1
00:00:01,120 --> 00:00:07,120
[संगीत]

2
00:00:07,360 --> 00:00:11,560
तो सभी को जय श्री राम जितने भी श्रोता

3
00:00:11,560 --> 00:00:16,000
गण जय श्री राम जय श्री राम जितने भी अतिथि है

4
00:00:16,000 --> 00:00:20,080
सभी को जय श्री राम युगल किशोर

5
00:00:20,080 --> 00:00:24,360
जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है आज हमारे बीच में राघव जी भी है राघव

6
00:00:24,360 --> 00:00:28,960
जी को आपने पिछली एक चर्चा हुई थी जो

7
00:00:28,960 --> 00:00:33,080
जिसमें हम लोगों ने कुछ मुंह

8
00:00:33,080 --> 00:00:37,280
को छिपाने वाले काले कारनामे करने वाले लोगों के बारे में बात की थी काफी

9
00:00:37,280 --> 00:00:41,280
विस्तृत चर्चा थी और हमारे बीच में एक नए अतिथि और

10
00:00:41,280 --> 00:00:45,840
है शेखर प्रताप सिंह जी और बहुत

11
00:00:45,840 --> 00:00:50,160
ही जय श्री राम जय श्री राम शेखर जी इनका शेखर

12
00:00:50,160 --> 00:00:54,840
जी का भी चैनल है धार्मिक इंटेलिजेंस के नाम से

13
00:00:54,840 --> 00:00:59,120
और बहुत ही लॉजिकल बात को रखते

14
00:00:59,120 --> 00:01:03,680
हैं लॉजिकली बात को रखते हैं यह भी तर्क और प्रमाण के

15
00:01:03,680 --> 00:01:07,720
साथ मैं आप लोगों से कहूंगा कि इनका चैनल भी एक बार जो है आप लोग

16
00:01:07,720 --> 00:01:11,960
जरूर वहां पर जाए और इनकी चीजों को देखें जोय कर रहे हैं किस तरीके

17
00:01:11,960 --> 00:01:16,080
से अपनी चीजों को रखते हैं और आज की जो चर्चा

18
00:01:16,080 --> 00:01:17,080
है

19
00:01:17,080 --> 00:01:21,960
उसको शुरू करने से पहले मैं भगत सिंह का एक

20
00:01:21,960 --> 00:01:25,840
वक्तव्य मुझे याद है वो

21
00:01:25,840 --> 00:01:29,920
कहूंगा सीने पर जो घाव है वो

22
00:01:29,920 --> 00:01:31,320
फलो के गुच्छे

23
00:01:31,320 --> 00:01:35,520
हैं सीने पर जो घाव है वो फूलों

24
00:01:35,520 --> 00:01:39,840
के गुच्छे हैं हमें पागल ही रहने दो हम पागल

25
00:01:39,840 --> 00:01:42,640
ही अच्छे हैं

26
00:01:42,640 --> 00:01:47,080
यह मैं क्यों कह रहा हूं क्योंकि हमारा कहीं पर

27
00:01:47,080 --> 00:01:53,080
लाइव इलाज चल रहा है दिमाग

28
00:01:53,200 --> 00:01:57,560
का तो इसलिए बताना पड़ रहा है

29
00:01:57,560 --> 00:02:01,760
वहां पर एक पर्टिकुलर एक डॉक्टर भी है पता नहीं लोगों

30
00:02:01,760 --> 00:02:05,880
को ऐसा क्यों लगता है कि डॉक्टर से उनी के पास है मगर हम अपनी

31
00:02:05,880 --> 00:02:10,280
बात जब भी लाएंगे धर्म के विषय में तो शास्त्र लेके आएंगे

32
00:02:10,280 --> 00:02:14,280
साइजल प्रॉब्लम है हमारा नहीं

33
00:02:14,280 --> 00:02:18,440
नहीं हमारा इलाज भी चल रहा है लाइव और सबसे बड़ी

34
00:02:18,440 --> 00:02:22,480
बात है ना भगवान श्री कृष्ण ने एक बात कही थी

35
00:02:22,480 --> 00:02:27,520
तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र

36
00:02:27,520 --> 00:02:31,520
प्रमाण हम अपनी जो बात बोल रहे हैं आचरण के संबंध

37
00:02:31,520 --> 00:02:35,560
में भी बोल रहे हैं सिद्धांत भी बोल रहे हैं उसके लिए

38
00:02:35,560 --> 00:02:40,520
शास्त्र का प्रमाण रख रहे हैं और यह लोग क्या कर रहे

39
00:02:40,520 --> 00:02:45,120
हैं डॉक्टर को ला रहे हैं संविधान को ला रहे हैं

40
00:02:45,120 --> 00:02:49,320
राजनीतिज्ञों को ला रहे हैं इनका धर्म से लेना देना खत्म हो गया

41
00:02:49,320 --> 00:02:53,360
अब आधुनिक भौतिक विज्ञान पर आ गए हैं धर्म

42
00:02:53,360 --> 00:02:57,440
से लेना देना बंद हो गया धर्म के साथ जोड़ते हुए लाए तब भी ठीक

43
00:02:57,440 --> 00:02:57,960
है

44
00:02:57,960 --> 00:03:02,040
युक्ति के लिए वैज्ञानिक उसको अब जैसे मैंने

45
00:03:02,040 --> 00:03:07,480
अभी थोड़ा सा मेरे कान में पढ़ा कि

46
00:03:07,480 --> 00:03:11,520
भाई जब तुम किसी का तुम्हें कोई अधिकार नहीं

47
00:03:11,520 --> 00:03:15,800
है कि तुम किसी के बारे में कुछ बोलो ना मनुस्मृति में लिखा है

48
00:03:15,800 --> 00:03:20,080
सुन लेना भैया लड़का हो या लड़की वह आवाज बदल के लाइव

49
00:03:20,080 --> 00:03:24,120
करते हो कि वाकई मेंही कोई किसी की बिटिया हो

50
00:03:24,120 --> 00:03:28,240
सुन लेना कि मनुस्मृति

51
00:03:28,240 --> 00:03:32,400
में लिखा है मौन रहने से अच्छा है सत्य

52
00:03:32,400 --> 00:03:36,600
बोलना यह है शास्त्र शास्त्र के साथ

53
00:03:36,600 --> 00:03:41,440
अपनी बात बोलो ना भाई हमने जो प्रश्न किया

54
00:03:41,440 --> 00:03:45,680
यज्ञ पवित्र करते समय के लिए किसी पर तो हमने शास्त्र

55
00:03:45,680 --> 00:03:49,720
से किया हमने कहा कि वेदों में लिखा है कॉपी मेखला पहनकर

56
00:03:49,720 --> 00:03:54,040
धारण पूर्वक ब्रह्मचारी धारण करता है तो कहां है कपन

57
00:03:54,040 --> 00:03:58,960
मेखला और अगर तुम धारण कर भी रहे हो तो कौन से तुम्हारे

58
00:03:58,960 --> 00:04:03,120
वस्त्र है यह फिर कहां से निर्धारण हो रहा है अगर तुम शास्त्रो चित विधि का उपयोग

59
00:04:03,120 --> 00:04:07,160
नहीं कर रहे हो जो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजों में से एक

60
00:04:07,160 --> 00:04:11,360
है उसको करते समय तो फिर वह जो चीजें हैं उनको कहो

61
00:04:11,360 --> 00:04:13,320
कि वह शास्त्री

62
00:04:13,320 --> 00:04:18,680
है और अगर हमने यह वाली लाइन भी कही है ना

63
00:04:18,680 --> 00:04:22,960
कि भाई मैं धर्म का जो

64
00:04:22,960 --> 00:04:26,960
धर्मानुसार जो विधि है उसका तरीके से निर्वाह नहीं कर पा रहा हूं ये भी

65
00:04:26,960 --> 00:04:31,000
भगवत गीता में है भगवत गीता भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं

66
00:04:31,000 --> 00:04:35,640
व्यवस्था वश अज्ञानता वश शास्त्रो चित

67
00:04:35,640 --> 00:04:39,800
विधान का पालन ना करने की स्थिति में यदि तुम्हारी प्रमाण

68
00:04:39,800 --> 00:04:45,800
बुद्धि शास्त्रों में है धर्म में है तो भी तुम

69
00:04:47,120 --> 00:04:51,320
धर्मजीत मैं यह स्वीकार कर रहा हूं कि मैं शास्त्र उचित नहीं हूं

70
00:04:51,320 --> 00:04:55,400
मैं जो कर रहा हूं वो कहीं ना कहीं गलत है मैं यदि यह स्वीकार कर रहा हूं

71
00:04:55,400 --> 00:04:59,800
तो भी मैं धर्मजयगढ़

72
00:04:59,800 --> 00:05:05,560
जब शास्त्रों के बाहर जाकर के कुछ करेगा और यह कहेगा नहीं यह शास्त्र उचित

73
00:05:05,560 --> 00:05:09,560
है तो अच्छा एक बात तो है

74
00:05:09,560 --> 00:05:14,040
वो कहते हैं ना कि अच्छे लोगों की जब संगत मिलती है

75
00:05:14,040 --> 00:05:18,160
तो भले ही विरोध के रूप में मिले या सहयोग के रूप

76
00:05:18,160 --> 00:05:22,720
में मिले उसका असर आने लगता है तो मैं देख रहा हूं कि असर आया

77
00:05:22,720 --> 00:05:27,120
आज वह अभद्रता व अ मर्यादा वो हीन आचरण

78
00:05:27,120 --> 00:05:31,320
वो सब मुझे थोड़ा उसकी मैं ट नजर आई बाकी

79
00:05:31,320 --> 00:05:36,200
तो आगे तो चीजें है अपनी अपनी

80
00:05:36,200 --> 00:05:40,440
जगह हां एक एक मैं मुख्य विषय को स्टार्ट

81
00:05:40,440 --> 00:05:44,440
करने से पहले एक बात और कह दू

82
00:05:44,440 --> 00:05:48,760
कि हमारे बारे में आचार्य प्रशांत जी है उन्होंने

83
00:05:48,760 --> 00:05:52,800
अपने चैनल पर एक पोस्ट डाला है और

84
00:05:52,800 --> 00:05:58,800
मैं उनका सम्मान करता हूं उन्होंने बहुत ही अच्छे शब्दों का उपयोग करते हुए

85
00:05:59,880 --> 00:06:04,320
जो है अपनी बात को रखा है कि आप हमारे आश्रम आ जाइए

86
00:06:04,320 --> 00:06:08,640
और जो दो पक्ष है उन दोनों पक्षों में बात होनी चाहिए आचार्य प्रशांत

87
00:06:08,640 --> 00:06:12,920
जी मुझे आपको आपने उसमें कुछ जो कुछ मैं कहूंगा

88
00:06:12,920 --> 00:06:17,720
शायद आपको मालूम नहीं होगा हमारे बारे में इस वजह से वो हुआ है पहली बात तो यह

89
00:06:17,720 --> 00:06:22,280
है कि आपने कहा कि नव युवकों में

90
00:06:22,280 --> 00:06:26,960
आजकल वाद विवाद छेड़ा हुआ है तो

91
00:06:26,960 --> 00:06:32,440
प्रशांत जी मुझे नहीं पता आपकी आयु कितनी है

92
00:06:32,440 --> 00:06:36,440
मगर यदि आप 35 वर्ष की आयु वाले

93
00:06:36,440 --> 00:06:40,680
को नवयुवक कहेंगे तो

94
00:06:40,680 --> 00:06:44,880
फिर अधेड़ या फिर जो 21 साल का युवा

95
00:06:44,880 --> 00:06:48,920
होगा 24 का युवा होगा उसको क्या कहेंगे या

96
00:06:48,920 --> 00:06:53,120
मतलब क्या कहेंगे उसको नव युवक अगर आप कह रहे 35

97
00:06:53,120 --> 00:06:58,080
वर्ष की आयु वाले को जिसका परिवार है है ना

98
00:06:58,080 --> 00:07:02,280
तो मुझे लगता है कि मेरी और आपकी आयु में बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं

99
00:07:02,280 --> 00:07:07,120
होगा जो आप अपने को अलग करते हुए और हमें जो

100
00:07:07,120 --> 00:07:11,200
है चिला चटर मटर में थोड़ा सा डाल रहे

101
00:07:11,200 --> 00:07:16,160
होग वो कैंडी खाने वाले बच्चे आपस में लड़ रहे हैं ऐसा नहीं है

102
00:07:16,160 --> 00:07:20,280
35 वर्ष की आयु है और मुझे

103
00:07:20,280 --> 00:07:25,200
लगता है य जितने भी जो नवयुवक हैं जो भिड़ने आ रहे

104
00:07:25,200 --> 00:07:29,920
हैं उन सबसे करीब 10 10 साल का गैप तो होगा ही

105
00:07:29,920 --> 00:07:34,080
हां वो जो एक भद

106
00:07:34,080 --> 00:07:38,160
सा क्या है वो एक गुंडा टाइप का है ना

107
00:07:38,160 --> 00:07:42,200
जो अंडर कवर्ड एजेंट है जो गालियां दिया

108
00:07:42,200 --> 00:07:46,960
करता है विविर वगैरह पर और अभद्र भाषा का उपयोग करता है

109
00:07:46,960 --> 00:07:47,720
उस उससे

110
00:07:47,720 --> 00:07:52,080
मुझे लगता है कि हमारी आयु की सिमिलरिटी हो सकती है मगर यह जो विज्ञान

111
00:07:52,080 --> 00:07:56,280
दर्शन इत्यादि है वि विज्ञान दर्शन हो गया जो जो हमारे ऊपर

112
00:07:56,280 --> 00:08:00,360
जो वीडियो बनाया गया लाइव किया गया उसमें जो उपलब्ध और

113
00:08:00,360 --> 00:08:04,880
अन्य जो युवा थे मुझे नहीं लगता कि उनकी जो हा

114
00:08:04,880 --> 00:08:09,040
उवाच नाम का जो एक अमर्यादित हीन

115
00:08:09,040 --> 00:08:13,480
आचरण युक्त व्यक्ति है वो उससे आयु की हो सकता है सिमिलरिटी

116
00:08:13,480 --> 00:08:17,760
हो 19 20 का अंतर हो यह हो सकता है मुझे ऐसा लगता है बाकी सत्यता

117
00:08:17,760 --> 00:08:21,760
क्या है वो नहीं पता तो एक

118
00:08:21,760 --> 00:08:25,920
तो यह बात हो गई कि जो आपने कहा कि नवीको में आपस में वो हो रही

119
00:08:25,920 --> 00:08:30,240
है तो मुझे फिर यह जानना होगा कि आपकी नजरों में फिर युवक

120
00:08:30,240 --> 00:08:36,040
क्या है जब 35 साल का व्यक्ति भी आपके लिए नव युवक है तो

121
00:08:36,040 --> 00:08:40,760
फिर नव युवक है 35 वाला तो फिर युवक क्या होगा

122
00:08:40,760 --> 00:08:44,960
40 45 इसको थोड़ा सा ठीक करें दूसरी बात आपने एक शब्द

123
00:08:44,960 --> 00:08:49,200
उपयोग में लिया हमारे लिए पौराणिक

124
00:08:49,200 --> 00:08:53,960
और आर्य समाज के लिए वैदिक तो यह

125
00:08:53,960 --> 00:08:58,160
निर्धारित आपने कहां से किया कि हमारे लिए जब आप हमारे

126
00:08:58,160 --> 00:09:02,240
समक्ष किसी को रख रहे हैं वैसे आप पौराणिक कह सकते हैं मगर जब समक्ष किसी

127
00:09:02,240 --> 00:09:02,800
को रखते हुए

128
00:09:02,800 --> 00:09:06,880
पौराणिक कह रहे हैं जब किसी को समक्ष रखते हुए वैदिक कह रहे हैं

129
00:09:06,880 --> 00:09:10,960
तो आप वहां पर हमें पौराणिक कहने का अधिकार

130
00:09:10,960 --> 00:09:16,680
आपको किसी ने नहीं दिया तो इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए मैं सम्मान कह रहा हूं

131
00:09:16,680 --> 00:09:20,920
क्योंकि अगर हमें कोई पौराणिक कहेगा तो हम वेदों की सीमा

132
00:09:20,920 --> 00:09:25,200
के अंदर होते हुए पौराणिक है अगर मैं

133
00:09:25,200 --> 00:09:29,440
आपको आर्य समाज को वैदिक ना कहूं सत्य प्रकाशी कहूं

134
00:09:29,440 --> 00:09:33,440
कैसा चलेगा आपको अजीब लगेगा क्योंकि जो

135
00:09:33,440 --> 00:09:37,760
आइडेंटिटी आपने अपनी बनाई है या जो अपने लिए आप सुनना चाहते हैं

136
00:09:37,760 --> 00:09:41,880
जो अपने आप को आप कहते हैं वोह सामने वाला नहीं कह रहा है भले ही वो

137
00:09:41,880 --> 00:09:45,880
जो बुक है वो आप यूज करते हो उस पर आधारित

138
00:09:45,880 --> 00:09:50,040
हो मैं आपको अगर बोलने लगू ये जो है सत्य प्रकाशी है वैदिक

139
00:09:50,040 --> 00:09:54,280
ना बोलू वैदिक हम अपने लिए वैदिक बोलू और आपके लिए बोलू

140
00:09:54,280 --> 00:09:58,280
यह प्रकाशी है यह समाजी है तो आपको अजीब लगेगा तो

141
00:09:58,280 --> 00:10:02,400
आपको ये वर्तनी का थोड़ा सा ध्यान रखना चाहिए था कि आपको हमारे लिए

142
00:10:02,400 --> 00:10:06,560
बोलना चाहिए था परंपरा प्राप्त वैदिक और

143
00:10:06,560 --> 00:10:10,800
आर्य समाज के लिए बोलना चाहिए था स्वघोषित

144
00:10:10,800 --> 00:10:14,800
वैदिक ऐसा ही है ना या अगर स्वघोषित नहीं बोल रहे

145
00:10:14,800 --> 00:10:17,800
हैं तो समाजी वैदिक यह

146
00:10:17,800 --> 00:10:21,960
बोल सकते हैं है ना परंपरा

147
00:10:21,960 --> 00:10:26,680
प्राप्त वैदिक परंपरा प्राप्त वैदिक बोलेंगे तो उसमें पुराण आ जाएगा

148
00:10:26,680 --> 00:10:30,880
फिर अलग से पुराण को लगाने की आवश्यकता नहीं

149
00:10:30,880 --> 00:10:34,920
हां किसी ऐसे व्यक्ति के लिए आप पुराणिक संज्ञा दे सकते हैं जो पुराण

150
00:10:34,920 --> 00:10:39,440
को मानता हो मगर वेदों को ना मानता हो

151
00:10:39,440 --> 00:10:43,560
तो ऐसे तो नहीं हम वेदों में प्रमाण बुद्धि ना रखता हो

152
00:10:43,560 --> 00:10:47,680
पुराण में प्रमाण बुद्धि रखता ह ऐसे तो नहीं तो यह थोड़ा सा आपको ध्यान रखना

153
00:10:47,680 --> 00:10:51,880
चाहिए था और मैं नहीं चाहता हूं कि आपके

154
00:10:51,880 --> 00:10:56,280
साथ आपके लिए मैं इस तरह के अलंकार समाज इत्यादि

155
00:10:56,280 --> 00:11:00,400
जो मैं प्रस्तुत करता हूं अलंकार समाज आपने

156
00:11:00,400 --> 00:11:04,480
स्वीकार किया आर्य समाज ने स्वीकार किया अलंकार समाज को अलंकार को

157
00:11:04,480 --> 00:11:09,240
वेदों में कई जगह अलंकार आ गया विराट पुरुष में अलंकार आ जाएगा

158
00:11:09,240 --> 00:11:13,320
तीन पग जब धरती नाप वामन अवतार में तो अलंकार आ

159
00:11:13,320 --> 00:11:17,480
जाएगा तो अलंकार को स्वीकार करते हैं इसलिए अगर हम आपको अगर अलंकारी

160
00:11:17,480 --> 00:11:22,440
कहने लगे तो आपको उचित नहीं लगेगा तो इसी प्रकार से

161
00:11:22,440 --> 00:11:26,680
आपको पुराण पौराणिक नहीं कहना चाहिए ठीक पौराणिक

162
00:11:26,680 --> 00:11:31,040
कहिए वैदिक होते हुए पौराणिक कहिए या परंपरा प्राप्त वैदिक

163
00:11:31,040 --> 00:11:32,840
कह सकते हैं यह तो

164
00:11:32,840 --> 00:11:37,000
रही आपने जो व लिखा है उसके अंदर की बात दूसरी

165
00:11:37,000 --> 00:11:41,560
बात यह है कि बिल्कुल आपका

166
00:11:41,560 --> 00:11:45,600
जो क्या कहते हैं उसको आपका जो निमंत्रण

167
00:11:45,600 --> 00:11:49,680
है आपका जो आमंत्रण वह हमें स्वीकार है

168
00:11:49,680 --> 00:11:54,640
बस बात यह है कि जो विज्ञान दर्शन नाम का जो व्यक्तित्व है

169
00:11:54,640 --> 00:11:58,640
उसके साथ कोई भी चर्चा नहीं होगी उसके साथ इसलिए

170
00:11:58,640 --> 00:12:02,680
चर्चा नहीं होगी कि यह व्यक्ति वहां उस मंच का एक

171
00:12:02,680 --> 00:12:06,760
भागीदार था जिस मंच पर अशा

172
00:12:06,760 --> 00:12:10,760
स्त्रीय रूप से हमारे ऊपर टीका टिप्पणी की गई हमारे

173
00:12:10,760 --> 00:12:14,880
आध्यात्मिक मार्ग में आने से पहले के जीवन की फोटो लगा कर के इस तरह से उन्हें

174
00:12:14,880 --> 00:12:20,360
उपयोग में लाया गया जैसे आज भी हम उस तरह की फोटो

175
00:12:20,360 --> 00:12:24,520
अ कर रहे हैं खिंचवा रहे हैं और उनको उपयोग में लाया गया

176
00:12:24,520 --> 00:12:28,600
हमें डिफेम करने का प्रयास किया गया और सबसे बड़ी बात है कि

177
00:12:28,600 --> 00:12:32,640
हमारे जो परिवार है फैमिली है जिसने किसी के ऊपर कोई कटाक्ष

178
00:12:32,640 --> 00:12:36,920
नहीं किया था उसको भी नहीं छोड़ा गया उसको भी बीच में लाया

179
00:12:36,920 --> 00:12:41,080
गया तो यह व्यक्ति वहां पर उपलब्ध थे उपस्थित

180
00:12:41,080 --> 00:12:45,080
थे वहा इनका कहना है कि भाई हमने नहीं किया वो जिसका पेज है

