1
00:00:02,100 --> 00:00:08,100
[संगीत]

2
00:00:08,960 --> 00:00:12,960
सभी को जय श्री राम तो

3
00:00:12,960 --> 00:00:16,960
आज एक

4
00:00:16,960 --> 00:00:22,480
विशेष संस्करण लेकर आए हम विशेषांक

5
00:00:22,480 --> 00:00:26,480
इनकी ओर से अब तक ये दावा किया जाता रहा कबीर

6
00:00:26,480 --> 00:00:30,480
पंथिया की तरफ से कबीर पंथी नोट जो वो वाले

7
00:00:30,480 --> 00:00:35,280
जो अपने ही उसमें मगर जो रामपाल

8
00:00:35,280 --> 00:00:39,320
दास जी के द्वारा फैलाई जाने वाली जो मिथ्या प्रपंच

9
00:00:39,320 --> 00:00:43,360
और प्रचार प्रसार हो रहा है और उनके शिष्यों

10
00:00:43,360 --> 00:00:47,400
के द्वारा जय श्री राम हरजी जय

11
00:00:47,400 --> 00:00:49,720
श्री

12
00:00:49,720 --> 00:00:52,960
राम

13
00:00:52,960 --> 00:00:57,160
तो यह विशेषांक है इस बात पर कि यह लोग

14
00:00:57,160 --> 00:01:02,760
जो खूब चिल्लाते जैसे पहले चिल्ला शुरू किया था कि वेदों में प्रमाण

15
00:01:02,760 --> 00:01:07,000
है आज तो मैं लेट नहीं हूं प्यारी बहना

16
00:01:07,000 --> 00:01:11,160
जी आज तो मैं समय से आ गया हूं फिर भी आप लेट कह रहे हैं मुझे

17
00:01:11,160 --> 00:01:16,160
एक मिनट ही लेट हुआ

18
00:01:16,160 --> 00:01:19,440
हूं

19
00:01:19,440 --> 00:01:23,800
तो

20
00:01:23,800 --> 00:01:28,040
अ कबीर के लिए कहते हैं कि भाई ब्रह्मा

21
00:01:28,040 --> 00:01:32,320
विष्णु महेश जो है अविनाशी है और और कबीर अविनाशी नहीं है इसलिए

22
00:01:32,320 --> 00:01:36,400
वो ईश्वर है अब बात य आती है कि जब हमने य पूछा

23
00:01:36,400 --> 00:01:40,600
कि लीला में कबीर का जो शरीर है वोह विनाश उसका

24
00:01:40,600 --> 00:01:44,760
हो सकता है कि नहीं लीला में लीला का अर्थ

25
00:01:44,760 --> 00:01:48,840
क्या है कि हमें वोह चीजें दिखाई जाए जो वास्तविक नहीं है

26
00:01:48,840 --> 00:01:52,640
मगर लीला पूर्वक हमें दिखाई

27
00:01:52,640 --> 00:01:56,880
जाती जो जैसा दिख रहा है वैसा नहीं है

28
00:01:56,880 --> 00:02:01,000
तो लीला में लीला में भी उनका शरीर यह सब कर सकता है

29
00:02:01,000 --> 00:02:05,400
कि नहीं तो इनका कहना था कि नहीं लीला में कर पहले पहला था कि लीला में भी अविनाशी

30
00:02:05,400 --> 00:02:08,000
है और मुझे जहां तक

31
00:02:08,000 --> 00:02:12,440
है कि इनके जो शीर्ष के जो

32
00:02:12,440 --> 00:02:16,520
नेतृत्व करने वाले लोग हैं उनका अभी भी यही मानना होगा

33
00:02:16,520 --> 00:02:20,720
कि लीला में उनका जो शरीर है वह परिवर्तित नहीं हो सकता

34
00:02:20,720 --> 00:02:25,000
है शाश्वत मगर क्योंकि इनके

35
00:02:25,000 --> 00:02:29,480
जो कहूंगा कि क्या कहू उनके लिए मूर्ख श शब्द निकलता है

36
00:02:29,480 --> 00:02:33,560
उनको इससे मतलब नहीं है कि वो अपने जिस मत को मान

37
00:02:33,560 --> 00:02:37,600
रहे हैं उसकी रक्षा कर रहे हैं कि नहीं उनको इससे मतलब नहीं है कि वह धर्म की रक्षा कर रहे हैं कि

38
00:02:37,600 --> 00:02:41,720
नहीं उनको इससे मतलब नहीं है कि वह ईश्वर के

39
00:02:41,720 --> 00:02:46,200
अस्तित्व की रक्षा कर रहे हैं कि नहीं उनको इससे मतलब है कि

40
00:02:46,200 --> 00:02:50,800
हम शिवांश नारायण द्विवेदी का या आहवान

41
00:02:50,800 --> 00:02:56,800
का मुझे मेरा य नाम ज्यादा पसंद है आहवान आहवान

42
00:02:57,920 --> 00:03:01,960
का आवान से कैसे उसका मुंह बंद कराए कैसे उसको जो

43
00:03:01,960 --> 00:03:06,280
है पछाड़े और भले ही पछाड़ के लिए

44
00:03:06,280 --> 00:03:10,720
हमें अपने ही मत का खंडन क्यों ना करना पड़ जाए अपनी मत को छोड़ना क्यों ना पड़ जाए

45
00:03:10,720 --> 00:03:14,720
तो ऐसे ही कुछ इनके मूर्ख

46
00:03:14,720 --> 00:03:18,800
शिष्य कहूंगा पिछले कुछ समय में आए

47
00:03:18,800 --> 00:03:23,120
और उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि लीला में जो है उनका शरीर

48
00:03:23,120 --> 00:03:27,240
जो कबीर कबीर जी हैं उनका शरीर प्रभावित होता है ये स्वीकार

49
00:03:27,240 --> 00:03:31,840
कर लिया पंक्चुअल

50
00:03:31,840 --> 00:03:36,400
प्यारी बहना कह रही है मैं पंक्चुअल हो गया हूं इतना

51
00:03:36,400 --> 00:03:40,600
मत कहिए पता नहीं अगली बार कब आ पाऊंगा टाइम

52
00:03:40,600 --> 00:03:44,680
पर तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि लीला में

53
00:03:44,680 --> 00:03:49,600
जो है कबीर का जो शरीर है वह प्रभावित होता है

54
00:03:49,600 --> 00:03:53,880
परंतु जो शाश्वत शरीर है वो प्रभावित नहीं होता है शाश्वत शरीर

55
00:03:53,880 --> 00:03:57,880
जो लीला के बाहर का शरीर है अच्छा ब्रह्मा विष्णु महेश के

56
00:03:57,880 --> 00:04:02,320
बारे में भी हम लोग यही बताते चले आ रहे कि लीला पूर्वक

57
00:04:02,320 --> 00:04:06,560
उनका आविर्भाव तिरोभाव होना तो सिद्ध होता है और अभी

58
00:04:06,560 --> 00:04:11,480
भी देखिए कबीर यहां पर नहीं है तो आविर्भव है ना कबीर

59
00:04:11,480 --> 00:04:13,200
का खैर ब्रह्मा

60
00:04:13,200 --> 00:04:17,360
विष्णु महेश का भी जो भगवान के रूप

61
00:04:17,360 --> 00:04:21,560
है उनमें से तीन जो रूप है ब्रह्मा विष्णु महेश

62
00:04:21,560 --> 00:04:25,760
उनका भी आविर्भाव रो भाव लीला पूर्वक ही सिद्ध होता है वस्तुतः

63
00:04:25,760 --> 00:04:30,320
व अजर अमर अविनाशी है मगर

64
00:04:30,320 --> 00:04:34,440
लीला पूर्वक ब्रह्मा विष्णु महेश का यदि शरीर जो है अविर भाव तिरो भाव होगा

65
00:04:34,440 --> 00:04:38,720
प्रकट अपक होगा तो उसको पकड़ के ये लोग गाना गाएंगे

66
00:04:38,720 --> 00:04:42,800
और लीला पूर्वक हालांकि इनके मत के द्वारा यह नहीं माना जाता

67
00:04:42,800 --> 00:04:47,040
फिर भी इन्होंने स्वीकार कर लिया कि कबीर जी का जो

68
00:04:47,040 --> 00:04:51,320
शरीर है वोह आविर्भाव तिरोभाव होगा मगर वह तब भी ईश्वर

69
00:04:51,320 --> 00:04:55,480
है अगर यह आधार है ईश्वर को ईश्वर कहने का कि लीला में भी उसका शरीर

70
00:04:55,480 --> 00:04:59,800
जो है वो बदलेगा नहीं वो आविर्भाव तिरोभाव

71
00:04:59,800 --> 00:05:05,760
को प्राप्त नहीं हो सकता तो ऐसे में फिर

72
00:05:05,760 --> 00:05:09,880
यदि अगर नहीं हो सकता है आविर्भाव तिरोभाव को प्राप्त

73
00:05:09,880 --> 00:05:14,240
तो वो सब कुछ कर सकने वालाला सर्वशक्तिमान नहीं रह जाएगा तो इन्होंने इस बात को स्वीकार

74
00:05:14,240 --> 00:05:18,560
किया कि नहीं लीला में हो सकता है तो जब लीला में हो सकता है तो उसी आधार

75
00:05:18,560 --> 00:05:22,680
पर कि वो बदल रहा है या शाश्वत नहीं है शरीर नित्य

76
00:05:22,680 --> 00:05:26,880
नहीं है शरीर उसी आधार पर ब्रह्मा विष्णु महेश के लिए बहुत चिल्लाते ब्रह्मा विष्णु

77
00:05:26,880 --> 00:05:28,240
महेश नाशवान है नाशवान

78
00:05:28,240 --> 00:05:32,400
है नाशवान है नाशवान है तो पहले तो आज हम शास्त्रों में देखेंगे ब्रह्मा

79
00:05:32,400 --> 00:05:36,400
विष्णु महेश को नाशवान कहां कहा गया है शास्त्रों

80
00:05:36,400 --> 00:05:40,960
में देखेंगे कि परम पुरुष किसे कहा गया है पुरुषोत्तम

81
00:05:40,960 --> 00:05:45,080
किसे कहा गया है जो य चिल्लाते हैं भगवत गीता में जो पुरुषोत्तम है आज थोड़ा डिटेल में

82
00:05:45,080 --> 00:05:51,080
जाएंगे और शास्त्रों के आधार पर देखेंगे

83
00:05:53,240 --> 00:05:58,000
कि शास्त्रों के आधार पर देखेंगे कि भाई ब्रह्मा विष्णु

84
00:05:58,000 --> 00:06:02,240
महेश मूलतः अविनाशी है

85
00:06:02,240 --> 00:06:07,080
या केवल लीला में ही मतलब मूलतः उनका आविर्भाव तिरोभाव होता है

86
00:06:07,080 --> 00:06:11,160
या केवल लीला में ही होता है तो इसको हम लोग आज देखने जा रहे हैं और

87
00:06:11,160 --> 00:06:15,160
जब शुरू की हम लोग कुछ बातें कर लेंगे तो उसके बाद हम लोग लिंक भी शेयर करेंगे

88
00:06:15,160 --> 00:06:19,240
कोई आना चाहता है तो आ सकता है अपनी बात को

89
00:06:19,240 --> 00:06:23,360
रखने के लिए तो मैं

90
00:06:23,360 --> 00:06:29,360
बहुत सारे प्रमाण दिखाऊंगा बोलूंगा मगर

91
00:06:30,520 --> 00:06:35,320
शास्त्रों से कुछ एक दो उदाहरण के लिए दे दूंगा क्योंकि

92
00:06:35,320 --> 00:06:40,000
सारे प्रमाण दिखाने के लिए क्या होता है पूरी टेबल पर सारे शास्त्र

93
00:06:40,000 --> 00:06:44,680
नीचे उतर आते हैं टेबल भर जाती है तो मैं

94
00:06:44,680 --> 00:06:50,680
प्रमाण बहुत सारे बोलूंगा रेफरेंसेस

95
00:06:50,960 --> 00:06:55,120
मगर और एक बात और है कि

96
00:06:55,120 --> 00:06:59,640
यदि हम यह भी कह रहे हैं कि जो यहां से लीला से बाहर का शरीर

97
00:06:59,640 --> 00:07:03,920
ईश्वर का कम से कम वो तो अजर अमर अविनाशी

98
00:07:03,920 --> 00:07:08,080
होना चाहिए यदि ये कह रहे हैं कि ईश्वर का अंततोगत्वा जो रूप है वो साकार

99
00:07:08,080 --> 00:07:12,480
है तो वो आयु से प्रभावित नहीं दिखना चाहिए मगर

100
00:07:12,480 --> 00:07:16,480
इनका जो शरीर है कबीर का वो आयु से प्रभावित दिखता है

101
00:07:16,480 --> 00:07:21,320
वो अजर नहीं है आयु से प्रभावित दिखता है सफेद दाढ़ी वाला दिखता है

102
00:07:21,320 --> 00:07:25,480
जबकि अगर लीला से बाहर वाला ही रूप आप मान

103
00:07:25,480 --> 00:07:30,200
रहे हो कि वो शाश्वत है तो वहां पर फिर दाढ़ी नहीं होनी चाहिए उनका वैसा रूप होना चाहिए

104
00:07:30,200 --> 00:07:34,280
यंग रूप होना चाहिए उससे प्रभावित रूप नहीं होना चाहिए जिस जिस

105
00:07:34,280 --> 00:07:38,440
रूप से व्यक्ति यहां पर बचता है इस जीवन में व्यक्ति बुढ़ापे वाले

106
00:07:38,440 --> 00:07:42,920
रूप से बचता है और वैसा ही बुढ़ापे का जो शरीर है

107
00:07:42,920 --> 00:07:45,880
वह कबीर जी का दिखाया जाता है

108
00:07:45,880 --> 00:07:49,880
इस बारे में हमने बहुत सी पड़ताल

109
00:07:49,880 --> 00:07:54,000
की सबसे पहली बात है कि कबीर बूढा दिखता है यदि

110
00:07:54,000 --> 00:07:58,040
वो उसम भी है लीला से बाहर यहां पर लीला में अगर

111
00:07:58,040 --> 00:08:03,000
दिखे तो पहली तो इन्ह अपना सिद्धांत बताना पड़ेगा कि वो शरीर उसका

112
00:08:03,000 --> 00:08:07,000
जो है वो शाश्वत नहीं है लीला में आने के बाद यह सिद्धांत स्वीकारा

113
00:08:07,000 --> 00:08:11,080
गया है रामपाल दास के द्वारा वो बताना पड़ेगा फिर

114
00:08:11,080 --> 00:08:15,120
इनका अपना ही एक मत है उसका खंडन हो जाएगा कि भाई लीला

115
00:08:15,120 --> 00:08:19,200
में ही ब्रह्मा विष्णु महेश यदि अपने शरीर का आविर्भाव तिरोभाव कर

116
00:08:19,200 --> 00:08:23,200
रहे हैं तो उससे आपको दिक्कत है मगर वही आविर्भाव तिरोभाव यदि कबीर का

117
00:08:23,200 --> 00:08:27,280
हो रहा है तो उससे आपको दिक्कत नहीं है और आप नाशवान इसको आवि

118
00:08:27,280 --> 00:08:31,400
भाव को तिरो भाव को नाशवान कहते हुए ब्रह्मा

119
00:08:31,400 --> 00:08:35,520
विष्णु महेश के ईश्वर का खंडन कर देते हो मगर आविर्भाव

120
00:08:35,520 --> 00:08:39,640
तिरोभाव होने पर भी कबीर के ईश्वर का ईश्वर की रक्षा करते हो तो

121
00:08:39,640 --> 00:08:44,960
यह क्या है ढोल में

122
00:08:44,960 --> 00:08:49,080
पोल अब बात आती है कि इन्होंने जब यह मान लिया कि लीला के अंदर

123
00:08:49,080 --> 00:08:53,120
तो उसका शरीर बदलेगा बुढ़ापे को भी प्राप्त होगा आविर्भव तिरोभाव भी होगा ठीक है अभी

124
00:08:53,120 --> 00:08:57,160
हमय मान के चल रहे रामपाल का मत ऐसा ही है जबकि रामपाल दास जी का मत ऐसा नहीं

125
00:08:57,160 --> 00:09:01,000
है हमसे जीतने के लिए इस बात को मात्र उन्होने रखा था और जब

126
00:09:01,000 --> 00:09:05,000
बात पूरी नहीं हो पाई तो यह कहते हुए चले गए कि भाई हम अगली बार

127
00:09:05,000 --> 00:09:09,200
आएंगे मगर यदि लीला से बाहर भी उसका शरीर अजर अमर

128
00:09:09,200 --> 00:09:14,040
अविनाशी है तो व अजर दिखना चाहिए ना बुढ़ापे का दतक तो नहीं होना चाहिए

129
00:09:14,040 --> 00:09:19,000
मगर बुढ़ापे का दतक हो रहा है आप जब भी कबीर की फोटो देखेंगे

130
00:09:19,000 --> 00:09:23,080
तो वह सफेद दाढ़ी वाली फोटो आपको दिखेगी तो बुढ़ापे का असर

131
00:09:23,080 --> 00:09:27,720
वहां पर है कबीर अब क्या

132
00:09:27,720 --> 00:09:32,000
है कि अथ वेद में कहा गया है 108 32

133
00:09:32,000 --> 00:09:36,440
में कि ईश्वर का जो ईश्वर पर

134
00:09:36,440 --> 00:09:41,040
आयु का फर्क नहीं पड़ता प्रभावित नहीं होता है

135
00:09:41,040 --> 00:09:45,120
इसके साथ ही साथ जो योगा अग्नि मय दिव्य शरीर

136
00:09:45,120 --> 00:09:49,960
होता है स्वेता शत्र उपनिषद दो 26 के अनुसार

137
00:09:49,960 --> 00:09:54,000
उस पर भी आयु का प्रभाव नहीं पड़ता है और

138
00:09:54,000 --> 00:09:58,080
भागवत के अनुसार एक 1926 जो भगवान है वो

139
00:09:58,080 --> 00:10:02,720
सदैव 16 वर्ष दिखते हैं तो लीला में आने के बाद भी

140
00:10:02,720 --> 00:10:07,240
उनका शरीर कन्वर्ट होना है कि नहीं होना है यह भगवान के ऊपर है वो

141
00:10:07,240 --> 00:10:11,400
चाहे तो अपने स्वरूप स्वरूप को एज इट इज बना कर के रखें जैसे कि राम

142
00:10:11,400 --> 00:10:15,480
कृष्ण के रूप में बनाते हैं और वो चाहे तो उसको आयु से प्रभावित

143
00:10:15,480 --> 00:10:16,160
होने वाला दिखा

144
00:10:16,160 --> 00:10:20,200
भी सकते ठीक है तो राम

145
00:10:20,200 --> 00:10:24,200
और कृष्ण का जो रूप है वो अजर दिखाया गया हमारे शास्त्र राम और कृष्ण के रूप

146
00:10:24,200 --> 00:10:28,240
में भगवान जो है वो अजर होते उनका शरीर आयु से प्रभावित भी नहीं होता

147
00:10:28,240 --> 00:10:32,280
है तो वो अपने अजर को यहां पर आपको प्रस्तुत कर देते

148
00:10:32,280 --> 00:10:36,360
हैं सबूत दे देते हैं कि मैं अजर हूं लीला के बाहर वाला जो अजर हूं मैं देखो

149
00:10:36,360 --> 00:10:40,520
अजर हूं मैं अविनाशी हूं मैं परमेश्वर हूं वो आपको प्रमाण दे देते हैं इस बात का

150
00:10:40,520 --> 00:10:44,600
जब वो राम कृष्ण के रूप में आते अब बात करते हैं शिव जी

151
00:10:44,600 --> 00:10:49,480
का शरीर अविनाशी है ये शब्द बहुत बार आता है कि वो अविनाशी है क्या तो

152
00:10:49,480 --> 00:10:53,480
हम शिव जी का शरीर अविनाशी है कि नहीं इसके लिए हम देख

153
00:10:53,480 --> 00:10:57,840
लेते हैं शिव पुराण विदेश्वर समता

154
00:10:57,840 --> 00:11:03,840
सातवा अध्याय 19 से

155
00:11:07,720 --> 00:11:11,840
30 पहली बात तो यह जो हमने जो शास्त्रों का रेफरेंस लिया कि

156
00:11:11,840 --> 00:11:16,320
ईश्वर जो है उसका शरीर अविनाशी अजर होना चाहिए अजर

157
00:11:16,320 --> 00:11:20,320
अजर होना चाहिए ईश्वर तो यदि यह कबीर को अजर कह रहे हैं तो ना तो

158
00:11:20,320 --> 00:11:24,320
उनका लीला के अंदर वो अजर दिख रहा है उस पर तो पर्दा डाल दे रहे हैं

159
00:11:24,320 --> 00:11:28,440
कि भाई चलो लीला पूर्वक दिख रहा है या वो नाशवान प्रकृति

160
00:11:28,440 --> 00:11:32,480
में है इसलिए ये दिख रहा है और

161
00:11:32,480 --> 00:11:36,640
वो लीला से बाहर भी अजर नहीं दिख रहा है बूढ़ा दिख रहा है

162
00:11:36,640 --> 00:11:40,960
तो ये क्यों बूढ़ा नहीं दिखना चाहिए और यदि उसको बूढ़ा नहीं कहेंगे

163
00:11:40,960 --> 00:11:45,200
तो क्या कहेंगे यह भी सोचने वाली बात है मैंने कई बार पूछा य आपको बूढ़ा दिख रहा

164
00:11:45,200 --> 00:11:49,200
है युवा दिख रहा है बालक दिख रहा है शिशु दिख रहा है किशोर दिख

165
00:11:49,200 --> 00:11:54,240
रहा है अधेर दिख रहा है क्या दिख रहा है है ना

166
00:11:54,240 --> 00:11:58,280
तो नहीं बता पाते तो शिव

167
00:11:58,280 --> 00:12:04,280
पुराण विदेश्वर सातवा

168
00:12:07,480 --> 00:12:13,480
अध्याय देखि पहले तो एक अच्छा अच्छी चीज है वोह देख

169
00:12:13,520 --> 00:12:18,200
लीजिए कि भगवान साकार और निराकार

170
00:12:18,200 --> 00:12:22,480
दोनों है यह हम लोग उपनिषद से भी दिखा चुके हैं

171
00:12:22,480 --> 00:12:26,800
और यह लिखा है मेरे दो रूप है सकल

172
00:12:26,800 --> 00:12:30,240
रूप और

173
00:12:30,240 --> 00:12:34,320
निष्कल रूप ठीक है भगवान के

174
00:12:34,320 --> 00:12:38,840
दोनों रूप होते हैं इसके साथ ही साथ

175
00:12:38,840 --> 00:12:43,640
यह विद्वेष समता है उसमें नौवा अध्याय है और

176
00:12:43,640 --> 00:12:47,640
30 से 32 लोक है इसमें भगवान कह रहे हैं मेरे दो रूप है सकल

177
00:12:47,640 --> 00:12:51,720
और निष्कल दूसरे किसी के ऐसे रूप नहीं है मेरे

178
00:12:51,720 --> 00:12:55,960
अतिरिक्त यहां ध्यान देने वाली बात है भगवान के अतिरिक्त यदि हम

179
00:12:55,960 --> 00:13:00,040
किसी की सत्ता को भगवान सेत रूप में स्वीकार

180
00:13:00,040 --> 00:13:04,120
करते हैं तो वो ईश्वर नहीं है यह भाव है ब्रह्म भाव मेरा

181
00:13:04,120 --> 00:13:08,480
निष्कल रूप और महेश्वर भाव मेरा सकल रूप भगवान कह रहे देखो मेरा निष्कल

182
00:13:08,480 --> 00:13:12,480
निराकार रूप और साकार रूप दोनों ये दोनों मेरे

183
00:13:12,480 --> 00:13:16,760
ही सिद्ध रूप है मेरे अतिरिक्त किसी दूसरे के नहीं है इस कारण तुम दोनों का अथवा

184
00:13:16,760 --> 00:13:21,320
अन्य किसी का ईश्वर नहीं है मुझ परमेश्वर

185
00:13:21,320 --> 00:13:22,760
में अपनी बुद्धि स्थित

186
00:13:22,760 --> 00:13:26,920
करो देखो मुझ परमेश्वर शिव जी कह रहे और ये जो लोग

187
00:13:26,920 --> 00:13:30,960
ऐसे कहने लगते हैं वो आदि शिव है आदि शंकर

188
00:13:30,960 --> 00:13:35,320
है तो भैया यहां स्टोरी देखो पहले कि कौन से शिव है कहां से आए

189
00:13:35,320 --> 00:13:39,400
कब बोल रहे हैं ऐसे थोड़ी ना कि अचानक से कोई दूसरा शिव प्रकट

190
00:13:39,400 --> 00:13:43,520
हो जाएगा वही शिव है जो अपनी शिवलिंग की पूजा की बात कर रहे

191
00:13:43,520 --> 00:13:47,680
हैं वही शिव है जो अपनी विग्रह की बात कर रहे हैं वही शिव है जो अपने

192
00:13:47,680 --> 00:13:51,720
को महेश्वर भी कह रहे हैं महेश ठीक है सब जगह आदि

193
00:13:51,720 --> 00:13:56,160
लगा के काम नहीं चलेगा इसके बाद

194
00:13:56,160 --> 00:14:00,320
यह कहते हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं इसी अध्याय में मतलब आप

195
00:14:00,320 --> 00:14:05,720
जब अ विद्वेष समता का

196
00:14:05,720 --> 00:14:09,960
विद्वे सवर समता का आप नौवा अध्याय जब पढ़ेंगे तो उसमें जो मैंने

197
00:14:09,960 --> 00:14:14,200
आपको श्लोक बताया है 30 से 32 वहां से लेकर के और

198
00:14:14,200 --> 00:14:18,480
काफी देर तक उनके जो परम ब्रह्म है

199
00:14:18,480 --> 00:14:22,840
भगवान शिव उन्हीं की बात हो रही है और यहां पर देख लीजिए जैसे स्कोन

200
00:14:22,840 --> 00:14:27,160
वाले भी कई बार कहते हैं कि सबने कहा है कि वो भगवान है वो भगवान

201
00:14:27,160 --> 00:14:31,560
है मगर कृष्ण ने कहा है मैं भगवान हूं मैं भगवान तो यहां पढ़ लीजिए

202
00:14:31,560 --> 00:14:36,080
भगवान स्वयं कह रहे हैं अहम परम ब्रह्म

203
00:14:36,080 --> 00:14:38,600
अहम परम ब्रह्म

204
00:14:38,600 --> 00:14:43,040
दिख रहा है श्लोक क्रमांक 36 है

205
00:14:43,040 --> 00:14:47,440
अे परम ब्रह्म मैं परम ब्रह्म हूं

206
00:14:47,440 --> 00:14:53,440
ठीक है तो

207
00:15:00,750 --> 00:15:06,750
[संगीत]

208
00:15:07,040 --> 00:15:11,520
ठीक है मैं ही परम ब्रह्म हूं और

209
00:15:11,520 --> 00:15:15,760
सगुण और निर्गुण यह दोनों मेरे ही रूप

210
00:15:15,760 --> 00:15:19,760
है मैं ही ब्रह्म हूं मैं ही ईश्वर हूं तो यह सब कुछ कह रहे

211
00:15:19,760 --> 00:15:23,920
हैं अपने आप ठीक है और यही अपने लिंग के पूजन

212
00:15:23,920 --> 00:15:27,920
की बात कर रहे हैं शिवलिंग के रूप में यही अपने विग्रह के पूजन की

213
00:15:27,920 --> 00:15:31,920
बात कर रहे हैं मूर्ति के रूप में अब आ जाते

214
00:15:31,920 --> 00:15:36,080
हैं सातवे अध्याय प जहां इनको वह शब्द चाहिए ना एजेक्ट कि भाई

215
00:15:36,080 --> 00:15:40,240
वह अजर अमर अविनाशी तो

216
00:15:40,240 --> 00:15:44,480
अविनाशी शब्द देख लीजिए भगवान शिव नाशवान है

217
00:15:44,480 --> 00:15:48,840
कि नहीं सातवा अध्याय आ

218
00:15:48,840 --> 00:15:54,840
गया सातवे अध्याय का 29 से 30

219
00:16:00,840 --> 00:16:04,840
उस अंत से आदि और अंत से रहित शरीर वाले

220
00:16:04,840 --> 00:16:09,800
आप परमेश्वर के विषय में क्या हुआ हे करुणाकर

221
00:16:09,800 --> 00:16:14,000
आदि और अंत से रहित शरीर वाले आप परमेश्वर

222
00:16:14,000 --> 00:16:18,080
के विषय में मैंने मोह बुद्धि से बहुत विचार किया यह

223
00:16:18,080 --> 00:16:22,080
कौन कह रहा है ब्रह्मा जी कह रहे

224
00:16:22,080 --> 00:16:28,080
हैं किसको कह रहे हैं

225
00:16:32,600 --> 00:16:37,080
देखिए विष्णु भगवान की कोई बातचीत चल रही प्रसंग

226
00:16:37,080 --> 00:16:41,160
अनुसार ब्रह्मा जी के साथ और फिर वहां पर विष्णु

227
00:16:41,160 --> 00:16:47,160
भगवान और ब्रह्मा जी के बीच में भगवान शिव आ जाते हैं

228
00:16:47,440 --> 00:16:51,560
और जब आ जाते हैं तो लिंग से प्रकट

229
00:16:51,560 --> 00:16:55,560
होकर आते हैं व शिवलिंग था वहां पर उससे प्रकट होकर महेश्वर प्रकट हो गए तो

230
00:16:55,560 --> 00:16:59,560
ये महेश ब्रह्मा विष्णु महेश महेश्वर परमेश्वर

231
00:16:59,560 --> 00:17:03,760
को प्रकट हुआ देखकर विष्णु उठ खड़े हुए और कांपते हाथों से उनका चरण

232
00:17:03,760 --> 00:17:07,880
पकड़कर कहने लगे हे करुणाकर आदि और अंत से रहित

233
00:17:07,880 --> 00:17:11,920
क्या बोले आदि और अंत से रहित शरीर वाले

234
00:17:11,920 --> 00:17:17,920
देखो भैया इनका शरीर जो है नाशवान नहीं है देख

235
00:17:18,480 --> 00:17:24,480
अ आदि और अंत से

236
00:17:27,080 --> 00:17:31,920
रहित शरीर वाले आप परमेश्वर ठीक है

237
00:17:31,920 --> 00:17:36,480
पहला ठीक है भैया पहला हो गया

238
00:17:36,480 --> 00:17:40,760
दूसरा ले लेते हैं शिव पुराण रुद्र समिता

239
00:17:40,760 --> 00:17:45,000
और दसवा अध्याय यहां से इसका

240
00:17:45,000 --> 00:17:49,080
पृष्ठ संख्या देख लेते हैं शिव पुराण रुद्ध समिता का

241
00:17:49,080 --> 00:17:53,080
और इसका जो है दवा

242
00:17:53,080 --> 00:17:57,400
अध्याय श्री हरि की सृष्टि की रक्षा का भार शिव का अंतर्धान

243
00:17:57,400 --> 00:18:03,080
241

244
00:18:03,080 --> 00:18:07,080
तो अब इसकन वाले कभी कहे आपको कहते हुए मिल जाए कि केवल कृष्ण ने

245
00:18:07,080 --> 00:18:12,880
कहा है कि मैं भगवान हूं तो आप क्या कहेंगे

246
00:18:12,880 --> 00:18:17,040
उन्हें आप कहेंगे

247
00:18:17,040 --> 00:18:21,280
कि शिव भगवान ने भी कहा वैसे भगवान के सभी रूपों ने यहां

248
00:18:21,280 --> 00:18:25,880
वहां कहा है बस क्या है कि जैसे योग पहले भी था

249
00:18:25,880 --> 00:18:30,160
मगर पतंजलि वालों ने उसका उपयोग करके बाबा रामदेव जी ने उसका उपयोग करके प्रचार

250
00:18:30,160 --> 00:18:34,360
करके आज जो है जब हम योग का नाम लेते हैं तो बाबा रामदेव की शक्ल

251
00:18:34,360 --> 00:18:38,440
आ जाती है वैसे अब थोड़ा कम होने लगा है मगर बीच में ऐसा हो गया था योग

252
00:18:38,440 --> 00:18:42,520
का मतलब ही था बाबा रामदेव इसी प्रकार

253
00:18:42,520 --> 00:18:46,640
से भगवान के सभी रूपों ने स्वयं को बिल्कुल ठोक के कहा है कि मैं हूं परम

254
00:18:46,640 --> 00:18:50,840
ब्रह्म बिल्कुल ठोक के ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश राम

255
00:18:50,840 --> 00:18:54,880
कृष्ण सबने यहां वहां कहा है गणेश जी ने भी कहा है मगर क्या

256
00:18:54,880 --> 00:18:58,880
हुआ कि उस एक डायलॉग का जैसे कृष्ण भगवान स्वयं

257
00:18:58,880 --> 00:19:02,960
इस इस एक डायलॉग का प्रचार प्रसार कि कोन ने पकड़ लिया

258
00:19:02,960 --> 00:19:07,040
हम इसका प्रचार प्रसार करेंगे आज नरेट बन गया कि भाई जो है

259
00:19:07,040 --> 00:19:11,120
कृष्ण कृष्ण भगवान स्वयं राम के लिए भी शब्द आया है

260
00:19:11,120 --> 00:19:15,640
शिव जी के लिए भी यह पंक्ति आई है मगर इसका प्रचार प्रसार वैसे नहीं हुआ

261
00:19:15,640 --> 00:19:18,360
उन्होंने उसको एक कोपरेटिव वे

262
00:19:18,360 --> 00:19:22,680
में बिल्कुल नैरेटिव बनाए और प्रचार प्रसार किया इस कारण

263
00:19:22,680 --> 00:19:26,960
से आज

264
00:19:26,960 --> 00:19:30,720
ये है ना

265
00:19:30,720 --> 00:19:34,960
तो यह हो गया आजय नरेट बन ग कृष्ण

266
00:19:34,960 --> 00:19:40,960
भगवान स्वयं वैष्णवास्त्र

267
00:19:58,760 --> 00:20:02,880
तो उसम भी वैश्णवा नाम यथा नैरेटिव डाला जा रहा है

268
00:20:02,880 --> 00:20:07,040
तो ठीक है वो वैष्णव है मगर इस बिहाव

269
00:20:07,040 --> 00:20:11,280
पर नहीं है कि नहीं सिर्फ वही वैष्णव है कृष्ण

270
00:20:11,280 --> 00:20:16,160
भी सैव है महाभारत में है है ना

271
00:20:16,160 --> 00:20:20,320
तो रुद्र समिता दसवा अध्याय और

272
00:20:20,320 --> 00:20:24,960
श्लोक

273
00:20:24,960 --> 00:20:29,000
है 10 से 11 12 दवा

274
00:20:29,000 --> 00:20:35,000
अध्याय का 11 से 12

275
00:20:42,360 --> 00:20:46,600
श्लोक शिव ने मेरा हाथ पकड़ कर श्री विष्णु को सर्वदा कामनाओं

276
00:20:46,600 --> 00:20:50,760
से

277
00:20:50,760 --> 00:20:54,920
र एकता में है संदेह नहीं करना चाहिए यहां पर देखिए एक चीज

278
00:20:54,920 --> 00:20:58,920
और है कि ब्रह्मा विष्णु और शिव की एक

279
00:20:58,920 --> 00:21:03,280
में किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए यह भी साथ साथ बताते

280
00:21:03,280 --> 00:21:07,280
चलते हैं जिससे कि लोगों को भ्रम ना हो जाए

281
00:21:07,280 --> 00:21:13,280
किसी प्रकार का

282
00:21:50,920 --> 00:21:55,480
346 बाकी आप अब लिंक शेयर कर दीजिए तो

283
00:21:55,480 --> 00:22:01,480
जिसको आना होगा वो आ सकता है चर्चा के लिए

284
00:22:02,840 --> 00:22:07,040
अंधविश्वास पाखंड से छुटकारा क्या हमारे आपके घर की बहन

285
00:22:07,040 --> 00:22:13,040
बेटियों पर अत्याचार होता तो तुम चुप बैठ जाओगे द्रौपदी

286
00:22:20,480 --> 00:22:24,920
को तो यह हमने दे दिया है

287
00:22:24,920 --> 00:22:28,920
कोई अगर देखिए वैचारिक मतभेद के निमित्त यदि रामपाल दास

288
00:22:28,920 --> 00:22:32,960
जी का कोई फॉलोअर है जैसा कि हमने कई बार कहा

289
00:22:32,960 --> 00:22:37,240
है कि आप आकर के अपना विचार प्रकट कर सकते हैं रख सकते हैं

290
00:22:37,240 --> 00:22:43,240
तो आप आ

291
00:22:43,560 --> 00:22:49,560
सकते 346

292
00:23:04,400 --> 00:23:09,080
जय श्री राम राजा राय जी हैप्पी छट पूजा क्या बात है आज

293
00:23:09,080 --> 00:23:13,080
आज छट पूजा बना रहे हैं हम आ गए घट से वापस आ गए ना तब

294
00:23:13,080 --> 00:23:17,080
देखि आपका लाइव चालू है तो फिर आए हां आज हम ब्रह्मा

295
00:23:17,080 --> 00:23:21,160
विष्णु महेश का जो अविनाशी तत्व है उसको बताने बैठे

296
00:23:21,160 --> 00:23:25,200
मैं उससे पहले कुछ कहना चाहता हूं मैं आज सुबह देख रहा था कि एक सज्जन जो उस

297
00:23:25,200 --> 00:23:29,240
दिन आए थे लाइव स्ट्रीम में रामपाल जी की तरफ से और

298
00:23:29,240 --> 00:23:33,440
अपना मत सिद्ध नहीं कर पाए थे तो हम लोगों को देखा देखिए आजकल वो भी लाइव स्ट्रीम करते हैं अपना

299
00:23:33,440 --> 00:23:37,960
चैनल बना के और अपने जो गुरु भाई लोग है उनको बुलाते हैं तो आ

300
00:23:37,960 --> 00:23:42,320
आपस में क्या बात कर रहे थे भाई हमारी जो परंपरा

301
00:23:42,320 --> 00:23:46,480
वादी हम लोग हैं तो वो कह रहे हैं अरे भाई पुरखों ने जो बात नहीं

302
00:23:46,480 --> 00:23:50,520
समझ पाई तो उस कुर्तियों का अंत किया है रामपाल जी ने तो

303
00:23:50,520 --> 00:23:54,880
लोग तुम नहीं मानते हो कोई जरी थोड़ी पुरखों की बात मानना पुरखों ने कोई बात नहीं समझी

304
00:23:54,880 --> 00:23:58,560
तो अरे भैया तुम्हारे पुरखे मूर्ख होंगे ना हमारे पुरखे मूर्ख नहीं

305
00:23:58,560 --> 00:24:02,560
थे तुम्हारे जो पुरखे होंगे वो मूर्ख रहे होंगे हमारे पुरखे

306
00:24:02,560 --> 00:24:06,920
मूर्ख नहीं थे वो आचार्य थे और समस्त शास्त्र वेद को जानते थे श्रोत्रीय

307
00:24:06,920 --> 00:24:11,920
ब्रह्मण महापुरुष थे हम सनातन धर्मिल

308
00:24:11,920 --> 00:24:16,440
के शिष्यों से कहना चाहता हूं हम सनातन धर्म के जो आचार्य है शंकराचार्य रामानुजाचार्य

309
00:24:16,440 --> 00:24:20,520
माधवाचार्य निबार काचार्य वल्लभाचार्य ये लोग मूर्ख नहीं थे तुम्हारी जो

310
00:24:20,520 --> 00:24:24,560
गुरु परंपरा र तुम्हारे जो पुरखे रहे सारे मूर्ख रहे होंगे जैसा कि दिखता भी है प्रमाण के

311
00:24:24,560 --> 00:24:28,640
अनुसार हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे भैया ये मैं

312
00:24:28,640 --> 00:24:33,000
ब बहुत ही क्लियर तरीके से कहना चाहता हूं कि ये जो ये जो आप लोगों का सिद्धांत

313
00:24:33,000 --> 00:24:37,400
है ना ये आप ही लोगों को को जो है मुबारक को

314
00:24:37,400 --> 00:24:41,680
हमारे पहले भगवत गीता को मानने की बात करेंगे मगर फिर

315
00:24:41,680 --> 00:24:45,720
जब बताया जाएगा कि देखो उसमें कहा जा रहा है कि पूर्वजों द्वारा परंपरा से जो किया जा

316
00:24:45,720 --> 00:24:50,120
रहा है वही धर्म है हम तो कहेंगे हम नहीं मानते

317
00:24:50,120 --> 00:24:54,320
हमको दर्शी मनवाने के लिए हमको कभी कबीर जो है नहीं गीता

318
00:24:54,320 --> 00:24:59,200
में उसको भगवान मनवाने के लिए हमको गीता दिखाएंगे

319
00:24:59,200 --> 00:25:03,400
फिर हम जब गीता सेही उनका तोड़ बताएंगे तो वो कहेंगे ये तो काल ने कहा है

320
00:25:03,400 --> 00:25:07,560
और फिर पूछेंगे काल ने कहा है वो सिद्ध करो तो वो पता नहीं मैं फिर आऊंगा

321
00:25:07,560 --> 00:25:11,640
अ भाई हा कबीर सागर से लाइन दिखाएंगे कि चार भुजा की चार भुजा

322
00:25:11,640 --> 00:25:13,840
की भक्ति में भूल पड़ संसार

323
00:25:13,840 --> 00:25:17,840
हम कह रहे लाइन ही प्रमाणिक है चारज की भक्ति जिसने लिखने वाला होगा मूर्ख होगा

324
00:25:17,840 --> 00:25:21,880
मैं कहता हूं जाओ अगर विष्णु की भक्ति में करने वाले हम लोग मूर्ख है

325
00:25:21,880 --> 00:25:26,040
तो तुम लोग कैसे प्रमाणिक हमारी दृष्टि में लिखने वाला ग्रंथी मूर्ख मूर्खों का लिखा

326
00:25:26,040 --> 00:25:30,080
हुआ है जाओ भाई देखिए कुल मिलाकर बात आ जाती है आप अपने

327
00:25:30,080 --> 00:25:34,720
मन गणन ग्रंथों के आधार पर किसी को भी कुछ भी मानो कुछ भी मानो

328
00:25:34,720 --> 00:25:38,960
हां वो बात की बात है कि वो तुम्हारा जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान सिद्ध

329
00:25:38,960 --> 00:25:43,920
नहीं होगा बाद की बात है हा मगर आप वेद के आधार

330
00:25:43,920 --> 00:25:48,000
पर पुराण के आधार पर गीता के आधार पर ये नहीं कह सकते कि नहीं

331
00:25:48,000 --> 00:25:52,280
नहीं ऐसा है वैसा है है ना अरे हम तुम्हारे

332
00:25:52,280 --> 00:25:56,480
तुम अपने पुरखों को मानो ना मूर्ख भैया हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे ये लोग

333
00:25:56,480 --> 00:26:00,480
मोरे भाई है समाजी लोग उन लोगों का भी यही है उनकी नजर में भी

334
00:26:00,480 --> 00:26:04,680
सारे जो पूर्वा आचार्य थे आप स्तम ऋषि वाला सब नगण्य है वो सब मिथ्या वादी

335
00:26:04,680 --> 00:26:08,760
थे आप स्तम मिथ्या वादी थे कात्यान मिथ्या वादी थे बौधायन मिथ्या

336
00:26:08,760 --> 00:26:13,000
वादी थे जमनी मिथ्या वादी थे बस 20वीं शताब्दी में एक महर्षि

337
00:26:13,000 --> 00:26:17,480
आए बस वही सत्यवादी थे बाकी पिछले जितने आचार्य हुए रामानुज शंकर मध निंबार्क

338
00:26:17,480 --> 00:26:22,040
वल्लभ बलदेव विद्या भूषण सब मिथ्या वादी थे ये लोग य

339
00:26:22,040 --> 00:26:26,280
19वी दो इतने बड़े महापुरुषों ने अवतार लिया है धर्म की रक्षा के लिए

340
00:26:26,280 --> 00:26:29,240
बस यही लोग सत्यवादी है बा

341
00:26:29,240 --> 00:26:33,520
सारे हमारे जो आचार्य थे वो सब मिथ्या वादी थे अरे कहने में तुम लोग को लज्जा आनी चाहिए

342
00:26:33,520 --> 00:26:37,760
भाई जैसे कोई बालक अपने पिता से कल को बोले कि पिताजी आपको संतान

343
00:26:37,760 --> 00:26:41,760
उत्पत्ति करना नहीं आता आइए हम आपको सिखाए ऐसे तुम अपने ऐसे

344
00:26:41,760 --> 00:26:46,040
तुम अपने जो पूर्वा चार्य को हमारे पूर्वा चार्य को तो अपने पुरखों को मूर्ख मानते हो हमारे पुरखे

345
00:26:46,040 --> 00:26:50,160
मूर्ख नहीं थे भैया हमारे

346
00:26:50,160 --> 00:26:54,200
नहीं ये देखिए ये जो है ना यह अब

347
00:26:54,200 --> 00:26:58,480
यह लोग धर्म को नहीं बचा रहे हैं हा ये लोग

348
00:26:58,480 --> 00:27:02,600
को नहीं बचा रहे यह लोग केवल अपने उसको बचा रहे हैं कि हमने जिसको पकड़ लिया

349
00:27:02,600 --> 00:27:06,760
है अहंकार को बचा रहे हैं अपने लज्जा आ रही है ना छोड़े

350
00:27:06,760 --> 00:27:10,800
कैसे इतने साल तक हम बेवकूफ बनते रहे अब छोड़ देंगे तो हमारे समाज में

351
00:27:10,800 --> 00:27:14,920
हमारी हमारी हमारी बेज्जती होगी तुम तो बेवकूफ बने रहे

352
00:27:14,920 --> 00:27:18,920
व लड़का सा शिवा लोग थे उनके कहने में आ तुम छोड़ गए फिर तो हमारी

353
00:27:18,920 --> 00:27:22,960
बेजती हो जाएगी ना इ गधे रहे तब जिसम पड़े हुए उसी को जबरदस्ती

354
00:27:22,960 --> 00:27:28,960
सही सिद्ध करो कैसे भी करके हा

355
00:27:29,400 --> 00:27:33,680
किसीने निष्ठा पूर्वक अपनी माता का दूध पिया हो तो शास्त्र

356
00:27:33,680 --> 00:27:38,440
के द्वारा सिद्ध कर दे उनके मत को करके

357
00:27:38,440 --> 00:27:42,680
दिखाओ कहते हैं कुछ समाजी कहते हैं कि भाई तुम्हारे यहां भी तो विरोधाभास

358
00:27:42,680 --> 00:27:47,080
है अरे भाई तो हमारे यहां विरोधा भास है तो हम कहा लड़ रहे हैं आपस में कि तुम विशिष्ट

359
00:27:47,080 --> 00:27:51,080
द्वत को मानते होत को मानते हैं आओ आपस में लड़ तुम्हारा खंडन करें तुम्हारा

360
00:27:51,080 --> 00:27:55,400
मंडन [संगीत] करें

361
00:27:55,400 --> 00:28:01,400
नहीं है वो सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति

362
00:28:02,080 --> 00:28:06,240
और मैं तो कहता हूं अगर आर्य समाज जो है वर्णाश्रम धर्म और य

363
00:28:06,240 --> 00:28:10,440
जो यज्ञ पवित इत्यादि का जो धर्म आचरण है उसमें जो इसने विकृति डाली

364
00:28:10,440 --> 00:28:14,440
है इसको छोड़ दे तो ब्रह्म को लेकर के य भी सर्वाइव

365
00:28:14,440 --> 00:28:18,440
कर सकते हैं शंकराचार्य के मन के अंडर में यह

366
00:28:18,440 --> 00:28:22,680
भी सरवाइव कर सकते हैं है ना अरे शंकराचार्य से

367
00:28:22,680 --> 00:28:27,200
तो नाम तक मिला है भैया य दयान स्वती नाम कहां से मिला है

368
00:28:27,200 --> 00:28:31,280
शंकराचार्य से मिला है शंका के संप्रदाय में सन्यास लिया है आपने

369
00:28:31,280 --> 00:28:35,360
पूर्णानंद सरस्वती से परमानंद सरती का नाम था उनका नाम था परमानंद

370
00:28:35,360 --> 00:28:39,800
सरस्वती सुन लो भैया आ समा जीयों परमानंद सरस्वती जो शंकराचार्य

371
00:28:39,800 --> 00:28:43,960
संप्रदाय के सन्यासी थे उनसे इनको नाम तक मिला है और

372
00:28:43,960 --> 00:28:44,480
इनका पहले

373
00:28:44,480 --> 00:28:48,480
उससे नाम था शुद्ध चैतन्य वो भी शकर के संप्रदाय के सन्यासी के द्वारा ही इनको

374
00:28:48,480 --> 00:28:52,680
ब्रह्मचर्य की दीक्षा भी मिली थी ठीक है कहां से लाओगे ज्ञान

375
00:28:52,680 --> 00:28:56,680
कहां से लाओगे ज्ञान भैया हमारे यहां से ही लेना पड़ेगा हमारे यहां ही आना

376
00:28:56,680 --> 00:29:00,720
पड़ेगा कोई तु पास कोई सोर्स नहीं है और कुछ निर्लज

377
00:29:00,720 --> 00:29:05,320
आजकल ऐसा कहते हैं कि हमको डायरेक्ट भगवान से ज्ञान मिल गया अच्छा

378
00:29:05,320 --> 00:29:09,920
तो तुमको एक और एक और प्रमाण मिल गया

379
00:29:09,920 --> 00:29:14,840
अविनाशी इनको अविनाशी शब्द चाहिए ना भगवान शिव के लिए

380
00:29:14,840 --> 00:29:19,160
ये देखिए उसके बाद उन्होंने

381
00:29:19,160 --> 00:29:23,240
अपने अविनाशी स्वरूप का दर्शन

382
00:29:23,240 --> 00:29:27,360
किया दिख रहा है अविनाशी स्वरूप का दर्शन किया ये

383
00:29:27,360 --> 00:29:31,440
शिवजी का हो गया और ऐसे ही

384
00:29:31,440 --> 00:29:35,600
मैं रेफरेंसेस बोल दूं बहुत सारे हैं हमारे पास

385
00:29:35,600 --> 00:29:39,680
रेफरेंसेस बोल दूं बीच-बीच में दिखाता रहूंगा अभी हम लोग चर्चा कर लेते हैं आगे

386
00:29:39,680 --> 00:29:44,080
जिससे कि बीच-बीच में एक रस आता रहेगा अभी हमने

387
00:29:44,080 --> 00:29:48,400
शिवजी का अविनाशी तत्व बताया है शास्त्रों से

388
00:29:48,400 --> 00:29:52,400
और अब हम जो है आगे बीच-बीच में विष्णु भगवान का ब्रह्मा जी

389
00:29:52,400 --> 00:29:56,680
का भी बताएंगे गणेश जी का भी बताएंगे माता का भी बताएंगे है

