1
00:00:01,040 --> 00:00:07,040
[संगीत]

2
00:00:07,360 --> 00:00:11,760
तो सभी को जय श्री

3
00:00:11,760 --> 00:00:15,800
राम बिना विलंब किए हम हमारे जो अतिथि

4
00:00:15,800 --> 00:00:21,800
आज के उन्हे ले लेते

5
00:00:25,120 --> 00:00:31,120
हैं धर्म सनातन जी आप

6
00:00:31,320 --> 00:00:35,320
हमारी जिनसे चर्चा हुई है वही है या कोई और है थोड़ा सा अपना फेस दिखा

7
00:00:35,320 --> 00:00:39,400
देंगे आप भैया हमारे यहां लाइट नहीं है मैं अयोध्या दास जी

8
00:00:39,400 --> 00:00:43,640
पर जड़ते हु नहीं बन रहा था तो मैं उनको जोड़ना सिखा रहा था मैं आउट

9
00:00:43,640 --> 00:00:47,240
हो रहा हूं वो आएंगे

10
00:00:47,240 --> 00:00:52,000
अच्छा जय श्री राम युगल किशोर

11
00:00:52,000 --> 00:00:56,600
जी जय श्री राम जय श्री राम

12
00:00:56,600 --> 00:01:02,120
जी जय श्री राम अमित जी आपका स्वागत

13
00:01:02,120 --> 00:01:06,600
है आवाज क्लियर आ रही है आपको आवाज ठीक आ रही है मैं

14
00:01:06,600 --> 00:01:10,600
एक निवेदन करूंगा कि आप एक बार ना बिना हेडफोन के

15
00:01:10,600 --> 00:01:16,600
भी ट्राई कर लीजिए ज्यादातर ऐसा होता है कि बिना हेडफोन के ज्यादा अच्छी आवाज आती

16
00:01:20,480 --> 00:01:24,960
है जी महाराज जी अब देखिए आ रही है बढ़िया अब ज्यादा

17
00:01:24,960 --> 00:01:29,480
ज्यादा अच्छी आवाज आ रही है सभी को जय श्री राम हरष

18
00:01:29,480 --> 00:01:33,720
प्यारी बहना जी और जितने भी यहां

19
00:01:33,720 --> 00:01:38,560
पर समर्थक हैं या फिर श्रोता गण है

20
00:01:38,560 --> 00:01:42,640
ज्यादा इंतजार ज्यादा दायित्व दे रखा है आप लोगों ने तो

21
00:01:42,640 --> 00:01:46,720
क्या करें ज्यादा इंतजार तो कराना ही पड़ेगा ज्यादा सारे काम

22
00:01:46,720 --> 00:01:52,720
है ज्यादा कार्य है ज्यादा दायित्व है

23
00:01:52,920 --> 00:01:56,760
तो होता

24
00:01:56,760 --> 00:02:00,800
है हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे

25
00:02:00,800 --> 00:02:05,040
कृष्णा राजेश सिंह जी अब तो ऐसा

26
00:02:05,040 --> 00:02:09,360
हो गया कि हमारे मुख से हरे कृष्णा अपराध

27
00:02:09,360 --> 00:02:12,680
जैसा ना [संगीत]

28
00:02:12,680 --> 00:02:16,920
लगता व एक पहचान हो चुका है

29
00:02:16,920 --> 00:02:20,320
किसी विशेष तंत्र

30
00:02:20,320 --> 00:02:24,600
की तो आज हम

31
00:02:24,600 --> 00:02:28,600
उपस्थित हुए हैं जो मुख्य रूप से तो

32
00:02:28,600 --> 00:02:34,520
एक आधारभूत चर्चा है वो उसका आधार है

33
00:02:34,520 --> 00:02:38,720
कि इकोन के द्वारा जो एक

34
00:02:38,720 --> 00:02:44,000
श्रीमद् भागवत उनके द्वारा नाम दिया जाता है श्रीमद्

35
00:02:44,000 --> 00:02:48,200
भागवत जी श्रीमद् भागवत का एक

36
00:02:48,200 --> 00:02:53,040
पूरा चैप्टर उससे गायब है जिसका नाम है

37
00:02:53,040 --> 00:02:57,040
भागवत महात्म चैप्टर से पूरा

38
00:02:57,040 --> 00:03:01,880
गायब है और वो क्यों गायब है जबकि वो व्यास जी जी ने लिखा है

39
00:03:01,880 --> 00:03:06,000
आगे जिसको हम श्रीधर स्वामी

40
00:03:06,000 --> 00:03:10,880
जी को वो भी प्रमाण मानते हैं उन्होंने भी अपनी टीका में

41
00:03:10,880 --> 00:03:11,880
उसको लिया

42
00:03:11,880 --> 00:03:15,800
है और उसके

43
00:03:15,800 --> 00:03:19,960
बाद आज वो गायब है तो यह तो हमारा एक

44
00:03:19,960 --> 00:03:25,120
वस्तुनिष्ठ विषय है इसके इर्दगिर्द जो

45
00:03:25,120 --> 00:03:29,200
एक अभियान है कि सनातन या सनातना भास धर्म

46
00:03:29,200 --> 00:03:33,520
या धर्मा आस तो उसमें फिर विवेचन इनका भी आ

47
00:03:33,520 --> 00:03:38,880
जाएगा जैसे जो अलंकार समाज

48
00:03:38,880 --> 00:03:42,960
है या फिर वो जो ये

49
00:03:42,960 --> 00:03:46,800
स्वघोषित तत्वदर्शी स्वघोषित

50
00:03:46,800 --> 00:03:51,960
जगतगुरु रामपाल इत्यादि कैंपेन चलता

51
00:03:51,960 --> 00:03:56,160
है तो वो भी सब इसमें समाहित है तो सर्वप्रथम

52
00:03:56,160 --> 00:04:00,840
मैं अंकित जी से कहूंगा कि अपना परिचय देते हुए एक

53
00:04:00,840 --> 00:04:05,240
जो प्रारंभिक वक्तव्य होम आप दे

54
00:04:05,240 --> 00:04:09,520
जी सभी को जय जय सीताराम मैं अंकित

55
00:04:09,520 --> 00:04:13,640
शर्मा पूज्य पाराशर जी द्वारा दीक्षित हूं तो

56
00:04:13,640 --> 00:04:18,520
रामानंदी संप्रदाय से हम जुड़ चुके हैं

57
00:04:18,520 --> 00:04:23,600
सोशल मीडिया के आधार पर अगर देखा जाए तो गुरु जी ने मुझे नाम दे रखा है अयोध्या

58
00:04:23,600 --> 00:04:27,320
दास अयोध्या दास गुरु जी ने नाम दे रखा है

59
00:04:27,320 --> 00:04:31,600
और मैं आज इस यहां जुड़ने का मेरा मकसद

60
00:04:31,600 --> 00:04:36,080
केवल एक ही था कि यह जो स्कोन है या फिर आर्य

61
00:04:36,080 --> 00:04:40,200
समाज इत्यादि है और मैं हिमाचल से बिलोंग करता हूं तो

62
00:04:40,200 --> 00:04:44,920
यहां पर एक और समाज चलता है जिसको राधा स्वामी कहा जाता

63
00:04:44,920 --> 00:04:48,960
है एक संप्रदाय और चलती है जो राधा स्वामी के नाम

64
00:04:48,960 --> 00:04:53,280
पर है पर सनातन से बिल्कुल विमुख चलती है

65
00:04:53,280 --> 00:04:57,560
जिसके बारे में थोड़ी मैं चर्चा करने के लिए आज यहां जुड़ा हूं कि जो भी थोड़ी

66
00:04:57,560 --> 00:05:03,560
बहुत शंकाएं हैं उसका निवारण हो सके सभी को जय जय

67
00:05:06,480 --> 00:05:09,520
सीताराम

68
00:05:09,520 --> 00:05:13,560
जी तो हम लोग ऐसा करते हैं

69
00:05:13,560 --> 00:05:17,600
कि जो हमारा जो सामग्री है उसके

70
00:05:17,600 --> 00:05:21,720
आधार पर चर्चा चालू करते हैं जी और फिर वह अपने आप

71
00:05:21,720 --> 00:05:26,120
उसमें समावेश हो जाएगा अन्य विषयों का भी जी तो

72
00:05:26,120 --> 00:05:30,360
जैसे युगल किशोर जी मैं आपको

73
00:05:30,360 --> 00:05:35,160
यह तो यहां पर रामानंदी बैठे हैं तो सबसे अच्छी बात तो एकय है जो एकत्व है

74
00:05:35,160 --> 00:05:39,400
जो परंपराओं में और आ

75
00:05:39,400 --> 00:05:43,600
स्वित जो दीक्षित है वो भी जो युगल

76
00:05:43,600 --> 00:05:48,000
किशोर जी भी जो रामानुज परंपरा के हैं ठाकुर जी के नाम से प्रसिद्ध

77
00:05:48,000 --> 00:05:52,760
है व कथा वाचन करते हैं वहां से दीक्षित है उनके

78
00:05:52,760 --> 00:05:56,840
द्वारा और अध्ययन के लिए शंकर मत

79
00:05:56,840 --> 00:06:00,920
का भी आलंबन लेते हैं ल किशोर जी आप अपना थोड़ा सा परिचय स्वयं ही

80
00:06:00,920 --> 00:06:05,040
दे दे और फिर हम लोग हमारा जो मुख्य वो

81
00:06:05,040 --> 00:06:09,160
है उसको स्टार्ट करते हैं पूर्व में भी हमने

82
00:06:09,160 --> 00:06:15,160
अपना परिचय दे ही चुका है तो कई सारे लोग परिचित भी होंगे हमसे

83
00:06:23,320 --> 00:06:27,360
कि पूर्व में भी कई सारे लोग हमसे परित होंगे पूर्व में

84
00:06:27,360 --> 00:06:31,360
भी हमने परिचय दिया था आपका नेटवर्क शायद ठीक से नहीं आ

85
00:06:31,360 --> 00:06:37,360
रहा युगल किशोर जी क्योंकि आपका जो चित्र है वो रुका हुआ

86
00:06:47,600 --> 00:06:53,600
है हर हर महादेव पहाड़ी जी

87
00:06:54,160 --> 00:06:58,320
और तब तक ले लेते हैं कई लोगों को सवाल

88
00:06:58,320 --> 00:07:02,640
ले लेते हैं ये इतने सारे पेक पंथ कैसे

89
00:07:02,640 --> 00:07:05,280
पैदा हो

90
00:07:05,280 --> 00:07:09,520
गए हमारा प्रमाद ही तो इन सबका अस्तित्व है

91
00:07:09,520 --> 00:07:13,840
अभी आज इग्राम पर हमने जगतगुरु

92
00:07:13,840 --> 00:07:18,000
पुरी शंकराचार्य जी उनकी एक स्टोरी उनका एक वक्तव्य है जो स्टोरी

93
00:07:18,000 --> 00:07:22,160
पर लगाया हुआ है गुरुदेव बता रहे हैं कि बीच

94
00:07:22,160 --> 00:07:26,440
में ऐसी हरि भक्ति लोगों के ऊपर आ गई मतलब

95
00:07:26,440 --> 00:07:30,440
हरि भक्ति का प्रमाद उसका विकृत स्वरूप हो

96
00:07:30,440 --> 00:07:34,600
गया वो क्या था कि फेरे पढ रहे हैं तो हरि

97
00:07:34,600 --> 00:07:38,320
भक्ति से व हरे कृष्ण का जाप हो रहा है फेरे पढ़ते समय ऐसा आ

98
00:07:38,320 --> 00:07:42,320
गया गंगा किनारे खड़े मगर हम गंगा स्नान नहीं करेंगे क्योंकि हम तो

99
00:07:42,320 --> 00:07:46,320
हरे कृष्ण का जाप कर रहे हैं जबकि इन्हीं बातों के

100
00:07:46,320 --> 00:07:50,360
इसी समय की सिचुएशन के बारे में पदम पुराण में जो 10

101
00:07:50,360 --> 00:07:54,360
नाम अपराध दिए गए हैं उसमें से एक अपराध है कि

102
00:07:54,360 --> 00:07:58,560
जो हमारे शति का विधि विधान है शति वचनों का स्मृति

103
00:07:58,560 --> 00:08:02,640
वचनों का विधि विधान उनके प्रति अनास्ता वान हो जाना कि हम तो बस

104
00:08:02,640 --> 00:08:06,800
नाम के सहारे चल रहे तो हम कर भी सकते हैं तो भी हम नहीं करेंगे

105
00:08:06,800 --> 00:08:10,800
स्नान कर सकते हैं गंगा का तब भी हम अ मानना करेंगे यह कहते

106
00:08:10,800 --> 00:08:14,800
हुए कि हम तो नाम जप के सहारे चल रहे तो यह 10 अपराधों में से एक

107
00:08:14,800 --> 00:08:19,000
नाम अपराध है तो ऐसा आलंबन

108
00:08:19,000 --> 00:08:23,160
जब लेने लगते हैं केवल कीर्तन हो जाता है और कर्तन साइड हो जाता

109
00:08:23,160 --> 00:08:27,160
है छात्र धन गायब हो जाता है भक्ति के नाम पर तो इस तरह

110
00:08:27,160 --> 00:08:31,840
के प्रमाद उत्पन्न हो जाते हैं जी युगल जी

111
00:08:31,840 --> 00:08:35,880
जी तो पूर्व में हमारा परिचय हो ही चुका है तो हम विषय

112
00:08:35,880 --> 00:08:40,240
पर आते हैं विषय ये है किन

113
00:08:40,240 --> 00:08:44,240
ने जो श्रीमद् भागवत है उसके अंदर जो महात्म था वो पूरा

114
00:08:44,240 --> 00:08:48,360
गायब कर दिया इन लोगों ने आपका चित्र फिर कट रहा है

115
00:08:48,360 --> 00:08:52,800
क्या मुझी को इनका चित्र ऐसा दिख रहा है या बाकी सबको दिख रहा है

116
00:08:52,800 --> 00:08:53,520
आपका चित्र

117
00:08:53,520 --> 00:08:58,360
पॉज है नेटवर्क ठीक से नहीं आ रहे क्या आपके यहां

118
00:08:58,360 --> 00:09:03,000
शायद नेटवर्क प्रॉब्लम होगी आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए

119
00:09:03,000 --> 00:09:07,560
सही है नहीं यहां तो ठीक आ रहा है ठीक आ रहा है आपको

120
00:09:07,560 --> 00:09:11,640
जी जी ठीक रहा अच्छा तो फिर बोलिए फिर फिर कोई बात नहीं मुझी को दिख

121
00:09:11,640 --> 00:09:15,680
रहा होगा हा तो जो कन की भागवत है उसके अंदर क्या है जो

122
00:09:15,680 --> 00:09:19,840
महात्म श्रीमद् भागवत के अंदर बताया गया उसके अंदर एक पूरी विधि बताई गई है

123
00:09:19,840 --> 00:09:23,880
एक तो सप्ताह यज्ञ की विधि है कि जो साप्ताहिक भागवत होती है

124
00:09:23,880 --> 00:09:28,200
जो सप्ताह यज्ञ की पूर्ण विधि होती है उसम क्या क्या विधि का आलंबन लेकर

125
00:09:28,200 --> 00:09:32,400
के हम श्रीमद भागवत सकते तो पहले दिन जो श्रीमद

126
00:09:32,400 --> 00:09:38,400
भागवत होती है उसके अंदर जो व्यास

127
00:09:50,360 --> 00:09:54,400
जी तो जो श्रीमद् भागवत का महात्म होता है जो पहले

128
00:09:54,400 --> 00:09:58,720
दिन व्यास जी होते हैं वो क्या करते हैं श्रीमद् भागवत का महात्म कहते हैं अब महात्म

129
00:09:58,720 --> 00:10:02,720
में कथा दुकारी की भी आती है नारद जी की भक्ति

130
00:10:02,720 --> 00:10:06,720
जी से भेट होती है वो कथा भी आती है अब उसम सप्ताह यज्ञ की विधि भी

131
00:10:06,720 --> 00:10:10,840
आती है जो वक्ता होता है श्रोताओं को बताता है कि भाई सप्ता यज्ञ

132
00:10:10,840 --> 00:10:14,880
की विधि य है अमुक अमुक तरीके से जो है भागवत के अंदर य नियम बताए

133
00:10:14,880 --> 00:10:19,120
गए है तो वक्ता और श्रोता दोनों ही जो है नियमों का यथारूप पालन

134
00:10:19,120 --> 00:10:23,160
करें अब जहां पर हमारे अनुकूल बात लिखी हुई है

135
00:10:23,160 --> 00:10:27,240
वहा बात हमने लेली हां हमारे प्रतिकूल बात लिखी हुई

136
00:10:27,240 --> 00:10:31,320
है वो बात उसम से हमने हटा दी तो यहां हमने अ कर

137
00:10:31,320 --> 00:10:35,320
दिया आधी मुर्गी तो रखी है आधी मुर्गी हमने खाली आधी मुर्गी रख

138
00:10:35,320 --> 00:10:39,360
दी अंडा देने के लिए पूरा का पूरा भागवत का जो महात्म

139
00:10:39,360 --> 00:10:43,360
होता है व उन्होने गायत किया सप्ता यज्ञ की विधि के अंदर एक बात लिखी है

140
00:10:43,360 --> 00:10:47,400
गणनाथम प्रज माने की जो विघ्न आते हैं हम

141
00:10:47,400 --> 00:10:51,560
कोई भी पूजा का कार्य करते हैं तो विघ्न नाशक के लिए भगवान गणेश जी की पूजा

142
00:10:51,560 --> 00:10:55,920
करते हैं तो श्रीमद भागवत के अंदर भी य विधान है कि भगवान गणेश

143
00:10:55,920 --> 00:11:00,000
की पूजा की जाए किंतु वहां पर भी ने क्या किया

144
00:11:00,000 --> 00:11:04,280
पूरा महात्म गायब कर दिया तो गणेश जी की पूजा का तो विधान आता ही नहीं है

145
00:11:04,280 --> 00:11:05,600
अगर आप बताएंगे तो

146
00:11:05,600 --> 00:11:09,720
मैं अगर आप बताएंगे तो मैं वो चैप्टर खोल के य दिखा सकता

147
00:11:09,720 --> 00:11:13,800
हूं वो भी श्रीधरी टीका से हो सकता है गीता प्रेस का दिखाऊ तो ये ना

148
00:11:13,800 --> 00:11:18,480
माने मर पास जी

149
00:11:18,480 --> 00:11:22,600
श्रीमद भागवत का जब अध्ययन किया तो मैंने मैंने कुछ बातें देखी उसके

150
00:11:22,600 --> 00:11:26,760
अंदर तो मेरे को लगा ये श्लोक देखना चाहिए मेरे को कि इस श्लोक का ट्रांसलेशन

151
00:11:26,760 --> 00:11:30,760
इस कौन की भागवत के अंदर क्या है मैं गया भागवत पढ़ने के

152
00:11:30,760 --> 00:11:34,960
लिए वहा पर मे को शलोक मिले नहीं मिले क्यों नहीं मैंने दे महात्म यब

153
00:11:34,960 --> 00:11:39,200
तो शलोक से आएंगे तो इन्होने आर से

154
00:11:39,200 --> 00:11:43,560
मंगलाचरण से जन्मा व सेने आरंभ कर दिया

155
00:11:43,560 --> 00:11:47,680
तो आप दिखा दीजिए एक बार जो श्रोता देख रहे हमारे उनको पता

156
00:11:47,680 --> 00:11:51,000
चलना

157
00:11:51,000 --> 00:11:55,680
चाहिए पिछली लाइव में हम दिखा चुके हैं

158
00:11:55,680 --> 00:11:59,680
ये जो सबसे ऊपर आपको पहले सबसे

159
00:11:59,680 --> 00:12:04,760
पहले आपको जो महात्म दिख रहा है इसमें

160
00:12:04,760 --> 00:12:09,200
करीब अध्याय है वह पूरा का पूरा एक महात्म

161
00:12:09,200 --> 00:12:13,280
नाम का जो चैप्टर है इसका व हटा दिया गया है और इसी

162
00:12:13,280 --> 00:12:17,640
में जो युगल किशोर जी बात कर रहे सप्ताह यज्ञ की विधि है

163
00:12:17,640 --> 00:12:21,680
और इसी में वो गणेश जी की वंदना की बात है क्या जी

164
00:12:21,680 --> 00:12:23,840
जी

165
00:12:23,840 --> 00:12:28,360
स मैं एक मिनट ये प्रश् संख्या 62 है इसम

166
00:12:28,360 --> 00:12:34,360
खोल के देख

167
00:12:40,400 --> 00:12:44,480
किस किस प्रकार से उसम बाकी देवी देवताओं का आहवान किया जाए इत्यादि कई

168
00:12:44,480 --> 00:12:49,360
सारी बातें उसम लिखी

169
00:12:49,360 --> 00:12:53,720
जी ये 62 नंबर पृष्ठ संख्या पर हम आ

170
00:12:53,720 --> 00:12:59,720
गए इसमें

171
00:13:02,720 --> 00:13:08,040
यहां साध्य तो तक अत्यंत

172
00:13:08,040 --> 00:13:12,160
दुर्लभ कोई लोक क्रमांक आपको याद होगा जिसमें सीधे-सीधे वो

173
00:13:12,160 --> 00:13:17,400
बात हो रही हो सप्ताह यज्ञ की विधि में देखिए आप

174
00:13:17,400 --> 00:13:21,480
उसम 14 श्लोक या फिर कुछ 18 या 28

175
00:13:21,480 --> 00:13:26,280
के बीच में कुछ ऐसा श्लोक है उधर

176
00:13:26,280 --> 00:13:30,280
देखिए मैं देख रहा हूं 18वां वक्ता को

177
00:13:30,280 --> 00:13:34,520
अभिमुख होना चाहिए श्रोता को पूर्वा भिम मुख होना चाहिए यदि

178
00:13:34,520 --> 00:13:38,600
वक्ता पूर्वा भिम हो तो श्रोता उत्तरा विमुख रहे

179
00:13:38,600 --> 00:13:43,280
उससे आ उस आ अगर 28 प आ जाए तो

180
00:13:43,280 --> 00:13:47,600
उसके पश्चात श्रीमद् भागवत महापुराण की

181
00:13:47,600 --> 00:13:52,280
भी प्रयत्न करके विधि पूर्वक धूप इत्यादि के द्वारा पूजा करनी

182
00:13:52,280 --> 00:13:56,600
चाहिए ये श्रीम हा गणेश जी की वंदना जी

183
00:13:56,600 --> 00:14:00,920
जी अपने यह आ रहा है है

184
00:14:00,920 --> 00:14:05,080
कि अपने जो नित्य कर्म होते हैं अपने

185
00:14:05,080 --> 00:14:09,320
संध्या बंधन आदि नित्य कर्मों को संक्षेप में पूजा करके कथा में संभावित

186
00:14:09,320 --> 00:14:13,760
विघ्नों का विनाश करने के लिए गणेश जी की पूजा करनी

187
00:14:13,760 --> 00:14:18,400
चाहिए तो ये भागवत कह रहा है

188
00:14:18,400 --> 00:14:23,440
अब क्या हु अब इसमें समस्या यह है कि

189
00:14:23,440 --> 00:14:27,520
जो कौन है उसके द्वारा एक स्लोगन फिट

190
00:14:27,520 --> 00:14:31,600
किया गया है कि जब हम पेड़ को पेड़ की मूल में पानी डाल रहे

191
00:14:31,600 --> 00:14:35,840
हैं तो फिर पत्तों पर पानी क्यों डाला जाए तो एक तरीके से

192
00:14:35,840 --> 00:14:40,000
इसीलिए भागवत को यहां से कट किया गया उन्ह पत्तो पर पानी नहीं डालना है

193
00:14:40,000 --> 00:14:41,360
अगर मुझे कोई स्कोन वाला

194
00:14:41,360 --> 00:14:46,040
सुन रहा है तो ध्यान दे कि क्या इसीलिए

195
00:14:46,040 --> 00:14:50,280
पूरा भागवत का चैप्टर हटाया कि आपको पत्तो पर पानी नहीं डालना इसलिए व्यास

196
00:14:50,280 --> 00:14:54,520
जी के व्यास जी द्वारा कहा गया श्रीधर स्वामी द्वारा स्वीकारा

197
00:14:54,520 --> 00:14:58,560
गया जो चैप्टर है पूरा का पूरा वो

198
00:14:58,560 --> 00:15:02,840
गाय जो जड़ होती है जब जड़

199
00:15:02,840 --> 00:15:07,000
जहां से आरंभ होती है वहीं से तो आरंभ होगा श्रीमद् भागवत का जो

200
00:15:07,000 --> 00:15:11,080
महात्म वही तो उसकी जड़ है सबसे पहले वही से तो आरंभ करेंगे अब महात्म का अर्थ

201
00:15:11,080 --> 00:15:15,640
क्या होता है महात्म का अर्थ होता है महत्व यदि किसी व्यक्ति को हम महत्व

202
00:15:15,640 --> 00:15:20,240
नहीं बताएंगे किसी वस्तु का तो उसकी उसम प्रीति कैसे होगी

203
00:15:20,240 --> 00:15:24,560
किसी व्यक्ति को

204
00:15:24,560 --> 00:15:28,600
मैं 24 वा सबसे ऊपर वाला श्लोक है इसमें

205
00:15:28,600 --> 00:15:33,040
आप लोग ध्यान से देखें गणेश जी की पूजा करनी चाहिए यह भागवत

206
00:15:33,040 --> 00:15:37,440
कह रहा है और यह चैप्टर यह जो

207
00:15:37,440 --> 00:15:41,440
स्वयं को भागवत को सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ मानने वाला कहते

208
00:15:41,440 --> 00:15:45,560
हैं उन्होंने पूरा का पूरा चैप्टर ही चबा लिया है हजम

209
00:15:45,560 --> 00:15:49,560
कर लिया है है ना जब श्रीमद

210
00:15:49,560 --> 00:15:53,640
भाग अब ये कहते है जड़ के अंदर पानी डालो पेड़ पत्तो पानी मत डालो तो हम

211
00:15:53,640 --> 00:15:57,920
ये कह रहे हैं जब श्रीमद् भागवत के अंदर महात्मा लिखा हुआ है पहले से

212
00:15:57,920 --> 00:16:01,960
तो तुम होते कौन उसको हटाने वाले जब पुराण के अंदर यदि

213
00:16:01,960 --> 00:16:06,000
उसके अंदर ना लिखी होती तो तो बात थी ही नहीं भाई चलो लिखी नहीं

214
00:16:06,000 --> 00:16:10,480
है उसके अंदर किसी ने ऐड कर दिया कि गणेश जी की पूजा करनी चाहिए लेकिन ऑलरेडी

215
00:16:10,480 --> 00:16:14,480
जब भागवत में वो बात लिखी हुई है तो लिखे हुए को जब तुम काट रहे हो

216
00:16:14,480 --> 00:16:18,720
उसका अर्थ क्या हो गया कि भागवत जो संदेश देना चाहती है उस संदेश

217
00:16:18,720 --> 00:16:22,720
को तुम श्रोताओं तक पहुंचने देना नहीं चाहते इसका सीधा सधा पता चल

218
00:16:22,720 --> 00:16:28,720
रहा है कि यहां पर मिलावट कर रहे हो

219
00:16:33,600 --> 00:16:39,600
आप कुछ बोलेंगे अंकित शर्मा

220
00:16:51,280 --> 00:16:55,440
जी शर्मा जी आपको आवाज आ रही है

221
00:16:55,440 --> 00:16:59,720
जी कटकट के आ रही थोड़ी आपकी आवाज आपको युगल

222
00:16:59,720 --> 00:17:03,760
जी मेरी आवाज कैसे आ रही है क्लियर आ रही क्लियर आ रही

223
00:17:03,760 --> 00:17:07,760
है क्लियर आ रही है क्लियर आ रही है जी जी

224
00:17:07,760 --> 00:17:11,800
इस विषय पर आप कुछ अपना बताएंगे कुछ इस विषय पर यही

225
00:17:11,800 --> 00:17:15,920
कहना चाहूंगा महाराज जी कि स्कन जो है वो कुल मिला करर के टोटल

226
00:17:15,920 --> 00:17:19,920
ही कहा जा सकता है कि सनातन को खत्म करने की उनकी यह साजिश

227
00:17:19,920 --> 00:17:24,320
चल रही है हमारा यह सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात है

228
00:17:24,320 --> 00:17:28,320
मैं वृंदावन में जैसे तीन चार साल से हूं तो वृंदावन में भी काफी

229
00:17:28,320 --> 00:17:32,440
देखने को मिलता है कि कोई हमारा जो भारतीय व्यक्ति कोई भी होता है

230
00:17:32,440 --> 00:17:36,880
उस कोन ज्यादातर इसीलिए जुड़ता है कि उनको ये चाहिए कि वो

231
00:17:36,880 --> 00:17:41,040
अंग्रेज को देखें या उनका कीर्तन सुने या यह सुने हमारे लोग

232
00:17:41,040 --> 00:17:45,120
इस चीज को नहीं देख पा रहे हैं कि वह जो स् कोन है वो अंदर ही अंदर साजिश

233
00:17:45,120 --> 00:17:48,720
क्या चल रहा है महात्म की बात आ रही है तो महात्म

234
00:17:48,720 --> 00:17:52,880
इतना विशेष है संपूर्ण भागवत के लिए कि

235
00:17:52,880 --> 00:17:56,960
अब अगर इनकी इनकी बात में मैं समझाऊं कि अगर

236
00:17:56,960 --> 00:18:01,480
कोई व्यक्ति कोई बच्चा कोई डिग्री कर रहा है कोई कोर्स कर रहा है तो व

237
00:18:01,480 --> 00:18:05,560
अगर किसी कोर्स को किसी स्ट्रीम को अपने से जोड़ रहा है कोई

238
00:18:05,560 --> 00:18:09,600
बीए कर रहा है कोई बीएससी कर रहा है तो व इसी उद्देश्य से करता है क्योंकि उसे पता

239
00:18:09,600 --> 00:18:13,680
है कि बीएससी करने से उसको क्या लाभ होगा बीकम वाले को पता है कि

240
00:18:13,680 --> 00:18:17,920
वह अपना बैंक में काम कर सकता है पर जब तक किसी को उसकी

241
00:18:17,920 --> 00:18:22,120
महिमा ही नहीं मालूम तब तक वह उसमें श्रद्धा जो है उसकी नहीं हो

242
00:18:22,120 --> 00:18:26,400
सकती कोई भी आप काम करो अब भागवत में महात्म

243
00:18:26,400 --> 00:18:30,920
इसीलिए कहा गया है ताकि भगवान के बारे में बताया जा सके

244
00:18:30,920 --> 00:18:35,200
पहले श्लोक महात्म में भी पहले ही अध्याय में पहले श्लोक में भगवान के रूप

245
00:18:35,200 --> 00:18:39,480
रूप का वर्णन है भगवान करते क्या है भगवान का गुण क्या है

246
00:18:39,480 --> 00:18:43,760
भगवान को प्रणाम किया गया भक्ति महारानी का चरित्र है ज्ञान

247
00:18:43,760 --> 00:18:47,760
वैराग्य का चरित्र है दुंदु कारी का चरित्र है कि पतित से

248
00:18:47,760 --> 00:18:52,040
पतित जो भी जिसने जीवन भर पाप किया हो वह भी इस भागवत को सुनकर

249
00:18:52,040 --> 00:18:56,240
के तर सकता है अब इस पूरे महात्म को खत्म

250
00:18:56,240 --> 00:19:00,360
ही कर देना यह तो कुल मिलाकर कि भागवत का ही अपमान

251
00:19:00,360 --> 00:19:03,720
है और जब भागवत का अपमान है तो यह साक्षात

252
00:19:03,720 --> 00:19:07,760
भगवान कृष्ण का अपमान है क्योंकि भगवान की ही वांक में प्रति स्वरूपा या

253
00:19:07,760 --> 00:19:12,080
श्रीमद् भागवत है तो ये पूर्ण रूप से इसको उनकी एक साजिश

254
00:19:12,080 --> 00:19:16,800
चल रही है ये मैं बता दूं कि ये हमारा

255
00:19:16,800 --> 00:19:20,800
एक विषय है समस्या है जो हमने

256
00:19:20,800 --> 00:19:25,040
प्रदर्शित की है यहां पर और यदि आपके पास इस समस्या

257
00:19:25,040 --> 00:19:29,200
का कोई समाधान है स्कोन वालों से कह रहा हूं मैं तो वो

258
00:19:29,200 --> 00:19:33,840
समाधान प्रस्तुत करें सार्वजनिक करें उस समाधान को कि

259
00:19:33,840 --> 00:19:37,920
व्यास जी ने भागवत लिखी उसम महात्मा नाम

260
00:19:37,920 --> 00:19:42,000
का चैप्टर सबसे पहले लिखा उसके बाद श्रीधर स्वामी जी जिनकी टी

261
00:19:42,000 --> 00:19:46,320
का प्रामाणिक मानते हो उन्होंने उसको स्वीकार किया और

