1
00:00:01,870 --> 00:00:07,870
[संगीत]

2
00:00:08,840 --> 00:00:12,160
सभी को जय श्री

3
00:00:12,160 --> 00:00:16,160
राम और पलेट को लेकर के

4
00:00:16,160 --> 00:00:20,320
काफी शिकायत हैं शिवांश भैया

5
00:00:20,320 --> 00:00:26,320
लेट भाई पूरा प्रयास करते हैं क्या

6
00:00:26,640 --> 00:00:31,840
बताए आखिरी मिनट तक कोई ना कोई कार्य कर रहे होते हैं

7
00:00:31,840 --> 00:00:36,040
तो आज हम लोग एक और बहुत बड़े खुलासे के साथ आए

8
00:00:36,040 --> 00:00:40,280
हैं एक विशेष ऐसी वार्ता जो कहीं ना कहीं हम लोगों से

9
00:00:40,280 --> 00:00:45,120
अछूती रह गई है और जिस पर बात करना बहुत आवश्यक है

10
00:00:45,120 --> 00:00:51,120
जय श्री राम पैरा सेटा मल

11
00:00:53,440 --> 00:00:58,040
जी लुकिंग फायर तो हम लोगों से एक बहुत विशेष

12
00:00:58,040 --> 00:01:03,400
बात जो है अछूती रह गई है आज हम उस पर भी चर्चा करेंगे

13
00:01:03,400 --> 00:01:07,480
और यदि कोई अपने मत

14
00:01:07,480 --> 00:01:11,600
को स्थापित करते करने हेतु चर्चा के लिए आना चाहता है तो वो

15
00:01:11,600 --> 00:01:16,680
भी आ सकता है कुछ देर के बाद हम लोग

16
00:01:16,680 --> 00:01:22,680
अ लिंक देंगे आने के लिए

17
00:01:23,360 --> 00:01:27,480
और तो सबसे पहली बात है एक एक बार एक अमित दास नाम

18
00:01:27,480 --> 00:01:31,600
का व्यक्ति आया था आर समाज की तरह

19
00:01:31,600 --> 00:01:36,200
तत्वदर्शी जो जेल धाम निवासी हैं तथागत

20
00:01:36,200 --> 00:01:40,240
उनकी तरफ से तो उससे एक चर्चा हुई थी जिसका उत्तर उसने

21
00:01:40,240 --> 00:01:45,240
अंततोगत्वा यह दिया था कि उसको नहीं पता है

22
00:01:45,240 --> 00:01:49,320
और वह प्रश्न यह था कि यदि

23
00:01:49,320 --> 00:01:53,640
जो इनके जो संत है तथाकथित

24
00:01:53,640 --> 00:01:57,880
वो इस समय जो जेल में है तो उनके नाम से जो बाहर

25
00:01:57,880 --> 00:02:02,640
जो नाम दीक्षा बाटी जा रही है लोगों को और जो एलईडी

26
00:02:02,640 --> 00:02:06,680
में बिठा कर के जो इत्यादि इत्यादि ये सब

27
00:02:06,680 --> 00:02:09,040
कार्य हो रहे हैं क्या

28
00:02:09,040 --> 00:02:13,320
एलईडी में जिसको दीक्षा लेनी होती है वो एलईडी के थ्रू दीक्षा ले लेता

29
00:02:13,320 --> 00:02:17,440
है तो यह शास्त्र सम्मत नहीं है उसने कहा

30
00:02:17,440 --> 00:02:21,440
था कि यह जो है हमारे गुरु सम्मत है पहली बात तो

31
00:02:21,440 --> 00:02:25,480
वही बात आ जाती है कि गुरु सम्मत यदि

32
00:02:25,480 --> 00:02:29,480
शास्त्र सम्मत नहीं है तो फिर वो माना कैसे जाएगा वो वाली बात आ जाती है

33
00:02:29,480 --> 00:02:34,040
मगर गुरु सम्मत भी है कि नहीं यह भी आज हम लोग बात

34
00:02:34,040 --> 00:02:40,040
करेंगे हरिशंकर द्विवेदी जी जय श्री राम जी

35
00:02:40,040 --> 00:02:45,040
तो पहली बात तो यह हो गई और

36
00:02:45,040 --> 00:02:49,240
कुछ और भी आवश्यक तथ है तो सबसे पहली

37
00:02:49,240 --> 00:02:53,320
बात है कि यदि रामपाल

38
00:02:53,320 --> 00:02:58,000
दास जी के नाम से जो नाम दान केंद्र चल रहे

39
00:02:58,000 --> 00:03:02,360
हैं वह शास्त्र सम्मत है तो हमें इस बात का

40
00:03:02,360 --> 00:03:07,280
शास्त्रोक्त प्रमाण प्राप्त होना चाहिए कि जो

41
00:03:07,280 --> 00:03:11,480
गुरु है वह कहीं और है उसको एक महीने के बाद

42
00:03:11,480 --> 00:03:15,560
यह ज्ञात हो रहा है कि आज उसने किसी को दीक्षा दी है जिस समय दीक्षा ली जा रही

43
00:03:15,560 --> 00:03:19,560
दी जा रही है उस समय गुरु को पता ही नहीं कि मैं इस समय किसी को दीक्षा दे रहा हूं

44
00:03:19,560 --> 00:03:23,800
हो सकता है व उस समय भोजन कर रहे हो हो सकता है वो उस समय

45
00:03:23,800 --> 00:03:24,300
सच

46
00:03:24,200 --> 00:03:29,080
में बैठे हो हो सकता है वो उस समय कोई उनसे

47
00:03:29,080 --> 00:03:33,280
जो जेल हो उसके अंदर की गतिविधिया आप जानते ही है उनसे कोई ऐसी

48
00:03:33,280 --> 00:03:37,840
बात हो गई हो जिसके कारण जो है वहां का प्रशासन उन्हें प्रताड़ित कर रहा हो

49
00:03:37,840 --> 00:03:41,880
है ना उन्हें दंड भुगतना पड़ रहा हो और उस समय यहां पर जो है

50
00:03:41,880 --> 00:03:46,120
दीक्षा ली और दी मतलब दीक्षा दी जा रही है उनके नाम से

51
00:03:46,120 --> 00:03:50,560
ये कितना शास्त्रोक्त है दूसरी बात हम लोग एक बात

52
00:03:50,560 --> 00:03:54,560
पूर्व पक्ष के रूप में यहां पर ये रख सकते कि भाई नहीं जो गुरु है भगवान के

53
00:03:54,560 --> 00:03:58,960
तुल्य होता है और उस तरीके से देखा जाए तो गुरु में दैवीय

54
00:03:58,960 --> 00:04:03,800
शक्तियां होती है वो कहीं पर है और फिर

55
00:04:03,800 --> 00:04:07,960
भी जो है वो

56
00:04:07,960 --> 00:04:12,000
शिष्य को जो है वह जान रहा है कि मैं इस समय दे रहा हूं कि नहीं दे रहा हूं

57
00:04:12,000 --> 00:04:16,560
मेरा कौन सा शिष्य बन रहा है मगर इस पर अमित दास जी का कहना था कि

58
00:04:16,560 --> 00:04:20,560
भाई हमारी तरफ से हर हफ्ते जो है हर महीने पूरा का पूरा

59
00:04:20,560 --> 00:04:24,720
मान लीजिए इनकी तरफ से य कहा जाता है बहुत लोग जुड़ रहे हैं तो अगर एक

60
00:04:24,720 --> 00:04:29,360
महीने में 10 20 हजार लोग भी अगर जुड़े हैं रामपाल से नए

61
00:04:29,360 --> 00:04:33,440
तो उन सबका खाता खतौनी हर महीने जाता है वहां पर और उनको दिखा

62
00:04:33,440 --> 00:04:37,440
दिया जाता है अब सबसे पहली बात है कि इस संबंध

63
00:04:37,440 --> 00:04:39,440
में क्या रामपाल जी ने कोई

64
00:04:39,440 --> 00:04:43,480
ऐसा वक्तव्य जारी किया है ठोस कि भाई मेरे नामदान केंद्र

65
00:04:43,480 --> 00:04:47,520
के द्वारा जो नाम दीक्षा दी जा रही है मेरे अनुमति से दी जा रही है तो

66
00:04:47,520 --> 00:04:51,600
हो सकता है दिया हो मगर उसने य हमको नहीं बताया कि

67
00:04:51,600 --> 00:04:55,760
ऐसा कोई वक्तव्य उनका है कोई ऐसा वीडियो है अब बात दूसरी

68
00:04:55,760 --> 00:04:59,800
आ जाती है क्या उन्होंने किसी को अपनी ओर से प्रामाणिक बात बोलने वाला

69
00:04:59,800 --> 00:05:04,040
उत्तराधिकारी घोषित किया है तो ऐसा भी कोई

70
00:05:04,040 --> 00:05:08,200
हमें प्राप्त नहीं है तो बात य आ जाती

71
00:05:08,200 --> 00:05:12,560
उनके नाम से जोय नाम दान केंद्र चल रहे हैं क्या वह

72
00:05:12,560 --> 00:05:17,240
वास्तविकता में रामपाल दास जी की ही कही हुई बातें

73
00:05:17,240 --> 00:05:21,280
बता रहे हैं या फिर कुछ और बता

74
00:05:21,280 --> 00:05:25,280
रहे हैं या फिर व कुछ ऐसा बोल रहे हैं जो रामपाल दास

75
00:05:25,280 --> 00:05:31,280
जी ने स्वीकार नहीं किया है तो यह सारी बातें जो है

76
00:05:31,600 --> 00:05:35,800
विचारणीय है बहुत ज्यादा क्योंकि ऐसी भी खबरें सुनाई देती है कहीं

77
00:05:35,800 --> 00:05:39,880
कहीं से कि रामपाल दास जी को उन्हीं के जो प्रियजन है उन्होंने ही

78
00:05:39,880 --> 00:05:44,160
अंदर फसा रखा है और वह नहीं चाहते हैं कि वह बाहर

79
00:05:44,160 --> 00:05:48,400
आए जिससे कि इनका जो कार्य चल रहा है सुचारू

80
00:05:48,400 --> 00:05:52,400
रूप से उसमें कोई बाधा है ऐसा भी सामने आ रहा

81
00:05:52,400 --> 00:05:56,480
है तो पहली बात इस बारे में कोई शास्त्रोक्त हमें

82
00:05:56,480 --> 00:06:00,560
संदर्भ प्राप्त नहीं है कि गुरु के बिना ही गुरु

83
00:06:00,560 --> 00:06:04,760
की अनुमति के बिना ही गुरु की स्वीकार्यता के बिना ही किसी को उन्होंने

84
00:06:04,760 --> 00:06:08,840
अपना शिष्य बना लिया गुरु शिष्य गुरु

85
00:06:08,840 --> 00:06:13,520
शिष्य का रिलेशनशिप है गुरु शिष्य का संबंध

86
00:06:13,520 --> 00:06:17,560
है केवल शिष्य का गुरु के प्रति नहीं है गुरु का भी शिष्य के

87
00:06:17,560 --> 00:06:21,600
प्रति है तो यदि गुरु की एक रिकॉर्ड

88
00:06:21,600 --> 00:06:26,360
की हुई जो बात है उसी से सब कुछ हो जाना है

89
00:06:26,360 --> 00:06:30,760
तो उससे का मैं अभी कहूंगा तब इसको आप चलाइए मैं भी

90
00:06:30,760 --> 00:06:35,280
कहूं तो एक सबसे बड़ी बात य आ जाती है कि क्या रामपाल

91
00:06:35,280 --> 00:06:39,280
दास जी के नाम से जो नामदान केंद्र चल रहे हैं क्या वह रामपाल दास

92
00:06:39,280 --> 00:06:43,520
जी की सहमति से चल रहे हैं इसके बारे में कोई शास्त्रोक्त बात

93
00:06:43,520 --> 00:06:47,680
नहीं है अगर रामपाल दास जी का कोई ठोस वक्तव्य हमें प्राप्त

94
00:06:47,680 --> 00:06:51,800
नहीं है तो फिर यह कैसे माना जाए कि उनके द्वारा

95
00:06:51,800 --> 00:06:55,800
जो जो किताबें जो हमें मिल रही है वोह सत्य

96
00:06:55,800 --> 00:06:59,840
है यह भी बात खड़ी हो जाती है वो जो साहित्य है व है

97
00:06:59,840 --> 00:07:03,960
कि नहीं भाई जो व्यक्ति झूठा झूठ बोल सकता है झूठ फसा सकता है तो कुछ भी कर सकता

98
00:07:03,960 --> 00:07:08,200
है कुछ भी कहीं पर भी झूट मिला सकता है रामपाल दास जी के नाम से कितनी किताबें

99
00:07:08,200 --> 00:07:12,600
सत्य कितनी किताबें सत्य नहीं है ये सब चीजें फिर विचार हो जाती

100
00:07:12,600 --> 00:07:16,840
अब इसमें एक पक्ष ये सामने आता है कि रामपाल दास

101
00:07:16,840 --> 00:07:20,840
जी के द्वारा जो दीक्षित जो महकमा है उसमें ही इस बात को

102
00:07:20,840 --> 00:07:24,840
लेकर के दुराव है जैसे स्न है ना इकोन में भी इस बात

103
00:07:24,840 --> 00:07:28,520
का दुराव है कि भाई तुम गुरु कैसे बन रहे हो या तुम किसी को नाम दीक्षा कैसे दे

104
00:07:28,520 --> 00:07:32,840
रहे हो कुछ कु लोग ये कह रहे कि नहीं नहीं गुरु तो वही रहेंगे कौन

105
00:07:32,840 --> 00:07:36,920
शील प्र उपाद तो इसी प्रकार से यहां पर भी दो महकमे बन चुके

106
00:07:36,920 --> 00:07:40,960
हैं एक महकमा है जो यह कह रहा है कि नहीं नहीं उनके नाम से जब तक वो

107
00:07:40,960 --> 00:07:45,200
है तब तक जो है दीक्षा नहीं दी जा सकती नाम दान नहीं दिया जा सकता है और

108
00:07:45,200 --> 00:07:49,720
दूसरा महकमा है जय श्री राम प्यारी मना

109
00:07:49,720 --> 00:07:53,720
और दूसरा महकमा है जो यह कह रहा है कि नहीं नहीं उनके नाम से नामदान केंद्र

110
00:07:53,720 --> 00:07:57,720
चल रहे हैं पहली बात तो ये जो पहला वाला पक्ष है जो यह कह रहा है

111
00:07:57,720 --> 00:08:02,560
कि भाई जो शास्त्रों के आधार पर तो उसकी बात सही है गुरु है

112
00:08:02,560 --> 00:08:06,600
गुरु को पता ही नहीं चल रहा है और यहां पर गुरु किसी का शिष्य प्राप्त कर रहा

113
00:08:06,600 --> 00:08:10,640
है शिष्य उनके जानकारी के बाहर शिष्य प्राप्त कर रहा

114
00:08:10,640 --> 00:08:14,880
है तो ये बहुत बड़ा ड्रॉ बैक है जिस पर कोई भी व्यक्ति

115
00:08:14,880 --> 00:08:18,960
हमारी बातों को मानता है नहीं मानता वो एक अलग बात है मगर उसे इस बात

116
00:08:18,960 --> 00:08:23,200
को लेकर के हमारा जो दर्शन है हमारा जो सिद्धांत

117
00:08:23,200 --> 00:08:27,320
है उसको वो मानता है नहीं मानता मगर यदि कोई रामपाल के प्रति भी आस्थान वित

118
00:08:27,320 --> 00:08:31,360
है उसको भी इस बात पर प्र करना चाहिए कि मैं रामपाल

119
00:08:31,360 --> 00:08:36,200
से जुड़ रहा हूं तो रामपाल से दीक्षा ले रहा हूं या फिर किसी

120
00:08:36,200 --> 00:08:40,400
एलईडी से टीवी से किससे दीक्षा ले रहा

121
00:08:40,400 --> 00:08:43,720
हूं और यदि इस तरीके से एलईडी से कोई शब्द

122
00:08:43,720 --> 00:08:48,320
प्राप्त कर लेने पर यदि कोई वो बन जाता है शिष्य बन जाता है

123
00:08:48,320 --> 00:08:52,360
तो फिर इस तरीके से तो यदि आप गीता प्रेस की छपी हुई किताबें पढ़ रहे

124
00:08:52,360 --> 00:08:56,800
हैं तो गीता प्रेस को छापने वाला या गीता उसका लेखक आपका गुरु बन गया

125
00:08:56,800 --> 00:09:00,880
फिर उसके प्रति गुरु का धर्म नि भाइए क नहीं मार ये वाली बात

126
00:09:00,880 --> 00:09:04,960
आ जाती है तो अब

127
00:09:04,960 --> 00:09:09,080
इस बारे में रामपाल दास जी का एक सनसनी खेज वीडियो हमें प्राप्त

128
00:09:09,080 --> 00:09:13,080
हो गया है जिसका आज हम खुलासा करने वाले हैं कि क्या शास्त्र

129
00:09:13,080 --> 00:09:17,320
तो नहीं मानते मगर क्या रामपाल दास इस बात को मानते हैं कि गुरु

130
00:09:17,320 --> 00:09:21,640
आमने सामने नहीं है उसको चार महीने बाद पता चलेगा एक महीने बाद पता चलेगा

131
00:09:21,640 --> 00:09:25,760
फिर भी जो है वहां नाम दन हो गया नाम दीक्षा हो गई किसने

132
00:09:25,760 --> 00:09:30,400
दी अरे भैया रामपाल दास जी से ली कहां से ली एलईडी से ली सीडी से

133
00:09:30,400 --> 00:09:36,400
तो इनको जरा वो वीडियो दिखाइए क्या कहना है इस बारे में रामपाल दास जी

134
00:09:46,360 --> 00:09:50,680
का गुरुजी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने

135
00:09:50,680 --> 00:09:54,880
सामने मंत्र देवे गुरुजी बैठे अमेरिका में

136
00:09:54,880 --> 00:09:55,380
वो

137
00:09:55,160 --> 00:09:59,600
तो बैठे अमेरिका में महात्मा जी और नाम देव थर्ड पर्सन और गुरु जी वो

138
00:09:59,600 --> 00:10:02,800
य बहुत बढ़िया बात भाई फेरे हु

139
00:10:02,800 --> 00:10:07,080
की सेत और पति कोई और ये कभी आज तक सुना है किसी

140
00:10:07,080 --> 00:10:11,240
ने अब जो और संत अभी आए भक्त आत्मा हमारे

141
00:10:11,240 --> 00:10:15,440
पास परिभाषा प्रभु की सुनक वो कहते हैं जी वो

142
00:10:15,440 --> 00:10:19,520
तो पहले तो ऐसा किया करते थे अब तो स्वयं ही क्रिया बताते

143
00:10:19,520 --> 00:10:23,600
हैं अब किसी के माध्यम से नहीं बताते उनको पता लग गया होगा कि ये

144
00:10:23,600 --> 00:10:27,600
तो सब ऐसे ऐसे कहानी हो रही है और फिर य तो मर्यादा

145
00:10:27,600 --> 00:10:31,800
भंग हो रही है फिर वो स्वयं कया

146
00:10:31,800 --> 00:10:36,640
गुरुजी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र देवे

147
00:10:36,640 --> 00:10:41,080
बस इतना काफी है गुरु जी तो वह है

148
00:10:41,080 --> 00:10:45,320
जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने मंत्र

149
00:10:45,320 --> 00:10:49,320
भेज दे हां गॉड इज वन कबीर जी अभी

150
00:10:49,320 --> 00:10:54,320
अब आपको लिंक दे रहे हैं हमारी बात जरा पूरी हो जाए तब तक आप थोड़ा धैर

151
00:10:54,320 --> 00:10:58,400
रखिए गुरु जी तो वो है जो प्रैक्टिकल करवावे और आमने

152
00:10:58,400 --> 00:11:03,040
सामने मंत्र दे तो यहां से बात इनकी क्लियर हो गई है

153
00:11:03,040 --> 00:11:07,120
अब ये जो वीडियो जिस सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन से मिला

154
00:11:07,120 --> 00:11:12,320
है मैं उसके बारे में बता दूं पवन दास नाम का इनका एक शिष्य है

155
00:11:12,320 --> 00:11:16,440
जो इस बात को लेकर आवाज उठा रहा है उसका कहना है कि जब तक गुरुदेव

156
00:11:16,440 --> 00:11:18,040
गुरु जिंदा है स

157
00:11:18,040 --> 00:11:22,440
शरीर यहां पर प्राप्त है तब तक जो है उनके नाम से नाम दन केंद्रों में एलईडी

158
00:11:22,440 --> 00:11:26,880
के द्वारा जो नाम दान दिया जा रहा है वो उचित नहीं है वो

159
00:11:26,880 --> 00:11:31,040
शास्त्र उचित नहीं है इस अंश में केवल इस अंश में वो व्यक्ति सही

160
00:11:31,040 --> 00:11:35,040
कह रहा है कि गुरु को पता ही नहीं है

161
00:11:35,040 --> 00:11:39,040
वो जेल में विवश है वो अपनी दिन गिन रहा है वहां पर दिन काट रहा है और यहां पर

162
00:11:39,040 --> 00:11:43,400
उसके नाम से जो है नामदान केंद्र चल रहे है जबकि गुरु ने किसी को अपना उत्तराधिकारी

163
00:11:43,400 --> 00:11:47,440
घोषित नहीं किया है इसमें एक बात और आ जाती है कि जो उनकी पैरवी कर

164
00:11:47,440 --> 00:11:51,600
रहा है जो उनसे मिलता जुलता उसका आदेश आता है तो गुरु ने क्या कोई ऐसा

165
00:11:51,600 --> 00:11:55,600
वक्तव्य दिया है कि मुझसे यह फलाना व्यक्ति जो मिलता है वो मेरी ओर से

166
00:11:55,600 --> 00:12:00,120
वक्तव्य देगा अभी गु गुरु इनके जो गुरु हैं

167
00:12:00,120 --> 00:12:04,240
वह तो उनसे तो मिलने वाले कई लोग उनका वकील भी है वो जब

168
00:12:04,240 --> 00:12:08,280
कभी अगर मान लो पेशी पर आते होंगे वहां से जेल धाम से निकल कर

169
00:12:08,280 --> 00:12:12,320
के और न्यायालय धाम तक तो जब वह दोनों एक धाम से दूसरे

170
00:12:12,320 --> 00:12:16,480
धाम आते होंगे तो उनको कुछ पुलिस वाले साथ में पकड़ के लेकर आते होंगे कि भाग ना जाए

171
00:12:16,480 --> 00:12:21,280
दौड़ ना लगा ले तो क्या

172
00:12:21,280 --> 00:12:25,400
जो साथ में चल रहे पुलिस वाले हैं जो उनको उनके साथी दिख रहे हैं

173
00:12:25,400 --> 00:12:29,560
क्या वो लोग भी इनके गुरु के नाम से बात बोल

174
00:12:29,560 --> 00:12:33,080
कुछ नहीं बोल सकते तो उनका एक ठोस वक्तव्य होना चाहिए

175
00:12:33,080 --> 00:12:37,160
कि मेरी ओर से कौन मेरा उत्तराधिकारी है जिसकी बात को मेरी तरफ से प्रमाण

176
00:12:37,160 --> 00:12:41,240
मान लिया जाए कि यह जो है गुरु ने ही बोली है और इसी

177
00:12:41,240 --> 00:12:45,240
व्यवस्था को गुरु परंपरा भी कहते हैं है ना गुरु अपना

178
00:12:45,240 --> 00:12:49,280
उत्तराधिकारी घोषित कर देते और वह फिर अपना उत्तराधिकारी घोषित करते

179
00:12:49,280 --> 00:12:53,320
वो अपना तो वो उन्होंने क्या बोला था यह हमें प्रामाणिक रूप से किसकी बात

180
00:12:53,320 --> 00:12:58,160
माननी पड़ेगी जिसको उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है

181
00:12:58,160 --> 00:13:02,200
अब इस जो पवन दास है इनको गुरु द्रोही कहने वाला

182
00:13:02,200 --> 00:13:06,360
एक वीडियो वह जो धाम है जेल धाम वहां से और प्रसारित

183
00:13:06,360 --> 00:13:10,520
होता है कि भाई उन्होंने जो है इनको गुरु द्रोही कहा

184
00:13:10,520 --> 00:13:14,600
है और गुरु द्रोही कहते हुए यह भी कहा है कि वोह लोग गलत बोल रहे

185
00:13:14,600 --> 00:13:17,680
हैं जो यह कहते हैं

186
00:13:17,680 --> 00:13:21,720
कि एलईडी के माध्यम से दीक्षा नहीं होगी ये इस तरह का एक

187
00:13:21,720 --> 00:13:25,800
वीडियो प्राप्त है उनका जेल से मगर आप ध्यान से जब

188
00:13:25,800 --> 00:13:29,920
उस वीडियो को देखेंगे तो उस पर कई सारे प्रश्न उठ जाते हैं उस वीडियो पहली

189
00:13:29,920 --> 00:13:33,920
बात यह है कि जब यह वाला प्रसंग आता है कि

190
00:13:33,920 --> 00:13:38,080
वो लोग गलत है जो यह कह रहे हैं वहां पर आप देखिएगा

191
00:13:38,080 --> 00:13:42,280
कि उनकी लिप्सिंग जो है मैच नहीं करेगी उन शब्दों से जो बोल रहे

192
00:13:42,280 --> 00:13:46,840
हैं तो इससे षड्यंत्र का और पर्दा फास हो जाता है

193
00:13:46,840 --> 00:13:48,280
क्योंकि वो जो लिप्सिंग है

194
00:13:48,280 --> 00:13:52,480
मुझे ऐसा लगता है आप लोग भी उस वीडियो को सर्च करेंगे मिल जाएगा जेल धाम से जहा

195
00:13:52,480 --> 00:13:56,600
पवन दास के लिए बोला उन्होंने कि भाई यह पवन दास गुरु द्रोही है यह काल

196
00:13:56,600 --> 00:14:00,680
करवा रहा है इस पर ध्यान मत दो यह सब बातें उन्होने और फिर

197
00:14:00,680 --> 00:14:04,760
बीच में एक जगह उन्होने य कहा कि भाई वो लोग गलत है जो यह बोलते एलईडी के माध्यम से

198
00:14:04,760 --> 00:14:09,080
दीक्षा नहीं हो सकती है मगर यहां पर बात य सामने आती

199
00:14:09,080 --> 00:14:13,240
कि जब व यह वाली बात आती तो वहां हल्का सा कट दिखाई देता है हल्का सा

200
00:14:13,240 --> 00:14:17,640
एक कट सा समझ में आएगा आपको एडिट किया हुआ वीडियो और

201
00:14:17,640 --> 00:14:21,720
जो उनकी लिप्सिंग है वह मैच नहीं करेगी इस लाइन के साथ

202
00:14:21,720 --> 00:14:25,720
कि वह लोग गलत है जो यह

203
00:14:25,720 --> 00:14:29,880
बोलते हैं कि एलईडी के माध्यम से दीक्षा नहीं

204
00:14:29,880 --> 00:14:34,000
इतनी जगह पर उनकी लिप्सिंग आपको मैच करती हुई नहीं दिखाई देगी मगर हमने जो वीडियो आपको

205
00:14:34,000 --> 00:14:38,280
अभी दिखाया और सुनाया है यह वीडियो पवन दास के द्वारा भी

206
00:14:38,280 --> 00:14:42,400
डाला गया है किसी चैनल पर कहीं पर

207
00:14:42,400 --> 00:14:46,400
और साथ ही साथ यह वीडियो जो है इसमें बिल्कुल स्पष्ट है क्लियर सामने

208
00:14:46,400 --> 00:14:50,520
से आपको दिखाई दे रहा है वहां पर तो इनके जो परमेश्वर है इनके

209
00:14:50,520 --> 00:14:54,560
अनुसार परमेश्वर है वो परेशान है दिख रहे हैं दया है

210
00:14:54,560 --> 00:14:59,040
यह है वो सब आपको पता चलेगा जेल धाम से जब वो फोन पर बात करते हुए दिखेंगे

211
00:14:59,040 --> 00:15:03,200
यहां पर वो चौड़े में बैठे हैं उन पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं है और उनका बिल्कुल लिप्सिंग

212
00:15:03,200 --> 00:15:03,700
आपको

213
00:15:03,360 --> 00:15:07,360
समझ में आएगी कि जो आवाज आपको सुनाई दे रही है वही इनके होठ भी

214
00:15:07,360 --> 00:15:11,680
उसी प्रकार से हरकत कर रहे हैं तो यह एक बहुत

215
00:15:11,680 --> 00:15:15,800
बड़ा मामला है कि इनकी ओर से यह

216
00:15:15,800 --> 00:15:19,800
जो नाम दाम नाम दान केंद्र चल रहे हैं वास्तविकता में रामपाल के

217
00:15:19,800 --> 00:15:23,880
द्वारा ही चल रहे हैं या फिर उनके नाम का उपयोग करते हुए अन्य लोग उस

218
00:15:23,880 --> 00:15:27,920
पर जो है अपना काम कर रहे हैं अब

219
00:15:27,920 --> 00:15:31,960
इसी मामले में एक बात और मैं याद दिला दूं कि ये जो

220
00:15:31,960 --> 00:15:36,280
तत्वदर्शी शब्द है इसकी बड़ी बात होती है

221
00:15:36,280 --> 00:15:40,360
इस बारे में इनका यह कहना होता है कि तत्वदर्शी

222
00:15:40,360 --> 00:15:44,360
चा 34 में भगवत गीता में कहा गया कि तू विभिन्न यज्ञों

223
00:15:44,360 --> 00:15:48,360
के ज्ञान को तत्वदर्शी से लेने जा वोह

224
00:15:48,360 --> 00:15:52,560
बात अलग है कि यज्ञ को इन्होंने कह दिया यज्ञों से मुक्ति

