1
00:00:01,390 --> 00:00:07,390
[संगीत]

2
00:00:08,080 --> 00:00:12,640
तो सभी को जय श्री

3
00:00:12,640 --> 00:00:17,720
राम स्वयं को सनातनी कहने वाले

4
00:00:17,720 --> 00:00:23,200
कुछ विशेष सनातन का चोला ओड़कर

5
00:00:23,200 --> 00:00:27,560
सनातन विरुद्ध विचारधारा पन पाने वाले

6
00:00:27,560 --> 00:00:30,640
और

7
00:00:30,640 --> 00:00:35,440
सनातन के विरुद्ध बात करने वाले तंत्र से जुड़े हुए कुछ

8
00:00:35,440 --> 00:00:40,160
समाजी हैं जिन्हें हम अलंकार समाजी के नाम से जानते हैं

9
00:00:40,160 --> 00:00:45,280
तो कल से हमारे पास बहुत सारे इस तरह के मैसेजेस आ रहे

10
00:00:45,280 --> 00:00:49,360
थे जिसमें कि हमें किसी यह जानकारी दी

11
00:00:49,360 --> 00:00:53,480
जा रही कि हमारे विरुद्ध आक्षेप

12
00:00:53,480 --> 00:00:58,120
लगाते हुए हमारे ऊपर कुछ वीडियो बनाया गया है

13
00:00:58,120 --> 00:01:02,160
उस वीडियो में क्या है यह भी बताया

14
00:01:02,160 --> 00:01:06,400
गया हमें कि भाई हमारी

15
00:01:06,400 --> 00:01:10,400
कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो आज

16
00:01:10,400 --> 00:01:14,480
से करीब 6 साल चार साल पा साल आ

17
00:01:14,480 --> 00:01:16,600
साल पहले की है कुछ इस तरह

18
00:01:16,600 --> 00:01:20,880
की सामग्री जो हमारी व्यक्तिगत है हमारे घर की उसम मात शक्तियां

19
00:01:20,880 --> 00:01:25,040
भी है ऐसी जानकारी उन लोगों को मिल गई जिन

20
00:01:25,040 --> 00:01:30,240
लोगों के सिद्धांतों पर हम प्रश्न करते हैं

21
00:01:30,240 --> 00:01:34,440
तो उन नीच लोगों ने क्या किया कि उनके पास सैद्धांतिक

22
00:01:34,440 --> 00:01:38,600
जवाब तो है नहीं हमने कई बार कहा यह वाली कहानी

23
00:01:38,600 --> 00:01:43,360
भी हम आपको एक बार सुना चुके हैं कि बचपन में हमने किसी बच्चे

24
00:01:43,360 --> 00:01:47,600
को अपनी कोई वस्तु थी उसको प्राप्त करने के लिए

25
00:01:47,600 --> 00:01:51,840
हम भी छोटे ही थे बालक थे तो उस समय हमने

26
00:01:51,840 --> 00:01:56,600
उसे मार लगा दी थी उस पर प्रहार कर दिया था

27
00:01:56,600 --> 00:02:00,720
तो उसने हमें गाली दी थी अब उसने जब

28
00:02:00,720 --> 00:02:04,720
हमें गाली दी तो हमने उसे हमने उससे अपनी

29
00:02:04,720 --> 00:02:09,000
चीज जो है जो उसके पास चली गई थी उसके अधिकार में नहीं थी व चीज हमने उससे

30
00:02:09,000 --> 00:02:13,640
छीन ली जब छीन ली तो उसने हमें गाली दी जब गाली दी

31
00:02:13,640 --> 00:02:18,120
तो हमने उसकी मार ल पिटाई कर

32
00:02:18,120 --> 00:02:22,360
जो गन्ने का डंडा वले लिए हुए था उसी गन्ने के डंडे को उसे छीना और

33
00:02:22,360 --> 00:02:26,560
चार पांच उसके चपा चप चपा चप पीछे चिपका दिए

34
00:02:26,560 --> 00:02:30,760
जब हमने चिपका दिए तो हम घर ले आए अपने

35
00:02:30,760 --> 00:02:31,760
जो सामग्री

36
00:02:31,760 --> 00:02:36,320
थी उसे लेकर के उसके थोड़ी देर बाद उसकी दादी या संभवत

37
00:02:36,320 --> 00:02:40,360
उसकी माता जी वह हमारे

38
00:02:40,360 --> 00:02:44,560
घर पर आ गई पिताजी को हमारे डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब

39
00:02:44,560 --> 00:02:48,760
बोला जाता है तो वो आकर के घर

40
00:02:48,760 --> 00:02:53,600
पर आकर के बोली कि अरे देखो डॉक्टर साहब तुम्हारे मोड़ ने

41
00:02:53,600 --> 00:02:58,160
हमारे लल्लू को और वो

42
00:02:58,160 --> 00:03:02,320
डंडे से मारा है तो मैंने कहा कि भाई इसने हमें गाली दी

43
00:03:02,320 --> 00:03:06,520
थी माता की बहन की इस तरह की गालियां दी थी तो उन्होंने

44
00:03:06,520 --> 00:03:10,720
कहा बेटा जिसके पास सामर्थ्य नहीं होता है ना वह मुंह चलाता

45
00:03:10,720 --> 00:03:15,000
है जिसको भगवान ने सामर्थ्य नहीं दिया है उसको भगवान ने जुबान

46
00:03:15,000 --> 00:03:19,200
दी है तो जब हमने सैद्धांतिक चर्चा शुरू की

47
00:03:19,200 --> 00:03:23,400
सैद्धांतिक बातें की कि भाई ईश्वर अनंत

48
00:03:23,400 --> 00:03:27,920
सामर्थ वान है कि नहीं आपके पास वेद मंत्र किस प्रकार से आए

49
00:03:27,920 --> 00:03:32,760
यह सब बातें जब हमने छेड़ी तो पांच मूल सिद्धांत

50
00:03:32,760 --> 00:03:36,960
जिनके प्राप्त ना होने के कारण जिनका प्रचार प्रसार ना होने के कारण आज हमारा

51
00:03:36,960 --> 00:03:41,400
सनातन समाज बटक रह गया है और कोई भी विधर्मी कोई मले

52
00:03:41,400 --> 00:03:45,800
हमारे ऊपर आक्रमण आसानी से कर सकता है कुछ भी बोल सकता है क्योंकि हम बटे हुए हैं

53
00:03:45,800 --> 00:03:47,400
बटे हुए क्यों है क्योंकि

54
00:03:47,400 --> 00:03:51,560
सनातन का चोला तो सबने पहना है मगर उसमें वास्तविक सनातन से कोई कोई

55
00:03:51,560 --> 00:03:55,800
जुड़ा हुआ है ज्यादातर लोग सनातन विरुद्ध विचारधाराएं

56
00:03:55,800 --> 00:04:00,680
पकड़ के चल रहे हैं कोई खुद को ईश्वर बनाने में लगा है कोई

57
00:04:00,680 --> 00:04:05,160
सनातन के नाम पर अब्राह्मिक विचारधारा दे रहा है

58
00:04:05,160 --> 00:04:09,200
कोई सनातन के नाम पर मूर्ति पूजा का ही खंडन कर रहा है कोई

59
00:04:09,200 --> 00:04:13,600
सनातन के नाम पर कृष्ण को क्राइस्ट से जोड़ दे रहा है कोई सनातन

60
00:04:13,600 --> 00:04:17,680
के नाम पर अपना व्यापार चला रहा है जहां पर उनकी वोह ब्रह्मा जी

61
00:04:17,680 --> 00:04:21,880
की वाणी आती है स्वयं रोज तो यह सब हो रहा है और अगर हमने

62
00:04:21,880 --> 00:04:25,920
ऐसे में कुछ मूल चार पांच प्रश्न पूछ लिए तो ये जो अलंकार

63
00:04:25,920 --> 00:04:30,760
समाज है हमने कोई दोष भावना से नहीं पूछ

64
00:04:30,760 --> 00:04:34,800
हमने केवल इतना हमारा प्रयास था कि जो चीजें जहां पर

65
00:04:34,800 --> 00:04:38,840
संशोधन हो वो संशोधित हो जाए जिससे कि समाज में जो बिखराव

66
00:04:38,840 --> 00:04:42,880
है वो दूर हो जाए और अगर आपके सिद्धांत ज्यादा मजबूत

67
00:04:42,880 --> 00:04:47,360
है तो हमने खुले हृदय से

68
00:04:47,360 --> 00:04:51,600
हृदय से उनका स्वागत करने की बात भी कही कि आपके यदि ज्यादा

69
00:04:51,600 --> 00:04:55,680
स्ट्रांग सिद्धांत है या फिर इन प्रश्नों का उत्तर है आपके

70
00:04:55,680 --> 00:04:59,920
पास तो आप हमें वो उत्तर बता दीजिए हम आपके साथ खड़े हैं

71
00:04:59,920 --> 00:05:02,480
मगर हमें वो उत्तर कभी नहीं बताया गया हमें

72
00:05:02,480 --> 00:05:06,600
कभी नहीं बताया गया व परंपरा से कैसे वेद मंत्र आए आप तक हमें कभी नहीं बताया गया

73
00:05:06,600 --> 00:05:10,720
कि अगर यदि ईश्वर सीमित है तो असीमित कैसे यदि ईश्वर

74
00:05:10,720 --> 00:05:14,840
की सामर्थ्य का अंत है तो अनंत सामर्थ्य वान कैसे है

75
00:05:14,840 --> 00:05:19,080
ना यह सब हमें कभी बताया नहीं गया मगर हमारे इन प्रश्नों को बंद करने

76
00:05:19,080 --> 00:05:24,120
के लिए एक व्यक्तिगत लड़ाई छेड़ दी व्यक्तिगत

77
00:05:24,120 --> 00:05:28,640
निजी निजी युद्ध में कई तरीके हो सकते हैं कि

78
00:05:28,640 --> 00:05:32,720
भाई किसी ने कह दिया

79
00:05:32,720 --> 00:05:37,320
कि तुम्हारी संस्था नकली है कई तरीके

80
00:05:37,320 --> 00:05:41,640
मतलब सिद्धांति जवाब नहीं है कि जब ईश्वर

81
00:05:41,640 --> 00:05:45,680
की सामर्थ्य का अंत है उसे ईश्वर मानो

82
00:05:45,680 --> 00:05:50,120
कहो ईश्वर मगर यह सत्य तो एक्सेप्ट करो कि वो अनंत सामर्थ

83
00:05:50,120 --> 00:05:54,320
वान नहीं है कहीं ब्रेक लग रही है उसम

84
00:05:54,320 --> 00:05:58,640
तो इसका कोई उत्तर नहीं देते वो और निजी

85
00:05:58,640 --> 00:06:03,440
निजता प आ जाते तो ऐसी निजता एक बात बात हुई हमने एक वीडियो बनाया था

86
00:06:03,440 --> 00:06:07,520
जिसमें कि हमने कुछ संस्कार होते हैं मानव जीवन

87
00:06:07,520 --> 00:06:11,960
के उनमें से एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण संस्कार होता है जिसके कारण वेदों का

88
00:06:11,960 --> 00:06:15,960
गायत्री मंत्र इत्यादि को जपने का अधिकार प्राप्त होता है और

89
00:06:15,960 --> 00:06:17,480
जो परंपरा

90
00:06:17,480 --> 00:06:21,560
प्राप्त आचार्य गण है उनके द्वारा

91
00:06:21,560 --> 00:06:25,720
स्त्रियों के लिए उसे उपयोगी नहीं माना गया उपयुक्त नहीं माना गया स्त्रियों के लिए

92
00:06:25,720 --> 00:06:29,880
दूसरी विधि है ईश्वर को प्राप्त करने तो ऐसे

93
00:06:29,880 --> 00:06:33,880
में कुछ लोग जब यह जो सनातन परंपराएं चली आ रही है और वह

94
00:06:33,880 --> 00:06:38,160
आपको वेद मंत्र दे रही है वो उनका अर्थ आपको दे रही है और आप उनका विरोध करते हुए

95
00:06:38,160 --> 00:06:42,760
अपनी कोई नई चीजें फैला रहे हैं तो हम उस पर प्रश्न कर रहे हैं

96
00:06:42,760 --> 00:06:46,800
तो उस प्रश्न के उत्तर में कोई उत्तर तो है नहीं तो कहां से

97
00:06:46,800 --> 00:06:51,600
देंगे तो क्या ढूंढा कि शिवांश नारायण द्विवेदी की

98
00:06:51,600 --> 00:06:55,760
व्यक्तिगत जीवन में क्या है क्या नहीं है उसकी फोटो है

99
00:06:55,760 --> 00:06:59,800
वह अपनी धर्मपत्नी के साथ कैसे रह

100
00:06:59,800 --> 00:07:03,920
है या जो भी उनको सामग्री हालांकि उसमें भी कुछ ऐसा नहीं है कि बहुत बड़ा

101
00:07:03,920 --> 00:07:07,920
कोई बहुत बड़ा कोई शैतानी प्रूव हो रहा हूं ऐसा कुछ नहीं

102
00:07:07,920 --> 00:07:11,920
है सामग्रियों में उसको प्रस्तुतीकरण आप ऐसे

103
00:07:11,920 --> 00:07:16,400
कर दो कि परंपरा है कि अमुक अमुक है वो बात अलग है मगर

104
00:07:16,400 --> 00:07:20,440
ऐसा तो है नहीं कि मुझे आपने शराब पीते हुए मेरा फोटो ले लिया सिगरेट पीते

105
00:07:20,440 --> 00:07:24,880
हुए फोटो ले लिया है ना या व विचार वो कहीं वैश्यालय

106
00:07:24,880 --> 00:07:28,960
में जाते हुए मेरा फोटो ले लिया हो ऐसा तो कुछ है नहीं क्योंकि राम की

107
00:07:28,960 --> 00:07:32,480
छाया जो थी वो हमारे ऊपर बचपन से पड़ गई थी तो ये सब

108
00:07:32,480 --> 00:07:36,760
चीज अज्ञानता का अज्ञानता के कारण सही विधियों

109
00:07:36,760 --> 00:07:41,400
का आलंबन नहीं था गुरु विहीन होने की वज और यह जो बात

110
00:07:41,400 --> 00:07:45,880
है यह बात हम अपने अनेकानेक वीडियो में बता भी चुके

111
00:07:45,880 --> 00:07:49,880
हैं कि हम पहले कैसे थे और फिर गुरु की शरण में

112
00:07:49,880 --> 00:07:53,880
आने पर शंकराचार्य शरण में

113
00:07:53,880 --> 00:07:57,920
आने पर हमारे जीवन में क्या बदलाव आया हमने विशेष रूप से सब

114
00:07:57,920 --> 00:08:02,480
वीडियो के माध्यम से बताया है कुछ इंटरव्यू भी हुए उसमें भी बताया

115
00:08:02,480 --> 00:08:06,720
मगर ये जो नीच वृत्ति के लोग हैं इनको

116
00:08:06,720 --> 00:08:11,120
ये बात शायद ये सुन नहीं पाए क्योंकि जो चील होता है जिस तरीके से

117
00:08:11,120 --> 00:08:15,200
आकाश में रहता है आज मेरे एक मित्र ने मुझे ये उदाहरण दिया चिल चील होता

118
00:08:15,200 --> 00:08:19,480
है उसको केवल अपने खाने की चीज जो होती है ना मास

119
00:08:19,480 --> 00:08:23,560
वही दिखता है इसी प्रकार से इनको बाकी सब चीजें

120
00:08:23,560 --> 00:08:27,600
नहीं दिखी कि शिवांश द्विवेदी ने अपना जो पुराना जीवन है कहीं बताया तो नहीं

121
00:08:27,600 --> 00:08:31,680
है वो नहीं देखा और हमारे जो जिस पुराने

122
00:08:31,680 --> 00:08:35,800
जीवन को हम बताया हमने बताया है दर्शकों के समक्ष आम जन

123
00:08:35,800 --> 00:08:40,000
के समक्ष हम बता चुके हैं जिस जीवन को उसी जीवन को दोबारा से उठा कर के लाकर

124
00:08:40,000 --> 00:08:44,000
देखो आज हमें बहुत बड़ा हम आज विश्व विजेता हो गए हमने आवान

125
00:08:44,000 --> 00:08:47,480
को आज हम हरा देंगे दंब आज

126
00:08:47,480 --> 00:08:52,680
हम विश्व विजेता हो गए क्योंकि हमें आवान की ऐसी चीज मिल गई

127
00:08:52,680 --> 00:08:56,800
वो चीज जो हम पहले ही प्रस्तुत कर चुके उसी उसी चीज को बस ज्यादा से ज्यादा आपने

128
00:08:56,800 --> 00:09:00,800
इतना अंतर ला दिया कि हमने अपने घर की मात शक्ति की फोटो नहीं दिखाई थी अपने

129
00:09:00,800 --> 00:09:05,280
जीवन में मगर आपने हमारे घर की मातृ शक्तियों को भी सामने लाकर खड़ा कर दिया

130
00:09:05,280 --> 00:09:09,640
और एक अनकहे रूप से अप्रत्यक्ष रूप से नीचता

131
00:09:09,640 --> 00:09:13,720
के साथ यह बता दिया कि भाई आपके घर की जो गरिमा है मान सम्मान

132
00:09:13,720 --> 00:09:17,920
है वह जो है उसका हम दुरुपयोग कर सकते हैं इसलिए हमारे विरुद्ध

133
00:09:17,920 --> 00:09:22,280
बोलना नहीं चुप हो जाना हमसे परंपरा

134
00:09:22,280 --> 00:09:26,400
मत पूछना हमसे यह मत पूछना कि

135
00:09:26,400 --> 00:09:30,680
ईश्वर का यदि सामर्थ्य का अंत है तो व अनंत सामर्थ्य वान कैसे हमसे

136
00:09:30,680 --> 00:09:34,880
यह मत पूछना कि जनेऊ धारण करते टाइम यज्ञोपवित

137
00:09:34,880 --> 00:09:38,920
धारण करते टाइम किसकिस प्रकार का विधान किया गया है किस

138
00:09:38,920 --> 00:09:43,040
संस्कार में कौन से विधान है शास्त्रों में वो शास्त्र जो आपको परंपरा से मिलते

139
00:09:43,040 --> 00:09:47,440
हैं बिना परंपरा के तो नहीं मिलते ईश्वर कान में आगे तो कह नहीं रहा

140
00:09:47,440 --> 00:09:50,800
आपके

141
00:09:50,800 --> 00:09:55,240
तो यह सारी बातें हैं एक एक करके हम सारे चैप्टर्स खोलेंगे जो

142
00:09:55,240 --> 00:09:59,520
जो वहां पर बातें की गई है मोटी मोटी जो

143
00:09:59,520 --> 00:10:03,520
मालूम है उस पर तो अब

144
00:10:03,520 --> 00:10:07,680
जब इनको वह सामग्री मिल गई तो सबसे पहले तो हम अपने पुराने जीवन

145
00:10:07,680 --> 00:10:11,840
के बारे में दर्शकों को बता चुके हैं कि नहीं बता चुके यह मैं आपको बताना चाहूंगा

146
00:10:11,840 --> 00:10:17,840
भाई वो वीडियो जरा प्ले कर दीजिए

147
00:10:32,240 --> 00:10:36,240
ये लगभग आज से डेढ़ डेढ़ साल पहले यह वीडियो हम डाल

148
00:10:36,240 --> 00:10:42,240
चुके हैं य पर

149
00:11:04,080 --> 00:11:08,520
ठीक है बस ब बस

150
00:11:08,520 --> 00:11:10,640
करिए

151
00:11:10,640 --> 00:11:15,480
तो इस वीडियो के माध्यम से इसके इसके

152
00:11:15,480 --> 00:11:19,760
इससे भिन्न कुछ और इंटरव्यू भी हुए हमारा एक इंटरव्यू हुआ था के

153
00:11:19,760 --> 00:11:23,760
द लास्ट वरियर पर वहां पर उस इंटरव्यू को हमने अपने चैनल पर भी डाला हुआ

154
00:11:23,760 --> 00:11:28,240
है अनेका अनेक बार जब कई बार बात आती है तो हमने पुराने जीवन

155
00:11:28,240 --> 00:11:32,720
का ब में बताते हैं कि भाई ऐसा ऐसा था

156
00:11:32,720 --> 00:11:37,000
धर्म रक्षा के कारण हमारी धर्म रक्षा के भाव

157
00:11:37,000 --> 00:11:41,360
के कारण हमारी रुचि हुई भगवत भक्ति में

158
00:11:41,360 --> 00:11:45,520
और भगवत भक्ति के कारण हमारे जीवन में आए गुरु और गुरु

159
00:11:45,520 --> 00:11:49,680
के कारण हमारे जीवन में आया आचरण धर्मा आचरण

160
00:11:49,680 --> 00:11:53,920
और अभी भी पूरा नहीं आ गया है अभी भी पूरा नहीं आ गया है अभी

161
00:11:53,920 --> 00:11:58,320
भी प्रयासरत है मगर भगवत गीता में एक बात कही गई है

162
00:11:58,320 --> 00:12:02,320
क्या अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश

163
00:12:02,320 --> 00:12:06,360
धर्म का पालन ना कर पाने की स्थिति में यदि आपके मन में पश्चाताप है

164
00:12:06,360 --> 00:12:10,480
तब भी आप धर्म के कहलाएंगे है ना तो

165
00:12:10,480 --> 00:12:14,640
धर्म का पालन ना करना आपकी

166
00:12:14,640 --> 00:12:19,040
व्यवस्था होनी चाहिए आपका चयन नहीं ठीक है

167
00:12:19,040 --> 00:12:19,540
और

168
00:12:19,520 --> 00:12:23,800
यदि आप गलत तरीके से लोगों के सामने

169
00:12:23,800 --> 00:12:27,840
धर्म का स्वरूप प्रस्तुत कर रहे हैं और जब हम उस पर प्रश्न कर

170
00:12:27,840 --> 00:12:32,120
रहे हैं तो आप यह बात बोल रहे हैं कि भैया आप भी तो ऐसे

171
00:12:32,120 --> 00:12:36,520
रहते हैं पहली बात तो हम ऐसे रहते थे यह

172
00:12:36,520 --> 00:12:40,680
आप यह जो सामग्री आपने उपयोग की है आप खुद वहां

173
00:12:40,680 --> 00:12:44,840
पर जाकर के देख सकते हैं अगर निष्पक्ष होंगे आत्मा अंदर की मरी नहीं होगी तो खुद

174
00:12:44,840 --> 00:12:48,920
वहां पर जाकर के देख सकते हैं कि यह जो सामग्री आपने दिखाई आज से सा

175
00:12:48,920 --> 00:12:53,800
साल छ साल आ साल पहले की सामग्री है

176
00:12:53,800 --> 00:12:58,080
तो पहली बात तो ये तबकी है दूसरी बात

177
00:12:58,080 --> 00:13:02,120
यह है कि क्या हमने उस सामग्री को दिखाते समय

178
00:13:02,120 --> 00:13:06,320
वहां यह दावा किया है धर्म है यह शास्त्रीय है

179
00:13:06,320 --> 00:13:10,440
अरे भाई हम तो कह ही रहे हैं ना कि हम भटके हुए थे हम तो पहुंचे गुरु की शरण में तब

180
00:13:10,440 --> 00:13:14,520
हमें जो है चीजें पता चली क्या है क्या नहीं है

181
00:13:14,520 --> 00:13:19,120
हमें तो कुछ मालूम ही नहीं था हम भी कहते थे ईश्वर अल्लाह एक है

182
00:13:19,120 --> 00:13:23,240
हम भी कहते थे कुछ नहीं मालूम था

183
00:13:23,240 --> 00:13:27,680
भटके हुए थे नहीं था गुरु हमारे जीवन में

184
00:13:27,680 --> 00:13:31,680
मगर जब एक दिन किसी कन्वर्टेड हिंदू

185
00:13:31,680 --> 00:13:35,000
ने कन्वर्टेड हिंदू ऐसा हिंदू

186
00:13:35,000 --> 00:13:39,280
जो मुस्लिम धर्म को अपना चुका था धर्म नहीं मुस्लिम

187
00:13:39,280 --> 00:13:43,280
जो विचारधारा है उसे अपना चुका था उसने हमें बताया कि

188
00:13:43,280 --> 00:13:47,640
मैं वो था जन्म से क्षत्रिय है उसने हमको बताया

189
00:13:47,640 --> 00:13:51,760
कि मुझे मुस्लिम ज्यादा पसंद है हम तब

190
00:13:51,760 --> 00:13:55,880
तक यही सोचते थे कि सारे जो जितने भी जो वही वाली जो डाल दी

191
00:13:55,880 --> 00:13:59,880
गई थी यही सोचते थे कि भाई जैसे

192
00:13:59,880 --> 00:14:03,880
हमारा हिंदू धर्म वैसे ही बाकी के क्योंकि यह मेंटालिटी है यह डाल दी गई

193
00:14:03,880 --> 00:14:07,960
थी सबके मन में हम भी उनमें से एक थे भटके हुए मगर

194
00:14:07,960 --> 00:14:12,760
जिस दिन उसने यह बोला कि मुझे इस्लाम पसंद है

195
00:14:12,760 --> 00:14:16,800
तब मैंने मेरे जीवन में बदलाव आना शुरू हुआ और

196
00:14:16,800 --> 00:14:20,960
वह इस्लाम पर और ऐसा नहीं है धर्म रक्षा के निमित्त धर्म

197
00:14:20,960 --> 00:14:25,560
परिवर्तन के निमित्त यह यह जो कबीर वाले हैं ना

198
00:14:25,560 --> 00:14:29,600
यह कबीर वालों से रोड पर लड़े हैं गुरुदेव का

199
00:14:29,600 --> 00:14:33,800
सानिध्य तब तक नहीं मिला था सिर्फ राम का नाम था कुछ नहीं पता था सिर्फ राम

200
00:14:33,800 --> 00:14:38,120
पता था राम एक ही बात पता थी बचपन से

201
00:14:38,120 --> 00:14:42,280
राम जहां हारोगेट में वह हारने

202
00:14:42,280 --> 00:14:46,280
नहीं देंगे तुम्हे राम का नाम तुम्हें हारने नहीं देगा

203
00:14:46,280 --> 00:14:50,000
और वही हुआ राम के नाम के कारण

204
00:14:50,000 --> 00:14:54,120
ही उस समय तक जब तक मैं इस्लाम को जानता ही

205
00:14:54,120 --> 00:14:58,280
नहीं था कि इस्लाम ने कहा क्या है मैं तो यही सोचता था जैसे हमारे

206
00:14:58,280 --> 00:15:02,360
यहां कहा गया ईश्वर ने वहां पर उस भाषा में कह दिया ये मेंटालिटी

207
00:15:02,360 --> 00:15:06,400
थी भटके हुए हिंदू मगर

208
00:15:06,400 --> 00:15:10,720
फिर भी कहीं पर अगर बड़ा छोटे की बात आती थी ना कि हिंदुत्व छोटा है

209
00:15:10,720 --> 00:15:14,760
कहीं ऐसी कंपैरेटिव बात आती थी तो अपने धर्म को आगे रखने के लिए सबसे

210
00:15:14,760 --> 00:15:18,840
आगे रहते थे दुर्गा माता के बारे में कोई बुरी बात बोलता था सड़क पर मिल

211
00:15:18,840 --> 00:15:22,840
जाता था खड़ के मारते थे अभी भी मारेंगे अभी

212
00:15:22,840 --> 00:15:26,920
भी मारेंगे अगर माता के बारे में कोई गलत बात

213
00:15:26,920 --> 00:15:32,920
बोलेगा तो मारेंगे

214
00:15:33,480 --> 00:15:37,600
तो यह सब स्थिति थी उसके बाद जब

215
00:15:37,600 --> 00:15:41,760
उस व्यक्ति ने बोला यह परिवर्तन हम देखते आ रहे हैं कि भाई स्टॉल

216
00:15:41,760 --> 00:15:45,920
लगे हैं गीता तेरा ज्ञान अमृत और हिंदू

217
00:15:45,920 --> 00:15:49,960
मुस्लिम सिख ईसाई कोई धर्म नहीं है न्यारा है ना यह सब

218
00:15:49,960 --> 00:15:54,560
जब हम जुमले देखते आ रहे थे लोग इधर उधर ऐसे में जब एक प्रकट

219
00:15:54,560 --> 00:15:59,120
शिव जी छोटे हैं विष्णु जी विष्णु जी बड़े हैं कृष्ण जी उनसे भी बड़े हैं

220
00:15:59,120 --> 00:16:03,200
यह सब मैं देखते आ रहा था मेरा दिमाग भर चुका था

221
00:16:03,200 --> 00:16:07,200
आत्मा बिल्कुल चीत्कार करने लगी थी और उसका बिल्कुल जो अंतिम व

222
00:16:07,200 --> 00:16:11,280
चरण था वो वो था जब एक व्यक्ति ने कह दिया क्षत्रिय घर के उत्पन्न व्यक्ति

223
00:16:11,280 --> 00:16:15,520
ने उसने यह कह दिया कि मैं मुझे इस्लाम पसंद है वहां

224
00:16:15,520 --> 00:16:19,680
से मेरे जीवन में मोड़ आया बदलाव आया

225
00:16:19,680 --> 00:16:23,840
और गुरुदेव का भगवत भक्ति स्टार्ट की

226
00:16:23,840 --> 00:16:28,040
तब मैंने भगवान के नाम का आलंबन लिया मुझे कुछ नहीं समझ

227
00:16:28,040 --> 00:16:32,320
में आ रहा था मैं क्या तब भगवान के नाम का सहारा लिया उनकी भगवत भक्ति

228
00:16:32,320 --> 00:16:37,560
की उनकी कृपा से जो मेरे जीवन में होना चाहिए था अनन्यास

229
00:16:37,560 --> 00:16:41,840
चिंतन जो मेरे जीवन में मुझे होना चाहिए था मेरे जीवन के लिए आवश्यक

230
00:16:41,840 --> 00:16:46,200
था वह भगवान ने फिर उसकी व्यवस्था की भगवान ने सार बम जगतगुरु शंकराचार्य

231
00:16:46,200 --> 00:16:49,080
को मेरे जीवन में ला दिया क्योंकि

232
00:16:49,080 --> 00:16:53,320
जो लड़ाई में लड़ना चाहता था उसका उसके लिए मुझे सबसे बड़ा जो

233
00:16:53,320 --> 00:16:57,440
शस्त्र चाहिए था ब्रह्मास्त्र चाहिए था वो था प्रामाणिक

234
00:16:57,440 --> 00:16:59,800
आचार्य

235
00:16:59,800 --> 00:17:04,080
ऐसा आचार जिसकी बात अका रूप से आप रख सकते हो

236
00:17:04,080 --> 00:17:08,280
नो फफ नो बट वह आचार मेरे जीवन

237
00:17:08,280 --> 00:17:12,800
में मुझे मिले और मैं तड़पा

238
00:17:12,800 --> 00:17:17,040
हं ऐसे आचार्य ऐसे सार्वभौम

239
00:17:17,040 --> 00:17:23,040
अकाट्य सिद्धांतों के लिए मैं तरसा हूं धर्मयोद्दा

240
00:17:29,360 --> 00:17:33,520
गुरुदेव आए तो यदि कोई जी यदि किसी का जीवन

241
00:17:33,520 --> 00:17:38,080
बिगड़ा हुआ है और उसके जीवन में

242
00:17:38,080 --> 00:17:42,280
गुरु का आगमन होता है और उसका जीवन सुधर जाता है तो

243
00:17:42,280 --> 00:17:46,720
यह गलत बात नहीं सुधरना चाहिए है

244
00:17:46,720 --> 00:17:50,720
ना मुझे एक बात यह भी अच्छी लगी

245
00:17:50,720 --> 00:17:54,800
जब मुझे जानकारी मिली य वाली कि भाई आपके लिए ऐसा

