1
00:00:01,980 --> 00:00:07,980
[संगीत]

2
00:00:16,240 --> 00:00:19,920
तो सभी को जय श्री

3
00:00:19,920 --> 00:00:24,440
राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक

4
00:00:24,440 --> 00:00:27,200
होंगे

5
00:00:27,200 --> 00:00:31,280
और आज का विषय तो आपने देख ही लिया है गंभीर विषय जिस

6
00:00:31,280 --> 00:00:35,320
पर हम लोग चर्चा करने वाले हैं जो चर्चा

7
00:00:35,320 --> 00:00:39,600
में हमारे आज के मुख्य अतिथि हैं वोह

8
00:00:39,600 --> 00:00:43,720
एक सरप्राइज

9
00:00:43,720 --> 00:00:47,720
है आचार्य प्रशांत जी जो आर्य समाज

10
00:00:47,720 --> 00:00:52,040
से हैं उन्होंने एक वक्तव्य दिया है हमारे लिए कि

11
00:00:52,040 --> 00:00:56,160
कॉल वार्ता पर हमने उनको मना किया चर्चा

12
00:00:56,160 --> 00:01:00,200
में ना आने के लिए

13
00:01:00,200 --> 00:01:06,160
हमको यह नहीं पता है कि हमारी कॉल वार्ता आचार्य प्रशांत जी के साथ कब

14
00:01:06,160 --> 00:01:10,480
हुई अब बात य आती है वह कौन है जिसने कि उनको शिवांश

15
00:01:10,480 --> 00:01:14,800
द्विवेदी बनके या फिर शिवांश द्विवेदी की का मध्यस्थ

16
00:01:14,800 --> 00:01:18,800
बन कर के उनको यह कहा क्या कोई

17
00:01:18,800 --> 00:01:22,800
ऐसा है वाकई में जिसने उनको यह कहा या

18
00:01:22,800 --> 00:01:26,880
फिर आचार्य प्रशांत जी झूठ बोल रहे हैं

19
00:01:26,880 --> 00:01:31,720
क्योंकि अभी तक हमने जितने लोगों का आचरण देखा है उनके लिए बात नहीं करूंगा

20
00:01:31,720 --> 00:01:36,080
तो उसमें झूठ

21
00:01:36,080 --> 00:01:40,200
फरेब धोखा

22
00:01:40,200 --> 00:01:42,320
इत्यादि

23
00:01:42,320 --> 00:01:47,240
अ जो स्थितियां है लोगों की वो प्राप्त होती

24
00:01:47,240 --> 00:01:51,320
है तो ई समदा

25
00:01:51,320 --> 00:01:55,400
जी आपका स्वागत है सत्यम जी हैं और इनका ई

26
00:01:55,400 --> 00:01:58,760
संविधान नाम से पेजेस हैं

27
00:01:58,760 --> 00:02:02,200
जिस पर ये

28
00:02:02,200 --> 00:02:06,360
अपने जो विचार हैं उनको रखते हैं जी

29
00:02:06,360 --> 00:02:10,400
आप थोड़ा सा अपने बारे में बता द और फिर मैं कुछ कहूंगा उसके बाद हम

30
00:02:10,400 --> 00:02:15,000
लोग मुख्य विषय पर आएंगे जी सत्यम जी

31
00:02:15,000 --> 00:02:19,080
शेयर कर देता हूं लाइव

32
00:02:19,080 --> 00:02:24,240
को लाइव अच्छा अ

33
00:02:24,240 --> 00:02:30,160
आपके चैनल पर नहीं नहीं लिंक शेयर कर देता हूं ऐसा

34
00:02:30,160 --> 00:02:34,560
अच्छा अच्छा ठीक है ठीक तब तक मैं कुछ

35
00:02:34,560 --> 00:02:38,680
बातें बता दूं सबसे पहली बात तो यह है कि अभी हम लोग ये जो 30 40 मिनट

36
00:02:38,680 --> 00:02:42,720
जो भी वार्ता होगी उसके बाद कुछ बाकी रह गए

37
00:02:42,720 --> 00:02:47,120
थे एक दो चीजें मिस कर गया था मैं जो दोगला

38
00:02:47,120 --> 00:02:52,440
भाई अभिषेक के बारे में जब बात कर रहे थे रामपाल एंड कंपनी

39
00:02:52,440 --> 00:02:58,400
तो वह बातें हम लोग 30 40 मिनट के बाद लेंगे

40
00:02:58,400 --> 00:03:02,520
और एक शुरुआत में जब तक यह

41
00:03:02,520 --> 00:03:06,920
अपना कार्य कर रहे हैं तब तक मैं आपको बता दूं कुछ कुतर्क

42
00:03:06,920 --> 00:03:11,880
किए जाते हैं जिनका मैं समय समय पर जब ध्यान आ जाता है तो

43
00:03:11,880 --> 00:03:13,880
बता देता हूं कुत उन कुतर्कों

44
00:03:13,880 --> 00:03:18,240
का समाधान तो हमने

45
00:03:18,240 --> 00:03:22,240
एक जगह पर कहा था कि भाई तुम हमारे छोटे भाई की बात क्यों कर रहे हो

46
00:03:22,240 --> 00:03:26,320
उसने किसी से क्या टिप्पणी की है उसको क्यों तुमने

47
00:03:26,320 --> 00:03:30,600
चर्चा में घसीटा छोटे वाले भाई को और पता नहीं किसी

48
00:03:30,600 --> 00:03:34,880
कारणवश हमने यह भी कहा कि अगर जो पिजा खाते

49
00:03:34,880 --> 00:03:39,080
हुए तुम छोटे अनुज की जो इमेजेस दिखा रहे हो दुनिया को

50
00:03:39,080 --> 00:03:43,640
वो उसकी 10 12 साल पहले की है आज आप आक के उससे अगर बात करोगे

51
00:03:43,640 --> 00:03:47,920
तो उसमें इतना सामर्थ्य है कि व तुम्हें उठा उठा के पटके

52
00:03:47,920 --> 00:03:52,360
तो मतलब यहां मैंने अपने जो अनुज है उनका सामर्थ्य

53
00:03:52,360 --> 00:03:56,680
दिखाया कि उनमें इतना सामर्थ्य है ऐसा है बोला मैं

54
00:03:56,680 --> 00:04:01,160
ठीक है बोला अब इस पर कोई दीदी है

55
00:04:01,160 --> 00:04:07,000
दीदी नहीं सॉरी दी दी है

56
00:04:07,000 --> 00:04:11,720
उन्हीं समाज हों की समाज हों की दीदी है और

57
00:04:11,720 --> 00:04:16,040
समय आने पर व यह भी कहती है कि मैं आर समाजी नहीं हूं यह भी कह देती है

58
00:04:16,040 --> 00:04:20,600
इनका सबसे बड़ा दोगलापन तो यही दिखता है कि भाई

59
00:04:20,600 --> 00:04:24,600
यह किसी एक सिद्धांत के है ही नहीं जिसका कोई

60
00:04:24,600 --> 00:04:28,760
सिद्धांत नहीं होता उससे कैसे बात करोगे आप जैसे कि

61
00:04:28,760 --> 00:04:29,260
कई

62
00:04:29,000 --> 00:04:33,120
बार होता है कि रामपाल वाले आकर के रामपाल जी द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षाएं

63
00:04:33,120 --> 00:04:37,160
हैं उन्हीं का ही विरोध करते हैं क्यों क्योंकि अपने

64
00:04:37,160 --> 00:04:41,440
आप को वहां पर जितवा है भले ही रामपाल जी को हराते हुए जितवा है

65
00:04:41,440 --> 00:04:45,800
उनके मन में य होता है तो इसी

66
00:04:45,800 --> 00:04:50,560
प्रकार से ऐसे लोग होते जो किसी सिद्धांत के सगे नहीं है खैर

67
00:04:50,560 --> 00:04:55,360
तो कोई इनकी दी है व यह कहती है भाई

68
00:04:55,360 --> 00:04:59,840
कि जो व्यक्ति बॉडी की बात करेगा जो व्यक्ति शरीर के बाहुबल

69
00:04:59,840 --> 00:05:04,360
की बात करेगा उसको छपरी नहीं कहेंगे तो क्या

70
00:05:04,360 --> 00:05:08,960
कहेंगे है ना वैसे जो स्वयं को

71
00:05:08,960 --> 00:05:13,240
आर्या कहने वाली है मुझे लगता है कि कोई लड़का

72
00:05:13,240 --> 00:05:17,360
ही है जो आवाज बदल के बात करता है तो आर्य शब्द का जो

73
00:05:17,360 --> 00:05:22,000
अर्थ है वह किसी किसी भाषा में थोड़ा भी है अश्व भी है

74
00:05:22,000 --> 00:05:26,160
तो जो इस तरह से किसी सिद्धांत के सगे नहीं होते

75
00:05:26,160 --> 00:05:30,160
हैं उनके लिए आर समथिंग ना

76
00:05:30,160 --> 00:05:34,880
कह करके ऐसी दी को या ऐसे ब्रो को

77
00:05:34,880 --> 00:05:38,920
घोड़ा अश्व समथिंग समथिंग कहना ज्यादा उचित वहां पर लगेगा वो

78
00:05:38,920 --> 00:05:43,160
किसी किसी भाषा में है आर शब्द का अर्थ है ऐसा वो माधवाचार्य

79
00:05:43,160 --> 00:05:44,120
शास्त्री जी है ना

80
00:05:44,120 --> 00:05:48,920
उनकी उनके ग्रंथ में लिखी है य बात या समथिंग

81
00:05:48,920 --> 00:05:52,960
उसमें लिखी है गर्व से कहो हिंदू में आर शब्द का

82
00:05:52,960 --> 00:05:57,360
अर्थ कहां कहीं कहीं पर कुछ अन्य देशों में गलत उसम भी

83
00:05:57,360 --> 00:06:01,480
है र हम आ जाते हैं सनातन सिद्धांत पर तो मैं जब

84
00:06:01,480 --> 00:06:05,840
भी बात करता हूं कि भाई कोई बात आप हमारी अगर काट रहे तो सिद्धांत

85
00:06:05,840 --> 00:06:10,080
से काटिए सनातन सिद्धांत से मनम कीी बातों से मत

86
00:06:10,080 --> 00:06:14,600
काट तो उधर से जितने भी दागदी फायर होते हैं

87
00:06:14,600 --> 00:06:18,600
वो सब मनमुक कुछ भी कहते रहो कि ऐसे व्यक्ति को छपरी कहेंगे कि नहीं

88
00:06:18,600 --> 00:06:22,840
कहेंगे जो बॉडी की बात करता हो भाई

89
00:06:22,840 --> 00:06:26,920
जब रामायण की शुरुआत होती है तो उसमें प्रभु श्री

90
00:06:26,920 --> 00:06:31,440
राम के कंधे बताए जाते हैं व स्थल बताया जाता है

91
00:06:31,440 --> 00:06:35,680
अगर यह सब बताया जा रहा है तो छपरी हो गए

92
00:06:35,680 --> 00:06:39,760
रामायण के जो नायक है वो छपरी हो गए ना ऐसे ही सनातनी

93
00:06:39,760 --> 00:06:44,360
हो ना तुम लोग जब राक्षस का

94
00:06:44,360 --> 00:06:48,400
वो ण के रूप में शव पड़ा हुआ होता है

95
00:06:48,400 --> 00:06:52,760
दुदु भी राक्षस था हा

96
00:06:52,760 --> 00:06:56,880
वहां पर लक्ष्मण जी बताते हैं कि मेरे भाई में इतना शौर है इतना वीर है कि वो

97
00:06:56,880 --> 00:07:00,240
एक छू देंगे तो वो उड़ जाएगा उड़ जाता है

98
00:07:00,240 --> 00:07:04,760
वो सब पपरी पन है आपके हिसाब से रामायण में सनातन सिद्धांत

99
00:07:04,760 --> 00:07:08,800
कहां है भाई तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के

100
00:07:08,800 --> 00:07:13,400
विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है शास्त्र लाओ ना

101
00:07:13,400 --> 00:07:17,960
बाहुबल की बात करने वाला छपरी है शास्त्र से दिखाओ कहां है शास्त्र

102
00:07:17,960 --> 00:07:22,000
और अगर नहीं है शास्त्र के बाहर से अपना ज्ञान देना है मनमुक

103
00:07:22,000 --> 00:07:26,080
ज्ञान देना है तो यह ढंडोरा पीटना बंद करो कि हम धर्म के प्रचारक है धर्म

104
00:07:26,080 --> 00:07:32,080
के रक्षक

105
00:07:32,920 --> 00:07:37,080
हा आ गया हूं एक मिनट एक और उनका

106
00:07:37,080 --> 00:07:41,720
कुत क था यह जो ती

107
00:07:41,720 --> 00:07:46,360
है समाझ हों अलंकार समाज हों की द

108
00:07:46,360 --> 00:07:50,360
इनका एक कुतर्क था कि भाई यह बोल रहे हैं ऐसे ऐसे शब्द बोल

109
00:07:50,360 --> 00:07:55,600
रहे हैं पहली बात तो हमने किसी एक व्यक्ति विशेष को वो शब्द नहीं बोला था

110
00:07:55,600 --> 00:07:59,640
कोई मातृ शक्ति थी जो नृत्य कर

111
00:07:59,640 --> 00:08:03,720
रही थी तो उसके लिए वो शब्द बोला था कि वो जो नाच रही है तो

112
00:08:03,720 --> 00:08:07,800
नाचने वाली के रूप में जब वो नाच रही है जिस समय तो जिस समय कोई नृत्य कर रहा

113
00:08:07,800 --> 00:08:11,880
है तो उसको नृत्य की बोला जाएगा और अगर उसको

114
00:08:11,880 --> 00:08:15,680
नाचना कहते हैं नाच है वो तो नाचने वाले को जैसे

115
00:08:15,680 --> 00:08:19,960
नाचने वाला कहा जाएगा तो जिस समय वो नाच कर रही है तो उनको नाचने

116
00:08:19,960 --> 00:08:24,200
वाली कहा जाएगा इस संदर्भ में हमने वहां पर वह शब्द उपयोग में

117
00:08:24,200 --> 00:08:28,400
लाए खैर और वो भी किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था

118
00:08:28,400 --> 00:08:32,480
एक जनरल किसी का नाम लेकर के कोई टिप्पणी नहीं थी

119
00:08:32,480 --> 00:08:38,480
पर्सनल अटैक नहीं था खैर फिर भी

120
00:08:38,520 --> 00:08:42,600
हम फिर हमें यह कहा गया कि भाई यह क्या सन्यासियों की

121
00:08:42,600 --> 00:08:46,800
ऐसी भाषा होती है क्या परंपरा प्राप्त ऐसे होते हैं

122
00:08:46,800 --> 00:08:51,000
पहले तो सनातन सिद्धांत सुनो इस बारे में

123
00:08:51,000 --> 00:08:55,960
जब सूप नखा कामा वेश होकर के

124
00:08:55,960 --> 00:09:00,120
है ना रामचंद्र जी के पास आती है तो रामचंद्र

125
00:09:00,120 --> 00:09:04,160
जी वहां पर उसके साथ विनोद ही करते हैं

126
00:09:04,160 --> 00:09:08,400
सीधे-सीधे फ फ्लैट जवाब नहीं दे देते स्पष्ट

127
00:09:08,400 --> 00:09:12,640
रूप से विनोद करते हैं वहां पर क्योंकि वह देख रहे हैं कि का मातुर

128
00:09:12,640 --> 00:09:16,720
हो गई है तो अगर कोई आता ताई हो रहा है तो

129
00:09:16,720 --> 00:09:21,400
उसके साथ विनोद करने का भी प्रावधान है सनातन सिद्धांत में

130
00:09:21,400 --> 00:09:25,640
अब दूसरी बात ले लेते हैं कि यह जो दी है ये अपने आप

131
00:09:25,640 --> 00:09:27,880
को

132
00:09:27,880 --> 00:09:33,880
अ कहती कि

133
00:09:34,000 --> 00:09:38,200
हम समाजी नहीं है मगर हम जो दयानंद जी हैं उनके

134
00:09:38,200 --> 00:09:42,480
सिद्धांतों को बहुत मानते हैं तो मेरे भाई दयानंद

135
00:09:42,480 --> 00:09:46,600
जी ने उन्हीं सन्यासियों को जिनका

136
00:09:46,600 --> 00:09:51,400
आप अपने ढंडोरा पीटते हो कि हम बहुत संतों का बहुत सम्मान करते हैं

137
00:09:51,400 --> 00:09:55,400
हम उन्हीं सन्यासियों को उन्हीं आचार्यों को

138
00:09:55,400 --> 00:10:01,400
पोप पंडे इत्यादि इत्यादि काहा है भांड काहा

139
00:10:02,880 --> 00:10:08,880
यह सब सन्यासियों की लैंग्वेज है तक कहा है

140
00:10:12,160 --> 00:10:16,320
भगवान शिव पर आस्था रखने वालों पर कितना बड़ा कोठरा गात

141
00:10:16,320 --> 00:10:20,800
है यह सब सन्यासियों की लैंग्वेज है

142
00:10:20,800 --> 00:10:25,720
तो इसीलिए कहता हूं कि आप जरा

143
00:10:25,720 --> 00:10:30,560
सिद्धांतों पर बात करो साइकेट्रिस्ट

144
00:10:30,560 --> 00:10:36,560
और कानून इत्यादि वगैरह बहुत पहले छोड़

145
00:10:37,600 --> 00:10:42,040
चुके वो कहावत है की गुरुदेव की लाइब्रेरी

146
00:10:42,040 --> 00:10:46,200
में कानून की किताब भी पढ़ी थी हम जी सत्यम जी

147
00:10:46,200 --> 00:10:50,240
जय श्री राम बोलिए जय श्री राम नम

148
00:10:50,240 --> 00:10:54,880
चंडिका हर हर महादेव जी

149
00:10:54,880 --> 00:10:59,760
तो आज का विषय यही था कि आपके और

150
00:10:59,760 --> 00:11:03,960
जो जिसके बीच वार्ता होने जा रही थी शास्त्रार्थ होना था

151
00:11:03,960 --> 00:11:08,160
उसका मध्यस्थ मैं हूं तो सबसे पहले तो यह

152
00:11:08,160 --> 00:11:13,040
क्लियर कर देता हूं कि अगर आपको किसी ने यह कहा हो कि मैं मध्यस्थ नहीं हूं

153
00:11:13,040 --> 00:11:17,360
ऐसा अगर किसी ने कहा हो तो अभी बता दीजिए

154
00:11:17,360 --> 00:11:21,440
ताकि मैं वोह भी क्लियर कर दूं कि मध्यस्थ था भी या नहीं अगर

155
00:11:21,440 --> 00:11:25,760
जिसको लगता है कि मैं मध्यस्थ नहीं था और व प्रमाणित कर दे कि मैं मध्यस्थ

156
00:11:25,760 --> 00:11:27,600
नहीं था ऐसा कहके

157
00:11:27,600 --> 00:11:31,880
तो मेरा जो ई समधा चैनल टेलीग्राम पर 14000 जो सब्सक्राइबर

158
00:11:31,880 --> 00:11:36,080
है मैं उसको दे दूंगा ऐसा की ऐसा उसको एडमिन ओनर बनाकर लेफ्ट कर जाऊंगा

159
00:11:36,080 --> 00:11:40,240
अगर यह प्रमाणित कर दे कि मैं मध्यस्थ नहीं था तो

160
00:11:40,240 --> 00:11:44,680
एक मिनट यहां पर मैं बोलना चाहूंगा एक बहुत बड़ा खुलासा है

161
00:11:44,680 --> 00:11:48,800
कि जिस वार्ता की आचार्य प्रशांत जो आर समाज से

162
00:11:48,800 --> 00:11:53,160
हैं जिस वार्ता को वो उधत कर रहे हैं कि हमने जो है शिवांश

163
00:11:53,160 --> 00:11:57,200
की सारी शर्तें मान ली और शिवांश ने हमसे मना कर

164
00:11:57,200 --> 00:12:01,200
दिया वो वार्ता उन्होंने हमसे से नहीं की थी वोह

165
00:12:01,200 --> 00:12:07,200
हमारे एक

166
00:12:28,160 --> 00:12:32,200
बंधुवुलु जो भी मैसेज हमारा गया है उन तक वो इनके

167
00:12:32,200 --> 00:12:36,240
द्वारा गया है और वो क्या गया है वो कुछ और गया है और उन्होंने उसको कुछ और

168
00:12:36,240 --> 00:12:40,320
रूप देकर के वहां डाल दिया सबसे पहली बात तो यह आ जाती है

169
00:12:40,320 --> 00:12:44,320
हम अपने हर वीडियो में जब अपना नंबर देते हैं

170
00:12:44,320 --> 00:12:48,320
हम अपने फबुक में लगभग हर कमेंट में नंबर देते

171
00:12:48,320 --> 00:12:52,400
रहे हैं हमारे प्रोफाइल में हमारा नंबर है हर तरह से हम तक पहुंचना

172
00:12:52,400 --> 00:12:56,440
बहुत ही सरल और सुगम है तो यह स्थिति

173
00:12:56,440 --> 00:13:00,680
आती क्यों है लोगों की कि वो किसी और से हमारे बारे में बात करते

174
00:13:00,680 --> 00:13:05,240
हैं जब हमने अपना नंबर दे रखा है क्या हाथ कापते

175
00:13:05,240 --> 00:13:09,960
हैं नंबर डायल करते समय जैसे वो भाई साहब

176
00:13:09,960 --> 00:13:14,080
वो इनके आजकल वो आगे बात करेंगे विज्ञान दर्शन

177
00:13:14,080 --> 00:13:18,440
जी जो आजकल इनके वो सिप सलार बने हुए हैं

178
00:13:18,440 --> 00:13:22,720
सरगना वही एक है बस वही पार लगाएंगे अब समाज की अलंकार

179
00:13:22,720 --> 00:13:27,480
समाज की तो अब उन्होंने क्या किया जब हमारा जब जब हमारा नंबर

180
00:13:27,480 --> 00:13:31,560
सर्वसामान्य के लिए सुलभ है जब हमारा फेस जो इंस्टा अकाउंट

181
00:13:31,560 --> 00:13:36,080
है उस पर जो मैसेज आते ज्यादातर मैसेज के जवाब दिए जाते हैं

182
00:13:36,080 --> 00:13:40,320
तो उनको क्या आवश्यकता पड़ी थी कि बात जो है जाकर के आदित्य

183
00:13:40,320 --> 00:13:43,200
रसने से करें जो छोटे भाई है क्या

184
00:13:43,200 --> 00:13:49,200
आवश्यकता पड़ी थी डर डर है

185
00:13:49,280 --> 00:13:53,280
ना और इसी प्रकार से आचार्य प्रशांत जी तो

186
00:13:53,280 --> 00:13:57,520
सज्जन व्यक्ति मैंने मुझे उनसे ये अपेक्षा नहीं थी

187
00:13:57,520 --> 00:14:01,560
मगर उन्होंने भी यही किया भाई डायरेक्ट जब हमारा नंबर अवेलेबल है तो आपको किसी और से

188
00:14:01,560 --> 00:14:06,080
वार्ता करनी आवश्यकता क्या पड़ रही है और फिर आवश्यकता जब पड़ रही है चलो मध्यस्थ

189
00:14:06,080 --> 00:14:10,080
का उपयोग कर भी रहे हैं तो फिर सच्चाई के साथ क्यों नहीं कर रहे हैं यह सच्चाई

190
00:14:10,080 --> 00:14:14,120
है कि नहीं है उनके द्वारा कही जाने वाली बातें आप लोगों को अभी पता चलेगा मगर इन्होंने

191
00:14:14,120 --> 00:14:18,200
एक बहुत बड़ी बात कह दी है कि इनका टेलीग्राम पर ई संविधान नाम से

192
00:14:18,200 --> 00:14:22,200
14000 फॉलोअर्स का चैनल है यह उसकी ओनरशिप उसको

193
00:14:22,200 --> 00:14:26,200
दे देंगे जो यह कह दे आकर के ये सिद्ध कर दे कि ये वो

194
00:14:26,200 --> 00:14:30,280
मध्यस्थ नहीं है जिस मध्यस्थता के आधार आचार्य प्रशांत यह

195
00:14:30,280 --> 00:14:34,320
कह रहे हैं कि हमने उनको कॉल पर मना कर दिया हमने उन्हें मना नहीं

196
00:14:34,320 --> 00:14:38,480
किया है वो इनके आधार पर य बोल रहे कि हमने मना

197
00:14:38,480 --> 00:14:42,840
किया है अब इन्होंने यह बोला भी हमारी तरफ से कि नहीं यह सारी कहानी अब आपको पता चलने वाली है

198
00:14:42,840 --> 00:14:46,880
जी सत्यम जी बोलिए तो सबसे पहले

199
00:14:46,880 --> 00:14:51,040
मैं बता दू जो आचार्य प्रशांत शर्मा जी है मैं उनका सम्मान करता हूं

200
00:14:51,040 --> 00:14:55,760
क्योंकि वह अन्य आर्य जो नव आर्य समाज की भाति

201
00:14:55,760 --> 00:14:58,360
नहीं है चर्चा करने में बहुत अच्छे से करते

202
00:14:58,360 --> 00:15:03,120
हैं जैसे हम चर्चा करते हैं वैसे ही वो करते हैं और चर्चा का स्वरूप भी ऐसा ही होना

203
00:15:03,120 --> 00:15:07,240
चाहिए तो उन्होंने मुझे कहा कि अभी

204
00:15:07,240 --> 00:15:11,360
जो यह चल रहा है चर्चा का विषय कि एक दूसरे पर बोले

205
00:15:11,360 --> 00:15:15,360
जा रहे हैं सब तो मैं चाहता हूं कि विज्ञान

206
00:15:15,360 --> 00:15:19,440
दर्शन जो मोहित गोड है उनका और शिवांश जी का शास्त्रार्थ हो

207
00:15:19,440 --> 00:15:23,760
जाए आमने सामने बैठकर तो मैंने अच्छा विचार है

208
00:15:23,760 --> 00:15:28,080
हो जाना चाहिए बात कर लीजिए तो उन्होंने कहा कि आप बात करिए

209
00:15:28,080 --> 00:15:32,360
शिवांश जी से कि वोह तैयार है या नहीं है इधर

210
00:15:32,360 --> 00:15:36,440
मोहित गोड तैयार है तो मैंने बोला ठीक है मैं पूछ

211
00:15:36,440 --> 00:15:40,520
लेता हूं फिर मैंने शिवांश जी को फोन किया

212
00:15:40,520 --> 00:15:44,600
पूछा कि ऐसी ऐसी बात है कि वह आपको शास्त्रार्थ के लिए आमने सामने के लिए पूछ

213
00:15:44,600 --> 00:15:48,640
रहे हैं तो शिवांश जी ने कहा कि पहले सबसे

214
00:15:48,640 --> 00:15:52,960
पहले मोहित को उन टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी पड़ेगी जो उस

215
00:15:52,960 --> 00:15:57,000
स्ट्री में बैठ के हम मेरे परिवार के लिए उसने की तो

216
00:15:57,000 --> 00:16:01,360
मला ठीक बात है और उसने किया उस स्ट्रीम में हुई

217
00:16:01,360 --> 00:16:05,960
इसको थोड़ा स्पष्ट करिए क्योंकि मोहित गौर फिर यहां पर ये क मैंने कोई टिप्पणी नहीं की

218
00:16:05,960 --> 00:16:10,080
उस स्ट्रीम के उस स्ट्रीम से जुड़ा होने के लिए माफी

219
00:16:10,080 --> 00:16:13,360
मांगनी होगी कुछ इस तरह का भाव था या मोहित गौड़

220
00:16:13,360 --> 00:16:17,360
की टिप्पणियों के लिए ही केवल माफी का भाव

221
00:16:17,360 --> 00:16:21,440
हां तो इस तरह इन्होंने कहा वही जाकर मैंने कह दिया कि वहां पर

222
00:16:21,440 --> 00:16:25,640
पहले वो माफी मांगने का कह रहे हैं कि पहले माफी मांगे उसके बाद

223
00:16:25,640 --> 00:16:29,680
सहार दोपर चर्चा होगी कोई तो उन्होंने ने कहा कि जब

224
00:16:29,680 --> 00:16:34,400
मिलेंगे आमने सामने तो माफी मांग लेंगे तो

225
00:16:34,400 --> 00:16:38,400
जब मिलेंगे आमने सामने तब माफी मांग लेंगे उसके बाद शास्त्रार्थ कर लेंगे तो

226
00:16:38,400 --> 00:16:42,840
बोला ठीक है मैं यह कह देता हूं उनका क्या रिप्लाई आता है तो मैंने शिवान

227
00:16:42,840 --> 00:16:46,840
जी को फिर फोन किया शायद अगले दिन किया था और इनको यह

228
00:16:46,840 --> 00:16:50,960
बात बताई तो इन्होंने कहा नहीं पहले वह अभी माफी मांगे उसके बाद मिलने

229
00:16:50,960 --> 00:16:55,120
का तय होगा जहां मिलना होगा फिर मैंने यही बात आचार्य

230
00:16:55,120 --> 00:16:59,360
जी को बता दी कि वो तो ऐसे कह रहे हैं कि पहले माफी मांगो और

231
00:16:59,360 --> 00:17:03,560
उसके बाद मैंने कहा कि आचार्य जी आप एक बार मोहित की मेरे से बात करवा दीजिए

232
00:17:03,560 --> 00:17:07,680
ताकि उसमें पता चल जाए कि मुद्दा क्या है पूरा मोहित जी की तरफ से तो

233
00:17:07,680 --> 00:17:11,720
आचार्य जी ने मुझे कुछ पॉइंट लिखकर भेजे मोहित ने लिख

234
00:17:11,720 --> 00:17:15,880
केर भेजे थे वहीं से उस आचार्य जी ने मुझे फॉरवर्ड कर दिया कि ये ये ये

235
00:17:15,880 --> 00:17:20,000
बिंदु है जो मोहित के हैं वही बिंदु मैंने फॉरवर्ड कर दिया

236
00:17:20,000 --> 00:17:24,240
शिवांश जी को ट पर सुबह किए थे शाम को इन्होंने सीन

237
00:17:24,240 --> 00:17:28,600
कर लिया था और शाम को जब सीन कर लिया उसके बाद मैंने 8

238
00:17:28,600 --> 00:17:32,600
बजे के आसपास कुछ आचार्य जी को मैसेज किया कि उन्होंने सीन तो कर लिया लेकिन

239
00:17:32,600 --> 00:17:36,920
रिप्लाई नहीं दिया तो आचार्य जी को यह लगा कि इन्होंने

240
00:17:36,920 --> 00:17:40,920
कोई रिप्लाई नहीं दिया है इसका मतलब वोह नहीं आएंगे

241
00:17:40,920 --> 00:17:45,760
जबकि शिवांश जी ने आचार्य जी का वोह पूरा पढ़कर इन्होंने

242
00:17:45,760 --> 00:17:49,840
आप वीडियो बना रहे थे युगल किशोर जी के साथ उसमें आपने

243
00:17:49,840 --> 00:17:54,040
वीडियो में कहा था उसका रिप्लाई दिया था आपने जी

244
00:17:54,040 --> 00:17:58,280
तो उन्होंने वो वीडियो नहीं देखी थी और

245
00:17:58,280 --> 00:18:02,520
आज मैंने जब यह कहा था कि वो शिवांशी ऐसे कह रहे हैं कि पहले

246
00:18:02,520 --> 00:18:06,600
माफी मांगे तो उसका अर्थ यह था कि अभी माफी मांगे उसके

247
00:18:06,600 --> 00:18:10,880
बाद मिलने की चर्चा होगी तो आचार्य जी यह समझ

248
00:18:10,880 --> 00:18:15,040
नहीं पाए उनका उन्होंने यह समझा कि पहले माफी तो मांग

249
00:18:15,040 --> 00:18:19,640
ही रहा है मोहित गड़ मिलने पर कि म मांग लेंगे फिर भी ये मना कर रहे हैं

250
00:18:19,640 --> 00:18:23,800
तो मेरे समझाने में दिक्कत हुई या उनके समझने में दिक्कत हुई

251
00:18:23,800 --> 00:18:28,120
इसमें मुझे पता नहीं है लेकिन य से दिक्कत चालू हुई इसके बाद इ

252
00:18:28,120 --> 00:18:32,880
आचार्य जी ने तुरंत डाल दिया कि उन्होंने मना कर दिया

253
00:18:32,880 --> 00:18:36,920
यह होने के बाद सुबह शिवास जी का मेरे पास रिप्लाई आ जाता है उन

254
00:18:36,920 --> 00:18:41,280
सारे बिंदुओं का इन्होंने बिंदु बनाकर भेज दिए थे मैंने वही फॉरवर्ड आचार्य

255
00:18:41,280 --> 00:18:44,040
जी को कर दिया फिर

256
00:18:44,040 --> 00:18:48,040
मैंने यह भी कहा कि आपने जो डाला है वो जल्द जल्दी डाल

257
00:18:48,040 --> 00:18:52,600
दिया हो सकता है उनको रिप्लाई करने में लेट हो गया है यह और लेकिन इन्होंने कर दिया

258
00:18:52,600 --> 00:18:56,680
है तो कहीं भी यह चर्चा नहीं हुई कहीं भी मैंने यह

259
00:18:56,680 --> 00:19:00,800
नहीं कहा कि शिवांश जी मना कर रहे हैं शास्त्रार्थ के लिए यह करने को तैयार

260
00:19:00,800 --> 00:19:05,760
है शर्त सिर्फ एक है कि पहले मोहित गोड को माफी मांगनी

261
00:19:05,760 --> 00:19:09,880
होगी इस बात को मैं जरा दर्शकों को और क्लियर कर

262
00:19:09,880 --> 00:19:14,160
दूं अगर मैं कहीं पर गलत हूं तो आप मुझे बताइएगा हां

263
00:19:14,160 --> 00:19:18,800
जब आपने हमसे प्रस्ताव रखा है तो एट दी एंड हमारा यह कहना था

264
00:19:18,800 --> 00:19:23,160
कि एक ऐसी चर्चा जहां पर मर्यादा का उल्लंघन हुआ

265
00:19:23,160 --> 00:19:27,160
है जो कि यदि मोहित गौर हमसे अकेले में माफी मांगने को

266
00:19:27,160 --> 00:19:31,560
कह रहे हैं तो इसका मतलब व मान रहे हैं कि हां उस चर्चा में गलत हुआ है पहली बात

267
00:19:31,560 --> 00:19:35,640
वो मान रहे हैं तभी तो हमसे अकेले में वहां पर जब शास्त्र से तुरंत

268
00:19:35,640 --> 00:19:39,640
पहले माफी मांगने के लिए तैयार हुए हैं ठीक है अब

269
00:19:39,640 --> 00:19:44,280
बात यह आती है कि हमने यह कहा कि जिस चर्चा से आप जुड़े हुए हैं

270
00:19:44,280 --> 00:19:48,680
यदि आपको लगता है कि वह चर्चा गलत थी आपको सार्वजनिक रूप

271
00:19:48,680 --> 00:19:52,760
से चर्चा की निंदा करनी चाहिए उस चर्चा से

272
00:19:52,760 --> 00:19:57,000
जुड़े होने वाले के रूप में क्षमा मांगनी चाहिए और उस चर्चा

273
00:19:57,000 --> 00:19:59,080
को जो व सोल मीडिया

274
00:19:59,080 --> 00:20:03,240
के पटल पर डला हुआ है उसको हटाने की मांग भी करनी चाहिए य तीन बातें

275
00:20:03,240 --> 00:20:08,440
मेरी थी क्या मैं सही कह रहा हूं सत्यम जी

276
00:20:08,440 --> 00:20:13,360
हां यही बातें थी इस पर मैं एक और ध्यान देना चाहूंगा

277
00:20:13,360 --> 00:20:17,600
बताना चाहूंगा कि जो मोहित गोड की तरफ से बिंदु आए थे कि ये यह बिंदु

278
00:20:17,600 --> 00:20:21,760
है मेरी तरफ से उसमें बिंदु संख्या दो है अगर आप चाहे तो बाद

279
00:20:21,760 --> 00:20:25,760
में इसको कम्युनिटी में पोस्ट कर दे कि उन्होंने क्या लिख के भेजा था उनमें वो लिख

280
00:20:25,760 --> 00:20:29,920
रहे हैं कि स्ट्रीम पर 30 मिनट बाद विज्ञान दर्शन ने

281
00:20:29,920 --> 00:20:33,920
जाकर अपना रिएक्शन दिया उसे क्या पता कि यह जानकारी कहां

282
00:20:33,920 --> 00:20:38,080
से और किस प्रसंग में आई है आपके ऊपर बात हो रही है लेकिन मैं

283
00:20:38,080 --> 00:20:42,200
जब कह रहा हूं कि विज्ञान दर्शन ये कह रहे है कि 30 मिनट बाद जॉइन हुए

284
00:20:42,200 --> 00:20:46,200
तो स्ट्रीम चालू होने से पहले कम्युनिटी पर पोस्ट क्यों कर दिया इस स्ट्रीम के

285
00:20:46,200 --> 00:20:50,240
बारे में तो यानी उनको पता था चलिए पता भी नहीं था कि

286
00:20:50,240 --> 00:20:54,440
क्या होने वाला है लेकिन स्ट्रीम का जो टाइटल था छपरी परंपरावादी तो इससे

287
00:20:54,440 --> 00:20:58,640
भी समझ कि नहीं यार यहां कुछ गड़बड़ हो सकती है बार पूछ लेता हूं कि ये किसके

288
00:20:58,640 --> 00:21:02,720
के विषय में हो रहा है क्या विषय है यह हमारी जिम्मेदारी होती है हम कहीं जा

289
00:21:02,720 --> 00:21:06,920
रहे हैं तो पूरी जानकारी ले नहीं तो कहीं भी पहुंच जाए और फिर कह दे नहीं

290
00:21:06,920 --> 00:21:12,520
मेरी कोई गलती नहीं है

291
00:21:12,520 --> 00:21:16,600
तो जी मैं भी एक बात जोड़ना चाहूंगा इसमें मैंने भी एक उत्तर लिख के

292
00:21:16,600 --> 00:21:20,680
दिया था उनके इस बिंदु का कि मान लिया कि तुम 30 मिनट बाद जुड़े हो

293
00:21:20,680 --> 00:21:24,680
स्ट्रीम से तो तुम्हें तीन घंटे की स्ट्रीम में

294
00:21:24,680 --> 00:21:28,720
अंत तक ये पता नहीं चल पाया कि इसमें क्या हो रहा है और

295
00:21:28,720 --> 00:21:33,080
तुम वहां पर बैठ कर के सुन रहे हो उसमें अपनी क्योंकि उसमें तुम

296
00:21:33,080 --> 00:21:37,280
किसी का प्रतिकार तो नहीं कर रहे हो और बल्कि उनके ही पक्ष में उनका ही समर्थन

297
00:21:37,280 --> 00:21:41,400
रखने वाली बातें कर रहे हो तो इससे भी उनको मोरल सपोर्ट प्राप्त हो रहा है वो

298
00:21:41,400 --> 00:21:46,360
करने का जो वो कर रहे हैं जो आपको पता नहीं है जो आपको पता होना चाहिए

299
00:21:46,360 --> 00:21:50,440
अंत तक दूसरी बात ये आती है कि चलो ठीक है स्ट्रीम होने के बाद आपको

300
00:21:50,440 --> 00:21:54,920
पता चल गया उस स्ट्रीम में क्या था जब पता चल

301
00:21:54,920 --> 00:21:59,040
गया जब पता चल गया तो अब आप उसका प्रतिकार करो कि

302
00:21:59,040 --> 00:22:03,760
ऐसा ऐसा हुआ उस स्ट्रीम में हटाइए इसको

303
00:22:03,760 --> 00:22:07,880
अनैतिक है अमर्यादित है अब भी नहीं है क्योंकि भाई

304
00:22:07,880 --> 00:22:12,160
क्षमा मांगने के लिए भी बहुत ज्यादा साहस चाहिए होता है वह हर एक में नहीं होता

305
00:22:12,160 --> 00:22:16,360
है क्षमा मांगने के लिए भी साहस चाहिए होता है तो जब तुम्ह जब तुम्ह

306
00:22:16,360 --> 00:22:20,360
पता चल गया बाद में स्ट्रीम और हटाने की

307
00:22:20,360 --> 00:22:24,440
मांग करो वीडियो बनाओ उसके विरुद्ध कि ऐसी ऐसी चीजें

308
00:22:24,440 --> 00:22:27,640
हुई है मुझे धोखे में रखा गया मुझे मालूम नहीं था ये चीजें वहां

309
00:22:27,640 --> 00:22:31,960
पर हो रही है बनाओ वीडियो प्रतिकार करो गलत गलत व्यक्ति

310
00:22:31,960 --> 00:22:36,240
का जी उन्होंने बिंदु संख्या एक में लिखा है

311
00:22:36,240 --> 00:22:40,480
कि वो सब जानकारी तो उन बहन ने स्ट्रीम

312
00:22:40,480 --> 00:22:44,560
पर करी थी कि भाई पत्नी आदि की जो खुद महिला है

313
00:22:44,560 --> 00:22:48,640
तो यह बिंदु मुझे कभी समझ ही नहीं आ रहा है इतने मतलब दो तीन

314
00:22:48,640 --> 00:22:52,920
दिन से पढ़ रहा हूं कि महिला है तो क्या गाली देने का वो

315
00:22:52,920 --> 00:22:56,920
परमिशन मिल जाती है कि तुम महिला हो महिला को गाली दे सकते हो तुम पुरुष हो तुम पुरुष को

316
00:22:56,920 --> 00:23:00,920
गाली दे सकते हो या अभद्रता पूर्वक व्यवहार कर सकते नहीं कर सकते ये

317
00:23:00,920 --> 00:23:06,200
सनातन सिद्धांत तो मुझे नहीं दिखाई दे रहे इसमें जैसा कि बताया जाता है

318
00:23:06,200 --> 00:23:10,200
है नहीं सनातन सिद्धांत तो है ही है लेकिन यह तो

319
00:23:10,200 --> 00:23:14,320
सामान्य से नियम होते हैं समाज में जीने के कि किसी

320
00:23:14,320 --> 00:23:18,840
को अभद्रता पूर्वक कुछ नहीं कहना मैं तो ये कहूंगा

321
00:23:18,840 --> 00:23:23,040
चतम जी की जितने भी नियम ग्रहण करने योग्य है मानव

322
00:23:23,040 --> 00:23:28,960
उचित मर्यादा के रूप में वो सारे नियम हमारे ग्रंथावली में दिए गए हैं

323
00:23:28,960 --> 00:23:33,440
बिल्कुल वाल्मीकि संहिता अगर आप देखें

324
00:23:33,440 --> 00:23:37,480
वाल्मीकि संहिता में लिखा हुआ है कि भोजन करते समय अच्छे विचार ही

325
00:23:37,480 --> 00:23:42,280
होने चाहिए मन में अगर बुरे विचार होंगे तो राक्षस प्रवृत्ति का

326
00:23:42,280 --> 00:23:42,780
आचरण

327
00:23:42,720 --> 00:23:46,800
बना देगा तो ये आज भी आप देखिए ना लागू हो रहा

328
00:23:46,800 --> 00:23:51,240
है कि आप भोजन करते वक्त टीवी देख रहे हैं उस पर

329
00:23:51,240 --> 00:23:55,600
कुछ भी ऐसे मारधाड़ देख रहे हैं तो मन वैसा रहेगा और जैसा मन होगा

330
00:23:55,600 --> 00:23:59,680
और जैसा खाना होगा जैसा मन होगा वैसे आचरण बनता जाएगा धीरे

331
00:23:59,680 --> 00:24:03,880
धीरे अपना तो ये शास्त्र तो बहुत कुछ ऐसी बातें कहते

