1
00:00:02,090 --> 00:00:08,090
[संगीत]

2
00:00:10,080 --> 00:00:13,520
जय श्री

3
00:00:13,520 --> 00:00:19,520
राम सभी को आवाज आ रही है ठीक

4
00:00:28,960 --> 00:00:31,640
से

5
00:00:31,640 --> 00:00:36,960
हम वो कुछ कैमरे में कुछ

6
00:00:36,960 --> 00:00:41,400
सेटिंग हो गई थी गड़बड़ तो एंड

7
00:00:41,400 --> 00:00:46,280
मूवमेंट तक ठीक नहीं हो पाई है आज बिल्कुल टाइम पर आने वाले थे तो यह हो

8
00:00:46,280 --> 00:00:50,560
गया ठीक है कौन-कौन है

9
00:00:50,560 --> 00:00:54,680
जो देख रहा है प्यारी बहना तो बहुत

10
00:00:54,680 --> 00:00:58,600
डाट

11
00:00:58,600 --> 00:01:03,040
है तो तो आज हम लोग बहुत

12
00:01:03,040 --> 00:01:07,560
सारी तकती भड़कती न्यूज लेकर आए आपके लिए

13
00:01:07,560 --> 00:01:11,560
जो जानकारियां है आपको बहुत आनंद आने वाला है एक रोमांचकारी सफर

14
00:01:11,560 --> 00:01:17,560
पर जाने वाले हैं आप सब लोग

15
00:01:19,560 --> 00:01:23,720
और हां भाई गर्मी आ गई वो सर्दी आ गई ना

16
00:01:23,720 --> 00:01:28,360
इसलिए थोड़ा सा विंटर वाला वैसे

17
00:01:28,360 --> 00:01:32,440
यह वही ड्रेस है जिस ड्रेस पहली बार हम मेले में गए थे ना

18
00:01:32,440 --> 00:01:36,520
न इट ऑल वाज स्टार्टेड रामपाल काउंटर

19
00:01:36,520 --> 00:01:40,520
पर काउंटर किया था तो ये वही ड्रेस

20
00:01:40,520 --> 00:01:45,600
है हां तो हम लोग आज बात करने वाले

21
00:01:45,600 --> 00:01:50,080
हैं डगले पन की पराकाष्ठा डगले

22
00:01:50,080 --> 00:01:54,320
पन की भी कोई सीमा होती है जय श्री राम जय श्री राम सभी

23
00:01:54,320 --> 00:01:58,920
को तो दोगले पन की पराकाष्ठा क्या है वो आज हम देखेंगे

24
00:01:58,920 --> 00:02:04,160
और थोड़ी सी इनके काल की मीमांसा करेंगे

25
00:02:04,160 --> 00:02:08,480
कि इनका काल है क्या वह क्या-क्या करता है और बहुत ही अच्छी

26
00:02:08,480 --> 00:02:12,640
अच्छी चीजें आपको मालूम पड़ने वाली है तो सबसे पहले तो वह जो एक व्यक्ति

27
00:02:12,640 --> 00:02:16,760
है जो बातें किया करता है मगर वो

28
00:02:16,760 --> 00:02:21,280
सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता हमको फोन नहीं कर पाता कि शिवांश नारायण

29
00:02:21,280 --> 00:02:25,680
द्विवेदी मैं आपसे चर्चा करना चाहता हूं आपके चैनल पर नहीं

30
00:02:25,680 --> 00:02:30,160
आप इस वाले चैनल पर आ सकते हैं क्या या यहां पर आ सकते हैं क्या या ऐसा कुछ

31
00:02:30,160 --> 00:02:34,400
वो नहीं वो वही कर सकता है कुंडी लगा

32
00:02:34,400 --> 00:02:34,900
के

33
00:02:34,640 --> 00:02:38,720
बिल्कुल सेफ कोई है तो नहीं फिर मैं अपने मन की सारी बातें बोल

34
00:02:38,720 --> 00:02:42,720
डालू बस और वही वाली बात

35
00:02:42,720 --> 00:02:46,720
जो अंद भक्त वा वा वाह वा

36
00:02:46,720 --> 00:02:50,880
वा वा शुरू तो करने दो होता है

37
00:02:50,880 --> 00:02:55,440
ना अर्ज किया है तो अर्ज करना शुरू किया

38
00:02:55,440 --> 00:02:59,840
और उससे पहले ही जो जनता है वो चिल्लाने लगी

39
00:02:59,840 --> 00:03:04,160
वाह वाह वाह तो व्यक्ति को कहना पड़ता है हमामा

40
00:03:04,160 --> 00:03:08,680
शुरू तो करने दो उसी तरीके का हिसाब उनका है उंडी लगाई

41
00:03:08,680 --> 00:03:12,680
कुछ भी बोल डाला कुछ ना कुछ बोलना है कुछ भी बोलना है भले

42
00:03:12,680 --> 00:03:16,680
ही व तर्क पूर्ण हो प्रमाण पूर्ण हो उस बात का कोई आधार निकल रहा

43
00:03:16,680 --> 00:03:20,960
हो नहीं निकल रहा हो बस बोलना है बोल के स्वयं

44
00:03:20,960 --> 00:03:26,000
को संतुष्टि दे देनी है कि हमने बोल दिया भाई और

45
00:03:26,000 --> 00:03:28,760
जो

46
00:03:28,760 --> 00:03:32,760
वो ट्रेन में भरकर जाते हैं जो यहां भी आते

47
00:03:32,760 --> 00:03:36,840
जाते हैं आज कुछ पिक्चर आई थी तो वो जो अंध भक्त है उनको

48
00:03:36,840 --> 00:03:41,240
बस मिल गया वाह वाह वाह भाई क्या तीर मारा है

49
00:03:41,240 --> 00:03:46,000
वाह मजा आ गया अब उसने किया क्या है

50
00:03:46,000 --> 00:03:50,320
सबसे पहले उसके दोगले पन का आज प्रत्यक्ष प्रमाण

51
00:03:50,320 --> 00:03:54,720
आप लोग देखोगे उस व्यक्ति का दोगले पन की पराकाष्ठा

52
00:03:54,720 --> 00:03:58,880
वैसे वो पराकाष्ठा आई तो वहीं से है जिनका वो स्वयं

53
00:03:58,880 --> 00:04:02,920
को शिष्य कहता है वह भी देखोगे पराकाष्ठा उनके भी दोगले पन की और

54
00:04:02,920 --> 00:04:07,760
उनके जो जेल धाम निवासी जो संत है

55
00:04:07,760 --> 00:04:11,880
और यह जेल धाम निवासी मैं नहीं बोल रहा हूं यह आपके ही एक जो

56
00:04:11,880 --> 00:04:15,880
गुरु भाई है दास जो पहले गंजेपन

57
00:04:15,880 --> 00:04:20,120
का तेल बेचते थे यब पर और अब जो है

58
00:04:20,120 --> 00:04:24,280
उससे काम नहीं बना तोब धीरे से पहले

59
00:04:24,280 --> 00:04:28,400
रामपाल दास जी की बातें बताने

60
00:04:28,400 --> 00:04:33,160
आए और उसके के बाद देखा कि शिवांश नारायण द्विवेदी के साथ चर्चाएं गर्म है

61
00:04:33,160 --> 00:04:37,280
तो चलो बनाते हैं वीडियो शिवांश नारायण द्विवेदी अच्छा मैं कुछ ये भी देख रहा हूं कि

62
00:04:37,280 --> 00:04:41,280
ये जो कुछ लोग ऐसे भी है जो काउंटर करने के लिए आ तो रहे हैं मगर वो

63
00:04:41,280 --> 00:04:43,800
क्या करते हैं कुछ काउंटर काउंटर नहीं करते हैं सीधे बस यहां की

64
00:04:43,800 --> 00:04:48,120
चीजें उठा के वहां दिखा देते हैं दो चार शब्द बोल देते हैं बस हो गया काट ऐसे काउंटर

65
00:04:48,120 --> 00:04:52,240
कैसे चलेगा ये तो वही वाली बात हो गई कि यहां के कंटेंट का उपयोग कर रहे

66
00:04:52,240 --> 00:04:56,280
हैं बस अपने चैनल से दिखा के एक दो बातें बोल दी बस ना कोई तर्क ना

67
00:04:56,280 --> 00:05:00,440
कोई प्रमाण र कम टू द पॉइंट क्विकली

68
00:05:00,440 --> 00:05:04,480
तो सबसे पहले उसने क्या कहा कि हमने जो

69
00:05:04,480 --> 00:05:08,720
अग्न्या के लिए प्रमाण दिखाया था उस अग्न के लिए

70
00:05:08,720 --> 00:05:12,800
प्रमाण हमने गलत भाष्य से दिखाया क्योंकि वो जो है इंद्र का

71
00:05:12,800 --> 00:05:17,120
अर्थ इंद्र लिख रहा है अरे भाई हमने आपसे कहा क्या आप इंद्र कार्थ

72
00:05:17,120 --> 00:05:21,240
इंद्र ही मानो हमने तो नहीं आपको अटका अब परमेश्वर मान

73
00:05:21,240 --> 00:05:25,360
लो बात वहां पर हो रही है जो अग्निया वाला मंत्र है उसमें बात

74
00:05:25,360 --> 00:05:30,160
हो रही है कि अग्न्या का अर्थ क्या लिया है

75
00:05:30,160 --> 00:05:34,680
तो इंद्र के अर्थ को दिखाने के लिए इन्होंने दूसरा वो दिखा दिया

76
00:05:34,680 --> 00:05:39,240
इंद्र के अर्थ को दिखाने के लिए इन्होंने दूसरा भाष्य दिखा दिया आर समाज का भाष्य

77
00:05:39,240 --> 00:05:43,520
और आर्य समाज के भाष्य से इन्होने दिखा दिया कि इंद्र का मतलब इन्होंने यह लिया है कबीर

78
00:05:43,520 --> 00:05:47,640
कवि का मतलब यह लिया है इंद्र अगर ये इंद्र का मतलब य नहीं लेते कवि का मतलब

79
00:05:47,640 --> 00:05:52,280
यह सब कर दिया अग्न्या पर बात क्या की इन्होंने अग्न्या का अर्थ होता है

80
00:05:52,280 --> 00:05:56,360
कुमारी गाय अब इनके जो तत्वदर्शी

81
00:05:56,360 --> 00:05:59,120
है इनके अनुसार तथाकथित उनका

82
00:05:59,120 --> 00:06:03,280
कहना है हमारी भाषा जो हरियाणवी भाषा है

83
00:06:03,280 --> 00:06:09,280
उसमें

84
00:06:13,000 --> 00:06:17,000
अधनतरी होता है सबसे पहली बात यह

85
00:06:17,000 --> 00:06:21,040
है उनको पता नहीं मालूम है कि नहीं कोई उनको बता दो जाकर के जो हमारे वेद

86
00:06:21,040 --> 00:06:25,120
है ना वो वैदिक संस्कृत में है हरियाणवी लैंग्वेज में नहीं

87
00:06:25,120 --> 00:06:29,600
है और अगर आप यह कह रहे हो कि संस्कृत में कोई शब्द

88
00:06:29,600 --> 00:06:33,760
तो संस्कृत की जो डिक्शनरी होगी उस डिक्शनरी से आपको अदन्या

89
00:06:33,760 --> 00:06:37,880
का वो अर्थ दिखाना पड़ेगा मगर

90
00:06:37,880 --> 00:06:41,920
इन्होंने इस सब पर बात नहीं की कि दयानंद जी ने

91
00:06:41,920 --> 00:06:46,160
अग्न्या का अर्थ क्या लिखा है इसने इस व्यक्ति

92
00:06:46,160 --> 00:06:50,160
ने दोगले व्यक्ति ने इस बात बारे में बात ही नहीं की और यह दिखा दिया देखो

93
00:06:50,160 --> 00:06:54,200
यह जो आपको भाष्य दिखा रहा है ये गलत भाष्य क्योंकि इसी चीज

94
00:06:54,200 --> 00:06:58,240
का अर्थ जो है दयानंद जी ने यह लिखा है ना तो तुम इस भाष को

95
00:06:58,240 --> 00:07:02,280
मानते हो ना तुम जी को मानते हो तो तुम मानते किसी को भी

96
00:07:02,280 --> 00:07:07,120
नहीं हो मगर दूसरे को चुप कराने के लिए किसी का भी प्रमाण उठा कर के दिखा देते हो

97
00:07:07,120 --> 00:07:11,440
पहली बात अब दूसरी बात इन्होंने कही

98
00:07:11,440 --> 00:07:14,280
ज्ञान यज्ञ कि ज्ञान यज्ञ

99
00:07:14,280 --> 00:07:18,520
क्या होता है तो ज्ञान यज्ञ के लिए इनका जो है मैं निराकरण कर दूं

100
00:07:18,520 --> 00:07:22,840
कि ज्ञान यज्ञ के बारे में इनके तत्वदर्शी क्या लिख रहे हैं

101
00:07:22,840 --> 00:07:27,240
यह कहते हैं ज्ञान यज्ञ से ही तो ज्ञान यज्ञ का अर्थ भाई वो आपके तत्वदर्शी

102
00:07:27,240 --> 00:07:31,440
ने तो स्वीकार नहीं किया ना हम तो मा ज्ञान यज्ञ का अर्थ होता है

103
00:07:31,440 --> 00:07:35,720
परमेश्वर की प्राप्ति मगर आपके तत्वदर्शी ने ज्ञान यज्ञ को स्वीकार

104
00:07:35,720 --> 00:07:40,280
नहीं किया कि ज्ञान यज्ञ वो यज्ञ है जिसके आधार पर आपको मोक्ष

105
00:07:40,280 --> 00:07:44,360
मिलेगा और वह बताते हैं कैसे स्वीकार नहीं किया खर आपने भी अपनी वीडियो

106
00:07:44,360 --> 00:07:48,400
में क्या स्वीकार किया कि ज्ञान यज्ञ के साथ में नाम

107
00:07:48,400 --> 00:07:52,800
जप करेंगे भगवान का स्मरण करेंगे आपका जो भगवान है बाधित वाला

108
00:07:52,800 --> 00:07:56,800
उसका स्मरण करेंगे तो मोक्ष मिलेगा ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं

109
00:07:56,800 --> 00:08:01,520
मिलेगा यानी कि ज्ञान यज्ञ की बात बता ने वाला जो व्यक्ति है वो

110
00:08:01,520 --> 00:08:05,600
पूर्ण मोक्ष का ज्ञान बताने वाला व्यक्ति नहीं है पूर्ण मोक्ष का ज्ञान बताने

111
00:08:05,600 --> 00:08:09,640
वाला व्यक्ति वो है जो व नाम बता दे तब भी ठीक है मगर यह

112
00:08:09,640 --> 00:08:13,680
बात तो गीता में नहीं लिखी है गीता में लिखी है ज्ञान य का

113
00:08:13,680 --> 00:08:18,160
ज्ञान देने वाला व्यक्ति आपको जो है

114
00:08:18,160 --> 00:08:22,360
उसके पास जाना चाहिए वह आपका पूर्ण गुरु है पूर्ण रूप से तत्वदर्शी

115
00:08:22,360 --> 00:08:26,880
उसको कहा है ज्ञान यज्ञ के ज्ञान देने वाले को तत्वदर्शी कौन है

116
00:08:26,880 --> 00:08:29,480
जो व्रत बताता है तप बताता है संयम बताता है

117
00:08:29,480 --> 00:08:34,080
ने आपको भागवत से दिखा दिया मगर इसको अभी साइड में रख दीजिए

118
00:08:34,080 --> 00:08:38,120
तो भाई ज्ञान यज्ञ आपके तत्वदर्शी ने माना है शास्त्रों का

119
00:08:38,120 --> 00:08:42,440
पठन पाठन केवल शास्त्र को रीड करना

120
00:08:42,440 --> 00:08:46,480
पठन का मतलब रीड करना पाठन का मतलब रीड कराना

121
00:08:46,480 --> 00:08:51,040
ठीक है ज्ञान यज्ञ का मतलब आपके यहां तत्वदर्शी नहीं माना है

122
00:08:51,040 --> 00:08:55,200
और ज्ञान यज्ञ से मिलने वाला जो मोक्ष है उसने नहीं माना आपके तत्वदर्शी

123
00:08:55,200 --> 00:08:59,440
ने कि ज्ञान यज्ञ से आपको मोक्ष मिलेगा ब

124
00:08:59,440 --> 00:09:03,520
ब उसने कहा कि कि आपको फला फला कार्य करके शास्त्रों

125
00:09:03,520 --> 00:09:07,880
के पठन पाठन से वही फल मिलता है जो ज्ञान यज्ञ से मिलता है मगर पूर्ण मोक्ष

126
00:09:07,880 --> 00:09:11,920
नहीं मिलता तो जब ज्ञान यज्ञ एक अलग चीज है

127
00:09:11,920 --> 00:09:16,040
नाम से नाम नाम जप करने से एक

128
00:09:16,040 --> 00:09:20,560
अलग चीज है ज्ञान यज्ञ तो उस और उसका भी

129
00:09:20,560 --> 00:09:24,560
जो फल है वो मोक्ष नहीं है तो जब मोक्ष नहीं है तो ज्ञान य

130
00:09:24,560 --> 00:09:28,600
का ज्ञान देने वाला व्यक्ति पूर्ण गुरु नहीं हुआ पूर्ण गुरु वो हो सकता है जो नाम

131
00:09:28,600 --> 00:09:32,600
बताए मगर इसका विवरण वो कौन होगा इसका विवरण गीता में

132
00:09:32,600 --> 00:09:36,680
नहीं दिया है आपके अनुसार जो गीता में दिया है वो

133
00:09:36,680 --> 00:09:40,680
यह है ठीक अब इनको ज्ञान यज्ञ की परिभाषा एक बार याद दिला देते

134
00:09:40,680 --> 00:09:44,800
हैं तो ज्ञान यज्ञ की परिभाषा इनकी जीजी

135
00:09:44,800 --> 00:09:49,800
के खोलिए और उसमें कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार

136
00:09:49,800 --> 00:09:53,880
जो पेज नंबर है वो 118 गरिमा गीता की

137
00:09:53,880 --> 00:09:57,640
जीजी

138
00:09:57,640 --> 00:10:01,920
के कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर 60 और

139
00:10:01,920 --> 00:10:07,920
पीडीएफ के अनुसार पेज नंबर

140
00:10:13,440 --> 00:10:17,480
40 कोई लिंक भी मांग रहा है क्या वैभव जी

141
00:10:17,480 --> 00:10:23,480
अभी देंगे लिंक अभी बहुत सारी चीजें हैं आपको बताने वाली

142
00:10:34,720 --> 00:10:40,080
तब तक मैं कमलेश

143
00:10:40,080 --> 00:10:44,920
जी आपको पढ़नी चाहिए ज्ञानेश्वरी गीता रामचरित

144
00:10:44,920 --> 00:10:49,320
मानस और दास

145
00:10:49,320 --> 00:10:53,680
बोध हिंदी के साथ और

146
00:10:53,680 --> 00:10:59,440
इसके साथ ही साथ भक्ति सुदा और गर्व से कहो हम हिंदू है

147
00:10:59,440 --> 00:11:05,440
पांच ग्रंथ ले लीजिए इनको पढ़िए क्रमानुसार

148
00:11:07,240 --> 00:11:11,480
हां मैं बोल रहा हूं ना गरिमा गीता की

149
00:11:11,480 --> 00:11:15,960
पेज नंबर 60 60 नहीं सॉरी 118

150
00:11:15,960 --> 00:11:20,080
118 वो खोलिए कंप्यूटर

151
00:11:20,080 --> 00:11:23,800
स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर

152
00:11:23,800 --> 00:11:27,920
118 वो इनको दिखा दें कि आपके तत्वदर्शी ज्ञान यज्ञ

153
00:11:27,920 --> 00:11:32,240
का अर्थ क्या मानते हैं यहां बहुत मात खा गए

154
00:11:32,240 --> 00:11:36,960
शब्दों को पकड़ते थे ना आप लोग अब जब हम शब्दों को पकड़ रहे तो तुम्हें दिक्कत हो रही

155
00:11:36,960 --> 00:11:41,160
है भाई ज्ञान एक का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है

156
00:11:41,160 --> 00:11:45,600
नाम बताने वाला तत्वदर्शी नहीं है मोक्ष मिलेगा नाम से

157
00:11:45,600 --> 00:11:49,920
आपके अनुसार अभी दिखाते हैं बोलो

158
00:11:49,920 --> 00:11:55,920
भाई ऑपरेटर

159
00:11:56,880 --> 00:12:01,880
जी हां आज खबर अच्छे से लेनी

160
00:12:01,880 --> 00:12:06,560
है आपकी स्टोरी वो फेमस हो गई छोटी बहन

161
00:12:06,560 --> 00:12:10,720
रामपाल के फॉलोअर्स भी आपकी स्टोरी चला रहे हैं

162
00:12:10,720 --> 00:12:15,560
अपने य

163
00:12:15,560 --> 00:12:19,600
पर पैक्ट भाई अभिषेक के दोगले

164
00:12:19,600 --> 00:12:24,080
पन की पराकाष्ठा आज आप लोग

165
00:12:24,080 --> 00:12:28,240
देखेंगे पराकाष्ठा सीमा रहित और

166
00:12:28,240 --> 00:12:32,560
मुझे कुछ लगता है क्रैक है क्या भाई

167
00:12:32,560 --> 00:12:36,600
आंखें बंद कर लेते हो क्या क्या बोल रहे हो क्या नहीं बोल रहे हो कुछ

168
00:12:36,600 --> 00:12:42,600
भी बे से पैर की बातें इसीलिए सामने नहीं आते अटक

169
00:12:43,280 --> 00:12:47,320
जाऊंगा अब देखो चूल्हे से रोटी निकालने के

170
00:12:47,320 --> 00:12:53,320
लिए चिमटे को अपना मुह जलाना ही पड़ता है है

171
00:12:53,560 --> 00:12:59,560
ना भैया पेज नंबर आपको निकालना है 118

172
00:13:08,400 --> 00:13:13,440
118 हा यही है इसमें पैराग्राफ नंबर

173
00:13:13,440 --> 00:13:18,840
फोर ऊपर से दिखाइए जरा पैराग्राफ कौन सा है वन

174
00:13:18,840 --> 00:13:23,640
टू और नीचे थ्री और

175
00:13:23,640 --> 00:13:26,600
फोर

176
00:13:26,600 --> 00:13:32,600
हा इसको बड़ा करिए जरा

177
00:13:34,080 --> 00:13:38,280
अब इसमें फोर्थ पैराग्राफ कहां है नीचे लाइए

178
00:13:38,280 --> 00:13:42,360
हा और नीचे हां तो यह देखिए यहां

179
00:13:42,360 --> 00:13:46,480
क्या लिखा है कि

180
00:13:46,480 --> 00:13:50,680
नाम साधना के साथ पांचों यज्ञ भी

181
00:13:50,680 --> 00:13:55,000
आवश्यक हैं ठीक है

182
00:13:55,000 --> 00:13:59,120
और तो यहां पर यज्ञ अलग हो गया और नाम

183
00:13:59,120 --> 00:14:04,080
साधना अलग हो गई ठीक है और यज्ञ से नाम मिलेगा

184
00:14:04,080 --> 00:14:08,400
यज्ञ करने से नाम प्राप्त होगा यह कहीं नहीं लिखा आपके तत्वदर्शी ने यज्ञ

185
00:14:08,400 --> 00:14:12,480
को अलग कहा है और क्या कहा है लाइन

186
00:14:12,480 --> 00:14:17,360
नंबर फाइव पढ़नी वन टू थ्री फोर फ हा

187
00:14:17,360 --> 00:14:21,680
देखिए ज्ञान यज्ञ का अर्थ क्या है धार्मिक शास्त्रों

188
00:14:21,680 --> 00:14:25,680
का पठन पाठन क्या है धार्मिक

189
00:14:25,680 --> 00:14:31,560
शास्त्रों का पठन पाठन यह ज्ञान यज्ञ है

190
00:14:31,560 --> 00:14:36,080
पठन पाठन मतलब बुक को रीड करना

191
00:14:36,080 --> 00:14:40,600
इवन समझना भी नहीं है अंडरस्टैंडिंग नहीं ओनली

192
00:14:40,600 --> 00:14:45,240
रीड पठन पाठन का मतलब होता है पठन पाठन

193
00:14:45,240 --> 00:14:49,600
तो आपको किस तरह से रीड करना है शास्त्रों को

194
00:14:49,600 --> 00:14:53,920
यह बताता है तत्वदर्शी आपके अनुसार आपके तत्वदर्शी के अनुसार

195
00:14:53,920 --> 00:14:58,040
नहीं तो मुझे आप आपके तत्वदर्शी के द्वारा स्वीकारी गई परिभाषा

196
00:14:58,040 --> 00:15:02,120
दिखाइए कि कहां उसने लिखा है कि ज्ञान यज्ञ का मतलब है

197
00:15:02,120 --> 00:15:05,480
मोक्ष

198
00:15:05,480 --> 00:15:10,200
प्राप्ति ज्ञान यज्ञ के द्वारा मोक्ष प्राप्ति नहीं है

199
00:15:10,200 --> 00:15:14,400
और अगर ज्ञान यज्ञ और नाम जप एक ही है तो अलग

200
00:15:14,400 --> 00:15:18,800
से क्यों लिखा जा रहा है यहां पर कि नाम जप भी होना चाहिए

201
00:15:18,800 --> 00:15:23,080
अच्छा ज्ञान यज्ञ से यदि नाम मिलने वाला है नाम की प्राप्ति

202
00:15:23,080 --> 00:15:27,120
यदि ज्ञान यज्ञ से होनी है तो फिर यह क्यों कहा जा रहा है कि ज्ञान यज्ञ के साथ

203
00:15:27,120 --> 00:15:31,280
साथ नाम जब भी आवश्यक है जब ज्ञान यज्ञ ज्ञान प्राप्त

204
00:15:31,280 --> 00:15:35,480
होगा तत्वदर्शी के पास जाकर के और तत्वदर्शी

205
00:15:35,480 --> 00:15:39,600
फिर जब आपको समझा देगा अच्छे से तब आपको नाम मिल जाएगा ईश्वर का तो य

206
00:15:39,600 --> 00:15:44,360
ज्ञान यज्ञ के समय नाम कैसे आ रहा है इसका मतलब नाम अलग है

207
00:15:44,360 --> 00:15:48,520
नाम जप अलग है और ज्ञान यज्ञ अलग है ज्ञान यज्ञ

208
00:15:48,520 --> 00:15:53,160
से मुक्ति नहीं है पेज नंबर इनका इनको दिखा दीजिए

209
00:15:53,160 --> 00:15:59,160
इसी का 60 60 पेज नंबर

210
00:16:20,480 --> 00:16:24,800
हां तो क्या है यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति

211
00:16:24,800 --> 00:16:30,800
नहीं नीचे आइए

212
00:16:30,800 --> 00:16:35,160
एक मिनट हा एक दो तीन

213
00:16:35,160 --> 00:16:39,320
चार हां तो यह जो है यहां पर भी

214
00:16:39,320 --> 00:16:43,520
ज्ञान यज्ञ वही दिया है अच्छा अ ज्ञान गंगा का इनको दिखा

215
00:16:43,520 --> 00:16:47,600
दीजिए पेज नंबर 240 पीडीएफ

216
00:16:47,600 --> 00:16:52,920
वाला पेज नंबर है यह ज्ञान गंगा

217
00:16:52,920 --> 00:16:57,240
का अनेकानेक जगह इन्होंने जो

218
00:16:57,240 --> 00:17:01,680
यज्ञ है ज्ञान यज्ञ से पूर्ण मुक्ति नहीं बताई

219
00:17:01,680 --> 00:17:05,880
है शास्त्रों का पठन पाठन अलग चीज है और

220
00:17:05,880 --> 00:17:10,240
वह नाम जप अलग चीज है क्योंकि नाम जप के बिना शास्त्रों

221
00:17:10,240 --> 00:17:14,520
के पठन पाठन से मुक्ति नहीं मिल रही है ज्ञान यज्ञ

222
00:17:14,520 --> 00:17:18,560
से मुक्ति नहीं है पॉइंट टू बी नोटे

223
00:17:18,560 --> 00:17:22,600
ठीक है अगर ज्ञान यज्ञ ज्ञान यज्ञ के द्वारा नाम

224
00:17:22,600 --> 00:17:26,640
मिलना था तो ज्ञान यज्ञ से मुक्ति बतानी चाहिए

225
00:17:26,640 --> 00:17:30,920
थी ज्ञान यज्ञ के द द्वारा या पूरी बात बतानी चाहिए थी और दूसरी

226
00:17:30,920 --> 00:17:35,000
बात जब आप जान रहे हो कि कौन है ईश्वर तो उस समय नाम जप

227
00:17:35,000 --> 00:17:35,880
कहां से होगा

228
00:17:35,880 --> 00:17:39,920
पहले जानोगे ना तो फिर नाम जप कौन सा है इसका मतलब नाम जप

229
00:17:39,920 --> 00:17:44,160
लेने के लिए आपको अलग जाना पड़ेगा ना किसी और के पास तत्वदर्शी के

230
00:17:44,160 --> 00:17:48,240
पास नहीं किसी और के पास आपके अनुसार और वह व्याख्या सा सम्मत है

231
00:17:48,240 --> 00:17:52,240
नहीं किसके पास जाना है आपके

232
00:17:52,240 --> 00:17:56,240
अनुसार तो इसमें इनका पेज नंबर है ज्ञान गंगा में

233
00:17:56,240 --> 00:18:00,640
अभी हम लोग 18 प है ना हमको जाना है ज्ञान गंगा में 240

234
00:18:00,640 --> 00:18:04,920
पेज नंबर में काफी आगे है हा

235
00:18:04,920 --> 00:18:09,200
ये 218 है और आगे चलिए 240 पर जाना है दो

236
00:18:09,200 --> 00:18:13,320
हा एक दो पेज और आगे पैराग्राफ टू

237
00:18:13,320 --> 00:18:17,320
है 240 में और पैराग्राफ टू में लाइन

238
00:18:17,320 --> 00:18:21,480
पहली है धार्मिक सद ग्रंथों के पठन पाठन

239
00:18:21,480 --> 00:18:25,600
से ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है ठीक है

240
00:18:25,600 --> 00:18:30,280
ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है और मोक्ष

241
00:18:30,280 --> 00:18:34,840
नहीं मोक्ष नहीं मिलता ज्ञान यज्ञ से अलग हो गया ये नाम जप से

242
00:18:34,840 --> 00:18:39,520
नाम जप और एक ये जो है एक नहीं है ज्ञान यज्ञ

243
00:18:39,520 --> 00:18:43,840
पहली बात अच्छा इनके दोगले पन की शुरुआत में एक हम पिछली

244
00:18:43,840 --> 00:18:47,880
लाइव में दिखा चुके हैं यह तो हो गया चैप्टर क्लोज ज्ञान

245
00:18:47,880 --> 00:18:51,600
यज्ञ की परिभाषा अगर ज्ञान यज्ञ से

246
00:18:51,600 --> 00:18:55,680
आपको मोक्ष नहीं मिल रहा है नाम से मिल रहा है तो नाम अलग चीज हो गई

247
00:18:55,680 --> 00:18:59,840
और ज्ञान यज्ञ अलग चीज हो गया नाम यदि आपको ज्ञान

248
00:18:59,840 --> 00:19:03,880
यज्ञ से मिलना है ईश्वर के बारे में जानकारी आपको ज्ञान यज्ञ से मिलनी है

249
00:19:03,880 --> 00:19:07,880
तो फिर जिस समय आप किसी के बारे में जानकारी पर्याप्त कर

250
00:19:07,880 --> 00:19:12,000
रहे हो उस समय नाम जप कैसे करोगे जब आपको ज्ञान

251
00:19:12,000 --> 00:19:16,880
शास्त्रों के पठन पाठन से ही ये मालूम पड़ रहा है कि हमें तत्वदर्शी के पास जाना है

252
00:19:16,880 --> 00:19:20,880
और तत्वदर्शी के पास जाकर के आपको नाम प्राप्त हो रहा है

253
00:19:20,880 --> 00:19:24,920
तो फिर यहां ज्ञान यज्ञ के समय नाम कहां से आ जाएगा कौन बताएगा

254
00:19:24,920 --> 00:19:29,000
आ कर के जब अभी तुम तत्वदर्शी के पास गए नहीं हो

255
00:19:29,000 --> 00:19:33,120
तुमको ईश्वर का स्वरूप समझ में नहीं आया है तो यज्ञ के साथ

256
00:19:33,120 --> 00:19:37,360
में वह नाम जो आपको जपना है जिससे मोक्ष मिलना है मोक्ष

257
00:19:37,360 --> 00:19:41,560
उसी से मिलना है ज्ञान यज्ञ से मोक्ष

258
00:19:41,560 --> 00:19:45,840
नहीं है पॉइंट टू बी नोटे ध्यान रखना अगली बार

259
00:19:45,840 --> 00:19:50,040
दोगले पन की अच्छा इनके दोगले पन की पराकाष्ठा का एक

260
00:19:50,040 --> 00:19:54,520
हम लोग पिछली लाइव में एक में दिखा चुके हैं एक बार और दिखा दीजिए गरिमा

261
00:19:54,520 --> 00:20:00,520
गीता की जो इनका जीजी के है उसका पृष्ठ खोलिए

262
00:20:01,200 --> 00:20:05,280
199 एक बार जरा ध्यान से देख लो अपने तत्वदर्शी को

263
00:20:05,280 --> 00:20:09,280
कितना तत्व पता है उसे और क्यों वह इस

264
00:20:09,280 --> 00:20:15,280
समय जेल धाम में

265
00:20:26,720 --> 00:20:31,480
है इसमें जाइए आप 179 199

266
00:20:31,480 --> 00:20:35,720
हा पेज जी सही पेज सही पेज है इसमें पैराग्राफ तीसरे से चौथा

267
00:20:35,720 --> 00:20:39,000
जाइए तीन और

268
00:20:39,000 --> 00:20:43,040
चार तत्व बस बस बस तत्व ज्ञान के अभाव से मूर्ख

269
00:20:43,040 --> 00:20:47,240
प्राणी मुझे सभी प्राणियों का प्रभु मानते हैं क्या मानते

