1
00:00:00,000 --> 00:00:04,320
दुर्गा माता का अपमान नहीं सहेगा नहीं दुर्गा माता

2
00:00:04,320 --> 00:00:08,800
का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान दुर्गा माता का अपमान

3
00:00:08,800 --> 00:00:13,040
नहीं सहेगा हिंदुस्तान दुर्गा माता का अपमान नहीं सहेगा

4
00:00:13,040 --> 00:00:17,280
हिंदुस्तान दुर्गा माता का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान

5
00:00:17,280 --> 00:00:21,600
रामपाल का एक ठिकाना जेलखाना जेलखाना रामपाल

6
00:00:21,600 --> 00:00:26,860
का एक ठिकाना जेलखाना जेलखाना

7
00:00:26,860 --> 00:00:32,860
[संगीत] ओमम

8
00:00:33,410 --> 00:00:39,410
[संगीत]

9
00:01:32,960 --> 00:01:36,960
अब यह बताओ सबसे पहली बात कि तुमको एन

10
00:01:36,960 --> 00:01:41,200
केन प्रकारन जब यह पता है कि रामपाल

11
00:01:41,200 --> 00:01:45,280
के विरुद्ध हाई कोर्ट में केस लगा हुआ है उत्तर प्रदेश में तुमने रामपाल से प्रश्न

12
00:01:45,280 --> 00:01:49,360
किया कि तुम्हारे जो लोग हैं

13
00:01:49,360 --> 00:01:53,520
शासन है। शासन ने वहां पर एफआईआर दर्ज कराई है तुम्हारे नाम

14
00:01:53,520 --> 00:01:57,520
दान सेंटर के ऊपर। शासन के आदेश से उसमें एसीपी

15
00:01:57,520 --> 00:02:02,000
की रिपोर्ट लगी है कि हम किताबों को ढूंढ रहे हैं। नामदान सेंटर पर किताबें नहीं मिली है।

16
00:02:02,000 --> 00:02:06,000
यह एसीपी की रिपोर्ट मेरे पास है। मैंने तुमको ये सारी चीजें बताई

17
00:02:06,000 --> 00:02:10,320
है। हाई कोर्ट का आर्डर बताया है। एफआईआर के बारे में बताया है। नामद

18
00:02:10,320 --> 00:02:14,560
सेंटर बंद होने के बारे में बताया है। किताबों के जलने के बारे में बताया है। WhatsApp

19
00:02:14,560 --> 00:02:18,560
के जरिए और भी बहुत सी चार चीजें भेजी हैं। इंटरनेट पर

20
00:02:18,560 --> 00:02:22,560
जो यह लाइव लॉ करके

21
00:02:22,560 --> 00:02:26,720
वेबसाइट होती है जहां पर जो कानूनी ऑर्डर्स वगैरह निकलते हैं वहां

22
00:02:26,720 --> 00:02:30,720
पर हिंदुस्तान टाइम्स पर जाने कितनी तरीके की चीजें वहां पर खबरें

23
00:02:30,720 --> 00:02:34,720
पड़ी हुई हैं जो हाई जो रामपाल

24
00:02:34,720 --> 00:02:38,960
के ऊपर जो हत्या के केस हैं यह है वो है वह सब एक तरफ

25
00:02:38,960 --> 00:02:43,040
मगर रामपाल को लेकर के जो हमारा जो हिंदुओं

26
00:02:43,040 --> 00:02:47,200
का जब मुख्य विरोध है एक खूनी के रूप में नहीं है

27
00:02:47,200 --> 00:02:48,080
पाखंडी के

28
00:02:48,080 --> 00:02:52,400
रूप में, वेद विरोधी के रूप में, अधर्मी के रूप में उस अधर्म

29
00:02:52,400 --> 00:02:56,480
का उस अधर्म के विरुद्ध हाई कोर्ट में।

30
00:02:56,480 --> 00:03:00,480
ठीक है? उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका लगी हुई है।

31
00:03:00,480 --> 00:03:04,560
जिस पर कोर्ट ने आड़े हाथों लिया शासन को और जिस

32
00:03:04,560 --> 00:03:08,560
पर शासन ने एफआईआर करवाई है। तुम्हारी लखनऊ में रामपाल की

33
00:03:08,560 --> 00:03:12,640
किताबें नहीं बच पा रही हैं। तुमने पूछा कि तुम्हारा सेंटर वहां

34
00:03:12,640 --> 00:03:16,720
क्यों बंद हो गया है? तुमने पूछा कि वहां पर दोबारा किताबें कब बिकने वाली है

35
00:03:16,720 --> 00:03:20,960
तुम्हारी? तुमने पूछा कि तुम्हारा कोई पैरोकार हाई कोर्ट में तुम्हारे उनकी पैरवी

36
00:03:20,960 --> 00:03:25,040
करने क्यों नहीं जा रहा है? तुमने पूछा कि ऑफिशियली रामपाल की ओर से कौन

37
00:03:25,040 --> 00:03:29,200
खड़ा हुआ है जो एफआईआर हुई है उस संबंध में? तुमने पूछा

38
00:03:29,200 --> 00:03:33,200
तुमने पूछा कि जेलर को तलब कर लिया

39
00:03:33,200 --> 00:03:37,280
हाई कोर्ट ने कि भाई तुम्हारे यहां पर जिस समय रामपाल जेल में था उस समय

40
00:03:37,280 --> 00:03:41,280
जेल में बंद व्यक्ति के नाम से बाहर इतना बड़ा कारोबार चल रहा है। तो जेलर क्या

41
00:03:41,280 --> 00:03:45,280
कर रहा है? उस संबंध में जेलर को तलब कर लिया गया। जेलर

42
00:03:45,280 --> 00:03:49,920
आज के टाइम में पार्टी है उस केस में उस रिट में और जैसे अन्य

43
00:03:49,920 --> 00:03:54,160
YouTube मेटा इत्यादि ये सब पार्टी है। शासन उसमें एक पार्टी है

44
00:03:54,160 --> 00:03:58,320
कि भाई उसके अंडरटेिंग में ये सब कैसे हो रहा है? तो शासन को रामपाल

45
00:03:58,320 --> 00:04:02,400
क्यों नहीं बता रहा है अपनी चीजें? जिससे कि शासन वह

46
00:04:02,400 --> 00:04:03,680
जवाब लगाए

47
00:04:03,680 --> 00:04:07,760
कि हम हम लोग तो ठीक हैं। रामपाल तो फरार है। रामपाल

48
00:04:07,760 --> 00:04:11,760
को पता ही नहीं है कि उसकी चीजों पर केस चल रहा है। रामपाल को पता ही नहीं है कि उसके लोग

49
00:04:11,760 --> 00:04:15,600
यहां पर नामदान सेंटर उनका बंद हो चुका है।

50
00:04:15,600 --> 00:04:20,160
यह सब सवाल तुमने किए रामपाल से। इसको पत्रकारिता नहीं पत्रकारिता

