 --> 00:26:00,520
जी उसी

355
00:26:01,080 --> 00:26:07,080
स था कति ज्ञाप वाद माना जाता

356
00:26:20,840 --> 00:26:26,840
जी आवाज नहीं आ रही राघव जी आपकी

357
00:26:29,960 --> 00:26:35,440
आपको एक मजे की बात बताऊं जैसे कि अभी राघव जी ने एक बात कही

358
00:26:35,440 --> 00:26:39,480
कि हमारे समाज में आप नॉर्मली देखिए जहां भी आप जाते

359
00:26:39,480 --> 00:26:43,600
हैं क्या आप आप जो एक सामान्य नागरिक है उसकी बात मैं कर रहा

360
00:26:43,600 --> 00:26:47,800
हूं क्या वह य देखता है कि मैं किससे क्या ले रहा हूं किससे मिल रहा हूं कौन है क्या है

361
00:26:47,800 --> 00:26:52,400
जाति व्यवस्था कहां है अच्छा

362
00:26:52,400 --> 00:26:57,040
तो दूसरी बात यह है कि

363
00:26:57,040 --> 00:27:01,080
अभी आप देखो कि हम हमारे यहां पर देश में जितने भी शीर्ष के लोग हैं

364
00:27:01,080 --> 00:27:05,360
जिसको हर कोई फॉलो करना चाहता है जितने भी शीर्ष

365
00:27:05,360 --> 00:27:09,280
के लोग हैं वह नेता हो अभिनेता

366
00:27:09,280 --> 00:27:13,480
हो कलाकार म्यूजिशियन हो आईएएस हो

367
00:27:13,480 --> 00:27:17,520
आईपीएस हो यह जितने भी शीर्स पर रहने वाले लोग हैं इवन कोचिंग

368
00:27:17,520 --> 00:27:21,600
बड़ी बड़ी यह सब लोग वर्णाश्रम को ना

369
00:27:21,600 --> 00:27:26,360
मानने वाले लोग

370
00:27:26,360 --> 00:27:30,720
है तो कहां पर किस रूप में वह वर्णाश्रम व्यवस्था

371
00:27:30,720 --> 00:27:34,760
है जो आपको चुप रही है कुल मिलाकर के यह दिखाई दे रहा

372
00:27:34,760 --> 00:27:38,880
है कि ले दे कर के जो ये कुछ मठ है रामानुजाचार्य के मठ हो गए मधवा

373
00:27:38,880 --> 00:27:43,320
चार्य के मठ हो गए शंकराचार्य के मठ हो गए इन मठों में जो कुछ आचार्य

374
00:27:43,320 --> 00:27:47,320
गण जो बच गए हैं जोय चार पांच मट बच गए चार पांच

375
00:27:47,320 --> 00:27:51,360
परंपराएं हैं जो अपने धर्म को लेकर आ

376
00:27:51,360 --> 00:27:55,800
रही है सदियों से इन मठों पर अब आपका अतिक्रमण है

377
00:27:55,800 --> 00:27:59,800
इससे आपको समाज सुधार दिख रहा है मतलब प्रधानमंत्री को क्यों

378
00:27:59,800 --> 00:28:04,000
मानते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री की शैली को प्रधानमंत्री के ज्ञान

379
00:28:04,000 --> 00:28:08,280
को प्रधानमंत्री की हर चीज को बदल देना इसलिए मानते हैं

380
00:28:08,280 --> 00:28:12,360
ऐसे नहीं बोलना चाहिए जब हम एक भीड़

381
00:28:12,360 --> 00:28:16,520
को संबोधित कर रहे होते तो हमें ध्यान रखना है कि हम क्या कह रहे हैं किससे कह रहे हैं कौन कौन

382
00:28:16,520 --> 00:28:21,200
हमें सुन रहा है आते जी आ चुके

383
00:28:21,200 --> 00:28:24,280
बहुत बहुत स्वागत है आप जी आपका जय श्री

384
00:28:24,280 --> 00:28:29,040
राम जी जय श्री राम जी

385
00:28:29,040 --> 00:28:33,160
तो दर्शकों को मैं थोड़ा सा आप स्वयं ही बता दें अपने बारे

386
00:28:33,160 --> 00:28:37,440
में मैं तो बोल ही चुका हूं आप भी थोड़ा सा बता दे और

387
00:28:37,440 --> 00:28:41,720
फिर हम आगे फिर बात करते

388
00:28:41,720 --> 00:28:45,880
जी कलकाता से का रहने वाला हूं मूलत

389
00:28:45,880 --> 00:28:50,200
बिहार से हूं जी जी

390
00:28:50,200 --> 00:28:54,440
और धर्म का कार्य करना चाहता हूं कुछ सोच

391
00:28:54,440 --> 00:28:59,640
विचार रखता हूं इस माम जी

392
00:28:59,640 --> 00:29:03,960
बहुत बढ़िया अच्छा ये एक बात जैसे एक बात कही गई है जो

393
00:29:03,960 --> 00:29:08,280
उसी पर हम लोग आज चर्चा कर रहे हैं जात पात की करो विदाई जैसे मान लीजिए

394
00:29:08,280 --> 00:29:12,320
जो हमारे मुख्य मुख्य शहर है जो जितना भी हमारा जो ऐसा ऐसी

395
00:29:12,320 --> 00:29:16,360
जगह है वहां पर कोई वर्णाश्रम आज लागू नहीं है हो सकता है

396
00:29:16,360 --> 00:29:20,840
किसी गली कूचे में किसी गांव में किसी रूरल एरियाज

397
00:29:20,840 --> 00:29:25,040
में बच गया हो मगर क्या यह जो नारा दिया जा रहा है जात

398
00:29:25,040 --> 00:29:29,280
पात की करो विदाई क्या विशेष तौर पर वहां के लिए है तो ये किस

399
00:29:29,280 --> 00:29:33,520
जात पात की विदाई करने की बात कह रहे हैं लोग जो जात पात

400
00:29:33,520 --> 00:29:37,640
जो जो जात पात आज अस्तित्व में रही नहीं गई है और जिसके ना

401
00:29:37,640 --> 00:29:39,440
रहने का यह दोष है जो आज हम पतन

402
00:29:39,440 --> 00:29:43,440
देख रहे हैं क्षति देख रहे हैं समाज की जो उसके ना

403
00:29:43,440 --> 00:29:47,840
रहने पर जिस उससे जो उत्पन्न होने वाली जो विकृतियां है उन्हीं विकृतियों का

404
00:29:47,840 --> 00:29:52,040
दोष जो चीज नहीं है जिसके कारण वह विकृति उत्पन्न

405
00:29:52,040 --> 00:29:56,160
हो रही है उसी को पहनाया जा रहा है तेरे ही कारण है तो इस पर

406
00:29:56,160 --> 00:30:00,240
आप अपना क्या विचार रखते वो थोड़ा सा बताए जात पात की

407
00:30:00,240 --> 00:30:04,360
करो क्या विधाई ये तो ऑलरेडी सब कोई करके बैठे हुए हैं

408
00:30:04,360 --> 00:30:08,600
और जितना जात पात से दूर जाएंगे

409
00:30:08,600 --> 00:30:13,280
उतना ही अपना अनिष्ट बुला के

410
00:30:13,280 --> 00:30:17,400
लाएंगे जैसे आप मैं बंगाल से हूं तो बंगाल

411
00:30:17,400 --> 00:30:21,760
में एक बात खूब चलता है कि देश का जब बंटवारा

412
00:30:21,760 --> 00:30:25,960
हुआ था तो बंगालियों और पंजाबियों का बंटवारा कर दिया गया और

413
00:30:25,960 --> 00:30:30,000
इसका दोष नेहरू के नाम पर एक्चुअली हिंदुओं को दिया जाता है

414
00:30:30,000 --> 00:30:34,160
कि हिंदी भाषी लोगों ने ऐसा करवाया था यह कम्युनिस्ट की एक चाल

415
00:30:34,160 --> 00:30:38,160
है तो मेरा यह कहना है कि जब आप लोग यह

416
00:30:38,160 --> 00:30:42,640
समझ रहे हो कि बंगाल और पंजाब का बटवारा हुआ किसी और प्रांत का नहीं हुआ

417
00:30:42,640 --> 00:30:46,760
तो उनको यह भी तो समझना चाहिए कि बंगाल और पंजाब में ही उस काल

418
00:30:46,760 --> 00:30:51,200
में जाति को लेकर सभी कोई उल्टा

419
00:30:51,200 --> 00:30:54,600
बात करने लग गए थे कि जाति ही सबसे खराब चीज होती है जाति को छोड़ देना

420
00:30:54,600 --> 00:31:00,560
चाहिए जाति को जिस राज्य ने छोड़ा वो बद

421
00:31:00,560 --> 00:31:04,680
हो जाति को छोड़ना क्यों है

422
00:31:04,680 --> 00:31:09,160
किस लिए है क्योंकि

423
00:31:09,160 --> 00:31:13,960
दरअसल हम आज के डेट में जो भी जीविका करते हैं

424
00:31:13,960 --> 00:31:18,080
जिस जो भी जीविका करने के लिए मजबूर है उसमें

425
00:31:18,080 --> 00:31:22,120
जाति की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि हम जहां पर भी नौकरी करते

426
00:31:22,120 --> 00:31:26,120
हैं या जो भी कार्य करते हैं वह कार्य करवाने वाला

427
00:31:26,120 --> 00:31:30,720
कोई एक कंपनी तंत्र है और कंपनी की तो अपनी जाति होती नहीं

428
00:31:30,720 --> 00:31:35,760
तो व अपने यहां पर काम करने वालों की जातियों से उसका क्या लेना

429
00:31:35,760 --> 00:31:40,280
देना और जैसे ही हम किसी नौकरी में चले जाते हैं

430
00:31:40,280 --> 00:31:45,080
तो हमारी जाति खत्म हो गई यह

431
00:31:45,080 --> 00:31:49,920
लोग चूंकि अपनी जातिया कर्म करने के लिए अब

432
00:31:49,920 --> 00:31:54,200
उनके पास कोई स्कोप नहीं है और ऐसे होते हुए भी

433
00:31:54,200 --> 00:31:58,360
इतने साल गुजर गए चार पांच जनरेशन तो आराम से निकल ज्यादा

434
00:31:58,360 --> 00:32:02,800
भी हो सकते हैं तो इतने

435
00:32:02,800 --> 00:32:06,880
जनरेशन के बाद लोग भूल गए हैं कि हम जाति व्यवस्था में क्यों थे उसका

436
00:32:06,880 --> 00:32:10,720
रहने का क्या अच्छाइयां था अच्छाइयां

437
00:32:10,720 --> 00:32:14,880
थी आज के डेट में अगर हम नौकरी के लिए ही सोचते

438
00:32:14,880 --> 00:32:19,240
हैं कि भाई पढ़ाई लिखाई क्यों कर र है नौकरी करने के लिए पढ़ाई लिखाई

439
00:32:19,240 --> 00:32:23,280
क्यों करना है आर्थिक दृष्टिकोण से सफल होने

440
00:32:23,280 --> 00:32:29,280
के लिए पर आर्थिक दृष्टिकोण क्या है अर्थ क्या है

441
00:32:30,160 --> 00:32:34,880
अर्थ के लिए सबसे पहले लोग

442
00:32:34,880 --> 00:32:39,080
पैसे रुपए पैसे को मानते हैं रुप आज के रेट में जो रुपया पैसा

443
00:32:39,080 --> 00:32:43,240
है ुद उसकी अपनी जाति विकृत हो चुकी है अगर

444
00:32:43,240 --> 00:32:47,240
कोई हिस्ट्री ऑफ मनी पढ़े तो रुपए पैसे

445
00:32:47,240 --> 00:32:51,480
की भी एक जाति होती है

446
00:32:51,480 --> 00:32:55,560
विच मटेरियल कैन बिकम फिट टू बी अ

447
00:32:55,560 --> 00:32:59,760
मनी हम सोना को पैसा मानते हैं ना सोना

448
00:32:59,760 --> 00:33:04,160
को क्यों मानते हैं आलू को क्यों नहीं मानते हैं इसके

449
00:33:04,160 --> 00:33:08,840
पीछे कुछ कारण है क्यों सोना को ही पैसा माना गया है

450
00:33:08,840 --> 00:33:13,440
तो सोना में हर वो गुण है जिसके कारण व पैसा बन सकता है

451
00:33:13,440 --> 00:33:17,440
वह पैसे की जाति के हिसाब से एकदम सही है पर यह कागज का जो

452
00:33:17,440 --> 00:33:21,640
नोट जिसे हम आज पैसा मान रहे हैं उसमें पैसा बनने का कोई गुण

453
00:33:21,640 --> 00:33:25,680
नहीं है उसकी जाति पैसों की रुपयों की है ही

454
00:33:25,680 --> 00:33:26,680
नहीं

455
00:33:26,680 --> 00:33:30,680
तो हम लोग जब वाले अर्थ को ही अर्थ मान रहे हैं तो हमारी तो

456
00:33:30,680 --> 00:33:35,440
अपनी जाति होगी हम समझेंगे नहीं की जाति क्या

457
00:33:35,440 --> 00:33:40,680
ब

458
00:33:40,680 --> 00:33:44,880
बढ़िया बहुत सारी बातें इतने सारे विषय

459
00:33:44,880 --> 00:33:49,160
है और इतने सारे अलग अलग आयाम है और सब एक दूसरे

460
00:33:49,160 --> 00:33:53,160
से जुड़े हुए हैं और हम लोग ज्यादातर आयाम और विषय के बारे

461
00:33:53,160 --> 00:33:57,280
में के मूल सिद्धांतों के बारे में भी नहीं जानते ऐसे

462
00:33:57,280 --> 00:34:03,280
में से कोई बात कह देना बहुत गलत है

463
00:34:03,520 --> 00:34:07,680
जी अच्छा एक ये जो बात आती है मैं

464
00:34:07,680 --> 00:34:11,680
इस पर अपनी बात बता दू की जैसे कुछ लोग कहते कि

465
00:34:11,680 --> 00:34:16,000
नहीं कर्म से होती है जाती कि व्यक्ति

466
00:34:16,000 --> 00:34:20,200
जन्म से कुछ और होगा मगर वह जो कर्म करेगा उसके अनुसार उसकी

467
00:34:20,200 --> 00:34:24,400
जाति हो जाएगी तो इस बारे में हम लोग बहुत सारी चीजें

468
00:34:24,400 --> 00:34:28,480
कह चुके हैं मगर केवल सिर्फ तर्क परही बात करले प्रमाण प तो

469
00:34:28,480 --> 00:34:33,360
फिर वो वाली बात आ जाएगी कि हम जो प्रमाण दिखाएंगे उसका अ कुछ और निकालते क्या कहे

470
00:34:33,360 --> 00:34:39,080
चिरिया चिरिया खाना में रहने से शेर बिल्ली हो जाता है

471
00:34:39,080 --> 00:34:44,000
क्या नहीं मगर मैं यह सोचता हूं

472
00:34:44,000 --> 00:34:48,280
कि जो व्यवस्था है व्यवस्था का भी परवन कहीं ना कहीं

473
00:34:48,280 --> 00:34:52,400
एक सुनियोजित वातावरण से है व्यवस्था

474
00:34:52,400 --> 00:34:56,960
का अर्थ है एक सुनियोजित वातावरण और सुनियोजित अर्थात

475
00:34:56,960 --> 00:35:01,840
उसमें सीमाएं हैं कि एक ऐसा वातावरण

476
00:35:01,840 --> 00:35:06,120
जिसमें हमने जो सीमाएं बना दी हैं उन सीमाओं के अंदर की चीजें

477
00:35:06,120 --> 00:35:10,320
होंगी उन सीमाओं के बाहर की चीजें नहीं होंगी अर्थात व्यवस्था का मतलब

478
00:35:10,320 --> 00:35:14,640
यह हो गया कि यह होगा और यह नहीं होगा

479
00:35:14,640 --> 00:35:18,720
जी है ना अगर हम कर्म के अनुसार यह

480
00:35:18,720 --> 00:35:22,800
बहुत बड़ा एक टॉपिक आ जाता है जब हम लोग जाति व्यवस्था की विदाई की बात कर तो कर्म के

481
00:35:22,800 --> 00:35:27,160
अनुसार यदि हम लोग मान लेते हैं कि व्यवस्था हो सकती

482
00:35:27,160 --> 00:35:31,400
तो क्या वो उस व्यवस्था का परवन एक व्यवस्था

483
00:35:31,400 --> 00:35:35,560
के रूप में देखा जा सकता है जैसे अभी आपने बात कही ना कि सोना सोने

484
00:35:35,560 --> 00:35:39,960
में सोने के गुण है व सारे गुण है जिससे उसको मनी माना जा सके

485
00:35:39,960 --> 00:35:44,040
मनी उसको मनी के रूप में माना जागर जो कागज का नोट है उसम वो गुण

486
00:35:44,040 --> 00:35:48,360
नहीं है फिर भी वो उस चीज को उसम अपनाया

487
00:35:48,360 --> 00:35:52,400
जा रहा है तो इसी प्रकार से ये जो कर्म

488
00:35:52,400 --> 00:35:54,240
के अनुसार जो वर्ण व्यवस्था

489
00:35:54,240 --> 00:35:58,640
है यह वास्तविक तौर पर वण व्यवस्था है नहीं

490
00:35:58,640 --> 00:36:02,800
और इसी का तो नतीजा है आज अपने चारों और जो आप विकृति देख रहे

491
00:36:02,800 --> 00:36:07,080
हैं समाज में अब ऐसी बातों का क्या कहे

492
00:36:07,080 --> 00:36:11,360
कभी ऐसा लगता है खर मैं भी यह सब बातें अपने यंग

493
00:36:11,360 --> 00:36:15,720
टाइम में बोला करता था नहीं समझता था आजकल तो ऐसा लगता है कि

494
00:36:15,720 --> 00:36:19,840
इन सब बातो का क्या जवाब दे कोई कहे आसमान का रंग

495
00:36:19,840 --> 00:36:23,120
लाल

496
00:36:23,120 --> 00:36:27,680
है पानी भगाता नहीं है तो फिर इस बात का क्या जवाब हो सकता है

497
00:36:27,680 --> 00:36:31,960
के अनुसार जाति अरे जाति जाति होती है कर्म कर्म होता है

498
00:36:31,960 --> 00:36:35,280
आप एक बात

499
00:36:35,280 --> 00:36:40,600
बताइए पिता का धन पुत्र को मिलना चाहिए या नहीं मिलना

500
00:36:40,600 --> 00:36:44,680
चाहिए बिल्कुल मिलना चाहिए क्यों अगर

501
00:36:44,680 --> 00:36:48,760
उसम वो आवारा है तो नहीं नहीं वो बगल वाले

502
00:36:48,760 --> 00:36:53,560
को पहले गुण कर्म देके उसको दे फिर हा गही ना

503
00:36:53,560 --> 00:36:57,720
मेरे परोस का एक लड़का अच्छा है और मेरा बच्चा आवारा है तो

504
00:36:57,720 --> 00:37:02,320
मैं अपनान परोस वाले को दे दूं

505
00:37:02,320 --> 00:37:06,400
फिर फिर तो सेकंड सेकंड ऑप्शन आ जाएगा

506
00:37:06,400 --> 00:37:10,560
भाई पति मेरा कर्म ठीक से करता नहीं है कोई और लड़का है वो

507
00:37:10,560 --> 00:37:14,800
अच्छा कर्म करता पति के रूप में तो क्या उसको पति मान ले

508
00:37:14,800 --> 00:37:19,120
अरे जी कुछ भी बोल रहे

509
00:37:19,120 --> 00:37:23,360
हैं इसमें एक ये भी बात है कि जैसे ये

510
00:37:23,360 --> 00:37:28,120
कर्म के अनुसार परवन अगर होगा तो जैसे भगवान ने कहा हे अर्जुन जा