270
00:20:47,240 --> 00:20:51,600
हैं सभी प्राणियों का प्रभु यह पहली लाइन है बड़े बड़ा करिए

271
00:20:51,600 --> 00:20:55,960
थोड़ा तत्व ज्ञान के अभाव से मूर्ख प्राणी मुझे

272
00:20:55,960 --> 00:21:00,480
सभी प्राणियों का प्रभु मानते

273
00:21:00,480 --> 00:21:04,800
हैं ठीक है और अब इसका नीचे

274
00:21:04,800 --> 00:21:09,560
क्या कहेंगे भावार्थ किया है कि अनुवाद किया है

275
00:21:09,560 --> 00:21:14,720
ऊपर ऊपर ऊपर एक पैराग्राफ ऊपर जाइए

276
00:21:14,720 --> 00:21:16,560
इसी का यह लोग अनुवाद

277
00:21:16,560 --> 00:21:20,640
लिख रहे हैं कि मूर्ख जन यानी कि भाई तत्व ज्ञान से अभाव में ऊपर

278
00:21:20,640 --> 00:21:26,640
जाइए इससे जस्ट पहले वाले पैराग्राफ में ब्लू करिए नीचे आइए

279
00:21:26,640 --> 00:21:30,840
हां जो सेकंड पैरा है ना उसम जाइए सेकंड

280
00:21:30,840 --> 00:21:36,280
सेकंड सेकंड में जाइए सेकंड

281
00:21:36,280 --> 00:21:40,680
पैराग्राफ हां क्या है कि मूर्ख

282
00:21:40,680 --> 00:21:45,000
जन

283
00:21:45,000 --> 00:21:49,000
मुझे तुच्छ जानते हैं

284
00:21:49,000 --> 00:21:53,200
तो न 11 में क्या लिख रहे हैं कि मूर्ख लोग मुझे तुच्छ जानते

285
00:21:53,200 --> 00:21:57,360
हैं और उसी के भावार्थ में क्या लिख रहे हैं

286
00:21:57,360 --> 00:22:00,280
कि

287
00:22:00,280 --> 00:22:04,320
मूर्ख लोग मुझे भगवान मानते हैं

288
00:22:04,320 --> 00:22:09,000
अब बताइए कितना दोगलापन ठीक

289
00:22:09,000 --> 00:22:15,000
है अब हम अगला टॉपिक ले लेते

290
00:22:17,200 --> 00:22:23,200
हैं इनका गरमा गीता की

291
00:22:24,480 --> 00:22:30,480
का निकालिए पेज नंबर 116

292
00:22:39,160 --> 00:22:43,280
पेज नंबर 116 यही है

293
00:22:43,280 --> 00:22:47,960
अच्छा इसमें जो है पैराग्राफ नंबर फाइव

294
00:22:47,960 --> 00:22:52,040
पांचवा पैराग्राफ है

295
00:22:52,040 --> 00:22:56,640
इसमें पहला तो हो गया यह दूसरा हो

296
00:22:56,640 --> 00:23:00,920
गया तीसरा चौथा पांचवा हां

297
00:23:00,920 --> 00:23:04,920
ये तो अध्याय चार के श्लोक 23 से 24 का भाव है कि

298
00:23:04,920 --> 00:23:09,640
जो साधक सर्व कर्म परमात्मा को साक्षी रखकर कर

299
00:23:09,640 --> 00:23:14,040
रहा है वह सर्व कर्म

300
00:23:14,040 --> 00:23:18,080
ब्रह्म किसके लिए होते हैं उसके सारे

301
00:23:18,080 --> 00:23:22,560
कर्म ब्रह्म जैसे होते हैं क्यूंकि तत्व ज्ञानी

302
00:23:22,560 --> 00:23:27,400
शास्त्र विधि नीचे जाइए तत्व ज्ञानी

303
00:23:27,400 --> 00:23:32,040
शास्त्र विधि रहित मन माना आचरण नहीं करता

304
00:23:32,040 --> 00:23:32,540
और

305
00:23:32,440 --> 00:23:36,680
इसलिए उसके वचन कर्म परमात्मा के गुणगान करने

306
00:23:36,680 --> 00:23:40,760
में तथा सर्व समय प्रभु चिंतन में ही ली लीन रहता है तो

307
00:23:40,760 --> 00:23:41,260
तत्व

308
00:23:41,160 --> 00:23:45,160
ज्ञानी कौन है ऊपर जाइए जरा दोबारा इनको दिखा दीजिए तत्व

309
00:23:45,160 --> 00:23:50,320
ज्ञानी कौन है जो ब्रह्म

310
00:23:50,320 --> 00:23:55,080
पूर्ण ब्रह्म नहीं पूर्ण ब्रह्म नहीं

311
00:23:55,080 --> 00:23:59,120
तत्व ज्ञानी कौन है जो ब्रह्म और वो भी परमा यहां पर

312
00:23:59,120 --> 00:24:03,280
ब्रह्म को परमात्मा भी मान लिया उन्होने ब्रह्म परमात्मा जैसे

313
00:24:03,280 --> 00:24:07,440
होते हैं अगर ब्रह्म और पूर्ण ब्रह्म अलग अलग है तो यहां पर पूर्ण ब्रह्म लिखना

314
00:24:07,440 --> 00:24:11,800
चाहिए था तो य तत्व ज्ञानी से सच्चाई

315
00:24:11,800 --> 00:24:16,360
बाहर आ गई यहां देखिए तत्व ज्ञानी ने अपने पैरों पर

316
00:24:16,360 --> 00:24:20,400
कुला मारी और कई जगह मारी है अभी आप हैरान होते जाएंगे यहां

317
00:24:20,400 --> 00:24:25,000
पर इसने क्या माना परमात्मा कौन है ब्रह्म उसके सर्व कर्म

318
00:24:25,000 --> 00:24:28,920
ब्रह्म जैसे होते हैं

319
00:24:28,920 --> 00:24:33,080
तो यहां पर ब्रह्म के लिए कोष्टक में लिखा है परमात्मा कोई इसमें आना कानी

320
00:24:33,080 --> 00:24:37,280
नहीं और नीचे इसी परमात्मा में तत्व ज्ञानी लीन रहता है तो

321
00:24:37,280 --> 00:24:41,360
तत्वदर्शी कौन है जो इनके अनुसार जो गीता को

322
00:24:41,360 --> 00:24:45,480
बोलने वाला काल ब्रह्म है ना इन्हीं के अनुसार तत्वदर्शी वह

323
00:24:45,480 --> 00:24:49,640
है तत्व ज्ञानी वह है जो ब्रह्म में लीन रहता है ब्रह्म का भजन करता

324
00:24:49,640 --> 00:24:53,760
है और ऐसा करना शास्त्र विधि के अनुसार

325
00:24:53,760 --> 00:24:56,760
करना है इनको दिखा दीजिए तत्व ज्ञानी साधक

326
00:24:56,760 --> 00:25:00,960
आगे की लाइन दिखा दीजिए ज्ञानी साधक शास्त्र विधि

327
00:25:00,960 --> 00:25:05,040
विधि रहित मनमाना आचरण नहीं करना करता यानी कि यह बात जो है

328
00:25:05,040 --> 00:25:09,400
ब्रह्म में लीन रहना यह शास्त्र सम्मत

329
00:25:09,400 --> 00:25:13,760
बात है ठीक है यह हो गया इनका और

330
00:25:13,760 --> 00:25:18,200
इसमें इन्होंने गपला भी किया है ये 24

331
00:25:18,200 --> 00:25:22,440
23 24 में गपला क्यों किया है क्योंकि 23 24

332
00:25:22,440 --> 00:25:26,600
में कहा जा रहा है कि जिस यज्ञ का अर्पण भी ब्रह्म है और यह भी ब्रह्म है

333
00:25:26,600 --> 00:25:31,840
उसमें डाली जाने वाली आहुति भी ब्र है है ना सब कुछ ब्रह्म

334
00:25:31,840 --> 00:25:36,120
है तो इन्होंने वह सब बातें गण कर

335
00:25:36,120 --> 00:25:40,160
दी और

336
00:25:40,160 --> 00:25:46,160
उस उसके द्वारा जो प्राप्त होने वाला जो फल है ना वह भी ब्रह्म

337
00:25:49,040 --> 00:25:54,000
है ठीक है तो यह हो गया

338
00:25:54,000 --> 00:26:00,000
अच्छा अब बात करते हैं हमारी भगवत गीता

339
00:26:00,280 --> 00:26:06,280
414 में हमारी भगवत गीता कहती है

340
00:26:17,280 --> 00:26:21,280
कि एक मिनट खोल लू जरा 4

341
00:26:21,280 --> 00:26:25,640
14 और न 22 एक जैसी बात

342
00:26:25,640 --> 00:26:30,160
है 4 14 हां

343
00:26:30,160 --> 00:26:35,000
तो 41 में क्या लिखा है कि

344
00:26:35,000 --> 00:26:39,320
कर्मों के फल में मेरी कोई आसक्ति नहीं है इसलिए

345
00:26:39,320 --> 00:26:43,920
मुझे कर्म लिप्त नहीं करते तो

346
00:26:43,920 --> 00:26:47,960
इन्होंने वह चार च का वह अर्थ दिया ही नहीं है क्योंकि इनके विरुद्ध जा

347
00:26:47,960 --> 00:26:52,360
रहा था जो गीता को कहने वाला है वह कह रहा है कि मुझे

348
00:26:52,360 --> 00:26:56,200
कुछ भी प्राप्त करना शेष नहीं

349
00:26:56,200 --> 00:27:01,160
है तो इसका मतलब क्या

350
00:27:01,160 --> 00:27:05,360
हुआ कि काल को कुछ भी खाने पीने

351
00:27:05,360 --> 00:27:10,160
की आश आवश्यकता नहीं है भगवत गीता 41

352
00:27:10,160 --> 00:27:14,240
इनके इनके इनका वाला दिखा दीजिए कहां पर है व मैंने पेज नोट नहीं किया

353
00:27:14,240 --> 00:27:18,440
है इसी में दिखाइए पीछे होगा अध्याय चार

354
00:27:18,440 --> 00:27:22,840
में इन्होंने क्या अर्थ किया देख लेते हैं

355
00:27:22,840 --> 00:27:26,880
नहीं 2 24 नहीं पीछे चवा च श्लोक का क्या किया

356
00:27:26,880 --> 00:27:29,720
इन्होने

357
00:27:29,720 --> 00:27:34,880
इसी अध्याय के चवा श्लोक पीछे जाइए थोड़ा

358
00:27:34,880 --> 00:27:38,880
हा रुक ऊपर चार देखिए

359
00:27:38,880 --> 00:27:42,920
10 से 15 में काल ने ब्रह्म ने कहा कि जिनके दग जिसने यह वो

360
00:27:42,920 --> 00:27:46,960
मुझे यहां यह करता मैं मालिक हूं यह इन्होंने पूरा कच्चा

361
00:27:46,960 --> 00:27:51,280
चबा लिया जबकि यहां

362
00:27:51,280 --> 00:27:55,480
पर जो 15 चवा श्लोक है उसमें

363
00:27:55,480 --> 00:27:59,840
भगवान ने स्पष्ट कहा कि कर्म के फल में मेरी आसक्ति

364
00:27:59,840 --> 00:28:04,400
नहीं है इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते मतलब

365
00:28:04,400 --> 00:28:08,560
वह सब कुछ करने वाला होकर के भी कुछ भी नहीं करते कुछ भी ना करने

366
00:28:08,560 --> 00:28:12,680
वाले क्योंकि उनके फल से उनके लिए सब एक जैसा है एक रस है और यही

367
00:28:12,680 --> 00:28:17,000
बात उन्होंने न 22 में भी कही है 322 में इनका तीसरा अध्याय

368
00:28:17,000 --> 00:28:23,000
दिखाइए जरा बहुत पीछे होगा बीच में उन्होंने कई सारी कथाएं लिख दी

369
00:28:27,120 --> 00:28:31,120
है मुझे इन तीनों लोगों में ना तो कुछ कर्तव्य

370
00:28:31,120 --> 00:28:35,560
है और ना ही कोई प्राप्त करने योग्य वस्तु अप्राप्य है

371
00:28:35,560 --> 00:28:39,840
लो जो काल है अगर वह यह कह रहा है

372
00:28:39,840 --> 00:28:44,480
तीसरे अध्याय के 22वें श्लोक में कि मुझे कुछ भी प्राप्त नहीं करना है

373
00:28:44,480 --> 00:28:50,480
नीचे जाइए

374
00:28:58,320 --> 00:29:02,720
न 12 य यह देखिए तीन

375
00:29:02,720 --> 00:29:06,920
तीन श्लोक 26 में यही कहा है 27 से 29 ऊपर थोड़ा सा ऊपर तीन

376
00:29:06,920 --> 00:29:11,000
श्लोक 26 का भावार्थ और थोड़ा सा ऊपर यह

377
00:29:11,000 --> 00:29:15,920
देखिए जहां पर इनके विरुद्ध बात होती है ना उसको गप कर जाते हैं थोड़ा ऊपर जाएंगे भैया

378
00:29:15,920 --> 00:29:20,040
ऊपर दिखाइए इससे और ऊपर बस बस बस बस बस

379
00:29:20,040 --> 00:29:24,160
बस बस तीन श्लोक 10 से 19 और 19

380
00:29:24,160 --> 00:29:29,160
के बाद

381
00:29:29,160 --> 00:29:34,080
और आगे चलिए

382
00:29:34,080 --> 00:29:38,840
जरा धीरे धीरे धीरे 17 18 ठीक है

383
00:29:38,840 --> 00:29:43,080
अब आ गया कथनी और करनी

384
00:29:43,080 --> 00:29:47,600
में अंतर और 21 ये देखिए ये

385
00:29:47,600 --> 00:29:50,720
21 से 24 ज्ञानी संतों

386
00:29:50,720 --> 00:29:54,760
को अच्छे कर्म शास्त्र अनुकूल करने चाहिए क्योंकि उन्हीं का अनुसरण अन्य समाज

387
00:29:54,760 --> 00:29:58,920
भी करता है जबकि मुझे तीनों लों में कोई कर्म करने की आवश्यकता

388
00:29:58,920 --> 00:30:03,680
नहीं क्योंकि तीन लोग की सर्व सुविधा

389
00:30:03,680 --> 00:30:07,840
मैं बिन कर्म किए भी प्राप्त कर सकता हूं

390
00:30:07,840 --> 00:30:12,360
अब बताइए और

391
00:30:12,360 --> 00:30:16,360
यहां पर काल कह रहा है कि उसको कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं

392
00:30:16,360 --> 00:30:18,720
है

393
00:30:18,720 --> 00:30:22,480
मगर फिर उसकी जो

394
00:30:22,480 --> 00:30:24,880
छुदाई

395
00:30:24,880 --> 00:30:28,880
यह कौन सा पेज नंबर है पेज नंबर कौन

396
00:30:28,880 --> 00:30:33,280
सा है ये दिखाइए बस बस 48

397
00:30:33,280 --> 00:30:37,520
हां तो यहां पर काल ने इन्होंने मान लिया कि गीता ज्ञानदाता

398
00:30:37,520 --> 00:30:41,560
कह रहा है कि मुझे कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है अब इनको इसी का

399
00:30:41,560 --> 00:30:45,560
पेज नंबर दिखा

400
00:30:45,560 --> 00:30:50,120
दीजिए इसका पेज नंबर दिखाइए 11

401
00:30:50,120 --> 00:30:56,120
इसी गरिमा गीता की का

402
00:31:08,560 --> 00:31:12,560
आ गया हां पीडीएफ के अनुसार

403
00:31:12,560 --> 00:31:16,600
91 पेज नंबर आएगा यह 98 है ना पीछे जाना

404
00:31:16,600 --> 00:31:22,600
है

405
00:31:28,040 --> 00:31:32,160
िप

406
00:31:32,160 --> 00:31:36,600
व 91 आ गया इसमें पैराग्राफ

407
00:31:36,600 --> 00:31:41,360
नंबर वन है वन हा काल भगवान

408
00:31:41,360 --> 00:31:45,640
देखिए काल भगवान ने सोचा यदि संसार के प्राणी

409
00:31:45,640 --> 00:31:49,760
ऐसी साधना करने लग गए तो मेरी भूख कैसे मिटेगी यानी कुछ

410
00:31:49,760 --> 00:31:54,040
है जो इन्ह प्राप्त करना है जबकि गीता में वहां क्या हो रहा है इनको कुछ भी प्राप्त नहीं करना

411
00:31:54,040 --> 00:31:58,280
है और इन्ह कुछ करना पड़ेगा देखिए बुराई को आरंभ

412
00:31:58,280 --> 00:32:02,280
में काट डालू यह सोचकर क्यों ना बुराई

413
00:32:02,280 --> 00:32:07,000
को आरंभ में काट डालू इस पैराग्राफ की अंतिम लाइन दिखाई

414
00:32:07,000 --> 00:32:11,240
ने इसी पैराग्राफ की हा यानी कि इनको

415
00:32:11,240 --> 00:32:15,520
काट डालना पड़ेगा किसी चीज को इनको कुछ करने की आवश्यकता

416
00:32:15,520 --> 00:32:19,680
है वहां क्या कह रहे दोगले पन में कि काल भगवान को कुछ

417
00:32:19,680 --> 00:32:24,400
भी करने की आवश्यकता नहीं है ठीक है लेपन

418
00:32:24,400 --> 00:32:30,400
की पराकाष्ठा

419
00:32:32,160 --> 00:32:37,200
अब जरा सा बीच में उसका दोबारा ले लू टॉपिक जो उसने बातें की है

420
00:32:37,200 --> 00:32:41,200
कि ज्ञान यज्ञ की बात हो गई अब

421
00:32:41,200 --> 00:32:45,320
बात करते हैं उसने और क्या बात की थी हा

422
00:32:45,320 --> 00:32:50,120
उसने एक बात यह की थी

423
00:32:50,120 --> 00:32:54,760
कि ऐसा कोई कवि नहीं है जिसने जो

424
00:32:54,760 --> 00:32:58,800
कबीर जी ने जो बातें जो कार्य किए हैं वो और किसी ने

425
00:32:58,800 --> 00:33:03,160
नहीं किए ऐसा कोई और कभ कभी नहीं है

426
00:33:03,160 --> 00:33:07,480
यह बात हम क्यों मान ले भाई ऐसा कोई और कभी नहीं है क्यों मान ले

427
00:33:07,480 --> 00:33:12,120
वेद में लिखी है गीता में लिखी है क्यों मान ले सनातनी क्यों मान ले इस बात को

428
00:33:12,120 --> 00:33:18,120
क्योंकि फैक्ट भाई अभिषेक कह रहा है इसलिए हा

429
00:33:19,320 --> 00:33:24,360
अच्छा ठीक है अब हम इसकी एक बात और पकड़ते

430
00:33:24,360 --> 00:33:26,760
हैं

431
00:33:26,760 --> 00:33:31,280
कि इसने जो है वहां पर जो अग्न्या को कहा

432
00:33:31,280 --> 00:33:36,160
कि जिसका वध ना किया जा सके वह अग्निया

433
00:33:36,160 --> 00:33:40,160
नहीं हो सकती क्योंकि हमारे सारे तत्व जो है वह अविनाशी कहे गए

434
00:33:40,160 --> 00:33:44,200
हैं लो साहब अब अगर किसी का वध नहीं

435
00:33:44,200 --> 00:33:48,240
किया जा सकता है तो फिर तुम यह क्यों कहते हो कि उन्होंने बहुत से लोगों को मरवाया

436
00:33:48,240 --> 00:33:52,240
काल बहुत से लोगों को खाता है अगर कहो कि लीला

437
00:33:52,240 --> 00:33:56,720
में तो लीला में गाय को भी मारा जाना स्वीकार करो

438
00:33:56,720 --> 00:34:01,680
मतलब जहां जिस बात से काम चल जाए वहां पर वही बात मान ली ं

439
00:34:01,680 --> 00:34:05,840
अरे भाई जब किसी का वध नहीं किया जा सकता है तो फिर तुम क्यों कह रहे हो कि काल

440
00:34:05,840 --> 00:34:10,120
जो है वो दांतों में चवा रहा है जब किसी का वध नहीं किया जा सकता

441
00:34:10,120 --> 00:34:14,160
तो तुम क्यों आरोप लगा रहे हो भगवान श्री कृष्ण पर कि उन्होंने जो है वो

442
00:34:14,160 --> 00:34:18,160
वो लोग आते हैं तो लोगों का श्रंगार करते हैं और बहुत

443
00:34:18,160 --> 00:34:22,200
सारी चीजें उसमें बक रहे हो क्यों बक रहे हो किसी का वद हो ही

444
00:34:22,200 --> 00:34:26,480
नहीं सकता तो यहां पर अग्न्या

445
00:34:26,480 --> 00:34:30,560
का अर्थ है कि जिसका वध ना किया जा सके संस्कृत खोलो भाई अपने मन से

446
00:34:30,560 --> 00:34:34,640
मनगण बातें मत करो शास्त्र के प्रमाण दिखाओ

447
00:34:34,640 --> 00:34:39,400
और अगर नहीं किया जा सकता किसी का वध तो अविनाशी तो भैया

448
00:34:39,400 --> 00:34:43,480
सारे लोग है सारे तत्व जीवन अविनाशी है किसी का वध नहीं किया जा सकता तो फिर

449
00:34:43,480 --> 00:34:47,600
तुम क्यों बद मानना स्वीकार कर रहे हो

450
00:34:47,600 --> 00:34:52,920
मीठा मीठा गप ग कड़वा कड़वा थू और क्या इन्होंने

451
00:34:52,920 --> 00:34:57,160
कहा कि भगवान वो

452
00:34:57,160 --> 00:35:01,360
गुणों की इन्होंने परिभाषा दी है कि हमने गुण युक्त

453
00:35:01,360 --> 00:35:05,640
माना है तो गुण गुण गुण जब हमने गुण युक्त मान लिया है

454
00:35:05,640 --> 00:35:09,640
तो उनको गुण भी मान लो क्यों मान ले यह तर्क

455
00:35:09,640 --> 00:35:13,760
देखिए कितने निचले लेवल के तर्क है यह बोल रहे हैं कि हमने माना कि

456
00:35:13,760 --> 00:35:17,960
उनमें वो जो है उस उनमें गुण है

457
00:35:17,960 --> 00:35:22,040
वो गुण स्वयं नहीं है उनमें वो गुण युक्त है वो गुण स्वयं

458
00:35:22,040 --> 00:35:26,360
नहीं है अच्छा गुण है क्या क्या है गुण

459
00:35:26,360 --> 00:35:28,520
क्वालिटी

460
00:35:28,520 --> 00:35:33,240
क्वालिटी निराकार है या साकार है क्वालिटी

461
00:35:33,240 --> 00:35:36,560
क्वालिटी निराकार है कि साकार

462
00:35:36,560 --> 00:35:40,600
है साकार है मगर यह लोग तो खुद कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश को

463
00:35:40,600 --> 00:35:45,000
जन्म दिया माता ने उनका आविर्भाव होता है त्र भाव होता

464
00:35:45,000 --> 00:35:49,120
है तो गुण युक्त होने में और गुण होने में अंतर

465
00:35:49,120 --> 00:35:49,880
है

466
00:35:49,880 --> 00:35:54,080
यह तुम मानो यह बुद्धिजीवी लोग नहीं मानेंगे

467
00:35:54,080 --> 00:35:58,920
गुण युक्त होने को गुण मान लिया और सुनो

468
00:35:58,920 --> 00:36:03,280
तुम तो अभी कह रहे हो ना कि वो गाय को जो है अञ नहीं कहा जा सकता अध

469
00:36:03,280 --> 00:36:07,920
नहीं कहा जा सकता क्योंकि सभी अविनाशी है तो फिर काहे के लिए पीछे पड़े ब्रह्मा विष्णु महेश

470
00:36:07,920 --> 00:36:12,120
के वोह भी तो विनाशी हो गए मतलब

471
00:36:12,120 --> 00:36:16,160
जहां चाहो जिसको जैसे टोपी पहना दो फिर दोगलापन जिंदाबाद दोगलापन

472
00:36:16,160 --> 00:36:21,080
जिंदाबाद दोगले पन की पराकाष्ठा

473
00:36:21,080 --> 00:36:25,400
जिंदाबाद अब देखो गुण युक्त होने में

474
00:36:25,400 --> 00:36:30,360
गुण युक्त होने में आप दे देखिए कि अगर गुण युक्त

475
00:36:30,360 --> 00:36:34,440
होना क्या गुण युक्त होने से आप गुण

476
00:36:34,440 --> 00:36:38,240
मान लोगे

477
00:36:38,240 --> 00:36:44,240
तो अब इनको पेज नंबर खोलिए

478
00:36:46,120 --> 00:36:50,000
भैया गरिमा गीता

479
00:36:50,000 --> 00:36:54,840
की पेज नंबर

480
00:36:54,840 --> 00:37:00,840
48 ज्ञान गंगा सॉरी ज्ञान गंगा

481
00:37:01,080 --> 00:37:07,080
पेज नंबर 48 उसम षट रचना

482
00:37:08,840 --> 00:37:12,880
है हां भाई चर्चा करेंगे कोई चीज शुरू करते हैं तो

483
00:37:12,880 --> 00:37:17,280
उसको खत्म भी करते हैं अधूरा नहीं छोड़ते है ना चर्चा करेंगे

484
00:37:17,280 --> 00:37:21,320
उनसे बात हो रही है वह उनके बेसरी है अभी उनको उनको

485
00:37:21,320 --> 00:37:25,440
भी उत्तर देंगे हा

486
00:37:25,440 --> 00:37:29,640
ज्ञान गंगा और स्क्रीन के हिसाब से 48

487
00:37:29,640 --> 00:37:34,600
नंबर और इसमें पैराग्राफ वन और लाइन नंबर फोर

488
00:37:34,600 --> 00:37:39,000
कबीर हां यह देखिए सत्पुरुष ने

489
00:37:39,000 --> 00:37:43,720
उसे तीन गुण प्रदान किए

490
00:37:43,720 --> 00:37:47,840
सत्पुरुष कौन है कबीर और कबीर ने काल

491
00:37:47,840 --> 00:37:51,960
को तीन गुण प्रदान किए ऊपर दे ऊपर जाइए जरा सा इनको तीन गुण की वो

492
00:37:51,960 --> 00:37:53,320
बता दे भागे नहीं कि

493
00:37:53,320 --> 00:37:57,520
नहीं नहीं वो दूसरे तीन गुण थे है ना

494
00:37:57,520 --> 00:38:02,000
कौन से तीन गुण है व वो भी इसी में लिखा है कौन से तीन गुण है बस बस बस बस

495
00:38:02,000 --> 00:38:06,080
बस निरंजन चाहने लगे जैसे सत पुरुष रह

496
00:38:06,080 --> 00:38:12,080
रहे हैं नेता निकट परती और ऊपर जाइए थोड़ा

497
00:38:12,960 --> 00:38:17,040
सा यहीं पर तीन गुण की परिभाषा भी है बस बस ज्यादा ऊपर नहीं ज्यादा

498
00:38:17,040 --> 00:38:21,040
ऊपर नहीं नीचे जाइए व तीन

499
00:38:21,040 --> 00:38:27,040
गुण वही है सत और तम

500
00:38:28,640 --> 00:38:32,800
और थोड़ा नीचे एक तो इनकी बुक्स नहीं मिल रही है ना तो इसलिए ज्यादा

501
00:38:32,800 --> 00:38:37,200
दिक्कत आ रही है बस बस बस बस

502
00:38:37,200 --> 00:38:43,200
बस ऊपर जाइए ऊपर जाइए

503
00:38:43,240 --> 00:38:47,320
वापस इसी इसी पेज में कहीं पर है कि

504
00:38:47,320 --> 00:38:51,640
वह तीन गुण वही है सतर रज और तम तो सतर रज और तम किसने

505
00:38:51,640 --> 00:38:55,800
दिया सत्पुरुष ने उसे तीन गुण दिए क्यों दिए इसको

506
00:38:55,800 --> 00:39:00,080
पीछे से पढ़ लेते हैं थोड़ा कुछ समय उपरांत ज्योति निरंजन ने सोचा

507
00:39:00,080 --> 00:39:04,320
इस इसमें कुछ रचना करनी चाहिए खाली ब्रह्मांड यानी

508
00:39:04,320 --> 00:39:08,320
प्लॉट किस काम के यह विचार कर 70

509
00:39:08,320 --> 00:39:12,640
युग तप करके पूर्ण परमात्मा कबीर देव से रचना सामग्री

510
00:39:12,640 --> 00:39:17,040
की याचना की रचना सामग्री की याचना की और

511
00:39:17,040 --> 00:39:23,040
कबीर देव ने सत्पुरुष ने उसको तीन गुण दे

512
00:39:23,520 --> 00:39:27,600
दिए ठीक है क्या हुआ और

513
00:39:27,600 --> 00:39:31,640
भी कुछ हां ये ये तीन गुण आ गए ऊपर निकला है अभी ठीक

514
00:39:31,640 --> 00:39:35,640
है तीन गुण ठीक है

515
00:39:35,640 --> 00:39:40,360
ये रहने दीजिए ये वाला नहीं ये नहीं दिखाना वो

516
00:39:40,360 --> 00:39:44,360
वो जो तीन गुण की बात हो रही थी वही तो अब ये जो तीन गुण

517
00:39:44,360 --> 00:39:48,640
है वो किसने दिए वो किसने

518
00:39:48,640 --> 00:39:53,200
दिए वो दिए कबीर ने और किसको दिए

519
00:39:53,200 --> 00:39:57,440
काल को दिए तो तीन गुण काल को दिए अब दूसरी बात ये है कि कबीर

520
00:39:57,440 --> 00:40:01,520
जो है वो पूर्ण ईश्वर है पूर्ण ब्रह्म है तो उसकी कोई भी चीज ना तो कभी

521
00:40:01,520 --> 00:40:05,560
कम होती है ना ज्यादा होती है जैसा है वैसा ही रहता है इसका अर्थ ये

522
00:40:05,560 --> 00:40:09,600
हुआ कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है अगर वो गुण है तो उनकी

523
00:40:09,600 --> 00:40:13,760
कभी भी वो कभी भी उनका नाश नहीं होता और वैसे

524
00:40:13,760 --> 00:40:18,520
भी अभी तुमने गाय के चक्कर में मान ही लिया कि उनका कभी नाश नहीं होता

525
00:40:18,520 --> 00:40:22,680
और दूसरी बात यह है कि

526
00:40:22,680 --> 00:40:26,800
अगर गुण युक्त होने से किसी को गुण माना जाएगा तो

527
00:40:26,800 --> 00:40:31,280
ये जो क कबीर गुण प्रदान कर रहे हैं ज्योति निरंजन को ब्रह्म को

528
00:40:31,280 --> 00:40:35,400
तो इसका मतलब कबीर के पास तीन गुण है

529
00:40:35,400 --> 00:40:38,640
तो फिर वह क्या हो गए वो भी गुण हो गए तो उनकी

530
00:40:38,640 --> 00:40:42,640
भक्ति भी गलत हो गई ठीक है इसीलिए

531
00:40:42,640 --> 00:40:47,880
तो कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

532
00:40:47,880 --> 00:40:52,200
अच्छा इनकी ये बात हो गई अच्छा इसने जिस पेज

533
00:40:52,200 --> 00:40:56,280
जो पेज ये दिखाता है ना कि वो तीन गुणों से युक्त है तीन गुणों से युक्त है ये जो फैक्ट

534
00:40:56,280 --> 00:41:00,520
वाइ अभिषेक है बस हटा लीजिए जो यह दिखाता है फैक्ट

535
00:41:00,520 --> 00:41:05,520
वाई अभिषेक कि ये तीन गुणों से युक्त है तीन गुणों से युक्त

536
00:41:05,520 --> 00:41:09,680
है यह जहां दिखा रहा है वहीं पर लिखा हुआ

537
00:41:09,680 --> 00:41:12,680
है कि परमेश्वर निर्गुण

538
00:41:12,680 --> 00:41:16,800
है तो पहली बात अगर परमेश्वर निर्गुण है तो यहां पर गुण कैसे

539
00:41:16,800 --> 00:41:20,960
प्रदान कर रहा है पहली बात तो य हो गई और अगर परमेश्वर निर्गुण है

540
00:41:20,960 --> 00:41:25,040
यह परमेश्वर को निर्गुण मानते हैं कि नहीं मानते और अगर मानते हैं तो फिर

541
00:41:25,040 --> 00:41:29,560
वो तो साकार हो रहा है सगुण हो रहा है यह दिक्कत हो गई

542
00:41:29,560 --> 00:41:33,640
जहां से प्रमाण दे रहा है वही लिखा है जहां प्रमाण दे रहा है जब ये कह रहा है कि ब्रह्मा

543
00:41:33,640 --> 00:41:37,880
विष्णु महेश तो तीन गुणों से युक्त है वही नीचे लिखा है परमेश्वर तो निर्गुण

544
00:41:37,880 --> 00:41:43,880
है हम गुण आ गया

545
00:41:44,440 --> 00:41:48,640
अच्छा रामपाल भक्तों तुम अपने गुरु के दर्शन करने

546
00:41:48,640 --> 00:41:54,640
के लिए जेल धाम जाते होंगे पक्का कोई कांड

547
00:41:54,680 --> 00:41:58,840
करके किसी ने ये कमेंट लिखा है वो पढ़ रहा था

548
00:41:58,840 --> 00:42:02,840
अच्छा ठीक है तो अब अब आगे चलते हैं इनकी एक बात

549
00:42:02,840 --> 00:42:06,840
का और जवाब देते हैं कि भाई वही वाली बात कि गुण जो है वो

550
00:42:06,840 --> 00:42:10,920
तो निराकार है गुण क्या है क्वालिटी और ये कह र ब्रह्मा विष्णु

551
00:42:10,920 --> 00:42:15,000
महेश जो है गुण है तो या तो उनको गुण मान लो और

552
00:42:15,000 --> 00:42:19,320
या फिर उनको जो है जन्मा मान लो दे धारी मान लो फस जाओगे

553
00:42:19,320 --> 00:42:23,520
बहुत तुम्हारा जो है ना बहुत ज्यादा वो चक्की पिसाई अजीब