51
00:04:20,160 --> 00:04:26,160
ना कहकर चाटुकारिता ना कहे तो क्या कहें? बताओ।

52
00:04:27,360 --> 00:04:31,280
अब तुम उस व्यक्ति से पूछ रहे हो

53
00:04:31,280 --> 00:04:36,160
उस व्यक्ति से तुम पूछ रहे हो कि पाखंड क्या होता है? धर्मेंद्र

54
00:04:36,160 --> 00:04:40,480
जी से तुमको पाखंड का अर्थ पता है? तुम खुद बताओ।

55
00:04:40,480 --> 00:04:44,480
अभी तक के टाइम पे इस समय तक मैं लिख के दे सकता हूं कि

56
00:04:44,480 --> 00:04:48,720
स्टेप अप जे को पाखंड का अर्थ ही नहीं पता है। पाखंड

57
00:04:48,720 --> 00:04:53,040
का अर्थ सुनो। पा का मतलब है वेद।

58
00:04:53,040 --> 00:04:57,120
खंड का मतलब है विरोध। वेद विरोधी जो होता

59
00:04:57,120 --> 00:05:01,120
है वह पाखंडी है। वेद का विरोधी पाखंड है। वेद का

60
00:05:01,120 --> 00:05:06,560
मतलब ही धर्म है। शिवराम आपटे की इनको दिखाओ।

61
00:05:06,560 --> 00:05:10,960
प्रमाण क्रमांक एक पाखंड का अर्थ क्या होता है? देखो पाखंडी

62
00:05:10,960 --> 00:05:15,200
कैसे सिद्ध होता है? शिवराम आपटे का दिखाओ इनको। ये

63
00:05:15,200 --> 00:05:18,720
देखो पढ़ो। त्रई धर्म

64
00:05:18,720 --> 00:05:23,200
है ना? उसका खंडन करने वाला उसको पाखंडी कहते हैं।

65
00:05:23,200 --> 00:05:27,440
नास्तिक कहते हैं। अधर्मी कहते हैं। वेद विरोधी नास्तिक होता है। दूसरा

66
00:05:27,440 --> 00:05:31,600
प्रमाण दिखाओ मनुस्मृति का। ये पढ़ो थोड़ा बहुत। ठीक है?

67
00:05:31,600 --> 00:05:36,320
केवल फरलोबाजी वाली पत्रकारिता मत करो। पढ़ो थोड़ा बहुत।

68
00:05:36,320 --> 00:05:40,960
यह देखो मनुस्मृति में क्या लिखा है। दो 9

69
00:05:40,960 --> 00:05:45,040
मनुष्य वेद और स्मृतियों में कहे हुए धर्म को करता

70
00:05:45,040 --> 00:05:49,120
हुआ इस संसार में कीर्ति और मरकर निश्चय

71
00:05:49,120 --> 00:05:53,680
करके परम परमोत्तम सुख पाता है।

72
00:05:53,680 --> 00:05:57,680
ठीक है? वेद और स्मृति में कहा हुआ। बड़ा रखो अभी

73
00:05:57,680 --> 00:06:01,680
वेद को श्रुति और धर्म शास्त्र को स्मृति जानना चाहिए। धर्म शास्त्र सब

74
00:06:01,680 --> 00:06:06,400
हो गए। पुराण इतिहास पुराण स्मृति इत्यादि।

75
00:06:06,400 --> 00:06:10,560
ठीक है? और यह दोनों सब विषयों में आगे

76
00:06:10,560 --> 00:06:14,800
क्या कहा जा रहा है? जो द्विज नीचे 11वा 11वा

77
00:06:14,800 --> 00:06:19,120
श्लोक मुख्य है। जो द्विज उन दोनों धर्म के मूलों का तर्क

78
00:06:19,120 --> 00:06:23,440
शास्त्र के सहारे अपमान करता है। कुल मिलाकर के वेद की निंदा

79
00:06:23,440 --> 00:06:27,680
करता है। वह नास्तिक है। वह नास्तिक और वेद

80
00:06:27,680 --> 00:06:32,400
निंदक है। नास्तिक कौन है? वेद निंदक। यह है।

81
00:06:32,400 --> 00:06:33,840
पाखंडी का मतलब क्या है?

82
00:06:33,840 --> 00:06:37,920
नास्तिक। वेद विरोधी और वेद विरोधी कौन

83
00:06:37,920 --> 00:06:42,240
है? नास्तिक। और यह मनुस्मृति के प्रमाणिकता पर अगर मालूम

84
00:06:42,240 --> 00:06:46,400
ना हो तो पता कर लेना। वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है जब सुग्रीव

85
00:06:46,400 --> 00:06:50,560
को बाली को तीर मारा था ना प्रभु श्री राम ने। तुम तो कहते हो ना तुम तुम सबको

86
00:06:50,560 --> 00:06:54,640
मानते हो। राम जी को मानते तुम रामपाली तो नहीं हो ना। उसको थोड़ा ज्यादा प्रमाण

87
00:06:54,640 --> 00:06:58,640
देने पड़ेंगे। रामपाली होगा तो और देने पड़ेंगे प्रमाण। जो

88
00:06:58,640 --> 00:07:02,720
ग्रंथ वो मानता है उन्हीं से देने पड़ेंगे। मनुस्मृति को तुम्हें मानना

89
00:07:02,720 --> 00:07:07,280
पड़ेगा ना। वाल्मीकि रामायण में प्रभु श्री राम ने तीर मारा था बाली को।

90
00:07:07,280 --> 00:07:11,360
बाली ने आरोप लगाया कि तुमने मुझे गलत तरीके से मारा है। बाली

91
00:07:11,360 --> 00:07:15,680
ने भी वहां पर लगभग लगभग मनुस्मृति की बातें ही कही। तब जाकर

92
00:07:15,680 --> 00:07:20,160
प्रभु श्री राम ने एज इट इज वाल्मीकि रामायण में मनुस्मृति

93
00:07:20,160 --> 00:07:24,240
के दो से तीन श्लोक बोले हैं। उच्चारित किए हैं। एज इट इज

94
00:07:24,240 --> 00:07:28,320
उठा के वो पढ़ लेना। मनुस्मृति में जो श्लोक आठव अध्याय में दिए

95
00:07:28,320 --> 00:07:32,400
गए हैं वही श्लोक वहां किष्किंदा कांड में

96
00:07:32,400 --> 00:07:36,400
बाली की मृत्यु के समय बाली को उत्तर देते हुए प्रभु श्री राम ने बोले हैं

97
00:07:36,400 --> 00:07:40,880
वाल्मीकि रामायण का अध्ययन कर लेना। ठीक है? तो मनुस्मृति