181
00:12:45,080 --> 00:12:48,120
उसने किया है ना तो आपने

182
00:12:48,120 --> 00:12:52,760
तो आप तो आचार्य है और जो यह कह रहा है वो भी सुन ले

183
00:12:52,760 --> 00:12:56,840
भीष्म पिता महा वहां उपलब्ध थे उपस्थित थे जहां पर द्रौपदी

184
00:12:56,840 --> 00:13:01,040
का चीर हो रहा था विवेकी का दायित्व ज्यादा

185
00:13:01,040 --> 00:13:05,880
होता है तो जब पनिशमेंट

186
00:13:05,880 --> 00:13:10,000
का अवसर आया ना तो पहले कौरवों की बारी

187
00:13:10,000 --> 00:13:14,240
नहीं आई पहले दुर्योधन की बारी नहीं आई पहले उसका ऋण

188
00:13:14,240 --> 00:13:18,800
चुकाना पड़ा भीष्म पिता मा इत्यादि को जिन्हें धर्म का बोध था

189
00:13:18,800 --> 00:13:23,280
तो यदि आप वहां पर उपलब्ध है तो मनुस्मृति का खंडन कर रहे हैं मौन रहकर

190
00:13:23,280 --> 00:13:27,320
क्यों यदि आपको लगता है कि वह कार्य गलत हो रहा है या तो

191
00:13:27,320 --> 00:13:31,680
आपके अनुसार वो गलत नहीं है गलत नहीं है तो आप फिर से विरोधी हो गए और यदि विरोधी

192
00:13:31,680 --> 00:13:35,720
अगर गलत है और आप मौन है तो आप मनुस्मृति का खंडन कर रहे हैं धर्म का खंडन

193
00:13:35,720 --> 00:13:40,360
कर रहे हैं क्यों क्योंकि मौन रहने से उचित होता है सत्य

194
00:13:40,360 --> 00:13:44,160
बोलना तो ये जो

195
00:13:44,160 --> 00:13:48,200
अ दर्शन विज्ञान दर्शन नाम का व्यक्तित्व है जो

196
00:13:48,200 --> 00:13:52,200
बोल रहा है कि मैंने नहीं वो तो दीदी ने बोला था अच्छा उसका एक तर्क और है

197
00:13:52,200 --> 00:13:56,280
वो ये भी बोल रहा है कि भाई वो वो मातृ शक्ति ने मातृ शक्ति के लिए बोला

198
00:13:56,280 --> 00:14:00,400
है मातृ शक्ति ने मातृ शक्ति के लिए मतलब आपके हिसाब से मातृ शक्ति अगर

199
00:14:00,400 --> 00:14:03,600
मातृ शक्ति के साथ कुछ भी करे तो वह कर सकती है

200
00:14:03,600 --> 00:14:07,720
यह कहने का मतलब है हम तक सीमित होते तो

201
00:14:07,720 --> 00:14:11,880
अलग बात थी परिवार को बीच में ले आए तो ऐसे व्यक्ति के साथ हम मंच

202
00:14:11,880 --> 00:14:16,800
साझा नहीं करेंगे हां कोई अन्य व्यक्ति जो

203
00:14:16,800 --> 00:14:21,040
जिसके अंदर सद्भाव हो जिसके अंदर मर्यादा हो आप उससे

204
00:14:21,040 --> 00:14:25,240
हमारी चर्चा करवाए या फिर आपने जैसा की अंत में कहा कि भाई आप हमसे

205
00:14:25,240 --> 00:14:29,360
पूछ लीजिए अपने प्रश्न जो है तो यह भी हो सकता है आप आप अपने

206
00:14:29,360 --> 00:14:33,440
आप को रखिए वहां पर या फिर आप अन्य किसी को किसी

207
00:14:33,440 --> 00:14:38,120
मर्यादित व्यक्ति को अगर रखना चाहे तो वहां पर रखिए मगर

208
00:14:38,120 --> 00:14:42,200
विज्ञान दर्शन ने अच्छा विज्ञान दर्शन का एक और कहना

209
00:14:42,200 --> 00:14:46,080
भी है

210
00:14:46,080 --> 00:14:50,280
कि विज्ञान दर्शन का एक और कहना भी है कि भाई मैंने

211
00:14:50,280 --> 00:14:54,360
कुछ नहीं किया था अरे जब आप यह कहते हुए अपने आपको अलग कर रहे हो मैंने कुछ नहीं

212
00:14:54,360 --> 00:14:58,480
किया इसका मतलब आप अप्रत्यक्ष रूप से तो स्वीकार कर रहे हो कि वहां कुछ हुआ

213
00:14:58,480 --> 00:15:02,680
मगर आप आपने नहीं किया जब हुआ तो जब आपको पता लग गया कि ऐसा

214
00:15:02,680 --> 00:15:06,760
हो रहा है तो आपने क्या किया आप मौन रहे आप वापस बाहर

215
00:15:06,760 --> 00:15:10,760
आ चुके हैं बाहर आने के बाद आपने जहां पर यह सब हुआ है उसका

216
00:15:10,760 --> 00:15:15,080
विरोध प्रकट किया आपने उनसे याचना की कि भाई वो आपने उनके परिवार

217
00:15:15,080 --> 00:15:19,280
को बीच में लाकर के गलत किया है आप जो है उनके पुराने फोटो दिखा

218
00:15:19,280 --> 00:15:24,800
कर के गलत किया परिवार तो दूर की बात है आप उनके पुराने फोटो क्यों दिखा रहे आज के फोटो

219
00:15:24,800 --> 00:15:28,960
दिखाइए और तो और उसने जो है शास्त्र को रखते हुए

220
00:15:28,960 --> 00:15:33,720
प की थी जहां पर वेद आपके कपड़ों पर जा रहे हैं वहां पर उसने बोला था

221
00:15:33,720 --> 00:15:37,760
और जिस बात को आप धर्मो चित रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं उस बात

222
00:15:37,760 --> 00:15:41,760
पर बोला था आप कॉफी पीजिए कैफेटेरिया में जाकर के

223
00:15:41,760 --> 00:15:46,080
उसको धर्म के रूप में प्रस्तुत मत करिए कोई कुछ नहीं कहेगा मगर आप कल को यह बताने लगेंगे

224
00:15:46,080 --> 00:15:50,280
कि कॉफी पीना जो है वेद संवत है गीता संवत है तो तो प्रश्न

225
00:15:50,280 --> 00:15:54,640
करना पड़ेगा ना इस इस संदर्भ

226
00:15:54,640 --> 00:15:59,160
में प्रश्न किया गया था खैर तो आपने इसी

227
00:15:59,160 --> 00:16:01,480
मर्यादा को नहीं कई मर्यादाओं को तोड़ा

228
00:16:01,480 --> 00:16:05,520
संदर्भ को छोड़ दिया उसके बाद आप जो है व्यक्तिगत पुराने जीवन पर चले

229
00:16:05,520 --> 00:16:09,560
गए फिर परिवार को ले आए तो यह सब बातें आपको यदि गलत नहीं लगती है

230
00:16:09,560 --> 00:16:14,280
तो भी हम आपके साथ मंच साझा नहीं करेंगे यदि गलत लगती है और आप मौन है

231
00:16:14,280 --> 00:16:18,280
आप प्रतिकार नहीं कर रहे हैं तो भी आप जो है

232
00:16:18,280 --> 00:16:22,440
दोषी है यदि आपको लग रहा है कि य सब चीजें

233
00:16:22,440 --> 00:16:26,480
गलत है तो आपको वहां खलना चाहिए वो वीडियो डिलीट कर दो

234
00:16:26,480 --> 00:16:29,520
गलत किया तुमने

235
00:16:29,520 --> 00:16:33,880
यह अन्याय है मगर नहीं हम पक्षपात विहीन

236
00:16:33,880 --> 00:16:37,920
नहीं है हम तो पक्षपाती हैं तो यह विज्ञान

237
00:16:37,920 --> 00:16:41,960
दर्शन का पॉइंट ऑफ व्यू है अगर आप यह कहते

238
00:16:41,960 --> 00:16:46,120
हुए अपने आप को अलग कर रहे हो कि वह गलत हुआ है तो आपको स अगर आपके कहने

239
00:16:46,120 --> 00:16:50,440
पर व वीडियो डिलीट नहीं हो रहा है तो आपको सार्वजनिक रूप से उसका उसकी निंदा

240
00:16:50,440 --> 00:16:55,040
करते हुए यह सब आचरण गलत था और वीडियो बनाना चाहिए था

241
00:16:55,040 --> 00:16:59,120
यह सारी चीजें हैं बाकी लिखित में हमारे पास जो आया उसका ख

242
00:16:59,120 --> 00:17:03,120
में भी हम उत्तर दे देंगे जैसे एक विधिवत एक पैराग्राफ है उसका

243
00:17:03,120 --> 00:17:07,160
भी उत्तर दे देंगे वो हमें समय नहीं था गुरुदेव इस समय लखनऊ आए

244
00:17:07,160 --> 00:17:11,240
हुए हैं हमारा जो कार्य स्थली है वहां पर और

245
00:17:11,240 --> 00:17:15,280
इस कारण से हमें समय नहीं है हम एक से दो दिन में जो आपका प्रॉपर

246
00:17:15,280 --> 00:17:16,480
एक जो उत्तर है बाई

247
00:17:16,480 --> 00:17:20,520
पोस्ट या जैसे भी उचित होगा दे देंगे उसको

248
00:17:20,520 --> 00:17:26,240
तो यह सारी बातें हमने कह ली अब आ जाते हैं हम मुख्य विषयों

249
00:17:26,240 --> 00:17:31,160
पर जी युगल किशोर जी जय श्री राम

250
00:17:31,160 --> 00:17:36,240
जय श्री राम जय श्री राम आज मुख्य रूप से हमने जो य चर्चा रखी है

251
00:17:36,240 --> 00:17:40,320
वो कल जो गोपाष्टमी

252
00:17:40,320 --> 00:17:45,480
है उसका विशेष महत्व लोगों को बताने के लिए रखी है

253
00:17:45,480 --> 00:17:50,440
और यह प्रेरणा देने के लिए रखी है कि

254
00:17:50,440 --> 00:17:55,320
अब से आने वाले समय से गोपाष्टमी को

255
00:17:55,320 --> 00:17:59,400
एक बहुत महत्त्वपूर्ण पर्व के रूप में प्रत्येक

256
00:17:59,400 --> 00:18:03,520
सनातनी मनाए तो इस तरह का कुछ भाव लेकर के आज हम चले

257
00:18:03,520 --> 00:18:07,560
हैं तो इसमें युगल जी हम सबसे पहले चाहते हैं कि आप थोड़ा सा इस

258
00:18:07,560 --> 00:18:11,880
पर प्रकाश डाले गौ का महत्व और गोपाष्टमी

259
00:18:11,880 --> 00:18:16,080
पर गौ का पूजन सपथम हम

260
00:18:16,080 --> 00:18:20,200
गोविंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र को प्रणाम कर लेते हैं फिर उसके

261
00:18:20,200 --> 00:18:24,640
बाद इस पर प्रकाश डाल सभी मेरे साथ एक मंत्र का उच्चारण

262
00:18:24,640 --> 00:18:29,240
करें नमो ब्रह्मण्य देवाय

263
00:18:29,240 --> 00:18:32,040
ब्राह्मण हिताय जगत

264
00:18:32,040 --> 00:18:36,600
ताय गोविंदाय नमो नम

265
00:18:36,600 --> 00:18:40,760
तो भगवान श्री कृष्ण भगवान श्री गोपा देख

266
00:18:40,760 --> 00:18:45,040
महत्व बहुत अधिक सभी पुराणों ने

267
00:18:45,040 --> 00:18:49,280
सभी धर्मशास्त्रों ने य का महत्व बहुत बताया है

268
00:18:49,280 --> 00:18:53,880
महाभारत के अनुशासन पर्व की यदि मैं बात करू उसकी बात बाद में करूंगा

269
00:18:53,880 --> 00:18:58,200
सर्वप्रथम में बात करूंगा जो गोपाष्टमी है व कार्तिक

270
00:18:58,200 --> 00:19:02,480
में पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है तो कार्तिक शुक्ल पक्ष की जो अष्टमी

271
00:19:02,480 --> 00:19:06,760
होती है उसको हम कहते गोपाष्टमी और भगवान

272
00:19:06,760 --> 00:19:10,960
श्री कृष्ण चंद्र जी ने जब गोवर्धन धारण किया था अपनी उंगली पर

273
00:19:10,960 --> 00:19:15,240
श्रीमद भागवत के द में बताया गया है गलोक से

274
00:19:15,240 --> 00:19:19,600
स् माता कामधेनु पधारी और स्वर्ग लोक से देवराज इंद्र

275
00:19:19,600 --> 00:19:23,960
पधारे तो गलोक से माता कामधेनु और स्वर्ग से देवराज इंद्र

276
00:19:23,960 --> 00:19:28,360
जब पधारे जब उनका अहंकार चूर कर दिया भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी ने

277
00:19:28,360 --> 00:19:32,600
त माता काम नेनु ने अपने दुध की धारा से भगवान श्री कृष्ण

278
00:19:32,600 --> 00:19:36,760
चंद्र का अभिषेक किया वहा पर मा माता काम नेनु

279
00:19:36,760 --> 00:19:40,960
ने क्या कहा कि आप जो है आज से हमारे इंद्र हो जाइए तो

280
00:19:40,960 --> 00:19:45,160
वहां पर भगवान श्री कृष्ण चंद्र का नया नाम संस्कार हुआ वहा

281
00:19:45,160 --> 00:19:47,680
पर उनका क्या नाम पड़ा गोविंद

282
00:19:47,680 --> 00:19:52,160
इसलिए हम कहते हैं गोविंद जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र

283
00:19:52,160 --> 00:19:56,600
है वो हमारे सहायक हो वो जगत के

284
00:19:56,600 --> 00:20:00,960
हित के कारण है तो य गोपाष्टमी का महत्व गोदान

285
00:20:00,960 --> 00:20:05,120
का तो बहुत अधिक महत्व है अब देखिए जब हम मृत्यु

286
00:20:05,120 --> 00:20:09,240
को प्राप्त हो जाते है तो परलोक में क्या होता है तनी नाम

287
00:20:09,240 --> 00:20:13,320
की नदी होती वो तनी नाम की नदी इतनी भयानक होती

288
00:20:13,320 --> 00:20:17,680
है उसके अंदर रक्त पी मास इत्यादि य सब भरे हुए होते

289
00:20:17,680 --> 00:20:21,800
वो रक्त पी मास इत्यादि भरे हुए होते और नदी कैसी होती

290
00:20:21,800 --> 00:20:26,280
समुद्र जैसी उसका कोई और छोर नहीं होता समुद्र जैसी लंबी नदी होती है

291
00:20:26,280 --> 00:20:30,600
अब समुद्र जैसी लंबी नदी उसको पार कर भाई वहां पर खड़ा

292
00:20:30,600 --> 00:20:34,840
रहना भी मतलब कोई व्यक्ति खड़ा भी नहीं रह सकता इतनी दुर्गंध

293
00:20:34,840 --> 00:20:39,080
होती है वहा पर रक्त प मास इत्यादि भरा हो कितनी दुर्गंध

294
00:20:39,080 --> 00:20:43,240
आएगी और वो भी समुद्र की भाति ना और है ना छोर है तो वहां

295
00:20:43,240 --> 00:20:47,360
प महाभारत के अनुशासन परव में पितामह भीष्म ने गाय

296
00:20:47,360 --> 00:20:51,840
का य महत्व बताया की गाय की सेवा को तो आप छोड़

297
00:20:51,840 --> 00:20:56,440
केवल व्यक्ति गाय का यदि स्पर्श मात्र कर ले कभी

298
00:20:56,440 --> 00:21:00,920
जीवन में यदि उसको गाय का स्पर्श हुआ हो तो वो

299
00:21:00,920 --> 00:21:03,360
रभी माता स्वयं तनी

300
00:21:03,360 --> 00:21:07,840
नदी पर आकर के उस व्यक्ति को तनी नदी को पार करने में उसकी सहायक होती

301
00:21:07,840 --> 00:21:11,880
ये पिता भीष्म के वचन है और महाभारत अनुशासन पर बहुत

302
00:21:11,880 --> 00:21:16,000
अच्छी कथा है जो में रघुनंदन

303
00:21:16,000 --> 00:21:20,080
मह चवन होते हैं म चवन है रघुनंदन

304
00:21:20,080 --> 00:21:24,160
तो वो क्या जल के अंदर समा भी लेते हैं जब जल के अंदर समाधि

305
00:21:24,160 --> 00:21:28,160
लेते हैं तो वहां पर व्रत धारण करते हैं तो

306
00:21:28,160 --> 00:21:32,360
क मछार आ जाते हैं कई सारे मछुआरे आ जाते हैं वहा पर मछली

307
00:21:32,360 --> 00:21:36,560
को पकड़ने के लिए मछली को पकड़ने के लिए आते हैं जैसे जाल

308
00:21:36,560 --> 00:21:40,600
डालते मछली तो आती नहीं साथ में रघुनंदन चवन ऋषि होते है वो

309
00:21:40,600 --> 00:21:44,800
निकल आते हैं जाले के साथ जब वो बाहर निकल के आते

310
00:21:44,800 --> 00:21:49,160
हैं तो वो कहते कि तुम मछार ने मेरे को निकाला है और तुम्हारी

311
00:21:49,160 --> 00:21:53,200
इस रस्सी से जाल से कई सारी मछलियों का वध भी हुआ है तुमको पाप

312
00:21:53,200 --> 00:21:57,240
भी लगा इसलिए जो तुम्हारे राजा है उनके

313
00:21:57,240 --> 00:22:01,320
पास मेरे को ले चलो वो राजा के पास जाते हैं राजा

314
00:22:01,320 --> 00:22:05,480
कौन थे न उनके पास जाते हैं अब उन राजा से कहते कि राजा

315
00:22:05,480 --> 00:22:09,600
तुम मेरे को खरीद लो यदि तुम्हारे अंदर सामर्थ्य हो किंतु

316
00:22:09,600 --> 00:22:14,040
राजा खरीदे कैसे राजा कहता है अच्छा तो

317
00:22:14,040 --> 00:22:18,160
वो अपने पुरोहित जी से कहता है कि पुरोहित जी आप एक कार्य कीजिए

318
00:22:18,160 --> 00:22:18,660
आप

319
00:22:18,600 --> 00:22:23,080
जो चवन है ना उनके 1000 मुद्राए इन मार को

320
00:22:23,080 --> 00:22:27,600
दे दीजिए और हम इनको खरीद लेते हैं तो 1000

321
00:22:27,600 --> 00:22:31,600
मुद्राए चिवन ऋषि को खरीदने के लिए वो देते चवन ऋषि क्या कहते

322
00:22:31,600 --> 00:22:36,000
है देखो राजन तुमने मेरा जो मूल्य है व 1000

323
00:22:36,000 --> 00:22:40,040
रुद्रा में लगाया है मेरा मूल्य 1000 मुद्रा का नहीं

324
00:22:40,040 --> 00:22:44,480
है राजा सोच में पड़ गया अच्छा तो एक लाख मुद्रा

325
00:22:44,480 --> 00:22:48,680
शिवन ऋषि ने फिर कहा ना एक लाख मुद्राए नहीं एक

326
00:22:48,680 --> 00:22:52,800
लाख मुद्राओं का भी मेरा मूल्य नहीं है फिर पुन कहा एक

327
00:22:52,800 --> 00:22:57,080
करोड़ मुद्रा शन ष ने पुन कहा ना पुन सोच

328
00:22:57,080 --> 00:23:01,080
विचार करो एक करोड़ मुद्र भी नहीं बोले

329
00:23:01,080 --> 00:23:05,360
अपने पुरोहित जी से कि एक काम करो मैं अपना सारा राज्य समर्पित कर देता हूं

330
00:23:05,360 --> 00:23:09,400
मैं अपना आधा राज्य दे देता हूं बोले राजन एक बार

331
00:23:09,400 --> 00:23:14,000
पुनः विचार करो ऋषियों के साथ विचार करो ब्राह्मणों के साथ विचार करो

332
00:23:14,000 --> 00:23:18,240
तो वहां पर जब ब्राह्मणों के साथ ऋषियों के साथ वो विचार करने के लिए

333
00:23:18,240 --> 00:23:22,320
बैठे तब एक निष्कर्ष निकल के आया एक ऋषि वहां पर बैठे हुए

334
00:23:22,320 --> 00:23:26,640
थे जो कि गौ के उदर से ही उत्पन्न हुए थे

335
00:23:26,640 --> 00:23:30,640
तो वहां पर उन ऋषि ने बताया कि देखो एक काम करो

336
00:23:30,640 --> 00:23:33,760
इनको हम संतुष्ट कर सकते हैं किंतु सारा राज्य दे

337
00:23:33,760 --> 00:23:38,320
कर के नहीं संतुष्ट कर सकते क्योंकि इनका मूल्य सारा राज्य देकर भी

338
00:23:38,320 --> 00:23:42,360
इनको खरीदा नहीं जा सकता तो बोले क्या करें तो आप

339
00:23:42,360 --> 00:23:46,600
एक काम कीजिए इनको एक गौ दान कर दीजिए एक गौ

340
00:23:46,600 --> 00:23:50,640
दान का इतना बड़ा महत्व है कि महर्षि चवन को एक गौ दान

341
00:23:50,640 --> 00:23:54,680
में खरीद मतलब राजन तो देखिए पूरा राज्य देकर भी

342
00:23:54,680 --> 00:23:58,680
चिवन ऋषि को नहीं खरीद पा रहा किंतु एक गौन का कितना महत्व

343
00:23:58,680 --> 00:24:02,760
च बिकने को तैयार हो गए ये गौन का महत्व और

344
00:24:02,760 --> 00:24:06,760
सबसे बड़ी बात वहा पर यह बताया गया की

345
00:24:06,760 --> 00:24:10,880
गौ माता का और ब्राह्मण का कुल एक है तो

346
00:24:10,880 --> 00:24:15,480
ब्राह्मणों का तो प्रथम कर्तव्य बनता है गौ माता की रक्षा करे

347
00:24:15,480 --> 00:24:19,560
क्यों गौ माता का ब्राह्मणों का कुल एक है एक के हाथों

348
00:24:19,560 --> 00:24:23,680
में मंत्र की शक्ति है और एक में हविष्य की देवताओ

349
00:24:23,680 --> 00:24:27,880
को गौ माता से हविष्य मिलता है और ब्राह्मणों के द्वारा जो है मंत्र

350
00:24:27,880 --> 00:24:32,440
शक्ति प्र होती है तो इसीलिए ब्राह्मणों का सर्वप्रथम कर्तव्य