390
00:29:56,680 --> 00:30:00,000
ना सबका बताएंगे आज की चर्चा में और

391
00:30:00,000 --> 00:30:04,280
परम पुरुष पुरुषोत्तम कौन है यह भी बताएंगे और

392
00:30:04,280 --> 00:30:08,480
स शरीर कौन जाता है यहां से आप तो कबीर का स शरीर जाना नहीं दिखा पाओगे

393
00:30:08,480 --> 00:30:12,680
हमें शास्त्रों से हम दिखाएंगे स शरीर कौन जाता है ठीक है ना

394
00:30:12,680 --> 00:30:17,320
श्री कृष्ण भैया श्री कृष्ण का दिखा दीजिए ना भागवत से ज भगवान का ज

395
00:30:17,320 --> 00:30:21,480
लीला दिखाए वही दिखाएंगे वही दिखाएंगे वही है

396
00:30:21,480 --> 00:30:25,480
वही है भगवान लिखा हुआ है कि भगवान

397
00:30:25,480 --> 00:30:29,760
ने अपने शरीर को जलाया नहीं है स योयो के ध्यान का विषय

398
00:30:29,760 --> 00:30:34,040
है स्पष्ट लिखा है स्पष्ट लिखा है तो भाई हमारे

399
00:30:34,040 --> 00:30:38,720
बीच में आए हैं जय श्री राम

400
00:30:38,720 --> 00:30:42,760
ज श्रम बताइए भाई साब आपका

401
00:30:42,760 --> 00:30:46,760
परिचय आप तो पहले शायद आके एक बार हां जी जीी एक बार

402
00:30:46,760 --> 00:30:50,880
आ चुका हूं जी बताइए जी मेरा मानना यह

403
00:30:50,880 --> 00:30:55,680
है कि एक्चुअली हम हिंदुओं की भी कुछ गलती

404
00:30:55,680 --> 00:31:00,160
है जब कुछ मंत मत पंथ संप्रदाय

405
00:31:00,160 --> 00:31:04,240
पनपने लगते हैं जो ज्यादा जरूरी नहीं

406
00:31:04,240 --> 00:31:08,280
है उनको हम ही खुद पोषण करते हैं जब वो बहुत

407
00:31:08,280 --> 00:31:12,280
ज्यादा पोषित हो जाते हैं तो फिर उनकी ताकत इतनी बढ़ जाती

408
00:31:12,280 --> 00:31:15,400
है कि उसको जड़ से मिटाना बड़ा मुश्किल हो जाता है

409
00:31:15,400 --> 00:31:19,560
हम क्या करते हैं उसकी डालो को काटते हैं पत्तो काते एक पत्ता तोड़ते हैं चार पत्ते और रुक

410
00:31:19,560 --> 00:31:24,240
जाते हैं हम उसे जड़ से उखाड़ने की कोशिश नहीं करते हैं

411
00:31:24,240 --> 00:31:28,640
ये ब्रह्म की व्याख्या ही बड़ी गलत करते हैं ब्रम अर्थात जो ब्रह्मांड

412
00:31:28,640 --> 00:31:33,160
पूरा परिपूर्ण ब्रह्म से है इसलिए तो ब्रह्मांड बोला जाता है

413
00:31:33,160 --> 00:31:37,240
सारा संसार ही परमात्मा से परिपूर्ण है अब

414
00:31:37,240 --> 00:31:41,680
ये क्या कहते हैं कि एक बात कही ना भाई साहब

415
00:31:41,680 --> 00:31:46,120
ये हिंदुओं की ही गलती है जो संप्रदाय में वो हो जाता है विकृतियां आ जाती है

416
00:31:46,120 --> 00:31:50,720
विकृति आती इस आप बिल्कुल सही कह रहे हैं इसका कारण क्या है

417
00:31:50,720 --> 00:31:54,800
कि होता क्या है कि जैसे हमारे यहां पहले कुल गुरु हुआ करते

418
00:31:54,800 --> 00:31:58,840
थे कुल देवता हुआ करते थे आज के टाइम हमारे घरों में ये सब

419
00:31:58,840 --> 00:32:03,000
कुछ मालूम ही नहीं है हमारे कुल गुरु कौन है कुल देवता कौन है ये सब कुछ आज

420
00:32:03,000 --> 00:32:07,240
के टाइम में नहीं मालूम बहुत कम लोगों को मालूम तो होता क्या है कि

421
00:32:07,240 --> 00:32:11,720
शास्त्र कहते हैं कि भाई भगवान की

422
00:32:11,720 --> 00:32:15,840
बारे में जो अध्ययन करना है वह गुरुओं की शरण में जाकर करो

423
00:32:15,840 --> 00:32:20,440
तो पहली बात तो कुछ लोग गुरु से गुरु की शरण में नहीं जाते हैं

424
00:32:20,440 --> 00:32:24,480
फिर जाते हैं तो वो फिर अप प्रमाणिक गुरु की शरण

425
00:32:24,480 --> 00:32:28,760
में चले जाते हैं तो एक एक क्रम है पांच पॉइंट्स

426
00:32:28,760 --> 00:32:30,920
में अगर बताना चाहूं

427
00:32:30,920 --> 00:32:35,200
कि सबसे पहली बात तो सनातन समाज की जो मुख्य

428
00:32:35,200 --> 00:32:39,320
समस्या है वह है सार्वभौम सिद्धांतों

429
00:32:39,320 --> 00:32:41,760
से

430
00:32:41,760 --> 00:32:46,080
अनभिज्ञता सनातन समाज एक नहीं है

431
00:32:46,080 --> 00:32:50,120
और जबकि शास्त्र कहते हैं एक रहो ऋग्वेद

432
00:32:50,120 --> 00:32:54,360
में आया एक रहने के लिए दव मंडल में अब

433
00:32:54,360 --> 00:32:58,400
एक क्यों नहीं है वेद कहते हैं कि एक होकर भगवान

434
00:32:58,400 --> 00:33:02,640
की पूजा अर्चना करो एक मत से रहो संगठित हो कर के रहो

435
00:33:02,640 --> 00:33:06,720
बिल्कुल तो एक क्यों नहीं है क्योंकि सार्वभौम सिद्धांतों का अभाव है

436
00:33:06,720 --> 00:33:10,920
समाज में व्यक्ति को मालूम नहीं है कि भगवान

437
00:33:10,920 --> 00:33:15,120
निराकार है कि साकार है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश

438
00:33:15,120 --> 00:33:19,800
कौन सा उनका विग्रह है या पांचों एक ही परम तत्व के रूप है

439
00:33:19,800 --> 00:33:23,920
या फिर मास खाना है कि नहीं खाना है इस यही नहीं मालूम है मांस खाना पाप

440
00:33:23,920 --> 00:33:28,040
है कि निम्न है कि अमुक अमुक विधि का आलंबन लेते हुए अमुक

441
00:33:28,040 --> 00:33:32,680
अमुक व्यवस्था पढ़ने पर ही खाना है यह सब संशय है

442
00:33:32,680 --> 00:33:36,840
इवन यहां तक की भी संशय है कि मैं आपको बताऊं अगर मैं यह

443
00:33:36,840 --> 00:33:41,040
कह दूं आज के समय कि भाई सनातन धर्म

444
00:33:41,040 --> 00:33:45,440
में चचेरी ममेरी फुफेरी जो बहने हैं उनसे विवाह

445
00:33:45,440 --> 00:33:46,640
अमान्य

446
00:33:46,640 --> 00:33:50,800
है फिर भी आपको कुछ परंपराएं कुछ कुल परंपरा ऐसी मिल जाएगी

447
00:33:50,800 --> 00:33:55,720
ज बुआ और मामा में और इस तरह से विवाह हो रहे होंगे

448
00:33:55,720 --> 00:33:59,720
है ना और वो भी अपने आप को हिंदू भी कह रहे होंगे

449
00:33:59,720 --> 00:34:03,760
बिल्कुल बकल तो ये जो क्या कहते हैं यह जो

450
00:34:03,760 --> 00:34:08,640
एकता नहीं है ना वैचारिक एकता अब हम उनको जाकर बताए कि मनुस्मृति में लिखा है

451
00:34:08,640 --> 00:34:13,200
वो कहेंगे मनुस्मृति है क्या भला वैचारिक

452
00:34:13,200 --> 00:34:17,640
अविज्ञता हम लोगों के बीच में बटवारा अब वैचारिक

453
00:34:17,640 --> 00:34:22,000
अविज्ञता है मनुस्मृति मालूम ही नहीं राम ने मनुस्मृति को संविधान

454
00:34:22,000 --> 00:34:26,000
माना और यह तथाकथित जो स्वघोषित आचार्य ये कहते हैं कि

455
00:34:26,000 --> 00:34:30,560
मुझे पता नहीं है किसी ने मनुस्मृति को संविधान माना हो अपना

456
00:34:30,560 --> 00:34:34,760
राम ने जिसको संविधान माना उसके बारे में इनको नहीं पता

457
00:34:34,760 --> 00:34:38,880
आचार बने घ बड़ संविधान मनुस्मृति है हां और आचार्य

458
00:34:38,880 --> 00:34:42,920
बने घूम रहे हैं अब वो जो बताएंगे लोगों को भाई मुझे नहीं लगता किसी

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00:34:42,920 --> 00:34:47,040
ने संविधान माना तो आजकल के युवाओं ने तो वो पढ़ा नहीं है बिल्कुल

460
00:34:47,040 --> 00:34:51,200
रामायण को इसमें राम जी मनुस्मृति का श्लोक उत कर रहे हैं एज

461
00:34:51,200 --> 00:34:55,960
इट इज जैसे मनुस्मृति में आए हैं वैसे के वैसे ही शलोक कुदरत

462
00:34:55,960 --> 00:35:00,040
किए तो अब लोगों को मालूम ही नहीं है कि भाई मनुस्मृति

463
00:35:00,040 --> 00:35:01,760
में यह लिखा है अच्छा आज मैं वैश्य

464
00:35:01,760 --> 00:35:05,800
से कहूं कोई जो वैश्य कुल में जन्म लेने वाला है उससे मैं कहूं आपके

465
00:35:05,800 --> 00:35:09,840
घर के जो बालक हो उनका 16 से 22 वर्ष की आयु के बीच

466
00:35:09,840 --> 00:35:13,880
में जन करा देना मनुस्मृति में लिखा है वह क्या कहता है

467
00:35:13,880 --> 00:35:17,920
हमारे य होता ही नहीं है क्षत्रिय कहता है हमारे य शादी

468
00:35:17,920 --> 00:35:21,960
में होता है ब्राह्मण कहता है हमारे

469
00:35:21,960 --> 00:35:26,120
यहां शादी में होता है यह सब क्या है

470
00:35:26,120 --> 00:35:30,760
यह विकृति अपने शास्त्र को य क्या है धर्म और अधर्म को लेकर के

471
00:35:30,760 --> 00:35:35,360
जो सार्वभौम सिद्धांत है व पता ही नहीं दूसरा पॉइंट है सार्वभौम

472
00:35:35,360 --> 00:35:39,760
सिद्धांतों का अभाव ही संशय है जिसको भगवत गीता 44

473
00:35:39,760 --> 00:35:43,920
में भगवान ने कहा संचय आत्मा विन जिस व्यक्ति

474
00:35:43,920 --> 00:35:48,120
के मन में अपने विशेषता धर्म और ईश्वर को लेकर

475
00:35:48,120 --> 00:35:52,240
के संशय होगा वो ना तो इस जीवन में सुखी है और ना ही परलोक में

476
00:35:52,240 --> 00:35:56,440
सुखी है तो हमारा जो समाज है पहला क्या है व्यावहारिक

477
00:35:56,440 --> 00:36:00,760
अनेकता और दूसरा क्या है संचय अनेकता

478
00:36:00,760 --> 00:36:04,760
क्यों है क्योंकि संचय संचय क्यों है क्योंकि गुरु तत्व

479
00:36:04,760 --> 00:36:08,840
से अविज्ञता है यह नहीं मालूम है कि हमको गुरु आवश्यक है यह

480
00:36:08,840 --> 00:36:12,920
नहीं मालूम है और जिनको मालूम है उनको यह नहीं मालूम है कि

481
00:36:12,920 --> 00:36:16,880
गुरु कौन कौन होना चाहिए वो फिर तत्वदर्शी को भी

482
00:36:16,880 --> 00:36:20,920
य तथा जेल धाम में बैठे हु को भी गुरु बना लेंगे

483
00:36:20,920 --> 00:36:25,000
वो बाहर से आए हुए जो अतिक्रमण कारी रहे पुराने

484
00:36:25,000 --> 00:36:29,280
समय में मले उनको भी गुरु बना लेंगे

485
00:36:29,280 --> 00:36:33,360
आज मैंने एक फोटो देखी इा पर उसमें जो

486
00:36:33,360 --> 00:36:37,440
है एक विदेशी मूल का व्यक्ति हाथ

487
00:36:37,440 --> 00:36:41,680
में जो है जाप जाप जप माला लिए सिंहासन पर बैठा है

488
00:36:41,680 --> 00:36:45,800
और पीछे तथाकथित गुरु परंपरा दिखाई गई है और नीचे कौन बैठे

489
00:36:45,800 --> 00:36:49,920
हैं ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि अब यह

490
00:36:49,920 --> 00:36:55,040
क्या है व्यक्ति ने उनको गुरु बना लिया जिनको

491
00:36:55,040 --> 00:36:59,680
कभी उस रूप में स्वीकार नहीं किया और गुरु बनाया तो बनाया

492
00:36:59,680 --> 00:37:03,800
अपने ब्रह्मा विष्णु महेश जो परमेश्वर के रूप है उनको भी दिखा रहा है

493
00:37:03,800 --> 00:37:08,640
चे बड बन गया छोटा दिखाओ और अपने गुरु को बड़ा दिखा दो

494
00:37:08,640 --> 00:37:12,640
हा अभी मैंने राम मि वालो की राम कृ मिशन वालो

495
00:37:12,640 --> 00:37:16,640
का एक फोटो देखा उसमें जो है मां

496
00:37:16,640 --> 00:37:20,640
काली नीचे बैठी है जो पूरे ब्रह्मांड की सबकी नियंता है सृष्ट

497
00:37:20,640 --> 00:37:25,240
की ऊपर जो है वो बैठे

498
00:37:25,240 --> 00:37:29,520
हैं वो ऊपर बैठे हैं और वो उनके जो है नीचे बैठी

499
00:37:29,520 --> 00:37:34,160
है एक साइड कोई आचार्य है दूसरी साइड वो है पादरी

500
00:37:34,160 --> 00:37:38,600
ये है फोटो जब हम ऐसे फोटोस का प्रचार प्रसार

501
00:37:38,600 --> 00:37:43,440
करेंगे आने वाले टाइम में वोह फोटोस प्रमाण के रूप में उपयोग होने लगेंगी जैसे

502
00:37:43,440 --> 00:37:47,560
आज जो स्त्रियों का जनेऊ करवाने के लिए कहते हैं वो कहते हैं देखो देखो

503
00:37:47,560 --> 00:37:52,440
वहां पर एक मूर्ति उसमें जनेऊ है तो क्या हुआ

504
00:37:52,440 --> 00:37:56,600
हो सकता है नेपाल में एक आभूषण ऐसा आता है जो जने की तरह

505
00:37:56,600 --> 00:38:01,480
से पहना जाता है वो सिद्ध तो नहीं हो रहा जन फिर किस परंपरा में

506
00:38:01,480 --> 00:38:05,480
आचार्य ने जन स्वीकार किया है है ना

507
00:38:05,480 --> 00:38:10,040
स्त्रियों का नहीं स्वीकार किया तो अब जैसे य फोटो है यह प्रचलित हो रही

508
00:38:10,040 --> 00:38:14,200
है तो यह है क्रम सबसे पहले

509
00:38:14,200 --> 00:38:18,320
व्यवहारिक अनेकता उसके बाद दूसरा

510
00:38:18,320 --> 00:38:22,480
वैचारिक अनेकता और इसका कारण यह देखिए वो फोटो है

511
00:38:22,480 --> 00:38:26,600
देखिए ये वो फोटो है ये ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि देखिए साइड

512
00:38:26,600 --> 00:38:29,720
में बैठे हुए बड़ा करिए

513
00:38:29,720 --> 00:38:33,760
थोड़ा और यह किस तंत्र के द्वारा प्रचारित की जा रही है आप

514
00:38:33,760 --> 00:38:37,840
देख सकते हैं आने वाले टाइम में यह भी भगवान

515
00:38:37,840 --> 00:38:40,800
हो जाएंगे बिल्कुल यह

516
00:38:40,800 --> 00:38:45,000
शिव जी बैठे हैं साइड में देखिए हाथ जोड़े

517
00:38:45,000 --> 00:38:49,200
है ना अच्छा ये हो सकता है कि ऑफिली

518
00:38:49,200 --> 00:38:53,240
यह हो सकता है कि ऑफिली यह जो फोटो है वो स्कोन ने

519
00:38:53,240 --> 00:38:57,440
ना बनाई हो यह भी हो सकता है ऑफिशियल उन्होंने ना बनाई हो

520
00:38:57,440 --> 00:39:01,640
मगर अगर अनऑफिशियली उनके किसी फॉलोअर ने भी बनाई है

521
00:39:01,640 --> 00:39:05,680
तो यह खतरे की घंटी नहीं है कि उनके दिमाग में क्या भरा जा रहा है

522
00:39:05,680 --> 00:39:09,720
जो यह नौबत आ गई देखिए मैं इसका एक कारण

523
00:39:09,720 --> 00:39:13,840
बताता हूं आपको मैं मैं बस पूरा कर लू क्रम क्रम मेरा टूट

524
00:39:13,840 --> 00:39:18,960
जाएगा नहीं तो वैचारिक व्यावहारिक अनेकता

525
00:39:18,960 --> 00:39:23,680
उसके बाद वैचारिक अनेकता उसके बाद गुरु तत्व से अविज्ञता

526
00:39:23,680 --> 00:39:28,600
उसके बाद प्रामाणिक आचार्य के नियमों का ना मालूम

527
00:39:28,600 --> 00:39:33,400
होना प्रामाणिक आचार्य किसको बनाए यह मालूम ही नहीं

528
00:39:33,400 --> 00:39:37,480
है तो किसी को भी आचार्य बना लेते हैं किसी को भी गुरु बना लेते

529
00:39:37,480 --> 00:39:41,640
हैं उसमें फिर फस जाते हैं वह गलत गुरु निकलता है कभी-कभी वहां

530
00:39:41,640 --> 00:39:45,640
पर गुरु नाम जो है वो उसका अपमान

531
00:39:45,640 --> 00:39:49,680
हो जाता है गुरु शब्द का ही वहां पर तिरस्कार हो जाता है ऐसे ऐसे गुरु

532
00:39:49,680 --> 00:39:53,840
निकल आते हैं अब जैसे जब तत्वदर्शी य तथाकथित गए

533
00:39:53,840 --> 00:39:55,800
होंगे जहां पर इस समय है जेल

534
00:39:55,800 --> 00:40:00,120
धाम में तो क्या के हयो पर आघात नहीं पहुचा होगा

535
00:40:00,120 --> 00:40:04,840
अब कुछ लोग उस बोझ को ढो रहे हैं कुछ लोगों ने छोड़ा भी

536
00:40:04,840 --> 00:40:09,640
होगा तो यह क्रम है वैचारिक व्यावहारिक अनेकता

537
00:40:09,640 --> 00:40:15,120
वैचारिक अनेकता गुरु तत्व से अविज्ञता फिर प्रामाणिक गुरु से

538
00:40:15,120 --> 00:40:19,200
अविज्ञता यह चार चीजें जब तक हमने प्रामाणिक गुरु की व्यवस्था

539
00:40:19,200 --> 00:40:23,240
हमारे शास्त्रों ने की है अथर्ववेद 11 पा 16 मनुस्मृति 12वां

540
00:40:23,240 --> 00:40:27,440
अध्याय 112 से 114 क्या ब्रह्मचारी सन्यासी

541
00:40:27,440 --> 00:40:31,560
वैराग्य वैराग्य वैराग्य कितनी बार आ रहा भगवत गीता में कि संसार

542
00:40:31,560 --> 00:40:36,000
रूपी वृक्ष को वही काट सकता है जो वैराग्य हो उसके पास वैराग्य

543
00:40:36,000 --> 00:40:40,200
अंततोगत्वा जो अंतिम निर्णायक है आपका वह वैराग्य वाला होना

544
00:40:40,200 --> 00:40:44,360
चाहिए सन्यासी होना चाहिए दूसरा परंपरा प्राप्त होना

545
00:40:44,360 --> 00:40:48,560
चाहिए चार दो तीन 16 छंद उपनिषद मुंड उपनिषद प्रार उपनिषद

546
00:40:48,560 --> 00:40:52,880
सब में लिखा है सब लोग अपनी परंपरा बता रहे हैं मगर जो तथाकथित

547
00:40:52,880 --> 00:40:56,880
लोग जो आज आचार्य बनकर बैठ गए हैं अपने तंत्र खोलकर

548
00:40:56,880 --> 00:41:00,920
बैठ ग वो अपनी परंपरा नहीं बता रहे हमने परंपरा

549
00:41:00,920 --> 00:41:04,960
पर प्रश्न किया आर्य समाज वालों से

550
00:41:04,960 --> 00:41:09,360
तो हमारे व्यक्तिगत हो गए यह हो गए वो हो गए ठीक है आज तक उन्होंने परंपरा

551
00:41:09,360 --> 00:41:11,000
नहीं बताई कैसे वेद

552
00:41:11,000 --> 00:41:14,480
मंत्र आए आप तक नहीं बता

553
00:41:14,480 --> 00:41:18,680
पाए और उनके कई आचार्यों ने कई जगह पर परंपरा

554
00:41:18,680 --> 00:41:23,440
से वेदों को सुरक्षित होना माना है कैसे इंकार करोगे

555
00:41:23,440 --> 00:41:27,640
उनके जो खुद के कोई कई विद्वान है उन्होंने माना है तो

556
00:41:27,640 --> 00:41:32,040
से होना चाहिए चौथा जो हमारे जितने भी

557
00:41:32,040 --> 00:41:36,520
प्रामाणिक ग्रंथ स्वीकार किए गए उसमें शति स्मति शास्त्रों में सामंजस

558
00:41:36,520 --> 00:41:40,840
की शिक्षा देने वाला होना चाहिए ऐसा नहीं कि ये शिव पुराण

559
00:41:40,840 --> 00:41:44,880
मत मानो और फलाना पुराण मानो ऐसा नहीं उसके तथ्यों को हम

560
00:41:44,880 --> 00:41:48,960
नकार नहीं सकते किसी भी तथ्य का खंडन ना हो जाए शिव

561
00:41:48,960 --> 00:41:53,280
पुराण भी मानना है विष्णु भी मानना है ऐसा तथ्य निकालो जिसमें दोनों की बात रह जाए

562
00:41:53,280 --> 00:41:58,760
किसी की बात कट ना जाए और पांचवा क्या

563
00:41:58,760 --> 00:42:03,240
गुरु वही जो आपका अंधकार दूर कर दे ईश्वर को सर्वशक्तिमान

564
00:42:03,240 --> 00:42:07,480
सिद्ध कर दे मोक्ष को परम स्वतंत्र सिद्ध कर दे धर्म को शाश्वत सिद्ध

565
00:42:07,480 --> 00:42:11,560
कर दे बस वो आपका गुरु अब इनसे मैंने कितनी बार पूछ

566
00:42:11,560 --> 00:42:15,640
लिया कि आपका जो कबीर अगर सर्वशक्तिमान है तो अपना दे बदल

567
00:42:15,640 --> 00:42:19,760
सकता है कि नहीं बदल सकता तो नहीं

568
00:42:19,760 --> 00:42:23,800
खड़े हो जाते हैं हा क्या है इनके द्वारा मिलने वाला जो

569
00:42:23,800 --> 00:42:26,160
ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है ही नहीं

570
00:42:26,160 --> 00:42:30,400
मनुष्य को चाहिए मुक्ति प्रत्येक नियम से मुक्ति

571
00:42:30,400 --> 00:42:34,440
चाहिए उसे तो जो ईश्वर खुद

572
00:42:34,440 --> 00:42:38,280
नियमों में है वो मुक्ति कैसे

573
00:42:38,280 --> 00:42:42,400
देगा ये था जी बोलिए जी मैं ये कह रहा

574
00:42:42,400 --> 00:42:46,600
था कि उदाहरण के लिए आप आर्य समाज ही ले लो

575
00:42:46,600 --> 00:42:50,840
हम जो आर्य समाज की स्थापना हुई थी वो अंग्रेजों से मिलकर की थी

576
00:42:50,840 --> 00:42:55,800
अपने दयानंद जी ने जिनका मूल नाम ही था मूल शंकर तिवारी

577
00:42:55,800 --> 00:43:00,080
थियोसोफिकल सोसाइटी को लेकर के हम प्रामाणिक नहीं है मगर हा उनकी

578
00:43:00,080 --> 00:43:05,160
कई जगह पर ऐसी बात है है

579
00:43:05,160 --> 00:43:09,320
योसो फिकल सोसाइटी य 70 देशों में आज भी है अलग अलग

580
00:43:09,320 --> 00:43:13,800
नामों से िकल सोसाइटी ऑफ आर्य समाज

581
00:43:13,800 --> 00:43:17,840
के नाम से आरंभिक काल में चालू हुई थी 187 के

582
00:43:17,840 --> 00:43:22,120
आसपास बाद में दयानंद जी उनसे अलग हो गए थे

583
00:43:22,120 --> 00:43:26,640
उनके विचारधारा थोड़ी मैच नहीं कर रही थी तो थोड़ा अलग हो गए थे आप

584
00:43:26,640 --> 00:43:31,160
ये बताइए अंग्रेजों के ब्रिटिश राज था जब ब्रिटिश ब्रिटिशर राज करते थे

585
00:43:31,160 --> 00:43:35,400
वो क्या एक हिंदू अलग से ऐसा संगठन तैयार कर सकते हैं

586
00:43:35,400 --> 00:43:39,520
उनको फंडिंग क से होती होगी सीधी सी बात है उनको फंड करने वाले

587
00:43:39,520 --> 00:43:41,280
दयानंद जी हिंदुओ के मोहम्मद बनना

588
00:43:41,280 --> 00:43:45,440
चाहते थे वो चाहते थे एक ही हमारी किताब हो उन्होने

589
00:43:45,440 --> 00:43:49,760
वेदों को चुन लिया वो भी अपने लिखे हुए वेदों

590
00:43:49,760 --> 00:43:53,760
को चुन लिया एक ही पुस्तक हो एक ही आदमी हो नबी की तरह

591
00:43:53,760 --> 00:43:58,120
जैसे खुद को चन लिया उन्होंने म ब्रा

592
00:43:58,120 --> 00:44:02,240
उनका सारा वो था अब जो भी जितने भी मत पंथ समुदाय चल रहे

593
00:44:02,240 --> 00:44:05,880
तो गंग गरो की तरह जो बिल्कुल

594
00:44:05,880 --> 00:44:09,880
अब्र की तरह काम करते हैं अब्र एक परमात्मा होता

595
00:44:09,880 --> 00:44:14,000
है जिसका नाक मुह आ मु कुछ नहीं होता

596
00:44:14,000 --> 00:44:18,080
है कोई हाथ पैर नहीं होते हैं दिखता नहीं है सुनता नहीं है बोलता नहीं है जन

597
00:44:18,080 --> 00:44:22,280
नहीं लेता अवतार नहीं लेता व मर नहीं सकता ऐसे का क्या काम

598
00:44:22,280 --> 00:44:27,200
जो आपके धरती प आके अवतार ना ले आपसे प्रेम ना कर सके

599
00:44:27,200 --> 00:44:32,120
अधर्म का विनाश ना कर सके पापियों का नाश ना कर सके आपके साथ रह ना सके

600
00:44:32,120 --> 00:44:36,200
तो ऐसे मुझे तो नहीं लगता परमात्मा का कोई

601
00:44:36,200 --> 00:44:40,640
अंग भी हो सकता कबीर को तो ईश्वर छोड़ो मैं उनसे तो महान

602
00:44:40,640 --> 00:44:44,640
भगत सिंह और चंद्रशेखर आजादी हो जिन्ने कम से अंग्रेजों के साथ लड़ाई

603
00:44:44,640 --> 00:44:50,560
तो वो तो अपने काल के मुसलमानों से भी

604
00:44:50,560 --> 00:44:55,440
मतलब मैं संक्षिप्त में इस बात को ऐसे बोल दू कि उनके

605
00:44:55,440 --> 00:44:59,440
जो चीज है आर्य समाज की उसका एक बहुत बड़ी

606
00:44:59,440 --> 00:45:03,640
अपूर्णता का दतक है कि जो उस समाज का आचार्य

607
00:45:03,640 --> 00:45:07,680
है आचार्य कोटि का व्यक्ति कह रहा है कि मैं यहां के

608
00:45:07,680 --> 00:45:12,240
मोक्ष से संतुष्ट नहीं हूं समझ नहीं पा रहा हूं आचार्य

609
00:45:12,240 --> 00:45:16,800
कोटि का व्यक्ति उनके यहां का यह कहता है पब्लिक में जाकर के मैं

610
00:45:16,800 --> 00:45:21,160
जो मोक्ष है उससे संतुष्ट नहीं हूं तो व्यक्ति

611
00:45:21,160 --> 00:45:25,920
आपके उसका पालन क्यों करेगा फिलोसोफी का

612
00:45:25,920 --> 00:45:29,920
केवल इसलिए कि आपने अपनी जो तथाकथित चीजें हैं उनको

613
00:45:29,920 --> 00:45:34,000
जो है वेदों से जोड़ दिया है एनीहाउ य हम जो

614
00:45:34,000 --> 00:45:38,080
बता रहे वेद के अर्थ बता रहे हैं अब वेद का अर्थ है कि मोक्ष नहीं है तो

615
00:45:38,080 --> 00:45:42,120
नहीं है मानना पड़ेगा वेद का अर्थ है ईश्वर फलानी फलानी

616
00:45:42,120 --> 00:45:45,880
चीज नहीं कर सकता तो मानना

617
00:45:45,880 --> 00:45:50,080
पड़ेगा जी राम पांडे जी को जय

618
00:45:50,080 --> 00:45:54,600
श्री राम स्वागत है आपका राम पांडे जी जी बताइए अभी भी भाई मैं कह रहा हूं

619
00:45:54,600 --> 00:45:58,680
वेदों में प्रमाण है कबीर साब भगवान है आ जाना

620
00:45:58,680 --> 00:46:02,840
भैया आवाज लगा रहे हैं कोई हो तो आ जाए

621
00:46:02,840 --> 00:46:05,680
है ना

622
00:46:05,680 --> 00:46:09,960
कोई आना चाहे तो आ सकता है भैया वो अजर

623
00:46:09,960 --> 00:46:14,240
सिद्ध करें अविनाशी सिद्ध करें कबीर को शास्त्रों से हमने सिद्ध कर दिया ब्रह्मा

624
00:46:14,240 --> 00:46:18,440
विष्णु महेश को शास्त्रों से हा अविनाशी आप

625
00:46:18,440 --> 00:46:22,680
सिद्ध करिए कबीर अविनाशी है आ जाइए टक्कर

626
00:46:22,680 --> 00:46:27,120
में जी रामपाल पांडे जी जय श्री राम सभी को

627
00:46:27,120 --> 00:46:31,240
जय श्री राम मैं आज यह

628
00:46:31,240 --> 00:46:35,480
कहना चाह रहा था कि आज मैं एक न्यू चैनल देख रहा था ईटी करके इनोमिक टाइम

629
00:46:35,480 --> 00:46:39,960
से तो वहा पर एक हमारे महाराज जी है व मतलब तथा

630
00:46:39,960 --> 00:46:44,000
महाराज जी उनको बोलता हूं बहुत फेमस हुए थे कोरोना

631
00:46:44,000 --> 00:46:48,240
के टाइम उन्होने कहीं किसी मंदिर में शिव त पढ़ा था

632
00:46:48,240 --> 00:46:52,760
तो वो वीडियो बहुत वायरल हो गया था वो महाराज जी का

633
00:46:52,760 --> 00:46:57,160
इंटरव्यू चल रहा था वहा पर तो जैसे की

634
00:46:57,160 --> 00:47:01,280
एक तो हमारे अंदर में यह चीज है कि हमारा कोई जो हिंदुओं

635
00:47:01,280 --> 00:47:05,480
के जो धर्म गुरु है जो आचार्य हैं वो मतलब उनको

636
00:47:05,480 --> 00:47:09,600
कोई लीड कर हिंदू समाज को लीड करने वाला कोई नहीं है हर कोई हिंदू

637
00:47:09,600 --> 00:47:13,800
समाज को लीड करने में लगा हुआ है हर कोई हिंदू का ठेकेदार समझ

638
00:47:13,800 --> 00:47:17,840
के और कहीं भी जो मन में आता है वह बयानबाजी करने लग जाता है वो भी धर्म

639
00:47:17,840 --> 00:47:21,120
को कोट करते हुए तो एंकर

640
00:47:21,120 --> 00:47:25,120
ने कोई क्वेश्चन पूछा था कि मतलब हिंदुओ में एकता कैसे आएगी

641
00:47:25,120 --> 00:47:29,360
हिंदू कैसे होंगे हिंदू राष्ट्र कैसे बनेगा

642
00:47:29,360 --> 00:47:33,480
तोव जाति व्यवस्था के ऊपर उन्होंने

643
00:47:33,480 --> 00:47:37,760
वो किया था क्या बोलते हैं प्रहार किया था कि हिंदुओ में जाति व्यवस्था जो है

644
00:47:37,760 --> 00:47:43,160
जातिवाद सबसे बड़ा घातक है जातिवाद होना ही नहीं चा क्या

645
00:47:43,160 --> 00:47:47,400
लीला जी की बात कर रहे क्या नहीं नहीं नहीं वो

646
00:47:47,400 --> 00:47:50,480
बहुत बड़े

647
00:47:50,480 --> 00:47:54,480
लगा शिव तांडव स्त्रोत उनका एक वीडियो था वो बहुत वायरल हुआ

648
00:47:54,480 --> 00:47:59,120
था वो सा साई बाबा

649
00:47:59,120 --> 00:48:03,440
बात कर अमोग लीला जी शिव तांडव स्त पढ़ेंगे तो पश्चिम

650
00:48:03,440 --> 00:48:08,240
से नहीं उ जाएगा

651
00:48:08,240 --> 00:48:12,320
सूरज नहीं नहीं वो इतना हि दूंगा कि वो सा

652
00:48:12,320 --> 00:48:17,440
साई साई बाबा को भी वो भगवान की कैटेगरी में रखते

653
00:48:17,440 --> 00:48:21,440
हैं सदगुरु तो नहीं है नहीं नहीं सदगुरु

654
00:48:21,440 --> 00:48:25,480
सदगुरु नहीं है वो वो महाराज जी है वो

655
00:48:25,480 --> 00:48:30,480
कहते तथा जी हमारे कोई भी महाराज जी बन जा

656
00:48:30,480 --> 00:48:34,480
रहा उनको मानता हूं वो चीज है हा ठीक

657
00:48:34,480 --> 00:48:38,680
है व्याख्यान देते हैं अच्छा राष्ट्रवादी आदमी है राष्ट्र के प्रति उ मतलब

658
00:48:38,680 --> 00:48:42,800
हित रहता है उनका बट धर्म को कोट करते हुए जब कोई कुछ बोलता है तो

659
00:48:42,800 --> 00:48:47,040
मुझे बहुत बुरा लगता है क्योंकि जो देखने वाले लोग है जो देखने वाला समाज है हिंदू

660
00:48:47,040 --> 00:48:53,040
समाज वो उनको उनका तो आचार्य मानता है आए

661
00:48:53,160 --> 00:48:59,160
थे भैया कहां चले गए अभी कोई आया था

662
00:48:59,640 --> 00:49:03,960
वो है बैक स्टेज है ना

663
00:49:03,960 --> 00:49:07,960
अभी जी बोलिए राम पांडे जी तो

664
00:49:07,960 --> 00:49:12,280
मैं ये कंटिन्यू करना चाह रहा था कि जो देखने वाले लोग है

665
00:49:12,280 --> 00:49:16,280
वो तो यही समझेंगे ये हमारे धर्म के आचार्य है यह जो बातें बता

666
00:49:16,280 --> 00:49:20,280
रहे हैं धर्म के अकॉर्डिंग बता रहे हैं तो उनके अंदर तो गलत फहमी तो जाएगी

667
00:49:20,280 --> 00:49:24,440
जाएगी अब वो जातिवाद को लेकर यह बोल रहे हैं कि हिंदुओं के अंदर जातिवाद

668
00:49:24,440 --> 00:49:28,520
है जातिवाद को खत्म कर दो जाति को खत्म कर दो वर्ण व्यवस्था

669
00:49:28,520 --> 00:49:33,000
के आधार पर जिनकी जो शादिया होती है वसे कर दो शादी वगैरह शादी

670
00:49:33,000 --> 00:49:37,120
वगैरह करने में जाति व्यवस्था मत देखो कौन जाति किसी की जाति में है

671
00:49:37,120 --> 00:49:41,280
कि नहीं है तो एक उसम मेरे को बहुत अच्छा लगा कि एक अपने आप को कम्युनिस्ट बोलता

672
00:49:41,280 --> 00:49:45,400
है उनका नाम है विवेक श्रीवास्तव मैं नाम लेता हूं

673
00:49:45,400 --> 00:49:49,480
वो इवन वो महाभारत का वो श्लोक तो कोड नहीं

674
00:49:49,480 --> 00:49:54,200
किया बट जहां पर भी आता है श्री कृष्ण भगवान कहते हैं कि हे अर्जुन

675
00:49:54,200 --> 00:49:58,560
जो जाति व्यवस्था के बारे में जो भगवान श्री कृष्ण ने बोला है अर्जुन को कि अगर

676
00:49:58,560 --> 00:50:02,600
जातियों में अगर विवाह नहीं होगा तो वर्ण सकता आ जाएगी

677
00:50:02,600 --> 00:50:06,640
वर्ण सकता पैदा होगी समाज तो इस तरीके से वो कोट कर रहा है तोव

678
00:50:06,640 --> 00:50:10,920
उस बातो को घुमाने लग गए जो महाराज जी है वो

679
00:50:10,920 --> 00:50:14,720
बातों को घुमाने लग गए कि नहीं नहीं ऐसा तो नहीं है भीम ने भी पता कौन

680
00:50:14,720 --> 00:50:19,120
से हिडिंबा से शादी किया था अर्जुन ने भी नाग कन्या से शादी करी थी

681
00:50:19,120 --> 00:50:23,320
तो ऐसा कुछ होता तो य थड़ी हो रहा होता है ऐसे तो आजकल के समाज

682
00:50:23,320 --> 00:50:27,920
में यही है कि हर कोई जो बाबा है आज के टाइम प हिंदू ग्रंथों करते हुए

683
00:50:27,920 --> 00:50:30,840
और समाज में

684
00:50:30,840 --> 00:50:34,880
गलतफमिया मैं बताऊंगा जब तक हमारे ऊपर

685
00:50:34,880 --> 00:50:39,080
ब्रिटिशर्स का राज था ना तब तक भी एक चीज थी कि

686
00:50:39,080 --> 00:50:43,280
कोई भी अपने आप को अपने मन से आचार जगतगुरु की उपाधि नहीं देता

687
00:50:43,280 --> 00:50:47,600
था हा बिल्कुल बकुल आज कोई भी व्यक्ति जब से हम लोग स्वतंत्र

688
00:50:47,600 --> 00:50:51,640
हुए तब से हमारी सबसे पहले जो व्यास गदी है ना उसके साथ खिलवाड़

689
00:50:51,640 --> 00:50:55,680
चालू हो गया कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे जगतगुरु लगा सकता है आप उसको

690
00:50:55,680 --> 00:50:59,960
रोक नहीं सकते अच्छा अगर देखा जाए

691
00:50:59,960 --> 00:51:04,000
तो धर्म के अनुसार सबसे बड़ी गद्दी है जगतगुरु आचार्य यह सब

692
00:51:04,000 --> 00:51:08,760
गद्दिया सबसे इंपॉर्टेंट है प्रधानमंत्री से भी ऊंची गद्दी है

693
00:51:08,760 --> 00:51:12,920
क्योंकि यह हमारी अच्छाई और बुराई का निर्णायक गद्दी है मगर आज

694
00:51:12,920 --> 00:51:18,480
यदि कोई अपने घर के बाहर नेम प्लेट में लिखवा दे

695
00:51:18,480 --> 00:51:22,640
प्रधानमंत्री या फिर राष्ट्रपति या फिर लिखवा दे केवल

696
00:51:22,640 --> 00:51:26,640
एसपी लिखवा दे आईजी लिखवा दे तो एक दो दिन लगेंगे वो व्यक्ति

697
00:51:26,640 --> 00:51:30,880
जेल के अंदर हवालात में दिखाई देगा ब बिल्कुल मगर

698
00:51:30,880 --> 00:51:35,720
कोई व्यक्ति अपने नाम के आगे जगतगुरु लगा दे उसको कोई कुछ नहीं

699
00:51:35,720 --> 00:51:39,920
कहेगा तो सबसे पहली दिक्कत है कि हमने इतने सारे आचार

700
00:51:39,920 --> 00:51:44,320
खड़े कर रखे हैं मनमाने ढंग से होने दिए क्या देखो

701
00:51:44,320 --> 00:51:48,720
जेल धाम में भी बैठा हुआ है तत्वदर्शी जगतगुरु है

702
00:51:48,720 --> 00:51:52,720
तो यह जो छूट है ना इसके कारण है यह जो

703
00:51:52,720 --> 00:51:56,720
दिख रहा है कि कोई भी व्यक्ति जो हमने छूट दे रखी है शासन तंत्र के

704
00:51:56,720 --> 00:52:01,480
द्वारा छूट प्राप्त है अरे भाई कई तो ऐसे जगतगुरु हैं

705
00:52:01,480 --> 00:52:05,520
चलो ठीक है वो अपने आप को जगतगुरु कह रहे हैं थोड़ा बहुत व परंपरा से जुड़े भी हुए

706
00:52:05,520 --> 00:52:09,760
हैं तो ठीक है कुछ तो बिल्कुल ही सुभ झूठे जगतगुरु बने हुए हैं नकली

707
00:52:09,760 --> 00:52:14,120
जगतगुरु बने हुए हैं शंकराचार्य बने हुए हैं नकली

708
00:52:14,120 --> 00:52:18,560
बिल्कुल एब्सलूट और

709
00:52:18,560 --> 00:52:24,560
की ही उन्ह वो प्राप्त है जी कोई आया है मैं देख लेता हूं कौन

710
00:52:24,840 --> 00:52:30,840
है बौधि सत्व जी आप अपना कैमरा ऑन

711
00:52:32,000 --> 00:52:38,000
करें कैमरा ऑन करें बौधि बौधि सत्व

712
00:52:38,480 --> 00:52:41,200
जी

713
00:52:41,200 --> 00:52:45,560
और रामपाल दास का कोई भी

714
00:52:45,560 --> 00:52:51,560
शिष्य अगर आकर

715
00:52:52,600 --> 00:52:57,280
के भाई कैमरा कैमरे में अपना फेस दिखाए बौधि स

716
00:52:57,280 --> 00:53:00,680
जी जी

717
00:53:00,680 --> 00:53:04,760
अछ जी जी मेरे कुछ सवाल है मेरे कुछ सवाल है

718
00:53:04,760 --> 00:53:10,760
आपसे आप पहले फेस दिखाए भाई

719
00:53:11,480 --> 00:53:16,240
साहब पहले फेस दिखा फ दिखा

720
00:53:16,240 --> 00:53:20,680
चोरी चोरी कायरता पूर्वक नहीं अगर सत्य के पक्षधर

721
00:53:20,680 --> 00:53:24,880
है तो सामने से आइए बिल्कुल चोरी और कायरता पूर्वक

722
00:53:24,880 --> 00:53:27,280
नहीं

723
00:53:27,280 --> 00:53:31,680
एक महा पाशुपतास्त्र महा

724
00:53:31,680 --> 00:53:35,960
पाशुपतास्त्र जीको बता दीजिए क्यों नहीं हो पाएगा इसलिए

725
00:53:35,960 --> 00:53:40,240
नहीं हो पाएगा क्योंकि जब हम अपना चेहरा साथ में लेकर

726
00:53:40,240 --> 00:53:44,560
चल रहे हैं अपनी आइडेंटिटी छुपा नहीं रहे हैं तो बात करते

727
00:53:44,560 --> 00:53:48,640
समय आपके पास एक प्लस पॉइंट होता है कुछ भी बोल देने के लिए

728
00:53:48,640 --> 00:53:52,720
क्योंकि आप सुरक्षित फील कर रहे होते हैं कि हमें कोई नहीं

729
00:53:52,720 --> 00:53:56,880
जानता तो ये जो बात बातचीत होगी वो समानांतर नहीं होगी

730
00:53:56,880 --> 00:54:01,520
समतुल्य नहीं होगी अंतर होगा इसमें ठीक है

731
00:54:01,520 --> 00:54:05,760
और आपके जो प्रश्न है व आप लिखकर भेजिए टेलीग्राम

732
00:54:05,760 --> 00:54:09,880
ग्रुप पर हमारे डिस्क्रिप्शन में लिखा हुआ है

733
00:54:09,880 --> 00:54:13,920
लिंक ठीक है ना बाकी भैया कोई रामपाल दास

734
00:54:13,920 --> 00:54:19,920
जी का आकर के बताना चाहता हो अविनाशी अविनाशी सिद्ध

735
00:54:20,000 --> 00:54:24,000
करो किसको कबीर दास जी को

736
00:54:24,000 --> 00:54:26,560
और यह लोग जो यह कहते हैं ना कि रामपाल जो

737
00:54:26,560 --> 00:54:31,320
है वो गुरु के रूप में अ वो

738
00:54:31,320 --> 00:54:35,520
है वो गुरु के रूप में ईश्वर है नहीं रामपाल दास ने

739
00:54:35,520 --> 00:54:39,960
स्वयं को परमेश्वर कहा है बिल्कुल स्पष्ट बोला स् परमेश्वर

740
00:54:39,960 --> 00:54:44,160
इस समय दास के रूप में यहां विद्यमान है आपके सामने स्पष्ट कहा है पहली

741
00:54:44,160 --> 00:54:48,160
बात दूसरी बात अभी मैंने कल परसों की एक वीडियो में क्लिप

742
00:54:48,160 --> 00:54:52,240
देखी थी बोल रहा था कि मैं बीमार था और अब ठीक हो गया

743
00:54:52,240 --> 00:54:56,680
हूं यह बोल रहे थे वो बीमार कैसे हो गया भाई ईश्वर

744
00:54:56,680 --> 00:55:00,680
कैसे हो रहा है और अगर पहले की फोटो से आज की फोटोस का

745
00:55:00,680 --> 00:55:04,720
मिलान भी कर ले तो यंग से लेकर के बुढ़ापे तक का सफर नजर आ रहा

746
00:55:04,720 --> 00:55:10,720
है चश्मा लग गया बहुत कुछ नजर आ रहा है

747
00:55:15,080 --> 00:55:19,360
तो नहीं नहीं गाली बाज की बात नहीं है यह एक मर्यादा है इस चैनल

748
00:55:19,360 --> 00:55:23,440
की बौधि सत्व जी कि हम जो वैचारिक मतभेद

749
00:55:23,440 --> 00:55:27,600
के निमित्त जो चर्चा होती है वो व्यक्ति की पहचान के साथ ही

750
00:55:27,600 --> 00:55:31,840
करते हैं व कायरों की तरह चोरी

751
00:55:31,840 --> 00:55:35,920
छिपे वाले चैनल नहीं है यह जहां पर बिना चेहरे के ही खूब सारी बातें हो जाती है

752
00:55:35,920 --> 00:55:40,480
लोग वापस चले जाते हैं आप वहां उन चैनल चैनल पर जाइए

753
00:55:40,480 --> 00:55:45,360
जहां पर इस तरह का आचरण ही होता हो केवल

754
00:55:45,360 --> 00:55:49,600
ठीक है तो बीच में मैं अब जो है

755
00:55:49,600 --> 00:55:53,800
वायु पुराण से प्रमाण कुछ दे दू एक ब्रेक ले लेते हैं छोटा

756
00:55:53,800 --> 00:55:58,200
सा और बाकी रामपाल दास जी के शिष्यों

757
00:55:58,200 --> 00:56:02,320
को निमंत्रण है कि आए और कबीर को

758
00:56:02,320 --> 00:56:06,640
अविनाशी ईश्वर परम ब्रह्म अजर

759
00:56:06,640 --> 00:56:10,760
कुवारी गाय अन्या बहुत सारे हमारे पास

760
00:56:10,760 --> 00:56:15,080
है तो उनमें से कोई भी आप अच्छा

761
00:56:15,080 --> 00:56:19,520
एक चीज मैंने और देखी है इनके जितने भी चैनल्स

762
00:56:19,520 --> 00:56:23,560
है जो हमने क्वेश्चन उठाए हैं उन क्वेश्चन पर कोई

763
00:56:23,560 --> 00:56:27,840
बात नहीं वो जो गोबर गणेश सभी ले थे बीच में और फिर

764
00:56:27,840 --> 00:56:30,120
फिर बीच में ले आए धूप अगरबत्ती

765
00:56:30,120 --> 00:56:33,560
य सब ले आए

766
00:56:33,560 --> 00:56:38,480
तो राम पांडे जी चले गए थे क्या

767
00:56:38,480 --> 00:56:42,640
गोबर गणेश ले आए मगर अ ये कहते हैं कि वो जैसे ही उसकी बात कटने

768
00:56:42,640 --> 00:56:46,640
लगती तो व हटा देता है वह बात और है कि हम हटाते

769
00:56:46,640 --> 00:56:50,880
हैं जब विषयात कर रहा होता है या एक ही बात पर अटक जाता है या

770
00:56:50,880 --> 00:56:55,040
विषय से भाग रहा होता है वो अलग बात है मगर वो अपने

771
00:56:55,040 --> 00:56:59,440
चैनल पर स्वतंत्र करके भी उन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पा रहे हैं शास्त्र

772
00:56:59,440 --> 00:57:03,600
लेकर नहीं बैठते हैं जो बोलते ना उन्होंने सभी सद

773
00:57:03,600 --> 00:57:08,200
ग्रंथों को खोल के दिखाया है अरे तो दिखाया तो दिखाओ ना भैया

774
00:57:08,200 --> 00:57:12,320
जो सवाल कर रहे हैं वो दिखाओ अब अपने बंद कमरे में बैठ कर

775
00:57:12,320 --> 00:57:16,600
के भी जब तुम शास्त्र को नहीं दिखा पा रहे हो वहा बैठ कर के दो दो तीन तीन घंटे

776
00:57:16,600 --> 00:57:20,680
अच्छा मैंने एक चीज और देखी हसी की आप लोगों ने पता नहीं देखा हो कि नहीं

777
00:57:20,680 --> 00:57:24,920
वो जो एक नेपाली आता था ना ज्ञान से ज्ञान करता है

778
00:57:24,920 --> 00:57:29,120
मैं ज्ञान से ज्ञान को गा एक नेपाल से जुड़ा था एक व्यक्ति सावले कलर का

779
00:57:29,120 --> 00:57:33,120
था उसका क्या हुआ वो वहां पर लाइव चल रहा है उसके घर का