511
00:37:28,120 --> 00:37:32,440
तेरा धर्म है युद्ध करना तो कर्म के अनुसार जो जाति

512
00:37:32,440 --> 00:37:37,400
को हम अगर वर्ण को अगर हम स्वीकार करने भी लगेंगे तो फिर

513
00:37:37,400 --> 00:37:41,400
उस वर्ण आधारित जो धर्म होगा उसके लिए हम किसी को बाध्य

514
00:37:41,400 --> 00:37:45,400
कैसे करेंगे क्योंकि वह तो अपना मन मन के अनुसार

515
00:37:45,400 --> 00:37:49,600
कर्म करके और अपना धर्म धर्म बदल लेगा और उसको

516
00:37:49,600 --> 00:37:50,480
वह धर्म बदलने

517
00:37:50,480 --> 00:37:54,600
का विकल्प हमने दे रखा है मतलब की

518
00:37:54,600 --> 00:37:59,040
जसे जैसे अभी हम हमने बात कहा ना

519
00:37:59,040 --> 00:38:04,680
कि पिता का धन पुत्र को मिलना चाहिए या नहीं मिलना चाहिए

520
00:38:04,680 --> 00:38:08,800
अगर सच्चे इस्लाम की बात की जाए माने जो

521
00:38:08,800 --> 00:38:13,680
आधार था इस्लाम का यहां तक कि अली को

522
00:38:13,680 --> 00:38:17,880
नेक्स्ट खलीफा नहीं माना गया अबू बकर को माना गया इसके

523
00:38:17,880 --> 00:38:23,360
पीछे लॉजिक यही था कि पिता का धन पुत्र को नहीं मिलना

524
00:38:23,360 --> 00:38:27,640
चाहिए अच्छा उनका कहना था कि जो मुसलमान

525
00:38:27,640 --> 00:38:31,880
लोग लूट खोट के जो भी पैसा ला रहे हैं वह तो

526
00:38:31,880 --> 00:38:36,720
धर्म का पैसा हुआ तो चलो मान ली

527
00:38:36,720 --> 00:38:41,240
कोई एक मोमिन अच्छा है उसने बहुत सारा काफिरो को लूट लिया तोब

528
00:38:41,240 --> 00:38:46,120
उसके मरने के बाद उसका पैसा उसके बेटे को जाएगा या समाज में बटेगा

529
00:38:46,120 --> 00:38:50,440
क्योंकि उसके बेटे ने तो जिहाद किया नहीं था जिहाद

530
00:38:50,440 --> 00:38:54,560
तो बाकियों ने किया है तो इस्लाम के हिसाब से पिता

531
00:38:54,560 --> 00:38:58,760
का धन पुत्र को नहीं मिलना चाहिए वकफा कारण

532
00:38:58,760 --> 00:39:03,080
भी यही है कि हर व्यक्ति का अपना संचित

533
00:39:03,080 --> 00:39:05,520
धन उसके मृत्यु के बाद

534
00:39:05,520 --> 00:39:09,680
धर्म को जाएगा और कुछ हिस्सा वो अपने बच्चों को भी दे सकता है तो पूरा

535
00:39:09,680 --> 00:39:13,720
हिस्सा बच्चे को देने के लिए वो वक बोर्ड बनाकर उसका मतवाली अपने बच्चे को बना

536
00:39:13,720 --> 00:39:17,920
देता है तो उस तरह से वो ये र बैक डोर पॉलिसी

537
00:39:17,920 --> 00:39:22,040
निकाला गया है तो उ वही बात यहां पर आती है

538
00:39:22,040 --> 00:39:26,080
जी मतलब आपका कहने का मतलब है कि इस्लाम की जो मूल संरचना है वो

539
00:39:26,080 --> 00:39:30,360
भी वर्णाश्रम के विरोध में हां मल इस

540
00:39:30,360 --> 00:39:34,440
तो विरोध में है सक्सेशन एक्ट में पर

541
00:39:34,440 --> 00:39:38,760
हां लेकिन कहने का मतलब क्या है अल्टीमेटली अली

542
00:39:38,760 --> 00:39:42,800
खलीफा बना अल्टीमेटली अबू सुफियान के

543
00:39:42,800 --> 00:39:46,880
बच्चों का ही वंश चला जो सुनी

544
00:39:46,880 --> 00:39:51,480
लोग कहते थे कि वंश नहीं चलना चाहिए उन्होंने भी अपना ही वंश चलाया

545
00:39:51,480 --> 00:39:55,960
तो वो कहने से नहीं होता वो प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है

546
00:39:55,960 --> 00:40:00,440
जी हा और सार का क्या मतलब होता है

547
00:40:00,440 --> 00:40:04,240
मतलब कुछ भी बोल सकते

548
00:40:04,240 --> 00:40:08,720
हैं जैसे एक एग्जांपल अभी देता हूं

549
00:40:08,720 --> 00:40:12,720
आजकल यह फेमिनिज्म का मैटर बहुत चल रहा है हमारे बड़े

550
00:40:12,720 --> 00:40:17,240
बड़े कोर्ट के बड़े बड़े जज भी उल्टा सीधा बोल देते हैं अब

551
00:40:17,240 --> 00:40:20,560
कोई अगर मन से माने कि वो लड़की है चाहे व पुरुष के रूप में जन्म

552
00:40:20,560 --> 00:40:24,600
लिया हो तो आज का कानून व्यवस्था धीरे धीरे

553
00:40:24,600 --> 00:40:29,360
य हमें समझाना चाहता है कि वो मन से लड़की तो उसे लड़की मान लो

554
00:40:29,360 --> 00:40:33,840
अब एक पुरुष लड़कियों के हॉस्टल में चला गया

555
00:40:33,840 --> 00:40:37,880
ये कह के कि मैं अपने आप को लड़की मानता हूं और फिर वहां किसी के साथ उसने

556
00:40:37,880 --> 00:40:42,760
दुष्कर्म कर दिया जबरदस्ती यह केस हुआ है

557
00:40:42,760 --> 00:40:46,840
तो भाई मनमाना तरीका से करो इसमें ये वाला भी

558
00:40:46,840 --> 00:40:51,600
हुआ है कि एक एकने बोला मैं मन से अपने को लड़की मानता हूं तो उसको

559
00:40:51,600 --> 00:40:55,840
लड़की घोषित कर दिया गया उसने जो है ओलंपिक शायद उसमें भाग

560
00:40:55,840 --> 00:40:59,720
लिया और

561
00:40:59,720 --> 00:41:04,920
यों को पटक दिया

562
00:41:04,920 --> 00:41:09,480
अ नहीं ऐसा ऐसा हुआ है

563
00:41:09,480 --> 00:41:13,760
लड़कियों के हॉस्टल में वो लड़का लड़की बनके रह रहा है और वहां

564
00:41:13,760 --> 00:41:18,040
पर रहते हुए उसने अपने रूम मेट का या हॉस्टल की किसी दूसरी लड़की

565
00:41:18,040 --> 00:41:22,320
के साथ दुष्कर्म किया और वो दुष्कर्म

566
00:41:22,320 --> 00:41:26,360
का केस कोर्ट में आया तो वहां पर यह कहा जा रहा है

567
00:41:26,360 --> 00:41:31,160
कि चकि वो लड़की तो दुष्कर्म कैसे कर सकता है

568
00:41:31,160 --> 00:41:35,360
पता नहीं उसका जजमेंट अभी मुझे ध्यान में पूरा केस चल ही रहा है

569
00:41:35,360 --> 00:41:39,760
तो भाई अगर मन माने तरीके से हर चीज करोगे तो जन को मानना ही नहीं

570
00:41:39,760 --> 00:41:45,280
है तो फिर यह तो क्या कह

571
00:41:45,280 --> 00:41:49,440
मैंने एक आ स्पद बात थी अगर सनातन धर्म

572
00:41:49,440 --> 00:41:54,320
के दृष्टिकोण से अगर देखे फिलहाल तो

573
00:41:54,320 --> 00:41:58,520
इसका परवन अगर कर्म के अनुसार मान लेते तो इसका पसान

574
00:41:58,520 --> 00:42:02,560
किस व्यवस्था में होता है सोच के देखिए कि यह व्यवस्था की इसलिए जा

575
00:42:02,560 --> 00:42:06,720
रही है कि जब हमें आवश्यकता पड़े कि हमें ब्राह्मण की आवश्यकता है क्षत्रिय की आवश्यकता

576
00:42:06,720 --> 00:42:10,840
है तो हम उसको आसानी से ढूंढ सके इसलिए हमारे यहां पर नाम

577
00:42:10,840 --> 00:42:15,040
तक डिवाइड किए गए कि अगर ब्राह्मण हो वो ऐसा नाम रखे जिससे वोह जल्दी

578
00:42:15,040 --> 00:42:19,200
पहचान में आए अगर हमें ब्राह्मण की आवश्यकता है क्षत्रिय की आवश्यकता जल्दी

579
00:42:19,200 --> 00:42:23,400
पहचान में आए तो इसलिए नाम को भी डिवाइड किया गया कि वो ऐसे नाम रखे

580
00:42:23,400 --> 00:42:27,440
वो ऐसे नाम रखे टीका भी डिवाइड किया गया वो ऐसा का

581
00:42:27,440 --> 00:42:31,600
लगाए वो लगा है ना ये मतलब बहुत सारी

582
00:42:31,600 --> 00:42:35,880
सिंबल्स है जो डिवाइड कर दिए गए कि जिससे कि वो व्यवस्था

583
00:42:35,880 --> 00:42:40,160
में जल्दी से काम आए अब मैंने एक आर्य समाज

584
00:42:40,160 --> 00:42:44,680
की एक महिला थी माता शक्ति उनसे मैंने कहा था पूछा था

585
00:42:44,680 --> 00:42:48,880
कि वह सिचुएशन कैसी है कि भाई मैं मैं यह सोच मैं आज तक जानता हूं

586
00:42:48,880 --> 00:42:53,360
कि यह व्यक्ति ब्राह्मण है या क्षत्रिय है और मैं छत्री के पास गया रक्षा

587
00:42:53,360 --> 00:42:57,520
रक्षा के विषय से जल्दी चलो डाका डाला जा रहा है आपकी आवश्यकता

588
00:42:57,520 --> 00:43:00,480
रक्षा करो अब वो क्षत्रिय बोलता है भाई

589
00:43:00,480 --> 00:43:04,560
पाच मिनट पहले तुमने थोड़ा सा दीर कर दी मैंने पाच मिनट पहले कर्म कर लिया ब्राह्मण का

590
00:43:04,560 --> 00:43:08,840
मैं अभी भी ब्राह्मण हो गया हूं तो यह कैसा धर्म है

591
00:43:08,840 --> 00:43:12,880
जो अपने धर्म को त्यागने का विकल्प दे रहा है व्यक्ति को यह कैसी

592
00:43:12,880 --> 00:43:17,600
व्यवस्था है और जब धर्म को त्यागने की व्यवस्था थी ही

593
00:43:17,600 --> 00:43:21,600
तो ऐसे धर्म को मानने के लिए बाध्य करते भगवान श्री कृष्ण

594
00:43:21,600 --> 00:43:25,600
अर्जुन को हे अर्जुन जा तू क्षत्रिय है तेरा धर्म

595
00:43:25,600 --> 00:43:30,040
है रक्षा करना जा के युद्ध कर रक्षा कर मैंने

596
00:43:30,040 --> 00:43:34,600
आपको एक लेख भेजा है

597
00:43:34,600 --> 00:43:39,920
नौकरी का इतिहास नौकरी का इतिहास जी

598
00:43:39,920 --> 00:43:44,240
तो दरअसल जब यूरोपियन लोग अपने

599
00:43:44,240 --> 00:43:48,480
यूरोप से बाहर निकले दुनिया में अनजान जगहों पर जाकर लूटपाट करके

600
00:43:48,480 --> 00:43:52,640
वहां से धन इकट्ठा करने के लिए तो वो लूटपाट के लिए उनको नौकरों

601
00:43:52,640 --> 00:43:57,320
की आवश्यकता थी कोई भी लुटेरा गैंग होता है तो उसको

602
00:43:57,320 --> 00:44:01,360
लुटेरे गैंग में बहुत सारे लोगों की आवश्यकता पड़ती है ना तो

603
00:44:01,360 --> 00:44:05,360
पहले क्या होता था कि लोग अपने कुछ दोस्त दोस्तों को एकत्र कर लिए और

604
00:44:05,360 --> 00:44:09,680
कहीं पर जाकर लूटपाट कर लिए तो यूरोप में एक सिद्धांत

605
00:44:09,680 --> 00:44:13,680
बना कि हम लोग कुछ कंपनी खोल लेंगे और कंपनी

606
00:44:13,680 --> 00:44:15,480
में लोगों को नौकरी देंगे और

607
00:44:15,480 --> 00:44:19,520
उनका नौकरी में काम ही होगा कि दूसरे जगह पर जाकर लूटपाट करके व से धन इकट

608
00:44:19,520 --> 00:44:22,960
करके ला

609
00:44:22,960 --> 00:44:27,440
अच्छा ईस्ट इंडिया कंपनी का क्या काम था वो

610
00:44:27,440 --> 00:44:31,440
जहां भी गया लूटपाट किया ईस्ट इंडिया कंपनी के अलावा और भी जितने

611
00:44:31,440 --> 00:44:36,280
ईस्ट इंडिया कंपनी या उस समय जो भी कंपनिया यूरोप में बना

612
00:44:36,280 --> 00:44:40,400
जो अफ्रीका में गया दक्षिण अमेरिका में गया ऑस्ट्रेलिया में गया

613
00:44:40,400 --> 00:44:45,040
भारत में तो आया ही और भी अलग जगह पर गया उनका काम क्या था लूटपाट करना

614
00:44:45,040 --> 00:44:51,040
पर वहां पर वो लूटपाट करते कौन थे जो उन कंपनियो की नौकरी

615
00:44:51,720 --> 00:44:56,120
करते और एक बात है एक किसी अंग्रेज

616
00:44:56,120 --> 00:45:00,960
इतिहासकार का एक बहुत फेमस कोट है

617
00:45:00,960 --> 00:45:05,120
शायद सीटी बॉक्सर नाम था अभी ध्यान में नहीं आ रहा उसने कहा

618
00:45:05,120 --> 00:45:09,240
था थर्ड वर्ल्ड इज द बेस्ट प्लेस फॉर द

619
00:45:09,240 --> 00:45:13,160
यूरोपियन टू सेंड देर बास्टर्ड्स

620
00:45:13,160 --> 00:45:17,400
आपने टी लोरेंस का नाम सुना होगा जिसने इस्लामिक वर्ल्ड

621
00:45:17,400 --> 00:45:21,440
का राजनैतिक नक्शा तैयार किया था आज जो

622
00:45:21,440 --> 00:45:25,640
हम मिडिल ईस्ट में इस्लामिक दुनिया का जो भी नक्शा देख रहे

623
00:45:25,640 --> 00:45:29,640
हैं कि कहां पर कौन सा देश है यह सारा प्लान टी लॉरेंस

624
00:45:29,640 --> 00:45:34,320
का बनाया हुआ था और टी लॉरेंस जैसे हजारों

625
00:45:34,320 --> 00:45:39,160
या बहुत सारे मिलिट्री स ऑफिसर थे अंग्रेजी

626
00:45:39,160 --> 00:45:43,280
सेना में जो किसी राजा के किसी बहुत बड़े बैरन

627
00:45:43,280 --> 00:45:47,360
के नाजायज औलाद थे ये हर बड़ा

628
00:45:47,360 --> 00:45:51,560
जो भी पैसे वाला लोग था राज परिवार का हो या कोई बहुत बड़े

629
00:45:51,560 --> 00:45:55,760
धनाढ्य परिवार का उनके घर में जो नौकरा निया काम करती थी उन नौकरा

630
00:45:55,760 --> 00:46:00,120
नियों से इनके संताने होती थी और इन्हीं संतानों को

631
00:46:00,120 --> 00:46:04,160
यह लोग अपने फौज में टॉप पोजीशन देकर दूसरे देश में

632
00:46:04,160 --> 00:46:08,560
भेजते थे मार्केट करने के लिए लूटपाट करने के लिए

633
00:46:08,560 --> 00:46:13,360
क्योंकि जिस व्यक्ति का जन्म का ठीक ना हो

634
00:46:13,360 --> 00:46:17,960
वह बहुत आसानी से कुछ भी गलत कर जाता है

635
00:46:17,960 --> 00:46:21,960
फिर धीरे-धीरे जब उनको इसमें सफलता मिलने लग गया तो उनको यह भी पता चल गया कि

636
00:46:21,960 --> 00:46:26,000
हमारे देश में इतने ज्यादा मने जार पुत्र

637
00:46:26,000 --> 00:46:30,120
नहीं है या इतने सारे लोग नहीं है जिनको हम नौकरी दे सके तब इन्होंने अपनी

638
00:46:30,120 --> 00:46:35,800
रचना रची कि भाई जिस देश को हम लूटेंगे वहीं से लोगों को नौकरियां

639
00:46:35,800 --> 00:46:40,200
देंगे और ये नौकरी आप हां ताकि भाई

640
00:46:40,200 --> 00:46:44,320
वो हमें मान लीजिए भारत को छोड़ दीजिए एक छोटा सा कोई देश मान

641
00:46:44,320 --> 00:46:48,320
लीजिए मान लीजिए नाइजीरिया को लूटना है तो नाइजीरिया को लूटने के लिए

642
00:46:48,320 --> 00:46:52,960
हमारे फ्रांस में ज्यादा व्यक्ति नहीं है तो नाइजीरिया के कुछ लोगों को नौकरी पर रख लो

643
00:46:52,960 --> 00:46:57,880
वो लोग हमारा होकर लूटने में मदद करेंगे फिर

644
00:46:57,880 --> 00:47:02,040
आज के डेट में बहुत लोग कॉरपोरेट वर्ल्ड की बात करते हैं कि रे हमारे यहां तो इतने

645
00:47:02,040 --> 00:47:06,080
धना से धन्ना सेठ लोग हैं इनका कंपनी इतना बड़ा हो

646
00:47:06,080 --> 00:47:10,720
गया यह हो गया वो हो गया तो ज्यादातर

647
00:47:10,720 --> 00:47:15,160
कॉरपोरेट फैमिलीज का हिस्ट्री यह है कि इनके

648
00:47:15,160 --> 00:47:19,280
पूर्वज इनके परदादा के परदादा लोग ईस्ट इंडिया

649
00:47:19,280 --> 00:47:23,440
कंपनी का जितना इलीगल ट्रेड था उस समय

650
00:47:23,440 --> 00:47:23,940
भी

651
00:47:23,600 --> 00:47:28,160
और आज भी चाहे वो ड्रग्स का स्मगलिंग हो

652
00:47:28,160 --> 00:47:32,400
चाहे ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो उसमें उनकी हिस्सेदारी थी

653
00:47:32,400 --> 00:47:36,960
बिरला फैमिली रविंद्रनाथ ठाकुर का फैमिली

654
00:47:36,960 --> 00:47:41,120
यह लोग सब उस समय के अफीम के बिजनेस में इनके

655
00:47:41,120 --> 00:47:45,600
पार्टनर थे टाटा का भी वही हाल

656
00:47:45,600 --> 00:47:49,840
है तो इन्होंने हा इन लोगों का

657
00:47:49,840 --> 00:47:53,880
अपना जो जिन लोगों से इन्होने अपना

658
00:47:53,880 --> 00:47:58,240
सारा इलीगल धंधा करवाया हम कहते कपनी ने हमारे ऊपर अत्याचार

659
00:47:58,240 --> 00:48:02,400
किया तोव अत्याचार करने में जिन लोगों ने उनको हेल्प किया उनके

660
00:48:02,400 --> 00:48:06,520
लिए इन्होंने बड़े बड़े कॉरपोरेट बॉडी बनाकर उनको बैठा के