246
00:17:54,800 --> 00:17:59,000
ऐसा हो रहा है वहां पर 10 द लोग झुंड बना कर के बातें कर रहे हैं तो मुझे यह अच्छा ल

247
00:17:59,000 --> 00:18:02,960
लगा

248
00:18:02,960 --> 00:18:07,120
कि एक व्यक्ति के लिए भाई मेरा कोई अगर मुझे देखा

249
00:18:07,120 --> 00:18:11,440
जाए तो हमारा ऐसा कोई बहुत विश्वव्यापी संगठन तो हो नहीं गयान

250
00:18:11,440 --> 00:18:16,000
एक व्यक्ति के लिए कितने लोग भेड़िए बन कर के गीदड़ बन कर के

251
00:18:16,000 --> 00:18:20,280
बातें कर रहे तो यह गर्व की बात है एक व्यक्ति

252
00:18:20,280 --> 00:18:24,720
ने इतना इनकी जड़ों को हिला दिया कि इतने लोगों को एक साथ आना पड़ा

253
00:18:24,720 --> 00:18:28,760
हमने पहले भी कहा कि वो जो चोर टाइप का है एक इनका अलंकार

254
00:18:28,760 --> 00:18:33,720
मायों का वो कहते हैं अंडर कवर्ड गुंडा जो पहले

255
00:18:33,720 --> 00:18:38,560
अपने ट्विटर प टेलीग्राम पर आचार्यों को गाली देता है

256
00:18:38,560 --> 00:18:44,200
शिवलिंग के बारे में भद्दे भद्दे अश्लील बातें कहता है

257
00:18:44,200 --> 00:18:48,200
और तर मतलब सारी इलीगल चीज इलीगल वक्तव्य जो व

258
00:18:48,200 --> 00:18:52,400
दे सकता है मर्यादा के बाहर जाकर के वो सब देता है हमने उसे

259
00:18:52,400 --> 00:18:56,520
इतना विवश कर दिया कि उसको जाकर के झूठ ठ के लिए ही

260
00:18:56,520 --> 00:19:00,600
सही थोड़ी बहुत देर के इसलिए ही सही आचार्य का आलंबन लेना पड़ा

261
00:19:00,600 --> 00:19:05,400
आचार्य के शरणागत होना पड़ा है ना और

262
00:19:05,400 --> 00:19:09,400
इतनी रातों की उसकी वो नींद उड़ गई रात रात में उठ उठ

263
00:19:09,400 --> 00:19:13,400
करके वह खड़े होकर के सपने देख सपने में जब उसके आवान आने लगा तो

264
00:19:13,400 --> 00:19:17,680
वह न केन प्रकार हर उसने दाब पेच

265
00:19:17,680 --> 00:19:21,840
उपयोग में लाकर के देख लिया मगर उसका जो सार्थक नहीं हो पाया वह कैसे रोक के

266
00:19:21,840 --> 00:19:26,720
आवान कैसे रोके सनातन धर्म को एक करने की साधी को

267
00:19:26,720 --> 00:19:31,240
कैसे रोके और उसको वास्तविकता

268
00:19:31,240 --> 00:19:35,840
य उसको आधी से कोई दिक्कत नहीं है सनातन धर्म से कोई दिक्कत नहीं है

269
00:19:35,840 --> 00:19:40,080
उसकी विचारधारा पर कोई उंगली कैसे उठा रहा है इससे दिक्कत

270
00:19:40,080 --> 00:19:44,160
और उसकी विचारधारा की रक्षा के लिए यदि सनातन एक नहीं होता है सनातन की रक्षा

271
00:19:44,160 --> 00:19:48,200
नहीं होती तो ना हो बाल में जाए मेरी विचारधारा

272
00:19:48,200 --> 00:19:52,440
सुरक्षित रहनी चाहिए भले ही वो अकाट्य ना हो भले

273
00:19:52,440 --> 00:19:57,200
ही वो सार्वभौम सिद्ध ना हो सके मेरी विचारधारा

274
00:19:57,200 --> 00:19:59,480
नहीं होनी चाहिए तो

275
00:19:59,480 --> 00:20:05,160
मुझे यह अच्छा लगा कि इतने सारे लोग जो

276
00:20:05,160 --> 00:20:09,720
है ने बैठ कर के हमारे बारे में चर्चा की और

277
00:20:09,720 --> 00:20:14,280
हमारी उस सामग्री को लिया जो सामग्री हम भूल चुके थे

278
00:20:14,280 --> 00:20:18,320
कि भाई वह कहीं डली है हमने नहीं डाली है किसी और डाली वो सब अलग विषय

279
00:20:18,320 --> 00:20:22,800
है तो ऐसी सामग्री प्राप्त करके यह स्वयं को

280
00:20:22,800 --> 00:20:26,920
घोषित करने लगे हम विश्व विजेता हो गए और कितने लोगों को उसमें आना

281
00:20:26,920 --> 00:20:31,080
पड़ रहा है तो एक आवान कितनों पर भारी पड़ रहा है यह सोचने

282
00:20:31,080 --> 00:20:35,320
वाली बात और सिद्धांत के जवाब में सिद्धांत

283
00:20:35,320 --> 00:20:39,520
नहीं आ रहा है व्यक्तिगत कटाक्ष आ रहे हैं यह सोचने वाली बात

284
00:20:39,520 --> 00:20:44,080
भाई और अंततोगत्वा एक बात में आपको हसी की बताऊ

285
00:20:44,080 --> 00:20:48,640
कि मेरी जो सामग्री आपने दिखाई है इस

286
00:20:48,640 --> 00:20:52,760
कंपैरिजन में दिखाते हुए कि तुमने भी तो उसके जनेऊ पर या

287
00:20:52,760 --> 00:20:56,800
उसके किसी संस्कार पर फलाने के संस्कार पर बात की कि तुमने जो

288
00:20:56,800 --> 00:21:00,880
है क्या पहन रखा है तो भाई आपके

289
00:21:00,880 --> 00:21:04,880
हमने उस कृत पर बात की थी जिस कृत को आप

290
00:21:04,880 --> 00:21:08,960
धर्म के स्वरूप में प्रस्तुत कर रहे थे हमने अपने

291
00:21:08,960 --> 00:21:13,440
यह जो हमारी सामग्री जो आप प्रदर्शित कर रहे हो हमने इस सामग्री को धार्मिक

292
00:21:13,440 --> 00:21:14,840
सामग्री के रूप में प्रदर्शित

293
00:21:14,840 --> 00:21:18,840
नहीं किया है आपकी और भी आपका और भी निजी जीवन है

294
00:21:18,840 --> 00:21:22,840
आगे हम लोग इस पर बात करेंगे हमने उस पर कुछ भी कटाक्ष नहीं किया

295
00:21:22,840 --> 00:21:26,880
था हमने सिर्फ प्रश्न पूछा था जिस बात को अपने

296
00:21:26,880 --> 00:21:31,440
जीवन के उस अंश को जिसको आप धर्म धार्मिक या शास्त्रो चित

297
00:21:31,440 --> 00:21:35,600
रूप में लोगों के सामने प्रदर्शित कर रहे हैं उस पर हमने प्रश्न किया था कि

298
00:21:35,600 --> 00:21:39,800
क्या ऐसे ऐसे होता है क्या ऐसा ऐसा शास्त्रों में लिखा है हमने

299
00:21:39,800 --> 00:21:44,720
अपनी हमारी जिस सामग्री को आपने प्रदर्शित किया

300
00:21:44,720 --> 00:21:49,160
है क्या कहते हैं हमारे हमारे ऊपर कटाक्ष करने के लिए

301
00:21:49,160 --> 00:21:53,680
उस सामग्री को हमने थोड़ी ना ये धर्म में लिखा है यह शास्त्रो चित है या ये धर्म

302
00:21:53,680 --> 00:21:57,800
धर्म है हम तो खुद उसे त्यागे बैठे हैं आज हम तो खुद उसे

303
00:21:57,800 --> 00:22:02,120
त्यागना चाहते व्यवस्था वश आवश्यकता पड़ने पर दोबारा पहनेंगे

304
00:22:02,120 --> 00:22:06,320
जींस दोबारा पहनेंगे टीशर्ट यदि धर्म रक्षा की आवश्यकता हो जाएगी

305
00:22:06,320 --> 00:22:10,720
तो अवश्य पहनेंगे मगर जो पुरानी

306
00:22:10,720 --> 00:22:14,760
सामग्री आपको प्राप्त भी है तो हमने उसमें कहीं यह दिखाया क्या ये धर्म है यहां

307
00:22:14,760 --> 00:22:18,920
लिखा है या हमारा देखो यहां पर जने हो रहा है मुंडन हो रहा है ऐसा दिखाया

308
00:22:18,920 --> 00:22:23,000
क्या हमने हमने तो नहीं कहा उस समय पूर्ण शास्त्रीय

309
00:22:23,000 --> 00:22:27,320
थे हमने तो अपने कई वक्तव्य मगर आप अपने आप को जरूर शास्त्रो चित रूप में धार्मिक

310
00:22:27,320 --> 00:22:30,120
रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं तो हमने

311
00:22:30,120 --> 00:22:34,440
उस धार्मिक रूप में प्रस्तुत करने पर आपके वहां पर प्रश्न

312
00:22:34,440 --> 00:22:38,480
किया है कि भाई क्या ऐसा ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं कि जनी इस प्रकार

313
00:22:38,480 --> 00:22:42,800
से होता है संस्कार इस प्रकार से होता है मुंडन इस प्रकार से होता है तो अगर

314
00:22:42,800 --> 00:22:47,160
आप उसके कंपैरिजन में हमको यह बता रहे हैं कि देखो तुम भी तो ऐसा कर रहे हो

315
00:22:47,160 --> 00:22:51,200
तो भाई मैं आपको एक बात बता दूं मैं आज चौड़ी छाती करके बोल रहा हूं गर्व के

316
00:22:51,200 --> 00:22:55,200
साथ मुझे गर्व है कि आज मैं परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य की शरण

317
00:22:55,200 --> 00:22:59,280
में आज आ गया मुझे गर्व है और जितने भी उनके एक लाख

318
00:22:59,280 --> 00:23:03,480
करोड़ जितने शिष्य होंगे उन सबको आज ये गर्व होगा कि हम

319
00:23:03,480 --> 00:23:07,600
शंकराचार्य की शरण में हैं ठीक है मैं आज गर्व के साथ बोल

320
00:23:07,600 --> 00:23:11,760
सकता हूं कि मेरी वह सारी जो सामग्री है जो आपने दिखाई है वह धर्मो

321
00:23:11,760 --> 00:23:16,280
चित नहीं है शास्त्रो चित नहीं है गलत है तुम बोल दो

322
00:23:16,280 --> 00:23:20,640
तुम बोल दो तुम्हारा वह संस्कार गलत था

323
00:23:20,640 --> 00:23:24,800
बोल पाओगे है हिम्मत नहीं क्योंकि

324
00:23:24,800 --> 00:23:29,360
आपका जो अस्तित्व है वो सत्य पर नहीं है

325
00:23:29,360 --> 00:23:33,360
इसलिए आपको झूठ का आलंबन लेना पड़ेगा सिद्धांत नहीं

326
00:23:33,360 --> 00:23:37,600
है इसलिए आपको व्यक्तिगत टिप्पणी का आलंबन लेना पड़ेगा मैं बोल रहा हूं

327
00:23:37,600 --> 00:23:41,880
जो मेरी पूरी सामग्री आपने प्रस्तुत की है भाई वो

328
00:23:41,880 --> 00:23:45,560
ऐसी कोई सामग्री उसमें नहीं है जो निकृष्ट

329
00:23:45,560 --> 00:23:49,680
रूप से ही देखा जाए हां जो शास्त्रों पर चलने वाला बिल्कुल पक्का व्यक्ति

330
00:23:49,680 --> 00:23:53,800
होगा आचार्य गण होंगे उनके अनुसार वो निम्न जरूर है

331
00:23:53,800 --> 00:23:58,560
मगर वो ऐसी अधर्म अधार्वा

332
00:23:58,560 --> 00:24:02,840
मैं कह रहा हूं कि वोह शास्त्रो चित नहीं है कोट पहनना जींस

333
00:24:02,840 --> 00:24:07,120
पहनना शास्त्रो चित नहीं है आप कह दो

334
00:24:07,120 --> 00:24:11,160
कि आपने वह जो ड्रामा किया है अपने संस्कार में वह शास्त्रो चित नहीं है

335
00:24:11,160 --> 00:24:15,200
वह केवल एक ड्रामा है कह सकते हो जब नहीं कह सकते हो तो इससे

336
00:24:15,200 --> 00:24:19,800
कंपेरिजन क्यों करके दिखा रहे हो अपने आप को क्यों जस्टिफाई कर रहे हो

337
00:24:19,800 --> 00:24:23,840
पहली बात अब जरा हम एक एक करके विषय खोलते रहेंगे हमारे साथ कई

338
00:24:23,840 --> 00:24:27,880
सारे साथी हैं हम उनको लेंगे और पहली

339
00:24:27,880 --> 00:24:31,920
बात ध्यान रखेंगे कि हमने पहले भी

340
00:24:31,920 --> 00:24:36,080
ऐसे मित्रों के साथ चर्चा की है जो अपना चेहरा

341
00:24:36,080 --> 00:24:40,520
नहीं दिखाते हैं मगर हमने कोई भी वैचारिक

342
00:24:40,520 --> 00:24:44,520
मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं की जिसमें कि सामने वाला

343
00:24:44,520 --> 00:24:48,560
चेहरा ना दिखाए इसका कारण क्या है कि जब चेहरा नहीं होता है तो सामने

344
00:24:48,560 --> 00:24:54,560
वाला कुछ भी

345
00:24:58,360 --> 00:25:02,480
छुपा कर के चलते ही है इंटरनेट पर कि हम वो कर सके जो हम अंदर से जो हमारा

346
00:25:02,480 --> 00:25:06,720
पशु त्व हम उसे पोषित कर सके तो यहां पर जिनको भी हम बिना चेहरे

347
00:25:06,720 --> 00:25:11,320
के लेंगे पहली बात तो वैचारिक मतभेद है ही नहीं जिसके कारण कि

348
00:25:11,320 --> 00:25:16,280
ऐसा कोई सीन हो कि उसमें अश्लील चीज आ जाए और दूसरी बात यह

349
00:25:16,280 --> 00:25:20,320
कि उनको हम व्यक्तिगत स्तर पर जानते भी हैं जो व्यक्ति

350
00:25:20,320 --> 00:25:25,040
यहां पर आएगा कहीं से बकैती करने

351
00:25:25,040 --> 00:25:29,880
डिबेट करने जबकि हम डिबेट नहीं करते चर्चा करते हैं जो व्यक्ति बाहर से कोई आएगा

352
00:25:29,880 --> 00:25:33,960
तो हम उसको नहीं जानते वो कौन है क्या है इसलिए उसका चेहरा आवश्यक है कि उसको डर

353
00:25:33,960 --> 00:25:39,480
रहे कि वो जो बोल रहा है वो दुनिया देख रही है उसकी पहचान है

354
00:25:39,480 --> 00:25:43,480
मगर जब कोई व्यक्ति बिना पहचान के आता निर्द हो कर

355
00:25:43,480 --> 00:25:47,480
के वो कुछ भी बोलता है और बोलते हैं देखो आप यही इनका

356
00:25:47,480 --> 00:25:51,480
जो अंडर कवर्ड एजेंट है इसी की खूब सारी चैट है भांड ये वो अरे

357
00:25:51,480 --> 00:25:55,680
गंदे गंदे वर्ड भाई मैं बोल नहीं सकता राधा रानी के लिए शिवलिंग

358
00:25:55,680 --> 00:25:59,680
के लिए यही अंडर कव जो इनका गुंडा है जिसको इन्होंने खुद

359
00:25:59,680 --> 00:26:03,840
ही लात मार दिया अलंकार हों ने अब वो मारा मारा फिर रहा है ऑफिशियल मतलब

360
00:26:03,840 --> 00:26:08,040
डिक्लेयर कर दिया हम इसे नहीं जानते अब वो मारा मारा फिर रहा है तो वो जो अंडर

361
00:26:08,040 --> 00:26:12,360
कवर्ड गुंडा है वो अपने चेहरे छुपे होने के कारण ही उसकी बहुत सारी सामग्री

362
00:26:12,360 --> 00:26:13,560
आपको प्राप्त हो जाएगी इंटरनेट

363
00:26:13,560 --> 00:26:17,760
से फिलहाल जो हमारे आज के जो चर्चा में लोग आ रहे हैं उनको हम क्योंकि

364
00:26:17,760 --> 00:26:21,800
व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और यह वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं है तो

365
00:26:21,800 --> 00:26:26,120
इसलिए आज कई लोग ऐसे भी हैं जो अपना चेहरा रिवील नहीं करेंगे

366
00:26:26,120 --> 00:26:30,240
क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से उ जैसे आज ये मेरे साथ कर रहे हैं मैं भी ऐसे

367
00:26:30,240 --> 00:26:34,960
ही होता अपना चेहरा ना दिखाता और खुब अपनी फैमिली की फोटो डालता है ना

368
00:26:34,960 --> 00:26:39,160
मैंने क्या ऐसा नहीं है क्या ये सब करते हुए मेरे मन में भय नहीं आया होगा

369
00:26:39,160 --> 00:26:43,320
आया था जब मैं मुस्लिमों की डिबेट में गया था तब आया था

370
00:26:43,320 --> 00:26:47,640
जब मैं बोलता हूं ऐसे करके जो जेल में बैठा हुआ व्यक्ति है उसका बाहर तंत्र

371
00:26:47,640 --> 00:26:52,320
चल रहा है उसके बारे में जब मैं निडर हो कर के बोलता हूं तो मेरे मन में भय आता है

372
00:26:52,320 --> 00:26:56,440
कि मेरा भी परिवार है क्या होगा उसका

373
00:26:56,440 --> 00:27:00,480
यह सारी चीजें मेरे मन में भी आती है मगर तब मुझे एक नाम याद आता

374
00:27:00,480 --> 00:27:03,960
है एक नाम

375
00:27:03,960 --> 00:27:07,480
राम वो

376
00:27:07,480 --> 00:27:13,480
देखेंगे तब मैं य सब कर पाता

377
00:27:26,600 --> 00:27:31,440
हूं गोविंद जी जी लिंक मैंने आपको वहां दिया है

378
00:27:31,440 --> 00:27:35,640
गोविंद गुरकुल जी मैंने लिंक आपको आपकी इग्रा आईडी पर दिया

379
00:27:35,640 --> 00:27:39,720
है युगल किशोर जी आप अपना आपका स्वागत

380
00:27:39,720 --> 00:27:45,720
है आप अपनी बात

381
00:27:52,120 --> 00:27:56,560
रखें जय श्री कृष्ण जय श्री

382
00:27:56,560 --> 00:28:00,600
श्र

383
00:28:00,600 --> 00:28:06,600
जी

384
00:28:13,680 --> 00:28:17,800
बोलिए तो जो विषय को लेकर आज हम य उपस्थित हुए हैं

385
00:28:17,800 --> 00:28:22,160
जो जिस प्रकार से सामग्री इन्होने डाली

386
00:28:22,160 --> 00:28:26,160
जो पहले हुआ या आ साल या फिर न साल पहले तो इस प्रकार से

387
00:28:26,160 --> 00:28:30,760
ि देखा जाए तो भगवान कृष्ण के ऐसे कई सारे भक्त हुए हैं

388
00:28:30,760 --> 00:28:34,920
भगवान राम के भी ऐसे कई सारे भक्त हुए हैं जिन्होंने पीछे पाप

389
00:28:34,920 --> 00:28:39,160
किया हुआ था किंतु बाद में वे शुद्ध हुए

390
00:28:39,160 --> 00:28:43,280
तो उल्टा नाम जपत जग जाना वाल्मीकि व ब्रह्म समाना यह रामचरित

391
00:28:43,280 --> 00:28:47,360
मानस में लिखा है माने कि जो वाल्मीकि

392
00:28:47,360 --> 00:28:51,400
जी है वो उल्टा नाम जपते जपते ब्रह्म समान हो गए भगवान श्री

393
00:28:51,400 --> 00:28:55,680
राम की कृपा से वो पहले कुसंगति में पड़ गए थे अब इस

394
00:28:55,680 --> 00:28:59,800
कथा को भी कुछ लोग जो है प्रक्षिप्त मानेंगे कि वाल्मीकि जी है वो

395
00:28:59,800 --> 00:29:04,360
पाप युक्त नहीं थे वो तो शुद्ध थे भागवत जी में लिखा है कि वो

396
00:29:04,360 --> 00:29:08,480
वरुण के प्राची के दसव पुत्र थे किंतु

397
00:29:08,480 --> 00:29:12,960
कल्प भेद से कल्प भेद हरि चरित सुहाय कल्प भेद से

398
00:29:12,960 --> 00:29:15,680
इस सारी कथा मान्य में सामंजस्य साधना

399
00:29:15,680 --> 00:29:19,880
पड़ता है तो ऐसे स्कंद पुराण के अंदर भी आता महाभारत

400
00:29:19,880 --> 00:29:23,920
के अंदर महाभारत के अंदर वाल्मिकी जी स्वयं युधिष्ठिर जी से बोल रहे

401
00:29:23,920 --> 00:29:28,120
हैं कि अहिता मुनियों ने मेरे को कहा था कि तुम पाप

402
00:29:28,120 --> 00:29:32,120
त हो जाओ मैं पाप युक्त हो गया इसका अर्थ क्या है कि वाल्मीकि जी स्वयं अपनी

403
00:29:32,120 --> 00:29:36,360
वाणी से कह रहे हैं कि अहिता मुनियों ने किसी कारण वश मेरे को श्राप

404
00:29:36,360 --> 00:29:40,440
दे दिया कि तुम पाप युक्त हो जाओ मैं पाप युक्त हुआ किंतु बाद में क्या

405
00:29:40,440 --> 00:29:44,600
हुआ भगवान शिव की ईशान की शरण में जाने से मैं

406
00:29:44,600 --> 00:29:48,640
पाप मुक्त हुआ मुझे आदेश प्राप्त हुआ कि तुम वाल्मीकि रामायण की रचना

407
00:29:48,640 --> 00:29:52,640
करो तो वाल्मीकि रामायण लिखी और स्कंद पुराण के अंदर भी बात को

408
00:29:52,640 --> 00:29:56,800
बताया गया है कि अग्नि शर्मा नाम के ब्राह्मण थे तो अग्नि

409
00:29:56,800 --> 00:30:00,800
शर्मा जो ब्राह्मण थे कुछ कुसंगति में वो फस गए थे तो ऐसे

410
00:30:00,800 --> 00:30:04,960
चरित्र देखे जाते हैं कि कितने ही भक्त जो होते हैं कई कई जो होते

411
00:30:04,960 --> 00:30:09,120
हैं वो जन्म से भक्त होते हैं कई कई जो होते है कुसंगति में फस जाते हैं जैसे

412
00:30:09,120 --> 00:30:13,240
तुलसीदास जी अब तुलसीदास जी का बहुत बड़ा उदाहरण है रामचरित मानस उन्होंने लिखी

413
00:30:13,240 --> 00:30:17,320
राम जी गते बड़े भक्त हुए अनन्य भक्त हुए

414
00:30:17,320 --> 00:30:21,440
तो तुलसीदास जी भी कुछ क्षण के लिए अपनी पत्नी में आसक्त हो गए वहां पर भी

415
00:30:21,440 --> 00:30:25,520
ये देखा जा सकता है किंतु बाद में उनके जीवन में क्या परिवर्तन

416
00:30:25,520 --> 00:30:30,920
आया भगवान श्री राम की भक्ति से आज सारा

417
00:30:30,920 --> 00:30:31,920
संसार

418
00:30:31,920 --> 00:30:36,000
यह बात नहीं देखता कि व पत्नी में आसक्त हुए थे वो इस बात को देखता है कि जो पत्नी

419
00:30:36,000 --> 00:30:40,320
में आ सकति हुई बाद में भगवान श्री राम की जो उन्होने भक्ति की

420
00:30:40,320 --> 00:30:44,640
जो उनको भगवान हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए जो राम चरित मानस

421
00:30:44,640 --> 00:30:49,160
जैसा सद ग्रंथ उन्होने आज समाज को दिया उसके कारण तुलसीदास

422
00:30:49,160 --> 00:30:53,920
जी कितनी महिमा है भक्तों के बीच में सारे भक्त जन उनका न करते

423
00:30:53,920 --> 00:30:58,040
हैं तो यदि हम पिछली लाइफ को अगर

424
00:30:58,040 --> 00:31:02,200
करके यदि हम कुछ कहते हैं वहां पर अब उन लोगों का क्या

425
00:31:02,200 --> 00:31:06,240
है कि शास्त्र यदि किसी अपात्र के हाथ में

426
00:31:06,240 --> 00:31:10,240
पड़ जाते हैं वो क्या करता है वो उसका अर्थ विपरीत कर

427
00:31:10,240 --> 00:31:14,960
देता है भगवत गीता में ही बोला गया है ना अधर्मम

428
00:31:14,960 --> 00:31:19,160
धर्मम तिया मन तमता सर्व अर्था विपरीता बुद्धि

429
00:31:19,160 --> 00:31:23,160
साथ तामसी हमारी बुद्धि तामसी नहीं है हम

430
00:31:23,160 --> 00:31:27,280
अर्थ का अनर्थ नहीं करते पीछे किसी की आवाज आ रही है किसकी

431
00:31:27,280 --> 00:31:30,080
आवाज आ रही है

432
00:31:30,080 --> 00:31:34,800
पीछे कोई आवाज आ रही है बो तो हमारी

433
00:31:34,800 --> 00:31:39,040
हमारी जो बुद्धि है वो तामसी नहीं है इनकी बुद्धि तामसी

434
00:31:39,040 --> 00:31:43,040
है तो अर्थ का अनर्थ कर देते हैं यजुर्वेद भाष 26 दो का जो ये लोग

435
00:31:43,040 --> 00:31:46,960
उदाहरण देते हैं शूद्र को वो यज पवित को

436
00:31:46,960 --> 00:31:51,040
धारण करने के लिए तो वहां पर ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि

437
00:31:51,040 --> 00:31:55,720
वहां पर जो है यज्ञ पवित धारण करवाया जाए वहा पर कोई ऐसा अब

438
00:31:55,720 --> 00:31:59,840
एक बात मैंने इनकी वीडियो में कल देखी जहा पर ये लोग एक बात इन्होंने कही कि

439
00:31:59,840 --> 00:32:04,640
बड़े से बड़ा व्याकरण आचार्य मेरे समक्ष यदि उपस्थित हो जाए

440
00:32:04,640 --> 00:32:08,680
तो वो भी मुझे संतुष्ट नहीं कर पाएगा इसका अर्थ य है कि उन्होने पहले ही ये स्वीकार कर

441
00:32:08,680 --> 00:32:12,880
लिया कि मैं संतुष्ट होंगा ही नहीं तुम करने का प्रयास करो मैं संतुष्ट तुमसे होंगा

442
00:32:12,880 --> 00:32:17,280
ही नहीं बड़े से बड़ा व्याकरण आचार्य फिर इन्होने दूसरी बात क्या कही

443
00:32:17,280 --> 00:32:21,400
कि मैं अभी व्याकरण हालांकि मैं व्याकरण का प्रकांड विद्वान नहीं हूं

444
00:32:21,400 --> 00:32:25,800
मैं व्याकरण इतनी अच्छी नहीं जानता मैं सीख रहा हूं सीखते हुए भी

445
00:32:25,800 --> 00:32:29,800
जो प्रकांड विद्वान है उसकी बात भी स्वीकार नहीं कर सकते इसका

446
00:32:29,800 --> 00:32:34,120
अर्थ क्या हो गया ये अहंकार अंदर बोल रहा

447
00:32:34,120 --> 00:32:38,520
है ये उसकी बात कर रहे हैं क्या जो एक रहरे

448
00:32:38,520 --> 00:32:42,600
से बदन का एक है जो पोट पें टाई में साक्षात्कार किया करता

449
00:32:42,600 --> 00:32:47,360
है जो जी जी जी वही

450
00:32:47,360 --> 00:32:51,480
वही वही उत्तर का को प्रक्षिप्त बोलने के लिए इन्होने राम

451
00:32:51,480 --> 00:32:55,560
भद्राचार्य जी का उदाहरण ले लिया वही रामभद्राचार्य जी ने इनके लिए

452
00:32:55,560 --> 00:32:59,680
कुछ कह दिया तोय लोग तिल मिला गका मतलब क्या हुआ

453
00:32:59,680 --> 00:33:02,320
कि दुश्मन का दुश्मन मित्र

454
00:33:02,320 --> 00:33:06,320
ये मतलब एक खेल देखिए कि राम भद्राचार्य जी को यदि आप मान रहे हैं तो पूरा

455
00:33:06,320 --> 00:33:10,360
मानिए और नहीं मान रहे तो अर्ध कुकुट न्याय अर्ध कुकुट न्याय जो

456
00:33:10,360 --> 00:33:14,720
कर रहे हो आद मुर्गी खाली इस व्यक्ति की नीचता मैंने ये देखी है

457
00:33:14,720 --> 00:33:19,400
इतना नीच है गिरा हुआ कि इसने अपने

458
00:33:19,400 --> 00:33:23,720
प्रचार के लिए पहले कहा वहां पर ये इसका दोगलापन

459
00:33:23,720 --> 00:33:28,000
ये है जिसकी आप बात कर रहे हैं इसने अपने साक्षात्कार

460
00:33:28,000 --> 00:33:32,080
ये कहा कि वो जो उत्तर कांड है प्रक्षिप्त

461
00:33:32,080 --> 00:33:37,000
है और एक परंपरा प्राप्त आचार्य है वो भीय मानते हैं राम भद्राचार्य ठीक है

462
00:33:37,000 --> 00:33:41,160
राम भद्राचार्य मूर्ति पूजा का विरोध करने के कारण दयानंद

463
00:33:41,160 --> 00:33:45,560
जी का वो करते हैं कहीं पर कह देते हैं दयानंद

464
00:33:45,560 --> 00:33:49,640
जी से गलती हो गई उसके विरोध में जिसको य समर्थन देता है

465
00:33:49,640 --> 00:33:53,720
य व्यक्ति लड़का व्यक्ति क्या है अभी किशोर अवस्था

466
00:33:53,720 --> 00:33:58,240
में ही है तो ये जिसको समर्थन देता है

467
00:33:58,240 --> 00:34:02,400
उस तंत्र के द्वारा राम भद्राचार्य के लिए सड़को पर उतर

468
00:34:02,400 --> 00:34:06,520
आते हैं वो लोग राम भद्राचार्य अपनी बात वापस लो अपनी बात वापस लो नहीं

469
00:34:06,520 --> 00:34:10,800
तो हम ये कर देंगे वो कर देंगे यह सब करते हैं तब

470
00:34:10,800 --> 00:34:14,880
इसको ध्यान नहीं आता कि मुझे इन्ह रोकना चाहिए परंपरा प्र आचार कुछ बोल रहे तो सुन

471
00:34:14,880 --> 00:34:17,440
लो तब प्रमाण नहीं है तब वो प्रमाण

472
00:34:17,440 --> 00:34:21,800
है जन आंदोलन हो रहा है उसके बाद उसी समय बांग्लादेश

473
00:34:21,800 --> 00:34:26,080
में हिंदू काटे जा रहे हैं उसके लिए रोड पर नहीं उतर रहे जो

474
00:34:26,080 --> 00:34:30,280
इनके अलंकार समाजी जिनम अभी भी वो तत्व बाकी

475
00:34:30,280 --> 00:34:34,680
है कुछ है ना जो सनातन परंपरा वाले वो तब भी एक निष्पक्ष

476
00:34:34,680 --> 00:34:39,080
होकर के बात कह रहे कि भाई हमारे देखो अलंकार वाले इस समय क्या कर रहे हैं यह समाजी

477
00:34:39,080 --> 00:34:43,240
इस समय क्या कर रहे हैं इस समय राम भद्राचार्य का विरोध करने का समय नहीं है इस समय बांग्लादेशी