332
00:24:03,880 --> 00:24:09,040
हैं जिनको समझना है सिर्फ

333
00:24:09,040 --> 00:24:15,040
जी तो इसमें एक बात और है

334
00:24:15,720 --> 00:24:20,080
कि जैसे यह यह बात जो कही जा रही है कि मातृ

335
00:24:20,080 --> 00:24:24,120
शक्ति ने मातृ शक्ति को बोला इसलिए इसमें कोई दोराय नहीं है मतलब उसमें कोई ऑफेंस नहीं

336
00:24:24,120 --> 00:24:28,400
है तो जब सूपनखा जो

337
00:24:28,400 --> 00:24:32,440
अटैक कर रही थी सीता माता पर कि मैं इसको ही मार देती हूं

338
00:24:32,440 --> 00:24:36,440
भाई हमारे पास तो यही है जीवन जीने के लिए हम हर बात में रामायण को लाएंगे हर

339
00:24:36,440 --> 00:24:40,840
बात में श्री कृष्ण महाभारत को लाएंगे गीता को लाए हमारे पास यही है

340
00:24:40,840 --> 00:24:44,840
हमें ज्यादा इससे बाहर की चीज हमें नहीं मालूम है आप लोगों

341
00:24:44,840 --> 00:24:49,000
को मालूम होंगी तो सूपनखा पर जब सूपनखा जब अटैक कर रही

342
00:24:49,000 --> 00:24:53,080
है माता सीता पर तो उसमें लक्ष्मण जी को श्री राम

343
00:24:53,080 --> 00:24:57,120
जी को बीच में नहीं आना चाहिए क्योंकि एक मात शक्ति मातृ शक्ति पर अटैक कर रही है हमारा

344
00:24:57,120 --> 00:25:01,160
क्या काम उसम है ना वो सब गलत था आप लोग सही हो

345
00:25:01,160 --> 00:25:05,240
मर्यादा पुरुषोत्तम गलत है उनके छोटे अनुज गलत है

346
00:25:05,240 --> 00:25:09,760
रामायण गलत है आदर्श गलत है व रामो विग्रह वान धर्मा

347
00:25:09,760 --> 00:25:14,480
लिखने वाले जो ऋषि वाल्मीक है वोह गलत है यह लोग सही

348
00:25:14,480 --> 00:25:19,040
है जी अच्छा एक पॉइंट और कहते हैं

349
00:25:19,040 --> 00:25:23,560
कि मैंने अर्थात विज्ञान दर्शन ने लाइव में उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी

350
00:25:23,560 --> 00:25:27,640
नहीं की पर उन्होंने खुद टिप्पणियां की है फिर भी मैंने कोई क्षमा की उम्मीद

351
00:25:27,640 --> 00:25:31,400
नहीं की जिन्हे चर्चा करनी है वह क्षमा पर इतना नहीं अटक

352
00:25:31,400 --> 00:25:35,560
अब आपने कितनी करी वह मुझे नहीं पता लेकिन यह जब कहते हैं कि जिन्ह चर्चा करनी

353
00:25:35,560 --> 00:25:39,600
होती है वो क्षमा पर इतना नहीं अटक तो भाई आपको चर्चा करनी है तो आप भी

354
00:25:39,600 --> 00:25:44,600
मत अटको क्षमा मांगो और चर्चा करो बिंदु तो यह भी बन रहा

355
00:25:44,600 --> 00:25:48,800
है नहीं व्यक्तिगत टिप्पणी इन्होंने नहीं की

356
00:25:48,800 --> 00:25:53,360
मगर यह वहां पर समर्थक के रूप में खड़े हुए हैं और

357
00:25:53,360 --> 00:25:57,600
फिर वही बात होती है कि डायरेक्ट भीष्म पिता म ने द्रौपदी

358
00:25:57,600 --> 00:26:02,080
का ण करने का प्रयास तो नहीं किया मगर व वहां बैठे थे

359
00:26:02,080 --> 00:26:07,040
तो क्या उनको वह दोष नहीं लगा मौन रहे बिल्कुल लगा है

360
00:26:07,040 --> 00:26:11,200
हा सबसे पहले तो विवेकी का ही व होता है अगर आप आप यह बनते

361
00:26:11,200 --> 00:26:15,240
हो कि आप जो है धर्म जानते हो धर्म अधर्म में अंतर जानते

362
00:26:15,240 --> 00:26:19,560
हो तो पहले तो फिर आपका ही बनता है कि आप उसका प्रतिकार

363
00:26:19,560 --> 00:26:24,560
करो द्रोणा

364
00:26:24,560 --> 00:26:28,640
ब्रा जी मनुस्मृति में तो ब्राह्मण को सबसे

365
00:26:28,640 --> 00:26:33,040
ज्यादा दंड मिलता है क्योंकि वो धर्म और अधर्म को जानता है इसीलिए हां

366
00:26:33,040 --> 00:26:37,080
इसीलिए ब्राह्मण को अधिक दंड क्यों है क्योंकि विवेकी का दायित्व ज्यादा होता

367
00:26:37,080 --> 00:26:41,200
है यदि आप ये कह रहे हो कि हमें मालूम नहीं था वहा क्या हो रहा है और मैंने तो कुछ

368
00:26:41,200 --> 00:26:45,240
अपनी ओर से पर्सनली नहीं बोला तो आपको वहां पर आप अगर

369
00:26:45,240 --> 00:26:49,440
विवेकी हो तो आपका दायित्व ज्यादा हो जाता है आप उसे रोको जो गलत हो रहा है ना

370
00:26:49,440 --> 00:26:53,480
कि वहां पर मौन समर्थन दो ना कि वहां पर कुछ ऐसे वक्तव्य देते

371
00:26:53,480 --> 00:26:57,480
हुए उनका समर्थन करो जो वक्तव्य उस समय

372
00:26:57,480 --> 00:27:01,480
उनके काम आ रहे हो उनकी चीजों को ठोस बनाने के

373
00:27:01,480 --> 00:27:05,640
लिए हां जी चलिए ये चले गए

374
00:27:05,640 --> 00:27:10,280
वहां पर इन्होंने सारी बातें हो गई वहां खड़े थे ठीक है सम सम

375
00:27:10,280 --> 00:27:14,320
मतलब स्ट्रीम में थे जब इनको पता चल गया कि यह जो

376
00:27:14,320 --> 00:27:18,320
स्ट्रीम पर सारी चीजें दिखाई गई थी वो भूतकाल था किसी

377
00:27:18,320 --> 00:27:22,480
व्यक्ति का अब वो ऐसा बिल्कुल नहीं है वो स्वयं कह रहा है कि वो तो अधर्म था

378
00:27:22,480 --> 00:27:26,480
जो मैं कर रहा था अब मैं इस रास्ते से हट गया तो अब

379
00:27:26,480 --> 00:27:30,840
तो मानना चाहिए कि ठीक है व स्ट्रीम नहीं होनी चाहिए थी अब तो मानो यह बात

380
00:27:30,840 --> 00:27:34,960
कि हां वो स्ट्रीम नहीं होनी चाहिए थी ये तो स्पष्ट है वही वही

381
00:27:34,960 --> 00:27:39,400
मैं कह रहा हूं कि अब तो उसकी निंदा करो अब तो उसका प्रतिकार करो

382
00:27:39,400 --> 00:27:39,900
हा

383
00:27:39,800 --> 00:27:43,520
अब क्या हो

384
00:27:43,520 --> 00:27:47,600
गया अच्छा एक बात और आती है कि

385
00:27:47,600 --> 00:27:51,640
भाई यह कहा जाता है बीच बीच में मैं थोड़ा सा वो दे देता हूं अब यह कहा

386
00:27:51,640 --> 00:27:56,000
जाता है कि शिवांश द्विवेदी को विज्ञान दर्शन

387
00:27:56,000 --> 00:28:00,000
के साथ शास्त्रार्थ के लिए ल गया मर शिमा द्विवेदी ने उसको

388
00:28:00,000 --> 00:28:04,160
एक्सेप्ट नहीं किया अच्छा अभी मैं ललकार

389
00:28:04,160 --> 00:28:08,440
रहा हूं आ समाज के पूरी दुनिया में सबसे बड़ा जो विद्वान है वो आ जाए लखनऊ

390
00:28:08,440 --> 00:28:12,760
ललकार दिया अब अगर नहीं आया एक दो दिन बाद में डाल दूंगा

391
00:28:12,760 --> 00:28:17,080
भाग गए भगोड़े है चलेगा मतलब

392
00:28:17,080 --> 00:28:21,160
कोई भी कारण हो उसके ना आने का वह मायने नहीं रखता नहीं

393
00:28:21,160 --> 00:28:25,360
आया भगोड़ा है कहोगे

394
00:28:25,360 --> 00:28:29,400
अरे शर्म करो कुछ लज्जा होनी चाहिए तुम लोगों

395
00:28:29,400 --> 00:28:33,640
में कुछ पक्षपात हीनता एक कौन है न्याय

396
00:28:33,640 --> 00:28:38,280
प्रियता एक कौन है केवल अपने मत की सिद्धि

397
00:28:38,280 --> 00:28:42,360
मैं ऐसी चर्चा में क्यों जाऊं जहां मुझे उस व्यक्ति को सम्मान देना पड़े

398
00:28:42,360 --> 00:28:46,920
जो खुद ये मान रहा है कि वो ऐसी चर्चा के साथ में समर्थक के रूप में उपलब्ध

399
00:28:46,920 --> 00:28:51,120
था जो चर्चा उचित नहीं थी मैं उसको मुझे उसको सम्मान

400
00:28:51,120 --> 00:28:55,640
देना पड़ेगा

401
00:28:55,640 --> 00:28:59,640
ना क्यों दूं मैं उसको सम्मान क्यों हंस के

402
00:28:59,640 --> 00:29:04,000
बात करूं उससे क्यों सामान्यत बात करूं उससे स्पष्ट

403
00:29:04,000 --> 00:29:08,000
वादी है हम लोग अपनी भावनाओं को

404
00:29:08,000 --> 00:29:12,040
एक तरफ करके अपने विचारों को एक तरफ करके खला पाखंड यह

405
00:29:12,040 --> 00:29:18,040
सब दिखाना नहीं आता है सिखाया नहीं गया जो अंदर है वही बाहर

406
00:29:18,040 --> 00:29:22,080
है अच्छा मैंने जब आपने जब वो मोहित गोड

407
00:29:22,080 --> 00:29:26,360
के बिंदुओं का रिप्लाई मुझे दिया उसके उसी दिन मैंने आपको 11

408
00:29:26,360 --> 00:29:30,600
बजे मैसेज किया था कि इस चर्चा का मैं मध्यस्थ बना उसके लिए क्षमा

409
00:29:30,600 --> 00:29:34,680
चाहता हूं आपसे मैंने क्षमा मांगी थी वो क्षमा इसलिए मांगी थी

410
00:29:34,680 --> 00:29:39,040
कि मैं समझा नहीं पाया इस वजह से लोग गलत समझ रहे हैं कि आप च

411
00:29:39,040 --> 00:29:43,160
चर्चा से मना कर दिए तो उसकी गलानी मुझे अंदर बहुत थी आप

412
00:29:43,160 --> 00:29:45,720
एक बात बताइए

413
00:29:45,720 --> 00:29:49,760
मुझे सच्ची सच्ची एक मत हृदय पर हाथ रख के बात

414
00:29:49,760 --> 00:29:53,960
बताइएगा कि आप उनको समझा नहीं पाए या वो आपको समझ नहीं पाए

415
00:29:53,960 --> 00:29:58,120
ठीक है उन्होंने उसम पोस्ट डाल दिया कि भाई शिवांश द्विवेदी की

416
00:29:58,120 --> 00:30:03,120
सारी शर्त मानने के बाद भी शिवांश द्विवेदी ने चर्चा से मना कर दिया

417
00:30:03,120 --> 00:30:07,280
है क्या इसमें मेरा कोई दोष है जो मेरे लिए

418
00:30:07,280 --> 00:30:10,960
उन्होने भ्रांति फ नहीं नहीं आपका कोई दोष

419
00:30:10,960 --> 00:30:15,880
मेरा कोई दोष नहीं है अच्छा दस बात जब आपको

420
00:30:15,880 --> 00:30:20,160
जब उन्होंने यह वहां पर रिप्लाई डाल दिया है कि शिवांश द्विवेदी

421
00:30:20,160 --> 00:30:24,560
की सारी शर्तें मानने के बाद भी हमने जो है

422
00:30:24,560 --> 00:30:28,560
वो शिवांश द्विवेदी जी ने चर्चा के लिए मना कर दिया जब उन्होंने रिप्लाई डाल

423
00:30:28,560 --> 00:30:32,680
दिया वहां पर और हमारी वो पोस्ट आ चुकी थी उस समय कि हम

424
00:30:32,680 --> 00:30:36,680
किस किस तरह से चर्चा करेंगे मोहित गौर के साथ और आपके साथ तो हम तैयार है करने

425
00:30:36,680 --> 00:30:40,880
को यह पोस्ट में डाल चुका था फिर भी उन्होंने उसके बाद य रिप्लाई डाला है

426
00:30:40,880 --> 00:30:44,920
अगर यह रिप्लाई डाला भी है तो एक सत्यवादी व्यक्ति यह होता

427
00:30:44,920 --> 00:30:49,000
है कि अगर उससे गलतफहमी के कारण कोई कार्य हो गया है

428
00:30:49,000 --> 00:30:53,040
भ्रांति के कारण कोई कार्य हो भी गया है तो उसको सहर्ष स्वीकार

429
00:30:53,040 --> 00:30:57,120
करता है साहस के साथ हां भाई ठीक है सत्यम जी ने मुझसे

430
00:30:57,120 --> 00:31:01,280
जो कहा मैं नहीं सम पाया तो क्या आपने उनकी य जो गलत फहमी है उसके बाद

431
00:31:01,280 --> 00:31:05,600
दूर करने का प्रयास किया जब उन्होंने रिप्लाई डाल दिया उसके बाद

432
00:31:05,600 --> 00:31:09,600
हां मैंने कहा था कि आपने एक जल्दबाजी करी है और ना मैं

433
00:31:09,600 --> 00:31:14,000
आपको समझा पाया बात को कि असल में बात क्या है

434
00:31:14,000 --> 00:31:18,240
उसके बाद मैंने उनको आपने तो समझाया आपने तो सही शब्द कहे थे पहले माफी मांगे

435
00:31:18,240 --> 00:31:22,720
उसके बाद चर्चा के लिए बात होगी आपने समझाया रिप्लाई के बाद

436
00:31:22,720 --> 00:31:26,360
रिप्लाई के बाद मैंने आपने जोय बाद में रिप्लाई डाला है

437
00:31:26,360 --> 00:31:30,360
कि वो मना कर दिया चर्चा के लिए तो वो ठीक नहीं है वो जल्दबाजी में

438
00:31:30,360 --> 00:31:34,440
डाला गया है और मैं आपको समझा नहीं पाया ढंग से

439
00:31:34,440 --> 00:31:38,680
पूरी बात को नहीं आप अपने ऊपर क्यों ले रहे हो ना समझा

440
00:31:38,680 --> 00:31:43,240
पाने की बात आप एक न्यूट्रल बात कह सकते हो ना कि भाई मैंने जो कहा वोह समझ नहीं

441
00:31:43,240 --> 00:31:47,280
पाए मगर ये नहीं ये नहीं कहा जा सकता इसमें सिर्फ आपकी गलती उनके

442
00:31:47,280 --> 00:31:51,440
ना समझने में हो सकता है वो सिर्फ अपने पॉइंट ऑफ व्यू से देख रहे हैं हां हा ठीक है ठीक है ठीक

443
00:31:51,440 --> 00:31:55,760
है भाई आपने तो यही बात कही थी ना उनसे शुरू से कि पहले वो माफी मांगेगा

444
00:31:55,760 --> 00:31:59,840
उसके बाद चर्चा के निमित्त जो भी बात होनी वो और न्याय

445
00:31:59,840 --> 00:32:04,280
भी यही कहता है कि अगर आपकी जो चीजें वह सार्वजनिक है

446
00:32:04,280 --> 00:32:08,320
तो पहले आप सार्वजनिक रूप से वह सारी कार्य करिए बाद में वहां पर जाकर

447
00:32:08,320 --> 00:32:12,800
के चर्चा होगी आप ही सोचो

448
00:32:12,800 --> 00:32:17,120
कि यदि मैं किसी व्यक्ति के साथ दुराव रखता

449
00:32:17,120 --> 00:32:21,680
हूं दूरी रखता हूं तो मैं उसके साथ कैसे वहां जाकर के सौहार्द पूर्ण व्यवहार

450
00:32:21,680 --> 00:32:25,960
करूंगा क्या वह पाखंड नहीं होगा

451
00:32:25,960 --> 00:32:30,080
क्या वह छलावा नहीं होगा झूट नहीं होगा अगर मैं करता भी हूं तो तो मैं

452
00:32:30,080 --> 00:32:35,000
क्यों करूं क्यों मैं झूठ का आलंबन

453
00:32:35,000 --> 00:32:39,160
लू अच्छा इसमें अगर किसी को यह लग रहा हो कि भाई सत्यम

454
00:32:39,160 --> 00:32:41,440
को मध्यस्थ बनने का बड़ा शौक है तो मैंने

455
00:32:41,440 --> 00:32:45,480
आचार्य जी को दो बार कहा था दो या तीन बार कि आप डायरेक्ट शिवांश जी

456
00:32:45,480 --> 00:32:49,640
को कॉल कर लीजिए या मोहित जी कॉल कर ले तो चर्चा आराम से हो जाएगी

457
00:32:49,640 --> 00:32:53,920
कि क्या गलती किसकी है क्या शर्त है कब चर्चा होगी

458
00:32:53,920 --> 00:32:58,240
तो आचार्य जी ने कहा कि नहीं आप ही उनको कहिए

459
00:32:58,240 --> 00:33:04,240
तो मैं कोई शौक से इस मध्यस्थ मध्यस्थ नहीं बना इस चर्चा

460
00:33:06,320 --> 00:33:10,560
का तो यह सारी कहानी है कि पहली बात

461
00:33:10,560 --> 00:33:15,000
आचार्य जो प्रशांत जी कहते हैं स्वयं को

462
00:33:15,000 --> 00:33:19,080
उन्होंने डायरेक्ट हमसे बात क्यों नहीं की दूसरी बात

463
00:33:19,080 --> 00:33:23,160
यह है कि जब उन्हें आधी अधूरी कोई बात पता चल रही है उसके बाद उन्होंने क्यों

464
00:33:23,160 --> 00:33:27,280
डाल दिया वहा रिप्लाई कि हम उनसे बात नहीं करना चाहते हैं तीसरी बात यह

465
00:33:27,280 --> 00:33:31,280
है कि जब उन्होने सच्चाई खोल खोल के बताई कि नहीं यह आपने शिवांश द्विवेदी

466
00:33:31,280 --> 00:33:35,400
की तरफ से गलत डाला हुआ है रिप्लाई कि शिवांश जी ने सारी

467
00:33:35,400 --> 00:33:39,480
शर्त मान लेने के बाद भी चर्चा के लिए मना कर दिया जब इन्होंने उनको खोल

468
00:33:39,480 --> 00:33:43,520
खोल के बताई तो वह क्यों अपनी उस झूठी बात को हटा नहीं रहे

469
00:33:43,520 --> 00:33:46,840
वहां से सोच के देखिए

470
00:33:46,840 --> 00:33:50,880
क्यों क्योंकि जो अपनी लोक लज्जा का

471
00:33:50,880 --> 00:33:54,960
डर है तो इसलिए अब जो झूठ निकल गया है गलत

472
00:33:54,960 --> 00:33:56,680
बात कोई निकल गई है

473
00:33:56,680 --> 00:34:02,560
अज्ञानता के चल ना समझ पाने के चलते उसी का ही निर्वाह

474
00:34:02,560 --> 00:34:07,440
करेंगे यही एक बात और जोड़ एक बावा

475
00:34:07,440 --> 00:34:12,040
एक बात है हमने भाई अंततोगत्वा एक बात माननी पड़ेगी

476
00:34:12,040 --> 00:34:16,440
कि हमने स्पष्ट कहा कि जब तक वह तीन चीजें

477
00:34:16,440 --> 00:34:20,480
हैं कि पहले तो मोहित गौर उस चर्चा की निंदा

478
00:34:20,480 --> 00:34:24,560
करें सार्वजनिक रूप से स्वयं के उससे जुड़े होने

479
00:34:24,560 --> 00:34:30,560
के लिए क्षमा याचना करें और

480
00:34:30,560 --> 00:34:34,840
उस वीडियो को उस वहां से हटाने की

481
00:34:34,840 --> 00:34:39,160
मांग करें प्रतिकार करें यथा

482
00:34:39,160 --> 00:34:43,920
सामर्थ्य तो इन तीन चीजों को करने के बाद तुरंत

483
00:34:43,920 --> 00:34:47,960
रख लेंगे चर्चा कोई बात नहीं है शेर का बच्चा

484
00:34:47,960 --> 00:34:52,520
एक ही अच्छा जहां चा चाहोगे वहां पहुंचेंगे

485
00:34:52,520 --> 00:34:56,640
उसमें कोई डर थोड़ी ना है कोई भय थोड़ी ना है किसी को

486
00:34:56,640 --> 00:35:01,080
ईश्वर को सर्वशक्ति मान सिद्ध किया जाएगा भाई आर्य समाज की तरफ

487
00:35:01,080 --> 00:35:05,880
से धर्म को शाश्वत सिद्ध किया जाएगा

488
00:35:05,880 --> 00:35:10,040
और सबसे बड़ी बात यह है कि ये आर्य समाज वाले मोहित गौर मोहित गौर

489
00:35:10,040 --> 00:35:14,040
चिल्लाया करते हैं मोहित गौर आकर के अपनी लाइव स्ट्रीम में कहते हैं कि भैया मैं आर समाजी नहीं

490
00:35:14,040 --> 00:35:18,120
हूं यह भी एक बात है यह भी

491
00:35:18,120 --> 00:35:22,280
एक बड़ी बात है अच्छा कॉल रिकॉर्डिंग

492
00:35:22,280 --> 00:35:26,640
है आपके पास कि नहीं इन सब बातों की

493
00:35:26,640 --> 00:35:30,800
दिखा नहीं रहे मगर है ना तसल्ली के लिए हां वो

494
00:35:30,800 --> 00:35:34,840
तो रहती है अगर बात पड़ जाएगी तो कॉल रिकॉर्डिंग भी

495
00:35:34,840 --> 00:35:38,920
है यह सुनिए क्या कह रहे हैं वो आर्य समाज से

496
00:35:38,920 --> 00:35:42,920
मैं तो अभी पहली बार देखा आर्य समाज से नहीं है बिल्कुल भी आर्य

497
00:35:42,920 --> 00:35:45,640
समाज से नहीं है यहां कुछ लोग हैं जो कि

498
00:35:45,640 --> 00:35:49,840
आर्य समाज की संस्था से डायरेक्ट एसोसिएटेड है जैसे अभी ऋषि

499
00:35:49,840 --> 00:35:55,200
जी आए थे बाकी अन्य लोग

500
00:35:55,200 --> 00:35:59,640
अपने आए थे बाकी अन्य लोग अपने अपनी स्वतंत्र

501
00:35:59,640 --> 00:36:03,800
अच्छा एक बात और है जानते हैं

502
00:36:03,800 --> 00:36:07,960
वैसे इन्हें बहुत बड़ी विज्ञान धर्म और धर्म की सब सारे

503
00:36:07,960 --> 00:36:12,000
जो परंपरा प्राप्त आचार गण है इनके आगे पानी पानी है सब कुछ जो

504
00:36:12,000 --> 00:36:16,040
है इनका ऐसा ऐसा है मगर इनको यह नहीं पता है किय ऋषि विवाज

505
00:36:16,040 --> 00:36:20,040
क्याक करते हैं ये बहुत ताज्जुब की बात है नहीं ये कह रहे

506
00:36:20,040 --> 00:36:24,320
हैं कि ऋषि विवाज जी आर्य समाज से है और वो व्यक्ति कहता है कि मैं आर्य समाज

507
00:36:24,320 --> 00:36:28,520
से नहीं हूं तो आर्य समाज से है कौन इनमें से मेरे को तो यही समझ नहीं

508
00:36:28,520 --> 00:36:32,960
जो जिस व्यक्ति की छवि बिगड़ने लगती है वह आर समाज से नहीं है

509
00:36:32,960 --> 00:36:37,120
अच्छा इसमें देखिए मैंने आज सुबह ा पर स्टोरी डाली थी कि मैं

510
00:36:37,120 --> 00:36:41,120
इस मध्यस्थ चचा का और वो सब गलत हुआ

511
00:36:41,120 --> 00:36:45,160
उसके बाद भी उस स्टोरी को देखने मैं पूरा कर दूं मैं

512
00:36:45,160 --> 00:36:49,400
फिर बता रहा हूं हमारी पहली बात उन्होंने एक मिथ्या प्रचार किया है इसके

513
00:36:49,400 --> 00:36:53,680
लिए भी हम कुछ एक्शन ले सकते हैं मगर हम सम्मान करते हैं आचार्य प्रशांत

514
00:36:53,680 --> 00:36:57,760
जी का जो उन्होंने हमारे नाम से एक मिथ्या प्रचार किया है कि

515
00:36:57,760 --> 00:37:00,640
कॉल वार्ता पर शिवांश नारायण द्विवेदी ने चर्चा करने

516
00:37:00,640 --> 00:37:05,360
से मना कर दिया व कॉल वार्ता व सिद्ध नहीं कर पाएंगे हमारे साथ कब

517
00:37:05,360 --> 00:37:09,520
हुई पहली बात दूसरी बात य है कि उन्होंने यह कहा कि हमने उनकी

518
00:37:09,520 --> 00:37:14,360
सारी शर्त मान ली हमारी तीन शर्त थी मोहित गौर

519
00:37:14,360 --> 00:37:18,640
यह कहे कि वह जो चर्चा थी वह गलत थी अनैतिक थी उसकी निंदा

520
00:37:18,640 --> 00:37:22,760
करें क्षमा मांगे उस चर्चा से जुड़े होने के लिए और

521
00:37:22,760 --> 00:37:27,000
उस चर्चा को सोशल मीडिया से हटाने की मांग करे केवल इतना करे

522
00:37:27,000 --> 00:37:31,240
इन न शर्तो को मानते ही हम लोग वार्ता करेंगे

523
00:37:31,240 --> 00:37:35,240
और जगह डिसाइड करेंगे आधी दूरी आप आ

524
00:37:35,240 --> 00:37:39,520
जाओ आधी दूरी हम हो जाए जहां चाहो वहां एक बीच का मध्यस्थ पॉइंट

525
00:37:39,520 --> 00:37:43,640
डिसाइड कर लो आ जाएंगे भैया तो यह तो पहली बात

526
00:37:43,640 --> 00:37:47,760
क्लियर है मोहित गौर से किस रूप में चर्चा हो सकती है और

527
00:37:47,760 --> 00:37:51,880
क्या वह तीन शर्त मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हमने अपनी पोस्ट में भी डाल

528
00:37:51,880 --> 00:37:56,080
दिया दूसरी बात य है कि आचार प्रशांत स्वयं क्या

529
00:37:56,080 --> 00:38:00,080
कम है उन्होंने तो कोई टीका टिप्पणी वहां पर

530
00:38:00,080 --> 00:38:04,160
ऐसी नहीं की है वो आ जाए चर्चा के लिए उनसे तो हम पीछे नहीं हट रहे हैं कब

531
00:38:04,160 --> 00:38:08,160
आना है आ जाइए भाई बीच में इंदौर आ जाइए कहां पर आपका

532
00:38:08,160 --> 00:38:13,600
आश्रम है दोनों आ जाते हैं बीच में मिलकर के वार्ता कर लेते हैं हो जाएगी

533
00:38:13,600 --> 00:38:15,760
चर्चा अच्छा तो क्यों

534
00:38:15,760 --> 00:38:19,760
इसका उत्तर नहीं आ रहा है और जब आपको ऐसे ही मोन हो जाना था तो क्यों बीच

535
00:38:19,760 --> 00:38:23,840
में कूद पड़े आधी पड़ी लकड़ी उठा ली आधी रोटी

536
00:38:23,840 --> 00:38:27,880
पर दाल तो आपने ले ली क्या अब मैं इस पर कोई रिप्लाई

537
00:38:27,880 --> 00:38:31,920
नहीं दूंगा किसी टीका टप्पणी पर मतलब दूसरे के बारे में मिथ्या प्रचार करके

538
00:38:31,920 --> 00:38:36,640
अब मैं शांत हो जा रहा हूं अब आप लोग देखो

539
00:38:36,640 --> 00:38:42,640
अपना अच्छा शिवास जी मैंने जब

540
00:38:57,480 --> 00:39:01,720
डालता है कि शिवांश मना कर दिया है अरे भाई जब मस् व्यक्ति

541
00:39:01,720 --> 00:39:05,720
कह रहा शिवांश मना कर दिया उन

542
00:39:05,720 --> 00:39:09,840
आचार से पूछो तो कहां पर मना किया तुम्हारी बात कहां पर हुई थी शिवांश से जो उसने

543
00:39:09,840 --> 00:39:13,880
मना कर दिया वही मैं कह रहा हूं कि जब मध्यस्थ

544
00:39:13,880 --> 00:39:17,880
व्यक्ति कह रहा है कि वो गलत फहमी है तो भी देखने के बाद उसने

545
00:39:17,880 --> 00:39:21,960
डाली है वो स्टोरी तो इनका मानसिक स्तर देखिए कितना निम्न है बहुत

546
00:39:21,960 --> 00:39:26,040
निम्न है य समझ नहीं पा रहे हिंदी नहीं समझ पाते क्या लिखा

547
00:39:26,040 --> 00:39:30,160
हुआ है अच्छा स्तर की बात करते हैं एक बात

548
00:39:30,160 --> 00:39:30,800
मैं आपको बताता

549
00:39:30,800 --> 00:39:34,800
हूं कि आपने जब स्ट्रीम कर ली उन्होंने स्ट्रीम

550
00:39:34,800 --> 00:39:39,120
करी फिर आपने स्ट्रीम करी फिर उन्होंने एक और स्ट्रीम करी थी दीदी

551
00:39:39,120 --> 00:39:43,600
ने तो उसमें एक महिला को बुलाती है वह शास्त्र

552
00:39:43,600 --> 00:39:47,720
चर्चा के लिए उस महिला उस स्ट्रीम का एक

553
00:39:47,720 --> 00:39:51,840
घंटे और दो मिनट से आप चलाएंगे वह महिला कहती है कि शिवांश जी

554
00:39:51,840 --> 00:39:56,120
या शिवांश जी या इन लोगों में आपका नाम शायद नहीं लिया

555
00:39:56,120 --> 00:40:00,280
इन लोगों में मैच्योरिटी नहीं है ठीक है अब मैच्योरिटी की

556
00:40:00,280 --> 00:40:05,040
वो बात कर रहे हैं जबकि खुद वो महिला एक

557
00:40:05,040 --> 00:40:09,080
कुत्ते को पालती है जिसको सुपुत्र कहती है उसका नाम रख रखे हैं उसका

558
00:40:09,080 --> 00:40:13,360
सरनेम रख रखे हैं तो मैच्योरिटी किसम नहीं है मतलब

559
00:40:13,360 --> 00:40:17,400
आप एक जानवर को पाल रहे हैं जो भोग योनि है शास्त्रों के

560
00:40:17,400 --> 00:40:21,480
अनुसार उसको नाम दे रहे हैं उसको सुपुत्र कह

561
00:40:21,480 --> 00:40:25,600
रहे हैं ठीक है पुत्र शब्द का अर्थ क्या होता है यह नहीं जानते शास्त्रों में लिखा है

562
00:40:25,600 --> 00:40:29,640
जब और उसको सरनेम दे रहे हैं क्या ब्राह्मणों का

563
00:40:29,640 --> 00:40:33,640
सरनेम क्यों दिया जा रहा है उस कुत्ते को

564
00:40:33,640 --> 00:40:37,720
बात तो यह भी है तो क्या उनका लेवल कहां है मैच्योरिटी उम कहा है

565
00:40:37,720 --> 00:40:42,080
फिर इसी के दो मिनट बाद कहती है कोई कोई अपनी व्यक्तिगत लाइफ

566
00:40:42,080 --> 00:40:46,200
में क्या कर रहा है क्या नहीं कर रहा है वह तो एक अलग बात है मगर मैं तो यह कह रहा हूं कि

567
00:40:46,200 --> 00:40:52,200
जो व्यक्ति ने आपको फीस नहीं दी है आपको यह नहीं कहा मेरा इलाज कर

568
00:40:52,640 --> 00:40:56,640
दो आप उसका इलाज क्यों कर रहे हो य

569
00:40:56,640 --> 00:41:00,080
समझ में नहीं

570
00:41:00,080 --> 00:41:04,680
अच्छा दूसरी एक बात और है

571
00:41:04,680 --> 00:41:08,880
कि मैं कहना चाहूंगा कि जो भी मातृ शक्ति

572
00:41:08,880 --> 00:41:13,000
है जिनको हृदयाघात पहुंचा है और मैंने

573
00:41:13,000 --> 00:41:17,120
कहीं कहीं पर करुणा भरे शब्द भी सुने हैं हालांकि मैंने उसे

574
00:41:17,120 --> 00:41:21,280
सबसे पहली बार बहन के रूप में ही बोला था जो भी कोई वक्तव्य दिया था

575
00:41:21,280 --> 00:41:25,360
जिनकी वजह से उनको आघात पहुंच गया उसमें बहन शब्द

576
00:41:25,360 --> 00:41:29,640
सबसे पहले था और यह बात सच है कि आज

577
00:41:29,640 --> 00:41:33,720
भी यदि कभी एन केन प्रकार ने मुझे पता है कि बहुत फालतू

578
00:41:33,720 --> 00:41:37,960
बात होगी य कहना मेरा उनके लिए आज भी अगर बहन

579
00:41:37,960 --> 00:41:42,160
होते हुए आपके किसी भी प्रकार

580
00:41:42,160 --> 00:41:46,720
से आपके ऊपर कोई संकट आएगा और अगर मैं आसपास होऊंगा

581
00:41:46,720 --> 00:41:50,800
तो प्राथमिकता से रक्षा में उठने वाले हाथ भी

582
00:41:50,800 --> 00:41:55,160
यही होंगे यह बात भी सत्य

583
00:41:55,160 --> 00:42:00,440
है तो हालाकि इन दृष्टि कोणों को वो लोग देख नहीं पाए

584
00:42:00,440 --> 00:42:01,440
और

585
00:42:01,440 --> 00:42:05,760
हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है ना

586
00:42:05,760 --> 00:42:10,400
कि हम सबके हैं

587
00:42:10,400 --> 00:42:14,920
कोई निराकार ईश्वर की बुराई करेगा हर समाधि यों के निराकार ईश्वर

588
00:42:14,920 --> 00:42:19,000
तो भी हम जाएंगे भैया कोई भगवान

589
00:42:19,000 --> 00:42:23,000
श्री कृष्ण की बुराई करेगा तो भी हम जाएंगे क्योंकि कृष्ण

590
00:42:23,000 --> 00:42:27,320
भी हमारे हैं कोई श्री राम की

591
00:42:27,320 --> 00:42:31,440
की बुराई करेगा तो भी हम जाएंगे शि शिव जी भी हमारे हैं राम भी हमारे हैं

592
00:42:31,440 --> 00:42:36,160
हमको हर एक तरफ से जाकर के मोर्चे को संभालना ही संभालना है

593
00:42:36,160 --> 00:42:40,360
हम सबके हैं पर हमारा कोई नहीं है

594
00:42:40,360 --> 00:42:45,360
यही तो है स्मार्थ होते हुए वैष्णव स्मार्थ होते हुए

595
00:42:45,360 --> 00:42:49,440
जो शब है इनकी व्यथा वास्तविकता

596
00:42:49,440 --> 00:42:53,520
क्या है यही है कि

597
00:42:53,520 --> 00:42:57,560
हम सबके हैं पर हमारा कोई नहीं है एक मिनट

598
00:42:57,560 --> 00:43:03,560
जरा डिस्प्ले ठीक कर लू डिस्प्ले में दिक्कत आ

599
00:43:14,480 --> 00:43:18,520
हां अ मैं वापस आ गया हूं क्या

600
00:43:18,520 --> 00:43:22,680
हां तो और एक बात और है

601
00:43:22,680 --> 00:43:26,680
कि यह जो मातृ शक्ति है जिसके बारे में हो रहा

602
00:43:26,680 --> 00:43:31,360
है मुझे पता ही नहीं है कि वह लाइव में थी कि नहीं थी कि क्या है

603
00:43:31,360 --> 00:43:35,480
सब जानकारियां है नहीं व्यक्ति विशेष के रूप में मैंने बताया ना मैंने कोई टिप्पणी की नहीं है किसी

604
00:43:35,480 --> 00:43:39,480
व्यक्ति विशेष के लिए मैंने आधार दिया है कि क्या क्या हो रहा

605
00:43:39,480 --> 00:43:43,760
है किसकिस प्रकार से हो रहा है और आप लोग

606
00:43:43,760 --> 00:43:48,480
हमें गलत सिद्ध कर रहे हो

607
00:43:48,480 --> 00:43:52,680
खैर फिर भी मैं अपनी बहनों को

608
00:43:52,680 --> 00:43:56,680
कहूंगा जिसको मैंने बहन कहा है वो अगर चर्चा

609
00:43:56,680 --> 00:44:00,840
करना चाहे तो चर्चा कर सकती है

610
00:44:00,840 --> 00:44:06,360
और सामान्य चर्चा के रूप में सौहार्दपूर्ण चर्चा के रूप

611
00:44:06,360 --> 00:44:11,320
है ना तो तो अब ये वाली बात है

612
00:44:11,320 --> 00:44:15,360
कि आज मैंने एक आज मैंने एक एक थोड़ी सी रोचक बात हो जाए

613
00:44:15,360 --> 00:44:18,760
बीच में

614
00:44:18,760 --> 00:44:23,200
कि आज मैंने एक रील देखी उस

615
00:44:23,200 --> 00:44:28,960
रील में एक सीन दिखाया गया कि बैटमैन

616
00:44:28,960 --> 00:44:33,160
सुपरमैन को पीट रहा है मार रहा है

617
00:44:33,160 --> 00:44:37,880
और सुपरमैन के ऊपर नाम लिखा गया था मेरा

618
00:44:37,880 --> 00:44:42,080
और बैटमैन के ऊपर नाम लिखा गया था यह

619
00:44:42,080 --> 00:44:46,240
गौर जी का मोहित गौर

620
00:44:46,240 --> 00:44:50,240
तो पहली बात तो यह है जिसने रील बनाई य

621
00:44:50,240 --> 00:44:54,360
दिखा रहा है देखो यह मोहित गौड़ हैय कह रहा है मैं एनी टाइम एनी वेर भैया तुम तो एनी

622
00:44:54,360 --> 00:44:58,360
टाइम एनी वेर वाले होही धर्म धर्म का कुछ नहीं है तो व्यक्ति ऐसा ही होता है एनी

623
00:44:58,360 --> 00:45:02,480
टाइम सिद्धांत वादी के तो सिद्धांत होते हैं ना और अगर एनी

624
00:45:02,480 --> 00:45:06,680
टाइम एनी वेयर हो तो क्षमा मांग के आ जाओ ना एनी टाइम एनी

625
00:45:06,680 --> 00:45:11,080
वेयर आ जाओ क्षमा मांग के अगर आप तैयार

626
00:45:11,080 --> 00:45:16,200
हो तो हमारे चैनल पर आ जाओ कल बिना क्षमा मांगे

627
00:45:16,200 --> 00:45:20,520
अब हमारे चैनल पर और वो जो मध्यस्थ चर्चा में अंतर क्या

628
00:45:20,520 --> 00:45:24,720
है कि हमारे चैनल पर हम आपसे सौहार्द पूर्ण चर्चा नहीं करेंगे

629
00:45:24,720 --> 00:45:29,560
उसी भाव के साथ चर्चा करेंगे जिस भाव के साथ हमें आपके आपने

630
00:45:29,560 --> 00:45:34,080
जो है हमें हमारी आपसे दूरी है अगर आपको स्वीकार

631
00:45:34,080 --> 00:45:38,280
है वो भाव आ जाइए मध्य मध्यस्थ स्थान

632
00:45:38,280 --> 00:45:42,960
क्यों ढूंढा जा रहा है जिससे कि दोनों एक दूसरे के प्रति सामान्य

633
00:45:42,960 --> 00:45:44,840
बिहेव

634
00:45:44,840 --> 00:45:48,960
करें तो उसमें वो बैटमैन बनाया गया उसको मोहित

635
00:45:48,960 --> 00:45:53,080
गड को और सुपरमैन बनाया गया हमें मगर उसमें

636
00:45:53,080 --> 00:45:57,520
जिस बनाने वाले ने बेवकूफ ने यह नहीं देखा

637
00:45:57,520 --> 00:46:01,720
फिल्म में पीटा पीटा बैटमैन को ही गया है बैटमैन वर्सेस

638
00:46:01,720 --> 00:46:05,800
सुपरमैन आई थी तो मैंने देखा था उसको और

639
00:46:05,800 --> 00:46:09,840
उसमें मार मुख्य रूप से जो पड़ी है वह बैटमैन की ही पड़ी है बस

640
00:46:09,840 --> 00:46:13,920
एक बार यह होता है कि बैटमैन ने बहुत बढ़िया कवच बनाया था उस

641
00:46:13,920 --> 00:46:17,960
कवच को पहन करके थोड़ी देर के लिए फाइट में वो भारी पड़ा था

642
00:46:17,960 --> 00:46:22,080
बस सुपरमैन पर बस वो भी कवच बना कर के

643
00:46:22,080 --> 00:46:26,400
जो कवच उसने बनाया था आखिर में वो सब तोड़ ताड़ के फेंक देता है सुपरमैन

644
00:46:26,400 --> 00:46:30,960
तो तुम जहां से रेफरेंस ले रहे हो कम से कम उसको ठीक से जांच तो कर

645
00:46:30,960 --> 00:46:35,080
लो सुपरमैन बैटमैन की कारवार वो ऐसे फाड़

646
00:46:35,080 --> 00:46:39,800
देता है कि दोबारा ऐसा है इस तरह से मेरे सामने सब मत करना इस तरह फाड़ देता

647
00:46:39,800 --> 00:46:43,440
है

648
00:46:43,440 --> 00:46:47,640
तो ये बात जी अच्छा मैं

649
00:46:47,640 --> 00:46:51,720
एक कहता हूं कि ये कहते हैं कि आप स्त्री विरोधी

650
00:46:51,720 --> 00:46:55,720
है ऐसा आप पर आरोप लगता रहता है साथ प मुझे भी

651
00:46:55,720 --> 00:46:59,720
जोड़ लेते हैं मैंने दीदी को कहा कि आप चर्चा करिए मेरे साथ तो कहा फॉर्म

652
00:46:59,720 --> 00:47:03,800
भरना पड़ेगा क्या तो मैंने बोला मैं उनकी तरफ से नहीं हूं मैं तो

653
00:47:03,800 --> 00:47:07,880
खुद अपना चैनल है उस पर आप चर्चा कीजिए अच्छा इनको चर्च

654
00:47:07,880 --> 00:47:12,160
अंतर नहीं पता मैं चर्चा की बात कर रहा हूं इसका मतलब है आप बोलेंगे

655
00:47:12,160 --> 00:47:16,360
मैं बोलूंगा ये चर्चा हो डिबेट होती है कोई पक्ष लेकर अपना रखेंगे और