661
00:48:06,520 --> 00:48:10,560
गए हम इसीलिए किसी भी कॉर्पोरेट बॉडी से धर्म के

662
00:48:10,560 --> 00:48:14,760
लिए उनके जेब से पैसा नहीं निकलता है क्योंकि उनका तो पैसा

663
00:48:14,760 --> 00:48:20,760
मिला ही है का काम

664
00:48:21,120 --> 00:48:25,920
करके एक प्रश्न आ रहा है मैं कुछ बातें इसम बीच में बोल दू

665
00:48:25,920 --> 00:48:29,960
जी जी जैसे बोल रहे हैं कि रक्षा पुलिस करेगी क्षत्रिय कहां से आ

666
00:48:29,960 --> 00:48:34,280
गया भाई तो इस यही तो हम बता रहे हैं कि आज के टाइम

667
00:48:34,280 --> 00:48:38,280
में जो वर्ण व्यवस्था है वो जन्म से लागू ही

668
00:48:38,280 --> 00:48:42,280
नहीं है वो डिपार्टमेंट खोल दिए गए बस वो आपको करेगा तो फिर

669
00:48:42,280 --> 00:48:46,480
किस जात पात की विदाई कर रहे हो वही तो हम कह रहे हैं अभी

670
00:48:46,480 --> 00:48:51,160
हा अभी दो बहुत नया घटना है

671
00:48:51,160 --> 00:48:55,240
एकदम नया घटना है और इसी से पता चल जाता है कि पुलिस हमारी रक्षा कर रही है या नहीं कर

672
00:48:55,240 --> 00:48:59,880
रही है जी एक तो कोलकाता का आरजी करर का घटना पता

673
00:48:59,880 --> 00:49:05,880
है जी आरजी करर हॉस्पिटल में जो घटना हुआ वो क्या आपको पता

674
00:49:06,040 --> 00:49:10,680
है कोलकाता आ हा

675
00:49:10,680 --> 00:49:15,280
कोलकाता में जो ई है हां कोलकाता में हुई है

676
00:49:15,280 --> 00:49:20,120
जो डॉक्टर के साथ दुष्कर्म करके उसकी हत्या कर दी गई ना

677
00:49:20,120 --> 00:49:24,200
जी तो जिस दिन यह दुष्कर्म हुआ था उसके दो

678
00:49:24,200 --> 00:49:28,400
दिन बाद आके पुलिस कमिश्नर टीवी पर बैठ के बोल रहा है कि यहां

679
00:49:28,400 --> 00:49:33,040
पर यह केस हत्या का नहीं है आत्महत्या का है

680
00:49:33,040 --> 00:49:36,120
कोई गोयल जी है यहां के कलकाता के पुलिस कमिश्नर उन्होने

681
00:49:36,120 --> 00:49:40,120
यह बयान दिया हुआ है जी तो जब आप

682
00:49:40,120 --> 00:49:44,680
वैकल्पिक रक्षा के लोगों को खड़ा करेंगे तो ऐसे ही बोलेंगे

683
00:49:44,680 --> 00:49:49,080
अभी दो चार दिन पहले मद्रास के एक कोर्ट में

684
00:49:49,080 --> 00:49:53,160
किसी वकील को धारदार हथियार से मारा गया बेचारा बच गया

685
00:49:53,160 --> 00:49:57,520
लेकिन हालत खराब था कौन पुलिस आया किसको पकड़ा

686
00:49:57,520 --> 00:50:02,160
गया कुछ नहीं जी

687
00:50:02,160 --> 00:50:06,840
इस मैं एक आंसर दे दू मैं इस

688
00:50:06,840 --> 00:50:11,520
की छत्रिय कैसे आ जो पुलिस वाला है

689
00:50:11,520 --> 00:50:15,600
उसको आप धर्म का वास्ता देक के बाद नहीं कर सकते कि तुझे

690
00:50:15,600 --> 00:50:19,800
यह करना है उसको आप जिसकी भी नौकरी कर रहा है जिस शासन

691
00:50:19,800 --> 00:50:23,840
की नौकरी कर रहा है अकॉर्डिंग टू कांस्टिट्यूशन वो नौकरी कर रहा

692
00:50:23,840 --> 00:50:28,120
है वहां पर और गवर्नमेंट का वास्ता देखकर देख कर के आप उसे बाद कर सकते हो

693
00:50:28,120 --> 00:50:32,480
वो भी वो उसको कितना फॉलो करता है उस पर निर्भर करता है ठीक है मगर

694
00:50:32,480 --> 00:50:36,760
धर्म क्या होता है कि अगर उसने नौकरी छोड़

695
00:50:36,760 --> 00:50:40,760
दी है तो आप उसी व्यक्ति को बाद नहीं कर सकते हो कि

696
00:50:40,760 --> 00:50:44,960
भाई मैं जो है अब तुम्हारी तुझे अब भी मेरी रक्षा

697
00:50:44,960 --> 00:50:49,040
करनी है मगर यह जो है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र

698
00:50:49,040 --> 00:50:51,120
इसमें जो क्षत्रिय जो है

699
00:50:51,120 --> 00:50:55,120
उसका जन्म है क्षत्रिय के लिए तो

700
00:50:55,120 --> 00:50:59,360
उसको आप धर्म जो जो धर्म है

701
00:50:59,360 --> 00:51:03,400
एक क्षत्रिय के नाते धर्म का वास्ता देकर के भी उसको रक्षा

702
00:51:03,400 --> 00:51:08,040
के लिए बाध्य किया जा सकता है यह अंतर है पुलिस में

703
00:51:08,040 --> 00:51:12,200
और क्षत्रिय में आप पुलिस के पास जाओगे

704
00:51:12,200 --> 00:51:16,320
जो पुलिस में कल तक था आप सिचुएशन के डीप में जाए जो

705
00:51:16,320 --> 00:51:20,360
पुलिस में कल तक था और उसने आज रिजाइन दे दिया है पुलिस में आप उसके भरोसे

706
00:51:20,360 --> 00:51:24,400
हो कि मैं जा रहा हूं उसके पास जो कल तक पुलिस में था

707
00:51:24,400 --> 00:51:28,440
और आपने उसका दरवाजा खटखटाया आपको इमरजेंसी है कि मुझे रक्षा

708
00:51:28,440 --> 00:51:32,640
चाहिए और उस समय उसने कहा कि मैंने वो नौकरी छोड़ दी अब मैंने

709
00:51:32,640 --> 00:51:36,720
जो है पढ़ाना चालू कर दिया कॉलेज में ब्राह्मण बन गया हूं मैं

710
00:51:36,720 --> 00:51:40,840
मतलब पुलिस नहीं सॉरी लेक्चरर बन गया हूं अकॉर्डिंग टू तो वहां पर

711
00:51:40,840 --> 00:51:44,840
क्या हुआ व्यवस्था आपकी चरमरा गई ठीक

712
00:51:44,840 --> 00:51:49,080
है तो यही अंतर है जब हम लोग वैकल्पिक जो

713
00:51:49,080 --> 00:51:53,320
आधार ले रहे हैं कर्म क्षेत्र का कि अमुक अमुक कोई भी व्यक्ति

714
00:51:53,320 --> 00:51:57,360
बस वो अपनी योग्यता सिद्ध कर दे और उस परीक्षा में पास हो

715
00:51:57,360 --> 00:52:01,640
जाए और वो जो है मान ली जाए अच्छा दूसरी बात ये भी है कि हम जब परीक्षा लेते

716
00:52:01,640 --> 00:52:06,160
भी है जैसे मान लीजिए किसी की हमने पुलिस की भर्ती की

717
00:52:06,160 --> 00:52:10,600
तो पुलिस की भर्ती जब हम करते हैं होती है भर्तियां तो

718
00:52:10,600 --> 00:52:14,680
वहां पर एक क्राइटेरिया सेट किया जाता है कि इस भर्ती में अमुक

719
00:52:14,680 --> 00:52:18,920
अमुक जिसने उत्तीर्ण कर लिया होगा स्नातक उत्तीर्ण कर लिया होगा या

720
00:52:18,920 --> 00:52:23,200
बवी क्लास उत्तीर्ण कर ली होगी वही इस भर्ती में फॉर्म भर सकते हैं

721
00:52:23,200 --> 00:52:27,240
तो वहां आने के बाद भी एक परीक्ष तो ली जाती

722
00:52:27,240 --> 00:52:31,280
है भले ही सब लोग ग्रेजुएट थे उन सबने फॉर्म भरा आने

723
00:52:31,280 --> 00:52:35,360
के बाद सबकी परीक्षा हुई वहां जिसने सही कर्म कर

724
00:52:35,360 --> 00:52:39,440
दिया गुण कर्म का प्रदर्शन कर दिया उस गुण कर्म के आधार पर उसको पद

725
00:52:39,440 --> 00:52:43,960
मिल गया पुलिस वाले का मगर

726
00:52:43,960 --> 00:52:48,160
वहां पर आकर के जो उसने गुण कर्म किया है उससे पहले भी उसकी

727
00:52:48,160 --> 00:52:52,200
एक पहचान थी जिसके कारण वह नॉमिनेट हुआ था अगर

728
00:52:52,200 --> 00:52:56,680
आप नॉमिनेशन के लिए एक आधार को छोड़ दोगे तो नॉमिनेशन के

729
00:52:56,680 --> 00:52:59,080
आधार पर

730
00:52:59,080 --> 00:53:03,240
करोगे वह आधार आज नहीं है तभी तो यह वर्ण व्यवस्था के

731
00:53:03,240 --> 00:53:07,360
बिना जो समाज है भाई वर्ण

732
00:53:07,360 --> 00:53:11,400
व्यवस्था का अभाव है वही तो हम भी कह रहे हैं अगर

733
00:53:11,400 --> 00:53:15,720
हमने वह क्राइटेरिया सेट नहीं किया जो पुलिस

734
00:53:15,720 --> 00:53:20,000
में भर्ती होने के लिए जो प्रतियोगिता कराई जा रही है वो प्रतियोगिता

735
00:53:20,000 --> 00:53:21,280
हो गया गुण कर्म

736
00:53:21,280 --> 00:53:25,960
का प्रदर्शन ठीक है कि गुण कर्म के आधार पर

737
00:53:25,960 --> 00:53:30,280
आपका जो है सिलेक्शन होगा यह बात सही है कि प्रतियोगिता

738
00:53:30,280 --> 00:53:34,440
में आपका गुण कर्म का प्रदर्शन होगा ठीक है मगर उस गुण कर्म

739
00:53:34,440 --> 00:53:38,680
के प्रदर्शन के लिए आपको नॉमिनेट कैसे किया गया

740
00:53:38,680 --> 00:53:42,840
वहां पर जो भर्ती हुई है उस भर्ती से पहले जो आपकी

741
00:53:42,840 --> 00:53:47,160
पहचान थी उसके आधार पर आपको नॉमिनेट किया गया तो इसी प्रकार

742
00:53:47,160 --> 00:53:51,440
से जो मानव जीवन आपको मिला है इससे पहले आपके जो एक पहचान लेकर

743
00:53:51,440 --> 00:53:55,440
के आए भगवान की ओर से पिछले जन्म के कर्मों के आधार

744
00:53:55,440 --> 00:54:00,080
पर पूर्व जन के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर

745
00:54:00,080 --> 00:54:04,120
शरीर के आधार पर इस जन्म का वर्ण ण वर्ण के आधार पर

746
00:54:04,120 --> 00:54:08,120
इस जन्म के पुनः कर्म इसी प्रकार से भर्ती से पहले के

747
00:54:08,120 --> 00:54:12,360
आधार पर आपका इस जन्म में यह नॉमिनेशन कि आप कौन

748
00:54:12,360 --> 00:54:16,680
से पद के लिए फॉर्म भर सकते हैं और फिर

749
00:54:16,680 --> 00:54:20,680
उस जो आपको इस जन में जो भर्ती के आधार पर

750
00:54:20,680 --> 00:54:25,200
आपको पद का वो मिला कि आप जो क्षत्रिय का फॉर्म भर सकते पुलिस का फॉर्म भर सकते हैं

751
00:54:25,200 --> 00:54:29,240
उसके आधार पर फिर से इस जन्म के कर्म यानी पुलिस के आधारित कर्म

752
00:54:29,240 --> 00:54:33,680
अब आपने पुलिस का फॉर्म भर दिया पुलिस के पद पर आप जो है

753
00:54:33,680 --> 00:54:36,360
नियुक्त हो गए मगर आपने पुलिस के अनुसार

754
00:54:36,360 --> 00:54:40,720
आचरण नहीं किया तो क्या होगा आपका बहिष्कार सस्पेंड होंगे

755
00:54:40,720 --> 00:54:44,960
टर्मिनेट होंगे यही होगा ना मान लीजिए भ्रष्ट आचरण करने लगे घूस

756
00:54:44,960 --> 00:54:49,320
लेने लगे यह करने लगे वो करने लगे तो क्या होगा आपका बहिष्कार

757
00:54:49,320 --> 00:54:53,600
होगा इसी प्रकार से आपको ब्राह्मण जन्म मिला क्षत्रिय जन्म मिला

758
00:54:53,600 --> 00:54:57,640
और आपने आकर के सिलेक्शन भी करवा लिया कि वो जो वहां पर जाकर गुरुकुल में

759
00:54:57,640 --> 00:55:01,960
जो है आचार्य बन गए ब्राह्मण और जो क्षत्रिय वो जाकर के कहीं पर

760
00:55:01,960 --> 00:55:06,040
सेनापति बन गए मगर उन्होंने अपने कर्म को त्याग करके दूसरे भ्रष्टा आचरण

761
00:55:06,040 --> 00:55:10,120
शुरू कर दिए तो क्या हुआ उनका उस पद से बहिष्कार हो

762
00:55:10,120 --> 00:55:14,200
गया किस पद से जिस पर वो नियुक्त हुए सेनापति के पद से या

763
00:55:14,200 --> 00:55:18,440
आचार्य के पद से मगर उन्होंने जो जिस कुल में उन्होंने जन्म लिया था

764
00:55:18,440 --> 00:55:23,240
वह तो उनसे नहीं चिना तो

765
00:55:23,240 --> 00:55:27,320
कर्म के आधार पर जो व्यवस्था है वो केवल खावा है वो व्यवस्था

766
00:55:27,320 --> 00:55:31,320
है ही नहीं और उसी का तो नतीजा आज हम देख रहे हैं पिछले 200 साल में

767
00:55:31,320 --> 00:55:35,640
जितना विभाजन हुआ देश का उतना विभाजन उससे पहले हुआ था क्या

768
00:55:35,640 --> 00:55:39,680
जब से हम लोगों ने हिंदुओं ने ही पहले तो जब विरोध हुआ वर्ण व्यवस्था

769
00:55:39,680 --> 00:55:43,840
का तो कैसे हुआ जैन और बौद्ध के रूप में और

770
00:55:43,840 --> 00:55:48,000
फिर जब जैन और बौद्ध के रूप में जब विरोध होने लगा और तर्क और प्रमाण के आधार पर उनका

771
00:55:48,000 --> 00:55:51,520
आपके पास निराकरण नहीं रहा तो आप ही ने ये चिल्लाना शुरू

772
00:55:51,520 --> 00:55:55,640
कर दिया आप ही ने चिल्लाना शुरू कर दिया

773
00:55:55,640 --> 00:55:59,880
कि नहीं नहीं वो कर्म के आधार पर जाति व्यवस्था मतलब कुल मिलाकर वो जाति

774
00:55:59,880 --> 00:56:04,080
व्यवस्था जो पुरानी चली आ रही जिसके कारण जैन और बौद्ध जो है अपने यह

775
00:56:04,080 --> 00:56:08,960
भ्रम में हो गए और उसका आधार बना कर के निंदा करने लगे

776
00:56:08,960 --> 00:56:13,360
समाज की तो उस समस्या के निराकरण का

777
00:56:13,360 --> 00:56:18,040
समाधान देने की बजाय आपने उस समस्या का जो वो है

778
00:56:18,040 --> 00:56:23,440
अस्तित्व जहा से व उत्पन्न हो रही दिख रही है

779
00:56:23,440 --> 00:56:28,280
जी आवाज आ रही है आवाज वापस लट रही

780
00:56:28,280 --> 00:56:33,560
है जैन और बौद्धों के बारे में एक बात कहना चाहता हूं

781
00:56:33,560 --> 00:56:37,760
जी जो बात है वह है तो थ्योरी के लेवल

782
00:56:37,760 --> 00:56:42,720
परने प्रमाण अभी मेरे पास नहीं है पर थ्योरी प्रबल

783
00:56:42,720 --> 00:56:47,080
है जिस तरह

784
00:56:47,080 --> 00:56:51,160
से डिप्लोमेटिक वर फेयर होता है उसमें हम

785
00:56:51,160 --> 00:56:55,480
ऐसा करते हैं कि शत्रु के यहां पर कुलांग पदा

786
00:56:55,480 --> 00:56:59,560
पैदा कराया जाता है ताकि वो शत्रु को भीतर से

787
00:56:59,560 --> 00:57:03,840
खोखला करे जैन और बौद्ध

788
00:57:03,840 --> 00:57:07,920
जिस समय आए थे अगर आप ध्यान देंगे तो जैन बौद्ध और

789
00:57:07,920 --> 00:57:12,440
मूसा इन तीनों का लगभग टाइम

790
00:57:12,440 --> 00:57:16,720
फ्रेम सेम है मूसा या डेविड कोई एक प्रोफेट

791
00:57:16,720 --> 00:57:21,600
है जिसका टाइम फ्रेम सेम है इस समय में इस काल में

792
00:57:21,600 --> 00:57:25,600
मध्य एशिया में जरर ये पारसियों का धर्म काफी

793
00:57:25,600 --> 00:57:30,000
शक्तिशाली और वही हर तरफ अपना वर्चस्व

794
00:57:30,000 --> 00:57:34,360
दिखा रहे थे तो उस समय हमारा एक कॉन्फ्लेट

795
00:57:34,360 --> 00:57:38,400
था पारसियों के धर्म के साथ और यह पारसियों के जो बड़े बड़े राजा

796
00:57:38,400 --> 00:57:42,920
हुए साइरस दारा इन्हीं के मेरे ख्याल से इफस

797
00:57:42,920 --> 00:57:46,920
में बौद्ध जैनियों का जन्म हुआ है हमारे य पर और

798
00:57:46,920 --> 00:57:51,440
बौद्धों का इतना बड़ा प्रभाव रहा

799
00:57:51,440 --> 00:57:56,160
कि मध्य एशिया जो पहले पूरी तरह से हिंदू हिंदुओं का देश था

800
00:57:56,160 --> 00:58:00,280
व पर हिंदुओ का ही वर्चस्व था पॉपुलेशन भी हिंदुओ का था जब

801
00:58:00,280 --> 00:58:02,440
वो लोग बध बन गए

802
00:58:02,440 --> 00:58:07,840
तो उनका धर्मांतरण या मता कराना बहुत आसान हो

803
00:58:07,840 --> 00:58:12,000
गया महमूद गजनवी एक तरह से कहा

804
00:58:12,000 --> 00:58:16,160
जाए तो सबसे पहला सफल आक्रांता था जो भारत

805
00:58:16,160 --> 00:58:20,240
में प्रवेश कर पाया मोहम्मद बिन कासिम की बात

806
00:58:20,240 --> 00:58:24,560
को छोड़ दीजिए वो बस एक युद्ध करके फिर मारा गया था पहला सफल

807
00:58:24,560 --> 00:58:28,680
मोहम्मद गजनी है गजनी का क्या पिताजी का

808
00:58:28,680 --> 00:58:33,600
नाम था सबुत जिन और सबुत जिन के दादाजी बौद्ध

809
00:58:33,600 --> 00:58:38,080
थे तो अगर हम यह कहे कि मध्य एशिया के वो

810
00:58:38,080 --> 00:58:42,200
प्रांत जिनके ऊपर यह जिनका धर्म था

811
00:58:42,200 --> 00:58:46,360
मूल भारत भूमि की रक्षा करना जब उनका मता तरण

812
00:58:46,360 --> 00:58:50,840
और धर्मांतरण हो गया तब उन्होंने हम पर अटैक किया अरब