554
00:42:23,520 --> 00:42:28,680
टाइप का है तुम्हारा अब मैं एक बात कहूंगा

555
00:42:28,680 --> 00:42:33,000
आर्य समाज यों से अलंकार समाज

556
00:42:33,000 --> 00:42:37,240
यों से कि आर्य समाज

557
00:42:37,240 --> 00:42:41,840
की संस्था है माउंट ताबू के द्वारा जिन्होंने हमको एक आमंत्रण दिया

558
00:42:41,840 --> 00:42:46,480
था शास्त्रार्थ की चुनौती और हमने उसका

559
00:42:46,480 --> 00:42:50,560
मौखिक जवाब यहीं से यब से दे दिया था लिखित जवाब देने का समय

560
00:42:50,560 --> 00:42:54,760
नहीं निकाल पा रहे थे वो भी दिया जा रहा था बहुत ज्यादा जल्दी है आपको

561
00:42:54,760 --> 00:42:58,760
मगर हमारे पास थोड़ा सा काम रहता है तो इस वजह से हम समय नहीं निकाल पा रहे

562
00:42:58,760 --> 00:42:59,640
थे हमने

563
00:42:59,640 --> 00:43:03,720
कल की डेट तक आपका वो लिख तैयार कर

564
00:43:03,720 --> 00:43:07,920
दिया था आपका जो रिप्लाई है और वह शायद हम कल सुबह पोस्ट कर देंगे

565
00:43:07,920 --> 00:43:12,160
ट्वीट भी कर देंगे ठीक है तो थोड़ा सा सब रखिए

566
00:43:12,160 --> 00:43:16,240
धैर रखिए बहुत ज्यादा मच मतलब

567
00:43:16,240 --> 00:43:20,240
वैसे अरी मत होइए संयम रखना सीखिए थोड़ा सा

568
00:43:20,240 --> 00:43:24,280
संयम रखें थोड़ा स्वयं पर इतना ज्यादा जल्दी आज आपने हम जब तक आपको

569
00:43:24,280 --> 00:43:28,600
देते हमारा नंबर आपको प्राप्त है आप कॉल कर लेते आप जवाब आप दे रहे कि नहीं दे रहे

570
00:43:28,600 --> 00:43:32,840
जब तक देते ना देते आपने तब तक जो है अपना एक और

571
00:43:32,840 --> 00:43:37,080
प्रस्तुत कर दिया तो हम जवाब दे रहे थे आपको और आज

572
00:43:37,080 --> 00:43:41,440
ही हमने कल हमने लिख लिया था और आज भी उसको देख पाने का समय नहीं मिला

573
00:43:41,440 --> 00:43:46,040
और कल हम उसको डाल देंगे तो थोड़ा सा अधैर

574
00:43:46,040 --> 00:43:50,440
मत दिखाए अधैर का प्रदर्शन ना करें और आपसे

575
00:43:50,440 --> 00:43:55,200
ही मुझे एक बात और याद आई कि आज एक बहुत ही

576
00:43:55,200 --> 00:44:00,160
निचले दर्जे की एक हरकत मैंने देखी तो मुझे बड़ा दुख हुआ

577
00:44:00,160 --> 00:44:05,560
और इसलिए मैं उसको थोड़ा सा बताऊंगा यह जो व्यक्ति है जो रामपाल का स्वयं को

578
00:44:05,560 --> 00:44:09,680
ये जेल धाम निवासी जो रामपाल है उनका जो स्वयं को

579
00:44:09,680 --> 00:44:14,240
शिष्य कहता है फैक्ट बाई अभिषेक

580
00:44:14,240 --> 00:44:14,960
तो ये फैक्ट

581
00:44:14,960 --> 00:44:19,080
बाई अभिषेक ने वो जो किया हमको जो कहा सो कहा वह सब करते करते

582
00:44:19,080 --> 00:44:23,560
इसने बहुत ही कुछ नीच किस्म के कुछ

583
00:44:23,560 --> 00:44:28,000
वक्तव्य कह दिए मतलब निचले दर्जे के कहेंगे उस

584
00:44:28,000 --> 00:44:32,000
जो बिल्कुल भी क्षम में नहीं है जो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं

585
00:44:32,000 --> 00:44:37,400
है अगर कोई मतलब मैं मुझको

586
00:44:37,400 --> 00:44:41,520
मुझको वो सुन कर के खुद आत्मा में ठेस पहुंची

587
00:44:41,520 --> 00:44:45,680
इसने क्या किया कि

588
00:44:45,680 --> 00:44:49,680
कोई अमित जी करके हैं जो इनका निराकरण प्रस्तुत

589
00:44:49,680 --> 00:44:53,760
कर रहे हैं अपने स्तर पर तो उन्होंने अमित जी ने कहीं पर दयानंद

590
00:44:53,760 --> 00:44:57,760
जी की बात की होगी और दयानंद जी की बात करते करते उन्होंने कुछ प्रमाण दिखा

591
00:44:57,760 --> 00:45:02,200
दिए होंगे दयानंद जी की ओर से तो इसने जो है उनकी

592
00:45:02,200 --> 00:45:06,520
इतनी अवेल की है दयानंद जी की शर्म करो तुम थोड़ी बहुत

593
00:45:06,520 --> 00:45:10,560
तुम्हारे को बात करने की तमीज नहीं है फैक्ट बाई अभिषेक

594
00:45:10,560 --> 00:45:15,280
तुम्हें शर्म आनी चाहिए लज्जा आनी चाहिए तुम्हें अरे भाई

595
00:45:15,280 --> 00:45:19,320
जो व्यक्ति शरीर छोड़ चुका है हा उससे भी

596
00:45:19,320 --> 00:45:23,800
तुम घणा रख रहे हो उससे तुम दुश्मनी रख रहे हो और वो भी इतने स्तर की

597
00:45:23,800 --> 00:45:28,480
अगर तुम्हारे सामने होते ना दयानंद जी नहीं निकलती

598
00:45:28,480 --> 00:45:30,360
आवाज हमारे वैचारिक

599
00:45:30,360 --> 00:45:34,520
मतभेद हैं दर्शन को लेकर सिद्धांतों को लेकर

600
00:45:34,520 --> 00:45:38,560
अंतर है मगर इतना पता है कि वो दयानंद स्वामी जो थे ना

601
00:45:38,560 --> 00:45:43,800
एक वीर मां की संतान थे ऐसे वैसे नहीं थे तुम्हारी

602
00:45:43,800 --> 00:45:49,800
जैसे विद्वान थे चतुर

603
00:45:50,760 --> 00:45:56,760
थे उनके पैरों के धूल के कण के बराबर भी नहीं हो

604
00:45:57,280 --> 00:46:01,400
इतनी घृणित बातें बोली इस व्यक्ति ने इतनी मतलब

605
00:46:01,400 --> 00:46:07,400
कोई कोई सीमा ही नहीं है कैसे कोई सुन सकता

606
00:46:07,800 --> 00:46:12,080
है और इसके दोगले पन की पराकाष्ठा में कह रहा था ना

607
00:46:12,080 --> 00:46:16,200
दोगले पन की पराकाष्ठा क्या है देखिए फिर

608
00:46:16,200 --> 00:46:22,200
बताता हूं दिखाइए इनको वीडियो भैया

609
00:46:29,680 --> 00:46:35,680
वीडियो दिखा

610
00:46:48,800 --> 00:46:53,280
रहे करके पु थे

611
00:46:53,280 --> 00:46:57,080
पहले वो दिखाइए वो वाला जहां

612
00:46:57,080 --> 00:47:01,160
जहां इसने शब्दावली यूज की है गंदी वाली वो

613
00:47:01,160 --> 00:47:05,360
दिखाइए थे या करके इन्होने सत्या प्रकाश बोली

614
00:47:05,360 --> 00:47:09,080
है और भी

615
00:47:09,080 --> 00:47:13,320
जो थे यानी करके इन्होने सत्यार्थ प्रकाश बोली

616
00:47:13,320 --> 00:47:17,320
है और भी जो प कर पज करिए नसेड़ी

617
00:47:17,320 --> 00:47:21,960
थे और नशा करके इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश बोली है

618
00:47:21,960 --> 00:47:26,120
नसेड़ी थे गंजेड़ी थे अरे हटा क्यों लिया वो चलाइए ना अंत

619
00:47:26,120 --> 00:47:30,800
तक चलाइए

620
00:47:30,800 --> 00:47:35,000
को फ क्यों आप ऐसे लोगों को जी करके पुकार

621
00:47:35,000 --> 00:47:39,040
रहे हैं थे करके इन्होने

622
00:47:39,040 --> 00:47:43,240
सत्या प्रकाश बोली है और भी जो फिर क्यों आप ऐसे

623
00:47:43,240 --> 00:47:47,520
लोगों को जी करके पुकार रहे हैं देखिए

624
00:47:47,520 --> 00:47:52,400
इसने यहां पर जो एक बहुत आपत्ति जनक शब्द बोला है

625
00:47:52,400 --> 00:47:58,200
कि ऐसे नसेड़ी को आप लोग जी करके पुकार रहे हैं नसेड़ी

626
00:47:58,200 --> 00:48:02,280
जिस दयानंद सरस्वती को समाज

627
00:48:02,280 --> 00:48:06,360
जानता है वह नसेड़ी नहीं था उनके जीवन में

628
00:48:06,360 --> 00:48:10,480
जो भी रहा हो और तुम उनके बारे में

629
00:48:10,480 --> 00:48:15,160
इतनी आपत्ति जनक बातें कर रहे तुम्हें शर्म नहीं आती है वैसे कहोगे कि हम लोग बहुत

630
00:48:15,160 --> 00:48:19,160
सभ्यता वाले हैं कितनी बार तुम लोगों को कह दिया

631
00:48:19,160 --> 00:48:23,360
इस तरह की

632
00:48:23,360 --> 00:48:27,400
चीजें खैर अब इसके दोगले पन की पराकाष्ठा

633
00:48:27,400 --> 00:48:31,480
यह है यह व्यक्ति क्या कह रहा है यहां पर कि ऐसे लोगों

634
00:48:31,480 --> 00:48:35,800
को तुम जी करके बुलाते हो मतलब ये मना कर रहा है कि जी करके नहीं बुलाना

635
00:48:35,800 --> 00:48:39,840
चाहिए दयानंद जी को है ना नहीं बुलाना चाहिए अब

636
00:48:39,840 --> 00:48:43,840
जरा इनका भाई वो दिखा दो इन्होंने ही शुरू

637
00:48:43,840 --> 00:48:47,920
में क्या बोला है जब इनको दया जब इनको किसी बात में

638
00:48:47,920 --> 00:48:52,600
दयानंद जी को प्रमाण के रूप में लेना था तो य वहां पर खुद कह रहा है

639
00:48:52,600 --> 00:48:58,600
कि दयानंद जी और बाद में मना कर रहा है

640
00:49:15,680 --> 00:49:20,040
वह वाला क्लिप आप लोग इनके चैनल पर देख सकते हैं

641
00:49:20,040 --> 00:49:24,240
वो अवेलेबल नहीं है हमारे पास पहले खुद इसने प्रमाण

642
00:49:24,240 --> 00:49:28,360
दिखाने के लिए दयानंद जी बोला और बाद में खुद कह रहा है कि ऐसे

643
00:49:28,360 --> 00:49:32,560
नसेड़ी को आप लोग दयानंद जी कैसे बोल सकते हो

644
00:49:32,560 --> 00:49:37,200
तो ये है दोगले पन की पराकाष्ठा फैक्ट भाई

645
00:49:37,200 --> 00:49:41,960
अभिषेक माता जी ने निष्ठा पूर्वक नहीं पिलाया ना

646
00:49:41,960 --> 00:49:46,400
दुग्ध पान कराया है तो आप आइए सामना

647
00:49:46,400 --> 00:49:50,440
करिए सामना फोन करिए मुझे 7408 30169

648
00:49:50,440 --> 00:49:54,560
है गुरदा है गुरदा आर्य समाज से कोई आए

649
00:49:54,560 --> 00:49:58,560
ना आए इस अमानना का प्रतिकार

650
00:49:58,560 --> 00:50:04,560
करने इसके लिए मैं ही पर्याप्त

651
00:50:04,760 --> 00:50:07,080
हूं

652
00:50:07,080 --> 00:50:11,760
खर आप लिंक दे दीजिए वैसे अभी बहुत सी बातें हैं

653
00:50:11,760 --> 00:50:17,760
जब तक आप लिंक दे दीजिए अगर कोई बीच में आ जाएगा तो ले लेंगे

654
00:50:18,600 --> 00:50:22,840
उसे हां इसने एक काम और किया है इसने

655
00:50:22,840 --> 00:50:27,040
फैक्ट बाय अभिषेक ने कि जो नियोग वाला अध्या

656
00:50:27,040 --> 00:50:31,440
आता है वहां पर जो है बहुत मतलब

657
00:50:31,440 --> 00:50:35,520
निचले स्तर की इसने बातें वहां पर की है खुल के कोई

658
00:50:35,520 --> 00:50:41,520
मर्यादा नहीं है कोई सीमा नहीं

659
00:50:42,920 --> 00:50:47,080
है ठीक है तो हमने लिंक दे दिया है कोई

660
00:50:47,080 --> 00:50:51,200
हमारी बातों को से सहमत ना हो तो आ सकता

661
00:50:51,200 --> 00:50:57,200
है

662
00:51:03,560 --> 00:51:08,040
एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि आवान

663
00:51:08,040 --> 00:51:12,680
दयानंद जी और रामपाल एक ही है नहीं है

664
00:51:12,680 --> 00:51:16,800
एक नहीं है इंस्पायर्ड हो सकता है रामपाल

665
00:51:16,800 --> 00:51:20,840
उनसे मगर एक नहीं है क्योंकि दयानंद जी की वेदों

666
00:51:20,840 --> 00:51:24,920
में निष्ठा थी उन्होंने वेदों की निंदा नहीं की कभी वेदों में मुक्ति नहीं

667
00:51:24,920 --> 00:51:29,720
है यह अंतर

668
00:51:29,720 --> 00:51:34,200
है वेदों में मुक्ति नहीं है यह नहीं कहा दयानंद

669
00:51:34,200 --> 00:51:38,480
जी ने कभी वेदों की निंदा नहीं की उन्होंने उन्होंने परंपरा प्राप्त

670
00:51:38,480 --> 00:51:42,520
वेदार्थ की वेदार्थ का अनुगमन नहीं किया उसका प्रचार

671
00:51:42,520 --> 00:51:46,960
नहीं किया दूसरा अपना अर्थ निकाल लिया वह एक अलग बात है मगर वेदों के प्रति अनास्ता

672
00:51:46,960 --> 00:51:51,080
नहीं थी उनके मन में वेदों का सम्मान किया था

673
00:51:51,080 --> 00:51:55,160
प्रणव का सम्मान किया था इस व्यक्ति के द्वारा प्रणव की निंदा

674
00:51:55,160 --> 00:51:58,240
होती है का तो वो चिन्ह है

675
00:51:58,240 --> 00:52:04,240
प्रणव और आप इसको और उनको एक कैसे कर

676
00:52:06,240 --> 00:52:10,240
दोगे कौन है

677
00:52:10,240 --> 00:52:14,400
भाई जय श्री राम महेंद्र जी जय श्री राम जी

678
00:52:14,400 --> 00:52:18,800
ज जय श्री राम भाई साहब य रामपाल है ना रामपाल खुद नसेड़ी

679
00:52:18,800 --> 00:52:22,880
कहता है दयानंद जी को भाई वो तो कहता है तो

680
00:52:22,880 --> 00:52:27,400
वो तो जेल में है ना और कहां

681
00:52:27,400 --> 00:52:31,400
लेकि लेकिन एक संत को ऐसी भाषा सबात नहीं देती ना गलत कहता है

682
00:52:31,400 --> 00:52:35,720
ना वो नहीं ठीक है वो जो भी है वो संत है कि नहीं वो तो

683
00:52:35,720 --> 00:52:39,880
एक अलग बात है ना मगर अगर दयानंद ने अगर इन्होने ये

684
00:52:39,880 --> 00:52:44,360
रामपाल ने अगर कुछ किया है तो समय जेल में

685
00:52:44,360 --> 00:52:48,880
और भेज दोगे हाय तो है

686
00:52:48,880 --> 00:52:53,120
मगर ये जो उनके नाम पर बाहर चल रहे हैं यह बड़ा मतलब

687
00:52:53,120 --> 00:52:57,760
इतना अमर्यादित बात इसने की है इस व्यक्ति ने आज कि मतलब

688
00:52:57,760 --> 00:53:03,560
मतलब आंखें जो है शर्म से झुक जाए किसी

689
00:53:03,560 --> 00:53:08,120
ठीकठाक बिल्कुल बोलते हैं ये इनके मर्यादा तो है ही नहीं इनके पास

690
00:53:08,120 --> 00:53:12,240
कोई मर्यादा नहीं है भाई आप अपनी बात को रखो दर्शन

691
00:53:12,240 --> 00:53:16,600
विज्ञान व्यवहार मर्यादा की सीमा में अपनी बात को रखो यह क्या आप नसेड़ी

692
00:53:16,600 --> 00:53:20,680
बोल रहे हो घटिया बोल रहे हो नीच बोल रहे हो पता नहीं क्या क्या बोला है

693
00:53:20,680 --> 00:53:24,800
बहुत गंदा गंदा बोला बोला है भाई साब बर्दा से बाहर है

694
00:53:24,800 --> 00:53:29,120
ये बातें बहुत बहुत बुरा है बहुत बुरा बोला र

695
00:53:29,120 --> 00:53:33,320
हम लोग आ जाते दोबारा से जो बात

696
00:53:33,320 --> 00:53:39,320
चल रही थी

697
00:53:41,080 --> 00:53:45,360
कि अब देखिए इन्होंने गरमा गीता की

698
00:53:45,360 --> 00:53:48,840
पेज

699
00:53:48,840 --> 00:53:53,000
नंबर पेज नंबर है 70

700
00:53:53,000 --> 00:53:59,000
निकालिए गरिमा गीता की

701
00:54:08,480 --> 00:54:12,560
इतनी सारी बातें चल रही है रामपाल हम भी कोशिश करते

702
00:54:12,560 --> 00:54:16,800
हैं कि भाई रामपाल जैसे का नाम भी जी लगा के निकले कोशिश करते हैं प्रयास करते

703
00:54:16,800 --> 00:54:21,120
हैं और कभी कोई इतने सारे लांच

704
00:54:21,120 --> 00:54:25,840
लग चुके हैं इतनी सारी प्रेस की कटिंग है हमने कभी कोई उसके बारे में बात नहीं की

705
00:54:25,840 --> 00:54:31,840
कभी भी बात नहीं की

706
00:54:32,240 --> 00:54:36,280
हमने तो पेज नंबर 70 पैराग्राफ तीसरे से

707
00:54:36,280 --> 00:54:40,880
चौथा पीडीएफ के अनुसार 50 नंबर

708
00:54:40,880 --> 00:54:46,080
पेज हां इसमें क्या

709
00:54:46,080 --> 00:54:50,880
है जो देखिए यहां पर इन्होंने मान लिया

710
00:54:50,880 --> 00:54:54,920
जो मेरे मत का अनुसरण करते हैं वह बुरे कर्मों

711
00:54:54,920 --> 00:54:59,840
से बच जाते हैं जो ऐसा नहीं करते वह मूर्ख अज्ञानी है

712
00:54:59,840 --> 00:55:00,340
हुआ

713
00:55:00,160 --> 00:55:04,480
क्या है यहां पर इन्होंने यह जो गीता ज्ञान दाता है इनके अनुसार हमारे

714
00:55:04,480 --> 00:55:08,720
भगवान श्री कृष्ण उसने यहां पर स्वीकार किया

715
00:55:08,720 --> 00:55:12,320
है

716
00:55:12,320 --> 00:55:16,800
कि यह मतलब यहां पर भी उसने कहा है शायद

717
00:55:16,800 --> 00:55:20,800
37 नंबर के श्लोक में शायद कहा है कि ऐसा मेरा मत है

718
00:55:20,800 --> 00:55:25,040
यह कहा है तो ऐसा मेरा मत है जब उसने कह दिया तो यहां पर इन्होंने

719
00:55:25,040 --> 00:55:29,880
वह बात मान ली कि काल के मत के अनु मत भी सही है

720
00:55:29,880 --> 00:55:34,280
ठीक है तो काल ऐसा मेरा मत है कहकर

721
00:55:34,280 --> 00:55:38,440
सही बात बता रहा है यहां पर यह सिद्ध हो गया क्योंकि इन्होंने मान भी ली

722
00:55:38,440 --> 00:55:43,360
जो काल के मत के अनुसार नहीं चलते वह मूर्ख है अज्ञानी

723
00:55:43,360 --> 00:55:47,640
है वह सर्व शास्त्र विरुद्ध अज्ञान पर ज्ञान

724
00:55:47,640 --> 00:55:51,880
पर आसक्त है तो काल के मत के अनुसार चलना है यह र्च

725
00:55:51,880 --> 00:55:56,800
दर्शी के अनुसार ठीक है

726
00:55:56,800 --> 00:56:02,800
और देखिए आगे चलते

727
00:56:08,040 --> 00:56:12,800
हैं इन्होंने एक जगह माना है

728
00:56:12,800 --> 00:56:18,800
69 पेज नंबर निकालिए

729
00:56:29,960 --> 00:56:35,160
48 निकालिए 48 4 इससे एक

730
00:56:35,160 --> 00:56:39,200
पहले बस बस

731
00:56:39,200 --> 00:56:43,320
48 में जो तीसरे अध्याय के 21 में

732
00:56:43,320 --> 00:56:47,880
की इन्होंने वह की है कथनी करनी हां

733
00:56:47,880 --> 00:56:52,080
यहां देखिए यह भगवान श्री कृष्ण की बुराई कर रहे हैं यहां पर

734
00:56:52,080 --> 00:56:56,240
क्या बुराई कर रहे हैं कि

735
00:56:56,240 --> 00:57:00,400
गीता अध्याय तीन के श्लोक 21 से 24 में कहा है कि हे अर्जुन ज्ञानी

736
00:57:00,400 --> 00:57:04,440
संतो को अच्छे शास्त्र करने चाहिए और

737
00:57:04,440 --> 00:57:08,520
मैं फिर भी अच्छे कर्म करता हूं मुझे कुछ भी प्राप्त करना बाकी

738
00:57:08,520 --> 00:57:12,520
नहीं है मगर मैं अच्छे कर्म करता हूं ताकि अन्य

739
00:57:12,520 --> 00:57:17,000
प्राणी भी मेरा अनुसरण करें तो भाई

740
00:57:17,000 --> 00:57:21,120
काल का कौन सा अच्छा कर्म माना है तुमने काल को तुमने

741
00:57:21,120 --> 00:57:23,240
महाभारत कराने वाला माना काल

742
00:57:23,240 --> 00:57:27,240
को तुमने प्राणियों को खाने वाला माना काल के सारे बुरे कर्म

743
00:57:27,240 --> 00:57:31,640
आपने माने ठीक है पहली बात तो क्या हमको इसका अनुसरण

744
00:57:31,640 --> 00:57:36,280
करना है जीवों को खाना है लड़ाई करवानी है आपके अनुसार

745
00:57:36,280 --> 00:57:40,560
तो यहां पर आपने मान लिया कि काल अच्छे कर्म करता है दूसरी बात क्यों माना

746
00:57:40,560 --> 00:57:44,640
है जिससे कि लोगों के मन में कृष्ण के प्रति नफरत पैदा हो

747
00:57:44,640 --> 00:57:48,880
कैसे होगी तो श्री कृष्ण यहां पर बुरे हैं

748
00:57:48,880 --> 00:57:53,000
इनके अनुसार इनके अनुसार यहां पर श्री कृष्ण के बारे में इन्होंने

749
00:57:53,000 --> 00:57:57,440
बहुत सी बातें कर दी कि वो ऐसे थे वो वैसे थे वो लीला यह वो

750
00:57:57,440 --> 00:58:01,680
सब बातें इन्होंने कर दी श्री कृष्ण को बुरा दिखाने के लिए कंपेरटिवली टू

751
00:58:01,680 --> 00:58:06,240
काल श्री कृष्ण को बुरा दिखाने के लिए इन्होंने काल

752
00:58:06,240 --> 00:58:11,200
के सामने रखते हुए कृष्ण जी की बुराई कर दी

753
00:58:11,200 --> 00:58:17,200
मगर अब जरा इनको पेज नंबर वो दिखा दीजिए महाभारत

754
00:58:17,440 --> 00:58:21,520
वाला तो पहली बात तो यह हो गई एक बात तो यह निकल

755
00:58:21,520 --> 00:58:25,640
के आई कि काल जो है अच्छे कर्म करता है तो इनके हिसाब से लोगों

756
00:58:25,640 --> 00:58:29,800
को खाना यह सब अच्छे कर्म है और हम लोगों को भी वह करने चाहिए

757
00:58:29,800 --> 00:58:34,120
काल के अनुसार चलना है ना हमको जो मेरे मत के अनुसार यही पर माना अच्छा

758
00:58:34,120 --> 00:58:38,360
दूसरी बात क्या है कि इन्होंने कृष्ण की बुराई करने के लिए य बात कही थी

759
00:58:38,360 --> 00:58:42,840
कि कृष्ण से अलग कर दे काल को और कृष्ण की खूब बुराई कर दे मगर

760
00:58:42,840 --> 00:58:47,160
दिक्कत क्या है कि इन्होंने दूसरी जगह पर कृष्ण को काल से अलग करके कृष्ण

761
00:58:47,160 --> 00:58:51,760
की अच्छाई और काल की बुराई की है वह क्या

762
00:58:51,760 --> 00:58:57,760
है 21 नंबर पेज है इसका

763
00:59:03,080 --> 00:59:07,440
21 म यहां पर 21 में देखिए महाभारत का इन्होने उदाहरण

764
00:59:07,440 --> 00:59:12,000
दिया कि गीता ज्ञान को बोलने वाला जो है वह काल है ऊपर

765
00:59:12,000 --> 00:59:16,040
करिए ऊपर जाइए हा और नीचे आ जा नीचे

766
00:59:16,040 --> 00:59:20,320
आ जा हेडिंग डली होगी गीता ज्ञान को बोलने वाला कौन है

767
00:59:20,320 --> 00:59:22,960
सबसे

768
00:59:22,960 --> 00:59:26,960
नीचे फोर्थ पैराग्राफ हां पवित्र श्रीमद् भगवत गीता

769
00:59:26,960 --> 00:59:31,120
का ज्ञान किसने कहा अब यहां पर उन्होने महाभारत का उदाहरण दे दिया है

770
00:59:31,120 --> 00:59:35,280
और यहां पर बताया कि श्री कृष्ण तो युद्ध को रोकना चाहते थे पर काल को

771
00:59:35,280 --> 00:59:41,040
क्योंकि लोगों को खाना था यह करना था वोह करना था तो उसने यह सब लड़ाई

772
00:59:41,040 --> 00:59:45,800
करवाई श्री कृष्ण तो अच्छे थे काल के कंपैरेटिव

773
00:59:45,800 --> 00:59:49,840
तो यहां पर श्री कृष्ण अच्छे हैं काल जो है बुरा है और वहां पर काल

774
00:59:49,840 --> 00:59:54,040
अच्छा है श्री कृष्ण बुरे हैं एट दी एंड कोई अच्छा नहीं है सब

775
00:59:54,040 --> 00:59:58,040
बुरे हैं केवल इनके जो जेल धाम में बै बैठे हुए तिरछे दर्शी है

776
00:59:58,040 --> 01:00:04,040
वो सही है ठीक है तो यह हो गई

777
01:00:06,320 --> 01:00:12,320
बात

778
01:00:16,280 --> 01:00:22,280
अब हम

779
01:00:29,760 --> 01:00:35,760
अब देखिए गरमा गीता की का पेज नंबर

780
01:00:40,480 --> 01:00:44,640
108 यहां पर यह लोग कह रहे हैं कि भगवान शंकर भी ब्रह्मा

781
01:00:44,640 --> 01:00:50,640
विष्णु महेश भी अज्ञानी है

782
01:00:59,400 --> 01:01:03,560
ब्रह्मा विष्णु महेश जो है वह अज्ञानी है और यह संदर्भ

783
01:01:03,560 --> 01:01:07,880
हम कई बार मिल जाएगा कि ब्रह्मा जी को वेद प्राप्त हुए शिव जी से विष्णु

784
01:01:07,880 --> 01:01:12,200
जी को वेद प्राप्त हुए शिव जी से विष्णु जी से शिव जी को प्राप्त हुए स्वास रूपी

785
01:01:12,200 --> 01:01:16,280
वेद जो है प्राप्त होते हैं मगर जो ब्रह्मा विष्णु

786
01:01:16,280 --> 01:01:22,280
महेश है वेदों को देने वाले वह अज्ञानी

787
01:01:22,400 --> 01:01:28,240
है तो क्या हुआ

788
01:01:28,240 --> 01:01:32,480
अज्ञानी का मतलब यह हुआ कि ब्रह्मा विष्णु महेश को पता

789
01:01:32,480 --> 01:01:36,480
नहीं है कि क्या करना है क्या नहीं काल को भी नहीं पता है क्या क्या करना है क्या नहीं

790
01:01:36,480 --> 01:01:40,560
काल भी अज्ञानी है ब्रह्मा विष्णु महेश भी अज्ञानी है तो जब काल को कुछ पता नहीं

791
01:01:40,560 --> 01:01:44,560
है तो उसको यह कैसे पता कि तत्वदर्शी के पास जाना है और तत्वदर्शी कौन होगा

792
01:01:44,560 --> 01:01:48,560
जो उल्टे प्रक्ष की व्याख्या करेगा यह कैसे पता इसमें काल की

793
01:01:48,560 --> 01:01:53,160
अज्ञानता नहीं हो सकती जब ब्रह्मा विष्णु महेश को पता नहीं है

794
01:01:53,160 --> 01:01:57,440
कुछ भी तो उनको यह कैसे पता कि मेरा भी च और जन्म

795
01:01:57,440 --> 01:02:01,440
होता है त्र भाव आविर्भव होता है यह कैसे पता

796
01:02:01,440 --> 01:02:07,440
अज्ञानी का मतलब अज्ञानी और क्यों अज्ञानी है भी

797
01:02:08,160 --> 01:02:13,720
समझो पेज नंबर 108 आ

798
01:02:13,720 --> 01:02:19,720
गया हां इसमें पीछे वाला पेज है पैराग्राफ नंबर

799
01:02:21,640 --> 01:02:27,640
टू दूसरा पैराग्राफ

800
01:02:27,920 --> 01:02:32,120
यह देखिए एक समय भगवान रामचंद्र पुत्र श्री दशरथ

801
01:02:32,120 --> 01:02:36,360
अयोध्यावासी को उनकी मौसी य वो एक दिन लंका के राजा रावण

802
01:02:36,360 --> 01:02:40,600
ने साधु के भेष में आकर हो गया थोड़ा आगे और चलिए इसमें

803
01:02:40,600 --> 01:02:44,760
लाइन नंबर है फाइव रुक रुकी ज्यादा

804
01:02:44,760 --> 01:02:49,120
नीचे मत जाइए ऊपर जाइए वापस हा बस बस बस बस

805
01:02:49,120 --> 01:02:53,520
न टूथ फोर फ हां देखिए भगवान

806
01:02:53,520 --> 01:02:58,720
शिव ने कहा यह परम ब्रह्म प्रभु है किसको

807
01:02:58,720 --> 01:03:02,760
कहा रामचंद्र जी को

808
01:03:02,760 --> 01:03:06,920
और यह काल को ही परम ब्रह्म मानते हैं तो

809
01:03:06,920 --> 01:03:11,040
यह अब यहां पर कह दिया क्योंकि यह लोग गलत मानते हैं तो अज्ञानी

810
01:03:11,040 --> 01:03:15,040
है तो जब इनकी यह बात गलत है तो उनकी व बात कैसे सही कि मेरा आविर्भव होता

811
01:03:15,040 --> 01:03:19,320
है त्र भाव होता है अज्ञानी है उनको नहीं पता मेरा क्या होता

812
01:03:19,320 --> 01:03:23,560
है है ना और दूसरी बात यह है

813
01:03:23,560 --> 01:03:26,600
कि

814
01:03:26,600 --> 01:03:31,080
काल का जन्म और मृत्यु अलौकिक इसको तो अलग से लेंगे पूरा काल का चैप्टर बना दिया है

815
01:03:31,080 --> 01:03:34,600
ठीक है आगे चलते

816
01:03:34,600 --> 01:03:38,840
हैं अच्छा यह लोग कहते हैं यज्ञों से पूर्ण

817
01:03:38,840 --> 01:03:42,880
ब्रह्म की पूजा नहीं होती है

818
01:03:42,880 --> 01:03:48,200
मगर इनकी गर्मा गीता की खोलिए

819
01:03:48,200 --> 01:03:53,120
अ 64 नंबर

820
01:03:53,120 --> 01:03:58,000
64 हर चीज गलत है हर चीज

821
01:03:58,000 --> 01:04:04,000
कुछ नहीं सही है कूड़ा

822
01:04:09,240 --> 01:04:13,600
है हां भाई कर लेंगे

823
01:04:13,600 --> 01:04:19,600
दयानंद सही कि रामपाल सही कर लेंगे इसम

824
01:04:20,120 --> 01:04:22,360
बात

825
01:04:22,360 --> 01:04:26,480
रामपाल आपको वेदों से बाहर निकाल रहे हैं इस

826
01:04:26,480 --> 01:04:30,520
बात को समझिए और दयानंद जी उसका

827
01:04:30,520 --> 01:04:34,600
अर्थ जो भी करें मगर आपको वेदों में वेदों की सीमा में रख रहे हैं तो

828
01:04:34,600 --> 01:04:38,680
जब जब व्यक्ति को वेदों के प्रति आस्था आस्था है तो उसको आसान है कि

829
01:04:38,680 --> 01:04:43,160
सही अर्थ बता कर के सही रास्ते पर लाना मगर जो व्यक्ति वेदों के प्रति अनास्ता

830
01:04:43,160 --> 01:04:47,600
वान है उसको पहले वेदों तक लाना पड़ेगा

831
01:04:47,600 --> 01:04:52,960
और फिर उसको धर्म का रास्ता दिखाना पड़ेगा अंतर

832
01:04:52,960 --> 01:04:57,000
है एक बार पूज्य गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य जी बता

