1
00:00:01,540 --> 00:00:07,540
[संगीत]

2
00:00:08,400 --> 00:00:11,400
सभी को जय श्री

3
00:00:11,400 --> 00:00:13,960
राम

4
00:00:13,960 --> 00:00:18,160
और एस यूजुअल अब हम लोग लगता है आदत हो गई

5
00:00:18,160 --> 00:00:21,280
देर से आने

6
00:00:21,280 --> 00:00:25,560
की आज बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषयों पर हम लोग चर्चा करने वाले

7
00:00:25,560 --> 00:00:30,080
हैं जिसमें कि आज पता चलेगा कि संत राम

8
00:00:30,080 --> 00:00:34,200
बाल जो तथाकथित स्वयं को संत बोलते हैं

9
00:00:34,200 --> 00:00:38,280
यह कितने सनातनी है कितने वैदिक हैं कितने गीता

10
00:00:38,280 --> 00:00:42,360
को मानने वाले हैं यह सारी चर्चाएं आज हम लोग जानने

11
00:00:42,360 --> 00:00:46,360
वाले हैं अब तक हमने अने अलग अलग तरीके से जो

12
00:00:46,360 --> 00:00:51,200
है समझने का प्रयास किया

13
00:00:51,200 --> 00:00:55,520
कि क्या कहती है संत रामपाल जो तथाकथित है

14
00:00:55,520 --> 00:01:00,240
सो कॉल्ड सं इनकी विज्ञान इनका क्या है क्या

15
00:01:00,240 --> 00:01:04,080
है ये सारी चीजें

16
00:01:04,080 --> 00:01:08,160
हैं शुरू करने से पहले मैं कुछ चीजें

17
00:01:08,160 --> 00:01:12,360
याद दिला दूं हमको

18
00:01:12,360 --> 00:01:16,480
माउंट आबू से आर्य समाज की ओर से एक लेटर प्राप्त हुआ

19
00:01:16,480 --> 00:01:21,440
है पूरी तरीके से मुझे स्मरण नहीं है कि उसमें क्याक लिखा है तो

20
00:01:21,440 --> 00:01:25,640
उसमें उन्होंने हमें आमंत्रित किया था

21
00:01:25,640 --> 00:01:30,120
शास्त्रार्थ के लिए तो हमने उनको

22
00:01:30,120 --> 00:01:34,680
उनका निमंत्रण जो है स्वीकार करते हुए ने कहा कि आप शास्त्र कर लीजिए लखनऊ आ कर

23
00:01:34,680 --> 00:01:38,720
के तो उन्होंने हमें समय दिया है छ से न

24
00:01:38,720 --> 00:01:42,720
तारीख के बीच तो डेट हम आपको बता देंगे कौन सी

25
00:01:42,720 --> 00:01:47,000
उचित रहेगी न या उन्होंने कुछ एक दो

26
00:01:47,000 --> 00:01:51,000
दिन और याद दिलाए तो डेट हम

27
00:01:51,000 --> 00:01:55,600
आपको बता देंगे आपका आप यहां आ सकते हैं उन तारीखों में जो आपने कही है

28
00:01:55,600 --> 00:02:00,040
और हम लोग चर्चा करेंगे उसे चर्चा का नाम दे शास्त्रार्थ का नाम ना दे

29
00:02:00,040 --> 00:02:04,080
हम चर्चा कर सकते हैं सामान्य चर्चा जो होती है धर्म और ईश्वर के संबंध

30
00:02:04,080 --> 00:02:09,560
में और हां आपने एक बात और कही थी कि आपका जो विषय है

31
00:02:09,560 --> 00:02:13,800
वह आपका विषय है कि किसकी परंपरा मान्य किसकी परंपरा

32
00:02:13,800 --> 00:02:17,800
श्रेष्ठ या किसकी परंपरा प्रमाणिक तो इस विषय पर थोड़ा ध्यान

33
00:02:17,800 --> 00:02:19,640
दीजिए यह विषय अस्तित्व

34
00:02:19,640 --> 00:02:23,880
में ही नहीं है क्यों क्योंकि आज तक आपने अपनी

35
00:02:23,880 --> 00:02:27,880
परंपरा को बताया ही नहीं है परंपरा को जब आप बता

36
00:02:27,880 --> 00:02:31,920
देंगे उसके बाद उस विषय पर बात होगी कि आपकी मान्य क्यों नहीं है हमारी

37
00:02:31,920 --> 00:02:36,120
मान्य क्यों है हमारी मान्य क्यों नहीं आपकी मान्य क्यों है आपने सामने से

38
00:02:36,120 --> 00:02:40,160
वो रखा ही नहीं है कि भाई आपकी कोई परंपरा भी है तो पहले आप

39
00:02:40,160 --> 00:02:44,240
उसका अस्तित्व बताइए कि वीडियो साफ नहीं

40
00:02:44,240 --> 00:02:50,240
दिख रहा है

41
00:02:51,000 --> 00:02:57,000
ओ अब दिख रहा है वीडियो मेरा

42
00:03:05,080 --> 00:03:11,000
दिख रहा है कि नहीं दिख रहा अभी मेरा वीडियो ठीक दिख रहा है या रुक रुक के चल रहा

43
00:03:11,000 --> 00:03:14,280
है तो

44
00:03:14,280 --> 00:03:18,280
मैं अभी भी साफ नहीं है तो मैं एक बार वापस जाके

45
00:03:18,280 --> 00:03:24,280
आऊ

46
00:03:46,940 --> 00:03:52,940
[संगीत]

47
00:03:56,200 --> 00:04:02,080
अभी साफ दिख रहा है मेरा वीडियो

48
00:04:02,080 --> 00:04:06,360
अच्छा ठीक है तो मैं आपको बता रहा था मैं माउंट आबू

49
00:04:06,360 --> 00:04:10,520
एक माउंट आबू में आर समाज नाम की एक संस्था है वहां से

50
00:04:10,520 --> 00:04:14,880
इनवाइट किया गया था अ डिबेट के लिए शास्त्रार्थ

51
00:04:14,880 --> 00:04:19,960
के लिए तो हमने उनका वो जो निमंत्रण है स्वीकार किया है

52
00:04:19,960 --> 00:04:24,040
आप हमने उनसे कहा था कि आप लखनऊ आ जाइए और हमारे और आपके

53
00:04:24,040 --> 00:04:28,240
बीच में जो है बात हो जाएगी जो भी वैचारिक

54
00:04:28,240 --> 00:04:32,240
मतभेद है उसके निमित्त तो उन्होंने उसको भी स्वीकार कर लिया वो लखनऊ आने

55
00:04:32,240 --> 00:04:36,560
की बात स्वीकार कर तो आप आ जाइए

56
00:04:36,560 --> 00:04:40,560
जो आपने दिनांक दिए हैं उनमें से किसी एक दिन

57
00:04:40,560 --> 00:04:44,720
आप आ जाइए और जो फिक्स है वो मैं आपको अपडेट कर देंगे

58
00:04:44,720 --> 00:04:49,680
हम लोग उस पर मुझे थोड़ा सा देखना है कि उन दिनों हमारा कोई आवश्यक कार्य तो नहीं है

59
00:04:49,680 --> 00:04:53,760
पहली बात तो यह हो गई कि आप आज आ सकते हैं बात बात हो सकती है दूसरी बात यह

60
00:04:53,760 --> 00:04:57,800
है कि आपने जो विषय चुना है उसको थोड़ा सा करेक्शन की जरूरत है आपने

61
00:04:57,800 --> 00:05:02,120
विषय दिया है कि किसकी परंपरा श या किसकी परंपरा

62
00:05:02,120 --> 00:05:06,360
मान्य तो यह जो कंपैरेटिव

63
00:05:06,360 --> 00:05:10,600
सिचुएशन है तब आ सकती है जब आप अपनी परंपरा का अस्तित्व

64
00:05:10,600 --> 00:05:11,960
प्रकट करें

65
00:05:11,960 --> 00:05:16,200
हमने कभी भी यह कहा ही नहीं है कि आपकी परंपरा मान्य नहीं है हमने प्रश्न

66
00:05:16,200 --> 00:05:20,520
पूछा है कि आपकी परंपरा क्या है तो वोह आपने आज तक बताया नहीं है तो पहले आप

67
00:05:20,520 --> 00:05:24,520
अपनी परंपरा बताए तो फिर उस विषय पर बात हो सकती बाकी धर्म और

68
00:05:24,520 --> 00:05:28,520
ईश्वर के विषय में आप आ करर के चर्चा करें और धर्म और ईश्वर में बात करते

69
00:05:28,520 --> 00:05:32,600
समय बीच में उसका एक अंग हो सकता है कि भाई हां भाई परंपरा वेद मंत्र

70
00:05:32,600 --> 00:05:36,760
कैसे आए यह है वो है तो वो एक वो मुख्य बिंदु नहीं हो सकता वो उसका

71
00:05:36,760 --> 00:05:41,440
एक पहलू हो सकता है इसके साथ ही साथ

72
00:05:41,440 --> 00:05:45,440
मैं फिर कहूंगा इसको शास्त्रार्थ का नाम ना दे हमने आज तक अपनी किसी भी

73
00:05:45,440 --> 00:05:49,520
चर्चा को शास्त्रार्थ नहीं कहा है डिस्कशन कहे डिस्कशन

74
00:05:49,520 --> 00:05:53,880
हम लोग कर सकते हैं हम और आप शास्त्रार्थ नहीं हम कोई आचार्य नहीं है

75
00:05:53,880 --> 00:05:58,240
कोई प्रामाणिक गुरु नहीं है जो हम आपके साथ शास्त्रार्थ करने बैठे

76
00:05:58,240 --> 00:06:02,640
आप अपनी नजरों में हो सकते हमारे दृष्टिकोण में आप भी नहीं है

77
00:06:02,640 --> 00:06:07,360
हम तो है ही नहीं और आप भी नहीं है खैर दूसरी बात यह है कि अगर

78
00:06:07,360 --> 00:06:11,480
आप आचार्य स्वयं को कह भी रहे हैं तो हमें कोई

79
00:06:11,480 --> 00:06:15,640
उससे आपत्ति नहीं मगर बात यही है कि हम आपके साथ चर्चा करेंगे

80
00:06:15,640 --> 00:06:19,240
शास्त्रार्थ

81
00:06:19,240 --> 00:06:23,240
और एक विषय यह भी है कि जब आप यह देख रहे हैं

82
00:06:23,240 --> 00:06:27,400
कि आपने जो है शिवांश नारायण द्विवेदी से

83
00:06:27,400 --> 00:06:31,480
चर्चा या आपके भाषा में क तो श के लिए कहा है तो

84
00:06:31,480 --> 00:06:36,000
आप इतने पत्र भेज चुके हैं आपने अपने तरफ के किसी व्यक्ति का नाम उधत

85
00:06:36,000 --> 00:06:40,000
नहीं किया है तो ये सोचने का विषय महत्त्वपूर्ण विषय है आपको

86
00:06:40,000 --> 00:06:44,200
भी उसको प्रकट करना चाहिए हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ता है आप किसको रखेंगे

87
00:06:44,200 --> 00:06:48,280
किसको नहीं मगर इसका कारण क्या है जो आप अपने पक्षकार

88
00:06:48,280 --> 00:06:52,400
को बता ही नहीं रहे कि हमारी चर्चा होनी किसके साथ उसको भी आप दिखाइए

89
00:06:52,400 --> 00:06:56,520
उसका फोटो दिखाइए जिससे कि उसकी बातें हो न्यूज जाए लोगों तक है ना

90
00:06:56,520 --> 00:07:01,720
ज्यादा से ज्यादा लोग लोग

91
00:07:01,720 --> 00:07:05,800
ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उस होने वाली चर्चा के बारे में

92
00:07:05,800 --> 00:07:10,120
समाचार पहुंच सके इसके अलावा आपने एक बात और कही है कि

93
00:07:10,120 --> 00:07:14,200
आपके सारे खर्चे हम उठाएंगे लखनऊ आक के हमारे खर्चे उठाने की आपको

94
00:07:14,200 --> 00:07:18,200
आवश्यकता नहीं है आप स्वयं का उठा लीजिए बस आप

95
00:07:18,200 --> 00:07:22,520
आ जा चर्चा हो जाएगी

96
00:07:22,520 --> 00:07:26,680
और यह था संदेश हा इस बीच मुझे एक बात और याद आई

97
00:07:26,680 --> 00:07:30,720
एक वो जो कलयुग का नीच व्यक्ति है

98
00:07:30,720 --> 00:07:34,880
जो सनातन शास्त्रों को बदलने की बात करता है

99
00:07:34,880 --> 00:07:38,920
और स्वयं को कलयुग का योगी कहता है

100
00:07:38,920 --> 00:07:43,320
और वह किसी भी सिद्धांत को तब मानता है जब वह उसे अपने

101
00:07:43,320 --> 00:07:47,600
व्यवहारिक जीवन में एमप्लीफाई ना कर ले तो हमने

102
00:07:47,600 --> 00:07:51,600
जब उस पर यह उसकी सच्चाई उसको दिखा दिया ना उसको दिखा दिया तो उसने

103
00:07:51,600 --> 00:07:55,760
कुछ अजीब से कुतर को भरी एक वीडियो बनाई हमारे

104
00:07:55,760 --> 00:07:59,800
ऊपर जो हमारे संज्ञान में आई है उस वीडियो में उसका कहना

105
00:07:59,800 --> 00:08:04,000
कि मेरे गुरु स्वयं श्री कृष्ण तो मेरे

106
00:08:04,000 --> 00:08:08,800
भाई आप हमारे वीडियोस को अगर स्क्रॉल करेंगे ना

107
00:08:08,800 --> 00:08:12,800
तो आपके इस कथन का भी आपको उत्तर मिल जाएगा हम दे चुके

108
00:08:12,800 --> 00:08:16,800
पहली बात तो यह है कि जो ईश्वर

109
00:08:16,800 --> 00:08:21,080
है ना उसको वो एक जटिल

110
00:08:21,080 --> 00:08:25,160
एक उस तक पहुंचना एक संघर्ष का कार्य है

111
00:08:25,160 --> 00:08:29,520
उस पर ध्यान लगाना संघर्ष का कार्य है और इस कार्य में ही मदद करने

112
00:08:29,520 --> 00:08:33,800
के लिए गुरु होता है ठीक है तो यदि आपने

113
00:08:33,800 --> 00:08:38,080
उस जो आपका गंतव्य है उसी को ही अपना क्या कहते

114
00:08:38,080 --> 00:08:42,200
हैं उसी को अपना गति का आलंबन लेने के योग्य साधन

115
00:08:42,200 --> 00:08:46,400
बना लिया तो फिर वह जो साधन जो आपके

116
00:08:46,400 --> 00:08:50,520
कार्य को सरल करने के लिए आया वह साधन आपने ऑलरेडी कठिन बना लिया तो फिर

117
00:08:50,520 --> 00:08:54,600
अब अब आपको फिर से सरलता के लिए किसी और को आलंबन बनाना होगा

118
00:08:54,600 --> 00:08:58,600
वो बात अलग है कि उसको आप गुरु ना कहो फॉर एग्जांपल जब आप यह कहते हैं कि

119
00:08:58,600 --> 00:09:02,960
मेरे गुरु स्वयं श्री कृष्ण है तो आपको ये भगवत गीता

120
00:09:02,960 --> 00:09:06,960
या वेद या इनकी इनको पढ़ने के लिए बुक्स की जरूरत क्यों है

121
00:09:06,960 --> 00:09:11,120
जो आपकी फोटो में पीछे दिखाई देती जब स्वयं श्री कृष्ण आपके गुरु है तो वो

122
00:09:11,120 --> 00:09:15,280
तो आपको कान में आकर के सारे मंत्र दे ही देंगे आपको पता भी लग जाएगा

123
00:09:15,280 --> 00:09:19,800
दूसरी बात यह है कि ये जो बुक्स आपने पीछे रख रखी है तो

124
00:09:19,800 --> 00:09:24,120
इन बुक्स में यदि कोई प्रेस वाला यदि आपको डायरेक्ट

125
00:09:24,120 --> 00:09:28,480
इन्हीं पर विश्वास है यदि कोई प्रेस वाला इनमें एक दो श्लोक

126
00:09:28,480 --> 00:09:32,080
मिला देगा या कम कर देगा तो आपको कैसे पता चलेगा कि ये श्लोक मिलाए

127
00:09:32,080 --> 00:09:36,960
गए नहीं और दूसरी बात ये है कि जो

128
00:09:36,960 --> 00:09:41,560
श्री कृष्ण जो आपको आकर के डायरेक्ट ज्ञान दे रहे हैं जैसा कि आप बोल रहे हैं

129
00:09:41,560 --> 00:09:45,720
तो वो श्री कृष्ण सही बोल रहे हैं आपको कैसे पता लगेगा क्योंकि इधर

130
00:09:45,720 --> 00:09:49,880
आप आप आपके लिए जो बुक्स है इनका आधार श्री कृष्ण

131
00:09:49,880 --> 00:09:54,440
दिखने वाले जबकि श्री कृष्ण का आधार होते हैं हमारे शास्त्र

132
00:09:54,440 --> 00:09:58,520
अगर बुद्ध के रूप में भगवान आएंगे तो हम उनको नहीं मानते क्योंकि वेदों का खंडन करते हैं

133
00:09:58,520 --> 00:10:02,680
भले ही यज्ञों की रक्षा के लिए करें है ना वही सनातनी है

134
00:10:02,680 --> 00:10:06,800
तो थोड़ा ध्यान दो इन सब चीजों पर क्या बोल रहे हो आपके तर्क बहुत वीक होते

135
00:10:06,800 --> 00:10:11,160
जा रहे हैं है ना अगर आपकी ही इंद्रियों के द्वारा बनाया गया

136
00:10:11,160 --> 00:10:15,240
ईश्वरी ईश्वरीय प्रतिबिंब है और वह आकर के आपको बोल रहा है

137
00:10:15,240 --> 00:10:19,400
कि ऐसा करो ऐसा ना करो आपको धर्म और धर्म का निर्णय कैसे करेंगे आप तो

138
00:10:19,400 --> 00:10:23,760
केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल क्या कहते

139
00:10:23,760 --> 00:10:28,320
हैं गुरु गोविंद और ग्रंथ इन तीनों को मिलाकर के

140
00:10:28,320 --> 00:10:33,040
धर्म प्राप्त हो होता है अगर इसमें से एक भी पायदान आप खींचें ये तीनों इंटरडिपेंडेंट

141
00:10:33,040 --> 00:10:37,040
है ये हो सकता है कि किसी के जीवन में आचार्य पहले आ जाए किसी के जीवन

142
00:10:37,040 --> 00:10:40,600
में ग्रंथ पहले आ जाए मगर ये तीनों इंटरडिपेंडेंट

143
00:10:40,600 --> 00:10:44,720
है तो आप ये नहीं कह सकते कि हमारे पास सीधे श्री कृष्ण आते हैं

144
00:10:44,720 --> 00:10:47,120
श्री कृष्ण आते हैं तो उनकी पहचान कैसे करोगे

145
00:10:47,120 --> 00:10:51,440
पहचान अगर आप शास्त्र से कर रहे हैं तो शास्त्र को लिखने वाला आपका गुरु है

146
00:10:51,440 --> 00:10:55,480
है ना क्योंकि शास्त्र के जो नियम है उनके आधार पर आप देख रहे

147
00:10:55,480 --> 00:10:59,480
हो कि ये श्री कृष्ण है कि नहीं इनके मोर का पंख है या इनका कैसा है

148
00:10:59,480 --> 00:11:03,560
कैसे दिखते हैं ये सब शास्त्र की चीज है ना तो यानी कि आपके पास गुरु

149
00:11:03,560 --> 00:11:09,560
है श्री कृष्ण को पहचानने के लिए बस आप कह नहीं रहे

150
00:11:10,080 --> 00:11:14,320
हो प्रतिमा दिख रही है आपको

151
00:11:14,320 --> 00:11:19,640
हमारे पीछे ही है गणेश जी

152
00:11:19,640 --> 00:11:23,760
और फिर इसमें इन्होंने एक बात कही कि अगर

153
00:11:23,760 --> 00:11:27,840
हमको य वीडियो से कोई न्यूज पता चल रही है तो हम

154
00:11:27,840 --> 00:11:32,520
उस न्यूज पर ध्यान देंगे ना की वो जहां से प्राप्त हो रही है उस साधन पर

155
00:11:32,520 --> 00:11:36,560
तो यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि जिस

156
00:11:36,560 --> 00:11:40,680
साधन पर हम भरोसा कर रहे होते हैं उसकी बात को इसलिए मान रहे होते हैं कि

157
00:11:40,680 --> 00:11:45,280
उसकी बात को वेरीफाई करने के लिए भी हमारे पास कोई अंततोगत्वा कोई प्रामाणिक

158
00:11:45,280 --> 00:11:49,280
साधन है वही गुरु है यदि आपको शास्त्र से कोई

159
00:11:49,280 --> 00:11:53,280
बात प्राप्त हो रही है तो उस शास्त्र को प्रामाणिक मानना है कि नहीं मानना उसमें मिलावट

160
00:11:53,280 --> 00:11:57,280
है कि नहीं उसके लिए ही गुरु है अन्यथा कल को हर वो व्यक्ति

161
00:11:57,280 --> 00:12:01,360
आपके धर्म को बदल सकता है जो आप आप जिन किताबों को पढ़ रहे हैं उनको छाप रहा है

162
00:12:01,360 --> 00:12:05,480
समझ गए पहली और एक लास्ट बात आपने और कही

163
00:12:05,480 --> 00:12:10,520
धर्म परिवर्तन की बात कि आपके ये

164
00:12:10,520 --> 00:12:14,640
विधि निषेध इत्यादि से छुआछूत की वजह से पहली बात तो आपको

165
00:12:14,640 --> 00:12:18,840
समग्र रूप से आपने अध्ययन किया नहीं है इन चीजों का परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण में जाकर

166
00:12:18,840 --> 00:12:23,000
के और परंपरा प्राप्त आचार्यों के शिष्य केवल ब्राह्मण नहीं होते हैं शूद्र

167
00:12:23,000 --> 00:12:27,480
भी होते हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब होते हैं हमारे

168
00:12:27,480 --> 00:12:31,600
शूद्र जो भाई होंगे गुरु भाई वो आप लोगों की संख्या से बहुत

169
00:12:31,600 --> 00:12:34,800
ज्यादा होंगे है ना तो पहले तो इसको समझो

170
00:12:34,800 --> 00:12:38,800
दूसरी बात यह है कि आपका कहना छुआछूत की वजह से धर्म परिवर्तन हो रहा

171
00:12:38,800 --> 00:12:43,000
है भाई धर्म परिवर्तन तो तब भी होगा जब हम एलजीबीटी क्य को नहीं अपनाएंगे जब

172
00:12:43,000 --> 00:12:47,480
हम लिविन रिलेशनशिप को नहीं अपनाएंगे क्योंकि धर्म जो है ना वो लगाम लगाता है

173
00:12:47,480 --> 00:12:51,480
मनुष्य जो जन्मा है भोग भोग की प्रवृत्ति के साथ जन्मा है और धर्म व

174
00:12:51,480 --> 00:12:55,480
है जो उस पर लगाम लगाएगा तो जहां उसको भोग मिलने लगेगा उधर

175
00:12:55,480 --> 00:12:59,480
भागेगा और रही बात आप ये जो जिन लोगों का पक्ष ले

176
00:12:59,480 --> 00:13:03,560
हरियाणा पंजाब आपने वहां पर वर्ण व्यवस्था परंपरा प्राप्त

177
00:13:03,560 --> 00:13:07,760
आचार्य शिष्य ये सब छोड़ दिया तो वहां का

178
00:13:07,760 --> 00:13:11,800
वो देखो आप क्या हाल है आज क्या हालेलुया

179
00:13:11,800 --> 00:13:15,840
होता है वहां पर कितनी तेजी से कन्वर्जन हो रहा है और

180
00:13:15,840 --> 00:13:20,520
यह जो यह टूटे हैं ना य आपके रामपाल वाले लोग यह भी वही आर समाज से

181
00:13:20,520 --> 00:13:24,680
वहां आर समाज का एक और रूप है है ना अब ये लोग

182
00:13:24,680 --> 00:13:28,680
भी आज मैं बता रहा हूं आपको ये लोग भी थोड़े दिन बाद आपको पूर्णत अभी थोड़े बहुत

183
00:13:28,680 --> 00:13:32,720
वेद विरुद्ध है थोड़ दिन बाद आपको ईसाई दिखाई देंगे तो आप

184
00:13:32,720 --> 00:13:36,880
ये बात तो करो ही मत कि आपकी व से कन्वर्जन हो रहा है अगर धर्म

185
00:13:36,880 --> 00:13:41,240
के कारण अगर कन्वर्जन होने के व्यक्ति छोड़ छोड़ के भाग रहा है

186
00:13:41,240 --> 00:13:45,880
इस कारण से हम अपने धर्म को बदलने लगेंगे

187
00:13:45,880 --> 00:13:49,960
तो धर्म का अस्तित्व क्या रह जाएगा और अंत तो गवा भाई तुमने

188
00:13:49,960 --> 00:13:54,520
इतनी सारी जो सब चीजें अपने वो वीडियो में दे दी है

189
00:13:54,520 --> 00:14:00,280
आप मुझे एक बात बताओ आपने बोला कृष्ण मेरे हैं कृष्ण कौन है

190
00:14:00,280 --> 00:14:04,520
बताइए आपको बताना पड़ेगा शास्त्र का नाम लेना पड़ेगा जैसे ही शास्त्र का नाम लिया

191
00:14:04,520 --> 00:14:08,640
तो शास्त्र आप तक आए कैसे अगर जहां से आ रहे

192
00:14:08,640 --> 00:14:12,800
हैं उस पर आपको विश्वास नहीं है तो फिर आपका शास्त्रों पर विश्वास होना सिद्ध

193
00:14:12,800 --> 00:14:16,960
नहीं होता है और यदि शास्त्रों पर विश्वास है तो जहां से आ रहे उस पर विश्वास

194
00:14:16,960 --> 00:14:21,280
ना होना सिद्ध नहीं कर पाओगे इसीलिए कहता हूं मत पड़ा करो चक्कर में

195
00:14:21,280 --> 00:14:25,400
है ना अभी छोटे हो थोड़ा और अनुभव प्राप्त करो और

196
00:14:25,400 --> 00:14:29,720
थोड़े से लॉजिस लाओ उसके बाद निकलना राजू श्रीवास्तव

197
00:14:29,720 --> 00:14:33,840
का एक चुटकला याद आ गया कि मोमबत्ती होती है ना जब आंधी चलती है तो ऐसे

198
00:14:33,840 --> 00:14:38,080
ऐसे करती है ऐसे ऐसे यूं य जैसे कोई मात

199
00:14:38,080 --> 00:14:42,240
शक्ति हो और जब मोम बत्ता होता है जो बड़ा

200
00:14:42,240 --> 00:14:46,280
वो जब आधी चलती है तो ऐसे ऐसे करता है टकराता है वो राजू श्रीवास्तव का

201
00:14:46,280 --> 00:14:50,520
एक गुर था तो अभी आप ममत्ती वाली स्टेज में है

202
00:14:50,520 --> 00:14:54,720
बेकार में आंधियों से उलझने का प्रयास ना करें है

203
00:14:54,720 --> 00:14:59,120
ना तो एक ये दो चीज हो गई अब हम आते हैं हमारे मुख्य

204
00:14:59,120 --> 00:15:05,120
बिंदु पर आज का जो है तत्व ज्ञानी काल ब्रह्म

205
00:15:06,320 --> 00:15:10,360
भगवान तो सबसे पहली बात है कि हम आज

206
00:15:10,360 --> 00:15:14,400
एक मुख्य विषय लेकर के आए हैं कि भाई जो

207
00:15:14,400 --> 00:15:18,520
काल है

208
00:15:18,520 --> 00:15:22,560
इनका रामपाल वालों का जो काल है

209
00:15:22,560 --> 00:15:26,560
वो क्या कह रहा है वो क्या कर रहा है उसका वास्तविक अस्तित्व क्या है इस पर भी हम सीरीज अब

210
00:15:26,560 --> 00:15:30,880
चलाएंगे तो आज हम लोग बात कर रहे हैं कि

211
00:15:30,880 --> 00:15:35,160
यह जो है काल को भगवान भी कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान

212
00:15:35,160 --> 00:15:39,360
भी कहते हैं इससे पहले मैं आपको बता दूं कि भगवत गीता नवे अध्याय के 33

213
00:15:39,360 --> 00:15:43,400
में श्लोक में भगवान ने फिर कहा था श्री कृष्ण जी ने कि

214
00:15:43,400 --> 00:15:47,640
तू मुझको भज तू मुझको मेरा जाप कर

215
00:15:47,640 --> 00:15:51,840
और ऐसे बहुत सारे श्लोक है भगवत गीता में जैसा कि हमने पिछली बार बताया

216
00:15:51,840 --> 00:15:56,440
था और ये लोग ये कहते हैं ना जो उल्टे उल्टे पेड़ के रूप में सही सही व्याख्या कर दे

217
00:15:56,440 --> 00:16:01,360
ये देख लीजिए भगवत गीता का ही है ये उल्टे के रूप में व्याख्या की

218
00:16:01,360 --> 00:16:05,440
इसको इसके जो लेखक है उन्हे आप तर्शी मान लेंगे शायद या नहीं

219
00:16:05,440 --> 00:16:10,040
मानेंगे कुछ उतरक करेंगे तो यह तो एक बात रही मगर

220
00:16:10,040 --> 00:16:14,320
हमने अपने पिछले वीडियो में बताया कि जो भगवान श्री कृष्ण उन्होंने

221
00:16:14,320 --> 00:16:18,320
कई बार स्वयं को भजने की बात की है तो आज ऐसा सनसनी

222
00:16:18,320 --> 00:16:21,520
खेज खुलासा होने वाला है ना ऐसा सनसनी खेज जो अभी

223
00:16:21,520 --> 00:16:25,680
तक आपने कभी नहीं सुना होगा मेरे रोंगटे खड़े हो गए ऐसी ऐसी चीज

224
00:16:25,680 --> 00:16:29,800
मुझे आज पता चली है और यह भी ऊपरी ऊपरी जो जो अध्ययन किया है मैंने

225
00:16:29,800 --> 00:16:35,800
इनकी चीजों का तब है ना

226
00:16:36,080 --> 00:16:40,280
तो अब ये बात आती है कि

227
00:16:40,280 --> 00:16:45,000
अ मैंने जो मैंने ये बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने

228
00:16:45,000 --> 00:16:49,120
कई श्लोकों में यह कहा है कि तू मुझको भज तू मुझको भज तो

229
00:16:49,120 --> 00:16:53,240
इन्होंने वहां पर कई श्लोकों में जैसे कि नौवे अध्याय अध्याय

230
00:16:53,240 --> 00:16:57,480
का जो 33 वा श्लोक है उसमें भगवान कह रहे हैं कि तू मुझको भज तो इन्होंने

231
00:16:57,480 --> 00:17:01,520
वहां पर मुझको भजने की बज उस कर दिया है उस परमेश्वर को बज ऐसे

232
00:17:01,520 --> 00:17:05,560
कई जगह इन्होने किया है सबसे पहली बात यहां पर यह आती है कि जब उस

233
00:17:05,560 --> 00:17:09,680
आ जाता है उस तो माम की सं

234
00:17:09,680 --> 00:17:13,960
मतलब मुझ मुझे भज मुझे भज की संस्कृत तो वहां पर दिख रही है

235
00:17:13,960 --> 00:17:18,080
माम ठीक है मगर उस की संस्कृत वहां पर उन श्लोकों में

236
00:17:18,080 --> 00:17:22,200
नहीं है जहां पर इन्होने उस उस कर दिया उस उस उस ये उस नहीं है वहा

237
00:17:22,200 --> 00:17:26,520
पर संस्कृत में तो ऐसा इन्होने बहुत बार किया है

238
00:17:26,520 --> 00:17:29,680
अब आ जाते हैं

239
00:17:29,680 --> 00:17:33,760
यह लोग काल को भगवान भी कहते हैं तो यह सबसे बड़ी एक दिक्कत वाली

240
00:17:33,760 --> 00:17:36,920
बात है कि भाई आप इतना बड़ा झूठ

241
00:17:36,920 --> 00:17:40,960
क्यों बोलते हैं और मैं जानता हूं क्यों बोलते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भी

242
00:17:40,960 --> 00:17:45,360
भगवान है काल ब्रह्म भी भगवान है

243
00:17:45,360 --> 00:17:49,400
और फिर कहते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब या

244
00:17:49,400 --> 00:17:53,640
तो ये तय कर ले कि काल भगवान नहीं

245
00:17:53,640 --> 00:17:57,720
है और तब कहे वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है मगर

246
00:17:57,720 --> 00:18:01,760
खुद ही कहते हैं कहीं कहीं काल जो है भगवान जैसे इन्होंने अपनी गीता में कई

247
00:18:01,760 --> 00:18:05,800
जगह काल को भगवान कहा है गरिमा गीता की तो आज हम इनका

248
00:18:05,800 --> 00:18:10,160
य दोहरा चरित्र बाहर लाएंगे यह जो दोहरी

249
00:18:10,160 --> 00:18:14,280
बातें बोलते हैं और इन्हीं के ज्ञान से इन्हीं का ज्ञान कटेगा यह

250
00:18:14,280 --> 00:18:18,320
लोग बहुत कहते हैं ना भगवत गीता के ज्ञान से भगवत गीता का ज्ञान कटेगा तो आज

251
00:18:18,320 --> 00:18:22,800
इन्हीं के ज्ञान से इन्हीं का ही ज्ञान कटेगा तो क्या है

252
00:18:22,800 --> 00:18:26,960
सबसे पहले हम यह देखते हैं कि इन्होंने काल

253
00:18:26,960 --> 00:18:31,520
को भगवान क्यों कहा और यदि काल भगवान है तो इन्होंने झूठ लिखा है

254
00:18:31,520 --> 00:18:35,880
तत्व दर्शी संत नहीं है ये क्यों नहीं है मैं बताता

255
00:18:35,880 --> 00:18:40,080
हूं तो सबसे पहली बात है कि भगवान

256
00:18:40,080 --> 00:18:44,400
कहते किसे हैं यह परिभाषा हमें मिलती है विष्णु

257
00:18:44,400 --> 00:18:47,480
[संगीत]