225
00:15:52,560 --> 00:15:56,600
प्राप्त नहीं होती यह दिखा दीजिए यज्ञों से

226
00:15:56,600 --> 00:16:02,600
मुक्ति प्राप्त नहीं होती दूसरा तीसरा पेज है तीसरा

227
00:16:02,760 --> 00:16:08,400
चौथा गरिमा गीता

228
00:16:08,400 --> 00:16:12,480
की इन्होंने मेंशन कर दिया यज्ञ और उसमें यह भी मेंशन

229
00:16:12,480 --> 00:16:17,080
कर दिया कि सारे यज्ञ उसमें ज्ञान यज्ञ भी है और 433

230
00:16:17,080 --> 00:16:21,280
में कहा जा रहा है कि भाई ज्ञान यज्ञ की बात हो रही है और फिर 434

231
00:16:21,280 --> 00:16:25,360
में कहा है भगवान ने कि वो जो ज्ञान यज्ञ उसका ज्ञान

232
00:16:25,360 --> 00:16:31,360
लेने के लिए तू तत्वदर्शी के पास जा

233
00:16:50,760 --> 00:16:55,520
तो सबसे पहली बात तो ये आ जाती है कि

234
00:16:55,520 --> 00:16:59,520
वहां पर उन्होंने पूर्ण परमात्मा के नहीं यज्ञ जो ज्ञान

235
00:16:59,520 --> 00:17:03,720
यज्ञ है उसकी बात की है ज्ञान और अगर ज्ञान यज्ञ के

236
00:17:03,720 --> 00:17:07,840
अनु ज्ञान यज्ञ के द्वारा इन्होंने खुद स्वीकार किया है कि मुक्ति

237
00:17:07,840 --> 00:17:12,000
संभव नहीं है मोक्ष नहीं है

238
00:17:12,000 --> 00:17:16,120
तो जब मोक्ष नहीं है ज्ञान य के द्वारा तो ज्ञान य का ज्ञान

239
00:17:16,120 --> 00:17:20,480
देने वाला भी पूर्ण जो पूर्ण

240
00:17:20,480 --> 00:17:23,800
प्रामाणिक आचार्य या गुरु नहीं हो सकता

241
00:17:23,800 --> 00:17:27,880
दूसरी बात इन्होंने तत्वदर्शी की बात कही है वहां पर

242
00:17:27,880 --> 00:17:33,880
जी आपको पेज नहीं मिल रहा है क्या वो यज्ञ

243
00:17:34,360 --> 00:17:40,360
वाला तीन नंबर पेज

244
00:17:48,200 --> 00:17:53,680
देखिए हेडलाइन में ही लिखा होगा

245
00:17:53,680 --> 00:17:59,680
वो बड़ा करिए थोड़ा

246
00:18:02,880 --> 00:18:07,640
और नीचे

247
00:18:07,640 --> 00:18:13,640
चलिए और और नीचे चलिए अगला

248
00:18:13,800 --> 00:18:16,280
पेज

249
00:18:16,280 --> 00:18:22,280
ीरे नीचे

250
00:18:22,600 --> 00:18:26,680
चलिए और नीचे चलिए ये हम लोग पिछली वाली लाइव

251
00:18:26,680 --> 00:18:32,680
में दिखा भी चुके हैं और नीचे चलिए अन्य

252
00:18:35,200 --> 00:18:39,640
प्रमाण ना पेज नंबर अभी याद नहीं है पिछले

253
00:18:39,640 --> 00:18:43,880
पिछले वाले उसमें हमने दिखाया था कि वेद के

254
00:18:43,880 --> 00:18:49,880
द्वारा जो है आपको मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो

255
00:18:50,240 --> 00:18:54,560
सकती अभी पेज नंबर ढूंढना पड़ जाएगा

256
00:18:54,560 --> 00:19:00,560
एक मिनट

257
00:19:06,480 --> 00:19:10,640
4 नंबर निकालिए 39

258
00:19:10,640 --> 00:19:14,840
नंबर 39 नंबर पेजय

259
00:19:14,840 --> 00:19:19,200
यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति नहीं है

260
00:19:19,200 --> 00:19:23,800
अच्छा दूसरी बात एकय बात और कहते हैं यज्ञों का लाभ सांसारिक सुविधाए

261
00:19:23,800 --> 00:19:29,000
मुक्ति नहीं है मगर दूसरी और यह भी कहते हैं कि जो व्यक्ति

262
00:19:29,000 --> 00:19:33,720
इसका मतलब यह हुआ कि तत्वदर्शी जो इनके अनुसार है वह

263
00:19:33,720 --> 00:19:37,880
सांसारिक नहीं बल्कि मोक्ष की व्यवस्था करता सांसारिक चीजों के लिए यज्ञ बहुत

264
00:19:37,880 --> 00:19:42,000
है मगर यह लोगों को लुभाने के लिए कि देखो हमारे यहां

265
00:19:42,000 --> 00:19:46,080
आओगे तो यह होगा य भंडारा मिलेगा या तुम्हारे जो बेटियों की

266
00:19:46,080 --> 00:19:50,160
शादी हो जाएगी बहुत सस्ते में निपट जाओगे या बिना पैसों

267
00:19:50,160 --> 00:19:54,520
के ही निपट जाओगे तो यह यह देखिए इन्होंने यहां पर

268
00:19:54,520 --> 00:19:58,840
यज्ञ हवन यज्ञ ध्यान यज्ञ प्रणा प्रणाम यज्ञ

269
00:19:58,840 --> 00:20:03,040
ञ कौन सा होता वो नहीं पता और ज्ञान यज्ञ यह यज्ञ पांचों

270
00:20:03,040 --> 00:20:05,320
माने है और पांचों यज्ञों

271
00:20:05,320 --> 00:20:09,480
के ऊपर शीर्षक में इन्होंने कह दिया कि यज्ञों से मुक्त

272
00:20:09,480 --> 00:20:13,800
मुक्ति प्राप्त नहीं होगी मोक्ष प्राप्त नहीं होगा हा पेज नंबर मिल गया

273
00:20:13,800 --> 00:20:17,920
भाई पेज नंबर मिल गया वडी डा द चाहे तो अपना

274
00:20:17,920 --> 00:20:22,160
कमेंट डिलीट कर दीजिए पेज नंबर आपके सामने है

275
00:20:22,160 --> 00:20:26,520
ठीक है मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर

276
00:20:26,520 --> 00:20:32,520
में

277
00:20:32,560 --> 00:20:36,840
तो क्या हुआ कि इन्होंने पांचों यज्ञ माने

278
00:20:36,840 --> 00:20:41,040
यज्ञों से मुक्ति प्राप्त नहीं है वह बात और है यह खुद भी सांसारिक

279
00:20:41,040 --> 00:20:45,120
भोग ही दिलवा हैं य लोगों को अपने से जोड़ने के लिए हमारे शरण में आया तो

280
00:20:45,120 --> 00:20:49,200
उसका स्वास्थ्य ठीक हो गया हमारी शरण में आओगे तो दहेज मुक्त जो है विवाह

281
00:20:49,200 --> 00:20:53,360
होगा हमारी शरण में आओगे तो भंडारा मिलेगा य इनको यह नहीं पता बनारस

282
00:20:53,360 --> 00:20:57,400
में त्रिपति बालाजी में जाने कितने भंडारे लगातार चलते सि तीन दिन भंडारे

283
00:20:57,400 --> 00:21:01,880
नहीं होते लगा तार चलते हैं जाइए और खाइए नाश्ता भी पाइए

284
00:21:01,880 --> 00:21:05,920
दोपहर का भोजन भी पाइए और रात का भोजन भी पाइए बस वो बात और है हम आपकी तरह जो

285
00:21:05,920 --> 00:21:09,960
है यह जो हाथी बैठ के चिल्लाते नहीं है इन चीजों

286
00:21:09,960 --> 00:21:14,640
को है ना जाइए अन्नपूर्णा मंदिर है आइए

287
00:21:14,640 --> 00:21:18,440
दिन और रात वहा पर चल रहा है

288
00:21:18,440 --> 00:21:20,760
भंडारा

289
00:21:20,760 --> 00:21:21,760
अच्छा

290
00:21:21,760 --> 00:21:26,280
तो यह लोग यह दावा करते कि यज्ञों से सांसारिक भोग मिल जाता है मगर

291
00:21:26,280 --> 00:21:30,560
जब धरातल पर बात होती तो यह लोग य दावा करते कि ये जो वैदिक रीति रिवाज

292
00:21:30,560 --> 00:21:34,840
है वैदिक चीजें है इनसे आपको सांसारिक भोग भी प्राप्त नहीं होगा

293
00:21:34,840 --> 00:21:38,920
सांसारिक चीजें भी आपको मिल नहीं पाएंगी तो एक तो यह बात हो गई दूसरी

294
00:21:38,920 --> 00:21:43,280
बात इन्होंने खुद मान लिया यज्ञों से मुक्ति नहीं है और वहां पर चार

295
00:21:43,280 --> 00:21:47,640
चौ में तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान

296
00:21:47,640 --> 00:21:52,480
यज्ञ का ज्ञान दे वो तत्वदर्शी है चार चौ में

297
00:21:52,480 --> 00:21:56,760
और इसका इसका मतलब क्या हुआ जब इन्होंने यह कह दिया यज्ञों से मुक्ति

298
00:21:56,760 --> 00:22:00,880
नहीं है और तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान यज का ज्ञान

299
00:22:00,880 --> 00:22:04,880
दे यानी कि तत्वदर्शी मुक्ति की बात नहीं बता सकता पहली

300
00:22:04,880 --> 00:22:08,880
बात अब दूसरी बात ये आती है कि आगे अगर

301
00:22:08,880 --> 00:22:13,400
मान भी ले तो और इन्होंने उसी उसी के अनुसार उल्टा वृक्ष तो

302
00:22:13,400 --> 00:22:17,440
जब ये ये कह चुके कि यज्ञ से मुक्ति नहीं

303
00:22:17,440 --> 00:22:21,840
है और यह कह चुके कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी

304
00:22:21,840 --> 00:22:26,080
है और तत्वदर्शी कौन है उल्टे वृक्ष की बात करने वाला तो उल्टे वृक्ष

305
00:22:26,080 --> 00:22:30,160
की बात करने वाले के रूप में संत रामपाल इनके तो इन्हीं की

306
00:22:30,160 --> 00:22:34,360
बात के अनुसार वह तत्वदर्शी जो है मोक्ष दायक सिद्ध नहीं होते क्यों क्योंकि यज्ञों

307
00:22:34,360 --> 00:22:36,920
से मुक्ति नहीं मिलती और वह तत्वदर्शी

308
00:22:36,920 --> 00:22:40,960
है तत्वदर्शी कौन है जो यज्ञ की यज्ञ का ज्ञान दे तो पहली

309
00:22:40,960 --> 00:22:45,480
बात तो यह हो गई अब जो

310
00:22:45,480 --> 00:22:49,640
है अब क्या है कि एक प्रामाणिक बात

311
00:22:49,640 --> 00:22:53,880
कर लेते हैं अब हमने भले भले पूछा कि तत्वदर्शी कहां

312
00:22:53,880 --> 00:22:58,040
लिखा है कि वो रामपाल ही है भाई उल्टे वृक्ष की बात तो भगवत गीता

313
00:22:58,040 --> 00:23:02,520
य पीछे रखी है इनको लिखने वाले जो जय दयाल गोविंद का जी हैं

314
00:23:02,520 --> 00:23:06,520
उन्होंने रामपाल दास जी से बहुत साल पहले इसमें

315
00:23:06,520 --> 00:23:10,680
उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दी है तो इनको इनको तत्वदर्शी

316
00:23:10,680 --> 00:23:15,480
क्यों नहीं माना इसमें उन्होंने उल्टे वृक्ष की व्याख्या की है

317
00:23:15,480 --> 00:23:20,240
यह देखिए यह भगवत गीता है और य

318
00:23:20,240 --> 00:23:24,840
देख दिख रहा है उल्टा वक्ष

319
00:23:24,840 --> 00:23:29,400
हा पहली बात तो ये हो गई दूसरी बात हो गई

320
00:23:29,400 --> 00:23:33,560
कि इन्होंने कहा कि भैया हमारे तत्वदर्शी तत्वदर्शी तो इनके लिए

321
00:23:33,560 --> 00:23:37,680
कहीं लिखा नहीं है तत्वदर्शी मगर यह कह

322
00:23:37,680 --> 00:23:41,720
रहे हैं कि यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती है मगर तत्वदर्शी कौन है यह हम

323
00:23:41,720 --> 00:23:45,880
आपको दिखा देते हैं यह शास्त्र है हमारे पास श्रीमद् भागवत

324
00:23:45,880 --> 00:23:50,560
श्रीमद् भागवत स्कन वाला नाम निकल जाता है आदत हो गई है क्योंकि उनका

325
00:23:50,560 --> 00:23:51,920
कई बार पढ़ते शिव विष्णु

326
00:23:51,920 --> 00:23:56,280
में कहां भेद किया है श्रीमद् भागवत है

327
00:23:56,280 --> 00:24:00,200
और उसमें स्कंद नंबर चार

328
00:24:00,200 --> 00:24:04,480
अध्याय 18 श्लोक नंबर तीन इसमें

329
00:24:04,480 --> 00:24:08,800
सीधे-सीधे तत्वदर्शी का उपयोग हुआ है शब्द बिल्कुल उसमें कोई फेर नहीं है

330
00:24:08,800 --> 00:24:12,960
तत्वदर्शी अ उंगली रख ल

331
00:24:12,960 --> 00:24:17,200
पहले ये देखिए यह मेरी

332
00:24:17,200 --> 00:24:21,800
जहां पर उंगली है यहां पर आप लोग देख सकते हैं

333
00:24:21,800 --> 00:24:24,280
तत्वदर्शी

334
00:24:24,280 --> 00:24:28,600
आया तत्वदर्शी भी ठीक है

335
00:24:28,600 --> 00:24:33,880
तो यह तत्वदर्शी कहा जा रहा है किसको कहा जा रहा है यहां

336
00:24:33,880 --> 00:24:38,160
पर स्कंद चार श्रीमद् भागवत स्कंद चार

337
00:24:38,160 --> 00:24:42,720
और अध्याय 18 और श्लोक

338
00:24:42,720 --> 00:24:46,800
तीन तत्व दर्शी मुनियों ने इस लोक

339
00:24:46,800 --> 00:24:51,160
और परलोक में अग्नि होत्र यज्ञ

340
00:24:51,160 --> 00:24:55,160
आदि बहुत से उपाय निकाले हैं और काम

341
00:24:55,160 --> 00:24:59,200
में लिए हैं पहली बात क्या है तत्वदर्शी वही है जो यज्ञ की बात

342
00:24:59,200 --> 00:25:03,280
कराए ठीक है उन प्राचीन ऋषियों के बताए हुए

343
00:25:03,280 --> 00:25:07,280
उपायों का इस समय भी जो पुरुष श्रद्धा

344
00:25:07,280 --> 00:25:11,480
पूर्वक भली भाति आचरण करता है वह सुगमता से

345
00:25:11,480 --> 00:25:15,720
अभीष्ट फल को प्राप्त कर लेता है तत्वदर्शी मुनियों

346
00:25:15,720 --> 00:25:20,680
ने इस लोक और परलोक में मनुष्यों के कल्याण के लिए

347
00:25:20,680 --> 00:25:24,840
तो परलोक परमार्थ भी सिद्ध हो गया और ये लोक भी सिद्ध हो गया और

348
00:25:24,840 --> 00:25:28,880
अभीष्ट फल भी प्राप्त करने वाला हो गया और इसमें आगे बहुत सी

349
00:25:28,880 --> 00:25:32,960
चीजें बताई है मगर सबसे पहली बात है इसी में आगे ब्रह्मा जी को कहा

350
00:25:32,960 --> 00:25:37,200
जा रहा है तत्वदर्शी के रूप में ब्रह्मा जी ने जिन धान्य अच्छा ब्रह्मा

351
00:25:37,200 --> 00:25:41,760
जी को ये लोग क्या कहते हैं अज्ञानी शास्त्र ब्रह्मा जी को क्या कह रहे हैं

352
00:25:41,760 --> 00:25:45,920
पूर्व काल में ब्रह्मा जी ने जिन धान्य आदि को उत्पन्न किया था मैंने देखा कि यम

353
00:25:45,920 --> 00:25:49,040
नियम आदि व्रतों का पालन ना करने वाले दुराचारी

354
00:25:49,040 --> 00:25:53,240
लोग ही लोग ही उन्हें खाए जा रहे थे तो यहां पर क्या हुआ तत्वदर्शी

355
00:25:53,240 --> 00:25:57,880
ब्रह्मा जी तत्वदर्शी और ब्रह्मा जी के द्वारा बताए गए जो ये

356
00:25:57,880 --> 00:26:02,120
व्रत उनका पालन ना करने वाले कौन लोग हैं दुराचारी

357
00:26:02,120 --> 00:26:06,520
उन्हें खाए जा रहे हैं तो क्या हुआ इसका मतलब कि

358
00:26:06,520 --> 00:26:10,680
जो यह तत्वदर्शी सिद्ध कर रहे हैं कि

359
00:26:10,680 --> 00:26:14,840
हमारा हमारे द्वारा माना जाने वाला तत्वदर्शी ही तत्वदर्शी है

360
00:26:14,840 --> 00:26:18,880
वह तत्वदर्शी नहीं है पहली बात शास्त्रों के हिसाब से और

361
00:26:18,880 --> 00:26:23,280
दूसरी बात अगर इनकी ही बात को मान ले तो वह मोक्ष दायक नहीं है

362
00:26:23,280 --> 00:26:27,520
क्यों क्योंकि यज्ञों से मुक्ति नहीं मिलती और 434 में

363
00:26:27,520 --> 00:26:31,520
किसी और के पास नहीं बल्कि यज्ञ का ज्ञान देने वाले के पास जाने वाले का

364
00:26:31,520 --> 00:26:35,760
जाने के लिए कहा जा रहा है तो ये खुलासा है सबसे

365
00:26:35,760 --> 00:26:39,840
पहली बात कि नाम दान केंद्र का पता लगाया जाए कि भाई

366
00:26:39,840 --> 00:26:43,880
वो रामपाल दास जी के अज्ञान में ही चलाए जा रहे

367
00:26:43,880 --> 00:26:47,960
हैं वो जो विधि है उन्हीं के अनुसार है या कुछ और है

368
00:26:47,960 --> 00:26:51,960
दूसरी बात ये है कि अ

369
00:26:51,960 --> 00:26:56,200
तत्वदर्शी शास्त्रों के हिसाब से हमने आपको शब्द के साथ दिखा दिया वो है

370
00:26:56,200 --> 00:27:00,240
जो यज्ञ यज्ञ की बात बताए जिस और उन यज्ञों से लोक

371
00:27:00,240 --> 00:27:04,880
परलोक दोनों का व्यक्ति का लाभ सिद्ध हो जाए और

372
00:27:04,880 --> 00:27:09,160
उसमें व्रत भी आता है व्रत का खंडन नहीं बल्कि व्रत बताने वाला तत्वदर्शी और

373
00:27:09,160 --> 00:27:13,560
आगे बहुत बहुत सारी इसमें बातें हैं जो आपको पता चलेंगी

374
00:27:13,560 --> 00:27:19,560
ठीक है तो यह तत्वदर्शी शब्द हमने दिखा दिया

375
00:27:20,120 --> 00:27:26,120
स्पष्ट अब आप लिंक दे दीजिए यदि कोई आना चाहता है तो आ सकता है

376
00:27:56,400 --> 00:27:59,520
हम

377
00:27:59,520 --> 00:28:04,280
बिल्लू सांडा जी अपना मुखड़ा दिखाएं

378
00:28:04,280 --> 00:28:10,280
ऐसे बात नहीं होती है मुखड़ा

379
00:28:19,280 --> 00:28:25,280
दिखाए हमने पिछली वाली लाइव में यह बताया था

380
00:28:26,120 --> 00:28:30,160
कि क्लास जवाइन हो जाए आपको थोड़ा धैर रखना है

381
00:28:30,160 --> 00:28:34,160
आपसे संपर्क संपर्क किया जाएगा और

382
00:28:34,160 --> 00:28:38,640
तब तक आप लोग अपने प्रश्न पूछ सकते हैं जब तक कोई आ नहीं रहा है तो

383
00:28:38,640 --> 00:28:44,640
तो हम लोग उसकी बात कर लेंगे है

384
00:28:46,840 --> 00:28:51,000
ना इस धरती पर कोई तत्वदर्शी नहीं

385
00:28:51,000 --> 00:28:55,120
आज की संख्या में आज की डेट में संत रामपाल जी संत

386
00:28:55,120 --> 00:28:59,560
रामपाल जी तो आपके अनुसार यज्ञ का जन देने वाले हैं ना

387
00:28:59,560 --> 00:29:05,560
और यज्ञ का ज्ञान तो मोक्ष दायक है

388
00:29:06,600 --> 00:29:12,600
नहीं यज्ञ का ज्ञान मोक्ष दायक है क्या पहले तो यह

389
00:29:15,040 --> 00:29:19,040
बताओ मोहम्मद रकीब रकीब जी अपना

390
00:29:19,040 --> 00:29:21,840
चेहरा

391
00:29:21,840 --> 00:29:27,840
दिखाए हां महेंद्र सिंह जी

392
00:29:28,840 --> 00:29:33,680
जय श्री राम जयी जय श्री राम जी

393
00:29:33,680 --> 00:29:39,680
बताए बस भाई साहब बस देख रहा था मैं तो

394
00:29:40,520 --> 00:29:44,840
अच्छा तो भैया कोई हो जो पढ़ना चाहता हो चक्कर

395
00:29:44,840 --> 00:29:50,840
में और जिसको लगता हो कि वह है टक्कर में तो व [हंसी]

396
00:29:51,640 --> 00:29:55,640
आए कोई आए कोई नहीं

397
00:29:55,640 --> 00:29:59,840
आता तत्व ज्ञान से प्रकाशित कर दे

398
00:29:59,840 --> 00:30:03,920
कोई नहीं आ रहा एक बार तब तक इनको वो

399
00:30:03,920 --> 00:30:07,920
वीडियो और दिखा दीजिए कि जो जो लोग नाम दान लेकर बैठे हैं एलईडी पे

400
00:30:07,920 --> 00:30:13,560
एलईडी से वो उनको क्लियर हो जाए अमित

401
00:30:13,560 --> 00:30:18,320
चौहान अमित चौहान चेहरा दिखाएं

402
00:30:18,320 --> 00:30:22,480
अभी मैं कहूंगा कि अभी केवल उसी के लिए आए क्या कहते

403
00:30:22,480 --> 00:30:26,480
हैं ये अ अगर कोई अपनी बात रखनी है

404
00:30:26,480 --> 00:30:32,480
अन्यथा आप प्रश्न पूछ सकते हैं

405
00:30:33,680 --> 00:30:37,720
व है करवाने सामने मत्र

406
00:30:37,720 --> 00:30:41,880
बस इसी को थोड़ा दो चार बार दोहरा दीजिए जो लोग अपने आप को रामपाल दास

407
00:30:41,880 --> 00:30:46,160
का शिष्य समझ रहे हैं प्रैक्टिकल करवावे और आमने सामने

408
00:30:46,160 --> 00:30:50,400
मंत्र दे गुरुजी बैठे अमेरिका में गुरुजी

409
00:30:50,400 --> 00:30:54,840
तो व है जो प्रैक्टिकल करवावे और आने सामने मंत्र दे

410
00:30:54,840 --> 00:30:59,040
गुरुजी बैठे अमेरिका में

411
00:30:59,040 --> 00:31:03,240
ठीक है ना तो ये जो

412
00:31:03,240 --> 00:31:07,640
जो लोग ऐसा सोचते हैं कि हम जो है रामपाल

413
00:31:07,640 --> 00:31:11,720
दास के चेले हैं चेले भी नहीं हो आपका तो

414
00:31:11,720 --> 00:31:16,400
कौन मालिक है वह भी समझ में नहीं आता है क्योंकि

415
00:31:16,400 --> 00:31:20,520
आपको लगता है कि आप जो है उनके चेले हो मगर रामपाल दास का भी हाथ

416
00:31:20,520 --> 00:31:24,720
नहीं है आपके ऊपर आपको तो एक तरीके से देखा जाए तो प्राइवेट

417
00:31:24,720 --> 00:31:28,760
कंपनी यूज कर रही है अपने अपनी चीजों के लिए आपका दोहन कर

418
00:31:28,760 --> 00:31:32,760
रही है अगर आपकी निष्ठा रामपाल दास जी के लिए

419
00:31:32,760 --> 00:31:36,840
भी है तो आपको चिंता में पड़ जाना चाहिए पता करिए अपने रामपाल दास

420
00:31:36,840 --> 00:31:41,080
जी से मिलिए जाकर के नाम लिखवाए जेल में जाकर के पर्ची लिखवाए

421
00:31:41,080 --> 00:31:45,080
अपने नाम की हमें मिलना है इनसे कम मिल सकते हैं अगर वाकई में

422
00:31:45,080 --> 00:31:48,960
अपने आप को तुम रामपाल दास का ही चेला मानते हो शिष्य

423
00:31:48,960 --> 00:31:53,160
मानते हो तो जाकर मिलो अपने गुरु से पूछो कि

424
00:31:53,160 --> 00:31:57,200
क्या हमने एलईडी से जो हम दीक्षा ले रहे हैं आपकी जो दीक्षा ली है वो मान्य

425
00:31:57,200 --> 00:32:01,360
है कि नहीं नहीं मानने तो कम से कम वहीं की वहीं दीक्षा ले लो मेरे

426
00:32:01,360 --> 00:32:05,920
भाई बहुत बड़ी गलतफहमी में चल रहे हो

427
00:32:05,920 --> 00:32:10,120
जाके इसको पता करो मिलो किसी के ऊपर विश्वास मत

428
00:32:10,120 --> 00:32:14,120
करो कुछ पता है नहीं कैसे पहुंचे क्यों बैठे हैं वहां

429
00:32:14,120 --> 00:32:18,240
वह क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हैं वह बैठे हैं संडास में और उनके

430
00:32:18,240 --> 00:32:22,960
नाम से यहां पर दीक्षा चल रही है ऐसे होती है दीक्षा

431
00:32:22,960 --> 00:32:26,960
हो सकता है उनके बोतल चढ़ रही हो गुल कोस की चक्कर आ गया हो कुछ परेशानी

432
00:32:26,960 --> 00:32:32,800
में हो यहां पर दीक्षा हो गई दीक्षा हो गई ऐसे होती है

433
00:32:32,800 --> 00:32:38,800
दीक्षा कोई मतलब नहीं है केवल बस अंधे में फायर करना है

434
00:32:39,840 --> 00:32:45,840
बस हां भाई अमित दास

435
00:32:46,920 --> 00:32:51,000
बताइए अभी आपने जो बोला था कि यज्ञों से मोक्ष नहीं

436
00:32:51,000 --> 00:32:55,440
होता चार 34 में लिखा हुआ है तो 4 34 में ऐसा कुछ नहीं

437
00:32:55,440 --> 00:32:59,440
लिखा हुआ है मुझको ये बताइए कि आप मानते किसे हैं

438
00:32:59,440 --> 00:33:04,080
कबीर को भगवान मानते हैं कि नहीं मानते क्यों आए य

439
00:33:04,080 --> 00:33:08,760
पर कबीर को भगवान मानते श्लोक आ

440
00:33:08,760 --> 00:33:12,760
श्लोक आठ के न में लिखा हुआ है कबीर भगवान ने

441
00:33:12,760 --> 00:33:17,080
कबीर गीता अध्याय आ के

442
00:33:17,080 --> 00:33:22,640
शलोक कबीर अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है या र पुरुष

443
00:33:22,640 --> 00:33:27,040
है वो तो पूर्ण परमात्मा है

444
00:33:27,040 --> 00:33:31,400
नहीं व पुरुष तो नहीं है ना

445
00:33:31,400 --> 00:33:35,840
पूर्ण परमात्मा है वह सबके पिता है मैं पूछ रहा हूं

446
00:33:35,840 --> 00:33:40,360
व अक्षर पुरुष है या परम परम अक्षर पुरुष है

447
00:33:40,360 --> 00:33:44,400
परम अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है

448
00:33:44,400 --> 00:33:49,080
तो जरा इनको संपूर्ण सृष्टि रचना खोलिए

449
00:33:49,080 --> 00:33:53,920
जरा शायद 548 पेज नंबर है

450
00:33:53,920 --> 00:33:59,040
आपके कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार

451
00:33:59,040 --> 00:34:03,200
नहीं अभी आपने एक शब्द जो बोला था यज्ञों के विषय में

452
00:34:03,200 --> 00:34:07,840
4 34 में यज्ञ की बात आप य

453
00:34:07,840 --> 00:34:11,880
पहले हम पता करले आप कबीर को भगवान मानते हैं कि नहीं मानते हैं

454
00:34:11,880 --> 00:34:16,080
वो हम देख रहे हैं उसके बाद आपका प्रश्न पहली बात आपने

455
00:34:16,080 --> 00:34:20,120
झूठ बोली है जो कवि आपने 44 में यज्ञ की

456
00:34:20,120 --> 00:34:24,640
बात कर तो आपको हटाया

457
00:34:24,640 --> 00:34:29,080
जाएगा कबीर परम अक्षर पुरुष नहीं है अभी अब आपको दिखा रहे

458
00:34:29,080 --> 00:34:35,080
हैं संपूर्ण सृष्टि रचना

459
00:34:46,480 --> 00:34:52,480
खोलिए 548 पेज है

460
00:34:58,760 --> 00:35:04,760
संपूर्ण सृष्टि

461
00:35:05,880 --> 00:35:11,880
रचना अब यह तो मुझे भी नहीं पता

462
00:35:13,920 --> 00:35:17,920
है संपूर्ण सृष्टि रचना में है मैं मैं मैं बता रहा