98
00:07:40,880 --> 00:07:45,600
से हो गया वेद विरोधी। और अगला

99
00:07:45,600 --> 00:07:49,200
तीसरा प्रमाण भी दिखा दीजिए। तीसरा प्रमाण। इसके

100
00:07:49,200 --> 00:07:53,600
बाद क्या लिखा है? तीसरे में जो ब्राह्मण ब्राह्मण आदि वर्ण

101
00:07:53,600 --> 00:07:57,600
स्वधर्म को छोड़कर पर धर्मों में प्रवृत्त होते हैं अथवा हीन वृत्ति का

102
00:07:57,600 --> 00:08:01,600
आलंबन लेते हैं वह नग्न कहलाते हैं। नग्न कहलाते

103
00:08:01,600 --> 00:08:05,600
हैं। आगे पढ़िए। जिस स्थान में चारों वर्णों का अत्यंत मिश्रण हो उसमें रहने

104
00:08:05,600 --> 00:08:09,680
से पुरुष की साधु वृत्तियों का क्षय हो जाता है। जो पुरुष

105
00:08:09,680 --> 00:08:13,840
ऋषि अब ये देखो देख लो यहां। यह तुम्हारे बाबा

106
00:08:13,840 --> 00:08:17,840
जी का इस समय तुम्हारे हो गए ना बाबा जी। तभी तो उनका प्रचार करते घूम

107
00:08:17,840 --> 00:08:22,160
रहे हो माइक लेकर के। तो पढ़ो यहां पत्रकारिता या चाटुकारिता

108
00:08:22,160 --> 00:08:26,800
कर रहे हो निश्चय करो जो पुरुष ऋषि देव प्रत पितृ

109
00:08:26,800 --> 00:08:31,120
भूत और अतिथि गण का पूजन किए बिना भोजन करता है

110
00:08:31,120 --> 00:08:35,120
उससे संभाषण करने से भी लोग नरक में पड़ते हैं

111
00:08:35,120 --> 00:08:39,440
और तुम्हारा जो रामपाली है वो क्या करता है क्या कहता है पितृ

112
00:08:39,440 --> 00:08:43,760
पूजा नहीं करनी चाहिए पितृ पूजा का तो निषेध है

113
00:08:43,760 --> 00:08:48,080
पितृ पूजा अगर हम यह मान करके चले कि यही सब कुछ

114
00:08:48,080 --> 00:08:52,160
है स्वतंत्र सत्ता मान करके चले तब वहां पर गीता में उसके लिए कहा

115
00:08:52,160 --> 00:08:56,160
गया है ऐसा ना सोचे यह नहीं कहा गया कि पितृ पूजन करना ही नहीं

116
00:08:56,160 --> 00:09:00,160
है श्राद्ध कर्म करना ही नहीं है ठीक है इसके आगे क्या लिखा है

117
00:09:00,160 --> 00:09:04,320
अतः वेदत्रय के त्याग से यानी वेद विरुद्ध हो गया मामला वेदत्रय

118
00:09:04,320 --> 00:09:08,640
के त्याग से दूषित इन नग्नों के साथ वेद विरोधी कौन हो गए नास्तिक

119
00:09:08,640 --> 00:09:12,720
नास्तिक को यहां नंगा कहा जा रहा है नंगा शास्त्र में ये

120
00:09:12,720 --> 00:09:16,880
लोग बहुत यहां की बात वहां निकाल के उल्टे सीधे शब्दों का प्रयोग करते हैं ना हमारे लिए

121
00:09:16,880 --> 00:09:20,880
अगर मैं अपनी पे आ जाऊं तो ये लोग खून के आंसू रोने लगे।

122
00:09:20,880 --> 00:09:25,200
मगर मेरे को मुझे मेरे पास एक मर्यादा रूपी धर्म है ना। इसलिए

123
00:09:25,200 --> 00:09:29,360
ये लोग इतना नाच लेते हैं। जो नंगा नाच करते हैं ना ये सब ये युवराज

124
00:09:29,360 --> 00:09:33,520
और ये सचिन अभिषेक ये नंगा नाच जो दिखाते हैं इसी कारण से दिखाते

125
00:09:33,520 --> 00:09:37,520
हैं। ये देखो तुम्हारे बारे में क्या लिखा है। नंगे हो तुम लोग। जो

126
00:09:37,520 --> 00:09:41,840
इन चीजों का विरोध करते हो पितृ पूजन का श्राद्ध

127
00:09:41,840 --> 00:09:46,160
कर्म का। श्राद्ध कर्म का विरोध करने वाला वेद विरोधी है।

128
00:09:46,160 --> 00:09:51,680
वेदत्र को त्याग देने वाला है और उसको नंगा कहा गया है। नंगो

129
00:09:51,680 --> 00:09:56,560
हां इसमें क्या कहा है? इस प्रकार मैंने तुमसे पाखंडी

130
00:09:56,560 --> 00:10:00,720
तो संभाषण तक करने से मना किया है। बात करने से

131
00:10:00,720 --> 00:10:04,800
और जिसे नंगा कहा गया है। जिसे नास्तिक कहा गया जिसे वेदत्रय का विरोध

132
00:10:04,800 --> 00:10:09,040
करने वाला कहा गया है। विष्णु पुराण तीसरा अंश 18वां अध्याय

133
00:10:09,040 --> 00:10:13,920
48 से 51 अभी हमने पढ़ा है और अब हम पढ़ रहे हैं 96 से 102

134
00:10:13,920 --> 00:10:18,160
ठीक है? उसी क्रम में आगे मुख्य बातें क्या लिखा है? इस प्रकार मैंने

135
00:10:18,160 --> 00:10:19,360
तुमसे पाखंडी से

136
00:10:19,360 --> 00:10:23,360
संभाषण करने का दोष और फिर आगे अश्वमेध यज्ञ

137
00:10:23,360 --> 00:10:27,520
का महत्व दिखाया गया है। इसलिए पाखंडी और पापाचार पाखंडी

138
00:10:27,520 --> 00:10:31,680
कौन है? पापाचारी। पाखंडी और पापाचारी से कभी

139
00:10:31,680 --> 00:10:35,840
वार्तालाप और स्पर्श ना करे। इसको मानते हो ना तुम?