262
00:19:46,320 --> 00:19:50,320
आप अपने मन मर्जी से कैसे भागवत

263
00:19:50,320 --> 00:19:54,560
को भागवत का पूरा का पूरा एक चैप्टर कच्चा चबा सकते हैं

264
00:19:54,560 --> 00:19:58,680
और इसके बाद भी यह कहते हैं कि हम श्रीमद

265
00:19:58,680 --> 00:20:02,680
भागवत बहुत सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है यही कहते हैं ना य

266
00:20:02,680 --> 00:20:06,800
लोग आप ये बताइए जो सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ होता है क्या उसके

267
00:20:06,800 --> 00:20:11,400
कुछ अंश को हम मानने वाले और कुछ अंश को ना मानने वाले होते हैं क्या

268
00:20:11,400 --> 00:20:15,840
तो फिर रामपाल में हम तो बारबार यही कहते हैं कि रामपाल

269
00:20:15,840 --> 00:20:19,440
दास के नाम से जो इस समय सेक् चल रहा है

270
00:20:19,440 --> 00:20:23,880
उसका ही एक बहुत अच्छा सा भव्य सा स्वरूप है

271
00:20:23,880 --> 00:20:28,240
जो स्कोन के रूप में चल रहा है क्योंकि इनका भी भगवान

272
00:20:28,240 --> 00:20:32,880
ऐसा जो स शरीर कहीं पर बैठा है और वो सीधे नीचे आता है

273
00:20:32,880 --> 00:20:37,000
रामपाल वालो का और ऐसे ही इनका भी है

274
00:20:37,000 --> 00:20:41,240
इनकी भी मुक्ति वही है कि अंत में आपको एक बहुत भव्य

275
00:20:41,240 --> 00:20:45,360
नगरी मिलेगी है ना वो थोड़ा सा शब्दों का ऐसा भेद है

276
00:20:45,360 --> 00:20:49,800
कि यह आपको थोड़ा सुनने में रस लगे पवित्र सा लगेगा

277
00:20:49,800 --> 00:20:53,880
और जो उनका लगेगा उसम आपको हीनता अगर आप थोड़ा

278
00:20:53,880 --> 00:20:59,880
सा पहले से आपका कुछ बैकग्राउंड होगा तो आपको व हीन भावना जैसी आएगी

279
00:21:01,000 --> 00:21:05,640
मगर कुल मिलाकर के वही इर्द गि उसी कहानी के इर्दगिर्द

280
00:21:05,640 --> 00:21:09,800
घूमेगा जिस प्रकार से वहां कह दिया जाएगा

281
00:21:09,800 --> 00:21:13,800
कि पूरे पूरी चीजों को हम नहीं जान सकते इस्लाम में कह दिया

282
00:21:13,800 --> 00:21:18,760
जाएगा आज मैं वो देख रहा था

283
00:21:18,760 --> 00:21:22,920
है ना जो एक्स मुस्लिम है आपके

284
00:21:22,920 --> 00:21:27,000
पीछे शोर हो रहा है शर्मा जी अंकित शर्मा जी एक मिनट

285
00:21:27,000 --> 00:21:32,400
मिनट

286
00:21:32,400 --> 00:21:36,720
जी तो मैंने एक्स मुस्लिम साहिल का आज एक वीडियो

287
00:21:36,720 --> 00:21:41,600
देखा हालाकि ये चीज मैं भी जानता हूं मगर

288
00:21:41,600 --> 00:21:45,680
एकदम से वो रिफ्लेक्ट कर गया ना जो हम जानते हैं तब भी सामने से देख ले तो याद आ जाती

289
00:21:45,680 --> 00:21:49,680
है वो चीज तो उससे कोई इंटरव्यू ले रहा है तो वो पूछ रहा

290
00:21:49,680 --> 00:21:53,840
है कि भाई कुरान का जो अल्लाह है वो

291
00:21:53,840 --> 00:21:57,840
साकार है कि निराकार अब वो बताते हैं कि

292
00:21:57,840 --> 00:22:01,960
है तो वो निराकार भी मगर एक

293
00:22:01,960 --> 00:22:06,720
तरफ बोलो कहते वो स्पेस से बाहर है वो टाइम से बाहर है ठीक है

294
00:22:06,720 --> 00:22:10,960
फिर दूसरी तरफ कहते हैं कि जो कुरान का ईश्वर है उसके हाथ

295
00:22:10,960 --> 00:22:15,200
है व अपने हाथों से आपको शराब पिलागा जब आप मुक्त

296
00:22:15,200 --> 00:22:16,200
हो जाओगे उनके अनुसार

297
00:22:16,200 --> 00:22:20,240
जो मुक्ति है वहां पर व अपने हाथों से जब हाथों से पिलाए

298
00:22:20,240 --> 00:22:25,000
तो उसके हाथ हो गए या फिर उसकी उसके हर

299
00:22:25,000 --> 00:22:29,000
जगह क्या कहते उसके हर जगह मुख है

300
00:22:29,000 --> 00:22:33,080
बहुत सारे मुख वाला है तो उसका मुख हो गया तो

301
00:22:33,080 --> 00:22:37,560
यहां पर उनका जो सेक्ट है वो यह कहता है कि भाई देखो

302
00:22:37,560 --> 00:22:40,640
वह

303
00:22:40,640 --> 00:22:43,760
स्पेसलेंस

304
00:22:43,760 --> 00:22:48,120
हाथ है उसके वह चेहरा है तो लिखा

305
00:22:48,120 --> 00:22:52,160
है तो मानना पड़ेगा अब उसमें लॉजिक में आपस

306
00:22:52,160 --> 00:22:56,320
में अगर कांट्रडिक्शन हो रहा है लॉजिकली वो

307
00:22:56,320 --> 00:23:00,960
आपस में मैच नहीं हो रहा है आपको संतुष्टि नहीं मिल पा रही है तो सवाल मत

308
00:23:00,960 --> 00:23:05,280
करो अब जो हम लोगों का जो जानकारी

309
00:23:05,280 --> 00:23:09,360
में ईश्वर का स्वरूप है एक वाणी का अ विषय वाणी के द्वारा

310
00:23:09,360 --> 00:23:13,560
प्रतिपाद्य नहीं है फिर वही जो अ विषय है वो एक ऐसा स्वरूप लेता

311
00:23:13,560 --> 00:23:17,720
है जो वाणी के द्वारा प्रतिपाद्य हो जाता है उस

312
00:23:17,720 --> 00:23:21,720
को उसकी भक्ति करके उसका अनुसरण अनुकरण करके

313
00:23:21,720 --> 00:23:25,880
जो व्यवहारिक स्वरूप है भगवान का उसका वो स्वरूप उसके उस

314
00:23:25,880 --> 00:23:30,200
स्वरूप तक की प्राप्ति होती है जो वाणी के द्वारा

315
00:23:30,200 --> 00:23:31,720
अनिर्वचनीय है

316
00:23:31,720 --> 00:23:35,840
मगर यहां पर क्या हो रहा है कि आप ही तो भगवान को पहले

317
00:23:35,840 --> 00:23:40,040
कह रहे हो कि भगवान जो है वो यहां से शुरू हो रहे हैं वहां

318
00:23:40,040 --> 00:23:44,160
पर जा रहे हैं य ये सब आपी कर रहे हो और फिर जब उनकी किसी

319
00:23:44,160 --> 00:23:48,200
चीज में बादिता उत्पन्न हो रही है कि अगर व यहां से शुरू हो रहे हैं वहां खत्म हो

320
00:23:48,200 --> 00:23:52,320
रहे हैं तो क्या व अपने रूप को बदल सकते हैं अगर रूप को बदल सकते हैं तो उनका शाश्वत

321
00:23:52,320 --> 00:23:56,360
कैसे रूप तो इन सब चीजों पर जब उनके ही

322
00:23:56,360 --> 00:24:00,480
सिद्धांत कि वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं उनके ही सिद्धांत खंडित होने लगते हैं

323
00:24:00,480 --> 00:24:05,160
तो वो कह देते भाई देखो ये विषय अचिंत है

324
00:24:05,160 --> 00:24:09,440
अचिंत है विषय मगर आप उसको पहले चिंतनीय बना रहे हो और

325
00:24:09,440 --> 00:24:14,120
उस चिंतनीय बनाने के कारण भगवान की सर्वशक्ति मत्ता

326
00:24:14,120 --> 00:24:18,120
और अ बाध्यता को खंडित कर रहे हो फिर

327
00:24:18,120 --> 00:24:22,800
जब आपसे प्रश्न किया जा रहा है तब आप अचिंत को ला रहे हो अचिंत को आपको पहले लाना था

328
00:24:22,800 --> 00:24:26,960
यहां भगवान का एक जो स्वरूप है वो अचिंत है और

329
00:24:26,960 --> 00:24:31,480
फिर उसके बाद एक ऐसा है चिंतनी तब तो समझ में आता है तो

330
00:24:31,480 --> 00:24:36,040
ये सारे फैक्टर ये सारे फैक्टर्स इनम मिलते हैं

331
00:24:36,040 --> 00:24:40,200
कि रामपाल दास भी यही कर रहे हैं कि भगवत

332
00:24:40,200 --> 00:24:44,480
गीता में 5 पर मानने लायक है जो 5 पर मानने लायक

333
00:24:44,480 --> 00:24:46,720
नहीं है जो काल ने बोला है और बाकी

334
00:24:46,720 --> 00:24:50,720
का मानने लायक है और यह भी वही कर रहे हैं भागवत में

335
00:24:50,720 --> 00:24:54,880
एक चैप्टर मानने लायक नहीं है उसको हटा दिया पूरा का पूरा अच्छा

336
00:24:54,880 --> 00:24:58,880
मैंने पूछा भी अभी कोई स्न से पिछले उसमें

337
00:24:58,880 --> 00:25:02,920
जुड़ा था तो मुझे लगा शायद कुछ आंसर होगा तो उसने इसका उत्तर देते

338
00:25:02,920 --> 00:25:06,960
हुए कहा हमने कहा कि अ

339
00:25:06,960 --> 00:25:11,080
भाई इसमें जो महात्म है वो कहां है तोव बोला कि महात्म है ना

340
00:25:11,080 --> 00:25:15,160
13वें स्कंद में है ना बवे स्कंद में है ना तो जब

341
00:25:15,160 --> 00:25:19,880
ऐसा हुआ तो बवे

342
00:25:19,880 --> 00:25:24,720
स्कं में इसमें भी महत्व है मगर जब

343
00:25:24,720 --> 00:25:28,720
अ क्या कहते भागवत के शुरू होने से पहले ही

344
00:25:28,720 --> 00:25:33,240
पहले स्कंद से पहले ही व्यास जी उसका म बता रहे हैं श्रीधर

345
00:25:33,240 --> 00:25:37,240
स्वामी उसका अनुवाद कर रहे हैं भाष्य लिख रहे हैं तो आपको कैसे अधिकार

346
00:25:37,240 --> 00:25:41,480
प्राप्त हुआ कि आप जो अपने मन मुताबिक कि पूरे पूरे चैप्टर

347
00:25:41,480 --> 00:25:45,520
को गायब कर दो और क्या यही परंपरा सिखाती है कि पीछे से जो

348
00:25:45,520 --> 00:25:50,040
गुरुओ ने दिया है उसको हम अपने अनुसार जो है बदल

349
00:25:50,040 --> 00:25:54,280
दे और इस तरीके की और भी कुछ चीज है जो भगवत गीता में

350
00:25:54,280 --> 00:25:58,320
मिलेंगी जिस पर बात करेंगे जी आप कुछ कह रहे थे यल जी

351
00:25:58,320 --> 00:26:01,800
मैं यह कह रहा था एक तरफ तो यह बात करते हैं शास्त्रों की वही

352
00:26:01,800 --> 00:26:06,000
दूसरी ओर यह कहते हैं कि भाई हरि नाम संकीर्तन अत्यंत आवश्यक है

353
00:26:06,000 --> 00:26:10,080
जब हरि नाम संकीर्तन तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है तो हम यह कहते

354
00:26:10,080 --> 00:26:14,440
हैं कि किस मुख से तुम शास्त्रों की बात कर रहे हो फिर अधिकार नहीं बनता है तुम्हारा

355
00:26:14,440 --> 00:26:18,520
कि तुम शास्त्रों की बात करो क्यों क्योंकि अपने मुख से जब तुम कह रहे

356
00:26:18,520 --> 00:26:22,560
हो कि हरि नाम ही सर्वोच्च है हरि नाम कीर्तन ही कलयुग का तार

357
00:26:22,560 --> 00:26:26,720
है तो जब हरे ना हरेर नाम हरेर नाम हरेर नाम केवलम ही तुम्हारे लिए

358
00:26:26,720 --> 00:26:30,840
सब कुछ है तब तुम मुह से शास्त्रों की बात कर रहे हो एक व्यक्ति

359
00:26:30,840 --> 00:26:35,160
से मेरी बात हुई इस कौन का मेरे को ये

360
00:26:35,160 --> 00:26:39,480
जब मेरी इनसे बात हुई मेरे को जानकर खेद हुआ कि इनको अपने ही सिद्धांतों

361
00:26:39,480 --> 00:26:43,480
के बारे में ज्ञान नहीं है और य दूसरों के ऊपर आक्षेप कैसे कर देते हैं क्योंकि

362
00:26:43,480 --> 00:26:47,600
इनको मूल सिद्धांत का भी ज्ञान नहीं है मैंने इनसे पूछा

363
00:26:47,600 --> 00:26:51,680
आप ये बताइए कि आपको यज्ञ पवित आपने धारण किया हुआ है आपको

364
00:26:51,680 --> 00:26:55,720
मालूम है किस आयु पर धारण किया जाता है बोले नहीं किस आयु

365
00:26:55,720 --> 00:26:59,960
पर धारण किया जाता है किस शास्त्र के अंदर प्रमाण है अब जिस व्यक्ति को यह नहीं

366
00:26:59,960 --> 00:27:04,200
पता कि किस पुराण के अंदर यज्ञ प के बारे में बताया गया है किस आयु

367
00:27:04,200 --> 00:27:08,440
पर उसको धारण करवाया जाता है उस व्यक्ति से क्या बात की जाए

368
00:27:08,440 --> 00:27:13,040
वही एक दूसरा व्यक्ति से मैंने बात की तो उसने क्या उत्तर दिया

369
00:27:13,040 --> 00:27:16,920
मैंने उससे पूछा क्या आप जो पुराण है 18 के 18 पुराण उनको

370
00:27:16,920 --> 00:27:21,000
प्रमाण मानते हो उसने बोला हा मानता हूं मैंने कहा व्याज कृत

371
00:27:21,000 --> 00:27:25,160
18 पुराण है आप मानते हो किय व्याज कृत है बोले हां मानता हूं

372
00:27:25,160 --> 00:27:29,400
मैंने कहा ठीक है तो अब ये बताओ कि श्रीमद भागवत को सर्वोच्च

373
00:27:29,400 --> 00:27:33,720
मानते हो तो क्या जो विवाह आदि के मंत्र है वो तुमको श्रीमद् भागवत

374
00:27:33,720 --> 00:27:37,800
से प्राप्त होंगे उसके लिए तुमको वेदों का सहारा

375
00:27:37,800 --> 00:27:41,880
लेना पड़ेगा या नहीं लेना पड़ेगा या गीता के श्लोकों के माध्यम से ही

376
00:27:41,880 --> 00:27:46,160
तुम किसी का विवाह करवा दोगे नहीं करवा सकते ना गीता के लोको से या भागवत के लोको

377
00:27:46,160 --> 00:27:50,160
से भाई भागवत के अंदर कुछ मिलता है हमको देवी भागवत

378
00:27:50,160 --> 00:27:54,600
के अंदर कुछ मिलता है अब ऐसा नहीं है कि श्रीमद् भागवत के अंदर जो बातें है

379
00:27:54,600 --> 00:27:58,840
वो देवी भागवत के अंदर भी हो या विष्णु पुराण के अंदर भी हो

380
00:27:58,840 --> 00:28:02,840
अब जैसे आर्य समाज जी आक्षेप करते हैं कि विष्णु पुराण के अंदर जो है राधा जी का नाम

381
00:28:02,840 --> 00:28:06,920
नहीं है महाभारत के अंदर जो है राधा जी का नाम नहीं है अब हम ये कह रहे

382
00:28:06,920 --> 00:28:11,000
हैं कि हम 18 पुराणों को मानते हैं किंतु जिस पुराण के अंदर जैसे

383
00:28:11,000 --> 00:28:15,040
कि विष्णु पुराण के अंदर यदि राधा जी का नाम नहीं है तो तुम केवल विष्णु पुराण का नाम क्यों

384
00:28:15,040 --> 00:28:19,240
ले रहे हो तुम क्यों नहीं बता रहे हो कि शिव पुराण के अंदर भी राधा जी का नाम है देवी

385
00:28:19,240 --> 00:28:23,480
भागवत के अंदर भी राधा जी का नाम है भाई 18 पुराणों को

386
00:28:23,480 --> 00:28:27,520
हम लोग मानते हैं जब तुम कह रहे हो कि विष्णु पुराण के अंदर राधा जी का नाम

387
00:28:27,520 --> 00:28:31,680
नहीं है तो यह बात तुम कह रहे हो जो पुराणों को नहीं मानते तो तुम

388
00:28:31,680 --> 00:28:32,180
विष्णु

389
00:28:32,000 --> 00:28:36,240
पुराण को क्यों मान रहे हो इसका मतलब क्या हुआ जहां से तुम्हारा मतलब

390
00:28:36,240 --> 00:28:40,680
सिद्ध हो रहा है तुम केवल उन्ही बातों को लेकर के प्रस्तुत हो रहे हो

391
00:28:40,680 --> 00:28:45,000
देवी भागवत का नाम नहीं लोगे है ना और जो जितनी

392
00:28:45,000 --> 00:28:49,160
अन्य पुराण उनका नाम नहीं लोगे केवल एक विष्णु पुराण को लेकर के राधा जी के ऊपर आक्षेप

393
00:28:49,160 --> 00:28:53,320
कर दोगे तो ये कहा की बात हुई बात करनी है तो पूरी 18 पुराणों की करो

394
00:28:53,320 --> 00:28:58,240
क्या क्या ज्ञान विज्ञान है फिर उसको हम बताएंगे 18 पुराणों के अंदर क्या है क्या नहीं है

395
00:28:58,240 --> 00:29:02,240
तो जो एकन की व्यक्ति से जब मेरी बात चल रही थी ये वाली

396
00:29:02,240 --> 00:29:06,320
इनको क्या करना है कि तर्क से जब प्रमाण नहीं है इनके पास तो तर्क से

397
00:29:06,320 --> 00:29:10,880
सिद्ध करने का प्रयास करते हैं तो तर्क त प्रमाण

398
00:29:10,880 --> 00:29:15,320
व्यवस्थित परजने ना सोय अनपूर्ण उपनिषद

399
00:29:15,320 --> 00:29:19,480
में कहा गया है कि ब्रह्म वेदा आदि जो ज्ञान है उसको

400
00:29:19,480 --> 00:29:23,480
सिद्ध करने के लिए तर्क की नहीं उसके लिए शास्त्र प्रमाण सिद्ध

401
00:29:23,480 --> 00:29:27,520
है तो वहा पर हम शास्त्रों की बात करेंगे भाई तर्क की बात

402
00:29:27,520 --> 00:29:32,120
नहीं करेंगे तर्क से तो कुछ भी सिद्ध भी किया जा सकता है सिद्ध भी किया जा सकता

403
00:29:32,120 --> 00:29:36,400
आज ऐसे कई सारे लोग है जो भगवान को ना मानने के लिए तर्क देते

404
00:29:36,400 --> 00:29:40,520
हैं भगवान लेकिन भगवान है या नहीं है ये हमें

405
00:29:40,520 --> 00:29:44,560
कहां से पता चलेगा भगवान के क्या लक्षण है क्या नहीं है अवतार लेते

406
00:29:44,560 --> 00:29:47,160
हैं नहीं लेते हैं कहां से पता चलेगा य शास्त्रों

407
00:29:47,160 --> 00:29:51,320
से पता चलेगा आप ऐसे ही एक कन्वर्सेशन लेकर के बैठ जाओ

408
00:29:51,320 --> 00:29:55,320
डिबेट लेकर के बैठ जाओ क्या भगवान अवतार लेते हैं तो आप कभी सिद्ध नहीं

409
00:29:55,320 --> 00:29:59,560
कर पाओगे कि भगवान अवतार लेते अथवा नहीं लेते जब शास्त्र का आलन व्यक्ति

410
00:29:59,560 --> 00:30:03,560
ने नहीं लिया तर्क के आधार पर वो कभी इस बात को सुद्ध नहीं

411
00:30:03,560 --> 00:30:08,120
कर सकता कि भगवान एस्ट करते हैं अथवा नहीं करते हैं तो

412
00:30:08,120 --> 00:30:12,320
यहां पर बात तर्क की नहीं है यहां पर बात है शास्त्रीय प्रमाण

413
00:30:12,320 --> 00:30:16,400
की जब हम शास्त्रीय प्रमाण आपको दे रहे हैं तो भाई शास्त्रीय प्रमाणों से

414
00:30:16,400 --> 00:30:20,720
बात करो शास्त्रीय प्रमाणों से बात क्यों नहीं करते क्योंकि उनके

415
00:30:20,720 --> 00:30:24,800
पास शास्त्रीय प्रमाणों का अभाव अभाव

416
00:30:24,800 --> 00:30:28,840
चल अभाव होने के कारण शास्त्रीय प्रमाणों का बात फ तर्क

417
00:30:28,840 --> 00:30:33,520
की फिर बात करते हैं वो कुतर्क की तर्क भी नहीं पाता

418
00:30:33,520 --> 00:30:37,800
तो यहां पर मैं एक बात याद दिलाना चाहूंगा

419
00:30:37,800 --> 00:30:42,000
कि भगवान को मानने के संबंध में

420
00:30:42,000 --> 00:30:46,000
जितने कुतर्क भगवान को ना मानने

421
00:30:46,000 --> 00:30:50,000
वाले कर सकते हैं उससे ज्यादा

422
00:30:50,000 --> 00:30:54,200
तर्क भगवान को मानने के संबंध में पूर्व पक्ष

423
00:30:54,200 --> 00:30:58,480
के आधार पर या न केन प्रकार लीलाओं का वर्णन करते हुए हमारे शास्त्रों

424
00:30:58,480 --> 00:31:02,200
में दिए हुए हैं आप कैसे भी आओगे

425
00:31:02,200 --> 00:31:06,480
कहीं से भी आओगे तो मुकी खाओगे तो इसलिए

426
00:31:06,480 --> 00:31:10,560
ही व्यास जी ने एक जगह कहा व्यक्तिगत तर्क मान्य

427
00:31:10,560 --> 00:31:14,560
शास्त्र के विरोध में दो 11 ब्रह्म सूत्र शास्त्रों

428
00:31:14,560 --> 00:31:18,720
के विरोध में अगर आप व्यक्तिगत तर्क ला रहे हो तो वह

429
00:31:18,720 --> 00:31:22,800
अमान्य है वो तर्क जो है रिलेट करना चाहिए मान

430
00:31:22,800 --> 00:31:27,320
लीजिए हम कह रहे हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो ईश्वर को सर्वशक्तिमान

431
00:31:27,320 --> 00:31:31,320
कहा गया हो शास्त्रों में और कहा गया है तब

432
00:31:31,320 --> 00:31:36,000
हम बोलते हैं ना किसी से कि ईश्वर तो पूर्ण है वो अपूर्ण कैसे हो रहा है दूध दही

433
00:31:36,000 --> 00:31:40,120
और दूध दही पर इतने लॉजिकल जवाब आ रहे हैं कुछ लोग हमारे चैनल को

434
00:31:40,120 --> 00:31:44,800
टैक करते हुए बना रहे हैं इतने इलॉजिकल जवाब

435
00:31:44,800 --> 00:31:48,840
कि एकने जवाब दोनों ने एक ही जवाब दिया है कि

436
00:31:48,840 --> 00:31:53,320
राजा ने यदि किसी को मंत्री बनाया है तो

437
00:31:53,320 --> 00:31:57,520
यदि वो वापस मंत्री से राजा नहीं बन सकता है तो इसलिए वो राजा

438
00:31:57,520 --> 00:32:01,880
राजा नहीं है ये हमको कुतर भरा जवाब दिया गया जब

439
00:32:01,880 --> 00:32:06,280
मैं याद दिला दूं दूध दही की थ्योरी क्या है दूध दही वो

440
00:32:06,280 --> 00:32:10,800
दूध दही वो मटेरियल है जो सबसे पहले जब हम इकन मंदिर में गए थे

441
00:32:10,800 --> 00:32:15,400
और हमने जब पूछा था वहां के अध्यक्ष से कि भाई

442
00:32:15,400 --> 00:32:17,280
बताइए जिस प्रकार आप लोग

443
00:32:17,280 --> 00:32:21,480
कहते हो जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव

444
00:32:21,480 --> 00:32:25,520
बन सकते हैं पर जो शिव है वो कृष्ण नहीं बन

445
00:32:25,520 --> 00:32:29,680
सकते तो इस पर वहां वही आ गया अचिंत है सवाल

446
00:32:29,680 --> 00:32:33,800
मत पूछो 51 कुरान सवाल मत

447
00:32:33,800 --> 00:32:37,880
पूछो और रामपाल के द्वारा भी यही बात

448
00:32:37,880 --> 00:32:42,600
आ जाती है जब फसने लगते हैं कि सवाल मत पूछो

449
00:32:42,600 --> 00:32:47,440
तो अब बात यह आती है कि इन्होंने उसके

450
00:32:47,440 --> 00:32:51,600
उत्तर में यह कुतर्क किया यदि राजा किसी को मंत्री

451
00:32:51,600 --> 00:32:55,680
बना देगा कलेक्टर बना देगा और वह कलेक्टर राजा नहीं बन सकता

452
00:32:55,680 --> 00:33:00,080
है तो इसका मतलब राजा राजा नहीं है

453
00:33:00,080 --> 00:33:04,360
अरे मेरे भाई ध्यान से सुनो मेरी बात जब

454
00:33:04,360 --> 00:33:08,400
कोई प्रधानमंत्री या राजा किसी को कलेक्टर बनाता है

455
00:33:08,400 --> 00:33:12,640
या किसी को मुख्यमंत्री बनाता है तो वह किसी और

456
00:33:12,640 --> 00:33:16,840
को बनाता है खद थोड़ी ना वहां पर जाकर के मंत्रालय

457
00:33:16,840 --> 00:33:20,960
में मुख्यमंत्री बन जाता है यहां तो आप ही कह रहे हो ना कि कृष्ण

458
00:33:20,960 --> 00:33:25,160
ही शिव बनते हैं अपनी ही बात को भूल जाते

459
00:33:25,160 --> 00:33:28,600
हो क्या

460
00:33:28,600 --> 00:33:33,080
आपका कीर्तन दूसरा होना चाहिए हरे राम हरे हरे कृष्ण हरे राम का कीर्तन

461
00:33:33,080 --> 00:33:37,080
आपको सूट नहीं करता है केवल अंधे अंधे

462
00:33:37,080 --> 00:33:41,400
अंधे अंधे अंधे अंधे यह अंधे वाला कीर्तन होना चाहिए

463
00:33:41,400 --> 00:33:45,760
अरे भाई खुद ही तो कह रहे हो कि कृष्ण जी शिव बनते हैं शंकर

464
00:33:45,760 --> 00:33:49,840
बनते हैं और वहां आप क्या उदाहरण में क्या दे रहे हो

465
00:33:49,840 --> 00:33:54,240
कि प्रधानमंत्री ने किसी को कलेक्टर बना किसी को वहां पर किसी

466
00:33:54,240 --> 00:33:58,520
है प्रधानमंत्री से भिन्न कोई एंटिटी है उसको बना रहे हो कलेक्टर

467
00:33:58,520 --> 00:34:03,560
उसको बना रहे हो मुख्यमंत्री हां वो नहीं बन सकता

468
00:34:03,560 --> 00:34:08,200
क्योंकि क्योंकि वो ईश्वर उसकी ईश्वर भंग होगी उसमें

469
00:34:08,200 --> 00:34:12,200
तो अब यहां पर बात आती जब कृष्ण भगवान स्वयं

470
00:34:12,200 --> 00:34:16,720
शिव के रूप में विराजमान है तो क्या वह उनकी शक्तियों में छय हो

471
00:34:16,720 --> 00:34:21,480
गया है ना अभी मैंने एक इंटरव्यू और देखा इस बारे

472
00:34:21,480 --> 00:34:25,600
में कि अमोग लीला जी बैठे थे न्यूज

473
00:34:25,600 --> 00:34:29,840
चैनल पर और वहां पर ू चैनल वालों ने वही प्रश्न उठा दिया कि

474
00:34:29,840 --> 00:34:34,040
कन जो है शिव और विष्णु में भेद करता है ऊंच नीच का हालांकि वो खींचा

475
00:34:34,040 --> 00:34:38,680
नहीं गया वो क्यों नहीं खींचा गया थोड़ा सा उनके प्रति उदारता बरती गई वो बात अलग है

476
00:34:38,680 --> 00:34:42,680
मगर उदारता बरती गई वहां पर मगर उन्होंने

477
00:34:42,680 --> 00:34:43,920
जवाब दिया

478
00:34:43,920 --> 00:34:48,280
हा उन्होंने उत्तर ये दिया कि तत्व से

479
00:34:48,280 --> 00:34:53,160
जो शिव और विष्णु है वो एक है और लीला का भेद है

480
00:34:53,160 --> 00:34:57,240
तो भाई लीला का भेद है तो वही तो हम भी कह रहे हैं लीला का भेद है फिर

481
00:34:57,240 --> 00:35:01,400
पीछे क्यों पढ़े जब लीला भेद तत्व से वो एक है तो कर लेने दो शिवजी

482
00:35:01,400 --> 00:35:05,680
को परम ब्रह्म यहां प एक छोटी सी बात कहूंगा

483
00:35:05,680 --> 00:35:09,880
जैसे ने जैसे ये लोग कहते है ना कि लीला भेद है जैसे भगवान

484
00:35:09,880 --> 00:35:14,120
शिव जो मोहिनी अवतार के पीछे भागते हैं तो इनकी गीता में उनको काम बताया

485
00:35:14,120 --> 00:35:18,480
गया है श्रीमद् भागवत का जब ये श्रीमद् भागवत

486
00:35:18,480 --> 00:35:22,640
का अध्ययन करते हैं तो उसी के अंदर माता पार्वती क्या कह रही है अयम मु

487
00:35:22,640 --> 00:35:27,120
लोके श दंड धरा प्रभु अस्मा दुदा नाम दुष्टा नाम निर्लज्जा

488
00:35:27,120 --> 00:35:31,440
नाम प्रत यानी कि च चित्र केतु है वो जब अपमान

489
00:35:31,440 --> 00:35:35,480
करता है भगवान शिव के साथ माता पार्वती बैठी है और वो समझ लेता

490
00:35:35,480 --> 00:35:39,560
य तो कामी है तो वहा पर माता पार्वती कहती है कि ये दुष्ट

491
00:35:39,560 --> 00:35:43,920
और निर्लज ही मतलब य दुष्ट य निर्लज वैकुंठ में रहने योग्य

492
00:35:43,920 --> 00:35:48,160
नहीं है वहा पर तक्षण माता पार्वती उसको श्राप दे देती है

493
00:35:48,160 --> 00:35:52,520
की बड़े बड़े जो नावेद धर्मम किल पदम योनी ना ब्रह्म पुत्र

494
00:35:52,520 --> 00:35:56,680
भु नारद ना कुमारा कपिलो मनुष यानी

495
00:35:56,680 --> 00:35:59,120
कि जहा पर उनके नारद

496
00:35:59,120 --> 00:36:03,320
जी पुत्र कपिल जी जो बड़े बड़े सिद्ध है उन लोगों ने कभी आपत्ति

497
00:36:03,320 --> 00:36:07,360
नहीं जताई भाई तुम कौन हो आपत्ति जताने वाले तुम उनसे बड़े सि

498
00:36:07,360 --> 00:36:12,640
हो गए क्या भागवत का आठवा स्कंध

499
00:36:12,640 --> 00:36:16,640
सातवा अध्याय और 33 से 34 श्लोक है जिसके बारे

500
00:36:16,640 --> 00:36:21,080
में बात हो रही है और यह एक काट भी है

501
00:36:21,080 --> 00:36:25,120
कि कैसे यह पता चलता है कि जो शील प्रभुपाद जी

502
00:36:25,120 --> 00:36:29,200
है उन्होंने जो लिखा है हम एटस प्राप्त है कि

503
00:36:29,200 --> 00:36:33,320
नहीं हम हम यह स्पष्ट नहीं कह सकते क्यों नहीं कह सकते क्योंकि

504
00:36:33,320 --> 00:36:37,800
यहां पर शील प्रभुपाद जी ने भी इसको क्यों की त्यों माना

505
00:36:37,800 --> 00:36:41,880
है कि जो शिव जीी है

506
00:36:41,880 --> 00:36:45,960
उनको पार्वती के साथ देखकर कामी समझने वाले

507
00:36:45,960 --> 00:36:50,120
मूर्ख है और दो 62 में उनको पार्वती के साथ देख कर के लिखने वाले