780
00:57:33,120 --> 00:57:37,480
कोई व्यक्ति आया उसके एक कंटाप दिया लाइव

781
00:57:37,480 --> 00:57:41,640
में और उसको उसने तुरंत अपना कैमरा बंद किया यह सब

782
00:57:41,640 --> 00:57:45,160
भी उनके चैनल्स में चल रहा है ज्ञान से ज्ञान काटू पड़ गया

783
00:57:45,160 --> 00:57:49,760
कंटाप और ज्ञान से ज्ञान कट गया जी गोविंद जी

784
00:57:49,760 --> 00:57:53,760
मैंने आपको वीडियो भेजी थी व पर एक इन्होने

785
00:57:53,760 --> 00:57:57,880
मेरे को ड किया आवाज आवाज आ रही बहुत बहुत कम आ रही है

786
00:57:57,880 --> 00:58:02,360
अच्छा अभी आ रही है मेरी आवाज नहीं स्लो है

787
00:58:02,360 --> 00:58:06,480
अच्छा रुकिए जरा अब आ रही है मेरी आवाज थोड़ा ऊंचा बोलता

788
00:58:06,480 --> 00:58:10,720
हूं थोड़ा आ रही मैं सोच रहा हूं एक बार आप लीव करके दोबारा आ

789
00:58:10,720 --> 00:58:13,280
जाए

790
00:58:13,280 --> 00:58:17,360
हा तो मेरे ख्याल से दो तीन लोग आए हैं पंकज कटारे

791
00:58:17,360 --> 00:58:21,640
जी हैं और अमित स्वामी जी

792
00:58:21,640 --> 00:58:25,800
है दादू दास जी आप अपना चेहरा दिखाए अमित स्वामी जी जय

793
00:58:25,800 --> 00:58:27,920
श्री

794
00:58:27,920 --> 00:58:32,000
जय श्री राम जय श्री राम आप सभी को जय श्री राम जय श्री रामया जय श्री

795
00:58:32,000 --> 00:58:34,600
राम जय श्री

796
00:58:34,600 --> 00:58:38,640
राम अच्छा जब उसके कंटा प ना जब

797
00:58:38,640 --> 00:58:42,680
उसके कंटाप पड़ा लाइ लाइव स्ट्रीम में नेपाली के तो यह

798
00:58:42,680 --> 00:58:48,360
लोग भी थोड़ी देर तक मुस्कुरा रहे हैं यह क्या हो गया आप कुछ कर नहीं सकते लाइव

799
00:58:48,360 --> 00:58:51,920
है जी

800
00:58:51,920 --> 00:58:57,920
स्वामी शिवा जी मेरे पास ना तीन बातें है मैं आपसे डिस्कस करना चाहता

801
00:58:58,080 --> 00:59:00,600
मैं मेरा नाम अमित है मैं हरियाणा

802
00:59:00,600 --> 00:59:04,080
से हूं

803
00:59:04,080 --> 00:59:08,320
और मेरे पास मैंने आपको एक बार पहले भी मैं आपके साथ

804
00:59:08,320 --> 00:59:13,200
जुड़ा था कुछ क्षण के लिए तब मैंने आपको बताया था कि यहां पर

805
00:59:13,200 --> 00:59:17,680
रामपाल महाराज जी का कितना सिस्टम फैला हुआ है

806
00:59:17,680 --> 00:59:21,680
तो एक्चुअल में मेरे पास तीन ही बातें हैं फिर मैं आपसे एक बात के लिए मैं आपसे सोल्यूशन

807
00:59:21,680 --> 00:59:26,120
भी चाहता हूं मैंने मैसेज भी किए थे लास्ट वाली स्ट्रीम में पर शायद वो

808
00:59:26,120 --> 00:59:30,560
किसी दूसरे विषय पर थी इसलिए आपने लिया नहीं होगा

809
00:59:30,560 --> 00:59:34,800
अच्छा मैं ये कह रहा हूं जैसे गांव में जो लोग हैं

810
00:59:34,800 --> 00:59:39,080
जो अभी इनके अनुयाई बन रहे हैं पहले भी बने हुए हैं और अ

811
00:59:39,080 --> 00:59:43,080
भी भी बन रहे हैं जबक संत रामपाल महाराज तो जेल में

812
00:59:43,080 --> 00:59:47,480
है तो इसका कारण क्या है कि लोगों को एक तो

813
00:59:47,480 --> 00:59:51,840
मैं जितने भी लोगों से मिला हूं एक तो आपको मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपकी स्ट्रीम

814
00:59:51,840 --> 00:59:56,040
देखने के बाद में मुझे कुछ ऐसी चीजें मेरे हाथ में है कि जिनके

815
00:59:56,040 --> 01:00:00,360
के बिहाव पर मैं लोगों से बात कर सकता हूं सो

816
01:00:00,360 --> 01:00:04,520
थैंक यू वेरी मच मैंने लोगों से बात की है तो मुझे यह समझ में आया

817
01:00:04,520 --> 01:00:08,720
कि किसी को किसी भी चीज का ज्ञान नहीं है ठीक है और

818
01:00:08,720 --> 01:00:13,160
धर्मशास्त्र का ज्ञान जीरो है तो इसलिए और यह जो शास्त्रों

819
01:00:13,160 --> 01:00:15,760
में दिखाते हैं ना कि ब्राह्मण उसमें

820
01:00:15,760 --> 01:00:19,800
कलयुग में राक्षस बन जाएगा तो वह राक्षस वो इसी तरीके के ब्राह्मण

821
01:00:19,800 --> 01:00:24,080
है जिन्होंने शास्त्रों का थोड़ा बहुत ज्ञान लिया वह अपने आप में एक ब्राह्मण

822
01:00:24,080 --> 01:00:28,240
बन गए फिर उन्होंने लोगों को गलत रास्ते की तरफ लेकर गए तो वो एक राक्षस

823
01:00:28,240 --> 01:00:32,240
प्रवृति है मैं तो यह समझता हूं तो उसकी व्याख्या की गल फिट होती है

824
01:00:32,240 --> 01:00:36,280
वो बात मैं उसी के लिए कह रहा हूं तो यहां जो गांव में जो

825
01:00:36,280 --> 01:00:40,360
भोली भाली जनता है उसको एक्चुअल में शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं

826
01:00:40,360 --> 01:00:44,520
है तो जिसने जो दिखाया वह मान लिया और भेड़

827
01:00:44,520 --> 01:00:48,600
चाल ज्यादा चलती है एक गया उस वो एक्चुअल में उसकी बीमारी ठीक

828
01:00:48,600 --> 01:00:52,760
होने वाली थी वोह ठीक हो गया उसके पीछे 20 और चले गए फिर उन्होंने

829
01:00:52,760 --> 01:00:56,760
जाकर के सोच लिया भाई हम तो बस गुरु का वो लेले तो यह तो

830
01:00:56,760 --> 01:01:00,760
है कारण गांव में अशिक्षित यह लोग कहते हैं हम शिक्षित है शिक्षित

831
01:01:00,760 --> 01:01:04,760
है लेकिन आप पहली दूसरी तीसरी पांचवी क्लास पढ़े होंगे स्कूल

832
01:01:04,760 --> 01:01:09,040
में जाकर लेकिन आपने शास्त्रों का शिक्षा नहीं ली है इसलिए आप

833
01:01:09,040 --> 01:01:13,160
शास्त्रों की दृष्टि से आप अशिक्षित है ठीक है अब उनको

834
01:01:13,160 --> 01:01:17,200
जो चार लाइने बताई गई है वह उन्होंने मान ली है ठीक है उन

835
01:01:17,200 --> 01:01:21,280
चार लाइनों को लेकर के वह लोग चलते हैं और उनके दिमाग में बैठ गई है खाली दिमाग में आप कुछ भी

836
01:01:21,280 --> 01:01:25,440
भरोगे ना व कहते ना कि कच्ची मिट्टी से जो भी बनाओगे बन जाएगा

837
01:01:25,440 --> 01:01:29,800
तो वो सिस्टम ये इस भोली भाली जनता पर चलता है इन्होंने वो चार लाइने

838
01:01:29,800 --> 01:01:30,880
जो भी रटाई है ना वो रट

839
01:01:30,880 --> 01:01:34,960
गई है वो निकलती नहीं है यह तो कारण दिखता है मुझे यहां दूसरा मैं आपसे एक

840
01:01:34,960 --> 01:01:39,120
निवारण चाहता हूं मैंने लोगों को बताया कुछ लोग मुझे मिले

841
01:01:39,120 --> 01:01:43,120
जो मेरी जान पहचान के थे उनको मैंने समझाया उनकी समझ में भी

842
01:01:43,120 --> 01:01:47,280
आया पर पता है लोग क्या कहते हैं लोग ये कहते हैं कि अमित

843
01:01:47,280 --> 01:01:51,560
भाई क्या है ना ये हमारा धर्म यह कहता

844
01:01:51,560 --> 01:01:55,560
है हमने किसी को गुरु मान लिया तो उसको छोड़ नहीं सकते

845
01:01:55,560 --> 01:01:59,600
अब तो मुझे आपसे यह सलूशन चाहिए कि मैं मैं उस

846
01:01:59,600 --> 01:02:03,600
पर भी थोड़ा सा थोड़ा संशय हो गया मैंने सोचा मैं क्या जवाब दूं तो मुझे आपसे इसका उत्तर

847
01:02:03,600 --> 01:02:07,680
चाहिए कि जो लोग छोड़ना चाहते हैं लेकिन वह लोग यह समझते हैं कि

848
01:02:07,680 --> 01:02:11,720
एक बार गुरु मान लिया तो मान लिया किसी एक बंदे ने मुझे एग्जांपल

849
01:02:11,720 --> 01:02:15,760
दिया कि गुरु गोरखनाथ जी ने गुरु मछिंद्रनाथ को गुरु मनाया

850
01:02:15,760 --> 01:02:19,960
था तो गुरु मछिंद्रनाथ ने धर्मशास्त्र छोड़ दिया था वह राजा बन गए

851
01:02:19,960 --> 01:02:24,120
थे कहीं रहने लग गए थे किसी सा किसी देश में तो गुरु

852
01:02:24,120 --> 01:02:28,600
गोरखनाथ जी ने क्या कि आपने गुरु को नहीं छोड़ा अपने गुरु को लेकर आए

853
01:02:28,600 --> 01:02:32,720
वापस तो तो लोग कहते हैं कि हम गुरु को बुरा नहीं कह सकते हम

854
01:02:32,720 --> 01:02:36,960
अपनी भक्ति करेंगे गुरु जैसा भी है तो इस चीज

855
01:02:36,960 --> 01:02:41,440
दो बा है य पर मैं आपको इसका सलूशन दे दूं बहुत इजी है महाभारत

856
01:02:41,440 --> 01:02:45,880
में कहा गया है घटनाओं का घटित होना

857
01:02:45,880 --> 01:02:50,200
प्रमाण नहीं है उन्हें शास्त्र के

858
01:02:50,200 --> 01:02:54,480
द्वारा धर्म के रूप में स्वीकार किया जाना प्रमाण है

859
01:02:54,480 --> 01:02:59,120
घटनाओं का घटित होना प्रमाण प्रमाण नहीं है उन्हें शास्त्रों के द्वारा

860
01:02:59,120 --> 01:03:03,760
धर्म के रूप में स्वीकार किया जाना ही प्रमाण है

861
01:03:03,760 --> 01:03:07,920
तो सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि हमने किसी को गुरु बनाया

862
01:03:07,920 --> 01:03:12,080
तो गुरु का अर्थ क्या है अद्व तार का उपनिषद में कहा

863
01:03:12,080 --> 01:03:16,360
गया है गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला

864
01:03:16,360 --> 01:03:20,920
स्कंद पुराण गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने

865
01:03:20,920 --> 01:03:25,040
वाला अज्ञानता रूपी अंधकार से निकालने वाला

866
01:03:25,040 --> 01:03:29,320
ही आपका गुरु हो सकता है ठीक है असतो

867
01:03:29,320 --> 01:03:33,440
मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया मृत मा मतम गमाया

868
01:03:33,440 --> 01:03:37,880
जब वो तमसो मा ज्योतिर गमाया कर ही नहीं रहा है

869
01:03:37,880 --> 01:03:41,880
तमसो मा ज्योतिर गमाया मुझे अंधकार से उजाले की ओर ले

870
01:03:41,880 --> 01:03:46,400
चलो जब जिसको आप गुरु कह रहे हो मगर वह आपको

871
01:03:46,400 --> 01:03:51,160
अंधकार से उजाले की ओर अभी मैंने पांच पैरामीटर बताए थे गुरु के

872
01:03:51,160 --> 01:03:55,160
गुरु कौन हो सकता है तो जब आप किसी को गुरु कह रहे हो

873
01:03:55,160 --> 01:03:59,280
तो शास्त्र के आधार पर कह रहे हो ना यह बात आपने शास्त्र से स्वीकारी कि गुरु को नकारा

874
01:03:59,280 --> 01:04:01,080
नहीं जा सकता इसका मतलब

875
01:04:01,080 --> 01:04:05,520
गुरु भी आप उसी को बनाओगे जिसके लिए शास्त्र आदेश कर रहे होंगे शास्त्रों

876
01:04:05,520 --> 01:04:09,520
ने आदेश किया है कि गुरु अंततोगत्वा सन्यासी होना चाहिए

877
01:04:09,520 --> 01:04:13,560
आप सन्यासी के अधीन रहने वाले किसी गृहस्थ से दीक्षा ले

878
01:04:13,560 --> 01:04:17,560
सकते हो उसके अंदर शिक्षा ले सकते हो मगर वो किसी ना किसी

879
01:04:17,560 --> 01:04:21,680
सन्यासी के अधीन होना चाहिए किसी ना किसी अंतिम निर्णायक

880
01:04:21,680 --> 01:04:26,400
जो आपका हो जीवन का वो कोई वैरागी होना चाहिए वैराग्य होना चाहिए उसके

881
01:04:26,400 --> 01:04:30,400
पहली बात दूसरा परंपरा प्राप्त होना चाहिए भी

882
01:04:30,400 --> 01:04:34,920
शास्त्र कह रहे हैं तीसरा शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य

883
01:04:34,920 --> 01:04:39,200
की शिक्षा देने वाला होना चाहिए चौथा वोह आपका अंधकार

884
01:04:39,200 --> 01:04:43,600
दूर कर दे अब जैसे हम कह रहे हैं कि आप कह रहे हो कि जो जैसे

885
01:04:43,600 --> 01:04:48,560
ये जो तत्वदर्शी है तथाकथित यह कह रहे हैं कि भाई

886
01:04:48,560 --> 01:04:52,640
जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो नाशवान है अब हम दिखा

887
01:04:52,640 --> 01:04:57,160
रहे हैं शास्त्रों से कि भैया ब्रह्मा विष्णु महेश तो अपने आप को अविनाशी

888
01:04:57,160 --> 01:05:01,160
भी कह रहे हैं दिखा दिया हमने तो पहली बात आई कि

889
01:05:01,160 --> 01:05:05,320
समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य नहीं बैठाया

890
01:05:05,320 --> 01:05:09,360
क्यों क्योंकि जहां पर अविनाशी कहा गया वो नहीं माना और जहां नाशवान

891
01:05:09,360 --> 01:05:13,600
मान कहा जा रहा है वो मान लिया शिक्षा ऐसी देने वाला होना चाहिए

892
01:05:13,600 --> 01:05:16,080
गुरु जो दोनों बातों का मान रख

893
01:05:16,080 --> 01:05:20,360
जाए तो मान क्या है लीला पूर्वक वो जो है अपना आविर्भाव तिरोभाव करते

894
01:05:20,360 --> 01:05:24,800
हैं मगर वस्तुतः वो अविनाशी दोनों बातें हो गई लीला पूर्वक आविर्भाव

895
01:05:24,800 --> 01:05:28,880
तिरोभाव हो गया वो भी स्वीकार हो गया मगर वास्तविकता में तो

896
01:05:28,880 --> 01:05:33,360
वह अविनाशी है तो यह एक पैरामीटर अंततोगत्वा

897
01:05:33,360 --> 01:05:37,440
जब व्यक्ति पूछ रहा है कि गुरुदेव यहां पर यह लिखा है मुझे

898
01:05:37,440 --> 01:05:41,440
समझ में नहीं आ रहा है गुरुदेव अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो रूप क्यों

899
01:05:41,440 --> 01:05:45,560
नहीं बदल पा रहा है गुरुदेव ईश्वर अगर अजर है तो वह दाढ़ी

900
01:05:45,560 --> 01:05:50,040
में क्यों दिख रहा है सफेद दाढ़ी में ईश्वर अगर आपके अंदर है तो आपको

901
01:05:50,040 --> 01:05:54,120
बीमारी क्यों हो रही है आपको आप चश्मा क्यों लगा रहे हो आप जेल में

902
01:05:54,120 --> 01:05:58,120
क्यों बंद हो इन का उत्तर गुरु नहीं दे रहा है तो

903
01:05:58,120 --> 01:06:02,320
इसका अर्थ है कि गुरु जो आप जिसको मान बैठे हैं वह आपका गुरु है ही नहीं

904
01:06:02,320 --> 01:06:06,880
क्योंकि उस पर गुरु शब्द चरितार्थ नहीं हो रहा क्यों नहीं हो रहा गु का मतलब अंधकार

905
01:06:06,880 --> 01:06:11,200
आपके अज्ञानता है आप पूछ रहे हो मगर वह नहीं बता रहा

906
01:06:11,200 --> 01:06:16,480
पाच 101 में कुरान में क्या कहा गया

907
01:06:16,480 --> 01:06:20,520
कि ज्यादा प्रश्न मत पूछो अन्यथा आपके

908
01:06:20,520 --> 01:06:24,840
लिए वो आयतें खोल दी जाएंगी जिनके कारण पूर्व

909
01:06:24,840 --> 01:06:29,000
में कुछ लो बागी हो गए थे इसका मतलब क्या है कि कुरान

910
01:06:29,000 --> 01:06:31,160
के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म है वह

911
01:06:31,160 --> 01:06:35,280
यह सोच कर बताया जा रहा है कि कहीं यह व्यक्ति

912
01:06:35,280 --> 01:06:39,480
बुरा ना मान जाए अब जिस व्यक्ति को मान लो व्यभिचार

913
01:06:39,480 --> 01:06:43,520
की आदत पड़ी हुई है तो उस व्यक्ति को वो लोग यह बताएंगे कि तू व विचार

914
01:06:43,520 --> 01:06:47,520
कर यही तेरा धर्म है क्योंकि नहीं बताएंगे तो व बुरा मान जाएगा बागी हो

915
01:06:47,520 --> 01:06:51,600
जाएगा यह कोई आधार है धर्माधर्म का कि व्यक्ति को क्या अच्छा

916
01:06:51,600 --> 01:06:55,640
लगेगा वो हम उसको धर्म के रूप में बताए तो वहां मना कर दिया गया प्रश्न

917
01:06:55,640 --> 01:06:59,880
लिए अच्छा स्कोन की बात कर ले अचिंत प्रश्न

918
01:06:59,880 --> 01:07:03,920
मत करो अचिंत विषय तो यह भी आपके गुरु नहीं हो सकते गुरु

919
01:07:03,920 --> 01:07:08,560
वही जो आपके संच हों का निराकरण करने में समर्थवादी

920
01:07:08,560 --> 01:07:12,600
तरीके से तत्वदर्शी तो यदि आप शास्त्रों के आधार पर

921
01:07:12,600 --> 01:07:17,040
गुरु का आलंबन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले शास्त्रों

922
01:07:17,040 --> 01:07:21,440
के आधार पर समझना होगा कि गुरु कौन हो सकता है यह

923
01:07:21,440 --> 01:07:25,600
शास्त्र में ही लिखा है कि गु का मतलब अंधकार तो अगली बार जब आपसे कोई

924
01:07:25,600 --> 01:07:29,640
ये कहेगा कि हम गुरु का त्याग नहीं कर सकते तो पहले आपको उससे कहना है कि

925
01:07:29,640 --> 01:07:33,640
गुरु का अर्थ बता तू मुझे यदि तू किसी को

926
01:07:33,640 --> 01:07:37,680
गुरु कह रहा है तो गुरु का अर्थ क्या है बता अब शास्त्र से आप

927
01:07:37,680 --> 01:07:41,920
उसको अर्थ बताओगे गुरु का अर्थ है जो तुझे अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाल

928
01:07:41,920 --> 01:07:46,080
दे तो क्या जिसको तू गुरु कह रहा है वो तुझे अज्ञानता से बाहर ला रहा

929
01:07:46,080 --> 01:07:46,580
है

930
01:07:46,280 --> 01:07:50,440
नहीं ला रहा है बहुत सारे टटर पटरम करके वो तुझको

931
01:07:50,440 --> 01:07:54,840
जो है अज्ञानता में फसाए हुए वो गुरु कहलाने लायक

932
01:07:54,840 --> 01:07:59,120
नहीं है और अगर लायक नहीं है तो आप तुरंत उसको छोड़िए

933
01:07:59,120 --> 01:08:04,040
उसका त्याग कर दीजिए वो गुरु है ही नहीं जी गोविंद जी जय श्री राम

934
01:08:04,040 --> 01:08:08,160
धन्यवाद धन्यवाद धनवाद अ जी आपको एक और बात

935
01:08:08,160 --> 01:08:12,320
बोलना चाहूंगा अगर आपके पास उम्मीद है एक मिनट होगा ठीक है यह रामपाल

936
01:08:12,320 --> 01:08:16,440
जी के आपने शायद किया होगा तो रामपाल जी की पुस्तक है ज्ञान गंगा

937
01:08:16,440 --> 01:08:20,960
उसका पेज नंबर छ सिक्स जहां लिखा होगा ना वो खोल लीजिएगा

938
01:08:20,960 --> 01:08:26,960
यहां पर खुद ही रामपाल बाबा जी क्या बोल रहे हैं अब भक्त समाज

939
01:08:27,160 --> 01:08:31,160
ऐसी पुस्तक वैसे आपको नहीं उससे डरने वाली कोई बात

940
01:08:31,160 --> 01:08:35,200
नहीं है यदि आपको किसी चीज के ऊपर काम करना तो वो रख लेना कोई बुरी बात नहीं है रखे नहीं

941
01:08:35,200 --> 01:08:39,320
रखे वो आपकी चिंता है मैं आपको बता रहा हूं इसकी पुस्तक में क्या लिखा है ठीक है भक्त

942
01:08:39,320 --> 01:08:43,480
समाज में एक नकली गुरु नकली गुरु कौन है जो शास्त्र विरुद्ध ज्ञान देता हो ठीक

943
01:08:43,480 --> 01:08:47,720
है यह आ गया पक्की बात है ये ठीक है द्वारा एक गलत

944
01:08:47,720 --> 01:08:51,760
धारणा फैला रखी है कि एक बार गुरु धारण करने के पश्चात दूसरा

945
01:08:51,760 --> 01:08:56,000
गुरु नहीं बदलना चाहिए जरा विचार करके कि गुरु हमारे

946
01:08:56,000 --> 01:09:00,400
जन्म मृत्यु के रूप को रोग को काटने वाला वैद होता है

947
01:09:00,400 --> 01:09:04,480
यदि एक वैद हमारा रोग नहीं कटता है तो हम दूसरे अच्छे वैद के पास

948
01:09:04,480 --> 01:09:08,760
जाएंगे जिससे हमारा जानलेवा ठीक हो सके रोग जैसे

949
01:09:08,760 --> 01:09:12,840
ठीक धर्मदास जी के पहले गुरु श्री रूप दस द थे ठीक है

950
01:09:12,840 --> 01:09:16,920
तो फिर वह उसके बाद जो है वह कबीर जी की शरण में चले गए

951
01:09:16,920 --> 01:09:20,920
ठीक है तो इसके साथ नीचे भी एक इन्होंने लिखा हुआ है झूठे

952
01:09:20,920 --> 01:09:25,600
गुरु के पक्ष को तजत ना कीज वारी यानी देर ना लगाइए

953
01:09:25,600 --> 01:09:29,800
आपको पता चल जाए आपका गुरु झूठा है तो उसका त्याग करने में देर ना लगाइए

954
01:09:29,800 --> 01:09:34,040
तो मैं नहीं कह रहा यह बाबा रामपाल की पुस्तक है ज्ञान गंगा उसका प्रश् नंबर छ

955
01:09:34,040 --> 01:09:39,360
कह रहा है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत बहुत बढ़िया

956
01:09:39,360 --> 01:09:42,200
तो ये अगर और ज्यादा

957
01:09:42,200 --> 01:09:46,280
उनको चाहिए हो तो बता दीजिएगा तुम्हारा ही गुरु अपना खंडन करने के लिए कह

958
01:09:46,280 --> 01:09:50,960
रहा है तो मुझे अब तो मुझे परचेज करनी

959
01:09:50,960 --> 01:09:56,560
पड़ेगी देखिए डरना नहीं है कभी भी जीवन में कभी भी

960
01:09:56,560 --> 01:10:01,440
दादू दास जी आए हैं दादू दास जी कहां चले

961
01:10:01,440 --> 01:10:05,720
गए दादू दास जी चले गए छोड़ गए हम उनको सुनने

962
01:10:05,720 --> 01:10:10,600
वाले थे करण जी एक मिनट एक मिनट जुड़ गए

963
01:10:10,600 --> 01:10:16,480
क्या अभी दादू दास करके जुड़े थे

964
01:10:16,480 --> 01:10:20,600
चलिए जी करण जी जय श्री

965
01:10:20,600 --> 01:10:24,760
राम जय श्री राम जी जय श्री राम भैया बहुत दिन से आपकी

966
01:10:24,760 --> 01:10:28,920
लाइव स्ट्रीम देख रहा था तो काफी मन भी था आने का एक्चुअली मैं बेसिकली

967
01:10:28,920 --> 01:10:33,400
ट्रक ड्राइवर हूं बहुत छोटे लेवल से आता हूं

968
01:10:33,400 --> 01:10:37,400
तो आप मेरी अभी उम्र जो है वो 43 इयर्स है

969
01:10:37,400 --> 01:10:41,600
तो मैं रामपाल को एक्चुअली मैं रामपाल ही कहूंगा

970
01:10:41,600 --> 01:10:45,720
महाराज नहीं कगा क्योंकि मैं इसको तब से जानता हूं जब मंजे में बैठता था जब

971
01:10:45,720 --> 01:10:50,280
चार पांच भगत इसके आगे बैठते थे मैं 93 से इनको जान रहा हूं

972
01:10:50,280 --> 01:10:54,320
तो मैं वैसे बेसिकली पंजाब से रहने वाला हूं य चंडीगढ़ के एरिया में जिर्कपुर गांव

973
01:10:54,320 --> 01:10:57,840
पड़ता है तो वहां से रहने वाला हूं उस टाइम ये

974
01:10:57,840 --> 01:11:02,360
तो यह कबीर पंथी थे एक्चुअली को कबीर पंथ से निकाल दिया गया था

975
01:11:02,360 --> 01:11:06,520
तो कबीर पंथ से जैसे ही इनको निकाला क्योंकि ये कबीर पंथ में रहते हुए ना खुद

976
01:11:06,520 --> 01:11:10,680
गुरु बनने की कोशिश में थे कहीं से जेई वगैरह रिटायर है ये जूनियर

977
01:11:10,680 --> 01:11:14,840
इंजीनियर तो उसके बाद फिर इन्होंने अपना ये पंथ स्टार्ट कर दिया और

978
01:11:14,840 --> 01:11:19,320
अपनी अपनी इन्होंने वो कहते है ना अर्थ का अनर्थ कर दिया

979
01:11:19,320 --> 01:11:23,440
वो काम किया इन्होंने यह तो पता नहीं किसकिस पर ब्लेम लगाते हैं तो गुरु नानक देव

980
01:11:23,440 --> 01:11:27,760
जी को भी धोखेबाज कहते हैं गुरु गोविंद सिंह जी को कहते तो कुछ है ही नहीं गुरु नान

981
01:11:27,760 --> 01:11:32,000
जी धोखेबाज थे वो नामदान लेकर चले गए और जो इनके अपने गुरु थे

982
01:11:32,000 --> 01:11:36,000
कबीर जी के रामानंद जी जो भी है उनको कहते हैं कि वो इनसे

983
01:11:36,000 --> 01:11:40,120
ही उन्होंने इ से ही नामदान लिया और इन्होने उनको सतलोक दिखाया कबीर

984
01:11:40,120 --> 01:11:44,120
जी ने तो बड़े काफी बार मुझे बुलाया मेरे

985
01:11:44,120 --> 01:11:48,160
पास एक दो इनकी बुक्स भी थी मैंने ऐसे ही फेंक दी बट अभी मैं जब जब भी इनका

986
01:11:48,160 --> 01:11:52,200
देखता हूं ना तो काफी ना एक मन में

987
01:11:52,200 --> 01:11:56,800
आता है क्या आता है मुझे मेरे मन में जो मेरे लाइव मेरे ल के जो लोग है ना

988
01:11:56,800 --> 01:12:01,040
जो बहुत नीवे लोग जो आप मानो जो दिहाड़ी करते हैं खेतों में जो दिहाड़ी

989
01:12:01,040 --> 01:12:05,080
करते हैं वो लोग इनके पास फसते हैं और यह

990
01:12:05,080 --> 01:12:09,120
उनको क्या कहते हैं स्टेज में कि आप पढ़े लिखे हो आपको सब पता है तो आप

991
01:12:09,120 --> 01:12:12,960
आ जाओ आपको वहां पर कोई भी बंदा वेल

992
01:12:12,960 --> 01:12:17,080
एजुकेटेड नहीं मिलेगा आपको वहां सारे कौन मिलेंगे फिफ्थ

993
01:12:17,080 --> 01:12:21,120
क्लास सिक्सथ क्लास पास और उनके उनके पेरेंट्स क्या करते हैं कि

994
01:12:21,120 --> 01:12:25,720
मैं उनको बुरा नहीं कह रहा उन बेचार को कुछ पता ही नहीं है

995
01:12:25,720 --> 01:12:30,400
कि जीवन में हमने करना क्या है जीवन में हमें चाहिए क्या

996
01:12:30,400 --> 01:12:36,400
मैं आपकी बात फिर से सुनूंगा दादू दास जी आए हैं दादू दास जी जय श्री

997
01:12:37,960 --> 01:12:43,960
राम दादू दास जी जय श्री

998
01:12:44,400 --> 01:12:49,200
राम आप अपना माइक ऑन करिए दा

999
01:12:49,200 --> 01:12:55,200
उनका माइक बंद है माइक ऑन कर लीजिए

1000
01:12:58,600 --> 01:13:03,240
बोलिए वो बोल रहे हैं इनका माइक चालू नहीं है माइक

1001
01:13:03,240 --> 01:13:07,960
माइक को ऑन कर लीजिए और एक जगह बैठ

1002
01:13:07,960 --> 01:13:13,960
जाइए दादू दास जी आपका माइक बंद

1003
01:13:16,520 --> 01:13:19,680
है बाबूराम

1004
01:13:19,680 --> 01:13:25,680
यादव आप तो आ चुके हैं शायद एक बार

1005
01:13:26,760 --> 01:13:30,880
बाबूराम यादव

1006
01:13:30,880 --> 01:13:36,880
जी सुनाई दे रहा है दिखाई दे रहा है बाबूराम

1007
01:13:39,040 --> 01:13:43,240
जी नहीं दिख रहा इनको नहीं सुनाई दे रहा है कुछ

1008
01:13:43,240 --> 01:13:48,360
भी दादू दास जी चले गए और

1009
01:13:48,360 --> 01:13:52,480
बाबू राम यादव जी का फोटो स्टॉप हो गया है

1010
01:13:52,480 --> 01:13:58,240
जी आप कंटिन्यू करें करण जी

1011
01:13:58,240 --> 01:14:02,360
बेसिक मिलता है जाकिर नायक से इनका जो थोड़ा-थोड़ा बेसिक है वो

1012
01:14:02,360 --> 01:14:06,480
जाकिर नायक से मिलता है वो भी वर्ष नंबर ये पेज नंबर ये व्ट एवर

1013
01:14:06,480 --> 01:14:10,480
ये वो दिस एंड दैट करके बता देता है तो इनके जो भक्त होते हैं

1014
01:14:10,480 --> 01:14:14,600
ना वो सत्संग में लिखते होते हैं मैं गया हूं कई जगह तो इनके गुरुजी

1015
01:14:14,600 --> 01:14:18,640
उनको कहते थे उस टाइम कि यह चीज अपने पास लिख लो कि ताकि तुम

1016
01:14:18,640 --> 01:14:22,720
किससे ज्ञान चर्चा करो मैं अपने दिमाग में सोचता था ये कैसी ज्ञान चर्चा की जो तुम

1017
01:14:22,720 --> 01:14:26,800
पेज नंबर और मंत्र नंबर लिख के किसी साथ बात करोगे जब तक तुम्हे खुद शस

1018
01:14:26,800 --> 01:14:31,160
नहीं करना आता किसी के साथ तो इनका यही चलता रहता है वहां प सिस्टम

1019
01:14:31,160 --> 01:14:35,360
काफी जब अभी मैं बैठ के इनके देखता हूं प्रवचन

1020
01:14:35,360 --> 01:14:39,480
वगैरह काफी सुनता हूं देखे भी है मैंने एक्चुअली सुनने का मतलब मेरा यह है कि मैं इनकी तरफ

1021
01:14:39,480 --> 01:14:43,600
ध्यान देता मैं एक्चुअली इनका देखता हूं कि कर क्या रहे हैं इनका मतलब

1022
01:14:43,600 --> 01:14:46,160
क्या है यह करना क्या चाहते हैं

1023
01:14:46,160 --> 01:14:50,600
कोई वो भैया ने बहुत पहले जो गोविंद जी है गुरुकुल वाले उन्होने कहा था एक फ्लोरेंस

1024
01:14:50,600 --> 01:14:54,640
नाम की कोई लड़की है अमेरिका में और इन्होंने जय गुरुदेव

1025
01:14:54,640 --> 01:14:58,800
की कुछ भविष्यवाणियां उठा के अपने से सिमिलर करके कि उन्होंने सा

1026
01:14:58,800 --> 01:15:03,080
सितंबर एक 7 सितंबर 1971 को कहा था कि लड़का 20 साल का हो चुका है

1027
01:15:03,080 --> 01:15:07,200
और वह पैदा हो चुका है तो व कहते ये दास ही है कि कहने का मतलब खुद

1028
01:15:07,200 --> 01:15:11,240
को भी अब धीरे-धीरे कबीर प्रमोट करने वाले थे

1029
01:15:11,240 --> 01:15:15,480
कि मैं ही कबीर का अवतार हूं यह इनका चल रहा था यदि

1030
01:15:15,480 --> 01:15:19,560
इन पर पुलिस रेड ना होती तो आज यह बंदा कबीर बनके बैठा

1031
01:15:19,560 --> 01:15:23,560
होता यह मेरी शटी है क्योंकि मैं 93 से इनको

1032
01:15:23,560 --> 01:15:27,800
फॉलो कर रहा हूं एज लगालो इन्होने

1033
01:15:27,800 --> 01:15:32,800
स्वयं को कबीर बोल दिया है बोलु अवरी

1034
01:15:32,800 --> 01:15:36,880
नेता पुरुष बोल चुके दस के रूप में आपके सामने

1035
01:15:36,880 --> 01:15:41,040
विराजमान है हां जी बोल चुके हैं इन्होंने यह भी कहा कि कबीर की

1036
01:15:41,040 --> 01:15:44,800
एक वाणी है कि कलयुग जब

1037
01:15:44,800 --> 01:15:48,960
555 555 व ह यर पूरे हो जाएंगे तो

1038
01:15:48,960 --> 01:15:54,960
मैं ही दोबारा आऊंगा और कबीर पंथ में 13वां पंथ चलाऊंगा इन्होने

1039
01:15:55,080 --> 01:15:59,280
यह बात बोली है तो ये कहते कि दास ही पैदा हुआ भी रामपाल अपने आप को कहता

1040
01:15:59,280 --> 01:16:03,360
कि दास ही पैदा हुआ है और दास ही कबीर के रूप में दोबारा आया और तुम सबको

1041
01:16:03,360 --> 01:16:08,080
सतलोक ले जाने आया तुम सब ब्रह्म के ग्रास हो ये हो व्ट एवर

1042
01:16:08,080 --> 01:16:12,280
जो भी है मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है वो कुछ भी बोलता रहे पर मुझे

1043
01:16:12,280 --> 01:16:16,280
दिक्कत आनी शुरू पता कब हुई है सर मुझे एक्चुअली दिक्कत आनी शुरू जब

1044
01:16:16,280 --> 01:16:20,440
हुई है जब इसने भगवानों को ही काल कहना शुरू कर दिया

1045
01:16:20,440 --> 01:16:25,120
पहले नहीं कहता था ये मैंने इसके पुराने प्रवचन आप इसके देखना तब ये कहता नहीं था

1046
01:16:25,120 --> 01:16:29,520
तब ये कहता था कि ये मृत्यु लोक है ऐसे है वैसे है तब तक तो य सिंपल बात करता

1047
01:16:29,520 --> 01:16:33,600
जब तक एक छोटी सी खाट पर बैठता था जैसे ही इनका

1048
01:16:33,600 --> 01:16:37,640
आश्रम बनाना और वहां से थोड़ा बढ़ना शुरू हुआ

1049
01:16:37,640 --> 01:16:41,960
इस तो फिर डायरेक्टली ही बस इशारा करना शुरू कर दिया कि यह सब

1050
01:16:41,960 --> 01:16:45,960
फ्रॉड है मैं ही हूं जो हूं हा भया कबीर भगवान

1051
01:16:45,960 --> 01:16:50,360
कहने वाले ध्यान से सुने माता जी ने निष्ठा पूर्वक यदि

1052
01:16:50,360 --> 01:16:54,400
आपको सेवन कराया है और

1053
01:16:54,400 --> 01:16:58,760
रक्त में प्रवाह है रक्तचाप है ठीक ठाक तो आ जाए और

1054
01:16:58,760 --> 01:17:02,760
बताएं कहां तो बा ये तो

1055
01:17:02,760 --> 01:17:07,160
बातें इनके खुद के पास पड़ी है और कबीर जी ने खुद को कभी कहा ही नहीं कि मैं भगवान

1056
01:17:07,160 --> 01:17:10,360
हूं मैंने उनका काफी पढ़ के देखा है

1057
01:17:10,360 --> 01:17:14,400
यहां हमारे यहां भी एक दो कबीर पंथी संत है उनसे ही बात कीया वो कहते कबीर जी ने तो कभी

1058
01:17:14,400 --> 01:17:18,480
आपको भगवान कहा ही नहीं वो तो कहते कि मैं संत हूं संत हूं

1059
01:17:18,480 --> 01:17:22,640
बहा जो मर्यादा चल रही है मैं उनको हटाना चाहता हूं जो पढ़े

1060
01:17:22,640 --> 01:17:26,920
लिखे नहीं है मैं उनको पढ़ाना चाहता हूं वो तो ये बा करते थे बट इनका एक अलग ही फंडा

1061
01:17:26,920 --> 01:17:30,920
चल पड़ा था अ तो अब तो इनमें एक और दिक्कत हो गई है सर अब तो यह

1062
01:17:30,920 --> 01:17:35,360
रामपाल जी रो रहे हैं जेल से फोन करके आप इनकी वीडियो देखना इनके

1063
01:17:35,360 --> 01:17:39,640
चेले अलग हो गए उनके नाम पर सेक्स चल चुका है और जो जिसको

1064
01:17:39,640 --> 01:17:43,680
जो फायदा हो रहा है वो हो रहा है अब इसमें जो रामपाल

1065
01:17:43,680 --> 01:17:47,960
दास जी का रोल नहीं है कुछ भी अब अब तो खत्म हो चुका है सर

1066
01:17:47,960 --> 01:17:52,080
इन्होने अपने भाई को बिठाने की कोशिश की थी इन्होने भाई को बने

1067
01:17:52,080 --> 01:17:56,920
कोशिश की भैया मैं बीमार हो गया था ठीक हो गया

1068
01:17:56,920 --> 01:18:00,920
हूं नहीं सर एक लेटेस्ट वीडियो है इनका उसमें ना

1069
01:18:00,920 --> 01:18:05,040
इनके चेले हैं कोई पवन दास कर कहते हैं लोग

1070
01:18:05,040 --> 01:18:09,160
हमसे ये कहते हैं कि अरे भैया उनकी

1071
01:18:09,160 --> 01:18:13,160
भक्ति करने से सद भक्ति करने से हमारी बीमारी ठीक हो गई मा वो खुद

1072
01:18:13,160 --> 01:18:17,160
बीमार पड़ रहा है व्यक्ति वो खुद बाहर तो आ नहीं रहे सर

1073
01:18:17,160 --> 01:18:21,400
वो खुद तो अंदर बैठे हैं सबसे बड़ी बात है बीमारी को छोड़ दो मैं कहता हूं

1074
01:18:21,400 --> 01:18:25,520
कि यार मैंने चमत्कारी पुरुष अपनी आंखों के सामने मैं नांगा साधु

1075
01:18:25,520 --> 01:18:29,600
गिरी साधु ऐसे देखे हैं सर मैंने ऐसे देखे हैं कि जो उन्होंने मुझे

1076
01:18:29,600 --> 01:18:33,600
मेरे साथ हुआ है मुझे उन्होंने बोला कि आज तेरे घर से मुझे गाजर का

1077
01:18:33,600 --> 01:18:37,640
हलवा आएगा सर मैं लेके गया हूं मेरे घर प बन रहा था जी मैं प्रत्यक्ष

1078
01:18:37,640 --> 01:18:41,800
प्रमाण बैठा हूं वो अपने वो धुनि लगाई होती उन्होने उस पर बैठे

1079
01:18:41,800 --> 01:18:46,120
थे और उन्होंने मुझे कहा कि आज तेरे घर से खाना आएगा और मीठा आएगा और हालू

1080
01:18:46,120 --> 01:18:50,280
उसका गाजर का हलवा आएगा सर मैं घर पर आया तो मेरे

1081
01:18:50,280 --> 01:18:54,360
घर वाले बना रहे थे मेरे मम्मी और मेरे वाइफ वो बना रहे थे तो

1082
01:18:54,360 --> 01:18:58,600
मैंने यार ये तो मुझे बोला ही था तो मैं उस चीज को नहीं कहा जो जो करने

1083
01:18:58,600 --> 01:19:02,880
जो करने वाले साधु है ना तो वो सर वो तो बहुत कुछ कर देते हैं और

1084
01:19:02,880 --> 01:19:06,880
अभी तक तो इसका बहुत कुछ साबित हो जाता अभी तक तो बहुत कुछ

1085
01:19:06,880 --> 01:19:11,120
साबित हो जाताला जी जय श्री राम थोड़ा सा ब्रेक लूंगा करण जी

1086
01:19:11,120 --> 01:19:15,480
जय श्री राम शुक्ला जी जय श्री राम पहाड़ी जी जी शुक्ला जी बोले

1087
01:19:15,480 --> 01:19:19,560
जय श हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव जय

1088
01:19:19,560 --> 01:19:24,320
श्री राम शुक्ला जी बताए नारायण नारायण जी

1089
01:19:24,320 --> 01:19:28,400
वही अभी मैं जस्ट जवाइन किया तो शिवांश

1090
01:19:28,400 --> 01:19:32,680
जी आवाज आ रही है आपको मेरी थोड़ी कम आ रही है आवाज आप

1091
01:19:32,680 --> 01:19:36,920
अब आ रही है आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए आवाज

1092
01:19:36,920 --> 01:19:39,680
बहुत कम

1093
01:19:39,680 --> 01:19:40,680
है

1094
01:19:40,680 --> 01:19:45,000
भैया कोई आना चाहे कबीर को अविनाशी परमेश्वर सिद्ध कर दे आए

1095
01:19:45,000 --> 01:19:49,240
भैया अविनाशी परमेश्वर वाले यह हिस्ट्री ऑफ स्पिरिचुअलिटी

1096
01:19:49,240 --> 01:19:53,400
कबीर जी अविनाशी परमेश्वर है बाकी सभी की जन्म और मृत्यु

1097
01:19:53,400 --> 01:19:56,480
आ जाइए भैया

1098
01:19:56,480 --> 01:20:01,200
आ जाओ ओ वेद में प्रमाण ओ कबीर नहीं भगवान है

1099
01:20:01,200 --> 01:20:07,200
आवाज लगानी पड़ती सब्जी

1100
01:20:10,200 --> 01:20:16,200
तरकारी वेदों में प्रमाण है क भगवान सबजी का ठेला चालू कर

1101
01:20:19,400 --> 01:20:23,480
दिया लाइव स्म लाइव स्ट्रीम का लिंक ले लो और

1102
01:20:23,480 --> 01:20:27,840
आ जाओ और सुनि

1103
01:20:27,840 --> 01:20:31,880
सबसे बड़ी बात है कि हम य जो क्वेश्चन पुट अप कर रहे हैं इनका कोई निराकरण प्राप्त नहीं हो

1104
01:20:31,880 --> 01:20:36,680
रहा जो वहा दूसरी वह चल रही है लाइव स्ट्रीम

1105
01:20:36,680 --> 01:20:41,640
अविनाश शुक्ला जी वापस आ

1106
01:20:41,640 --> 01:20:45,640
गए हा जी अविनाश शुक्ला

1107
01:20:45,640 --> 01:20:51,640
जी बोलिए

1108
01:20:52,120 --> 01:20:58,120
बोलिए बोलिए बोलिए

1109
01:21:01,480 --> 01:21:06,680
बोलिए अवना

1110
01:21:06,680 --> 01:21:11,000
जी आप अपना अन म्यूट कर लीजिए अन म्यूट कर लीजिए

1111
01:21:11,000 --> 01:21:15,640
जी बोलिए पंकज जी बोलिए मैं वही कह रहा थाय

1112
01:21:15,640 --> 01:21:19,720
मूर्ति पूजा का विरोध करते करते थक नहीं रहे साक्षात

1113
01:21:19,720 --> 01:21:25,040
अभी प्रमाण है और कबीर जी जब थे तो तब से ही और

1114
01:21:25,040 --> 01:21:29,120
उसी 600 साल पुराना जो है मंदिर आज बना हुआ है भगवान राम

1115
01:21:29,120 --> 01:21:33,120
का कबीर जी ने खुद बनाया था उनके शिष्य के पास गए थे

1116
01:21:33,120 --> 01:21:37,200
ना तो राजस्थान के मुंडावर तहसील में आज भी वो मंदिर जो

1117
01:21:37,200 --> 01:21:41,640
है बना हुआ है और वहां पर जो है ना रामानु संप्रदाय के जो हमारे

1118
01:21:41,640 --> 01:21:45,680
जो महंत है वहां पर पूजा अर्चना जो भी है उनकी सेवा कर

1119
01:21:45,680 --> 01:21:49,680
रहे हैं य मूर्ति पूजा का विरोध करते करते जो है ना थक नहीं

1120
01:21:49,680 --> 01:21:54,080
रहे और उनके खुद के कबीर जी जो है भगवान राम का मंदिर बना के चले गए

1121
01:21:54,080 --> 01:21:58,280
एक जी कह रहे जो लोग कह रहे हैं कि जो लोग अन

1122
01:21:58,280 --> 01:22:02,400
एजुकेटेड है व अच्छे हैं तो सुन लो मेरी बहन आईआईटी बमबे

1123
01:22:02,400 --> 01:22:06,480
में है और व भी उन्हे फॉलो करती है हा भाई करती है

1124
01:22:06,480 --> 01:22:12,480
हो सकता है ऐसा नहीं है कि व ह

1125
01:22:13,800 --> 01:22:17,960
पर तने फॉलोवर्स यहां पर आए हैं आप सबकी शक्ल देख लेना

1126
01:22:17,960 --> 01:22:21,960
शक्ल से ही पता चल जाएगा कितना एजुकेशन है उनके अंदर केवल शक्ल

1127
01:22:21,960 --> 01:22:26,280
से तो आपकी बहन हो स सती है हमने ऐसा नहीं कहा 100

1128
01:22:26,280 --> 01:22:30,400
पर ही है ऐसा नहीं है मिल जाता है अगर ऐसे एजुकेशन की आप बात

1129
01:22:30,400 --> 01:22:34,520
करेंगे तो अब आप शंकराचार्य को रामानुजाचार्य को फॉलो

1130
01:22:34,520 --> 01:22:38,720
करने वालों का एजुकेशन लेवल देखेंगे क्या अरे

1131
01:22:38,720 --> 01:22:42,760
शंकराचार्य का स्वयं का एजुकेशन लेवल देखेंगे हाई कोर्ट

1132
01:22:42,760 --> 01:22:46,960
के जो उनको जेल धाम में बैठाए हुए हैं वह लोग उनसे

1133
01:22:46,960 --> 01:22:51,200
शिक्षा लेते हैं जिन्होंने आपके तत्वदर्शी को जेल धाम में बिठाया

1134
01:22:51,200 --> 01:22:55,800
हुआ है ठीक है वो उ सुनते हैं

1135
01:22:55,800 --> 01:23:00,160
हाथ जोड़ते हैं प्रणाम करते हैं पैर छूते हैं

1136
01:23:00,160 --> 01:23:04,160
साइंटिस्ट वो आते हैं सुनने के लिए तो

1137
01:23:04,160 --> 01:23:08,160
ये एक वो चेरी पिकिन मत करिए कि कोई एक

1138
01:23:08,160 --> 01:23:12,960
बात बस मिल गई बस उसका उत्तर दे दूं अरे अविनाशी सिद्ध करो ना यार आकर के

1139
01:23:12,960 --> 01:23:17,120
अविनाशी सिद्ध करो ईश्वर सिद्ध करो कबीर को वेदों के द्वारा ईश्वर

1140
01:23:17,120 --> 01:23:21,520
सिद्ध करो ईश्वर सिद्ध करो अविनाशी सिद्ध करो अजर सिद्ध करो तत्वदर्शी सिद्ध

1141
01:23:21,520 --> 01:23:25,760
करो कुवारी गाय का दूध ही सिद्ध कर दो चलो कुछ

1142
01:23:25,760 --> 01:23:28,880
तो कर दो इतने

1143
01:23:28,880 --> 01:23:33,160
सारे ऑप्शन है अब जाकर तुम लाइव स्ट्रीम करोगे

1144
01:23:33,160 --> 01:23:37,280
गोबर गणेश की पूजा भैया मत करो हम नहीं आएंगे आपसे कहने मत करो गोबर

1145
01:23:37,280 --> 01:23:41,280
गणेश की पूजा वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है दिखाओ ना

1146
01:23:41,280 --> 01:23:45,680
भाई हम कहां कह रहे गोबर गणेश की पूजा करो आप मत

1147
01:23:45,680 --> 01:23:49,880
करो मत बनाओ दीपावली मत बनाओ

1148
01:23:49,880 --> 01:23:54,640
होली हमको तो यह दिखा दो वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान है

1149
01:23:54,640 --> 01:23:58,880
हमको तो यह दिखा दो ये सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा व्यक्ति अजर कहां से दिख रहा

1150
01:23:58,880 --> 01:24:02,920
है हमको तो यह दिखा दो जो खुद बीमार पड़ रहा है व कहां से आपको

1151
01:24:02,920 --> 01:24:07,080
जो है परमेश्वर का अवतार दिख रहा है हमको

1152
01:24:07,080 --> 01:24:11,240
तो ये दिखा दो कि वो तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हो गया कब पी लिया