140
00:10:35,840 --> 00:10:39,920
वही जाकर आए हो ना स्पर्श कर करके पाखंडियों के यहां।

141
00:10:39,920 --> 00:10:44,000
देखो अपनी चाटुकारिता है कि नहीं? तो आगे क्या

142
00:10:44,000 --> 00:10:48,000
है? और तुम नंगो भी सुनो जो नंगे लोग हैं। जो नंगाई करते हैं

143
00:10:48,000 --> 00:10:52,160
अपने वीडियोस में आजकल खैर शांत है वो

144
00:10:52,160 --> 00:10:56,160
वो हो गई है ना पूजा उनकी चांटों से

145
00:10:56,160 --> 00:11:00,160
लातों से घूसों से हो गई है पूजा तो आजकल शांत है थोड़े पर

146
00:11:00,160 --> 00:11:04,320
खैर तुम्हारा वो परमानेंट निवारण तो यहां से ही होगा ना परमानेंट

147
00:11:04,320 --> 00:11:09,520
निवारण तो हम ही करेंगे ये तो सतई स्तर की बातें हैं

148
00:11:09,520 --> 00:11:13,920
अह तो वार्तालाप स्पर्श भी ना करें ठीक है जिसके

149
00:11:13,920 --> 00:11:18,000
घर में एक मास आज तक

150
00:11:18,000 --> 00:11:22,480
नित्य कर्मों का अनुष्ठान ना हुआ हो। उसको देख लेने पर बुद्धिमान

151
00:11:22,480 --> 00:11:26,560
मनुष्य सूर्य का दर्शन करें। ये जिन जिनके

152
00:11:26,560 --> 00:11:30,880
घर में ऐसा नहीं होता उनको देख लेने से क्या दोष होता है? फिर जिन्होंने वेद त्रय का सर्वथा

153
00:11:30,880 --> 00:11:34,960
त्याग कर दिया है। तथा जो पाखंडियों

154
00:11:34,960 --> 00:11:39,280
का अन्न खाते हैं। अन्न तो नहीं खाया वहां जाकर प्रसाद तो नहीं लिया खीर इत्यादि

155
00:11:39,280 --> 00:11:43,360
का। यह मैं स्टेप अप जे वालों से पूछ रहा हूं। ऐसा तो नहीं

156
00:11:43,360 --> 00:11:47,440
इनका अन्न वन्न तो नहीं खाया। देखो क्या लिखा है? अन्न खाया हो तो देख लेना। अन्न

157
00:11:47,440 --> 00:11:51,760
खाते हैं वैदिक मत का विरोध करते हैं। उन पापात

158
00:11:51,760 --> 00:11:55,920
पापात्माओं के दर्शन आदि करने पर तो कहना ही क्या है? इन

159
00:11:55,920 --> 00:11:59,920
दुराचारी पाखंडियों के साथ वार्तालाप करने संपर्क

160
00:11:59,920 --> 00:12:04,080
रखने उठने बैठने में महापाप होता है। इसलिए इन सब बातों का त्याग

161
00:12:04,080 --> 00:12:08,560
करें। पाखंडी है ना विकर्मी विडाल

162
00:12:08,560 --> 00:12:12,800
व्रत वाले दुष्ट स्वार्थी बगुला

163
00:12:12,800 --> 00:12:16,800
भगत लोगों का वाणी से भी आदर ना करें तुम वाणी से आदर करते फिर

164
00:12:16,800 --> 00:12:21,040
रहे हो अरे शर्म करो जो तुम्हारी मां के बारे में इतनी अश्लीलता परोस

165
00:12:21,040 --> 00:12:25,520
रहा है अपनी किताबों में उसके द्वारा इजाद किए हुए जो

166
00:12:25,520 --> 00:12:29,680
ये युवराज जैसे लोग हैं इतनी घृणित

167
00:12:29,680 --> 00:12:33,760
बातें कर रहे हैं तुम्हें शर्म नहीं आ रही है उसकी उसका प्रचार करते फिर रहे हो कहते

168
00:12:33,760 --> 00:12:38,400
हो अपने आपको पत्रकार लज्जा आनी चाहिए तुम्हें अपने आप पर

169
00:12:38,400 --> 00:12:42,720
कह रहे हो कि मैं तो सबको मानता हूं क्या खाक मानते हो तुम

170
00:12:42,720 --> 00:12:47,520
अंडरवियर से लेकर के जाने क्या-क्या बातें लिखी हुई है इसकी किताबों में पता भी है

171
00:12:47,520 --> 00:12:50,080
जीने की राह में पढ़ के देख लेना शिव पार्वती

172
00:12:50,080 --> 00:12:54,080
के प्रसंग में क्या-क्या लिखा है इसने तुम्हारे फुअर

173
00:12:54,080 --> 00:12:58,240
बाबा ने और उन्हीं का आलंबन लेकर के सचिन और

174
00:12:58,240 --> 00:13:03,600
युवराज जैसे लोग वीडियो बनाते हैं

175
00:13:03,600 --> 00:13:07,680
यह मसल दी वो मसल दी कुछ मालूम ना तालुम

176
00:13:07,680 --> 00:13:11,760
ना संस्कृत का ज्ञान ना शास्त्र का ना

177
00:13:11,760 --> 00:13:17,760
शास्त्र का अवलोकन ना गुरु का सानिध्य खड़े हो गए

178
00:13:18,640 --> 00:13:22,800
और उसका उसका तुम ढिंढोरा पीट रहे हो वाह बहुत अच्छा घी है बहुत

179
00:13:22,800 --> 00:13:26,880
अच्छा घी है बहुत अच्छा घी है मुझको अक्सर लोग फोन करके कहते

180
00:13:26,880 --> 00:13:31,040
क्यों रामपाल के पाइप नहीं दिखाई दिए तुम्हें एनाकोंडा जैसे वैसे तो

181
00:13:31,040 --> 00:13:35,040
वो भी क्या है क्या नहीं है अलग बात मगर यदि रामपाल पाइप

182
00:13:35,040 --> 00:13:39,200
लगा रहा है लोगों के घर में तो उसके पास तुम लोग अपनी स्त्रियों को सोने भेज दोगे

183
00:13:39,200 --> 00:13:45,200
क्या विरोध नहीं करोगे अगर वो मंगाएगा उनको तो

184
00:13:45,520 --> 00:13:49,920
पाइप का विरोध हो रहा है क्या ये रामपाल के रामपाल

185
00:13:49,920 --> 00:13:54,160
के द्वारा फैलाए गए वैचारिक जहर का विरोध हो रहा है। वैचारिक जहर

186
00:13:54,160 --> 00:13:58,320
रामपाल चाहे घी बेचे बहुत अच्छी क्वालिटी का सस्ते दामों में

187
00:13:58,320 --> 00:14:03,840
चाहे लोगों के घर में सिलेंडर लगा दे चाहे सिलेंडर खोल के आग लगा दे

188
00:14:03,840 --> 00:14:08,960
बात यहां उसकी नहीं हो रही है बात यहां हो रही है वैचारिक जहर की

189
00:14:08,960 --> 00:14:12,960
उसका विरोध हो रहा है कि रामपाल ये बेच रहे हैं वो बेच

190
00:14:12,960 --> 00:14:17,040
रहे हैं उसके वहां जाकर के दिखा रहे हो यहां का दृश्य क्यों नहीं दिखा रहे

191
00:14:17,040 --> 00:14:21,120
रामपाल का सेंटर क्यों बंद है किताबों किताबों के बारे में बता नहीं पा रहे

192
00:14:21,120 --> 00:14:25,200
हैं तुमने पूछा रामपाल से तुम्हारी किताबें कहां छपती है? पुलिस

193
00:14:25,200 --> 00:14:29,440
ढूंढ रही है रामपाल की किताबों को। पूछ

194
00:14:29,440 --> 00:14:33,600
पाओगे? दिखा पाओगे वो कारखाना रामपाल का?