508
00:36:50,120 --> 00:36:54,200
ने लिखा है कि वह कामी है काम इंद्रियों के अधीन है तो

509
00:36:54,200 --> 00:36:58,440
इसका मतलब या तो वो श्री प्रभुपाद जी ने नहीं लिखा है फय श प्रवाद

510
00:36:58,440 --> 00:37:04,440
जी ने नहीं लिखा है है ना तो ये प्रश्न खड़ा हो जाता है मैं

511
00:37:04,760 --> 00:37:10,160
आठवा सातवा अध्याय आपको दिखा देता

512
00:37:10,160 --> 00:37:14,160
हूं आठवा स्कंद आ

513
00:37:14,160 --> 00:37:19,320
सा 33 सातवा अध्याय और

514
00:37:19,320 --> 00:37:25,320
यह आ

515
00:37:29,280 --> 00:37:33,280
हां देखिए यह इनका अनुवाद पहले पढ़

516
00:37:33,280 --> 00:37:38,160
देता हूं फिर दिखा दूंगा सारे विश्व को उपदेश देने वाले महान आत्म

517
00:37:38,160 --> 00:37:42,240
तुष्ट व्यक्ति अपने हृदयं में आपके चरण कमलों का निरंतर

518
00:37:42,240 --> 00:37:46,560
चिंतन करते हैं किंतु जब आपकी तपस्या को ना जानने वाले व्यक्ति

519
00:37:46,560 --> 00:37:50,680
आपको उमा के साथ वि चरते देखते हैं तो वे आपको ब्रम

520
00:37:50,680 --> 00:37:54,800
वश कामी समझते हैं ब्रम वश ठीक है

521
00:37:54,800 --> 00:37:59,160
अथवा जब मैं आपको बस य ब्रम वश समझते हैं

522
00:37:59,160 --> 00:38:02,200
तो यह

523
00:38:02,200 --> 00:38:06,640
देखिए अब यहां पर यह

524
00:38:06,640 --> 00:38:10,880
श्रीमद् भागवत का यह है श्रीमद् भागवत

525
00:38:10,880 --> 00:38:15,720
कन की और इसका आठवा स्कंध है

526
00:38:15,720 --> 00:38:19,920
आठवा स्कं का 33 वा श्लोक है इसका

527
00:38:19,920 --> 00:38:24,720
अर्थ करते हुए अर्थ यहां पर है यहां

528
00:38:24,720 --> 00:38:28,360
पर यह अर्थ है

529
00:38:28,360 --> 00:38:32,400
ठीक है इसी में उन्होंने कहा है कि जो लोग उनको ब्रम

530
00:38:32,400 --> 00:38:36,800
कामी समझते हैं ये ये

531
00:38:36,800 --> 00:38:40,160
देखिए

532
00:38:40,160 --> 00:38:44,520
इनके का समझते और

533
00:38:44,520 --> 00:38:48,800
इसके ठीक विपरीत जो इनकी भगवत गीता वो भी दिखा देता हूं जिने

534
00:38:48,800 --> 00:38:54,800
ना देखी वसे देखी हो का

535
00:38:56,510 --> 00:39:02,510
[संगीत]

536
00:39:04,840 --> 00:39:09,120
पुनी पुरानी वाली गीता नहीं है आपके पास य है हमारे

537
00:39:09,120 --> 00:39:12,920
पास यह भगवत

538
00:39:12,920 --> 00:39:16,920
गीता और दूसरे अध्याय का 6वा

539
00:39:16,920 --> 00:39:22,200
श्लोक हम खोल लेते

540
00:39:22,200 --> 00:39:26,960
हैं इंद्रिय विषयों का चिंतन अब इसमें देखिए

541
00:39:26,960 --> 00:39:32,160
य 62 में उन्होंने क्या लिखा

542
00:39:32,160 --> 00:39:36,280
है इस भौतिक जगत में हर एक प्राणी इंद्रिय विषयों

543
00:39:36,280 --> 00:39:40,280
के अधीन है यहां तक

544
00:39:40,280 --> 00:39:44,480
कि ब्रह्मा तथा शिवजी भी शिव ध्यान मगन थे किंतु

545
00:39:44,480 --> 00:39:48,600
जब पार्वती ने विषय भोग के लिए उन्हें उत्तेजित किया तो व सहमत हो गए तो

546
00:39:48,600 --> 00:39:52,760
क्या हुआ सती के साथ उमा के साथ शिव जी को देखकर

547
00:39:52,760 --> 00:39:56,880
यहां जो लिखने वाला है वो उन्हें काम के अधीन समझ रहा है

548
00:39:56,880 --> 00:40:01,320
यख ने वाला और प्रभुपाद जी क्या कह रहे हैं कि जो

549
00:40:01,320 --> 00:40:05,400
ऐसा समझता है वो मूर्ख है वो ब

550
00:40:05,400 --> 00:40:09,400
वो भ्रम में है तो या तो वो उन्होंने नहीं लिखा है इसीलिए हम लोग कहते

551
00:40:09,400 --> 00:40:13,480
कि श्रील प्रभुपाद जी को भी फॉलो नहीं किया जा रहा है इस कोन के द्वारा इस कोन को

552
00:40:13,480 --> 00:40:17,640
इस बात का उत्तर देना चाहिए कि प्रभुपाद जी एक जगह पर यह लिख

553
00:40:17,640 --> 00:40:21,720
रहे हैं अगर यह भागवत उनके द्वारा लिखी गई है तो है ना

554
00:40:21,720 --> 00:40:25,840
अब क्या उनके द्वारा लिखित है क्या नहीं है ये तो वही लोग जाने

555
00:40:25,840 --> 00:40:30,040
मगर एक चीज और है जो मैंने अभी अभी मेरी नजर में आई जब मैं

556
00:40:30,040 --> 00:40:36,040
यहां पर इसको देख रहा था दृष्टि गोचर हुई वो चीज वो क्या थी

557
00:40:36,120 --> 00:40:40,240
कि सातवा अध्याय और 33 वा

558
00:40:40,240 --> 00:40:44,680
श्लोक इसमें देखिए यहां कहा जा रहा है शिवजी सर्वोच्च वैष्णव

559
00:40:44,680 --> 00:40:47,200
है जो कि पूरे सब लोगों के द्वारा

560
00:40:47,200 --> 00:40:51,280
कहा जाता है सर्वोच्च वैष्णव ये तो फेमस डायलॉग है

561
00:40:51,280 --> 00:40:57,280
वैष्णवास्त्र

562
00:40:57,480 --> 00:41:01,840
ठाकुर जी से हुई है कि शिवजी अपने ऊपर नियंत्र

563
00:41:01,840 --> 00:41:05,960
नियंत्रण नहीं रख पाए मगर भगवत भक्त यानी की भगवत

564
00:41:05,960 --> 00:41:10,320
भक्त शिवजी को भग भगवत भक्त नहीं कहा गया इनको कहा गया भगवत

565
00:41:10,320 --> 00:41:15,120
भक्त हरिदास ठाकुर को माया देवी के अवतार ने मोहित करने का प्रयास किया किंतु

566
00:41:15,120 --> 00:41:19,240
विशुद्ध कृष्ण भक्ति के कारण व इस कसौटी में खरे उतर तो यहां पर लिखने

567
00:41:19,240 --> 00:41:23,240
वाले ने शिवजी से श्रेष्ठ हरिदास ठाकुर

568
00:41:23,240 --> 00:41:27,400
जी को सिद्ध कर दिया शिवजी से श्रेष्ठ

569
00:41:27,400 --> 00:41:31,600
बिल्कुल हां तो दो बातें कटी यहां पर प्रभुपाद

570
00:41:31,600 --> 00:41:36,200
जी की एक कि शिवजी सर्वोच्च वैष्णव है और

571
00:41:36,200 --> 00:41:38,760
दूसरी

572
00:41:38,760 --> 00:41:42,920
कि शिव जी को पार्वती मां के साथ देखकर उन्हें कामी

573
00:41:42,920 --> 00:41:47,080
समझने वाले मूर्ख होते हैं ये दोनों बाटे दो में कट

574
00:41:47,080 --> 00:41:51,520
गई तो अब बताइए क्या यहां से यह निकलता है कि प्रभुपाद

575
00:41:51,520 --> 00:41:55,560
जी को फॉलो किया जा रहा है कन के द्वारा जो प्रभुपाद जी के नाम पर अपनी

576
00:41:55,560 --> 00:41:59,680
रोटिया सेकते हैं कि भाई हम बहुत महान प्रभुपाद जी के वो

577
00:41:59,680 --> 00:42:02,320
हैं भाई उनकी सामग्री कौन सी है कौन सी नहीं

578
00:42:02,320 --> 00:42:06,520
पहले वो तो बता दो उनका लिखा हुआ बदल दे रहे हो नित्य शब्द

579
00:42:06,520 --> 00:42:10,760
को हटा दे रहे हो बहुत से शब्दों को हटा दे रहे हो इस नाम पर कि हमको

580
00:42:10,760 --> 00:42:15,240
परमिशन दी है प्रभुपाद जी ने प्रभुपाद जी भागवत के

581
00:42:15,240 --> 00:42:19,520
भूमिका में लिख रहे हैं भागवत की भूमिका

582
00:42:19,520 --> 00:42:23,680
में प्रभुपाद जी लिखते हैं कि भगवान

583
00:42:23,680 --> 00:42:27,840
के कहे हुए को यथावत पहुंचाना है अगर हम भाष्य

584
00:42:27,840 --> 00:42:32,400
के नाम पर कुछ भी करते हैं यथावत नहीं पहुंचाते

585
00:42:32,400 --> 00:42:36,520
और भाष्य के नाम पर अपने मन को लिख देते हैं तो

586
00:42:36,520 --> 00:42:42,080
वह गलत होता है यह प्रभुपाद जी लिख रहे

587
00:42:42,080 --> 00:42:46,600
हैं लिखा इस भूमिका में यह लिखा है इन्होंने कि

588
00:42:46,600 --> 00:42:50,760
अगर आप भाष्य के नाम पर उनका यथावत अर्थ ना करते हुए भाष्य के नाम

589
00:42:50,760 --> 00:42:54,840
पर कुछ भी लिख रहे हो तो फिर इससे क्या होगा सबको अपने अपने मन

590
00:42:54,840 --> 00:42:59,200
की बात लिखने का प्राप्त हो जाएगा

591
00:42:59,200 --> 00:43:04,920
बकल और यह इन्होंने इसमें लिखा भी

592
00:43:04,920 --> 00:43:10,920
है यथावत होना

593
00:43:11,000 --> 00:43:15,760
चाहिए और इसके बाद भी भाष्य

594
00:43:15,760 --> 00:43:20,360
के नाम पर इकोन की जो भगवत गीता है उसमें

595
00:43:20,360 --> 00:43:24,760
ढेर सारी मिलावट हमको देखने को मिलती जहां पर शब्द का बिल्कुल बिल्कुल बदल

596
00:43:24,760 --> 00:43:29,280
दिया गया हास्य के नाम पर भाष्य के नाम पर अनुवाद

597
00:43:29,280 --> 00:43:35,280
भी बदल दिया गया जैसे कि ब्रह्मर्पनम

598
00:43:37,280 --> 00:43:41,440
ब्रह्म शब्द इतनी बार आया है कि पूछिए नहीं मैं पढ़ देता हूं

599
00:43:41,440 --> 00:43:47,320
एक बार पास में ही

600
00:43:47,320 --> 00:43:51,840
है चौथा अध्याय 24 शलोक

601
00:43:51,840 --> 00:43:56,240
य देखि दिख रहा है चौथा अध्याय 24

602
00:43:56,240 --> 00:44:00,600
शलोक ब्रह्मर्पनम ब्रह्म हर ब्रह्मा

603
00:44:00,600 --> 00:44:04,800
ग्र ब्रह्मणा होतम ब्रह्मण ते

604
00:44:04,800 --> 00:44:09,120
गंतव्य ब्रह्म कर्म समाधि नाम ब्रह्म

605
00:44:09,120 --> 00:44:13,440
शब्द आपने कितनी बार सुन लिया ब्रह्म शब्द का उपयोग

606
00:44:13,440 --> 00:44:17,440
इसके अनुवाद में एक भी बार नहीं हुआ जो व्यक्ति कृष्ण

607
00:44:17,440 --> 00:44:21,840
भावना कृष्ण भावना मृत में पूर्णतया लीन रहता है

608
00:44:21,840 --> 00:44:26,400
उसे अपने आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही

609
00:44:26,400 --> 00:44:30,440
भगवत की प्राप्ति होती है क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता है

610
00:44:30,440 --> 00:44:34,720
और हभ भी आध्यात्मिक होती है वा पूरा

611
00:44:34,720 --> 00:44:40,720
गाब तो यह सोचने वाली बात है जी आप

612
00:44:41,840 --> 00:44:47,040
बोले

613
00:44:47,040 --> 00:44:52,880
य युगल जी

614
00:44:52,880 --> 00:44:58,880
बोले ल जी को सुनाई नहीं दे रहा है म्यूट है क्या

615
00:44:59,960 --> 00:45:05,960
आवाज नहीं आ रही है

616
00:45:07,320 --> 00:45:11,320
तो मैंने ऐसे बहुत सारे उदाहरण है मेरे पास आ थ दो 62 भी

617
00:45:11,320 --> 00:45:15,320
देखना चाहिए की जो गीता है नवीन गीता उसके अंदर भी

618
00:45:15,320 --> 00:45:19,640
कुछ इस तरह का ही थोड़ा सा

619
00:45:19,640 --> 00:45:24,520
मतलब गलत अर्थ के साथ या गलत भाव के साथ प्रकट किया गया ऐसा मेरा मानना है

620
00:45:24,520 --> 00:45:29,400
दो 62 दो सेकंड चैप्टर में तो बहुत इस तरह के

621
00:45:29,400 --> 00:45:33,720
मि लेकिन यह समस्या य आती है लिख रहे हैं

622
00:45:33,720 --> 00:45:37,840
कि जी मैं बस अपनी बात पूरी कर लेता मैं क जब आप लिख रहे हैं कि

623
00:45:37,840 --> 00:45:41,840
जब यह गीता एज इट इज है तो या

624
00:45:41,840 --> 00:45:46,040
तो ए इट की संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए ठीक है इसको

625
00:45:46,040 --> 00:45:50,200
फिर आपको कुछ और कहना चाहिए नहीं तो फिर आपको एसी देना चाहिए

626
00:45:50,200 --> 00:45:56,200
यह मेरा मत है जी जी बताइए धर्म सनातन जी बोलिए

627
00:45:57,920 --> 00:46:02,520
युगल जी एक कारण यह भी हो सकता है

628
00:46:02,520 --> 00:46:06,680
हया है तो एक कारण सबसे प्रमुख कारण यही होगा

629
00:46:06,680 --> 00:46:11,000
के जो भागवत जी के महात्म का सटम अध्याय है जिसमें भागवत श्रवण

630
00:46:11,000 --> 00:46:15,000
विधि बताई गई है तो इसकन क्या करता है कि जितना उनके लिए

631
00:46:15,000 --> 00:46:19,120
ग्राही है उतना ग्रहण करता है बाकी वह छोड़ देता है तो जो

632
00:46:19,120 --> 00:46:23,120
भागवत जी के महात्मा का सटम अध्याय है उसमें भागवत श्रवण विधि

633
00:46:23,120 --> 00:46:27,480
बताई गई जिसम कई जगह लोक आते हैं कि वक्ता कैसा होना चाहि

634
00:46:27,480 --> 00:46:33,440
श्रोता किस प्रकार होना चाहिए ण वेदु

635
00:46:33,440 --> 00:46:37,680
दता इसम वक्ता के गुण बतान के पास इस प्रकार

636
00:46:37,680 --> 00:46:41,680
के वक्ता है ही नहीं तो उन्होंने यह सब नियम हटा दिए महात्मा हटा

637
00:46:41,680 --> 00:46:45,680
दिया ताकि किसी को पता ना चले

638
00:46:45,680 --> 00:46:49,160
अने

639
00:46:49,160 --> 00:46:53,160
खंडवा पंडित जो ब्राह्मण झूठ भी बोलता है उसका त्याग

640
00:46:53,160 --> 00:46:57,240
कर देना चाहिए उससे हमें भागवत कथा नहीं करानी चाहिए

641
00:46:57,240 --> 00:47:01,760
परंतु इसन में कई लोग भ्रांति फैला रहे ठ बोल रहे हैं और

642
00:47:01,760 --> 00:47:06,200
श्री प्रभुपाद जी ने जो भाष्य किए हैं उनका अर्थ का

643
00:47:06,200 --> 00:47:10,400
मतलब स्वच्छा से व जितना ग्राही है उतना ग्रहण करते हैं बाकी वह

644
00:47:10,400 --> 00:47:14,800
हटा देते हैं

645
00:47:14,800 --> 00:47:20,800
जी जील जी आप कुछ कहना चाह रहे

646
00:47:21,880 --> 00:47:26,000
हैं युगल जी आपको आवाज नहीं आ रही है क्या यल जी

647
00:47:26,000 --> 00:47:28,200
बोलिए

648
00:47:28,200 --> 00:47:32,840
आ रही है आ रही है आ रही तो मैं ये अब जैसे कि इन्होंने भागवत

649
00:47:32,840 --> 00:47:37,080
जी से भागवत का महात्म गायब कर दिया अब श्रीमद भगवत गीता जैसा कि आपने

650
00:47:37,080 --> 00:47:41,600
अभी कहा था कि भगवत गीता का नाम एज इट इज नहीं होना चाहिए इसका नाम कुछ और होना चाहिए

651
00:47:41,600 --> 00:47:45,720
तो इनको लिखना चाहिए कि भगवत गीता और जो भाष्य का

652
00:47:45,720 --> 00:47:49,880
है जो जिस जिस व्यक्ति ने भाष्य किया जैसे प्रभुपाद जी भाष्य किया तो उनका

653
00:47:49,880 --> 00:47:53,960
नाम लिखे और भगवत गीता लिखे ये ना लिखे एज इट इज

654
00:47:53,960 --> 00:47:58,000
क्योंकि वहां प एज इट इज जैसा कुछ भी नहीं है जब गीता

655
00:47:58,000 --> 00:48:02,400
से इतने सारे श्लोकों का अर्थ बदल दिया गया आपने भागवत का महात्म

656
00:48:02,400 --> 00:48:06,480
गायब कर दिया महात्म में से सप्ताह विधि जो भी महात्मा पूरा सब

657
00:48:06,480 --> 00:48:10,840
कुछ चा पूरा सब कुछ चाट ग सब कुछ उड़ा डाला और फिर कहते हैं

658
00:48:10,840 --> 00:48:14,920
कि भाई हम तो शास्त्र की बात करेंगे शास्त्र की बात आप किस आधार पर कर रहे

659
00:48:14,920 --> 00:48:19,120
हो मेरे तो यह बात नहीं समझ में आती किस आधार पर आप शास्त्र की बात करो किस मुख

660
00:48:19,120 --> 00:48:23,240
से कर रहे हो आप जब सभी को ये ज्ञात हो रहा है धीरे धीरे

661
00:48:23,240 --> 00:48:27,520
कि आपकी गीता में वो श्लोक नहीं है आपके भागवत

662
00:48:27,520 --> 00:48:30,080
में वो बातें नहीं है और वहां पर बात

663
00:48:30,080 --> 00:48:34,080
श्रीमद भागवत में चैतन्य महाप्रभु की कहीं बात नहीं आर तो चैतन्य महाप्रभु की बात

664
00:48:34,080 --> 00:48:38,160
आ गई उसके अंदर कहां से आ रही है सारी बात भाई

665
00:48:38,160 --> 00:48:42,160
जो भागवत में 18000 लोक है मूल बध जो श्लोक

666
00:48:42,160 --> 00:48:46,560
बध जो भागवत है 18000 लोको की उन 18000 लोको

667
00:48:46,560 --> 00:48:52,440
में कहां पर चैतन्य महाप्रभु की बात आई है यह तो

668
00:48:52,440 --> 00:48:57,040
बताइए इन्होने आरंभ कर दिया चेतन महाप्रभु की बात उसके अंदर

669
00:48:57,040 --> 00:49:01,320
आद अंकित जी आप बोले कुछ का कर्तव्य

670
00:49:01,320 --> 00:49:06,440
होता है जो मूल श्लोक बद्ध भागवत है उसकी मूल बातों को

671
00:49:06,440 --> 00:49:10,480
बताना जी जी ये नहीं आप कुछ कुछ भी

672
00:49:10,480 --> 00:49:14,680
चेंज कर देंगे यहां का वहां कर देंगे जो चित्र केतु की कथा है वो भी छठे

673
00:49:14,680 --> 00:49:18,680
स्कंद में है इनका आठवे स्कंद में जा रही है कथा मतलब इन्होंने मतलब

674
00:49:18,680 --> 00:49:23,000
भाष में इतना कुछ लंबा चौड़ा लिख दिया है कहीं की बातें कहीं

675
00:49:23,000 --> 00:49:27,040
मार दी है इन लोगों ने तो वही बात है कि कहीं स्कंद कहीं जा रहा है

676
00:49:27,040 --> 00:49:31,200
सब कुछ तितर बतर कर दिया है भागवत की ना जाने कितनी वॉल्यूम इनकी

677
00:49:31,200 --> 00:49:35,360
है द हज का सेट इनका भागवत की वॉल्यूम का चल रहा है तो आप देखिए

678
00:49:35,360 --> 00:49:39,600
क्या ये एक धन कमाने काया

679
00:49:39,600 --> 00:49:44,080
बन रहा है क्या इनका भागवत अय गीता जो है फ्री में बांटते हैं क्या भागवत

680
00:49:44,080 --> 00:49:45,480
का सेट भीय फ्री में देते

681
00:49:45,480 --> 00:49:49,640
हैं जोज का भागत ये गलत है

682
00:49:49,640 --> 00:49:53,720
ये गलत है गीता फ्री में नहीं बांटते हैं ये क्या करते हैं कि

683
00:49:53,720 --> 00:49:58,400
जब उनके यहां पर संडे के दिन क्लास होती है या

684
00:49:58,400 --> 00:50:02,800
जो इनके समृद्ध फॉलोवर्स होते हैं वो जाकर जब वहां प्रवचन

685
00:50:02,800 --> 00:50:07,000
में बैठ जाते हैं जो प्रवचन करता होते हैं वो या फिर उनके

686
00:50:07,000 --> 00:50:11,160
जो परिक इत्यादि होते हैं वो वो कोर्स करते

687
00:50:11,160 --> 00:50:15,480
हैं कि आप प्रण लीजिए 1100 गीता बांटने का

688
00:50:15,480 --> 00:50:19,480
अपने प्रियजनों को ये कभी स्कोन संस्था स्वयं

689
00:50:19,480 --> 00:50:24,160
अधिकृत रूप से भगवत गीता फ्री में किसी को नहीं देती

690
00:50:24,160 --> 00:50:28,760
वो क्या करते हैं जो उनके यहां पर आ चुके हैं फस चुके हैं

691
00:50:28,760 --> 00:50:33,040
वो उनको बोलते हैं कि भाई आप यहां से 1100 गीता

692
00:50:33,040 --> 00:50:37,360
ले लो और 1100 गीता अपने प्रियजनों को बांटो

693
00:50:37,360 --> 00:50:41,520
आपको कभी रोड में कोई फ्री में गीता देने वाला मिला क्या स्कोन से वो

694
00:50:41,520 --> 00:50:46,400
बेच रहा होता है फ्री में नहीं देता है वो बेचता है

695
00:50:46,400 --> 00:50:50,520
मगर वो बोलता है अवश्य बोलता है कि ये फ्री में है गीता फिर

696
00:50:50,520 --> 00:50:54,840
इसके बाद वो बोलता है कि फिर हमें सपोर्ट के लिए पूछ दीजिए

697
00:50:54,840 --> 00:51:00,480
प्रिंटिंग प्राइज बताता गीता

698
00:51:00,480 --> 00:51:05,680
तो अंकित जी को चाहूंगा वो अपना वक्तव्य जी अक

699
00:51:05,680 --> 00:51:09,760
जी मैं फ्री की बात अगर बात आप कर रहे हैं तो फ्री

700
00:51:09,760 --> 00:51:13,960
इनका एक बड़ा सुंदर तरीका है गीता को लोगों में देने का मैंने दो तीन

701
00:51:13,960 --> 00:51:18,200
जगह उनको देखा तो वोय ये क्या करते हैं य पहले उनको

702
00:51:18,200 --> 00:51:22,280
प्राइस बताते हैं ये गीता का ये प्राइज है और फिर

703
00:51:22,280 --> 00:51:26,600
जब प्राइस बताते फिर कहते हैं जैसी आपकी इच्छा हो आप उतनी दे दो

704
00:51:26,600 --> 00:51:30,640
दे दो 20 दे दो अब इन्होंने प्राइस बता दिया 400 और 10

705
00:51:30,640 --> 00:51:34,720
20 देने की बात कर रहे तो आदमी मुझे नहीं लगता कोई ऐसा होगा

706
00:51:34,720 --> 00:51:39,000
कि 400 प्राइस सुन करके देगा या देगा व

707
00:51:39,000 --> 00:51:43,320
10 20 कम करके है बिल्कुल है ऐसा और यह मेरा

708
00:51:43,320 --> 00:51:47,520
जी बिल्कुल सही कह रहे वो हेडफोन की वजह से आपकी आवाज

709
00:51:47,520 --> 00:51:51,320
कम आ रही

710
00:51:51,320 --> 00:51:55,480
है ऐसा देखिए मैं अपने छोटे भाई को

711
00:51:55,480 --> 00:51:59,480
भ्राता को अपने भी भेजता था उस समय जब मैं गीता

712
00:51:59,480 --> 00:52:03,720
की क्लासेस करने के लिए बाद में उसके साथ यही समस्या होने लग गई थी कि फिर

713
00:52:03,720 --> 00:52:07,720
उसको प्रवोक इस तरह से करते थे कि अब आपको इतना सेट दे दिया अब आपको य सेल

714
00:52:07,720 --> 00:52:11,880
करना है बेचना है बेचना है ये सारी चीज करके अब मैं उससे रोज पूछता

715
00:52:11,880 --> 00:52:16,120
था कि तुम्हें आज क्या बताया आज क्या बताया तो मैंने कहा अच्छा बता रहे हैं चलिए पढ़ते

716
00:52:16,120 --> 00:52:20,240
रहिए पढ़ते रहिए पढ़ते रहिए लेकिन जब यह सब बातें आने लग गई कि अब ये करना है

717
00:52:20,240 --> 00:52:24,240
तो फिर मुझे लगा कि अब ये अब अब्जॉर्ब कर रहे हैं तो मुझे अब इनसे

718
00:52:24,240 --> 00:52:28,320
दूर हट जाना चाहिए उन्हे और आप मानेंगे नहीं मेरे

719
00:52:28,320 --> 00:52:32,360
ही घर की एक सदस्य है जो उनको

720
00:52:32,360 --> 00:52:36,360
उनके साथ में ट्रेवल कर रहा था कहीं पर और मुझे उनको

721
00:52:36,360 --> 00:52:40,680
कहीं पर ड्रॉप करना था तो मेरी उनसे बातचीत भी हुई थी कि

722
00:52:40,680 --> 00:52:45,040
और वो हुई थी हरि और ह के बीच में हरि और हर की तो बात ही नहीं कर रहा हूं मैं

723
00:52:45,040 --> 00:52:49,400
ठीक है उसके भेद की बात ही नहीं कर हरि और हरि यानी मैं राम और कृष्ण की बात कर रहा हूं

724
00:52:49,400 --> 00:52:53,520
और उस समय अब क्या है कि बचपन से हमने भी जाना है सीखा है समझा है

725
00:52:53,520 --> 00:52:57,600
राम को ही जाना है है ना तो और हमें य भी पता है संस्कार बचपन

726
00:52:57,600 --> 00:53:01,680
से य मिले कि राम और कृष्ण में तो कोई अंतर है ही नहीं ठीक है राम और शिव की तो बात मतलब

727
00:53:01,680 --> 00:53:06,000
मैं बात ही नहीं कर रहा उसम तो है ही नहीं अंतर हरिहर में तो भेद है ही नहीं हरि हर भेदी नरक गामी

728
00:53:06,000 --> 00:53:06,640
वो तो दिमाग

729
00:53:06,640 --> 00:53:11,120
प बना हुआ था लेकिन मैं राम कृष्ण की बात कर रहा हूं अभी तो अब

730
00:53:11,120 --> 00:53:15,360
बिल्कुल स्कन वाले श्रेष्ठता है कृष्ण की होनी भी चाहिए अन्यता

731
00:53:15,360 --> 00:53:19,480
के भाव से आप कर भी सकते हैं कोई उसमें कोई दिक्कत नहीं है अब कोई रामानंदी संप्रदाय

732
00:53:19,480 --> 00:53:23,720
का होगा तो वो कृष्ण राम को ही परब्रह्म मानेगा तो उसमें भी कोई गलत

733
00:53:23,720 --> 00:53:27,880
नहीं है ठीक है लेकिन वो कुछ छोटी दृष्टि

734
00:53:27,880 --> 00:53:32,000
से कृष्ण को नहीं देखेगा ठीक है तो वो वाली बात है अब क्या है कि

735
00:53:32,000 --> 00:53:36,120
मैं जब उनके साथ ड्राइव कर रहा था मैं वही ड्राइव करके लेके जा रहा था तो मेरी कुछ डिस्कशन हुई

736
00:53:36,120 --> 00:53:40,120
थी उसका सगा छोटा भाई था जो वहां पर हा

737
00:53:40,120 --> 00:53:44,760
हा मेरा सगा छोटा भाई जी जी जी मेरा सगा छोटा भाई था उस समय वो गया

738
00:53:44,760 --> 00:53:49,960
था आपने उसे स्न भेजा था अच्छा

739
00:53:49,960 --> 00:53:54,240
ये तो आज सुन रहा हूं देखिए ऐसा है कि उस समय क्या होता था कि मैं भी

740
00:53:54,240 --> 00:53:58,440
पढ़ाई कर रहा था उस समय मेरा आ थंक लास्ट र था कॉलेज का और

741
00:53:58,440 --> 00:54:02,520
मुझे भी इतना समय नहीं मिलता था कि मतलब मैं उसको पढ़ा दिखाऊ त इन सब चीजों के बारे

742
00:54:02,520 --> 00:54:06,720
में कुछ बताऊ पिताजी भी थोड़ा व्यस्त रते थे तो मैंने उसको

743
00:54:06,720 --> 00:54:10,840
बोला कि जब अब शुरुआत जब करनी है धर्म समझना है तो गीता तो बहुत

744
00:54:10,840 --> 00:54:14,960
अच्छा है आप उसे सीखिए अब मेरे मन में भी यही भाव था कि और

745
00:54:14,960 --> 00:54:19,400
मैं पढ़ता और मैं आपको य भी बता दूं मैं जिस स्कूल में पढ़ता था व वो स्कूल आर्य समाजी

746
00:54:19,400 --> 00:54:22,360
था ठीक है

747
00:54:22,360 --> 00:54:26,800
ठीक है हा और और वहां पर

748
00:54:26,800 --> 00:54:30,920
लेकिन वहां पर सरस्वती माता की पूजा होती थी बैसाख पंचमी के दिन मूर्ति

749
00:54:30,920 --> 00:54:35,080
लगाकर पूरी विधि विधान से ठीक है और बहुत सारी चीज भी होती थी

750
00:54:35,080 --> 00:54:39,080
जिससे मैं मेरे को अच्छा नहीं लगता था जैसे उनकी कुछ मोरल एजुकेशन की पढ़ाई होती

751
00:54:39,080 --> 00:54:43,320
थी उसमें जो मुझे इतनी ज्यादा ठीक नहीं लगती थी तो मैं मुझे

752
00:54:43,320 --> 00:54:47,600
अच्छा नहीं लगता था बट अभी बहरहाल उसकी बात नहीं करते हैं तो मैं छोटे भाई को अपने स्कन

753
00:54:47,600 --> 00:54:51,600
भेजता था तो व जाता था तो जब शाम को सेशन

754
00:54:51,600 --> 00:54:55,600
करके आता था तो उसको बोलते थे कि कि मैं

755
00:54:55,600 --> 00:54:59,640
उसे पूछता था कि आज तुम्ह क्या बताया क्या पढ़ाया तोव बताता था मुझे मुझे भी सुनने में

756
00:54:59,640 --> 00:55:03,680
अच्छा लगता था कि चलो भाई अच्छा बता रहे अच्छा बता रहे हैं तो फिर इसके

757
00:55:03,680 --> 00:55:08,680
बाद उसको अब क्या है कि मेरे जो माता-पिता है वो रामानंद संप्रदाय

758
00:55:08,680 --> 00:55:13,320
से दीक्षित है है ना तो अब शुरू से

759
00:55:13,320 --> 00:55:17,440
अब उसको अब हमारे यहां तो मतलब सेवा होती है प्रभु की ठाकुर जी की इस तरह से उस भाव