833
01:04:57,000 --> 01:05:01,040
रहे थे यह बात मैं उनके लिए नहीं बोल रहा हूं दयानंद

834
01:05:01,040 --> 01:05:05,880
जी के लिए मगर बता रहे थे वो एक बार जंगल में जब शायद

835
01:05:05,880 --> 01:05:10,280
वो जंगल में थे यात्रा के दौरान थे तो वहां पर क्रिश्चन

836
01:05:10,280 --> 01:05:14,400
लोग जो है धर्म परिवर्तन कर रहे थे ईसाई मिशनरी वहां

837
01:05:14,400 --> 01:05:18,440
पर उनको कौन लो ले रहा था पता है उनसे क्रिश्चन से

838
01:05:18,440 --> 01:05:23,320
कौन लो ले रहा था उनसे गायत्री परिवार

839
01:05:23,320 --> 01:05:24,320
वाले

840
01:05:24,320 --> 01:05:28,360
लड़ रहे थे वहां पर तो आपको चुनना होगा

841
01:05:28,360 --> 01:05:30,880
प्राथमिकताओं

842
01:05:30,880 --> 01:05:34,880
को ठीक है अच्छा मैं कह रहा

843
01:05:34,880 --> 01:05:40,200
था आप पेज नंबर निकालिए

844
01:05:40,200 --> 01:05:44,480
64 पेज नंबर इन्होंने इनको आप बिल्कुल सही कह रहे हैं इनको

845
01:05:44,480 --> 01:05:49,280
समझने का मतलब यह है किताबें छोड़ दो किताब पढ़ोगे कुछ नहीं

846
01:05:49,280 --> 01:05:53,320
खत्म और इनके पास चले जाओ बस किताबों

847
01:05:53,320 --> 01:05:57,520
से इनकी कोई बात मैच ही नहीं खाएगी अब इसमें

848
01:05:57,520 --> 01:06:01,640
यज्ञ में पूज्य पूर्ण ब्रह्म है ये लोग कहते हैं ञ जो वेदों

849
01:06:01,640 --> 01:06:06,360
की पूजा है वो पूर्ण ब्रह्म की पूजा नहीं है

850
01:06:06,360 --> 01:06:10,800
मगर इसका पैरा पैराग्राफ नंबर तीन है

851
01:06:10,800 --> 01:06:15,560
इसका

852
01:06:15,560 --> 01:06:19,600
तीसरा देखिए सर्वव्यापी परम

853
01:06:19,600 --> 01:06:24,040
अक्षर ब्रह्म यज्ञ यानी धार्मिक अनुष्ठानों में

854
01:06:24,040 --> 01:06:28,320
प्रतिष्ठित है और के रूप में पूज्य यानी यज्ञों

855
01:06:28,320 --> 01:06:32,400
के द्वारा किसकी पूजा हो रही है ब्रह्म की

856
01:06:32,400 --> 01:06:37,040
और खुद ही कहते फिर रहे हैं कि वेदों के अनुसार जो पूजा है वो मतलब

857
01:06:37,040 --> 01:06:41,240
यज्ञों के द्वारा किसकी पूजा हो रही है सर्वत ब्रह्म सर्वव्यापी परम अक्षर ब्रह्म

858
01:06:41,240 --> 01:06:45,280
की हो रही है और खुद ही कहते घूम रहे हैं कि यज्ञ वो

859
01:06:45,280 --> 01:06:49,560
वेदों के द्वारा यज्ञ के द्वारा जो है पूर्ण परम अक्षर ब्रह्म की पूजा नहीं

860
01:06:49,560 --> 01:06:54,000
है ठीक

861
01:06:54,000 --> 01:07:00,000
है इतनी कितनी चीजें हैं हर कदम पर

862
01:07:03,280 --> 01:07:08,080
इनका वेद गीता का ज्ञान

863
01:07:08,080 --> 01:07:14,080
अधूरा

864
01:07:15,120 --> 01:07:21,120
देखिए 117 नंबर पेज निकालिए जरा

865
01:07:37,400 --> 01:07:41,840
117 नंबर पेज पीडीएफ के अनुसार 97

866
01:07:41,840 --> 01:07:46,160
और पैराग्राफ नंबर तीन हम

867
01:07:46,160 --> 01:07:52,160
यह ज्यादा नीचे आ गए ऊपर

868
01:07:52,640 --> 01:07:57,360
जाइए ऊपर से मुझे गिनने दीजिए ना पैराग्राफ कौन सा

869
01:07:57,360 --> 01:08:01,640
है वो पहला हो गया दूसरा हो गया तीसरा हां ये

870
01:08:01,640 --> 01:08:05,800
विचार करें ठीक है भगवान कृष्ण अर्जुन के गुरु

871
01:08:05,800 --> 01:08:11,000
रूप में थे इसमें क्या है

872
01:08:11,000 --> 01:08:15,200
कि लाइन नंबर नाइन इसकी नौवी लाइन वन टू

873
01:08:15,200 --> 01:08:19,240
थ्री फोर फ सक्स सेन 8 नाइन

874
01:08:19,240 --> 01:08:20,960
हां इससे विरुद्ध

875
01:08:20,960 --> 01:08:24,960
है कि वेदों व गीता जी में वर्णित साधना से पाप का विनाश

876
01:08:24,960 --> 01:08:28,800
नहीं होता भोगने ही पड़ते हैं अन्य उपलब्धियां जैसे सिद्धियां

877
01:08:28,800 --> 01:08:32,800
वहा सर्ग प्राप्त हो जाती है परंतु पाप कर्म नष्ट नहीं होते क्योंकि वेदों

878
01:08:32,800 --> 01:08:36,840
तथा गीता का ज्ञान अधूरा है ठीक है वेदों में कबीर

879
01:08:36,840 --> 01:08:40,920
भी है तो यानी पूर्ण ब्रह्म की बात हो गई कबीर

880
01:08:40,920 --> 01:08:44,920
कैसा दिखता है वह सबको पता है और वेदों के द्वारा

881
01:08:44,920 --> 01:08:49,160
पूजा कौन जा रहा है कबीर ही पूजा जा रहा है मगर

882
01:08:49,160 --> 01:08:53,200
वेदों और गीता का ज्ञान अधूरा है तो भैया वेदों और गीता को छोड़

883
01:08:53,200 --> 01:08:57,320
दो राम पाली किताबों में चले जाओ और अपना सर फोड़ लो

884
01:08:57,320 --> 01:09:01,440
जाकर के वेद और गीता तुम्हें इसीलिए पढ़ने

885
01:09:01,440 --> 01:09:05,640
हैं हिंदुओं रामपाल के अनुसार कि वेद और गीता

886
01:09:05,640 --> 01:09:11,640
नहीं पढ़ना है यह सीखो

887
01:09:13,720 --> 01:09:18,120
उससे यहां पर इन्होंने चौथे अध्याय चौथा अध्याय चल रहा है क्या देखिए

888
01:09:18,120 --> 01:09:22,240
इसका ऊपर पेज कौन सा है अध्याय कौन सा चल रहा

889
01:09:22,240 --> 01:09:25,480
है

890
01:09:25,480 --> 01:09:29,560
इस इस पेज पर होगा अध्याय का नाम हां चौथा

891
01:09:29,560 --> 01:09:33,560
अध्याय चल रहा है इसमें देखिए 25 से 29 तक की व्याख्या

892
01:09:33,560 --> 01:09:37,960
गड़बड़ कर दी

893
01:09:37,960 --> 01:09:43,480
इन्होने इसी में होगा चा 10 से 15 चल रहा है ना आगे

894
01:09:43,480 --> 01:09:47,560
चलिए कोई भी बात एक भी लाइन सही नहीं है मुश्किल है

895
01:09:47,560 --> 01:09:53,560
एक भी लाइन समझना

896
01:10:06,080 --> 01:10:10,120
ऐसा हो सकता है आप कह रहे हैं जो वो हो सकता है मगर

897
01:10:10,120 --> 01:10:14,160
हम लोग दूसरी चीज में जा रहे हैं उस पर भी

898
01:10:14,160 --> 01:10:18,920
बात करते हैं उस जगह आप सही कह रहे हो

899
01:10:18,920 --> 01:10:21,760
देखिए इन्होंने क्या किया 25 से 30 तक में

900
01:10:21,760 --> 01:10:25,800
कहा है कि इनमें भिन्न भिन्न प्रकार की कर्म उपासना

901
01:10:25,800 --> 01:10:28,880
का विवरण दिया है कहा है कि कुछ साधक तो हवन यज्ञ करते

902
01:10:28,880 --> 01:10:32,920
हैं यह करते हैं वो करते हैं अन्य प्राणायाम करते हैं और यहां पर जो

903
01:10:32,920 --> 01:10:37,480
है पूरा इन्होंने उसका भाव ही बदल के रख

904
01:10:37,480 --> 01:10:42,120
दिया जो 25 से 29 तक की व्याख्या है

905
01:10:42,120 --> 01:10:48,120
वास्तविकता क्या है व मैं आपको बता देता हूं जो काम की बात है

906
01:11:25,680 --> 01:11:29,760
यह सभी योगी जन यज्ञों के द्वारा पापों का नाश कर देने वाले

907
01:11:29,760 --> 01:11:34,880
हैं और यज्ञों को जानने वाले हैं

908
01:11:34,880 --> 01:11:38,880
तो यहां पर जो 25 से 30 में आ रहा है ना यह सभी योगी जन पापों का

909
01:11:38,880 --> 01:11:43,040
नाश कर देने वाले क्लेम करते हैं पापों का नाश नहीं होता पापों का नाश नहीं होता तो पापों का नाश

910
01:11:43,040 --> 01:11:43,880
हो रहा है

911
01:11:43,880 --> 01:11:48,600
यज्ञ से पापों का नाश हो रहा है ठीक है

912
01:11:48,600 --> 01:11:54,600
र आगे चलते हैं

913
01:11:55,560 --> 01:12:01,160
यज्ञ से बचे हुए भविष्य

914
01:12:01,160 --> 01:12:04,840
को यह गपला

915
01:12:04,840 --> 01:12:09,920
है देखिए गपला क्या है मैं बताता

916
01:12:09,920 --> 01:12:14,120
हूं जो भगवत गीता 431 है

917
01:12:14,120 --> 01:12:19,640
उसमें जो संस्कृत आई

918
01:12:19,640 --> 01:12:23,840
है यज्ञ शिष्टा मृत भुज

919
01:12:23,840 --> 01:12:28,000
यहां पर इसका अर्थ जो है वो किया है यज्ञ से बचे हुए

920
01:12:28,000 --> 01:12:32,240
अमृत का अनुभव करने वाले मगर वहां उन्होंने

921
01:12:32,240 --> 01:12:36,600
कर दिया यज्ञ से अलग यज्ञ से बचे हुए यज्ञ

922
01:12:36,600 --> 01:12:40,920
से अलग तो जब वो यज्ञ से बचे हुए की जगह यज्ञ से अलग कर रहे तो उसकी संस्कृत

923
01:12:40,920 --> 01:12:45,000
देनी पड़ेगी ना ये घपला करते हैं यज्ञ से अलग

924
01:12:45,000 --> 01:12:49,240
अमृत का जो पान करते अनुभव करते हैं वो

925
01:12:49,240 --> 01:12:53,280
लोग जो है वो होते हैं यज्ञ का अनुभव जो करते हैं उनको वो नहीं मिलता है मोक्ष नहीं

926
01:12:53,280 --> 01:12:57,800
मिलता उनको परमात्मा नहीं मिलता यज्ञ से अलग अमृत का

927
01:12:57,800 --> 01:13:02,240
जो पान करते हैं उनको परमात्मा मिलता है उनको मोक्ष मिलता है

928
01:13:02,240 --> 01:13:06,520
जबकि यहां पर यज्ञ से बचे हुए अमृत

929
01:13:06,520 --> 01:13:10,600
का अनुभव करने वाले मतलब जो उसम आवती दी और वह जो लास्ट

930
01:13:10,600 --> 01:13:14,680
में जो किसी भी प्रकार का यज्ञ हो अगर वो जो अपान वायु में प्राण

931
01:13:14,680 --> 01:13:19,040
वायु का और प्राण वायु में अपान वायु यज्ञ इस तरह से बताए गए तो अलग-अलग

932
01:13:19,040 --> 01:13:23,160
प्रकार के जो यज्ञ है उसके बाद जो तत्व बच जाएगा उसका

933
01:13:23,160 --> 01:13:27,240
अनुभव करने वाले जो होते हैं योग जन वो जो यहां पर सुखी

934
01:13:27,240 --> 01:13:31,840
बताए गए हैं और परलोक का भी सुख उनको प्राप्त होता है सुखी

935
01:13:31,840 --> 01:13:34,840
मर यहां वहा पर क्या कर दिया यज्ञ से बचे

936
01:13:34,840 --> 01:13:39,680
हुए यज्ञ से बचे हुए को यज्ञ से अलग यह

937
01:13:39,680 --> 01:13:43,840
गपला और वहां पर कर दिया मुक्ति

938
01:13:43,840 --> 01:13:47,880
है ना कि उसको मुक्ति मिल जाती है अब आती

939
01:13:47,880 --> 01:13:52,200
है बहुत जोरदार धमाकेदार बात वो क्या है

940
01:13:52,200 --> 01:13:57,200
इनकी भगवत गीता निकालिए

941
01:13:57,200 --> 01:14:00,480
116 पेज नंबर

942
01:14:00,480 --> 01:14:04,480
और पीडीएफ के अनुसार 96 शायद यही है यही

943
01:14:04,480 --> 01:14:09,440
कही है व और पैराग्राफ भी पहला है

944
01:14:09,440 --> 01:14:13,600
हा पिछला हा बस बस

945
01:14:13,600 --> 01:14:17,760
बस अब देखिए यहां पर य लोग फस गए क्यों

946
01:14:17,760 --> 01:14:22,000
फस गए लाइन नंबर वन

947
01:14:22,000 --> 01:14:25,480
अध्याय

948
01:14:25,480 --> 01:14:29,640
चार के श्लोक 10 से 15 में काल ब्रह्म ने

949
01:14:29,640 --> 01:14:32,920
कहा कि जिनके राग द्वेष मर चुके

950
01:14:32,920 --> 01:14:37,040
हैं जिनने यह जान लिया है यह वह मता अलंबी

951
01:14:37,040 --> 01:14:41,280
हो चुके हैं तीनों मंत्रों के उपासक कबीर हंश सतनाम य

952
01:14:41,280 --> 01:14:45,560
स्मरण करके पैर रखकर यह वो सब आए हैं जैसे

953
01:14:45,560 --> 01:14:49,840
गीता अध्याय से मुझे अच्छे लगते हैं तथा मैं ज्ञानी को प्रिय हूं क्योंकि

954
01:14:49,840 --> 01:14:54,080
वह तीन गुणों की भक्ति छोड़कर जो है मेरी अर्थात ब्रह्म की भक्ति

955
01:14:54,080 --> 01:14:58,240
करते हैं इसी प्रकार गीता 41 में कहा है कि जो मुझे

956
01:14:58,240 --> 01:15:02,640
बसते हैं मैं उन्हें बसता हूं अर्थात मुझे अच्छे लगते हैं यही प्रमाण गीता में मिलता

957
01:15:02,640 --> 01:15:07,360
है फिर नीचे जाइए थोड़ा नीचे

958
01:15:07,360 --> 01:15:11,720
जाइए बस बस बस बस ज्यादा नीचे नहीं ज्यादा नीचे नहीं ज्यादा नीचे नहीं

959
01:15:11,720 --> 01:15:15,880
आप ज्यादा नीचे चले जाते थोड़ा ऊपर जाइए

960
01:15:15,880 --> 01:15:20,400
बस बस बस बस बस बस बस अरे

961
01:15:20,400 --> 01:15:24,480
हां तो क्या है ज्ञानी मुझे अच्छे लगते हैं ज्ञानी को प्रिय हूं

962
01:15:24,480 --> 01:15:28,480
क्योंकि तीनों गुणों को जोड़कर मेरी भक्ति करते हैं मुझे अच्छे लगते हैं फिर कहा कि जो

963
01:15:28,480 --> 01:15:33,200
मुझे अच्छी तरह जान लेता है फिर मेरे जाल में नहीं फसता तथा जो

964
01:15:33,200 --> 01:15:37,600
देवताओं को ये वो करके परंतु पूर्ण मुक्त नहीं है इसलिए

965
01:15:37,600 --> 01:15:41,920
देखिए भाई नीचे चलिए यहां पर इसने

966
01:15:41,920 --> 01:15:45,920
बता दिया कि जो मेरी भक्ति करेगा वह पूर्ण मुक्त नहीं

967
01:15:45,920 --> 01:15:48,280
है और यह जान लेना

968
01:15:48,280 --> 01:15:52,680
यह पूर्वजों की तरह शास्त्र अनुकूल कर्म है इसलिए

969
01:15:52,680 --> 01:15:58,680
तू अपने पूर्वजों की तरह

970
01:16:03,920 --> 01:16:07,920
शास्त्रार्थ उनके पास तो सूक्ष्म वेद

971
01:16:07,920 --> 01:16:12,120
था नहीं सूक्ष्म वेद तो अभी आया है

972
01:16:12,120 --> 01:16:17,000
था तो किस रूप में था बताएं कष्ट

973
01:16:17,000 --> 01:16:21,680
करें सूक्ष्म वेद कहां था

974
01:16:21,680 --> 01:16:26,120
और पूर्वजों की तरह भक्ति कर तो

975
01:16:26,120 --> 01:16:30,200
अच्छा एक जगह इन्होने माना भी है कि अर्जुन जो है मुक्त हुआ

976
01:16:30,200 --> 01:16:34,480
तो अर्जुन का तत्वदर्शी गुरु कौन था और उस तत्वदर्शी ने

977
01:16:34,480 --> 01:16:38,520
पूर्वजों की तरह कौन सी भक्ति दी थी यह तो पूर्वजों की जो बातें

978
01:16:38,520 --> 01:16:42,560
चली आ रही है परंपरा से प्रचलित उनका खंडन करते हैं हम तो

979
01:16:42,560 --> 01:16:46,880
सूक्ष्म वेद के अनुसार चलेंगे यह करेंगे वह करेंगे तो सूक्ष्म वेद का

980
01:16:46,880 --> 01:16:51,720
क्या प्रमाण है कि वह पहले था किस रूप में था सूक्ष्म

981
01:16:51,720 --> 01:16:55,800
वेद इन्होंने एक जगह कहा है काल ने छिपा दिया था पांचवा

982
01:16:55,800 --> 01:16:59,800
वेद और वो बाद में कबीर जी आकर के

983
01:16:59,800 --> 01:17:03,520
स्वयं देते हैं कबीर स्वयं आते हैं वो देते हैं

984
01:17:03,520 --> 01:17:08,040
तो कबीर जब स्वयं आ कर के दे रहे हैं तो वह पहले कहां था

985
01:17:08,040 --> 01:17:12,040
सूक्ष्म वेद तो नहीं था तो अर्जुन को कौन से पूर्वजों

986
01:17:12,040 --> 01:17:16,320
को पूर्वजों को फॉलो करने की बात की जा रही है उनके प्रमाण क्या

987
01:17:16,320 --> 01:17:20,920
है है ना इसीलिए कहता हूं भाई मत पढ़ो चक्कर

988
01:17:20,920 --> 01:17:24,960
में कोई है नहीं टक्कर में यहां से इनका पूरा

989
01:17:24,960 --> 01:17:29,240
सारा ताना बना खत्म हो गया पूर्वजों की भक्ति को इन्होने स्वीकार कर लिया

990
01:17:29,240 --> 01:17:33,360
अब जब पूर्वजों वो भी अर्जुन के पूर्वज हमारे पूर्वज होते तब भी मान लेते 600

991
01:17:33,360 --> 01:17:37,680
साल पहले कबीर जी आए तब मान मान लेते पूर्वजों के अनुसार

992
01:17:37,680 --> 01:17:41,840
अर्जुन अर्जुन के पूर्वज कहां है कहां है वहां पर सक्षम

993
01:17:41,840 --> 01:17:46,120
इसलिए कहते हैं परंपरा प्राप्त

994
01:17:46,120 --> 01:17:50,480
ज्ञान अब इनका एक इनके

995
01:17:50,480 --> 01:17:55,520
तत्व ज्ञानी का जो ये लोग जो

996
01:17:55,520 --> 01:17:59,720
वेद से तत्व ज्ञानी का वो लेते हैं ना भाई एक बार बो कर दीजिए बीच

997
01:17:59,720 --> 01:18:05,680
बीच

998
01:18:05,680 --> 01:18:09,720
में वह लिंक दे दीजिए जिससे कोई अगर आना चाहता हो

999
01:18:09,720 --> 01:18:14,320
भाई लिंक दे रहे हैं किसी को कोई बात से आपत्ति है तो व आ सकता

1000
01:18:14,320 --> 01:18:18,880
है जो समझ ना पा रहे हो या समझाना चाह रहे हो वह आ सकता

1001
01:18:18,880 --> 01:18:23,600
है विजय सिंह गुर्जर जी आ जाइए

1002
01:18:23,600 --> 01:18:28,040
है ना जल्दी से आइए अपना आव भाव रो भाव कराइए

1003
01:18:28,040 --> 01:18:33,280
केवल कमेंट में ही आव भाव त्र भाव हुआ करता है

1004
01:18:33,280 --> 01:18:38,080
आपका हा आओ ना भाई राजकुमार दास

1005
01:18:38,080 --> 01:18:44,080
जवाइन करो राजकुमार

1006
01:18:49,960 --> 01:18:55,960
दास अरे कहां गए राजकुमार दास जी

1007
01:18:56,160 --> 01:19:00,600
इतनी बार कमेंट कर रहे हो कि आवान

1008
01:19:00,600 --> 01:19:04,840
ऊपर लो दम है तो कमेंट में बात करके कुछ नहीं होगा

1009
01:19:04,840 --> 01:19:09,640
औकात की बात भी कर रहे हो आप क्या हुआ राजकुमार

1010
01:19:09,640 --> 01:19:13,800
जी जिसकी फोटो लगा रखी है उसने आपको आपकी

1011
01:19:13,800 --> 01:19:18,480
जिस जो शब्द आपने यूज किया औकात उस

1012
01:19:18,480 --> 01:19:22,640
बताई नहीं आपको आपकी या आपके अंदर वो नहीं

1013
01:19:22,640 --> 01:19:27,840
है क्या है

1014
01:19:27,840 --> 01:19:32,600
महेंद्र जी दोबारा आए जी महेंद्र

1015
01:19:32,600 --> 01:19:36,920
जी बढ़िया है जी मजा आ रहा

1016
01:19:36,920 --> 01:19:41,040
है ये भाई साहब कह तो रहे हैं औकात

1017
01:19:41,040 --> 01:19:45,080
की बात तो कर रहे हैं मगर आ नहीं रहे हैं नहीं कोई नहीं आता य ये

1018
01:19:45,080 --> 01:19:49,360
सामने आते नहीं इनके पास तरक नहीं है ना जी तक हो

1019
01:19:49,360 --> 01:19:55,120
तब तो आए जय जय श्री राम अमित जी जय जय श्री राम

1020
01:19:55,120 --> 01:19:59,360
क्या कह रहे हैं रोकली जी आप मैं

1021
01:19:59,360 --> 01:20:03,440
समझ नहीं पा रहा हूं आपके मैं कह रहा हूं

1022
01:20:03,440 --> 01:20:07,680
जी इनके पास त्रक नहीं है रामपाल के दास के पास

1023
01:20:07,680 --> 01:20:12,480
नहीं आपकी बात तो समझ में आ रही है वो कोई कमेंट कर रहा था मैं उसके लिए बोल रहा था खैर चलिए

1024
01:20:12,480 --> 01:20:17,000
आगे चलते हैं आज बड़ी अच्छी अच्छी इंफॉर्मेशन मिल रही है ना

1025
01:20:17,000 --> 01:20:21,280
बिल्कुल जी बहुत बढ़िया बढ़िया बातें हां

1026
01:20:21,280 --> 01:20:25,400
ये अपनी बातों में फसते हैं बाद में बोलते हैं इसने ये कहा उसने वो कहा बिल्कुल सही कह रहे

1027
01:20:25,400 --> 01:20:29,520
हो हा अपनी बात में फते हैं बिल्कुल हां अब बात करते

1028
01:20:29,520 --> 01:20:33,680
हैं इनका जो देखिए हमने जो इनका भगवत गीता से जो तत्व ज्ञानी

1029
01:20:33,680 --> 01:20:37,680
है उसका तो हमने निराकरण कर दिया कि वह पूर्ण ज्ञानी नहीं है

1030
01:20:37,680 --> 01:20:41,880
पूर्ण ब्रह्म के बारे में बताने वाला नहीं है क्यों क्योंकि तत्वदर्शी की बात

1031
01:20:41,880 --> 01:20:43,080
जो हो रही है वोह कौन

1032
01:20:43,080 --> 01:20:47,320
है ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला

1033
01:20:47,320 --> 01:20:51,360
और ज्ञान यज्ञ के ज्ञान से मुक्ति नहीं है यानी कि गीता

1034
01:20:51,360 --> 01:20:56,000
का जो तत्वदर्शी है वो वो नहीं है जो मुक्त करेगा

1035
01:20:56,000 --> 01:21:00,320
ठीक है बिल्कुल तो फिर अगर अगर रामपाल तत्वदर्शी

1036
01:21:00,320 --> 01:21:04,480
है तो रामपाल मुक्त कराने वाले नहीं है या तो बोलना

1037
01:21:04,480 --> 01:21:09,680
बंद करो कि वो तत्वदर्शी है कुछ और

1038
01:21:09,680 --> 01:21:13,720
बोलो अपनी बातों से फस रहे हैं अपनी

1039
01:21:13,720 --> 01:21:17,840
बा बिल्कुल अब हम लोग अब इन्होने वेदों से

1040
01:21:17,840 --> 01:21:22,400
भी सहारा लिया है थोड़ा सा वो मैं आपको बता दूं इन्होंने क्या किया

1041
01:21:22,400 --> 01:21:26,600
है तत्व ज्ञानी की क्या करते करते यह कहा है कि

1042
01:21:26,600 --> 01:21:30,640
भाई वेदों में जो

1043
01:21:30,640 --> 01:21:34,920
है वो कहा गया है कि जिसको वेदों में यजुर्वेद के 40

1044
01:21:34,920 --> 01:21:39,000
में अध्याय के हम 13वें मंत्र में यह

1045
01:21:39,000 --> 01:21:43,080
कहा गया है कि जिसको अक्षर का ज्ञान होगा

1046
01:21:43,080 --> 01:21:47,120
वो विद्वान है जिसको अक्षर का ज्ञान होगा वो

1047
01:21:47,120 --> 01:21:51,240
विद्वान है मगर कबीर जी ने कुछ और कहा

1048
01:21:51,240 --> 01:21:55,400
है इस बारे में और ये बात इन्होंने

1049
01:21:55,400 --> 01:21:58,480
कही है इनकी गरमा गीता की खोलिए

1050
01:21:58,480 --> 01:22:02,640
पेज नंबर 69 प्रमाण के साथ

1051
01:22:02,640 --> 01:22:08,640
बात करते हैं पेज नंबर

1052
01:22:08,920 --> 01:22:13,080
69 इतना इनका हो गया ये लोग मुझे लग रहा है अब तो एक जन्म

1053
01:22:13,080 --> 01:22:17,120
लग जाएगा इन बातों का कुछ कुछ तो जवाब देने तो एक जन्म लग

1054
01:22:17,120 --> 01:22:22,840
जाएगा हर बात का जवाब

1055
01:22:22,840 --> 01:22:28,160
देने तो

1056
01:22:28,160 --> 01:22:32,640
69 पेज नंबर पीडीएफ के अनुसार 49 बिल्कुल सही इसमें पैराग्राफ

1057
01:22:32,640 --> 01:22:36,200
नंबर

1058
01:22:36,200 --> 01:22:40,640
फाइ एक दो तीसरा आ गया हे पार्थ वाला

1059
01:22:40,640 --> 01:22:45,280
दो तीन चौथा आ गया ए पार्थ वाला और अगला आ गया

1060
01:22:45,280 --> 01:22:49,360
ए पार्थ बस बस बस

1061
01:22:49,360 --> 01:22:55,240
यही है क्या 49 पेज पर पेज नंबर फ

1062
01:22:55,240 --> 01:22:59,280
पैराग्राफ नंबर फाइव और नीचे चलिए थोड़ा सा लगता

1063
01:22:59,280 --> 01:23:03,720
है मुझसे नोट करने में कोई गलती हो गई

1064
01:23:03,720 --> 01:23:07,880
यह देखो यह आ गया विद्वानों तो गीता ये

1065
01:23:07,880 --> 01:23:12,120
वो करके इन्होंने आगे लिखा है यजुर्वेद अध्याय 40 श्लोक 13

1066
01:23:12,120 --> 01:23:16,920
में जरा वो अंडरलाइन कर दीजिए पहली लाइन में ही है

1067
01:23:16,920 --> 01:23:21,040
पवित्र यजुर्वेद पहली बात तोय पवित्र क्या होता है मुझे समझ में नहीं आ रहा है

1068
01:23:21,040 --> 01:23:27,040
जिसमें मोक्ष नहीं है जिसमें पूर्ण ब्रम की जानकारी नहीं है पवित्र क्यों है

1069
01:23:28,440 --> 01:23:32,720
तो यजुर्वेद अध्याय 40 श्लोक 13

1070
01:23:32,720 --> 01:23:37,200
में वेद ज्ञान दाता ब्रह्म ने कहा है कि जिस व्यक्ति को अक्षर

1071
01:23:37,200 --> 01:23:41,360
अच्छा इस वेद को कहने वाला भी अज्ञानी है फिर

1072
01:23:41,360 --> 01:23:46,160
भी वेद पवित्र है जनता आएगी नहीं ना बिना पवित्र कहे दुकान पर

1073
01:23:46,160 --> 01:23:50,240
आएगी नहीं तो पवित्र कहना जरूरी है काल को भगवान कहना जरूरी है भले

1074
01:23:50,240 --> 01:23:55,200
ही वो खाता है राक्षस जैसी सारी चीज मगर काल जो है भगवान है

1075
01:23:55,200 --> 01:23:59,360
उसका भाव घटिया है अनुत्तम है मगर

1076
01:23:59,360 --> 01:24:04,440
वोह जो है भगवान है तो

1077
01:24:04,440 --> 01:24:09,000
अध्याय 40 मंत्र 13 में वेद ज्ञान दाता ब्रह्म ने कहा

1078
01:24:09,000 --> 01:24:13,480
कि जिस व्यक्ति को अक्षर ज्ञान है उसे विद्वान कहते हैं इसका

1079
01:24:13,480 --> 01:24:17,800
मतलब अध्याय 40 श्लोक 13 में तत्वदर्शी की

1080
01:24:17,800 --> 01:24:22,320
बात नहीं हो रही है क्योंकि किसकी बात हो रही है

1081
01:24:22,320 --> 01:24:27,000
ऐसे किसी की जिसको अक्षर ज्ञान जिसको इन्होने विद्वान नहीं माना आगे पढ़ लीजिए

1082
01:24:27,000 --> 01:24:33,000
जिसे अक्षर ज्ञान नहीं है उसे अवि

1083
01:24:37,760 --> 01:24:42,040
दवानलोद जी ने कहा अपनी अमृतवाणी में विद्वान तथा विद्वान

1084
01:24:42,040 --> 01:24:46,600
की परिभाषा बताई है और उन्होंने आगे बता दिया कि केवल अक्षर ज्ञान नहीं

1085
01:24:46,600 --> 01:24:50,840
बल्कि जिसे परमात्मा का ज्ञान होता है वो जो है होता है

1086
01:24:50,840 --> 01:24:56,840
अब इन्होंने क्या किया है

1087
01:24:57,320 --> 01:25:01,640
इन्होंने हर जगह जो यह

1088
01:25:01,640 --> 01:25:05,680
40 13 का ही प्रमाण दिया है कि वेदों में भी यजुर्वेद में कहा है तत्वदर्शी

1089
01:25:05,680 --> 01:25:10,000
के पास जाओ हालाकि कहा नहीं है मंत्र में यह आ रहा है कि हमें तत्व

1090
01:25:10,000 --> 01:25:14,480
ज्ञान यह प्राप्त हुआ तत्व ज्ञान ज्ञान प्राप्त हुआ वेदों का मनीषियों

1091
01:25:14,480 --> 01:25:18,600
के द्वारा जाने को नहीं कहा जा रहा कि कहीं जाओ मगर मैं कह रहा हूं एक

1092
01:25:18,600 --> 01:25:22,600
मिनट को अगर मान भी लिया जाए कि वहां पर मनीषियों की बात हो रही है तो

1093
01:25:22,600 --> 01:25:26,640
वहां पर आप ही तो उनको म नहीं मान रहे हो आप तो स्वयं

1094
01:25:26,640 --> 01:25:30,640
कह रहे हो कि वो वो जो है विद्वान नहीं है 40 1

1095
01:25:30,640 --> 01:25:35,200
में विद्वान की बात नहीं हुई है आपके हिसाब से ठीक है

1096
01:25:35,200 --> 01:25:39,320
यजुर्वेद तो इनका तत्व ज्ञानी जो वहां का है गीता का वो

1097
01:25:39,320 --> 01:25:44,080
भी खंडित और जो यहां वेदों का है वो भी खंडित सब खंडित

1098
01:25:44,080 --> 01:25:46,600
आगे चलते

1099
01:25:46,600 --> 01:25:50,760
हैं अच्छा एक ये लोग ये कहते हैं कि जो परमात्मा

1100
01:25:50,760 --> 01:25:53,240
है वो माता के गर्भ से नहीं आता है मगर

1101
01:25:53,240 --> 01:25:58,160
अ इनका यह

1102
01:25:58,160 --> 01:26:04,160
गरमा गीता की में लिखा हुआ है

1103
01:26:04,160 --> 01:26:08,240
कि परमा जो परम अक्षर ब्रह्म है

1104
01:26:08,240 --> 01:26:12,000
वह अवतार लेता

1105
01:26:12,000 --> 01:26:14,200
है

1106
01:26:14,200 --> 01:26:20,200
यह किसी और दिन ले लेंगे अवतार लेने वाली बात

1107
01:26:25,480 --> 01:26:31,480
अच्छा अब जरा ज्ञान गंगा खोलिए ज्ञान गंगा का 58 नंबर