813
00:58:50,840 --> 00:58:54,920
अरब देश के लोग हम पर कभी अटैक नहीं किया मोहम्मद बिन कासम

814
00:58:54,920 --> 00:58:59,000
बा किसी का हिमत नहीं हु से य अटैक करे उन्होंने फिर क्या

815
00:58:59,000 --> 00:59:03,120
किया कि बीच में इंटरमीडियरी बनाया बीच के लोगों को हिंदुओं

816
00:59:03,120 --> 00:59:07,440
से मुसलमान बनाया और फिर उन्होंने हम पर अटैक किया मोहम्मद गोरी

817
00:59:07,440 --> 00:59:12,160
गजनी लजी सब ऐसे ही लोग है और

818
00:59:12,160 --> 00:59:16,280
इस धर्मांतरण में बौद्धों का बहुत बड़ा योगदान

819
00:59:16,280 --> 00:59:17,760
रहा है

820
00:59:17,760 --> 00:59:22,000
मुसलमानों के लिए बहुत ही बड़ा शहर है धार्मिक

821
00:59:22,000 --> 00:59:26,160
शहर है उसका नाम है बुखारा और हदीस सही

822
00:59:26,160 --> 00:59:30,360
हदीस लिखने वाले सही बुखारी वही बुखारा शहर से थे

823
00:59:30,360 --> 00:59:34,480
कहते हैं कि बुखारा सहर का ओरिजिनल नाम विहारा था

824
00:59:34,480 --> 00:59:38,800
और वह बौद्धों का एक बहुत बड़ा केंद्र था और

825
00:59:38,800 --> 00:59:43,040
उन्होंने उस काल में इस्लामिक आक्रांता के बहुत हेल्प

826
00:59:43,040 --> 00:59:47,520
किया था और उस बुखारा शहर में एक मौत का

827
00:59:47,520 --> 00:59:52,640
टावर है उस टावर से सारे बौद्धों को फेंक फेंक के मारा गया

828
00:59:52,640 --> 00:59:56,880
था जैसे ही बौद्धों ने हमें हमारी जाति से काटा

829
00:59:56,880 --> 01:00:00,960
हमारा मता तरण हो गया और फिर हम जिनके ऊपर रक्षा का दायित्व

830
01:00:00,960 --> 01:00:05,960
था वही आक्रांता बन ग

831
01:00:05,960 --> 01:00:10,000
जी बिल्कुल ब नहीं इसमें इसमें यही बात आती है ना

832
01:00:10,000 --> 01:00:14,040
कि कर्म के आधार पर जब हम कह देते हैं तो फिर अगर कर्म के आधार पर सिलेक्शन

833
01:00:14,040 --> 01:00:18,040
होना ही नहीं है अगर रक्षा के लिए हमें यह देखना ही नहीं है कि

834
01:00:18,040 --> 01:00:22,280
कौन क्षत्रिय है कौन ब्राह्मण है तो फिर य ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र

835
01:00:22,280 --> 01:00:26,280
का अस्तित्व नहीं होना चाहिए ना फिर वेदों में और दूसरी

836
01:00:26,280 --> 01:00:30,360
बात जो एक बात की जा रही है कि जैसे विदेशों में उनके य तो वो

837
01:00:30,360 --> 01:00:34,400
नहीं तो वैकल्पिक उन्होंने भी वर्ण व्यवस्था को लिया ना वैकल्पिक वर्ण

838
01:00:34,400 --> 01:00:38,920
व्यवस्था को उन्होंने लिया उस वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था का पर्यान किसम है

839
01:00:38,920 --> 01:00:43,040
अव्यवस्था अधर्म आपके यहां आज भी वह धर्म

840
01:00:43,040 --> 01:00:47,520
बचा हुआ है मूल्य बचे हुए हैं आदर्श बचे हुए हैं

841
01:00:47,520 --> 01:00:51,800
तो क्यों बचे हुए हैं क्योंकि थोड़ी बहुत आज भी वर्ण व्यवस्था थोड़ी बहुत कहीं ना कहीं अस्तित्व

842
01:00:51,800 --> 01:00:56,200
में है और आप जो रही सही वर्ण व्यवस्था उसको भी आप लजली दे

843
01:00:56,200 --> 01:01:00,520
चाहते हो और जो वर्ण व्यवस्था का नाश हुआ उसका नतीजा

844
01:01:00,520 --> 01:01:04,520
पिछले 200 सालों में आप देखिए क्या क्या हो रहा है देश का

845
01:01:04,520 --> 01:01:08,640
विभाजन हो रहा है देश की जो संस्कृति उसका पतन हो रहा है आज हर कोई

846
01:01:08,640 --> 01:01:12,800
व्यक्ति अद्वैत को पढ़ाने चल देता है अद्वैत को पढ़ा रहा है

847
01:01:12,800 --> 01:01:16,880
अद्वैत का खंडन करते हुए अद्वैत को पढ़ा रहा है आज आप देखिए

848
01:01:16,880 --> 01:01:21,840
मैंने अपने चैनल पर देखा मैं एक दिन स्क्रॉल कर रहा था ा

849
01:01:21,840 --> 01:01:26,640
उसम मैंने देखा कि आदि शंकराचार्य जी द्वारा बताया गया अद्वैत

850
01:01:26,640 --> 01:01:30,800
इसका अद्वैत का अध्ययन करिए आप हमारे पास आग कौन था पता है

851
01:01:30,800 --> 01:01:34,920
साइंस जर्नी वाला साइंस जर्नी वाला आपको अद्वैत

852
01:01:34,920 --> 01:01:39,040
पढ़ा रहा है यही नतीजा है ना वर्ण

853
01:01:39,040 --> 01:01:43,160
व्यवस्था को ना मानने का रामपाल आपको वेद इसलिए पढ़ा

854
01:01:43,160 --> 01:01:47,560
रहा है गीता इसलिए पढ़ा रहा है कि वेद और गीता छोड़ दो

855
01:01:47,560 --> 01:01:51,640
क्यों पढ़ा रहा है किस किसने अधिकार दिया उसको पढ़ाने का

856
01:01:51,640 --> 01:01:55,880
क्योंकि कोई भी पढ़ा सकता है जो पढ़ाए वही ब्राह्मण कहलाएगा

857
01:01:55,880 --> 01:02:00,640
ब नहीं पढ़ाए जो पढ़ाए वो ब्राह्मण कहलाएगा पढ़ रहे सब लोग

858
01:02:00,640 --> 01:02:05,160
जब अनाधि कारी भी अर्थ करने लगेगा तो अर्थ होगा

859
01:02:05,160 --> 01:02:10,560
वो हो रहा है होने

860
01:02:10,560 --> 01:02:14,560
दो तो यह जो व्यवस्था है

861
01:02:14,560 --> 01:02:18,680
कि पुलिस के पास जाएगा यह बिल्कुल ठीक है

862
01:02:18,680 --> 01:02:22,720
मगर यह भी तो वैकल्पिक व्यवस्था ही है कि हर हाल में हम पुलिस के ही

863
01:02:22,720 --> 01:02:26,800
पास जाएंगे हम किसी के पास भी नहीं चले जाएंगे मगर व व्यवस्था वो है

864
01:02:26,800 --> 01:02:31,040
कि क्षत्रिय ही पुलिस बने तो क्या होगा कि क्षत्रिय जब पुलिस

865
01:02:31,040 --> 01:02:35,200
बनेगा तो क्षत्रिय वो है जिसको पहले से उसके पिता द्वारा

866
01:02:35,200 --> 01:02:39,200
उसके पूर्वजों द्वारा उसके जीनस में उसके शरीर में वो क्षत्रिय प्राप्त है

867
01:02:39,200 --> 01:02:43,200
कि वो पुलिस का कार्य अच्छे से करेगा और जब हम विकल्प ढूंढ करके किसी को

868
01:02:43,200 --> 01:02:47,360
पुलिस वाला बनाते हैं तो उस विकल्प को ढूंढने में उसको

869
01:02:47,360 --> 01:02:51,560
पुलिस वाला बनाने में अर्थ समय ज्यादा खर्च होगा और फिर भी हमें

870
01:02:51,560 --> 01:02:55,840
वो क्षत्रिय प्राप्त नहीं होगा जो क्षत्रिय पीछे से चला आ रहा वंश

871
01:02:55,840 --> 01:02:59,960
पंच परंपरा से जो हमें प्राप्त हो इसके लिए है

872
01:02:59,960 --> 01:03:05,200
वर्ण

873
01:03:05,200 --> 01:03:09,280
व्यवस्था और जो छुआछूत की बात है

874
01:03:09,280 --> 01:03:13,680
तो छुआछूत का परव सान सिर्फ इतनी सी बात में है

875
01:03:13,680 --> 01:03:17,720
कि अगर ब्राह्मण को जीवन मिला है कि तुम्हारी प्रज्ञा

876
01:03:17,720 --> 01:03:21,880
शक्ति इतनी हो कि तुम वेद पढ़ो और पढ़ा पाओ तो उसके अनुसार

877
01:03:21,880 --> 01:03:25,880
ब्राह्मणों के जो जीवन है जीवनयापन सौचा चार

878
01:03:25,880 --> 01:03:30,000
मुख्य रूप से उसको अत्यंत कठिन और जटिल बना दिया गया बहुत

879
01:03:30,000 --> 01:03:34,120
जटिल जीवन है अगर जो शास्त्रों के हिसाब से अगर आप

880
01:03:34,120 --> 01:03:38,600
ब्राह्मण का जीवन देखेंगे तो बहुत जटिल होता है और उससे सरल

881
01:03:38,600 --> 01:03:42,880
थोड़ा सा किया गया क्षत्रिय का क्यों क्योंकि क्षत्रिय को कहीं

882
01:03:42,880 --> 01:03:46,880
सीमा पर लड़ना है तो सीमा पर लड़ते हुए क्षत्रिय ये नहीं कर सकता कि

883
01:03:46,880 --> 01:03:50,920
उसको इतने कुल्ले करने हैं इतनी बार वो मूत्र विसर्जन के बद हर

884
01:03:50,920 --> 01:03:55,200
बार वो इतना मूत्र त्याग के बाद इतने कुल्ले करे इतनी बार ये करे तो एक सिस्टम

885
01:03:55,200 --> 01:03:59,800
बनाया जिसको प्रज्ञा शक्ति अपनी बटोर के रखने के लिए ब्राह्मण

886
01:03:59,800 --> 01:04:04,160
का जीवन दिया गया उसको सबसे कठिन जीवन दे दिया गया और फिर

887
01:04:04,160 --> 01:04:08,160
उससे थोड़ा सा मुक्त किया गया क्षत्रिय को उससे थोड़ा सा मुक्त किया गया वैश्य

888
01:04:08,160 --> 01:04:12,440
को और उससे और मुक्त किया गया शूद्र को तो जो अ स्पता

889
01:04:12,440 --> 01:04:16,440
वाला विचार आता है स्पर्ता स्पर्ता वाला विचार मैं पूरा

890
01:04:16,440 --> 01:04:20,560
करलू बस यह विचार केवल इसलिए आता है कि जिनकी

891
01:04:20,560 --> 01:04:24,600
जीवन शैली दोनों की बिल्कुल ठीक विपरीत है वो

892
01:04:24,600 --> 01:04:28,800
दोनों आपस में एक दूसरे के गुण दोषों का आदान प्रदान ना करें

893
01:04:28,800 --> 01:04:32,840
सिर्फ इसमें परवन है उसका और गुण दोष स्पर्श

894
01:04:32,840 --> 01:04:36,840
होता से आदान प्रदान होते हैं इसका नतीजा आपने कोरोना के

895
01:04:36,840 --> 01:04:40,840
काल में देख लिया और नहीं होते और अगर इसी

896
01:04:40,840 --> 01:04:44,880
बात से ही दिक्कत है कि नहीं हम जो आपका जो यह

897
01:04:44,880 --> 01:04:49,440
जो वर्ण व्यवस्था या उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो स्पष्टता

898
01:04:49,440 --> 01:04:53,440
अस्पष्टता है इसको हम तभी मानेंगे इसको हम घृणा

899
01:04:53,440 --> 01:04:57,600
मूलक तब नहीं मानेंगे जब आप जब हम यह करो यह करके दिखा

900
01:04:57,600 --> 01:05:01,960
दो तो इसमें एक छोटी सी बात है हम किसी से पूछे

901
01:05:01,960 --> 01:05:06,240
कि आपके घर की मातृ शक्ति को आप हमें स्पर्श कर लेने देंगे

902
01:05:06,240 --> 01:05:10,560
क्या इसमें किसी साइंस ने आपको मना नहीं किया होगा कि इससे कोई दिक्कत है

903
01:05:10,560 --> 01:05:14,640
तो आप क्यों नहीं छूने देंगे आपको दिक्कत क्यों होगी

904
01:05:14,640 --> 01:05:18,680
उस छूने से उसमें साइंस भी है मगर उसमें धर्म

905
01:05:18,680 --> 01:05:22,800
भी है धर्म की भी मर्यादा है उसम धर्म की मर्यादा क्या है धर्म ने कहा

906
01:05:22,800 --> 01:05:27,160
है कि स्पर्श नहीं होना चाहिए तो इसलिए वो वो जो धर्म है उसमें भी साइंस

907
01:05:27,160 --> 01:05:31,200
है कि हमारे कुल के जो गुण दोष है उसमें मिलावट ना

908
01:05:31,200 --> 01:05:35,280
हो छूने से तो वो जो एक जीवन शैली है दोनों की अलग-अलग

909
01:05:35,280 --> 01:05:35,920
उसमें

910
01:05:35,920 --> 01:05:40,320
मिलावट ना हो गुण दोष की इस वजह से इसमें परवन

911
01:05:40,320 --> 01:05:45,560
है उसका घृणा मूलक नहीं है व्यवस्था मूलक है ठीक है

912
01:05:45,560 --> 01:05:49,920
जी मैं एक बात और कहना इस पर जोड़ना

913
01:05:49,920 --> 01:05:53,960
चाहूंगा जी यूं समझ लीजिए

914
01:05:53,960 --> 01:05:58,160
कि समाज में बहुत सारे एसेट्स है फिजिकल

915
01:05:58,160 --> 01:06:03,160
एसेट्स जिसे हम अर्थ कह सकते हैं संपत्ति कह सकते हैं धन कह सकते

916
01:06:03,160 --> 01:06:07,760
हैं ब्राह्मणों को किसी भी

917
01:06:07,760 --> 01:06:12,520
संपत्ति का ओनरशिप नहीं लेना

918
01:06:12,520 --> 01:06:16,560
है वह किसी भी संपत्ति का स्वामी नहीं

919
01:06:16,560 --> 01:06:20,600
है स्वामी नहीं बनेंगे स्वामी बनने का

920
01:06:20,600 --> 01:06:25,000
अधिकार क्षत्रियों को दिया गया है जी

921
01:06:25,000 --> 01:06:29,440
वो स्वामी तो क्षत्रिय रहेंगे मगर जिस भी

922
01:06:29,440 --> 01:06:34,000
संपत्ति का वो स्वामी है उसका उपयोग क्षत्रिय नहीं

923
01:06:34,000 --> 01:06:38,960
करेंगे ब्राह्मण स्वामी भी नहीं रहेंगे

924
01:06:38,960 --> 01:06:43,520
क्षत्रिय स्वामी रहेंगे मगर उपयोग नहीं करेंगे

925
01:06:43,520 --> 01:06:47,520
जो भी संपत्ति है व एक जगह से

926
01:06:47,520 --> 01:06:50,960
दूसरे जगह हर व्यक्ति को मिलता रहे ताकि

927
01:06:50,960 --> 01:06:55,600
वो उसका अपने जीवन में उपयोग कर सके यह कार्य वैश्य

928
01:06:55,600 --> 01:07:00,360
प्राप्त है पर संपत्ति का जनरेशन और संपत्ति का भोग

929
01:07:00,360 --> 01:07:04,680
ये शूद्र को प्राप्त है जी संपत्ति के भोग

930
01:07:04,680 --> 01:07:09,360
में कभी कभार कुछ दोष आ जाते हैं

931
01:07:09,360 --> 01:07:13,800
उस दोष के कारण वो संपत्ति जो है उसमें भी वो दोष आ जाता है

932
01:07:13,800 --> 01:07:18,680
फिर जब हम उस संपत्ति का क्योंकि हम भी

933
01:07:18,680 --> 01:07:23,240
जीवित प्राणी है तो हमें तो संपत्ति का उपयोग थोड़ा बहुत तो करना ही पड़ेगा

934
01:07:23,240 --> 01:07:27,520
तो जब हम संपत्ति का उपयोग करते हैं और क्योंकि वो भोग से उत्पन्न

935
01:07:27,520 --> 01:07:31,640
हुई संपत्ति है तो उसमें कहीं ना कहीं दोष रहता है तो जितना

936
01:07:31,640 --> 01:07:35,800
कम दोष वाला संपत्ति हम उपयोग कर सके यही ब्राह्मण का लक्ष्य

937
01:07:35,800 --> 01:07:39,800
होता है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिस

938
01:07:39,800 --> 01:07:43,840
संपत्ति में उसे लगता है कि थोड़ा सा भी दोष हो सकता है

939
01:07:43,840 --> 01:07:48,440
तो उस संपत्ति से वो अपने आप को दूर रखना चाहता है स्पता

940
01:07:48,440 --> 01:07:52,440
अस्पृश्यता के पीछे लॉजिक यही है अब इसको प्रैक्टिकल

941
01:07:52,440 --> 01:07:56,520
लाइफ में कहां पर कहां तक खींच के ले जा रहे हैं लोग क्या कर रहे हैं

942
01:07:56,520 --> 01:08:00,520
इंडिविजुअल लेवल पर क्या हो रहा वो दूसरी बात यूं

943
01:08:00,520 --> 01:08:04,640
समझना है कि ब्राह्मण को स्वामित्व नहीं है क्षत्रिय

944
01:08:04,640 --> 01:08:06,080
को स्वामित्व है पर उपयोग

945
01:08:06,080 --> 01:08:10,080
नहीं करना है अब मैं एक प्राइम मिनिस्टर हूं तो मैं प्राइम मिनिस्टर गाड़ी

946
01:08:10,080 --> 01:08:14,720
उपयोग करूंगा मैं राजा हूं तो राजमल उपयोग करूंगा पर

947
01:08:14,720 --> 01:08:19,000
मैं सैनिक हूं मैं किसी क्षेत्र के जमीन का मालिक हूं

948
01:08:19,000 --> 01:08:23,040
क्योंकि हो सकता है मैं छत्री हूं तो वो जमीन मेरे नाम पर है पर उस जमीन का

949
01:08:23,040 --> 01:08:27,280
उपयोग वहां रहने वाले लोग करेंगे उस जमीन का दोहन करके

950
01:08:27,280 --> 01:08:31,600
जो भी संपत्ति का उत्पन्न होगा वो शूद्र के हाथ में

951
01:08:31,600 --> 01:08:35,720
और शूद्र से छत्रिय छीनने नहीं जाते हैं शूद्र से दान

952
01:08:35,720 --> 01:08:40,040
लेते हैं यही बहु बात है

953
01:08:40,040 --> 01:08:44,040
इसमें मुझे एक बात याद आई इतनी बात तो जितने भी सनातनी

954
01:08:44,040 --> 01:08:48,280
होंगे व सब मानेंगे कि आहार को लेकर के विचार किया गया हमारे यहां

955
01:08:48,280 --> 01:08:52,440
अब कोई मानता है नहीं मानता है जो व्यक्ति भोजन को बना

