1
00:00:02,030 --> 00:00:08,030
[संगीत]

2
00:00:08,640 --> 00:00:12,840
जय श्री राम सभी को बहुत लेट हो गए आज पूरे लगभग

3
00:00:12,840 --> 00:00:17,000
आधा घंटे लेट है और अगर मैं आपको लेट आने का कारण

4
00:00:17,000 --> 00:00:21,120
बताऊंगा तो संभवतः आप मुझे क्षमा कर सके

5
00:00:21,120 --> 00:00:25,360
है ना सब लोग छोटे भाई हैं छोटी बहने हैं जय श्री राम काफी

6
00:00:25,360 --> 00:00:29,600
देर हो गई है पंडित जी भी यहां पर वेट कर रहे थे काफी देर से

7
00:00:29,600 --> 00:00:34,360
और और मैं लेट था और मेरे लेट होने का कारण क्या

8
00:00:34,360 --> 00:00:38,520
है मैं अभी आने से पहले फैक्ट बाई अभिषेक का वीडियो देख

9
00:00:38,520 --> 00:00:42,880
रहा था कि उसने क्या क्या कुतर के किए

10
00:00:42,880 --> 00:00:46,960
तो मैंने कहा भाई क्या कहते हैं उसका

11
00:00:46,960 --> 00:00:51,120
थोड़ा देख लो उसने क्या क्या कुतर किए है तो उसको अभी अभी देखा है बस

12
00:00:51,120 --> 00:00:55,480
आने से जस्ट पहले मैं देख ही रहा था और मैं देख कर के आया हूं जी

13
00:00:55,480 --> 00:01:00,880
उसने उसने मैं तो कह रहा हूं ना इनके ही वीडियोस को अगर आप देखोगे

14
00:01:00,880 --> 00:01:05,880
तो उसी में इनका खंडन मिल जाएगा आराम से

15
00:01:05,880 --> 00:01:10,520
जी कुछ और देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी जैसे फैक्ट भाई अभिषेक नेही

16
00:01:10,520 --> 00:01:14,680
अभी एक जगह बताया कि भाई जो

17
00:01:14,680 --> 00:01:17,640
गुणों की भक्ति के लिए भगवान ने मना किया

18
00:01:17,640 --> 00:01:22,600
है उसके संबंध में उसने बताया

19
00:01:22,600 --> 00:01:26,720
कि यह जो ब्रह्मा विष्णु महेश है यह

20
00:01:26,720 --> 00:01:30,760
गुण है अच्छा जब इसने प्रमाण दिखाया तो वहां क्या

21
00:01:30,760 --> 00:01:35,160
दिखा रहा है वो इन तीन गुणों से युक्त

22
00:01:35,160 --> 00:01:39,160
है वो इन तीन गुणों से युक्त है

23
00:01:39,160 --> 00:01:43,200
तो युक्त होना और वही होने में अंतर है

24
00:01:43,200 --> 00:01:47,320
भाई अगर मैं जल से युक्त हूं तो मैं जल नहीं

25
00:01:47,320 --> 00:01:51,840
हूं मैं किसी की प्यास नहीं बुझा दूंगा मेरी बॉडी के अंदर जल है

26
00:01:51,840 --> 00:01:56,040
70 पर हमारी बॉडी में क्या है

27
00:01:56,040 --> 00:02:00,120
जल जल है ना मगर इसका मतलब य नहीं

28
00:02:00,120 --> 00:02:05,640
है कि मुझे कोई पी सकता है

29
00:02:05,640 --> 00:02:10,080
मारूंगा हुआ था एक बार ऐसा मेरे साथ

30
00:02:10,080 --> 00:02:14,320
एक दो बार हो चुका है कोई किसी ने अलग तरह का प्रयास किया तो

31
00:02:14,320 --> 00:02:18,520
उसको मार खानी पड़ी अच्छा हा मिल जाते

32
00:02:18,520 --> 00:02:23,200
हैं ना एलजीबीटी क्य वाले जी

33
00:02:23,200 --> 00:02:27,400
जी कहीं प था मैं कोल्हापुर में था तो

34
00:02:27,400 --> 00:02:31,840
वहां के वहां के होटल का जो मैनेजर था

35
00:02:31,840 --> 00:02:36,160
उसमें पता नहीं क्या सक्ति हो गई और अकेलापन

36
00:02:36,160 --> 00:02:40,200
देख कर के लिफ्ट में जो है कुछ अलग तरह की बातें करने

37
00:02:40,200 --> 00:02:44,200
लगा तो जैसे ही उसने कुछ अनर्गल बातें की

38
00:02:44,200 --> 00:02:48,200
तो मैंने उसका ऐसे थोड़ा पकड़ा और वह जो लिफ्ट थी

39
00:02:48,200 --> 00:02:52,240
उसमें पीछे की साइड कांच लगा हुआ था तो मतलब दूर आपको बाहर से

40
00:02:52,240 --> 00:02:56,400
लोग देख सकते हैं रोड साइड था जी होती है ना लिफ्ट

41
00:02:56,400 --> 00:03:00,760
बाहर लगी होती बिल्डिंग के हां हा की लिफ्ट थी

42
00:03:00,760 --> 00:03:04,920
तो मैंने उसको ऐसे थोड़ा यूं पकड़ के और पीछे उस कांच से चिपका दिया मैंने

43
00:03:04,920 --> 00:03:08,920
कहा सुन वो

44
00:03:08,920 --> 00:03:13,120
दूसरा रद्र रूप उसको दिखाया मैंने कहा देख गलत बात गलत प्रयास मत

45
00:03:13,120 --> 00:03:17,120
करना नहीं तो वही वाली बात है कि वो मार

46
00:03:17,120 --> 00:03:20,760
पड़ेगी दाया की दाया हाथ जेब

47
00:03:20,760 --> 00:03:25,960
में रख लो सेठ वरना पूरी उम्र बाए हाथ से खाना खाना

48
00:03:25,960 --> 00:03:30,240
पड़ेगा वो वाली बात तो एक अर्पित

49
00:03:30,240 --> 00:03:34,360
जी है जो आना चाहते हैं कुछ बातें मैं पहले

50
00:03:34,360 --> 00:03:40,360
क्लियर कर दूं नहीं तो फिर फैक्ट बाई अभिषेक का अलग से करना

51
00:03:41,440 --> 00:03:45,560
पड़ेगा अच्छा इस समय क्या है कि पता नहीं क्या हुआ फसबुक पर भी ऐसा

52
00:03:45,560 --> 00:03:49,560
ही कुछ हो रहा है फस

53
00:03:49,560 --> 00:03:53,840
पर क्या हुआ है मैंने जब से अपना अकाउंट बनाया है तो उसमें

54
00:03:53,840 --> 00:03:58,320
व्यर्थ के जो संपर्क करने वाले लोग बहुत आते हैं

55
00:03:58,320 --> 00:04:02,520
फुक में अब फबुक के लिए एक रा क्रिएट हो गया मेरे दिमाग

56
00:04:02,520 --> 00:04:07,240
में फु पर वैसे ही लोग मिलते हैं हां

57
00:04:07,240 --> 00:04:11,280
ऐसा नहीं अच्छे लोग भी होते हैं मगर मुझे सारे जितने भी संपर्क कर रहे हैं

58
00:04:11,280 --> 00:04:15,440
वहां पर ऐसा कुछ हुआ है कुछ पता नहीं कुछ षड्यंत्र है कि आए दिन मुझे

59
00:04:15,440 --> 00:04:19,600
एक ना एक मैसेज मिलता रहता है वह कभी मातृ शक्ति की तरफ से कभी

60
00:04:19,600 --> 00:04:23,840
कोई पुरुष की तरफ से इस तरह का हो रहा है तो हो सकता है कोई षड्यंत्र

61
00:04:23,840 --> 00:04:28,280
पूर्वक किया जा रहा हो र अभी हम आते हैं मुख्य बिंदु पर

62
00:04:28,280 --> 00:04:32,360
हमारी जो लास्ट चर्चा हुई थी कोई

63
00:04:32,360 --> 00:04:36,280
मुझे याद नहीं है उनका नाम हर हर महादेव हर हर

64
00:04:36,280 --> 00:04:40,560
महादेव तो लास्ट चर्चा जो हुई थी उसमें

65
00:04:40,560 --> 00:04:44,840
एक दृश्य था कि व्यक्ति ने

66
00:04:44,840 --> 00:04:48,920
पहले बताया कि वह तत्वदर्शी कैसे हैं यह बताने

67
00:04:48,920 --> 00:04:53,040
के लिए उसने देवी भागवत खोला देवी भागवत में उसने बताया कि जो

68
00:04:53,040 --> 00:04:57,200
इस स् तरह से भक्ति बताए वो तत्वदर्शी है मगर तत्वदर्शी

69
00:04:57,200 --> 00:05:01,480
की केवल एक यही पहचान नहीं हो सकती वरना हर कोई वो देवी भागवत

70
00:05:01,480 --> 00:05:05,720
के वो दो पेज जो है जिसमें उस उस तरह की भक्ति लिखी है

71
00:05:05,720 --> 00:05:10,000
उस उस तरह की भक्ति बता कर के उसको रीड करके केवल बताने लगेगा

72
00:05:10,000 --> 00:05:14,320
और वह तत्वदर्शी स्वयं को सिद्ध कर लेगा

73
00:05:14,320 --> 00:05:18,400
तो फिर उसने भगवत गीता का चैप्टर खोल दिया कि

74
00:05:18,400 --> 00:05:22,520
वो फिर उसी से मिलती जुलती कोई बात सातव अध्याय से बताने लगा

75
00:05:22,520 --> 00:05:26,680
शायद आठवे से और उसके बाद फिर वो हमें

76
00:05:26,680 --> 00:05:30,880
434 पर ले गया 434 के बाद ने 435 में उसको

77
00:05:30,880 --> 00:05:35,040
पढ़ाया कि भगवान य वहां यह कह रहे हैं कि तत्व ज्ञान वो ज्ञान है

78
00:05:35,040 --> 00:05:39,560
जिस ज्ञान को पाकर तू बंधनों से मुक्त हो जाएगा और पहले

79
00:05:39,560 --> 00:05:44,280
सारे सर्वस्व संसार को स्वयं में और फिर मुझ में देखेगा

80
00:05:44,280 --> 00:05:48,920
बिल्कुल और वहां पर एक बात और बता दी

81
00:05:48,920 --> 00:05:51,720
गोविंद गुरुकुल जी ने मुझे

82
00:05:51,720 --> 00:05:55,760
अध्याय और श्लोक क्रमांक याद नहीं आ रहा है उन्होंने बता दिया कि उसमें यह भी लिखा

83
00:05:55,760 --> 00:05:59,800
है कि वेदों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण को ही जाना

84
00:05:59,800 --> 00:06:04,080
जाता है ठीक है ब यह भी उन्होंने बता

85
00:06:04,080 --> 00:06:08,360
दिया अब इसके बाद वो व्यक्ति आया कि पहले हम समीक्षा

86
00:06:08,360 --> 00:06:12,400
करेंगे कि भाई यह जो आप चार 34 में कह रहे हो ना

87
00:06:12,400 --> 00:06:16,560
कि मुझ सर्वशक्तिमान या सच्चिदानंद घन ब्रह्म में सारी

88
00:06:16,560 --> 00:06:20,800
दुनिया को देख इसमें सच्चिदानंद घन ब्रह्म आया है कि नहीं क्योंकि उसके

89
00:06:20,800 --> 00:06:24,800
जेल जाने से पहले तत्वदर्शी जी ने उसको बता दिया होगा यहां

90
00:06:24,800 --> 00:06:29,600
पर यह वाली बात 435 तो जो रटी हुई बातें होती केवल उन्हीं का उत्तर होता

91
00:06:29,600 --> 00:06:33,760
जिसकी इन्होंने इनको तैयारी करवाई गई है तो

92
00:06:33,760 --> 00:06:37,800
फिर क्या कहते हैं वो बोला कि

93
00:06:37,800 --> 00:06:41,800
भाई हम वहां पर शब्दों को देखेंगे 435 में हम शब्द

94
00:06:41,800 --> 00:06:45,920
देखेंगे तो पहली बात तो यह है कि जब तुम संस्कृत के शब्द को चेक करने

95
00:06:45,920 --> 00:06:50,600
वाले हो तो तुमने देवी भागवत संक्षिप्त क्यों पढ़ी

96
00:06:50,600 --> 00:06:54,680
वहां पर आपको संस्कृत के साथ जो हिंदी अर्थ आता है उसे पढ़ना चाहिए था

97
00:06:54,680 --> 00:06:58,800
और चेक करना चाहिए था कि कहां पर संस्कृत का अर्थ सही किया है कि नहीं

98
00:06:58,800 --> 00:07:03,000
किया है या वो शब्द है भी कि नहीं संस्कृत में तो तुमने वहा

99
00:07:03,000 --> 00:07:06,840
पक्षपात क्यों किया बिना देखे ही संस्कृत आज तक

100
00:07:06,840 --> 00:07:10,880
रामपाल जी ने भी संभवत संस्कृत वाली देवी भागवत

101
00:07:10,880 --> 00:07:15,160
देखी नहीं है देखी तक नहीं है केवल अपने

102
00:07:15,160 --> 00:07:19,240
मतलब के वो जो क्योंकि वहां पर कुछ चैप्टर्स है जिनसे व अपना मतलब

103
00:07:19,240 --> 00:07:23,240
हल कर सकते हैं तो इस कारण से उन्होंने संक्षिप्त देवी भागवत

104
00:07:23,240 --> 00:07:27,480
को प्रस्तुत कर दिया कहां है संस्कृत वाला वीडियो दिखाइए

105
00:07:27,480 --> 00:07:31,920
ना देवी भागवत का और भी कई पुराण उन्होने ऐसे ही लिए हैं

106
00:07:31,920 --> 00:07:36,080
जिसमें कि संस्कृत है ही नहीं तो जब तुम संस्कृत

107
00:07:36,080 --> 00:07:40,400
चेक करते हो तुम्हे विश्वास नहीं है गीता प्रेस के अनुवाद पर

108
00:07:40,400 --> 00:07:44,600
तो जब तुम संस्कृत चेक करने वाले हो तो आपको

109
00:07:44,600 --> 00:07:49,440
प्रत्येक शास्त्र का करना चाहिए ना यह थोड़ी ना कि मीठा मठा गप गप और कड़वा कड़वा

110
00:07:49,440 --> 00:07:53,720
थू हा पहली बात हो गई दूसरी

111
00:07:53,720 --> 00:07:56,320
बात ये हो गई

112
00:07:56,320 --> 00:08:00,480
कि जैसे आप बता रहे हो वही वाली शास्त्र अनुकूल

113
00:08:00,480 --> 00:08:04,480
भक्ति बताने से ही एक मात्र तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होगा उसके लिए

114
00:08:04,480 --> 00:08:08,480
उसको शास्त्रों का बोध तो होना चाहिए और देवी भागवत में कहा जा रहा

115
00:08:08,480 --> 00:08:13,600
है हमने बता दिया है कि शास्त्रों का बोध उसे होता है

116
00:08:13,600 --> 00:08:17,600
पूर्णतया जो कि मां जिसको होता है वो मां भगवती

117
00:08:17,600 --> 00:08:21,600
को निरंतर उनकी आराधना करता है ठीक है

118
00:08:21,600 --> 00:08:22,100
यह लोग

119
00:08:21,960 --> 00:08:26,760
एक डायलॉग मारते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश में तीन गुण है ठीक है

120
00:08:26,760 --> 00:08:30,800
मगर उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि मां भगवती जो है वो

121
00:08:30,800 --> 00:08:34,840
माया जो शक्ति है भगवान की वो है इस बारे में

122
00:08:34,840 --> 00:08:39,280
उन्होंने मतलब य तीन गुण से वो ब्रह्मा विष्णु महेश को कट करते हैं

123
00:08:39,280 --> 00:08:43,360
फिर देवी की पूजा कर लो अगर आप तीन गुणों से ब्रह्मा विष्णु महेश को

124
00:08:43,360 --> 00:08:47,480
कट कर रहे हो तो देवी की पूजा कर लो उनको भी कट कर रहे हो तो गणेश

125
00:08:47,480 --> 00:08:52,400
जी की पूजा कर लो नहीं करोगे उसकी पूजा करोगे जिसका जिक्र ही नहीं है

126
00:08:52,400 --> 00:08:56,480
भाई अगर आप तीन गुणों से युक्त सिद्ध मान रहे हो कि

127
00:08:56,480 --> 00:09:00,520
युक्त है वो गुण ही है अगर मान रहे हो और इसलिए

128
00:09:00,520 --> 00:09:05,440
उनकी पूजा नहीं कर रहे हो मगर जिसकी पूजा कर रहे हो उसका भी तो व होना चाहिए प्रमाण

129
00:09:05,440 --> 00:09:09,560
कि वह कबीर तीन गुणों से युक्त नहीं है उसका कहीं रेफरेंस ही

130
00:09:09,560 --> 00:09:13,600
नहीं है उसकी पूजा करोगे करते हैं फिर इसी

131
00:09:13,600 --> 00:09:17,640
में आगे वो अच्छा तत्वदर्शी संत की

132
00:09:17,640 --> 00:09:21,920
पहचान हमने जान लिया कि 15.1 के अनुसार अगर इनका तत्वदर्शी है

133
00:09:21,920 --> 00:09:25,920
तो तत्वदर्शी व है जो संपूर्ण वेद शास्त्रों को

134
00:09:25,920 --> 00:09:30,120
जानता हो और वेद शास्त्रों को जानने वाले के लक्ष है

135
00:09:30,120 --> 00:09:34,440
कि वो नित्य जो है निरंतर मां भगवती की आराधना

136
00:09:34,440 --> 00:09:37,760
करता हो अब

137
00:09:37,760 --> 00:09:42,000
बात आती है कि कि मान

138
00:09:42,000 --> 00:09:46,280
लिया जाए कि वह जो श्लोक है चार च 35

139
00:09:46,280 --> 00:09:50,280
जिसमें कि हमने यह कहा कि पहले मतलब भगवान वहां पर यह कह रहे

140
00:09:50,280 --> 00:09:54,320
हैं श्री कृष्ण कि पहले तू सारी दुनिया को स्वयं में देख

141
00:09:54,320 --> 00:09:58,640
और फिर मुझ में देख ठीक है तो यह जो शिक्षा

142
00:09:58,640 --> 00:10:02,720
है में देखने की इस

143
00:10:02,720 --> 00:10:06,720
शिक्षा के कारण वहां कहा जा रहा है कि इस शिक्षा के कारण तू जो

144
00:10:06,720 --> 00:10:11,040
है बंधनों से मुक्त हो जाएगा और जो यह ज्ञान तुझे देगा वोह तत्व ज्ञानी

145
00:10:11,040 --> 00:10:15,080
है यही ज्ञान तत्व ज्ञान है ठीक है चलो मान लिया वहां पर

146
00:10:15,080 --> 00:10:19,120
सच्चिदानंद घन ब्रह्म नहीं लिखा है वो बात और है कि जब भगवान

147
00:10:19,120 --> 00:10:23,280
यह कह रहे हैं कि मुझ मुझ में देख तो वह अन्य कई जगहो

148
00:10:23,280 --> 00:10:27,400
पर स्वयं को ईश्वर कह रहे हैं है ना जैसे सात सात में स्वयं

149
00:10:27,400 --> 00:10:31,440
को ईश्वर कहा है सा 19 में स् को ईश्वर कहा है तो वह कह

150
00:10:31,440 --> 00:10:35,600
रहे हैं साथ साथ में स्वयं को ईश्वर साथ 19 में कह रहे हैं बहुत जगह अनेक अनेक जगह

151
00:10:35,600 --> 00:10:39,720
कह रहे हैं है ना संपूर्ण प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी

152
00:10:39,720 --> 00:10:43,760
अपनी योग माया को अधीन करके मैं जन्म लेता हूं प्रकट इसके साथ

153
00:10:43,760 --> 00:10:48,560
ही साथ अनेक अनेक जगह स्वयं स्वयं को परम ब्रह्म कहा तो

154
00:10:48,560 --> 00:10:52,560
मान लो वहां पर सच्चिदानंद घन ब्रह्म शब्द नहीं आया संस्कृत में

155
00:10:52,560 --> 00:10:53,060
मगर

156
00:10:52,760 --> 00:10:56,920
यह तो आया कि सारी दुनिया को मुझ में देखने से तो तुम क्या सारी दुनिया

157
00:10:56,920 --> 00:11:01,080
को ब्रह्म में देखते हो नहीं देखते देखते

158
00:11:01,080 --> 00:11:05,280
हो क्या अगर ज्यादा बात आएगी तो तुम कबीर या

159
00:11:05,280 --> 00:11:09,360
परमात्मा को श सबब दुनिया में देखने की बात हो सकता है कबीर ने

160
00:11:09,360 --> 00:11:13,720
कहीं कही हो या फिर परमात्मा में सारी दुनिया को देखने की बात

161
00:11:13,720 --> 00:11:17,840
कही हो मगर वहां बोलने वाला कौन है ब्रह्म ब्रह्म में देखने की बात

162
00:11:17,840 --> 00:11:21,880
तो नहीं कही ब्रह्म तो अलग है ठीक है तुम्हारे हिसाब से

163
00:11:21,880 --> 00:11:26,040
तो सबसे पहली बात ये हो गई फिर उसके बाद क्या है

164
00:11:26,040 --> 00:11:30,040
कि वही वाली बात कि तत्वदर्शी की सही व्याख्या तो वही है जो देवी भागवत

165
00:11:30,040 --> 00:11:34,160
में बताई गई है अगर बात ये

166
00:11:34,160 --> 00:11:38,040
आती

167
00:11:38,040 --> 00:11:42,480
हैन सी शिक्षा कबीर हां ठीक है

168
00:11:42,480 --> 00:11:46,600
अच्छा एक बात और है अब इन्होंने ये

169
00:11:46,600 --> 00:11:50,680
जो संस्कृत वाला व्रज शब्द है जैसे इन्होंने उसम उंगली उठा दी संस्कृत

170
00:11:50,680 --> 00:11:54,840
वाला जो व्रज शब्द है उसका मतलब या तो गो होता है या कम होता है अलग अलग

171
00:11:54,840 --> 00:11:58,960
कर दिया ठीक है इस पर हम एंड में आएंगे शरण में जाने के लिए

172
00:11:58,960 --> 00:12:03,160
कहा मतलब यहां पर मैं यह बता रहा हूं कि यह जब किसी से

173
00:12:03,160 --> 00:12:07,360
अपने मन की बात चल रही होती है तो तो उसकी शिक्षा को बिना चेक

174
00:12:07,360 --> 00:12:11,360
किय ही स्वीकार कर लेते हैं यह भी नहीं देखते कि यहां पर संस्कृत

175
00:12:11,360 --> 00:12:15,520
में क्या लिखा है और जब अपने विरुद्ध जा रही होती है तब

176
00:12:15,520 --> 00:12:19,920
उसी की उसी के ज्ञान पर व लगाने लगते हैं तो इसका पैरामीटर

177
00:12:19,920 --> 00:12:24,000
क्या है कि किसी को किसी को सही और किसी को गलत

178
00:12:24,000 --> 00:12:28,160
मानने का आपका पैरामीटर क्या है ठीक

179
00:12:28,160 --> 00:12:32,360
है अर्पित जी अपने चेहरे के साथ आप आइएगा किसी दिन लाइव में हमारा

180
00:12:32,360 --> 00:12:37,600
नंबर नोट कर लीजिए वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा का

181
00:12:37,600 --> 00:12:42,040
हां रिप्लाई आएगा आपको आर्यन जी ना मास्त्र के लिए

182
00:12:42,040 --> 00:12:48,040
रिप्लाई आएगा

183
00:12:48,320 --> 00:12:52,680
और आप जो है तब जवाइन करें तो इनके हिसाब से किसी की शिक्षा

184
00:12:52,680 --> 00:12:56,800
उतनी सही है जितना इनके पक्ष की बात हो रही वो भी इनके पक्ष की नहीं है

185
00:12:56,800 --> 00:13:00,840
अगर इनके सारी चीजों को देख लिया जाए कि भाई वहां

186
00:13:00,840 --> 00:13:05,040
पर ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने को मना किया गया है गणेश जी की भक्ति

187
00:13:05,040 --> 00:13:09,160
करने को मना किया गया सब ठीक है कबीर की भक्ति करने को कहां

188
00:13:09,160 --> 00:13:13,360
आ गया है रामपाल कहां

189
00:13:13,360 --> 00:13:17,600
से आ गए अगर तत्वदर्शी की बात हो रही है तुम्हारी व्याख्या तुमने

190
00:13:17,600 --> 00:13:21,800
हमारी व्याख्या को गलत कर दिया सब सब कुछ गलत तुमने सिद्ध कर दिया तो

191
00:13:21,800 --> 00:13:26,440
रामपाल वहां पर कहां से आ गए कैसे सिद्ध कर रहे हो रामपाल को जबरन

192
00:13:26,440 --> 00:13:30,600
कि उन्होंने उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर दी मैं भी कर रहा हूं उल्टे वृक्ष की व्याख्या

193
00:13:30,600 --> 00:13:34,680
मैं कर दे रहा हूं मान लो मुझे तत्वदर्शी और मैं कविता भी करता

194
00:13:34,680 --> 00:13:38,720
हूं अभी सुनाई थी मुझे तेरा अंतिम प्रयास चाहिए

195
00:13:38,720 --> 00:13:42,760
और बचपन में मेरे घर वाले मुझे वो भी कहते हैं कवि

196
00:13:42,760 --> 00:13:46,760
लो तुम्हे तो कबीर कहना पड़ेगा मेरे घर वाले मुझे कवि कहते हैं

197
00:13:46,760 --> 00:13:51,040
स्वेतांक जी मुझे कभ बोल दीजिए एक बार कभ बोलिए मुझे एक बार एक बार बोल दीजिए बस कवि

198
00:13:51,040 --> 00:13:55,160
जी कवि जी आपको प्रणाम हैलो लो मेरा वेदों में प्रमाण आ गया पूजा

199
00:13:55,160 --> 00:13:59,640
कर लो मेरी हो गया प्रमाण देखो

200
00:13:59,640 --> 00:14:03,360
भाई तुम तुम उसको तुम उसको वहां पर वेदों में कवि लिखा

201
00:14:03,360 --> 00:14:07,480
मेरे को तो कवि बोल रहे हैं तुम तो कबीर बोलते हो ऐसे नहीं होता है ना प्रमाण

202
00:14:07,480 --> 00:14:11,720
होना चाहिए कि यही वाला कबीर कबीर है अगर कबीर है भी तो कबीर

203
00:14:11,720 --> 00:14:15,840
है नहीं वैसे यही वाला कबीर कबीर है है ना

204
00:14:15,840 --> 00:14:20,000
ऐसे नहीं होता है कि बस तुमने किसी को कवि कह दिया हमने कभ कहा हमने किसी कवि कहा

205
00:14:20,000 --> 00:14:24,880
वही तो कवि बस चालू हो जाओ ऐसे नहीं होता है

206
00:14:24,880 --> 00:14:29,080
तो ये हो गया अब इसके बाद ज

207
00:14:29,080 --> 00:14:33,160
लेकिन इसमें एक बात और है ऐसे तो वो हमारे वो थे ना कौन से कवि बड़े मशहूर है ये

208
00:14:33,160 --> 00:14:37,160
कोई दीवाना कहता है कोई वो भी भी क है

209
00:14:37,160 --> 00:14:41,240
हां उनसे भी मैं कह दूंगा जरा तुम पेन कॉपी लेकर उल्टे वृक्ष की व्याख्या

210
00:14:41,240 --> 00:14:45,520
कर दो नीचे अपने कविताओं के नाम लिख देना ये पत्ते प फलानी कविता

211
00:14:45,520 --> 00:14:49,800
ये पत्ते पर फलानी कविता वो भी वो हो गए आपके लिए

212
00:14:49,800 --> 00:14:54,000
भगवान और अब मैं एक काम करूंगा किसी के य कोई छोटा बच्चा

213
00:14:54,000 --> 00:14:58,080
जब जन्म लेगा उसको कह दूंगा इसका नाम तुम कवि रख दो और फूल वाली

214
00:14:58,080 --> 00:15:01,920
कहानी मैं बना दूंगा उड़ा

215
00:15:01,920 --> 00:15:06,400
दूंगा क्यों विश्वास करें अगर विश्वास ही करने की बात है

216
00:15:06,400 --> 00:15:10,680
तो बकल और सीधी बात है कि कौन

217
00:15:10,680 --> 00:15:14,840
अगर मान लो वेदों में कहीं कबीर की बात हुई नहीं अगर हुई है एक

218
00:15:14,840 --> 00:15:18,400
बार को मान लो तो यह कैसे माना जाए कि तुम जिसे कबीर कह

219
00:15:18,400 --> 00:15:22,560
रहे हो उसी कबीर की बात हुई है भाई मैं कह रहा हूं मेरे मेरे मोहल्ले

220
00:15:22,560 --> 00:15:26,600
में पोस्ट मास्टर है वो कविता करते हैं और वो जो है उनका नाम

221
00:15:26,600 --> 00:15:31,000
कबीर है उस कबीर की बात हो रही है क्यों नहीं मानोगे आप ऐसे नहीं होता है ना

222
00:15:31,000 --> 00:15:35,040
वही कबीर है तो ये इनकी कहानी है पूरी पिक्चर

223
00:15:35,040 --> 00:15:39,240
में यह हमको गलत तो साबित करने में लग रहेंगे मगर कभी यह नहीं बताएंगे

224
00:15:39,240 --> 00:15:43,280
कि भैया इसमें कबीर कहां से आ गया रामपाल कहां से आ गया पिक्चर में

225
00:15:43,280 --> 00:15:49,280
वो नहीं वो उनका कैमियो रोल अचानक से मेन रोल हो जाता

226
00:15:52,000 --> 00:15:56,040
है अच्छा अब इसके बाद अगली बात देखें इनकी क्या है बहुत हंसी

227
00:15:56,040 --> 00:16:00,080
की बातें हैं ्र शब्द तो लास्ट में आएंगे अब जरा

228
00:16:00,080 --> 00:16:04,120
फैक्ट वाइ अभिषेक की बात कर लेते हैं इसमें सबसे पहली

229
00:16:04,120 --> 00:16:09,000
बात तो यह है कि मैंने एक वीडियो था जिसमें की व्यक्ति कह रहा था

230
00:16:09,000 --> 00:16:13,000
कि पहले वेद फिर गीता फिर पुराण मैंने

231
00:16:13,000 --> 00:16:17,360
उससे पूछा यह सीक्वेंस कहां लिखा है अगर आप यह कहो

232
00:16:17,360 --> 00:16:21,440
कि वेद जो है हमारे लिए अंतिम प्रमाण है

233
00:16:21,440 --> 00:16:25,720
जो भी चीज उसके अकॉर्डिंग होगी वो हमारे लिए प्रमाण है जो उसका विरोध

234
00:16:25,720 --> 00:16:30,120
करेगी वो प्रमाण नहीं है यह तो ठीक है मगर तुम ये सीक्वेंस

235
00:16:30,120 --> 00:16:34,240
बता रहे हो पहले वेद फिर गीता फिर पुराण यह कहां लिखा है तो वो

236
00:16:34,240 --> 00:16:38,400
व्यक्ति कह रहा है किय तो मैंने अपने मन से निकाला है मेरा मन है

237
00:16:38,400 --> 00:16:42,560
अरे मन है तो फिर ये क्यों चिल्ला र सद ग्रंथों के आधार पर भक्ति सद ग्रंथों के आधार

238
00:16:42,560 --> 00:16:46,560
पर भक्ति तो इसमें वो व्यक्ति मुझे उत्तर दे अच्छा मेरा पूछने

239
00:16:46,560 --> 00:16:50,720
का कारण क्या था मेरा पूछने का कारण यह था कि इनके जो

240
00:16:50,720 --> 00:16:55,360
तथाकथित तत्वदर्शी है जेल धाम में जो इस समय निवासी है वो

241
00:16:55,360 --> 00:16:59,480
ये कहते हैं वो उन्होंने अपना जो तानाबाना मेनली बुना है वो वेदों के आधार

242
00:16:59,480 --> 00:17:05,480
पर नहीं होना है वेदों के आधार पर केवल कवि शब्द की ज्यादा वो अग्न्या को

243
00:17:06,160 --> 00:17:10,440
अधनोम सारा बना है गीता और पुराणों पर

244
00:17:10,440 --> 00:17:14,960
ठीक है तो अब ये जब मैं इसको पुराण से कोई प्रमाण दूंगा

245
00:17:14,960 --> 00:17:19,800
और उसकी बात ही वेद में नहीं हो रही है मान लो उस किस्से की उस दृष्टांत की

246
00:17:19,800 --> 00:17:23,800
नहीं हो रही है मगर उसमें जिस तत्व के बारे में बात हो रही है उस तत्व

247
00:17:23,800 --> 00:17:27,800
के बारे में वेद में बात होती है जैसे विष्णु तत्व शिव तत्व इनकी बात

248
00:17:27,800 --> 00:17:31,920
वेदों में हुई है और इन्हीं तत्वों का विस्तार से यहां पर लीला पूर्वक वर्णन है

249
00:17:31,920 --> 00:17:36,000
है ना तो मैं उससे ये जानना चाह रहा

250
00:17:36,000 --> 00:17:40,640
था कि जब तुम्हारे ज्ञान गंगा के अनुसार

251
00:17:40,640 --> 00:17:44,640
तुम्हारे जो तत्वदर्शी है उन्होंने पुराणों को प्रमाण माना है तो तुम

252
00:17:44,640 --> 00:17:48,760
पुराणों को प्रमाण क्यों नहीं मान रहे बिना वेद के आधार के भी जब वो कई बार

253
00:17:48,760 --> 00:17:52,840
पुराण दिखाते तो तुम मानते हो ना जैसे कि ब्रह्मा

254
00:17:52,840 --> 00:17:57,080
विष्णु महेश ने स्वयं को आविर्भव और त्र भाव वाला कहा क्या तुमने इसम

255
00:17:57,080 --> 00:18:01,360
पुराण से चेक किया ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भाव तिरोभाव होता है

256
00:18:01,360 --> 00:18:05,480
किया चेक नहीं किया है ना तो ये सीक्वेंस

257
00:18:05,480 --> 00:18:09,520
में पता करना पा रहा था कि और दूसरी बात गीता बीच में कैसे आ गई

258
00:18:09,520 --> 00:18:13,520
अगर अगर अगर पहले नंबर बात आएगी अगर बात

259
00:18:13,520 --> 00:18:17,560
आएगी तो पुराण की बात पहले आई इतिहास पुराणा भ्यम

260
00:18:17,560 --> 00:18:21,960
मैं आपको श्लोक दिखा देता हूं गीता फिर पहले कैसे आ जाएगी

261
00:18:21,960 --> 00:18:25,960
ये देखिए यह महाभारत है भैया मेरे पास

262
00:18:25,960 --> 00:18:29,960
फैक्ट वाई अभिषेक अगर देख पा रहे हो तो

263
00:18:29,960 --> 00:18:34,080
देख ले आपने जैसे देवी भागवत आपका देवी भागवत का मैं

264
00:18:34,080 --> 00:18:38,400
विरोध थोड़ी ना कर रहा हूं बिल्कुल सही बात है कोई भी किसी भी प्रमाण

265
00:18:38,400 --> 00:18:42,400
को तब तक माना जा सकता है जब तक व वेद विरुद्ध ना हो मगर

266
00:18:42,400 --> 00:18:46,600
मैं उससे सामने वाले व्यक्ति से यह जानना चाह रहा हूं कि अगर

267
00:18:46,600 --> 00:18:50,720
पुराण कोई बात कह रहा है जिसमें की वेद का विरोध नहीं है मगर

268
00:18:50,720 --> 00:18:55,080
डायरेक्ट प्रत्यक्ष रूप से वेद में उस बारे में बात ही नहीं हो रही तो उसको

269
00:18:55,080 --> 00:18:59,240
मानोगे कि नहीं मानोगे इसलिए मैंने पूछा और तुम्हारा जो स्केंस है भी गलत

270
00:18:59,240 --> 00:19:03,360
है कि वेद गीता पुराण यह सीक्वेंस भी गलत है

271
00:19:03,360 --> 00:19:07,360
वेद पुराण यह सीक्वेंस सही है इसलिए जानने के लिए मैंने उससे

272
00:19:07,360 --> 00:19:11,920
तीन चार बार कहा कि शास्त्र में लिखा है अंत तो एक बात क

273
00:19:11,920 --> 00:19:15,960
जो जो तुम कह रहे हो अगर वो व्यक्ति ने कह दिया होता तो

274
00:19:15,960 --> 00:19:20,120
हमारी वो चर्चा आगे बढ़ जाती क्यों ऐसे मूर्ख शिष्य भाई तुम्हारे

275
00:19:20,120 --> 00:19:24,320
जेल धामी वालों के क्यों नहीं बोल पाते वो बात जो तुमने

276
00:19:24,320 --> 00:19:28,320
बोल दी अगर जो बात तुमने बोली है तो फिर मैं अपनी भावना

277
00:19:28,320 --> 00:19:32,360
त करता है ना और वो बात आगे पहुंचती

278
00:19:32,360 --> 00:19:36,360
किसी निष्कर्ष तक पहुंचती पर वो मूर्त तो ये बोल रहा है कि

279
00:19:36,360 --> 00:19:37,040
नहीं नहीं मैंने

280
00:19:37,040 --> 00:19:41,440
अपने मन से मैंने अपने मन से कह दिया आप मेरी भावना को कैसे बदल दोगे

281
00:19:41,440 --> 00:19:45,440
मेरे मैं मैं अरे भाई व्यक्ति तो कह रहा है कि मुझे हर जगह संभोग करने

282
00:19:45,440 --> 00:19:50,320
दो किसी के भी साथ संभोग करने दो तो दो चाटे मार के उसकी भावनाओ को नहीं बदला

283
00:19:50,320 --> 00:19:54,560
जाएगा बिल्कुल बिल्कुल ये कौन सी बात है पता

284
00:19:54,560 --> 00:19:58,880
व्यक्ति ये बोल कैसे देता है कि मेरा मन है तो मेरे मन की

285
00:19:58,880 --> 00:20:04,320
को कैसे बदल दोगे मार के बदला

286
00:20:04,320 --> 00:20:09,840
जाएगा

287
00:20:09,840 --> 00:20:14,080
अच्छा मैं वो दिखा रहा हूं आपको कि गीता

288
00:20:14,080 --> 00:20:18,160
जहां से निकली है महाभारत से इनको मालूम ही नहीं गीता कहां से आई गीता आ गई

289
00:20:18,160 --> 00:20:23,120
साब हवा में आ गई गीता महाभारत से आई है गीता

290
00:20:23,120 --> 00:20:27,640
महाभारत आदि पर्व और जो

291
00:20:27,640 --> 00:20:31,920
श्लोक है अध्याय का

292
00:20:31,920 --> 00:20:37,040
167 वा श्लोक है

293
00:20:37,040 --> 00:20:43,040
267 क्या है

294
00:20:44,880 --> 00:20:49,000
उसमें 267 वा लोक कह रहा है इतिहास और

295
00:20:49,000 --> 00:20:53,160
पुराणों की सहायता से ही वेदों के अर्थ का विस्तार

296
00:20:53,160 --> 00:20:57,280
एवं समर्थन करना चाहिए यानी कि इतिहास पुराण

297
00:20:57,280 --> 00:21:01,280
की सीमा में उनके सीमा में रहते

298
00:21:01,280 --> 00:21:05,320
हुए सामंजस एक तरीके से वेदों का अर्थ करना

299
00:21:05,320 --> 00:21:10,280
चाहिए यानी कि अगर वेदों में भगवान

300
00:21:10,280 --> 00:21:14,360
शिव की बात हो रही है तो वह कौन से शिव है कैसे शिव है यह आपको

301
00:21:14,360 --> 00:21:18,440
पुराणों में मिलेगा उनका विस्तृत वर्णन विष्णु की बात

302
00:21:18,440 --> 00:21:22,560
हो रही है तो वह कैसे दिखते हैं उनकी भुजाएं कैसी है उनके पास

303
00:21:22,560 --> 00:21:26,840
क्याक वो धारण करते हैं वो सब आपको पुराणों में मिलेगा

304
00:21:26,840 --> 00:21:30,840
तो जो इहा अच्छा इसमें एक बात और

305
00:21:30,840 --> 00:21:34,880
कही जा रही है जो इतिहास और पुराणों से अनभिज्ञ है

306
00:21:34,880 --> 00:21:39,280
है ना उनके लिए कहा जा रहा है उससे वेद डरते रहते हैं यानी कि आप पुराणों

307
00:21:39,280 --> 00:21:43,360
को नकार करके वेदों पर नहीं जा सकते अगर आप

308
00:21:43,360 --> 00:21:47,440
महाभारत गीता को मानने वाले तब की बात कर रहा हूं नहीं

309
00:21:47,440 --> 00:21:51,760
अभी बीच में आर समाजी भाजी ना मानने लगे

310
00:21:51,760 --> 00:21:56,920
मुझे तो खाने के लिए सब बैठे

311
00:21:56,920 --> 00:22:01,240
हैं मुझे ऐसा लग रहा है थोड़े दिनों में ये लोग आपस में देखो

312
00:22:01,240 --> 00:22:05,240
देखो बाद में लड़ेंगे आपस आपस की चीजें बाद में

313
00:22:05,240 --> 00:22:09,320
देखेंगे पहले बात बोल देंगे ना कि

314
00:22:09,320 --> 00:22:14,400
अभी हम वो पांडव अभी हम 106 हो जाते हैं

315
00:22:14,400 --> 00:22:18,400
105 हा मुझे ऐसा ही लग रहा है ये लोग

316
00:22:18,400 --> 00:22:22,720
बहुत जल्दी और मुझे लग रहा है नास्तिक भी आने वाले हैं हमारे भी नाक में दम कर लगका

317
00:22:22,720 --> 00:22:26,720
है शिवांश ने लेकिन लेकिन अंततोगत्वा देखिए

318
00:22:26,720 --> 00:22:30,880
ना लेंगे सहारा किसका स्मृति का पुराण

319
00:22:30,880 --> 00:22:34,960
का इतिहास का तो अभी

320
00:22:34,960 --> 00:22:39,040
अभी बहुत जल्दी अच्छा ऐसा हो भी रहा है कुछ हद तक जैसे वो

321
00:22:39,040 --> 00:22:43,200
बंगाल के बाबू जी ने वीडियो बनाया था तो उसमें रामपाल और

322
00:22:43,200 --> 00:22:47,600
स्कन दोनों को अपने साथ मिलाया था बात करते समय रामपाल

323
00:22:47,600 --> 00:22:52,480
वो जिसको ल भिजवाने वाले स्वयं आर समाजी

324
00:22:52,480 --> 00:22:56,520
है ना आर समाज से ही कोई वो था वो दयानंद जी के लिए इन्होंने

325
00:22:56,520 --> 00:23:00,920
कुछ अभद्र टिप्पणी कर दी थी तो उनको जेल भिजवाने

326
00:23:00,920 --> 00:23:05,160
वाले वही और क्या कहते हैं उसने

327
00:23:05,160 --> 00:23:09,160
जो है इन दोनों को अपने साथ मिलाया था तो यह खतरे

328
00:23:09,160 --> 00:23:12,760
की घंटी है मेरे लिए य खतरे की घंटी

329
00:23:12,760 --> 00:23:16,920
है एक साथ सबसे ले लिया है ना पंगा तो ये लोग

330
00:23:16,920 --> 00:23:21,080
ये लोग मिल बाट करके भी एक एक हो गए हा भाई आ जाओ

331
00:23:21,080 --> 00:23:25,200
कान्फ्रेंस में मगर बात यह है कि तुम्हारे

332
00:23:25,200 --> 00:23:29,320
पास अगर संख्या बल है प्रस बल है

333
00:23:29,320 --> 00:23:33,480
वो डॉक्टर को भी ले आए वकील को भी ले आए

334
00:23:33,480 --> 00:23:37,480
और बहुत सारे बल है तुम्हारे पास और भी बहुत सारे

335
00:23:37,480 --> 00:23:41,840
बल होंगे तुम्हारे पास तो तुम पूछोगे मेरे पास क्या है हा

336
00:23:41,840 --> 00:23:46,640
मेरे पास क्या ऐसे ही पूछोगे ना मेरे पास ये है वो है

337
00:23:46,640 --> 00:23:50,640
मेरे पास क्या है मेरे पास राम है

338
00:23:50,640 --> 00:23:54,880
मेरे पास राम है राम बस वो काफी सर्व

339
00:23:54,880 --> 00:23:59,440
सामर्थ वान मर जाऊंगा मगर अपनी बात से पीछे

340
00:23:59,440 --> 00:24:03,520
नहीं मर जाऊंगा लड़ता रहूंगा आखिर तक आखिरी

341
00:24:03,520 --> 00:24:07,960
सांस तक अगर जैसे एक कतरा भी बचेगा ना

342
00:24:07,960 --> 00:24:12,120
रक्त का तब भी लड़ता रहूंगा धर्म के लिए और

343
00:24:12,120 --> 00:24:16,160
अपने भाइयों के शोधन के लिए जो भटक

344
00:24:16,160 --> 00:24:20,160
गए ठीक है तो यह तो एक बात

345
00:24:20,160 --> 00:24:25,840
य हो गई देवी भागवत की हमने कर ली और भी लोग हैं

346
00:24:25,840 --> 00:24:28,000
क्या फैक्ट भाई अभिषेक

347
00:24:28,000 --> 00:24:32,000
पर मुझे लग रहा है वीडियो बनाना पड़ेगा क्योंकि अभी यह हो रहा है कि बहुत से

348
00:24:32,000 --> 00:24:36,040
लोग आने को कह रहे हैं एक दो और एक दो और बता देता हूं

349
00:24:36,040 --> 00:24:41,120
फिर हम वो कर देंगे

350
00:24:41,120 --> 00:24:45,120
क्या कहते हैं पब्लिक कर देंगे

351
00:24:45,120 --> 00:24:49,640
अपना

352
00:24:49,640 --> 00:24:53,760
लिंक यह अपने एक दो व्यक्ति पूछ रहे हैं कैसे

353
00:24:53,760 --> 00:24:57,760
जवाइन करे लाइव अ गुप्ता जी परेशान अभी अभी जरा फैक्ट बाई

354
00:24:57,760 --> 00:25:02,280
अभिषेक का एक दो एक दो चीज और बता दू ले लीजिए हा लीजिए

355
00:25:02,280 --> 00:25:06,480
हा अभी क्या है कि गीता वेद पुराण

356
00:25:06,480 --> 00:25:10,520
का सीक्वेंस हमने देख लिया अच्छा इसमें एक बात और है इसने एक बात और

357
00:25:10,520 --> 00:25:14,600
मान ली फैक्ट बाई अेक में वो एक जगह यह बोल गया

358
00:25:14,600 --> 00:25:18,720
है कि उपनिषद उपनिषद को मान गया

359
00:25:18,720 --> 00:25:23,040
है है ना वैसे उपनिषद बहुत प्रमाणिक ग्रंथ है

360
00:25:23,040 --> 00:25:27,760
कोई ऐसा सनातनी नहीं है इनको छोड़ कर के उपनिषद को ता हो मगर

361
00:25:27,760 --> 00:25:32,000
उपनि जो है इन्होंने स्वीकार कर लिया हमें नहीं मालूम

362
00:25:32,000 --> 00:25:36,040
था यह क्या कहते उपनिषद के बारे में मगर उपनिषद को फैक्ट वाइ अभिषेक ने स्वीकार किया

363
00:25:36,040 --> 00:25:40,560
उपनिषद बोला अरे अपने मतलब के लिए वो कुछ भी कर देंगे

364
00:25:40,560 --> 00:25:43,360
हा उपनिषद यहां पर भी लिखा है महाभारत में भी उपनिषद

365
00:25:43,360 --> 00:25:47,720
के बारे में लिखा है तो अब बात आ जाती है तुमने

366
00:25:47,720 --> 00:25:52,000
उपनिषद को गलत कह रहे हो तु उपनिषद को नहीं मानते और यह सीक्वेंस

367
00:25:52,000 --> 00:25:56,080
तुम्हारे लोग अलग अलग बताते सिखाओ ना भाई अपने लोगों को सिखाओ वहा जाने

368
00:25:56,080 --> 00:26:00,240
से पहले मुंह धोया करो पहले तो एक तो सब बिना मुंह धोए चले आते हैं वहां

369
00:26:00,240 --> 00:26:04,240
से मैंने जितने भी लोगों को देखा यूं ही चले आते बीड़ी कारखाने से सीधे आ

370
00:26:04,240 --> 00:26:08,680
गए अरे भाई ठीक से भी आओ बहुत कम लोग आए ऐसे

371
00:26:08,680 --> 00:26:12,800
फैक्ट वाई अभिषेक तब भी थोड़ा नहा धो करके वीडियो बनाता है

372
00:26:12,800 --> 00:26:18,800
थोड़ा साफ सुथरा लगता है अच्छा फिर क्या है

373
00:26:20,520 --> 00:26:24,560
आगे अब बात आती है कि आप लोगों के

374
00:26:24,560 --> 00:26:29,160
लोग यहां पर आकर के हम नहीं कहते आप लोगों के जो नुमाइंदे

375
00:26:29,160 --> 00:26:33,520
वो कहते य पर आकर के कि वेदों में मिलावट हो गई है हम तो कहते हैं कि रामपाल

376
00:26:33,520 --> 00:26:37,560
जी ने काम आना दिखाओ तो वो नहीं बता पाते मगर कहते मिलावट हो गई है क्यों कहते

377
00:26:37,560 --> 00:26:42,320
हैं क्योंकि हमने रुद्र के विष्णु भगवान के उनको सूक्त

378
00:26:42,320 --> 00:26:46,400
दिखाए उसमें प्रमाण है कि रुद्र की पूजा

379
00:26:46,400 --> 00:26:51,480
करने से रुद्र की पूजा कल्याण काक है सवा अध्याय यजुर्वेद

380
00:26:51,480 --> 00:26:55,560
हा तो अगर तुम लोग वेदों को मिलावट वाला नहीं

381
00:26:55,560 --> 00:26:59,360
मानते तो रुद्र सूक्त का क्या करोगे

382
00:26:59,360 --> 00:27:03,440
मानना पड़ेगा या तो मिलावट या तो तुमने वेद उतने ही पढ़े

383
00:27:03,440 --> 00:27:07,600
है जितना जितना वो लेंस लगा कर के दिखा दिया अब बात ये आती

384
00:27:07,600 --> 00:27:11,800
है कि जो सूक्ष्म वेद है तुम कहते हो पूरी वही वही

385
00:27:11,800 --> 00:27:15,920
वाली बात की सारी कथा तुम्हारी सुन ली फैक्ट भाई अब से कहां

386
00:27:15,920 --> 00:27:20,080
पर लिखा है कि जो पांचवा पुराण है वह तुम्हारा व कबीर सागर है

387
00:27:20,080 --> 00:27:25,000
क्यों माने भाई पुराणों के लिए तो लिखा है उपनिषद में

388
00:27:25,000 --> 00:27:29,240
वेद में पुराण के लिए लिखा है दो चार 10

389
00:27:29,240 --> 00:27:33,280
पढ़ो धारण उपनिषद तुम्हारा कहां

390
00:27:33,280 --> 00:27:35,640
लिखा है कि कबीर सागर वो सूक्ष्म

391
00:27:35,640 --> 00:27:39,800
वेद है या पंचम वेद है अरे भाई तुम

392
00:27:39,800 --> 00:27:44,760
सब तरह से गल कर दोगे मर अपनी चीजों को तो सही करो

393
00:27:44,760 --> 00:27:49,080
बिल्कुल वो कहां से आएगी मतलब

394
00:27:49,080 --> 00:27:53,120
हमारी पूरी इमारत को वही वाली बात की तो तू तेरे पिता के बारे में

395
00:27:53,120 --> 00:27:57,200
नहीं जानता तू तेरी मां के बारे में नहीं जानता तू तेरा नाम नहीं जानता तुझे प्यास लगी है क्या