258
00:18:47,480 --> 00:18:52,160
पुराण विष्णु पुराण यह वही वाला विष्णु पुराण

259
00:18:52,160 --> 00:18:56,160
है जो इन्होंने अपने कई वीडियोस में

260
00:18:56,160 --> 00:19:00,080
उद्र किया है

261
00:19:00,080 --> 00:19:04,320
तो विष्णु पुराण में खोल रहा

262
00:19:04,320 --> 00:19:08,360
हूं छठवां अंश पांचवां

263
00:19:08,360 --> 00:19:12,400
अध्याय तो इसमें भगवान की जो व्याख्या

264
00:19:12,400 --> 00:19:16,040
है सीधे-सीधे

265
00:19:16,040 --> 00:19:20,200
भगवान शब्द भगवत शब्द की व्याख्या भी है और भगवान

266
00:19:20,200 --> 00:19:25,120
शब्द की व्याख्या भी है तो भगवान शब्द की क्या व्याख्या है

267
00:19:25,120 --> 00:19:29,120
संपूर्ण ऐश्वर्य संपूर्ण ध्यान रखिएगा

268
00:19:29,120 --> 00:19:33,200
संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म

269
00:19:33,200 --> 00:19:38,000
यश श्री ज्ञान और वैराग्य

270
00:19:38,000 --> 00:19:43,200
इन छह का नाम भग है भग ठीक

271
00:19:43,200 --> 00:19:45,960
है

272
00:19:45,960 --> 00:19:50,000
और जो व इसमें जो भगवान में व अक्षर जो

273
00:19:50,000 --> 00:19:54,120
आ रहा है व उसका क्या अर्थ है उस

274
00:19:54,120 --> 00:19:58,360
अखिल भूत गण उस अखिल भूतात्मा में समस्त भूत

275
00:19:58,360 --> 00:20:02,560
गण निवास करते हैं और स्वयं भी समस्त भूतों में विराजमान

276
00:20:02,560 --> 00:20:06,960
है इसलिए वह अव्यय परमात्मा ही वकार

277
00:20:06,960 --> 00:20:11,320
का अर्थ है यानी कि जो वो अव्यय परमात्मा है

278
00:20:11,320 --> 00:20:15,320
वह जो व आया है उसका अर्थ है अव्यय परमात्मा भग

279
00:20:15,320 --> 00:20:17,600
का मतलब

280
00:20:17,600 --> 00:20:21,880
अ संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म यश श्री ज्ञान

281
00:20:21,880 --> 00:20:26,320
और वैराग्य और इस प्रकार

282
00:20:26,320 --> 00:20:30,480
यह महान भगवान शब्द परम ब्रह्म

283
00:20:30,480 --> 00:20:34,640
स्वरूप श्री वासुदेव का ही वाचक है तो पहली बात तो जिसको

284
00:20:34,640 --> 00:20:38,680
हम भगवान कह रहे हैं वोह मुख्य रूप से वह

285
00:20:38,680 --> 00:20:42,960
उसका अगर सही उपयोग है तो वह परम ब्रह्म के लिए ही है यह विष्णु

286
00:20:42,960 --> 00:20:45,400
पुराण में आ

287
00:20:45,400 --> 00:20:49,400
गया इसको आप देख लीजिए इन्होंने क्याक बताया क्याक होना चाहिए फिर हम

288
00:20:49,400 --> 00:20:53,080
आगे

289
00:20:53,080 --> 00:20:59,080
बढ़ेंगे उंगली रख देता हूं यह संपूर्ण ऐश्वर्य से पढ़िए

290
00:20:59,960 --> 00:21:04,480
दिख रहा संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म यश

291
00:21:04,480 --> 00:21:09,240
श्री वैराग्य तो अब इनका दोगलापन

292
00:21:09,240 --> 00:21:13,320
देखेंगे कि इन्होंने काल

293
00:21:13,320 --> 00:21:17,400
को भगवान क्यों कहा तो पहली बात तो यह है कि

294
00:21:17,400 --> 00:21:21,560
जब हम भगवान कह रहे हैं काल को तो यह गुण उसमें

295
00:21:21,560 --> 00:21:26,160
होने चाहिए तभी तो तत्वदर्शी संत की वाणी जो है सत्य

296
00:21:26,160 --> 00:21:30,200
सिद्ध होगी कि वो अगर काल को भगवान कह रहे हैं ब्रह्म को भगवान

297
00:21:30,200 --> 00:21:34,200
कह रहे हैं तो भ क्या उन्होंने ब्रह्म में वो सारे

298
00:21:34,200 --> 00:21:40,200
गुण माने जिसके कारण किसी को भगवान कहा जाता है तो सबसे पहली बात है

299
00:21:40,480 --> 00:21:44,960
क्या धर्म क्या जो इनके

300
00:21:44,960 --> 00:21:49,400
ये रामपाल के अनुसार ही क्या जो काल है वह धर्म की स्थापना

301
00:21:49,400 --> 00:21:54,080
करता है अब धर्म क्या होता है सत्य बोलना

302
00:21:54,080 --> 00:21:59,120
और बुलवाना है ना ज्ञान

303
00:21:59,120 --> 00:22:03,560
के अनुसार आचरण करना और करवाना यह सब सत्य है

304
00:22:03,560 --> 00:22:07,240
और क्या

305
00:22:07,240 --> 00:22:09,680
है

306
00:22:09,680 --> 00:22:13,880
जो मतलब कुल मिलाकर के जितनी भी अच्छी अच्छी चीजें हैं अहिंसा

307
00:22:13,880 --> 00:22:18,160
अलो दया क्षमा है ना वह सब धर्म है

308
00:22:18,160 --> 00:22:22,280
तो अब देखते हैं कि उन्होंने क्या कहा है काल के बारे में जगह जगह पर

309
00:22:22,280 --> 00:22:27,520
तो भाई इनकी गीता का पेज नंबर आप निकालिए

310
00:22:27,520 --> 00:22:33,520
चवा पेज नंबर 14 गरिमा गीता की जीजी

311
00:22:42,080 --> 00:22:46,680
के हां इसको बड़ा

312
00:22:46,680 --> 00:22:50,720
करिए यह इनका देखिए दोगलापन क्या है कि यह कहते हैं कि

313
00:22:50,720 --> 00:22:54,800
हम सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं उसकी रक्षा कर रहे हैं अब

314
00:22:54,800 --> 00:22:59,040
सबसे पहले सनातन धर्म को बांच वाले जो लोग उनके

315
00:22:59,040 --> 00:23:03,080
बारे में इनके क्या विचार है उनको य भगवान तो कहते हैं मगर भगवान

316
00:23:03,080 --> 00:23:09,080
होते हुए भी इसमें आप अगर और बड़ा हो सकता है

317
00:23:10,000 --> 00:23:14,120
क्याय मोबाइल पला

318
00:23:14,120 --> 00:23:19,320
तो इसमें यह साफसाफ लिखा है कि गीता का जो

319
00:23:19,320 --> 00:23:23,520
ज्ञान वेदों और इन्होंने कह दिया यहां

320
00:23:23,520 --> 00:23:28,720
पर सूक्ष्म वेद ये अपने मन से है इस पर भी आगे विश्लेषण है अच्छा खासा

321
00:23:28,720 --> 00:23:31,880
वेदों के जो विरुद्ध है सच्चिदानंद गन ब्रह्म

322
00:23:31,880 --> 00:23:35,960
अर्थात सत्य पुरुष ने अपने मुख कमल से तत्व ज्ञान बोला

323
00:23:35,960 --> 00:23:37,720
है उससे मेल नहीं करता

324
00:23:37,720 --> 00:23:41,960
यह ध्यान दीजिएगा वे जो गीता का जो ज्ञान वेदों

325
00:23:41,960 --> 00:23:46,720
से मेल नहीं खाएगा वह ज्ञान व्यर्थ है

326
00:23:46,720 --> 00:23:51,160
और वह ज्ञान जो है यहां पर इन्होंने लिखा है वह ज्ञान इन्होंने अपने

327
00:23:51,160 --> 00:23:55,880
मन से दे दिया है इसका 132 पेज नंबर भी

328
00:23:55,880 --> 00:24:01,880
निकालिए 132

329
00:24:05,280 --> 00:24:09,520
132 तो इनकी दोहरी बातें क्या है कि एक तरफ

330
00:24:09,520 --> 00:24:13,560
यह कह रहे हैं भगवत गीता में काल कह रल इनके अनुसार जो इनका

331
00:24:13,560 --> 00:24:18,120
काल है वह यह कह रहा है कि मैं धर्म की संस्थापन करता हूं स्थापना करता हूं

332
00:24:18,120 --> 00:24:22,360
यदा यदा धर्म भवती भारता तो उसमें इन्होंने

333
00:24:22,360 --> 00:24:26,480
भी मान लिया दो लाइन लिख दी कि वो धर्म की स्थापना करता है मगर क्या वो

334
00:24:26,480 --> 00:24:31,360
वास्तविकता में इनके अनुसार धर्म की स्थापना इन्होंने मानी है काल द्वारा

335
00:24:31,360 --> 00:24:35,400
तो सबसे पहली बात है कि वह भटका रहा है वोह

336
00:24:35,400 --> 00:24:40,400
अपने मत का ज्ञान दे रहा है 132 आ

337
00:24:40,400 --> 00:24:42,600
गया

338
00:24:42,600 --> 00:24:46,720
हम इसमें क्या है युद्ध नहीं करूंगा इसमें आखिर में देखिए यहां

339
00:24:46,720 --> 00:24:50,280
पर

340
00:24:50,280 --> 00:24:54,680
वो यहां पर वह जो है ये देखिए यहां पे इन्होंने भगवान

341
00:24:54,680 --> 00:24:59,240
शब्द का उपयोग भी किया है काल के लिए जो आप लोग ये कहे कि कहां किया है

342
00:24:59,240 --> 00:25:03,320
तो भगवान जो है यह भगवान भी कहते हैं काल को

343
00:25:03,320 --> 00:25:07,480
और उसके बाद उस भगवान की धज्जियां भी उड़ाते हैं कहां कहा उड़ाते

344
00:25:07,480 --> 00:25:11,720
हैं व मैं आपको बता रहा

345
00:25:11,720 --> 00:25:16,360
हूं इसमें थोड़ा और नीचे जाए विरोधाभास

346
00:25:16,360 --> 00:25:20,560
यह 10 से 15 में और नीचे जाइए

347
00:25:20,560 --> 00:25:24,760
हां बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस इस

348
00:25:24,760 --> 00:25:29,880
अध्याय यह जो इन्होंने लिखा है गीता छ श्लोक 10 से 15 में इसके

349
00:25:29,880 --> 00:25:34,000
विपरीत अपना मत काल जाल में रखने का विधान बताया है अब

350
00:25:34,000 --> 00:25:38,000
देखिए काल जाल में रखने का विधान यह धर्म नहीं है ना

351
00:25:38,000 --> 00:25:42,000
मगर बताया काल ने तो इसका मतलब काल में धर्म नहीं है वोह

352
00:25:42,000 --> 00:25:46,160
लोगों को भटका रहा है कहा है कि साधक यानी

353
00:25:46,160 --> 00:25:50,400
योगी अपने मन इंद्रियों सहित शरीर को वश में रखना रखने वाला आशा

354
00:25:50,400 --> 00:25:54,640
रहित तंग रहित अकेला ही एकांत स्थान में और ये वो इस तरीके से आगे

355
00:25:54,640 --> 00:25:59,400
चला आसन बहुत ऊंचा हो उस पर बैठकर इंद्रियों को

356
00:25:59,400 --> 00:26:03,560
अच्छा शुद्धि के लिए हो बस कर फिर श्लोक 131 तक स्पष्ट किया है कि

357
00:26:03,560 --> 00:26:05,680
ऐसे ऐसे कर उससे मुझ में रहने

358
00:26:05,680 --> 00:26:09,920
वाली शांति को प्राप्त होता है देखिए यहां पर झूठ है इनके अनुसार

359
00:26:09,920 --> 00:26:13,920
यहां पर काल झूठ बोल रहा है क्यों क्योंकि काल कह रहा है कि अगर वो ऐसे

360
00:26:13,920 --> 00:26:18,280
चलेंगे लोग इसके कहे अनुसार तो उनको शांति प्राप्त होगी

361
00:26:18,280 --> 00:26:22,360
मगर वास्तविकता में इन्होंने क्या लिखा है बाद में यानी मुझ काल के जाल

362
00:26:22,360 --> 00:26:26,400
में फसा रहेगा यानी काल यहां झूठ बोल रहा है इनके अनुसार

363
00:26:26,400 --> 00:26:30,920
काल यहां पर सत्य नहीं बोल रहा है वो वास्तविकता में यहां पर

364
00:26:30,920 --> 00:26:34,960
जो व्यक्ति उसके अनुसार चलेगा वह उसके जाल में फस जाएगा तो

365
00:26:34,960 --> 00:26:39,360
इसका मतलब काल जो है काल के अंदर धर्म नहीं है यानी भगवान

366
00:26:39,360 --> 00:26:43,760
में जो हमने छह गुण देखे थे ऐश्वर्य वान ऐश्वर्य

367
00:26:43,760 --> 00:26:47,760
वान तो वही नहीं पूर्ण ऐश्वर्य वान तो कौन है कबीर संपूर्ण ऐश्वर्य वान

368
00:26:47,760 --> 00:26:52,440
कबीर है काल नहीं है और उसके बाद

369
00:26:52,440 --> 00:26:56,680
अब इन्होंने जब यह कह दिया कि तुम मुझको शांति को प्राप्त होगे मुझ में रहने

370
00:26:56,680 --> 00:27:00,760
वाली शांति तुम्हें मिल जाएगी वह शांति शांति नहीं है

371
00:27:00,760 --> 00:27:04,840
वास्तविकता में वह तो अशांति है क्योंकि वह

372
00:27:04,840 --> 00:27:09,640
काल का जाल है तो यहां पर काल ने झूठ बोल दिया

373
00:27:09,640 --> 00:27:13,800
इसके बाद आपको सभी को पता है कि इन्होंने सृष्टि रचना

374
00:27:13,800 --> 00:27:18,080
के समय काल के बारे में क्या लिखा है कि वह दुर्गा

375
00:27:18,080 --> 00:27:20,800
माता के साथ अब उनकी कोई अलग दुर्गा हमारी

376
00:27:20,800 --> 00:27:25,160
व दुर्गा माता नहीं है हम कभी नहीं कहेंगे मगर इसने वहां पर मर्यादा

377
00:27:25,160 --> 00:27:29,200
को लांगाह ंगने वाला धर्म कहां

378
00:27:29,200 --> 00:27:33,200
से हो गया और जब धर्म नहीं है तो भगवान कहां से हो गया क्योंकि भगवान का

379
00:27:33,200 --> 00:27:37,240
पहला लक्षण हमने विष्णु पुराण में पढ़ा कि धर्म

380
00:27:37,240 --> 00:27:41,240
होना चाहिए ऐश्वर्य होना चाहिए फिर धर्म होना चाहिए अभी हटाइए

381
00:27:41,240 --> 00:27:47,120
नहीं अभी हटाइए नहीं

382
00:27:47,120 --> 00:27:51,440
अच्छा श्रीमद् भागवत में पहले स्कंद के दूसरे अध्याय के नौवे

383
00:27:51,440 --> 00:27:56,280
श्लोक में लिखा हुआ है कि भक्ति का जो

384
00:27:56,280 --> 00:28:00,360
जो धर्म का लय है मतलब धर्म का जो वास्तविक प्रतिपाद्य विषय है वोह

385
00:28:00,360 --> 00:28:04,440
क्या है वो है मोक्ष तो

386
00:28:04,440 --> 00:28:08,720
काल का जो वास्तविक प्रतिपाद्य विषय व मोक्ष नहीं है वह क्या

387
00:28:08,720 --> 00:28:13,040
है अपनी जो जाल है उसमें फसा करके रखना

388
00:28:13,040 --> 00:28:17,240
तो काल जो है काल के अंदर किसी भी प्रकार से एन

389
00:28:17,240 --> 00:28:21,240
केन प्रकार आप देख लीजिए व भटका रहा है वो झूठ बोल रहा है वह मोक्ष

390
00:28:21,240 --> 00:28:25,240
देने वाली बातें नहीं कर रहा है वो शांति बोल कर के अपनी अशांति

391
00:28:25,240 --> 00:28:29,520
दे रहा है सामने वाले को तो क्या है ये उसके अंदर धर्म

392
00:28:29,520 --> 00:28:33,680
नहीं है एक आज बहुत एक कंक्लूजन लाइन मैं आपको बताऊंगा

393
00:28:33,680 --> 00:28:36,160
वीडियो के एंड में सूत्रा क्मक शैली आपको याद रहेगी

394
00:28:36,160 --> 00:28:40,360
हमेशा और उसको सुनना आप लोग ध्यान से

395
00:28:40,360 --> 00:28:44,520
तो श्रीमद् भागवत के अनुसार जो धर्म का लय है जो भी

396
00:28:44,520 --> 00:28:48,520
जिस भी ज्ञान को हम धर्म का ज्ञान मानते उसका जो परवन है वह मोक्ष में

397
00:28:48,520 --> 00:28:52,600
होना चाहिए अगर मोक्ष में नहीं हो रहा है उसका परवन तो वह धर्म नहीं है धर्म

398
00:28:52,600 --> 00:28:56,880
के बाहर की चीज है तो काल जो भी बता रहा है वो बता रहा है जिससे

399
00:28:56,880 --> 00:29:00,920
कि मोक्ष प्राप्त नहीं होगा इसको भी हम सिद्ध कर लेंगे

400
00:29:00,920 --> 00:29:05,080
तो इसके अलावा दया क्षमा सत्य अहिंसा यह सब धर्म

401
00:29:05,080 --> 00:29:09,560
है यह कहां लिखा है महाभारत अनुशासन पर्व 162 वा अध्याय

402
00:29:09,560 --> 00:29:14,480
23 वा श्लोक फिर महाभारत शांति पर्व 100

403
00:29:14,480 --> 00:29:18,720
62 वा अध्याय और 21वां श्लोक फिर मत्स पुराण

404
00:29:18,720 --> 00:29:23,000
143 वा अध्याय 31 32 श्लोक इन सब के अनुसार

405
00:29:23,000 --> 00:29:27,280
अलो काल को लोभ है जीवों को खाने का अपने जाल में फसाने

406
00:29:27,280 --> 00:29:31,400
का धर्म क्या है अलो जहा लोभ ना हो

407
00:29:31,400 --> 00:29:35,440
मनवाणी और क्रिया द्वारा किसी भी प्राणियों के द्रोह नहीं करना मगर यह दिन

408
00:29:35,440 --> 00:29:39,480
भर क्या करता है जो काल है इनका प्राणियों के खाने का इंतजाम करता है कैसे

409
00:29:39,480 --> 00:29:43,520
प्राणी हमारे चंगुल में फसे यह सारी बातें वह करता है तो

410
00:29:43,520 --> 00:29:47,720
इसका मतलब क्या हुआ कि काल को भगवान कहना बिल्कुल

411
00:29:47,720 --> 00:29:51,560
भी तत्वदर्शी तत्त बात

412
00:29:51,560 --> 00:29:55,680
सच नहीं है तो क्या

413
00:29:55,680 --> 00:29:59,880
हुआ इसका अर्थ क्या हुआ कि तत्वदर्शी से गलती हो गई यहां पर भगवान

414
00:29:59,880 --> 00:30:05,800
जो कह दिया काल को ठीक है

415
00:30:05,800 --> 00:30:10,120
अच्छा हां उसने प्रतिज्ञा की है ये ये ये चैप्टर हम लोग लाएंगे

416
00:30:10,120 --> 00:30:14,560
बाद में लाएंगे एक अगला एक अगला सेशन और बनाएंगे कि काल निराकार

417
00:30:14,560 --> 00:30:18,680
है या साकार है इस पर अलग से बात होगी अभी हम केवल

418
00:30:18,680 --> 00:30:22,720
ये बता रहे हैं कि काल को भगवान कहना उचित है कि दोगलापन है अभी ये कहते क्यों है

419
00:30:22,720 --> 00:30:26,840
काल को क्योंकि ये काल से ब्रह्मा विष्णु महेश को जोड़ते हैं क्योंकि ये दुर्गा

420
00:30:26,840 --> 00:30:30,880
माता को जोड़ते हैं काल से तो इसलिए काल को भी भगवान कहते रहे भले ही उसके

421
00:30:30,880 --> 00:30:35,120
बारे में खुद ही बोलेंगे कि वो घटिया है अभी देखिए

422
00:30:35,120 --> 00:30:37,320
क्या

423
00:30:37,320 --> 00:30:41,400
है अब इन्होंने पेज नंबर 95 पर यह भी कह दिया है

424
00:30:41,400 --> 00:30:45,520
कि काल को तत्व से जानना पूर्ण ज्ञान है तो ये

425
00:30:45,520 --> 00:30:49,840
बात के लिए रखेंगे काल को तत्व से जानना ही पूर्ण ज्ञान है

426
00:30:49,840 --> 00:30:54,000
म काल को जो तत्व से जान गया वो तत्वदर्शी है

427
00:30:54,000 --> 00:30:58,240
इसका मतलब इनके अनुसार जो यह बोला जाता है

428
00:30:58,240 --> 00:31:02,240
कि परमात्मा को तत्व से जानना पूर्ण ज्ञानी है

429
00:31:02,240 --> 00:31:06,800
तो वो जो है यह गलत हो रहा है तो इसका मतलब रामपाल

430
00:31:06,800 --> 00:31:10,880
जी को किसी काल नामक एंटिटी ने बुलवाया है गलत

431
00:31:10,880 --> 00:31:15,360
छप गया इनकी गरमा गीता की में अच्छा

432
00:31:15,360 --> 00:31:20,440
अब बात आती ज्ञान की कि क्या काल जो

433
00:31:20,440 --> 00:31:25,200
है यश की बात आती यश

434
00:31:25,200 --> 00:31:30,080
तो जो गीता ज्ञान दाता

435
00:31:30,080 --> 00:31:34,280
कि घिनौनी वास्तविकता को जानकर उसकी भक्ति

436
00:31:34,280 --> 00:31:39,120
ना करके रामपाल की भक्ति करते हैं वही मोक्ष को प्राप्त करते

437
00:31:39,120 --> 00:31:43,240
हैं यह वाली बात हम बाद में लेंगे मगर अभी बात करते हैं जो दूसरी चीज हमने

438
00:31:43,240 --> 00:31:47,320
पढ़ी ऐश्वर्य वान नहीं है काल धर्म नहीं है काल के पास अब

439
00:31:47,320 --> 00:31:51,640
बात आती है श्री यानी लक्ष्मी तो पेज नंबर 10 निकालिए

440
00:31:51,640 --> 00:31:56,960
इनकी गरमा गीता की का पेज नंबर 10

441
00:31:56,960 --> 00:32:01,440
आज हम देखिए के दोगले पन को इतना क्रिस्टल क्लियर

442
00:32:01,440 --> 00:32:05,920
करेंगे कि दोगलापन भी घबरा जाएगा कि भाई वो

443
00:32:05,920 --> 00:32:10,000
वो शर्म से जाकर के वो छुप जाएगा कहीं पर इतना ज्यादा

444
00:32:10,000 --> 00:32:14,560
अंत तक आते आते आपको जो है पता चलेगा तो भाई देखिए खोलिए

445
00:32:14,560 --> 00:32:17,880
इनका जो है पेज नंबर

446
00:32:17,880 --> 00:32:22,000
10 जो दूसरा भगवान का जो तीसरा गुण है

447
00:32:22,000 --> 00:32:26,080
वो है श्री ठीक है और हम सभी

448
00:32:26,080 --> 00:32:30,200
लोग जानते हैं श्री का अर्थ है लक्ष्मी और पेज नंबर

449
00:32:30,200 --> 00:32:33,920
10 पर उन्होंने यह कहा

450
00:32:33,920 --> 00:32:37,920
है कि जब तक वह विष्णु रूप में

451
00:32:37,920 --> 00:32:42,240
रहता रहता है काल तब तक तो वह लक्ष्मी

452
00:32:42,240 --> 00:32:46,320
के साथ रहता है मगर जब वह लक्ष्मी से अलग हो

453
00:32:46,320 --> 00:32:51,000
जाता है यह देखिए उसका परम रूप काल

454
00:32:51,000 --> 00:32:55,080
है ऊपर से थोड़ा लाइए ऊपर से अंडरलाइन करिए भगवान

455
00:32:55,080 --> 00:32:59,400
विष्णु हां जो काल है है वो भगवान विष्णु

456
00:32:59,400 --> 00:33:03,600
महाविष्णु के रूप में काल रहता है काल का प्रथम रूप है प्रभु

457
00:33:03,600 --> 00:33:08,280
जैसा परंतु उसका परम रूप काल है जब भगवान विष्णु

458
00:33:08,280 --> 00:33:12,400
काल जो महाविष्णु के रूप में ब्रह्मलोक में रहता है तथा प्रकृति अर्थात

459
00:33:12,400 --> 00:33:16,960
दुर्गा को अपनी पत्नी महालक्ष्मी के रूप में रखता है अपनी प्रकृति

460
00:33:16,960 --> 00:33:20,960
दुर्गा से अलग हो जाता है जब काल दुर्गा दुर्गा

461
00:33:20,960 --> 00:33:25,120
कौन है जो महालक्ष्मी के रूप में उनके साथ विष्णु रूप में रह रही है तो

462
00:33:25,120 --> 00:33:29,200
दुर्गा से जब वो अलग हो जाता है तब काल के रूप में प्रकट होता है यानी कि जब वो काल

463
00:33:29,200 --> 00:33:33,360
बना तो वो दुर्गा से यानी वो लक्ष्मी से अलग है ठीक

464
00:33:33,360 --> 00:33:37,080
है जब वो काल बना तो लक्ष्मी से अलग है तो

465
00:33:37,080 --> 00:33:41,120
यानी कि उसके पास श्री भी नहीं है श्री लक्ष्मी जी

466
00:33:41,120 --> 00:33:45,160
का दूसरा नाम है श्री यह भी शास्त्रों में है ठीक है

467
00:33:45,160 --> 00:33:49,320
तो काल के पास ना तो संपूर्ण ऐश्वर्य है ना ही उसके

468
00:33:49,320 --> 00:33:53,640
पास धर्म है ना ही उसके पास श्री है है

469
00:33:53,640 --> 00:33:58,440
ना अब आगे क्या है और क्या है उसके पास

470
00:33:58,440 --> 00:34:02,520
अब बात होती है यस की तो हम सभी

471
00:34:02,520 --> 00:34:06,680
जानते हैं कई जगह उन्होंने कहा है वो ला

472
00:34:06,680 --> 00:34:11,560
दीजिए सा 24 सा 24 ला दीजिए

473
00:34:11,560 --> 00:34:17,560
भगवत गीता का सा 24 मैंने पेज नंबर इसका नोट नहीं कर पाया हूं इसमें देखना

474
00:34:18,520 --> 00:34:22,800
पड़ेगा भगवत गीता का सा 24 उसमें

475
00:34:22,800 --> 00:34:26,880
इन्होंने काल को घटिया कहा है यह मेरा घटिया भाव

476
00:34:26,880 --> 00:34:31,320
है मेरे घटिया नियम है अविनाशी घटिया नियम है

477
00:34:31,320 --> 00:34:37,320
वो सब हम बाद में बात करेंगे अविनाशी और यह साकार निराकार वाली बातें

478
00:34:37,440 --> 00:34:41,440
मगर यस की जब बात करते हैं तो इसका मतलब पेज नंबर हमें नहीं

479
00:34:41,440 --> 00:34:45,760
मालूम है आपको देखना पड़ेगा सातवा अध्याय निकालना है र

480
00:34:45,760 --> 00:34:50,560
काल को इन्होंने अपनी जो गीता गर्मा की है उसमें जीजी के में

481
00:34:50,560 --> 00:34:54,760
उसमें इन्होंने काल को घटिया स्वीकार किया है तो अगर उसका जो यश

482
00:34:54,760 --> 00:34:59,360
फैल भी रहा है तो घटिया पन का यश है उसको यश नहीं कहते उसको अपकीर्ति

483
00:34:59,360 --> 00:35:03,400
कहते हैं या फिर उसको जो है कुख्यात कहते हैं वह

484
00:35:03,400 --> 00:35:07,760
कभी भी विख्यात में नहीं आता है तो यश नहीं है वो

485
00:35:07,760 --> 00:35:11,760
घटिया भाव वाला अनुत्तम भाव वाला यह सब इनकी

486
00:35:11,760 --> 00:35:15,760
जीजी के में लिखा हुआ है यानी कि ना उसके पास संपूर्ण ऐश्वर्य

487
00:35:15,760 --> 00:35:20,560
है ना उसके पास लक्ष्मी है ना उसके पास

488
00:35:20,560 --> 00:35:24,560
यश है ना उसके पास यश में

489
00:35:24,560 --> 00:35:28,640
क्या क्यों क्यों यश नहीं है तो व घटिया है उसका भाव टिया है

490
00:35:28,640 --> 00:35:32,760
वो बलात्कारी है वह अज्ञानी है

491
00:35:32,760 --> 00:35:33,600
अज्ञानी कहां

492
00:35:33,600 --> 00:35:37,920
पर कहा है वो भी पढ़ लीजिए

493
00:35:37,920 --> 00:35:41,960
39 नंबर पेज निकालिए इनका हाय ये आ गया सातवा अध्याय हा इसमें 24 वा

494
00:35:41,960 --> 00:35:46,400
निकालिए 24 में श्लोक की व्याख्या कहां हो रही है हालांकि इन्होंने घटिया और

495
00:35:46,400 --> 00:35:50,440
अनुत्तम यह सब गंदी गंदी बातें काल के लिए बहुत कई

496
00:35:50,440 --> 00:35:54,880
है इनका काल हमारा काल नहीं जो इन्होंने तथाकथित काल्पनिक काल

497
00:35:54,880 --> 00:35:59,520
डेवलप किया है और डेवलप करने के के बाद भी

498
00:35:59,520 --> 00:36:03,880
वह जो है क्या कहता है कि वह भगवान

499
00:36:03,880 --> 00:36:08,280
है है ना तो देवी दुर्गा के पति

500
00:36:08,280 --> 00:36:14,040
ब्रह्मा विष्णु महेश साथ अब और आगे और आगे और

501
00:36:14,040 --> 00:36:18,040
आगे हां पी प ऊपर जा ऊपर जा ऊपर चलिए ऊपर चलिए

502
00:36:18,040 --> 00:36:24,040
कुछ निकला था अभी घटिया शब्द देखा था और थोड़ा और

503
00:36:26,560 --> 00:36:30,680
थोड़ा नहीं नहीं वो बिल्कुल निचला पहला पैराग्राफ

504
00:36:30,680 --> 00:36:35,200
था ऊपर जाइए ऊपर हां हां

505
00:36:35,200 --> 00:36:39,880
देखिए मेरा ये इन्होंने काल

506
00:36:39,880 --> 00:36:44,600
ने इनके अनुसार 24 से 25 में स्पष्ट किया है कि मेरा

507
00:36:44,600 --> 00:36:48,680
अविनाशी अनुत्तम विधान है अनुत्तम और

508
00:36:48,680 --> 00:36:53,480
इसको य घटिया कहते हैं बार-बार ऊपर जाइए थोड़ा भैया ऊपर

509
00:36:53,480 --> 00:36:57,840
जाइए और ऊपर पिछला पेज पेज प आ जाइए पिछले

510
00:36:57,840 --> 00:37:01,920
धीरे धीरे हां ये ये ये गीता ज्ञान देने वाले ने अपनी

511
00:37:01,920 --> 00:37:06,040
भक्ति से होने वाली गति को अनुत्तम यानी घटिया

512
00:37:06,040 --> 00:37:10,280
अपने भाव को घटिया कहा है प्राप्त होने वाली गति को घटिया

513
00:37:10,280 --> 00:37:14,440
कहा है तोय कैसा कैसा भगवान है

514
00:37:14,440 --> 00:37:18,480
जो आप भगवान कह रहे हो काल को ना तो उसके पास ऐश्वर्य है

515
00:37:18,480 --> 00:37:22,560
ना उसके पास श्री है ना यश है बलात्कारी है धर्म भी नहीं

516
00:37:22,560 --> 00:37:27,800
है सत्य नहीं है है ना लालच है उसके अंदर और

517
00:37:27,800 --> 00:37:32,120
और जीवों के लिए द्वेष है उसके अंदर तो फिर आप उसको

518
00:37:32,120 --> 00:37:36,320
कैसे कह रहे हो कि वोह भगवान है लोगों को भ्रमित

519
00:37:36,320 --> 00:37:40,400
करने के लिए क्योंकि अगर आप शुरू में यह कह दोगे कि हम उसे गीता के

520
00:37:40,400 --> 00:37:41,760
ज्ञान को देने वाले को भगवान

521
00:37:41,760 --> 00:37:45,960
नहीं मानते तो आपके पास कोई फटके का नहीं ठीक

522
00:37:45,960 --> 00:37:49,960
है तो गीता ज्ञान दाता जो है अज्ञानी भी है तो उसके पास ज्ञान

523
00:37:49,960 --> 00:37:54,760
भी नहीं है है क्या बचा

524
00:37:54,760 --> 00:37:58,920
क्या क्यों नहीं है उसके पास ज्ञान पहली बात तो इन्होने 39 नंबर

525
00:37:58,920 --> 00:38:03,920
पेज निकालो

526
00:38:03,920 --> 00:38:08,240
भैया आप देखिए सनातन के नाम पर यह लोग क्या

527
00:38:08,240 --> 00:38:12,400
क्या कर रहे हैं अंत तक होते होते आपके आंसू आ जाएंगे मैंने

528
00:38:12,400 --> 00:38:16,560
खून का घूंट पी पी करके आज जो इनकी पड़ी है और यह सरसरी

529
00:38:16,560 --> 00:38:22,080
निगाहों से है यह सरसरी निगाहों से

530
00:38:22,080 --> 00:38:26,280
है तो ये जो ये इसमें साफ

531
00:38:26,280 --> 00:38:32,280
कह रहे हैं क्या कह रहे हैं

532
00:38:34,160 --> 00:38:38,400
भाई इसमें इन्होंने यहां कहीं कहा है कि जो वेदों