656
00:47:16,360 --> 00:47:20,760
वो शास्त्र जैसा हो गया तो मैं जब भी चर्चा की कहता ये डिबेट प ले

657
00:47:20,760 --> 00:47:25,000
आते तुम्हारे विषय पर डिबेट क्यों करू ऐसा तो मैंने

658
00:47:25,000 --> 00:47:29,160
कहा कि चर्चा होगी अगर आप अकेले करने में सामर्थ्य हीन है तो दो

659
00:47:29,160 --> 00:47:33,400
जनों को ले आइए तीन जनों को ले आइए लेकिन करिए तो सही तो इन्होंने

660
00:47:33,400 --> 00:47:37,960
कोई रिप्लाई नहीं दिया है और

661
00:47:37,960 --> 00:47:42,160
जब ये कहते हैं कि स्त्री विरोधी है तो मैं मेरे बारे में बता दूं कि मैं खुद शाक्त संप्रदाय

662
00:47:42,160 --> 00:47:47,000
से हूं ठीक है स्त्रियों का बहुत सम्मान होता है हम तो देवी पूजक हैं

663
00:47:47,000 --> 00:47:51,080
और अगर हमारा व्यक्तिगत मेरा देखा जाए तो

664
00:47:51,080 --> 00:47:55,080
मेरे बड़े जिस देवी की जिस देवी की ये अंडर

665
00:47:55,080 --> 00:47:59,120
कवर्ड जो गुंडे पाले हुए हैं ऋषि वाद जैसे

666
00:47:59,120 --> 00:48:03,520
जिस देवी की ये अपमान करते अमानना करते

667
00:48:03,520 --> 00:48:07,600
हैं समय आने पर वह जनेऊ का प्रतिपादन कराने के लिए उन्हीं

668
00:48:07,600 --> 00:48:11,800
देवियों की मूर्तियां ले आते हैं क्या दोगलापन है

669
00:48:11,800 --> 00:48:15,800
भाई उसी उसी उसी देवी का अपमान करता है तुम्हारा

670
00:48:15,800 --> 00:48:19,840
ऋषि वाद जो तुम्हारी चर्चाओं में तुम बिठाते हो सम्मान के साथ कुछ

671
00:48:19,840 --> 00:48:23,840
भी कितना भी गिर जाओगे जीतने की हवस

672
00:48:23,840 --> 00:48:27,520
है केवल

673
00:48:27,520 --> 00:48:31,520
तो दीदी कहती है कि हम तो महिलाओं के लिए काम कर रहे हैं तो महिलाओं के लिए कैसा काम

674
00:48:31,520 --> 00:48:35,640
होता है मैं बताता हूं अच्छा वह भी कर रही होगी मुझे नहीं पता बहुत अच्छा कर रही होंगी अपने

675
00:48:35,640 --> 00:48:39,880
स्तर पर तो मेरा व्यक्तिगत है मेरे जो बड़े भैया है उनका ट्रस्ट है डिवाइन भारत चैरिटेबल

676
00:48:39,880 --> 00:48:43,960
ट्रस्ट उसमें निशुल्क कन्याओं को पढ़ाया जाता है जिनके माता-पिता नहीं है जो

677
00:48:43,960 --> 00:48:48,040
गरीब है उनको निशुल्क पढ़ाया जाता है वह भी बहुत अच्छे स्कूल में सामान्य स्कूल

678
00:48:48,040 --> 00:48:52,400
में नहीं बहुत अच्छे स्कूल में तो 50

679
00:48:52,400 --> 00:48:56,560
से अधिक कन्या है जिनको निशुल्क पढ़ा रहे हैं तो यह

680
00:48:56,560 --> 00:49:00,680
भी कार्य ही है अगर हम स्त्री विरोधी होते तो क्या मेरा परिवार यह सब कार्य

681
00:49:00,680 --> 00:49:04,680
करता अच्छा इनको लग रहा होगा ट्रस्ट है तो डोनेशन मिलता होगा

682
00:49:04,680 --> 00:49:09,120
कोई ने नहीं जब से लग जाते शूद्र देखिए स्त्री विरोध

683
00:49:09,120 --> 00:49:13,120
शूद्र का जनेऊ शूद्र का वेद पाठ और यह

684
00:49:13,120 --> 00:49:14,360
जो तथाकथित नैरेटिव

685
00:49:14,360 --> 00:49:20,080
है इनके ऊपर ही तो इसकी अलंकार अलंकार समाज की पूरी इमारत

686
00:49:20,080 --> 00:49:24,080
है अलंकार समाज में बहुत कम ऐसे

687
00:49:24,080 --> 00:49:28,160
लोग हैं जो बिना ये जो

688
00:49:28,160 --> 00:49:32,160
शूद्र और यह वाली बातों के बिना जो है भर्ती हो जाए उनके मन में पहले

689
00:49:32,160 --> 00:49:36,160
र घोला जाता है ऐसे ऐसे यय है देखो जहां तुम

690
00:49:36,160 --> 00:49:41,720
हो उसके बाद तब वो जो है भर्ती होते हैं बिल्कुल

691
00:49:41,720 --> 00:49:45,800
कता जन्मना जाते शूद्र

692
00:49:45,800 --> 00:49:50,040
सबसे बड़ी बात हा पुराणों का

693
00:49:50,040 --> 00:49:54,640
खंडन य आप ही बोलिए आप ही की बात है आप ही बोले

694
00:49:54,640 --> 00:49:58,840
कि जब भी वर्ण व्यवस्था में चार तरफ से गिर जाते हैं कि अब तो कुछ बोलने को बचा

695
00:49:58,840 --> 00:50:03,000
ही नहीं है तो तुरंत बोलेंगे कि देखो एक श्लोक है जन्म ना जायते शुद्र

696
00:50:03,000 --> 00:50:07,280
है स्कंद पुराण में आता है इसके अनुसार तो सब शुद्र है अरे भाई जिस

697
00:50:07,280 --> 00:50:11,320
जो तुम कह रहे हो कि वर्ण कर्म से होता है इतनी देर से वो ये श्लोक

698
00:50:11,320 --> 00:50:15,400
तुम प्रमाण के रूप में देख के तुम स्वयं सिद्ध कर रहे हो कि शुद्र तो जन्म से हो

699
00:50:15,400 --> 00:50:19,520
गया वर्ण जन्म से हो गया तो ये

700
00:50:19,520 --> 00:50:23,600
जो श्लोक है वो तुम्हारा प्रमाण नहीं है वो हमारा ही प्रमाण है तुम बस बातों को

701
00:50:23,600 --> 00:50:27,680
घुमा के समझ नहीं पाए और खुद की बातों में फस गए सामने वाला इतना

702
00:50:27,680 --> 00:50:29,360
ध्यान से पकड़ा नहीं

703
00:50:29,360 --> 00:50:33,560
अगर वो पकड़ ले तो वही पर बता दे कि ये तो हमारा ही प्रमाण है कोई

704
00:50:33,560 --> 00:50:38,040
दूसरा प्रमाण लेकर आओ और ऋषि वाक्य हो जाता है स्कंद पुराण के लिए

705
00:50:38,040 --> 00:50:42,200
कि वर्ण व्यवस्था तो कर्म से होती है अरे ऋषि

706
00:50:42,200 --> 00:50:46,280
वाच ने अपनी कई रील्स में यह पुराणों का और

707
00:50:46,280 --> 00:50:50,760
भी संदर्भ लिया है कहीं कहीं पर

708
00:50:50,760 --> 00:50:54,760
वायु वायु पुराण का मैंने देखा था खैर मैं अभी

709
00:50:54,760 --> 00:50:58,120
एक बात कर रहा था

710
00:50:58,120 --> 00:51:04,080
कि आखिर में संक्षिप्त वि दे दू अभी तक की वार्ता का

711
00:51:04,080 --> 00:51:08,120
कि जी जी शिवांश जी की जन्मना ता जायते

712
00:51:08,120 --> 00:51:12,320
शुद्र है अगर वो यहां किसी ने सुना है तो वो भी फिर खोजने की प्रयास खोजने

713
00:51:12,320 --> 00:51:16,360
का प्रयास करेगा तो इसका अर्थ है कि जन्मना

714
00:51:16,360 --> 00:51:20,400
जायते शुद्र संस्कार दज उच्च यहां जो शूद्र इसलिए कहा

715
00:51:20,400 --> 00:51:24,560
है कि असं स्कृत व्यक्ति की शुद्र वत संज्ञा होती है हमारे यहां

716
00:51:24,560 --> 00:51:28,800
सिद्धांतों में कि जैसे कोई संस्कार नहीं हुआ इसको

717
00:51:28,800 --> 00:51:33,120
मैं ऐसे बता दूं जैसे कहा जाता है कि धर्मेन हीना

718
00:51:33,120 --> 00:51:37,240
पशु भी समाना इसका अर्थ ये नहीं है कि जो पहली बात इस लाइन

719
00:51:37,240 --> 00:51:41,320
का अर्थ है कि धर्म के बिना व्यक्ति पशु के समान है या कहीं कहीं प आया कि

720
00:51:41,320 --> 00:51:44,480
गुरु के बिना व्यक्ति जो है स्कंद पुराण में ही आया है

721
00:51:44,480 --> 00:51:48,720
गुरु जिनका गुरु नहीं वो पशु है तो इसका मतलब यह नहीं हो गया कि

722
00:51:48,720 --> 00:51:52,800
जो व्यक्ति उसकी पशु योनि है नहीं वो पशु वत है

723
00:51:52,800 --> 00:51:57,360
ऐसे ही यहां पर जो ये शूद्र शब्द आया है जन्मना जाति शूद्र

724
00:51:57,360 --> 00:52:01,360
वो शूद्र वत है और यह बताओ जब वर्ण से

725
00:52:01,360 --> 00:52:05,400
जब कर्म से ही किसी का वर्ण डिसाइड हो रहा है तो जब व्यक्ति ने

726
00:52:05,400 --> 00:52:09,440
कोई कर्म किया नहीं है तो उसको तुम क्यों शूद्र बोल रहे हो

727
00:52:09,440 --> 00:52:13,960
यह भी बात है और माना जाए

728
00:52:13,960 --> 00:52:18,240
तो पूरा विश्व शुद्र हो गया मले भी शुद्र हो गया चतुर्वर्ण में आ गया

729
00:52:18,240 --> 00:52:22,600
चतुर्वर्ण के बाहर कोई रहा ही नहीं फिर हां सब चतुर्वर्ण वर्ण

730
00:52:22,600 --> 00:52:28,600
में आ गए

731
00:52:31,560 --> 00:52:35,840
आचार्य प्रशांत ने जया किशोरी जी का भी विरोध किया था ध्यान

732
00:52:35,840 --> 00:52:40,320
हो आपको तो वो नारी नारी विरोधी कहलाएंगे

733
00:52:40,320 --> 00:52:44,920
क्या नहीं क्योंकि उन्होंने तो सिद्धांत का खंडन किया

734
00:52:44,920 --> 00:52:50,920
है और जो वो कर रही है धर्म के ण में व्यापार

735
00:52:51,760 --> 00:52:55,840
जी ठीक है तो नहीं तब जो हैय नहीं पूछने

736
00:52:55,840 --> 00:53:00,520
जाते तुमको किसने अधिकार दे दिया खर

737
00:53:00,520 --> 00:53:04,600
आज की जो चर्चा है उसका मैं सूत्रा क्मक शैली में थोड़ा सा बता दूं

738
00:53:04,600 --> 00:53:08,960
क्या संक्षिप्त विवरण है उसके बाद हम कबीर वालों को लेंगे कबीर

739
00:53:08,960 --> 00:53:13,960
टॉपिक उठाएंगे पहली बात यह है

740
00:53:13,960 --> 00:53:18,120
कि आचार्य प्रशांत जी ने एक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने यह कहा कि

741
00:53:18,120 --> 00:53:22,480
आर्य समाज और पौराणिक तो यह पौराण

742
00:53:22,480 --> 00:53:26,600
कों के बीच जो वैचारिक मतभेद है या जो भी चल रही छटा कसी उस

743
00:53:26,600 --> 00:53:31,360
को समाप्त करने के लिए आर समाज की पक्ष से मोहित गौड़ और पौराणिक

744
00:53:31,360 --> 00:53:35,560
समाज की तरफ से शिवांश नारायन द्विवेदी आए

745
00:53:35,560 --> 00:53:39,880
और चर्चा करें और इस बात को खत्म करें और उसके बाद उनके कुछ

746
00:53:39,880 --> 00:53:43,880
वो रह जाते हैं तो हमसे भी चर्चा कर सकते हैं यह उन्होंने कहा पोस्ट डाल

747
00:53:43,880 --> 00:53:46,680
करके अब पहली बात तो इसमें दो चीजें

748
00:53:46,680 --> 00:53:50,800
हैं मोहित गौड़ आर समाजी नहीं है मोहित

749
00:53:50,800 --> 00:53:55,200
गौड़ आर समाजी नहीं है मोहित गौड़ बोल रहे हैं और

750
00:53:55,200 --> 00:53:59,320
जब आप यह समझ रहे व आर समाजी है तो आप आर्य समाज

751
00:53:59,320 --> 00:54:03,960
के लिए वही शब्द यूज कर रहे हो जो आर समाज चाहता है कि हमारे लिए य शब्द यूज किया जाए

752
00:54:03,960 --> 00:54:08,120
तो आप कौन होते हैं आर्य समाज के समक्ष हम

753
00:54:08,120 --> 00:54:12,200
यह कभी नहीं चाहते हैं कि हमको जो पौराणिक उद्बोधन

754
00:54:12,200 --> 00:54:16,240
किया जाए या वहां पर हमें उद् भाषित किया जाए हमें वहां पर आप

755
00:54:16,240 --> 00:54:20,480
सनातन वैदिक कार्य हिंदू कहिए परंपरा प्राप्त सनातनी

756
00:54:20,480 --> 00:54:24,960
कही है तो आपको यह अधिकार किसने दिया जो आप हमें एक संज्ञा दे दो

757
00:54:24,960 --> 00:54:29,720
पौराणिक क्योंकि पौराणिक को आपके यहां पर आपके ही लोग

758
00:54:29,720 --> 00:54:33,760
हीन भावना से उपयोग में लाते हुए प्रस्तुत करते हैं हम तो वैदिक

759
00:54:33,760 --> 00:54:38,280
हैं आर्य समाजी और यह पौराणिक है ये वैदिक नहीं है पौराणिक है

760
00:54:38,280 --> 00:54:42,600
आपसे हमने कहा है क्या कि हम वैदिक नहीं है तो हमारे लिए पौराणिक शब्द क्यों

761
00:54:42,600 --> 00:54:47,160
यूज कर रहे हैं अगर करना भी तो वैदिक यूज करिए पहली बात

762
00:54:47,160 --> 00:54:51,160
दूसरी बात आपने कहा कि आर्य समाज के पक्ष से मोहित गौड़ आएंगे मगर मोहित

763
00:54:51,160 --> 00:54:56,600
गौड़ तो यह कह रहा है कि वो आर समाजी नहीं है तो फिर आपका ये जो

764
00:54:56,600 --> 00:55:00,600
जो निमंत्रण है खारिज हो गया अपने आप में ही क्योंकि आप यह चाहते हैं कि आर्य समाज

765
00:55:00,600 --> 00:55:01,880
और जो

766
00:55:01,880 --> 00:55:06,240
आर्य समाज के नवयुवक और हमारे बीच जो चीजें चल रही है वो शॉर्ट आउट हो

767
00:55:06,240 --> 00:55:10,280
मगर जो व्यक्ति आ रहा है स्वयं को कह रहा है मैं आ समाज का नहीं हूं इसका मतलब

768
00:55:10,280 --> 00:55:14,440
वो चर्चा हो भी जाएगी तो वो शॉर्ट आउट नहीं होगी क्योंकि वो ये कह रहा है कि मैं आर

769
00:55:14,440 --> 00:55:18,520
समाजी हूं ही नहीं आर समाज तो ये कहेगा कि भैया तुमने जिससे

770
00:55:18,520 --> 00:55:22,560
बात की थी वो तो आर समाजी था ही नहीं वो तो ब बो चका हैह

771
00:55:22,560 --> 00:55:27,200
बात दूसरी बात यह कि हमने नीता

772
00:55:27,200 --> 00:55:32,120
मोहित गौड़ उस चर्चा की निंदा करें

773
00:55:32,120 --> 00:55:36,280
उससे जुड़े होने के लिए क्षमा याचना करें और उसको हटाने

774
00:55:36,280 --> 00:55:40,960
की मांग करें यह तीन चीजें करने पर हम मोहित गौर के साथ चर्चा करेंगे

775
00:55:40,960 --> 00:55:45,040
इन शर्तों को उनके द्वारा स्वीकार नहीं किया गया

776
00:55:45,040 --> 00:55:49,160
आचार्य प्रशांत के द्वारा मगर यह कहते हुए कि हमने उनकी

777
00:55:49,160 --> 00:55:53,320
सारी शर्तें स्वीकार कर ली थी एक मिथ्या प्रचार हमारे नाम से कर दिया कि हमने

778
00:55:53,320 --> 00:55:57,320
उनकी सारी शर्त स्वीकार कर ली और कॉल वार्ता पर शिवांश नारायण द्विवेदी

779
00:55:57,320 --> 00:56:01,320
जी ने वो जो निमंत्रण था उसको ठुकरा दिया है और

780
00:56:01,320 --> 00:56:05,320
चर्चा करने से मना कर दिया है तो ये झूठ भरोसा गया हमारी तरफ से कि हमने

781
00:56:05,320 --> 00:56:09,320
चर्चा करने से मना किया और दूसरी बात

782
00:56:09,320 --> 00:56:13,320
कॉल वार्ता हमारी और आपकी हुई नहीं है किसी मध्यस्थ के द्वारा हुई है मध्यस्थ आपको ये

783
00:56:13,320 --> 00:56:16,960
बोल रहा है कि आप जो लिख रहे हैं हमारे संदर्भ से वो गलत लिख रहे हैं तो

784
00:56:16,960 --> 00:56:21,040
आपको उसे संशोधित करना चाहिए एक मैच्योर

785
00:56:21,040 --> 00:56:25,120
पर्सन की तरह वहां पर आपको अपना करना चाहिए निर्वाह

786
00:56:25,120 --> 00:56:29,120
और चौथी और बात हमने मोहित गौर के साथ चर्चा के लिए मना किया है आपके

787
00:56:29,120 --> 00:56:33,560
साथ तो नहीं किया है आप करिए चर्चा

788
00:56:33,560 --> 00:56:38,080
आप आइए अ पॉट बोला

789
00:56:38,080 --> 00:56:42,200
है ये अच्छा पॉइंट बोला है तो आप जो कह रहे है ना

790
00:56:42,200 --> 00:56:46,640
कि आचार्य प्रशांत जी को मना नहीं किया चर्चा के लिए वह आ सकते हैं तो

791
00:56:46,640 --> 00:56:51,920
विज्ञान दर्शन जी अच्छे से सुन लीजिएगा यह वाक्य

792
00:56:51,920 --> 00:56:56,280
हा या फिर ऐसा समझा जाता हो कि नहीं विज्ञान दर्शन ही एक

793
00:56:56,280 --> 00:57:00,480
अगवा का हो सकते हैं पूरे आर् समाज के तो बात अलग है भाई घोषित कर दो विज्ञान

794
00:57:00,480 --> 00:57:04,640
दर्शन ही एक मात्र हो सकते हैं अगवा का आर् समाज के अलंकार समाज

795
00:57:04,640 --> 00:57:09,000
के अलंकार समाज मुझे इसीलिए यूज करना पड़ रहा है क्योंकि आप पौराणिक यूज कर रहे

796
00:57:09,000 --> 00:57:13,000
हो हम स्पष्ट वादी है ना भावनाओं को छुपाते नहीं है जो भावना मन में

797
00:57:13,000 --> 00:57:17,160
उसको बिल्कुल रख देते हैं स्पष्ट सामने तो

798
00:57:17,160 --> 00:57:21,200
हमने आपको तो मना नहीं किया हमने अपनी पोस्ट में हमने अपने रिप्लाई में हमने अपने वीडियो

799
00:57:21,200 --> 00:57:25,840
में बारबार यह कहा कि हम आपके साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं

800
00:57:25,840 --> 00:57:29,920
आप बात करिए कहां कैसे हो सकती है कब हो सकती है और हमने

801
00:57:29,920 --> 00:57:32,440
बार-बार अपना फोन दिया अभी भी दे रहे हैं

802
00:57:32,440 --> 00:57:37,640
740819 आप में कोई कमी है क्या जो आपको मोहित गौर की आवश्यकता

803
00:57:37,640 --> 00:57:41,680
है तो यह सारी बातें हैं इसके लिए हमने लाइव रखी थी

804
00:57:41,680 --> 00:57:46,440
आशा करते हैं यथोचित संदेश लोगों तक पहुंचेगा और

805
00:57:46,440 --> 00:57:50,960
जो अलंकार समाज है व उसको थोड़ा सा झूठ फरेब धोखा इत्यादि

806
00:57:50,960 --> 00:57:55,000
से ऊपर उठना चाहिए और आकर के सत्य की

807
00:57:55,000 --> 00:57:59,040
खोज के लिए वार्ता करना चाहिए सत्य की खोज एक व्यक्ति कर

808
00:57:59,040 --> 00:58:03,120
रहा है धोखा की अपने समक्ष जो है आवान के किसी फॉलोअर के रूप में

809
00:58:03,120 --> 00:58:07,240
अपने ही व्यक्ति को बिठा ले रहा है अपने मन मुताबिक वहां से तर्क और प्रश्न करवा

810
00:58:07,240 --> 00:58:11,280
रहा है फिर उनका निराकरण करके बेताज बादशाह बनने का प्रयास कर रहा है यह क्या है

811
00:58:11,280 --> 00:58:15,320
झूठ फरेब धोखा अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए जो मूर्तियों का

812
00:58:15,320 --> 00:58:19,960
खंडन करते हैं वह मूर्तियों को ही ले आते हैं ये क्या है झूठ फरेब वो

813
00:58:19,960 --> 00:58:23,960
धोखा पुराणों की निंदा करने वाले अपनी बातों को रखने के लिए पुराण का

814
00:58:23,960 --> 00:58:27,960
ही उपयोग करते हैं ये क्या है झूठ फरेब और जब आपके लिए पुराण प्रमाण

815
00:58:27,960 --> 00:58:32,720
नहीं है तो क्यों ला रहे हो अपनी चीजों के लिए अपनी चीजों को सिद्ध करने के लिए उनको पक्ष

816
00:58:32,720 --> 00:58:36,720
यह है झूठ फरेब धोखा तो यह सारी

817
00:58:36,720 --> 00:58:42,720
चीजें

818
00:58:45,240 --> 00:58:49,640
हैं तो अब मैं चाहूंगा कि भाई

819
00:58:49,640 --> 00:58:53,640
और यह वो मध्यस्थ है जिन्होंने वो दूध का दूध और पानी का पानी किया है

820
00:58:53,640 --> 00:58:57,880
कि इनके थ्रू आचार्य प्रशांत जी का संदेश तक आया अच्छा एक बात और क्लियर

821
00:58:57,880 --> 00:59:02,240
कर दीजिए ई समदा जी सत्यम जी क्या

822
00:59:02,240 --> 00:59:06,240
जो संदेश आप मुझे दे रहे थे क्या मुझे यह उस समय बताया भी था आपने

823
00:59:06,240 --> 00:59:10,240
कि आचार्य प्रशांत का वो संदेश है सिर्फ आपने आचार्य बोला था तो इतना

824
00:59:10,240 --> 00:59:14,360
तक मुझे नहीं पता था किय कहां से आने वाली बात है जो मेरे मित्रवत मुझे

825
00:59:14,360 --> 00:59:18,440
बता रहे हैं और इन्होंने उनकी लाज इतनी रखते हैं देखिए

826
00:59:18,440 --> 00:59:22,960
उनकी पीठ पीछे के उनकी कौन सी बात कहनी है किसी से किसी से नहीं कहनी है

827
00:59:22,960 --> 00:59:26,960
दोनों तरफ ये संभालते हैं इन्होंने वह रिकॉर्डिंग तक

828
00:59:26,960 --> 00:59:31,200
हमें नहीं द है इन्हीं के पास है जो इनकी बातें आचार्य प्रशांत जी के साथ हुई इन्होंने

829
00:59:31,200 --> 00:59:35,320
ऐसा नहीं किया कि अगर आचार्य प्रशांत जी गलत है तो लो शिवाज जी

830
00:59:35,320 --> 00:59:39,560
यह लो रिकॉर्डिंग दिखा दो यह इस तरह से निर्वाह कर रहे हैं अपने धर्म

831
00:59:39,560 --> 00:59:43,800
का दोनों ओर से निर्वाह कर रहे हैं तब इनको गिल्ट हो रहा है कि भाई मेरे कारण जो है शिवांस

832
00:59:43,800 --> 00:59:47,880
द्विवेदी के नाम से गलत मिथ्या प्रचार हो रहा है वो भी उस व्यक्ति के द्वारा जिसको

833
00:59:47,880 --> 00:59:51,960
मैं सही समझता हूं हमें आचार

834
00:59:51,960 --> 00:59:56,080
इन्होंने इतनी वहां पर कहूंगा वो उपलब्ध नहीं थे आचार्य

835
00:59:56,080 --> 01:00:00,120
प्रशांत जी उनकी पीठ पीछे भी हमारे

836
01:00:00,120 --> 01:00:00,620
से

837
01:00:00,320 --> 01:00:04,440
उनका कभी नाम नहीं लिया बाद में जब ये मुश्किलें पड़ गई तब इन्होंने भेद खोला

838
01:00:04,440 --> 01:00:08,720
कि जिससे मैं आपकी बात जिसको जिसकी बात मैं आपको बता रहा था वो यही है आचार्य

839
01:00:08,720 --> 01:00:12,760
प्रसन बाद में और बात यह जा रही है कि हम

840
01:00:12,760 --> 01:00:18,680
डरते हैं चर्चा से यह फैलाया जाता है हमारे बारे में यह भी सुन लीजिए

841
01:00:18,680 --> 01:00:23,480
भाई सीना तान के आर समाज के मंदिरों में कौन गया

842
01:00:23,480 --> 01:00:27,960
अब आप कह रहे हो कि आपने जितने भी लोगों से बात करी उन्हें शास्त्र का उतना ज्ञान नहीं था

843
01:00:27,960 --> 01:00:33,040
व आपकी जो इंटरनेशनल प्रचार है उनको भी आप इसी में समझते

844
01:00:33,040 --> 01:00:37,200
हो बोल दो वो जो आपकी आधुनिक गार्गी है

845
01:00:37,200 --> 01:00:41,600
उनको आधुनिक गार्गी की संज्ञा दी गई थी एक लाइव डिबेट में लाइव स्ट्रीम

846
01:00:41,600 --> 01:00:45,880
में तो ये आप किसके लिए कह रहे हो और जब ऐसे

847
01:00:45,880 --> 01:00:50,040
आप अपने लोगों को नकारने लगोगे कि नहीं नहीं वो वो जो है शास्त्रों का ज्ञान

848
01:00:50,040 --> 01:00:54,160
नहीं था उसको शास्त्रों का ज्ञान नहीं था तो फिर किसको समझा जाए आर समाज

849
01:00:54,160 --> 01:00:58,840
की तरफ से प्रतिनिधि उसको जो कह रहा है मैं आर समाजी नहीं

850
01:00:58,840 --> 01:01:02,880
हूं आपने हमारे हमारे भय से एक फतवा

851
01:01:02,880 --> 01:01:06,920
जारी किया हमारे लिए यह है शिवांश नारायण द्विवेदी य इस तरह से

852
01:01:06,920 --> 01:01:11,360
चर्चा करता है इसकी चर्चा में मत आ जाना इसकी बातों में मत आ जाना

853
01:01:11,360 --> 01:01:15,320
तो यहां पर यहां पर कौन छोड़ रहा है चर्चा चर्चा को कौन छोड़ रहा है कौन भाग

854
01:01:15,320 --> 01:01:19,480
रहा है कौन अपने मंदिरों में फतवा जारी कर रहा है भैया इससे चर्चा मत करना क्यों

855
01:01:19,480 --> 01:01:23,520
इतना टेरर हो गया क्या ऐसे खड़े नहीं कर पाए क्या आप जो

856
01:01:23,520 --> 01:01:27,920
शिवांश नारायण द्वेदी से बात कर सके

857
01:01:27,920 --> 01:01:33,920
कोई सभ्य व्यक्ति नहीं है आपके

858
01:01:35,160 --> 01:01:39,440
पास अरे भाई हम तो आपके मंदिरों में जा ही रहे थे अभी भी

859
01:01:39,440 --> 01:01:43,520
जाएंगे प्रयास तो करेंगे ही फतवा जारी हुआ हो या ना हुआ हो

860
01:01:43,520 --> 01:01:47,640
अभी मुझे किसी ने टैक कर दिया माउंट आबू से व पत्र बहुत पहले का आया था हमारे

861
01:01:47,640 --> 01:01:52,040
पास उसका उत्तर दे दिया था हमने कह दिया आ जाओ उसमें वो शास्त्रार्थ

862
01:01:52,040 --> 01:01:57,240
के लिए बोल रहे मैंने कहा आ जाओ लखनऊ कर लो चर्चा आपके

863
01:01:57,240 --> 01:02:01,280
समय आपके स्थान पर ही क्यों हो आ जाओ लखनऊ

864
01:02:01,280 --> 01:02:05,920
हमें आपसे चर्चा करने की आवश्यकता लगेगी तो हम अवश्य आ जाएंगे

865
01:02:05,920 --> 01:02:11,920
आपको लग रही आ जाओ लखनऊ दो तीन घंटे बैठ के चर्चा हो जाएगी अच्छे

866
01:02:12,000 --> 01:02:16,120
से भाई हम किसी के भी बुलाने पर क्यों चले जाए अभी मैं

867
01:02:16,120 --> 01:02:20,840
मैं कह रहा हूं ना हर समाज का दुनिया का संसार का सबसे बड़ा विद्वान

868
01:02:20,840 --> 01:02:24,960
हो अगर उसमें सामर्थ्य है तो व आ जाए लखनऊ चर्चा

869
01:02:24,960 --> 01:02:29,040
हो जाएगी इनमें से ना हो जिनके ऊपर य यह जो रडार

870
01:02:29,040 --> 01:02:30,480
प जैसे अंडर

871
01:02:30,480 --> 01:02:34,640
कवर्ड गुंडे या उस चर्चा से जुड़े हुए लोग जो है यह है

872
01:02:34,640 --> 01:02:38,800
ना बहन को छोड़ कर के उसको एक थोड़ा सा मैंने

873
01:02:38,800 --> 01:02:43,240
वो दिया है मातृ शक्ति होने के नाते एक

874
01:02:43,240 --> 01:02:48,160
उसको क्या कहते हैं प्रायोरिटी प्राथमिकता दी है थोड़ी छूट दी है

875
01:02:48,160 --> 01:02:52,400
तो आ जाए चर्चा के

876
01:02:52,400 --> 01:02:56,760
लिए नहीं है क्या यही ऋषि वाच यही सब है

877
01:02:56,760 --> 01:03:01,240
जिनको धर्म अधर्म का बोध नहीं है जिनका कोई सिद्धांत नहीं है

878
01:03:01,240 --> 01:03:05,480
क्या सिद्धांत है भाई तुम्हारा मैं समाजी नहीं हूं मैं परंपरा प्राप्त आचार्यों

879
01:03:05,480 --> 01:03:09,600
का शिष्य नहीं हूं मेरा कोई सिद्धांत नहीं मगर मैं सनातन धर्मी हूं सनातन धर्म

880
01:03:09,600 --> 01:03:13,880
आया कहां से तुम्हारे पास

881
01:03:13,880 --> 01:03:19,640
सपने में आकर दे गए भगवान यह सब बातें

882
01:03:19,640 --> 01:03:25,640
है चलिए

883
01:03:26,120 --> 01:03:31,760
जो भी आ रहे

884
01:03:31,760 --> 01:03:37,760
हैं जी हरि शरणम जी जय श्री

885
01:03:38,880 --> 01:03:42,920
राम रामपाल दास के शिक्षाओं

886
01:03:42,920 --> 01:03:47,000
के बारे में जो हम लोग यहां पर चर्चा करते हैं उसके निमित्त किसी को अगर

887
01:03:47,000 --> 01:03:51,800
आना है वैचारिक मतभेद के निमित्त तो वो

888
01:03:51,800 --> 01:03:56,120
आए जी हरि शरणम जी प्रणाम

889
01:03:56,120 --> 01:04:02,120
जय श्री राम जय श्री राम रछ र

890
01:04:05,200 --> 01:04:09,480
बताइए अब जो आदित्य जी आदित्य

891
01:04:09,480 --> 01:04:14,120
जी इंडियन फर्स्ट भारतीय समथिंग समथिंग लिखा

892
01:04:14,120 --> 01:04:18,160
है मैं चाहूंगा कि आप लोग किसी और स्ट्रीम में आए अ

893
01:04:18,160 --> 01:04:22,560
ये आर समाज वाला टॉपिक हम लोग बंद कर रहे हैं फ किसी दिन लेंगे

894
01:04:22,560 --> 01:04:27,000
और इतना ही बोलना था बस ये जो बता जी

895
01:04:27,000 --> 01:04:31,000
हरि शरणम जी बताए अच्छा एक वो

896
01:04:31,000 --> 01:04:35,200
जो दोगला भाई अभिषेक है उसकी बात याद आ गई उसने प्रश्न किया

897
01:04:35,200 --> 01:04:37,440
था

898
01:04:37,440 --> 01:04:41,440
कि यह जो हरे कृष्ण हरे राम मंत्र है कहां लिखा है पहली बात तो

899
01:04:41,440 --> 01:04:45,960
यह मंत्र जो है लिखा है कली संत्र उपनिषद में है ना

900
01:04:45,960 --> 01:04:50,320
और दूसरी बात यह है कि नाम जप की महिमा का गुणगान कई

901
01:04:50,320 --> 01:04:54,520
जगह पर किया गया है और आप गल पर कर लीजिए पद

902
01:04:54,520 --> 01:04:58,560
पुराण में दिया गया है खंड में नाम जप नाम जप को लेकर

903
01:04:58,560 --> 01:05:02,680
के हमने स्कोन वालों से बहुत सारे वो प्रश्न किए 10 नाम अपराध में से एक नाम अपराध है जिसको

904
01:05:02,680 --> 01:05:06,880
स्कोन चेंज करता है तो नाम अपराध जब बताए जा रहे हैं

905
01:05:06,880 --> 01:05:10,880
नाम अपराध जब बताए जा रहे हैं तो इसलिए बताए जा रहे हैं क्योंकि नाम जपने की

906
01:05:10,880 --> 01:05:14,880
विधा है और नाम जपने की विधा क्यों है य भागवत पुराण में

907
01:05:14,880 --> 01:05:20,880
दिया गया है क्या दिया है भागवत पुराण में

908
01:05:21,560 --> 01:05:25,680
कि पतित ब्राह्मण और जो ऐसे लोग हैं

909
01:05:25,680 --> 01:05:29,800
नका जो है उच्च मतलब अच्छी अवस्था में जिनको

910
01:05:29,800 --> 01:05:33,840
शरीर नहीं प्राप्त है उन लोगों द्वारा

911
01:05:33,840 --> 01:05:38,600
वेदोक्त कर्मों में होने वाली संभावित भूल चूक के कारण

912
01:05:38,600 --> 01:05:42,720
उन्हें वेदोक्त कर्मों से मुक्त करते हुए पुराण पुराणों की व्यवस्था की गई

913
01:05:42,720 --> 01:05:47,040
है और पुराणों के आधार पर भी उनकी निवृत्ति होती है उनकी मुक्ति

914
01:05:47,040 --> 01:05:51,360
होती है और इसका 932 में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जिनका

915
01:05:51,360 --> 01:05:55,360
जन्म जो तामस गुण प्रधान होता है जिनके जीवन में उनकी

916
01:05:55,360 --> 01:05:59,480
भी की मुक्ति हो जाती है अगर वो मेरे शरण में आ जाते हैं इन सब बातों को

917
01:05:59,480 --> 01:06:03,760
जोड़ कर के जो नाम जप है पुराणों में नाम जप का विधान किया गया है और अनेका

918
01:06:03,760 --> 01:06:08,080
अनेक शास्त्रों में है नारद पुराण में है पद्म पुराण में है आवश्यकता

919
01:06:08,080 --> 01:06:12,880
पड़ेगी तो उसका श्लोक क्रमांक इत्यादि सब उपलब्ध करा दिया जाएगा हालांकि

920
01:06:12,880 --> 01:06:16,960
इस बारे में तो आप गल पर भी सर्च कर लेंगे बहुत सारे प्रमाण मिल जाएंगे

921
01:06:16,960 --> 01:06:21,240
ठीक है पद्म पुराण में है जहां पर 10 नाम अपराध

922
01:06:21,240 --> 01:06:25,600
बताए गए हैं तो 10 नाम अपराध बताए इसलिए जा रहे हैं कि नाम जप करते समय आप वो 10 अपराध

923
01:06:25,600 --> 01:06:29,920
ना करें वहां पर आप सर्च कर सकते हैं अनेक अनेक जगह और

924
01:06:29,920 --> 01:06:33,960
तुलसीदास जी का अगर आप वो करते हो तो उन्होंने भी नाम जपते कलयुग में

925
01:06:33,960 --> 01:06:36,840
बहुत ज्यादा जोर दिया है भगवान के नाम का जप

926
01:06:36,840 --> 01:06:41,080
बहुत बहुत सारे प्रमाण है नाम जप के ठीक है जी

927
01:06:41,080 --> 01:06:45,440
हरि शम जी बोले जय श्री रामय

928
01:06:45,440 --> 01:06:50,000
श्री राम जय श्री राम

929
01:06:50,000 --> 01:06:56,000
आप ये निकाल दीजिए आपकी आवाज बहुत कम आ रही है

930
01:07:04,400 --> 01:07:10,400
अभी लगभग 15 दिन पहले की बात

931
01:07:10,560 --> 01:07:14,760
है आप अपना सबसे पहले परिचय दे दे तो अच्छा

932
01:07:14,760 --> 01:07:18,760
होगा लवलेश तिवारी लखीमपुर

933
01:07:18,760 --> 01:07:23,720
खेरी अच्छा लखीमपुर खीरी से कमलेश तिवारी जी बता

934
01:07:23,720 --> 01:07:27,720
अभी लगभग 15 दिन पहले की बात है तो हम एक गांव में ऐसे

935
01:07:27,720 --> 01:07:32,160
गए थे काम

936
01:07:32,160 --> 01:07:37,200
से तो वहां यही रामपाल वाले घूम रहे थे

937
01:07:37,200 --> 01:07:41,440
अच्छा हा तो उनसे आपके वीडियो देखे थे और थोड़ा

938
01:07:41,440 --> 01:07:45,560
स्टडी भी करते रहते इस विषय में तो फर

939
01:07:45,560 --> 01:07:49,360
उनसे बातचीत हो गई तो फिर व भाग गए

940
01:07:49,360 --> 01:07:53,920
थेम साथ में हा हमने फिर जो उनका जो

941
01:07:53,920 --> 01:07:57,920
लिस्ट रहती है जिसम केवल लिखा रहता है सोर्स लिखे रहते हैं ना वो

942
01:07:57,920 --> 01:08:02,080
होता कुछ नहीं है उनके पास तो

943
01:08:02,080 --> 01:08:06,120
वही जो शब्द था कि कबीर मतलब परमात्मा है तो हमने कहा दिखाइए फिर आप

944
01:08:06,120 --> 01:08:10,480
सोर्स दीजिए तो जो जो उन्होंने बताए

945
01:08:10,480 --> 01:08:14,880
कि मतलब वहां वहां लिखा है तो हमारे मोबाइल में पीडीएफ पड़े थे तो हमने निकाले

946
01:08:14,880 --> 01:08:19,400
उनको कौन सी पीडीएफ थी आपके मोबाइल में

947
01:08:19,400 --> 01:08:24,440
जी कौन किस मतलब क्या था उस पीडीएफ

948
01:08:24,440 --> 01:08:25,760
में यही

949
01:08:25,760 --> 01:08:29,840
व गीता के जो वो थे मतलब उन्होंने गलत ट्रांसलेशन कर रखा

950
01:08:29,840 --> 01:08:33,920
था उन्होंने अपने वा गीता अच्छा हमारे पास गीता प्रस

951
01:08:33,920 --> 01:08:38,600
गोरखपुर का पीडीएफ है अच्छा हां तो वही

952
01:08:38,600 --> 01:08:42,720
हमने हमने भी एक पीडीएफ दी हुई है प्रमाणों के लिए एक पीडीएफ दी

953
01:08:42,720 --> 01:08:46,800
हुई है जी वो जो रामपाल वाली जो सीरीज है छह

954
01:08:46,800 --> 01:08:51,320
वीडियोस की उसमें अंत में है जी जी जी बोलिए

955
01:08:51,320 --> 01:08:55,760
ये जो ग कोई रामपाल का श भैया आ करके बताना चाहे

956
01:08:55,760 --> 01:08:59,920
तो आ सकता है चर्चा चल रही है व आए और

957
01:08:59,920 --> 01:09:04,120
बताए कि ईश्वर सर्वशक्तिमान उनका है कि नहीं वेदों में कहां

958
01:09:04,120 --> 01:09:08,320
प्रमाण है कि कबीर भगवान है यह सब वो बताए आ कर

959
01:09:08,320 --> 01:09:10,920
जी ह

960
01:09:10,920 --> 01:09:15,040
शरण वो गीताप्रेस डट ओजी वाली जो वेबसाइट है

961
01:09:15,040 --> 01:09:21,040
ऑफिशियल गीता प्रेस गोरखपुर की

962
01:09:40,360 --> 01:09:44,960
जी ह हरि शरणम जी आपको आवाज आ रही है मेरी

963
01:09:44,960 --> 01:09:49,400
जी नेटवर्क य

964
01:09:49,400 --> 01:09:53,480
वेब जी तो उनकी उनकी वेबसाइट

965
01:09:53,480 --> 01:09:59,360
पर एक सेक्शन है ईबुक का

966
01:09:59,360 --> 01:10:03,480
तो वहां पर बहुत सारी ई बुक्स उन्होंने फ्री ऑफ कॉस्ट अवेलेबल करवा रखी डाउनलोड

967
01:10:03,480 --> 01:10:07,080
नहीं हो सकते हैं बट पढ़ सकते हैं आप

968
01:10:07,080 --> 01:10:11,080
उनको ऑपरेटर जी यहां पर ऑपरेटर जी आप एक बार और बीच बीच

969
01:10:11,080 --> 01:10:16,000
में दे दीजिए कोई आने की चेष्टा कर रहा होगा तो उसको लिंक मिल

970
01:10:16,000 --> 01:10:20,000
जाए जी तो हमने मतलब

971
01:10:20,000 --> 01:10:24,720
वहां के जो लोग थे तो हमने बताया कि यदि आपको मतलब आप बुक्स नहीं खरीद सकते इसे

972
01:10:24,720 --> 01:10:29,280
कम समय है पढ़ना चाहते हैं तो आप यहां से पढ़ सकते हैं किताब

973
01:10:29,280 --> 01:10:32,600
यह ज्यादा अच्छा रहेगा गीता

974
01:10:32,600 --> 01:10:36,920
प्रेस और यह लोग दिग भ्रमित कर देते हैं लोगों

975
01:10:36,920 --> 01:10:40,920
को तो फिर वहां पर आप आप सफल हुए उनको

976
01:10:40,920 --> 01:10:45,240
उनका प्रतिकार करने में जो वो दुष्प्रचार कर रहे

977
01:10:45,240 --> 01:10:49,360
थे आज एक व्यक्ति का फोन आया आज एक व्यक्ति का फोन