396
00:27:57,200 --> 00:28:01,360
मैं कहूंगा हा लगी तू नहीं जानता मुझे मालूम है सब कुछ मुझे मालूम

397
00:28:01,360 --> 00:28:05,440
है एवरीथिंग मुझे मालूम है मगर अपने बारे में मुझे कुछ नहीं

398
00:28:05,440 --> 00:28:09,920
मालूम है वो कहां से आएगा वो नहीं पता

399
00:28:09,920 --> 00:28:15,920
और देखो और क्या

400
00:28:17,440 --> 00:28:21,640
है अब ये 6 16 में गीता

401
00:28:21,640 --> 00:28:26,080
में कहते हैं 6 16 भगवत गीता में जरा शॉर्ट में चल रहा हूं फटाफट

402
00:28:26,080 --> 00:28:30,240
फटाफट 6 16 में गीता कहते हैं

403
00:28:30,240 --> 00:28:34,560
कि यह क्या कहते

404
00:28:34,560 --> 00:28:38,560
हैं व्रत नहीं करने चाहिए अब 6 16 इन्होने खोल

405
00:28:38,560 --> 00:28:43,280
के भी दिखाई वहां व्रत शब्द का उपयोग ही नहीं हुआ है

406
00:28:43,280 --> 00:28:47,440
वहां कहा जा रहा हैने मन से ना अधिक जानने वाला

407
00:28:47,440 --> 00:28:51,520
अब अब ये लोग अब ये लोग शब्द क्यों नहीं पकड़ रहे अब क्यों नहीं

408
00:28:51,520 --> 00:28:55,560
शब्द पकड़ रहे भाई कहां चली गई शब्द को पकड़ने की

409
00:28:55,560 --> 00:28:59,720
कहानी मीठा मीठा ग ग कड़वा थ इसीलिए आते

410
00:28:59,720 --> 00:29:04,000
नहीं हो तुम मेरे पास जानते हो मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

411
00:29:04,000 --> 00:29:08,120
ये लोग समझ गए सीख गए चक्कर में नहीं पढ़ना है इसीलिए

412
00:29:08,120 --> 00:29:12,440
आते नहीं है वही बंद कक्ष में बैठ कर के बढ़िया ट्यूनिंग लगा लेंगे आजकल एआई

413
00:29:12,440 --> 00:29:17,080
वाला वो आ गया है तो एआई के आधार पर जो है बहुत बढ़िया सा

414
00:29:17,080 --> 00:29:21,280
सनसनी खेज वाला वीडियो और बनाएंगे आराम से खड़े

415
00:29:21,280 --> 00:29:25,720
होकर के बकल 6 16 देखते हैं क्या लिखा

416
00:29:25,720 --> 00:29:29,760
है थोड़ा सा रोचक भी रखना पता वीडियो को जिससे की ज्ञान के

417
00:29:29,760 --> 00:29:32,720
साथ साथ एक जुड़ाव बना रहे लोगों

418
00:29:32,720 --> 00:29:35,440
का देखते

419
00:29:35,440 --> 00:29:39,520
रहे तो 6 16 के आधार कहते व्रत नहीं

420
00:29:39,520 --> 00:29:43,680
करने चाहिए कोती संत

421
00:29:43,680 --> 00:29:48,760
वाला य वाला होगा है ना नात

422
00:29:48,760 --> 00:29:52,880
हे अर्जुन योग ना तो बहुत खाने वाला खाने वाले का

423
00:29:52,880 --> 00:29:57,040
और ना बिल्कुल ना खाने वाले का तथा ना बहुत

424
00:29:57,040 --> 00:30:01,240
चयन करने वाले का और ना सदा जागने

425
00:30:01,240 --> 00:30:05,280
वाले का ही सिद्ध होता है तो इसमें कहां से आगे

426
00:30:05,280 --> 00:30:10,600
व्रत नहीं करना चाहिए मैं बताता बताता

427
00:30:10,600 --> 00:30:14,680
उनके हिसाब से व्रत करना मतलब खाना नहीं खाना होता है लिएने बोल

428
00:30:14,680 --> 00:30:18,800
दिया त नहीं करना चाहिए पहली बात तोय है यहां पर क्या लिख

429
00:30:18,800 --> 00:30:22,800
रहे हैं ना अधिक जागने वाले

430
00:30:22,800 --> 00:30:26,960
का है ना ना अधिक जागने वाले का

431
00:30:26,960 --> 00:30:31,840
और ना ही अधिक सोने वाले का बिल्कुल तो

432
00:30:31,840 --> 00:30:36,040
जब आप व्रत करते हैं क्या आप अगर ना सोने

433
00:30:36,040 --> 00:30:40,040
वाले का अधिक है ना अधिक जागने वाले का अधिक है तो यहां तो बैलेंस बताने की

434
00:30:40,040 --> 00:30:44,040
बात की जा रही है कि तुम किसी भी एक चीज में अगर वो विस्तृत

435
00:30:44,040 --> 00:30:48,320
व्याख्या तो अलग होगी वोह बात अलग है मगर फिलहाल

436
00:30:48,320 --> 00:30:52,440
अगर मोटी मोटी मोटी बात करें तो एक बैलेंस बताने की बात की जा रही है किसी से तुम

437
00:30:52,440 --> 00:30:56,800
एकदम से अलग नहीं हो सकते डिटैच नहीं हो सकते और किसी से तुम एकदम से

438
00:30:56,800 --> 00:31:01,320
जुड़ नहीं सकते उसी पूरा पसान नहीं कर सकते अपनी पूरी दिन चर का

439
00:31:01,320 --> 00:31:05,440
ये अभी मोटी मोटी व्याख्या यह योग ना तो बहुत खाने वाले

440
00:31:05,440 --> 00:31:10,000
का ना बिल्कुल ना खाने वाले का अब ये बताओ जो व्रत करता है व्यक्ति

441
00:31:10,000 --> 00:31:14,440
वो क्या बिल्कुल ना खाने वाला इंसान हो जाता है उसी दिन ूसा

442
00:31:14,440 --> 00:31:18,800
भर गया है भाई कैसी बात कर अगले दिन वो खाएगा नहीं

443
00:31:18,800 --> 00:31:22,960
व्रत के अगले दिन वो खाएगा कि नहीं खाएगा तो बिल्कुल खाने वाला कहा

444
00:31:22,960 --> 00:31:27,240
से हो गया व्रत का अर्थ व्रत

445
00:31:27,240 --> 00:31:31,360
का अर्थ बिल्कुल ना खाने वाला व्यक्ति है व्रत

446
00:31:31,360 --> 00:31:35,560
करने वाला का अर्थ ये दिखाओ कहां लिखा है अपने मन

447
00:31:35,560 --> 00:31:39,600
से मन कुछ भी व्याख्या कर लो यहां बैलेंस बनाने

448
00:31:39,600 --> 00:31:44,040
की बात की जा रही है बहुत ज्यादा सोना भी गलत है बहुत ज्यादा जागना भी गलत

449
00:31:44,040 --> 00:31:48,040
अगर स्वास्थ की दृष्टि सेही देख लो तो भी गलत है तो इनमें से कौन

450
00:31:48,040 --> 00:31:52,240
सी चीज छोड़ दोगे तुम तो व्रत जो है

451
00:31:52,240 --> 00:31:57,080
व्रत करने वाला व्यक्ति बिल्कुल वो हो गया ना जो है

452
00:31:57,080 --> 00:32:01,280
ना सोने वाला सदा जागने वाला हो गया व्रत करने वाला व्यक्ति वो

453
00:32:01,280 --> 00:32:03,440
तो एक दिन की प्रैक्टिसिंग है

454
00:32:03,440 --> 00:32:07,520
बहुत सारी चीजें होती है व्रत में व्रत में आपकी जो बॉडी होती है अगर साइंटिफिक

455
00:32:07,520 --> 00:32:12,080
लैंग्वेज में देखें तो वो डिटॉक्स होती है आपकी बॉडी करेक्ट

456
00:32:12,080 --> 00:32:16,400
है ना तो यह सब बातें खैर इनको समझ में नहीं आएंगी डिटॉक्स

457
00:32:16,400 --> 00:32:20,880
टॉक्स के लिए इनको डिक्शनरी खोलनी पड़ेगी वो शरीर की अशुद्धिया

458
00:32:20,880 --> 00:32:25,560
निकल जाती है फैक्ट वा अभिषेक जी आप भी करके देखिएगा

459
00:32:25,560 --> 00:32:29,800
या इंटरमिटेंट फस्टिंग कर लीजिएगा इन्होंने इन्होंने क्या

460
00:32:29,800 --> 00:32:33,800
है ना कि इस श्लोक में एक शब्द है ये न चै

461
00:32:33,800 --> 00:32:37,840
कांत यानी कि न एकांतम अनत इन्होंने

462
00:32:37,840 --> 00:32:41,840
इसको पकड़ लिया और जिसका अर्थ होता है कि ना बिल्कुल ना

463
00:32:41,840 --> 00:32:45,960
खाने वाला बिल्कुल ना खाने वाले से इन्होंने यह मान लिया

464
00:32:45,960 --> 00:32:50,480
कि जो बिल्कुल नहीं खाता है तो उसके लिए तो बिल्कुल ठीक है बिल्कुल नहीं खाओगे तो जीवित ही नहीं रहोगे

465
00:32:50,480 --> 00:32:54,480
अच्छा एक बात बताइए ऐसे व्रत होते हैं कि नहीं जिसमें फलर भी करता है

466
00:32:54,480 --> 00:32:58,640
व्यक्ति होते हैं बिल्कुल होते हैं चलो भैया तुम फलारी वाला

467
00:32:58,640 --> 00:33:02,640
व्रत कर लेना ठीक है आज से डन

468
00:33:02,640 --> 00:33:06,680
य हो ग तसल्ली हो गई फलारी वाला व्रत

469
00:33:06,680 --> 00:33:11,120
कर लेना आज से तुम करोगे ना क्ट भाई अभिषेक कल से फलाहार वाला व्रत कर लेना

470
00:33:11,120 --> 00:33:15,720
लिखा हुआ फला वाला कर सकते वो भी उसके प्रमाण किसी अन्य वीडियो में दे देंगे

471
00:33:15,720 --> 00:33:19,000
ठीक है और श्री राम

472
00:33:19,000 --> 00:33:23,240
अगर मान लो कि ऐसे बहुत कम व्रत

473
00:33:23,240 --> 00:33:27,240
है जिसमें रात्रि भर जागा जाता है ठीक है मगर यह

474
00:33:27,240 --> 00:33:31,360
कह रहे हैं कि बहुत ज्यादा जागने वाला यानी कि इनका

475
00:33:31,360 --> 00:33:35,520
कहने का मतलब है कि यदि व्यक्ति पूरे दिन जाग रहा है तो व भी व्रत

476
00:33:35,520 --> 00:33:40,040
का एक हिस्सा है तो यह भाई साहब पूरे दिन जागते नहीं है

477
00:33:40,040 --> 00:33:44,040
दिन में भी कम से कम अब आधा आधा तो सो ग ना तो अगर दिन के 12 घंटे

478
00:33:44,040 --> 00:33:48,160
हैं तो ये भाई साहब छ घंटे दिन में सोते हैं है

479
00:33:48,160 --> 00:33:52,240
ना भाई फैक्ट बाई अभिषेक इसको इसमें एक और पॉइंट जोड़ देता

480
00:33:52,240 --> 00:33:56,640
हूं मैं जहां से उन्होने श्लोक उठाया है ना उसी जगह पर

481
00:33:56,640 --> 00:34:00,800
ठीक है जोय शब्द चन जाग्रता वाला

482
00:34:00,800 --> 00:34:05,080
जो शब्द है उसम न के ब्रैकेट में सदा लिखा हुआ है

483
00:34:05,080 --> 00:34:09,200
सदा सदा जागने वाला सदा जागने वाला लेकिन वो पन

484
00:34:09,200 --> 00:34:13,400
चल जाएगी उस ठीक है क्योंकि

485
00:34:13,400 --> 00:34:17,600
उन्ह व फिर य पर सदा का मीनिंग नहीं है ना मगर व्रत का मीनिंग

486
00:34:17,600 --> 00:34:22,080
इनको मिल गया भाई व्रत की कौन सी व्याख्या है व हमको लाकर दिखाइए

487
00:34:22,080 --> 00:34:26,120
जो बिल्कुल य अर्थ निकले उस व्याख्या य आपको बैलेस बताना

488
00:34:26,120 --> 00:34:29,160
सिखाया जा रहा है

489
00:34:29,160 --> 00:34:33,240
अच्छा अब आगे चलते हैं 6 16 से अच्छा इसके लिए मुझे

490
00:34:33,240 --> 00:34:34,040
कोई बहुत मेहनत

491
00:34:34,040 --> 00:34:38,120
नहीं करनी पड़ती इनकी चीजों के लिए जैसे इसने वो वेद वेद

492
00:34:38,120 --> 00:34:42,640
के लिए निकाला होगा तो व सब इन्होंने बहुत

493
00:34:42,640 --> 00:34:46,720
पूरा वीडियो बनाया अभी अभी मैंने इसका वीडियो देखा है और साथ की साथ व वही

494
00:34:46,720 --> 00:34:51,040
की वही अब इन्होंने क्या कहा है

495
00:34:51,040 --> 00:34:55,280
कि मूर्ति की हां इसने एक प्रमाण

496
00:34:55,280 --> 00:34:59,400
दिया कि केवल मूर्ति सब कुछ नहीं होती है संत

497
00:34:59,400 --> 00:35:03,520
भी संतों का भी वो करना चाहिए अबे मेरे भाई तुम

498
00:35:03,520 --> 00:35:07,560
ही तो कह रहे हो केवल मूर्ति यहां पर बात हो रही है कि

499
00:35:07,560 --> 00:35:11,560
ऐसा नहीं है कि अगर आप मूर्ति पूजा कर रहे हो पास में कोई संत आए तो उसकी अवेल ना

500
00:35:11,560 --> 00:35:15,640
करो यह बात की जा रही है शास्त्र में तो आपने मान लिया मूर्ति

501
00:35:15,640 --> 00:35:19,880
को हटा ही दो बिल्कुल निकाल ही दो है

502
00:35:19,880 --> 00:35:23,880
बिल्कुल वहां केवल शब्द आ रहा है ना केवल मूर्ति ही सब

503
00:35:23,880 --> 00:35:27,880
कुछ नहीं है बिल्कुल सही बात है ऐसा ना हो कि म

504
00:35:27,880 --> 00:35:32,280
कारण किसी संत का अनादर करो निरादर करो यह कहा जा रहा है

505
00:35:32,280 --> 00:35:36,360
मगर मूर्ति पूजा गलत है तो शिव पुराण में भगवान कह रहे हैं मेरी मूर्ति

506
00:35:36,360 --> 00:35:40,440
पूजा होती है शुरू में ही बता रहे हैं सकल और जब अपने

507
00:35:40,440 --> 00:35:44,480
सकल और निष्कल रूप के बारे में बात कर रहे हैं वहा अपने

508
00:35:44,480 --> 00:35:48,520
निष्कल रूप के लिए शिवलिंग बता रहे हैं और सकल रूप के लिए मूर्ति बता रहे हैं ऐसे

509
00:35:48,520 --> 00:35:49,040
थोड़ी ना

510
00:35:49,040 --> 00:35:53,600
होता है कहीं पर भी बस जरा सी कोई बात मिल गई बस डंका बजाने

511
00:35:53,600 --> 00:35:57,720
लगे और फिर वहां पर केवल शब्द आया है ना कि केवल हम

512
00:35:57,720 --> 00:36:01,720
कहा कह रहे केवल मूर्ति से मोक्ष मिल जाएगा मूर्ति पूजा

513
00:36:01,720 --> 00:36:06,120
करोगे अच्छा आचरण करोगे संतों का

514
00:36:06,120 --> 00:36:10,280
सानिध्य प्राप्त करोगे उनसे मिलने वाले ज्ञान को अपने

515
00:36:10,280 --> 00:36:14,920
जीवन में उतारो चरितार्थ करोगे तब आप उस

516
00:36:14,920 --> 00:36:19,760
मार्ग पर आगे बढ़ पाओगे बहुत सी चीज है

517
00:36:19,760 --> 00:36:24,160
तो हम कहा कह रहे केवल मूर्ति पूजा तुम कह रहे हो मूर्ति पूजा खंडन

518
00:36:24,160 --> 00:36:28,640
खत्म हो गया यह कहा लिखा है मूर्ति पूजा बंद कर दो

519
00:36:28,640 --> 00:36:32,840
मूर्ति पूजा के लिए वेदों में प्रमाण है प्राण प्रतिष्ठा

520
00:36:32,840 --> 00:36:36,840
होती है वेद में तुमने वेद उतने ही पढ़े हैं जितनी चाबी भरी

521
00:36:36,840 --> 00:36:41,000
जेल धाम से उतना चले

522
00:36:41,000 --> 00:36:47,000
खिलौना दिखाना पड़ेगा क्या मूर्ति पूजा का

523
00:36:51,360 --> 00:36:56,520
प्रमाण बताओ ये चीज र समायो के लिए लेकर रखनी पड़ती

524
00:36:56,520 --> 00:37:01,360
थी अब जो है इनको भी दिखाना

525
00:37:01,360 --> 00:37:06,160
पड़ेगा अरे केवल मैं तो कह रहा हूं कि दिखाने की आवता नहीं

526
00:37:06,160 --> 00:37:10,360
जी पहली बात तो ये है जब ब्रह्म साकार हो गया परम ब्रह्म

527
00:37:10,360 --> 00:37:14,480
भगवान जो है साकार हो गए तो वहीं से मूर्ति हो गई है ना मूर्ति

528
00:37:14,480 --> 00:37:17,320
की बात आ

529
00:37:17,320 --> 00:37:21,320
गई एक मैं बिल्कुल स्पष्ट इनको दे दूं मूर्ति के बारे में जहा बात

530
00:37:21,320 --> 00:37:27,320
हो रही है

531
00:37:30,560 --> 00:37:34,640
अथर्ववेद हा 5 30 12 अथर्ववेद

532
00:37:34,640 --> 00:37:38,880
5 30 12 इस प्रतिमा में प्राण आए

533
00:37:38,880 --> 00:37:42,880
मन आए नेत्र आए बल आए य प्राण प्रतिष्ठा के संबंध

534
00:37:42,880 --> 00:37:47,400
में है अथर्ववेद 16 दो 16 दो नहीं है

535
00:37:47,400 --> 00:37:51,600
अथर्ववेद में लिखा है हे प्रतिमा ये जो वो

536
00:37:51,600 --> 00:37:56,240
है क्या कहते हैं प्रमाण इसमें करेक्शन है प्रमाण स्थली में

537
00:37:56,240 --> 00:38:00,280
बात गलत नहीं है प्रमाण ल बताना पड़ेगा अलग से हे प्रतिमा

538
00:38:00,280 --> 00:38:04,680
तू ऋषियों का पाषाण है तुझसे पा

539
00:38:04,680 --> 00:38:08,840
तुझसे तुझे पाषाण के लिए नमस्कार हो इस तरह का

540
00:38:08,840 --> 00:38:14,840
वर्णन है मूर्ति पूजा का और स्वेता सत्रप निषद में ले

541
00:38:15,640 --> 00:38:20,480
लो उपनिषद में लेलो उपनिषद को तो मान लिया ना अभिषेक जी ने

542
00:38:20,480 --> 00:38:24,480
मूर्ति पूजा हो रही है और अथर्ववेद में एक जगह

543
00:38:24,480 --> 00:38:28,320
और है वो क्या है

544
00:38:28,320 --> 00:38:32,760
5 58 ऋग्वेद 5588 हे बुद्धिमान

545
00:38:32,760 --> 00:38:36,840
मनुष्यों उस प्रतिमा का पूजन करो और यह

546
00:38:36,840 --> 00:38:41,200
स्वेता शतु में

547
00:38:41,200 --> 00:38:47,200
है तीसरा अध्याय

548
00:38:55,600 --> 00:38:59,760
है अध्याय तीन और

549
00:38:59,760 --> 00:39:05,760
इसका जो मंत्र है वह तीन

550
00:39:06,360 --> 00:39:12,360
पांच भगवान शिव की बात हो रही है यहां पर रुद्र

551
00:39:16,760 --> 00:39:20,880
की हां तुम्हारी जो मंगलमय

552
00:39:20,880 --> 00:39:25,560
शांत पुण्य प्रकाशनी मूर्ति है हे गिरि संत

553
00:39:25,560 --> 00:39:29,920
उस पूर्ण आनंदम मूर्ति के द्वारा तुम हमारी ओर देखो

554
00:39:29,920 --> 00:39:34,000
यह मूर्ति की बात हो रही है ठीक है स्पष्ट रूप से भाई तुम्हारी

555
00:39:34,000 --> 00:39:38,160
तरह नहीं कि कवि को कबीर बना दिया अग्न्या

556
00:39:38,160 --> 00:39:42,560
को अदन्या बना दिया हरियाणवी लैंग्वेज कर दिया संस्कृत को ऐसे

557
00:39:42,560 --> 00:39:46,680
नहीं है ना यह हो गया मूर्ति वाली बात

558
00:39:46,680 --> 00:39:50,760
अब आगे चलते हैं अब इन्होंने बात कर दी

559
00:39:50,760 --> 00:39:55,680
रामचरित मानस की रामचरित मानस में तुलसीदास जी स्वयं को

560
00:39:55,680 --> 00:39:59,720
गलत बता रहे मैं इतना वैसा इंसान हूं मतलब उस

561
00:39:59,720 --> 00:40:03,800
अपने आप को समर्पण भाव एक दिखा रहे है कि मैं कितना गया बीता हूं

562
00:40:03,800 --> 00:40:08,040
तो अगर वो समर्पण भाव सही है तो फिर यह अगर इसके

563
00:40:08,040 --> 00:40:12,200
कारण किसी की बात को नहीं मानना चाहिए रामचरित मानस लिखने वाले की बात

564
00:40:12,200 --> 00:40:16,360
को तो फिर तुम उसकी लिखी हुई इस बात को क्यों मान रहे हो कि हनुमान जी अपनी भक्ति

565
00:40:16,360 --> 00:40:20,440
को मना कर रहे हैं जबकि शिव पुराण में हनुमान जी की भक्ति को मोक्ष दायक

566
00:40:20,440 --> 00:40:21,680
कहा गया है मान

567
00:40:21,680 --> 00:40:25,720
लो रामचरित मानस में तुलसीदास जी स्वयं

568
00:40:25,720 --> 00:40:29,760
को गलत बोल रहे हैं इसने बोला कि वहा तुलसीदास जी स्वयं को गलत बोलते हैं

569
00:40:29,760 --> 00:40:33,840
उन्होंने अपना समर्पण भाप दिखा दिया तो फिर जब उस

570
00:40:33,840 --> 00:40:38,480
उनकी बात नहीं माननी है तो फिर हनुमान जी के विषय में उनकी बात क्यों मान रहे हो

571
00:40:38,480 --> 00:40:42,600
जब तुलसीदास जी गलत है तो क्यों मान रहे हो कि हनुमान जी के विषय में जो उन्होंने लिखा है वो

572
00:40:42,600 --> 00:40:47,320
सही लिखा है कि हनुमान जी ने ऐसा ऐसा कहा

573
00:40:47,320 --> 00:40:51,600
था ये क्या है दोगलापन डगला भाई अभिषेक

574
00:40:51,600 --> 00:40:56,920
हो तुम फैक्ट भाई अभिषेक नहीं हो डोला भाई अभिषेक

575
00:40:56,920 --> 00:41:01,040
क्या दोगलापन है हम रामचरित मानस लिखने वाले को इसलिए नहीं मानेंगे कि उसने

576
00:41:01,040 --> 00:41:05,200
खुद कहा है कि मैं गलत हूं अरे भाई वो गलत है तो हनुमान जी के बारे में भी तो वही

577
00:41:05,200 --> 00:41:09,280
लिख रहा है क्यों मान रहे हो फिर उसका प्रचार क्यों कर रहे हो क्योंकि वो हमारे मन

578
00:41:09,280 --> 00:41:13,440
की बात है मन की बात जैसे प्रधानमंत्री मोदी मोदी

579
00:41:13,440 --> 00:41:17,720
जी की मन की बात है ऐसे तुम भी शुरू करो एक शो मन की बात बिल्कुल

580
00:41:17,720 --> 00:41:21,760
अजीब बात है अच्छा एक बात और है जब हम इनसे पूछेंगे

581
00:41:21,760 --> 00:41:26,000
कि वो तुम्हारा जो जेल धाम निवासी जो गुरु है तुम्हारे तत्वदर्शी

582
00:41:26,000 --> 00:41:28,200
वो

583
00:41:28,200 --> 00:41:32,680
स्वयं को कुत्ता कह रहे हैं तो फिर वहां कुत्ता क्यों नहीं मान

584
00:41:32,680 --> 00:41:36,960
रहे वहां तो मान लो वो संकेत कर रहे हैं कि ईश्वर के उसमें

585
00:41:36,960 --> 00:41:41,280
ऐसे जाना चाहिए तो वैसे ही तुलसीदास जी भी कर रहे हैं

586
00:41:41,280 --> 00:41:45,400
बक सही बात है ऐसे किया जाता है भाई ऐसे ही हनुमान

587
00:41:45,400 --> 00:41:49,760
जी कर रहे स्वयं को राम जी के प्रति समर्पित ठीक है अच्छा

588
00:41:49,760 --> 00:41:54,400
आगे चलते

589
00:41:54,400 --> 00:41:59,800
हैं इसमें इन्होंने एक वाली बात कही रामायण पर दोष ना

590
00:41:59,800 --> 00:42:03,920
करे अच्छा इस इस सब में तत्वदर्शी संत कहां है

591
00:42:03,920 --> 00:42:07,960
कबीर कहां है वो वाला जो जिसको यह बता रहे हैं कि उसके दाढ़ी होगी उसके ऐसा होगा

592
00:42:07,960 --> 00:42:12,280
उसका वैसा होगा व वहां य होगा वह सब कुछ नहीं पता एक

593
00:42:12,280 --> 00:42:17,160
पूरी पूरी कहानी में एक दो चीजें इनकी गायब रहेंगी है

594
00:42:17,160 --> 00:42:22,000
ना बहुत चीज निकल गई हां यह वाला निकल गया

595
00:42:22,000 --> 00:42:26,120
पेज 6 16 के बाद इसने बात की भागवत

596
00:42:26,120 --> 00:42:30,320
में 8 में श्लोक में मूर्ति की बात हो रही है केवल मूर्ति

597
00:42:30,320 --> 00:42:35,640
की वो नहीं करनी चाहिए तो उसका हमने कर दिया अच्छा एक चीज और

598
00:42:35,640 --> 00:42:39,680
है वहां पर ये भी लिखा है जहां ये उंगली दिखा रहा है ना ये

599
00:42:39,680 --> 00:42:44,000
डगला व्यक्ति वहीं पर ये लिखा है कि

600
00:42:44,000 --> 00:42:48,200
स्त्री पुत्र को अपना मतलब वहां पर मानने के उसमें

601
00:42:48,200 --> 00:42:52,320
कि केवल उससे ही तुम्हारा जीवन नहीं जीवन यापन नहीं हो जाएगा मगर अगर केवल

602
00:42:52,320 --> 00:42:56,600
के कारण तुम मूर्ति को निकाल रहे हो तो क्या तुमने स्त्री पुत्र को अपना मानना

603
00:42:56,600 --> 00:43:00,720
छोड़ दिया क्या तुम गृहस्थ नहीं हो

604
00:43:00,720 --> 00:43:04,960
क्या तुमने वैराग्य ले लिया सबने नहीं लिया

605
00:43:04,960 --> 00:43:09,320
ना वहीं पर लिखा है जहां इसकी उंगली है वहीं से मिला मुझे प्रमाण

606
00:43:09,320 --> 00:43:13,520
वहीं पर लिखा है कि केवल स्त्री पुत्र से स्त्री पुत्र

607
00:43:13,520 --> 00:43:17,600
को अपना मान कर के काम नहीं चलेगा कुछ इस तरह का भाव व व्यक्त हुआ है जहा इसने उंगली

608
00:43:17,600 --> 00:43:22,840
दिखाई वहीं पर लिखा है तो फिर स्त्री पुत्र को अपने घर से निकालो

609
00:43:22,840 --> 00:43:27,120
बाहर अगर तुम मूर्ति को निकाल रहे हो कि केवल मूर्ति से काम नहीं चले

610
00:43:27,120 --> 00:43:31,760
लेगा तो इस हिसाब से वही लिखा है स्त्री पुत्र को अपना मानने से काम नहीं चलेगा

611
00:43:31,760 --> 00:43:35,800
बिल्कुल सिमिलरली लिखा है निकाल दो बाहर क्यों नहीं निकाल रहे

612
00:43:35,800 --> 00:43:39,920
हो तब तो नहीं नहीं लाल चुनरिया वाली कोई

613
00:43:39,920 --> 00:43:42,960
घर मेरे भी

614
00:43:42,960 --> 00:43:47,360
लाओ मैं कुवारा कब तक बैठू बैंड मेरा बजवा हो

615
00:43:47,360 --> 00:43:52,360
मेरी शादी करवाओ तब तो यह चल रहा है

616
00:43:52,360 --> 00:43:56,520
अच्छा 8 1 8

617
00:43:56,520 --> 00:44:00,960
1 का आधार लेते हुए उन्होंने कहा कि भाई जब मान लो वहां पर प्रणव

618
00:44:00,960 --> 00:44:05,240
की बात हो रही है तो तुम प्रणव का उच्चारण क्यों नहीं कर रहे कौन कह रहा नहीं कर

619
00:44:05,240 --> 00:44:07,320
रहे कई संत ऐसे हैं

620
00:44:07,320 --> 00:44:11,520
जो प्रणव से ही अपनी साधना करते हैं किसने कहा किसने मना किया

621
00:44:11,520 --> 00:44:15,560
कई संत है जो केवल प्रणव से अपनी साधना करते हैं मगर

622
00:44:15,560 --> 00:44:19,600
अगर प्रणव के लिए कहा गया है तो दूसरी चीजों के लिए दूसरी जगह भी

623
00:44:19,600 --> 00:44:24,080
तो कहा गया है और प्रणव युक्त गायत्री

624
00:44:24,080 --> 00:44:28,200
मंत्र का जा पहली बात तो यह है कि जब हम किको धन कर रहे तो एक अक्षर

625
00:44:28,200 --> 00:44:32,720
परम अक्षर ब्रह्म को भगवान को तो लगाया गया प्रणव

626
00:44:32,720 --> 00:44:36,840
और फिर उसके लिए मंत्र क्या है गायत्री ऐसे

627
00:44:36,840 --> 00:44:41,000
करके भगवान का आहवान कर कर के और मंत्र

628
00:44:41,000 --> 00:44:45,080
का जाप किया जाता है गायत्री मंत्र के बारे में देवी भागवत में लिखा हुआ है

629
00:44:45,080 --> 00:44:49,720
प्रणव युक्त गायत्री मंत्र के बारे में देवी भागवत में लिखा है वही लिखा है

630
00:44:49,720 --> 00:44:53,880
जहां पर यह लिखा है कि वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन

631
00:44:53,880 --> 00:44:58,080
है जो मां भगवती की निरंतर आराधना करता है

632
00:44:58,080 --> 00:45:02,720
वहीं पर लिखा है प्रणव युक्त प्रणव युक्त हम ऐसे ऐसे

633
00:45:02,720 --> 00:45:07,600
कच्ची गोलिया नहीं खेलते हम है ना तुम खेलते

634
00:45:07,600 --> 00:45:11,840
हो तुम करते हो इसकी इसकी ईट इसका रोड़ा भानुमती

635
00:45:11,840 --> 00:45:15,960
का कुनबा जोड़ा हम नहीं करते हर एक बात का शास्त्र प्रमाण देते

636
00:45:15,960 --> 00:45:19,960
हैं बिल्कुल अच्छा फिर इन्होने कह दिया वेद मंत्र से

637
00:45:19,960 --> 00:45:22,760
छेड़खानी वगैरह इत्यादि इत्यादि

638
00:45:22,760 --> 00:45:28,160
वेद मंत्र से छेड़खानी तो तुम करते हो भाई तुम करते हो अगनि

639
00:45:28,160 --> 00:45:32,880
अदन्या जब वहां लिखा है अग्न्या तो उसको अदन्या कैसे कर दिया

640
00:45:32,880 --> 00:45:36,880
तुमने और अगर तुम तुम तुम तुम्हारे पास फिर वही बात

641
00:45:36,880 --> 00:45:40,960
जो जो तुम्हें वेद दे रहा है उसके मंत्र तुम्हें नहीं मानने अपने मानने हैं

642
00:45:40,960 --> 00:45:45,080
तो फिर वो वाली बात आ गई तुम्हारी तुम जो कहते हो वेदों के सब मंत्रों को मानते हो नहीं

643
00:45:45,080 --> 00:45:49,640
मानते भाई वेद के मंत्र में लिखा हुआ है अग्न घ

644
00:45:49,640 --> 00:45:54,600
और तुम कर रहे हो धा ये छेड़खानी ये है इसे कहते हैं छेड़खानी है

645
00:45:54,600 --> 00:45:59,080
ना कवि को तुमने लिख दिया य कबीर है यह है छेड़ कानी

646
00:45:59,080 --> 00:46:03,160
कवि का अर्थ कबीर लिखा दिखाओ कवि का अर्थ कबीर कहां लिखा

647
00:46:03,160 --> 00:46:07,400
है और तुम कहते कबीर देव कबीर देव अगर

648
00:46:07,400 --> 00:46:11,560
कबीर एक देव है तो फिर महादेव कौन है उनको

649
00:46:11,560 --> 00:46:16,240
मान लो भैया अथर्ववेद में लिखा है स रुद्र स

650
00:46:16,240 --> 00:46:20,280
महादेव गणपति कौन है हां अगर

651
00:46:20,280 --> 00:46:24,400
क मानते हो तो गणपति ले लो अगर कबीर

652
00:46:24,400 --> 00:46:28,560
देव को मानते हो तो महादेव ले लो कहां बचोगे इसीलिए आते

653
00:46:28,560 --> 00:46:32,640
नहीं हो मालूम है कोई है नहीं टक्कर में नहीं

654
00:46:32,640 --> 00:46:36,640
पड़ना चक्कर में यह हंसते हंसते

655
00:46:36,640 --> 00:46:37,920
खेलते खेलते तुम्हारा वो

656
00:46:37,920 --> 00:46:41,920
हो रहा है अभी पाच मिनट पहले आने से पहले देखा वो उसका परिणाम

657
00:46:41,920 --> 00:46:46,000
है य अगर लग के बैठ कर के आधे घंटे बाद

658
00:46:46,000 --> 00:46:51,400
पड़ पड़ा लिए तुम्हारे बा तो क्या होगा

659
00:46:51,400 --> 00:46:55,000
तुम्हारा आगे क्या

660
00:46:55,000 --> 00:46:59,320
है और यह बात नहीं कहते मिलावट छेड़खानी तुम

661
00:46:59,320 --> 00:47:03,480
लोग तुम्हारे लोग आते हैं यहां पर कहते उनको मना करो उनको मना

662
00:47:03,480 --> 00:47:07,480
करो वो लोग बोल के गए हैं तुम्हारे यहां के लोग बोल के गए हैं कि

663
00:47:07,480 --> 00:47:12,480
वेद म वो जो वेद है उसमें मिलावट हो गई है अपना अपना वो है

664
00:47:12,480 --> 00:47:17,160
थिंकिंग तुम्हारे लोग बोल के गए उनको मना करो

665
00:47:17,160 --> 00:47:21,920
बस खत्म ही होने वाला है फिर ले लेते

666
00:47:21,920 --> 00:47:26,040
फटाफट और अगर तुम वेद मंत्रों को पूरा का पूरा मानते हो तो शिव रुद्र

667
00:47:26,040 --> 00:47:30,240
विष्णु वालो मंत्रों को क्यों नहीं मानते हो गणपति वालों को क्यों नहीं मानते हो जिनके बारे में स्पष्ट

668
00:47:30,240 --> 00:47:34,360
लिखा हुआ उनको क्यों नहीं मानते हो वो आदि शिव है वो आदि गणेश है

669
00:47:34,360 --> 00:47:39,280
बोल ना बोल वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान

670
00:47:39,280 --> 00:47:43,360
है जिसका नाम जिसका नाम ठीक से है ही नहीं अपना

671
00:47:43,360 --> 00:47:47,600
मन से मिलावट करते हो उसके लिए बोलते हो और जिसका नाम ठीक से है उसका

672
00:47:47,600 --> 00:47:50,560
क्यों नहीं बोलते

673
00:47:50,560 --> 00:47:54,760
हो बेवकूफ नारायण फ गु गुण

674
00:47:54,760 --> 00:47:59,320
प आ फिर गुण प आ गया व्यक्ति फिर बोलता है

675
00:47:59,320 --> 00:48:03,560
कि वोह साते में गुणों की भक्ति करने को मना किया है वहीं पर लिखा है

676
00:48:03,560 --> 00:48:07,720
जहां य गुणों की भक्ति करने को मना करने को कह रहा है वहां क्या लिखा

677
00:48:07,720 --> 00:48:12,320
है कि वो

678
00:48:12,320 --> 00:48:16,320
ब्रह्मा विष्णु महेश है जो उनकी भक्ति करने में मना कर रहा है क् क्यों मना कर

679
00:48:16,320 --> 00:48:20,360
रहा है क्योंकि उनमें गुणों से युक्त है और युक्त कैसे हुए

680
00:48:20,360 --> 00:48:24,360
भागवत में वचन है वो स्वयं अपनी इच्छा

681
00:48:24,360 --> 00:48:28,360
से स्वीकार करते हैं गुणों को वोह स्वयं

682
00:48:28,360 --> 00:48:32,680
अपनी इच्छा से स्वीकार करते हैं और यह बताओ अगर

683
00:48:32,680 --> 00:48:36,840
गुण अगर गुण का अस्तित्व इस दुनिया में तो

684
00:48:36,840 --> 00:48:38,000
क्या

685
00:48:38,000 --> 00:48:42,000
यह बाहर से कहीं से आ गए क्या गुण अगर तुम्हारे अनुसार

686
00:48:42,000 --> 00:48:46,480
कबीर ने दुनिया बनाई है तो उसकी बिना मर्जी के टपक आए है

687
00:48:46,480 --> 00:48:50,800
क्या यह गुण कहां से आ गए इस दुनिया में अगर

688
00:48:50,800 --> 00:48:54,880
गुण से युक्त होना य सिद्ध करता है कि ये गुण है

689
00:48:54,880 --> 00:48:59,240
पहली बात तो गुण से युक्त होना सिद्ध नहीं होता मेरी बॉडी पानी से युक्त है

690
00:48:59,240 --> 00:49:03,360
मगर मैं पानी नहीं हूं अगर ब्रह्मा विष्णु महेश गुण

691
00:49:03,360 --> 00:49:07,640
से युक्त है जहां प्रमाण दिखा रहे हो वही लिखा है दोगला भाई

692
00:49:07,640 --> 00:49:11,760
अभिषेक अपने चैनल का नाम बदल लो फैक्ट भाई अभिषेक

693
00:49:11,760 --> 00:49:15,920
अच्छा नहीं है दोगला भाई अभिषेक यह करो यह अच्छा

694
00:49:15,920 --> 00:49:20,400
है जहां उंगली दिखा रहे हो वही लिखा है गुण युक्त

695
00:49:20,400 --> 00:49:24,480
कि ब्रह्मा विष्णु महेश इन तीन गुणों से युक्त है ब्रह्मा विष्णु

696
00:49:24,480 --> 00:49:28,840
महेश ये तीन गुण है ये नहीं लिखा और अगर युक्त

697
00:49:28,840 --> 00:49:32,920
होने से आप यह मानते हैं कि वह गुण हो गए तो

698
00:49:32,920 --> 00:49:37,000
कबीर के कबीर से ही बन रही ना सृष्टि कि हवा से आ

699
00:49:37,000 --> 00:49:41,280
गई बाहर से आ गई कोई और है बनाने वाला वो भी सिद्ध हो गए गुण से युक्त

700
00:49:41,280 --> 00:49:45,280
उसकी भक्ति क्यों कर रहे हो और मैंने एक

701
00:49:45,280 --> 00:49:50,080
बात देखी इसने वहां पर ब्रह्म को अविनाशी मान लिया

702
00:49:50,080 --> 00:49:53,040
इसने वहां पर इसने जो वहां पर गीता पढ़ी

703
00:49:53,040 --> 00:49:57,080
है जहां सात 1 का बताया इसने वहां पर इसने ब्रह्म को

704
00:49:57,080 --> 00:50:01,120
अविनाशी मान लिया अब फिर ये लोग कहते ब्रह्म के बारे में ब्रह्म के

705
00:50:01,120 --> 00:50:05,200
बारे इनका जो स्पेसिफिक ब्रह्म है काल फिर ये लोग उसके बारे

706
00:50:05,200 --> 00:50:09,240
में कहते हैं कि वो उसके तो कई बार जन्म और मरण हो चुके हैं तू जानता

707
00:50:09,240 --> 00:50:13,240
है मैं नहीं जानता हे अर्जुन य उसको कोट करते हैं ब्रह्म बोल रहा है

708
00:50:13,240 --> 00:50:17,240
कि तेरे और मेरे बहुत से वो हो चुके हैं भाई एक बार तय कर

709
00:50:17,240 --> 00:50:21,960
लो तुम्हारा ब्रह्म अविनाशी है कि नहीं फ फिर उस पर हम बात करेंगे

710
00:50:21,960 --> 00:50:25,960
तय तो करो पहले कि ब्रह्म विनाशी है

711
00:50:25,960 --> 00:50:30,360
कि नहीं तो ब्रह्म को अविनाशी मान लिया

712
00:50:30,360 --> 00:50:34,400
और जो तीन गुणों की भक्ति ना करने की बात होती है

713
00:50:34,400 --> 00:50:38,440
वह बात होती है कि जो इस माया रूपी संसार में हम लोग

714
00:50:38,440 --> 00:50:42,520
लोलुपता में फसे रहते हैं मुझे ये मिल जाए जैसे

715
00:50:42,520 --> 00:50:48,080
यह मिल जाए वो मिल जाए तो उनके पीछे भागने को मना किया गया है

716
00:50:48,080 --> 00:50:52,800
कि क्या कहते हैं इन तीन गुणों के पीछे नहीं भागना इनकी भक्ति नहीं करनी

717
00:50:52,800 --> 00:50:57,080
वहां पर यह बात हो रही है अच्छा खैर अब आगे चलते

718
00:50:57,080 --> 00:51:01,200
इसने एक बात मेरी कही मेरे मुह से निकल गया होगा कि सा 37 इसने पकड़ लिया

719
00:51:01,200 --> 00:51:05,240
इसने कभी गीता पढ़ी नहीं है भाई जितना पढ़ा है ना तुम जैसे लोगों

720
00:51:05,240 --> 00:51:08,360
के लिए बहुत है आओगे ना

721
00:51:08,360 --> 00:51:12,400
तब पता चलेगा तो भगवान ने जो साथ मेरे

722
00:51:12,400 --> 00:51:16,440
मु से सा 37 निकल गया व सात सात था तो सात सात में

723
00:51:16,440 --> 00:51:22,240
भगवान ने कहा कि मैं परमेश्वर हूं सा 19 में भगवान ने कहा कि मैं परमेश्वर

724
00:51:22,240 --> 00:51:27,960
हूं फिर कह रहा है गणेश जी को व्यर्थ बताया गया है हां भाई

725
00:51:27,960 --> 00:51:32,120
कई जगह पर ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश की जो बात

726
00:51:32,120 --> 00:51:36,400
हुई है पुराणों में वहां पर क्या हुआ है कि सृष्टि

727
00:51:36,400 --> 00:51:40,400
की रचना एक बार नहीं हुई है हर बार भगवान के अलग अलग रूपों के द्वारा सृष्टि

728
00:51:40,400 --> 00:51:44,480
की रचना बताते हुए जो भगवान के अन्य रूप है उनको उनके परिकर

729
00:51:44,480 --> 00:51:48,520
के रूप में ख्या पित किया जाता है और वह भी उनके उस

730
00:51:48,520 --> 00:51:52,800
रूप को जो भगवान खुद ही कह रहे हैं कि कार्य कारण भेद

731
00:51:52,800 --> 00:51:56,800
कार्य रूप में भगवान दिखने लगते हैं कि वो जो है शिव की तरह वो

732
00:51:56,800 --> 00:52:01,400
पर स्वयं को आविर्भव रोभ मगर परम तत्व के रूप में वो सदैव

733
00:52:01,400 --> 00:52:05,480
वो रहते हैं मां भगवती य भी कहती है कि भाई

734
00:52:05,480 --> 00:52:10,280
जो पांचों है वो एक ही है यह क्यों नहीं मानते हो

735
00:52:10,280 --> 00:52:15,000
चलो बस एंड है आपका यह होही गया हनुमान वाला

736
00:52:15,000 --> 00:52:19,000
अब बात आ जाती है सबसे अंतिम बात वो ये जो बहुत संस्कृत बनते

737
00:52:19,000 --> 00:52:23,000
हैं इनका मतलब है कि कम का मतलब केवल

738
00:52:23,000 --> 00:52:23,500
आना ही

739
00:52:23,480 --> 00:52:27,600
होता है जाना नहीं होता है है ना इनका मतलब है

740
00:52:27,600 --> 00:52:32,000
कि कम का मतलब केवल आना ही होता है जाना नहीं होता है

741
00:52:32,000 --> 00:52:36,520
जबकि कई बार हम लोग ऐसे शब्दों का उपयोग करते हैं

742
00:52:36,520 --> 00:52:40,560
जहां जाने में आ भी छुपा हुआ होता है अंडरस्टूड होता है

743
00:52:40,560 --> 00:52:44,560
अलग से बोलने की आवश्यकता नहीं होती है आने के लिए जाने शब्द का उपयोग भी

744
00:52:44,560 --> 00:52:49,480
करते हैं तो भैया इनको जरा इनका दे दो

745
00:52:49,480 --> 00:52:53,520
प्रमाण वो वाला दिखा दो

746
00:52:53,520 --> 00:52:57,520
जहां पर यह एक ही शब्द जहां पर यह क्या चा इनकी थ्योरी

747
00:52:57,520 --> 00:53:01,000
के अनुसार अगर

748
00:53:01,000 --> 00:53:06,120
बंदे शरण राम

749
00:53:06,120 --> 00:53:09,520
की आजा

750
00:53:09,520 --> 00:53:13,640
बंदे शरण राम की हां भैया एक

751
00:53:13,640 --> 00:53:17,880
मिनट अब इसकी अंग्रेजी क्या करोगे गो कम कम

752
00:53:17,880 --> 00:53:22,640
गो आजा दो बातें हो गई ना यहां तो

753
00:53:22,640 --> 00:53:27,040
यहां तो दो बातें हो गई ना केवल एक बात कहनी चाहिए ना भाई आ आजा

754
00:53:27,040 --> 00:53:31,160
क्यों बोल रहे हो इसकी अंग्रेजी क्या करोगे कम गो कम

755
00:53:31,160 --> 00:53:35,160
गो बंदे शरण राम की मालूम है वो वो आदि

756
00:53:35,160 --> 00:53:39,240
राम है मालूम है तुम लोग आदि राम कहोगे ठीक है अभी बात यह चल रही है इसकी

757
00:53:39,240 --> 00:53:43,520
अंग्रेजी क्या करोगे कम गो या कम आजा

758
00:53:43,520 --> 00:53:47,800
वो बोल रहे हैं आजा दोबारा सुनाओ भैया दोबारा

759
00:53:47,800 --> 00:53:52,000
सुनाओ इनको आजा बंदे हा

760
00:53:52,000 --> 00:53:56,080
अब इसमें इसमें अब इसको इसको आजा आजा

761
00:53:56,080 --> 00:54:00,200
को क्या क्या कहोगे कम गो कहोगे गो कम कहोगे

762
00:54:00,200 --> 00:54:04,560
इसका क्या करोगे संस्कृत में आ ब्रज करोगे या ब्रज करोगे

763
00:54:04,560 --> 00:54:08,560
क्योंकि इसमें तो वो जाने को बोल रहे हैं मगर कहां जाने को बोल

764
00:54:08,560 --> 00:54:13,560
रहे हैं अपनी शरण में या राम की शरण में हो

765
00:54:13,560 --> 00:54:18,000
गया हो गया ठन ठन

766
00:54:18,000 --> 00:54:22,320
गोपाल बताओ इसका अर्थ क्या करोगे और इन सारी बातों

767
00:54:22,320 --> 00:54:27,320
के बाद बहुत मूल प्रश्न है

768
00:54:27,320 --> 00:54:31,360
कि भाई तुमने हमको हर जगह से गलत मान लिया गलती हो गई तुमसे

769
00:54:31,360 --> 00:54:35,640
या तुमको लगता है कि तुम ही सही हो कबीर कहां से आ गया पिक्चर

770
00:54:35,640 --> 00:54:39,880
में तत्वदर्शी के रूप में रामपाल कहां से आ गए

771
00:54:39,880 --> 00:54:43,920
इस बारे में तो कोई प्रमाण है ही नहीं इसके लिए तुरंत सूक्ष्म वेद पर चले जाओ कबीर

772
00:54:43,920 --> 00:54:48,000
सागर पर चले जाओ वेदों में प्रमाण दिखाओ ना

773
00:54:48,000 --> 00:54:52,520
कि जिस कबीर को तुम पूज रहे हो वही उसी कबीर की बात हो रही वेदों में

774
00:54:52,520 --> 00:54:58,520
यही दिखा दो पहले तो कबीर को कबीर सिद्ध करके दिखाओ कवि को कबीर सिद्ध करके

775
00:54:59,040 --> 00:55:03,040
दिखाओ तत्वदर्शी अगर वो सब व्याख्या गलत है हमारी तो तुम्हारे

776
00:55:03,040 --> 00:55:07,240
रामपाल दास जी कहां से आ गए और तो और

777
00:55:07,240 --> 00:55:11,320
5 पर का अर्थ वो 35 श्लोक कौन से हैं गीता

778
00:55:11,320 --> 00:55:16,440
के जिनको नहीं मानना है जो काल ने बोल दिए वो कब

779
00:55:16,440 --> 00:55:21,800
बताओगे पूरा जीवन निकल जाएगा जब जेल धाम में

780
00:55:21,800 --> 00:55:27,800
उनका हद होती है

781
00:55:28,920 --> 00:55:33,600
बताना ये इसकी अंग्रेजी क्या करोगे आजा जब

782
00:55:33,600 --> 00:55:37,760
जब गो का मतलब तुमने कहा कि ब्रज का अर्थ आना जाना

783
00:55:37,760 --> 00:55:41,840
नहीं होता है य उसका मतलब वही होता है तो अब ये आजा बोल

784
00:55:41,840 --> 00:55:46,000
रहे हैं अब इसमें भी कहीं पर जाने की बात हो रही है मगर

785
00:55:46,000 --> 00:55:50,440
कहां आने आते हुए जाने की बात हो रही

786
00:55:50,440 --> 00:55:54,520
है तो इसमें भी जाने की बात हो रही है इसी प्रकार से जाने की

787
00:55:54,520 --> 00:56:00,520
बात हो रही है भगवान श्री कृष्ण के तो इसलिए उसका परव सान आने में लिया जाता

788
00:56:02,840 --> 00:56:06,840
है शब्द कोष में देख लिया है पाणिनी के सूत्र में देख

789
00:56:06,840 --> 00:56:11,240
लिया है और दूसरे वीडियोस देखिए भाई साहब अभी

790
00:56:11,240 --> 00:56:15,240
आप बहुत देर से आए हैं ठीक है इनको सुना

791
00:56:15,240 --> 00:56:19,960
दो दोबारा इनके तिरछे दर्शी की आवाज एक बार और आजा बंदे

792
00:56:19,960 --> 00:56:24,240
और इनसे पूछो कि इसमें

793
00:56:24,240 --> 00:56:28,320
क्या ब्रज शब्द लिख दें इसको क्योंकि जाने को कह रहे हैं वो एक बार