1108
01:26:44,880 --> 01:26:49,000
पेज अरे भाई मूर्खों से ज्ञान चर्चा नहीं करनी है तो यहां

1109
01:26:49,000 --> 01:26:54,560
पर यह लिख कर जन चर्चा क्यों कर रहे हो क्योंकि कायर हो

1110
01:26:54,560 --> 01:26:58,680
कायर हो सामना नहीं कर सकते हो अगर मूर्खों से ज्ञान चर्चा नहीं

1111
01:26:58,680 --> 01:27:03,440
करनी तो लिख के ज्ञान चर्चा क्यों कर रहे हो लिख के भी मत करो ना

1112
01:27:03,440 --> 01:27:09,440
क्योंकि कायर हो यहीं पर जुबान चल पाएगी

1113
01:27:18,120 --> 01:27:22,120
राजकुमार दास जी आप आ सकते हैं ऊपर आइए

1114
01:27:22,120 --> 01:27:25,240
बात करिए

1115
01:27:25,240 --> 01:27:31,240
ज्ञान गंगा का पेज नंबर

1116
01:27:38,640 --> 01:27:42,920
58 पेज नंबर 58 पीडीएफ के अनुसार

1117
01:27:42,920 --> 01:27:47,040
36 और पैराग्राफ नंबर

1118
01:27:47,040 --> 01:27:51,240
वन जीव बिना सोचे समझे बस वही वही बड़ा

1119
01:27:51,240 --> 01:27:55,280
करिए

1120
01:27:55,280 --> 01:27:59,080
जीव बिना सोचे

1121
01:27:59,080 --> 01:28:03,280
समझे जो है मन के प्रभाव

1122
01:28:03,280 --> 01:28:08,240
से गलत कार्य कर देता है और मन कौन है काल

1123
01:28:08,240 --> 01:28:12,840
निरंजन किसके प्रभाव से काम काम कर देता

1124
01:28:12,840 --> 01:28:17,160
है गलत कार्य और यहां पर किसे गलत कार्य माना जा रहा है ऊपर

1125
01:28:17,160 --> 01:28:21,480
ऊपर चलिए थोड़ा सा थोड़ा ऊपर चलिए क्या गलत कार्य है

1126
01:28:21,480 --> 01:28:27,480
यहां पर बात हो रही है कि

1127
01:28:28,480 --> 01:28:32,480
इस प्रकार तीनों को साप देकर भवानी बहुत पछताई यानी

1128
01:28:32,480 --> 01:28:36,720
कि श्राप देना गलत कार्य है श्राप देना गलत

1129
01:28:36,720 --> 01:28:40,840
कार्य नीचे चलिए श्राप देना गलत कार्य और श्राप क्यों

1130
01:28:40,840 --> 01:28:44,840
देता है कोई काल से प्रभावित

1131
01:28:44,840 --> 01:28:47,240
होकर

1132
01:28:47,240 --> 01:28:51,760
तो कबीर जी ने जो काल को श्राप दिया था

1133
01:28:51,760 --> 01:28:55,840
वह काल से प्रभावित होकर दिया था

1134
01:28:55,840 --> 01:28:59,920
ठीक है कबीर जी ने जो श्राप दिया था काल को कि तू एक

1135
01:28:59,920 --> 01:29:04,280
लाख जीवों को रोज खाएगा सवा लाखों को उत्पन्न करेगा जो भी है वह

1136
01:29:04,280 --> 01:29:08,480
काल से प्रभावित होकर कहा

1137
01:29:08,480 --> 01:29:12,800
था और काल से प्रभावित होकर कहा था

1138
01:29:12,800 --> 01:29:17,200
काल देखिए क्या कर रहा है कि पहले प्रभावित

1139
01:29:17,200 --> 01:29:21,560
कर रहा है कबीर जी कबीर जो भगवान है उनको भगवान को भी कोई प्रभावित

1140
01:29:21,560 --> 01:29:25,760
कर सकता है पहली बात और उसके

1141
01:29:25,760 --> 01:29:30,080
बाद काल स्वयं की मरने की व्यवस्था कर रहा है कि मैं

1142
01:29:30,080 --> 01:29:34,920
काल स्वयं को श्राप दिलवा रहा है भगवान को कंट्रोल कर रहा है कौन काल

1143
01:29:34,920 --> 01:29:39,280
क्योंकि श्राप देना जो है वो काल के प्रभाव से

1144
01:29:39,280 --> 01:29:44,200
है एक तो पक्ष ये हो गया यहां का दूसरा पक्ष अब ले लीजिए

1145
01:29:44,200 --> 01:29:48,240
काल यहां पर किसे कहा गया है मन को

1146
01:29:48,240 --> 01:29:52,880
यहां पर काल कहा गया है मन को और

1147
01:29:52,880 --> 01:29:58,880
इसी में अगले पेज

1148
01:29:59,880 --> 01:30:04,040
चलिए हां अगले पेज पर और

1149
01:30:04,040 --> 01:30:08,320
यह जो है इस प्रकार माता विष्णु से कहा कि मन

1150
01:30:08,320 --> 01:30:12,440
ही जग का करता है और वही ज्योत निरंजन

1151
01:30:12,440 --> 01:30:16,440
है मन कौन है अब

1152
01:30:16,440 --> 01:30:20,480
काल जो है मन है मन ही है जो जीवों को

1153
01:30:20,480 --> 01:30:24,520
खाता है मन ही है जो राक्षस की

1154
01:30:24,520 --> 01:30:28,680
तरह अपना विराट स्वरूप दिखाता है और मन जो है

1155
01:30:28,680 --> 01:30:32,720
उसका आकार है मगर वह आकार दिखाता नहीं है

1156
01:30:32,720 --> 01:30:36,720
यह मन है यह काल जो है काल की सबसे बड़ी व्याख्या क्या हो

1157
01:30:36,720 --> 01:30:41,720
गई आज कि ज्योति निरंजन कौन है वो मन है

1158
01:30:41,720 --> 01:30:45,720
मन ये आप लोग देख लीजिए बड़ा करके दिखा दीजिए भैया इनको मन

1159
01:30:45,720 --> 01:30:50,040
ही जक्का करता है और वही ज्योत निरंजन

1160
01:30:50,040 --> 01:30:54,240
है ठीक है तो काल जो

1161
01:30:54,240 --> 01:30:58,240
जो है निराकार हो गया कहीं साकार हो गया काल है कौन यह समझ में

1162
01:30:58,240 --> 01:31:02,240
नहीं आता है काल पहले श्री कृष्ण के अंदर

1163
01:31:02,240 --> 01:31:07,400
घुसता है फिर बाहर निकल आता है फिर अपना विराट स्वरूप दिखाता है

1164
01:31:07,400 --> 01:31:11,640
और हजारों तरह की बातें काल के बारे में केवल आप लोग

1165
01:31:11,640 --> 01:31:15,560
पागल होते रहिए और कुछ नहीं कुछ नहीं

1166
01:31:15,560 --> 01:31:21,240
मिलेगा ठीक है अच्छा इसके

1167
01:31:21,240 --> 01:31:25,240
बाद आगे चलते हैं कबीर भी

1168
01:31:25,240 --> 01:31:30,240
किसी और का भजन कर रहे हैं ज्ञान गंगा पेज नंबर

1169
01:31:30,240 --> 01:31:34,240
30 हम कबीर वाणी के केवल उन चीजों को दिखाएंगे

1170
01:31:34,240 --> 01:31:38,240
जो चीजें इनकी किताबों में स्वीकार कर ली गई बाकी

1171
01:31:38,240 --> 01:31:42,560
चीजें नहीं दिखाएंगे क्योंकि उन बाकी की चीजों को य कह देंगे वो काल से प्रभावित

1172
01:31:42,560 --> 01:31:47,080
है मन से प्रभावित है इनका मन जो है उसमें पेन चलवा देता है

1173
01:31:47,080 --> 01:31:51,160
काल कौन है मन और जो हमसे गलतियां होती है वो

1174
01:31:51,160 --> 01:31:55,920
काल के प्रभाव से होती है तो ये जो पेन चला देते हैं ग्रंथों में

1175
01:31:55,920 --> 01:32:00,560
वह मन के प्रभाव से करते हैं काल के प्रभाव से हां इसमें जो है

1176
01:32:00,560 --> 01:32:04,560
यह जो कविता लिखी है ना जो कबीर

1177
01:32:04,560 --> 01:32:09,000
जी की हां हां बस बस ब

1178
01:32:09,000 --> 01:32:14,560
बस बस बस बस बस नहीं नहीं ज्यादा ऊपर नहीं ज्यादा ऊपर

1179
01:32:14,560 --> 01:32:18,640
नहीं जो पेज नंबर नीचे वाला पेज था

1180
01:32:18,640 --> 01:32:24,640
ना जो इससे नीचे

1181
01:32:25,080 --> 01:32:29,760
ऊपर ही ऊपर ही है ये नौ नंबर है ऊपर आ जाइए ऊपर चलिए

1182
01:32:29,760 --> 01:32:34,120
बस बस बस

1183
01:32:34,120 --> 01:32:38,280
बस नंबर सात था वो

1184
01:32:38,280 --> 01:32:42,400
एल वन इसकी लाइन वन बस बस कबीरा

1185
01:32:42,400 --> 01:32:46,880
सुमर तासु को जाके भुजा अनंत

1186
01:32:46,880 --> 01:32:51,000
कबीरा कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा अनंत

1187
01:32:51,000 --> 01:32:55,000
ये क्या है भाई कबीर जी किसी ऐसे ऐसे का भजन

1188
01:32:55,000 --> 01:32:59,720
करते हैं जिसकी भुजाएं अनंत है अब क्या

1189
01:32:59,720 --> 01:33:04,200
करें और यहां पर सुनिए एक बात और है गजब की

1190
01:33:04,200 --> 01:33:08,240
कबीर जी ने वशिष्ठ जी को तत्व वेता ज्ञानी कहा है पॉइंट

1191
01:33:08,240 --> 01:33:12,280
टू बी नोटे तत्व ज्ञानी कबीर के अनुसार कौन है

1192
01:33:12,280 --> 01:33:16,880
वशिष्ठ जी अंडरलाइन करके दिखाइए जनता को

1193
01:33:16,880 --> 01:33:21,240
प्रेस बिल्कुल

1194
01:33:21,240 --> 01:33:26,600
फ्रेश यह देखिए तत्व ज्ञान

1195
01:33:26,600 --> 01:33:30,640
ठीक है तो कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा

1196
01:33:30,640 --> 01:33:35,000
अनंत वशिष्ठ मुनि से तत्व वेता ज्ञानी

1197
01:33:35,000 --> 01:33:39,000
अब देखिए यह तत्व ज्ञानी तो हो गए तत्वदर्शी तो हो गए वशिष्ठ जी अब

1198
01:33:39,000 --> 01:33:43,120
इनके अनुसार मोक्ष उन्होने कबीरा जी ने माना है कि नहीं माना बात अलग है मगर

1199
01:33:43,120 --> 01:33:48,040
तत्वदर्शी कौन है कबीर के अनुसार वशिष्ठ जी

1200
01:33:48,040 --> 01:33:52,040
वशिष्ठ जी कौन थे शंकराचार्य परंपरा

1201
01:33:52,040 --> 01:33:55,920
के तीसरे नंबर के गुरु

1202
01:33:55,920 --> 01:34:00,120
श्री राम जी के गुरु

1203
01:34:00,120 --> 01:34:04,200
वशिष्ठ जी को त तत्व ज्ञानी माना है तुम्हारी गुरु परंपरा में कहीं अगर आता

1204
01:34:04,200 --> 01:34:08,880
हो तो वशिष्ठ जी का नाम तो बताना ठीक है

1205
01:34:08,880 --> 01:34:13,640
भाई और कोई किताब पढ़ने की जरूरत ही नहीं है गुरुकुल गोविंद

1206
01:34:13,640 --> 01:34:17,840
जी केवल इ की किताब पढ़ते रहो ये मैं एक

1207
01:34:17,840 --> 01:34:21,920
एक नीचे वाला देख रहा हूं कि कबीर गोवर्धन श्री कृष्ण

1208
01:34:21,920 --> 01:34:26,680
उठाया द्रोणागिरी हनुमंत शेष सृष्टि उठाई में कौन भगवंत

1209
01:34:26,680 --> 01:34:30,800
अब इनको कोई पूछे क्या वेट की कंपटीशन चल रहा था कहीं प की कोई

1210
01:34:30,800 --> 01:34:34,840
ज्यादा वेट उठाएगा तो उसको भगवान बना दिया

1211
01:34:34,840 --> 01:34:39,600
जाएगा चलिए खैर वो कबीर जी की बात है क्या वो उनका

1212
01:34:39,600 --> 01:34:43,720
दृष्टांत रहा लिखने का वह बात अलग है मगर यहां दो बातें क्लियर हो गई

1213
01:34:43,720 --> 01:34:47,840
कि कबीर जो है किसी और को भजता है व स्वयं को नहीं भजता है

1214
01:34:47,840 --> 01:34:52,080
उसको तो लिखा हुआ है कबीर

1215
01:34:52,080 --> 01:34:56,080
सुमर तासु को जाके भुजा अनंत तो इसमें कौन सी शक

1216
01:34:56,080 --> 01:35:00,360
बात अब इनको जवाब देना पड़ेगा इसके कौन है अनंत बाजुओ वाला फिर दिखा देंगे

1217
01:35:00,360 --> 01:35:04,360
अनंत बाजू बस बस बस अनंत बाजू विराट स्वरूप

1218
01:35:04,360 --> 01:35:09,320
मन मन जो है काल

1219
01:35:09,320 --> 01:35:13,360
है क्या इन्होने चक्कर आ जाए कोई कोई नॉर्मल

1220
01:35:13,360 --> 01:35:18,120
आदमी ब पढ़ने बैठ जाए तो उसको चक्कर आने लगे खैर

1221
01:35:18,120 --> 01:35:22,320
अच्छा आप करिए करिए जी जी मैं इसको पूरा कर लू

1222
01:35:22,320 --> 01:35:25,240
बस तो

1223
01:35:25,240 --> 01:35:29,440
अच्छा अब एक चीज और बता दूं आपको यह सब तो हमने कर लिया मगर इनके

1224
01:35:29,440 --> 01:35:33,720
दोगले पन की पराकाष्ठा दिखानी है ना हम आपको तो हम दिखाएंगे

1225
01:35:33,720 --> 01:35:39,360
आज तो देखिए भाई यह

1226
01:35:39,360 --> 01:35:45,360
है गरिमा गीता की 147 पेज

1227
01:35:49,720 --> 01:35:54,080
नंबर डगले पन की पराकाष्ठा दिखाएंगे वो क्या है

1228
01:35:54,080 --> 01:36:00,080
ऐसे थोड़ी ना जाने

1229
01:36:01,680 --> 01:36:07,080
देंगे 147 147 यही है

1230
01:36:07,080 --> 01:36:13,080
क्या इससे पीछे वाला होगा शायद

1231
01:36:13,360 --> 01:36:19,360
126 पैराग्राफ नंबर

1232
01:36:21,280 --> 01:36:25,360
टू यहां पर कहीं पर प्रणव

1233
01:36:25,360 --> 01:36:31,360
वो जो इनका तत्सत वाला मंत्र है ना उसकी व्याख्या दी गई है

1234
01:37:41,320 --> 01:37:47,320
स

1235
01:38:14,920 --> 01:38:18,040
हरब

1236
01:38:18,040 --> 01:38:24,040
का ज्ञान गंगा का 147

1237
01:38:25,240 --> 01:38:29,240
और इसमें है पेज नंबर टू हां

1238
01:38:29,240 --> 01:38:33,280
यह देखिए अब देखिए दोगले पन की वह क्या है पराकाष्ठा वह

1239
01:38:33,280 --> 01:38:37,800
यह है पैराग्राफ नंबर पूर्ण

1240
01:38:37,800 --> 01:38:42,080
परमात्मा का जो मंत्र है पूर्ण पूर्ण परमात्मा को प्राप्त

1241
01:38:42,080 --> 01:38:46,520
करने का मंत्र देखिए क्या कहेंगे आप

1242
01:38:46,520 --> 01:38:50,960
किसी एक बात पर टिके हैं ये देखिए

1243
01:38:50,960 --> 01:38:55,000
पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का यह जो मंत्र है यह दिया गया

1244
01:38:55,000 --> 01:38:59,080
है यज्ञों से वेदों में भगवान की

1245
01:38:59,080 --> 01:39:03,200
पूरी जानकारी नहीं मगर कबीर की जानकारी है जब कबीर तुमने बता

1246
01:39:03,200 --> 01:39:07,200
दिया कि उसका शरीर है वह शरीर आता है जब शरीर के बारे में

1247
01:39:07,200 --> 01:39:11,280
तुमने बता दिया तो पूरी जानकारी दे दी ठीक है अब यज्ञों से आपको

1248
01:39:11,280 --> 01:39:15,480
मुक्ति नहीं मिलती मगर अर्जुन को मुक्ति मिल जाती है वो बात और है कि अर्जुन

1249
01:39:15,480 --> 01:39:19,480
का कोई तत्वदर्शी गुरु नहीं था अर्जुन के पास सूक्ष्म वेद नहीं था मगर अर्जुन को मुक्ति

1250
01:39:19,480 --> 01:39:23,560
मिल गई मगर अर्जुन को मुक्ति नहीं भी मिलती है अर्जुन को मुक्ति नहीं

1251
01:39:23,560 --> 01:39:27,600
मिलती य भी बात है और अब यहां पर तुमने कहा

1252
01:39:27,600 --> 01:39:31,720
कि यज्ञों में पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का मंत्र नहीं है वेदों गीता

1253
01:39:31,720 --> 01:39:33,400
में ज्ञान अधूरा है मगर

1254
01:39:33,400 --> 01:39:37,400
यहां पर क्या कहा कि पूर्ण परमात्मा

1255
01:39:37,400 --> 01:39:43,160
को भैया अंडरलाइन कर दो ब्लू ब्लू लाइन से जरा जनता देख ले अच्छे

1256
01:39:43,160 --> 01:39:47,360
से पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का ये जो प्रणव

1257
01:39:47,360 --> 01:39:51,800
तत सत यह मंत्र है यह जाप का निर्देश

1258
01:39:51,800 --> 01:39:56,360
है किसको प्राप्त करने का है भ पूर्ण परमात्मा को

1259
01:39:56,360 --> 01:40:00,360
हो गया यह सारी चीजें थी अब मैं इनके काल की जरा

1260
01:40:00,360 --> 01:40:04,600
विवेचना आज मैंने नोट की थी वो मैं आपको बता दूं एक समरा कर दूं काल

1261
01:40:04,600 --> 01:40:08,720
कौन है उसके बारे में बस हम लोगों का चेहरा बड़ा बड़ा कर दीजिए

1262
01:40:08,720 --> 01:40:13,600
आपको पीडीएफ खोलने का अब काम नहीं है आज की डेट में

1263
01:40:13,600 --> 01:40:17,600
ठीक है इनकी कोई बात भी इन्हीं की

1264
01:40:17,600 --> 01:40:21,760
बातों से नहीं ठहरती है इनकी सारी बातें सारी बातें इन्होंने

1265
01:40:21,760 --> 01:40:26,120
खुद ही काटी है खुद ही सब काट डाला

1266
01:40:26,120 --> 01:40:30,320
तो काल अविनाशी नहीं

1267
01:40:30,320 --> 01:40:34,200
है कौन सा

1268
01:40:34,200 --> 01:40:40,200
श्लोक कौन सा श्लोक आप मुझे चैट में

1269
01:40:40,960 --> 01:40:46,960
बताए कौन सा श्लोक दिखाना

1270
01:40:47,800 --> 01:40:52,280
है भगवत गीता का 17 से 23

1271
01:40:52,280 --> 01:40:58,280
और चैप्टर कौन

1272
01:41:02,360 --> 01:41:06,440
15 चैप्टर 17 चैप्टर 17 श्लोक 23 वहीं पर ओम

1273
01:41:06,440 --> 01:41:12,440
तत्सत का है ना वो जिक्र 17 2 चैप्टर 17 शलोक 2

1274
01:41:25,040 --> 01:41:29,080
टी आर पहाड़ी जी इनको जो धो रहे हैं ना दूसरे चैनल पर मेरे को तो

1275
01:41:29,080 --> 01:41:33,200
उसने ब्लॉक कर दिया वहां से अ गए

1276
01:41:33,200 --> 01:41:37,240
क्या क्या हा और आज जहां पर गया

1277
01:41:37,240 --> 01:41:41,840
है दूसरा एमपी खबर वाला वो उसने पहले लाइव खत्म की

1278
01:41:41,840 --> 01:41:46,120
फिर लाइव खत्म करने के बाद उसने मेरे को बैक स्टेज से जोड़ा अंदर और

1279
01:41:46,120 --> 01:41:50,480
मैंने स्क्रीन भी रिकॉर्ड करके रखी हु सारी की सारी

1280
01:41:50,480 --> 01:41:56,480
येवा य तत

1281
01:42:01,680 --> 01:42:07,680
हां बिल्कुल

1282
01:42:10,320 --> 01:42:14,440
ब्राह्मण और वेद उसी से षष्टि

1283
01:42:14,440 --> 01:42:19,400
के आदि काल में ब्राह्मण और वेद तथा यज्ञ आदि रचे गए हैं

1284
01:42:19,400 --> 01:42:23,800
किसने रचे हैं

1285
01:42:23,800 --> 01:42:28,680
ब्रह्म ने ब्रह्म ने रचे हैं भाई

1286
01:42:28,680 --> 01:42:33,160
ब्राह्मण और ये जो वेद है

1287
01:42:33,160 --> 01:42:37,520
तो ईश्वर ने वेदों को नहीं रचा इनके हिसाब से

1288
01:42:37,520 --> 01:42:41,640
ब्रह्म ने रचा काल ने रचा है वेदों को वेदों को किसने

1289
01:42:41,640 --> 01:42:46,680
रचा भाई इनके हिसाब से काल ने रचा है

1290
01:42:46,680 --> 01:42:51,240
तो अपर है वेद अपर है मगर इन्होने

1291
01:42:51,240 --> 01:42:55,400
नहीं जो इनके हिसाब से वेदों को काल ने रचा

1292
01:42:55,400 --> 01:42:59,640
इनके हिसाब से चलिए अब मैं काल को समरा

1293
01:42:59,640 --> 01:43:03,880
इज करूंगा मगर उससे पहले मैं कुछ

1294
01:43:03,880 --> 01:43:08,480
जरी बात एक बता दूं आपको ये

1295
01:43:08,480 --> 01:43:14,480
इसमें भी मेरे पास कुछ

1296
01:43:20,400 --> 01:43:24,640
है एक बहुत जबरदस्त बात और है मेरे

1297
01:43:24,640 --> 01:43:30,640
पास मैंने इसम नोट नहीं

1298
01:43:38,680 --> 01:43:42,680
किए जो जो सातवा अध्याय है ना इसमें भी

1299
01:43:42,680 --> 01:43:46,840
इनकी बहुत पोल खुलती है क्योंकि

1300
01:43:46,840 --> 01:43:50,880
सातवे अध्याय का दूसरा श्लोक जरा दिखा दीजिए भैया अपनी गीता

1301
01:43:50,880 --> 01:43:55,760
का

1302
01:43:55,760 --> 01:43:59,800
अब वहां पर ये गीता को गीता ज्ञान देने वाला जो है व इनके हिसाब से

1303
01:43:59,800 --> 01:44:03,880
कह रहा है कि अब मैं तुझे वह ज्ञान दे रहा हूं जिसको जानने के बाद कोई और ज्ञान

1304
01:44:03,880 --> 01:44:08,520
शेष नहीं रह जाता वोह ज्ञान गीता ज्ञान दाता

1305
01:44:08,520 --> 01:44:12,760
दे रहे हैं ठीक है और वह ज्ञान क्या है इनके हिसाब

1306
01:44:12,760 --> 01:44:17,120
से अगर वो ब्रह्म काल का ज्ञान है तो वही ज्ञान ऐसा है जिसको जानने के बाद

1307
01:44:17,120 --> 01:44:21,280
और कोई ज्ञान शेष नहीं रह जाता उसी ज्ञान को अगर तुझे जानना है तो तत्वदर्शी के

1308
01:44:21,280 --> 01:44:25,480
पास जा ठीक है अगर मान ले तत्वदर्शी के पास जाने को का

1309
01:44:25,480 --> 01:44:29,680
मगर कौन सा ज्ञान जानना है काल को जानना ब्रह्म को जानना इनके

1310
01:44:29,680 --> 01:44:33,760
अकॉर्डिंग और कोई ज्ञान नहीं जानना है ब्रह्म को जानना ही

1311
01:44:33,760 --> 01:44:38,760
वह ज्ञान है जिसके बाद और कोई ज्ञान नहीं जानना है

1312
01:44:38,760 --> 01:44:42,840
तो तत्वदर्शी के पास भी आप ब्रह्म के लिए जाओगे अगर ब्रह्म से अलग

1313
01:44:42,840 --> 01:44:48,440
कोई परम ब्रह्म है कबीर सफेद दाढ़ी वाला उसके लिए नहीं जाओगे

1314
01:44:48,440 --> 01:44:52,800
आप क्यों क्योंकि यहां पर काल ने स्पष्ट कह दिया

1315
01:44:52,800 --> 01:44:56,960
कि कि जो मुझको जान ले मुझको जानेगा वो मेरे परायण मगर

1316
01:44:56,960 --> 01:45:01,560
सात अध्याय के दूसरे शलोक में उन्होने कह दिया कि मुझको

1317
01:45:01,560 --> 01:45:05,560
मुझको जानना ही व ज्ञान है जिसके पाद अन्य कोई ज्ञान शेष

1318
01:45:05,560 --> 01:45:09,920
नहीं रह जाता इसका क्या करोगे कैसे काटोगे

1319
01:45:09,920 --> 01:45:11,040
अब यदि तुम कहो

1320
01:45:11,040 --> 01:45:15,160
कि गीता में पूर्ण ब्रह्म की जानकारी नहीं है कल हमने वेद

1321
01:45:15,160 --> 01:45:19,840
में दिखा दिया कि वेद में जिसकी बात हो रही है वही

1322
01:45:19,840 --> 01:45:24,320
उसी को जानना उसी को पूजा करनी विराट पुरुष

1323
01:45:24,320 --> 01:45:28,920
और आज हमने गीता से दिखा दिया कि भगवान

1324
01:45:28,920 --> 01:45:32,920
श्री कृष्ण हमारे अनुसार और आपके अनुसार गीता ज्ञान

1325
01:45:32,920 --> 01:45:36,960
को कहने वाला काल वो कौन है मन है क्या है वो अभी हम

1326
01:45:36,960 --> 01:45:42,520
देखेंगे इनके उसके अनुसार भी आप

1327
01:45:42,520 --> 01:45:46,600
ये उसको ही जान लेना वो ज्ञान है जिसके अलावा कुछ जानना बाकी

1328
01:45:46,600 --> 01:45:51,000
नहीं रह जाए कोई और पूर्ण परम ब्रह्म के पास जाने की आवश्यकता नहीं है

1329
01:45:51,000 --> 01:45:55,120
यह भगवत गीता में स्पष्ट कर दिया गया अगर वह काल है ना तो वही आपका

1330
01:45:55,120 --> 01:46:00,000
अंत है उसके आगे कुछ नहीं है अब उसको काल मान लो

1331
01:46:00,000 --> 01:46:04,200
भगवान श्री कृष्ण मान लो परम ब्रह्म मान लो कुछ भी मान लो मगर

1332
01:46:04,200 --> 01:46:08,240
भगवत गीता की यह लाइन आपको काटनी पड़ेगी अगर इससे कोई और

1333
01:46:08,240 --> 01:46:12,360
आपको भगवान चाहिए तो इससे भिन्न भगवान चाहिए तो गीता

1334
01:46:12,360 --> 01:46:16,600
से बाहर का कोई और भगवान चाहिए तो तो आपको काल

1335
01:46:16,600 --> 01:46:20,720
से गीता से भी छोड़ दो नहीं तो उसमें भी कुछ ना कुछ मिला के एक वीडियो बनाई होगी

1336
01:46:20,720 --> 01:46:25,080
आधे घंटे का काल से बिन्नर आपको कोई भगवान चाहिए तो आपको भगवत

1337
01:46:25,080 --> 01:46:26,040
गीता की ये लाइन

1338
01:46:26,040 --> 01:46:30,120
काटनी पड़ेगी जिस लाइन को उन्होंने ये नहीं कहा आपके तत्वदर्शी ने कि काल ने

1339
01:46:30,120 --> 01:46:34,600
अपने मन से बोला यह भी नहीं बोला इसमें भी चूक हो गई

1340
01:46:34,600 --> 01:46:38,880
तो ये लाइन आपको आप खुद सोचो अगर आप हिंदू हो आपसे

1341
01:46:38,880 --> 01:46:42,920
कहा जा रहा है कि आप पवित्र वेदों को देखो और पवित्र गीता को देखो पग

1342
01:46:42,920 --> 01:46:46,960
पग पर उसका अपमान हो रहा है और फिर आपसे कहा जा रहा है कि

1343
01:46:46,960 --> 01:46:51,040
इसको छोड़ो इसमें कुछ नहीं है ना पूर्ण ब्रह्म है ना ब्रह्म को प्राप्त करने

1344
01:46:51,040 --> 01:46:55,080
की पूर्ण सामग्री है इसको छोड़ो और हमारे साथ चलो जेल

1345
01:46:55,080 --> 01:46:59,320
धाम में वहां पर आपको सारे जो

1346
01:46:59,320 --> 01:47:03,360
प्रवचन है वो प्राप्त होंगे ईश्वर को जानने के लिए और स्वयं को

1347
01:47:03,360 --> 01:47:07,600
सोचो कि हम बहुत बड़े शास्त्रों को मानने वाले हैं मगर हो असल में कुछ

1348
01:47:07,600 --> 01:47:12,680
नहीं कुछ नहीं हो जीरो

1349
01:47:12,680 --> 01:47:17,680
शास्त्रों को मानने के नाम पर जीरो हो

1350
01:47:17,680 --> 01:47:21,720
जीरो अच्छा इसमें सातव अध्याय के सातव श्लोक में फिर उन्होने क

1351
01:47:21,720 --> 01:47:25,760
दिया मुझसे भिन्न कोई दूसरा परम कारण नहीं है अब इसका क्या

1352
01:47:25,760 --> 01:47:29,800
करोगे क्या करोगे इसका मुझसे भिन्न कोई दूसरा परम कारण

1353
01:47:29,800 --> 01:47:32,720
नहीं है कह

1354
01:47:32,720 --> 01:47:37,000
दिया तो मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर भाई

1355
01:47:37,000 --> 01:47:41,400
अच्छा मैं इसको समरा इज कर देता हूं जरा काल इनका क्या है आपको अच्छा

1356
01:47:41,400 --> 01:47:45,440
लगेगा तो इनकी दोरी बातें पराकाष्ठा एक तो वो आपने देख ही

1357
01:47:45,440 --> 01:47:49,880
लिया वो क्या है वो उसका क्या नाम है फैक्ट वाइ अभिषेक फैक्ट

1358
01:47:49,880 --> 01:47:55,320
नहीं वो क्या कहेंगे उसको फॉल्स वाइ अभिषेक

1359
01:47:55,320 --> 01:47:59,960
रमर भाई अभिषेक ये नाम रख लो अपने चैनल का रमर भाई अभिषेक

1360
01:47:59,960 --> 01:48:04,040
अच्छा वो क्या कहता है पहले हमारी किसी बात को या

1361
01:48:04,040 --> 01:48:08,280
किसी और की किसी बात को हमारी वेद में यह लिखा है तो दयानंद

1362
01:48:08,280 --> 01:48:12,400
जी के वेद में तो यह लिखा है दयानंद जी और उसके

1363
01:48:12,400 --> 01:48:16,760
बाद जब दयानंद जी की बात से आपकी बात को दिक्कत हो रही है अरे ऐसे

1364
01:48:16,760 --> 01:48:21,640
नसेड़ी को तुम जी कहते हो इतनी गंदी बात उसने कही है वहां पर

1365
01:48:21,640 --> 01:48:26,160
दोगले पन की

1366
01:48:26,160 --> 01:48:31,040
किसी के सगे नहीं है इनका जब फायदा दिखता है तो प्रभुपाद जी के भी चरणों में लेलेट

1367
01:48:31,040 --> 01:48:35,080
जाते हैं देखिए वो सही लिख रहे हैं फिर स्वामी दयानंद जी के चरणों में भी लेट जाते

1368
01:48:35,080 --> 01:48:39,480
हैं और जब इनको शक इवन की इन्होने शंकराचार्य की बातों को भी माना है

1369
01:48:39,480 --> 01:48:43,600
कि उन्होंने अपने एक जगह पर लिखा है कि पंचम वेद भी है मैंने कहा ठीक है भाई पंचम वेद

1370
01:48:43,600 --> 01:48:47,880
है तो उसका कोई नाम होगा ना नाम पता कुछ वो जब से पिक्चर

1371
01:48:47,880 --> 01:48:53,000
में हम लोग आए तब से उठाइए वो बात

1372
01:48:53,000 --> 01:48:57,320
जब से हमने आगे परंपरा की बात छेड़ दी ना बिल्कुल ब

1373
01:48:57,320 --> 01:49:01,320
नहीं परंपरा की बात करने वाला परंपरा छेड़ दि है तो उन्होंने वो बात उठा ली पंचम

1374
01:49:01,320 --> 01:49:07,320
वेद पंचम वेद तो मैंने पूछा उस नाम पता

1375
01:49:07,480 --> 01:49:11,600
वो मैं जरा काल को सराइज

1376
01:49:11,600 --> 01:49:16,360
कर दू फिर अगर कोई आया होगा बात करने तो उसको ले लेंगे काल को समरा करता हूं दो मिनट

1377
01:49:16,360 --> 01:49:20,680
में उनी दे काल अविनाशी नहीं है पर उसका

1378
01:49:20,680 --> 01:49:24,720
जन्म और मरण माता के गर्भ

1379
01:49:24,720 --> 01:49:28,760
से नहीं होता इसलिए उसे अविनाशी भी कहा गया है दोहरी