760
00:55:17,440 --> 00:55:21,640
से होती है राम ही जानते हैं मानते हैं मेरे माता-पिता तो

761
00:55:21,640 --> 00:55:26,640
है ना अब क्या है कि जब वो जब राम की बातें करने लग जाए

762
00:55:26,640 --> 00:55:30,760
तब उसको और ध्यान से सुनिए का मेरी बात यह बात य कि

763
00:55:30,760 --> 00:55:34,920
उसको बोलते थे कि राम के लिए तुम अब उसको अंतर बताते थे राम और कृष्ण

764
00:55:34,920 --> 00:55:37,680
में क्या अंतर है भेद ठीक है यहां

765
00:55:37,680 --> 00:55:41,680
पर हमारे गुरुजन ठीक है जो अभी

766
00:55:41,680 --> 00:55:46,360
कुछ कुछ समय पहले पुनीत जी भी आए थे य लाइव प

767
00:55:46,360 --> 00:55:51,000
इसी आवाहन चैनल प उनके जो दादा श्री थे वो मेरे माता-पिता के गुरु थे

768
00:55:51,000 --> 00:55:55,000
वो कृष्ण और राम को एक बताते थे वृंदावन के रहने वाले हैं वो भी ठीक है

769
00:55:55,000 --> 00:55:59,320
राम भक्ति है उनकी उसम अंदर लेकिन राम और कृष्ण को एक बताते थे उसका

770
00:55:59,320 --> 00:56:03,400
पूरे सब सब इंफॉर्मेशन जो व शेयर करते थे शास्त्र से लेकर

771
00:56:03,400 --> 00:56:07,520
वो बहुत ही सटीक और बहुत बढ़िया तरीके से समझाते थे अब वो क्या करते

772
00:56:07,520 --> 00:56:11,720
थे कि व राम और कृष्ण में अंतर बताना शुरू करते थे कि राम में यह कमी है तो

773
00:56:11,720 --> 00:56:16,080
कृष्ण में ये कमी है अब वो आके अब उसको पता नहीं है उसको तो

774
00:56:16,080 --> 00:56:20,320
मुझे पता है भैया ऐसा है देखो राम में ना ये कमिया है ठीक है और

775
00:56:20,320 --> 00:56:24,320
ऐसे मैंने कहा था ठीक है मतलब जब वो बोले कृष्ण में

776
00:56:24,320 --> 00:56:28,480
तो यह है बहुत अच्छा बहुत अच्छा जब राम बताने लग जाए तो मुझे भी थोड़ा ऑकवर्ड लगा

777
00:56:28,480 --> 00:56:32,560
उस सम लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया मैंने कहा कि कोई बात नहीं हो सकता है कि ये अभी बीच

778
00:56:32,560 --> 00:56:36,600
का चैप्टर के बीच में कोई चीज होती है ना जो अभी बीच में बताई गई है

779
00:56:36,600 --> 00:56:40,720
लेकिन अंत में उसको पूरा बता दिया जाएगा कि नहीं नहीं अंत में एक ही है देखिए अभी मैं अंतर

780
00:56:40,720 --> 00:56:45,280
बता रहा हूं लेकिन अंतर अभी के लिए है अंत में सब कर दिया जाएगा खेल

781
00:56:45,280 --> 00:56:49,520
खत्म तो अब आज एक दिन हो जाए दो दिन हो जाए फिर उसको

782
00:56:49,520 --> 00:56:52,760
फिर उसको पता नहीं लग जाए अब वो क्या होता था कि अब हमारे यहां क्या

783
00:56:52,760 --> 00:56:56,880
होता है कि मेरे यहां परंपरा है घर में कि हर भगवान

784
00:56:56,880 --> 00:57:00,960
मतलब तुलसी रामचरित मानस जी का पाठ होता है

785
00:57:00,960 --> 00:57:05,160
एक दोहा दो दोहा दोहे के बीच में इस तरह से मतलब हो ग ही होगा

786
00:57:05,160 --> 00:57:09,200
होगा ही होगा ठीक है तो कोई ना कोई बैठ के करता था वो भी करता था तो अब

787
00:57:09,200 --> 00:57:13,440
उसको थोड़ा जल्दी हो रहा था उस दिन कि मैं मुझे क्लास करने जानी है तो मैं आज नहीं कर पाऊंगा उसकी टर्न

788
00:57:13,440 --> 00:57:17,600
थी तो हमारे घर पिताजी क्या करते थे ऐसे टर्न्स बनाते थे ताकि सब लोग

789
00:57:17,600 --> 00:57:21,760
ही करे और मतलब वो संस्कार डालने की अपनी अपनी प्रक्रिया होती है थोड़ मेरे

790
00:57:21,760 --> 00:57:26,320
पिताजी थोड़े फौजी मिजाज के थे तो वो थोड़ थोड़ रूल्स

791
00:57:26,320 --> 00:57:30,840
के बनाया करते थे तो उस दिन तो उसने नहीं पढ़ा आके उसने बताया कि मैं

792
00:57:30,840 --> 00:57:34,840
मैं अपने जाक वहां पर गुरु जी को बता रहा था कि मैं तुलसीदास जी की पढ़ता हूं ये सारी चीजें कर रहा था

793
00:57:34,840 --> 00:57:38,840
और आज मैं छोड़ के क्लास करने आया लेट हो गया था क्योंकि मुझे वहां पर पढ़ना

794
00:57:38,840 --> 00:57:42,920
पड़ा तो फिर बता रहे हैं कि तब उसके मुंह से मैंने जीवन

795
00:57:42,920 --> 00:57:47,280
में पहली बार अपने छोटे भाई के मुंह से यह बात सुनी कि तुलसीदास जी मायावादी

796
00:57:47,280 --> 00:57:51,760
है ठीक है अब मैंने बोला कि मायावादी है

797
00:57:51,760 --> 00:57:55,920
यह होता क्या है मुझे तो नहीं पता ठीक है तब मैंने थोड़ा बहुत रिसर्च

798
00:57:55,920 --> 00:58:00,000
की देखा पता लगा फिर उस टाइम भी मैं इतना ध्यान नहीं दिया उसको और वो

799
00:58:00,000 --> 00:58:04,120
भी तुलसीदास जी ये है वो है उन्होने शिव की भक्ति कर दी है सरस्वती की भक्ति कर दी

800
00:58:04,120 --> 00:58:08,000
है गणेश की भक्ति कर दी है सबकी भक्ति कर रहे हैं ऐसा है वैसा है

801
00:58:08,000 --> 00:58:12,200
करके उन्होंने बोला तो मुझे थोड़ा अब फिर मुझे थोड़ा सा समस्या होने लग गई थी

802
00:58:12,200 --> 00:58:16,400
तो मैंने उसको बोला कि एक काम करो तुम अपना तो वैष्णव तिलक लगाओ रामानंदी

803
00:58:16,400 --> 00:58:20,400
वाला जो जैसे अंकित शर्मा जी ने लगाया है उसी तरह से और तुम

804
00:58:20,400 --> 00:58:24,400
धोती बहन के जाओ अब सेशन करने ठीक है तो एक दो दिन में आए

805
00:58:24,400 --> 00:58:29,000
प्रभु जी आए हैं हमारे रामानंदी प्रभु जी आए ये व है फिर उन्हीं के जो

806
00:58:29,000 --> 00:58:33,120
टीचर थे वो बोलते थे कि आप पीली धोती क्यों पहन के आते हैं हमारे यहां परंपरा नहीं

807
00:58:33,120 --> 00:58:37,160
है पीली धोती पहनने की अब पीरी धोती इसलिए पते क्योंकि उनके

808
00:58:37,160 --> 00:58:41,440
कुछ रूल्स होंगे कि पीरी धोती शायद कोई मतलब पोजीशन

809
00:58:41,440 --> 00:58:45,440
होती है वही लोग पहन सकते हैं ऐसा कुछ करके है या फिर जैसे कंठी पहनी है मैंने है

810
00:58:45,440 --> 00:58:49,560
ना तो अब ये कंठी क्या है कि ये दो लाइनस है इसमें तो उनके क्या

811
00:58:49,560 --> 00:58:53,920
होता है कि तीन कंठी वाला थोड़ा अपर लेवल का होगा दो कंठी वाला उससे लोअर होगा सबसे स्टार्टर

812
00:58:53,920 --> 00:58:58,320
जो होगा वो अब उसने दो कंठी पहनी थी थी ठीक है तो उसको फिर इसलिए

813
00:58:58,320 --> 00:59:02,360
टोक रहे थे छोटी को टोकना शुरू कर दिया और फिर एक दिन क्या हुआ थोड़ा वो बंडल ले

814
00:59:02,360 --> 00:59:06,440
आया अलग-अलग किताबें लेके आया था कुछ ग्रंथ लेके आया था जो स्कन से छपे हुए

815
00:59:06,440 --> 00:59:10,680
थे उसमें गीता भी थे कुछ पूरा बैग भर के उसको दिया था ठूंस के ठीक है अब

816
00:59:10,680 --> 00:59:14,760
उसको बोला कि मुझे ना उसका कोई मित्र था मैं नाम बदल

817
00:59:14,760 --> 00:59:18,880
देता हूं कार्तिक कह देता हूं मैं अभी ठीक है कार्तिक के साथ में जा रहा है और कार्तिक

818
00:59:18,880 --> 00:59:22,960
जो है मुझे उसके साथ उस चौक प जाना है फलाने चौक प जाना

819
00:59:22,960 --> 00:59:23,460
है

820
00:59:23,160 --> 00:59:27,400
और वहां पे मतलब मेरे मुझे टारगेट मिला है अगर मुझे टारगेट ये मैं ये कंप्लीट करूंगा

821
00:59:27,400 --> 00:59:31,520
तो मेरी भक्ति और बढ़ेगी मेरी भक्ति और बढ़ेगी ये वाला चीज है तो मैंने कहा तुम पढ़ाई

822
00:59:31,520 --> 00:59:35,800
लिखाई करनी है कि तुमहे अ ये अभी यही सब काम करना है ठीक है

823
00:59:35,800 --> 00:59:39,920
तो फिर मैंने इसको धीरे फिर मैं एक दिन गया फिर मैंने देखा बातचीत की तो मुझे

824
00:59:39,920 --> 00:59:43,960
कुछ ठीक नहीं लगा तो मैंने छोड़ दिया ठीक है मैं उस कौन का नाम नहीं लूंगा

825
00:59:43,960 --> 00:59:48,000
यहां पर लेकिन ऐसा ऐसा हुआ दूसरी घटना यह हुई कि

826
00:59:48,000 --> 00:59:52,040
अभी जो मैं बता रहा था जब शिवान जी

827
00:59:52,040 --> 00:59:56,560
थोड़ा दूर थे यहां पर कि मेरी सदस्या है मेरे परिवार

828
00:59:56,560 --> 00:59:59,160
की

829
00:59:59,160 --> 01:00:03,600
वो मतलब मेरे नानी की के साइड की है

830
01:00:03,600 --> 01:00:07,800
तो वो क्या बोलते हैं कि वो भी स्कन से जुड़ी हुई है

831
01:00:07,800 --> 01:00:11,840
ठीक है और शिवान जी जिससे मिलक आए थे उन्हीं की

832
01:00:11,840 --> 01:00:17,080
है शायद डिसाइल है ना शिष्या

833
01:00:17,080 --> 01:00:21,440
तो अब मैं बोलिए

834
01:00:21,440 --> 01:00:25,520
लखनऊ के प्रेसिडेंट है जो मंदिर लखनऊ मंदिर के

835
01:00:25,520 --> 01:00:30,360
जी जी जी जी उन्हीं की शिष्या है जिनका हमने इंटरव्यू लिया था

836
01:00:30,360 --> 01:00:34,560
जी जी तो जो बता रहे थे शास्त्रों की गहराई में जाना

837
01:00:34,560 --> 01:00:38,240
हमारा उद्देश्य नहीं है जी बिल्कुल मैं

838
01:00:38,240 --> 01:00:42,560
स्वयं इस बात को कहता हूं कि मैं अवल दर्जे का मूर्ख

839
01:00:42,560 --> 01:00:46,640
हूं ये उनके उत्तर थे जब हमने बहुत ही सामान्य

840
01:00:46,640 --> 01:00:51,080
से प्रश्न किए थे उनसे जी तो

841
01:00:51,080 --> 01:00:55,240
अब देखिए मतलब कैसे जोड़ता हैका उनका

842
01:00:55,240 --> 01:00:59,240
शिष्य प्राप्त है जी जी उनका उन्हीं का है

843
01:00:59,240 --> 01:01:03,440
और फिर वो अपने मतलब अब चल रहा है जैसे नहीं एक रेफरल

844
01:01:03,440 --> 01:01:07,480
बोनस चलता है वहां प म रेफरल टाइप जो चलता रहता है व वैसे ही चल रहा है

845
01:01:07,480 --> 01:01:11,960
तो बस ठीक है तो वो भी किसी के रेफर से ही आई थी वो अपने भाई के रेफर से आई थी

846
01:01:11,960 --> 01:01:16,080
ऐसे ऐसे करके जो भी हुआ था अब क्या हुआ कि

847
01:01:16,080 --> 01:01:20,080
वो हमारे मतलब घर पे आई हुई थी कुछ फंक्शन था उस लिए तो

848
01:01:20,080 --> 01:01:24,080
उस समय मम्मी जो थी हमारी जो माता जी थी वो

849
01:01:24,080 --> 01:01:28,240
शनिवार का शायद समय था उस दिन सुंदरकांड का पाठ था तो

850
01:01:28,240 --> 01:01:32,440
पिताजी को हमारे लगा कि चलो भाई ये भी तो बहुत अच्छी बड़ी वैष्णवी है तो उन्होने

851
01:01:32,440 --> 01:01:36,480
बोला कि यहां आप आई है तो सुंदर कान का पाठ चल रहा है जाइए एक घंटा कराइए

852
01:01:36,480 --> 01:01:40,800
आपको पापा ने मेरे पिताजी ने इस भाव से बोला था कि अब भाई वैष्णव

853
01:01:40,800 --> 01:01:45,000
है तो इनको इनका अब हनुमान जी के सुंदर का पाठ तो इनको बहुत मजा आएगा

854
01:01:45,000 --> 01:01:49,000
क्योंकि हम लोगों को तो आता ही है लेकिन वो गई नहीं ठीक है तो

855
01:01:49,000 --> 01:01:53,240
पापा ने फिर बोला कि अरे चले जाइए मतलब कि बहुत अच्छा होता है यहां पर सारी चीजें

856
01:01:53,240 --> 01:01:57,600
और मजा आएगा बहुत अच्छा है सारी ची लेकिन वो लोग ग जो नहीं कॉलोनी में लोग कराते

857
01:01:57,600 --> 01:02:01,640
रहते हैं मंदिर में हमेशा चलता रहता है तो उस समय नहीं गई वो

858
01:02:01,640 --> 01:02:05,640
थोड़ा बिजी है ये है व कुछ काम करते उने टाल दिया तो हमने उसको ध्यान नहीं लेकिन जब मैं कड़िया जोड़ रहा हूं तोत

859
01:02:05,640 --> 01:02:09,960
मुझे थोड़ा समझ में आ रहा है अब क्या हुआ कि फिर वो अपना भक्ति

860
01:02:09,960 --> 01:02:14,000
करती थी बहुत अच्छी बात है और अपना भगवान का नाम का जब तो करती ही है जो

861
01:02:14,000 --> 01:02:18,320
मैं मैं गलत नहीं बोलूंगा ऐसा नहीं है वो हरे कृष्ण महामंत्र का जब करती है

862
01:02:18,320 --> 01:02:23,240
ठीक है हरनेस जब भी उनको समय मिलता है है ना अब

863
01:02:23,240 --> 01:02:27,240
लेकिन अब मैं उनको जब वापस लेक आ रहा था तो मैं राम जी की

864
01:02:27,240 --> 01:02:31,880
और शिव जी के उसके बारे में थोड़ा मेरी बात चल रही थी कि ऐसा ऐसा है

865
01:02:31,880 --> 01:02:35,920
और अब मैं जब मैं अब क्या है कि मैं

866
01:02:35,920 --> 01:02:40,200
हूं काशी से है ना तो हमारे य जो ग्रीटिंग करने का तरीका है ना उसमें

867
01:02:40,200 --> 01:02:44,560
क्या होता है कि वो हम अब अब बाबा जो है वो हमारे घर के सदस्य

868
01:02:44,560 --> 01:02:48,600
है ठीक है महादेव तो तो हम भी जब फोन कभी उठाएंगे तो

869
01:02:48,600 --> 01:02:52,800
जैसे कोई जय श्री राम बोलेगा को जय श्री कृष्ण बोलता है है ना तो हमारा सीधा

870
01:02:52,800 --> 01:02:56,880
हां भैया महादेव क्या हाल है महादेव महादेव यही चलता है है ना मतलब ग्रीटिंग

871
01:02:56,880 --> 01:03:01,120
में यही है कि बस बाबा का नाम लेना है महादेव का नाम लेना है ठीक है बिल्कुल सही

872
01:03:01,120 --> 01:03:05,640
उसमें कोई गलत नहीं है तो अब हमारे यहां कुछ भी हो जाए कोई बात हो

873
01:03:05,640 --> 01:03:08,280
मतलब कोई भी आका लग रहा है कोई हसी हो रही है

874
01:03:08,280 --> 01:03:12,320
तो नमः पार्वती पतय हर हर महादेव ही होता है ठीक है ठीक है तो ये तो

875
01:03:12,320 --> 01:03:16,600
नॉर्मल है तो अब वो उसमें भी उतना ज्यादा सम्मिलित

876
01:03:16,600 --> 01:03:20,720
नहीं होती थी वो करती थी थोड़ा ड़ लगता था उनको कि ये सब चीजें हो रही है

877
01:03:20,720 --> 01:03:24,840
और महादेव महादेव क्या है कि कृष्ण कृष्ण का करो ये सब चीजें करो वो इनडायरेक्टली बोलती थी

878
01:03:24,840 --> 01:03:28,960
बट मैं इतना ध्यान मैंने कहा चलो भाई मैं यह सोचता था और बहुत अच्छी मतलब मेरे

879
01:03:28,960 --> 01:03:33,440
मन में य भाव था कि ये इतनी बड़ी अनन्य भक्त है देखिए मुझे इनसे सीखना चाहिए

880
01:03:33,440 --> 01:03:37,800
ठीक है अन्यता सीखनी चाहिए इतनी बड़ी भक्त है कि वो कृष्ण के अलावा किसी को जानती

881
01:03:37,800 --> 01:03:43,000
नहीं तो बहुत अच्छी बात है आप बोलिए कि जैसे बोल लीजिए कि

882
01:03:43,000 --> 01:03:47,040
मैं इनको नहीं समझता कुछ कृष्ण को नहीं समझता राम

883
01:03:47,040 --> 01:03:51,400
को मान लीजिए मान लीजिए मैं राम का भक्त हूं और मैंने बोल दिया कि मैं कृष्ण को नहीं जान

884
01:03:51,400 --> 01:03:55,400
समझता या फिर शिव को नहीं समझता तो यह बोलना ठीक नहीं होगा

885
01:03:55,400 --> 01:03:59,480
मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप यह बोल कि मैं राम के अलावा को जानता ही नहीं मैं शिव

886
01:03:59,480 --> 01:04:03,800
में भी राम को देखता हूं गुरुदेव बोलते हैं ना कि अगर ब्रह्मा

887
01:04:03,800 --> 01:04:07,960
विष्णु महेश भगवती और गणेश इसमें से जो भी आपके ईस्ट है उसको ईस्ट

888
01:04:07,960 --> 01:04:12,040
मानकर उसको सर्वश्रेष्ठ मानकर बाकी चार ब्रह्म के स्वरूप को इस

889
01:04:12,040 --> 01:04:16,200
भाव से पूजा करनी चाहिए जैसे मान लीजिए मैं राम का भक्त हूं कि

890
01:04:16,200 --> 01:04:20,240
हे ब्रह्मा हे भगवती हे गणेश हे महादेव

891
01:04:20,240 --> 01:04:23,320
हे शिव हे भगवान सूर्यनारायण मुझे राम की और

892
01:04:23,320 --> 01:04:27,640
भक्ति मिले इस भाव से तो उससे क्या होगा उनकी भी बच जाएगी

893
01:04:27,640 --> 01:04:31,840
साख रह जाएगी और मतलब कि आपकी भक्ति भी हो जाएगी तो ये मुझे

894
01:04:31,840 --> 01:04:35,880
ये तो मुझे बहुत अच्छी बात लगी मैंने कहा ये तो ये तो बहुत ही जबरदस्त सामंजस्य बैठ गया

895
01:04:35,880 --> 01:04:39,880
है इसमें इसमें तो मेरे ही घर में अब जैसे मेरी मेरी जो पत्नी है

896
01:04:39,880 --> 01:04:44,080
वो शिवकी बहुत अनन्य भक्ति भक्त है तो वो अपनी भक्ति करती रहती रहती

897
01:04:44,080 --> 01:04:48,120
है उसमें करके मैं भगवती की उपासना करता हूं तो वो वाली बातें हैं तो जब गाड़ी वाड़ी में

898
01:04:48,120 --> 01:04:53,000
हम बातचीत हमारी चल रही थी बस थोड़ा सा समय लूंगा पांच मिनट और बोलूंगा मैं ज्यादा नहीं

899
01:04:53,000 --> 01:04:57,160
तो तो उस समय जब राम की बात हुई तो उन्होंने मुझे

900
01:04:57,160 --> 01:05:01,360
टोक दिया कि राम परब्रह्म थोड़ी

901
01:05:01,360 --> 01:05:05,680
ना है कृष्ण है और उन्होंने उसका आर्गुमेंट ये दिया

902
01:05:05,680 --> 01:05:10,040
ठीक है ध्यान से सुनेगा कि राम ने कभी नहीं बोला कि मैं हूं कृष्ण ने देखो हर जगह बोला है

903
01:05:10,040 --> 01:05:14,320
कि मैं यह हूं मैं वो हूं मैं ही सब कुछ करने वाला हूं राम ने कभी बोला है राम नहीं है

904
01:05:14,320 --> 01:05:20,320
वो तो उनका एक इनकार्नेसियों

905
01:05:23,400 --> 01:05:27,560
नहीं होगा भाई तो मेरे राम के लिए आप ऐसा

906
01:05:27,560 --> 01:05:31,560
बोल रहे हैं ठीक है तो फिर मतलब उस टाइम

907
01:05:31,560 --> 01:05:35,640
मेरी थोड़ी से बहस हो गई गाड़ी में अब मेरी जो हमारी जो मालकिन थी

908
01:05:35,640 --> 01:05:39,760
वो आप कर कंट्रोल कर ड्राइव भी कर रहा था अब दुख क्या हुआ

909
01:05:39,760 --> 01:05:43,760
खून खोल गया था मेरा ठीक है उस समय लेकिन मैंने

910
01:05:43,760 --> 01:05:47,920
कुछ उस समय कुछ मैंने उसको बोला कि तुलसीदास जी ने इतने

911
01:05:47,920 --> 01:05:51,920
इतनी बार इतनी मतलब चीजों के उनकी परबता सिद्ध की है

912
01:05:51,920 --> 01:05:55,960
ठीक है अपने ग्रंथों से अपने लिख के और शास्त्रों से ठीक है शास्त्र

913
01:05:55,960 --> 01:06:00,240
प्रमाण से सिद्ध की है तुलसीदास जी ने तो उसके ऊपर उनका ये आर्गुमेंट

914
01:06:00,240 --> 01:06:04,280
था अरे ऐसे तो कोई कुछ भी लिख के चला जाएगा तो थोड़ी ना मान लेंगे

915
01:06:04,280 --> 01:06:09,080
येला ये था उनका तो मुझे लगा कि तुलसीदास जैसे परम वैष्णव

916
01:06:09,080 --> 01:06:13,200
मतलब उनकी तो मतलब मिट्टी के धूल भी नहीं है हम मुझे

917
01:06:13,200 --> 01:06:17,440
लगता नहीं कि य जितने दर्शक बैठे होंगे शायद कोई हो भी तुसी जितना बड़ा वैष्णव

918
01:06:17,440 --> 01:06:21,760
आज के समय तो कोई मुझे लगता है कोई नहीं होगा ठीक है तो

919
01:06:21,760 --> 01:06:25,920
लेकिन उनको भी उन्होंने बोल दिया कि कोई कुछ भी लिख के चला जाएगा ना

920
01:06:25,920 --> 01:06:29,960
मान लेंगे तोय ये तर्क होता है ठीक है तो उस समय तो चलिए

921
01:06:29,960 --> 01:06:34,160
थोड़ा रिलेशन के सम्मान में मैंने इतना नहीं तक किया लेकिन

922
01:06:34,160 --> 01:06:38,240
मैंने अपने फिर छोटे भाई को बताया उसको भी बहुत दुख हुआ क्योंकि वो भी राम का ही भक्त

923
01:06:38,240 --> 01:06:38,800
है मतलब

924
01:06:38,800 --> 01:06:43,000
वो ऐसा है कि मतलब वो राम के अलावा किसी को जानते नहीं वो वाली भावना है उसकी ठीक है

925
01:06:43,000 --> 01:06:47,320
मतलब इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारे यहां किसी को भी

926
01:06:47,320 --> 01:06:51,400
मतलब किसी भी ब्रह्म के किसी स्वरूप को किसी देवी देवताओं को किसी उस दृष्टि

927
01:06:51,400 --> 01:06:56,120
से देखा जाए कि नहीं नहीं छोटे हैं बड़े हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है ठीक है मैं अगर

928
01:06:56,120 --> 01:07:00,320
दर्शन करने जाऊंगा भी तो राम नाम का श्री राम जय राम जय जय राम त्रयो दरी

929
01:07:00,320 --> 01:07:04,800
मंत्र जो है यह हनुमान जी महाराज का दिया हुआ वो जपता ही रहता हूं ठीक है और

930
01:07:04,800 --> 01:07:08,840
महादेव महादेव करता रहता हूं उस उसम कोई समस्या नहीं है मुझे मुझे कोई दिक्कत

931
01:07:08,840 --> 01:07:13,360
नहीं और ऐसा नहीं है लेकिन मुझे अब अब ये चीज जो है ना

932
01:07:13,360 --> 01:07:17,520
ये है फंडामेंटल डिफरेंस आप समझिए चीज ठीक है कि

933
01:07:17,520 --> 01:07:21,600
आपके रूट्स को मतलब इतना रिजट कर रहे हैं

934
01:07:21,600 --> 01:07:25,600
और यह जो दृष्टिकोण है ना पॉइंट ऑफ पूरा का पूरा अमिक है अगर आप इसको

935
01:07:25,600 --> 01:07:29,640
ध्यान से समझिए अगर ठीक है तो ये पूरा अब्राह्मिक है बिल्कुल

936
01:07:29,640 --> 01:07:33,640
देयर इज वन गॉड ये सारी चीजें है लेकिन उनकी जो फिलॉसफी है ना वो

937
01:07:33,640 --> 01:07:37,640
पूरी मैच करती है अब जिसके अगेंस्ट जिसके डिफेंस में ये लोग यह बोलते

938
01:07:37,640 --> 01:07:41,720
हैं कि अब उनको समझाना है तो उनकी भाषा में समझाना

939
01:07:41,720 --> 01:07:45,800
पड़ेगा ना मतलब बिल्कुल ठीक है ठीक है लेकिन उन्हीं की भाषा में आप यहां क्यों

940
01:07:45,800 --> 01:07:49,920
समझा रहे हो फिर यहां तो मत समझाइए ना फिर उनकी भाषा में जब

941
01:07:49,920 --> 01:07:53,880
आपने डिफरेंशिया है कि अमुक अमुक देश के

942
01:07:53,880 --> 01:07:58,000
प्रांत के लोगों को को ऐसी मतलब उनको अब्राम पॉइंट ऑफ व्यू से समझाना पड़ेगा

943
01:07:58,000 --> 01:08:02,160
तभी उनको बात समझ में आएगी तो यह तो अब्रिक

944
01:08:02,160 --> 01:08:06,320
देश है नहीं अगर मैं इस भारतवर्ष की बात करूं तो तो ऐसा नहीं है ठीक है

945
01:08:06,320 --> 01:08:10,320
तो उनको इस भाषा में समझाने की क्या आवश्यकता है तो फिर उसका जवाब नहीं होता

946
01:08:10,320 --> 01:08:14,440
कि ऐसा है वैसा है भक्ति करनी पड़ेगी करनी पड़ेगी य पर एक बड़ी बात

947
01:08:14,440 --> 01:08:18,520
याद दिलाऊंगा जब उनका इंटरव्यू चल रहा था मोग लीला जी का

948
01:08:18,520 --> 01:08:23,080
तो उनसे पूछा गया क्या भाई तुम ये शिव और विष्णु में भेद आप क्यों करते

949
01:08:23,080 --> 01:08:27,200
हैं देखिए वो तात्विक तात्विक है रस में

950
01:08:27,200 --> 01:08:31,640
मतलब लीलाओं का भेद है और तत्व से भेद नहीं है तो जैसे हमें प्राप्त

951
01:08:31,640 --> 01:08:35,720
है श्री कृष्ण भगवान को

952
01:08:35,720 --> 01:08:39,760
परम ब्रह्म के रूप में स्थापित करने वाली लीला है वैसे ही हमें

953
01:08:39,760 --> 01:08:43,760
व्यास जी के द्वारा ही प्राप्त है शंकर जी को परम तत्व के रूप में स्थापित करने

954
01:08:43,760 --> 01:08:47,760
वाली लीलाए वैसे ही हमें प्राप्त है राम जी को परम तत्व के रूप में

955
01:08:47,760 --> 01:08:51,920
स्थापित करने वाली लीलाए तो फिर आप एक यह

956
01:08:51,920 --> 01:08:56,000
एजेंडा लेकर क्यों चलते हो कि नहीं उन लीलाओं पर ध्यान मत दो

957
01:08:56,000 --> 01:09:00,320
जी तव तो एक ही है अच्छा फिर अगर ये कहेंगे हम वैष्णव

958
01:09:00,320 --> 01:09:05,240
है तो बात ये आ जाती है कि पहले आप वैष्णव हुए हैं

959
01:09:05,240 --> 01:09:09,080
इसलिए आप विष्णु को या कृष्ण को मानते हैं या

960
01:09:09,080 --> 01:09:13,280
पहले कृष्ण को मानते थे तब आप वैष्णव हुए हैं मतलब आपने शास्त्रों

961
01:09:13,280 --> 01:09:17,480
को पढ़ के कृष्ण की महिमा को जाना तो सारे शास्त्र पढ़ोगे तब तो मानोगे

962
01:09:17,480 --> 01:09:21,600
बिल्कुल त तो आपकी आस्था एक में जगी जी तो आपको यह

963
01:09:21,600 --> 01:09:25,680
कहना चाहिए या फिर आप यह प्रचार मत करो कि हम सनातन का प्रचार कर रहे हैं आप य कहो

964
01:09:25,680 --> 01:09:29,720
कि सनातन में जो हमें अच्छा लगता है हमारा

965
01:09:29,720 --> 01:09:33,720
जो मन करता है हम उस भाव का सनातन के उस अंश का प्रचार

966
01:09:33,720 --> 01:09:38,600
कर रहे हैं हालांकि वो अंश भी सनातनी अंश नहीं है पूरी तरीके से

967
01:09:38,600 --> 01:09:42,680
जी क्यों क्योंकि फर विष्णु से भी अलग कर दिया हरेर नाम हरेर नाम

968
01:09:42,680 --> 01:09:46,680
केवलम तो हरि का नाम लो फिर फिर

969
01:09:46,680 --> 01:09:50,720
आप ही तो विष्णु को अलग कर रहे हो कृष्ण से दो 62 में लीलाओं के भेद के आधार पर

970
01:09:50,720 --> 01:09:55,360
यदि कृष्ण सर्वोच्च सिद्ध होते हैं तो लीलाओं का भेद आपने मान लिया

971
01:09:55,360 --> 01:09:59,840
तो 2.2 में कि विष्णु भगवान भी थोड़ा सा इतर

972
01:09:59,840 --> 01:10:04,120
है कमतर है थोड़ा सा लीलाओं का भेद मान लिया जब आप

973
01:10:04,120 --> 01:10:08,200
जब आप कृष्ण को विष्णु से अलग मानते हैं हरि से कृष्ण को अलग मानते

974
01:10:08,200 --> 01:10:12,440
हैं लीला में तत्व से तोय सब एक है आप ही कह रहे हो तो लीला में अलग

975
01:10:12,440 --> 01:10:16,720
होने के कारण यदि आप ऊंच नीच कर रहे हैं तो विष्णु से यदि आप ऊपर मानते

976
01:10:16,720 --> 01:10:20,760
हैं कृष्ण को तो फिर आप कहां से हुए हरे नाम केवलम वाले आप

977
01:10:20,760 --> 01:10:24,080
कृष्ण नाम केवलम करो फिर वो लिखा नहीं है

978
01:10:24,080 --> 01:10:28,240
कहीं एक बहुत ही

979
01:10:28,240 --> 01:10:32,280
बहुत ही बड़े आचार्य है वैष्णव आप सब जानते होंगे