794
00:56:28,320 --> 00:56:32,520
और सुना

795
00:56:32,520 --> 00:56:36,640
दो एक बार सुना दीजिए संस्कृत

796
00:56:36,640 --> 00:56:40,720
में क्योंकि ये इसमें जाने की बात कर रहे हैं एट दी एंड तो ब्रज लिख

797
00:56:40,720 --> 00:56:44,920
दे क्या यहां पर और जब ब्रज लिख देंगे तो इस इसका मतलब तो राम की शरण

798
00:56:44,920 --> 00:56:49,800
से जाने की बात हो जाएगी आजा

799
00:56:49,800 --> 00:56:54,240
बंदे आना है जाना है आजा

800
00:56:54,240 --> 00:56:56,600
बंदे

801
00:56:56,600 --> 00:57:02,600
शरण राम [हंसी]

802
00:57:04,120 --> 00:57:08,280
की चलो खैर तो अंत

803
00:57:08,280 --> 00:57:13,120
में तीन बातें बताओ कि अगर

804
00:57:13,120 --> 00:57:17,320
पहली बात वो कबीर कबीर कबीर कैसे हुआ कवि कबीर कैसे हुआ

805
00:57:17,320 --> 00:57:21,360
कबीर देव कबीर देव कैसे हुआ और अगर हो भी गया

806
00:57:21,360 --> 00:57:25,560
तो वही कबीर क्यों जिसको तुम बता रहे हो वो प्रमाण लाओ शास्त्रों से

807
00:57:25,560 --> 00:57:29,760
और यह तत्वदर्शी अगर हमारे जो व्याख्या

808
00:57:29,760 --> 00:57:33,840
सब गलत है तो वह व्याख्या लाओ तत्वदर्शी रामपाल कहां

809
00:57:33,840 --> 00:57:37,880
से आ गए इसम वो अचानक से आ जाते हैं बाहर से सारी चीज हमारी गलत

810
00:57:37,880 --> 00:57:42,000
बता के वो अचानक से बाहर से उसम मिनिमाइज कर देते हैं उसम जंप मार जाते हैं

811
00:57:42,000 --> 00:57:46,160
बंबू लेकर और वो 35 श्लोक बताओ जिससे

812
00:57:46,160 --> 00:57:50,360
कि हम उनके बिना बात करें आप लोगों से ठीक है यह सारी बातें

813
00:57:50,360 --> 00:57:56,360
हो गई अब हम लोग ले लेते हैं भैया ऋतिक जी जय श्री राम

814
00:57:59,880 --> 00:58:04,360
एक मेरा प्रश्न था एक बात बताइए आप वि

815
00:58:04,360 --> 00:58:10,040
के म हा जी हा जी कबीर के ऊपर है मंडल नंबर

816
00:58:10,040 --> 00:58:12,880
न

817
00:58:12,880 --> 00:58:17,720
हा जी सर मेरा नाम रितिक

818
00:58:17,720 --> 00:58:21,760
है रितिक रितिक अरे ये तो हम पढ़ ही

819
00:58:21,760 --> 00:58:25,840
रहे हैं आगे तो दीजिए परिचय क्या है आपका मैं सरपुर से रहने

820
00:58:25,840 --> 00:58:28,280
वाला हूं

821
00:58:28,280 --> 00:58:32,440
हा तो ऋगवेद के मंडल नंबर न सक्त नंबर एक

822
00:58:32,440 --> 00:58:37,200
भाई साब परिचय य बताइए आध्यात्मिक परिचय क्या है आपका

823
00:58:37,200 --> 00:58:41,440
कहां से शिक्षा ले किसके शिष्य वो बताइए रामपाल जी शिष्य

824
00:58:41,440 --> 00:58:45,720
हूं मैं रामपाल कौन

825
00:58:45,720 --> 00:58:49,760
है गुरु मेरे गुरु का अर्थ

826
00:58:49,760 --> 00:58:54,440
क्या है जान देने

827
00:58:54,440 --> 00:58:58,200
वाला कहा

828
00:58:58,200 --> 00:59:02,200
जान देने वाला बता दीजिए अरे मैं

829
00:59:02,200 --> 00:59:06,320
तो बताऊंगा तो बताऊंगा आप अगर किसी को अपना गुरु कह रहे तो आपको पता होना चाहिए

830
00:59:06,320 --> 00:59:10,760
ना गुरु का अर्थ क्या है अरे व बता तो आपको प्रश्न पूछ

831
00:59:10,760 --> 00:59:14,960
न देने वाला गुरु है एक मिनट एक मिनट एक मिनट ज्ञान देने वाला गुरु

832
00:59:14,960 --> 00:59:19,640
है जी इतनी परिभाषा है इसमें कुछ ड तो नहीं करना है

833
00:59:19,640 --> 00:59:23,760
नहीं जो परमात्मा तक हमें मिलाने का रा दिखाता है रास्ता दिखाता है उसे गुरु कहते

834
00:59:23,760 --> 00:59:29,400
है तो फिर यह वाली व्याख्या होनी चाहिए ना तो बोलो

835
00:59:29,400 --> 00:59:34,200
ना अरेका उद में लिखी हुई है

836
00:59:34,200 --> 00:59:38,360
अद्वैता आरका उपनिषद में लिखा हु जानकारी सुनना है कि नहीं सुनना

837
00:59:38,360 --> 00:59:42,600
है जी जी बो बोलिए अद्वैता आरिका उपनिषद

838
00:59:42,600 --> 00:59:47,360
में लिखा हुआ है गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने

839
00:59:47,360 --> 00:59:51,440
वाला तो अंधकार रूपी अज्ञानता से निकालने वाला आपका

840
00:59:51,440 --> 00:59:56,520
गुरु हुआ ठीक है अंधकार

841
00:59:56,520 --> 01:00:01,200
रूपी अज्ञान जो है अज्ञान अब जो अज्ञान है

842
01:00:01,200 --> 01:00:05,440
उससे क्या गुरुदेव वो जो है उनके ज आपके सवालों के जवाब देते

843
01:00:05,440 --> 01:00:09,640
हैं व अज्ञान जो अज्ञानता है आपके गुरु जी जी

844
01:00:09,640 --> 01:00:14,160
देते हैं आलि

845
01:00:14,160 --> 01:00:18,360
आलिया तो मुझे सर यह बताइए आप भाई साब एक बात

846
01:00:18,360 --> 01:00:22,440
पूछ रसे आपने आपने अपनी पहचान बताई है मैं आपका

847
01:00:22,440 --> 01:00:26,480
प्रश्न ले रहा हूं आपने कहा कि वो मेरे गुरु है तो क्या उन्होंने

848
01:00:26,480 --> 01:00:30,560
आपको अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाला है आपके मन में परमात्मा को

849
01:00:30,560 --> 01:00:35,120
लेकर के कोई अज्ञानता कोई अंधेरा तो नहीं

850
01:00:35,120 --> 01:00:39,400
है नहीं है नहीं नहीं है

851
01:00:39,400 --> 01:00:43,520
नहीं है तो तो मुझे ये बात बताइए जैसे भगवान एक छोटी सी बात

852
01:00:43,520 --> 01:00:47,840
पूछूंगा फिर आपका प्रश्न ले लूंगा जिससे कि आपके वो गुरु सिद्ध हो जाए ठीक

853
01:00:47,840 --> 01:00:52,880
है आप मुझे बताइए कबीर ने यह संसार

854
01:00:52,880 --> 01:00:57,800
बनाया तो संसार में जो भी कुछ बनाया अपने अंदर से निकाला

855
01:00:57,800 --> 01:01:03,000
या बाहर अपने आप प्रकट हो गया वह कहां था उससे पहले

856
01:01:03,000 --> 01:01:07,280
देखिए जो कबीर थे उसने सब कुछ

857
01:01:07,280 --> 01:01:11,320
बनाया सब कुछ सब कुछ सब कुछ बनाया उसने ठीक

858
01:01:11,320 --> 01:01:15,760
है और कबीर सर्वशक्तिमान है कबीर सब कुछ कर सके

859
01:01:15,760 --> 01:01:19,960
कुछ और रहा मैं कुछ और पूछ रहा हू जब उसने सब कुछ बनाया तो

860
01:01:19,960 --> 01:01:25,960
जहां जिस जगह वो बैठा है वो जगह किसने बनाई है कबीर ने बनाई

861
01:01:26,720 --> 01:01:31,400
यानी कि जब कबीर पहले से सदा से है ना

862
01:01:31,400 --> 01:01:35,840
तो उसके बाहर की जगह सदा से हो गई ना कबीर का एक स्ट्रक्चर

863
01:01:35,840 --> 01:01:39,960
है ना कोई स्ट्रक्चर तभी है जब स्पेस है

864
01:01:39,960 --> 01:01:44,960
जी तो इसका मतलब स्पेस को कबीर ने नहीं

865
01:01:44,960 --> 01:01:49,040
बनाया देखिए सब कुछ बनाने वाला वही है फ फिर वही

866
01:01:49,040 --> 01:01:52,200
बात मैं पूछ

867
01:01:52,200 --> 01:01:56,320
रहा क्या मैं आपको बता मैं आपको मतलब समझा नहीं इतना

868
01:01:56,320 --> 01:02:01,200
अंतर है बस यानी कि अंधकार है अभी

869
01:02:01,200 --> 01:02:05,280
थोड़ा चलो सर छोड़ को छोड़ नहीं छोड़

870
01:02:05,280 --> 01:02:09,360
देंगे छोड़ देंगे थोड़ा थोड़ा थोड़ा सा एक चीज कंफर्म

871
01:02:09,360 --> 01:02:13,160
कर ल यानी कि अभी अंधकार

872
01:02:13,160 --> 01:02:17,200
है अंधकार नहीं सर मुझे इतना मतलब थोड़ा इसके बारे

873
01:02:17,200 --> 01:02:21,240
में मैं समझा नहीं पा रहा आपको थोड़ा इसके बारे

874
01:02:21,240 --> 01:02:27,240
में क्या है सम समझा नहीं पा रहे क्यों

875
01:02:32,640 --> 01:02:37,000
मैं कहता हूं नहीं सर वो बात नहीं है

876
01:02:37,000 --> 01:02:41,480
चलो चलो ले लीजिए का प्रश्न

877
01:02:41,480 --> 01:02:45,680
मेरा प्रश् सर मेरा प्रश्न लेज आप भी बस ऐसे ही करते आप अपनी अपनी बताते

878
01:02:45,680 --> 01:02:49,760
पूछ र प्रश्न लो प्रश्न बताओ हा वो ऋगवेद

879
01:02:49,760 --> 01:02:54,320
मंडल नंबर न सक्त नंबर एक मंत्र नंबर न

880
01:02:54,320 --> 01:02:58,400
इसमें लिखा है कि भाई वो परमात्मा वो

881
01:02:58,400 --> 01:03:02,560
परमात्मा ऐसी लीला करते आता है और कमारी गायो से उसकी

882
01:03:02,560 --> 01:03:06,720
पालन पोषण होता है तो किस परमात्मा लिखा हुआ पहली

883
01:03:06,720 --> 01:03:10,960
बात तो ये है कि उसम कुवारी गाय की बात हो रही है ये बताओ मुझे

884
01:03:10,960 --> 01:03:15,560
कैसे हो रही है कौन सा शब्द है व कुमारे के लिए

885
01:03:15,560 --> 01:03:20,000
वहा देख मेरे पास नहीं मेरे पास फिलहाल मैंने नोट कर

886
01:03:20,000 --> 01:03:24,280
आपके पास क्या है जो आप तड़ा तड़ मुझसे प्रश्न करने आए हो कैसे आपको

887
01:03:24,280 --> 01:03:28,320
इतना वो आया नहीं मैं देख का कौन

888
01:03:28,320 --> 01:03:32,760
सा शब्द है मंत्र में जिससे आपको य पता लगा कि वहा कुमारी

889
01:03:32,760 --> 01:03:36,800
शब्द लिखा है नहीं वहा पर लिखा है ना पता क्या

890
01:03:36,800 --> 01:03:40,960
अरे तो बताओ ना दिखाओ बताओ मुझे कहां लिखा है कौन सा शब्द है व शब्द

891
01:03:40,960 --> 01:03:45,480
तो बोलो आजा बंदे चरण

892
01:03:45,480 --> 01:03:49,320
जेल

893
01:03:49,320 --> 01:03:53,760
की वो शब्द तो बताओ ये रामपाल

894
01:03:53,760 --> 01:03:55,880
का

895
01:03:55,880 --> 01:04:00,160
बताता मैं क्यों बताऊ जब तुम्हारा प्रश्न है मुझे प्रश्न तो पूरा बताओ वो शब्द

896
01:04:00,160 --> 01:04:04,200
बताओ मैंने पूछ तो लिया तुमसे कुवारी को उद् भाषित करने वाला

897
01:04:04,200 --> 01:04:08,200
वहां कौन सा शब्द है सर मेरे पास ना असल में ऋग्वेद नहीं

898
01:04:08,200 --> 01:04:12,360
है फिलहाल मैंने मैंने अपने गुरुजी गुरुजी बता रहे थे

899
01:04:12,360 --> 01:04:16,400
वहा पर मेरे गुरु क गुरुजी वेद

900
01:04:16,400 --> 01:04:20,400
थोड़ी ना है हमको वेद का वो शब्द बताइए कि जो

901
01:04:20,400 --> 01:04:24,560
आपने कहा उसका संस्कृत शब्द कौन सा है

902
01:04:24,560 --> 01:04:30,080
कुमारी के लिए वहां पर कौन सा संस्कृत शब्द आया

903
01:04:30,080 --> 01:04:35,040
है तो वहां पर लिख रहा है ना मतलब जो ट्रांसलेट रखी है

904
01:04:35,040 --> 01:04:39,440
नहीं वहां प कुमारी गाय नहीं लिखा है वो आपके जेल धाम निवासी

905
01:04:39,440 --> 01:04:43,520
संत जी ने लिखा है वहां कुमारी गाय नहीं लिखा है किसी वेद में नहीं लिखा है किसी

906
01:04:43,520 --> 01:04:47,600
ट्रांसलेशन में नहीं लिखा है और अगर ट्रांसलेशन करने वाले जेल

907
01:04:47,600 --> 01:04:51,600
धाम निवासी है तो फिर उनको बुलाइए और संस्कृत का वो कराइए

908
01:04:51,600 --> 01:04:55,720
उनसे सारे वो जो संक्षिप्त देवी भागवत पढ़ते हैं

909
01:04:55,720 --> 01:05:01,720
व देखिए उन्होंने कौन-कौन से ग्रंथ उन्होंने संस्कृत से हिंदी किए

910
01:05:02,960 --> 01:05:07,320
बताइए उन्होंने तो कई प्रमाण ऐसे दिए जिसमें उन्होंने संस्कृत

911
01:05:07,320 --> 01:05:11,400
देखी नहीं कौन सी है आज तक देवी भागवत का संस्कृत

912
01:05:11,400 --> 01:05:15,640
संस्कृत वाला संस्करण उन्होंने देखा नहीं है आंखों

913
01:05:15,640 --> 01:05:21,640
से क्योंकि तब तक गता छाप नहीं रही थी

914
01:05:26,240 --> 01:05:32,240
खुद अज्ञानी है कभी संस्कृत पढ़ी नहीं जिन्होंने व क्या

915
01:05:35,160 --> 01:05:40,440
देखेंगे हर हर महादेव सभी लोगों को हर हर महादेव

916
01:05:40,440 --> 01:05:44,920
भैया शिवान जी भाई एक मैं क्वेश्चन इनसे पूछना चाहूंगा

917
01:05:44,920 --> 01:05:48,960
रितिक भाई जैसे आप इंग्लिश सीखना चाहते हो आप किसके पास

918
01:05:48,960 --> 01:05:54,960
जाओगे इंग्लिश सीखने के लिए

919
01:05:56,240 --> 01:06:00,920
भाई ऋतिक भाई अभी यहां से जरूर जाने वाले हैं कुछ ही मिनटों में

920
01:06:00,920 --> 01:06:05,200
अभी देखते जाइए आप सिंपल सा क्वेश्चन है आपने

921
01:06:05,200 --> 01:06:10,040
इंग्लिश सीखनी है इंग्लिश सीखने के लिए किसके पास जाएंगे आप

922
01:06:10,040 --> 01:06:14,160
उसके पास जाएंगे जो इंग्लिश का टीचर है या उसके पास जाएंगे जिसने

923
01:06:14,160 --> 01:06:18,280
कभी इंग्लिश जिंदगी में पढ़ी नहीं किसके पास जाओगे आप

924
01:06:18,280 --> 01:06:22,520
नहीं उन्हें सब आता है वो वो आपके इसम है ना वो आपके

925
01:06:22,520 --> 01:06:26,920
उ नहीं संस्कृत प है अरे भाई मैं मैं आपको

926
01:06:26,920 --> 01:06:31,400
उनको सब आता है उनको अंग्रेजी पढ़ना नहीं आती है

927
01:06:31,400 --> 01:06:36,200
संस्कृत पढ़ते तो मैंने कभी देखा नहीं अंग्रेजी पढ़ना नहीं आती है

928
01:06:36,200 --> 01:06:40,280
उन्हें उससे अच्छी अंग्रेजी तो आप पढ़ लोगे

929
01:06:40,280 --> 01:06:41,400
न्यूमरस को न मोरिय

930
01:06:41,400 --> 01:06:45,400
पढ़ते हैं वो थोड़ा वो हरियाणा के हरियाणा के उधर

931
01:06:45,400 --> 01:06:49,440
के हो ग ना मैं ऐसा थोड़ा बोरे ऐसे थोड़ी ना ऐसे थोड़ी ना होता

932
01:06:49,440 --> 01:06:53,480
है कहां लिखा है कि हरियाणा के उधर के हो जाओगे तो गलत उच्चारण

933
01:06:53,480 --> 01:06:56,160
करोगे

934
01:06:56,160 --> 01:06:58,840
कहलाओगे

935
01:06:58,840 --> 01:07:02,880
देखिए रितिक भाई दोनों

936
01:07:02,880 --> 01:07:06,880
अलग अलग है आपको कुछ नहीं पता है आपको कुछ नहीं

937
01:07:06,880 --> 01:07:11,640
पता है आपको वही पता है जो आपके जो इस समय जेल धाम में बैठे हुए हैं उ

938
01:07:11,640 --> 01:07:16,120
जेलम जाने से पहले जो बता के गए वो आपको पता है मैंने आपको

939
01:07:16,120 --> 01:07:20,280
दयानंद सरस्वती ने कई ट्रांसलेशन गलती कर रखा है आपको कैसे बता अरे

940
01:07:20,280 --> 01:07:24,320
भाई वो पहली बात तो वो शब्द अगर उन्होंने ट्रांसलेशन गलत कर रखा है तो कहीं पर

941
01:07:24,320 --> 01:07:30,320
तो सही होगा जहां से पता चले वो सही जगह लाओ ना कहां पे

942
01:07:31,160 --> 01:07:35,400
है आपको गलत चीज का पता तब चलेगा

943
01:07:35,400 --> 01:07:39,720
ना जब सही चीज बगल में रखोगे वो सही चीज ले आओ उसमें देख

944
01:07:39,720 --> 01:07:43,720
ले सही वाला ट्रांसलेशन ले आओ कौन सा है

945
01:07:43,720 --> 01:07:47,800
सर देखिए मेरे पास ऋगवेद है नहीं व आपको मंत्र में दिखाता पढ़ के मेरे पास फिलहाल

946
01:07:47,800 --> 01:07:52,160
ऋगवेद नहीं है अब मैं आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं आप मुझे

947
01:07:52,160 --> 01:07:56,160
वो कंपनी का नाम बताओ जिसने सही ट्रांसलेशन किया हो और उसम वहां

948
01:07:56,160 --> 01:08:00,200
पर कुमारी शब्द आया हो वो ट्रांसलेशन का नाम आपको कैसे

949
01:08:00,200 --> 01:08:04,200
पता कि वो ट्रांसलेशन गलत है तभी ना जब आपको सही वाला

950
01:08:04,200 --> 01:08:08,840
पता हो तभी आपको पता चलता है कि यह चीज गलत है तो वह सही वाला ट्रांसलेशन

951
01:08:08,840 --> 01:08:13,560
किसका है रामपाल दास जी ने तो ट्रांसलेशन वेदों का किया नहीं कहीं

952
01:08:13,560 --> 01:08:17,560
नहीं किया ना दयानंद सरस् दयानंद सरस् दयानंद

953
01:08:17,560 --> 01:08:21,640
जी ने किया ना अब वो कह रहे हो कि वो उनका ट्रांसलेशन गलत है

954
01:08:21,640 --> 01:08:25,680
तो सही वाला कहां है वो लाओ उससे हम चेक कर ले डिशन

955
01:08:25,680 --> 01:08:29,720
लेओ डिक्शनरी में लिखा हो कि वहां पर कोई ऐसा शब्द आया जिसका

956
01:08:29,720 --> 01:08:33,960
जिसका अर्थ कुवारी लिखा हो डिक्शनरी ले अच्छा

957
01:08:33,960 --> 01:08:38,200
एक बारसे शब्द के लिए एक मिनट

958
01:08:38,200 --> 01:08:42,240
जैसे ब्रज शब्द के लिए डिक्शनरी लाते हो

959
01:08:42,240 --> 01:08:46,320
लाते हो कि नहीं लाते हो जाना होता है शब्द का अर्थ अरे मैं पूछ रहा हूं लाते

960
01:08:46,320 --> 01:08:50,360
हो डिक्शनरी की नहीं लाते हो जी

961
01:08:50,360 --> 01:08:54,600
तो फिर इसके लिए भी ले आओ डिक्शनरी में दिखा दो कहां लिखा

962
01:08:54,600 --> 01:08:58,720
है वहां पर कोई ऐसा शब्द जिसका अर्थ यहां कुवारी लिखा हो डिक्शनरी

963
01:08:58,720 --> 01:09:03,040
में शिवराम आपटे की डिक्शनरी निकालो उसमें दिखा दो और अगली बार इस तैयारी

964
01:09:03,040 --> 01:09:07,480
के साथ आओ या अभी चले जाओ आधा घंटा खोजबीन करो और ले आओ जाओ

965
01:09:07,480 --> 01:09:12,400
अभी तो है हम लोग आधे पन घंटे जाओ जाओ इतनी छूट दी

966
01:09:12,400 --> 01:09:16,440
मैंने देखिए मैं ऐसा तो मतलब हो ऐसा तो मुमकिन नहीं

967
01:09:16,440 --> 01:09:20,880
है फिलहाल अरे भाई अभी आप लाइव से जाओ डिक्शनरी से लेकर आओ

968
01:09:20,880 --> 01:09:25,400
किस डिक्शनरी में ऋग्वेद के उसके अंदर जो मंत्र के अंदर जो शब्द है

969
01:09:25,400 --> 01:09:29,560
उस शब्द का अर्थ कुमारी लिखा है या कोई वेदों का ऐसा ट्रांसलेशन

970
01:09:29,560 --> 01:09:33,760
ले आओ जिसमें उस शब्द का अर्थ कुमारी लिया गया हो

971
01:09:33,760 --> 01:09:38,360
तो आपके हिसाब से मतलब अर्थ क्या है वहां पे दूसरा अर्थ है

972
01:09:38,360 --> 01:09:42,360
क्या अर्थ है कुमारी अर्थ है ही नहीं वहां प वहां प तो वहां बात

973
01:09:42,360 --> 01:09:46,360
हो रही है कि वहां जो हवन यज्ञ हो रहा होता है इंद्र

974
01:09:46,360 --> 01:09:52,000
इंद्र के लिए वहां परमात्मा की बात हो रही है कि इंद्र के लिए जो यज्ञ हो रहा होता है वहां पर जो

975
01:09:52,000 --> 01:09:56,200
अवद अवध गाय होती है गाय को गाय को वहां

976
01:09:56,200 --> 01:10:00,400
अव का अरे यार अब तुमने जब पूछा तो सुनो ना जी

977
01:10:00,400 --> 01:10:01,640
जी जी ओके बताओ

978
01:10:01,640 --> 01:10:07,080
ये गाय को अवध कहा गया है जिसका वध नहीं किया जा

979
01:10:07,080 --> 01:10:11,520
सकता उसको वहां पर अवध कहा गया है और अवध के लिए कि भाई

980
01:10:11,520 --> 01:10:15,560
गाय को कभी-कभी हम लोग अवध भी बोलते हैं अवध जिसको मारा

981
01:10:15,560 --> 01:10:19,720
नहीं जा सकता उस रूप में वहां गाय को कहा गया और फिर कहा गया कि उसका दूध उसमें

982
01:10:19,720 --> 01:10:24,760
मिलाया जाता है यज्ञ में हो गया हां जी

983
01:10:24,760 --> 01:10:29,040
चलो ठीक है ठीक है बढ़िया लगा और वो अपना

984
01:10:29,040 --> 01:10:34,720
हा जी अज्ञानता रूपी अंधकार दूर करो ठीक

985
01:10:34,720 --> 01:10:38,720
है तब उनको गुरु कहना पूछन से जाक जब सब कुछ

986
01:10:38,720 --> 01:10:42,720
उन्होंने बनाया तो फिर वो जो सतलोक

987
01:10:42,720 --> 01:10:46,720
है वह किसने बनाया पूछो कहां था सतलोक बनने

988
01:10:46,720 --> 01:10:51,480
से पहले अच्छा आपका परमात्मा तो बता

989
01:10:51,480 --> 01:10:55,560
दीजिए अब आप जाइए मैं दूसरे से बात कर रहा हूं

990
01:10:55,560 --> 01:10:59,040
चलो

991
01:10:59,040 --> 01:11:03,480
ओके हां भाई कबीर इज गॉड कहां

992
01:11:03,480 --> 01:11:08,640
है चले

993
01:11:08,640 --> 01:11:13,160
गए जिन्हे जल्दी थी वह चले

994
01:11:13,160 --> 01:11:19,160
गए अग्न्या शब्द आया है न एकन में अग्न्या

995
01:11:21,440 --> 01:11:27,440
घ कहां है भाई

996
01:11:27,520 --> 01:11:33,520
अर्पित जी अपना चेहरा दिखाए ऊपर

997
01:11:37,320 --> 01:11:41,320
आए बोलिए अर्पित जी जय श्री राम

998
01:11:41,320 --> 01:11:44,880
भैया जय श्री

999
01:11:44,880 --> 01:11:50,880
राम आवाज आ रही है आपको

1000
01:11:51,520 --> 01:11:55,680
हम बोलिए आप ही क्या कमेंट

1001
01:11:55,680 --> 01:12:00,760
में कह रहे थे जातिवादी इत्यादि नहीं नहीं भैया

1002
01:12:00,760 --> 01:12:05,520
अच्छा एक मिनट भैया एक मिनट

1003
01:12:05,520 --> 01:12:09,680
अभी मैंने जो किसी का नाम पढ़ा है ना कबीर इज गॉड ये मैंने किसी का नाम

1004
01:12:09,680 --> 01:12:13,800
पढ़ा है इसको ये लोग उठा लेते हैं देखो ये

1005
01:12:13,800 --> 01:12:17,880
जो है देखो उनके मुंह से भी निकलवा लेता है हमारा कबीर

1006
01:12:17,880 --> 01:12:22,240
कि कबीर इज गॉड इसकी कटिंग करके निकलवा लेते हैं देखो

1007
01:12:22,240 --> 01:12:26,240
उसने बोला उसको भी बोलना पड़ गया कबीर इज गॉड अभी मैंने कहा

1008
01:12:26,240 --> 01:12:30,400
आजा बंदे शरण राम की निकलवा

1009
01:12:30,400 --> 01:12:34,680
लिया तुम्हारे तुम्हारे जेल धाम निवासी

1010
01:12:34,680 --> 01:12:38,960
से निकलवा लिया ना आजा वंदे शरण राम की अब क्या करोगे

1011
01:12:38,960 --> 01:12:44,960
इसकी कटिंग नहीं करोगे क्योंकि हम मीठा मीठा ग ग कड़वा कड़वा

1012
01:12:45,240 --> 01:12:49,440
ू चलिए अरे कहां गए भाई वो

1013
01:12:49,440 --> 01:12:52,440
वो आए थे अभी फॉरेन कलर के

1014
01:12:52,440 --> 01:12:56,520
अरे वो तोब क्या बताए अभी छोड़ क्या हुआ था क्या

1015
01:12:56,520 --> 01:12:59,040
कुछ कह रहे

1016
01:12:59,040 --> 01:13:02,320
क्या नहीं

1017
01:13:02,320 --> 01:13:07,080
नहीं कुछ बताइए तो दो चीज होती है एक तो होता है कि

1018
01:13:07,080 --> 01:13:11,360
एई फेस एई ठीक है उससे आ थे

1019
01:13:11,360 --> 01:13:15,480
हा और दसरा हा दूसरा य होता है कि कैमरे के ऊपर

1020
01:13:15,480 --> 01:13:19,520
उन्होने वीडियो चला दी थी जैसे की वो रिपीटेड बस वही चल

1021
01:13:19,520 --> 01:13:24,000
रही थी व था बस यही था अी

1022
01:13:24,000 --> 01:13:28,120
अभी मतलब इस तरह से आ रहे हैं अ ये लोग हा

1023
01:13:28,120 --> 01:13:32,640
साइड में भी पूछा ना कि अपनी टोपी हटाइए हाथ हिलाए भाग गया

1024
01:13:32,640 --> 01:13:36,920
नहीं कर सकता पकड़ा जाएगा नई विधा निकाली

1025
01:13:36,920 --> 01:13:40,920
है कि इनके चैनल पर चेहरे को छुपा के कैसे जाए तो नकली चेहरा लेकर

1026
01:13:40,920 --> 01:13:44,960
आ रहे हैं अगर थोड़े बहुत दिनों में एआई ने टेक्नोलॉजी निकाल दी

1027
01:13:44,960 --> 01:13:49,080
कि आप जो है वीडियो कॉन्फ्रेंस में जा सकते हैं अपना एआई वाला रूप लेकर

1028
01:13:49,080 --> 01:13:53,280
के ऐसा है है ऐसा है एआई वाला रूप लेकर के वीडियो

1029
01:13:53,280 --> 01:13:57,320
कॉन्फ्रेंस में जा सकते हैं हां करते हैं लोग मैं आपको ऐसे बहुत

1030
01:13:57,320 --> 01:14:01,600
सारे हैं अब जैसे एक एप्लीकेशन है एवी ब्रॉडकास्ट जो अभी मैं यूज कर रहा हूं

1031
01:14:01,600 --> 01:14:05,600
अरे बताओ मत बताओ मत भाई ये लोग वो करने

1032
01:14:05,600 --> 01:14:07,560
लगेंगे यूज करने ल इस इसमें

1033
01:14:07,560 --> 01:14:12,120
इसमें ये नहीं है इसमें ये नहीं है जो बता रहा हूं वो है ये है मान लीजिए कि

1034
01:14:12,120 --> 01:14:16,160
मैं मीटिंग कर रहा हूं वैसे तो ये हमारी कंपनी में अलाउड नहीं है ये सब बप्स लेकिन मैं मीटिंग ले रहा

1035
01:14:16,160 --> 01:14:20,280
हूं मुझे नींद आ रही है बहुत तेज तो मैं आराम से आंख बंद किए रहूंगा लेकिन मैं

1036
01:14:20,280 --> 01:14:26,280
उसमें चालू कर दूंगा ओपन आई तो मेरी आंख खुली रहेगी और झपक की रहेगी अच्छा

1037
01:14:27,800 --> 01:14:32,800
ये सब भी है अच्छा एक बात और है

1038
01:14:32,800 --> 01:14:36,800
कि अ बहुत सारी कोशिश की जा रही

1039
01:14:36,800 --> 01:14:41,800
रिपोर्ट करके चैनल को रुकवाने की

1040
01:14:41,800 --> 01:14:46,040
तो कोशिश नहीं धमकी बोलिए धमकी धमकी

1041
01:14:46,040 --> 01:14:50,160
क्या धमकी कह रहा हूं कोशिश क्यों कह रहे हैं सीधा बोले धमकी दे रहे

1042
01:14:50,160 --> 01:14:54,200
हैं रुकवा देंगे कोन करवाने की धमकी मिल रही है

1043
01:14:54,200 --> 01:14:58,280
तो आप लोग थोड़ा सपोर्ट दिखाए और चैनल को

1044
01:14:58,280 --> 01:15:02,680
सुरक्षित करने के लिए लाइक

1045
01:15:02,680 --> 01:15:07,440
और हो सके तो चैनल की सदस्यता अवश्य ले ले

1046
01:15:07,440 --> 01:15:11,480
क्योंकि सदस्यता लेने से उसका सदस्यता का जो एक अंश होता है

1047
01:15:11,480 --> 01:15:15,560
वो य को मिलता है और जब य को मिलता है तोय के पास

1048
01:15:15,560 --> 01:15:19,640
य मैसेज जाता है कि इस चैनल की आवश्यकता है

1049
01:15:19,640 --> 01:15:23,640
लोग देख रहे हैं इसको पसंद करने वाले लोग भी हैं जी मयंक जी बोले जय

1050
01:15:23,640 --> 01:15:28,160
श्री राम एक बार वो और दे दीजिए

1051
01:15:28,160 --> 01:15:31,040
लिंक लिंक दे

1052
01:15:31,040 --> 01:15:35,200
दीजिए मैं लूंगा सदस्यता आपने

1053
01:15:35,200 --> 01:15:39,360
तो ले ली होगी ना ले क्या अब लूंगा मैं लेकिन अब लेना जरूरी

1054
01:15:39,360 --> 01:15:43,360
है ना तो ले लीजिएगा ये

1055
01:15:43,360 --> 01:15:47,360
इतने हाथ धो के पीछे पड़े है ना जिसकी हद नहीं

1056
01:15:47,360 --> 01:15:51,480
है एक नहीं है खूब होंगे एक

1057
01:15:51,480 --> 01:15:55,560
नहीं है बहुत है एक

1058
01:15:55,560 --> 01:15:59,640
आप है ना

1059
01:15:59,640 --> 01:16:03,840
भैया जी आप इनके ऊपर रोज

1060
01:16:03,840 --> 01:16:07,920
लाइव डिबेट किया करो पता है जब

1061
01:16:07,920 --> 01:16:11,760
रात को नींद नहीं आती

1062
01:16:11,760 --> 01:16:17,760
है मैं सोचता रहता हूं कब लाइव आए कब लाइव

1063
01:16:18,480 --> 01:16:22,640
आए पता है कल भैया य लाय लाइव चला रखे थे एमपी फास्ट

1064
01:16:22,640 --> 01:16:26,680
वाले है ना तो मैं भी उनको पूछा था

1065
01:16:26,680 --> 01:16:32,120
मैंने कि अगन का मतलब कंवारी का एक कन लिखा हुआ मैंने कि बताओ मेरे

1066
01:16:32,120 --> 01:16:36,440
को तो पता है व खोलने लग गए बस खोलने लग गए

1067
01:16:36,440 --> 01:16:42,000
कि ये लिखा हुआ है मैंने की सामने करो ना जो लिखा हुआ है उसको सामने करो

1068
01:16:42,000 --> 01:16:46,640
अच्छा फिर मेरे बाद में एक भैया आए आशीष नाम के

1069
01:16:46,640 --> 01:16:51,160
उन्होंने इनको इतना समझाया इतना समझाया

1070
01:16:51,160 --> 01:16:57,160
यह मान लो कि य इंसान हो ना इनम थोड़ी बहुत बुद्धि हो

1071
01:16:57,200 --> 01:17:01,360
हर चीज को उन्होने प्रमाण दिया हर चीज उनको समझाई कम से कम तीन घंटे की

1072
01:17:01,360 --> 01:17:05,320
लाइव थी बहुत समझाया

1073
01:17:05,320 --> 01:17:10,040
उन्होंने भाई कल हुआ क्या बड़ा फनी फनी क्या हुआ

1074
01:17:10,040 --> 01:17:14,640
जो दूसरे भाई गए थे हमारे सनातन उने सात ग्रंथों के नाम पूछ लिए

1075
01:17:14,640 --> 01:17:18,680
पसीने पसीने हो गए बता नहीं

1076
01:17:18,680 --> 01:17:22,880
पाए देखना सात ग्रंथों के नाम नहीं बता पाए और ये ज्ञान

1077
01:17:22,880 --> 01:17:27,040
चर्चा में बैठे हैं हां उनको पूछे थे ना सात गमतो

1078
01:17:27,040 --> 01:17:31,720
के नाम बताओ इनकी पोल इ के

1079
01:17:31,720 --> 01:17:35,960
उसने खोली थी पवन दास ने कि तुम्हारी शक्ल नहीं है तुम्ह

1080
01:17:35,960 --> 01:17:41,080
बैठने का संस्कार नहीं है सभ्यता नहीं है तुम मुंह उठा के चले जाते

1081
01:17:41,080 --> 01:17:45,120
हो यह जो लोग बैठ कर के करते हैं इनकी पोल उसी ने खोली

1082
01:17:45,120 --> 01:17:49,240
है और आपको बता दूं ये लोग कहते हैं छठ पूजा के दिन ये हो गया वो

1083
01:17:49,240 --> 01:17:53,280
हो गया मैं कह रहा हूं भाई तुम्हारे शरण में आने के कारण तुम्हारे ये

1084
01:17:53,280 --> 01:17:57,560
सब करने के कारण तुम्हारा व्यक्ति जेल धाम में रो रहा है बीमार

1085
01:17:57,560 --> 01:18:02,120
पड़ रहा है लोग मर गए उस

1086
01:18:02,120 --> 01:18:06,480
वो क्या हुआ था वो झड़प उसमें लोग मरे अभी

1087
01:18:06,480 --> 01:18:10,640
कल फोटो आई कि वहां फलाना आश्रम है वो कौन सा लोक है वो वाला

1088
01:18:10,640 --> 01:18:12,240
आश्रम है कोई वहां पर

1089
01:18:12,240 --> 01:18:16,240
दांत टूटे हुए व्यक्ति का मुंह टूटा हुआ है ये सब क्या हो रहा है तुम

1090
01:18:16,240 --> 01:18:20,320
तो नहीं करते ना छटका व्रत अरे भाई

1091
01:18:20,320 --> 01:18:24,360
अगर किसी ने मंदिर में चंदा दे दिया है दान कर दिया है तो इसका मतलब

1092
01:18:24,360 --> 01:18:28,600
यह नहीं बाहर जाक वो टकती डालेगा तो उसको फल नहीं मिलेगा

1093
01:18:28,600 --> 01:18:32,800
अगर किसी ने गंगा में स्नान कर लिया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस

1094
01:18:32,800 --> 01:18:37,080
वो अगर कीच में खेलेगा तो दोबारा गंदा नहीं होगा ठीक इसी

1095
01:18:37,080 --> 01:18:41,120
प्रकार हमें सब जगह ध्यान रखना है केवल यही नहीं कि व्रत

1096
01:18:41,120 --> 01:18:45,400
ही कर लिया बस बाकी पाप करो ऐसा नहीं

1097
01:18:45,400 --> 01:18:49,480
है स्कोन वाले आएंगे जब स्कोन पर वीडियो बनेंगे

1098
01:18:49,480 --> 01:18:53,560
तो स्कन वाले आने लगेंगे ये कोई है जो कह रहे भैया लगता

1099
01:18:53,560 --> 01:18:57,920
है स्न वाले गायब हो गए स्कन वाले आएंगे

1100
01:18:57,920 --> 01:19:02,040
स्कन प वीडियोस बनेंगे तब आएंगे आज मैं इनका वीडियो

1101
01:19:02,040 --> 01:19:06,040
देख रहा था मैं तो कोई हो भाई जो कबीर का

1102
01:19:06,040 --> 01:19:10,120
पक्ष जो है करना चाहता हो रखना चाहता हो फैक्ट

1103
01:19:10,120 --> 01:19:14,440
भाई अभिषेक का दोगला भाई अभिषेक का रखना चाहता

1104
01:19:14,440 --> 01:19:19,200
ह वो आए अभी फिलहाल हम लोग एक बात प बात करते हैं

1105
01:19:19,200 --> 01:19:23,360
काफी सारे वैसे लोग हो गए हैं तो मैं अभी थोड़ी देर के लिए ड्रॉप हो जाता हूं

1106
01:19:23,360 --> 01:19:26,960
ताकि और लोग जुड़ सके

1107
01:19:26,960 --> 01:19:27,460
भाई जी

1108
01:19:27,320 --> 01:19:31,680
जय श्री राम मैं एक बात कहना चाह रहा था बोलिए बोलिए

1109
01:19:31,680 --> 01:19:35,840
मैं परसों गड़गंगा गया था तो वहां पर भी इनकी टीम सक्रिय थी

1110
01:19:35,840 --> 01:19:39,920
भाई जी वहां पर भी ऐसे लोग थे इनके दो चार मात शक्ति और दो

1111
01:19:39,920 --> 01:19:44,040
चार ए जेंट्स वहां भी अपनी किताब को बांट रहे हैं अब लोगों को क्या

1112
01:19:44,040 --> 01:19:48,160
कहते हैं क्या भ्रमित करते हैं कि गंगा स्नान करने से कोई मोक्ष

1113
01:19:48,160 --> 01:19:52,160
नहीं मिलेगा परंतु आपको आपके वीडियो का इतना प्रभाव है

1114
01:19:52,160 --> 01:19:56,320
लोगों ने इतना धोया इनको इतना धोया मेरा मन बड़ा खुश हो गया फिर

1115
01:19:56,320 --> 01:20:00,640
मैंने बीच में थोड़ा फिर मैंने भी उनको ऐसे भगाया

1116
01:20:00,640 --> 01:20:04,960
लोगों ने मतलब मुझे देख कर के बड़ी खुशी हुई इतना सनातन जागृत हो

1117
01:20:04,960 --> 01:20:09,040
है मतलब की इनको वहां टिकने ही नहीं दिया इनकी

1118
01:20:09,040 --> 01:20:13,360
जो टीम आई थी गंगा स्नान से कुछ नहीं होता जितने मातृ

1119
01:20:13,360 --> 01:20:17,480
शक्ति थी वहां पर जितने लोग थे बहुत भीड़ हो रखी थी सबने इनको इतना

1120
01:20:17,480 --> 01:20:21,600
मतलब इतना मतलब बेजत किया वहां पर मैं फिर भी ये अपनी

1121
01:20:21,600 --> 01:20:25,640
बुद्धि को ऐसा व जबरदस्ती किताब दे रहे हैं जबरदस्ती

1122
01:20:25,640 --> 01:20:29,920
मनवा रहे हैं फिर भी इतना मतलब की राम

1123
01:20:29,920 --> 01:20:34,000
रामपाल की इतनी मतलब दुर्बुद्धि इनके मन में है यह मेरी समझ में

1124
01:20:34,000 --> 01:20:40,000
नहीं आया मैं ये देख रहा था कितना एक ब जिद्दी

1125
01:20:40,480 --> 01:20:44,840
पना हेलो मैं आपको बता दे रहा हूं वेदों में लिखा है 24

1126
01:20:44,840 --> 01:20:49,240
सूक्त है पाप नाशक गंगा आदि

1127
01:20:49,240 --> 01:20:53,800
नदिया नदियों का जल हिमालय से निकलता है और सागर में मिलता है

1128
01:20:53,800 --> 01:20:58,840
इस प्रकार का दिव्य जल औषधिया

1129
01:20:58,840 --> 01:21:03,960
प्रदान कौन सा वेद है एक मिनट मैं

1130
01:21:03,960 --> 01:21:08,040
देख य अथ अवेद एक मिनट

1131
01:21:08,040 --> 01:21:14,040
मैं देखता

1132
01:21:18,040 --> 01:21:22,600
हूं मैं बताता हूं

1133
01:21:22,600 --> 01:21:27,440
चलिए तब तक हम इनसे पूछ ले ज श्री राम आपका नाम है जय

1134
01:21:27,440 --> 01:21:32,280
सीताराम जी गुरुजी जय

1135
01:21:32,280 --> 01:21:35,680
सीताराम जी

1136
01:21:35,680 --> 01:21:40,120
बोलिए जी मैं ज्यादा तो नहीं थोड़ा सा ही कहूंगा

1137
01:21:40,120 --> 01:21:44,720
कि आप जो कार्य कर रहे हैं सनातन से संबंधित

1138
01:21:44,720 --> 01:21:49,280
व बहुत ही अच्छा उत्कृष्ट कार्य है

1139
01:21:49,280 --> 01:21:53,520
और मैं केवल अपने हृदय से

1140
01:21:53,520 --> 01:21:56,560
आपको दुआ तो नहीं

1141
01:21:56,560 --> 01:22:00,680
मतलब अपनी शुभेक्षा व्यक्त करता हूं कि ईश्वर आपको और

1142
01:22:00,680 --> 01:22:04,760
आपके परिवार को सदैव प्रसन्न रखे स्वस्थ

1143
01:22:04,760 --> 01:22:09,120
रखे और आप दीर्घा हो मैंने

1144
01:22:09,120 --> 01:22:13,800
एक बात जानी है ज्यादा इतना ज्ञानी कि धर्मो रक्षति

1145
01:22:13,800 --> 01:22:18,040
रक्षिता जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा

1146
01:22:18,040 --> 01:22:22,360
करता है मैं ईश्वर से कामना करता हूं आप दीर्घायु हो

1147
01:22:22,360 --> 01:22:26,760
स्वस्थ रहे प्रसन्न रहे और इसी प्रकार से सनातन का

1148
01:22:26,760 --> 01:22:31,160
प्रचार और प्रसार करते रहे ताकि जो वास्तव में पाखंड

1149
01:22:31,160 --> 01:22:35,560
जो है कहने वाले तो बहुत कहते हैं कि पाखंड

1150
01:22:35,560 --> 01:22:39,960
क्या है लेकिन पाखंड की जो वास्तविक परिभाषा है जो वेदों

1151
01:22:39,960 --> 01:22:44,200
से शास्त्रों से रहित जो ज्ञान है उसको दुष्प्रचार

1152
01:22:44,200 --> 01:22:48,280
करके लोग अपने अपने मत मजहब संप्रदाय जो

1153
01:22:48,280 --> 01:22:52,680
बना रहे हैं आप वास्तव में उस पाखंड को

1154
01:22:52,680 --> 01:22:56,960
लोगों को लोगों के सामने लेकर आ रहे हो इसके लिए मैं अपने हृदय

1155
01:22:56,960 --> 01:23:01,040
से और ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि आपको सदैव सुखी और

1156
01:23:01,040 --> 01:23:05,360
स्वस्थ रहे जय सीताराम जय श्री नारायण आभार

1157
01:23:05,360 --> 01:23:09,360
आपको बहुत-बहुत आभार आभार आपका ये

1158
01:23:09,360 --> 01:23:11,640
अथर्ववेद का छटा कांड है 24

1159
01:23:11,640 --> 01:23:15,760
वा सूक्त है मंत्र नंबर एक एक से

1160
01:23:15,760 --> 01:23:19,920
लेकर तीन मंत्र है इसमें पाप नाशक गंगा आदि

1161
01:23:19,920 --> 01:23:24,160
नदियों का जल हिमालय से निकलता है और सागर में मिलता है इस प्रकार दिव्य

1162
01:23:24,160 --> 01:23:28,680
जल हृदय की जलन मिटाने वाले औषधियां प्रदान करें

1163
01:23:28,680 --> 01:23:32,800
इसमें और भी लिखा है बहुत सी चीजें लिखी है इसमें गंगा जी के बारे

1164
01:23:32,800 --> 01:23:38,040
में बहुत बढ़िया

1165
01:23:38,040 --> 01:23:42,800
तो शंकर सिंह जी जय श्री राम

1166
01:23:42,800 --> 01:23:48,640
बताइए सत सा भाई बोलिए आपका

1167
01:23:48,640 --> 01:23:53,160
परिचय परी कुछ नहीं बहुत वो कर रहे हो लाइव

1168
01:23:53,160 --> 01:23:57,200
में क्या क्या कर रहे हैं

1169
01:23:57,200 --> 01:24:01,520
गुरु संत रामपाल जी की मतलब कुछ कर रहे हो आप

1170
01:24:01,520 --> 01:24:05,600
संत रामपाल जी के शिष्य हैं हां जी शिष्य वो

1171
01:24:05,600 --> 01:24:10,600
आपके गुरु वो आपके गुरु हैं जी

1172
01:24:10,600 --> 01:24:15,920
जी अच्छा तो गुरु का मतलब क्या होता

1173
01:24:15,920 --> 01:24:20,080
है मैं तो यह पूछने आया हूं कि जैसे तुम बोल रहे हो ना जैसे छठ

1174
01:24:20,080 --> 01:24:24,560
पूजा में कितने नुकसान हुए थे मतलब भक्तों के जैसे छठ पूजा जाते हैं

1175
01:24:24,560 --> 01:24:26,680
नुकन होता भाब देखिए मैं एक

1176
01:24:26,680 --> 01:24:30,880
बात बताऊ आपको हमारे और रामपाल दास जी के बीच

1177
01:24:30,880 --> 01:24:35,080
में इस बात को लेकर के नहीं इस बात को लेकर

1178
01:24:35,080 --> 01:24:39,280
के कोई मतभेद नहीं है कि उनको छट पूजा करनी है कि नहीं करनी हमने

1179
01:24:39,280 --> 01:24:43,280
नहीं कहा छट पूजा करो ही करो ना करो मगर य

1180
01:24:43,280 --> 01:24:47,360
मत वेद में प्रमाण है कबीर भगवान यह मत कहो गीता को काल ने बोला

1181
01:24:47,360 --> 01:24:51,600
है यह मत कहो के रामपाल तत्वदर्शी है अगर यह कहो

1182
01:24:51,600 --> 01:24:55,240
तो इस खा

1183
01:24:55,240 --> 01:24:59,640
शलोक में लिखा है कि अर्जुन मैं स्वयं काल बताओ आप खुद स्क्रीन पर प्रमाण चला दय

1184
01:24:59,640 --> 01:25:03,960
बैठे य भी देखेंगे आप भी देखोगे अब आपने सही बात बोली जिस

1185
01:25:03,960 --> 01:25:07,240
लोग बात करेंगे आपका

1186
01:25:07,240 --> 01:25:13,240
कहना दिखा मुझे ठीक मैं अभी दिखा

1187
01:25:13,520 --> 01:25:18,320
रहा अरे भाई दिखा रहा हूं मुझे वो शलोक

1188
01:25:18,320 --> 01:25:22,960
बताओ अरे मैं दिखाऊंगा मेरे भाई तुम मुझे

1189
01:25:22,960 --> 01:25:27,680
ला चला रहे दिखाना चाहिए ना प्रमाण तभी तो आदमी जानेंगे कि

1190
01:25:27,680 --> 01:25:31,760
वास्त ये ये कहां लिखा है जिस तरह से तुम दिखाने को बोल रहे हो

1191
01:25:31,760 --> 01:25:35,840
वो कहां लिखा है मैंने सिर्फ एक क्वेश्चन किया आप स्क्रीन पर नहीं पूछ रहा हूं मैं पूछ

1192
01:25:35,840 --> 01:25:39,960
रहा हूं स्क्रीन पर ऐसे ऐसे लाइव चला रहे हो ऐसे दिखाना चाहिए कहां लिखा

1193
01:25:39,960 --> 01:25:44,680
है बताओ क्या चीज क्या चीज हो गया क्या चीज

1194
01:25:44,680 --> 01:25:48,720
क्या चीज कुछ मतलब समझ में नहीं आया क्या बोलना चाह रहे हो मैंने बोला ऐसे

1195
01:25:48,720 --> 01:25:52,760
ऐसे लाइव चला रहे हो ऐसे स्क्रीन पर दिखाना चाहिए कहां लिखा

1196
01:25:52,760 --> 01:25:57,440
है अरे मेरी बात को उल्टा क्यों घुमा रहे हो आप मैं बोल

1197
01:25:57,440 --> 01:26:01,920
रहा मैंने तुमसे मना किया क्या तुम जो बोल रहे हो वो नहीं लिखा है प्रमाण

1198
01:26:01,920 --> 01:26:06,760
दिखाने की आवश्यकता तब है जब जो तुम कह रहे हो व मैं नहीं मान रहा हूं

1199
01:26:06,760 --> 01:26:10,960
मैंने तुमको कहा क्या मैं नहीं मान रहा हूं नहीं तो आप तो कभी मानोगे