195
00:14:33,600 --> 00:14:39,600
जैसे घी दिखाया, तेल दिखाया है। किताबें कहां छप रही? दिखाओ कारखाना।

196
00:14:40,000 --> 00:14:44,320
बात करते हैं पत्रकारिता की। 3 18 96 से 102

197
00:14:44,320 --> 00:14:48,640
क्या लिखा है? इन पाखंडी

198
00:14:48,640 --> 00:14:52,800
दुराचारी अति पापियों का संसर्ग दूर से ही त्यागने

199
00:14:52,800 --> 00:14:57,200
योग्य है। इसलिए इनका सर्वदा त्याग करें। और नीचे आइए।

200
00:14:57,200 --> 00:15:01,520
रामपाल को नहीं अब रामपालियों को पकड़ा जाएगा।

201
00:15:01,520 --> 00:15:05,120
तो विष्णु पुराण

202
00:15:05,120 --> 00:15:09,600
3 18 48 से 51 यहां तक आपने देख लिया। पाखंडी

203
00:15:09,600 --> 00:15:13,680
का अर्थ है नास्तिक। पाखंडी का अर्थ है वेद विरोधी। नंगा।

204
00:15:13,680 --> 00:15:17,920
पाखंडी का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसको देखना नहीं चाहिए, बात नहीं करनी चाहिए,

205
00:15:17,920 --> 00:15:22,080
स्पर्श नहीं करना चाहिए। ठीक है? यह सब पाखंडी

206
00:15:22,080 --> 00:15:27,280
के लिए कहा गया है। और पाखंडी होने का एक प्रमाण हम लोग इसी

207
00:15:27,280 --> 00:15:31,440
जो हमने टेक्स्ट पढ़ा है अभी उसी में से दे दिया विष्णु पुराण में कि वहां पर व्रत

208
00:15:31,440 --> 00:15:35,440
ना रखने वाले को व्रत को वेद का अंग माना गया है। आगे हम प्रमाण

209
00:15:35,440 --> 00:15:39,600
दे देंगे। व्रत को वेद का अंग माना गया है।

210
00:15:39,600 --> 00:15:43,760
और वेद की निंदा हो रही है व्रत की निंदा करने में। चलो अब आगे

211
00:15:43,760 --> 00:15:47,760
चलते हैं। यह तो हमने दिखा दिया। इसके साथ ही

212
00:15:47,760 --> 00:15:52,080
साथ लिंग पुराण खुद देख लेना। 7821 और अग्नि पुराण 164

213
00:15:52,080 --> 00:15:56,240
इसमें भी आपको मिल जाएगा। अब यहां तक हमने ये समझ

214
00:15:56,240 --> 00:16:00,400
लिया पाखंडी किसे कहते हैं और विष्णु

215
00:16:00,400 --> 00:16:04,480
पुराण में वेद विरोधी किसको कहा गया है? पाखंडी

216
00:16:04,480 --> 00:16:08,560
वेद विरोधी को कहते हैं। नास्तिक को कहते हैं। ये सब हमने समझ लिया। अब रामपाल

217
00:16:08,560 --> 00:16:12,560
पाखंडी कैसे हैं? रामपाल पाखंडी कैसे हैं? यानी रामपाल

218
00:16:12,560 --> 00:16:16,800
वेद विरोधी कैसे है? तो एक तो हमने यही जान लिया व्रत का विरोध करने वाला पाखंडी

219
00:16:16,800 --> 00:16:20,880
हो गया, वेद विरोधी हो गया, नास्तिक हो गया, नंगा हो गया शास्त्र के हिसाब

220
00:16:20,880 --> 00:16:25,280
से। आगे जो है वेद की घोषणा है नान्या पंतः

221
00:16:25,280 --> 00:16:30,560
विद्यते क्या है? नान्या पंथ विद्यते

222
00:16:30,560 --> 00:16:34,720
वेद घोषणा कर रहे हैं। जीवन मरण के चक्र से

223
00:16:34,720 --> 00:16:38,960
छूटने का जो वेद बता रहा है उससे भिन्न कोई और

224
00:16:38,960 --> 00:16:44,720
मार्ग नहीं है। 31 18 यजुर्वेद

225
00:16:44,720 --> 00:16:48,960
ये देख लो वेद की घोषणा नान्या पंथा विद्यते

226
00:16:48,960 --> 00:16:52,960
ये वेद की घोषणा है। स्पष्ट क्या घोषणा कर रहे

227
00:16:52,960 --> 00:16:57,120
हैं? वेद से भिन्न जीवन मरण से मुक्ति दिलाने

228
00:16:57,120 --> 00:17:01,280
वाला और कोई मार्ग नहीं है। स्पष्ट घोषणा

229
00:17:01,280 --> 00:17:06,160
है वेद भगवान की और कहां पर है? यही घोषणा श्वेता शत्रुपनिषद

230
00:17:06,160 --> 00:17:10,320
तीन आठ में है। श्वेता शत्रुपनिषद दिखाइए इनको यह

231
00:17:10,320 --> 00:17:15,360
देखिए नान्या पंथा विद्यते

232
00:17:15,360 --> 00:17:19,440
और दिखाइए। इसके बाद वाला छ पांच श्वेता शत्रपनिषद

233
00:17:19,440 --> 00:17:23,760
नान्या पंथा विद्यते

234
00:17:23,760 --> 00:17:28,880
इससे भिन्न मोक्ष प्राप्ति का कोई और मार्ग नहीं है।

235
00:17:28,880 --> 00:17:33,040
यह वेद की घोषणा है। ठीक है? अब इनको जरा

236
00:17:33,040 --> 00:17:37,280
अच्छा एक घोषणा और दिखा बोल देता हूं। वो फोटो

237
00:17:37,280 --> 00:17:41,280
नहीं है। 11 5 16 ब्रह्मचारी ही आचार्य

238
00:17:41,280 --> 00:17:45,760
बनता है। कबीरचारी नहीं परम ब्रह्मचारी

239
00:17:45,760 --> 00:17:50,000
नहीं ब्रह्मचारी क्योंकि ब्रह्म ही हमारे यहां परम तत्व है।

240
00:17:50,000 --> 00:17:54,160
उसी को कहीं-कहीं जब उसके कई रूप होते हैं कार्य कारण भेद से तो

241
00:17:54,160 --> 00:17:58,240
उसी में परम और पूर्ण इत्यादि ये जो

242
00:17:58,240 --> 00:18:02,480
विशेषण है वो लगाने पड़ते हैं। कार्य कारण भेद से जब वो विभिन्न रूपों

243
00:18:02,480 --> 00:18:06,480
में प्रकट होता है। मगर परम तत्व के रूप में ब्रह्म की ही बात हुई

244
00:18:06,480 --> 00:18:11,840
है। अथ तो ब्रह्म जिज्ञासा है। अथा तो कबीर जिज्ञासा नहीं है।

245
00:18:11,840 --> 00:18:16,000
ब्रह्मसूत्र है हमारे यहां। तुम तो पढ़े लिखे हो ना स्टेप जे

246
00:18:16,000 --> 00:18:20,400
वाले। तुम तो इनकी तरह फुअर नहीं हो। हां?