956
01:08:52,440 --> 01:08:56,440
रहा है उस व्यक्ति के मुख में तो कुछ

957
01:08:56,440 --> 01:09:00,560
झूट नहीं है वह कहीं चप्पल तो नहीं पहने हैं वो

958
01:09:00,560 --> 01:09:04,720
कहीं गालियां दे दे करके तो जो

959
01:09:04,720 --> 01:09:08,720
खाद्य पदार्थ है व उनका निर्माण नहीं कर रहा है क्यों होता है

960
01:09:08,720 --> 01:09:13,320
ऐसा क्यों सोचा गया यह सब कि किसके द्वारा बनाया जा रहा है

961
01:09:13,320 --> 01:09:17,560
क्योंकि उसके द्वारा बनाए जाने में वह जो उसकी जो तामसिक

962
01:09:17,560 --> 01:09:21,120
प्रवृतियां जो तामसिक चीज उनका निवेश हो

963
01:09:21,120 --> 01:09:25,680
जाएगा उसके बनाए गए भोजन तो इस

964
01:09:25,680 --> 01:09:30,400
लिए जैसे इन्होंने अभी एक बात कही कि उसका भोग

965
01:09:30,400 --> 01:09:35,200
भोग भोग से उत्पन्न होने वाली जो अर्थ होता है उसमें जो

966
01:09:35,200 --> 01:09:39,240
है कहीं ना कहीं दोष आ जाता है तो

967
01:09:39,240 --> 01:09:43,280
ब्राह्मण का जीवन होता है कि कम से कम ऐसे अर्थ का उपयोग करना जिसमें की

968
01:09:43,280 --> 01:09:47,400
जो भोग से उत्पन्न हुआ हो तो बिल्कुल वही चीज इसमें आ रही है कि भाई किसी

969
01:09:47,400 --> 01:09:51,520
ने जब गालियां देते हुए खाना बनाया या झूठे मुख

970
01:09:51,520 --> 01:09:55,920
से खाना बनाया अच्छा एक बात और है कि शूद्र को मुक्त क्यों किया

971
01:09:55,920 --> 01:10:00,040
गया इस तरह के कठिन जीवन से क्यों मुक्त किया गया क्योंकि

972
01:10:00,040 --> 01:10:04,200
मुक्त नहीं करेंगे तोव अपना काम नहीं कर पाएगा जैसे क्षत्रिय को अगर ब्राह्मण

973
01:10:04,200 --> 01:10:08,560
जैसा जीवन दे दिया जाए टोटली तो क्षत्रिय अपना क्षत्रिय त्व नहीं निभा पाएगा

974
01:10:08,560 --> 01:10:13,000
तो एक व्यवस्था के लिए कि अगर तुम्हारा यहां पर सरल है केवल मानसिक

975
01:10:13,000 --> 01:10:17,280
कार्य है ब्राह्मण का तो उसके शारीरिक इधर कार्य बढ़ा दिए गए और

976
01:10:17,280 --> 01:10:21,640
उसका जो जीवन कठिन हो गया अगर दूसरा क्षत्रिय उसका

977
01:10:21,640 --> 01:10:25,800
वहा लड़ना है उसका शारीरिक कार्य है तो उसका वहां पर जो मानसिक

978
01:10:25,800 --> 01:10:29,880
कार्यों के निमित्त जो शारीरिक जटिलताएं बढ़ाई गई थी वह शारीरिक जटिलताएं

979
01:10:29,880 --> 01:10:35,000
यहां पर कम कर दी गई तो यह एक व्यवस्था है और इसमें

980
01:10:35,000 --> 01:10:36,160
जो या

981
01:10:36,160 --> 01:10:40,600
तो विवाह इत्यादि हो अंतरजातीय विवाह इत्यादि जो भी है व उस पर प्रतिबंध

982
01:10:40,600 --> 01:10:44,640
लगाना जो भी है उन सब का परिवन इस

983
01:10:44,640 --> 01:10:49,320
जो मूल जो जेनेटिकली आपको प्राप्त हो रहा है ब्राह्मण क्षत्रिय

984
01:10:49,320 --> 01:10:53,440
वैश्य या फिर शूद्र इन सबकी रक्षा करना

985
01:10:53,440 --> 01:10:58,720
है वर्ण आश्रम की रक्षा करना है

986
01:10:58,720 --> 01:11:02,880
है ना तो दूसरी बात ये है कि विदेश में अधर्मी

987
01:11:02,880 --> 01:11:07,360
नहीं होते हैं मगर क्या उनके यहां वो प्रज्ञा शक्ति है

988
01:11:07,360 --> 01:11:11,640
जो व्यक्ति के जीवन का परव सान मोक्ष में हो सके

989
01:11:11,640 --> 01:11:16,760
नहीं है आना पड़ रहा है ना उनको यहां

990
01:11:16,760 --> 01:11:20,760
पर भारत के गुरुओं के पास क्यों आना पड़ रहा है धर्म को जानने के

991
01:11:20,760 --> 01:11:24,760
लिए क्यों आना पड़ रहा है अधर्मी का मतलब क्या है जो बुरे कार्य

992
01:11:24,760 --> 01:11:29,520
करे या सनातन धर्म को ना माने वो अधर्मी पहले तो सनातनी को यह सोचना

993
01:11:29,520 --> 01:11:34,520
चाहिए वेद विरोधी नास्तिक नास्तिक कौन

994
01:11:34,520 --> 01:11:38,720
है जिसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में चुनाव करने

995
01:11:38,720 --> 01:11:42,960
का आधार नहीं है और

996
01:11:42,960 --> 01:11:47,080
धर्म क्या है जीव की चाह

997
01:11:47,080 --> 01:11:51,800
के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

998
01:11:51,800 --> 01:11:56,040
परिभाषित करने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद

999
01:11:56,040 --> 01:12:00,200
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई

1000
01:12:00,200 --> 01:12:04,320
गई विधि का नाम धर्म है तो

1001
01:12:04,320 --> 01:12:08,320
व्यक्ति के जीवन का जो मुख्य उद्देश्य है धर्म धर्म

1002
01:12:08,320 --> 01:12:13,600
का जो परवन है वास्तविक फल क्या है धर्म का मोक्ष

1003
01:12:13,600 --> 01:12:17,640
तो वह जो उनकी जो प्रज्ञा शक्ति है वहा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो

1004
01:12:17,640 --> 01:12:21,880
वैकल्पिक बनाए जा रहे हैं उनकी प्रज्ञा शक्ति क्या उस

1005
01:12:21,880 --> 01:12:25,960
ये जो ब्रह्म की व्याख्या रामानुजाचार्य जी ने की आचार्य जी ने

1006
01:12:25,960 --> 01:12:30,000
की ये सब व्याख्या है क्या उनको प्राप्त नहीं है आना पड़

1007
01:12:30,000 --> 01:12:36,000
रहा है आपके पास इसी इसी विषय में मैंने

1008
01:12:37,480 --> 01:12:41,680
बोला अगर आप ऐसा समझते हैं कि बाइबल है ना उधर उसको मोक्ष

1009
01:12:41,680 --> 01:12:45,960
मिलता ही होगा तो फिर आप इसका मतलब यह समझते हैं कि वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला मोक्ष

1010
01:12:45,960 --> 01:12:50,240
मोक्ष ही नहीं है क्योंकि बाइबल और वेद के ईश्वर

1011
01:12:50,240 --> 01:12:55,200
में बहुत अंतर है बाइबल और वेद के मोक्ष में बहुत अंतर है

1012
01:12:55,200 --> 01:12:59,200
तो आप पहले सिद्ध करें आक के बाइबल का जो धर्म है वो धर्म है कि नहीं बाइबल

1013
01:12:59,200 --> 01:13:03,520
का ईश्वर ईश्वर है कि नहीं बाइबल का जो मोक्ष है मोक्ष है कि नहीं फिर आके सिद्ध

1014
01:13:03,520 --> 01:13:07,560
करें जो ये बोल रहा है कि जिनके पास बाइबल है उसे बाइबल अरे भाई

1015
01:13:07,560 --> 01:13:11,800
अगर बाइबल से भी मोक्ष मिलता है अगर कुरान

1016
01:13:11,800 --> 01:13:15,840
से भी मोक्ष मिलता है तो ये सब चीजें अलग होती ही क्यों जब सबसे मोक्ष

1017
01:13:15,840 --> 01:13:19,880
मिल रहा है सबसे मोक्ष नहीं मिल रहा है इसीलिए तो अलगाव है

1018
01:13:19,880 --> 01:13:24,200
अगर आप बाइबल में मोक्ष मिलना स्वीकार कर रहे हैं तो आपने इनडायरेक्ट वे में स्वीकार

1019
01:13:24,200 --> 01:13:28,720
कर लिया कि सनातन से मोक्ष नहीं है रामानुजाचार्य गलत

1020
01:13:28,720 --> 01:13:33,120
शंकराचार्य गलत ार काचार्य गलत और

1021
01:13:33,120 --> 01:13:37,240
वहां जो बाइबल लिखने वाले लोग हैं वह सही

1022
01:13:37,240 --> 01:13:41,320
ठीक है किसी भी प्रकार से

1023
01:13:41,320 --> 01:13:45,400
एड़ी चोटी का जोल लगाना है मगर काटना है बात को सोचना समझना

1024
01:13:45,400 --> 01:13:51,400
नहीं है क्या कह रहे हैं क्या नहीं कह रहे हैं

1025
01:14:00,680 --> 01:14:04,800
अरे वह पुरी के लिए नहीं बोले थे यह बात अपनी जानकारी सही कर

1026
01:14:04,800 --> 01:14:09,080
लीजिए यह बात वह बोले थे अभि

1027
01:14:09,080 --> 01:14:12,280
मुक्तेश्वरा नंद जी के

1028
01:14:12,280 --> 01:14:17,280
लिए जी आते जी एक बात मैं कहना चाहूंगा आपने एक बात

1029
01:14:17,280 --> 01:14:21,600
कही बौद्धों और जैनों की भी बात हो रही थी तो मैंने देखा कि भारत

1030
01:14:21,600 --> 01:14:25,640
जो है सोने की चिड़िया थी और भारत विश्व गुरु

1031
01:14:25,640 --> 01:14:29,680
कहा जाता था जो अभी जो पिछले 200 सालों में

1032
01:14:29,680 --> 01:14:33,720
जो वर्णाश्रम धर्म के विरोधी के रूप में उत्पन्न हुए हैं तंत्र ये तो

1033
01:14:33,720 --> 01:14:37,760
तब थे नहीं जब भारत को विश्व गुरु कहा जाता था भारत को

1034
01:14:37,760 --> 01:14:41,840
सोने की चिड़िया कहा जाता था तो उस काल में जातियां

1035
01:14:41,840 --> 01:14:46,520
थी कि नहीं इस इस परिपेक्ष से थोड़ा सा दृष्टि डाले मतलब

1036
01:14:46,520 --> 01:14:50,960
जो 200 साल पहले का जो भारत है जब व सोने की चिड़िया था

1037
01:14:50,960 --> 01:14:55,960
आपने एक बात और कही पहले आप इसको ले लीजिए फिर मैं आपको जो है पूछता हूं

1038
01:14:55,960 --> 01:15:00,040
नहीं यह इस प्रश्न का तथ्यात्मक उत्तर देना मेरे लिए कठिन

1039
01:15:00,040 --> 01:15:04,240
है यह काफी शोध का विषय है जी

1040
01:15:04,240 --> 01:15:08,400
जिसे जिस समय भारत सोने की चिरिया थी उसका

1041
01:15:08,400 --> 01:15:12,840
अवसान एक तरह से समझ लीजिए कि गुप्त काल के साथ हो गया

1042
01:15:12,840 --> 01:15:15,680
उसके बाद हम सोने की चिरिया बने रहे पर हमारी

1043
01:15:15,680 --> 01:15:19,920
शक्तिया छीन होती चली गई और यह सोने की चिरिया

1044
01:15:19,920 --> 01:15:23,920
को जो सोना है वो 1857 तक भी हम बचा

1045
01:15:23,920 --> 01:15:28,280
के रख पाए क्योंकि हम जाति को मानते थे 1857

1046
01:15:28,280 --> 01:15:32,480
के बाद वो हमसे त लुप्त हो गया लुप्त तो ठीक नहीं हुआ पर

1047
01:15:32,480 --> 01:15:36,760
क्या है कि अर्थ का अर्थ के प्रकृति

1048
01:15:36,760 --> 01:15:41,040
को बदल दिया गया बैंकिंग सिस्टम आ गया तो जो अर्थ हमारे

1049
01:15:41,040 --> 01:15:45,320
पास है वो अब निरर्थक हो गए और जो निरर्थक थे

1050
01:15:45,320 --> 01:15:49,480
वही अर्थ हो गया तो इस तरह से हम लोग लुट

1051
01:15:49,480 --> 01:15:53,520
गए क्योंकि हमसे जितने लोगों ने जो भी लूटा लूटने के बाद भी हम गरीब नहीं

1052
01:15:53,520 --> 01:15:56,960
हुए

1053
01:15:56,960 --> 01:16:01,360
हम हमारे पास हमारे लोग अभाव में नहीं थे

1054
01:16:01,360 --> 01:16:06,440
अभाव में आए हैं नौकरी तंत्र के शुरुआत के बाद

1055
01:16:06,440 --> 01:16:11,240
1857 के बाद से हमारे घरों में अभाव शुरू हुआ है

1056
01:16:11,240 --> 01:16:15,920
क्योंकि 1857 के बाद से अब हम हम अपना जाति का काम

1057
01:16:15,920 --> 01:16:20,000
काम नहीं कर पा रहे तो जैसे ही हमारी जाति वाली जीविका खत्म हो

1058
01:16:20,000 --> 01:16:24,080
गई तो हम गरीब हो गए अगर हम जाति का कार्य कर पाए

1059
01:16:24,080 --> 01:16:28,760
तो हम अभी भी नहीं है जी जी अभी भी सब खड़े हो

1060
01:16:28,760 --> 01:16:33,080
जाएंगे गुरुदेव कहते हैं ना कि कोई चुनौती

1061
01:16:33,080 --> 01:16:37,360
देकर के ऐसी व्यवस्था ला दो वर्णाश्रम के विरोध में कि जन्म

1062
01:16:37,360 --> 01:16:41,960
से सबकी जीविका सुरक्षित हो मातृ शक्ति का शील सुरक्षित

1063
01:16:41,960 --> 01:16:46,000
हो और सुव्यवस्थित हो और

1064
01:16:46,000 --> 01:16:50,360
व्यक्ति का परवन जो है धर्म अर्थ काम मोक्ष में हो

1065
01:16:50,360 --> 01:16:54,360
तो वो कहते हैं गुरुदेव जो है जी जी इस पर मैं एक

1066
01:16:54,360 --> 01:16:58,360
बात इस पर मैं एक बात कहना चाहूंगा

1067
01:16:58,360 --> 01:17:02,520
हमारे देश में 2011 में अंतिम सेंसस हुआ है तो

1068
01:17:02,520 --> 01:17:07,640
हमारे पास 2011 का डाटा है 21 में कोई सेंसस हुआ नहीं तो डटा नहीं

1069
01:17:07,640 --> 01:17:12,160
है हमारे यहां जो नौकरियों का जो

1070
01:17:12,160 --> 01:17:16,480
आंकड़ा है वह है सरकारी नौकरी में पौने

1071
01:17:16,480 --> 01:17:21,000
पर लोग काम कर रहे हैं और

1072
01:17:21,000 --> 01:17:25,160
जो ऑर्गेनाइज सेक्टर है जो कॉर्पोरेट हाउसेस है बड़े-बड़े

1073
01:17:25,160 --> 01:17:29,160
वहां पर सवा पर लोग काम कर रहे हैं दोनों मिलाकर 6

1074
01:17:29,160 --> 01:17:33,160
पर लोग काम करते हैं यहां पर डी के भाई आप जो है अभी लाइव

1075
01:17:33,160 --> 01:17:37,640
में आ जाइएगा आपसे लाइव बात करेंगे आप जो है बाइबल के द्वारा मोक्ष को सिद्ध करिएगा

1076
01:17:37,640 --> 01:17:41,640
ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिएगा बार-बार आप वो करेंगे तो आपको फिर

1077
01:17:41,640 --> 01:17:45,640
बैन करना पड़ेगा एक ही कमेंट आप बारबार करते जा रहे हैं ठीक है आप

1078
01:17:45,640 --> 01:17:50,160
लाइव में आ जाइएगा जी बताइए तो

1079
01:17:50,160 --> 01:17:54,480
क्या कह रहा था [संगीत] मैं

1080
01:17:54,480 --> 01:17:58,160
किस विषय पर बात कर रहा

1081
01:17:58,160 --> 01:18:02,440
था कुछ हिस्ट्री में चल रहा था

1082
01:18:02,440 --> 01:18:06,760
कुछ सिस्टम ब जैसे हमा जा जातीय

1083
01:18:06,760 --> 01:18:11,520
काम जो खत्म हो गया हमारा तभी हम गरीब हो गए अगर

1084
01:18:11,520 --> 01:18:15,520
हमारे पास हमारी जाति का कार्य रहता तो हम

1085
01:18:15,520 --> 01:18:19,520
गरीब नहीं रहते और नौकरी में 6 पर

1086
01:18:19,520 --> 01:18:23,560
लोग नौकरी कर रहे हैं यानी कि 94 पर लोगों के पास

1087
01:18:23,560 --> 01:18:27,320
नौकरिया नहीं है जीविका नहीं है

1088
01:18:27,320 --> 01:18:31,320
और यह जो तंत्र चल रहा है वह चाहता है कि लोगों के पास जीविका

1089
01:18:31,320 --> 01:18:35,680
ना हो वह चाहता है कि स्त्रियों का सील सुरक्षित

1090
01:18:35,680 --> 01:18:40,320
ना हो क्योंकि स्त्रियों का अगर सील सुरक्षित

1091
01:18:40,320 --> 01:18:44,520
होगा तो उनके गर्भ से

1092
01:18:44,520 --> 01:18:49,240
भविष्य में मानव समाज के कल्याणकारी

1093
01:18:49,240 --> 01:18:53,280
लोग लोगों का जन्म होगा और जब कल्याणकारी लोगों का

1094
01:18:53,280 --> 01:18:57,440
जन्म होगा तो इनका यह सिस्टम है जिसके द्वारा

1095
01:18:57,440 --> 01:19:02,160
वो पूरी दुनिया में एक लूट तंत्र चला रहे हैं उसका अवसान हो जाएगा

1096
01:19:02,160 --> 01:19:06,440
तो उन्होंने इतना तक सोचा कि भाई अगर स्त्री का शील ही सुरक्षित

1097
01:19:06,440 --> 01:19:11,400
ना रहे तो ऐसा कोई व्यक्ति जन्म ही नहीं लेगा जो हमें चैलेंज कर सके

1098
01:19:11,400 --> 01:19:15,880
और इसीलिए वह चाहते हैं कि स्त्रियों का सील सुरक्षित ना हो

1099
01:19:15,880 --> 01:19:20,000
और अगर हम सबके हाथ में जीविका हो जन्म से सुरक्षित

1100
01:19:20,000 --> 01:19:24,760
जीविका हो मुझे कहीं सोचना नहीं पड़े मुझे एक काम है मैं करूंगा

1101
01:19:24,760 --> 01:19:28,880
और मेरे मुझे भोजन मिलता रहेगा रहने का जगह

1102
01:19:28,880 --> 01:19:32,960
रहेगा मुझे किसी चीज की कोई तकलीफ ना रहेगी तो अगर किसी चीज

1103
01:19:32,960 --> 01:19:37,600
की तकलीफ नहीं रहेगी तो आप इन लुटेरों की के लिए किस काम के

1104
01:19:37,600 --> 01:19:41,720
है आपको तकलीफ रहेगी तभी तो आप किसी से मदद मांगने

1105
01:19:41,720 --> 01:19:42,600
जाएंगे

1106
01:19:42,600 --> 01:19:47,240
और तब वह आपको मदद करके अपना लूट तंत्र चलाएंगे तो