463
00:35:17,920 --> 00:35:23,920
हूं आपको

464
00:35:30,960 --> 00:35:35,200
संपूर्ण सृष्टि रचना शायद यह ज्ञान गंगा का ही

465
00:35:35,200 --> 00:35:41,200
है

466
00:35:43,000 --> 00:35:49,000
चैप्टर ज्ञान गंगा में

467
00:35:49,040 --> 00:35:55,040
देखिए तब तक आप लोग प्रश्न कर सकते हैं

468
00:36:35,040 --> 00:36:39,880
अभी नहीं मिल रहा है ठीक है उसको दिखाएंगे हम लोग

469
00:36:39,880 --> 00:36:43,960
ढूंढना

470
00:36:43,960 --> 00:36:48,920
पड़ेगा योगेश जी आगरा से

471
00:36:48,920 --> 00:36:53,160
राकेश दास हा और टी

472
00:36:53,160 --> 00:36:59,160
आर पहाड़ी जी जी बताइए

473
00:36:59,480 --> 00:37:03,480
योगेश जी जी मैं रामपाल वालो से बात करने

474
00:37:03,480 --> 00:37:07,880
आया था लेकिन लगता कोई आया नहीं रामपाल

475
00:37:07,880 --> 00:37:12,040
वाले आए हैं राकेश दास जी आप रामपाल से हैं अभी

476
00:37:12,040 --> 00:37:18,040
आए हा जी जी

477
00:37:18,720 --> 00:37:22,880
बताइए आप ही बताओ हम तो सुन रहे हैं बैठ

478
00:37:22,880 --> 00:37:28,880
के बताइए तत्वदर्शी है कि नहीं आपके व रामपाल

479
00:37:29,280 --> 00:37:33,840
उनका ज्ञान पढ़िए समझ में आ जाएगा तत्वदर्शी है या नहीं

480
00:37:33,840 --> 00:37:37,200
यही बताने आए हैं

481
00:37:37,200 --> 00:37:42,760
क्या यही बताने आए हैं हां जी

482
00:37:42,760 --> 00:37:47,080
क्या मैं आपको कह रहा हूं जाके ज जॉर्ज बुस का ज्ञान पढ़ो

483
00:37:47,080 --> 00:37:51,760
समझ में आ जाएगा व तत्वदर्शी है कि नहीं हो गया नहीं आज

484
00:37:51,760 --> 00:37:57,640
आज तक कोई पैदा नहीं हुआ तत् होते तो साहित्य का पूरा

485
00:37:57,640 --> 00:38:01,640
कोई पैदा नहीं हुआ जो ज जॉर्ज बुझ से जाकर के उसका तत्व

486
00:38:01,640 --> 00:38:06,720
वो जो वहां का ज्ञान है और ये सब कर ले अब बताओ मेरी बात मान

487
00:38:06,720 --> 00:38:10,880
लोगे नहीं मानेंगे जभी तो बे सिर पैर की बातें

488
00:38:10,880 --> 00:38:14,920
मत करिए कोई तात्विक बात हो तो वो करिए कर रहे हो ना आआ भाई

489
00:38:14,920 --> 00:38:20,920
बकरे हो कोई पॉइंट बताओ ना अपनी बात करने के

490
00:38:20,920 --> 00:38:25,360
लिए हर हर महादेव शिवांश भाई ये शास्त्र

491
00:38:25,360 --> 00:38:29,760
में लिखा है कहीं पे

492
00:38:29,760 --> 00:38:33,840
बताइए जो आप बोल रहे हो आप बताओ

493
00:38:33,840 --> 00:38:37,880
ना त दर्शी का मतलब क्या होता में लिखी मनम

494
00:38:37,880 --> 00:38:42,160
बात हैय बताओ नहीं आप तो सारी मनम की बात कर रहे हो शास्त्रों

495
00:38:42,160 --> 00:38:47,400
की बात कर रहे हो कुछ बताना नहीं है इनको इनको कुछ नहीं बताना

496
00:38:47,400 --> 00:38:52,080
है हर हर महादेव भाई हर हर महादेव

497
00:38:52,080 --> 00:38:58,080
जय श्री राम जय श्री राम बहुत बढ़िया

498
00:38:58,160 --> 00:39:03,680
कैसे हो बस कृपा है राम

499
00:39:03,680 --> 00:39:07,960
की आपने अभी जो अमित दास जी आए थे ना

500
00:39:07,960 --> 00:39:12,440
वह वीडियो का कंटेंट लेने आए थे मुझे पता

501
00:39:12,440 --> 00:39:16,600
है यह संपूर्ण स रचना है मुक्ति

502
00:39:16,600 --> 00:39:20,920
बोध मुक्ति बोध में है यह और कंप्यूटर

503
00:39:20,920 --> 00:39:26,920
स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर है 556

504
00:39:33,680 --> 00:39:39,680
नहीं ये वो वाला नहीं

505
00:39:50,760 --> 00:39:55,320
है हां यही यही है 548 पेज नंबर

506
00:39:55,320 --> 00:40:01,320
निकालिए 548 पीडीएफ के अनुसार और

507
00:40:02,200 --> 00:40:07,760
556 556 आपकी कंप्यूटर स्क्रीन के

508
00:40:07,760 --> 00:40:13,760
अनुसार निकालिए मुक्ति बोध

509
00:40:27,960 --> 00:40:33,960
देखो इनका ज्ञान कैसे पता

510
00:40:48,800 --> 00:40:52,920
चलेगा हां इसमें आपकी स्क्रीन के अनुसार

511
00:40:52,920 --> 00:40:58,920
548 पेज नंबर है

512
00:41:07,800 --> 00:41:12,720
556 आपकी आपकी जो ऊपर काउंटिंग आती है उसके

513
00:41:12,720 --> 00:41:18,720
अनुसार हां

514
00:41:19,920 --> 00:41:23,920
556 राकेश दास जी आपके पास कुछ प्रमाण है नहीं शास्त्रों पर

515
00:41:23,920 --> 00:41:28,000
आपको बात नहीं करनी है केवल मुंह चलाना है बकवास करने के लिए यहां पर हम पास समय नहीं

516
00:41:28,000 --> 00:41:34,000
है आप कहीं और जाकर के अपना ट चैनल खोलिए वहां जाकर के बकवास

517
00:41:44,080 --> 00:41:48,120
करिए देखिए यह लोग अपना पहले से नरेट यह देखिए इसको थोड़ा

518
00:41:48,120 --> 00:41:52,640
बड़ा करिए और ऊपर से चौथी लाइन पर आइए पांचवी लाइन

519
00:41:52,640 --> 00:41:57,440
पर ऊपर से पांचवी लाइन पर आइए बड़ा करिए

520
00:41:57,440 --> 00:42:01,640
और बड़ा

521
00:42:01,640 --> 00:42:06,200
करिए हां देखिए यहां पर

522
00:42:06,200 --> 00:42:12,200
यही प्रमाण गीता में यहां से जरा अंडरलाइन

523
00:42:12,400 --> 00:42:16,440
करिए गीता अध्याय 3 15 में है कि

524
00:42:16,440 --> 00:42:20,480
अक्षर पुरुष अर्थात अविनाशी प्रभु से ब्रह्म उत्पन्न

525
00:42:20,480 --> 00:42:24,600
हुआ है ठीक है यानी

526
00:42:24,600 --> 00:42:29,000
कि अक्षर पुरुष को इन्होंने मान लिया अक्षर

527
00:42:29,000 --> 00:42:33,120
पुरुष और परम अक्षर पुरुष एक है अगर एक

528
00:42:33,120 --> 00:42:37,280
नहीं है तो इनको मानना पड़ेगा कि कबीर जो है परम

529
00:42:37,280 --> 00:42:41,520
अक्षर पुरुष नहीं है और कबीर जो है वह

530
00:42:41,520 --> 00:42:46,120
अविनाशी नहीं है यहां देखिए अक्षर पुरुष को इन्होंने कबीर

531
00:42:46,120 --> 00:42:50,200
को इन्होंने अक्षर पुरुष बोला है न 15 में है कि अक्षर

532
00:42:50,200 --> 00:42:54,360
पुरुष अर्थात अविनाशी प्रभु से ब्रह्म उत्पन्न हुआ

533
00:42:54,360 --> 00:42:58,480
है ऊपर देखिए ऊपर भी लिखा है जस्ट वाली लाइन कबीर

534
00:42:58,480 --> 00:42:59,080
देव कबीर

535
00:42:59,080 --> 00:43:03,240
प्रभु से विराट अर्थात ब्रह्म काल की उत्पत्ति हुई है तो

536
00:43:03,240 --> 00:43:07,640
कबीर और अक्षर पुरुष दोनों एक हो गए

537
00:43:07,640 --> 00:43:11,720
तो कोई अलग तीसरा परम अक्षर पुरुष नहीं है कबीर ही

538
00:43:11,720 --> 00:43:15,800
या तो अक्षर पुरुष है यानी कबीर भगवान नहीं है और या फिर ये मान लो

539
00:43:15,800 --> 00:43:20,840
तुम्हारी किताब में लिखा हुआ है या तो ये मान लो

540
00:43:20,840 --> 00:43:25,240
कि या तो दोनों अलग नहीं है अक्षर और परम अक्षर या तो ये मान लो

541
00:43:25,240 --> 00:43:29,360
या फिर ये मान लो कि कबीर देव जो है कबीर जो है व भगवान नहीं है व अक्षर पुरुष

542
00:43:29,360 --> 00:43:33,720
है क्योंकि यहां उसके लिए आपने लिख दिया कि वह

543
00:43:33,720 --> 00:43:39,520
उससे ही ब्रह्म उत्पन्न हुआ है ठीक

544
00:43:39,520 --> 00:43:44,280
है हा इस बुक को नकार देंगे

545
00:43:44,280 --> 00:43:48,640
हा य मुक्ति बोध है तुम्हारे जो जेल धाम निवासी

546
00:43:48,640 --> 00:43:52,920
जी है वस्तुत वर्तमान में उनके

547
00:43:52,920 --> 00:43:57,200
उनके द्वारा रचित पुस्तकों में से एक

548
00:43:57,200 --> 00:44:01,960
ऊपर दिखा दीजिए लेखक तथा सरलार्थ कता संत रामपाल दास

549
00:44:01,960 --> 00:44:04,760
ठीक

550
00:44:04,760 --> 00:44:08,800
है यह अमित दास पहले से कुछ एक दो लाइन बोलने

551
00:44:08,800 --> 00:44:13,400
आता है स्क्रीन पर और फिर जाएगा अपने चैनल पर वह वीडियो बनाएगा

552
00:44:13,400 --> 00:44:17,920
और फिर वू कमाए इसको मतलब नहीं है तत्वदर्शी

553
00:44:17,920 --> 00:44:23,920
से इसको जेल नहीं

554
00:44:25,240 --> 00:44:29,440
है राकेश दास जी कुछ शास्त्रोक्त बातें करनी है कि केवल मुंह

555
00:44:29,440 --> 00:44:34,160
चलाना है अरे मुंह तो आप चला रहे हो तुम्हे सबता ही नहीं

556
00:44:34,160 --> 00:44:37,800
है

557
00:44:37,800 --> 00:44:42,160
देखा आप जाइए राकेश दास जी अपना चैनल खोलिए वहां पर खूब गालियां

558
00:44:42,160 --> 00:44:48,160
दीजिए हमें

559
00:44:50,280 --> 00:44:54,440
जाइए ये इसलिए आए हैं इनके पास वो शास्त्रोक्त बात

560
00:44:54,440 --> 00:44:59,440
नहीं हुई ये पूछ लूंगा इसका इसका प्रमाण कहां है के मुंह मैं चला रहा

561
00:44:59,440 --> 00:45:05,440
हूं और यह गलत है तो फिर दिक्कत आएगी

562
00:45:06,120 --> 00:45:10,560
शास्त्र शास्त्र समत शास्त्र सम्मत बात कर कर के तुमने अपना

563
00:45:10,560 --> 00:45:14,560
झंडा खड़ा किया है आज जब शास्त्र खोल के तुम्हारे ही दिखाए जा रहे है

564
00:45:14,560 --> 00:45:18,560
तो तुमको दिक्कत हो रही है जब हमने कहा कि अक्षर

565
00:45:18,560 --> 00:45:22,760
और परम अक्षर में कोई अंतर नहीं है वही परम अक्षर पुषी अक्षर बनता

566
00:45:22,760 --> 00:45:27,000
है जीव जगत और जगदीश्वर तीनों रूपों में एक ही परम तत्व

567
00:45:27,000 --> 00:45:31,400
स्वयं को प्रकट करता है तब समझ में नहीं आया अब देखिए आप खुद ही फस गए

568
00:45:31,400 --> 00:45:35,600
कबीर से ब्रह्म उत्पन्न हो रहा है और फिर नीचे अक्षर पुरुष से ब्रह्म

569
00:45:35,600 --> 00:45:40,120
उत्पन्न हो रहा है तो हो गया कभी रक्षण परम अक्षर नहीं रहा

570
00:45:40,120 --> 00:45:45,560
अगर अलग है

571
00:45:45,560 --> 00:45:49,840
तो राकेश दास जी आपको शास्त्रोक्त बात करनी

572
00:45:49,840 --> 00:45:54,040
है तो आप यहां पर बात करने के लिए रुकिए अन्यथा आप अपना समय नष्ट कर रहे हैं

573
00:45:54,040 --> 00:45:59,040
अगर आपको शास्त्र सम्मत बातें करनी है तो आप रुकिए यहां पर

574
00:45:59,040 --> 00:46:03,920
करनी है तो हा हा में हा मिलाइए ऐसे करनी है

575
00:46:03,920 --> 00:46:07,960
इनको मत लो ना इनको हटा दो किक फ्रॉम द स्टूडियो व लिख के आता है व

576
00:46:07,960 --> 00:46:11,040
ऑप्शन हटा दो इनको

577
00:46:11,040 --> 00:46:15,920
जाए जय श्री राम जय श्री राम

578
00:46:15,920 --> 00:46:19,960
जाने इनको जवाब देना चाहिए इनको ऐसे क्यों जाने दे रहे हो

579
00:46:19,960 --> 00:46:24,040
अरे भाई बात ये है कि हम लोग अपनी मर्यादा को भंग ना करे ना

580
00:46:24,040 --> 00:46:28,040
यहां पर वो वैसा माल ब जैसे को

581
00:46:28,040 --> 00:46:32,200
तैसा ये कह रहे थे आप कर प्रेम से बोलेंगे ये वो

582
00:46:32,200 --> 00:46:36,600
जगह नहीं है जैसे को तसा जैसे कोसा चला रहे हैं

583
00:46:36,600 --> 00:46:40,880
इतने मूर्ख होने के बाद भी महामूर्ख से महामूर्ख का ठप्पा

584
00:46:40,880 --> 00:46:45,280
इन पर लग चुका है फिर भी अपनी बात मनवा रहे हैं

585
00:46:45,280 --> 00:46:49,600
एक होता है ये है महामूर्ख इनको तो महामूर्ख

586
00:46:49,600 --> 00:46:53,600
के कंपटीशन में जाना चाहिए अरे अरे देखो

587
00:46:53,600 --> 00:46:57,800
ये व्यक्ति क्या कह रहा है ट्रथ फुल कबीर य फला है भाई कबीर

588
00:46:57,800 --> 00:47:00,680
अक्षर पुरुष है परम अक्षर पुरुष है ये बताओ

589
00:47:00,680 --> 00:47:04,960
खुद ही बातो फस गए इनके ग्रंथों में इनकी का

590
00:47:04,960 --> 00:47:08,080
रखी

591
00:47:08,080 --> 00:47:12,080
है जय श्री राम जी जय श्री राम जय श्री

592
00:47:12,080 --> 00:47:16,680
राम महेंद्र जी वापस आ गए इनको जुड़ने दीजिए जो एक

593
00:47:16,680 --> 00:47:20,720
राकेश जी को जुड़ने दो अभी अरे रा अरे वो ठीक है

594
00:47:20,720 --> 00:47:24,840
वो यहां पर वो सब नहीं करना है वो क्या है जैसे बे

595
00:47:24,840 --> 00:47:29,040
सिर पैर की बातें होती है उससे वो चलाएंगे हमें उनको जवाब देना

596
00:47:29,040 --> 00:47:33,200
पड़ेगा य कोई बात थोड़ी ना कोई शास्त्र की बात हो रही हो शास्त्र चर्चा

597
00:47:33,200 --> 00:47:37,280
चल रही हो कुछ बात कहनी हो तब तो क रोका भी जाए जी बोलिए शास्त्र

598
00:47:37,280 --> 00:47:41,440
नको मानना ही नहीं है लाते

599
00:47:41,440 --> 00:47:47,440
में प्रमाण है अब हमने इनकी

600
00:47:48,880 --> 00:47:53,280
किताब हा ये लोग वेद विरोधी हैय लोग

601
00:47:53,280 --> 00:47:57,520
पूरी

602
00:47:57,520 --> 00:48:02,440
पूरी इनकी पूरी किताब में वेदों की निंदा लिखी हुई है

603
00:48:02,440 --> 00:48:06,480
वेदों से नहीं हा वेदों में

604
00:48:06,480 --> 00:48:10,960
ब्रह्म नहीं वेदों में मोक्ष नहीं को कहने वाला

605
00:48:10,960 --> 00:48:15,320
वेदों को कहने वाला ज्ञानी नहीं व्याकरण

606
00:48:15,320 --> 00:48:19,360
के दर्शन नहीं कि कभी गुरु परंपरा से पढ़े नहीं शब्दों को कैसे रखना है

607
00:48:19,360 --> 00:48:25,360
कैसे बोलना है जो मन में आया वो बोल दिया जो मन में आया वो लिख दिया

608
00:48:27,160 --> 00:48:31,440
अभी तो इनकी एक दो किताबे खोली है सरसरी निगाहो से अभी देखते जाइए

609
00:48:31,440 --> 00:48:35,480
क्या क्या खुलेगा किताब भाईजी स्क्रीन पर दिखाओ इनका

610
00:48:35,480 --> 00:48:41,480
सारा पाखंड खोलना चाहिए हम लोगों को

611
00:48:42,680 --> 00:48:48,680
अभी ब्राह्मण है अच्छे व्याकरण की दृष्टि से तो व भी कह रहे

612
00:48:48,920 --> 00:48:53,440
थे व भी

613
00:48:53,440 --> 00:48:57,880
कगा जब तक कोई आ नहीं रहा है तब तक हम लोग और देख लेते

614
00:48:57,880 --> 00:49:02,480
हैं कि इनका जो परमात्मा है

615
00:49:02,480 --> 00:49:06,520
उसको जो है यह कहते हैं ना कि वो काल वो खाएगा

616
00:49:06,520 --> 00:49:11,280
वो खाएगा तो इनके जो परमात्मा है वो क्या कर रहे हैं

617
00:49:11,280 --> 00:49:15,440
48 नंबर पेज निकालिए स्क्रीन के हिसाब

618
00:49:15,440 --> 00:49:21,440
से मुक्ति बोध का 48

619
00:49:23,640 --> 00:49:26,920
नंबर सप्ता

620
00:49:26,920 --> 00:49:32,920
कंप्यूटर स्क्रीन के हिसाब से 48

621
00:49:34,560 --> 00:49:38,880
नंबर यहां पर यह वाली बात है काल ने काल की प्रार्थना

622
00:49:38,880 --> 00:49:44,880
कबीर ने मान ली यही है क्या

623
00:49:50,240 --> 00:49:54,280
48 जब कबीर जीवात्मा जो फसी

624
00:49:54,280 --> 00:49:58,280
हुई थी

625
00:49:58,280 --> 00:50:02,760
उन जीवात्मा हों को लेने आए थे बचाने के लिए आए थे तो काल ने उनके

626
00:50:02,760 --> 00:50:07,120
पैर पकड़ लिए और उन्होंने

627
00:50:07,120 --> 00:50:13,120
काल की बात मान ली

628
00:50:30,640 --> 00:50:34,920
हम तो इसमें एक और बात भी तो है आजकल

629
00:50:34,920 --> 00:50:39,120
य रामपाल वाले कहते हैं कचरा चता है का लेकिन रामपाल कहते है कि

630
00:50:39,120 --> 00:50:43,840
उनकी शरीर में से निकलने वाली गंध को खाते है क्या करते

631
00:50:43,840 --> 00:50:48,000
हैं रामपार कहते है कि सूक्ष्म शरीर से गंध जो निकलती

632
00:50:48,000 --> 00:50:52,040
है उसको काल खाते है और आजकल ये रामपार वाले कह रहे कि उसको कच्चा खा

633
00:50:52,040 --> 00:50:54,200
जाते

634
00:50:54,200 --> 00:50:58,240
है मैं समझ नहीं पाया क्या कह रहे हैं मैं बोल रहा

635
00:50:58,240 --> 00:51:02,640
हूं कि रामपाल वाले कहते कि काल लोगों कचा खाते है कच्चा

636
00:51:02,640 --> 00:51:06,800
खाता है हां जबक रामपाल कहते है कि उनके

637
00:51:06,800 --> 00:51:12,760
शरीर से निकलने वाली गंद को खाते है गंद को खाता है

638
00:51:12,760 --> 00:51:13,760
हा

639
00:51:13,760 --> 00:51:17,480
बिना सर पैर की बातें

640
00:51:17,480 --> 00:51:21,480
है इस तरीके से इनका एलिगेंस रामपाल जी

641
00:51:21,480 --> 00:51:25,640
का कि जब हम हमारी जब वो काल हम हमारी आत्मा

642
00:51:25,640 --> 00:51:29,840
खींच के ले जाता है एक तप्त शिला है व तपत शिला में हम सेकता है जैसे

643
00:51:29,840 --> 00:51:33,960
पराठा सेका जाता है ना वसे सेकता है वहा से कु पदार्थ निकलता है

644
00:51:33,960 --> 00:51:38,160
वो खाता है व काल है

645
00:51:38,160 --> 00:51:42,800
त हमको सेकता है उधर काल

646
00:51:42,800 --> 00:51:46,960
कैसा मूर्ख है कैसा मूर्ख व्यक्ति

647
00:51:46,960 --> 00:51:52,960
है नहीं चलो

648
00:51:53,640 --> 00:51:58,280
रा इनकी दशा उससे भी बेकार है उपनिषद

649
00:51:58,280 --> 00:52:03,200
का श्लोक है तो एक्चुअली क्या पंडित जी

650
00:52:03,200 --> 00:52:07,640
पंडित जी एक्चुअली है क्या व अपने डिबेट में या अपने सत्संग में

651
00:52:07,640 --> 00:52:11,680
व दूसरों को आपका स्न

652
00:52:11,680 --> 00:52:15,960
है मैं तो अभी मलेशिया में उत्तराखंड से हूं मैं देखो

653
00:52:15,960 --> 00:52:18,640
यह अपने डिबेट

654
00:52:18,640 --> 00:52:22,920
में उत्तराखंड में कौन जगह से है आप उत्तराखंड

655
00:52:22,920 --> 00:52:26,920
में खटीमा से है

656
00:52:26,920 --> 00:52:31,080
मैं पहन पन हम लोग कर लेंगे

657
00:52:31,080 --> 00:52:35,200
स्ट्रीम के बाद कर लेंगे जा

658
00:52:35,200 --> 00:52:39,840
जन बातें करें एक दूसरे जान पहचान हो

659
00:52:39,840 --> 00:52:44,080
जाएगी क्या है ना वो अपने सत्संग में या अपने डिबेट में भर

660
00:52:44,080 --> 00:52:48,600
भर के हमारे ऋषि मुनियों को या किसी को गाली देते रहते हैं किसी को अज्ञानी

661
00:52:48,600 --> 00:52:54,600
मूर्ख या कुछ भी कह देते हैं वो पर हम अपनी जो ट है

662
00:52:57,120 --> 00:53:01,760
मैं कहता बताओ किताब लेकर जाते हैं कभी कभी तो

663
00:53:01,760 --> 00:53:06,400
को लेवल तक बात करनी है प्रश्न जरूर करना मगर किसी को मूर्ख

664
00:53:06,400 --> 00:53:10,440
इस तरह की संज्ञा हम लोग ना देने से बचे जहां तक हो सके संभव

665
00:53:10,440 --> 00:53:14,680
हो और एक क्वालिटी कंटेंट लोगों को प्रदान करें जिस

666
00:53:14,680 --> 00:53:18,760
पर कोई अेक ना लगा क्या करें

667
00:53:18,760 --> 00:53:23,040
उनके वो भड़ने आ जाएंगे पर बातों को समझेंगे नहीं

668
00:53:23,040 --> 00:53:27,200
पहले व सुनिए फ प्रथम भगत संतन कर

669
00:53:27,200 --> 00:53:31,920
संगा तो श्रवण कीर्तनम विष्णु को ना सुनना है ना कुछ है

670
00:53:31,920 --> 00:53:35,960
पहले वो सुनो तो सही फिर अपनी बात रखें वो ना सुनते हैं

671
00:53:35,960 --> 00:53:40,080
ना कुछ करते हैं फिर अपनी बात जो जितना उन्होंने रटा है कि वेद का

672
00:53:40,080 --> 00:53:41,920
ये सक्त मंडल गीता का ये

673
00:53:41,920 --> 00:53:47,160
उससे मैंने आज तक उनको कभी बाहर जाते हुए नहीं

674
00:53:47,160 --> 00:53:51,160
देखा नहीं वो उनकी सोच है ना अब हमने तो उनकी

675
00:53:51,160 --> 00:53:55,200
उनके हिसाब से अपनी सोच नहीं रखनी ना तो हमने हमारी जो स्ट्रीम है थोड़ी

676
00:53:55,200 --> 00:53:59,440
साफ सुथरी रहे तो एक अच्छा कट बनेगा भाईजी

677
00:53:59,440 --> 00:54:03,600
शिवा बड़ा है उनको भगवान का मल बध शक्ति बहुत

678
00:54:03,600 --> 00:54:07,760
है हम लोगों के बस का नहीं है पहले ठीक है पहले ठीक है बाद में हम

679
00:54:07,760 --> 00:54:13,600
तो बड़ा बीपी हाई हो जाता है सुन के भा हम

680
00:54:13,600 --> 00:54:17,720
क जी जो जीवात्मा फसी हुई है वो क्यों फसी हुई

681
00:54:17,720 --> 00:54:21,800
है क्योंकि कबीर ने काल की बात

682
00:54:21,800 --> 00:54:25,840
मान ली काल ने चरण पकड़ के प्रार्थना की तो कबीर ने

683
00:54:25,840 --> 00:54:30,000
कबीर जी का दिल पिकल गया और उन्होंने उस

684
00:54:30,000 --> 00:54:34,400
समय जब वो ले जाने के लिए आए थे जीवा आत्माओं को

685
00:54:34,400 --> 00:54:38,600
देखिए जिस समय परमेश्वर कबीर जी प्रथम बार हमारी

686
00:54:38,600 --> 00:54:42,720
शुद्ध लेने के लिए काल लोक में आए थे तो काल ने

687
00:54:42,720 --> 00:54:46,760
चरण पकड़ कर कुछ शर्त रखी थी जो परमेश्वर कबीर जी ने मान

688
00:54:46,760 --> 00:54:51,720
ली क्यों मानी भाई मानली क्यों मानी

689
00:54:51,720 --> 00:54:56,640
वो तो अपने जीवों से प्यार करते हैं ना काल

690
00:54:56,640 --> 00:54:57,140
ने कहा

691
00:54:56,960 --> 00:55:01,400
था कि आप कह रहे हो कि मैं जीवों को तेरे जाल से निकाल कर वापस सतलोक ले

692
00:55:01,400 --> 00:55:05,440
जाऊंगा मेरे को सत्पुरुष ने श्राप दे रखा है कि एक लाख

693
00:55:05,440 --> 00:55:09,960
मानव शरीर धारी जीव खाने का तथा सवा लाख उत्पन्न करने का

694
00:55:09,960 --> 00:55:14,480
यदि सब जीव वापस चले गए तो मेरी भूख कैसे समाप्त

695
00:55:14,480 --> 00:55:19,040
होगी इसलिए आप जोर जबरदस्ती करके जीव ना ले

696
00:55:19,040 --> 00:55:23,320
जाना यह देख लो जीवों

697
00:55:23,320 --> 00:55:27,560
को वापस ले जा सकते थे मगर काल के पैर पकड़ने

698
00:55:27,560 --> 00:55:31,720
पर छोड़

699
00:55:31,720 --> 00:55:36,120
दिया ठीक है इसका मतलब क्या हुआ

700
00:55:36,120 --> 00:55:40,200
पुत्र मुह में फस गए तो कौन जिम्मेदार

701
00:55:40,200 --> 00:55:44,480
है काल के लोक में फसने का और देखिए

702
00:55:44,480 --> 00:55:48,560
कबीर भी मर जाता है कबीर मरता भी है तो कबीर ईश्वर कैसे

703
00:55:48,560 --> 00:55:54,560
हो रहा है 72 नंबर

704
00:55:54,640 --> 00:56:00,640
निकालिए भक्तो भगवान

705
00:56:01,440 --> 00:56:05,480
का यह लोग तो बोलते हैं इसमें ज्ञानी ज्ञान भरा है पर लगता

706
00:56:05,480 --> 00:56:10,000
तो किसी अंगल से नहीं कि ज्ञान

707
00:56:10,000 --> 00:56:14,040
है भक्त और भगवान का निकालिए अपने

708
00:56:14,040 --> 00:56:18,360
शुरू में एक बात बोली थी पहले डिबेट में कि काल को उत्पन्न

709
00:56:18,360 --> 00:56:22,800
करने वाले भी कबीर जी है तो बुराई तो कबीर जी ने उत्पन्न

710
00:56:22,800 --> 00:56:27,840
करी इसका जवाब नहीं मिला अभी तक नहीं

711
00:56:27,840 --> 00:56:32,720
मिलेगा आपने राइट क्वेश्चन किया था ये उस दिन

712
00:56:32,720 --> 00:56:36,840
हां बिल्कुल जब यह ये कहते कि वो ईश्वर यह कैसे कर सकता