1153
01:24:11,240 --> 01:24:17,240
उसने कुमारी गाय का

1154
01:24:18,680 --> 01:24:22,280
दूध ये देख लीजिए

1155
01:24:22,280 --> 01:24:27,040
भैया कौन बैठे हैं ये थोड़ा बड़ा

1156
01:24:27,040 --> 01:24:31,320
करिए उच्चतम न्यायालय में पुरी शंकराचार्य जी

1157
01:24:31,320 --> 01:24:35,520
का प्रवचन सुन लो जो अपने नकली प्रवचन

1158
01:24:35,520 --> 01:24:39,520
दिखाते हो ना वीडियो में नकली प्रवचन दिखाते

1159
01:24:39,520 --> 01:24:43,520
हैं एक कमरे में बैठा हुआ बोल रहा है कोई व्यक्ति और फिर दूसरी पब्लिक

1160
01:24:43,520 --> 01:24:47,760
दिखा दी कहीं और की व अनिरुद्धाचार्य की पब्लिक दिखा दया एक बार शायद

1161
01:24:47,760 --> 01:24:51,840
इकट्ठा हो गई हो वही पब्लिक हर वीडियो में यह इनका तरीका इतनी

1162
01:24:51,840 --> 01:24:55,880
पब्लिक ने सुना इनके वीडियो देखो नकली साफ पता लगता है

1163
01:24:55,880 --> 01:25:00,000
कमरे में बैठ कर के व्यक्ति बोल रहा है और जब पब्लिक दिखाई तो इतनी दिखा दी पूछो

1164
01:25:00,000 --> 01:25:04,680
नहीं बागेश्वर धाम की पब्लिक ले आए जोड़ दिया पब्लिक को

1165
01:25:04,680 --> 01:25:08,800
शास्त्री जी एक बात और कहनी चाहता हूं इनका एक एमपी खबर फस्ट

1166
01:25:08,800 --> 01:25:12,880
एमपी खबर फास्ट करके य चैनल है और एक ऐसे करके

1167
01:25:12,880 --> 01:25:17,080
य चैनल है वहां प ये क्या करते हैं को कह रहा हूं

1168
01:25:17,080 --> 01:25:21,160
मैं उन्ही को कह रहा हूं य जो बात कह रहा हूं गोबर गणेश वाली अरे भाई

1169
01:25:21,160 --> 01:25:25,280
आप यह तो बताओ अविनाशी का तो उत्तर दो से हम नहीं कह रहे

1170
01:25:25,280 --> 01:25:30,120
आप गोबर गणेश की पूजा करो मत करो

1171
01:25:30,120 --> 01:25:33,720
अभी आप और हम तो बैठे हैं हमने कौन सा गले में

1172
01:25:33,720 --> 01:25:37,800
कोई हमने कौन सा गले में रुद्राक्ष की माला डाल ली है पीले वस्त्र भगवा वस्त्र डाल

1173
01:25:37,800 --> 01:25:41,960
के हम य बैठ के कोई आपस ट कर ले मतभेद थोड़ी ना ये तो बाद की बात

1174
01:25:41,960 --> 01:25:46,360
है मतभेद इस बात का है वेद में प्रमा कबीर भगवान

1175
01:25:46,360 --> 01:25:50,600
और तुम अग को अन बोल धन्य तुम तुम

1176
01:25:50,600 --> 01:25:56,240
जो है वो जो क्या होता है घटा कास को तुम क्या का

1177
01:25:56,240 --> 01:26:00,480
बोलोगे एक बात रखना चाहता हूं इसके बीच में जैसे कीय मूर्ति पूजा का खंडन

1178
01:26:00,480 --> 01:26:04,800
करते ये वो अभी पंकज जी ने बोला मैं आज यही बोलने वाला था दरअसल

1179
01:26:04,800 --> 01:26:09,560
उन्होंने कहा कि कबीर जी ने एक राम जी का मंदिर बनाया था अच्छा

1180
01:26:09,560 --> 01:26:13,720
आपको पता है कि जगन्नाथ जी की मूर्तिया किसने

1181
01:26:13,720 --> 01:26:17,840
किसने बनाई थी इसमें फनी बात क्या है बता

1182
01:26:17,840 --> 01:26:21,920
देता हूं पहले तो प्रणाम है जगन्नाथ जी को इसमें फनी बात यह है

1183
01:26:21,920 --> 01:26:26,280
कि पेज नंबर 52 ज्ञान मेरे हाथ में है देखिए कितनी मजेदार

1184
01:26:26,280 --> 01:26:30,320
बातें लिखते हैं य पढ़ा करिए आपका बहुत वो कहते हैं ना खून बढ़ता रहता है

1185
01:26:30,320 --> 01:26:34,480
हसने हसाने से ठीक है 52 नंबर पेज पर ये लिखते

1186
01:26:34,480 --> 01:26:38,480
हैं कि कबीर साहब ने छ दिन में यह सृष्टि

1187
01:26:38,480 --> 01:26:42,560
बना दी ठीक है यह लिखा हुआ है आपके सामने य छ दिन में उन्होंने सृष्टि बना

1188
01:26:42,560 --> 01:26:46,800
दी ठीक है वैसे तो आपके पास होगा ही पीडीएफ इसका 52 नंबर पेज है

1189
01:26:46,800 --> 01:26:49,080
छ दिन में बना रहे हैं पूरी सृष्टि

1190
01:26:49,080 --> 01:26:53,080
ध्यान से सुनिए और पेज नंबर 218

1191
01:26:53,080 --> 01:26:57,080
में लिखते हैं कि कबीर जी को जगन्नाथ जी की मूर्तियां बनाने में

1192
01:26:57,080 --> 01:27:01,080
लगे थे 12 दिन यानी कि जगन्नाथ की मूर्तिया कबीर

1193
01:27:01,080 --> 01:27:05,360
जी ने बनाई थी और दिन में बनी थी

1194
01:27:05,360 --> 01:27:09,400
सृष्टि छ दिन में बना देते हैं और मूर्ति बनाने में 12 दिन लग जाते हैं

1195
01:27:09,400 --> 01:27:14,040
भाई ये कौन य सा मेरे को बिल्कुल समझ नहीं आ रही से

1196
01:27:14,040 --> 01:27:18,880
आ वो अजर अमर है ना इसलिए

1197
01:27:18,880 --> 01:27:23,080
मल की जगन्नाथ जी की मूर्तियां बनाना इस सृष्टि को बनाने

1198
01:27:23,080 --> 01:27:27,120
से भी डबल मुश्किल ठीक पहले ुद मूर्तिया

1199
01:27:27,120 --> 01:27:33,080
बना रहे बता रहे कि इतनी महान है और फिर बोलते देखो मूर्ति पूजा कर

1200
01:27:33,080 --> 01:27:37,520
रहे तो भैया आइए वेदों में प्रमाण वाले

1201
01:27:37,520 --> 01:27:43,520
कहां चले गए व लुप्त हो गए पहले आते

1202
01:27:45,320 --> 01:27:48,680
आते

1203
01:27:48,680 --> 01:27:52,680
ने बलक कर दिया मे को परसों मैं इनके उसम गया हु

1204
01:27:52,680 --> 01:27:56,880
था लाइव में इन्होने पहले मेरे को एक्सेप्ट किया जैसे मेरी शक्ल देखी तुरंत

1205
01:27:56,880 --> 01:28:00,880
एक सेकंड में मेरे को ब्लॉक भी कर दिया वहां से और बच्चों

1206
01:28:00,880 --> 01:28:04,960
और छोटे छोटे बच्चों के साथ डिबेट कर रहे थे वहा बैठ के

1207
01:28:04,960 --> 01:28:10,960
मैं जो है वायु पुराण का एक रेफरेंस दे रहा

1208
01:28:11,040 --> 01:28:15,320
हूं य टी आर पहाड़ी जी आप मेरे को उतनी देर बता दीजिए कौन सी साइंस

1209
01:28:15,320 --> 01:28:19,520
है कि छ दिन में सृष्टि बन जाती है और 12 दिन लगते हैं मूर्ति बनाने

1210
01:28:19,520 --> 01:28:24,200
में ओ अब वही लोग जाने इस बात को

1211
01:28:24,200 --> 01:28:27,680
वायु पुराण 12वां

1212
01:28:27,680 --> 01:28:31,760
अध्याय पूर्वार्ध में ही है वायु पुराण

1213
01:28:31,760 --> 01:28:37,760
का 12वां अध्याय और 86

1214
01:28:48,880 --> 01:28:53,040
वा गोविंद जी आपने मतलब कि यह ज्ञान गंगा पुस्तक की मतलब

1215
01:28:53,040 --> 01:28:57,440
अच्छे से अध्ययन कर रखा एक एक चीज आपको मालूम मैंने हाई लाइटर

1216
01:28:57,440 --> 01:29:01,720
से इसका छोड़ा कुछ नहीं है मैंने जोक्स इसके लिखे हुए सारे

1217
01:29:01,720 --> 01:29:07,720
मैं इस कपिल शर्मा शो की तरह पता जब डिप्रेशन में

1218
01:29:08,800 --> 01:29:12,880
होता ना लज के हिब

1219
01:29:12,880 --> 01:29:17,240
है इसम ये तक बताया हु है कि द्रोपदी जी का जब वो

1220
01:29:17,240 --> 01:29:21,240
हरण हो रहा था तो कबीर जी प्रकट हुए व उने उनका

1221
01:29:21,240 --> 01:29:27,160
चीर रो

1222
01:29:27,160 --> 01:29:33,160
हम अध्याय और शलोक है 27 से

1223
01:29:36,240 --> 01:29:40,280
33 और यह अपने चैनल पर बैठकर हाथ जोड़ जोड़

1224
01:29:40,280 --> 01:29:46,280
के लोगों से प्रार्थना कर रहे हैं कि आवान चैनल पर नहीं

1225
01:29:46,440 --> 01:29:50,440
जाना मैं आपको अरे मैं वीडियो दिखा दूंगा मैं वीडियो दिखा

1226
01:29:50,440 --> 01:29:54,560
दूंगा आपको हाथ जोड़ जोड़ के प्रार्थना करते ना जिसको कि भैया ये देखिए

1227
01:29:54,560 --> 01:29:58,680
हाथ जुड़े हुए उनके चैनल पर कोई डिबेट करने बाबू राम

1228
01:29:58,680 --> 01:30:04,560
जी आए बाबू राम जी

1229
01:30:04,560 --> 01:30:09,000
बताए प्रमाण दे दू बस एक प्रमाण दे दूं योगी

1230
01:30:09,000 --> 01:30:13,400
जिस किसी ऐश्वर्य लक्षण वाले भूत

1231
01:30:13,400 --> 01:30:17,400
पर आसक्त होकर उसका सेवन करता है तब तक उसका निश्चित रूप से

1232
01:30:17,400 --> 01:30:21,600
विनाश हो जाता है इसलिए जो ब्राह्मण सूक्ष्म परस्पर संश क्त

1233
01:30:21,600 --> 01:30:25,800
भूत समूहों का परिहार करता है वही परम को प्राप्त करता है

1234
01:30:25,800 --> 01:30:30,440
यह देखा गया है कि दिव्य नेत्र वाले महात्मा ऋषि

1235
01:30:30,440 --> 01:30:34,680
गण भी सूक्ष्म भाव समूहों

1236
01:30:34,680 --> 01:30:39,680
में समाज शक्ति के कारण दोष युक्त कहे गए हैं

1237
01:30:39,680 --> 01:30:43,720
इसीलिए सूक्ष्म भूत समूहों में कभी भी

1238
01:30:43,720 --> 01:30:48,080
आस्थावान ना हो ऐश्वर्य से अनुराग उत्पन्न होता है

1239
01:30:48,080 --> 01:30:52,160
परंतु ब्रह्म जो है वो राग हीन है यह

1240
01:30:52,160 --> 01:30:56,200
मैं क्यों बता रहा हूं वायु प्राण ब्रह्म जो है राग हीन

1241
01:30:56,200 --> 01:31:00,200
है उसको राग नहीं होता किसी चीज से मगर ब्रह्म

1242
01:31:00,200 --> 01:31:04,240
जो इनके अनुसार जो काल ब्रह्म है जिसको य तथाकथित इनका जो नकली वाला

1243
01:31:04,240 --> 01:31:08,520
ब्रह्म है उसको यह बताते हैं कि उसको सृष्टि करने का राग

1244
01:31:08,520 --> 01:31:12,560
हो गया था है ना सृष्टि करने का राग हो गया था

1245
01:31:12,560 --> 01:31:16,600
ना इसी कारण से नई सृष्टि हुई ना वो सतलोक से आना पड़ा फिर उसको कॉपी करने

1246
01:31:16,600 --> 01:31:19,640
के चक्कर में लोगों को तो ब्रह्म जो है यहां

1247
01:31:19,640 --> 01:31:23,920
पर राग हीन होता है आगे बताया जा रहा है इसलिए सात सूक्ष्म

1248
01:31:23,920 --> 01:31:28,000
तत्वों का षड़ंग महेश्वर को जानकर प्र प्रकृति

1249
01:31:28,000 --> 01:31:32,280
नियोग निपुणता से पारदर्शी होने में समर्थ होते हैं

1250
01:31:32,280 --> 01:31:37,200
वही भगवान परब्रह्म को प्राप्त करते हैं

1251
01:31:37,200 --> 01:31:42,600
और वह परम जो परम ब्रह्म है विधित तत्व के ज्ञाता

1252
01:31:42,600 --> 01:31:46,920
महेश्वर डंग तत्व को इस प्रकार कहते हैं सर्व

1253
01:31:46,920 --> 01:31:51,840
ज्ञाता तृप्ति अनादि अनादि आ गया भैया

1254
01:31:51,840 --> 01:31:56,000
अनादि स्वतंत्र नित्य नित्य का मतलब

1255
01:31:56,000 --> 01:32:00,000
जिसका नाश नहीं होता नित्य है तो अनादि

1256
01:32:00,000 --> 01:32:04,040
भी आ गया और नित्य भी आ गया महेश्वर भगवान महेश के लिए यह वायु पुराण से

1257
01:32:04,040 --> 01:32:08,400
पढ़ रहा हूं मैं और इसके पूर्वार्ध का 12वां अध्याय

1258
01:32:08,400 --> 01:32:12,520
है और पहली बात ब्रह्म राग

1259
01:32:12,520 --> 01:32:16,520
हीन है यानी कि इनके द्वारा ब्रह्म की जो डेफिनेशन है सृष्टि रचना

1260
01:32:16,520 --> 01:32:20,640
में जो बताई गई है वो गलत है कि ब्रह्म को राग हो गया था

1261
01:32:20,640 --> 01:32:25,440
कुछ करने का कुछ पाने का कुछ खोने का राग था और

1262
01:32:25,440 --> 01:32:29,600
साथ ही साथ यहां पर भगवान को अनादि अनंत

1263
01:32:29,600 --> 01:32:34,560
शाश्वत कहा गया है जी अब ले लेते हैं कौन है

1264
01:32:34,560 --> 01:32:35,060
बाबू

1265
01:32:34,960 --> 01:32:39,280
राम दास जी को पहले ले ले मैं आपको

1266
01:32:39,280 --> 01:32:43,280
बात बोलूंगा शुक्ला जी बाबू राम

1267
01:32:43,280 --> 01:32:49,280
दास जी अपना कैमरा ऑन

1268
01:32:50,440 --> 01:32:55,360
करें हां जी बाबू राम जी बताए श्री

1269
01:32:55,360 --> 01:33:00,520
राम राम राम सर राम राम जी

1270
01:33:00,520 --> 01:33:04,560
बताए सर मैं आपसे कुछ पूछना चाहते हैं सर

1271
01:33:04,560 --> 01:33:08,840
हमारे मोबाइल में थोड़ा नेट कम चलता है इस से थोड़ा आपसे बात नहीं हो पा रही है

1272
01:33:08,840 --> 01:33:13,320
तो हम अभी साइड में है बाहर जी सर हम

1273
01:33:13,320 --> 01:33:17,400
ये पूछना चाहते हैं कि आपने संत रामपाल जी महाराज के लिए बहुत

1274
01:33:17,400 --> 01:33:21,560
आपने कुछ बोलते हैं तो अच्छा नहीं लगता है देखिए हम लोग

1275
01:33:21,560 --> 01:33:25,560
के और आप लोग के बीच में प्रकार से सब समस्या खड़ी हो रही है

1276
01:33:25,560 --> 01:33:29,880
भाई जिसमें जो सच्चाई है सच्चाई जनता के सामने आना चाहिए चाहे

1277
01:33:29,880 --> 01:33:34,120
कहीं से ज्ञान मिले जी तो हम यही चाहते

1278
01:33:34,120 --> 01:33:38,600
हैं कि अगर आप लोग ही बता दें कि वर्तमान में

1279
01:33:38,600 --> 01:33:42,720
जो ज्ञान सही है या संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सही है उस ज्ञान को हम लोग स्वीकार

1280
01:33:42,720 --> 01:33:47,000
किया जाए सब जनता ठीक है

1281
01:33:47,000 --> 01:33:50,040
तो मैं आपसे यही पूछना चा सही बात

1282
01:33:50,040 --> 01:33:54,240
जो है वही तो हम बता रहे हैं बाबूराम जी जी

1283
01:33:54,240 --> 01:33:58,400
तो मैं आपसे एक प्रश्न पूछ रहा हूं कि वर्तमान में

1284
01:33:58,400 --> 01:34:02,440
जैसे कि हिंदू धर्म में तो सब लोग कहते हैं कि भाई हम लोग सनातनी है हम

1285
01:34:02,440 --> 01:34:06,480
लोग सनातन धर्म को मानते एक मिनट एक मिनट एक मिनट पहले मैं ये कहूंगा

1286
01:34:06,480 --> 01:34:10,560
महे जी आप थोड़ा उठ के बैठ जाइए और मैं आपको ये कहूंगा बाबू

1287
01:34:10,560 --> 01:34:14,560
राम जी कि जी आपने एक बात कही कि आप बहुत

1288
01:34:14,560 --> 01:34:18,720
गलत चलत बातें बोलते देखिए हमने कोई गाली तो दी नहीं है

1289
01:34:18,720 --> 01:34:23,160
हमने ऐसा कोई शब्द नहीं बोला है जो मर्यादा के बाहर हो हां

1290
01:34:23,160 --> 01:34:27,280
मगर जो थोड़ी बहुत जो अप्रत्यक्ष रूप से आपको अमानना जैसी

1291
01:34:27,280 --> 01:34:31,320
फील हो रही है उसका कारण यह है कि हमारी दुर्गा माता के बारे में बहुत

1292
01:34:31,320 --> 01:34:35,480
गलत बातें बोली है रामपाल दास ने बहुत गलत

1293
01:34:35,480 --> 01:34:40,120
बात हमने कुछ नहीं बोला उसने यह तक बोला है दुर्गा माता के लिए

1294
01:34:40,120 --> 01:34:44,400
कि दुर्गा माता के साथ दुराचार हुआ था इस सृष्टि में कोई ऐसा तत्व

1295
01:34:44,400 --> 01:34:48,480
नहीं है जो उनके साथ कुछ कर सके जी तो पहले हमें सुधारने से पहले

1296
01:34:48,480 --> 01:34:52,840
आप अपने तत्वदर्शी को सुधारने जाइए और फिर य अपेक्षा करिए

1297
01:34:52,840 --> 01:34:56,920
यहां पर उसके लिए हीन भावना वाले वक्तव्य नहीं दिए जाएंगे जो व्यक्ति जिस

1298
01:34:56,920 --> 01:35:01,760
लायक है जो उदारता आपके अस्तित्व और आदर्श पर हारी

1299
01:35:01,760 --> 01:35:05,400
हो जाए हावी हो जाए वो उदारता उदारता नहीं कायरता कहलाती है

1300
01:35:05,400 --> 01:35:10,000
मेरी मां के विषय में तुम लोग ऐसे करोगे और यहां मैं आप लोगों का पूजा

1301
01:35:10,000 --> 01:35:14,080
करूंगा नहीं नहीं हम किसी के देखिए नहीं हम किसी के सा

1302
01:35:14,080 --> 01:35:18,840
किसी भी धर्म के बारे में किसी को भी अनदेखा नहीं कह रहे हैं जो

1303
01:35:18,840 --> 01:35:23,200
अगर माय देखिए क्या शब्द लिखा है मुझे पूरे शास्त्र

1304
01:35:23,200 --> 01:35:28,000
से मैं दिखा रहा

1305
01:35:28,000 --> 01:35:32,440
मैं बिल्कुल क्लियर दिखा रहा हूं आपको रुकिए इनका थोड़ा सा वहम दूर हो जाएगा ठीक है बक

1306
01:35:32,440 --> 01:35:36,440
पेज नंबर निकालो अरे पूरी षि रचना सुन लो ना सात आठ मिनट का

1307
01:35:36,440 --> 01:35:41,280
वीडियो है उसका लिखा हुआ है भा क्या लिखा

1308
01:35:41,280 --> 01:35:45,480
है और किसके बारे में लिखा हुआ है ये किसके

1309
01:35:45,480 --> 01:35:49,560
बारे में लिखा हुआ है येट लिखा हुआ है ये

1310
01:35:49,560 --> 01:35:53,720
कौन है हां ये कौन है बस करिए बस करिए हटा दीजिए

1311
01:35:53,720 --> 01:35:57,880
बस करिए कभी गए अपने त से ा

1312
01:35:57,880 --> 01:36:02,840
दर्शी से पूछने केय क्या लिख दिया तुमने दुर्गा माता के बारे में

1313
01:36:02,840 --> 01:36:07,000
ये पृष्ठ संख्या बताइए हम मिलाते हैं अपने हमारे पास भी बुक है ना बताओ इनको

1314
01:36:07,000 --> 01:36:12,000
पृष्ठ संख्या 24 नंबर

1315
01:36:12,000 --> 01:36:16,120
24 बुक कौन सा है ज्ञान

1316
01:36:16,120 --> 01:36:20,120
गंग पहचाना चलिए ठीक है अब इसको मिला लेंगे हमारे

1317
01:36:20,120 --> 01:36:24,200
पास अभी नेटवर्क अभी मिलाओ अब देखो बा भाई अब

1318
01:36:24,200 --> 01:36:29,240
अभी मिलाओ अगर सत्य के पक्षधर हो अभी मिलाओ

1319
01:36:29,240 --> 01:36:33,360
तुरंत बहुत सी वीडियो में तो यह कहा कि राम तो

1320
01:36:33,360 --> 01:36:37,360
बोले राम तो राजा के लाग नहीं था इस तरीके से बोला राम तो

1321
01:36:37,360 --> 01:36:41,360
राजा के ला नहीं था उसको तुम भगवान मानताओ आप

1322
01:36:41,360 --> 01:36:45,800
हमको आ रहे हो संस्कार सिखाने हमने आज तक कुछ ऐसी बात कही नहीं है

1323
01:36:45,800 --> 01:36:49,840
ना ही कोई व्यक्तिगत टिप्पणी की फैमिली के बारे में कोई टिप्पणी कर द

1324
01:36:49,840 --> 01:36:54,040
हो 24 ंबर पेज

1325
01:36:54,040 --> 01:37:00,040
नंबर है 24

1326
01:37:04,320 --> 01:37:08,840
नंबर दीपावली में भर भर के वीडियो उछाली है सोशल मीडिया पर इन लोगों ने

1327
01:37:08,840 --> 01:37:12,960
और आपको नहीं मिलेगा तो आपको

1328
01:37:12,960 --> 01:37:16,960
कहना चाहिए कि भाई मैं इतना बड़ा मुझे आपको दोष इस बात का देना चाहिए कि

1329
01:37:16,960 --> 01:37:21,360
तुम कैसे पुत्र हो जो अपनी मां के बारे में य सब बातें सुन कर के यहां पर

1330
01:37:21,360 --> 01:37:27,160
बात चौरिया रहे हो

1331
01:37:27,160 --> 01:37:31,480
देखि देखिए मेरा 24 देखिए बुक पेज नंबर

1332
01:37:31,480 --> 01:37:35,960
पेज नंबर 2 चैप्टर क्रमांक सब बता

1333
01:37:35,960 --> 01:37:40,040
दो आप आप लोग देख लीजिए 24 मेरा पेज

1334
01:37:40,040 --> 01:37:44,200
नंबर दिखा रहे आपके हाथ में अगर ज्ञान गंगा है

1335
01:37:44,200 --> 01:37:48,760
तो उसी में आपको सबूत मिलेगा दिखा चैप्टर

1336
01:37:48,760 --> 01:37:53,920
यह कौन सी पुस्तक हैन पर देखि एक बार ठीक है

1337
01:37:53,920 --> 01:37:58,280
वही पुस्तक है दूसरा पुस्तक नहीं लिया वही पुस्तक है सता है आपके प

1338
01:37:58,280 --> 01:38:02,960
क्रमांक बदल गए हो छपाई में कोई बात नहीं कोई बात नहीं अभी

1339
01:38:02,960 --> 01:38:07,920
आहा रचना होगी शायद नहीं भक्ति मर्यादा

1340
01:38:07,920 --> 01:38:11,960
है रना है नहीं

1341
01:38:11,960 --> 01:38:17,960
ठीक सृष्टि रचना का पहला दूसरा तीसरा पन्ना

1342
01:38:20,120 --> 01:38:23,560
जी लो

1343
01:38:23,560 --> 01:38:28,480
ये वाला पेज है आप य हेलो

1344
01:38:28,480 --> 01:38:31,880
देख रहे देख रहे खल देख

1345
01:38:31,880 --> 01:38:36,200
रहे और आपके यहां के लोगों का खून पता नहीं क्यों नहीं खोलता

1346
01:38:36,200 --> 01:38:40,280
जब आप लोग यहां पर बैठ के प्रचार करते हो पुस्तकें देते हो ठीक है मैं

1347
01:38:40,280 --> 01:38:44,400
कुछ बोलना नहीं चाहता हूं लाइव वीडियो में ठीक है लेकिन यदि

1348
01:38:44,400 --> 01:38:49,680
ठीक है समझ जाइए बाकी बात किसी का खून खोल किसी

1349
01:38:49,680 --> 01:38:54,320
दिन तो एक नई सृष्टि की रचना हो जाएगी

1350
01:38:54,320 --> 01:38:58,320
पुरानी वाली का विवांस हो जाएगा अरे

1351
01:38:58,320 --> 01:39:02,520
भाई क्या हुआ क्या बहुत देर लग रही है बाबू भाई नहीं

1352
01:39:02,520 --> 01:39:08,520
मेरे में तो देखिए नहीं मिल रहा है

1353
01:39:08,960 --> 01:39:13,120
क्योंकि एक ब्रहमांड का मेन

1354
01:39:13,120 --> 01:39:18,600
प दिखाइए बुक का

1355
01:39:18,600 --> 01:39:23,720
देखना रचना वाला पेज दिखाइए जो दिखा रहे

1356
01:39:23,720 --> 01:39:27,960
ये एक ब्रह्मांड का लघु चित्र आप पहले 24 नंबर पेज खोलिए ना

1357
01:39:27,960 --> 01:39:32,040
जरा इ इनकी स्क्रीन करिए जो है ना मेन स्क्रीन इनकी

1358
01:39:32,040 --> 01:39:37,480
लाइए मैं इनको गाइड करता हूं थोड़ा सा इनको मेन स्क्रीन पर ले लो

1359
01:39:37,480 --> 01:39:41,560
भैया हां ये है ना आपका चलिए इसम अगले दो पेज और

1360
01:39:41,560 --> 01:39:45,640
पलट यही हैका सुनिए आप अपना बैक कैमरा ऑन कर लीजिए बैक

1361
01:39:45,640 --> 01:39:49,800
कैमरा ब दिखाइए आप स्वयं ना देखिए बैक कैमरा ऑन

1362
01:39:49,800 --> 01:39:54,400
कर लीजिए आप उसके आगे ये चित्र आने वाला है ये वाला एक ब

1363
01:39:54,400 --> 01:39:58,680
भाई आप अपना बैक कैमरा ऑन कर

1364
01:39:58,680 --> 01:40:03,000
लीजिए बैक कैमरा ऑन करिए और आपका पृष्ठ

1365
01:40:03,000 --> 01:40:07,800
मिले या ना मिले उससे हमें कोई लेना देना बाबू भाई

1366
01:40:07,800 --> 01:40:11,960
बक कमरा न करलो बैक कैमरा ऑन

1367
01:40:11,960 --> 01:40:16,480
कर लो क चले गए बैक कैमरा

1368
01:40:16,480 --> 01:40:22,480
ले टू स्टॉप द ट्रेन पुल चन

1369
01:40:26,400 --> 01:40:31,280
इनको इनको बोले दिखाइए क्यों भाग रहे हैं व पीछे

1370
01:40:31,280 --> 01:40:36,560
आ गए आ गए आ गए आओ भैया आ

1371
01:40:36,560 --> 01:40:40,960
जाओ बाबू भाई आ

1372
01:40:40,960 --> 01:40:45,280
जाइए बैक कैमरा ऑन कर लीजिए बाबू भाई

1373
01:40:45,280 --> 01:40:49,960
कैमरा नहीं हो रहा है कट जा रहा है क्या नहीं

1374
01:40:49,960 --> 01:40:55,960
हो बै कमरा नहीं हो रहा कट जाता है

1375
01:40:57,280 --> 01:41:01,280
चलो बुक ऊपर ले लो आप हम लोग पन्ना कहते जाएंगे आप पलटते जाना

1376
01:41:01,280 --> 01:41:05,280
बुक ऊपर ले लो

1377
01:41:05,280 --> 01:41:09,440
आप बुक ऊपर ले लो बाबू भाई जी जी

1378
01:41:09,440 --> 01:41:14,320
जी जी मैं उ बुक परर में लिया देख लीजिए

1379
01:41:14,320 --> 01:41:19,120
देखिए हा थोड़ा पास लाओ कैमरे के

1380
01:41:19,120 --> 01:41:23,320
हटाओ मत उसको हम लोग बताएंगे ना आपको पन्ना पलटने के लिए आप वही रखो

1381
01:41:23,320 --> 01:41:28,920
कैमरे के सामने जी जी जी कैमरे के सामने

1382
01:41:28,920 --> 01:41:33,520
रखो अरे इतनी दूर नहीं पास में ला कैमरे

1383
01:41:33,520 --> 01:41:37,960
के [संगीत] हा

1384
01:41:37,960 --> 01:41:42,000
ऐसे क्या पता चलेगा आपका बैक कैमरा चालू नहीं हो

1385
01:41:42,000 --> 01:41:46,440
रहा क्या फोन का कट जा रहा है ना

1386
01:41:46,440 --> 01:41:52,440
सर बक कैमरा मेरा तो नहीं कटेगा मैं तो अभी करके दिखा दूं आपको

1387
01:41:53,720 --> 01:41:58,160
र आपकी ज्ञान गंगा है य जन गंगा

1388
01:41:58,160 --> 01:42:02,320
आपको दिखा रहे आप देख नहीं पा रहे शायद दिखा दो भैया अपनी ज्ञान

1389
01:42:02,320 --> 01:42:06,040
गंगा

1390
01:42:06,040 --> 01:42:10,160
इनको ज्ञान गंगा दिखा दो मैं

1391
01:42:10,160 --> 01:42:14,160
तो दिखा रहा देखि मेरा मत दि आपकी ज्ञान गंगा पढ़ने में

1392
01:42:14,160 --> 01:42:20,160
आ रही है क्या आपका बकम रा क्या

1393
01:42:21,120 --> 01:42:25,120
कर नहीं क्या नहीं नहीं मैं इनको एक और बात क्लियर कर

1394
01:42:25,120 --> 01:42:29,400
देता हूं आप यहां से भाग इसलिए नहीं सकते क्योंकि आप पेज पलटे ना पलटे

1395
01:42:29,400 --> 01:42:33,440
यह जो हम दिखा रहे हैं ना स्क्रीन पर ये आपके बाबा रामपाल जी की वेबसाइट से डाउनलोड की

1396
01:42:33,440 --> 01:42:37,480
गई है पीडीएफ ठीक है तो मैंने आपको बुक खोल के

1397
01:42:37,480 --> 01:42:41,560
दिखा दिया है पीडीएफ में भी सेम बात लिखी हुई है ले आइए स्पी बड़ा

1398
01:42:41,560 --> 01:42:45,800
करके दिखाओ 27 नंबर पेज पर लेके आइए इसको 27 नंबर पर देखिए

1399
01:42:45,800 --> 01:42:50,080
जो संत रामपाल जी महाराज ने जो भी अगर लिखे हैं उनका जो ज्ञान है मि

1400
01:42:50,080 --> 01:42:53,400
र दो मिनट चुप रहिए

1401
01:42:53,400 --> 01:42:56,080
सड़ करने

1402
01:42:56,080 --> 01:43:00,480
लगे ये शब्द तुमको दुर्गा माता के लिए सही लग रहा है क्या

1403
01:43:00,480 --> 01:43:04,840
नहीं नहीं दिखाइए आप कहां लिखा हुआ है हा बस जूम कर

1404
01:43:04,840 --> 01:43:09,080
दीजिए हा बस आ गया ना ये तो मैं पढ़ दू या स्क्रीन से

1405
01:43:09,080 --> 01:43:12,440
आपको पढ़ना आता

1406
01:43:12,440 --> 01:43:16,240
है जी जी पढ़

1407
01:43:16,240 --> 01:43:20,600
ले हुई है आप मेरे बड़े भाई हो बहन

1408
01:43:20,600 --> 01:43:24,920
भाई का योग बना महापाप का कारण बनेगा परंतु जति निरंजन में प्रकृति

1409
01:43:24,920 --> 01:43:29,120
देवी को एक भी प्रार्थना नहीं सुनी तथा अपनी सब शक्ति द्वारा

1410
01:43:29,120 --> 01:43:33,400
नाखूनों से स्त्री इंद्र प्रकृति को लगा तथा

1411
01:43:33,400 --> 01:43:37,880
बलात्कार करने की ठानी उसी समय

1412
01:43:37,880 --> 01:43:42,160
दुर्गा ने अपनी इज्जत रक्षा के लिए जी इसको तो संत रामपाल

1413
01:43:42,160 --> 01:43:46,160
जी महाराज ने बताया तो है कि इसलिए इस प्रकार से उनके साथ ऐसा कर रहा

1414
01:43:46,160 --> 01:43:50,200
था ज्योति निरंजन नहीं य कौन

1415
01:43:50,200 --> 01:43:54,040
शत्र में खा के साथ ऐसा हुआ

1416
01:43:54,040 --> 01:43:59,080
भाई उनको वहा तक तत्वदर्शी है तो उनको वहा तक की

1417
01:43:59,080 --> 01:44:03,120
जानकारी फिर हमसे मत बोलो तुम रामपाल के लिए सब क्यों बोल

1418
01:44:03,120 --> 01:44:07,800
रहे हो हम भी तत्वदर्शी है य बैठे सब तर्शी है

1419
01:44:07,800 --> 01:44:12,920
तत्वदर्शी है तो शस्त्र से ज्ञान देता था या अपने से कहानी बनाता था तत्वदर्शी

1420
01:44:12,920 --> 01:44:18,680
र् का काम क्या होता

1421
01:44:18,680 --> 01:44:23,720
खागा आए तुम हमको ज्ञान देने आप लोग रामपाल के लिए

1422
01:44:23,720 --> 01:44:29,720
बोल रहे हो और तुम्हारा रामपाल ये बोल के बैठा उसको कुछ बोलने नहीं जाओगे वो तत्वदर्शी

1423
01:44:30,120 --> 01:44:34,320
है बना द अपने से कहानी तो मेरे को तत्वदर्शी बोलोगे तुम

1424
01:44:34,320 --> 01:44:38,400
मैं बाबू राम पूछ रहा मैं अपने से कहानी बनाऊ अगर तुम्हारे कबीर जी

1425
01:44:38,400 --> 01:44:42,400
के बारे में कोई ऐसी बात बोलू तो तुम मेरे को तत्वदर्शी मान लोगे

1426
01:44:42,400 --> 01:44:46,440
उ उन्होने य जो ज्ञान गंगा पुस्तक है सुप्रीम

1427
01:44:46,440 --> 01:44:50,600
कोट बाबू बाबू सुनो प्यार से दूसरी बात कोई करनी

1428
01:44:50,600 --> 01:44:54,640
है तो वो करो वरना जाओ सुप्रीम को फालतू की बकवास मत

1429
01:44:54,640 --> 01:44:58,800
करना मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं ऐसी बातें मत करना अभी यहां पर गल कर लूंगा ना

1430
01:44:58,800 --> 01:45:02,840
सुप्रीम कोर्ट में जो तुम झूठ बोलते हो ना तुम्हारा सुप्रीम कोर्ट का झूठ यही धरा का धरा रह

1431
01:45:02,840 --> 01:45:07,600
जाएगा हमारे पास गल भी है औरन भी है साथ में शेयर करने वाली

1432
01:45:07,600 --> 01:45:11,800
ठीक है प बन आए रामपाल

1433
01:45:11,800 --> 01:45:16,120
के लिए बड़े अच्छे शब्द निकाले जो हमारी मां के बारे में सब बातें कर रहा है

1434
01:45:16,120 --> 01:45:20,360
उसकी पूजा करें हम लोग यहा बैठ कर के इनके ऊपर केस होना

1435
01:45:20,360 --> 01:45:24,480
पब्लिकेशन जो इसको छाप रहा है उसके ऊपर भी केस होना बदले इन किताबों को

1436
01:45:24,480 --> 01:45:28,480
बदले कहां से केस होगा कहां से केस होगा सब तो बटे बैठे है ना

1437
01:45:28,480 --> 01:45:32,480
हिंदू कोई मतलब है किसी को

1438
01:45:32,480 --> 01:45:35,360
सब बटे बैठे

1439
01:45:35,360 --> 01:45:39,560
हैं अपने ही बंदों को खाने के लिए जब कोई बैठ सुनिए

1440
01:45:39,560 --> 01:45:44,160
सुनिए मैं आपकी बात पंडित सूर्य प्रकाश जी की बात

1441
01:45:44,160 --> 01:45:48,280
करकड़ा एक ककड़ा जब बाहर निने लगता हैना तो दूसरा उसको खच के अंदर

1442
01:45:48,280 --> 01:45:53,400
लेता है वैसे हिंदुओ काल हो गया है

1443
01:45:53,400 --> 01:45:57,600
पल बताओ तुम मुझे बाबू तुम मुझे ये बताओ तुम मुझे

1444
01:45:57,600 --> 01:46:01,800
ये बताओ ये जो ये जो चीज है जो लिखी हुई

1445
01:46:01,800 --> 01:46:06,520
है वहां पर यह शास्त्र में कहां लिखी है बताओ

1446
01:46:06,520 --> 01:46:10,520
अब इसका उन्होंने प्रमाण हर देवी भागवत से दिए हैं वेद से दिए

1447
01:46:10,520 --> 01:46:15,960
ग पूछ रहा हूं शास्त्र में कहां लिखी है आप मुझे शास्त्र का नाम

1448
01:46:15,960 --> 01:46:20,120
बताइए अब देखिए हम उसको शास्त्र से तो हम अभी नहीं मिलाए है तो उसको हम कैसे

1449
01:46:20,120 --> 01:46:24,400
क सकते हैं प क्यों ले रहे उसका तत्वदर्शी चलो तत्वदर्शी

1450
01:46:24,400 --> 01:46:28,880
है वो सिद्ध करोगे तत्वदर्शी है वो उन्होंने

1451
01:46:28,880 --> 01:46:33,000
सभी ग्रंथों से खुल खुल करके अरे या मैं कह रहा हूं वो तत्वदर्शी

1452
01:46:33,000 --> 01:46:37,000
है ये कैसे सिद्ध होता है ये बताओ चलो तत्वदर्शी कैसे

1453
01:46:37,000 --> 01:46:41,240
सिद्ध होता है ब तत्वदर्शी का मतलब क्या होता है ये तत्वदर्शी का

1454
01:46:41,240 --> 01:46:45,560
मतलब क्या होता है तत्वदर्शी का मतलब ये होता है कि जो तत्व

1455
01:46:45,560 --> 01:46:49,560
ज्ञान को दे जो यहां से वो मत बताओ मुझे मुझे मुझे बताओ कहां

1456
01:46:49,560 --> 01:46:50,400
से सिद्ध होता है

1457
01:46:50,400 --> 01:46:54,600
कि रामपाल तत्वदर्शी है ये बताओ चलो उन्होंने

1458
01:46:54,600 --> 01:46:58,680
बताया है कि तत्वदर्शी वही होगा जो गीता अध्याय 15 श

1459
01:46:58,680 --> 01:47:03,560
बताओ मेरे भाई हम लोग शास्त्र को मानेंगे पहले कि पहले उन्हे तत्वदर्शी मान लेंगे

1460
01:47:03,560 --> 01:47:08,040
जी जी जी जी बता रहे हैं गीता गीता अध्याय 15

1461
01:47:08,040 --> 01:47:12,640
श्लोक नंबर एक से चार को जो व्यक्ति जड़ से लेकर पत्ते तक डिटेल

1462
01:47:12,640 --> 01:47:16,720
र् शब्द ही नहीं लिखा हुआ तुम्हारा एक और झूठ पकड़ा गया वहां तत्वदर्शी शब्द ही नहीं

1463
01:47:16,720 --> 01:47:21,120
लिखा गया तो पहला झूठ तो

1464
01:47:21,120 --> 01:47:25,400
आप रामपाल तोतो भैया रट्टू

1465
01:47:25,400 --> 01:47:30,560
तोते हो तुम लोग रट्टू

1466
01:47:30,560 --> 01:47:34,720
तोते शब्द दिखा दो मैं मान लूंगा उसको 15 एक से चार में तत्वदर्शी

1467
01:47:34,720 --> 01:47:39,400
शब्द दिखा दीजिए में तत्वदर्शी लिखा है बोलो

1468
01:47:39,400 --> 01:47:43,560
रुकिए हम भी खोल ले रहे हैं खोल लो खोलो खोल

1469
01:47:43,560 --> 01:47:49,560
लो

1470
01:48:04,480 --> 01:48:10,440
जलेब बनाएंगे अभी थोड़ी देर

1471
01:48:10,440 --> 01:48:14,640
बाद इसमें जो 15 अध्याय के जो से लेकर

1472
01:48:14,640 --> 01:48:19,080
के चार लोक तक जो है तत्वदर्शी दिखाओ

1473
01:48:19,080 --> 01:48:23,360
उसम लिखा हुआ गीता में

1474
01:48:23,360 --> 01:48:27,880
गीता में तत्वदर्शी लिखा हुआ दिखाए अरे 15.1

1475
01:48:27,880 --> 01:48:32,320
में तुम 15.1 से सिद्ध कर रहे हो ना

1476
01:48:32,320 --> 01:48:36,400
एक से चार में बताए हम खा है

1477
01:48:36,400 --> 01:48:42,400
अरे तत्वदर्शी कहा लिखा

1478
01:48:42,840 --> 01:48:46,840
है जी जी जी बता बता रहे एक मिनट ता

1479
01:48:46,840 --> 01:48:52,840
प में दिखाओ मुझे भाई जी जी बता रहे

1480
01:48:52,880 --> 01:48:57,240
दर्शी संत लिखा है क्या हां बता रहे हैं उस लिखा हुआ है

1481
01:48:57,240 --> 01:48:59,240
अर्थ को सुनिए उसमें

1482
01:48:59,240 --> 01:49:03,520
लिखा हुआ है आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले और ब्रह्मा

1483
01:49:03,520 --> 01:49:07,560
रूप मुख शाखा वाले जिस

1484
01:49:07,560 --> 01:49:09,360
जिस संसार रूप पीपल के

1485
01:49:09,360 --> 01:49:13,640
बीज को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए

1486
01:49:13,640 --> 01:49:17,640
बताओ रुक जाओ एक मिनट रुक जाओ क्या ये जो पीपल

1487
01:49:17,640 --> 01:49:22,240
रूपी वृक्ष है संसार रूपी वृक्ष ये अविनाशी है

1488
01:49:22,240 --> 01:49:26,280
जी अविनाशी है अरे जो

1489
01:49:26,280 --> 01:49:30,440
अर्थ बनाया उसने अविनाशी लिखा है लिखा तुम मानते हो कि नहीं

1490
01:49:30,440 --> 01:49:33,760
संसार रूपी वृक्ष अविनाशी

1491
01:49:33,760 --> 01:49:38,040
है हमारे गुरु संसार रूपी

1492
01:49:38,040 --> 01:49:42,120
वृक्ष अविनाशी है कि नहीं भाई जो चीज इसम लिखा

1493
01:49:42,120 --> 01:49:46,200
हुआ उसको हम क्यों नहीं माने भाई तुम मानते हो कि नहीं मैं पूछ रहा हूं जो चीज लिखी

1494
01:49:46,200 --> 01:49:50,600
है मानते हो मानते हैं मानते हैं मानते हो

1495
01:49:50,600 --> 01:49:55,000
इसम क्या ब्रह रूप वाला तो जब पेड़ अविनाशी

1496
01:49:55,000 --> 01:49:59,040
है तो ब्रह्मा रूप शाखा क्या हो गई अविनाशी हो गई

1497
01:49:59,040 --> 01:50:03,040
ब्रह्मा को अविनाशी मानते हो ठीक है उसका लोक

1498
01:50:03,040 --> 01:50:07,160
पूरा तो पढ़ने दीजिए काट क्यों रहे हैं बा अरे मेरे भाई जहा तक पढ़ लिया उसको

1499
01:50:07,160 --> 01:50:12,680
तो क्लियर कर ले ब्रह्मा जी को अविनाशी मानते हो

1500
01:50:12,680 --> 01:50:16,840
भाई अगर लिखा होगा तो क्यों नहीं मानेंगे अगर नहीं लिखा कैसे माने सामने लिखा

1501
01:50:16,840 --> 01:50:21,160
मैं पूछ रहा हूं ना सामने लिखा है ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाला

1502
01:50:21,160 --> 01:50:24,800
यह लिखा है रुक जाइए देख रहा हूं

1503
01:50:24,800 --> 01:50:28,840
मैं आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले

1504
01:50:28,840 --> 01:50:33,080
ब्रह्मा रूप ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाले हा

1505
01:50:33,080 --> 01:50:37,440
जी ब्र खा है ब्रह्मा रूप शाखा

1506
01:50:37,440 --> 01:50:41,520
वाला पेड़ पेड़ अविनाशी तो जब उस

1507
01:50:41,520 --> 01:50:45,560
पेड़ में जो मुख्य शाखा है व है ब्रह्मा तो जब पेड़ अविनाशी

1508
01:50:45,560 --> 01:50:49,760
है तो उसकी जो शाखा है वो भी अविनाशी हो गई ना भाई आगे

1509
01:50:49,760 --> 01:50:53,840
अगर अविनाशी ब्रह्मा रूप को लिखा होगा तब हम उसको कहेंगे जब लिखा नहीं है तो कैसे कर

1510
01:50:53,840 --> 01:50:58,160
अरे ब्रह्मा मैं कह रहा हूं य तुम्ह अविनाशी दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है

1511
01:50:58,160 --> 01:51:02,200
ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाला लिखा हुआ है अब सु यानी कि तुम ये कह

1512
01:51:02,200 --> 01:51:06,200
रहे हो पे पेड़ जो है अविनाशी नहीं है वो कट जाती है उसकी डाल ब्रह्मा जो है वो खत्म हो

1513
01:51:06,200 --> 01:51:10,200
जाते हैं भाई सर लिखा होगा तब तो हम कहेंगे ऐसे कैसे

1514
01:51:10,200 --> 01:51:14,400
कर दे अरे तो रहा य ब्रह्मा जब उसकी शाखा है

1515
01:51:14,400 --> 01:51:18,760
जब ब्रह्मा रूप उसका मुख्य शाखा है और पेड़ जो है वो अविनाशी

1516
01:51:18,760 --> 01:51:24,040
है तो तुम ब्रह्मा जी को अविनाशी मानोगे कि नहीं मानोगे बताओ

1517
01:51:24,040 --> 01:51:28,240
भाई ब्रह्मा जी को अविनाशी नहीं लिखा हुआ हम इसको कैसे कर हम झूठ कैसे बोल क्या लिखा

1518
01:51:28,240 --> 01:51:32,360
है ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले संसार रूपी पीपल वृक्ष को अविनाशी कहते

1519
01:51:32,360 --> 01:51:36,640
हैं अविनाशी पीपल का वृक्ष है सुनो पीपल का वृक्ष

1520
01:51:36,640 --> 01:51:39,880
अविनाशी है कि नहीं है यह बताओ पहले

1521
01:51:39,880 --> 01:51:44,080
जी उस पीपल बृ को अविनाशी बोला है और फिर

1522
01:51:44,080 --> 01:51:48,200
यानी कि उसकाय नहीं हो सकता उसको काटा

1523
01:51:48,200 --> 01:51:54,200
मारा नहीं जा सकता और ब्रह्मा क्या उस वक्ष

1524
01:51:54,360 --> 01:51:58,560
रुक रुक एक मिनट रुक जा यहां पर हमारे गुरुजी ने अर्थ को बताए हैं जो

1525
01:51:58,560 --> 01:52:02,840
हा अधम जो उर्ध्व मूलम को लिखा आदि पुरुष परमेश्वर

1526
01:52:02,840 --> 01:52:07,480
वाले इसके बाद आया है जो ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाला है इसको जो

1527
01:52:07,480 --> 01:52:11,800
इसका जो संस्कृत लिखा हुआ अध खम लिखा हुआ है भाई साहब

1528
01:52:11,800 --> 01:52:16,080
मैं आपसे पूछ रहा हूं अभी आप अर्थ पढ़ रहे थे आपने बोला ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा

1529
01:52:16,080 --> 01:52:20,160
वाले अर्थ गलत है क्या भाईयो यहां पर जो हमारे

1530
01:52:20,160 --> 01:52:24,400
गुरुजी जिस आधार अर्थ को बताए है यहां पर गलत है ये अर्थ

1531
01:52:24,400 --> 01:52:28,560
य यही प अर्थ जो है गलत है आपके

1532
01:52:28,560 --> 01:52:32,880
जो आपके जो वो क्या कहते उनको ति

1533
01:52:32,880 --> 01:52:36,960
दर्शी तत्वदर्शी वो सही अर्थ आपको बता रहे हैं है

1534
01:52:36,960 --> 01:52:39,240
ना

1535
01:52:39,240 --> 01:52:44,040
उन्होने उसको हम सिद्ध कर रहे हैं आपको दिखा रहे हैं आप थ शांत हो जाइए

1536
01:52:44,040 --> 01:52:48,240
हा इस अखम का इसमें दिए है उन्होंने दूसरे

1537
01:52:48,240 --> 01:52:52,640
श्लोक में दूसरे लोक में दूसरे शलोक

1538
01:52:52,640 --> 01:52:54,960
देखिए दूसरा श्लोक में अध लिखा हुआ है एक जगह तो

1539
01:52:54,960 --> 01:52:59,160
अध माने नीचे लिखा हुआ है उसका अर्थ

1540
01:52:59,160 --> 01:53:03,600
तो अध माने नीचे अ नीचे लिखा हुआ है तो इस पहला

1541
01:53:03,600 --> 01:53:07,600
का पहले वाले श्लोक का जो अम लिखा हुआ है तो इसका होगा