351
00:24:32,440 --> 00:24:36,880
और श्रीमद भगवत गीता के 18 अध्याय में बताया गया है ऋषि गोरक्ष

352
00:24:36,880 --> 00:24:41,160
वाणिज्य वैश्य कर्म स्वभाव माने के वैश्य

353
00:24:41,160 --> 00:24:45,240
का कर्म है कृषि खेती करना व्यापार करना और

354
00:24:45,240 --> 00:24:48,960
गौ माता की रक्षा करना खेती और व्यापार के बीच में गौ

355
00:24:48,960 --> 00:24:53,120
माता को रखा गया है माने की खेती करते व्यापार करते गौ माता

356
00:24:53,120 --> 00:24:57,400
की रक्षा तुमको अवश्य करनी चाहिए तुम्हारा कर्तव्य है वैश्य कर्म स्वभाव

357
00:24:57,400 --> 00:25:01,560
स्वभाव से को कर्म प्राप्त है कि वो गौ माता की रक्षा अवश्य

358
00:25:01,560 --> 00:25:05,800
करे यदि ग गौ माता की रक्षा नहीं होगी अ श्रीमद् भागवत

359
00:25:05,800 --> 00:25:10,240
में एक वचन प्राप्त हुआ है छठे स्कंध में वहा प

360
00:25:10,240 --> 00:25:14,440
चित्र केद नाम का एक राजा होता है जो बाद में तासर आदि बन गया श्राप के कारण माता

361
00:25:14,440 --> 00:25:18,960
पार्वती के तो वहां पर लिखा है चित्र केतु का पुत्र हुआ था

362
00:25:18,960 --> 00:25:23,720
तो वहा लिखा है कि उन्होने कई सारी गय दान की और कितनी ग दान करी

363
00:25:23,720 --> 00:25:28,600
धेनु नाम ट नु नाम ट गुदान

364
00:25:28,600 --> 00:25:32,600
माने की छह अर्ध ग दान करी उन्होने छ

365
00:25:32,600 --> 00:25:36,680
अर्ध ग सोची कितनी एक अवध में 10 करोड़ तो

366
00:25:36,680 --> 00:25:40,880
छ उर्द में 60 करोड़ हो गई आज तो भारतवर्ष में 60 करोड़ ग है ही

367
00:25:40,880 --> 00:25:45,160
नहीं इतनी ग एक करोड़ भी नहीं है तो आप सोचिए

368
00:25:45,160 --> 00:25:49,480
जब वो राजा उस समय प्राचीन भारत में जो राजा थे जब 6

369
00:25:49,480 --> 00:25:53,560
6 करोड़ ब दान कर सकते थे आप सोच की देश कितना समृद्ध

370
00:25:53,560 --> 00:25:57,720
होगा उस समय 60 करोड़ उनका दु उनका घी

371
00:25:57,720 --> 00:26:02,280
उनका कितना लाभ प्राप्त करते हैं और भारत की

372
00:26:02,280 --> 00:26:04,000
देसी गाय है देसी नस्ल की

373
00:26:04,000 --> 00:26:08,320
जो गौ माता है जिसके गल कंबल आद जो

374
00:26:08,320 --> 00:26:12,480
र से होता है व देसी गाय होती है य ये

375
00:26:12,480 --> 00:26:16,720
मैं य पर विशेष रूप से बताना चाहूंगा कि जो

376
00:26:16,720 --> 00:26:20,840
देसी गाय हैं वेद लक्षणा गाय उनके पीछे

377
00:26:20,840 --> 00:26:25,160
कुब होता है है ना और गल कंबल होता है दो चीज

378
00:26:25,160 --> 00:26:29,280
ध्यान अगर पूजन करना है आपको तो सबसे पहले प्राथमिकता यही

379
00:26:29,280 --> 00:26:33,480
है कि हमें वेद लक्षणा गाय का पूजन करना चाहिए

380
00:26:33,480 --> 00:26:37,520
वो प्योर मतलब जो देसी हमारे भारतवर्ष की जो गाय जी

381
00:26:37,520 --> 00:26:41,800
और भारत की जो वेद लक्षणा देसी उसकी परंपरा कहां से है ब्रह्म लोकी

382
00:26:41,800 --> 00:26:45,880
भ भव जना सत्यम सारे लोगों की एक एक गौ

383
00:26:45,880 --> 00:26:50,160
माता है और ब्रह्म लोक से जो गौ माता है बहुला वहा से

384
00:26:50,160 --> 00:26:54,280
परंपरा प्राप्त हमारी जो देसी गौ माता भारत की गौ माता है वहा

385
00:26:54,280 --> 00:26:58,600
तक परंपरा प्राप्त तो दीपावली के दूसरे दिन से गौ नवरात्र ंभ

386
00:26:58,600 --> 00:27:02,600
हो जाते है दीपावली के दिन भी गौ माता का पूजन

387
00:27:02,600 --> 00:27:06,640
का विशेष महत्व है गौ पूजन के बिना माता लक्ष्मी का पूजन हो ही नहीं

388
00:27:06,640 --> 00:27:10,720
सकता क्योंकि माता लक्ष्मी का पूजन तभी माता ग्रहण करती

389
00:27:10,720 --> 00:27:14,800
है जब ग का पूजन हो और आप देखिए श्रीमद भागवत में विशेष रूप से कहा

390
00:27:14,800 --> 00:27:19,080
गया कि जब भी पृथ्वी पर संकट आता है संकट के बागल ते

391
00:27:19,080 --> 00:27:23,120
है तो पृथ्वी क्या करती है ग का रूप बनाती है ग का रूप बनाती है

392
00:27:23,120 --> 00:27:27,200
और भगवान के पास जाती है जब महाराज थु ने पृथ्वी

393
00:27:27,200 --> 00:27:31,200
को मारने के लिए जब पृथ्वी सारा अन्न निकल गई अपने अंदर क्योंकि दुष्टों

394
00:27:31,200 --> 00:27:35,400
का राज्य था तो जब दुष्टों का राज्य आता है पृथ्वी क्या करती है सारे अन्न रस

395
00:27:35,400 --> 00:27:40,080
को निगल जाती है और जब कोई ऐसा शासन करता आता है जो सु बुद्ध हो

396
00:27:40,080 --> 00:27:44,240
जो समृद्ध हो और जो प्रतापी हो जो धर्म के मार्ग पर

397
00:27:44,240 --> 00:27:48,280
चलने वाला हो सारे अनन रस को अपने आप बाहर कर देती

398
00:27:48,280 --> 00:27:52,840
है तो महाराज पृथु को बड़ा कष्ट हुआ कि ये पृथ्वी को मैंने

399
00:27:52,840 --> 00:27:56,920
इतना संभाला और ये क्या कर रही है कि सारा अन्य रस निकल ग मेरी

400
00:27:56,920 --> 00:28:01,120
प्रजा भूख मर रही है महाराज प भागे पीछे तो उन्होंने गौ का रूप

401
00:28:01,120 --> 00:28:05,200
धारण कर लिया ग का रूप धारण करके कहा महाराज प से कि आप क्या कर रहे

402
00:28:05,200 --> 00:28:09,200
मैं तो आपकी इतनी प्या और आप मेरा वध कर देना चाहते हैं ये तो आपके लिए

403
00:28:09,200 --> 00:28:13,520
अच्छा नहीं आप एक काम करिए आप सभी को पात्र बनाइए और दोहन की

404
00:28:13,520 --> 00:28:17,520
पृथ्वी का दोहन हुआ तो सभी जानते उसम से नाना प्रकार की औषधि और अन

405
00:28:17,520 --> 00:28:21,680
निकले तो जो पृथ्वी है वो सारे औषधि और अन्न

406
00:28:21,680 --> 00:28:25,720
की भूमि है अब देखिए सबसे बड़ा महत्व क्या है जो गाय का

407
00:28:25,720 --> 00:28:30,040
गोबर होता है ना गाय का गोबर उसके अंदर अर विष नाशक

408
00:28:30,040 --> 00:28:34,160
जो है औषधि होती है एक ऋषि थे काशी के अंदर

409
00:28:34,160 --> 00:28:38,160
काशी के अंदर जो एक ऋषि थे तो वहा प एक व्यक्ति की मृत्यु

410
00:28:38,160 --> 00:28:42,720
हो गई उस व्यक्ति की मृत्यु हुई सर्प के डंस से

411
00:28:42,720 --> 00:28:47,040
तो उसके पूरे शरीर में विष फैलने लगा उन ऋषि को जाकर के सबने

412
00:28:47,040 --> 00:28:51,280
बताया कि इसकी जो है मृत्यु हो गई है बोले कैसे हुई स के डंग से हुई

413
00:28:51,280 --> 00:28:55,400
एक काम करो गाय का गोबर लेकर के आ गाय का गोबर लेकर के आए सभी

414
00:28:55,400 --> 00:28:59,400
लोग नासिका को छोड़ कर के संपूर्ण पर गाय के गोबर का

415
00:28:59,400 --> 00:29:03,560
लेपन कर दिया फिर आधे घंटे बाद पुन लेपन कर दिया गाय के गोबर

416
00:29:03,560 --> 00:29:07,800
का तो जब गाय के गोबर का लेपन हुआ वो व्यक्ति सांस लेने

417
00:29:07,800 --> 00:29:11,800
लगा तो उससे गाय के गोबर से विष उतर गया पूरा

418
00:29:11,800 --> 00:29:15,880
हैजा प्लाज्मा जो इत्यादि जो बीमारियां भयंकर भयंकर बीमारियां

419
00:29:15,880 --> 00:29:20,400
होती है वो सभी गाय के गोबर से दूर हो जाती है आज

420
00:29:20,400 --> 00:29:24,400
भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि गौ रक्षा के लिए कोई प्रयास

421
00:29:24,400 --> 00:29:28,600
नहीं किया जा रहा है है ना तो जो गौ माता

422
00:29:28,600 --> 00:29:32,680
की परंपरा है देखिए बहुला ंगा अतो भया ीमा कामा

423
00:29:32,680 --> 00:29:37,000
शरभ ये इत्यादि जितनी गौ है हमारी वो सभी परंपरा

424
00:29:37,000 --> 00:29:41,240
है हमारी गौ माता की और गौ माता से हमको सीखना चाहिए गौ माता कभी

425
00:29:41,240 --> 00:29:45,280
भी फालतू में नहीं बोलती अब देखिए जब गौ माता को कष्ट

426
00:29:45,280 --> 00:29:49,640
होगा ना तभी बोलेगी कष्ट नहीं होगा तो नहीं बोलेगी जैसे कोई भी जानवर

427
00:29:49,640 --> 00:29:53,840
जैसे कुत्ता भता रहता है अब देखिए खेती के अंदर गौ

428
00:29:53,840 --> 00:29:58,280
माता का बड़ा प्रयोग है ग से जो बैल उत्पन्न होता है खेती के

429
00:29:58,280 --> 00:30:02,840
हम उसका प्रयोग कर सकते गौ माता का दूध सात्विक होता है किंतु

430
00:30:02,840 --> 00:30:06,920
हम भैस का दूध उपयोग कर लेते हैं भैस का दूध उतना सात्विक नहीं होता

431
00:30:06,920 --> 00:30:10,960
जितना दूध गौ माता का सात्विक होता है दूध तो ऊट का भी लिया जा सकता

432
00:30:10,960 --> 00:30:14,960
है टनी का भी लिया जा सकता है किंतु टनी का दूध जो है वो तामसी

433
00:30:14,960 --> 00:30:19,000
होता है उससे दुर्गंध आती है और उससे घी

434
00:30:19,000 --> 00:30:23,400
भी नहीं बन सकता और ना ही जो उनके

435
00:30:23,400 --> 00:30:27,400
ट ऊट होता है जो ना उससे खेती की जा सकती है क्योंकि खेती इसलिए

436
00:30:27,400 --> 00:30:31,440
नहीं की जा स क्य ऊंट बहुत महंगा होता है सामान्य व्यक्ति के अंदर समता

437
00:30:31,440 --> 00:30:35,600
नहीं की ऊंट को खरीद ले किंतु जो बैल होता है उसके हम खेती

438
00:30:35,600 --> 00:30:39,680
में भी प्रयोग ला सकते हैं गौ माता का जो मूत्र होता है गौ माता का जो

439
00:30:39,680 --> 00:30:44,080
गोबर होता है उसको यदि हम खेती में खाद के रूप में प्रयोग करते हैं

440
00:30:44,080 --> 00:30:48,080
तो अा एक प्रयोग हुआ था खाद के रूप में उसको प्रयोग किया गया

441
00:30:48,080 --> 00:30:52,200
था अंगूर का वृक्ष निकला था किसी व्यक्ति ने बताया था

442
00:30:52,200 --> 00:30:56,240
लिखा हुआ है गीता प्रेस के एक

443
00:30:56,240 --> 00:31:00,240
उसम मैंने पढ़ा था उसम लिखा हु राम सुखदास जी के द्वारा

444
00:31:00,240 --> 00:31:04,520
तो एक व्यक्ति ने उनको बताया की खाद का प्रयोग किया था ग गोबर

445
00:31:04,520 --> 00:31:05,020
का और

446
00:31:04,760 --> 00:31:09,000
ग मूत्र का अंगूर का पेड़ लगाने के लिए तो वहा पर जो अंगूर थे दुगने

447
00:31:09,000 --> 00:31:13,000
अंगूर बड़े बड़े मोटे मोटे अंगूर और सबसे बड़ी विशेषता

448
00:31:13,000 --> 00:31:17,280
य है की ग का गोबर और ग का मूत्र प्रयोग किया जाए तो

449
00:31:17,280 --> 00:31:21,400
खेती है जो बीज व नष्ट नहीं होता विदेशी का

450
00:31:21,400 --> 00:31:25,400
जो करते लोग यूज उससे क्या है जो बीज होता है व नष्ट

451
00:31:25,400 --> 00:31:30,360
हो जाता है धरती जो होती है र हो जाती है उससे कोई

452
00:31:30,360 --> 00:31:34,480
प्रयोग में लाने योग्य वो होती नहीं है इसलिए देसी गाय जो होती है वो सर्व

453
00:31:34,480 --> 00:31:39,040
उपयोगी होती है भगवान श्री कृष्ण चंद्र भगवान श्री रामचंद्र

454
00:31:39,040 --> 00:31:43,040
य सदैव गौमूत्र का सेवन किया करते थे जो छोटी सी

455
00:31:43,040 --> 00:31:47,080
बछिया होती है ना गौ माता की छो छोटी सी बच्ची यदि

456
00:31:47,080 --> 00:31:51,440
उसका भी गौ मूत्र उसका भी मूत्र पान किया जाए उससे

457
00:31:51,440 --> 00:31:55,560
हमारे पेट की जो बीमारिया होती है वो ठीक हो जाती है और आज के

458
00:31:55,560 --> 00:32:00,080
साइंस ने माना भी है कि ऐसी प्रकार की बीमारिया है

459
00:32:00,080 --> 00:32:04,480
जो गौ के मुख से ही ठीक हो जाती है

460
00:32:04,480 --> 00:32:08,480
गौ का इतना बड़ा महत्व हमारे धर्मशास्त्र के अंदर बताया गया है

461
00:32:08,480 --> 00:32:12,480
पद्म पुराण के अंदर भी वर्णित है महाभारत के अनुशासन पर मैंने आपको

462
00:32:12,480 --> 00:32:16,480
बताया कितना बड़ा महत्व उसका है और ब्राह्मण और जो गौ माता है वो तो एक

463
00:32:16,480 --> 00:32:19,920
ही कुल की दोनों शाखाए है अब यदि गौ

464
00:32:19,920 --> 00:32:24,280
की रक्षा नहीं होगी तो संपूर्ण मानव जाति संकट में आ जाएगी कैसे आ

465
00:32:24,280 --> 00:32:28,320
जाएगी सर्वप्रथम ग का उपयोग हम करते हैं

466
00:32:28,320 --> 00:32:32,400
यज्ञ में गौ का उपयोग होता है उसके हविष्य का उपयोग होता है घी का उपयोग होता है

467
00:32:32,400 --> 00:32:36,840
दुध का उपयोग होता है पंचगव्य जो गौ माता के होते है दूध

468
00:32:36,840 --> 00:32:41,000
ी गोबर गोमूत्र इत्यादि जो पंच गव्य होते है उनको

469
00:32:41,000 --> 00:32:45,720
मिला कर के जो यज्ञ में उनका उपयोग किया जाता है वो बहुत महत्त्वपूर्ण होता है

470
00:32:45,720 --> 00:32:50,120
अब यदि ग लुप्त हुई तो क्या होगा ग का घी लुप्त हो जाएगा

471
00:32:50,120 --> 00:32:54,200
घी लुप्त हुआ तो जो यज्ञ है ब्राह्मण यज्ञ कैसे करेगा

472
00:32:54,200 --> 00:32:58,280
बिना गौ माता की ी के तो देवताओ तक अविष्य पहुंचेगा ही नहीं अब

473
00:32:58,280 --> 00:33:02,680
भैस का यूज करो चाहे किसी का आप प्रयोग करो उससे कोई लाभ नहीं है क्योंकि शास्त्रीय

474
00:33:02,680 --> 00:33:07,440
बात क्या है गौ शास्त्रीय बात है गौ का हविष्य होना आवश्यक

475
00:33:07,440 --> 00:33:11,680
तो गौ का हविष्य यदि ब्राह्मण को प्राप्त नहीं होगा तो ब्राह्मण का मंत्र

476
00:33:11,680 --> 00:33:16,080
जो है उचित रूप से जो है देवताओं तक नहीं पहुंचेगा

477
00:33:16,080 --> 00:33:20,200
अब जब ग का ग लुप्त हुई हविष्य लुप्त हुआ यज्ञ

478
00:33:20,200 --> 00:33:24,440
लुप्त हुआ यज्ञ से ब्राह्मण लुप्त हुआ ब्राह्मण से मंत्र लुप्त हुआ

479
00:33:24,440 --> 00:33:28,440
मंत्र से वेद लुप्त हुआ और वेद लुप्त हुआ तो ज्ञान और ज्ञान

480
00:33:28,440 --> 00:33:32,680
त हुआ तो पूरा विश्व संकट तो गौ माता की रक्षा

481
00:33:32,680 --> 00:33:35,120
ही विश्व की रक्षा है यदि हम गौ

482
00:33:35,120 --> 00:33:39,120
माता की रक्षा नहीं कर सकते तो आप समझिए कि ये पूरा विश्व

483
00:33:39,120 --> 00:33:43,320
पूरी मानव जाति संकट के अंदर है जैसा की मैंने कहा कि प्राचीन

484
00:33:43,320 --> 00:33:47,480
भारत के अंदर 60 करोड़ ग चित्र केतु राजा ने दान में की और

485
00:33:47,480 --> 00:33:51,520
एक समय तो ऐसा भी था भारत के अंदर की अकबर के शासन काल में

486
00:33:51,520 --> 00:33:55,680
भी गौ मास बिकता नहीं था कहीं जगह गौ

487
00:33:55,680 --> 00:33:59,760
मास तो छोड़िए एक जीव की हत्या अकबर के शासनकाल में नहीं होती थी

488
00:33:59,760 --> 00:34:03,840
किंतु भारत का आज कोई ऐसा प्रांत नहीं दिखाई देता जहां प

489
00:34:03,840 --> 00:34:07,960
ग हत्या ना होती हो या किसी जीव की हत्या ना होती हो

490
00:34:07,960 --> 00:34:12,000
इस विषय प हम लोग आएंगे इस विषय पर हम लोग आएंगे कि गौ माता की रक्षा

491
00:34:12,000 --> 00:34:16,080
के लिए हम क्या कर सकते हैं अब थोड़ा सा मैं राघव जी से कहूंगा कि वह

492
00:34:16,080 --> 00:34:21,720
अपना कुछ वक्तव्य रखे जी राघव जी जय श्री

493
00:34:21,720 --> 00:34:26,320
राम बहुत सुंदर विवेचन किया आपने आपने

494
00:34:26,320 --> 00:34:30,480
मतलब जो काफी समग्र रूप से आपने सार

495
00:34:30,480 --> 00:34:35,160
गर्भ एक विवेचन दे दिया

496
00:34:35,160 --> 00:34:39,680
और कुछ भी ऐसी चीज बची नहीं है कि जो मुझे

497
00:34:39,680 --> 00:34:43,760
जिसको जोड़ना ड ऑन करना होता है ना कि कुछ चीज बच जाए तो उसको ड ऑन करने

498
00:34:43,760 --> 00:34:47,920
का म होता है जी राघव जी जी

499
00:34:47,920 --> 00:34:52,120
सभी को जय श्री राम और एक बार प्रेम से सभी जय गौ माता

500
00:34:52,120 --> 00:34:56,800
जय गोपाल बोले जय गौ माता जय गोपाल

501
00:34:56,800 --> 00:35:01,240
जी हा देखिए शर्मा जी ने बहुत अच्छा बोला

502
00:35:01,240 --> 00:35:07,240
इस विषय में मैं एक बात यह कहना चाहता हूं कि

503
00:35:09,000 --> 00:35:13,840
बहुदा आवाज नहीं आ

504
00:35:13,840 --> 00:35:17,920
रही देखने में आता है कि सनातन में एक चर्चा हा

505
00:35:17,920 --> 00:35:22,680
जीरी आवाज आ बहुदा के बाद आपकी आवाज कट गई थी हा जी बहुदा

506
00:35:22,680 --> 00:35:26,920
हा बहुदा क्या हो रहा है कि सनातन में बहुत सारे प्रश्नों

507
00:35:26,920 --> 00:35:31,160
पर चर्चा चल रही है उसमें एक प्रश्न यह भी है कि हम जो त्यौहारों

508
00:35:31,160 --> 00:35:35,440
की संस्कृति वाले हैं उसमें हमारा इन सभी त्यौहारों में सबसे

509
00:35:35,440 --> 00:35:39,680
मुख्य त्यौहार कौन सा माना चाहिए माना जाना चाहिए जी तो

510
00:35:39,680 --> 00:35:43,680
कोई कुछ कहता है कोई कुछ कहता है क्योंकि कुछ त्यौहार हमारे यहां

511
00:35:43,680 --> 00:35:48,120
प्रांतीय विशेषता लिए हुए भी होते हैं लेकिन समग्र

512
00:35:48,120 --> 00:35:52,680
रूप से एक त्यौहार की प्राधान्य होनी चाहिए

513
00:35:52,680 --> 00:35:56,880
और वह क्यों होनी चाहिए क्योंकि

514
00:35:56,880 --> 00:36:00,960
हम यदि किसी एक त्यौहार पर एक नहीं होंगे तो

515
00:36:00,960 --> 00:36:05,040
फिर हम अपने बाकी त्यौहारों की महत्ता भी नहीं जान सकेंगे तो