478
00:34:43,240 --> 00:34:47,480
हिंदुओं को अपना समर्थन प्रकट करने का समय है वो कह रहे हैं इन्हीं

479
00:34:47,480 --> 00:34:51,960
के लोग कह रहे हैं मगर तब विज्ञान दर्शन को याद नहीं आता किय जो जो

480
00:34:51,960 --> 00:34:57,960
ये अलंकार वाले लोग है समय गलत कर रहे हैं है ना

481
00:34:58,480 --> 00:35:02,520
तो यह जो है इस तरह से ये जो

482
00:35:02,520 --> 00:35:06,680
लोग हैं जो अपने अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं इनका दो

483
00:35:06,680 --> 00:35:10,800
और फिर उसके बाद क्या करता है ये इसकी नीचता देखिए समय

484
00:35:10,800 --> 00:35:15,040
आने पर य भी बोल देता है कि हमरे समाज के भी नहीं है हम अलंकार समाज

485
00:35:15,040 --> 00:35:19,720
के भी नहीं है क बार हु

486
00:35:19,720 --> 00:35:24,160
मिक्स ब्रीड लेकर के चल रहे हैं य

487
00:35:24,160 --> 00:35:28,160
देखिए ये जिस सिद्धांत को पकड़ के चलेंगे यह जिस

488
00:35:28,160 --> 00:35:32,360
सिद्धांत को पकड़ के चलेंगे जैसे ही वह सिद्धांत इनके आड़े

489
00:35:32,360 --> 00:35:36,760
आने लगेगा ये तुरंत उसको छोड़ देंगे यह है सनातन

490
00:35:36,760 --> 00:35:40,920
जो किसी भी देश काल परिस्थिति में नहीं बदलता ये है इनके अकाट्य

491
00:35:40,920 --> 00:35:45,120
सिद्धांत कि हम उत्तरकांड को प्रक्षिप्त इसलिए मानते हैं क्योंकि राम भद्राचार्य

492
00:35:45,120 --> 00:35:49,400
जी ने भी कहा है हम राम भद्राचार्य को भी नहीं मानते क्योंकि वो मूर्ति पूजा के

493
00:35:49,400 --> 00:35:53,400
समर्थक हम विरोधी है और हम फिर उसको भी नहीं मानते जो मूर्ति पूजा का

494
00:35:53,400 --> 00:35:57,720
विरोधी है क्योंकि हम पर बात आ रही है अब हम तो अलंकार समाजी भी नहीं है

495
00:35:57,720 --> 00:36:01,840
हम है क्या हम वो है जिसको भगा भगा के मारा जाए सड़क में दौड़ा दौड़ा

496
00:36:01,840 --> 00:36:06,480
के घुमा घुमा के बस मारा जाए हम वो है

497
00:36:06,480 --> 00:36:10,960
और कुछ ना किया जाए हम बस वो है जिसको बस दौड़ा और मारो

498
00:36:10,960 --> 00:36:14,240
एक ही काम

499
00:36:14,240 --> 00:36:18,840
खैर ये ये चीज तो है

500
00:36:18,840 --> 00:36:22,920
ही मैं यहां पर सत्यम जी को कहूंगा कि

501
00:36:22,920 --> 00:36:27,240
वो कुछ बात कहे अपनी जी सत्यम जी

502
00:36:27,240 --> 00:36:31,440
जय मां जय श्री राम जय मां जय श्री

503
00:36:31,440 --> 00:36:35,520
राम तो सबसे पहले तो मैं एक बात कहना

504
00:36:35,520 --> 00:36:39,520
चाहूंगा युगल जी ने जो बात कही कि उस व्यक्ति ने कहा

505
00:36:39,520 --> 00:36:43,520
कि व्याकरण का प्रकांड विद्वान भी आ जाए तो मैं उसकी बात नहीं मानूंगा तो उस

506
00:36:43,520 --> 00:36:47,600
पर मुझे एक बात याद आ गई दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे

507
00:36:47,600 --> 00:36:51,880
थे वो एक ने कहा कि मैं काशी में शास्त्रार्थ करने गया और

508
00:36:51,880 --> 00:36:55,880
मुझे कोई भी विद्वान हरा नहीं पाया तो दूसरा व्यक्ति कहा कि

509
00:36:55,880 --> 00:36:59,880
तुझे कुछ तो आता ही नहीं है ऐसा कैसे हो गया कि कोई हरा नहीं पाया

510
00:36:59,880 --> 00:37:04,160
बोले वो बोलते थे मैं मानता ही नहीं था तो इतनी

511
00:37:04,160 --> 00:37:08,160
सी बात है आप चाहे कितना शास्त्र प्रमाण दे लो इनको नहीं मानना

512
00:37:08,160 --> 00:37:12,600
वो और कल की जो जो भी स्ट्रीम हुई जब भी हुई

513
00:37:12,600 --> 00:37:16,680
उसमें इनकी जो आवाज थी जो जो वहां बैठे थे कुछ लोगों की

514
00:37:16,680 --> 00:37:20,760
आवाज इतनी मतलब द्वेष से भरी हुई थी वह स्पष्ट समझ

515
00:37:20,760 --> 00:37:25,560
आ रहा था कि पर्सनल कुछ द्वेष था इसलिए वो स्ट्रीम करी गई

516
00:37:25,560 --> 00:37:29,600
किसी भी तरीके से आप को गलत साबित करना है

517
00:37:29,600 --> 00:37:34,480
लोगों को भटका है यही उनका उद्देश्य

518
00:37:34,480 --> 00:37:38,760
था भाई उद्देश्य की बात तो यह है कि हमने

519
00:37:38,760 --> 00:37:43,200
पूछा है कि वेद मंत्र आपके पास कैसे आए

520
00:37:43,200 --> 00:37:47,920
इसका उत्तर नहीं है प्रॉब्लम यह क्यों कर रहा है यह

521
00:37:47,920 --> 00:37:51,920
सवाल हमने पूछा है यदि ईश्वर

522
00:37:51,920 --> 00:37:56,240
अवतार नहीं ले सकता सीमित है तो ठीक है मान लो कि ईश्वर

523
00:37:56,240 --> 00:37:59,440
अनंत सामर्थ वान नहीं

524
00:37:59,440 --> 00:38:03,480
हमने तो केवल मर्यादा में रहते हुए एक प्रश्न किया था ना

525
00:38:03,480 --> 00:38:07,520
दे देते उत्तर आज तक नहीं दिया उत्तर आज तक

526
00:38:07,520 --> 00:38:11,520
टिल टुडे आज तक इन्होने उत्तर नहीं दिया उत्तर में क्या दिया कि

527
00:38:11,520 --> 00:38:15,680
हम तुम्हारे घर की मातृ शक्तियों को सार्वजनिक रूप से हम जो है लोगों तक पहुंचा देंगे

528
00:38:15,680 --> 00:38:19,960
बता देंगे ये भैया यह करना इनका

529
00:38:19,960 --> 00:38:23,960
दुरुपयोग करना और वहां पर ये भी कहेंगे कि देखो हम किसी स्त्री पर अलान

530
00:38:23,960 --> 00:38:28,320
नहीं लगाना चाह रहे हैं मगर उस स्त्री की जो जो

531
00:38:28,320 --> 00:38:32,480
उसकी अनुमति के बिना किसी भी मातृ

532
00:38:32,480 --> 00:38:36,720
शक्ति की इस तरह से हम जो है पब्लिक में ले आएंगे

533
00:38:36,720 --> 00:38:41,280
भाई जहां से आपने व सामग्री उठाई है वोह

534
00:38:41,280 --> 00:38:44,760
उसकी जानकारी में है वह सामग्री नहीं है

535
00:38:44,760 --> 00:38:48,520
यह सारी बात सोचने की

536
00:38:48,520 --> 00:38:52,800
है एक बात और है इसमें

537
00:38:52,800 --> 00:38:58,040
मैं अभी दो दिन से एक आर्य समाज के व्यक्ति से मैं बात कर रहा था

538
00:38:58,040 --> 00:39:02,120
जी बात यह थी कि दयानंद जी ने माना है कि 1000 हत्या का दोष

539
00:39:02,120 --> 00:39:06,240
लगता है मूर्ति पूजा करने पर तो उसने बोला यह कहां लिखा हुआ है मैंने उसको

540
00:39:06,240 --> 00:39:10,440
बताया कि देखो पत्र व्यवहार में मि द जी दशो जी

541
00:39:10,440 --> 00:39:14,600
वो जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं वो इस बात के लिए पश्चाताप

542
00:39:14,600 --> 00:39:18,800
प्रकट कर चुके क्षमा भी मांग चुके हैं और अब वह एक नए रूप में नए

543
00:39:18,800 --> 00:39:22,800
जीवन में आगे बढ़ना चाह रहे हैं तो हमें ऐसी स्थिति में उनका

544
00:39:22,800 --> 00:39:27,360
प्रोत्साहन करना चाहिए ना कि बारबार उसी बात को लेकर कटाक्ष करना चाहिए

545
00:39:27,360 --> 00:39:31,840
उसके बारे में उन्होंने पूरा एक्सप्लेनेशन दिया है दो चार लाइव पहले आप जाक के देखे

546
00:39:31,840 --> 00:39:36,200
तो आपको पता चलेगा जी कंटिन्यू करिए सत्यम जी तो

547
00:39:36,200 --> 00:39:40,440
उन्होंने बोला कि कहां लिखा हुआ है मैंने कहा कि देखो य युधिष्ठिर वि मांस

548
00:39:40,440 --> 00:39:44,560
जी जो है आर्य समाज के विद्वान उन्होंने पत्र व्यवहार नाम से

549
00:39:44,560 --> 00:39:48,720
पुस्तक निकाली है तो सामने से रिप्लाई आया कि युधिस्टर वि मांस

550
00:39:48,720 --> 00:39:52,720
जी तो उटपटांग लिखते रहते हैं तो अपनी बात सिद्ध करने के लिए

551
00:39:52,720 --> 00:39:57,000
अपने ही विद्वानों को कुछ भी कह देते य तो उटपटांग लिखते रहते हैं इनको

552
00:39:57,000 --> 00:40:00,120
तो जन ही नहीं है वर्तमान के जो आचार्य

553
00:40:00,120 --> 00:40:04,120
गुरुकुल से पढ़कर आचार्य बने हैं उनको दोगला कह देते हैं मतलब सिर्फ अपने

554
00:40:04,120 --> 00:40:08,120
मत की पुष्टि के लिए सामने वाला व्यक्ति गुरुकुल में पड़ा है

555
00:40:08,120 --> 00:40:12,240
अध्ययन किया है गुरु के उसने सानिध्य में तब आचार्य बन रहा है उसको दोगला

556
00:40:12,240 --> 00:40:16,400
कह रहे हैं खुद घर बैठे सत्या प्रकाश पढ़ रहे हैं सिर्फ सत्या प्रकाश

557
00:40:16,400 --> 00:40:20,480
पढ़कर अपने आप को प्रकांड विद्वान माने जा रहे हैं तो यहीं से समझ आ रहा है कि

558
00:40:20,480 --> 00:40:24,520
इनकी बुद्धि का स्तर बहुत ही निम्न है मैं तो कह रहा हूं जीरो से भी नीचे जा रहा

559
00:40:24,520 --> 00:40:28,960
है कहीं कहीं तो सामान्य हिंदी शब्द नहीं पढ़ पाते

560
00:40:28,960 --> 00:40:33,840
वो मिल गया ना भाई सिद्धांतों का अभाव कैसे पता चलता है

561
00:40:33,840 --> 00:40:38,280
उत्तर नहीं है अनंत और उसका सामर्थ्य वान का तो परंपरा का उत्तर नहीं है

562
00:40:38,280 --> 00:40:42,520
तो क्या करेंगे भाई ये आज से आठ साल पहले देखो ऐसे करता था वो भी उसको गलत

563
00:40:42,520 --> 00:40:47,320
मिस इफॉर्म भी करेंगे साथ ही साथ कि आज भी ऐसे करता है तुमको नहीं दिखाता है

564
00:40:47,320 --> 00:40:51,360
आज भी ऐसे करता है तुमको नहीं दिखाता है एक एक चीज प बात करेंगे जो जो चीजें की गई

565
00:40:51,360 --> 00:40:55,960
है अभी मैं बीच में एक बात ले लेता हूं कि

566
00:40:55,960 --> 00:41:00,560
इनके यहां पर कोई श्रद्धानंद जी थे है ना

567
00:41:00,560 --> 00:41:04,880
श्रद्धानंद जी अलंकार समाझ श्रद्धानंद जी

568
00:41:04,880 --> 00:41:09,080
जो थे वो पहले उनके बारे में हिस्ट्री है कि वो इन्हीं के चैनलों

569
00:41:09,080 --> 00:41:13,560
पर व हिस्ट्री पड़ी हुई है कि भाई वो मास तक खाते थे

570
00:41:13,560 --> 00:41:15,120
वो शराब तक पीते थे

571
00:41:15,120 --> 00:41:19,480
वो व्या व्यक्ति का भी आलंबन कर लेते थे वह सारे अवगुण

572
00:41:19,480 --> 00:41:23,800
जो एक व्यक्ति में हो सकते उनके अंदर थे उसके बाद उनके

573
00:41:23,800 --> 00:41:27,880
जीवन में बदलाव आया फिर वो एक बड़े क्रांतिकारी के रूप में

574
00:41:27,880 --> 00:41:32,320
सामने आए इनके अकॉर्डिंग यह बात है तो यदि

575
00:41:32,320 --> 00:41:36,720
अब जैसे कि इन्होने हमारी पुरानी सामग्री को उठा करके और हमारे लिए

576
00:41:36,720 --> 00:41:40,880
इत्यादि इत्यादि जो शब्द उपयोग में लाया छपरी तो इनके अनुसार वह

577
00:41:40,880 --> 00:41:45,040
सतानंद जी भी छपरी है है ना और वह

578
00:41:45,040 --> 00:41:49,600
हर व्यक्ति वो हर व्यक्ति व हर क्रांतिकारी व हर आचार्य छपरी है

579
00:41:49,600 --> 00:41:53,680
जिसका भूत भूतकाल में या भूतपूर्व में कुछ ऐसा इतिहास रहा

580
00:41:53,680 --> 00:41:57,800
है जो शास्त्रो चित नहीं था मेरा तो ऐसा भी नहीं है क्योंकि मैंने पहले ही बताया

581
00:41:57,800 --> 00:42:01,800
कि बचपन से राम की छाया मुझे मिल गई थी यह कृपा है कुछ

582
00:42:01,800 --> 00:42:05,920
प्रारब्ध की कृपा मान लो या फिर कुछ संस्कार मान लो ऐसे घर

583
00:42:05,920 --> 00:42:10,000
में जन्म मिल गया यह कृपा रही ईश्वर की की मुझे राम का जो

584
00:42:10,000 --> 00:42:14,240
आदर्श था बचपन में ही ये सेट हो गया था कि मेरे आदर्श

585
00:42:14,240 --> 00:42:18,480
कौन है हम सबको एक आदर्श चाहिए होता है ना मैंने तब तक नहीं पढ़ा था रामो

586
00:42:18,480 --> 00:42:22,680
विग्रह वान धर्मा नहीं पढ़ा था मगर मुझे यह पता चल गया था कि मुझे

587
00:42:22,680 --> 00:42:26,720
जीवन में अगर किसी को बेंचमार्क बनाना है किसी को अपना आदर्श बनाना है

588
00:42:26,720 --> 00:42:30,520
तो और जब मैं काफी

589
00:42:30,520 --> 00:42:34,600
जब मैं अध्ययन किया बड़ा हुआ और जब मैंने अपने शास्त्रों को तब

590
00:42:34,600 --> 00:42:38,680
मुझे वो लाइन मिली रामो विग्रहवां धर्मा तोय भगवत कृपा नहीं है

591
00:42:38,680 --> 00:42:43,120
तो और क्या है कि बिना शास्त्र को खोले ही मुझे वोह जो शास्त्र

592
00:42:43,120 --> 00:42:47,280
उचित बात थी वो बचपन से मेरे अंदर धारण हो गई थी कि मुझे अगर

593
00:42:47,280 --> 00:42:51,960
किसी को फॉलो करना है कोई मेरे लिए एग्जांपल है जीवन में तो वो राम

594
00:42:51,960 --> 00:42:56,480
मैं कर पाऊ ना कर पाऊ बाद की बात है मगर जब भी मैं अपने आपको को लूंगा

595
00:42:56,480 --> 00:43:01,160
कि मैंने सही किया या गलत किया तो मैं किससे तो लूंगा भगवान राम से

596
00:43:01,160 --> 00:43:05,160
मुझे जब भी चुनाव करना होगा धर्म और अधर्म में तो मैं किससे

597
00:43:05,160 --> 00:43:09,280
लूंगा कुछ समझ में नहीं आ रहा होगा तो भगवान राम से तो मेरे ऊपर तो तब

598
00:43:09,280 --> 00:43:13,280
भी ऐसी कृपा रही कि भाई मेरा मेरे पास ना मेरा ऐसा कोई इन्होने भी सामग्री

599
00:43:13,280 --> 00:43:17,320
दिखाई कोई ऐसी थोड़ी ना है कि प्रदर्शित नहीं कर सकते हां वो एक

600
00:43:17,320 --> 00:43:21,400
धार्मिक व्यक्तित्व के अग की

601
00:43:21,400 --> 00:43:25,440
सीमा से बाहर जरूर है मगर वो ऐसी थोड़ी ना दिखाई नहीं जा सकती जैसे वो जो

602
00:43:25,440 --> 00:43:29,480
तथागत स्वघोषित आचार रहे उनकी हुक्का पीते हुए सामग्री आ गई

603
00:43:29,480 --> 00:43:33,800
थी ऐसी कोई सामग्री मेरी नहीं है है ना फिर भी उस सामग्री

604
00:43:33,800 --> 00:43:38,320
को य पुरानी जो भूतकाल की सामग्री है गुरुदेव की शरण में आने से पहले की सामग्री

605
00:43:38,320 --> 00:43:43,200
उसको ऐसे प्रस्तुत कर रहे देखो ये छपरी तो इनके हिसाब से सदानंद जी इत्यादि

606
00:43:43,200 --> 00:43:46,360
और भी जो अशा स्त्रीय कार्य जिसने भी

607
00:43:46,360 --> 00:43:50,720
किए धार्मिक मार्ग में आने से पहले वो सब इनके लिए छपरी होंगे

608
00:43:50,720 --> 00:43:54,920
और मैंने तो अभी तक कहीं पर भी यह भी घोषित नहीं किया कई बार लोग मुझे गुरु कहते हैं

609
00:43:54,920 --> 00:43:59,160
कई बार लोग आचार्य कह देते हैं मैं उनको याद दिलाता हूं कि मैं आचार्य कहलाने योग्य

610
00:43:59,160 --> 00:44:03,400
नहीं हूं मैं गुरु के संबोधन के योग्य नहीं हूं आप मुझे अपना भाई समझे

611
00:44:03,400 --> 00:44:07,400
आप मुझे अपना मित्र समझे बंधु समझे मैं कभी हमेशा सदैव मैं इन बातों

612
00:44:07,400 --> 00:44:11,560
के लिए मना करता हूं मैं तो कभी अपने आप को ऐसे प्रस्तुत नहीं करता सामने से मना करता

613
00:44:11,560 --> 00:44:15,720
हूं आप लोगों ने देखा ही होगा जो अगर रेगुलर जो भी देखते हैं तो इन केन प्रकार अगर ये वाली

614
00:44:15,720 --> 00:44:19,720
बात आती तो मैं मा मना करता हूं मगर फिर भी मेरा इतिहास तो ऐसा नहीं है

615
00:44:19,720 --> 00:44:23,800
जैसा इन लोगों का है फिर भी वो आपके लिए श्रद्धावन है आपके

616
00:44:23,800 --> 00:44:27,920
लिए जो है वो पूजनीय है सम्माननीय है और मैं नहीं

617
00:44:27,920 --> 00:44:32,160
हूं मैं आपके लिए सम्मान छोड़िए एक सामान्य व्यवहार के लायक

618
00:44:32,160 --> 00:44:36,200
भी नहीं हूं आपने कर दिया पपड़ी तो ये क्या है आपके लिए क्या इनको भी आप छपी

619
00:44:36,200 --> 00:44:40,320
कहेंगे तो यह डगला पन है और जहां पर

620
00:44:40,320 --> 00:44:44,360
धर्म का अभाव होता है जहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर का अभाव होता

621
00:44:44,360 --> 00:44:48,800
है वहां पर धर्म जो आचरण है उसम हीनता आएगी भाई

622
00:44:48,800 --> 00:44:53,280
मेरे पास परंपरा प्राप्त गुरु नहीं था आचरण हीन था

623
00:44:53,280 --> 00:44:57,560
मेरे को नहीं पता था धोती बांधनी है आज मैं संध्या वंदन करता हूं धती बांध के कर

624
00:44:57,560 --> 00:45:01,400
रोज सुबह का हमारा नाम जप का सेशन देख लीजिए रोज सुबह धोती में

625
00:45:01,400 --> 00:45:05,840
मिलूंगा मैं आपको आ जाइए नाम जप करेंगे साथ में पूजा के

626
00:45:05,840 --> 00:45:09,920
आसन पर बैठूंगा तो मैं धोती धोती बांध के मिलूंगा आपको अभी भी सिले हुए

627
00:45:09,920 --> 00:45:13,960
वस्त्र है सिले हुए वस्त्र अभी भी है क्योंकि हमें ऐसी समय धारा

628
00:45:13,960 --> 00:45:18,480
में जी रहे हैं जिसमें कि वास्तविक स्वरूप में पहुंचने में समय

629
00:45:18,480 --> 00:45:22,680
लगेगा मगर हम यह नहीं है कि उसी को धर्म मान लेंगे जो हमें आपातकालीन

630
00:45:22,680 --> 00:45:26,840
स्थितियों के लिए हम आलंबन लेना पड़ रहा है जिन चीजों का उसी को हम धर्म के रूप

631
00:45:26,840 --> 00:45:31,600
में प्रचारित नहीं करेंगे जब हमें शुद्ध धर्म बताना होगा तो हम बताएंगे भैया धोती

632
00:45:31,600 --> 00:45:35,680
जो बिना सिले हुए वस्त्र है लांग मार कर के लांग लपेट करके ही

633
00:45:35,680 --> 00:45:39,720
आसन पर बैठा जाता है जब आप वैदिक पूजा के विधि विधान से बैठते हैं

634
00:45:39,720 --> 00:45:44,520
पूजा के लिए तो

635
00:45:44,520 --> 00:45:48,520
ये इस बारे में क्या कहेंगे कि जो इनके श्रद्धानंद जी है वो और भी बहुत

636
00:45:48,520 --> 00:45:52,880
से हैं ज्यादा लोगों के मे तो दयानंद

637
00:45:52,880 --> 00:45:56,960
जी भी तो बचपन में वो चिलम आयुर्वेद के रूप में चिलम वगैरह पीते थे

638
00:45:56,960 --> 00:46:00,960
को डिफेंड करते हैं कि वो बीमारी के लिए पीते थे बाद में छोड़ दिए थे तो बाद

639
00:46:00,960 --> 00:46:05,080
में छोड़ दिए थे उनको भी तो फिट कर रहे हो ना आप फ्रेम में बाद

640
00:46:05,080 --> 00:46:09,160
में आचरण बदल गया था हां तो और

641
00:46:09,160 --> 00:46:13,200
तो दूसरों पर आप ये क्यों नहीं फिट करते हो वो दोगलापन है ना

642
00:46:13,200 --> 00:46:16,560
दोगलापन कहां होगा रामो दना भाषित

643
00:46:16,560 --> 00:46:20,600
राम दो प्रकार की बातें करना नहीं सिखाते वो दोगलापन है

644
00:46:20,600 --> 00:46:24,680
तो दोगलापन कहां से आ रहा है जब राम धर्म है राम बता रहे हैं दो तरह की बातें मत

645
00:46:24,680 --> 00:46:29,200
करो तो इनके व्यवहार में दोगलापन क्यों आ रहा है क्योंकि वहां पर सर्वशक्तिमान

646
00:46:29,200 --> 00:46:33,280
ईश्वर नहीं है बात सारी आकर के टिक जाती है जहां

647
00:46:33,280 --> 00:46:37,320
ईश्वर होगा वहां धर्म होगा और ईश्वर वो होगा जो सर्वशक्तिमान

648
00:46:37,320 --> 00:46:41,440
होगा जहां बाधित ईश्वर है वहां अधर्म है आप कोई भी देख

649
00:46:41,440 --> 00:46:45,640
लीजिए भले ही वो सनातन का चोला ड़ करके तंत्र काम कर रहा हो या

650
00:46:45,640 --> 00:46:49,640
सनातन के विरुद्ध सनातन से बाहर सीमा में रह कर के तंत्र काम कर रहा

651
00:46:49,640 --> 00:46:54,320
हो अब जैसे आप देखो इनका ये जो स्ट्रेटजी है जो इन्होंने व्यक्तिगत

652
00:46:54,320 --> 00:46:58,360
आक्षेप लगाने का आलंबन लिया हालांकि उससे हमें

653
00:46:58,360 --> 00:47:02,800
कोई प्रभाव नहीं पड़ा मैं बता रहा हूं आपको क्योंकि हमारे साथ

654
00:47:02,800 --> 00:47:07,600
श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें

655
00:47:07,600 --> 00:47:11,680
ठीक है हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ा मगर जनता के समक्ष

656
00:47:11,680 --> 00:47:15,800
वास्तविकता रखने का रखने की आवश्यकता थी तो आज

657
00:47:15,800 --> 00:47:19,840
हम रख रहे हैं तो प्रभाव नहीं पड़ा और तो और हमें उससे फायदा हुआ क्यों

658
00:47:19,840 --> 00:47:24,160
फायदा हुआ क्योंकि धर्म के पास लाने के लिए जो पहला

659
00:47:24,160 --> 00:47:28,360
जो आकर्षण चाहिए होता है ना जो हमारे बारे में आप ने लोगों को जो बताया है

660
00:47:28,360 --> 00:47:31,600
उससे लोग और प्रभावित हो रहे हैं मेरे पास पूरे दिन

661
00:47:31,600 --> 00:47:35,880
भर में आज इतने मैसेजेस आ ग भैया आप ऐसे से ऐसे आए आपका ये जीवन है

662
00:47:35,880 --> 00:47:40,160
भैया मैं बहुत प्रभावित हूं अभी भी कई लोगों ने यह देखिए कई लोगों ने कमेंट

663
00:47:40,160 --> 00:47:44,320
किया है तो यह कमेंट ये क्या है शिवांश भाई मैं आपको

664
00:47:44,320 --> 00:47:49,040
बताऊं आपका ट्रांसफॉर्मेशन ही इनके लिए सबसे बड़ी इच्छा है तो

665
00:47:49,040 --> 00:47:53,320
जो व्यक्ति अपना मंतव्य पहले से बना चुका

666
00:47:53,320 --> 00:47:57,440
है मुझे भी जी जी जी

667
00:47:57,440 --> 00:48:01,560
जी जी प्यारी बहना तो जो व्यक्ति अपना मंतव्य पहले से बना

668
00:48:01,560 --> 00:48:06,280
चुका है उसकी बात तो अलग है मगर जो न्यूट्रल व्यक्ति जो अभी भी भटक रहा है वो देखेगा

669
00:48:06,280 --> 00:48:10,520
एक व्यक्ति की एक व्यक्ति का जीवन ऐसा भी था वो ऐसे कार

670
00:48:10,520 --> 00:48:14,680
कारों में चलता था ऐसे वो हवाई जहाज में उड़ता था वो

671
00:48:14,680 --> 00:48:18,720
ऐसी लाइफ जीता था और वो आज ये कर रहा है और इतने डंके की

672
00:48:18,720 --> 00:48:23,200
चोट पर कर रहा है वो प्रभावित हो रहे हैं लोग उससे मेरे पास बहुत सारे मैसेजेस आए

673
00:48:23,200 --> 00:48:27,360
और अभी कमेंट्स भी आ रहे हैं तो हालाकि इन्होंने जो किया है वो तो हमारे समर्थन

674
00:48:27,360 --> 00:48:31,840
में व सिद्ध हो रहा है क्योंकि मैंने पहले ही कहा था भगवत गीता

675
00:48:31,840 --> 00:48:36,080
9 कि तू मेरी शरण में आजा तेरी प्राप्ति

676
00:48:36,080 --> 00:48:40,200
की चिंता और अप प्राप्ति वो अप प्राप्ति की चिंता और प्राप्ति की रक्षा

677
00:48:40,200 --> 00:48:44,680
मैं देखूंगा मैं तो जिस दिन हमने ये वाले श्लोक पढ़ लिए थे हमने केवल य श्लोक

678
00:48:44,680 --> 00:48:46,600
आप लोगों की तरह माइक पर वो जनता

679
00:48:46,600 --> 00:48:50,760
के समक्ष उनको बेवकूफ बनाने के लिए हम लोग ये लोक नहीं बोलते हैं ये

680
00:48:50,760 --> 00:48:54,800
धारण है अंदर रक्त में बह रहे हैं लोक कर्मन वादी कारते

681
00:48:54,800 --> 00:48:58,880
मा फले सु कदाचना रामो विग्रहवां धर्मा य ऐसे

682
00:48:58,880 --> 00:49:04,000
ही नहीं बोलते हैं ये अंदर खून में बह रहे हैं तब बोलते

683
00:49:04,000 --> 00:49:08,040
हैं तो हमें तो कोई दिक्कत नहीं ई बल्कि और समर्थन हो

684
00:49:08,040 --> 00:49:12,080
गया मगर इनकी जो य स्ट्रेटजी है वो स्ट्रेटजी वही वाली

685
00:49:12,080 --> 00:49:16,680
स्ट्रेटजी है जो कम्युनिस्ट और जो यह मल

686
00:49:16,680 --> 00:49:20,960
तंत्र है मैंने कहा ना सनातन आपका शत्रु कौन है

687
00:49:20,960 --> 00:49:24,960
वो नहीं जो सामने खड़ा हुआ आपको दिखाई दे रहा है कि

688
00:49:24,960 --> 00:49:29,040
सनातन का जो मुख्य शत्रु है वो सामने हाथों में शत्र

689
00:49:29,040 --> 00:49:33,440
लिए खड़ा हुआ कोई अजन भी नहीं है सनातन का जो वास्तविक शत्रु

690
00:49:33,440 --> 00:49:39,320
है वह पीछे शास्त्र लिए खड़ा हुआ आपका कोई अपना

691
00:49:39,320 --> 00:49:43,560
है आपका कोई अपना तो अब इनका ये आलंबन

692
00:49:43,560 --> 00:49:47,600
देखिए इनका हीन आचरण देखिए और किसी एक ने नहीं किया है यह भी

693
00:49:47,600 --> 00:49:51,720
है तंत्र के तंत्र से जुड़े हुए बहुत सारे लोग उसमें शामिल

694
00:49:51,720 --> 00:49:55,720
थे एक से एक से अधिक बहुत सारे और

695
00:49:55,720 --> 00:49:59,920
यहां तक की जो स्वयं को हरे कृष्ण वाले कहते हैं वो भी उनका समर्थन कर रहे हैं

696
00:49:59,920 --> 00:50:01,640
उन्हीं की राधा रानी को गाली पड़ती

697
00:50:01,640 --> 00:50:06,080
है वो भी उनका समर्थन कर रहे हैं उन्हीं के

698
00:50:06,080 --> 00:50:10,200
अवतारवाद का वो भागवत का खंडन लिखा हुआ

699
00:50:10,200 --> 00:50:14,400
है दयानंद जी के द्वारा भागवत का खंडन लिखा

700
00:50:14,400 --> 00:50:18,720
है दयानंद जी के द्वारा उन्हीं का वही सपोर्ट करते हैं खैर तो इन्होंने जो