978
01:10:49,360 --> 01:10:53,400
आया मैं उस चर्चा को आपको थोड़ा सा बताऊ बोला कि आप जो है

979
01:10:53,400 --> 01:10:55,560
रामपाल दास जी के बारे में बहुत गलत सल

980
01:10:55,560 --> 01:10:59,640
बोलते मैंने कहा हमने क्या गलत बोला बोलते हैं वो जो उनका वो कहते

981
01:10:59,640 --> 01:11:03,800
हैं मैं कुत्ता हूं तो वो वो अपने आप को इसलिए कह रहे हैं वो अपनी

982
01:11:03,800 --> 01:11:07,800
दीनता प्रकट कर रहे हैं ईश्वर के समक्ष तो मैंने कहा ऐसे ही तो दीनता प्रकट

983
01:11:07,800 --> 01:11:11,800
कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा माता के समक्ष उस बात को

984
01:11:11,800 --> 01:11:16,440
तो आपने पकड़ लिया अच्छा आविर्भव तिरो भाव से एक बात और याद आ गई आविर्भव

985
01:11:16,440 --> 01:11:20,440
और तिरो भाव का अर्थ जो है क्योंकि प्रकट और अप प्रकट है मूल

986
01:11:20,440 --> 01:11:24,800
मूल अर्थ आविर्भाव और रो भाव का मूल अर्थ है प्रकट

987
01:11:24,800 --> 01:11:28,800
और अपक तो प्रकट और अपक का उपयोग जो

988
01:11:28,800 --> 01:11:33,680
है जन्म और मृत्यु में होता है ऐसा नहीं नहीं होता है मगर वो मूल अर्थ नहीं है

989
01:11:33,680 --> 01:11:37,760
जैसे प्रतिमा प्रतिमा का मूल अर्थ है के समान

990
01:11:37,760 --> 01:11:42,040
किसी के समान है ना मगर मगर

991
01:11:42,040 --> 01:11:46,080
अब जब क्योंकि मूर्ति जो विग्रह देखने में किसी

992
01:11:46,080 --> 01:11:50,160
के समान होती है इसलिए मूर्ति के लिए भी प्रतिमा शब्द का उपयोग

993
01:11:50,160 --> 01:11:54,200
होता है तो इसलिए प्रतिमा का अर्थ मूर्ति भी हो जाता है

994
01:11:54,200 --> 01:11:58,200
तो इसी प्रकार से जब किसी का जन्म हो रहा है तो वो क्योंकि प्रकट हो रहा

995
01:11:58,200 --> 01:12:02,640
है और मृत्यु हो रही है तो उसका जो है अप प्रकट हो रहा है तो इसलिए

996
01:12:02,640 --> 01:12:06,760
जन्म मृत्यु के लिए भी आविर्भव और त्र भाव य होता है

997
01:12:06,760 --> 01:12:11,400
मगर आविर्भव और त्र भाव का मूल अर्थ प्रकट और अपक है

998
01:12:11,400 --> 01:12:15,320
जन्म मृत्यु नहीं है

999
01:12:15,320 --> 01:12:19,840
मलय आवाज क से आ रही है मेरी आवाज आपके य चल रहा है क्या

1000
01:12:19,840 --> 01:12:24,160
य था व आपकी आवाज य कट रही थी लाइव स्ट्रीम पर

1001
01:12:24,160 --> 01:12:28,480
अच्छा अच्छा तो भाई रामपाल

1002
01:12:28,480 --> 01:12:32,800
को फॉलो करने वाले लोग है कहां गए आए और अपना वो जो रामपाल

1003
01:12:32,800 --> 01:12:37,120
दास जी के द्वारा जो दिया जाने वाला जो ज्ञान है

1004
01:12:37,120 --> 01:12:41,440
उसकी रक्षा करें आ कर के

1005
01:12:41,440 --> 01:12:46,280
जी उन्होंने हमसे कहा कि ये जो

1006
01:12:46,280 --> 01:12:50,920
बोलिए बोलिए ये जो मूर्ति मतलब जो पूजन का है

1007
01:12:50,920 --> 01:12:56,640
कोई देवता जो ब्रह्म है मूर्ति नहीं हो सकती मूर्ति

1008
01:12:56,640 --> 01:13:01,160
तोय गणपत थव शीर्ष में भगवान गणेश की पूजी

1009
01:13:01,160 --> 01:13:07,160
जो मूर्ति है उसका विधान है उसमें फल श्रुति

1010
01:13:07,480 --> 01:13:13,480
में हमने वही टेक करके बताया तुम प्रत्यक्ष ब्रह्मा

1011
01:13:19,960 --> 01:13:24,080
से आप अपना चेहरा दिखाए मनीष गिठाला

1012
01:13:24,080 --> 01:13:27,640
जी

1013
01:13:27,640 --> 01:13:31,720
जी जी जय श्री राम जय श्री राम तो मुझे जो

1014
01:13:31,720 --> 01:13:35,840
मुझे जो फोन आया था मैं एक मिनट अपनी बात पूरी कर लू मुझे जो फोन आया

1015
01:13:35,840 --> 01:13:39,840
था उसमें व्यक्ति कहता है कि आप ऐसा क्यों कहते तो हमने कहा आप ऐसा

1016
01:13:39,840 --> 01:13:43,920
क्यों कहते हैं यह दुर्गा माता के बारे में तो बोला दुर्गा माता के बारे में वह एस इट बात

1017
01:13:43,920 --> 01:13:48,120
लिखी है मेरे भाई वह एस इट बात लिखी है कहां पर कबीर

1018
01:13:48,120 --> 01:13:52,240
सागर में भाई कबीर सागर आपके लिए प्रमाण है हमारे लिए नहीं

1019
01:13:52,240 --> 01:13:56,320
है हमारे लिए प्रमाण है ही नहीं वो दुर्गा दुर्गा

1020
01:13:56,320 --> 01:14:00,320
माता की उत्पत्ति जब पुराणों से हो रही है वेदों से हो रही है तो दुर्गा माता के

1021
01:14:00,320 --> 01:14:04,440
लिए बात जानने के लिए आप कबीर सागर में कैसे जा सकते हैं केवल

1022
01:14:04,440 --> 01:14:08,480
उतना ही अंश उनका सुना जा सकता है जो जहां से दुर्गा माता की उत्पत्ति हो

1023
01:14:08,480 --> 01:14:12,480
रही है जहां पर है वहां से मैच

1024
01:14:12,480 --> 01:14:16,720
खा रहा हो और यदि तुम्हारे कबीर सागर में लिखा

1025
01:14:16,720 --> 01:14:21,640
हुआ है दुर्गा जी के बारे में वह सब तो तुम्हारे रामपाल स्वयं को कह तो रहे कि मैं कुत्ता

1026
01:14:21,640 --> 01:14:22,640
हूं

1027
01:14:22,640 --> 01:14:27,040
हम भी तो वही बात रिपीट कर रहे हैं वो बुरी क्यों लग रही तो

1028
01:14:27,040 --> 01:14:31,480
कुल मिलाकर के वर्ड गलत नहीं है गलत यह है

1029
01:14:31,480 --> 01:14:35,880
कि सच बोलना चाहिए वो ये बोले कि देखिए जो बात

1030
01:14:35,880 --> 01:14:39,880
वो बोलते हैं दुर्गा माता के बारे में वो लिखी है किताबों में अरे भाई तो हम भी तो

1031
01:14:39,880 --> 01:14:44,080
जो बात रामपाल दास जी के लिए बोल रहे हैं वो बात रामपाल दास जी स्वयं बोलते हैं अनेक

1032
01:14:44,080 --> 01:14:48,080
अनेक वीडियो में बोलते हैं तो इसका मतलब

1033
01:14:48,080 --> 01:14:52,200
क्या है कि बात ये है कि वो जो शब्द है वो बोल सकते हैं

1034
01:14:52,200 --> 01:14:56,360
मगर वो सच होना चाहिए पहली बात तो ये है तो पहली बात हमारा

1035
01:14:56,360 --> 01:15:00,360
जो शब्द हम जो बोल रहे हैं अगर आपके लिए कबीर सागर सच है तो आपके लिए रामपाल भी

1036
01:15:00,360 --> 01:15:04,520
तो सच है आप जो शब्द यूज कर रहे हो वो ऐसी चीज से कर रहे जो हमारे

1037
01:15:04,520 --> 01:15:08,520
लिए सच नहीं है मगर हम जिस जहां से शब्द यूज कर रहे व

1038
01:15:08,520 --> 01:15:13,160
ऐसा शब्द यूज कर रहे जो आपके लिए सच है

1039
01:15:13,160 --> 01:15:17,280
सोचिए कौन न्याय प है दूसरी

1040
01:15:17,280 --> 01:15:20,560
बात

1041
01:15:20,560 --> 01:15:25,000
कि अब यह बात आ जाती है कि आप

1042
01:15:25,000 --> 01:15:29,320
तो ये आपने कहा कि भाई उसका भाव यह है रामपाल दास जी

1043
01:15:29,320 --> 01:15:33,360
जो अपने आप को य बोल रहे हैं भाव यह है हम भी तो बताते हैं कि भाव है तुम हमारी बात

1044
01:15:33,360 --> 01:15:37,480
मानते हो इसका मतलब क्या है कि सच बोलना चाहिए

1045
01:15:37,480 --> 01:15:41,560
यह आप हमको कह रहे हो ठीक है उसके बाद सच क्या है और क्या नहीं है यह

1046
01:15:41,560 --> 01:15:46,160
भी आप ही डिसाइड कर रहे हो समझ रहे हैं बंधुवर

1047
01:15:46,160 --> 01:15:50,320
जिन्होंने आज हमें फोन किया था आप हमें पहले तो यह कह रहे हैं वो शब्द

1048
01:15:50,320 --> 01:15:54,480
आप बोल सकते हो जो बोल रहे हो मगर वो सच होना चाहिए आपने कहा सच होना चाहिए उसके

1049
01:15:54,480 --> 01:15:58,840
बाद क्या है यह भी आप ही डिसाइड कर रहे हो हमारे

1050
01:15:58,840 --> 01:16:03,640
पास कोई अधिकार है ही नहीं कुछ भी करने का मेरे भाई

1051
01:16:03,640 --> 01:16:08,000
क्योंकि आप स्वयं भू हो क्योंकि आप तानाशाह

1052
01:16:08,000 --> 01:16:12,120
हो इसलिए आप जो डिसाइड करोगे उसको हमें फॉलो करना

1053
01:16:12,120 --> 01:16:16,480
है ऐसा नहीं

1054
01:16:16,480 --> 01:16:21,360
होगा अंकित झा चेहरा दिखाए

1055
01:16:21,360 --> 01:16:27,120
तो मनीष जी आप बताए जय श्री राम जय

1056
01:16:27,120 --> 01:16:31,400
सियाराम मैं ये क रहा था गीता में 10

1057
01:16:31,400 --> 01:16:35,400
31 पर भगवान श्री कृष्ण ने

1058
01:16:35,400 --> 01:16:39,600
एक बात बोली ना सस्त्र दारियो में राम हो

1059
01:16:39,600 --> 01:16:43,800
मुझे इस पर य शंका है शका क्या है व रियल में मैंने उसको किया

1060
01:16:43,800 --> 01:16:48,080
है देखा है तो दशरथ रघुवीर प्रभु राम है

1061
01:16:48,080 --> 01:16:52,360
ना उनके लिए नहीं कहा शायद मेरे अनुसार वो भृगु नंदन

1062
01:16:52,360 --> 01:16:56,480
परशुराम जी है उनके लिए कहा उन्होंने श्रीराम ह इस बात

1063
01:16:56,480 --> 01:17:00,680
का फिर मैंने परीक्षण कहां पर किया महाभारत केन है ना उसमें

1064
01:17:00,680 --> 01:17:06,000
दो तीन में उन्होंने फिर से कहा कि मैं सस्त्र धारी भग भार्गव

1065
01:17:06,000 --> 01:17:10,160
राम लोक क्रमांक बोलिए जरा 10 31

1066
01:17:10,160 --> 01:17:13,240
पहले गता देखो

1067
01:17:13,240 --> 01:17:17,520
आप 10 32 31

1068
01:17:17,520 --> 01:17:22,720
10

1069
01:17:22,720 --> 01:17:27,200
31 ये तो आप हमसे फोन प बात कर लेते

1070
01:17:27,200 --> 01:17:31,240
नहीं तो आप फोन कर बात ही नहीं बता यहां शंकराचार्य

1071
01:17:31,240 --> 01:17:37,240
जी ने दशरथ पुत्र राम माना है परशुराम नहीं

1072
01:17:37,360 --> 01:17:41,440
माना शस्त्र धारियों में पवित्र करने वालों

1073
01:17:41,440 --> 01:17:45,760
में वायु और शस्त्र धारियों में मैं दशरथ पुत्र

1074
01:17:45,760 --> 01:17:50,080
राम हूं य शंकराचार्य जी की है

1075
01:17:50,080 --> 01:17:56,080
और श्रीधर स्वामी जी ने क्या माना है

1076
01:17:58,000 --> 01:18:02,120
महाभारत का आदि पर्व खोलो आप मैं बता देता हूं य संक समाधान

1077
01:18:02,120 --> 01:18:08,120
कर देता हूं इससे हमारा अभिप्राय क्या है इससे क्या करना है

1078
01:18:09,200 --> 01:18:13,400
ये मिट क्यों कहना चाह रहा हूं क्योंकि अगर भगवान श्री कृष्ण

1079
01:18:13,400 --> 01:18:17,480
कहते मैं शस्त्र धारी हूं राम हूं तो वो एक मात्र अंश रूप में हो

1080
01:18:17,480 --> 01:18:22,080
गए स्वीकारी बताओ क्यों क्योंकि बाकी जो अवतार है उनके अंश

1081
01:18:22,080 --> 01:18:25,560
अगर वो राम जी को

1082
01:18:25,560 --> 01:18:29,760
अर्जुन को यह बता रहे हैं जी जी

1083
01:18:29,760 --> 01:18:32,000
वो

1084
01:18:32,000 --> 01:18:36,320
अधारी थे तो ये क्या है तो सामान्य हो ग राम जी कोधारी

1085
01:18:36,320 --> 01:18:40,400
में जोड़ देते वोय बता रहे

1086
01:18:40,400 --> 01:18:45,000
की जिस भी क्षेत्र में जो सबसे सर्वश्रेष्ठ

1087
01:18:45,000 --> 01:18:49,280
है वह मैं हूं जैसे

1088
01:18:49,280 --> 01:18:53,360
अगर कोई उसमें मैं सिंह हूं पशुओ में सिंह हूं जो

1089
01:18:53,360 --> 01:18:57,480
भी कोई सर्वश्रेष्ठ है वो मैं ही हूं यह बता रहे

1090
01:18:57,480 --> 01:19:01,720
तो शस्त्र धारियों में जो सर्वोत्तम सबसे बड़े जो धन धारी माने

1091
01:19:01,720 --> 01:19:06,080
गए व राम माने गए राम से बड़ा तो कोई नु है नहीं

1092
01:19:06,080 --> 01:19:10,120
धनुर्धारी बोले उन्होने सधी बोला महाभारत का आदि परम में लिखा हुआ है दो तीन

1093
01:19:10,120 --> 01:19:13,040
में कि मैं सस्त्र दार में भर्ग पुत्र राम हूं

1094
01:19:13,040 --> 01:19:17,040
उन्होंने यह बात बोल ठीक है तो आप आप वो मान

1095
01:19:17,040 --> 01:19:23,040
लो हमारी इस हमारे यहां पर चर्चा होने का क्या उच

1096
01:19:23,200 --> 01:19:27,560
उसका क्योंकि मैंने अधिकतर य लोग मतलब इस चीज को मैंने

1097
01:19:27,560 --> 01:19:31,600
परीक्षण कर लिया कि मतलब जो प्रभु राम जी के लिए कहते हैं तो सामान्य अंश के रूप

1098
01:19:31,600 --> 01:19:35,640
में दोरा देते हैं तो मैंने माना कि एक अगर सस्त धारी मानना राम जी के लिए एक अंश

1099
01:19:35,640 --> 01:19:39,960
के रू में है यहां पर नहीं नहीं वो आपकी राम भक्ति कह रही है देखिए

1100
01:19:39,960 --> 01:19:44,040
ऐसा है राम जी को कहीं पर भी जो हमारे आचार्य गण है उन्होंने

1101
01:19:44,040 --> 01:19:48,040
अपूर्ण नहीं माना है पूर्ण माना है पूर्ण जो हो गया जो

1102
01:19:48,040 --> 01:19:52,960
पूर्ण हो गया वो कहीं वो अंश अंश नहीं रहा वो पूर्ण है पूर्ण का मतलब पूर्ण

1103
01:19:52,960 --> 01:19:57,440
जब पूर्ण मान लिया उनको राम जी को पूर्ण परम ब्रह्म मान लिया जगह जगह

1104
01:19:57,440 --> 01:20:01,600
तो फिर वो पूर्ण ही है वो तो कहीं कहीं पर उन्होंने अगर धनु धारी का रोल

1105
01:20:01,600 --> 01:20:05,960
निभाया है या शस्त्र धारी का रोल निभाया है तो सबसे ऊंचा शस्त्र

1106
01:20:05,960 --> 01:20:10,360
धारी दुनिया में कौन है राम तो उस रूप में कहा जा रहा है कि वो श्रेष्ठतम

1107
01:20:10,360 --> 01:20:14,400
जो संज्ञा हो सकती है किसी शस्त्र को धारण करने वाले की उस रूप में कहा जाए

1108
01:20:14,400 --> 01:20:18,680
इस रूप मैं नहीं मानूंगा इस चीज को तो आपको मैं कहां मनवा रहा हूं मैंने तो बुलाया

1109
01:20:18,680 --> 01:20:22,680
भी नहीं आपको मनवाने के लिए बताइए इसमें तो हमारा होना ही नहीं

1110
01:20:22,680 --> 01:20:26,800
चाहिए हा बताओ क्यों और दूसरा कारण य बता देता हूं मैंने

1111
01:20:26,800 --> 01:20:28,320
श्री कृष्ण सहीता आपसे

1112
01:20:28,320 --> 01:20:34,320
हम फोन पर बात करेंगे यहां पर बात नहीं कर पाएंगे क्षमा चाहता हूं

1113
01:20:35,400 --> 01:20:38,400
ओके

1114
01:20:38,400 --> 01:20:44,400
जी सनातन धर्म रहस्य कौन है

1115
01:20:45,320 --> 01:20:49,640
भाई सनातन धर्म रहस्य आप

1116
01:20:49,640 --> 01:20:55,000
कैमरे के सामने आएंगे

1117
01:20:55,000 --> 01:20:58,520
दिख नहीं रहे जमिनी

1118
01:20:58,520 --> 01:21:04,520
जी जी

1119
01:21:09,240 --> 01:21:13,680
बोले नमस्कार शिवा जी सभी को ज्र

1120
01:21:13,680 --> 01:21:18,320
राम जी खुश र आवाज आ रही है

1121
01:21:18,320 --> 01:21:22,880
मेरी जी आ रही है आ रही जी

1122
01:21:22,880 --> 01:21:27,000
मैं माफी चाहूंगा देर से मैं जड़ पाया और

1123
01:21:27,000 --> 01:21:31,680
जी जो जिस प्रकार से आप धर्म के लिए कार्य कर रहे हो

1124
01:21:31,680 --> 01:21:36,120
तो वो स्पीचलेस है मतलब मार्वेल है बढ़िया

1125
01:21:36,120 --> 01:21:40,400
है इसी प्रकार से आप करते रहिए

1126
01:21:40,400 --> 01:21:44,560
हमारे हरियाणा से खबर आ रही है

1127
01:21:44,560 --> 01:21:48,560
विशेषकर रोहतक जिले से रामपा

1128
01:21:48,560 --> 01:21:52,680
कुछ टूटे हैं वो आपके वीडियो के बदौलत प्रयास

1129
01:21:52,680 --> 01:21:57,440
के बदौलत क्या कर राम पाली

1130
01:21:57,440 --> 01:22:01,640
जो है टूट कर के आए हैं धर्म में वापस आपकी वीडियो देख कर

1131
01:22:01,640 --> 01:22:05,640
के अच्छा जी ऐसा एक हमारे मित्र

1132
01:22:05,640 --> 01:22:10,080
ने हमें खबर दी थी जो रोहतक का रहने वाला है क्या

1133
01:22:10,080 --> 01:22:14,120
बात तो प्रयास रंग ला रहा है

1134
01:22:14,120 --> 01:22:18,120
आपका और जो हमने देखा है व मतलब

1135
01:22:18,120 --> 01:22:22,320
गलत नहीं हो ग अति शक्ति नहीं है आज करपात्री

1136
01:22:22,320 --> 01:22:24,240
जी महाराज जी की छवि आपके अंदर दिखाई

1137
01:22:24,240 --> 01:22:30,240
दे रही कैसी बात कर रहे

1138
01:22:32,640 --> 01:22:36,800
हैं ज्यादा बोल दिया नहीं

1139
01:22:36,800 --> 01:22:40,840
दूसरा बात य कि हरियाणा में

1140
01:22:40,840 --> 01:22:45,000
विशेष रूप से भव स्थिति है एक

1141
01:22:45,000 --> 01:22:50,080
धर्म में मतलब की जो असमंजस की और भ्रम की

1142
01:22:50,080 --> 01:22:54,640
स्थिति तो आज मतलब कि हरियाणा में चर्चा

1143
01:22:54,640 --> 01:22:58,640
आपको बताऊ अपने लेवल से बात करूं के अगर कोई

1144
01:22:58,640 --> 01:23:02,640
क्वेश्चन का आंसर है तो सिर्फ आपके चैनल पर मिल सकता है मैं सभी

1145
01:23:02,640 --> 01:23:06,840
भाई जो देख रहे हैं मैं यही कहूंगा कि आपका कोई भी प्रश्न

1146
01:23:06,840 --> 01:23:11,120
है चाहे वह धर्म से जुड़ा हुआ सोत्री वा का प्रश्न है

1147
01:23:11,120 --> 01:23:15,360
तो आहवान चैनल से जुड़े और फॉर्म भरे

1148
01:23:15,360 --> 01:23:21,360
और यहां पर मतलब की क्वेश्चन रखे अपना आपके क्वेश्चन का आंसर मिलेगा

1149
01:23:25,400 --> 01:23:30,200
कपाती जी बहुत महान वेदों के महान पारंगत

1150
01:23:30,200 --> 01:23:34,320
हमने तो उनका अगर एक कोई कण

1151
01:23:34,320 --> 01:23:38,440
भी होगा ना तो वो भी खैर बहुत बड़ी बात होगी वह भी अपने आप को नहीं समझा कभी

1152
01:23:38,440 --> 01:23:42,520
खैर का भाव है और अगर कोई हमारे कारण जो

1153
01:23:42,520 --> 01:23:46,560
है आ रहा है वापस से तो बहुत बहुत अच्छी बात है भगवत कृपा से ऐसा

1154
01:23:46,560 --> 01:23:51,520
हो रहा है गुरु गोविंद ग्रंथ का बल है पीछे

1155
01:23:51,520 --> 01:23:56,240
मेरे पीछे देखिए मैं आपको दिखाऊ थोड़ा सा ऊपर कर मैं इसको

1156
01:23:56,240 --> 01:24:00,360
मेरे पीछे कौन कौन है मेरे पीछे गुरु है

1157
01:24:00,360 --> 01:24:04,520
और ऊपर देखिए नारायण भी है यानी गोविंद भी है और

1158
01:24:04,520 --> 01:24:08,720
ग्रंथ तो आप देख ही रहे हैं तो मेरे पीछे तीन चीज

1159
01:24:08,720 --> 01:24:12,720
है गुरु गोविंद ग्रंथ एमथ जीी इसीलिए

1160
01:24:12,720 --> 01:24:18,720
हमारे वीडियो में आता है मिशन एम मिशन जीी

1161
01:24:19,720 --> 01:24:24,480
जीी हम सभी का साथ भी आपके साथ है प्रेम

1162
01:24:24,480 --> 01:24:28,800
भी आपके साथ है बस बस बस वो

1163
01:24:28,800 --> 01:24:33,160
वो इसी रूप में जो आप लोगों का साथ है वो इसी रूप में समाहित हो गया

1164
01:24:33,160 --> 01:24:37,320
सब भाइयों का साथ मिल गया और एक मतलब एक ध्वजा लहरा दि है कि हम

1165
01:24:37,320 --> 01:24:42,080
भैया अब लोग लोगों का विषय बन गया है चर्चा का कि भाई

1166
01:24:42,080 --> 01:24:46,200
अच्छा आज सुबह मुझे मुझे एक फोन आया वो प्रशंसा कर रहे थे व

1167
01:24:46,200 --> 01:24:51,040
बोले कि मुझे अब आपका वीडियो जब तक आता नहीं तो मुझे रात में नींद नहीं

1168
01:24:51,040 --> 01:24:56,480
आती जी वो बोल रहे थे

1169
01:24:56,480 --> 01:25:00,560
जी पहाड़ी जी जय श्री राम हर हर महादेव हर हर महादेव सभी

1170
01:25:00,560 --> 01:25:04,640
लोगों को आज लेट ही आए आप भी

1171
01:25:04,640 --> 01:25:09,160
हा आपका विषय था ही नहीं तो आपका लेट आना ठीक ही है

1172
01:25:09,160 --> 01:25:13,400
दूसरा विषय चल रहा था आपकी

1173
01:25:13,400 --> 01:25:17,440
एक्सपर्टीज आपकी जो एक्सपर्टीज है वो विषय नहीं था

1174
01:25:17,440 --> 01:25:21,600
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सही कहा आपने

1175
01:25:21,600 --> 01:25:25,680
उस दिन ये उनके स्ट्रीम में एक

1176
01:25:25,680 --> 01:25:29,920
जो हमारे सनातनी भाई गए थे तोव एक क्वेश्चन में आके अटक गए थे

1177
01:25:29,920 --> 01:25:33,960
कि जो अध्याय 18 का 62 वा श्लोक है कि वो तो दूसरे

1178
01:25:33,960 --> 01:25:34,760
की शरण में जाने को

1179
01:25:34,760 --> 01:25:39,040
बोल रहे हैं तो इसका उत्तर वो सही सही दे नहीं पाए थोड़ा

1180
01:25:39,040 --> 01:25:43,200
मैं एक्सप्लेन कर दूं यहां पर कि अगर कोई कंफ्यूज हो रहा है कि व दूसरे

1181
01:25:43,200 --> 01:25:47,360
की शरण में जाने को बोल रहे हैं भगवान श्री कृष्ण तो यह सरासर गलत

1182
01:25:47,360 --> 01:25:51,560
है उन्होने पढ़ी नहीं गीता अच्छी से पूरी जब मैं पहले

1183
01:25:51,560 --> 01:25:55,680
भी बता चुका हूं कि जो शरणागत की बात शुरू होती है अध्या 18 से 55 श्लोक

1184
01:25:55,680 --> 01:25:59,760
से शुरू होती है तो एक बार मैं इसको थोड़ा सा इसका निरूपण

1185
01:25:59,760 --> 01:26:04,000
कर दूं मैं कि लोगों को अच्छे से समझ में आ

1186
01:26:04,000 --> 01:26:08,080
जाए 55 श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन

1187
01:26:08,080 --> 01:26:12,240
से बोलते हैं कि परा भक्ति से मुझे जितना हूं और

1188
01:26:12,240 --> 01:26:16,480
मैं जो हूं तत्व से जान लेता फिर मुझ मुझे तत्व से जानकर

1189
01:26:16,480 --> 01:26:20,560
तत्काल प्रविष्ट मुझ में प्रविष्ट हो जाता है 56 में श्लोक

1190
01:26:20,560 --> 01:26:24,680
में फिर उन्होने बोला मेरा आश्रय लेने वाला भक्त सदा सब

1191
01:26:24,680 --> 01:26:28,760
कर्म करता हुआ भी मेरी कृपा से शाश्वत अविनाशी पद को प्राप्त

1192
01:26:28,760 --> 01:26:32,760
हो जाता है 56 में श्लोक में मेरी कृपा से यह

1193
01:26:32,760 --> 01:26:36,760
नहीं बोला कि किसी और की कृपा से 57

1194
01:26:36,760 --> 01:26:40,920
श्लोक में फिर बोला चित्त से संपूर्ण कर्म मुझ में अर्पण

1195
01:26:40,920 --> 01:26:45,120
करके मेरे परायण होकर तथा समता का आश्रय लेकर निरंतर

1196
01:26:45,120 --> 01:26:49,520
मुझ में चित्त वाला हो जा अभी यहां पर अर्जुन कुछ नहीं बोल रहे उनसे

1197
01:26:49,520 --> 01:26:50,020
भगवान

1198
01:26:49,880 --> 01:26:54,440
श्री कृष्ण से समझा रहे लगातार कर्म के बारे में

1199
01:26:54,440 --> 01:26:58,720
श्लोक में बोला मुझ में चित्त वाला होकर मेरी कृपा से संपूर्ण विघ्नों

1200
01:26:58,720 --> 01:27:02,760
को तर जाएगा और यदि तू अहंकार के कारण मेरी बात नहीं

1201
01:27:02,760 --> 01:27:06,800
सुनेगा तो तेरा पतन हो जाएगा अब यहां पर उनको धमका भी रहे

1202
01:27:06,800 --> 01:27:11,440
कि तू मेरी बात नहीं सुनेगा तो तू तेरा पतन हो जाएगा फिर भी श्री

1203
01:27:11,440 --> 01:27:15,640
अर्जुन कुछ नहीं बोले चुप्पे चाप बैठे रहे दोबारा फिर

1204
01:27:15,640 --> 01:27:19,640
59 में श्लोक में बोला अहंकार के अहंकार का आश्रय

1205
01:27:19,640 --> 01:27:23,680
लेकर जो ऐसा तू मान रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूंगा तेरा यह

1206
01:27:23,680 --> 01:27:27,840
निश्चय मिथ्या है क्योंकि तेरी छात्र प्रकृति

1207
01:27:27,840 --> 01:27:32,440
तुझे युद्ध में लगा देगी यह धमकाया उसको अर्जुन

1208
01:27:32,440 --> 01:27:36,520
को भगवान श्री कृष्ण ने हे कुं

1209
01:27:36,520 --> 01:27:41,000
सा सा श्लोक में बोला हे कुंती नंदन अपने स्वभाव

1210
01:27:41,000 --> 01:27:45,080
जन के कर्म से बदा हुआ तू मोह के कारण जिस युद्ध को

1211
01:27:45,080 --> 01:27:49,160
नहीं करना चाहता उसको भी तू छात्र प्रकृति के

1212
01:27:49,160 --> 01:27:53,600
पवस होकर करेगा 60 तक हु अब 61 श्लोक सबसे इंपोर्टेंट

1213
01:27:53,600 --> 01:27:58,080
है यहां पर ना हे अर्जुन ईश्वर संपूर्ण

1214
01:27:58,080 --> 01:28:02,120
प्राणियों के हृदय में रहता है यहां पर बोला

1215
01:28:02,120 --> 01:28:05,000
कि ईश्वर संपूर्ण प्राणियों के हृदय में रहता

1216
01:28:05,000 --> 01:28:09,440
है अपने माया से शरीर रूपी यंत्र पर आरुण हुए संपूर्ण

1217
01:28:09,440 --> 01:28:13,680
प्राणियों के उनके सौभाग्य के सौभाग स्वभाव के अनुसार

1218
01:28:13,680 --> 01:28:17,680
भ्रमण कराता रहता है अब 62 श्लोक

1219
01:28:17,680 --> 01:28:21,720
में क्या बोला कि हे अर्जुन सर्व भाव से

1220
01:28:21,720 --> 01:28:26,000
उस ईश्वर की ही जो अंतर्यामी रूप से जो हृदय

1221
01:28:26,000 --> 01:28:30,040
में रहते हैं उस ईश्वर की ही यहां पर ही शब्द आया मतलब जो

1222
01:28:30,040 --> 01:28:34,160
पहले वात चलली है जिसकी वही बात यहां करी जा रही

1223
01:28:34,160 --> 01:28:38,520
है इस श्लोक में त अर्जुन

1224
01:28:38,520 --> 01:28:42,720
सर्व भाव से उस ईश्वर की ही शरण में चला जा उसकी कृपा से तू

1225
01:28:42,720 --> 01:28:46,880
परम शांति को प्राप्त हो जाएगा अविनाशी परमत को प्राप्त हो जाएगा मतलब

1226
01:28:46,880 --> 01:28:51,000
कहने का अर्थ यह है कि यहां किसी और की शरण में नहीं जो हृदय रूपी

1227
01:28:51,000 --> 01:28:55,280
अंतर्यामी रूप से जो ईश्वर रहता है हमारे हृदय में उनकी शरण

1228
01:28:55,280 --> 01:28:59,360
में आने जाने को बोल यहां पर ही शब्द आया है

1229
01:28:59,360 --> 01:29:03,360
स्पेशल तो पुरानी बातों को जो पुरानी जो बात चल रही थी 61

1230
01:29:03,360 --> 01:29:07,560
श्लोक में उसी की शरण में जाने को बोल रहे यह नहीं बोल रहे कि तू दूसरे की शरण

1231
01:29:07,560 --> 01:29:11,680
में चले जा और सबके हृदय में भगवान श्री कृष्ण ही निवास

1232
01:29:11,680 --> 01:29:17,680
करते हैं अध्याय 15 के 15 श्लोक में आप देख सकते

1233
01:29:18,080 --> 01:29:20,280
हो ये हो गया आपका मैं बोलू

1234
01:29:20,280 --> 01:29:24,280
इसमें कुछ बोलिए देखिए पह

1235
01:29:24,280 --> 01:29:28,360
बात य है कि पहले अर्जुन को समझाया गया कि तेरा धर्म

1236
01:29:28,360 --> 01:29:32,520
तेरा मोक्ष का परवन किसम तुझे ईश्वर की शरण में जाना है उसके

1237
01:29:32,520 --> 01:29:36,800
बाद उसको बोल दिया मैं ही ईश्वर हूं मेरी शरण में आना है जी ईश्वर की व्याख्या

1238
01:29:36,800 --> 01:29:41,680
की उसके बाद लास्ट में बोल दिया अब मैं

1239
01:29:41,680 --> 01:29:45,720
एक चीज बोलता हूं कि अगर मुझे बोलना है कि मैं ही

1240
01:29:45,720 --> 01:29:50,120
ईश्वर हूं तो क्या मैं बोलूंगा मैं ही ईश्वर

1241
01:29:50,120 --> 01:29:54,160
हूं या जो ईश्वर है मेरे जैसे अगर

1242
01:29:54,160 --> 01:29:58,200
मुझे यह वाली बात बोलनी है कि ईश्वर मेरे रूप में यहां पर बैठा हुआ

1243
01:29:58,200 --> 01:30:02,600
है तो मैं यही तो बोलूंगा कि ईश्वर मेरे रूप में यहां पर बैठा हुआ है

1244
01:30:02,600 --> 01:30:06,600
अगर मैं बोलूंगा कि ईश्वर इस रूप में यहां पर बैठा हुआ है इस

1245
01:30:06,600 --> 01:30:10,680
व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ है तो इसका मतलब है मैं अपनी बात

1246
01:30:10,680 --> 01:30:15,360
नहीं कर रहा हूं मैं किसी और की बात कर रहा हूं जैसे मैं आपसे बात कर रहा हूं

1247
01:30:15,360 --> 01:30:19,480
और मैंने बोला ईश्वर इस व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ

1248
01:30:19,480 --> 01:30:24,000
है मैंने इशारा भी नहीं किया ईश्वर इस व्यक्ति के रूप में यहां पर बैठा हुआ है

1249
01:30:24,000 --> 01:30:28,320
तो इसका मतलब है मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूं किसी तीसरे की बात कर रहा हूं

1250
01:30:28,320 --> 01:30:32,600
है ना मैं हो गया फर्स्ट पर्सन आप हो गए सेकंड पर्सन

1251
01:30:32,600 --> 01:30:35,440
और जिसके बारे में मैंने बात की वो हो गया थर्ड पर्सन

1252
01:30:35,440 --> 01:30:39,680
ठीक है इनके रामपाल दास भी कई

1253
01:30:39,680 --> 01:30:43,920
बार ऐसे ही बोलते हैं इस दास इस दास के रूप में ऐसे बैठा

1254
01:30:43,920 --> 01:30:48,040
हुआ है पता नहीं परमेश्वर को इस दास में क्या दिखा अब वो यहां पर

1255
01:30:48,040 --> 01:30:52,400
अपनी बात तो नहीं कर रहे हैं किसी और की बात कर रहे हैं इसका मतलब बिल्कुल दिखा

1256
01:30:52,400 --> 01:30:56,400
दो भैया कोई ऑपरेटर जी कोई पढ इस दास वाला कोई

1257
01:30:56,400 --> 01:31:01,320
वीडियो ऐसा पढ़ाओ इस दास मैंने आपको

1258
01:31:01,320 --> 01:31:05,480
इसस दिया मैंने आपको एक वीडियो भेजा इस दास को भेज दिया हा

1259
01:31:05,480 --> 01:31:09,600
भेजा होगा पर वो अभी इनके पास नहीं होगा रेटर के पास आप हमें

1260
01:31:09,600 --> 01:31:13,640
बता दीजिए है कि नहीं वह वीडियो नहीं

1261
01:31:13,640 --> 01:31:18,280
तो चलिए वह वीडियो मिल जाएगा

1262
01:31:18,280 --> 01:31:22,720
मेरे ख्याल से अभी नहीं होगा तो रामपाल दास स्वयं

1263
01:31:22,720 --> 01:31:27,480
कई बार ऐसे बात करते हैं रसपूर्ण जो

1264
01:31:27,480 --> 01:31:31,640
वो अपने बारे में ही बात कर रहे हैं मगर वो ऐसे शब्दों का उपयोग करते हैं कि वो किसी

1265
01:31:31,640 --> 01:31:35,720
और के बारे में बात कर रहे हैं ठीक है तो वहां पर क्या

1266
01:31:35,720 --> 01:31:40,280
समझा जाए कि वो अपने बारे में बात नहीं कर रहे हैं

1267
01:31:40,280 --> 01:31:44,920
पहले तो पहली बात तो ये हो गई अच्छा दूसरी बात ये हो

1268
01:31:44,920 --> 01:31:49,560
गई कि जैसे कल हमने एक वीडियो दिखाया था आा

1269
01:31:49,560 --> 01:31:50,440
अगर ब्रज

1270
01:31:50,440 --> 01:31:54,640
का अर्थ जो है जाना है है ना तो

1271
01:31:54,640 --> 01:31:58,720
यहां पर यह कह रहे हैं आजा यहां पर जो रामपाल

1272
01:31:58,720 --> 01:32:02,720
है वो कह रहे हैं आजा बंदे शरण राम

1273
01:32:02,720 --> 01:32:06,880
की बारबार कह रहे तो यह कह रहे आ जा तो

1274
01:32:06,880 --> 01:32:10,920
क्योंकि य पर जा शब्द है तो यहां पर जो यह आ कह

1275
01:32:10,920 --> 01:32:15,640
रहे जा क रहे व पहली बात तो सम यहां ब्रज लिख दे क्या

1276
01:32:15,640 --> 01:32:20,880
ब्रज का अर्थ फिर वहा जाना मान लेंगे क्या

1277
01:32:20,880 --> 01:32:25,040
ये या कई बार जाने का

1278
01:32:25,040 --> 01:32:29,880
उपयोग जो होता है वह आने में भी होता है यह मानना पड़ेगा

1279
01:32:29,880 --> 01:32:33,920
जाना शब्द का उपयोग आने में भी होता है वरना अगर आने

1280
01:32:33,920 --> 01:32:37,960
और जाने को बिल्कुल अलग समझ लेंगे तो यह जो कह रहे आजा इसका अर्थ

1281
01:32:37,960 --> 01:32:42,000
क्या है आके जा आ फिर

1282
01:32:42,000 --> 01:32:46,360
जा यही कह रहे ना जी हा विशाल

1283
01:32:46,360 --> 01:32:50,480
बो ज जय श्रीम जय श्री

1284
01:32:50,480 --> 01:32:55,120
राम श्रीम प्रमा ब लाया

1285
01:32:55,120 --> 01:33:00,200
हूं बिना प्रमाण की थोड़ी

1286
01:33:00,200 --> 01:33:05,040
आऊगा बिना प्रमाण के थोड़ी आऊगा मैं हा

1287
01:33:05,040 --> 01:33:09,360
आऊंगा तो इनका खंडन लेके ही आऊंगा मैं और बाकी सनातनी

1288
01:33:09,360 --> 01:33:14,080
जो लोग है उनकी संतुष्टि होगी इसमें अब वोह चाहे रोना है तो रो ले राम पाली

1289
01:33:14,080 --> 01:33:18,080
लोग तो अभी मैं लाया हूं अभी मेरे पास है

1290
01:33:18,080 --> 01:33:22,240
यह महाभारत है मेरे पास देख सकते हैं आप लेकिन यह

1291
01:33:22,240 --> 01:33:26,680
गीता संक्षिप्त वा पूरा प्रॉपर छ खंड वाली महाभारत है य संस्कृत

1292
01:33:26,680 --> 01:33:30,920
में एक लाख लो की तो अब मैं इसमें इनका खंडन

1293
01:33:30,920 --> 01:33:35,000
बताऊंगा अब एक चीज तो चलो यह लोग मानते हैं कि जो श्री कृष्ण भगवान

1294
01:33:35,000 --> 01:33:39,120
है व तो विष्णु जी के अवतार है तो अब एक चैप्टर में य लाया

1295
01:33:39,120 --> 01:33:43,880
हूं महाभारत अभी देखिए इसमें क्या लिखा हुआ

1296
01:33:43,880 --> 01:33:48,080
है थोड़ा सा

1297
01:33:48,080 --> 01:33:54,040
हमको एक सेकंड है आप

1298
01:33:54,040 --> 01:33:58,160
महाभारत अंशा वतन पर्व अध्याय नंबर

1299
01:33:58,160 --> 01:34:02,320
अध्याय नंबर कौन सा पर्व है

1300
01:34:02,320 --> 01:34:06,320
य आदि पर्व अनुशासन पर्व

1301
01:34:06,320 --> 01:34:10,760
आदि पर्व आदि पर्व पहला खंड

1302
01:34:10,760 --> 01:34:15,520
आदि पर बोलिए एक सेकंड व

1303
01:34:15,520 --> 01:34:19,680
हमको हमको मिल नहीं रहा है मैं पहले

1304
01:34:19,680 --> 01:34:23,720
मैं सबसे पहला प्रमाण आपको महाभारत के पहले अध्याय से दिखाऊंगा

1305
01:34:23,720 --> 01:34:27,720
ठीक है महाभारत का सबसे पहला पर अब ये कहते हैं

1306
01:34:27,720 --> 01:34:31,840
कि श्री कृष्ण को हम भगवान मानते हैं लेकिन वो जो है छोटे भगवान है और उनकी भी

1307
01:34:31,840 --> 01:34:36,080
एक्सपायरी डेट है श्री कृष्ण की तो अगर ये लोग बोलते कि श्री कृष्ण

1308
01:34:36,080 --> 01:34:40,640
भगवान वो सुप्रीम गॉड नहीं है छोटे भगवान है और वो भी जन्म मृत्य उनका होता है

1309
01:34:40,640 --> 01:34:44,680
तो देखिए अब इनकी बंड बजने वाली है क्योंकि महाभारत का जो सबसे पहला अध्याय है

1310
01:34:44,680 --> 01:34:48,960
ना सबसे पहला अध्याय सबसे पहले प का पहला है उसम इनका खंडन