247
00:18:20,400 --> 00:18:24,640
ब्रह्मसूत्र लिखा है हमारे यहां। कबीर सूत्र लिखा है। जिस

248
00:18:24,640 --> 00:18:29,280
पर जिस पर भाष्य हुआ है सभी आचार्यों का।

249
00:18:29,280 --> 00:18:33,360
कुछ मालूम ना तालूम चले हैं प्रचारक बनने बनने स्टार प्रचारक

250
00:18:33,360 --> 00:18:38,080
बनेंगे भले ही धर्म को कोई भी क्षति पहुंचे उससे कोई मतलब नहीं है

251
00:18:38,080 --> 00:18:39,120
सनातन धर्म

252
00:18:39,120 --> 00:18:43,440
है ना तब तक सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन और पत्नी में अंतर

253
00:18:43,440 --> 00:18:47,520
कर रहा है मनुष्य जैसेजैसे तुम क्षति पहुंचाओगे

254
00:18:47,520 --> 00:18:51,680
जैसेजैसे लोग इसमें अनास्थावान होंगे सनातन धर्म में वैसे वैसे

255
00:18:51,680 --> 00:18:55,680
पाप को तुम न्योता दोगे समझ लेना

256
00:18:55,680 --> 00:19:00,160
आज तुम्हारे घर के बाहर आग नहीं लगी हुई है तब तुम चैन चैन से बैठे हुए हो और इंतजार

257
00:19:00,160 --> 00:19:05,440
कर रहे हो कि मेरे घर पर कब आग लगेगी तब मैं बोलूंगा।

258
00:19:05,440 --> 00:19:09,760
बिजली में बिजली के झूले में बैठे बैठा हुआ वो व्यक्ति जो

259
00:19:09,760 --> 00:19:14,080
नीचे आते टाइम आंखें बंद करता है वो हो तुम जो सोच रहे हो कि सनातन

260
00:19:14,080 --> 00:19:18,080
धर्म के साथ खिलवाड़ करके और मैं अपना चैनल चला के अपना जीवन सुखी

261
00:19:18,080 --> 00:19:22,080
बना लूंगा। कभी नहीं होगा। विभिन्न प्रकार के श्राप

262
00:19:22,080 --> 00:19:27,280
लगेंगे तुमको। विभिन्न प्रकार के

263
00:19:27,280 --> 00:19:31,280
आचार्यों से लेकर बटों तक के तुम्हें श्राप लगेंगे जो तुम्हें फैला

264
00:19:31,280 --> 00:19:35,360
रहे हो रायता यदि तुम्हारी जानकारी में है तो

265
00:19:35,360 --> 00:19:39,520
अभी के अभी इससे पृथक हो जाओ जीवन का भला चाहते हो

266
00:19:39,520 --> 00:19:43,520
तो और आत्मा अवलोकन करो क्या कर रहा

267
00:19:43,520 --> 00:19:48,240
हूं मैं बने पत्रकार फिर रहे हैं लो भैया आगे प्रमाण

268
00:19:48,240 --> 00:19:52,240
तो वेद की घोषणा क्या है वेद की

269
00:19:52,240 --> 00:19:56,960
घोष घोषणा क्या है? नान्य पंथा विद्यते वेद

270
00:19:56,960 --> 00:20:01,280
के अलावा कोई भी और मार्ग नहीं है मुक्ति का। ठीक है?

271
00:20:01,280 --> 00:20:06,240
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। 11 पांच 16 अथर्ववेद

272
00:20:06,240 --> 00:20:11,440
अब इनको दिखाओ भैया इनके बाबा जी क्या कह रहे हैं वेद के बारे में?

273
00:20:11,440 --> 00:20:15,840
हम क्या कह रहे हैं वेद के बारे में? दिखाओ।

274
00:20:15,840 --> 00:20:20,000
वेदों व गीता में ज्ञान तो श्रेष्ठ है। परंतु भक्ति की

275
00:20:20,000 --> 00:20:24,000
साधना केवल काल ब्रह्म की प्राप्ति है। जिससे विकार

276
00:20:24,000 --> 00:20:28,640
रहित नहीं हो सकता। उस परमात्मा को प्राप्त करने योग्य

277
00:20:28,640 --> 00:20:32,640
मंत्र के जाप से ही हो सकता है। वो किसी शास्त्र में नहीं है।

278
00:20:32,640 --> 00:20:36,720
वेद में मार्ग नहीं है। इसको कहते हैं पाखंड।

279
00:20:36,720 --> 00:20:40,880
वेद की इस बात का खंडन हो रहा है कि वेद

280
00:20:40,880 --> 00:20:42,400
के अलावा कोई मार्ग नहीं

281
00:20:42,400 --> 00:20:46,400
है। वेद से भिन्न कोई मार्ग नहीं है। इस बात का खंडन

282
00:20:46,400 --> 00:20:50,480
है तुम्हारे बाबा की प्रत्येक कृताब में। ये है पाखंड।

283
00:20:50,480 --> 00:20:54,560
समझ लेना पाखंड की बात हो रही थी ना पाखंड कहते किसे हैं। तुम पूछ रहे थे

284
00:20:54,560 --> 00:20:58,960
धर्मेंद्र जी से तुमको खुद मालूम नहीं है पाखंड कहते किसे हैं। पाखंड

285
00:20:58,960 --> 00:21:03,360
कहते हैं वेद विरोध को। वेद विरोधी होता है नास्तिक। नास्तिक

286
00:21:03,360 --> 00:21:07,760
होता है नंगा। तो यह देखो नंगपन क्या

287
00:21:07,760 --> 00:21:11,840
लिखा है कि वेद और गीता से मुक्ति नहीं होगी और दिखा दो

288
00:21:11,840 --> 00:21:16,640
इसमें नीचे क्या लिखा है दिखाओ वेद को बोलने वाला

289
00:21:16,640 --> 00:21:20,880
वेद को बोलने वाला अज्ञानी भी है इसी यही कहीं आपको मिल जाएगा

290
00:21:20,880 --> 00:21:24,960
ठीक है अच्छा यह ब्रह्म साधना

291
00:21:24,960 --> 00:21:29,040
की घटिया गति है जिसका प्रमाण स्वयं ब्रह्म भगवान

292
00:21:29,040 --> 00:21:33,040
देते हैं यहां पर ब्रह्म जो है भगवान हो गया दूसरे शास्त्र में ब्रह्म को