533
00:38:38,400 --> 00:38:42,680
को बोलने वाला है काल वह अज्ञानी है

534
00:38:42,680 --> 00:38:47,360
और नीचे आइए एक मिनट एक

535
00:38:47,360 --> 00:38:52,360
मिनट उस परमात्मा पूर्ण य

536
00:38:52,360 --> 00:38:56,440
ये यह 39 नंबर वाला पेज ही है ना कि और कोई

537
00:38:56,440 --> 00:39:00,520
है हां 39 निमित उपरोक्त गीता अध्याय य

538
00:39:00,520 --> 00:39:05,320
है यह है विधान यज्ञ आदि करने भक्ति का विधान बताया

539
00:39:05,320 --> 00:39:09,560
है ब्रह्म कहा परम अक्षर ब्रह्म कहा है परम भक्ति करो हा

540
00:39:09,560 --> 00:39:12,880
नीचे आइए और और नीचे आइए

541
00:39:12,880 --> 00:39:16,880
पवित्र वेदों को बोलने वाले ब्रह्म ने कहा कि पूर्ण परमात्मा के विषय

542
00:39:16,880 --> 00:39:21,240
में कोई तो कहता है कि व अवतार रूप में उत्पन्न होता है और अंतत

543
00:39:21,240 --> 00:39:25,360
गत्वा उस पूर्ण परमात्मा का तत्व ज्ञान तो तत्वदर्शी के पास

544
00:39:25,360 --> 00:39:29,440
है वास्तव में कि पूर्ण परमात्मा का

545
00:39:29,440 --> 00:39:33,640
शरीर कैसे हुआ एक मिनट एक मिनट यहीं पर वह

546
00:39:33,640 --> 00:39:38,280
कैसे प्रकट होता है पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी तत्वदर्शी से सुने

547
00:39:38,280 --> 00:39:42,640
मैं वेद का मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं

548
00:39:42,640 --> 00:39:43,640
जानता

549
00:39:43,640 --> 00:39:47,720
ठीक है यह अज्ञानी भी है और वह भी कौन है अज्ञानी

550
00:39:47,720 --> 00:39:52,560
ब्रह्म का ज्ञान भी इसी ने दिया है काल नहीं वो वेदों का ज्ञान भी इसी ने दिया है

551
00:39:52,560 --> 00:39:56,720
और गीता का ज्ञान भी इसी ने दिया है यह अज्ञानी भी है मतलब

552
00:39:56,720 --> 00:40:01,480
जिसने वेद दिए हैं वो अज्ञानी है और

553
00:40:01,480 --> 00:40:05,520
वह जो है गीता गीता का ज्ञान जो दिया वो भी अज्ञानी वो नहीं जानता

554
00:40:05,520 --> 00:40:09,720
है ठीक है उसका ज्ञान है यह जिसके आधार

555
00:40:09,720 --> 00:40:14,320
पर ये लोग सिद्ध कर रहे हैं कि कबीर भगवान है अब यदि कबीर भगवान

556
00:40:14,320 --> 00:40:18,360
यह कहते कि वेदों के आधार पर है तो वेद तो किसी अज्ञानी ने बोले हैं इन्हीं

557
00:40:18,360 --> 00:40:22,520
के अनुसार तो अज्ञानी की बोली हुई है कबीर वाली बात सत्य कैसे

558
00:40:22,520 --> 00:40:27,840
हो जाएगी वो भी झूठ है वो भी अज्ञानता है इसको हम बिल्कुल अभी निचोड़ लेंगे

559
00:40:27,840 --> 00:40:32,000
अभी आगे चलते हैं तो यह परमात्मा

560
00:40:32,000 --> 00:40:36,240
वो ज्ञानी भी नहीं है अब बा जाती है वैराग्य

561
00:40:36,240 --> 00:40:40,280
तो हम जानते ही है क्या काल में वैराग्य है क्या वह खाने के लिए फिरता है

562
00:40:40,280 --> 00:40:44,320
लोगों को वह बलात्कारी है भोगी है

563
00:40:44,320 --> 00:40:48,480
लालची है क्या इसको वैराग्य मानेंगे आप तो वो

564
00:40:48,480 --> 00:40:53,000
उसके अंदर ना तो ऐश्वर्य है ना ही उसके अंदर धर्म है

565
00:40:53,000 --> 00:40:58,800
ना ही उसके पास श्री है यानी लक्ष्मी जी है ना ही उसके पास जो है

566
00:40:58,800 --> 00:40:59,300
क्या

567
00:40:58,960 --> 00:41:03,240
कहते हैं वह यश उसका यश है और ना ही

568
00:41:03,240 --> 00:41:07,440
उसके पास ज्ञान है और ना ही उसके पास वैराग्य है तो

569
00:41:07,440 --> 00:41:12,960
तुम लोग उसको भगवान किस आधार पर बोल रहे हो डो

570
00:41:12,960 --> 00:41:17,160
गलो है कोई जवाब अभी लिंक

571
00:41:17,160 --> 00:41:21,400
देंगे बताना किस आधार पर तुम लोग उसको बोलते हो

572
00:41:21,400 --> 00:41:25,560
भगवान झूठ का महल खड़ा कर रखा है किला

573
00:41:25,560 --> 00:41:29,560
बना दिया है झूठों का काल

574
00:41:29,560 --> 00:41:33,560
भगवान है और और इनके लिए भी यही सब बातें लिख रखी है

575
00:41:33,560 --> 00:41:37,960
ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान तो है मगर अज्ञानी है

576
00:41:37,960 --> 00:41:42,480
दिखाइए भैया इनका वीडियो अज्ञानी वाला ब्रह्मा विष्णु

577
00:41:42,480 --> 00:41:46,600
महेश ना तो ब्रह्मा विष्णु महेश के पास ऐश्वर्य है ना वह ज्ञानी

578
00:41:46,600 --> 00:41:50,640
है और क्योंकि वह समय समय पर कामुकता के वशीभूत हो जाते

579
00:41:50,640 --> 00:41:54,840
हैं तो वो जो है उनके पास ना वैराग्य

580
00:41:54,840 --> 00:41:59,120
है ना उनका यश है क्योंकि तुम तो उनकी बुराई कर रहे हो

581
00:41:59,120 --> 00:42:03,320
ना उनका यश है ना उनकी पास कीर्ति है कुछ नहीं है केवल तुमने

582
00:42:03,320 --> 00:42:07,320
नाम के लिए उनको माना है वरना यह विष्णु पुराण की परिभाषा के अनुसार सिद्ध कर दो कि

583
00:42:07,320 --> 00:42:13,320
काल को तुम भगवान कैसे मानते हो तुम्हारी बात तुम्हारी बात सेही कट रही है

584
00:42:16,000 --> 00:42:20,120
ना समझ ना सार रहे अज्ञानी ये सारे

585
00:42:20,120 --> 00:42:24,560
ज्ञानी थे ब्रह्मा विष्णु

586
00:42:24,560 --> 00:42:28,600
महेश दुर्गा और इनका पिता

587
00:42:28,600 --> 00:42:32,880
सर पुरुष और योग्य ब्राह्मण

588
00:42:32,880 --> 00:42:35,120
ये

589
00:42:35,120 --> 00:42:36,720
सारे पढ

590
00:42:36,720 --> 00:42:41,360
जो प्राणी समझे ना सार रहे अज्ञानी

591
00:42:41,360 --> 00:42:46,360
ये सारे ज्ञानी थे ब्रह्मा विष्णु

592
00:42:46,360 --> 00:42:50,400
महेश दुर्गा और ब्रह्म इनका पिता

593
00:42:50,400 --> 00:42:52,400
सर पुरुष और

594
00:42:52,400 --> 00:42:56,400
सतयुग के ब्राह्मण ये सारे अज्ञानी थे

595
00:42:56,400 --> 00:42:58,920
ठीक है

596
00:42:58,920 --> 00:43:02,960
अज्ञानी अभी और भी पोल खुलने बाकी है

597
00:43:02,960 --> 00:43:06,960
तो यह दोगलापन आपने देखा कि यह काल को भगवान कहते

598
00:43:06,960 --> 00:43:11,080
हैं काल भगवान काल भगवान ब्रह्म भगवान ब्रह्म भगवान मगर क्या

599
00:43:11,080 --> 00:43:15,080
उसमें एक भी पॉइंट इन्होंने स्वीकार किया है कि कोई भगवान वाला बात

600
00:43:15,080 --> 00:43:19,360
भगवान वाली बात है नहीं और आगे हम लोग यह भी करेंगे

601
00:43:19,360 --> 00:43:23,600
कि वह अविनाशी है तो अविनाशी कैसे नहीं है यह भी तोड़ेंगे हम आगे अगली सीरीज

602
00:43:23,600 --> 00:43:27,720
में जो ये कहते हैं वो जन्म वो जन्म लेता नहीं है मरता नहीं है वो आकार

603
00:43:27,720 --> 00:43:31,840
नहीं है ये है वो है जैसे कि एक जगह इन्होंने ये माना है मैं आपको थोड़ी सी हिंट

604
00:43:31,840 --> 00:43:36,200
दे दूं उसके बारे में इन्होंने एक जगह यह माना है कि अर्जुन

605
00:43:36,200 --> 00:43:40,440
से काल कह रहा है कि अर्जुन मैं बड़ा हुआ ब्रह्म वो बड़ा हुआ काल हूं

606
00:43:40,440 --> 00:43:44,440
ठीक है अब ये लोग मानते हैं जो श्री कृष्ण चंद्र है वो दो भुजाओं

607
00:43:44,440 --> 00:43:48,760
वाले हैं उनके शरीर से काल बोल रहा है तो जब वो बढ़ा

608
00:43:48,760 --> 00:43:52,800
हुआ शरीर है तो वो बढा हुआ शरीर जो है वो अर्जुन का नहीं है वो

609
00:43:52,800 --> 00:43:57,240
बढ़ा हुआ शरीर शरीर जो है वो काल का है तो अब बात ये आई कि अगर

610
00:43:57,240 --> 00:44:01,360
काल दिखाई नहीं दे रहा है तो क्या बढ़े हुए के रूप में काल दिखाई दे रहा है तो इनकी बात कट

611
00:44:01,360 --> 00:44:05,560
जाएगी क्योंकि इन्होंने कहा काल अव्यक्त है योग माया से छिपा के छिपा रहता

612
00:44:05,560 --> 00:44:07,640
है मगर यहां तो काल दिखाई दे रहा

613
00:44:07,640 --> 00:44:11,880
है और अगर यह कहते हैं कि श्री कृष्ण का ही शरीर

614
00:44:11,880 --> 00:44:15,920
जो है बड़ा हुआ है उसी के चार भुजा निकल आई तो फिर ये इनको मानना पड़ेगा कि

615
00:44:15,920 --> 00:44:20,120
श्री कृष्ण का ही बड़ा हुआ शरीर रूप है वो वो अलग कोई शरीर

616
00:44:20,120 --> 00:44:24,280
नहीं है तो यह सब बातें हम लोग अगले उसम करेंगे अभी थोड़ा अभी

617
00:44:24,280 --> 00:44:29,160
सिस्टमिकली चले तो इनके अनुसार ब्रह्मा विष्णु

618
00:44:29,160 --> 00:44:33,480
महेश भगवती और यह जो इनका तथाकथित काल

619
00:44:33,480 --> 00:44:37,600
है ब्रह्म है यह जो है भगवान नहीं

620
00:44:37,600 --> 00:44:41,960
है यह केवल औपचारिकता के लिए हिंदुओं को बरगलाने के लिए

621
00:44:41,960 --> 00:44:46,080
जिससे कि हिंदू प्राथमिकता जब सुने कि अरे य तो ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान कह

622
00:44:46,080 --> 00:44:50,280
रहे हैं दुर्गा माता को भगवान कह रहे हैं भगवती कह रहे हैं तो इसलिए

623
00:44:50,280 --> 00:44:54,280
ये लोग कहते हैं कि भगवान है वरना इनकी नजरों में इनसे गया भीता कोई

624
00:44:54,280 --> 00:44:58,480
नहीं है ठीक है हिंदुओ सुन लो और

625
00:44:58,480 --> 00:45:03,280
ये कितने बड़े सनातनी है ना और कितने बड़े दोगले हैं ये भी आज पता चलेगा

626
00:45:03,280 --> 00:45:08,160
चलिए अब मैं आपको दिखाता हूं कि विष्णु पुराण में

627
00:45:08,160 --> 00:45:13,120
ब्रह्म के बारे में क्या लिखा है क्या कहता है

628
00:45:13,120 --> 00:45:18,200
पहले ब्रह्म का चैप्टर हम पूरा कर ले फिर हम बात

629
00:45:18,200 --> 00:45:21,600
करेंगे

630
00:45:21,600 --> 00:45:26,240
तो यहां पर परिभाषा दी गई है

631
00:45:26,240 --> 00:45:30,800
जो यह है छठवां अध्याय व छठवां अंश

632
00:45:30,800 --> 00:45:35,080
पांचवा अध्याय और 66 से

633
00:45:35,080 --> 00:45:40,000
68 श्लोक क्या लिखा है जो अव्यक्त

634
00:45:40,000 --> 00:45:44,080
अजर अचिंत अज अव्यय

635
00:45:44,080 --> 00:45:48,200
अनिर्देश अरूप पाणी पादा दि

636
00:45:48,200 --> 00:45:52,280
शून्य व्यापक सर्व गत नित्य भूतों का

637
00:45:52,280 --> 00:45:56,360
आदि कारण स्वयं कारण हीन स्वयं कारण

638
00:45:56,360 --> 00:46:00,400
हीन इसका और कोई कारण नहीं है स्वयं कारण

639
00:46:00,400 --> 00:46:05,080
हीन जिससे संपूर्ण व्याप और व्यापक

640
00:46:05,080 --> 00:46:09,280
प्रकट हुआ है और जिसे पंडित जन देखते

641
00:46:09,280 --> 00:46:13,600
हैं वह परम धान ज्ञान नेत्रों से देखते हैं पंडित जन

642
00:46:13,600 --> 00:46:17,920
वह परम धाम ही ब्रह्म है तो ब्रह्म

643
00:46:17,920 --> 00:46:21,960
का वास्तविक स्वरूप हमारा क्या है जिसका और कोई कारण ना

644
00:46:21,960 --> 00:46:26,000
हो परम अंतिम जो बिंदु है वही ब्रह्म है उसी

645
00:46:26,000 --> 00:46:30,760
को कहीं कहीं परम ब्र कह दिया जाता है ठीक है

646
00:46:30,760 --> 00:46:33,280
इसी कारण से हमारे यहां पर ब्रह्म सूत्र

647
00:46:33,280 --> 00:46:37,520
लिखा गया है परम ब्रह्म सूत्र नहीं लिखा वेदव्यास जी ने जिन शास्त्रों

648
00:46:37,520 --> 00:46:41,720
के आधार पर आप अपने आप को सनातनी मानते हो ठीक है उन्होंने

649
00:46:41,720 --> 00:46:45,840
ब्रह्म सूत्र लिखा परम ब्रह्म सूत्र नहीं लिखा और बताऊंगा अभी

650
00:46:45,840 --> 00:46:48,240
और क्या

651
00:46:48,240 --> 00:46:52,320
है तो य देखते हैं मुमुक्षु को उसी का ध्यान

652
00:46:52,320 --> 00:46:56,440
करना चाहिए और वही भगवान विष्णु का वेद वचनों से प्रतिपादित

653
00:46:56,440 --> 00:47:00,640
अति सूक्ष्म परम पद है परम पद कौन सा है विष्णु

654
00:47:00,640 --> 00:47:05,400
भगवान ठीक है तो यह हो गया

655
00:47:05,400 --> 00:47:09,520
परम पद वाला मामला कि हमारा ब्रह्म कौन है हमारा

656
00:47:09,520 --> 00:47:13,760
और इसी ब्रह्म की आगे व्याख्या की गई है इसमें य भगवान वाली बात आई है

657
00:47:13,760 --> 00:47:18,160
कि भगवान किसे कह सकते हैं भगवत किसे कह सकते हैं ठीक है

658
00:47:18,160 --> 00:47:23,360
भगवान की हमने व्याख्या पढ़ ली ब्रह्म हमारा कौन है अब बात आती है

659
00:47:23,360 --> 00:47:27,080
कि वेदों में

660
00:47:27,080 --> 00:47:31,280
ब्रह्मचारी की बात हुई है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है

661
00:47:31,280 --> 00:47:35,680
वेद में ठीक है वेद में वेद के अनुसार ब्रह्मचारी

662
00:47:35,680 --> 00:47:40,000
आचार्य बनता है इन्होंने अभी क्या दिखाया था

663
00:47:40,000 --> 00:47:44,840
इन्होंने अभी बताया था

664
00:47:44,840 --> 00:47:48,960
कि गीता का वह ज्ञान गीता का जो

665
00:47:48,960 --> 00:47:53,160
ज्ञान वेद से मेल ना करे वह व्यर्थ है दिखा द 14 नंबर

666
00:47:53,160 --> 00:47:57,520
पेज दिखाइए इनको गीता का जो ज्ञान

667
00:47:57,520 --> 00:48:03,520
वेद से मेल ना करे वह व्यर्थ है 14

668
00:48:11,920 --> 00:48:16,040
नंबर 14 हा यह इसमें है गीता का

669
00:48:16,040 --> 00:48:20,840
जो ज्ञान वेदों से मैच ना करे

670
00:48:20,840 --> 00:48:24,840
वह व्यर्थ है ठीक है वह गीता का व

671
00:48:24,840 --> 00:48:28,400
ज्ञान व्यर्थ है

672
00:48:28,400 --> 00:48:32,400
उससे मेल नहीं करता वह ज्ञान वो गलत ज्ञान है ठीक है यह हमने ले

673
00:48:32,400 --> 00:48:38,400
लिया 130 नंबर पेज और निकाल दीजिए

674
00:48:40,240 --> 00:48:45,160
जरा अभी हम थोड़ी देर में व देने वाले हैं लिंक

675
00:48:45,160 --> 00:48:49,560
आज के जो विषय है उन पर हम लोग बात करेंगे

676
00:48:49,560 --> 00:48:53,800
आज सबको फ्री में भंडारा मिल रहा होगा इसलिए आज आएंगे

677
00:48:53,800 --> 00:48:58,640
नहीं हां यहां पर भी ने कहीं लिखा है

678
00:48:58,640 --> 00:49:03,240
कि वेद के विरु वेद के सम्मत जो वो

679
00:49:03,240 --> 00:49:08,000
है वेदों के अनुसार साधना साधन ना करने वाला पूर्ण

680
00:49:08,000 --> 00:49:10,960
मुक्त नहीं

681
00:49:10,960 --> 00:49:15,040
होता हां हां हा ये ये नीचे नीचे

682
00:49:15,040 --> 00:49:19,240
गीता अध्याय 17 पाछ में एक मिनट एक मिनट

683
00:49:19,240 --> 00:49:24,640
मिनट मुझे परमात्मा को कंस करने वाला है उन अ ज्ञानियों

684
00:49:24,640 --> 00:49:28,840
को तक भी वेद ज्ञान है इस

685
00:49:28,840 --> 00:49:33,680
इस अध्याय छ में हमें वेद का ज्ञान

686
00:49:33,680 --> 00:49:37,720
ग्रहण करना चाहिए और इसमें एक जगह यहां पर इसमें कहीं पर ये वाली पंक्ति भी

687
00:49:37,720 --> 00:49:41,720
आई है कि इसमें एक जगह यहां पर ये

688
00:49:41,720 --> 00:49:43,600
वाली पंक्ति भी आई है कि

689
00:49:43,600 --> 00:49:47,600
वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला जो है पूर्ण

690
00:49:47,600 --> 00:49:51,640
मुक्त नहीं होता यह भी आया है

691
00:49:51,640 --> 00:49:55,800
इसको पढ़ लेते हैं थोड़ा सा पता चल जाएगा इसको पढ़ते हैं एक

692
00:49:55,800 --> 00:50:00,560
मिनट रोक दीजिए अई

693
00:50:00,560 --> 00:50:06,560
घंटे 130 है ना हा

694
00:50:07,040 --> 00:50:11,160
टी सुनी पल साधक कहता है हा ऊपर

695
00:50:11,160 --> 00:50:14,840
ऊपर करिए

696
00:50:14,840 --> 00:50:20,480
थोड़ा और ऊपर करिए

697
00:50:20,480 --> 00:50:24,680
थोड़ा हा नीचे चलिए नीचे एक मिनट एक मिनट यानी

698
00:50:24,680 --> 00:50:27,800
य

699
00:50:27,800 --> 00:50:32,720
यह लिखा है स्वास अमृत यानी ब्रह्म शरीर के हां देखिए

700
00:50:32,720 --> 00:50:37,040
इन श्लोकों में गीता ज्ञान दाता ने अपना बताया जो वेद विरुद्ध

701
00:50:37,040 --> 00:50:41,080
है और इसलिए जो है

702
00:50:41,080 --> 00:50:44,720
यह जो है गलत है ठीक

703
00:50:44,720 --> 00:50:48,840
है और वह पूर्ण मुक्त नहीं है ये लाइन स्पष्ट इसमें लिखी हुई है कहीं

704
00:50:48,840 --> 00:50:52,880
ना कहीं तो इसका मतलब यह है कि वेद के

705
00:50:52,880 --> 00:50:57,720
बाहर आप जब भी जाएंगे तो वो जो है अ

706
00:50:57,720 --> 00:51:01,960
वेदों के विरोध में अगर आप जाएंगे तो वह ग्रहण करने योग्य नहीं है

707
00:51:01,960 --> 00:51:06,160
वह गलत है तो अब बात आती है कि हमारे पास

708
00:51:06,160 --> 00:51:12,160
अथर्व वेद में लिखा हुआ

709
00:51:13,320 --> 00:51:19,320
है अथर्ववेद में हमारे पास लिखा है

710
00:51:20,000 --> 00:51:24,760
कि अथर वेद गवा कांड

711
00:51:24,760 --> 00:51:30,760
और पांचवा स

712
00:51:32,640 --> 00:51:36,920
ये इस सूक्त का नाम है ब्रह्मचारी ब्रह्मचर्य

713
00:51:36,920 --> 00:51:41,520
सूक्त दिखा देता हूं ठीक है

714
00:51:41,520 --> 00:51:45,760
अब सबसे पहली बात तो यह है कि वेदों ने कहीं पर भी परम ब्रह्म सूत्र

715
00:51:45,760 --> 00:51:49,840
की बात नहीं की है प्र परम ब्रह्मचर्य की बात नहीं की है

716
00:51:49,840 --> 00:51:54,680
ब्रह्मचर्य की बात की है क्योंकि उनके लिए वे वेद के अनुसार शास्त्र के अनुसार

717
00:51:54,680 --> 00:51:58,880
ब्रह्म और परम ब्रह्म में कोई अंतर नहीं ठीक है मगर कहीं कहीं

718
00:51:58,880 --> 00:52:02,960
पर लोगों को समझाने की दृष्टि से परम ब्रह्म को अलग से इंगित

719
00:52:02,960 --> 00:52:07,120
कर दिया कि भाई अब तुम जो भी और भी परम सोच सकते हो ना तो परम ब्रम शब्द लिख दिया

720
00:52:07,120 --> 00:52:11,280
है मगर वस्तुतः ब्रह्म ही तत्व की आखिरी

721
00:52:11,280 --> 00:52:15,800
अंतिम जो स्थिति है वह स्वीकार की गई है तो इन्होंने कहीं

722
00:52:15,800 --> 00:52:20,200
पर भी परम ब्रह्मचर्य स्वीकार नहीं किया ब्रह्मचर्य का अगर एक भावार्थ

723
00:52:20,200 --> 00:52:24,240
निकाले तो ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला सिखाने वाला यह

724
00:52:24,240 --> 00:52:28,640
ब्रह्मचारी होता है ब्रह्म के लिए ब्रह्म की प्राप्ति की

725
00:52:28,640 --> 00:52:33,960
तो अब जो है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है यह वेद कह रहे हैं

726
00:52:33,960 --> 00:52:38,000
और जो तत्वदर्शी है वह कौन है

727
00:52:38,000 --> 00:52:42,080
वो ब्रह्म के लिए आचरण नहीं करता है ना सिखाता है इनके अनुसार वो

728
00:52:42,080 --> 00:52:46,160
परम ब्रह्म के लिए आचरण करता है वेद कह रहे हैं ब्रह्म के लिए आचरण

729
00:52:46,160 --> 00:52:50,200
करने वाला आचार्य है गीता कह रही है कौन गीता कह

730
00:52:50,200 --> 00:52:54,200
रही है 15 एक में कि जो इनके अनुसार पूर्ण

731
00:52:54,200 --> 00:52:58,200
ब्रह्म के लिए जो आचरण करेगा वो तत्वदर्शी वो आचार्य है

732
00:52:58,200 --> 00:53:02,360
तो किसकी बात मानोगे यहां तो गीता विरोध कर रही है वेद का

733
00:53:02,360 --> 00:53:06,480
वेद कह रहे ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला ही तत्वदर्शी आचार्य है संत

734
00:53:06,480 --> 00:53:10,920
है जो आपको पढ़ाए देखिए क्या क्या लिखा है ब्रह्मचारी पृथ्वी

735
00:53:10,920 --> 00:53:14,960
और सूर्य दोनों को पुनः पुनः अनुकूल बनाता हुआ विचर है

736
00:53:14,960 --> 00:53:19,000
यह पहला मंत्र उस ब्रह्मचारी में देवता

737
00:53:19,000 --> 00:53:23,440
गण अनुकूल मन के साथ रहते हैं वह ब्रह्मचारी पृथ्वी और लोक

738
00:53:23,440 --> 00:53:27,920
को लोक को धारण कर है

739
00:53:27,920 --> 00:53:32,360
वह तब से आचार्य को परिपूर्ण बनाता है ठीक है

740
00:53:32,360 --> 00:53:36,720
और क्या लिखा है इसमें आगे ब्रह्मचर्य ब्रह्मचारी की बात हो रही है और ब्रह्मचारी

741
00:53:36,720 --> 00:53:41,080
ही आचार्य बनता है सोवे में स्पष्ट है आचार्य कौ

742
00:53:41,080 --> 00:53:43,640
बनेगा जो ब्रह्म प्राप्ति के लिए

743
00:53:43,640 --> 00:53:48,240
आचरण करे परम ब्रह्म प्राप्ति के लिए नहीं तुमको तुम्हारी बातों से

744
00:53:48,240 --> 00:53:52,440
पकड़ेंगे आचार कौन बनेगा जो परम ब्रह्म प्राप्ति

745
00:53:52,440 --> 00:53:56,920
की बात ना करे ब्रह्म प्राप्ति की बात करे तो ये ब्रह्म प्राप्ति की बात ये कर रहे

746
00:53:56,920 --> 00:54:01,120
ब्रह्मचर्य सूक्त इसमें कहीं पर भी वेदों में परम

747
00:54:01,120 --> 00:54:05,760
ब्रह्म सूक्त नहीं है तो गीता की जो बात आपने कही

748
00:54:05,760 --> 00:54:09,880
कि जो क्योंकि ब्रह्म को तो आप प्राप्त करने योग्य नहीं मानते हो आपका ब्रह्म ही कुछ

749
00:54:09,880 --> 00:54:13,960
नया है तो क्या हुआ कि गीता की जो बात उन्होंने आप ये मानते

750
00:54:13,960 --> 00:54:18,520
हो कि गीता में परम ब्रह्म को प्राप्त करने की बात की जा रही वो तत्वदर्शी है नहीं

751
00:54:18,520 --> 00:54:22,520
आपकी ही बात से आपकी बात कट रही है क्यों क्योंकि आपने एक जगह यह कहा है

752
00:54:22,520 --> 00:54:26,760
कि गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल नहीं खाता है वो ज्ञान जो है ग्रहण

753
00:54:26,760 --> 00:54:31,440
करने योग्य नहीं है वेदों के बाहर ठीक है

754
00:54:31,440 --> 00:54:35,880
कोई उत्तर नहीं है आगे चलते

755
00:54:35,880 --> 00:54:41,440
हैं तो अब इसमें एक बात आ जाती

756
00:54:41,440 --> 00:54:45,440
है कि जैसे इन्होंने ये कह दिया एक जगह ये

757
00:54:45,440 --> 00:54:49,560
कहते हैं कि परमात्मा को पूर्ण तरीके से जानना जो है वो

758
00:54:49,560 --> 00:54:53,560
पूर्ण ज्ञानी है मगर इन्होंने 95 नंबर के पेज में कहा है

759
00:54:53,560 --> 00:54:57,680
कि काल को तत्व से पूर्ण तरीके से जान लिया वो पूर्ण ज्ञान है

760
00:54:57,680 --> 00:54:58,680
तो काल को यदि

761
00:54:58,680 --> 00:55:02,800
पूर्ण ज्ञान अगर इनकी यह बात मानी जाए कि काल

762
00:55:02,800 --> 00:55:06,840
को तत्व से जानने वाला पूर्ण ज्ञानी है तो काल को काल को इन्हीं के

763
00:55:06,840 --> 00:55:10,880
अनुसार जो है वेदों से गीता से जाना जा रहा है ठीक है और

764
00:55:10,880 --> 00:55:15,560
वोह कौन है जो ब्रह्मचारी परम ब्रह्मचारी नहीं ब्रह्मचारी तो जब

765
00:55:15,560 --> 00:55:19,920
तो जब ब्रह्मचारी की बात हो रही है तो तत्व ज्ञानी कौन सिद्ध हुआ

766
00:55:19,920 --> 00:55:23,960
जो काल को इनके द्वारा खड़े हुए काल को जो पूर्ण तरीके से जानता है जिनकी

767
00:55:23,960 --> 00:55:27,960
बात वेदों में हुई है जिनकी बात जिसकी बात गीता में हुई है

768
00:55:27,960 --> 00:55:31,960
वो जो जानता है वह तत्वदर्शी है वह प्रामाणिक आचार्य वेदों के

769
00:55:31,960 --> 00:55:37,560
अनुसार ठीक है

770
00:55:37,560 --> 00:55:41,600
अच्छा एक बात इसमें और कही गई है 95 नंबर के पेज पर

771
00:55:41,600 --> 00:55:46,120
कि जो गीता ज्ञानदाता की घिनौनी वास्तविकता को जानकर य

772
00:55:46,120 --> 00:55:50,400
95 नंबर का पेज निकाल दीजिए जो इनके इन्होंने क्या क्या घटिया बटिया बोला है उसके

773
00:55:50,400 --> 00:55:56,400
बारे में अपने काल के बारे में वो दिख जाएगा

774
00:55:57,480 --> 00:56:01,640
95 में देखिए लिखा है इनके जो काल को तत्व से जान लेता

775
00:56:01,640 --> 00:56:06,520
है वह पूर्ण ज्ञानी पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होता तो लो

776
00:56:06,520 --> 00:56:12,000
अब जो है परमात्मा को भी तत्व से नहीं जानना है इनके ही

777
00:56:12,000 --> 00:56:16,080
अनुसार ब्रह्म को तत्व से जानने वाला पूर्ण

778
00:56:16,080 --> 00:56:20,160
ज्ञानी है और पूर्ण पुनर्जन्म

779
00:56:20,160 --> 00:56:24,280
को प्राप्त नहीं यानी कि तत्वदर्शी इन्हीं के अनुसार तत्वदर्शी कौन है जो काल को ब्रह्म

780
00:56:24,280 --> 00:56:28,440
को जानता है और ब्रह्मचारी की पहचान अथर्ववेद में दी गई है 11

781
00:56:28,440 --> 00:56:32,560
पा 16 उल्टे वृक्ष की अगर बात करो तो गीता में

782
00:56:32,560 --> 00:56:37,160
उल्टा वृक्ष भी दिया गया है मगर अभी उसकी आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि

783
00:56:37,160 --> 00:56:41,200
आपके अनुसार तत्वदर्शी जो है वह ब्रह्म

784
00:56:41,200 --> 00:56:45,200
को प्राप्त करने की नहीं बल्कि परम ब्रह्म को प्राप्त करने की शिक्षा देता है तो

785
00:56:45,200 --> 00:56:49,440
वेदों वेदों के अनुसार जो आचार्य है प्रामाणिक

786
00:56:49,440 --> 00:56:52,840
वह कौन है जो ब्रह्म को प्राप्त करने की शिक्षा दे

787
00:56:52,840 --> 00:56:58,320
ठीक अब इसमें एक चीज और है जो गीता ज्ञानदाता की घिनौनी

788
00:56:58,320 --> 00:57:02,800
वास्तविकता वो लगाइए जरा भाई 95 नंबर पेज उसी में घिनौनी वास्तविकता

789
00:57:02,800 --> 00:57:07,200
शब्द आया है ऊपर जाइए

790
00:57:07,200 --> 00:57:13,040
हां बस बस बस गीता के अध्याय एक

791
00:57:13,040 --> 00:57:17,080
मिनट काल ब्रह्म कह रहा है अर्जुन मेरी जन्म मृति होती है इसे तू नहीं

792
00:57:17,080 --> 00:57:21,200
जानता यही प्रमाण यह है यह है ब्रह्मा विष्णु महाविष्णु

793
00:57:21,200 --> 00:57:26,160
महाशिव में रहता है इसकी इतनी इतनी प्रलय की जानकारी है

794
00:57:26,160 --> 00:57:30,200
मेरे जन्म कर्म है तत्व से नहीं जान लेता वह शरीर त्याग कर मेरे

795
00:57:30,200 --> 00:57:34,240
जाल में फसा रह जाता है तो बारबार काल इसमें स्वयं को

796
00:57:34,240 --> 00:57:38,560
तत्व से जानने की बात कर रहा है ठीक है और वेदों में भी

797
00:57:38,560 --> 00:57:42,560
काल यानी ब्रह्म को जानने वाले को ब्रह्मचारी को ही आचार्य

798
00:57:42,560 --> 00:57:48,360
कहा है रुक जाओ रुक जाओ जो एक मिनट घटिया शब्द ढूंढना है

799
00:57:48,360 --> 00:57:52,480
हमें पैदा करता है उनमें स्वयं प्रवेश करके गुप्त रूप

800
00:57:52,480 --> 00:57:56,640
से अपना उल्लू सीधा करता है तथा अपने आप को आकार में प्रकट नहीं करता य

801
00:57:56,640 --> 00:58:00,840
ध्यान देखिए ये लोग एक जगह कह रहे हैं कि वो बढ़ा हुआ

802
00:58:00,840 --> 00:58:05,000
काल है बढ़ा हुआ आकार हो गया जब बढ़ा हुआ है तो आकार

803
00:58:05,000 --> 00:58:07,840
हो गया उसका और यहां पर कह रहे हैं कि वह अपने आप

804
00:58:07,840 --> 00:58:11,840
को आकार में प्रकट नहीं करता इसका यह अटल अविनाशी नियम है कि