1200
01:26:10,960 --> 01:26:14,960
नहीं ये बात म इतने मैं तो मान

1201
01:26:14,960 --> 01:26:19,000
रहा मैं तो मान रहा हूं कि भगवत गीता को काल ने कहा है मगर

1202
01:26:19,000 --> 01:26:23,200
वो काल भगवान स्वयं है भगवान श्री कृष्ण

1203
01:26:23,200 --> 01:26:27,320
ही काल है नहीं वो काल नहीं है श्री कृष्ण भगवान काल

1204
01:26:27,320 --> 01:26:28,680
नहीं है मुझे

1205
01:26:28,680 --> 01:26:32,760
य बताओ अब मुझे यह बताओ मैं कौन सा श्लोक खोलू यह रही भगवत

1206
01:26:32,760 --> 01:26:36,800
गीता जिसम लिखा हो मेरा

1207
01:26:36,800 --> 01:26:41,080
सवाल तो सुनलो रोबोट हो क्या बताइए

1208
01:26:41,080 --> 01:26:45,120
बताइए सवाल यह है तुमने कहा नहीं वो काल नहीं

1209
01:26:45,120 --> 01:26:49,240
है तुमने य कहा ना जी जी य कहा लिखा है कि श्री कृष्ण

1210
01:26:49,240 --> 01:26:53,240
काल नहीं है ये

1211
01:26:53,240 --> 01:26:57,480
बताओ आप ये बताइए कृष्ण भगवान काल नहीं थे उनके

1212
01:26:57,480 --> 01:27:01,480
अंदर य बताओ श्री कृष्ण भगवान काल नहीं है ये

1213
01:27:01,480 --> 01:27:06,440
कहा लिखा है मैं तुम्ह बताऊंगा श्री कृष्ण भगवान ही काल है

1214
01:27:06,440 --> 01:27:12,440
वो नहीं है आप बताओ बताओ आप इतने पढ़े लिखे हो इतने ग्रंथ

1215
01:27:12,600 --> 01:27:16,640
कारे बता रहे चुप हो जाओ बता रहे

1216
01:27:16,640 --> 01:27:21,920
क काल लिखा है बताइए

1217
01:27:21,920 --> 01:27:26,040
बताइ का बता रहे तब तक तुम रामपाल

1218
01:27:26,040 --> 01:27:30,120
जी महाराज के चेले हो ना हा जी

1219
01:27:30,120 --> 01:27:34,320
बताइए म आप अगन का मतलब निकाल के

1220
01:27:34,320 --> 01:27:38,840
बताओ वो राम भगवान श्री कृष्ण का

1221
01:27:38,840 --> 01:27:42,840
तब तक आप निकाल के बताओ ना मेरे पास देखो ग्रंथ तो है नहीं

1222
01:27:42,840 --> 01:27:47,400
मैं कोई इतना बड़ा पंडित तो नहीं हूं जो मैं ग्रंथ रखूंगा य अच्छा मतलब तु अप

1223
01:27:47,400 --> 01:27:51,440
अपनी बात आई तो मैं पंडित नहीं हूं अरे तुम हमसे पूछ रहे हो तो

1224
01:27:51,440 --> 01:27:55,560
अपनी बातो को भी तो सिद्ध करो अरे तो भा प्रमाण दिखाने की बोल

1225
01:27:55,560 --> 01:27:59,560
रहे तो मेरे पास ग्रंथ नहीं है अभी फिलहाल क दि जो मान

1226
01:27:59,560 --> 01:28:03,640
लिया खुद की बुद्धि काम में नहीं करती है तुम्हारी भाई आप जो लाइव

1227
01:28:03,640 --> 01:28:07,640
चला रहे हो उसके पाद सब स्क्रीन वगर हर चीज देखो इनके पास कितनी किताब प दिखा

1228
01:28:07,640 --> 01:28:13,080
दीजिए मैं जो बोल रहा दिखा दीजिए बात खत्म हो जाएग मैं लेकिन तुमको बोल रहा

1229
01:28:13,080 --> 01:28:17,280
हूं कर चते सुनि सुनि एक करके चलते

1230
01:28:17,280 --> 01:28:21,360
मैं इनको पहले काल खा द एक मिनट काल

1231
01:28:21,360 --> 01:28:25,480
बता दे शकर जब श्री

1232
01:28:25,480 --> 01:28:27,720
कृष्ण जब अर्जुन ने श्री कृष्ण से

1233
01:28:27,720 --> 01:28:31,760
कहा कि मैं आप आपको किन किन रूपों में किन

1234
01:28:31,760 --> 01:28:35,800
किन रूपों में आपका चिंतन करूं मैं दसव अध्याय में क्योंकि श्री

1235
01:28:35,800 --> 01:28:40,080
कृष्ण ने नव अध्याय में कहा कि सब कुछ में हूं किंचित मात्र भी कोई दूसरा

1236
01:28:40,080 --> 01:28:44,080
कारण है ही नहीं तो अर्जुन को शंका हुई कि मैं किन किन रूपों में

1237
01:28:44,080 --> 01:28:48,080
आपकी मैं क्या करूं चिंतन करूं तो श्री कृष्ण ने अध्याय 10 के 33

1238
01:28:48,080 --> 01:28:52,280
श्लोक में कहा कि अक्षरों में आकार और समावेश द्वंद समास

1239
01:28:52,280 --> 01:28:56,480
मैं ही हूं काल अर्थात काल का भी महाकाल तथा

1240
01:28:56,480 --> 01:29:00,720
सब और मुख वाला धाता सबका पालन पोषण करने वाला भी मैं ही हूं

1241
01:29:00,720 --> 01:29:05,440
पहले ही काल कह दिया 11 32 से पहले अपने को काल बता दिया हो

1242
01:29:05,440 --> 01:29:11,440
गया श्लोक क्रमांक दिखा दूं बताइए श्लोक क्रमांक

1243
01:29:11,560 --> 01:29:15,720
बोलो बो दिया तो बाद में आया है

1244
01:29:15,720 --> 01:29:19,080
11

1245
01:29:19,080 --> 01:29:23,400
3 जी कौन सा बोल रहे

1246
01:29:23,400 --> 01:29:28,720
ये जो बोल मि मिनट मिनट मिनट मिनट एक मिनट

1247
01:29:28,720 --> 01:29:33,360
मिनट जी आप कौन सा बोलना है 10

1248
01:29:33,360 --> 01:29:37,600
अरे भाई तुम चुप रहो ना तुम्हारा 11 सुन लिया मैंने अध्याय

1249
01:29:37,600 --> 01:29:41,600
10 लोक संख्या बात बोलना

1250
01:29:41,600 --> 01:29:45,880
जरूरी है क्या बीच में बोलिए अध्याय

1251
01:29:45,880 --> 01:29:51,880
10 श्लोक संख्या 33 33

1252
01:29:54,240 --> 01:29:59,160
और सबसे पहले तो एक परमाण य दिखा देना इनको कि अर्जुन ने

1253
01:29:59,160 --> 01:30:03,680
भगवान श्री कृष्ण से बोला कि मैं आपको किन किन रूपों में आपका चिंतन करूं

1254
01:30:03,680 --> 01:30:07,680
मैं मतलब कि आपके रूप कौन-कौन से हैं तो उन्होने कहा कि मैं

1255
01:30:07,680 --> 01:30:11,720
ही काल हूं पहले ही बोल दिया 11 से 32 से पहले ही बोल

1256
01:30:11,720 --> 01:30:16,360
दिया अर्जुन नेय कहां पूछा है किन किन रूपों में चिंतन करू

1257
01:30:16,360 --> 01:30:22,360
अभी बताते हैं आपको हम शलोक संख्या देता हूं आपको

1258
01:30:22,960 --> 01:30:28,960
मैं मिन इसी में अध्याय

1259
01:30:32,160 --> 01:30:36,360
में स्क्रीन पर दिखाओ मुझे 11 32

1260
01:30:36,360 --> 01:30:40,960
हाय 1 श्लोक में 10 के 1 श्लोक में हे योगी निरंतर

1261
01:30:40,960 --> 01:30:45,200
सांग चिंतन करता हुआ मैं आपको कैसे जानू और हे भगवान

1262
01:30:45,200 --> 01:30:51,200
किन किन भाव में आपके मे मेरे दरा

1263
01:30:58,840 --> 01:31:03,200
18 फिर अच्छे से कहा हे जनार्दन अपने योग को और विभूति

1264
01:31:03,200 --> 01:31:07,320
को मिनट ये अर्जुन ने पूछा है

1265
01:31:07,320 --> 01:31:13,320
भाई 10 1 10

1266
01:31:18,440 --> 01:31:22,480
है में अर्जुन कह रहा है हे

1267
01:31:22,480 --> 01:31:26,720
जनार्दन आप अपनी योग शक्ति को विभूति को फिर से फिर

1268
01:31:26,720 --> 01:31:31,040
भी विस्तार पूर्वक कहिए आपको किन किन रूप में भजना है देख लो

1269
01:31:31,040 --> 01:31:35,440
विस्तार पूर्वक कहो अपने को दिख रहा

1270
01:31:35,440 --> 01:31:39,440
है विस्तार पूर्वक कहिए अर्जुन कह

1271
01:31:39,440 --> 01:31:44,280
रहा है 11 अध्याय का 32 निकालो अरे

1272
01:31:44,280 --> 01:31:50,280
तुम्हारी बात हमने मान तो ली

1273
01:31:51,000 --> 01:31:57,000
भाई सबको पता लगना चाहिए

1274
01:31:57,920 --> 01:32:02,040
क्या अरे 11 32 में क्या लिखा है दिखा

1275
01:32:02,040 --> 01:32:06,280
तो स्क्रीन प बताओ तो

1276
01:32:06,280 --> 01:32:10,960
सही बोल रहे खुद में काल जैसे प्रकट हो बोला

1277
01:32:10,960 --> 01:32:15,000
गता कौन बोल रहा है कौन बोल रहा है

1278
01:32:15,000 --> 01:32:19,080
भगवान का शरीर यूज हो रहा उसम

1279
01:32:19,080 --> 01:32:24,000
बात मुझे ख दिखाओ श्री कृष्ण का शरीर यूज हो रहा है य दिखाओ लिख

1280
01:32:24,000 --> 01:32:28,320
अगर यह बात तुम लिख के नहीं दिखा रहे हो एक मिनट एक मिनट अगर तुम यह वाली बात लिखी

1281
01:32:28,320 --> 01:32:32,440
नहीं दिखा रहे हो कि श्री कृष्ण का शरीर यूज हो रहा है काल अंदर से बोल रहा है काल

1282
01:32:32,440 --> 01:32:36,600
कोई और है तो फिर यह वाली बात तुम्हारी क्यों मान ली जाए श्री कृष्ण

1283
01:32:36,600 --> 01:32:41,000
काल से अलग है गीताजी में लिखा है भाई आप क्यों नहीं मानोगे उसको

1284
01:32:41,000 --> 01:32:45,840
श्री कृष्ण का शरीर यूज हो रहा है ये कहा लिखा है

1285
01:32:45,840 --> 01:32:49,880
श्री कृष्ण भगवान काल है क्या ये बताओ बिल्कुल श्री कृष्ण

1286
01:32:49,880 --> 01:32:55,880
भगवान काल वही तो हम तुम्ह बता रहे हैं वही बता रहे क्या होता है

1287
01:32:59,240 --> 01:33:05,240
में श्री कृष्ण भगवान य बोल

1288
01:33:08,720 --> 01:33:14,720
रहे

1289
01:33:22,760 --> 01:33:27,440
में सुनना है कि नहीं सुनना है क्लियर जवाब

1290
01:33:27,440 --> 01:33:31,840
सुनना है इसलिए तो बैठा हूं मैं हा सुनना है तो सुनो

1291
01:33:31,840 --> 01:33:35,880
10 33 में ये श्री कृष्ण भगवान अपने रूप का विस्तार बता रहे

1292
01:33:35,880 --> 01:33:38,880
हैं कि मैं काल

1293
01:33:38,880 --> 01:33:43,040
हूं बहुत से रूपों का किया मैं ही विष्णु हूं मैं ही श्रीराम हूं

1294
01:33:43,040 --> 01:33:47,480
मैं ही गंगा हूं ब मैं ही पम

1295
01:33:47,480 --> 01:33:53,480
हूं मैं ही पीपल का विय देख

1296
01:33:54,080 --> 01:33:58,440
बो काल क्या कौन सा

1297
01:33:58,440 --> 01:34:02,320
शलोक कौन सा

1298
01:34:02,320 --> 01:34:06,920
शलोक 10 33 मेरे को क्या

1299
01:34:06,920 --> 01:34:10,960
मतलब क्या मतलब मलब गीता से मतलब नहीं है 10

1300
01:34:10,960 --> 01:34:15,080
से अरे तो उनका क्वेश्चन था ना मेरा क्वेश्चन अलग है मेरे कहने का मतलब

1301
01:34:15,080 --> 01:34:19,080
अरे अलग क्या है तुमको मुझे य बताओ कि उनका शरीर यूज हो रहा है वो

1302
01:34:19,080 --> 01:34:23,160
नहीं बोल रहे ये बताओ बता रहे हो अध्याय

1303
01:34:23,160 --> 01:34:27,320
का 3 लो बता ही नहीं रहे आप अरे 11 अध्याय का 32 वा मैं दिखा देता हूं

1304
01:34:27,320 --> 01:34:31,400
उससे हो क्या जाएगा मैं मान तो रहा हूं तुम्हारी बात कि काल है

1305
01:34:31,400 --> 01:34:35,400
वो हा कौन काल है ये बताओ क्या हो जाएगा उससे क्या

1306
01:34:35,400 --> 01:34:39,440
हो जाएगा लो काल कौन है ये बताओ अरे

1307
01:34:39,440 --> 01:34:43,480
भाई साब श्री कृष्ण ही काल है तु दिखा तो दिया 33 में मैं ही काल हूं

1308
01:34:43,480 --> 01:34:48,280
बोल काल नहीं है नहीं श्री कृष्ण जी जिसको जो जो काल मानते हैं वो

1309
01:34:48,280 --> 01:34:52,480
श्री कृष्ण काल नहीं है ये बताओ ये कृष्ण जी भगवान

1310
01:34:52,480 --> 01:34:56,680
है मैं पूछ रहा हूं उनके उनका शरीर यूज

1311
01:34:56,680 --> 01:35:01,080
हो रहा है वो नहीं बोल रय कहा लिखा है सुन तो लो

1312
01:35:01,080 --> 01:35:05,320
हर चीज लिखा होता है क्या मतलब हा आ गई ना मनम

1313
01:35:05,320 --> 01:35:09,160
भक्ति य कौन बात भक्ति नहीं

1314
01:35:09,160 --> 01:35:13,480
है लिखा दिखाओ जब यहां पर श्री कृष्ण का उवाच है श्री कृष्ण

1315
01:35:13,480 --> 01:35:17,560
रुक जाओ यहां प लिखा है श्री कृष्ण ने बोला तुम कह रहे

1316
01:35:17,560 --> 01:35:21,560
हो उनका शरीर य हो रहा है मगर वो नहीं बोल रहा लिखा दिखाओ कहा लिखा

1317
01:35:21,560 --> 01:35:25,880
है पले बताओ गीता जी किने लिखा है गीताजी

1318
01:35:25,880 --> 01:35:30,800
व्यास जी ने लिखी है ट उसका वो बोलने वाला कौन है

1319
01:35:30,800 --> 01:35:34,840
श्री कृष्ण बोलने वाले ये नहीं है

1320
01:35:34,840 --> 01:35:38,200
काल और

1321
01:35:38,200 --> 01:35:42,320
सुनलो सुनो गता भगवान नहीं बोली अरे कहा

1322
01:35:42,320 --> 01:35:46,320
लिखा है मेरे भाई वही तो बोल रहा हू उनका शरीर यूज

1323
01:35:46,320 --> 01:35:50,600
किया गया है काल ने बोली बात लिखी है शरीर य हुआ उनका

1324
01:35:50,600 --> 01:35:55,400
उन्होने बोला नहीं है अध श्री कृष्ण

1325
01:35:55,400 --> 01:35:59,800
भगवान प लेते सबको खाने के लिए प्रकट हुआ

1326
01:35:59,800 --> 01:36:05,320
फालतू बात वो श्री कृष्ण नहीं है य लिखा है

1327
01:36:05,320 --> 01:36:09,760
वो तो बोल रहे हैं ना थोड़ा आप रिलैक्स होकर बोलिए थोड़ा

1328
01:36:09,760 --> 01:36:13,880
इस तर मम बार वही बात रिपीट करोगे तो तुम्हारी बात हम सुनते

1329
01:36:13,880 --> 01:36:18,000
रहे क्या 11 32 में लिखा है क्या वो कह रहे मैं बड़ा हुआ

1330
01:36:18,000 --> 01:36:22,200
काल हूं ये क लिखा शरीर मेरा शरीर यूज हो रहा है मैं नहीं बोल रहा

1331
01:36:22,200 --> 01:36:24,160
हूं लि तो है ना उसम

1332
01:36:24,160 --> 01:36:28,480
काल है अरे काल है वो तो हम भी मान रहे हैं वो श्री कृष्ण

1333
01:36:28,480 --> 01:36:32,640
नहीं है ये बताओ कहा लिखा है भगवान काल नहीं है आप ये मान रहे हो कृष्ण

1334
01:36:32,640 --> 01:36:37,400
भगन ये जो भाई साहब तुम बोल रहे हो यह कहां लिखा है

1335
01:36:37,400 --> 01:36:42,160
गोविंद जी गोविंद जी कहां गए वो

1336
01:36:42,160 --> 01:36:47,040
वो कौन सा पर्व वो कौन सा पर्व था जहां पर वो

1337
01:36:47,040 --> 01:36:51,280
श्री कृष्ण भगवान से दोबारा उन्होंने पूछा था

1338
01:36:51,280 --> 01:36:56,080
कि वो मुझे गीता का ज्ञान दोबारा सुना दो ज वो कौन सा पर्व था

1339
01:36:56,080 --> 01:37:00,280
तब भी वो श्री कृष्ण भगवान नहीं बोल पाए भाई

1340
01:37:00,280 --> 01:37:04,400
साहब आपसे जब बात की जाए ना तब आप बात करिएगा अभी मैं किसी और से बात करता

1341
01:37:04,400 --> 01:37:08,840
चुप रहिए य मुझे पता है हा

1342
01:37:08,840 --> 01:37:14,280
वो पर्व कौन सा है गोविंद

1343
01:37:14,280 --> 01:37:20,280
जी गोविंद जी कौन गोविंद जी दिख ही नहीं र

1344
01:37:32,600 --> 01:37:36,760
वो चैप्टर नंबर मुझे नहीं मिल रहा अनुशासन पव में है

1345
01:37:36,760 --> 01:37:41,680
शायद हरि ओम जी मैं दिख रहा हूं आपको

1346
01:37:41,680 --> 01:37:46,600
हरि ओम जी मैं दिख रहा हूं जी आप दिख रहे हैं आज मेरे नेटवर्क

1347
01:37:46,600 --> 01:37:50,600
नेटवर्क की बड़ी प्रॉब्लम है महाभारत अनुशासन पर्व

1348
01:37:50,600 --> 01:37:55,120
अध्याय नंबर 17 से शुरू हो रहा है वो अध्याय

1349
01:37:55,120 --> 01:37:57,240
17

1350
01:37:57,240 --> 01:38:03,240
है अनुशासन पर्व के

1351
01:38:04,720 --> 01:38:08,800
अंतर्गत

1352
01:38:08,800 --> 01:38:14,280
अध्याय अमिक पर्व है अनुशासन पर्व नहीं

1353
01:38:14,280 --> 01:38:20,280
है अश्व मैिक पर्व

1354
01:38:20,920 --> 01:38:25,280
है पर्व है अध्याय 17 अध्याय नंबर

1355
01:38:25,280 --> 01:38:29,480
17 हा अनु गीता नाम का पर्व है

1356
01:38:29,480 --> 01:38:33,680
आप ही आप ही खोलो जरा मैं समझ यहां

1357
01:38:33,680 --> 01:38:37,880
तो अनुग अनु गीता पर्व लिखा है भाग

1358
01:38:37,880 --> 01:38:41,400
गया वो तो अनु गीता

1359
01:38:41,400 --> 01:38:45,480
प अनुग प पता नहीं

1360
01:38:45,480 --> 01:38:49,680
क्यों हालाकि वाईफाई चल रहा है 806

1361
01:38:49,680 --> 01:38:53,680
अनुग पर्व है ना ये आदिक पर्व के अंदर

1362
01:38:53,680 --> 01:38:58,400
पर्व हां अनु गीता पर्व है

1363
01:38:58,400 --> 01:39:04,400
806 हां

1364
01:39:23,840 --> 01:39:28,720
ये मानने वाले तो है नहीं फिर जाकर फिर वही रोना रोएंगे ये

1365
01:39:28,720 --> 01:39:34,720
कौन सा श्लोक है अमिक पर्व में ये है

1366
01:39:36,120 --> 01:39:40,160
169 169 10

1367
01:39:40,160 --> 01:39:46,160
जी

1368
01:39:54,200 --> 01:39:58,720
श भाइयों वासुदेव श्री कृष्ण अनेक

1369
01:39:58,720 --> 01:40:02,920
शांत किया बता आपको नहीं मिल महा

1370
01:40:02,920 --> 01:40:07,120
तपस्वी श्री कृष्ण विधि पूर्वक अर्जुन को शत देकर अपना भ दिया बातचीत

1371
01:40:07,120 --> 01:40:11,280
में कोने वा

1372
01:40:11,280 --> 01:40:15,920
बाहु इसम

1373
01:40:15,920 --> 01:40:19,960
सोवा उस समय मैंने तुम्ह य श्री कृष्ण बोल

1374
01:40:19,960 --> 01:40:24,390
मैंने तुम्ह य अत्यंत गोपनीय ज्ञान दिया था

1375
01:40:24,390 --> 01:40:26,760
[संगीत]

1376
01:40:26,760 --> 01:40:30,840
बता तो श्री कृष् दिया य लि है गीता का जन

1377
01:40:30,840 --> 01:40:34,880
आ जब अर्जुन को ता चल रही थी तो क्या बोल र जी

1378
01:40:34,880 --> 01:40:39,880
जो नहीं सुना सकता वापस जैसे मैं कोई बात

1379
01:40:39,880 --> 01:40:44,160
बोल क्योंकि अर्जुन ने उस गुप्त ज्ञान को से याद नहीं रखा

1380
01:40:44,160 --> 01:40:48,680
उन्होने बताया श्री कृष्ण वक्ता

1381
01:40:48,680 --> 01:40:53,720
होता देखिए बात बारबार बदली जा रही है थोड़ क्लियर

1382
01:40:53,720 --> 01:40:57,880
अगर वो जो का त्य नहीं बता सकते तो इसका मतलब ये ज्ञान उन्होंने

1383
01:40:57,880 --> 01:41:02,120
नहीं दिया ये कहा लिखा है यह बताइए जैसे मैंने थोड़ी

1384
01:41:02,120 --> 01:41:06,920
देर पहले बात बोली रिपीट एकदम करेक्ट कर दूंगा उसको अगर क

1385
01:41:06,920 --> 01:41:09,400
बोल रहे होय

1386
01:41:09,400 --> 01:41:13,480
लिखाने आपसे पूछ मैं आपसे पूछ रहा हूं आप जो बोल रहे हो

1387
01:41:13,480 --> 01:41:17,520
यह लिखा कहां है क्या यदि वो दोबारा ज्ञान

1388
01:41:17,520 --> 01:41:22,160
नहीं दे रहे हैं तो इसका मतलब उन्होंने नहीं बोला था

1389
01:41:22,160 --> 01:41:26,280
स्पष्ट कह रहा है अरे मेरे भाई ये लिखा कहां है कि अगर

1390
01:41:26,280 --> 01:41:30,600
कोई व्यक्ति ने एक बात कही और उसके थोड़ी देर बाद वो दोबारा नहीं कह पा रहा है

1391
01:41:30,600 --> 01:41:31,100
नहीं कह

1392
01:41:30,960 --> 01:41:35,880
रहा है तो इसका मतलब वो ज्ञान उसने नहीं बोला था यह नियम कहां लिखा हैय

1393
01:41:35,880 --> 01:41:40,320
तो आपका है पहले मुझे बता दो य लिखा है कि नहीं लिखा

1394
01:41:40,320 --> 01:41:44,360
है अगर कोई व्यक्ति ने मैंने आपको कुछ भी बताया

1395
01:41:44,360 --> 01:41:48,400
मैं दोबारा नहीं बता पा रहा हूं तो इसका मतलब पहली बार मैंने नहीं बताया था

1396
01:41:48,400 --> 01:41:53,240
किसी और ने बताया था यह सिद्धांत कहां लिखता है

1397
01:41:53,240 --> 01:41:57,360
सिद्धांत नहीं अगर कोई हो सवास में होगा है क्याले

1398
01:41:57,360 --> 01:42:02,160
करके सिद्धांत है क ब गता का जन दे

1399
01:42:02,160 --> 01:42:06,240
दिया में

1400
01:42:06,240 --> 01:42:11,040
है मैं पूछ रहा हूं क्या यह सिद्धांत है कहीं

1401
01:42:11,040 --> 01:42:15,560
आप तो नहीं आप तो भगवान को भी काल बता सकते हो तो फिर तो आप

1402
01:42:15,560 --> 01:42:20,040
देख बा करेंगे हया जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं

1403
01:42:20,040 --> 01:42:24,040
य सिधांत लिखा है क्या

1404
01:42:24,040 --> 01:42:28,200
अ यह मुझे नहीं पता कहां लिखा है कि क नहीं पता नहीं तो

1405
01:42:28,200 --> 01:42:32,280
पता करिए य सिद्धांत पर है किसीने सुनो

1406
01:42:32,280 --> 01:42:36,480
अगर किसी ने कोई बात बोल द दोबारा नहीं बोल रहा है किसी भी वजह

1407
01:42:36,480 --> 01:42:41,040
से तो इसका मतलब व पहली बार थी व उसने नहीं बोली थी

1408
01:42:41,040 --> 01:42:45,120
वो कोई आम आदमी नहीं था भगवान था बता सकता उसका

1409
01:42:45,120 --> 01:42:50,200
मन नहीं बता रहा

1410
01:42:50,200 --> 01:42:54,440
दोबारा को कुता क रहा है ये कौन सी बात हो भगवान

1411
01:42:54,440 --> 01:42:58,640
वाली बात च र ये कौन सी बात है ये कौन सी बात है रामपाल स्वयं को कुत्ता

1412
01:42:58,640 --> 01:43:02,840
कह रहे हैं कबीर स्वयं को कुत्ता कह रहे हैं कबीर किसको कुत्ता

1413
01:43:02,840 --> 01:43:07,000
कह रहा है स्वयं को हा तो कुत्ता मीस होता है जैसे

1414
01:43:07,000 --> 01:43:11,080
अगर दास बन के रहेंगे तो भगवान अपने निकट आता है कहने का मतलब ये नहीं तो बस

1415
01:43:11,080 --> 01:43:15,320
ऐसे ही वो भी अपनी वो भी ऐसे ही कर रहे हैं ये कहां लिखा है कि कबीर ने इसलिए

1416
01:43:15,320 --> 01:43:19,480
कुत्ता बोला तो यार तुम पता नहीं कौन से टोपी में कहां

1417
01:43:19,480 --> 01:43:24,200
घुसा रहे हो मतलब भा ह श से पूछी जाएगी आपकी

1418
01:43:24,200 --> 01:43:28,360
अपने लिए दास के लिए मतलब भक्ति के लिए जैसे

1419
01:43:28,360 --> 01:43:33,320
इसका मतलब वो जो बोल रहे है कि वो कुत्ता है वो वास्तविक में कुत्ता नहीं है

1420
01:43:33,320 --> 01:43:38,000
कुत्ता का मीस होता है नौकर मतलब आई थक जैसे अपने कुत्ता पालते

1421
01:43:38,000 --> 01:43:42,240
लिखा है कुत्ता का मीन नौकर कहा लिखा है य आपकी

1422
01:43:42,240 --> 01:43:46,320
मुझे नहीं लग रहा कि आपकी थोड़ी माइंड हर चीज लिखा लिखा

1423
01:43:46,320 --> 01:43:50,600
म बो तुम गलत बोल रहे हो ना तुमको य मानना पड़ेगा

1424
01:43:50,600 --> 01:43:54,800
कि उन्होंने कुत्ता लीला पूर्वक कहा है तुमको

1425
01:43:54,800 --> 01:43:58,920
ये मानना पड़ेगा वो कुत्ता है नहीं वास्तव में तुमको यह मानना पड़ेगा

1426
01:43:58,920 --> 01:44:03,000
लेकिन आप मतलब कहने का मतलब है मैं आपसे पूछ रहा

1427
01:44:03,000 --> 01:44:05,280
हूं मेरे भाई क्या कुत्ता मान लिया जाए

1428
01:44:05,280 --> 01:44:09,560
उनको स्पष्ट किसको मान लिया जाए

1429
01:44:09,560 --> 01:44:13,600
जो कह रहा है कि मैं कुत्ता हूं उसम पूरी वाणी में क्या लिखा

1430
01:44:13,600 --> 01:44:17,880
है कुत्ता हू राम कुत्ता हूं मैं मैं दो टके का ह

1431
01:44:17,880 --> 01:44:23,880
यह सब कह रहे है वो रामपाल

1432
01:44:25,200 --> 01:44:29,320
परमात्मा नहीं है तर्शी तो है कुत्ता मानते हो तुम रामपाल

1433
01:44:29,320 --> 01:44:33,480
को नहीं वो ऐसी कैसी बात कर रहा

1434
01:44:33,480 --> 01:44:37,520
हा बोलो नहीं नहीं इस

1435
01:44:37,520 --> 01:44:41,520
तरह की बात करना आपको शोभ दे रहा आपसे पड़े वो थोड़ा

1436
01:44:41,520 --> 01:44:45,840
देरहा है क्या आपको शो दे रहा है क्या मैं आपसे

1437
01:44:45,840 --> 01:44:50,120
पूछ रहा मैं बात नहीं कर रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं वो कह रहे कि मैं कुत्ता हूं दो कड़ी

1438
01:44:50,120 --> 01:44:54,880
का हूं तो क्या वो वास्त में कुत्ते हैं

1439
01:44:54,880 --> 01:44:58,880
इसका मींस होता है पहले इसका जवाब दो है क्या

1440
01:44:58,880 --> 01:45:02,960
वास्तव में कुत्ता तो नहीं है भाई नहीं है इसका मतलब वो लीला पूर्वक

1441
01:45:02,960 --> 01:45:07,920
बोल रहे हैं ना लीला पूर्वक नहीं मतलब कुत्ते का मीस जैसे अपन

1442
01:45:07,920 --> 01:45:11,960
जैसे मैं समझा रहा हूं जैसे कोई वो कोई आपको अर्थ समझाना चाहते हैं

1443
01:45:11,960 --> 01:45:16,520
ना इसलिए बोल रहे हैं ना हां तो ऐसे ही श्री कृष्ण

1444
01:45:16,520 --> 01:45:20,280
अर्जुन को अर्थ समझाना चाहते हैं इसलिए बोल रहे हैं

1445
01:45:20,280 --> 01:45:24,760
ये आपका कोई मीस नहीं नि सु दिक्कत क्या है रामपाल दास

1446
01:45:24,760 --> 01:45:28,800
सुनो दिक्कत क्या है रामपाल दास जब कुछ बोलेंगे तो उनकी बातों को एज

1447
01:45:28,800 --> 01:45:32,840
इट इज नहीं मानोगे उनके पूछे का भाव ढूंढ लोगे श्री कृष्ण जब कोई बात

1448
01:45:32,840 --> 01:45:36,880
बोलेंगे तो उनकी बातों को एज इट पकड़ोगे सबसे पहले हम जुड़े

1449
01:45:36,880 --> 01:45:41,400
थे तो रामपाल जी की बात नहीं मान थ हम परमाण देख के माना ऐ थ

1450
01:45:41,400 --> 01:45:46,280
प्रमाण प्रमाण प भी आएंगे प्रमाण प भी आएंगे प्रमाण प भी आएंगे

1451
01:45:46,280 --> 01:45:51,040
बताओ ब्रम है ब्रह्म है वो अविनाशी है कि नहीं है ब्रह्म

1452
01:45:51,040 --> 01:45:55,760
काल ब्रम अविनाशी नहीं है नहीं है ब्रह्म विनाशी नहीं है

1453
01:45:55,760 --> 01:45:59,880
नहीं है हा अच्छा तो ब्रह्म का विनाश होता है कब

1454
01:45:59,880 --> 01:46:04,360
होता है जी बिल्कुल होता है कब होता

1455
01:46:04,360 --> 01:46:08,360
है कब होता है जब प्रलय होगी जब होगा और क्या मुझे

1456
01:46:08,360 --> 01:46:12,360
क्या तो अभी तक ब्रह्म का एक भी बार विनाश हुआ है

1457
01:46:12,360 --> 01:46:16,520
क्या बिल्कुल कितनी असं जन्म हो गए तो आज के नहीं

1458
01:46:16,520 --> 01:46:20,600
अपन बहुत पहले अरे ब्रह्म का मैं अपनी बात नहीं

1459
01:46:20,600 --> 01:46:24,600
कर रहा हूं ब्र का बोल रहा था उनका कई बार

1460
01:46:24,600 --> 01:46:28,800
विनाश हो चुका है कई बार वापस भी उनको जैसे सृष्टि रचना वापस जैसे हुई

1461
01:46:28,800 --> 01:46:32,840
बनी है जैसे मतलब हम लोग हम लोग कई बार सतलोक जा चुके हैं

1462
01:46:32,840 --> 01:46:36,240
कौन कौन ब्र ब्रह्म सतलोक

1463
01:46:36,240 --> 01:46:40,360
ब्रह्म सतलोक नहीं गया कभी वापस नहीं गया तो ब्रह्म तो ब्रह्म सतलोक

1464
01:46:40,360 --> 01:46:44,560
नहीं गया यानी कि ब्रह्म का विनाश अभी तक तो एक भी बार नहीं हुआ है मगर सृष्टि के प्रलय

1465
01:46:44,560 --> 01:46:48,560
में होगा कितनी बार हो चुका है आगे भी होगा

1466
01:46:48,560 --> 01:46:52,960
और ये चीज प्रलय प्रलय जब प्रलय होती है तब सारे लोग कहां जाते हैं

1467
01:46:52,960 --> 01:46:57,240
जब प्रलय हो जाती है सृष्टि रहती नहीं है जब रहती नहीं है जब

1468
01:46:57,240 --> 01:47:01,400
इसके जो नेक्स्ट ब्रह्म है परब्रह्म जिसको कहा गया गीता जी में तीन राम बताए

1469
01:47:01,400 --> 01:47:05,400
गए हैं रे भाई कहां जाती सीधे बताओ वो गीता जी तीन बाला मालूम है

1470
01:47:05,400 --> 01:47:09,560
मुझे आप बात बताओ सब लोग कहां जाते हैं प्रलय में व परब्रह्म

1471
01:47:09,560 --> 01:47:14,720
के लोक में शिफ्ट कर दी जाती है आत्माएं तो वो पर परम ब्रम का लोक कौन सा लोक

1472
01:47:14,720 --> 01:47:19,200
है जो परब्रह्म जो नेक्स्ट राम है जैसे ब्रह्म होता है इसके

1473
01:47:19,200 --> 01:47:23,280
परम ब्रम अलग है और तुम्हारा कबीर अलग है परब्रह्म है हमारा कबीर

1474
01:47:23,280 --> 01:47:27,480
जो है अपन सभी का है वो पूर्ण ब्रम है उसको पूर्ण ब्रम बोला गया

1475
01:47:27,480 --> 01:47:31,480
अच्छा वो पूर्ण ब्रम है और ये परम ब्रह्म है जि लोक में

1476
01:47:31,480 --> 01:47:34,160
य लोग जाते

1477
01:47:34,160 --> 01:47:38,160
हैंते जी भाई साहब आपने कभी गीता पढ़ी

1478
01:47:38,160 --> 01:47:42,200
है जीवन में गीता नाम का एक ग्रंथ होता है सा श्लोक वाला

1479
01:47:42,200 --> 01:47:46,400
शंकर जी जी से

1480
01:47:46,400 --> 01:47:50,440
बोल हाजी हा शंकर जी मैंने कहा आपने कभी जीवन में गीता नाम

1481
01:47:50,440 --> 01:47:53,200
का ग्रंथ पढ़ा है कभी

1482
01:47:53,200 --> 01:47:57,760
जी पढ़ा आप थोड़ा डायरेक्टली क्वेश्चन कीजिए इस तरह अगर घुमा फिरा होगे तो

1483
01:47:57,760 --> 01:48:02,320
तो अगर हमारे भी थोड़े ज्ञान चु प्रकाशित करने हो तो 18

1484
01:48:02,320 --> 01:48:06,600
अध्याय का लेकर थोड़े दो चार श्लोक पढ़ के सुनाएंगे

1485
01:48:06,600 --> 01:48:11,000
हमें देखो भैया मेरे पास तो गीता है नहीं फिलहाल तो और जो

1486
01:48:11,000 --> 01:48:15,120
पास है मेरे पास है आपने प्रमाण देखे

1487
01:48:15,120 --> 01:48:19,080
प्रमाण कैसे देखते थे आप

1488
01:48:19,080 --> 01:48:23,200
प्रमाण गुरुजी सत्संग करते हैं डेली प्रमाण दिखाते स्क्रीन प गुरुजी

1489
01:48:23,200 --> 01:48:27,200
सत्संग करते हैं जब जब गुरुजी प आपको जब आपने गुरुजी

1490
01:48:27,200 --> 01:48:31,280
को दे एक मिनट गोविंद जी जब आपने गुरुजी को देखा था तो उन्होंने जो प्रमाण

1491
01:48:31,280 --> 01:48:35,760
दिखाए आपको जब उन पर विश्वास नहीं था उस समय की बात पूछ रहा हूं

1492
01:48:35,760 --> 01:48:39,960
उस समय आपने कैसे मान लिया य जो दिखा रहे यही प्रमाण है आपने बाहर से चेक

1493
01:48:39,960 --> 01:48:44,000
नहीं किया बाहर से चेक नहीं किया वो गुरुजी है

1494
01:48:44,000 --> 01:48:48,760
ना ने से खोलने से पहले उसम गीता प्रेस गोरखपुर से सब

1495
01:48:48,760 --> 01:48:53,520
भाई तोप सकता नकली किताब

1496
01:48:53,520 --> 01:48:57,560
नकली किताब सता है मैं तुमसे पूछ रहा हूं नकली किताब कोई छाप सकता है

1497
01:48:57,560 --> 01:49:01,800
कि नहीं रामपाल जी कोई कोण में बैठ के गीत थोड़ी रे

1498
01:49:01,800 --> 01:49:07,800
इंटरने पूछ रहा भाई साब मे सवाल का जवाब ही नहीं दे रहे हो

1499
01:49:08,240 --> 01:49:12,360
नकली हा तो फिर आपको कैसे पता कि उन्होने जो किताब दिखाई

1500
01:49:12,360 --> 01:49:16,640
है व नकली नहीं है जब तक आप बाहर असली किताब से उसक

1501
01:49:16,640 --> 01:49:21,040
कर हमारे घर में हमारे पिताजी खुद पहले पंडित जी

1502
01:49:21,040 --> 01:49:25,200
थे ब गीता खोल के दिखाई थी तो उस दिन आपने अपने

1503
01:49:25,200 --> 01:49:29,360
घर की गीता से उसको चेक किया था जो बोल रहा है सही है कि नहीं बिल्कुल किया था

1504
01:49:29,360 --> 01:49:33,440
ये ज्ञान गंगा और मैं दोनों गीताने गता प है आपके पास

1505
01:49:33,440 --> 01:49:37,480
गीता है गीता है बिल्कुल क्यों नहीं है आज भी रख तो

1506
01:49:37,480 --> 01:49:41,800
क रहे नहीं है फिल य नहीं है मैं य पर नहीं मेरा घर

1507
01:49:41,800 --> 01:49:45,920
राजस्थान में हूं फिलहाल भी कानपुर में बैठा हूं बाकी सारे ग्रंथ भी है

1508
01:49:45,920 --> 01:49:50,320
आपके पास सारे कमरे दि

1509
01:49:50,320 --> 01:49:54,960
पूरे ब से भरे त पूरा फोटो भेजेंगे

1510
01:49:54,960 --> 01:49:58,960
कल फोटो कैसे भे मगा नंबर कर रहा आप

1511
01:49:58,960 --> 01:50:03,760
फोटो भेज दीजिए आपके पास सारे ग्रंथ जिनका उपयोग रामपाल करते हैं

1512
01:50:03,760 --> 01:50:07,960
चलो भेज दूंगा उसकी कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन आप थोड़ा उस

1513
01:50:07,960 --> 01:50:08,680
आप ये मानते

1514
01:50:08,680 --> 01:50:14,480
हो कबीर भगवान नहीं है कहने का मतलब अभी अभी आपको बता रहे है

1515
01:50:14,480 --> 01:50:18,680
158 कबीर को भगवान नहीं मानते हो ना कहने मतलब

1516
01:50:18,680 --> 01:50:24,040
नहीं मानते ना कबीर को भगवान ना तत्वदर्शी रामपाल

1517
01:50:24,040 --> 01:50:28,120
अ तो फिर रामपाल जी की चर्चा क्यों हो रही और संत की तो नहीं हो रही

1518
01:50:28,120 --> 01:50:32,400
फिर ऐसा आपको लग रहा है जब जिसकी

1519
01:50:32,400 --> 01:50:36,520
बात होती है सुनो जब जिसकी बात सुनो सुनो

1520
01:50:36,520 --> 01:50:40,720
जब टिकट के बिना पकड़ा जाता है ट्रेन में कोई व्यक्ति

1521
01:50:40,720 --> 01:50:45,120
तो वो ये नहीं कह सकता कि तुमने औरों को क्यों नहीं पकड़ा है

1522
01:50:45,120 --> 01:50:49,360
अच्छा जी समझ रहे हो बिना टिकट अगर कोई पकड़ा गया तो उसको इसलिए नहीं छोड़ दिया

1523
01:50:49,360 --> 01:50:53,640
कि सब सब खुले छूट रहे हैं अगर सब खुले घूम रहे हैं तो आपके

1524
01:50:53,640 --> 01:50:59,640
पास टिकट नहीं हैय चीज सही नहीं हो

1525
01:51:05,000 --> 01:51:09,040
गई दो चार लोक पढने थे मेरे को अगर इत

1526
01:51:09,040 --> 01:51:13,240
एक मिनट मिनट इनको कुछ दिखाने वाला हूं 79

1527
01:51:13,240 --> 01:51:17,360
में बड़ा मजा आएगा सबको बता

1528
01:51:17,360 --> 01:51:21,440
अविनाशी भगवान कौन है मिनट एक मिनट अभी बता

1529
01:51:21,440 --> 01:51:27,440
रहा करके अपना अपना मत भागो 39

1530
01:51:31,760 --> 01:51:36,800
40 गंत लेकर बैठे हो प्रमाण नहीं

1531
01:51:36,800 --> 01:51:42,520
मानते अरे रुक जाओ ना कुछ हो जाएगा क्या 10 मिनट में कहीं जाना

1532
01:51:42,520 --> 01:51:46,640
इमरजेंसी वासुदेव जी भूत संकर्षण और

1533
01:51:46,640 --> 01:51:50,960
चौथा अनिरुद्ध कहते हैं आ परमात्मा को सबकी आज्ञा

1534
01:51:50,960 --> 01:51:56,960
से दिखाते हैं

1535
01:52:03,160 --> 01:52:08,680
य देखो भया ये देखो

1536
01:52:08,680 --> 01:52:12,720
ये के बारे में बताया रहा है नहीं

1537
01:52:12,720 --> 01:52:16,960
रहा सुना हा पढ़ रहा यह

1538
01:52:16,960 --> 01:52:21,240
विश्व के निवास स्थान और निर्गुण है इन् को वासुदेव जी

1539
01:52:21,240 --> 01:52:25,640
भूत संकर्षण प्रदुमन और चौथा अनिरुद्ध कहते हैं

1540
01:52:25,640 --> 01:52:29,720
यह आत्म योनि परमात्मा सबको अपनी आज्ञा के अधीन रखते हैं

1541
01:52:29,720 --> 01:52:34,320
यह कृष्ण के लिए यहां पर बोला जा रहा है महाभारत

1542
01:52:34,320 --> 01:52:38,840
हा अनुशासन पर्व और उसमें भी दान धर्म पर्व

1543
01:52:38,840 --> 01:52:42,840
और उसमें भी ये अध्याय नंबर

1544
01:52:42,840 --> 01:52:47,200
है 158 और श्लोक नंबर है

1545
01:52:47,200 --> 01:52:51,320
39 अब वासुदेव इनको कहा जा रहा है और

1546
01:52:51,320 --> 01:52:55,400
भगवत गीता में सा 19 वासुदेव का मतलब होता है अविनाशी

1547
01:52:55,400 --> 01:52:59,800
भगवान अभ अविनाशी है क्याय बताओ तो वही तो मैं कह रहा हूं

1548
01:52:59,800 --> 01:53:05,000
वही मैं कह रहा हूं सा में क्या कह रहे देख

1549
01:53:05,000 --> 01:53:09,320
अविनाशी य य कृष्ण के लिए वासुदेव और

1550
01:53:09,320 --> 01:53:15,320
सा 19

1551
01:53:15,680 --> 01:53:19,760
में हा हा अविनाशी है दे रहे हैं ना दो मिनट रुके होगे कि

1552
01:53:19,760 --> 01:53:25,760
नहीं कृष्ण भगवान अविनाशी है नहीं वो तो माता ग से जन्म

1553
01:53:25,760 --> 01:53:29,920
लिया मरे वाला भी दिखा देंगे अभी दिखा देंगे मरे वाला जल्दी

1554
01:53:29,920 --> 01:53:34,000
में ककर जी कहीं जाना है क्या आपने जाना नहीं है मैं मोटे

1555
01:53:34,000 --> 01:53:39,240
मोटे सवाल करना चाह ब जल्दबाजी में

1556
01:53:39,240 --> 01:53:43,280
होता भाई साहब लोग को भाई साहब लोग को ऐसा रटा

1557
01:53:43,280 --> 01:53:47,600
दिया गया है कि तुरंत किताब दिखाओ और यह वाला लाइन पढ़ो

1558
01:53:47,600 --> 01:53:51,720
और इसके बाद दूसरा प्रमाण और फिर भाग जाओ अच्छा हा

1559
01:53:51,720 --> 01:53:55,720
फिर भाग जाओ इनको जो है कभी शिक्षा

1560
01:53:55,720 --> 01:54:00,040
नहीं दी जाती कि बच्चों आप लोग पूरी गीता पढ़ो पूरा महाभारत पढ़ो

1561
01:54:00,040 --> 01:54:04,200
पूरा वेद पढ़ो पूरा पुराण पढ़ो कभी नहीं बताते हैं नहीं तो ये सब बोल

1562
01:54:04,200 --> 01:54:08,680
र भगवान अविनाशी है केवल एक लाइन

1563
01:54:08,680 --> 01:54:12,760
बता हा वो बताएंगे ना अभी आप चिंता क्यों कर रहे इतनी टेंशन मत

1564
01:54:12,760 --> 01:54:18,240
लिया आपको अच्छे खासे ये देखो भैया

1565
01:54:18,240 --> 01:54:22,800
य ये किसके लिए आया है

1566
01:54:22,800 --> 01:54:25,280
सुनाओ हां पढ़ के सुन लो

1567
01:54:25,280 --> 01:54:29,960
बहुत जन्मों के अंत के ज जन्म में तत्व ज्ञान को प्राप्त पुरुष

1568
01:54:29,960 --> 01:54:34,360
सब कुछ वासुदेव ही है इस प्रकार उनको बजता है

1569
01:54:34,360 --> 01:54:36,440
सब कुछ वासुदेव भगवान

1570
01:54:36,440 --> 01:54:40,440
अविनाशी कहां है ये लिखा प्रमाण बताऊ मैं यहां बता रहा हूं ना श्री

1571
01:54:40,440 --> 01:54:44,760
कृष्ण भगवान वासुदेव है वासुदेव वासुदेव

1572
01:54:44,760 --> 01:54:48,920
कहां है वासुदेव मीस होता है अविनाशी भगवान अरे तो मैं बता तो रहा हूं ये कृष्ण

1573
01:54:48,920 --> 01:54:53,360
के लिए वासुदेव शब्द आ रहा है ये महाभारत में

1574
01:54:53,360 --> 01:54:57,880
कृष्ण जी वासुदेव नहीं है लेकिन वो वासुदेवन की महिमा गाई जा रही

1575
01:54:57,880 --> 01:55:02,280
वासुदेव नहीं है तुम दिखा दो हमने तु प्रमाण दिखाया प्रमाण को माने तुमको

1576
01:55:02,280 --> 01:55:05,320
माने

1577
01:55:05,320 --> 01:55:09,600
प्रमा प्रमाण कोने वासुदेव आ गया यहा

1578
01:55:09,600 --> 01:55:15,600
तुमको माने प्रमाण को

1579
01:55:15,880 --> 01:55:20,200
मानेव हैको माने तुमको माने अ

1580
01:55:20,200 --> 01:55:24,800
तो मुझे नहीं मानना बो प्रमाण को आपकी कोई बा

1581
01:55:24,800 --> 01:55:29,520
ये महा भारत को नहीं मानते हो लिखा हुआ है ये बोल रहे है कि ये वासुदेव है

1582
01:55:29,520 --> 01:55:33,640
वासुदेव असली कौन है ये पूछ रहा हूं ना मैं जैसे राम चार बता असली वासुदेव

1583
01:55:33,640 --> 01:55:37,920
पहले तुम ये बताओ ये नकली वासुदेव है यहां लिखा है ये कहां लिखा है ये नकली

1584
01:55:37,920 --> 01:55:41,960
वासुदेव है हर बात सुनो जब भी कई शिव आएगा वो आदि शिव

1585
01:55:41,960 --> 01:55:46,120
है जब भी कोई काल वो जब भी क्या कहते हैं वो कृष्ण

1586
01:55:46,120 --> 01:55:50,160
आएगा तो काल है जब भी कहीं वासुदेव आएगा तो असली वासुदेव अरे भाई

1587
01:55:50,160 --> 01:55:53,840
कहां लिखा है कि ये नकली है

1588
01:55:53,840 --> 01:55:59,760
कहा खा वासुदेव अलग [संगीत]

1589
01:55:59,760 --> 01:56:03,920
है देख ऐसा हैना गोविंद जीसे बहुत

1590
01:56:03,920 --> 01:56:08,040
ज्यादा प्रमाण की आवश्यकता नहीं है इनको केवल उस बात पस

1591
01:56:08,040 --> 01:56:12,880
बात भागते दूसरी बात अभी

1592
01:56:12,880 --> 01:56:18,880
बता असली वासद

1593
01:56:23,800 --> 01:56:27,960
क्या लिखा य पर जो लिखा है नकली वासुदेव

1594
01:56:27,960 --> 01:56:32,560
लिखा है य लिखा दिखाओ करहा

1595
01:56:32,560 --> 01:56:36,640
भगवान भवान श्री कृष्ण वासुदेव है व लेकिन

1596
01:56:36,640 --> 01:56:42,640
तीन लोग तक भगवान है

1597
01:56:44,080 --> 01:56:48,120
जैसे वासद ख दिया गया तो य लिखा दिखाओ यह वासुदेव

1598
01:56:48,120 --> 01:56:52,840
असली वासुदेव नहीं है मैं एक प्रमाण समझा थोड़ा

1599
01:56:52,840 --> 01:56:56,920
सुनना चाहोगे तो आप मुझे य प्रदेव नहीं

1600
01:56:56,920 --> 01:57:00,960
है बार बार हो क्या रहा है आप मेरी बात को समझो आप थोड़े समझदार दिख रहे

1601
01:57:00,960 --> 01:57:04,960
हो बारबार हो क्या रहा है जब हम आपको कोई प्रमाण दे रहे हैं तो आप