713
00:56:36,840 --> 00:56:40,840
है वोह कैसे कर सकता है तो मैंने पूछा था अगर ऐसा है तो व काल को उत्पन्न करने

714
00:56:40,840 --> 00:56:45,240
वाला भी तो वही है बिना उसकी मर्जी के उत्पन्न हो गया क्या

715
00:56:45,240 --> 00:56:50,400
मुसीबत तो कबीर दास जी ने खड़ी करी

716
00:56:50,400 --> 00:56:54,680
हा ना काल बनाते ना हम चे आते ये लोग बड़ा

717
00:56:54,680 --> 00:57:00,680
दम भरते हैं इन्हीं की किताब में लिखा है कबीर मरता भी

718
00:57:01,760 --> 00:57:06,120
है उनका व हाल है काजल काजल वाला आप एक डायलॉग

719
00:57:06,120 --> 00:57:09,080
मारते हो

720
00:57:09,080 --> 00:57:13,120
ना काजल काजल वाला परमाण से मतलब नहीं है

721
00:57:13,120 --> 00:57:17,680
इनको यह भक्त और भगवान का 72 नंबर

722
00:57:17,680 --> 00:57:23,680
पेज है

723
00:57:29,960 --> 00:57:35,960
कबीर अपने मरने की बात कर रहा

724
00:57:36,080 --> 00:57:40,080
है पर आपकी बातों का असर हो रहा है लोगों पर जो विवेकशील

725
00:57:40,080 --> 00:57:44,160
है वह मंथन कर रहे हैं भाई मैं तो आज

726
00:57:44,160 --> 00:57:48,240
यह तक कह रहा हूं कि वह बाद में देख लेंगे रामपाल दास ने सही कहा है कि

727
00:57:48,240 --> 00:57:52,240
नहीं कहा है मगर जो उसके शिष्य स्वयं को समझ रहे हैं वो जाकर अपने गुरु से पूछो

728
00:57:52,240 --> 00:57:56,400
तो कि तुमने हमें दीक्षा दी है मेरा नाम बताओ मैंने चलो

729
00:57:56,400 --> 00:58:00,440
नाम मत बताओ मैंने तुमसे दीक्षा लिए तुम्हे पता चल गया कि नहीं पता चल गया

730
00:58:00,440 --> 00:58:04,520
इतना तो पूछ लो जाके और तुम्हारे नाम से ये नाम

731
00:58:04,520 --> 00:58:09,400
नाम दान केंद्र चल रहे हैं सब ऑथेंटिक है कि नहीं

732
00:58:09,400 --> 00:58:13,640
अरे वेदों में ही लिखा है 11 ये अथर वेद

733
00:58:13,640 --> 00:58:18,040
का अथर वेद का 11

734
00:58:18,040 --> 00:58:22,800
अध्याय है पांचवा सूक्त हैद हा यही है 11

735
00:58:22,800 --> 00:58:28,760
11 पा ब्रह्मचर्य

736
00:58:28,760 --> 00:58:32,760
गुरु दीक्षा दे रहे हैं यहां पर गुरु दीक्षा दे रहे हैं

737
00:58:32,760 --> 00:58:37,400
य सात मंत्र से शुरू होता है गुरु अपने शिष्य से इस प्रकार कहे मतलब की गुरु

738
00:58:37,400 --> 00:58:41,640
शिष्य सामने बैठे हैं इस प्रकार क आगे पूरी दीक्षा दे

739
00:58:41,640 --> 00:58:46,200
पूरे मंत्र है इनके बहुत सारे हा

740
00:58:46,200 --> 00:58:50,440
व वही वाला है मैंने उस सवाल य उठाया कि वेद

741
00:58:50,440 --> 00:58:54,560
जो है परम ब्रह्म की बात नहीं करते हैं ब्रह्म की बात करते हैं

742
00:58:54,560 --> 00:58:58,800
तो यदि कोई परम के पास जाने की शिक्षा दे रहा है तो वेद विरुद्ध

743
00:58:58,800 --> 00:59:02,920
है और तुम कहते हो कि वेद विरुद्ध शिक्षा जो है व मान नहीं है जो वेद

744
00:59:02,920 --> 00:59:07,280
से मैच नहीं खाएगी वह मान्य नहीं है य वे

745
00:59:07,280 --> 00:59:11,320
यदि वेद से मैच नहीं खा रहा है आपका परम ब्रह्म हा यही

746
00:59:11,320 --> 00:59:17,320
है क्या 72 नंबर

747
00:59:21,440 --> 00:59:26,720
है इसी में है कहीं पर

748
00:59:26,720 --> 00:59:31,680
यह देखिए मैं मरूंगा मैं मघर में मरूंगा

749
00:59:31,680 --> 00:59:36,360
यहां पर वह अपने मरने को भी स्वीकार कर रहे हैं कि ऐसी स्थिति भी आ सकती

750
00:59:36,360 --> 00:59:41,200
है कबीर साहब ने कहा कि मैं मगहर में

751
00:59:41,200 --> 00:59:45,640
मरूंगा यह देख लीजिए

752
00:59:45,640 --> 00:59:50,240
भैया मैं मगर में मरूंगा तो

753
00:59:50,240 --> 00:59:54,760
कबीर मघर में अपने मरने की बात को स्वीकार कर रहे हैं इसका निराकरण

754
00:59:54,760 --> 00:59:57,400
प्रस्तुत करें

755
00:59:57,400 --> 01:00:02,600
ठीक

756
01:00:02,600 --> 01:00:06,640
है ये काल ने लिख दिया है यह काल ने

757
01:00:06,640 --> 01:00:10,720
लिखवा दिया है यह काल ने

758
01:00:10,720 --> 01:00:14,840
लिखवा दिया एक भाई साहब कह रहे पूरा पढ़ तो पहली बात

759
01:00:14,840 --> 01:00:18,920
तो य आपने पहले जो कहा था उसका उत्तर मिला कि नहीं मिला दूसरी बात

760
01:00:18,920 --> 01:00:23,720
यह है कि जब पूरा पढ़ने की बात है तो तुमने पूरे पढ़े थे क्या शास्त्र

761
01:00:23,720 --> 01:00:27,800
जहा मना है वहा से उठा के ब्रह्मा विष्णु म वो सिद्ध कर दिया तीसरी बात

762
01:00:27,800 --> 01:00:32,280
ये है कि यहां पर हमने उसम आगे ऐसा कुछ नहीं लिखा जिसको पढ़ने की आवश्यकता हो

763
01:00:32,280 --> 01:00:36,440
आवश्यकता होगी तो पढ़ा जाएगा और आपको कोई दिक्कत है सत्य के पक्षधर है माता

764
01:00:36,440 --> 01:00:40,480
जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप ऊपर आ जाए बात

765
01:00:40,480 --> 01:00:45,440
करिए आ कर के आमना सामना करिए इतनी चिंता है तो

766
01:00:45,440 --> 01:00:49,760
आ और दिखाते पूरा पढ़ अपनी बात आएगी तो पूरा

767
01:00:49,760 --> 01:00:53,840
पढ़ और दूसरों की बात आएगी तो उसम जहां मन चाहो जहां

768
01:00:53,840 --> 01:00:58,200
से ये उठा लिया मन चाहो वहां से वो उठा बाकी का छोड़

769
01:00:58,200 --> 01:01:00,800
दो

770
01:01:00,800 --> 01:01:05,120
हा पूरा पढ

771
01:01:05,120 --> 01:01:09,200
अब रामायण का युद्ध कबीर ने करवाया जीवात्मा को

772
01:01:09,200 --> 01:01:13,400
ले जा सकता था मगर नहीं ले गया तो कौन

773
01:01:13,400 --> 01:01:18,160
फसाया जो लोग ये लोग कहते उन्होंने महाभारत करवा

774
01:01:18,160 --> 01:01:22,560
दी कौन फसा रहा है

775
01:01:22,560 --> 01:01:28,560
अच्छा

776
01:01:30,640 --> 01:01:35,280
इन्होने शास्त्र हमारे वेदों में समथिंग साज

777
01:01:35,280 --> 01:01:39,360
से ऊपर मंत्र होंगे उसमें से 20 से 25 मंत्र लोगों ने

778
01:01:39,360 --> 01:01:44,080
उठाए हैं बाकी का क्या करें छोड़ दे

779
01:01:44,080 --> 01:01:48,200
बाकी का पढ़ नहीं पाए होंगे उनको संस्कृत आती नहीं है और जहां से मिल लिया होगा

780
01:01:48,200 --> 01:01:52,400
उसम व पेज पट गया होगाया कुछ हो गया होगा तो बाकी

781
01:01:52,400 --> 01:01:56,520
का पढ़ नहीं पाए

782
01:01:56,520 --> 01:02:01,000
बाकी क्या वो तो एक भी नहीं पढ़ पाए ने जरा हि देख करके व देख लिया

783
01:02:01,000 --> 01:02:05,200
उनको एक शलोक बताए पूछिए

784
01:02:05,200 --> 01:02:09,400
हमने अभी तक यह जाना है कि यह लोग वेदों की बात

785
01:02:09,400 --> 01:02:14,200
अवश्य करते हैं मगर यह वेद निंदक है क्योंकि ये कहते हैं

786
01:02:14,200 --> 01:02:18,280
वेदों के द्वारा मो नहीं मिलता है वेदों के द्वारा

787
01:02:18,280 --> 01:02:22,320
सिर्फ आपको एक ही बात मिलेगी वेद गीता के द्वारा सिर्फ आपको एक ही बात इनकी

788
01:02:22,320 --> 01:02:25,960
स्ट्री क्या उसको समझिए

789
01:02:25,960 --> 01:02:30,000
उसी सर्वशक्तिमान पूर्ण ब्रह्म कबीर देव ने से ही विराट

790
01:02:30,000 --> 01:02:34,280
अर्थात ब्रह्म काल की उत्पत्ति हुई है हां हा बिल्कुल वो तो हुई है

791
01:02:34,280 --> 01:02:38,440
जो काल इनको खा रहा है उसकी उत्पत्ति तुमने ही करी है

792
01:02:38,440 --> 01:02:42,440
और तो और ले जा सकते थे पर ले नहीं गए काल के लिए तो क्या

793
01:02:42,440 --> 01:02:46,440
गारंटी है कि दोबारा काल कहेगा पैर पकड़ के भगवान मुझे

794
01:02:46,440 --> 01:02:51,840
इनको ले जाने दो दोबारा फसा देने दो क्या गारंटी है कि नहीं मानेंगे उसकी

795
01:02:51,840 --> 01:02:57,560
बात करेक्ट

796
01:02:57,560 --> 01:03:02,160
अच्छा काल का कांसेप्ट आया कहां से समझ में नहीं आया मेरे

797
01:03:02,160 --> 01:03:06,200
अरे कहीं बनाया है अपना बैठ करके मैं भी बचपन में

798
01:03:06,200 --> 01:03:11,080
अपने मित्रों को कहानियां सुनाया करता था बढ़िया

799
01:03:11,080 --> 01:03:15,240
मेरे घर के पीछे जो है एक जंगल है और उसमें हर कम पर एक भेड़िया एक भालू

800
01:03:15,240 --> 01:03:20,040
है एक शैतान है यह सब मैं बनाता सुनाता था तो

801
01:03:20,040 --> 01:03:24,080
कोई बहुत बड़ी बात नहीं है सब इस तरह से लिखने के लिए अगर

802
01:03:24,080 --> 01:03:28,840
सिंपली भी अगर अगर शास्त्र के आधार भी देखा जाए तो काल का अर्थ होता है समय

803
01:03:28,840 --> 01:03:33,440
समय सभी को नष्ट करता है जी पृथ्वी

804
01:03:33,440 --> 01:03:38,160
लोक में जितनी भी चीजें है सभी चीज नाशवान तो है कौन है

805
01:03:38,160 --> 01:03:42,440
हमने इनको शास्त्र में दिखा दिया यज्ञों को मानने वाला यज्ञ कराने

806
01:03:42,440 --> 01:03:46,560
वाला व्रत व्रत की बात करने वाला तत्वदर्शी है अभी

807
01:03:46,560 --> 01:03:50,640
भी इनकी आंखें नहीं ऐसे खुलेगी नहीं भाई

808
01:03:50,640 --> 01:03:54,640
आप उसको तत्वदर्शी मान रहे हो जो यज्ञों की बात नहीं कर रहा है

809
01:03:54,640 --> 01:04:00,640
वो तो कह रहा है ञ से मुक्ति नहीं है य यज्ञों से परलोक सिद्ध हो रहा

810
01:04:06,080 --> 01:04:10,080
है मैं पूर्ण परमेश्वर हूं मेरे द्वारा बनाए नियम के

811
01:04:10,080 --> 01:04:14,160
आधार से रावण में रामचंद्र की उत्पत्ति हुई रामायण का ना

812
01:04:14,160 --> 01:04:18,680
रामायण का युद्ध कैसे हुआ पूर्व निर्धारित संस्कार

813
01:04:18,680 --> 01:04:23,200
से किसने निर्धारण किया उनका

814
01:04:23,200 --> 01:04:29,160
किसने निर्धारण किया

815
01:04:29,160 --> 01:04:33,560
मैं पूर्ण परमेश्वर हूं पूर्ण और

816
01:04:33,560 --> 01:04:38,320
आधा परमेश्वर परमेश्वर है अर्धा पूर्ण कहां से आ गया

817
01:04:38,320 --> 01:04:42,800
वो वही वाली बात कि भाई वो इसलिए है इनका मामला

818
01:04:42,800 --> 01:04:47,440
कि परम लगा के अपनी दुकान का नया सेटर खोल दो अभी इनमें एक और कोई लग

819
01:04:47,440 --> 01:04:51,600
जाएगा कोई और एडजेक्टिव लगाते जाओ नया अपना खोलते

820
01:04:51,600 --> 01:04:56,320
जाओ जैसे शास्त्रों ने दे दिया ब्रह्म फाइनल स्टेट ब्रह्म

821
01:04:56,320 --> 01:05:00,400
अब क्या करें पूर्ण ब्रम परम ब्रम यह सब

822
01:05:00,400 --> 01:05:04,680
लगा दो अभी कोई नया आ जाएगा ा दर्शी वो कहेगा परम

823
01:05:04,680 --> 01:05:08,880
परम ब्रह्म अरे तुम्हारा एक ही बार परम ब्रह्म है हमारा

824
01:05:08,880 --> 01:05:13,640
परम परम ब्रह्म है दो परम है हमारे पास रा

825
01:05:13,640 --> 01:05:17,640
वो कहेगा परम परम पूर्ण ब्रह्म तुम्हारा ब्रह्म है परम तो है

826
01:05:17,640 --> 01:05:21,880
पर वो ब्रह्म है हमारा परम परम पूर्ण ब्रह्म

827
01:05:21,880 --> 01:05:27,080
फिर और एक और आ जाएगा परम परम परम

828
01:05:27,080 --> 01:05:31,080
अच्छा एक चीज समझ में नहीं आई अभिनाशी और अमर का

829
01:05:31,080 --> 01:05:35,520
अर्थ होता है कि कभी ना मरने वाला और

830
01:05:35,520 --> 01:05:39,600
इनकी इनकी पढ़ाई भी देखोगे इस तरीके की ना एक एक ना

831
01:05:39,600 --> 01:05:43,760
एक बार वो मरता है तो फिर अभिनाशी किधर से हो गया अमर कहां से हो गया मर रहा

832
01:05:43,760 --> 01:05:48,720
ना वो खत्म हो रहा है तो अविनाशी तो उसके लिए लगेगा नहीं

833
01:05:48,720 --> 01:05:52,720
हम तो ये अर्थ कहां से मिले इनको ये अविनाशी का अर्थ ये होता

834
01:05:52,720 --> 01:05:56,800
है देख कबीर का शरीर भी यहां आ के नष्ट होता है उसने मान

835
01:05:56,800 --> 01:06:00,800
लिया ना बूढ़ा होता है बिल्कुल उसने माना कबीर

836
01:06:00,800 --> 01:06:06,360
का शरीर भी य के नष्ट होता है फि बक फिर क्या है

837
01:06:06,360 --> 01:06:10,480
भाई झूठी खबर फैलाने के लिए तो कोम क्रम ब्राउजर

838
01:06:10,480 --> 01:06:15,040
के डेस्कटॉप साइट को ही ब्लॉक कर दिया

839
01:06:15,040 --> 01:06:19,320
क्रोम ब्राउजर के डेस्कटॉप साइट को ब्लॉक कर दिया

840
01:06:19,320 --> 01:06:23,960
यह क्या भाई यह क्या बात हुई भाई सुंदर

841
01:06:23,960 --> 01:06:28,040
य क रहे जी आपने झूठी खबर फैलाने

842
01:06:28,040 --> 01:06:32,040
के लिए तो क्रोम ब्राउजर के डेस्कटॉप साइट को ही

843
01:06:32,040 --> 01:06:36,200
ब्लॉक कर दिया पहले तो आप यह सोचो आप जो है अभी बहुत कम उम्र के दिख रहे

844
01:06:36,200 --> 01:06:37,080
हैं तो

845
01:06:37,080 --> 01:06:41,440
आपकी दीक्षा कहां हुई है अगर जेल धाम में जाकर हुई है तो तो ठीक है एलईडी

846
01:06:41,440 --> 01:06:45,560
से हुई है तो पहले चेक कर लो कि आपके गुरु वही है जिनके लिए आप लड़

847
01:06:45,560 --> 01:06:50,400
रहे हो कि नहीं फिर बात करते हैं समझ में नहीं आ रही वैसे आपकी बात

848
01:06:50,400 --> 01:06:54,440
शिवान जी आपको खुला चैलेंज सबलोक आश्रम में आ जाओ कभी समय

849
01:06:54,440 --> 01:06:58,760
होगा तो पहुंचेंगे अभी यहां लखनऊ में कोई हो आपके आ

850
01:06:58,760 --> 01:07:03,680
का ने खा 30 मार खाको भेजो

851
01:07:03,680 --> 01:07:07,720
सुबह बोलो सुबह शाम बोलो शाम एनी टाइम

852
01:07:07,720 --> 01:07:13,720
एनी वेर यहां भेजो बिल्कुल

853
01:07:16,360 --> 01:07:19,440
खड़े

854
01:07:19,440 --> 01:07:24,040
तो ठीक है आप लोग एक बात कुछ सूत्रम

855
01:07:24,040 --> 01:07:28,840
शैली में समझा दूं इनके द्वारा क्या स्ट्रेटजी अपनाई जाती है

856
01:07:28,840 --> 01:07:32,840
इनके द्वारा यह आपको बताया जा रहा है कि यह देखो यहां ब्रह्मा जी लिखा है

857
01:07:32,840 --> 01:07:37,080
यह मत पढ़ो जहां ब्रह्मा जी का मरना लिखा है वो पढ़ो यह देखो यहां पूर्ण

858
01:07:37,080 --> 01:07:41,320
ब्रह्म लिखा है शिव जी का वो मत पढ़ो जहां शिव जी की

859
01:07:41,320 --> 01:07:45,520
दास्ता सिद्ध हो रही है वो पढ़ो और यह पढ़ पढ़ के तुमको क्या पता चलेगा

860
01:07:45,520 --> 01:07:49,520
यह सारे शास्त्र नहीं पढ़ने हैं हां इन शास्त्रों की एक

861
01:07:49,520 --> 01:07:53,560
बात पढ़नी है बस वो क्या है कि उल्टे वृक्ष की

862
01:07:53,560 --> 01:07:58,360
व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी है ये पढ़ना है और देखो

863
01:07:58,360 --> 01:08:02,400
देखो हमारे जेल दव निवासी ने उल्टा वृ सिखा दिया हो गए त

864
01:08:02,400 --> 01:08:06,440
वा बस हो गया हो

865
01:08:06,440 --> 01:08:10,800
गया इतनी बात के लिए इनके लिए

866
01:08:10,800 --> 01:08:15,000
ये है शास्त्र और बाकी बाकी यज्ञ

867
01:08:15,000 --> 01:08:19,000
से मुक्ति नहीं मिलती गीता में मुक्ति का वो परम ब्रह्म की बात जरूर

868
01:08:19,000 --> 01:08:23,000
है क्योंकि तत्वदर्शी की बात कह दी गई है बाकी उसमें वो भी नहीं है अच्छा

869
01:08:23,000 --> 01:08:27,160
गीता और वेद को कहने वाला भी अज्ञानी है वो

870
01:08:27,160 --> 01:08:31,760
भी अज्ञानी है मूर्ख है और अगर गीता और वेद का तुमने पालन

871
01:08:31,760 --> 01:08:35,800
किया तो तुमको वो खाएगा क्योंकि वोह एक काल

872
01:08:35,800 --> 01:08:39,880
नाम का राक्षस समझ लो उसे और भगवान तो हमने यूं ही लिखा

873
01:08:39,880 --> 01:08:45,880
है जबकि हम उनका अपमान करते हैं दिन और रात बिल्कुल

874
01:08:46,080 --> 01:08:50,120
अच्छा कुछ लोग अभी अपने गुरु के लिए नहीं लड़ने अपने स्वाभिमान के

875
01:08:50,120 --> 01:08:54,240
लिए लड़ने की जो हमने किया है वो सही किया है बिल्कुल और आपको

876
01:08:54,240 --> 01:08:59,040
दिखा दे एक बात मुक्ति बोध का पेज क्रमांक 346

877
01:08:59,040 --> 01:09:05,040
दिखाइए बीच-बीच में टस्ट लेते रहिए कहानी

878
01:09:05,640 --> 01:09:09,800
में यह क्या बोल रहे हैं कबीर गाली दिए कबीर

879
01:09:09,800 --> 01:09:14,560
को जिनम था ज्ञान या फिर गाली वह दिए जिनकी बंद हुई

880
01:09:14,560 --> 01:09:20,560
दुकान हां तुम्हारी दुकाने बंद हो रही है यह कबीर जी की बात सही

881
01:09:20,640 --> 01:09:25,040
है तुम्हारी दुकान जो चल रही है रामपाल दास जी के नाम पर

882
01:09:25,040 --> 01:09:29,960
उस में दिक्कत आ रही है जाके अपने गुरु भाई से

883
01:09:29,960 --> 01:09:34,480
मिलो इसका पेज नंबर है 346

884
01:09:34,480 --> 01:09:38,680
कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार अरे दुकान तो उन्होंने

885
01:09:38,680 --> 01:09:42,720
खोली थी ना जो प्रचार कर रहे हैं मैं तो

886
01:09:42,720 --> 01:09:46,920
गया था इनकी दुकान पर वहां पर इनके 15 20 लोग

887
01:09:46,920 --> 01:09:50,960
लोग थे सबका मुह बंद हो गया वेद को नहीं मानते भाई सीधे

888
01:09:50,960 --> 01:09:56,960
कहो ना वो वीडियो बड़ी अच्छी लगी आपकी

889
01:09:57,360 --> 01:10:01,360
उसी के कारण तो यह सब स्टार्ट हो गया जब वो वीडियो

890
01:10:01,360 --> 01:10:05,480
बनी थी उसके बाद हमने छोड़ दिया था इनको बस वो वीडियो

891
01:10:05,480 --> 01:10:09,600
बनवा दिया था और वीडियो

892
01:10:09,600 --> 01:10:13,840
वीडियो ब बना कर के हमने छोड़ दिया था उसके बाद हुआ क्या वह वीडियो बाद में चलती

893
01:10:13,840 --> 01:10:17,880
रही चलती रही चलती रही और उसको लोग देखते रहे जब देखते रहे तो इनको

894
01:10:17,880 --> 01:10:22,040
दिक्कत हुई कि भैया लोग उससे प्रभावित हो रहे हैं जब

895
01:10:22,040 --> 01:10:26,200
प्रभावित हो रहे हैं तो क्या हुआ कि

896
01:10:26,200 --> 01:10:30,400
इन्होंने हमारे विरोध में कई सारे वीडियोस बना दिए तब भी मैंने

897
01:10:30,400 --> 01:10:34,600
कहा कि छोड़ो सामना करें करना होगा तो आएंगे मैंने तो अपना नंबर

898
01:10:34,600 --> 01:10:38,800
दिया था उस वीडियो में भी अपना नंबर दिया मैंने पता दिया

899
01:10:38,800 --> 01:10:43,120
दिया दिया है हा तो नंबर दिया था मगर किसी में इतनी झस

900
01:10:43,120 --> 01:10:47,360
नहीं हुई कि वो एक बार कॉल कर लेता इतना गुर्दा किसी का नहीं था

901
01:10:47,360 --> 01:10:52,080
कि कॉल कर लेता मैं आपके साथ लाइव आऊंगा फिर उसके बाद लाइव आए

902
01:10:52,080 --> 01:10:56,200
तो लाइव आकर के फिर वो लाइव आने से फिर वो क्रम बन गया फिर मैंने इनका

903
01:10:56,200 --> 01:11:00,800
जो मैंने कहा यार अच्छा मुझे लगता था मुझे इनका ऐसे शास्त्रोक्त तरीके

904
01:11:00,800 --> 01:11:04,960
से बैठ कर के विवत इनके मतलब इनके जाल में

905
01:11:04,960 --> 01:11:09,440
बुद्धिजीवी लोग नहीं फसते होंगे ऐसे ही जो कम ज्ञानी है

906
01:11:09,440 --> 01:11:12,560
या जो पिछड़े वर्ग के लोग है वही फसते होंगे

907
01:11:12,560 --> 01:11:16,680
तो मैंने अपने मन में ये नहीं था कि मैं इनका शास्त्रों को लेकर के निराकरण प्रस्तुत करूं

908
01:11:16,680 --> 01:11:21,280
बस ये वहा मिल गए थे मेले में तो मैंने इनका वहा पर किया

909
01:11:21,280 --> 01:11:25,280
मगर जब मैंने इसको ध्यान से देखा तो मैंने कहा ये लोग तो मतलब बिल्कुल

910
01:11:25,280 --> 01:11:29,520
कर दे रहे तब मैंने जो है शास्त्रों को लेकर

911
01:11:29,520 --> 01:11:33,760
बैठा और फिर एक पूरी पीडीएफ बनाई कि इनकी हर बात का निराकरण

912
01:11:33,760 --> 01:11:37,800
प्रस्तुत करना कर दे एक बार को और वो किया तब से

913
01:11:37,800 --> 01:11:41,800
यह सिलसिला चालू हो गया बहुत बढ़िया ऐसे

914
01:11:41,800 --> 01:11:46,040
ही अगर और एक बार लिक लिंक दे दीजिए कोई आना चाहता हो

915
01:11:46,040 --> 01:11:50,040
कोई जो पढ़ना चाहता हो चक्कर में मानता हो खुद

916
01:11:50,040 --> 01:11:54,240
को टक्कर में वो आए ऊपर जी बोलिए पाड़ी

917
01:11:54,240 --> 01:11:58,280
जी बो कि ऐसे ही अगर कहीं और स्टॉल लगता है तो

918
01:11:58,280 --> 01:12:02,360
आप इस बार टीम के साथ जाइए और निराकरण करके आ

919
01:12:02,360 --> 01:12:06,800
अी से बिल्कुल बिल्कुल अब लगा नहीं है इस बार फिलहाल

920
01:12:06,800 --> 01:12:10,880
तो नहीं लगा अभी कल जाकर चेक करना है व लखनऊ महोत्सव लग गया है

921
01:12:10,880 --> 01:12:15,160
इस बार वो यहां के जो आरएसएस वाले लोग है वो लोग भी तैयार है

922
01:12:15,160 --> 01:12:19,480
फुल तरीके से अगर लगता है तो वहां पहुंचेंगे सब लोग

923
01:12:19,480 --> 01:12:24,240
अभी लगा नहीं है इस बार अब उसका कारण यह टेरर है

924
01:12:24,240 --> 01:12:27,720
या फिर यह कि इनका

925
01:12:27,720 --> 01:12:31,880
भंडारा भी था ना 15 16 17 को हो सकता है उसकी

926
01:12:31,880 --> 01:12:34,920
वजह से ना

927
01:12:34,920 --> 01:12:38,920
लगाओ हो सकता है

928
01:12:38,920 --> 01:12:42,920
तात्विक जी तो मैं एक बार जय

929
01:12:42,920 --> 01:12:46,920
श्री राम सा जी तो मैं एक

930
01:12:46,920 --> 01:12:51,040
ब जो है जय श्री राम मैं एक बार जो है वो

931
01:12:51,040 --> 01:12:55,400
एक पूरा बता दूं यह लोग वेदों में विश्वास नहीं रखते क्योंकि

932
01:12:55,400 --> 01:12:59,680
अगर हम किसी को पवित्र ग्रंथ कह रहे हैं सद ग्रंथ कह रहे हैं तो सत्य

933
01:12:59,680 --> 01:13:04,520
ग्रंथ सद ग्रंथ सत ग्रंथ सत्य बोलने वाले ग्रंथ

934
01:13:04,520 --> 01:13:08,680
यह फिर उसी ग्रंथ में खुद कह देते कि वो सत्य नहीं बोल रहे कहीं कहीं दूसरी

935
01:13:08,680 --> 01:13:12,680
बात य सत का मतलब व ईश्वर की बात कर रहे ईश्वर तक पहुंचाने की बात कर रहे

936
01:13:12,680 --> 01:13:16,720
फिर य खुद ही कहते यज्ञ के द्वारा मोक्ष नहीं है जब

937
01:13:16,720 --> 01:13:20,760
यज्ञ के द्वारा मोक्ष नहीं है तो यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी नहीं है

938
01:13:20,760 --> 01:13:26,760
पूर्ण ब्रम की प्राप्ति कराने वाला नहीं है

939
01:13:27,320 --> 01:13:31,400
और बहुत सारी चीजें हैं किसी दिन इसको एक समरा इज करके भी

940
01:13:31,400 --> 01:13:37,400
एक साथ बता दिया

941
01:13:49,720 --> 01:13:54,000
जाएगा आपकी बहुत जल्द पोल खोलने वाली भाई ऐसे पोल

942
01:13:54,000 --> 01:13:58,200
मत खोलो ना सामना करो ना अपने बंद कमरे में बैठ के कुछ भी बना दो