805
00:58:11,840 --> 00:58:16,440
वह अपने वास्तविक रूप को प्रकट नहीं करता है

806
00:58:16,440 --> 00:58:20,560
और यहीं पर इनके लिए इनके इन्होंने

807
00:58:20,560 --> 00:58:24,960
अपने तथाकथित काल के लिए घटिया शब्द का उपयोग भी बहुत अच्छे से किया है

808
00:58:24,960 --> 00:58:29,320
खर अब हम इसमें थोड़ा नीचे आइए नीचे

809
00:58:29,320 --> 00:58:33,560
काल अपने भक्त को महा स्वर्ग काल अपने

810
00:58:33,560 --> 00:58:37,960
भक्त को महा सर्ग यानी ब्रह्म लोक में भेजकर कुछ लंबे समय तक यह है

811
00:58:37,960 --> 00:58:42,600
पु क्योंकि वह भक्त पू तत्व भक्ति करे

812
00:58:42,600 --> 00:58:46,840
अद्भुत है जो मुझे इस प्रकार जान लेता ब्र विष्णु म को छोड़कर मेरा

813
00:58:46,840 --> 00:58:51,160
मेरे ही तो इनका जो है अविनाशी

814
00:58:51,160 --> 00:58:55,200
भाव है घटिया भाव है और वो कभी खत्म नहीं होगा वो अविनाशी है

815
00:58:55,200 --> 00:58:59,240
ठीक है पूर्ण ज्ञानी काल के जाल में नहीं

816
00:58:59,240 --> 00:59:04,080
रहते ठीक है तो अब क्या है

817
00:59:04,080 --> 00:59:08,200
अब सबसे जरूरी बातें अब आपको बहुत ज्यादा बहुत बड़ा

818
00:59:08,200 --> 00:59:12,200
आज पर्दाफाश होने वाला है वह क्या पर्दाफाश है कि

819
00:59:12,200 --> 00:59:16,240
एक तरफ यह कहते हैं कि गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल ना कर

820
00:59:16,240 --> 00:59:20,400
मेल ना खाए या जो भी ऐसा ज्ञान हो जो वेदों से मैच

821
00:59:20,400 --> 00:59:23,400
ना करे वो व्यर्थ है

822
00:59:23,400 --> 00:59:28,040
वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला पूर्ण

823
00:59:28,040 --> 00:59:32,080
नहीं पूर्ण मुक्त नहीं है यह दो चीजें इन्होंने वेद के

824
00:59:32,080 --> 00:59:36,240
लिए कह दी तो पहली बात तो जो ब्रह्मचारी

825
00:59:36,240 --> 00:59:40,640
जो वेदों में वर्णित है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है उसका आलंबन ला लेके गीता के तत्वदर्शी

826
00:59:40,640 --> 00:59:45,080
का आलंबन लेगा तोव वेद विरोधी है इसलिए इन्हीं के अनुसार

827
00:59:45,080 --> 00:59:49,200
उसको नहीं माना जाना चाहिए दूसरी बात

828
00:59:49,200 --> 00:59:53,240
अब ये वेदों के विरोध में क्या कहते हैं ये विरोध में यह कहते हैं वेदों के

829
00:59:53,240 --> 00:59:59,240
विरोध में 34 नंबर पेज निकालिए जरा

830
01:00:05,200 --> 01:00:11,200
34 यह जीजी के चल रही जीजी

831
01:00:11,480 --> 01:00:15,760
के आशा करता हूं आज आप लोगों को काफी अच्छा लग रहा होगा देखो

832
01:00:15,760 --> 01:00:20,280
वेदना वेदों में वर्णित साधना से विधि के विकार नहीं मिटते

833
01:00:20,280 --> 01:00:24,280
और इसमें इन्होंने यह कहा है कि 34 हो गया

834
01:00:24,280 --> 01:00:28,320
इसी में इन्होंने लिखा है कि वेदों में वर्णित पूजा का तरीका ब्रह्म प्राप्ति का नहीं

835
01:00:28,320 --> 01:00:32,720
है यानी कि एक तरफ ये कह रहे

836
01:00:32,720 --> 01:00:34,840
हैं

837
01:00:34,840 --> 01:00:38,880
कि मतलब परम ब्रह्म प्राप्ति का नहीं है इसी में इन्होंने यहां पर कहीं

838
01:00:38,880 --> 01:00:42,960
कहा है इस पेज पर ही कि कुटिया में रहते थे जो

839
01:00:42,960 --> 01:00:47,040
नीचे जाइए नीचे जाइए और नीचे

840
01:00:47,040 --> 01:00:51,240
चलिए हम और नीचे

841
01:00:51,240 --> 01:00:55,360
चलिए पूर्ण ब्रह्म की साधना के अतिरिक्त परम ब्रह्म ब्रह्म

842
01:00:55,360 --> 01:00:59,440
अन्य श्री ब्रह्मा जी विष्णु जी जैसा कर्म किया वैसा फल

843
01:00:59,440 --> 01:01:05,440
मिलता है और अगला पेज आ जाइए अगले पेज प

844
01:01:06,640 --> 01:01:10,960
आइए तो यहां पर इन्होंने देखिए

845
01:01:10,960 --> 01:01:15,840
यह नीचे आई वेदों व गीता जी का ज्ञान तो श्रेष्ठ है

846
01:01:15,840 --> 01:01:19,920
काम यह सब परंतु भक्ति की साधना केवल काल की प्राप्ति

847
01:01:19,920 --> 01:01:23,920
की है तो इन्होंने क्या बता दिया

848
01:01:23,920 --> 01:01:27,920
कि गीता के अनुसार ज्ञान देने वाला जो है तत्वदर्शी नहीं हो

849
01:01:27,920 --> 01:01:32,040
सकता क्योंकि गीता और वेद के अनुसार जो प्राप्त

850
01:01:32,040 --> 01:01:36,800
हो सकता है वह काल हो सकता है केवल केवल काल

851
01:01:36,800 --> 01:01:41,920
और दूसरी एक बात यह भी है कि

852
01:01:41,920 --> 01:01:47,240
हां देखिए यह

853
01:01:47,240 --> 01:01:51,520
जो प्रणव है है ना प्रणव

854
01:01:51,520 --> 01:01:53,080
नाम का ज जप

855
01:01:53,080 --> 01:01:57,480
तथा पांचों यज्ञ तथा घोर तप ठीक है ही

856
01:01:57,480 --> 01:02:01,480
पूर्ण ब्रह्म की साधना मान लिया परंतु यह साधना केवल ब्रह्म तक की

857
01:02:01,480 --> 01:02:01,980
है

858
01:02:01,640 --> 01:02:05,800
इसी में यह लाइन स्पष्ट है कि कि वेदों का जो ज्ञान है वह

859
01:02:05,800 --> 01:02:09,800
पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति का नहीं है ठीक है यह भी

860
01:02:09,800 --> 01:02:13,840
आप चेक कर लीजिएगा और गीता द्वारा मुक्ति नहीं मिलती है

861
01:02:13,840 --> 01:02:18,080
35 नंबर पेज निकालिए यह देखिए

862
01:02:18,080 --> 01:02:22,120
ब्रह्म साधना ब्रह्म यह ब्रह्म साधना घटिया है तो

863
01:02:22,120 --> 01:02:27,240
अब जो है तत्वदर्शी जो है जो भगवान नहीं है उसका मंत्र क्यों दे रहा है

864
01:02:27,240 --> 01:02:31,320
जो भगवान नहीं है उसको भगवान के रूप में क्यों कह रहा है उसका मंत्र दे रहा है प्रणव कह

865
01:02:31,320 --> 01:02:35,480
रहा है ना व वो प्रणव तत्सत और दूसरी बात कि

866
01:02:35,480 --> 01:02:39,800
गीता के अनुसार जो तत्वदर्शी है

867
01:02:39,800 --> 01:02:44,080
एक मिनट रुक जाइए गीता के अनुसार जो तत्वदर्शी है

868
01:02:44,080 --> 01:02:48,840
तो गीता के अनुसार तत्वदर्शी जो है उसके द्वारा आपको मुक्ति प्राप्त नहीं होगी

869
01:02:48,840 --> 01:02:52,880
यह इन्होंने ही डिक्लेयर कर दिया तो इनकी बातें आपस में ही कितना कट रही

870
01:02:52,880 --> 01:02:57,040
है पहले तो गीता के आधार पर किसी को तत्वदर्शी बनाओ और

871
01:02:57,040 --> 01:03:01,040
फिर यह कह दो कि गीता में गीता के अनुसार जो है आपको ब्रह्म की प्राप्ति होगी

872
01:03:01,040 --> 01:03:05,080
ही नहीं अच्छा दूसरी बात यह कह रहे हो कि वेदों के विरुद्ध जो

873
01:03:05,080 --> 01:03:09,160
भी बात होगी वह ग्रहण करने योग्य नहीं है तो आप यहां पर जब यह कह रहे हो

874
01:03:09,160 --> 01:03:13,360
कि वेदों द्वारा परम ब्रह्म की प्राप्ति नहीं हो सकती तो आप यहां वेदों

875
01:03:13,360 --> 01:03:16,680
का विरोध कर रहे हो जब आप यह कह

876
01:03:16,680 --> 01:03:20,800
रहे हो कि वेदों में क्या यह बात कहीं वेदों में लिखी है क्या वेदों के द्वारा परम ब्रह्म

877
01:03:20,800 --> 01:03:24,920
की प्राप्ति नहीं होगी तो आप यहां पर विरोध कर रहे हो वेदों का इस बात को

878
01:03:24,920 --> 01:03:29,280
काट दो तो की इतनी खिचड़ी इन्होंने पकाई है इसमें अच्छा

879
01:03:29,280 --> 01:03:34,160
वेद कहने वाले को ब्रह्म ज्ञान नहीं है लो

880
01:03:34,160 --> 01:03:38,160
लगाइए भैया ये 39

881
01:03:38,160 --> 01:03:42,320
नंबर का पेज निकालिए 39 थोड़ा सा बुक

882
01:03:42,320 --> 01:03:47,680
नहीं है ना मेरे पास इनकी पीडीएफ से दिखाना पड़ रहा है तो दिक्कत आ रही

883
01:03:47,680 --> 01:03:52,520
है 39 नंबर पेज और

884
01:03:52,520 --> 01:03:56,560
इसमें एकांत में पवित्र गीता अध्याय आठ

885
01:03:56,560 --> 01:04:01,080
फिर अध्याय जिसका

886
01:04:01,080 --> 01:04:05,480
विन साधक परमात्मा नीचे करिए नीचे

887
01:04:05,480 --> 01:04:09,760
चलिए ये देखिए यहां पर देखिए पवित्र वेदों को बोलने

888
01:04:09,760 --> 01:04:14,200
वाले ब्रह्म ने कहा कि पूर्ण परमात्मा के विषय में ये है ऐसे करके

889
01:04:14,200 --> 01:04:18,240
और लास्ट में उसने कहा मैं वेद का ज्ञान देने

890
01:04:18,240 --> 01:04:22,440
वाला ब्रह्म भी परम परम परम ब्रह्म के बारे में नहीं जानता

891
01:04:22,440 --> 01:04:26,800
तो भैया देखिए सनातनी कौन है हिंदू

892
01:04:26,800 --> 01:04:31,040
कौन है जो यह मानता है कि वेद आदि जो

893
01:04:31,040 --> 01:04:35,040
शास्त्र है उनके द्वारा हमें मुक्ति मिलती है उनके द्वारा हमें मोक्ष मिलता है उसे

894
01:04:35,040 --> 01:04:39,240
हिंदू माना जाता है उसे सनातनी माना जाता है यह क्या कह रहे हैं कि वेदों

895
01:04:39,240 --> 01:04:43,600
के द्वारा पहली बात तो वेदों को बोलने वाला ही अज्ञानी है

896
01:04:43,600 --> 01:04:47,760
ठीक है और दूसरी बात यह है कि वेदों के द्वारा मुक्ति नहीं है यह

897
01:04:47,760 --> 01:04:52,080
भी इन्होंने मान लिया और अब इनके तत्वदर्शी

898
01:04:52,080 --> 01:04:56,120
को भी तबाह करते चले पूरी तरीके से एक एक

899
01:04:56,120 --> 01:05:00,200
तरीके से तो हमने क्या तवा किया तत्वदर्शी को कि तत्वदर्शी

900
01:05:00,200 --> 01:05:04,320
कोई काम का नहीं है क्योंकि वह जो ज्ञान है वह परम ब्रह्म के लिए

901
01:05:04,320 --> 01:05:08,360
इनके अनुसार और वेद में ब्रह्म ब्रह्मचारी

902
01:05:08,360 --> 01:05:13,000
को ब्रह्म के लिए आचरण करने वाले को प्रामाणिक आचार्य कहा है

903
01:05:13,000 --> 01:05:16,400
ठीक है तो आपके तत्वदर्शी की आवश्यकता

904
01:05:16,400 --> 01:05:20,680
नहीं है आप ही के अनुसार क्योंकि गीता का जो ज्ञान वेदों के विरोध में हो

905
01:05:20,680 --> 01:05:24,880
वो ज्ञान स्वीकार करने योग्य नहीं है यह आप ही ने लिखा है तो आप पहले

906
01:05:24,880 --> 01:05:28,920
सोच के आओ करना क्या है आपको अब

907
01:05:28,920 --> 01:05:34,240
इनका पेज नंबर दिखाओ इनको 40 अब इनका तत्वदर्शी भी निकाल

908
01:05:34,240 --> 01:05:40,240
ले बिल्कुल आज तत्वदर्शी का तो एंड है यह मान

909
01:05:42,920 --> 01:05:45,280
लीजिए

910
01:05:45,280 --> 01:05:51,240
हां नीचे

911
01:05:51,240 --> 01:05:55,480
चलिए देखिए देखिए देखिए देखिए देखिए यग के द्वारा देखता

912
01:05:55,480 --> 01:05:59,600
हू और नीचे

913
01:05:59,600 --> 01:06:04,320
चलिए ऊपर ऊपर चलिए ऊपर ऊपर चलिए हेडिंग

914
01:06:04,320 --> 01:06:08,400
दिखाइए इस पेज की हेडिंग क्या है और ऊपर

915
01:06:08,400 --> 01:06:12,480
चलिए हां हां हां नीचे जा नीचे जा नीचे जा नीचे

916
01:06:12,480 --> 01:06:17,320
जाइए डिंग निकल गई ना और नीचे जाइए

917
01:06:17,320 --> 01:06:22,320
और नीचे जाइए बा

918
01:06:22,320 --> 01:06:26,840
यज्ञों का लाभ मुक्ति नहीं

919
01:06:26,840 --> 01:06:31,000
है क्या है यज्ञों का लाभ यानी यज्ञ

920
01:06:31,000 --> 01:06:35,160
करने से मुक्ति नहीं है यज्ञ

921
01:06:35,160 --> 01:06:40,560
से मुक्ति नहीं मिलेगी अब इनका तत्वदर्शी का देखिए कैसे तेल

922
01:06:40,560 --> 01:06:44,600
निकलेगा अब आप चलिए भैया इनका वो मुझे पेज नंबर

923
01:06:44,600 --> 01:06:49,280
नहीं मालूम है आप चार 433 लगाइए

924
01:06:49,280 --> 01:06:53,400
433 433 लगाइए इन्होंने यहां पर ये मान लिया

925
01:06:53,400 --> 01:06:57,480
यज्ञ से मुक्ति नहीं है ठीक अब इनके तत्वदर्शी

926
01:06:57,480 --> 01:07:02,440
की सच्चाई देखिए 4 34

927
01:07:02,440 --> 01:07:06,360
प जाना है चौथा अध्याय 34 वा श्लोक उसका पेज नंबर

928
01:07:06,360 --> 01:07:12,360
नहीं

929
01:07:21,040 --> 01:07:25,080
र चौथा अध्याय

930
01:07:25,080 --> 01:07:30,240
च सवा

931
01:07:30,240 --> 01:07:36,240
श्लोक नहीं नहीं वो अध्याय ऊपर लिखा होना चाहिए

932
01:07:38,360 --> 01:07:41,200
14

933
01:07:41,200 --> 01:07:45,400
हां मैं आपको इससे बता दे रहा हूं इसमें देर लग जाएगी भगवत

934
01:07:45,400 --> 01:07:50,440
गीता में क्या लिखा हुआ है हिंदी वो बता दे रहा हूं रहने दीजिए हटा

935
01:07:50,440 --> 01:07:54,440
दीजिए चौथा अध्याय इनका जो तत्वदर्शी है ना

936
01:07:54,440 --> 01:07:58,680
वो इनको पता चलेगा आज क्या है इन्होंने माना

937
01:07:58,680 --> 01:08:02,800
कि यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी ठीक है

938
01:08:02,800 --> 01:08:06,880
और चौथे अध्याय के

939
01:08:06,880 --> 01:08:11,560
यह जो 34 वा श्लोक है ना इसमें कहते तत्वदर्शी के पास जा

940
01:08:11,560 --> 01:08:15,640
तो क्यों जा वो 33 में बताया है

941
01:08:15,640 --> 01:08:20,360
यहां पूरे चैप्टर में शुरू से यज्ञ की बात ही चल रही है

942
01:08:20,360 --> 01:08:24,360
तो यहां पर भगवान ने कहा है कि फलाने यज्ञ

943
01:08:24,360 --> 01:08:28,880
से ज्यादा अच्छा फलाना यज्ञ होता है अब

944
01:08:28,880 --> 01:08:33,000
33 में कहा कि फलाना यज्ञ श्रेष्ठ है अब 34 में कहा

945
01:08:33,000 --> 01:08:37,240
कि उस यज्ञ का यानी उस ज्ञान का कौन

946
01:08:37,240 --> 01:08:41,440
सा ज्ञान यज्ञ का ज्ञान यज्ञ

947
01:08:41,440 --> 01:08:45,560
का ज्ञान लेने के लिए तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास

948
01:08:45,560 --> 01:08:49,640
जा तो तत्वदर्शी जो होगा वह आपका आपको क्या

949
01:08:49,640 --> 01:08:53,640
देने वाला है यज्ञ का ज्ञान और इन्होंने क्या

950
01:08:53,640 --> 01:08:56,600
लिखा है यज्ञ के ज्ञान से मुक्ति

951
01:08:56,600 --> 01:09:01,240
नहीं है तो देखा कितनी बड़ी सटर घोट इन्होने की

952
01:09:01,240 --> 01:09:05,720
है अभी इनकी जो बुक्स है ना ठीक से आई नहीं है हाथों में

953
01:09:05,720 --> 01:09:09,920
यह लोग जो यह करते ना ज्ञान से ज्ञान को काटेंगे अब इनसे

954
01:09:09,920 --> 01:09:14,200
पूछिए यज्ञों से मुक्ति नहीं है यज्ञों का ज्ञान

955
01:09:14,200 --> 01:09:20,200
देने ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्वदर्शी के पास जाना है

956
01:09:20,760 --> 01:09:24,880
तो जब उससे मुक्ति नहीं है तो तत्वदर्शी के पास जाने से आपको मुक्ति

957
01:09:24,880 --> 01:09:28,920
नहीं मिल ने वाली और जो अगर

958
01:09:28,920 --> 01:09:32,960
इस इस बात को एक साइड कर दो दूसरी बात ले लो वो क्या है

959
01:09:32,960 --> 01:09:37,800
कि गीता का वो ज्ञान जो वेदों से मेल ना खाए

960
01:09:37,800 --> 01:09:42,400
वो ज्ञान ग्रहण करने योग्य नहीं है तो तो वेद कह रहे हैं ब्रह्मचारी

961
01:09:42,400 --> 01:09:47,480
वो मुक्ति दिलाएंगे उसम मुक्ति शब्द भी आया है गवे

962
01:09:47,480 --> 01:09:51,760
मंडल के गवे कांड के पांचवे सूक्त के जो सूक्त

963
01:09:51,760 --> 01:09:55,800
है पूरा ब्रह्मचर्य सूक्त पहली बात तोय परम ब्रह्म सूक्त क्यों नहीं है

964
01:09:55,800 --> 01:10:00,000
परम ब्रह्मचर्य यह सूक्त क्यों नहीं है ब्रह्मचर्य क्यों है क्योंकि

965
01:10:00,000 --> 01:10:04,280
ब्रह्म ही अल्टीमेट वो है उसमें परम लगा के कहीं कहीं भावों को व्यक्त

966
01:10:04,280 --> 01:10:08,560
किया जाता है अंत तो गत्वा हर जगह हमने प्रमाण कई सारे दे दिए ब्र ब्रह्म

967
01:10:08,560 --> 01:10:12,520
और परम ब्रह्म एक ही है ठीक है

968
01:10:12,520 --> 01:10:16,720
अब वेद कह रहे हैं ब्रह्मचर्य करो ब्रह्मचारी के पास जाओ

969
01:10:16,720 --> 01:10:20,960
ब्रह्मचारी को आचार्य बनाओ गुरु बनाओ और गीता कह रही है कि

970
01:10:20,960 --> 01:10:25,360
आपके अनुसार गीता कह रही है ब्रह्म से अलग कोई परम ब्रह्म है अगर वो परम ब्रह्म ब्रम

971
01:10:25,360 --> 01:10:29,520
एक ही है तो तो कोई बात नहीं मगर वो यदि ब्रह्म

972
01:10:29,520 --> 01:10:33,520
से अलग कोई परम ब्रह्म है तो गीता यदि उसके पास जाने को कह रही ज्ञान लेने

973
01:10:33,520 --> 01:10:37,680
के लिए तो गलत है क्योंकि व वेद के विरुद्ध है और

974
01:10:37,680 --> 01:10:42,040
ऐसे भी वेद के विरुद्ध है कि आपने कहा कि जो यज्ञ

975
01:10:42,040 --> 01:10:46,400
है उनसे मुक्ति नहीं मिलती मगर आप जो है तत्वदर्शी

976
01:10:46,400 --> 01:10:50,800
उसी को कह रहे हो जो यज्ञ का ज्ञान दे ठीक है आप

977
01:10:50,800 --> 01:10:56,080
ही की बात अब दूसरी बात एकय आती है कि

978
01:10:56,080 --> 01:11:00,200
जब ये यह कह रहे हैं कि वेद

979
01:11:00,200 --> 01:11:04,240
जो है पूर्ण ब्रह्म की बात नहीं करते वेद

980
01:11:04,240 --> 01:11:08,360
को कहने वाला वह ज्ञानी नहीं है तो इसका मतलब

981
01:11:08,360 --> 01:11:12,520
अगर यह यह कहते हैं कि उसमें कबीर की बात की है तो वोह

982
01:11:12,520 --> 01:11:16,640
कबीर जो है वह परमेश्वर नहीं है क्योंकि यही कह रहे हैं

983
01:11:16,640 --> 01:11:20,640
कि वेदों के द्वारा पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति नहीं है पूर्ण ब्रह्म की बात ही नहीं है

984
01:11:20,640 --> 01:11:24,640
उसमें वेद और गीता में इतना

985
01:11:24,640 --> 01:11:27,560
सारा दुराचार करके

986
01:11:27,560 --> 01:11:31,640
रखा है शास्त्रों का हम वेद को मानते हैं मगर

987
01:11:31,640 --> 01:11:35,760
वेद के द्वारा मोक्ष नहीं है हम वेद के यज्ञ को मानते हैं मगर यज्ञ के

988
01:11:35,760 --> 01:11:40,000
द्वारा मोक्ष नहीं है हम गीता को मानते हैं मगर गीता के द्वारा भी

989
01:11:40,000 --> 01:11:44,160
मोक्ष नहीं है हम वेद को मानते

990
01:11:44,160 --> 01:11:48,600
हैं मगर उसके द्वारा परम ब्रह्म को जाना नहीं जा सकता

991
01:11:48,600 --> 01:11:52,800
हम वेद को मानते हैं मगर उसको कहने वाला उसको बताने वाला अज्ञानी

992
01:11:52,800 --> 01:11:56,920
है मूर्ख है हम काल को भगवान

993
01:11:56,920 --> 01:12:01,200
मानते हैं मगर वह झूठा है लालची है बलात्कारी है व्यभिचारी

994
01:12:01,200 --> 01:12:06,480
है उसके पास ऐश्वर्य नहीं है उसके पास कुछ नहीं

995
01:12:06,480 --> 01:12:10,520
है तो कंक्लूजन सर अगर मैं दूं कि यह

996
01:12:10,520 --> 01:12:14,520
जो मुखौटा पहनते हैं कि हम वेदों के वेदों के अनुकूल

997
01:12:14,520 --> 01:12:18,680
भक्ति बताते हैं शास्त्रों के अनुकूल भक्ति बताते हैं यह जो चित्र छपते

998
01:12:18,680 --> 01:12:23,040
हैं इस नाम पर यह आपको अंदर यह बताते हैं यह शास्त्र

999
01:12:23,040 --> 01:12:27,360
क्यों क्यों गलत है समझ में आया कुछ

1000
01:12:27,360 --> 01:12:31,360
यह जिसका नाम लेकर के आपको अपने पास बुलाते हैं ना यह अंदर

1001
01:12:31,360 --> 01:12:36,120
किताब के अंदर यही बताते हैं कि

1002
01:12:36,120 --> 01:12:40,440
ये जिनका नाम देखकर तू हमारे पास आया है यह लोग तो गलत लोग है

1003
01:12:40,440 --> 01:12:42,600
जिन शास्त्रों को देखकर तू हमारे पास आया है

1004
01:12:42,600 --> 01:12:47,080
य शास्त्र तो गलत शास्त्र है अधूरे हैं अपूर्ण है गलत है

1005
01:12:47,080 --> 01:12:51,400
इसलिए यह कहते हैं कि हम जो है शास्त्रों के अनुकूल भक्ति बताते हैं क्योंकि य उन शास्त्रों

1006
01:12:51,400 --> 01:12:56,560
की बुराई करते हैं उसके अंदर बुराई अब मान

1007
01:12:56,560 --> 01:13:00,600
ना समझे वेदों को जो ना माने वेदों का

1008
01:13:00,600 --> 01:13:04,920
खंडन कर दे तुमने बात जो लिख दी है ये वेदों में वर्णित साधना जो है

1009
01:13:04,920 --> 01:13:08,960
वो मुक्ति नहीं मिलती उससे यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती

1010
01:13:08,960 --> 01:13:13,120
या वो उसमें पूर्ण परम ब्रह्म तक पहुंचाने वाली बात नहीं है

1011
01:13:13,120 --> 01:13:16,520
यह कहीं लिखी है वेदों में

1012
01:13:16,520 --> 01:13:20,560
बात अब तुम कहोगे तत्वदर्शी तो बता रहा है तो तत्वदर्शी

1013
01:13:20,560 --> 01:13:24,680
को तत्वदर्शी से सिद्ध करो अब सिद्ध कहां से करोगे तो सिद्ध हो ही

1014
01:13:24,680 --> 01:13:28,720
नहीं रहा क्योंकि तुम पहले ही कह चुके कि उनके अंदर पूर्ण ज्ञान है ही नहीं अज्ञानी

1015
01:13:28,720 --> 01:13:33,440
ने कहा है वो सब अज्ञानी की बात पर भरोसा कैसे

1016
01:13:33,440 --> 01:13:37,760
करोगे तो अज्ञानी के अनुसार यदि किसी को तुमने तत्वदर्शी कलवा

1017
01:13:37,760 --> 01:13:42,720
भी दिया तो वो तत्वदर्शी कैसे

1018
01:13:42,720 --> 01:13:47,040
होगा पूरा इन्होंने बवंडर मचा रखा

1019
01:13:47,040 --> 01:13:51,760
है तो यह जो कहते हैं ना शास्त्र अनुकूल भक्ति

1020
01:13:51,760 --> 01:13:56,040
इसका अर्थ ये होता है ये जब आप इनके शास्त्रों को पढ़ोगे तो उसमें

1021
01:13:56,040 --> 01:14:00,160
आपको यह पता लगेगा कि इन शास्त्रों में क्या लिखा हुआ है इन

1022
01:14:00,160 --> 01:14:04,480
शास्त्रों की इन शास्त्रों को लिखने वाले की इन शास्त्रों को देने वाले की बुराई

1023
01:14:04,480 --> 01:14:08,600
और फिर इनको छोड़ कर के क्रिश्चन की तरह आप धीरे से इनके

1024
01:14:08,600 --> 01:14:12,800
दूसरा जो उन्होंने अपने आप अपने मन से जो कुछ बना लिया है जो भी है

1025
01:14:12,800 --> 01:14:17,040
उस पर चले जाओ अब कोई आ जाए भाई यह जो इतना सारा

1026
01:14:17,040 --> 01:14:21,080
तुम्हारा है तुम वेदों को मानने वाले सिद्ध नहीं होगे तुम काल को भगवान मानने

1027
01:14:21,080 --> 01:14:25,120
वाले सिद्ध नहीं होंग तुम ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान मानने वाले सिद्ध नहीं हो गे तुम

1028
01:14:25,120 --> 01:14:29,280
गीता को गीता को प्रामाणिक मानने वाले सिद्ध नहीं होंगे उन श्लोकों के

1029
01:14:29,280 --> 01:14:34,320
बाद जो जिन श्लोकों को तुम कहते हो कि काल ने बोल दिया है अपने मन

1030
01:14:34,320 --> 01:14:38,360
से एक दिन की बात है ये जिस दिन पीछे

1031
01:14:38,360 --> 01:14:43,480
पड़ गए ना ऐसी चिंदी में हिंदी एक एक निकाल के रख देंगे

1032
01:14:43,480 --> 01:14:47,640
ना कि खंडन भी एक बार को सोचेगा कि

1033
01:14:47,640 --> 01:14:52,520
कहां मैं छुप जाकर

1034
01:14:52,520 --> 01:14:56,960
के और जो कंक्लूजन लाइन है वो पता है क्या है

1035
01:14:56,960 --> 01:15:01,040
य आपको बुलाते हैं कि आओ आओ वेदों में प्रमाण है गीता में प्रमाण है ये है

1036
01:15:01,040 --> 01:15:05,680
वो हैय सब करके आपको बुलाते तो हैं मगर इनके अकॉर्डिंग

1037
01:15:05,680 --> 01:15:10,480
गीता और वेद में पता है क्या बताया है जो आपको नहीं करना

1038
01:15:10,480 --> 01:15:14,680
है ये इन्होंने स्वीकार भी किया है आपको क्या नहीं करना

1039
01:15:14,680 --> 01:15:18,880
है ब्रह्म की भक्ति नहीं करनी है तो इनका ज्ञान

1040
01:15:18,880 --> 01:15:23,040
कहां तक सीमित है वेद गीता का ज्ञान ब्रह्म तक पूर्ण

1041
01:15:23,040 --> 01:15:27,280
ब्रह्म तक नहीं है वो लाइन दिखा इनका ज्ञान जो है पूर्ण ब्रह्म

1042
01:15:27,280 --> 01:15:33,280
तक नहीं

1043
01:15:40,840 --> 01:15:46,840
है शायद 34 नंबर पेज पर

1044
01:15:46,920 --> 01:15:51,600
है वेदों में वर्णित जो पूजा है

1045
01:15:51,600 --> 01:15:57,600
साधना नहीं मरते नीचे जाइए नीचे जाइए और नीचे

1046
01:15:59,080 --> 01:16:03,120
पूर्ण ब्रह्म की साधना के अतिरिक्त परम ब्रह्म ये है यहीं पर

1047
01:16:03,120 --> 01:16:07,240
कहीं पर लिखा हुआ है हम अगली बार कभी दे देंगे आपको

1048
01:16:07,240 --> 01:16:10,040
पढ़ा था आज हमने

1049
01:16:10,040 --> 01:16:14,520
तो वेदों में वर्णित जो ज्ञान है यज्ञ है ये सब

1050
01:16:14,520 --> 01:16:18,600
वो त वहां तक नहीं है पूर्ण ब्रह्म तक नहीं है वो ब्रह्म

1051
01:16:18,600 --> 01:16:22,720
तक रह जाता है ब्रह्म तक सीमित है वो परम ब्रह्म तक नहीं है

1052
01:16:22,720 --> 01:16:26,960
तो इसका मतलब क्या हुआ ये ये कह रहे हैं कि

1053
01:16:26,960 --> 01:16:31,200
हम वेदों को गीता को मानने वाले हैं क्योंकि हम उसके आधार पर आपको यह बताते

1054
01:16:31,200 --> 01:16:35,360
हैं कि वेद और गीता को क्यों ना मानू बस वेद

1055
01:16:35,360 --> 01:16:39,360
और गीता को क्यों नहीं मानना है इसलिए और तो और

1056
01:16:39,360 --> 01:16:43,440
उसमें इनकी एक चोरी यह फस जाती है कि फिर भी य उन्हीं के उन्हीं में कहीं पर अपना

1057
01:16:43,440 --> 01:16:47,720
कबीर भी ढूंढ लेते हैं तो इन्हीं की बात से इन्हीं की बात कर जाती है जब वेदों

1058
01:16:47,720 --> 01:16:51,880
का ज्ञान ब्रह्म तक सीमित है पूर्ण ब्रह्म तक नहीं है इनका वाला पूर्ण ब्रह्म

1059
01:16:51,880 --> 01:16:56,040
हमारा तो पूर्ण ब्रह्म वही है ब्रह्मी है मगर इनका ब्रम अलग है

1060
01:16:56,040 --> 01:17:00,360
ठीक है तो जब ये यह कह देते कि वेदों का ज्ञान जो ब्रह्म तक सीमित

1061
01:17:00,360 --> 01:17:04,440
है और उसी में फिर कबीर को ढूंढ देते तो वह कबीर भी पूर्ण ब्रह्म सिद्ध

1062
01:17:04,440 --> 01:17:08,920
नहीं होगा ठीक है तो कंक्लूजन लाइन यही है

1063
01:17:08,920 --> 01:17:14,240
कि वेद और गीता के मानने का दावा करने वाले जो य लोग

1064
01:17:14,240 --> 01:17:18,600
हैं हा वेदों के अनुसार अब यहां पर देखिए क्या दोहरी

1065
01:17:18,600 --> 01:17:22,880
बात बोल रहे वेदों के अनुसार साधन ना करने वाले पूर्ण मुक्त नहीं है और दूसरी जगह

1066
01:17:22,880 --> 01:17:27,520
वेदों के अनुसार वेदों का जो वो पूर्ण नहीं है

1067
01:17:27,520 --> 01:17:32,120
उनको मुक्ति नहीं मिलेगी ठीक

1068
01:17:32,120 --> 01:17:36,520
है अभी हमने पहले दिखा दिया है वो वाली लाइन वो पीछे है