1380
01:49:28,760 --> 01:49:32,840
बात क्योंकि उसका जन्म और मरण माता के गर्भ से नहीं होता इसलिए

1381
01:49:32,840 --> 01:49:36,920
उसको जो है अविनाशी भी कहा गया है वह बात और है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी माता

1382
01:49:36,920 --> 01:49:40,920
के गर्भ से नहीं जन्म लिए मगर उन्होंने अपना आदर भाव भाव कह

1383
01:49:40,920 --> 01:49:45,520
दिया इसलिए वह नाशवान है और यहां पर

1384
01:49:45,520 --> 01:49:49,720
इसने अपना स्वयं का जन्म और मरण माता के गर्भ से माना तब भी य नाशवान है तो नाशवान

1385
01:49:49,720 --> 01:49:53,840
मानोगे कैसे और जो गैया माता है माता वो

1386
01:49:53,840 --> 01:49:58,160
अविनाशी है क्योंकि उसको वहां पर अग्न को जो

1387
01:49:58,160 --> 01:50:02,280
है काउंटर करना है इसलिए वो अविनाशी है

1388
01:50:02,280 --> 01:50:06,480
अच्छा आगे चलते हैं काल स्थूल शरीर वाला

1389
01:50:06,480 --> 01:50:08,800
जो रूप है वह किसी को दिखा नहीं सकता

1390
01:50:08,800 --> 01:50:12,800
पर समय आने पर वह श्री कृष्ण के शरीर से बाहर निकलता है

1391
01:50:12,800 --> 01:50:16,800
और वह बन जाता है विराट स्वरूप अपना धारण कर लेता है जबकि वह विराट स्वरूप भी

1392
01:50:16,800 --> 01:50:21,040
किसी को नहीं दिखाता अपना वास्तविक स्वरूप किसी को ना दिखाने का उसने

1393
01:50:21,040 --> 01:50:25,160
संकल्प लिया है और यह संकल्प घटिया भाव है

1394
01:50:25,160 --> 01:50:29,600
उसका अविनाशी अच्छा अविनाशी घटिया भाव क्या होता है

1395
01:50:29,600 --> 01:50:33,640
अगर भाव अविनाशी है तो जिसका वह भाव है वह भी तो अविनाशी हो गया

1396
01:50:33,640 --> 01:50:37,800
नहीं तो जिस दिन वह विनाश होगा उसका उस दिन वह उसका भाव भी खत्म हो

1397
01:50:37,800 --> 01:50:41,800
जाएगा तो अविनाशी घटिया भाव की इन्होंने व्याख्या नहीं

1398
01:50:41,800 --> 01:50:45,840
की उसका भाव अविनाशी है काल घटिया अच्छा काल घटिया है

1399
01:50:45,840 --> 01:50:49,840
मगर व भगवान है काल जो है वो घटिया है लोगों को खाता है

1400
01:50:49,840 --> 01:50:53,920
मगर वो भगवान है काल की भक्ति से काल वाली

1401
01:50:53,920 --> 01:50:58,240
घटिया शांति प्राप्त होती है मुक्ति प्राप्त होती है परम गति प्राप्त होती है

1402
01:50:58,240 --> 01:51:03,080
कौन सी वाली काल वाली किससे काल की भक्ति से

1403
01:51:03,080 --> 01:51:07,280
प्राप्त होती है और काल इसीलिए बारबार कह रहा है मेरी भक्ति करो मेरी भक्ति

1404
01:51:07,280 --> 01:51:11,440
करो अच्छा काल श्री कृष्ण से अलग है पर अर्जुन

1405
01:51:11,440 --> 01:51:15,480
काल को कृष्ण ही बोलते हैं जब काल कृष्ण

1406
01:51:15,480 --> 01:51:19,840
के शरीर से बाहर निकलकर विराट स्वरूप ले रहा है उसके बाद भी अर्जुन

1407
01:51:19,840 --> 01:51:24,440
वहां पर काल को कृष्ण ही बोलते हैं काल मन

1408
01:51:24,440 --> 01:51:28,720
है पर जीवों को खाता है काल मन है

1409
01:51:28,720 --> 01:51:33,280
काल कोई वैसा कोई जीव नहीं है पर वह जीवों को खाता है

1410
01:51:33,280 --> 01:51:37,560
दांतों में चबा आता है काल और वह स्थूल शरीर धारण

1411
01:51:37,560 --> 01:51:41,680
नहीं कर सकता मगर वह जीवों को खाता है उसका दांत नहीं दिखाई

1412
01:51:41,680 --> 01:51:46,200
दे भाई मन है ना मन का दांत थोड़ी ना होता है मगर उसका दांत है

1413
01:51:46,200 --> 01:51:50,320
ठीक है काल की भक्ति से काल भी नहीं मिलता कितनी

1414
01:51:50,320 --> 01:51:54,400
तरह की बातें काल की भक्ति काल भी नहीं मिलता काल

1415
01:51:54,400 --> 01:51:58,440
की भक्ति करने वालों को काल खाता है जबकि काल की भक्ति करने वालों

1416
01:51:58,440 --> 01:52:02,720
को तो काल प्यार करता है मगर उनको खाता भी है

1417
01:52:02,720 --> 01:52:06,800
काल ने धृतराष्ट्र और द्रोणाचार्य जी को दांतों में चबा

1418
01:52:06,800 --> 01:52:10,960
रहा था जब उसने विराट रूप दिखाया था मगर वही धृतराष्ट्र द्रोणाचार्य

1419
01:52:10,960 --> 01:52:15,400
बाद में धृतराष्ट्र जो है वो भगवत गीता सुन रहे हैं महाभारत

1420
01:52:15,400 --> 01:52:19,600
सुन रहे हैं और वही जो क्या कहते द्रोणाचार्य बाद

1421
01:52:19,600 --> 01:52:23,640
में युद्ध भी लड़ रहे हैं मगर काल ने तो उनको चबा लिया था कचा है

1422
01:52:23,640 --> 01:52:27,920
ना अच्छा श्री कृष्ण से काल अच्छा

1423
01:52:27,920 --> 01:52:32,080
है क्यों क्योंकि श्री कृष्ण की लीलाए ऐसी है उनको फॉलो नहीं किया

1424
01:52:32,080 --> 01:52:36,160
जा सकता मगर श्री कृष्ण से काल बुरा

1425
01:52:36,160 --> 01:52:39,600
भी है क्यों क्योंकि श्री कृष्ण युद्ध नहीं करवाना चाहते थे व काल युद्ध करवाना

1426
01:52:39,600 --> 01:52:44,240
चाहता था कितना बढ़िया गोगले पन की पराकाष्ठा

1427
01:52:44,240 --> 01:52:49,040
पराका कोई एंड नहीं है अच्छा

1428
01:52:49,040 --> 01:52:53,080
काल के कई जन्म हो चुके हैं इसने माना कि काल के जन्म और

1429
01:52:53,080 --> 01:52:57,160
वो माता के गर्भ से नहीं मगर काल कई बार उत्पन्न हो चुका है अर्जुन तेरे

1430
01:52:57,160 --> 01:53:01,760
और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तो इन्होने व मान लिया काल के कई जन्म हो चुके हैं

1431
01:53:01,760 --> 01:53:06,120
अब इसका क्या मतलब है कि काल कई बार जन्म लिया

1432
01:53:06,120 --> 01:53:10,120
और उसने कई बार जीवात्मा को अपने उसम फसाया

1433
01:53:10,120 --> 01:53:14,160
यही तो मतलब हुआ इसका मतलब क्या है कि जो जीवात्मा सतलोक पहुंच

1434
01:53:14,160 --> 01:53:18,160
जाती है काल का दोबारा जन्म होता है उसके बाद काल फिर से

1435
01:53:18,160 --> 01:53:23,160
अपने जाल में उन्हें फता लेता है सिंपल

1436
01:53:23,160 --> 01:53:27,280
भाई कई बार जब काल का जन्म हो रहा है तो जो जीवात्मा जो मोक्ष को प्राप्त

1437
01:53:27,280 --> 01:53:31,360
कर लेंगी फिर काल का जन्म होगा और फिर वो ले आएगा

1438
01:53:31,360 --> 01:53:35,480
उनको नीचे फसा लेगा तो मोक्ष मोक्ष नहीं है नहीं

1439
01:53:35,480 --> 01:53:39,600
तो कुछ और आंसर हो तो वो दीजिए क्या आंसर है इसका काल के कई जन्म

1440
01:53:39,600 --> 01:53:43,880
से क्या मतलब है काल कई बार उत्पन्न हुआ कई बार अगर उत्पन्न

1441
01:53:43,880 --> 01:53:47,920
हुआ काल तो उसने कई बार वो 21 ब्रह्मांड लिए उन

1442
01:53:47,920 --> 01:53:52,040
21 ब्रह्मांड में उन्होंने अपनी अपना संसार बचाया संसार बचाने के लिए

1443
01:53:52,040 --> 01:53:56,120
उसने वहां से जीव लिए है ना तो अगर काल के

1444
01:53:56,120 --> 01:54:00,520
कई बार जन्म हो चुके हैं तो काल का तो यही काम है काल कई बार सृष्टि

1445
01:54:00,520 --> 01:54:04,520
बना चुका है तो सृष्टि बना चुका है काल कई बार तो जो सतलोक में रहने वाले

1446
01:54:04,520 --> 01:54:08,720
प्राणी है उनको ला चुका है वो कई बार नहीं तो बताओ क्या हुआ काल का

1447
01:54:08,720 --> 01:54:12,960
काल भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान वो कैसे

1448
01:54:12,960 --> 01:54:16,560
समझ में नहीं

1449
01:54:16,560 --> 01:54:20,560
आता प्राकृतिक रूप में वो जन्म नहीं लेता वो फिर भी अविनाशी है ये

1450
01:54:20,560 --> 01:54:24,680
डेफिनेशन कहां पर है कि अविनाशी का मतलब होता है कि

1451
01:54:24,680 --> 01:54:28,680
जो प्राकृतिक रूप से जन्म जन्म मृत्यु का धारण करने वाला नहीं है

1452
01:54:28,680 --> 01:54:32,920
इसलिए व अविनाशी है वस्तुत व अविनाशी नहीं है जबकि

1453
01:54:32,920 --> 01:54:37,160
सभी लोग अविनाशी है जीव तक जीव तक अविनाशी है

1454
01:54:37,160 --> 01:54:41,600
मगर काल अविनाशी नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है

1455
01:54:41,600 --> 01:54:45,600
जो गाय माता है उनका अगन का अर्थ सही वाला स्वीकार ना करना

1456
01:54:45,600 --> 01:54:49,760
पड़ जाए इसलिए वह अविनाशी है मगर ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है दुर्गा

1457
01:54:49,760 --> 01:54:54,480
माता अविनाशी नहीं है काल अविनाश कोई अविनाशी नहीं

1458
01:54:54,480 --> 01:54:58,880
जी मैं कुछ कहू बोलिए य पूरा

1459
01:54:58,880 --> 01:55:04,240
करलो इन्होने जानबूझ के डाला हैल का

1460
01:55:04,240 --> 01:55:08,240
म जहां पर गीता से व्यक्ति को भटना हो वेदों से व्यक्ति

1461
01:55:08,240 --> 01:55:12,440
को भटना हो काल कोड़ दो किसी प्रकार से बस काल का कांसेप्ट डाला

1462
01:55:12,440 --> 01:55:16,440
और ये बता दिया गया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति से काल के गाल में चले

1463
01:55:16,440 --> 01:55:20,600
जाओगे पर मेरे यह समझ में नहीं आ रहा है कि ये जब कबीर की भक्ति

1464
01:55:20,600 --> 01:55:24,720
करते इनकी क्या मृत्यु नहीं होती काल का मतलब तो समय होता है समय

1465
01:55:24,720 --> 01:55:30,720
के अंतर्गत तो सारी चीज आती है मेज कुर्सी टेबल पहाड़

1466
01:55:33,160 --> 01:55:37,280
पथर जैसे बात कर रहे थी बन

1467
01:55:37,280 --> 01:55:41,360
जाएंगे मैं समरी जरा पूरी कर लू तो अंत में

1468
01:55:41,360 --> 01:55:45,640
क्या आया कि काल जो है

1469
01:55:45,640 --> 01:55:49,640
वह मन है और मन का कोई आकार नहीं होता मगर काल

1470
01:55:49,640 --> 01:55:53,680
का आकार है और काल आकार के साथ में अपना असली रूप

1471
01:55:53,680 --> 01:55:57,840
दिखाता नहीं है वो छिपा रहता है ये अभी तक की काल की एक

1472
01:55:57,840 --> 01:56:02,360
समरा इज है कुछ ही दिनों में एक अच्छी सी बुक आपको प्राप्त हो जाएगी

1473
01:56:02,360 --> 01:56:06,480
जिसमें कि विधिवत इनका ये जो क्रमानुसार सारा प्रक्रिया इनकी

1474
01:56:06,480 --> 01:56:10,600
लिखी होगी हर एक चीज का वो जो पहले जो पीडीएफ दी है उसमें

1475
01:56:10,600 --> 01:56:14,640
केवल डिफेंस है अटैक नहीं है डिफेंस मतलब य जो जो आक्षेप करते हैं हमारे

1476
01:56:14,640 --> 01:56:18,880
शास्त्रों में उनका निराकरण है आक्षेप का अब जो पीडीएफ उसी में अपग्रेड

1477
01:56:18,880 --> 01:56:23,160
हो कर के आपको मिलेगी तो अब इसमें इनका तोड़ होगा इनकी हर बात का कि इन्होंने कितना

1478
01:56:23,160 --> 01:56:27,240
गपला किया है अपने इसमें ये जीजी

1479
01:56:27,240 --> 01:56:31,640
के में मुझे नहीं लगता कुछ बाकी रह गया अभी भी कुछ कोई मतलब बिल्कुल

1480
01:56:31,640 --> 01:56:35,640
ही क्या कहते दवार में सर मारने वाला व्यक्ति होगा जो

1481
01:56:35,640 --> 01:56:39,840
अभी भी यह सोचेगा कि नहीं नहीं वो शास्त्र सम्मत भक्ति कराते

1482
01:56:39,840 --> 01:56:45,840
हैं तो कोई आया है क्या

1483
01:56:46,480 --> 01:56:50,520
जो इनकी तरफ से हो रामपाल

1484
01:56:50,520 --> 01:56:54,680
दास करके कोई आया है दीपक शुक्ला जी जय श्री राम

1485
01:56:54,680 --> 01:56:59,880
राम पांडे जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

1486
01:56:59,880 --> 01:57:04,600
गुरुदेव हा मैं थोड़ा

1487
01:57:04,600 --> 01:57:09,160
सा हा मैं थोड़ा सा कॉल

1488
01:57:09,160 --> 01:57:13,240
पर थोड़ा सा हम भी प्लस कर दें जी

1489
01:57:13,240 --> 01:57:17,320
जैसे य ज्ञान का पृ 31 और 32

1490
01:57:17,320 --> 01:57:21,800
पर जो ये कभी कता कि काल निरंजन मन है

1491
01:57:21,800 --> 01:57:27,600
ऐसा करके बोलता है एक बार तो अगर ये मन है

1492
01:57:27,600 --> 01:57:31,680
तो ये जो है जब वहां से कहते हैं कि काल निरंजन

1493
01:57:31,680 --> 01:57:35,800
और अष्टांगी दुर्गा को सतलोक से निकाल

1494
01:57:35,800 --> 01:57:40,720
दिए और अगर शरीर में प्राण नहीं रहेगा

1495
01:57:40,720 --> 01:57:45,120
तो मन का कोई अर्थ नहीं है मन अपने आप समाप्त हो जाएगा

1496
01:57:45,120 --> 01:57:49,600
दूसरी बात अगर ये कहते हैं कि प्राण भी सोचता है मतलब उसमें

1497
01:57:49,600 --> 01:57:54,280
वो जीवात्मा है उसको सोचता है उसका भी एक मन है तो सत्पुरुष

1498
01:57:54,280 --> 01:57:58,560
ने इनको सतलोक से निकाल कैसे पाए जैसे प्राण

1499
01:57:58,560 --> 01:58:01,520
के पास भी मन है तो वहा सतलोक में भी व जो

1500
01:58:01,520 --> 01:58:05,640
है मन म काल निवास करता है और हर एक

1501
01:58:05,640 --> 01:58:09,840
जीव के पास अपना मन तो काल कितना है सबका अलग

1502
01:58:09,840 --> 01:58:14,480
अलग प्रकार का मन ठीक है तो यह जो

1503
01:58:14,480 --> 01:58:18,600
है सोचते मन है दूसरे कता खाता हैका

1504
01:58:18,600 --> 01:58:22,600
जो काल है व एक शब्द है जो इन्होने यूज किया है हर जगह हमारी बात

1505
01:58:22,600 --> 01:58:26,600
को गीता की बात को वेद की बात को काटने के लिए इतना समझिए बस

1506
01:58:26,600 --> 01:58:31,000
और कुछ नहीं है इनका काल

1507
01:58:31,000 --> 01:58:35,000
हमारा काल तो ईश्वर ही है वही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप

1508
01:58:35,000 --> 01:58:39,800
में ईश्वर है थोड़ा सा इस हम

1509
01:58:39,800 --> 01:58:44,000
की जो ये काल का ये कांसेप्ट लाए हैं यह बाइबिल

1510
01:58:44,000 --> 01:58:48,320
और कुरान से लेकर के आए जो आदम और हवा की और जो काल जो शैतान

1511
01:58:48,320 --> 01:58:54,320
है वो शैतान वाली बात जो जैसे निकाल दिया था वहां से

1512
01:58:54,880 --> 01:58:59,280
आवाज नहीं आ रही आपकी म्यूट हो गए हैं म्यूट हो गए

1513
01:58:59,280 --> 01:59:03,560
हैं हा जो एक कांसेप्ट है बाइबिल और कुरान की

1514
01:59:03,560 --> 01:59:07,560
य जो आदम और हवा को जो है शैतान ने बहका दिया था तो उसको

1515
01:59:07,560 --> 01:59:11,720
निकाल दिया था शैतान के कारण वही चीज क्योंकि ये कबीर उसमें

1516
01:59:11,720 --> 01:59:16,680
इस्लाम से भी इसको जो है ऐड करना चाहते थे ठीक है वो का

1517
01:59:16,680 --> 01:59:20,760
हां वो जो काल का जो शैतान का जो कांसेप्ट है वहां से कॉपी

1518
01:59:20,760 --> 01:59:24,880
किया गया है ठीक है मब है मगर

1519
01:59:24,880 --> 01:59:29,480
बात ये है कि इन्होंने अगर कॉपी भी की होती तो कम से कम अपनी बात की

1520
01:59:29,480 --> 01:59:33,520
तो रक्षा करते कि हम क्या बोल रहे क्या नहीं बोल रहे ये इन्होंने तो झूठों का

1521
01:59:33,520 --> 01:59:38,040
पुलिंदा बना दिया पुलिंदा झूठों का

1522
01:59:38,040 --> 01:59:42,280
पु अभी हम आज उसका एमपी फास्ट खबर का देख रहे थे

1523
01:59:42,280 --> 01:59:46,320
तो हमको तो नहीं जोड़ा तो उसमें जो है ये बहस हो रहा था एक दीपक जी

1524
01:59:46,320 --> 01:59:50,640
थे उसमें जो है उनसे डिबेट कर रहे थे तो वो एक यादव था उसे कह रहा था

1525
01:59:50,640 --> 01:59:54,840
कि जो है कबीर देव हो गया ऐसा हो गया तो वहां जो है

1526
01:59:54,840 --> 01:59:59,280
उसको मतलब बता रहे थे किय स्वामी दयानंद सरस्वती जो है

1527
01:59:59,280 --> 02:00:03,320
उसको एक यजुर्वेद को एक जगह यजुर लिख दिए हैं ठीक है

1528
02:00:03,320 --> 02:00:07,360
तो इस नाते जो है इस तरह से कबीर देव को कबीर हम लिख सकते हैं ऐसा

1529
02:00:07,360 --> 02:00:09,880
जब वो कह रहे थे उसी बात से

1530
02:00:09,880 --> 02:00:13,960
खंडन होता है इनका जब कबीर जब यजुर्वेद को उसकी

1531
02:00:13,960 --> 02:00:18,160
जो संधि हो के वो जुड़ा है यजुर्वेद उसको जब तोड़ोगे तो क्या बचेगा

1532
02:00:18,160 --> 02:00:22,240
यजू यजू प्लस विसर्ग और प्लस वेद जब

1533
02:00:22,240 --> 02:00:26,640
यजुर्वेद को हमने खोला तो क्या आया यज प्लस वेद

1534
02:00:26,640 --> 02:00:31,960
मगर जब कबीर देव को हम खोलेंगे तो वो कह रहे कबीर देव

1535
02:00:31,960 --> 02:00:36,240
अगर यजुर्वेद की तरह ही चलना है तो ऐसे खोलो ना

1536
02:00:36,240 --> 02:00:40,480
कबीर देव को खोलो कवि प्लस देव कबीर कहां आया

1537
02:00:40,480 --> 02:00:44,480
बिल्कुल बिल्कुल वही होगा लेकिन वो थोड़ा सा एक दे रहा था कि सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी

1538
02:00:44,480 --> 02:00:48,480
दयानंद सरस्वती ने यजुर वेद को यजुर लिख दिए हैं तो वो

1539
02:00:48,480 --> 02:00:52,480
ये कह रहा था कि जैसे वो कर उसी तरह से हमने ठीक है यजुर लिख

1540
02:00:52,480 --> 02:00:56,920
लेकिन व का ब कब बनता है और छोटी ई का बड़ी ई कब बनता है

1541
02:00:56,920 --> 02:01:01,080
और व और ब अगर कह रहा मैं कह रहा हूं कि है तो

1542
02:01:01,080 --> 02:01:05,120
वही कबीर क्यों जिसको तुम कह रहे हो जी जी जिसको

1543
02:01:05,120 --> 02:01:09,120
तुम कह रहे हो वही क्यों कोई प्रमाण होना चाहिए ना

1544
02:01:09,120 --> 02:01:13,200
उसका प्रमाण के लिए इनको बाहर जाना पड़ेगा अब बाहर जाने

1545
02:01:13,200 --> 02:01:17,240
के लिए वो तत्वदर्शी बताएगा तत्वदर्शी सेट हो नहीं रहा ना तो वेद में हो रहा ना

1546
02:01:17,240 --> 02:01:21,520
गीता में हो रहा से ठीक है अच्छा एक एक

1547
02:01:21,520 --> 02:01:25,840
में रामपाल बोलते हैं कि

1548
02:01:25,840 --> 02:01:29,880
दयानंद जी को दयानंद जी को जो पकड़ रहे हैं तो दयानंद जी कोरय पकड़ भी

1549
02:01:29,880 --> 02:01:34,040
रहे हैं तो मैं अभी यही तो कह रहे कि वो नसेड़ी है वो

1550
02:01:34,040 --> 02:01:38,120
यह है वो वो है आपत्ति जनक बातें कर रहे हैं फ दयानंद जी इनके लिए प्रमाण कैसे

1551
02:01:38,120 --> 02:01:42,120
हो गए बिल्कुल बिल्कुल एक बात

1552
02:01:42,120 --> 02:01:46,560
और बोलते एक अंतिम जल्दी से बोल लीजिए आप बात

1553
02:01:46,560 --> 02:01:50,720
हा एक बात और बोलते हैं कि ऐसा भी करते हैं कि

1554
02:01:50,720 --> 02:01:54,760
कवि भी है वो ठीक है जैसे कबीर से जब पकड़ते हैं तो कहते हैं कवि

1555
02:01:54,760 --> 02:01:59,360
भी है वो इसलिए वो देव है तो उसका सं विच्छेद कवि है क्योंकि कबीर देव

1556
02:01:59,360 --> 02:02:03,640
कबीर जी एक कवि भी थे इसलिए व वही परमात्मा है वही कवि है ठीक है

1557
02:02:03,640 --> 02:02:07,880
तो लेकिन गीता अध्याय 10 मैं ये कह रहा हूं अगर कोई

1558
02:02:07,880 --> 02:02:12,360
ऐसा कभी हो गया हो जिसको तुम नहीं जानते तो उसका क्या करोगे

1559
02:02:12,360 --> 02:02:16,480
ऐसे थोड़ी ना होता अ से कोई नहीं मिल रहा तो जो सामने दिख रहा है वही है प्रमाण

1560
02:02:16,480 --> 02:02:20,800
होना चाहिए नहीं यही है तब होता है वो बात प्रमाण

1561
02:02:20,800 --> 02:02:24,960
कते प्रमाण हां कवि कवि ही कबीर है तो

1562
02:02:24,960 --> 02:02:29,560
गीता अध्याय 10 का 37 उसमें उन्होने कहा कि

1563
02:02:29,560 --> 02:02:33,560
मैं उसना नाम का कवि हूं ठीक है तो मैं उसना कवि कवियों

1564
02:02:33,560 --> 02:02:38,400
में मैं उसना कवि हूं तो वो जो काल है बो

1565
02:02:38,400 --> 02:02:41,520
कवि शब्द पर हम लोग बहुत विवेचन कर चुके हैं

1566
02:02:41,520 --> 02:02:45,640
कवि शब्द कहां कहा किसकिस के लिए आया है वो भी है और अगर कवि

1567
02:02:45,640 --> 02:02:50,280
की बात करोगे तो कवियों का कवि वेद में कहा गया है गणेश जी को

1568
02:02:50,280 --> 02:02:54,320
कवियों का कवि वेद में कहा गया है गणेश जी को तो अगर तुम कवि की

1569
02:02:54,320 --> 02:02:58,320
बात कर रहे हो कि कवि कहा गया तो गणेश जी ने शास्त्र भी लिखे हैं

1570
02:02:58,320 --> 02:03:03,760
गणेश जी ने शास्त्र भी लिखे हैं ना गणेश जी शास्त्रों के रचनाकार

1571
02:03:03,760 --> 02:03:07,880
अग अगर हम गीता कोही ले ले तो जो कते

1572
02:03:07,880 --> 02:03:11,880
का और संसार का जो सबसे बड़ा काव्य रचना है वो है सबसे

1573
02:03:11,880 --> 02:03:15,880
पहली महाकाव्य रामायण महाकाव्य

1574
02:03:15,880 --> 02:03:19,880
और उसको रचने वाले वाल्मीक जी को कवीश्वर कवियों का

1575
02:03:19,880 --> 02:03:23,640
ईश्वर कहा भी गया है

1576
02:03:23,640 --> 02:03:27,720
अगर हम गीता में ही ले ले तो अगर ये जो कवि

1577
02:03:27,720 --> 02:03:32,520
बोल रहा है तो जो कहते की गीता को कालने क तो काल की पूजा

1578
02:03:32,520 --> 02:03:36,640
करवा जी कभी मतलब कबीर है तो अगर आप

1579
02:03:36,640 --> 02:03:40,720
फिर एक तरफ कते कबीर है फिर कहते हैं नहीं वह जो काल कहा गीता को

1580
02:03:40,720 --> 02:03:45,120
तो जो है य काल की भक्ति करवा रहे हैं जी

1581
02:03:45,120 --> 02:03:49,880
श हा विशाल जी जम ज श्री राम भैया

1582
02:03:49,880 --> 02:03:54,120
प्रणाम सभी को जय श्री राम स भैया

1583
02:03:54,120 --> 02:03:58,240
पता नहीं मुझको समझ में नहीं आ रहा पता नहीं एक आमने सामने एक युद्ध सा चल रहा

1584
02:03:58,240 --> 02:04:02,320
है क्या भैया अभी अभी ये जो अमित दास नाम की जो व्यक्ति है ना ये लाइव

1585
02:04:02,320 --> 02:04:06,400
अपना लाइव स्ट्रीम भी अपनी चला रहे हैं और ये जो हमारे

1586
02:04:06,400 --> 02:04:10,440
मित्र है ना टी आर पहाड़ी जी हां हां ये उनके साथ डिबेट में

1587
02:04:10,440 --> 02:04:14,520
लगे हुए हैं और जो यह प्रमाण टया पहाड़ जी इनको दे समझा रहे हैं वो मानने को वो राजी

1588
02:04:14,520 --> 02:04:18,840
नहीं हो रहा है अपनी बातें में उसम लिंक में वो लिंक उसमें दिया नहीं वरना मेरे पास उसके खंडन

1589
02:04:18,840 --> 02:04:24,840
में बहुत सारे प्रमाण मैं महाभारत से लाया हूं मैं

1590
02:04:25,000 --> 02:04:29,120
परन क्या करू एक तरफ पता नहीं मुझे खुद समझ में नहीं आ रहा

1591
02:04:29,120 --> 02:04:33,640
क्या हो रहा है वो अभि नाथ तो किस बात की चिंता हम

1592
02:04:33,640 --> 02:04:37,720
हा इतने उसमले नहीं हो जाना तर्क से आराम से

1593
02:04:37,720 --> 02:04:41,880
सोच समझ करके जवाब देना है आपको प्रभावित नहीं होना है

1594
02:04:41,880 --> 02:04:45,880
सिचुएशन में भगवत गीता भगवान ने पूरे पूरी

1595
02:04:45,880 --> 02:04:49,880
भगवत गीता में अर्जुन को एक बात सिखाई है कि ना जीत में ना हार में

1596
02:04:49,880 --> 02:04:54,160
सम बुद्धि रख सम बुद्धि समान

1597
02:04:54,160 --> 02:04:58,160
बुद्धि चंद्रमा के समान है विशाल जी बर्मी को

1598
02:04:58,160 --> 02:05:02,640
गुण पुत्र नच मूर्खा सते रप वो तो मूर्खों के समान है

1599
02:05:02,640 --> 02:05:07,280
न चंद तारा बो तारा

1600
02:05:07,280 --> 02:05:12,080
तारा कितने भी आकाश में हो चंद्रमा की अलग पहचान होती है आप ऐसे हैं

1601
02:05:12,080 --> 02:05:16,400
शिवान जी दिखाऊ क्या महाभारत वाला

1602
02:05:16,400 --> 02:05:20,720
महाभारत वाला दि हां महाभारत वाला दिखा दीजिए

1603
02:05:20,720 --> 02:05:26,520
संक्षिप्त महाभारत

1604
02:05:26,520 --> 02:05:32,520
ज रामानंद

1605
02:05:34,160 --> 02:05:40,160
स्वामी से आया है ज कबीर

1606
02:05:41,080 --> 02:05:46,480
उसम अरे कौन बो मैं

1607
02:05:46,480 --> 02:05:48,920
बोल

1608
02:05:48,920 --> 02:05:54,920
मिनट मिनट पा

1609
02:05:59,280 --> 02:06:02,320
कहां गए

1610
02:06:02,320 --> 02:06:06,360
भाई मैं एक चीज बता दे रहा हूं किसी को भना सही जो अमित

1611
02:06:06,360 --> 02:06:10,600
दस दो इनको मेरे लिए आप छोड़ दीजिएगा इनका हिसाब मैं करके रहूंगा

1612
02:06:10,600 --> 02:06:14,800
अगली बार आएंगे य तो लि नहीं मिल रहा था

1613
02:06:14,800 --> 02:06:18,920
टी पहाड़ी जी अकेले हैं आप मेरी बात समझ नहीं रहे हैं

1614
02:06:18,920 --> 02:06:23,400
विशाल जी वो जोम दा स नाम का व्यक्ति है वह

1615
02:06:23,400 --> 02:06:27,520
इसलिए नहीं आता है कि उसको हमें हमसे जीतना है वह जीतने और

1616
02:06:27,520 --> 02:06:31,520
हारने नहीं आता है वोह केवल इस स्क्रीन पर दिखने के

1617
02:06:31,520 --> 02:06:36,160
लिए आता है अपनी दो चार बातें बोलने के लिए आता है हां भाई

1618
02:06:36,160 --> 02:06:40,240
देखिए कबीर ने उसे 21

1619
02:06:40,240 --> 02:06:41,600
ब्रह्मांड प्रदान

1620
02:06:41,600 --> 02:06:45,880
किए कहां से जरा ब्लू कर दीजिएगा जो पढ़ना

1621
02:06:45,880 --> 02:06:51,880
है चलिए मैं अभी कुछ देर में आता हूं इधर ही हूं ठीक है

1622
02:07:03,280 --> 02:07:07,480
यह आपको केवल एक डोले पन की पराकाष्ठा

1623
02:07:07,480 --> 02:07:11,840
दिखाई जा रही है इस फिल्म

1624
02:07:11,840 --> 02:07:15,840
में दिखाए जाने वाले सभी पात्र एवं घटनाए काल्पनिक है जो

1625
02:07:15,840 --> 02:07:21,840
बलधाम निवासी जी के द्वारा रचे गए हैं

1626
02:07:22,720 --> 02:07:27,120
ये उससे भी अनर्थ पूर्ण है ओके

1627
02:07:27,120 --> 02:07:31,920
एक म अभ ये

1628
02:07:31,920 --> 02:07:36,000
पढ़े कहां से हा परमेश्वर कबीर

1629
02:07:36,000 --> 02:07:40,320
साहब जी ने पूछा स्वामी जी गीता जी का ज्ञान किसने बोला स्वामी

1630
02:07:40,320 --> 02:07:44,480
रामानंद जी ने उत्तर दिया कि श्री कृष्ण जी ने परमेश्वर कबीर साहब जी ने

1631
02:07:44,480 --> 02:07:49,440
कहा स्वामी जी संक्षिप्त महाभारत द्वितीय खंड पृष्ठ संख्या

1632
02:07:49,440 --> 02:07:54,120
1531 पुराना वाला त 6

1633
02:07:54,120 --> 02:07:58,160
खंड वाली नहीं है अरे रुको तो 667 नया

1634
02:07:58,160 --> 02:08:02,360
वाला में लिखा है कि श्री कृष्ण जी

1635
02:08:02,360 --> 02:08:06,360
तो कह रहे हैं कि अर्जुन मुझे अब व गीता वाला ज्ञान याद नहीं है मैं

1636
02:08:06,360 --> 02:08:10,520
दोबारा वही ज्ञान नहीं सुना सकता तो देखिए कबीर साहब 600

1637
02:08:10,520 --> 02:08:14,760
साल पहले गीता प्रेस गोरखपुर का हवाला दे रहे हैं