1542
01:53:07,600 --> 01:53:11,920
अध साख का मतलब होगा नीचे की ओर शाखा वाले

1543
01:53:11,920 --> 01:53:16,320
अब आप ये बताइए कि य प आप ब्रह्मा जी को मानते हैं कि नहीं मानते

1544
01:53:16,320 --> 01:53:20,640
यहां ब्रह्मा जी है ब्रह्मा लिखा हुआ है नहीं लिखा है ब्रह्मा ब्रह्मा

1545
01:53:20,640 --> 01:53:25,600
लिखा हु इसको हम मानते हैं लेकिन जो हमारे गुरुजी ने बताया उसको बताया आपको

1546
01:53:25,600 --> 01:53:29,720
रे गुरुजी को क्यों माने चलो ठीक है र् बताओ इसम इस लोक

1547
01:53:29,720 --> 01:53:33,800
में तत्वदर्शी बताओ चलो बताओ चलो जी

1548
01:53:33,800 --> 01:53:37,920
जी बता रहे आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले ब्रह्मा रूप

1549
01:53:37,920 --> 01:53:41,520
मुख शाखा वाले संसार रूपी पीपल

1550
01:53:41,520 --> 01:53:45,840
के बृज को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं

1551
01:53:45,840 --> 01:53:49,920
उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित

1552
01:53:49,920 --> 01:53:53,640
तत्व से जानता है

1553
01:53:53,640 --> 01:53:58,160
जो तत्व से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला

1554
01:53:58,160 --> 01:54:02,160
है अब अब यहां पर तत्व से जानने के लिए बोला

1555
01:54:02,160 --> 01:54:06,280
गया है कहा है तो भाई

1556
01:54:06,280 --> 01:54:10,640
तत्वदर्शी य नहीं जानता अच्छा एक बात बताओ वेदों

1557
01:54:10,640 --> 01:54:16,640
को जानने वाला तत्वदर्शी होता है क्या आपके अनुसार

1558
01:54:17,480 --> 01:54:23,400
भाई वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी होता है क्या आपके अनुसार

1559
01:54:23,400 --> 01:54:27,480
जी जी जी इसमें लिखा हुआ है कि वेद उसके सुनो य

1560
01:54:27,480 --> 01:54:31,560
पर पेड़ को तत्व से जानने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया जो

1561
01:54:31,560 --> 01:54:35,560
पेड़ को तत्व से जानता है पेड़ को तत्व से जानने वाले को वेदों को जानने वाला कहा

1562
01:54:35,560 --> 01:54:40,200
गया तो क्या आप वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी मानते

1563
01:54:40,200 --> 01:54:44,240
हैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल जो वेदों को जानेगा वह

1564
01:54:44,240 --> 01:54:48,680
तत्वदर्शी होगा ठीक है अच्छा

1565
01:54:48,680 --> 01:54:52,880
क्या वेदों में पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का पूर्ण दिया

1566
01:54:52,880 --> 01:54:57,960
गया है जी परमात्मा के बारे

1567
01:54:57,960 --> 01:55:01,960
में होने लगा मैं पूछ रहा हूं क्या वेदों में

1568
01:55:01,960 --> 01:55:06,040
आपके अनुसार परमात्मा का पूर्ण ज्ञान दिया गया है या

1569
01:55:06,040 --> 01:55:08,720
किसी और वेद की जरूरत है

1570
01:55:08,720 --> 01:55:12,760
किसी और वेद की जरूरत है उसम पूर्ण ज्ञान नहीं है इस तो

1571
01:55:12,760 --> 01:55:17,120
इसका मतलब वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी सिद्ध नहीं हुआ

1572
01:55:17,120 --> 01:55:21,280
और इस इसमें भी सुन लीजिए गीता में पूछ रहा पहले इस बात

1573
01:55:21,280 --> 01:55:26,080
का उत्तर दो वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी सिद्ध हुआ क्या

1574
01:55:26,080 --> 01:55:30,280
तुम ही कह रहे हो इसमें पूर्ण ज्ञान नहीं है वेदों में

1575
01:55:30,280 --> 01:55:34,320
भाई जो तत्वदर्शी हो वही तो उसको क्लियर करेगा कि कौन सही

1576
01:55:34,320 --> 01:55:38,840
है कौन गलत है कहां तक जन को जानने वाला तत्वदर्शी से दोरा है क्या

1577
01:55:38,840 --> 01:55:42,960
क्योंकि वेदों में तो पूर्ण ज्ञान है ही नहीं तो भाई उस

1578
01:55:42,960 --> 01:55:47,560
तत्वदर्शी इसलिए तो उसको सही का चि मार रहा क्रस का चि मार रहा है कि नहीं कहां तक ज्ञान है क

1579
01:55:47,560 --> 01:55:51,640
पहले र् तो सिद्ध होगा तब तो व चिन्ह मारेगा ना पहले तुम

1580
01:55:51,640 --> 01:55:55,680
तत्वदर्शी सिद्ध करोगे पहले च चिन्ह मरवाओ ग भाई

1581
01:55:55,680 --> 01:56:01,680
वो तद को जानने वाला वो दिखा दो दुर्गा देवी दुर्गा

1582
01:56:02,200 --> 01:56:06,240
से अभी तो गीता ही दिखा रहे गीता तो क्लियर कर लीजिए इसके बाद आगे

1583
01:56:06,240 --> 01:56:10,320
दिखाएंगे आपको अरे भा आपको वेदों को जानने वाला कौन है

1584
01:56:10,320 --> 01:56:14,360
यह दिखा रहे हैं वेदों को जानने वाला कौन हैय दिखा रहे हैं चलो

1585
01:56:14,360 --> 01:56:19,240
चलो गीता को क्लियर कर ले चलो

1586
01:56:19,240 --> 01:56:22,720
कर निकालो

1587
01:56:22,720 --> 01:56:27,160
निकालो जी निकल गया निकल गया पढ़ो

1588
01:56:27,160 --> 01:56:31,280
जी पढ़ो इस संसार इस संसार का वृच

1589
01:56:31,280 --> 01:56:36,440
का स्वरूप जैसा कहा गया है वैसा यहां विचार काल में नहीं पाया जाता है

1590
01:56:36,440 --> 01:56:40,600
हा पाया जाता है क्योंकि क्योंकि ना

1591
01:56:40,600 --> 01:56:44,680
तो इसका आदि है और ना अंत है तथा ना इसकी

1592
01:56:44,680 --> 01:56:49,160
अच्छी प्रकार से स्थिति है इसलिए इस इस अहं

1593
01:56:49,160 --> 01:56:53,240
ममता अवर वासना रूप अति दृढ़ मूल वाले सार रूप पीपल

1594
01:56:53,240 --> 01:56:57,680
के बृज को दृढ़ वैराग से शस्त्र द्वारा काटकर काटकर

1595
01:56:57,680 --> 01:57:01,760
उसके पत वैराग्य संसार रूपी वृक्ष

1596
01:57:01,760 --> 01:57:05,880
को काटने के लिए क्या चाहिए तत्व

1597
01:57:05,880 --> 01:57:10,440
ज्ञान चाहिए नहीं वैराग्य भी चाहिए

1598
01:57:10,440 --> 01:57:14,880
15.3 वैराग्य भी चाहिए जी

1599
01:57:14,880 --> 01:57:17,280
हा वैराग्य स्या

1600
01:57:17,280 --> 01:57:22,280
है आपके तत्वदर्शी है एक मिनट इसमें यह बोला गया

1601
01:57:22,280 --> 01:57:26,360
श्लोक में कि जिस प्रकार से इसमें बताया गया है कि ऊपर का जोड़ नीचे की

1602
01:57:26,360 --> 01:57:30,720
शाखा वाला तो ऐसा य विचार क भाई भाई सुनो जो तत्वदर्शी

1603
01:57:30,720 --> 01:57:34,920
है वो जो पेड़ को है वो काटने वाला होगा ना काटने

1604
01:57:34,920 --> 01:57:38,920
में सामर्थ मान हां जी वही बता सकता है कि ये संसार

1605
01:57:38,920 --> 01:57:42,960
कैसा बना हुआ है तो ठीक है वो बता सकता है वो बता सकता है अभी मैं कह

1606
01:57:42,960 --> 01:57:47,240
रहा हूं उसके पास यहां प बोला जा रहा है दण वैराग्य रूप का शस्त्र होना चाहिए

1607
01:57:47,240 --> 01:57:51,600
है क्या जी जी जी उसी के पास है दूसरे के पास नहीं है वैराग्य

1608
01:57:51,600 --> 01:57:56,280
है आप जिसको तत्वदर्शी बोल रहे हो वो वैरागी है

1609
01:57:56,280 --> 01:58:00,560
उसके पास सब कुछ है का चीज नहीं है सरसे पूछ रहा हूं जो तत्वदर्शी जिसको

1610
01:58:00,560 --> 01:58:04,600
बोल रहे हो वह गृहस्थ है या सन्यासी है वह

1611
01:58:04,600 --> 01:58:09,880
तो गृहस्थ है तो फिर हो

1612
01:58:09,880 --> 01:58:14,360
गया रुको अब हम आपको सबूत दे रहे वेदों को जानने वाला कौन है

1613
01:58:14,360 --> 01:58:18,440
यहां पर तत्वदर्शी आपने माना ना वेदों को जानने वाला जी

1614
01:58:18,440 --> 01:58:23,080
हा भैया इनको देवी भागवत दिखाओ अभी

1615
01:58:23,080 --> 01:58:27,400
गता रुक जा गीता एक मिनट देवी भागवत को नहीं

1616
01:58:27,400 --> 01:58:31,400
मानते क्यों नहीं मानते मानते हैं तो फिर देवी भागवत से

1617
01:58:31,400 --> 01:58:32,320
आप मुझे वेदों

1618
01:58:32,320 --> 01:58:37,080
को जानने वाला संत रामपाल है ये दिखा दो दिखा

1619
01:58:37,080 --> 01:58:41,120
दो दिखाओ वेदों को जानने वाला संत रामपाल है

1620
01:58:41,120 --> 01:58:46,080
लिखा दिखा दो वहां पर किसी का नाम नहीं लिखा गया है वेदों में कि मतलब

1621
01:58:46,080 --> 01:58:50,120
भागवत में उसकी पूर्ण पहचान बता रहे हैं वेदों को जानने वाला कौन है देखो

1622
01:58:50,120 --> 01:58:56,120
देवी भागवत निकालो मैं बता रहा हूं आपको नी

1623
01:58:59,840 --> 01:59:04,000
है यह है देवी भागवत श्री देवी भागवत है गीता

1624
01:59:04,000 --> 01:59:08,400
प्रस गौरपुर द्वारा प्रकाशित है ठीक है इसके अंदर हम चलते

1625
01:59:08,400 --> 01:59:12,720
हैं पेज नंबर देख लीजिए एक बार छटा स्कंद है

1626
01:59:12,720 --> 01:59:16,720
और 424 नंबर है और यह 425 नंबर में क्या कह रहे हैं

1627
01:59:16,720 --> 01:59:20,760
देखिए ध्यान से ठीक है जी अब पूरा ही पढ़ लेते हैं सुनो इस

1628
01:59:20,760 --> 01:59:25,120
विषय में तुम्हें एक दृष्टांत दे रहा हूं साधु पुरुषों की चित् भी युग के प्रभाव

1629
01:59:25,120 --> 01:59:29,160
से प्रभावित होकर भ्रम में पड़ जाते हैं राजेंद्र

1630
01:59:29,160 --> 01:59:33,360
जैसे तुम्हारे पिता जी थे यद्यपि धर्म में उनकी निष्ठा थी ठीक है और इसी प्रकार

1631
01:59:33,360 --> 01:59:37,560
नीचे आते आते और बताते हैं कि यहां से

1632
01:59:37,560 --> 01:59:41,680
यह सब युग का प्रभाव है राजन निश्चय है कि सतयुग

1633
01:59:41,680 --> 01:59:45,760
में ब्राह्मण वेद के पूर्ण विद्वान थे उनके द्वारा निरंतर भगवती

1634
01:59:45,760 --> 01:59:47,400
जगदंबा की आराधना होती थी हां

1635
01:59:47,400 --> 01:59:52,920
भैया बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस और बताइए

1636
01:59:52,920 --> 01:59:57,440
विन एक मिनट सर और बता थ अ काट देंगे

1637
01:59:57,440 --> 02:00:01,920
मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट वेद का पूर्ण विद्वान

1638
02:00:01,920 --> 02:00:06,200
है जो मां जगदंबा की नित्य आराधना

1639
02:00:06,200 --> 02:00:08,360
करता

1640
02:00:08,360 --> 02:00:12,480
है पूरा क्यों दिखाते दोबारा दिखा दो भैया दोबारा

1641
02:00:12,480 --> 02:00:18,480
दिखा दो इनको

1642
02:00:22,120 --> 02:00:26,800
रामपाल जी पूते थे पूरा पेज पढ़ाते थे वैसे

1643
02:00:26,800 --> 02:00:31,320
वैसे पढ़ना है भाई जब और नीचे ही देखेंगे तो कैसे होगा

1644
02:00:31,320 --> 02:00:35,520
और उसमें क्या लि बाबा जी आपके बाबा जी ने तो बस इतना सा कह दिया

1645
02:00:35,520 --> 02:00:39,560
था कि भाई सतयुग के ब्राह्मण कलयुग में राक्षस है या पता नहीं क्या

1646
02:00:39,560 --> 02:00:43,560
तो आपने कहा उनको कि पूरा पेज पढ़ाइए मेरे को कहा था इतनी

1647
02:00:43,560 --> 02:00:47,760
बात आपने आप ज्यादा से नहीं कहेंगे उनको

1648
02:00:47,760 --> 02:00:52,360
नहीं कहेंगे वो जो करें वो पहले ही बिना शास्त्रों के ही वो तत्वदर्शी हो जाते हैं

1649
02:00:52,360 --> 02:00:57,280
आप आप क्या ज्यादा स्याने हो भाई मेरे को बता दीजिए हम आपको मूर्ख लग रहे हैं

1650
02:00:57,280 --> 02:01:01,520
कोई आप अपने आप को समझते हो या हमें बचकाना

1651
02:01:01,520 --> 02:01:03,080
समझ रहे हो आप

1652
02:01:03,080 --> 02:01:07,120
हम किसी को मूर्ख नहीं कर सकते

1653
02:01:07,120 --> 02:01:11,600
आपने माना आपने माना वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है

1654
02:01:11,600 --> 02:01:15,680
य हमने लिखा दिखा दिया वेदों का पूर्ण विद्वान व है जो मां जगदंबा की

1655
02:01:15,680 --> 02:01:19,800
नित्य आराधना करता है मानोगे कि नहीं

1656
02:01:19,800 --> 02:01:24,000
तो ये बताइए कि क्या हम लोग नहीं करते क्या मैं अभी ये पूछ

1657
02:01:24,000 --> 02:01:28,480
रहा हूं कि जो मां जगदंबा को परम ब्रह्मा मानता दोबारा दिखाओ

1658
02:01:28,480 --> 02:01:33,040
परम ब्रह्म के रूप में गाय मंत्र का जाप करता है यह भी दिखा दो

1659
02:01:33,040 --> 02:01:37,120
यत्र मंत्र का जाप करता है यह भी दिखा दो भैया यह

1660
02:01:37,120 --> 02:01:42,000
देखिए जरा य क्या लिखा हुआ है एक मिनट

1661
02:01:42,000 --> 02:01:47,080
जदा यह देखिएगा जरा य पढ़ के सबको सुनाइए क्या

1662
02:01:47,080 --> 02:01:51,120
है कौन सा श्रीमद भागवत गीता है जी अरे

1663
02:01:51,120 --> 02:01:55,280
भागवत गीता यार देवी भागवत पुराण है क्या बच

1664
02:01:55,280 --> 02:01:59,920
बात कर रहे ये क्या है गायत्री के ध्यान प्राणायाम

1665
02:01:59,920 --> 02:02:04,120
एक मिनट मैं पढ़ रहा हूं सतयुग में ब्राह्मण वेद के पूर्ण विद्वान थे

1666
02:02:04,120 --> 02:02:08,680
उनके द्वारा निरंतर भगवती जगदंबा की आराधना होती थी

1667
02:02:08,680 --> 02:02:13,240
भगवती का दर्शन करने के लिए उनका मन सदा लालायित रहता था

1668
02:02:13,240 --> 02:02:17,680
गायत्री के ध्यान प्राणायाम और जप में अपना सारा समय व्यतीत

1669
02:02:17,680 --> 02:02:22,320
करते थे हो गया जी गायत्री काप

1670
02:02:22,320 --> 02:02:27,240
एक मिनट गायत्री का जप मां भगवती की निरंतर आराधना

1671
02:02:27,240 --> 02:02:31,440
निरंतर ये है वेदों को पूर्ण विद्वान अब आप मुझे

1672
02:02:31,440 --> 02:02:35,480
दिखा दो वेदों का पूर्ण विद्वान आपका रामपाल कहां है या फिर

1673
02:02:35,480 --> 02:02:39,600
वेदों का पूर्ण विद्वान एक मिनट वेदों का पूर्ण विद्वान

1674
02:02:39,600 --> 02:02:43,800
कबीर को भगवान कहने वाला कहां लिखा है बताओ अब आप ठर

1675
02:02:43,800 --> 02:02:47,880
लीजिए आप आप ठर लीजिए थोड़ी सी मेरी बात को सुनिए उसम आपने

1676
02:02:47,880 --> 02:02:52,000
जो दिखाया कि सतयुग में ब्राह्मण पूर्व विद्वान मानते

1677
02:02:52,000 --> 02:02:56,160
जो देवी का पूजा करते थे लेकिन आपने ये नहीं दिखाया कि देवी

1678
02:02:56,160 --> 02:02:57,000
की पूजा करने से क्या

1679
02:02:57,000 --> 02:03:01,480
मोक्ष होता है क्या उसको आप दिखाइए बात ये चल रही है तत्वदर्शी कौन

1680
02:03:01,480 --> 02:03:06,280
है अभी बात ये चल रही है तत्वदर्शी कौन है विषय को मत बदलो

1681
02:03:06,280 --> 02:03:10,320
अभी बात चल रही है तत्वदर्शी कौन है तुमने माना वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला

1682
02:03:10,320 --> 02:03:14,560
तत्वदर्शी है हमने आपको दिखाया वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला मां

1683
02:03:14,560 --> 02:03:18,640
भगवती की उपासना कर रहा गायत्री मंत्र का जाप कर रहा है यह दोनों चीजें आपका जो

1684
02:03:18,640 --> 02:03:22,920
तिरछा दर्शी है जेल धाम में उसके पास नहीं है अब आप बताइए

1685
02:03:22,920 --> 02:03:27,160
अपनी बात विषय को मत बदलिए तत्वदर्शी

1686
02:03:27,160 --> 02:03:31,400
कहां लिखा है दो तरीके से बता दीजिए या तो बता दीजिए

1687
02:03:31,400 --> 02:03:35,760
तत्वदर्शी रामपाल हैय लिखा हो या तो बता दीजिए तत्वदर्शी व

1688
02:03:35,760 --> 02:03:40,120
है जो कबीर को भगवान मानता है कबीर की पूजा करता है और

1689
02:03:40,120 --> 02:03:45,200
जो तत मंत्र देता है वो अ

1690
02:03:45,200 --> 02:03:49,200
अभी तो हम देखो भाई आप विषयात करोगे हम

1691
02:03:49,200 --> 02:03:53,360
लोग अब हो गए अभ्यास अब अभ्यस्त हो चुके

1692
02:03:53,360 --> 02:03:57,560
हैं ठीक है विषयात मत करना मैं सिर्फ

1693
02:03:57,560 --> 02:04:01,800
पूछ रहा हूं तत्वदर्शी रामपाल कैसे है

1694
02:04:01,800 --> 02:04:07,320
वह बताओ कहां लिखा है हेलो

1695
02:04:07,320 --> 02:04:12,400
हेलो गए टू स्टॉप द ट्रेन पुल द

1696
02:04:12,400 --> 02:04:16,160
चेन

1697
02:04:16,160 --> 02:04:20,200
हा इनको जरा जुड़ने दीजिए इनको मैं बताता हूं कि देवी मोक्ष

1698
02:04:20,200 --> 02:04:25,000
कैसे देती है इनको जरा जुड़ने दीजिएगा अभी भाग

1699
02:04:25,000 --> 02:04:29,000
पेज मेरे को पेज खोलने में थोड़ा सा टाइम लग

1700
02:04:29,000 --> 02:04:33,840
गया तथा कथित तत्वदर्शी स्वघोषित जगतगुरु

1701
02:04:33,840 --> 02:04:37,840
जेल धाम में निवास करने वाले रामपाल दास

1702
02:04:37,840 --> 02:04:43,440
जी के चेले के द्वारा पलायन किया गया ठीक

1703
02:04:43,440 --> 02:04:47,560
है भाग गए इनका फंडा

1704
02:04:47,560 --> 02:04:51,840
क्या है पता है बारीकी से समझिए जब इनको इनकी चीज का प्रमाण

1705
02:04:51,840 --> 02:04:56,520
देंगे तो ये दूसरा प्रश्न करेंगे कि मोक्ष कैसे मिलता है

1706
02:04:56,520 --> 02:05:00,720
और फिर हम इनको गायत्री के जब से मोक्ष भी दिखा देंगे देवी भागवत

1707
02:05:00,720 --> 02:05:04,320
सेही

1708
02:05:04,320 --> 02:05:08,320
दे सुनिए होगा क्या सुनिए गोविंद जी जब हम इनको

1709
02:05:08,320 --> 02:05:12,360
मोक्ष दिखाएंगे तो फिर य तीसरा प्रश्न कर देंगे फ फिर विषयात हो

1710
02:05:12,360 --> 02:05:16,440
जाएगा एक बात पहले खत्म तो हो अभी बात चल रही

1711
02:05:16,440 --> 02:05:22,440
तत्वदर्शी हमने प्रमाण दिखा दिया आपका प्रमाण कहां है

1712
02:05:22,440 --> 02:05:26,440
भाग ही गए बताओ सर पर पांव रख कर के अब

1713
02:05:26,440 --> 02:05:32,440
दोबारा मुझे लगता नहीं जुड़ने का साहस करेंगे हां

1714
02:05:34,480 --> 02:05:38,640
भाई अच्छाई ये है इन सब चीजों की ये ज्यादातर जो प्रमाण

1715
02:05:38,640 --> 02:05:42,880
है हमें रामपाल जी के वीडियो से ही मिल गए मैंने बताया

1716
02:05:42,880 --> 02:05:46,880
नाय ये जो अभी दुर्गा देवी भागवत वाला प्रमाण है यह

1717
02:05:46,880 --> 02:05:50,920
तो मैंने वहीं से लिया जहां पर वो यह बता रहे कि वो सतयुग के जो ब्राह्मण है वो

1718
02:05:50,920 --> 02:05:54,440
राक्षस होंगे

1719
02:05:54,440 --> 02:05:58,640
थोड़ा स्क्रीन अगर मेरी बड़ी कर दे तो इनको मैं मोक्ष का जवाब दे दूं यह श्रीमद् देवी भागवत

1720
02:05:58,640 --> 02:06:02,640
है नवा स्कंद है शेयर कर देता हूं आप

1721
02:06:02,640 --> 02:06:06,800
पेज नबर बता दीजिए परनी नहीं पेज नंबर नवा स्कंद

1722
02:06:06,800 --> 02:06:11,080
खोल लीजिए उसका पहला ही अध्याय जैसे इन्होने

1723
02:06:11,080 --> 02:06:15,120
आज कहा ना कि पूरा दिखाइए यही हिम्मत पहले दिखाई होती तो आज

1724
02:06:15,120 --> 02:06:20,160
नौ मत नहीं आती रामपाल जी होरा दिखा

1725
02:06:20,160 --> 02:06:24,800
कौन सा पेज है इसम बस नवा

1726
02:06:24,800 --> 02:06:29,160
प लिए प

1727
02:06:29,160 --> 02:06:33,280
नवा आ ग आ वापस आ

1728
02:06:33,280 --> 02:06:39,280
ग मोक्ष देखलो देवी की पूजा से मोक्ष देखलो

1729
02:06:40,160 --> 02:06:44,760
भैया मि दो मिनट रुक जा सब कुछ कहेंगे आप ही कहेंगे

1730
02:06:44,760 --> 02:06:49,760
पढ़ लीजिए पले उसके बाद आपने कुछ

1731
02:06:49,760 --> 02:06:55,120
का जवाब दिया जा रहा है पूर्वक आप

1732
02:06:55,120 --> 02:06:59,400
देखिए कीजिएगा स्क्रीन को ऊपर नीचे मत कीजिएगा बस यही रुकिए कहीं

1733
02:06:59,400 --> 02:07:03,480
मत कीजिएगा स्क्रीन को अच्छा यह जो बाबा जी है हमारे पास रामपाल

1734
02:07:03,480 --> 02:07:07,560
जी के आए इनका कहना है कि जो देवी दुर्गा है वो काल

1735
02:07:07,560 --> 02:07:11,600
ब्रह्म की पत्नी है ठीक है चलिए आज इनके दोनों क्लेम को उड़ा देता हूं

1736
02:07:11,600 --> 02:07:16,600
य प्रश् को थोड़ा नीचे लाइए अंतिम भाग में

1737
02:07:16,600 --> 02:07:20,640
और से पढ़ाइए य जरा सारा य बस बस यही पर य जहा अंडरलाइन हुआ

1738
02:07:20,640 --> 02:07:24,840
है पढ़ना एक बार जो

1739
02:07:24,840 --> 02:07:29,000
गणेश की माता भगवती दुर्गा है उन्हें शिव स्वरूपा कहा जाता

1740
02:07:29,000 --> 02:07:33,400
है यह भगवान शंकर की प्रयश भार्या है

1741
02:07:33,400 --> 02:07:37,400
नारायणी विष्णु माया और पूर्ण ब्रह्म स्वरूपिणी नाम

1742
02:07:37,400 --> 02:07:43,400
से प्रसिद्ध ब्रह्मादेवी

1743
02:07:51,600 --> 02:07:56,200
है यश मंगल सुख मोक्ष और हर्ष प्रदान करना लो भाई

1744
02:07:56,200 --> 02:08:00,800
मोक्ष मिल गया हे उनका स्वाभाविक गुण है

1745
02:08:00,800 --> 02:08:04,920
स्वाभाविक गुण है मोक्ष देना हेलो कहां ग मोक्ष

1746
02:08:04,920 --> 02:08:09,320
मिल गया मैं कहीं दूर नहीं गया हं आपके पास मे सुनेंगे

1747
02:08:09,320 --> 02:08:13,080
कुछ अपना सुनाते

1748
02:08:13,080 --> 02:08:17,080
रहेंगे आपको सुन रहा इनकी स्क्रीन बड़ी कर दीजिए इकी

1749
02:08:17,080 --> 02:08:21,120
स्क्रीन बड़ी कर दीजिए वापस ले आइए नर्मल कर दीजिए मैं आपको सुन रहा हं

1750
02:08:21,120 --> 02:08:25,560
बा जी अब दो बातें हो गई पहली तत्वदर्शी आपने

1751
02:08:25,560 --> 02:08:29,560
माना वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जानता है हमने बताया वेदों

1752
02:08:29,560 --> 02:08:33,680
को पूर्ण रूप से वो है जानने वाला जो मां दुर्गा की निरंतर आराधना

1753
02:08:33,680 --> 02:08:38,040
करे गायत्री मंत्र का जाप करे और वैराग्य भी हो ठीक है जी

1754
02:08:38,040 --> 02:08:42,040
अब दूसरी बात ये आपने कहा कि मोक्ष हमने मोक्ष भी दिखा

1755
02:08:42,040 --> 02:08:46,640
दिया और गायत्री के जब से मोक्ष भी हम दिखा सकते हैं आपको अगर आप कहेंगे

1756
02:08:46,640 --> 02:08:51,080
तो जी मैं प्रश्न मैं प्रश्न कर दूं फिर आप करिए

1757
02:08:51,080 --> 02:08:55,080
अब हमने अपने पक्ष के संबंध में सुनिए

1758
02:08:55,080 --> 02:08:59,600
हमने अपने पक्ष के संबंध में आपको प्रमाण दे दिया अब आप रामपाल

1759
02:08:59,600 --> 02:09:04,360
के पक्ष में प्रमाण दीजिए कि तत्वदर्शी रामपाल कैसे है

1760
02:09:04,360 --> 02:09:06,640
बताओ मैं पहले पहला

1761
02:09:06,640 --> 02:09:11,040
बात मैं ये कहूंगा कि मैं अभी मैं जो कटा था मेरा य लाइव तो

1762
02:09:11,040 --> 02:09:15,040
मैंने जब ड हो रहा था तो मैं ड क्यों नहीं हो पा रहा भाई इसमें कारण क्या

1763
02:09:15,040 --> 02:09:17,760
है

1764
02:09:17,760 --> 02:09:21,800
क्या मैं बता देता हूं क्या बोल रहे हैं ये

1765
02:09:21,800 --> 02:09:26,400
य मुझे कु सुना दे रहा है क्या

1766
02:09:26,400 --> 02:09:32,400
बाबू

1767
02:09:40,080 --> 02:09:44,240
रामकी रहा दोबारा तो क्यों नहीं हो रहा इसम कारण

1768
02:09:44,240 --> 02:09:46,960
क्या है

1769
02:09:46,960 --> 02:09:51,440
अड नहीं हो

1770
02:09:51,440 --> 02:09:55,440
अभी थोड़ी देर पहले एक मिनट मैं इनको इन्हीं की भाषा में जवाब दूंगा आप लोग रहने दिया

1771
02:09:55,440 --> 02:09:59,560
करो मैं दूंगा इनको जवाब इ की भाषा में अभी थोड़ी देर पहले आप कह रहे थे

1772
02:09:59,560 --> 02:10:03,760
कि मेरा बैक कैमरा ऑन हो रहा है तो मैं कट जा रहा हूं उसका क्या कारण

1773
02:10:03,760 --> 02:10:07,880
था उसका तो मान लीजिए मेरे से कैमरा बैक नहीं हो

1774
02:10:07,880 --> 02:10:13,160
मतलब तुम्हारे पर जब बात आ तो मान लीजिए और हम पर तुम आरोप

1775
02:10:13,160 --> 02:10:17,920
लगाओगे हम मान ले तुम्हारी सब बातें मान ले वो तत्वदर्शी है

1776
02:10:17,920 --> 02:10:22,000
वो भगवान है सब बात मान ले तुम्हारी हम जी जी

1777
02:10:22,000 --> 02:10:26,400
जी अच्छा कोई बात नहीं मैं आपसे भी पूछता हूं मेरा मेरा प्रश्न

1778
02:10:26,400 --> 02:10:30,840
क्लियर नहीं हुआ है आपको बताना पड़ेगा आप

1779
02:10:30,840 --> 02:10:35,080
अभी सुनो प्रश्न क्या है वो समझ लो आप

1780
02:10:35,080 --> 02:10:39,720
आपने कहा तत्वदर्शी वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जाने

1781
02:10:39,720 --> 02:10:44,000
हमने आपको बता दिया वेदों से वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है

1782
02:10:44,000 --> 02:10:48,120
जो मां भगवती की निरंतर आराधना करे और गायत्री मंत्र का जप

1783
02:10:48,120 --> 02:10:53,640
करे अब आप बताओ कि तत्वदर्शी कैसे सि हुआ

1784
02:10:53,640 --> 02:10:58,240
बताओ मेरा भी कुछ सवाल रहेगा खाली आप ही सवाल करेंगे एक सवाल आप

1785
02:10:58,240 --> 02:11:02,520
करेंगे तत्वदर्शी सिद्ध करो ना

1786
02:11:02,520 --> 02:11:06,760
तुम विषय बदलते हो भाई अभी बात चल रही थी त की

1787
02:11:06,760 --> 02:11:11,080
तुमने फिर कहा मोक्ष है जब मोक्ष दिखा दिया तो अब तुम और सवाल करोगे

1788
02:11:11,080 --> 02:11:17,080
अब पहले अपने रामपाल के बारे में तत्वदर्शी पना उसका सिद्ध

1789
02:11:17,320 --> 02:11:21,440
करो नहीं है व तत्वदर्शी है सिद्ध करो ठीक

1790
02:11:21,440 --> 02:11:25,840
है ठीक है मैं ये कह रहा हूं कि एक सवाल आप करेंगे एक सवाल हम करेंगे

1791
02:11:25,840 --> 02:11:29,880
ऐसा नहीं है कि सिर्फ आप ही आप सवाल करेंगे

1792
02:11:29,880 --> 02:11:34,000
अभी आप जो तत्वदर्शी की बात चल रही है उसका उत्तर दीजिए

1793
02:11:34,000 --> 02:11:38,000
फिर आप प्रश्न करिएगा जी आपने जो आप लोगों के

1794
02:11:38,000 --> 02:11:42,160
अनुसार जो जो भी तत्वदर्शी है बताइए कि गीता अध्याय 15 श्लोक

1795
02:11:42,160 --> 02:11:46,440
नंबर एक से चा से मेरे को डिटेल बताइए कि वो तत्वदर्शी कौन

1796
02:11:46,440 --> 02:11:50,840
है जो इसको डिटेल बता देगा वो तत्वदर्शी आप

1797
02:11:50,840 --> 02:11:54,840
हीने कहाना वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जानता हो अब मुझे आप दिखा

1798
02:11:54,840 --> 02:11:58,920
दीजिए कि वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कहीं पर लिखा हो कि वो

1799
02:11:58,920 --> 02:12:03,120
कबीर को मानने वाला हो मान लूंगा आपकी बात मैंने आपको दिखा

1800
02:12:03,120 --> 02:12:07,400
दिया वेदों को पूर्ण रूप से मानने वाला जानने वाला वह है जो दुर्गा

1801
02:12:07,400 --> 02:12:12,160
जो दुर्गा की पूजा करता है निरंतर फिर चले

1802
02:12:12,160 --> 02:12:17,520
अबब फिर आएंगे रोएंगे बोलेंगे जुड़ नहीं रहा हूं मैं हा

1803
02:12:17,520 --> 02:12:23,520
देख लिया भैया तिचा दर्शी की पोल

1804
02:12:24,400 --> 02:12:28,440
मत मैं दर्शकों को बता देता हूं देखिए ऐसा है कि हम लोग नहीं जोड़ते

1805
02:12:28,440 --> 02:12:32,720
हैं अगर बैक स्टेज पर 10 लोग हैं टोटल यहां पर तो

1806
02:12:32,720 --> 02:12:36,720
उसके बाद जुड़ नहीं पाएंगे ठीक है

1807
02:12:36,720 --> 02:12:42,720
तो आए दादू दास जी आए हैं उनको ले

1808
02:12:42,800 --> 02:12:47,680
लीजिए बोलिए दादू दास जी जय श्री राम

1809
02:12:47,680 --> 02:12:52,240
नमस्कार सर हां नमस्कार बताइए

1810
02:12:52,240 --> 02:12:55,840
कबीर अविनाशी है अजर है

1811
02:12:55,840 --> 02:12:59,920
क्या कबीर साहिब में लिखा है कि

1812
02:12:59,920 --> 02:13:04,280
कबीर सा कबीर साब नहीं वेदों में प्रमाण है

1813
02:13:04,280 --> 02:13:07,560
कबीर अविनाशी है

1814
02:13:07,560 --> 02:13:11,560
क्या वेदों में भी प्रमाण है और

1815
02:13:11,560 --> 02:13:17,440
गीता में भी प्रमाण

1816
02:13:17,440 --> 02:13:21,960
है क्या प्रमाण है

1817
02:13:21,960 --> 02:13:26,400
भाई साहब आपसे मैं पूछ रहा हूं कहां चले गए दादू दास जी कैमरा दिखाइए

1818
02:13:26,400 --> 02:13:30,800
कैमरा ऑन करिए लाइट कैमरा एक्शन

1819
02:13:30,800 --> 02:13:35,000
जी मैं पूछ रहा हूं कबीर अविनाशी है क्या अजर

1820
02:13:35,000 --> 02:13:41,000
है क्या अजर अजर है क्या

1821
02:13:41,200 --> 02:13:46,520
कबीर शिवांशु भाई पहले इनको अजर का अर्थ समझा

1822
02:13:46,520 --> 02:13:51,160
दीजिए दादू दस जी आप अपना पहले माइक ऑन करिए हा

1823
02:13:51,160 --> 02:13:55,680
हेलो सर आपको अजर का अर्थ पता है क्या तो पूर्णता

1824
02:13:55,680 --> 02:13:59,720
अमर होते हैं वो अजर अजर का अर्थ पता है क्या

1825
02:13:59,720 --> 02:14:03,640
अजर अजर का अर्थ पता है

1826
02:14:03,640 --> 02:14:08,160
क्या जर मतलब बुढ़ापा नहीं आना हा

1827
02:14:08,160 --> 02:14:14,160
ठीक है बुढ़ापा नहीं आना तो इनको फोटो दिखा दो फट से भैया बिना देर

1828
02:14:14,960 --> 02:14:18,320
किए

1829
02:14:18,320 --> 02:14:24,320
नारायण ये तो फोटो में फस गए

1830
02:14:29,480 --> 02:14:33,480
यह तो ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने लिए खुद ही इतनी खाया खोद

1831
02:14:33,480 --> 02:14:37,480
रखी है कि हमें कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं है तभी मेरे समझ में आया

1832
02:14:37,480 --> 02:14:41,480
कि जो पवन दास है जिनको य गुरु द्रोही बोलते हैं वह जो कबीर

1833
02:14:41,480 --> 02:14:45,480
दास की जो फोटो है पिक्चर है उसको ता है इसलिए

1834
02:14:45,480 --> 02:14:51,480
फता हो सकता कि य कुछ य

1835
02:14:51,960 --> 02:14:57,960
मैं दिखा दूं मैं दिखा देता

1836
02:15:00,400 --> 02:15:06,360
हूं नारायण

1837
02:15:06,360 --> 02:15:10,480
सर्च अरे वही सर्च कर दीजिए ना य प सर्च कर दीजिए

1838
02:15:10,480 --> 02:15:12,640
आ

1839
02:15:12,640 --> 02:15:16,640
जाएगा फोटो भर भर के बुक केपर फोटो बनी हुई है

1840
02:15:16,640 --> 02:15:22,640
मेरे दूसरी कमरे में पड़ी हुई थी बुक

1841
02:15:23,880 --> 02:15:28,320
रुकिए रुकिए मैं कर देता हूं हा ये आ गया ये आ गया दादू

1842
02:15:28,320 --> 02:15:32,560
दास जी इनको देखिए क्या यह कबीर है आप पहचानते

1843
02:15:32,560 --> 02:15:36,960
हैं क्या इन्ह जी इनको

1844
02:15:36,960 --> 02:15:41,040
पहचानते हैं क्या पहचानते हैं अच्छा

1845
02:15:41,040 --> 02:15:45,640
इनको आप क्या कहेंगे बूढ़ा कहेंगे अधेड़ कहेंगे

1846
02:15:45,640 --> 02:15:50,440
युवा कहेंगे किशोर कहेंगे बालक कहेंगे या शिशु कहेंगे क्या कहेंगे इसे

1847
02:15:50,440 --> 02:15:54,600
अच्छा एक चर्चा हुई है गोरखनाथ जी की और कबीर साहेब जी की एक चर्चा

1848
02:15:54,600 --> 02:15:58,960
हुई भाई साहब देखिए देखिए मेरी एक बात समझिए विषयात नो

1849
02:15:58,960 --> 02:16:03,120
नॉट अलाउड विषयात नॉट अलाउड अभी जो चीज चल रही है

1850
02:16:03,120 --> 02:16:07,040
क्या कबीर अजर है उसके अंतर्गत एक बात हो रही है यह जो व्यक्ति है

1851
02:16:07,040 --> 02:16:11,640
जो आपने देखा आपने माना कि पूर्ण ब्रम परमात्मा है

1852
02:16:11,640 --> 02:16:15,960
अब ये जो कबीर आपको दिख रहे हैं क्या ये आपको

1853
02:16:15,960 --> 02:16:20,080
बूढ़े लग रहे हैं युवा लग रहे हैं बालक लग रहे हैं किशोर लग रहे हैं अधेड़ लग रहे

1854
02:16:20,080 --> 02:16:24,280
हैं शिशु लग रहे वो बताइए पहले प्रश्न से भागय

1855
02:16:24,280 --> 02:16:28,360
मत देखिए व परमात्मा यहां पर जो अपना कोई सा भी

1856
02:16:28,360 --> 02:16:32,640
यहां से 12 साल रहे साब आपसे पूछ रहा पहले तो य बता दोय

1857
02:16:32,640 --> 02:16:36,640
लग क्या रहा है बूढ़ लग रहा है कि नहीं लग रहा है फिर बाद में बात करेंगे बूढ़ा है

1858
02:16:36,640 --> 02:16:39,320
कि

1859
02:16:39,320 --> 02:16:43,920
नहीं लग रहे है ना लग रहा है गुड

1860
02:16:43,920 --> 02:16:48,200
बूढ़ा लग रहा है पॉइंट टू बी नोटे बूढ़ा लग रहा है

1861
02:16:48,200 --> 02:16:52,720
हा अब बताइए यह अजर तो नहीं है

1862
02:16:52,720 --> 02:16:57,880
य कौन सा स्वरूप

1863
02:16:57,880 --> 02:17:01,880
है देखिए परमात्मा कोई सा भी स्वरूप बना लेते हमारे लिए आते

1864
02:17:01,880 --> 02:17:05,960
धरती पे सतलोक से चल साहब आपसे मैं पूछ रहा हूं यह परमात्मा का

1865
02:17:05,960 --> 02:17:10,360
ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं है व

1866
02:17:10,360 --> 02:17:14,360
जब चाहे तब अपनी दाढी रख लेते हैं निकाल लेते हैं अरे मैं मैं पूछ रहा हूं

1867
02:17:14,360 --> 02:17:18,880
यह परमात्मा का ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं यह नहीं है ओरिजिनल

1868
02:17:18,880 --> 02:17:21,480
स्वरूप

1869
02:17:21,480 --> 02:17:25,760
है यह ओरिजिनल है तो यह ओरिजिनल स्वरूप बूढ़ा

1870
02:17:25,760 --> 02:17:31,760
दिख रहा है और परमात्मा के लिए कहा गया है अजर उसका प्रमाण दिखाऊ

1871
02:17:32,600 --> 02:17:37,720
क्या किसने प्रमाण दिखाएंगे वेदों

1872
02:17:37,720 --> 02:17:41,720
में दिखाइए वेदों में युवा

1873
02:17:41,720 --> 02:17:47,040
ये कह रहे हो कि हमारा परमात्मा अजर नहीं है उस पर आयु का फर्क पड़ता

1874
02:17:47,040 --> 02:17:53,040
है पड़ता सर आयु का फर्क [हंसी]

1875
02:17:53,200 --> 02:17:57,040
पड़ता है कि नहीं पड़ता है एक बार और बता

1876
02:17:57,040 --> 02:18:01,040
दो आयु का फर्क नहीं पड़ता है सर तत्व से थोड़ा

1877
02:18:01,040 --> 02:18:05,520
बात करिए ना नहीं पड़ता है तो फिर ये बूढ़ा क्यों दिख रहा है

1878
02:18:05,520 --> 02:18:09,560
सुनिए मेरी बात आप फोटो देख के उनको बता रहे हैं कि ये बूढ़ा दिख रहा है

1879
02:18:09,560 --> 02:18:13,840
कि नहीं दिख रहा है आपने हम नहीं बता रहे आपने स्वीकार

1880
02:18:13,840 --> 02:18:17,840
किया किय बूढ़ा दिख रहा है अच्छा शंकर जी की फोटो भी होती है वो भी

1881
02:18:17,840 --> 02:18:22,000
तो बूढ़ दछ रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपसे पूछ रहा हूं आपने

1882
02:18:22,000 --> 02:18:26,160
स्वीकार किया ना कि ये बूढ़ा है बूढ़ा मेरे

1883
02:18:26,160 --> 02:18:30,240
स्वीकार करने से लेकिन वो बूढ़े नहीं है वो युवा कबीर है ये बूढ़ा बूढ़ा

1884
02:18:30,240 --> 02:18:36,240
है कि नहीं ये जो व्यक्ति दिख रहा है आपको ये बूढ़ा है कि

1885
02:18:42,240 --> 02:18:46,480
नहीं आगे बढ़ो ना सर आगे नेक्स्ट सवाल करिए ना नेक्स्ट

1886
02:18:46,480 --> 02:18:50,520
सवाल क्यों करे पहले इसको इसको या तो मान लो कि हां जो कबीर है

1887
02:18:50,520 --> 02:18:53,720
वो नहीं

1888
02:18:53,720 --> 02:18:57,800
है अच्छा ठीक है सिद्ध करके बताइए मेरे को क्या क्या

1889
02:18:57,800 --> 02:19:02,000
सिद्ध करू कि जरा नहीं है करके उनको बुढ़ापा

1890
02:19:02,000 --> 02:19:06,000
नहीं है आप मुझे कसी से वेदों में जसे अरे भाई य आपको बूढ़ रहा

1891
02:19:06,000 --> 02:19:10,760
बूढ़ा लग रहा है कि नहीं लग रहा है कबीर लग रहे है

1892
02:19:10,760 --> 02:19:14,760
तो जब जब कबीर आपने बूढ़ा स्वीकार कर लिया

1893
02:19:14,760 --> 02:19:19,000
तो फिर यह कहां से हुआ वो अजर कहां से हुआ और ईश्वर तो अजर है अजर अमर

1894
02:19:19,000 --> 02:19:22,440
अविनाशी

1895
02:19:22,440 --> 02:19:26,800
अच्छा तोय क आपके अकॉर्डिंग जो ईश्वर है वो अजर नहीं है ये मान लो

1896
02:19:26,800 --> 02:19:30,840
फिर हम आपको वेदों से प्रमाण देंगे कि हा ईश्वर अजर है या तो

1897
02:19:30,840 --> 02:19:36,840
यह कहो कि ईश्वर जो है अजर नहीं है फिर हम वेद खोलेंगे

1898
02:19:36,920 --> 02:19:41,040
ईश्वर तो है ईश्वर अजर है और कबीर

1899
02:19:41,040 --> 02:19:46,160
अजर नहीं है इसका मतलब कबीर ईश्वर नहीं

1900
02:19:46,160 --> 02:19:50,840
है चलो मान लेते हैं कुछ देर के लिए

1901
02:19:50,840 --> 02:19:54,880
मत करो दूसरे लोग भी लाइन में है टाइम वेस्ट मत करो अगर आपके

1902
02:19:54,880 --> 02:19:59,000
पास उत्तर है तो बताओ खामा खा टाइम वेस्ट मत करो मैं

1903
02:19:59,000 --> 02:20:03,400
आपसे पूछ रहा हूं कि जो कबीर है वह अजर है

1904
02:20:03,400 --> 02:20:07,440
कि नहीं आपने कहा नहीं व बूढ़ा दिख रहा है व अजर नहीं सिद्ध हुआ अब आप कह रहे

1905
02:20:07,440 --> 02:20:11,560
हो ईश्वर अजर है तो या तो ईवर को अजर मत मानो एक मिनट या

1906
02:20:11,560 --> 02:20:15,560
तो ईश्वर को अजर मत मानो या फिर कबीर को ईश्वर मत मानो दो में से एक

1907
02:20:15,560 --> 02:20:18,360
बात हो सकती

1908
02:20:18,360 --> 02:20:22,440
है बताइए कबीर को क्या मानते

1909
02:20:22,440 --> 02:20:26,960
भाई साहब फिर आप बात चेंज कर रहे हैं कबीर बूढ़ा दिख रहा है ना

1910
02:20:26,960 --> 02:20:31,040
आपको कबीर बूढ़ तो

1911
02:20:31,040 --> 02:20:35,200
अजर नहीं है

1912
02:20:35,200 --> 02:20:39,240
ी फिर आप अरे फोटो तो फोटो बनी है ना सर

1913
02:20:39,240 --> 02:20:43,480
इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि यह जो फोटो दिखाई जा रही है यह ओरिजिनल

1914
02:20:43,480 --> 02:20:49,480
फोटो नहीं है परमात्मा की

1915
02:20:51,200 --> 02:20:55,240
यहां पर व ला करके गए धरती मैं आपसे पूछ रहा

1916
02:20:55,240 --> 02:21:01,240
हूं यह जो फोटो दिखाई जा रही है क्या यह ओरिजिनल फोटो है परमात्मा

1917
02:21:01,560 --> 02:21:05,800
की यह ओरिजिनल नहीं है ना लेकिन य तो

1918
02:21:05,800 --> 02:21:10,080
ओरिजिनल नहीं है पॉइंट टू भी नोटे भाई देखो

1919
02:21:10,080 --> 02:21:16,080
ओरिजिनल क्या है फिर और कहां है

1920
02:21:18,920 --> 02:21:23,000
दिखाओ रिजन तो आपके ब्रह्मा विष्णु महेश के फोटो नहीं है

1921
02:21:23,000 --> 02:21:27,600
लेकिन हमारे पास अभी जो बात हो रही है ना वो बताओ

1922
02:21:27,600 --> 02:21:31,680
आप जब अपनी चीज सिद्ध करने की बात आएगी हम एक एक चीज खोल

1923
02:21:31,680 --> 02:21:36,040
के कर देंगे बिल्कुल

1924
02:21:36,040 --> 02:21:40,200
जो परमात्मा है व वहां से सतलोक से स शरीर

1925
02:21:40,200 --> 02:21:44,280
आता है हा स शरीर जाता भी है हा

1926
02:21:44,280 --> 02:21:48,320
तो स शरीर आता है तो व अपने यह तो नहीं लिखा कि व अपने शरीर को बदल के आता

1927
02:21:48,320 --> 02:21:51,680
है

1928
02:21:51,680 --> 02:21:55,880
बदल के आते हैं बदल के आते हैं कि नूर को कम करके आते

1929
02:21:55,880 --> 02:22:00,760
हैं नूर को भी कम करके आते हैं फिर यहां पर लीला करते हैं

1930
02:22:00,760 --> 02:22:06,760
जैसे आने वाली बात लिखी है आपकी किताबों में पहले तो यह

1931
02:22:08,560 --> 02:22:13,520
बताओ लेकिन यहां पर मृत्यु लोक में आते हैं तो अने

1932
02:22:13,520 --> 02:22:17,600
चीज क्लियर करते चलोगे बात अच्छे से हो जाएगी मैं पूछ रहा हूं यह बदल

1933
02:22:17,600 --> 02:22:23,600
के आने वाली बात आपके उसम कहां लिखी हुई है

1934
02:22:24,560 --> 02:22:28,880
लिखी ना है लेकिन चलो यही बता दो कि ये जो किताब में छपा है जिसके नीचे

1935
02:22:28,880 --> 02:22:33,280
पूर्ण ब्रह्म पर परम ब्रह्म परमात्मा लिखा है यह ओरिजिनल स्वरूप

1936
02:22:33,280 --> 02:22:38,240
नहीं है भगवान का यही लिखा हो दिखा दो कहीं लिखा हो तुम्हारी किताबों

1937
02:22:38,240 --> 02:22:42,840
में स्वरूप के बा ये मतलब चित्र उन्हीं का ही है वो

1938
02:22:42,840 --> 02:22:46,960
मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो चित्र है यह ओरिजिनल