516
00:36:05,040 --> 00:36:09,360
मुझे ऐसा लगता है मेरे अपने अध्ययन के अनुसार कि गोपा अष्टमी को

517
00:36:09,360 --> 00:36:13,440
हम सनातनी हों में सबसे बड़ा पर्व माना जाना चाहिए कारण क्या है

518
00:36:13,440 --> 00:36:17,480
इसके पीछे क्योंकि पूरा विश्व आज

519
00:36:17,480 --> 00:36:21,680
यह विषय नहीं है इसलिए ज्यादा उसमें डिटेल में नहीं जाऊंगा अन्यथा किसी दिन

520
00:36:21,680 --> 00:36:24,200
मैं इस विषय को कह दूंगा कि कोई भी नास्तिक

521
00:36:24,200 --> 00:36:28,280
से नास्तिक भी प्रभु श्री रामचंद्र और श्री कृष्ण चंद्र का भक्त हुए बगैर

522
00:36:28,280 --> 00:36:32,760
नहीं रह सकता तो जो भगवान श्री राम और कृष्ण

523
00:36:32,760 --> 00:36:37,280
जिनका ही जन्म गौ माता की रक्षार्थ ब्राह्मण की रक्षार्थ

524
00:36:37,280 --> 00:36:41,840
और सभी की रक्षार्थ होता है उनकी भी आराध्य

525
00:36:41,840 --> 00:36:46,120
पूज्य गौ माता है तो हमारे आराध्य की भी आराध्या जो है

526
00:36:46,120 --> 00:36:50,280
हमारे आराध्य देव ही जिनकी आराधना करते हैं उस पर्व

527
00:36:50,280 --> 00:36:55,240
को हमारे यहां सबसे बड़ा पर्व माना जाना चाहिए और

528
00:36:55,240 --> 00:36:59,320
हम लोग गौ माता क्यों कहते हैं केवल वह हमारा पोषण करती

529
00:36:59,320 --> 00:37:03,320
हैं जैसा शर्मा जी ने कहा कि उनके सारे जो गव्य पदार्थ है उससे

530
00:37:03,320 --> 00:37:07,440
हमारे उपचार होते हैं यह बात बिल्कुल सही है लेकिन

531
00:37:07,440 --> 00:37:12,120
इससे भी बड़ी एक बात यह है मेरी आवाज आ रही है ना कहीं रुके तो

532
00:37:12,120 --> 00:37:16,280
बताइएगा तो सन 1995 में गीता प्रेस

533
00:37:16,280 --> 00:37:21,200
गोरखपुर की मासिक पत्रिका कल्याण में एक गौ तंत्र नामक ग्रंथ

534
00:37:21,200 --> 00:37:25,480
छपा वो गौ तंत्र में भगवान श्री शिव और माता

535
00:37:25,480 --> 00:37:29,520
पार्वती जी का संवाद है उसमें भगवान श्री शिव माता जी

536
00:37:29,520 --> 00:37:34,040
से कहते हैं कि हे जगत जननी आद्या शक्ति

537
00:37:34,040 --> 00:37:38,320
पार्वती तुमसे ही यह जगत सब

538
00:37:38,320 --> 00:37:39,320
फैला है तुम

539
00:37:39,320 --> 00:37:43,640
ही सबकी माता हो लेकिन इन सभी जीव जगत

540
00:37:43,640 --> 00:37:47,760
के पोषण हेतु तुमने गौ के रूप में इस धरा

541
00:37:47,760 --> 00:37:53,760
धाम पर अवतार लिया है इसलिए माता पार्वती

542
00:37:54,000 --> 00:37:58,560
हमारी जी आवाज फिर से चली गई

543
00:37:58,560 --> 00:38:02,640
राघव जी का स्पीकर वगैरह बड़ा बड़ी स्पष्ट आवाज

544
00:38:02,640 --> 00:38:06,840
आती है जब बोलते हैं तो जी बो हा जी

545
00:38:06,840 --> 00:38:11,680
आ रही है ना मेरी आवाज हा जी आवा हा

546
00:38:11,680 --> 00:38:15,800
तो गौ माता के रूप में मां आद्याशक्ति पार्वती

547
00:38:15,800 --> 00:38:19,920
माता ही गौ के रूप में हमें प्राप्त है

548
00:38:19,920 --> 00:38:24,280
इसलिए उनके शरीर से प्राप्त होने वाला जितना भी पदार्थ है

549
00:38:24,280 --> 00:38:28,400
वह हमारे लिए पूजनीय है अब सोचिए जिसका मल भी ना परम पवित्र

550
00:38:28,400 --> 00:38:32,600
है वह कितनी पवित्र होगी और

551
00:38:32,600 --> 00:38:36,640
आज गोपा अष्टमी पर जब हम लोग बात कर रहे हैं गौ सेवा की गौ दान

552
00:38:36,640 --> 00:38:40,800
की तो मैं कहना चाहता हूं गौ दान के बारे में सब लोग बात करते हैं लेकिन

553
00:38:40,800 --> 00:38:44,920
वही गौ तंत्र नामक ग्रंथ यह कहता है और भगवान शिव के वचन में कह रहा हूं या

554
00:38:44,920 --> 00:38:48,960
शिव पार्वती के संवाद की चर्चा कर रहा हूं कि

555
00:38:48,960 --> 00:38:53,320
10 गौ माता के दान के बराबर एक नंदी महाराज के दान की महत्ता

556
00:38:53,320 --> 00:38:54,520
है क्योंकि नंदी महाराज

557
00:38:54,520 --> 00:38:58,560
और कोई नहीं भगवान श्री शिव ही है क्योंकि जब माता पार्वती गौ

558
00:38:58,560 --> 00:39:02,560
माता के रूप में आई है तो भगवान श्री शिव नंदी महाराज के रूप

559
00:39:02,560 --> 00:39:06,560
में अवती हुए हैं और इसके

560
00:39:06,560 --> 00:39:10,720
अतिरिक्त एक बात कहना चाहता हूं मैं जो हमारा

561
00:39:10,720 --> 00:39:15,080
साधन चतुष्टय है हमारा पुरुषार्थ चतुष्टय

562
00:39:15,080 --> 00:39:19,400
जो है धर्म अर्थ काम और मोक्ष उसकी सरलता से

563
00:39:19,400 --> 00:39:24,160
जो हमें प्राप्ति करवा सकता है शक्ति है वह एकमात्र गौ माता है

564
00:39:24,160 --> 00:39:28,920
तो यह महत्व का ध्यान में रखते हुए यदि कार्य करें

565
00:39:28,920 --> 00:39:32,960
तो उनके जीवन का उत्कर्ष होगा अब इसमें क्या है जैसे अभी

566
00:39:32,960 --> 00:39:37,080
देसी गौ माता की बात की तो केवल और केवल देसी गौ

567
00:39:37,080 --> 00:39:41,360
माता की ही पूजा होनी चाहिए क्योंकि देसी गौ माता ही हमारी

568
00:39:41,360 --> 00:39:45,880
माता है मैं गौ सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ हूं

569
00:39:45,880 --> 00:39:50,360
तो प्राय में गौ पालक किसानों से चर्चा करता हूं तो कई

570
00:39:50,360 --> 00:39:54,520
बार जर्सी को भी गौ माता कह देते हैं जबकि जर्सी पशु

571
00:39:54,520 --> 00:39:58,560
है और इससे भी भयानक स्थि यह है कि

572
00:39:58,560 --> 00:40:02,800
जो जर्सी और देसी गौ माता का वर्ण शंकर पशु है उसे भी गौ माता

573
00:40:02,800 --> 00:40:07,000
मान लिया जाता है जबकि देसी गौ माता की जो पहचान

574
00:40:07,000 --> 00:40:09,800
है जो थोड़ी देर पहले आप दोनों महानुभावों ने कही

575
00:40:09,800 --> 00:40:13,920
कि पीछे कुकु होता है दिखने में सुंदर होती है सुंदर सिंग

576
00:40:13,920 --> 00:40:18,200
होते हैं पीछा जो पीछे जो उनका पृष्ठ भाग है उसमें शंख जैसी आकृति

577
00:40:18,200 --> 00:40:22,440
बनती है और पूछ नीचे तक जाती है वह

578
00:40:22,440 --> 00:40:26,720
हमारी गौ माता की पहचान है तो आज

579
00:40:26,720 --> 00:40:31,000
गौ के रूप में यदि इन पशुओं की पूजा हो रही है इसी वजह

580
00:40:31,000 --> 00:40:35,240
से हम अपने लक्ष्य को अर्जित नहीं कर पा रहे हैं कई बार

581
00:40:35,240 --> 00:40:39,320
क्या होता है कि गौ हत्याएं जब हो रही होती है तो हम एक दूसरे पर दोष डालते

582
00:40:39,320 --> 00:40:44,240
हैं जी हां सरकार की अपनी महती भूमिका है उसे इस बारे में काम करना चाहिए

583
00:40:44,240 --> 00:40:48,320
लेकिन हम क्या कर सकते हैं पहले हम इस प्रश्न को अच्छे से समझे

584
00:40:48,320 --> 00:40:52,400
तो कि गौ रक्षा क्या है कैसे करनी है बाद में पहले प्रश्न को समझे

585
00:40:52,400 --> 00:40:56,600
प्रश्न यह है कि गौ रक्षा है क्या क्या गौ रक्षा

586
00:40:56,600 --> 00:41:01,200
करने में कहीं हमसे चूक हो रही है जो हम गौ पालक है उनसे भी

587
00:41:01,200 --> 00:41:05,320
जी हां हो रही है कैसे यदि हम में से कोई गौ पालक

588
00:41:05,320 --> 00:41:09,480
है तो वह कह देगा कि नहीं नहीं मैं तो कभी गह को किसी के हाथों नहीं बेचता

589
00:41:09,480 --> 00:41:15,480
मैं तो दूध देना भी बंद कर देती तब भी सेवा करता हूं

590
00:41:15,720 --> 00:41:21,360
जी राघव जी आपकी आवाज फिर से चली

591
00:41:21,360 --> 00:41:23,520
गई

592
00:41:23,520 --> 00:41:29,520
लेकिन आपकी आवाज कट गई थी राघव जी

593
00:41:30,480 --> 00:41:35,800
जी जी जी आवाज आ रही मेरी जी अभी कट गई

594
00:41:35,800 --> 00:41:40,680
थी जी शिवस दास दासा

595
00:41:40,680 --> 00:41:45,000
जी देखिए आपको क्या लगता है कि हम वह कौन सा दिन होगा

596
00:41:45,000 --> 00:41:49,840
जब वह हमारी बुराई नहीं कर रहे होंगे

597
00:41:49,840 --> 00:41:54,760
तो आप आपको इसमें दुखी होने की आवश्यकता नहीं है भक्ति का बल बढ़ाइए

598
00:41:54,760 --> 00:41:58,800
अपना कार्य करिए कर्म करिए और वोह

599
00:41:58,800 --> 00:42:02,840
लोग तो कुछ ना कुछ करेंगे ही ना ऐसा तो है नहीं कि भाई हम लोग कुछ भी

600
00:42:02,840 --> 00:42:06,920
करते रहे और सैद्धांतिक प्रश्न करते रहे और

601
00:42:06,920 --> 00:42:11,080
वह कुछ भी ना करें कुछ तो करेंगे ही करेंगे कुछ ना कुछ उसमें दुखी होने की आवश्यकता

602
00:42:11,080 --> 00:42:15,200
नहीं है भक्ति इस सिचुएशन से निपटने के लिए गौ माता की सेवा

603
00:42:15,200 --> 00:42:19,480
करिए भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करिए और

604
00:42:19,480 --> 00:42:23,840
जो संत महापुरुष है उनके दर्शन करिए उनका सानिध्य प्राप्त करिए तो

605
00:42:23,840 --> 00:42:27,880
आपको वो बल मिलेगा जिससे कि विपरीत परिस्थिति से आप जो है

606
00:42:27,880 --> 00:42:31,920
हसते हसते सामना करते हुए लड़ पाएंगे निकल पाएंगे

607
00:42:31,920 --> 00:42:36,080
है ना जी राघव जी हा तो गौ रक्षा

608
00:42:36,080 --> 00:42:37,000
क्या है

609
00:42:37,000 --> 00:42:41,000
हमें उसको समझना होगा क्या हम भी गौ हत्या के रूप में कहीं ना कहीं

610
00:42:41,000 --> 00:42:45,240
हम भागीदार तो सिद्ध नहीं हो रहे जो यह हम में से कोई यह दंब भरता हो कि हम गौ

611
00:42:45,240 --> 00:42:49,320
सेवा करते हैं हमने कभी किसी कसाई के हाथ गाय नहीं दी है

612
00:42:49,320 --> 00:42:53,360
तो मैं कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार से आप

613
00:42:53,360 --> 00:42:57,440
लोग गौ माता के वर्ण संकरी को बढ़ावा दे रहे हैं आज

614
00:42:57,440 --> 00:43:01,520
जगह जगह गांव में शहरों में कृत्रिम गर्भाधान केंद्र सरकार ने खोल

615
00:43:01,520 --> 00:43:06,080
रखे हैं जिसमें अनपढ किसान गौ पालक वहां जाता है

616
00:43:06,080 --> 00:43:10,080
और वह कहता है कि दूध अच्छा दे दे ऐसी नस्ल तैयार करने

617
00:43:10,080 --> 00:43:14,120
के लिए डॉक्टर साहब आप जो भी इंजेक्शन लगाएंगे तो आप लगा दीजिए बस

618
00:43:14,120 --> 00:43:18,640
दूध अच्छा आना चाहिए तो वह जर्सी का इंजेक्शन लगा देता है और

619
00:43:18,640 --> 00:43:22,680
हमारे गौ पालक किसान यह सोचते हैं कि हमने तो बहुत

620
00:43:22,680 --> 00:43:27,120
अच्छा काम किया है इसके अतिरिक्त होता क्या है कि

621
00:43:27,120 --> 00:43:31,200
नंदी महाराज के एक बार की सीमन से 80 लगभग 80

622
00:43:31,200 --> 00:43:35,760
स्ट्रिप एआई की आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन यानी कृत्रिम गर्भधान

623
00:43:35,760 --> 00:43:39,760
के ट्यूब तैयार किए जाते हैं अब इससे समस्या क्या

624
00:43:39,760 --> 00:43:44,160
आती है कि जब 80 आपके पास ट्यूब केवल एक बार के सीमें

625
00:43:44,160 --> 00:43:48,360
से किसी एक नंदी महाराज के तैयार हुए इसके जो दूरगामी

626
00:43:48,360 --> 00:43:52,440
परिणाम जो घातक होते हैं वो यह होते हैं कि आपके पास नंदी

627
00:43:52,440 --> 00:43:56,560
महाराज की वैल्यू ही खत्म हो रही है तो यदि बछड़ा

628
00:43:56,560 --> 00:44:00,720
जन्म ले रहा है यदि आप देसी का भी टीका लगवा रहे हैं लेकिन बछड़ा

629
00:44:00,720 --> 00:44:04,720
ही जन्म ले रहा है तो वह आपके लिए यूजफुल नहीं है क्योंकि आपको मालूम है कि बछड़े

630
00:44:04,720 --> 00:44:08,760
से मुझे लेना देना नहीं है मुझे तो गौ माता से है जो दूध देगी जैसे ही

631
00:44:08,760 --> 00:44:12,840
बछड़ा होता है तो कहने में बड़ा दुख होता है कि उसे इन लोगों के

632
00:44:12,840 --> 00:44:17,120
हा हवाले कर दिया जाता है और मैं ऐसे लोगों

633
00:44:17,120 --> 00:44:21,240
से कहना चाहता हूं कि जो लोग कृत्रिम गर्भाधान पर जोर देते हैं

634
00:44:21,240 --> 00:44:25,400
वह क्या अपनी माता बहनों के लिए इस प्रक्रिया को का प्रयोग

635
00:44:25,400 --> 00:44:29,400
करना चाहेंगे आप ना खर्चा करके अपनी बहन बेटियों

636
00:44:29,400 --> 00:44:33,480
की शादियां करते हैं अपने जिगर के टुकड़े को किसी और के हवाले करते हैं

637
00:44:33,480 --> 00:44:38,080
तो क्या दिक्कत है मॉडर्न जमाने में मॉडर्न बनि है उसको घर पर रखिए और एक से एक

638
00:44:38,080 --> 00:44:42,200
नेता अभिनेता के सीमन उपलब्ध होंगे तो उनसे उसको गर्भवती

639
00:44:42,200 --> 00:44:46,360
भी करवाइए ऐसा भी कीजिए लेकिन यदि वह

640
00:44:46,360 --> 00:44:50,360
सुनने में ही खराब लग रहा है तो आप जिनको अपनी माता कह रहे हैं उनके साथ

641
00:44:50,360 --> 00:44:54,560
ऐसा क्यों कर रहे हैं इससे गौ माता के गर्भ धारण

642
00:44:54,560 --> 00:44:58,760
की क्षमता भी खत्म हो रही है ण की यूटिलिटी खत्म

643
00:44:58,760 --> 00:45:03,080
की जा रही है क्या यह गौ हत्या नहीं है जी बिल्कुल

644
00:45:03,080 --> 00:45:07,280
है लेकिन केवल यही समस्या भी

645
00:45:07,280 --> 00:45:08,280
नहीं

646
00:45:08,280 --> 00:45:14,280
है गौ रक्षा में एक बड़ी समस्या यह भी है कि कुछ बनिया

647
00:45:17,920 --> 00:45:23,920
ने राघव जी आपकी आवाज फिर से चली गई

648
00:45:25,960 --> 00:45:30,120
है जी बताए जी आ रही है अभी आ रही

649
00:45:30,120 --> 00:45:34,400
है जी जी आ रही है हां तो एक और घातक

650
00:45:34,400 --> 00:45:38,440
प्रक्रिया हमारे देश में चल रही है कि कुछ

651
00:45:38,440 --> 00:45:42,440
हमारी श्रद्धा का हमारी भावुकता का जो गौ माता के प्रति है उसका लाभ उठाने

652
00:45:42,440 --> 00:45:46,520
के लिए कुछ बनियां ने गीर गौ माता जो गुजरात की

653
00:45:46,520 --> 00:45:50,880
गौ माता है उनकी बहुत तगड़ी वाली ब्रांडिंग कर रखी है जिसके तहत

654
00:45:50,880 --> 00:45:54,920
उन्होंने क्या करना चालू किया है कि पूरे देश में गीर गौ माता

655
00:45:54,920 --> 00:45:59,040
का एक तरीके से मार्केट खड़ा किया है लेकिन वह मूर्ख

656
00:45:59,040 --> 00:46:03,880
और उनकी बातों में आने वाले महामूर्ख यह नहीं सोचते कि भारत

657
00:46:03,880 --> 00:46:08,120
के हर प्रांत में अलग-अलग जलवायु है और उस जलवायु के अनुरूप

658
00:46:08,120 --> 00:46:12,200
वहां पर गौवंश प्राप्त है तो यदि आप गीर गौ

659
00:46:12,200 --> 00:46:16,320
माता को जो गुजरात की मुख्य रूप से गौ माता है उनको ला रहे हैं तो

660
00:46:16,320 --> 00:46:20,680
अपने घर की जो नस्ल है उसको आप स्वतः ही कसाई

661
00:46:20,680 --> 00:46:23,640
के हवाले कर रहे हैं बड़ा खर्चा

662
00:46:23,640 --> 00:46:27,960
करके ला रहे हैं यह कहते हुए कि वह दूध ज्यादा देती हैं लेकिन वे दूध

663
00:46:27,960 --> 00:46:32,240
गुजरात में रह कर के देती हैं क्योंकि गुजरात के वातावरण के अनुकूल

664
00:46:32,240 --> 00:46:36,480
उनकी उत्पत्ति हुई है अन्यथा भगवान एक ही गौ माता

665
00:46:36,480 --> 00:46:40,480
समग्र भारतवर्ष में प्रदान करते तो इस प्रकार की

666
00:46:40,480 --> 00:46:44,480
मूर्खता से हम मौसी गीर गौ माता हमारी मौसी हुई गुजरात के

667
00:46:44,480 --> 00:46:48,560
लिए गुजरातियों के लिए वो मां हु हम मौसी को घर में ला रहे हैं और मां को बाहर

668
00:46:48,560 --> 00:46:52,560
निकाल रहे हैं यह मूर्खता है यदि देसी

669
00:46:52,560 --> 00:46:57,520
गौ माता जो आपकी स्थानीय गौ माता है उन पर अच्छे से काम किया जाए

670
00:46:57,520 --> 00:47:01,680
तो वह उतना ही दूध देंगी जो प्रचारित प्रसारित अन्य गौवंश के लिए

671
00:47:01,680 --> 00:47:05,800
किया गया है इसके लिए गुजरात में ही राजस्थान में ही मध्य

672
00:47:05,800 --> 00:47:09,800
प्रदेश में बहुत सारे गौ प्रेमी गौ पालक और गौ

673
00:47:09,800 --> 00:47:14,080
वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और उन्होंने सिद्ध करके बताया कि गिर गौ माता के हवे

674
00:47:14,080 --> 00:47:18,360
में आप मत जाइए और तो और गीर गौ माता की एक विशेषता

675
00:47:18,360 --> 00:47:22,760
यह है कि गीर गौ माता का एक ही वर्ण होता है रक्त वर्ण

676
00:47:22,760 --> 00:47:26,960
लेकिन यदि हम शास्त्रों को पढ़ते हैं गौ तंत्र जिसके बारे में बात कर रहा हू

677
00:47:26,960 --> 00:47:31,080
या अन्यान्य जो पुराण आद है उसमें अलग-अलग वर्ण की गौ माताओं

678
00:47:31,080 --> 00:47:35,360
के गोबर गोमूत्र ग्रत दूध दुग्ध आदि की महिमा

679
00:47:35,360 --> 00:47:41,360
कही गई है तो केवल रक्त वर्णा जो गिर गौ

680
00:47:42,120 --> 00:47:46,160
माता राघव जी बड़ा अच्छा प्रकाश डाल रहे पर बारबार बीच में इनका जो

681
00:47:46,160 --> 00:47:51,000
है एक वो कैप आ जाता है

682
00:47:51,000 --> 00:47:57,000
आपकी आवाज कट जाती है बारबार राघव जी

683
00:47:57,720 --> 00:48:01,960
शिवस दाह जी आपकी बात मैंने देख ली है हां

684
00:48:01,960 --> 00:48:06,240
जी आवाज आ रही है अब प्रशांत कर निमंत्रण

685
00:48:06,240 --> 00:48:10,560
दिया है हमने उनका उत्तर इस लाइव स्ट्रीम की शुरुआत में दे दिया उसको