1602
01:57:04,960 --> 01:57:09,800
कोई ऐसी बात बोलते हो कि वो वाली बात बंद हो करके नई बात खुल जाती है

1603
01:57:09,800 --> 01:57:13,920
समझ रहे हो आप मुझे बताओ भगवत गीता में

1604
01:57:13,920 --> 01:57:18,440
कहा पर लिखा है कि वो जो ज्ञान है वो कृष्ण ने नहीं

1605
01:57:18,440 --> 01:57:22,680
दिया बस यह बताओ

1606
01:57:22,680 --> 01:57:26,680
अच्छा मैं अब दो मिनट अपनी बात रखना चाहूंगा शंकर जी यह तीन चार श्लोक आपके सामने

1607
01:57:26,680 --> 01:57:30,960
खो पड़ी कर दीजिए तीन चार श्लोक पढ़ देंगे मेरे लिए मेरे को थोड़ा

1608
01:57:30,960 --> 01:57:35,080
पढ़ा नहीं जा रहा मेरे ये पढ़िए जरा ये

1609
01:57:35,080 --> 01:57:39,440
क्या है श्रीमद भगवत गीता है अवा अध्याय 73 शलोक

1610
01:57:39,440 --> 01:57:43,800
पढ़ देंगे थोड़ा सा 74 में से पढ़ दीजिए इस प्रकार मैंने

1611
01:57:43,800 --> 01:57:48,160
वा लिखा है वासुदेव श्री वासुदेव

1612
01:57:48,160 --> 01:57:52,160
के और महात्मा अर्जुन के इस अदभुत

1613
01:57:52,160 --> 01:57:58,040
रहस्य युक्त रोमांसक सधन को

1614
01:57:58,040 --> 01:58:02,320
सुना श्री व्यास जी को कृपा से दिव्य दृष्टि

1615
01:58:02,320 --> 01:58:06,680
पर पाकर मैंने इस परम गोपनी योग को अर्जुन के प्रति

1616
01:58:06,680 --> 01:58:11,720
कहते हुए

1617
01:58:11,720 --> 01:58:17,440
स्वयं योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण से प्रत्यक्ष सुना

1618
01:58:17,440 --> 01:58:21,440
है हे राजन भगवत भगवान श्री कृष्ण और

1619
01:58:21,440 --> 01:58:26,080
अर्जुन के के इस रहस्य युक्त कल्याण काक और अद्भुत

1620
01:58:26,080 --> 01:58:30,560
संवाद को पुनः पुन स्मरण करके

1621
01:58:30,560 --> 01:58:33,920
मैं बारबार हर्षित हो रहा

1622
01:58:33,920 --> 01:58:38,320
हूं राजन श्री हरि के उस अत्यंत विलक्षण

1623
01:58:38,320 --> 01:58:42,360
रूप को भी पुन पुन करके मेरे चित में आवाज बंद करो

1624
01:58:42,360 --> 01:58:46,520
यार रे कर आवा

1625
01:58:46,520 --> 01:58:51,440
महान आश्चर्य होता है और मैं बारबार अरित हो रहा हूं

1626
01:58:51,440 --> 01:58:55,560
लास्ट पर दीजिए जहां योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण

1627
01:58:55,560 --> 01:59:00,200
है और जहां का धनुष दारी

1628
01:59:00,200 --> 01:59:04,600
अर्जुन है वहीं पर शी विजय विभूति और अचल नीति

1629
01:59:04,600 --> 01:59:09,040
है ऐसा मेरा मत

1630
01:59:09,040 --> 01:59:13,520
है बताइए तो आप कह रहे थे कि भाई

1631
01:59:13,520 --> 01:59:17,560
गीता का ज्ञान ही नहीं दिया

1632
01:59:17,560 --> 01:59:21,800
नहीं श्री कृष्ण ने गीता जी नहीं बोली ये बात क्लेरिटी

1633
01:59:21,800 --> 01:59:24,800
है अगर

1634
01:59:24,800 --> 01:59:30,040
गता आपसे बा बात कर रहा

1635
01:59:30,040 --> 01:59:34,360
सु आपको एक बात बताता बड़ी मजेदार बात है आपको सुनोगे

1636
01:59:34,360 --> 01:59:40,360
आप आज पूरी रात आनंद से अपनी रात बताओगे य

1637
01:59:45,880 --> 01:59:51,880
पर मानागा

1638
01:59:52,880 --> 01:59:57,080
हा माना जाएगा शास्त्र की बात हो श कृ पढ़

1639
01:59:57,080 --> 02:00:03,080
अब तो पढ़ने में आ रहा होगा पढ़िए भगवान श्री कृष्ण

1640
02:00:03,120 --> 02:00:07,280
से छोटा छोटा दिख रहा है पास में करो

1641
02:00:07,280 --> 02:00:11,880
भगवान श्री कृष्ण ये जो है

1642
02:00:11,880 --> 02:00:16,520
हा बल्कि मैं इससे भी अधिक प्रभावशाली है

1643
02:00:16,520 --> 02:00:20,560
यही परम पुरुष अविनाशी नारायण है यही सतावर

1644
02:00:20,560 --> 02:00:24,760
ज हो गया क्या हो गया अरे अविना

1645
02:00:24,760 --> 02:00:27,600
परम पुरुष नारायण

1646
02:00:27,600 --> 02:00:33,600
है य क हो

1647
02:00:34,800 --> 02:00:39,960
गया नारायण है अब क्या करोगे इसको मानोगे कि

1648
02:00:39,960 --> 02:00:44,720
नहीं इनको

1649
02:00:44,720 --> 02:00:49,000
बताइए परम पुरुष अविनाशी नारायण

1650
02:00:49,000 --> 02:00:55,000
लो दोबारा देख लो

1651
02:00:55,120 --> 02:01:00,680
पढो

1652
02:01:00,680 --> 02:01:04,360
पलो रहा है

1653
02:01:04,360 --> 02:01:10,360
आदरा लेने दिख नहीं रहा थ इधर

1654
02:01:12,360 --> 02:01:16,640
करो स्क्रीन पर नहीं चला सकते हो क्या अभी फिलहाल

1655
02:01:16,640 --> 02:01:22,640
नहीं ये पढ़ो भगवान श्री कृष्ण की ऐसी महिमा है

1656
02:01:22,720 --> 02:01:27,080
नहीं तोय कौन बोल कौन रहा है मसे श्री कृष्ण भगवान महिमा है

1657
02:01:27,080 --> 02:01:31,240
जो इससे प्रभावशाली है यही

1658
02:01:31,240 --> 02:01:35,640
परम अविनाशी नारायण है यही

1659
02:01:35,640 --> 02:01:39,800
सता अना आ का हैना भाई और क्या करोगे पर

1660
02:01:39,800 --> 02:01:44,720
महाभारत पहने का मतलब मतलब य अविनाशी है

1661
02:01:44,720 --> 02:01:49,520
आपका अविनाशी है

1662
02:01:49,520 --> 02:01:54,560
नो शस्त्र को शास्त्र को मानता हूं मैं

1663
02:01:54,560 --> 02:02:00,360
हा मान ग श्री कृष्ण अविनाशी पर परम पुरुष नारायण

1664
02:02:00,360 --> 02:02:06,360
और दोबारा पलो लास्ट लाइन

1665
02:02:06,560 --> 02:02:10,680
पराय लास्ट वाला क्या लिखा है

1666
02:02:10,680 --> 02:02:15,040
इच्छा वाले प्राणियों के उत्पति कारण ला लास्ट लाइन

1667
02:02:15,040 --> 02:02:19,960
को इन्ही को अधिकारी परमात्मा कहते हैं

1668
02:02:19,960 --> 02:02:23,920
अकारी जिसम कोई विकार नहीं

1669
02:02:23,920 --> 02:02:28,000
अविकारी फिर व गोपियो के पीछे नहीं गोपियों

1670
02:02:28,000 --> 02:02:32,200
के पीछे क्यों पढते थे श्री कृष्ण जी गोपियों के पीछे फिर फालतू

1671
02:02:32,200 --> 02:02:36,240
बात अरे इसको मानते हो कि नहीं मानते हो अच्छा सुनो सुनो सुनो ये कहा

1672
02:02:36,240 --> 02:02:40,400
लिखा है गोपियों के पीछे अगर कोई पड़ेगा तो परमात्मा नहीं होगा

1673
02:02:40,400 --> 02:02:43,280
बताओ

1674
02:02:43,280 --> 02:02:47,680
जैसे प्रमाण से कोई मतलब नहीं है मेरे भाई तु बंदे

1675
02:02:47,680 --> 02:02:51,920
हो अरे तुमसे मैंने पूछा कहा लिखा है

1676
02:02:51,920 --> 02:02:56,720
कोई गोपियों के पीछे पड़ेगा तो वह परमात्मा नहीं होगा कहां लिखा

1677
02:02:56,720 --> 02:03:00,920
है फालतू की बात अब मैं

1678
02:03:00,920 --> 02:03:05,280
पूछू ये बताओ अगर अगर वो जो है जो परमात्मा है

1679
02:03:05,280 --> 02:03:09,280
कबीर जो है उनको दूध पीने की जरूरत क्यों पड़ी कौन

1680
02:03:09,280 --> 02:03:13,360
दूध पिया जो तुम कह रहे हो कबीर कबीर को कुमारी गाय के दूध की

1681
02:03:13,360 --> 02:03:17,800
जरूरत क्यों पड़ी एक मिनट थ

1682
02:03:17,800 --> 02:03:21,880
प देना और वो तो 25 दिन से भूखा था

1683
02:03:21,880 --> 02:03:26,040
कबीर उसको दूध भी आकर भगवान श्री शिव ने पिलाया है आपको

1684
02:03:26,040 --> 02:03:30,080
नहीं पता बच्चा 25 दिन से रो रहा था वहां पर

1685
02:03:30,080 --> 02:03:33,920
रुको नेट खम

1686
02:03:33,920 --> 02:03:37,960
हो नहीं य य क्या दिखा

1687
02:03:37,960 --> 02:03:41,800
दिया आप सीधी

1688
02:03:41,800 --> 02:03:46,880
बात आप सीधी बात पर आते हैं हेलो कहा

1689
02:03:46,880 --> 02:03:49,160
गए

1690
02:03:49,160 --> 02:03:53,400
इनको जितनी बारन कोई प्रमाण दूसरी बात पूछेंगे

1691
02:03:53,400 --> 02:03:57,440
कि वो गोपियों के पीछे क्यों भागे यह क्या दिखाया जा रहा है

1692
02:03:57,440 --> 02:04:01,520
रोहतक में अस्पताल में गए तत्वदर्शी संत

1693
02:04:01,520 --> 02:04:05,800
अरेरेरे ये तत्वदर्शी जी है क्या ये तत्वदर्शी

1694
02:04:05,800 --> 02:04:09,840
वही है जो वो जो

1695
02:04:09,840 --> 02:04:14,000
दूर से ही देख के कैंसर ठीक कर देते थे वही है ये ये अस्पताल

1696
02:04:14,000 --> 02:04:20,000
जा रहे ये क्या चक्कर है लीला कर रहे लीला

1697
02:04:20,160 --> 02:04:26,160
हा वहीं प बासुरी बजाएंगे वहीं

1698
02:04:38,480 --> 02:04:43,680
पे शिवान जी यह जो एक उदाहरण दे रहे थे महाभारत का

1699
02:04:43,680 --> 02:04:47,720
कि भगवान कृष्ण जो है अर्जुन को वहां पे

1700
02:04:47,720 --> 02:04:51,760
गीता का संवाद नहीं किए हैं उसका एक मेरे

1701
02:04:51,760 --> 02:04:56,040
विचार में एक परिपेक्ष ऐसा है कि जैसे कोई एक जो सर्जन

1702
02:04:56,040 --> 02:05:00,200
है यदि कहीं पर कोई मिल जाता है बोले कि भई हमारा सर्जरी

1703
02:05:00,200 --> 02:05:04,600
कर दो तो वो वहां पर सर्जरी थोड़ी ना करेगा उसके लिए परिपेक्ष

1704
02:05:04,600 --> 02:05:08,760
एक व्यवस्था चाहिए तब वो जाके वहां प सर्जरी करेगा तो गीता

1705
02:05:08,760 --> 02:05:12,960
जी ऐसे थोड़ी ना जहां चलते फिरो जहां पर रास्ते में मिलो वहीं पर गीता जी बोलना चालू

1706
02:05:12,960 --> 02:05:17,080
कर दे बकुल मैं इस इसके ऊपर कुछ बोलना चाहूंगा

1707
02:05:17,080 --> 02:05:21,120
आप बोलिए पहले शिवांश जी आप बोल लीजिए अरे ये अगर वापस

1708
02:05:21,120 --> 02:05:25,200
आ गए अच्छा नहीं आए जी बोलिए आप गोविंद जी आप बोलिए

1709
02:05:25,200 --> 02:05:29,240
देखिए क्या होता है चक्र पानी मिश्रा जी जब संवाद पूरा नहीं पढ़ा जाता ना

1710
02:05:29,240 --> 02:05:33,400
बीच के कोई एक दो अक्षर भी रह जाए तो फिर दिक्कत हो जाए उन्होंने कहा है उस

1711
02:05:33,400 --> 02:05:35,560
समय मैं योग अवस्था

1712
02:05:35,560 --> 02:05:39,560
में था ठीक है और मैंने तुम्ह य ज्ञान तो योग अवस्था

1713
02:05:39,560 --> 02:05:43,680
में जब चाहे वो वापस जा सकते हैं जबकि उनको संपूर्णता उनको

1714
02:05:43,680 --> 02:05:47,720
योगेश्वर कहा गया तो योग का जो ईश्वर है ठीक है वो उनकी स्थिति

1715
02:05:47,720 --> 02:05:51,760
है वो कह रहे हैं कि उस वक्त मैं योग अवस्था में था तो जब भी देना होगा दोबारा तो

1716
02:05:51,760 --> 02:05:56,280
चले जाएंगे योग अवस्था में उन्होंने ये तो नहीं कहा मैं दोबारा कभी योग अवस्था में नहीं जा सकता

1717
02:05:56,280 --> 02:06:00,520
हम आप समझ रहे हैं हम उनके परिपेक्ष में हमें एक उदाहरण दे रहे हैं नहीं

1718
02:06:00,520 --> 02:06:04,520
बिल्कुल बिल्कुल आपने जो बात मैं रिपीट कर रहा हूं लेकिन मैं बस एक शब्द

1719
02:06:04,520 --> 02:06:08,720
बीच में ले आपने मैंने कोई अल नहीं जी जी बिल्कुल बिल्कुल सही

1720
02:06:08,720 --> 02:06:12,800
बात है तो रही बात काल की भाई

1721
02:06:12,800 --> 02:06:17,120
पहले पढ़ लीजिए पदम पुराण के अंतर्गत उत्तरखंड में काल भगवान

1722
02:06:17,120 --> 02:06:21,240
श्री कृष्ण का ही नाम है ठीक है तो पहले अगर आपको किसी चीज का नहीं पता तो

1723
02:06:21,240 --> 02:06:25,560
पहले पढ़ लिया करिए ये है ना काल युग वर्ष मास पक्ष

1724
02:06:25,560 --> 02:06:29,560
आदि रूप से सबका सबको अपना ग्रास बनाने वाले

1725
02:06:29,560 --> 02:06:33,560
यही है ना यही कह रहे हैं भगवत गीता 1132 में जी जी

1726
02:06:33,560 --> 02:06:37,680
ठीक है काल ठीक है विसर्ग लगा हुआ साथ में युग वर्ष

1727
02:06:37,680 --> 02:06:42,120
मास पक्ष आदि रूप से संपूर्ण विश्व को ग्रास बनाने वाले काल पदवा

1728
02:06:42,120 --> 02:06:46,360
यमराज भी है ठीक है आप कौन सा कह रहे हो भाई

1729
02:06:46,360 --> 02:06:50,400
कौन सी नई साइंस आई है कि भाई काल अलग है और श्री कृष्ण अलग है ये थोड़ा मेरे को अब

1730
02:06:50,400 --> 02:06:50,900
आप

1731
02:06:50,600 --> 02:06:54,680
बताइए जरा चलिए अपने प्रमाण देना शुरू करिए शंकर जी लिए

1732
02:06:54,680 --> 02:06:58,640
अपना ग्रंथ

1733
02:06:58,640 --> 02:07:02,880
जरान आज तक नहीं बताया गया

1734
02:07:02,880 --> 02:07:06,920
है आप बताइए पदम पुराण

1735
02:07:06,920 --> 02:07:11,040
के अंतर्गत पदम पुराण गीता प्रस गोरखपुर का प्रकाशित

1736
02:07:11,040 --> 02:07:15,280
है संक्षिप्त उसके अंदर उत्तर कांड है और उत्तर कांड के अंतर्गत

1737
02:07:15,280 --> 02:07:19,440
ही आता है यह विष्णु सहस्त्र नाम का अध्याय

1738
02:07:19,440 --> 02:07:23,040
विष्णु सहस्त्रनाम

1739
02:07:23,040 --> 02:07:28,520
पीछे देखिए इसम अध्याय क्रमांक लिखा होगा जहा ये खत्म हो रहा

1740
02:07:28,520 --> 02:07:32,600
है जी जी मैं आपको अध्याय का नंबर अध्याय

1741
02:07:32,600 --> 02:07:36,680
का नंबर सीधे बता देता हूं वैसे

1742
02:07:36,680 --> 02:07:40,880
तो है नाम कीर्तन की महिमा ठीक है था विष्णु का स्रोत

1743
02:07:40,880 --> 02:07:46,880
का वर्णन लेकिन मैं आपको अध्याय नंबर बता रहा हूं आप बोल

1744
02:07:47,600 --> 02:07:51,760
लीजिए अरे भाई आप जहां से आए हैं ना हम बहुत

1745
02:07:51,760 --> 02:07:56,240
पहले से उसका सारा कर चुके हैं इंतजाम

1746
02:07:56,240 --> 02:08:00,560
बोलिए शिम भाई क्या बोल रहे हो अट करिए बोलिए

1747
02:08:00,560 --> 02:08:04,640
हां कुछ बोल ना शय जो पूछ रहे हैं श्री कृष्ण काल

1748
02:08:04,640 --> 02:08:08,960
है कि नहीं है इसका प्रमाण अनुशासन पर्व पर

1749
02:08:08,960 --> 02:08:13,000
चैप्टर 148 में दिया गया है 148

1750
02:08:13,000 --> 02:08:17,120
में ना मैं वही कुछ गलती हो गई थी वही उसी को ही ढूंढ रहा था

1751
02:08:17,120 --> 02:08:21,240
तो उसम दिया गया मैं एक बार पढ़ क्या बोल सकता हूं एक मैं मैं खोल रहा

1752
02:08:21,240 --> 02:08:25,240
हूं आपके पास है जी हां है आपना

1753
02:08:25,240 --> 02:08:29,280
शिवांश जी आप 712 नंबर पेज खोलिए मेरे को इसका अध्याय जल्दबाजी

1754
02:08:29,280 --> 02:08:33,280
में मिल नहीं रहा है अच्छा ठीक है मैं नोट कर लेता हूं 712 नंबर

1755
02:08:33,280 --> 02:08:37,960
प है ना ये हा 712 नंबर पेज ठीक है ठीक है

1756
02:08:37,960 --> 02:08:38,460
भाई

1757
02:08:38,120 --> 02:08:42,280
पहले इनसे पूछते लीजिए ये शंकर जी से कि ये प्रमाण मानेंगे नहीं मानेंगे इतनी मेहनत

1758
02:08:42,280 --> 02:08:46,440
करवा रहे हैं हम लोग हम लोग अभी करेंगे अपना अपनी चीजें पूरी दिखा

1759
02:08:46,440 --> 02:08:50,440
दे क्योंकि फिर इनके लोग बोलते वो जब प्रमाण मांगता है तो ये लोग प्रमाण

1760
02:08:50,440 --> 02:08:54,600
नहीं दिखाते हा भैया पढ़ दो 148 का उसम

1761
02:08:54,600 --> 02:08:58,840
भीष्म पिता कहते प्रमाण क्या दिखा रहे हो मुझे क्या पता चल रहा है

1762
02:08:58,840 --> 02:09:03,160
क्या दिखा हो गया अब प्रमाण की बात खत्म करें फिर

1763
02:09:03,160 --> 02:09:07,800
अब आए आर्य पार की लड़ाई पर बोलो खत्म करें फिर

1764
02:09:07,800 --> 02:09:11,840
आ लड़ाई नहीं करनी लड़ाई करनी है लड़ाई मतलब

1765
02:09:11,840 --> 02:09:16,440
तुमने कहा प्रमाण नहीं दिखा रहे हो बात कर

1766
02:09:16,440 --> 02:09:20,360
अब बात की बात

1767
02:09:20,360 --> 02:09:24,760
करमा महाभारत दिखा

1768
02:09:24,760 --> 02:09:27,320
रहे

1769
02:09:27,320 --> 02:09:31,480
बो काल का कृष्ण भगवान अविनाशी है क्या मतलब किस चीज

1770
02:09:31,480 --> 02:09:35,560
का बता रही नहीं है हमने

1771
02:09:35,560 --> 02:09:39,960
हमने दिखा दिया अना आप कह रहे श्री कृष्ण परमेश्वर नहीं दिया परमेश्वर

1772
02:09:39,960 --> 02:09:44,000
है आपके कहने से कुछ नहीं होता है अच्छा तो

1773
02:09:44,000 --> 02:09:46,520
हमने शास्त्र

1774
02:09:46,520 --> 02:09:52,520
में आपके कहने से होता है ठीक है भया

1775
02:09:52,520 --> 02:09:56,880
बहुत बढ़िया मेरे कहने से भी कुछ नहीं होगा तो फिर आपने शस्त्र जब

1776
02:09:56,880 --> 02:10:01,760
शा आपके कहने से कुछ नहीं होगा

1777
02:10:01,760 --> 02:10:05,880
रा नहीं आपको भी सबको पता होगा लाक ब्रह्मा विष्णु महेश

1778
02:10:05,880 --> 02:10:10,240
की जन्म मृत्यु होती है व तीन

1779
02:10:10,240 --> 02:10:14,320
गु पूछ रहा ब्रह्मा विष्णु महेश की लीला अगर वो होती है मैंने आपको

1780
02:10:14,320 --> 02:10:18,400
दिखा दिया ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है तो क्या करोगे अगर

1781
02:10:18,400 --> 02:10:22,640
मैंने नहीं दिखा उसकी जन्म मत दिखा दी तो तो आप क्या कर तो वो लीला

1782
02:10:22,640 --> 02:10:26,680
पूर्व करते हैं लीला जैसे ता क रहा है ुद

1783
02:10:26,680 --> 02:10:31,000
को नहीं तो ये लीला है क्या मतलब जन्म म

1784
02:10:31,000 --> 02:10:35,160
जैसे कुत्ता कहना लीला है ना कुत्ता क्या है सबसे

1785
02:10:35,160 --> 02:10:41,000
पहले अविनाशी भगवान का एक प्रमाण होता

1786
02:10:41,000 --> 02:10:45,360
ताछ ता क्या है हेलो हेलो कुत्ता क्या है

1787
02:10:45,360 --> 02:10:49,680
सच है या लीला है कुता एक डॉग है सुनो मेरी बात

1788
02:10:49,680 --> 02:10:53,880
कता लीला है सच है

1789
02:10:53,880 --> 02:10:57,920
एक अपने आप को दास के लिए बोला गयासे नहीं बो ऐसे ही दास

1790
02:10:57,920 --> 02:11:01,960
दिखाने के लिए देवी मां के समक्ष उन्होंने अपने आ भाव और रो भाव

1791
02:11:01,960 --> 02:11:06,120
को स्वीकार किया तामसी वृति का जीव अगर

1792
02:11:06,120 --> 02:11:10,160
अविनाशी होगा तो कभी मा के अगर श्री कृष्ण मैं

1793
02:11:10,160 --> 02:11:14,520
कह रहा हूं अगर तुम श्री कृष्ण को अविनाशी मानते हो तो इस अगर विनाशी

1794
02:11:14,520 --> 02:11:18,720
नहीं मानते हो तो तुम इसका क्या करोगे जो अभी अभी दिखाया मैंने तुम्ह इसको नहीं मानोगे

1795
02:11:18,720 --> 02:11:23,280
ना मानेंगे हर चीज मानेंगे ऐसी बात तो फिर तुम तो फिर तुम

1796
02:11:23,280 --> 02:11:25,360
तो फिर तुम एक जगह की बात को क्यों पकड़

1797
02:11:25,360 --> 02:11:29,400
रहे हो जब एक जगह लिखा है अविनाशी दूसरी जगह लिखा है आविर्भव तीरो भाव

1798
02:11:29,400 --> 02:11:33,520
तो ऐसा अर्थ निकालो जिसमें दोनों अर्थ का मान रह जाए एक जगह की बात रह

1799
02:11:33,520 --> 02:11:37,520
जाए ये नहीं दोनों जगहों का मान रह जाए ऐसी बात बोलो जैसे

1800
02:11:37,520 --> 02:11:41,520
मैं बोलूं कि रामपाल जी तो इंसान है मगर एक जगह वो कह रहे हैं को कुत्ता

1801
02:11:41,520 --> 02:11:45,560
है तो मैं ऐसा अर्थ निकालू कि दोनों की बात रह जाए तो मैं ये

1802
02:11:45,560 --> 02:11:49,680
मानूंगा कि जहां वो अपने आप को कुत्ता कह रहे हैं वो कुत्ता है नहीं वो

1803
02:11:49,680 --> 02:11:53,640
अपनी भक्ति दिखा रहे हैं

1804
02:11:53,640 --> 02:11:57,880
भक्ति मार्ग है तो भक्ति मार्ग में अपने आप को थोड़ा नीचे रखना ऐसे ही जहा

1805
02:11:57,880 --> 02:12:02,080
ऐसे ही जहां प वो दुर्गा माता के सामने खड़े हो करर के अपनी

1806
02:12:02,080 --> 02:12:06,360
भक्ति दिखा रहे हैं कि देखो हमारा भी आविर्भव तिरो भाव होता

1807
02:12:06,360 --> 02:12:10,480
है र ऐसे ही मतलब लिखा है मतलब प्रमाण में बताओ आप खुद

1808
02:12:10,480 --> 02:12:14,680
बोल रहे हो आ आपको पूछ रहा हूं

1809
02:12:14,680 --> 02:12:19,440
कबीर है मैं आपको पूछ रहा हं

1810
02:12:19,440 --> 02:12:23,480
अभी अभी मैं आपको पूछ रहा हूं भाई साहब देखो प्रमाणों की आप बात मानोगे नहीं अब मैं

1811
02:12:23,480 --> 02:12:27,640
आपसे पूछ रहा हूं जो कबीर है वो स शरीर आता है नीचे या कैसे आता

1812
02:12:27,640 --> 02:12:31,960
है बताओ बस ये इसी से मानते हैं और किसी से नहीं मानते

1813
02:12:31,960 --> 02:12:36,000
नहीं स शरीर ही आता है स शरीर आता उसका शरीर

1814
02:12:36,000 --> 02:12:40,480
अविनाशी है कि नहीं है अविनाशी है बिल्कुल है

1815
02:12:40,480 --> 02:12:44,960
यानी कि अगर उसमें हथौड़ा पड़ेगा तो चोट लगेगी कि नहीं लगेगी नहीं

1816
02:12:44,960 --> 02:12:49,080
लगेगी नहीं लगेगी उसको काटने की कोशिश की जाएगी तो कटेगा

1817
02:12:49,080 --> 02:12:53,080
कि नहीं कटेगा नहीं कटेगा यानी कि ना तो

1818
02:12:53,080 --> 02:12:57,600
वह कम हो सकता है ना ही ज्यादा हो सकता है जैसा है वैसा ही रहेगा अविनाशी

1819
02:12:57,600 --> 02:13:01,680
का मतलब यही होता है मैं पूछ रहा हूं जो बताओ यानी कि अगर

1820
02:13:01,680 --> 02:13:05,920
वो यानी कि वो जैसा है वैसा का ही रहेगा वो बिल्कुल भी उसम ना तो कट

1821
02:13:05,920 --> 02:13:10,160
लग सकता है ही वो जो है उसको खींच के लंबा किया जा सकता है नाही

1822
02:13:10,160 --> 02:13:14,400
ही कट करके कम किया जा सकता है बिल्कुल वो मतलब उनका

1823
02:13:14,400 --> 02:13:18,400
कुछ खोस तक नहीं आ सकती कहने का मतलब मतलब कहने का मतलब है ना

1824
02:13:18,400 --> 02:13:22,600
तो उसको काटा जा सकता है ना ही उसको खीच के लंबा किया जा सकता है हा

1825
02:13:22,600 --> 02:13:26,720
मतलब कुछ भी नहीं किया जा सकता उसका अब मैं पूछ रहा हूं वो सर्वशक्तिमान है कि

1826
02:13:26,720 --> 02:13:30,840
नहीं बिल्कुल है तो वो रूप बदल सकता है कि

1827
02:13:30,840 --> 02:13:34,840
नहीं बदल सकता है तो वो 6 फ पा इंच

1828
02:13:34,840 --> 02:13:39,480
के है तो क्या 15 किलोमीटर लंबे पहाड़ बन सकते हैं कि नहीं

1829
02:13:39,480 --> 02:13:43,840
बन सकते हैं तो तुम तो कह रहे थे वो लंबा नहीं होगा खिच के

1830
02:13:43,840 --> 02:13:48,000
य आप बोल रहे हो कि खिच के लंबा नहीं आप बोलो मैंने तो कुछ बोला ही नहीं अरे अभी तुमने

1831
02:13:48,000 --> 02:13:52,160
बोला नहीं नहीं लंबा नहीं हो सकता वो अच्छा बताओ वो

1832
02:13:52,160 --> 02:13:55,680
आपने कहा वो कम आपने कहा वो जैसा कहा है वैसा ही

1833
02:13:55,680 --> 02:13:59,720
रहेगा आपने कहा वो जैसा है वैसा ही रहेगा आपने कहा

1834
02:13:59,720 --> 02:14:03,800
वो जैसा है वैसा ही रहेगा वो छोटा हो सकता है

1835
02:14:03,800 --> 02:14:07,840
इस थरी का कोई मैं आपसे भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं आपने

1836
02:14:07,840 --> 02:14:11,880
कहा कबीर जैसा है वैसा का ही वैसा ही रहेगा क्या वो च बन स

1837
02:14:11,880 --> 02:14:16,120
मतलब है कि वो अविनाशी है मतलब उसको कोई मार नहीं सकता मेरा कहने का मतलब

1838
02:14:16,120 --> 02:14:20,760
केवल अना की बात नहीं होती है केवल अच्छा एक बात बताओ

1839
02:14:20,760 --> 02:14:25,120
स क्या कबीर अपने शरीर को गायब कर सकते हैं कि नहीं

1840
02:14:25,120 --> 02:14:29,360
बिल्कुल कर सकते हैं कर सकते हैं क्या कबीर लोगों को ये लीला

1841
02:14:29,360 --> 02:14:34,280
दिखा सकते हैं देखो मेरी तो मृत्य हो गई मेरा शरीर गायब हो गया

1842
02:14:34,280 --> 02:14:38,480
वो दिखा ही नहीं सकते उनका अविनाशी शरीर है गायब का मैं पूछ रहा हूं क्या वो ऐसी

1843
02:14:38,480 --> 02:14:42,520
लीला दिखा सकते लीला वास्तविकता में वो नहीं

1844
02:14:42,520 --> 02:14:46,760
मरेंगे मगर वो लोगों को य लीला दिखा सकते हैं कि नहीं लीला

1845
02:14:46,760 --> 02:14:50,760
दिखा सकते हैं ना वो समर्थ है कुछ भी कर सकते मल लोगों कोय कह सकते हैं मेरा भी आबि

1846
02:14:50,760 --> 02:14:54,840
भाव और रो भाव हो सकता है नहीं कभी नहीं बोल सकते क्योंकि वो

1847
02:14:54,840 --> 02:14:59,320
उनका है ही नहीं या सर्वशक्तिमान नहीं है सर्वशक्तिमान

1848
02:14:59,320 --> 02:15:03,440
है वो तो यानी कि व बोल सकते कि मेरा भी आविर्भव रो भाव होता

1849
02:15:03,440 --> 02:15:07,480
है नहीं बोल सकते यानी कि कबीर कुछ नहीं

1850
02:15:07,480 --> 02:15:11,240
कर सकता कबीर सब कुछ नहीं कर सकता

1851
02:15:11,240 --> 02:15:15,480
बिल्कुल कर सकता है तो यानी की व बोल सकते है मेरा भीरो

1852
02:15:15,480 --> 02:15:19,520
भाव होता है आप जो बात बोल रहे हो बस फट

1853
02:15:19,520 --> 02:15:23,600
करना चाह रहे हो से कहना चाहे और

1854
02:15:23,600 --> 02:15:27,840
जब वो अपने शरीर सुनो आव रोव का मतलब क्या है पहले तोय बताओ

1855
02:15:27,840 --> 02:15:32,040
अव होता जम और रोव मीस मृत्यु और बताओ

1856
02:15:32,040 --> 02:15:36,160
कहां लिखा

1857
02:15:36,160 --> 02:15:42,160
है री में लिखा है डिशनरी

1858
02:15:42,520 --> 02:15:46,680
में अपनी ली खोलिए ना जहां से आपने पढ़ा था रामपाल जी ने जहा आपको पढ़ाया

1859
02:15:46,680 --> 02:15:49,920
था वो खोलिए

1860
02:15:49,920 --> 02:15:54,200
न बता दो पेज नंबर मैं थोड़ी बताऊंगा इसमें आप ढूंढो

1861
02:15:54,200 --> 02:15:58,240
आविर्भाव कहां ब अरे मैं क ढूंढू तुम बोल रहे हो ना आविर्भाव का मतलब वो

1862
02:15:58,240 --> 02:16:02,280
है जन्म मृत्यु आविर्भव रो भाव आवि भाव

1863
02:16:02,280 --> 02:16:08,280
का मतलब है प्रकट और अप्रकृतिक

1864
02:16:21,120 --> 02:16:25,160
मतलब डिक्शनरी में बताओ अरे मैं क्यों बताऊ भाई

1865
02:16:25,160 --> 02:16:29,240
तुम बताओ ना सबूत तुम दो ना मैं क्यों टाइम वेस्ट करू

1866
02:16:29,240 --> 02:16:33,840
अरे भाई बात तुमने रखी है आविर्भाव का मतलब ये होता है

1867
02:16:33,840 --> 02:16:38,000
भैया आप चाहे जितनी बात बना लो लेकिन यही होता है अरे यही होता

1868
02:16:38,000 --> 02:16:42,400
है अरे भाई फिर भाही बात यही होता तो तुने पढ़ा होगा ना कहीं

1869
02:16:42,400 --> 02:16:46,840
पे कहां पे होता है कहां पे होता है शिवा जी दो मिनट ा

1870
02:16:46,840 --> 02:16:51,120
कहां प होता आप नहीं मानते हो गोविंद जी आप नहीं मानते हो आप

1871
02:16:51,120 --> 02:16:55,240
नहीं मानते आपने कहा प पढ़ा वो पूछ रहा हूं ना मैं आपने कहीं से पढ़ा होगा आप तो

1872
02:16:55,240 --> 02:16:59,520
बिना शास्त्र की बात करते नहीं है आपने कहां पर पढ़ा हम नहीं मानते

1873
02:16:59,520 --> 02:17:03,600
बताए ना हम नहीं मानते आप पढ़ है हमें भी पढ़ाइए हम सभी देख लेते हैं एक

1874
02:17:03,600 --> 02:17:08,480
बार कौन से ग्रंथ है का नाम बताइए

1875
02:17:08,480 --> 02:17:13,200
ग्रंथ का नाम बताइए शास्त्र के अनुसार च वैदिक आश्रम से पढ़े हैं

1876
02:17:13,200 --> 02:17:18,560
शब्द कोश में लिखा है स्प आप खोल के देख लीजिए

1877
02:17:18,560 --> 02:17:22,680
श का नाम बता दो चलो शब्दकोश का नाम बता दो

1878
02:17:22,680 --> 02:17:26,840
शब्दकोश में पढ़ा है ना तुमने नाम बता दो तुमने कुछ नहीं पढ़

1879
02:17:26,840 --> 02:17:31,600
है तुमने केवल जेल धाम की वाणी सुनी है कुछ नहीं पढ़ा तु

1880
02:17:31,600 --> 02:17:35,760
नहीं यही बोल सकते हो आप बस और कुछ नहीं बोल सते अरे और तुम क्या बोल

1881
02:17:35,760 --> 02:17:37,600
सकते

1882
02:17:37,600 --> 02:17:42,000
हो टीवी ऑन कीता है

1883
02:17:42,000 --> 02:17:46,280
होल डाउन होल डाउन अच्छा शंकर

1884
02:17:46,280 --> 02:17:50,320
देखो भगवान के बारे में बुराई करेंगे उतना ही अपने कर्म बिगड़ेंगे

1885
02:17:50,320 --> 02:17:54,400
पहली बात हमने कोई प्रमाण नहीं दिखाया तुम हमसे मांग रहे हो प्रमाण बस

1886
02:17:54,400 --> 02:17:58,400
हमने बहुत प्रमाण दिखा दिए शास्त्री आप हो ना फिर आपसे ही

1887
02:17:58,400 --> 02:18:02,600
मांगेंगे तो श तो हमने दिखा दिए तो उसके बाद मान कहां रहे

1888
02:18:02,600 --> 02:18:07,040
हो मान ो डिक्शनरी खोल ली

1889
02:18:07,040 --> 02:18:11,240
तो अरे भाई तुमने कहां से पढ़ा वो डिक्शनरी कौन सी है जेल

1890
02:18:11,240 --> 02:18:15,400
धाम मेरे पास यार ये क्यों बोलते हो तुम जेल

1891
02:18:15,400 --> 02:18:19,440
क्यों ना बोले जब तुम कोई ऐसी बात बोल सकते हो जो हमें बुरी

1892
02:18:19,440 --> 02:18:23,520
लगे तो हम क्यों ना बोले को ऐसी बात जो तुम्ह बुरी लगे नहीं

1893
02:18:23,520 --> 02:18:27,640
थो शांति से पूछ रहे हम शांति से पूछ रहे

1894
02:18:27,640 --> 02:18:31,720
हैं ना आप आप आर भाव का मतलब जन्म तिरो भाव का मतलब मृत्यु

1895
02:18:31,720 --> 02:18:35,840
कहां पर पढ़ा आपने आप यह नहीं मानते यह बता दो चलिए मेरी तरफ

1896
02:18:35,840 --> 02:18:39,920
से इसी चलती लाइव में आपको 000 का इनाम पेटीएम की तरफ से मैं

1897
02:18:39,920 --> 02:18:44,040
दूंगा आविर्भव का मतलब जन्म रो भाव का मतलब मृत्यु सिद्ध करिए

1898
02:18:44,040 --> 02:18:48,320
किसी भी ग्रंथ से हमें इनाम चाहिए नहीं पहले

1899
02:18:48,320 --> 02:18:53,360
अरे भाई आपको नहीं चाहिए किसी जरूरतमंद को डिक्शनरी

1900
02:18:53,360 --> 02:18:58,200
हा इसम बताओ अ लि अच्छा मानोगे नहीं मानोगे

1901
02:18:58,200 --> 02:19:03,000
हा मानो आर भाव का मतलब है

1902
02:19:03,000 --> 02:19:07,440
बताओ बताओ अभिव्यक्ति अभिव्यक्ति क्यार

1903
02:19:07,440 --> 02:19:11,720
लिखा पले य बताओ अरे य लिखा है यार यह देखो

1904
02:19:11,720 --> 02:19:16,720
दिख गया ड़ पास में

1905
02:19:16,720 --> 02:19:22,720
करो आ बता हा आगे ब इसका मतलब अभी

1906
02:19:22,840 --> 02:19:27,160
उपस्थिति प्रकट होना

1907
02:19:27,160 --> 02:19:31,520
अवतार हो क्या

1908
02:19:31,520 --> 02:19:36,920
ट होने का मतलब नहीं

1909
02:19:36,920 --> 02:19:42,920
पता टाइम पास कर इनको पीछे ीन

1910
02:19:43,080 --> 02:19:49,080
ला आपके गुरु

1911
02:19:49,640 --> 02:19:53,800
जीने तुम तो मुझे बताओ आर भाव का ज आविर्भव

1912
02:19:53,800 --> 02:19:57,960
का अर्थ उसमें जन्म लिखा है क्या किसम

1913
02:19:57,960 --> 02:20:01,320
ये डिक्शनरी

1914
02:20:01,320 --> 02:20:05,320
में जन्म तो नहीं लिखा है मतलब कोई जैसे पर्यायवाची व हो है

1915
02:20:05,320 --> 02:20:09,680
अलर मतलब मैं पूछ रहा हूं अभी तुम कह रहे थे जन्म होता है मैं जब बोल रहा था प्रकट

1916
02:20:09,680 --> 02:20:13,760
अप प्रकट तो तुम नहीं मान रहे थे अब डिक्शनरी में दिखा दिया प्रकट अब

1917
02:20:13,760 --> 02:20:17,760
तुम दिखाओ जन्म अभी दूसरी डिक्शनरी

1918
02:20:17,760 --> 02:20:22,320
से मैं दिखा दूं अच्छा तुम भी

1919
02:20:22,320 --> 02:20:26,320
नहीं मु दिखाओ मेहनत मत करो अब मुझे बताओ क्या कबीर सब कुछ कर सकता है

1920
02:20:26,320 --> 02:20:30,400
कि नहीं सब कुछ कर सकता है भाई आज अच्छा वो अपना

1921
02:20:30,400 --> 02:20:34,480
रूप बदल सकता है कि नहीं रूप तो

1922
02:20:34,480 --> 02:20:38,880
कुछ भी अनेक बना सकता है यानी कि कबीर जो है वह अगर

1923
02:20:38,880 --> 02:20:43,040
6 फीट 5 इंच का है तो वह 5 फीट का शेर बन सकता है

1924
02:20:43,040 --> 02:20:47,240
कि नहीं क्यों नहीं बन सकता है कुछ भी कर सकता है यानी कि

1925
02:20:47,240 --> 02:20:51,560
जब वो जब वो 6 फीट 5 इंच का है तो जब वो 5 फीट बना

1926
02:20:51,560 --> 02:20:52,240
तो बाकी

1927
02:20:52,240 --> 02:20:56,320
का जो एक फीट 5 इंच है व कहां गया कम हो

1928
02:20:56,320 --> 02:21:02,320
गया ना य आपकी बालक वाली

1929
02:21:03,800 --> 02:21:08,280
सोच ह दि भाई

1930
02:21:08,280 --> 02:21:13,360
हर बात लिखी नहीं होती आप

1931
02:21:13,360 --> 02:21:17,920
देखते फगा जैसे आप बातो में फसा रहे ऐसे ही फगा

1932
02:21:17,920 --> 02:21:22,000
क्या सुनो सुनो क्या अनंत काल तक अपने बदले

1933
02:21:22,000 --> 02:21:26,600
हुए रूप में रह सकता है क्या वापस रिपीट

1934
02:21:26,600 --> 02:21:30,760
करो तुमने कहा कि वो रूप बदल सकता है क्या वो अनंत

1935
02:21:30,760 --> 02:21:34,920
काल तक अपने बदले हुए रूप में रह सकता है क्या क्यों नहीं

1936
02:21:34,920 --> 02:21:39,120
जैसे अगर मालिक की इच्छा चाहे जो रू यानी

1937
02:21:39,120 --> 02:21:43,280
कि जो उसका स्वरूप यानी कि जो उसका स्वरूप है वो वास्तविक स्वरूप नहीं

1938
02:21:43,280 --> 02:21:47,480
है क्योंकि वो अनंत काल बदल सकता है वो

1939
02:21:47,480 --> 02:21:51,600
उनकी इच्छा हो तो कुछ भी कर सकता है ना मतलब सतगुरु जो यानी

1940
02:21:51,600 --> 02:21:55,800
यानी कि वो डेड एंड नहीं है वो शाश्वत नहीं है

1941
02:21:55,800 --> 02:22:00,720
आपके कहने से नहीं होगा ये चीज हम हम और आपके कहने से नहीं होगा

1942
02:22:00,720 --> 02:22:05,280
तो भगवान है अरे तु अरे भाई वो तुम ख

1943
02:22:05,280 --> 02:22:07,320
सुनो सुनो पहले मेरी बात

1944
02:22:07,320 --> 02:22:11,840
शाश्वत का अर्थ क्या होता है क्या जी

1945
02:22:11,840 --> 02:22:16,560
शाश्वत का अर्थ क्या होता है शाश्वत का मतलब बिल्कुल

1946
02:22:16,560 --> 02:22:21,280
जैसे य कह सकते हैं हम की

1947
02:22:21,280 --> 02:22:25,400
शव का मतलब तुम लोग तरस आता है तुम

1948
02:22:25,400 --> 02:22:29,680
लोग को उसके अलावा कुछ नहीं पता है जो उसने पढ़ा दिया है उसके अलावा तुम्ह

1949
02:22:29,680 --> 02:22:32,960
कुछ नहीं पता

1950
02:22:32,960 --> 02:22:35,600
है

1951
02:22:35,600 --> 02:22:40,200
सुनो सुनो शाश्वत का अ होता है ई

1952
02:22:40,200 --> 02:22:44,280
वही तो कह रहा शव तुम क रहे हो

1953
02:22:44,280 --> 02:22:48,320
व शरीर बदल सकता है या तो व शाश्वत नहीं है या फिर व

1954
02:22:48,320 --> 02:22:52,440
बदल नहीं सकता भाई आपके उन अनेक सि तो कुछ

1955
02:22:52,440 --> 02:22:56,560
भी कर सकता है आपको इससे क्या मतलब तो फिर वो शाश्वत नहीं है ना बोलो वो शाश्वत नहीं है उसका

1956
02:22:56,560 --> 02:23:00,760
शरीर बोलो मैं क्यों बोल आप नहीं बोलूंगा मैं आपके कहने से

1957
02:23:00,760 --> 02:23:04,840
अरे तो आप ही तो कह रहे हो कि वो शाश्वत है शाश्वत उसे कहते जिसको बदला ना

1958
02:23:04,840 --> 02:23:09,000
जा सके आज अपन जितने भी लाइव स्ट्रीम पर बैठे हैं या कुछ देख रहे हैं और सारे

1959
02:23:09,000 --> 02:23:13,080
कबीर भगवान के बच्चे करो फलत बात मत करोट करो

1960
02:23:13,080 --> 02:23:17,200
इनको फालतू बात बोलने के लिए नहीं दिया जाएगा फालतू बात म्यूट करो

1961
02:23:17,200 --> 02:23:21,400
इ फालतू बात नहीं जो बात च वो करो अच्छा

1962
02:23:21,400 --> 02:23:23,200
चलो ठीक

1963
02:23:23,200 --> 02:23:27,520
है क्या जो कबीर है वो अजर अमर अविनाशी

1964
02:23:27,520 --> 02:23:32,000
है कि नहीं अजर

1965
02:23:32,000 --> 02:23:36,160
अमर अविनाश तीनों है हां अजर का मतलब

1966
02:23:36,160 --> 02:23:39,560
क्या

1967
02:23:39,560 --> 02:23:43,560
है ये तो कह रहे हैं कि भाई आविर्भव तिरो भाव नहीं होता उनका

1968
02:23:43,560 --> 02:23:47,640
तो यहां पर तो जो है यह पूर्ण प्रभु इनका प्रकट हुआ है यानी

1969
02:23:47,640 --> 02:23:51,680
कि उसका आविर्भाव हुआ है यहां पर स लो ये क्या

1970
02:23:51,680 --> 02:23:55,960
हो रहा है भाई ये ये थोड़ा समझाना मेरे को समझ नहीं आ रहा

1971
02:23:55,960 --> 02:24:00,000
हां तो ये सही तो लिखा है इस अभी आप कह रहे थे

1972
02:24:00,000 --> 02:24:04,040
मेरे को प्रकट का मतलब ही नहीं पता उसका अभी आप कह रहे

1973
02:24:04,040 --> 02:24:08,120
थे अभी अभी प्रकट का मतलब आप हमसे पूछ रहे थे और आपकी किताब

1974
02:24:08,120 --> 02:24:12,120
में ही प्रकट लिखा हुआ है इसका मतलब क्या है थोड़ा समझाइए लोगों को ये इनको इनको

1975
02:24:12,120 --> 02:24:16,560
जरा प्रकट का मतलब समझाने दीजिए हमको थोड़ा प्रकट का मतलब

1976
02:24:16,560 --> 02:24:20,640
क्या मतलब होता है

1977
02:24:20,640 --> 02:24:24,880
पूर्ण परमात्मा के लिए लिखा है जो सतलोक से जो प्रकट हुए थे उसके लिए लिखा प्रकट

1978
02:24:24,880 --> 02:24:29,920
होने का मतलब क्या है वही पूछ रहे हैं ना कोई मैं आपसे कोई जापनीज में बात थोड़ी कर रहा

1979
02:24:29,920 --> 02:24:33,920
च सरीर सर प्रकट का

1980
02:24:33,920 --> 02:24:38,160
मतलब स शरीर होता है ना पक्का शरीर नहीं होता सरीर

1981
02:24:38,160 --> 02:24:42,560
आना मतलब प्रकट होना जैसे कोई होना मतलब प्रकट अट

1982
02:24:42,560 --> 02:24:47,720
होने का मतलब आना नहीं होता है आना तो ब्रज होता है ना

1983
02:24:47,720 --> 02:24:51,840
प्र होने का मतलब होता क्या सुन अरे मेरे भाई प्रकट

1984
02:24:51,840 --> 02:24:56,600
प्रकट होने का मतलब आना होता है कहां लिखा है डिक्शनरी में लिखा है क्या

1985
02:24:56,600 --> 02:25:00,680
ब्रज मीस आना नहीं होता ये भी आपकी बात अरे वो छोड़ दो वो छोड़ दो मैं अभी पूछ रहा हूं

1986
02:25:00,680 --> 02:25:05,400
प्रकट होने का मतलब आना का का मतलब नहीं पता है आना होता

1987
02:25:05,400 --> 02:25:10,320
प्रकट हो विषय मत बदलो प्रकट होने का मतलब आना कहां लिखा है वो बताओ

1988
02:25:10,320 --> 02:25:14,680
प्रकट का भगवान ऊपर से प्रकट होता है सबको पता है ना

1989
02:25:14,680 --> 02:25:18,920
प्रकट होता ऊपर से प्रकट होता है में प्रकट होता है तलोक में प्रकट

1990
02:25:18,920 --> 02:25:22,000
होता है

1991
02:25:22,000 --> 02:25:26,160
भगवान य सुनो भगवान सुनो सुनो सुनो भगवान ऊपर से या नीचे

1992
02:25:26,160 --> 02:25:30,200
आते हैं उसको एक बार को माना जा सकता है प्रकट हुए सतलोक में

1993
02:25:30,200 --> 02:25:34,400
सतलोक में प्रकट हो रहा है भगवान सतलोक में प्रकट हो रहा है जो सतलोक

1994
02:25:34,400 --> 02:25:38,400
है जहा सब कुछ नित्य है तो यह प्रकट

1995
02:25:38,400 --> 02:25:42,720
का शब्द का अर्थ आपसे मैं पूछ रहा हूं शंकर सिंह जी दो मिनट सुनिए कोई ना बहुत

1996
02:25:42,720 --> 02:25:46,720
आप भी कोई अच्छे व्यक्ति लग रहे हैं प्रकट का अर्थ क्या होता है यह पूछ रहा

1997
02:25:46,720 --> 02:25:51,640
हूं मैं आपसे बस प्रकट शब्द का

1998
02:25:51,640 --> 02:25:55,680
प्रकट काने बता आप तर्शी संत के चेले हैं और आपको

1999
02:25:55,680 --> 02:26:01,680
यह भी नहीं पता कि प्रकट शब्द का अर्थ क्या होता

2000
02:26:02,000 --> 02:26:06,200
है म प्रकट का मतलब जैसे भगवान ऊपर से आए हैं धरती में

2001
02:26:06,200 --> 02:26:10,360
बस य प्रकट होना य मेरा मतलब भाई आने का मतलब प्रकट