943
01:13:58,200 --> 01:14:02,920
और फिर उसके बाद को हमने पोल खोल दी यही तो किया था आपके

944
01:14:02,920 --> 01:14:07,040
तथाकथित तत्वदर्शी जी ने या कहे तिरछा दर्शी जी

945
01:14:07,040 --> 01:14:11,240
ने पता नहीं कौन सा रजिस्टर्ड लेटर भेजा भी है कि नहीं भेजा

946
01:14:11,240 --> 01:14:15,960
है उसमें खुद ही ठप्पा लगा के बना बनू के दिखा दिया हमको क्या पता

947
01:14:15,960 --> 01:14:20,760
है और अगर कोई तुम्हारे बुलाने पर नहीं आया तो बस

948
01:14:20,760 --> 01:14:24,880
हो गया अब मैं बुला रहा हूं तुम नहीं आ रहे हो तो तुम हर

949
01:14:24,880 --> 01:14:29,640
ग तुम्हारा मत जो है गलत है मैं बुला रहा हूं आ

950
01:14:29,640 --> 01:14:34,760
जाओ मैं बुला रहा हूं तुम्हें आ जाओ

951
01:14:34,760 --> 01:14:39,160
आओ ये वही हेमंत दास है क्या

952
01:14:39,160 --> 01:14:42,520
वही तो नहीं है अरे छह

953
01:14:42,520 --> 01:14:46,600
शास्त्रों के नाम पूछे थे इनसे छह शास्त्रों के

954
01:14:46,600 --> 01:14:50,600
नाम नहीं बता पाए ये एमपी खबर वाले पा पाच छछ लोग

955
01:14:50,600 --> 01:14:55,120
बैठे थे इनके नहीं चलो खैर ये तो खैर एक वो

956
01:14:55,120 --> 01:14:59,160
वस्तुनिष्ठ वाली बात है कि नहीं स्मरण रहा व्यक्ति को अब जैसे

957
01:14:59,160 --> 01:15:03,200
कि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति है उससे आप यह भी कह दो कि भाई छोटा बड़ा सुना

958
01:15:03,200 --> 01:15:07,760
दे पूरा वो तो ठीक है

959
01:15:07,760 --> 01:15:11,960
कई बार हो सकता है वो गच्चा खा जाए मगर उनके पास शास्त्रोक्त बातों

960
01:15:11,960 --> 01:15:15,200
का जवाब नहीं

961
01:15:15,200 --> 01:15:19,240
है कुछ रट रखा उन लोगों ने उन्होंने बस वही

962
01:15:19,240 --> 01:15:23,440
चीज याद है उनको वेदों की अपता के बारे

963
01:15:23,440 --> 01:15:27,880
में यही है कि उनका रचनाकार नहीं

964
01:15:27,880 --> 01:15:32,160
है इसी से वो अपुष सिद्ध है उनको

965
01:15:32,160 --> 01:15:36,320
किसी ने रचा नहीं है ये वेदों से सिद्ध हो जाता है वेदों में बहुत

966
01:15:36,320 --> 01:15:39,400
जगह आ रखा हैय चीजें

967
01:15:39,400 --> 01:15:44,000
हां चलिए फिर मेरे ख्याल से आज की बातें पूरी हो गई

968
01:15:44,000 --> 01:15:48,000
और कोई और है नहीं जो आना आ सकता हो

969
01:15:48,000 --> 01:15:53,120
गोपाल चौधरी जी आपकी फोटो नहीं दिख रही आपका शायद वो नेट गड़बड़ कर रहा

970
01:15:53,120 --> 01:15:57,520
है तो आज मुख्य रूप से वही चीज जान लीजिए

971
01:15:57,520 --> 01:16:01,680
कि जो वेद है रामपाल उसके निंदक

972
01:16:01,680 --> 01:16:06,040
है वेद निंदक और अगर वेदों की भाषा में कहा जाए तो वह नास्तिक

973
01:16:06,040 --> 01:16:10,080
है क्योंकि वह वेदों की निंदा कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं क्योंकि

974
01:16:10,080 --> 01:16:14,120
उस वेदों को गीता को बोलने वाला लिखने वाला जो है वह

975
01:16:14,120 --> 01:16:18,200
अज्ञानी है और उनका अनुसरण

976
01:16:18,200 --> 01:16:22,200
करोगे उनके रास्ते पर चलोगे तो तुमको खा लेगा ब्रह्म नाम ब्रह्म नाम

977
01:16:22,200 --> 01:16:26,320
का एक राक्षस है इन्होने बनाया है ठीक

978
01:16:26,320 --> 01:16:30,320
है और उनके इनके अनुसार उनसे मिलने

979
01:16:30,320 --> 01:16:34,560
वाली केवल एक ही शिक्षा है जो काम की है वो है कि उसमें लिखा है तत्वदर्शी के

980
01:16:34,560 --> 01:16:38,800
पास जाओ इसको छोड़ दो उसमें लिखा है मुझे छोड़ो इसके पास जाओ

981
01:16:38,800 --> 01:16:42,880
किसके पास तत्वदर्शी के पास तो उसमें भी इनसे चूक

982
01:16:42,880 --> 01:16:47,080
हो गई क्योंकि वो तत्वदर्शी क्या है जो यज्ञ की बात सिखाए यज्ञ

983
01:16:47,080 --> 01:16:51,080
जो है मोक्ष देते नहीं है और

984
01:16:51,080 --> 01:16:55,240
भी अच्छा इन्होंने अपना ही खंडन वो खिचड़ी जो पकाई उसने

985
01:16:55,240 --> 01:16:59,440
खूब किया है खूब खंडन अपना किया है अब यज्ञ जो है वो नहीं देते मगर

986
01:16:59,440 --> 01:17:03,440
अर्जुन जो है मुक्त हो गया वह तो

987
01:17:03,440 --> 01:17:07,880
नहीं मिला रामपाल से वो नहीं मिला कबीर से मगर अर्जुन मुक्त हो

988
01:17:07,880 --> 01:17:11,920
गया सभी को मुक्ति मिली थी हा

989
01:17:11,920 --> 01:17:15,920
नहीं मैं इनकी किताबों की बात कर रहा हूं अभी तो अर्जुन

990
01:17:15,920 --> 01:17:20,480
इनकी किताबों के अनुसार मुक्त हुआ है

991
01:17:20,480 --> 01:17:24,520
क्या खिचड़ी पगा रखी है महाभारत में जितने

992
01:17:24,520 --> 01:17:28,760
भी रेक्टर थे प्रतिपक्ष पक्षम जी करके कोई आए

993
01:17:28,760 --> 01:17:33,080
हैं आपके पास आपका चेहरा होगा तो उसको

994
01:17:33,080 --> 01:17:37,080
दिखाए राम जी नहीं है तो

995
01:17:37,080 --> 01:17:43,080
फिर आपको हटा दिया

996
01:17:46,120 --> 01:17:50,360
जाएगा एक दिन शिवं भाई महाभारत

997
01:17:50,360 --> 01:17:54,880
का महाभारत का प्रथम खंड का

998
01:17:54,880 --> 01:17:58,880
एक जल्द ही एक समरा इज वीडियो लेकर के आऊंगा जो अभी तक हमने

999
01:17:58,880 --> 01:18:03,120
इतनी सारी डिबेट्स की है या जो चर्चाएं की है उनको लेकर

1000
01:18:03,120 --> 01:18:08,960
के पूरा एक सराइज वीडियो कि आधे घंटे में ही आपको सारी

1001
01:18:08,960 --> 01:18:13,000
जानकारी सूत्रा क्मक शैली में पता चल जाए कि इनका है क्या क्या कर रहे

1002
01:18:13,000 --> 01:18:17,120
हैं अंततोगत्वा तो मैं ये कह रहा हूं अगर तुम सबसे पहले तो ये जानो

1003
01:18:17,120 --> 01:18:21,400
एलईडी से दीक्षा ले लेकर के जो तुम लोग बन रहे हो हम रामपाल

1004
01:18:21,400 --> 01:18:25,400
के शिष्य हो गए रामपाल जिंदाबाद पहले जाके पता करोगे डी से माना

1005
01:18:25,400 --> 01:18:29,520
है कि नहीं रामपाल ने जी जी जी नहीं मैं ये कह

1006
01:18:29,520 --> 01:18:33,720
रहा था जैसे एलिगेंस से लगाते हैं ना ये कि भगवान श्री कष्ण इतने महान

1007
01:18:33,720 --> 01:18:37,920
थे तो उन्होने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं रोका उनको शराब

1008
01:18:37,920 --> 01:18:42,040
क्यों लगा तो इसका एक दिन आप महाभारत के

1009
01:18:42,040 --> 01:18:46,040
ऊपर वीडियो रखो लाइव स्ट्रीम रखो प्रथम

1010
01:18:46,040 --> 01:18:50,040
खंड का एक अवतार अवतार जो पर्व है

1011
01:18:50,040 --> 01:18:54,760
एक वो और स्त्री विलाप पर्व दो और

1012
01:18:54,760 --> 01:18:58,920
स्वर्गारोहण पर्व तीन ये तीन पर्व में पूरे महाभारत का सारांश

1013
01:18:58,920 --> 01:19:01,160
निकल जाएगा पूरा पता चल जाएगा

1014
01:19:01,160 --> 01:19:05,760
कि ये युद्ध क्यों हुआ था और भगवान श्री कृष्ण को

1015
01:19:05,760 --> 01:19:09,880
जो शराप दिया था यादव वंश को कटने का तो श्री कृष्ण

1016
01:19:09,880 --> 01:19:13,880
भगवान ने कहा था कि ये तो पहले से तय था ये तो होने वाला था जो होने वाला

1017
01:19:13,880 --> 01:19:18,040
तुम उसी को बता रहे हो मेरे को ये अवद है जितने भी यादव है

1018
01:19:18,040 --> 01:19:22,160
ये ये अवद है ये देव है ये देवता है ये ये किसी के द्वारा

1019
01:19:22,160 --> 01:19:26,480
मारने योग्य नहीं है इसलिए आपस में ही कट के मरेंगे और और मेरे साथ ही यह

1020
01:19:26,480 --> 01:19:31,040
वहां जाएंगे य मधाम में लिखा है महाभारत

1021
01:19:31,040 --> 01:19:35,360
में उदेश यदि गलत को जानना है तो ठीक है लेकिन

1022
01:19:35,360 --> 01:19:39,600
ईष है तो गलत ही है कौन है अच्छा

1023
01:19:39,600 --> 01:19:43,960
एक चीज और दिखा देते इनको कि

1024
01:19:43,960 --> 01:19:49,960
काल जो है वह किसके इशारों पर काम करता है यह भी देख

1025
01:19:50,640 --> 01:19:54,720
लीजिए इनकी एक बुक है भगवान

1026
01:19:54,720 --> 01:20:00,720
और भक्त उसमें 54 नंबर पेज

1027
01:20:00,800 --> 01:20:05,080
निकालिए जहा परमेश्वर के अलावा

1028
01:20:05,080 --> 01:20:09,320
जहा परमेश्वर के अलावा किसी और की सत्ता हुई तो व परमेश्वर सर्वशक्तिमान कैसे

1029
01:20:09,320 --> 01:20:15,320
हो गया वही तो बात है जो ये लोग नहीं

1030
01:20:23,240 --> 01:20:28,080
सुनते इसका मतलब काल के आगे कबीर दास जी की भी नहीं

1031
01:20:28,080 --> 01:20:32,080
चलती

1032
01:20:32,080 --> 01:20:38,080
जी

1033
01:20:42,840 --> 01:20:48,840
मिला ये बड़ी अच्छी अच्छी इन्होंने जानकारियां दे रखी

1034
01:20:49,480 --> 01:20:55,480
है हां ये

1035
01:21:01,200 --> 01:21:05,440
देखिए कबीर ने हमें बारबार कहा था य ज्योत निरंजन तुम्हें

1036
01:21:05,440 --> 01:21:10,680
बहुत दुखी करेगा क्योंकि यह तो मेरा मजबूर मजदूर है

1037
01:21:10,680 --> 01:21:14,920
तो किसका मजदूर है काल किसके कहने पर काम करता

1038
01:21:14,920 --> 01:21:19,640
है कवि जी के हा

1039
01:21:19,640 --> 01:21:25,640
यह कबीर की ही इच्छा है कि वह दुखी कर रहा है आपको और बताओ

1040
01:21:25,920 --> 01:21:30,120
ठीक है चलिए कोई

1041
01:21:30,120 --> 01:21:36,120
है नहीं टक्कर में कोई पढ़ना नहीं चाहता चक्कर

1042
01:21:37,400 --> 01:21:41,640
में तो बहुत सारी बातें मेन बात तो आज की यह थी कि

1043
01:21:41,640 --> 01:21:45,760
भाई जो नाम नाम दान दिया जा रहा है इनके

1044
01:21:45,760 --> 01:21:49,880
द्वारा वोह अच्छा य जो अमित दास है ना इससे कोई

1045
01:21:49,880 --> 01:21:53,960
भी बात अर्थपूर्ण बात नहीं हो रही है यह केवल आता है कुछ

1046
01:21:53,960 --> 01:21:58,120
रट के उसको उसको यहां पर आके बोलना होता है फिर यह यहां से कट

1047
01:21:58,120 --> 01:22:03,280
उठाता है और वहां जाकर के दिखाता है देखो हमने यह किया वो

1048
01:22:03,280 --> 01:22:05,400
किया

1049
01:22:05,400 --> 01:22:09,800
बाबूराम चलो कोई तो

1050
01:22:09,800 --> 01:22:15,800
आया बाबूराम चेहरा कहां है

1051
01:22:19,720 --> 01:22:24,760
आपका बाबूराम

1052
01:22:24,760 --> 01:22:30,760
चेहरा कहां है आपका बाबूराम जी सर जी सर आ रहा

1053
01:22:39,120 --> 01:22:41,720
[संगीत]

1054
01:22:41,720 --> 01:22:46,080
हूं हां सर बोलिए बाबू

1055
01:22:46,080 --> 01:22:50,240
राम हां नमस्ते सर हां जय

1056
01:22:50,240 --> 01:22:54,800
श्री राम बोलिए आपसे हम

1057
01:22:54,800 --> 01:22:59,160
आज गरुड़ पुराण पर चर्चा करना चाहते हैं गरुड़

1058
01:22:59,160 --> 01:23:03,400
पुराण पर चर्चा क्यों करना चाहते हो यह बताओ हम मक्ष

1059
01:23:03,400 --> 01:23:07,880
प्राप्ति के लिए जानना चाहते हैं कि जो हमारे हिंदू धर्म के लोगों को आप लोगों ने

1060
01:23:07,880 --> 01:23:11,960
मक्ष प्राप्ति के क्या दिशा निर्देश दिए हैं मैं आपसे यह

1061
01:23:11,960 --> 01:23:15,960
पूछूंगा सबसे पहले क्या आप मानते हो कि जो वेदों

1062
01:23:15,960 --> 01:23:19,880
का मार्ग है उससे मोक्ष मिलता

1063
01:23:19,880 --> 01:23:24,920
है वेदक मार्ग से मानने वाले हो कि नहीं

1064
01:23:24,920 --> 01:23:29,240
मानते हैं ना सर वेदों को मानते हो तो क्या मानते

1065
01:23:29,240 --> 01:23:33,360
हो वेदों के बारे में वेदों में हमारे

1066
01:23:33,360 --> 01:23:37,640
गुरुजी ने बताया है कि कबीर परमात्मा का एक वाणी है कि वेद मेरा

1067
01:23:37,640 --> 01:23:41,720
भेद है मैं ना मिलू वेदन की माही जोन वेद से मैं मिलू व

1068
01:23:41,720 --> 01:23:46,560
वेद कोई जानते नहीं बताया है कि जो हमारे

1069
01:23:46,560 --> 01:23:51,120
चार वेद है अथर्ववेद सामवेद और ये जो है

1070
01:23:51,120 --> 01:23:55,480
इनसे क्या मुक्ति मिलती है

1071
01:23:55,480 --> 01:24:00,640
इसमें देखिए कुछ भेद छिपा हुआ है लेकिन मुक्ति के रास्ता नहीं है तत्वदर्शी के पास है

1072
01:24:00,640 --> 01:24:04,800
अच्छा मुक्ति का रास्ता में नहीं है ना

1073
01:24:04,800 --> 01:24:09,080
मुक्ति का रास्ता तत्वदर्शी के पास उसम कुछ भेद छिपे हुए हैं

1074
01:24:09,080 --> 01:24:13,200
देखिए पॉइंट टू नटेड आप लोग पहले देख लीजिए कि यह खुद कह रहे

1075
01:24:13,200 --> 01:24:17,240
हैं वेदों में और यह जो गीता है इसमें केवल एक ही चीज आपको मिलनी

1076
01:24:17,240 --> 01:24:21,240
है और वो है तत्वदर्शी अय

1077
01:24:21,240 --> 01:24:26,120
बताइए कि आपने अपने गुरु को तत्वदर्शी क्यों माना है

1078
01:24:26,120 --> 01:24:30,360
गीता जैसे बता रहे हैं आप देखिए गीता में अगर कृष्ण

1079
01:24:30,360 --> 01:24:34,560
भगवान के पास अगर पूरा ज्ञान होता तो वह तत्वदर्शी भाई साहब

1080
01:24:34,560 --> 01:24:38,720
देखिए होता होता नहीं जो बात चल रही है वो पूछ रहा हूं आपने अपने गुरु को

1081
01:24:38,720 --> 01:24:40,240
तत्वदर्शी क्यों माना

1082
01:24:40,240 --> 01:24:44,800
है तत्वदर्शी इसलिए माने है कि उन्होने तत्व ज्ञान दे रहे हैं

1083
01:24:44,800 --> 01:24:49,120
और तत्व ज्ञान क्या है वह परमात्मा

1084
01:24:49,120 --> 01:24:53,280
परमात्मा तक का जानकारी देते हैं कि परमात्मा कौन सुलो

1085
01:24:53,280 --> 01:24:57,280
ध्यान से पूछ रहा हूं अब दोबारा पलटना नहीं अपनी बात से जैसे पलटते

1086
01:24:57,280 --> 01:25:01,280
हो जी जी जी गीता में चा 34 में

1087
01:25:01,280 --> 01:25:05,360
तत्वदर्शी जाने को बात कही गई है ना जी सर जी सर

1088
01:25:05,360 --> 01:25:09,600
तो 4 34 का जो तत्वदर्शी है व कौन सा ज्ञान देता

1089
01:25:09,600 --> 01:25:13,720
है वह तत्व ज्ञान देता है उसमें लिखा गया है कि द्रव में यज्ञ

1090
01:25:13,720 --> 01:25:18,160
की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है और न मात्र

1091
01:25:18,160 --> 01:25:22,160
जो द्रव यज्ञ है वह व क्या है कि जो तत्व ज्ञान

1092
01:25:22,160 --> 01:25:26,320
है तत्व ज्ञान में मुझे बताइए जो तत्व दर्शी है

1093
01:25:26,320 --> 01:25:30,360
4 34 का वह कौन सा ज्ञान देता है वह

1094
01:25:30,360 --> 01:25:34,640
तत्व ज्ञान देता है तत्व ज्ञान किस चीज का तत्व

1095
01:25:34,640 --> 01:25:39,200
तत्व तो पेड़ का भी तत्व है साइंस का भी तत्व है किस चीज का तत्व ज्ञान

1096
01:25:39,200 --> 01:25:43,200
वह परमात्मा तत्व का ज्ञान देता है परमात्मा

1097
01:25:43,200 --> 01:25:47,400
तत्व का ज्ञान देने वाला नहीं लिखा है वहां पर यज्ञ का ज्ञान देने वाला लिखा है वहां

1098
01:25:47,400 --> 01:25:53,400
पर मैं खोल रहा हूं सर खोल रहा हूं खोलिए

1099
01:26:09,360 --> 01:26:14,320
हा 3 33 से पढ़ रहे हैं ना सर

1100
01:26:14,320 --> 01:26:17,400
पढ़ो हे प्रपंच अर्जुन द्रव्य में

1101
01:26:17,400 --> 01:26:21,680
यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है तथा

1102
01:26:21,680 --> 01:26:25,960
या वन मात्र संपूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं

1103
01:26:25,960 --> 01:26:30,200
यह बोल रहा है कि द्रव में यज्ञ यानी जो वस्तु का यज्ञ है अरे वो द्र यज्ञ

1104
01:26:30,200 --> 01:26:34,280
छोड़ो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है ना

1105
01:26:34,280 --> 01:26:38,480
जी सर जी सर ठीक है अब इनको इनकी

1106
01:26:38,480 --> 01:26:42,680
किताब दिखा दो वही जो सबसे पहले दिखाया था रुक जा बात मत काटिए

1107
01:26:42,680 --> 01:26:47,920
परा सुन्य दीजिए बात क्यों काट रहे हैं इसमें अब 34 में क्या कहता

1108
01:26:47,920 --> 01:26:51,920
है आपने जब ये मान लिया ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने

1109
01:26:51,920 --> 01:26:56,800
वाला तत्वदर्शी है तो अब और क्या सुनाओ जी जी जी

1110
01:26:56,800 --> 01:27:01,320
जन यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है ना हा और

1111
01:27:01,320 --> 01:27:05,560
यहां पर ये बोल रहा परमा ई पूछ रहा उसम ना यार

1112
01:27:05,560 --> 01:27:09,640
क्यों टाइम बढ़ रहे हो आगे का ज्ञान देने

1113
01:27:09,640 --> 01:27:14,040
वाला तत्वदर्शी है ठीक है

1114
01:27:14,040 --> 01:27:18,240
इनको को सुनि इसीज

1115
01:27:18,240 --> 01:27:22,320
आपको दिखा रहे रुक जाओ जी व निकालो क्या

1116
01:27:22,320 --> 01:27:25,560
कहते हैं

1117
01:27:25,560 --> 01:27:30,400
इनकी गरिमा गीता की का पेज नंबर शुरुआत का था

1118
01:27:30,400 --> 01:27:36,400
जो जी

1119
01:27:36,520 --> 01:27:40,640
खाए हां पहले इनको हेडिंग दिखा दो इसी की

1120
01:27:40,640 --> 01:27:45,000
इस पैराग्राफ की हेडिंग है पिछले पेज प

1121
01:27:45,000 --> 01:27:49,840
ये पढ़ संख्या पृष्ठ संख्या बोलिए

1122
01:27:49,840 --> 01:27:55,160
मे मे पास पुत पृष्ठ संख्या बता

1123
01:27:55,160 --> 01:28:01,160
प्रश् संख्या

1124
01:28:01,400 --> 01:28:04,680
39 जी

1125
01:28:04,680 --> 01:28:08,800
बोलिए इसको पढ़ो हेडिंग क्या लिखी है जो सामने दिख रहा है

1126
01:28:08,800 --> 01:28:13,000
बड़ा कर दो थोड़ा बाबू की शायद आंखें वीक हो जी

1127
01:28:13,000 --> 01:28:17,440
जी थ बड़ा कर पढ़ो बाबू

1128
01:28:17,440 --> 01:28:21,800
जी क्या इस हेडिंग में इस हेडिंग में लिखा है यज्ञों का लाभ

1129
01:28:21,800 --> 01:28:26,920
केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति

1130
01:28:26,920 --> 01:28:30,920
खा हु रुक जाओ गलत अरे यार तुम वो मत बताओ जो पढ़

1131
01:28:30,920 --> 01:28:35,680
रहा है पढ़ दिया ना अब आगे नीचे जाओ नीचे जाओ इनको दिखाओ

1132
01:28:35,680 --> 01:28:40,240
कौन-कौन से यज्ञ जिनसे मुक्ति नहीं होगी यह पढ़ो

1133
01:28:40,240 --> 01:28:44,280
दिखा नीचे पढ़े हा यह

1134
01:28:44,280 --> 01:28:48,960
पढ़ो धर्म यज्ञ कौन-कौन से यज्ञ यज्ञों का मतलब

1135
01:28:48,960 --> 01:28:52,600
40 पृष्ठ

1136
01:28:52,600 --> 01:28:57,480
पर उसम

1137
01:28:57,480 --> 01:29:01,680
धर्म धर्म य हवन य ध्यान य प्रणाम य ज्ञान

1138
01:29:01,680 --> 01:29:06,720
यज हा रूपी रू

1139
01:29:06,720 --> 01:29:10,840
जल जी जन यज आ गया ना

1140
01:29:10,840 --> 01:29:14,880
पाच होता है सुनो सुनो बड़ा कर

1141
01:29:14,880 --> 01:29:20,520
दो हमारा इनका चेहरा बड़ा कर दो हमारा इनका चेहरा बड़ा कर

1142
01:29:20,520 --> 01:29:24,560
जी यज्ञ का अर्थ ज्ञान भी

1143
01:29:24,560 --> 01:29:28,680
है ना जी ऊपर आपने लिख दिया

1144
01:29:28,680 --> 01:29:32,800
यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी तो वो

1145
01:29:32,800 --> 01:29:36,840
बोल तो रहा है कि आप जो यज्ञ करेंगे उसे संसार द्रव

1146
01:29:36,840 --> 01:29:41,280
में यज्ञ करेंगे द्रव में यज्ञ से आपका संसार व पर पांचों यज्ञों

1147
01:29:41,280 --> 01:29:45,520
का लिखा है ना वहा नहीं ज्ञान यज्ञ को छोड़ा नहीं गया है

1148
01:29:45,520 --> 01:29:49,720
वहा पांचों यज्ञों की बात हो रही है कि यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी पांचों प्रकार

1149
01:29:49,720 --> 01:29:55,160
के यज्ञों से आपने पढ़ा ना पांचों का नाम प

1150
01:29:55,160 --> 01:29:59,200
ज्ञान यज्ञ से मुक्ति हो पांच य तो होते

1151
01:29:59,200 --> 01:30:03,720
है पाच य पाच य होते हैं

1152
01:30:03,720 --> 01:30:07,960
य पा लेकिन मुक्ति होती है जन यज से

1153
01:30:07,960 --> 01:30:13,240
उसम लिखा है क्या जन होगी

1154
01:30:13,240 --> 01:30:17,240
परा को पढ़ दोबारा कहा लिखा है आपको

1155
01:30:17,240 --> 01:30:21,640
गीता से नहीं दिखा क्या सर दरा

1156
01:30:21,640 --> 01:30:25,760
स्वीकार चीज है उसम पढ़ो य से मुक्ति क लिखा है तुम्हारे

1157
01:30:25,760 --> 01:30:30,240
गुरु ने जी पढ़ रहे

1158
01:30:30,240 --> 01:30:34,240
के लिए जल पोषण के लिए खाद आवश्यकता होती उसी प्रकार परमात्मा

1159
01:30:34,240 --> 01:30:38,400
के भ मंत्र बीज रूपी आत्मा डालने के पश्चात

1160
01:30:38,400 --> 01:30:42,480
उसम चल खाद की आवश्यकता परंतु उस पूर्ण गुरु से नाम लेने

1161
01:30:42,480 --> 01:30:46,600
परक गुरु माध रहने से अंतिम समय तक अन मन से नाम

1162
01:30:46,600 --> 01:30:50,680
जाप अभ्यास योग करते है व साधक अंत समय में

1163
01:30:50,680 --> 01:30:54,680
अपने लोक में चला जाता है जबत में रहता है उसको

1164
01:30:54,680 --> 01:30:59,080
यज्ञ के फल स्वरूप संसारी सुविधाएं भी अधिक मिलती रहती है वही यज्ञ में प्रतिष्ठित

1165
01:30:59,080 --> 01:31:03,240
इष्ट ही मन इच्छित यज्ञ का फल देता है यह बोल रहा है कि आपको पूर्ण

1166
01:31:03,240 --> 01:31:07,400
गुरु की आवश्यकता है तो आपको मोक्ष हो जाए पूण गुरु की पहचान के लिए ही

1167
01:31:07,400 --> 01:31:11,440
अभी हम लोग बात कर रहे हैं ना जी पूर्ण गुरु

1168
01:31:11,440 --> 01:31:15,440
कौन होगा उसकी पहचान के लिए बात कर रहे हैं ना उससे जब तक पहचान नहीं मिल

1169
01:31:15,440 --> 01:31:19,880
जाती तब तक तो हम किसी को पूर्ण गुरु नहीं बना लेंगे ना जी

1170
01:31:19,880 --> 01:31:23,080
अब आपका कहना है कि पूर्ण गुरु वो है जो ज्ञान यज्ञ

1171
01:31:23,080 --> 01:31:27,280
का ज्ञान दे जी जी जी आप ये कह रहे हो

1172
01:31:27,280 --> 01:31:31,280
कि किसी भी प्रकार का यज्ञ पांच यज्ञ बताए हैं उन

1173
01:31:31,280 --> 01:31:36,760
पांचों में से कोई भी यज्ञ ऊपर हेडिंग लिखी है यज्ञों से मुक्ति नहीं

1174
01:31:36,760 --> 01:31:40,960
है यानी कि जो गीता का जो तत्वदर्शी

1175
01:31:40,960 --> 01:31:45,160
है आपके अनुसार वोह ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला

1176
01:31:45,160 --> 01:31:49,160
है और ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं है ज्ञान

1177
01:31:49,160 --> 01:31:53,280
यग से मुक्ति है तो गीता कह रही है तो कैसे गलत कर रहे आप आपका गुरु कह

1178
01:31:53,280 --> 01:31:57,360
रहा है गलत कह रहा है क्या हमारे गुरु जी कह रहे पांच प्रकार के यग

1179
01:31:57,360 --> 01:32:01,440
होते हैं हां तो उसम उसम ऊपर क्या हेडिंग है उसमें ऊपर क्या

1180
01:32:01,440 --> 01:32:05,680
हैडिंग है ऊपर में हेडिंग है मुक्ति बताई

1181
01:32:05,680 --> 01:32:09,880
उसम बताया है कि जो यज्ञ करते हैं इस यज्ञों से मुक्ति नहीं होती है ये संसार