701
00:50:18,720 --> 00:50:23,080
स्ट्रेटजी अपनाई है ये मलेच्छ तंत्रों की स्ट्रेटजी होती है

702
00:50:23,080 --> 00:50:27,640
और यह जो कम्युनिस्ट तंत्र है धर्म से हीन तंत्र उनकी स्ट्रेटजी

703
00:50:27,640 --> 00:50:31,800
होती है कि जब सैद्धांतिक वार ना कर पाओ सैद्धांतिक

704
00:50:31,800 --> 00:50:36,320
हमारे पास शस्त्र अस्त्र ना रह जाए तो क्या करो व्यक्तिगत कुछ निकालो

705
00:50:36,320 --> 00:50:40,680
जैसे बागेश्वर वाले अभी ज्यादा प्रचार होने लगा था उनका वो आगे बढ़ने लगे थे

706
00:50:40,680 --> 00:50:44,800
तो उनके खिलाफ मुकदमा हो गया वो जो है हाई कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए

707
00:50:44,800 --> 00:50:48,880
उनको लेकर के जहां भी है न्यायालय का उनके लिए जो है ये सब केस बस

708
00:50:48,880 --> 00:50:53,120
लगा दिए और ऐसा होता है कि जब कोई व्यक्ति सता

709
00:50:53,120 --> 00:50:57,480
नहीं है सिद्धांत से सामर्थ्य से नहीं सत्ता है तो इस तरह के ये जो मले

710
00:50:57,480 --> 00:51:01,480
तंत्र है और जो कम्युनिस्ट तंत्र है इस तरह के कुचक्र चलाते हैं जो चलाए जा

711
00:51:01,480 --> 00:51:05,640
रहे हैं तो ये धर्म

712
00:51:05,640 --> 00:51:09,680
वाले कहां से हुए सनातन धर्म वाले कहां से हुए कॉपी तो कर रहे

713
00:51:09,680 --> 00:51:14,120
हैं ये मले तंत्र को मले हुए फिर

714
00:51:14,120 --> 00:51:17,440
कम्युनिस्ट को कॉपी कर रहे तो कम्युनिस्ट हो गए

715
00:51:17,440 --> 00:51:21,400
धर्म हीन आचरण हीन

716
00:51:21,400 --> 00:51:25,480
नीच ऐसी चीजों का आलंबन लेते हुए चल रहे हैं जी

717
00:51:25,480 --> 00:51:31,480
मैं गोविंद जी से कहूंगा कुछ

718
00:51:31,920 --> 00:51:35,960
बताए सबसे पहले तो सभी को हरि ओम नमस्ते जय

719
00:51:35,960 --> 00:51:40,000
श्री राम जैसे कि आपको पहले बताया आज बात भी हुई

720
00:51:40,000 --> 00:51:44,080
आपसे एक ही मैसेज किया था मैंने आपको की कल मेरे पास य खबर आ गई

721
00:51:44,080 --> 00:51:48,640
थी कि यह वाली लाइव चलने वाली है ठीक है

722
00:51:48,640 --> 00:51:52,760
तो मैंने इनको बहुत समझाया अब एक आदमी कैसे ही इनको समझा सकता

723
00:51:52,760 --> 00:51:56,960
है मैंने इनको जितने भी तरीके से हो सकता है

724
00:51:56,960 --> 00:52:01,200
कहा इनको मतलब बहुत ज्यादा तो इनकी मेरे साथ बातचीत नहीं हुई थी लेकिन मैंने इनको

725
00:52:01,200 --> 00:52:05,200
ये गुण बताने की जो मेरा प्रयास था वो मैंने किया कि भाई

726
00:52:05,200 --> 00:52:09,320
तुम यह क्या कर रहे हो किसी पर पर्सनल टिप्पणी करके तुम्हें

727
00:52:09,320 --> 00:52:13,640
प्राप्त क्या होगा यह तो बता दो कम से कम ठीक है

728
00:52:13,640 --> 00:52:17,760
तो इनको मैंने बताया तो फिर इन्होंने मेरे को कोई रिप्लाई तो दिया था लेकिन वो वही था कि

729
00:52:17,760 --> 00:52:21,880
पता नहीं क्या ऐसे फालतू का कोई बात आई थी मैंने इनको समझाया कि भाई यह सब काम

730
00:52:21,880 --> 00:52:26,040
तुम क्यों कर रहे अगर तुम स्वयं को वैदिक मानते भी हो तो क्या

731
00:52:26,040 --> 00:52:30,160
वेद यह बताते हैं कि पर्सनल टिप्पणी करो किसी स्त्री के ऊपर

732
00:52:30,160 --> 00:52:32,560
उसकी फोटो लगा दो ठीक है या फिर

733
00:52:32,560 --> 00:52:36,720
उसका यह कर लो और क्या कौन सा अपराध मतलब की अपराध क्या है इसमें

734
00:52:36,720 --> 00:52:40,720
कि यदि कोई व्यक्ति जिम में अपना कोई कार्य कर रहा है और फोटो खिंचवा

735
00:52:40,720 --> 00:52:45,040
रहा है तो उसमें अपराध क्या बनाना यह नहीं समझ पाया

736
00:52:45,040 --> 00:52:49,080
ठीक है ना अगर यह फोटो खिंचवाना अगर आदि आदी चीजें

737
00:52:49,080 --> 00:52:53,280
अवैध हैय आप कहते हो कि गलत चीजें हैं तो आप क्यों

738
00:52:53,280 --> 00:52:57,440
मोबाइल का इस्तेमाल करके अपना प्रचार कर रहे हो बताइए आपकी भी तो वीडियो

739
00:52:57,440 --> 00:53:01,760
आ रही है ना उसमें या आप कह दीजिए कि हमारी सोच इतनी

740
00:53:01,760 --> 00:53:06,040
ज्यादा छोटी है कि यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ फोटो खिंचवा

741
00:53:06,040 --> 00:53:10,160
लेता है तो मतलब उसमें कुछ गलत ही हो जाता है तो

742
00:53:10,160 --> 00:53:14,160
मेरे को लगता है कि आर्य समाज जिस स्थिति पे है ना बहुत अच्छे लोग भी

743
00:53:14,160 --> 00:53:18,200
हैं बीच में कुछ चुनिंदा लोग हैं जो बहुत अच्छे भी है सकारात्मक बातें भी

744
00:53:18,200 --> 00:53:22,640
होती है लेकिन यह जो लोग उछलकर सामने आ रहे हैं ना

745
00:53:22,640 --> 00:53:26,840
ना इनके पास बोलने का ढंग है पहली बात पहली बात तो इनके पास बोलने

746
00:53:26,840 --> 00:53:31,040
का कोई ढंग नहीं दूसरी बात इन्ह शून्य भी ज्ञान नहीं है ठीक है

747
00:53:31,040 --> 00:53:35,280
और तीसरी बात है जब व्यक्ति केवल निंदा को ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य

748
00:53:35,280 --> 00:53:39,440
बना लेता है हां खंडन मंडन की आपकी प्रतिक्रिया है वह आप करिए

749
00:53:39,440 --> 00:53:43,560
लेकिन जब निंदा ही एकमात्र जीवन का लक्ष्य बन जाए तब तो आप वैदिक

750
00:53:43,560 --> 00:53:47,560
भी नहीं रहे क्योंकि वेद तो कह नहीं रहा किसी चीज की व्यर्थ में निंदा ही

751
00:53:47,560 --> 00:53:51,680
निंदा करते रहो यदि कोई व्यक्ति हमारा ऐसा व्यक्ति

752
00:53:51,680 --> 00:53:55,840
हो जो कि हमें देखे कोई नया व्यक्ति आकर और वो इनकी ऐसी

753
00:53:55,840 --> 00:53:59,840
भाषा सुने और ऐसे लोगों की विचार सुने और

754
00:53:59,840 --> 00:54:03,880
छपरी आदि फोटो के ऊपर लिखना ये कौन सा वैदिक कार्य बताइए यदि

755
00:54:03,880 --> 00:54:07,920
फिर वैदिक आज तक आपको वैदिक क्रियाए या वेदों का ज्ञान

756
00:54:07,920 --> 00:54:12,040
आपको यह भी नहीं सिखा पाया कि किसी से बात कैसे करनी है आपकी और

757
00:54:12,040 --> 00:54:16,120
हमारी दुश्मनी क्या है जैसे शिवांश जी है उनकी आपके साथ दुश्मनी क्या है

758
00:54:16,120 --> 00:54:20,400
पहले यह बताइए शून्य बस इतनी सी बात है कि आप उनका खंडन

759
00:54:20,400 --> 00:54:24,600
नहीं कर पा रहे हैं बस यही है ना इसके अलावा तो कुछ और नहीं है

760
00:54:24,600 --> 00:54:28,640
तो इसका क्या मतलब है कि सामने आके चर्चा करिए उससे या पीठ पीछे किसी को

761
00:54:28,640 --> 00:54:32,760
छपरी आदि लगा बताइए अब मेरा भी काम जिम में ही था

762
00:54:32,760 --> 00:54:36,920
ठीक है मैं बता रहा हूं आपको अपना भी इतिहास बना देता हूं मैं अभी जिम

763
00:54:36,920 --> 00:54:41,520
में ही ट्रेनिंग दिया करता था चार सर्टिफिकेशन है मेरे पास पर्सनल ट्रेनिंग से लेकर

764
00:54:41,520 --> 00:54:45,560
स्पेशलिस्ट इन स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ठीक है मैंने सारी ऑनलाइन सर्टिफिकेशन की

765
00:54:45,560 --> 00:54:49,640
हुई तो अब इसका मतलब क्या है कि मनुष्य का जीवन चेंज नहीं हो सकता

766
00:54:49,640 --> 00:54:53,640
या जैसे श्रद्धानंद जी की अभी बात आई है तो फिर आप क्या उनको पूरी उम्र

767
00:54:53,640 --> 00:54:57,800
यही बात अब हम लगा दें ऐसी फोटो तो फिर होगा हम तो करते नहीं

768
00:54:57,800 --> 00:55:01,840
ऐसी छोटी चीजें हमारे पास और बहुत काम है करने के लिए तो यह

769
00:55:01,840 --> 00:55:03,120
चीजें देखिए

770
00:55:03,120 --> 00:55:07,360
कितना बोलना है कितनी बात करनी है मुंह को कितना

771
00:55:07,360 --> 00:55:11,360
खोलना है यदि इतना भी फिर वैदिक ज्ञान से आपको चीज नहीं प्राप्त हो तो

772
00:55:11,360 --> 00:55:15,520
मेरे को लगता है बहुत अफसोस जनक बात है और कम से कम आपको इसके

773
00:55:15,520 --> 00:55:19,640
बारे में अब यह वीडियो तो आपने बना ही दी है लेकिन मुझे लगता है कि आपको

774
00:55:19,640 --> 00:55:23,680
इस वीडियो को डिलीट करके कुछ दिन के लिए एक दिन के लिए कम से

775
00:55:23,680 --> 00:55:27,840
कम उपवास रखकर ध्यान करना चाहिए मनन करना चाहिए कि मेरे मुख

776
00:55:27,840 --> 00:55:32,160
से क्याक गलत शब्द निकले हैं और इन शब्दों को हम आगे ना दोहराए

777
00:55:32,160 --> 00:55:36,480
शिवांश जी को याद होगा कुछ दिन पहले जब हमारा

778
00:55:36,480 --> 00:55:40,480
एक टॉपिक चल रहा था रामपाल जी के बारे में मैंने शिवांश जी को बताया

779
00:55:40,480 --> 00:55:44,840
कि ऐसे ऐसे करके आज पुण्य तिथि है दयानंद

780
00:55:44,840 --> 00:55:48,960
जी की तो इन्होंने हमारा इतना सम्मान रखा है हालांकि मैं भी

781
00:55:48,960 --> 00:55:53,000
आर्य समाज से ही जुड़ा हुआ हूं कहीं ना कहीं ठीक है

782
00:55:53,000 --> 00:55:57,040
इन्होंने हमारा इतना सम्मान रखा बात का मतलब कि मेरे को यकीन नहीं हुआ कि क्या

783
00:55:57,040 --> 00:56:01,120
मेरी ये चीज ठीक है एक्सेप्ट होगी तुरंत ही इन्होंने बात

784
00:56:01,120 --> 00:56:05,200
को रोक कर बताया कि हमारा किसी के साथ कोई वैर भाव नहीं है और दयानंद जी को

785
00:56:05,200 --> 00:56:09,360
उनकी पुण्य तिथि पर आज हम जो है वो साधुवाद देते हैं या जो

786
00:56:09,360 --> 00:56:13,520
भी उनके लिए ठीक है सम्मान जनक तो बताइए अब

787
00:56:13,520 --> 00:56:17,680
व्यक्ति इससे ज्यादा और क्या कर सकता है एक व्यक्ति और

788
00:56:17,680 --> 00:56:18,280
उसमें कौन

789
00:56:18,280 --> 00:56:22,720
सी ऐसी गलत बात थी जो कि बड़ी गैर वैदिक थी या कोई पाप था उसमें

790
00:56:22,720 --> 00:56:26,760
जो फोटो अगर खिंचवाना पाप है आपके अनुसार यानी कि कुछ

791
00:56:26,760 --> 00:56:30,880
नहीं मिला तो आप पर्सनल टारगेटिंग कर दीजिए यह फिर आप अपने आप को

792
00:56:30,880 --> 00:56:34,880
आर्य तो नहीं कह सकते ना कम से कम यह श्रेष्ठ पुरुषों की वाणी है

793
00:56:34,880 --> 00:56:38,920
श्रेष्ठ पुरुषों का लक्षण है किसी की फोटो के ऊपर छपरी लिख दीजिए अगर आप

794
00:56:38,920 --> 00:56:43,040
उसको परास्त नहीं कर पा रहे सिद्धांत में तो मुझे लगता है आ

795
00:56:43,040 --> 00:56:47,080
आर्य समाज को भी ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए हमसे ज्यादा

796
00:56:47,080 --> 00:56:51,160
आर्य समाज के जो ऑफिशियल हैं उनको इनके ऊपर नजर रखनी

797
00:56:51,160 --> 00:56:55,240
चाहिए कि यह क्या हरकतें कर रहे हैं आर्य समाज के नाम पर और आर्यों के नाम पर ये

798
00:56:55,240 --> 00:56:59,560
क्या कार्य कर रहे हैं तो मुझे लगता है हमसे ज्यादा कार्यवाही इनके ऊपर स्वयं आर्य

799
00:56:59,560 --> 00:57:03,720
समाज को ही कर देनी चाहिए कि ये कैसी व्यर्थ टिप्पणी है किसी

800
00:57:03,720 --> 00:57:08,160
स्त्री के बारे में तुम ऐसे शब्द बोल रहे हो उसको टारगेट कर रहे हो दुनिया को दिखा रहे हो

801
00:57:08,160 --> 00:57:12,560
वैसे तो तुम कहते हो कि भाई हमारे यहां पर स्त्रियां बड़ी सम्माननीय

802
00:57:12,560 --> 00:57:17,040
है वेदों में सबको जो है वह पूर्ण अधिकार दिया गया है

803
00:57:17,040 --> 00:57:21,240
तो आगे चलकर प्रश्न नहीं उठेंगे आप पर तो मैं बस यही

804
00:57:21,240 --> 00:57:25,320
कहना चाहता हूं क्योंकि मैं थोड़ा सा आज दुखी हूं इस चीज से ठीक है मेरे

805
00:57:25,320 --> 00:57:29,400
मुंह से कहीं कोई ज्यादा बात ना निकल जाए जो अक्सर निकल जाती है तो मैं

806
00:57:29,400 --> 00:57:33,440
बस यही कहूंगा कि यह अत्यंत दुष्ट और अत्यंत नीच आचरण

807
00:57:33,440 --> 00:57:37,520
था जो इन्होने वीडियो में कहा है इससे बाद मैं अब जो है विराम चाहता

808
00:57:37,520 --> 00:57:41,680
हूं वाणी के लिए आपने जो बातें

809
00:57:41,680 --> 00:57:46,000
कही है वो मतलब काफी सार गर्भित है

810
00:57:46,000 --> 00:57:50,120
उसमें मुझे दो चीजें यहां पर मैं बताना चाहूंगा दर्शकों

811
00:57:50,120 --> 00:57:54,200
को एक चीज आई सामने जिम

812
00:57:54,200 --> 00:57:58,200
और एक चीज आई कि भाई पर्सनल नहीं जाते तो पर्सनल नहीं जाते

813
00:57:58,200 --> 00:58:02,680
प मतलब कि व्यक्तिगत जब आप सिद्धांत से खंडन नहीं कर पा रहे सिद्धांत का जवाब

814
00:58:02,680 --> 00:58:06,800
अच्छा पहले मेरी भावनाएं देखिए आप य इन लोगों को यह लगता है

815
00:58:06,800 --> 00:58:10,800
जितने भी लोग हैं कि मैं अपना जिस मत को मानता हूं उसका

816
00:58:10,800 --> 00:58:15,120
झंडा ऊंचा करना चाहता हूं इनको यह गलत फहमी है मैं बार-बार कहता

817
00:58:15,120 --> 00:58:19,280
हूं कि आप सिद्धांत ले आइए ऐसा सिद्धांत जिसकी

818
00:58:19,280 --> 00:58:23,360
काट ना हो मैं आपका प्रचार करने लगूंगा व्यक्तिगत रूप से मैं भले

819
00:58:23,360 --> 00:58:27,400
ही शंकराचार्य का शिष्य रहू मैं आपका प्रचार बन जाऊंगा मैं आपका झंडा

820
00:58:27,400 --> 00:58:31,720
लेकर चलूंगा मगर वो नहीं लाते वो कभी नहीं लाएंगे क्योंकि है ही नहीं

821
00:58:31,720 --> 00:58:35,840
प्रॉब्लम य इनको लगता है कि मैं जो है शंकराचार्य का झंडा ऊंचा करना

822
00:58:35,840 --> 00:58:40,040
अपने वो व्यक्तिगत जो मैंने मंतव्य बना लिया उसका आगे रखना चाहता

823
00:58:40,040 --> 00:58:44,240
हूं अपना सिद्धांत नहीं देंगे जिसको काटना काट ना सके कोई

824
00:58:44,240 --> 00:58:48,280
दे दो ना नहीं देते अच्छा दूसरी बात ये है कि जब हम

825
00:58:48,280 --> 00:58:48,780
ये

826
00:58:48,440 --> 00:58:52,640
क ये कहेंगे इन्होने मैंने जाना वो हम जब ये बात आए

827
00:58:52,640 --> 00:58:56,920
कि भाई तुम जब सिद्धांत से खंडन नहीं कर पाए तो व्यक्तिगत आक्षेप के तो वो बोल र वो

828
00:58:56,920 --> 00:59:01,200
सामने वाला वहां बता रहा है वो जो अपने आप को वीरा

829
00:59:01,200 --> 00:59:05,320
कहता है वीरा कहती है वो वहां बोल रही है कि क्यों उसने

830
00:59:05,320 --> 00:59:09,440
भी तो इसके ऊपर व्यक्तिगत आक्षेप किया मैंने उसके उसका व्यक्तिगत आक्षेप

831
00:59:09,440 --> 00:59:13,440
नहीं किया है उसका जो आप धार्मिक संस्कार दिखा रहे

832
00:59:13,440 --> 00:59:17,840
हो वैदिक स्वरूप में उस पर आक्षेप किया है कि वो धार्मिक

833
00:59:17,840 --> 00:59:22,120
नहीं है वो अवैदिस वस्त्रों

834
00:59:22,120 --> 00:59:26,160
में आप ये संस्कार का आलंबन ले रहे हो इस संसार

835
00:59:26,160 --> 00:59:30,160
इस संस्कार को क्रियान्वित कर रहे हो क्या यह संस्कार ऐसा लिखा है

836
00:59:30,160 --> 00:59:34,280
हमारे शास्त्रों में और फिर मैं वही कहता हूं कि जब

837
00:59:34,280 --> 00:59:38,640
आप उसके उत्तर में मेरी उन चीजों को रख रहे हो तो मैं तो ठोक के कह रहा हूं

838
00:59:38,640 --> 00:59:42,720
कि मेरी वो चीजें अशा स्त्री है तुम कह दो मेरा वो संस्कार अशा स्त्री है

839
00:59:42,720 --> 00:59:46,720
अभी हो जाएगा दूध का दूध और पानी का पानी आप मैं तो अभी

840
00:59:46,720 --> 00:59:50,840
कह रहा हूं यहां मैं तो कह रहा हूं य तो बात आप किसी सिद्धांत के ऊपर

841
00:59:50,840 --> 00:59:54,880
ही कर रहे हो ना यहां भी तो आप बात सिद्धांत के ये तो व्यक्तिगत चीज हो ही नहीं

842
00:59:54,880 --> 00:59:58,960
सकती कभी यहां तो सिद्धांत हां जी तो

843
00:59:58,960 --> 01:00:03,360
हमने सिद्धांत पूछा कि क्या जिन वस्त्रों को धारण करके

844
01:00:03,360 --> 01:00:03,860
आप

845
01:00:03,560 --> 01:00:07,560
अपना वो संस्कार क्रियान्वित कर रहे हो क्या उन वस्त्रों का के

846
01:00:07,560 --> 01:00:11,760
लिए कहा गया है क्या वह हमारे भारत की संस्कृति है तो इन्होंने

847
01:00:11,760 --> 01:00:16,000
उसको य ले लिया व्यक्तिगत टिप्पणी है भाई है ना जब अगर आपका

848
01:00:16,000 --> 01:00:20,080
जो व्यक्तिगत जीवन है तो फिर उसमें आप धार्मिक वो मत बनो

849
01:00:20,080 --> 01:00:24,120
इनफ्लुएंसर हमने कई बार इसमें यह कहा अपनी लाइव स्ट्रीम

850
01:00:24,120 --> 01:00:28,560
में अपनी वीडियोस में कि भाई मैं अल्पज्ञ शिष्य हूं और

851
01:00:28,560 --> 01:00:32,800
प्रयास करता हूं चीजें पहुंचाने का जो आचार्य गण कहते हैं

852
01:00:32,800 --> 01:00:37,760
फिर भी यदि कोई मेरे मुख से ऐसी बात निकल जाएगी जो परंपरा से प्राप्त

853
01:00:37,760 --> 01:00:42,160
सर्व मान सार्वभौम आचार्य के विरुद्ध होगी तो वहीं की वही मेरी बात निरस्त मानी जाए

854
01:00:42,160 --> 01:00:46,240
हम तो यह बता हमने कभी अपने आप को आचार्य के रूप में गुरु के रूप में ख्या

855
01:00:46,240 --> 01:00:50,840
पित ही नहीं किया कि हम धर्म की वो बिल्कुल क्या

856
01:00:50,840 --> 01:00:55,120
कहते धर्म हमी से शुरू होता है हमने इस तरह से अपने आप को प्रस्तुत ही नहीं किया फिर भी हमारी

857
01:00:55,120 --> 01:00:59,240
कोई अगर साल पुरानी सामग्री के आधार पर आप ये बता रहे हो क्या शास्त्र

858
01:00:59,240 --> 01:01:03,360
कहते हैं तो हम यह स्वीकार करते हैं कि हमारी वह सामग्री अशा

859
01:01:03,360 --> 01:01:07,520
स्त्रीय है अब आपने अब आप अपनी उस सामग्री को अशा

860
01:01:07,520 --> 01:01:12,000
स्त्रीय मान लो जिसके कंपैरिजन

861
01:01:12,000 --> 01:01:16,000
में आपने हमारी सामग्री दिखाई है कि यह भी तो ऐसा करता है

862
01:01:16,000 --> 01:01:18,640
हमने कभी उसे धार्मिक स्वरूप में प्रस्तुत नहीं किया हम

863
01:01:18,640 --> 01:01:22,920
तो उसे प्रस्तुत ही नहीं कर रहे हो गए होंगे छ साल हम तो उसे प्रस्तुति

864
01:01:22,920 --> 01:01:27,120
नहीं कर रहे भूल गए किसने डाली वो भी अभी जांच का विषय है वो भी जांच

865
01:01:27,120 --> 01:01:31,800
का विषय वो डाली किसने तो हम तो उसे यूज ही नहीं कर रहे

866
01:01:31,800 --> 01:01:35,840
मगर यह उसको आज भी यूज कर रहे हैं जिसको इन्होंने धर्म के स्वरूप में

867
01:01:35,840 --> 01:01:40,040
दिखाया तो जब हम यह ठोक के सीना कह रहे हैं कि भैया हमारी वो शास्त्र

868
01:01:40,040 --> 01:01:44,080
के बाहर की चीज है वो गलत वो वो धर्म धर्म की सीमा में नहीं है धर्म

869
01:01:44,080 --> 01:01:48,080
की सीमा के बाहर की चीज है हो सकता है कि आज की दृष्टिकोण से वो पहनावा

870
01:01:48,080 --> 01:01:52,240
पहनना आम हो गया हो प्रासंगिक हो गया हो मगर वो जो अशा

871
01:01:52,240 --> 01:01:56,440
स्त्रीय है तो है अब आप अपनी उस चीज को शास्त्रीय मान लो अब

872
01:01:56,440 --> 01:02:00,680
दूसरी बात एक है यह है कि आज हम लोग जिस समय धारा

873
01:02:00,680 --> 01:02:04,760
में जी रहे हैं जहां पर हमारा अध्ययन से लेकर के शिक्षा

874
01:02:04,760 --> 01:02:09,040
से लेकर के सुरक्षा से लेकर के हर चीज पर पाश्चात्य

875
01:02:09,040 --> 01:02:13,080
करण हो गया है स्कूल स्कूल लाइफ से लेकर के

876
01:02:13,080 --> 01:02:17,920
हर चीज में पाश्चात्य विचारधारा घुस चुकी है

877
01:02:17,920 --> 01:02:22,440
ऐसी सिचुएशन में अगर कोई व्यक्ति मेडिकल स्टोर खोल करके बैठा है

878
01:02:22,440 --> 01:02:26,480
तो यदि वो धीरे धीरे धीरे धीरे परंपरा प्राप्त आचार की शरण में

879
01:02:26,480 --> 01:02:30,680
आ जाए और मेडिकल स्टोर से उसकी रस्ती चल रही है मेडिकल स्टोर बंद कर

880
01:02:30,680 --> 01:02:33,640
दे तुरंत क्या मैंने

881
01:02:33,640 --> 01:02:37,640
कहा आपको कि मैं पुरोहित हूं या मैं यज्ञ करवाता हूं

882
01:02:37,640 --> 01:02:41,720
मुझसे आप संपर्क करिएगा मैं आपका जो है जो वेदोक्त कर्म होते हैं वो

883
01:02:41,720 --> 01:02:45,960
मैं करवाता हूं मैंने कहा मैंने तो कभी इस तरह से प्रस्तुत नहीं किया

884
01:02:45,960 --> 01:02:50,320
जब हम यह देखेंगे कि अगर यह ब्राह्मण है तो और क्या ये ब्राह्मण

885
01:02:50,320 --> 01:02:54,400
उचित कार्य कर रहा है तो वो तब उसकी आवश्यकता तब होगी जब हम वैदिक

886
01:02:54,400 --> 01:02:58,800
कर्म करवाने होंगे उस ब्राह्मण से से हमने तो अपने आप को कभी प्रस्तुत ही नहीं किया

887
01:02:58,800 --> 01:03:02,800
हम तो खुले कई बार सामने से बताते हैं कि भाई

888
01:03:02,800 --> 01:03:06,880
जो हमारे शास्त्रों की सीमा के बाहर था वो ज्ञान हमने अर्जित किया है उसी

889
01:03:06,880 --> 01:03:10,880
से हमारा जीवन चलता है जो थोड़ा बहुत और हमने स्वीकार भी किया कि

890
01:03:10,880 --> 01:03:14,920
वो जो जो चीजें है वो शास्त्रीय नहीं है भैया वो वीडियो दिखा दीजिए

891
01:03:14,920 --> 01:03:19,120
जिम के विषय में जब हमने अपना जिम का वीडियो डाला था तो हम अपनी

892
01:03:19,120 --> 01:03:23,160
बात को बता रहे हैं कि यह शास्त्रीय नहीं है देखिए और उसकी

893
01:03:23,160 --> 01:03:27,280
तुलना किससे कर रहे हैं जिसको ये शास्त्रीय बताते हुए प्रस्तुत कर रहे हैं मतलब अपने संस्कार

894
01:03:27,280 --> 01:03:31,360
को यह शास्त्रीय बता रहे हैं कि हमने वो संस्कार जो किया देखो देखो स्त्रियों का

895
01:03:31,360 --> 01:03:35,520
ये होता है स्त्रियों का वो होता है उसकी तुलना उससे कर रहे हैं जिसको हम ये बताते हुए

896
01:03:35,520 --> 01:03:39,720
बता रहे हैं कि यह शास्त्रीय नहीं है यह हमारी व्यवस्था है कि गुरु

897
01:03:39,720 --> 01:03:43,840
के आने से पहले ज्ञान प्राप्त करने से पहले हमारा जो आजीवक पार्जन का माध्यम

898
01:03:43,840 --> 01:03:48,040
था हमारी शिक्षा हमारा जो क्या कहते हैं

899
01:03:48,040 --> 01:03:48,720
संस्कार वो

900
01:03:48,720 --> 01:03:52,960
इस तरह के हुए कि हमको इन सब चीजों का आलंबन लेना पड़ा दिखा दीजिए भैया वो वाला

901
01:03:52,960 --> 01:03:57,080
वीडियो जो जिम के लिए हमने बनाया था मेरा प्रश्न

902
01:03:57,080 --> 01:04:01,080
तो ये है कि जिम जो है उससे कोई व्यक्ति

903
01:04:01,080 --> 01:04:05,320
अवैध कैसे हो जाता है या उससे कोई व्यक्ति जो है वो कैसे

904
01:04:05,320 --> 01:04:09,680
खंडित हो जाता है उसका धर्म कैसे खंडित हो जाता है धर्म खंडित

905
01:04:09,680 --> 01:04:13,680
नहीं मगर मैं यह कहूंगा अगर कोई ब्राह्मण घर में जन्म

906
01:04:13,680 --> 01:04:18,080
लेकर के ब्राह्मण वृत्ति से आज को पार्जन नहीं कर रहा है जो कि आजकल मैंने वो

907
01:04:18,080 --> 01:04:22,120
जिम से जो अर्थ आता था मैं अपनी पर्सनल बात कर रहा हूं छोटे वाले भाई

908
01:04:22,120 --> 01:04:26,120
है उनकी बात नहीं कर रहा हूं जो जिम से आने वाला अर्थ आज मेरे जीवन में नहीं कह

909
01:04:26,120 --> 01:04:30,440
गया आज जो है जिम से जो ब्राह्मण की वृत्ति होनी चाहिए

910
01:04:30,440 --> 01:04:34,440
आज लगभग उसी पर आ चुका हूं आने वाले समय में भगवान ने चाहा तो पूर्णतः

911
01:04:34,440 --> 01:04:38,840
उसी पर आ जाऊंगा मगर जो जिम का वो है हिस्सा

912
01:04:38,840 --> 01:04:42,880
मेरे जीवन प वो कम होता जा रहा है अब मैं क्या करूं भाई कि गुरुदेव के

913
01:04:42,880 --> 01:04:47,000
आने से पहले या ज्ञान प्राप्त करने से पहले इतना मटिया मेट हो रखा था कि

914
01:04:47,000 --> 01:04:51,000
हमारी जो पढ़ाई हुई वो मिशनरी स्कूल में हुई

915
01:04:51,000 --> 01:04:55,120
हम जो पले बड़े हमने इंग्लिश की शिक्षा ली इंग्लिश मीडियम स्कूल में जाकर के

916
01:04:55,120 --> 01:04:59,360
पढ़े और हमने वैसी शिक्षाए प्राप्त की उसी के बारे में हमने अपने

917
01:04:59,360 --> 01:05:03,480
जो प्रोफेशन था उसी में तैयार किया तो आज अगर हम लोग धर्म