1638
02:08:14,760 --> 02:08:19,080
कि उसके द्वारा जो छापी जाती है महाभारत गीता प्रेस गोरखपुर

1639
02:08:19,080 --> 02:08:23,720
के द्वारा जो दो खंड में जो महाभारत छापी जाती है के द्वितीय खंड का हवाला दे रहे हैं

1640
02:08:23,720 --> 02:08:27,840
अगर ये ये कहे ना वो कोष्टक में रामपाल जी ने अपनी तरफ से लिखा है तो कोष्टक के बाहर

1641
02:08:27,840 --> 02:08:31,840
द्वितीय खंड लिखा है तो दो खंडों की महाभारत

1642
02:08:31,840 --> 02:08:36,040
जो है उसकी बात कर रहे हैं कबीर जी 600 साल पहले

1643
02:08:36,040 --> 02:08:38,480
और उसका सबूत देते हुए

1644
02:08:38,480 --> 02:08:42,760
रामानंद जी को यह बता रहे हैं कि उसमें महाभारत में द्वितीय

1645
02:08:42,760 --> 02:08:46,960
खंड में जो गीता प्रस के द्वारा छापी जाती है उसमें तो ऐसा ऐसा लिखा है

1646
02:08:46,960 --> 02:08:51,440
कि अर्जुन को कृष्ण ने ज्ञान नहीं बोला

1647
02:08:51,440 --> 02:08:56,680
तो ये आपको एक बहुत अच्छी जानकारी यहां प्राप्त हुई

1648
02:08:56,680 --> 02:09:00,880
कि 600 साल पहले जब गीता प्रेस नहीं थी उस समय भी गीता

1649
02:09:00,880 --> 02:09:05,080
प्रस के प्रमाण चलते थे और कबीर जी अपने गुरु को यह ज्ञान

1650
02:09:05,080 --> 02:09:09,440
देते थे यह आप लोग देख सकते हैं लिखते समय

1651
02:09:09,440 --> 02:09:14,360
पता नहीं क्या सोच के लिख रहे थे ये लोग क्या

1652
02:09:14,360 --> 02:09:18,680
आपको तो बहुत-बहुत धन्यवाद है शिवांश भाई कि आप इतना झेल

1653
02:09:18,680 --> 02:09:22,920
लेते हो हमारे बस का नहीं है पांडे जी बोले जय श्री

1654
02:09:22,920 --> 02:09:27,000
राम जय श्री राम सभी को शिवान जी मैं बस य कहना चाह रहा

1655
02:09:27,000 --> 02:09:31,440
था कि इनके

1656
02:09:31,440 --> 02:09:35,440
youtube1 दो तीन अब तो अचानक से जैसे ही कि मैं अपना टाइमलाइन खोलता

1657
02:09:35,440 --> 02:09:39,640
हूं तो कभी अमित जात जी है कभी अभिषेक है कभी एमपी फोर

1658
02:09:39,640 --> 02:09:43,960
है आज मैंने एक सुना एक दुर्गा ठाकुर ब्लॉग

1659
02:09:43,960 --> 02:09:48,600
करके एक य चैनल है उनका सब मुझे गाली दे रहे

1660
02:09:48,600 --> 02:09:52,600
नहीं गाली नहीं दे रहे हैं एक्चुअली क्या हमारे हमारे विरोध

1661
02:09:52,600 --> 02:09:56,640
में ही सब बना रहे हैं हां वो उसी उसी एजेंडे प लगे

1662
02:09:56,640 --> 02:10:00,840
हुए हैं सारे के सारे एक ही एजेंडा है उनका कि कैसे आवाहन को रोका जाए कैसे

1663
02:10:00,840 --> 02:10:04,880
उनके तर्को को और कुतर्क है बस मतलब सुन मब हंसी आती है मैं तो

1664
02:10:04,880 --> 02:10:09,840
देखता भी नहीं हूं बस थोड़ा सा देख के और साइड कर देता हूं मैं कहना क्या चाह रहे हैं

1665
02:10:09,840 --> 02:10:13,920
आज मैं दुर्गा जी दुर्गा बहन जी का वो य चैनल देख रहा था

1666
02:10:13,920 --> 02:10:17,920
थोड़े टाइम के लिए तो किसी हमारे कथावाचक है उनका

1667
02:10:17,920 --> 02:10:22,000
नाम याद नहीं आ रहा मेरे को तो वो रामपाल का ही खंडन करते हुए

1668
02:10:22,000 --> 02:10:26,840
उमेश जी उमेश जी उमेश जीम

1669
02:10:26,840 --> 02:10:30,920
आचार अमित नहीं नहीं रामचंद्र कुछ उनका नाम

1670
02:10:30,920 --> 02:10:35,040
था रामचंद्र शेखर ऐसे कुछ करके थे वो मैंने भी पहली बार उनका

1671
02:10:35,040 --> 02:10:39,120
वीडियो देखा था तो वह रामपाल का खंडन करते हुए बोलते कौन

1672
02:10:39,120 --> 02:10:44,320
सा भगवान अपने नाम के आगे दास लगाता है अगर कहीं शास्त्र में ऐसा कुछ मिल

1673
02:10:44,320 --> 02:10:46,640
जाए तो उसका

1674
02:10:46,640 --> 02:10:51,280
उसका वो मतलब प्रमाण देने के लिए रामचरित मानस का

1675
02:10:51,280 --> 02:10:55,680
वाला दे रही थी बहन जी मैंने बस ऐसे वीडियो ऐसे

1676
02:10:55,680 --> 02:10:59,920
वीडियो में जाकर मैंने एक दो कमेंट किए कि सबसे पहले

1677
02:10:59,920 --> 02:11:04,440
तो रामपाल जी को तत्वदर्शी सिद्ध करो और कबीर भगवान को कबीर भगवान

1678
02:11:04,440 --> 02:11:08,480
सिद्ध करो वेद के अनुसार आओ वेलकम है आपका आपका ही चैनल का हवाला देते

1679
02:11:08,480 --> 02:11:12,800
हुए आवाहन जी के चैनल पर आओ और वहां पर यह सब प्रूफ

1680
02:11:12,800 --> 02:11:16,800
करके दिखाओ दूसरे में कह र हम तो बड़े बड़े टीवी पर आप

1681
02:11:16,800 --> 02:11:21,360
बड़े टीवी का इंतजाम करो छोटे चैनल पर क्या होगा हम तो वर्ल्ड लेवल

1682
02:11:21,360 --> 02:11:25,480
वर्ल्ड लेवल पर डिबेट कर ही रहे हैं मैंने बोला कि आपका छोटा सा कमरा ही वर्ल्ड है क्या

1683
02:11:25,480 --> 02:11:29,600
आपने उसी को वर्ल्ड मान रखा है छोटे से कमरे पर मैंने तो आज तक आपका डिबेट नहीं देखा किसी

1684
02:11:29,600 --> 02:11:33,720
बड़े चैनल प बड़े चैनल पर बस एक ही चीज आती है रामपाल जी का

1685
02:11:33,720 --> 02:11:37,800
जो प्रवचन है मनगण जो देते रहते हैं आप लोग उसको ग्रहण करते

1686
02:11:37,800 --> 02:11:41,840
रहते हो सुनते रहते हो तो कहने का मतलब मे बस यही

1687
02:11:41,840 --> 02:11:46,120
है कि इनका और उनकी बातों से क्या लगता है आप किसी को भी देखिएगा ना उनकी

1688
02:11:46,120 --> 02:11:50,280
बातों से यही लगता है ब्राह्मणवाद का नशा उनके अंदर घोला

1689
02:11:50,280 --> 02:11:54,640
जा रहा है जो परंपरागत जो है चीज

1690
02:11:54,640 --> 02:11:58,800
ब्राह्मण विरोध हा मब हमारे ऊपर ठप्पा लगा जाता है कि ब्राह्मणवाद

1691
02:11:58,800 --> 02:12:01,800
है ये ब्राह्मणवाद का प्रव है

1692
02:12:01,800 --> 02:12:05,800
पांडे जी जय भीम वाले हो गए ये हो गए ये बड़ा खंडन करते

1693
02:12:05,800 --> 02:12:10,000
हमें मनोवा दी बोलते हैं एक वो शंभू जी का चैनल है आप देख लेना

1694
02:12:10,000 --> 02:12:14,360
जय भीम से वो ब्राह्मणों को कितनी गालियां देते हैं पानी पी प करके

1695
02:12:14,360 --> 02:12:18,640
अरे तो उनका चैनल क्यों प्रमोट कर रहे हो नाम बता के व्यूज बढ़ेंगे

1696
02:12:18,640 --> 02:12:23,440
सर सूरज को सूरज जी

1697
02:12:23,440 --> 02:12:28,640
वो तो मुझे पता हैम आमी वाले हैं भीम आर्मी वाले

1698
02:12:28,640 --> 02:12:33,600
वो वो जो लोग हैं जो भीम आर्मी वाले हैं वो तो भाई

1699
02:12:33,600 --> 02:12:37,800
पॉलिटिकल एजेंडा है उनका व वो तो खंडन खुल के करते हैं लेकिन इनका खुला

1700
02:12:37,800 --> 02:12:41,800
हुआ नहीं है इनके पीछे की बात बता रहा हूं इनके जो मन में जो भरा हुआ

1701
02:12:41,800 --> 02:12:46,080
है ना उनकी बात बता रहा हूं कि ये बस ये चाहते की जरूरत

1702
02:12:46,080 --> 02:12:52,080
नहीं है राक्षस हर युग में हुए हैं इसीलिए तो कोई प्रभा

1703
02:12:54,520 --> 02:12:58,600
ये महाभारत के पौंड्रक है पौंड्रक ये भाई कोई

1704
02:12:58,600 --> 02:13:03,040
गाली दे रहा है अगर ज्यादा गलत गलत तो उसको जो है आप ब्लॉक कर

1705
02:13:03,040 --> 02:13:08,040
दीजिए कोई गाली दे रहा है

1706
02:13:08,040 --> 02:13:12,080
र हिमत है तो डिबेट में आओ गाली देने से खाली लिखने से क्या हो

1707
02:13:12,080 --> 02:13:16,760
जाएगा हां यहां तो हम किसी को गाली भी नहीं देते बड़ी मर्यादा में बात करते

1708
02:13:16,760 --> 02:13:21,240
आपको प्यार से बताएंगे

1709
02:13:21,240 --> 02:13:25,320
मैं बस ये कहना चाह रहा हूं कि भागवत के भागवत भागवत कथा जो आती है ना

1710
02:13:25,320 --> 02:13:29,640
जिसम श्री कृष्ण की लीला है उसमें पौंड्रक नाम का

1711
02:13:29,640 --> 02:13:33,840
एक हीरो है वहां पर वो अपने आप को कृष्ण भगवान नहीं बताता था वासुदेव

1712
02:13:33,840 --> 02:13:37,960
अपने आप को कलवाना चाह रहा था तो वही सब चीजें है एजेंडा वही

1713
02:13:37,960 --> 02:13:42,200
है उसको भी उस टाइम पर लाका लोग को फॉलो करते ध सुदामा

1714
02:13:42,200 --> 02:13:46,480
जी लेकिन एक धर्म नि जो सुदामा जी थे जो उसको

1715
02:13:46,480 --> 02:13:51,080
टक्कर देते थे उसके बहकावे में नहीं है और वो रियल भगवान जो हमारे

1716
02:13:51,080 --> 02:13:55,080
भगवान ते उनके उनको अपना आदर्श मानते हुए

1717
02:13:55,080 --> 02:14:00,000
ने भकाया था उनको ना काशीराज ने भड़काया

1718
02:14:00,000 --> 02:14:04,520
था लिंक आ गया है अगर माइका लाल हो तो वो आए

1719
02:14:04,520 --> 02:14:08,680
और यहां पर अपनी बातों को रखे नहीं आएंगे

1720
02:14:08,680 --> 02:14:09,600
ये एजेंडा

1721
02:14:09,600 --> 02:14:14,480
इनका खत्म हो चुका है जो लोगों को आना था वो आकर वो सीख चुके हैं

1722
02:14:14,480 --> 02:14:20,480
साहस दात देनी होगी बाबूराम आ गया नहीं नहीं

1723
02:14:24,640 --> 02:14:28,800
है ये नॉर्मल ये नॉर्मल नॉर्मल डिटर्जेंट से नहीं धुलने

1724
02:14:28,800 --> 02:14:33,000
वाले हैं इनको स्पेशल सर्फ एक्शन लो ऋण लो और इनको

1725
02:14:33,000 --> 02:14:37,080
अच्छे से इनको लगा के उसके बाद रगड़ दो ये अच्छे से साफ हो जाए तभी ये

1726
02:14:37,080 --> 02:14:41,280
इन दिल के नो कहते थे हमारे

1727
02:14:41,280 --> 02:14:45,320
गुरुजी कहते एक खाली पेज है और उसपे कुछ लिख दिया है

1728
02:14:45,320 --> 02:14:49,480
पूरा पेज भरा हुआ है अब फिर उस परे दोबारा लिखने की कोशिश करो तो समझ

1729
02:14:49,480 --> 02:14:54,360
में नहीं आएगा तोय भी ऐसे ही है क्या

1730
02:14:54,360 --> 02:14:58,520
करनी बार कर चुके फिर से ले क्या बाबूराम को नहीं

1731
02:14:58,520 --> 02:15:02,360
नहीं

1732
02:15:02,360 --> 02:15:06,560
बाब थ

1733
02:15:06,560 --> 02:15:11,320
मुझे सबसे सब के सब एक जैसे

1734
02:15:11,320 --> 02:15:15,480
हैं माइंड सेट इनका ऐ बन हम

1735
02:15:15,480 --> 02:15:19,640
तो कहते नहीं कुछ रामपाल जी के बारे में जब वो जेल में गए तो इनके आश्रम

1736
02:15:19,640 --> 02:15:23,880
में कितनी बोल नहीं चाहते वसे सबको मीडिया ने दिखाया हमने कभी

1737
02:15:23,880 --> 02:15:27,880
बोला नहीं चलो संत है संतों के बारे में कितने संत तो खैर वो है ही नहीं

1738
02:15:27,880 --> 02:15:33,520
कितनी आप क्या क

1739
02:15:33,520 --> 02:15:39,520
रहे हां बाबू राम जी दिखाइए

1740
02:15:45,280 --> 02:15:49,440
चेहरा बाबू राम जी हमारी पिछली बार पूरी हुई थी कि

1741
02:15:49,440 --> 02:15:54,040
जो पूर्ण प्रमाणिक आचार्य है गुरु

1742
02:15:54,040 --> 02:15:58,120
उसके पास जो भगवान है कबीर आपके

1743
02:15:58,120 --> 02:16:02,320
अनुसार उसका पूर्ण ज्ञान है कि नहीं हमारी

1744
02:16:02,320 --> 02:16:06,360
यहां पर बात खत्म हुई थी आपने कहा था नहीं मैं बताऊंगा नहीं अभी

1745
02:16:06,360 --> 02:16:10,640
आप उसका जवाब लेकर आए हैं क्या

1746
02:16:10,640 --> 02:16:14,640
मैं जवाब दूंगा आपको लेकिन पहले मैं अपना प्रश्न रखूंगा क्योंकि आप तो पहले

1747
02:16:14,640 --> 02:16:18,800
अपना प्रश्न रखेंगे तो ह देंगे आप प्रश्न अपना कहां से रखने वाले

1748
02:16:18,800 --> 02:16:22,480
हैं एक बात बताइए

1749
02:16:22,480 --> 02:16:26,520
गीता से गीता से और वो किस संबंध

1750
02:16:26,520 --> 02:16:30,760
में है

1751
02:16:30,760 --> 02:16:34,800
प्रश्न प्रश्न रखेंगे गीता से आप तो कहते हैं कि गीता हमारे खून

1752
02:16:34,800 --> 02:16:38,840
में बहती है तो आप तो खुद जान लेंगे कि कैसा खून बता बात यह है

1753
02:16:38,840 --> 02:16:42,880
जब हम लोग वो सारी बातें कर चुके हैं और अब हम इस पर आ गए हैं कि गीता

1754
02:16:42,880 --> 02:16:47,200
और वेद में ब्रह्म की पूर्ण जानकारी नहीं है

1755
02:16:47,200 --> 02:16:51,680
हम लोग वो सारी बातें करके आगे आ चुके हैं तो फिर वही बातें

1756
02:16:51,680 --> 02:16:55,760
क्यों और अगर आपके पास कुछ गरुण पुराण की कोई ऐसी बात है जो आपको

1757
02:16:55,760 --> 02:17:00,480
समझ नहीं आ रही है तो मैं आपको याद दिला दूं हमारे बीच में जो दूरी है

1758
02:17:00,480 --> 02:17:04,600
हमारे बीच में जो परस्पर विरोध है वो इस बात का नहीं है कि गरुण पुराण

1759
02:17:04,600 --> 02:17:08,880
में क्या लिखा है वो इस बात का है कि क्या जो आप

1760
02:17:08,880 --> 02:17:12,920
कबीर कह रहे हो भगवान कह रहे हो कबीर को या रामपाल को तत्वदर्शी कह

1761
02:17:12,920 --> 02:17:16,960
रहे हो या श्री गीता को बोलने वाले को श्री कृष्ण से

1762
02:17:16,960 --> 02:17:22,600
अलग कोई काल कह रहे हो क्या ये तीन चीजें हमारे शास्त्रों से सिद्ध है

1763
02:17:22,600 --> 02:17:26,600
जी तो नहीं है ना आप तो यह तीनों चीजें कहते हो कि

1764
02:17:26,600 --> 02:17:30,600
शास्त्र से बाहर जाओ तो शास्त्र से बाहर जाने की बात आ चुकी

1765
02:17:30,600 --> 02:17:34,800
है शास्त्र में पूरी जानकारी नहीं है काल से अन्य

1766
02:17:34,800 --> 02:17:39,240
भी भगवान है गीता के अंदर उसको आप गहन अध्ययन करेंगे तभी तो पता चलेगा

1767
02:17:39,240 --> 02:17:43,280
भाई गहन अध्ययन मैंने वो सारे करके आपसे खूब सारी बातें कर ली

1768
02:17:43,280 --> 02:17:46,160
है आप तो मुझे ये बताओ क्या तत्वदर्शी जो आपके अनुसार

1769
02:17:46,160 --> 02:17:50,280
जो पूर्ण ज्ञानी है उसके पास पूर्ण

1770
02:17:50,280 --> 02:17:55,560
ज्ञान है है कि नहीं ब्रह्म का यह बताओ

1771
02:17:55,560 --> 02:17:59,640
आप देखिए मैं आपका उत्तर दूंगा तहा आप लास्ट में हटा

1772
02:17:59,640 --> 02:18:03,840
देंगे मेरे को पहले मैं प्रश्न रखूंगा इसके बाद आप रखेंगे अच्छा आप प्रश्न

1773
02:18:03,840 --> 02:18:09,840
रख लीजिए

1774
02:18:15,280 --> 02:18:19,360
चलिए जो सनातन परमात्मा है संसार

1775
02:18:19,360 --> 02:18:23,520
रूपी पीपल के वृक्ष का कौन सा विभाग है उसका और जो

1776
02:18:23,520 --> 02:18:28,080
गीता ज्ञान देता है उसका कौन सा विभाग है संसार रूपी पीपल

1777
02:18:28,080 --> 02:18:32,240
परीक्षा मत लीजिए आप तो यह बताइए यहां से यह सिद्ध हो रहा है वहां

1778
02:18:32,240 --> 02:18:36,400
से वो सिद्ध हो रहा है आप यहां पर परीक्षा मत लीजिए आप अपना मत

1779
02:18:36,400 --> 02:18:40,800
बताइए आपका सिद्धांत क्या है वो बताइए बस

1780
02:18:40,800 --> 02:18:45,680
हम हमरा सिद्धांत यह है कि

1781
02:18:45,680 --> 02:18:49,800
गीता के अंदर तीन भगवान बताया गया है और

1782
02:18:49,800 --> 02:18:53,920
आप लोग आप लोग कहते हैं कि कृष्ण ही काल है काल ही

1783
02:18:53,920 --> 02:18:58,480
कृष्ण है इसके आगे कोई भगवान नहीं है अच्छा तो

1784
02:18:58,480 --> 02:19:01,200
हम इस इस गीता से हम सिद्ध करना चाहते

1785
02:19:01,200 --> 02:19:06,080
हैं कि गीता के अंदर तीन भगवान हैं जिनका व

1786
02:19:06,080 --> 02:19:10,360
मैं कह रहा हूं उनमें से एक भगवान वो है जो श्री कृष्ण के अंदर घुसा

1787
02:19:10,360 --> 02:19:14,640
था जिसने गीता बोली अच्छा गीता को आप प्रमाण

1788
02:19:14,640 --> 02:19:18,800
मानते हैं जी अच्छा अगर गीता

1789
02:19:18,800 --> 02:19:23,320
बोलने वाले को मैंने सिद्ध कर दिया गीता बोलने वाला अज्ञानी

1790
02:19:23,320 --> 02:19:29,320
है तो आप गीता को प्रमाण मानेंगे

1791
02:19:29,560 --> 02:19:33,680
वो अपने लेवल का अपना ज्ञान दिया है इसके बाद गीता

1792
02:19:33,680 --> 02:19:37,800
को आप पता है गीता को प्रमाण क्यों मानते हैं आप गीता को प्रमाण

1793
02:19:37,800 --> 02:19:41,920
इसलिए मानते हैं कि गीता को क्यों नहीं मानना है गीता में

1794
02:19:41,920 --> 02:19:46,200
दी गई चीजों को क्यों नहीं मानना है यह साबित करने के लिए आप गीता को प्रमाण

1795
02:19:46,200 --> 02:19:50,200
मानते हैं और उसके बाद जब हमको यह साबित कर दोगे तो अंत में आपको

1796
02:19:50,200 --> 02:19:54,200
कहां जाना गीता से बाहर भक्ति

1797
02:19:54,200 --> 02:19:58,440
कहां मिलेगी गीता से बाहर पूर्ण ब्रम का ज्ञान कहा मिलेगा गीता से

1798
02:19:58,440 --> 02:20:02,640
बाहर गीता को प्रमाण मानते हो अगर मैंने आपको बता दिया

1799
02:20:02,640 --> 02:20:06,840
कि गीता कहने वाला ज्ञानी है तो फिर गीता

1800
02:20:06,840 --> 02:20:10,920
की कोई भी बात आपके लिए प्रमाण कैसे रह

1801
02:20:10,920 --> 02:20:14,440
गई

1802
02:20:14,440 --> 02:20:18,640
म सुनो जो मूर्ख है वो कहीं भी मूर्खता कर सकता

1803
02:20:18,640 --> 02:20:22,840
है तुमको कैसे पता उसने वहां पर मूर्खता नहीं की जहां पर तुम उसे

1804
02:20:22,840 --> 02:20:26,920
मान रहे हो ठीक है मान लीजिए को

1805
02:20:26,920 --> 02:20:31,120
मूर्खता किया होगा लेकिन उसने एक विचार बात है कि अगर

1806
02:20:31,120 --> 02:20:35,480
गीता के अंदर अगर कंप्लीट ज्ञान है तो उसने अ

1807
02:20:35,480 --> 02:20:39,680
अर्जुन को तत्व दर्शी सं के शरण में जाने के लिए नहीं कहता

1808
02:20:39,680 --> 02:20:44,440
वो तत्वदर्शी सं कौन है

1809
02:20:44,440 --> 02:20:48,600
भाई तत्वदर्शी संत के बारे में उसने बताया है वो पर देखो

1810
02:20:48,600 --> 02:20:52,800
आराम आराम से बात करते हैं तुमने कहा कि अगर वो उसने पूरा ज्ञान दिया होता

1811
02:20:52,800 --> 02:20:56,880
तो वो उसको तत्वदर्शी संत के शरण में जाने को नहीं कहता ठीक

1812
02:20:56,880 --> 02:21:02,400
है बिलकुल ये ये सिद्धांत जो है ये कहां लिखा

1813
02:21:02,400 --> 02:21:06,560
है गीता अध्याय चार श्लोक नंबर 33

1814
02:21:06,560 --> 02:21:10,800
34 आप सिद्धांत समझिए कि अगर मुझे सारी बात पता

1815
02:21:10,800 --> 02:21:15,000
है फिर भी मैं यह बता रहा हूं कि अगर तुझे ये ज्ञान लेना

1816
02:21:15,000 --> 02:21:19,040
है तो किस तरह के लोगों से लेना है जी ये ज्ञान किस तरह

1817
02:21:19,040 --> 02:21:23,040
के लोगों से लेना चाहिए तो यह जो मैं बता रहा हूं मैं मेरे को

1818
02:21:23,040 --> 02:21:27,080
ज्ञान है मैं बता रहा हूं फिर भी मैं ये बता रहा हूं कि यह ज्ञान किस तरह के

1819
02:21:27,080 --> 02:21:29,880
लोगों से मिलता है जी

1820
02:21:29,880 --> 02:21:33,920
यह इसलिए बताना आवश्यक है कि जब मैं भी मैं नहीं भी होगा तो तू इस

1821
02:21:33,920 --> 02:21:38,320
इस तरह के लोग जो होंगे उनके पास जाकर ज्ञान ले लेना ठीक है

1822
02:21:38,320 --> 02:21:42,360
जी मगर अगर आप कह रहे हो कि अगर मुझे पूरा ज्ञान होता तो मैं किसी

1823
02:21:42,360 --> 02:21:46,560
और के पास जाने को क्यों कहता ठीक है जी तो

1824
02:21:46,560 --> 02:21:50,960
ये किसी और के पास जाने की जो बात है यह सिद्ध कर

1825
02:21:50,960 --> 02:21:55,880
मुझे ज्ञान नहीं है यह कहां पर लिखा है

1826
02:21:55,880 --> 02:22:01,240
वही चार का 34 सिद्ध करता है कि मेरे पास व कंपलीट ज्ञान नहीं है

1827
02:22:01,240 --> 02:22:05,880
देखा मैं पूछ क्या रहा हूं यह जो बात है

1828
02:22:05,880 --> 02:22:10,320
कि मैंने अगर यह कह दिया कि तू किसी और के पास जाकर के ज्ञान ले

1829
02:22:10,320 --> 02:22:14,560
तो इसका मतलब है कि मैं ज्ञानी नहीं हूं यह

1830
02:22:14,560 --> 02:22:18,840
सिद्धांत कहां लिखा है उसने

1831
02:22:18,840 --> 02:22:23,240
गीता अध्याय आठ लोक न भाई साहब आपको मैं एक बात

1832
02:22:23,240 --> 02:22:27,360
बताऊं मेरी बात एक मिनट आपको मैं एक बात बताऊं

1833
02:22:27,360 --> 02:22:31,920
आपने अभी एक लाइन बोली थी अगर उसको ज्ञान होता तो वह किसी और के पास

1834
02:22:31,920 --> 02:22:36,120
जाने को क्यों कहता यह लाइन कहां पर लिखी

1835
02:22:36,120 --> 02:22:41,120
है जो आपने लाइन बोली है ये कहां लिखी है

1836
02:22:41,120 --> 02:22:45,120
उसने अपने से अन्य के अन्य के पास जाने के

1837
02:22:45,120 --> 02:22:49,280
लिए अपने से अपने से अन्य के पास जाने के लिए

1838
02:22:49,280 --> 02:22:53,320
18 के 62 में भी बोल दिया अवर 15 के चार

1839
02:22:53,320 --> 02:22:57,440
में भी बोल दिया फिर वही बात मैं यह कह रहा हूं 18

1840
02:22:57,440 --> 02:23:01,600
अभी आपने जो एक जो श्लोक पकड़ा है ना 434 अपने

1841
02:23:01,600 --> 02:23:05,760
से अन्य के पास जाने के लिए उसने यह नहीं कहा तू अभी चला जा

1842
02:23:05,760 --> 02:23:09,880
मेरे पास ज्ञान नहीं है तू चला जा उसने कहा उस ज्ञान को

1843
02:23:09,880 --> 02:23:12,600
वहां से लेना

1844
02:23:12,600 --> 02:23:16,760
चाहिए उसने अपने त अभी यहां से चला जा मेरे पास ज्ञान

1845
02:23:16,760 --> 02:23:20,800
नहीं है मगर उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि अगर मैं नहीं भी

1846
02:23:20,800 --> 02:23:25,600
तो तब कहा पर जाना पड़ेगा तुम्ह तत्व दर्श के पास जाना पड़ेगा तुम्ह

1847
02:23:25,600 --> 02:23:30,520
उसने उसम उसने बोला एक बात

1848
02:23:30,520 --> 02:23:35,480
अर्जुन को अर्जुन को तत्व ज्ञानी मिल गया था क्या कि नहीं मिला था

1849
02:23:35,480 --> 02:23:39,720
नहीं मिला था ना नहीं मिला अन को मोक्ष भी नहीं

1850
02:23:39,720 --> 02:23:43,840
मिला नहीं मिला चलो भैया

1851
02:23:43,840 --> 02:23:47,840
चलो मोक्ष दि हा बता अर्जुन

1852
02:23:47,840 --> 02:23:51,960
को अगर अर्जुन को मोक्ष अगर मिला होता तो उसने नरक

1853
02:23:51,960 --> 02:23:55,960
में नहीं जाता उस आगे लिखा है महाभारत

1854
02:23:55,960 --> 02:24:00,400
में मिला है पांडवों को मिला है अरे महाभारत

1855
02:24:00,400 --> 02:24:04,480
नहीं दिखाएंगे ना ना ना ना ना ना महाभारत नहीं दिखाएंगे इनको इनके तिरछे दर्शी

1856
02:24:04,480 --> 02:24:08,800
की किताब दिखाएंगे खोलो भैया पेज नंबर

1857
02:24:08,800 --> 02:24:12,880
99 ठीक हम उसको देखेंगे अरे ऐसे कैसे

1858
02:24:12,880 --> 02:24:17,160
देखोगे उसको हम दिखा रहा हूं बिना तत्वदर्शी

1859
02:24:17,160 --> 02:24:22,160
के चलो भैया खोलो जी जी

1860
02:24:22,160 --> 02:24:28,160
हां गरमा गीता

1861
02:24:30,520 --> 02:24:34,600
की अब एक बात और बता रहा हूं इनके किताबों से इनका

1862
02:24:34,600 --> 02:24:38,920
ही वो होने लगा है ना अब देख लेना मैं चैलेंज के साथ कह रहा हूं थोड़े ही दिनों में

1863
02:24:38,920 --> 02:24:43,000
इनकी किताबें बदलने लगेंगी इसलिए जितना हो सके

1864
02:24:43,000 --> 02:24:47,080
इनकी किताबें सबूत बना करके रख लीजिए थोड़ी-थोड़ी जिससे बाद में अपनी

1865
02:24:47,080 --> 02:24:51,320
किताबें पलट क्योंकि इनकी किताबों की सच्चाई बाहर आ रही है

1866
02:24:51,320 --> 02:24:55,400
स्क्रीन शट करके र की बात आप गीता की बात करते हो अरे पूरी

1867
02:24:55,400 --> 02:24:58,920
महाभारत में श्री कृष्ण परमात्मा

1868
02:24:58,920 --> 02:25:03,120
है पेज नंबर पीडीएफ

1869
02:25:03,120 --> 02:25:09,120
के हिसाब से 99

1870
02:25:13,520 --> 02:25:17,680
है संयोग से अर्जुन को मोक्ष वाला जो पेज है वो

1871
02:25:17,680 --> 02:25:21,760
मुझे याद है बबली इसको ढूंढना

1872
02:25:21,760 --> 02:25:26,240
पड़ता फर्स्ट पैरा में ही

1873
02:25:26,240 --> 02:25:29,520
है 99 बस बस बस बस बस अर्जुन

1874
02:25:29,520 --> 02:25:33,720
यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्व परमात्मा को ईट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा

1875
02:25:33,720 --> 02:25:38,680
यज्ञों के साथ साथ वास्तविक नाम का स्मरण करके मोक्ष रूपी

1876
02:25:38,680 --> 02:25:40,520
अवंत को प्राप्त हो जाता

1877
02:25:40,520 --> 02:25:44,720
है पूर्ण परमात्मा को प्राप्त हो जाता है लो भाई पढ़

1878
02:25:44,720 --> 02:25:50,720
लो

1879
02:25:59,480 --> 02:26:03,480
गता द्वारा दिया गया अर्जुन यज

1880
02:26:03,480 --> 02:26:07,960
प्रति पूर्ण परमात्मा के इट रूप में मानकर यज करता है तथा

1881
02:26:07,960 --> 02:26:12,920
यज्ञों के साथ साथ वास्तविक नाम का शम करके पूर्ण मो रूपी अमृत को प्राप्त

1882
02:26:12,920 --> 02:26:17,040
हो जाता है अर्थात परमात्मा बताओ

1883
02:26:17,040 --> 02:26:21,640
इनकी स्क्रीन बड़ी कर दो जी जी रुक जाइए पढ़ तो रहे

1884
02:26:21,640 --> 02:26:25,720
हैं अरे भैया पहली बात तो यह है कि हमें तो हमारे मतलब का

1885
02:26:25,720 --> 02:26:30,000
जितना होगा उतना पढ़ेंगे ना हम पूरा प हमारे

1886
02:26:30,000 --> 02:26:35,680
पास भी तो है पास मतलब जितना होता है उतना

1887
02:26:35,680 --> 02:26:39,680
पढ़ेंगे का यही डायलग है डायलग

1888
02:26:39,680 --> 02:26:43,920
है जो भी किताब लते उससे कहते हमारे मतलब का जितना

1889
02:26:43,920 --> 02:26:48,040
है उतना पड़ेंगे अच्छा ठीक है अगर आप अपनी मतलब

1890
02:26:48,040 --> 02:26:52,600
अगर हमको दिखा देंगे अन को मोक्ष मिला पढ़ लिया तुमने

1891
02:26:52,600 --> 02:26:55,840
पढ़ लो और अर्जुन गीता

1892
02:26:55,840 --> 02:26:59,960
का ज्ञान दे जो अर्जुन था उस अर्जुन को मोक्ष नहीं मिला

1893
02:26:59,960 --> 02:27:04,200
था उसने युधिष्ठिर युधिष्ठिर के पुण्य

1894
02:27:04,200 --> 02:27:08,520
से उसने स्वर्ग में गया था अरे मेरे भाई यह लिखा है पूर्ण परमात्मा