1182
01:32:09,880 --> 01:32:13,920
सुविधाए आपको उपलब्ध हो जाएगी लेकिन जो ञान उन्होने उन्होंने

1183
01:32:13,920 --> 01:32:18,400
यज्ञ का अर्थ ज्ञान यज्ञ भी माना है ना माना

1184
01:32:18,400 --> 01:32:22,520
है जो पांचवा ज्ञान यज्ञ है जो पांच यज्ञ है तो उसमें पांचवा

1185
01:32:22,520 --> 01:32:26,800
जो ज्ञान यज्ञ है उस मुक्ति ये आपके गुरु ने नहीं लिखा

1186
01:32:26,800 --> 01:32:30,840
ना व ज्ञान यज्ञ अलग है उन्होंने ज्ञान यज्ञ को

1187
01:32:30,840 --> 01:32:34,880
भी उन्ही यज्ञों के साथ में लिया है इसलिए तो बताया है पाच

1188
01:32:34,880 --> 01:32:38,160
प्रकार के य होते है इसम गुरु

1189
01:32:38,160 --> 01:32:42,680
व आपको पूछ रहा ज्ञान यज्ञ अलग

1190
01:32:42,680 --> 01:32:47,400
लि उसी में तो नीचे लिखा हु पूर्ण गुरु से ही मुक्ति होगी

1191
01:32:47,400 --> 01:32:51,680
ज्ञान यज्ञ को अलग लिखा है क्या ज्ञान यज्ञ अलग है

1192
01:32:51,680 --> 01:32:55,720
ऐसे लिखा है क्या एक में लिखा हुआ है एक

1193
01:32:55,720 --> 01:33:00,200
में लिखा हुआ है उसम हम नहीं क रहे लेकिन उसी नीचे लि सुनो

1194
01:33:00,200 --> 01:33:04,320
उन्होने सुनो जब उन्होंने हेडिंग डाली यज्ञों से मुक्ति

1195
01:33:04,320 --> 01:33:08,360
नहीं उसके बाद उन्होंने यज्ञ का जब मतलब समझाया तो उसमें

1196
01:33:08,360 --> 01:33:12,880
पांचों यज्ञ लिए हैं जी तो आपके अनुसार

1197
01:33:12,880 --> 01:33:16,920
जो भगवत गीता का जो तत्वदर्शी है आपके अनुसार आपके गुरु

1198
01:33:16,920 --> 01:33:21,280
के अनुसार वो पूर्ण मोक्ष देने वाला नहीं

1199
01:33:21,280 --> 01:33:25,400
है ज्ञान यज्ञ देर कैसे नहीं नीचे खुद लिखा है पूर्ण गुरु से मुक्ति

1200
01:33:25,400 --> 01:33:30,080
होगी उसी में अरे पूण पूर्ण गुरु कौन होगा

1201
01:33:30,080 --> 01:33:34,280
जो ज्ञान यज्ञ देगा ज्ञान यज्ञ देगा ये कहां लिखा है इन्होने

1202
01:33:34,280 --> 01:33:39,240
जो ज्ञान यज्ञ देगा जो पूर्ण गुरु होगा य

1203
01:33:39,240 --> 01:33:43,400
अभी तुम कह रहे थे कि जो परमात्मा का ज्ञान देगा वो जो है पूर्ण

1204
01:33:43,400 --> 01:33:47,400
गुरु है और ज्ञान यज्ञ प आ गए तुम

1205
01:33:47,400 --> 01:33:52,040
तो ज्ञान यका गीता से हम प्रमाण दिखा दिए कि व तत्वदर्शी वही होगा

1206
01:33:52,040 --> 01:33:53,240
तुम्हारा गुरु तो कुछ और

1207
01:33:53,240 --> 01:33:57,240
बोल रहा है तुम्हारा गुरु कहा है जन

1208
01:33:57,240 --> 01:34:01,800
तुम्हारा गुरु यह कह रहा है कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं

1209
01:34:01,800 --> 01:34:05,960
है बरा गु वो ये लिखता

1210
01:34:05,960 --> 01:34:10,120
कि यज्ञों से मुक्ति नहीं है मगर कौन से यज्ञ शुरू के चार

1211
01:34:10,120 --> 01:34:14,240
यज्ञ ज्ञान यज्ञ अलग है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होगी मगर उसने ज्ञान यज्ञ

1212
01:34:14,240 --> 01:34:18,320
को तो यज्ञ का अर्थ जब किया जब उसने यह कह दिया यज्ञ

1213
01:34:18,320 --> 01:34:22,320
से मुक्ति नहीं उसके बाद उसने यज्ञ का अर्थ किया है उसमें उसने पांचों यज्ञ

1214
01:34:22,320 --> 01:34:26,840
माने हैं वो बताए है पा

1215
01:34:26,840 --> 01:34:31,160
पांच प्रकार के जन उन्होने माने है कि पांच

1216
01:34:31,160 --> 01:34:35,200
होते हैं उसम से जो ज्ञान यज्ञ है वह पूर्ण गुरु देगा उससे मुक्ति

1217
01:34:35,200 --> 01:34:39,400
होगी कहा लिखा है देख नीचे

1218
01:34:39,400 --> 01:34:44,040
नीचे लिखा हु पूण गुरु से मुक्ति होगी देख गुरु देय

1219
01:34:44,040 --> 01:34:48,720
लिखा है उल्लू हमको बनाते होय

1220
01:34:48,720 --> 01:34:52,760
लिखा है पूर्ण गुरु से मुक्ति होगी लिखा है ना देखिए पूर्ण गुरु

1221
01:34:52,760 --> 01:34:57,560
से मुक्ति होगी पूर्ण गुरु ज्ञान यज्ञ देगा ये कहां लिखा है इन्होने

1222
01:34:57,560 --> 01:35:01,600
आपको गीता से हम दिखाए तो भाई पूर्ण गुरु वही होगा जो ज्ञान यज्ञ देगा

1223
01:35:01,600 --> 01:35:05,840
गीता से दिखा रहे हो जब तुम्हारे यहां पर गुरु कह रहे हैं कि गीता से तो मुक्ति

1224
01:35:05,840 --> 01:35:09,000
है ही नहीं अच्छा ये बताओ

1225
01:35:09,000 --> 01:35:13,760
वेदों में वेदों में प्रमाण है कि कबीर भगवान

1226
01:35:13,760 --> 01:35:17,760
है अ अभी हमारे पास वेद नहीं रखे हम गीता रखे

1227
01:35:17,760 --> 01:35:21,920
हैं गरुण रखे हैं और ये रखे हैं ये बु ये देख लीजिए ये बुक रखे हैं

1228
01:35:21,920 --> 01:35:26,120
इससे आप प्रमाण ले सकते हैं हम कहेंगे प्रमाण दिखा प्रमाण कैसे दिखाए मैं प्रमाण दिखाने

1229
01:35:26,120 --> 01:35:30,200
को नहीं कहूंगा मैं तुमको प्रमाण दिखा दूंगा फिर लोग देखेंगे कि तुम उस

1230
01:35:30,200 --> 01:35:34,640
प्रमाण को मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो हम

1231
01:35:34,640 --> 01:35:39,000
अब बता तुमय मानते हो

1232
01:35:39,000 --> 01:35:43,040
सद ग्रंथ का मतलब क्या है अभी जो जन ज्ञान

1233
01:35:43,040 --> 01:35:47,040
की जो बात हो रही है आपको इसी ज्ञान को हम गरुड़ पुराण से भी दिखा दे

1234
01:35:47,040 --> 01:35:51,200
रहे हैं उसम भी बोला गया मुझे तुम गरु प्रमाण से

1235
01:35:51,200 --> 01:35:55,240
पुराण से प्रमाण तब देना जब गरु पुराण को तुम मानने वाला अपने

1236
01:35:55,240 --> 01:35:59,360
आप को सिद्ध करो गरुण पुराण को तुम

1237
01:35:59,360 --> 01:36:03,600
नहीं मानते हो क्योंकि तुम्हारे अनुसार गरुण पुराण से मुक्ति नहीं है

1238
01:36:03,600 --> 01:36:08,360
गीता से मुक्ति नहीं है वेद से मुक्ति नहीं है बोलो हा

1239
01:36:08,360 --> 01:36:12,640
गरु पुराण में य लिखा हुआ है कि ज्ञान कोई गुरु देगा

1240
01:36:12,640 --> 01:36:16,800
देखो बाबू अपने मन की बात बोलने के लिए यहां पर तुम आए हो

1241
01:36:16,800 --> 01:36:20,880
मुझे पता है कि तुम्हे कर के कुछ बात रट के आए हो वो

1242
01:36:20,880 --> 01:36:24,200
तुम्ह बोलनी है सर हम फोटो अग

1243
01:36:24,200 --> 01:36:28,320
मैं तुमको विषय से भागने नहीं दूंगा मैं तुमसे पूछ रहा

1244
01:36:28,320 --> 01:36:32,360
हूं मैं तुमसे ये पूछ रहा हूं क्या तुम गरुण पुराण को सद

1245
01:36:32,360 --> 01:36:37,200
ग्रंथ मानते हो बिल्कुल मानते हैं

1246
01:36:37,200 --> 01:36:41,440
क्या होता है गरुड़ पुराण अपने लेवल में ऑथेंटिक है महत्त्वपूर्ण

1247
01:36:41,440 --> 01:36:47,440
है अपने लेवल के लिए जी क्या लिखा है

1248
01:36:49,280 --> 01:36:55,040
ो नहीं मिलता पंडित दीजिए

1249
01:36:55,040 --> 01:36:59,560
पठन पाठन से ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है मोक्ष नहीं मिलता लो

1250
01:36:59,560 --> 01:37:03,920
ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है फिर मान लिया ज्ञान यज्ञ

1251
01:37:03,920 --> 01:37:08,880
का फल मोक्ष नहीं है देख लो पढ़ लो तुम्हा त

1252
01:37:08,880 --> 01:37:13,240
लिख रहे हैं ज्ञान गंगा स ग्रंथ सद ग्रंथों को पढ़ने

1253
01:37:13,240 --> 01:37:17,800
से आप मोक्ष नहीं मिलता है ये आपका गरु पुराण भी सिद्ध कर रही है

1254
01:37:17,800 --> 01:37:22,040
अरे मेरे भाई तुम अपने गुरु को मानते हो कि मानते हो

1255
01:37:22,040 --> 01:37:26,240
और सुनिए गरुण आपको बता रहेता तु अपने गुरु

1256
01:37:26,240 --> 01:37:30,400
को मानते हो कि नहीं मानते हो 100 पर मानते हैं

1257
01:37:30,400 --> 01:37:35,080
100 पर मानते हो तो तुम्हारे गुरु यहां पर यह कह रहे हैं

1258
01:37:35,080 --> 01:37:39,360
कि जो गीता या सद ग्रंथ है उनको पढ़ने से

1259
01:37:39,360 --> 01:37:43,440
ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है यानी ज्ञान यज्ञ से जो मिलता है व

1260
01:37:43,440 --> 01:37:47,440
मिलता है मगर मोक्ष नहीं मिलता यानी की ज्ञान

1261
01:37:47,440 --> 01:37:51,840
यज्ञ से मिलने वाला जो फल है व मोक्ष नहीं है

1262
01:37:51,840 --> 01:37:57,200
नहीं है लि

1263
01:37:57,200 --> 01:38:01,480
पढ़ो इसको लाइन को पढ़ो अंडरलाइन को धार्मिक ग्रंथों के पठन

1264
01:38:01,480 --> 01:38:05,480
पाठन से ज्ञान यज का फल मिलता है य

1265
01:38:05,480 --> 01:38:09,640
यक्ष का फल कुछ समय व स् या जिस उद्देश्य से किया

1266
01:38:09,640 --> 01:38:13,640
गया उसका फल मिल जाता है परंतु मोक्ष नहीं है क्या है कि

1267
01:38:13,640 --> 01:38:17,920
ग्रंथों को पढ़ने से मक्ष होता हैनो

1268
01:38:17,920 --> 01:38:22,120
मेरे भाई सुनो तुमने कहा तुमने कहा उसम लिखा

1269
01:38:22,120 --> 01:38:26,200
है तुम्हारे में कि ज्ञान यज्ञ से फल ज्ञान

1270
01:38:26,200 --> 01:38:30,240
यज्ञ का फल तो मिलता है मगर तुमने आगे जाकर

1271
01:38:30,240 --> 01:38:34,360
के लिखा है मगर मोक्ष नहीं यानी की ज्ञान यज्ञ का जो फल है व मोक्ष नहीं

1272
01:38:34,360 --> 01:38:36,520
है

1273
01:38:36,520 --> 01:38:40,640
क्य सद ग्रंथों को पढ़ने से मोक्ष नहीं मिलता उसम लिखा हुआ है

1274
01:38:40,640 --> 01:38:44,720
जन यज आया है कि नहीं व उसम ज्ञान यज्ञ

1275
01:38:44,720 --> 01:38:49,240
आया है लेकिन बोला स मिल रहा है एक मिनट जन

1276
01:38:49,240 --> 01:38:53,440
से क्या मिल रहा है उसम बोला गया है जन

1277
01:38:53,440 --> 01:38:54,480
पढ़ेगा उसे

1278
01:38:54,480 --> 01:38:58,480
ज्ञान तो ज मिल आपसे पूछ रहा हं व पर ज्ञान यज्ञ से क्या मिल रहा

1279
01:38:58,480 --> 01:39:02,640
है ये बताइए बस फल मिल र उसम वहा पर

1280
01:39:02,640 --> 01:39:06,880
लिखा है जन फल मिहा है

1281
01:39:06,880 --> 01:39:10,960
उ ग्रंथ लिखा है ज्ञान यज स ग्रंथ नहीं बोलोगे नहीं

1282
01:39:10,960 --> 01:39:15,080
बोलोगे पटरी छोड़ोगे भागोगे प्रश्न से

1283
01:39:15,080 --> 01:39:19,960
मैं पूछ रहा हूं ज्ञान यज्ञ से फल मिलना लिखा है कि नहीं

1284
01:39:19,960 --> 01:39:24,280
ज्ञान यज्ञ सद ग्रंथों से बोला गया है ज्ञान यज्ञ का अगर स ग्रंथ

1285
01:39:24,280 --> 01:39:28,280
में उसको आप पढ़ेंगे तो उसम आपको स्वर्ग मिल सकता है लेकिन आपका मोक्ष नहीं

1286
01:39:28,280 --> 01:39:32,480
होगा ज जन यज्ञ का फल

1287
01:39:32,480 --> 01:39:36,840
लिखा है कि नहीं ज्ञान यज्ञ का फल

1288
01:39:36,840 --> 01:39:41,000
उस लिखा ज्ञान यज्ञ सद ग्रंथों से पढ़ेंगे अगर आप तो उससे आपको स्वर्ग

1289
01:39:41,000 --> 01:39:45,400
मिल सकता है लेकिन म नहीं मिलेगा ग्रंथ को पढ़ने पर

1290
01:39:45,400 --> 01:39:49,640
ज्ञान यज का फ मिलेगा क्या मिलेगा जो

1291
01:39:49,640 --> 01:39:53,760
फल जन यज्ञ से मिलता है वो मिलेगा

1292
01:39:53,760 --> 01:39:58,560
मगर मोक्ष नहीं मिलेगा उसम कपलीट नहीं

1293
01:39:58,560 --> 01:40:02,640
अरे क्यों नहीं कपलीट है तुम्हारे कहने से कट नहीं है अब तुम

1294
01:40:02,640 --> 01:40:06,880
मुझे तुम मुझे अब यह बताओ कि वेदों में प्रमाण है कबीर

1295
01:40:06,880 --> 01:40:10,280
भगवान है सही बात है

1296
01:40:10,280 --> 01:40:14,720
सही बात है इसको हम देखे हैं यानी कि वे में

1297
01:40:14,720 --> 01:40:19,040
यानी कि वेदों में ब परम ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म की पूरी जानकारी

1298
01:40:19,040 --> 01:40:23,600
है यह तो है प्राप्त करने की जानकारी नहीं है पर

1299
01:40:23,600 --> 01:40:28,200
पर पूर्ण ब्रह्म की पूरी जानकारी है प्राप्त कैसे

1300
01:40:28,200 --> 01:40:32,200
होगा उसम कुछ कुछ जानकारिया छिपी है लेकिन पूर्ण

1301
01:40:32,200 --> 01:40:36,280
नहीं है उसम इन कंप्लेंट है कंप्लीट नहीं है पूरा कुछ जानकारिया

1302
01:40:36,280 --> 01:40:40,320
छिपी है जैसे की

1303
01:40:40,320 --> 01:40:44,480
जैसे को परमात्मा कैसे लीला कैसे लीला करता है धरती पर कैसे आता

1304
01:40:44,480 --> 01:40:49,200
है अपने बच्चों को कैसे ज्ञान देता है इस प्रकार से उसकी जानकारिया

1305
01:40:49,200 --> 01:40:53,560
छिपी है उस ग्रंथों में लेकिन तो उसको क्या

1306
01:40:53,560 --> 01:40:57,960
रह गया रहया गया कि मोक्ष प्राप्ति के लिए उसमें नहीं है

1307
01:40:57,960 --> 01:41:03,080
मोक्ष प्राप्ति नहीं ईश्वर के विषय में कौन सी बात बाकी रह

1308
01:41:03,080 --> 01:41:07,240
गई भाई बाकी यही है कि मोक्ष प्राप्ति करना मोक्ष

1309
01:41:07,240 --> 01:41:11,320
प्राप्ति के लिए यानी की ईश्वर के विषय में जितना जितना है सब

1310
01:41:11,320 --> 01:41:15,680
लिखा है मगर मोक्ष प्राप्त कैसे होगा यह नहीं लिखा

1311
01:41:15,680 --> 01:41:20,600
है मोक्ष प्राप्त के लिए तत्वदर्शी की बात संकेत किया है तर्शी

1312
01:41:20,600 --> 01:41:24,600
देख जो पूछा जा रहा है उसकी बात करो मैं रहा हूं क्या

1313
01:41:24,600 --> 01:41:25,280
ईश्वर के

1314
01:41:25,280 --> 01:41:29,480
विषय में पूरी जानकारी है वेद के अंदर या अधूरी जानकारी है ईश्वर

1315
01:41:29,480 --> 01:41:33,560
के विषय में अधूरी जानकारी अधूरी जानकारी है अरी जानकारी है तो क्या बाकी

1316
01:41:33,560 --> 01:41:38,000
है और क्या दिया गया है यह बताइए उसमें

1317
01:41:38,000 --> 01:41:42,240
बोला गया तत्वदर्शी के पास जा वही बताएगा उसम कंपलेट नहीं दिया

1318
01:41:42,240 --> 01:41:46,520
पूछ रहा हूं क्या जानकारी है और क्या नहीं है यह बताओ

1319
01:41:46,520 --> 01:41:50,960
उसमें जानकारी है परमात्मा यहां पर आता है अपना शिशु रूप में आकर के यहां पर

1320
01:41:50,960 --> 01:41:55,320
लीला करता है और उसने अपने भक्तों को ज्ञान उपदेश

1321
01:41:55,320 --> 01:41:59,600
देता है इसके बाद यहां से चला जाता है और उसको परमा को प्रत

1322
01:41:59,600 --> 01:42:04,080
क्या रह गया वो बताओ उसमें मोक्ष प्राप्ति के लिए बोला गया है कि आप तत्वदर्शी

1323
01:42:04,080 --> 01:42:08,320
की तलाश करो भाई मैं अभी अभी हम लोग बात कर रहे थे ईश्वर

1324
01:42:08,320 --> 01:42:12,440
कैसा है ईश्वर के क्या-क्या चीजें हैं ईश्वर की कैरेक्टरिस्टिक

1325
01:42:12,440 --> 01:42:16,640
क्या है ईश्वर के फीचर्स क्या है यह सब आपने कहा जो वेद

1326
01:42:16,640 --> 01:42:20,680
है उसमें पूरा नहीं बताया है अधूरा बताया है तो आपने बता दिया वेद में

1327
01:42:20,680 --> 01:42:25,080
क्याक बताया है अब बाकी क्या रह गया वो बताओ ईश्वर के बारे में वो विधि

1328
01:42:25,080 --> 01:42:29,080
विधि बाद की बात है कि मोक्ष प्राप्त कैसे होगा वो उसम दिया है कि नहीं दिया वो एक

1329
01:42:29,080 --> 01:42:33,280
अलग विषय है अभी हम पूछ रहे हैं कि ईश्वर के विषय में कौन सी जानकारी

1330
01:42:33,280 --> 01:42:37,560
है जो वेद में नहीं दी गई है वो बताओ

1331
01:42:37,560 --> 01:42:40,280
वही तो बता रहे मोक्ष प्राप्ति नहीं है जबरी खाई लड़ रहे

1332
01:42:40,280 --> 01:42:44,360
हैं आप जब मोक्ष प्राप्ति नहीं कैसे बताते आपका

1333
01:42:44,360 --> 01:42:49,200
बहुत बहुत स्वागत है गीता वेद पुराण वा

1334
01:42:49,200 --> 01:42:53,200
अब हटा द क्या करेंगे हया

1335
01:42:53,200 --> 01:42:57,400
भाई वही तो आप करना चाह रहे हैं अपनी बात को र कर थोड़ी देर मैं भाई

1336
01:42:57,400 --> 01:43:01,520
साहब से बात कर लू जब तक या तो स्वयं ही चुप रहे

1337
01:43:01,520 --> 01:43:05,720
तो अच्छा होगा म्यूट नहीं करना पड़े थोड़ी देर चुप रहिए

1338
01:43:05,720 --> 01:43:10,840
हा जी भाई साहब जय श्री राम सभी भाइयों को राम राम जी

1339
01:43:10,840 --> 01:43:14,920
जी आपके वीडियो देखे थे मैंने काफी पहले

1340
01:43:14,920 --> 01:43:19,000
बहुत ब किया था तो अभी बंद कैसे हो

1341
01:43:19,000 --> 01:43:23,240
गया क्या हो गया बस सर थोड़ा सा मैं गांव चला गया तो

1342
01:43:23,240 --> 01:43:27,320
थोड़ा सा मैं नेटवर्क का थोड़ा प्रॉब्लम रहता है यहां पर तो इसलिए मैंने बंद कर

1343
01:43:27,320 --> 01:43:31,680
दिया बाकी दो तीन साल खूब वीडियो बनाए थे मैंने ह

1344
01:43:31,680 --> 01:43:35,920
से भी ज्यादा वीडियो बनाए थे इनके खिलाफ कई सारे वीडियोस थे मेरे

1345
01:43:35,920 --> 01:43:39,960
हां देखे हमने आपके वीडियो हां जी हा वीडियो बहुत बढ़िया

1346
01:43:39,960 --> 01:43:43,960
लगा था जिसम आपने जो है जो तत्वदर्शी को सिद्ध किया

1347
01:43:43,960 --> 01:43:48,000
था गीता से बहुत पहले का वीडियो है वो आपका जी जी

1348
01:43:48,000 --> 01:43:52,040
आपने गीता से ही बताया था कि तत्वदर्शी क्या है और तत्व ज्ञान क्या

1349
01:43:52,040 --> 01:43:55,560
है भगवान को जान लेना तत्वज्ञान है उनको अविनाशी

1350
01:43:55,560 --> 01:44:00,080
समझना ही तत्व ज्ञान है वो सब आपने गता सेया

1351
01:44:00,080 --> 01:44:04,360
जी बहुत बढ़िया तो आपसे मैं कहूंगा

1352
01:44:04,360 --> 01:44:09,280
कि अभी बंद ना करें बनाए बिल्कुल बिल्कुल आपके

1353
01:44:09,280 --> 01:44:13,320
साथ में आया करूंगा और कल हम और आपस में डिस्कस कर लेंगे टॉपिक रखते हैं

1354
01:44:13,320 --> 01:44:17,440
और उस पर हम लाइव आते हैं हम आपके साथ बिल्कुल बिल्कुल आप लाइव

1355
01:44:17,440 --> 01:44:22,120
आइए आपका स्वागत थैंक यू थक तो

1356
01:44:22,120 --> 01:44:25,600
बाबू राम जी

1357
01:44:25,600 --> 01:44:30,120
भगवान के विषय में भगवान समझ गए

1358
01:44:30,120 --> 01:44:34,520
एक मिनट प्रश्न क्लियर कर दू मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं

1359
01:44:34,520 --> 01:44:39,120
भगवान के देखो मोक्ष प्राप्त नहीं होगा यह हम समझ गए यज्ञों से

1360
01:44:39,120 --> 01:44:43,200
अब भगवान के विषय में क्या वेदों में पूरी जानकारी

1361
01:44:43,200 --> 01:44:47,240
है या अधूरी जानकारी है इस बारे में आपका क्या मानना है भगवान के

1362
01:44:47,240 --> 01:44:51,240
विषय में मोक्ष के विषय में नहीं वो हमने उस बात को अलग रख दिया

1363
01:44:51,240 --> 01:44:55,360
कि मोक्ष कैसे मिलेगा ये बात यज्ञ वेदों में नहीं है

1364
01:44:55,360 --> 01:44:59,440
यह बात हमने आपकी साइड में रख दी अब बात हो रही है ईश्वर

1365
01:44:59,440 --> 01:45:03,720
के विषय में क्या पूरी जानकारी वेदों में है या नहीं है

1366
01:45:03,720 --> 01:45:07,840
अगर नहीं है तो कौन सी जानकारी है और कौन सी नहीं है कौन सी जानकारी है

1367
01:45:07,840 --> 01:45:10,720
यह आपने बता दिया अब कौन सी नहीं है य आप बताना

1368
01:45:10,720 --> 01:45:14,880
है आपको बताइए हम अभी उसको नहीं बताएंगे

1369
01:45:14,880 --> 01:45:19,520
आपको एलर्जी हो जाएगी हम पले हम पुराण से आपको दिखा रहे कुछ जानकारी

1370
01:45:19,520 --> 01:45:23,680
भाई मैं आपको तब मानूंगा गरु पुराण की आपकी कोई तब सुनूंगा

1371
01:45:23,680 --> 01:45:29,320
जब आप गरु पुराण को मानने वाले सिद्ध होंगे आप

1372
01:45:29,320 --> 01:45:33,480
भाई आपकी मैं वो पोल खोल रहा हूं जिसमें की

1373
01:45:33,480 --> 01:45:37,560
आप जो है वेदों को मानने वाले ही सिद्ध नहीं होंगे क्योंकि आपने

1374
01:45:37,560 --> 01:45:41,560
यह कह दिया कि ना तो वेदों से मुक्ति मिलेगी वेदों में

1375
01:45:41,560 --> 01:45:45,680
मुक्ति का ज्ञान नहीं है ना अगर मुक्ति का ज्ञान होता तो तत्वदर्शी

1376
01:45:45,680 --> 01:45:49,160
के पास क जाने

1377
01:45:49,160 --> 01:45:53,600
करो जो सीधा उत्तर है वो दो वेदों

1378
01:45:53,600 --> 01:45:58,160
में मुक्ति नहीं है दूसरी बात अब आपका कहना है कि

1379
01:45:58,160 --> 01:46:02,480
वेद के अंदर जो है ईश्वर का ज्ञान है मगर

1380
01:46:02,480 --> 01:46:06,520
अधूरा है तो बाकी वेद से आगे की बात किसने

1381
01:46:06,520 --> 01:46:11,880
की है और वो क्या बात है वो

1382
01:46:11,880 --> 01:46:16,440
बताओ देखिए नहीं आए

1383
01:46:16,440 --> 01:46:20,440
आउट ऑफ सिलेबस हो गया ना क्वेश्चन अब आ रहा है आ

1384
01:46:20,440 --> 01:46:24,480
रहा है आ रहा आ रहा है आप तोर आप ये चाह रहे

1385
01:46:24,480 --> 01:46:29,080
है कि सिर्फ अपना बात को हम ऊपर रख दे इसको हम हटा दे त हमारा नाम रोशन हो जाएगा

1386
01:46:29,080 --> 01:46:33,240
देखिए बोले तो तुरत हटाएंगे मैं आखिरी बार कह रहा हूं विषय से हट

1387
01:46:33,240 --> 01:46:37,480
करके अगर बोला मैं सट से हटाऊ काम की बात

1388
01:46:37,480 --> 01:46:41,560
करिए काम की कौन सा ज्ञान है जो वेदों से

1389
01:46:41,560 --> 01:46:46,320
आगे का ज्ञान आपके तत्वदर्शी ने दिया वो ज्ञान क्या है

1390
01:46:46,320 --> 01:46:50,520
वो ज्ञान वह परमात्मने है वो क्या है बोलो

1391
01:46:50,520 --> 01:46:54,800
उसको बोलो य और बताया जो वे नहीं था जी

1392
01:46:54,800 --> 01:46:58,880
उस परमात्मा तक जाने के लिए उस परमात्मा के पास जब जीव चला

1393
01:46:58,880 --> 01:47:03,640
जाता है तो उसका जन्म मृत्यु दोबारा नहीं होती है तो उस उस ज्ञान

1394
01:47:03,640 --> 01:47:07,920
ये तो गीता में लिखा है उसी ज्ञान को तो दे रहे हैं वो

1395
01:47:07,920 --> 01:47:12,000
कि जन्म मृत्य बताओ जो गीता और वेद में नहीं है वो

1396
01:47:12,000 --> 01:47:16,400
कौन सा ज्ञान है गीता वेद में वो ज्ञान नहीं है जिसको

1397
01:47:16,400 --> 01:47:20,520
गीता गीता ज्ञानदाता बोल दिया कि तत्वदर्शी के पास जाओ वो ज्ञान

1398
01:47:20,520 --> 01:47:23,320
नहीं है

1399
01:47:23,320 --> 01:47:27,120
कि गीता और वेद में कौन सा ज्ञान नहीं है जो तुम्हारे तत्वदर्शी ने

1400
01:47:27,120 --> 01:47:31,360
दिया या सूक्ष्म वेद ने दिया वो कौन सा

1401
01:47:31,360 --> 01:47:35,560
ज्ञान तत्वदर्शी ने दिया तत्व ज्ञान को जिसम गीता वेद में नहीं है