1311
01:34:48,960 --> 01:34:53,120
मिल जाएगा तो महाभारत का पहला ये आदि पर्व

1312
01:34:53,120 --> 01:34:57,480
का पहला जी मैं दूसरा भी दिखाऊंगा अभी

1313
01:34:57,480 --> 01:35:02,000
तो यह देखिए अभी मेरे पास है महाभारत का आदि पर्व पहला

1314
01:35:02,000 --> 01:35:03,960
अध्याय श्लोक

1315
01:35:03,960 --> 01:35:09,960
नंबर 252 से लेके 252 से लेकर

1316
01:35:11,200 --> 01:35:15,640
दो ज शम करया

1317
01:35:15,640 --> 01:35:19,680
अपने को मूट म्यूट कर लीजिए मैं अभी

1318
01:35:19,680 --> 01:35:25,360
पहला प्रमाण दिखा रहा दिखात

1319
01:35:25,360 --> 01:35:28,720
इनको म्यूट

1320
01:35:28,720 --> 01:35:32,920
करिए जी बोलिए मैं पहला प्रमाण आपको दिखा

1321
01:35:32,920 --> 01:35:38,680
देता हूं दूसरा मुझे भी मैं ढूंढ के बताता हूं पहला प्रमाण

1322
01:35:38,680 --> 01:35:42,680
य उग्र सवा ऋषि कह रहे हैं मर्ष वेदव्यास जी लिख रहे

1323
01:35:42,680 --> 01:35:46,680
हैं सूत वंशी संजय ने यह सब कहकर पुत्र शक से व्याकुल

1324
01:35:46,680 --> 01:35:50,680
रपति राष्ट को समझाया बुझा उनको स्वस्थ किया इसी महाभारत इतिहास

1325
01:35:50,680 --> 01:35:54,880
के आधार पर श्री कृष्ण द्वैपायन ने इस परम पुण्यम उपनि रूप महाभारत का निरूपण

1326
01:35:54,880 --> 01:35:59,080
किया है विदत विद्वत जनलोक लोक में और शेषम कवि पुराणों

1327
01:35:59,080 --> 01:36:03,120
में सदा इसी का वर्णन करते हैं महाभारत का अध्ययन अंतःकरण को शुद्ध करने

1328
01:36:03,120 --> 01:36:07,200
वाला है जो कोई श्रद्धा के साथ इसके किसी भी एक श्लोक के

1329
01:36:07,200 --> 01:36:11,280
या एक पद का भी अध्ययन करता है उसके सब पाप संपूर्ण रूप से मिट जाते

1330
01:36:11,280 --> 01:36:15,520
हैं इस ग्रंथ रत में शुभ कर्म करने वाले देवता देवऋषि निर्मल

1331
01:36:15,520 --> 01:36:19,800
ब्रह्म शी यक्ष महाना का वर्णन किया गया है इस ग्रंथ के मुख्य

1332
01:36:19,800 --> 01:36:25,400
विषय है स्वयं परब्रह्म स्वरूप वासुदेव भगवान श्री कृष्ण

1333
01:36:25,400 --> 01:36:29,520
उन्हीं से उन्हीं का इस पूरी महाभारत में संकीर्तन किया गया है वेही

1334
01:36:29,520 --> 01:36:33,640
सत्य पवित्र एवं पुण्य है वे ही शाश्वत परब्रह्म है

1335
01:36:33,640 --> 01:36:37,760
और वे ही अविनाशी सनातन ज्योति है परब्रह्म कौन अविनाशी

1336
01:36:37,760 --> 01:36:41,760
कौन श्री कृष्ण मनीषी पुरुष मनीषी या तत्वदर्शी पुरुष उन्हीं

1337
01:36:41,760 --> 01:36:45,920
की दिव्य लीलाओं का संकीर्तन किया करते हैं उन्हीं से सत असत

1338
01:36:45,920 --> 01:36:50,720
सत सत उभय रूप संपूर्ण विश्व उत्पन्न होता है उन्हीं से संतति प्रवृत्ति

1339
01:36:50,720 --> 01:36:53,800
और जन्म मृत्यु तथा पुनर्जन्म होते हैं देखिए

1340
01:36:53,800 --> 01:36:57,920
पहला अधक है कौन सा श्लोक है

1341
01:36:57,920 --> 01:37:02,320
श्लोक कौन सा है पहला अध्याय श्लोक नंबर ये

1342
01:37:02,320 --> 01:37:06,360
254 से लेकर 258

1343
01:37:06,360 --> 01:37:10,400
तक बहुत बढ़िया पहला अ तो

1344
01:37:10,400 --> 01:37:14,480
देखिए वो तो कोई भी ग्रंथ उठा लीजिए जिसके नाम का

1345
01:37:14,480 --> 01:37:18,720
वो ग्रंथ है जो ईश्वर वो अगर पढ़ने लगेंगे फड़ा बहुत प्रमाण मिलेंगे

1346
01:37:18,720 --> 01:37:23,000
बहुत प्रमाण मिलेंगे अनेकानेक बहुत सारे प्रमाण जी

1347
01:37:23,000 --> 01:37:27,120
आगे बोलिए कृष्ण ने परीक्षित को खुद अश्वथामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया था

1348
01:37:27,120 --> 01:37:31,160
क्या उनकी जन्म मृत्यु होगी ये पहला अध्याय बोल रहा है कि भगवान श्री कृष्ण से जन्म मृत्यु

1349
01:37:31,160 --> 01:37:35,320
होती है तो जिससे जन्म मृत्यु होती है वो भला क्या मरेगा एक

1350
01:37:35,320 --> 01:37:39,480
तरह से तोव अपनी देह का नाश कर रहा है ना लीला पूर्वक

1351
01:37:39,480 --> 01:37:43,520
वो केवल वो भी लीला होती है लोगों को दिखाने के लिए आविर्भव

1352
01:37:43,520 --> 01:37:47,560
तिरो भाव होता है केवल और ये देखिए मैं दिखा रहा हूं ये है मेरे पास

1353
01:37:47,560 --> 01:37:51,600
पद्म पुराण हम अब ये देखिए मैं इसमें दिखा रहा

1354
01:37:51,600 --> 01:37:56,280
हूं जिसमें लिखा है कि ईश्वर अपनी देह का नाश भी कर सकता है ये देखिए

1355
01:37:56,280 --> 01:38:00,280
यह संक्षिप्त है तो इसमें अध्याय नंबर मैं बता नहीं सकता इनके क्या बात है

1356
01:38:00,280 --> 01:38:04,320
ये तो मेरे वाले वीडियो में काम में आएगा जिस पर

1357
01:38:04,320 --> 01:38:10,320
य लोग जिस पर य लोगन वाले भड़कते हैं

1358
01:38:10,720 --> 01:38:15,120
मुझसे ये देखिए

1359
01:38:15,120 --> 01:38:19,320
महाभारत अरे रामपाल वाले कहां गए

1360
01:38:19,320 --> 01:38:24,840
कमेंट ही लिख रहे शिवा

1361
01:38:24,840 --> 01:38:28,840
ये ये कल के डिबेट में मैं देख रहा था ये

1362
01:38:28,840 --> 01:38:32,840
रामपाल वाले क्या आपके हमारे पास पढ़ने आते हैं क्या भैया इनके पास कुछ होता सब कुछ

1363
01:38:32,840 --> 01:38:36,400
हम ही दिखाए

1364
01:38:36,400 --> 01:38:40,880
और हमारे पास य पढ़ने आते हो क्या भैया तुम्हारे पास कुछ नहीं

1365
01:38:40,880 --> 01:38:46,520
है कुछ नहीं है फिर फिर भी हमारा विश्वास

1366
01:38:46,520 --> 01:38:50,600
अट आज तो मैंने एक अदभुत वीडियो देखा जो पवन दास करके इनके

1367
01:38:50,600 --> 01:38:55,240
य कोई जिन्होने वीडियो बनाया था एक बार [संगीत]

1368
01:38:55,240 --> 01:38:59,480
य कह रहे अनपढ लाइव जाओ नहीं लाइव आओ होता

1369
01:38:59,480 --> 01:39:03,520
है

1370
01:39:03,520 --> 01:39:08,040
येस बात को अर्पण

1371
01:39:08,040 --> 01:39:13,720
कौन है तो सब देखा है ना किसके लिए कह रहे

1372
01:39:13,720 --> 01:39:17,720
भाई जी मैं प चलिए ठीक है

1373
01:39:17,720 --> 01:39:22,000
कमेंट करके बता दीजिए सत्य जी

1374
01:39:22,000 --> 01:39:26,080
ये देखिए मैं पदम पुराण से दिखा रहा हूं आपको मैं इसमें से कुछ

1375
01:39:26,080 --> 01:39:30,160
पढ़ूंगा जिसमें लिखा हुआ है कि ईश्वर अपनी दे का नाश लीला से कर सकते हैं देखिए

1376
01:39:30,160 --> 01:39:34,280
यहां पर पदम पुराण का दूसरा अध्याय होगा इसमें मषि पु

1377
01:39:34,280 --> 01:39:38,600
भीष्म पितामह का संवाद के अंतर्गत य पद्म पुराण है तो उसमें भीष्म

1378
01:39:38,600 --> 01:39:42,800
पिता में कौन सा है कौन सा अध्याय है देखिए अय

1379
01:39:42,800 --> 01:39:47,280
गीता प्र संक्षिप्त है तो इसम अध्याय नंबर देखि लिखा नहीं है पेज नंबर क्या है

1380
01:39:47,280 --> 01:39:51,400
बता देता हूं पेज नंबर 20

1381
01:39:51,400 --> 01:39:55,440
पेज नंबर 20 आपके पास कौन सा वाला है चौखंबा का

1382
01:39:55,440 --> 01:39:59,440
है कि गीता प्रस का है चौखंबा अच्छा मैं तो गीता

1383
01:39:59,440 --> 01:40:04,040
प्रस के ग्रंथ पढ़ता हूं मैं तो ज्यादा चटर का नाम क्या

1384
01:40:04,040 --> 01:40:08,160
है अब वो उसम चैप्टर नंबर भी नहीं लिखा है लास्ट

1385
01:40:08,160 --> 01:40:12,200
में नहीं नहीं नाम नाम होगा ना कुछ चैप्टर का जहां से शुरू हो रहा होगा वहां देखो नाम

1386
01:40:12,200 --> 01:40:16,400
होगा कुछ उसके सबसे आखरी में मैं पढ़ रहा हूं फम

1387
01:40:16,400 --> 01:40:18,520
पुलत का संवाद सृष्ट क्रम का वर्णन तथा

1388
01:40:18,520 --> 01:40:22,560
भगवान विष्णु की महिमा अच्छा अब आप अपना वो

1389
01:40:22,560 --> 01:40:26,720
पढ़ो पेज नंबर 20 है ना ये

1390
01:40:26,720 --> 01:40:31,160
पेज नंबर 20 किसका संवाद है मर्ष

1391
01:40:31,160 --> 01:40:35,240
पुल और भीष्म पितामह

1392
01:40:35,240 --> 01:40:39,280
अच्छा इसमें देखो यह चीज जो मैं पढ़ रहा हूं य आपको विष्णु

1393
01:40:39,280 --> 01:40:44,000
पुराण के पहले अंश के दूसरे अध्याय में भी मिलेगा इसमें

1394
01:40:44,000 --> 01:40:48,320
कह रहे हैं पुराण का कौन सा है विष्णु पुराण का कौन

1395
01:40:48,320 --> 01:40:52,560
सा ये पहला अध्याय

1396
01:40:52,560 --> 01:40:57,160
पहला अंश दूसरा अध्याय के स्टार्टिंग में ठीक है

1397
01:40:57,160 --> 01:41:01,440
नहीं लास्ट में लास्ट में सॉरी श्लोक नंबर अभी नहीं है वो ऊपर रखा हुआ है

1398
01:41:01,440 --> 01:41:05,800
ठीक है बाद में बाद में बोल लिखा हुआ है इसमें भगवान

1399
01:41:05,800 --> 01:41:09,840
विष्णु स्वयं ही ब्रह्मा होकर संसार की सृष्टि में प्रवृत्त होते हैं और

1400
01:41:09,840 --> 01:41:14,040
तथा जब तक कल्प की स्थिति बनी रहती है तब तक वेही युग युग में अवतार धारण

1401
01:41:14,040 --> 01:41:18,040
करके समूची सृष्टि की रक्षा करते हैं वे विष्णु सत्व गुण धारण किए रहते

1402
01:41:18,040 --> 01:41:22,080
हैं उनके पराक्रम की कोई सीमा नहीं है हे राजेंद्र जब

1403
01:41:22,080 --> 01:41:26,200
कल्प का अंत हो तब ही अपना तम प्रधान रद्र रूप

1404
01:41:26,200 --> 01:41:30,320
धारण करते हैं और रद्र माने शिव रूप धारण करते हैं और अत्यंत भयानक आकार

1405
01:41:30,320 --> 01:41:33,720
धारण करके संपूर्ण प्राणियों का संहार करते हैं तोय तीनों

1406
01:41:33,720 --> 01:41:37,880
वो तीन गुणों का व मतलब उसको यूज करते हैं उसका ऐसा नहीं कि उसम वो बंधे

1407
01:41:37,880 --> 01:41:42,040
हुए हैं इस प्रकार सब भूतों का नाश करके संसार को एव

1408
01:41:42,040 --> 01:41:46,320
जल में निमग्न कर वे सर्व रूप धारी भगवान स्वयं ही शेष नाग की सया पर सहन

1409
01:41:46,320 --> 01:41:50,360
करते हैं फिर जागने पर ब्रह्मा का रूप धारण करके वे नए श से संसार की सृष्टि करने

1410
01:41:50,360 --> 01:41:54,720
लगते हैं इस तरह एक ही भगवान जनार्दन सृष्टि पालन

1411
01:41:54,720 --> 01:41:58,920
और संघार करने के कारण ब्रह्मा विष्णु तथा शिव नाम धारण करते हैं

1412
01:41:58,920 --> 01:42:03,240
वे प्रभु सृष्टा होकर स्वयं अपनी सृष्टि करते हैं पालक होकर

1413
01:42:03,240 --> 01:42:07,520
पालनीय रूप से अपना ही पालन करते हैं और संघार कारी होकर स्वयं

1414
01:42:07,520 --> 01:42:11,520
ही अपना संघार करते हैं देखिए स्वयं ही अपना संघार करते हैं इसका मतलब अपनी देह

1415
01:42:11,520 --> 01:42:16,200
का नाशय कर सकते हैं इसमें जब बताया जा रहा है साफसाफ पृथ्वी

1416
01:42:16,200 --> 01:42:20,200
जल तेज वायु और आकाश सब ही है क्योंकि अविनाशी

1417
01:42:20,200 --> 01:42:24,360
विष्णु अविनाशी विष्णु ही सब भूतों के ईश्वर और वि रूप है इसलिए

1418
01:42:24,360 --> 01:42:28,480
प्राणियों में स्थित सर्ग आदि भी उन्हीं के सहायक है देखिए यह वाली लाइन मैं फिर

1419
01:42:28,480 --> 01:42:32,800
से पढ़ता हूं वे प्रभु सृष्टा होकर स्वयं ही अपनी सृष्टि करते हैं पालक

1420
01:42:32,800 --> 01:42:37,240
होकर पालनीय रूप से अपना ही पालन करते हैं और संघर कारी होकर स्वयं

1421
01:42:37,240 --> 01:42:42,440
स्वयं अपना ही संहार करते

1422
01:42:42,440 --> 01:42:46,960
हैं

1423
01:42:46,960 --> 01:42:51,000
बढ़िया अब एक महाभारत का दूसरा प्रमाण है मैं जब तक ढूं रहा हूं आप लोग

1424
01:42:51,000 --> 01:42:55,480
अपनी बातें कीजिए चलिए उनको ते बाबू राम जी आ गए

1425
01:42:55,480 --> 01:42:58,360
हैं

1426
01:42:58,360 --> 01:43:02,600
अरे शद का शिवराम आप जी की जो संस्कृत

1427
01:43:02,600 --> 01:43:06,680
व्याकरण है ना शब्दकोश अगर उनके ऊपर इतना विश्वास है तो

1428
01:43:06,680 --> 01:43:10,800
उधर वच के अर्थ के साथ पधार लिख रखा

1429
01:43:10,800 --> 01:43:15,000
है और उसके आगे एग्जांपल दे रखा है मामक मामे कम शरणम

1430
01:43:15,000 --> 01:43:19,120
ब्रज पधारो उसके आगे एग्जांपल लिख

1431
01:43:19,120 --> 01:43:23,120
रखा है आप अच्छे से देखिएगा पधार पार क्या होता

1432
01:43:23,120 --> 01:43:27,240
पधारो आओ और वहा पर एग्जांपल के तौर पर भी लिख रखा

1433
01:43:27,240 --> 01:43:31,280
है मामे कम शरणम ब्रज पधारने

1434
01:43:31,280 --> 01:43:35,320
के लिए दिया उन्होने वो ठीक है उनके लिए अचित इंजम कर दिया

1435
01:43:35,320 --> 01:43:39,520
ब्रज शब्द में उनका ही व्यक्ति बोल रहा है आजा अब

1436
01:43:39,520 --> 01:43:43,640
इसको क्या करेंगे इसको कम कहेंगे कि कम एंड गो कहेंगे

1437
01:43:43,640 --> 01:43:48,000
या केवल कम कहेंगे कम का मतलब आना जाना दोनों कैसे हो गया

1438
01:43:48,000 --> 01:43:52,160
अरे शिवा भैया यानी कि जब कई बार

1439
01:43:52,160 --> 01:43:57,800
जाना शब्द का उपयोग आने के उसमें भी होता है

1440
01:43:57,800 --> 01:43:58,800
सिंपल

1441
01:43:58,800 --> 01:44:03,040
हम जी शिवा शिवांश भाई वो एक इनके

1442
01:44:03,040 --> 01:44:07,080
यहां रामपाल जी क्या एक पवन दास करके हैं तो

1443
01:44:07,080 --> 01:44:11,800
उनको ये लोग कहते हैं गुरु द्रोही तो उनका आज मैंने य पर वीडियो देखा

1444
01:44:11,800 --> 01:44:15,960
उसमें रामपाल जी फोन पर बात कर रहे हैं और अपने सबसे कह रहे हैं कि

1445
01:44:15,960 --> 01:44:20,240
ये जो दिल्ली वाला संजय है और ये पवन दास है ये दोनों गुरु द्रोही हैं

1446
01:44:20,240 --> 01:44:24,280
और इन लोगों से बातचीत नहीं करना इन लोगों से मतलब नहीं रखना तो उन्होंने

1447
01:44:24,280 --> 01:44:28,760
अपनी वीडियो बनाई है पवन दास जी ने वो कह रहे हैं अब देखो जिस पद्धति से रामपाल

1448
01:44:28,760 --> 01:44:32,920
जी ने जो कार्य करने की कार्य किया है उसी पद्धति सब उनके चेले वही

1449
01:44:32,920 --> 01:44:37,000
साथ उनके साथ कर रहे हैं तो वो कह रहे देखो भाई ये काल जो है

1450
01:44:37,000 --> 01:44:41,080
ना इसने जब बड़ बड़ों को मूर्ख बना दिया है

1451
01:44:41,080 --> 01:44:45,480
तो वो काली जो है ना वो परमात्मा जो है ना मेरे परमात्मा रामपाल

1452
01:44:45,480 --> 01:44:49,600
जी वही काल के रूप में इन सब चेलों को मूर्ख बना रहे हैं वास्तव में

1453
01:44:49,600 --> 01:44:53,640
वो मुझे मुझे बना रहे

1454
01:44:53,640 --> 01:44:57,800
सभी लोगों के बीच में इसको कहते हैं अपने

1455
01:44:57,800 --> 01:45:02,080
ही जाल में फस जाना जी भाई जो चीज आप यूज करोगे

1456
01:45:02,080 --> 01:45:06,320
तो आपके चले वही चीज आपके लिए भी यूज करेंगे आगे चलके वो परंपरा बन जाती है ना कपट

1457
01:45:06,320 --> 01:45:11,200
की कपट की परंपरा बन जाती है

1458
01:45:11,200 --> 01:45:14,240
चलिए बाबूराम जी आपसे

1459
01:45:14,240 --> 01:45:20,240
चर्चा कहां पर छूटी थी आपने कहा था ये मैं देख के आऊंगा फिर बताऊंगा

1460
01:45:21,600 --> 01:45:27,600
आपको जी सर

1461
01:45:27,720 --> 01:45:32,400
हम बताइए हा

1462
01:45:32,400 --> 01:45:37,800
सर बताइए बता रहे हैं सर

1463
01:45:37,800 --> 01:45:41,880
बता रहे बता रहे हैं बता रहे सर अरे बोलिए ना

1464
01:45:41,880 --> 01:45:46,160
बता रहे बता रहे आप कर रहे हो कब से

1465
01:45:46,160 --> 01:45:50,760
रामपाल जी स्वस्थ है इस समय जेल में कि नहीं

1466
01:45:50,760 --> 01:45:55,200
उनकी खबर लेते हैं कि नहीं आप अरे जेल से

1467
01:45:55,200 --> 01:45:59,240
जेल से फोन करके डीलिंग करते हैं मैनेजमेंट है य मेरे द्वारा

1468
01:45:59,240 --> 01:46:04,240
बनाया गया है और आप सब लोग उसके अनुसार चले और

1469
01:46:04,240 --> 01:46:09,120
बात करते जेलम बोलिए जेलम जेल

1470
01:46:09,120 --> 01:46:13,240
धाम सर ट जी बोलिए

1471
01:46:13,240 --> 01:46:17,440
अच्छा लावा भाई अभिषेक

1472
01:46:17,440 --> 01:46:23,040
करके जो है जो हमेशा भकता रहता हैय प आके उसको

1473
01:46:23,040 --> 01:46:27,120
जोड़ के रिक्वेस्ट करके बोलिए कि भैया यहां आओ और हम तुमसे जरा सा भी अग्रेसिव होकर

1474
01:46:27,120 --> 01:46:31,560
बात नहीं करेंगे अपनी बात को सिद्ध करो हम बड़े आराम से और बड़े धैर्य से आपसे बात

1475
01:46:31,560 --> 01:46:35,560
करेंगे मैंने तोय बोला है लोग से कि तुम लोग अगर

1476
01:46:35,560 --> 01:46:39,720
तुम लोग चाहो तो किसी बीच की जगह प आ जाते हैं कोई चैनल

1477
01:46:39,720 --> 01:46:43,960
ते है बीच का चैनल जो न्यूट्रल हो उसपे हम लोग चर्चा

1478
01:46:43,960 --> 01:46:48,040
कर लेते हैं और वो सब छोड़ो किसी बीच के स्थान में आ जाते

1479
01:46:48,040 --> 01:46:52,040
हैं मैं आ जाता हूं चार कदम अपने घर से तुम आ जाओ अपने घर से चार

1480
01:46:52,040 --> 01:46:56,280
कदम हां हा बस लेकिन कैमरे में रिकॉर्डिंग जरूर होगी सारी बात ऐसे

1481
01:46:56,280 --> 01:47:02,080
नहीं नहीं है उतना ही है बस

1482
01:47:02,080 --> 01:47:06,120
वीडियो देख पूजा का देखो ऐसे फोटो

1483
01:47:06,120 --> 01:47:10,600
हा

1484
01:47:10,600 --> 01:47:15,360
हा शकर के समान मुख बना के

1485
01:47:15,360 --> 01:47:19,400
ऐसे नहीं देखो शिवांश भाई जो अर्ध ज्ञानी होता है ना

1486
01:47:19,400 --> 01:47:24,040
उसको भय जरूर होता है अपने जी

1487
01:47:24,040 --> 01:47:28,280
ये तो है तभी इसलिए नहीं आते हैं जो अर्ध ज्ञानी होता है जिनका ज्ञानी

1488
01:47:28,280 --> 01:47:30,440
आधा

1489
01:47:30,440 --> 01:47:34,600
हो बाबू राम जी आप क्या सिद्ध करने वाले हैं कुमारी गाय

1490
01:47:34,600 --> 01:47:39,160
से दूध पीना कबीर साकार

1491
01:47:39,160 --> 01:47:43,560
है कबीर सर्वशक्तिमान है

1492
01:47:43,560 --> 01:47:48,000
गीता का ज्ञान जो है भगवान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है काल

1493
01:47:48,000 --> 01:47:52,320
कृष्ण से अलग है श्री कृष्ण अविनाशी

1494
01:47:52,320 --> 01:47:57,120
नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1495
01:47:57,120 --> 01:48:01,480
नहीं है किस विषय पर बात करने और आपके जो संत

1496
01:48:01,480 --> 01:48:06,080
है वो तत्वदर्शी है गीता के आधार पर और

1497
01:48:06,080 --> 01:48:10,480
गीता में 5 प्रतित ज्ञान जो है वो काल ने दिया है वो 5 प्र

1498
01:48:10,480 --> 01:48:15,040
ज्ञान वो कौन सा वाला है कौन से श्लोक है वो वो सब आप बताएं

1499
01:48:15,040 --> 01:48:19,520
कौन से विषय पर बात करने वाले

1500
01:48:19,520 --> 01:48:24,480
हैं घ घट रामायण सर मानते हैं

1501
01:48:24,480 --> 01:48:28,760
पहले आप विषय बताइए विषय सुनिए पहले विषय

1502
01:48:28,760 --> 01:48:32,960
बताइए विषय क्या है अभी आप अभी

1503
01:48:32,960 --> 01:48:37,080
आपने जो जो पूछा था मैं सभी का उत्तर दूंगा घटमा य मानते हो तो हम उसी से प्रमाण

1504
01:48:37,080 --> 01:48:41,280
दिखा देते हैं नहीं हम किसी भी रामायण को

1505
01:48:41,280 --> 01:48:46,200
तब तक मानते हैं जब तक वह रामायण वाल्मीक रामायण के अनुरूप हो

1506
01:48:46,200 --> 01:48:50,360
यदि वाल्मिक रामायण का विरोध होगा तो उसको नहीं माना जाएगा

1507
01:48:50,360 --> 01:48:54,520
जैसे कि किसी भी शास्त्र को तब तक माना जाएगा जब तक वेदों के अनुरूप

1508
01:48:54,520 --> 01:48:58,920
हो यदि वेदों का विरोध होगा तो उसको नहीं माना जाएगा 70

1509
01:48:58,920 --> 01:49:03,280
पर विरोध करती है घट रामायण हमारे वाल्मीकि रामायण

1510
01:49:03,280 --> 01:49:07,760
का कौन ने लिखी है घट रामायण कहां से

1511
01:49:07,760 --> 01:49:10,640
अभी हुए

1512
01:49:10,640 --> 01:49:14,760
थे लस देख आप पहले अपनी बात

1513
01:49:14,760 --> 01:49:19,920
बताइए आप सिद्ध क्या करना चाहते हैं यह बताइए पहले

1514
01:49:19,920 --> 01:49:24,360
हम यह सिद्ध करना चाहते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता है

1515
01:49:24,360 --> 01:49:29,200
इनके हम इस चीज को सिद्ध करना चाहते हैं घट रामायण से

1516
01:49:29,200 --> 01:49:33,320
भाई आप यह बताइए कि हम आपको भविष्य

1517
01:49:33,320 --> 01:49:34,640
पुराण से सिद्ध कर दे कि

1518
01:49:34,640 --> 01:49:39,440
कबीर के माता-पिता है

1519
01:49:39,440 --> 01:49:43,480
तो हम जबरदस्त थोड़ी कर रहे सर यदि आप स्वीकार करेंगे तो हम

1520
01:49:43,480 --> 01:49:47,640
इस दिखाए नहीं स्वीकार करेंगे तो हम इसमें जबरस्त बात य हो रही है

1521
01:49:47,640 --> 01:49:51,680
बात यह हो रही है कि ब्रह्मा विष्णु महेश को यदि

1522
01:49:51,680 --> 01:49:55,720
कहीं पर जन्म ने वाला कहा गया है आर भाव तिरो भाव

1523
01:49:55,720 --> 01:49:59,760
वाला कहा गया है मगर अंततोगत्वा उनको अविनाशी भी कहा

1524
01:49:59,760 --> 01:50:03,920
गया है अगर श्री कृष्ण को जन्म लेने वाला कहा गया

1525
01:50:03,920 --> 01:50:07,920
है मगर अंततोगत्वा उनको अविनाशी भी कहा गया है

1526
01:50:07,920 --> 01:50:12,120
उसको छोड़ नहीं सकते ना ऐसी चीज बोलनी पड़ेगी

1527
01:50:12,120 --> 01:50:16,200
जिसमें दोनों चीजों का मान हो जाए जैसे कि

1528
01:50:16,200 --> 01:50:20,600
रामपाल दास जी ने स्वयं को तत्वदर्शी भी बोला परमेश्वर भी बोला

1529
01:50:20,600 --> 01:50:24,680
और कुत्ता भी बोला तो अब हमें ऐसा अर्थ निकालना

1530
01:50:24,680 --> 01:50:28,800
पड़ेगा दोनों बातों का जिसमें दोनों में से किसी बात का खंडन ना

1531
01:50:28,800 --> 01:50:33,160
हो तो आप ये अर्थ निकालते हो उसका कि कुत्ता जहां पर बोला है वो

1532
01:50:33,160 --> 01:50:37,160
उन्होंने रस पूर्वक बोल दिया है अपनी अपनी दीनता

1533
01:50:37,160 --> 01:50:41,160
प्रकट करने के लिए ईश्वर के प्रति बोल दिया है यही निकालते हो

1534
01:50:41,160 --> 01:50:45,280
ना जी तो इसी प्रकार से भगवान

1535
01:50:45,280 --> 01:50:49,680
श्री कृष्ण के लिए बारंबार अविनाशी सनातन

1536
01:50:49,680 --> 01:50:53,800
काल शाश्वत सब कुछ आया है काल ही परमेश्वर है

1537
01:50:53,800 --> 01:50:58,040
वेद में आया है हम आपको वेदों से प्रमाण दे रहे हैं

1538
01:50:58,040 --> 01:51:02,560
कि ब्रह्मा विष्णु महेश परमेश्वर है गणपति परमेश्वर है

1539
01:51:02,560 --> 01:51:06,640
कवियों के कवि हैं वेदों से प्रमाण दे रहे हैं वेदों के आगे

1540
01:51:06,640 --> 01:51:11,080
तो किसी की नहीं चलेगी ना कि चलेगी आपके लिए चलेगी

1541
01:51:11,080 --> 01:51:15,200
जी नहीं चलेगी तो नहीं नहीं आपके लिए

1542
01:51:15,200 --> 01:51:19,360
आपके लिए नहीं चलेगी वो तो तो तो कवि का सुनिए कवि

1543
01:51:19,360 --> 01:51:25,360
का अर्थ क्या है कवि का अर्थ क्या है

1544
01:51:25,440 --> 01:51:29,560
जो कवि का अर्थ है कभी होगा दूसरा क्या होगा

1545
01:51:29,560 --> 01:51:35,560
कवि का अर्थ कबीर तो नहीं है परमात्मा तो नहीं

1546
01:51:35,880 --> 01:51:40,280
है भैया मुझे दूसरा प्रमाण मिल गया

1547
01:51:40,280 --> 01:51:44,480
बताइए ब ढूंढने पर सब लोग सुनिए अभी

1548
01:51:44,480 --> 01:51:49,280
बाबूराम दास जी आप भी सुनिए आप ये तो मानते हो

1549
01:51:49,280 --> 01:51:53,400
आज की लाइव बहुत ज्यादा नहीं चलाएंगे आज 10:30 प वो कर देंगे

1550
01:51:53,400 --> 01:51:57,400
क्योंकि भाई थोड़ा सा जीवन थोड़ा सा वो हो रहा है थोड़ा प्रभावित हो रहा

1551
01:51:57,400 --> 01:52:01,400
है व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हो रहा है हा नींद नहीं पूरी हो पा

1552
01:52:01,400 --> 01:52:05,520
रही है थकान रहती पूरे दिन चलिए मैं बस दूसरा प्रमाण आपको

1553
01:52:05,520 --> 01:52:09,760
दिखा दे रहा हूं आप सब देखिए जो सनी लोग है वो उनको

1554
01:52:09,760 --> 01:52:14,000
आनंद आएगा और जो रामपाल के लोग देख रहे हैं वो या तो रोएंगे या फफड़ा

1555
01:52:14,000 --> 01:52:19,000
एंगे अपनी बातें बोलेंगे वि में प्रमाण है

1556
01:52:19,000 --> 01:52:23,320
लिए कब भगवान है वेदों में प्रमाण

1557
01:52:23,320 --> 01:52:27,400
नहीं हो कबीर साब भगवान नहीं कहां चले गए भैया अ वो चले

1558
01:52:27,400 --> 01:52:32,480
गए क्या बाबूराम जी घाट घाट का

1559
01:52:32,480 --> 01:52:38,480
पानी बाबू राम दस सुनि सुनि सुनिए

1560
01:52:41,200 --> 01:52:44,720
नेटवर्क आना बाबू

1561
01:52:44,720 --> 01:52:48,800
रामस थ य पर नेट पकड़ता है सर बाबूराम

1562
01:52:48,800 --> 01:52:52,560
जी [संगीत]

1563
01:52:52,560 --> 01:52:57,040
जी सर एक मिनट सब लोग चुप हो जाए सब लोग एक मिनट चुप हो जाए

1564
01:52:57,040 --> 01:53:01,280
विशाल टिया जी आप अपना प्रमाण दिखाइए तो

1565
01:53:01,280 --> 01:53:05,280
सबसे पहले मैं दिता से दिखाए एक

1566
01:53:05,280 --> 01:53:09,320
सेकंड मैं दिखाऊंगा पहले पहले मैं आप यह तो मानते हो ना

1567
01:53:09,320 --> 01:53:13,520
कि श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है यह मानते

1568
01:53:13,520 --> 01:53:18,040
हो ना आप जी तो अब देखिए मैं महाभारत

1569
01:53:18,040 --> 01:53:22,800
से आपको दिखा रहा हूं जहा से गीता निकली है ये है मेरे पास महाभारत

1570
01:53:22,800 --> 01:53:26,960
पव ये 6वा अध्याय चैप्टर

1571
01:53:26,960 --> 01:53:32,960
63 अब य से पगा दो लछ

1572
01:53:33,240 --> 01:53:34,240
छपा

1573
01:53:34,240 --> 01:53:38,600
देंगे बक गीता प्रस की महात खंड वाली गीता

1574
01:53:38,600 --> 01:53:42,880
से प्रकाशित महाभारत अय देखि मैं पढ

1575
01:53:42,880 --> 01:53:45,640
लोक

1576
01:53:45,640 --> 01:53:48,000
नंबर

1577
01:53:48,000 --> 01:53:53,000
हा बोलिए लोक संख्या

1578
01:53:53,000 --> 01:53:58,040
98 से लेके 98 से लेके 104 तक मैं

1579
01:53:58,040 --> 01:54:02,520
पढ़ूंगा ज्यास जी बता रहे हैं

1580
01:54:02,520 --> 01:54:06,920
राजा आप सब ध्यान से सुनिए राजा कुंती भोज की कन्या

1581
01:54:06,920 --> 01:54:11,120
कुंती के गर्भ से सूर्य के सूर्यदेव के अंश से महाबली कर्ण की उत्पत्ति हुई

1582
01:54:11,120 --> 01:54:15,360
वह बालक जन्म के साथ ही कवच धारी था उसका मुख शरीर के साथ ही उत्पन्न

1583
01:54:15,360 --> 01:54:19,400
हुए कुंडल की प्रभा से प्रकाशित होता था अब आगे सुनिए बाबूराम शास्त्री

1584
01:54:19,400 --> 01:54:23,840
जी और सभी सनातन लोग उन्हीं दिनों विश्व वंदर महा यशस्वी

1585
01:54:23,840 --> 01:54:28,080
भगवान विष्णु जगत के जीवों पर अनुग्रह करने के लिए वसुदेव जी के द्वारा

1586
01:54:28,080 --> 01:54:32,320
देवकी के गर्भ से प्रकट हुए वे भगवान आदि अंत से रहित

1587
01:54:32,320 --> 01:54:36,520
आदि अंत से रहित दती मान संपूर्ण जगत के कर्ता तथा प्रभु है

1588
01:54:36,520 --> 01:54:40,800
उन्हीं उन्हीं को अव्यक्त अक्षर ब्रह्म अव्यक्त अक्षर अविनाशी

1589
01:54:40,800 --> 01:54:45,120
ब्रह्म और त्रिगुण में प्रधान कहा गया है त्रिगुण में प्रधान और अक्षर

1590
01:54:45,120 --> 01:54:49,440
यानी अविनाशी ब्रह्म कहा गया है आत्मा अव्यय प्रकृति

1591
01:54:49,440 --> 01:54:53,480
प्रभव प्रभु पुरुष विश्वकर्मा सत्व गुण से प्राप्त

1592
01:54:53,480 --> 01:54:57,800
होने योग्य तथा प्रण वक्ष यानी ओमकार भी ही है उन्हीं को अनंत

1593
01:54:57,800 --> 01:55:02,520
अचल देव हंस नारायण प्रभु था था अजन्मा

1594
01:55:02,520 --> 01:55:07,120
अजन्मा अव्यक्त पर अव्यय अव्यय का मतलब अविनाशी

1595
01:55:07,120 --> 01:55:11,120
कैवल्य निर्गुण विश्वरूप अनादि जन्म रहित

1596
01:55:11,120 --> 01:55:15,520
और अविकारी कहा गया है वे ही सर्वव्यापी परम पुरुष परमात्मा

1597
01:55:15,520 --> 01:55:19,760
वे ही सर्वव्यापी परम पुरुष परमात्मा सब के कर्ता और संपूर्ण

1598
01:55:19,760 --> 01:55:23,840
भूतों के पितामह है उन्हीं परमात्मा ने नेही धर्म की वृद्धि के लिए

1599
01:55:23,840 --> 01:55:28,240
अंधक और विषण कुल में बलराम और श्री कृष्ण के रूप में अवतार

1600
01:55:28,240 --> 01:55:34,240
लिया अवतार याया बाबूराम जी इसको मानेंगे कि

1601
01:55:36,680 --> 01:55:42,520
नहीं हम दिखा

1602
01:55:42,520 --> 01:55:47,000
रहे बाराम जी मेरी बात सुनि मैं एक बात कहूंगा आपसे

1603
01:55:47,000 --> 01:55:51,080
मैं आपके बातो को मना नहीं कर रहा हूं कि आप जो बोल रहे वो लिखा नहीं

1604
01:55:51,080 --> 01:55:55,360
है मैंने आपको बता दिया कि दो प्रकार की जब बातें आएंगी

1605
01:55:55,360 --> 01:55:59,800
ग्रंथों में तो हमें उनको मिलाकर आंसर लेना पड़ेगा

1606
01:55:59,800 --> 01:56:04,480
एक प्रकार की बात से दूसरी प्रकार की बात कट नहीं जाएगी

1607
01:56:04,480 --> 01:56:08,600
समझ रहे हैं मैं आपके प्रमाण को मना नहीं कर रहा हूं

1608
01:56:08,600 --> 01:56:12,840
आप थोड़ा बुद्धि खोल के समझिए जहां पर उन्होंने अपनी दीनता

1609
01:56:12,840 --> 01:56:16,960
प्रकट करने के लिए कहा भी है कि मेरा भी आविर्भव होता है तेरो भाव होता है अपने

1610
01:56:16,960 --> 01:56:21,080
को बेकार बताया है तो वो उसी प्रकार से बताया जैसे रामपाल दास

1611
01:56:21,080 --> 01:56:25,240
जी स्वयं को कुत्ता बता

1612
01:56:25,240 --> 01:56:29,440
जी जी जी तो इस बात को आप समझिए

1613
01:56:29,440 --> 01:56:33,560
यह कहीं का सिद्धांत नहीं है कि एक बात के आधार पर

1614
01:56:33,560 --> 01:56:37,800
दूसरी बात को काट दिया जाए यह सिद्धांत अवश्य है यदि

1615
01:56:37,800 --> 01:56:41,880
दो प्रकार के वो होंगे शास्त्र में वचन दोनों

1616
01:56:41,880 --> 01:56:46,640
एक दूसरे के विरोध होंगे तो दोनों धर्म है यह हम कई बार दिखा चुके हैं

1617
01:56:46,640 --> 01:56:50,720
अभी दिखाऊ तो सर तो ये क

1618
01:56:50,720 --> 01:56:55,440
रहे हैं कि इसको सही कैसे माना जाए कि कौन सही है या कौन गलत है

1619
01:56:55,440 --> 01:56:59,480
इसकी व्यवस्था भी शास्त्र में की गई है कौन सही कौन सही है कौन गलत

1620
01:56:59,480 --> 01:57:03,600
है ही नहीं आपको ऐसा रास्ता निकालना है जिसमें किसी का खंडन

1621
01:57:03,600 --> 01:57:07,680
ना हो दूसरे शब्द का खंडन ना हो दूसरी बात एक

1622
01:57:07,680 --> 01:57:12,080
मिनट मुझे शास्त्र ने इन सब बातों का शास्त्र

1623
01:57:12,080 --> 01:57:16,160
ने इन सब बातों का वो दिया है निचोड़ कि

1624
01:57:16,160 --> 01:57:20,320
आपको सही अर्थ बताने वाला कौन है

1625
01:57:20,320 --> 01:57:26,120
अब मैं सही अर्थ बता वाला कौन है पहले तो इसको समझ लो कौन

1626
01:57:26,120 --> 01:57:30,600
है कोई बात नहीं गीता उठा लीजिए सर

1627
01:57:30,600 --> 01:57:34,680
गीता उठा लीजिए अरे मैं गीता नहीं ला रहा हूं मैं

1628
01:57:34,680 --> 01:57:38,840
कुछ और ला रहा हूं मैं कुछ और ला रहा हूं

1629
01:57:38,840 --> 01:57:40,320
जी ये जो तुमने कहा

1630
01:57:40,320 --> 01:57:44,440
ना बता भगवत गीता 44 में लिखा

1631
01:57:44,440 --> 01:57:49,480
है संचय भगवत गीता 440 में क्या लिखा

1632
01:57:49,480 --> 01:57:53,520
है क्या लिखा है संशय जिसके मन में

1633
01:57:53,520 --> 01:57:57,720
संशय होता है वो कभी

1634
01:57:57,720 --> 01:58:02,400
सुखी नहीं रहता 4

1635
01:58:02,400 --> 01:58:08,400
है जिसके मन में संशय होता

1636
01:58:08,400 --> 01:58:12,520
है अरे मैं बता रहा हूं अभी ऐसा कोई प्रमाण प्रमाण की बात

1637
01:58:12,520 --> 01:58:16,640
नहीं है जिसको आपको मानने में आपके पक्ष का खंडन हो जाए

1638
01:58:16,640 --> 01:58:20,720
अभी खोल के देखने की आवश्यकता नहीं है भगवत गीता 4 में जैसे

1639
01:58:20,720 --> 01:58:25,200
आज आप पूछ रहे हो ना एक तरफ ये बात है एक तरफ यह बात है तो इसका

1640
01:58:25,200 --> 01:58:29,200
इसका उत्तर कैसे मिलेगा तो इसकी व्याख्या भगवान ने की भगवत

1641
01:58:29,200 --> 01:58:33,320
गीता 440 में उन्होंने बोला है कि संचय

1642
01:58:33,320 --> 01:58:37,320
आत्मा विनती अभी मैं आपको एक सिलसिले बार

1643
01:58:37,320 --> 01:58:43,320
से बताता हूं एक

1644
01:58:46,320 --> 01:58:50,600
मिनट अब जब उन्होंने यह बता दिया कि तुम्हारा जो सबसे बड़ा शत्रु