1939
02:22:46,960 --> 02:22:50,960
भगवान का चित्र नहीं है पहले तो यह दिखाओ तब तो हमारी जीत हो जाएगी अगर आपने

1940
02:22:50,960 --> 02:22:55,160
यह दिखा दिया तो मैं कैसे दिखाऊ मेरे

1941
02:22:55,160 --> 02:22:59,400
पास आपको नहीं पता आप अपने मन से बोल रहे

1942
02:22:59,400 --> 02:23:03,520
हैं यह कबीर जी है और पूर्ण पात्मा है

1943
02:23:03,520 --> 02:23:07,240
यह उनका ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं

1944
02:23:07,240 --> 02:23:11,280
है है देखो भाई व्यक्ति

1945
02:23:11,280 --> 02:23:15,480
कैसे टाइम पास करता है देखो टाइम पास

1946
02:23:15,480 --> 02:23:19,560
तुम कर रहे हो भाई टाइम पास कर रहे हो अभी कह रहे थे कि नहीं

1947
02:23:19,560 --> 02:23:23,680
ओरिजनल स्वरूप नहीं स्वरूप है सुनो सुनो

1948
02:23:23,680 --> 02:23:27,760
तुम लोग सिर्फ श्री राम की कथा फलत देखो फालतू फालतू बात

1949
02:23:27,760 --> 02:23:31,760
नहीं फालतू बात नहीं विषयात नहीं विषयात करोगे हटा दिया

1950
02:23:31,760 --> 02:23:35,880
जाएगा विषयात करोगे हटा दिया जाएगा विषयात करोगे

1951
02:23:35,880 --> 02:23:39,960
हटा दिया जाएगा मैं कह रहा हूं जवाब देना चाहिए काम

1952
02:23:39,960 --> 02:23:44,080
की बात करो काम की बात करो आपने पहले कहा वो ओरिजिनल स्वरूप नहीं है अब

1953
02:23:44,080 --> 02:23:48,400
कह रहे ओरिजिनल स्वरूप है अगर ओरिजिनल स्वरूप है

1954
02:23:48,400 --> 02:23:52,440
तो क्या ये स्वरूप अजर है

1955
02:23:52,440 --> 02:23:56,640
अजर भी है और अमर भी है अभी तुमने खुद कहा था कि यह

1956
02:23:56,640 --> 02:24:02,640
जो है बूढ़ा दिख रहा है

1957
02:24:09,240 --> 02:24:13,360
मुझे एक बात पर नहीं रहते हैं ये यह

1958
02:24:13,360 --> 02:24:17,520
केवल पता हैय ये अपने वो तत्वदर्शी जो रामपाल जेल

1959
02:24:17,520 --> 02:24:21,920
धाम में है ये तथाकथित जो संत है यह उनका पक्ष रखने

1960
02:24:21,920 --> 02:24:26,240
नहीं आए हैं यह अपनी अपनी वर्चस्व

1961
02:24:26,240 --> 02:24:30,560
सिद्ध करने आए यह गुरु यह गुरु भक्त भी नहीं है कि ये हो

1962
02:24:30,560 --> 02:24:34,560
गु गुरु क्योंकि ये उसके सिद्धांत को भी ब्रेक कर रहे

1963
02:24:34,560 --> 02:24:38,640
हैं य कर और

1964
02:24:38,640 --> 02:24:42,920
ये भी तो बोल रहा है कि इनके सारे सिद्धांत इनकी पुस्तक में भी कहीं नहीं लिखे हुए खुद ही तो बोल रहा

1965
02:24:42,920 --> 02:24:46,960
वो नहीं लिखा हु जब वो कह ही नहीं रहा कि व यह नहीं कह रहा कि व कबीर

1966
02:24:46,960 --> 02:24:52,960
जो है नकली रूप है उसका लोग कह रहे अपनी जीत के लिए नकली है

1967
02:24:54,960 --> 02:24:58,960
यानी इनके इनके ग्रंथ कपलीट नहीं है इनके ग्रंथ भी कंप्लीट नहीं है

1968
02:24:58,960 --> 02:25:03,000
पहली बात तो य सिद्ध हो जाता है और इतने भी कंप्लीट नहीं है कि इनके

1969
02:25:03,000 --> 02:25:07,400
अपने ही जो कबीर जी है उनका स्वरूप का वर्णन कर सके

1970
02:25:07,400 --> 02:25:11,400
हा ठीक है तोय कौन से कौन से ग्रंथ है भाई और कौन सा ग्रंथ

1971
02:25:11,400 --> 02:25:15,720
पढ़ के आप अपने आप को धोखा दे रहे हो क्या मानव शरीर मिला हुआ है सत्य

1972
02:25:15,720 --> 02:25:19,760
जानने के लिए या कोई ऐसी व्यर्थ की चीज करने के जब

1973
02:25:19,760 --> 02:25:23,840
तुम्हे खुद पता है कि तुम्हारे ग्रंथों में पूर्ण जानकारी नहीं है तो क्यों अपना

1974
02:25:23,840 --> 02:25:28,040
जीवन व्यर्थ कर रहे हो और अपने साथ हजारों का भी कर रहे हो पागल हो गए

1975
02:25:28,040 --> 02:25:32,040
पागल हो गए बिल्कुल पागल हो गए कोई मतलब नहीं है पूर्ण ब्रह्म से

1976
02:25:32,040 --> 02:25:38,040
धर्म से कोई मतलब नहीं है पागल हो गए

1977
02:25:38,680 --> 02:25:42,760
य क रहे हो अपनी बात पूरी कर कह

1978
02:25:42,760 --> 02:25:46,840
रहे हो कि बाबा जी ने हमारे भंडारा लगाया हुआ है अरे भाई तुम्हें यह नहीं पता है

1979
02:25:46,840 --> 02:25:51,400
कि जानवरों के चार लक्षण कौन से हैं खाना ना

1980
02:25:51,400 --> 02:25:55,400
यह करना ठीक है यह जो मैथुन क्रियाए है और यह सब करना यह

1981
02:25:55,400 --> 02:25:59,480
जानवरों के भी काम है मनुष्य शरीर तुम्हें क्यों मिला भंडारा खाने के लिए या सत्य जानने

1982
02:25:59,480 --> 02:26:03,600
के लिए कैसी बात है वहा पर भंडारा लगा हुआ तो देखो

1983
02:26:03,600 --> 02:26:08,280
वो सत्य हो जाता उससे कभी तो सोचो कभी

1984
02:26:08,280 --> 02:26:12,880
मैं एक बात कह रहा हूं तिरुपति बालाजी में पूरे साल भंडारा चलता

1985
02:26:12,880 --> 02:26:18,120
है क्यों नहीं मान लेते विष्णु भगवान को

1986
02:26:18,120 --> 02:26:22,560
परमेश्वर जब है नहीं तो कैसे मानेंगे परमात्मा होगा तो मानेंगे क

1987
02:26:22,560 --> 02:26:26,840
गए पहले फोटो पहले अपना मुह

1988
02:26:26,840 --> 02:26:30,760
दिखाओ पहले मुह दिखाओ

1989
02:26:30,760 --> 02:26:34,840
अपना मुह दिखाने लायक तो है इतना

1990
02:26:34,840 --> 02:26:39,280
भी क्या शरमाना को गोल्ड साबित करना चाहते है हा भाई

1991
02:26:39,280 --> 02:26:43,360
कबीर का वो ओरिजिनल फोटो है अभी आपने माना अब ये बताइए

1992
02:26:43,360 --> 02:26:48,200
कि वो बूढ़ा दिख रहा है यानी कि आपका जो ईश्वर है व अजर नहीं

1993
02:26:48,200 --> 02:26:52,360
है हेलो भाई साहब देखिए चलते फिरते बात

1994
02:26:52,360 --> 02:26:58,080
मत करिए एक जगह बैठ जाइए और चेहरा

1995
02:26:58,080 --> 02:27:02,480
दिखाइए चेहरा यहां पर लाइट नहीं सर देख

1996
02:27:02,480 --> 02:27:06,640
तो लाइट में आके बात करिए भाई साहब ऐसे बात नहीं कर पाएंगे क्योंकि हमें जो है

1997
02:27:06,640 --> 02:27:10,800
कंटेंट नहीं मिलेगा फ जगत को दिखाने

1998
02:27:10,800 --> 02:27:16,800
के लिए जगत वाले हैं ना हम लोग जगत वाले सतलोक वाले आप

1999
02:27:19,160 --> 02:27:23,400
लोग हमको जो है

2000
02:27:23,400 --> 02:27:27,840
शर्ट हमको शॉर्ट बनाने के लिए आपका चेहरा चाहिए

2001
02:27:27,840 --> 02:27:33,520
होगा अरे सतलोक के ऊपर तो एक नई स्टोरी डाल दी उसने अनामी

2002
02:27:33,520 --> 02:27:37,840
लोग हा दोबारा बैक इन एक्शन बाबू

2003
02:27:37,840 --> 02:27:41,960
रामदास जी बैक इन एक्शन जी बाबू

2004
02:27:41,960 --> 02:27:46,120
राम जी वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है

2005
02:27:46,120 --> 02:27:50,480
जी सर आप ही सवाल नहीं करें मैं भी सवाल करूंगा पहले मेरा सवाल रहे

2006
02:27:50,480 --> 02:27:54,560
पहले वो एक बात जो जो बात पहले चल रही है पहले वो खत्म होगी तब

2007
02:27:54,560 --> 02:27:58,920
अगला सवाल आएगा वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है

2008
02:27:58,920 --> 02:28:02,920
अगर तत्वदर्शी का मतलब है वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला

2009
02:28:02,920 --> 02:28:07,640
तो हमको बताओ वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है

2010
02:28:07,640 --> 02:28:12,600
बस वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज है इसके अलावा कोई नहीं है कहां लिखा

2011
02:28:12,600 --> 02:28:17,000
है कहां लि नाम थोड़ी लिखा रता है उस नाम

2012
02:28:17,000 --> 02:28:21,800
यानी आप जो है शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं करते पॉइंट टू बी

2013
02:28:21,800 --> 02:28:26,520
नोटे ये लोग बहुत चिल्लाते हैं शास्त्र समत भक्ति

2014
02:28:26,520 --> 02:28:30,600
पॉइंट टू ब नोटे हम लोग शास्त्र समत भक्ति

2015
02:28:30,600 --> 02:28:34,200
करते हैं ऐसा कैसे लिखा है वेदों को पूर्ण रूप

2016
02:28:34,200 --> 02:28:38,280
से जानने वाला संत रामपाल है बताओ

2017
02:28:38,280 --> 02:28:43,240
वो किसी को नहीं लिखा किसी के नाम थोड़ी लिखा है आप लोग का भी नाम नहीं लिखा उसम

2018
02:28:43,240 --> 02:28:47,320
उस दो ची उसमें दो चीज ऐसी लिखी है जो रामपाल में नहीं

2019
02:28:47,320 --> 02:28:51,560
है पहली मां भगवती की निरंतर आराधना करने वाला

2020
02:28:51,560 --> 02:28:57,160
दूसरा गायत्री का जप करने वाला जी जी जी

2021
02:28:57,160 --> 02:29:01,520
हम हमने य सिध कर दिया कि वेदों को जो जानने वाला सुको

2022
02:29:01,520 --> 02:29:06,040
एक मिनट वेदों को जो पूर्ण रूप से जानने वाला है वो

2023
02:29:06,040 --> 02:29:10,200
रामपाल तो नहीं है अब आप कर रामपाल कैसे

2024
02:29:10,200 --> 02:29:14,200
तर्शी कोई बात नहीं हम मान लेते नहीं है लेकिन अब आप हमारा भी

2025
02:29:14,200 --> 02:29:18,240
सवा नहीं ऐसे नहीं ो के मानो

2026
02:29:18,240 --> 02:29:22,400
थोड़ी देर के लिए नहीं ठोक के मानो आज मैं स्वीकार

2027
02:29:22,400 --> 02:29:26,920
करता हूं कि रामपाल तत्वदर्शी संत नहीं है ो

2028
02:29:26,920 --> 02:29:32,640
के [संगीत]

2029
02:29:32,640 --> 02:29:36,760
मानो भागत आपको हम कैसे मान लेंगे भाई साब

2030
02:29:36,760 --> 02:29:41,040
देवी भागवत को आपके तत्व ा दर्शी संत नहीं मानते क्या इनको

2031
02:29:41,040 --> 02:29:45,440
भैया प्रमाण दिखाओ देवी भागवत प्रमाण है कि

2032
02:29:45,440 --> 02:29:50,360
नहीं सि आपका प्रश्

2033
02:29:50,360 --> 02:29:55,080
सुनिए पहली बात तो ये है सुनिए जब तत्वदर्शी की बात आई

2034
02:29:55,080 --> 02:29:59,160
तो आपने कहा 15 एक में लिखा है तत्वदर्शी कौन है जबक वहां तत्वदर्शी

2035
02:29:59,160 --> 02:30:03,360
नहीं लिखा था जो पेड़ को तत्व से जानने वाला है

2036
02:30:03,360 --> 02:30:07,560
उसके बारे में लिखा था पेड़ को पेड़ को तत्व से जानने वाला

2037
02:30:07,560 --> 02:30:11,840
उसको आपने कह दिया त एक मिनट उसको आपने कह दिया एक मिनट

2038
02:30:11,840 --> 02:30:16,280
उसको आपने कह दिया तत्वदर्शी अब उसी अगर वो तत्वदर्शी है

2039
02:30:16,280 --> 02:30:20,440
तो उस तत्वदर्शी की पहचान बताए गई कि वो वेदों को पूरा जानने

2040
02:30:20,440 --> 02:30:24,760
वाला है वे को पूरा जानने वाला शास्त्रों में ब्रह्मा विष्णु

2041
02:30:24,760 --> 02:30:29,040
महेश भगवती को गणेश को भगवान मानने वाला है

2042
02:30:29,040 --> 02:30:33,040
तो हमने आपको उसम से एक प्रमाण दिखा

2043
02:30:33,040 --> 02:30:37,200
दिया कि वेदों को जो पूरा मान पूरा जानता है पूर्ण विद्वान

2044
02:30:37,200 --> 02:30:41,680
है वेदों का वह मां भगवती की निरंतर आराधना करता

2045
02:30:41,680 --> 02:30:46,440
और गायत्री का जाप करता है ठीक है दिखाइए

2046
02:30:46,440 --> 02:30:47,880
यदि उस

2047
02:30:47,880 --> 02:30:51,920
पेड़ को तत्व से जानने वाला त है और तत्वदर्शी वही है

2048
02:30:51,920 --> 02:30:56,040
जो वेदों को पूर्ण जानता है तो वो रामपाल है वेदों को जानने वाला

2049
02:30:56,040 --> 02:31:00,280
या फिर यह दिखा दीजिए कि कबीर को भगवान समझने वाला वेदों

2050
02:31:00,280 --> 02:31:04,760
को पूर्ण रूप से जानने वाला है मान लेंगे दिखाइए है ह

2051
02:31:04,760 --> 02:31:09,040
हमारा प्रश्न है भाई साहब देखिए प्रश्न नहीं पहले एक चीज

2052
02:31:09,040 --> 02:31:13,320
खत्म करिए तत्वदर्शी का चैप्टर चल रहा है अब

2053
02:31:13,320 --> 02:31:17,680
पहले आप वो क्लियर करिए पहले आप वो क्लियर करिए कि वेदों

2054
02:31:17,680 --> 02:31:22,120
को पूर्ण रूप से जानने वाला जो है वो या तो कबीर को भगवान

2055
02:31:22,120 --> 02:31:26,280
कहने वाला हो या स्वयं को भगवान कहने वाला हो या फिर

2056
02:31:26,280 --> 02:31:30,640
व वो जो जेल धाम में बैठा हो या फिर जिस पर मुकदमा

2057
02:31:30,640 --> 02:31:34,840
चल रहा हो य जो भी मुकदम रामपाल जी पर चल रहे या फिर जो रामपाल

2058
02:31:34,840 --> 02:31:39,000
हो ऐसे बताइए सि हो जाए जेल जो जेल धाम

2059
02:31:39,000 --> 02:31:43,800
बैठे वही है तत्वदर्शी हा तो वो लिखा दिखाओ भैया

2060
02:31:43,800 --> 02:31:49,800
लिखा शस्त्र में दिखाओ जैसे हमने दिखाया

2061
02:31:50,120 --> 02:31:54,120
वो किसी भी वेद में ग्रंथ में नहीं लिखा है किसी का नाम तो आप ही लोग का

2062
02:31:54,120 --> 02:31:58,240
नाम नहीं लिखा उका लि बो यानी

2063
02:31:58,240 --> 02:32:02,520
कि आप शास्त्र के बिना यह मानते हैं कि वह तत्वदर्शी है शास्त्र

2064
02:32:02,520 --> 02:32:05,000
के

2065
02:32:05,000 --> 02:32:09,000
बिना पूरे शास्त्र को खोल कर रख दिया आप कैसे कह रहे हैं

2066
02:32:09,000 --> 02:32:13,360
भाई साहब आपसे शस्त्र में खा लिखा दिखाओ

2067
02:32:13,360 --> 02:32:17,760
वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला रामपाल है

2068
02:32:17,760 --> 02:32:22,160
वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाले म में निवास करने वाले रामपाल है

2069
02:32:22,160 --> 02:32:26,280
आप दिखाइए मुझे या फिर वेदों को जानने वाले पूर्ण रूप

2070
02:32:26,280 --> 02:32:30,840
से जेल धाम में निवास करने वाले कबीर को भगवान कहने वाले रामपाल

2071
02:32:30,840 --> 02:32:34,880
है ऐसे दिखाइए चलिए नेट

2072
02:32:34,880 --> 02:32:37,480
कटने लगा तो

2073
02:32:37,480 --> 02:32:41,800
का नेट कटने लगा हेलो

2074
02:32:41,800 --> 02:32:46,080
जी जी नेट कट रहा था ये क रहे

2075
02:32:46,080 --> 02:32:50,400
हेलो क्या आपके पास आपके पास क पर प्रमाण

2076
02:32:50,400 --> 02:32:54,400
है भाई साहब कि तत्वदर्शी जो है वह पूरा

2077
02:32:54,400 --> 02:33:00,400
वेदों को जानने वाला जो है वह रामपाल है कहीं प्रमाण

2078
02:33:00,440 --> 02:33:04,560
है उसमें ना तो आप लोगों का नाम लिखा हुआ है ना तो उनका नाम लिखा

2079
02:33:04,560 --> 02:33:05,160
उसम य लिखा

2080
02:33:05,160 --> 02:33:09,240
हु है पास इतना है ना गायत्री का जप करता हो हम कह

2081
02:33:09,240 --> 02:33:13,400
रहे सुनिए गायत्री का जप करता हो और देवी मां

2082
02:33:13,400 --> 02:33:19,400
की आराधना करता ह क्या ये दोनों चीजें रामपाल में है

2083
02:33:20,040 --> 02:33:24,960
सिर्फ आपका प्रश्न नहीं रहेगा प्रश्न मेरा भी रहेगा आप जबरदस्ती क्यों कर रहे भा

2084
02:33:24,960 --> 02:33:28,200
करो ना तत्वदर्शी

2085
02:33:28,200 --> 02:33:32,560
हेलो ये पहले क्लियर तो करो तरा प्रश्न य है

2086
02:33:32,560 --> 02:33:36,560
अरे भाई प्रश्न मैं पूछूं मैं मैं आपको प्रश्न करने मैं प्रश्न

2087
02:33:36,560 --> 02:33:40,760
करने को कहूंगा मैं प्रश्न पूछूंगा आपसे आपका प्रश्न क्या है

2088
02:33:40,760 --> 02:33:45,320
अभी आप ये चीज क्लियर करिए कि जब हमने बताया कि भैया

2089
02:33:45,320 --> 02:33:49,360
वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला वो है जो देवी मां की आराधना

2090
02:33:49,360 --> 02:33:54,040
करेगा गायत्री का जप करेगा तो अब आप मुझे बताइए

2091
02:33:54,040 --> 02:33:58,120
कि आपके जो रामपाल है वो तत्वदर्शी क्यों मान लिए जाए जबक वह

2092
02:33:58,120 --> 02:34:02,240
गायत्री का जप नहीं करते हैं वह देवी मां की निरंतर आराधना नहीं करते

2093
02:34:02,240 --> 02:34:05,000
हैं

2094
02:34:05,000 --> 02:34:09,280
बताइए संत रामपाल जी महाराज देवी का भी निरंतर अर्थना करते हैं गायत्री

2095
02:34:09,280 --> 02:34:13,280
का भी जाप करते हैं आप ऐसे कैसे समझिए नहीं करते चलो

2096
02:34:13,280 --> 02:34:17,440
तालिया बजाओ भैया तालिया बजाओ तालिया बजाओ भैया

2097
02:34:17,440 --> 02:34:21,680
एक बार और रिपीट कर दीजिए संत राम महाराज देवी मां की निरंतर आराधना

2098
02:34:21,680 --> 02:34:26,160
करते हैं मां भगवती की चलिए कहिए मेरी बात सुनिए

2099
02:34:26,160 --> 02:34:30,400
संत रामत राम हम क्लियर सुन नहीं पाए

2100
02:34:30,400 --> 02:34:34,480
हम क्लियर सुन नहीं पाए जी जी संत रामपाल जी महाराज निरंतर

2101
02:34:34,480 --> 02:34:39,560
देवी मां की आराधना करते हैं गायत्री का जप करते

2102
02:34:39,560 --> 02:34:45,560
हैं संत रामपाल जी

2103
02:34:47,240 --> 02:34:51,400
महाराज उनके मत कर हमको

2104
02:34:51,400 --> 02:34:55,840
यह बताइए एक बार क्लियर बोलिए क्या संत रामपाल

2105
02:34:55,840 --> 02:35:00,480
जी महाराज निरंतर देवी मां की आराधना करते हैं और

2106
02:35:00,480 --> 02:35:06,480
गायत्री मंत्र का जाप करते हैं यह बताइए

2107
02:35:06,960 --> 02:35:11,040
बोलिए संत रामपाल जी महाराज जो हम लोग को मंत्र दिए हैं उसमें देवी का

2108
02:35:11,040 --> 02:35:15,160
भी मंत्र है ब्रह्मा विष्णु महे का मंत्र नहीं बोलेंगे सब बोल

2109
02:35:15,160 --> 02:35:19,160
देंगे अब थोड़ी देर गोविंद जी आपल कर भैया

2110
02:35:19,160 --> 02:35:23,800
देवी का मंत्र दिया है इन्होने कौन से ग्रंथ में लिखा हुआ है ट के

2111
02:35:23,800 --> 02:35:28,720
अलावा देख आप देखिए इनसे कुछ जानकारी

2112
02:35:28,720 --> 02:35:33,320
लेता देख लिया भैया हेलो रामपाल के फॉलो

2113
02:35:33,320 --> 02:35:37,440
देख लो ऐसे ही सच्चाई पर आना पड़ेगा जब बाल की खाल

2114
02:35:37,440 --> 02:35:41,800
निकलेगी एक एक अपनी बुद्धि में थोड़ा बहुत विवेक बचाओ

2115
02:35:41,800 --> 02:35:45,920
तो सोचो उन्हीं पन्नों से उन्हीं श्लोकों

2116
02:35:45,920 --> 02:35:51,880
से जिन श्लोकों को तुम स्वीकार कर रहे हो उन्हीं से बता रहे

2117
02:35:51,880 --> 02:35:55,960
औरक लिखा है उसी श्लोक में उसी भगवत गीता में

2118
02:35:55,960 --> 02:35:59,960
ये कौन होते हैं संस्कृत का अर्थ करने वाले कौन होते हैं अभी

2119
02:35:59,960 --> 02:36:02,320
संस्कृत में दो मिनट बोलने को दे दिया जाएगा बोल नहीं

2120
02:36:02,320 --> 02:36:06,800
पाएंगे न्यूमरस को न मोरिस बोलते हैं इंग्लिश में न्यूमरस को

2121
02:36:06,800 --> 02:36:11,280
न मोरिस बोलते है रा बाराम जी ये जो देवी

2122
02:36:11,280 --> 02:36:15,640
आद अरे सुन लीजिए सुन लीजिए ना आ रहा उसी पर आ रहा दो मिनट शांत रही

2123
02:36:15,640 --> 02:36:19,840
इतना जल्दबाजी नहीं है कोई कहीं नहीं भाग रहा य जो देवी आदि के व मंत्र दे

2124
02:36:19,840 --> 02:36:23,960
वो कौन से ग्रंथ से देते हैं कौन सा शास्त्र है व 18 पुराण

2125
02:36:23,960 --> 02:36:28,000
होंगे ठीक है या वेद होंगे ठीक है

2126
02:36:28,000 --> 02:36:33,040
आपको पता है श्लोक और मंत्र में अंतर क्या होता है

2127
02:36:33,040 --> 02:36:37,240
वैसे जी जी हम उसको आप ही बताएंगे

2128
02:36:37,240 --> 02:36:41,720
लोक और मंत्र में क्या [संगीत] अ

2129
02:36:41,720 --> 02:36:45,840
जी एक बात आपसे निवेदन करूंगा विषय बदल जाएगा ये बात

2130
02:36:45,840 --> 02:36:51,840
क्लियर नहीं हो पाएगी आप उस उसी

2131
02:36:53,160 --> 02:36:58,000
ये लोग क्या करते जैसे ये वाली बात खुलने लगी अगले अगले ल

2132
02:36:58,000 --> 02:37:04,000
वो बात लने लगी उससे अग ल क्लियर होता

2133
02:37:09,480 --> 02:37:13,680
नली स्कार कर लीजिए आप या तो यह मानिए कि जो

2134
02:37:13,680 --> 02:37:17,920
आपके रामपाल है भगवती के भक्त हैती के भक्त

2135
02:37:17,920 --> 02:37:22,000
यन्ने मान लिया रिकॉर्डिंग हमारे पास ी एक बार और एक बार और क्लियर

2136
02:37:22,000 --> 02:37:26,000
कर दे जरा जनता देख ले जनता देख ले जरा जी जी जी जी मैं क्लियर कर

2137
02:37:26,000 --> 02:37:30,280
रहा हूं मैं क्लियर कर रहा हूं संत राम अरे स्क्रीन दिखाइए

2138
02:37:30,280 --> 02:37:34,760
स्क्रीन क्यों हटा रहे हैं स्क्रीन दिखाइए हां

2139
02:37:34,760 --> 02:37:38,840
ये क रहे कि संत रामपाल जी महाराज देवी का भी ब्रह्मा विष्णु महेश का भी

2140
02:37:38,840 --> 02:37:42,880
मंत्र देते हैं अपने भक्तों को हम लोग प्रतिदिन जाप करते हैं हम यह कह रहे

2141
02:37:42,880 --> 02:37:47,240
हैं देवी मां की नित्य आराधना करते हैं क्या वो

2142
02:37:47,240 --> 02:37:51,800
अब उसको उनसे पूछना पड़ेगा करते हैं नहीं करते हम उसको कैसे बाप बता तो फिर तोर

2143
02:37:51,800 --> 02:37:57,640
पूछ के आइए या तो यह मानिए कि नहीं करते हैं पूछ के

2144
02:37:57,640 --> 02:38:01,800
आइए उनसे पूछेंगे तो फिर आप चले जा

2145
02:38:01,800 --> 02:38:05,800
बैठ कर चर्चा कर लीजिए ठीक है अब यहां प आपकी बात हो गई अब

2146
02:38:05,800 --> 02:38:08,240
आप अपनी बात बोल सकते हैं वैसे अभी

2147
02:38:08,240 --> 02:38:12,360
आपने बिना पूछे मान लिया कि वो देवी मां की आराधना करते की निरंतर

2148
02:38:12,360 --> 02:38:16,000
आराधना नहीं करते हैं

2149
02:38:16,000 --> 02:38:20,000
बताइए संत रामपाल जी महाराज का निर ना करते हैं

2150
02:38:20,000 --> 02:38:24,240
गायत्री का भी जाप करते हैं आप े कैसे समझ नहीं

2151
02:38:24,240 --> 02:38:28,640
करते ठीक

2152
02:38:28,640 --> 02:38:33,160
है प्रश् गोविंद जी इनको प्रश्न पूछ लेने दीजिए

2153
02:38:33,160 --> 02:38:39,160
हो गया क्लियर हो गया पूछिए

2154
02:38:41,920 --> 02:38:45,360
पूछिए अरे

2155
02:38:45,360 --> 02:38:51,360
बोलिए वो ये सोच रहे हैं ऐसा ना हो एक और कंट दे द मैं इनको

2156
02:38:51,800 --> 02:38:57,800
सही से चल नहीं रहा वो नहीं

2157
02:38:58,640 --> 02:39:03,200
चलेगा अरे वो कई लोग जुड़ना चाह रहे हैं तो

2158
02:39:03,200 --> 02:39:08,240
नहीं चलिए ठीक है आप फिर बाद में आइए हां भाई कौन

2159
02:39:08,240 --> 02:39:12,400
है योगेश योगेश को लीजिए पहले मयूर चौहान

2160
02:39:12,400 --> 02:39:17,080
है और कौन है जोगेश जी

2161
02:39:17,080 --> 02:39:21,160
बताइए मूट कर अपने आपको को अन म्यूट कर लीजिए

2162
02:39:21,160 --> 02:39:26,120
योगेश जी एक जगह बैठ जाइए जय श्री राम शव

2163
02:39:26,120 --> 02:39:30,480
जय श्री राम जय श्री राम यह जो कहते ना

2164
02:39:30,480 --> 02:39:36,480
सतयुग में मतलब कबीर ने अवतार लिया तो इनका मतलब कोई भक्ति क्यों नहीं

2165
02:39:37,280 --> 02:39:41,640
करते अरे वो सत सुकृत नाम से मतलब अवतार लिया था ना ये

2166
02:39:41,640 --> 02:39:45,760
कबीर ने तो इनकी कोई भक्ति नहीं कर पतार लिया

2167
02:39:45,760 --> 02:39:48,620
ना

2168
02:39:48,620 --> 02:39:53,520
[प्रशंसा]

2169
02:39:53,520 --> 02:39:57,960
की भक्ति क्यों नहीं करते

2170
02:39:57,960 --> 02:40:03,960
हा शलेश पुरी जी वापस आए

2171
02:40:04,480 --> 02:40:09,200
आज शलेश पुरी जी वापस

2172
02:40:09,200 --> 02:40:13,280
आए सुनिए योगेश कौन है दास

2173
02:40:13,280 --> 02:40:17,920
जी कौन है ये शलेश चौहान जी

2174
02:40:17,920 --> 02:40:22,080
आपको कोई विशेष बात कहनी हो तो बताए बताइए अरे

2175
02:40:22,080 --> 02:40:26,360
मुझे वो ये कबीर सागर में है ना ये कहते ना मतलब संत

2176
02:40:26,360 --> 02:40:30,760
मतलब संत क्या रामपाल को कहते ना मतलब 500 साल

2177
02:40:30,760 --> 02:40:34,920
55 क्या था वो मतलब बाद में कबीर मतलब कबीर का चेला आएगा

2178
02:40:34,920 --> 02:40:39,360
सतनाम देने योगेश जी आपकी बात इनको समझा देता हूं

2179
02:40:39,360 --> 02:40:43,640
मैं आपकी बात इनको समझा देता हूं दरअसल है क्या कि इन्होने अपने पुस्तक

2180
02:40:43,640 --> 02:40:47,680
में लिखा है कि सतयुग में कबीर जी आए थे सत स्वीकृत नाम से ठीक है

2181
02:40:47,680 --> 02:40:51,760
त्रेता में आए वो के नाम से द्वापर में वो किसी और के नाम

2182
02:40:51,760 --> 02:40:56,160
से आए तो ये पूछ रहे हैं कि ये जो उनके रूप है जो मुनंदर

2183
02:40:56,160 --> 02:41:01,440
है या सत सुकृत है सतयुग वाले तो उनकी आराधना क्यों नहीं होती है हमारे

2184
02:41:01,440 --> 02:41:05,440
अनुसार हा वह आराधना सीधे एक ही की होती है रामपाल

2185
02:41:05,440 --> 02:41:09,600
दास जी यह देख लो जो इस समय बीमार पड़े

2186
02:41:09,600 --> 02:41:13,640
थे अभी कुछ दिन पहले आंखें सूझी हुई थी गाल और

2187
02:41:13,640 --> 02:41:19,640
मुह सब सूजा हुआ था अभी लास्ट मैंने वो देखा वो एकम

2188
02:41:20,360 --> 02:41:25,120
द्वितीय चैनल है उस पर मैंने देखा लास्ट एपिसोड जो

2189
02:41:25,120 --> 02:41:29,120
ऐसे ही सामने आ गया था तो उसमें देखा कि यह इनका

2190
02:41:29,120 --> 02:41:33,800
इंटरव्यू चल रहा है प्रेस वाले इंटरव्यू ले रहे हैं इनका और

2191
02:41:33,800 --> 02:41:38,440
उसमें वो कह र भाई बीमार था में सही हो गया चश्मा लगाया आंखों पर

2192
02:41:38,440 --> 02:41:42,800
आंखों पर चश्मा कब लगता है पाड़ी

2193
02:41:42,800 --> 02:41:46,800
जी आपके चश्मा लगा हुआ है आप बताए चश्मा तभी लगता है जब

2194
02:41:46,800 --> 02:41:51,480
नजरें कमजोर हो जाती है नजर कम हो जाती है शक्ति

2195
02:41:51,480 --> 02:41:56,480
हीनता शक्तिमान में शक्ति हीनता आती है

2196
02:41:56,480 --> 02:42:00,760
तब और हम तो साधारण मनुष्य

2197
02:42:00,760 --> 02:42:04,840
हैं वो तो तत्वदर्शी थे कबीर का अवतार थे उनको कैसे

2198
02:42:04,840 --> 02:42:08,840
लग गया चश्मा आज मुझे लग रहा है शैलेश पुरी

2199
02:42:08,840 --> 02:42:12,880
जी बहुत तैयारी के साथ आए

2200
02:42:12,880 --> 02:42:17,400
हैं सही बात है बोलिए शैलेश पुरी जी

2201
02:42:17,400 --> 02:42:21,400
योगेश जी आपको कुछ नहीं कहना है तो आप डप हो

2202
02:42:21,400 --> 02:42:25,400
सकते यो जी आपकी बात हो गई वो अपनी

2203
02:42:25,400 --> 02:42:29,600
मनमानी करते हैं शास्त्र समत कुछ नहीं करते वो उन शास्त्रों

2204
02:42:29,600 --> 02:42:34,560
को भी नहीं मानते जो शास्त्र व मानने का दावा करते

2205
02:42:34,560 --> 02:42:40,560
हैं नहीं नहीं अगर कोई रामपाल चले आए

2206
02:42:40,640 --> 02:42:46,640
तो सुनाई नहीं दे रही आपकी आवाज एक तो आपके

2207
02:42:47,120 --> 02:42:51,400
पीछे एक जग पले होके बात करिए हा वो घ

2208
02:42:51,400 --> 02:42:53,720
इधर

2209
02:42:53,720 --> 02:42:58,080
उधर हां हां हां मैं क्या कह रहा हूं तो पय

2210
02:42:58,080 --> 02:43:02,160
भक्ति नहीं करते बताते हम भक्ति कर योगेश

2211
02:43:02,160 --> 02:43:06,720
जी आप रविवार को आ जाइए ठीक है रविवार को बात करते हैं आपसे है ना

2212
02:43:06,720 --> 02:43:11,840
ठीक है हां हां ओके ओके ओ जय श्री

2213
02:43:11,840 --> 02:43:16,080
राम जय श्री राम

2214
02:43:16,080 --> 02:43:20,560
जय श्री राम जिनको मैं कहूंगा

2215
02:43:20,560 --> 02:43:24,600
कि मयंक जी आप थोड़ा सा बता दे कोई विशेष प्रयोजन हो

2216
02:43:24,600 --> 02:43:28,760
तो थोड़ा सा स्क्रीन खाली करें ना होता क्या है कि चेहरे ज्यादा छोटे होते हैं ना तो

2217
02:43:28,760 --> 02:43:33,480
शॉर्ट बनाते समय पिक्चर क्लियर नहीं आती

2218
02:43:33,480 --> 02:43:37,480
है जी आप अपनी बात रख दे लेश

2219
02:43:37,480 --> 02:43:41,560
जी पाच मिनट दीजिए मुझे मैं आपको लेता हूं जी कोई बात

2220
02:43:41,560 --> 02:43:45,720
नहीं भैया मैं निकल जाता हूं अभी आप बात कर लो इनसे हा थोड़ा चेहरे बहुत छोटे

2221
02:43:45,720 --> 02:43:50,640
हो जाते हैं ना तो वो रील बनाते टाइम वो बड़ा करना पड़ता है पड़ जाता है चेहरा

2222
02:43:50,640 --> 02:43:55,280
ठीक है जितना कम से कम हो सके जी

2223
02:43:55,280 --> 02:43:59,520
मुझे तो सिर्फ इतना याद आ रहा है वो कहावत नहीं आती अंधेर नगरी चौपट राजा

2224
02:43:59,520 --> 02:44:02,760
नका य हाल है

2225
02:44:02,760 --> 02:44:07,120
य तोते बन गए जिनको सिखा दिया गया बस यही करना है वह तोते

2226
02:44:07,120 --> 02:44:12,800
बन गए बाकी इनका खुद का जो स्व विवेक है ना खत्म हो

2227
02:44:12,800 --> 02:44:18,800
गया चलिए कोई नहीं शायद जाग जाए भाई है हमारे

2228
02:44:19,560 --> 02:44:25,560
कोई नहीं मुझे मैं हट जाता हूं कोई बात नहीं जी

2229
02:44:25,840 --> 02:44:31,840
जी जी शैलेश पुरी जी

2230
02:44:34,360 --> 02:44:39,400
जीम बोलिए जी ब बताइए सर

2231
02:44:39,400 --> 02:44:44,840
क्या कबीर अजर है

2232
02:44:44,840 --> 02:44:50,840
अजर हालचाल लेने आ क्या बताइए क्या

2233
02:44:51,000 --> 02:44:55,240
देखो सर जी पहले तो ये मेरे को एक चीज

2234
02:44:55,240 --> 02:44:59,880
आपकी डिबेट में थोड़ी सी ठीक नहीं लगी हम

2235
02:44:59,880 --> 02:45:04,720
जैसे अपन परमात्मा के ज्ञान की चर्चा कर रहे

2236
02:45:04,720 --> 02:45:08,960
हैं जी परमात्मा तो सभी के लिए

2237
02:45:08,960 --> 02:45:13,640
पूजनीय होते हैं कोई किसी भी रूप में पूज रहा है कोई किसी रूप में पूज रहा है

2238
02:45:13,640 --> 02:45:18,080
तब देखिए आपके द्वारा बताई गई धारणाएं हमारे लिए तब सम्माननीय

2239
02:45:18,080 --> 02:45:22,280
नहीं रह जाती जब आप हमारे हमारे द्वारा आस्त जो चीजें

2240
02:45:22,280 --> 02:45:26,920
हैं उनका मजाक उड़ाए दीपावली का मजाक

2241
02:45:26,920 --> 02:45:31,440
उड़ाए दुर्गा माता का मजाक उड़ाए इसलिए हमसे

2242
02:45:31,440 --> 02:45:35,600
हमने जो व्यवहार किया बहुत मर्यादित किया है तो इसलिए हमसे

2243
02:45:35,600 --> 02:45:40,240
तो यह सवाल करने का आपका कोई अधिकार है ही नहीं हम बहुत म

2244
02:45:40,240 --> 02:45:44,360
आपके आगे आप आप तो उन किताबों को बेच रहे हो बांट

2245
02:45:44,360 --> 02:45:49,000
रहे हो जिन किताबों में हमारी मां का अपमान लिखा हुआ है देखो

2246
02:45:49,000 --> 02:45:53,000
अगर सर ऐसा है तो तो मैं अभी लेफ्ट हो जाता हूं आप आप अगर

2247
02:45:53,000 --> 02:45:57,000
आप ये सवाल लेकर आए हैं कि देखिए मुझे आपकी डिबेट में ये नहीं अच्छा लगा

2248
02:45:57,000 --> 02:45:59,960
वो नहीं अच्छा लगा तो आप जा सकते हैं नहीं

2249
02:45:59,960 --> 02:46:04,000
तो सुन तो लीजिए बो है तो आपको जो आपकी जो किताब है वो सबसे पहले

2250
02:46:04,000 --> 02:46:08,000
जलानी चाहिए जिसमें दुर्गा माता के माले में भद्दी बात लिखी हुई

2251
02:46:08,000 --> 02:46:12,120
है आपको अपना एमपी चैनल है सुनिए सुनिए

2252
02:46:12,120 --> 02:46:16,400
आपको आपका जो एमली फास्ट चैनल है वहां जाकर के प्रतिकार करना चाहिए भाई देखो

2253
02:46:16,400 --> 02:46:21,560
दिवाली तुम्हें नहीं बनानी मत बनाओ मजाक मत उड़ाओ दीपावली

2254
02:46:21,560 --> 02:46:25,600
का तुम्हें गोवर का सम्मान नहीं है तुम्हें गणेश का सम्मान

2255
02:46:25,600 --> 02:46:29,640
नहीं है मत करो मगर मजाक मत उड़ाओ तब हमसे आक के

2256
02:46:29,640 --> 02:46:33,840
आपका य कहना उचित बनता है हम तो तब भी शब्दों की मर्यादा

2257
02:46:33,840 --> 02:46:37,120
रख रहे

2258
02:46:37,120 --> 02:46:42,080
हैं पहले पहले पूरा सुनिए मैंने पूरा बोलही नहीं पाया

2259
02:46:42,080 --> 02:46:46,960
मैं अपनी बात खत्म करता फिर आपने ही बोलना ठीक है मैं आपको बी

2260
02:46:46,960 --> 02:46:51,120
बोलिए सुंदर सुंदर जी है ना हमारे जैसे कि एक वो

2261
02:46:51,120 --> 02:46:55,200
प्रेमानंद जी है ठीक है उन्होंने भी दिवाली के लिए कुछ कहा था मैं उन्होंने क्या

2262
02:46:55,200 --> 02:46:59,280
कहा था वो सुना दीजिए उन्होंने इतनी बात दिवाली

2263
02:46:59,280 --> 02:47:03,480
केवल और केवल पटाखे आदि जलाने तक सीमित ना रखिए उनको कम

2264
02:47:03,480 --> 02:47:07,800
करके ध्यान को ऊपर बढ़ाइए हरि का चिंतन करिए पूरा परिवार

2265
02:47:07,800 --> 02:47:12,280
बैठकर हरि का भजन करिए हमने तो नहीं उनका कोई वो किया हालांकि

2266
02:47:12,280 --> 02:47:16,440
उन्होंने भी अगर देखा जाए तो दीपावली का वैसे ही विरोध किया था लेकिन उन्होंने बताया कि

2267
02:47:16,440 --> 02:47:20,560
सत्य क्या है आप लोगों के साथ दिक्कत क्या है आप पूरे त्यौहार को ही निंदनीय

2268
02:47:20,560 --> 02:47:24,760
बताते हो ठीक है और आप निंदा पर ध्यान देते हो अब आप बोलिए

2269
02:47:24,760 --> 02:47:28,840
मैं नहीं बोल अभी अभी भी इस समय छट पूजा का अपमान

2270
02:47:28,840 --> 02:47:33,160
चल रहा है एक और बात इसम जोड़ देता हूं दिवाली

2271
02:47:33,160 --> 02:47:37,440
के अवसर पर हम भगवती माल मा लक्ष्मी की आराधना करते हैं

2272
02:47:37,440 --> 02:47:41,440
उनका आवाहन करते हैं उनकी प्रांत प्रतिष्ठा करते हैं और फिर उनकी

2273
02:47:41,440 --> 02:47:45,640
आराधना करते हैं और उनसे उनसे य रिक्वेस्ट करते हैं कि वो यहां रह जाए

2274
02:47:45,640 --> 02:47:49,800
भगवान गणेश के साथ और बाकी जो देवताओं का आवान कि होता है उनको अपने यथा

2275
02:47:49,800 --> 02:47:52,320
यथा स्थान पर जाने के लिए उनसे प्रार्थना करते

2276
02:47:52,320 --> 02:47:56,960
हैं ठीक तो उसम भगवती की उपासना होती है उस समय रात में शाम को

2277
02:47:56,960 --> 02:48:01,280
ठीक है यह सिर्फ पटाखे फोड़ना लाइट जलाना मिठाई बाटना नहीं है मेन

2278
02:48:01,280 --> 02:48:05,840
जो कार्य है वो भगवती की आराधना ही है उस समय ठीक है मेरी बात भी हो गई है

2279
02:48:05,840 --> 02:48:09,920
कोई जो एक मूर्ख है वो बारबार कुछ लिख रहा है अ ब्रह्मा

2280
02:48:09,920 --> 02:48:14,200
गए 4 कोटि कन्हैया सात कोटि य वो सब लिख रहा है अरे

2281
02:48:14,200 --> 02:48:20,000
मूर्ख यहां पर आकर के बात करना क्या हो गया

2282
02:48:20,000 --> 02:48:24,280
पन में मा माता जी ने निष्ठा पूर्वक नहीं

2283
02:48:24,280 --> 02:48:28,480
ले जी बोलिए ऐसा जी देखो

2284
02:48:28,480 --> 02:48:32,520
वोह जो बोल रहे हैं आप आप जी को मैं डिबेट में

2285
02:48:32,520 --> 02:48:37,240
आया हूं थोड़ा सा टाइम दीजिएगा प्लीज बोलिए

2286
02:48:37,240 --> 02:48:41,400
मैं अपनी बात अभी पूरी नहीं कर पाई आपने का मैं यह कहना चाह रहा था कि जैसे आप डिबेट

2287
02:48:41,400 --> 02:48:46,080
करते हो अच्छी चीज है होना चाहिए परमात्मा के ज्ञान के लिए डिबेट होना चाहिए

2288
02:48:46,080 --> 02:48:50,400
जी लेकिन लेकिन जैसे परमा के डिबेट में अगर कोई हंसता

2289
02:48:50,400 --> 02:48:54,800
है उसका मजाक बनाता है तो यह ठीक नहीं

2290
02:48:54,800 --> 02:48:59,240
अरे भैया इनको जरा एक क्लिप दिखा दो उनके हसने वाली एमपी फास्ट वालों की

2291
02:48:59,240 --> 02:49:03,240
और रामपाल जी के रामपाल जी की क्लिप दिखा दूं वो वाला दिखा

2292
02:49:03,240 --> 02:49:07,720
दो ये हो गया ना इनका बाप वो वाली क्लिप दिखा दो अगर हो

2293
02:49:07,720 --> 02:49:11,720
तो अभी मैं कोई क्लिप नहीं देख रहा अभी मैं कोई क्लिप

2294
02:49:11,720 --> 02:49:15,920
नहीं रहा आपको हमारा हसना दिखाई दे रहा है रामपाल दास के द्वारा

2295
02:49:15,920 --> 02:49:20,080
मजाक ाना स्वीकार नहीं दे रहा दिखाई नहीं दे रहा बोल रहे थे आप बोल

2296
02:49:20,080 --> 02:49:24,640
रहे थे कि संत रामपाल जी महाराज जो है दुर्गा जी का अपमान करते हैं मैं

2297
02:49:24,640 --> 02:49:28,720
देखिए एक ॉ आपने छेड़ा है तो उस टॉपिक की बाल की

2298
02:49:28,720 --> 02:49:32,720
खाल निकले उसके बाद मले में जाए या तो आप कए मुझे टॉप

2299
02:49:32,720 --> 02:49:37,480
बात नहीं करनी ये अपना पवित्र सद ग्रंथ

2300
02:49:37,480 --> 02:49:41,560
है ठीक है जी और हम इसको बहुत ही आदरण की दृष्टि से

2301
02:49:41,560 --> 02:49:45,880
देखते हैं हमारे गुरुदेव जी देखते हैं हमारे गुरुदेव जी ने इनका आदर करना सिखाया है हमको

2302
02:49:45,880 --> 02:49:50,080
भाई साहब सुनिए अभी एक बात चल रही है कि आपके जो गुरुदेव

2303
02:49:50,080 --> 02:49:54,440
है उनको आपने गुरुदेव माना क्यों है यह बताइए

2304
02:49:54,440 --> 02:49:58,560
क्यों माना है ये ये ये अच्छा यह कोई तर्क

2305
02:49:58,560 --> 02:50:02,640
वाला प्रश्न नहीं है जी क्योंकि किसी को हम

2306
02:50:02,640 --> 02:50:06,680
जब गुरु बनाते हैं तो उसका आधार होता है ना कुछ कि

2307
02:50:06,680 --> 02:50:10,720
हम किसी को गुरु क्यों बनाएंगे हा उसका आधार सद ग्रंथ होते

2308
02:50:10,720 --> 02:50:15,160
हैं सद ग्रंथ होते हैं तो सद ग्रंथ में कहां लिखा है रामपाल

2309
02:50:15,160 --> 02:50:19,200
दास जी को गुरु बनाओ नहीं सद ग्रंथ के अंदर यह लिखा

2310
02:50:19,200 --> 02:50:22,960
है कि वह गुरु है जो शास्त्र के अनुकूल साधना करवाए

2311
02:50:22,960 --> 02:50:28,640
हा शास्त्र के अनुकूल तो शास्त्र के अनुकूल मुझे बताओ तत्वदर्शी कैसे

2312
02:50:28,640 --> 02:50:32,760
है यो जो गुरु शास्त्र के अनुकूल साधना करवाता

2313
02:50:32,760 --> 02:50:36,760
है सभी शास्त्रों में मैं पूछ रहा हूं वो

2314
02:50:36,760 --> 02:50:41,240
तर्शी वो तत्वदर्शी कैसे सिद्ध हुए शास्त्र के अनुकूल वो

2315
02:50:41,240 --> 02:50:45,640
बताइए वही बता रहे हैं वही बता रहे हैं यही अपना जो पवित्र

2316
02:50:45,640 --> 02:50:49,800
ये अपना जो पवित्र देवी भागवत है ना हमी किसे बताएंगे आपको

2317
02:50:49,800 --> 02:50:53,880
ये थोड़ा चैप्टर बदल रहे हैं आप नहीं अरे क्या बात करते

2318
02:50:53,880 --> 02:50:57,880
हो आप भाई तत्वदर्शी तत्वदर्शी आपने

2319
02:50:57,880 --> 02:51:01,880
15 एक में माना है ना सुनो जी सुनो

2320
02:51:01,880 --> 02:51:06,240
हम सुनो जी ऐसा है जी तत्वदर्शी तत्वदर्शी

2321
02:51:06,240 --> 02:51:10,520
का तो हमारे सभी पवित्र सद ग्रंथों में प्रमाण है ऐसा नहीं है कि कोई एक गीता

2322
02:51:10,520 --> 02:51:14,560
जी के अंदर हो के एक वेद के अंदर ही हो ऐसा नहीं है हमारे जितने

2323
02:51:14,560 --> 02:51:18,840
भी हमारे जितने भी आदरणीय सद ग्रंथ हैं चारों वेद हैं

2324
02:51:18,840 --> 02:51:23,280
और अपना गीता है पुराण है बाइबल है

2325
02:51:23,280 --> 02:51:28,080
पुराण है हां जी बाइबल बिल्कुल आपको एलर्जी हो

2326
02:51:28,080 --> 02:51:32,600
अब अब अब आप यह दिखाइए कि देवी भागवत से आप क्या दिखा रहे हैं