2002
02:26:10,360 --> 02:26:14,880
नहीं होता आना शब्द आना होता है प्रकट का क्या मतलब होता है य पूछ रहा हूं मैं

2003
02:26:14,880 --> 02:26:19,400
आप बता दीजिए हमारा इतनी बुद्धि काम तत्वदर्शी जी

2004
02:26:19,400 --> 02:26:23,680
ने आज तक आपको इतनी बात भी नहीं समझाई कि प्रकट का अर्थ क्या होता है आपको हिंदी

2005
02:26:23,680 --> 02:26:29,680
भी नहीं आती है इसका मतलब संस्कृत की तो मैंने बात ही नहीं की अभी तक

2006
02:26:29,680 --> 02:26:33,840
आपसे चलिए गल कर लीजिए चलिए गल कर लीजिए

2007
02:26:33,840 --> 02:26:37,960
कोई बात नहीं चलो प्रकट होने प्रकट होने का मतलब बताए आपको मान

2008
02:26:37,960 --> 02:26:42,000
लोगे बताइए बताइए प्रकट होने का मतलब है

2009
02:26:42,000 --> 02:26:46,240
आंखों का विषय बन जाना प्रकट आंखों का विषय

2010
02:26:46,240 --> 02:26:51,280
बन जाना हा जिसको देख जा

2011
02:26:51,280 --> 02:26:55,440
जिसको देखा जा सके ऐ इसका भी नहीं पता इनको इसका मतलब नहीं पता

2012
02:26:55,440 --> 02:26:59,600
इनको आंखों का विषय बन जाना अच्छा आप मेरे को बताइए पांच

2013
02:26:59,600 --> 02:27:03,680
विषय कौन से होते हैं हमारे शरीर में हमारे शरीर के साथ जुड़े पांच विषय कौन से होते हैं फिर

2014
02:27:03,680 --> 02:27:07,680
ही बताएगा ना विषय क्या होता है पांच विषय कौन से हैं

2015
02:27:07,680 --> 02:27:11,720
हमारे पाच कमल कमल की बात कर रहे हो क्या आप अरे

2016
02:27:11,720 --> 02:27:15,920
भाई कमल कहीं नहीं खिले हुए हमारे शरीर में आप चिंता मत करिए होगा तो कमल का फूल

2017
02:27:15,920 --> 02:27:17,160
मेरे को लाके देना मैं बीजेपी

2018
02:27:17,160 --> 02:27:21,480
के दफ्तर में दे आऊंगा मैं ये पूछ रहा हूं आपसे कि हमारे पंच विषय

2019
02:27:21,480 --> 02:27:25,560
कौन से होते हैं पंच विषय क्या होते हैं

2020
02:27:25,560 --> 02:27:29,680
अपने शरीर में कमल होते हैं ऐसी बात नहीं पंच विषय क्या होते हैं कमल

2021
02:27:29,680 --> 02:27:33,520
की बात नहीं कर रहा हूं पंच विषय क्या होते

2022
02:27:33,520 --> 02:27:37,520
हैं मैंने कमलो के नहीं पूछा कि पंच कमल कौन से होते हैं उनमें कौन से देवता होते

2023
02:27:37,520 --> 02:27:41,600
हैं पूछ रहा हूं पांच विषय कौन से होते हैं हमारे यह तो

2024
02:27:41,600 --> 02:27:45,720
जानकारी नहीं है भया आप बता दीजिए अच्छा वेरी गुड वेरी गुड एक बार ताली बजाओ

2025
02:27:45,720 --> 02:27:51,720
के अपने लिए बार नहीं तो आप बता दे क्या दिक्कत है इस अच्छा

2026
02:27:53,080 --> 02:27:57,640
जब हम बता रहे तो हमारी चीज पर विश्वास तो है नहीं तो हम बता के करें क्या

2027
02:27:57,640 --> 02:28:01,800
नहीं नहीं आप एक ल ब यही जब हम आपको शास्त्र खोल

2028
02:28:01,800 --> 02:28:05,840
खोल के दिखा रहे तो आप कह रहे हो आप पता नहीं कौन सी किताब दिखा रहे हो क्या दिखा रहे हो

2029
02:28:05,840 --> 02:28:10,000
हमें क्या पता ये वो मैंने ऐसे बोला ही नहीं अभी तक कि कौन

2030
02:28:10,000 --> 02:28:14,080
सी किताब शिवा जी एक मिनट मैं इनसे बात करू अच्छा मेरे को

2031
02:28:14,080 --> 02:28:18,360
बताइए शंकर सिंह जी सर्ग में और अध्याय में क्या अंतर आप करोगे

2032
02:28:18,360 --> 02:28:22,560
जब आपको बोला जाएगा कि यह रामायण का का सर्ग है और बोला जाए कि यह महाभारत का अध्याय

2033
02:28:22,560 --> 02:28:26,560
है तो इसमें क्या अंतर करोगे आप

2034
02:28:26,560 --> 02:28:30,560
अरे गोविंद भा क प अरे छोटी बेसिक जानकारी

2035
02:28:30,560 --> 02:28:34,600
तो ले लेने दो इनसे अच्छा वेद शब्द का अर्थ क्या है और कौन सी धातु

2036
02:28:34,600 --> 02:28:38,680
से बना हुआ है वो देखो इतना बड़ा लिखा नहीं है जो आप मेरे

2037
02:28:38,680 --> 02:28:42,680
से बात कर रहे हो अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा चलिए और आसान कर

2038
02:28:42,680 --> 02:28:46,680
थोड़ा सा और आसान कर देता हूं दशा अवतारों के नाम पता है आप

2039
02:28:46,680 --> 02:28:50,840
दशा अवतारों के नाम पता है आपको बताइए सीक्वेंस

2040
02:28:50,840 --> 02:28:54,960
वाइज बता दीजिए पहला दूसरा तीसरा

2041
02:28:54,960 --> 02:28:59,040
चौथा हमें नहीं बताया मैं सड़क प बैठा हुआ अगर

2042
02:28:59,040 --> 02:29:03,120
कोई चरसी भी होगा ना ठीक है मैं वैसे ही बात यूज नहीं करता हूं अगर

2043
02:29:03,120 --> 02:29:07,160
मैं किसी अपने अभी निकल जाऊ ना घर के बाहर सड़क प कोई बैठा हो ना जो थोड़ा

2044
02:29:07,160 --> 02:29:08,080
मादक पदार्थ भी

2045
02:29:08,080 --> 02:29:12,080
लेता है ठीक है उसको भी ये सारे विषयों का ज्ञान होगा

2046
02:29:12,080 --> 02:29:16,160
उसने अगर कोई भी अपना गुरु बनाया होगा ठीक है उस चीज

2047
02:29:16,160 --> 02:29:20,160
का ज्ञान होने से क्या वो भगवान का वो हो जाएगा या फिर

2048
02:29:20,160 --> 02:29:24,160
भगवान का ज्ञान शास्त्र से होगा और जब आपको शास्त्र का बेसिक ज्ञान

2049
02:29:24,160 --> 02:29:28,240
ही नहीं है तो आप किस अनुसार कह रहे कि उससे भगवान का पता चल जाएगा भगवान

2050
02:29:28,240 --> 02:29:32,360
आपको खुद तो आए नहीं थे

2051
02:29:32,360 --> 02:29:36,400
मिलने एक बात बताओ जब तुम्हें कुछ ज्ञान ही नहीं है तो तुम किसी और

2052
02:29:36,400 --> 02:29:40,560
के क्लेम को काउंटर कैसे करते हो जब तुमको कुछ पता ही नहीं है

2053
02:29:40,560 --> 02:29:44,800
तुमको यह नहीं पता आर भाव का अर्थ जन्म नहीं बल्कि प्रकट है रो भाव

2054
02:29:44,800 --> 02:29:49,080
का अर्थ मृत्यु नहीं बल्कि अपक है तुमको यह नहीं पता कि सतलोक

2055
02:29:49,080 --> 02:29:53,400
में आपका जो परमेश्वर प्रकट हो रहा है प्रकट होने का मतलब उससे पहले सतलोक

2056
02:29:53,400 --> 02:29:57,520
में नहीं था अप प्रकट था जब कोई चीज प्रकट हो रही है तो इसका

2057
02:29:57,520 --> 02:30:03,520
मतलब व अप प्रकट थी उससे

2058
02:30:04,560 --> 02:30:08,680
पहले में किया इसका मतलब य है कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान

2059
02:30:08,680 --> 02:30:12,800
नहीं है आप ही के अनुसार नहीं सर्वशक्तिमान तो है य

2060
02:30:12,800 --> 02:30:18,000
तो मैं मानता

2061
02:30:18,000 --> 02:30:22,160
हूं जी क्या बोल रहे जी थोड़ी इजाजत चाहूंगा

2062
02:30:22,160 --> 02:30:26,240
आज के लिए आपसे बड़ी क्षमा चाहता हूं कुछ भाई बंधु और भी है वो वेट कर रहे हैं ठीक

2063
02:30:26,240 --> 02:30:30,440
है ऐसे लोगों से आप जितना भी कर लीजिए कोई फायदा नहीं इनकी

2064
02:30:30,440 --> 02:30:36,120
एक रील भी काट के डाल दीजिएगा जो जो मैंने इनसे पूछा है अगर हो सके

2065
02:30:36,120 --> 02:30:42,120
तो नहीं भाई अब एक बा काटने और व सेने

2066
02:30:43,440 --> 02:30:47,520
कोई

2067
02:30:47,520 --> 02:30:51,640
महाभारत 148 4 वा

2068
02:30:51,640 --> 02:30:55,720
श्लोक पढ़ो श्री कृष्ण

2069
02:30:55,720 --> 02:30:59,720
ही क्या लिखा है भैया कोई पढ़ के सुना दो इनको श्री कृष्ण

2070
02:30:59,720 --> 02:31:04,080
ही यहां से पढ़िए य से श्री कृष्ण ही श्री कृष्ण

2071
02:31:04,080 --> 02:31:08,120
ही लाल नेत्रों वाले दंड दारी

2072
02:31:08,120 --> 02:31:12,760
सनातन काल है इसको सेव भी कर लीजिएगा सेव है सेव

2073
02:31:12,760 --> 02:31:16,800
से और परमेश्वर भी लिखा है ये देखो काल

2074
02:31:16,800 --> 02:31:20,080
ही परमेश्वर है

2075
02:31:20,080 --> 02:31:24,400
को काल मानते हो ना अरे काल ही परमेश्वर है देखलो पहले

2076
02:31:24,400 --> 02:31:28,520
पहले ये देख लो ऊपर काल ही परमेश्वर है ये भी देख लो हरि

2077
02:31:28,520 --> 02:31:33,200
ओम जी माया हेलो

2078
02:31:33,200 --> 02:31:37,360
क्याय काल ही परमेश्वर है दिख रहा है काल

2079
02:31:37,360 --> 02:31:41,960
अलग चीज है भगवान अलग चीज देखो क्या लिखा है

2080
02:31:41,960 --> 02:31:46,160
काल ही परमेश्वर है क्या लिखा है

2081
02:31:46,160 --> 02:31:50,320
लिखा है का परमे ये देखो ना काली परमेश्वर

2082
02:31:50,320 --> 02:31:51,560
लिखा है

2083
02:31:51,560 --> 02:31:56,680
ये ये पढ़ो खा

2084
02:31:56,680 --> 02:32:00,920
काल ही परमेश्वर है दिख रहा दिख रहा है हो

2085
02:32:00,920 --> 02:32:04,960
गया हैरे सु अब

2086
02:32:04,960 --> 02:32:10,400
सुनो की बात बताओ हा बताओ

2087
02:32:10,400 --> 02:32:14,440
जो कबीर का जो शरीर है जो

2088
02:32:14,440 --> 02:32:20,440
कबीर का शरीर है वोह बदला जा सकता है या नहीं बदला जा सकता

2089
02:32:20,720 --> 02:32:24,720
आपका कहने मतलब आप क्यों देखो फल बात मत करो बहुत देर

2090
02:32:24,720 --> 02:32:29,600
हो गई वो कम ज्यादा हो सकता है कि नहीं वो शाश्वत है कि नहीं है बताओ

2091
02:32:29,600 --> 02:32:34,120
उनके डिक्शनरी में इंपॉसिबल वर्ड नहीं है वो कुछ भी कर सकता हैका

2092
02:32:34,120 --> 02:32:38,360
मतलब उसका शरीर है व शाश्वत नहीं है बदला

2093
02:32:38,360 --> 02:32:42,560
जा सता है क्यों नहीं अरे तो तुम बताओ ना क्यों

2094
02:32:42,560 --> 02:32:47,040
है जब वो बदला जा सकता तो व शाश्वत क्यों है

2095
02:32:47,040 --> 02:32:51,520
भाई वो अविनाशी भगवान है बाकी सारे जितने भी भगवा तो है लेकिन

2096
02:32:51,520 --> 02:32:55,600
वो मुझे बस यह बताओ कि उनका शरीर शाश्वत

2097
02:32:55,600 --> 02:32:59,880
है कि नहीं है उनका शरीर शाश्वत

2098
02:32:59,880 --> 02:33:05,080
है शाश्वत है यानी कि उसको कम ज्यादा नहीं किया जा

2099
02:33:05,080 --> 02:33:06,600
सकता वो कुछ भी

2100
02:33:06,600 --> 02:33:11,000
कर सकता है मैं बोल रहा हूं कब से आप का मतलब य होता है जिसको

2101
02:33:11,000 --> 02:33:15,240
कम और ज्यादा नहीं किया जा सकता ऐसा नहीं होता है आप

2102
02:33:15,240 --> 02:33:19,240
बो रहे या तोय मानो ईश्वर भी अपने शरीर को कम

2103
02:33:19,240 --> 02:33:23,640
ज्यादा नहीं सता या तो यह मानो की ईश्वर का जो शरीर है वह शाश्वत

2104
02:33:23,640 --> 02:33:28,080
नहीं है बस दोनों में से एकज मान सकते हो

2105
02:33:28,080 --> 02:33:32,160
आपके कहने से चलो क्या य बता अजीब बात है मेरे कहने से

2106
02:33:32,160 --> 02:33:37,520
चलो मैं आपसे पूछ

2107
02:33:37,520 --> 02:33:41,640
रहा शास्त्र के कहने से चलोगे

2108
02:33:41,640 --> 02:33:45,680
मैंने बोल तो दिया कुछ भी कर सकता था आप कुछ भी कर

2109
02:33:45,680 --> 02:33:50,000
सकता है तो यह बोलो उनका शरीर शाश्वत नहीं है

2110
02:33:50,000 --> 02:33:54,120
मैं क्यों बोलू आप क्योंकि उनका शरीर

2111
02:33:54,120 --> 02:33:58,240
बदल सकता है आप थोड़ा टॉपिक चेंज कर द आपके

2112
02:33:58,240 --> 02:34:02,360
समझ में नहीं आएगा येज क क्यों क्यों टॉपिक चेंज करें यही तो टॉपिक है ज फोगे

2113
02:34:02,360 --> 02:34:06,360
क्यों टॉपिक चेंज करें मयंक जी को बोलने दो काफी देर से नहीं

2114
02:34:06,360 --> 02:34:10,600
नहीं म जी मत बो म जी आप मत बोलो रुक जाओ आप मुझे

2115
02:34:10,600 --> 02:34:14,640
ये बताओ आप मुझे य बताओ

2116
02:34:14,640 --> 02:34:18,680
आप मुझे ये बताओ कि आपके जो

2117
02:34:18,680 --> 02:34:21,800
कबीर साहब है उनका शरीर अजर है कि नहीं अजर अमर

2118
02:34:21,800 --> 02:34:25,920
अविनाशी बोला मैंने वो है कि नहीं जी बिल्कुल तीनों

2119
02:34:25,920 --> 02:34:30,640
है तीनों है और अपान वायु है कि

2120
02:34:30,640 --> 02:34:34,840
नहीं अपान वायु बोले तो भैया इनको

2121
02:34:34,840 --> 02:34:39,840
पहले इनका मतलब बताओ फिर ये बात करेंगे ना इनको

2122
02:34:39,840 --> 02:34:44,000
म अपान वायु का मतलब आप तो उसमें वर्ड आ जाता जैसे

2123
02:34:44,000 --> 02:34:48,040
निराकार में नहीं नहीं आप यहां बोल

2124
02:34:48,040 --> 02:34:52,200
निराकार नहीं तो समझ में नहीं आ रहा है मैं आपसे यह पूछ रहा हूं

2125
02:34:52,200 --> 02:34:56,520
चलो उसको छोड़ दो पानवा को आप मुझे बताओ कि आपका जो कबीर

2126
02:34:56,520 --> 02:35:01,280
है वो अजर है कि नहीं अजर आपका नहीं

2127
02:35:01,280 --> 02:35:05,800
अजर अमर अविनाशी है भैया कब से बोल रहा हूं

2128
02:35:05,800 --> 02:35:09,680
ठीक है अजर का मतलब क्या समझते हैं

2129
02:35:09,680 --> 02:35:13,680
आप उनको बोलो मैडम जी को बीच में ना

2130
02:35:13,680 --> 02:35:19,680
बोले कोई

2131
02:35:20,080 --> 02:35:24,200
को अल हां तो उनसे कहिए किसी और रूम में जाए या आप

2132
02:35:24,200 --> 02:35:29,040
दूसरे रूम में चले

2133
02:35:29,040 --> 02:35:33,720
जाइए उल्

2134
02:35:33,720 --> 02:35:37,920
सीधा हां भैया बात करनी है हमसे कि हम लोग फालतू बैठे

2135
02:35:37,920 --> 02:35:42,160
हैं आप वही उनसे ही बात करिए य तो आप बताइए ना

2136
02:35:42,160 --> 02:35:46,360
अरे मैं क्यों बताऊं भाई तुमको क्या पता है हमने तो बहुत

2137
02:35:46,360 --> 02:35:49,800
चीज बता दी

2138
02:35:49,800 --> 02:35:53,840
बूढ़ा नहीं होता मैंने बता दिया नहीं तो आप नहीं मानोगे ना

2139
02:35:53,840 --> 02:35:58,000
इस चीज को कि कबीर भगवान बूढ़ा भी हो सकता है ऐसे आप तो मानोगे नहीं ना मैं आपसे पूछ

2140
02:35:58,000 --> 02:36:02,280
रहा हूं कभी क्या आपका भगवान ऐसा है जो कभी बूढ़ा नहीं होता

2141
02:36:02,280 --> 02:36:06,280
बिल्कुल कभी बूढ़ा नहीं हो सकता ठीक है अब भैया इनको फोटो

2142
02:36:06,280 --> 02:36:10,280
दिखाओ फोटो दिखाओ फोटो दिखा दीजिए क्या

2143
02:36:10,280 --> 02:36:14,600
दिक्कत बस ये लोग इन्ही चीजों प होते हैं फोटो

2144
02:36:14,600 --> 02:36:18,600
का मतलब जैसे धरती पर आते हैं तो जैसे अपने यहां जैसे बूढ़े लोग होते हैं तो

2145
02:36:18,600 --> 02:36:23,200
वो लीला अनुसार व रहते हैं ऐसी बात नहीं है कि य आने से मतलब बूढ़े होने से भगवान

2146
02:36:23,200 --> 02:36:26,680
या वो उका वास्तविक रूप नहीं

2147
02:36:26,680 --> 02:36:30,680
है वास्तविक रूप का मीस ये नहीं होता है जैसे आपने बोला कि

2148
02:36:30,680 --> 02:36:34,840
बूढ़ा नहीं हो सकता कहने का मतलब आप भा जो चित्र आप लेके चल रहे हो कबीर

2149
02:36:34,840 --> 02:36:35,340
का

2150
02:36:35,240 --> 02:36:39,360
कि वो जो दाढ़ी है सफेद सफेद बुढ़ापे जैसा शरीर है जो

2151
02:36:39,360 --> 02:36:42,920
वो उनका वास्तविक रूप है कि

2152
02:36:42,920 --> 02:36:46,920
नहीं देखो परमात्मा का जो चित्र जो कबीर साहेब

2153
02:36:46,920 --> 02:36:51,320
का है इनकी बुक इनकी बुक चित्र दिखाओ

2154
02:36:51,320 --> 02:36:55,640
कबीर साब का चित्र

2155
02:36:55,640 --> 02:36:59,000
[संगीत]

2156
02:36:59,000 --> 02:37:03,080
जो शिवांश जी मैं आपके साथ कल जुड़ता हूं फिर अगली लाइव में अभी मेरे को

2157
02:37:03,080 --> 02:37:07,560
जाना पड़ेगा ठीक है आप सभी कोरी तरफ चले जा थो एंटरटेनमेंट

2158
02:37:07,560 --> 02:37:11,800
होता है बिल्कुल रुकता थोड़ा सा भाई लोग और भी इंतजार

2159
02:37:11,800 --> 02:37:16,040
कर

2160
02:37:16,040 --> 02:37:21,200
रहे जय श्री राम

2161
02:37:21,200 --> 02:37:25,520
बताइए बताइए बताइ हा भाई ये बूढ़ा है जवान

2162
02:37:25,520 --> 02:37:29,560
है कि क्या है ये यह भगवान है कुछ भी नहीं

2163
02:37:29,560 --> 02:37:33,960
है भगवान है अरे मैं कह रहा हूं यह जो इनका शरीर दिख रहा है बुढ़ापे

2164
02:37:33,960 --> 02:37:38,280
का शरीर है या जवानी का शरीर है

2165
02:37:38,280 --> 02:37:42,320
बुढ़ापे का है बुढ़ापे का है तो तुम तो कह रहे हो

2166
02:37:42,320 --> 02:37:46,360
कभी बूढ़ा नहीं होता वो नहीं होता लेकिन य लीला अनुसार

2167
02:37:46,360 --> 02:37:51,120
दिखाना पड़ता है ना लोगों को लोगों को इस तरह लगे लिखा

2168
02:37:51,120 --> 02:37:55,200
है पता है भगवान की महिमा है भाई

2169
02:37:55,200 --> 02:38:00,000
इछ लिखा है उसको लीला अनुसार ऐसा करना पड़ता है

2170
02:38:00,000 --> 02:38:04,000
आप हर चीज का लिखा लिखा मत बोलिए मतलब आपके पास

2171
02:38:04,000 --> 02:38:08,200
हरज का लिखा लिखा नहीं है लेकिन मैं जो बोल रहा

2172
02:38:08,200 --> 02:38:12,360
बिल्कुल सच्चाई है आप अरे सचाई ख दिखाओ ना

2173
02:38:12,360 --> 02:38:16,400
तब तो बात कर हमने आपको दि दिया सनातन

2174
02:38:16,400 --> 02:38:20,720
काल है हमने आपको दिखा दिया कृ वासुदेव हमने दिया कृष्ण ही परमेश्वर

2175
02:38:20,720 --> 02:38:24,800
है तुम लिखा दिखा तुम अभी तक लिखा नहीं दिखा पाए कृष्ण काल नहीं है कृष्ण

2176
02:38:24,800 --> 02:38:29,120
परमेश्वर नहीं है पूछ रहा जो आपका जो ईश्वर

2177
02:38:29,120 --> 02:38:31,120
है उसको यदि लीला में आना

2178
02:38:31,120 --> 02:38:35,120
पड़ता है तो बूढ़ा ही होना पड़ता है यह कहां लिखा है और दूसरी

2179
02:38:35,120 --> 02:38:39,120
बात यह है कि इसका मतलब यह जो फोटो है यह

2180
02:38:39,120 --> 02:38:43,960
वास्तविक फोटो नहीं है यह आपके रामपाल जी ने कहां पर लिखा है

2181
02:38:43,960 --> 02:38:48,440
यह वास्तविक स्वरूप नहीं है यह कहां लिखा है ऐसा तो नहीं लिखा

2182
02:38:48,440 --> 02:38:52,800
भैया तो फिर ये तो तुम्हारे मन की बात हो गई फिर तुम्हारे लोग दूसरे

2183
02:38:52,800 --> 02:38:56,800
दूसरे कहते हैं तुम्हारे लोग दूसरे दूसरे कहते हैं कि मूर्खों से हमारे मूर्खों से बात

2184
02:38:56,800 --> 02:39:01,280
करते हो तुम्हारे ही लोग बोलते हैं फिर वीडियो बनाते हैं

2185
02:39:01,280 --> 02:39:05,280
अरे वो बात बोलो ना जो रामपाल जी ने मानी हो जो स्वीकार की हो उस बात के

2186
02:39:05,280 --> 02:39:09,440
लिए बात रखो यहां पे फालतू बात बोल रहे अपने मन

2187
02:39:09,440 --> 02:39:13,480
से भगवानों की बात कर रहे हो अविनाशी अंतर

2188
02:39:13,480 --> 02:39:17,680
देखिए अब जो विषय चल रहा है उस पर रहिए कबीर बूढ़ा दिख रहा है कि नहीं दिख रहा

2189
02:39:17,680 --> 02:39:21,800
आपने मान लिया बूढ़ा दिख रहा है आप कह रहे हो बुढ़ापा उस पर नहीं आता आप बताओ

2190
02:39:21,800 --> 02:39:26,080
कि ये उसका असली शरीर नहीं है ये कहां लिखा है

2191
02:39:26,080 --> 02:39:30,280
रामपाल ने क स्वीकार किया रामपाल दास ने यह

2192
02:39:30,280 --> 02:39:34,360
कहां स्वीकार किया यह जो कबीर दिख रहा है यह वास्तविक

2193
02:39:34,360 --> 02:39:38,640
शरीर नहीं है कबीर का आज की डेट में देखो भगवान

2194
02:39:38,640 --> 02:39:42,720
है वो सुन रहे होंगे तो क्या आपको बोलते हो फि प्रमाण बताओ अब प्रमाण

2195
02:39:42,720 --> 02:39:46,160
फलतु बात मत बोलो प्रमाण है प्रमाण क्या दिखा

2196
02:39:46,160 --> 02:39:50,200
मेरे पास मेरे पास कु है ठीक है

2197
02:39:50,200 --> 02:39:53,680
चलिए

2198
02:39:53,680 --> 02:39:58,080
निकलिए शंकर जी कभी दिल में झांक

2199
02:39:58,080 --> 02:40:02,440
बढ़िया टाइम पास हुआ आज क्या कहते हैं करीब दो घंटे

2200
02:40:02,440 --> 02:40:06,480
अच्छा टाइम पास हुआ इसमें क्या हुआ ऐसे लोग आते हैं सोच के कि हम लोग जाकर

2201
02:40:06,480 --> 02:40:10,760
के व यह करेंगे वो करेंगे और उसम हमारे लोगों को सच्चाई दिखती

2202
02:40:10,760 --> 02:40:14,880
है पता चलता है क्या है क्या नहीं है हां

2203
02:40:14,880 --> 02:40:20,880
भाई आकाश तिवारी नहीं है झूठ

2204
02:40:21,000 --> 02:40:23,160
क्यों

2205
02:40:23,160 --> 02:40:27,680
भाई शरू से ही लीला

2206
02:40:27,680 --> 02:40:31,960
लीला नहीं जो आपने कहा था

2207
02:40:31,960 --> 02:40:37,000
इनकी शुरू से ही लीला चल रही देख

2208
02:40:37,000 --> 02:40:41,160
लो आकाश हा एक मिनट एक मिनट एक मिनट

2209
02:40:41,160 --> 02:40:47,160
आकाश दास जी आप बोले शिवो हम

2210
02:40:47,480 --> 02:40:51,720
बो भैया आपको इनसे एक चीज और पूछना चाहिए

2211
02:40:51,720 --> 02:40:55,840
था जो यह बताते हैं जो भी आए शंकर सिंह जी उनसे पूछना

2212
02:40:55,840 --> 02:40:59,920
चा जोय बताते हैं कि पांचवे वेद के रूप में सूक्ष्म

2213
02:40:59,920 --> 02:41:05,920
वेद में जो कबीर सागर का नाम लेते हैं

2214
02:41:06,800 --> 02:41:12,200
उस जबका जी मैं ये पूछ रहा हूं आपसे

2215
02:41:12,200 --> 02:41:16,520
कि आपकी ज्ञान गंगा इत्यादि में लिखा है

2216
02:41:16,520 --> 02:41:20,840
गीता तेरा ज्ञान अमृत में भी लिखा है कि जो

2217
02:41:20,840 --> 02:41:24,920
भगवत गीता है उसके 5 प्र श्लोक जो है वह काल

2218
02:41:24,920 --> 02:41:29,200
ने अपने मन का अपना ज्ञान दे दिया है ऐसा ही है ना

2219
02:41:29,200 --> 02:41:33,600
5 प्र बात सुनिए ऐसा है

2220
02:41:33,600 --> 02:41:38,200
देखिए देख मैं जो पूछ रहा हूं उसका उसके बारे में बताइए हां

2221
02:41:38,200 --> 02:41:44,200
जो आप कह रहे हो काल ने दिया है ना

2222
02:41:45,360 --> 02:41:49,480
अरे मुझे अपना प्रश्न तो पूछ लेने दो क्यों ज्यादा बता रहे

2223
02:41:49,480 --> 02:41:54,480
मैं ज्यादा पूछ नहीं रहा हूं तो अच्छा अच्छा हा

2224
02:41:54,480 --> 02:41:59,360
गीता में टोटल 700 श्लोक है गीता में

2225
02:41:59,360 --> 02:42:03,760
टोटल 700 श्लोक है हा 700 का

2226
02:42:03,760 --> 02:42:07,960
5 प्रत होता है 5 35

2227
02:42:07,960 --> 02:42:12,240
यह जो 35 यानी कि गीता के 35 श्लोक ऐसे

2228
02:42:12,240 --> 02:42:14,480
हैं

2229
02:42:14,480 --> 02:42:18,600
जो काल ने अपना ज्ञान दे दिया है वो 5 प्र 35

2230
02:42:18,600 --> 02:42:23,520
शलोक कौन कौन से हैं वो

2231
02:42:23,520 --> 02:42:28,000
बताइए देखिए नहीं पता ऐसा

2232
02:42:28,000 --> 02:42:32,120
बात पहले हम इस तर्क प नहीं कर अरे भाई जो तुम लोग देखो तुम

2233
02:42:32,120 --> 02:42:36,160
एक कहानी लेकर चलते हो मैं क्यों पूछ र हूं उसको समझो तुम एक कहानी लेकर

2234
02:42:36,160 --> 02:42:40,240
चलते हो भाई काल ने अपना भी ज्ञान दे दिया अपने बारे में बोल दिया अपने बारे में बोल दिया यह

2235
02:42:40,240 --> 02:42:44,560
तो काल बोल रहा है ये तो अपने बारे में बोल रहा है बोलते हो ना तो

2236
02:42:44,560 --> 02:42:48,640
अब हम आपको अब हम आपको वो प्रमाण दिखा पाए जिसमें आप ये ना बोल

2237
02:42:48,640 --> 02:42:52,800
पाओ कि तो काल ने अपने लिए बोला है यह काल ने अपना ज्ञान दिया

2238
02:42:52,800 --> 02:42:56,800
इसलिए हमें यह पता होना चाहिए कि गीता के व 35 लोक कौन

2239
02:42:56,800 --> 02:43:00,520
कौन से है

2240
02:43:00,520 --> 02:43:04,640
बताओ बताओ मैं टिक लगाऊंगा गीता में

2241
02:43:04,640 --> 02:43:09,160
जल्दी बताओ शलोक कौन कन से देखिए यने

2242
02:43:09,160 --> 02:43:13,520
अपने लिए बोला है तत्वदर्शी संत ने नहीं

2243
02:43:13,520 --> 02:43:17,680
बताया व जो पूज्य गुरुदेव ने जो बताया है

2244
02:43:17,680 --> 02:43:21,680
नहीं उन्होने आपको य नहीं बता कौन से लोक है

2245
02:43:21,680 --> 02:43:26,040
नहीं जो गलत है काल ने अपना जन दिया है वो ऐसा

2246
02:43:26,040 --> 02:43:30,160
है देखिए बात समझ देखिए ऐसा

2247
02:43:30,160 --> 02:43:34,320
इधर उधर की बात मत कर देखिए जो ज्ञान

2248
02:43:34,320 --> 02:43:38,560
गुरु पूछ रहा पता है क्या गीता में वो 35 लोक कौन-कौन

2249
02:43:38,560 --> 02:43:40,880
से

2250
02:43:40,880 --> 02:43:45,160
हैं देखिए जो वो 3 पले पहले

2251
02:43:45,160 --> 02:43:49,200
बात क्लियर करो कि पता है कि नहीं पता है अभी

2252
02:43:49,200 --> 02:43:53,960
संदर्भ में हम कंफर्म नहीं कर सकते हां कल परसों में हम इसमें

2253
02:43:53,960 --> 02:43:58,000
बता सकते हैं क्या है अच्छा ठीक है दूसरा अब

2254
02:43:58,000 --> 02:44:02,120
आप बोलिए क्या बोल रहे थे बोलिए हां यह बोल रहे

2255
02:44:02,120 --> 02:44:07,040
हैं कि देखिए जो आप यह कह रहे हो कि

2256
02:44:07,040 --> 02:44:11,120
जैसे श्रीमद भाग देवी पुराण में या किसी में भी जो ज्ञान

2257
02:44:11,120 --> 02:44:15,920
है या कोई जैसे अविनाश है कहीं है देखो ज्ञान

2258
02:44:15,920 --> 02:44:19,960
एक परमात्मा ने जो बताया है गुरुजी उसका

2259
02:44:19,960 --> 02:44:24,280
मूल आधार जो है व कबीर सागर है

2260
02:44:24,280 --> 02:44:28,400
वाह वाह वा एक ब सब लोग तालिया बजा दो

2261
02:44:28,400 --> 02:44:32,680
भैया सब लोग एक बार तालिया बजा दो बहुत बढ़िया

2262
02:44:32,680 --> 02:44:36,840
भैया पा आप बजा माइक खोल के बजाइए माइक खोल लीजिए अपने अपने

2263
02:44:36,840 --> 02:44:41,840
माइक खोल लीजिए सब लोग तालिया बजा

2264
02:44:41,840 --> 02:44:45,840
बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया बहुत बढ इतनी सची

2265
02:44:45,840 --> 02:44:50,760
बात कही आपने उसका मूल आधार कबीर सागर है

2266
02:44:50,760 --> 02:44:55,040
उसका मूल आधार वेद नहीं

2267
02:44:55,040 --> 02:44:59,040
है लेकिन ऐसा नहीं है कि कि उसका

2268
02:44:59,040 --> 02:45:04,080
ज्ञान वेदों में भी नहीं मिलता है अरे भाई सुनो मेरी बात

2269
02:45:04,080 --> 02:45:08,880
सुनो जैसे मान लो की

2270
02:45:08,880 --> 02:45:13,440
कुत्ता जो है दातो से चबा के खाना खाता है स्वान जानते हो स्वान

2271
02:45:13,440 --> 02:45:18,040
हिंदी में कुत्ता कहते हैं शु हिंदी में स्वान जी जी समझता

2272
02:45:18,040 --> 02:45:22,080
ठीक है स्वान जो है दांतों से चबा केर खाना खाता

2273
02:45:22,080 --> 02:45:27,240
है अब जैसे रामपाल दास जी अपने लिए कह भी रहे हैं कि मैं कुत्ता हूं

2274
02:45:27,240 --> 02:45:31,360
और वो भी दांतों से ही चबा के खाना खाते हैं तो

2275
02:45:31,360 --> 02:45:35,440
क्या केवल इतने मात्र से कि कुत्ते ने दांतों से चबा के खाना खाया और

2276
02:45:35,440 --> 02:45:39,920
उन्होंने भी दांतो से छवा के खाना खाया इसलिए कुत्ता और रामपाल

2277
02:45:39,920 --> 02:45:42,560
एक हो जाएंगे

2278
02:45:42,560 --> 02:45:47,040
क्या नहीं उसका भाव देखना पड़ता है कहां कैसा नहीं

2279
02:45:47,040 --> 02:45:51,200
मैं बोलने वाली बात पर नहीं बात कर रहा हूं बोल रहा हूं जैसे कुत्ता भी दातो से चबा के खाना

2280
02:45:51,200 --> 02:45:55,320
खाता है और रामपाल दास भी खाते हैं हम भी खाते हैं ठीक है जी जी

2281
02:45:55,320 --> 02:45:59,480
जी क्या इस कारण से कुत्ते और रामपाल दास जी को एक मान

2282
02:45:59,480 --> 02:46:03,600
लिया जाएगा नहीं नहीं माना जाएगा और कब एक माना

2283
02:46:03,600 --> 02:46:08,120
जाएगा जब तक कुत्ते के सारे गुण रामपाल दास जी में ना मिलते हो

2284
02:46:08,120 --> 02:46:10,120
कब एक माना जाएगा

2285
02:46:10,120 --> 02:46:14,240
हा हा कब एक माना जाएगा जब तक गुण

2286
02:46:14,240 --> 02:46:18,280
रूप और ना मिले तब तक नहीं माना जा सारे के सारे

2287
02:46:18,280 --> 02:46:22,400
हम सारे सारे हा तो रामपा

2288
02:46:22,400 --> 02:46:26,480
जैसे आपने कहा ना कबीर सागर आप खूब मानो मगर वो सारा का सारा वेदों

2289
02:46:26,480 --> 02:46:30,480
से मैच नहीं खाता है कुछ एक बात अगर मैच खा गई तो उसके आधार पर आप ये नहीं

2290
02:46:30,480 --> 02:46:34,680
कह सकते हो कि नहीं वो ज्ञान वेदों में नहीं है क्योंकि वेदों में दूसरा भी ज्ञान

2291
02:46:34,680 --> 02:46:39,000
है उसका खंडन हो रहा है आपके कारण

2292
02:46:39,000 --> 02:46:43,080
वेदों में दूसरा भी ज्ञान है उसका खंडन हो रहा है आप ये

2293
02:46:43,080 --> 02:46:47,160
बोला करो कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है खुब बोलो

2294
02:46:47,160 --> 02:46:51,360
हम भी बोलेंगे जी बोलेंगे भाई कबीर सागर में प्रमाण है बोल दो भैया

2295
02:46:51,360 --> 02:46:55,440
सब लोग कबीर सागर में प्रमाण है और आपके कबीर जो है

2296
02:46:55,440 --> 02:46:59,760
आपके लिए भगवान है बोल दिया कबीर पंथ के लिए कबीर भगवान

2297
02:46:59,760 --> 02:47:03,960
है हा विरोध किस चीज का है

2298
02:47:03,960 --> 02:47:08,200
देखिए क्या नाम है आकाश दास जी विरोध हमारा यह नहीं है कि आप कबीर दास को

2299
02:47:08,200 --> 02:47:13,400
भगवान मानते हो विरोध इस बात का है कि आप ये कहते हो कि वेदों में प्रमाण

2300
02:47:13,400 --> 02:47:17,880
है ऐसा विरोध इस बात का देखो परमात्मा

2301
02:47:17,880 --> 02:47:22,080
ने ये कबीर साहब ने स्वयं बताया है कि देखिए

2302
02:47:22,080 --> 02:47:25,320
हम हमारे लिए कबीर साहब की वाणी प्रमाण

2303
02:47:25,320 --> 02:47:29,320
नहीं है पहले तो ये समझ लो सुनो हमको प्रमाण के

2304
02:47:29,320 --> 02:47:33,400
रूप में वेद चाहिए हमको प्रमाण के रूप में पुराण चाहिए हमको कबीर सागर नहीं

2305
02:47:33,400 --> 02:47:37,520
चाहिए कबीर साहब ने क्या बोला नहीं चाहिए अगर उनकी कोई चीज

2306
02:47:37,520 --> 02:47:41,840
हमारी वेदों से मैच खाएगी जो वेदों का खंडन ना करती हो वेदों के बाहर ना हो

2307
02:47:41,840 --> 02:47:46,560
तो हम उनकी वाणी को ले लेंगे

2308
02:47:46,560 --> 02:47:50,560
बस जैसे जैसे जैसे आप वेदों

2309
02:47:50,560 --> 02:47:54,720
की वो बात लेंगे जो कबीर सागर से मैच करती हो ऐसे ही हम कबीर

2310
02:47:54,720 --> 02:47:58,840
सागर की सिर्फ वो बात लेते हैं जो वेद और पुराण से मैच

2311
02:47:58,840 --> 02:48:03,720
करती हो ट्स इट और यह बात महाभारत में लिखी भी

2312
02:48:03,720 --> 02:48:07,840
है यह बात अन्य शास्त्रों में लिखी ई है तुम्हारा जो फैक्ट फुल

2313
02:48:07,840 --> 02:48:11,840
वो दोगला अभिषेक है जो उसने भी बोला कि जो भी जो

2314
02:48:11,840 --> 02:48:15,840
भी ग्रंथ है उनका जो अर्थ है वो वेद के सीमा

2315
02:48:15,840 --> 02:48:19,880
में होना चाहिए अगर वेद के कोई बाहर जाएगा तो वो ले जाने वाला गधा

2316
02:48:19,880 --> 02:48:24,720
है ये वो है ये बोला उसने ऐ

2317
02:48:24,720 --> 02:48:28,960
वेद में जो लिखा है वो सत्य लिखा है लेकिन ऐसा है

2318
02:48:28,960 --> 02:48:34,280
देखिए वेद में सुनिए आप कह रहे वेद में लिखा है स क

2319
02:48:34,280 --> 02:48:38,480
र आप कह रहे वेद में जो लिखा है सत्य लिखा है हम कह रहे वेद

2320
02:48:38,480 --> 02:48:40,480
में सब कुछ जो लिखा है वो सब कुछ सत्य

2321
02:48:40,480 --> 02:48:44,600
लिखा है यह दिक्कत है आप सब कुछ नहीं मानते हैं स आप

2322
02:48:44,600 --> 02:48:49,480
सिर्फ उतना सत्य मानते जितना आपके कबीर सागर से मैच खाता है

2323
02:48:49,480 --> 02:48:54,640
समझ

2324
02:48:54,640 --> 02:48:58,720
रहे अब एक बात बताइए आप यह तो

2325
02:48:58,720 --> 02:49:02,720
हो गई य बात के शास्त्रों का आधार पर वो नहीं है कबीर सागर के आधार पर

2326
02:49:02,720 --> 02:49:07,120
आपका मामला ठीक अच्छी बात अब आप मुझे बात बताइए

2327
02:49:07,120 --> 02:49:11,120
गीता के साथ जो प लोक है वो पता करके आइएगा

2328
02:49:11,120 --> 02:49:15,400
और अब मुझे बात बताइए कि क्या

2329
02:49:15,400 --> 02:49:19,440
कबीर जो है वो सदैव था हमेशा से

2330
02:49:19,440 --> 02:49:23,680
था या नहीं था वो बताइए हां जी कबीर

2331
02:49:23,680 --> 02:49:27,760
जी ही सर्वप्रथम स प्रथम वही थे

2332
02:49:27,760 --> 02:49:31,840
कबीर साहब ही नहीं सर्वप्रथम नहीं वो

2333
02:49:31,840 --> 02:49:36,080
सदैव थे कि नहीं थे हा सदैव थे सदैव है और सदैव

2334
02:49:36,080 --> 02:49:40,200
रहेंगे सदैव थे सदैव है और सदैव रहेंगे तो

2335
02:49:40,200 --> 02:49:44,360
जो सबसे अंतिम जो दुनिया है वो कौन सी दुनिया उसका कुछ नाम

2336
02:49:44,360 --> 02:49:50,360
है क्या जी उसका नाम है सतलोक

2337
02:49:50,400 --> 02:49:54,440
उससे भिन्न तो कोई दुनिया नहीं है उससे भी

2338
02:49:54,440 --> 02:49:55,520
भिन्न है लेकिन उ

2339
02:49:55,520 --> 02:50:01,520
के तीन लोग है वो भी अजर अक लोग अनामी लोग और अगम

2340
02:50:01,680 --> 02:50:05,720
लोग नहीं नहीं उससे ऊपर उससे ऊपर तो कोई

2341
02:50:05,720 --> 02:50:10,040
लोग नहीं है हां उससे ऊपर है ये तीनों लोग

2342
02:50:10,040 --> 02:50:14,800
तलोक से ऊपर हां जी अच्छा

2343
02:50:14,800 --> 02:50:20,640
तलोक के ऊपर है तो सबसे एंड में कौन सा वो है

2344
02:50:20,640 --> 02:50:24,760
अनामी शिवम जी आप अपनी बात रख

2345
02:50:24,760 --> 02:50:29,040
लीजिए आपको एक मिनट ले रहा हूं मैं आकाश दास

2346
02:50:29,040 --> 02:50:33,160
बोलिए भैया इनसे यह पूछिए जोय लोग बकवास करते

2347
02:50:33,160 --> 02:50:37,600
हैं कि यह सक्षम वेद इनका जो कबीर सागर है यह पांचवा

2348
02:50:37,600 --> 02:50:41,640
वेद है यह भी कई लोग बकवा अरे वो अपने मन से करते हैं वो

2349
02:50:41,640 --> 02:50:45,760
अपने मन से करते बोल तो रहे कि हमारा जो आधार है व कबीर सागर है और क्या बोले

2350
02:50:45,760 --> 02:50:49,760
आदमी इतना सच बोल तो दिया और क्या

2351
02:50:49,760 --> 02:50:53,960
बोले हमारा आधार कबीर सागर है और

2352
02:50:53,960 --> 02:50:58,680
हमारा आधार वेद है हमारा

2353
02:50:58,680 --> 02:51:02,880
नहीं य तुम्हारा कबीर कहां

2354
02:51:02,880 --> 02:51:07,080
पर रहता है उस बारे में मुझे बात करने आ एक्सपर्ट

2355
02:51:07,080 --> 02:51:10,560
न मामलो का मुझे उस बारे में बात कर दज

2356
02:51:10,560 --> 02:51:15,160
ठीक है हा भाई तो सबसे अंतिम वाला जो लोग

2357
02:51:15,160 --> 02:51:19,440
है वो कौन सा है हां बता दो

2358
02:51:19,440 --> 02:51:24,560
दिया अरे एक बार और बता दो अनामी लोग अनामी

2359
02:51:24,560 --> 02:51:28,640
लोग तो ये जो अनामी लोग है इसमें कबीर स शरीर

2360
02:51:28,640 --> 02:51:32,920
रहता है या नहीं रहता है हां कबीर साहब जी

2361
02:51:32,920 --> 02:51:37,240
अपने स शरीर मतलब जो रूप में है परमात्मा एक मनुष्य

2362
02:51:37,240 --> 02:51:41,280
के रूप में रहते हैं हां ठीक बहुत बढ़िया

2363
02:51:41,280 --> 02:51:44,560
तो मुझे बता दो

2364
02:51:44,560 --> 02:51:49,200
कि जब सब कुछ उसी ने बनाया है कि नहीं बनाया है

2365
02:51:49,200 --> 02:51:54,080
जी सब कुछ उसी ने बनाया सारे लोक भी उसी ने बनाए

2366
02:51:54,080 --> 02:51:58,680
हां सारे लोकों की रचना उन्हीं ने की है अच्छा तो

2367
02:51:58,680 --> 02:52:02,720
जहां वो अनामी लोक है वो अनामी लोक

2368
02:52:02,720 --> 02:52:06,800
किसने बनाया कबीर साहब

2369
02:52:06,800 --> 02:52:10,920
ने जैसे मान लीजिए ये कबीर साब ये कबीर

2370
02:52:10,920 --> 02:52:14,920
साहब है हम समझ गए आपके भाव को समझ ग एक मिनट

2371
02:52:14,920 --> 02:52:19,480
एक मिनट मुझे बोल बोलने दीजिए ये कबीर साहब है मान लीजिए

2372
02:52:19,480 --> 02:52:23,720
जी अभी तक अनामी लोक नहीं है वो बनाने वाले हैं तो ये कहां खड़े

2373
02:52:23,720 --> 02:52:25,560
हैं उस समय

2374
02:52:25,560 --> 02:52:29,680
देखिए सर्वप्रथम को जब कोई लोग नहीं थे तब वो

2375
02:52:29,680 --> 02:52:33,680
कबीर साहब ही थे उनमें सब समस्त चराचर सब कुछ उन्हीं में विद्यमान

2376
02:52:33,680 --> 02:52:37,800
था नहीं नहीं उनमें था उनके बाहर उनके बाहर दुनिया थी कि

2377
02:52:37,800 --> 02:52:41,960
नहीं थी उनसे बाहर नहीं तब दुनिया नहीं थी उनके

2378
02:52:41,960 --> 02:52:46,000
बाहर स्पेस था कि नहीं स्पेस

2379
02:52:46,000 --> 02:52:50,960
स्पेस नहीं था कुछ भी नहीं था ड़ थे सर्वप्रथम

2380
02:52:50,960 --> 02:52:54,560
मनुष्य रूप

2381
02:52:54,560 --> 02:52:58,960
में मनुष्य रूप में परमात्मा तब नहीं थे तब

2382
02:52:58,960 --> 02:53:03,040
मालिक जो है उनका रूप अनित्य था और अनित

2383
02:53:03,040 --> 02:53:07,440
नहीं अरे मतलब परमात्मा का जो है वो रूप

2384
02:53:07,440 --> 02:53:11,560
हम बता नहीं सकते शब्दों में तरीके से

2385
02:53:11,560 --> 02:53:15,760
अरे बात तो मतलब जो परमात्मा का ये वाला रूप है यह जो रूप

2386
02:53:15,760 --> 02:53:19,840
है यह प्रकट नहीं था उस समय

2387
02:53:19,840 --> 02:53:24,520
हां ये रूप तब नहीं था यानी कि ये रूप शाश्वत नहीं

2388
02:53:24,520 --> 02:53:28,760
है अरे ये रूप शाश्वत ही है जब मालिक ने

2389
02:53:28,760 --> 02:53:32,920
आप कह रहे हो ना कि ये रूप तब नहीं था अरे भा

2390
02:53:32,920 --> 02:53:37,240
पहले बात तो पूरी समझिए ठीक है बताइए तब

2391
02:53:37,240 --> 02:53:40,760
परमात्मा ने सृष्टि की रचना की विषय में उनका विचार

2392
02:53:40,760 --> 02:53:44,960
आया तब उन्होंने अपने शब्द से ये लोग भाई साहब पहले

2393
02:53:44,960 --> 02:53:49,080
तो मेरी एक बात समझिए पहले मेरी एक बात समझिए मनुष्य

2394
02:53:49,080 --> 02:53:53,400
के रूप में विराजमान हुए यानी कि कोई समय ऐसा था

2395
02:53:53,400 --> 02:53:57,960
जब वो मनुष्य के रूप में नहीं थे सबसे पहले वो अपक रूप में

2396
02:53:57,960 --> 02:54:02,280
थे हां वो एक समय था सबसे पहले सबसे पहले

2397
02:54:02,280 --> 02:54:06,520
वो अपक रूप में थे जी जी तो उसको

2398
02:54:06,520 --> 02:54:11,200
क्या निराकार भी कहते हैं क्या ऐसा

2399
02:54:11,200 --> 02:54:15,240
तब वो निराकार रूप नहीं था लेकिन वो उनका एक रूप ऐसा था कि

2400
02:54:15,240 --> 02:54:20,280
कैसा रूप था वो बताओ कैसा रूप था कैसा रूप

2401
02:54:20,280 --> 02:54:24,320
भाई साहब देखो आगे की स्टोरी में सुनूंगा आपसे बहुत अच्छी है रोचक

2402
02:54:24,320 --> 02:54:30,320
है मैं सुनूंगा उनका कैसा रूप

2403
02:54:31,880 --> 02:54:36,640
था रूप का मतलब आ समझ लीजिए कि

2404
02:54:36,640 --> 02:54:40,960
उनके अंदर सब विद्यमान था हर

2405
02:54:40,960 --> 02:54:45,080
अी बताइए परमात्मा से अलग कुछ खाली जगह थी कि नहीं

2406
02:54:45,080 --> 02:54:49,240
थी खाली जगह परमात्मा से अलग मैं छोड़ दो मैं अभी इस

2407
02:54:49,240 --> 02:54:53,440
नहीं जा रहा हूं वो किस रूप में थे खाली जगह थी हा

2408
02:54:53,440 --> 02:54:57,760
श्य स्थान था सु स्न

2409
02:54:57,760 --> 02:55:02,120
अरे मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे परमात्मा अभी ऐसे रूप में है