686
00:48:10,560 --> 00:48:13,200
देखें

687
00:48:13,200 --> 00:48:17,200
जी अब जैसे एक उदाहरण के लिए मैं एक बात कहता हूं पहले

688
00:48:17,200 --> 00:48:21,440
तो हम कहेंगे कि हमारी जो ऑडियंस है दर्शक गण है वो उनको

689
00:48:21,440 --> 00:48:26,000
आपकी जो आवाज है बहुत प्यारी लगती है वाणी आपकी

690
00:48:26,000 --> 00:48:30,160
माता की कृपा और उसको अगर एक उचित

691
00:48:30,160 --> 00:48:35,320
संबोधन दिया जाए तो उसको कहेंगे आप मृद भाषी है

692
00:48:35,320 --> 00:48:39,320
म सब गुरु जी की कृपा आशीर्वाद और गौ माता की कृपा

693
00:48:39,320 --> 00:48:43,360
है और कुछ भी नहीं है और मैं तो गौ माता को लेकर के बहुत भावुक हूं

694
00:48:43,360 --> 00:48:47,520
इसलिए जो कुछ भी निकल रहा वो मेरी कोरी भावना ही प्रकट हो रही है मैं बहुत

695
00:48:47,520 --> 00:48:51,520
दुखी हृदय से य सारी बातें कह रहा हूं क्योंकि मैं जुड़ा हुआ हूं

696
00:48:51,520 --> 00:48:55,600
उस क्षेत्र से तो जैसे उदाहरण के लिए मैं अपनी बात कहना

697
00:48:55,600 --> 00:48:57,240
चाह रहा था जैसे पुरा में

698
00:48:57,240 --> 00:49:01,400
शास्त्रों में एक बात आती है कि जो श्याम वर्णा गौ माता है

699
00:49:01,400 --> 00:49:05,720
उनका गौमूत्र में सबसे ज्यादा करक्यूमिन पाया जाता है और करक्यूमिन कैंसर

700
00:49:05,720 --> 00:49:10,080
से लड़ने की सबसे बड़ी औषधि है दूसरी गौ माता के मूत्र में करक्यूमिन

701
00:49:10,080 --> 00:49:14,160
नहीं है ऐसा नहीं लेकिन सबसे अधिक श्याम वर्णना में अब गिर गौ माता

702
00:49:14,160 --> 00:49:18,240
श्याम वर्णना नहीं हो सकती है तो सबकी अलग अलग अलग

703
00:49:18,240 --> 00:49:22,480
अलग महिमा है और आज जैसे हम क्लाइमेटिक चेंज के कारण

704
00:49:22,480 --> 00:49:26,560
परेशान है सबके अपने अपने वो है पेड़ कट रहे हैं यह हो रहा है वो हो रहा

705
00:49:26,560 --> 00:49:31,320
है लेकिन पेड़ जो लगा भी रहे हैं वह भी पनप क्यों नहीं रहे

706
00:49:31,320 --> 00:49:35,920
इसलिए क्योंकि उनको खुराक नहीं मिल रही उनकी खुराक गौ माता का गोबर

707
00:49:35,920 --> 00:49:40,160
और मूत्र और तो और उनको अच्छे

708
00:49:40,160 --> 00:49:44,200
से वातावरण मिले ईश्वरी कृपा से बरसात का पानी

709
00:49:44,200 --> 00:49:48,400
उनको मिले उसके कारण भी वह जो पनपते हैं वह पनप

710
00:49:48,400 --> 00:49:53,000
नहीं पा रहे क्योंकि उसमें भी गौ माता के गोबर की बड़ी महिमा है

711
00:49:53,000 --> 00:49:57,560
आप यदि शास्त्रों को पढ़ेंगे तो आप देखेंगे माता

712
00:49:57,560 --> 00:50:01,680
ऐसा प्राणी है जैसा मैंने कहा कि गौ माता जिनका मल ही इतना पवित्र

713
00:50:01,680 --> 00:50:05,880
है तो सोचो व कितनी पवित्र है तो उनके मल की अद्भुत महिमा यानी

714
00:50:05,880 --> 00:50:10,120
गोबर की इतनी अच्छी महिमा है कि गौ माता के गोबर पर

715
00:50:10,120 --> 00:50:12,240
जब आप उसे उठाए ना जमीन पर पड़ा

716
00:50:12,240 --> 00:50:16,320
रहने दे तो उस पर एक दो दिन बाद या अगले ही दिन एक

717
00:50:16,320 --> 00:50:20,400
सफी सफेद सी चादर बन जाती है झिल्ली जैसी आपने देखा होगा

718
00:50:20,400 --> 00:50:24,600
कभी ध्यान दिया होगा पूरी सफेद पपड़ी जम जाती है उसको

719
00:50:24,600 --> 00:50:29,040
संस्कृत में कषण कहते हैं वो कषण इतनी शक्तिशाली

720
00:50:29,040 --> 00:50:33,440
है कि जिस जमीन पर वो गोबर कषण वाला पड़ा हुआ है जिस पर कषण

721
00:50:33,440 --> 00:50:37,680
आ चुकी है वो आकाश में बादलों को आकर्षित कर देती है जल वर्षा

722
00:50:37,680 --> 00:50:43,680
करने के लिए अच्छा तो ये खुराक नहीं मिल रही

723
00:50:43,920 --> 00:50:48,280
है जी नहीं आपने एक बहुत अच्छा दृष्टिकोण

724
00:50:48,280 --> 00:50:52,880
बताया कि जो हम गिर गिर गिर गाय की

725
00:50:52,880 --> 00:50:57,360
और जो एक मार्केट बना दी गई है वहां के गौवंश की

726
00:50:57,360 --> 00:51:01,640
और उसकी वजह से हम अपने यहां का जो लोकल स्थानीय वंश परंपरा

727
00:51:01,640 --> 00:51:05,760
से प्राप्त जो गौवंश है उसको महत्व ना दे कर के हम गिर

728
00:51:05,760 --> 00:51:10,400
से लाकर गौ माता को जो है उनका भरण पोषण करते हैं तो उनके साथ भी

729
00:51:10,400 --> 00:51:14,520
गलत कर रहे हैं क्योंकि वो यहां के क्लाइमेट के लिए नहीं है और साथ

730
00:51:14,520 --> 00:51:18,720
ही साथ अपने य की जो परंपरा प्राप्त नस्ल है जो वंश है

731
00:51:18,720 --> 00:51:22,720
उसका हम धीरे धीरे य कर रहे हैं हमारी

732
00:51:22,720 --> 00:51:26,800
स्थि बरी है कि हम कुए से निकल के ई

733
00:51:26,800 --> 00:51:30,880
में गिर रहे हैं पहले अभी जर्सी का बड़ा बोलबाला चल रहा था कुछ समय से

734
00:51:30,880 --> 00:51:35,240
सोशल मीडिया ने जर्सी का थोड़ा सा थोड़ा सा कह रहा हूं अभी नहीं पूरा तिलिस्म

735
00:51:35,240 --> 00:51:39,480
नहीं टूटा है जर्सी का टूटा तो हम गीर में आकर फस गए याने

736
00:51:39,480 --> 00:51:43,880
खाई में आकर गिर गए हम गीर माता को वैसे ही पूज्या मानते हैं

737
00:51:43,880 --> 00:51:48,200
लेकिन स्थानीय गौ माता के निरादर करके हम गीर माता की भी पूजा करेंगे

738
00:51:48,200 --> 00:51:53,080
तो वह मेरी गीर माता भी खुश नहीं होगी अपनी बहन का तिरस्कार देख कर के

739
00:51:53,080 --> 00:51:57,440
मैं सभी सनातनी हों से यह कहना चाहता हूं कि कृपया

740
00:51:57,440 --> 00:51:59,200
इस बात को बंद कीजिए

741
00:51:59,200 --> 00:52:03,240
और जब तक आप गौ माता को पैसा कमाने की मशीन के

742
00:52:03,240 --> 00:52:07,280
रूप में पा लेंगे तब तक आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं

743
00:52:07,280 --> 00:52:11,480
मां के साथ व्यापार नहीं किया जाता यदि आप मां

744
00:52:11,480 --> 00:52:15,680
मान रहे हैं और यदि उस उनके गौ माता के मैं

745
00:52:15,680 --> 00:52:19,680
किसी व्यापारिक पक्ष को भी देखूं तो दुग्ध के

746
00:52:19,680 --> 00:52:23,800
लिए गौ माता पालन करना हमेशा हानिकारक है क्योंकि गौ माता

747
00:52:23,800 --> 00:52:28,520
जीवन में अपने कुछ समय तक ही दूध देती है और

748
00:52:28,520 --> 00:52:32,760
उतना दूध नहीं देती है जितना कि हमें अपेक्षित है इसलिए गौ माता

749
00:52:32,760 --> 00:52:36,880
कभी भी पाली जाती है तो गौ माता पाली जाती समा गौ

750
00:52:36,880 --> 00:52:41,080
माता हमें पालती है तो जब भी हम उनके आश्रित होते हैं

751
00:52:41,080 --> 00:52:45,160
तो यदि हम व्यापार के रूप में उनको लाना चाह रहे हैं देखना चाह रहे हैं

752
00:52:45,160 --> 00:52:49,160
तो हमें चाहिए कि हम गोबर गोमूत्र के रूप में उनका पालन करें

753
00:52:49,160 --> 00:52:53,280
क्योंकि जन्म से लेकर आखिरी समय तक गौ माता गोबर गोमूत्र

754
00:52:53,280 --> 00:52:57,320
तो प्रचुर मात्रा में देती है और सब

755
00:52:57,320 --> 00:53:01,480
इतने समय से सोशल मीडिया है मैं उसमें नहीं जाना चाहूंगा कि उसके कितने कितने उपयोग

756
00:53:01,480 --> 00:53:05,720
और कितने कितनी आजकल दवाइयां और क्याक उत्पाद बन रहे हैं वो एक अलग विषय

757
00:53:05,720 --> 00:53:10,120
में उसकी डिटेल में नहीं जाना चाहता सबको पता है सबके पास ट मैसेज आद आते रहते

758
00:53:10,120 --> 00:53:14,120
हैं तो हम यह कहना चाहते हैं कि

759
00:53:14,120 --> 00:53:14,840
हम

760
00:53:14,840 --> 00:53:19,640
अपने अपने क्षेत्र में इस प्रकार की जागरूकता के साथ काम करें

761
00:53:19,640 --> 00:53:23,920
यदि गोपाष्टमी के दिन या अपने जो परिवार

762
00:53:23,920 --> 00:53:28,000
के जो मुख्य तिथियां है जिनको हम उत्सव के रूप में मनाते किसी का जन्मदिवस किसी

763
00:53:28,000 --> 00:53:32,280
की सालगिरा वह हम गौशाला में मनाए कितना

764
00:53:32,280 --> 00:53:36,480
अच्छा होगा बच्चों को भी अच्छा लगता है यह मैंने खुद में प्रयोग किया हुआ

765
00:53:36,480 --> 00:53:40,920
है कि बच्चों को ले जाया जाए उनके जन्मदिन को वहां मनाया जाए

766
00:53:40,920 --> 00:53:45,120
उनके हाथों से गौ सेवा करवाई जाए तो अगली बार से बच्चा खुद

767
00:53:45,120 --> 00:53:49,120
अपने माता-पिता की उंगली पकड़ के बोलेगा कि आज मेरा जन्मदिवस है मुझे गौशाला

768
00:53:49,120 --> 00:53:53,320
ले चलिए माता-पिता बच्चों को एडवेंचर चाहिए ना यदि

769
00:53:53,320 --> 00:53:57,400
मैं बच्चों के पॉइंट ऑफ व्यू से भी कहूं तो यह उनके के एडवेंचर को

770
00:53:57,400 --> 00:54:01,640
भी पूरा कर रहा है तो गौ से उनको जोड़िए गौ माता

771
00:54:01,640 --> 00:54:05,640
की महत्व महत्वता बताइए अपनाए ट पर शेयरिंग

772
00:54:05,640 --> 00:54:09,760
करने से मतलब नहीं है आप एक रोटी दे

773
00:54:09,760 --> 00:54:13,840
देते हैं बासी तो आप समझते हैं आपने गौ सेवा कर ली जी

774
00:54:13,840 --> 00:54:18,040
नहीं और मैं बड़ी बड़ी गौशाला चलाने वाले हमारे

775
00:54:18,040 --> 00:54:22,120
जो गौ माता की सेवा करने वाले जितने भी हैं बहुत अच्छे लोग हैं

776
00:54:22,120 --> 00:54:26,200
उनसे एक और विनम्र विनती करना चाहता हूं कई बार देखने

777
00:54:26,200 --> 00:54:30,200
में आता है कि गौशाला है गौ

778
00:54:30,200 --> 00:54:31,200
माता

779
00:54:31,200 --> 00:54:35,280
आप राघव जी आप अपना हेडफोन हटा लीजिए मुझे लग रहा है वो दिक्कत कर

780
00:54:35,280 --> 00:54:39,280
रहा है हा जी हा जी हां थोड़ा सा आज वो कुछ अभी

781
00:54:39,280 --> 00:54:43,480
आ रही है आवाज हा आवाज आ रही है हा तो

782
00:54:43,480 --> 00:54:48,080
कई बार क्या होता है मैंने देखा है बहुत स गौशालाओं में मैं रहा हूं गया हूं

783
00:54:48,080 --> 00:54:52,400
गौशालाओं में गौ माता को तो रखा जाता है अच्छा पैसा भी आ रहा है अच्छा चारा

784
00:54:52,400 --> 00:54:56,520
भी आ रहा है सब कुछ हो रहा है ऐसी बात नहीं लेकिन क्या होता है कि गौ माता

785
00:54:56,520 --> 00:55:00,920
को चरने के लिए छोड़ा नहीं जाता जबकि गौ माता यदि चरने के लिए विचरण

786
00:55:00,920 --> 00:55:05,120
नहीं करेंगी तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है और

787
00:55:05,120 --> 00:55:09,560
गौ माता का चरना इसक है कि गौ माता यदि आपको

788
00:55:09,560 --> 00:55:13,760
शरीर में किसी प्रकार की व्याधि है तो व आपको सूंघ के पता लगा लेती हैं कि आपको

789
00:55:13,760 --> 00:55:18,000
क्या व्याधि है और किस औषधि को वह खाएं जिसके कारण उनके दुग्ध गोबर

790
00:55:18,000 --> 00:55:22,400
गोमूत्र में वो उसके गुण आ जाए जिसका सेवन करके आप

791
00:55:22,400 --> 00:55:26,400
आरोग्य को प्राप्त करें ऐसा वो जाकर के वो वनस्पति

792
00:55:26,400 --> 00:55:30,480
को खाके आती हैं तो आप उन्हें छोड़ नहीं रहे हैं यह तो

793
00:55:30,480 --> 00:55:35,080
वृद्धाश्रम जैसा है और भी बुरी बात कहूं तो जेल जैसा है

794
00:55:35,080 --> 00:55:39,080
तो ऐसा नहीं होना चाहिए गौ माता को थोड़े में थोड़ा

795
00:55:39,080 --> 00:55:43,200
घूमने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए

796
00:55:43,200 --> 00:55:46,280
जब हम इन चीजों पर काम करेंगे तो सरकार पर

797
00:55:46,280 --> 00:55:50,440
भी बल पड़ेगा सरकार को अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए बिल्कुल कोई

798
00:55:50,440 --> 00:55:54,800
पार्टी

799
00:55:54,800 --> 00:55:59,000
कोई जी राघव जी मैं आपने

800
00:55:59,000 --> 00:56:03,280
बहुत सुंदर सुंदर जो है प्रासंगिक

801
00:56:03,280 --> 00:56:07,320
विषयों पर प्रकाश डाला है और जी बीच में बाधा

802
00:56:07,320 --> 00:56:12,080
आ जाने के कारण आपकी आवाज टूट जाती है जी हां

803
00:56:12,080 --> 00:56:16,480
जी जी जी नहीं बहुत सुंदर आपने जो व्याख्यान किया युगल जी ने जो शास्त्रोक्त

804
00:56:16,480 --> 00:56:20,720
तरीके से और जो हमारे जो लीलाओं के वर्णन के द्वारा गौ का महत्व

805
00:56:20,720 --> 00:56:24,960
बताया तो वही दूसरी ओर आपने जो है वैज्ञानिक और राजनीतिक दृष्टिकोण

806
00:56:24,960 --> 00:56:29,280
से भी उनके महत्व का और उनके संरक्षण संवर्धन का आपने उपाय

807
00:56:29,280 --> 00:56:33,680
भी बताया अब मैं एक जो

808
00:56:33,680 --> 00:56:37,840
गौवंश की रक्षा है उसको लेकर के प्रैक्टिकली बिल्कुल

809
00:56:37,840 --> 00:56:41,920
प्रैक्टिकली देखि हमने क्या होता है कि आजकल क्या होता है

810
00:56:41,920 --> 00:56:45,960
जब ये सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की लहर आई है तबसे मैं एक

811
00:56:45,960 --> 00:56:50,400
चीज देखता हूं मेरे पास मैसेजेस भी आते थे जब मैं

812
00:56:50,400 --> 00:56:54,400
इस युद्ध में उतरा नहीं था धर्म रक्षा के युद्ध में उतरा नहीं

813
00:56:54,400 --> 00:56:58,520
था संभवत सात आ साल पहले की बात है जब

814
00:56:58,520 --> 00:57:01,280
मैं एक सामान्य व्यक्ति बन कर के

815
00:57:01,280 --> 00:57:05,600
और केवल मेरा जो पॉइंट ऑफ व्यू होता था दिन भर का वह पॉइंट

816
00:57:05,600 --> 00:57:09,640
ऑफ व्यू होता था कि किस तरीके से कंजन करू यह दुनिया में मैं आया हूं

817
00:57:09,640 --> 00:57:13,880
तो मुझे कंज्यूम करना है एक व्यक्ति का एक नॉर्मल व्यक्ति का जो दिन

818
00:57:13,880 --> 00:57:18,000
भर जो एक कोर पॉइंट ऑफ व्यू

819
00:57:18,000 --> 00:57:22,160
होता है व होता है कंजप्शन हाउ टू कंज्यूम द वर्ल्ड हां

820
00:57:22,160 --> 00:57:26,240
पर आपको जन्म मिला तो मैं भी ऐसा ही था तो उस

821
00:57:26,240 --> 00:57:30,640
मैं कंजप्शन करते समय भी मगर हां वही मैं बताता हूं प्रारब्ध

822
00:57:30,640 --> 00:57:34,640
या संस्कार प्रारब्ध के कारण ऐसे घर परिवार में जन्म मिल गया

823
00:57:34,640 --> 00:57:39,080
जो राम नाम मुझे बचपन से मिल गया था बारबार मैं बता देता हूं अपनी बात

824
00:57:39,080 --> 00:57:43,320
और राघव जी मुझे आपका नाम भी बहुत अटैच करता है आपसे

825
00:57:43,320 --> 00:57:47,320
क्योंकि आपका नाम राघव है और हा जी

826
00:57:47,320 --> 00:57:51,480
तो जी क्या कहा राघव जी आपने क्या कहा जी

827
00:57:51,480 --> 00:57:56,320
मैंने कहा कि आपका नाम भी मुझे बहुत अटैच कर देता है आपके साथ

828
00:57:56,320 --> 00:58:01,480
आपका नाम ही राघव है वो हमारे स् है तो जी

829
00:58:01,480 --> 00:58:05,480
हा तो ये था एक बात बताना चाहता हूं

830
00:58:05,480 --> 00:58:09,680
माफी चाहूंगा लेकिन आपने बात कही तो मेरा जो नामकरण है हमारे पूज्य पिताजी

831
00:58:09,680 --> 00:58:13,920
नेने भगवान राम के इष्ट जो स्वयं है उन्हीं की प्रेरणा से ही रखा

832
00:58:13,920 --> 00:58:16,360
है अच्छा तो राम

833
00:58:16,360 --> 00:58:20,840
भक्त परिवार में मैं भी जन्मा हूं इस वजह से यह राघव नाम मिला है बहुत बड़ी जिम्मेदारी

834
00:58:20,840 --> 00:58:24,880
में उसको समझता हूं जी तो आप बो

835
00:58:24,880 --> 00:58:29,080
ईश्वर की एक अनुक रही कि बचपन से प्रभु श्री राम का नाम

836
00:58:29,080 --> 00:58:33,200
मिल जाने के कारण जो व्यक्तिगत आचरण में हीनता

837
00:58:33,200 --> 00:58:37,240
आ जानी चाहिए ना विधि विधि निषेध इत्यादि का नहीं पता

838
00:58:37,240 --> 00:58:41,320
है शास्त्रो क्या है क्या नहीं है वह अलग बात है मगर जो एक धर्म

839
00:58:41,320 --> 00:58:45,360
और अधर्म के निर्णय में जो हीनता आ जानी चाहिए वो नहीं आई एक

840
00:58:45,360 --> 00:58:50,080
राम नाम के कारण जैसे वय विचार इत्यादि के बारे में कहूं

841
00:58:50,080 --> 00:58:54,400
तो बचपन से ही जब छोटे थे तो तभी से

842
00:58:54,400 --> 00:58:58,560
एक ई श्री राम आदर्श और उन्होंने हमें सिखाया है

843
00:58:58,560 --> 00:59:02,640
कि एक नारी सदा ब्रह्मचारी तो ये सब जो भावनाए निर्मित हुई

844
00:59:02,640 --> 00:59:06,680
वो मतलब छोटे थे तभी से निर्मित हो चुकी थी व विचार इत्यादि

845
00:59:06,680 --> 00:59:10,760
के बारे में तो सोचना बहुत दूर की बात तो राम नाम का एक बहुत बड़ा प्रभाव

846
00:59:10,760 --> 00:59:15,560
है गुरुदेव भी कहते हैं कि जहां राम जहां राम है वहां काम नहीं

847
00:59:15,560 --> 00:59:19,880
तो राम जी का वो था आलंबन तो

848
00:59:19,880 --> 00:59:24,320
जिसके कारण क्या था कि एक रा था कंज्यूम कंजप्शन

849
00:59:24,320 --> 00:59:28,400
तो था कि हां मुझे जो है कंज्यूम करना है मगर फिर भी राम की

850
00:59:28,400 --> 00:59:31,720
एक मर्यादा थी इस मर्यादा के अंदर रहते हुए कंज्यूम

851
00:59:31,720 --> 00:59:35,960
करना है तो कंजप्शन में दिन भर यही

852
00:59:35,960 --> 00:59:40,320
है कि भाई कहां घूमने जा सकते हैं कितने अच्छे से अच्छे और महंगे