1402
01:47:35,560 --> 01:47:39,600
गीता ज्ञान दाता बोल दिया तत्वदर्शी के पास जाओ फिर भाही बात

1403
01:47:39,600 --> 01:47:43,640
वो ज्ञान क्या है वो तो बताओ क्या ज्ञान है गीता

1404
01:47:43,640 --> 01:47:48,040
वेद से बाहर का है बता रहे हैं हम लोग सदियों

1405
01:47:48,040 --> 01:47:52,080
से पंडित लोगों को ऊंचा स्थान पर रखे हैं देख लीजिए गरु में आपको

1406
01:47:52,080 --> 01:47:56,160
क्या कर सुनो मेरी बात सुनो मैं तुम्ह बता दूं तुम समझ जाओ शायद कि

1407
01:47:56,160 --> 01:48:00,160
पूछा क्या जा रहा है पूछा ये जा रहा है जैसे कि तुमने

1408
01:48:00,160 --> 01:48:04,160
कहा कि ईश्वर के बारे में वेदों में अधूरा ज्ञान है और

1409
01:48:04,160 --> 01:48:08,160
तत्वदर्शी के पास से पूरा ज्ञान मिलेगा ठीक है तो

1410
01:48:08,160 --> 01:48:12,240
अब उसमें ऐसी बात है मैं उदाहरण दे रहा हूं इसको समझो कि

1411
01:48:12,240 --> 01:48:16,400
ईश्वर जो है वो सफेद दाढ़ी वाला है यह वेदों

1412
01:48:16,400 --> 01:48:20,560
में नहीं लिखा ये हमको तत्वदर्शी बताएगा ठीक

1413
01:48:20,560 --> 01:48:24,720
है तो कहने का मतलब इस तरह की बातें बताओ ईश्वर

1414
01:48:24,720 --> 01:48:29,160
के विषय में जो वेदों ने नहीं बताई और जो बहुत आवश्यक है जिनको जानना

1415
01:48:29,160 --> 01:48:33,440
और जिससे य सिद्ध हो रहा है कि ईश्वर के बारे में जो तत्वदर्शी है

1416
01:48:33,440 --> 01:48:38,160
व पूर्ण ज्ञानी है बताइए जी

1417
01:48:38,160 --> 01:48:42,280
देखिए जो गता में

1418
01:48:42,280 --> 01:48:47,240
गीता में दिया गया है तत्वदर्शी को व संसार वृक्ष है

1419
01:48:47,240 --> 01:48:51,280
जो संसार रूपी वृक्ष को आज दिना तक

1420
01:48:51,280 --> 01:48:55,280
किसी भी धर्म गुरु ने नहीं बता पाया कौन जड़ है भाई साहब

1421
01:48:55,280 --> 01:48:59,320
आपको और कर द जरा प्रश्न को सीधा कर दू फ्लैट कर दू

1422
01:48:59,320 --> 01:49:03,320
आपने कहा कि वेदों में

1423
01:49:03,320 --> 01:49:07,360
वेदों को देने वाला पूर्ण ज्ञानी नहीं था इसलिए उसने वेदों में जो ज्ञान दिया

1424
01:49:07,360 --> 01:49:12,240
है वह अधूरा है और हमारे तत्वदर्शी पूर्ण ज्ञानी है ठीक है

1425
01:49:12,240 --> 01:49:16,240
जी ये तो सही है ठीक है जी तो यानी कि ईश्वर के विषय में

1426
01:49:16,240 --> 01:49:20,240
ऐसा कोई सवाल नहीं है जो तत्वदर्शी के पास ना

1427
01:49:20,240 --> 01:49:24,240
हो जी ठीक ठीक तो अब मुझे

1428
01:49:24,240 --> 01:49:28,360
बताओ कि तत्व वो जो ईश्वर है तत्वदर्शी के अनुसार वो

1429
01:49:28,360 --> 01:49:32,360
कहां रहता है क्याय बताया ने कि नहीं बताया

1430
01:49:32,360 --> 01:49:37,240
है वह सनातन परमधाम में रहता है अच्छा

1431
01:49:37,240 --> 01:49:41,360
ये बताया है अच्छा जी जहां पर वो रहता है उस

1432
01:49:41,360 --> 01:49:45,640
जगह को किसने बनाया व सा

1433
01:49:45,640 --> 01:49:49,640
प बताओ हम उस ज्ञान को अगर आपको बता देंगे तो आपके अंदर

1434
01:49:49,640 --> 01:49:52,960
वो नहीं समाए

1435
01:49:52,960 --> 01:49:57,200
तो क्यों टाइम वेस्ट कर रहे हो जाओ फिर आप जैसे अगर पहली

1436
01:49:57,200 --> 01:50:01,320
कक्षा पहली कक्षा के ब से ज्यादा

1437
01:50:01,320 --> 01:50:05,640
बताया ने तो वे से ज्यादा वाली बात तो बोलो ना

1438
01:50:05,640 --> 01:50:10,520
बता रहे हैं अगर पहली कक्षा के बच्चे को अगर बवी तक का ज्ञान

1439
01:50:10,520 --> 01:50:14,800
देंगे बताना है बता

1440
01:50:14,800 --> 01:50:19,160
नहीं बताना है कि नहीं

1441
01:50:19,160 --> 01:50:24,120
बता अभी नहीं नहीं चलिए

1442
01:50:24,120 --> 01:50:28,440
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन

1443
01:50:28,440 --> 01:50:32,480
देख लिया इनको वेदों में अधूरा ज्ञान है अब देखिए है क्या मैं

1444
01:50:32,480 --> 01:50:36,480
बताऊ है क्या यह बात हमारे शास्त्रों में कई बार कही गई

1445
01:50:36,480 --> 01:50:40,600
है कि ईश्वर के बारे में पूर्ण रूप से बता

1446
01:50:40,600 --> 01:50:45,040
पाना हमारे लिए भी संभव नहीं है क्योंकि वह विषय वाणी

1447
01:50:45,040 --> 01:50:49,360
का नहीं है भगवान का जो एक स्वरूप है ना जो वाणी का विषय नहीं है

1448
01:50:49,360 --> 01:50:53,520
उसको आप शब्दों में व्याख्या नहीं कर सकते जो असीमित रूप

1449
01:50:53,520 --> 01:50:57,880
है क्योंकि भगवान असीमित है तो सीमित शब्दों में उनकी व्याख्या

1450
01:50:57,880 --> 01:51:01,960
नहीं हो सकती उसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है जैसे हमसे कोई कहे

1451
01:51:01,960 --> 01:51:06,080
कि तुम कितना प्रेम करते हो अपनी बिटिया से

1452
01:51:06,080 --> 01:51:08,440
क्या मैं इसको शब्दों में वर्णित कर सकता

1453
01:51:08,440 --> 01:51:12,720
हूं नहीं कर सकते अगर मेरी कोई बिटिया है मेरा

1454
01:51:12,720 --> 01:51:16,840
मैं अपनी माता जी से प्यार करता हूं या अपने छोटे भाई से प्यार करता हूं या अपने किसी

1455
01:51:16,840 --> 01:51:21,000
मित्र से प्यार करता हूं उसकी क्वांटिटी क्या है एटली वो

1456
01:51:21,000 --> 01:51:25,000
मैं किसी को बिल्कुल फिक्स कर के शब्दों में बयान नहीं कर इस रूप को कहा

1457
01:51:25,000 --> 01:51:29,480
गया है कि भैया यह जो है सिर्फ अनुभव का विषय है यह सिर्फ प्राप्त

1458
01:51:29,480 --> 01:51:33,480
का विषय है इसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है जैसे कि मान

1459
01:51:33,480 --> 01:51:37,680
लीजिए कि आपने भोजन प्राप्त किया आपकी भूख मिट

1460
01:51:37,680 --> 01:51:41,800
गई मगर भूख मिटते समय आपको कैसा अनुभव हो रहा था क्या इसको आप

1461
01:51:41,800 --> 01:51:45,840
वाणी में बता सकते हैं मेरी नसे यहां पर फूल रही थी यहां पर

1462
01:51:45,840 --> 01:51:49,840
आथ सुकड़ रही थी ऐसे फिक्स आप बता सकते हैं कि क्या हो रहा

1463
01:51:49,840 --> 01:51:54,000
था मेरे शरीर में इन विषयों के लिए हमारे शास्त्रों में कई जगह यह बात

1464
01:51:54,000 --> 01:51:58,040
कही गई कि भाई पूर्ण वो प्राप्ति का विषय है कई जगह

1465
01:51:58,040 --> 01:52:02,240
पर जाकर के वो जो है बताने योग्य नहीं है बता बताया

1466
01:52:02,240 --> 01:52:06,480
नहीं जा सकता भगवान के उस स्वरूप को हां वही भगवान अपना एक ऐसा स्वरूप धारण करते

1467
01:52:06,480 --> 01:52:10,560
हैं जो वाणी का विषय हो जाता है जिनके बारे में चर्चा करके

1468
01:52:10,560 --> 01:52:14,560
हम और आप उसका अनुगमन करके अनुसरण करके अनुकरण करके मोक्ष के प्राप्त

1469
01:52:14,560 --> 01:52:18,760
के रास्ते पर जा सकते हैं अब इस बात का य लोग फायदा उठाते वेदों में भी अधूरा

1470
01:52:18,760 --> 01:52:23,000
ज्ञान है या शास्त्रों में सनातन शास्त्र अधूरा ज्ञान है तो जब आप

1471
01:52:23,000 --> 01:52:23,500
वेदों की

1472
01:52:23,480 --> 01:52:27,640
निंदा कर रहे हो अधूरा ज्ञान कहते हुए तो आपको फिर अपने ज्ञान को पूर्ण तो सिद्ध

1473
01:52:27,640 --> 01:52:31,680
करना होगा और आपके पास तो वो वो ज्ञान नहीं है जो वेदों में

1474
01:52:31,680 --> 01:52:35,880
दिया गया ऑलरेडी आप तो उसी में ही चूक रहे हो क्योंकि आपने

1475
01:52:35,880 --> 01:52:39,920
ईश्वर को एक सातव आसमान पर बैठा हुआ बता दिया तो फिर आपका

1476
01:52:39,920 --> 01:52:44,800
ईश्वर इतनी बार बाधित होगा इतनी बार खंडित होगा कि पूछो नहीं उसका ईश्वर

1477
01:52:44,800 --> 01:52:49,000
फिर आप खुद कहोगे इनके जो अमित दास

1478
01:52:49,000 --> 01:52:53,080
है अमित दास नहीं इनका जो वो

1479
01:52:53,080 --> 01:52:57,520
है एक दिनेश दास नाम का व्यक्ति आया था उसने खुद बोला

1480
01:52:57,520 --> 01:53:01,720
ईश्वर ने इस विषय में बताया ही नहीं है ई हमारे तत्वदर्शी संत

1481
01:53:01,720 --> 01:53:06,000
ने इस बारे में बताया नहीं तो क्या हो गया अधूरा ज्ञान हो गया ना वेदों की निंदा

1482
01:53:06,000 --> 01:53:10,040
तुमने क्यों की कि यह अधूरे हम पूर्ण है और पूर्ण कैसे हो

1483
01:53:10,040 --> 01:53:15,680
हमें भी नहीं पता

1484
01:53:15,680 --> 01:53:19,680
गा और फिर भी जो आंसर इनके पास नहीं

1485
01:53:19,680 --> 01:53:25,680
है वो आंसर हमारे आचार्य गण लेकर बैठे हुए हैं

1486
01:53:27,760 --> 01:53:32,240
एक जगह जाकर के बस वो बात होती है कि जो उनका पर्थ स्वरूप है वह अनिर्वचनीय

1487
01:53:32,240 --> 01:53:36,320
है उसको वचनों के माध्यम से नहीं बताया जा सकता व से प्राप्त

1488
01:53:36,320 --> 01:53:40,600
किया जा सकता है कैसे प्राप्त होगा कि उनका जो वनीय रूप है

1489
01:53:40,600 --> 01:53:44,640
उसको फॉलो करो उसकी पूजा करो उसकी भक्ति करो तो उनको प्राप्त

1490
01:53:44,640 --> 01:53:49,880
करने से आपको उनका जो अनिर्वचनीय रूप है प्राप्त हो जाएगा जैसे

1491
01:53:49,880 --> 01:53:54,040
भोजन चाहिए कैलोरी चाहिए हमको

1492
01:53:54,040 --> 01:53:58,080
कैलोरी जिसके बारे में परिभाषा देना मुश्किल है कितनी ग्राम

1493
01:53:58,080 --> 01:54:02,360
चाहिए कितना यह चाहिए मगर वो जिससे प्राप्त होती है उसके लिए हम व्यवहार

1494
01:54:02,360 --> 01:54:06,360
करते हैं किससे प्राप्त होती है भोजन से मैं चार रोटी खाऊंगा

1495
01:54:06,360 --> 01:54:10,520
मैं छह रोटी खाऊंगा मैं दाल पिऊंगा एक कटोरी दाल पिऊंगा यह सब

1496
01:54:10,520 --> 01:54:14,640
क्या है वचनी जिसको परिभाषा की जा सकती है और इससे हमको जो

1497
01:54:14,640 --> 01:54:18,880
अनिर्वचनीय चीज है व प्राप्त हो जाती कैलोरी हम कभी कैलोरी खरीदने जाते हैं क्या

1498
01:54:18,880 --> 01:54:24,080
बाजार 50 ग्राम कैलोरी दे दो या कैलोरी दे

1499
01:54:24,080 --> 01:54:29,800
दो तो यह बात है

1500
01:54:29,800 --> 01:54:33,800
जैसे भगवान का जो यह वाला रूप होता है व्यवहार

1501
01:54:33,800 --> 01:54:37,800
में आ सकने वाला रूप इसकी पूजा करके व्यवहार में ना आ

1502
01:54:37,800 --> 01:54:41,920
सकने वाले रूप की प्राप्ति होती है यह शास्त्रों का सार है अगर

1503
01:54:41,920 --> 01:54:46,080
इससे ज्यादा अगर किसी को ज्ञान है तो व

1504
01:54:46,080 --> 01:54:52,080
आए हो हमें वो ज्ञान बताए भाई कौन सा पूर्ण ज्ञान दे दिया

1505
01:54:53,000 --> 01:54:57,280
जी आपने ज्ञान पढ़ तो लिया अभी किताबों से

1506
01:54:57,280 --> 01:55:02,000
इनके वही है दूसरा कोई नहीं है

1507
01:55:02,000 --> 01:55:06,000
अब यह अपनी यह जो 39 नंबर का पेज है ना इनका वो दिखाना

1508
01:55:06,000 --> 01:55:12,000
जरा गरमा गीता की दिखाना

1509
01:55:15,160 --> 01:55:19,280
जरा हमारे बात सही क रहे ये बात सही

1510
01:55:19,280 --> 01:55:23,640
कह रहे गरुण पुराण गरु पुराण तो लेकर चल रहे मगर इनको अपना जो इनके तत्वदर्शी

1511
01:55:23,640 --> 01:55:29,640
है उनका ज्ञान नहीं पता

1512
01:55:34,560 --> 01:55:40,360
है 39 में और थोड़ा नीचे

1513
01:55:40,360 --> 01:55:44,600
चलिए नहीं नहीं नहीं ऊपर है ऊपर है यही 39 है

1514
01:55:44,600 --> 01:55:49,640
क्याय 39

1515
01:55:49,640 --> 01:55:55,640
है नहीं ये तो 19 है 39

1516
01:56:05,320 --> 01:56:08,960
लाइए आ गया

1517
01:56:08,960 --> 01:56:12,960
39 जय श्री राम शिवांश जी जय श्री राम जय

1518
01:56:12,960 --> 01:56:17,000
श्री राम छोटे भाई और सबसे पहले सभी

1519
01:56:17,000 --> 01:56:21,240
को जय श्री राम और सबसे पहले मैं देवेंद्र शर्मा जी को भी जय श्री राम मेरा मैं बहुत-बहुत

1520
01:56:21,240 --> 01:56:25,400
आपको धन्यवाद करना चाहूंगा मैंने भी आपकी वीडियोस देखी आपका जितना

1521
01:56:25,400 --> 01:56:29,480
धन्यवाद किया जाए बहुत कम है बहुत-बहुत आपकी आपकी वजह से मैं

1522
01:56:29,480 --> 01:56:33,600
बहुत सारे डाउट्स भी बहुत क्लियर हुए हैं मेरे जी जी बहुत अच्छा था

1523
01:56:33,600 --> 01:56:37,760
और कोई नहीं था जब कोई नहीं था तब ये उतरे थे मैदान में जब कोई

1524
01:56:37,760 --> 01:56:41,880
नहीं था संत रामपाल के मिथ्या प्रचार के विरुद्ध हां भैया

1525
01:56:41,880 --> 01:56:46,000
ऊपर जाइए थोड़ा सा ऊपर जाइए मैं इनके बारे में बताने भी वाला था लेकिन मैं भूल गया आज

1526
01:56:46,000 --> 01:56:50,120
अच्छा लगा इनको यहां प देख के बहुत बहुत देवेंद्र जी आपका धन्यवाद बहुत बहुत

1527
01:56:50,120 --> 01:56:54,120
जय श्री राम देखिए श को बोलने वाले ब्रह्म ने कहा

1528
01:56:54,120 --> 01:56:58,320
कि पूर्ण परमात्मा के विषय में कोई यह कहता है उसके बारे में और फिर आ जाइए

1529
01:56:58,320 --> 01:57:02,520
यहां पर कि पूर्ण परमात्मा के बारे में

1530
01:57:02,520 --> 01:57:04,840
मुझे पूरी जानकारी नहीं है

1531
01:57:04,840 --> 01:57:08,960
अब जितनी जानकारी इनके हिसाब से वेद में है कि कबीर ही भगवान

1532
01:57:08,960 --> 01:57:12,960
है तो कबीर का कंधा कहां से चालू हो रहा है और कहां

1533
01:57:12,960 --> 01:57:17,880
पर खत्म हो रहा है यह जानकारी वेद में है इनके ही हिसाब से मैं बोल रहा हूं अभी

1534
01:57:17,880 --> 01:57:21,920
कबीर का सर कहां से शुरू हो रहा है और पैर कहां पर है यह जानकारी वेद

1535
01:57:21,920 --> 01:57:26,200
में इनके हिसाब से जब कबीर नाम ले दिया इनके हिसाब

1536
01:57:26,200 --> 01:57:30,520
से तो वेद में पर्याप्त जानक मतलब पर्याप्त जानकारी वेद में है फिर

1537
01:57:30,520 --> 01:57:34,600
यह कह रहे हैं कि पूरी जानकारी नहीं है तो जब

1538
01:57:34,600 --> 01:57:39,400
पूरी जानकारी नहीं है तो वोह जानकारी आपको देनी होगी उसके विषय में

1539
01:57:39,400 --> 01:57:43,440
जो जानकारी वेद में नहीं है वो जानकारी

1540
01:57:43,440 --> 01:57:47,560
जब आपसे पूरी लेने जाते हैं तो आपके एक भी भक्त के पास एक

1541
01:57:47,560 --> 01:57:51,840
भी भगत के पास जवाब नहीं होता है कि कबीर ने जो बनाया है वह कहां से बनाया

1542
01:57:51,840 --> 01:57:56,400
है वो दिखा दीजिए एक मिनट वो दिखा दीजिए उसमें वो लाइन दिखा

1543
01:57:56,400 --> 01:58:00,600
दूं अब इनकी दो बात महाराज होते हैं ना

1544
01:58:00,600 --> 01:58:04,960
आज अग क पात्री जी महाराज होते तो ये ये रामपाल या आर समाज सबकी बुनियाद

1545
01:58:04,960 --> 01:58:09,520
हिला देते हैं खटिया खड़ी हो जाती इनकी अरे इनका अस्तित्व ही नहीं होता

1546
01:58:09,520 --> 01:58:13,680
ये सारा जो ढो रहे हैं ना हम लोग ये आर्य समाज के प्रमा को ढो

1547
01:58:13,680 --> 01:58:17,800
रहे हैं हम ये ये सब आ समाज लाया हूं जहा भगवान ने अपने को

1548
01:58:17,800 --> 01:58:20,720
काल बोला है जी जी

1549
01:58:20,720 --> 01:58:26,560
मैं दिखाऊंगा कहां गया 39 वाला अभी जो

1550
01:58:26,560 --> 01:58:30,680
था अरे नहीं वो वो वाला खोलिए वो जो अभी खुला था

1551
01:58:30,680 --> 01:58:34,800
गरिमा गीता की मा भा से हमने गीता

1552
01:58:34,800 --> 01:58:40,040
की गरिमा दिखा दी उससे इनको संतुष्टि नहीं हुई जी

1553
01:58:40,040 --> 01:58:45,120
नहीं इनको कभी संतुष्टि नहीं होगी हम वो पब्लिक को होगी

1554
01:58:45,120 --> 01:58:47,920
संतुष्टि

1555
01:58:47,920 --> 01:58:52,120
हम अब अब अब अब बाबू राम यादव क्या करेंगे मैं

1556
01:58:52,120 --> 01:58:55,560
बताऊंगा

1557
01:58:55,560 --> 01:58:59,720
नहीं इसको कहते हैं हा नीचे आइए थोड़ा इसमें इस पेज में नीचे

1558
01:58:59,720 --> 01:59:05,320
आइए हा और नीचे और

1559
01:59:05,320 --> 01:59:09,480
नीचे अब देखिए मैं वेद को ये ऊपर से

1560
01:59:09,480 --> 01:59:13,480
पांचवी लाइन है लास्ट में मैं वेद ज्ञान देने

1561
01:59:13,480 --> 01:59:17,560
वाला ब्रह्म भी नहीं जानता पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी

1562
01:59:17,560 --> 01:59:21,640
मैं वेद का ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता पहली बात

1563
01:59:21,640 --> 01:59:25,720
अपने मन मन गंत लिखा है इन्होंने इसमें मगर अगर

1564
01:59:25,720 --> 01:59:29,800
पूर्ण ये नहीं जानते हैं वेद तो क्या आप जानते हो अगर जानते हो तो हमसे

1565
01:59:29,800 --> 01:59:33,960
आगे बात करो एक सवाल का जवाब

1566
01:59:33,960 --> 01:59:38,080
नहीं दे पाओगे उन सवालों का जवाब हम आपको दे देंगे

1567
01:59:38,080 --> 01:59:42,880
वेद में प्रमाण है ओ कहां गए

1568
01:59:42,880 --> 01:59:46,880
वेदों में प्रमाण भगवान है आ जाओ

1569
01:59:46,880 --> 01:59:51,160
भैया बात आती है कि अगर वेद

1570
01:59:51,160 --> 01:59:55,720
में जो वेदों इनके अनुसार जो वेद को कह रहा है

1571
01:59:55,720 --> 02:00:00,080
उसके पास परमात्मा का पूर्ण ज्ञान नहीं है तो इसके

1572
02:00:00,080 --> 02:00:04,240
अनुसार अगर देखें तो जो कबीर शब्द वहां पर आया है वो कबीर

1573
02:00:04,240 --> 02:00:08,480
जो है भगवान नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि वो तो पूरा शरीर

1574
02:00:08,480 --> 02:00:10,640
उसका है कबीर का कहां से चालू हो रहा है क्या

1575
02:00:10,640 --> 02:00:14,760
क्या कर सकता है सब कुछ है उसमें मगर तुम कह रहे हो कि वेदों को बोलने वाले को पूर्ण

1576
02:00:14,760 --> 02:00:19,320
जानकारी नहीं है इसका मतलब उसके द्वारा भगवान के बारे में बात नहीं की

1577
02:00:19,320 --> 02:00:23,440
गई जो करनी चाहिए थी तो जब नहीं की गई

1578
02:00:23,440 --> 02:00:27,520
तो फिर य कबीर को भगवान कैसे माना जा रहा है उसके अनुसार पहली

1579
02:00:27,520 --> 02:00:31,560
बात और दूसरी बात यदि उसमें अधूरी जानकारी है तो तुम

1580
02:00:31,560 --> 02:00:36,320
आ जाओ और हमें बता दो कि तुम्हारे पास पूर्ण जानकारी क्या क्या

1581
02:00:36,320 --> 02:00:40,360
है हा वो वा अंडर कवर्ड गुंडा

1582
02:00:40,360 --> 02:00:45,720
है उसका चैनल आप देखते क्यों है मत देखा

1583
02:00:45,720 --> 02:00:51,720
करिए उसको व्यू भी तो हम लोग देते हैं विशाल भाटिया जी बोले

1584
02:00:53,800 --> 02:00:58,240
विशाल भाटिया जी बोले नहीं तो स्ट्रीम को हम लोग बढ़ाते हैं और कल हमारी

1585
02:00:58,240 --> 02:01:02,320
स्ट्रीम होगी आपका मैं नाम नहीं जानता हूं एक

1586
02:01:02,320 --> 02:01:07,160
बार नाम बता दीजिए गीता वेद पुराण वाले भाई देवेंद्र शर्मा

1587
02:01:07,160 --> 02:01:09,400
देवेंद्र

1588
02:01:09,400 --> 02:01:13,720
शर्मा अच्छा हाका चैनल देखा था देवेंद्र शर्मा

1589
02:01:13,720 --> 02:01:18,840
आपका चैनल है ना कुछ

1590
02:01:18,840 --> 02:01:24,840
करके बहुत बढ़िया खंडन किया इनका

1591
02:01:26,760 --> 02:01:31,120
जी मुझे लगा इन्होने आपके साथ मतलब कुछ आपको दबाने का प्रयास

1592
02:01:31,120 --> 02:01:34,680
कुछ इस तरह का किया

1593
02:01:34,680 --> 02:01:38,920
है ऐसा कुछ नहीं

1594
02:01:38,920 --> 02:01:42,920
तो देखिए य नहीं देखते जैसे कोई वेद का दो

1595
02:01:42,920 --> 02:01:47,040
लाइन का श्लोक है उसका 12 ब लाइन का इन्होने अर्थ कर रखा

1596
02:01:47,040 --> 02:01:51,400
है बारबार अर्थात अर्थात सब लगे तो वो अर्थ कहां रह जाता है वो तो अनर्थ

1597
02:01:51,400 --> 02:01:55,520
हो गयाना य ये लोग सोचते हैं दो लाइन

1598
02:01:55,520 --> 02:01:59,640
का अगर श्लोक है तो चार लाइन का अर्थ हो सकता है लेकिन इन्होने चार लाइन की

1599
02:01:59,640 --> 02:02:03,720
10 लाइन 12 लाइन इस तरीके से अर्थ कर रखा है यानी आठ लाइन

1600
02:02:03,720 --> 02:02:07,880
उन्होंने अपनी तरफ से मिक्स कर दी है तो वो अर्थ कहां रह जाता है

1601
02:02:07,880 --> 02:02:11,920
मैं यही कहूंगा कि हमें जो है डिफेंसिव बहुत हो गया खेलते खेलते

1602
02:02:11,920 --> 02:02:16,000
अब अटैकिंग खेलना पड़े शास्त्र से अपने

1603
02:02:16,000 --> 02:02:20,080
शास्त्रों से बारबार इनको जवाब प्रस्तुत करते हैं बारबार करते हैं कुछ नहीं होता उससे

1604
02:02:20,080 --> 02:02:24,240
अब इनके शास्त्र सेन की नानी याद दिलाओ

1605
02:02:24,240 --> 02:02:28,400
बिल्कुल बिल्कुल वीडियो बना रहे हैं अभी भी हैं वो

1606
02:02:28,400 --> 02:02:32,840
अभी भी वीडियोस ही बनाए जा रहे हैं बंद कमरे में

1607
02:02:32,840 --> 02:02:36,840
बा आप बताइए क्या प्रमाण लाए हैं आज प्रमाण बताने से

1608
02:02:36,840 --> 02:02:40,840
पहले मैं एक चीज आप लोगों को बताना चाहूंगा जैसे शिवांश जी आप जो प्रमाण बता रहे

1609
02:02:40,840 --> 02:02:45,000
हो उसके वीडियोस तो ये लोग बनाए रहे हैं अब जैसे देवेंद्र शर्मा जी ने बनाए

1610
02:02:45,000 --> 02:02:49,440
तो उनके भी ऊपर वीडियोस बने मैंने जो आपकी स्ट्रीम में जो प्रमाण दिखाया हैं मेरे ऊपर भी वीडियोस

1611
02:02:49,440 --> 02:02:49,940
वो लोग

1612
02:02:49,760 --> 02:02:53,800
बना सकते हैं काट पीट करके लेकिन अब उसका का कुछ फायदा नहीं होगा क्योंकि आप ही ने

1613
02:02:53,800 --> 02:02:58,760
बोला है कि बंद के कमरे में बनाना और सामने आके चर्चा करना दोनों में बहुत अंतर होता है

1614
02:02:58,760 --> 02:03:02,800
हो सकता है कि तुम्हारे लोगों के बीच में गए थे 1515 20 20

1615
02:03:02,800 --> 02:03:06,880
लोगों के बीच में तुम्हारी तरह नहीं नकली शूटिंग कर लेते हैं

1616
02:03:06,880 --> 02:03:11,160
जो तो ये सही कहा आपने वो आपस में जगत

1617
02:03:11,160 --> 02:03:15,600
भगत बन जाते हैं हां जगत भगत

1618
02:03:15,600 --> 02:03:19,680
तो मिल गया किसी दिन तुम लोगों को तो पता चलेगा प्रार्थना

1619
02:03:19,680 --> 02:03:23,840
करना कभी टकराव नहीं रस्ते रस्ते में वरना

1620
02:03:23,840 --> 02:03:28,040
हम सर सिर को सामने पाओगे किसी दिन बिल्कुल बताइए विशाल

1621
02:03:28,040 --> 02:03:32,360
जी बताइए तो बताया था तो सबसे पहले अब तीन मैंने