2410
02:55:02,120 --> 02:55:06,120
जिसको देखा नहीं जा सकता जिसको सुना नहीं जा सकता जिसको छुआ नहीं जा

2411
02:55:06,120 --> 02:55:10,960
सकता ऐसे रूप में था ना परमात्मा सर्वप्रथम

2412
02:55:10,960 --> 02:55:15,200
जी जी तो फिर यहां तो उसका आविर्भाव होना सिद्ध

2413
02:55:15,200 --> 02:55:19,840
हो गया देखो आर्व

2414
02:55:19,840 --> 02:55:23,840
परमात्मा का अविर भाव और जो त्र भाव जो यह है

2415
02:55:23,840 --> 02:55:27,840
वो ना उनके जन्म हुआ ना उनकी मृत ई अरे मेरे

2416
02:55:27,840 --> 02:55:31,840
भाई मैं अभी आर भाव की बात कर रहा हूं पहली बात तो ये

2417
02:55:31,840 --> 02:55:35,920
है अगर आप ये मान रहे हैं कि सबसे पहले वह ऐसी अवस्था में था

2418
02:55:35,920 --> 02:55:39,920
जिसका कोई रूप नहीं होता अब तुम उसको मानो नहीं कि मैं वो

2419
02:55:39,920 --> 02:55:43,960
निराकार है बात अलग है तुमने कहा उसका कोई रूप नहीं होता ठीक

2420
02:55:43,960 --> 02:55:48,360
है अब उसका कोई रूप नहीं है मैं उसको निराकार नहीं बोल रहा मगर जो

2421
02:55:48,360 --> 02:55:52,720
उसका रूप तुम मान रहे हो उस रूप का आविर्भाव हुआ

2422
02:55:52,720 --> 02:55:57,440
ना प्रकट हुआ ना वो

2423
02:55:57,440 --> 02:56:01,680
अरे तो वो प्रकट हुए या उन्होंने मतलब प्रकट प्रकट हुआ

2424
02:56:01,680 --> 02:56:05,880
प्रकट प्रकट हुआ

2425
02:56:05,880 --> 02:56:11,880
ना हां यानी कि आविर्भाव

2426
02:56:12,800 --> 02:56:16,920
हुआ ठीक ठीक अच्छा तो पहली

2427
02:56:16,920 --> 02:56:21,320
बात तो यहां पर स हो गया अब दूसरी बात मैं कह रहा हूं

2428
02:56:21,320 --> 02:56:25,840
कि जिस समय परमात्मा किसी ऐसे रूप में था

2429
02:56:25,840 --> 02:56:30,000
जो जिसका कोई रूप नहीं है उस समय

2430
02:56:30,000 --> 02:56:34,000
क्या परमात्मा से अलग थोड़ी बहुत जगह जिसमें

2431
02:56:34,000 --> 02:56:38,440
की परमात्मा खुद को प्रकट करे वो थी कि नहीं

2432
02:56:38,440 --> 02:56:42,440
थी थी बता तो रहा हूं सुन्य स्थान था

2433
02:56:42,440 --> 02:56:46,480
अरे भाई सुन्य स्थान का मतलब जैसे मान के चलिए

2434
02:56:46,480 --> 02:56:51,480
1015 किलोमीटर का एरिया या अनंत

2435
02:56:51,480 --> 02:56:55,520
मतलब की जो परमात्मा ने प्रकट होने से पहले जब

2436
02:56:55,520 --> 02:56:59,760
वो अप प्रकट था तब तक उसने यह जो शून्य

2437
02:56:59,760 --> 02:57:04,240
स्थान है उसको उसने नहीं बनाया जी जी श

2438
02:57:04,240 --> 02:57:08,320
स्थान को उसने नहीं बनाया नहीं यानी वह सब कुछ

2439
02:57:08,320 --> 02:57:12,360
बनाने वाला रचयिता नहीं है क्यों नहीं सब कुछ उसी ने

2440
02:57:12,360 --> 02:57:18,360
रचना की आप ही तो क श स्थान को उसने नहीं बनाया

2441
02:57:20,800 --> 02:57:25,000
अरे बनाया सब उन्हीं ने है फिर वही बात अभी आपने कहा श्य

2442
02:57:25,000 --> 02:57:29,640
स्थान उन्होंने नहीं

2443
02:57:29,640 --> 02:57:33,960
बनाया श्य स्थान के बारे में कल कन्फर्म करके बता देंगे

2444
02:57:33,960 --> 02:57:38,000
बहुत बढ़िया आप सच्चे व्यक्ति है अपना नाम बदल के मत आया

2445
02:57:38,000 --> 02:57:44,000
कर आकाश तिवारी रख के मत आया कर ठीक है कल आइए

2446
02:57:49,320 --> 02:57:54,000
विल जी जय श्री राम

2447
02:57:54,000 --> 02:57:58,280
जय श्री राम जय श्री राम बहुत बहुत बधाई आपको अरे बहुत

2448
02:57:58,280 --> 02:58:02,720
बहुत अच्छे से गौ माता की कल सेवा की है वीडियो डालेंगे एक दिन में हम

2449
02:58:02,720 --> 02:58:06,880
लोग और यह थोड़े से थोड़े थोड़े

2450
02:58:06,880 --> 02:58:11,400
ठीक व्यक्ति है स जहां पर जो सच होता है उसको फर बोलते हैं

2451
02:58:11,400 --> 02:58:15,760
अब खुल के उन्होने बोला जो बात य लोग नहीं बोलते य हमारा अंतिम प्रमाण

2452
02:58:15,760 --> 02:58:19,960
वेद नहीं है हमारा अंतिम प्रमाण क्या है कबीर सागर कबीर

2453
02:58:19,960 --> 02:58:25,120
सागर हमारा अंतिम प्रमाण भद है

2454
02:58:25,120 --> 02:58:29,120
िक व है सनातनी व है जिसका अंतिम प्रमाण वेद

2455
02:58:29,120 --> 02:58:33,320
है सुनिए मैं य चल सकता है इस एक वीडियो

2456
02:58:33,320 --> 02:58:35,880
दिखानी है मुझे आपको सबको नहीं

2457
02:58:35,880 --> 02:58:39,920
असल में व वीडियो आप पहले से देनी होगी क्योंकि वीडियो दे देते हैं ना दिखा

2458
02:58:39,920 --> 02:58:44,040
देते सीधे सधे कुछ इशू होते हैं टेक्निकल तो वीडियो

2459
02:58:44,040 --> 02:58:48,080
मैं आपको इ प डीम कर दू कहा आप अपने मोबाइल में दिखा सकते जसे

2460
02:58:48,080 --> 02:58:52,120
दसरा मोबाइल हो कोई उसम प्ले करके दिखा सकते हैं

2461
02:58:52,120 --> 02:58:56,400
पता नहीं ना कि मैं यय कैसे चल रहा हूं इतना भी मुझको दूसरा

2462
02:58:56,400 --> 02:59:00,400
दूसरा मोबाइल जैसे इससे आप बात कर रहे हो और दूसरा

2463
02:59:00,400 --> 02:59:04,440
मोबाइल प आप प्ले करके थोड़ा आवाज सुना दो अच्छा तो

2464
02:59:04,440 --> 02:59:08,960
एक सेकंड में लेकर आता हूं ठीक है जी एक सेकंड

2465
02:59:08,960 --> 02:59:13,440
आ जाइ वेदों में परमात्मा

2466
02:59:13,440 --> 02:59:17,440
की स्तुति कैसी की जाती है उसके बारे में किस तरीके से बताया जाता है थोड़ा

2467
02:59:17,440 --> 02:59:21,840
बहुत बगा यजुर्वेद का 31 31

2468
02:59:21,840 --> 02:59:26,040
और 32 अध्याय है उस परमात्मा के बारे में क्या लिखा

2469
02:59:26,040 --> 02:59:30,440
है परम पुरुष हजारों सिर वाला हजारों नेत्रों

2470
02:59:30,440 --> 02:59:34,720
वाला व हजारों पैर वाला है वह परम पुरुष सारे ब्रह्मांड

2471
02:59:34,720 --> 02:59:38,920
को घेर कर भी 10 अंगुल ऊपर अधिक तट है जो

2472
02:59:38,920 --> 02:59:43,080
हो चुका है जो होने वाला है वह परम पुरुष ही है वह अमरता का स्वामी

2473
02:59:43,080 --> 02:59:48,080
है जो अन्य से बढ़ोतरी पाते हैं उनके भी व स्वामी है

2474
02:59:48,080 --> 02:59:51,120
परम पुरुष अत्यंत महिमा वान है इनके चरणों

2475
02:59:51,120 --> 02:59:55,120
में सभी प्राणी है इसका इनका एक भाग पृथ्वी

2476
02:59:55,120 --> 02:59:59,240
पर है जिसमें सब प्राणी है और तीन भाव तीन भाग कौन

2477
02:59:59,240 --> 03:00:02,360
सा कौन सा पढ़

2478
03:00:02,360 --> 03:00:06,280
रहे यजुर्वेद 3

2479
03:00:06,280 --> 03:00:10,280
अध्याय और इसमें देखो और जब इसका

2480
03:00:10,280 --> 03:00:15,120
तुम सवा 18

2481
03:00:15,120 --> 03:00:19,200
मंत्र पढ़ोगे उसम क्या लिखा है परम पुरुष को जानने से परम

2482
03:00:19,200 --> 03:00:23,600
तत्व की प्राप्ति होती वह अंधकार से परे है वह आदित्य जैसे वर्ण

2483
03:00:23,600 --> 03:00:27,600
के हैं उसको उनको जानने के जानकर जो मृत्यु

2484
03:00:27,600 --> 03:00:32,080
के पथ पर जाते हैं उन्हें उस पथ से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है

2485
03:00:32,080 --> 03:00:36,600
इसके अलावा मोक्ष का कोई दूसरा मार्ग नहीं है और

2486
03:00:36,600 --> 03:00:41,280
20 बावे मंत्र में क्लियर किया कि वोह कौन है

2487
03:00:41,280 --> 03:00:46,040
हे परम पुरुष श्री लक्ष्मी आपकी पत्नी है कौन हुए

2488
03:00:46,040 --> 03:00:50,080
हे परम पुरुष श्री आप श्री लक्ष्मी आपकी पत्नी है दोनों भुजाएं

2489
03:00:50,080 --> 03:00:54,120
दिन और रात है नक्षत्र आपके रूप हैं आप सबकी

2490
03:00:54,120 --> 03:00:58,160
इच्छा पूर्ति की सामर्थ्य रखते हैं आप सभी लोगों की इच्छा पूर्ति

2491
03:00:58,160 --> 03:01:02,320
की पूर्ति करने की कृपा कीजिए इसमें 22

2492
03:01:02,320 --> 03:01:06,360
मंत्र है 31 अध्याय

2493
03:01:06,360 --> 03:01:11,000
और 32 31 में 22 है और 32 32 में तुम्हारे

2494
03:01:11,000 --> 03:01:15,000
हैं 16 16 और 22

2495
03:01:15,000 --> 03:01:19,320
38 मंत्रों में पूरी व्याख्या की गही है

2496
03:01:19,320 --> 03:01:24,280
परम पुरुष की व्याख्या हो गई परम पुरुष जो है लक्ष्मी पति

2497
03:01:24,280 --> 03:01:28,440
विष्णु हा विशाल जी बोलिए पहाड़ी जीने जोभी

2498
03:01:28,440 --> 03:01:33,120
बताया उसी पर वीडियो लाया य देखि इनको आप जानते ही होंगे

2499
03:01:33,120 --> 03:01:37,880
य आवा सुना दीजिए व दिख नहीं रहा स्क्रीन में

2500
03:01:37,880 --> 03:01:43,880
आवाज सुना आवाज आ रही

2501
03:01:45,000 --> 03:01:50,160
है उसका जो स्पीकर है

2502
03:01:50,160 --> 03:01:54,160
ना उसका जो स्पीकर है ना वो आप बिल्कुल य

2503
03:01:54,160 --> 03:01:59,280
जो इसका जो होता है ना बोलने वाला वहां पर कर उसका स्पीकर

2504
03:01:59,280 --> 03:02:03,520
नीचे में हा जहा पर वो हा जहां से बोलते

2505
03:02:03,520 --> 03:02:07,960
हैं ना फोन में नीचे की साइड से वहा पर आप उसका स्कर

2506
03:02:07,960 --> 03:02:13,360
लगा जोड़ दे रहा इनको आप ऐसा

2507
03:02:13,360 --> 03:02:18,040
करो मेरी इंस्टा आईडी पर उसका लिंक मैसेज कर दो वीडियो का

2508
03:02:18,040 --> 03:02:22,440
एक सेकंड वो मैं इस दिखाना सभी लोग देखे रुकिए

2509
03:02:22,440 --> 03:02:26,560
ऐसा करो हो गया इंतजाम कर दिया है आप इसका लिंक भेज दीजिए मेरी

2510
03:02:26,560 --> 03:02:31,080
इं आईडी ठीक है मैं इसका लिंक भेज दूंगा आपको

2511
03:02:31,080 --> 03:02:35,160
अभी भेज दीजिए वही बताने अभी बोला

2512
03:02:35,160 --> 03:02:39,520
अच्छा नहीं आप आप भेजिए तो हम दिखा देंगे

2513
03:02:39,520 --> 03:02:43,600
अभी दिखा देंगे भेजता हूं भेजता

2514
03:02:43,600 --> 03:02:47,840
हं अगर उसके लिए आउट होना पड़े ना तो आउट हो जाइएगा थोड़ी देर

2515
03:02:47,840 --> 03:02:52,080
के लिए फिर आ जाइए ंश भाई एक जो मंत्र है ना वो चारों वेदों

2516
03:02:52,080 --> 03:02:56,080
में मिलेगा तुमको सहस्त्र शीर्ष पुरष चैट पर

2517
03:02:56,080 --> 03:03:00,040
चैट पर दे दीजिए चैट पर भी मांग रहे दे दीजिए विशाल जी चैट

2518
03:03:00,040 --> 03:03:04,120
पर दे दीजिए आप कर देंगे इस आपका लाइव स्ट्रीम

2519
03:03:04,120 --> 03:03:09,160
हमारे टेक्निशियन आ ग भैया हमें टेक्निक मालूम नहीं है ज्यादा

2520
03:03:09,160 --> 03:03:14,080
हमें व्यक्ति को कैसे फसाना है ये आता है

2521
03:03:14,080 --> 03:03:18,120
ये चैट प शेर कर उस तो हम आही रहे कर दीजिए चैट प कर दीजिए जी जी

2522
03:03:18,120 --> 03:03:22,360
कह रहा हूं कह रहा हूं अच्छा एक बात एक बात आप माननी

2523
03:03:22,360 --> 03:03:26,720
पड़ेगी भाई सामने वालों के मुख से भी अपने लिए वो निकलवाना सकारात्मक

2524
03:03:26,720 --> 03:03:30,880
चीजें ये बहुत टेढ़ी बात होती है

2525
03:03:30,880 --> 03:03:34,880
जैसे इनके पवन दास जी को बोलना पड़ गया कि भैया वो जो है कांटे के सवाल पूछता

2526
03:03:34,880 --> 03:03:39,880
है है ना अभी एक व्यक्ति लिख रहा है कि आपको ज्ञान बहुत

2527
03:03:39,880 --> 03:03:43,960
है चलिए कोई आना चाह रहा है मैं ट्र जाता हूं मगर वो

2528
03:03:43,960 --> 03:03:48,240
शास्त्र विरुद्ध है देखो अभी किसी

2529
03:03:48,240 --> 03:03:52,040
ने बोला था अभी एक मिनट

2530
03:03:52,040 --> 03:03:58,040
पहले अरे किसी ने बोला है

2531
03:03:58,760 --> 03:04:02,920
भाई यह लोग कभी इतना जाते नहीं ना उसके बारे में सोचने के

2532
03:04:02,920 --> 03:04:07,840
लिए यह देखिए देखिए ये देखिए क्या बोल रहे हैं

2533
03:04:07,840 --> 03:04:12,840
शिवांश भाई आपके पास दिमाग बहुत है लेकिन शास्त्र विरुद्ध

2534
03:04:12,840 --> 03:04:17,000
साधना ये बात भी ये बात भी विरोधी के मुख से निकलवाना

2535
03:04:17,000 --> 03:04:22,120
मुश्किल होता है

2536
03:04:22,120 --> 03:04:26,560
ये तड़प में नि लिखा गया है तड़प तड़पा है व यार

2537
03:04:26,560 --> 03:04:30,560
ये कहां तक पहुंच गया

2538
03:04:30,560 --> 03:04:34,600
यजुर्वेद जी एक चीज बताऊंगा यजुर्वेद के 32

2539
03:04:34,600 --> 03:04:38,600
अध्याय का पांचवा मंत्र है उसमें परम पुरुष की बात हो रही है इसमें श्री कृष्ण

2540
03:04:38,600 --> 03:04:42,800
भगवान का भी इसमें व्याख्या की गई है जिससे पहले

2541
03:04:42,800 --> 03:04:46,960
कोई उत्पन्न नहीं हुआ उस परमात्मा से सभी लोग उत्पन्न हुए वह

2542
03:04:46,960 --> 03:04:51,000
परम पुरुष प्रजा के साथ रहते हैं वह परम पुरुष तीन ज्योति को

2543
03:04:51,000 --> 03:04:55,240
धार हैं तीन ज्योतिया कौन अग्नि सूर्य और विद्युत ये कौन है श्री

2544
03:04:55,240 --> 03:04:59,360
क जी के वो थे प्रजा के साथ रहने वाले प्रजापति 16

2545
03:04:59,360 --> 03:05:03,520
कला के कलाओ के स्वामी है 16 कलाओ के स्वामी कौन थे भगवान

2546
03:05:03,520 --> 03:05:07,080
श्री कृष्ण और कोई नहीं तो यहां पर श्री

2547
03:05:07,080 --> 03:05:09,960
कृष्ण का नाम भी आ

2548
03:05:09,960 --> 03:05:14,080
गया य जवेद कावा अध्याय है पांचवा मंत्र

2549
03:05:14,080 --> 03:05:18,120
किसी को सक हो तो पढ़ लेना नहीं नहीं काफी है

2550
03:05:18,120 --> 03:05:23,000
इतना काफी है

2551
03:05:23,000 --> 03:05:27,000
तो अभी एक बात और है

2552
03:05:27,000 --> 03:05:31,160
इन्होंने यह माना कि सबसे पहले जो परमेश्वर था

2553
03:05:31,160 --> 03:05:37,160
वो जो है अप्रकृतिक

2554
03:05:48,320 --> 03:05:52,120
सुजीत जी कैसे हैं जय श्री

2555
03:05:52,120 --> 03:05:56,160
राम मैंने भेज बार चला दीजिए अरे

2556
03:05:56,160 --> 03:06:00,160
सुनो ना इनको पहले तो संस्कृत का ज्ञान नहीं है संस्कृत का ऐसा

2557
03:06:00,160 --> 03:06:04,200
मतलब व्याख्यान करेंगे कि इनको संधि का पता नहीं है कि सर्ग संधि के

2558
03:06:04,200 --> 03:06:08,200
नियम क्या है जो है व्यंजन संधि में किस तरह का व्यंजन संधि क्या

2559
03:06:08,200 --> 03:06:13,160
होता है हां दिखाओ

2560
03:06:13,160 --> 03:06:17,240
भाई राम राम भैया जय श्री राम ज जय

2561
03:06:17,240 --> 03:06:20,160
माता

2562
03:06:20,160 --> 03:06:25,200
दोस्त लोकी जी कहां

2563
03:06:25,200 --> 03:06:29,200
गए मैंने आज चैट पर वीडियो सेंड की है शेयर कर दी

2564
03:06:29,200 --> 03:06:33,240
मैंने अब की तो है अब हमारे जो टेक्नोलॉजी वाले हैं वह दिखाएंगे

2565
03:06:33,240 --> 03:06:37,320
थोड़ा सा थोड़ा सा घर रखिए व दिखा रहे होंगे दिखा दीजिए मतलब उनको

2566
03:06:37,320 --> 03:06:41,960
आप बोल दीजिए बहुत सरी वीडियो है हा हा दिखाएंगे

2567
03:06:41,960 --> 03:06:47,960
सुजीत जी जय श्री राम

2568
03:06:48,600 --> 03:06:52,680
बाबू राम जी वापस आए हैं लेना है

2569
03:06:52,680 --> 03:06:57,200
क्या काफी देर हो गई तीन घंटे तो हो ही गए तो ठीक है ऑफ करते

2570
03:06:57,200 --> 03:07:01,360
हैं बाबूराम जी फिर किसी दिन आइएगा तीन

2571
03:07:01,360 --> 03:07:07,280
घंटे हो चुके हैं थक गए दो दो लोगों से बात कर ली गले में खराश आ जाती है

2572
03:07:07,280 --> 03:07:11,280
बा कौन जो परस आए बात करलो सुनो ना यार कितना भी

2573
03:07:11,280 --> 03:07:15,440
बात करलो ये लोग मानने वाले हैं नहीं नहीं नहीं ठीक है वो

2574
03:07:15,440 --> 03:07:19,560
लोग लोग तो सुन रहे हैं देख रहे हैं ना ना ये ठीक

2575
03:07:19,560 --> 03:07:24,320
है देखो हमने तो यहां तक कहा एक दो लोगों से हमने यहां तक कहा कि देखो यार

2576
03:07:24,320 --> 03:07:28,400
सत्य ही शिव है शिव ही सुंदर है अद्वैत में जाओगे आप तो अद्वैत

2577
03:07:28,400 --> 03:07:32,760
में सबके अंदर वही परम पुरुष परमात्मा है ठीक तो आप कबीर

2578
03:07:32,760 --> 03:07:35,480
में मानते हो तो ठीक है कोई ना आप कबीर में ही मानो

2579
03:07:35,480 --> 03:07:39,480
बट ये मत चिल्लाओ कि कबीर ही परमात्मा है अरे इनका तो हद

2580
03:07:39,480 --> 03:07:43,640
हो गया ये यार ये कहते हैं कि कबीर का बेटा काल काल का बेटा

2581
03:07:43,640 --> 03:07:47,720
जो है ब्रह्मा विष्णु महेश हद पागल पंथी है कहां से

2582
03:07:47,720 --> 03:07:51,760
ता आप भगवान को कबीर नाम से पूज रहे हो तो उतने में कोई

2583
03:07:51,760 --> 03:07:55,800
दिक्कत नहीं है पहली बात तो ये है कि

2584
03:07:55,800 --> 03:07:59,880
यह सब ले रहे हो ब्रह्मा विष्णु महेश ये नहीं है वो नहीं अपना प्रचार करने के लिए

2585
03:07:59,880 --> 03:08:04,000
अरे या इतने पागल है सुन य इतने पागल है इनको नहीं समझ

2586
03:08:04,000 --> 03:08:08,320
में आ रहा है कि कबीर का बेटा काल बना दे रहे हैं यह

2587
03:08:08,320 --> 03:08:12,320
हद हो गई अगर यह थोड़ा सा अद्वैत को

2588
03:08:12,320 --> 03:08:16,320
जाने तभी इनका मैटर सॉल्व हो जाए ऑपरेटर जी

2589
03:08:16,320 --> 03:08:21,440
इनका लिंक आपको तो इनका वो दिखा दीजिए

2590
03:08:21,440 --> 03:08:25,600
और जो आज काउंटर क्वेश्चन करने आए हैं चर्चा के लिए बाबू

2591
03:08:25,600 --> 03:08:31,080
राम जी और रामपाल आपका क्या नाम है क्रिश्चियन है ना

2592
03:08:31,080 --> 03:08:35,080
तो रामपाल करके कुछ लिखा है आप तो क्रिश्चियन

2593
03:08:35,080 --> 03:08:39,240
है ना आधा घंटे के लिए ले लीजिए

2594
03:08:39,240 --> 03:08:44,080
आ घंटे देखलो आप क्रिश्चियन है ना पहले आ चुके

2595
03:08:44,080 --> 03:08:48,080
अच्छा एकज और हमने नोटिस किया सुनो वो बाइबल

2596
03:08:48,080 --> 03:08:50,680
में बोलते हैं ये बोलते हैं आप आप ही तो थे हां

2597
03:08:50,680 --> 03:08:55,080
हां अरे एक चीज हमने और नोटिस किया इनके जितने भी वो

2598
03:08:55,080 --> 03:08:59,240
सिद्धांत है ना वो आप देखोगे तो वो कहीं ना कहीं बाइबल

2599
03:08:59,240 --> 03:09:03,480
से जो है मिलते जुलते हैं अरे वो वो है बाइबल

2600
03:09:03,480 --> 03:09:07,640
और कुरान से ज्यादा मैच करते हैं मेरी बात सु हा और हां

2601
03:09:07,640 --> 03:09:11,840
बोलो भाई अग कोई अगर कोई अब्राहम अब्राहम रिलीजन का और भद

2602
03:09:11,840 --> 03:09:16,160
का ज्ञान मैच करने की कोशिश करेगा ना तो कभी नहीं मैच होनागा मैं आपको पूछ रहा हूं

2603
03:09:16,160 --> 03:09:21,000
मैं आपको ये पूछ रहा हूं आप तो क्रिश्चियन है ना हां जी हां

2604
03:09:21,000 --> 03:09:25,680
तो आप वो वाली बात करिए क्रिश्चियन वाली इसको छोड़िए रामपाल जी की

2605
03:09:25,680 --> 03:09:30,120
नहीं जी वो छोड़ दो आप मैं कह रहा हूं कि जो अगर

2606
03:09:30,120 --> 03:09:34,240
कोई भी रामपाल नहीं कह रहा कोई भी अगर कुरान का

2607
03:09:34,240 --> 03:09:38,240
बाइबल का और इससे वेद ज्ञान मैच करने की कोशिश करेगा तो कभी

2608
03:09:38,240 --> 03:09:42,440
मैच नहीं होने का कभी नहीं मैच होनागा बिल्कुल अलग मैच नहीं होगा

2609
03:09:42,440 --> 03:09:46,640
क्योंकि जो अब्राम जो ब्रा जो वो है उसमें

2610
03:09:46,640 --> 03:09:51,120
जो है ईश्वर सृष्टि से अलग है अलग है हा

2611
03:09:51,120 --> 03:09:55,560
और यह जो वैदिक है इसमें ईश्वर ही सृष्टि है ईश्वर ही

2612
03:09:55,560 --> 03:09:56,060
संसार

2613
03:09:55,960 --> 03:10:00,000
है सब कुछ ईश्वर ब्र ब्रह्मण से पैदा हुआ मैं समझ गया बा थोड़ा पढ़

2614
03:10:00,000 --> 03:10:04,240
था ब्रह्मण से पैदा हुआ

2615
03:10:04,240 --> 03:10:09,160
तो आप आए क्यों है क्या करना है आपको क्या बताना है

2616
03:10:09,160 --> 03:10:13,760
बस ऐसे ही आ गया था कलने

2617
03:10:13,760 --> 03:10:17,760
आए आप आप जो है ये जो आप

2618
03:10:17,760 --> 03:10:22,680
है अपनी बात रखने आए हैं अपनी बात रखना य बता तो सही रहे

2619
03:10:22,680 --> 03:10:23,800
मैं आपको ये पूछ रहा

2620
03:10:23,800 --> 03:10:27,920
हूं मैं कि आप जो है

2621
03:10:27,920 --> 03:10:32,480
ये ईसा मसीह में बिलीव करते हैं बाइबल में बिलीव करते हैं

2622
03:10:32,480 --> 03:10:36,600
जी जी करता हूं अ तो बाइबल

2623
03:10:36,600 --> 03:10:40,680
के अनुसार जो वो है

2624
03:10:40,680 --> 03:10:44,760
क्या कहते हैं ईश्वर वो सर्वशक्तिमान

2625
03:10:44,760 --> 03:10:48,920
है हां जी सर्वशक्तिमान है सब कुछ कर सके वो सब

2626
03:10:48,920 --> 03:10:53,000
कुछ कर सकता है जी सब कुछ कर सके तो उसका जो फाइनल

2627
03:10:53,000 --> 03:10:57,120
रूप है फाइनल रूप जिसको चेंज नहीं कर

2628
03:10:57,120 --> 03:11:01,480
जो चेंज नहीं होता कभी नित्य वो कौन सा रूप है

2629
03:11:01,480 --> 03:11:05,680
वो साकार भी है वो निराकार भी है वो साकार

2630
03:11:05,680 --> 03:11:09,720
भी है व निराकार भी है जी बिल्कुल अच्छा मतलब उसका कोई

2631
03:11:09,720 --> 03:11:14,600
एक फिक्स रूप नहीं है फिक्स रूप नहीं है उसका अच्छा

2632
03:11:14,600 --> 03:11:18,600
तो जी उसका फिक्स यानी कि वो जो प्राथमिक रूप हो गया व

2633
03:11:18,600 --> 03:11:22,760
निराकार ही हो गया ना निराकार से साकार निकल रहा है ऐसा हां

2634
03:11:22,760 --> 03:11:27,040
कुछ ऐसा समझ लो अच्छा यह प्रूफ कहां पर लिखा

2635
03:11:27,040 --> 03:11:31,320
है ई प्रूफ मतलब लिखा नहीं है देखो एजेक्ट एकदम

2636
03:11:31,320 --> 03:11:35,760
लिखा नहीं होता एट नहीं मिलता जलता मिलता जुलता

2637
03:11:35,760 --> 03:11:38,840
हा अगर किसी को परमेश्वर अगर किसी को दर्शन देने के लिए

2638
03:11:38,840 --> 03:11:43,480
आते है तो साकार रूप में आते है

2639
03:11:43,480 --> 03:11:47,800
बाकी जो परमेश्वर में है वो निराकार है

2640
03:11:47,800 --> 03:11:51,880
हां ऐसे ही समझ लो अच्छा तो परमेश्वर कितनी बार

2641
03:11:51,880 --> 03:11:56,080
आए हैं जी परमेश्वर कितनी बार आए

2642
03:11:56,080 --> 03:12:00,800
हैं धरती पर कहां कहां पर धरती हा

2643
03:12:00,800 --> 03:12:04,800
धरती पर परमेश्वर यीशु मसीह के रूप में 2000 साल पहले

2644
03:12:04,800 --> 03:12:09,680
आए थे जो आप पढ़ते हो जी

2645
03:12:09,680 --> 03:12:14,200
2000 साल पहले जी दोबारा दोबारा भी आ सकते हैं

2646
03:12:14,200 --> 03:12:18,360
दोबारा आगमन होगा उनका ऐसा बता

2647
03:12:18,360 --> 03:12:22,360
दोबारा क होगा लगभग दोबारा मतलब कुछ

2648
03:12:22,360 --> 03:12:26,600
कह नहीं सकते लेकिन दोबारा आगमन होगा उनका उन्होंने कुछ चिन बता रखे है अपने आने

2649
03:12:26,600 --> 03:12:30,680
प ठीक है अभी मैं ये पूछ रहा हूं ये जो सृष्टि है पूरी सृष्टि

2650
03:12:30,680 --> 03:12:34,920
उन्होंने ही बनाई है जी बिल्कुल उन्होने बनाई स

2651
03:12:34,920 --> 03:12:39,040
सृष्टि तो वो जब उन्होंने सृष्टि

2652
03:12:39,040 --> 03:12:43,160
बनाई है तो वो सबसे पहले जब सृष्टि नहीं थी तो वो

2653
03:12:43,160 --> 03:12:48,200
किस रूप में विद्यमान थे और उनसे अलग जो शृष्टि थी वो किस रूप में

2654
03:12:48,200 --> 03:12:52,440
मानती सृष्टि मतलब सृष्टि उन्होने बनाई सृष्टि

2655
03:12:52,440 --> 03:12:54,240
से पहले भी थे

2656
03:12:54,240 --> 03:12:59,080
किस रूप में क्या हवा थे निराकार थे क्या थे

2657
03:12:59,080 --> 03:13:03,520
निराकार ही थे तो वास्तविक स्वरूप उनका निराकार हुआ

2658
03:13:03,520 --> 03:13:07,720
हां वास्तविक निराकार हुआ यह कहां लिखा

2659
03:13:07,720 --> 03:13:12,800
है यह बाइबल में लिखा है कहां

2660
03:13:12,800 --> 03:13:18,600
उत्पत्ति ग्रंथ में उत्पत्ति ग्रंथ बताइए बाइबल है मेरे पास

2661
03:13:18,600 --> 03:13:19,440
उत्पत्ति दे

2662
03:13:19,440 --> 03:13:23,480
स्पष्ट लिखा है मतलब जि परमेश्वर शुरुआत में

2663
03:13:23,480 --> 03:13:27,640
वास्तविक स्वरूप निराकार है कहां लिखा है और अगर

2664
03:13:27,640 --> 03:13:31,680
वह उस रूप में आते हैं जीसस वाले रूप में तो वह रूप अस्थाई

2665
03:13:31,680 --> 03:13:35,760
रूप है ना व तो थोड़ी देर के लिए बनाते हैं फिर अपने वास्तविक रूप

2666
03:13:35,760 --> 03:13:40,200
में निराकार वाले में चले जाते हैं हा जी हा जी है

2667
03:13:40,200 --> 03:13:42,480
ना और दूसरी बात यह है

2668
03:13:42,480 --> 03:13:47,480
कि वो जब निराकार रूप में थे तो उनसे अलग

2669
03:13:47,480 --> 03:13:53,480
कुछ खाली जगह पड़ी थी या नहीं पड़ी थी स्पेस था कि नहीं

2670
03:13:53,480 --> 03:13:58,040
था देखिए मैं आपको बता दूं

2671
03:13:58,040 --> 03:14:02,280
इसके बारे में यह प्रश्न मेरे मन में है

2672
03:14:02,280 --> 03:14:06,440
ज पूछ रहे हो मतलब आपके आपका क्लियर नहीं है अभी कि

2673
03:14:06,440 --> 03:14:10,600
इसका क्या मामला है ये वाला मेरा थोड़ा क्लियर नहीं है देखो लंबी ख इनकी

2674
03:14:10,600 --> 03:14:13,320
तो रामपाल

2675
03:14:13,320 --> 03:14:17,320
ती देखि मैं एक बात बता रहा हूं हर

2676
03:14:17,320 --> 03:14:21,320
व्यक्ति के मन में तीन प्रकार की प्यास है

2677
03:14:21,320 --> 03:14:22,760
असतो मा सद

2678
03:14:22,760 --> 03:14:26,880
गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्य मा मतम

2679
03:14:26,880 --> 03:14:31,160
गमाया मुझे सत से असत की ओर ले चलो

2680
03:14:31,160 --> 03:14:35,400
असतो मा सत गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया

2681
03:14:35,400 --> 03:14:39,600
मुझे अंधेरे से उजाले की ओर ले चलो और मृत्युर

2682
03:14:39,600 --> 03:14:43,720
मा मतम गमाया मुझे मृत्यु से अमृत्व की ओर ले चलो

2683
03:14:43,720 --> 03:14:47,320
ल है ना तो जब ये जो

2684
03:14:47,320 --> 03:14:51,320
है आपके अंदर की आत्मा की प्यास है और

2685
03:14:51,320 --> 03:14:55,320
यदि आप अपने जो आत्मा की प्यास है वह जानना चाहती है

2686
03:14:55,320 --> 03:15:00,040
कि एगजैक्टली मैं कौन हूं और मेरे को कहां जाना है मेरा उद्देश्य क्या है

2687
03:15:00,040 --> 03:15:04,200
और जब तक आपकी ये आत्मा की प्यास बुझाने वाले

2688
03:15:04,200 --> 03:15:08,200
उत्तर आपको नहीं प्राप्त हो रहे हैं तो आपको ये

2689
03:15:08,200 --> 03:15:12,600
डिक्लेयर करना बेकार है कि मैं जो है इसको मानता हूं अभी आप

2690
03:15:12,600 --> 03:15:17,080
उस अपने आप को खोज गई है आप

2691
03:15:17,080 --> 03:15:21,400
प्रश् कुछ अलग अलग अलग तरीके का प्रश्न होगा देखो ज आप पूछ

2692
03:15:21,400 --> 03:15:25,440
समझ नहीं र आपको अपने जिसको आप जिसको मानने का दावा कर

2693
03:15:25,440 --> 03:15:29,480
रहे हो उसी को लेकर के आपके मन में संशय है

2694
03:15:29,480 --> 03:15:33,760
जिसको मानने का आप दावा कर रहे हो उन चीजों को लेकर के आपके मन में दुविधा

2695
03:15:33,760 --> 03:15:37,760
है प्रश्न है तो फिर आप अपने ही डिसीजन को

2696
03:15:37,760 --> 03:15:41,840
लेकर के बोल रहे हो कि भाई मैं अभी किसी उस पर नहीं हूं मैं उत्तर ढूंढ रहा हूं तो

2697
03:15:41,840 --> 03:15:45,960
जब आप उत्तर ढूंढ रहे हो तो आप उत्तर को स्वीकार किसी एक उत्तर को स्वीकार करने

2698
03:15:45,960 --> 03:15:50,360
वाले कैसे हुए अभी तो आप उत्तर ढूंढ रहे हो ना

2699
03:15:50,360 --> 03:15:54,360
इसका उत्तर ढूंढो आपको वहां नहीं मिलेगा जब कहीं ना मिले तो

2700
03:15:54,360 --> 03:15:58,560
हमारे पास आइएगा हम इसका उत्तर आपको देंगे देखिए बाइबल में ना इसका उत्तर

2701
03:15:58,560 --> 03:16:02,560
है मैंने इतना धन किया नहीं है बाइबल का बस थोड़ी इतना है आपने

2702
03:16:02,560 --> 03:16:07,480
पहले आप जन्म से तो आप मेरे ख्याल से सनातन है जी

2703
03:16:07,480 --> 03:16:11,680
तो आपने सनातन को क्यों छोड़ा सनातन

2704
03:16:11,680 --> 03:16:16,520
को मैंने इसलिए छोड़ा इधर सच्चाई दिखी

2705
03:16:16,520 --> 03:16:20,720
आप ने जब बाइबल को अच्छे से जाना नहीं आप कह रहे हो मैंने उसका अच्छे

2706
03:16:20,720 --> 03:16:25,000
से अध्ययन नहीं किया तो क्यों छोड़ दिया सनातन को बस

2707
03:16:25,000 --> 03:16:29,360
ऐसे ही ना बचपन से चाह यशु मसी की तरफ बिना किसी करने के चाह

2708
03:16:29,360 --> 03:16:33,560
बस बचपन से अच्छ बात बताइए

2709
03:16:33,560 --> 03:16:38,120
कुछ लोगों की चा होती हैरी फेरी बहनों से शादी करने

2710
03:16:38,120 --> 03:16:42,120
की कुछ लोगों की चाह होती है अपनी ही बहन से विवाह कर लेने

2711
03:16:42,120 --> 03:16:48,120
की तो क्या करना चाहिए

2712
03:16:48,920 --> 03:16:53,160
नहीं सर वो गलत है गलत है ना तो चा

2713
03:16:53,160 --> 03:16:57,320
इसका अर्थ ये है कि चाह के ऊपर य डिपेंड नहीं करता है कि

2714
03:16:57,320 --> 03:17:01,640
हमें क्या करना है क्या नहीं करना है केवल चाह के ऊपर वो नहीं कर सकते हमलाई

2715
03:17:01,640 --> 03:17:05,640
क्योंकि वास्तविकता में देखा जाए अगर आपके मां-बाप ने आपको

2716
03:17:05,640 --> 03:17:10,480
मनुष्य ना बनाया होता आपके मां-बाप पहले तो वो रहे होंगे ना हिंदू

2717
03:17:10,480 --> 03:17:15,840
है ना यानी कि जो मनुष्यता का ज्ञान है जितना भी आपके अंदर

2718
03:17:15,840 --> 03:17:19,840
मनुष्यवकाशा हिंदुत्व से आया है

2719
03:17:19,840 --> 03:17:23,960
ना मानवता का ज्ञान आप मानव आज की डेट में क्यों हो आप

2720
03:17:23,960 --> 03:17:28,160
मां को मां क्यों मान रहे हो आप बहन को बहन क्यों मान रहे हो क्योंकि आपके

2721
03:17:28,160 --> 03:17:32,400
जो माता-पिता है उन्होंने आपको सिखाया और उनको

2722
03:17:32,400 --> 03:17:36,400
हिंदू धर्म ने सिखाया है ना देखिए मैं मैं आपको

2723
03:17:36,400 --> 03:17:40,920
क्रिश्चियनिटी की एक बात बता दूं मेरी एक बात सुनो बस मेरी बात सुनिए

2724
03:17:40,920 --> 03:17:45,520
सुनिए बहुत सी चीजें है जो क्रिश्चियनिटी में अच्छी मिल जाएंगी

2725
03:17:45,520 --> 03:17:49,560
बहुत सी चीजें मगर तीन चीजें हैं जिसके आधार

2726
03:17:49,560 --> 03:17:53,600
पर धर्म और अधर्म का निर्णय होता है पहली बात

2727
03:17:53,600 --> 03:17:57,880
तो यह कि जो भी अच्छी चीज मिलेगी वह चीज यहां ना हो

2728
03:17:57,880 --> 03:18:01,960
ऐसा नहीं है जो चीज वही चीज मिल सकती है जो चीज यहां

2729
03:18:01,960 --> 03:18:04,000
पर अवेलेबल हो दूसरी

2730
03:18:04,000 --> 03:18:08,080
बात जो अच्छाई और बुराई को निर्धारित करती

2731
03:18:08,080 --> 03:18:13,360
है वह सिर्फ तीन चीजें हैं सिर्फ तीन चीजें

2732
03:18:13,360 --> 03:18:18,040
सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

2733
03:18:18,040 --> 03:18:23,000
शाश्वत धर्म यह तीनों ही चीजें बाइबल में नहीं है

2734
03:18:23,000 --> 03:18:28,120
सर्वशक्तिमान है ईश्वर बता मैं पूछ लेता हूं अभी देखिए सिद्ध हो

2735
03:18:28,120 --> 03:18:33,640
जाएगा यह बताइए क्या आपका ईश्वर कण कण में है

2736
03:18:33,640 --> 03:18:37,760
मतलब क्या आपका ईश्वर क एजिस्ट करते हैं आपके

2737
03:18:37,760 --> 03:18:42,000
अंदर भी है हमारे अंदर भी है पत्थर में भी

2738
03:18:42,000 --> 03:18:46,080
अब सुनो मेरी बात ईश्वर ईश्वर हर

2739
03:18:46,080 --> 03:18:50,200
जगह मौजूद ईश्वर ईश्वर हर जगह म लेकिन ईश्वर आपके

2740
03:18:50,200 --> 03:18:54,200
अंदर नहीं है ईश्वर क्योंकि हमारे अंदर पाप है यानी कि

2741
03:18:54,200 --> 03:18:58,240
एक मिनट मिनट यानी की जितने एरिया में मेरा शरीर

2742
03:18:58,240 --> 03:19:03,160
है उतने एरिया में आपका ईश्वर नहीं है जी

2743
03:19:03,160 --> 03:19:08,000
ठीक है तो सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या होता है

2744
03:19:08,000 --> 03:19:12,160
सर्वशक्तिमान का मतलब होता है सब कुछ करने वाला तो क्या वो

2745
03:19:12,160 --> 03:19:16,240
सब जगह हो सकता है सब जगह हो सकता है वो आपके अंदर भी

2746
03:19:16,240 --> 03:19:19,080
हो सकता है लेकिन क लिखा है कहां

2747
03:19:19,080 --> 03:19:23,440
लिखा है वो हमारे अंदर हो सकता है बाइबल में कहा लिखा है

2748
03:19:23,440 --> 03:19:27,920
मतलब आप अपनी बाइबल के विरुद्ध जा रहे हो नहीं

2749
03:19:27,920 --> 03:19:32,080
हा बाइबल में दिखाओ लिखा हुआ ये तो आप सनातन की ओर जा रहे

2750
03:19:32,080 --> 03:19:36,560
हो करतु अतु पर चले जा रहे हो तुम

2751
03:19:36,560 --> 03:19:41,040
तुम करतु और अतु का जो श्लोक है उस पर जा रहे हो

2752
03:19:41,040 --> 03:19:45,240
बाइबल में देखो लिखा हुआ है मुझे वो आसे होता कसे नहीं होता देखो भाई

2753
03:19:45,240 --> 03:19:49,240
तुम कह रहे बाइबल का शक्तिमान है बाइबल में लिखा तो दिखाओ कि वो हमारे अंदर हो

2754
03:19:49,240 --> 03:19:53,640
सकता है अब आप कहते हो आपका ईश्वर सब शक्तिमान है

2755
03:19:53,640 --> 03:19:57,680
अच्छा एक बात बताओ एक मिनट एक मिनट मैं आपकी इस बात को क्लियर कर

2756
03:19:57,680 --> 03:20:02,160
लू हमारे अंदर ईश्वर नहीं है क्योंकि हमारे अंदर पाप है

2757
03:20:02,160 --> 03:20:06,640
ठीक है पाप है ठीक है ये वजह है तो हमारे अंदर ईश्वर का कंट्रोल

2758
03:20:06,640 --> 03:20:09,160
कैसे

2759
03:20:09,160 --> 03:20:13,440
है हमारे अंदर ईश्वर का कंट्रोल कैसे है मतलब उसने

2760
03:20:13,440 --> 03:20:17,440
जब मनुष्य को बनाया था तो उसने सब कुछ चुनने का अधिकार

2761
03:20:17,440 --> 03:20:21,440
दिया था मैं कह रहा अगर ईश्वर चाहे तो मेरा दिल

2762
03:20:21,440 --> 03:20:25,560
रुक सकता है कि नहीं बिल्कुल रुक सकता है इसका

2763
03:20:25,560 --> 03:20:29,640
मतलब उसका मेरे शरीर पर कंट्रोल

2764
03:20:29,640 --> 03:20:33,640
है हां कंट्रोल है

2765
03:20:33,640 --> 03:20:34,140
उसने

2766
03:20:34,080 --> 03:20:39,000
बना रखा तो जब वो मेरे अंदर नहीं है तो उसका कंट्रोल कैसे है मेरे अंदर वो

2767
03:20:39,000 --> 03:20:43,720
बताओ जरूरी थोड़ी है उसे अंदर जाना पड़ेगा जरूरी है ना

2768
03:20:43,720 --> 03:20:48,360
यानी कि उसकी शक्ति है ना

2769
03:20:48,360 --> 03:20:52,400
उसकी पावर है ना मेरे अंदर उसने जब आपको बनाया

2770
03:20:52,400 --> 03:20:57,400
था ना तो उसने पहले से ऐसा बनाया था

2771
03:20:57,400 --> 03:21:02,040
भाई साहब मैं पूछ रहा हूं उसका मेरे शरीर पर पूरा पूरा कंट्रोल है कि

2772
03:21:02,040 --> 03:21:06,200
नहीं आपके शरीर पर उसका पूरा पूरा कंट्रोल है ठीक

2773
03:21:06,200 --> 03:21:10,360
है तो जब व मेरे शरीर के अंदर नहीं है तो वह मेरे शरीर को कंट्रोल कैसे कर रहा है यानी

2774
03:21:10,360 --> 03:21:14,520
कि मानना पड़ेगा कि उसकी पावर मेरे शरीर में है हा

2775
03:21:14,520 --> 03:21:18,640
पावर है पावर है ठीक है तो अब दो चीज हो गई

2776
03:21:18,640 --> 03:21:23,400
एक हो गया ईश्वर और एक उसकी पावर हो गई ना

2777
03:21:23,400 --> 03:21:27,400
दो चीज हो गई ना अब जो ईश्वर की

2778
03:21:27,400 --> 03:21:33,400
पावर है वो ईश्वर जितनी शक्तिशाली तो हो नहीं

2779
03:21:33,440 --> 03:21:37,920
सकती भाई जैसे कि मान लीजिए ये ईश्वर है

2780
03:21:37,920 --> 03:21:43,080
ठीक है शक्ति ललग आपकी बात में

2781
03:21:43,080 --> 03:21:47,320
समझ गया आपकी बात की शक्ति मेरा शरीर है जितना

2782
03:21:47,320 --> 03:21:49,160
पावरफुल ये है यहां प

2783
03:21:49,160 --> 03:21:53,160
ये खड़ा है उतना पावरफुल जो शक्ति इसके अंदर

2784
03:21:53,160 --> 03:21:57,240
है उतनी पावरफुल वो शक्ति नहीं जितना पावरफुल ये स्वयं है है

2785
03:21:57,240 --> 03:22:01,280
ना क्योंकि दो चीज है ना शक्ति ईश्वर से अलग है बकुल बकुल

2786
03:22:01,280 --> 03:22:05,360
है ना पावरफुल है ना पावरफुल नहीं है अच्छा

2787
03:22:05,360 --> 03:22:09,760
तो इसका अर्थ यह हुआ कि ईश्वर का जितना कंट्रोल यहां पर है

2788
03:22:09,760 --> 03:22:13,960
उतना कंट्रोल इसके अंदर नहीं

2789
03:22:13,960 --> 03:22:18,720
है हेलो जी जी बिल्कुल बिल्कुल इसका

2790
03:22:18,720 --> 03:22:22,920
मतलब ईश्वर का जो जहां जहां पे हम लोग

2791
03:22:22,920 --> 03:22:26,920
है जहां जहां पे हम लोगों का शरीर है वहां वहां प उतना कंट्रोल

2792
03:22:26,920 --> 03:22:32,920
नहीं हो सकता जितना जहां पर वो बैठा है वहां हो सकता

2793
03:22:33,200 --> 03:22:37,240
है तो हो गया ना बाधित नहीं

2794
03:22:37,240 --> 03:22:41,400
बाधित नहीं हुआ ना बाधित नहीं हु तो कह रहे हो कि जहां पे ईश्वर

2795
03:22:41,400 --> 03:22:45,600
है वहां पर उसका कंट्रोल ज्यादा हो सकता है जहां पर वो नहीं है वहां उसका कंट्रोल

2796
03:22:45,600 --> 03:22:49,720
ज्यादा नहीं हो सकता अंतर है ईश्वर अगर चाहे तो

2797
03:22:49,720 --> 03:22:54,600
हर जगह कंट्रोल कर सकता है पहले तो आप ये लिखा दिखाओ

2798
03:22:54,600 --> 03:22:58,640
कि ईश्वर जो है पाप की वजह से अंदर नहीं अंदर नहीं रहता है और

2799
03:22:58,640 --> 03:23:02,960
वह रहता भी है हर जगह है भी दूसरी बात यह है कि वो वोह कंट्रोल

2800
03:23:02,960 --> 03:23:06,960
कर रहा है य बात मैं आपकी मान रहा हूं मगर जब आप कह रहे हो कि जो शक्ति

2801
03:23:06,960 --> 03:23:11,080
है वह थोड़ा बहुत तो कहीं 19 होगी ना ईश्वर से कि

2802
03:23:11,080 --> 03:23:16,000
बिल्कुल बराबर है कोई अंतर नहीं है ईश्वर और उसमें

2803
03:23:16,000 --> 03:23:20,040
अगर आप बिल्कुल अगर आप थोड़ा भी अंतर मानते हो तो आपको य मानना

2804
03:23:20,040 --> 03:23:24,200
पड़ेगा कि ईश्वर जहां पर अवेलेबल है उतना

2805
03:23:24,200 --> 03:23:28,200
कंट्रोल जितना कंट्रोल जहां पर ईश्वर है वहां पर उसका उतना

2806
03:23:28,200 --> 03:23:32,240
कंट्रोल उसका मनुष्य के शरीर के अंदर नहीं है थोड़ा कम है तो यह बाधित

2807
03:23:32,240 --> 03:23:36,200
हो गया नियमित हो

2808
03:23:36,200 --> 03:23:42,200
गया देखब परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया

2809
03:23:42,360 --> 03:23:46,440
था जो उसने क्या कहा वो मैं मैं अंत में

2810
03:23:46,440 --> 03:23:50,520
आउटपुट क्या आया वो पूछ रहा हूं उसने जो कहानी आपको सुनाई है व

2811
03:23:50,520 --> 03:23:55,200
मैं समझ रहा हूं कोई ना कोई कहानी होगी उसकी मैं अभी आपको आउट