2327
02:51:32,600 --> 02:51:36,640
वो दिखाइए हम य जैसे आपने अभी बताया था कि संत रामपाल

2328
02:51:36,640 --> 02:51:39,280
जी महाराज तत्वदर्शी कैसे

2329
02:51:39,280 --> 02:51:43,520
हैं बताओ कैसे देखो ऐसे है मैंने अभी

2330
02:51:43,520 --> 02:51:47,600
मैंने अभी अपना जो पवित्र देवी प्राण है

2331
02:51:47,600 --> 02:51:52,760
उसका यह प्रश्न नंबर 571 खोल रखा है खोल लो भैया

2332
02:51:52,760 --> 02:51:57,040
571 क्या लिखा है पहले पढ़ के बता दीजिए इसमें

2333
02:51:57,040 --> 02:52:02,320
एक प्रकरण है देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश

2334
02:52:02,320 --> 02:52:08,320
ये अरे क्या लिखा है आगे पढ़ो तो जो आप बताना चाह रहे हो वो

2335
02:52:10,520 --> 02:52:14,520
पढ़ो पहले ये पता कर लो कि इनका संस्कृत हिंदी वाला है या

2336
02:52:14,520 --> 02:52:19,480
केवल हिंदी संक्षिप्त वाला होगा इनका नहीं ऐसा

2337
02:52:19,480 --> 02:52:23,560
जी प्रका वही है संत हिंदी वाला

2338
02:52:23,560 --> 02:52:27,840
है या बना बिना संस्कृत वाला है इन गता

2339
02:52:27,840 --> 02:52:32,120
इनको संस्कृत हिंदी भी नहीं पता है अरे

2340
02:52:32,120 --> 02:52:36,400
र ऊपर संक्षिप्त लिखा है कि नहीं आप भी बताइए अपनी जो जो आपने ग्रंथ

2341
02:52:36,400 --> 02:52:41,480
निकाला है उसके ऊपर संक्षिप्त लिखा है ऊपर सबसे परर क्या लिखा

2342
02:52:41,480 --> 02:52:44,840
है

2343
02:52:44,840 --> 02:52:48,960
बोलिए अच्छा पहले हम इसका पहले हम इसका ये बोलना रहे

2344
02:52:48,960 --> 02:52:52,960
थे 544 पेज निकाल लिया भाई साहब आप बताइए

2345
02:52:52,960 --> 02:52:58,200
क्या है 544 नहीं है जी 5

2346
02:52:58,200 --> 02:53:03,640
सेव 571 पेज निकालिए भैया आ जाते

2347
02:53:03,640 --> 02:53:07,640
हैं 57 य लीजिए यानी कि अब

2348
02:53:07,640 --> 02:53:11,800
कुल मिला के अभी तक इतना तो है कि गीता के अनुसार तत्व द नहीं है

2349
02:53:11,800 --> 02:53:16,800
फिलहाल इतना तो मानना पड़ेगा गीता छोड़ दी इन्होने

2350
02:53:16,800 --> 02:53:21,560
नहीं आपकी बना पॉट टू बी नटेड गीता

2351
02:53:21,560 --> 02:53:25,680
छोड़ ये आपकी बनावटी बात है बताइए बताइए क्या लिखा

2352
02:53:25,680 --> 02:53:29,920
है उसम बताइए यानी हमारा यह पवित्र सद

2353
02:53:29,920 --> 02:53:34,160
ग्रंथ है जैसे आप लोग कहते हो कि संत रामपाल जी महाराज

2354
02:53:34,160 --> 02:53:38,280
इसको नहीं मानते तो इसी के अंदर लिखा हुआ है जो हमारी जो

2355
02:53:38,280 --> 02:53:42,280
देवी शक्ति है आदि शक्ति माता जी वो राजा हिमालय को

2356
02:53:42,280 --> 02:53:46,280
ज्ञान उपदेश दे रही है तो वो कह रही है इसम सभी कमलों

2357
02:53:46,280 --> 02:53:50,480
का विवरण है इसके अंदर अरे बताओ आगे बताओ भैया आगे

2358
02:53:50,480 --> 02:53:55,560
बताओ इसमें सभी कमलों का विवरण दिया है

2359
02:53:55,560 --> 02:53:59,720
हम ठीक है तो उन कमलों की जानकारी इसमें

2360
02:53:59,720 --> 02:54:00,220
दी

2361
02:53:59,920 --> 02:54:04,440
है जैसे मूल कमल स्वाद कमल नावी

2362
02:54:04,440 --> 02:54:08,600
कमल हृदय कमल कंठ कमल ठीक

2363
02:54:08,600 --> 02:54:12,720
है संसार कमल हम इसमें जो कमलों

2364
02:54:12,720 --> 02:54:16,720
का वर्णन दिया हुआ है तो हमारे पूज्य गुरुदेव जी इन्हीं

2365
02:54:16,720 --> 02:54:20,800
कमलों के अंदर जितने भी हमारे जो अधिपत्य है श्री गणेश

2366
02:54:20,800 --> 02:54:24,800
जी श्री शेरावली माता जी श्री ब्रह्मा

2367
02:54:24,800 --> 02:54:29,000
विष्णु जी और अपने विष्णु भगवान जी

2368
02:54:29,000 --> 02:54:33,200
इन सबके जो वास्तविक रियल मंत्र है जो

2369
02:54:33,200 --> 02:54:37,440
वास्तविक रियल मंत्र है उनको हमारे गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज अपने अनुयायियों

2370
02:54:37,440 --> 02:54:41,480
को देते हैं उन मंत्रों का जो सही जो वास्तव जो जाप

2371
02:54:41,480 --> 02:54:45,800
है वह हमारे शरीर में सभी देवता विराजमान है अपने

2372
02:54:45,800 --> 02:54:50,280
अपने कमलों के अंदर उनके मंत्र उनसे सभी

2373
02:54:50,280 --> 02:54:54,480
लोगों कोब आपकी बात बहुत लंबी हो रही है आप मुझे

2374
02:54:54,480 --> 02:54:58,680
य लिखा दिखा

2375
02:54:58,680 --> 02:55:02,720
य संत रामपाल जी महाराज की जो भक्ति है वो शास्त्र के अनुकूल

2376
02:55:02,720 --> 02:55:07,480
है हमारे पवित्र के सुनो

2377
02:55:07,480 --> 02:55:11,560
शास्त्र के अनुकूल कोई चोर भी होगा ना व भी अगर बता देगा गण

2378
02:55:11,560 --> 02:55:16,040
जी की पूजा करो हदय में दिल में वो बाम जो बामन

2379
02:55:16,040 --> 02:55:21,440
जी है चोर उसको भी हम त ले क्या

2380
02:55:21,440 --> 02:55:25,560
जो भी जिसने हमारी किताबों को पढ़ लिया और उसने

2381
02:55:25,560 --> 02:55:29,880
आकर के किताबों में य क गया उसके अनुसार बता दिया कि देख भाई झे

2382
02:55:29,880 --> 02:55:33,960
ऐसा करना तुझे ऐसा करना हो गया तत्वदर्शी अच्छा

2383
02:55:33,960 --> 02:55:38,280
एक रामपाल कोही तत्वदर्शी क्यों माना जाए यह

2384
02:55:38,280 --> 02:55:42,400
बताओ अगर अगर यह बात अगर आपकी बड़ी

2385
02:55:42,400 --> 02:55:46,640
करके मानते हैं एक मिनट के लिए आप पहले मुझे लिखा दिखाओ कि जो

2386
02:55:46,640 --> 02:55:52,640
इस प्रकार से भक्ति बताएगा वो तत्वदर्शी कहलाएगा पहले तो ये

2387
02:55:54,160 --> 02:55:58,400
दिखाओ अब इसके लिए आपको गीता जी में जाना पड़ेगा हां

2388
02:55:58,400 --> 02:56:02,440
जाओ जाओ जल्दी जाके लिए गीता जी

2389
02:56:02,440 --> 02:56:06,520
में जाना पड़ेगा हां जाओ और गीता जी में जाने से पहले

2390
02:56:06,520 --> 02:56:11,040
जाओ गीता जी खोलो गीता जी खोलो गीता जी खोलो बिल्कुल बिल्कुल अच्छा

2391
02:56:11,040 --> 02:56:15,160
गीता जी में जाने से पहले अपन यहां पर थोड़ा सा हिंट दिया है अपने पवित्र

2392
02:56:15,160 --> 02:56:19,280
इसी सद ग्रंथ के अंदर भा हमें हिंट प नहीं चलना है क्लियर कट

2393
02:56:19,280 --> 02:56:23,840
बात पर चलना है हिंट पर नहीं चलना है क्लियर कट लिखा

2394
02:56:23,840 --> 02:56:28,120
दिखाओ ंट पर नहीं चलना आपको क्लियर कट लिख दिखाएंगे गीता

2395
02:56:28,120 --> 02:56:32,400
जी पर जाओ जाओ गीता जी

2396
02:56:32,400 --> 02:56:36,840
पर यह अपनी पवित्र गीता है

2397
02:56:36,840 --> 02:56:39,480
हा

2398
02:56:39,480 --> 02:56:43,800
बोलो अरे बोलो आगे बोलो तत्वदर्शी

2399
02:56:43,800 --> 02:56:49,240
बोलो प्रचार करले पहले वो हा

2400
02:56:49,240 --> 02:56:53,560
आप अपने सद ग्रंथ का म मजा को आते हो भाई जो मंत्र

2401
02:56:53,560 --> 02:56:58,200
जो जो व्यक्ति मंत्र दे देगा यत में

2402
02:56:58,200 --> 02:57:03,240
ख हो गया मतलब की अभी कोई चोर

2403
02:57:03,240 --> 02:57:09,240
च कोई

2404
02:57:10,800 --> 02:57:16,400
गता र् हो गया

2405
02:57:16,400 --> 02:57:20,720
वाह अभी देखो गीता जी में अपन जाएंगे अभी गीता जी के देखो

2406
02:57:20,720 --> 02:57:25,080
अ हेलो भैया सुनिए यह भी मंत्र देते हैं यह बता रहे

2407
02:57:25,080 --> 02:57:29,600
तत्वदर्शी में भी मंत्र देता हूं वही वाले ये भी देता हैका

2408
02:57:29,600 --> 02:57:33,760
नाम है रू ये भी तत्वदर्शी हो ग आपके लिए

2409
02:57:33,760 --> 02:57:38,000
ये भी मंत्र देते मैं भी तो देवी भागवत पढ़ के दिखा रहा हूं आपको

2410
02:57:38,000 --> 02:57:42,000
तो मेरे को तत्वदर्शी मानेंगे

2411
02:57:42,000 --> 02:57:46,080
क्या हेलो मंत्र तो दो लोग और मिल

2412
02:57:46,080 --> 02:57:50,280
गए देने वाले इनको भी मानते हो क्या तत्वदर्शी शास्त्र अनुकूल भक्ति

2413
02:57:50,280 --> 02:57:56,280
बता रहे हैं ये दोनों

2414
02:57:56,880 --> 02:58:01,520
हेलो चलो बस अब इनका ले ले भाई बाबूराम

2415
02:58:01,520 --> 02:58:06,040
जी है आप फिर बात होगी आपकी

2416
02:58:06,040 --> 02:58:10,240
गीता जी जो है गीता जी इसका जो अध्याय नंबर चार

2417
02:58:10,240 --> 02:58:14,240
का श्लोक नंबर 33 में गीता ज्ञान देने वाले भगवान स्पष्ट कह रहे हैं कि

2418
02:58:14,240 --> 02:58:18,280
अर्जुन द्रव्य यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है

2419
02:58:18,280 --> 02:58:22,520
पहले ज्ञान को समझो ठीक है फिर

2420
02:58:22,520 --> 02:58:26,880
ज्ञान समझो से आ

2421
02:58:26,880 --> 02:58:31,040
गए ठीक है जी अरे

2422
02:58:31,040 --> 02:58:35,400
राम ज्ञान क्या है ज्ञान क्या है

2423
02:58:35,400 --> 02:58:39,400
ज्ञान वो है जो कि संत सभी

2424
02:58:39,400 --> 02:58:44,480
शास्त्रों में प्रमाण करे आज तक हमें तो किसी

2425
02:58:44,480 --> 02:58:48,320
में लिखा हुआ क्या है वो बोलो अपना

2426
02:58:48,320 --> 02:58:52,560
मत बताओ सुनो पन आपका ज्ञान की बात ही

2427
02:58:52,560 --> 02:58:56,640
झूठ है आपने जो ज्ञान का मतलब बताया वही झूठ है पहली बात तो ये है

2428
02:58:56,640 --> 02:59:00,720
सुनो सुनो गीता जी के अंदर क्या

2429
02:59:00,720 --> 02:59:04,720
लिखा है जो हमारे पूज्य गुरुदेव जी ने हमको बताया

2430
02:59:04,720 --> 02:59:08,920
है हम पहले गीता प क्या लिखा है पढ़ो भैया वो पढ़ो

2431
02:59:08,920 --> 02:59:13,800
गीता जी में क्या लिखा है आपके पूज्य गुरुदेव ने क्या बताया वो

2432
02:59:13,800 --> 02:59:18,120
बताओ अध्याय नंबर चार का लोक नंबर

2433
02:59:18,120 --> 02:59:22,200
में स्पष्ट लिखा हुआ है हा उस

2434
02:59:22,200 --> 02:59:26,560
ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ

2435
02:59:26,560 --> 02:59:30,760
ठीक है अब बताओ रामपाल कैसे हुए

2436
02:59:30,760 --> 02:59:35,640
उसम यह नहीं लिखा कि किसी के पास भी उसम लिखा है तत्व

2437
02:59:35,640 --> 02:59:39,680
रामपाल कैसे हुए वो बताओ ना भाई क्यों इतनी देर लगा रहे हो

2438
02:59:39,680 --> 02:59:42,440
उनको भली बाती नवत प्रणाम कर

2439
02:59:42,440 --> 02:59:46,480
अरे भाई मैं त समझ गया आगे बढ़ो 15 एक प जाओ मुझे मालूम

2440
02:59:46,480 --> 02:59:51,320
15 प जाओगे उसके बाद में उसके बाद में

2441
02:59:51,320 --> 02:59:56,080
वो तत् दर्शी संत होगा जो ज्ञान को बताएगा बारीकी से

2442
02:59:56,080 --> 03:00:00,320
ठीक है जी अब क्या वो ज्ञान कौन सा है वो ज्ञान

2443
03:00:00,320 --> 03:00:04,520
कौन सा है हां बोलो वो वो ज्ञान है

2444
03:00:04,520 --> 03:00:08,880
अध्याय नंबर सात का श्लोक नंबर 29 बोलो भैया

2445
03:00:08,880 --> 03:00:13,000
अध्याय नंबर सात श्लोक नंबर 29 हां लो

2446
03:00:13,000 --> 03:00:17,040
मैं खोल लेता हूं 15 एक छोड़ दिया देख लो भैया 15 एक

2447
03:00:17,040 --> 03:00:21,760
छोड़ दिया वो हो गया उसका काम हो

2448
03:00:21,760 --> 03:00:26,240
गया उस पर जितनी करवानी थी वो करवा चुके

2449
03:00:26,240 --> 03:00:30,640
हा खुल गया भाई बताइए लया इस इसमें स्पष्ट

2450
03:00:30,640 --> 03:00:35,280
लिखा हुआ है कि जरा मरण मोछ माम आस

2451
03:00:35,280 --> 03:00:37,560
यत

2452
03:00:37,560 --> 03:00:42,080
ते ते ब्रह्म तद विदु कृष्णम अध्यात्म

2453
03:00:42,080 --> 03:00:46,280
कर्म अखिलम यानी इसम क रहे जो

2454
03:00:46,280 --> 03:00:50,480
मेरे शरण होकर जरा माने वृद्धावस्था और

2455
03:00:50,480 --> 03:00:55,240
मरण माने मृत्यु से छूटने के लिए यत्न करते हैं

2456
03:00:55,240 --> 03:00:57,840
वे पुरुष उस ब्रह्म को

2457
03:00:57,840 --> 03:01:02,200
यानी वो ब्रह्म अलग है उस ब्रह्म को और संपूर्ण अध्यात्म

2458
03:01:02,200 --> 03:01:06,320
को संपूर्ण कर्म को जानते हैं भाई साब

2459
03:01:06,320 --> 03:01:12,320
मैं पूछ रहा हूं तत्वदर्शी सिद्ध करिए तत्वदर्शी कहां है

2460
03:01:12,720 --> 03:01:16,800
इसमें तत्वदर्शी ये तीन

2461
03:01:16,800 --> 03:01:21,040
चीजों को से परिचित जाएगा व व्यक्ति जो त

2462
03:01:21,040 --> 03:01:25,160
वो भी आप मुझे लिखा दिखाइए कि ये तीन चीजों से जो परिचित हो जाएगा वो

2463
03:01:25,160 --> 03:01:29,360
तत्वदर्शी कहलाएगा वो भी लिखा दिखाओ अभी

2464
03:01:29,360 --> 03:01:34,280
अभी वर्तमान के अंदर संत रामपाल जी महाराज ही तीन चीजों

2465
03:01:34,280 --> 03:01:38,360
सेवा सुनने नहीं बैठा हूं आपको बोलने का अवसर दे रहा हूं इसका मतलब य नहीं आप

2466
03:01:38,360 --> 03:01:42,600
अपनी बकवास बोलेंगे मैं पूछ रहा हूं कि यह तीनों चीज जो आपने

2467
03:01:42,600 --> 03:01:48,120
बताई यह बताने वाला तत्वदर्शी होगा य कहां से सिद्ध हो रहा है

2468
03:01:48,120 --> 03:01:52,480
आपको लेफ्ट करना है तो हटा दीजिए मैं स्वच्छा से हट जाऊगा कोई दिक्कत नहीं

2469
03:01:52,480 --> 03:01:58,480
सते आपकी मर्जी आप जा सकते अगर

2470
03:02:00,000 --> 03:02:04,080
बता बता इन्होने अपने गुरु का दामन छोड़ दिया

2471
03:02:04,080 --> 03:02:10,080
दिखाओ इनको ज्ञान गंगा में तत्वदर्शी की व्याख्या दिखाओ अभी

2472
03:02:11,000 --> 03:02:15,240
जन मानते बकुल माते मानते हो

2473
03:02:15,240 --> 03:02:19,320
नहीं हेलो देखो जो ज्ञान गंगा के अंदर ज्ञान है वो संत रामपाल

2474
03:02:19,320 --> 03:02:23,360
जी महाराज ने हमारे अंदर ठोक के भर रखा है जी ठीक है तो अब हम

2475
03:02:23,360 --> 03:02:27,400
उससे आपको दिखा रहे त कौन हैन दिखा

2476
03:02:27,400 --> 03:02:31,560
दो चाहे तो आप ज्ञान गंगा तो भी कोई दिक्कत नहीं और

2477
03:02:31,560 --> 03:02:35,760
संत रामपाल जी महाराज के दिखाइ पहले यहां

2478
03:02:35,760 --> 03:02:39,960
पर स तत्वदर्शी की बात हो रही है और यहां

2479
03:02:39,960 --> 03:02:44,160
पर जो है ब्रह्मा ब्रह्म को पूर्ण रूप से जानने

2480
03:02:44,160 --> 03:02:48,160
वाले को आप कह रहे हो तत्वदर्शी ब्रह्म आपके अनुसार ब्रह्म तो पूर्ण

2481
03:02:48,160 --> 03:02:52,200
ही नहीं वो तो काल है काल को जानने वाला

2482
03:02:52,200 --> 03:02:56,920
तत्वदर्शी है क्या यही कह रहा है जो ब्रह्म

2483
03:02:56,920 --> 03:03:01,040
को वो स्वयं ब्रह्म कह रहा है कि जो वे पुरुष उस

2484
03:03:01,040 --> 03:03:05,400
ब्रह्म को यानी जो अलग ब्रह्म है मेरे से अलग ब ब्र का मतलब परम ब्रह्म

2485
03:03:05,400 --> 03:03:09,440
भी होता है परम अक्षर ब्रह्म ब्रह्म का

2486
03:03:09,440 --> 03:03:13,600
मतलब परम अक्षर ब्रह्म भी होता है परम अक्षर ब्रह्म

2487
03:03:13,600 --> 03:03:15,040
मैं पूछ रहा हूं ब्रह्म

2488
03:03:15,040 --> 03:03:19,960
का मतलब परम अक्षर ब्रम भी होता है परम अक्षर ब्रह्म

2489
03:03:19,960 --> 03:03:24,080
है इस अरे सर जी

2490
03:03:24,080 --> 03:03:28,760
देखिए मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो आपे सबसे पहले लि दिखाओ

2491
03:03:28,760 --> 03:03:33,200
कि जो उस ब्रह्म को संपूर्ण अध्यात्म को जानता है संपूर्ण

2492
03:03:33,200 --> 03:03:37,200
कर्म को जानता है वो तत्वदर्शी होता है य कहा लिखा है अध्याय

2493
03:03:37,200 --> 03:03:41,200
नंबर तुरंत इसमें लिखा है अध्याय नंबर आठ के

2494
03:03:41,200 --> 03:03:45,240
श्लोक नंबर एक में तुरंत प्रश्न किया है किम त ब्र हा

2495
03:03:45,240 --> 03:03:47,840
किम अध्याम

2496
03:03:47,840 --> 03:03:51,920
कर्म पुरुषोत्तम हा ठीक है फिर उसम तुरंत लिखा

2497
03:03:51,920 --> 03:03:56,280
है तीसरे में कि वह जो ब्रह्म है जिसकी बात की जा रही है सा देख

2498
03:03:56,280 --> 03:04:00,400
आप बातो को घमा रहे है आप ये बताइए तत्वदर्शी कहां लिखा है

2499
03:04:00,400 --> 03:04:05,000
इनको जानने वाला तत्वदर्शी होगा यह

2500
03:04:05,000 --> 03:04:09,280
बताइए अच्छा एक आप बताइए वो तो लिखा है उसम तो

2501
03:04:09,280 --> 03:04:13,280
वो तो डंके की चोट पर लिखा है वो कोई लिखा है बताओ कहां लिखा

2502
03:04:13,280 --> 03:04:17,280
है अब आप बताइए जी क्योंकि

2503
03:04:17,280 --> 03:04:21,480
आप बताइए कि इसमें ये कहां लिखा है कि श्री कृष्ण भगवान तत्वदर्शी

2504
03:04:21,480 --> 03:04:25,840
आप ये दिखाइए मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं बता मैंने कब

2505
03:04:25,840 --> 03:04:29,920
मैं तो यहां कह ही नहीं रहा हूं मैं तो आपको बता रहा हूं कि तत्वदर्शी रामपाल नहीं

2506
03:04:29,920 --> 03:04:30,420
है

2507
03:04:30,240 --> 03:04:34,360
मैं ये बता रहा हूं तो फ तत्वदर्शी फिर तत्वदर्शी

2508
03:04:34,360 --> 03:04:38,840
कौन है आप बताओ बता रहा हूं मैं बता रहा हूं बता

2509
03:04:38,840 --> 03:04:43,440
खोल दो इनको 15 एक हां बताओ बता

2510
03:04:43,440 --> 03:04:47,920
आप बताओ जी हम पहले आपका ही देख ले सुनो

2511
03:04:47,920 --> 03:04:52,160
इनको पहले 435 दिखा दो 45 में तत्वदर्शी बताया गया है

2512
03:04:52,160 --> 03:04:56,840
कौन है दिखा

2513
03:04:56,840 --> 03:05:02,840
[संगीत]

2514
03:05:14,200 --> 03:05:18,720
दो 434 के बाद 435 पढ़ो

2515
03:05:18,720 --> 03:05:23,120
आप खोलन मैं दिखान

2516
03:05:23,120 --> 03:05:29,120
दिखा स्क्रीन पर दिखा

2517
03:05:35,000 --> 03:05:39,080
दो इसमें लिखा है कि

2518
03:05:39,080 --> 03:05:43,160
तव तत्व से जानने वाला कौन है तत्व दर्श क्या है वो तुझे

2519
03:05:43,160 --> 03:05:47,320
तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे इसमें क्या लिखा है पहले चार

2520
03:05:47,320 --> 03:05:51,640
च में पढ़ रहा हूं कि तू जो है

2521
03:05:51,640 --> 03:05:55,760
तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ दंडवत प्रणाम कर

2522
03:05:55,760 --> 03:05:59,800
उनकी सेवा करने से छल कपट छोड़कर सरलता पूर्वक

2523
03:05:59,800 --> 03:06:04,000
प्रश्न करने से परमात्मा तत्व को भली बाती जानने वाले ज्ञानी

2524
03:06:04,000 --> 03:06:08,200
महात्मा तुझे उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे अब वो अगले ही श्लोक

2525
03:06:08,200 --> 03:06:12,200
में बता रहे हैं जिसको जानकर फिर तू

2526
03:06:12,200 --> 03:06:16,400
इस प्रकार मोह को प्राप्त नहीं होगा हे अर्जुन जिस

2527
03:06:16,400 --> 03:06:20,680
ज्ञान के द्वारा तू संपूर्ण भूतों को नि शेष

2528
03:06:20,680 --> 03:06:22,680
भाव से पहले अपने में

2529
03:06:22,680 --> 03:06:27,560
और फिर मुझ सच्चिदानंद घन परमात्मा में देखेगा

2530
03:06:27,560 --> 03:06:32,160
अब लो अ जो भगवान

2531
03:06:32,160 --> 03:06:37,040
जो जो जो गीता ज्ञान दाता है उसमें सच्चिदानंद

2532
03:06:37,040 --> 03:06:41,320
घन परमात्मा को देखेगा परमेश्वर को वह तत्वदर्शी

2533
03:06:41,320 --> 03:06:45,560
सिद्ध हो गया यहां से और 15 एक दिखा दो इनको बोल के

2534
03:06:45,560 --> 03:06:49,480
रुक 15 एक दिखा दो

2535
03:06:49,480 --> 03:06:55,480
एक मिनट नहीं अभी हमारा पूरा नहीं हुआ 15 एक दिखाओ

2536
03:07:18,240 --> 03:07:24,240
हां भाई 15

2537
03:07:24,960 --> 03:07:27,840
एक आदि पुरुष परमेश्वर स्वरूप

2538
03:07:27,840 --> 03:07:31,920
मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस

2539
03:07:31,920 --> 03:07:36,160
संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद

2540
03:07:36,160 --> 03:07:40,320
जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो

2541
03:07:40,320 --> 03:07:42,480
पुरुष मूल सहित तत्व से जानता

2542
03:07:42,480 --> 03:07:47,600
है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है

2543
03:07:47,600 --> 03:07:51,800
अब वेद के तात्पर्य को जानने वाला कौन है वेद

2544
03:07:51,800 --> 03:07:55,880
के तात्पर्य को जानने वाला वो है जो मां भगवती की आराधना

2545
03:07:55,880 --> 03:07:59,920
करता है और 15 का 15 भी खोलिए एक बार

2546
03:07:59,920 --> 03:08:04,160
15 का 15 खोलिए इनको यही से सारे जवाब मिल जाएंगे कि

2547
03:08:04,160 --> 03:08:08,520
वेद वेदों के द्वारा किसको जानना है

2548
03:08:08,520 --> 03:08:11,840
15 का

2549
03:08:11,840 --> 03:08:16,160
16 15 15 ये इनसे ही कहिए

2550
03:08:16,160 --> 03:08:20,800
पढ़ने के लिए प 15 का 15

2551
03:08:20,800 --> 03:08:25,400
ये पढ़िए जरा एक बार प्रभु जी ये जो आए हैं रामपाल जी के जम

2552
03:08:25,400 --> 03:08:29,400
सब प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप से स्थित हूं तज मुझसे

2553
03:08:29,400 --> 03:08:33,560
ही स्मृति ज्ञान और अपोहन होता है और सब वेदों द्वारा

2554
03:08:33,560 --> 03:08:37,600
मैं ही जानने योग्य हूं तथा वेदांत का कर्ता और वेदों को

2555
03:08:37,600 --> 03:08:41,880
जानने वाला मैं ही हूं लो वेदों के द्वारा

2556
03:08:41,880 --> 03:08:45,960
जानने योग्य क्या है भगवान जो बोल रहे हैं जो

2557
03:08:45,960 --> 03:08:50,160
गीता बोल रहा है वही द्वारा जानने योग्य है हो

2558
03:08:50,160 --> 03:08:54,520
गया आपका अब बोले अब बोलो धन्यवाद

2559
03:08:54,520 --> 03:08:57,480
जी हा जैसे अभी

2560
03:08:57,480 --> 03:09:01,640
आपने इससे पहले बताया था 14 का

2561
03:09:01,640 --> 03:09:05,840
35 च का 3 हा उससे

2562
03:09:05,840 --> 03:09:10,480
पहले आपने बताया था कि उस ज्ञान को तू तशी ज्ञानियों के पास जाकर समझ

2563
03:09:10,480 --> 03:09:14,920
हा बताया था सर जी उसम उसम

2564
03:09:14,920 --> 03:09:19,000
उसम अपन संस्कृत भी पढ़ेंगे प्रतिन

2565
03:09:19,000 --> 03:09:23,320
प्र प्रश्ने सेवया

2566
03:09:23,320 --> 03:09:27,520
उप मिट एक मिनट मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको संस्कृत आती है

2567
03:09:27,520 --> 03:09:30,760
क्या ऐसा

2568
03:09:30,760 --> 03:09:34,880
सुनो आप जब संस्कृत पढ़ोगे जनी की आप य दावा कर रहे हो कि इसमें

2569
03:09:34,880 --> 03:09:39,320
संस्कृत का अर्थ गलत है यानी कि आप हमें सही संस्कृत बताने वाले हो

2570
03:09:39,320 --> 03:09:43,720
अब आप मुझे पट्टी प पं बता दो पूरी सुना दो

2571
03:09:43,720 --> 03:09:48,000
आती है पट्टी पट पनती इसका मतलब एक मिनट

2572
03:09:48,000 --> 03:09:52,320
भैया देखिए आप हमें संस्कृत के ज्ञाता बन के दिखा रहे हो आप हमें

2573
03:09:52,320 --> 03:09:57,160
संस्कृत की जो ए बी सीडी है पटती पटत पं या साते

2574
03:09:57,160 --> 03:10:01,440
ये बता दो अरे मैं तो

2575
03:10:01,440 --> 03:10:05,520
सुनो सुनो

2576
03:10:05,520 --> 03:10:09,800
सुनो आप जो है बात को खींच रहे हैं आप जो है य ज्ञानी

2577
03:10:09,800 --> 03:10:14,160
बन रहे संस्कृत के अब संस्कृत के ज्ञानी यदि हमें आपका ज्ञान मानना है

2578
03:10:14,160 --> 03:10:19,640
तो हमें जानना होगा कि आपको संस्कृत आती है कि नहीं

2579
03:10:19,640 --> 03:10:23,880
मैं पूछ रहा आपको संस्कृत आती है अभी जान

2580
03:10:23,880 --> 03:10:27,400
लेता अभी

2581
03:10:27,400 --> 03:10:31,720
जान अरे सुन लीजिए देखिए एक दूसरे पर आरोप मत लगाइए ये लिखने

2582
03:10:31,720 --> 03:10:37,720
वाली एक चीज है इसको संस्कृत में क्या कहते

2583
03:10:37,840 --> 03:10:41,840
हैं अच्छा मैं य यह पूछ रहा हूं इसमें उर्दू में क्या

2584
03:10:41,840 --> 03:10:46,120
कहते हैं भाई साहब हम य उर्दू को उर्दू को जानने

2585
03:10:46,120 --> 03:10:50,320
नहीं बैठे हम य इस बिलीव सुनिए हम यहां प गीता प्रेस

2586
03:10:50,320 --> 03:10:54,520
गोरखपुर के अनुवाद पर बिलीव कर रहे हैं अगर आप कह रहे हो कि उनका अनुवाद गलत

2587
03:10:54,520 --> 03:10:58,880
है तो आपको स करना होगा कि आप संस्कृत के ज्ञाता है अगर आप संस्कृत

2588
03:10:58,880 --> 03:11:03,000
के ज्ञाता है तो हमको बता दीजिए कि साते को पूरा

2589
03:11:03,000 --> 03:11:07,520
उसको जो टेबल है साते वाली वो बता दो जीने आप जी

2590
03:11:07,520 --> 03:11:11,560
आप जी मेरे को ये बताइए सभी दर्शक देख रहे हैं आपने जो मेरे को पढ़ के सुनाया कि

2591
03:11:11,560 --> 03:11:15,640
जिसको जानकर 34 में 35 में चौथा के अ मैं

2592
03:11:15,640 --> 03:11:19,920
आपसे पूछ रहा हूं क्या आपको जो गीता का जो अर्थ किया है उस पर भरोसा

2593
03:11:19,920 --> 03:11:20,720
नहीं है गीता

2594
03:11:20,720 --> 03:11:24,720
प्रस प गीता जीने अर्थ किया हुआ

2595
03:11:24,720 --> 03:11:28,920
है सुनिए पहले हा हम हम बिल्कुल सभी

2596
03:11:28,920 --> 03:11:33,320
शब्दों को तोल के बोल रहे हैं सुनिए जी अच्छा जो

2597
03:11:33,320 --> 03:11:37,400
गीता जी के अंदर आपने अभी अनुवाद मेरे को पढ़ के सुनाया

2598
03:11:37,400 --> 03:11:41,680
है सुनो पहले आपका अनुवाद देखेंगे 434 को खोलो और अनुवाद

2599
03:11:41,680 --> 03:11:45,720
करो उसको चलो पहले आपने शुरू किया ना 4 34

2600
03:11:45,720 --> 03:11:49,800
खोलो रुको 44 ने सबसे पहले देवी भागवत दिखाई थी

2601
03:11:49,800 --> 03:11:53,960
और उसका मैं संस्कृत शलोक दिखा रहा हूं संस्कृत वाली देवी भागवत लिए

2602
03:11:53,960 --> 03:11:59,960
भैया अभी बात को

2603
03:12:08,640 --> 03:12:13,680
ई साब संस्कृत वाली देवी भागवत

2604
03:12:13,680 --> 03:12:19,680
बताओ क्या बताया

2605
03:12:19,840 --> 03:12:23,840
अभी आपने जो मेरे को सुनाया है पढ़ के उसके अंदर

2606
03:12:23,840 --> 03:12:28,000
तो सच्चिदानंद जब आप ये कह रहे हैं कि संस्कृत चेक करनी होगी एक

2607
03:12:28,000 --> 03:12:33,040
एक शब्द को तोलना होगा तो हम अब एक एक शब्द को तोले गे

2608
03:12:33,040 --> 03:12:37,400
ना हम एक एक शब्द को लेंगे ना तो अभी जो

2609
03:12:37,400 --> 03:12:41,720
इन्होंने वो देवी भागवत बताई थी ना इन्होंने थोड़ी देर पहले

2610
03:12:41,720 --> 03:12:45,720
वो कौन सा पेज नंबर था 571 उसम उसमें ये

2611
03:12:45,720 --> 03:12:49,840
चेक करो 571 में अध्याय कौन सा है फिर मैं बताता हूं कौन सा निकालना

2612
03:12:49,840 --> 03:12:54,480
है 51 संक्षिप्त वाली खोलिए पहले

2613
03:12:54,480 --> 03:12:58,680
संक्षिप्त वाली हा इसम 571 पेज में देखिए सुनिए

2614
03:12:58,680 --> 03:13:03,040
सर जी रुक जाओ भैया रुक

2615
03:13:03,040 --> 03:13:07,240
जा रिक्वे रा जी ने एक एक शब्द

2616
03:13:07,240 --> 03:13:12,160
को तोल के बताया है ना भैया र् है ना रुक जाओ रुक जाओ

2617
03:13:12,160 --> 03:13:16,240
रुक जाओ इनको भैया सुनिए बीच में अब मत बोलिए आपने कहा एक एक शब्द को

2618
03:13:16,240 --> 03:13:21,240
तोल के देखेंगे अब एक एक शब्द को तोल रहे हैं ठीक

2619
03:13:21,240 --> 03:13:23,680
है नहीं इनको दो चार श दे

2620
03:13:23,680 --> 03:13:27,720
दीजिए ना कोई भी ट्रांसलेट करने के लिए सीधे ही नहीं नहीं ऐसे

2621
03:13:27,720 --> 03:13:32,080
नहीं इन्होने जो दिखाया था 571 पेज तो निकालिए पहले वाली

2622
03:13:32,080 --> 03:13:36,320
है अरे ये य अध्याय है आपका संक्षिप्त

2623
03:13:36,320 --> 03:13:40,400
वाली ये रही संक्षिप्त वाली इसका ये अध्याय है आपका 39 ठीक

2624
03:13:40,400 --> 03:13:46,400
है अध्याय 39 और स्कंद कौन सा है

2625
03:13:47,320 --> 03:13:53,320
स्कंद भी लिखा होगा व परर जाना पड़ेगा

2626
03:13:53,760 --> 03:13:59,760
मुझे च खा काट दिया

2627
03:14:01,320 --> 03:14:05,360
हैने क्रमांक दि देखिए कु शलोक क्रमांक दि

2628
03:14:05,360 --> 03:14:09,240
नीचे

2629
03:14:09,240 --> 03:14:15,240
जा शलोक दिए य पर

2630
03:14:18,960 --> 03:14:23,480
अच्छा ये ओके ओके ओके मैं यहां पढ़ रहा हूं मैं इधर पढ़ रहा था मेरी गलती

2631
03:14:23,480 --> 03:14:27,760
है कौन सा सा अध कौन सा है

2632
03:14:27,760 --> 03:14:32,160
से देखो हिमालय राजा को

2633
03:14:32,160 --> 03:14:36,320
ज्ञान सातवा स्कंद और

2634
03:14:36,320 --> 03:14:40,400
39 चैप्टर 39

2635
03:14:40,400 --> 03:14:44,640
आम आराम से ढूंढ आराम से श्री राम

2636
03:14:44,640 --> 03:14:48,120
जय राम जय जयराम

2637
03:14:48,120 --> 03:14:52,280
ये है दे पूजन के देवि पूजन के विविध प्रकारों का वर्णन

2638
03:14:52,280 --> 03:14:57,160
यही है ना हा हा 114 मेरे पास

2639
03:14:57,160 --> 03:15:02,040
ठीक है अब इसका आप ऐसे करके दिखाइए कि हिंदी ना दिखाई दे व

2640
03:15:02,040 --> 03:15:06,320
कर सकते हैं क्या बिल्कुल कर सकते जी

2641
03:15:06,320 --> 03:15:10,320
बिल्कुल कर सकते हैं चतुर्थ अध्याय अच्छ तो

2642
03:15:10,320 --> 03:15:14,320
अष्टम स्कंद आ गया [संगीत] है ये रहा एक

2643
03:15:14,320 --> 03:15:18,240
एक शब्द को तो लेंगे ना भैया

2644
03:15:18,240 --> 03:15:24,240
इनसे पूछेंगे जो हमें नहीं समझ आएगा वो इनसे हम पूछ

2645
03:15:28,360 --> 03:15:32,400
लेंगे श्री देवी पूजा पटल जहां मनाया गीता प्रस

2646
03:15:32,400 --> 03:15:38,400
को मान लिया और जहां मनाया नकार दिया अभी पता

2647
03:15:39,720 --> 03:15:43,760
चलेगा यह लीजिए ये पढ़ प्रभु जी

2648
03:15:43,760 --> 03:15:47,760
थोड़ा हा अभी एक मिनट वो

2649
03:15:47,760 --> 03:15:51,920
मिलान कर लीजिए कहां पर थे जहा य वो 39 चैप्टर

2650
03:15:51,920 --> 03:15:56,480
में बता रहे थे मैं वो मैं बता देता हूं य

2651
03:15:56,480 --> 03:16:00,680
इन्होने बताया था व गणेश जी और ये और वो समझ

2652
03:16:00,680 --> 03:16:05,120
गया समझ गया हा वो निकालिए व श्लोक कौन सा था

2653
03:16:05,120 --> 03:16:09,440
जिसम वही सब बातें हो रही है वो श्लोक निकालिए

2654
03:16:09,440 --> 03:16:13,480
यय थ और जूम कर ली और जूम

2655
03:16:13,480 --> 03:16:18,160
कर दे हा थोड़ा सा वो हिंदी दिखेगी उसे

2656
03:16:18,160 --> 03:16:22,240
अरे उतना व इतना क्या बता देंगे अभी इसमें ठीक है उनको ये

2657
03:16:22,240 --> 03:16:27,080
नहीं पता चलेगा ना कि श्लोक का अर्थ है

2658
03:16:27,080 --> 03:16:32,120
हा चलिए भैया

2659
03:16:32,120 --> 03:16:38,120
बताइए संस्कृत पढ़िए और एक एक शब्द को तोल के हमें इसका अर्थ

2660
03:16:40,080 --> 03:16:44,120
बताइए हे तत्वदर्शी संत जी जेल धाम से इनकी रक्षा

2661
03:16:44,120 --> 03:16:50,120
करें इनको शक्ति दे जिससे कि अर्थ कर पाए

2662
03:16:52,280 --> 03:16:56,360
हां ये वाला है देखिए चलिए भैया ये आपके

2663
03:16:56,360 --> 03:17:00,440
सामने वही संस्कृत के श्लोक है जिनका आपने हिंदी अर्थ पढ़ा था अभी

2664
03:17:00,440 --> 03:17:04,960
आपने हमें बताया था अब आप इसका हिंदी करके बताइए एक एक शब्द को तोलिए

2665
03:17:04,960 --> 03:17:10,080
कोई शब्द छोड़ मत दीजिएगा

2666
03:17:10,080 --> 03:17:15,840
एक ध्यान नहीं भट केगा नेटवर्क चला

2667
03:17:15,840 --> 03:17:20,200
गयाने हमने 18 19 20 रखे ये वाले

2668
03:17:20,200 --> 03:17:24,440
हा पढ़िए इनको इनका अर्थ बताइए ये वही अर्थ है

2669
03:17:24,440 --> 03:17:28,480
जो आप बोल रहे थे या

2670
03:17:28,480 --> 03:17:32,960
आप बता दो हम वो खोल देंगे

2671
03:17:32,960 --> 03:17:37,520
अभी बता अच्छा इसमें जो कमलों की जानकारी

2672
03:17:37,520 --> 03:17:42,080
दी जा रही थी वो वाले काते ये लोक है येरे

2673
03:17:42,080 --> 03:17:46,840
मेरी बात सुनो बो

2674
03:17:46,840 --> 03:17:51,080
सातवा स्कंद है पूछ 35 अध्याय अध्याय

2675
03:17:51,080 --> 03:17:55,160
नंबर 35 है अरे उससे मतलब उससे मतलब क्या हैको

2676
03:17:55,160 --> 03:17:59,200
तो इनको तो एक एक शब्द को तोलना है ना तो ये तोले गे बोलिए भैया

2677
03:17:59,200 --> 03:18:03,280
39 है 39 जिसमें वो बता रहे थे देखिए ना

2678
03:18:03,280 --> 03:18:08,400
ये है आपका 39

2679
03:18:08,400 --> 03:18:12,680
हां कौन सा पेज नंबर बता 3 भाई आप नीचे मत देखिए चोरी

2680
03:18:12,680 --> 03:18:18,480
करने के लिए ऊपर देखिए वो संक्षिप्त है एक एक शब्द का अर्थ नहीं है उसमें

2681
03:18:18,480 --> 03:18:22,480
नीचे देखकर चोरी करने का जो प्लान बना रहे हैं मत देखिए वो एक एक शब्द का अर्थ

2682
03:18:22,480 --> 03:18:26,880
नहीं है आप जी ने आप जी ने एक सच्चाई

2683
03:18:26,880 --> 03:18:30,920
को छुपाने के लिए कौन सा नाटक शुरू कर दिया भाई साब देखिए विषय

2684
03:18:30,920 --> 03:18:34,960
से हट के बात करेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा आप कह रहे एक एक शब्द को तोलना

2685
03:18:34,960 --> 03:18:40,200
है आपको गीता प्रेस के अनुवाद पर यकीन नहीं

2686
03:18:40,200 --> 03:18:44,480
है देखिए इधर उधर की बातें करेंगे तो मुझे आपको हटाना

2687
03:18:44,480 --> 03:18:48,880
पड़ेगा आपने कहा एक एक शब्द को तोलना है आपने सबसे पहले देवी भागवत

2688
03:18:48,880 --> 03:18:53,040
का प्रमाण दिखाया था अभी देवी भागवत आपके सामने पढ़ना

2689
03:18:53,040 --> 03:18:57,040
शुरू करिए और एक एक शब्द का आप मुझे अर्थ बताते जाइए मैं चेक

2690
03:18:57,040 --> 03:18:59,840
करूंगा है कि

2691
03:18:59,840 --> 03:19:04,160
नहीं कौन सा श्लोक नंबर 21 पढ़ दीजिए

2692
03:19:04,160 --> 03:19:08,280
कोई भी पढ़ दीजिए आप मैं क्या बोल चलिए भाई

2693
03:19:08,280 --> 03:19:12,480
2 प आ गए बताइए पढ़िए

2694
03:19:12,480 --> 03:19:16,760
भाई साहब सुनो मेरी बात सं के

2695
03:19:16,760 --> 03:19:20,120
संस्कृत ज्ञ शिष्य

2696
03:19:20,120 --> 03:19:23,600
पढ़िए सुनो भाई मनीष जी स साब

2697
03:19:23,600 --> 03:19:28,040
आपको पढ़ना है कि नहीं एक एक शब्द को तोलना है कि नहीं देखो मैं फालतू बात बिल्कुल नहीं सुनूंगा

2698
03:19:28,040 --> 03:19:32,040
एक एक शब्द को तोलना है कि नहीं

2699
03:19:32,040 --> 03:19:36,760
एक एक शब्द को तोलना है कि

2700
03:19:36,760 --> 03:19:40,800
नहीं यानी इसको जो पढ़ एक शब्द

2701
03:19:40,800 --> 03:19:44,880
को तोलना है कि नहीं इसको जो पढ़ देगा वो त

2702
03:19:44,880 --> 03:19:49,040
है इसको पढ़ लना है

2703
03:19:49,040 --> 03:19:53,080
इसको पढ़ के कोई कह देगा कि गोबर की पूजा कर दो तत्वदर्शी है चलो

2704
03:19:53,080 --> 03:19:57,640
भाई आप जा सकते हो जाइए

2705
03:19:57,640 --> 03:20:01,680
चलिए गोबर की गोबर से

2706
03:20:01,680 --> 03:20:07,000
पता

2707
03:20:07,000 --> 03:20:11,160
नहीं सिद्ध करने के लिए देवी भागवत पर आ गए देवी

2708
03:20:11,160 --> 03:20:15,600
भागवत से कूद के फिर गीता जी पर आ गए अब गीता जी के वो शलोक

2709
03:20:15,600 --> 03:20:19,600
पहले बिना सोचे मान लिया जो अपने फेवर में है और जो अपने विरुद्ध जा रहे हैं

2710
03:20:19,600 --> 03:20:23,600
उनको हम एक एक शब्द तो लेंगे तो शब्द तोलो अब अब

2711
03:20:23,600 --> 03:20:27,880
इनके जो तत्वदर्शी जो जेल धाम में बैठे हैं सुन लो उनकी कहानी वो

2712
03:20:27,880 --> 03:20:32,200
सब कुछ जो देवी भागवत से बता के गए वोह संक्षिप्त वाली से बता के गए हैं

2713
03:20:32,200 --> 03:20:38,040
अब हम सब इनके सामने संस्कृत खोलेंगे इनको दिक्कत आ सर

2714
03:20:38,040 --> 03:20:42,200
हेलो चलिए अब किसी और दिन रखते हैं बाबूराम जी आप फिर

2715
03:20:42,200 --> 03:20:47,080
आइएगा दोबारा बहुत समय हो गया ज्यादा लेट नहीं कर सकते एक मिनट

2716
03:20:47,080 --> 03:20:51,520
मिनट मिन ना अब आप कल आइएगा

2717
03:20:51,520 --> 03:20:56,960
कल ठीक है कल आइएगा एडेंट वाइट सिंघम खाते हैं

2718
03:20:56,960 --> 03:21:01,040
क्या नहीं इनको इनको गोबर से इतना प्रेम कैसे हो गया एकदम

2719
03:21:01,040 --> 03:21:05,040
से इन्होंने सारे शास्त्र सारे वेद सारा कुछ साइड

2720
03:21:05,040 --> 03:21:09,240
कर दिया और पास जब इनके पास जब उत्तर नहीं होता

2721
03:21:09,240 --> 03:21:12,880
है तोय फुदक के दूसरी डाल पर बैठते हैं हम पंछी

2722
03:21:12,880 --> 03:21:16,880
डाल के हम तो डाल डाल चलते रहेंगे हम इस डाल से उस डाल उल

2723
03:21:16,880 --> 03:21:20,560
से उल बस य इनका

2724
03:21:20,560 --> 03:21:24,640
कार्यक्रम बंजारे तो नहीं बन गए कहीं बंजारों की तरह एक स्थान

2725
03:21:24,640 --> 03:21:27,320
से दूसरा फ

2726
03:21:27,320 --> 03:21:32,120
रा को संतक बनेगा ना उसके सामने

2727
03:21:32,120 --> 03:21:37,160
उसके सामने यही संस्कृत खोलो सीधे आते

2728
03:21:37,160 --> 03:21:41,440
बताता होता है ससंग आ मन लगा लो

2729
03:21:41,440 --> 03:21:45,600
जहा मन आए अनुवाद सही है जहा मन आए अनुवाद गलत है हम एक एक शब्द

2730
03:21:45,600 --> 03:21:50,360
लेंगे लिए खोल दिया तो हो गया

2731
03:21:50,360 --> 03:21:54,480
वो इनके ना वो जो होता नहीं वही वो पहले में ऐसा होता था फिर मेरे दोस्त फड

2732
03:21:54,480 --> 03:21:58,760
ने मेरे को यह बताया फिर मैं ये हो गया वैसे ही इनके सत्संग में खड़े ऐसे करके

2733
03:21:58,760 --> 03:22:02,800
मैंने फलानी फलानी जगह से इतनी पीएचडी की है संस्कृत में और ये जो

2734
03:22:02,800 --> 03:22:07,080
बोल रहे एक एक बात है खून से लिख कर दे सकता हूं य व

2735
03:22:07,080 --> 03:22:11,520
ऐसे अपने प्रमाण देते एक बार पूछा इसको क्या

2736
03:22:11,520 --> 03:22:15,640
उस व्यक्ति का वो देखिए कॉन्फिडेंट जो उसके जो बाबा

2737
03:22:15,640 --> 03:22:19,760
जी ने बता दिया उसको उस उस एक दो श्लोक

2738
03:22:19,760 --> 03:22:23,800
की संस्कृत की हिंदी के सहारे और वो जो है इतना ल के

2739
03:22:23,800 --> 03:22:28,120
बोल रहा है एक एक शब्द को लेंगे मतलब

2740
03:22:28,120 --> 03:22:32,480
तुमको जहां प जहां पर तुम्हें अपना मन का बताना था मन का था वहां तुमने बिना तोले