1895
02:27:08,520 --> 02:27:12,720
को प्राप्त हो जाता है मोक्ष इसका क्या करें ठीक

1896
02:27:12,720 --> 02:27:16,800
है तो पढ़ तो रहे हैं रुक तो जाइए आप भग क्यों रहे हैं भाई मेरे पास

1897
02:27:16,800 --> 02:27:20,800
वही पुस्तक है ना आपका गीता गरिमा

1898
02:27:20,800 --> 02:27:26,800
सनातन प ब्र

1899
02:27:32,480 --> 02:27:38,480
परमा अर्जुन भी दो हो

1900
02:27:40,600 --> 02:27:45,040
गए तब तक आप महाभारत से दिखा दीजिए बोलिए

1901
02:27:45,040 --> 02:27:48,040
अर्जुन का

1902
02:27:48,040 --> 02:27:52,640
मोक्ष भया चा 3 पर बैटरी रह गई रुकिए भैया एक

1903
02:27:52,640 --> 02:27:56,680
सेकंड जल्दी लगाओ भाई आज तो इन्होंने दिमाग खराब

1904
02:27:56,680 --> 02:28:01,400
कर दिया क्या बताऊं अरे आप दिमाग खराब म करिए भाई

1905
02:28:01,400 --> 02:28:05,440
प्रभु का नाम लीजिए अरे भैया इतना टाइम नहीं है

1906
02:28:05,440 --> 02:28:09,960
आप पहले ढूंढ लो पढ़ लो फिर आओ दोबारा पढ़ लिए पढ़ लिए पढ़ लिए

1907
02:28:09,960 --> 02:28:14,000
पढ़ लिए आप ऐसा मत स कि हटा देंगे तो हमारा नाम रोशन चला

1908
02:28:14,000 --> 02:28:18,400
जाएगा आप नाम रोशन ऐसे बताइए फालतू बात मत करिए

1909
02:28:18,400 --> 02:28:22,960
बताइए अर्जुन को मोक्ष मिला कि नहीं उसम बता

1910
02:28:22,960 --> 02:28:26,960
उसमें बता रहा है कि पूर्ण संत से भक्ति

1911
02:28:26,960 --> 02:28:31,400
करने पर अर्जुन का मोक्ष मिल सकता है ऐसे मोक्ष नहीं मिलेगा

1912
02:28:31,400 --> 02:28:36,360
कहां लिखा है ये उसी में लिखा दिखा दे रहे हैं आपको

1913
02:28:36,360 --> 02:28:40,440
अरे अर्जुन को मोक्ष नहीं मिला ये कहां लिखा है अरे उस

1914
02:28:40,440 --> 02:28:44,480
अर्जुन को नहीं बोल रहा है किसी भी अर्जुन को बोल रहा है यहां पर अच्छा

1915
02:28:44,480 --> 02:28:46,680
बहुत

1916
02:28:46,680 --> 02:28:52,680
बढ़िया किसी अर्न को किसी भी अर्जुन को बहुत बढ़िया व

1917
02:28:55,680 --> 02:28:59,760
पर तुम बो रहे हो वो अलग अर्जुन है वो कहा

1918
02:28:59,760 --> 02:29:04,600
लिखा है इसी पर लिख रहा है सुन लीजिए सुना दे रहे आपको

1919
02:29:04,600 --> 02:29:08,920
हा य बोल र कि भावत है कि पूर्ण संत द्वारा

1920
02:29:08,920 --> 02:29:13,240
दिया गया दिया पूर्ण भक्ति मार्ग ही लाभदायक है अर्जुन

1921
02:29:13,240 --> 02:29:14,920
यज्ञ में प्र अर्जुन

1922
02:29:14,920 --> 02:29:19,120
यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को इष्ट रूप में मानकर यज्ञ करता

1923
02:29:19,120 --> 02:29:23,240
है तथा यज्ञ के साथ साथ वास्तविक नाम का सुमिर

1924
02:29:23,240 --> 02:29:24,520
करके पूर्ण मोक्ष रूपी

1925
02:29:24,520 --> 02:29:28,520
अमृत को प्राप्त हो जाता है अर्थात पूण परमात्मा को प्राप्त हो

1926
02:29:28,520 --> 02:29:33,160
जाता है वो क्या बो रहा है परमात्मा का भक्ति करेगा

1927
02:29:33,160 --> 02:29:39,160
बताओ ये वो अर्जुन नहीं है ये

1928
02:29:40,360 --> 02:29:44,680
बताओ इसमें उस अर्जुन को नहीं कहा जा रहा है आप

1929
02:29:44,680 --> 02:29:49,400
कैसे बात है अब तुम जाओ य तेजी के साथ फिर आना

1930
02:29:49,400 --> 02:29:53,040
कोई बात नहीं अर्जुन

1931
02:29:53,040 --> 02:29:56,440
दास य इसीलिए

1932
02:29:56,440 --> 02:30:00,560
आते आपने हटा दिया उसको

1933
02:30:00,560 --> 02:30:04,720
हटा दिया आपने उसको तो तो आप अपना अरे

1934
02:30:04,720 --> 02:30:08,880
भाई उसको क्यों हम लोग स्पेस दे यहां पर क्यों उसको स्क्रीन टाइम दे खामा

1935
02:30:08,880 --> 02:30:13,040
खा वो जब कहने लगा कि दूसरा अर्जुन है दूसरा अर्जुन लिखा कहां

1936
02:30:13,040 --> 02:30:17,160
है उसके तत्वदर्शी ने वो भी नहीं दिखा दिखा रहा है अपने मन

1937
02:30:17,160 --> 02:30:21,400
से चाहिए हमारे लिए तो

1938
02:30:21,400 --> 02:30:25,440
ने ल नेशन मार रखा है रामपाल जी ने कुछ

1939
02:30:25,440 --> 02:30:29,680
नहीं समझ में आएगा इनको कुछ भी आपना कितना भी कोशिश

1940
02:30:29,680 --> 02:30:33,840
कर लो इनकी बातो को ग नहीं ने इ

1941
02:30:33,840 --> 02:30:37,920
के ग्रंथ खोलने इनकी स करने थी होता

1942
02:30:37,920 --> 02:30:39,520
है चर्चा करने का तरीका ही नहीं होता य

1943
02:30:39,520 --> 02:30:44,280
सब चीज य चर्चा थोड़ी होती है आ अपने

1944
02:30:44,280 --> 02:30:48,360
याद किया हुआ है जाकर य पर उल्टी कर देते कर देना ये सब थोड़ी होता है चर्चा

1945
02:30:48,360 --> 02:30:52,880
का मतलब

1946
02:30:52,880 --> 02:30:58,120
ये कौन सा अर्जुन है जिसको वो मोक्ष मिल

1947
02:30:58,120 --> 02:31:02,240
गया बन रहे होंगे वो बस ये कहते हैं य

1948
02:31:02,240 --> 02:31:06,280
से चले जाते हैं तो कमेंट कमेंट गिरी करते हैं कि आप य ऐसे ही

1949
02:31:06,280 --> 02:31:10,520
करते हो आप हटा देते हो अरे भाई अपने बात तो रखो रखना तो सीखो कि हा

1950
02:31:10,520 --> 02:31:14,960
बातो को कैसे रखा जाता है तर्क कैसे किया जाता है चाहे आप

1951
02:31:14,960 --> 02:31:20,960
भाई मेरे को समझ में नहीं आता इनके जो पूर्वज थे ये क्यों इतना ब

1952
02:31:20,960 --> 02:31:24,960
अपने पूर्वजों को मूर्ख मानना कर व क देवी जी को सुन रहा था तो क

1953
02:31:24,960 --> 02:31:30,960
पहले के लोग अनपढ गवार थे इसीलिए वो किसी के बका में आ जाते

1954
02:31:33,400 --> 02:31:39,400
थेने लिखा है पूर्वजों के अनुसार कर्म करने पर ही पूर्ण मोक्ष

1955
02:31:41,640 --> 02:31:46,560
मिलेगा उनके हिसाब से मूर्ख है

1956
02:31:46,560 --> 02:31:50,760
इनकी हा बो विल जी महाभारत का

1957
02:31:50,760 --> 02:31:54,760
छठ खंड है अब तो उन्होने बोल दिया कि महाभारत हमारे पास संक्षिप्त है गीता

1958
02:31:54,760 --> 02:31:58,840
प्रस की त भी उनके टा खंड वाली आती थी

1959
02:31:58,840 --> 02:32:04,840
अब ये देखिए मेरे पास महाभारत का स्वर्गारोहण पर्व चौथा अध्याय

1960
02:32:09,640 --> 02:32:15,640
येय

1961
02:32:16,360 --> 02:32:20,720
स् उसका चौथा चौथा अध्याय स्वर्ण

1962
02:32:20,720 --> 02:32:24,920
पर सबसे आखरी पर भारत का बा बता दे र हूं

1963
02:32:24,920 --> 02:32:29,680
दो बातें बता दे रहा हूं ये लोग अपनी किताबें बहुत जल्द बदलेंगे पक्का

1964
02:32:29,680 --> 02:32:34,240
पक्की बात इनकी र पर रखलो भाई जी

1965
02:32:34,240 --> 02:32:38,400
सबूत के तौर पर सार किताब दूसरी बात एक

1966
02:32:38,400 --> 02:32:43,040
ये है हम तो उतना ही लेंगे जितना हमारे मतलब का

1967
02:32:43,040 --> 02:32:46,320
होगा हम तो

1968
02:32:46,320 --> 02:32:50,640
उतना अभी जैसे होती है ना एक सेना

1969
02:32:50,640 --> 02:32:54,720
एक सेना दूसरी सेना प अपने निशाना चलाती है फ दूसरे पक्ष की सेना उसी

1970
02:32:54,720 --> 02:32:58,840
सेना पर अपने निशाने चलाती है वैसे ही हो रहा है एक तरफ आप इनकीम दूसरी

1971
02:32:58,840 --> 02:33:03,240
तरफ अमित दास फेक्ट बा अभिषेक अपने अपने वीडियो ला जा रहे बस यही चल रहा है अभी तो

1972
02:33:03,240 --> 02:33:07,240
येय में जंग चल रही है इनकी अच्छा धंधा चल रहा है उन लोगों

1973
02:33:07,240 --> 02:33:11,600
का बढ़िया चल रहा है उन लोगों कावा जी अजी

1974
02:33:11,600 --> 02:33:17,600
थोड़ी बदलनी पड़ेगी ठ

1975
02:33:18,760 --> 02:33:22,960
बता यहां से काम नहीं चलेगा क्योंकि जितने भगत आने

1976
02:33:22,960 --> 02:33:27,320
थे ना वो आ चुके हैं वो समझ चुके हैं देखिए महाभारत

1977
02:33:27,320 --> 02:33:31,440
गीता प्र का ये छठ खंड है स्वर्गारोहण पर चौथा

1978
02:33:31,440 --> 02:33:35,920
अध्याय अब इसकी य देखिए स्क्रीन बड़ी कीजिए मेरी ये देखिए

1979
02:33:35,920 --> 02:33:40,080
क्या लिखा है यह हेडिंग पढ़िए क्या लिखा है य युधिष्ठिर

1980
02:33:40,080 --> 02:33:44,160
का दिव्य लोक में श्री कृष्ण अर्जुन आदि का

1981
02:33:44,160 --> 02:33:48,080
दर्शन

1982
02:33:48,080 --> 02:33:52,200
करना अब आप प बता दो आप स्क्रीन प मत दिखाओ पढ़ के बता

1983
02:33:52,200 --> 02:33:55,320
दो

1984
02:33:55,320 --> 02:33:59,440
जी पहले स् में पढ़ रहा अरे भैया हमारा

1985
02:33:59,440 --> 02:34:03,600
घर सतलोक वाले आप आ जाइए निष्ठा पूर्वक माता जी ने यदि बचपन

1986
02:34:03,600 --> 02:34:07,840
में आपको पौष्टिक आहार वगैरह दिया हो तो आप आ जाइए ऊपर

1987
02:34:07,840 --> 02:34:12,520
आ रामपाल जी के शरीर का दूध पिया हो

1988
02:34:12,520 --> 02:34:16,680
तो चलिए मैं पढ़ रहा हूं फर ठीक है पढ एक मिनट

1989
02:34:16,680 --> 02:34:21,560
देखिए आपके बाबू भाई आकर के क्या कर रहे हैं अर्जुन दो कर दिए

1990
02:34:21,560 --> 02:34:26,360
अभी देखिए हो सकता है रामपाल जी ने ना कि हो तो गुरु विरोधी है बड़े वाले

1991
02:34:26,360 --> 02:34:32,360
अब रामपाल दो जाए कुछ दिनों बाद जेल वाला अलग बाहर

1992
02:34:32,880 --> 02:34:37,280
वाला काम नहीं आ

1993
02:34:37,280 --> 02:34:41,440
रहे इनकी पुस्तको को देख के लगता है अरे कहना क्या

1994
02:34:41,440 --> 02:34:45,000
चाहते

1995
02:34:45,000 --> 02:34:49,040
हो प्रमाण स्टार्ट करने से पहले एक गाने की

1996
02:34:49,040 --> 02:34:53,280
लाइन इन लोगों के लिए जोय ये खुद नहीं बोलते लेकिन ये है वही

1997
02:34:53,280 --> 02:34:57,440
ये अंदर से बोल बाहर से नहीं बोल सकते अंदर सेय जरूर बोलेंगे पता है वो गाने

1998
02:34:57,440 --> 02:35:01,560
की ंग है हम पागल नहीं है भैया हमारा

1999
02:35:01,560 --> 02:35:05,600
दिमाग खराब है है

2000
02:35:05,600 --> 02:35:09,960
ना चलिए अब मैं पढ़ रहा हूं महाभारत स्वर्गारोहण

2001
02:35:09,960 --> 02:35:14,000
पर्व चौथा अध्याय यर का द लोक में श्री कृष्ण अर्जुन आदि

2002
02:35:14,000 --> 02:35:18,120
का दर्शन करना अब य वैम महाराज जन्मेजय को सुना रहे है

2003
02:35:18,120 --> 02:35:22,520
जन्मेजय तन देवता ऋषियो और मग के मु से अपनी प्रशंसा सुनते हुए

2004
02:35:22,520 --> 02:35:26,720
राजा यष उस स्थान पर जा पहुचे शेष भीम सेना अर्जुन

2005
02:35:26,720 --> 02:35:30,720
आदि विराजमान थे वहां पर वहा जाकर उन्होंने सबसे पहले क्या देखा

2006
02:35:30,720 --> 02:35:34,720
य जी ने दूसरे शलोक में प वहा जाकर उन्होंने देखा कि

2007
02:35:34,720 --> 02:35:39,280
भगवान श्री कृष्ण अपने ब्रह्म विग्रह से अपने ब्राहमम विग्रह से संपन्न है

2008
02:35:39,280 --> 02:35:43,360
पहले के देखे गए साद से वे पहचाने जाते हैं उनके श्री विग्रह

2009
02:35:43,360 --> 02:35:48,120
से अदभुत दीपति छटक रही है चक्र आदि दिव्य एवं भयंकर अस्त शस्त्र

2010
02:35:48,120 --> 02:35:52,400
दिव्य पुरुष विग्रह धारण कर उनकी यानी भगवान श्री कृष्ण की सेवा में उपस्थित

2011
02:35:52,400 --> 02:35:56,480
है अत्यंत तेजस्वी वीरवर अर्जुन भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लगे

2012
02:35:56,480 --> 02:36:00,640
हुए हैं कु कुंती कुमार युधिष्ठिर ने भगवान मधुसूदन का उसी

2013
02:36:00,640 --> 02:36:05,000
स्वरूप में दर्शन किया पुरुष सिंह अर्जुन और श्री कृष्ण देवताओ

2014
02:36:05,000 --> 02:36:11,000
द्वारा पूजित थे इन दोनों ने यि को उपस्थित देख उनका यथावत सम्मान

2015
02:36:11,640 --> 02:36:15,640
किया ये दिव्य लो वो सब

2016
02:36:15,640 --> 02:36:19,680
अपने अपने स्वरूप में आगे चलकर विलीन हो गए थे अर्जुन जैसे इ

2017
02:36:19,680 --> 02:36:23,880
के अश थे भीम पवन पुत्र के अंश थे और जो कौर

2018
02:36:23,880 --> 02:36:27,880
वो राक्षसों के यक्ष के अलग अलग उस रूप में व अपने वापस विलीन हो ग

2019
02:36:27,880 --> 02:36:32,160
थ महाभारत में लिखा हुआ है ऐसा

2020
02:36:32,160 --> 02:36:38,160
अरे तुम लोग भगवत गता की बात करते हो तुम भगवत गीता की बात करते

2021
02:36:38,840 --> 02:36:43,160
होत भगवत गीता के अनुसार बता दू जनक जी को मोक्ष

2022
02:36:43,160 --> 02:36:47,440
मिला है जनक जी को भगवत गीता के अनुसार

2023
02:36:47,440 --> 02:36:52,480
मोक्ष मिला है कहां पर है ये बात बता देता

2024
02:36:52,480 --> 02:36:56,560
हूं जो पूर्वजों के अनुसार जो भक्ति करते ये 4 10 से

2025
02:36:56,560 --> 02:37:02,360
15 या सवा सवा श्लोक है उसमें जनक जी को मोक्ष मिला

2026
02:37:02,360 --> 02:37:07,320
है उन्होने जनक जी का नाम लिया

2027
02:37:07,320 --> 02:37:11,360
नाम अपना कबीर तो देखो अपना कवि तो वो

2028
02:37:11,360 --> 02:37:16,120
वही कबीर है जो हम कह रहे हैं अर्जुन कोई दूसरा अर्जुन

2029
02:37:16,120 --> 02:37:20,320
है अर्जुन कोई दूसरा अर्जुन शिरोमण कबीर

2030
02:37:20,320 --> 02:37:24,600
दास जी को भी बदनाम करके रखा है इन लोगों ने

2031
02:37:24,600 --> 02:37:29,240
चलिए अब कोई नहीं आ रहा आज की लाइव स्ट्रीम को समाप्त करते हैं सभी को जय श्री राम

2032
02:37:29,240 --> 02:37:33,680
विशाल जी जय श्री राम अच्छा एक बात और कहूंगा य

2033
02:37:33,680 --> 02:37:37,920
चैनल को बंद कराने के प्रयास हो सकते हैं इसलिए आप लोगों से निवेदन

2034
02:37:37,920 --> 02:37:41,960
है इसकी स सबसे पहले क्या कहते हैं जो

2035
02:37:41,960 --> 02:37:46,240
लाइक और ये कमेंट वगैरह जो पॉजिटिव होते वो करें क्योंकि य

2036
02:37:46,240 --> 02:37:50,440
को एक मिस इंफॉर्मेशन जाती है कि ये चैनल से गलत चीज हो रही है

2037
02:37:50,440 --> 02:37:54,160
तो आपको अपना समर्थन प्रकट करना है यह करते हुए

2038
02:37:54,160 --> 02:38:00,160
कि लाइक करेंगे तो चैनल को

2039
02:38:10,480 --> 02:38:16,480
youtube2 9 की उसका कुछ परसेंटेज

2040
02:38:19,520 --> 02:38:23,840
महत्वपूर्ण हो जाता है ठीक है उसको पहली बात तो आप मेंबरशिप

2041
02:38:23,840 --> 02:38:28,200
लेते हो तो उसको और पता चलता है कि भाई लोगों कोय चैनल बहुत पसंद आ रहा है दूसरी बात

2042
02:38:28,200 --> 02:38:32,560
उसके पास कुछ परसेंटेज जाता है तो भी उसके लिए हमारा चैनल इंपोर्टेंट

2043
02:38:32,560 --> 02:38:37,160
हो जाता है तो इसलिए यदि आपके पास है एक मासिक रूप से 29

2044
02:38:37,160 --> 02:38:41,280
मिनिमम जो मेंबरशिप है चैनल की 9र वाली है तो व आप अवश्य

2045
02:38:41,280 --> 02:38:45,720
ले ले ठीक है अब कोई है नहीं

2046
02:38:45,720 --> 02:38:50,000
अब हम लोग बढ़ाते हैं काफी देर हो चुकी है विशाल जी पूरी

2047
02:38:50,000 --> 02:38:54,040
कर अब मैं एक प्रमाण वैसे ये जो प्रमाण अभी दिखा रहा हूं मैं पहले

2048
02:38:54,040 --> 02:38:58,080
आपको एक बार दिखा चुका हूं लेकिन अभी जो ये लोग है इनकी संतुष्टि के लिए मैं

2049
02:38:58,080 --> 02:39:02,080
ये प्रमाण दिखाना चाहता हूं कि अब जैसे ये लोग दिखाते हैं देवी

2050
02:39:02,080 --> 02:39:06,120
भागवत से छाट छाट के कि ब्रह्मा विष्णु महे देवी की स्तुति करते हैं हम अजर नहीं है अविनाशी

2051
02:39:06,120 --> 02:39:09,320
नहीं है हमारी जन्म मृत्यु होती है दिखाते हैं ना अब

2052
02:39:09,320 --> 02:39:13,440
यह मैं जो पुराण लाया हूं यह ब्रह्म पुराण है यह पहले भी मैं दिखा चुका हूं लेकिन

2053
02:39:13,440 --> 02:39:17,480
एक बार दर्शको की संतुष्टि के लिए आप सबके लिए दिखा दे रहा हूं ये 18

2054
02:39:17,480 --> 02:39:21,640
पुराण जो है उम ब्रह्म पुराण सबसे पहली गिनती में आता है गीता

2055
02:39:21,640 --> 02:39:25,720
का पुराण है संक्षिप्त है इनको संक्षिप्त समझ में आते है ना अब ये

2056
02:39:25,720 --> 02:39:31,240
देखिए मेरे पास इसका पेज नंबर 116

2057
02:39:31,240 --> 02:39:35,480
हैन बड़ी में देखिए भगवान विष्णु क्या बोल रहे हैं

2058
02:39:35,480 --> 02:39:39,880
जो भगवान विष्णु के भक्त थे उज्जैन के राजा महाराज इंद जिन्होने जगन्नाथ

2059
02:39:39,880 --> 02:39:44,080
जी का मंदिर बनवाया था जगन्नाथ जी का मंदिर

2060
02:39:44,080 --> 02:39:50,080
अब देखिए अब यहां से मैं पढ़ता हूं क्या बोल रहे भगवान विष्णु

2061
02:39:50,200 --> 02:39:54,360
भगवान विष्णु बोले मैं देवता यक्ष दैत्य

2062
02:39:54,360 --> 02:39:58,360
देवराज इंद्र ब्रह्मा अथवा रुद्र नहीं हूं मुझे पुरुषोत्तम समझो

2063
02:39:58,360 --> 02:40:02,360
मैं समस्त लोगों की पीड़ा को दूर करने वाला अनंत बल पौरुष से

2064
02:40:02,360 --> 02:40:06,520
संपन्न और संपूर्ण भूतों का आराध हूं मेरा कभी अंत नहीं होता

2065
02:40:06,520 --> 02:40:10,880
क्या बोलर विष्णु जी मेरा कभी अंत नहीं होता जिसका सब शास्त्रों में उल्लेख

2066
02:40:10,880 --> 02:40:14,920
किया जाता है जिसका सब शास्त्र में उल्लेख किया जाता है वेदांत ग्रंथों

2067
02:40:14,920 --> 02:40:19,320
में वर्णन मिलता है जिसे योगी जन ज्ञान गम्य एवं वासुदेव कहते हैं

2068
02:40:19,320 --> 02:40:24,240
वह परमात्मा मैं ही हूं वह परमात्मा मैं ही हूं

2069
02:40:24,240 --> 02:40:25,240
भगवान

2070
02:40:25,240 --> 02:40:30,160
अनंत कोटि ब्रह्मांड नाय प्रा अखिलेश्वर भगवान ही नारायण

2071
02:40:30,160 --> 02:40:34,360
है अब वो बोलेंगे कि वो विष्णु नहीं है कोई और विष्णु

2072
02:40:34,360 --> 02:40:38,560
है उनके लिए तो सब दो दो है उनके लिए उनका तो कोई है ब्रम

2073
02:40:38,560 --> 02:40:43,000
पुराण का कौन सा पेज है य

2074
02:40:43,000 --> 02:40:47,560
116 116 अध्याय कौन सा है

2075
02:40:47,560 --> 02:40:51,640
अध्याय अध्याय इसम नहीं लिखा नंबर नहीं है लिखा होगा पीछे

2076
02:40:51,640 --> 02:40:56,000
देखो वो लिख के आता है जहां खत्म होता है

2077
02:40:56,000 --> 02:41:00,160
वहा जहां खत्म होता है ना नहीं लिखा है नहीं लिखा

2078
02:41:00,160 --> 02:41:05,360
है नहीं लिखा है नहीं लिखा है कहीं नहीं

2079
02:41:05,360 --> 02:41:09,360
लिखा ठीक है तो सभी को जय

2080
02:41:09,360 --> 02:41:14,120
श्री राम किसी भी प्रकार के मद के

2081
02:41:14,120 --> 02:41:18,240
लिए इनका जो मन

2082
02:41:18,240 --> 02:41:22,400
है ले सकते हैं हमारे वीडियो यहां से ले सकते हैं उनको अपने

2083
02:41:22,400 --> 02:41:26,400
चैनल पर डाल सकते हैं बशर्ते कि हम जो कह रहे हैं उसका भाव ना बदल

2084
02:41:26,400 --> 02:41:30,600
जाए हम जो कह रहे वही रहे उसम दवारा

2085
02:41:30,600 --> 02:41:34,680
प्रतित प्रतिपादित है उसका खंडन जरूर होना चाहिए और सत्य की राह

2086
02:41:34,680 --> 02:41:38,720
पर जो है सनातन को आगे बढ़ाना है आप बिल्कुल भी हमेशा

2087
02:41:38,720 --> 02:41:40,240
बिल्कुल लाइव आ कर के इनका

2088
02:41:40,240 --> 02:41:44,480
खंडन करिए और इनके द्वारा जो ख्या पित है उसको दूर

2089
02:41:44,480 --> 02:41:48,880
करना हमारा अवश्य कार्य है ताकि जो सनातनी

2090
02:41:48,880 --> 02:41:53,080
परम भ्रमित ना हो जाए और सनातनी परंपरा

2091
02:41:53,080 --> 02:41:57,200
आगे बढ़े और इनके द्वारा जितना भी पाखंड हो पाखंड

2092
02:41:57,200 --> 02:42:01,800
है उसको दूर जरूर करना चाहिए हम आपके साथ है आप निश्चिंत रहिए

2093
02:42:01,800 --> 02:42:05,840
आपके चैनल को अच्छा मिलेगा और आपसे डिबेट में अभी हमारे अच्छे अच्छे

2094
02:42:05,840 --> 02:42:10,040
मित्र भी जुड़ेंगे इसमें कोई संशय नहीं है चलिए

2095
02:42:10,040 --> 02:42:16,040
आभार सभी को सभी को जय

2096
02:42:16,840 --> 02:42:20,920
श्री पिछली बार वक्ति जो सवाल कर रहा था

2097
02:42:20,920 --> 02:42:26,920
कि महाभारत में कृष्ण जी ने लाखों लोगों को मरवा दिया महाभारत करवा

2098
02:42:27,600 --> 02:42:31,840
दी मिला नहीं व रामायण का प्रमाण

2099
02:42:31,840 --> 02:42:37,840
दिखा दीजिए

2100
02:42:40,000 --> 02:42:44,120
रता ईश्वर जब संघार करते हैं किसी का तो सिर्फ संघार नहीं करते

2101
02:42:44,120 --> 02:42:48,160
दूसरी तरफ रक्षा भी करते हैं जैसे किसी अपराधी को पकड़ा जाता तो हजारों लोगों

2102
02:42:48,160 --> 02:42:51,320
की रक्षा अपने आप हो जा

2103
02:42:51,320 --> 02:42:55,480
तो भगवान कृष्ण एक उनका श्लोक है यदा

2104
02:42:55,480 --> 02:43:00,000
यदा ही धर्म पूरे लोक का अ जा उ

2105
02:43:00,000 --> 02:43:04,280
सते जब जब धन की हानि होती है तब तब मैं आता हूं जब जब पाप बढ़ता

2106
02:43:04,280 --> 02:43:08,480
है तब तब मैं आता हूं दुष्टों का अंत करने आता हूं अधर्म का विनाश करने आता हूं

2107
02:43:08,480 --> 02:43:12,520
अपने भक्तों की रक्षा करता हूं साधुओं को भय मुक्त करता हूं धर्म

2108
02:43:12,520 --> 02:43:15,320
की स्थापना

2109
02:43:15,320 --> 02:43:21,320
बो य

2110
02:43:25,920 --> 02:43:31,000
भगवान महाभारत क्यों करवाते

2111
02:43:31,000 --> 02:43:34,160
ला मवाते

2112
02:43:34,160 --> 02:43:40,160
नहीं रक्षा कर

2113
02:43:42,320 --> 02:43:48,320
ह मुक्ति बोध निकालिए मुक्ति बोध

2114
02:43:51,960 --> 02:43:55,960
राजकुमार दास आने को बोल रहे हैं मगर बहुत लेट हो चुके हैं आप जो

2115
02:43:55,960 --> 02:43:59,200
नंबर नोट कर

2116
02:43:59,200 --> 02:44:03,240
लीजिए मेरा व्यक्तिगत पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है अगले दिन

2117
02:44:03,240 --> 02:44:08,320
का बता गाली दे रहा थामा

2118
02:44:08,320 --> 02:44:13,440
मांगो भाई पहले नोट करलो राजकुमार

2119
02:44:13,440 --> 02:44:19,240
दास इसम

2120
02:44:19,240 --> 02:44:25,240
देखिए रावण में रामचंद्र की उत्पत्ति किससे हुई

2121
02:44:29,880 --> 02:44:33,880
है मेम मेरे द्वारा बनाए गए

2122
02:44:33,880 --> 02:44:38,760
नियम के आधार से रावण और रामचंद्र की उत्पत्ति हुई उनका

2123
02:44:38,760 --> 02:44:43,600
युद्ध उनका युद्ध पूर्व निर्धारित संस्कार से हुआ

2124
02:44:43,600 --> 02:44:48,040
परमेश्वर कबीर का वचन तो तुम्हारे कबीर

2125
02:44:48,040 --> 02:44:53,040
ने कबीर ने लड़ाई करवा

2126
02:44:53,040 --> 02:44:57,360
दी और समझदार इनके सामने

2127
02:44:57,360 --> 02:45:02,240
अपनी निष्ठा पूर्वक माता जी ने जिसको दूध पिलाया हो वो अगर चर्चा के

2128
02:45:02,240 --> 02:45:07,120
र पहाड़ी जी आ गए ह महादेव र पहा जी

2129
02:45:07,120 --> 02:45:11,480
अपनी बात पूरी कर लू आप लोग शांत हो जाए प्लीज थोड़ा सा माता जी ने निष्ठा

2130
02:45:11,480 --> 02:45:14,360
पूर्वक जिसको दूध पिलाया है वो

2131
02:45:14,360 --> 02:45:19,160
चर्चा में आए हमारा नंबर नोट कर ले वहां पर एक फॉर्म मिलेगा वो फॉर्म भरे

2132
02:45:19,160 --> 02:45:23,720
और वह चर्चा में आए नंबर है

2133
02:45:23,720 --> 02:45:26,960
से

2134
02:45:26,960 --> 02:45:31,600
74836 जी पड़ी जय श्री राम

2135
02:45:31,600 --> 02:45:35,800
अभी मैंने आपको अमित दास जी के साथ लड़ते हुए देखा दो दिन से देख रहा हूं मैं देख रहा हूं

2136
02:45:35,800 --> 02:45:39,800
किस तरह से बदतमीजी कर रहा था शल जी मैं आपसे अलग

2137
02:45:39,800 --> 02:45:43,840
से बात करूंगा अ ये वाली बात दोबारा मत मुझे कुछ देर बात करनी है ना वो लिक था

2138
02:45:43,840 --> 02:45:47,920
नहीं वरना मैं भी आपके साथ आता वभी

2139
02:45:47,920 --> 02:45:52,200
बात नहीं आप अपनी बात बोले बोलिए

2140
02:45:52,200 --> 02:45:56,520
मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसके पीछे एक रीजन है मैं बताऊंगा मैं गया था उधर

2141
02:45:56,520 --> 02:46:01,240
मैं ऐसा एक्चुअली हुआ कि चुनौती जब देने लगे कि निष्ठा पूर्वक वाला ना

2142
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तो भीतर का सनातन जाग उठता है

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तो होके आए अकेले ु अब गुरुकुल

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गोविंद जी को तो ब्लॉक ही कर दिया उन लोगों ने अभ ये उनका भय है कि

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क्या है मेरे समझ में नहीं आया क्यों गुरुकुल गोविंद जी ने गाली वाली दी है

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क्या नहीं अब वो करते सि

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मैं एक तंज कस रहा हूं मैं एक तंज कस र हूं

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तो कल भी थोड़ी देर थोड़ी बात हुई

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थी आज भी और वही शास्त्रों के ऊपर ही बात हो रही थी हमारी ज्यादा

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ऐसा कुछ नहीं है और एक एक ही चीज को बार-बार घुमा के कह रहे थे इसलिए मेरे को थोड़ा क्रोध

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आ गया कितनी बार कर र मेरा मुंह थ गया बोलते बोलते आप

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लोग देखते क्यों देखा ही मत करो परेशान होते

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हो एक ही चीज बार कोई पूछेगा तो सही थोड़ी

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ना है बता चुका हूं मैं उस चीज को मैं चलिए आपको यहां देख

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के अच्छा लगा वैसे चलिए ठीक है

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अब आज की चर्चा को पूरा करते हैं विशेष संदेश इसमें क्या है

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हां यह देखिए यह भी हम अगली बार इसका चिट्टा खोलेंगे

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तैमूर लंग को जो राज करने

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का वो था ना वरदान तैमूर लंग को मुगल जो आक्रांता

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था वो वरदान कबीर नहीं दिया था आप सोच लो

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अक्रांता को वरदान हा कबीर नहीं दिया

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था

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कब ठीक है अब हम लोग अगली बार आते हैं आज की लाइव पूरी करते

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हैं आने के लिएने सभी को जय श्री रामय श्री राम

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जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो

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गुरुदेव i

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[संगीत]