293
00:21:33,040 --> 00:21:37,440
लिख रहे हैं काल और शैतान राक्षस जो आत्माओं

294
00:21:37,440 --> 00:21:40,880
को खाता है

295
00:21:40,880 --> 00:21:44,960
तो ब्रह्म साधना की घटिया गति ये तुम्हारी चीजों को

296
00:21:44,960 --> 00:21:49,120
जिनका तुम दिखा रहे हो ना कि मैं कलावा बांधता हूं मैं तो सबको मानता हूं ये

297
00:21:49,120 --> 00:21:53,280
घटिया कहा जा रहा है वेदों को वेदों के वक्ता को यहां घटिया कहा

298
00:21:53,280 --> 00:21:57,520
जा रहा है आ रही है शर्म थोड़ी बहुत आ रही है शर्म

299
00:21:57,520 --> 00:22:02,080
थोड़ी बहुत चलो और नीचे दिखाओ इनको

300
00:22:02,080 --> 00:22:06,560
और नीचे दिखाओ क्या कहा जा वेदों को बोलने वाले के लिए मेरी भक्ति

301
00:22:06,560 --> 00:22:10,800
वेदों व गीता में वर्णित विधि से करता है। वह मेरे भाव में भावित होता है

302
00:22:10,800 --> 00:22:15,280
तथा मेरे जैसे गुणों वाला अर्थात काल का दूसरा रूप हो जाता है। यह

303
00:22:15,280 --> 00:22:19,440
यानी काल की घटिया गति को प्राप्त करता है। जो घटिया गति पीछे हमने दिखा दी

304
00:22:19,440 --> 00:22:23,440
और अगला प्रमाण दिखाओ। वेद का विरोध देखो। पाखंड देखो

305
00:22:23,440 --> 00:22:27,760
रामपाल का। इसकी हेडलाइन पढ़ो चैप्टर की। क्या लिखा है?

306
00:22:27,760 --> 00:22:32,080
वेदों में वर्णित साधना से साधना विधि से विकार

307
00:22:32,080 --> 00:22:36,160
नहीं मरते। यानी वेदों में मोक्ष

308
00:22:36,160 --> 00:22:40,240
का मार्ग नहीं है। मुक्ति का मार्ग नहीं है। और

309
00:22:40,240 --> 00:22:44,480
भरभर के ना जाने कितनी बार ये लाइन चैप्टर की हेडलाइन

310
00:22:44,480 --> 00:22:49,040
है। रामपाल की ये भ्रष्ट किताबों में जो इललीगल

311
00:22:49,040 --> 00:22:53,120
रूप से छपती है। छुप करके और तुम चले उसको बताने

312
00:22:53,120 --> 00:22:56,000
साधु। हां। और दिखाओ भाई अगला

313
00:22:56,000 --> 00:23:00,160
प्रमाण। चारों वेदों 18 पुराणों गीता जी व छह शास्त्रों

314
00:23:00,160 --> 00:23:04,240
में केवल ब्रह्म काल जो कि इसके अनुसार शैतान है

315
00:23:04,240 --> 00:23:08,240
की उपासना की जानकारी है यानी कि वेदों

316
00:23:08,240 --> 00:23:12,320
की इस बात का खंडन है इसके इसके यहां पर और तो

317
00:23:12,320 --> 00:23:16,480
और इसके रेफरेंस अलग से डालेंगे इस वीडियो में।

318
00:23:16,480 --> 00:23:20,480
यह जो वेदों को बोलने वाला है ना यह अपना उल्लू सीधा करने के

319
00:23:20,480 --> 00:23:24,640
लिए झूठ बोलता है। वेदों को बोलने वाला है ना जिसको भगवान कह

320
00:23:24,640 --> 00:23:28,800
रहा है वो जो है अज्ञानी है।

321
00:23:28,800 --> 00:23:33,280
वो कुछ जानता नहीं है। यह है तुम्हारे रामपाल का पाखंड।

322
00:23:33,280 --> 00:23:37,280
ठीक है। झूठ बोलता है और जो इसने यहां पर पिछले पेज पर

323
00:23:37,280 --> 00:23:41,440
भगवान कह दिया था ना भगवान की व्याख्या को भी मैं दे दूंगा। छठवे अध्याय

324
00:23:41,440 --> 00:23:45,520
में लिखी हुई है विष्णु पुराण के। जो पूर्ण होता है ना

325
00:23:45,520 --> 00:23:49,600
जिसको कोई अभाव नहीं होता वह भगवान होता है। यह दिखावे के लिए यहां पर

326
00:23:49,600 --> 00:23:53,600
भगवान कहता है। दूसरी जगह शैतान कहता है। प्राणियों को खाने

327
00:23:53,600 --> 00:23:58,320
वाला कहता है। हैं और तुम इसके

328
00:23:58,320 --> 00:24:02,400
इसकी पत्रकारिता कर रहे हो। हमें वो चाटुकारिता क्यों नहीं दिखाई

329
00:24:02,400 --> 00:24:06,640
देगी? ये देखो 97 नंबर पष्ठ है क्या? इसके आगे 97 नंबर

330
00:24:06,640 --> 00:24:10,640
पष्ठ है। हां। वेदों व गीता में वेदों

331
00:24:10,640 --> 00:24:11,200
व गीता

332
00:24:11,200 --> 00:24:15,920
जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। इसको कहते हैं पाखंड।

333
00:24:15,920 --> 00:24:20,080
पाखंडी हर वो व्यक्ति है जो वेदों को वेदों के प्रति अनास्था

334
00:24:20,080 --> 00:24:24,160
कर रखता है। शास्त्र के हिसाब से यदि तुम हिंदू हो तो

335
00:24:24,160 --> 00:24:28,960
बाकी अगर हिंदू नहीं हो तो हम तुम्हें हिंदू बना देंगे। कभी मिलना।

336
00:24:28,960 --> 00:24:34,240
एक भी कमी हमारे सनातन धर्म में दिखा देना। एक भी

337
00:24:34,240 --> 00:24:38,240
अभी किसी ठीक-ठाक व्यक्ति से सामना नहीं हुआ है। ठीक है?

338
00:24:38,240 --> 00:24:42,480
इसीलिए ऐसा है। तो क्या है? वेदों

339
00:24:42,480 --> 00:24:46,560
व गीता जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। वेद क्या कह

340
00:24:46,560 --> 00:24:51,520
रहे हैं? और कोई मार्ग नहीं है। यह क्या कह रहा है?

341
00:24:51,520 --> 00:24:55,520
जेल कट्टू तुम्हारा क्या कह रहा है? वेदों और गीता में वर्णित

342
00:24:55,520 --> 00:25:01,120
साधना से पाप विनाश नहीं होते। मुक्ति नहीं होती है।

343
00:25:01,120 --> 00:25:05,840
ठीक है? वेदों और गीता का ज्ञान अधूरा है।

344
00:25:05,840 --> 00:25:10,320
क्या है? अधूरा यह कहा है क्या वेद ने कहीं पे?