1107
01:19:47,240 --> 01:19:51,640
वह चाहते ही है कि हमें जीविका हमारे पास ना हो

1108
01:19:51,640 --> 01:19:55,640
स्त्रियों का सील सुरक्षित ना हो तभी उनका सिस्टम चलेगा

1109
01:19:55,640 --> 01:19:59,640
ये ठीक ऐसे है जैसे एक मिनरल

1110
01:19:59,640 --> 01:20:04,120
वाटर कंपनी राजस्थान में अपना प्लांट डालने जाती है

1111
01:20:04,120 --> 01:20:08,600
जी वो क्या करती है कि पहले जो है वहां के जो पीने का पानी होता है

1112
01:20:08,600 --> 01:20:12,760
हम उस पीने के पानी के जितने भी स्त्रोत थे उनमें सब में कुछ ऐसे

1113
01:20:12,760 --> 01:20:16,920
केमिकल या कुछ ऐसा जहर मिलाती है जिससे कि वहां के लोग बीमार पड़ने

1114
01:20:16,920 --> 01:20:21,680
लगे हम और फिर उसकी दवाई के रूप में अपना

1115
01:20:21,680 --> 01:20:26,320
उसके समाधान के रूप में अपना मिनरल वाटर वो प्रसिद्ध करती है जी

1116
01:20:26,320 --> 01:20:30,440
जी बिल्कुल बिल्कुल इसी प्रकार से जैसे वर्णाश्रम धर्म

1117
01:20:30,440 --> 01:20:34,520
के बारे में पहले ऐसी फिल्म बनाओ ऐसे शूद्र ये वो वहां पर

1118
01:20:34,520 --> 01:20:38,760
इतना नाक रगड़ा जाती थी सर पर जूते रखवा जाते थे इतना घणा

1119
01:20:38,760 --> 01:20:42,960
मूलक पेश कर दो वर्णाश्रम व्यवस्था को कि व्यक्ति को

1120
01:20:42,960 --> 01:20:47,080
वर्णाश्रम व्यवस्था में दोष लगने लगे बीमारी दिखने लगे और फिर

1121
01:20:47,080 --> 01:20:51,360
उसके समाधान के रूप में अपनी वैकल्पिक जो चीजें

1122
01:20:51,360 --> 01:20:56,000
है जो जहां पर आपको उनका उपयोग करना है अपने मन के अनुसार उनका फिर उपयोग

1123
01:20:56,000 --> 01:20:57,960
करो है ना

1124
01:20:57,960 --> 01:21:02,000
इसमें इसमें एक चीज अभी आपने थोड़ी देर पहले कही थी कि जो दो

1125
01:21:02,000 --> 01:21:06,040
ये बंगाल और पंजाब कटे जो ये कहने लगे कि भाई वो वहां पर

1126
01:21:06,040 --> 01:21:10,280
वर्णाश्रम का त्याग हुआ वहां पर आप देखिए दोनों जगह पर हिंदू

1127
01:21:10,280 --> 01:21:14,320
धर्म का जो है जो क्या कहते उ डेमोग्राफी वो

1128
01:21:14,320 --> 01:21:18,480
नीचे होती जा रही है वहा हा हो रहा है वहां व्यक्ति क्रिश्चन

1129
01:21:18,480 --> 01:21:22,480
बन रहा है वो लंगड़े को खड़ा कर दे रहे हैं वहां पर पंजाब में

1130
01:21:22,480 --> 01:21:26,960
खूब धर्म परिवर्तन तेजी से हो रहा है और इधर बंगाल का आप देख ही रहे

1131
01:21:26,960 --> 01:21:31,000
अब तो मैं पंजाब के लिए नहीं अब तो मैं हिमाचल और हरियाणा के चिंतित

1132
01:21:31,000 --> 01:21:35,360
हूं हिमाचल और हरियाणा में इन घुस पैट बहुत ज्यादा हो चुका

1133
01:21:35,360 --> 01:21:39,360
है जी पंजाब तो गन केस है अब हिमाचल

1134
01:21:39,360 --> 01:21:43,440
हरियाणा को बचाना है जी हरियाणा

1135
01:21:43,440 --> 01:21:47,640
के लोग इतने तेजी से कन्वर्ट हो रहे हैं

1136
01:21:47,640 --> 01:21:51,800
जी और इसमें सबसे बड़ा रोल प्ले कर रहा है

1137
01:21:51,800 --> 01:21:55,200
हमारे

1138
01:21:55,200 --> 01:21:59,240
सरकारी नौकरी वाले लोग जो किसी ना किसी यूनियन के साथ जुड़े

1139
01:21:59,240 --> 01:22:03,720
हुए हैं और वह यूनियन किसी ना किसी दिल्ली या किसी विश्वविद्यालय

1140
01:22:03,720 --> 01:22:07,880
के प्रोफेसर के साथ जुड़ा हुआ है और यह

1141
01:22:07,880 --> 01:22:11,960
लोग हर वीकेंड में मंथ

1142
01:22:11,960 --> 01:22:16,120
में एक बार साल में बहुत बड़ा सेमिनार करते हैं

1143
01:22:16,120 --> 01:22:20,280
जहां पर लोगों बताया जाता है कि जाति को नहीं मानना चाहिए जी

1144
01:22:20,280 --> 01:22:25,920
और जाति मानने से क्या क्या खराबी होगा और जाति ना मानने से क्याक अच्छा

1145
01:22:25,920 --> 01:22:30,200
पर वह यह नहीं बताते हैं कि उस नछा इयों में सिर्फ 6 पर का ही गुजारा होगा बाकियों

1146
01:22:30,200 --> 01:22:34,440
का नहीं होगा बहुत बड़े लेवल

1147
01:22:34,440 --> 01:22:38,520
पर एक ट्रैप चल रहा है वर्णाश्रम को खत्म करने का

1148
01:22:38,520 --> 01:22:43,120
बहुत अब तो उका सक्सेस का पोजीशन आ गया ना

1149
01:22:43,120 --> 01:22:47,440
1857 में कोलकाता विश्वविद्यालय बना तो मान लीजिए

1150
01:22:47,440 --> 01:22:52,960
20 साल बाद उनका पहला खेप तैयार हुआ

1151
01:22:52,960 --> 01:22:57,720
18777 है मान लीज कितना साल हो गया

1152
01:22:57,720 --> 01:23:01,880
150 साल 20 साल का एक जनरेशन होने पर सात

1153
01:23:01,880 --> 01:23:05,960
पु खत्म हो गया आठवा पुस्त चल

1154
01:23:05,960 --> 01:23:10,120
रहा है अभी या और आठवा पुस्तो सात पिछले सात

1155
01:23:10,120 --> 01:23:14,200
पुस्त कब चीज बदल गया तो एक तरह से उनका जो

1156
01:23:14,200 --> 01:23:18,360
1857 में जो बीज रोपण किया था अब तो फसल काटने

1157
01:23:18,360 --> 01:23:22,560
का टाइम हम जैसे कुछ लोग इधर उधर बच

1158
01:23:22,560 --> 01:23:27,120
गए हैं हम लोग जब हो जाएंगे तो फिर यह सब बात करने वाले भी लोग नहीं

1159
01:23:27,120 --> 01:23:31,400
रहेंगे जी एक भाई साहब कह रहे हैं कि वेद

1160
01:23:31,400 --> 01:23:35,720
को ना मानने वाले वही वेद को ना मानने वाले देश अमेरिका

1161
01:23:35,720 --> 01:23:39,920
चाइना भारत से ज्यादा डेवलप है पर्न इंडस्ट्री भी वहीं पर ज्यादा

1162
01:23:39,920 --> 01:23:44,200
डेवलप है है ना इसका मैं उत्तर देना

1163
01:23:44,200 --> 01:23:49,800
चाह इसका मैं उत्तर देना चाहू आप भी दे दीजिएगा मैं भी दे दूं

1164
01:23:49,800 --> 01:23:53,960
प बहुत डेवलप है और अंततोगत्वा जो शीर्ष

1165
01:23:53,960 --> 01:23:57,960
के लोग है ना उनको वो जो चैन और सुख चाहिए ना जिसके जिसको वो

1166
01:23:57,960 --> 01:24:01,960
अर्थ में ढूंढ रहे हैं जिनको विकास में ढूंढ रहे हैं विकास के नाम पर जो

1167
01:24:01,960 --> 01:24:06,080
विनाश हो रहा है उसमें ढूंढ रहे हैं उनको आना यही पड़ता है

1168
01:24:06,080 --> 01:24:08,480
अंततोगत्वा

1169
01:24:08,480 --> 01:24:09,480
मांग

1170
01:24:09,480 --> 01:24:13,640
चुकर बर्ग और क्या कहते हैं ये स्टीव जॉब्स

1171
01:24:13,640 --> 01:24:17,800
के बारे में आपने शायद सुना हो है ना तो अर्थ

1172
01:24:17,800 --> 01:24:23,800
का ये देखिए विकास विकास आपको दे क्या रहा है क्या दे रहा है

1173
01:24:24,480 --> 01:24:28,680
आपके घर के बगल में जब पन इंडस्ट्री खुल जाएगी तब आपको पता चलेगा नहीं भारत

1174
01:24:28,680 --> 01:24:33,240
ही अच्छा था जी बताइए आप भी दे दीजिए इनका

1175
01:24:33,240 --> 01:24:38,000
जवाब जिन व्यक्ति ने यह बात कहा उन्हें चीन और अमेरिका के

1176
01:24:38,000 --> 01:24:42,040
पिछले 200 साल का इतिहास के बारे में कुछ मने है नॉलेज है

1177
01:24:42,040 --> 01:24:46,040
कुछ बात कर सकते हैं चीन को कहा जाता है

1178
01:24:46,040 --> 01:24:50,960
कि वह 1949 में आजाद हुआ था यह बात गलत है

1179
01:24:50,960 --> 01:24:55,200
चीन कभी भी पराधीन नहीं था अंग्रेजों ने कभी भी चीन पर शासन

1180
01:24:55,200 --> 01:24:59,280
नहीं किया था हां चीन के ऊपर उसका पूरा एक तरह से वैचारिक

1181
01:24:59,280 --> 01:25:03,360
कब्जा था हर बात उसी का चलता था क्योंकि उसको

1182
01:25:03,360 --> 01:25:07,560
वहां पर वो लोग मिल गए थे जो ब्रिटिश इंटरेस्ट का काम करते

1183
01:25:07,560 --> 01:25:11,840
थे चीन में तो माओ के आने के बाद

1184
01:25:11,840 --> 01:25:16,160
1975 में माओ मारा गया और इतने काल में

1185
01:25:16,160 --> 01:25:20,160
चीन पूरी तरह से बर्बाद हो चुका था गरीबी हर तरफ थी

1186
01:25:20,160 --> 01:25:24,400
हर तरफ लोग परेशान थे तब उस

1187
01:25:24,400 --> 01:25:24,900
मरने

1188
01:25:24,720 --> 01:25:29,560
के बाद न साल तक उसके पत्नी ने पूरे चीन को संभाल के रखा 1978

1189
01:25:29,560 --> 01:25:33,640
में उसके पत्नी के खिलाफ जो भी आंदोलन वगैरह हुआ जिसमें उसकी पत्नी और उसके कुछ

1190
01:25:33,640 --> 01:25:37,880
लोगों को फांसी दे दी जिसे गैंग ऑफ फोर कहा जाता है

1191
01:25:37,880 --> 01:25:42,360
तो 1978 में डंग पंग पावर में आया डंग

1192
01:25:42,360 --> 01:25:46,360
जियांग पंग भी माओ का ही सिद्धांत मानने वाला

1193
01:25:46,360 --> 01:25:50,360
व्यक्ति था पर उसके पास दिमाग माओ से ज्यादा था

1194
01:25:50,360 --> 01:25:54,400
वो यह बात समझ चुका था कि चीन के

1195
01:25:54,400 --> 01:25:58,600
लोगों के पास वो टेक्नोलॉजी है नहीं जिसके दम पर वो अमेरिका के साथ पंजा

1196
01:25:58,600 --> 01:26:03,360
लड़ा सके तो उस टेक्नोलॉजी को समझने के लिए उसने चाल चला

1197
01:26:03,360 --> 01:26:07,440
और वह चला गया यूरोप और अमेरिका के टूर पर और वहां

1198
01:26:07,440 --> 01:26:11,520
के राष्ट्र राष्ट्र अध्यक्षों के साथ मिला और उनको यह समझाया

1199
01:26:11,520 --> 01:26:15,560
कि चीन में अगर आप अपना प्रोडक्शन करेंगे तो आपकी प्रोडक्शन की कॉस्ट बहुत

1200
01:26:15,560 --> 01:26:19,560
कम हो जाएगा और आपका प्रॉफिट बढ़ जाएगा इस लालच में यूरोप और

1201
01:26:19,560 --> 01:26:23,600
अमेरिका के जो बिजनेसमैन थे वो आ गए और सरकार भी आ गई और उन्होंने

1202
01:26:23,600 --> 01:26:28,640
चीन में लगाना शुरू किया ये काल है 1980 का

1203
01:26:28,640 --> 01:26:33,120
दशक तो 1980 के दशक से असल में चीन का उत्थान

1204
01:26:33,120 --> 01:26:37,200
आज जिसको ये उत्थान कह र है वो शुरू हो रहा है और

1205
01:26:37,200 --> 01:26:39,800
उस समय चीन का प्रोडक्शन हब

1206
01:26:39,800 --> 01:26:44,720
बनने के लिए एक बहुत बड़ा कंपटीशन था कलकाता और हुगली

1207
01:26:44,720 --> 01:26:48,840
कोलकाता हावड़ा हुगली ये तीन जो डिस्ट्रिक्ट है बंगाल के यहां पर बहुत

1208
01:26:48,840 --> 01:26:53,200
फैक्ट्रियां थी और बहुत बड़े बड़े फैक्ट्रियां थी बहुत कुछ प्रोड्यूस होता था

1209
01:26:53,200 --> 01:26:57,280
तो चूंकि बंगाल में ज्योति बसु शासन में थे और वह चीन के ही एक तरह

1210
01:26:57,280 --> 01:27:01,400
से पिट्ठू थे तो चीन के कहने पर उन्होंने यहां के सारे इंडस्ट्री को बर्बाद

1211
01:27:01,400 --> 01:27:05,480
कर दिया ताकि जो प्रोडक्शन हावरा में होता था अब वो चीन में

1212
01:27:05,480 --> 01:27:09,680
हो और इस तरह से जो प्रोडक्शन का हब

1213
01:27:09,680 --> 01:27:13,840
इंडिया में था वो खत्म होता चला गया और चीन में प्रोडक्शन बढ़ता चला

1214
01:27:13,840 --> 01:27:18,000
गया अब चीन में अगर हम कहे

1215
01:27:18,000 --> 01:27:22,080
तो हां ठीक है आज के डेट में इकोनॉमिकली इकोनॉमिक पावर हाउस बन

1216
01:27:22,080 --> 01:27:26,400
गया है पर उसने इकोनॉमिक पावर हाउस बनने के लिए जिस तरह से फैक्ट्रियों

1217
01:27:26,400 --> 01:27:30,840
को अपने यहां पर लगाया तो फैक्ट्रियां लगाने के पीछे उनका प्रोडक्शन करने का

1218
01:27:30,840 --> 01:27:35,040
मन नहीं था उनका विचार यह था कि हम जब वो प्रोडक्शन

1219
01:27:35,040 --> 01:27:39,200
करेंगे तो हम ये टेक्नोलॉजी को सीखेंगे और सीखने के बाद हम खुद

1220
01:27:39,200 --> 01:27:43,200
बनाएंगे तो अब उन्होंने दुनिया में हर चीज जो बनता है

1221
01:27:43,200 --> 01:27:48,080
उसका नकल बनाना शुरू कर दिया इसके बाद क्या हुआ

1222
01:27:48,080 --> 01:27:52,160
कि इन्होंने यूरोप से जो निकले हुए इकोनॉमिक्स के सिद्धांत है

1223
01:27:52,160 --> 01:27:54,840
अर्थशास्त्र के जितने सिद्धांत है उसको मानते

1224
01:27:54,840 --> 01:27:58,880
हुए इन्होंने कुछ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स अपने यहां लगाए इन्होंने

1225
01:27:58,880 --> 01:28:03,080
क्या किया कि किसी भी एक जगह को उठा लिया यहां पर एक नया शहर बनाएंगे

1226
01:28:03,080 --> 01:28:07,440
और उन्होंने वहा एक नया शहर बना दिया तो जिस समय वह शहर बन रहा है

1227
01:28:07,440 --> 01:28:11,640
वहां पर मटेरियल लग रहा है लेबर काम कर रहा है

1228
01:28:11,640 --> 01:28:15,760
लोग वहां पर जो घर बन रहे है वह खरीद रहे हैं तो बैंकिंग का भी पैसा चल रहा

1229
01:28:15,760 --> 01:28:19,960
है इकोनॉमी में पैसे आ रहे हैं और उन्नति हो रही है

1230
01:28:19,960 --> 01:28:24,120
ये लगभग 1990 के बाद से शुरू हुआ

1231
01:28:24,120 --> 01:28:28,200
2000 2014 20 तक पूरा हो गया अब ऐसे बहुत सारे

1232
01:28:28,200 --> 01:28:32,240
भूतिया शहर चीन में बन चुके हैं जिनके सारे घर भी हो

1233
01:28:32,240 --> 01:28:37,160
सकता है बिक ग हो या नहीं बके हो पर उन शहरों में कोई जाना नहीं चाहता

1234
01:28:37,160 --> 01:28:42,480
और यह सारे शहर बस खड़े हैं खंडार के रूप में नहींन स

1235
01:28:42,480 --> 01:28:46,760
अब जो इन्होंने झूठा एक इकोनॉमिक

1236
01:28:46,760 --> 01:28:51,520
डेवलपमेंट दिखाया वो तो खत्म हो गया कितने नए शहर

1237
01:28:51,520 --> 01:28:55,520
बनाएगा अब इनका फॉल का टाइम आ गया है

1238
01:28:55,520 --> 01:28:59,680
और ऊपर से क्या हो गया है कि इनके यहां पर नौकरी करने

1239
01:28:59,680 --> 01:29:04,200
वाले लोग कम है पेंशन लेने वाले लोग ज्यादा

1240
01:29:04,200 --> 01:29:08,200
है तो कमाने वाले लोग अगर कम होंगे और पेंशन लेने

1241
01:29:08,200 --> 01:29:10,080
वाले लोग अगर ज्यादा होंगे तो

1242
01:29:10,080 --> 01:29:14,200
सिस्टम चलेगा या नहीं चलेगा जो व्यक्ति चीन के इकोनॉमिक्स

1243
01:29:14,200 --> 01:29:18,320
इकोनॉमिक राइज की बात कर रहे हैं मैं उन्हें क और 10 15 साल रुक

1244
01:29:18,320 --> 01:29:22,680
जाइए आपने 10 15 साल उनका राइज देखा है अब 10 15 साल में फॉल भी देख

1245
01:29:22,680 --> 01:29:26,800
लीजिए ये हुई चीन की बात अमेरिका की बात

1246
01:29:26,800 --> 01:29:31,040
करते हैं अमेरिका कोई

1247
01:29:31,040 --> 01:29:36,000
बहुत बड़ा इकोनॉमिक पावर हाउस शुरू में नहीं था

1248
01:29:36,000 --> 01:29:40,480
बल्कि हिटलर के मृत्यु तक भी यह कहा जा सकता है कि वह

1249
01:29:40,480 --> 01:29:44,760
वर्ल्ड में कोई बहुत बड़ा इकोनॉमिक पावर नहीं था मगर हिटलर ने जब यूरोप

1250
01:29:44,760 --> 01:29:48,960
को तहस नहस कर दिया तो यूरोप के जो धनाढ्य देश थे

1251
01:29:48,960 --> 01:29:53,280
वो एक तरह से टूट गए और उनके तुलना में अमेरिका के पास कुछ भी उनको