980
01:10:32,280 --> 01:10:36,280
थोड़ा सा अंकित जी को सुनना चाहूंगा अंकित जी क्योंकि काफी

981
01:10:36,280 --> 01:10:40,280
देर से कुछ बोलना चाह रहे हैं और पहली बार चैनल पर आए भी है तो

982
01:10:40,280 --> 01:10:44,400
उन्ह थोड़ा सा समय देना चाहू जी अंक जी बोलिए स्वागत है जी जी जी

983
01:10:44,400 --> 01:10:48,480
जी धन्यवाद महाराज अब इतना आप विद्वान लोगों को सुन रहे हैं

984
01:10:48,480 --> 01:10:52,720
तो मन कर नहीं रहा था वैसे बोलने का पर कुछ एक बातें मैं जरूर रखने

985
01:10:52,720 --> 01:10:56,920
चाहूंगा परकन की बात चल रही है कि ये भेद रखते हैं

986
01:10:56,920 --> 01:11:01,200
या यह रखते हैं यह केवल कुछ एक जो अपने

987
01:11:01,200 --> 01:11:05,240
ही ढंग से बनाए हुए संप्रदाय हैं जैसे कह सकते हैं य सुकन हो गया

988
01:11:05,240 --> 01:11:09,320
आर्य समाजी हो गए रामपाल वाले हो गए यह जितने भी

989
01:11:09,320 --> 01:11:13,720
हैं यह सब ही हमारी संप्रदायों को तोड़ने का काम करते हैं

990
01:11:13,720 --> 01:11:18,200
अब मैंने पूज्य गुरुदेव से जब दीक्षा ली तो गुरुजी ने अब रामानंदी

991
01:11:18,200 --> 01:11:22,480
संप्रदाय है तो राम जी की है ना उपासना के बारे में बताया

992
01:11:22,480 --> 01:11:26,720
पर मैंने गुरुजी से कहा गुरुजी मैं भागवत पढ़ता हूं

993
01:11:26,720 --> 01:11:31,000
आगे भागवत करूंगा तो गुरु जी ने कहा खूब करो कोई दिक्कत नहीं

994
01:11:31,000 --> 01:11:35,400
भगवान राम भगवान कृष्ण भगवान शिव कोई अंतर नहीं है

995
01:11:35,400 --> 01:11:39,160
शिवस हृदयम विष्णु विष्णु हृदयम शिव दोनों एक दूसरे के

996
01:11:39,160 --> 01:11:43,320
ह में है ठीक है अगर आप इसम भेद करेंगे

997
01:11:43,320 --> 01:11:47,480
तो आप गुरु जी ने मेरे को एक बात बोली गुरु जी बोले अगर आप व्यास

998
01:11:47,480 --> 01:11:51,680
पीठ पर बैठ कर के कथा कर रहे हैं और फिर भी व्यास

999
01:11:51,680 --> 01:11:56,000
जी द्वारा रचित आप ग्रंथों में भेद कर रहे

1000
01:11:56,000 --> 01:12:00,040
तो आपका व्यासपीठ पर बैठना निरर्थक है आप व्यासपीठ पर

1001
01:12:00,040 --> 01:12:04,080
बैठने के अधिकारी नहीं है ही बात अगर कोन की हम बात

1002
01:12:04,080 --> 01:12:08,320
कर रहे हैं तो कोन तो मैं अगर बात कह

1003
01:12:08,320 --> 01:12:12,720
तो बात गलत नहीं होगी जैसे पूर्व में ब्रिटिश

1004
01:12:12,720 --> 01:12:16,800
सरकार आई थी कब्जा करने के लिए ऐसी एक

1005
01:12:16,800 --> 01:12:21,080
तरह से ब्रांच चली हुई है जो धीरे धीरे कब्जा

1006
01:12:21,080 --> 01:12:25,200
करने का प्रयास कर रही है हमारे सभी ग्रंथों में भेद

1007
01:12:25,200 --> 01:12:29,320
ने का काम कर रही है हमारे वेदों को ना मान कर के हमारे शास्त्रों

1008
01:12:29,320 --> 01:12:33,920
को ना मान कर के हमारे सभी पुराणों में अंतर डाल रही

1009
01:12:33,920 --> 01:12:38,160
रामचरित मानस को नहीं मानती है अच्छा ये तोन की बात कर रहा

1010
01:12:38,160 --> 01:12:42,600
एक जय कृष्ण नाम संप्रदाय है अब आपने शायद सुना सुना

1011
01:12:42,600 --> 01:12:46,600
कृष्ण नाम संप्रदाय है मैं वहा के महामा

1012
01:12:46,600 --> 01:12:50,640
पजाब में मिला उन्होंने मुझसे क्या बात करी देखिए मतलब

1013
01:12:50,640 --> 01:12:54,320
मानसिकता कैसी है इनकी दिमाग जो है इनका य इतना खाली

1014
01:12:54,320 --> 01:12:58,440
हो चुका है नहीं पा रहे बोल क्या रहे उन्होंने मुझसे बात करी

1015
01:12:58,440 --> 01:13:02,640
कि जो श्रीमद् भगवत गीता है वह भगवान द्वारा रचित

1016
01:13:02,640 --> 01:13:06,720
है मैंने कहा बिल्कुल ठीक है भगवान की वाणी है भगवान ने बोला है

1017
01:13:06,720 --> 01:13:11,240
बोले जो बाकी ग्रंथ है वो व्यास जी महाराज ने लिखे

1018
01:13:11,240 --> 01:13:15,600
इस मानते केवल भगवत गीता को हम मानते हैं

1019
01:13:15,600 --> 01:13:19,880
तो उनसे अगर यह पूछा जाए कि भगवत गीता जो है वह महाभारत

1020
01:13:19,880 --> 01:13:24,200
से ही ली गई है तो महाभारत किसने रचना करी बोले वेदव्यास

1021
01:13:24,200 --> 01:13:28,440
जी महाराज ने अगर व्यास जी ने भागवत की रचना करी उस उस

1022
01:13:28,440 --> 01:13:32,760
महाभारत की रचना करी महाभारत में आप गीता जी को ले रहे हैं

1023
01:13:32,760 --> 01:13:36,840
तो आप महाभारत को क्यों नहीं मान रहे आप तो फिर

1024
01:13:36,840 --> 01:13:41,080
तो या तो आप किसी को मत मानो त भी हम माने ठीक है अगर

1025
01:13:41,080 --> 01:13:45,120
हमें कोई आ कर के मुस्लिम कोई हमसे डिबेट करे कि तुम्हारे सारे ग्रंथ है ना

1026
01:13:45,120 --> 01:13:49,120
यह निष्फल है कोई इसमें कोई शक्ति नहीं कोई कुछ नहीं तो उसकी बात

1027
01:13:49,120 --> 01:13:53,240
को एक समय के लिए हम यह कह सकते हैं कि वो जो अपने तरीके से तर्क दे रहा है वो ठीक

1028
01:13:53,240 --> 01:13:57,320
है उसको जो सिखाया जा रहा है ठीक है पर ये अपने ही देवताओं

1029
01:13:57,320 --> 01:14:01,320
में भेद कर रहे हम वेद शास्त्र तो यहां तक

1030
01:14:01,320 --> 01:14:05,360
कहते हैं कि तुम लोगों में भेद नहीं है जी तुम आपस

1031
01:14:05,360 --> 01:14:09,360
में जो हो तुम लोगों में भेद नहीं है और हमने लोगों की तो बात छोड़ो देवताओं में

1032
01:14:09,360 --> 01:14:13,360
भेद कर दिया मराज अरे देवताओं में अरे हरि और हरि

1033
01:14:13,360 --> 01:14:18,360
में ही भेद कर दिया अय देखिए ना हरि और हर में हरि और हर में अरे

1034
01:14:18,360 --> 01:14:22,840
भया याद आया बीच बीच में एक टॉप अप देता चलू मैं चर्चा में

1035
01:14:22,840 --> 01:14:26,840
सामग्री का पहली बात तो कोई हमारे

1036
01:14:26,840 --> 01:14:30,840
सज्जन है जो अभी मैंने कहा वो इंग्लिश वाली भगवत गीता कौन सी पढ़नी चाहिए

1037
01:14:30,840 --> 01:14:35,520
तो मेरे ख्याल से गीता प्रस से प्रकाशित है इंग्लिश में ट्रांसलेशन

1038
01:14:35,520 --> 01:14:39,680
जी देखिए अगर मैं इसमें जोड़ना चाहूंगा अगर आपको

1039
01:14:39,680 --> 01:14:44,680
ज्ञानेश्वरी अंग्रेजी अनुवाद है इसका अगर आपको मिल जाएगा तो वो आप अवश्य पढ़िए

1040
01:14:44,680 --> 01:14:49,240
और आपको जहां तक मेरी जानकारी मैंने अंग्रेजी एक दो ग्रंथों

1041
01:14:49,240 --> 01:14:53,360
देखे हैं मतलब पब्लिकेशन देखे हैं उन्होंने एज इटस ही ट्रांसलेट किया है उसको उसमें अंतर नहीं

1042
01:14:53,360 --> 01:14:57,560
किया है जो संत ज्ञानेश्वर जी महाराज ने जो लिखा है मराठी में उसका

1043
01:14:57,560 --> 01:15:01,600
हिंदी में भी एस इट ही किया है और उसी का अंग्रेजी मेंट किया तो अगर आपको मिल जा रही

1044
01:15:01,600 --> 01:15:05,720
है ज्ञानेश्वरी उस गीता का नाम ही ज्ञानेश्वरी साधक सुदा साधक

1045
01:15:05,720 --> 01:15:10,120
संजीवनी तत्व वि वेचनी यह सब गीता के अलग अलग वर्जन है जिन

1046
01:15:10,120 --> 01:15:14,200
कमेंट्री की है महापुरुषों ने वैसे ही ज्ञानेश्वरी संत ज्ञानेश्वर

1047
01:15:14,200 --> 01:15:18,240
द्वारा अपनी कमेंट्री दी गई है अगर आपको वो अंग्रेजी अनुवाद

1048
01:15:18,240 --> 01:15:22,880
मिलता है तो अवश्य ले लीजिए उसको पढ़िए

1049
01:15:22,880 --> 01:15:25,160
मुझे याद आई

1050
01:15:25,160 --> 01:15:29,160
हम लोग एस इट की बात कर रहे थे भगवत गीता और अभी भेद की

1051
01:15:29,160 --> 01:15:33,160
बात चल रही थी तो आप देखि भगवत गीता में स्पष्ट

1052
01:15:33,160 --> 01:15:37,800
स्पष्ट दै से मुक्त होने की बात हो रही है

1053
01:15:37,800 --> 01:15:41,880
श्लोक है पांचवा अध्याय और पवा लोक इसको आप

1054
01:15:41,880 --> 01:15:46,560
देख सकते हैं जी लते

1055
01:15:46,560 --> 01:15:51,440
ब्रम निर्माण वि से मुक्त होने की बात हो रही है

1056
01:15:51,440 --> 01:15:56,440
तो हिंदी जब इन्होने की है तो हिंदी में तो इनको लिखना प

1057
01:15:56,440 --> 01:16:01,120
क्यों लिखना पड़ गया क्योंकि य तो अपने म मनमोजी है कहीं लिखते क नहीं लिखते इट

1058
01:16:01,120 --> 01:16:05,480
मगर यहां परने अनुवाद कम से कम लिखा जो लोग

1059
01:16:05,480 --> 01:16:09,640
संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे

1060
01:16:09,640 --> 01:16:13,840
है द यानी की गुरुदेव क्या कहते हैं भेद

1061
01:16:13,840 --> 01:16:17,840
हमें दिख रहा है भेद का नाम संसार भेद का निर्वाह

1062
01:16:17,840 --> 01:16:21,920
करके अभेद की प्राप्ति य हमारा लक्ष्य तो भेद

1063
01:16:21,920 --> 01:16:26,080
क्या है द तो संशय से मोह से उत्पन्न

1064
01:16:26,080 --> 01:16:30,240
माया से उत्पन्न जो द्वैत है इसको हमें पार करना है

1065
01:16:30,240 --> 01:16:34,760
तो जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं

1066
01:16:34,760 --> 01:16:38,800
है ना जिनके मन आत्म साक्षात्कार में रत है

1067
01:16:38,800 --> 01:16:40,160
यहां द्वैत का खंडन

1068
01:16:40,160 --> 01:16:44,160
हो गया मैं द्वैत का वैसा खंडन नहीं मान रहा हूं तात्विक रूप से मगर

1069
01:16:44,160 --> 01:16:48,560
जिस दैत का प्रचार ऐसे किया जाता है अद्वैत के खंडन

1070
01:16:48,560 --> 01:16:52,760
में जिस द्वैत का प्रचार किया जाता है क्योंकि द्वैत हमारे

1071
01:16:52,760 --> 01:16:56,920
उसम है जिस मार्ग में बकुल

1072
01:16:56,920 --> 01:17:01,240
मगर यदि आप अद्वैत का खंडन करते हुए द द्वैत

1073
01:17:01,240 --> 01:17:05,280
की स्थापना करते हैं तो यहां पर इस प्रकार के द्वैत का

1074
01:17:05,280 --> 01:17:09,680
निराकरण किया जा रहा है कि जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत

1075
01:17:09,680 --> 01:17:13,760
से परे हैं यह भगवत गीता इसकन की है भैया

1076
01:17:13,760 --> 01:17:17,800
पा प जिनके मन में

1077
01:17:17,800 --> 01:17:21,880
आत्म साक्षात जिनके मन आत्म साक्षात्कार में रत है तो

1078
01:17:21,880 --> 01:17:26,080
जी आत्म साक्षात्कार में रत है जो समस्त जीवों

1079
01:17:26,080 --> 01:17:30,800
के कल्याण कार्य करने में सदय व्यस्त रहते हैं

1080
01:17:30,800 --> 01:17:35,040
तो आगे ऐसे लोगों को मुक्ति वाला कहा गया द्वैत से

1081
01:17:35,040 --> 01:17:39,080
परे भगवत गीता एज इट इज तथाकथित एज

1082
01:17:39,080 --> 01:17:43,240
इट इज है ना तो द्वैत से परो को

1083
01:17:43,240 --> 01:17:47,320
परे जो है उनको मुक्ति प्राप्त हो अब यहां पर पता है क्या है नीचे तात्पर्य आ

1084
01:17:47,320 --> 01:17:51,560
जाता है भाई बच के नहीं जा पाओगे अब

1085
01:17:51,560 --> 01:17:55,280
इसके नीचे आ जाता है तात्पर्य फिर क्या होगा अब

1086
01:17:55,280 --> 01:18:00,080
यहां पर घुट लाएंगे घुट पिलाएंगे पिलाएंगे

1087
01:18:00,080 --> 01:18:04,560
तो फिर क्या होगा अब यहां पर कह दिया गया केव

1088
01:18:04,560 --> 01:18:09,520
वही हा जी जी ल

1089
01:18:09,520 --> 01:18:12,280
जी

1090
01:18:12,280 --> 01:18:16,640
बोलिए जी मैं कुछ कह रहा था मैं यह कह रहा था मैं अभी

1091
01:18:16,640 --> 01:18:20,640
कुछ बातें रखकर अभी य से जाना चाहूंगा क्षमा चाहूंगा मेरा नेट

1092
01:18:20,640 --> 01:18:25,080
जा रहा था इसीलिए खमरा इसलिए बात

1093
01:18:25,080 --> 01:18:29,320
रख द फिर अभी यहा से जाता हूं

1094
01:18:29,320 --> 01:18:33,440
मैं ये जो बात कह रहा हूं इन्होने कैसे उस बात को मोड़ा दत वाली बात

1095
01:18:33,440 --> 01:18:37,560
को मोड़ा वो मैं पूरा कर दू फिर

1096
01:18:37,560 --> 01:18:42,240
ये कह रहे है केवल वही व्यक्ति सभी जीवों के कल्याण

1097
01:18:42,240 --> 01:18:46,440
कार्य में रत कहा जाएगा केवल वही व्यक्ति सभी जीवों के कल्याण

1098
01:18:46,440 --> 01:18:50,640
कार्य में रत कहा जाएगा जो पूर्णतया कृष्ण भावना भावित हो

1099
01:18:50,640 --> 01:18:54,760
कृष्णा कॉशसनेस इंग्लिश में अगर ट्रांसलेट करें

1100
01:18:54,760 --> 01:18:58,760
क कॉशसनेस तोय ब्रेन सिस्टम क्या है जहा

1101
01:18:58,760 --> 01:19:03,280
पर व शब्द नहीं भी है वहा पर भी कृष्णा कनेस औरन क्या है

1102
01:19:03,280 --> 01:19:07,400
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा

1103
01:19:07,400 --> 01:19:10,320
तो व्यक्ति सोचे तो शास्त्र में बात हो रही कृष्णा

1104
01:19:10,320 --> 01:19:14,400
कॉशसनेस की हर जगह और द्वैत से परे हो करर के

1105
01:19:14,400 --> 01:19:18,400
भी वो सब दत को मिक्सचर कर दिया भगवत

1106
01:19:18,400 --> 01:19:23,720
गीता ही इस प्रकार के अवद द का खंडन कर देती

1107
01:19:23,720 --> 01:19:28,640
र जी युगल जी आप अपनी बात रख ले अरे

1108
01:19:28,640 --> 01:19:32,760
बस लाइन बोलूंगा मैं जी बोलिए बोलिए यल

1109
01:19:32,760 --> 01:19:36,880
जी बोलिए आप बोलिए जी जी तो मैं ये कह

1110
01:19:36,880 --> 01:19:41,080
रहा था जैसे की इन्होंने बताया कि हम पंच देव

1111
01:19:41,080 --> 01:19:45,080
को उपासना मान जैसे एक ईट को आप अपने रखिए जैसे राम हो गए कृष्ण हो गए

1112
01:19:45,080 --> 01:19:49,280
शिव हो गए बाकी जो हो जाते हैं हम जैसे शिव जी के मंदिर में जाए

1113
01:19:49,280 --> 01:19:53,320
तो हम केवल उन्हीं को प्रणाम करके हम ये उनसे मांगे कि हमको भगवान कृष्ण

1114
01:19:53,320 --> 01:19:57,520
की भक्ति दीजिए यदि हम उनके हम यदि वो हमारे ईट है तो

1115
01:19:57,520 --> 01:20:01,560
तो जैसे हमारी दीक्षा ई श्री संप्रदाय के अंदर तो हमारे

1116
01:20:01,560 --> 01:20:05,680
गुरुदेव ने भी यही कहा था कि देखो किसी से घृणा मत करना अब

1117
01:20:05,680 --> 01:20:09,720
तुम श्री वैष्णव हो गए हो श्री वैष्णव का अर्थ यह नहीं होता कि भाई तुम

1118
01:20:09,720 --> 01:20:13,760
भगवान शिव से घृणा करने लग जाओ दुर्गा जी के मंदिर में नाक मु से उड़ने

1119
01:20:13,760 --> 01:20:17,760
लग जाओ जाकर के अभी मैंने वीडियो भी डाली थी गुरुजी की तो उसम बता रहे

1120
01:20:17,760 --> 01:20:21,760
थे कि कोई बा के मंदिर में जाएंगे तो राधा वल्लभ जी के

1121
01:20:21,760 --> 01:20:25,400
नहीं जाएंगे राधा वल्लभ जी के में जाएंगे तो राधा रमण नहीं जाए

1122
01:20:25,400 --> 01:20:29,440
तो एक घटना बताई गुरुदेव ने कि कई लोग सोच रहे थे

1123
01:20:29,440 --> 01:20:33,680
कि जो ठाकुर जी है वो तो श्री वैष्णव है तो श्री वैष्णव है तो ये महादेव के मंदिर

1124
01:20:33,680 --> 01:20:37,760
में नहीं जाएंगे भाई अब ऐसा होता है कि क्या पता ऐसे कट्टर श्री वैष्णव हो

1125
01:20:37,760 --> 01:20:41,880
की महादेव के मंदिर में नहीं जाएंगे गुरुजी के पास बात पहुंचाई गई की

1126
01:20:41,880 --> 01:20:45,920
आप तो ठाकुर जी श्री वैष्णव हो तो क्या आप शिव जी के मंदिर में जाओगे

1127
01:20:45,920 --> 01:20:49,960
तो गुरुदेव ने कहा क्यों नहीं जाएंगे शिवजी के मंदिर में अवश्य जाएंगे और शिव जी

1128
01:20:49,960 --> 01:20:54,120
से प्रार्थना करेंगे कि हमारी कृष्ण भक्ति और बढ़ाए

1129
01:20:54,120 --> 01:20:59,000
बिल्कुल नव दुर्गे आते हैं हम दुर्गा जी के मंदिर में जाते

1130
01:20:59,000 --> 01:21:03,360
हैं उनसे प्रार्थना करते हैं कि भाई दुर्गा जी की भक्ति हमारी बढे

1131
01:21:03,360 --> 01:21:07,400
भगवान कृष्ण के प्रति और आकर्षण बढ़े तो ये सारी बात

1132
01:21:07,400 --> 01:21:11,440
है और एक बात ये कि कलयुग के अंदर जैसे की जो कौन कहता है कि हम

1133
01:21:11,440 --> 01:21:16,120
हर जगह जो गीता बांटते हैं गीता से प्रचार करते तो मैं ये बात बता दूं कि

1134
01:21:16,120 --> 01:21:20,160
भागवत का जो महात्म इन्होंने खाया है महात्म के अंदर ये स्पष्ट रूप से लिखा हुआ

1135
01:21:20,160 --> 01:21:24,160
है कि जब ज्ञान और वैराग्य रो रहे थे वहां प वृद्ध अवस्था को प्राप्त

1136
01:21:24,160 --> 01:21:28,680
हो गए तो भक्ति माता रो रही थी दुखी हो रही थी मेरे ज्ञान और वैराग्य

1137
01:21:28,680 --> 01:21:33,040
दोनों पुत्र है वो वृद्ध अवस्था को प्राप्त हो गए हैं तो नारद

1138
01:21:33,040 --> 01:21:37,120
जी उनके कानों में गीता का भी पाठ करते हैं यह भी लिखा है गीता

1139
01:21:37,120 --> 01:21:40,880
का पाठ करते किंतु जन वैराग्य को होश नहीं आता

1140
01:21:40,880 --> 01:21:44,920
है तो गीता का पाठ करने से भी उनको होश नहीं आ रहा

1141
01:21:44,920 --> 01:21:49,080
है तो वहां पर स ऋषियों से भेट होकर के नारद जी की उनको यह बात

1142
01:21:49,080 --> 01:21:53,520
पता चलती है कि श्रीमद भागवत का साप्ताहिक पाठ किया जाए

1143
01:21:53,520 --> 01:21:58,000
तब ज्ञान और ञ जो है वो पुनः उनको अपनी जो

1144
01:21:58,000 --> 01:22:02,200
यवन अवस्था है जो योन

1145
01:22:02,200 --> 01:22:06,440
है वो प्राप्त होगी तो इसका अर्थ क्या हुआ कि जोय कहते हैं कि हम गीता का प्रचार

1146
01:22:06,440 --> 01:22:10,640
करते हैं गीता बांटते हैं इसका अर्थ गीता नहीं आपको फिर तो श्रीमद् भागवत ही मा

1147
01:22:10,640 --> 01:22:14,760
चाए गीता को भी मत मानिए फिर तो क्योंकि गीता के पाठ से भी ज्ञान वैराग्य को होश

1148
01:22:14,760 --> 01:22:19,000
नहीं आए कहा लिख रहा है श्रीमद भागवत के अंदर जो आप सात्विक पुराण जिसको कहते

1149
01:22:19,000 --> 01:22:23,040
सात पुराण ही इस बात को बता रही है तो फिर आप गीता को भी मत मानिए इसके

1150
01:22:23,040 --> 01:22:27,280
हिसाब से य जाए जी

1151
01:22:27,280 --> 01:22:33,280
ये आप तर्क करेंगे इनको पहले से पता था इसलिए पूरा महात्म उड़ा दिया ना

1152
01:22:33,280 --> 01:22:38,280
इसलिए दिया इसी वजह से उन्होने

1153
01:22:38,280 --> 01:22:42,400
महाया है श्रीमद भागवत से भक्ति भी मिलेगी ज्ञान भी मिलेगा

1154
01:22:42,400 --> 01:22:46,600
और वैराग्य भी मिलेगा तीनों की पुष्टि होगी तो तीनों की पुष्टि

1155
01:22:46,600 --> 01:22:50,600
श्रीम भागवत से ही हो रही है तो वहां पर आपको गीता बाटने की आवश्यकता नहीं

1156
01:22:50,600 --> 01:22:56,600
है फिर श्रीमद् भागवत का हर जगह प्रचार करिए गीता का मत करिए

1157
01:22:57,280 --> 01:23:01,320
सब जी भागवत जी ही यही है ना जैसे आपने बताया की गीता

1158
01:23:01,320 --> 01:23:05,760
का पाठ का भागवत जीस नेय लि गीता पाठ

1159
01:23:05,760 --> 01:23:09,960
एक बार बार किया नहीं हु थोड़ा होश

1160
01:23:09,960 --> 01:23:14,400
आया किंतु फिर बे की अवस्था में हो गए तो

1161
01:23:14,400 --> 01:23:18,600
ही श्रीमद भागवत के पाठ से ही उनको होश आया तो भाई

1162
01:23:18,600 --> 01:23:22,640
आपको सबको होश में लाने के लिए जैसे नारद जी ने श्रीमद भागवत की कथा

1163
01:23:22,640 --> 01:23:27,360
करी आपको महा श्रीमद भागवत की साप्ताहिक विधि

1164
01:23:27,360 --> 01:23:31,600
से कथा करनी पड़ेगी जब जाकर भक्ति ज्ञान वैराग्य पुष्ट होंगे यदि

1165
01:23:31,600 --> 01:23:35,840
साप्ताहिक विधि से आप पाठ नहीं कर रहे हो तो इसका अर्थ है कि आप ज्ञान

1166
01:23:35,840 --> 01:23:39,960
वैराग्य भक्ति को पुष्ट नहीं कर रहे हो भक्ति रानी आपके यहां पर रो

1167
01:23:39,960 --> 01:23:44,120
रही है केवल भक्ति को नचा रहे हैं मराज जी और कुछ

1168
01:23:44,120 --> 01:23:48,360
नहीं कर रहे हैं केवल भक्ति को नचाने का काम किया जा रहा है ज्ञान वैराग्य

1169
01:23:48,360 --> 01:23:52,880
से को दूर ले जा जब लखनऊ के प्रेसिडेंट

1170
01:23:52,880 --> 01:23:53,600
से शिवा

1171
01:23:53,600 --> 01:23:57,640
जी का इंटरव्यू हु उन्होने एक बात कही थी हम शास्त्रों के डीप में जाते ही नहीं है

1172
01:23:57,640 --> 01:24:01,640
जब आप शास्त्रों के डीप में नहीं जाते इसका मतलब ज्ञान वैराग्य लुत हो गया और

1173
01:24:01,640 --> 01:24:05,640
ज्ञान वैराग्य भक्ति रानी रो रही है और भक्ति रानी रो रही

1174
01:24:05,640 --> 01:24:09,720
हैव क्या है सीधी सी बात हो गई बिल्कुल

1175
01:24:09,720 --> 01:24:13,960
जी बिल्कुल ब इसम एक पॉइंट आपने बीच में एक पॉइंट

1176
01:24:13,960 --> 01:24:16,800
कह दिया था ये

1177
01:24:16,800 --> 01:24:20,800
सात्विक ग्रंथों का है ना तो वो बात देखिए अब

1178
01:24:20,800 --> 01:24:25,680
इसम एक पॉइंट जोड़ना बड़ा इंटरेस्टिंग बात है इस कि

1179
01:24:25,680 --> 01:24:29,960
आपके ये पद्म पुराण के उत्तर कांड में ये

1180
01:24:29,960 --> 01:24:34,040
236 वा चैप्टर है उसमें आई थिंक 18 से 21 के बीच में इन पुराणों की लिस्ट

1181
01:24:34,040 --> 01:24:38,240
दी गई है कि सात्विक कौन से हैं राजसिक कौन से हैं तामसिक कौन से हैं

1182
01:24:38,240 --> 01:24:42,240
ठीक है अब देखिए ठीक उसी ठीक है उसी

1183
01:24:42,240 --> 01:24:46,560
के उलट स्कंद पुराण में वैष्णव पुराणों को तामसिक

1184
01:24:46,560 --> 01:24:52,560
और शैव पुराणों को ये सात्विक बताया गया है अब क्या करें इसका

1185
01:24:56,320 --> 01:25:00,800
कि जो उध पुंड लगाते हैं ना उनको वो भी नरक गामी होते हैं ये भी लिखा है उसके

1186
01:25:00,800 --> 01:25:04,840
फिर इसका क्या करोगे जो भक्ति करते हैं वो भी नरक गामी होते ऐसा भी

1187
01:25:04,840 --> 01:25:08,920
लिखा है फिर उसका क्या करोगे इसका अर्थ क्या हो गया कि ये इसीलिए

1188
01:25:08,920 --> 01:25:13,080
दोष पूर्वक नहीं इसीलिए लिखा है सबकी जो भक्ति है वो अपने इष्ट के प्रति

1189
01:25:13,080 --> 01:25:16,520
रहे वो एकाकी रहे अनन्य

1190
01:25:16,520 --> 01:25:21,200
रहे यहां प मैं निराकरण थोड़ा सा सरल भाषा में दूं

1191
01:25:21,200 --> 01:25:25,600
वो यही है कि जिसका जो ईस्ट है

1192
01:25:25,600 --> 01:25:29,760
उसका मन उसमें रमेश यदि किसी के ईष्ट शिवजी है तो

1193
01:25:29,760 --> 01:25:33,800
उसके लिए जो वैष्णव पुराण है वो तांक हो ग

1194
01:25:33,800 --> 01:25:37,800
क्योंकि वो ट ईट की लीलाए नहीं होंगी उसम तो

1195
01:25:37,800 --> 01:25:42,000
उसका मन जो है एकाग्रता उसकी चंचलता आएगी एकाग्रता जाएगी

1196
01:25:42,000 --> 01:25:46,080
उसी प्रकार से जिसके ईट भगवान विष्णु है उनके लिए जो

1197
01:25:46,080 --> 01:25:50,080
श पुराण है वो तामसिक हो गए क्योंकि वो उसकी मुक्ति में बाधक

1198
01:25:50,080 --> 01:25:55,320
होंगे क्योंकि वहां पर विष्णु की लीलाए कम होंगी शिवजी की लीलाए बहुत ज्यादा होंगी

1199
01:25:55,320 --> 01:25:59,760
इसी प्रकार से अब इसका सबसे अच्छा तो तरीका वो है ना

1200
01:25:59,760 --> 01:26:03,920
भगवान ने कहा कि जो मुझसे अतिरिक्त देवी देवता

1201
01:26:03,920 --> 01:26:07,960
अतिरिक्त देवी देवताओं की पूजा करता है वह कभी मुक्ति को

1202
01:26:07,960 --> 01:26:11,320
प्राप्त नहीं होता इसका अर्थ क्या है

1203
01:26:11,320 --> 01:26:15,680
कि यदि आप किसी एंटिटी की सत्ता कृष्ण से

1204
01:26:15,680 --> 01:26:20,040
स्वतंत्र रूप में समझ रहे हैं तो आप मुक्ति प्राप्त

1205
01:26:20,040 --> 01:26:24,320
नहीं कर पाएंगे तो जो यहां पर वर्ड आया ना कि आप

1206
01:26:24,320 --> 01:26:28,840
ने उर्द कुंड लगा लिया अब आप हो भगवान आपके ईट है

1207
01:26:28,840 --> 01:26:33,160
भगवान शिव और आपने वैष्णव टीका लगा लिया

1208
01:26:33,160 --> 01:26:37,200
और इसके साथ साथ वो अर्थ भी मिला हुआ है कि आपने भगवान विष्णु की

1209
01:26:37,200 --> 01:26:41,800
सत्ता को भगवान शिव से अतिरिक्त स्वीकार कर लिया

1210
01:26:41,800 --> 01:26:45,880
स्वतंत्र भगवान विष्णु की स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार कर लिया शिव

1211
01:26:45,880 --> 01:26:50,120
से अलग तो वहां पर व आपके लिए नन गामी हो गया इसी प्रकार से

1212
01:26:50,120 --> 01:26:54,320
आप हो वैष्णव और आपने जो है मतलब ये

1213
01:26:54,320 --> 01:26:58,360
भाव दर्शा दिया कि हम शिव जी की स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार करते हैं

1214
01:26:58,360 --> 01:27:02,720
भले ही हमारे ईस्ट जो है विष्णु है तो स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार

1215
01:27:02,720 --> 01:27:06,920
करने के उसमें वह आपके लिए तामसिक हो गया वह आपके लिए अनुकरणीय