2741
03:22:32,480 --> 03:22:36,520
समान लिया और जहां पर तुम्हारे विपरीत दिखाई दे रहा है वहां पर

2742
03:22:36,520 --> 03:22:40,680
तुम तोल रहे हो तो फिर वहां से तोलना शुरू करो फिर पीछे से अब

2743
03:22:40,680 --> 03:22:44,800
ये क्या है संक्षिप्त देवी भागवत में कहीं संस्कृत

2744
03:22:44,800 --> 03:22:49,320
तो है नहीं जो रामपाल दास जी ने जेल धाम से पहले बताया ये वाला श्लोक ऐसे वैसे

2745
03:22:49,320 --> 03:22:54,000
अब हम इनसे जो है वब जब ये तोलने की बात करेंगे कभी भी तो हम वो खुलवाए

2746
03:22:54,000 --> 03:22:58,080
पढ़ो इसको संस्कृत के ज्ञानी आए थे मैंने बस ये पूछा कि

2747
03:22:58,080 --> 03:23:02,600
ये कलम को क्या कहते हैं संस्कृत में वो बोलने लगा नहीं तुम्हें उर्दू आती है मैंने कहा भाई

2748
03:23:02,600 --> 03:23:06,600
य उर्दू की बात चल रही है मैं बता तो रहा हूं मैं जब छोटा था

2749
03:23:06,600 --> 03:23:11,160
मैं रहागा शायद 21 या 22 वर्ष का

2750
03:23:11,160 --> 03:23:15,320
तो मुझे रामपाल वाले लोग मिले थे उस समय और मुझे बैठ

2751
03:23:15,320 --> 03:23:19,480
कर के गीता कार्थ सम आने लगे तो मेरी हिंदी अच्छी है जो

2752
03:23:19,480 --> 03:23:23,760
हिंदी का वो है पकड़ हिंदी प अच्छी है तो मैंने

2753
03:23:23,760 --> 03:23:27,760
तुरंत यह कुछ मुझे श्लोक पढ़ा रहे थे वो जो ब्रियों के बीच में

2754
03:23:27,760 --> 03:23:31,840
ध्यान लगाने को कहते हैं ना भगवान कि दोनों ब्रियों के बीच में

2755
03:23:31,840 --> 03:23:36,000
अपान वायु को रोक कर स्थिर करके

2756
03:23:36,000 --> 03:23:40,160
आपको ध्यान लगाना है बस मैंने वही पूछ लिया बताओ अपान वायु

2757
03:23:40,160 --> 03:23:43,480
क्या है पांचवे अध्याय में है ये

2758
03:23:43,480 --> 03:23:48,480
अब अपान वायु का अर्थ लोगों को पता नहीं है

2759
03:23:48,480 --> 03:23:52,600
कि फार्ट को ही श ी में फर्ट को ही अपान वायु

2760
03:23:52,600 --> 03:23:56,720
कहते हैं अब ये लोग घन चक्कर होगा मैंने कहा तुम तर्शी करके आए

2761
03:23:56,720 --> 03:24:00,840
हो मेरे पास मैं 100 जूते में लगाऊंगा अपान

2762
03:24:00,840 --> 03:24:04,880
वायु का तो बताओ पहले क्या है जब तुम मुझे गीता पढ़ाने बैठे हो

2763
03:24:04,880 --> 03:24:09,040
तो बताओ य क्या लिखा है कुछ नहीं पता इनको वही

2764
03:24:09,040 --> 03:24:13,520
पता है जितनी चाबी भरी तिरछा दर्शी ने उतना चले खिलौना

2765
03:24:13,520 --> 03:24:18,080
उतना चले हा उतना चले भगत जी

2766
03:24:18,080 --> 03:24:22,400
भगत भक्त नहीं भगत भगत

2767
03:24:22,400 --> 03:24:27,080
उनके आगे श श का अपमान है हा

2768
03:24:27,080 --> 03:24:31,360
शास्त्र इनके आगे शास्त्रों को खोलना शास्त्रों का अपमान है अच्छा

2769
03:24:31,360 --> 03:24:35,360
इनकी एक कहानी और है एक कहानी और है कि क्योंकि भगवत

2770
03:24:35,360 --> 03:24:39,360
गीता में मान लो देवी भागवत में ये लिखा है कि जो जो

2771
03:24:39,360 --> 03:24:43,440
जो ऐसे ऐसे बताएगा वो सच्चा वो सच्चा जो ऐसे भक्ति

2772
03:24:43,440 --> 03:24:47,920
बतानी चाहिए ऐसे भक्ति अब कोई कोई अगर

2773
03:24:47,920 --> 03:24:52,000
बिल्कुल क्या कहते हैं चोर भी अगर वो वैसे भक्ति बता दे वो

2774
03:24:52,000 --> 03:24:55,240
तत्वदर्शी हो जाएगा क्या

2775
03:24:55,240 --> 03:24:58,560
बकल बिलकुल बकल यह कहां का लॉजिक

2776
03:24:58,560 --> 03:25:02,800
है भाई लिखा तो लिखा हुआ कि जो ऐसे बताएगा व तत्वदर्शी होगा

2777
03:25:02,800 --> 03:25:06,880
और जब हम तुम्ह बता रहे तो उसम तुम तोल शब्दों को और शब्दों

2778
03:25:06,880 --> 03:25:12,880
को जब तुमने बताया तो तोल नहीं रहे हिंदी पढ़ने

2779
03:25:12,880 --> 03:25:17,720
वा जी पहाड़ी जी बोलिए

2780
03:25:17,720 --> 03:25:22,360
जी आज का जो स्ट्रीम रहा व्यर्थ ही रहा

2781
03:25:22,360 --> 03:25:26,920
थ यावा की बातो में ज्यादा चला गया नहीं नहीं

2782
03:25:26,920 --> 03:25:31,320
नहीं व्यर्थ नहीं रहा है देखिए मेरे को जो हमारे

2783
03:25:31,320 --> 03:25:35,520
जो मैं कहूंगा कि जो विद्युत मंडली है उसमें यह कहा जाता है कि

2784
03:25:35,520 --> 03:25:39,520
आप क्या किया करते हैं इतने इतने लो लेवल के

2785
03:25:39,520 --> 03:25:43,560
लोगों से आप चर्चा करते हैं तो मैं कहता हूं इसमें मेरी

2786
03:25:43,560 --> 03:25:47,640
अवमानना है ना ठीक है मैं वो अवमानना सह लूंगा मगर उस चर्चा को देख कर

2787
03:25:47,640 --> 03:25:51,640
के एक व्यक्ति भी अगर सही राह पर आया या एक व्यक्ति

2788
03:25:51,640 --> 03:25:56,600
को भी अगर उससे सकारात्मक कुछ मिल गया तो मेरी वो चर्चा सर्तक है

2789
03:25:56,600 --> 03:26:00,840
जी मैं कुछ रामपाल के जो शिष्य है उनके लिए कुछ क्वेश्चन

2790
03:26:00,840 --> 03:26:04,840
छोड़ के जाऊंगा हो सके तो वो अपने स्ट्रीम में इनको

2791
03:26:04,840 --> 03:26:09,000
ले सकते है पहला क्वेश्चन ये कि गीता का ज्ञान काल ने दिया

2792
03:26:09,000 --> 03:26:13,280
है तो अगर काल सबको भ्रमित करता है सबको अधर्म के मार्ग

2793
03:26:13,280 --> 03:26:13,920
में लगाता

2794
03:26:13,920 --> 03:26:18,080
है तो गीता अध्याय चार के छठे या सातव श्लोक

2795
03:26:18,080 --> 03:26:22,200
में कह रखा है कि मैं धर्म को धर्म की स्थापना करता हूं साधु संतों की रक्षा करता हूं

2796
03:26:22,200 --> 03:26:26,280
तो यह कैसे संभव हुआ तो इसका जवाब चाहिए हमको सबसे

2797
03:26:26,280 --> 03:26:30,360
पहले जब वो भ्रमित करेगा हमको तो धर्म की भी

2798
03:26:30,360 --> 03:26:34,800
स्थापना नहीं करेगा ना साधु संतो की रक्षा करेगा वो तोव

2799
03:26:34,800 --> 03:26:38,920
तो उनको मारना ही चाहता ना वो तो तपत शिला में तपा के कुछ वहां

2800
03:26:38,920 --> 03:26:43,160
से कुछ निकलता व खाता है उसके लिए तो और अ एक लाख

2801
03:26:43,160 --> 03:26:47,800
जीवा आत्माओं का भोजन करना है डेली तो ये एक सवाल है मेरा

2802
03:26:47,800 --> 03:26:52,440
तो काल ने धर्म की काल कैसे धर्म की स्थापना करता है और

2803
03:26:52,440 --> 03:26:56,760
काल क्यों मतलब की साधु संतो की रक्षा करेगा

2804
03:26:56,760 --> 03:27:00,760
गुड क्वेश्चन गुड क्वेश्चन और 182 में क्यों बोलेगा

2805
03:27:00,760 --> 03:27:04,760
कि परमात्मा की शरण में जा इसमें एक बात में जोडा देखिए काल

2806
03:27:04,760 --> 03:27:08,840
जो इनके हिसाब से बताया हुआ जो काल है ना वो नहीं करेगा

2807
03:27:08,840 --> 03:27:13,120
ठीक है लेकिन जो हमारे हिसाब से बताया हु यानी कि जो

2808
03:27:13,120 --> 03:27:18,160
शास्त्र के हिसाब से बताया हुआ काल है वो कर भी वो कर देगा

2809
03:27:18,160 --> 03:27:22,480
व वो नहीं करेगा हमारे साथ तो करता ही है तो फिर व शलोक

2810
03:27:22,480 --> 03:27:26,680
गलत हो जाएगा सबसे पहली बात तो य है इनसे यही पूछा जाए

2811
03:27:26,680 --> 03:27:29,240
कि भैया तुम पहले यह बता दो गीता के

2812
03:27:29,240 --> 03:27:34,360
00 शलोक कौन से जिनको तुम मानते नहीं

2813
03:27:34,360 --> 03:27:38,720
हो एक ला जी आप बोले कुछ

2814
03:27:38,720 --> 03:27:43,280
बता जय श्री राम श जी भी ज हुए उनसे भी

2815
03:27:43,280 --> 03:27:49,280
जी जी शुक्ला जी आप

2816
03:27:52,000 --> 03:27:56,440
शुक्ला जी बोल रहे हैं जी

2817
03:27:56,440 --> 03:28:00,680
बोलिए आवाज रही थोड़ी

2818
03:28:00,680 --> 03:28:06,680
धीरे आ रही है थोड़ी धीरे आ रही है आपने यर फोनस लगाए

2819
03:28:06,720 --> 03:28:11,720
हैं अब आ रही है थोड़ा तेजी में

2820
03:28:11,720 --> 03:28:16,240
जी मैं तो शवा जी आप बहुत बहुत धन्यवाद

2821
03:28:16,240 --> 03:28:20,280
नारायण और पंडित जी आपका भी मैं इनके जैसे

2822
03:28:20,280 --> 03:28:24,440
गोविंद जी है ना इनके प्रकार मैं भी पिछले चार पाच सालों से इनकी

2823
03:28:24,440 --> 03:28:28,560
किताबों को इतना खंगाल डाला मैंने और इनकी किताबों से इतना

2824
03:28:28,560 --> 03:28:32,720
पकड़ पकड़ के झूठ मिलता है मतलब मैं क्या बताऊं कि एक व्यक्ति के पास

2825
03:28:32,720 --> 03:28:36,880
तनिक भी विवेक होगा ना और वो यदि जो ये प्रमाण देते अपनी किताब

2826
03:28:36,880 --> 03:28:41,000
में उसको अगर अपनी किताबों से मिला लेंगे तो वैसे आदमी समझ

2827
03:28:41,000 --> 03:28:45,360
जाएगा ये क्या क्योंकि बहुत वर्ष पहले मैं भी हल्का सा भ्रमित हुआ था इनकी बातों से

2828
03:28:45,360 --> 03:28:49,520
लेकिन जब रामपाल एक निमित्त बने उनके निमि से मैंने देवी भागवत

2829
03:28:49,520 --> 03:28:54,200
पुराण पूरा अध्ययन किया तो समझ में आया कि व्यक्ति क्या बता रहे हैं और

2830
03:28:54,200 --> 03:28:58,200
असल में क्या लिखा है हमारे शास्त्रों में पूरा उल्टा मैं आपको एक

2831
03:28:58,200 --> 03:29:03,160
छोटा सा उदाहरण देता हूं इसके हेतु

2832
03:29:03,160 --> 03:29:07,600
अरे कहां चले गए प्रप हो गए वो नेटवर्क इशू

2833
03:29:07,600 --> 03:29:11,760
शायद नेट का प्रॉब्लम शं जी शशांक जी

2834
03:29:11,760 --> 03:29:16,320
आप आ आ ग जी बोलिए बोलिए

2835
03:29:16,320 --> 03:29:20,400
हेलो जी बोलिए इनकी एक

2836
03:29:20,400 --> 03:29:22,120
पुस्तक है अध्यात्मिक ज्ञानगंगा

2837
03:29:22,120 --> 03:29:26,200
इनकी पुस्तक आती है ज्ञानगंगा से थोड़ा अलग है वो पर व

2838
03:29:26,200 --> 03:29:30,200
वैसी बात लिखी है उसमें एक देते ने

2839
03:29:30,200 --> 03:29:34,280
नया करैक्टर बना परब्रह्म नाम का आपको शायद पता ही होगा ये अक्षर पुरुष

2840
03:29:34,280 --> 03:29:38,320
इसका नाम हालाकि पारब्रह्म कैसा दिखता है क्या है कुछ इनको आईडिया नहीं

2841
03:29:38,320 --> 03:29:42,480
जानकारी थोड़ी बहुत य व की तो उसके विषय में लिखा है इन्होंने

2842
03:29:42,480 --> 03:29:46,520
शायद पेज नंबर याद नहीं आ रहा गोविंद जी देख के बता देंगे

2843
03:29:46,520 --> 03:29:50,800
के परब्रह्मा की 100 हज कलाए है इने

2844
03:29:50,800 --> 03:29:54,800
इसने लिखा हुम और उसका प्रमाण देते हैं विष्णु पुराण

2845
03:29:54,800 --> 03:29:59,160
के अंश एक के अध्याय न के श्लोक नंबर 53 में

2846
03:29:59,160 --> 03:30:03,160
जिसमें यह लिखा हुआ है कि जिसके दज अश के द

2847
03:30:03,160 --> 03:30:07,240
हजार अंश में अनेको सृष्टि होती है वो परब्रह्मा है

2848
03:30:07,240 --> 03:30:11,280
लेकिन वो श्लोक वास्तव में भगवान विष्णु के लिए ब्रह्मा जी बोल रहे है

2849
03:30:11,280 --> 03:30:15,320
उसके ज नीचे में आप केंगे स्पष्ट रूप से लिखा है भगवान विष्णु के

2850
03:30:15,320 --> 03:30:19,680
लिए और किस विष्णु के लिए क्योंकि विष्णु भी कई बना के रखे ने काल बवाला

2851
03:30:19,680 --> 03:30:25,680
अलग उसम लिखा है कि पूर्व अवतारी विष्णु के लिए ब्रह्मा जी

2852
03:30:26,240 --> 03:30:30,400
ने ड्रॉप हो

2853
03:30:30,400 --> 03:30:35,280
गए रेफरेंस याद है इन्होंने क्या रेफरेंस बोला था

2854
03:30:35,280 --> 03:30:39,320
एक बार चेक कर लेते

2855
03:30:39,320 --> 03:30:43,520
हैं इनका ऐसा है ना

2856
03:30:43,520 --> 03:30:47,680
आधी बात आधी बात जैसे अब मैं कहूं

2857
03:30:47,680 --> 03:30:51,960
किसी व्यक्ति से दो व्यक्ति हम बात कर रहे हैं मैं कहूं आप तो बहुत फ्रॉड

2858
03:30:51,960 --> 03:30:56,040
है अब तीसरा व्यक्ति इतना ही सुना उसने और वहां से चला गया वो और

2859
03:30:56,040 --> 03:31:00,320
पूरे गांव में फैला जा कि फलाना व्यक्ति फ्रॉड है पर उसने मेरी पूरी बात सुनी

2860
03:31:00,320 --> 03:31:04,320
नहीं मैं कहना चाहता था आप फ्रॉड हो मैं आपके बारे में ऐसा सोचता था

2861
03:31:04,320 --> 03:31:08,560
पर आप तो अच्छे व्यक्ति हो यह बात नहीं सुनी ये सुना

2862
03:31:08,560 --> 03:31:12,800
उसने की आप फ्रॉड हो वो पूरे गांव में फैल गई

2863
03:31:12,800 --> 03:31:17,560
हमें अभी क्या बना जेल में उसका नाम था

2864
03:31:17,560 --> 03:31:19,720
नटवर

2865
03:31:19,720 --> 03:31:24,000
लाल उसने क्या कहा कि जेलर से एक बार कह दिया

2866
03:31:24,000 --> 03:31:28,520
कि मैं फलानी फलानी तारीख को जेल से भाग जाऊंगा

2867
03:31:28,520 --> 03:31:32,640
तो जेलर ने क्या किया एक पर्ची बनवाई

2868
03:31:32,640 --> 03:31:36,720
और सारे स्टाफ को बटवा दी उस पर्ची में लिखा था

2869
03:31:36,720 --> 03:31:40,760
रोको मत जाने दो पर्ची में लिखा

2870
03:31:40,760 --> 03:31:41,840
था रोको

2871
03:31:41,840 --> 03:31:46,520
मत जाने दो और

2872
03:31:46,520 --> 03:31:50,760
उसमें जो है सब उसमें जो है अर्थ का अनर्थ कर दिया गया कि रोको मत

2873
03:31:50,760 --> 03:31:54,840
जाने दो पची में लिखा था रोको मत जाने दो और उसमें

2874
03:31:54,840 --> 03:31:58,880
अर्थ का अनर्थ हो गया रोको मत जाने दो नटवरलाल

2875
03:31:58,880 --> 03:32:03,080
जिस तारीख को भागने को था तो उसम सब लोग पच बड़े रोको मत

2876
03:32:03,080 --> 03:32:07,240
जाने दो जा भाई तो इनका वो हाल है अर्थ का अनर्थ

2877
03:32:07,240 --> 03:32:11,320
करते हैं ब खैर इतनी शार्पनेस से भी नहीं

2878
03:32:11,320 --> 03:32:16,600
करते हैं कि मतलब उसको पकड़ने में देर लगे इतनी शार्पनेस भी नहीं है

2879
03:32:16,600 --> 03:32:20,840
अरे भाई अगर शास्त्र अनुकूल भक्ति बताने वाला कोई भी व्यक्ति

2880
03:32:20,840 --> 03:32:25,040
तत्वदर्शी हो जाएगा तो जो देवी भागवत का आपका बताया हुआ चैप्टर

2881
03:32:25,040 --> 03:32:29,040
पढ़ लेगा वो वैसे ही बोलने लगेगा हा भाई यह वाला मंत्र पढ़ो य वाला मंत्र

2882
03:32:29,040 --> 03:32:33,040
पढ़ो मैं हो गया त यह कहां

2883
03:32:33,040 --> 03:32:37,040
लिखा है कि वैसा का वैसा ही जो बताने लगे व तत्वदर्शी हो जाएगा फिर तो

2884
03:32:37,040 --> 03:32:41,040
जो भी उसको रीड करेगा व तत्वदर्शी कहला देगा

2885
03:32:41,040 --> 03:32:45,840
अगर कल आप लाइव आओ तो कल एक

2886
03:32:45,840 --> 03:32:49,840
मुख्य उद्देश्य य था कि वेदों से मैं यह साबित करना चाह रहा था कि जो श्री कृष्ण

2887
03:32:49,840 --> 03:32:53,920
भगवान ने जो परम पुरुष परम पुरुष का रूप दिखाया था

2888
03:32:53,920 --> 03:32:57,360
चार वेद में कल देखिए दो दिन दो तीन दिन संभवत

2889
03:32:57,360 --> 03:33:01,920
थोड़ा प्रॉब्लम आएगी क्योंकि गुरुदेव आ गए लखनऊ जी

2890
03:33:01,920 --> 03:33:05,960
वहां पर समय देना होगा दो तीन दिन और इसके बाद गोपाष्टमी पड़ रही

2891
03:33:05,960 --> 03:33:10,000
है न तारीख को मैं आप लोगों से भी कहूंगा विशेष रूप से

2892
03:33:10,000 --> 03:33:14,760
अपने आसपास गौ माता को ढूंढे गौवंश को ढूंढे गोपाष्टमी

2893
03:33:14,760 --> 03:33:19,040
के दिन गौ माता की पूजा विशेष रूप से करें उनको

2894
03:33:19,040 --> 03:33:23,920
सजाए उन पर फूल फूलों का फूल माला चढ़ाए

2895
03:33:23,920 --> 03:33:28,200
उनके पैरों में वो घुंगरू वो जो आती है घंटी उनके गले में घंटी बांधे

2896
03:33:28,200 --> 03:33:32,240
मतलब जो जिस तरह से भी उनका सम्मान किया जाता है और

2897
03:33:32,240 --> 03:33:36,440
उनको अगर उड़ाने के लिए कुछ बनवा सके अच्छा सा कपड़ा तो जितना आप उसमें

2898
03:33:36,440 --> 03:33:40,720
मिला सके उनको खाने पीने के लिए उनका जो चारा होता है उसकी व्यवस्था

2899
03:33:40,720 --> 03:33:45,360
करें गुड़ और चने का ये सब व्यवस्था करें ये खिलाए उन्हें

2900
03:33:45,360 --> 03:33:49,560
और बहुत मन से गौ माता का पूजन करें बहुत पुण्य प्राप्त होता है गोपाष्टमी

2901
03:33:49,560 --> 03:33:54,040
है 9 तारीख के दिन सभी को मेरा संदेश है और

2902
03:33:54,040 --> 03:33:58,160
और हमारा ं अकाउंट है वहा पर आप चाहे तो गोपाष्टमी के दिन जो पूजन

2903
03:33:58,160 --> 03:34:02,360
करेंगे उस पूजन को आप वहा शेयर करें हो सका तो हम

2904
03:34:02,360 --> 03:34:07,240
रील बना करके डालेंगे कि भाई ये लोगों ने पूजन पूरे भारतवर्ष में किया

2905
03:34:07,240 --> 03:34:12,200
तो आप गोपाष्टमी के दिन जो है गौ माता का पूजन अवश्य करें गोपाष्टमी

2906
03:34:12,200 --> 03:34:12,700
के

2907
03:34:12,360 --> 03:34:18,360
दिन ही गौ माता की गौवंश की हत्या की की गई थी 1866mhz

2908
03:34:45,920 --> 03:34:50,280
वहां जो जेल में मिली जो चोट थी उनके साथ उन चोटों के साथ ही कराते

2909
03:34:50,280 --> 03:34:54,560
कराते वह अंत तक अ अथवा

2910
03:34:54,560 --> 03:34:58,880
जो है अपने दे को छोड़कर गए थे और जाने से पहले उन्होंने श्राप

2911
03:34:58,880 --> 03:35:02,960
दिया था उस समय के शासन तंत्र को कि

2912
03:35:02,960 --> 03:35:07,120
गोपाष्टमी के दिन तुमने गौ हत्या नहीं गौ

2913
03:35:07,120 --> 03:35:11,880
हत्या तुमने की है तो तुम्हारे कुल का सर्वनाश भी गोपाष्टमी के दिन ही होगा

2914
03:35:11,880 --> 03:35:17,880
और फिर वो जो कुल उससे जुड़ा हुआ था शासन से कि

2915
03:35:19,320 --> 03:35:23,480
हां एक बार में ज्यादा गुण ना खिलाएगा

2916
03:35:23,480 --> 03:35:27,960
एक बात मैं कहता वो 1800 नहीं 1966 था वो गलती से बोल दिया

2917
03:35:27,960 --> 03:35:32,640
186 नहीं था 1966 था गलती से हो गया तो 1966

2918
03:35:32,640 --> 03:35:36,680
की बात है तो गौ माता मैं थोड़ा सा भावल

2919
03:35:36,680 --> 03:35:41,640
हो जाता हूं उस वाले चैप्टर को जब मैं सोचता हूं मैं तो नाम दे दूंगा

2920
03:35:41,640 --> 03:35:46,160
अभी तो भाई वो जो था इंदिरा

2921
03:35:46,160 --> 03:35:50,480
गांधी उस जुड़े हुई थी उस समय शासन तंत्र से तो

2922
03:35:50,480 --> 03:35:55,240
करपात्री जी ने श्राप दिया था कि जाओ आपके कुल का नाश भी गोपाष्टमी

2923
03:35:55,240 --> 03:35:59,440
के दिन ही होगा और फिर तीनों लोगों का जो जो मरण हुआ है वह

2924
03:35:59,440 --> 03:36:03,600
गोपाष्टमी को ही हुआ राजीव गांधी और जो संजय गांधी है और इंदिरा

2925
03:36:03,600 --> 03:36:07,680
गांधी तीनों लोग गोपाष्टमी के दिन ही गए थे तो

2926
03:36:07,680 --> 03:36:12,040
यह श्राप आज भी जाना जाता है एक संत का श्राप लगा था उस परिवार

2927
03:36:12,040 --> 03:36:16,200
को और आप लोग विशेष रूप से

2928
03:36:16,200 --> 03:36:20,720
गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजन अवश्य करें और

2929
03:36:20,720 --> 03:36:24,920
और संसार को यह मैसेज दे कि गौ माता हमारे लिए कितनी

2930
03:36:24,920 --> 03:36:29,000
स्पेशल है गौ माता हमारे लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है संसार भर को यह

2931
03:36:29,000 --> 03:36:33,440
मैसेज दे कि गौ माता का कितना सम्मान होना चाहिए सब लोग जो सुन रहे हैं

2932
03:36:33,440 --> 03:36:34,400
गोपाष्टमी

2933
03:36:34,400 --> 03:36:38,880
के दिन न तारीख के दिन गौ माता का विशेष रूप से पूजन करें

2934
03:36:38,880 --> 03:36:43,080
संभव हो सके फोटो वीडियो इत्यादि हमारे साथ साझा करें

2935
03:36:43,080 --> 03:36:47,080
यथा संभव हम प्रयास करेंगे कि वो सब कुछ इस प्लेटफॉर्म पर आवान के

2936
03:36:47,080 --> 03:36:51,680
प्लेटफार्म पर दिखाया जाए जी बूंगा

2937
03:36:51,680 --> 03:36:55,920
मैं एक बात से पूरी कर देता हूं कि इंदिरा गांधी मरी थी

2938
03:36:55,920 --> 03:37:00,400
आवास में थी गोपाष्टमी राजीव गांधी मरे

2939
03:37:00,400 --> 03:37:04,560
मद्रास में थथ गोपाष्टमी और संजय गांधी मरे आकाश में

2940
03:37:04,560 --> 03:37:08,640
थ गोपाष्टमी धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री

2941
03:37:08,640 --> 03:37:12,680
जी महाराज की जय होय जय हो और

2942
03:37:12,680 --> 03:37:17,560
एक बात अपनी रखनी चाहूंगा छोटी सी ज्यादा टाइम नहीं लूंगा हम यह करें

2943
03:37:17,560 --> 03:37:21,800
ये कार्य करेंगे ठीक है क्योंकि गऊ सब हिंदुओं का ही एक

2944
03:37:21,800 --> 03:37:25,840
केंद्र है जैसे मंदिर केंद्र है ना वैसे ही गौ की बात आते ही

2945
03:37:25,840 --> 03:37:30,120
लोग संगठित हो जाते हैं तो अगर कोई व्यक्ति ऐसी छोटी सी भी गोष्ठी करे ना

2946
03:37:30,120 --> 03:37:34,440
तो जरूर कुछ ना कुछ ऐसा उसके ऊपर जरूर बोले कि गौ रक्षा

2947
03:37:34,440 --> 03:37:38,440
के लिए भी हम जो जरूरी कदम उठा रहे हैं ठीक है वो भी थोड़े थोड़े थोड़े

2948
03:37:38,440 --> 03:37:42,440
ही आपके मदद से जो है वो लोगों में पहुंचेंगे ठीक है तो ये

2949
03:37:42,440 --> 03:37:46,640
ना हो ये तो हो जाए पूजन हो जाए परंतु वो जो न के साथ जो

2950
03:37:46,640 --> 03:37:49,920
व कहते हैं कि जो मेन मुद्दा है

2951
03:37:49,920 --> 03:37:53,920
वो भी हमने आगे बढ़ना कुछ ना जरूर बोलना है कैमरे के सामने

2952
03:37:53,920 --> 03:37:58,080
कि इस प्रकार से गौ हत्या की जो की जा रही है हम सौहार्द चाहते हैं

2953
03:37:58,080 --> 03:38:02,200
प्रेम चाहते हैं और गौ माता उसका मुख्य

2954
03:38:02,200 --> 03:38:06,240
स्थान है उसी के दूध से हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी पाले जा रहे

2955
03:38:06,240 --> 03:38:10,360
हैं ठीक है तो यह भी मुझे लगता है एक मैसेज भी कन्वे करना अच्छा रहेगा

2956
03:38:10,360 --> 03:38:14,440
उसमें और रामपाल भी गाय को माता मानते हैं

2957
03:38:14,440 --> 03:38:18,480
तो उनके जो उनके जो शिष्य है वो भी गोपाष्टमी के दिन गौ

2958
03:38:18,480 --> 03:38:22,520
पूजन करें गौ दान करें और

2959
03:38:22,520 --> 03:38:26,760
विशाल भाटिया जी बोलिए जय श्री राम चलिए अभी

2960
03:38:26,760 --> 03:38:30,800
अभी जो कपाती जी महाराज की बात हुई है तो उनके जो काशी

2961
03:38:30,800 --> 03:38:34,880
में जो शब्द थे जो मंदिरों में बोए जाते हैं मैं उनसे बोलूंगा धर्म

2962
03:38:34,880 --> 03:38:39,480
की जय हो विनाश हो

2963
03:38:39,480 --> 03:38:43,920
प्राणियों में सवना विश्व का कल्याण

2964
03:38:43,920 --> 03:38:48,680
कल्याण होनम पार्वती पते हर हर महादेव

2965
03:38:48,680 --> 03:38:51,960
थ हर हर महादेव थोड़ा अधूरा रह गया गौ माता

2966
03:38:51,960 --> 03:38:56,360
की जय हो गौ हत्या बंद

2967
03:38:56,360 --> 03:39:00,400
हो भारत अखंड हो अखंड हो भारत

2968
03:39:00,400 --> 03:39:04,960
अखंड हो अखंड हो हर हिंदू सेना हो हर हिंदू सनातनी

2969
03:39:04,960 --> 03:39:09,080
होनी हो नम पार्वती पतय हर हर महादेव हर हर

2970
03:39:09,080 --> 03:39:13,120
महादेव शशांक चौधरी जी आपकी बात रह गई है

2971
03:39:13,120 --> 03:39:17,160
जी जय श्री राम जय श्री राम मैं बाथरूम से

2972
03:39:17,160 --> 03:39:22,560
करने आया लो रामपाल जी को तो चलेगा

2973
03:39:22,560 --> 03:39:27,400
समय हो गया था नहीं तो हम उनको ले लेते व जो बाबू दास जी थे

2974
03:39:27,400 --> 03:39:33,400
मैं आज फर उनका खंडन लाया

2975
03:39:35,440 --> 03:39:40,720
हूं अच्छा शशा जी फिर कोई विशेष बात नहीं है फर करने

2976
03:39:40,720 --> 03:39:46,120
को ब बहुत बढ़िया

2977
03:39:46,120 --> 03:39:50,560
बहुत बढ़िया तो शशांक जी फिर कोई विशेष बात नहीं है ना आपको बोलनी है जो

2978
03:39:50,560 --> 03:39:55,200
नहीं नहीं मुझे उनसे काउंटर आर्गुमेंट करना था कुछ दो तीन पॉ

2979
03:39:55,200 --> 03:39:59,280
पहाड़ी जी ने बोला था ना यदा यही धर्मस्य तो

2980
03:39:59,280 --> 03:40:03,480
उसी में मुझे पूछना था कि अगर वो काल ने बोला है तो फिर वह धर्म की स्थापना

2981
03:40:03,480 --> 03:40:07,920
कैसे करेगा और अगर व कृष्ण जी ने ही बोला है तो इसमें एक और बात आती ना

2982
03:40:07,920 --> 03:40:11,920
कि वो दुष्टों का संहार करने के लिए भी जन्म लेते हैं और य कबीर जी को

2983
03:40:11,920 --> 03:40:16,800
परमात्मा मानते हैं तो उन्होने तो कोई सहार नहीं किया उसके

2984
03:40:16,800 --> 03:40:20,840
बाद ब है कबीर जी फ उनको भी रामपाल जी उनको भी

2985
03:40:20,840 --> 03:40:24,880
परमात्मा मानते उन्होने भी उन्होंने भी उससे रिलेटेड कुछ नहीं किया अब तक

2986
03:40:24,880 --> 03:40:28,880
कार्य इसका उत्तर मैं आपको दे देता हूं वो कितने चालाक लोग हैं

2987
03:40:28,880 --> 03:40:32,920
वेदों में एक जगह आया कि व दुष्टों का संघार करता है तो रामपाल जी ने

2988
03:40:32,920 --> 03:40:37,000
उसको पलट कर उसी के ऊपर पेन चलाकर लिख दिया कि वह अपने ज्ञान के

2989
03:40:37,000 --> 03:40:41,040
द्वारा दुश्मनों को पराजित करता है ठीक हैसे

2990
03:40:41,040 --> 03:40:45,840
ज्यादा आप क्या कर लो वो पन चला देगा उसके ऊपर ठीक है ना

2991
03:40:45,840 --> 03:40:50,720
देखिए बात पूरी घूम फिर के आ जाएगी तत्वदर्शी प

2992
03:40:50,720 --> 03:40:55,040
और तत्वदर्शी की डेफिनेशन ही अपनी बनाएंगे शास्त्र से नहीं देंगे

2993
03:40:55,040 --> 03:40:59,040
तत्वदर्शी की डेफिनेशन एक डेफिनेशन तो बदल दी 15 एक

2994
03:40:59,040 --> 03:41:01,360
की डेफिनेशन देते थे पहले आज वो भेद

2995
03:41:01,360 --> 03:41:05,400
खुल गया 15 एक के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध नहीं हुए 15 एक के

2996
03:41:05,400 --> 03:41:09,520
अनुसार मां भगवती की पूजा करने वाला और शास्त्रों का अध्ययन करेंगे तो

2997
03:41:09,520 --> 03:41:13,680
15 एक के अनुसार बल्कि आगे दिखा दिया श्री कृष्ण को भगवान

2998
03:41:13,680 --> 03:41:17,800
देखने वाला आगे बता दि है ना श्री कृष्ण

2999
03:41:17,800 --> 03:41:21,880
को भगवान देखने वाला तत्वदर्शी है और

3000
03:41:21,880 --> 03:41:26,040
435 में बता दिया तत्वदर्शी है वो शास्त्र

3001
03:41:26,040 --> 03:41:30,160
से नहीं बताएंगे शास्त्र से क्या बताएंगे कि वो नौ मंत्र

3002
03:41:30,160 --> 03:41:34,320
देते हैं हमारे रामपाल जी भी नौ मंत्र देते तो हो गए तत्व दशी अरे भाई मैं भी देने

3003
03:41:34,320 --> 03:41:38,560
लगू नौ मंत्र सबके मंत्र मैं भी दे रहा हूं पहाड़ी

3004
03:41:38,560 --> 03:41:42,640
जी भी दे रहे हैं गोविंद जी भी दे रहे हैं पंडित पंडित जी भी दे रहे हैं

3005
03:41:42,640 --> 03:41:47,360
भाटिया भी दे रहे हैं ज श

3006
03:41:47,360 --> 03:41:51,440
यहां बैठे हुए सभी लोग तत्वदर्शी हो गए ये तो मनम

3007
03:41:51,440 --> 03:41:54,000
व्याख्या है

3008
03:41:54,000 --> 03:41:58,000
नारा में सारे के सारे देवताओं के मंत्र लिखे विधिया तक लिखी

3009
03:41:58,000 --> 03:42:02,160
हुई है सारी तो वो तो बच्चा भी पढ़ के सुना देगा आपको अरे

3010
03:42:02,160 --> 03:42:06,400
व विधिया अगर उसम भी डेप्थ में जाएंगे तो वो विधिया

3011
03:42:06,400 --> 03:42:12,400
भी वो उपयोग में नहीं लाते हैं कहा लाते कुछ नहीं

3012
03:42:13,440 --> 03:42:17,680
लाते कर लीजिए बात आप इन लोगों से पूछिए

3013
03:42:17,680 --> 03:42:21,800
पूरी महाभारत में जगह-जगह श्री कृष्ण को ईश्वर कहा गया है खाली गीता ही नहीं महाभारत

3014
03:42:21,800 --> 03:42:26,360
में जगह जगह श्री कृष्ण ने अपने को ईश्वर बोला और तीन-तीन जगहों पर अपने विश्वरूप दिखाए हैं

3015
03:42:26,360 --> 03:42:30,360
एक कर्मों की सभा में दिखाया था जब वो संधि प्रस्ताव के लिए गए थे एक उत्तक

3016
03:42:30,360 --> 03:42:34,800
ऋषि को उन्होंने अपना विश्वरूप दिखाया और एक दिखाया नारद ऋषि को महाभारत

3017
03:42:34,800 --> 03:42:38,840
में चार चार दिखाए जिनमें गीता में उन्होंने दिखाया क्या तब भी उनके अंदर कोई काल बैठा हुआ

3018
03:42:38,840 --> 03:42:42,920
था अ ये इनसे पूछिए पूरी महाभारत में क्या काल बैठा था कृष्ण के अंदर

3019
03:42:42,920 --> 03:42:47,160
अरे भाई वो तो यही कहेंगे वो बड़ा हुआ काल है अरे

3020
03:42:47,160 --> 03:42:51,160
वो कह रहे व्यास जी के अंदर ही काल है वो वो कह रहा है व्यास के अंदर ही

3021
03:42:51,160 --> 03:42:55,240
काल है तो आप कौन सा नहीं अनुशासन पर्व में लिखा है ना श्री कृष्ण

3022
03:42:55,240 --> 03:42:59,440
ही काल है अनुशासन पर्व में वो तो हम लोग बात करेंगे काल

3023
03:42:59,440 --> 03:43:03,440
प आएंगे चलिए आज का तो अच्छा रहा दो दो

3024
03:43:03,440 --> 03:43:07,840
दो दो लोग आए मण मारना जी शशांक शुक्ला जी

3025
03:43:07,840 --> 03:43:12,200
अविनाश शुक्ला जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

3026
03:43:12,200 --> 03:43:16,280
पूछेंगे भाया जी वाला और आप मुझसे संपर्क नहीं कर रहे हैं मैंने आपको कई बार

3027
03:43:16,280 --> 03:43:20,320
कहा है नंबर नंबर दिया आपको कई बार संपर्क करने के लिए आपने आज

3028
03:43:20,320 --> 03:43:24,640
तक व नहीं किया मुझे जी मैं प्रयास करूंगा लेकिन अभी मैं इंस्टा

3029
03:43:24,640 --> 03:43:28,640
पे ही अभी मैं थोड़ा ठीक हूं तो इसलिए इ में थोड़ी सुविधा है ना तो इसलिए

3030
03:43:28,640 --> 03:43:32,960
मुझे असल में कानपुर में कुछ कार है ना इसलिए मैं कह रहा था जी आप

3031
03:43:32,960 --> 03:43:37,160
आज मैं वैसे भी आज सुबह पनकी मंदिर में गया हुआ था आप बोले थे ना कई बार आप जा चुके

3032
03:43:37,160 --> 03:43:41,240
हैं और मुझे आपकी बानपुर में कुछ कार्य है इसलिए मैं आपसे बोल रहा

3033
03:43:41,240 --> 03:43:45,480
था जी जरूर श्री राम जय श्री राम अविनाश

3034
03:43:45,480 --> 03:43:49,520
शुक्ला जी मैं ये कह रहा हूं कि इनको यही नहीं पता

3035
03:43:49,520 --> 03:43:53,840
कि भगवत गीता महाभारत का एक भाग है अलग अलग मानते हैं

3036
03:43:53,840 --> 03:43:57,880
अब मैं इनको क्या इनकी मूर बात करू इनको लगता है गीता जी अलग है

3037
03:43:57,880 --> 03:44:01,880
महाभारत अलग है बोलते महाभारत नहीं मानेंगे लेकिन गीता मानेंगे मैं भी बोल

3038
03:44:01,880 --> 03:44:06,160
दू भाई कि मैं तुम्हारी गरीब दास की वाणी में ये असुर नि कंदर रमण

3039
03:44:06,160 --> 03:44:10,320
मानूंगा और गरीब दास की बाकी वाण को नहीं मानूंगा तो क्या मूर्खता इनकी बताओ

3040
03:44:10,320 --> 03:44:14,360
आप इनको तो बेस इनके इनका रामपाल एक

3041
03:44:14,360 --> 03:44:19,160
जगह लिखता है जब भगवत गीता बोली जा रही थी अरे भाई विशाल

3042
03:44:19,160 --> 03:44:23,440
विशाल सट जी आइए ऊपर आइए भाई अगली बार आइएगा

3043
03:44:23,440 --> 03:44:27,680
आज तो नहीं ठीक है सभी को जय श्री राम

3044
03:44:27,680 --> 03:44:32,160
भैया आप लोग गोपाष्टमी के दिन 9 तारीख को गोपाष्टमी

3045
03:44:32,160 --> 03:44:37,320
जरूर मनाए गौ माता की पूजा करें और धरातल पर जुड़ने के लिए 7408

3046
03:44:37,320 --> 03:44:41,520
30169 यह हमारा नंबर है आप जुड़ सकते हैं और धर्म

3047
03:44:41,520 --> 03:44:43,800
रक्षा में सहायता कर सकते

3048
03:44:43,800 --> 03:44:47,800
हैं नास्त्र हमारा एक प्रकल्प चल रहा है जिसमें हम सब

3049
03:44:47,800 --> 03:44:51,840
भाई बैठ कर के भगवान के नाम का जप करते हैं उसमें भी आप

3050
03:44:51,840 --> 03:44:56,120
जुड़ सकते हैं ना मास्त्र में दिन में पांच बार अलग-अलग करते हैं 1515 मिनट और सुबह

3051
03:44:56,120 --> 03:45:00,200
सवा घंटे करते हैं और इसके साथ ही

3052
03:45:00,200 --> 03:45:04,400
साथ हमारी क्लासेस भी चलती है तो जो अध्ययन करना चाहते हैं वह भी

3053
03:45:04,400 --> 03:45:08,560
ट कर सकते हैं वो निशुल्क होती है क्लासेस और

3054
03:45:08,560 --> 03:45:12,640
किसी भी प्रकार की टेंशन है अगर हमारी बातों को लेकर

3055
03:45:12,640 --> 03:45:16,640
के तो भी आप व कर सकते हैं टेंशन मिटाने के लिए फॉर्म है

3056
03:45:16,640 --> 03:45:21,480
वहां पर वो भर सकते हैं वेदों में प्रमाण नहीं है ओए

3057
03:45:21,480 --> 03:45:26,760
और कबीर भगवान नहीं है ठीक है

3058
03:45:26,760 --> 03:45:30,960
सभी को कुछ कोई कुछ कहना चाह रहा है क्या

3059
03:45:30,960 --> 03:45:35,120
बोली बत लेट हो रहे थोड़ा सा जाना था बोल लीजिए बोल लीजिए

3060
03:45:35,120 --> 03:45:40,240
पूरा कर लीजिए मैं पूरा कर

3061
03:45:40,240 --> 03:45:44,240
लू अना पूरा कर हा

3062
03:45:44,240 --> 03:45:48,800
मैं की किताब में एक जगह ये भी लिखा है कि जब गीता का ज्ञान बोला जा रहा था

3063
03:45:48,800 --> 03:45:53,240
तब शास्त्रों के रूप में एक मात्र वेद ही उपलब्ध थे और कोई नहीं थे

3064
03:45:53,240 --> 03:45:57,360
तो इनको इनके बाबा ने पूरी गीता ही नहीं पढ़ी कि भगवान स्वयं अध्याय 13

3065
03:45:57,360 --> 03:45:59,000
के श्लोक में चार में

3066
03:45:59,000 --> 03:46:03,080
ब्रह्म सूत्र के पदों की बात कर रहे हैं तो इनको ब्रह्म सूत्र क्या होता है

3067
03:46:03,080 --> 03:46:07,120
इने पता ही नहीं होगा इनको क्या चीज होती है बाबाज अरे लोग मना कर देते हैं

3068
03:46:07,120 --> 03:46:11,480
उपनिषद को मना कर देते हैं ब्रह्म सूत्र को मना कर देते हैं

3069
03:46:11,480 --> 03:46:15,560
नहीं तो बाबा झूठ क्यों बोल र जब गीता बोली जा रही कोई शास्त्र

3070
03:46:15,560 --> 03:46:19,680
नहीं थे भगवान खुद ब्रह्मसूत्र के पदों की बात कर रहे हैं ना तो मतलब उन्होने पढ़ी नहीं गीता तो

3071
03:46:19,680 --> 03:46:23,880
का तत्वदर्शी हुई जब जिसने पूरे श्लोक ही नहीं पढ़ा तो कैसे ऐसे व्यक्ति को

3072
03:46:23,880 --> 03:46:27,920
स दर्शी माना जाए या तो वो झूठ बोल ना है या तो उने पढ़ा नहीं री बात तो है

3073
03:46:27,920 --> 03:46:32,040
नहीं तो जिस जिस जिस जो ये पढ़ा रहे हैं सारे के सारे

3074
03:46:32,040 --> 03:46:36,200
यह जो जब बोलते हैं कि हमारा जो ग्रंथ है वह तो पता नहीं

3075
03:46:36,200 --> 03:46:40,280
उड़ता हुआ समुद्र मंस में से निकला था तो यही से झूठ सिद्ध

3076
03:46:40,280 --> 03:46:45,080
हो जाते हैं और कोई ग्रंथ ही नहीं वेदों के अलावा

3077
03:46:45,080 --> 03:46:49,360
जय श्री राम जी आप भी बोल वेदों में प्रमाण है

3078
03:46:49,360 --> 03:46:53,560
कबीर भगवान है जब ऐसा बोलते ना बड़ी हसी आती है यह ऐसा

3079
03:46:53,560 --> 03:46:57,880
लगता है जैसे लोहे को सोना पहना चाहते हैं

3080
03:46:57,880 --> 03:47:03,880
गोल्ड 24 कैरेट गोल्ड बनाना चाहते हैं

3081
03:47:06,480 --> 03:47:10,840
बताओ बो अपमान है शास्त्र का इनको तो तर्को ही

3082
03:47:10,840 --> 03:47:15,160
भगा देना चाहिए अरे मैं तो वही कर रहा था फिर इन्होने उड़ाना शुरू

3083
03:47:15,160 --> 03:47:19,800
शिवांश नारायण द्वेदी शास्त्र नहीं खोलता है अरे तो

3084
03:47:19,800 --> 03:47:23,880
शास्त्र तो इनके लिए समझ लो कि क्या क बच्चे भी इनसे

3085
03:47:23,880 --> 03:47:28,480
बहुत बढ़िया है य अपनी स्ट

3086
03:47:28,480 --> 03:47:32,600
नामा ऑनलाइन होता है ऑनलाइन होता है हम लोग गगल मीट

3087
03:47:32,600 --> 03:47:38,600
इत्यादि पर जुड़ते हैं फिर साथ में मिलकर भजन व भगवान के नाम का जप करते

3088
03:47:41,280 --> 03:47:47,280
हैं यह गुरु वाणी है

3089
03:47:49,840 --> 03:47:55,360
क्या दिखाना है

3090
03:47:55,360 --> 03:48:00,640
इसमें गरीब

3091
03:48:00,640 --> 03:48:06,640
दास थोड़ा जूम कर लीजिए फिर क्या

3092
03:48:08,040 --> 03:48:12,320
है मूल कमल में राम है स्वाद

3093
03:48:12,320 --> 03:48:16,840
चक्र में राम नाभी कमल में राम है कमल विश्राम

3094
03:48:16,840 --> 03:48:20,960
कंठ कमल में राम है त्रिकुटी कमल में राम अब लो सब जगह राम

3095
03:48:20,960 --> 03:48:26,080
है भैया सहस कमल दल राम है मुनि

3096
03:48:26,080 --> 03:48:30,200
बसती त ठाम सब

3097
03:48:30,200 --> 03:48:36,200
जगह राम ही राम है राम के भक्त

3098
03:48:38,280 --> 03:48:42,560
चलिए इसका रेफरेंस रख लीजिएगा प्लीज इसका रेफरेंस सेव कर

3099
03:48:42,560 --> 03:48:45,800
लीजिएगा पाच

3100
03:48:45,800 --> 03:48:51,040
यह इनका पांचवा वेद है ठीक

3101
03:48:51,040 --> 03:48:55,240
है ठीक है भाई कुल मिलाकर बात यह है अगर यह अपनी

3102
03:48:55,240 --> 03:48:59,400
कितनी भी बातें बताते हैं प्रमाण तो इनके सारे प्रमाण सबसे

3103
03:48:59,400 --> 03:49:03,440
पहली बात है कि इनके ही अनुसार अगर इनकी बात मान ले थोड़ी देर वह

3104
03:49:03,440 --> 03:49:07,920
सारे प्रमाण संकेता क्मक है कोई ठोस नहीं है

3105
03:49:07,920 --> 03:49:12,160
संकेता क्मक प्रमाण है सारे तत्वदर्शी क्यों संकेता मेंक

3106
03:49:12,160 --> 03:49:16,680
कबीर कबीर भगवान है क्यों संकेत

3107
03:49:16,680 --> 03:49:20,840
काल संकेता मक कबीर की भक्ति संकेता क्मक सब संकेता मक है कुछ

3108
03:49:20,840 --> 03:49:25,600
ठोस है ही नहीं और जो ठोस है उनको नकार देंगे

3109
03:49:25,600 --> 03:49:29,680
चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय

3110
03:49:29,680 --> 03:49:34,040
श्री राम जय श्री राम और एक बार फिर कह रहा

3111
03:49:34,040 --> 03:49:38,040
हूं कबीर के श कबीर दास जी के रामपाल

3112
03:49:38,040 --> 03:49:42,200
दास जी के शिष्यों को माता जी ने निष्ठा पूर्वक अगर पान

3113
03:49:42,200 --> 03:49:46,200
कराया हो सेवन कराया हो उनके अंदर सा तो व आए

3114
03:49:46,200 --> 03:49:50,200
और वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है सिद्ध करें भगवत गीता को

3115
03:49:50,200 --> 03:49:53,440
काल ने बोला है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है सिद्ध करें तत्वदर्शी

3116
03:49:53,440 --> 03:49:58,240
सिद्ध करें अजरावर अविनाशी नहीं है

3117
03:49:58,240 --> 03:50:02,680
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश सिद्ध करें और कबीर अजर

3118
03:50:02,680 --> 03:50:06,960
अमर अविनाशी है यह सिद्ध करें ठीक है

3119
03:50:06,960 --> 03:50:11,650
जय श्री राम जय श्री राम

3120
03:50:11,650 --> 03:50:15,650
[संगीत]