1069
01:17:36,520 --> 01:17:40,840
जहां पर लिखा है कि जो वेदों का ज्ञान है वह वही ब्रह्म तक सीमित

1070
01:17:40,840 --> 01:17:46,840
है यह वाला निकालिए गीता का जो ज्ञान है

1071
01:17:50,600 --> 01:17:56,600
यह वह है तो पूर्ण

1072
01:17:58,640 --> 01:18:02,800
जो गीता ज्ञान दाता गिनोना है अभी एक ब

1073
01:18:02,800 --> 01:18:06,920
एक जगह आया था ना गीता और वेद का ज्ञान है वो है तो अच्छा

1074
01:18:06,920 --> 01:18:11,200
ज्ञान मगर वो ब्रह्म तक सीमित है तो ब्रह्म तक यदि उनका ज्ञान सीमित है

1075
01:18:11,200 --> 01:18:15,200
तो तत्वदर्शी अगर जो गीता के अनुसार है व आपको ब्रह्म का ज्ञान देने वाला है मुक्ति का

1076
01:18:15,200 --> 01:18:19,280
ज्ञान देने वाला नहीं है और यदि उसके अंदर

1077
01:18:19,280 --> 01:18:23,440
वेदों के अंदर कबीर है तो वो पूर्ण ब्रह्म नहीं है इनके अनुसार

1078
01:18:23,440 --> 01:18:27,880
वो ब्रह्म तक ही सीमित है क्योंकि वेद और गीता तो यह सारी इनकी पल

1079
01:18:27,880 --> 01:18:33,640
थी और मेरे को जो खून का घूंट पीना पड़ा वह लाइन भी मैं आपको दिखा देता

1080
01:18:33,640 --> 01:18:37,680
हूं हां यह देखिए वेदों का ज्ञान तो

1081
01:18:37,680 --> 01:18:41,720
श्रेष्ठ है परंतु भक्ति की साधना केवल काल ब्रह्म

1082
01:18:41,720 --> 01:18:46,320
की प्राप्ति की है ठीक है

1083
01:18:46,320 --> 01:18:50,440
तो परम ब्रह्म की और एक जगह बिल्कुल स्पष्ट आया वो ब्रह्म तक सीमित

1084
01:18:50,440 --> 01:18:53,720
है वो लाइन भी आई

1085
01:18:53,720 --> 01:18:57,720
है तो अभी हम लोग ये बात कर रहे थे कि

1086
01:18:57,720 --> 01:19:01,840
मेरा जो आज पढ़ते पढ़ते जो है मैंने खून का घूंट क्यों पिया मैं

1087
01:19:01,840 --> 01:19:06,360
वो भी आपको दिखाऊंगा अब इधर देखिए कैसे जहर गोलते हैं हमारी

1088
01:19:06,360 --> 01:19:10,400
माता के बारे में हमारे मन में वो देखिए 89 नंबर पेज

1089
01:19:10,400 --> 01:19:16,400
दिखाइए जरा

1090
01:19:33,840 --> 01:19:38,120
हां देखिए इन्होंने कितनी चालाकी से उनके बारे में कितनी घृणा

1091
01:19:38,120 --> 01:19:42,200
योग्य बातें की है जब वह

1092
01:19:42,200 --> 01:19:46,320
रामचंद्र जी भाव हील हो रहे थे माता सीता के लिए

1093
01:19:46,320 --> 01:19:50,800
तो वह प्रकरण है जिसमें कि जो

1094
01:19:50,800 --> 01:19:55,080
मां पार्वती उनकी परीक्षा लेने जाती है तो देखिए ये जो लाइन है ना

1095
01:19:55,080 --> 01:19:59,320
बीच में आ जाइए बीच में उमा गौरी बोली

1096
01:19:59,320 --> 01:20:03,480
भगवान कभी रोते क्यों नहीं मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी अब

1097
01:20:03,480 --> 01:20:07,840
देखिए परीक्षा लेने का तो बहाना चालू हुआ इनके अनुसार

1098
01:20:07,840 --> 01:20:11,920
कौन है जिसने तब इसको प्रम एक मिनट मिट ज्यादा नीचे

1099
01:20:11,920 --> 01:20:16,240
क्यों जा रहे हैं बीच का पैराग्राफ है थोड़ा ऊपर जाइए हा ये उमा गौरी उमा

1100
01:20:16,240 --> 01:20:20,320
गौरी से शुरू हो रहा है सेकंड पैराग्राफ हा उमा गौरी

1101
01:20:20,320 --> 01:20:21,440
बोली भगवान कभी रोते

1102
01:20:21,440 --> 01:20:26,080
हैं क्या मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी तब इसको

1103
01:20:26,080 --> 01:20:30,120
प्रणाम करूंगी भगवान शिव बोले कि परीक्षा मत लेना

1104
01:20:30,120 --> 01:20:34,120
मगर उन्होंने कहा मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी देखो इन्होंने कितना घिनौना लिखा है

1105
01:20:34,120 --> 01:20:37,720
इसके बाद कि परंतु शिव जी के

1106
01:20:37,720 --> 01:20:42,000
दूर जाते ही छिपकर सीता जी का रूप बनाकर

1107
01:20:42,000 --> 01:20:46,200
यह बोलकर कि मुझे सीता जानकर प्यार व संतोष

1108
01:20:46,200 --> 01:20:48,160
करेगा समझ

1109
01:20:48,160 --> 01:20:52,840
गए यह कैसे जहर घोला जा रहा है

1110
01:20:52,840 --> 01:20:57,320
आपकी मां के बारे में कैसे जहर घोला जा रहा है

1111
01:20:57,320 --> 01:21:01,720
आपके भाइयों के मन में पढ़ लो

1112
01:21:01,720 --> 01:21:05,800
उन्होंने क्या सोचा था क्या सोचा

1113
01:21:05,800 --> 01:21:10,480
उन्होंने कि मुझे सीता जानकर प्यार और संतोष

1114
01:21:10,480 --> 01:21:15,520
करेंगे किस ओर ले जा रहे हैं यह धर्म के नाम पर

1115
01:21:15,520 --> 01:21:20,480
आपको जितना क्रोध प्रकट किया जाए उतना कम है मगर हिंदुओं

1116
01:21:20,480 --> 01:21:26,480
अब भी तुम्हारी आंखें अगर ना खुले ना तो शर्म है

1117
01:21:27,000 --> 01:21:32,760
दे दो भाई लिंक किसी को आना हो तो आ

1118
01:21:32,760 --> 01:21:36,920
जाए शास्त्रों के साथ दुराचार करने वाले

1119
01:21:36,920 --> 01:21:40,920
लोग हैं दुराचार हम शास्त्र को मानते

1120
01:21:40,920 --> 01:21:45,000
हैं क्यों क्योंकि हम यह बताते हैं उन शास्त्रों के अर्थ में कि इन शास्त्रों को क्यों ना

1121
01:21:45,000 --> 01:21:50,000
माना जाए यह है कंक्लूजन यह है रामपाल एंड

1122
01:21:50,000 --> 01:21:54,160
कंपनी हम ब्रह्म को भगवान मानते हैं और ब्रह्म को भगवान

1123
01:21:54,160 --> 01:22:00,160
मान हुए यह बताते कि ब्रह्म कितना घटिया है कितना अनुत्तम

1124
01:22:03,880 --> 01:22:09,880
है दे दो भैया लिंक दे दो इनको अब

1125
01:22:34,400 --> 01:22:38,920
चेहरा लेकर जो आए वही आए बिना चेहरे के नहीं बात की

1126
01:22:38,920 --> 01:22:44,920
जाएगी सात्विक जी कैमरा ऑन कर लीजिए

1127
01:22:44,920 --> 01:22:50,920
अपना रौनक जी कैमरा ऑन कर लीजिए

1128
01:23:04,400 --> 01:23:08,600
अरे भाई उनका कोई हमारे पास संपर्क सूत्र नहीं है आप लोग कहते हो लाइव

1129
01:23:08,600 --> 01:23:12,840
में हम बात करेंगे कोई संपर्क सूत्र

1130
01:23:12,840 --> 01:23:18,840
नहीं है उनका हमारे

1131
01:23:22,920 --> 01:23:27,320
पास जोगेंदर जी ऊपर आ जाइए आपका भांडा फोड़ देंगे

1132
01:23:27,320 --> 01:23:33,320
आपका भी आपके तर्ष दर्शी संत का

1133
01:23:34,000 --> 01:23:38,880
भी बैठ के बात

1134
01:23:38,880 --> 01:23:44,880
करें आवाज आ रही है

1135
01:23:49,200 --> 01:23:53,400
आपको अरे भाई वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है मगर वेद

1136
01:23:53,400 --> 01:23:58,000
तो परम ब्रह्म की बात नहीं करते आपके ही अनुसार रछ

1137
01:23:58,000 --> 01:24:02,160
दर्शी की बात नहीं मानोगे

1138
01:24:02,160 --> 01:24:08,160
क्या वेद तो ब्रह्म तक की बात करते हैं

1139
01:24:16,920 --> 01:24:20,920
बस देखो क्या बोल रहे हैं भगवान भी

1140
01:24:20,920 --> 01:24:25,080
है और कसाई भी है पढ़ लो यह सिखाया तुम्हारे

1141
01:24:25,080 --> 01:24:29,520
भाइयों को तुम लोग कहते हो ना तुम सबकी पोल क्यों खोलते हो

1142
01:24:29,520 --> 01:24:35,520
इसलिए खोलनी पड़ती

1143
01:24:47,440 --> 01:24:51,640
है कोई है नहीं क्या सब भंडारा खाने गए हैं

1144
01:24:51,640 --> 01:24:54,840
क्या महादेव

1145
01:24:54,840 --> 01:25:00,840
महादेव सात्विक जी आप कैमरा ऑन

1146
01:25:14,800 --> 01:25:19,040
कर हा एक बात मैं और याद दिला दूं कि काल को श्राप

1147
01:25:19,040 --> 01:25:23,360
मिला था कि वो पता नहीं कितने जीव को डेली

1148
01:25:23,360 --> 01:25:27,680
खाएगा तो वो साकार निराकार उसकी जन्म और मृत्यु

1149
01:25:27,680 --> 01:25:31,720
होती है कि नहीं ये अगला चैप्टर हम लोग उसम बात करेंगे मगर अभी

1150
01:25:31,720 --> 01:25:36,520
मैं एक बात बताऊं कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई पाप किया

1151
01:25:36,520 --> 01:25:40,560
उस व्यक्ति को सजा य दी गई तू एक एक लाख जीवों को रोज खाएगा और

1152
01:25:40,560 --> 01:25:44,720
उसका जीवों को खाना बुरा कार्य है आपके अनुसार तो

1153
01:25:44,720 --> 01:25:50,720
उसको यह जो श्राप दिया है कि उसको खाना है वो बुरा नहीं

1154
01:25:51,760 --> 01:25:56,480
है कहीं से ये जो आज जो पता चला है ना आप लोगों के बारे में

1155
01:25:56,480 --> 01:26:00,560
आप लोग कहीं से मुंह दिखाने लायक नहीं हो पूरी दुनिया से कहीं पर भी राम

1156
01:26:00,560 --> 01:26:05,400
रामपाल को मानने वाला हो तो व आ जाए सामने अभी

1157
01:26:05,400 --> 01:26:09,640
हर हर महादेव शिवान से भाई हर हर महादेव पा

1158
01:26:09,640 --> 01:26:12,880
नमस्कार

1159
01:26:12,880 --> 01:26:16,960
भैया जय श्री राम

1160
01:26:16,960 --> 01:26:22,400
मतलब आज पूरा खोल के रख दिया

1161
01:26:22,400 --> 01:26:26,440
इनका हां प्रस कर रहा हूं कि इनके जो दो चार

1162
01:26:26,440 --> 01:26:30,640
मोटी मोटी इनकी जो जरूरी जो मेन मेन पुस्तक है ना मेरे पास आ

1163
01:26:30,640 --> 01:26:34,640
जाए अभी तो पीडीएफ से पढ़ा है तो ये निकला है

1164
01:26:34,640 --> 01:26:38,920
अभी तो ये लोग माने नहीं ना तो फिर मैं एक एक जो गीता का इन्होने

1165
01:26:38,920 --> 01:26:43,280
जो एक एक बात बोली है ना एक एक लेंस लेकर के

1166
01:26:43,280 --> 01:26:47,640
बैठेंगे इसम सबसे बड़ा सरद क्या पता है इनकी गरमा गीता की पढ़ोगे

1167
01:26:47,640 --> 01:26:51,880
आप भाई जैसे मैंने कुछ भी पढ़ा कुछ भी कहीं से भी पढ़ लो व तुरंत

1168
01:26:51,880 --> 01:26:55,880
अरे इसका तो ये तो गलत लिखा है अब जब मैं उसको गलत सोचूंगा तो

1169
01:26:55,880 --> 01:27:00,680
उसके लिए जानकारी प्रमाण वगैरह नोट करने चला जाऊंगा हा

1170
01:27:00,680 --> 01:27:04,680
जितनी बार में उसके लिए प्रमाण निकालने जाऊंगा जहां जाऊंगा वहां पर

1171
01:27:04,680 --> 01:27:07,720
फिर दूसरी नई बात यह भी गलत है

1172
01:27:07,720 --> 01:27:12,480
आप ये सोचने लगोगे कि मैं शुरू करूं तो कहां से

1173
01:27:12,480 --> 01:27:17,240
करूं यह दिक्कत हो जाती है पूरी खिचड़ी बना रखी है मतलब

1174
01:27:17,240 --> 01:27:21,560
पूरा बिल्कुल सटर भाई अगर आप गीता के आधार पर

1175
01:27:21,560 --> 01:27:25,560
वो वेदों के आधार पर गीता को नहीं मानते हो तो आप बाद में वेदों का भी

1176
01:27:25,560 --> 01:27:29,640
खंडन कर रहे हो वेदों को भी लिख रहे हो

1177
01:27:29,640 --> 01:27:33,840
अच्छा आपने ये बात कैसे बोल दी कि वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है

1178
01:27:33,840 --> 01:27:37,840
यह कहीं लिखी है क्या गीता में पुराण में उपनिषद

1179
01:27:37,840 --> 01:27:42,320
में वेद में कहीं लिखी है क्या कहीं नहीं लिखा है अच्छा

1180
01:27:42,320 --> 01:27:46,360
अब ये बात तत्वदर्शी कह रहा है अच्छा तत्वदर्शी कौन है जो गीता

1181
01:27:46,360 --> 01:27:50,360
गीता में तो पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं तो उसका

1182
01:27:50,360 --> 01:27:55,920
ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी हमारे काम का कहां से हो जाएगा

1183
01:27:55,920 --> 01:28:00,040
ब्रह्म का ज्ञान देने वाले को ब्रह्मचारी कह रहे हैं जो गीता में जो बात आई है

1184
01:28:00,040 --> 01:28:04,560
वह ब्रह्मचारी के विरुद्ध आई है वो तो परम ब्रह्मचारी है इनके

1185
01:28:04,560 --> 01:28:08,720
अनुसार जो गीता का ज्ञान जो गीता का तत्वदर्शी है वह

1186
01:28:08,720 --> 01:28:12,760
परम ब्रह्मचारी है और वेद क रहे ब्रह्मचारी तो वेद

1187
01:28:12,760 --> 01:28:17,240
के विरुद्ध इन्होने कहा कि वेद के विरुद्ध गीता की कोई बात मान नहीं

1188
01:28:17,240 --> 01:28:21,480
पागल कर दिया इन्होने मुझे जीजी के

1189
01:28:21,480 --> 01:28:23,200
पागल लोग

1190
01:28:23,200 --> 01:28:26,960
निकालेंगे पागल कर दिया पागल कर

1191
01:28:26,960 --> 01:28:31,120
दिया मैं तो आपकी हिम्मत की दात देता हूं कि इतनी कॉमेडी बुक

1192
01:28:31,120 --> 01:28:35,360
आपने पढ़ी और बिना हसे पढ़ी आपने अरे मुझे रोना

1193
01:28:35,360 --> 01:28:39,440
आ गया वो ये वाली जो लाइन थी ना ये पढ़ के दिमाग खराब हो गया ऐसा लगा

1194
01:28:39,440 --> 01:28:44,200
जैसे हां कुछ बहुत गंदी बातें लिखी

1195
01:28:44,200 --> 01:28:48,640
है शब्द नहीं है इतना बुरा लगा मुझे वो पढ़ के

1196
01:28:48,640 --> 01:28:54,560
भैया मैं कुछ बात बोलना चाहूंगा जी

1197
01:28:54,560 --> 01:28:58,680
अब जैसे यह जो रामपाल वाले हैं यह भगवान श्री कृष्ण को काल

1198
01:28:58,680 --> 01:29:02,760
बताते हैं और द्वापर युग

1199
01:29:02,760 --> 01:29:07,280
में यह बताते कि मुनंदर नाम से कबीर जी आए थे और वोह भगवान थे

1200
01:29:07,280 --> 01:29:11,760
तो मुनंदर जी थे वो खुद ने ज्ञान क्यों नहीं दिया

1201
01:29:11,760 --> 01:29:15,840
इनको काल का ही ज्ञान क्यों देना है फिर वो भी तो खुद

1202
01:29:15,840 --> 01:29:20,720
भी तो ज्ञान देना चाहिए था ना उसको वो खुद ज्ञान क्यों नहीं दिया

1203
01:29:20,720 --> 01:29:24,920
वो खुद अपने ग्रंथ बनाता खुद उसकी परिपाटी चलाता कह दिया

1204
01:29:24,920 --> 01:29:29,560
वेद का ज्ञान बोलने वाला जो है वह अज्ञानी है

1205
01:29:29,560 --> 01:29:34,000
तो यह कहां से सनातनी हो गए

1206
01:29:34,000 --> 01:29:38,080
बताइए जो यह कह दे कि वेद का ज्ञान देने वाला ज्ञानी है

1207
01:29:38,080 --> 01:29:42,160
गीता का ज्ञान देने वाला ज्ञानी है वो सनातनी कहां

1208
01:29:42,160 --> 01:29:46,320
से हो गया गता वेद में मुक्ति नहीं है

1209
01:29:46,320 --> 01:29:50,360
वो सनातनी क से हो गया मुनि ऋषि थे

1210
01:29:50,360 --> 01:29:55,880
वो क्या रंग रंग लिए बनाने आए थे क्या य पर द्वापर युग में

1211
01:29:55,880 --> 01:30:00,120
नहीं ऐसी बात नहीं है ऐसी मटिया मेट करके रखी है शास्त्रों

1212
01:30:00,120 --> 01:30:04,240
की इन्होंने ऐसी मटिया मेंट के अरे भाई

1213
01:30:04,240 --> 01:30:08,520
आ जाओ किसी ने माता जी का निष्ठा पूर्वक पिलाया हो पिया

1214
01:30:08,520 --> 01:30:14,520
हो आ जाए जल्दी जल्दी आए दयाल दास

1215
01:30:14,680 --> 01:30:18,680
जी य आवाज कहां से आई य

1216
01:30:18,680 --> 01:30:23,520
सात्विक जी बोले कौन बोले सात्विक जी बोलिए

1217
01:30:23,520 --> 01:30:27,560
जी कोई कमेंट में थे दयाल दास जी वो बड़ा ज्ञान बगार

1218
01:30:27,560 --> 01:30:32,240
रहे थे बुलाई उन्हे हा कहां है दयाल दास

1219
01:30:32,240 --> 01:30:36,320
नहीं आएंगे कोई ये लोगों का कैसे बात

1220
01:30:36,320 --> 01:30:41,040
करेंगे जो बात बोलेंगे उसका खंडन हो गया य गीता का प्रमाण देंगे

1221
01:30:41,040 --> 01:30:45,200
देख गीतो का गीता का ज्ञान परम ब्रम प्राप्ति का नहीं है ले कैसे खंडन कैसे

1222
01:30:45,200 --> 01:30:49,360
प्रमाण दे रहा गीता से नहीं वो क रहे वेद

1223
01:30:49,360 --> 01:30:55,000
का प्रमाण देंगे तो ले वेदों का ज्ञान तो परम ब्रम है ही नहीं

1224
01:30:55,000 --> 01:30:59,000
पुराणों में मिलावट हो रखी है मैंने पूछा जिस पूर्ण ब्रम

1225
01:30:59,000 --> 01:31:05,000
की केवल बात हुई

1226
01:31:07,080 --> 01:31:11,160
हो इनका हमारे जो शास्त्र है ना वो इसलिए नहीं पढ़ते

1227
01:31:11,160 --> 01:31:15,560
कि हमें उनसे ज्ञान लेना है आ जाओ य प

1228
01:31:15,560 --> 01:31:19,880
माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो आइए

1229
01:31:19,880 --> 01:31:24,200
आ जाइए इतना समझ में आया

1230
01:31:24,200 --> 01:31:28,480
कि हमारे जो शास्त्र है जितने भी ग्रंथ हैं वह इस

1231
01:31:28,480 --> 01:31:32,520
मकसद से नहीं पढ़ते हैं कि हमें इससे ज्ञान लेना है वो इस हिसाब से पढ़ते हैं

1232
01:31:32,520 --> 01:31:37,040
कि हमने कबीर दास जी को बड़ा साबित करना है और

1233
01:31:37,040 --> 01:31:41,360
जो नहीं हमें इस शास्त्र को गलत कैसे सिद्ध करना है

1234
01:31:41,360 --> 01:31:45,360
हा यही है इनका प्रावधान इनका कंक्लूजन क्या है कि

1235
01:31:45,360 --> 01:31:49,360
एंड द एंड जो वेद है उनसे मुक्ति नहीं है वेद है

1236
01:31:49,360 --> 01:31:53,520
उसमें पूर्ण ब्रह्म नहीं है वेद है उनको कहने वाला ज्ञानी है इसी

1237
01:31:53,520 --> 01:31:57,600
प्रकार गीता है एट द एंड यही है निचोड़

1238
01:31:57,600 --> 01:32:01,600
और फिर भी यह वेदों को मानने वाले हैं फिर भी यह गीता

1239
01:32:01,600 --> 01:32:05,880
को मानने वाले हैं यह छुपे हुए ये छुपे हुए अब्राम

1240
01:32:05,880 --> 01:32:09,920
लोग है अब्राम लोग है य लोग छुपे हुए

1241
01:32:09,920 --> 01:32:14,240
इनका धीरे धीरे कन्वर्जन तो इनको पता चल जाएगा

1242
01:32:14,240 --> 01:32:18,800
कि भैया एक मिनट एक मिनट

1243
01:32:18,800 --> 01:32:22,240
जी तत्वदर्शी दयाल दास जी कृपया

1244
01:32:22,240 --> 01:32:27,560
आ जाइए आप बड़े ज्ञान दे रहे थे आप कमेंट

1245
01:32:27,560 --> 01:32:31,920
में ये कमेंट वीर है

1246
01:32:31,920 --> 01:32:36,000
अरे कमेंट भीर नहीं है ऐसे ऐसे कमेंट कर रहे नहीं है इस तरह के लोग

1247
01:32:36,000 --> 01:32:40,000
कमेंट के नीच होते हैं अरे

1248
01:32:40,000 --> 01:32:44,120
मतलब मैंने पूछा कि आपको कैसे पता चला पुराणों में

1249
01:32:44,120 --> 01:32:48,160
मिलावट हो गई है तो मतलब अभद्र कमेंट कर रहे हैं हर कुछ लिख रहे हैं

1250
01:32:48,160 --> 01:32:52,320
भाई तुम्हारे भगवान ने ऐसा क्यों किया भगवान ने ऐसा क्यों किया अरे भाई तो तुम्हारी माता

1251
01:32:52,320 --> 01:32:56,840
जी ने तुम्हें पैदा करने के लिए तुम भी नकार दो

1252
01:32:56,840 --> 01:33:00,840
तुम्हारी माता जी ने तुम्हे पैदा करने के लिए विवाह क्यों कि क्यों करते हो कि नहीं वेद

1253
01:33:00,840 --> 01:33:04,960
में प्रमाण है ओ फ नाटक

1254
01:33:04,960 --> 01:33:08,960
री माता जी ने तो सीधी बात है ना तुम्हारी माता जी

1255
01:33:08,960 --> 01:33:14,960
ने तुम्हें पैदा करने के लिए विवाह क्यों किया ऐसे भी तो हो सकते

1256
01:33:17,240 --> 01:33:21,280
थे हां भैया कोई आने वाला है क्या

1257
01:33:21,280 --> 01:33:27,040
नहीं जो रामपाल दास हुआ है

1258
01:33:27,040 --> 01:33:33,040
मामला सब जेल धाम में गए हुए हैं

1259
01:33:33,120 --> 01:33:37,160
ना अब कोई कोई बंदा अपने आंखों से

1260
01:33:37,160 --> 01:33:41,200
कोई कोई चीज देखे सामने चलो कबीर दास जी हुए व तो

1261
01:33:41,200 --> 01:33:45,360
एक इतिहास है भाई साब कह रहे वैभव जी कि यह जो है

1262
01:33:45,360 --> 01:33:49,480
रामपाल दास जी के जो फॉलोअर्स होते हैं वो बिना विवाह के ही पैदा

1263
01:33:49,480 --> 01:33:54,080
हुए हैं यानी अवैध संताने हैं मगर एक तरीके से देख

1264
01:33:54,080 --> 01:34:00,080
तो इनकी बात तार्किक भी सिद्ध होती है क्यों

1265
01:34:00,200 --> 01:34:04,360
क्योंकि जो अगर इनका ज्ञान यह कहता है कि अभी

1266
01:34:04,360 --> 01:34:08,360
तक जो इनके जो पूर्वज जो करते आ रहे थे वह शास्त्र

1267
01:34:08,360 --> 01:34:12,600
सम्मत भक्ति नहीं कर रहे थे शास्त्र सम्मत जो चीजें हैं वह नहीं कर रहे थे

1268
01:34:12,600 --> 01:34:16,640
इनके इनका जो विवाह का तरीका है वह विवाह का

1269
01:34:16,640 --> 01:34:20,720
तरीका अभी रामपाल दास जी इत्यादि ने अभी कुछ

1270
01:34:20,720 --> 01:34:24,840
इसी पीढ़ी में प्रदान किया है तो मतलब इससे पहले जो

1271
01:34:24,840 --> 01:34:29,080
विवाह हुए थे वो सही नहीं हुए थे वो विवाह थे ही नहीं क्योंकि

1272
01:34:29,080 --> 01:34:33,120
रामपाल दास जी तो मना करते हैं उन विवाहों का खंडन करते हैं तो इसका मतलब

1273
01:34:33,120 --> 01:34:37,440
क्या है कि उससे उत्पन्न संतान ये खुद कह रहे हैं कि हम जो है कौन है

1274
01:34:37,440 --> 01:34:41,480
वो आप लोग सब समझ जाओ मैंने अपनी लाइफ

1275
01:34:41,480 --> 01:34:45,520
में पहले ऐसे देखे जो उनके पूर्वजों को कोई गाली दे रहा हो और वहां पर

1276
01:34:45,520 --> 01:34:49,560
बैठ के वो ताली बजा रहे हो उनकी जय जयकार कर

1277
01:34:49,560 --> 01:34:54,040
रहे हो जिस जो उनके पूर्वजों को गाली दे रहा अज्ञानी कह रहा हो

1278
01:34:54,040 --> 01:34:58,120
कि उनको ज्ञान नहीं था और वो बैठ के ताली बजा

1279
01:34:58,120 --> 01:35:02,520
रहे ये लोग जितना नकली इनका जो दोहरा दोगलापन है ना

1280
01:35:02,520 --> 01:35:06,520
वोह कैसे जब अपनी बात कहती हो गीता ज्ञान दाता में व काल

1281
01:35:06,520 --> 01:35:10,600
भगवान यह कह रहे य कह रहे आज इनकी जो असलियत सामने आ गई तो अब

1282
01:35:10,600 --> 01:35:14,680
यह बन गए विधर्मी अरे तुम्हारे तो वेदों में य लिखा

1283
01:35:14,680 --> 01:35:15,280
है तुम्हारे तो

1284
01:35:15,280 --> 01:35:19,280
पुराणों में य लिखा है अभी तक इनके भी थे

1285
01:35:19,280 --> 01:35:23,800
अब इनकी सच्चाई सामने आ गई तो उसम ये लिखा है वो लिखा है

1286
01:35:23,800 --> 01:35:28,040
इनके भगवान है ना इनके जो भगवान है वह सिर्फ इनके हिसाब से कार्य करें

1287
01:35:28,040 --> 01:35:34,040
य ऐसा चाहते हैं अपने हिसाब से वह कुछ भी नहीं कर

1288
01:35:36,160 --> 01:35:38,760
सकते

1289
01:35:38,760 --> 01:35:42,920
भ कहां है भाई जितेंद्र दास आज मैं बहुत भूखा हूं जल्दी आ जाइए

1290
01:35:42,920 --> 01:35:48,840
आप मैं भी काल हुआ हूं बड़ा

1291
01:35:48,840 --> 01:35:52,840
हुआ मैं भी बड़ा हुआ काल हूं आ जाइए लाइव

1292
01:35:52,840 --> 01:35:57,040
में भाई आप आउट ऑफ कोर्स का जो क्वेश्चन पूछ लेते

1293
01:35:57,040 --> 01:36:01,040
हो ना वो उसी में अटक जाते हैं वो इनका जो रटा टाया ज्ञान है जो

1294
01:36:01,040 --> 01:36:05,040
गीता का पुराणों का जो दो चार लाइन जो पढ़ रखी है उनके ऊपर ही

1295
01:36:05,040 --> 01:36:10,480
आप डिस्कस करोगे तो ये लोग करेंगे पर वो भी आधा अधूरा है

1296
01:36:10,480 --> 01:36:15,240
इनका नहीं पता है क्या होता है अब जैसे कोई बात कर रहे हैं

1297
01:36:15,240 --> 01:36:19,520
उस बात करने के लिए बोलते हैं कि हम इसका जवाब देंगे फिर वो लाइव में आते हैं

1298
01:36:19,520 --> 01:36:23,600
लाइव में आते यदि उनको फिर क्वेश्चन दूसरा पूछ लेते हैं ना फिर वो फिर

1299
01:36:23,600 --> 01:36:27,680
आ जाते हैं वो फिर उनकी हड़बड़ी मत जाती

1300
01:36:27,680 --> 01:36:31,680
है अभी जो लास्ट वाला हुआ था बाबू राम यादव फटक

1301
01:36:31,680 --> 01:36:36,200
के नहीं अब बाबूराम यादव अब जो है

1302
01:36:36,200 --> 01:36:39,680
गुरु द्रोही व पटक

1303
01:36:39,680 --> 01:36:43,920
नहीं अरे वो अमित दास से आपके हुआ नहीं था एक

1304
01:36:43,920 --> 01:36:48,200
दिन आपकी चर्चा हुई थी आपको

1305
01:36:48,200 --> 01:36:52,520
आपने उनको काल और श्री कृष्ण भगवान एक ही है क आपने

1306
01:36:52,520 --> 01:36:56,640
उनको भर भर के आपने प्रमाण दिए व दूसरे दिन

1307
01:36:56,640 --> 01:37:00,640
जाकर आपकी कटिंग निकाल के वीडियो बना रहा है कि की शिवांश

1308
01:37:00,640 --> 01:37:04,800
द्विवेदी और रामपाल के फ्लवर

1309
01:37:04,800 --> 01:37:09,040
जो रामपाल के शिष्य उनके बीच तगड़ी बहस हुई अरे

1310
01:37:09,040 --> 01:37:13,080
व तो गंजा जो गंजा है व अपने व

1311
01:37:13,080 --> 01:37:17,080
तत्वदर्शी का भी सगा नहीं है उसके लोग उसको

1312
01:37:17,080 --> 01:37:21,240
मना कर रहे मत जाया करो शिवांश द्वेदी की लाइव में तुम्हारा मुह नहीं अच्छा

1313
01:37:21,240 --> 01:37:25,760
है व फिर भी इसलिए उसको यहां से कंटेंट मिले

1314
01:37:25,760 --> 01:37:30,040
कंटेंट के चैनल

1315
01:37:30,040 --> 01:37:34,920
चला कौन है भाई कुछ

1316
01:37:34,920 --> 01:37:39,800
94 चेहरा दिखाए अभी जस्ट

1317
01:37:39,800 --> 01:37:44,160
एक वीडियो देख रहा था

1318
01:37:44,160 --> 01:37:48,320
वहा पर एक पदम पुराण में है कि हां वो ऋषि मुनि की एक

1319
01:37:48,320 --> 01:37:52,760
वार्तालाप आती है उसमें भी इनको आधा अधूरा दिखा के भ्रमित किया है

1320
01:37:52,760 --> 01:37:56,880
अब जो षि मुनि थे उनके जो पित आते हैं तो उनने विवाह

1321
01:37:56,880 --> 01:38:00,880
नहीं किया होता ऋषि मुनि ने तो पि आक उनसे बोलते हैं

1322
01:38:00,880 --> 01:38:05,560
कि जो तुम ये जो पुण्य काम रह गया है ये विवाह का तुमने किया नहीं

1323
01:38:05,560 --> 01:38:10,040
उसको तो रुचि मुनि ने कहा कि क्या हु जितेंद्र

1324
01:38:10,040 --> 01:38:14,480
दास जी आप आप जो है आप आइए

1325
01:38:14,480 --> 01:38:18,840
ऊपर आइए ऊपर आकर बात करिए ना क्या हुआ

1326
01:38:18,840 --> 01:38:19,920
बचपन में माता जी ने

1327
01:38:19,920 --> 01:38:25,680
निष्ठा पूर्वक पान नहीं कराया क्या आपको

1328
01:38:25,680 --> 01:38:29,920
या फिर आपके जो न संत उन्होंने आपको सीधी

1329
01:38:29,920 --> 01:38:34,560
कोई बात नहीं बताई जिसके कारण आप आ सके सामना कर

1330
01:38:34,560 --> 01:38:38,680
सके क्यों मंडल जी सुबह से लाइव करना अगर

1331
01:38:38,680 --> 01:38:42,720
आपको शास्त्र का प्रमाण चाहिए सुब

1332
01:38:42,720 --> 01:38:47,000
अभी नहीं है ना अभी तक है नहीं ना उनके पास प्रमाण तो अभी बोल क्यों रहे