1252
01:29:53,280 --> 01:29:57,280
उसको कुछ हुआ नहीं विनाश तो उसके यहां हुआ नहीं था तो

1253
01:29:57,280 --> 01:30:01,360
पैसा वाला बन गया तो यूरोप के लोगों ने यह

1254
01:30:01,360 --> 01:30:05,360
सोचा कि हिटलर को तो चलो हम लोगों ने संभाल लिया पर हमने

1255
01:30:05,360 --> 01:30:09,640
जो दुनिया पर राज किया इतने सालों तक उसको कैसे बचा के रखेंगे

1256
01:30:09,640 --> 01:30:13,960
तो अपने उस आसुरी राज्य को बचाने के लिए

1257
01:30:13,960 --> 01:30:18,160
उन्होंने यूएनओ के निर्माण के तौर पर यूएनओ का एक सिस्टम

1258
01:30:18,160 --> 01:30:22,320
डेवलप किया उस यूएनओ में वर्ल्ड को एक करेंसी देने की बात उठी

1259
01:30:22,320 --> 01:30:25,640
कि दुनिया में करेंसी कौन सा करेंसी बनेगा

1260
01:30:25,640 --> 01:30:30,360
चूंकि अमेरिका दुनिया का उस समय सबसे

1261
01:30:30,360 --> 01:30:34,480
कम क्षतिग्रस्त देश था तो इसलिए सारे यूरोपियन के लोगों

1262
01:30:34,480 --> 01:30:38,680
ने सोचा कि चलो अमेरिका को के डॉलर को ही हम दुनिया का

1263
01:30:38,680 --> 01:30:42,880
करेंसी मान ले क्योंकि बाकी यूरोपियन देश वाले किसी और अपने यूरोप

1264
01:30:42,880 --> 01:30:47,080
के किसी दूसरे करेंसी को वर्ल्ड का करेंसी नहीं बनने देना चाहते थे और उनको

1265
01:30:47,080 --> 01:30:51,240
लगा कि अमेरिका तो अपने हाथ में ही है वो कौन सा हमें हटा देगा इसलिए उन्होंने अमेरिका

1266
01:30:51,240 --> 01:30:55,360
के करेंसी वर्ल्ड का करेंसी बना दिया यह डॉलर जब

1267
01:30:55,360 --> 01:31:00,440
वर्ल्ड करेंसी बन गया तब अमेरिका के पास इकोनॉमिक पावर

1268
01:31:00,440 --> 01:31:05,320
और उस इकोनॉमिक पावर के पीछे अमेरिका ने उस

1269
01:31:05,320 --> 01:31:09,360
समाज को एक वादा दिया था कि वो यूरोप

1270
01:31:09,360 --> 01:31:13,720
के समाज को बिना बताए एक्स्ट्रा डॉलर नहीं

1271
01:31:13,720 --> 01:31:18,400
छापे और इस वादे से अमेरिका मुकर गया

1272
01:31:18,400 --> 01:31:22,440
और उसके इस मुकने के कारण 1970 71 में जो बहुत

1273
01:31:22,440 --> 01:31:26,880
भयंकर गरीबी दुनिया में छाया था उसका कारण यही था कि

1274
01:31:26,880 --> 01:31:31,000
अमेरिका डॉलर ना छापने का जो उसका वादा था

1275
01:31:31,000 --> 01:31:35,160
उससे व मुक चुका था जब अमेरिका ने डॉलर

1276
01:31:35,160 --> 01:31:39,280
ना छापने से मुकर गया तो डॉलर

1277
01:31:39,280 --> 01:31:44,160
कोलप्पन की इकोनॉमी कोलप कर जाती लेकिन उस समय

1278
01:31:44,160 --> 01:31:48,560
निक्सन ने जाकर सऊदी अरेबिया के राजा के साथ कांट्रैक्ट

1279
01:31:48,560 --> 01:31:54,040
किया और उसने यह कहा कि पेट्रोल जो बिकेगा वो डॉलर में बिकेगा

1280
01:31:54,040 --> 01:31:58,160
तो चूंकि पहले डॉलर के पीछे गोल्ड था अब पेट्रोल

1281
01:31:58,160 --> 01:32:02,320
आ गया और इसलिए व वर्ल्ड करेंसी रह गया तो

1282
01:32:02,320 --> 01:32:08,000
जो करेंसी वर्ल्ड में करेंसी रहेगा तो दे इकोनॉमिक पावर हाउस

1283
01:32:08,000 --> 01:32:12,200
बनेगा तो आप पहले इतिहास को देखि कौन

1284
01:32:12,200 --> 01:32:17,240
कैसे बड़ा बना है उसके बाद हम बात करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा

1285
01:32:17,240 --> 01:32:21,400
जी अच्छा एक चीज और बोलते हैं कि

1286
01:32:21,400 --> 01:32:25,720
क्या कहते हैं जाति के कारण जो पाकिस्तान ल बांगलादेश अलग हुआ है

1287
01:32:25,720 --> 01:32:29,800
या अफगानिस्तान यह टूटा जाति जाति के कारण तो इसमें इसको

1288
01:32:29,800 --> 01:32:33,880
कैसे देखते हैं जाति का मतलब क्यों जाति का क्या

1289
01:32:33,880 --> 01:32:38,160
बात हुआ जातिवाद

1290
01:32:38,160 --> 01:32:42,440
के जावा के कारण छोटी जाति के लोग मुसलमान बन ग और फिर वो

1291
01:32:42,440 --> 01:32:46,280
अलग हो गए यही कहना चाहते

1292
01:32:46,280 --> 01:32:50,480
परवत अगर आप पुराने सेंसस डटा

1293
01:32:50,480 --> 01:32:54,680
तो उतने है नहीं पर फिर भी अंग्रेज अपने टाइम में का डटा

1294
01:32:54,680 --> 01:32:59,280
बनाने लग गए थे तो आप पाएंगे कि

1295
01:32:59,280 --> 01:33:03,880
1857 के पहले तक पूरे भारतवर्ष में

1296
01:33:03,880 --> 01:33:08,760
मुसलमानों की संख्या 10 पर से अधिक नहीं थी जी

1297
01:33:08,760 --> 01:33:12,840
मैं इस बात पर आना चाह रहा था हा मुसलमानों ने

1298
01:33:12,840 --> 01:33:17,600
इतनी देर तक राज किया तब भी उनकी जनसंख्या इतनी नहीं बढ़ पाई मगर जब 1857

1299
01:33:17,600 --> 01:33:21,640
के बाद से जो चीज हुई वर्णाश्रम से दूर जाने लगा तब जो

1300
01:33:21,640 --> 01:33:26,080
जनसंख्या का बड़ा ग्रोथ हुई है बिल्कुल अलग

1301
01:33:26,080 --> 01:33:30,200
है बात आना चाह रहा था जी जी

1302
01:33:30,200 --> 01:33:35,120
और इस काल में जैसे

1303
01:33:35,120 --> 01:33:39,160
जो लोग कहते हैं कि हम छोटी जाति से अत्याचार के होने के

1304
01:33:39,160 --> 01:33:43,240
कारण हमने धर्म छोड़ दिया तो मेरा यह पूछना है कि

1305
01:33:43,240 --> 01:33:47,240
भाई जो हिंदू वहां पर छोटी जातियों पर अत्याचार करते थे

1306
01:33:47,240 --> 01:33:51,400
ऐसे किसी अत्याचारी का नाम बताओ जैसे हम कहते

1307
01:33:51,400 --> 01:33:55,600
हैं कि मुसलमानों ने मुगलों ने पर अत्याचार किया

1308
01:33:55,600 --> 01:33:59,880
तो फिर हमारे पास नाम है ना औरंगजेब है

1309
01:33:59,880 --> 01:34:03,880
मोहम्मद साह रंगीला है और भी बहुत सारे इनके सब

1310
01:34:03,880 --> 01:34:08,360
थे अफजल खान वगैरह ये सब है तो भाई एक हिंदू जमींदार

1311
01:34:08,360 --> 01:34:10,080
का नाम बताओ

1312
01:34:10,080 --> 01:34:14,200
जिसने छोटी जातो पर अत्याचार किया था और ऐसा एक अत्याचार

1313
01:34:14,200 --> 01:34:18,640
का कोई घटना बताओ बंगाल और पंजाब में दूसरे देश

1314
01:34:18,640 --> 01:34:22,800
राज्य की बात छोड़ देता हूं अब बंगाल से एक घटना बताओ

1315
01:34:22,800 --> 01:34:26,960
कि ऊंची जाति के लोगों ने छोटी जाति के लोगों पर अत्याचार किया उनके गांव

1316
01:34:26,960 --> 01:34:31,240
को जला दिया उनको कत्लेआम कर दिया ऐसा एक घटना का

1317
01:34:31,240 --> 01:34:35,320
वर्णन जी सारे इतिहासकार तुम्हारे कोलकाता विश्वविद्यालय में बैठे हुए

1318
01:34:35,320 --> 01:34:39,680
हैं बड़े बड़े कम्युनिस्ट नेता लोग बैठे हुए हैं

1319
01:34:39,680 --> 01:34:43,720
जिन्होंने पाकिस्तान के बनने को वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन का

1320
01:34:43,720 --> 01:34:47,720
नाम दिया हुआ है उनसे भी मैंने ये सवाल किया कि भाई तम मुझे एक घटना

1321
01:34:47,720 --> 01:34:51,920
बता दे जहां पर किसी जमींदार ने छोटी जाति के लोगों पर अत्याचार किया

1322
01:34:51,920 --> 01:34:55,960
बहुत अकते अत्याचार किया ने शासक ने किसी का तो हिस्ट्री

1323
01:34:55,960 --> 01:35:00,040
होगी ना हा अरे होगा ना ये कहते

1324
01:35:00,040 --> 01:35:04,680
है ना फुले ने लिख कर गया था बाद में अंबेडकर ने भी कहा

1325
01:35:04,680 --> 01:35:09,040
कि वो झारू बांध के चलते थे और एक घड़ा

1326
01:35:09,040 --> 01:35:13,400
बांध के चलते थे अरे भाई कोई लिखित प्रमाण दिखाओ ना यार पेशवा

1327
01:35:13,400 --> 01:35:18,200
का तो सारा डॉक्यूमेंट आपने भंडार में रखा हुआ है वहा से निकाल कर

1328
01:35:18,200 --> 01:35:22,280
दिखाओ कोई एक राज आज्ञा दिखाओ कि हा पेशवा ने ऐसी आज्ञा दी

1329
01:35:22,280 --> 01:35:25,920
थी

1330
01:35:25,920 --> 01:35:30,080
ये ये पिछले 100 200 साल में जो नैरेटिव बनाए गए

1331
01:35:30,080 --> 01:35:34,480
हैं उसमें ऐसे सिनेरियो बनाए गए कि भैया देखो देखो इतना अत्याचार

1332
01:35:34,480 --> 01:35:39,040
हुआ ऐसा ऐसा घरना मूलक चीजें की गई और वोह जो चीज नहीं थी

1333
01:35:39,040 --> 01:35:43,280
वो चीज बना कर के आपको प्रस्तुत कर दी गई जो अस्तित्व में थी नहीं वर्ण व्यवस्था से उत्पन्न

1334
01:35:43,280 --> 01:35:47,480
होने वाली कोई आधार नहीं इनकी बा इनकी बातो का कोई आधार नहीं है वो इन्होने

1335
01:35:47,480 --> 01:35:51,640
उत्पन्न कर दिया देखो ऐसा होता था वैसा होता था इतनी ज्यादा बातें की उसके

1336
01:35:51,640 --> 01:35:55,760
बारे में कि आदमी भूल ही गया कि कौआ कान ले गया कान ले गया कि देगा के

1337
01:35:55,760 --> 01:35:59,760
कान तो यही है कोई कुछ नहीं ले गया तो उस परे ध्यान देना भूल ही

1338
01:35:59,760 --> 01:36:03,920
ग ये इतिहास नहीं है ये जैसे फिल्मों की कहानियां लिखी जाती है

1339
01:36:03,920 --> 01:36:09,120
ना वैसे कुछ कहानियां लिखी गई है जी

1340
01:36:09,120 --> 01:36:13,200
सब इनके मन गणन बातें हैं जैसे ही बात करके ठीक

1341
01:36:13,200 --> 01:36:17,240
है भाई कोई ब्राह्मण अत्याचारी था कोई क्षत्रिय अत्याचारी था तो भाई नाम बताना

1342
01:36:17,240 --> 01:36:21,280
कौन था जी जब मैं पूछता हूं

1343
01:36:21,280 --> 01:36:27,280
किसी से कि एक अत्याचारी ब्राह्मण का नाम बताओ ये नाम बताते है

1344
01:36:27,840 --> 01:36:31,080
[हंसी]

1345
01:36:31,080 --> 01:36:35,880
रावण और कहीं कहीं कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो रावण को काल्पनिक

1346
01:36:35,880 --> 01:36:39,960
कहेंगे हा और जब मैं कहता कि एक ब्राह्मण का नाम बता जो

1347
01:36:39,960 --> 01:36:43,960
अत्याचारी था तो नाम आता रावण का मैं बो छत्रिय का

1348
01:36:43,960 --> 01:36:48,000
नाम बता जो बहुत बड़ा अत्याचारी था तो घूम फिर के क

1349
01:36:48,000 --> 01:36:53,840
दुर्योधन का नाम आ जाता है या वसे ही कुछ नाम आ जाते बस यही है

1350
01:36:53,840 --> 01:36:57,880
जी जी जी चलिए बहुत बढ़िया आपसे आज

1351
01:36:57,880 --> 01:37:02,080
चर्चा हुई है और मूल विषय यही है मूल विषय हमारा एक बात

1352
01:37:02,080 --> 01:37:06,120
याद दिला दूं कि पहली बात आप जो जात पात की करो विदाई की

1353
01:37:06,120 --> 01:37:10,320
बात कर रहे हो तो कहां पर वो लागू है वो तो दिखाओ

1354
01:37:10,320 --> 01:37:14,480
कहां पर लागू है बहुत स्ट्रिक्टली ज फॉलो हो रहा हो जिसकी

1355
01:37:14,480 --> 01:37:18,800
वजह से आपको बड़ी वो धर्म के क्षेत्र में धर्म की रक्षा करने की आवश्यकता

1356
01:37:18,800 --> 01:37:22,800
पड़ गई कि इस जात पात को नहीं मिटाए तब तक यह वाली जो यहां पर जो फॉलो

1357
01:37:22,800 --> 01:37:27,600
हो रही है जिसके कारण जो है हमारा धर्म खतरे में है

1358
01:37:27,600 --> 01:37:31,800
और भाई अधर्म से लड़ते लड़ते अगर यूं ही हम अपने धर्म को बदलते रहेंगे

1359
01:37:31,800 --> 01:37:35,960
बदलते रहेंगे तो आखिरी में हम सामने वाले से लड़ कर के बचाएंगे क्या

1360
01:37:35,960 --> 01:37:40,520
बदला हुआ धर्म बदले हुए धर्म

1361
01:37:40,520 --> 01:37:42,920
जो कहते हैं मैं लड़ रहा हूं

1362
01:37:42,920 --> 01:37:47,840
दूसरों से वो लड़ नहीं रहे वो उन्हीं के लोग है

1363
01:37:47,840 --> 01:37:52,120
मुझे यह बात कहने में कोई तकलीफ नहीं है मैंने

1364
01:37:52,120 --> 01:37:56,280
एक सिद्धांत दिया है कि 1793 के बाद बंगाल

1365
01:37:56,280 --> 01:38:00,280
में और 1857 के बाद समूचे भारतवर्ष

1366
01:38:00,280 --> 01:38:04,280
में जो भी व्यक्ति या जो भी संस्था जो भी

1367
01:38:04,280 --> 01:38:09,440
संगठन प्रसिद्ध हुआ है उसे संदेह की नजर से

1368
01:38:09,440 --> 01:38:15,080
देखो चाहे वह कोई भी हो कोई भी मतलब कोई

1369
01:38:15,080 --> 01:38:17,280
भी

1370
01:38:17,280 --> 01:38:21,920
जी बहुत बहुत सूत्रा क्मक बात बोल दी आपने

1371
01:38:21,920 --> 01:38:24,640
जी जी

1372
01:38:24,640 --> 01:38:28,840
जी जी आज हम एक चीज देखें कि

1373
01:38:28,840 --> 01:38:32,960
ये लोग कहते हैं कि भाई व जात पात की करो विदाई हम लोग अगर

1374
01:38:32,960 --> 01:38:36,960
बड़ी वाली वो आपको वो याद है लाइन मैन होते थे पटरी पर लाइन दिखाने वो

1375
01:38:36,960 --> 01:38:41,080
टॉर्च दिखाने जाते बड़ी सी टॉर्च होती थी उनके पास जी जी वो वाली टॉर्च

1376
01:38:41,080 --> 01:38:45,320
लेके भी आज हम ढूंढेंगे अगर मुख्य शहरों की बात कर ले जो

1377
01:38:45,320 --> 01:38:49,600
जो राज करते हैं जहां से आपकी चीजें चालू होती है भाई

1378
01:38:49,600 --> 01:38:53,880
गांव में राज तो होता नहीं है हेड क्वार्टर कहां होता है मुख्यालय वो तो सिटीज

1379
01:38:53,880 --> 01:38:58,400
में होता है तो अगर हम लोग सिटीज की बात कर ले मुख्य रूप से

1380
01:38:58,400 --> 01:39:02,520
तो उसमें हम लोग बड़ी वाली टॉर्च लेकर के घूमे ना तब हमें दो चार

1381
01:39:02,520 --> 01:39:06,760
वर्णाश्रम जने वाले ब्राह्मण जने वाले क्षत्रिय

1382
01:39:06,760 --> 01:39:10,840
जने वाले वैश्य ये लोग मिलेंगे तो ज्यादातर हम

1383
01:39:10,840 --> 01:39:14,880
जो ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला भी है ज्यादातर जो क्षत्रिय कुल में जन्म लेने

1384
01:39:14,880 --> 01:39:18,920
वाला भी है क्षत्रिय वैश्य में तो लुप्त हो चला प्राय साउथ की

1385
01:39:18,920 --> 01:39:23,120
साइड आप चाहेंगे तब भी काफी मिल जाएगा मगर जो जो हमारा जो

1386
01:39:23,120 --> 01:39:27,160
ये जो उत्तर प्रदेश अगर इसकी बात करें जहा राम जन्मभूमि कृष्ण

1387
01:39:27,160 --> 01:39:31,200
जन्मभूमि जो उद्गम स्रोत माने जाते हैं सनातन धर्म को

1388
01:39:31,200 --> 01:39:35,480
ले जाने वाले आगे तो इनकी जो धरती है इनके आसपास की धरती

1389
01:39:35,480 --> 01:39:39,680
इसमें देखिए आप ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला क्षत्रीय कुल में ब्राह्मण

1390
01:39:39,680 --> 01:39:43,800
कुल में तो तब भी मिल जाएंगे क्षत्रिय कुल में और वैश्य कुल में तो यही

1391
01:39:43,800 --> 01:39:47,880
कहेंगे कि भैया हमारे यहां लुप्त हो चुकी है परंपरा हमारे यहां

1392
01:39:47,880 --> 01:39:52,480
होता ही नहीं है मनु महाराज कहे तो कहने दो तो जब अच्छा

1393
01:39:52,480 --> 01:39:56,800
तो अब ये लोग कौन है पतित ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित

1394
01:39:56,800 --> 01:40:01,400
तो यह भी कोटि इनकी भी कोटि वही हो गई शूद्र कोटि के हो गए बस केवल

1395
01:40:01,400 --> 01:40:05,760
इनका एडजेक्टिव रह गया मैं बस इतना कहूंगा आप समझ

1396
01:40:05,760 --> 01:40:10,040
लीजिए कि अगर मैं सही माने में कह

1397
01:40:10,040 --> 01:40:13,560
जिनको हिंदू कहना चाहिए जिनको जाति मानने वाला हिंदू