1645
01:58:50,600 --> 01:58:54,720
है वो कौन है वो है संशय आपके मन

1646
01:58:54,720 --> 01:58:59,000
में जो संशय आ रहा ना य य लिखा है वहा वो लिखा है तो यह आपका दुश्मन

1647
01:58:59,000 --> 01:59:03,760
है अब यह संशय कटेगा कैसे तो स्कंद

1648
01:59:03,760 --> 01:59:07,160
पुराण गुरु

1649
01:59:07,160 --> 01:59:11,160
गीता इसमें बृहद व्याख्या है कि संन सेय आपका कटेगा

1650
01:59:11,160 --> 01:59:15,240
कैसे गुरु गीता यह स्कंद पुराण का एक चैप्टर है जिसम

1651
01:59:15,240 --> 01:59:19,320
शिव और पार्वती आपस में बातें कर रहे हैं तो इसका मैं

1652
01:59:19,320 --> 01:59:23,560
खोल रहा हूं लोक क्रमांक

1653
01:59:23,560 --> 01:59:27,920
3

1654
01:59:27,920 --> 01:59:32,280
सॉरी हा यह देखिए पहली बात आपने

1655
01:59:32,280 --> 01:59:36,400
जो कहा है ना कि यह कैसे पता चलेगा क्या होगा इस इसे कहते

1656
01:59:36,400 --> 01:59:40,880
हैं संचय और इसी को कहते हैं अज्ञानता रूपी अंधकार

1657
01:59:40,880 --> 01:59:44,960
आपको अज्ञानता है नहीं समझ में आ रहा है क्या करना है आपका रास्ता साफ

1658
01:59:44,960 --> 01:59:49,200
नहीं है तो इसी की व्याख्या यहां पर है

1659
01:59:49,200 --> 01:59:53,680
यह देखिए दिख रही है यह व्याख्या देखिए गु का मतलब

1660
01:59:53,680 --> 01:59:57,920
गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला इधर देखिए

1661
01:59:57,920 --> 02:00:02,280
इधर इस तरफ र रु का मतलब प्रकाश

1662
02:00:02,280 --> 02:00:06,880
र का मतलब प्रकाश होता है जी जी का मतलब

1663
02:00:06,880 --> 02:00:10,880
का मतलब अकार अरे जो शास्त्र में लिखा वो

1664
02:00:10,880 --> 02:00:15,600
पढ़ लो पहले पढ़ लो पहले गु का मतलब

1665
02:00:15,600 --> 02:00:20,040
अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला

1666
02:00:20,040 --> 02:00:24,160
ब्रह्म रूप प्रकाश है गुरु है है ये अवतार का उपनिषद

1667
02:00:24,160 --> 02:00:28,200
में भी यही दिया गया है जी ठीक है तो गुरु का मतलब

1668
02:00:28,200 --> 02:00:32,400
क्या हुआ जी जो आपको आपके जो मन में संशय

1669
02:00:32,400 --> 02:00:37,160
आ रहे हैं उनको दूर कर दे अब अगला पॉइंट है संशय दूर कौन करेगा

1670
02:00:37,160 --> 02:00:41,720
यह तो समझ में आ गया कि गुरु अब गुरु कौन होगा उसकी व्याख्या सुनो

1671
02:00:41,720 --> 02:00:43,040
क्यों गुरु

1672
02:00:43,040 --> 02:00:47,360
ही संशय को दूर करने वाला क्यों है क्योंकि क्योंकि

1673
02:00:47,360 --> 02:00:51,440
गुरु शास्त्र और युक्ति से केवल शास्त्र से भी

1674
02:00:51,440 --> 02:00:55,480
नहीं गुरु कौन है शास्त्र और

1675
02:00:55,480 --> 02:00:59,600
युक्ति से तर्क और प्रमाण से तर्क तर्क भी देगा

1676
02:00:59,600 --> 02:01:03,640
और युक्ति केवल शास्त्र नहीं केवल शास्त्र करेगा तो उलग

1677
02:01:03,640 --> 02:01:09,640
जाओगे कन्फ्यूज हो जाओगे तो क्या है ये गुरु गीता

1678
02:01:09,960 --> 02:01:14,640
184 जी गुरु गीता 184

1679
02:01:14,640 --> 02:01:20,640
इसमें पढ़िए

1680
02:01:26,840 --> 02:01:29,640
यह देखिए

1681
02:01:29,640 --> 02:01:33,680
184 जी गुरु गीता 184 में

1682
02:01:33,680 --> 02:01:38,960
क्या है कि क्योंकि वह शास्त्र और युक्ति

1683
02:01:38,960 --> 02:01:43,440
से आपके संपूर्ण संश हों का समाधान

1684
02:01:43,440 --> 02:01:47,640
करते हैं किससे प्रमाण और तर्क से

1685
02:01:47,640 --> 02:01:52,000
ठीक है जी ठीक है अब बात आती है आगे के अब

1686
02:01:52,000 --> 02:01:56,800
उसका जो है इसमें जो है उन्होंने गुरु की और व्याख्या भी की है कि गुरु

1687
02:01:56,800 --> 02:02:01,200
गुरु जो शिक्षा है व गुरुदेव के मुख में रहती है

1688
02:02:01,200 --> 02:02:05,360
चले गए क्या जो शिक्षा है वह गुरु गुरु के मुख

1689
02:02:05,360 --> 02:02:10,080
में रहती है अब आगे हम देखेंगे कि गुरु कौन हो सकता है 191

1690
02:02:10,080 --> 02:02:14,200
में भी गुरु कोही संशय मिटाने वाला कहा जा रहा है 191 भी देख

1691
02:02:14,200 --> 02:02:16,360
लेते

1692
02:02:16,360 --> 02:02:22,360
हैं कि गुरु कृपा से सब संशय मिट जाते हैं

1693
02:02:34,640 --> 02:02:39,080
गुरु गुरु दीक्षा से विमुख रहे लोग वास्तविक

1694
02:02:39,080 --> 02:02:43,320
ज्ञान से रहित है तो पहली बात तो य आ गई कि आपका जो सबसे

1695
02:02:43,320 --> 02:02:47,400
बड़ा शत्रु है वह संचय है और संशय से निकालने वाला कौन है

1696
02:02:47,400 --> 02:02:51,440
गुरु अब आगे हम देख लेते हैं कि

1697
02:02:51,440 --> 02:02:56,560
गुरु किसे कहा गया है पहली बात तो एक और है

1698
02:02:56,560 --> 02:02:59,200
कि

1699
02:02:59,200 --> 02:03:03,720
जो ऐसे गुरु का चुनाव करता है जो गलत है

1700
02:03:03,720 --> 02:03:07,880
प्रामाणिक नहीं है निषिद्ध गुरु है वह ब्रह्म प्रलय

1701
02:03:07,880 --> 02:03:12,040
तक पशु योनि में पड़ा रहता है यह भी इसी में लिखा है गुरु गीता

1702
02:03:12,040 --> 02:03:16,160
में स्कंद पुराण ब्रह्म प्रलय तक पशु योनि

1703
02:03:16,160 --> 02:03:20,160
में ही पड़ा रहता है इसलिए सब

1704
02:03:20,160 --> 02:03:25,080
प्रकार के प्रयासों से होकर जो है

1705
02:03:25,080 --> 02:03:29,440
वो अच्छा यहां पर देखिए जो गुरु अपने दर्शन से शिष्य को भ्रांति

1706
02:03:29,440 --> 02:03:33,560
में डालता है मतलब जब आप अपने गुरु को देखें तो ट्रांसपेरेंसी

1707
02:03:33,560 --> 02:03:37,560
हो इसीलिए कहा जाता है वैराग्य जो वैराग्य

1708
02:03:37,560 --> 02:03:41,680
हो वैरागी होता है उसका जीवन कैसा होता है जैसा आपको दिख रहा है वैसा इधर

1709
02:03:41,680 --> 02:03:45,840
है उसमें कोई पदे बाजी नहीं होती मगर गृहस्थ होगा तो उसमें

1710
02:03:45,840 --> 02:03:49,840
एक आवरण होगा आपके और उसके बीच में एक दूरी होगी

1711
02:03:49,840 --> 02:03:52,360
तो

1712
02:03:52,360 --> 02:03:56,360
जो गुरु है वह अपने दिखावे से शिष्य को भ्रांति में ना डालने वाला

1713
02:03:56,360 --> 02:04:01,880
हो तो यहां भी वैराग्य की ओर इंगित किया जा रहा है ठीक है

1714
02:04:01,880 --> 02:04:06,200
और ऐसा गुरु निषिद्ध माना जाता है और वैराग्य

1715
02:04:06,200 --> 02:04:11,040
की बात तो अनेक अनेक जगह हुई है अब पहली बात क्या हुई

1716
02:04:11,040 --> 02:04:15,200
भगवत गीता चार दो धर्म

1717
02:04:15,200 --> 02:04:19,200
का ज्ञान जो ज्ञान है ब्रह्म प्राप्ति का वो कहां

1718
02:04:19,200 --> 02:04:23,240
से प्राप्त हो रहा है गुरु परंपरा से भगत भग गीता चार दो एवं परंपरा

1719
02:04:23,240 --> 02:04:27,400
प्राप्ति मम भगवत गीता न 16 परंपरा

1720
02:04:27,400 --> 02:04:31,840
प्राप्त सेय जो चक्र है प्रकृति का चक्र है परंपरा से प्रचलित है

1721
02:04:31,840 --> 02:04:36,760
जो इसके अनुसार चलते हैं उन्हीं को मोक्ष मिलता है भगवत गीता

1722
02:04:36,760 --> 02:04:40,800
पांचवे अध्याय में भी कहा गया है कि पूर्व जो पूर्वज करते चले आ

1723
02:04:40,800 --> 02:04:44,840
रहे हैं परंपरा से वही करने पर आपको मोक्ष मिलेगा

1724
02:04:44,840 --> 02:04:48,880
उन पूर्वजों की बात नहीं की जा रही है यहां पर कि आपके बीच में कुछ पूर्वज ऐसे भी

1725
02:04:48,880 --> 02:04:53,000
हुए जिन्होंने गलत कार्य कर दिया उन पूर्वजों की बात की

1726
02:04:53,000 --> 02:04:57,720
जा रही है जो पीछे से अपने पूर्वजों को फॉलो कर रहे थे वही आप फॉलो करो

1727
02:04:57,720 --> 02:05:02,200
आचार्य लोगों हा यही बात छंद

1728
02:05:02,200 --> 02:05:05,480
उपनिषद में भी लिखी है कि आपके गुरुजन

1729
02:05:05,480 --> 02:05:09,720
जो परंपरा प्राप्त जो विद्या है वही गुरुओं से प्राप्त जो विद्या

1730
02:05:09,720 --> 02:05:13,720
है वही आपकी आपको जो मोक्ष दिला सकती है तो पहली बात तो

1731
02:05:13,720 --> 02:05:18,040
क्या निशानी आ गई हमारे पास कि गुरु जो होना चाहिए व परंपरा प्राप्त

1732
02:05:18,040 --> 02:05:22,360
होना चाहिए क्यों क्योंकि उसने शास्त्र किसी दुकान खरीदे

1733
02:05:22,360 --> 02:05:26,520
नहीं थे उसने अपने गुरु से सुने थे

1734
02:05:26,520 --> 02:05:31,360
और जब सुने थे तो जब उसके मन में यह सब बातें आई थी ना गुरु से सुनते समय शास्त्र

1735
02:05:31,360 --> 02:05:35,360
य अभी तो आपने थोड़ी देर पहले गुरुदेव यह कहा था कि वोह अविनाशी नहीं है

1736
02:05:35,360 --> 02:05:39,600
वो अपना आविर्भव रो भाव बता रहे ब्रह्मा विष्णु महेश और आप कह रहे हो व अविनाशी

1737
02:05:39,600 --> 02:05:44,120
है तो जब उन्होंने पूछा उन्होंने बताया वहां पर वह अपने आप दीनता

1738
02:05:44,120 --> 02:05:48,320
प्रकट कर रहे थे वो आविर्भव तिरो भाव का मतलब उनका

1739
02:05:48,320 --> 02:05:53,200
केवल य है कि वो प्रकट प्रकट होते हैं समझे बाबूराम

1740
02:05:53,200 --> 02:05:57,320
जी आप चले जाते हैं बात अलग है अरे हम आ

1741
02:05:57,320 --> 02:06:01,320
गया सर नेटवर्क क पसे इतनी बातें

1742
02:06:01,320 --> 02:06:05,520
कहते हैं अगर हम यह कह दे कि व लोक प्रक्षिप्त तो क्या

1743
02:06:05,520 --> 02:06:09,520
करेंगे हा सर रहे जी सर मैं आ गया

1744
02:06:09,520 --> 02:06:13,520
सुनि गुरु की पहचान के लिए सबसे पहली

1745
02:06:13,520 --> 02:06:17,640
बात हो गई ज्ञान परंपरा से प्राप्त होना चाहिए

1746
02:06:17,640 --> 02:06:20,640
तो जो अर्थ गुरु आपको बता रहा है

1747
02:06:20,640 --> 02:06:24,760
वो जो गुरु ब बैठा है वह परंपरा से होना चाहिए क्योंकि

1748
02:06:24,760 --> 02:06:28,960
यह जो शास्त्र है यह आपको किसी पब्लिक प्रेस ने अब छाप

1749
02:06:28,960 --> 02:06:33,080
के दिए हैं गीता प्रश्न अभी छापे हैं पिछले हजार

1750
02:06:33,080 --> 02:06:37,560
हज 1200 सालों में मेरे ख्याल से कागज की खोज हुई होगी प्रिंटिंग की खोज हुई होगी

1751
02:06:37,560 --> 02:06:41,680
है ना ऐसे ही हुआ होगा अंदाजा है मेरा एकदम क्लियर उससे

1752
02:06:41,680 --> 02:06:45,720
पहले शास्त्र कैसे चलते थे परंपरा से गुरु ने अपने शिष्य को

1753
02:06:45,720 --> 02:06:50,200
रए उन्होंने अपने शिष्य को रटा तो जब ऐसे चलते थे

1754
02:06:50,200 --> 02:06:54,240
जब ऐसे परंपरा से चलते थे तब आपके जैसे ही शिष्यों के मन में सवाल

1755
02:06:54,240 --> 02:06:58,240
आते थे कि गुरुदेव अभी अभी तो आपने कहा था कि वो उनका आविर्भाव

1756
02:06:58,240 --> 02:07:02,480
तिरोभाव होता है और अब आप कह रहे हो गुरुदेव कि ब्रह्मा विष्णु

1757
02:07:02,480 --> 02:07:06,520
महेश अविनाशी है तो गुरुदेव उनको समझाते थे कि जहां पर उन्होंने अपना आविर्भव रो

1758
02:07:06,520 --> 02:07:10,640
भाव बताया है वो उन्होंने अपनी दीनता प्रकट की है जिसकी वो पूजा कर रहे

1759
02:07:10,640 --> 02:07:14,680
हैं उसके प्रति सम्मान प्रकट किया है तो गुरु ऐसे निर्धारण

1760
02:07:14,680 --> 02:07:18,960
तो इसका मतलब क्या हुआ और यह भगवत गीता में लिखा भी है परंपरा

1761
02:07:18,960 --> 02:07:23,240
प्राप्त निरुक्त तक में लिखा है शति पर दी जा रही है उपनिषद

1762
02:07:23,240 --> 02:07:27,280
में लिखा है सुति परंपरा दी जा रही है मुनि परंपरा दिखाता

1763
02:07:27,280 --> 02:07:31,280
हूं आपको अच्छा हम कुछ आप से

1764
02:07:31,280 --> 02:07:35,640
शका समाधान करना चाते किया है पर क्या है क्या नहीं है इसका निर्धारण

1765
02:07:35,640 --> 02:07:39,640
कौन करेगा कैसे करेगा उसका प्रश् का जवाब सुनिए

1766
02:07:39,640 --> 02:07:44,120
य शुद्ध परंपरा क्या कह रही है जन

1767
02:07:44,120 --> 02:07:48,600
कैसे चला परंपरा से चला जी कैसे चला परपरा

1768
02:07:48,600 --> 02:07:52,720
परपरा से चला इसको हमारे गुरुजी भी कहा तो सही

1769
02:07:52,720 --> 02:07:56,720
कहते हैं कि नहीं परंपरा से चलती आ र है वो पहले से वो लोग जैसा भी उ

1770
02:07:56,720 --> 02:08:01,560
आपके पास आपके पास कबीर से पहले की परंपरा नहीं है ना

1771
02:08:01,560 --> 02:08:05,640
नहीं जैसे कि वेद जो गीता है इसको हमारे गुरु जी ने बोला है कि

1772
02:08:05,640 --> 02:08:09,800
जो ये लोग इतना तक हमारे यहां तक लाकर पहुंचा पले पहले

1773
02:08:09,800 --> 02:08:13,960
मेरी पूरी बात सुन लीजिए गुरु की जो पहचान है वो शास्त्र ही बता रहे

1774
02:08:13,960 --> 02:08:18,400
हैं 15 में कहा जा रहा है कि जो

1775
02:08:18,400 --> 02:08:22,560
वृक्ष वृक्ष है जो उल्टा संसार रूपी उल्टा वृक्ष उसको

1776
02:08:22,560 --> 02:08:27,240
काटने के लिए आपके पास हथियार होना चाहिए वैराग्य का

1777
02:08:27,240 --> 02:08:31,240
स्कंद पुराण में बोला जा रहा है कि जो गुरु अपने शिष्य

1778
02:08:31,240 --> 02:08:35,280
को भ्रमित करे अपने उससे रूप से यानी कि आप पता ना

1779
02:08:35,280 --> 02:08:39,280
लगा पाए अंदर जाकर क्या करने वाला है भ्रम पैदा हो तो

1780
02:08:39,280 --> 02:08:43,520
ग्रस्त जो होता है वो एट दी एंड जब जाएगा तो अपने दरवाजे की कुंडी

1781
02:08:43,520 --> 02:08:47,680
लगाएगा ग्रस्त व्यक्ति कौन है जिसके जीवन का कुछ ना

1782
02:08:47,680 --> 02:08:51,000
कुछ हिस्सा ऐसा है जो छुपा हुआ है समझ गए

1783
02:08:51,000 --> 02:08:55,160
जी जी उसके बाद वो क्या कर रहा है आपको नहीं पता सन्यासी कौन है

1784
02:08:55,160 --> 02:08:59,240
जिसके जीवन का हर हिस्सा आपको पता है क्या कर रहा है

1785
02:08:59,240 --> 02:09:03,280
वो सन्यासी है तो सन्यासी आपको ब्रम में नहीं डाल रहा है कि मैं गेट

1786
02:09:03,280 --> 02:09:07,400
बंद करने के बाद क्या कर रहा हूं अपने कमरे में ग्रस

1787
02:09:07,400 --> 02:09:11,560
आपको संचय में डाल रहा है कि वह गेट बंद करने के बाद गुरुजी अपने

1788
02:09:11,560 --> 02:09:15,680
कमरे में क्या कर रहे हैं इसलिए वह अंतिम निर्णायक नहीं है समझ

1789
02:09:15,680 --> 02:09:19,760
रहे हैं जी तो वैरागी

1790
02:09:19,760 --> 02:09:23,840
छव अध्याय में भी वैरागी की ई है और अथर्ववेद 11

1791
02:09:23,840 --> 02:09:28,560
पा 16 में कहा जा रहा है कि ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है

1792
02:09:28,560 --> 02:09:32,560
और मनुस्मृति में कहा जा रहा है मनुस्मृति में धर्म में

1793
02:09:32,560 --> 02:09:36,640
तुमने अभी प्रश्न किया य संशय का निराकरण कौन करेगा तो उसमें कहा

1794
02:09:36,640 --> 02:09:41,200
जा रहा है धर्म में संशय होने पर किसके पास जाए

1795
02:09:41,200 --> 02:09:45,240
ब्रह्मचारी के पास दिखा देता हूं अ सर गीता में तो तत्वदर्शी के

1796
02:09:45,240 --> 02:09:50,000
पास बोला है अरे मेरे भाई वही तत्वदर्शी है

1797
02:09:50,000 --> 02:09:54,200
जी तत्वदर्शी काल से कोई तुम्हारे पास व्याख्या है क्या

1798
02:09:54,200 --> 02:09:58,600
व उसमें बोला गया वो तत्व ज्ञान देगा तुमको सुनना नहीं है

1799
02:09:58,600 --> 02:10:02,680
बाबू मैं समझ रहा हूं तुम्हारी बात तुमको केवल भ भ अपनी बात

1800
02:10:02,680 --> 02:10:06,040
बोलनी है रट्टू तोते

1801
02:10:06,040 --> 02:10:07,040
वाली

1802
02:10:07,040 --> 02:10:11,120
तत्वदर्शी की व्याख्या क्या है बताओ

1803
02:10:11,120 --> 02:10:15,400
तत्वदर्शी व्याख्या यह है कि जो वह तत्व ज्ञान को देगा जो

1804
02:10:15,400 --> 02:10:19,560
ञान क्या है वो तत्व ज्ञान क्या है तत्व ज्ञान

1805
02:10:19,560 --> 02:10:23,760
वह ज्ञान है जो परमात्मा तक का ज्ञान जिसे जीव का मेरे भाई

1806
02:10:23,760 --> 02:10:27,800
तोय जो रामपाल ने दिया वह परमात्मा का ज्ञान है यह कैसे सिद्ध

1807
02:10:27,800 --> 02:10:31,920
हुआ बताओ व सि ऐसे

1808
02:10:31,920 --> 02:10:36,120
हुआ कि उन्होंने उन्होने परमा परमात्मा

1809
02:10:36,120 --> 02:10:40,240
तक का पहचान बताया कि परमात्मा वह है वहां रहता है ऐसे उसका विधि

1810
02:10:40,240 --> 02:10:44,280
है ऐसे मिलेगा पहली बात तो यह परमात्मा की बात क्या यहां

1811
02:10:44,280 --> 02:10:48,400
नहीं बताई जा रही तुमको जी वही व्याख्या

1812
02:10:48,400 --> 02:10:52,680
क्यों मानी जाएगी जो रामपाल बोल रहे हैं परमात्मा की व्याख्या दूसरा

1813
02:10:52,680 --> 02:10:56,720
जो परमात्मा की बात कर रहा है वो गलत है नहीं

1814
02:10:56,720 --> 02:11:00,720
नहीं का नाम क्यों नहीं ले रहे हो तुम 15 एक का

1815
02:11:00,720 --> 02:11:05,000
नाम क्यों नहीं ले रहे हो जी स उल्टे वक्ष

1816
02:11:05,000 --> 02:11:09,800
के रूप में उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दे उसका नाम लेना बंद कर दिया

1817
02:11:09,800 --> 02:11:13,960
नहीं नहीं उसको कहा भूलेंगे सर उसको तो पहले लेना है बोलो

1818
02:11:13,960 --> 02:11:18,720
तत्वदर्शी का तत्वदर्शी के लिए व्याख्या बताओ वो वाली 15 एक वाली

1819
02:11:18,720 --> 02:11:22,160
ठीक है उसको भी बताएंगे बाबू

1820
02:11:22,160 --> 02:11:26,440
तुमको कुछ जानना नहीं है तुमको यहां रट्टू तोता बनना है तुमसे वैसे ही बात करेंगे

1821
02:11:26,440 --> 02:11:30,960
चलो आप आपसे हम कुछ पूछने आ हो रहे थे चलो बोलो

1822
02:11:30,960 --> 02:11:35,560
आपसे हम कुछ पूछ में क्या लिखा है 15 एक में क्या लिखा है

1823
02:11:35,560 --> 02:11:39,760
पढ़ो उसको पहले हम जो पूछना चाह रहे उसको की व्याख्या 15

1824
02:11:39,760 --> 02:11:43,880
एक में है कि नहीं है है सर उसको

1825
02:11:43,880 --> 02:11:47,960
हम क मना कर रहे प है तो पढ़ो

1826
02:11:47,960 --> 02:11:51,960
है तो पढ़ो और हम गीता से दूसरा नहीं पूछ

1827
02:11:51,960 --> 02:11:57,960
पढ़ो 15 एक की व्याख्या पढ़ो तत्वदर्शी की

1828
02:11:59,600 --> 02:12:03,960
पढ़ो सर ऐसे जबरदस्त ज्ञान चर्चा नहीं होती है देखिए

1829
02:12:03,960 --> 02:12:07,960
ह तुमने कहा कि उसम तो तत्वदर्शी के पास जाने के लिए कहा

1830
02:12:07,960 --> 02:12:11,960
गया है तुम मुझे दिखा दो कि तत्वदर्शी का अर्थ ये लिखा हो जेल धाम में

1831
02:12:11,960 --> 02:12:15,960
बैठा हुआ रामपाल बस दिखा दो वो किसी

1832
02:12:15,960 --> 02:12:19,960
का नाम नहीं लिखा उसमें लिखा है मुको दिखा नाम नहीं लिखा है तो ठीक है

1833
02:12:19,960 --> 02:12:25,680
तो तुम अपना वो प्रमाण ना कि कहां कौन सी तरीके से रामपाल सिद्ध हो रहे

1834
02:12:25,680 --> 02:12:30,000
हैं सर जो चीज हम पूछना चाह रहे गीता से उसको बताइए हमरे

1835
02:12:30,000 --> 02:12:34,040
मेरे भाई तत्वदर्शी की व्याख्या तुम 15 एक से मानते हो कि नहीं मानते

1836
02:12:34,040 --> 02:12:38,320
हो यह बताओ फस गए ना अय क्योंकि इन्हीं किताबों

1837
02:12:38,320 --> 02:12:42,320
में ठोक ठोक के लिखा है ये मालूम है इनके पास 15 की काट

1838
02:12:42,320 --> 02:12:46,320
है अब ये 15 नहीं बोलेंगे उसको

1839
02:12:46,320 --> 02:12:50,400
हम मानते हैं हम कुछ दूसरा पूछना चाह रहे मानते हैं तो वो खोलो नहीं

1840
02:12:50,400 --> 02:12:54,520
तो य स्वीकार रामपाल ने व झूठ बोला गलत बोला

1841
02:12:54,520 --> 02:12:59,440
नहीं स्वीकार कर रहे भाई बोले कैसे झूठ बोलेंगे

1842
02:12:59,440 --> 02:13:03,720
क्या तत्वदर्शी की क्या व्याख्या है वहा पर बोलो संत रामपाल

1843
02:13:03,720 --> 02:13:07,760
जी महाराज ने बताए हैं गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर एक से चा जो कोई

1844
02:13:07,760 --> 02:13:11,800
व्यक्ति जड़ से लेकर के संसार ब्रज को जड़ भाई तुम

1845
02:13:11,800 --> 02:13:14,600
शलोक पढ़ो अपनी रामपाल जी जो बोल रहे

1846
02:13:14,600 --> 02:13:19,200
वो मत बोलो 15 एक में क्या लिखा है वो पढ़ो

1847
02:13:19,200 --> 02:13:22,400
जी

1848
02:13:22,400 --> 02:13:26,920
15 एक में लिखा हुआ है आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले ब्रह्मा

1849
02:13:26,920 --> 02:13:30,440
रूप मुख शाखा वाले जिस

1850
02:13:30,440 --> 02:13:34,680
जिस संसार रूप पीपल के बृज को अविनाशी कहते हैं वेद

1851
02:13:34,680 --> 02:13:38,800
जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को

1852
02:13:38,800 --> 02:13:43,080
जो पुरुष जो व्यक्ति मूल सहित यानी जड़ सहित तत्व से जानता

1853
02:13:43,080 --> 02:13:44,040
है

1854
02:13:44,040 --> 02:13:48,080
वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है

1855
02:13:48,080 --> 02:13:52,440
यानी कि तत्वदर्शी वो है जो वेद को पूर्ण रूप से जानता

1856
02:13:52,440 --> 02:13:56,680
है नहीं जो इस संसार में ब्रिज को जड़ से लेकर

1857
02:13:56,680 --> 02:14:00,760
पत्ते तक जानता है अच्छा जड़ से लेकर पत्ते तक जानने

1858
02:14:00,760 --> 02:14:04,840
वाला कोई कैसे सिद्ध होगा यह बताओ वो

1859
02:14:04,840 --> 02:14:09,040
बताएगा उसके बाद से पता चलेगा कि वो कहां तक का ज्ञान दे रहा है अरे

1860
02:14:09,040 --> 02:14:13,280
तो भाई मुझे बताओ ना उसका सबूत क्या है कि किसकी व्याख्या मानी जाएगी

1861
02:14:13,280 --> 02:14:18,000
जड़ से लेकर पत्ते तक की व्याख्या दूसरी बात तुमने कहा नहीं

1862
02:14:18,000 --> 02:14:22,000
मि एक मिनट एक मिनट तुमने कहा

1863
02:14:22,000 --> 02:14:26,200
वहा पर लिखा है कि वो वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला

1864
02:14:26,200 --> 02:14:30,440
होगा लिखा है कि नहीं आपने नहीं

1865
02:14:30,440 --> 02:14:34,520
कैसे बोला पहले य बताओ मानते हो कि नहीं

1866
02:14:34,520 --> 02:14:38,680
मानते हैं मानते हैं मानते रूप से जानने वाला

1867
02:14:38,680 --> 02:14:42,920
होगा जी जो वे देवी भागवत

1868
02:14:42,920 --> 02:14:46,960
में देवी भागवत में लिखा है वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला वो है जो मां भगवती

1869
02:14:46,960 --> 02:14:51,040
की निरंतर पूजा करता है गायत्री मंत्र का जाप करता है और बोलो

1870
02:14:51,040 --> 02:14:55,200
दिखाऊ रुक रुक तो लीजिए पहले भाई मैं रुकूंगा

1871
02:14:55,200 --> 02:14:59,120
मुझे पहले बता दो ये मानते हो कि नहीं

1872
02:14:59,120 --> 02:15:03,160
इस पहला श्लोक हम पढ़ रहे हैं इसका क्या कह रहा है मैं तुमसे पूछ रहा हूं इसको

1873
02:15:03,160 --> 02:15:07,320
मानते हो कि नहीं मानते को जानने वाला कौन

1874
02:15:07,320 --> 02:15:11,480
है जो संसार रूपी ब्रिज को डिटेल बता देगा

1875
02:15:11,480 --> 02:15:15,840
अरे तो देवी भागवत में झूठ मान रहे हो देवी भागवत

1876
02:15:15,840 --> 02:15:19,920
में उसकी पहचान दी गई है तो पीपल के संसार प

1877
02:15:19,920 --> 02:15:24,640
बताओ एक बात बताओ तुमसे किसने कहा कि शंकराचार्य ने

1878
02:15:24,640 --> 02:15:30,120
या रामानुजाचार्य ने डिटेल नहीं

1879
02:15:30,120 --> 02:15:35,800
बताई हम किसी को थ पूछ रहे

1880
02:15:35,800 --> 02:15:39,880
बता बताइ डिटेल

1881
02:15:39,880 --> 02:15:44,160
उ सुनो संसार रूपी उल्टे क् की डिटेल आदि

1882
02:15:44,160 --> 02:15:49,040
शंकराचार्य जीने राम अनचार जी ने बताई है हो

1883
02:15:49,040 --> 02:15:53,400
य बता देंगे शिष्य बन जाएंगे सब संत रामपाल जी महाराज के भगत उस

1884
02:15:53,400 --> 02:15:57,600
बता बताइ है अब अब ये बताओ रामपाल ने बताई

1885
02:15:57,600 --> 02:16:01,800
है कि नहीं ये बताओ अच्छा बताइए तो आप उसको बता दीजिए कैसे बता

1886
02:16:01,800 --> 02:16:06,040
इसमें लिखा रामपाल ने बताई है कि नहीं

1887
02:16:06,040 --> 02:16:10,080
आप जो शंकराचार्य बताया उसको बता दीजिए ना भाई इसमें लिखा हुआ है आदि पुरुष

1888
02:16:10,080 --> 02:16:14,560
परमेश्वर मूल वाले तो जो आदि पुरुष परमेश्वर है मूल जड़ वाला

1889
02:16:14,560 --> 02:16:18,720
वह कौन है इसके बाद बोल रहा है कि जो ब्रह्मा रूप मुख शाखा

1890
02:16:18,720 --> 02:16:22,880
वाला तो ये ब्रह्मा कौन शाखा वाला है मैं तुमसे ये पूछ रहा हूं कि

1891
02:16:22,880 --> 02:16:27,840
यहां पर लिखा है कि वेदों को जानने वाला भी होगा वही व्यक्ति

1892
02:16:27,840 --> 02:16:31,840
होगा कि नहीं होगा अरे पहले क्यों मैं बोल रहा हूं जो

1893
02:16:31,840 --> 02:16:36,120
व्यक्ति उल्टे वृक्ष की व्याख्या करेगा उसी व्यक्ति के लिए लिखा है वो वेदों को जानने

1894
02:16:36,120 --> 02:16:40,400
वाला भी होगा ठीक जी जी जी तो भागवत

1895
02:16:40,400 --> 02:16:44,480
पुराण में देवी भागवत में स्पष्ट बताया गया है कि जो पूर्ण

1896
02:16:44,480 --> 02:16:48,480
रूप से वेदों को जानने वाला है वो मां भगवती की निरंतर पूजा करता

1897
02:16:48,480 --> 02:16:52,480
है गायत्री मंत्र का प्रयुक्त जाप करता है है यह लक्षण बता

1898
02:16:52,480 --> 02:16:56,560
दिया पहचानने के लिए इसको नहीं मानोगे

1899
02:16:56,560 --> 02:17:01,120
मानते हैं इस ब्रज को बताइए इस अगर जो पूजा कर

1900
02:17:01,120 --> 02:17:05,480
को कैसे बताना है बताओ क्या बताना है वृक्ष के बारे में बताओ क्या बताना है

1901
02:17:05,480 --> 02:17:09,600
बृ को ये बताना है कि कौन जड़ है कौन पेड़ है कौन डाल है कौन

1902
02:17:09,600 --> 02:17:14,360
पत्ते है इसको बताइए हा अरे तो मैंने बता तो दिया

1903
02:17:14,360 --> 02:17:18,720
जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वही जीव जगत और जगदीश्वर

1904
02:17:18,720 --> 02:17:22,840
के रूप में प्रकट होता है वही पत्तो के रूप प्रकट होता है वही दाल के रूप में प्रकट

1905
02:17:22,840 --> 02:17:26,920
होता है वही तरह तरह की लीला करता है वेदों में भी लिखा है

1906
02:17:26,920 --> 02:17:29,600
गलत गलत आंसर है आंसर गलत है आपको हम

1907
02:17:29,600 --> 02:17:33,880
प्रूफ करा रहे आपको प्रूफ कर रहे आपको प्रूफ

1908
02:17:33,880 --> 02:17:38,040
करा दे रहे गलत आर मैंने बोला है एक मिनट जो मैंने बोला

1909
02:17:38,040 --> 02:17:42,200
है वो शास्त्र में लिखा दिखा दूं मैं दिखा रहा हूं भाई इसी गीता

1910
02:17:42,200 --> 02:17:46,200
से दिखा रहा बाब बाबू भाई मेरी बात सुनिए ध्यान

1911
02:17:46,200 --> 02:17:50,240
से लड़ाई इस बात की नहीं है कि क्या गलत

1912
02:17:50,240 --> 02:17:54,560
है और क्या सही है एक ही सिद्धांत है जो हमारे और आपके बीच में टकराता

1913
02:17:54,560 --> 02:17:58,600
है वो सिद्धांत ये है कि आप

1914
02:17:58,600 --> 02:18:02,760
हमारी कही हुई बात को जबक हम शास्त्र से दिखाते हैं

1915
02:18:02,760 --> 02:18:06,800
तो शास्त्र की उस बात से काटते हो जहां पर से आपको लग

1916
02:18:06,800 --> 02:18:11,080
रहा है कि इससे वो बात कट रही है सवाल यह आता है कि शास्त्र

1917
02:18:11,080 --> 02:18:15,240
में अगर दो प्रकार की बातें लिखी हुई है तो उनमें से किसी

1918
02:18:15,240 --> 02:18:19,240
एक बात को क्यों माना जाए कोई बात नहीं हम इस बात को

1919
02:18:19,240 --> 02:18:23,400
यब जी कि शास्त्र ये कह रहे हैं कि दोनों

1920
02:18:23,400 --> 02:18:27,640
बातों को मानना पड़ेगा कोई बात नहीं हम इस

1921
02:18:27,640 --> 02:18:31,880
बात आप आप ये कह रहे हो कि जो भगवान जो भगवत गीता

1922
02:18:31,880 --> 02:18:35,880
है वो कृष्ण ने नहीं बोली ठीक नहीं बो दिखा र वो

1923
02:18:35,880 --> 02:18:39,880
आपने आप आपने बोला कि वो काल ने बोली है ठीक जी सर जी

1924
02:18:39,880 --> 02:18:43,920
सर काल ने बोली है पहली बात ये है गीता में कहीं नहीं लिखा है

1925
02:18:43,920 --> 02:18:44,600
कि कृष्ण ने

1926
02:18:44,600 --> 02:18:48,840
नहीं बोली पहली बात ये है गीता में कहीं नहीं लिखा है कि जो स्वयं को काल

1927
02:18:48,840 --> 02:18:53,280
कह रहा है वो कृष्ण नहीं है मगर महाभारत में लिखा है

1928
02:18:53,280 --> 02:18:57,560
कि श्री कृष्ण ही काल है ठीक अब हमने आपको

1929
02:18:57,560 --> 02:19:02,080
शास्त्रों से दे दिया कि श्री कृष्ण ही काल है एक मिनट

1930
02:19:02,080 --> 02:19:06,200
एक मिनट हमने आपको शास्त्र से दे दिया कि श्री कृष्ण

1931
02:19:06,200 --> 02:19:10,240
ही काल है ठीक अब क्योंकि आपको ये लगता है कि यहां पर तो

1932
02:19:10,240 --> 02:19:14,320
श्री कृष्ण ऐसी बात बोल रहे हैं तो मेरे भाई हमारे और आपके बीच में जो दूरी

1933
02:19:14,320 --> 02:19:18,320
है वो इस बात की है कि आप शास्त्र को अधूरा अधूरा

1934
02:19:18,320 --> 02:19:22,440
स्वीकार कर रहे हो जब सरर पर तुम्ह ऐसा लग

1935
02:19:22,440 --> 02:19:26,440
रहा है जब तुम्ह कहीं पर ऐसा लग रहा है कि यह बात विरोधाभासी

1936
02:19:26,440 --> 02:19:30,560
है तो तुम यह बात को स्वीकार करके इस बात को काट नहीं

1937
02:19:30,560 --> 02:19:34,760
सकते आपको ऐसा अर्थ निकालना एक मिनट

1938
02:19:34,760 --> 02:19:39,120
आपको ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा जहां शास्त्र की दोनों बातों का मान

1939
02:19:39,120 --> 02:19:43,240
रह जाए और यह बात भी मैं नहीं कह रहा हूं यह बात

1940
02:19:43,240 --> 02:19:47,960
भी मैं नहीं कह रहा हूं यह बात भी शास्त्र ही कह रहे हैं समझ

1941
02:19:47,960 --> 02:19:51,960
गए तो सर हम शास्त्र से दिखा आप घटमा कर आप कह रहे

1942
02:19:51,960 --> 02:19:56,320
घट मानेंगे नहीं तुम जो शास्त्र

1943
02:19:56,320 --> 02:19:59,800
से दिखा रहे हो उसकी बात केवल नहीं मानी जा सकती

1944
02:19:59,800 --> 02:20:03,920
दोनों को मिला के मानना पड़ेगा तुम अगर शास्त्र

1945
02:20:03,920 --> 02:20:07,920
से ये दिखा रहे हो कि काल श्री कृष्ण से अलग है थोड़ी देर के लिए

1946
02:20:07,920 --> 02:20:12,880
मान लिया तो मैं तुम्हे शास्त्र से दिखा रहा हूं कि काल और श्री कृष्ण एक है

1947
02:20:12,880 --> 02:20:17,040
तो तुम्हारी बात को क्यों माना जाए एक गीता से

1948
02:20:17,040 --> 02:20:21,200
गीता से दिखा दीजिए गीता कृष्ण ने बोला है दिखा दीजिए गीता महाभारत

1949
02:20:21,200 --> 02:20:25,280
से दिखा तो रहा हूं तुम दिखाओ ना कि श्री कृष्ण काल नहीं है

1950
02:20:25,280 --> 02:20:29,560
टट से दिखा रहे हैं गट से दिखा घट रामायण

1951
02:20:29,560 --> 02:20:33,600
प्रमाणिक तब मानी जाएगी जब वो वाल्मीकि के अनुरूप हो कोई

1952
02:20:33,600 --> 02:20:37,680
बात नहीं गीता को क्यों माना जाए हम गीता से दिखा

1953
02:20:37,680 --> 02:20:41,800
दे रहे हैं ये क्या है गता गीता से दिखा दे रहे हैं

1954
02:20:41,800 --> 02:20:45,880
अरे भाई महाभारत को नहीं मानते क्या कोई बात

1955
02:20:45,880 --> 02:20:49,880
नहीं हम गीता से दिखा दे रहे दिक्कत क्या है आपको पूछ रहा महाभारत को मानते हो कि

1956
02:20:49,880 --> 02:20:54,280
नहीं मानते मानते हैं तो उसम लिखा है कृष्ण

1957
02:20:54,280 --> 02:20:58,440
ही सनातन काल है भाई जिसने जिसने इस

1958
02:20:58,440 --> 02:21:02,880
ग्रंथ को गीता को बो इसी से दिखा दे रहे हैं आपको क्या दिक्कत है पागल हो गए हो

1959
02:21:02,880 --> 02:21:07,200
क्या मैं पूछ रहा हूं महाभारत को मानते हो कि नहीं

1960
02:21:07,200 --> 02:21:11,520
बिल्कुल मानते हैं बिल्कुल मानते हैं तो उस लिखा है कि कृष्ण ही सनातन

1961
02:21:11,520 --> 02:21:15,000
काल है इसका क्या करोगे गीता

1962
02:21:15,000 --> 02:21:19,120
कहां से आई भैया पूछ कहां से आ एक मिनट एक मिनट एक मिनट

1963
02:21:19,120 --> 02:21:23,280
हां बताओ हम इसी से दिखा दे रहे आपको

1964
02:21:23,280 --> 02:21:27,360
उसम क्या दिक्कत पड़ रहा है भाई पूछ रहा महाभारत के लिखे का क्या

1965
02:21:27,360 --> 02:21:31,480
करोगे दोगे उसे अगर वो लिखा हुआ तो उ

1966
02:21:31,480 --> 02:21:35,640
स्वीकार करेंगे उसम कौन सी बड़ी बात हैर सचाई पता च सनातन

1967
02:21:35,640 --> 02:21:38,640
काल है करलो

1968
02:21:38,640 --> 02:21:43,120
स्वीकार गीता से भी मैच करना चाहिए गीता

1969
02:21:43,120 --> 02:21:47,520
कर अरे मेरे भाई मैं तुमसे यह पूछ रहा हूं कि रामपाल

1970
02:21:47,520 --> 02:21:51,720
ने एक जगह अपने आप को कुत्ता कहा है और एक जगह अपने

1971
02:21:51,720 --> 02:21:55,920
आप को परमेश्वर कहा है कौन सी बात को मानते हो व

1972
02:21:55,920 --> 02:22:00,480
तो मैच नहीं र दोनों

1973
02:22:00,480 --> 02:22:04,800
बात जिसने इस गीता का ज्ञान बोला उसने अपना

1974
02:22:04,800 --> 02:22:09,640
मत्र अपने आप को तत्वदर्शी भी कहते हैं और कुत्ता भी कहते हैं

1975
02:22:09,640 --> 02:22:15,640
यह तो मैच नहीं खा रही बात इसका मतलब आप

1976
02:22:21,240 --> 02:22:25,720
तो भाई कह रहे हैं बिल्कुल सही कह रहे रामपाल जी कुता