2812
03:23:55,200 --> 03:23:59,560
मैं आपको आउटपुट पर पूछ रहा हूं कि जब ईश्वर एक तरफ खड़ा है

2813
03:23:59,560 --> 03:24:03,840
और वह इसके शरीर में नहीं है इसके शरीर में उसकी शक्ति है

2814
03:24:03,840 --> 03:24:07,880
अगर शक्ति में वह सारे गुण नहीं है जो ईश्वर में है तो इसका

2815
03:24:07,880 --> 03:24:11,960
अर्थ यह माना जाएगा कि इस शरीर के अंदर ईश्वर का उतना

2816
03:24:11,960 --> 03:24:16,520
कंट्रोल नहीं है जितना यहां जहां वो खड़ा है वहां पर है ईश्वर

2817
03:24:16,520 --> 03:24:22,520
की शक्ति कम हो रही है यहां पर कंट्रोल कम हो रहा

2818
03:24:24,680 --> 03:24:29,120
है हो रहा है ना जी जी

2819
03:24:29,120 --> 03:24:32,040
तो हो गया

2820
03:24:32,040 --> 03:24:36,640
बाद अरे सर मतलब आपने मेरी बात समझ नहीं पा रहे

2821
03:24:36,640 --> 03:24:41,440
आप मेरी बात नहीं समझ पा रहे

2822
03:24:41,440 --> 03:24:45,600
ईश्वर ऐसे हो रहा है कि ईश्वर ईश्वर जो है

2823
03:24:45,600 --> 03:24:50,120
सब जगह सर्व नियंता नहीं है

2824
03:24:50,120 --> 03:24:54,240
वह जहां पर है वहीं सर्व नियंता है वह जहां

2825
03:24:54,240 --> 03:24:58,400
पर नहीं है वहा सर्व नियंता नहीं है आप कह रहे हो व हमारे शरीर में नहीं है

2826
03:24:58,400 --> 03:25:02,480
किसी कारण वस नहीं है तो इसका मतलब हमारे शरीर पर उतना

2827
03:25:02,480 --> 03:25:08,480
कंट्रोल उसका नहीं है सर्व नियंता नहीं रहा व बाधित हो

2828
03:25:10,080 --> 03:25:14,160
गया आप ना मतलब ऐसे प्रश्न करते हो अलग

2829
03:25:14,160 --> 03:25:18,240
तरीके से अलग ही है प्रश्

2830
03:25:18,240 --> 03:25:22,400
अलग तरीके करते हो अच्छा चलिए आज आपसे जो बातें हुई है इन प्रश्नों

2831
03:25:22,400 --> 03:25:26,600
के उत्तर ढूंढिए और फिर फिर वापस आइएगा

2832
03:25:26,600 --> 03:25:30,720
मिनट दो मुझे अबकी बार जो है मैं बोलने दे रहा हूं अबकी बार आप अपनी

2833
03:25:30,720 --> 03:25:35,080
बाइबल को बाइबल के प्रमाण लेकर आइएगा अभी आपने बहुत सी ऐसी बातें बोली है

2834
03:25:35,080 --> 03:25:39,760
जो बाइबल के ही विरुद्ध है मैंने कुछ कहा नहीं मान

2835
03:25:39,760 --> 03:25:44,760
लिया ठीक है अब आप अपनी बात बोलिए

2836
03:25:44,760 --> 03:25:49,000
देखिए हिंदू धर्म में और क्रिश्चियनिटी में अत अंतर क्या है

2837
03:25:49,000 --> 03:25:54,000
हिंदू धर्म हिंदू

2838
03:25:54,000 --> 03:25:58,040
धर्म हिंदू धर्म कहता है कि सनातन धर्म सरी हिंदू कह रहा

2839
03:25:58,040 --> 03:26:02,040
हूं के ब्रह्मण से सब कुछ पैदा हुआ ब्रह्मण यानी कण कण जो है हर

2840
03:26:02,040 --> 03:26:06,120
परमेश्वर है परमात्मा है लेकिन बाइबल बाइबल इस बात को क्या बता

2841
03:26:06,120 --> 03:26:10,160
बाइबल य बतावे कि नहीं वो नहीं है परमेश्वर कोई

2842
03:26:10,160 --> 03:26:14,280
है और उसके दरा सृष्टि की हु अरे भाई य तो

2843
03:26:14,280 --> 03:26:18,240
हम भी जान रहे हैं इससे मतलब क्या है इस बात से क्या मतलब ये

2844
03:26:18,240 --> 03:26:22,440
तो हम भी कह रहे आपकी बाइबल में लिखा है हा जी तो

2845
03:26:22,440 --> 03:26:25,480
य अंतर है

2846
03:26:25,480 --> 03:26:29,520
लेकिन जरा इटर करेंगे हम थोड़ा एक मिनट

2847
03:26:29,520 --> 03:26:33,680
एक मिनट बोल हमको बो

2848
03:26:33,680 --> 03:26:36,480
ठीक है ठीक है ठीक है बोलो भाई वही

2849
03:26:36,480 --> 03:26:41,040
बताया मैंने आपको ईश्वर के अंदर न्याय है

2850
03:26:41,040 --> 03:26:45,280
आपके आपके ईश्वर के अंदर जिस ईश्वर के अंदर न्याय नहीं है ना तो परमेश्वर

2851
03:26:45,280 --> 03:26:49,480
नहीं हो सकता अच्छा पहली बात तो ये बताओ

2852
03:26:49,480 --> 03:26:53,760
कि आप कहते हो कि ईश्वर के अंदर न्याय

2853
03:26:53,760 --> 03:26:57,840
है अन्याय नहीं है आपके ईश्वर के अंदर अन्याय नहीं है

2854
03:26:57,840 --> 03:27:01,880
अन्याय नहीं है अच्छा ठीक है अन्याय करने वालों

2855
03:27:01,880 --> 03:27:06,200
को किसने बनाया अन्याय देखिए

2856
03:27:06,200 --> 03:27:06,800
अब मेरी

2857
03:27:06,800 --> 03:27:11,240
उत्तर सुनि मेरा आपने प्र पूछा जब वही

2858
03:27:11,240 --> 03:27:15,240
स्टार्ट करूंगा जब भगवान ने मनु जब परमेश्वर ने परमात्मा ने मनुष्य को बनाया था तो उसने

2859
03:27:15,240 --> 03:27:19,360
बनाने के बाद की इच्छा जीती स्वयं से चुनने का अधिकार अरे मैं मैं

2860
03:27:19,360 --> 03:27:24,160
आपसे पूछ रहा हूं कि दुनिया में जब किसी का मर्डर हो रहा

2861
03:27:24,160 --> 03:27:28,160
हैई एक मिनट अब रुक जाओ अब रुक जाओ अब हमको बोलने दो

2862
03:27:28,160 --> 03:27:32,240
एक मिनट पहले इनके एक सवाल का जवाब हम दे दें ये कह रहे हैं कण

2863
03:27:32,240 --> 03:27:36,280
कण में ईश्वर नहीं है ठीक है आप कह रहे हो ना भाई अब हमको यह बताओ कण कण

2864
03:27:36,280 --> 03:27:40,280
में अगर ईश्वर नहीं है तो हम एक छोटा सा मिट्टी का टुकड़ा ले लिए या

2865
03:27:40,280 --> 03:27:44,320
कोई भी लोहे का टुकड़ा ले लिए या लकड़ी का टुकड़ा ले लिए आज का साइंस इस

2866
03:27:44,320 --> 03:27:48,800
बात को प्रूफ कर चुका है कि वो टम पार्टिकल से बना एटम से बना है ठीक

2867
03:27:48,800 --> 03:27:52,840
साइंस का मॉडल अगर आप स्टडी करो एटॉमिक मॉडल तो उसमें

2868
03:27:52,840 --> 03:27:57,120
इलेक्ट्रॉन कंटीन्यूअसली रिवॉल्व कर रहे हैं विदाउट एनर्जी लॉस किए

2869
03:27:57,120 --> 03:28:01,320
हुए एटॉमिक थरी अगर आप पढ़ोगे जो है तो आप अब बताओ

2870
03:28:01,320 --> 03:28:07,320
उसमें एनर्जी कहां से आ रही है कौन दे रहा है उसको एनर्जी अगर ईश्वर नहीं है

2871
03:28:08,600 --> 03:28:12,760
तो आप तो सीधे इनकार कर नहीं है नहीं है उसम

2872
03:28:12,760 --> 03:28:16,640
कुछ अगर उसम नहीं है तो

2873
03:28:16,640 --> 03:28:20,760
आप नहीं मानते हो मत मानो आप नहीं मानते हो लेकिन इसका सुन लो

2874
03:28:20,760 --> 03:28:24,880
मेरी बात मेरी बात सुनो पहले अगर आप नहीं मानते हो तो आप कुछ

2875
03:28:24,880 --> 03:28:29,080
भी मत मानो आपसे कोई जबरदस्ती या फोर्सफुली नहीं मना सकता बट एक चीज

2876
03:28:29,080 --> 03:28:33,640
जान लो कि अगर सुन लो सुन लो अगर ईश्वर नहीं है गॉड नहीं है ऑलमाइटी

2877
03:28:33,640 --> 03:28:37,720
नहीं है सर्वशक्तिमान विधाता नहीं है उस जगह तो उस जगह एनर्जी पॉसिबल नहीं

2878
03:28:37,720 --> 03:28:41,760
है उस जगह मूवमेंट पॉसिबल नहीं है इस बात को एक्सेप्ट आपको करना

2879
03:28:41,760 --> 03:28:46,200
पड़ेगा आप नहीं मानना चाहो मत मानो बट रियलिटी यही है कि अगर

2880
03:28:46,200 --> 03:28:51,560
या अल माइटी वहां नहीं है तो वहां कोई भी तरह का मोमेंट हो ही नहीं

2881
03:28:51,560 --> 03:28:55,640
सकता वो मोमेंट आप नहीं सुनो वो मोमेंट आप प्रोड्यूस नहीं कर रहे

2882
03:28:55,640 --> 03:28:59,360
हो सुनो सुनो

2883
03:28:59,360 --> 03:29:03,440
गड गॉड के बारे में एक चीज कहा गया है जो कि ना कभी

2884
03:29:03,440 --> 03:29:07,480
पैदा होता है ना कभी खत्म होता है ठीक यही चीज एनर्जी के बारे

2885
03:29:07,480 --> 03:29:11,720
में कहा जाता है एनर्जी नादर कैन बी क्रिएट न कैन बी डिस्ट्रॉयड देखो इसको हम साइंस

2886
03:29:11,720 --> 03:29:16,480
से भी जोड़ करके आपको समझाना है फिर भी आपको नहीं समझ में आ रहा है मींस कहीं ना

2887
03:29:16,480 --> 03:29:20,560
वही जो ईश्वर है वही परमात्मा है वही एनर्जी फॉर्म में सब

2888
03:29:20,560 --> 03:29:24,400
कुछ क्रिएट और डिय कर रहा है और वही है

2889
03:29:24,400 --> 03:29:28,360
जिसको आप एक्सेप्ट नहीं करोगे आप

2890
03:29:28,360 --> 03:29:32,440
कहोगे एकज इसको अगर आप समझोगे सुनो इ अच्छे वे

2891
03:29:32,440 --> 03:29:36,440
में समझो आप जरा सोचो सुनो सुनो आप एक मिनट शिवांश भाई

2892
03:29:36,440 --> 03:29:40,560
आप जरा सोचो अगर ईश्वर हमारे अंदर नहीं है तो हम कैसे बोल सकते

2893
03:29:40,560 --> 03:29:44,560
हैं इतना वोह आत्मा जिसको हम आत्मा कहते

2894
03:29:44,560 --> 03:29:48,560
हैं आप उसको कहते हो कि आत्मा हमारे अंदर है बट

2895
03:29:48,560 --> 03:29:52,640
हम अभी हमारे यहां एक मैडम है चकि हम पेसे से एक टीचर हैं हमारे यहां एक मैडम है वो

2896
03:29:52,640 --> 03:29:56,760
भी क्रिश्चियन रिलीजस को फॉलो करती हैं हिंदुइज्म से

2897
03:29:56,760 --> 03:30:00,960
कन्वर्ट हुई है वो तो हमें उसका कोई वो नहीं है बट उन्होंने एक दिन उनसे

2898
03:30:00,960 --> 03:30:05,480
हमारी बहस हो रही थी तो वहां हमने ज्यादा टाइम उनको देना ठीक नहीं समझा

2899
03:30:05,480 --> 03:30:09,520
उनका सीधा कहना था उन्होंने सीधे तौर पर हमसे कहा कि सर

2900
03:30:09,520 --> 03:30:13,720
आपके अंदर आत्मा है बट पशु पक्षियों में आत्मा नहीं है हाउ इज इट पॉसिबल

2901
03:30:13,720 --> 03:30:18,920
अगर पशु पक्षी में आत्मा नहीं है तो पशु पक्षी कैसे चल रहे हैं उनको कौन चला रहा

2902
03:30:18,920 --> 03:30:23,200
है मैं कौन चला रहा है मैं अब इनसे बात करू

2903
03:30:23,200 --> 03:30:27,400
देखो ऐसा है एक और फाइनल हम चीज बता द आपको

2904
03:30:27,400 --> 03:30:31,400
कि देखो आप जिस भी रिलीजियस को जिस भी ट्रेडीशन को

2905
03:30:31,400 --> 03:30:35,600
जिस भी कल्चर को अडॉप्ट कर लो बट एक चीज बता दे जो रियलिटी

2906
03:30:35,600 --> 03:30:39,640
आपका धर्म है ना वह आपके संस्कार में दिख ही जाएगा आप

2907
03:30:39,640 --> 03:30:43,800
भले किसी धर्म को अडॉप्ट कर लो बट आप हिंदू हो और यह आपके

2908
03:30:43,800 --> 03:30:47,880
संस्कार दिखा दे रहे हैं

2909
03:30:47,880 --> 03:30:52,080
जी उसको दिखाने की या पूछने की जरूरत टली

2910
03:30:52,080 --> 03:30:56,360
मिला है वो आपके अंदर दिख रहा है एक चीज बता अभी हम

2911
03:30:56,360 --> 03:31:00,360
एक छोटा सा एग्जांपल दे रहे है सुनो ना एक छोटा सा एग्जांपल दे रहे है आज भी कई

2912
03:31:00,360 --> 03:31:04,440
कन्वर्टेड मुसलमान भाई है हमारे बट उनके अंदर वही हिंदुओ

2913
03:31:04,440 --> 03:31:08,520
वाले कल्चर वही संस्कार वही तेवर आज भी दिखते हैं और वह दिखा देता है

2914
03:31:08,520 --> 03:31:12,560
कि यह हिंदू से कन्वर्ट किए गए मुसलमान है एक मुसलमान

2915
03:31:12,560 --> 03:31:16,680
वो जो अरब वगैरह से आए थे वो दूसरे उनके बिल्कुल अलग

2916
03:31:16,680 --> 03:31:20,840
दिखेंगे और यह तीन चार पीढ़ी के बाद भी हिंदुओं से जो कन्वर्टेड मुसलमान

2917
03:31:20,840 --> 03:31:24,960
भाई है हमारे उनके कल्चर बिल्कुल हिंदुओं से मिलते जुलते

2918
03:31:24,960 --> 03:31:30,960
उनमें कोई कटर पथता नहीं है भाई मैं

2919
03:31:33,960 --> 03:31:38,040
आपकी मुझे दिखा मेरी बात सुनो क्रिटी मुझे

2920
03:31:38,040 --> 03:31:42,880
खास दिखा आप क्रिटी बा से दिखाई दे सबको पता

2921
03:31:42,880 --> 03:31:46,920
क्रिश्चियनिटी समझ रोमन कैथोलिक धर्म उ समझा

2922
03:31:46,920 --> 03:31:51,160
इसमें बड़े-बड़े पादरी सफेद पादरा पहन के और ये ऐसे करे

2923
03:31:51,160 --> 03:31:55,720
ऐसे करे उसे लो वो क्रिश्चियनिटी नहीं है दूसरी बात क्रिश्चियनिटी

2924
03:31:55,720 --> 03:32:00,080
अध चर्चों में देखने कोसे ड्रा मिले के उसका कु बिठा दिया

2925
03:32:00,080 --> 03:32:04,200
उसका हाथ लगा दिया व ऐसे कर रहा इस भी क्रिटी समझ र

2926
03:32:04,200 --> 03:32:08,760
वो भी क्रिश्चियनिटी नहीं है क्रिश्चियनिटी भाई साहब अगर आप समझ रहे ना अनोखी है बिल्कुल

2927
03:32:08,760 --> 03:32:12,880
देखिए भाई साहब देखिए देखिए देखिए देखिए मैं आपका

2928
03:32:12,880 --> 03:32:16,960
य पर देखिए देखिए हमारे पास आपके ग्लोरिफिकेशन के लिए

2929
03:32:16,960 --> 03:32:21,440
समय नहीं है आप तर्क और प्रमाण की बात करिए

2930
03:32:21,440 --> 03:32:24,440
तर्क और प्रमाण

2931
03:32:24,440 --> 03:32:29,040
या मिनट मुझे बोलने दीजिए भाई साब एक मिनट मुझे बोलने

2932
03:32:29,040 --> 03:32:30,800
आपने जो चीज स्वीकार

2933
03:32:30,800 --> 03:32:34,800
की है अपने ईश्वर के लिए कि वह सबसे पहले निराकार होता है फिर रूप बना

2934
03:32:34,800 --> 03:32:38,800
कर के आता है इसका कोई प्रमाण हमें आज तक प्राप्त नहीं हुआ बाइबल से आप मुझे

2935
03:32:38,800 --> 03:32:41,880
बताइए पहली

2936
03:32:41,880 --> 03:32:45,880
बात पहली बात हो गई दूसरी बात ये है कि

2937
03:32:45,880 --> 03:32:49,880
ईश्वर से अलग सृष्टि थी स्पेस था नहीं था वोह उस समय किस रूप

2938
03:32:49,880 --> 03:32:54,280
में था यह सब भी आपको हमें बताना होगा ठीक है

2939
03:32:54,280 --> 03:32:58,400
आपने कहा यह मैं ढूंढ रहा हूं ठीक है तीसरी बात यह है कि

2940
03:32:58,400 --> 03:33:02,440
आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है इसका मतलब हर जगह

2941
03:33:02,440 --> 03:33:06,680
उसका पूर्णतया नियंत्रण है ठीक है मगर

2942
03:33:06,680 --> 03:33:10,840
आपने माना कि वह हम क्योंकि कड़कड़ में नहीं है तो

2943
03:33:10,840 --> 03:33:14,960
हमारे शरीर में वो नहीं है तो फिर हमारे शरीर

2944
03:33:14,960 --> 03:33:19,440
में उसकी शक्ति है तो जब शक्ति है वो दूसरी एंटिटी हो गई शक्ति

2945
03:33:19,440 --> 03:33:23,560
ठीक है वो तो है नहीं शक्ति दूसरी एंटिटी हो गई तो शक्ति

2946
03:33:23,560 --> 03:33:27,600
जब दूसरी एंटिटी हो गई दूसरी हो गई तो यानी कि वो कहीं ना कहीं ईश्वर से कमतर

2947
03:33:27,600 --> 03:33:31,760
है कमतर हो गई ना हम लोग तो ये मानते हैं ईश्वर

2948
03:33:31,760 --> 03:33:35,960
शक्ति के रूप में हमारे अंदर प्रेजेंट है ठीक है ईश्वर ही है

2949
03:33:35,960 --> 03:33:40,360
अंतर नहीं है कोई भी मगर आप ये कह रहे हो कि शक्ति अलग है

2950
03:33:40,360 --> 03:33:44,400
वो ईश्वर नहीं है ईश्वर नहीं है वो शक्ति दूसरी एंटिटी

2951
03:33:44,400 --> 03:33:46,320
है तो जब दूसरी मानेंगे

2952
03:33:46,320 --> 03:33:50,320
तो शक्ति कमतर हो जाएगी किससे ईश्वर से

2953
03:33:50,320 --> 03:33:54,680
तो जब ईश्वर से कमतर हो गई तो आपको य मानना पड़ेगा जहां ईश्वर है वहां उसका कंट्रोल

2954
03:33:54,680 --> 03:33:58,880
ज्यादा है और शरीर के अंदर उसका कंट्रोल कम है

2955
03:33:58,880 --> 03:34:03,720
तो व यहां पर सर्व नियंता नहीं रहा एक मिट

2956
03:34:03,720 --> 03:34:08,280
शिवांश भाई एक मिनट पूरा करल पूरा कर

2957
03:34:08,280 --> 03:34:12,600
सर्ता नहीं रहा अब लास्ट में आपने एक बात कही कि हमारा जो ईश्वर

2958
03:34:12,600 --> 03:34:16,640
है वो उसके अंदर न्याय अन्याय नहीं

2959
03:34:16,640 --> 03:34:20,800
है ठीक है हा तो अब बात य

2960
03:34:20,800 --> 03:34:24,880
आती है इस पर तो हम बाद में जाएंगे कि धर्म और धर्म का निर्धारण कैसे होगा

2961
03:34:24,880 --> 03:34:29,080
धर्म और अधर्म का निर्धारण कैसे

2962
03:34:29,080 --> 03:34:33,800
होगा क्या इस बात से होगा कि किसके अंदर न्याय है

2963
03:34:33,800 --> 03:34:38,240
यह सोचने वाली बात है इस हम जाएंगे आपने इसीलिए पकड़ा है ना व धर्म

2964
03:34:38,240 --> 03:34:42,360
ईश्वर के अंदर सिर्फ न्याय है मगर अभी हम यह बात कर रहे हैं क्या ईश्वर के अंदर सिर्फ न्याय

2965
03:34:42,360 --> 03:34:46,800
है तो इस पर मैं आपसे पूछना चाह रहा हूं कि जहा पर कहीं पर

2966
03:34:46,800 --> 03:34:50,800
मातृ शक्ति के साथ कोई दुर्व्यवहार हो रहा होता है दुराचार निर्दोष

2967
03:34:50,800 --> 03:34:54,800
मातृ शक्ति दुराचार हो रहा होता है वहां ईश्वर का नियंत्रण

2968
03:34:54,800 --> 03:34:59,000
होता है कि नहीं मैं

2969
03:34:59,000 --> 03:35:01,320
मैं एक एक करके आऊंगा आपकी बात प मैं आपकी बात

2970
03:35:01,320 --> 03:35:05,880
जानता हूं आप क्या बोलोगे वो फ्री विल देता है मैं जानता हूं

2971
03:35:05,880 --> 03:35:10,480
मैं पूछ रहा हूं नियंत्रण होता है कि नहीं ईश्वर का

2972
03:35:10,480 --> 03:35:13,560
नियंत्रण मतलब ईश्वर का नियंत्रण नहीं है

2973
03:35:13,560 --> 03:35:17,720
वहा वो आदमी के वो मनुष्य नियंत्रण है वहां पर अच्छा

2974
03:35:17,720 --> 03:35:21,880
तो ईश्वर का वहां पर नियंत्रण नहीं है नहीं है मतलब कुछ

2975
03:35:21,880 --> 03:35:25,880
भी हो जाए ईश्वर कुछ करने नहीं आएगा वो किसी को बचाने नहीं आएगा उसको

2976
03:35:25,880 --> 03:35:30,040
किसी से लेना देना थोड़ी है श् कि से लेना मुझे

2977
03:35:30,040 --> 03:35:30,800
मुझे बात करने

2978
03:35:30,800 --> 03:35:35,320
ईश्वर का नियंत्रण है कि नहीं दोबारा पूछ रहा हूं

2979
03:35:35,320 --> 03:35:39,480
ईश्वर का नियंत्रण हर जगह है वहां प भी नियंत्रण है वहां प नियंत्रण है

2980
03:35:39,480 --> 03:35:43,720
नियंत्रण है यानी यानी वो रोक सकता है रोक

2981
03:35:43,720 --> 03:35:47,800
सकता है मगर वो रोकता नहीं है लेकिन रोकता

2982
03:35:47,800 --> 03:35:51,920
नहीं है क्यों रोकता अभी पूछो अरे वो मुझे मालूम है कि उसने फ्री विल

2983
03:35:51,920 --> 03:35:56,280
दी है करने के लिए तो तो इसका मतलब

2984
03:35:56,280 --> 03:36:02,280
ईश्वर के अंदर भी अन्याय है मगर उसका कारण यह है कि उसने फ्री विल दी

2985
03:36:02,600 --> 03:36:06,880
है आपके अंदर आपके ईश्वर के अंदर अन्याय तो है क्योंकि

2986
03:36:06,880 --> 03:36:10,400
उसने रोका नहीं पाप होने

2987
03:36:10,400 --> 03:36:13,800
से मान लिया

2988
03:36:13,800 --> 03:36:17,800
ना सर दो मतलब आप ये कह रहे हो

2989
03:36:17,800 --> 03:36:21,880
कि हमारे ईश्वर के अंदर अन्याय है मगर उसका कारण

2990
03:36:21,880 --> 03:36:26,640
है अन्याय होने का और वो कारण भी आपके ईश्वर ने ही बताया है

2991
03:36:26,640 --> 03:36:31,120
भाई फ्रीविल भी नाम कुछ चीज होती है ना फ्रीविल आप

2992
03:36:31,120 --> 03:36:35,120
देखिए कारण बाद में आएगा अन्याय है कि नहीं है वो तो

2993
03:36:35,120 --> 03:36:39,120
कारण है कि क्यों नहीं रोकता मगर नहीं रोक रहा है ये तो माना ना

2994
03:36:39,120 --> 03:36:43,480
आपने अन्याय है नहीं तो अन्याय

2995
03:36:43,480 --> 03:36:46,680
है ना उसके अंदर नहीं है

2996
03:36:46,680 --> 03:36:50,960
अच्छा एक बात बताइए जब वो बना रहा था इन बलात्कारियों

2997
03:36:50,960 --> 03:36:55,320
को तो उसको पता नहीं था बलात्कार करेंगे देखिए

2998
03:36:55,320 --> 03:36:59,520
उसे सब पता था बुराई को बनाना बुराई एक मिनट बुराई को बनाना

2999
03:36:59,520 --> 03:37:04,000
बुराई नहीं मिट एक मिनट बराई को क्रिएट जानबूझ

3000
03:37:04,000 --> 03:37:08,560
बुराई को क्रिएट करना बुराई नहीं है

3001
03:37:08,560 --> 03:37:13,440
नहीं व तो हम तो उसके बच्चे है ना वो हमारा पिता होगा

3002
03:37:13,440 --> 03:37:17,640
मैं इसलिए बुराई कि उसको सब कुछ जानता है कि नहीं जानता है ये बताओ

3003
03:37:17,640 --> 03:37:21,920
चलो एक बाप का जो एक बाप के जो बच्चे मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब देखिए

3004
03:37:21,920 --> 03:37:26,000
मैं आपसे आप सीधे-सीधे जवाब दे रहे हैं आप यह बताइए उसको सब कुछ

3005
03:37:26,000 --> 03:37:30,520
पता है कि नहीं पता है भाई साहब सब कुछ पता

3006
03:37:30,520 --> 03:37:34,920
पता है तो जब वो किसी ऐसे इंसान को बना रहा है जो आगे जाकर के

3007
03:37:34,920 --> 03:37:39,160
किसी मातृ शक्ति के साथ दुराचार कर सकता है तो उसको मालूम

3008
03:37:39,160 --> 03:37:43,480
है ना मैं किसी दुराचारी को बना रहा हूं आज

3009
03:37:43,480 --> 03:37:47,960
जी मालूम है मालूम है ना फिर भी बना रहा है ना

3010
03:37:47,960 --> 03:37:52,640
तो बुराई को बना बुराई को बनाना बुराई नहीं होती है

3011
03:37:52,640 --> 03:37:57,400
तो हम तो उसके बच्चे हो गए ना अरे भाई बच्चे होलो

3012
03:37:57,400 --> 03:38:02,160
बच्चे हो या कुछ भी हो बुराई को तो क्रिएट कर रहा है ना वो बुराई को पै

3013
03:38:02,160 --> 03:38:07,160
नहीं बच्चे पैदा होने के बाद होंगे या पैदा होने से पहले ही

3014
03:38:07,160 --> 03:38:11,280
होंगे पैदा होने के बाद होंगे तो वो तो वो तो बना रहा

3015
03:38:11,280 --> 03:38:15,280
है ना वो जब बना रहा है तभी उसको पता चल रहा है कि मैं किसको बना रहा

3016
03:38:15,280 --> 03:38:19,400
हूं ऐसे नहीं ऐसे नहीं बच पाओगे वो जब बना

3017
03:38:19,400 --> 03:38:23,640
रहा है वो जब बना रहा है तभी उसको पता है कि मैं क्या बना रहा हूं

3018
03:38:23,640 --> 03:38:28,400
ना बनाए ऐसे बच्चे ना बनाए जो बलात्कार

3019
03:38:28,400 --> 03:38:32,480
करेंगे य खुल बोल नहीं पा रहा मेरा कभ फ्री होगा ना क्योंकि उधर मेरे

3020
03:38:32,480 --> 03:38:36,880
पापा सो रहे इधर आराम से बोल रहा हूं

3021
03:38:36,880 --> 03:38:41,040
आप आइएगा और हम लोग विस्तृत बात करेंगे और इस बार बाइबल के प्रमाण लेके

3022
03:38:41,040 --> 03:38:45,840
आइएगा क्योंकि आपने कई ऐसी बात बोली जो बाइबल के विरुद्ध है

3023
03:38:45,840 --> 03:38:50,240
हो सके हो सके तो उस प्रश्न का जवाब लेके आइएगा

3024
03:38:50,240 --> 03:38:54,240
की शुरुआत में ईश्वर किस रूप में था

3025
03:38:54,240 --> 03:38:54,740
हा

3026
03:38:54,520 --> 03:38:59,200
रणजीत सिंह जी रजीत सिंह जी हां दोस्त बोलो आपको

3027
03:38:59,200 --> 03:39:02,680
हा आपको मैं उत्तर दूंगा जो आपने प्रश्न पूछे मेरे

3028
03:39:02,680 --> 03:39:08,480
फिलहाल लेकिन अभी देने का नहीं फिलहाल मतलब हमारे य का माल अलग है

3029
03:39:08,480 --> 03:39:13,080
कुछ इन से देखो देखो एक चीज हम बताए अपनी कल्चर

3030
03:39:13,080 --> 03:39:17,600
जिसको तुम्हारी आत्मा एक्सेप्ट करे वही आपका धर्म ठीक है स्वधर्मे

3031
03:39:17,600 --> 03:39:21,640
निधन श्रेय पर धर्मो भयावह हमारा धर्म यही सिखाता

3032
03:39:21,640 --> 03:39:25,760
है अगर आपकी आत्मा ने उसे धर्म के रूप में स्वीकार किया तो

3033
03:39:25,760 --> 03:39:29,800
वही आपका धर्म है आप उस आत्मा ने स्वीकार नहीं किया ये अभी भी

3034
03:39:29,800 --> 03:39:35,040
खोज में है य संतु

3035
03:39:35,040 --> 03:39:39,160
नहीं शिवांश भाई सुनो ना अपने झूठ बोल रहे हो

3036
03:39:39,160 --> 03:39:43,320
अरे सुनो अभी हम देखो बहुत ज्यादा बाइबल के बारे में स्टडी नहीं किए ठीक है

3037
03:39:43,320 --> 03:39:47,360
बट एक मैडम के कांटेक्ट में भी चाहे हम क्रिश्चियन लोगों से तो हमारा

3038
03:39:47,360 --> 03:39:51,400
कोई कांटेक्ट रहा नहीं पिछले छ महीने से हैं तो हमको मेन अंतर जो

3039
03:39:51,400 --> 03:39:55,400
पता चली ना हमारे हिंदुइज्म में और क्रिश्चियनि जम में वो यह

3040
03:39:55,400 --> 03:39:59,520
कि परमात्मा को यह मानते हैं इनका मानना है कि इनका

3041
03:39:59,520 --> 03:40:03,800
परमात्मा कभी भी जो है किसी का अहित

3042
03:40:03,800 --> 03:40:07,800
नहीं करता किसी का खून नहीं बहाता और हमारा परमात्मा

3043
03:40:07,800 --> 03:40:11,800
जो है अहित करता है खून बहाता है अरे यार हमारा परमात्मा अहित

3044
03:40:11,800 --> 03:40:16,120
खून मैं बाइबल से दिखा दूंगा बाइबल से दिखा दूंगा जो दूसरे क्षेत्र

3045
03:40:16,120 --> 03:40:20,360
वाले हैं उनके साथ क्या क्या करने को कहा गया है बाइबल से आपको दिखाऊंगा

3046
03:40:20,360 --> 03:40:24,360
मतलब अभी ये वाला पार्ट खोला नहीं है हम लोगों ने बाइबल से भी आपको

3047
03:40:24,360 --> 03:40:28,360
दिखा दूंगा कि दूसरों के साथ क्या क्या करना है ठीक है आप दोबारा

3048
03:40:28,360 --> 03:40:32,560
आइए तैयारी तैयारी करके आइए हम भी आएंगे हम दि हम तो इतना जानते

3049
03:40:32,560 --> 03:40:36,280
हैं यार शिवांश की हम अपने चार

3050
03:40:36,280 --> 03:40:40,480
वेद शिवा शिवांश भाई जी आप किस बारे में बात कर रहे मतलब क्या दिखाओगे

3051
03:40:40,480 --> 03:40:44,640
थोड़ा बता दो उसके बारे में मैं आपको ये बताऊ सबसे पहली बात तो यही

3052
03:40:44,640 --> 03:40:48,640
है सबसे पहली बात तो यही है मैं आपको यह बताऊंगा कि जो

3053
03:40:48,640 --> 03:40:50,120
उसको नहीं मानते हैं

3054
03:40:50,120 --> 03:40:54,760
या दूसरे वाले जो लोग है उनको मारो यह करो वो करो यह

3055
03:40:54,760 --> 03:40:59,320
दिखाऊंगा चलो दिखा देना उसका उत्तर दूंगा आपको मैं लेकिन अभी

3056
03:40:59,320 --> 03:41:03,360
थोड़ी ठीक आप रुके क्यों जल्दी जाइए कोई बात

3057
03:41:03,360 --> 03:41:09,360
नहीं जय श्री राम जय श्री

3058
03:41:09,640 --> 03:41:14,400
राम लड़का जय श्री राम बोल के गया

3059
03:41:14,400 --> 03:41:16,880
अरे

3060
03:41:16,880 --> 03:41:20,960
च अरे सुनो ना जो धर्म है ना वो कहीं और

3061
03:41:20,960 --> 03:41:25,440
नहीं होता है इंसान के जो है डीएनए में होता है धर्म ठीक है लोग

3062
03:41:25,440 --> 03:41:29,680
किसी को डाइवर्ट कर सकते हैं सुनो किसी को डाइवर्ट किया जा सकता है बट उसकी

3063
03:41:29,680 --> 03:41:34,120
अंतरात्मा में जो ज्ञान है छिपा हुआ ना उसको आप खत्म नहीं कर सकते

3064
03:41:34,120 --> 03:41:38,120
उसके ऊपर चादर डाल कर के अज्ञान का भ्रमित करके उसको छिपा

3065
03:41:38,120 --> 03:41:42,240
सकते हो कुछ देर के लिए यह कबीर पंथी लोग भी आजकल यही कर रहे

3066
03:41:42,240 --> 03:41:46,320
हैं इनको जो है भ्रमित कर दिया जा रहा है अंतर आत्मा में छिपे

3067
03:41:46,320 --> 03:41:50,520
ज्ञान को भला कौन कब तक छिपाए वो तो एक ज्योति

3068
03:41:50,520 --> 03:41:54,560
कहते हैं ना हवा और ज्योति इस तरह का संबंध है

3069
03:41:54,560 --> 03:41:59,040
कि हवा बह नहीं कि चिनगारी जो है आग बन के

3070
03:41:59,040 --> 03:42:03,040
जलने लगेगी मैं तो ये कहता हूं भाई आपने अपने आपको को

3071
03:42:03,040 --> 03:42:05,160
ऐसे क्यों बोल रहे हो कि भाई मैं जो है

3072
03:42:05,160 --> 03:42:09,400
आप अपने सनातन को छोड़ कर के क्रिश्चियनिटी में क्यों जा रहे हो जब तक आपको पूर्ण

3073
03:42:09,400 --> 03:42:13,480
तरीके से हजम नहीं हुआ है जी यार सुनो ना हम बता रहे अच्छा एक बात

3074
03:42:13,480 --> 03:42:17,920
और है भाई मुझे जो न्याय का न्याय लगा वो न्याय अन्याय नहीं करता

3075
03:42:17,920 --> 03:42:22,080
पहली बात तो यह है कि अगर तुम न्याय और अन्याय के तराजू से अपने पर्सपेक्टिव

3076
03:42:22,080 --> 03:42:26,200
से ईश्वर को तोल रहे हो तो उस हिसाब से तो ईश्वर अन्याय तुम्हारा कर रहा

3077
03:42:26,200 --> 03:42:30,360
है क्योंकि अच्छाई बुराई सब कुछ बनाने वाले

3078
03:42:30,360 --> 03:42:34,640
ईश्वर है मगर इनके

3079
03:42:34,640 --> 03:42:38,720
मतलब इनके अनुसार अन्याय केवल मारना अन्याय है बट यह

3080
03:42:38,720 --> 03:42:43,120
नहीं सोच र है कि ईश्वर ने किसी का अगर संहार किया किसी दैत्य शक्ति का संहार

3081
03:42:43,120 --> 03:42:47,120
किया तो किस लिए किया ये इस जन से एकदम अभी दूर है

3082
03:42:47,120 --> 03:42:51,160
भाई उनका देखो ईश्वरीय शक्तियां जब भी अवतरित हुई है या

3083
03:42:51,160 --> 03:42:55,160
दुष्टों का संहार की है इसलिए थोड़ी की है कि उनको मारना था इसलिए कि

3084
03:42:55,160 --> 03:42:59,560
वो पाप शरीर में जी रहे थे उनकी आत्मा को मोक्ष देना था

3085
03:42:59,560 --> 03:43:04,120
बट इस चीज को ये नहीं मानते हैं चलिए ठीक है अब हम लोग फिर बात करेंगे

3086
03:43:04,120 --> 03:43:08,120
काफी देर हो चुकी है इसीलिए हमने आपको आपको कॉल किया

3087
03:43:08,120 --> 03:43:12,280
था ना उस दिन कि इन लोगों के लिए थोड़ा सा ना हम लोगों को वर्क आउट करके भाई लगना

3088
03:43:12,280 --> 03:43:16,280
हो सभी को आने के लिए सभी को आने के लिए ज श्री राम आप लोग

3089
03:43:16,280 --> 03:43:20,520
आए श्री राम ह महादेव जय माता दी पड़

3090
03:43:20,520 --> 03:43:25,000
जी आज का भी सार्थक रहा हमारा काफी देर हम

3091
03:43:25,000 --> 03:43:29,280
हम थोड़ा लेट हो गए या पता है हम ही थोड़ा लेट हो गए दरअसल पितांबरा

3092
03:43:29,280 --> 03:43:33,280
माता का जो है मूल मंत्र का जाप करना होता है थोड़ा लेट करते

3093
03:43:33,280 --> 03:43:38,240
हैं शम जी आपका कुछ रह गया है कुछ अगर बोलना चाहते तो

3094
03:43:38,240 --> 03:43:42,960
बोले ओके है ना शिवा

3095
03:43:42,960 --> 03:43:46,280
हेल्प

3096
03:43:46,280 --> 03:43:50,480
आपका हो गया का आप कल परसों देखेंगे जी जी

3097
03:43:50,480 --> 03:43:54,520
एक या शिवांश वोह हेल्प ऐसा है ना

3098
03:43:54,520 --> 03:43:58,880
कि आपके पास वह पीडीएफ फॉर्मेट में कुछ हमको पुराण

3099
03:43:58,880 --> 03:44:02,880
वगैरह मिल जाएंगे क्या मैं देखता हूं मैं प्रयास

3100
03:44:02,880 --> 03:44:06,880
करूंगा अगर हो तो परचेस भी हम करेंगे इसके लिए हमारे

3101
03:44:06,880 --> 03:44:11,520
टेलीग्राम ग्रुप पर संपर्क करें हमको

3102
03:44:11,520 --> 03:44:15,720
हमको मैसेज कर दो आप हम मैसेज कर रहे आपको ना आप ग्रुप का लिक हमको शेयर

3103
03:44:15,720 --> 03:44:19,800
कर दो इसके य के डिस्क्रिप्शन में य का जो प्रोफाइल होती है पीछे जाते

3104
03:44:19,800 --> 03:44:24,160
है उसम सब है डिक्र चैनल पर जाएंगे

3105
03:44:24,160 --> 03:44:28,160
टेलीग्राम चैनल पर जाएंगे वहा पर ग्रुप है व आप उनको टच कर

3106
03:44:28,160 --> 03:44:32,560
दीजिए व आपको लेले ठीक है सभी को जय श्री राम

3107
03:44:32,560 --> 03:44:35,880
जय श्री राम भाई

3108
03:44:35,880 --> 03:44:41,680
शिवम जी जय श्री राम आने के लिए आभार

3109
03:44:41,680 --> 03:44:47,680
आपका पाड़ी जी जय श्री राम

3110
03:44:49,200 --> 03:44:53,280
तो सर्वशक्तिमान ईश्वर के आधार पर आज हमारी चर्चा हुई

3111
03:44:53,280 --> 03:44:57,640
और काफी सारी चीजें हुई दज्जाल

3112
03:44:57,640 --> 03:45:01,720
जी आपको अच्छा लगा होगा आई थिंक आज की

3113
03:45:01,720 --> 03:45:03,920
चर्चा

3114
03:45:03,920 --> 03:45:08,280
और जो लोग नास्त्र में जुड़ना चाहते हैं हमारे साथ

3115
03:45:08,280 --> 03:45:12,320
भगवान के नाम का जप करना चाहते हैं वो कर सकते हैं नामा स्त्र

3116
03:45:12,320 --> 03:45:16,720
में जुड़ने के लिए अ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद

3117
03:45:16,720 --> 03:45:21,240
के निमित्त चर्चा करने के लिए या

3118
03:45:21,240 --> 03:45:25,360
फिर जो हमारा एक कोर्स है आवान उससे जुड़ने के लिए

3119
03:45:25,360 --> 03:45:29,680
और धर्म रक्षा के लिए आप हमें

3120
03:45:29,680 --> 03:45:34,640
संपर्क कर सकते हैं ट करिएगा केवल 740819

3121
03:45:34,640 --> 03:45:38,680
और ट पर आकर के आप चर्चा करने का प्रयास ना किया

3122
03:45:38,680 --> 03:45:42,760
करें क्योंकि बहुत सारे लोग होते हैं जो ये चाहते हैं कि हमसे पर चर्चा

3123
03:45:42,760 --> 03:45:46,760
की जाए पर हमारे लिए चर्चा करना संभव नहीं कारण एक तो

3124
03:45:46,760 --> 03:45:51,000
बहुत सारे लोग है दूसरा वहां पर हमारे द्वारा की जाने वाली जो

3125
03:45:51,000 --> 03:45:55,360
मेहनत है श्रम उसका उतना उपयोग विनियोग

3126
03:45:55,360 --> 03:45:59,360
नहीं होगा जितना यहां पर जब चर्चा करेंगे तो उसका होगा हमें केवल एक व्यक्ति

3127
03:45:59,360 --> 03:46:03,560
को कुछ निशब्द करा करके निरुत्तर करके कुछ नहीं सिद्ध

3128
03:46:03,560 --> 03:46:07,760
करना है हमें अपने समाज को जागृत करना है

3129
03:46:07,760 --> 03:46:11,880
धर्म के प्रति निष्ठावान बना तो हमारा लक्ष्य किसी को हराना

3130
03:46:11,880 --> 03:46:16,640
नहीं है हमारा लक्ष्य कितना लाना है समाज में

3131
03:46:16,640 --> 03:46:20,640
तो उसके लिए इसीलिए हम वहा अपना समय व्यर्थ नहीं करेंगे जब

3132
03:46:20,640 --> 03:46:24,960
आप लोग ट पर अभी कल एक मातृ शक्ति ने बहुत

3133
03:46:24,960 --> 03:46:29,080
परेशान किया कि आप मुझसे यहीं पर प्रश्न उत्तर करिए और तरह

3134
03:46:29,080 --> 03:46:33,080
तरह के उसमें कुतर्क करे तो हमने हमें उसे ब्लॉक करना

3135
03:46:33,080 --> 03:46:38,000
पड़ा तो इसलिए ऐसा प्रयास ना करें

3136
03:46:38,000 --> 03:46:42,120
और अपने मन से आपके मन से कहीं पर भी कभी भी यह

3137
03:46:42,120 --> 03:46:46,600
सब चीजें शुरू हो जाए कि हम आपसे चर्चा करने लगे य सब संभव तो

3138
03:46:46,600 --> 03:46:50,600
इसलिए किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त

3139
03:46:50,600 --> 03:46:55,600
चर्चा के लिए धर्म रक्षा में जुड़ने के

3140
03:46:55,600 --> 03:47:00,120
लिए नामा स्त्र में नाम जप करने के लिए साथ में

3141
03:47:00,120 --> 03:47:04,400
या फिर आवान का जो कोर्स है उसके लिए

3142
03:47:04,400 --> 03:47:06,040
हमारी मदद करने के लिए

3143
03:47:06,040 --> 03:47:11,440
अगर आप हमारा साथ देना चाहते हैं तो हमें ट कर सकते हैं

3144
03:47:11,440 --> 03:47:16,000
74836 इसके अलावा दो जरूरी बातें हैं

3145
03:47:16,000 --> 03:47:20,280
कि आपको जो ईश्वर से भगवान

3146
03:47:20,280 --> 03:47:24,600
से रिलेटेड जो क्वेश्चन आते हैं मन में वो सारे क्वेश्चंस

3147
03:47:24,600 --> 03:47:28,880
के लगभग लगभग उत्तर आपको प्राप्त है ट्यूब पर साज

3148
03:47:28,880 --> 03:47:32,920
प्रश्नों से ज्यादा जगतगुरु शंकराचार्य जी के उत्तर हैं वहां

3149
03:47:32,920 --> 03:47:37,720
पर जाएं उनको सुने और अगर कुछ नहीं अगर

3150
03:47:37,720 --> 03:47:42,040
मतलब कोई प्रश्न नहीं है तो कम से कम उनका एक धारण उपनिषद ब्रह्म

3151
03:47:42,040 --> 03:47:46,120
सूत्र या भागवत पर उनका जो को वो है पूरी क्लासेस है

3152
03:47:46,120 --> 03:47:50,440
उनको सुनिए उनका एक वीडियो ज्ञानार्थी आप

3153
03:47:50,440 --> 03:47:54,960
देख सकते हैं और इसके साथ ही

3154
03:47:54,960 --> 03:47:59,080
साथ विधि निषेध इत्यादि के बारे में हमसे संपर्क ना

3155
03:47:59,080 --> 03:48:03,480
करें ज्यादा अच्छा होगा क्योंकि हम भी जहां से उत्तर लाते हैं आपके लिए वह आचार्य

3156
03:48:03,480 --> 03:48:07,600
हैं राम शंकर शुक्ल जी जो प्रयाग में है तो उनका अपना

3157
03:48:07,600 --> 03:48:11,760
चैनल भी है और उनके चैनल को फॉलो करिए आपको बहुत

3158
03:48:11,760 --> 03:48:15,920
ज्यादा यह सब पता लगने लगेगा क्या करना है क्या नहीं विधि निषेध इत्यादि

3159
03:48:15,920 --> 03:48:20,200
के बारे में और इसके अलावा

3160
03:48:20,200 --> 03:48:21,200
जगतगुरु

3161
03:48:21,200 --> 03:48:25,320
भगवान के अभियान से जुड़ने

3162
03:48:25,320 --> 03:48:29,720
के लिए आप जो है सबसे पहले उनकी जो

3163
03:48:29,720 --> 03:48:33,840
पप है गोवर्धन मट उसमें अपने आपको वो

3164
03:48:33,840 --> 03:48:37,920
अपना डाउनलोड करिए उसमें रजिस्टर्ड करिए अपना नाम तो आपसे यथा साम

3165
03:48:37,920 --> 03:48:41,920
यथा संभव प्रयास संपर्क कर लिया जाएगा इसके

3166
03:48:41,920 --> 03:48:46,000
अलावा गुरुदेव से दीक्षा लेने के लिए गुरुदेव कब जा रहे कहां जा रहे

3167
03:48:46,000 --> 03:48:50,080
हैं यह सारी अपडेट्स आपको मिलेंगी कहां से जो

3168
03:48:50,080 --> 03:48:54,720
गोवर्धन मटकी पप वहां से इसके अलावा और भी बहुत सी सुविधाए हैं

3169
03:48:54,720 --> 03:48:58,800
गोवर्धन मट का ट चैनल भी है उसको भी आप फॉलो करें जिससे कि गुरुदेव

3170
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के बारे में आपको सारी जानकारियां प्राप्त हो जाए यह देखिए यह आपको

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प्ले स्टोर पर मिल जाएगी गोवर्धन मटकी पप और

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यह सारी चीजें हैं जो आपको करनी चाहिए और तब

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तक

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आप गुरुदेव के वीडियोस अवश्य देखें गोवर्धन मट

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के पप को जरूर डाउनलोड कर ले इसके साथ ही साथ

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हमारे बारे में हमने बता ही दिया 74 740

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8306 ठीक है सभी को

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जय श्री राम जो आज आए हैं और उनको हम ले नहीं पाए हैं

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उनके लिए क्षमा प्रार्थी है बहुत समय हो गया है तो अभी

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आवश्यक है लाइव स्ट्रीम को पूरा करना

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हमें ऐसी अपेक्षा है कि आज

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हम ऐसी आशा करते हैं कि आपने आज बहुत सारी चीजों को देखा होगा

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आप सनातन सिद्धांतों के बाहर जाकर के

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ईश्वर को मानने वाले सिद्ध नहीं हो सकते और

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ईश्वर को ना मानने वाले होते हुए आप धर्म का पालन करने वाले

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सिद्ध नहीं हो सकते और धर्म का पालन ना करने वाले

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होते हुए आप मानवो चित मर्यादा का

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अ निर्वाह करने वाले सिद्ध नहीं होते

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और सनातन के अंदर रहते हुए शंकराचार्य का विरोध

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करते हुए सनातन को मानने वाले आप सनातन सर्वशक्तिमान

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ईश्वर

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को मानने वाले आप सिद्ध नहीं हो पाएंगे किसी भी प्रकार

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से कोशिश करेंगे हां उनके द्वारा जो तैयार किया हुआ

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जो सिद्धांत का परिधि है

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डायमीटर है उसके अंदर रहकर के आप जरूर अपने अपने मत को पोषित कर सकते हैं

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जैसे कोई निराकार में इसकी आस्था है वह निराकार को पूछ सकता है

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ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान के जो अलग अलग रूप है जिस रूप में जिसकी आस्था

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है व उसको पूछ सकता है मगर उनका विरोध जब कर देंगे तो कहीं

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ना कहीं आपका धर्म शाश्वत नहीं रहेगा

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ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं रहेगा और मोक्ष परम स्वतंत्र नहीं

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रहेगा इस बात को समझने का प्रयास की हम किसी एक विशेष

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मत या धारणा को प्रचारित प्रसारित नहीं कर रहे हैं मूल

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में जाएंगे तो हम मानवता को प्रचारित प्रसारित कर रहे हैं मानवता को बचा रहे हैं

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मानवता ही धर्म है धर्म ही सनातन है और

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सनातन की जो शुद्ध विशु बिल्कुल जो शुद्ध व्याख्या है

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जो आप मतलब बिल्कुल भी उसका जो है

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विरोध करने योग्य नहीं है वो शंकराचार्य जी की है और जो

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अन्य आचार्य गण है परंपरा प्राप्त उनके द्वारा जो दिया

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गया ज्ञान है उसका विरोध नहीं है शंकराचार्य जी के द्वारा

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बल्कि इन सब आचार्यों का पर्या वसान है शंकराचार्य जी के सिद्धांत

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में तो सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति उसको

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कहा जा सकता सभी को जय शीराम

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[संगीत]