1333
01:38:47,000 --> 01:38:51,360
हो फम भरो सुबह भी कर लेंगे फम भरो 740

1334
01:38:51,360 --> 01:38:55,080
नंबर नोट करो

1335
01:38:55,080 --> 01:38:59,200
14369 फॉर्म भरो आपके अनुसार भी टाइमिंग

1336
01:38:59,200 --> 01:39:03,200
रखेंगे सुबह बोलो सुबह शाम बोलो शाम एनी टाइम

1337
01:39:03,200 --> 01:39:09,200
एनी वेयर एनीबडी आई एम

1338
01:39:10,800 --> 01:39:14,880
रेडी भाई एक आखिरी चोट तब

1339
01:39:14,880 --> 01:39:18,960
मारनी पड़ेगी ना जब एक ऐसा मंच ढूंढा

1340
01:39:18,960 --> 01:39:24,960
जाए जहां मतलब की एक व्यापक रूप से हमारी बात पहुंच सके

1341
01:39:25,200 --> 01:39:29,320
यह कौन आया सुंदर सिंह सुंदर सिंह

1342
01:39:29,320 --> 01:39:34,880
जी चेहरा

1343
01:39:34,880 --> 01:39:38,880
दिखाए शदा बी इससे ज्यादा बड़ी और कौन सी

1344
01:39:38,880 --> 01:39:43,160
बात हम लोग ढूंढे जब यह लोग यह कह रहे हैं कि वेदों में

1345
01:39:43,160 --> 01:39:47,400
पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं मुक्ति का ज्ञान है ही नहीं गीता में पूर्ण

1346
01:39:47,400 --> 01:39:51,520
ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं मुक्ति का ज्ञान है ही नहीं अब इससे ज्यादा और

1347
01:39:51,520 --> 01:39:56,200
बात ला को

1348
01:39:56,200 --> 01:40:00,640
गल तुम गीता का प्रमाण क्यों दिखा रहे

1349
01:40:00,640 --> 01:40:04,640
ये क्यों बोल तुम गीता दिखाकर

1350
01:40:04,640 --> 01:40:08,640
हमको यह बताना चाहते हो कि गीता गलत क्यों है तो सीधे कहो ना गीता

1351
01:40:08,640 --> 01:40:12,960
को मत नहीं म मत माना करो हमारी अब्राम करण इस्लामीकरण

1352
01:40:12,960 --> 01:40:18,960
क्रिश्चन क्रिश्चियनिटी इन सब चीजों को अपना

1353
01:40:20,240 --> 01:40:24,320
लो स्लोली स्लोली कन्वर्जन हो चुका बहु

1354
01:40:24,320 --> 01:40:29,560
का हो चुका है और ये यह जो कन्वर्जन है ना यह देखिए आप

1355
01:40:29,560 --> 01:40:33,560
हरियाणा हरियाणा पंजाब क्यों हो रहा है यह

1356
01:40:33,560 --> 01:40:37,600
लोग जो कहते ना वर्ण व्यवस्था को नहीं मानेंगे और मूर्ति पूजा को नहीं

1357
01:40:37,600 --> 01:40:42,440
मानेंगे देख लो वही की वही का जन्म हैय जहां इनका

1358
01:40:42,440 --> 01:40:46,840
इनका सबसे बड़ा गढ़ है जो यह आर समाज का

1359
01:40:46,840 --> 01:40:50,880
यह जो सबसे बड़ी जो वर्ण व्यवस्था पर जो पानी फेरा गया कोई भी अपने आप

1360
01:40:50,880 --> 01:40:54,920
को आचार्य कह रहा है उसका नतीजा प्रणाम है उसका

1361
01:40:54,920 --> 01:40:58,960
जो आज इन्होने ऐसा ऐसी भ्रष्ट की है और आर्थ समाज

1362
01:40:58,960 --> 01:41:03,160
को तो फुर्सत है नहीं ना जो रामपाल वालों के ऊपर

1363
01:41:03,160 --> 01:41:07,440
बात करे वो तो दयानंद सरस्वती के लिए कुछ कह दिया रामपाल

1364
01:41:07,440 --> 01:41:11,800
ने कमेंट कर दिया तो भिड़ गए सही

1365
01:41:11,800 --> 01:41:15,880
कहा देखो रामपाल ने क्या किया वह हर एक चीज करने

1366
01:41:15,880 --> 01:41:20,360
को मना किया जो तुम्हें सनातन से जोड़ती हो बस

1367
01:41:20,360 --> 01:41:25,080
हर अंत तो गत्वा उसने वेद को मना कर दिया

1368
01:41:25,080 --> 01:41:31,080
भाई अंत तो उसने गीता को भी मना कर

1369
01:41:32,040 --> 01:41:36,360
दिया राखी में रक्षा बंधन हमारी होती है उसम

1370
01:41:36,360 --> 01:41:40,680
क्या लॉजिक दिया रामपाल ने की इस दिन बहुत से बहनों की या

1371
01:41:40,680 --> 01:41:44,880
भाइयों भाइयों की हाथ सुनी रह जाती

1372
01:41:44,880 --> 01:41:50,880
क्योंकि इस दिन एक्सीडेंट ज्यादा होते हैं य कोई लॉजिक

1373
01:41:52,240 --> 01:41:56,760
है करते टाइम हुआ था जब ये कोर्ट में हाजिर नहीं हुए

1374
01:41:56,760 --> 01:42:02,680
थे मारे गए थे

1375
01:42:02,680 --> 01:42:06,680
लोग अरे कहां हो भाई और दिन भी

1376
01:42:06,680 --> 01:42:11,480
तो एक्सीडेंट होते हैं वेर आर द फॉलोअर्स ऑफ

1377
01:42:11,480 --> 01:42:15,600
रामपाल सर उन्होंने निष्ठा पूर्वक नहीं स

1378
01:42:15,600 --> 01:42:19,800
नहीं पिया नहीं पिया है जिसका गु

1379
01:42:19,800 --> 01:42:23,920
दयालदास जी आइए आइए दयालदास जी ना

1380
01:42:23,920 --> 01:42:27,960
ये जो फैक्ट भाई अभिषेक बताते हैं ना इनमें से किसी

1381
01:42:27,960 --> 01:42:32,080
ने नहीं पान किया है क्यों अरे भाई इतना तुम्हारे

1382
01:42:32,080 --> 01:42:36,160
35 36 हज फॉलोअर्स है यह देखिए जेल में बाबा

1383
01:42:36,160 --> 01:42:41,320
रामपाल के दर्शन को जा रहे थे हादसे में 13 की मौत

1384
01:42:41,320 --> 01:42:47,320
यह देख लो भैया काल खा गया काल काल खा गया

1385
01:42:50,760 --> 01:42:55,520
हा राधिका अधिकार पाद मैं आऊ

1386
01:42:55,520 --> 01:43:00,560
राम पाली की तरफ से उनसे तो बढ़िया मैं प्रमाण दे दूंगा

1387
01:43:00,560 --> 01:43:06,560
आप वास्तविकता में उनके फॉलोअर हो तो

1388
01:43:08,920 --> 01:43:13,000
आए कितना दोगलापन है कितना दोगलापन है कि हम आपको वेद

1389
01:43:13,000 --> 01:43:17,000
समत भक्ति बताएंगे हम आपको गीता समत भक्ति बताएंगे फिर उसका अर्थ

1390
01:43:17,000 --> 01:43:21,440
करते समय हम आपको यह बताएंगे गीता को क्यों नहीं मानना है

1391
01:43:21,440 --> 01:43:26,040
वेद को क्यों नहीं मानना है चोड़ है ये कंक्लूजन सर है रामपाल

1392
01:43:26,040 --> 01:43:30,320
के तमाम सटर घोट का कंक्लूजन सर कि वेद

1393
01:43:30,320 --> 01:43:34,480
का वेद का मतलब बताते हुए गीता का मतलब बताते हुए

1394
01:43:34,480 --> 01:43:38,680
आपको यह बताया जाएगा कि वेद को क्यों नहीं मानना चाहिए गीता

1395
01:43:38,680 --> 01:43:44,040
को क्यों नहीं मानना

1396
01:43:44,040 --> 01:43:48,080
चाहिए बन ये क्या कह रहे हैं ये

1397
01:43:48,080 --> 01:43:52,120
रामपाल कहते हैं आवान चैनल पर शिवांश

1398
01:43:52,120 --> 01:43:58,120
नाम का काल है है पहले उसे हटाओ हम फिर फिर

1399
01:43:58,600 --> 01:44:02,080
आएंगे क्या

1400
01:44:02,080 --> 01:44:07,480
हुआ मृत्यु का सही अर्थ नहीं पता है

1401
01:44:07,480 --> 01:44:11,920
इनको मृत्यु का सही अर्थ नहीं पता है इसीलिए

1402
01:44:11,920 --> 01:44:16,320
नहीं आ रहे सही अर्थ पता होता तो आ जाते कायर ना बनते अर्ध

1403
01:44:16,320 --> 01:44:20,480
ज्ञानी है ज्ञानी पूरा नहीं है तो कहां से पढ़ाई पूरा नहीं

1404
01:44:20,480 --> 01:44:24,600
है अरे अर्ध ज्ञानी भी नहीं है ऐसी बातें है ना ये

1405
01:44:24,600 --> 01:44:30,600
यह तो एक दो दिन मैंने जरा सरसरी निगाहों से मैंने इनका देखा ये कह क्या रहे

1406
01:44:30,680 --> 01:44:34,800
हैं यह तो ऐसी बात है यह अगर आपने शुरू में कर

1407
01:44:34,800 --> 01:44:39,000
दी ना यह बात जैसे सर्वशक्तिमान यह

1408
01:44:39,000 --> 01:44:43,040
बात अगर शुरू में आपने कर दी तो वही पर खत्म हो गई बहस वही पर चर्चा पूरी

1409
01:44:43,040 --> 01:44:47,240
हो गई उससे आगे क्या करोगे श

1410
01:44:47,240 --> 01:44:51,480
भाई आपकी बातों का जवाब दे ही नहीं पाएंगे क्योंकि यह वहां यह चीज

1411
01:44:51,480 --> 01:44:55,680
बताई नहीं गई है इनको रटा गया है फलाना

1412
01:44:55,680 --> 01:44:59,160
अध्याय फलाना श्लोक फलाना

1413
01:44:59,160 --> 01:45:03,320
वेद फलाना सूक्त फलाना मंत्र बस

1414
01:45:03,320 --> 01:45:07,520
पैसे दे दे पैसे पैसे ले लेकर गए थे ज्ञान लेने ये लोग

1415
01:45:07,520 --> 01:45:11,520
वहां पे और आपको एक

1416
01:45:11,520 --> 01:45:15,640
आवश्यक बात मैं बताऊ कि इन्होंने गपला एक और किया

1417
01:45:15,640 --> 01:45:20,400
है अभी मैंने उस पर तो बात की नहीं है इन्होंने क्या किया अपने मन से हर जगह अपना एक

1418
01:45:20,400 --> 01:45:24,400
कारण लिख दिया कि ऐसा है इसलिए ऐसा है कारण का कहीं

1419
01:45:24,400 --> 01:45:29,320
कोई संस्कृत वो नहीं है अपने मन से लिख दिया हर जगह कारण

1420
01:45:29,320 --> 01:45:33,400
कि ऐसा इसलिए किया काल ने ऐसा इसलिए अपने चंगल में फसाने के लिए वो

1421
01:45:33,400 --> 01:45:37,600
अपने जैसे काल ने कहा कि मेरी मेरे अंदर की शांति को प्राप्त होगा काल

1422
01:45:37,600 --> 01:45:41,640
ने यह कहा आगे लिख दिया काल के अंदर की शांति

1423
01:45:41,640 --> 01:45:46,200
का मतलब क्या है काल के जाल में फस कर रहेगा लो साहब

1424
01:45:46,200 --> 01:45:50,720
शांति का अर्थ शांति होता है काल का जाल कहा से आ गया अभी

1425
01:45:50,720 --> 01:45:54,760
इनके एक कारण का और खंडन कर यह कारण बताते

1426
01:45:54,760 --> 01:45:58,800
हैं क्योंकि मैं इतना जानकार नहीं हूं यह अपन बोलते कि

1427
01:45:58,800 --> 01:46:02,920
परमात्मा साकार भी और निराकार भी है हम बोलते हैं ना

1428
01:46:02,920 --> 01:46:08,000
तो पता है क्या बोलते हैं कि अंधा भी है और दिखता भी

1429
01:46:08,000 --> 01:46:12,240
है य उदाहरण देते हैं तो मान रहे

1430
01:46:12,240 --> 01:46:14,240
इनका इनका जोकट था

1431
01:46:14,240 --> 01:46:18,320
पहले निराकार था मान तो निराकार था व

1432
01:46:18,320 --> 01:46:23,000
प्रकट हुआ तो ये तो का मानता है रामपाल तो खुद बैठता है नहीं

1433
01:46:23,000 --> 01:46:27,120
आकार तो कोई था ही नहीं साकार है अभी ये मान लेंगे हमसे जैसे जैसे बात

1434
01:46:27,120 --> 01:46:31,320
होती जाएगी मान लेंगे सब मान लेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान मान

1435
01:46:31,320 --> 01:46:35,360
लेंगे यह धीरे धीरे सब मान लेंगे

1436
01:46:35,360 --> 01:46:39,480
उस दिन एक ने मान लिया था ना गायत्री मंत्र को जो तिरछा दर्शी संत

1437
01:46:39,480 --> 01:46:43,560
है जेल धाम में वो गायत्री मंत्र का जाप करते ब्रह्मा मां भगवती

1438
01:46:43,560 --> 01:46:47,560
की निरंतर पूजा करते हैं मान तो लिया व कल कल

1439
01:46:47,560 --> 01:46:53,560
परसों बाबूदास नहीं फस गया था वो

1440
01:46:53,960 --> 01:46:58,280
अभी इन्होंने हमारे क्षेत्र में क्या किया लोगों को

1441
01:46:58,280 --> 01:47:00,600
लोगों

1442
01:47:00,600 --> 01:47:04,800
सुनलो लोगों को पैसे दे दे के पास कोई

1443
01:47:04,800 --> 01:47:09,520
मत जाना और इनका ज्ञान पढ़ो जाकर के उसम

1444
01:47:09,520 --> 01:47:13,600
काल का ज्ञान मिलेगा आपको तत्वदर्शी जो त्रा दर्शी

1445
01:47:13,600 --> 01:47:17,800
जो तत्वदर्शी बनके जेल धाम में बैठे हैं उनके पास जाना जेल

1446
01:47:17,800 --> 01:47:23,800
धाम में वहा अच्छे से स्वागत होगा आपका

1447
01:47:29,040 --> 01:47:33,200
अभी यह वेदों का खंडन यहां से भी करते हैं मार्क पुराण

1448
01:47:33,200 --> 01:47:37,240
में जो रुचि रुचि मुनि की जो कहानी है ना इसमें बता रखा है

1449
01:47:37,240 --> 01:47:41,440
तो रुचि मुनि ने मुनि ने अपने जो पित्र थे उनसे पूछा वेदों में

1450
01:47:41,440 --> 01:47:45,680
कर्म मार्ग को अविद्या कहा गया है फिर क्यों आप लोग मुझे उस मार्ग पर लगाते

1451
01:47:45,680 --> 01:47:49,680
हो यह लाइन दिखाई उने यह सत्य

1452
01:47:49,680 --> 01:47:54,480
है कि कर्म को अविद्या ही कहा गया है इसमें तनि मिथ्या नहीं है

1453
01:47:54,480 --> 01:47:58,560
इतना ही दिखाते हैं व आगे और बहुत कुछ बोल रखा आगे क्या बोला उन्होने

1454
01:47:58,560 --> 01:48:03,040
फिर भी इतना तो निश्चित है कि उस विद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है

1455
01:48:03,040 --> 01:48:03,540
यह

1456
01:48:03,280 --> 01:48:07,640
नहीं बताया उस विद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है विहित

1457
01:48:07,640 --> 01:48:11,800
कर्म का पालन ना करने से जो अधम मनुष्य जो अधम मनुष्य

1458
01:48:11,800 --> 01:48:16,600
संयम करते हैं वह संयम अंत में मोक्ष की प्राप्ति नहीं

1459
01:48:16,600 --> 01:48:20,680
करता साहिल किरोड़ीवाल अगर वेदों

1460
01:48:20,680 --> 01:48:25,440
के अनुसार कबीर भगवान है तो कबीर परम ब्रह्म नहीं है समझ गए

1461
01:48:25,440 --> 01:48:29,680
क्योंकि वेदों की जो बात है वह परम ब्रह्म की नहीं है ब्रह्म की बात है

1462
01:48:29,680 --> 01:48:34,240
वे वेदों के अनुसार तो कबीर काल है

1463
01:48:34,240 --> 01:48:38,280
और सुनो और सुन लो अगर

1464
01:48:38,280 --> 01:48:42,440
कबीर तत्वदर्शी के द्वारा बताया गया कबीर है तत्वदर्शी संत के द्वारा

1465
01:48:42,440 --> 01:48:46,800
बताया गया कबीर है तो वह भी तुम्हारे

1466
01:48:46,800 --> 01:48:51,000
पूर्ण ज्ञान का विषय नहीं है मोक्ष का विषय नहीं है क्यों

1467
01:48:51,000 --> 01:48:55,280
क्योंकि जो तत्वदर्शी है गीता के आधार पर गीता का यह जो तत्वदर्शी वाला

1468
01:48:55,280 --> 01:48:59,360
मामला है वह ब्रह्मचारी वेद के विरोध में

1469
01:48:59,360 --> 01:49:03,480
है तो गीता को नहीं मान सकते गीता को ना मानने के कई कारण

1470
01:49:03,480 --> 01:49:08,120
है क्योंकि वह वेद का विरोध कर रही है आपके अनुसार तो ना मानो

1471
01:49:08,120 --> 01:49:12,720
और क्योंकि तुम खुद कह रहे हो कि गीता में पूर्ण मुक्ति का ज्ञान नहीं है तो ना मानो

1472
01:49:12,720 --> 01:49:17,000
बात खत्म अब जब आपने यह कह दिया कि गीता में वेद में मुक्ति का

1473
01:49:17,000 --> 01:49:18,600
मुक्ति का पूर्ण मुक्ति का इंतजाम

1474
01:49:18,600 --> 01:49:22,720
नहीं है तो उसमें आने वाला जो आपके अनुसार कबीर है

1475
01:49:22,720 --> 01:49:26,760
वो भी पूर्ण मुक्ति वाला नहीं रहा कितनी तरह की बातें

1476
01:49:26,760 --> 01:49:31,560
करोगे मेरे भाई कितनी तरह की बातें

1477
01:49:31,560 --> 01:49:36,360
करोगे चलिए फिर ओवर करते हैं आज की लाइव को

1478
01:49:36,360 --> 01:49:40,960
ठीक है नहीं है कोई लगता है सब भंडारे में

1479
01:49:40,960 --> 01:49:45,280
है सब आना भैया किसी ने किसी की माता जी ने निष्ठा

1480
01:49:45,280 --> 01:49:49,840
पूर्वक पान कराया हो तो

1481
01:49:49,840 --> 01:49:54,120
और काफी रोचक रहा आज का आ

1482
01:49:54,120 --> 01:49:58,920
करते नीचे पता है लड़का क्या लिख रहा है

1483
01:49:58,920 --> 01:50:04,920
कि दयाल दास की माने दयाल दास को कुवारी गाय का दूध नहीं [हंसी]

1484
01:50:11,960 --> 01:50:15,960
पिला कोई एक ऐसा मंच ढूंढो जहां से मतलब की

1485
01:50:15,960 --> 01:50:20,120
हमारी जो आपकी जो बात है वोह व्यापक रूप से

1486
01:50:20,120 --> 01:50:25,080
फैले और इनके जैसे

1487
01:50:25,080 --> 01:50:29,760
बीच का रास्ता जैसे आप ढूंढ रहे थे कोई क्योंकि यह लोग तो आएंगे नहीं

1488
01:50:29,760 --> 01:50:34,200
ये उनको पता चल गया पोल खुलने वाली लोग तो आएंगे नहीं

1489
01:50:34,200 --> 01:50:38,240
अब हम ही लोगों को जाना पड़ेगा और व्यापक रूप से इनको

1490
01:50:38,240 --> 01:50:43,640
दिखाना पड़ेगा लोगों को इनकी

1491
01:50:43,640 --> 01:50:47,720
सच्चाई क्योंकि यहां पर हम यहां पर कुछ ही

1492
01:50:47,720 --> 01:50:51,840
लोग आते हैं आ हज 15 हज 20 हज लोगों ने देखा और

1493
01:50:51,840 --> 01:50:56,360
अगर पूरे उसमें फेलेग आपकी बात

1494
01:50:56,360 --> 01:51:00,800
नहीं लोग सम में आएगा उनको मैं बता दू मैं बहुत जल्द

1495
01:51:00,800 --> 01:51:05,000
किसी तगड़े व्यक्ति के साथ जो आपके अनुसार तगड़ा

1496
01:51:05,000 --> 01:51:09,320
हो उनके साथ में जाने जा जाने उनके पास में जाने वाला

1497
01:51:09,320 --> 01:51:13,440
हूं बिल्कुल तब इनको सरप्राइज होगा और अपने

1498
01:51:13,440 --> 01:51:17,760
अपने शहरों में फोन लगाकर बता देना कि शिवांश आ तो पंगा मत लेना

1499
01:51:17,760 --> 01:51:22,560
क्योंकि मैं पहुंचने वाला हूं और यह लाइव चलाना बिल्कुल आप

1500
01:51:22,560 --> 01:51:28,560
बिल्कुल बिल्कुल हो सके तो टीम के साथ लाइव चलाना तब मजा

1501
01:51:29,040 --> 01:51:33,560
आएगा लोगों को पता चले

1502
01:51:33,560 --> 01:51:37,760
आज एक बिटिया है उसने भी बताया

1503
01:51:37,760 --> 01:51:41,920
कि उसकी जो मम्मी माता जी मम्मी कहती है माता

1504
01:51:41,920 --> 01:51:46,120
जी जो फसी हुई थी रामपाल के जाल में

1505
01:51:46,120 --> 01:51:50,120
वो भी जो है मुक्त हो गई है उन्होंने कह दिया डिक्लेयर

1506
01:51:50,120 --> 01:51:55,560
कर दिया मैं नहीं मानती अब बिल्कुल

1507
01:51:55,560 --> 01:52:00,200
है मेरे भी है तीन लोगों को मैंने निकाला पर उन्होने कहा कि नाम मत

1508
01:52:00,200 --> 01:52:04,360
लेना बताना मत क्योंकि मुझे

1509
01:52:04,360 --> 01:52:08,600
लग रहा है कुछ अंदर से भी कुछ चीजें है इनकी शायद ऐसी कुछ

1510
01:52:08,600 --> 01:52:13,800
मुझे लग रहा

1511
01:52:13,800 --> 01:52:17,880
है अब इन्होंने पता है वहां पर क्या किया लोगों को अपने उसमें लाने

1512
01:52:17,880 --> 01:52:22,000
के लिए सब तरफ बैनर लगा रखे हैं हम हम

1513
01:52:22,000 --> 01:52:26,760
हम हम हम लोग जो है दहेज मुक्त विवाह कराते हैं

1514
01:52:26,760 --> 01:52:31,360
मुफत विवा नाम दीक्षा फ्री फ्री

1515
01:52:31,360 --> 01:52:35,600
फ्री आंखों की जाच फ्री फ्री फ्री दांतों

1516
01:52:35,600 --> 01:52:40,040
की जाच फ्री फ्री फ्री और एकज और

1517
01:52:40,040 --> 01:52:44,160
क्या था भंडारा फ्री फ्री फ्री याद है कुछ

1518
01:52:44,160 --> 01:52:47,480
याद आया फ्री

1519
01:52:47,480 --> 01:52:51,640
फी नहीं अभी अभी इनके भंडारे चालू है इधर हमारे साइड

1520
01:52:51,640 --> 01:52:55,800
तो अभी इन्होने रैली निकाली थी रामपाल जी के नाम से है ना

1521
01:52:55,800 --> 01:53:00,000
तो रैली निकाल के जब रैली रैली निकालने

1522
01:53:00,000 --> 01:53:04,360
के बाद जब रैली खत्म हुई तो उसके बाद इन्होंने एक पालना मंगवाया और रामपाल

1523
01:53:04,360 --> 01:53:09,200
जी की फोटो पालने में रख के झुलाई है आधे घंटे तक अरे वाह

1524
01:53:09,200 --> 01:53:13,200
अच्छा लड्डू गोपाल जी बता के भाई ये हमारे लड्डू गोपाल जी और

1525
01:53:13,200 --> 01:53:17,360
भजन गाए है अच्छा इनके लोग भी इनके

1526
01:53:17,360 --> 01:53:21,560
लोग भी हस रहे थे तो वो तो वृद्ध है वो तो बैठे हुए हैं जेल

1527
01:53:21,560 --> 01:53:25,440
में उन्हीं को जुला ले

1528
01:53:25,440 --> 01:53:29,480
जाके वो तो अभी प्राप्त है ना उनका शरीर तो

1529
01:53:29,480 --> 01:53:33,520
चले जाते जेल जेल

1530
01:53:33,520 --> 01:53:37,640
में अलाउ नहीं तो वो तो तत्वदर्शी है

1531
01:53:37,640 --> 01:53:42,000
अवतार है कबीर के परम ब्रह्म के पूर्ण ब्रह्म के

1532
01:53:42,000 --> 01:53:46,760
वह जेल में होने से पता चल जाता है हां

1533
01:53:46,760 --> 01:53:50,760
भाई अरे भैया चेहरा दिखाओगे कि जाओगे

1534
01:53:50,760 --> 01:53:54,760
चेहरा दिखाओ चेहरा

1535
01:53:54,760 --> 01:54:00,040
चेहरा दिखाना है

1536
01:54:00,040 --> 01:54:04,600
आपको अरे हां ना बोल दो फिर चले जाओ चेहरा दिखाना है

1537
01:54:04,600 --> 01:54:08,680
अरे कबीर साहेब जी चेहरा दिखा दीजिए य आवाज

1538
01:54:08,680 --> 01:54:12,760
किसकी आ रही है पीछे से ये महके जी

1539
01:54:12,760 --> 01:54:18,760
के वहां से आ रही है चले गए जिन्ने जल्दी थी वो चले

1540
01:54:20,000 --> 01:54:24,280
गए ये हमारे जो शंकराचार्य है या

1541
01:54:24,280 --> 01:54:29,120
और भी जो गुरु हैं उनसे कहते आ जाओ

1542
01:54:29,120 --> 01:54:33,200
उनसे कहते रहते कि गुंडे में

1543
01:54:33,200 --> 01:54:39,200
बोलो दिनेश

1544
01:54:39,640 --> 01:54:45,640
दास बोलो राम राम जी राम

1545
01:54:47,400 --> 01:54:53,400
राम बोलो कैसे हो भा जी

1546
01:54:54,600 --> 01:54:59,400
जी

1547
01:54:59,400 --> 01:55:04,240
बताओ अभी सभी हमारे जो भगत भाई हैं

1548
01:55:04,240 --> 01:55:08,240
वो सभी आश्रमों में भंडारा चल रहा

1549
01:55:08,240 --> 01:55:12,680
है भाई साहब देखिए काम की बात करिए

1550
01:55:12,680 --> 01:55:16,680
अगर नहीं करनी है तो फिर दोबारा आइए जब करनी हो हम

1551
01:55:16,680 --> 01:55:20,680
यहां पर आपके प्रचारक नहीं बैठे हैं जो आपके मैसेजेस

1552
01:55:20,680 --> 01:55:26,520
लोगों तक पहुंचाए हैं आपकी आपकी महिमा का गान करवाए ठीक

1553
01:55:26,520 --> 01:55:32,160
है कोई और बात करनी है आपको सर ला के

1554
01:55:32,160 --> 01:55:36,240
बताइए नहीं सर इला के बताइए े

1555
01:55:36,240 --> 01:55:40,320
जो विवेचन चल रहा है विषय से संबंधित कोई बात करनी है

1556
01:55:40,320 --> 01:55:45,680
रामपाल तत्वदर्शी है सिद्ध करेंगे

1557
01:55:45,680 --> 01:55:49,880
आप हां या ना

1558
01:55:49,880 --> 01:55:53,920
हां या ना ऐसे कर बतासे क्या अरे तो

1559
01:55:53,920 --> 01:55:59,560
आपका शिस थोड़ी ऐसे करो वैसे करो क्या पूछना वो बताइए गन

1560
01:55:59,560 --> 01:56:03,680
बोको लड़ना है इनको कुछ करना नहीं है भैया इनको मत खोला

1561
01:56:03,680 --> 01:56:07,800
करो बिना इनको हटाइए ये यहां पर केवल विघ्न डालने

1562
01:56:07,800 --> 01:56:11,960
आ रहे हैं इनको अपना मत नहीं रखना इनके पास कुछ है नहीं

1563
01:56:11,960 --> 01:56:16,080
रखने के लिए जब इनको बोलने को कहा

1564
01:56:16,080 --> 01:56:20,280
गया तो क्या बोल रहे हैं रामपाल दास के सभी भगत जी ये वो अरे भाई ये सब बातें

1565
01:56:20,280 --> 01:56:25,120
यहां से क्यों बता रहे हो जाओ अपने चैनल पर जाओ जाके वहां

1566
01:56:25,120 --> 01:56:30,600
बताओ आपने इस लक छोड़ा ही नहीं उनको कि कुछ बोल सके

1567
01:56:30,600 --> 01:56:36,600
वो बोलना है

1568
01:56:38,600 --> 01:56:43,280
कुछ जो टॉपिक चल रहा है दिनेश जी उस पर बात की

1569
01:56:43,280 --> 01:56:48,480
रामपाल तत्वदर्शी है गुस्स बहुत जल्दी हो जाते हो

1570
01:56:48,480 --> 01:56:52,960
आप फिर देखो देख रहे हो पॉइंट की बात नहीं

1571
01:56:52,960 --> 01:56:57,000
करो क्योंकि है नहीं प पॉइंट की बात

1572
01:56:57,000 --> 01:57:01,480
करेंगे पहले शांत हो जाओ थोड़ चलो शांत है

1573
01:57:01,480 --> 01:57:05,840
भाई मैं आपसे पूछ रहा र् है हा तत्वदर्शी

1574
01:57:05,840 --> 01:57:10,240
है व तत्वदर्शी संत है और क्या बता रहे तत्वदर्शी संत

1575
01:57:10,240 --> 01:57:14,640
कैसे है बताइए बताइए क्या पूछ त

1576
01:57:14,640 --> 01:57:19,480
किसे माना है आपने देखिए

1577
01:57:19,480 --> 01:57:23,520
सभी शास्त्रों का भेद खोलकर उन्होने बता

1578
01:57:23,520 --> 01:57:27,840
दिया हिंदू धर्म से छोड़ सभी शास्त्रों का लकर

1579
01:57:27,840 --> 01:57:32,000
हमें किस चीज का ज्ञान प्राप्त होता है ये बताएंगे आप परमात्मा की

1580
01:57:32,000 --> 01:57:36,320
वास्तविक जो परमात्मा है जो जो वास्तव में परमात्मा है पूर्ण

1581
01:57:36,320 --> 01:57:40,440
ब्रम है उसकी जानकारी पूर्ण ब हा उसकी जानकारी संत

1582
01:57:40,440 --> 01:57:44,480
रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी की ये जो व्याख्या है इसका गीता

1583
01:57:44,480 --> 01:57:48,760
का कोई आधार है अपने मन से बोल रहे हैं गीता के आधार

1584
01:57:48,760 --> 01:57:54,760
से ही बताया है गीता में कहां पर लिखी है जानकारी तत्वदर्शी

1585
01:57:54,880 --> 01:57:59,320
की लिखी है ना अध्याय के पहले

1586
01:57:59,320 --> 01:58:03,400
15 अध्याय के एक से चार तक देखिए आप अ

1587
01:58:03,400 --> 01:58:07,640
पहले शलोक एक से चार में ये लिखा है कि तत्वदर्शी

1588
01:58:07,640 --> 01:58:11,880
जो है वह पूर्ण ब्रम की पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देता है

1589
01:58:11,880 --> 01:58:16,480
ठीक है यह नहीं लिखा है उसम लिखा है

1590
01:58:16,480 --> 01:58:20,920
कि जो संसार रूपी उल्टे लटके हुए पीपल के वृक्ष

1591
01:58:20,920 --> 01:58:24,960
के सारे विभागों भिन्न भिन्न तरीके से बता देगा वह

1592
01:58:24,960 --> 01:58:29,000
वेदों के जानने वाला होगा तो उसका अर्थ नीचे दिया

1593
01:58:29,000 --> 01:58:33,240
हुआ है जान के होगा क्या क्या मिलेगा

1594
01:58:33,240 --> 01:58:37,480
आपको तत्वदर्शी से मिलेगा क्या

1595
01:58:37,480 --> 01:58:41,960
भगवान की जानकारी मुक्ति की जानकारी हम क्यों पैदा होते हैं ज

1596
01:58:41,960 --> 01:58:46,160
लेते की जानकारी मिलेगी अच्छ पूर्ण

1597
01:58:46,160 --> 01:58:50,160
ब्रम ब्रम से अलग है या ब्रम ही है नहीं

1598
01:58:50,160 --> 01:58:54,400
बहुत सारे ब्रम हो गए इसलिए ब्र लगाना पड़ता है ब्रह्म पर्याप्त है लेकिन

1599
01:58:54,400 --> 01:58:58,440
बहुत सारे ब्रह्म हो गए तो इसलिए ब्र ब्र लगाना पड़ता है ये

1600
01:58:58,440 --> 01:59:02,680
कहा लिखा है क्या लिखा

1601
01:59:02,680 --> 01:59:06,680
है देख इसलिए पूर्ण लगाना

1602
01:59:06,680 --> 01:59:10,200
पड़ता है आप सुन लीजिए कोई

1603
01:59:10,200 --> 01:59:15,440
हनुमान जी को भी भगवान कोई शंकर जी को भी

1604
01:59:15,440 --> 01:59:19,760
भगवान कहता है ये जो नियम है बहुत सारे ब्रम

1605
01:59:19,760 --> 01:59:23,960
हो गए इसलिए पूर्ण लगाना पड़ता है यह नियम कहा लिखा है भाई