918
01:05:03,480 --> 01:05:03,980
को

919
01:05:03,800 --> 01:05:08,000
हमें अगर धर्म को हमें धर्म धर्म का आलंबन लेना है

920
01:05:08,000 --> 01:05:12,080
तो हम अपना आजी को पार्जन हटा दे अपने जो घर ग्रहस्ती है उसको भूका मरने

921
01:05:12,080 --> 01:05:16,160
के लिए छोड़ दे कि तुम मरो जाकर के क्योंकि हमने जो धर्म का आलंबन ले

922
01:05:16,160 --> 01:05:20,920
लिया है क्या यह धर्म कहता है धर्म कहता है यदि व्यवस्था वश

923
01:05:20,920 --> 01:05:25,040
आपको जो धर्म का अनुकरण नहीं भी कर पा रहे मगर आपको मालूम है

924
01:05:25,040 --> 01:05:29,240
कि धर्म क्या है और आपको मालूम है कि आप धर्म की सीमा के बाहर

925
01:05:29,240 --> 01:05:32,760
हो तब भी आप

926
01:05:32,760 --> 01:05:36,840
धर्मजीवन आप में नहीं आप अपने आप को वो नहीं कह

927
01:05:36,840 --> 01:05:40,880
रहे हो कि मैं सही हूं शास्त्र गलत है आपकी प्रमाण बुद्धि यदि

928
01:05:40,880 --> 01:05:46,880
शास्त्र में है तो भी आप धर्मजयगढ़

929
01:05:55,640 --> 01:05:59,720
कर्म होंगे उससे वो बहिष्कृत होता जाएगा तो मैं तो नहीं कह रहा हूं कि

930
01:05:59,720 --> 01:06:03,760
मैं किसी के यहां पर विवाह संस्कार कराऊ जाकर के मैं तो नहीं कह रहा हूं किसी के यहां जो है

931
01:06:03,760 --> 01:06:07,920
अश्वमेध यज्ञ कराओ मुझे पुरोहित बना कर के बिठा मैंने तो कभी नहीं कहा इसके लिए संपर्क करिए

932
01:06:07,920 --> 01:06:12,080
मुझसे यह लोग इनके य जरूर सब तरह की वक्ति ली जाती है और

933
01:06:12,080 --> 01:06:16,200
इनके यहां जरूर ये वो भी चलता है इनके य कि भैया हमसे संपर्क करें

934
01:06:16,200 --> 01:06:20,320
भागे हुए बच्चों का हम विवाह करवा देंगे यह करवा देंगे आपका वो करवा देंगे

935
01:06:20,320 --> 01:06:25,960
और वही लोग बाहर जाकर के सब सब तरह की पत्तियों में डूबे होते हैं

936
01:06:25,960 --> 01:06:30,040
कोई अपना व्यापार भी कर कोई व्यापार भी करेगा बाहर जाकर के

937
01:06:30,040 --> 01:06:34,040
कोई अधिवक्ता भी होगा बाहर जाकर के कोई पुलिस कर्मचारी भी होगा बाहर

938
01:06:34,040 --> 01:06:38,120
जाकर के और समय आने पर वही लोग आर्य आर्य बन कर के और आचार्य

939
01:06:38,120 --> 01:06:42,520
आचार्य बन कर के वहां बैठ जाएंगे और सब वो वेदोक्त कर्म भी कराने लगे मगर हमारे

940
01:06:42,520 --> 01:06:47,080
हम क्या है कि जो हमारे य आचार्य हैं उनका जीवन आप देख लीजिए

941
01:06:47,080 --> 01:06:51,520
कपाती जी के कृपा पात्र शिष्य है प्रयागराज चले जाइए

942
01:06:51,520 --> 01:06:55,600
पूरे दिन में त्रिकाल संध्या करने वाले पूरे दिन मिट्टी शौच सब

943
01:06:55,600 --> 01:06:59,720
का आलंबन है हालांकि सौचा चार का आलंबन तो हम भी लेते हैं मगर जितना वो

944
01:06:59,720 --> 01:07:04,680
वेदोक्त तरीके से जीवन जीते हैं वेदोक्त करने के लिए उपयुक्त ब्राह्मण

945
01:07:04,680 --> 01:07:08,880
कर्म से भी जन्म से तो है ही तो हमने तो नहीं कहा कि हम वेदोक्त

946
01:07:08,880 --> 01:07:10,680
कर्मों के करने के लिए भैया हमसे फोन

947
01:07:10,680 --> 01:07:14,840
लगाया और हम हम जो विवाह करा देंगे हम ये करा देंगे तो दोनों ही चीजें वो जिम वाला

948
01:07:14,840 --> 01:07:19,000
जरा दिखा दीजिए कि हमने उस चीज को अशा स्त्रीय स्वीकार किया था कि नहीं

949
01:07:19,000 --> 01:07:23,120
पर मैं इससे पहले एक बात कहना चाहूंगा अभी कुछ एक डेढ़

950
01:07:23,120 --> 01:07:27,520
दो तीन हफ्ते पहले मैं गया हुआ था आ समाज की एक मीटिंग थी ठीक है

951
01:07:27,520 --> 01:07:31,600
अब व यहां पर उनकी कोई खंडन नहीं है मैं बता रहा हूं कि

952
01:07:31,600 --> 01:07:36,040
वो क्या कह रहे थे वहां पर वहां पर पूछ रहे थे कि आर्य समाज निरंतर

953
01:07:36,040 --> 01:07:40,320
संख्या में घटता जा रहा है तो इसको बढ़ाने के लिए कोई हमें आप बताइए क्या-क्या हम

954
01:07:40,320 --> 01:07:44,760
कर सकते हैं और मैं अपनी जिम्मेदारी पर यह बात बोल रहा हूं अपनी पर्सनल जिम्मेदारी

955
01:07:44,760 --> 01:07:48,880
पर कि मैं जो बातें बोल रहा हूं वो बिल्कुल सत्य है और मेरे सामने ही घटित

956
01:07:48,880 --> 01:07:53,080
हुई है ठीक है जम्मू के आर्य समाज है मिट एक मिनट

957
01:07:53,080 --> 01:07:57,160
अमन जी आपको हम बता दें

958
01:07:57,160 --> 01:08:01,680
कि जो जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं वह

959
01:08:01,680 --> 01:08:06,080
यहां पर जब आए हैं आज उनका शायद पांचवा छठवां बार होगा

960
01:08:06,080 --> 01:08:10,520
जो प्रथम बार वह आए थे तो उन्होंने अपने पूर्व काल में किए हुए जो उनसे जो अज्ञानता

961
01:08:10,520 --> 01:08:14,760
वश कुछ ऐसी चीजें हुई थी उनको लेकर के पश्चाताप प्रकट किया

962
01:08:14,760 --> 01:08:19,000
क्षमा याचना की और वह भी बताया किन परिस्थितियों में उनसे वह गलतियां हुई और आगे

963
01:08:19,000 --> 01:08:23,080
ना करने का प्रण लेते हुए आज वह धर्म प्रहरी धर्म रक्षक

964
01:08:23,080 --> 01:08:25,760
के रूप में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं सेसे

965
01:08:25,760 --> 01:08:29,840
में हमें ऐसे लोगों का प्रोत्साहन करना चाहिए क्योंकि यदि हम यह

966
01:08:29,840 --> 01:08:33,920
चाहते हैं कि धर्म का विस्तार हो तो और यदि आपको यह लगता है कि आप धार्मिक

967
01:08:33,920 --> 01:08:38,320
है तो इसका अर्थ है कि हमें उन्हीं लोगों को धार्मिक बनाना होगा जो आज धार्मिक

968
01:08:38,320 --> 01:08:42,760
नहीं है और यदि कोई धार्मिक बन रहा है तो हमें उसके टांग नहीं हड़नी चाहिए

969
01:08:42,760 --> 01:08:47,440
ऐसा मेरा मानना है जी गोविंद जी बताइए तो यहां पर

970
01:08:47,440 --> 01:08:51,680
फिर एक मीटिंग हो रही थी कि कैसे इस चीज को आगे बढ़ाया जाए गिनती में आर्य समाज

971
01:08:51,680 --> 01:08:55,840
कम हो रहा काफी और युवा वर्ग जो है वो नहीं आकर्षित हो पा रहा

972
01:08:55,840 --> 01:09:00,080
तो वहां पर जो एक जो एक दिया गया आईडिया

973
01:09:00,080 --> 01:09:04,120
दिया गया और जिसे शॉर्ट लिस्ट भी किया गया है ठीक है वो यह

974
01:09:04,120 --> 01:09:08,120
है कि हमारे पास सार समाज मंदिर में बहुत सारी जगह है और क्यों ना हम

975
01:09:08,120 --> 01:09:12,600
यहां पर एक जिम खोल दी जाए ठीक है यहां पर 0 7 हजार

976
01:09:12,600 --> 01:09:16,760
लगभग लगेगा और हम एक यहां पर जिम खोल देते हैं जिम में बच्चे आएंगे और

977
01:09:16,760 --> 01:09:20,840
आर्य समाज की तरफ आकर्षित होंगे और यह मैं बात पूरी अपनी जिम्मेदारी

978
01:09:20,840 --> 01:09:25,040
पर बोल रहा हूं ये मेरा पर्सनल जिम्मेदारी के साथ मैं कह सकता हूं कि यह

979
01:09:25,040 --> 01:09:29,440
बात मेरे सामने घटित हुई है और कहां हुई है यह जम्मू के बक्षी

980
01:09:29,440 --> 01:09:33,480
नगर आर्य समाज में हुई है घटित ठीक है ये मीटिंग हुई थी और इस चीज को

981
01:09:33,480 --> 01:09:37,720
शॉर्ट लिस्ट भी किया गया है और मेरे सामने किया गया है तो अब इसमें

982
01:09:37,720 --> 01:09:40,800
फिर हम क्या बोलेंगे बिल्कुल हमने

983
01:09:40,800 --> 01:09:44,800
भी जो ये जो जिम है हमारा हमने भी इसको ओपन करते समय आप

984
01:09:44,800 --> 01:09:48,880
हमारे जिम में कभी देखोगे तो भगवत गीता के श्लोक अवतो मा सद्गमय ये सब

985
01:09:48,880 --> 01:09:53,640
आपको उपनिषदों के ये कर्मण्य वादी का पूरा आपको एक अलग वातावरण

986
01:09:53,640 --> 01:09:57,640
रामो विग्रहवां धर्म और हमने वहां पर कोट्स भी लिखवाया वो सब भगवान

987
01:09:57,640 --> 01:10:01,640
के जो श्लोक है मतलब एक अलग वातावरण तो जो एक

988
01:10:01,640 --> 01:10:06,120
जो आज के प्रासंगिक समाज में जो जीवन को जीने वाला जो एक भौतिकवादी

989
01:10:06,120 --> 01:10:10,400
जो युवा है वो जब ऐसी जिम में आता है और वो चीजों को धीरे धीरे जानना

990
01:10:10,400 --> 01:10:14,640
शुरू करता है तो उसके अंदर भी प्रभाव उत्पन्न होगा हमने यह सोचते हुए अपनी

991
01:10:14,640 --> 01:10:19,000
वृत्ति का ध्यान रखते हुए और फिर भी इस जिम को एक ब्रिज बनाया

992
01:10:19,000 --> 01:10:23,120
एक जो भौतिकवादी संसार है उससे कैसे कोई एक परंपरा प्राप्त

993
01:10:23,120 --> 01:10:27,200
आचार्य की शरण में आए या फिर वेदोक्त मार्ग अध्यात्म के मार्ग पर आए एक

994
01:10:27,200 --> 01:10:31,320
ब्रिज का कार्य हमने बना कर के किया मतलब उसको भी ऐसे नहीं कि स्वतंत्र

995
01:10:31,320 --> 01:10:35,760
रूप से हमने केवल व्यापार के निमित्त ही बनाया आज भी

996
01:10:35,760 --> 01:10:39,800
जो शौर यात्रा आपने देखी होगी जो बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए हमने निकाली

997
01:10:39,800 --> 01:10:44,120
उसमें युवा हमारे साथ कंधे से कंधा मिला कर के चल रहा है वो युवा हमने कहां से प्राप्त

998
01:10:44,120 --> 01:10:48,560
किया उसी जिम से उसी जिम में आने वाले जो व्यायामशाला

999
01:10:48,560 --> 01:10:52,680
में आने वाले जो व्यायाम करने वाले जो थे उसी से प्राप्त किया है

1000
01:10:52,680 --> 01:10:55,960
ना अब जरा मैं चाहूंगा कि उस जिम का जब हमने

1001
01:10:55,960 --> 01:11:00,920
वो इंट्रोडक्शन डाला था वो आप जरा शुरू से लगा दीजिए कि

1002
01:11:00,920 --> 01:11:04,920
शुरू में ही हमने ऐसे हाथ जोड़ते हुए वहां पर दिखाया है यह

1003
01:11:04,920 --> 01:11:09,560
एडमिट किया है कि यह चीज जो है शास्त्रीय नहीं है

1004
01:11:09,560 --> 01:11:13,680
अब जो चीज हम कह चुके हैं भाई य शास्त्री नहीं हमारी व्यवस्था है

1005
01:11:13,680 --> 01:11:18,040
क्योंकि हमारी शिक्षा ही ऐसी है जो मेन

1006
01:11:18,040 --> 01:11:22,400
एक जिम का इंट्रोडक्शन वाला वीडियो हा पेन मशीन जिम ऑफ आदित्यवानी

1007
01:11:22,400 --> 01:11:25,480
देखिए

1008
01:11:25,480 --> 01:11:30,280
सम राष्ट्र की वेदना हो शर अपने

1009
01:11:30,280 --> 01:11:34,440
ये वाला नहीं है वडियो ये तो शायद शर्ट है अच्छा यही

1010
01:11:34,440 --> 01:11:39,120
है यही है यही है इसको शुरू से लगाइए शुरू से य

1011
01:11:39,120 --> 01:11:45,120
जोभी अभी अभी दश आया था

1012
01:11:46,920 --> 01:11:50,600
जोड़ने पीछे

1013
01:11:50,600 --> 01:11:54,920
करिए थोड़ा थोड़ा आगे बढ़ाइए थोड़ा रक्ष

1014
01:11:54,920 --> 01:12:00,680
के नहीं इससे

1015
01:12:00,680 --> 01:12:05,680
पहले चलने दीजिए य सनातन धर्म

1016
01:12:05,680 --> 01:12:10,240
यही यही यही वाला सन दिखाना है वंदे गुरु

1017
01:12:10,240 --> 01:12:14,320
परंपरा मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुदेव यद्यपि

1018
01:12:14,320 --> 01:12:18,360
यह व्यायामशाला और यह

1019
01:12:18,360 --> 01:12:22,560
व्यायाम जो मैं जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं ये हमारे

1020
01:12:22,560 --> 01:12:27,120
सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है देख लीजिए

1021
01:12:27,120 --> 01:12:31,200
इसको कहते हैं सिद्धांत वादत प्रस्तुत कर रहा हूं य हमारे

1022
01:12:31,200 --> 01:12:35,320
सनातन ध अगर हम ऐसा कुछ दे भी रहे हैं सामने लोगों को दिखा भी रहे हैं

1023
01:12:35,320 --> 01:12:40,160
पॉज कर दीजिए बस एक बार और सुना दीजिए जो बात मैंने यहां कही एक बार और दिखा दीजिए

1024
01:12:40,160 --> 01:12:44,200
क्लियर हो जाएगा अपने आप

1025
01:12:44,200 --> 01:12:48,480
को छोटा कह पाना भी मुश्किल होता है लोगों के

1026
01:12:48,480 --> 01:12:52,480
लिए उसी के द्वारा मैं जनमानस की सेवा करने

1027
01:12:52,480 --> 01:12:56,760
के लिए प्रयासरत हूं देखिए पीछे कर मैंने ये बात भी बताई है जो

1028
01:12:56,760 --> 01:13:02,760
मेरे पास है उस सेवा कर पा के अनुसार तो नहीं है

1029
01:13:04,800 --> 01:13:08,240
परंतु

1030
01:13:08,240 --> 01:13:13,120
यद मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुदेव और पीछे यद्यपि

1031
01:13:13,120 --> 01:13:18,160
शंकराचार्य मध्यमा और पीछे

1032
01:13:18,160 --> 01:13:22,920
बस आप चलने दीजिए नारायण

1033
01:13:22,920 --> 01:13:27,720
समारंभ शंकराचार्य मध्य अदा चार्य

1034
01:13:27,720 --> 01:13:32,320
परं वंदे गुरु परंपराम मुझे आशीर्वाद दीजिए

1035
01:13:32,320 --> 01:13:36,640
गुरुदेव यद्यपि यह व्यायामशाला

1036
01:13:36,640 --> 01:13:40,640
और यह व्यायाम जो मैं जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर

1037
01:13:40,640 --> 01:13:44,920
रहा हूं ये हमारे सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है

1038
01:13:44,920 --> 01:13:49,480
परंतु जो भी इस आधुनिक युग में आधुनिक शिक्षा के द्वारा मुझे प्राप्त हो पाया है

1039
01:13:49,480 --> 01:13:54,280
उसी के द्वारा मैं मैंने यहां पर ये भी एडमिट किया है जो भी

1040
01:13:54,280 --> 01:13:58,600
एक मिनट आशीर्वाद मैंने यहां पर ये भी एडमिट किया

1041
01:13:58,600 --> 01:14:02,800
कि जो भी इस आधुनिक शिक्षा के द्वारा मुझे प्राप्त हो पाया है उसी के द्वारा

1042
01:14:02,800 --> 01:14:06,800
मैं सेवा कर पाऊंगा मेरे पास जो है मैं वही दे पाऊंगा समाज को

1043
01:14:06,800 --> 01:14:11,280
ना मैं और कुछ तो नहीं दे पाऊंगा अगर मैंने प्रोटीन फैट और कार्ब की पढ़ाई की है

1044
01:14:11,280 --> 01:14:15,960
तो मैं प्रोटीन फैट और कार्ब की ही बात कर सकता हूं या तो मैं बैठ जाऊ एक तरफ

1045
01:14:15,960 --> 01:14:20,800
है ना चलिए आगे बढ़ाइए

1046
01:14:20,800 --> 01:14:25,400
प्रभु श्री राम से भी यही प्रार्थना है प्रभु श्री राम

1047
01:14:25,400 --> 01:14:29,760
आप भी मुझे शक्ति दीजिएगा कि मैं आपकी भक्ति से

1048
01:14:29,760 --> 01:14:33,920
कहीं भी विचलित ना हो सकू और जो

1049
01:14:33,920 --> 01:14:38,760
उद्देश लेकर मैं चल रहा हूं उसमें सफल हो सक

1050
01:14:38,760 --> 01:14:43,880
बस बस करिए हटा दी

1051
01:14:43,880 --> 01:14:48,040
तो यदि हमारी कोई ऐसी चीज है भी जो

1052
01:14:48,040 --> 01:14:52,200
शास्त्रों की सीमा के बाहर है तो हम तो भैया जिस चीज को आप

1053
01:14:52,200 --> 01:14:56,640
आरोप आरोप के रूप में प्रस्तुत कर रहे उसको हम एडमिट कर रहे कि वो अ शस्त्री है

1054
01:14:56,640 --> 01:15:00,680
अब आप जिसके समानांतर उस चीज को प्रस्तुत कर रहे आप एडमिट कर लो कि

1055
01:15:00,680 --> 01:15:04,880
वह अ शस्त्री था अब देखिए एक खास

1056
01:15:04,880 --> 01:15:09,000
बात देखिए यह लोग अपने इन संस्कारों को य जो संस्कार

1057
01:15:09,000 --> 01:15:13,400
य करते हैं क्या कहते सलवार सूट में संस्कार

1058
01:15:13,400 --> 01:15:17,600
करते हैं जिसका कोई विवरण शास्त्र में नहीं है शास्त्रीय है तो जब यह करते

1059
01:15:17,600 --> 01:15:21,680
हैं इस तरह का कार्य तो उसके लिए कि किसका आलंबन लेते कि देखो फलानी

1060
01:15:21,680 --> 01:15:25,920
जगह मूर्ति बनी है जहां पर देवी है देवी पर है यज्ञ

1061
01:15:25,920 --> 01:15:30,280
पवित है हा और वैसे क्या है मूर्ति

1062
01:15:30,280 --> 01:15:34,480
विरोधी डगले पन की हद है

1063
01:15:34,480 --> 01:15:36,000
अपनी बातों को सिद्ध करने

1064
01:15:36,000 --> 01:15:40,400
के लिए राज व राम भद्राचार्य चाहिए अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए मूर्ति चाहिए

1065
01:15:40,400 --> 01:15:44,840
और ना हम राम भद्राचार्य को मानते हैं नाम मूर्ति को मानते हैं वस्तुतः

1066
01:15:44,840 --> 01:15:49,080
क्या दोगलापन है यह नहीं सोचेंगे कि वहां

1067
01:15:49,080 --> 01:15:55,040
पर परम तत्व की बात हो रही है जो सृष्टि को अपने धारण करती है

1068
01:15:55,040 --> 01:15:59,240
और वह मूर्ति किसने बनाई परंपरा प्राप्त व्यक्ति ने बनाई किसने नहीं बनाई इससे

1069
01:15:59,240 --> 01:16:03,280
मतलब नहीं जैसे आज मैंने एक फोटो देखा मैंने

1070
01:16:03,280 --> 01:16:07,360
मेरे संज्ञान में एक फोटो आया आज उसमें क्या था

1071
01:16:07,360 --> 01:16:11,480
कि भगवान श्री कृष्ण ऐसे उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाए हुए

1072
01:16:11,480 --> 01:16:15,680
हैं और साथ में एक इस्लामिक भेष

1073
01:16:15,680 --> 01:16:19,840
भूषा दिख रही है संभवत हो सकता है व राजस्थानी भेस भूषा हो पता नहीं पर वो भी अपनी उंगली

1074
01:16:19,840 --> 01:16:24,160
लगाए हुए हैं अब यह फोटो किस प्रामाणिक तंत्र

1075
01:16:24,160 --> 01:16:28,160
ने बनाई है नहीं बनाई है उसकी प्रमाणिकता क्या है वो बात बाद में है मगर उसका

1076
01:16:28,160 --> 01:16:32,560
भाव एकय भी आ रहा है केवल कृष्ण ने नहीं उठाया था गोवर्धन पर्वत वहां पर एक मुसलमान

1077
01:16:32,560 --> 01:16:36,600
जैसे दिखते दिखते हुए व्यक्ति ने भी गोवर्धन पर्वत में सहारा दिया ठीक

1078
01:16:36,600 --> 01:16:40,720
है या मुसलमान छोड़ दीजिए किसी और व्यक्ति ने भी

1079
01:16:40,720 --> 01:16:44,880
सहारा दिया इतना तो ठीक है अब अगर हम इस फोटो को आज

1080
01:16:44,880 --> 01:16:49,040
से 100 साल बाद देखा जाएगा तो यह भी प्रमाण हो जाएगा

1081
01:16:49,040 --> 01:16:51,120
देखो केवल कृष्ण ने नहीं दिया

1082
01:16:51,120 --> 01:16:55,720
था सहारा दूसरे व्यक्ति ने भी दिया था देखो प्रमाण

1083
01:16:55,720 --> 01:16:59,800
तो भाई जब तक उसकी प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होगी कि वह मूर्ति बनाई किसने किस

1084
01:16:59,800 --> 01:17:04,120
परिपेक्ष में उसको आप प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर लोगे वो भी तब जब आप स्वयं

1085
01:17:04,120 --> 01:17:08,600
मूर्ति को मानते ही नहीं हो तो ये यह पराकाष्ठा

1086
01:17:08,600 --> 01:17:12,680
है लेपन की पराकाष्ठा है ना

1087
01:17:12,680 --> 01:17:16,760
मैं मैं एक बात और छोटी सी इसमें ऐड करना चाहूंगा अगर फिर

1088
01:17:16,760 --> 01:17:20,920
ऐसे देखेंगे तो जाहिर सी बात है कि इस मोबाइल पर जब हम लाइव कर रहे

1089
01:17:20,920 --> 01:17:26,840
हैं तो यह भी अस्त्रीय होगा क्योंकि शास्त्रों में तो उसका कोई वर्णन है नहीं

1090
01:17:26,840 --> 01:17:31,120
ठीक है लेकिन लेकिन साधन जो है

1091
01:17:31,120 --> 01:17:35,320
यदि उसे तुम सत्य तक पहुंचने में और लोगों को सत्य तक

1092
01:17:35,320 --> 01:17:39,320
पहुंचाने में या धर्म को आगे बढ़ाने में मदद नहीं लोगे

1093
01:17:39,320 --> 01:17:43,320
तो क्या साधन सारे दुष्टों के लिए बने हैं यह बात का जवाब देना

1094
01:17:43,320 --> 01:17:47,760
पड़ेगा एक तो क्या साधन फिर सारे दुष्टों के लिए बने हैं कि कोई अश्लीलता

1095
01:17:47,760 --> 01:17:51,920
फैलाने के लिए मोबाइल को यूज कर सकता है लेकिन वह वैदिक ज्ञान

1096
01:17:51,920 --> 01:17:55,920
को या अपने गुरु वाणी को या अपने गुरु के आदेश को को बढ़ाने के लिए यूज नहीं

1097
01:17:55,920 --> 01:18:00,120
कर सकता क्योंकि य शास्त्री तो इसे भी माना जाएगा अगर फिर कट्टर ही

1098
01:18:00,120 --> 01:18:04,160
शास्त्रीय होना है तो तो इसलिए सारे साधन संतों

1099
01:18:04,160 --> 01:18:06,160
के लिए हैं पहले मैं एक बात अपनी क्लियर

1100
01:18:06,160 --> 01:18:10,360
कर देता हूं ये मेरी एक्चुअल सोच है सारे साधन

1101
01:18:10,360 --> 01:18:14,480
सत पुरुषों के लिए हैं सारे साधन सत्य का प्रचार

1102
01:18:14,480 --> 01:18:18,600
करने के लिए है और सारे साधन सत्य तक पहुंचने के लिए

1103
01:18:18,600 --> 01:18:22,920
है और जो जो भी साधन इसमें उपयोगी होंगे उसका उपयोग

1104
01:18:22,920 --> 01:18:26,960
किया जाएगा परंतु यह बात याद रखना है कि यदि

1105
01:18:26,960 --> 01:18:31,040
हम उसको शास्त्र का आलंबन लेकर या उसके पीछे

1106
01:18:31,040 --> 01:18:35,160
छुपकर या उसका स्टीकर लगाकर कर रहे हैं तो फिर वह हमारे लिए मान्य

1107
01:18:35,160 --> 01:18:39,160
नहीं है जैसे कि शिवास जी ने पहले ही अपने जिम के बारे में बोल दिया ठीक है तो इतनी

1108
01:18:39,160 --> 01:18:43,560
बात याद रखिएगा शास्त्र जितने भी यह साधन है यह सब सत्पुरुष

1109
01:18:43,560 --> 01:18:47,880
के लिए है बड़ी सुंदर वाक्य एक आया वीर भोग्य वसुंधरा का

1110
01:18:47,880 --> 01:18:52,000
तो वीर जो है वही इस वसुंधरा की हर एक चीज का

1111
01:18:52,000 --> 01:18:56,200
जो है वो इस्तेमाल करेगा हम सारे साधन इस्तेमाल करेंगे और आगे

1112
01:18:56,200 --> 01:19:00,320
बढ़ेंगे सत्य के लिए अगर किसी को परेशानी है वह हमारे सामने

1113
01:19:00,320 --> 01:19:04,480
आए बैठे अपनी बात रखे यदि उसका सत्य

1114
01:19:04,480 --> 01:19:08,480
सिद्धांत ज्यादा ऊपर है तो हम उसके अनुसार भी कार्य करने के लिए तैयार है जैसा कि

1115
01:19:08,480 --> 01:19:12,520
ये मैं आपकी बात दोहरा रहा हूं अपनी बात नहीं दोहरा रहा बक तो

1116
01:19:12,520 --> 01:19:17,320
ये मैं कहना चाहता हूं इसलिए इन छोटी-छोटी और बिल्कुल तुच्छ

1117
01:19:17,320 --> 01:19:21,320
मानसिकता वाली चीजों को त्याग दीजिए आप क्या कर रहे हो जैसे कि मैंने

1118
01:19:21,320 --> 01:19:25,600
पहले भी कहा कि आपको इस वीडियो बनाने के बाद पश्चाताप करने की आवश्यकता

1119
01:19:25,600 --> 01:19:29,640
है किसी भी सत्पुरुष से पूछ लीजिए जाकर किसी भी

1120
01:19:29,640 --> 01:19:33,720
100 सत्पुरुष की लिस्ट बनाइए उनमें से 100 को पूछ लीजिए वो

1121
01:19:33,720 --> 01:19:37,720
100 के 100 बोलेंगे आपने गलत काम किया है और आपको इसके लिए पश्चाताप

1122
01:19:37,720 --> 01:19:42,160
तक करने की अनिवार्यता है तो इसलिए मैं तो बस यही बोलूंगा

1123
01:19:42,160 --> 01:19:46,480
कि हम सारे साधन इस्तेमाल करेंगे परंतु सत्य के लिए परंतु धर्म

1124
01:19:46,480 --> 01:19:50,560
के लिए लोगों को जोड़ने के लिए इसमें गुरुदेव एक

1125
01:19:50,560 --> 01:19:55,760
युक्ति बताते हैं कि भाई ये तो वो वाली बात है इस समय

1126
01:19:55,760 --> 01:20:00,520
कि जब कोई डिवाइडर वाला रोड होता है ना रोड

1127
01:20:00,520 --> 01:20:04,720
डिवाइडर वाला जिसमें एक आने का है एक जाने का है मगर

1128
01:20:04,720 --> 01:20:08,720
जिस समय रो एक तरफ कंस्ट्रक्शन चल रहा होता है

1129
01:20:08,720 --> 01:20:12,800
तब जो रंग साइड जाना है वही धर्म हो जाता

1130
01:20:12,800 --> 01:20:16,800
है तो यदि यह जो समय है यह कंस्ट्रक्टिव

1131
01:20:16,800 --> 01:20:21,160
वाला ही समय है रोड का एक साइड तो बन रहा है तो एनीहाउ आपको

1132
01:20:21,160 --> 01:20:25,360
इधर से जाना ही पड़ेगा और यह जो आपातकालीन

1133
01:20:25,360 --> 01:20:29,680
धर्म है अगर इसमें लोग कहे कि वही तो हम भी कर रहे तो आपातकालीन धर्म की व्याख्या

1134
01:20:29,680 --> 01:20:34,120
भी हो चुकी है शास्त्रों में हमें शास्त्र से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है

1135
01:20:34,120 --> 01:20:36,560
आपातकालीन धर्म की भी व्याख्या हमारे शास्त्रों

1136
01:20:36,560 --> 01:20:40,720
में सुनिश्चित है इस पर मैं आऊंगा आगे किसी

1137
01:20:40,720 --> 01:20:44,800
निकृष्ट बुद्धि वाले नीच व्यक्ति ने यह तर्क भी दिया है कि धर्म भी बदलना

1138
01:20:44,800 --> 01:20:49,320
चाहिए उससे मैं पूछूंगा अभी कानों से उसका खून निकलेगा जब मैं पूछूंगा तोर

1139
01:20:49,320 --> 01:20:53,520
अभी मैं एक बात आ रहा हूं कि ये लोग एक कई बार अपनी जब चीजें बता

1140
01:20:53,520 --> 01:20:58,200
रहे होते हैं मैंने देखा अकाट्य चीज नहीं बताते क्यों नहीं बताते

1141
01:20:58,200 --> 01:21:02,440
अलंकार समाज के लोग कई बार ऐसी व्याख्या कर रहे होते कि फलाने विद्वान

1142
01:21:02,440 --> 01:21:06,600
ने रिसर्च के माध्यम से यह कहा है फलाने विद्वान ने यह