1622
02:03:32,360 --> 02:03:36,400
मतलब 2000 सबसे पहले मेरे पास अगर कोई ग्रंथ आया तो मेरे पास राम चत मानस

1623
02:03:36,400 --> 02:03:40,560
आई थी फिर मैंने 2021 से मैंने

1624
02:03:40,560 --> 02:03:44,600
सब ग्रंथों को धीरे धीरे पढ़ना स्टार्ट किया और जब मैंने देवेंद्र शर्मा जी

1625
02:03:44,600 --> 02:03:48,680
की मैंने वीडियो देखी तो उनसे भी प्रेरित होकर फिर मैं

1626
02:03:48,680 --> 02:03:53,080
ग्रंथों से ला ला के इनका खंडन में दिखा पा रहा हूं जो मुझको पढ़ने को मिल रहा है

1627
02:03:53,080 --> 02:03:57,480
तो अब जैसा कि आपको पता है मैंने पुराणों को पढ़ना भी स्टार्ट किया है तो 18

1628
02:03:57,480 --> 02:04:01,720
पुराणों में सबसे पहले ब्रह्म पुराण आता है फिर पदम पुराण आता है मैंने एक ब्रह्म पुराण

1629
02:04:01,720 --> 02:04:04,880
से एक बार इनका खंडन किया था जिसमें भगवान विष्णु ने बताया

1630
02:04:04,880 --> 02:04:08,960
कि मेरा कभी अंत नहीं होता और मैं परमात्मा हूं एक बार मैंने आपको दिखाया था आपको

1631
02:04:08,960 --> 02:04:12,960
याद होगा दूसरा आपने मुझसे अभी दो दिन पहले प्रमाण मांगा था कि आप

1632
02:04:12,960 --> 02:04:17,080
प्रमाण दिखाए जहा भगवान विष्णु या श्री कृष्ण ने अपने को काल बोला हो आपने मुझको फोन

1633
02:04:17,080 --> 02:04:21,240
भी किए थे उसके लिए एक प्रमाण मैंने श्रीमद् भागवत से दिखाया था 11

1634
02:04:21,240 --> 02:04:25,480
स्कंद से अब ये मैं लाया हूं ये पदम पुराण

1635
02:04:25,480 --> 02:04:29,800
देखो गीता का है संक्षिप्त पुराण हैय अब ये कल मैं ये पढ़ा

1636
02:04:29,800 --> 02:04:33,880
था पदम पुराण अभी मेरा इसका अध्ययन चल रहा है तो मुझे कल एक प्रमाण

1637
02:04:33,880 --> 02:04:38,000
मिला जैसे एक कथा है वो तीन तीन जग उसका मा कंड ऋषि

1638
02:04:38,000 --> 02:04:42,480
की कथा आती है उसका तीन तीन जग पर वर्णन आता है कि कुछ प्रलय काल आया तो एव

1639
02:04:42,480 --> 02:04:46,560
जल में उनको भगवान के बाल रूप के दर्शन हुए य ब्रह्म

1640
02:04:46,560 --> 02:04:50,600
पुराण श्रीमद भागवत और महाभारत में आपको य कथा तीन तीन जगह पर मिल जाएगी तो

1641
02:04:50,600 --> 02:04:54,640
एक पुराण में भी मिलाय आपने सुना होगा पढ़ा होगा ये

1642
02:04:54,640 --> 02:04:59,200
तो इसम क्या जो मारकंडे ऋषि थे

1643
02:04:59,200 --> 02:05:03,200
ना तो जब एक बार कल्प का अंत हो गया था पूरी पृथ्वी जल में

1644
02:05:03,200 --> 02:05:07,360
सब ब्रह्मांड ूब गया तो भगवान जो थे वो भगवान विष्णु अपने ए में वो शन

1645
02:05:07,360 --> 02:05:11,720
कर रहे थे तो एक बाल रूप में उनको मखंड जी को दिखाई दिए

1646
02:05:11,720 --> 02:05:15,760
तो मखंड जी को भगवान ने कहा कि मैं आपको एक चीज बताऊ अगर इनको

1647
02:05:15,760 --> 02:05:20,040
यह प्रसंग मिलता है ना कि वो परमात्मा ही थे बालक रूप में वो बोलेंगे

1648
02:05:20,040 --> 02:05:25,000
कि ये कबीर जी थे जो मांड के सामने बाल रूप में आए थे अगर प

1649
02:05:25,000 --> 02:05:29,080
पीछे से चैप्टर चला आ रहा होगा ना कौन थे क्या होंगे वो अपने मन से बोल

1650
02:05:29,080 --> 02:05:33,280
दे जब तक हम में से कोई नहीं है तो कुछ भी बोल दे सामने होंगे तो

1651
02:05:33,280 --> 02:05:37,880
उनको बोलेंगे भाई पीछे से पढ़ो कौन से मारकंडे ऋषि है पता चल जाएगा

1652
02:05:37,880 --> 02:05:42,160
मांडने जब एक बालक को देखा वो तेज निकलता हुआ देखा तो

1653
02:05:42,160 --> 02:05:46,240
उससे तो भगवान ने कहा बेटा मैं तुम्हारा पितामह आयु और प्रदान करने वाला

1654
02:05:46,240 --> 02:05:50,360
पुराण पुरुष भगवान विष्णु य बोल रहे हैं ये क पर है पदम पुराण में पदम

1655
02:05:50,360 --> 02:05:54,640
पुराण में कहां पर है सृष्टि खंड में है ये उसका देखो

1656
02:05:54,640 --> 02:05:58,720
अध्याय नंबर तो नहीं लिखा है लेकिन मैं बता दे रहा हूं भगवान श्री नारायण की महिमा

1657
02:05:58,720 --> 02:06:03,240
युगों का पचय प्रलय पेज नंबर क्या है

1658
02:06:03,240 --> 02:06:08,080
ये मेरे पास पेज नंबर दिखा रहा हूं 146

1659
02:06:08,080 --> 02:06:12,360
ठीक है बताइए इसमें देखिए भगवान माक

1660
02:06:12,360 --> 02:06:16,720
को अपना परिचय इस प्रकार दे रहे हैं भगवान विष्णु कह रहे ब्रह्मण मैं नारायण

1661
02:06:16,720 --> 02:06:20,720
हूं जिनकी जिन्ह हजारों मस्तको और हजारों चरणों से युक्त बताया

1662
02:06:20,720 --> 02:06:25,440
जाता है स शीष पूष सहस्त्र आक्ष सहस्त्र पाद वह विराट परमात्मा

1663
02:06:25,440 --> 02:06:30,440
स्वरूप है मैं सूर्य के समान वर्ण वाला तेजो में पुरुष हूं ये आप देख सकते

1664
02:06:30,440 --> 02:06:34,600
हैं एक सेकंड मेरा कैमरा पता नहीं कैसे उल्टा होगा आपको पता

1665
02:06:34,600 --> 02:06:35,200
हो तो कुछ बता

1666
02:06:35,200 --> 02:06:39,800
देना ना ना वो रहने दीजिए आप बस पढ़िए है बस

1667
02:06:39,800 --> 02:06:44,120
मैं तेजों मैं सूर्य के समान वण वाला तेजो में पुरुष हूं

1668
02:06:44,120 --> 02:06:48,440
मैं देवताओं को हविष्य पहुंचाने वाला अग्नि हूं और मैं सात घोड़ों वाला

1669
02:06:48,440 --> 02:06:52,800
सात घोड़ों के रथ वाला सूर्य हूं मैं ही इंद्र पद पर प्रतिष्ठित होने वाला इंद्र

1670
02:06:52,800 --> 02:06:56,960
और ऋतुओ में परिवल हूं संपूर्ण प्राणी तथा समस्त देवता मेरे ही स्वरूप है

1671
02:06:56,960 --> 02:07:01,120
मैं सर्पों में शेष ना पक्ष में गरु देखो यहां पर भी विभूतियों का वर्णन हो रहा

1672
02:07:01,120 --> 02:07:05,200
है संपूर्ण भूतों का संघार करने वाला मैं सर्प में शेष

1673
02:07:05,200 --> 02:07:09,240
और पक्षियों में गरुण हूं संपूर्ण भूतों का संहार करने वाला काल भी मुझे ही

1674
02:07:09,240 --> 02:07:15,240
समझना चाहिए भगवान विष्णु बोल रहे हैं

1675
02:07:15,240 --> 02:07:19,760
यण करने वाला काल मुझे ही समझना चाहिए

1676
02:07:19,760 --> 02:07:23,760
बहुत बढ़िया य दूरा प्रमाण मैंने दे दिया आपको

1677
02:07:23,760 --> 02:07:29,440
तीवा अध्याय है उसका सृष्ट खंड कावा

1678
02:07:29,440 --> 02:07:33,560
अध्याय पास मेरे पास अभी पीछे जितने भी सार ग्रंथ

1679
02:07:33,560 --> 02:07:37,560
आप देख रहे हो सब की सब गीता प्रस की है एक मेरे पास इसन की गीता

1680
02:07:37,560 --> 02:07:41,640
और रामायण है गीता प्रस भी है गीता रामायण लेकिन और भी जितने ग्रंथ

1681
02:07:41,640 --> 02:07:45,680
है सब गीता प्रस है पास और किसी प्रकाशक के नहीं है कौन के गीता

1682
02:07:45,680 --> 02:07:49,680
का क्या काम है वहा पर अरे पहले मैंने पढ़ा था ना एक बार तब मेरे पास

1683
02:07:49,680 --> 02:07:50,280
ने थे

1684
02:07:50,280 --> 02:07:54,280
नहीं आप देख सकते हो मेरे पीछे दिख रहे आपको

1685
02:07:54,280 --> 02:08:00,240
गता है बहुत बढ़िया और प्रकाश का

1686
02:08:00,240 --> 02:08:02,480
नहीं

1687
02:08:02,480 --> 02:08:06,640
गता त लाना पड़ेगा जब शलोक भी आपको कई ऐसे ग्रंथ

1688
02:08:06,640 --> 02:08:12,640
है जिनके शलोक नहीं

1689
02:08:13,000 --> 02:08:17,440
मिलते नहीं नहीं बढ़िया

1690
02:08:17,440 --> 02:08:21,680
ब ठीक है व मुझे लगता है चले गए कल हम लोग

1691
02:08:21,680 --> 02:08:26,720
वेद पुराण वालों से संपर्क करेंगे और

1692
02:08:26,720 --> 02:08:31,280
हम लोग लाइव आएंगे अगर वो हमें सुन रहे हो तो एक बार और आ जाए एक बार लाइन

1693
02:08:31,280 --> 02:08:35,680
में अगर वह हमें सुन रहे हैं तो या तो हमें 7408

1694
02:08:35,680 --> 02:08:41,680
30169 पर संपर्क करें जिससे

1695
02:08:42,680 --> 02:08:46,880
कि आपस में कोऑर्डिनेट करके हम कल की लाइव को डिसाइड

1696
02:08:46,880 --> 02:08:49,360
कर

1697
02:08:49,360 --> 02:08:53,600
सके है ना तो तो आज की यही पर हम लोग विराम देंगे

1698
02:08:53,600 --> 02:08:58,640
और कल फिर हम

1699
02:08:58,640 --> 02:09:03,720
लोग जय श्री राम भाई जय श्री

1700
02:09:03,720 --> 02:09:08,000
राम विशाल भाई जो आप बताए ना जो आप बताए सेम

1701
02:09:08,000 --> 02:09:13,440
ये चीज तो भगवान श्री कृष्ण ने उसम श्रीमद् भागवत गीता में भी कहा हुआ

1702
02:09:13,440 --> 02:09:17,800
है सूर्य हूं उसमें भी उन्होंने कहा

1703
02:09:17,800 --> 02:09:23,000
हैय बो व बैठा था

1704
02:09:23,000 --> 02:09:27,120
उन्होने ऐसा है भगवत गीता पर ही तो क्लेम है इसलिए

1705
02:09:27,120 --> 02:09:31,320
इनको उससे उससे सबूत दिखाया जा सकते है ऐसा नहीं है नहीं दिखा जा सकते मगर

1706
02:09:31,320 --> 02:09:36,200
उस मानते नहीं है हां ये मानते नहीं है ये उसी

1707
02:09:36,200 --> 02:09:40,400
को उसके उसके दूसरे जो रिलेटिवली जो शास्त्र है उससे

1708
02:09:40,400 --> 02:09:44,640
दिखाए जा रहे अरे तो उसमें भी तो है हम कह मत से पुराण खोलोगे

1709
02:09:44,640 --> 02:09:49,480
उसमें भी इन चीजों का जिक्र है मत्स पुराण में भी हमने देखा था अभी कल देख रहे

1710
02:09:49,480 --> 02:09:53,520
थे इसके बाद और हमसे संपर्क कर लीजिए और

1711
02:09:53,520 --> 02:09:57,560
कल की हम एक आपके साथ चर्चा रखते शिवांश आप अपना सेकंड वाला नंबर हमको सेंड

1712
02:09:57,560 --> 02:10:00,920
कर देना तो

1713
02:10:00,920 --> 02:10:05,400
प्लीज नहीं नहीं वो एक और नंबर जिस पर हम आपसे कॉल पर बात किए थे एक बार

1714
02:10:05,400 --> 02:10:09,760
ये नंबर तो हम बात हो जाएगी इस भी बात हो जाएगी ये प्रा

1715
02:10:09,760 --> 02:10:13,800
में है हा बात हो जाएगी ठीक है

1716
02:10:13,800 --> 02:10:18,080
कल हम लोग फिर 8 बजे आएंगे

1717
02:10:18,080 --> 02:10:22,120
लाइव बोलिए विशाल आप अगर एंड कर रहे तो

1718
02:10:22,120 --> 02:10:26,520
मेरे को भाव आ रहा है कि हम उससे करना चाहे हनुमान चालीसा

1719
02:10:26,520 --> 02:10:32,520
से दो मिनट अगर आप ले तो अरे बिल्कुल बिल्कुल हनुमान

1720
02:10:33,680 --> 02:10:38,640
चालीसा वो कर सकते जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुदव

1721
02:10:38,640 --> 02:10:42,680
बस दो मिनट

1722
02:10:42,680 --> 02:10:46,840
लगेगा चलो बो अरे कोई ना या दो मिनट की जग पा

1723
02:10:46,840 --> 02:10:51,600
मिनट लग जाए कोई ना चलो

1724
02:10:51,600 --> 02:10:55,640
नम हम सब पढ़ते हैं ताकि ऐसी सनातन मतलब बचा रहे

1725
02:10:55,640 --> 02:10:59,680
सुरक्षित रखे प्रभु श्र गुरु

1726
02:10:59,680 --> 02:11:04,400
निज मन मुकुर सुधारी वर्ण रघुवर विमल जस जोदा

1727
02:11:04,400 --> 02:11:09,120
फल चारी बुद्धिहीन तन जानि के सुमरो पवन कुमार

1728
02:11:09,120 --> 02:11:12,760
बल बुधि विद्या

1729
02:11:12,760 --> 02:11:16,840
दे जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कप

1730
02:11:16,840 --> 02:11:21,880
लो जागर रामदूत अतु बलमा अंज पुत्र

1731
02:11:21,880 --> 02:11:26,080
महावीर विक्रम बजरंगी कुवार सुम के संगी कंचन

1732
02:11:26,080 --> 02:11:30,200
ब विराज सु कानन कुंडल कु केसा हाथ बज

1733
02:11:30,200 --> 02:11:34,240
और ा बरा काधे मने शकर सुवन

1734
02:11:34,240 --> 02:11:38,840
केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवन

1735
02:11:38,840 --> 02:11:44,440
विद्यावान राम का प्रभु

1736
02:11:44,440 --> 02:11:49,040
च रामलखन सतावन

1737
02:11:49,040 --> 02:11:53,200
बसिया रूप रावा भीम रूप ध

1738
02:11:53,200 --> 02:11:57,280
अस रामचंद्र जी

1739
02:11:57,280 --> 02:12:01,440
लाय संजीवन लखन जी आए श्री रघुवीर ह

1740
02:12:01,440 --> 02:12:07,080
की बहुत बई

1741
02:12:07,080 --> 02:12:13,080
तुवे श्रीपति

1742
02:12:15,880 --> 02:12:20,200
कल जते कभी कोविद ग सके कहा तुम उपकार

1743
02:12:20,200 --> 02:12:23,240
सु

1744
02:12:23,240 --> 02:12:29,240
मिला तुम

1745
02:12:30,200 --> 02:12:36,200
मत्र ता मरल जान प्रभु मुदिका

1746
02:12:36,960 --> 02:12:41,640
मे दुर्गम का जगत के जते सुगम अनुग्रह तुमते

1747
02:12:41,640 --> 02:12:45,800
राम द्वारे तुम रखवार हो

1748
02:12:45,800 --> 02:12:51,800
सुख ल तुम्हारी शरणा तुम रक्षक का

1749
02:12:54,360 --> 02:12:58,720
भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे ना

1750
02:12:58,720 --> 02:13:02,880
रोग हरेरा हट से

1751
02:13:02,880 --> 02:13:07,000
हनुमान छुवे

1752
02:13:07,000 --> 02:13:11,240
मनम तपस्वी राजा न के का सकल तुम साजा और

1753
02:13:11,240 --> 02:13:16,080
मनोरथ जो कोई ला

1754
02:13:16,080 --> 02:13:20,120
सताप तुम्हारा है प्रगत उजियारा साधु संत

1755
02:13:20,120 --> 02:13:23,440
के तुम रखवा

1756
02:13:23,440 --> 02:13:27,800
अध के दाता अन जानकी माता राम रसाय

1757
02:13:27,800 --> 02:13:31,840
तुमरे पासा सदा रघुपति के तुमरे भजन राम

1758
02:13:31,840 --> 02:13:37,200
को पावे जन्म जनम के दुख बसरा अंत काल

1759
02:13:37,200 --> 02:13:42,040
रघुवर और देवता

1760
02:13:42,040 --> 02:13:46,880
च संकट कटे मिटे सब

1761
02:13:46,880 --> 02:13:51,720
हनुमत बलरा जय जय जय हनुमान कपा करो

1762
02:13:51,720 --> 02:13:55,720
गुरुदेव कीना जो सतवार पाठ कर कोई कोई छ

1763
02:13:55,720 --> 02:14:00,160
बंद महा सार पा करई

1764
02:14:00,160 --> 02:14:05,280
छ ब महा सुख होई

1765
02:14:05,280 --> 02:14:10,000
हनुमान ई गरी तुलसीदास

1766
02:14:10,000 --> 02:14:14,960
हरा की जय नाथरा पवन

1767
02:14:14,960 --> 02:14:19,000
संक मंगल म रू राम लखन सीता

1768
02:14:19,000 --> 02:14:23,480
स हदय बसो सु सियावर सियावर रामचंद्र

1769
02:14:23,480 --> 02:14:27,600
की जय पवन सुत हनुमान की

1770
02:14:27,600 --> 02:14:32,600
जय जय नम पार्वती पते हर हर

1771
02:14:32,600 --> 02:14:36,680
महादव तो भाई किसी को किसी भी प्रकार की चर्चा करनी हो वो आ

1772
02:14:36,680 --> 02:14:42,000
सकता है वैचारिक मतभेद के निमित्त हमारा नंबर है 7408

1773
02:14:42,000 --> 02:14:46,080
30169 नामा स्त्र में जुड़कर के नाम जप करना चाहते हैं

1774
02:14:46,080 --> 02:14:52,080
जो वो संपर्क कर सकते हैं और

1775
02:14:52,280 --> 02:14:56,480
जो क्लासेस जवाइन करना चाहते हैं वह इस पर व कर सकते हैं जो

1776
02:14:56,480 --> 02:15:00,560
धर्म रक्षा अभियान में भाग लेना चाहते हैं वह इसमें ट कर सकते

1777
02:15:00,560 --> 02:15:04,240
हैं

1778
02:15:04,240 --> 02:15:08,360
और एक और कोई चीज थ भूल गया

1779
02:15:08,360 --> 02:15:12,640
है ये ना मास्त्र हमको समझाइए जरा

1780
02:15:12,640 --> 02:15:16,720
आपके जो प्रश्न होते हैं वो सबसे पहले गोवर्धन मट के चैनल पर

1781
02:15:16,720 --> 02:15:20,960
आप देख सकते हैं जाकर के अपना प्रश्न टाइप करें और आगे पूरी शंकराचार्य लिख द तो

1782
02:15:20,960 --> 02:15:25,200
गन मिट के चैनल पर आपको जो है आपके प्रश्नों का उत्तर प्राप्त

1783
02:15:25,200 --> 02:15:29,360
हो जाएगा इसके अलावा ना होने पर ना मिलने पर आपसे

1784
02:15:29,360 --> 02:15:33,720
रिलेटेड प्रश्न आप वो क्वेश्चन लिख कर के हमें दे सकते हैं टेलीग्राम चैनल पर

1785
02:15:33,720 --> 02:15:38,040
एक ग्रुप है प्रश्न उत्तरी वाला उसम उसका लिंक आपको यहां पर वीडियो के लिंक

1786
02:15:38,040 --> 02:15:42,160
डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा विधि निषेध इत्यादि के संबंध में आचार्य राम

1787
02:15:42,160 --> 02:15:46,360
शंकर शुकल जी का चैनल है उसको आप देख सकते

1788
02:15:46,360 --> 02:15:51,000
फॉलो कर सकते हैं और गुरुदेव से दीक्षा लेने के लिए गुरुदेव

1789
02:15:51,000 --> 02:15:55,720
कहां पर है कहां नहीं है इसके लिए गोवर्धन मठ पप में आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए

1790
02:15:55,720 --> 02:16:00,240
गोवर्धन मठ पप है उसको इंस्टॉल करके उसमें अपने आपको रजिस्टर्ड करवा ले गोवर्धन

1791
02:16:00,240 --> 02:16:04,240
मठ की जो प है उसम आपको सारा गुरुदेव का प्रवास कहां कहा पर हो रहा है

1792
02:16:04,240 --> 02:16:07,480
सब कुछ मिल जाएगा और उनका व चैनल

1793
02:16:07,480 --> 02:16:11,840
है वहां पर भी आपको मिल जाएगा जी विशाल ये

1794
02:16:11,840 --> 02:16:16,440
नास्त्र के बारे में थोड़ा जानना चाहते थे ना मास्त्र में

1795
02:16:16,440 --> 02:16:20,480
दिन में पांच बार भगवान के भगवन नाम का जप होता है 1515 मिनट

1796
02:16:20,480 --> 02:16:24,680
के लिए तो उसमें एक एप्लीकेशन जूम या जो

1797
02:16:24,680 --> 02:16:29,000
मीटिंग गल मीट इत्यादि एप्लीकेशन के जरिए सब लोग एकत्रित

1798
02:16:29,000 --> 02:16:33,320
हो जाते 15 मिनट के लिए नाम जप करते हैं ऐसे करके दिन भर में पांच बार करते हैं

1799
02:16:33,320 --> 02:16:37,400
तो शास्त्रोक्त यह है कि हमारा दिन भर में सवा घंटे की

1800
02:16:37,400 --> 02:16:41,480
भक्ति हो जानी चाहिए भगवान की नित्य प्रति

1801
02:16:41,480 --> 02:16:45,920
तो सवा घंटे की भक्ति पूरी करवाई जा रही है और उसके बहुत ही पॉजिटिव

1802
02:16:45,920 --> 02:16:50,080
रुझान भी आ रहे हैं जैसे कुछ लोग थे जिन्होंने ऐसी बात

1803
02:16:50,080 --> 02:16:54,120
की थी कि उनके पास आजीवक पार्जन का माध्यम नहीं था और वह लगातार

1804
02:16:54,120 --> 02:16:58,160
नाम जप कर रहे हमारे साथ हमारे ही संज्ञान में हमसे किसी

1805
02:16:58,160 --> 02:17:02,200
ने संपर्क किया कि आपके जो भाई है जिनके पास अभी आजी

1806
02:17:02,200 --> 02:17:06,480
को पार्जन का माध्यम नहीं है तो उन्होंने संपर्क किया मदद करने के लिए

1807
02:17:06,480 --> 02:17:10,600
एक बहन थी जो इस बात से दुखी थी कि मेरे घर वाले मुझे पूजा

1808
02:17:10,600 --> 02:17:14,800
नहीं करने देते हैं मेरे पूरे घर वाले रामपाल दास को फॉलो करने लगे

1809
02:17:14,800 --> 02:17:18,880
हैं और भगवान की पूजा नहीं करने देते हैं उसकी भी न्यूज आई है वो

1810
02:17:18,880 --> 02:17:22,720
भी लगातार 40 दिन ने वाले उनको नाम जप

1811
02:17:22,720 --> 02:17:26,880
करते हुए उसकी भी न्यूज आई कि उसके घर में उनकी जो माता

1812
02:17:26,880 --> 02:17:31,240
जी है उन्होंने रामपाल को मानना छोड़ दिया है और अब वो भगवान

1813
02:17:31,240 --> 02:17:35,880
की जो जो ये परंपरा प्राप्त जो सनातन वैद का हिंदू

1814
02:17:35,880 --> 02:17:40,280
जो सिद्धांत है उनकी ओर वो प्रभावित हो चुकी है स्वित हो चुकी पुन

1815
02:17:40,280 --> 02:17:44,280
वापस एक तरी से घर वापसी उनकी एक तरह से आस्तिक हो

1816
02:17:44,280 --> 02:17:48,360
गए हैं नास्तिक से अच्छ एक एक और

1817
02:17:48,360 --> 02:17:52,920
क्वेश्चन था मेरा यार वो काफी परेशान है थोड़ा हमको बताइए आप लोग

1818
02:17:52,920 --> 02:17:56,920
हम किसी मतलब कोई हमारे तो अभी तक पर्टिकुलर किसी को हम गुरु

1819
02:17:56,920 --> 02:18:01,000
बना नहीं पाए हैं कोई हमारे आसपास ऐसा मिला नहीं व्यक्ति और हम

1820
02:18:01,000 --> 02:18:05,040
कुछ मंत्र ऐसे हैं जो जैसे कि पीतांबरा माता का जो 3 अक्षरी मंत्र

1821
02:18:05,040 --> 02:18:09,160
है इस तरह के मंत्र का जाप हम शुरू कर दिए काफी नियर अबाउट हम समझ लीजिए

1822
02:18:09,160 --> 02:18:13,520
कि मोर देन 36000 हम जाप कर भी चुके हैं

1823
02:18:13,520 --> 02:18:17,520
तो क्या वो करें देखिए मंत्र

1824
02:18:17,520 --> 02:18:22,000
और नाम भी गुरु मुख से ही सुन कर के करना चाहिए

1825
02:18:22,000 --> 02:18:26,680
अब उस समय तो मान लीजिए मिला नहीं कोई हमें और हमने शुरू कर दिया तो कोई

1826
02:18:26,680 --> 02:18:31,640
कर दिया तो कोई बात नहीं मगर जितना जल्दी हो सके किसी गुरु मुख से सुन

1827
02:18:31,640 --> 02:18:35,640
लीजिए यह शास्त्र कहते हैं हां तो वही अब

1828
02:18:35,640 --> 02:18:37,800
दिक्कत यह है ना कि हम मतलब एक दिन जैसे

1829
02:18:37,800 --> 02:18:41,960
ई आप जैसे लोग थे किसी का वीडियो हम देखे हैं और देखने के बाद

1830
02:18:41,960 --> 02:18:46,440
हमने जो है उसको ही सर्च किया फिर हमारे यहां काशी विश्वनाथ

1831
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मंदिर जो है भगवान शिव का वहां गए तो वहां एक कचौड़ी गली करके

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मार्केट है वहां पर सारे धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध है तो वहां से हम बगलामुखी साधना

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लेकर आए उसको बका मतलब जिस तरीके से उसमें था हमने सापा

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साप विमोचन किया दिंग न्यास अंगन यास यह सारी चीजों को करने

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के बाद जो है हम उस मंत्र का सवा लाख का संकल्प भी ले चुके

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हैं और प्रतिदिन कर रहे हैं लेकिन अभी तक हमने उसकी दीक्षा नहीं

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ली किसी से यही हमको चिंता है थ

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दीक्षा लिए बिना मंत्र कार्य नहीं करते हैं

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मंत्र का प्रभाव ी हैब दीक्षा हो जी विशाल जी

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बोले जाते जाते एक चीज स चाहूंगा ये बात

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देवेंद्र शर्मा जी भी जानते हैं अ गीता प्रस का जो ग्रंथ दिखाते हैं अब हमारे पास तो

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संस्कृत के होते हैं बाय संस्कृत क्या होते हैं इनके पास पता नहीं लेकिन हा

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गीता प्रस की अग कोई एक गीता होती है ना इनके पास तो यही होती है

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जैसे आप देख सकते हैं ये संधि विच्छेद वाली गीता दिख रही है आप लोगों को जय

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दयाल लेकिन इसमें भी इन्होने काटा पीटी कर रखी है ज इनके मतलब का अर्थ

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अरे उसमें भी कटपट है उसमें

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उन्होंने एक दो वीडियो हम आपको कहोगे तो हम सेंड कर देंगे स्क्रीन रिकॉर्डिंग बना के

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उसमें ये स्पष्ट करना कि देखो यहां पर इन्होंने ऐसे कर दिया ऐसे होना चाहिए

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था यह बोलते हैं उस बोलते

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सभी को जय श्री राम समय देने के लिए हमको जरा बताइए यार

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कि ये मतलब हमको पीतांबरी माता का जो 3 अक्षरी मंत्र है जो नंबर है ना

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उस वो जो हमारा टेलीग्राम चैनल है वहां पर प्रश्नोत्तरी

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वाला ग्रुप है वहां पर आप कर दीजिए से आप पूछ

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लीज और आपको ेर सारा सन

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जी और क आप हमसे संपर्क कर लीजिएगा

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ठीक है बिल्कुल बिल्कुल जय श्री राम जय

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श्री रामम जय माता

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जय माता दी

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आपको कुछ कहना है चौहान जी गए चलिए ठीक है जय

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श्री राम [संगीत]