1606
01:59:23,960 --> 01:59:28,400
साहब गीता जी में लिखा उसने लिखा है कि

1607
01:59:28,400 --> 01:59:32,800
तीन ब्रम है ओ तीन भगवान बताए

1608
01:59:32,800 --> 01:59:38,800
उसम भी आप खुद देख

1609
01:59:39,880 --> 01:59:44,000
लीजिएगा य काल है जो भगवान है नहीं आपका

1610
01:59:44,000 --> 01:59:48,400
है य हमारा नहीं काल आपका भगवान नहीं है

1611
01:59:48,400 --> 01:59:54,000
ना

1612
01:59:54,000 --> 01:59:58,000
काल का मंत्र नहीं जपते काल का

1613
01:59:58,000 --> 02:00:02,200
मंत्र जपते हैं लेकिन भक्ति नहीं करते साधना करते उसकी उसके लोक से निकलने

1614
02:00:02,200 --> 02:00:06,400
के लिए काल का मतलब काल भगवान नहीं है कुल मिलाकर के मगर

1615
02:00:06,400 --> 02:00:12,320
उसका मंत्र उसके लोक से निकलने के लिए जते हो य

1616
02:00:12,320 --> 02:00:17,480
देखलो को भगवान दिखाए आपकी गीता में

1617
02:00:17,480 --> 02:00:21,520
बताइए बताइए काल को भगवान कहा है दिखा दो

1618
02:00:21,520 --> 02:00:26,400
भैया वाला पेज अभी शुरू में दिखाया

1619
02:00:26,400 --> 02:00:30,440
आपके त्र दर्शी तत्वदर्शी संत ने हा तो

1620
02:00:30,440 --> 02:00:34,480
कहा है ना भगवान तो कृष्ण जी को भी कहा है विष्णु जी को भी कहा है

1621
02:00:34,480 --> 02:00:38,600
और क्या बोलते हैं शंकर जी को भी कहा है लेकिन लेवल के भगवान रहने

1622
02:00:38,600 --> 02:00:42,600
दो र लेवल के भगवान है वहा पर वो भी

1623
02:00:42,600 --> 02:00:46,600
कहा है वो भी देखिए नाय कहो ना कि

1624
02:00:46,600 --> 02:00:50,680
उस लेवल के नहीं है आप कह रहे हो भगवान नहीं मानते उ आपने उदाहरण

1625
02:00:50,680 --> 02:00:54,800
दिया संत रामपाल जी जी का कि उन्होंने भगवान कहा है लेकिन आगे की लाइन

1626
02:00:54,800 --> 02:00:58,840
नहीं पढ़ी आपने कि कितने लेवल के भगवान बताया भ है

1627
02:00:58,840 --> 02:01:02,960
वो यहां से शुरू हुई थी कि मैंने आपसे पूछा था आप काल को भगवान नहीं मानते

1628
02:01:02,960 --> 02:01:07,360
आपने कहा नहीं मानते आपने यह नहीं कहा कि मैं उस लेवल का भगवान नहीं मानता

1629
02:01:07,360 --> 02:01:09,040
हूं आपने कहा मैं

1630
02:01:09,040 --> 02:01:13,200
भगवान ही नहीं मानता हूं नहीं नहीं मैंने हद

1631
02:01:13,200 --> 02:01:17,480
है ऐसा नहीं है वो जिस लेवल के है अरे हम भी जिस लेवल के इंसान

1632
02:01:17,480 --> 02:01:22,200
है उस लेवल के हर व्यक्ति का भी पद होता है ऐसे उनका भील

1633
02:01:22,200 --> 02:01:26,400
प है मुझे बताओ ठीक है मैं समझ गया आपकी बात कि आपके वो स्तर के

1634
02:01:26,400 --> 02:01:31,200
वाले भगवान पूर्ण भगवान नहीं है पर भगवान है अब मुझे एक ब बताओ

1635
02:01:31,200 --> 02:01:36,040
कि 700 में से कितने श्लोक वो वाले श्लोक कौन से हैं

1636
02:01:36,040 --> 02:01:39,680
जो काल ने अपने मन से बोल दिए

1637
02:01:39,680 --> 02:01:44,080
हैं 35 श्लोक कौन से

1638
02:01:44,080 --> 02:01:48,440
जो वेदों से मैच नहीं करता ना ज्ञान वो कौन ककन से

1639
02:01:48,440 --> 02:01:52,440
शलोक वो कौन अब वो देख

1640
02:01:52,440 --> 02:01:56,440
के बताया जाएगा ना ऐसे थोड़ी ऐसे मख थोड़ी बता देंगे एकदम

1641
02:01:56,440 --> 02:02:00,480
पता है उसम देख के बताएंगे पूरी खोलनी पड़ेगी दिखाए

1642
02:02:00,480 --> 02:02:05,200
जी ने कहीं लिखा है क्या ये कौन-कौन से श्लोक है वो

1643
02:02:05,200 --> 02:02:09,320
दर्सी जी ने सारा बता रखा सारा खोल के बता रखा लिखा है कुछ

1644
02:02:09,320 --> 02:02:15,080
पता है क्या सब बताया है कहां लिखा

1645
02:02:15,080 --> 02:02:19,200
है सारी डिटेल पूछोगे तो फिर मेरे को देखना पड़ेगा खोलनी पड़ेगी बहुत

1646
02:02:19,200 --> 02:02:23,440
टाइम लगेगा अच्छा अब मैं मूल प्रश्न प आ जाता जी

1647
02:02:23,440 --> 02:02:24,080
जी आपने

1648
02:02:24,080 --> 02:02:28,120
कहा कि गीता के अनुसार तत्वदर्शी है और तत्वदर्शी से हमें

1649
02:02:28,120 --> 02:02:32,280
मिलता क्या है पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति ब्रह्म की प्राप्ति तो नहीं मिलती

1650
02:02:32,280 --> 02:02:36,360
ना सारा ज्ञान टोटल ज्ञान ए टू जेड ज्ञान मिलता

1651
02:02:36,360 --> 02:02:40,560
है तो टोटल जन मल है

1652
02:02:40,560 --> 02:02:44,800
पूर्ण ब्रह्म क्या टोटल ज्ञान से अलग है क्या टोटल

1653
02:02:44,800 --> 02:02:49,960
में पूर्ण ब्रह्म भी आ गया आत्म ज्ञान भी आ गया परमा ज्ञान भी आ गया

1654
02:02:49,960 --> 02:02:54,080
जन टोटल ज्ञान आ अगर आपने पूर्ण ब्रह्म कह दिया तो उससे

1655
02:02:54,080 --> 02:02:58,080
बाहर कुछ बचा ही नहीं कुछ भी ठीक

1656
02:02:58,080 --> 02:03:02,400
है तो तत्वदर्शी जो है वो पूर्ण तत्वदर्शी तत्वदर्शी इसलिए

1657
02:03:02,400 --> 02:03:06,440
क्योंकि वो पूर्ण ब्रह्म की पूर्ण ज्ञान की जानकारी आपको देता है ठीक

1658
02:03:06,440 --> 02:03:10,560
है जी जी अच्छा वेदों

1659
02:03:10,560 --> 02:03:14,800
में जो सूक्त है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है

1660
02:03:14,800 --> 02:03:19,120
उसको प्रामाणिक आचार्य कहा गया है वेदों में जी जी

1661
02:03:19,120 --> 02:03:23,680
वहा पर पूर्ण ब्रह्मचारी नहीं कहा गया

1662
02:03:23,680 --> 02:03:27,080
ब्रह्म अलग है ना पूर्ण ब्रह्म

1663
02:03:27,080 --> 02:03:31,120
से तो गीता कह रही है पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला

1664
02:03:31,120 --> 02:03:35,400
प्रामाणिक है आचार्य गुरु और वेद कह रहे ब्रह्म का ज्ञान

1665
02:03:35,400 --> 02:03:39,240
देने वाला प्रामाणिक है आचार्य गुरु और तत्वदर्शी संत आपके

1666
02:03:39,240 --> 02:03:43,520
कह रहे हैं कि जो चीज वेदों से मेल नहीं खाती गीता

1667
02:03:43,520 --> 02:03:47,840
की वो मान्य नहीं है तो यह जो चीज है

1668
02:03:47,840 --> 02:03:51,840
कि पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है ये

1669
02:03:51,840 --> 02:03:55,920
वेदों से मैच नहीं खा रही है क्योंकि वेद में लिखा है कि ब्रह्म का ज्ञान देने

1670
02:03:55,920 --> 02:04:01,040
वाला प्रामाणिक गुरु

1671
02:04:01,040 --> 02:04:06,080
है ब्रह्म का ज्ञान देने वाला हा तो ठीक है ना ब्रह्म का ज्ञान

1672
02:04:06,080 --> 02:04:10,200
भगवान नहीं तो ब्रह्म जो है पूर्ण ब्रम पूर्ण ब्रम

1673
02:04:10,200 --> 02:04:14,360
कह लीजिए उसको लेकिन ब्रह्म पर्याप्त है भगवान के संबोधन के लिए

1674
02:04:14,360 --> 02:04:18,520
ब्रम मा भगवान होता है आपके पूरे में कहां लिखा है कि ब्रह्म

1675
02:04:18,520 --> 02:04:22,520
पर्याप्त है रामपाल ने कहां माना है यह बताओ कहां

1676
02:04:22,520 --> 02:04:26,920
पर लिखा है देखिएगा उनके हजारों

1677
02:04:26,920 --> 02:04:31,120
सने कहा ये लोग धीरे धीरे हमारी सब बातें मान लेंगे अब ये ब्रह्म

1678
02:04:31,120 --> 02:04:36,720
पर आ गए कि हा ब्रह्म और पूर्ण ब्रह्म एक ही है अय इस पर आ

1679
02:04:36,720 --> 02:04:42,720
गए जी जी भा ब्रम तो अलग है

1680
02:04:43,960 --> 02:04:49,720
ना तो गीता जी ने क्यों कहा है ब्रम

1681
02:04:49,720 --> 02:04:53,320
सर्र गता का

1682
02:04:53,320 --> 02:04:57,360
ता गीता का वो ज्ञान जो वेदों से मैच नहीं खाता

1683
02:04:57,360 --> 02:05:01,360
वो गलत है हा तत्वदर्शी जो है वो पूर्ण ब्रम की

1684
02:05:01,360 --> 02:05:05,480
जानकारी देने वाला है और वेद कह रहे हैं कि प्रामाणिक गुरु वो है जो

1685
02:05:05,480 --> 02:05:09,800
ब्रह्म की जानकारी दे हम

1686
02:05:09,800 --> 02:05:13,800
ठीक है तो क्या दोबारा बोलो

1687
02:05:13,800 --> 02:05:19,280
दोबारा बोलो क्या बताया आपने दोबारा

1688
02:05:19,280 --> 02:05:23,360
बोलू नहीं नहीं हसो मत दोबारा बोलो कोई दिक्कत नहीं

1689
02:05:23,360 --> 02:05:27,560
समझ में नहीं आया दिक्कत नहीं है तो क्या कुछ करोगे क्या हमारा अभी

1690
02:05:27,560 --> 02:05:31,960
बात जो बोली है वो बताई

1691
02:05:31,960 --> 02:05:36,160
क्या हां सुनो हां बताओ गीता

1692
02:05:36,160 --> 02:05:40,440
कह रही है कि पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक

1693
02:05:40,440 --> 02:05:45,000
गुरु है जिसको आप तत्वदर्शी कहते हैं ठीक है

1694
02:05:45,000 --> 02:05:49,640
वेद कह रहे हैं ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है

1695
02:05:49,640 --> 02:05:54,440
ठीक है हमम तो गीता की य जो बात है

1696
02:05:54,440 --> 02:05:58,560
यह वेद से मैच नहीं खा रही तो इसको मत मानो नहीं

1697
02:05:58,560 --> 02:06:02,640
ऐसा नहीं है कि एक श्लोक आपने पढ़ा तो उसम एक लोक में एक

1698
02:06:02,640 --> 02:06:06,600
ही बात लिखी हुई

1699
02:06:06,600 --> 02:06:10,760
है गीता जी है गीता जी जो है वो वेदों का सारांश तो है

1700
02:06:10,760 --> 02:06:14,560
ऐसा तो नहीं है कि वेदों का सारा

1701
02:06:14,560 --> 02:06:19,480
जन से मैच नहीं खाता वो मान्य नहीं है मैच करवाओ इसको

1702
02:06:19,480 --> 02:06:24,440
इसको मैच करवाओ वेद से इसको मैच करवाए

1703
02:06:24,440 --> 02:06:29,200
हा ठीक है तो इसको भी मैच करके बता देंगे चलिए

1704
02:06:29,200 --> 02:06:32,400
आपने

1705
02:06:32,400 --> 02:06:36,680
आपने इसीलिए आए टाइम खोटी बच करके बता देंगे

1706
02:06:36,680 --> 02:06:42,680
पढ़ के बता

1707
02:06:43,600 --> 02:06:48,480
देंगे यह व्यक्ति कम से कम 10 बार आ चुका है अब तक

1708
02:06:48,480 --> 02:06:52,520
जय श्री कृष्ण शिवांश भाई क क रहा है वो नाक

1709
02:06:52,520 --> 02:06:56,520
में हाथ डाल डाल करके नाक में नाक में उंगली कर कर के वो क्या कह रहा

1710
02:06:56,520 --> 02:07:00,520
है ये कि भाई जय श्री राम अरे

1711
02:07:00,520 --> 02:07:04,800
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मैं कह रहा था मुझे मैं तो बताता

1712
02:07:04,800 --> 02:07:08,920
उसको आज बताता हूं 10 दिन आ गया एक ही बात रट के आ रहा है कभी उसकी अलग

1713
02:07:08,920 --> 02:07:12,960
बात है वही बात घूम फिर करके अरे मूर्खो केरे मूर्खो

1714
02:07:12,960 --> 02:07:17,120
कितना दिमाग खराब कराओ ग कितने मूर्ख है वो वही

1715
02:07:17,120 --> 02:07:21,200
बात बात बने सुनो

1716
02:07:21,200 --> 02:07:25,560
य य यय यह बताने आए हैं कि हम बता देंगे

1717
02:07:25,560 --> 02:07:29,760
अरे कब बताएंगे कब बताएंगे जिंदगी चले जाएगी तुम्हारी आज तब बताएंगे

1718
02:07:29,760 --> 02:07:33,920
जब मेरे से एक दिन मेरे से बोलने दिया करो मैं बो कितने

1719
02:07:33,920 --> 02:07:38,080
दिन बताओगे तुम तुम पाखंडी को असली बता रहे असली को नकली बता

1720
02:07:38,080 --> 02:07:42,320
रहे तो भला कहां से होने वाला आप लोगों का दिमाग ने खराब

1721
02:07:42,320 --> 02:07:47,520
कराने आ रहे हो क्या यहां ंग पाखंड फैला रखा है इन्होंने

1722
02:07:47,520 --> 02:07:51,640
वही बात इनकी वही बात वही बात वो हम कह रहे दो

1723
02:07:51,640 --> 02:07:56,040
दना चार होता व क दो दना पा होता हम क दो द चार होता व क

1724
02:07:56,040 --> 02:07:58,640
दो द पा होता वही बात उसकी है

1725
02:07:58,640 --> 02:08:02,760
वही कितने भी आ जाए व अपनी बात रखेंगे उनको शास्त्र से कोई

1726
02:08:02,760 --> 02:08:06,920
लेना देना नहीं ना उनको गीता का ज्ञान है ना वेद का ज्ञान है आप कही स मिलवा

1727
02:08:06,920 --> 02:08:11,360
लो वो बकल अनी र्

1728
02:08:11,360 --> 02:08:15,400
उसको खुल कर जेल दर्शी कहा

1729
02:08:15,400 --> 02:08:19,760
करो पहाड़ी जी अब तोय कुछ भी बात बोलेंगे

1730
02:08:19,760 --> 02:08:24,520
ना इनकी किताब से उसका अगर से प्रमाण देंगे

1731
02:08:24,520 --> 02:08:28,560
तो हम कहेंगे वेद में पूरा ज्ञान है ही नहीं व ज्ञानी ने बोला उसकी बात क्यों

1732
02:08:28,560 --> 02:08:32,640
माने आप उस ज्ञान गंगा में देखो कितना उल्टा

1733
02:08:32,640 --> 02:08:36,680
सुटा लिखा है इन्होने कहा अर्थ का अनर्थ क्या है उस ज्ञान गंगा

1734
02:08:36,680 --> 02:08:41,280
में हा बताइए रामचरित मानस से जी जय हो प्रभु के

1735
02:08:41,280 --> 02:08:45,360
दर्शन जय श्री राम पंडित जी आपको

1736
02:08:45,360 --> 02:08:51,360
भी प्रणाम सभी को मेरा जय श्री राम

1737
02:08:51,720 --> 02:08:55,880
में प्रमाण दिखाने से पहले ये टियर पहाड़ी जी आपका नाम क्या है आप

1738
02:08:55,880 --> 02:09:00,160
भी अंधेरे में क्यों बैठे रहते हैं मैं लाइट ऑफ है कोई

1739
02:09:00,160 --> 02:09:04,440
नहीं अच्छा ये कहीं पर बाहर है ना य विदेश

1740
02:09:04,440 --> 02:09:08,640
विदेश में है कहीं पर अच्छा वाह बात

1741
02:09:08,640 --> 02:09:12,920
है वहा रात का समय मतलब व अंधेरे का समय आपके य सुबह

1742
02:09:12,920 --> 02:09:17,240
होने वाली होगी शायद हा हा एक बज रहे रात

1743
02:09:17,240 --> 02:09:21,560
के त बजे

1744
02:09:21,560 --> 02:09:25,600
अच्छा मैं कुछ प्रमाण दिखाऊं उससे पहले आज सुबह मैंने आपको एक चीज एक दो फोटोस

1745
02:09:25,600 --> 02:09:29,760
डीएम की थी आपने देखी हां आर समाज वाली

1746
02:09:29,760 --> 02:09:33,920
हां हनुमान हां देखा

1747
02:09:33,920 --> 02:09:38,400
उन्होंने क्या कर दिया उसमें वो ऐसे ही क्या बो

1748
02:09:38,400 --> 02:09:42,520
आप इस पर क्या बोलेंगे मतलब अरे

1749
02:09:42,520 --> 02:09:46,920
वो देखिए जो वानर जो भगवान

1750
02:09:46,920 --> 02:09:50,920
जो हनुमान जी थे वो एक ऐसी प्रजाति अभी भी पाई जाती

1751
02:09:50,920 --> 02:09:54,920
है जिनके जो है भी जो यह जो जो

1752
02:09:54,920 --> 02:09:58,960
वानरों के गुण होते हैं वो होते हैं शरीर में शारीरिक उसमें होता

1753
02:09:58,960 --> 02:10:02,960
है तो वो वो प्रजाति थी उसका साइंस में भी

1754
02:10:02,960 --> 02:10:07,960
प्रमाण होमो सेपियंस हा

1755
02:10:07,960 --> 02:10:12,400
इसकी जानकारी इन्होने दी है जो

1756
02:10:12,400 --> 02:10:16,800
ये है ना जो होमो इरेक्टस क्यों

1757
02:10:16,800 --> 02:10:21,360
क्यों क्यों वाला ग्रंथ है ना जो उसमें दी है जानकारी माधवाचार्य जी

1758
02:10:21,360 --> 02:10:26,800
जैसे आप ये ग्रंथ जानते ही होंगे ये मेरे हाथ जो देख रहे हैं आप

1759
02:10:26,800 --> 02:10:31,000
हनुमान इसको आप पढ़ेंगे ना ये बहुत लाभ काई पुस्तक होगी मैं आपको

1760
02:10:31,000 --> 02:10:35,560
भा बाकी रह गया है दिनेश दास आज उनसे मैं बात

1761
02:10:35,560 --> 02:10:39,680
करूं आज मैं बात करूं इनसे प्लीज सुन कर

1762
02:10:39,680 --> 02:10:43,720
शाबाश करिए आप बात तब हम करते अरे भाई तुम जब कुछ बता ही नहीं रहे

1763
02:10:43,720 --> 02:10:47,840
हो तुम जब ये बोल रहे हो कि मैं जो है बताऊंगा दे दूंगा तो आए

1764
02:10:47,840 --> 02:10:51,880
क्यों तभी आओ कंटेंट लेने आ

1765
02:10:51,880 --> 02:10:54,080
दे

1766
02:10:54,080 --> 02:10:58,280
दूंगा दि राम

1767
02:10:58,280 --> 02:11:03,000
राम अनुसार साधना का परिणाम मुक्ति नहीं है

1768
02:11:03,000 --> 02:11:07,680
पढ़ लो यह कहां लिखा है वेद

1769
02:11:07,680 --> 02:11:11,800
में तु र् जो बोल रहे हैं तुम

1770
02:11:11,800 --> 02:11:15,880
वेदों का गीता का अर्थ करके यह बताते हो दुनिया को कि वेद

1771
02:11:15,880 --> 02:11:20,000
क्यों गलत है गीता क्यों गलत है गीता

1772
02:11:20,000 --> 02:11:22,960
को बोलने वाला क्यों गलत तुम यह बताते

1773
02:11:22,960 --> 02:11:27,080
हो बस डोंगी दोगले नहीं डोंगी

1774
02:11:27,080 --> 02:11:33,080
नहीं लि महा स्व की प्राप्ति महा स्वर्ग में जाने के

1775
02:11:38,360 --> 02:11:44,360
बादरा सही बात है मुक्ति नहीं है चार वेदों

1776
02:11:46,240 --> 02:11:51,440
की है नहीं

1777
02:11:51,440 --> 02:11:55,680
जेल जेल जेल में है भक्ति अबे भैया जब तुम वेद को मुक्ति मुक्ति देने

1778
02:11:55,680 --> 02:12:00,000
वाला एक मिनट मुझे बात करने दीजिए एक मिनट जब तुम वेद को मुक्ति देने वाला मानते

1779
02:12:00,000 --> 02:12:04,560
नहीं हो तो तुम कौन से हिसाब से कहते हो कि हम वेद को मानते हैं

1780
02:12:04,560 --> 02:12:08,880
बिल्कुल वेद में मुक्ति का ज्ञान नहीं है ना

1781
02:12:08,880 --> 02:12:13,040
सारा ज्ञान वेद में होता तो फिर आज आज तक किसने मुक्ति पाई

1782
02:12:13,040 --> 02:12:17,400
बताओ ये कहां लिखा है वेद में ज्ञान नहीं है मुक्ति का ये बताओ

1783
02:12:17,400 --> 02:12:23,400
है किसी ने पाई मुक्ति को बताइए उदाहरण दीजिए किसी ने मुक्ति पा

1784
02:12:28,800 --> 02:12:32,920
तो शास्त्र से प्रमाण वेद में मुक्ति नहीं है मैं शास्त्र

1785
02:12:32,920 --> 02:12:37,240
की ही बात कर रहा हूं आप यह बता दीजिए एक को उदाहरण बता दीजिए जिसने मुक्ति

1786
02:12:37,240 --> 02:12:41,440
पाई हो गीता जी को पढ़ कर के या वेदों को पढ़ कर के जिसने

1787
02:12:41,440 --> 02:12:47,440
मुक्ति प्राप्त की हो केवल स्वर्ग छोड़ कर के स् प्राप्ति हो

1788
02:12:49,160 --> 02:12:55,160
सने सुखदेव जीने प्रा की मुक्ति

1789
02:12:56,520 --> 02:13:00,760
नहीं तो वो मुक्ति जो है स्वर्ग प्राप्ति को ही कहते

1790
02:13:00,760 --> 02:13:05,280
हैं स्वर्ग प्राप्ति को ही मुक्ति

1791
02:13:05,280 --> 02:13:11,240
बोलते बनेले मुक्ति स्वर्ग को कहते

1792
02:13:11,240 --> 02:13:15,320
हैं अरे साफ लिखा गीता जी में स्वर्ग प्राप्ती

1793
02:13:15,320 --> 02:13:21,320
है बकवास करते ब सा लिखा हुआ है

1794
02:13:21,640 --> 02:13:25,760
अबे भैया यह क्यों आए देख लिया देख

1795
02:13:25,760 --> 02:13:29,880
लिया इनके पास कहने को कुछ नहीं है अरे आज

1796
02:13:29,880 --> 02:13:34,480
इनके सामने इन कुछ छूट का खंडन करने वाला था रामचरित मानस में आपने उनको हटा क्यों दिया

1797
02:13:34,480 --> 02:13:39,440
अब इनको मत लेना भाई य बदतमीजी करने आए हैं बस

1798
02:13:39,440 --> 02:13:44,400
चलिए मैं खंडन करूं हां तुम करो अपना

1799
02:13:44,400 --> 02:13:48,480
तो जै श्रीम यह वेदों को मानने वाली नई नस्ल है जो ये

1800
02:13:48,480 --> 02:13:52,640
कहती है कि वेदों में मुक्ति नहीं है अच्छा वेदों में जब

1801
02:13:52,640 --> 02:13:56,800
मुक्ति नहीं है तो वेदों में धर्म कहां रहा क्यों

1802
02:13:56,800 --> 02:14:00,960
क्योंकि महाभारत से लो प्रमाण यह रामपाल के चेले नहीं है

1803
02:14:00,960 --> 02:14:05,440
रामपाल के दल्ले है ये बिल्कुल

1804
02:14:05,440 --> 02:14:09,200
दलाल है

1805
02:14:09,200 --> 02:14:13,400
मल से अपने को मुक्त कर नहीं पा रहा रामपाल तो अपने को जेल

1806
02:14:13,400 --> 02:14:17,480
से मुक्त नहीं कर पा रहा इनको क्या मुक्ति दिलाएगा इनको कुछ ज्ञान

1807
02:14:17,480 --> 02:14:20,280
है लिखा है लिखा है ंगो पांग को

1808
02:14:20,280 --> 02:14:24,640
कभी पढ़ा नहीं एकांकी शब्दों को ढूंढ करके लाते देख इनकी वास्तविकता

1809
02:14:24,640 --> 02:14:28,680
कैसे आती है सामने इनकी

1810
02:14:28,680 --> 02:14:32,760
वास्तविकता कैसे सामने आती है देख रहे आपने हटाना नहीं

1811
02:14:32,760 --> 02:14:37,400
था मैं जरा आज बताता इसको रामपाल केत

1812
02:14:37,400 --> 02:14:41,480
बताता मैं इसको देखिए बात आप समझ नहीं रहे हैं सूरज जी हम

1813
02:14:41,480 --> 02:14:45,480
लोगों का एक जो एक तरीका है ना बस उसी पर रहे

1814
02:14:45,480 --> 02:14:49,800
नहीं तो हम लोग करने को बहुत कुछ कर सकते हैं क्या करें भाई जी जैसे

1815
02:14:49,800 --> 02:14:53,880
को तैसा होना पड़ता है क्या कर हमारे

1816
02:14:53,880 --> 02:14:58,160
गुरुदेव शकरा समाचार यही तो कहा है बाद में साम

1817
02:14:58,160 --> 02:15:03,400
दाम दंड और

1818
02:15:03,400 --> 02:15:07,440
भेद सुनि गीता क्या बता गीता में लिखा गीता मुक्ति नहीं

1819
02:15:07,440 --> 02:15:13,440
है मुक्ति तुम्हारे बोलने से हो जाएगा रामपाल खुद

1820
02:15:14,080 --> 02:15:18,960
अन पूछ आओ दिनेश दास

1821
02:15:18,960 --> 02:15:21,480
यह बताओ

1822
02:15:21,480 --> 02:15:26,000
गीता धार्मिक ग्रंथ है नहीं अब मुझे ये बताओ

1823
02:15:26,000 --> 02:15:32,000
कि स्वर्ग जाने के बाद मुक्ति प्राप्त हो जाती है नहीं

1824
02:15:32,760 --> 02:15:36,760
है मैं पूछ रहा हूं गीता और वेद में मुक्ति नहीं है तुमने ये

1825
02:15:36,760 --> 02:15:41,040
कहा अब ये बताओ क्या गीता और वेद धार्मिक ग्रंथ है

1826
02:15:41,040 --> 02:15:45,240
धार्मिक है जहां तक के हैं वहां तक धार्मिक है उससे ऊपर का ज्ञान नहीं

1827
02:15:45,240 --> 02:15:49,800
है धार्मिक है धार्मिक है

1828
02:15:49,800 --> 02:15:53,880
धर्म क्या है धार्मिक है धर्म क्या है

1829
02:15:53,880 --> 02:15:58,280
धर्म क्या है नहीं मुझे मुझे तो सिर्फ आप यह बता दीजिए स्वर्ग प्राप्ति

1830
02:15:58,280 --> 02:16:02,600
के बाद मुक्ति प्राप्त हो जाती

1831
02:16:02,600 --> 02:16:07,040
है देख रहे हो यह खेलने आए हैं

1832
02:16:07,040 --> 02:16:11,200
खेलने इनके पास कुछ है नहीं आप बोल लीजिए वो बदतमीज

1833
02:16:11,200 --> 02:16:15,440
व्यक्ति है उससे बात मत करिए आप बोलिए अपनी बात अरे तुम मुझे इतना बता दो कि जेल

1834
02:16:15,440 --> 02:16:21,440
में जाने वाला व्यक्ति तत्वदर्शी हो सकता है क्या

1835
02:16:30,120 --> 02:16:34,360
सुनो यह जो मुक्ति की बात बात आ रही है ना धर्म धर्म

1836
02:16:34,360 --> 02:16:38,600
क्या है उसको समझ लो धर्म क्या है धर्म मुक्ति है

1837
02:16:38,600 --> 02:16:42,800
अगर किसी शास्त्र में मुक्ति नहीं है तो उसको धर्म

1838
02:16:42,800 --> 02:16:47,000
नहीं माना जा सकता तो वो धार्मिक ग्रंथ नहीं है अगर मुक्ति

1839
02:16:47,000 --> 02:16:53,000
की बात वो नहीं कर रहा है कैसे यह भी हम प्रमाण देंगे महाभारत

1840
02:16:54,950 --> 02:16:58,120
[संगीत]

1841
02:16:58,120 --> 02:17:02,200
से कोई रजीत सिंह बोल रहे मुझको ऊपर ले लो मैं कबीर परमात्मा की

1842
02:17:02,200 --> 02:17:08,200
खोज कर चुका

1843
02:17:09,000 --> 02:17:13,040
हूं आप दिखा दीजिए फिर उसके बाद मैं बोलू फिर मेरे को काम होता

1844
02:17:13,040 --> 02:17:19,040
है

1845
02:17:22,560 --> 02:17:28,080
आप बहुत अच्छे मौके पर संदीप भद्रा जी जय श्री

1846
02:17:28,080 --> 02:17:33,280
राम बड़ा बहुत

1847
02:17:33,280 --> 02:17:38,360
ब सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

1848
02:17:38,360 --> 02:17:40,720
राम

1849
02:17:40,720 --> 02:17:45,240
शम अरे हम कुछ बताना चाहते हैं जरा सुनेंगे आप लोग

1850
02:17:45,240 --> 02:17:49,560
नेती नेती हेलो हा

1851
02:17:49,560 --> 02:17:54,400
हा जी हम कुछ बताना चाहते हैं जरा ये रामपाल जी के

1852
02:17:54,400 --> 02:17:59,320
लोगों को जरा आप लोग अगर बोले का जो यहां का

1853
02:17:59,320 --> 02:18:03,560
इनके सुनो अरे सुनो ना इनके जो कवि शब्द

1854
02:18:03,560 --> 02:18:07,880
जो लिए गए हैं उसके बारे में हमने स्टडी किया उसको हमने निकाला

1855
02:18:07,880 --> 02:18:11,960
है तो कवि का मतलब पहले इनको बता दे कवि का मतलब हम बता दे

1856
02:18:11,960 --> 02:18:16,720
महाभारत के जो है छठे खंड में जो है अनुशासन

1857
02:18:16,720 --> 02:18:20,800
पर्व जो है उसमें विष्णु सहस्त्र नाम स्तोत्र है

1858
02:18:20,800 --> 02:18:24,040
और विष्णु सहस्त्र नाम स्तोत्र में जो 27 वा

1859
02:18:24,040 --> 02:18:28,160
श्लोक है उसमें कवि शब्द से भगवान विष्णु को संबोधित किया

1860
02:18:28,160 --> 02:18:32,240
गया है अब इनसे जरा कोई पूछेगा कि यह विष्णु भगवान को जब कवि के नाम

1861
02:18:32,240 --> 02:18:36,280
से संबोधित किया जा रहा है तो यह कबीर देव के नाम से कबीर को कैसे

1862
02:18:36,280 --> 02:18:40,280
संबोधित कर रहे हैं अगर आपके पास हो

1863
02:18:40,280 --> 02:18:44,600
शिवांश भाई तो जरा महाभारत के छठे खंड का जो है अनुशासन पर्व

1864
02:18:44,600 --> 02:18:48,680
खोलो 149 अध्याय उसमें अरे वो है कवि

1865
02:18:48,680 --> 02:18:52,800
कवि के नाम से बहुतों को संबोधित कवि नाम से जो है

1866
02:18:52,800 --> 02:18:58,800
वाल्मीक जी को भी क नाम से संबोधित

1867
02:18:58,880 --> 02:19:03,200
हुआ हा वही और उसम क्या कवि एक पदवी

1868
02:19:03,200 --> 02:19:07,520
है कवि एक पदवी है लेकिन यहां पर सीधे विष्णु सहस्त्रनाम

1869
02:19:07,520 --> 02:19:11,600
गुण है कवि एक गुण है सर्वज्ञ जो सर्वज्ञ

1870
02:19:11,600 --> 02:19:16,280
उसको कवि कहा जाता है और कविता करने वाले को भी कवि इसलिए कहा जाता है

1871
02:19:16,280 --> 02:19:20,320
क्योंकि क करने वाले की कोई सीमा नहीं होती वो कहीं के बारे में भी सोच सकता

1872
02:19:20,320 --> 02:19:24,360
लिख सकता है इसलिए उसको भी ककार कहा गया और

1873
02:19:24,360 --> 02:19:28,480
कवि के कई सारे और भी अर्थ हमने जो है देखे थे उसमें दो तीन और अर्थ दिख

1874
02:19:28,480 --> 02:19:32,840
रहे थे और ये कबीर देव कबीर देव करके हां भाई

1875
02:19:32,840 --> 02:19:37,520
रंजीत जी जो ये गीता जी है ना ये ऑलरेडी महाकाव्य है मतलब

1876
02:19:37,520 --> 02:19:41,600
मतलब कविताओं का मतलब पिता या माता जो मर्जी बोल दो तो इससे ऊपर