1216
01:27:06,920 --> 01:27:11,720
नहीं रहा तो ऐसे लेंगे तो तो ठीक है वरना फिर

1217
01:27:11,720 --> 01:27:15,760
वही वाली बात कुरान को लिखने वाला ही ईश्वर कह रहा है कि हम

1218
01:27:15,760 --> 01:27:20,400
अपनी आयतों को बदल देते हैं दो 106

1219
01:27:20,400 --> 01:27:24,400
ठीक है अब जब वो ये खुद कह रहा है कि हम अपनी

1220
01:27:24,400 --> 01:27:26,360
आयतों को बदल देते हैं तो पता नहीं

1221
01:27:26,360 --> 01:27:30,520
कौन सी बात कब बदल दी जाए भाई कैसे उस पर रिलाई करोगे

1222
01:27:30,520 --> 01:27:34,760
शाश्वता तो खत्म हो गई हा दो 187

1223
01:27:34,760 --> 01:27:38,960
में कह भी दिया कि वो जो पवित्र

1224
01:27:38,960 --> 01:27:43,040
रोजे होते हैं उन दिनों में स्त्री सं करना पहले मना

1225
01:27:43,040 --> 01:27:47,240
था मगर आज क्योंकि हमें फॉलो करने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा

1226
01:27:47,240 --> 01:27:51,560
कंट्रोल नहीं हुआ और उसने वो कर दिया तो इसलिए आज से हम अलाउ

1227
01:27:51,560 --> 01:27:56,440
कर दे रहे हैं जाओ सबको छूट हो गई आज से वाह

1228
01:27:56,440 --> 01:28:00,440
187 में है तो वो ठीक है उनका अपना

1229
01:28:00,440 --> 01:28:04,560
है भाई व अपना जैसे भी मगर वहां पर

1230
01:28:04,560 --> 01:28:08,760
स्वीकार किया जा रहा है कि जो आपको प्रामाणिक चीजें दे रहा है

1231
01:28:08,760 --> 01:28:13,040
वह वही सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन जो है बातों

1232
01:28:13,040 --> 01:28:17,280
को बदलने वाला भी हो सकता है और एक जगह और कहा गया है सातवे

1233
01:28:17,280 --> 01:28:21,440
उसम सेन पॉइंट समथिंग है कि मैं भटका हूं

1234
01:28:21,440 --> 01:28:25,840
तो यदि जो उस ग्रंथ को लिख है वो भटकाने वाला है

1235
01:28:25,840 --> 01:28:30,000
तो वो जब आपको भटका जाएगा तो बताएगा थोड़ी ना यदि व्यास

1236
01:28:30,000 --> 01:28:34,200
जी भटकाने के लिए भ्रम फैलाने के लिए एक शब्द भी लिख

1237
01:28:34,200 --> 01:28:38,520
सकते हैं तो वो जब आपको भटका रहे होंगे तो बताएंगे

1238
01:28:38,520 --> 01:28:41,400
क्या आप तो खुद ही अपनी पूरी उसको

1239
01:28:41,400 --> 01:28:45,480
चरमरा दे रहे हो तो ये सब कॉपी है ये सारे जो तर्क है ये वही

1240
01:28:45,480 --> 01:28:50,200
से कॉपी है इसीलिए मैं कहता हूं इस्लामिक वो है ये तक क्यों

1241
01:28:50,200 --> 01:28:54,200
क्योंकि सारे तर्क वहीं से आ रहे हैं देखो जब हम लोगों ने

1242
01:28:54,200 --> 01:28:58,440
आशियाना में जो पावर हाउस चौराहा है वहां पकड़ा था

1243
01:28:58,440 --> 01:29:02,560
इनको दो लड़के जो भगवत गीता दे रहे

1244
01:29:02,560 --> 01:29:06,840
थे लोगों कोने आपने दूसरा चैप्टर

1245
01:29:06,840 --> 01:29:10,880
ख खोला था आपने जी जी हा उसके बाद जैसे ही

1246
01:29:10,880 --> 01:29:14,920
अच्छा उसमें दो लोग थे एक नया था और

1247
01:29:14,920 --> 01:29:19,000
एक जो है सीनियर था तो नया वाले न

1248
01:29:19,000 --> 01:29:23,080
वाले के साथ क्या हुआ कि नया वाला थोड़ा प्रभावित होने

1249
01:29:23,080 --> 01:29:27,240
लगा हमारी बात सुन कर के वो थोड़ा सा न्यूट्रल बिहेव करने लगा भैया

1250
01:29:27,240 --> 01:29:31,680
बात तो सही कह रहे पढ़ना पड़ेगा ये वो है ऐसे कर जो पुराना वाला

1251
01:29:31,680 --> 01:29:35,840
था वो उसके कान में कहने लगा अरे अ भक्त है

1252
01:29:35,840 --> 01:29:40,160
इनसे बात मत करो अब इसका रूपांतरण समझिए इस्लामिक

1253
01:29:40,160 --> 01:29:44,920
भाषा में अरे ये काफिर है इनसे बात मत कर

1254
01:29:44,920 --> 01:29:48,920
हो गया ना बकुल इन बना हुआ

1255
01:29:48,920 --> 01:29:53,120
था जो ये जो ये भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त अपने आप को

1256
01:29:53,120 --> 01:29:56,520
बताते हैं कोर मैंने देखा बना हुआ जहां प ये लोग लिख रहे

1257
01:29:56,520 --> 01:30:00,560
हैं कि हम यहोवा को प्रसाद अर्पण करेंगे हम इनकी बुद्धि में यहोवा चल रहा है ये

1258
01:30:00,560 --> 01:30:04,560
देखिए आप नरसिंह भगवान की जगह इनकी बुद्धि में यहोवा आ रहा है इसका

1259
01:30:04,560 --> 01:30:08,640
अर्थ क्या हो गया मतलब महादेव भी बुद्धि में दूर दूर तक इनके नहीं है

1260
01:30:08,640 --> 01:30:12,840
है ना वहां पर राम जी दूर दूर तक नहीं है इनके पोस्टर पे नरसिंह

1261
01:30:12,840 --> 01:30:16,920
भगवान लिखा है तो नरसिंह भगवान का फोटो तो है किंतु लिखित में क्या दे रहे

1262
01:30:16,920 --> 01:30:21,080
हैं यहोवा को हम प्रसाद आपका अर्पण करेंगे हमको प्रसाद लाकर के दीजिए अब

1263
01:30:21,080 --> 01:30:25,320
बताइए ये क्या है अनन्य है ये यहोवा के प्रति मतलब बुद्धि में सपनों

1264
01:30:25,320 --> 01:30:28,920
में यवा आ रहा है अल्लाह आ रहा है

1265
01:30:28,920 --> 01:30:33,000
वाह और जो फ्री में नहीं देते हैं उसका मैं

1266
01:30:33,000 --> 01:30:37,120
आपको प्रमाण बता दूं कि उस दिन हमने क्या किया था इन

1267
01:30:37,120 --> 01:30:41,280
लोगों से बात पूरी करने से पहले ये भागे नहीं

1268
01:30:41,280 --> 01:30:45,440
भाग जाएंगे ना तो हमने पहले जाके इनके एक दो ग्रंथ ले

1269
01:30:45,440 --> 01:30:49,600
लिए थे पढ़ने के बहाने कि लाओ देखे क्या है क्या नहीं तो हमने हाथ में रख

1270
01:30:49,600 --> 01:30:55,320
लिए उसके बाद हमने अपने सवाल किए तो भागे नहीं क्योंकि ग्रंथ वाप

1271
01:30:55,320 --> 01:30:59,400
ना तो हमने पैसे दिए तो जो फ्री में नहीं देते हैं उसका

1272
01:30:59,400 --> 01:31:03,440
य पर उदाहरण आपको बता रहा हूं कि पहले हमने कहा भा देखो सवाल का

1273
01:31:03,440 --> 01:31:07,520
जवाब दोगे तो तो हम तुमको य वापस करेंगे भगवत गीता

1274
01:31:07,520 --> 01:31:11,600
नहीं दोगे मतलब इस तरह से उनको सवाल का उत्तर देने पर

1275
01:31:11,600 --> 01:31:15,760
वो किया विवस किया तो पहले वो जाने लगे

1276
01:31:15,760 --> 01:31:19,800
दिखाने के लिए ठीक है हम भगवत गीता नहीं चाहिए हम जा रहे हैं उसके बाद

1277
01:31:19,800 --> 01:31:23,920
50 मीटर 100 मीटर दूर से दौड़ के आए लाओ भगवत गीता लाओ मतलब

1278
01:31:23,920 --> 01:31:28,360
बिना पैसों के नहीं देंगे जो हमारी एक भ्रांति के भगवत गीता फ्री में बांटते हैं

1279
01:31:28,360 --> 01:31:32,400
ये भगवत गीता फ्री में नहीं बांटते हैं हमारे ही नाते रिश्तेदारों को वहां

1280
01:31:32,400 --> 01:31:36,640
पर उकसाया जाता है जो समृद्ध होते हैं कि आप 50 आप

1281
01:31:36,640 --> 01:31:40,800
100 आप एक 1100 भगवत गीता हम से खरीदिए और फिर

1282
01:31:40,800 --> 01:31:45,000
अपने रिश्तेदारों को बाट आप देखिए जो भी आपके समृद्ध रिश्तेदार होंगे

1283
01:31:45,000 --> 01:31:49,080
यदि वो इसकन से जूझ हुए होंगे या फसे

1284
01:31:49,080 --> 01:31:53,080
हुए होंगे उनके यहां प आपको पेटी पेटी भगवत गीता की गड्डी

1285
01:31:53,080 --> 01:31:57,360
रसी मिलेगी उनके घर प कि पीछे

1286
01:31:57,360 --> 01:32:01,520
साउंड आ रहा है वो बंद कर ले अपना साउंड

1287
01:32:01,520 --> 01:32:05,640
तो जब मैं थ क्लास में था मैं बताऊ थ क्लास में जब मैं था तो मेरे

1288
01:32:05,640 --> 01:32:10,000
स्कूल के अंदर ही स्कोन की तरफ से कंपटीशन करवाया गया था भगवत गीता का

1289
01:32:10,000 --> 01:32:14,160
तो वहां पर इन लोगों ने भगवत गीता फ्री में डिस्ट्रीब्यूशन करने के लिए स्कूल

1290
01:32:14,160 --> 01:32:18,360
के अंदर हमारे दे दी थी सारी भगवत गीता तो वहां पर 20

1291
01:32:18,360 --> 01:32:22,720
रप में भगवत गीता डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे थे लोग

1292
01:32:22,720 --> 01:32:26,680
नहीं वो जो भगवत गीता डिशन करेंगे मगर वो अधिकृत

1293
01:32:26,680 --> 01:32:30,960
रूप सेन की तरफ से वो नहीं होगा स्नसर वो कोई ना कोई एक

1294
01:32:30,960 --> 01:32:35,040
ढूंढा जाएगा किसको हलाल किया जाए वो किसी

1295
01:32:35,040 --> 01:32:39,400
डिवटी को ही पकड़ा जाएगा वो करेगा ऐसे अधिकृत रूप से स्न नहीं करेगा

1296
01:32:39,400 --> 01:32:43,400
वो किसी को स्पनर कर बनाया जाएगा कि भा आप ये जो

1297
01:32:43,400 --> 01:32:49,400
है करो ऐसा नहीं है कि वहा से विदेश से चला आ रहा है भगवत गीता फ्री

1298
01:32:49,960 --> 01:32:54,240
बाटो मैं स्वयं भुक्त भोगी रहा हूं आपको अंदाजा

1299
01:32:54,240 --> 01:33:00,240
कितने स्न के ग्रंथ है ठीक है कहा मैंने पहुंचा

1300
01:33:00,240 --> 01:33:05,160
दिए

1301
01:33:05,160 --> 01:33:09,400
ग देने के लिए ठीक

1302
01:33:09,400 --> 01:33:13,600
है आही एक मिनट इस्लामिक करण से

1303
01:33:13,600 --> 01:33:17,800
बात याद आ रही थी अभी हमको किसी जो व्यू है बता

1304
01:33:17,800 --> 01:33:21,840
रहे थे कि आपका वो जो एक कोई नीच व्यक्ति था जिसके बारे में हमने बात की

1305
01:33:21,840 --> 01:33:26,600
थी अभी अपनी ल में वो स्वयं को योगी कहता है कलयुग का

1306
01:33:26,600 --> 01:33:30,760
और यह व्यक्ति वही है जो वहां पर उपस्थित था जब हमारे घर

1307
01:33:30,760 --> 01:33:34,800
की मातृ शक्तियों के बारे में बात की जा रही थी इसका ये कहना है कि

1308
01:33:34,800 --> 01:33:39,160
समय के साथ साथ जो है धर्म को बदलना

1309
01:33:39,160 --> 01:33:43,360
धर्म धर्म नहीं उसके नियमों को बदलना चाहिए हालांकि इसको अबोध है इसको

1310
01:33:43,360 --> 01:33:47,760
ये नहीं मालूम कि धर्म है क्या सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने

1311
01:33:47,760 --> 01:33:52,000
वाली नियमावली का नाम ही धर्म है और देश काल परिस्थिति के साथ

1312
01:33:52,000 --> 01:33:56,120
साथ जो भी उसमें बदलाव होने उसकी व्यवस्था ईश्वर ने कर रखी है

1313
01:33:56,120 --> 01:34:00,200
पहले से ही दूसरी बात अंततोगत्वा अंतिम निर्णायक के रूप

1314
01:34:00,200 --> 01:34:04,400
में आपको परंपरा प्राप्त आचार्यों की गद्दी प्राप्त है जो आपको बताएगी

1315
01:34:04,400 --> 01:34:08,720
कि एट द एंड बिल्कुल इस सिचुएशन में क्या करना है अगर नहीं समझ में आ रहा है

1316
01:34:08,720 --> 01:34:12,800
और क्या नहीं करना है मगर इन सब चीजों को तिलांजलि देते हुए अगर

1317
01:34:12,800 --> 01:34:15,600
हम मन मुताबिक चीजों को अपने अनुसार करने

1318
01:34:15,600 --> 01:34:19,720
लगे तो क्या होगा कि पहली बात

1319
01:34:19,720 --> 01:34:23,840
तो सनातन नहीं रह गया धर्म है ना धर्म सनातन

1320
01:34:23,840 --> 01:34:28,320
रह गया दूसरी बात जब हम ये करते हैं कि ब बदलना चाहिए तो रामपाल

1321
01:34:28,320 --> 01:34:32,480
भी बदलेगा है ना स् कन भी

1322
01:34:32,480 --> 01:34:36,840
बदलेगा जाकिर नायक भी बदलेगा वो कहेगा मुर्गा चढ़ाओ

1323
01:34:36,840 --> 01:34:41,080
कृष्ण भगवान को नियमों में बदलाव आ गया धर्म थोड़ी ना बदला है

1324
01:34:41,080 --> 01:34:45,640
कृष्ण भगवान को मुर्गा चढ़ दो है ना और उनका

1325
01:34:45,640 --> 01:34:49,760
जाप करने की बजाय नमाज पढ़ो नियमों में बदलाव आया है

1326
01:34:49,760 --> 01:34:53,760
धर्म में थोड़ी ना आ गया तो ये सब सोचने वाली बात है

1327
01:34:53,760 --> 01:34:57,800
अब वो यह सब हमने उसको बताया भी और एक जगह वो यह भी कह

1328
01:34:57,800 --> 01:35:02,320
रहा है गायत्री मंत्र के जाप के निषेध के बारे में विधि निषद

1329
01:35:02,320 --> 01:35:06,600
का विरोध करते हुए कह रहा है कि भाई गायत्री मंत्र

1330
01:35:06,600 --> 01:35:11,480
से क्या प्राप्त होगा ये तो तब पता चलेगा ना जब उसको जपा जाए

1331
01:35:11,480 --> 01:35:16,920
तो इसका अर्थ ये व्यक्ति ये सिखा रहा है समाज को

1332
01:35:16,920 --> 01:35:21,040
कि अगर हमसे कहा गया धर्म के द्वारा कि माता और

1333
01:35:21,040 --> 01:35:25,280
बहन के बहन के साम समक्ष माता और बहन के साथ गमन

1334
01:35:25,280 --> 01:35:29,360
नहीं करना है उनके उनके उनकी ओर जो पत्नी की दृष्टि

1335
01:35:29,360 --> 01:35:33,680
होती है उस दृष्टि के साथ नहीं देखना है तो यह पहले

1336
01:35:33,680 --> 01:35:37,680
मानेंगे नहीं उसे पहले उसे करके देखेंगे यह समाज को सिखाना

1337
01:35:37,680 --> 01:35:41,680
चाहते पहले करके देखो और उसके बाद प्रैक्टिकली जब वो अप्लाई

1338
01:35:41,680 --> 01:35:45,960
करने लायक नहीं रहे उसके बाद य स्वीकारें यह इनकी

1339
01:35:45,960 --> 01:35:50,680
अजल गगरी चलकत जाय वाला मामला है और तो और मैंने

1340
01:35:50,680 --> 01:35:55,560
छोटी सी एक स्टोरी बना करके हमने यह भी दिया भाई

1341
01:35:55,560 --> 01:35:59,960
देखो ठीक है आपको लगता है बहुत बड़े ता तार्किक है तुरम

1342
01:35:59,960 --> 01:36:04,760
खा है ठीक है बहुत बड़े ठीक है हमने अपना नंबर दिया

1343
01:36:04,760 --> 01:36:09,800
74036 आप आइए सामना करिए

1344
01:36:09,800 --> 01:36:14,080
है ना और वो क्या कहते पी

1345
01:36:14,080 --> 01:36:14,580
पीछ

1346
01:36:14,400 --> 01:36:18,440
वार करने वाला शेर नहीं गीदड़

1347
01:36:18,440 --> 01:36:22,440
होता है और दुश्मन अगर कायदे का हो तो उसे मारने का मजा ही अलग होता

1348
01:36:22,440 --> 01:36:24,920
है

1349
01:36:24,920 --> 01:36:29,200
वसे परामर्श य है कि छोटे हो मत पड़ो

1350
01:36:29,200 --> 01:36:34,440
चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में

1351
01:36:34,440 --> 01:36:38,800
कोई भया गायत्री मंत्र का आपने

1352
01:36:38,800 --> 01:36:43,040
बात करी तो इसके विषय में चर्चा जरूर आपसे पूछना चाहूंगा कि

1353
01:36:43,040 --> 01:36:47,160
एक कोई देवी जी है मैंने पीछे वीडियो देखी थी काफी समय

1354
01:36:47,160 --> 01:36:51,520
पहले जिन्होंने अपने ऊपर से ऐसे यज्ञ धारण किया था कि

1355
01:36:51,520 --> 01:36:57,250
भैया उस के मामले में आपको पता नहीं जी जी

1356
01:36:57,250 --> 01:37:01,400
[संगीत] जी मामले में हमने जो

1357
01:37:01,400 --> 01:37:05,440
है उनको पूछ लिया कि वेदों में लिखा हुआ है कि कपन

1358
01:37:05,440 --> 01:37:10,000
और मेखला पहनकर ब्रह्मचारी यज धारण करता है

1359
01:37:10,000 --> 01:37:14,160
आप जो है सलवार सूट में कर रहे हो साड़ी भी नहीं है तो यदि

1360
01:37:14,160 --> 01:37:18,440
आप अपनी किसी चीज को शास्त्रोक्त रूप में प्रस्तुत कर रहे हो शास्त्रीय

1361
01:37:18,440 --> 01:37:22,440
प्रश्न आपसे पूछे जा सकते हैं या तो आप कहो मत शास्त्रोक्त है आप बोल

1362
01:37:22,440 --> 01:37:26,520
दो मैं जो जो यह धागा पहन रही हूं यह जो है ड्रामा है यह

1363
01:37:26,520 --> 01:37:30,520
यज पवित नहीं है यह वेदा में अधिकार दिलाने

1364
01:37:30,520 --> 01:37:34,720
वाली प्रक्रिया नहीं है अगर दिखा तो आप वैसे ही रही हो लोगों को

1365
01:37:34,720 --> 01:37:38,840
और फिर उसम प्रश्न किया जा रहा है तो आप कह रहे हो कि कपड़ों में प्रश्न कर रहा है हम कपड़ों

1366
01:37:38,840 --> 01:37:40,680
में प्रश्न तब नहीं करेंगे

1367
01:37:40,680 --> 01:37:44,880
जब आप अपनी उस चीज को शास्त्रो धार्मिक रूप में

1368
01:37:44,880 --> 01:37:49,720
प्रस्तुत नहीं करेंगे हमें कोई मतलब नहीं अने निजी जीवन में क्या कर रहे

1369
01:37:49,720 --> 01:37:53,840
हैं तो उसी उसी मामले को वो

1370
01:37:53,840 --> 01:37:58,320
करते हुए और हमारे पूरे विरुद्ध एक पूरा षड्यंत्र

1371
01:37:58,320 --> 01:38:02,960
रचा गया बहुत सारे अलंकार समाजिक एकत्रित हो गए तरह तरह से

1372
01:38:02,960 --> 01:38:07,080
और जो हमारे परिवार की मातृ शक्तियों को भी उसम जो छवियां

1373
01:38:07,080 --> 01:38:11,480
उन्ह प्राप्त हो गई पुरानी जब हम भटके हुए थे दिशाहीन व्यक्ति थे

1374
01:38:11,480 --> 01:38:15,560
उस समय की उनको फोटो प्राप्त हो गई और उसके नाम पर

1375
01:38:15,560 --> 01:38:19,960
वो अपनी रोटिया सेकने लगे ये करने का अर्थ क्या

1376
01:38:19,960 --> 01:38:24,400
ये करने का अर्थ क्या निकला इनके पास सक उत्तर नहीं

1377
01:38:24,400 --> 01:38:28,920
ये देखो यहां पर लिखा है यह वाले वस्त्र भी धारण कर सकते हैं

1378
01:38:28,920 --> 01:38:33,120
अरे भाई मैंने वहा पर ये भी कहा कि अगर सीता माता का उदाहरण

1379
01:38:33,120 --> 01:38:37,160
लेते हो जो कि गलत है उसका भी उदाहरण नहीं लिया जा सता वो उसम

1380
01:38:37,160 --> 01:38:41,200
अलग तर्क है मगर आप यदि सीता माता का उदाहरण लेते भी हो

1381
01:38:41,200 --> 01:38:45,200
या आप जो है र्गी मैत्र का उदाहरण

1382
01:38:45,200 --> 01:38:49,240
लेते हैं तो क्या इन लोगों ने तलवार सूट धारण करके

1383
01:38:49,240 --> 01:38:55,000
इस तरह की जो वेदोक्त विधिया उनका पालन किया होगा बताइए

1384
01:38:55,000 --> 01:38:55,840
तो यह वाली

1385
01:38:55,840 --> 01:38:59,960
बात थी व उसको पर्सनल दिखा रहे हैं हमारी टिप्पणी उस बात पर

1386
01:38:59,960 --> 01:39:04,280
थी आपने जो विधि दिखाई है व शा है कि नहीं

1387
01:39:04,280 --> 01:39:08,560
और वो उसी के मामले पर हमारे ऊपर प्रहार

1388
01:39:08,560 --> 01:39:12,720
हुआ है और उसके बाद हमने एक जो है एक

1389
01:39:12,720 --> 01:39:16,880
उस वीडियो के बारे में यथोचित जाच पड़ताल

1390
01:39:16,880 --> 01:39:21,000
करते हुए हम जो है एक

1391
01:39:21,000 --> 01:39:25,240
कानूनी सलाह ले रहे हैं कर सकते क्या नहीं कर सकते उपयुक्त

1392
01:39:25,240 --> 01:39:29,240
रूप से यच कारवाई करेंगे क्योंकि उसमें

1393
01:39:29,240 --> 01:39:33,360
जिनका रोल नहीं भी था हमारे वीडियो में उनको भी घसीटा गया है

1394
01:39:33,360 --> 01:39:36,240
तो ठीक

1395
01:39:36,240 --> 01:39:40,240
हैलिए याद आई किसी

1396
01:39:40,240 --> 01:39:45,040
को कभी हम छेड़ते नहीं किसी को कभी हम छेड़ते नहीं

1397
01:39:45,040 --> 01:39:49,040
कोई हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं ड़ते नहीं हा

1398
01:39:49,040 --> 01:39:53,360
हमारे पुराने फोटो आप देखेंगे तो उसम हम गल लगा के

1399
01:39:53,360 --> 01:39:57,480
गल तो अभी भी लगाते हैं वस्त्र थोड़ा अलग हो गए गोगल अभी

1400
01:39:57,480 --> 01:40:01,480
भी लगाते हैं तो मेरा उनसे कहना है जो

1401
01:40:01,480 --> 01:40:05,520
उस पर जो टिप्पणियां की है हमने अपने काम करने

1402
01:40:05,520 --> 01:40:09,760
के तरीके बदले हैं जीवन को जीने के तरीके बदले हैं

1403
01:40:09,760 --> 01:40:11,200
सेवर नहीं

1404
01:40:11,200 --> 01:40:15,320
बदले ठीक है ना जदा खतरनाक

1405
01:40:15,320 --> 01:40:21,200
होता है हा बोलिए अंकित जी घायल नहीं ेर

1406
01:40:21,200 --> 01:40:25,200
जी कर रहा य बात इसलिए स्मरण में

1407
01:40:25,200 --> 01:40:29,240
आई क्योंकि मैं हिमाचल से हूं पंजाब साथ में लगता है यहां

1408
01:40:29,240 --> 01:40:33,960
एक और संप्रदाय महाराज जी चलती हैको राधा स्वामी कहा जाता है

1409
01:40:33,960 --> 01:40:38,080
नाम राधा स्वामी है पर वो मानते नहीं है किसी भी इस चीज

1410
01:40:38,080 --> 01:40:42,360
को पर ऐसे मानने वाले कुछ एक बिटिया

1411
01:40:42,360 --> 01:40:46,520
है बहने कह सकते हैं कुछ एक बहनिया जिन्होंने कुछ समय

1412
01:40:46,520 --> 01:40:50,600
पहले मुझसे यह प्रश्न पूछा था जैसे आपके य जने

1413
01:40:50,600 --> 01:40:54,640
का यत का तो जहां तक मुझे ज्ञान था मैंने

1414
01:40:54,640 --> 01:40:58,720
थोड़ा बहुत बताया भी था और मुझे याद है कि आपकी वीडियो आ

1415
01:40:58,720 --> 01:41:02,880
चुकी थी और मैंने भेजी थी खुद सुनने में नहीं वो समय लग पाया

1416
01:41:02,880 --> 01:41:06,880
खुद नहीं सुनी थी पर भेजी जरूर थी आज के समय में जितना भी

1417
01:41:06,880 --> 01:41:10,880
जिसको भी जो भी शंका होती है तो वीडियो आपकी भेज दी जाती है कि भैया यहां

1418
01:41:10,880 --> 01:41:14,920
सुन लो प्रमाण भी मिल जाएगा ग्रंथ भी पता लग जाएगा पृष्ठ नंबर भी

1419
01:41:14,920 --> 01:41:19,480
पता गा श्लोक भी पता चलेगा जो आपकी शंका हो पूछो

1420
01:41:19,480 --> 01:41:23,760
आपको पूरा जवाब मिलेगा अ ये सुकन की बात थी ना स्कोन

1421
01:41:23,760 --> 01:41:26,280
में अभी यहां पर हमारे नजदीक में भी कुछ है

1422
01:41:26,280 --> 01:41:30,400
जैसे मैं पहले मैंने आपको बताया कि लोग सिर्फ नाचने के लिए स्कोन मंदिर जाते

1423
01:41:30,400 --> 01:41:34,760
हैं तो उनको यह लगता है कि भाई देखने में कितना सुंदर है साफ सफाई है

1424
01:41:34,760 --> 01:41:38,880
और लोग नाच रहे हैं बस कीर्तन चल रहा है वो नाच रहे हैं इसीलिए

1425
01:41:38,880 --> 01:41:43,200
स्कन का पीछा कर रहे हैं और इतना स्कोन के पीछे जैसे अनन्य

1426
01:41:43,200 --> 01:41:47,440
भैया ने बात करी कि अनन्य ऐसी उसमें हो गई है उन स्कोन वालों के उनके

1427
01:41:47,440 --> 01:41:51,440
पीछे कि वो ऐसा उसमें रीच चुके हैं पूरी

1428
01:41:51,440 --> 01:41:55,520
तरह से कि जो वो बोल रहे हैं वो चीज व मान दे रहे और

1429
01:41:55,520 --> 01:41:59,560
किसी अगर मैं यहां अपने इधर किसी को पूछूं कि क्या वह राजेंद्र दास जी

1430
01:41:59,560 --> 01:42:03,640
महाराज को जानते हैं क्या शंकराचार्य भगवान को जानते हैं शंकराचार्य

1431
01:42:03,640 --> 01:42:07,840
भगवान का नाम इनको तब सुनाई पड़ा जब इनको यह राम मंदिर का विवाद

1432
01:42:07,840 --> 01:42:12,080
सामने आया यूर्त को लेकर के जब बात चली तब इनको

1433
01:42:12,080 --> 01:42:16,160
पता लगा कि कोई शंकराचार्य नाम की भी पदवी हमारे यहां है य

1434
01:42:16,160 --> 01:42:20,760
हमारे चार शंकराचार्य है ऐसे ऐसे लोगों को

1435
01:42:20,760 --> 01:42:25,240
बत ब बदलाव आया इसीलिए मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया

1436
01:42:25,240 --> 01:42:29,320
मेरा माथा ठनक गया पहले तो मुझे जब मेरे वही

1437
01:42:29,320 --> 01:42:33,720
मैंने कहा भगवत कृपा थोड़ी सी रही बचपन से पिताजी के द्वारा शंकराचार्य

1438
01:42:33,720 --> 01:42:37,960
शंकराचार्य इस तरह से सुनते रहे पिताजी बताते भी है बचपन में उन्होंने

1439
01:42:37,960 --> 01:42:41,360
करपात्री जी की सेवा भी की है जो पूज्य पूज्य

1440
01:42:41,360 --> 01:42:45,520
पाद ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी है वो उनका जब शिविर

1441
01:42:45,520 --> 01:42:49,760
लगा होगा घर के आसपास तो उन्होंने काजू बादाम वगैरह खाने को दिए थे

1442
01:42:49,760 --> 01:42:53,920
पिताजी ऐसा बताते हैं तो कुछ ऐसी ईश्वरीय अनुकंपा क्योंकि स्कंद

1443
01:42:53,920 --> 01:42:58,080
पुराण गुरु गीता में लिखा है ना कि अनेक जन्मों के

1444
01:42:58,080 --> 01:43:02,200
पुण्य कर्मों के बाद ये प्राप्त होता है तो मैं आपको

1445
01:43:02,200 --> 01:43:06,200
बताऊं कि जब मुझे मैं आपको दिखाई

1446
01:43:06,200 --> 01:43:10,680
देता हूं मैंने एक बुक लिखी थी बहुत

1447
01:43:10,680 --> 01:43:14,840
मतलब प्रयत्न कर कर के मैंने एक बुक लिखी तो उस

1448
01:43:14,840 --> 01:43:19,320
बुक का जो उद्देश्य था वो यह था कि किसी भी नास्तिक को नास्तिक

1449
01:43:19,320 --> 01:43:23,560
से और धीरे-धीरे उसको यथोचित जितने भी प्रासंगिक विषय

1450
01:43:23,560 --> 01:43:27,680
उसके बारे में बताते हुए और कि भक्ति की

1451
01:43:27,680 --> 01:43:32,040
ज्ञान कर्म और भक्ति निराकार साकार द्वैत अद्वैत जो बेसिक नॉलेज

1452
01:43:32,040 --> 01:43:36,640
है उसको देते हुए राम ने सीता जी सीता माता का परित्याग क्यों किया कृष्ण

1453
01:43:36,640 --> 01:43:41,320
कृष्ण भगवान की जो रास लीला उसका क्या अर्थ है शिव मोहिनी प्रकरण का क्या अर्थ है विष्णु

1454
01:43:41,320 --> 01:43:45,680
ये सारे जितने भी प्रासंगिक विषय थे इनके बारे में बताते हुए

1455
01:43:45,680 --> 01:43:49,840
और तर्क और युक्ति के साथ उनको सार्वभौम जो जगतगुरु शंकराचार्य

1456
01:43:49,840 --> 01:43:53,920
होते हैं उसके बारे में बताया उनके बारे में उस पद के बारे में बता दिया

1457
01:43:53,920 --> 01:43:56,640
जाए एक व्यक्ति को जीरो से अगर नास्तिक

1458
01:43:56,640 --> 01:44:00,640
भी आएगा ना उसको भी यदि वो सकारात्मक दृष्टि लेकर आएगा उसको

1459
01:44:00,640 --> 01:44:04,880
भी हम भक्त बना सकते हैं उसको भी हम वेदोक्त मार्ग पर चलने वाला

1460
01:44:04,880 --> 01:44:09,080
बना सकते हैं ऐसा एक हमने आचार्यों की कृपा से जो हमें

1461
01:44:09,080 --> 01:44:13,320
ग्रंथ प्राप्त है उनके ग्रंथों को चैप्टर को संकलित कर कर के एक ग्रंथ