1143
01:21:06,600 --> 01:21:10,680
कहा है तो इसका पहली बात तो यह कि इनके अनुसार जो विद्वान

1144
01:21:10,680 --> 01:21:14,720
है वो विद्वान है पहली बात और इनके अनुसार जो विद्वान

1145
01:21:14,720 --> 01:21:18,960
है उसने यदि कह दिया तो वह चीज सही हो गई अगर किसी

1146
01:21:18,960 --> 01:21:23,000
व्यक्ति के अनुसार कोई विद्वान है और उसके

1147
01:21:23,000 --> 01:21:27,080
अनुसार जो विद्वान है वो यह कह रहा है जो भी कह रहा है वो सच है तो एक

1148
01:21:27,080 --> 01:21:31,320
विद्वान बंगाल में भी हुए उन्होंने कहा कि वो किसी उनके

1149
01:21:31,320 --> 01:21:35,320
कोई सिद्धि की बात है वहां पर और उन्हें जो है नरक में नरक भोगते

1150
01:21:35,320 --> 01:21:39,720
हुए दयानंद जी मिल गए अब बताइए इस तरह की जानकारियों

1151
01:21:39,720 --> 01:21:44,080
को हमने कभी रखा अपने पटल पर

1152
01:21:44,080 --> 01:21:48,200
हमने सिर्फ अकाट्य चीजों को सदैव रखा कोई भी एक बात आप

1153
01:21:48,200 --> 01:21:51,640
आकर के काट ही नहीं सकते ऐसी चीजों को हम मैं क्यों नहीं

1154
01:21:51,640 --> 01:21:55,640
करता बहुत सारी बातें कर सकते हैं नहीं करते सिर्फ वो बात लोहे

1155
01:21:55,640 --> 01:21:59,800
की तरह जो मजबूत है केवल वो बात मजबूत एकदम मजबूत आर

1156
01:21:59,800 --> 01:22:04,440
या पार कुछ नहीं कर सकते उसमें टस से मसल ही नहीं सकते जैसे अंगत का पैर था

1157
01:22:04,440 --> 01:22:08,720
कोई नहीं हिला पाया वही पैर आज भी गड़ा हुआ है ईश्वर सर्वशक्तिमान

1158
01:22:08,720 --> 01:22:12,920
है कि नहीं वेद मंत्र कहां से आए बस

1159
01:22:12,920 --> 01:22:17,280
और यह हराने की भावना से नहीं है इसकी वजह से समाज क्षतिग्रस्त

1160
01:22:17,280 --> 01:22:21,320
हो रहा है इसकी वजह से रामपाल जैसों को मौका मिल

1161
01:22:21,320 --> 01:22:26,120
रहा है स्वयं को पुजवा का क्यों नहीं समझते

1162
01:22:26,120 --> 01:22:30,120
इसकी वजह से जाकिर नायक को मौका मिलता है वेदों का अर्थ बताने का हम नहीं

1163
01:22:30,120 --> 01:22:34,120
कह सकते उससे जब तुम ऐसा कहोगे बिना परंपरा के ज्ञान दोगे वो भी कहेगा

1164
01:22:34,120 --> 01:22:39,080
मैं भी दे सकता हूं बताओ मैंने भी जने करा लिया और मैं गलत दूंगा

1165
01:22:39,080 --> 01:22:45,080
करते रहो भते रहो शास्त्रार्थ करने के लिए मिलेगा ही नहीं व

1166
01:22:45,120 --> 01:22:49,200
तुमको तो यह जो अगर मैं

1167
01:22:49,200 --> 01:22:53,320
यहां पर बैठा हुआ हूं और आपके चैनल पर मेरी वीडियो भी डली हुई है जब

1168
01:22:53,320 --> 01:22:57,320
मैं आपके साथ प्रथम बार चर्चा करने आया था ठीक है जी तो

1169
01:22:57,320 --> 01:23:01,640
अगर मैं अपना अहम अपने पल्ले बांधकर उसको लटका कर फिरता रहूं

1170
01:23:01,640 --> 01:23:05,960
और मैं मनन ना करूं ठीक है तो फिर तो यही हो जाएगा कि मचाने दीजिए

1171
01:23:05,960 --> 01:23:07,280
जो भी

1172
01:23:07,280 --> 01:23:11,520
कन्वर्जन हो रहा है या जो भी हो रहा है उन सबको मचाने दीजिए अपनी तबाही

1173
01:23:11,520 --> 01:23:15,880
हम आपसी मतभेद लेकर यहां पर बैठे रहते हैं और जब हम एक दूसरे के सिद्धांत

1174
01:23:15,880 --> 01:23:20,760
को ना काट पाए तो एक दूसरे को नीचा दिखाएंगे क्योंकि जुबान तो सभी के पास

1175
01:23:20,760 --> 01:23:25,320
है मैं मैं क्यों बैठा हू यहां पर मैं

1176
01:23:25,320 --> 01:23:29,640
किसी वजह हेतु आपसे आया आपसे क्षमा भी याचना की है सबसे क्षमा याचना

1177
01:23:29,640 --> 01:23:34,080
की क्यों की क्योंकि मेरे को आपकी बात समझ आई ईश्वर सर्वशक्तिमान

1178
01:23:34,080 --> 01:23:38,120
है तो उसकी शक्तियों को बाधित करना केवल और केवल अपना ही कहीं ना

1179
01:23:38,120 --> 01:23:42,320
कहीं पर अहम दर्शाता है बाकी आपके सिद्धांत क्या है

1180
01:23:42,320 --> 01:23:46,680
क्या नहीं आप निराकार ईश्वर की व्याख्या करते हैं तो अच्छी बात है ना

1181
01:23:46,680 --> 01:23:50,680
वह भी तो है और हम उसको कहा मना कर रहे हैं परंतु

1182
01:23:50,680 --> 01:23:55,320
यदि आप हर एक चीज में केवल निंदा को ही अपना साधन मानोगे

1183
01:23:55,320 --> 01:23:59,480
तो निंदा से केवल और केवल मेरे को ल जहां तक ये मेरी अपनी पर्सनल टिप्पणी

1184
01:23:59,480 --> 01:24:03,640
है और अपने पर ही आर्य समाज के लोग इसको ना ले या कोई भी अपने यदि मैं केवल

1185
01:24:03,640 --> 01:24:07,720
निंदा का ही आश्रय लेता हूं तो मेरी बुद्धि एक दिन भ्रमित हो जाएगी एक

1186
01:24:07,720 --> 01:24:11,880
दिन मैं पाप की गर्क में गिर जाऊंगा मेरे को सत्पुरुष से भी ईर्षा होनी

1187
01:24:11,880 --> 01:24:16,120
शुरू हो जाएगी इतने बड़े तपस्वी बैठे हुए हैं यदि आपको उसकी

1188
01:24:16,120 --> 01:24:20,240
किसी बात से मानना नहीं है या आपका कोई मतभेद है

1189
01:24:20,240 --> 01:24:22,320
तो उन तपस्वी हों के साथ अपना मतभेद

1190
01:24:22,320 --> 01:24:26,680
प्रकट कर दीजिए बस कि हमारे यहां हम ऐसा नहीं करते हैं अपने अनुसार

1191
01:24:26,680 --> 01:24:30,720
ठीक है लेकिन जिस टाइप की बोली बोली जा रही है मुझे लगता है

1192
01:24:30,720 --> 01:24:34,960
वो बड़ी ही निंदनीय है बहुत बहुत जितनी उसकी भरत

1193
01:24:34,960 --> 01:24:39,040
सना की जाए कम है परंतु हम वो भी नहीं कर रहे हैं एक बार भी हम बस आपको

1194
01:24:39,040 --> 01:24:43,160
सत्य बता रहे हैं सत्य स्वीकार करिए दो चार चीजें करना

1195
01:24:43,160 --> 01:24:47,480
छोड़ दीजिए पहला तो पर्सनल अटैक दूसरा है सत्पुरुष की

1196
01:24:47,480 --> 01:24:51,680
निंदा तीसरा है जब भी बोले तब सोच विचार

1197
01:24:51,680 --> 01:24:55,720
करके बोले और जो आज तक किया है उसका पश्चाताप अवश्य

1198
01:24:55,720 --> 01:25:00,040
करें मैं बार-बार आपसे यह कह रहा हूं यदि आप पुराणों को नहीं मानते

1199
01:25:00,040 --> 01:25:04,120
हैं तो मत मानिए भाई परंतु पुराणों में भी तो वैदिक ज्ञान ही छिपा

1200
01:25:04,120 --> 01:25:08,440
है अंततः और यह बात तो मुझे लगता है कि इसमें

1201
01:25:08,440 --> 01:25:12,760
भी कही गई है जो सत्यार्थ प्रकाश है इसमें भी यह बात कही गई है

1202
01:25:12,760 --> 01:25:17,000
परंतु उन्होंने कहा है कि उसमें से लेने की आवश्यकता नहीं है हम डायरेक्ट वेदों से ही ले लेंगे

1203
01:25:17,000 --> 01:25:21,080
तो हमें कोई बुराई तो है नहीं तो आप वेदों को यदि

1204
01:25:21,080 --> 01:25:25,160
सर्वोच्च मान रहे हैं हम भी तो मान रहे हैं लेकिन कुछ आपसी बातें हैं

1205
01:25:25,160 --> 01:25:29,200
जिनका हल होना आवश्यक है नहीं तो लड़ते रहिए आपस में लोगों के

1206
01:25:29,200 --> 01:25:33,880
घर में रामपाल बाबा जी के चेले घुसे हुए हैं आपके सामने

1207
01:25:33,880 --> 01:25:37,560
महिला आई थी और भी आपको मैसेज आते होंगे अवश्य ही

1208
01:25:37,560 --> 01:25:41,920
मेरे को मैसेज आए मेरे को फोन कॉल आ रहे कि भैया हमारे घर में इस इस प्रकार से

1209
01:25:41,920 --> 01:25:46,200
मेरा बड़ा भाई है मेरे पिताजी है आदि है वो रामपाल जी के शिष्य हो चुके हैं

1210
01:25:46,200 --> 01:25:51,080
और हमें हर बार हर बात पर नीचा दिखाते हैं यह कार्य नहीं दिख रहा

1211
01:25:51,080 --> 01:25:55,080
यह कार्य नहीं दिख रहा आपको कि यह कार्य कितना आवश्यक है और आपके

1212
01:25:55,080 --> 01:25:59,360
लिए आवश्यक क्या हुआ दो घंटे की लाइव जिसमें आपने केवल निंदा की भरतना

1213
01:25:59,360 --> 01:26:03,680
की भर भर के व्यर्थ की टिप्पणियां की यह आपके लिए सर्वोत्तम लक्ष्य

1214
01:26:03,680 --> 01:26:08,400
है मेरे लिए होता तो मैं नहीं निंदा कर सकता था या मेरे पास मुंह नहीं है

1215
01:26:08,400 --> 01:26:12,480
मेरे को भी अच्छा खासा बोलना आता है लेकिन मैं क्यों यहां पर बैठा हूं क्योंकि मेरे को पता है मैं

1216
01:26:12,480 --> 01:26:16,720
उस समय गलत था या मेरे पास उस वक्त ऐसी दृष्टिकोण

1217
01:26:16,720 --> 01:26:20,760
नहीं था जो आज मेरे पास है तो छोड़ा ना अपने अहम को अपने

1218
01:26:20,760 --> 01:26:25,120
अहम में रहता तो कोई मेरे को गोली थोड़ी मार देता मैं एक बात

1219
01:26:25,120 --> 01:26:29,800
यहां पर यह कहूंगा यदि हम आचार्य पद की जो निश्चित

1220
01:26:29,800 --> 01:26:34,000
होनी चाहिए निश्चित सिद्धांत होने चाहिए उसको ही हटा देंगे

1221
01:26:34,000 --> 01:26:38,120
कि नहीं यही आचार्य बन सकता है जब हम उसको ही हटा देंगे तो हर

1222
01:26:38,120 --> 01:26:43,080
कोई आचार्य बनेगा और सबसे शास्त्रार्थ करते रहना

1223
01:26:43,080 --> 01:26:47,360
तुम सबको बताते रहना आज हमने यही तो किया है तभी

1224
01:26:47,360 --> 01:26:51,360
तो इतने टेक्ट खड़े हो गए ये जनक जनक

1225
01:26:51,360 --> 01:26:53,440
कौन है इसका

1226
01:26:53,440 --> 01:26:57,720
जिसने परम से चले आ रहे ज्ञान विज्ञान को जानने की बजाय

1227
01:26:57,720 --> 01:27:01,800
समझने की बजाय उसका आलंबन लेने की बजाय जो चीज नहीं समझ में आ रही

1228
01:27:01,800 --> 01:27:05,840
थी उसमें श्रद्धा जो शरणागत होकर के उसको समझने का प्रयास

1229
01:27:05,840 --> 01:27:09,960
करने की बज उसको तिरस्कार करके रख दिया आज उसका नतीजा इतने सारे तंत्र

1230
01:27:09,960 --> 01:27:13,960
जो आज खड़े हो गए हैं सबको उसने छूट दे दी सब करो

1231
01:27:13,960 --> 01:27:18,160
वेदों का वो भी करेगा वो अगन अन्या को अन्या बना देंगे

1232
01:27:18,160 --> 01:27:22,800
वो लोग वो लोग ब्रज का अर्थ आने का जाना कर देंगे

1233
01:27:22,800 --> 01:27:27,240
वो लोग ऐसी कॉमेडी करेंगे पूछो ही नहीं कॉमेडी बना देंगे शास्त्रों को

1234
01:27:27,240 --> 01:27:31,240
बिल्कुल क्योंकि हमने उन्हें परोस के दिया ना कि कोई भी कर सकता

1235
01:27:31,240 --> 01:27:35,360
है इनकी व्याख्या हमने उन्हें परोस के दिया तो ठीक है

1236
01:27:35,360 --> 01:27:39,760
अब हम एक बात यहां पर लेंगे

1237
01:27:39,760 --> 01:27:44,840
ये जैसे कुल मिलाकर के जैसे अभी अ

1238
01:27:44,840 --> 01:27:49,920
ये लोग जब हम इनके बारे में कोई बात करते हैं

1239
01:27:49,920 --> 01:27:53,960
तो जब ये हम पर बात करते तो ये चाहते हैं कि हम लोग परतंत्र

1240
01:27:53,960 --> 01:27:57,960
है पक्षपात हीनता तो है नहीं इनके अंदर तो जब यह हमारे बारे में बात

1241
01:27:57,960 --> 01:28:02,400
करते हैं तो यह सोचते हैं यह चाहते हैं कि हम लोग शांत रहे लोग कुछ ना कहे

1242
01:28:02,400 --> 01:28:06,440
ये लोग भांड बोले अपने शास्त्रों में कुछ भी लिख दे कुछ भी गंदे

1243
01:28:06,440 --> 01:28:08,520
से गंदा कर दे और हम लोग शांत

1244
01:28:08,520 --> 01:28:12,560
हो कर के सुनते रहे क्योंकि इनके अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब समान

1245
01:28:12,560 --> 01:28:16,560
है मगर हम लोगों का जन्म हुआ है इनकी गुलामी करने के

1246
01:28:16,560 --> 01:28:20,920
लिए इनके अकॉर्डिंग ये है यह ऐसी वृत्ति

1247
01:28:20,920 --> 01:28:25,360
वाले है और यदि किसी ने बोला यदि किसी का

1248
01:28:25,360 --> 01:28:29,520
यदि किसी ने किसी को आपने बोलने पर मजबूर कर दिया जैसे एक यश तिवारी

1249
01:28:29,520 --> 01:28:33,560
नाम का लड़का था हालांकि उसने कई कई

1250
01:28:33,560 --> 01:28:37,680
बार अमर्यादित आचरण किए और हमने उसके लिए उसको टोका भी कमेंट में जा जा कर के उस

1251
01:28:37,680 --> 01:28:41,960
समय हमय पर एक्टिव नहीं थे मगर अगर उसने

1252
01:28:41,960 --> 01:28:46,240
आपके आप बोल रहे हो आपका वो जो अंडर कवर्ड गुंडा है वो खूब

1253
01:28:46,240 --> 01:28:50,480
बोल रहा है उसकी खूब सारी सामग्री प्राप्त है ठीक है उसको आपने

1254
01:28:50,480 --> 01:28:54,560
जानबूझकर अपनी आंखों में पट्टी बान ली राधा मां के लिए शिवलिंग के लिए जी के लिए

1255
01:28:54,560 --> 01:28:58,800
गंदी से गंदी बातें तब आपको होश नहीं आया कि कोर्ट में मुकदमा

1256
01:28:58,800 --> 01:29:02,880
दर्ज करा दे मगर यदि यश तिवारी ने ऐसा कर दिया

1257
01:29:02,880 --> 01:29:07,040
तो यश तिवारी का तो हम करियर खत्म कर देंगे उसको बिल्कुल सर्वनाश

1258
01:29:07,040 --> 01:29:11,960
कर देंगे आज वो व्यक्ति गुमनामी के अंधेरों में जी रहा है

1259
01:29:11,960 --> 01:29:16,000
और अपने व्यक्ति से अपना पल्ला जाड़ लिया हम उसे जानते नहीं जाओ ढूंढते रहो

1260
01:29:16,000 --> 01:29:20,560
आज वो व्यक्ति निर्द हो कर के घूम रहा है अपने आप को सम्राट कह रहा है धर्म

1261
01:29:20,560 --> 01:29:23,640
का और ऐसे व्यक्ति की रातों में

1262
01:29:23,640 --> 01:29:27,720
आ सपने में आता है उसे जगाता है ऐसे व्यक्ति की

1263
01:29:27,720 --> 01:29:31,720
बिल्कुल रातों में आवान सपने में आता है उसे जगाता है कि मैं तुझे चैन से सोने

1264
01:29:31,720 --> 01:29:36,520
नहीं दूंगा तू जग खटिया से उठ उ के खड़ा

1265
01:29:36,520 --> 01:29:40,920
होगा मैं इसलिए चैन से नहीं सो पा रहा हूं क्योंकि आवान चैन से सो रहा

1266
01:29:40,920 --> 01:29:45,040
है यह प्रॉब्लम है मैं यहां पर इनको लूंगा

1267
01:29:45,040 --> 01:29:49,080
यह जो अपने बारे में यदि कोई भी ये

1268
01:29:49,080 --> 01:29:53,120
कुछ भी बोलते रहे राधा मां का जो तुलना है राधा जी की

1269
01:29:53,120 --> 01:29:57,400
तुलना वो वो कर दे ये क्या कहते हैं उससे

1270
01:29:57,400 --> 01:30:01,800
अरे मैं कैसे कहूं भाई

1271
01:30:01,800 --> 01:30:06,080
अश्लील अश्लील जो चलचित्र बनते हैं उनमें

1272
01:30:06,080 --> 01:30:10,120
काम करने वाली जो वो होती है महिलाएं उनसे राधा की

1273
01:30:10,120 --> 01:30:14,200
तुलना कर दे ये लोग मगर कोई

1274
01:30:14,200 --> 01:30:18,640
ना बोले मगर इधर से किसी इनके किसी कृत पर अगर इधर से किसी ने बोल दिया

1275
01:30:18,640 --> 01:30:22,680
तो ये लोग कोर्ट किसकी धमकी देते हैं ये करते हैं हमें भी तो दिया भाई इसका

1276
01:30:22,680 --> 01:30:26,720
इससे उसे क्या मतलब था कि हमारी संस्था क्या है क्या नहीं है इस देश

1277
01:30:26,720 --> 01:30:30,800
में बहुत सारे लोग हैं जो अपने अपने वो चला रहे हैं तंत्र मगर इसने

1278
01:30:30,800 --> 01:30:36,480
उनसे पूछा इसने हमसे पूछा क्यों पूछा क्योंकि हमने इससे इसकी परंपरा पूछी

1279
01:30:36,480 --> 01:30:38,760
थी हमने इससे इसकी परंपरा

1280
01:30:38,760 --> 01:30:43,600
पूछी थी इसलिए इसने पूछा संस्था का रजिस्ट्रेशन बताओ भैया देखो

1281
01:30:43,600 --> 01:30:47,960
वो होंगे तुम्हारे चपेट में जो आ गए होंगे खेल

1282
01:30:47,960 --> 01:30:52,080
इस बार भी अच्छा खेला है तुमने अंडर कवर्ड गुंडे सुन रहे हो तो

1283
01:30:52,080 --> 01:30:56,160
मेरी बात खेल इस बार भी ने अच्छा खेला था आदमी गलत चुन

1284
01:30:56,160 --> 01:31:00,320
लिया है यह आदमी थोड़ा सरफरा टाइप का है

1285
01:31:00,320 --> 01:31:04,320
ठीक है तो मैं लव भारत को यहां पर लेना चाहूंगा इनके साथ भी इस तरह

1286
01:31:04,320 --> 01:31:10,320
का कुछ हुआ है थोड़ा सा आप अपना वक्तव्य दे लव भारत जी जय श्री

1287
01:31:10,600 --> 01:31:15,960
राम ज श्री

1288
01:31:15,960 --> 01:31:20,440
रामकी आवाज थोड़ी आवाज ठीक नहीं आ रही

1289
01:31:20,440 --> 01:31:24,120
बंद कर

1290
01:31:24,120 --> 01:31:30,120
या तो ऐसे पास में लगा के बोलिए या तो माइक

1291
01:31:32,000 --> 01:31:37,680
को आपकी आवाज नहीं आ

1292
01:31:37,680 --> 01:31:42,000
रही जी बार

1293
01:31:42,000 --> 01:31:48,000
जी

1294
01:31:48,720 --> 01:31:54,720
बोलिए अब आ रही है आवाज बहुत बढ़िया

1295
01:31:58,000 --> 01:32:02,160
आ रही है आ रही है थोड़ी धीरे आ रही है

1296
01:32:02,160 --> 01:32:06,600
आपकी आ नहीं आ रही

1297
01:32:06,600 --> 01:32:12,600
है हेलो हेलो हां ठीक है अब आ रही

1298
01:32:13,320 --> 01:32:17,440
है करके आता हूं आपकी आवाज नहीं ना आवाज ठीक

1299
01:32:17,440 --> 01:32:21,920
से नहीं आ र उनका क्या

1300
01:32:21,920 --> 01:32:26,600
बोल दोबारा कनेक्ट करके आता हूं अच्छा

1301
01:32:26,600 --> 01:32:30,720
अच्छा तो तब तक हम अनुज शिवास

1302
01:32:30,720 --> 01:32:34,800
जी ये बात तो आपने वैसे बिल्कुल सही कही है और मैं आपसे बिल्कुल एग्री करता हूं इस बात

1303
01:32:34,800 --> 01:32:38,920
प कि इस बार उन्होंने गलत व्यक्ति चुन लिया

1304
01:32:38,920 --> 01:32:43,320
है बस यही दिक्कत क्योंकि

1305
01:32:43,320 --> 01:32:47,520
हां मतलब जितना वो समझ रहे हैं जैसे एक वो होता है ना एक

1306
01:32:47,520 --> 01:32:51,920
आइसबर्ग जो पहाड़ होता है इसका

1307
01:32:51,920 --> 01:32:55,920
बर्फ का बर्फ का पहाड़ हां बर्फ का पहाड़ जो होता है वो ऊपर से

1308
01:32:55,920 --> 01:33:00,080
तो दिखता है कि इतना बड़ा होगा इतना बड़ा है इतना ऊंचा है लेकिन

1309
01:33:00,080 --> 01:33:04,160
उसके नीचे जितना बड़ा हिस्सा होता है वो उनको दिखता नहीं है

1310
01:33:04,160 --> 01:33:08,280
और मुझे लग रहा है कि यही उन लोगों को दिख नहीं रहा है अभी ठीक है

1311
01:33:08,280 --> 01:33:12,280
कि आगे पीछे दाएं बाएं कौन है कितने हैं कहां

1312
01:33:12,280 --> 01:33:13,040
है वो वो वाली

1313
01:33:13,040 --> 01:33:17,120
बात है मतलब मैं उस भाव से नहीं कह रहा हूं कि बड़े छोटे वाले उस भाव से नहीं कह रहा

1314
01:33:17,120 --> 01:33:21,440
हूं मैं ये बताना चाह रहा हूं कि ये समाज

1315
01:33:21,440 --> 01:33:25,960
यह संस्था यह देश मतलब में लोग अकेले नहीं है

1316
01:33:25,960 --> 01:33:30,120
लोग लोग हैं साथ में और अगर साथ में नहीं अभी भी है तो जुड़

1317
01:33:30,120 --> 01:33:34,240
रहे हैं और जुड़ेंगे और जुड़ के फिर यह बड़ा बनेगा ठीक है

1318
01:33:34,240 --> 01:33:38,640
तो यही है बस यही है कि सिद्धांत जो है अपना वह

1319
01:33:38,640 --> 01:33:42,840
अटल अपना रहना चाहिए धर्म से रहना चाहिए और यथाशक्ति

1320
01:33:42,840 --> 01:33:46,920
जितना हो सके हमें समाज को

1321
01:33:46,920 --> 01:33:51,320
देना चाहिए जैसा कि आपने बोला कि जितनी आपकी था

1322
01:33:51,320 --> 01:33:55,440
शक्ति जितना आप कर सकते हैं समाज को दे रहे हैं जो भी आपके पास समाधान

1323
01:33:55,440 --> 01:33:59,440
है जो यंत्र है या जो आपका ज्ञान है

1324
01:33:59,440 --> 01:34:03,560
वह आप शेयर कर रहे हैं ता शक्ति था संभव जितना हो सकता है और वो

1325
01:34:03,560 --> 01:34:07,800
करना भी वो बिल्कुल ठीक है मुझे उसमें कोई कुछ गलत नहीं लगता ठीक है तो गुरुदेव

1326
01:34:07,800 --> 01:34:11,800
भी यही कहते हैं ऐसा थोड़ना है कि हर कोई बिल्कुल एकदम प्रगड़ पंडित ही

1327
01:34:11,800 --> 01:34:15,800
है सब कुछ ज्ञान ही है उसे और वो क्या बोलते हैं

1328
01:34:15,800 --> 01:34:20,000
कि सब कुछ जो करेगा वो शास्त्र नियम के शास्त्र विधि के हिसाब से ही करेगा अभी

1329
01:34:20,000 --> 01:34:24,240
के समय ठीक है लेकिन अगर एक हिस्सा अगर उसे आता है जो उसे

1330
01:34:24,240 --> 01:34:28,040
सीख सकता है जो उसने ग से सीखा है और उसको अपनी सीमित

1331
01:34:28,040 --> 01:34:32,200
में सीमित में जितना वो समाज को दे सकता है समझा सकता है तो

1332
01:34:32,200 --> 01:34:36,240
वो तो व कर ही रहा है ठीक है और इस बात के लिए मैं

1333
01:34:36,240 --> 01:34:40,520
पूरी तरह से सपोर्ट करता हूं हिवा जी आपको और आवान को और

1334
01:34:40,520 --> 01:34:45,640
इसीलिए मैं आपके साथ हूं हमेशा

1335
01:34:45,640 --> 01:34:49,760
नारायण आभार आपका जी लव भारत

1336
01:34:49,760 --> 01:34:54,400
जी वापस आ गए आवाज आ रही है बहुत बढ़िया

1337
01:34:54,400 --> 01:34:58,760
ठीक है ठीक तो मैं ये कह रहा था कि इनका जो आदत है व्यक्तिगत

1338
01:34:58,760 --> 01:35:03,360
प्रहार करने की और किसी भी प्रकार से जो सामने वाला व्यक्ति है जो वास्तविकता

1339
01:35:03,360 --> 01:35:07,480
सबके सामने लाने का प्रयास कर रहा है उसको उसको दबा देने की उसकी

1340
01:35:07,480 --> 01:35:11,520
आवाज को दबाने की जो यह आदत है ये ऐसा नहीं है कि एक के साथ हो

1341
01:35:11,520 --> 01:35:15,960
आपके साथ हो या फिर किसी और के साथ हो सबके साथ ही है इनका अब देखेंगे

1342
01:35:15,960 --> 01:35:20,040
कि इनके अभी इस समय बहुत ज्यादा प्रचलित है य इनकी

1343
01:35:20,040 --> 01:35:24,280
मानसिकता वालों में ये जो गौतम खट्टर है बहुत ज्यादा प्रचलित है है

1344
01:35:24,280 --> 01:35:28,280
और इन्होंने मुझे मैसेज करा था एक समय जब मैंने इनके

1345
01:35:28,280 --> 01:35:32,560
ऊपर वीडियो बनाई थी तो इन्होंने मैसेज यह करा कि

1346
01:35:32,560 --> 01:35:37,400
छोटी सी क्लिप काटकर गलत संदेश मत दो या तो

1347
01:35:37,400 --> 01:35:41,400
यह वीडियो हटा दो अन्यथा मैं साइबर सेल में

1348
01:35:41,400 --> 01:35:43,160
कंप्लेंट करूंगा आपके

1349
01:35:43,160 --> 01:35:48,120
इस कृत की तो आपका पूरा पेज जाएगा श्रीमान

1350
01:35:48,120 --> 01:35:52,200
फिर मैंने भी इनको यही बताया कि मैंने पहली बात तो आपका

1351
01:35:52,200 --> 01:35:56,640
जो बात है उसका संदेश बदला नहीं आपकी बात का मतलब बदला नहीं

1352
01:35:56,640 --> 01:36:00,640
तो अगर बदला नहीं है तो आपकी क्लिप में यूज कर सकता हूं इतना मैं स्वतंत्र हूं

1353
01:36:00,640 --> 01:36:04,680
यहां पर आप वो नहीं कर सकते कि नहीं आपने क्लिप कैसे यूज कर दी तो कोई वैसे भी

1354
01:36:04,680 --> 01:36:08,880
देखा जाए तो कुछ य कर नहीं सकते दूसरी बात कि

1355
01:36:08,880 --> 01:36:13,680
यह चीज है कि फिर इन्होंने मैंने यह लिखा कि नहीं मैंने आपकी बात का मतलब

1356
01:36:13,680 --> 01:36:17,840
बदला नहीं है और फिर ये जो यूज कर रहे ये मैंने बिल्कुल

1357
01:36:17,840 --> 01:36:21,960
ठीक कर और आपने जो गलत बोले है तो इसका मैं विरोध करता

1358
01:36:21,960 --> 01:36:26,080
हूं और आपको आगे चर्चा करनी है तो कर लीजिए ऐसे करके तो फिर

1359
01:36:26,080 --> 01:36:30,160
इन्होंने बोला ओके पेज तो डिलीट होगा आपका मतलब सीधे

1360
01:36:30,160 --> 01:36:34,960
मतलब धमकी फ इस पर मैंने वीडियो भी बनाई थी और इतना समर्थन मुझे

1361
01:36:34,960 --> 01:36:39,000
सच्चे हिंदुओं से प्राप्त हुआ कि ये ऐसा नहीं कर पाए जो इनकी

1362
01:36:39,000 --> 01:36:43,120
मंशा थी ऐसा करने आपने वो शेयर किया है क्या जो

1363
01:36:43,120 --> 01:36:47,600
चैट है वो शेयर की है क्या हां मैंने करी थी

1364
01:36:47,600 --> 01:36:51,840
शेयर ा पर की है ं

1365
01:36:51,840 --> 01:36:56,200
नहीं मेरे पे की है जी जी अच्छा

1366
01:36:56,200 --> 01:36:58,240
अच्छा मुझे वहां भेजनी पड़ेगी

1367
01:36:58,240 --> 01:37:02,440
पहले अच्छा तो मैं ठीक है अभी आपने

1368
01:37:02,440 --> 01:37:08,440
बता दिया है मैं अभी करता हूं उसका आप हो सके तो ना

1369
01:37:23,560 --> 01:37:27,800
हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव य से मैं एक बात

1370
01:37:27,800 --> 01:37:32,520
बोलूंगा कि आपके साथ नया नहीं हुआ है मेरे साथ भी हुआ था आर्य