1398
01:40:13,560 --> 01:40:17,800
कहना चाहिए तो उस नजरिए से मैं भी हिंदू नहीं

1399
01:40:17,800 --> 01:40:22,200
हूं जी मैं इतनी बड़ी बात क रहा हूं मेरा

1400
01:40:22,200 --> 01:40:26,800
जीवन ऐसा नहीं कि मैं अपने आप को वर्णाश्रम कह सक

1401
01:40:26,800 --> 01:40:31,000
मैं अपने आप को धार्मिक कह सकू तो हिसाब से

1402
01:40:31,000 --> 01:40:35,360
इसमें मैं आपका खंडन करूंगा मैं आपको एक बात बता दू आज भगवत

1403
01:40:35,360 --> 01:40:39,480
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने एक बात कही यदि

1404
01:40:39,480 --> 01:40:44,280
अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का

1405
01:40:44,280 --> 01:40:48,320
पालन ना कर पाने की स्थिति में आपके

1406
01:40:48,320 --> 01:40:52,960
मन में धर्म का पालन ना कर पाने का पश्चाताप है

1407
01:40:52,960 --> 01:40:57,120
या प्रमाण बुद्धि अभी भी वही है है तो सही वही

1408
01:40:57,120 --> 01:41:01,320
मैं जो कर रहा हूं वो गलत है मेरे से जो हुआ मेरे साथ जो हुआ वो गलत है

1409
01:41:01,320 --> 01:41:07,320
प्रमाण बुद्धि वही है केवल प्रमाण बुद्धि के कारण भी आप

1410
01:41:10,160 --> 01:41:14,280
धर्मजीत जान के बहुत अच्छा लगा हा ये अगर आपने

1411
01:41:14,280 --> 01:41:18,400
इसका उल्टा कर दिया कि मैं सही हूं शास्त्र गलत है वो कह रहे वो

1412
01:41:18,400 --> 01:41:22,440
आज के टाइम पर लागू नहीं हो सकते वो प्रक्षिप्त है जो भी है तो वहां पर जो है

1413
01:41:22,440 --> 01:41:26,480
हम लोग अधर्मी होते हैं तो अगर हम लोग आचरण में नहीं भी ला पा

1414
01:41:26,480 --> 01:41:30,680
रहे मगर हमें ये मालूम है कि प्रमाण बुद्धि वही है तो हम लोग तब भी धर्म

1415
01:41:30,680 --> 01:41:35,240
के कहलाएंगे जैसे एक पिता मना करता है कि बेटा सिगरेट मत पी

1416
01:41:35,240 --> 01:41:39,400
बहुत गलत आदत है मगर वो अपनी आदत नहीं छोड़ पा रहा किसी कारणवश भी

1417
01:41:39,400 --> 01:41:43,680
मजबूरी में अपनी आदतन वश उसको सिगरेट पीनी पड़ रही है मगर सिगरेट

1418
01:41:43,680 --> 01:41:47,880
पीते समय वो ये जान रहा है कि ये मैं गलत कर रहा हूं मेरे पिता ने जो कहा है वो सही है

1419
01:41:47,880 --> 01:41:51,960
तो वो अपने पिता का आज्ञा वो प्रमाण बुद्धि के कारण वो

1420
01:41:51,960 --> 01:41:56,040
एक अच्छा पुत्र कहलाएगा उसी तरीके से

1421
01:41:56,040 --> 01:42:00,160
आपातकाल में ये सब्रम नहीं भी है तब भी

1422
01:42:00,160 --> 01:42:06,160
आपकी क्योंकि प्रमाण बुद्धि है धर्मशास्त्रों में तो इसलिए आप

1423
01:42:08,440 --> 01:42:12,560
धर्मजीवन आया है महाभारत में भी कि इस कारण

1424
01:42:12,560 --> 01:42:16,640
से जो आपकी श्रद्धा है ना श्रद्धा वान जो

1425
01:42:16,640 --> 01:42:20,960
एक आचरण हीन व्यक्ति भी होता है वो भी अ श्रद्धावन

1426
01:42:20,960 --> 01:42:25,120
आचरण वान व्यक्ति से अच्छा होता

1427
01:42:25,120 --> 01:42:29,200
श्रद्धावन आचरण हीन व्यक्ति भी अ श्रद्धावन आचरण वान

1428
01:42:29,200 --> 01:42:34,000
व्यक्ति से अच्छा होता है क्योंकि वो जो आचरण वान है उसका

1429
01:42:34,000 --> 01:42:38,240
कोई आधार नहीं है इसके कारण उसके लुप्त हो जाने की बहुत जल्दी

1430
01:42:38,240 --> 01:42:42,560
आवश्य वो है संभावना और जिसके पास आचरण नहीं है

1431
01:42:42,560 --> 01:42:46,800
क्योंकि उसके पास आधार है अच्छे और बुरे का तो उसके पास आचरण

1432
01:42:46,800 --> 01:42:51,120
आ जाने की बहुत संभावना है जैसे कोई नास्तिक

1433
01:42:51,120 --> 01:42:55,200
है जिसको नहीं पता माता को माता क्यों मान रहा हूं बहन को बहन

1434
01:42:55,200 --> 01:42:59,360
क्यों मान रहा हूं और पत्नी को पत्नी क्यों मान रहा हूं इन तीनों में अंतर

1435
01:42:59,360 --> 01:43:03,560
क्यों कर रहा हूं उसको नहीं पता नास्तिक क्योंकि उसके पास धर्म नहीं है तो फिर

1436
01:43:03,560 --> 01:43:07,920
क्या होगा कि वह आज मान रहा है कि माता है बहन है पत्नी मगर

1437
01:43:07,920 --> 01:43:11,960
किस क्षण कौन सी घड़ी में उसकी व मनोवृति चेंज हो ठीक है

1438
01:43:11,960 --> 01:43:15,960
यार कॉम्प्रोमाइज कर लेगा और जो धर्म से जुड़ा

1439
01:43:15,960 --> 01:43:20,080
हुआ व्यक्ति होगा वह हमेशा एक बात नहीं यह

1440
01:43:20,080 --> 01:43:23,480
नहीं हो सकता उसके मन में एक मर्यादा हमेशा वो बनी

1441
01:43:23,480 --> 01:43:27,480
रहेगी इसलिए नास्तिक व्यक्ति का आचरण वान होना भी

1442
01:43:27,480 --> 01:43:31,640
कोई काम का नहीं होता है तो इसी तरीके से

1443
01:43:31,640 --> 01:43:35,880
है बहुत बढ़िया बात है आप कह रहे थे आप हम लोग शायद विषय

1444
01:43:35,880 --> 01:43:39,920
तो छूट गया मगर आप जो कह रहे थे ना कि हां टॉर्च

1445
01:43:39,920 --> 01:43:44,040
लेकर के भी ढूंढे तो कोई ब्राह्मण क्षत्रिय जो ये वर्णाश्रम धर्म का पालन

1446
01:43:44,040 --> 01:43:48,040
करने वाले आजकल हमारे जो जो मुख्यालय होंगे हेड क्वार्टर उसमें मिलना

1447
01:43:48,040 --> 01:43:52,040
मुश्किल है मगर हो क्या रहा है कि अ ये जात पात की करो विदाउट विदाई तो

1448
01:43:52,040 --> 01:43:56,080
क्या कर रहे हैं इसके नाम कि जिसको शास्त्रों ने या धर्म

1449
01:43:56,080 --> 01:44:00,240
ने कहा कि तुम ऐसा करो जिसके कुल वंश में पीछे से उसे जो गुण

1450
01:44:00,240 --> 01:44:04,800
प्राप्त है उसके अनुसार जो यह करना चाहिए तो यह लोग अपना जीवन

1451
01:44:04,800 --> 01:44:08,800
जो जिनके जीवन में कठिनाई है ब्राह्मण क्षत्रीय वश्य

1452
01:44:08,800 --> 01:44:13,520
इनका जीवन कंपेरटिवली टू शूद्र का जीवन जो है वह कठिन है

1453
01:44:13,520 --> 01:44:17,800
अगर देखा जाए है ना क्योंकि आज देखिए हम सरलता के लिए ही तो जने

1454
01:44:17,800 --> 01:44:21,800
को छोड़ के बैठे हैं जितने लोगों ने आज जने को छोड़ा है वो क्यों

1455
01:44:21,800 --> 01:44:25,880
छोड़ा है सरल होता है जीवन हम कहां कर पाएंगे उतनी बार

1456
01:44:25,880 --> 01:44:29,920
कुल्ले हम कहां कर पाएंगे छोटी छोटी सी जगह पर तो सरलता के

1457
01:44:29,920 --> 01:44:34,640
लिए जनेऊ को त्यागा हुआ है तो इसका अर्थ क्या है कि धर्म के अनुसार

1458
01:44:34,640 --> 01:44:38,520
जो शास्त्र ये जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य का जीवन है वो कंपेरटिवली टू

1459
01:44:38,520 --> 01:44:42,560
शूद्र कठिन है तो अब ये लोग क्या कर रहे हैं जो ऐसे ब्राह्मण

1460
01:44:42,560 --> 01:44:46,600
क्षत्रिय वैश शूद्र जिनका जो धे वो धर्मो

1461
01:44:46,600 --> 01:44:50,960
चित मार्ग में नहीं है बल्कि अपने जीवन के भोग में है अपने जीवन के उसमें

1462
01:44:50,960 --> 01:44:55,080
है लाभ में सुख भोगने में वो लोग क्या कर रहे हैं कि हम तो बिना

1463
01:44:55,080 --> 01:44:59,600
जनेऊ के रहे और जो शूद्र का सरल जीवन है वह तो हम जिए

1464
01:44:59,600 --> 01:45:03,760
और हमारा जो कठिन जीवन है वो शूद्र जी है ऐसा मिथ्या

1465
01:45:03,760 --> 01:45:07,920
भाषण फैलाया जाए ऐसा सिनेरियो क्रिएट कर दिया जाए वर्णाश्रम

1466
01:45:07,920 --> 01:45:12,000
जात पात मिटाओ जात पात से करो विदाई तो और इन सबका

1467
01:45:12,000 --> 01:45:16,320
जो दूरगामी जो वो है नतीजा परिणाम

1468
01:45:16,320 --> 01:45:20,440
वो दिखाई नहीं दे रहा है किसी को तो ये सारी चीजें है

1469
01:45:20,440 --> 01:45:24,480
आप आए आज बहुत अच्छी अच्छी बातें हुई और मैं चाहूंगा ना कि जो अर्थ

1470
01:45:24,480 --> 01:45:28,520
वाली जो आपकी थ्योरी है उस परे भी हम लोग किसी दिन जल्दी

1471
01:45:28,520 --> 01:45:32,760
से जल्दी चर्चा करें मुझे उसम उसमें एक बहुत दूरगामी

1472
01:45:32,760 --> 01:45:37,520
जो है आपका दृष्टिकोण प्राप्त हो रहा है जो इकोनॉमिक

1473
01:45:37,520 --> 01:45:41,520
इकोनॉमिकली जो आपने व्याख्या जहां जहां प की तो वहां पर बहुत शार

1474
01:45:41,520 --> 01:45:45,920
आपकी बातें थी और काफी बढता थी आपकी बातों में

1475
01:45:45,920 --> 01:45:49,920
और एक दू समय निकालते हैं फर उस बैठते हां

1476
01:45:49,920 --> 01:45:53,600
उसके लिए फिर एक दिन बैठेंगे एक आयु बहुत देर से

1477
01:45:53,600 --> 01:45:59,600
उनका नाम कमेंट में आ रहा

1478
01:45:59,960 --> 01:46:04,000
था आयुषी जी लिंक

1479
01:46:04,000 --> 01:46:10,000
दे दीजिए वह आना चाहती थी कोई क्वेश्चन है उनका पूछ लू

1480
01:46:13,640 --> 01:46:17,680
उनसे आज वैसे हमने यह

1481
01:46:17,680 --> 01:46:21,760
सभी के लिए नहीं नहीं रखी थी स्पेशली आतिश जी के साथ में ही चर्चा

1482
01:46:21,760 --> 01:46:25,960
थी मगर आयुषी जी को हम ले लेते हैं क्योंकि चर्चा की शुरुआत से अभी

1483
01:46:25,960 --> 01:46:31,960
तक उन्होंने जो है कमेंट किया है कि मुझे जो है लिंक दे

1484
01:46:32,880 --> 01:46:38,880
दीजिए जी आयुष लिंक दे दिया गया

1485
01:46:42,880 --> 01:46:48,440
है लिंक दे दिया गया आयुष

1486
01:46:48,440 --> 01:46:52,440
जी आयुषी जी को ही जुड़ना है केवल और कोई ना

1487
01:46:52,440 --> 01:46:56,720
जुड़े हम लोग फिर किसी दिन रखेंगे और कल हम लोग स्त्री

1488
01:46:56,720 --> 01:47:00,920
गायत्री और वैदिक मंत्रों पर एक चर्चा फिर से रखने

1489
01:47:00,920 --> 01:47:05,040
वाले हैं उसमें आएंगी विजया उनकी यात्रा है

1490
01:47:05,040 --> 01:47:09,200
वह कैसे एक आधुनिक लाइफ को जी रही थी पाश्चात्य

1491
01:47:09,200 --> 01:47:13,520
जो संस्कृति उनसे काफी प्रभावित थी उनकी उनका जीवन

1492
01:47:13,520 --> 01:47:17,520
और वह आज जो है वैदिक वर्णाश्रम धर्म को मानते

1493
01:47:17,520 --> 01:47:21,600
हुए परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्वारा दिए गए सिद्धांतों को

1494
01:47:21,600 --> 01:47:25,800
मानते हुए जी को जीवन को दिशा दे रही है

1495
01:47:25,800 --> 01:47:30,640
तो काफी अच्छा लगेगा आप लोगों को उन्ह सुनने

1496
01:47:30,640 --> 01:47:35,360
में आयुषी जी आ नहीं रही है हमें लग रहा

1497
01:47:35,360 --> 01:47:40,920
है ठीक है हम लोग फिर किसी दिन आते

1498
01:47:40,920 --> 01:47:45,000
हैं ठीक है आते जी आपको बहुत बहुत आभार आपने बहुत अच्छे

1499
01:47:45,000 --> 01:47:49,240
से प्रकाश डाला और आपने जो बहुत

1500
01:47:49,240 --> 01:47:53,280
अच्छा लगा आपका जो आपने जिस तरह से प्रकाश डाला और हम लोग जल्दी से जल्दी आपके साथ

1501
01:47:53,280 --> 01:47:57,320
एक चर्चा फिर से रखते हैं ठीक है सभी को जय श्री राम जड़ने

1502
01:47:57,320 --> 01:48:03,320
के लिए आभार सभी को जय श्री राम जय श्री

1503
01:48:08,280 --> 01:48:12,360
राम तो एक बात क्लियर हो गई है

1504
01:48:12,360 --> 01:48:16,480
कि जात पात की करो विदाई जात पात अस्तित्व में नहीं है यह तो

1505
01:48:16,480 --> 01:48:20,560
किस जात पात की विदाई हो रही है जात पात की विदाई करने के नाम पर जो परंपरा प्राप्त

1506
01:48:20,560 --> 01:48:24,600
हमारे सिद्धांत है शायद यह कहने वाले को भी नहीं पता है कि हम उन्हीं की विदाई

1507
01:48:24,600 --> 01:48:29,200
की बात कर रहे हैं ठीक है तो पहली बात तो यह हो गई

1508
01:48:29,200 --> 01:48:33,360
और दूसरी बात यह कि कर्म के आधार पर अगर जाति मान ली

1509
01:48:33,360 --> 01:48:37,520
जाए तो उसका परव सान क्या सुव्यवस्था में हो सकता है नहीं हो सकता

1510
01:48:37,520 --> 01:48:42,440
है और नहीं हो सकता है उसी का परिणाम है आज जो हम देख रहे हैं समाज में

1511
01:48:42,440 --> 01:48:46,680
ठीक है और किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद

1512
01:48:46,680 --> 01:48:51,280
के लिए आप लोग हमसे संपर्क कर सकते हैं

1513
01:48:51,280 --> 01:48:55,360
74836 य नंबर है नामा स्त्र हम लोग नाम जप

1514
01:48:55,360 --> 01:48:56,680
कर रहे हैं डेली

1515
01:48:56,680 --> 01:49:00,760
उसमें आप हमसे जुड़ सकते हैं उसके लिए भी यहीं पर ट करना है

1516
01:49:00,760 --> 01:49:04,760
भाई व किया करें फोन ना किया करें और

1517
01:49:04,760 --> 01:49:08,920
इसके इसी क्रम में आगे अगर आप धार्मिक इस

1518
01:49:08,920 --> 01:49:13,360
अभियान से जुड़ना चाहते हैं तो उसमें जुड़ सकते हैं इसी नंबर पर ट करके

1519
01:49:13,360 --> 01:49:16,680
हमारी क्लासेस से जुड़ सकते

1520
01:49:16,680 --> 01:49:20,920
हैं इसके साथ ही साथ

1521
01:49:20,920 --> 01:49:25,040
आपको जो धर्म के धर्म और धर्म के विषय में जो सवाल आते हैं आपके मन में उसको

1522
01:49:25,040 --> 01:49:29,200
आप गोवर्धन मठ पर पुरी शंकराचार्य जी के नाम से आप सर्च

1523
01:49:29,200 --> 01:49:33,200
कर सकते हैं अपने सवाल को लिख कर के हर हरघर गुरुकुल भी एक चैनल

1524
01:49:33,200 --> 01:49:37,680
है जहां से गुरुदेव के वक्तव्य मिल जाएंगे आपको और

1525
01:49:37,680 --> 01:49:41,800
विधि विषय विधि निषेध इत्यादि के बारे में जानने के लिए आचार्य राम शंकर

1526
01:49:41,800 --> 01:49:46,080
शुक्ल जी का चैनल है आचार्य राम शंकर शुक्ल के नाम से ही है वहां

1527
01:49:46,080 --> 01:49:50,360
जा सकते हैं और आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए गुरुदेव

1528
01:49:50,360 --> 01:49:54,440
का जो अभियान है गुरुदेव की से उसमें अपना नाम रजिस्टर अवि करा

1529
01:49:54,440 --> 01:49:58,440
ले उसके लिए आप उनकी जो गोवर्धन मठ पप है उसको

1530
01:49:58,440 --> 01:50:02,960
डाउनलोड करें उसमें अपना रजिस्ट्रेशन करा ले आयुषी

1531
01:50:02,960 --> 01:50:08,960
जी आ रही है जी आइए आयुषी जी बताइए

1532
01:50:24,560 --> 01:50:28,680
यह रामपाल के फॉलोअर नहीं है यह तो बाइबल के द्वारा मानते हैं

1533
01:50:28,680 --> 01:50:32,880
कि मोक्ष है बाइबल नास्तिक है नास्तिक चीजें हैं बाइबल इस्लाम

1534
01:50:32,880 --> 01:50:36,960
में अगर आप बाइबल और इस्लाम को मोक्ष

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01:50:36,960 --> 01:50:42,160
का प्रतिपादक मान रहे हैं तो आप फिर

1536
01:50:42,160 --> 01:50:46,960
आस्तिक नहीं रहे वेदोक्त दृष्टिकोण से

1537
01:50:46,960 --> 01:50:51,640
आपको जो है ना आर समाजी मानेंगे आपको यही लोग मानेंगे

1538
01:50:51,640 --> 01:50:56,840
जो ब्रह्मा कुमारी या राम पाली यार समाजी भी आपको आस्तिक नहीं मानेंगे

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01:50:56,840 --> 01:51:00,920
परंपरा प्राप्त आचार्य की तो बात दूर है

1540
01:51:00,920 --> 01:51:06,920
ठीक है वह आ नहीं रही है काफी देर हो चुकी है सभी को जय श्री राम

1541
01:51:10,250 --> 01:51:14,250
[संगीत]