1462
01:44:13,320 --> 01:44:17,520
लिखा और उस ग्रंथ का नाम हमने रखा

1463
01:44:17,520 --> 01:44:21,560
सर्व मान जगतगुरु शंकराचार्य ये उस ग्रंथ का नाम था

1464
01:44:21,560 --> 01:44:25,720
क्योंकि उसमें शुरुआत तो नास्तिक से होती है मगर उसका परवन होता

1465
01:44:25,720 --> 01:44:30,080
है आकर के शंकराचार्य रूपी सागर में ठीक है

1466
01:44:30,080 --> 01:44:34,440
तो हमने उसका नाम लिख दिया सर्व मान सार्वभौम

1467
01:44:34,440 --> 01:44:39,080
जगतगुरु शंकराचार्य अब हम उसको जब

1468
01:44:39,080 --> 01:44:43,080
पहली बार जब आसपास कभी शंकराचार्य जी आए तो मैं अपने मित्रों

1469
01:44:43,080 --> 01:44:47,200
के पास गया और मैं उनको बोल रहा हूं पागलों की तरह अरे य

1470
01:44:47,200 --> 01:44:51,200
शिव स्वरूप शंकराचार्य आए हैं चलो चलो तुम्हारे भाग्य खुल

1471
01:44:51,200 --> 01:44:55,240
गए चलो मैं उनकी महिमा जान कौन है मगर लोग

1472
01:44:55,240 --> 01:44:58,960
मुझे चल हवा आने

1473
01:44:58,960 --> 01:45:03,160
दे तो वो क्या है जब आज की परिस्थिति हो गई जब आप गुरु

1474
01:45:03,160 --> 01:45:07,320
के गुरु का नाम लोगे ना आम समाज में आम जन में तो

1475
01:45:07,320 --> 01:45:11,400
वो आपको ति निष्ठ समझेगा धर्म नि नहीं समझेगा वो

1476
01:45:11,400 --> 01:45:12,400
आपको

1477
01:45:12,400 --> 01:45:16,400
ईश्वर निष्ठ नहीं समझेगा वो आपको व्यक्ति समझेगा कि अपने गुरु से

1478
01:45:16,400 --> 01:45:20,440
जोड़ना चाहता है जी सब मनय जो

1479
01:45:20,440 --> 01:45:24,840
संशय है ना मैंने वो शलोक पढ़ लिया था भगवत गीता संशय आत्मा विनती

1480
01:45:24,840 --> 01:45:28,960
और उस संशय का समाधान एक प्रामाणिक आचार्य के शरण में जाके ही हो सकता

1481
01:45:28,960 --> 01:45:33,000
है तो मैं उनको हिला रहा हूं कॉलर पकड़ पकड़ के मैं पागलों की तरह

1482
01:45:33,000 --> 01:45:37,120
वैसे जैसे थोड़ा सा नहीं आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है व्यक्ति खुशी के मारे

1483
01:45:37,120 --> 01:45:41,640
तो मैं ऐसे करके उनको हिला रहा हूं अपने मित्रों को चलो चलो अरे चलो शंकराचार्य

1484
01:45:41,640 --> 01:45:45,920
आए चलोगे नहीं ऐसे कर रहा हूं और वो ऐसे अरे चल रे हवा आने दे

1485
01:45:45,920 --> 01:45:50,040
वो ऐसे कर रहे हैं तो मैं काफी दिनों तक मेहनत

1486
01:45:50,040 --> 01:45:54,080
जब करता रहा लोगों को अपनी वो जो ग्रंथ लिखा था व सुना ने जाता था कि

1487
01:45:54,080 --> 01:45:58,360
सुन लो भाई ये ग्रंथ सुन लोय इसमें देखो बहुत सारी अच्छी चीज

1488
01:45:58,360 --> 01:46:02,680
सुनते नहीं थे क्यों क्योंकि उसके पृष्ठ पर लिखा था सार्वभौम जगतगुरु

1489
01:46:02,680 --> 01:46:06,960
शंकराचार्य शंकराचार्य तो फिर मैंने एक दिन यह निर्णय

1490
01:46:06,960 --> 01:46:11,680
लिया कि ऐसे काम नहीं चलेगा लोगों को अपनी बात सुनानी होगी

1491
01:46:11,680 --> 01:46:15,720
तो क्या करें तो मैंने उसके मेन पृष्ठ पर उसका नाम बदल के

1492
01:46:15,720 --> 01:46:19,320
ये कर

1493
01:46:19,320 --> 01:46:23,360
दिया दिख रहा है आपको ना हां दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है

1494
01:46:23,360 --> 01:46:27,720
जी जी मैंने उसके कवर पेज प जो मैंने वो

1495
01:46:27,720 --> 01:46:31,760
संकलन किया था विषयों का विभिन्न उसके मेन

1496
01:46:31,760 --> 01:46:35,520
प्रश् पर उसका नाम बदल के य

1497
01:46:35,520 --> 01:46:39,680
आवान और वही आवान है जो आज आपको य चरितार्थ होता हुआ

1498
01:46:39,680 --> 01:46:43,760
यब के माध्यम से या शोभा यात्रा के माध्यम

1499
01:46:43,760 --> 01:46:47,760
से वही सब कुछ है जी जी वही अब जब

1500
01:46:47,760 --> 01:46:51,880
मैंने आहवान कर दिया तो व्यक्ति ने मुझको थोड़ा बहुत

1501
01:46:51,880 --> 01:46:56,040
समय देना चालू किया समझना चालू किया बात को सुनना चालू किया क्योंकि

1502
01:46:56,040 --> 01:47:00,080
शंकराचार्य का मतलब व्यक्ति निश्ता नहीं है शंकराचार्य का अर्थ ही

1503
01:47:00,080 --> 01:47:04,240
है धर्म शंकराचार्य का अर्थ ही है वास्तविक धर्म विशुद्ध

1504
01:47:04,240 --> 01:47:08,400
धर्म जो हमारे प्रामाणिक जितने भी आचार्य है परंपरा प्राप्त

1505
01:47:08,400 --> 01:47:13,160
उन से कोई भी नाम आप ले लो उसका अर्थ ही है धर्म

1506
01:47:13,160 --> 01:47:17,240
बस यह है कि गुरु का आलंबन लिए बिना उसके वास्तविक स्वरूप को प्राप्त

1507
01:47:17,240 --> 01:47:21,880
करना संभव नहीं होता तो

1508
01:47:21,880 --> 01:47:25,960
वो जो व्यक्ति के बारे में बता दूं थोड़ा सा अब वो एक

1509
01:47:25,960 --> 01:47:30,160
पॉइंट दे रहा है कि भाई कर तुम भी वही रहे हो जो बदलने की बात करता

1510
01:47:30,160 --> 01:47:34,320
है ना इस देश काल परिस्थिति के अनुसार जो बदलना चाहिए धर्म को

1511
01:47:34,320 --> 01:47:38,880
महाभारत में लिखा है भले ही सनातन का अर्थ ही है नित्य

1512
01:47:38,880 --> 01:47:42,920
नित्य स्थाई व ये भूल जाता है तो अब वो

1513
01:47:42,920 --> 01:47:46,960
कह रहा है कि भाई कर तुम भी वही रहे हो जो मैं कर रहा हूं

1514
01:47:46,960 --> 01:47:51,360
है ना या तो तुम समझना नहीं चाह रहे हो समझ नहीं रहे हो भाई

1515
01:47:51,360 --> 01:47:55,400
जितने अंश में मैं शास्त्र विरुद्ध हूं जितने अंश

1516
01:47:55,400 --> 01:47:59,760
में मैं शास्त्रों का अनुगमन नहीं कर पा रहा हूं उतने अंश में सीना

1517
01:47:59,760 --> 01:48:04,160
ठोक के कहूंगा यह बात अशा स्त्रीय है जिससे

1518
01:48:04,160 --> 01:48:08,280
कि व्यक्ति शास्त्रीय और अशा स्त्रीय में निर्णय ले पाए अगर हम

1519
01:48:08,280 --> 01:48:12,360
अपनी अशा स्त्रीय चीजों को शास्त्रीय रूप में प्रस्तुत करेंगे कि नहीं नहीं

1520
01:48:12,360 --> 01:48:16,520
कर तो मैं शास्त्रों के बाहर का काम रहा हूं मगर य शास्त्रीय मानो इसको क्योंकि

1521
01:48:16,520 --> 01:48:20,520
आज की टाइम की डिमांड है तो जो व्यक्ति कठिनाई पूर्वक शास्त्र का

1522
01:48:20,520 --> 01:48:25,000
आलंबन ले रहा होगा उसका क्या हो उसको व्यक्ति कैसे पहचाने का

1523
01:48:25,000 --> 01:48:29,120
जैसे मान लीजिए कि

1524
01:48:29,120 --> 01:48:33,440
मैं सपोज करिए शास्त्रीय रूप में कैसे चले मान लीजिए एक ब्राह्मण

1525
01:48:33,440 --> 01:48:37,680
है और उसको सौचा चार के लिए बताया गया कि भाई आप

1526
01:48:37,680 --> 01:48:41,960
जो है मिट्टी लेकर चलो उसका उपयोग करो इतनी बार वो

1527
01:48:41,960 --> 01:48:46,000
यह सब कुल्ला वगैरह सब बताया गया अब वो उसका अनुगमन नहीं कर

1528
01:48:46,000 --> 01:48:49,800
पा रहा क्योंकि आज की समय धारा ऐसी है कि वो अगर घर से बाहर निकलेगा

1529
01:48:49,800 --> 01:48:53,800
तो अमुक अमुक स्थितियों में सौचा चार का अनुपालन नहीं हो अब

1530
01:48:53,800 --> 01:48:57,920
वो व्यक्ति यह कहेगा कि नहीं मैं जो कर रहा हूं वो सही है जो शास्त्र

1531
01:48:57,920 --> 01:49:02,120
में लिखा है वह आज की स्थितियों के लिए उपयुक्त नहीं है फ

1532
01:49:02,120 --> 01:49:06,120
क्या हुआ शास्त्र में दोष दृष्टि आ गई कहना यह चाहिए भाई मैं जो

1533
01:49:06,120 --> 01:49:10,160
कर रहा हूं वो मेरी व्यवस्था है श है तो शुद्ध धर्म

1534
01:49:10,160 --> 01:49:14,440
वही जो शास्त्र में लिखा इससे क्या होगा कि हम जो विशुद्ध है धर्म

1535
01:49:14,440 --> 01:49:18,480
की उसको बचा पाएंगे अन्यथा हमने अपनी जो

1536
01:49:18,480 --> 01:49:22,800
हमने जो अपने मन से मिलावट की है उसको ही धर्म बनाक प्रस्तुत कर देंगे तो धीरे धीरे व

1537
01:49:22,800 --> 01:49:26,920
गायब हो जाएगा जो शुद्धता है उसका पालन करने अब तुम्हारी

1538
01:49:26,920 --> 01:49:31,040
व्यवस्था है कि तुम नहीं कर पा रहे अगर कोई करना चाहे तो फिर उसको

1539
01:49:31,040 --> 01:49:35,360
धम नहीं होगा सने की बात

1540
01:49:35,360 --> 01:49:39,600
कुछ एक भागवताचार्य जैसे हर घरी हर घर में भागवताचार्य निकल

1541
01:49:39,600 --> 01:49:44,120
रहे हैं तो भागवत का आज वो स्वरूप नहीं र नहीं रहा है

1542
01:49:44,120 --> 01:49:48,320
आज देखा जाए तो केवल संकीर्तन रह गया है या मानो की केवल

1543
01:49:48,320 --> 01:49:52,880
बस नाच गाना रह गया है आज मतलब कुछ अब कथा प्रवक्ता

1544
01:49:52,880 --> 01:49:57,320
को यह बात चाहिए कि वो लोगों को इस बारे में प्रेरित करें

1545
01:49:57,320 --> 01:50:01,480
कि केवल नाच गाना नहीं है हमारे गुरुदेव भगवान कहते हैं कि ये जो एक

1546
01:50:01,480 --> 01:50:04,800
संकीर्तन हम करते हैं अब जैसे भागवत में पढ़ा

1547
01:50:04,800 --> 01:50:09,160
जाए तो भागवत में कहीं नहीं है किस प्रसंग अनुसार सुखदेव जी ने राजा परीक्षित

1548
01:50:09,160 --> 01:50:13,200
को कोई भजन सुनाया या सका सन काद ऋषियों ने नारद

1549
01:50:13,200 --> 01:50:17,440
जी को सुना ऐसा कहीं वर्णन नहीं है पर समय अनुसार जैसे आपने कहा समय

1550
01:50:17,440 --> 01:50:21,800
अनुसार चलना पड़ता है हां थोड़ी बहुत जैसे छोटे बच्चे को कड़वी दवाई देते हैं

1551
01:50:21,800 --> 01:50:25,960
तो दवाई के साथ थोड़ा बहुत शय दे देते करना पड़ता है तो उसको फिर

1552
01:50:25,960 --> 01:50:30,080
विशुद्ध धर्म का नाम नहीं देंगे अगर आप अगर आप

1553
01:50:30,080 --> 01:50:34,320
विदेशों में प्रचार करने के लिए थोड़ा बहुत ट्विस्ट करके धर्म

1554
01:50:34,320 --> 01:50:38,680
को प्रस्तुत कर रहे हो तो यहां आके ये मत बोलो कि ये गीता जो है सनातनी

1555
01:50:38,680 --> 01:50:42,800
गीता है ये बोलो ये गीता वो गीता है जिससे मुस्लिमों को बदला जाता है

1556
01:50:42,800 --> 01:50:46,920
क्रिश्चन को बदला जाता है ये मत बोलो कि ये सनातन की गीता

1557
01:50:46,920 --> 01:50:51,080
है जिसको बदला नहीं जाता ये बोलोगे तो दिक्कत

1558
01:50:51,080 --> 01:50:54,080
जी बिल्कुल बिल्कुल

1559
01:50:54,080 --> 01:50:58,240
एक चीज य ऐड करना चाहूंगा जो अंकित शर्मा

1560
01:50:58,240 --> 01:51:02,400
जी ने बोली है जो इन्होंने अभी जो इन्होंने कहा ना

1561
01:51:02,400 --> 01:51:06,600
कि संगीत बहुत वो हां तो यह एक बात है यहां पर कि

1562
01:51:06,600 --> 01:51:10,680
श्रीमद् भागवत की जो कथा होती है उसके अंदर जो है संगीत को

1563
01:51:10,680 --> 01:51:15,080
बहुत एक गलत तरीके से कई सारे लोग प्रस्तुत करते हैं किंतु संगीत

1564
01:51:15,080 --> 01:51:19,360
जो है भगवान से जुड़ने का एक माध्यम भी है तो वहां पर

1565
01:51:19,360 --> 01:51:19,880
भागवत

1566
01:51:19,880 --> 01:51:24,160
जी की भागवत जी यदि हम कर रहे हैं और उसकी सीमा शास्त्रीय संगीत का आलंबन

1567
01:51:24,160 --> 01:51:28,520
लेकर के जो उचित है है ना और कहीं वहा पर फूता

1568
01:51:28,520 --> 01:51:32,560
ना फैलाए संगीत के रूप में जैसे कि दो प्रकार की ज कथा होती

1569
01:51:32,560 --> 01:51:36,880
है एक तो व्यास पद्धति की कथा एक नारद पद्धति की कथा तो नारद

1570
01:51:36,880 --> 01:51:41,000
पद्धति की कथा में क्या है हम संगीत का आलंबन लेते हैं तो संगीत का आलंबन

1571
01:51:41,000 --> 01:51:45,120
इसलिए लेते हैं भगवान से जोड़ सके क्योंकि संगीत भी एक बहुत ही

1572
01:51:45,120 --> 01:51:49,320
महत्व महत्व है जीवन में संगीत का भी भगवान से जुड़ने

1573
01:51:49,320 --> 01:51:53,640
के लिए तो यहां पर लेकिन सीत का प्रस्तुतीकरण

1574
01:51:53,640 --> 01:51:57,640
उस प्रकार ना किया जाए जहां पर फूता फैले या फिर

1575
01:51:57,640 --> 01:52:01,720
कोई इस प्रकार से जैसे कि कोई वैश्या नाच रही है इस प्रकार से संगीत या फिर

1576
01:52:01,720 --> 01:52:05,840
भगवान श्री कृष्ण राधा जी का रास इस प्रकार से प्रस्तुत ना किया जाए

1577
01:52:05,840 --> 01:52:09,880
उस संगीत को संगीत के तरीके से ही प्रस्तुत किया जाए तो

1578
01:52:09,880 --> 01:52:14,640
वही उचित होगा जी बिल्कुल आपकी बात से बिल्कुल सहमत हूं जैसे

1579
01:52:14,640 --> 01:52:18,720
आपको आप ही की उदाहरण दे दूं अगर में कि राजेंद्र दास जी महाराज जी की अगर कथा

1580
01:52:18,720 --> 01:52:23,160
सुने तो पूर्ण रूप से शास्त्रीय संगीत ही उनका चल

1581
01:52:23,160 --> 01:52:27,520
शास्त्रीय सं अनुसार हो तो भी तो मैं मना नहीं कर रहा

1582
01:52:27,520 --> 01:52:31,520
पर मैं उस चीज को ही बोल रहा हूं कि जैसे भजन ही भजन आ रहे हैं

1583
01:52:31,520 --> 01:52:34,880
और भजन होकर के कथा नहीं आ रही है उस चीज को य बात बोल

1584
01:52:34,880 --> 01:52:38,880
रहा हूं अगर तीन घंटे की कथा है तो डेढ़ घंटा

1585
01:52:38,880 --> 01:52:43,200
तो भजन में निकल जा रहा है बात मंगलाचरण तो ठीक है 15

1586
01:52:43,200 --> 01:52:47,240
20 मिनट मंगलाचरण लग गया तो थोड़ा सा संकीर्तन कर लिया यह एक अलग विषय

1587
01:52:47,240 --> 01:52:51,720
है पर बात बात प हर हर प्रसंग में भजन ले आना

1588
01:52:51,720 --> 01:52:54,520
हर प्रसंग

1589
01:52:54,520 --> 01:52:58,960
हा और वहा पर जो इस चीज का सहारा ले रहे हैं तो

1590
01:52:58,960 --> 01:53:03,520
कथा प्रवक्ता का कर्तव्य बनता है कि लोगों को यह बात समझाए कि भाई

1591
01:53:03,520 --> 01:53:07,760
फिर क वो फिर एक भजन संध्या हो गई फिर तो आप एक तरीके से भजन

1592
01:53:07,760 --> 01:53:12,360
संध्या समझ लो है ना आज लिख रहे

1593
01:53:12,360 --> 01:53:16,880
आजकल लोग लिख रहे भागवत संगीत में भागवत

1594
01:53:16,880 --> 01:53:21,440
फिर पता लग जाता है भाई य संगीत ही संगीत है अब श्रीमद भागवत सप्ताहिक

1595
01:53:21,440 --> 01:53:25,600
ज्ञान यज्ञ लिखने न घंटे में दो घंटा

1596
01:53:25,600 --> 01:53:29,880
कीर्तन करो डेढ़ घंटे कीर्तन कीर्तन करो तो वो वो मायने नहीं रखती

1597
01:53:29,880 --> 01:53:33,880
उस चीज को कि आप कथा सुनाने आए तो कथा विषय होना चाहिए जिस

1598
01:53:33,880 --> 01:53:37,920
चीज की आप पाच या छ मिनट तक थोड़ा

1599
01:53:37,920 --> 01:53:43,200
बहुत संकीर्तन आदि हो जाए वो ठीक है जी जी जी जैसे महा

1600
01:53:43,200 --> 01:53:47,680
भया जी जी बोलिए बोलिए महाराज

1601
01:53:47,680 --> 01:53:49,880
योल केशर भैया को मैं यह बात कहना

1602
01:53:49,880 --> 01:53:54,080
चाहता हूं आपने एक व्यास के ऊपर वीडियो बनाई थी जिसकी

1603
01:53:54,080 --> 01:53:58,160
कथा में मैं गया था उनका नाम है महेश आचार्य जी वो

1604
01:53:58,160 --> 01:54:02,200
पाच घंटे कथा करते थे पाच घंटे में से दो घंटे वह नाच गाना करते थे

1605
01:54:02,200 --> 01:54:06,240
जो जिस पर से आपने वीडियो बनाई थी युगल विग्रह को नचा रहे थे और भी

1606
01:54:06,240 --> 01:54:10,440
अन्य चीजें तो पाच घंटे कथा करते थे पाच घंटे में से दो घंटे

1607
01:54:10,440 --> 01:54:15,120
नृत्य चल रहा है तीन घंटे में उन्होने कम से कम 101 भजन गाते थे

1608
01:54:15,120 --> 01:54:19,240
और कथा बिल्कुल ना के बराबर तो आजकल इसी

1609
01:54:19,240 --> 01:54:23,360
प्रकार की स्थिति हर जगह ही हो रही है कुछ वक्ता को छोड़कर कुछ

1610
01:54:23,360 --> 01:54:27,520
विद्वान जनों को छोड़ कर के हर जगह इसी प्रकार की स्थिति बनी हुई है

1611
01:54:27,520 --> 01:54:31,680
कि केवल गाना बजाना ही आजकल कथाओं में रह गया है वृंदावन जाकर के छ

1612
01:54:31,680 --> 01:54:35,680
महीने में कथा पढ़ते हैं मूल से कभी कथा पढ़ी नहीं छ

1613
01:54:35,680 --> 01:54:40,200
महीने में कथा पढ़ कर के गांव में शहरों में कथा करते हैं

1614
01:54:40,200 --> 01:54:44,320
और केवल नाच गाना ही आजकल कथाओं में चल रहा है आपने हर जगह देखा

1615
01:54:44,320 --> 01:54:48,600
होगा इसीलिए हम ऐसी भागवत करने का वो कर रहे हैं

1616
01:54:48,600 --> 01:54:53,120
आने वाले निकट भविष्य में कि हम मतलब शास्त्रोक्त

1617
01:54:53,120 --> 01:54:57,120
मतलब जिसमें की कथा सार ज्यादा हो और

1618
01:54:57,120 --> 01:55:01,200
यह जो वो भी हो नृत्य भी हो गायन वादन

1619
01:55:01,200 --> 01:55:05,800
भी हो मगर उतना जितना की ठीक लगे अच्छा अभी मैं एक

1620
01:55:05,800 --> 01:55:09,960
बीच-बीच में मैंने कहा था ना वो काम की चीजें जो देता

1621
01:55:09,960 --> 01:55:13,960
रहूं जिस कारण से आवान जाना जाता

1622
01:55:13,960 --> 01:55:18,440
है तो भैया ये मैं अन पैक कर रहा हूं आपके सामने

1623
01:55:18,440 --> 01:55:22,800
श्रीमद् भागवत है इकोन का चतुर्थ खंड है

1624
01:55:22,800 --> 01:55:26,800
इसमें आज हम देखेंगे कि शिव और विष्णु की एकता ली गई है

1625
01:55:26,800 --> 01:55:31,080
कि नहीं ली गई है या जहां पर शिव जी को कहा जा रहा है

1626
01:55:31,080 --> 01:55:35,280
बड़ा वहां पर क्या किया गया है जैसे मैंने क्या हुआ था कि जब मैंने

1627
01:55:35,280 --> 01:55:39,320
एक बार स्पन के स्टॉल पर पहुंचा और मैंने वहां पर रामायण

1628
01:55:39,320 --> 01:55:43,760
रखी देखी तो यह बात हमारी हुई भी थी पहले भी हो चुकी है

1629
01:55:43,760 --> 01:55:48,720
मैंने छट से उसको रामायण को लिया और रामायण को खोलकर

1630
01:55:48,720 --> 01:55:53,000
देखा उसमें युद्ध कांड में जहां पर ब्रह्मा जी ने भगवान

1631
01:55:53,000 --> 01:55:57,040
श्री राम को परम ब्रह्म कहा है तो मैंने देखा इन्होंने अपना जो इनका जो

1632
01:55:57,040 --> 01:56:01,200
प्रोपेगेंडा है कि नहीं कृष्ण भगवान से भिन्न कोई भी सब

1633
01:56:01,200 --> 01:56:05,280
पीछे हैं तो इन्होंने उस इसका यहां जब रामायण का अर्थ

1634
01:56:05,280 --> 01:56:09,400
करेंगे तो क्या होगा भाई आप कृष्ण के प्रति अनन्य भाव रखना

1635
01:56:09,400 --> 01:56:13,480
चाह रहे हो रखो फिर आप राम की जहां पर वो चीज है राम

1636
01:56:13,480 --> 01:56:17,960
को जहां पर कहा गया है तो वहां उसका भाष्य कर ही क्यों रहे हो

1637
01:56:17,960 --> 01:56:20,960
मत करो केवल भगवान कृष्ण की जहां

1638
01:56:20,960 --> 01:56:25,480
लीला है उनका भाष्य करते हो उनका भाष भी करोगे फिर उसको नकली

1639
01:56:25,480 --> 01:56:31,080
गलत लिख दोगे झूठ लिख दोगे तो चौथा अध्याय

1640
01:56:31,080 --> 01:56:35,560
और चार छ चौथा

1641
01:56:35,560 --> 01:56:39,640
अध्याय छवा चौथा स्कंद छवा

1642
01:56:39,640 --> 01:56:44,040
अध्याय बोलते हैं भैया अध्याय नंबर

1643
01:56:44,040 --> 01:56:48,080
एकन चल रहा है ये

1644
01:56:48,080 --> 01:56:54,080
आ गया छवा टव का

1645
01:56:54,440 --> 01:57:00,440
42 अब यहां पर ब्रह्मा जी ने उनको मूल कह दिया

1646
01:57:03,200 --> 01:57:07,280
है श्रीधरी टीका में कहा गया है ब्रह्मा

1647
01:57:07,280 --> 01:57:11,600
जी ने कहा शिव जी ने ब्रह्मा जी को नमस्कार

1648
01:57:11,600 --> 01:57:16,000
किया और देवताओं ने जिनको प्रणाम कर लिया था ऐसे शंकर जी से हसते

1649
01:57:16,000 --> 01:57:20,000
हुए के समान ब्रह्मा जी ने कहा मैं आपको जानता

1650
01:57:20,000 --> 01:57:24,480
हूं कि अ आप संपूर्ण

1651
01:57:24,480 --> 01:57:28,560
जगत के स्वामी हैं जो एक रस ब्रह्म

1652
01:57:28,560 --> 01:57:32,680
है वह आप ही है एक रस ब्रह्म ठीक है अब यहां

1653
01:57:32,680 --> 01:57:35,760
इन्होंने क्या कहा

1654
01:57:35,760 --> 01:57:39,960
है द दृश्य जगत के माता-पिता और दृश्य जगत

1655
01:57:39,960 --> 01:57:43,960
से परे भी परे परम ब्रह्म है मैं आपको इसी रूप में जानता

1656
01:57:43,960 --> 01:57:47,960
हूं यद्यपि शिव ने ब्रह्मा को साधन नमस्कार किया था किंतु ब्रह्मा

1657
01:57:47,960 --> 01:57:53,040
जानते थे कि शिव का पद उनसे बड़ा है शिव के पद का वर्णन ब्रह्म सम

1658
01:57:53,040 --> 01:57:57,560
भगवान विष्णु तथा शिव की मूल स्थितियों में कोई अंतर नहीं है

1659
01:57:57,560 --> 01:58:01,680
तो शिव भगवान विष्णु से भिन्न है तो भी शिव भगवान अब देखिए यहां पर बचाने

1660
01:58:01,680 --> 01:58:05,720
के लिए अपने मत को बचाने के लिए क्योंकि यहां पर ब्रह्मा

1661
01:58:05,720 --> 01:58:09,760
जी ने शिव जी को एक रस ब्रह्म कह दिया तो

1662
01:58:09,760 --> 01:58:13,880
कैसे बचाए कैसे बचाए तो जिन चीजों

1663
01:58:13,880 --> 01:58:18,080
की आवश्यकता नहीं भी है उनको भी यहां लाकर देंगे तब

1664
01:58:18,080 --> 01:58:22,280
बचाना पड़ेगा कैसे कि भगवान विष्णु तथा शिव की

1665
01:58:22,280 --> 01:58:27,080
स्थितियों में कोई अंतर नहीं है तो भी शिव भगवान विष्णु से भिन्न है

1666
01:58:27,080 --> 01:58:31,160
वहां यह उदाहरण दिया गया है कि दही में जो दूध है दूध से जिससे दही बना है

1667
01:58:31,160 --> 01:58:35,680
भिन्न नहीं है बस कर दिया जो घुट्टी पिलाएंगे कर

1668
01:58:35,680 --> 01:58:39,720
दिया व्यक्ति कहीं से ऐसा ना समझ ले कि नहीं

1669
01:58:39,720 --> 01:58:43,840
भैया वो अनुवाद पढ़ कर के व्यक्ति समझ ना ले कि जो

1670
01:58:43,840 --> 01:58:48,000
परे परम ब्रह्म है अच्छा यहां पर एक चीज और

1671
01:58:48,000 --> 01:58:52,160
है यहां पर ब्रह्मा जी ने यह नहीं कहा कि मैं

1672
01:58:52,160 --> 01:58:56,280
आपको इसी रूप में जानता हूं मतलब ब्रह्मा जी की गलत फहमी भी हो सकती

1673
01:58:56,280 --> 01:59:00,360
है जानता हूं मैं ऐसा समझता हूं तो इन्होंने थोड़ा सा वडिंग को

1674
01:59:00,360 --> 01:59:04,520
भी कहा है कि भाई वो आप ही है मैं आपको इस रूप

1675
01:59:04,520 --> 01:59:08,720
में जानता हूं और मैं आपको जानता हूं में अंतर है मैं आपको इस रूप में जानता

1676
01:59:08,720 --> 01:59:12,760
हूं का मतलब कि वो मेरा भाव हो सकता है मैं जानता हूं वोह सत्य

1677
01:59:12,760 --> 01:59:16,960
है मैं एज इट इज जानता हूं तो यहां पर थोड़ा सा वर्ड्स को ट्विस्ट

1678
01:59:16,960 --> 01:59:20,960
किया गया शिव जी की परब्रह्म से शिव जी को परम ब्रह्म से

1679
01:59:20,960 --> 01:59:24,880
बचाने के लिए क्या आ गया कि

1680
01:59:24,880 --> 01:59:29,000
वो दूध दही ले आए फिर से दूध दही कर दिया

1681
01:59:29,000 --> 01:59:33,400
रस्सी बना दी है ना

1682
01:59:33,400 --> 01:59:37,520
और इसमें आगे भी कहा है हे भगवान आप अपने व्यक्तिगत विस्तार से

1683
01:59:37,520 --> 01:59:41,600
इस दृश्य जगत की सृष्टि पालन तथा संहार उसी प्रकार करते हैं

1684
01:59:41,600 --> 01:59:46,200
जिस प्रकार मकड़ी अपना जाला बनाती है शिव जी के लिए कह रहे ब्रह्मा जी

1685
01:59:46,200 --> 01:59:50,200
बनाए रखती है और फिर अंत कर देती है अब इस श्लोक

1686
01:59:50,200 --> 01:59:54,360
में शिव शक्ति शब्द महत्वपूर्ण शिव का अर्थ है शुभ और शक्ति का अर्थ है भगवान

1687
01:59:54,360 --> 01:59:58,440
की कई प्रकार की शक्तियां होती है सभी शुभ है ब्रह्मा विष्णु तथा महेश्वर

1688
01:59:58,440 --> 02:00:02,520
गुण अवतार कहलाते हैं इस भौतिक जगत में हम तीनों तो भैया श्रीधरी

1689
02:00:02,520 --> 02:00:06,840
टीका में तो यह सब नहीं लिखा है ना उन्होंने तो मान लिया शिव जी को एक

1690
02:00:06,840 --> 02:00:11,240
रस

1691
02:00:11,240 --> 02:00:15,520
ब्रह्म तो यह चीजें

1692
02:00:15,520 --> 02:00:19,720
हैं ये हमने जो पढ़ा है अभी ये चौथा स्कं

1693
02:00:19,720 --> 02:00:24,000
है और 42वां छवा अध्याय और 42

1694
02:00:24,000 --> 02:00:28,160
वा श्लोक हमने पढ़ा 42 और 43 किस

1695
02:00:28,160 --> 02:00:32,320
तरह से सिद्धांतों को मटिया मेट किया जाता है वह आप देख सकते

1696
02:00:32,320 --> 02:00:36,600
हैं तो हम लोगों की काफी देर की चर्चा हो गई है

1697
02:00:36,600 --> 02:00:40,720
अब हम लोग पूरी करें या किसी को और कुछ भाव

1698
02:00:40,720 --> 02:00:46,720
अगर रखना बाकी रह गया हो तो रखें

1699
02:00:49,480 --> 02:00:54,040
और भाई साहब बाब जी म

1700
02:00:54,040 --> 02:00:58,880
पुराण 145 वा अध्याय 5वा श्लोक है

1701
02:00:58,880 --> 02:01:02,920
बाबू नाम यादव जी समस्त सुति स्मति शास्त्रों में