853
00:59:40,320 --> 00:59:44,360
वस्त्र धारण कर सकते हैं यह सब कंजप्शन का वो पॉइंट

854
00:59:44,360 --> 00:59:48,840
ऑफ व्यू रहता अब ऐसे में मैं उस समय एक लहर चालू हो गई थी

855
00:59:48,840 --> 00:59:53,040
कि आपके पास मैसेजेस आते हैं आज भी आते हैं अरे य ये हो गया अरे

856
00:59:53,040 --> 00:59:57,200
हिंदुओ कब जागोगे अरे देखो उसने ये कर दिया अरे देखो इस्लाम

857
00:59:57,200 --> 01:00:01,360
कों ने ये कर दिया अरे तुम्हारे जिहादियों ने यह कर दिया आप अगर सोशल मीडिया

858
01:00:01,360 --> 01:00:06,160
में कनेक्टेड है तो आपको दिन भर में इतनी चीजें आएंगी

859
01:00:06,160 --> 01:00:10,520
खबरें यहां वहां की की आप कुछ करने

860
01:00:10,520 --> 01:00:14,520
वाले होने के लिए मोटिवेटेड होने की बजाय आप डी

861
01:00:14,520 --> 01:00:18,560
मोटिवेट हो जाओगे शाम तक अगर आपने ध्यान देना शुरू कर दिया अगर आप ध्यान देते

862
01:00:18,560 --> 01:00:23,200
हो तो आप विचलित रहोगे परेशान रहोगे प्रोत्साहित प्रोत्साहन

863
01:00:23,200 --> 01:00:27,320
मिलने की बजाय हतोत्साहित आप हो जाओ

864
01:00:27,320 --> 01:00:31,440
तो मेरे पास इस तरह के मैसेजेस बहुत आते थे कि देखो देखो तुम्हारे इतिहास के साथ

865
01:00:31,440 --> 01:00:35,520
खिलवाड़ हुआ है हालांकि मैं भी अपने धर्म को लेकर के बचपन से ही

866
01:00:35,520 --> 01:00:40,480
कट्टर रहा कि नहीं हिंदुत्व सबसे महान और

867
01:00:40,480 --> 01:00:45,400
मैं इस रूप में देखता था कि मुझे जब मालूम नहीं है कि कुरान में क्या लिखा है या

868
01:00:45,400 --> 01:00:46,720
बौद्ध में क्या लिखा है

869
01:00:46,720 --> 01:00:50,760
जो भी है तो मैं सोचता था भगवान ने अमुक अमुक जगह पर इस नाम से धर्म का

870
01:00:50,760 --> 01:00:54,840
प्रतिपादन किया है वो वस्तुत जो धर्म और अधर्म की व्याख्या वहा सब

871
01:00:54,840 --> 01:00:59,040
एक होगी जो वही व होगा ऐसा सोचता था वो भ्रम टूटा

872
01:00:59,040 --> 01:01:03,440
मेरा आज से कुछ पाच छ साल पूर्व

873
01:01:03,440 --> 01:01:07,880
तो इस रूप में मैं चलता था मगर कहीं पर यदि यह बराबरी

874
01:01:07,880 --> 01:01:12,200
की बात आ जाती ऊपर नीचे की बात आ जाती तो अपने धर्म को प्रति रूप से रखने

875
01:01:12,200 --> 01:01:16,320
का मेरा प्रयास रहता था तो मेरे पास जब इस तरह

876
01:01:16,320 --> 01:01:20,320
के वो आते थे कि उन्होंने यह कर दिया उन्होंने यह कर दिया जिहादियों ने

877
01:01:20,320 --> 01:01:24,800
यह करया इस्लामिया ने ये किया क्रिश्चन ने ये किया या

878
01:01:24,800 --> 01:01:30,800
तो एक दिन मैं परेशान हो गया और मैंने एक

879
01:01:56,400 --> 01:02:00,440
किसी को गोली मार दू बताओ जल्दी क्या करू यह मैसेजेस मेरे पास क्यों आ

880
01:02:00,440 --> 01:02:04,600
रहे हैं मुझे बता दो करना क्या है तो यह करना क्या है वाली बात

881
01:02:04,600 --> 01:02:08,640
पर कोई बात ही नहीं करता है जितने भी जो आपको

882
01:02:08,640 --> 01:02:12,640
इस तरह के तत्व मिलेंगे जो बता रहे होंगे

883
01:02:12,640 --> 01:02:17,040
वह सदैव आपको आपकी समस्याए बताएंगे वह

884
01:02:17,040 --> 01:02:21,120
कभी नहीं बताएंगे कि यह अधा उठाओ उसका सर फोड़ दो

885
01:02:21,120 --> 01:02:25,480
या फिर यह करो कुछ भी वो सृजनात्मक हो

886
01:02:25,480 --> 01:02:29,480
या विनाशा मक कुछ भी हो सजन हो या विनाश हो कुछ भी हो वो

887
01:02:29,480 --> 01:02:34,080
बात आपको सोल्यूशन कभी नहीं देंगे वो सदैव आपको

888
01:02:34,080 --> 01:02:38,280
खबरें देंगे तुम्हारे साथ ये हुआ तुमने क्या कर लिया जिससे कि आप

889
01:02:38,280 --> 01:02:42,800
जो है अब मैं कहूंगा यहां पर की उनको अपना नेतृत्व

890
01:02:42,800 --> 01:02:47,000
करने वाला मान लो वहां पर यही होता है कि आपको आपकी

891
01:02:47,000 --> 01:02:51,120
वही समस्याएं बताई जा रही है जिनको आप जानते हो ऑलरेडी आपको

892
01:02:51,120 --> 01:02:55,280
आपकी वही समस्या बताई जा रही है मगर इतने झग झोड़ देने वाले तरीके से बताई जा रही

893
01:02:55,280 --> 01:02:59,320
है कि आज आपको ऐसा लगने लगता है कि

894
01:02:59,320 --> 01:03:03,400
फिर भाई जो है यही हमारे लिए सोचने वाला है क्योंकि इसको मालूम है हमारे साथ

895
01:03:03,400 --> 01:03:07,520
हो क्या रहा है सबको मालूम भाई क्या हो रहा है तो ऐसा

896
01:03:07,520 --> 01:03:11,440
ही कुछ गौ माता के संबंध में भी है कि गौ माता की बातें बहुत सारी

897
01:03:11,440 --> 01:03:15,560
की जाती है मगर उनका संरक्षण और संवर्धन

898
01:03:15,560 --> 01:03:19,560
प्रैक्टिकली कैसे हो यह प्रैक्टिकली बिल्कुल बिल्कुल यह चीज

899
01:03:19,560 --> 01:03:24,480
करनी है यह पेन उठाना यहां रखना है यह मोबाइल उठाना है यहां रखना है

900
01:03:24,480 --> 01:03:28,520
इसको बटन को दबाना है इस तरीके से कोई आपको दिशा निर्देश देने

901
01:03:28,520 --> 01:03:32,680
वाली बात आप तक नहीं आती है तो ऐसी ही कोई

902
01:03:32,680 --> 01:03:37,080
बात थी जो जब गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हुआ था तो ऐसी

903
01:03:37,080 --> 01:03:41,440
एक बात मुझे मिल गई थी कि भाई हिंदू धर्म की रक्षा करनी तो क्या करें व्हाट टू डू

904
01:03:41,440 --> 01:03:45,560
पता चल गया कि भैया जो विदेशी अक्रांता है उन्होंने इतने साल तक

905
01:03:45,560 --> 01:03:49,640
राज किया तो उन्होने ये किया इन्होने वो किया पता चल गया अब करना

906
01:03:49,640 --> 01:03:53,680
क्या है बताइए तो यह मुझे गुरुदेव के सानिध्य से प्राप्त हुआ था

907
01:03:53,680 --> 01:03:57,760
कि अपने आसपास के मट मंदिरों को शिक्षा रक्षा सेवा

908
01:03:57,760 --> 01:04:01,880
का केंद्र बनाओ प्रैक्टिकली

909
01:04:01,880 --> 01:04:05,960
वहां पर जाओ वहां के पुजारी से बात करो जो आपके आसपास

910
01:04:05,960 --> 01:04:10,520
का मंदिर हो और वहां पर बैठना चालू करो वहां पर अपने आसपास के पड़ोसियों

911
01:04:10,520 --> 01:04:15,480
को बुलाना चालू करो और

912
01:04:15,480 --> 01:04:19,640
यह बिल्कुल जो प्रैक्टिकल इंतजाम होता है यह आप देखिएगा जितने

913
01:04:19,640 --> 01:04:23,680
भी इन्फ्लुएंस है जो इस तरह से इन्फ्लुएंस करते हैं कि अरे तुमने क्या कर

914
01:04:23,680 --> 01:04:26,800
लिया 200 साल और ये वो बहुत तरीके से से तो

915
01:04:26,800 --> 01:04:30,800
वो इनफ्लुएंसर कभी भी आपको सॉल्यूशन नहीं देते हैं और आपको जल मिन

916
01:04:30,800 --> 01:04:35,040
मछली के तरीके से छटपटा हुआ छोड़ देते हैं अगली

917
01:04:35,040 --> 01:04:39,080
बार ये ट्राई करके देखिएगा आप लोग जब आपके पास कोई ऐसा मैसेज आए ना अरे ये हुआ है

918
01:04:39,080 --> 01:04:43,240
वो हुआ है उसको पलट के उसी व्यक्ति को मैसेज भेजिएगा कि भाई मुझे

919
01:04:43,240 --> 01:04:47,560
इसका उत्तर दो कि अभी मैं यहां पर बैठा हुआ हूं रेलवे स्टेशन पर बैठा हूं

920
01:04:47,560 --> 01:04:51,560
क्या मैं कुछ कर सकता हूं क्या उठा के गुम्मा किसी को मार सकता हूं या

921
01:04:51,560 --> 01:04:56,200
फिर दूध दूध लेकर पी सकता हूं अपना बल बढ़ा सकता हूं क्या करना चाहिए

922
01:04:56,200 --> 01:05:00,280
तो और उससे लास्ट में य लाइन भी लिख दीजिएगा यदि य ये जो

923
01:05:00,280 --> 01:05:04,360
खबर है आप मुझे नहीं भेज रहे हैं तोय उसको यह मेरा प्रश्न उसे भेजे

924
01:05:04,360 --> 01:05:08,360
जहां से आपके पास खबर आई है तो जहां से वह खबर चली होगी ना उसको

925
01:05:08,360 --> 01:05:12,520
झटका लगेगा भाई यह कर क्या रहा हूं मैं केवल प्रॉब्लम पर

926
01:05:12,520 --> 01:05:16,520
बात करना कोई माने नहीं रखता है जब तक हम सॉल्यूशन ना दे

927
01:05:16,520 --> 01:05:20,800
रहे जब हमारे पास सोल्यूशन है तभी हमें प्रॉब्लम पर बात करनी

928
01:05:20,800 --> 01:05:24,800
चाहिए तो प्रैक्टिकली मैं फिर से आ जाता हूं मुख्य विषय पर

929
01:05:24,800 --> 01:05:28,800
काफी लंबा हो जाता है प्रैक्टिकली गौ

930
01:05:28,800 --> 01:05:32,840
माता की जो रक्षा करनी है उसमें से एक बात तो यह आती है

931
01:05:32,840 --> 01:05:37,080
जैसे कि अभी राघव जी ने बताया कि आप

932
01:05:37,080 --> 01:05:41,240
अपने यहां की जो स्थानीय जो वंश परंपरा है उसके

933
01:05:41,240 --> 01:05:41,840
अकॉर्डिंग

934
01:05:41,840 --> 01:05:45,960
जो गौवंश है आपके यहां आपके यहां का स्थानीय उसका उसको

935
01:05:45,960 --> 01:05:50,200
आप लाइए अपने घर और उसका लालन पालन करने का प्रयास करिए

936
01:05:50,200 --> 01:05:54,560
उनके ही संरक्षण में रह कर के पहला तो ये है

937
01:05:54,560 --> 01:05:58,680
इसके अलावा दूसरी बात ये है जैसे आपने भी बताई कि जब

938
01:05:58,680 --> 01:06:03,120
बछिया हो जाती है या वो बछड़ा हो जाता है जो नंदी

939
01:06:03,120 --> 01:06:07,280
आगे चल कर के रूप धारण करते हैं तो उनकी उपयोगिता

940
01:06:07,280 --> 01:06:11,960
हमने बिल्कुल ना के बराबर कर दी है तो आप यह समझ लीजिए

941
01:06:11,960 --> 01:06:16,320
कि गाय माता के दूध का जहां पर उपयोग हो रहा है सबसे

942
01:06:16,320 --> 01:06:20,760
ज्यादा वहां से वहां जो जन्म लेने वाले जो नंदी होते हैं

943
01:06:20,760 --> 01:06:24,800
ये बीफ का जो इंपोर्ट एक्सपोर्ट का मामला होता है उसमें उनका उपयोग होता

944
01:06:24,800 --> 01:06:29,040
है सबसे ज्यादा क्यों क्योंकि व्यक्ति जो दूध

945
01:06:29,040 --> 01:06:33,120
के लिए जो क्या कहते हैं गौ माता

946
01:06:33,120 --> 01:06:37,520
का पालन कर रहा है गौवंश का पालन कर रहा है वो उसके लिए जब

947
01:06:37,520 --> 01:06:41,600
नंदी ने जन्म ले लिया तो उनके लिए नंदी की कोई वैल्यू नहीं जैसा कि

948
01:06:41,600 --> 01:06:45,680
अभी इस बात पर प्रकाश डाला था तो सबसे पहली बात हम हमें

949
01:06:45,680 --> 01:06:49,840
अपने मन में भावना क्रिएट करनी है कि गाय

950
01:06:49,840 --> 01:06:53,960
माता का संरक्षण या गाय माता को हम जो ला

951
01:06:53,960 --> 01:06:57,120
रहे हैं अपने घर या गौशाला इत्यादि

952
01:06:57,120 --> 01:07:01,360
में वो हम उनसे मिलने वाले उत्पाद के लिए

953
01:07:01,360 --> 01:07:05,360
नहीं ला रहे हैं हम अपने ऊपर एक अनुकंपा कर रहे हैं गौ

954
01:07:05,360 --> 01:07:09,640
माता का सानिध्य प्राप्त करने के लिए सबसे पहला सिद्धांत ये होना चाहिए

955
01:07:09,640 --> 01:07:13,760
आपको यह नहीं सोचना है कि उनसे हमें अमुक अमुक चीजें प्राप्त होंगी आप यह सोच

956
01:07:13,760 --> 01:07:17,840
लो उनसे हमें गौमूत्र और केवल गोबर प्राप्त होगा क्योंकि जब तक जीवित

957
01:07:17,840 --> 01:07:22,040
है तब तक भोजन तो पाएंगे तब तक य दोनों चीज आपको सदैव मिलती

958
01:07:22,040 --> 01:07:27,000
रहे इस बोलना चाहता हूं मैं जी बोलो

959
01:07:27,000 --> 01:07:31,040
देखिए जैसा कि मैंने अपने अपने वचन के प्रारंभ

960
01:07:31,040 --> 01:07:35,040
में वक्तव्य के प्रारंभ में बोला था कि साक्षात माता

961
01:07:35,040 --> 01:07:39,320
पार्वती आदि शक्ति का ही रूप गौ माता के रूप में हमें दिखाई दे रहा है

962
01:07:39,320 --> 01:07:43,640
और उनके ही पुत्र नंदी महाराज है पुराणों में चर्चा

963
01:07:43,640 --> 01:07:47,760
भी वर्णन भी आता है कि एक बार भगवान भोलेनाथ को लीला

964
01:07:47,760 --> 01:07:51,920
स्वरूप अपने शरीर में बहुत ज्यादा पीड़ा हो गई जिसको

965
01:07:51,920 --> 01:07:55,920
मिटाने के लिए वह त्रिलोकी में गमन करते रहे लेकिन उसका नहीं

966
01:07:55,920 --> 01:08:00,120
हुआ तो व अंत में खुद गौ माता के पास पहुंचे और गौ माता ने

967
01:08:00,120 --> 01:08:04,160
उन्हें अपने पेट के भीतर स्थान दे दिया बाद

968
01:08:04,160 --> 01:08:08,400
में जब उनका रोग शांत हुआ तो गौ माता ने उनको प्रसव के रूप में बाहर

969
01:08:08,400 --> 01:08:12,440
किया और व नंदनी महाराज के रूप में प्रकट आए पुराणों में कथा आती है

970
01:08:12,440 --> 01:08:16,680
जी और आप देखिए कि हमारे देश में

971
01:08:16,680 --> 01:08:20,840
सबसे ज्यादा पूजा भगवान शिव और माता जी की ही होती

972
01:08:20,840 --> 01:08:26,840
है और इन दोनों की ही साक्षात प्रति

973
01:08:27,800 --> 01:08:33,640
साक्षात प्रतिमा गौ माता ही है गौवंश

974
01:08:33,640 --> 01:08:37,800
जी तो मैं आगे बढ़ाता हूं अपनी बात आपकी आवाज

975
01:08:37,800 --> 01:08:42,040
फ जो गौ माता है गौ माता जहां पर सांस लेती

976
01:08:42,040 --> 01:08:46,160
है जहा पर शवास लेती है वो स्थान ही इतना पवित्र हो जाता है

977
01:08:46,160 --> 01:08:50,520
मात्र गौ माता के शवास लेने तो गौ माता का जो स्थान

978
01:08:50,520 --> 01:08:54,520
है वो तो सर्वोपरि है ही और महत्व भी गौ माता

979
01:08:54,520 --> 01:08:58,560
का सर्वाधिक है जैसा कि राघव जी ने बताया था कि जो

980
01:08:58,560 --> 01:09:02,600
पुरुषार्थ चतु है धर्म अर्थ काम और मोक्ष की सिद्धि

981
01:09:02,600 --> 01:09:06,760
भी हमको गौ माता के माध्यम से प्राप्त हो जाती है गौ माता

982
01:09:06,760 --> 01:09:10,760
के ऊपर जब भगवान श्री कृष्ण को नजर लगती थी किसी की किसी

983
01:09:10,760 --> 01:09:15,160
की कुदृष्टि लग जाती थी तो माता यशोदा क्या करती थी गौ माता की पूछ

984
01:09:15,160 --> 01:09:19,160
लेती और भगवान कृष्ण के ऊपर ऐसे कर देती दो तीन बार तो

985
01:09:19,160 --> 01:09:23,320
भगवान कृष्ण की नजर भी उतर जाती है उस तो ये

986
01:09:23,320 --> 01:09:27,320
बात बोल शर्मा जी इस पर एक बात बोलना कृष्ण की

987
01:09:27,320 --> 01:09:27,820
माता

988
01:09:27,560 --> 01:09:31,720
यशोदा करती थ और एक बात सबसे महत्वपूर्ण

989
01:09:31,720 --> 01:09:35,800
ये है कि हम किसी भी जैसे पर्व मनाते हैं गोपाष्टमी का हमने

990
01:09:35,800 --> 01:09:40,000
पर्व मनाया दिवाली का पर्व मनाया या फिर कोई भी पर्व मनाया तो उस पर्व

991
01:09:40,000 --> 01:09:44,200
तक ही इस बात को सीमित ना रखे गौ माता की सेवा हमेशा करें

992
01:09:44,200 --> 01:09:48,160
नित्य प्रतिदिन गौ माता की सेवा करें

993
01:09:48,160 --> 01:09:52,560
और गोपाष्टमी आएगी तो हर व्यक्ति गौ माता को गुड़ खिलाएगा

994
01:09:52,560 --> 01:09:56,920
जिसे कई सारी गौ माता ऐसी है जो बीमार भी प जाती अने

995
01:09:56,920 --> 01:10:01,120
के कारण तो केवल एक ही दिन उनको गुड़ ना खिलाया जाए नित्य

996
01:10:01,120 --> 01:10:05,160
प्रतिदिन उनकी सेवा की जाए नित्य प्रतिदिन आप उनको रोटी भी खिलाए पहली रोटी

997
01:10:05,160 --> 01:10:09,280
तो गाय के लिए निकलती ही है और गुड़ भी खिलाए समय समय के हिसाब

998
01:10:09,280 --> 01:10:13,520
से हर उनके लिए खाद्य पदार्थों की आवश्यकता है वो भी खिलाई

999
01:10:13,520 --> 01:10:17,520
जाती है और सबसे महत्त्वपूर्ण बात ये है कि गौ माता को जो भी बीमारिया

1000
01:10:17,520 --> 01:10:21,760
होती है वो उन्हीं के शरीर के अंदर ऐसी क्षमता है उनके मूत्र

1001
01:10:21,760 --> 01:10:26,040
के अंदर गोबर के अंदर दुद के अंदर की उन्हीं से जो जो गौ

1002
01:10:26,040 --> 01:10:30,520
माता की बीमारिया उनका शमन हो सकता है अग्नि पुराण के अंदर

1003
01:10:30,520 --> 01:10:34,800
गौ माता की जो बीमारी शरीर के अंदर जितनी भी बीमारिया होती है जितने रोग इत्यादि

1004
01:10:34,800 --> 01:10:38,920
होते हैं या हाथ का भी रो कोई रोग हो अश्व का हो

1005
01:10:38,920 --> 01:10:42,600
गौ माता का हो अग्नि पुराण के अंदर उसका विवेचन किया गया है

1006
01:10:42,600 --> 01:10:46,880
कि किस प्रकार से जो गौ माता का रोग उनके शरीर के अंदर हो जाए उनके दांतों

1007
01:10:46,880 --> 01:10:51,080
में कष्ट हो रहा है तो हम क्या घर पर ऐसी सामग्री उपलब्ध है हमारे

1008
01:10:51,080 --> 01:10:55,280
घर प यदि गौ माता के दांतो में कष्ट हो रहा है तो सामग्री को

1009
01:10:55,280 --> 01:10:59,280
उपयोग करके हम गौ माता के दांत के रोग को भी ठीक कर सकते हैं

1010
01:10:59,280 --> 01:11:03,440
गौ माता के शरीर के ऊपर बहर रोग हो रहा है तो ऐसी सामग्री हमारे

1011
01:11:03,440 --> 01:11:07,520
घर पर ही उपलब्ध है अगनि पुराण के अनुसार तो उस उस

1012
01:11:07,520 --> 01:11:12,280
सामग्री का उपयोग करके हम गौ माता के रोग को दूर कर सकते हैं

1013
01:11:12,280 --> 01:11:16,320
तो गौ माता को गौ माता के लिए पालन करना चाहिए हमको गौ

1014
01:11:16,320 --> 01:11:20,400
माता सबका पालन करती है विश्व की माता है विश्वस्त माता

1015
01:11:20,400 --> 01:11:24,440
तो एक पर्व की तरह सीमित ना रखे नित्य प्रतिदिन गौ माता