345
00:25:10,320 --> 00:25:14,560
अधूरा ज्ञान है। पूरा नहीं है। उससे मोक्ष नहीं मिलेगा।

346
00:25:14,560 --> 00:25:18,800
11 पांच 16 से हमने बता दिया। वेद अभी ये हटा दीजिए।

347
00:25:18,800 --> 00:25:22,880
अभी हटा दीजिए। वेद बार-बार बात कर रहे हैं। अभी स्क्रीन

348
00:25:22,880 --> 00:25:26,400
बड़ी कर दीजिए। वेद बार-बार बात कर रहे हैं। ब्रह्मचारी के पास

349
00:25:26,400 --> 00:25:30,560
कैसे जाया जाए? ब्रह्मचारी बनना है। ब्रह्मचारी की पूरे उसमें

350
00:25:30,560 --> 00:25:34,560
बात हो रही है। गीता में भी ब्रह्मचारी को बताया जा रहा है। और ये

351
00:25:34,560 --> 00:25:38,560
कह रहा है ब्रह्म के पास मत जाओ। इसने ब्रह्म हर शब्द

352
00:25:38,560 --> 00:25:42,720
का एक गलत अर्थ निकाल रखा है। सनातन के आगे आदि लगा के दूसरा सनातन

353
00:25:42,720 --> 00:25:46,480
बनाएगा।

354
00:25:46,480 --> 00:25:51,600
और ब्रह्म के आगे परम पूर्ण इत्यादि लगा के दूसरे ब्रह्म बनाएगा।

355
00:25:51,600 --> 00:25:55,680
तो वेद जो है ब्रह्मचर ब्रह्मचारी के पास जाने की बात करता है। यानी ब्रह्म

356
00:25:55,680 --> 00:25:59,920
के पास वेद का ब्रह्म वह राक्षस नहीं है जो रामपाल के अनुसार

357
00:25:59,920 --> 00:26:03,600
राक्षस और प्राणियों को खाता है।

358
00:26:03,600 --> 00:26:07,840
प्राणियों को खाने वाला गीता जी में जो दृश्य है वो भगवान

359
00:26:07,840 --> 00:26:11,840
का जो संहार वाला रूप है वो दिखाने के लिए वो रूप दिखाया गया

360
00:26:11,840 --> 00:26:15,840
है। संहार मतलब जब प्रलय होती है। क्या प्रलय

361
00:26:15,840 --> 00:26:20,000
नहीं है। इसके टट्टू तो बोलते हैं कि प्रलय होगी 1000 साल के बाद तब

362
00:26:20,000 --> 00:26:24,080
तक का ठेका रामपाल ने ले रखा है।

363
00:26:24,080 --> 00:26:28,320
प्रलय होती है कि नहीं होती है? तो प्रलय होगी तो उसमें

364
00:26:28,320 --> 00:26:32,800
लोग खत्म होंगे कि जीवित रहेंगे। कैसी प्रलय होगी? तो प्रलय

365
00:26:32,800 --> 00:26:37,040
करने की शक्ति को धारण करने वाले के रूप में वो व्याख्या

366
00:26:37,040 --> 00:26:41,040
है। जो रूप वो दिखाया गया विराट स्वरूप। खैर बैक

367
00:26:41,040 --> 00:26:42,560
टू द पॉइंट।

368
00:26:42,560 --> 00:26:46,560
कुल मिलाकर के जो भी लिखा हो बात यह है कि तुमको यह विश्वास

369
00:26:46,560 --> 00:26:50,720
नहीं है कि वेद से मुक्ति मिलेगी। रामपाल को यह विश्वास नहीं है। गीता

370
00:26:50,720 --> 00:26:54,960
से मुक्ति मिलेगी यह भी विश्वास नहीं। उसको छोड़कर के कबीर

371
00:26:54,960 --> 00:27:00,960
सागर पर जाना पड़ेगा तभी मुक्ति मिलेगी। यह है रामपाल का पाखंड।

372
00:27:01,040 --> 00:27:05,280
और सुनो रामपाल कबीर सागर को सूक्ष्म

373
00:27:05,280 --> 00:27:09,520
वेद कहता है। छमम छक्षम वेद। मैं छमम छमम कहता हूं और वो सूक्ष्म

374
00:27:09,520 --> 00:27:13,520
कहता है रामपाल वाला जो वाकई में कबीर सागर है कबीर विजय

375
00:27:13,520 --> 00:27:17,840
के उसका सम्मान है मगर रामपाल ने अपना तोड़ मरोड़ के जो प्रस्तुत किया दूसरे

376
00:27:17,840 --> 00:27:21,920
रूप में वो छमछम सागर है छमम छमम वेद तो ये जो सूक्ष्म

377
00:27:21,920 --> 00:27:25,920
वेद जो कहता है ये गवार व्यक्ति कहता

378
00:27:25,920 --> 00:27:30,560
है दूसरी ओर कि गीता वेदों का सार है इसने अपनी इंटरव्यू में क्या कहा

379
00:27:30,560 --> 00:27:34,800
कि हम पुराणों को नहीं मानते हैं हम पुराणों को नहीं मानते

380
00:27:34,800 --> 00:27:38,800
हम पुराणों को बाद में मानते पहले वेद और वेद का सार गीता

381
00:27:38,800 --> 00:27:42,800
और कई जगह लिखा हुआ है इसी की किताबों में कि गीता जो है वेद

382
00:27:42,800 --> 00:27:48,160
का सार है और इसके जो टट्टू है वो भी बोला करते हैं ये सब

383
00:27:48,160 --> 00:27:52,560
अब जब गीता वेद का वेद का सार है और इसका जो कबीर

384
00:27:52,560 --> 00:27:56,560
सागर है वो पंचम वेद है या सूक्ष्म वेद है छमम छक्षम वेद है वेद

385
00:27:56,560 --> 00:27:57,760
तो है ना तो उसका

386
00:27:57,760 --> 00:28:01,920
भी तो सार गीता होना चाहिए या तो उसको वेद मत

387
00:28:01,920 --> 00:28:05,920
कहे और या फिर गीता को सार मत कह मगर दोनों जगह टांगे फसानी है ना

388
00:28:05,920 --> 00:28:10,080
फूल फूल और कांटे का अजय देवगन बन के भले ही बीच में डंडा आ जाए

389
00:28:10,080 --> 00:28:14,160
है ना दोनों मोटरसाइकिलों पर सवारी करनी है ना भले ही

390
00:28:14,160 --> 00:28:18,480
बीच में बंबू आ जाए तो ऐसे व्यक्ति की चाटुकारिता

391
00:28:18,480 --> 00:28:22,480
करते हुए आप दिखाई दे रहे हैं मिस्टर स्टेप अप जे उर्फ जगदीप या जगदीश जो

392
00:28:22,480 --> 00:28:28,480
भी हैं आप

393
00:28:36,770 --> 00:28:40,770
[संगीत]