1371
01:37:32,520 --> 01:37:36,520
समाज ने मेरी और मेरी वाइफ की फोटो घुमाई थी फेसबुक पर

1372
01:37:36,520 --> 01:37:41,120
और उस पर अबद टिप्पणी की थी अच्छा तो

1373
01:37:41,120 --> 01:37:45,280
लीगल सेल में जाने की बात करी थी राजीव शर्मा हमारे मित्र है

1374
01:37:45,280 --> 01:37:49,320
उन्होंने कहा था साइबर सेल में कंप्लेंट कर करने के

1375
01:37:49,320 --> 01:37:53,520
लिए तब उस समय माफी मांगी थी उन्होंने और मामला

1376
01:37:53,520 --> 01:37:57,520
दफा हो गया तो ये बहुत ही निंदनीय

1377
01:37:57,520 --> 01:38:01,840
है नीच मानसिकता है कि मतलब कि प्राइवेट फोटो जब

1378
01:38:01,840 --> 01:38:05,960
जो है वो वायरल करना ये किसी तरह से वैदिक परंपरा नहीं

1379
01:38:05,960 --> 01:38:10,760
है चलो ये वेद की बात करते हैं क्या वेद इनको यही सिखाता

1380
01:38:10,760 --> 01:38:13,320
है अरे हमें तो अरे

1381
01:38:13,320 --> 01:38:17,840
भाई राम जी से सीखो भाई कैसे युद्ध लड़ते हैं कैसे सिद्धांति

1382
01:38:17,840 --> 01:38:21,880
होते हैं बक वहां पे गए थे तो क्या स्त्रियों पे हाथ डाला था ये

1383
01:38:21,880 --> 01:38:26,280
तो मलेच्छ की मानसिकता है युद्ध में आई हाथ आई हुई

1384
01:38:26,280 --> 01:38:30,280
आपको हाथ आ गई स्त्रियों की छवि तो आपने उसको यूज कर लिया आपको

1385
01:38:30,280 --> 01:38:34,680
किसी शत्रु की कोई और स्त्री डायरेक्ट स स शरीर

1386
01:38:34,680 --> 01:38:39,560
प्राप्त हो जाए तो आप उसको उपयोग में ले आओगे अपना जी

1387
01:38:39,560 --> 01:38:43,600
गुरुकुल एक मिनट गुरुकुल जी मैं ये कहूंगा कि

1388
01:38:43,600 --> 01:38:47,680
जैसे हमारे भाई ने ये बात बोली है मुझे लगता है एक कंप्लेंट

1389
01:38:47,680 --> 01:38:52,000
तो आपको भी कर देनी चाहिए इसमें फायदा क्या है करें

1390
01:38:52,000 --> 01:38:56,000
या नहीं करें वो बात की बात है मेरा अपना सजेशन है इससे आप पर जो

1391
01:38:56,000 --> 01:39:00,000
की गई टिप्पणी है उनका तो उनको पश्चाताप होगा ही ठीक है परंतु वो सबक भी

1392
01:39:00,000 --> 01:39:04,240
सीखेंगे कि आगे से ऐसा किसी के साथ नहीं करना यह मेरा एक सजेशन है यदि

1393
01:39:04,240 --> 01:39:08,280
हो सके तो इसके ऊपर आप विचार भर भी कर सके तो मेरे को लगता है मेरा

1394
01:39:08,280 --> 01:39:12,640
सजेशन सार्थक हो जी जी हम लोग इस पर कार कर रहे हैं

1395
01:39:12,640 --> 01:39:17,000
इसके लिए तो मैं उनसे ये कहना चाहूंगा तो आप लोगों ने जो ये किया है

1396
01:39:17,000 --> 01:39:21,000
क्योंकि हो तो सबके सब चोर वहां पर भाई है तो नीच

1397
01:39:21,000 --> 01:39:25,240
इतने के चेहरा तो दिखाने का कहां कहां पर किस जिसने मुंह काला कराया कुछ कह नहीं सकते

1398
01:39:25,240 --> 01:39:28,360
क्योंकि सबने वहां पर चेहरा तो दिखाया नहीं वो वही लोग

1399
01:39:28,360 --> 01:39:32,680
हैं जो नाम दिखा रहे हैं वो नहीं है कौन है ये भी नहीं कहा जा सकता भाई

1400
01:39:32,680 --> 01:39:36,680
जब वहां चेहरा नहीं है तो हमें क्या पता कौन है क्या नहीं है है ना तो

1401
01:39:36,680 --> 01:39:40,800
जिनका नाम है जो अपना नाम लिख रहे हैं वो वही है कि नहीं जिनका नाम वो लिख

1402
01:39:40,800 --> 01:39:45,120
रहे हैं यह भी नहीं कहा सकता मगर फिर भी वहां जो भी है जो वो कुकृत्य

1403
01:39:45,120 --> 01:39:49,280
कर रहा है वो नीच ऐसा है जिसने कहीं ना कहीं अपना मुंह काला जरूर

1404
01:39:49,280 --> 01:39:53,440
कराया है जिसकी वजह से वो चेहरा दिखा नहीं पा रहा है है ना

1405
01:39:53,440 --> 01:39:57,560
ना जिसने भी वहां पर अपने आपको हो सकता है वो जो नाम उसने

1406
01:39:57,560 --> 01:40:01,680
वहां पर यूज किया उन लोगों ने वो उन लोगों ने उनका बदनाम करने

1407
01:40:01,680 --> 01:40:05,720
के लिए यूज कर दिया हो नाम वो कोई और हो मगर वो लोग जो भी

1408
01:40:05,720 --> 01:40:10,200
हैं उन्होंने वो इतने गए गुजरे हैं हो सकता है मां-बाप से अनाथ

1409
01:40:10,200 --> 01:40:14,480
मतलब ऐसी जगह उनका जन्म हुआ हो जहां से वो बता ना पा रहे हो अपने बारे में

1410
01:40:14,480 --> 01:40:18,600
या फिर उनके साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटित हो गई उन्होंने कुछ ऐसा पाप कर्म

1411
01:40:18,600 --> 01:40:22,680
कर दिया हो जिसकी वजह से वो अपने चेहरे पर कालिक पोत करके घूम रहे हैं जिसकी

1412
01:40:22,680 --> 01:40:26,840
वजह से वो अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हो खामा खा विज्ञान दर्शन और जो

1413
01:40:26,840 --> 01:40:30,960
वहां पर जितने भी लोग थे इनको बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं जो भी है मगर

1414
01:40:30,960 --> 01:40:35,040
है तो वो इतने नीच कि वो अपने चेहरे पर काले कुतबा कर के घूम रहे हैं

1415
01:40:35,040 --> 01:40:39,240
वो दिखा नहीं पा रहे उनको मैं ये कहना चाहूंगा कि आप अपने वीडियो को बारीक

1416
01:40:39,240 --> 01:40:43,240
नजरों से देखें अच्छे से कि आपने उसमें कोई आज

1417
01:40:43,240 --> 01:40:43,740
का

1418
01:40:43,360 --> 01:40:47,920
जो लौकिक संविधान है उसके बाहर तो कुछ नहीं किया

1419
01:40:47,920 --> 01:40:51,920
है है ना क्योंकि मैंने अभी

1420
01:40:51,920 --> 01:40:56,000
अभी आपको थोड़ी देर पहले बताया है खेल तो अच्छा खेल रहे हैं आप ऐसा

1421
01:40:56,000 --> 01:41:00,000
नहीं है नो डाउट खेल अच्छा है बस इस बार जो आपका वो है

1422
01:41:00,000 --> 01:41:04,080
ना प्रतिद्वंदी जिसके खिलाफ आप खेल रहे हैं वह आदमी व

1423
01:41:04,080 --> 01:41:08,080
आदमी गलत चुन लिया ठीक है

1424
01:41:08,080 --> 01:41:12,920
वो अनुज जी कुछ कहना चाह रहे थे आप कुछ कहना चाह रहे थे शता जी

1425
01:41:12,920 --> 01:41:17,000
मैं यही कहूंगा कि आप लीगल कारवाई करें जो

1426
01:41:17,000 --> 01:41:21,000
आपका राइट है और कोई कानून हमें प्रोविजन देता है

1427
01:41:21,000 --> 01:41:25,120
इस चीज की हम आप सभी आपके साथ और आहवान

1428
01:41:25,120 --> 01:41:29,200
चैनल और आपके साथ खड़े हैं आप अच्छा काम करें हैं एक बात और मैं

1429
01:41:29,200 --> 01:41:33,240
बोलूंगा फिल्मों का मैं हालांकि आलन नहीं लेना चाहिए परंतु एक डायलॉग

1430
01:41:33,240 --> 01:41:37,240
गुरु फिल्म का था अभिषक उन बोलते जब लोग आपके बारे

1431
01:41:37,240 --> 01:41:43,240
में बोलने लग जाए ना समझो तरक्की कर रहे

1432
01:41:43,640 --> 01:41:48,080
हो लीगल वाला जो आपने बोला है अनुज जी वो तो हम देख रहे हैं अभी

1433
01:41:48,080 --> 01:41:52,160
नहीं नहीं वो आपको देखना ही चाहिए पंडित जी पहले तो क्षमा

1434
01:41:52,160 --> 01:41:56,200
मांगूंगा मैं आपसे जी मैं नहीं कह रहा कि उसके पीछे कौन है या

1435
01:41:56,200 --> 01:42:00,320
नहीं है जैसे कि शिवास जी ने बोल कि हो सकता कोई उनको बदनाम करने के लिए

1436
01:42:00,320 --> 01:42:04,400
हो लेकिन एज ए हम जो है ना अपनी रिपोर्ट

1437
01:42:04,400 --> 01:42:08,480
दायर कर सकते हैं उस अकाउंट के खिलाफ क्योंकि उन्होंने हमारी

1438
01:42:08,480 --> 01:42:12,640
प्राइवेसी में या प्राइवेट लाइफ में जो दखलंदाजी की है कोई

1439
01:42:12,640 --> 01:42:16,640
भी हो उसके पीछे सामने तो आएगा कम से कम तो मुझे लगता है इसमें जो भी

1440
01:42:16,640 --> 01:42:20,640
समर्थन हमारी तरफ से भी रहेगा चाहे वो ग्राउंड लेवल पर हो या कुछ भी हो

1441
01:42:20,640 --> 01:42:24,920
ठीक है उसके लिए हम तैयार है बिल्कुल ठीक है हर प्रकार से

1442
01:42:24,920 --> 01:42:29,000
आपको आगे बढ़ना चाहिए जी जी मैं यही

1443
01:42:29,000 --> 01:42:33,200
कहूंगा कि भाई जो उन्होंने जो हीन आचरण

1444
01:42:33,200 --> 01:42:37,440
प्रस्तुत किया है और चेहरा नहीं दिखा पाए हैं तो इससे दो चीजें तो साफ

1445
01:42:37,440 --> 01:42:41,920
होती है या तो वह किसी संभ्रांत माता-पिता के जन्म

1446
01:42:41,920 --> 01:42:45,960
संताने नहीं है और या फिर उन्होंने स्वयं ही

1447
01:42:45,960 --> 01:42:50,160
वह स्वयं संभ्रांत नहीं है उन्होंने स्वयं ऐसा कुछ कर दिया है जिससे

1448
01:42:50,160 --> 01:42:54,360
कि उनको जो है जिस चीज को वो सत्य समझ रहे उसको प्रस्तुत करते

1449
01:42:54,360 --> 01:42:58,480
हुए भी उनको जो है अपने चेहरे पर कालिक पोत के रखनी पड़ती

1450
01:42:58,480 --> 01:42:59,480
है

1451
01:42:59,480 --> 01:43:04,000
तो इतने जो ऐसे छुपे हुए जो नीच है उनको सामने लाने के लिए

1452
01:43:04,000 --> 01:43:08,600
कुछ ना कुछ करा ही जाएगा खर अब मैं थोड़ा सा

1453
01:43:08,600 --> 01:43:13,080
कुछ पॉइंट्स पर आऊंगा कि

1454
01:43:13,080 --> 01:43:17,840
एक हो गया बात आई थी

1455
01:43:17,840 --> 01:43:20,320
एक

1456
01:43:20,320 --> 01:43:25,000
ये केक वाली बात है

1457
01:43:25,000 --> 01:43:29,240
और मतलब जो वहां पर एक मात्र शक्ति है जिसकी जिसकी

1458
01:43:29,240 --> 01:43:33,560
ओर से यह पक्ष काव संस्कार वाली बात प हमने जो बात उठाई

1459
01:43:33,560 --> 01:43:37,680
थी तो मातृ शक्ति की तरफ से दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि भाई

1460
01:43:37,680 --> 01:43:42,080
देखिए हमको यह जो है वस्त्र बताते हैं वस्त्र हम किस समय के लिए बताते हैं

1461
01:43:42,080 --> 01:43:46,120
संस्कार के समय के लिए वहां पर आवश्यक बहुत है है ना नहीं

1462
01:43:46,120 --> 01:43:50,320
है तो मत करो ना यार मत करो बिना उसके भी तो आप धर्म धार्मिक

1463
01:43:50,320 --> 01:43:54,400
कहला सकते हो आपके जो गौतम खट्टर जी है वो पजामा

1464
01:43:54,400 --> 01:43:58,560
पहन कर के घूमते हैं पजामा पहनते हैं ना तो

1465
01:43:58,560 --> 01:44:03,040
वो पजामा जो है क्या दयानंद जी पहनते थे क्या पजामा

1466
01:44:03,040 --> 01:44:07,080
नहीं पहनते थे तो मत करो ना यार वो काम जो अगर

1467
01:44:07,080 --> 01:44:11,200
आपके पास वो चीजें नहीं है तो वो चीजें करना आवश्यक नहीं है अपने

1468
01:44:11,200 --> 01:44:14,600
आप को उससे अलग कर लो खैर उन्होंने चार पांच चीजें

1469
01:44:14,600 --> 01:44:18,760
दिखाई एक तो कि केक उन्होंने कहा

1470
01:44:18,760 --> 01:44:24,760
कि भाई ये केक काट रहे हैं यह विदेशियों का है और केक में जो है

1471
01:44:24,800 --> 01:44:29,480
अंडा होता है पहली बात तो ये फोटो देख के ही समझ जाते हैं कि उसम अंडा है कि नहीं

1472
01:44:29,480 --> 01:44:33,640
जसे कोई सप्लीमेंट देख के अपने आप ही बता दिया कि इसमें

1473
01:44:33,640 --> 01:44:38,040
ये कैफीन है पूरा 100% कैफीन भरा हुआ है हा वो कैफीन को प्रमोट

1474
01:44:38,040 --> 01:44:42,240
कर रहे हैं और क्या कहते हैं इनका भाई ऐसा है

1475
01:44:42,240 --> 01:44:46,280
केक केक की बात कर रहे हैं वहां पर और एक चीज कोई

1476
01:44:46,280 --> 01:44:50,440
और थी अंडे वाला क्या अंडे वाला केक है पिज्जा पिज्जा का फोटो हमारे

1477
01:44:50,440 --> 01:44:54,440
छोटे भाई का दिखाया पिज्जा का भैया आज की डेट में मिल तो लो

1478
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हमारे भाई से उठा उठा के ना पटक दे तब बताना और वो फोटो

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01:44:58,440 --> 01:45:02,520
कबका है जिस बालक दिखाई दे रहा है 10 साल

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12 साल पहले का फोटो अभी आके मिल लो तुमको गिरा के ना मारे तब बात

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01:45:11,080 --> 01:45:15,080
करनाय देखिए ये जो ये जो आपको क्या लगता है हम आपके बारे में

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01:45:15,080 --> 01:45:19,200
जानते नहीं है हम ऐसी टिप्पणियां नहीं करते हमारा कोई

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01:45:19,200 --> 01:45:23,200
व्यक्तिगत वही नहीं है आक्षेप हम तो सैद्धांतिक बातें पूछ

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01:45:23,200 --> 01:45:27,840
रहे हैं आपसे अब ये केक कौन काट रहा है

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01:45:27,840 --> 01:45:31,920
यह आपके लिए संकेत है यह केक वही मातृ शक्ति से जुड़ा

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01:45:31,920 --> 01:45:36,400
हुआ है जो मातृ शक्ति आक्षेप लगा रही है वही

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01:45:36,400 --> 01:45:40,440
केक काट रही है अब इसमें कितने अंडे मिले हैं हमारा बड़ा था हमारी डाइट ज्यादा

1488
01:45:40,440 --> 01:45:43,920
है आपके अंडे कितने हैं पांच

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01:45:43,920 --> 01:45:47,920
छह अंडा दिया किसने मुर्गी का

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01:45:47,920 --> 01:45:52,120
ही है कबूतर का है किसका है वो पता लग जाता होगा आपको देखते ही

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01:45:52,120 --> 01:45:56,160
है ना पता ल हां वो केवल फोटो में देख कर

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01:45:56,160 --> 01:46:00,160
के पता लग जाता है कि वो केक अंडे वाला है कि बिना अंडे वाला है दूसरी बात

1493
01:46:00,160 --> 01:46:04,440
हमने तो कहा ही है कि भाई हम ऐसे समाज में उत्पन्न

1494
01:46:04,440 --> 01:46:08,560
हुए ऐसी ऐसे पढ़ाई लिखाई हुई और हमने

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01:46:08,560 --> 01:46:12,560
कभी नहीं कहा कि हम गुरुकुल में जाकर पड़े हैं हमने तो कभी ये दावा नहीं कहा कि

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01:46:12,560 --> 01:46:16,600
हम जो पाच वर्ष की उम्र में हमारा जने हो गया था व्रत संध्या लगी थी हमारा

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01:46:16,600 --> 01:46:20,680
दोष हुआ था रात दोष था उसको हमने नाम जप कर करके

1498
01:46:20,680 --> 01:46:24,800
कर करके कर करके प्रयास किया है भगवान ने उसको क्षमा किया हो ना किया हो बात

1499
01:46:24,800 --> 01:46:26,240
अलग है

1500
01:46:26,240 --> 01:46:31,000
हमने कभी नहीं कहा स्वयं के पुराने जीवन को पूर्णत शास्त्र

1501
01:46:31,000 --> 01:46:35,000
अभी भी आज भी मेरे इस जीवन को लेकर के मेरे गृहस्थ

1502
01:46:35,000 --> 01:46:39,120
जीवन में अड़चन आती है कि क्या आप सारे जीवन ऐसे ही रहोगे क्या

1503
01:46:39,120 --> 01:46:43,160
क्या आप जींस कभी नहीं पहनो ग क्या क्या आपका कोट पेंट यूंही चढ़ता रहेगा क्या

1504
01:46:43,160 --> 01:46:47,280
ये सब सवाल आते हैं प्रश्न आते हैं मेरे सामने और

1505
01:46:47,280 --> 01:46:51,720
मैं मैं उनको कभी ये नहीं कहता कि मैं नहीं करूंगा नहीं करूंगा मैं कहता हूं

1506
01:46:51,720 --> 01:46:55,960
कि भाई देखो आज तो आवश्यकता नहीं है यथा संभव प्रयास करने दो

1507
01:46:55,960 --> 01:47:00,160
जब आवश्यकता होगी तब देखा जाएगा तो ऐसे करके उनका

1508
01:47:00,160 --> 01:47:04,240
मन भी रख वो रह जाता है और जो है हम जो है इस ओर जो

1509
01:47:04,240 --> 01:47:08,640
आना चाहते हैं आध्यात्मिकता में वो भी आते हैं मगर

1510
01:47:08,640 --> 01:47:12,920
हमने कभी नहीं कहा कि हम पूर्णतया शास्त्रोक्त जीवन ही जी पा रहे हैं क्योंकि भाई भाई

1511
01:47:12,920 --> 01:47:16,960
हमने कहा ना यथा संभव प्रमाण बुद्धि हमने कभी अपने आप को सही नहीं कहा शास्त्र को

1512
01:47:16,960 --> 01:47:21,080
सही कहा हमने जब जिम डाली तो हमने वहां स्वीकार किया कि यह शास्त्रीय

1513
01:47:21,080 --> 01:47:25,160
नहीं है यह शास्त्र से वो है हम सही नहीं है शास्त्र

1514
01:47:25,160 --> 01:47:29,400
सही है मगर आप जो अ शस्त्री चीजें कर रहे हैं वहां

1515
01:47:29,400 --> 01:47:33,680
पर आप अपने को जो है प्रमाणिक कह रहे हो शास्त्रों

1516
01:47:33,680 --> 01:47:38,120
पर लांछन लगा रहे हैं ये अंतर है

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01:47:38,120 --> 01:47:41,240
तो अब यह तो रही केक की बात कि भैया

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01:47:41,240 --> 01:47:45,360
हम अगर यदि मैं शंकराचार्य जी का शिष्य हो गया या मैंने उनका आलंबन ले

1519
01:47:45,360 --> 01:47:49,720
लिया मैं वेदोक्त मार्ग पर आने का प्रयास कर रहा हूं तो एट ए टाइम

1520
01:47:49,720 --> 01:47:54,000
उसी समय मेरे माता पिता भाई बहन अगर संताने

1521
01:47:54,000 --> 01:47:58,680
हो तो वो सब उसी समय वेद पाठी ब्राह्मण हो जाए

1522
01:47:58,680 --> 01:48:03,000
है ना उसमें समय नहीं लगना चाहिए एक सेकंड का भी

1523
01:48:03,000 --> 01:48:07,200
इनका कहने का मतलब ये है ये इनकी युक्ति है जी

1524
01:48:07,200 --> 01:48:11,200
अच्छा इन्होंने अंडे वाले केक का हो गया अब इन्होंने एक बात कही कैफीन

1525
01:48:11,200 --> 01:48:15,280
की तो पहली बात तो फिर वही वाली बात आ जाएगी कि हम लोग

1526
01:48:15,280 --> 01:48:19,480
कार्य क्या कर रहे हैं हमारी आज को पार्जन क्या है जिम

1527
01:48:19,480 --> 01:48:24,400
में जिम जो है उसे किसे जिम कहा जाता है दूसरी बात

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01:48:24,400 --> 01:48:29,360
जो सप्लीमेंट यह देने का देने की बात कर रहे हैं

1529
01:48:29,360 --> 01:48:33,600
जिस सप्लीमेंट की बात कर रहे हैं वो सप्लीमेंट में तो कैफीन

1530
01:48:33,600 --> 01:48:37,840
है भी नहीं एक प्रतियोगिता करवाई थी हमने हिंदू युवाओं

1531
01:48:37,840 --> 01:48:41,920
को वो हमने कहा ना कि जिम को भी हमने एक सेतु बनाया कि किस तरीके

1532
01:48:41,920 --> 01:48:45,920
से जिम का उपयोग हम कर सके जो बच्चे हैं उनको धर्म रक्षा

1533
01:48:45,920 --> 01:48:50,000
में लाने के लिए अध्यात्म के मार्ग में लाने के लिए तो हमने एक हिंदू

1534
01:48:50,000 --> 01:48:54,480
योद्धा नाम से कंपटीशन करवाया है ना और उस कंपटीशन

1535
01:48:54,480 --> 01:48:56,360
में हमने पुरस्कार

1536
01:48:56,360 --> 01:49:00,440
स्वरूप सिट्रोन मलेट सिट्रोन मलेट क्या

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01:49:00,440 --> 01:49:04,520
करता है एक तत्व है जो कैफीन में नहीं आता

1538
01:49:04,520 --> 01:49:09,200
है और जो ड्रग्स में नहीं आता है हम कभी भी अपनी जिम में ड्रग्स

1539
01:49:09,200 --> 01:49:13,400
को प्रमोट नहीं करते कभी भी और ना ही किसी कॉफी

1540
01:49:13,400 --> 01:49:17,800
चाय ना पीने वाले को कैफीन के लिए कहते हैं जो पहले से कैफीन

1541
01:49:17,800 --> 01:49:22,160
ले रहा है उस अगर वो यह पूछेगा कि हम कैफीन कहां से ले

1542
01:49:22,160 --> 01:49:26,200
तो अवश उसको बताएंगे जानकारी उसको देंगे कि भाई कैफीन

1543
01:49:26,200 --> 01:49:30,360
और कैफीन होती क्या है जो आज जो है समाज में प्रासंगिक

1544
01:49:30,360 --> 01:49:34,440
है हर व्यक्ति कॉफी और चाय के रूप में कैफीन इंटेक कर रहा

1545
01:49:34,440 --> 01:49:39,000
है डेली लगभग हर व्यक्ति हम नहीं कर रहे लगभग हर

1546
01:49:39,000 --> 01:49:43,680
प्रत्येक व्यक्ति कर रहा है आपके ही आश्रम में

1547
01:49:43,680 --> 01:49:47,840
चलिए मान लिया ओए मान लिया जो आपकी

1548
01:49:47,840 --> 01:49:51,960
निष्ठा विद्या अलंकार जी हैं अलंकार समाज यों की जो

1549
01:49:51,960 --> 01:49:56,160
विश्व स्तर ये वो है प्रचारक

1550
01:49:56,160 --> 01:50:00,760
अलंकार समाज की उनके यहां जब हम गए थे साक्षात्कार

1551
01:50:00,760 --> 01:50:05,000
करने उनसे पूछ लीजिएगा अगर वह सत्यवादी होंगी तो उन्होंने हमको

1552
01:50:05,000 --> 01:50:09,040
चाय का चाय के लिए पूछा और

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01:50:09,040 --> 01:50:11,400
हमारे साथ में जो वहां पर थे उन्होंने

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01:50:11,400 --> 01:50:15,800
चाय पी उन लोगों ने चाय पी हमने चाय नहीं पी

1555
01:50:15,800 --> 01:50:20,040
यह है सिद्धांत वादी ता हम तो चाहे छूते ही नहीं है

1556
01:50:20,040 --> 01:50:24,120
शिवान जी इसमें एक पॉइंट ऐड करूंगा मैं तो जी ली बात आपने कही है कि जो पहले

1557
01:50:24,120 --> 01:50:28,120
से पी रहा है उसको बता रहे हैं कि क्या सही है तो एक तरह से देखा जाए तो यही तो

1558
01:50:28,120 --> 01:50:33,320
ये तो वेदोक्त विधि हो गई ना जिसे परिसंघ विधि बोलते हैं बिल्कुल

1559
01:50:33,320 --> 01:50:37,440
नहीं उसको हम कैफीन का विकल्प भी देते हैं कि कैफीन

1560
01:50:37,440 --> 01:50:41,880
की जगह मेंटल जो आपकी जो स्थिति है चित्त को एनस

1561
01:50:41,880 --> 01:50:46,080
वो जो एक आपका कॉन्शसनेस उसको बढ़ाने के लिए आप लंग खाइए

1562
01:50:46,080 --> 01:50:50,440
आप जो है सुबह सुबह दही में डाल कर के सेव खाइए जो एक नहीं

1563
01:50:50,440 --> 01:50:54,480
जब हैवी एक्सरसाइज करते तो ब्रेन जो है डाउन होने लगता है उसका ऑक्सीजन लेवल

1564
01:50:54,480 --> 01:50:58,640
कम हो जाता है तो कैफीन इंटेक अगर होता है तो व्यक्ति का थोड़ा सा और देर

1565
01:50:58,640 --> 01:51:02,720
तक वो चीज चलती है उसका परफॉर्मेंस अच्छा रहता है मगर वो

1566
01:51:02,720 --> 01:51:06,760
कैफीन आता तो उसमें हीय मादक पदार्थों में तामसिक में आता है तो उसको

1567
01:51:06,760 --> 01:51:10,840
हम ये तो नहीं कह सकते शास्त्र उचित है तो हम प्रयास करते हैं कि उसको विकल्प भी

1568
01:51:10,840 --> 01:51:14,920
बताए और धीरे-धीरे उसको जो है लाए ये तो गुरुदेव भी कहते

1569
01:51:14,920 --> 01:51:19,160
हैं कि भैया एक ही दिन में सारा घी मत पिला दो मगर इससे फर्क

1570
01:51:19,160 --> 01:51:23,240
कहां पड़ रहा है क्या प्रभावित हो गया धर्म या ब्रह्म मगर

1571
01:51:23,240 --> 01:51:26,880
आप जो कर रहे हैं उससे धर्म ब्रह्म प्रभावित हो रहा है

1572
01:51:26,880 --> 01:51:30,960
अथातो धर्म जिज्ञासा प्रभावित हो रहा है अथातो ब्रह्म जिज्ञासा प्रभावित

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01:51:30,960 --> 01:51:35,080
हो रहा है जी गोविंद जी मैं

1574
01:51:35,080 --> 01:51:39,200
आर्य समाज जब जाता हूं ठीक है तो वहां तो मेरे को आज तक उन्होंने

1575
01:51:39,200 --> 01:51:43,800
कभी ऐसी बात नहीं कही कि यह भाई चाय है या इसमें ये कैफीन

1576
01:51:43,800 --> 01:51:47,880
या ये वो जबक हर संडे को वहां पर प्रोग्राम होता और चाय तो

1577
01:51:47,880 --> 01:51:51,920
सबको दी जाती है ये देखिए एक चीज दिखा रहा था मैं य

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01:51:51,920 --> 01:51:56,040
ये कोई प्री प्लान नहीं है ये मेरे पास रखा था ये

1579
01:51:56,040 --> 01:52:00,160
वो प्रमाण पत्र है प्रशंसा पत्र जो वो जो प्रतियोगिता कराई थी ना

1580
01:52:00,160 --> 01:52:04,200
जिसका इन्होंने चित्र दिखाया है जिसमें हम उनको सिट्रोन मलेट दे रहे हैं

1581
01:52:04,200 --> 01:52:08,280
सिट्रोन मलेट होता क्या है कि उसके बारे में बता दूं कि

1582
01:52:08,280 --> 01:52:13,040
वो सप्लीमेंट में ही आता है सप्लीमेंट को हिंदी में कहेंगे तो पूरक आहार

1583
01:52:13,040 --> 01:52:17,280
कि आप दिन भर में आज जो खा पी रहे हैं जाहिर सी बात है आज जो हमें

1584
01:52:17,280 --> 01:52:21,320
मिल भी रहा है वो उतनी पौष्टिकता नहीं है सब्जियों में जो भी हम खा

1585
01:52:21,320 --> 01:52:25,520
पी रहे हैं जो पेस्टिसाइड्स लग लग के फल आ रहे हैं हर चीज

1586
01:52:25,520 --> 01:52:29,680
में मिलावट है तो हमारे पास वो पोषक तत्व नहीं पहुंच रहे हैं हमारी जो

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01:52:29,680 --> 01:52:33,880
जीवन शैली है आज की वो पूर्णतया आज कृत्रिम जैसी हो गई है

1588
01:52:33,880 --> 01:52:38,120
उस जीवन शैली में यदि सप्लीमेंट है भी तो कोई वो उस जीवन शैली

1589
01:52:38,120 --> 01:52:41,920
को जीते हुए वाले व्यक्ति के लिए उतनी ज्यादा विपरीत

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01:52:41,920 --> 01:52:45,960
नहीं है सप्लीमेंट मगर हमने जो सप्लीमेंट दिया वो सिलिन मलेट

1591
01:52:45,960 --> 01:52:50,200
वो किस कार्य आता है कि वो आपकी जो सिकड़ी हुई

1592
01:52:50,200 --> 01:52:54,240
जो नर्व्स होती है उनको वो खोलता है जिससे कि आपका जो

1593
01:52:54,240 --> 01:52:58,480
रक्तचाप है वो सुचारू रूप से हो जाए और ऑक्सीजन वगैरह

1594
01:52:58,480 --> 01:53:02,920
जहां पर जितनी मात्रा में पहुंचना चाहिए वो पहुंचे और जिसकी वजह से आपको

1595
01:53:02,920 --> 01:53:07,000
यथोचित ऑक्सीजन जगह-जगह पर मिले विशेष तौर पर वहां पर जहां

1596
01:53:07,000 --> 01:53:11,200
का आप व्यायाम कर रहे हैं और विशेष तौर पर ब्रेन में तो वो