1977
02:22:25,720 --> 02:22:29,800
गता क्या रहे हो गता मैं कह रहा हूं थोड़ी देर के लिए मैं मान ले रहा

1978
02:22:29,800 --> 02:22:34,040
हूं गीता में कोई ऐसी बात लिखी है जो महाभारत की चीज

1979
02:22:34,040 --> 02:22:38,200
को विरोध कर रही है ठीक है मैच नहीं हो रही तो यह कहां पर

1980
02:22:38,200 --> 02:22:42,360
लिखा है यदि कहीं शास्त्र में कोई ऐसी बात आ जाए जो पहली वाली बात

1981
02:22:42,360 --> 02:22:46,560
की गलत पहली वाली बात को गलत साबित कर दे जो पहली वाली

1982
02:22:46,560 --> 02:22:50,680
बात मानी नहीं जाएगी य कहां लिखा है क

1983
02:22:50,680 --> 02:22:53,240
लिखा

1984
02:22:53,240 --> 02:22:58,040
है भाई जिसने गीता बोला है वो खुदरा

1985
02:22:58,040 --> 02:23:02,080
सचाई से कोई मतलब नहीं है बाबू अपनी आत्मा में झाक कर देखो पागल

1986
02:23:02,080 --> 02:23:06,120
हो ग तुम मैं तुमसे य पूछ रहा हूं बाबू

1987
02:23:06,120 --> 02:23:10,160
बाबू मेरी बात सुन लो बाबू महाभारत में अगर कुछ लिखा

1988
02:23:10,160 --> 02:23:14,320
है और तुम्हारे हिसाब से तुम्हें लग रहा है कि गीता में कुछ और लिखा

1989
02:23:14,320 --> 02:23:15,720
है ठीक है मैंने

1990
02:23:15,720 --> 02:23:19,960
मान ली तो उस लिखे हुए से महाभारत की लिखी हुई बात

1991
02:23:19,960 --> 02:23:24,600
नहीं मानी जाएगी यह कहा लिखा है और

1992
02:23:24,600 --> 02:23:28,720
मैं तुम्ह बता रहा हू मैं तुम्ह बता रहा हूं कि यदि

1993
02:23:28,720 --> 02:23:32,840
धर्म में दो जगह दो अलग अलग बातें आएंगी तो दोनों को मानना है यह

1994
02:23:32,840 --> 02:23:36,200
धर्म में लिखा

1995
02:23:36,200 --> 02:23:40,440
है उस इसको बाबू को कुछ नहीं समझना है इसको

1996
02:23:40,440 --> 02:23:44,640
केवल अपनी रट तोती लगानी है य

1997
02:23:44,640 --> 02:23:50,640
देखो

1998
02:24:05,120 --> 02:24:09,880
यह देखो जहां शास्त्रों

1999
02:24:09,880 --> 02:24:12,040
में

2000
02:24:12,040 --> 02:24:16,960
जहां सुति शास्त्रों

2001
02:24:16,960 --> 02:24:21,160
में थोड़ा पढ़ के सुना दीजिए एक

2002
02:24:21,160 --> 02:24:25,400
मिनट जहां शति हों में विरोध है वहां पर दोनों ही अर्थों को धर्म

2003
02:24:25,400 --> 02:24:29,720
माना है अगर विरोध है भी अगर विरोध

2004
02:24:29,720 --> 02:24:33,840
है भी सुनो अगर विरोध है भी तो भी हमें

2005
02:24:33,840 --> 02:24:37,840
दोनों को मानना पड़ेगा किसी एक को नहीं मान सकते

2006
02:24:37,840 --> 02:24:42,000
तो इसका मतलब कि अगर तुम्हारे हिसाब से गीता

2007
02:24:42,000 --> 02:24:46,720
में कहीं लिखा है श्री कृष्ण काल नहीं है तब भी

2008
02:24:46,720 --> 02:24:52,000
आप इस बात को काट नहीं सकते कि श्री कृष्ण ही काल है

2009
02:24:52,000 --> 02:24:56,640
समझ गए कुछ आया बुद्धि में जैसे

2010
02:24:56,640 --> 02:25:00,880
उसम और कुछ लिखा है उसको हम बता रहे आपको गीता में यह भी लिखा है कि कृष्ण

2011
02:25:00,880 --> 02:25:04,920
कृष्ण के माता पिता भी है इस गीता में भी लिखा है हम इसको

2012
02:25:04,920 --> 02:25:09,040
उसने अभी महाभारत का उसने दिखाया ना कि वासुदेव ही

2013
02:25:09,040 --> 02:25:13,240
देवकी के गर्भ से जन्म लेते हैं भगवान श्री भगवान जो सच्चिदानंद

2014
02:25:13,240 --> 02:25:18,080
स्वरूप परमेश्वर है वो देवकी के गर्भ से जन्म लेते हैं

2015
02:25:18,080 --> 02:25:20,320
और प्रकट होते हैं वो लीला

2016
02:25:20,320 --> 02:25:24,760
पूर्वक दिखाते हैं कि मैं जन्म ले रहा हूं ये बताओ

2017
02:25:24,760 --> 02:25:28,840
कबीर ये बताओ एक बात बताओ मुझे एक बात बताओ कबीर

2018
02:25:28,840 --> 02:25:31,520
जो है वो परमेश्वर

2019
02:25:31,520 --> 02:25:35,720
है भाई इस इस गीता के अंदर ये परमे

2020
02:25:35,720 --> 02:25:39,840
वो बताओ कबीर परमेश्वर है हम उस पर बात नहीं कर रहे हम गीता पर बात

2021
02:25:39,840 --> 02:25:43,960
कर रहे हैं आपको अभी बात कर रहे हैं रुक जाओ हम कबीर पर बात कर रहे हैं करनी है कबीर

2022
02:25:43,960 --> 02:25:47,960
पर बात की नहीं करनी है उस पर नहीं करना है हमको गीता पर बात करना है नहीं करना

2023
02:25:47,960 --> 02:25:52,080
है तो जाइए चलिए जाइए अगर अगर आपको गरु पुराण

2024
02:25:52,080 --> 02:25:56,080
पर बात करना तो बात कर सकते हैं गरु पुराण म के बारे कबीर बात

2025
02:25:56,080 --> 02:26:00,440
नहीं करनी है कबीर पर बात करनी है कि नहीं करनी है कबीर

2026
02:26:00,440 --> 02:26:04,440
कर है जब आप कबीर में बात

2027
02:26:04,440 --> 02:26:08,720
करनी है बात करना करनी

2028
02:26:08,720 --> 02:26:13,600
है पहले गीता प बात करिए अरे मेरे भाई

2029
02:26:13,600 --> 02:26:17,720
तुम्हारे पास गरुण पुराण है तो ये कहा लिखा है कि महाभारत मानी

2030
02:26:17,720 --> 02:26:21,720
नहीं जाएगी तो हम स्वीकार तो हम

2031
02:26:21,720 --> 02:26:25,880
स्वीकार कर रहे हैं कहा मना कर रहे श्री कृष्ण ही

2032
02:26:25,880 --> 02:26:30,640
सनातन काल है कहां स्वीकार कर रहे हो

2033
02:26:30,640 --> 02:26:34,720
गरुड़ पुराण महाभारत में तो य भी लिखा हुआ है

2034
02:26:34,720 --> 02:26:35,400
श्री कृष्ण

2035
02:26:35,400 --> 02:26:38,840
ही सनातन काल है स्वीकार

2036
02:26:38,840 --> 02:26:43,600
करो स्वीकार कर रहे है कि जो काल है भ उसको स्वीकार काल को स्वीकार ही करते

2037
02:26:43,600 --> 02:26:49,600
हैं नहीं सनातन काल है बोलको

2038
02:26:50,400 --> 02:26:54,480
कैसे बो कितना भागोगे सच्चाई से कितना भागोगे लानत

2039
02:26:54,480 --> 02:26:58,680
है तुम पर लानत है तुम हम प्रूप कर रहे

2040
02:26:58,680 --> 02:27:02,720
तो आप कह रहे तुमसे ये पूछ रहा हूं ये कहा लिखा

2041
02:27:02,720 --> 02:27:06,800
है कि अगर तुम्हारे पास यहां पर कुछ लिखा है तो यहां का लिखा हुआ

2042
02:27:06,800 --> 02:27:10,840
मान्य नहीं होगा यह कहां लिखा है मैंने तुमको बता दिया

2043
02:27:10,840 --> 02:27:14,960
दोनों जगहो का लिखा हुआ धर्म है तुम मुझे दिखाओ कि अगर यहां

2044
02:27:14,960 --> 02:27:19,120
पर कोई लिखा होगा तो बाबू भाई के कहने पर यह बात मानी जाएगी यह बात नहीं मानी जाएगी

2045
02:27:19,120 --> 02:27:22,320
दिखाओ

2046
02:27:22,320 --> 02:27:26,320
ग ग गीता को कोर्ट से इसको खारिज करवा दीजिए गीता अगर ऐसी बात है तो

2047
02:27:26,320 --> 02:27:30,520
भाई आप लोग मानते नहीं गीता को अरे गीता कहा से आई है बताओ

2048
02:27:30,520 --> 02:27:34,680
कहां से आई है गीता आप ही लोग के माध्यम से आए है लेकिन

2049
02:27:34,680 --> 02:27:39,040
आप लोग इस ग्रंथ को स्वीकार नहीं गीता किस शास्त्र का अंश

2050
02:27:39,040 --> 02:27:41,880
है यह

2051
02:27:41,880 --> 02:27:46,200
बताओ हम उसको जब नहीं अभी वहा तक पढ़े कैसे स

2052
02:27:46,200 --> 02:27:50,240
बाब तुम पागल हो गए हो कुछ नहीं पता है तुम्ह गीता

2053
02:27:50,240 --> 02:27:54,680
महाभारत का अंश है किसका अंश है

2054
02:27:54,680 --> 02:27:58,760
इसमें कृष्ण जी के माता-पिता भी लिखा हुआ है हम इसको प्रूफ कर दे रहे भैया

2055
02:27:58,760 --> 02:28:03,040
इसको हटाओ ये कुछ जानने नहीं आया

2056
02:28:03,040 --> 02:28:07,160
है इस ह तुमसे मैं पूछ रहा हूं

2057
02:28:07,160 --> 02:28:11,280
गीता किसका अंश है ये कुछ नहीं

2058
02:28:11,280 --> 02:28:15,640
बो बात बोलेगा ये अपने मन की बात बोलेगा

2059
02:28:15,640 --> 02:28:19,680
आप बता दीजिए हम उसको नहीं पढ़े उसको हम नहीं पढ़े हैं आप बता दीजिए

2060
02:28:19,680 --> 02:28:24,080
उसको पूछ रहा हूं कि गीता के लिखे हुए के कारण महाभारत

2061
02:28:24,080 --> 02:28:30,000
को नहीं मानना है यह कहां लिखा है मेरे

2062
02:28:30,000 --> 02:28:34,200
भाई जो सच्चाई होगा जो तत्व ज्ञान से जानता होगा

2063
02:28:34,200 --> 02:28:38,240
मैंने सवाल क्या पूछा है मुझे शास्त्र से प्रमाण दो

2064
02:28:38,240 --> 02:28:42,240
कि गीता का लिखा हुआ महाभारत का मान्य नहीं होगा यदि गीता में

2065
02:28:42,240 --> 02:28:46,320
नहीं लिखा है तो यह कहां लिखा

2066
02:28:46,320 --> 02:28:50,680
है ये कहां लिखा हुआ है कि आप घट रामायण को नहीं मानेंगे

2067
02:28:50,680 --> 02:28:55,080
य कहा लिखा हैता क्योंकि गट रामायण यदि वाल्मीकि रामायण

2068
02:28:55,080 --> 02:28:59,400
का विरोध करेगी तो नहीं मानेंगे तुलसीदास जी ने लिखा है तुलसीदास

2069
02:28:59,400 --> 02:29:03,480
जी का जितना भी लिखा हुआ सबको गलत साबित कर दीजिए तुलसीदास का लिखा

2070
02:29:03,480 --> 02:29:07,760
माने होगा तो नहीं मानेंगे तुलसीदास जी ने कुछ ऐसा नहीं लिखा जो वाल्मीकि

2071
02:29:07,760 --> 02:29:12,000
रामायण का विरोध हो आपको हम दिखा देरा फोटो

2072
02:29:12,000 --> 02:29:18,000
उसका दिखा दे रहे हैं उसमें लिखा क्या चीज है दिखाओ

2073
02:29:21,080 --> 02:29:25,240
सबसे बड़ी इनकी भूल तो यह है कि परमात्मा संघार नहीं करता

2074
02:29:25,240 --> 02:29:29,400
है संघार करने वाला कोई और है कंफ्यूजन

2075
02:29:29,400 --> 02:29:34,120
यही पर है इन लोगों का कि काल करता है जो कुछ करता है परमात्मा

2076
02:29:34,120 --> 02:29:38,160
कुछ नहीं करता हैन कुछ नहीं है बस कपट का आश्रय और कोई

2077
02:29:38,160 --> 02:29:42,160
बात नहीं अरे घट रामायण क्यों ला रहे हो भाई कौन है घट रामायण वाले हम

2078
02:29:42,160 --> 02:29:47,240
नहीं जानते य देखि तुलसीदास हाथरस वाला लिखा हुआ

2079
02:29:47,240 --> 02:29:51,560
है लसम मानस की बात कर रहा हूं

2080
02:29:51,560 --> 02:29:56,440
तुम तो अपनी कुछ भी लिख लाओ सब कुछ मान लेंगे क्याई

2081
02:29:56,440 --> 02:30:01,360
कहां से छपा उसको तो हम दिखा दे रहे है छपा कहा से है अरे तो ऐसे तो अभी

2082
02:30:01,360 --> 02:30:05,560
बोल रहा य शिवांश नारायण द्वेदी की लिखी हुई कबीर सागर हैलो लो

2083
02:30:05,560 --> 02:30:09,960
लिख देता हूं लो कबीर सागर लो और इसको कल छ

2084
02:30:09,960 --> 02:30:13,000
दूंगा

2085
02:30:13,000 --> 02:30:19,000
मैं रामपाल तत्वदर्शी नहीं है

2086
02:30:22,680 --> 02:30:27,200
बाबू भाई कबीर दास जी क्या सृष्टि का संघार करते

2087
02:30:27,200 --> 02:30:31,200
हैं इस गीता को अगर आप लोग गलत साबित कर देंगे तो जीवन भर

2088
02:30:31,200 --> 02:30:35,440
आप लोग का चेला बन जाऊगा गीता को गलत साबित कहा

2089
02:30:35,440 --> 02:30:38,480
कर रहे

2090
02:30:38,480 --> 02:30:42,840
ल नहीं है खा दि

2091
02:30:42,840 --> 02:30:46,920
श्री कृष्ण अरेता मुझे

2092
02:30:46,920 --> 02:30:51,520
दिखाओ जो काल है व श्री कृष्ण से अलग है वो

2093
02:30:51,520 --> 02:30:56,360
दिखाओ जी दिखा रहे हैं हां दिखाओ

2094
02:30:56,360 --> 02:31:02,360
बेवकूफ कहीं के मूर्खों की

2095
02:31:08,760 --> 02:31:13,040
टोली सब कुछ बोलने के बाद गीता गलत है क्या गीता गलत है

2096
02:31:13,040 --> 02:31:17,360
क्या जो पूछ रहा हूं उसका आंसर नहीं है ग

2097
02:31:17,360 --> 02:31:23,200
मिला लीजिए गीता

2098
02:31:23,200 --> 02:31:27,400
बहुत बड़ा तुमको मौका मिल गया बोलने का बोलो गीता अध्याय 14

2099
02:31:27,400 --> 02:31:33,400
श्लोक नंबर पा लिए हा हा क्या लिखा है

2100
02:31:44,600 --> 02:31:48,600
पढ़ो अरे क्या लिखा है पढ़ो जी जी

2101
02:31:48,600 --> 02:31:52,760
पढ़ रसरा श्लोक से पढ़ रहे हैं तीसरा श्लोक से हा

2102
02:31:52,760 --> 02:31:55,880
हां लिखा हु हे अर्जुन मेरी महत

2103
02:31:55,880 --> 02:32:00,360
ब्रह्मा रूप मूल प्रकृति संपूर्ण भूतों की योनि है अर्थात गर्भधान

2104
02:32:00,360 --> 02:32:04,840
का स्थान है और मैं उस योनि में चेतन समुदाय

2105
02:32:04,840 --> 02:32:08,920
रूप गर्भ को स्थापन करता हूं उस जड़ चेतन के संयोग से

2106
02:32:08,920 --> 02:32:10,760
सब भूतों की उत्पत्ति होती

2107
02:32:10,760 --> 02:32:15,120
है इसके बाद इसके बाद आलोक

2108
02:32:15,120 --> 02:32:19,200
है कौन सा श्लोक है

2109
02:32:19,200 --> 02:32:23,480
ये श्लोक नंबर तीन का है ठीक

2110
02:32:23,480 --> 02:32:27,960
बोलो आगे बोलो चौथा श्लोक में बोल रहा है कि हे अर्जुन

2111
02:32:27,960 --> 02:32:32,280
नाना प्रकार की सब योनियों में जितनी मूर्तियां अर्थात शरीर धारी प्राणी

2112
02:32:32,280 --> 02:32:36,520
उत्पन्न होते हैं प्रकृति तो उन सब की गर्भ धारण करने वाली

2113
02:32:36,520 --> 02:32:40,600
माता है और मैं बीज को स्थापन करने वाला पिता

2114
02:32:40,600 --> 02:32:44,960
हूं इसके बाद पाचवा श्लोक में देखिए लिखा है

2115
02:32:44,960 --> 02:32:49,000
हे अर्जुन सतोगुण रजोगुण अ तमोगुण यह प्रकृति से

2116
02:32:49,000 --> 02:32:53,760
उत्पन्न तीनों अविनाशी जीवात्मा को शरीर में बांधते

2117
02:32:53,760 --> 02:32:58,040
हैं ये तीनों गुण है रज गुण ब्रह्मा स विम

2118
02:32:58,040 --> 02:33:02,120
यह बताओ कि यह कहां लिखा है कि यह जो गीता बोल रहा है

2119
02:33:02,120 --> 02:33:06,160
वह काल है और काल जो है व श्री कृष्ण से अलग है यह कहा लिखा

2120
02:33:06,160 --> 02:33:10,280
है यह तो हम भी पढ़ रहे हैं

2121
02:33:10,280 --> 02:33:14,800
इसमें इसमें यह बता रहा है कि जो रज गुण स

2122
02:33:14,800 --> 02:33:18,960
क्या बता रहा है बोलो बोलो ये बता रहा है कि रजो गुण

2123
02:33:18,960 --> 02:33:23,040
सतो प्रकृति से उत्पन्न हुए है ग धारण करने वाली माता

2124
02:33:23,040 --> 02:33:25,800
है और मैं इसके अंदर बीज स्थापित करता हूं

2125
02:33:25,800 --> 02:33:30,400
मैं पिता हूं यह बोल रहा है

2126
02:33:30,400 --> 02:33:34,560
ये बोल रहा है य है ब्र से अलग

2127
02:33:34,560 --> 02:33:39,080
कोई काल है य कहा लिखा है

2128
02:33:39,080 --> 02:33:43,080
यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि य ब्रह्मा विष्णु म इसके बच्चे है और

2129
02:33:43,080 --> 02:33:47,120
माता पिता पूछ रहा हूं कि यह जो काल है वो श्री कृष्ण से

2130
02:33:47,120 --> 02:33:51,240
अलग है यह बताना ब्रह्मा विष्णु महेश की बात कहां से आ अभी

2131
02:33:51,240 --> 02:33:55,320
अभी ब्रह्मा विष्णु महेश का सवाल चल रहा है क्या तुमको हमें यह बताना

2132
02:33:55,320 --> 02:33:59,480
है कि जो काल है जो तुम्हारे हिसाब से जो गीता है व कृष्ण ने

2133
02:33:59,480 --> 02:34:03,480
नहीं बोली है व किसी काल ने बोली है वो जो काल है व कृष्ण से

2134
02:34:03,480 --> 02:34:07,920
अलग काल है व कृष्ण नहीं है बोलो जी सर जी जी बता

2135
02:34:07,920 --> 02:34:12,840
गता गीता अ गीता अध लोक नंबर 13 खोलिए

2136
02:34:12,840 --> 02:34:16,840
खोल लेंगे खोलते रहो करवाओ बेज्जती अपनी और

2137
02:34:16,840 --> 02:34:22,840
रामपाल दास की

2138
02:34:22,840 --> 02:34:26,960
अच्छा भला इनको मैं बता रहा था तो सर क्या करें कहां क्या मतलब बड़े सीधे

2139
02:34:26,960 --> 02:34:31,240
बन के पूछ रहे थे इनको करना था अपना कुतर्क

2140
02:34:31,240 --> 02:34:35,400
वो तो सर आपके इस डिबेट में देख रहे हैं जनता देख रही है

2141
02:34:35,400 --> 02:34:39,400
पूरी जनता बोलो कौन सा कौन सा बताया आठवे

2142
02:34:39,400 --> 02:34:43,400
का आठवे का 13

2143
02:34:43,400 --> 02:34:47,840
श्लोक श्लोक का अर्थ यह है कि ओम इस एक अक्षर रूप ब्रह्मा

2144
02:34:47,840 --> 02:34:51,840
को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थ स्वरूप मुझ निर्गुण

2145
02:34:51,840 --> 02:34:56,280
ब्रह्मा का चिंतन करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है वह पुरुष

2146
02:34:56,280 --> 02:35:01,040
परम गति को प्राप्त होता है तो करिए ओम

2147
02:35:01,040 --> 02:35:05,200
का परम गति जी पाड़ी जी विषय बदल जाएगा बहुत

2148
02:35:05,200 --> 02:35:09,280
बहुत दिक्कत होती है फिर विषय बदलता है तो रुक जाइए हा इसमें कहां

2149
02:35:09,280 --> 02:35:13,280
लिखा है कि श्री कृष्ण से अलग कोई काल है इसने बोल रहा

2150
02:35:13,280 --> 02:35:17,440
है कि मुझ ब्रह्म का ओम मंत्र है ओम मंत्र का जाप करता हु रहा

2151
02:35:17,440 --> 02:35:21,640
हूं श्री कृष्ण से कोई अलग काल है कहां लिखा

2152
02:35:21,640 --> 02:35:25,680
है बोल रहा है कि मैं ब्रह्म हूं कृष्ण थोड़ी बता रहा है कि मैं कृष्ण हूं

2153
02:35:25,680 --> 02:35:29,760
ये कह रहा है मैं ब्रह्म हूं अरे पहले यह बताओ कि यह कहां लिखा है कि

2154
02:35:29,760 --> 02:35:34,160
गीता को बोलने वाला कोई श्री कृष्ण से अलग काल है तब तो तुम्हारी बात मानेंगे

2155
02:35:34,160 --> 02:35:38,040
मैं पूछ रहा हूं ये कहां लिखा है

2156
02:35:38,040 --> 02:35:42,120
दिखा रहा हूं दिखा रहा हूं एक मिनट तुरंत दिखा दे रहा दिखा बारबार

2157
02:35:42,120 --> 02:35:46,280
दिखाओ अरे वो घुमाते रहेगा आप क्या मतलब एक घंटे से यही

2158
02:35:46,280 --> 02:35:50,400
चल रहा है यही देखिए स सचाई जब दिखाते

2159
02:35:50,400 --> 02:35:54,520
तो आप लोग धीरे से साइड कर देते हैं क्योंकि आप लोग हारते हैं देखो

2160
02:35:54,520 --> 02:36:00,520
बाबू फ बोलोगे तो तुम्हारे कैमरे के अंदर घुस के कटा मारना पड़ेगा

2161
02:36:02,520 --> 02:36:06,640
मुझे एक घंटे से तो जेल रहे भैया

2162
02:36:06,640 --> 02:36:11,720
हद होती

2163
02:36:11,720 --> 02:36:17,720
है दिखाओ भैया दिखा रहा हूं

2164
02:36:29,280 --> 02:36:35,280
आज तो शिवान जी अपना आप

2165
02:36:35,320 --> 02:36:39,560
र सर तो ऐसा लग रहा है फट के बाहर आ जाएगा हमारे स्क्रीन

2166
02:36:39,560 --> 02:36:43,600
के ऊपर जो हालत हो गई है ना

2167
02:36:43,600 --> 02:36:46,800
सबकी हालत यही हो गई

2168
02:36:46,800 --> 02:36:51,480
है गीता अध्याय शलोक नंबर गीता

2169
02:36:51,480 --> 02:36:55,560
गीता अध्याय सात श्लोक नंबर 25 कैमरे में घुस के कोई कंटाप

2170
02:36:55,560 --> 02:37:00,040
मार नहीं सकता है तो उसका कोई अर्थ नहीं है केवल विनोद

2171
02:37:00,040 --> 02:37:04,280
है गीता अध्याय सा लोक नंबर इसमें

2172
02:37:04,280 --> 02:37:06,560
लिखा हुआ है कि अपनी योग माया

2173
02:37:06,560 --> 02:37:10,560
से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता इसलिए यह अज्ञानी

2174
02:37:10,560 --> 02:37:14,720
जन समुदाय मुझे मुझ जन्म रहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं

2175
02:37:14,720 --> 02:37:20,080
जानते अर्थात मुझे जन्मने मरने वाला समझता है

2176
02:37:20,080 --> 02:37:24,080
राइट इसमें यह कहा लिखा है कि यह कालने यह काल बोल रहा है

2177
02:37:24,080 --> 02:37:28,280
और काल श्री कृष्ण से अलग है

2178
02:37:28,280 --> 02:37:32,640
पहले इसको देख लीजिए क्या कर रहा है कि मैं जन्मने मरने वा

2179
02:37:32,640 --> 02:37:38,640
बात बताओ की काल ने बोली और काल श्री कृष्ण से अलग है दो चीज

2180
02:37:39,080 --> 02:37:43,160
दिखाओ काल श्री कृष्ण से अलग है इसने कह रहा है कि मुझे जन्मने मरने वाला

2181
02:37:43,160 --> 02:37:47,680
प्राणी समुदाय समझ रहे ज कोई अगर ये बोलेगा मुझे ज

2182
02:37:47,680 --> 02:37:51,920
जन्ने मरने वाला प्राणी समझ करके मुझे साधारण समझता है

2183
02:37:51,920 --> 02:37:56,200
तो वो श्री कृष्ण नहीं है एक चक्र लोक दोबारा दोहरा

2184
02:37:56,200 --> 02:38:00,520
दे रहे हैं समझ लीजिए यह कह रहा है कि अपनी योग माया

2185
02:38:00,520 --> 02:38:04,720
से छिपा हुआ हूं मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं

2186
02:38:04,720 --> 02:38:08,960
होता सबके प्रत्यक्ष नहीं होता इसलिए यह

2187
02:38:08,960 --> 02:38:13,000
अज्ञानी जन समुदाय मुझ जन्म रहित अविनाशी परमेश्वर

2188
02:38:13,000 --> 02:38:13,500
को नहीं

2189
02:38:13,480 --> 02:38:19,480
जानते अर्थात मुझे जन्मने मरने वाला समझते हैं

2190
02:38:19,720 --> 02:38:23,800
श्लोक को समझिए लोक इससे कहा से दुआ किय जो बोल

2191
02:38:23,800 --> 02:38:27,960
रहे हैं वह श्री कृष्ण नहीं है ये तो कह र है मैं छिपा रता

2192
02:38:27,960 --> 02:38:32,080
किसी के सामने ही नहीं होता हा श्र कृष्ण का भी

2193
02:38:32,080 --> 02:38:36,240
रूप है श्री कृष्ण का ही ऐसा एक रूप है जो सबके सामने नहीं

2194
02:38:36,240 --> 02:38:40,240
आता यह भी तो क रहा है मैं जन्मने मरने वाला नहीं हूं देखिए

2195
02:38:40,240 --> 02:38:44,560
क रहा है श्री कृष्ण भगवान श्री कृष्ण भगवान का जन्मने मरने

2196
02:38:44,560 --> 02:38:48,800
वाला रूप नहीं है ऐसा भी एक रूप है उनका जो जनता मरता

2197
02:38:48,800 --> 02:38:52,840
नहीं है और बोलो च अ

2198
02:38:52,840 --> 02:38:56,960
तो ये कह रहा हूं कि अगर यहां पर यह कह दिया गया कि वो जनता मरता

2199
02:38:56,960 --> 02:39:01,720
नहीं है तो वह श्री कृष्ण से अलग कोई काल है यह कहां लिखा है

2200
02:39:01,720 --> 02:39:05,760
अगर वह यह कह रहा है कि व जनता मरता नहीं है तो वह श्री कृष्ण से अलग हो

2201
02:39:05,760 --> 02:39:08,840
गया यह कहां लिखा

2202
02:39:08,840 --> 02:39:12,920
है य य श्लोक प्रूफ कर रहा है 14 का

2203
02:39:12,920 --> 02:39:17,800
एक 14 का एक से लेकर पाच लोक त वो प्रूफ किया आपको

2204
02:39:17,800 --> 02:39:22,240
अच्छा तुम ये कह रहे हो एक मिनट एक मिनट एक मिनट तुम ये कह रहे हो

2205
02:39:22,240 --> 02:39:26,240
कि ब्रह्म ये कह रहा है ये जो काल काल काल ब्रह्म ये

2206
02:39:26,240 --> 02:39:28,720
कह रहा है कि मैं जनता मरता नहीं हूं जबकि श्री कृष्ण

2207
02:39:28,720 --> 02:39:33,320
का जन्म वो होता है मृत्यु जी ठीक है जी अच्छा

2208
02:39:33,320 --> 02:39:37,320
अब यह बताओ कि काल ने कहीं पर गीता

2209
02:39:37,320 --> 02:39:41,520
में यह कहा है कि हे अर्जुन काल बोल रहा है ना हम

2210
02:39:41,520 --> 02:39:45,760
काल ही बोल रहा है ना गीता तो काल काल

2211
02:39:45,760 --> 02:39:49,960
ने भगवत गीता में कहीं पर यह कहा है क्या कि तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो

2212
02:39:49,960 --> 02:39:54,000
चुके जी बोला है बोला

2213
02:39:54,000 --> 02:39:58,200
कहा यहां वो ये कह रहा है मेरी जन्म मृत्यु नहीं होती वहां वो कह रहा है मेरी जन्म

2214
02:39:58,200 --> 02:40:02,880
होता है भाई दोनों बात तोय प्रूफ किया

2215
02:40:02,880 --> 02:40:08,880
दो तरह से बात बोला इसने तो फिर कौन सी बात हो क्यों मान रहे

2216
02:40:10,480 --> 02:40:14,560
हो भाई ये जब दोनों तरह का बात बोल रहा है मैं पूछ

2217
02:40:14,560 --> 02:40:18,600
रहा हूं कौन सी बात और क्यों मान रहे हो काल ही यह बोल रहा

2218
02:40:18,600 --> 02:40:22,960
है ना मेरी जन्म मृत्यु नहीं होती है मेरी मुझे जन्म मरने वाला समझते

2219
02:40:22,960 --> 02:40:27,280
मूर्ख है और काल ही बोल रहा है तुम्हारे हिसाब से कि मेरे और तेरे बहुत से जन्म

2220
02:40:27,280 --> 02:40:31,320
हो चुके हैं य यह बोल रहा है कि मनुष्य

2221
02:40:31,320 --> 02:40:35,400
की भाति में जन्मने मरने वाला नहीं हर समय जन्मता मरता नहीं हूं जैसे मनुष्य 100

2222
02:40:35,400 --> 02:40:41,400
साल में मर जाता है जन् मरण होता है जन् मरण होता है

2223
02:40:42,760 --> 02:40:46,800
इसका मरण अगर होता है मनुष्य की भाति नहीं होता है तो श्री कृष्ण

2224
02:40:46,800 --> 02:40:50,800
से अलग हो गया यह कहां लिखा है हां इसी में लिखा है ये कह रहा

2225
02:40:50,800 --> 02:40:55,200
है कि मैं अपनी योग माया से छिपा रहता हूं सबके प्रत्यक्ष

2226
02:40:55,200 --> 02:40:59,240
नहीं होता योग माया से छिपे रहते हैं तो वो श्री कृष्ण से अलग है

2227
02:40:59,240 --> 02:41:03,760
यह कहां लिखा है मेरे

2228
02:41:03,760 --> 02:41:07,840
भाई अरे यार जब ये 11वां अध्याय में विराट

2229
02:41:07,840 --> 02:41:11,880
रूप दिखाया और सबको देखना अर्जुन ने जब देखा तो उसके मुंह में सब घुस उड़ रहे

2230
02:41:11,880 --> 02:41:16,000
हैं वो सबको खा रहा है चबा रहा है ये बताइए कोई भगवान खाता है क्या ये तो राक्षस

2231
02:41:16,000 --> 02:41:20,800
लोग खाते हैं ऐसे क लिखा है ये कहां लिखा है भगवान नहीं खाता

2232
02:41:20,800 --> 02:41:24,800
क्या भगवान किसी जी पहले मैं तुम्ह लिखा

2233
02:41:24,800 --> 02:41:28,960
दिखाऊंगा पहले तुम मुझे बताओ भगवान भगवान नहीं खाता है यह

2234
02:41:28,960 --> 02:41:33,200
कहा लिखा है भगवान किसी जीव को नहीं खाता है भगवान क्यों

2235
02:41:33,200 --> 02:41:38,480
न नहीं ता है य लिखा

2236
02:41:38,480 --> 02:41:42,960
है अरे यार वो दयालु भगवान है तो काहे के लिए खाए कृ भगवान

2237
02:41:42,960 --> 02:41:48,960
तुमसे पूछ रहा हूं भगवान नहीं खाता है यह कहां लिखा है

2238
02:41:50,840 --> 02:41:54,880
जी गोविंद जी बोलिए वो ना बाबूराम जी बस

2239
02:41:54,880 --> 02:41:58,880
आपसे इतनी बात जानना चाह रहे हैं शिवास जी कि आपने यह

2240
02:41:58,880 --> 02:42:02,920
जो बात पढ़ी है कि भगवान नहीं खाते हैं किसी को भी या नहीं उसको ग्रहण

2241
02:42:02,920 --> 02:42:06,960
कर सकते ये आपने कहां पर पढ़ी है वो ये नहीं कह रहे कि आप गलत कह रहे हो वो पूछ रहे हैं

2242
02:42:06,960 --> 02:42:11,280
कि कहां पर किस शास्त्र में पड़ा क्योंकि आपकी जो भी बात होगी ना वो शास्त्र

2243
02:42:11,280 --> 02:42:15,320
अनुसार होनी चाहिए है ना तो आप अपने से बात नहीं कह सकते कि भगवान

2244
02:42:15,320 --> 02:42:19,440
जाके दुकान से टॉफी नहीं ले सकते भगवान इसको खा नहीं सकते

2245
02:42:19,440 --> 02:42:23,680
भगवान वहां पर बैठकर मंजीरा बजा के कीर्तन नहीं कर सकते ठीक है

2246
02:42:23,680 --> 02:42:28,000
आपकी बात पूछ हम पूछ रहे हैं कि कहां पढ़ा आपने यह

2247
02:42:28,000 --> 02:42:32,200
बता प्रूफ कर रहे आपको इसको आठवे अध्याय कावा

2248
02:42:32,200 --> 02:42:34,640
लोक

2249
02:42:34,640 --> 02:42:38,640
खोलिए यार य भाई ये टाइम वेस्ट कर रहे हैं कुछ नहीं कर रहे हैं

2250
02:42:38,640 --> 02:42:42,680
बार बार बस ये कर लो वो कर लो तु मुझे ब बाब भैया

2251
02:42:42,680 --> 02:42:47,200
बाबू भैया मैं आपको यह पूछ रहा हूं एक मिनट अब आप शलोक मत पूछो

2252
02:42:47,200 --> 02:42:51,200
अब आप मुझे बता दो क्या भ गीता का कोई ऐसा श्लोक है जिसमें

2253
02:42:51,200 --> 02:42:53,720
य लिखा हो कि भगवत गीता श्री

2254
02:42:53,720 --> 02:42:58,840
कृष्ण से अलग किसी काल ने बोली है है क्या

2255
02:42:58,840 --> 02:43:03,000
बिल्कुल बोली है दिखा जी श्री कृष्ण यह लिखा है श्री

2256
02:43:03,000 --> 02:43:07,280
कृष्ण से अलग काल ने बोली है तभी लोक खोलो

2257
02:43:07,280 --> 02:43:11,280
फालतू मत बोलो उसमें श्री कृष्ण का कोई नाम तक नहीं

2258
02:43:11,280 --> 02:43:15,520
है कि श्री कृष्ण ने बोला होगा रहा नाम नहीं है मगर बोल तो

2259
02:43:15,520 --> 02:43:19,520
शरीर किसका है अभी तुम बोल रहे हो क्या कोई और बोल रहा

2260
02:43:19,520 --> 02:43:23,720
है ये बताओ ये बताइए कोई प्रेत बन के सी पर

2261
02:43:23,720 --> 02:43:27,960
अभी अभी एक मिनट मैं पूछ रहा हूं अभी तुम बोल रहे हो या कोई और बोल रहा

2262
02:43:27,960 --> 02:43:32,200
है अभी तो मैं बोल रहा हूं लेकिन जब कोई प्रेत बढ़ सिर पर बैठ जाएगा

2263
02:43:32,200 --> 02:43:36,360
वो तो बताओ क्या जब तुम बोल रहे हो खुद मुख

2264
02:43:36,360 --> 02:43:40,400
से तो हमें यह पूछने की और तुम्हें बताने की आवश्यकता है कि

2265
02:43:40,400 --> 02:43:43,280
अभी मैं ही बोल रहा

2266
02:43:43,280 --> 02:43:47,440
हूं इसने अपने एक मिनट मैंने तुमसे जो

2267
02:43:47,440 --> 02:43:51,480
सवाल किया उसका आंसर दो बाबू अभी जब तुम बोल रहे हो

2268
02:43:51,480 --> 02:43:55,520
मेरे सामने तो क्या मुझे तुमसे पूछने की और तुम्हें मुझे बताने

2269
02:43:55,520 --> 02:44:00,080
की आवश्यकता है कि तुम ही बोल रहे

2270
02:44:00,080 --> 02:44:05,800
हो अगर गीता गी मैंने जो पूछा है उसका जवाब

2271
02:44:05,800 --> 02:44:08,880
दो मैंने जो पूछा उसका जवाब

2272
02:44:08,880 --> 02:44:13,200
दो हा हा पूछने की जरूरत नहीं है पूछने

2273
02:44:13,200 --> 02:44:17,240
की जरूरत नहीं है नहीं है ना पूछने की ना बताने की

2274
02:44:17,240 --> 02:44:21,720
ना पूछने की ना बताने की अब सुनो एक मिनट एक मिनट

2275
02:44:21,720 --> 02:44:25,880
प पट को हमारा बात आपका पकड़ गया रुक

2276
02:44:25,880 --> 02:44:29,880
जा एक मिनट एक मिनट भगवत गीता का

2277
02:44:29,880 --> 02:44:34,160
ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने भगवान श्री कृष्ण से भिन्न

2278
02:44:34,160 --> 02:44:38,240
किसी काल ने दिया है यह तुम नहीं बता पाए अब मैं बताता

2279
02:44:38,240 --> 02:44:42,440
हूं भगवत गीता का ज्ञान कृष्ण ने ही दिया है और कृष्ण ही काल

2280
02:44:42,440 --> 02:44:47,240
है मैं तुम्हें दिखा देता हूं हम बता रहे आप बताएंगे

2281
02:44:47,240 --> 02:44:51,320
रे पास बाबू कहीं लिखा है कि काल है

2282
02:44:51,320 --> 02:44:55,600
श्री कृष्ण से अलग है आपने बोला कि अगर सामने

2283
02:44:55,600 --> 02:44:59,640
से कोई बात कर रहा है तो ये बताने की जरूरत नहीं है कि किसी और ने बोल रहा है आप इस बात

2284
02:44:59,640 --> 02:45:04,000
को बोले अब लेकिन अर्जुन ने 11 अध्याय में पूछा कि हे उग्र रूप वाले आप कौन

2285
02:45:04,000 --> 02:45:08,160
है आपको देख करके मुझे बहुत डर लाग सहस्त्र बाहु आप कौन हो तो उसने

2286
02:45:08,160 --> 02:45:12,760
बोला कि मैं काल हूं सबको खाने के लिए आया हूं अर्जुन तेरे अलावा किसीने मेरा

2287
02:45:12,760 --> 02:45:16,920
विराट रूप को किसी ने नहीं देखा तो इससे सिद्ध

2288
02:45:16,920 --> 02:45:21,040
हो गया के काल उनसे अलग है बिल राइट क

2289
02:45:21,040 --> 02:45:24,600
खा है कहा लिखा

2290
02:45:24,600 --> 02:45:28,800
है अरे यार 14 अध अगर किसी व्यक्ति ने

2291
02:45:28,800 --> 02:45:33,000
अगर किसी व्यक्ति ने अपना उग्र रूप दिखा दिया किसी को और

2292
02:45:33,000 --> 02:45:37,080
वहां पर भावा वेश में आकर के व्यक्ति यह बोल रहा है कि मैं आपको पहचान

2293
02:45:37,080 --> 02:45:41,560
नहीं पा रहा हूं आप कौन है तो वह अपने रुद रूप को दिखा रहा है कि मैं काल हूं

2294
02:45:41,560 --> 02:45:45,840
तो वह काल श्री कृष्ण से अलग है यह कहां से हो गया

2295
02:45:45,840 --> 02:45:51,000
भाई उसने यह क्यों नहीं क दिया मैं श्री कृष्ण हूं उसने तो

2296
02:45:51,000 --> 02:45:55,160
अच्छा अच्छा ठीक है अब ये बताओ कि रामपाल

2297
02:45:55,160 --> 02:45:59,960
दास जी ने ये क्यों नहीं कह दिया कि मैं तत्वदर्शी हूं ये क्यों कहा कि मैं कुत्ता

2298
02:45:59,960 --> 02:46:04,040
हूं उन्होंने ये बोला है कि मैं जगत गुरु तत्वदर्शी उनके पुस्तक में देखिए

2299
02:46:04,040 --> 02:46:08,240
लिखा हुआ है उन्होंने बोला मैं जगत भैया इनको सुनाओ इनको सुनाओ

2300
02:46:08,240 --> 02:46:12,920
मैं कुत्ता हूं कह रहे हैं ये सुना है तुमने कि सुनना

2301
02:46:12,920 --> 02:46:16,960
है उन्होंने बोला है कि मैं उस परमात्मा का कुत्ता हूं 24

2302
02:46:16,960 --> 02:46:21,000
घंटा उनका ज्ञान को भोगते रहता हूं आपने बोला

2303
02:46:21,000 --> 02:46:26,080
है कि मैं तुच्छ सा जीव हूं

2304
02:46:26,080 --> 02:46:30,080
तुच्छ जबरदस्ती करते हैं यार अरे मैं पूछ रहा हूं

2305
02:46:30,080 --> 02:46:34,880
उन्होंने बोला है मैं तुच्छ सा जीव

2306
02:46:34,880 --> 02:46:39,320
हूं देखिए हमारे लास्ट हो रहा है अगर आप और सुनली

2307
02:46:39,320 --> 02:46:43,480
तो खत्म हो रहा है मेरा आपसे बहुत सुन चुके आप जा सकते