1877
02:19:41,600 --> 02:19:46,240
कोई बकुल भाई बिल्कुल बिल्कुल बता तो रहे हैं

1878
02:19:46,240 --> 02:19:50,240
ये जो हैनो अभी कल हम रिक्वेस्ट कर रहे

1879
02:19:50,240 --> 02:19:54,280
थे आप एक जरूरी बात धर्म

1880
02:19:54,280 --> 02:19:58,560
का वास्तव परव किसम है मोक्ष

1881
02:19:58,560 --> 02:20:02,560
में धर्म क्या है मोक्ष तो यदि किसी शास्त्र में धर्म

1882
02:20:02,560 --> 02:20:07,320
की बात नहीं हो रही है तो व धार्मिक शास्त्र नहीं है मोक्ष की बात नहीं हो रही है

1883
02:20:07,320 --> 02:20:11,480
बिल्कुल सही बात है कितना मतलब उलझा के रख दिया

1884
02:20:11,480 --> 02:20:14,040
है अब देखो आज इस व्यक्ति का रोल देखा

1885
02:20:14,040 --> 02:20:18,960
आपने आज ये वेदों का खंडन कर रहा है बैठ के नहीं है गीता में लिखा है

1886
02:20:18,960 --> 02:20:23,040
अ सुनो कल कल परसों हम आपसे रिक्वेस्ट कर रहे थे हमको ऊपर लो

1887
02:20:23,040 --> 02:20:27,400
ऊपर लो आप लिए नहीं नहीं तो हम बताते हैं ये जो है वो भगवान विष्णु के महाकाल

1888
02:20:27,400 --> 02:20:31,560
स्वरूप के बारे में तमाम अटकले लगा रहे थे तो उसमें

1889
02:20:31,560 --> 02:20:36,000
सात या आठ श्लोक आगे अर्जुन ने उनको जब कहा है कि

1890
02:20:36,000 --> 02:20:40,000
मैं आपके इस विकराल रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूं लेकिन मेरा मन भय से काप

1891
02:20:40,000 --> 02:20:44,160
रहा है कृपया मुझे उस चतुर्भुज रूप में ही दर्शन दीजिए विष्णु के चतुर्भुज रूप

1892
02:20:44,160 --> 02:20:48,360
में जब वो काल है तो फिर वो विष्णु के चतुर्भुज रूप की दर्शन

1893
02:20:48,360 --> 02:20:53,040
की मांग क्यों कर रहे हैं अर्जुन

1894
02:20:53,040 --> 02:20:57,200
एक बात और है जब धर्मदास जी ने जब कबीर के दर्शन किए

1895
02:20:57,200 --> 02:21:01,360
थे वो भी चक्कर खा गए थे वो दिखा दी जरा प्रमाण और जरा इनको ले

1896
02:21:01,360 --> 02:21:05,360
लीजिए ऊपर अरे यार कबीर तो खुद कहते

1897
02:21:05,360 --> 02:21:09,360
हैं साई इतना दीजिए जाम कुटुंब समाए मैं भी

1898
02:21:09,360 --> 02:21:13,360
भूखा ना रहू साधु ना भूखा जाए तो हमको

1899
02:21:13,360 --> 02:21:17,520
ये बताओ कबीर किस साई से मांग रहे जब वो परब्रह्म परमात्मा है इनके अनुसार चलो

1900
02:21:17,520 --> 02:21:21,600
मान लिए तोव किस साई से फिर मांग रहे हैं अच्छा

1901
02:21:21,600 --> 02:21:25,920
व्यक्ति देखो दो दो मिनट में अपनी बात कैसे बदल रहा है काल भगवान नहीं है

1902
02:21:25,920 --> 02:21:30,080
अरे उनको लो

1903
02:21:30,080 --> 02:21:35,240
उनको अरे वो कंटेंट लेने

1904
02:21:35,240 --> 02:21:37,720
आया

1905
02:21:37,720 --> 02:21:41,720
मतलब इलिए तो गुस्सा आ रहा है जरा इनको बोलने

1906
02:21:41,720 --> 02:21:46,960
दो बहुत देर से बचारे कुछ बोलना चाह रहे विशाल बोलिए बता

1907
02:21:46,960 --> 02:21:51,120
उस दिन की दो हते प की ब फिर से आ गए अमित दास

1908
02:21:51,120 --> 02:21:55,120
वो रामायण का दिखाए थे वह 145 वा पेज नंबर इसमें वह चक्कर खिला

1909
02:21:55,120 --> 02:21:59,200
दिए थे वह मैं समझ गया था किसकी बात कर थे रामचरित महास की उनको खुद नहीं पता तो यह

1910
02:21:59,200 --> 02:22:03,200
देखिए नेती नेती वो बोल रहे थे ना तो अब ये देखिए अब ये

1911
02:22:03,200 --> 02:22:07,280
रामायण का यह प्रसंग इसमें दिखाते हैं जब मनु और शतरूपा तपस्या करते

1912
02:22:07,280 --> 02:22:11,480
हैं भगवान को पुत्र रूप में पाने के लिए तो यह एक द्वादश

1913
02:22:11,480 --> 02:22:15,560
आक्ष मंत्र तो आता है उसमें एक चौपाई आती है ये चौपाई इसका ये लोग बहुत यूज कर रहे हैं मैं सुनाता

1914
02:22:15,560 --> 02:22:19,840
हूं ये चौपाई नेति नेती जेही वेद निरूपा

1915
02:22:19,840 --> 02:22:24,400
निजा ंद निरूपा अनूपा संभु रंच विष्णु

1916
02:22:24,400 --> 02:22:28,520
भगवाना उपज जासु अंसते नाना ये

1917
02:22:28,520 --> 02:22:32,800
थोड़ी स्क्रीन में बड़ी कर देंगे आप अब इसका अर्थ ये बताते हैं

1918
02:22:32,800 --> 02:22:36,800
जिन्हें वेद नेति नेति यानी यह भी नहीं यह भी नहीं कहकर निरूपण करते

1919
02:22:36,800 --> 02:22:40,800
हैं जो आनंद स्वरूप उपाधि रहित और अनुपम है एवं जिनके

1920
02:22:40,800 --> 02:22:44,920
अंश से अनेको शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं ऐसे

1921
02:22:44,920 --> 02:22:45,420
महान

1922
02:22:45,200 --> 02:22:49,360
प्रभु के क्या लिखा है जिनको वेद नेति नेति कहते

1923
02:22:49,360 --> 02:22:53,440
हैं और जिनके अंश से को शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं

1924
02:22:53,440 --> 02:22:57,520
तो अब यहां पर इनका मानना है कि वो कबीर जी थे लेकिन वो राम जी थे मैं दो दो

1925
02:22:57,520 --> 02:23:01,680
जगह से आपको राम चित मानस में प्रूफ करके दिखाऊंगा ठीक है मैं पहला

1926
02:23:01,680 --> 02:23:05,680
प्रमाण आपको दे रहा हूं ये रामचरित मानस का जब

1927
02:23:05,680 --> 02:23:09,960
भगवान शिव का सती के साथ विवाह होता है माता सती के साथ तो वो त्रेता

1928
02:23:09,960 --> 02:23:13,960
युग का समय था तब तो जब वो देखते हैं कि भगवान

1929
02:23:13,960 --> 02:23:18,280
श्री राम और लक्ष्मण सीता जी के लिए विलाप कर रहे हैं तो भगवान शिव उनको नमस्कार

1930
02:23:18,280 --> 02:23:22,640
करते हैं शिव जी तो वो सती जी थो जा परमात्मा

1931
02:23:22,640 --> 02:23:26,640
कैसे हो गए जो स्त्री के लिए ऐसा इतना वो कर रहे हैं तो वो कह

1932
02:23:26,640 --> 02:23:30,760
रहे हैं कि तुम अगर तुमको यकीन नहीं है तो तुम एक बार परीक्षा लेने चली जाओ

1933
02:23:30,760 --> 02:23:34,760
भगवान शिव ने कहा और फिर उसी के उसी के प्रसंग में

1934
02:23:34,760 --> 02:23:38,840
वो सबसे वर्ड फेमस चौपाई आती है होई ही सोई जो राम रज

1935
02:23:38,840 --> 02:23:43,040
राखा को करी तरक बढ़ाव साखा ठीक है

1936
02:23:43,040 --> 02:23:47,200
तो जब वो परीक्षा लेने गई वो सीता जी का उन्होंने रूप धारण किया

1937
02:23:47,200 --> 02:23:51,240
तो अब पहले प्रभु ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया

1938
02:23:51,240 --> 02:23:55,360
फिर कहा कि भगवान शिव कहां है फिर यह सब जब उन्होंने देखा

1939
02:23:55,360 --> 02:23:59,680
कि श्री राम जी ने मुझे पहचान लिया व उन्होंने सोचा मैं शकर

1940
02:23:59,680 --> 02:24:00,240
कर कहा

1941
02:24:00,240 --> 02:24:04,360
न माना निज अज्ञान राम पर आना कि मैंने

1942
02:24:04,360 --> 02:24:10,360
शंकर जी का काल भी आया

1943
02:24:10,520 --> 02:24:14,560
है मैंने शंकर जी का कहा ना माना और अपनी अज्ञान का

1944
02:24:14,560 --> 02:24:18,760
श्री रामचंद्र जी पर आरोप कर दिया फिर पता है क्या देखा भगवान श्री राम ने उनको

1945
02:24:18,760 --> 02:24:23,080
अपना ऐश्वर्य शली रूप दिखाया अब ये देखिए इसमें क्या आया

1946
02:24:23,080 --> 02:24:27,880
तब उन्होंने पीछे की ओर फिर के देखा फिर चितवा पासे प्रभु देखा

1947
02:24:27,880 --> 02:24:32,000
सहित बंधु सय सुंदर बेखा जह चित वही तह प्रभु

1948
02:24:32,000 --> 02:24:36,040
आ सना सेवई सिद्ध मुनी से प्रबीना देखे

1949
02:24:36,040 --> 02:24:40,280
शिव विधि विष्णु अनेका अमित प्रभाव एकते एका

1950
02:24:40,280 --> 02:24:44,280
बंद चरण करत प्रभु सेवा विविध ख देखे सब

1951
02:24:44,280 --> 02:24:48,640
देवा तब उन्होंने यानी सती मैया ने पीछे की ओर फिर करर देखा तो वहां भी

1952
02:24:48,640 --> 02:24:52,920
भाई लक्ष्मण जी और सीता जी के साथ श्री रामचंद्र जी सुंदर वेश में दिखाई दिए वे

1953
02:24:52,920 --> 02:24:57,080
जिधर देखती हैं उधर ही प्रभु श्री रामचंद्र जी विराजमान है और सचर सिद्ध

1954
02:24:57,080 --> 02:25:01,480
मुनीश्वर उनकी सेवा करते हैं सती जी ने अनेक शिव ब्रह्मा और विष्णु

1955
02:25:01,480 --> 02:25:05,520
देखे जो एक से बढ़कर एक असीम प्रभाव वाले थे उन्होंने देखा कि भाति

1956
02:25:05,520 --> 02:25:09,640
भाति के वेष धारण किए सभी देवता श्री रामचंद्र जी की चरण वंदना और

1957
02:25:09,640 --> 02:25:13,680
सेवा कर रहे हैं अब ये हो गया पहला प्रमाण ठीक है अब मैं

1958
02:25:13,680 --> 02:25:15,400
दूसरा प्रमाण आपको दिखाने वाला हूं

1959
02:25:15,400 --> 02:25:21,400
और वो जो मनु शत्रु का का जो प्रसंग है ना उसमें लिखा हुआ है कि पहले ब्रह्मा

1960
02:25:24,320 --> 02:25:28,800
लिएन ये किसम है किसम

1961
02:25:28,800 --> 02:25:33,040
बाल रामायण के बालकांड में कौन सा बालकांड

1962
02:25:33,040 --> 02:25:37,240
में कौन सा दोहा नंबर दो चपा नबर

1963
02:25:37,240 --> 02:25:41,360
ये पहले 145 पर जाइएगा ठीक है जो य मनुष्य

1964
02:25:41,360 --> 02:25:47,160
का प्रसंग है 145 स

1965
02:25:47,160 --> 02:25:51,720
नहीं बालकांड दोहा ये सॉरी

1966
02:25:51,720 --> 02:25:55,880
143 143 जी य श्रीराम जी के लिए

1967
02:25:55,880 --> 02:26:00,000
बात हो रही है इन्होने वहा भी का घुसा दिया चक देखिए मैं दूसरा

1968
02:26:00,000 --> 02:26:04,040
प्रमाण दिखा रहा हूं आपको बता दीजिए संग चली

1969
02:26:04,040 --> 02:26:08,120
जननी भवानी ज कु उन्होने यही कह दिया

1970
02:26:08,120 --> 02:26:12,200
किय जो सनातन धर्म के जो हमारे शास्त्र है उनमें मुक्ति नहीं है

1971
02:26:12,200 --> 02:26:17,440
मोक्ष नहीं है बात खत्म हो गई

1972
02:26:17,440 --> 02:26:21,560
धार्मिक शास्त्र नहीं है उनको कहने ज्ञानी है जो

1973
02:26:21,560 --> 02:26:25,800
हमारे शास्त्रों में लोक बताए गए ना वोह भी सारे के सारे

1974
02:26:25,800 --> 02:26:29,880
मतलब वो कुछ भी नहीं है उससे ऊपर एक और लोक है जो

1975
02:26:29,880 --> 02:26:33,960
कबीर का है ये यह मानते हैं और जितने भी हमारे

1976
02:26:33,960 --> 02:26:37,960
भगवान है वो सारे के सारे काल है ये स्पष्ट बोलते नहीं

1977
02:26:37,960 --> 02:26:42,120
ब बोलते यही है इनकी किताबों में यही लिखा है अंत में

1978
02:26:42,120 --> 02:26:46,400
आंसर यही आएगा कि जो हमारी जो ग्रंथ है उसमें धर्म

1979
02:26:46,400 --> 02:26:50,680
नहीं है उसमें मोक्ष नहीं है और उनमें जितने भी कैरेक्टर है जितने भी ईश्वर

1980
02:26:50,680 --> 02:26:54,880
के रूप दिखाए गए हैं वो सब ईश्वर नहीं है ईश्वर

1981
02:26:54,880 --> 02:26:59,520
उससे अलग है और वो कौन है वो इनके वो जो इनका जो

1982
02:26:59,520 --> 02:27:02,320
कोई एक इन्होंने सूक्ष्म वेद बना रखा

1983
02:27:02,320 --> 02:27:06,400
है अपने मन से वो है उसमें लिखा है इन्होने तो इन्होने तो

1984
02:27:06,400 --> 02:27:11,120
कबीर दास कात ये आती है कि जितने सारे

1985
02:27:11,120 --> 02:27:15,120
क्लेम्म वेद में लिखे हैं क्या ये क्लेम गीता में लिखे

1986
02:27:15,120 --> 02:27:19,240
हैं तो फिर इनकी जो बात है वो कहते हैं कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति बताते

1987
02:27:19,240 --> 02:27:23,520
हैं वो कहां चली गई कोई शास्त्र सम अगर ये क तत्वदर्शी

1988
02:27:23,520 --> 02:27:27,600
अब इनका जन्म निकल जाएगा य वेदय गीता के अनुसार तत्वदर्शी

1989
02:27:27,600 --> 02:27:31,720
नहीं कह पाएंगे क्यों क्योंकि गीता का जो तत्वदर्शी है व वेद

1990
02:27:31,720 --> 02:27:37,680
विरुद्ध य खुद कहते गीता की वो बात नहीं मानी जा सकती जो वेद के विरुद्ध

1991
02:27:37,680 --> 02:27:41,680
लो मैं बोलू भाई हमारा तत्वदर्शी तो ब्रह्मचर्य आश्रम

1992
02:27:41,680 --> 02:27:45,760
ब्रह्मचर्य सूक्त है 11 पा अवे

1993
02:27:45,760 --> 02:27:51,680
ब्रह्मचर्य परम ब्रह्मचर्य नहीं है पूर्ण ब्रह्मचर्य नहीं है

1994
02:27:51,680 --> 02:27:55,880
ब्रमर अब तुम कह रहे हो कि वो ब्रह्म से अलग हम लोग जो पूर्ण ब्रह्म

1995
02:27:55,880 --> 02:27:59,920
की बात कर रहे तो वो मेल नहीं खा रहा वेद से तुमने कहा जो वे से मेल

1996
02:27:59,920 --> 02:28:03,960
नहीं खाएगा वो गलत है तो तुम जो है कभी यह नहीं कह सकते कि गीता

1997
02:28:03,960 --> 02:28:09,960
के आधार पर हमारे पास जो है जेल धाम निवासी तत्वदर्शी

1998
02:28:11,720 --> 02:28:15,720
है क्या लेके आएंगे अय जो इधर का तीन पाच किया करते

1999
02:28:15,720 --> 02:28:19,800
उसने उधर क्या बोला क्या बोलेंगे अभी कुछ भी बोलेंगे वो इन्ही की बात

2000
02:28:19,800 --> 02:28:23,920
से जाएगा कुछ भी

2001
02:28:23,920 --> 02:28:28,320
बोलेंगे यह कहेंगे वेद में ये लिखा है तो ले ले भाई

2002
02:28:28,320 --> 02:28:32,560
तत्वदर्शी कह रहे वेद में पूर्ण ज्ञान है ही नहीं तत्वदर्शी कह रहे कि वेद को कहने वाला

2003
02:28:32,560 --> 02:28:37,360
अज्ञानी है अब बता वेद की बात क्यों मानी जाए

2004
02:28:37,360 --> 02:28:41,560
अगर यह कहेंगे वेद में कबीर है तो तुम तुम्हारे वेद कह रहे हैं कि वेद में

2005
02:28:41,560 --> 02:28:45,000
परम ब्रह्म का ज्ञान है ही

2006
02:28:45,000 --> 02:28:49,040
नहीं तो इसका मतलब तुमर कबीर को कह रहे हो वो परम ब्रम नहीं है क्योंकि

2007
02:28:49,040 --> 02:28:54,720
वो तो वेद में दिखा रहे हो में तो परम ब्रम नहीं है

2008
02:28:54,720 --> 02:28:58,960
ना पकड़ सही आपने सही सही प ऐसी खिचड़ी

2009
02:28:58,960 --> 02:29:02,960
पई है इन्होने जहां से छू लो इनकी जीजी

2010
02:29:02,960 --> 02:29:07,280
के वही पर आपका दिमाग खराब हो जाए जो पन्ना खोल लो उसी पन्ने

2011
02:29:07,280 --> 02:29:11,680
में आप फस जाओगे काल के जाल में आपको ना एक बात बताता

2012
02:29:11,680 --> 02:29:16,200
बड़ी शानदार अभी पीछे ना किसी दास से बहस हो रही थी

2013
02:29:16,200 --> 02:29:20,360
मैंने कहा कबीर दास जी ने बोला के चार बुजा के भजन

2014
02:29:20,360 --> 02:29:24,480
में भूरी पर सब संत कबीरा पूजे

2015
02:29:24,480 --> 02:29:28,640
तासु को जाके बुजा अनंत अब जिसकी बुझाई अनंत है कबीर

2016
02:29:28,640 --> 02:29:32,640
दास जी उसी की तो पूजा करेंगे अब गीता जी के अध्याय 11 श्लोक

2017
02:29:32,640 --> 02:29:36,720
19 के अंदर लिखा हुआ है जो अनंत भुजा है व श्री हरि विष्णु जी है यह

2018
02:29:36,720 --> 02:29:40,760
कहते अनंत बुजा कैसे हैते उनकी तो हजार बुजा थी मैं क अनंत का मतलब पहले

2019
02:29:40,760 --> 02:29:44,880
समझ लो क्या होता है मैं अनंत का मतलब हो जिसका अंत नहीं होता भुजाओ का

2020
02:29:44,880 --> 02:29:49,160
ये उसको गिन रहे हैं ऐसे तो मूर्ख है मल आप मेरी बात

2021
02:29:49,160 --> 02:29:55,160
उसम लिखा हुआ है स भुजा एक शब्द आया इन्होने उसको पकड़ लिया लेकिन सस्त्र

2022
02:29:59,280 --> 02:30:03,680
भुजा खा हैवे में ब

2023
02:30:03,680 --> 02:30:07,760
में लिखा हुआ है कि उनकी अनंत भुजा उनकी भुजाओ का कोई अंत नहीं है कोई अंत नहीं पा

2024
02:30:07,760 --> 02:30:12,920
सकता तो कबीर भन बाबूराम

2025
02:30:12,920 --> 02:30:16,280
क अभी ला

2026
02:30:16,280 --> 02:30:21,440
नहीं में

2027
02:30:21,440 --> 02:30:26,960
अरा रखा लाइट उनकी जेल धाम में चली गई

2028
02:30:26,960 --> 02:30:31,000
है हेलो सुनिए मैं बस मेरा टाइम हो रहा है मैं बस दूसरा

2029
02:30:31,000 --> 02:30:35,640
दिखा दू आप अपनी बात कर लीजिए भाटिया जी भाटिया

2030
02:30:35,640 --> 02:30:39,880
जी जी मिनट

2031
02:30:39,880 --> 02:30:44,400
जा रहा हूं आप इनकी बात सुनिए टिया जी की बात सुन लीजिए

2032
02:30:44,400 --> 02:30:48,560
मैं दूसरा प्रमाण आपको दिखा रहा हूं ब्रह्मा विष्णु महेश का मैंने एक बाल

2033
02:30:48,560 --> 02:30:52,800
कांड से दिखाया मैं शिवांशी आपको जितने भी लोग है

2034
02:30:52,800 --> 02:30:57,040
सबया 143 में वो तो नेति नेति थ था ना हा

2035
02:30:57,040 --> 02:31:01,200
हा तो उसका उत्तर कहा से दिखाया था आपने तो तो मैंने

2036
02:31:01,200 --> 02:31:05,480
यही दिखा रहा हं ना कि वो राम जी है जिससे प्रकट हुए वो कबीर क्लेम कर रहे हैं नहीं

2037
02:31:05,480 --> 02:31:11,480
वो वही पर लिखा है उसका उत्तर भी उत्तर कहीं और से दिखाया था

2038
02:31:13,480 --> 02:31:17,680
आपने वही प वो

2039
02:31:17,680 --> 02:31:22,040
सती उसम भी मैंने दिखाया पहले

2040
02:31:22,040 --> 02:31:27,000
श्रीराम जी के बारे में बात हो रही उसे पहले पेज

2041
02:31:27,000 --> 02:31:31,080
ठीक मेरी स्क्रीन थोड़ी बड़ी कर देंगे य यह देखिए

2042
02:31:31,080 --> 02:31:37,080
य सुंदर कांड है राम चित मानस का

2043
02:31:37,880 --> 02:31:41,960
इसमें इसमें पढ़िए क्या लिखा इसम जब हनुमान जी रावण के पास जाते हैं ना

2044
02:31:41,960 --> 02:31:47,360
रावण की सभा में

2045
02:31:47,360 --> 02:31:51,720
तो अब मेरे पास ये थोड़ा मझले सा इसका है ये

2046
02:31:51,720 --> 02:31:55,880
आप दोहा बोलिए अरे मेरे पास यही वाला है मेरे पास यही वाला

2047
02:31:55,880 --> 02:32:00,400
है आप बताइए ये दोहा नंबर 20

2048
02:32:00,400 --> 02:32:04,520
नं कौन सा बोला दोहा शुरू करिए

2049
02:32:04,520 --> 02:32:08,640
यहां पर हनुमान जी अपना इंट्रोडक्शन इस प्रकार से दे रहे हैं

2050
02:32:08,640 --> 02:32:12,920
सुन रावण ब्रह्मांड निकाया पाई जा सुबल

2051
02:32:12,920 --> 02:32:17,600
बिर जति माया जा के बल बरं हरी सा

2052
02:32:17,600 --> 02:32:21,680
पाल हरत द बिल्कुल बहुत सुंदर हे

2053
02:32:21,680 --> 02:32:25,760
रावण सुन हनुमान जी बोल रहे हैं हे रावण सुन जिनका बल

2054
02:32:25,760 --> 02:32:29,800
पाकर माया संपूर्ण ब्रह्मांड के समूह की रचना करती है दूसरी लाइन

2055
02:32:29,800 --> 02:32:34,080
जिनके बल से हे दशानन जिनके बल से ब्रह्मा विष्णु महेश

2056
02:32:34,080 --> 02:32:38,200
सृष्टि का सृजन पालन और संघार करते हैं देखिए जिनके बल से ब्रह्मा

2057
02:32:38,200 --> 02:32:42,200
विष्णु महेश सृष्टि का सृजन पालन और संघार करते हैं जिनके बल से

2058
02:32:42,200 --> 02:32:46,400
सहस्त्र फण वाले शेष जी पर्वत और वन सहित समस्त ब्रह्मांड को सिर पर धारण

2059
02:32:46,400 --> 02:32:50,520
करते हैं जो देवताओं की रक्षा के लिए नाना प्रकार के देह धारण करते ते हैं और

2060
02:32:50,520 --> 02:32:54,840
जो तुम्हारे जैसे मूर्खों को शिक्षा देने वाले हैं जिन्होंने शिव जी के कठोर धनुष

2061
02:32:54,840 --> 02:32:58,840
को तोड़ डाला और उसी के साथ राजाओं के समूह का गर्व चूर्ण कर

2062
02:32:58,840 --> 02:33:02,600
दिया जिन्होंने खर दूषण तिसरा और बाली बाली जैसों

2063
02:33:02,600 --> 02:33:06,800
को मार डाला जो सब के सब अतुलनीय बलवान थे जिनके लेश मात्र बल से तुमने

2064
02:33:06,800 --> 02:33:10,800
समस्त चराचर जगत को जीत लिया और जिनकी प्रिय पत्नी को तुम चोरी से हर लाए

2065
02:33:10,800 --> 02:33:15,600
हो मैं उन्हीं का दूत हूं जा के बल लवलेस ते जिते चराचर

2066
02:33:15,600 --> 02:33:21,600
झार सास दूत जा करी हरि आने प्रिय

2067
02:33:21,840 --> 02:33:26,040
तो य प देखिए ये वो हनुमान जी इनका खंडन कर रहे हैं जिनकी चौपाई दिखाकर बोलते

2068
02:33:26,040 --> 02:33:30,040
हैं प्रात लीज नाम हमारा ते दिन ईना मिले आरा वो हनुमान जी कह रहे

2069
02:33:30,040 --> 02:33:34,840
कर इनका खंडन बहुत

2070
02:33:34,840 --> 02:33:39,040
सुंदर जी ने बड़ा अच्छा दिया था वो जो इन्होने दिखाया था ना यही सेम की

2071
02:33:39,040 --> 02:33:43,040
थी वो जो रामपाल अपने बारे में बोलता बड़ा अच्छा दिखाया था इन्होने

2072
02:33:43,040 --> 02:33:47,040
अरे इसी तरह तो उसम भी तो है श्रीमद भागवत गीता के अध्याय न

2073
02:33:47,040 --> 02:33:51,080
में श्लोक नंबर 16 16 1 में

2074
02:33:51,080 --> 02:33:55,560
भगवान श्री कृष्ण ने भी उस विराट स्वरूप अपने क्या कहते है

2075
02:33:55,560 --> 02:33:59,800
निराकार स्वरूप के बारे में बताया हैय वाल्मीकि रामायण

2076
02:33:59,800 --> 02:34:03,840
हैय मेरे पास अब य देखि वाल्मीकि रामायण का स्कंद पुराण में इसम

2077
02:34:03,840 --> 02:34:07,880
देखिए मैं क्या पढ़ रहा हूं य स्कंद पुराण का महात्म है वाल्मिक रामायण

2078
02:34:07,880 --> 02:34:12,680
लिखा है ब्रहम वण शरीर

2079
02:34:12,680 --> 02:34:16,760
विश्व पामा देव परम

2080
02:34:16,760 --> 02:34:21,120
मा

2081
02:34:21,120 --> 02:34:25,360
ये ये जो स्कंद पुराण में रामायण का महात्म है ये उसके पहले अध्याय

2082
02:34:25,360 --> 02:34:29,800
का ये ये 29 वा श्लोक है अब इसमें लिखा है जो ब्रह्मा

2083
02:34:29,800 --> 02:34:33,800
रुद्र और विष्णु नामक भिन्न भिन्न रूप धारण करके विश्व की सृष्टि संहार

2084
02:34:33,800 --> 02:34:38,000
और पालन करते हैं उन आदिदेव परमो कृष्ण परमात्मा श्री रामचंद्र

2085
02:34:38,000 --> 02:34:42,160
जी को अपने हृदय मंदिर में स्थापित करके मनुष्य मोक्ष का भागी होता है देखो क्या कह रहे

2086
02:34:42,160 --> 02:34:46,360
हैं जो ब्रह्मा रुद्र और विष्णु नामक भिन्न भिन्न रूप धारण करके विश्व की सृष्टि संहार

2087
02:34:46,360 --> 02:34:50,440
और पालन करते हैं उन आदिदेव परमो कृष्ट परमा श्रीराम

2088
02:34:50,440 --> 02:34:56,440
जी को अपने हदय मंदिर में स्थापित करके मनुष्य मोक्ष का भाग होता है

2089
02:34:58,720 --> 02:35:02,880
देखिए बहुत बढ़िया चलिए आज की पूरा कर

2090
02:35:02,880 --> 02:35:06,920
सबसे ज्यादा विश्वास करते श्रीमद भागवत

2091
02:35:06,920 --> 02:35:11,560
श्रीराम आज हम लोग पूरा करते हैं इसको फिर किसी दिन हम लोग आएंगे

2092
02:35:11,560 --> 02:35:15,840
थोड़ा मुझे कहीं निकलना भी है और वाले भंडारे

2093
02:35:15,840 --> 02:35:20,920
में भी गए कोई उपलब्ध नहीं है य पर जो हमारी खुराक बन

2094
02:35:20,920 --> 02:35:26,680
सके सियावर रामचंद्र की

2095
02:35:26,680 --> 02:35:31,200
जयन की जय नम पार्वती

2096
02:35:31,200 --> 02:35:35,160
पते हर हर

2097
02:35:35,160 --> 02:35:38,600
महादेव सभी को जय

2098
02:35:38,600 --> 02:35:42,760
श्रीराम मद के लिए आप संपर्क कर सकते हैं हमारा

2099
02:35:42,760 --> 02:35:45,560
नंबर है

2100
02:35:45,560 --> 02:35:50,440
74836 और अगर धर्म रक्षा अभियान में साथ देना चाहते हैं

2101
02:35:50,440 --> 02:35:54,840
तो भी आप आ सकते हैं हमें जवाइन कर सकते हैं इसी नंबर पर ट

2102
02:35:54,840 --> 02:35:58,880
करेंगे और यदि हमारी क्लासेस जवाइन

2103
02:35:58,880 --> 02:36:03,160
करना चाहते हैं तो आप आ सकते हैं और

2104
02:36:03,160 --> 02:36:06,400
यदि

2105
02:36:06,400 --> 02:36:10,440
आप नामा स्त्र जो नाम जप चल रहा है

2106
02:36:10,440 --> 02:36:14,600
उसमें हमें जवाइन करना चाहते हैं साथ में एक साथ मिलकर

2107
02:36:14,600 --> 02:36:18,800
भगवान के नाम का जप करना चाहते हैं तो आप ना मास्त्र के द्वारा

2108
02:36:18,800 --> 02:36:22,920
हमसे जुड़ सकते एक ही नंबर है सभी

2109
02:36:22,920 --> 02:36:28,600
प्रकार के संदेश के लिए 7408

2110
02:36:28,600 --> 02:36:32,680
30169 आपके मन में आने वाले जो प्रश्न होते हैं उनके लिए

2111
02:36:32,680 --> 02:36:36,920
गोवर्धन मट का ऑफिशियल चैनल है अपने

2112
02:36:36,920 --> 02:36:41,400
प्रश्न को डाले पूरी शंकराचार्य डाले गोवर्धन मठ के जो

2113
02:36:41,400 --> 02:36:45,880
वीडियोस है उनके द्वारा आपको आपके ज्यादातर उत्तर प्राप्त हो जाएंगे

2114
02:36:45,880 --> 02:36:50,480
और एक प्रश्न और आ रहा था अभी सामने कि

2115
02:36:50,480 --> 02:36:54,680
ब्रह्मा जी जो हैं वोह ऐसा कुछ नहीं ब्रह्मा

2116
02:36:54,680 --> 02:36:59,040
जी का युवा स्वरूप भी हमें प्राप्त है ब्रह्मा

2117
02:36:59,040 --> 02:37:03,240
जी जो है अजर नहीं है वह ईश्वर की इच्छा है कि वह अजर बनक आपको दिखना चाहता

2118
02:37:03,240 --> 02:37:07,320
है मगर वहां पर ईश्वर के स्वरूप को शाश्वत नहीं

2119
02:37:07,320 --> 02:37:11,320
कहेंगे अगर वह आपको दिखना चाहता है तो आप शाश्वत भी

2120
02:37:11,320 --> 02:37:15,360
कहते हो दिखते भी हो ठीक है यह आपके प्रश्न का उत्तर था एक प्रश्न

2121
02:37:15,360 --> 02:37:18,520
बारबार आ रहा था य वाला

2122
02:37:18,520 --> 02:37:21,720
और वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान

2123
02:37:21,720 --> 02:37:25,760
नहीं है क्योंकि वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान ही नहीं है तो अगर वेदों में पूर्ण

2124
02:37:25,760 --> 02:37:29,920
ब्रह्म का ज्ञान नहीं है तो वेदों में पूर्ण ब्रह्म कबीर के बारे में कुछ नहीं लिखा है अगर

2125
02:37:29,920 --> 02:37:33,960
कबीर पूर्ण ब्रह्म है तो ठीक है इनकी बात से इनकी बातें

2126
02:37:33,960 --> 02:37:37,200
आज बहुत सारी हमने जानी

2127
02:37:37,200 --> 02:37:41,320
और विधि निषेध इत्यादि की जानकारी के लिए आचार्य राम शंकर शुक्ल

2128
02:37:41,320 --> 02:37:45,520
जी का चैनल है उसको आप जवाइन करें उसको

2129
02:37:45,520 --> 02:37:49,680
देखें फॉलो करें जो आपको अपने यज्ञ पवित के विषय

2130
02:37:49,680 --> 02:37:53,920
संध्या के विषय में क्या करना है क्या नहीं करना इन सब बातों के विषय में विधि विषयक जो प्रश्न

2131
02:37:53,920 --> 02:37:58,400
उनके उत्तर आपको वहां पर मिलेंगे सभी को जय श्री राम

2132
02:37:58,400 --> 02:38:03,760
धर्म सम्राट श्रीमत करपात्री जी महाराज की जय

2133
02:38:03,760 --> 02:38:07,760
[संगीत]