1016
01:11:24,440 --> 01:11:28,880
की सेवा उनको दंडवत प्रणाम अवश्य करें और श्री सुर

1017
01:11:28,880 --> 01:11:32,960
नम श्री सु नम इसका पाठ अवश्य करें इस मंत्र का जब

1018
01:11:32,960 --> 01:11:37,520
अवश्य जी जी आप पूरी कर लीजिए मैं क्योंकि

1019
01:11:37,520 --> 01:11:41,680
प्रैक्टिकल बता रहा था एक मैं फिर भूल जाऊंगा राघव जी अपनी

1020
01:11:41,680 --> 01:11:45,920
बात रख लीजिए क्योंकि मैं बता रहा था व्ट टू डू उस पर बात

1021
01:11:45,920 --> 01:11:50,000
कर इसी में कहना चाहता हूं जैसा कि मैंने कहा कि सबसे ज्यादा

1022
01:11:50,000 --> 01:11:54,200
पूजा पूरे कश्मीर से कन्याकुमारी त भारतवर्ष में माता रानी और शिवजी

1023
01:11:54,200 --> 01:11:57,920
की होती है तो गौ माता

1024
01:11:57,920 --> 01:12:02,360
इनकी गौ माता के बगैर इनकी पूजा संपन्न नहीं है तो यदि इनके

1025
01:12:02,360 --> 01:12:06,520
जितने भी भक्त हैं माता रानी के और भोलेनाथ के यदि यह

1026
01:12:06,520 --> 01:12:10,840
बिल्कुल सही रूप से आस्थान वित है इन दोनों हमारे भगवानों में

1027
01:12:10,840 --> 01:12:15,120
तो गौ माता की सेवा और रक्षा इनको तत्परता से करना चाहिए

1028
01:12:15,120 --> 01:12:19,120
जैसा कि मैंने अपने व्याख्यान के शुरुआत में कहा था कि गौ तंत्र

1029
01:12:19,120 --> 01:12:23,120
नामक ग्रंथ में यह लिखा गया है कि भोलेनाथ जी कहते हैं

1030
01:12:23,120 --> 01:12:27,560
कि हे पार्वती कोई 10 वंश का वि रक्षण कर ले तो तुम उसे साक्षात

1031
01:12:27,560 --> 01:12:33,560
शिव ही यानी कि मैं ही स्वीकार करो लेकिन

1032
01:12:33,960 --> 01:12:37,240
आज

1033
01:12:37,240 --> 01:12:41,400
जी चलिए मैं अपनी बात को आगे बढ़ाता हूं

1034
01:12:41,400 --> 01:12:45,120
जी बस मैं एक कंप्लीट

1035
01:12:45,120 --> 01:12:49,320
कर हा नेट की बड़ी गड़बड़ है तो हमें

1036
01:12:49,320 --> 01:12:53,320
क्या करना होगा कि हम गौ रक्षा यदि नहीं कर पा रहे हैं तो

1037
01:12:53,320 --> 01:12:57,480
हमें गोपालो की रक्षा करनी होगी यदि गोपालो की रक्षा

1038
01:12:57,480 --> 01:13:01,560
कर जाएंगे तो गौ रक्षा में हम बहुत बड़ा योगदान दे जाएंगे गोपालो की रक्षा

1039
01:13:01,560 --> 01:13:05,880
यह कि किसी भी तरीके से हम उनके जीवन में ऐसा क्या करें चाहे अर्थ

1040
01:13:05,880 --> 01:13:09,960
से चाहे किसी भी वस्तु विशेष से हम उनकी ऐसी सहायता करें कि वह

1041
01:13:09,960 --> 01:13:14,040
गौ रक्षा से गौ पालन से दूर ना हो क्योंकि यह

1042
01:13:14,040 --> 01:13:18,160
हमारे हाथ में है सरकार को मनाना हमारे हाथ में नहीं है जी

1043
01:13:18,160 --> 01:13:22,440
और छोटी-छोटी सेवाएं कर सकते हैं जैसे मैं मैं अपनी बात बताता

1044
01:13:22,440 --> 01:13:26,760
हूं दूसरा उसको माने ना माने मैं कहीं जा रहा होता हूं

1045
01:13:26,760 --> 01:13:30,800
तो लोग मूर्ख होते हैं मैं यहां इस पटल पर कहना चाहता हूं कि

1046
01:13:30,800 --> 01:13:34,800
मूर्ख लोगों कई बार आप अपने घर का कचरा पॉलिथीन प्लास्टिक की

1047
01:13:34,800 --> 01:13:39,240
पॉलिथीन में बांध के फेंक देते हैं तो उनके हाथ तो है नहीं पूज्य गौ माता के जिसको

1048
01:13:39,240 --> 01:13:44,800
खा लेती

1049
01:13:44,800 --> 01:13:48,920
है जी तो ऐसे छोटी-छोटी चीजों

1050
01:13:48,920 --> 01:13:53,080
का ध्यान रखना चाहिए आपकी आवाज फिर

1051
01:13:53,080 --> 01:13:57,400
चली गई थी अभी मैं आपकी बाता ह

1052
01:13:57,400 --> 01:14:01,840
छोटी छोटी सी ज ये देख सकते हैं जैसे पॉलीथिन में आप

1053
01:14:01,840 --> 01:14:06,600
कोई भोज पदार्थ पैक करके ना डाले जिसको की गौ माता

1054
01:14:06,600 --> 01:14:11,520
सबसे पहली बात है यहां वहा कचरा डालना ही क्यों है क्यों डालना है

1055
01:14:11,520 --> 01:14:15,720
उसको अच्छे तरीके से उनको निवेदित कीजिए किसी कारण वह कचरे के ढेर में मुंह डालती

1056
01:14:15,720 --> 01:14:19,800
हुई पॉलिथीन निकलती हुई मिले तो बिल्कुल जाइए परवाह मत

1057
01:14:19,800 --> 01:14:23,880
कीजिए और उनके मुख से वो पॉलिथीन खींचिए इतना तो कर सकते हैं यह मैं

1058
01:14:23,880 --> 01:14:27,880
करता हूं इतना भी नहीं कर सकते हम कहीं भी जा रहे हैं

1059
01:14:27,880 --> 01:14:31,920
आ रहे हैं अपने काम से और कहीं ऐसी गौ माता दिख रही है तो क्या हम वो

1060
01:14:31,920 --> 01:14:36,240
छुड़वा नहीं सकते किसी पॉलिथीन में जो भी कोई मूर्ख व्यक्ति है डाल के गया हम उस पॉलिथीन

1061
01:14:36,240 --> 01:14:40,280
को खोल के उनको जो खाना है वो खाने को निवेदित नहीं कर सकते क्या ये

1062
01:14:40,280 --> 01:14:44,600
एक गिलहरी प्रयास नहीं होगा गौ रक्षार्थ मैं सभी से प्रश्न कर रहा हूं

1063
01:14:44,600 --> 01:14:48,720
बिल्कुल तो अब आप पूरी कीजिए बात जी जी जी

1064
01:14:48,720 --> 01:14:52,880
मैं म्यूट हो जाता हूं मैं अपनी बात रखूं

1065
01:14:52,880 --> 01:14:57,120
तो देखिए सबसे पहले अगर हम मैं यह समझते

1066
01:14:57,120 --> 01:14:59,880
हुए बता रहा हूं कि अभी मैं

1067
01:14:59,880 --> 01:15:04,080
उन लोगों से बात कर रहा हूं जो बिल्कुल न्यूट्रल है अभी तक उन्होने इस दिशा

1068
01:15:04,080 --> 01:15:07,880
में कुछ भी नहीं सोचा है कुछ कर नहीं रहे

1069
01:15:07,880 --> 01:15:11,920
हैं तो वह कहां से शुरू करें तो

1070
01:15:11,920 --> 01:15:16,240
उसके लिए बहुत ही विशेष अवसर है कल गोपाष्टमी

1071
01:15:16,240 --> 01:15:20,520
का तो आप वहां पर एक प्रण लीजिए सबसे

1072
01:15:20,520 --> 01:15:25,320
पहले कि आज से मैं जो गौ

1073
01:15:25,320 --> 01:15:29,400
माता है गौ माता गौवंश उनके महत्व को लेकर के सजग हो

1074
01:15:29,400 --> 01:15:33,680
चुका हूं जागरूक हो चुका हूं अपने मन में सबसे पहले कल से एक

1075
01:15:33,680 --> 01:15:38,120
संकल्प धारण करिए कि यदि मैं स्वयं को हिंदू मानता हूं

1076
01:15:38,120 --> 01:15:43,640
यदि मुझे हिंदुत्व की रक्षा करनी है यदि

1077
01:15:43,640 --> 01:15:48,200
मैं अपने धर्म से प्यार करता हूं उसकी रक्षा करनी है तो मुझे

1078
01:15:48,200 --> 01:15:52,320
जो उसकी धारक है धर्म की

1079
01:15:52,320 --> 01:15:56,520
उस गौ माता की रक्षा करनी सबसे पहला कल से संकल्प

1080
01:15:56,520 --> 01:16:00,600
अब इस संकल्प को हम एमप्लीफाई कैसे करें उसके लिए मैं कुछ

1081
01:16:00,600 --> 01:16:04,840
महत्त्वपूर्ण बिंदु बता रहा हूं मैं बहुत ज्यादा विकल्प नहीं दूंगा आपको क्योंकि

1082
01:16:04,840 --> 01:16:09,640
विकल्प जब ज्यादा होते हैं तो फिर तब भीय व्यक्ति कंफ्यूज होता है कि यह करें कि यह करें

1083
01:16:09,640 --> 01:16:13,680
तो इसके लिए भी हमारी तरफ से कैंपेन चलाए जाएंगे कि पर्टिकुलर आपको

1084
01:16:13,680 --> 01:16:15,320
ये ये करना है जिससे कि अनुशासित

1085
01:16:15,320 --> 01:16:20,240
होकर के आप वो कार्य कर सके मगर अभी मैं आपको

1086
01:16:20,240 --> 01:16:24,320
सिस्टमिकली थोड़ा बताऊंगा कि आपको क्या करना है सबसे

1087
01:16:24,320 --> 01:16:28,360
पहली बात तो ये है कि आप अपने घर का कोई

1088
01:16:28,360 --> 01:16:32,600
भी पर्व बिना गौ पूजन के ना

1089
01:16:32,600 --> 01:16:36,960
मनाए प्रत्येक पर्व में प्रत्येक जन्म दिवस में प्रत्येक जितने

1090
01:16:36,960 --> 01:16:41,680
भी आपके यहां पर पर्व बने उस दिन गौ पूजन अवश्य रखें

1091
01:16:41,680 --> 01:16:45,720
इससे क्या होगा गौ का महत्व बढ़े दूसरी मैं बात बोल रहा

1092
01:16:45,720 --> 01:16:49,760
था जो वो था कि वो तो आप ऐड कर ही

1093
01:16:49,760 --> 01:16:53,920
लीजिएगा कि अपने यहां का जो स्थानीय गौवंश है उसका

1094
01:16:53,920 --> 01:16:57,960
पालन करें उसके पालन का प्रोत्साहन प्रोत्साहित करें लोगों

1095
01:16:57,960 --> 01:17:02,040
को वो ऐसा ना सोचे कि हम गुजरात

1096
01:17:02,040 --> 01:17:06,040
से लेकर के आएंगे तभी मामला बनेगा दूसरा एक भावना

1097
01:17:06,040 --> 01:17:10,040
अपने अपने अंदर और अपने आसपास के जो वातावरण है समाज

1098
01:17:10,040 --> 01:17:14,520
है उसमें डालिए कि गाय का पालन पोषण इसलिए

1099
01:17:14,520 --> 01:17:18,520
नहीं करना है कि हमें उनसे जो है दूध लेना है हमें उसको बेचना है

1100
01:17:18,520 --> 01:17:22,600
या पीना है इसके लिए नहीं करना है हमें गाय को गाय का

1101
01:17:22,600 --> 01:17:26,840
सानिध्य प्राप्त करना है अपने जी का एक अंश निकाल कर के गाय

1102
01:17:26,840 --> 01:17:30,320
को समर्पित कर देना है इसके लिए हम जो है गाय का

1103
01:17:30,320 --> 01:17:34,360
पालन गाय के पालन पोषण को प्रोत्साहित प्रोत्साहन कर रहे

1104
01:17:34,360 --> 01:17:38,360
हैं इसके अलावा जो बहुत प्रैक्टिकल बात है

1105
01:17:38,360 --> 01:17:42,480
बहुत प्रैक्टिकल बात आज भी इस लाइव को जो लोग देख रहे हैं या

1106
01:17:42,480 --> 01:17:46,520
जो जब यह लाइव नहीं रहेगा एक वीडियो के रूप में हो जाएगा तब इसको जो

1107
01:17:46,520 --> 01:17:50,520
लोग देखेंगे वो सब बातें सुनने के

1108
01:17:50,520 --> 01:17:54,840
बाद अभी जब दूध लेने जाएंगे तो अमूल का लाल वाला दूध

1109
01:17:54,840 --> 01:17:59,120
खरीदेंगे नमस्ते इंडिया का लाल पैकेट खरीदेंगे है

1110
01:17:59,120 --> 01:18:03,160
ना तो एक प्रण लीजिए कल से नहाकर

1111
01:18:03,160 --> 01:18:07,320
स्नान करने के बाद ईश्वर के सामने कि मैं अपनी

1112
01:18:07,320 --> 01:18:11,600
ओर से फुल एफर्ट लगाऊंगा कि भाई मेरे घर में जो दूध का

1113
01:18:11,600 --> 01:18:15,920
दूध पिया जाए व गाय का दूध इससे क्या होगा

1114
01:18:15,920 --> 01:18:19,920
गाय का महत्व बढ़े गाय का दूध मैं पि

1115
01:18:19,920 --> 01:18:24,080
अच्छा दूसरी बात क्या है भाई अगर माह में

1116
01:18:24,080 --> 01:18:28,240
आप चार बार कुछ व्यय करते हैं अपने पर्सनल

1117
01:18:28,240 --> 01:18:32,320
अपने भोग के लिए कि मैं यह खा लिया वो खा लिया

1118
01:18:32,320 --> 01:18:36,720
या यह कर लिया वो कर लिया थोड़ा कम कर दीजिए भाई थोड़ा महंगा

1119
01:18:36,720 --> 01:18:40,800
पड़ेगा दूध वो लाइए आप थोड़ा वहां से

1120
01:18:40,800 --> 01:18:45,040
जहां से आप दूध लेने जा रहे हैं ना वहां अपना जो मोल तोल वाला भाव है उसको

1121
01:18:45,040 --> 01:18:45,540
छोड़कर

1122
01:18:45,360 --> 01:18:50,280
जाइए अगर वह कह रहा है 5 रप लीटर दूंगा मैं आपको तो आप उसको

1123
01:18:50,280 --> 01:18:56,000
लीटर करिए पूरे महीने में पा रुप की बढ़त से आपको 50 रुप का फर्क पड़ा

1124
01:18:56,000 --> 01:19:00,120
पूरे महीने में पा रुप की अगर बढ़त पड़ गई तो आपको

1125
01:19:00,120 --> 01:19:04,200
50 रप पड़ा यह 50 रप से उसको जो गौ का पालन कर

1126
01:19:04,200 --> 01:19:08,640
रहा है उसको कितना प्रोत्साहन मिलेगा तो वहां पर अपनी भावनाएं

1127
01:19:08,640 --> 01:19:12,640
लेकर के जाइए वहां पर एक ग्राहक बन के मत

1128
01:19:12,640 --> 01:19:16,680
जाइए कि मैं तो दूध खरीदने आ रहा हूं और य जो लाल

1129
01:19:16,680 --> 01:19:20,680
वाले पैकेट है बिल्कुल इनको अवॉइड करिए यहां तक हो

1130
01:19:20,680 --> 01:19:24,960
सके यथा संभव तो इससे गाय का महत्व बढ़ेगा

1131
01:19:24,960 --> 01:19:29,160
अब बात आती है जो नंदी महाराज की हत्या होती है जो नंदी हो जाते

1132
01:19:29,160 --> 01:19:33,240
हैं जैसे कि इन्होंने बताया कि एक नंदी की एक बार के सीमन से 80

1133
01:19:33,240 --> 01:19:37,320
गाय गाय जो है गर्भवती हो सकती हैं तो इसलिए

1134
01:19:37,320 --> 01:19:41,560
नंदी की जो उपयोगिता है वह कम हो गई है तो नंदी महाराज की उपयोगिता

1135
01:19:41,560 --> 01:19:45,640
के लिए हम एक कैंपेन चलाने वाले हैं जिसमें

1136
01:19:45,640 --> 01:19:49,760
हम ऐसे प्लांट लगा रहे हैं जहां पर जो कोलू

1137
01:19:49,760 --> 01:19:54,040
है उसको नंदी महाराज जी के द्वारा चलाया जाएगा

1138
01:19:54,040 --> 01:19:58,040
और उसे धीरे धीरे करके शुद्ध वाला जो कोलू के बैल का पिसा हुआ जो

1139
01:19:58,040 --> 01:20:00,400
तेल हो वो निकलेगा और

1140
01:20:00,400 --> 01:20:04,600
आप लोग भी प्रयास करके अपने अगर थोड़ा बड़े लेवल

1141
01:20:04,600 --> 01:20:08,680
पर अगर कर सकते हैं जैसे जब सबसे पहला क्या है कि

1142
01:20:08,680 --> 01:20:12,680
आपने बनाया अपने आसपास के मठ मंदिर को शिक्षा रक्षा सेवा

1143
01:20:12,680 --> 01:20:16,800
का प्रकल्प उसके कारण क्या हुआ आपका एक ग्रुप बन गया आपकी

1144
01:20:16,800 --> 01:20:21,240
वो जो सोसाइटी आपका वो जो गली मोहल्ला जो भी है कॉलोनी

1145
01:20:21,240 --> 01:20:25,280
वो सब वहां के जितने भी हिंदुत्ववादी लोग है वहां आने लगे ग्रुप बन गया

1146
01:20:25,280 --> 01:20:29,520
अब इस ग्रुप ने मिलकर के क्या किया किसी गौ पालक

1147
01:20:29,520 --> 01:20:33,680
को पकड़ा या फिर स्वयं में ही निर्धारित किया कि भाई यह

1148
01:20:33,680 --> 01:20:38,200
वाले हैं यह चाचा जी हैं यह सेवा से निवृत हो चुके हैं इनके लिए सही रहेगा

1149
01:20:38,200 --> 01:20:42,400
और उनको जो है एक प्लांट लगवा दिया प्लांट में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता

1150
01:20:42,400 --> 01:20:46,560
है इस पर हम आगे आने वाले जब हम प्लांट डालेंगे आवान की तरफ से प्लांट हम डालने वाले

1151
01:20:46,560 --> 01:20:50,840
हैं तो जब हम यह प्लांट डालेंगे तो उसके वीडियोस सरलता पूर्वक कैसे

1152
01:20:50,840 --> 01:20:54,960
कैसे इसमें क्याक हो सकता है वो सब कुछ हम डालेंगे तो लू

1153
01:20:54,960 --> 01:20:59,400
के बैल द्वारा पिसने वाला तेल हम आप लोग घर में

1154
01:20:59,400 --> 01:21:03,560
उपयोग में लाए उसके वैज्ञानिक फायदे तो है ही साथ ही साथ

1155
01:21:03,560 --> 01:21:07,720
सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि हम इस तरीके से जगह जगह पर

1156
01:21:07,720 --> 01:21:11,920
कोलू के बैल की बात करने लगे तो कोलू के बैल के पिसे

1157
01:21:11,920 --> 01:21:15,680
हुए तेल को आप पहली बात तो आपकी फैमिली

1158
01:21:15,680 --> 01:21:20,160
आपका परिवार स्वस्थ होगा और दूसरी बात यह है कि हम लोग जो

1159
01:21:20,160 --> 01:21:24,920
नंदी महाराज की हत्या हो रही है निर्ममता के साथ बिना किसी आधार के

1160
01:21:24,920 --> 01:21:29,120
वो उसमें गिरावट आएगी धीरे धीरे क्योंकि हमने गौवंश का महत्व बताया

1161
01:21:29,120 --> 01:21:33,320
देखिए जो पुरी के शंकराचार्य जी जगतगुरु वोह

1162
01:21:33,320 --> 01:21:37,720
सूत्रा क्मक शैली में आपको इतना सब कुछ बता देते हैं कि आपको

1163
01:21:37,720 --> 01:21:42,080
बहुत कुछ अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है उन्होंने बता दिया कि

1164
01:21:42,080 --> 01:21:46,120
जो बैल है उनकी उपयोगिता बढ़ानी है अब उपयोगिता

1165
01:21:46,120 --> 01:21:50,240
कैसे कैसे बढ़ा सकते हैं कि कृषि में अगर उनका उपयोग हो सकता है तो वहां कर ले अब कृषि

1166
01:21:50,240 --> 01:21:54,280
तो हम लोग करते नहीं है शहरों में रहने वाले लोग तो हमें क्या करना

1167
01:21:54,280 --> 01:21:58,600
है ऐसी चीजें करनी है जैसे मान लीजिए हमारा

1168
01:21:58,600 --> 01:22:02,600
50 लोगों का भी ग्रुप हो गया तो आपका जो वो जो कोलू के एक

1169
01:22:02,600 --> 01:22:06,600
कोलू के बेल से जो तेल निकलेगा ना व 50 100

1170
01:22:06,600 --> 01:22:11,240
स लोगों मेंही कंज्यूम हो जाएगा आपको उसके लिए मार्केट ढूंढने की आवश्यकता नहीं पकड़नी है

1171
01:22:11,240 --> 01:22:15,320
अब दूसरी बात वो जो प्लांट है उसका खर्चा कैसे होगा कि यह

1172
01:22:15,320 --> 01:22:19,760
जो तेल होगा व र लीटर नहीं आएगा वो आएगा ज्यादा मगा

1173
01:22:19,760 --> 01:22:23,880
तो वहां पर आप अपनी भावनाए लेकर जाइए कि भाई हम जो है

1174
01:22:23,880 --> 01:22:28,080
यहां पर ये जो है गौ माता के लिए कर रहे हैं हम तेल पिएंगे

1175
01:22:28,080 --> 01:22:31,000
तेल लेंगे तेल खाएंगे तो वो ओलू

1176
01:22:31,000 --> 01:22:35,200
के बैल का पिसा हुआ ही खाएंगे और भले ही वो हमको 500 00 लीटर

1177
01:22:35,200 --> 01:22:39,200
घी के बराबर पड़े तब भी हम वही खाए ये बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं

1178
01:22:39,200 --> 01:22:43,200
है इससे ज्यादा इन्वेस्टमेंट शहरों में रहने वाले लोग सिंगम थ्री आती

1179
01:22:43,200 --> 01:22:47,320
है और कर देते हैं जाकर के वहां टिकट ले लेते हैं उसके तो

1180
01:22:47,320 --> 01:22:51,360
आप यदि छोटा सा ध्यान दें तो बहुत बड़ा कोई आपके

1181
01:22:51,360 --> 01:22:55,640
जीवन में प्रभाव नहीं पड़ने वाला है और यह आप को एक आपके

1182
01:22:55,640 --> 01:22:59,920
जीवन में एक वो वहां पर जो आपने फिल्म देख कर के पैसे वेस्ट

1183
01:22:59,920 --> 01:23:03,960
किए ना वही पैसे आपने यहां पर अपने धर्म की रक्षा में अपनी गौ माता

1184
01:23:03,960 --> 01:23:08,440
की रक्षा में अपने स्वास्थ्य पर खर्च किए आपके हॉस्पिटल्स के चक्कर कम होंगे

1185
01:23:08,440 --> 01:23:12,480
पलू के बेल का जब तेल पिसा हुआ लेंगे और अगर गौ माता

1186
01:23:12,480 --> 01:23:16,920
का सानिध्य आपको प्राप्त हो रहा है तो फिर कहना ही क्या है मगर हमें उपयोगिता

1187
01:23:16,920 --> 01:23:20,960
पर ध्यान देना है छोटे-छोटे से प्रोडक्ट बनते हैं गौ माता का जो गोबर होता है उससे भी बहुत

1188
01:23:20,960 --> 01:23:24,960
सारे आजकल चीजें बनने लगी हैं तो आप इन सबको प्रचलन में

1189
01:23:24,960 --> 01:23:29,160
लाए संकल्प ले कि हम गौ माता के पास जब जा रहे हैं तो वो गिव

1190
01:23:29,160 --> 01:23:34,040
एंड टेक वाले मामले से नहीं जा रहे हैं स्थानीय गाय का

1191
01:23:34,040 --> 01:23:38,880
पालन भरण पोषण पर ध्यान दें गौ पालको को प्रोत्साहन करें

1192
01:23:38,880 --> 01:23:43,000
और अपने जीवन में जहां जहां पर गौ माता से प्राप्त होने

1193
01:23:43,000 --> 01:23:46,040
वाला उत्पाद ऐड हो सकता है अब देखिए एक

1194
01:23:46,040 --> 01:23:50,080
वेगन की बात आती है वो जो है कुछ तथाकथित स्वघोषित आचार्य

1195
01:23:50,080 --> 01:23:54,200
है वो कहते हैं भाई जो है जो गाय से मिलने वाला

1196
01:23:54,200 --> 01:23:58,320
जो जो प्रोडक्ट है वो बंद कर दो

1197
01:23:58,320 --> 01:24:02,440
क्योंकि गाय पर अत्याचार होता है है ना तो इससे क्या कर रहे हैं हम

1198
01:24:02,440 --> 01:24:06,520
मानव जीवन में गाय की उपयोगिता ही उपयोगिता को ही खत्म कर दे रहे

1199
01:24:06,520 --> 01:24:11,200
हैं जब वो उपयोगी नहीं रहेगी तो धीरे धीरे वो समाप्त कर दिया जाएगा

1200
01:24:11,200 --> 01:24:15,200
उन्हे तो हमें अगर गाय को बचाना

1201
01:24:15,200 --> 01:24:19,440
है तो उनकी उपयोगिता को सिद्ध करना होगा और उन उनकी नहीं

1202
01:24:19,440 --> 01:24:23,680
उनके पूरे परिवार की उपयोगिता को सिद्ध करना हो और उसके लिए हमें सबसे

1203
01:24:23,680 --> 01:24:28,040
पहले अपना संगठन बनाना होगा कि हम कम से कम अपने नगर क्षेत्र

1204
01:24:28,040 --> 01:24:32,480
के हिसाब से वहां के 50 100 परिवार संगठित हो

1205
01:24:32,480 --> 01:24:36,560
जिससे कि हम कोई भी निर्णय ले पाए कि भाई हम 50 लोग तो वहां का

1206
01:24:36,560 --> 01:24:40,640
तेल ही खाए खाएंगे हम 50 लोग तो

1207
01:24:40,640 --> 01:24:44,720
वही वाला घी खाएंगे गौ माता मक्खन वही वाला खाएंगे

1208
01:24:44,720 --> 01:24:48,880
है ना यह आधारभूत चीजें हैं जो आप अपने जीवन

1209
01:24:48,880 --> 01:24:52,880
में छोटे से बदलाव को लाकर के कर सकते हैं और इसके साथ

1210
01:24:52,880 --> 01:24:56,920
ही साथ यह जो अवसर है कल जो गोपाष्टमी आ रही है यह प्रण अपने जीवन

1211
01:24:56,920 --> 01:25:01,120
में आप कल लेंगे कल एक संकल्पित हो जाइए कि मैं अपने जीवन

1212
01:25:01,120 --> 01:25:05,160
में ज्यादा से ज्यादा सबसे पहला स्टेप है कि गौ माता

1213
01:25:05,160 --> 01:25:09,800
के विषय में गौवंश के विषय में मैं गिव एंड टेक वाला व्यक्ति नहीं हूं

1214
01:25:09,800 --> 01:25:14,040
और दूसरा अब मैं ज्यादा से ज्यादा जो उत्पाद होंगे वह गौ

1215
01:25:14,040 --> 01:25:18,120
माता से आ रहे उत्पाद है वो लूंगा और प्रयास करूंगा कि

1216
01:25:18,120 --> 01:25:22,560
मेरे आसपास कोई गौशाला हो बड़े-बड़े शहरों में सब जगह है गौशाला

1217
01:25:22,560 --> 01:25:26,600
मैं वहां से लाऊ क्योंकि कंपनी से क्या आ रहा है क्या नहीं आ रहा वो

1218
01:25:26,600 --> 01:25:30,880
एक अलग बात मगर पहला प्राथमिक प्रयास क्या है कि आप वहां से

1219
01:25:30,880 --> 01:25:35,040
लाइए अपने जीवन से धीरे धीरे कट करिए कि गौ माता

1220
01:25:35,040 --> 01:25:39,200
की जो हां एक और दिक्कत आती है कि जब आप गौ

1221
01:25:39,200 --> 01:25:43,720
माता का दूध लेकर के आएंगे तो आपके घर वाले हो सकता है जो यह सब आध्यात्म

1222
01:25:43,720 --> 01:25:47,800
की बातें ना सुनते हो धर्म रक्षा की बातें ना सुनते हो वो हो सकता है कहे कि

1223
01:25:47,800 --> 01:25:52,000
अरे हमें पसंद नहीं आ रहा इनके दूध में स्वाद नहीं है वो गाढ़ा पन नहीं है वो मजेदार

1224
01:25:52,000 --> 01:25:56,080
नहीं भाई वो गाढ़ा पन आपके हृदय को नुकसान प रहा है जो ओवर

1225
01:25:56,080 --> 01:26:00,280
गाढ़ा पन है जो इसको कहते हैं क्या कहते हैं

1226
01:26:00,280 --> 01:26:04,360
बैड फैट में आता हैय जो ओवर जो फैट

1227
01:26:04,360 --> 01:26:08,800
होता है पाछ ग्राम फैट होता है 100 ग्राम दूध में

1228
01:26:08,800 --> 01:26:12,960
जो मैं भैंस के दूध की बात कर रहा हूं तो उसमें 5छ ग्राम फैट

1229
01:26:12,960 --> 01:26:16,280
होता है वो बहुत क्या कहते हैं उसको कहते

1230
01:26:16,280 --> 01:26:20,280
बैड फैट में आता है स्टन फैट जब आप कभी

1231
01:26:20,280 --> 01:26:24,480
अपने चर्बी को कम करने चलेंगे तो वो आपके लिए दुखदा

1232
01:26:24,480 --> 01:26:28,560
होगा आपके शरीर से वो चर्बी कम होना तो

1233
01:26:28,560 --> 01:26:32,600
आप यह सोच रहे हो कि आप बस आजकल वैसे भी घरों में क्या हुआ है

1234
01:26:32,600 --> 01:26:36,760
कि सामान्य जो परिवार है उनमें जब सुबह होती है

1235
01:26:36,760 --> 01:26:41,080
तो भोजन यह सोचकर नहीं बनता है कि क्या स्वास्थ वर्धक

1236
01:26:41,080 --> 01:26:45,160
आज बनाया जाए भोजन यह सोचकर बनता है कि क्या स्वादिष्ट बनाया

1237
01:26:45,160 --> 01:26:49,400
जाए तो उसी का प्रभाव यहां भी है कि हमको स्वाद चाहिए स्वाद

1238
01:26:49,400 --> 01:26:53,600
में नहीं बदलाव है बदलाव पता है क्या है आपको आदत है बचपन से भैंस का दूध

1239
01:26:53,600 --> 01:26:57,680
पीने की और इसलिए जब गाय का आ रहा है तो आपको ऐसा लग रहा है तो आपको क्या

1240
01:26:57,680 --> 01:27:02,160
करना है वहां पर पहले से ही एक प्रतिरोधक क्षमता निर्माण करनी है

1241
01:27:02,160 --> 01:27:06,640
कि भाई हमको प्रहलाद बन जाना है पूरे घर का पूरे घर पूरे घर से हम सामने

1242
01:27:06,640 --> 01:27:10,640
खड़े हो जाएंगे भाई गाय का दूध ही पी गाय के दूध पर आ जाइए

1243
01:27:10,640 --> 01:27:14,840
गाय के घी प आ जाइए गाय के मक्खन पर आ जाइए और हो

1244
01:27:14,840 --> 01:27:18,840
सके तो लू के बैल के तेल पर आ जाइए कुछ दिनों में हम

1245
01:27:18,840 --> 01:27:23,040
लोग चालू करने वाले हैं उसकी विधिवत जानकारी आपको दी जाएगी इसके साथ

1246
01:27:23,040 --> 01:27:27,840
ही साथ जो जैसे छोटी छोटी सी जो गिलहरी वाले प्रयास आपको बताए गए वो

1247
01:27:27,840 --> 01:27:31,840
मन की भावना कि हम गिव एंड टेक वाली भावना नहीं रखते हैं गाय के लिए

1248
01:27:31,840 --> 01:27:35,880
स्थानीय गाय गौवंश को देंगे यह सारे वो घटक है

1249
01:27:35,880 --> 01:27:40,160
जिन पर कार्य करते हुए आप गौवंश के संवर्धन में संरक्षण

1250
01:27:40,160 --> 01:27:44,440
में एक निमित्त बन सकते हैं और गाय की रक्षा

1251
01:27:44,440 --> 01:27:48,800
का मतलब है धर्म की रक्षा सनातन धर्म की रक्षा का जो आधार

1252
01:27:48,800 --> 01:27:53,000
है वो गाय से शुरू होता है गाय की रक्षा करने लग जाइए

1253
01:27:53,000 --> 01:27:57,160
सभी देखिए आपके आसपास का वातावरण सुधरने लगेगा

1254
01:27:57,160 --> 01:28:01,280
जितने भी अशा स्त्रीय कार्य हो रहे बंद होने लगेंगे अशा स्त्रीय जो मंत्र पढ़े जा रहे हैं बंद होने

1255
01:28:01,280 --> 01:28:05,480
लगेंगे जब अशा स्त्रीय मंत्र पढ़ा जाना बंद होने लगेगा तो जो गलत

1256
01:28:05,480 --> 01:28:10,000
वाइल्स उत्पन्न हो रही है मंत्र पढ़ने से है ना

1257
01:28:10,000 --> 01:28:14,040
वो बंद होने लगेंगी क्यों क्योंकि जब अशा स्त्रीय मंत्र पढ़ा जाता है शस्त्री विधि का

1258
01:28:14,040 --> 01:28:19,520
आलंबन लेकर के तो क्या होता है आपके पास यदि

1259
01:28:19,520 --> 01:28:23,600
आसपास अकाल घटनाए घटित हो रही है तो इसका अर्थ यह है

1260
01:28:23,600 --> 01:28:27,680
कि कहीं अधि पूर्वक पूजन अर्चन हो रहा है तपस्या हो रही

1261
01:28:27,680 --> 01:28:32,680
है कहां लिखा है रामायण में कहां लिखा है मनुस्मृति

1262
01:28:32,680 --> 01:28:36,760
में तो जब आपकी व गलत वाइब्रेशन उत्पन्न होना नकारात्मक

1263
01:28:36,760 --> 01:28:41,080
वाइब्रेशन उत्पन्न होना कम हो जाएंगी आपका वातावरण शुद्ध होने लगेगा

1264
01:28:41,080 --> 01:28:45,680
अब यहां पर कुछ लोग य यह भावना कर सकते हैं अब कौन कुछ कर पाएगा

1265
01:28:45,680 --> 01:28:46,960
क्या होगा सब बिगड़

1266
01:28:46,960 --> 01:28:51,200
चुका है कोई कुछ नहीं कर सकता है तो पता है क्या सोचना है

1267
01:28:51,200 --> 01:28:57,120
आपको कर्मन वादी का रस्ते फले सु कदा

1268
01:28:57,120 --> 01:29:01,200
चना आपको यह नहीं सोचना है कि हम क्या बदलाव ला पाएंगे क्या नहीं

1269
01:29:01,200 --> 01:29:05,960
ला पाएंगे आपको यह सोचना है कि यह मेरा

1270
01:29:05,960 --> 01:29:10,760
कर्तव्य है और मुझे करना है बस अपने कर्तव्य को करने का आनंद उठाइए

1271
01:29:10,760 --> 01:29:15,080
उसके परिणाम में आनंद मत ढूंढिए अपने

1272
01:29:15,080 --> 01:29:19,160
कर्तव्य कर्म को करने में आनंद ढूंढ है

1273
01:29:19,160 --> 01:29:23,720
ना और एक बात और आती है

1274
01:29:23,720 --> 01:29:27,840
एक युक्ति दी थी करपात्री जी महाराज ने इस विषय में कि सब बिगड़ चुका है

1275
01:29:27,840 --> 01:29:32,520
क्या है कलयुग है कुछ नहीं होगा तो करपात्री जी महाराज ने बताया था

1276
01:29:32,520 --> 01:29:37,440
जब उनसे किसी ने कुतर किया था कलयो है कुछ नहीं होगा तो कपाती जी महाराज बोले थे

1277
01:29:37,440 --> 01:29:42,240
कि गर्मियों के दिनों में भीषण गर्मी जब पड़ रही होती है

1278
01:29:42,240 --> 01:29:46,240
तब ये बात सर्व जगत मतलब जग जाहिर होती है कि गर्मी तो

1279
01:29:46,240 --> 01:29:50,320
है ही गर्मी तो पड़ेगी फिर भी हम यथासंभव प्रयास करते हैं

1280
01:29:50,320 --> 01:29:54,640
कि हमें गर्मी कम लगे यथासंभव प्रयास करते हैं कि नहीं

1281
01:29:54,640 --> 01:29:58,720
कि हमें गर्मी कम लगे इसी प्रकार से भले ही कलयुग है भले ही

1282
01:29:58,720 --> 01:30:02,200
सब कुछ है पूरा विरुद्ध हो रहा है आचरण सब कुछ है

1283
01:30:02,200 --> 01:30:06,280
मगर फिर भी हम सदैव प्रयासरत रहेंगे कि कलयुग का प्रभाव

1284
01:30:06,280 --> 01:30:10,360
कम हो यही धर्म सिखाता है चाहे कलयुग हो द्वापर

1285
01:30:10,360 --> 01:30:14,640
हो कुछ भी हो मगर हम सदैव प्रयास रत रहेंगे अपने धर्म की रक्षा

1286
01:30:14,640 --> 01:30:18,640
के लिए और जो कलयुग से होने वाले जो दुश प्रभाव

1287
01:30:18,640 --> 01:30:22,640
है उनके नाश के लिए बाकी महादेव की इच्छा बाकी भगवान

1288
01:30:22,640 --> 01:30:26,920
देखेंगे तू मेरी शरण में जा मैं देखूंगा तुझे क्या चाहिए और

1289
01:30:26,920 --> 01:30:31,520
क्या तेरे पास है वो सब मैं देखूंगा आप अपना कर्म

1290
01:30:31,520 --> 01:30:35,600
करिए कभी-कभी एक बात ये भी आती है यहां पर कि कर्म के फल

1291
01:30:35,600 --> 01:30:39,960
में आसक्ति नहीं होगी तो व्यक्ति जो है वो उतनी

1292
01:30:39,960 --> 01:30:44,120
निष्ठा से कैसे लड़ेगा आपकी निष्ठा किसम होनी चाहिए पता है मैं यह

1293
01:30:44,120 --> 01:30:48,320
काम जैसे जैसे अर्जुन अर्जुन ने कहा कि भाई मैं लड़ रहा हूं

1294
01:30:48,320 --> 01:30:52,320
और मैं अगर जीतूंगा अगर उसकी जीतने से

1295
01:30:52,320 --> 01:30:56,680
होने वाले जो फल है उसमें अगर निष्ठा नहीं होगी तो वो क्यों

1296
01:30:56,680 --> 01:31:00,680
जीतने में उसकी निष्ठा आएगी जब फल की उसके अंदर आसक्ति

1297
01:31:00,680 --> 01:31:05,200
होगी फल के प्रति कि मुझे ये फल मिलेगा तभी तो उसकी निष्ठा आएगी

1298
01:31:05,200 --> 01:31:09,600
नहीं उसकी निष्ठा किस बात में है जैसे अर्जुन से कोई पूछे क्यों

1299
01:31:09,600 --> 01:31:14,520
जीतना चाहते हो तो एक जवाब है कि जीतने के बाद मुझे महल मिलेगा

1300
01:31:14,520 --> 01:31:17,640
मुझे बहुत अच्छा सोने का सिंहासन मिलेगा

1301
01:31:17,640 --> 01:31:21,840
या अमुक अमुक चीजें मुझे मिलेंगी तो इसके

1302
01:31:21,840 --> 01:31:25,920
प्रति आसक्त होने से भगवान ने मना किया तो फिर लड़ क्यों रहे हैं जब कोई

1303
01:31:25,920 --> 01:31:30,400
परिणाम में हम ध्यान ही नहीं लड़ाई कैसे करे मुझे जीतना है क्यों

1304
01:31:30,400 --> 01:31:34,480
भगवान ने कहा शास्त्र ने कहा है इसलिए मुझे

1305
01:31:34,480 --> 01:31:38,480
जीतना है मुझे तुम्हें लड़ना है क्यों भगवान ने

1306
01:31:38,480 --> 01:31:42,680
कहा है शास्त्र ने कहा है इसलिए मुझे लड़ना है

1307
01:31:42,680 --> 01:31:46,840
बस यह बुद्धि होनी चाहिए कर्मण्य वादी का रस्ते माफस कदाचना

1308
01:31:46,840 --> 01:31:50,880
का यही अर्थ कि मैं क्यों जीतना चाहता हूं इसलिए नहीं

1309
01:31:50,880 --> 01:31:55,120
कि जीतने से मुझे महल मिल जाएंगे ईश्वर

1310
01:31:55,120 --> 01:31:59,280
ने कहा कृष्ण ने कहा है महादेव ने कहा है शास्त्र

1311
01:31:59,280 --> 01:32:04,200
ने कहा है इस बुद्धि को लेकर के अपना कर्म करना चालू

1312
01:32:04,200 --> 01:32:08,320
करिए यह सब जो लोक आते हैं तो मेरे

1313
01:32:08,320 --> 01:32:12,440
जो वक्तव्य कहते समय भाव होते हैं व बदल जाते

1314
01:32:12,440 --> 01:32:16,480
हैं तो ठीक है कल गोपाष्टमी सभी लोग मनाएंगे

1315
01:32:16,480 --> 01:32:20,880
मैं ऐसी अपेक्षा कर रहा हूं शिवस दशा जी अवनीश

1316
01:32:20,880 --> 01:32:25,120
जी आदित्य वासने जी आर

1317
01:32:25,120 --> 01:32:29,320
आर्यन कुशवा जी है ना

1318
01:32:29,320 --> 01:32:32,880
आप सभी जितने भी श्रोता गण है और मैं यह कहूंगा

1319
01:32:32,880 --> 01:32:37,400
कि भाई देखो इस मामले में आर्य समाजी हो इस कौन हो

1320
01:32:37,400 --> 01:32:41,600
या जो रामपाल दास जी के फॉलोअर्स है वह

1321
01:32:41,600 --> 01:32:45,720
हो इस बात को लेकर के हम सब एक मत है कि गाय हमारे लिए

1322
01:32:45,720 --> 01:32:49,800
सम्माननीय है और हमें उसका रक्षण करना है तो इसमें

1323
01:32:49,800 --> 01:32:53,880
कोई भी दुराव ना रखें कल से कल गोपाष्टमी

1324
01:32:53,880 --> 01:32:57,960
के दिन गौ पूजन अवश्य करें इस मामले में हम सब भाई हैं हमारे आपस

1325
01:32:57,960 --> 01:33:01,960
की बातें वो सब आपस की चीजें हैं वो सब सुलती रहेंगी मगर गाय

1326
01:33:01,960 --> 01:33:05,960
माता की रक्षा पर हम सब लोगों को ध्यान देना है आप सब लोगों से निवेदन

1327
01:33:05,960 --> 01:33:10,520
है कि निसंकोच होक के और निर्विवाद रूप से

1328
01:33:10,520 --> 01:33:14,840
गौ माता के संरक्षण संवर्धन पर ध्यान दें विशेष रूप से

1329
01:33:14,840 --> 01:33:18,840
और आपकी कुछ अन्य युक्तियां हो तो उनका स्वागत होगा आगे हम

1330
01:33:18,840 --> 01:33:23,320
इस तरह का प्रकल्प लाने वाले हैं मगर सबसे पहले कल गोपाष्टमी

1331
01:33:23,320 --> 01:33:27,680
के दिन गौ माता का पूजन और संकल्प ये दो चीजें कल करनी है

1332
01:33:27,680 --> 01:33:31,760
पूजन और संकल्प ठीक है इस पर

1333
01:33:31,760 --> 01:33:36,240
हम हैशटैग भी लाएंगे शैग चलाएंगे गौ माता का पूजन और संकल्प

1334
01:33:36,240 --> 01:33:40,280
य आपको कल करना है इसके साथ ही साथ आज की हम

1335
01:33:40,280 --> 01:33:46,120
ये जो लाइव है उसको पूरा कर रहे हैं

1336
01:33:46,120 --> 01:33:52,120
और सभी को जय श्री

1337
01:33:52,720 --> 01:33:56,720
राम h [संगीत]