2308
02:46:43,480 --> 02:46:48,040
हैं ठीक है जी कोई बढ़िया आया कर

2309
02:46:48,040 --> 02:46:54,040
एक मिनट बाब भाई एक मिनट किधर

2310
02:46:54,200 --> 02:46:58,840
गए किधर गए बाबू भाई जशवंत जी आए

2311
02:46:58,840 --> 02:47:02,920
हो बाबू भाई लेट गए नहीं इनको लगता है कि

2312
02:47:02,920 --> 02:47:06,960
परमात्मा सार नहीं करते गीता में ही अध्याय 13 के

2313
02:47:06,960 --> 02:47:11,200
16 श्लोक में लिखा है वे परमात्मा स्वयं विभाग रहित होते हुए

2314
02:47:11,200 --> 02:47:15,960
भी संपूर्ण प्राणियों में विभक्ति की तरह स्थित है और

2315
02:47:15,960 --> 02:47:20,040
वे जानने योग्य परमात्मा ही संपूर्ण प्राणी के उत्पन्न करने

2316
02:47:20,040 --> 02:47:25,320
वाले तथा उनका भरण पोषण करने वाले और संघार करने वाले हैं

2317
02:47:25,320 --> 02:47:29,800
लो वही

2318
02:47:29,800 --> 02:47:33,800
परमात्मा चला गया चला गया यह इनको मैं बताना चाह

2319
02:47:33,800 --> 02:47:37,800
रहा था मैं य गीता में लि रामपाल दास की तरफ से

2320
02:47:37,800 --> 02:47:42,040
चलिए अब एंड करते हैं अब हो गया बाबू भाई मैं आपको

2321
02:47:42,040 --> 02:47:46,120
कोई थप्पड़ पपड़ नहीं मारने की बात कर रहा था मैं टीवी

2322
02:47:46,120 --> 02:47:50,160
में घुसकर जो च चित्र था एक

2323
02:47:50,160 --> 02:47:54,800
टीवी में घुसकर कोई किसी को थप्पड़ नहीं मार सकता है टीवी में घुसकर किसी

2324
02:47:54,800 --> 02:47:58,800
को चित्र को जो है विनोद कर रहा था कि मैं

2325
02:47:58,800 --> 02:48:02,960
चित्र को जो है थप्पड़ मार दूंगा टीवी में घुसकर तो ये काल्पनिक बात

2326
02:48:02,960 --> 02:48:06,960
है यह किसी को कोई धमकी नहीं है मारने की ऐसा कुछ नहीं है तो

2327
02:48:06,960 --> 02:48:11,240
ऐसा ना समझे कि दोबारा ना आए यह सोचते हुए कि हमने आपको जो है

2328
02:48:11,240 --> 02:48:15,480
ऐसी कोई वो मारने मारने की बात कह दी मगर आप भी थोड़ा

2329
02:48:15,480 --> 02:48:19,680
सा बुद्धि विवेक लेकर के आए कि जो प्रश्न आपसे बारबार पूछा जा उस प्रश्न का उत्तर

2330
02:48:19,680 --> 02:48:23,920
ना दे कर के आप अपने हाथ में जो लेकर आए हैं बस उसी पर बात कर रहे

2331
02:48:23,920 --> 02:48:29,280
हैं तो टीवी में घुसकर जो चित्र

2332
02:48:29,280 --> 02:48:33,800
है उसको हाथ लगाने की रूप में मैंने ये बात कही

2333
02:48:33,800 --> 02:48:38,400
है वस्तुत वास्तविकता ये है कि आप हमारे भाई हैं और

2334
02:48:38,400 --> 02:48:42,880
भटके हुए तो बात अलग है मगर आपको

2335
02:48:42,880 --> 02:48:44,840
ऐसा कोई अभद्र आचरण आपके साथ नहीं

2336
02:48:44,840 --> 02:48:49,560
हो सकता चलिए

2337
02:48:49,560 --> 02:48:53,800
गीता मानते हैं पर महाभारत नहीं मानते हैं

2338
02:48:53,800 --> 02:48:57,840
अगर कहीं पर इनको लग रहा है कि काल काल बोल रहा है तो वोह बात

2339
02:48:57,840 --> 02:49:02,040
कट जाएगी जो महाभारत में लिखी है हां भाई जसवंत

2340
02:49:02,040 --> 02:49:06,240
रावत जी बोलिए जय श्री राम भाई जी जय

2341
02:49:06,240 --> 02:49:10,320
श्री राम भाई जी पहले मैं इनके

2342
02:49:10,320 --> 02:49:14,000
लिए कुछ कहना चाहता

2343
02:49:14,000 --> 02:49:18,000
हूं जी मैं मैं कहना चाहता हूं

2344
02:49:18,000 --> 02:49:23,160
पहले तो इनको यह पूछो प्रकृति है क्या

2345
02:49:23,160 --> 02:49:28,000
प्रकृति अपन को मिलेगी गीता अध्याय सात के

2346
02:49:28,000 --> 02:49:32,080
श्लोक नंबर चार और पाच में

2347
02:49:32,080 --> 02:49:36,080
मैं बताऊं प्रकृति क्या है पहले इनको यह पूछो प्रकृति श्री कृष्ण से

2348
02:49:36,080 --> 02:49:41,520
अलग नहीं है वही श्री कृष्ण है वही प्रकृति

2349
02:49:41,520 --> 02:49:45,720
है आपको एक बात बताऊ मेरी बात सुनिए जसवंत रावत राजावत

2350
02:49:45,720 --> 02:49:49,760
जी देखिए हा जी हा जी हम सब जानते वास्तविकता क्या

2351
02:49:49,760 --> 02:49:53,800
है इनके साथ आप शास्त्र के प्रमाण देते

2352
02:49:53,800 --> 02:49:58,000
रहोगे ये जो शास्त्र के प्रमाण इन्होंने रटे हैं

2353
02:49:58,000 --> 02:49:59,920
यह केवल उसको ही दिखाएंगे

2354
02:49:59,920 --> 02:50:04,080
आप कितने भी शास्त्रों के प्रमाण दे दो वह सब इनके लिए गलत

2355
02:50:04,080 --> 02:50:08,360
है क्योंकि इनके पास जो शास्त्रीय प्रमाण है चुनिंदा

2356
02:50:08,360 --> 02:50:12,520
वही सही है उनका अर्थ भी वही सही है जो इनको तिचा दर्शी

2357
02:50:12,520 --> 02:50:16,640
जी जाने से पहले दिखा गए पूछने की ये

2358
02:50:16,640 --> 02:50:20,920
है कि ईश्वर का आविर्भाव रो भाव नहीं होता है

2359
02:50:20,920 --> 02:50:24,920
चले गए फिलहाल तो मगर इनसे पूछने की बात यह है कि ईश्वर का यदि आविर्भाव

2360
02:50:24,920 --> 02:50:28,640
तिरो भाव नहीं होता है

2361
02:50:28,640 --> 02:50:33,320
तो जहां पर इनका ईश्वर बैठा है सतलोक वो किसने बनाया

2362
02:50:33,320 --> 02:50:37,440
सिंपल अभी कल वो बोल के गया ना कल वो बोल

2363
02:50:37,440 --> 02:50:41,440
के गया कि वो जगत से पहले अव्यक्त

2364
02:50:41,440 --> 02:50:46,160
रूप में था तो आर भाव भाव हो गया

2365
02:50:46,160 --> 02:50:50,280
अब इनको यह भी बताए कि अभी तो फिलहाल नहीं है महा

2366
02:50:50,280 --> 02:50:54,280
भारत की किताब कि श्री कृष्ण ने अभिमन्यु को जीवित क्यों नहीं किया मैं

2367
02:50:54,280 --> 02:50:58,480
प्रमाण सहित अरे देखिए वो सब बातें बहुत अलग

2368
02:50:58,480 --> 02:51:02,520
है उनको कुछ भी कहते रहोगे वो रट्टू राट रट के

2369
02:51:02,520 --> 02:51:07,120
जो बात आते हैं वो वही बस बोलते रहेंगे जब मैंने उनसे कई बार पूछा

2370
02:51:07,120 --> 02:51:11,320
ये कहां लिखा है कि अगर यहां पर कुछ लिखा है और वहां पर उसके विरुद्ध लिखा

2371
02:51:11,320 --> 02:51:15,200
है तो इनमें से कोई एक बात मान ली जाएगी दूसरी बात कट जाएगी

2372
02:51:15,200 --> 02:51:19,240
ये कहां लिखा है अरे मैं ये बता रहा कक वो

2373
02:51:19,240 --> 02:51:23,720
उन्होंने वही रटा है वो वही बोल सकते हैं जितनी चाबी भरी

2374
02:51:23,720 --> 02:51:28,000
जेल धाम निवासी ने उतना लिखलो ना

2375
02:51:28,000 --> 02:51:32,120
बस बस बस गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दवारा क्यों नहीं दिया

2376
02:51:32,120 --> 02:51:36,520
गीता ज्ञान इनको ये पूछो गीता ज्ञान की पुनः उनको एक कथा सुना के स्मृति

2377
02:51:36,520 --> 02:51:40,520
करा दी थी महाभारत पुराण को पढ़ो पता चल जाएगा किसी और

2378
02:51:40,520 --> 02:51:44,680
दिन लेते हैं जी ठीक श्रीराम गुरुकुल

2379
02:51:44,680 --> 02:51:49,080
गोविंद जी जय श्री रामसे जसवंत

2380
02:51:49,080 --> 02:51:53,360
जी कह रहे हैं कि इनको प्रकृति का नहीं पता तो जसवंत जी जैसे

2381
02:51:53,360 --> 02:51:57,360
जितने भी हमारे भाई बंधु है ना ठीक है उनको मैं पहले एक बात बता देता हूं

2382
02:51:57,360 --> 02:52:01,640
कि प्रकृति गहन विषय है जिस व्यक्ति को यह नहीं पता है जिनके

2383
02:52:01,640 --> 02:52:06,080
चेलों को कि प्रकट होने का मतलब क्या होता है हमारी इंद्रियों

2384
02:52:06,080 --> 02:52:10,400
के विषय क्या होते हैं हमारी इंद्रियों के नाम क्या होते हैं

2385
02:52:10,400 --> 02:52:14,400
ठीक है आविर्भव तिरो भाव जिस पर इनकी दुकानदारी चल रही है ठीक

2386
02:52:14,400 --> 02:52:18,640
है जो मेन प्रोडक्ट है इनके ठीक है उसका मतलब क्या होता है

2387
02:52:18,640 --> 02:52:22,680
और वो कहां पर लिखा है ठीक है इन इन सब ये

2388
02:52:22,680 --> 02:52:27,160
बेसिक क्वेश्चन मैंने कल इनसे पूछे थे कि भाई अध्याय

2389
02:52:27,160 --> 02:52:30,840
श्लोक में मंत्र में अंतर क्या होता है तो आप इनसे कोई बहुत बड़े

2390
02:52:30,840 --> 02:52:35,240
जो ज्ञान की ना उम्मीद मत रखा करिए ना ही इनसे कोई अति विषय

2391
02:52:35,240 --> 02:52:39,240
जो गहन विषय है जो ज्ञान पूर्वक या जो आप कह

2392
02:52:39,240 --> 02:52:43,320
सकते हो कि बड़े विषय हैं उन परे चर्चा ना किया करें इनसे

2393
02:52:43,320 --> 02:52:47,400
ठीक है हालांकि मैं आपको एक बात बताता हूं मैं परसु चोत पढ़ भी

2394
02:52:47,400 --> 02:52:51,600
रहा था पढ़ा भी रहा था जो वशिष्ट जी हैं जो

2395
02:52:51,600 --> 02:52:55,720
योग वशिष्ट में जो वशिष्ट जी हुए हैं वह भगवान श्री

2396
02:52:55,720 --> 02:52:59,840
राम को पढ़ा रहे हैं ठीक है उनको जो दे रहे हैं ज्ञान दे रहे

2397
02:52:59,840 --> 02:53:04,160
हैं उन्होंने इस बात पर भी बहुत अच्छी बात कही है कि अनाधि

2398
02:53:04,160 --> 02:53:08,560
कारी को ज्ञान देना मनुष्य स्वयं भी उससे यूत

2399
02:53:08,560 --> 02:53:12,960
होता है अपनी महिमा से और उसका तो कुछ जाता नहीं ठीक है

2400
02:53:12,960 --> 02:53:17,520
इसलिए विशेषक यह बात का भी ध्यान रखना है कि वशिष्ठ जी एक महापुरुष

2401
02:53:17,520 --> 02:53:21,640
थे ठीक है ऋषि थे तो उनकी बातों को भी थोड़ा सा हमें याद रखना चाहिए

2402
02:53:21,640 --> 02:53:25,800
इसलिए ऐसे व्यक्तियों के साथ इन सब चीजों इनको इन्हीं की बात से काटना

2403
02:53:25,800 --> 02:53:29,960
उत्तम है मेरे हिसाब से हां बस बस गीता तड़वी

2404
02:53:29,960 --> 02:53:34,000
जी आप आ जाइए और ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए बस

2405
02:53:34,000 --> 02:53:38,680
सीधी बात आप आ जाइए

2406
02:53:38,680 --> 02:53:42,840
मेरे को जो पता है वह मैं आपकी सेवा में लगा दूंगा ठीक है जितना

2407
02:53:42,840 --> 02:53:46,040
मेरे को पता होगा वो मैं आपकी सेवा में लगा दूंगा ना ठीक है बाकी

2408
02:53:46,040 --> 02:53:50,240
जो मेरे से गलती होगी वो मैं आपसे पूछ पूछ लूगा लोकेश

2409
02:53:50,240 --> 02:53:54,520
पांचाल जी कह रहे हैं कलयुग के ब्राह्मण गुंडे से कम नहीं आज शिवांश

2410
02:53:54,520 --> 02:53:58,920
भाई का जो रूप दिखा उससे स्पष्ट हो गया लोकेश

2411
02:53:58,920 --> 02:54:03,080
पांचाल जी अपने गुंडे को देखिए जिसने बोला है कि दुर्गा माता के साथ क्या

2412
02:54:03,080 --> 02:54:07,480
क्या होता है और यह वही व्यक्ति है जिसको मैंने पंक्ति बोली है ना विनोद

2413
02:54:07,480 --> 02:54:11,640
पूर्वक जिसमें की किसी को छुआ नहीं जा सकता टीवी में घुस करके यह

2414
02:54:11,640 --> 02:54:15,640
वही व्यक्ति है जो कल अभी एक दो दिन पहले य बोल रहा था कि दुर्गा माता के

2415
02:54:15,640 --> 02:54:20,000
साथ ये सब हुआ है क्यों हुआ है क्योंकि हमारे दर्शी संत जी ने बोला

2416
02:54:20,000 --> 02:54:24,400
है तो अपने गुंडई पर ध्यान

2417
02:54:24,400 --> 02:54:29,000
दीजिए और ज्यादा दिक्कत है तो आ जाइए देखा था आप आए थे जब

2418
02:54:29,000 --> 02:54:33,160
लाइव में जब लाइव में आए थे बोला बोल रहे थे मेरे

2419
02:54:33,160 --> 02:54:37,240
मेरा जो ईश्वर है उसको दुख होता है रोता है वो ये

2420
02:54:37,240 --> 02:54:41,360
बंदी छोड़ है ये बंदी छोड़ है

2421
02:54:41,360 --> 02:54:45,440
ऐसा छू से ईश्वर वो रो रहा है बंदी छोड़

2422
02:54:45,440 --> 02:54:51,440
तो हनुमान जी है ना छूट ही बंदी महासुख

2423
02:54:53,560 --> 02:54:57,800
मानते थोड़ अजर अमर है साथ चिरंजीवी है उनको

2424
02:54:57,800 --> 02:55:01,960
तो मानते ही नहीं है नहीं माने हमने इनकी इनकी कोई

2425
02:55:01,960 --> 02:55:06,000
हमने वो कोई इनकी स्ट थोड़ी देनी सत्य बात सत्य बोलने

2426
02:55:06,000 --> 02:55:09,760
वाले भाई साहब आपको क्या प्रॉब्लम

2427
02:55:09,760 --> 02:55:15,320
है चलिए ठीक है आज की चर्चा वो

2428
02:55:15,320 --> 02:55:19,320
रही लोकेश पांचाल जी आप यह लिखा दिखाइए

2429
02:55:19,320 --> 02:55:23,400
कि शास्त्रों में यदि दो अलग-अलग जगह दो अलग अलग प्रकार की बातें हो रही है

2430
02:55:23,400 --> 02:55:27,440
तो उनमें से वही बात माननी है जो लोकेश पांचाल ने स्वीकार की है

2431
02:55:27,440 --> 02:55:33,440
या उनके तिरछे दर्शी देल धाम निवासी ने स्वीकार की है हां

2432
02:55:33,600 --> 02:55:37,600
भाई कोई और है जो आना चाहता है उनका नेट

2433
02:55:37,600 --> 02:55:42,640
खत्म हो गया उनकी पिक्चर पूरी हो

2434
02:55:42,640 --> 02:55:48,640
गई पिक्चर खत्म पैसा हजम

2435
02:55:51,600 --> 02:55:55,640
सत्य जी अगर आपकी माता ने निष्ठा से दुख पिलाया तो आप भी चेहरा दिखाकर

2436
02:55:55,640 --> 02:55:59,760
आइए वहा पीछे से पीठ पीछे बोलने से कुछ नहीं होगा ठीक

2437
02:55:59,760 --> 02:56:03,840
है ऐसे कुत्ते भते रहते हैं

2438
02:56:03,840 --> 02:56:08,120
नहीं पड़ता महामंत्र वेदों में कहा लिखा है भाई

2439
02:56:08,120 --> 02:56:12,560
यह आप क्राइटेरिया डिसाइड मत करो कि वेदों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है

2440
02:56:12,560 --> 02:56:16,840
यह देख लीजिए भैया आप अभी कुछ बातें कर रहे थे

2441
02:56:16,840 --> 02:56:20,880
यह देख लीजिए कौन है क्या है क्या नहीं है

2442
02:56:20,880 --> 02:56:25,120
हेलो लोकेश पांचाल जी पॉइंट टू बी नोटे

2443
02:56:25,120 --> 02:56:28,160
कुछ दिखाई दे रहा है क्या स्क्रीन

2444
02:56:28,160 --> 02:56:34,160
पर अरे यह कोर्ट से

2445
02:56:49,880 --> 02:56:55,240
यह सिक्योरिटी है भाई इसमें क्या तकलीफ है बोल रहा है

2446
02:56:55,240 --> 02:56:59,320
यह सिक्योरिटी है अच्छा मान

2447
02:56:59,320 --> 02:57:03,880
लो की ईश्वर तो किसी को खाता मारता नहीं है

2448
02:57:03,880 --> 02:57:08,040
याय ईश्वर के लोग तो खाने मारने के लिए बंदूक लेकर चल रहे हैं और ईश्वर

2449
02:57:08,040 --> 02:57:12,560
को ईश्वर के लोगों को बंदूक की क्या आवश्यकता पड़ रही भाई

2450
02:57:12,560 --> 02:57:17,160
जो स्वयं परमेश्वर है उसको बंदूक लेकर चलना पड़ रहा

2451
02:57:17,160 --> 02:57:21,000
है कहां गए लोकेश

2452
02:57:21,000 --> 02:57:25,200
पांचाल हेलो लोकेश पांचल हेलो

2453
02:57:25,200 --> 02:57:29,600
हां तो इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि पीएम के पास होती है तो इसका मतलब अपनी रक्षा

2454
02:57:29,600 --> 02:57:35,600
में की जाने वाली जो हिंसा होती है वो गुंडई नहीं होती है है

2455
02:57:35,640 --> 02:57:39,640
ना और दूसरी बात यह तो परमेश्वर है यह तो कभी किसी को मार

2456
02:57:39,640 --> 02:57:42,120
खा नहीं

2457
02:57:42,120 --> 02:57:46,120
सकते हां तो यह जो हमने बातें बोली है ना हमने उसको बोली है

2458
02:57:46,120 --> 02:57:50,120
जो दुर्गा माता के लिए गंदी बातें बोलता है अश्लील बातें बोलता है

2459
02:57:50,120 --> 02:57:56,120
समझे बिल्कुल और ऊपर आ जाओ भाई ज्यादा कमेंट कमेंट मत

2460
02:57:57,000 --> 02:58:01,600
खेलो और वह सत्य क्या कह रहे थे वेदों में महामंत्र लिखा दिखाओ

2461
02:58:01,600 --> 02:58:05,880
मैं कह रहा हूं वेदों में लिखा दिखाओ कि तत्वदर्शी रामपाल

2462
02:58:05,880 --> 02:58:10,160
है ऐसे अगर चलोगे तो फिर ऐसे ही पूछेंगे

2463
02:58:10,160 --> 02:58:14,280
केवल वेद ही नहीं है वेदों का वेदों का वेदों के साथ साथ पुराण भी

2464
02:58:14,280 --> 02:58:18,440
है उपनिषद भी है और गीता भी है महा

2465
02:58:18,440 --> 02:58:22,480
भी है तो आप यह डिसाइड मत करो कि केवल वेद

2466
02:58:22,480 --> 02:58:26,640
में लिखा दिखाओ वेदों के आधार परही पुराण है वेदों के आधार पर

2467
02:58:26,640 --> 02:58:32,640
उपनिषद है सनातनी वह है जो इन सबको

2468
02:58:36,120 --> 02:58:42,120
माने आपका कौन सा कमेंट दिखाना

2469
02:58:44,400 --> 02:58:48,560
है वेदों में गणपति का नाम है शिवजी का नाम है

2470
02:58:48,560 --> 02:58:52,720
विष्णु का नाम है कहीं पर भी कबीर नाम नहीं

2471
02:58:52,720 --> 02:58:56,920
है यह लोग कवि को कबीर बनाते हैं

2472
02:58:56,920 --> 02:59:01,640
चलिए कोई नहीं आ रहा कोई लगता है सब लोग समझ चुके हैं

2473
02:59:01,640 --> 02:59:06,120
कि नहीं पढ़ना है चक्कर में और कोई है नहीं टक्कर

2474
02:59:06,120 --> 02:59:10,160
में हां जी बोलिए मैं ना ये जो

2475
02:59:10,160 --> 02:59:14,160
लिख रहे हैं कमेंट में कबीर है इसमें तो आप एक काम करिए ना आप

2476
02:59:14,160 --> 02:59:18,320
अगली लाइव जब भी होगी ना तो प्रमाण हमें दे देना हम आपको खुद ही खोल के खा

2477
02:59:18,320 --> 02:59:22,320
देंगे ठीक है और आपको पता चल जाए वहां कबीर है क्या है और दूसरी

2478
02:59:22,320 --> 02:59:26,720
बात यह जो कहते हैं इन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा हुआ है कि परमात्मा

2479
02:59:26,720 --> 02:59:31,080
या उनका अवतार यानी कि यह जो अपने आपको को कबीर का अवतार बताते हैं ठीक है

2480
02:59:31,080 --> 02:59:35,320
यह कभी भी जो है हिंसा करने नहीं आते हिंसा कौन

2481
02:59:35,320 --> 02:59:39,640
करते हैं जैसे श्री कृष्ण राम आदि जो है वह हिंसा करते हैं और सोचते

2482
02:59:39,640 --> 02:59:44,280
हैं कि शांति स्थापित कर देंगे लेकिन उनसे शांति स्थापित हो नहीं पाती

2483
02:59:44,280 --> 02:59:48,360
तो यह जो अभी हथियार हमने देखे हैं भाई पहले तो वो पुलिस

2484
02:59:48,360 --> 02:59:51,280
की वर्दी में नहीं है ठीक है तो वही

2485
02:59:51,280 --> 02:59:55,320
पता चल जाता उनका दूसरी बात यह है कि यानी कि आपके बाबा जी की

2486
02:59:55,320 --> 02:59:59,440
लिखी हुई किताब के भीतर जो बात है अवतार जहां पर

2487
02:59:59,440 --> 03:00:03,680
अवतारवाद की बात आती है वहां पर यह बात झूठी सिद्ध हो जाती है तो

2488
03:00:03,680 --> 03:00:08,200
आपकी बातों को काटने के लिए मेरे को कभी-कभी लगता है अवतार की परिभाषा

2489
03:00:08,200 --> 03:00:12,240
नाम का यह जो है कि मुझे आपकी बातों को काटने के लिए ना आप

2490
03:00:12,240 --> 03:00:16,240
ही बहुत हो आपकी बातों को काटने के लिए किसी भी अन्य ग्रंथ तक

2491
03:00:16,240 --> 03:00:20,280
को उठाने की आवश्यकता नहीं आपका आचरण और आपकी बुक यह

2492
03:00:20,280 --> 03:00:24,400
दोनों बहुत है आप ही की बातों का खंडन करने के लिए ब

2493
03:00:24,400 --> 03:00:28,480
तो इसलिए प्रमाणित हो जाता है कि आपकी कोई भी बात सार्थक नहीं है ना ही आपके

2494
03:00:28,480 --> 03:00:32,680
व्यवहार के अनुसार ना ही आपके ज्ञान के अनुसार तो यह मैं अपना पॉइंट

2495
03:00:32,680 --> 03:00:36,680
रखना चाह भाई साब भाई साहब सुनिए राम जी धनुष नहीं

2496
03:00:36,680 --> 03:00:40,880
लेते थे यह हमें दिक्कत नहीं है

2497
03:00:40,880 --> 03:00:44,880
हमारे ईश्वर हैं जो धर्म की रक्षा के लिए समार भी

2498
03:00:44,880 --> 03:00:48,880
करते हैं आप कह रहे हो कि ईश्वर समार नहीं करता है

2499
03:00:48,880 --> 03:00:52,880
समार करने के लिए रामकृष्ण आदी आते हैं ईश्वर कभी किसी को मारता नहीं है

2500
03:00:52,880 --> 03:00:55,240
समझ

2501
03:00:55,240 --> 03:00:59,800
गए अपनेट कमेंट कमेंट क्यों खेल रहे हो

2502
03:00:59,800 --> 03:01:03,840
ये फिर अपने कमेंट से मैंने कहा ना इनकी किसी भी बात का खंडन करने के लिए ग्रंथ

2503
03:01:03,840 --> 03:01:06,800
खोलने की इनकी अपनी बातें ही अपना खंडन

2504
03:01:06,800 --> 03:01:12,240
है फिर अपनी बात का खंडन कर गया कमेंट करके

2505
03:01:12,240 --> 03:01:18,240
आपने ज्यादा चर्चा कर ली गोविंद जी [हंसी]

2506
03:01:18,520 --> 03:01:22,640
बोलिए बोलिए गोविंद जी की चर्चा मैं

2507
03:01:22,640 --> 03:01:28,640
एक दिन देख रहा दो तीन दिन पहले देख रहा था गोमूत्र गोबर

2508
03:01:28,880 --> 03:01:33,000
गणेश कुछ नहीं बचा नहीं ना कुछ भी कुछ बचा हो

2509
03:01:33,000 --> 03:01:37,120
कुछ ऊंची बाज बची हो वह जो वेदों का गहन ज्ञान छापते

2510
03:01:37,120 --> 03:01:41,600
फिरते थे टीवी पर अब वह बचा हो तो कुछ बात करे ना अब यही है

2511
03:01:41,600 --> 03:01:45,680
अगरबत्ती धूप ली की टॉफी

2512
03:01:45,680 --> 03:01:50,360
उसका रैपर उसका ट्रेड मार्क ठीक है उसके बाद ये एमसील

2513
03:01:50,360 --> 03:01:54,440
जो है वो काले और ग्रे रंग में ही क्यों आती है ये लाल रंग

2514
03:01:54,440 --> 03:01:58,840
में क्यों नहीं आती हिंदू एमसील क्यों यूज करता है क्या इससे मोक्ष

2515
03:01:58,840 --> 03:02:03,000
हो जाएगा ठीक है पेन से ही क्यों लिखते मोर

2516
03:02:03,000 --> 03:02:07,120
पंख से क्यों नहीं लिखते ठीक है इसके बाद कुछ नहीं मिलता तो बस वही

2517
03:02:07,120 --> 03:02:11,120
टीका टिप्पणी करेंगे इधर उधर की बातें करेंगे कहां

2518
03:02:11,120 --> 03:02:15,120
कहां वेद का ज्ञान और कहां गोबर ठीक है तो ये इनका

2519
03:02:15,120 --> 03:02:19,200
ग्राफ ऐसे नीचे आया हमारे चैनल के बाद ऐसे सीधे गिरता हुआ

2520
03:02:19,200 --> 03:02:21,800
इसको कहते सर के बल गिरना वेदों

2521
03:02:21,800 --> 03:02:26,520
से गोबर प अगरबत्ती पे अगरबत्ती

2522
03:02:26,520 --> 03:02:31,120
इतने लोगों के मैसेज फोन आ रहे हैं शिवांश जी

2523
03:02:31,120 --> 03:02:35,400
मैं बता देता हूं इतने लोगों के मैसेज फोन आ रहे हैं कि मतलब वो आपकी

2524
03:02:35,400 --> 03:02:39,560
मतलब ये वीडियोस देख देख के ना उनको सच में मतलब उनकी बुद्धि खुल रही है कह

2525
03:02:39,560 --> 03:02:43,600
रहे हैं मतलब बोलते हैं कि कुछ तो गड़बड़ है मतलब यह तो थोड़ा फिर

2526
03:02:43,600 --> 03:02:47,920
से देखना पड़ेगा मतलब वो अच्छे अच्छे पढ़े लिखे लोग भी इसमें जा रहे थे

2527
03:02:47,920 --> 03:02:52,040
जो थोड़े बहुत वो थे अपने प्रियजनों के कारण माता-पिता के कारण

2528
03:02:52,040 --> 03:02:56,080
है ना लेकिन उसके बाद भी वो और अब वो यही नहीं रुक रहे हैं

2529
03:02:56,080 --> 03:03:00,960
कि नहीं नहीं हम तो बच गए आप कह रहे अब हम अपने आप अपने लोगों को भी बचाएंगे

2530
03:03:00,960 --> 03:03:05,120
इस इस कुए में गिरने से ठीक है तो ये सब चीजें है और

2531
03:03:05,120 --> 03:03:09,320
यह अच्छी है हो रही है और उसको सपोर्ट करना भी चाहिए बाकी इनका

2532
03:03:09,320 --> 03:03:13,480
तो काम ही यही है कि टका टिप्पणी करते रहेंगे पर्सनल सिद्धांत

2533
03:03:13,480 --> 03:03:17,800
प कोई बात होगी ही नहीं बस घुमाना मैं एक बात और आपकी बात

2534
03:03:17,800 --> 03:03:22,040
मैं पंडित जी की उसमें ऐड कर देता हूं कि जितने भी लोग ये देख रहे हैं ना चैनल

2535
03:03:22,040 --> 03:03:26,080
यह चैनल साधन है हमारा ठीक है ये वैसा ही जैसे राम जी के

2536
03:03:26,080 --> 03:03:30,080
हाथ में धनुष था तो इसको सपोर्ट करिए ठीक है हर एक

2537
03:03:30,080 --> 03:03:34,120
प्रकार से क्योंकि यह हमारा ठीक है साधन है बिना साधन के

2538
03:03:34,120 --> 03:03:36,800
बिना साधन के ना कोई भी चीज साध्य जो

2539
03:03:36,800 --> 03:03:40,880
होती है वह प्राप्त नहीं होती ठीक है इसलिए वीडियोस को लाइक करना इसको

2540
03:03:40,880 --> 03:03:45,080
शेयर करना लोगों के साथ इससे रीच बढ़ती है ठीक है तो मैं जरूर

2541
03:03:45,080 --> 03:03:49,720
चाहूंगा जितने भी लोग हैं वो अपना अपना भी फर्ज भाई थोड़ा

2542
03:03:49,720 --> 03:03:53,720
सा सही कक मेरा भी चैनल था

2543
03:03:53,720 --> 03:03:57,880
वो बंद हो गया मैंने एक दो बार फिर बनाया इन्होंने जो है इस प्रकार की कार्य किए अब

2544
03:03:57,880 --> 03:04:02,000
मैं चाहता हूं कि जो चल रहा है ना उसी को थोड़ा आगे धके ले ठीक

2545
03:04:02,000 --> 03:04:06,120
है ना कि अपने अपने पर्सनल स्वार्थ के लिए अपने अपने वो बनाकर तो

2546
03:04:06,120 --> 03:04:10,200
उसमें लगे रहे जो चल रहा है जो शक्तिमान है उसको

2547
03:04:10,200 --> 03:04:14,320
साधन देने चाहिए मेरी अपनी ये फिलॉसफी है जो शक्तिमान है

2548
03:04:14,320 --> 03:04:18,320
जो कार्य कर सकता है उसको हमें अपने साधन देने चाहिए ठीक

2549
03:04:18,320 --> 03:04:23,200
है उसके साथ अपना सहयोग करना ताक वो और आगे बढ़ सके तो

2550
03:04:23,200 --> 03:04:27,520
यरा व साथ हो गए हैं और कुछ पुरानी चीज

2551
03:04:27,520 --> 03:04:32,960
वो भूल चुके हैंको बारबार ना करा जाए

2552
03:04:32,960 --> 03:04:37,240
और एक बात और है कि लोकेश

2553
03:04:37,240 --> 03:04:41,320
पांचाल जी कह रहे हैं कि सतलोक आश्रम आ जाइए पहली

2554
03:04:41,320 --> 03:04:45,400
बात य हमने आपको कई बार कहा है कि आप वहां से

2555
03:04:45,400 --> 03:04:49,880
किसी बीच के स्थान में आ जाइए और हम से किसी बीच के स्थान में आ जाएंगे

2556
03:04:49,880 --> 03:04:51,840
इंदौर में हमारे लोग हैं हो सकता

2557
03:04:51,840 --> 03:04:55,880
है ऐसी वो आयोजित हो सके हम आ सकते हैं बिल्कुल आ सकते

2558
03:04:55,880 --> 03:05:00,160
हैं इसके लिए सतलोक आश्रम वालों से कहिए इंदौर

2559
03:05:00,160 --> 03:05:04,480
वालों से व हमसे संपर्क करें आपस में बातचीत

2560
03:05:04,480 --> 03:05:10,160
करके हम यह तय करेंगे कि हमारी चर्चा कहां पर हो सकती है ठीक

2561
03:05:10,160 --> 03:05:14,720
है उनको दीजिए निष्ठा पूर्वक

2562
03:05:14,720 --> 03:05:18,760
निष्ठा पूर्वक माता जी ने देखिए लोकेश जी आप कह रहे आप

2563
03:05:18,760 --> 03:05:22,880
भी तो आए थे मेरे चैनल पर क्योंकि मेरा खंडन करने के रूप

2564
03:05:22,880 --> 03:05:27,080
में आपको जो आपको अपने मत का प्रचार करना था उससे

2565
03:05:27,080 --> 03:05:31,800
काफी फायदा मिलता आप ऐसे व्यक्ति नहीं है कि आप पर्टिकुलर आपका

2566
03:05:31,800 --> 03:05:36,320
खंडन करने के लिए मैं कहीं जाऊं पहली बात और यदि सतलोक

2567
03:05:36,320 --> 03:05:40,600
आश्रम इत्यादि है जो ऐसी चीजें हैं हां जिनके साथ चर्चा

2568
03:05:40,600 --> 03:05:44,800
में सफल अथवा असफल के रूप में कोई ना कोई तथ्य बाहर आ सकता

2569
03:05:44,800 --> 03:05:48,840
है तो उनके साथ में चर्चा करने को त र मैंने तो कई बार कहा

2570
03:05:48,840 --> 03:05:52,880
है आपका वो दोगला अभिषेक हो या एक वो

2571
03:05:52,880 --> 03:05:57,720
जो जिसको कम दिखता है वो क्या नाम है एकम हेमंत

2572
03:05:57,720 --> 03:06:00,520
बाबा

2573
03:06:00,520 --> 03:06:05,480
एकम एकम अवि एकम अद्वितीय हा

2574
03:06:05,480 --> 03:06:09,840
वो मैंने कई बार कहा है अगर यह लोग मुझसे चर्चा करने के लिए

2575
03:06:09,840 --> 03:06:14,560
वो करते हैं प्रयास तो मैं बिल्कुल इनके साथ चर्चा करूंगा

2576
03:06:14,560 --> 03:06:18,680
मेरे चैनल पर नहीं किसी बीच के चैनल पर करेंगे किसी को ढूंढेंगे

2577
03:06:18,680 --> 03:06:22,840
बहुत सारे ऐसे चैनल है चर्चाएं करवाते हैं केवल ठीक है दूसरी

2578
03:06:22,840 --> 03:06:27,120
बात अगर बीच के चैनल को भी नहीं मानना है तो बीच की जगह पर आ

2579
03:06:27,120 --> 03:06:31,480
जाओ आप आ जाओ अगर आपका यहां से 500 किलोमीटर

2580
03:06:31,480 --> 03:06:36,360
है 50 आप आ जाओ 50 हम आ जाएंगे हम तो ओपन है भाई सबके लिए

2581
03:06:36,360 --> 03:06:40,560
ठीक है और उसके उसके लिए ना

2582
03:06:40,560 --> 03:06:44,840
पूर्ण कोई ऐसी चीज बनाइए लिस्ट बनाइए ये ये चीज प्रमाण

2583
03:06:44,840 --> 03:06:49,240
होंगी ऐसा थोड़ी है कि आप आपको प्रमाण दिखाए तो आप मचल

2584
03:06:49,240 --> 03:06:53,480
जाओ और उसम यह पूछ रहे हैं आज भी मैंने सुना कि भगवान

2585
03:06:53,480 --> 03:06:57,600
कृष्ण ने यही क्यों बोला उन्होंने यह क्यों नहीं बोला यह कोई बात

2586
03:06:57,600 --> 03:07:03,320
है करने वाली उन्होने यह क्यों बोला वो क्यों नहीं बोला यह क्या बात है

2587
03:07:03,320 --> 03:07:07,760
बताइए गीता को मानते और महाभारत को नहीं मानते

2588
03:07:07,760 --> 03:07:11,760
गीता को मानते महाभारत को नहीं मानते चलिए ठीक है सभी

2589
03:07:11,760 --> 03:07:15,600
को जय श्री राम और जो लोग आज नहीं जुड़ पाए वो अगली

2590
03:07:15,600 --> 03:07:20,120
लाइव में जुड़ने का प्रयास करें जब भी होती आज आपने देखा

2591
03:07:20,120 --> 03:07:24,960
कि हमने जब उस व्यक्ति से पूछा कि वो तत्वदर्शी है कि नहीं

2592
03:07:24,960 --> 03:07:29,040
सिद्ध करो तो और फिर वह गीता का ज्ञान जो है काल ने

2593
03:07:29,040 --> 03:07:33,240
दिया है श्री कृष्ण से अलग हमने भले भले उससे पूछा कि प्रमाण दिखाओ

2594
03:07:33,240 --> 03:07:38,040
कि अगर वह काल ही है वह काल श्री कृष्ण से अलग कैसे है यह

2595
03:07:38,040 --> 03:07:42,320
बताओ ठीक है तो उसने कहीं पर भी कोई प्रमाण

2596
03:07:42,320 --> 03:07:46,640
नहीं दिया और अंततोगत्वा जो

2597
03:07:46,640 --> 03:07:51,280
है हमने उसको ये बता दिया कि श्री कृष्ण ही सनातन

2598
03:07:51,280 --> 03:07:55,680
सनातन काल है और श्री कृष्ण

2599
03:07:55,680 --> 03:07:59,960
ही गीता का ज्ञान देने वाले थे और हमने अनेक

2600
03:07:59,960 --> 03:08:04,480
अनेक बार यह प्रमाण दिए हैं प्यारी बहना कुछ कह रही

2601
03:08:04,480 --> 03:08:09,040
है शिवांश भैया ओपी

2602
03:08:09,040 --> 03:08:12,480
ओवर पावर

2603
03:08:12,480 --> 03:08:16,560
ओवर अमेजिंग समसम ओवर पावर तो गलत होता

2604
03:08:16,560 --> 03:08:21,520
है

2605
03:08:21,520 --> 03:08:27,520
चलिए उनके लिए ओवर पावर है सामने विरोध

2606
03:08:28,320 --> 03:08:32,320
है ओवर पावर ओवर किल ऐसे ऐसे करके शब्दों का

2607
03:08:32,320 --> 03:08:35,480
प्रयोग होता

2608
03:08:35,480 --> 03:08:39,680
है जी से बहस मतलब जिंदगी तहस

2609
03:08:39,680 --> 03:08:44,120
नहस बिल्कुल सही बात लगसी

2610
03:08:44,120 --> 03:08:48,840
को पता ये शिवाजी गिरी कह र तुम लोग के दूत हो

2611
03:08:48,840 --> 03:08:54,840
भाई काल ही परमेश्वर है दिखा दे क्या

2612
03:08:57,200 --> 03:09:02,040
अवेद अच्छा काल के द

2613
03:09:02,040 --> 03:09:06,640
नाटक है व खत्म हो रहा है उससे बाहर निकलो वापस आ जाओ

2614
03:09:06,640 --> 03:09:12,160
हा बिल्कुल खतम होहा य क्या है क्या दिखा रहे हैं

2615
03:09:12,160 --> 03:09:18,160
य अरे जो आपने दिखाया था कल

2616
03:09:18,920 --> 03:09:23,040
व श्लोक है ना ये कालेन काले नायम जन सर्वो उसम लास्ट लाइन देखिए

2617
03:09:23,040 --> 03:09:29,040
क्योंकि काल ही परमेश्वर है

2618
03:09:29,560 --> 03:09:34,280
पयाया शलोक में लास्ट में देखिए कालो ही परमेश्वर

2619
03:09:34,280 --> 03:09:38,320
हम लोग तो परमेश्वर के दूत है और तुम किसके हो

2620
03:09:38,320 --> 03:09:42,400
रचा दर्शी जेल धाम निवासी उसके दूत

2621
03:09:42,400 --> 03:09:46,400
अगर उल्टा कर भी दिया जाए तो हम काल के दूत है ठीक है और ये परमात्मा

2622
03:09:46,400 --> 03:09:50,680
के दूत है परमात्मा के दूत जो है वो छुपकर क्यों

2623
03:09:50,680 --> 03:09:54,680
कमेंट कर रहे हैं काल के दूतों से यानी कि कॉल फिर वही बात है कि काल को आपने

2624
03:09:54,680 --> 03:09:58,720
बड़ा माना हुगा फिर कबीर जी से क्योंकि आप तो कबीर जी आपको तो खुल के

2625
03:09:58,720 --> 03:10:02,760
आना चाहिए ना मैदान में मैंने आज एक

2626
03:10:02,760 --> 03:10:06,760
व भेजा की बातो का कोई तर्क नहीं

2627
03:10:06,760 --> 03:10:10,800
कल चर्चा करते हैं एक लास्ट बात कह दूं मैं शिवांश

2628
03:10:10,800 --> 03:10:15,320
भाई को मैंने वीडियो भेजी है किसी वृद्ध महिला की

2629
03:10:15,320 --> 03:10:19,360
मृत्यु हो गई है देहांत हो गया है उनके सामने जाकर यह बोल रहे

2630
03:10:19,360 --> 03:10:23,440
हैं वो वेदों में प्रमाण है कबीर जी भगवान है बाइबल में प्रमाण है

2631
03:10:23,440 --> 03:10:27,440
कबीर जी भगवान है अरे उनको तो छोड़ दो यार कम से कम वह

2632
03:10:27,440 --> 03:10:31,840
अपनी अंतिम यात्रा में है अब वो भाई

2633
03:10:31,840 --> 03:10:36,320
उनका अपना पर्सनल मैटर है कोई क्या करे चलिए सभी को जय श्री

2634
03:10:36,320 --> 03:10:40,840
राम श्रीम हर महादेव महादेव

2635
03:10:40,840 --> 03:10:46,680
महादेव

2636
03:10:46,680 --> 03:10:50,680
[संगीत]