1702
02:01:02,920 --> 02:01:07,000
सामंजस्य की शिक्षा धर्म है ऐसे नहीं कि कहीं से पकड़ लिया बस

1703
02:01:07,000 --> 02:01:11,000
ये येय ये इसको मान लो इसको मान लो ऐसे नहीं इधर जो

1704
02:01:11,000 --> 02:01:15,160
लिखा है वो इधर जो लिखा है वो उन दोनों को मिलाओ

1705
02:01:15,160 --> 02:01:19,640
और उनसे जो एक निचोड़ निकले वो आपको मानना होगा

1706
02:01:19,640 --> 02:01:23,680
अगर हम यह मान लेंगे कि गंगा स्नान करने दिक्कत है तो स्कंद पुराण में

1707
02:01:23,680 --> 02:01:28,200
जहा महात्म बताया जा रहा है गंगा स्नान का मोक्ष बताया जा रहा है उसका क्या करोगे

1708
02:01:28,200 --> 02:01:32,680
उसको झुला दोगे तो वहां पर हमें देखना होगा

1709
02:01:32,680 --> 02:01:37,040
कि क्या कहा जा रहा है या तुम्हारे तत्वदर्शी ने उसमें शटर घोट करके कुछ

1710
02:01:37,040 --> 02:01:42,200
मसाला तो नहीं डाल दिया है वह सारी बातें देखनी पड़ेंगी सबसे

1711
02:01:42,200 --> 02:01:47,120
बड़ा काल काल तो हमें यही दिखता है

1712
02:01:47,120 --> 02:01:51,640
कि जो मिलावत करती जाती है अपने मन से हा एक एक बात

1713
02:01:51,640 --> 02:01:55,920
को जो उन्होने कहा कि गंगा स्नान करने से पुण्य नहीं मिलता तो जो

1714
02:01:55,920 --> 02:02:00,160
एक लाइव स्ट्रीम आपने की थी किसी के स्कोन वाले के साथ तो वहां पर वो कह रहा था गणेश

1715
02:02:00,160 --> 02:02:04,800
जी की आवश्यकता ही क्या है यदि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान है

1716
02:02:04,800 --> 02:02:09,120
तो भाई आवश्यकता जब भगवान कृष्ण सर्व शक्तिमान है तो ना गंगा

1717
02:02:09,120 --> 02:02:13,240
की आवश्यकता है ना यमुना की आवश्यकता है फिर तो किसी वस्तु की आवश्यकता

1718
02:02:13,240 --> 02:02:17,280
ही नहीं तुमको भी किसी को यजमान बनाने की आवश्यकता नहीं है किसी से

1719
02:02:17,280 --> 02:02:22,200
धन लेने की आवश्यकता नहीं है डायरेक्ट भगवान श्री कृष्ण से धन ले लो

1720
02:02:22,200 --> 02:02:26,240
आपके अनुसार बाबूराम यादव जी का बाकी का उत्तर

1721
02:02:26,240 --> 02:02:30,600
मैं दे दूं आपके अनुसार यदि कहीं पर ये लिखा भी है कि

1722
02:02:30,600 --> 02:02:34,920
गंगा में स्नान करने से पुण्य नहीं मिलेगा हां नहीं मिलेगा अगर आप गंगा

1723
02:02:34,920 --> 02:02:39,040
में स्नान करोगे और वापस आकर के जो है जो मातृ

1724
02:02:39,040 --> 02:02:44,000
शक्तियां होंगी उनको कुदृष्टि से देखोगे तो तुम्हें मोक्ष मिलेगा

1725
02:02:44,000 --> 02:02:48,120
क्या मैं बता तो रहा हूं मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं भाई मुझे फैट

1726
02:02:48,120 --> 02:02:52,160
लॉस करना है ठीक है मुझे अपना वजन कम करना

1727
02:02:52,160 --> 02:02:56,920
है मस्कुलर बॉडी बनानी है उसके बाद पूछेंगे सर यह बताइए

1728
02:02:56,920 --> 02:03:01,120
कि आपको मुझे जो है क्या कहते ज्यादा वर्क आउट तो नहीं कराएंगे

1729
02:03:01,120 --> 02:03:05,240
नहीं नहीं ज्यादा नहीं थोड़ा थोड़ा अच्छा और सर

1730
02:03:05,240 --> 02:03:09,280
मैं वो मतलब क्या कहते हैं ज्यादा मैं डाइटिंग नहीं

1731
02:03:09,280 --> 02:03:13,280
कर पाऊंगा अच्छा ठीक है थोड़ी बहुत डाइटिंग तो कर लोगे ठीक है भाई

1732
02:03:13,280 --> 02:03:17,280
कोई बात नहीं यह भी मान लेते हैं कि सर मुझे रेगुलर रेगुलर व्यायाम

1733
02:03:17,280 --> 02:03:19,800
तो नहीं करना पड़ेगा अच्छा ठीक है तुम

1734
02:03:19,800 --> 02:03:23,520
एक काम करो बाहर चले जाओ

1735
02:03:23,520 --> 02:03:27,600
वापस लौट जाओ अरे भाई मैं कोई वाशिंग मशीन थोड़ी ना हू जिसमें तुम

1736
02:03:27,600 --> 02:03:31,840
अपने आप को डालो और मैं तुम्ह बटन दबा कर के धुल के बाहर निकाल दूंगा चूहे

1737
02:03:31,840 --> 02:03:36,640
से रोटी निकालने के लिए चिमटे को अपना मुह जलाना ही पड़ेगा ना

1738
02:03:36,640 --> 02:03:40,800
तो उसी प्रकार से व्यक्ति यही सोचने लगे केवल गंगा स्नान

1739
02:03:40,800 --> 02:03:44,880
से गंगा स्नान के साथ साथ आपको बाकी की चीजों का भी यथोचित पालन

1740
02:03:44,880 --> 02:03:49,040
करना पड़ेगा ऐसा थोड़ी ना कि मातृ शक्तियों को आपको दृष्टि से देखो और

1741
02:03:49,040 --> 02:03:53,080
जो है व्यभिचार करो पाप करो चोरी करो ती करो और यह

1742
02:03:53,080 --> 02:03:57,080
सोचो मैं गंगा स्नान करके मुक्त हो जाऊंगा जब व्यक्ति ऐसा सोच के

1743
02:03:57,080 --> 02:04:01,320
गंगा स्नान करेगा तो फलित नहीं होगा यह भी शास्त्रों में वर्णन है

1744
02:04:01,320 --> 02:04:05,600
बिल्कुल य का कहां से

1745
02:04:05,600 --> 02:04:10,120
निवारण हो जाएगा कहां से अपराध का वो कटेगा पाप और

1746
02:04:10,120 --> 02:04:14,240
यह जानकर यह सोचकर अपराध करेगा कि मैं वहा गंगा ज नहा लूंगा तो

1747
02:04:14,240 --> 02:04:18,840
नहीं होगा पाप नहीं कटता

1748
02:04:18,840 --> 02:04:22,840
और बाकी भाई कल रखेंगे ला रामपाल एंड

1749
02:04:22,840 --> 02:04:28,720
फैक्ट्स के बारे में कल लाइव रखेंगे आप आइएगा और

1750
02:04:28,720 --> 02:04:32,720
बताइएगा एक बात जोड़ना चाहूंगा जैसे मतलब हर चीज की विधि होती जैसे ल

1751
02:04:32,720 --> 02:04:35,040
किशोर जी की बात भी रख दूंगा यहां पर और बाबूराम

1752
02:04:35,040 --> 02:04:39,160
जी की भी की बम को प्राप्त करने की भी विधि

1753
02:04:39,160 --> 02:04:43,240
है ना जैसे कृष्ण सर्वशक्तिमान है भगवान गणेश की आवश्यकता नहीं

1754
02:04:43,240 --> 02:04:47,560
है तो दूध में पहले से ही घी विद्यमान

1755
02:04:47,560 --> 02:04:51,840
है तो सीधा घी क्यों नहीं निकाल लेते हो गाय से

1756
02:04:51,840 --> 02:04:56,040
पहले दही बनाओगे फिर घी निकालो घी आवश्यकता घी की है ना आवश्यकता

1757
02:04:56,040 --> 02:05:00,040
कृष्ण की है तो उसके लिए भगवान गणेश की आवश्यकता पड़

1758
02:05:00,040 --> 02:05:04,120
रही है मतलब उनके माध्यम जाना पड़ रहा है तो

1759
02:05:04,120 --> 02:05:08,400
बस वैसे ही वाली बात है ठीक है जब घी चाहिए तो उसकी

1760
02:05:08,400 --> 02:05:12,400
सही बात है च का सार करने के लिए तो श्री कृष्ण नहीं आए थे ना वो भी

1761
02:05:12,400 --> 02:05:16,600
तो देवी का सहारा लेना ही पड़ा वहां पे हां

1762
02:05:16,600 --> 02:05:21,120
एक एक चीज और मैं कहूंगा कि

1763
02:05:21,120 --> 02:05:25,240
अगर भगवान गणेश के बारे में कहीं लिखा

1764
02:05:25,240 --> 02:05:29,800
है भागवत में और वह लिखा होना

1765
02:05:29,800 --> 02:05:34,200
इस बात का द्योतक है कि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान नहीं है

1766
02:05:34,200 --> 02:05:38,440
तो फिर राधा का लिखा होना राधा मां का लिखा होना भी आपके अनुसार

1767
02:05:38,440 --> 02:05:42,880
व्यर्थ है अगर अगर गणेश जी के विवरण होने से

1768
02:05:42,880 --> 02:05:47,160
यह सिद्ध होता है कि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान नहीं है तो अर्जुन

1769
02:05:47,160 --> 02:05:50,240
का भी नहीं लिखा होना चाहिए अर्जुन की आवश्यकता क्या है

1770
02:05:50,240 --> 02:05:54,240
जब श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान तो कौरवों की आवश्यकता क्या है किसी की

1771
02:05:54,240 --> 02:05:58,280
भी आवश्यकता ही नहीं है तो फिर ग्रंथ क्या बनेगा उस पर लिखा हो कृष्ण

1772
02:05:58,280 --> 02:06:02,360
अंदर खोलो क ब हो गया लीला फिर तो ये सब

1773
02:06:02,360 --> 02:06:06,720
लीला है हो गया बस अच्छा

1774
02:06:06,720 --> 02:06:11,400
भागवत पढ़ रहा हूं क्या पढ़ रहा हूं कृष्ण कृष्ण अरे लीला तो सुनाओ

1775
02:06:11,400 --> 02:06:15,720
कृष्ण तो यह भी यह भी एक स्टेज हो सकती है मगर य प्राप्त वाली स्टेज

1776
02:06:15,720 --> 02:06:19,920
है जब आपको वैराग्य हो गया आपने सब कुछ ग्रंथों

1777
02:06:19,920 --> 02:06:24,040
का मक्खन निकाल करके धारण कर लिया उसके बाद ऐ ऐसी

1778
02:06:24,040 --> 02:06:28,480
स्थिति आ सकती है कि आपको लीला ला सब में कृष्ण ही सुनाई दे मगर

1779
02:06:28,480 --> 02:06:32,840
वो आमजन के लिए तो प्रस्तुत करने के लिए नहीं है ऐसे

1780
02:06:32,840 --> 02:06:37,480
इनका एक कुतर्क था मैंने देखा था कि भाई वो प्रभुपाद

1781
02:06:37,480 --> 02:06:42,200
जी ने हर जगह जो है भक्ति भक्ति भक्ति कर दिया है क्यों कर दिया है कि व

1782
02:06:42,200 --> 02:06:46,320
वो जो कृष्ण भक्त होते हैं ना उनको हर जगह कृष्ण ही दिखाई देते हैं अरे मेरे

1783
02:06:46,320 --> 02:06:52,120
भाई जब हर जगह कृष्ण दिखाई देते हैं तो अर्जुन की जगह कृष्ण क्यों नहीं दिख रहे

1784
02:06:52,120 --> 02:06:56,240
जहां कौरव शब्द आ रहा है वहां तुम्हें कृष्ण क्यों नहीं दिख रहा है जहां

1785
02:06:56,240 --> 02:07:01,000
तुम्हें अपनी मंतव्य की सिद्धि करनी है वहां तुम अपने लॉजिक को अप्लाई कर रहे हो

1786
02:07:01,000 --> 02:07:05,000
और वाल्मीकि रामायण में जो वाल्मीक जी थे व तो राम राम

1787
02:07:05,000 --> 02:07:05,500
करके

1788
02:07:05,360 --> 02:07:10,160
मोक्ष को प्राप्त हुए थे उल्टा जब के मरा मरा मरा मरा करके

1789
02:07:10,160 --> 02:07:14,360
चैतन्य म प्रभु उनको राम अगर

1790
02:07:14,360 --> 02:07:18,400
यह बात होती हमें राम के अलावा कुछ और नहीं दिखता है और इसलिए हम

1791
02:07:18,400 --> 02:07:23,080
लोग राम तो हमें आज वाल्मीकि रामायण प्राप्त होती क्या केवल राम लिखा होता उसम राम

1792
02:07:23,080 --> 02:07:27,080
और देख लो आप लोग छाप के केवल कृष्ण ही दिखता है इसलिए हम

1793
02:07:27,080 --> 02:07:31,360
कृष्ण लिखेंगे एक बुक छाप दो कृष्ण अंदर भी कृष्ण लिखा हु हर पन्ने प

1794
02:07:31,360 --> 02:07:35,400
और उसको भागवत नाम से आप सेल करो लेकिन शिवा जी

1795
02:07:35,400 --> 02:07:39,480
अपने ये रामायण के साथ कोशिश तो की थी ना उन्होंने रामायण

1796
02:07:39,480 --> 02:07:43,560
जो छापी है उन्होंने थोड़ी सी उसम में उनकी वो वो अगर

1797
02:07:43,560 --> 02:07:48,040
वो भगवत भक्ति का स्वरूप वही है तो उनकी भगवत भक्ति उतने ही अंश में है जहां अपना प्रोपेगेंडा

1798
02:07:48,040 --> 02:07:52,280
जहां अपनी स्ट्रेटेजी अप्लाई करनी होगी जी वही

1799
02:07:52,280 --> 02:07:56,480
पर है बाकी अन्य जगहो पर नहीं है अन्य जगहो पर सिस्टमिकली

1800
02:07:56,480 --> 02:08:00,600
चलेंगे मगर जब ब्रह्म कर्म समाधि नाम आ जाएगा ब्रह्मे

1801
02:08:00,600 --> 02:08:04,840
गंतव्य आ जाएगा तो जरूर उसम कृष्ण भावना कृष्ण भावना भावित

1802
02:08:04,840 --> 02:08:08,840
और सुनिए वो भी अपनी संस्था का नाम डालेंगे उसमें ऐसा नहीं है

1803
02:08:08,840 --> 02:08:13,040
कृष्ण डाल दे भाई जब कृष्ण ही है तो कृष्ण कृष्ण कृष्ण करो कृष्ण

1804
02:08:13,040 --> 02:08:17,200
भावना भावित क्यों कर रहे हो इसी बात प बस एक लाइन

1805
02:08:17,200 --> 02:08:20,480
और जोड़ देता हूं मैं इसमें मैं जो अपने

1806
02:08:20,480 --> 02:08:24,560
सदस्य के बारे में बता रहा था अभी जो कन से है लखनऊ से

1807
02:08:24,560 --> 02:08:28,680
वो मुझे जन्मदिन पर भी जो विश करती है ना जो आशीर्वाद देती है उसम भी लिखती

1808
02:08:28,680 --> 02:08:33,320
है हैप्पी कृष्ण कॉन्शियस बर्थडे बेटा

1809
02:08:33,320 --> 02:08:38,400
हा हा ययय हर एक ता हैप्पी कृष्णा कॉन्शियस

1810
02:08:38,400 --> 02:08:42,640
बर्थडे और एक बात और जोड़ना चाहूंगा ठीक

1811
02:08:42,640 --> 02:08:46,320
है आप जो य कह रहे हो कि

1812
02:08:46,320 --> 02:08:50,400
अगर कि अगर गणेश जी अगर गणेश

1813
02:08:50,400 --> 02:08:54,760
जी का आना हो गया तो भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान क्यों नहीं रहे तो भैया फिर भागवत

1814
02:08:54,760 --> 02:08:58,960
को मत मानो यह क हम व्यास जी से दिक्कत है

1815
02:08:58,960 --> 02:09:03,680
यह भी तो स्वीकार

1816
02:09:03,680 --> 02:09:07,920
करो चैतन्य महाप्रभु भी जब तीर्थ करने के लिए गए थे तो उन्होंने भगवान

1817
02:09:07,920 --> 02:09:12,000
शिव के दर्शन किए थे और चैतन्य महाप्रभु की लीला के अंदर ही ऐसी

1818
02:09:12,000 --> 02:09:16,520
बात आती है कि उनके भगवान श्री राम के भक्त भी थे

1819
02:09:16,520 --> 02:09:20,600
तो भगवान श्री राम के जो भक्त थे उनसे उनके बड़े भाई ने कहा कि आप

1820
02:09:20,600 --> 02:09:24,600
जो की भक्ति कर लो तो दोनों भाई मिलकर क्या करेंगे भगवान कृष्ण की भक्ति

1821
02:09:24,600 --> 02:09:29,160
करेंगे किंतु उनकी अनन्य भगवान श्री राम के प्रति इतनी थी

1822
02:09:29,160 --> 02:09:33,480
कि उन्होंने कह तो दिया कि चलो ठीक है हम भगवान कृष्ण की भक्ति कर लेंगे

1823
02:09:33,480 --> 02:09:37,560
जब रात में सोने के लिए जाते हैं तो उनकी आंखों से अश्रु बहने लगते

1824
02:09:37,560 --> 02:09:41,640
हैं और केवल भगवान श्री राम का नाम लेकर के रोने लगते हैं और कहते हैं

1825
02:09:41,640 --> 02:09:45,800
कि नहीं मुझसे यह नहीं हो पाएगा मैं केवल भगवान श्री राम की भक्ति ही कर सकता हूं

1826
02:09:45,800 --> 02:09:49,840
राम की भक्ति ही करूंगा तब वहां पर वो जिन्हो जो

1827
02:09:49,840 --> 02:09:54,000
बड़े भाई थे वो कह रहे थे कि कृष्ण भक्ति कर लो तो उन्हो फिर रात में जा

1828
02:09:54,000 --> 02:09:58,120
कर के उन्होंने उनसे कहा कि देखो मैं कृष्ण भक्ति नहीं कर सकता

1829
02:09:58,120 --> 02:10:02,240
मैं केवल राम भक्ति ही कर सकता हूं और भगवान श्री राम क्योंकि मेरे इष्ट हैं

1830
02:10:02,240 --> 02:10:06,480
तो मैं उन्हीं के प्रति समर्पित हूं तो उन्होंने बदले में यह कहा कि इनसे हमको

1831
02:10:06,480 --> 02:10:10,600
सीखना चाहिए कि ईष्ट के प्रति अनन्य कैसी होती है ऐसी होती

1832
02:10:10,600 --> 02:10:14,800
है कि जिस प्रकार सेय भगवान श्री राम के प्रति समर्पित है हमको भगवान कृष्ण

1833
02:10:14,800 --> 02:10:18,760
के प्रति समर्पित होना चाहिए तो हम आपको फोर्स नहीं करेंगे

1834
02:10:18,760 --> 02:10:22,840
कि आप भगवान कृष्ण की भक्ति करो हमने तो आप भगवान श्री राम

1835
02:10:22,840 --> 02:10:26,840
की भक्ति करो बाद में फिर वह साकेत धाम को भी गए तो चेतन्य महाप्रभु की

1836
02:10:26,840 --> 02:10:30,880
लीला के अंदर भी कई सारी बातें ऐसी आती हैं और सनातन जो स्वामी

1837
02:10:30,880 --> 02:10:34,920
थे उनके तो कुष्ठ रोग हो गया था शरीर पर तो उनकी

1838
02:10:34,920 --> 02:10:39,200
ऐसी मर्यादा थी कि मंदिर के दूर से दर्शन करते थे हालांकि वह समर्थ

1839
02:10:39,200 --> 02:10:43,680
थे किंतु फिर भी मंदिर के दूर से ही दर्शन करते थे और चेतन्य महाप्रभु

1840
02:10:43,680 --> 02:10:48,560
के पास जब मिलने के लिए जाते थे तो जगत्नाथा पुरी का एक द्वार है

1841
02:10:48,560 --> 02:10:53,040
वहां से होकर नहीं जाते थे कि किसी भक्त से मेरा स्पर्श ना हो जाए

1842
02:10:53,040 --> 02:10:57,800
किसी भक्त से क्योंकि अगर यदि स्पर्श हो जाएगा तो उसको समस्या हो जाएगी और मेरे को पाप लगेगा

1843
02:10:57,800 --> 02:11:01,840
तो इस प्रकार से उनकी मर्यादा ऐसी थी उससे चैतन्य महाप्रभु इतना

1844
02:11:01,840 --> 02:11:05,920
प्रसन्न हुए चैतन्य महाप्रभु उनको हृदय से लगाना चाहते थे अरे तुम तो मेरे

1845
02:11:05,920 --> 02:11:09,960
हृदय से लग जाओ उसमें भी सनातन स्वामी को कष्ट होता कि अरे महाप्रभु मेरे

1846
02:11:09,960 --> 02:11:14,040
हृदय से लग रहे हैं मेरे शरीर में कुष्ठ रोग हुआ है और महाप्रभु मेरे

1847
02:11:14,040 --> 02:11:18,040
हृदय से लगेंगे तोय अच्छी बात नहीं है इससे अच्छा मैं आत्महत्या कर लू वो

1848
02:11:18,040 --> 02:11:22,320
आत्महत्या करने के लिए जाना चाहते थे कि अब यात्रा होगी भगवान

1849
02:11:22,320 --> 02:11:26,320
जगत नाथ के रथ के नीचे आकर के मैं अपनी जो है शरीर को समाप्त कर

1850
02:11:26,320 --> 02:11:30,320
दूंगा ये बात चेतन्य महाप्रभु को चली महाप्रभु फिर भी नहीं मैं

1851
02:11:30,320 --> 02:11:33,880
तो तुमको अपने हृदय से लगाऊंगा लेकिन सनातन स्वामी से यह सीखना चाहिए

1852
02:11:33,880 --> 02:11:37,960
हमको अब कई सारे लोग मर्यादा का उल्लंघन करने के लिए इस बात को तो

1853
02:11:37,960 --> 02:11:41,960
कह देते हैं कि भगवान जो है शुद्ध को अशुद्ध को

1854
02:11:41,960 --> 02:11:46,040
किसी को भी जो है स्वीकार करने को तैयार है किंतु यहां पे भक्त

1855
02:11:46,040 --> 02:11:50,080
से सनातन जी से यह मर्यादा भी तो सीखनी चाहिए कि उनको कष्ट कितना हो

1856
02:11:50,080 --> 02:11:55,040
रहा है कि भाई मे मेरे शरीर में देखो कुष रोग है मैं कितना नीच हूं मैं कितना

1857
02:11:55,040 --> 02:11:59,440
ये भक्त की जो सरलता होती है कि देखो मैं कितना नीच

1858
02:11:59,440 --> 02:12:03,720
हूं होते प्रस्तुत करता है

1859
02:12:03,720 --> 02:12:08,120
वो ऐसा है वो एक अलंकारी गुंडा है ना अंडर

1860
02:12:08,120 --> 02:12:13,000
कवर्ड उसका क्या नाम है वाच

1861
02:12:13,000 --> 02:12:17,200
तो उसने एक बार बोला था उसको हमने उसी की भाषा में उत्तर दिया था गीला गीला

1862
02:12:17,200 --> 02:12:21,280
कवा कवा थ गीला गीला गप कवा कवा थ

1863
02:12:21,280 --> 02:12:25,360
मीठा मीठा हा मीठा मीठा मीठा मठा मीठा मीठा गब

1864
02:12:25,360 --> 02:12:29,480
गप कड़वा कड़वा ये जो ये जो भूलने वाली बात

1865
02:12:29,480 --> 02:12:33,800
है ना ये इतने तरह के प्रसंग होते हैं अभी कुछ दिनों पहले क्या हुआ था

1866
02:12:33,800 --> 02:12:37,840
उसने इतना ज्यादा अपनी बातों को बदला फिर बोला कि यह सूक्त फिर वो

1867
02:12:37,840 --> 02:12:42,160
सूक्त तो मैं भी उससे कह रहा हूं कि नहीं चारों वेदों में सूक्त दिए गए हैं हालांकि

1868
02:12:42,160 --> 02:12:46,200
यजुर्वेद में सूक्त नहीं दिया गया है वो सिर्फ अध्याय और मंत्र है

1869
02:12:46,200 --> 02:12:48,960
उसमें मगर वो इतना ज्यादा ब्रेन

1870
02:12:48,960 --> 02:12:52,960
उस समय वर्क वर्किंग में होता है कि चीज स्लिप होने लगती है फिर

1871
02:12:52,960 --> 02:12:57,520
अब मीठा मीठा की जगह गीला गीला हो गया मैं खुद एक जगह

1872
02:12:57,520 --> 02:13:01,560
मैं खुद एक जगह जाकर के एक दिन इंटरव्यू में बोल गया कि वो वेदों के

1873
02:13:01,560 --> 02:13:05,600
जो श्लोक है वो आपके पास कैसे आए जबक वेदों के मंत्र होते हैं ये

1874
02:13:05,600 --> 02:13:09,760
सब है जो हो जाती है दिक्कत कभी कभी तो

1875
02:13:09,760 --> 02:13:14,200
भाई ठीक है अब हम लोग समाप्त करते हैं अंकित जी आने के लिए आपका धन्यवाद

1876
02:13:14,200 --> 02:13:18,200
बहुत-बहुत आभार आपका और इसी प्रकार से आप लोगों का

1877
02:13:18,200 --> 02:13:22,560
समर्थन मिलता रहे और हम लोग सनातन को एक

1878
02:13:22,560 --> 02:13:26,680
रा में लाने का प्रयास कर रहे हैं मैं फिर कहूंगा यदि

1879
02:13:26,680 --> 02:13:31,600
किसी के पास ईश्वर को ये

1880
02:13:31,600 --> 02:13:36,320
जो हम जो वि जो भी हम सिद्धांत प्रचार प्रसार कर रहे हैं

1881
02:13:36,320 --> 02:13:40,680
उससे आप सहमत नहीं है और आपके पास सर्वशक्तिमान ईश्वर

1882
02:13:40,680 --> 02:13:44,760
परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म है तो हमें अपना

1883
02:13:44,760 --> 02:13:48,840
बना लीजिए हमें आकर के बता दीजिए हम आपका प्रचार प्रसार करेंगे

1884
02:13:48,840 --> 02:13:53,280
ठीक है हमें तीन चीजें चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर

1885
02:13:53,280 --> 02:13:57,680
परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म कभी ना बदला जाने वाला धर्म

1886
02:13:57,680 --> 02:14:01,720
है ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले प्रभावित ना हो

1887
02:14:01,720 --> 02:14:04,000
नित्य स्थाई तो हम आपका

1888
02:14:04,000 --> 02:14:08,040
प्रचार करेंगे व भले ही रामपाल हो व भले ही

1889
02:14:08,040 --> 02:14:12,320
कन हो व भले ही आर्य समाजी हो ठीक है दूसरी

1890
02:14:12,320 --> 02:14:18,320
बात यह है कि किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप संपर्क कर सकते हैं

1891
02:14:18,360 --> 02:14:22,840
74839 और हम कल आएंगे एक टॉपिक ले कर के

1892
02:14:22,840 --> 02:14:27,280
कि एक वो तोड़ना है कि ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान

1893
02:14:27,280 --> 02:14:32,120
है वो नैरेटिव जो इनका तोड़ना है रामपाल

1894
02:14:32,120 --> 02:14:36,640
कोई आना चाहे सामने बैठ कर के बात करना चाहे तो संपर्क कर सकता है

1895
02:14:36,640 --> 02:14:40,640
दूसरी बात यह है कि हा नहीं छोड़ेंगे

1896
02:14:40,640 --> 02:14:44,680
नहीं नहीं रामपाल वालो रामपाल के द्वारा फैलाई जा रही जो गलत शिक्षा उनको

1897
02:14:44,680 --> 02:14:48,800
छोड़ेंगे नहीं और दूसरी बात यह है

1898
02:14:48,800 --> 02:14:52,880
कि ना मास्त्र मारा अयान चल रहा जिसम हम सब भाई बैठ कर के

1899
02:14:52,880 --> 02:14:56,920
नाम जप करते हैं सुबह सुबह प्रातः काल 5:30

1900
02:14:56,920 --> 02:15:01,120
बजे एक सेशन चालू होता है जो सवा घंटे नाम जब एक साथ होता है

1901
02:15:01,120 --> 02:15:05,560
उसमें मैं स्वयं होता हूं अगर जुड़ना चाहे तो वहां जुड़ सकते हैं

1902
02:15:05,560 --> 02:15:09,640
और इसके अलावा पांच अलग-अलग सत्र भी होते हैं 1515 मिनट के पूरे

1903
02:15:09,640 --> 02:15:14,320
दिन में टुकड़ों में अगर करना चाहते तो कर सकते हैं तो नामा आस्त्र

1904
02:15:14,320 --> 02:15:18,600
धारण करिए जिससे कि सभी प्रकार के जो बंधन है

1905
02:15:18,600 --> 02:15:19,100
भले ही

1906
02:15:19,040 --> 02:15:23,240
अज्ञानता रूपी बंधन हो धर्म को ना जानने के विषय में ईश्वर को ना जानने के विषय

1907
02:15:23,240 --> 02:15:27,960
में राष्ट्र की रक्षा के लिए स्वयं की रक्षा के लिए परिवार की रक्षा के लिए

1908
02:15:27,960 --> 02:15:31,960
आप जो है नामा आस्त्र

1909
02:15:31,960 --> 02:15:36,840
उठाइए नामा आस्त्र को जवाइन करिए दूसरी

1910
02:15:36,840 --> 02:15:40,440
बात यदि

1911
02:15:40,440 --> 02:15:44,960
आप अध्ययन करना चाहते हैं तो हमसे जुड़ सकते हैं इसी नंबर से

1912
02:15:44,960 --> 02:15:49,040
ट करें केवल और यदि आप धर्म रक्षा

1913
02:15:49,040 --> 02:15:53,360
के अभियान में साथ देना चाहते हैं तो भी इस नंबर पर ट कर सकते हैं और भैया एक

1914
02:15:53,360 --> 02:15:57,960
हाथ जोड़ के विनती है सबसे विशेष तौर पर

1915
02:15:57,960 --> 02:16:02,000
जो रामपाल जी के फॉलोअर्स है जिनका बिल्कुल ब्रेन एक ही दिशा

1916
02:16:02,000 --> 02:16:06,720
में चलता है चाबी भर दी तो बस उधर ही चलेंगे काजल काजल

1917
02:16:06,720 --> 02:16:10,760
काजल तो वो वो वाली स्थिति हो गई है वो

1918
02:16:10,760 --> 02:16:14,960
क्या करते हैं मेरा ट नंबर ले लेते हैं यह वाला जो हम ले रहे हैं और फिर

1919
02:16:14,960 --> 02:16:19,080
उस परे ना तो कोई बात ना कोई सवाल ना कोई

1920
02:16:19,080 --> 02:16:23,320
जवाब कुछ नहीं ना कोई प्रश्न ना कोई उत्तर वीडियो

1921
02:16:23,320 --> 02:16:27,560
सीधे वीडियो तत्वदर्शी संत रामपाल जी ने सिद्ध किया शास्त्रों

1922
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से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है उनके पति का नाम क्या है उनके पिता का नाम

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क्या है भाई मैं कहता हूं भैया य व्यर्थ

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के मैसेज मत भेजो व्यर्थ के मैसेज भेजोगे तो ब्लॉक करना पड़ेगा

1925
02:16:38,560 --> 02:16:42,640
आपको फॉर्म मिल गया फॉर्म भरो सामना करो ठीक है आपके वो

1926
02:16:42,640 --> 02:16:46,640
तथाकथित तत्वदर्शी के कई वीडियोस टैली करके अध्ययन करके

1927
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तब आए हैं ऐसे नहीं आए है ना आपकी तरह नहीं पहुंचे हैं कि बस हवा में

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02:16:51,080 --> 02:16:55,520
मारने लगे ठीक है तो ट पर य बेकार

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के व्यर्थ के मैसेज ना करें और

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02:17:00,960 --> 02:17:05,320
सीधे सीधे जो है फॉर्म भरे और सामना करें

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और यदि समझ गए हैं कोई वैचारिक मतभेद नहीं है तो आइए

1932
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साथ निभाए धर्म की रक्षा करने में अगर वैचारिक मतभेद है

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तो आइए अपने पक्ष को प्रस्तुत करिए ठीक है

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सभी को जय श्री राम जय श्री राम अंकित जी जय श्री राम

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जय श्री राम ज श्रीम जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय

1936
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श्री राम

1937
02:17:31,520 --> 02:17:35,520
[संगीत]