1597
01:53:11,200 --> 01:53:15,280
एक ऐसा सप्लीमेंट है जिसे मादक पदार्थ में नहीं गिना जाता है मादक नहीं है वो

1598
01:53:15,280 --> 01:53:19,360
तामसिक नहीं जो हमने दिया ये प्रभु श्री राम की कृपा है हमने सोचा

1599
01:53:19,360 --> 01:53:23,560
समझा नहीं था भाई ने जो छोटे वाले भैया ने जो पकड़ा दिया हम ने दे दिया मगर

1600
01:53:23,560 --> 01:53:27,680
उस चित्र कोब इन्होंने दिखाया है हमने कैफीन को वहां पर नहीं

1601
01:53:27,680 --> 01:53:32,480
दिया किसी को भी ठीक है और साथ में हमने क्या दिया

1602
01:53:32,480 --> 01:53:36,800
उन युवाओं को ये उनको एक प्रेरणा

1603
01:53:36,800 --> 01:53:40,880
यदि आप यह मल युद्ध कर रहे हैं यदि आप आज शरीर बना रहे हैं

1604
01:53:40,880 --> 01:53:45,800
यदि आप अपने आप चौड़ा कर रहे हैं तो गौ माता की रक्षा के

1605
01:53:45,800 --> 01:53:49,800
लिए यदि आपको योद्धा बनना है तो गौ माता की रक्षा के लिए

1606
01:53:49,800 --> 01:53:53,920
हमारी जिम में पोस्टर लगे हुए हैं गाय को प्यार करता

1607
01:53:53,920 --> 01:53:57,080
हुआ बॉडी बिल्डर ऐसे वैसे पोस्टर नहीं है

1608
01:53:57,080 --> 01:54:01,440
गाय को प्यार करता हुआ बॉडी बिल्डर हमारी जिम में मिलेगा वो नहीं मिलेंगे मलेच्छ

1609
01:54:01,440 --> 01:54:05,600
एक भी मलेच्छ नहीं मिलेगा गाय को प्यार करने वाला शास्त्र

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01:54:05,600 --> 01:54:09,640
को हाथ में लेकर चलने वाला रुद्राक्ष माला धारण करने वाला यज्ञ को भी

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01:54:09,640 --> 01:54:13,640
धारण करने वाला ऐसे चित्र आपको हमारी जिम में मिलेंगे उनको देख के

1612
01:54:13,640 --> 01:54:17,800
क्या भावना उड़ेगी युवाओं में यार हमको भी ऐसे ही धोती पहननी है

1613
01:54:17,800 --> 01:54:21,880
हमको भी ऐसे ही जने धारण करना है हमको भी स्वयं को इस योग्य बनाना है हम

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01:54:21,880 --> 01:54:25,920
भी ऐसे बनना चाहते तो ऐसी भावनाएं डालने वाला हमने ये

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01:54:25,920 --> 01:54:29,920
देख लो आख फाड़ के जिसको तुम हीन आचरण

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01:54:29,920 --> 01:54:34,000
में गिना रहे हो ये यह दिया था हमने उन्हें हिंदू

1617
01:54:34,000 --> 01:54:38,040
योद्धा सम्मान संयोग वष पास में रखा हुआ मिल

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01:54:38,040 --> 01:54:42,120
गया जी गोविंद जी कुछ कह रहे थे हां तो मैं कह रहा हूं

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01:54:42,120 --> 01:54:46,160
यदि फिर कैफीन की बात है तो आर्य समाज में भी तो हर संडे

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01:54:46,160 --> 01:54:50,320
को हम जाते हैं तो वहां पर भी हमें चाय आदि दी जाती है हम हमें तो आज

1621
01:54:50,320 --> 01:54:54,400
तक उन्होंने कभी ऐसी बात नहीं कही कि यह गलत है या कुछ भी हां

1622
01:54:54,400 --> 01:54:58,480
यदि नशीला पदार्थ होता है तो वह तो फिर हमें दवाई में भी

1623
01:54:58,480 --> 01:55:02,720
प्राप्त हो जाता है ना लेकिन उसी दवाई का कोई केवल नशे के लिए ही इस्तेमाल

1624
01:55:02,720 --> 01:55:07,040
करे वो तो बात गलत है ठीक है तो मुझे लगता है ना

1625
01:55:07,040 --> 01:55:11,320
यह आर्य समाज के सिद्धांत को ही पूर्ण तरीके से जानते हैं ठीक है

1626
01:55:11,320 --> 01:55:12,120
क्योंकि कोई भी

1627
01:55:12,120 --> 01:55:16,440
यदि वरिष्ठ अधिकारी है वो भी इतनी हीन बातें इसको ना

1628
01:55:16,440 --> 01:55:20,560
मैं कहना नहीं चाहता लेकिन हम टची बातें कहते हैं यानी छोटी

1629
01:55:20,560 --> 01:55:24,680
छोटी बातें जैसे चुगली हो होती है एक किस्म की जैसे चुगली की

1630
01:55:24,680 --> 01:55:29,040
जाती है ना वैसे ही इस आचरण को मैं देखूंगा तो ऐसी

1631
01:55:29,040 --> 01:55:34,880
कोई भी बात मेरे को इनकी एक भी नहीं लगी जहां पर इन्होंने कोई ऐसी बात कही

1632
01:55:34,880 --> 01:55:39,600
हो जैसे कि कोई सामर्थ्य वान बात थोड़ी है ये कोई

1633
01:55:39,600 --> 01:55:43,960
कि आपको नहीं पता सिन सिलिन मेलेट क्या होता है वो ऑक्सीजन बढ़ाने

1634
01:55:43,960 --> 01:55:47,960
के लिए शरीर में एक सप्लीमेंट होता है क्योंकि मैंने भी न्यूट्रिशन की

1635
01:55:47,960 --> 01:55:52,360
पढ़ाई की है ठीक है बड़े सारे सप्लीमेंट ऐसे होते हैं जो नहीं आते हैं

1636
01:55:52,360 --> 01:55:56,360
ड्रग्स की कैटेगरी में और उनके पीछे लिखा भी होता है कि यह इन सब

1637
01:55:56,360 --> 01:56:00,400
संस्थाओं से प्रमाणित है जहां की ड्रग्स वगैरह की टेस्टिंग होती है

1638
01:56:00,400 --> 01:56:04,400
ठीक है अब कोई अब तो ऐसे लोग भी है जो वे प्रोटीन को

1639
01:56:04,400 --> 01:56:08,520
भी वो मानते हैं कि ठीक है कि यह भी कोई एडिक्टिव

1640
01:56:08,520 --> 01:56:12,640
चीज है या कुछ भी तो मुझे लगता है कि जब आपने बता रहे हैं कि

1641
01:56:12,640 --> 01:56:16,720
सिटन मेलेट है तो मुझे लगता है पहले वीडियो बनाने से पहले एक बार देख तो लेते

1642
01:56:16,720 --> 01:56:21,360
होता क्या है नहीं पता था तो आजकल य पर 100 वीडियो मिल जाती है

1643
01:56:21,360 --> 01:56:25,680
ठीक है जब नाइट्रोजन हमारी मैं तो

1644
01:56:25,680 --> 01:56:27,480
मैं तो ये कह रहा हूं कि जिस समय

1645
01:56:27,480 --> 01:56:32,160
वहां पर दे रहा हूं वो भले ही वहां प सब पाश्चात्य वस्त्रों में हो

1646
01:56:32,160 --> 01:56:36,240
मैं वहां पर आपको पारंपरिक दिख रहा हूं जो उन्होंने चित्र दिखाया

1647
01:56:36,240 --> 01:56:40,320
देखो कैफीन को प्रमोट करते हैं मैं आपको उस भीड़ में पारंपरिक वस्त्रों

1648
01:56:40,320 --> 01:56:44,440
में दिख रहा हूं ऐसी जगह आप सोचो कोई व्यक्ति धोती और उसको पहन

1649
01:56:44,440 --> 01:56:48,600
करके ऐसे वस्त्रों को पहन करके अभी भी मॉल में आपको दिखे मैं आपको अपनी

1650
01:56:48,600 --> 01:56:52,920
मॉल की तस्वीरें दिखा दूं तो यह तो आप आपको प्रोत्साहित

1651
01:56:52,920 --> 01:56:57,080
करना चाहिए वो व्यक्ति जिम में जाकर के युवाओं के बीच में युवाओं

1652
01:56:57,080 --> 01:57:01,200
के लिए वो उदाहरण बन रहा है युवाओं को प्रेरित कर रहा है कि हम भी आपके

1653
01:57:01,200 --> 01:57:05,480
जैसे बने और उनको जो कैफीन नहीं था वो तो कैफीन

1654
01:57:05,480 --> 01:57:09,840
दिख गया मगर उनको य सर्टिफिकेट नहीं दिखा व

1655
01:57:09,840 --> 01:57:14,000
क्योंकि वो चील वाली कहावत बताई थी ना वो मा मास देखती है

1656
01:57:14,000 --> 01:57:18,240
केवल वो मास देखती है केवल चील वाली

1657
01:57:18,240 --> 01:57:22,240
कहावत है ना मैं तो मैं तो बड़ा ही स

1658
01:57:22,240 --> 01:57:26,440
कहि है तो मैं तो एक किस्म से बड़ा जो है ना दुखी भी इसके लिए वर्ड नहीं यूज

1659
01:57:26,440 --> 01:57:30,560
करूंगा क्योंकि वो ज्यादा हो जाता है थोड़ा ठीक है लेकिन आहत जरूर आप कह

1660
01:57:30,560 --> 01:57:34,560
सकते हैं कि आपने कैसे ऐसी बातें कही है जिनके बीच में

1661
01:57:34,560 --> 01:57:38,560
ना कोई तुक बनता है और चुगली निंदा आदि से ऊपर आप क्यों नहीं उठ

1662
01:57:38,560 --> 01:57:42,800
पा रहे हो मेरे को आज यह भी कहीं ना कहीं समझ आ रहा है क्योंकि आप संतों

1663
01:57:42,800 --> 01:57:46,920
के खिलाफ हमेशा से ही एक द्वेष भावना और उनकी जो

1664
01:57:46,920 --> 01:57:51,040
आप कह सकते हो कि हीन वाणी में उनके खिलाफ जो बोलते हैं ना शायद इसी

1665
01:57:51,040 --> 01:57:55,160
का फल ये है कि आप कोई भी तथ्यात्मक चर्चा नहीं करना

1666
01:57:55,160 --> 01:57:59,240
चाहते हो और आप केवल और केवल दोष ढूंढने में लगे हो केवल दोष

1667
01:57:59,240 --> 01:58:03,520
ढूंढने में ठीक है तो मेरे को मेरे को तो अंतत यह लग रहा है

1668
01:58:03,520 --> 01:58:07,720
कि आर्य समाज भी यदि कोई अच्छा व्यक्ति आर्य समाज का जैसे मैं

1669
01:58:07,720 --> 01:58:11,840
हमारे यहां पर है एक व्यक्ति बड़ी अच्छी बातें करते हैं बड़ी सरलता से हर एक चीज

1670
01:58:11,840 --> 01:58:15,880
को अपने भाव को रखते हैं ठीक है और उन्होंने 100 बार कहा है कि

1671
01:58:15,880 --> 01:58:19,960
मूर्ति पूजने वाले हमारे दुश्मन नहीं हमारे भाई है जब चाहे हमारे साथ आए

1672
01:58:19,960 --> 01:58:24,160
बैठे प्रेम से आचरण करें हम बैठ जो भी उनके साथ दिक्कत है ठीक है

1673
01:58:24,160 --> 01:58:28,360
लेकिन ऐसे व्यक्ति जो है ना ये कट्टर कहलाते हैं और हर जगह मिलते ही मिलते

1674
01:58:28,360 --> 01:58:32,600
हैं और ऐसे लोगों से मुझे सावधान तो रहने की जरूरत है ही

1675
01:58:32,600 --> 01:58:36,720
लेकिन साथ ही साथ इनको समय समय पर जवाब देने की और ज्यादा आवश्यकता है

1676
01:58:36,720 --> 01:58:40,800
ठीक है ताकि लोगों को भी पता चल सके मैंने इनको बड़ा समझाया कि ऐसा काम

1677
01:58:40,800 --> 01:58:45,720
मत करना लेकिन यह लोग नहीं हटे फिर भी जी जी

1678
01:58:45,720 --> 01:58:50,040
जी तो जी

1679
01:58:50,040 --> 01:58:56,040
आदित्य वाने जी को लूंगा भारत जी आपने वो सेंड किया है

1680
01:59:22,080 --> 01:59:26,120
गौतम खट्टर जी है जो धमकाते हैं भाई हा ये

1681
01:59:26,120 --> 01:59:29,680
चैट देख

1682
01:59:29,680 --> 01:59:33,720
ली या तो व वीडियो हटा दो अन्यथा साइबर

1683
01:59:33,720 --> 01:59:37,800
सेल में कंप्लेन करूंगा आपके इस कृत को आप इस

1684
01:59:37,800 --> 01:59:41,960
दोले देखिए इनके ऐसे कितने

1685
01:59:41,960 --> 01:59:46,120
चैट वो जो अधर्मी उवाच है उसके चैट में मिल जाएंगे

1686
01:59:46,120 --> 01:59:50,720
ऐसे कितने चैट होंगे इसको कहते दोगलापन ऐसे

1687
01:59:50,720 --> 01:59:56,000
कितने चैट मिलेंगे इनको वहां पर इसको कहते दोगलापन

1688
01:59:56,000 --> 02:00:01,320
इसको दोगलापन कहते हैं

1689
02:00:01,320 --> 02:00:05,400
खर अभी मैं आता जो हमारा एक हमारा

1690
02:00:05,400 --> 02:00:10,000
जो हमारे बीच का एक युवा है जो पता नहीं किसी

1691
02:00:10,000 --> 02:00:14,160
घमंड में आ गया है या किस प्रभाव में आ गया है कौन से प्रभाव में आया

1692
02:00:14,160 --> 02:00:18,480
है दोगलापन और नीच हरकत करना

1693
02:00:18,480 --> 02:00:22,680
स्वयं के नाम के आगे विज्ञान लगाना दर्शन लगाना

1694
02:00:22,680 --> 02:00:26,800
इस तरह की चीजें करना तो उसके बारे में बात करूंगा उसने हमारे बारे में कुछ बातें कही वहां

1695
02:00:26,800 --> 02:00:32,520
पर लाइव में वीडियो में वो क्या थी

1696
02:00:32,520 --> 02:00:36,880
कि सबसे पहली बात उनका यह कहना था कि मैंने

1697
02:00:36,880 --> 02:00:41,040
कई बार आवान से बात करने का प्रयास किया

1698
02:00:41,040 --> 02:00:45,240
उसके निमित्त उन्होंने हमारा एक अनुज

1699
02:00:45,240 --> 02:00:49,360
है आदित्य वर्ष ने हमारे अनुज

1700
02:00:49,360 --> 02:00:53,480
है और बहुत ज्यादा मतलब

1701
02:00:53,480 --> 02:00:57,880
कर्मठ मैं कहूंगा एक समझ लीजिए हमारे सदस्य

1702
02:00:57,880 --> 02:01:01,880
हैं हां इनकी जो शिक्षा दीक्षा है वह कोई गुरुकुल

1703
02:01:01,880 --> 02:01:06,120
की नहीं है जैसे हमारा एक पास्ट है और सच्ची बात

1704
02:01:06,120 --> 02:01:10,160
आपको सबसे बड़ी सरप्राइज तो यह होगा सुनक के कि यह पहले आर

1705
02:01:10,160 --> 02:01:14,680
समाज में फसे हुए थे हां

1706
02:01:14,680 --> 02:01:16,440
मुझे इन्होंने जो गलती

1707
02:01:16,440 --> 02:01:20,520
से वहां के ग्रंथ खरीद लिए थे वो ग्रंथ इन्होंने मुझे भिजवाए

1708
02:01:20,520 --> 02:01:24,560
भैया इनका मैं क्या करूं ईश्वर सर्वशक्तिमान है नहीं इनका तो मैंने कहा

1709
02:01:24,560 --> 02:01:28,560
ठीक है हमको भेज दो अध्ययन के काम आएंगे जब हम कोई बात कर

1710
02:01:28,560 --> 02:01:32,640
रहे होंगे तो हमें अपना उनकी तरफ

1711
02:01:32,640 --> 02:01:36,840
से क्या कहा गया है वो पक्ष दिखाने में आसानी रहेगी थोड़ी तो इन्होंने

1712
02:01:36,840 --> 02:01:41,160
हमको बिजवा दिया वो ग्रंथ अभी भी हमारे कार्य आते हैं वो सत्यार्थ प्रकाश है उसम और

1713
02:01:41,160 --> 02:01:46,440
चीज है उसम वो इनके द्वारा ही बजवाई गई है हमारे पास

1714
02:01:46,440 --> 02:01:50,480
भेजूंगा ब है मेरे पास गलती से मैंने भी ले लिया था मुझे आदित्य जी ने

1715
02:01:50,480 --> 02:01:54,480
ही बताया अरे आपकी लाइब्रेरी में ये ये ग्रंथ क्या कर रहा है मैंने कहा

1716
02:01:54,480 --> 02:01:58,520
अच्छा देखे तो तो देखा तो आदित्य जी

1717
02:01:58,520 --> 02:02:02,800
ने बताया रे पास भी आप क हो तो मैं उतार के दिखा दूं एक बड़ा

1718
02:02:02,800 --> 02:02:06,960
सा जत्था है पूरा वो आदित्य वासने जी ने ही भिजवाया हमको और ये

1719
02:02:06,960 --> 02:02:11,120
पहले प्रभा में आ गए थे मगर जब इनको ईश्वर की सर्वशक्ति

1720
02:02:11,120 --> 02:02:15,120
मत्ता वाला सिद्धांत प्राप्त हुआ तो फिर उन्होंने कहा कि नहीं ये तो

1721
02:02:15,120 --> 02:02:19,200
सही और उन्होंने पूछा और किसकिस से पूछा इन्होंने गौतम

1722
02:02:19,200 --> 02:02:23,280
खट्टर जी से इनका डायरेक्ट बात हो रही थी और भी कुछ लोग हैं

1723
02:02:23,280 --> 02:02:27,480
आर्य समाज के जो गणमान्य माने जाते हैं उनसे इनकी बातें हो रही थी इन्होंने हमसे पूछा

1724
02:02:27,480 --> 02:02:31,920
कि ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं वही वाली बात नहीं कर सकता

1725
02:02:31,920 --> 02:02:36,200
नहीं कर सकता तो सीमित हो गया ठीक है सीमित हो गया भाई तो

1726
02:02:36,200 --> 02:02:40,200
ऐसी इनकी चर्चाएं है अब यह जो है इनसे जो है सबसे पहली बात विज्ञान

1727
02:02:40,200 --> 02:02:44,280
दर्शन के नाम से जो अपने आप व्यक्ति बताता है विज्ञान दर्शन है भी कि नहीं

1728
02:02:44,280 --> 02:02:48,360
उस लाइव में विज्ञान दर्शन ही था है विज्ञान दर्शन के नाम से कोई और व्यक्ति था मैं

1729
02:02:48,360 --> 02:02:52,440
नहीं जानता मगर वहां पर उसने नीचता भरे और निकृष्ट भरी बातें की जब

1730
02:02:52,440 --> 02:02:56,440
उसने यह कहा कि हमने आवान से बात करने का प्रयास किया भाई सबसे

1731
02:02:56,440 --> 02:03:00,600
पहली बात तो यह बता दूं हमारा जो नंबर है दूर

1732
02:03:00,600 --> 02:03:04,920
भाष नंबर वो हर वीडियो में लगभग हम देते

1733
02:03:04,920 --> 02:03:09,440
हैं हर वीडियो में अभी भी बोल रहा हूं 740

1734
02:03:09,440 --> 02:03:13,480
8301 69 कितनी बार दे चुके हैं

1735
02:03:13,480 --> 02:03:18,120
हर वीडियो में हमारा नंबर है और लगभग आप

1736
02:03:18,120 --> 02:03:22,760
जिससे भी आप संपर्क करोगे सबके पास हमारा नंबर मिल जाएगा हमारे लगभग

1737
02:03:22,760 --> 02:03:27,080
इवन हमारी जो फेसबुक प्रोफाइल है वहां पर हमारा नंबर है हमारी

1738
02:03:27,080 --> 02:03:31,920
जो ये य चैनल का डिस्क्रिप्शन है इसमें आपको हमारी सारी जानकारी मिल जाएगी

1739
02:03:31,920 --> 02:03:36,320
तो आपको यदि हमसे चर्चा करनी थी कोई भी सौहार्द पूर्ण

1740
02:03:36,320 --> 02:03:40,600
व्यावहारिक चर्चा तो आपने हमसे संपर्क क्यों नहीं किया नंबर

1741
02:03:40,600 --> 02:03:44,600
से क्यों नहीं किया दूसरी बात डेली हम य लाइव कर रहे हैं क्यों नहीं

1742
02:03:44,600 --> 02:03:47,280
आ गए हम यहां पर लाइव स्ट्रीम के लिए देते हैं

1743
02:03:47,280 --> 02:03:51,440
कोई भी आदमी चला आर है कोई भी व्यक्ति जवाइन कर लेता

1744
02:03:51,440 --> 02:03:55,600
है तो आप क्यों नहीं कर लेते आपको तो चर्चा ही करनी थी हमसे क्यों नहीं की

1745
02:03:55,600 --> 02:04:00,080
दूसरी बात आदित्य वासने जी ने अगर हमारे

1746
02:04:00,080 --> 02:04:04,080
रेफरेंस से आपको कुछ कहा या नहीं कहा उन्होंने अपनी समझ से जो

1747
02:04:04,080 --> 02:04:08,120
भी कहा वहां पर तो क्या वह बिल्कुल एकदम अक्षरस बात हो गई

1748
02:04:08,120 --> 02:04:12,240
कि आवान ने य कहा है और फिर आप इस तरह से भी प्रस्तुत कर रहे हो

1749
02:04:12,240 --> 02:04:16,240
अपनी बातों को वहां पर कि भाई यह जो है आवान की ही दूसरी

1750
02:04:16,240 --> 02:04:20,480
आईडी मतलब कितने बड़े अंतर्यामी हो गए जबक चमत्कार को मानते नहीं हो

1751
02:04:20,480 --> 02:04:24,560
क्योंकि परंपरा को मानते नहीं नहीं हो आप चमत्कार को विज्ञान

1752
02:04:24,560 --> 02:04:28,640
का खंडन करते हुए उतने ही अंश में मानते हो जितने अंश में दयानंद जी

1753
02:04:28,640 --> 02:04:32,720
ने चमत्कार को मान लिया तो चमत्कार को

1754
02:04:32,720 --> 02:04:36,880
आप तो मानते नहीं हो तो जब मानते नहीं हो तो आप कैसे अपने आप को अंतर्यामी कह

1755
02:04:36,880 --> 02:04:41,080
रहे हो कि हमको जो है पता चल गया कि आदित्य वासने नाम की जो आईडी है वो आवान

1756
02:04:41,080 --> 02:04:45,480
की आईडी है बातें वो करो जो अकाट्य हो

1757
02:04:45,480 --> 02:04:49,640
कभी आना मिलना कभी-कभी बिल्कुल सारा जो भ्रम

1758
02:04:49,640 --> 02:04:54,120
है ना विज्ञान का दर्शन का अध्यात्म का

1759
02:04:54,120 --> 02:04:58,360
चकना चूर हो जाएगा व्याकरण का केवल

1760
02:04:58,360 --> 02:05:02,680
एक ही प्रश्न है ईश्वर सर्वशक्तिमान है

1761
02:05:02,680 --> 02:05:06,680
कि नहीं बस और यदि नहीं है तो

1762
02:05:06,680 --> 02:05:11,000
वह ईश्वर कैसा और यदि ईश्वर नहीं है तो माता

1763
02:05:11,000 --> 02:05:15,080
बहन और पत्नी में अंतर कैसे करते हो सर पर पांव रख

1764
02:05:15,080 --> 02:05:19,600
के भागोगे समझ रहे हो ना वैज्ञानिक

1765
02:05:19,600 --> 02:05:23,640
महोदय जो आए बड़े कोट प में सब जगह साक्षात्कार मनुवादी मिला

1766
02:05:23,640 --> 02:05:27,680
नहीं है कोई है ना मनुवादी

1767
02:05:27,680 --> 02:05:31,720
से जिस दिन सामना हो जाएगा कहीं वहां पर तुरंत अपनी चप्पल सर पर रख कर

1768
02:05:31,720 --> 02:05:35,760
के भागना पड़ेगा चप्पलों में जब हम भागते हैं तो चप्पलों से दिक्कत आती

1769
02:05:35,760 --> 02:05:39,800
है या तो स्पोर्ट शूज हो तभी आना

1770
02:05:39,800 --> 02:05:43,840
स्पोर्ट शूज पहन लो एडीडास वगैरह के तब आना वरना चप्पलों में मत आना

1771
02:05:43,840 --> 02:05:47,880
वरना चप्पल सर पर रखनी पड़ेगी भागते समय तो आदित्य जी

1772
02:05:47,880 --> 02:05:52,440
मैं आपसे पूछना चाहूंगा आपसे क्या बातें हुई इनकी वो सब चीज थोड़ा सा बताए

1773
02:05:52,440 --> 02:05:56,640
नारायण जय श्री राम मेरा यह बात

1774
02:05:56,640 --> 02:06:01,000
हुई थी कि उस समय लगभग लगभग जुलाई की बात है जूनन जुलाई की और

1775
02:06:01,000 --> 02:06:05,800
मेरे को ध्यान नहीं तो मैं पोस्ट डालता था

1776
02:06:05,800 --> 02:06:09,880
इं पर वैसे में एक्टिव कम रहता हूं जो भी हमसे परिचित है उनको

1777
02:06:09,880 --> 02:06:13,880
सबको पता होगा कि हमारा व्यापार है और बहुत विस्तृत है ऐसा नहीं है

1778
02:06:13,880 --> 02:06:17,680
कि कोई छोटा मोटा व्यापार हो तो उस चक्र में व्यस्त रहते हैं

1779
02:06:17,680 --> 02:06:21,760
तो उस समय इनका कमेंट आया करता था आवान की रील्स

1780
02:06:21,760 --> 02:06:25,880
पर और शायद हमारे पोस्टों पर कि आवाज आ रही

1781
02:06:25,880 --> 02:06:30,520
है मेरी वैसे भैया जी जी आ रही है बिल्कुल आ रही है बिल्कुल आ रही है तो इनका

1782
02:06:30,520 --> 02:06:35,160
कमेंट आया करता था कि आपसे चर्चा करने का माध्यम क्या है

1783
02:06:35,160 --> 02:06:39,480
तो उस समय हमने इनसे बात की

1784
02:06:39,480 --> 02:06:43,480
तो उस समय बात की तो उतनी बात हुई थी जो उन्होंने

1785
02:06:43,480 --> 02:06:47,640
उस पर दिखाई थी गलत तरीके से दिखाई थी उसके बाद मैं अपने कामों में लग

1786
02:06:47,640 --> 02:06:52,160
गया और मैं आज भी मैं 3040 दिन से

1787
02:06:52,160 --> 02:06:57,120
और लगभग लगभग हजारों मैसेज पेंडिंग में पड़े हैं जी

1788
02:06:57,120 --> 02:07:01,440
तो अगर इनको चर्चा करनी थी अगर इनको चर्चा करनी

1789
02:07:01,440 --> 02:07:05,480
भी थी तो दोबारा भी मैसेज कर सकते थे पर व उन्होंने नहीं

1790
02:07:05,480 --> 02:07:09,560
किया उस दिन के बाद से और उसको किस तरीके से

1791
02:07:09,560 --> 02:07:13,560
प्रस्तुत किया है वो सबने देखा मैं तो एक बात कहूंगा कि

1792
02:07:13,560 --> 02:07:17,720
आदित्य वासने जी अपनी व्यस्तता में अगर व्यस्त हो गए आदित्य

1793
02:07:17,720 --> 02:07:21,800
रसने जी आपको यथोचित उत्तर नहीं दे पाए तो आपको चर्चा

1794
02:07:21,800 --> 02:07:25,800
जब हमसे करनी है तो आदित्य वासने जी के पास जा क्यों रहे हैं हम जब

1795
02:07:25,800 --> 02:07:29,880
अपने हर वीडियो में अपना नंबर दे रहे हैं तो उसको क्यों नहीं मिला रहे कपी आती है क्या

1796
02:07:29,880 --> 02:07:33,120
आवान से भय है क्या आवान

1797
02:07:33,120 --> 02:07:37,920
जो है वह आपके सिद्धांतों को टटोल देगा क्या अंदर हलक में हाथ डाल करके

1798
02:07:37,920 --> 02:07:42,040
भय है क्या जो डायरेक्ट आवान की आवान को मैसेज

1799
02:07:42,040 --> 02:07:46,240
कहीं भी किसी प्रकार का रिस्ट्रिक्शन हमने नहीं लगा रखा तो आवान को डायरेक्ट

1800
02:07:46,240 --> 02:07:50,240
मैसेज करने में आपको कोई भय है क्या अच्छा उसके बाद इन्होंने बताया

1801
02:07:50,240 --> 02:07:54,880
कि हमने आवान को भी मैसेज किया है सबसे पहली बात वही वाली बात

1802
02:07:54,880 --> 02:07:58,960
कि भैया आपने क्या अपना थोबड़ा लगा रखा है क्या जिसको

1803
02:07:58,960 --> 02:08:03,040
लेकर के आप सारी उसमें जाते हैं चर्चाओं में उसको

1804
02:08:03,040 --> 02:08:09,040
तो आपने छुपा रखा है हमें आपसे पूछना पड़ रहा है यह

1805
02:08:11,480 --> 02:08:15,000
देखिए यह

1806
02:08:15,000 --> 02:08:19,280
देखिए यह चैट में क्या बता रहे हैं इन्होंने क्या बताया

1807
02:08:19,280 --> 02:08:23,440
कि हमने आवान से पूछने को कहा हमें कुछ बात करनी है आपसे तो हमने

1808
02:08:23,440 --> 02:08:27,600
कहा कि आपका परिचय जब हमने इनको परिचय बता दिया तो परिचय

1809
02:08:27,600 --> 02:08:31,600
का जवाब य कब दे रहे हैं थोड़ा बड़ा करिए थोड़ा

1810
02:08:31,600 --> 02:08:36,120
बड़ा करिए हां आपसे

1811
02:08:36,120 --> 02:08:40,120
बात व वार्ता करने का क्या माध्यम है तो

1812
02:08:40,120 --> 02:08:44,280
हमने पहला प्रश्न किया हम सिद्धांत वादी व्यक्ति है भैया पहले समझ लो भाषा

1813
02:08:44,280 --> 02:08:48,680
शैली आपका परिचय डायरेक्ट बहुत ज्यादा वो

1814
02:08:48,680 --> 02:08:52,680
इधर उधर की बातें नहीं करते आपका परिचय क्या है तो यह

1815
02:08:52,680 --> 02:08:56,760
बोल रहे हैं कि हमारा अब यह कब बोल रहे हैं पहली बात

1816
02:08:56,760 --> 02:09:01,560
जरा इसको डेट कितनी है जरा लिख के बता दीजिए आप

1817
02:09:01,560 --> 02:09:06,000
आप लिख के डेट बता दीजिए जब हमने इनसे पूछा है परिचय तो यह पूछा है

1818
02:09:06,000 --> 02:09:10,480
2 26 12 है कि 11 है 2612

1819
02:09:10,480 --> 02:09:14,680
2023 को उन्होंने 2:1 दोपहर में पूछा है हां

1820
02:09:14,680 --> 02:09:18,760
26 11202 को इन्होंने जो है

1821
02:09:18,760 --> 02:09:22,920
हमें मैसेज किया और हमने इनको बता दिया कि भैया हमने इनसे पूछा आपका

1822
02:09:22,920 --> 02:09:26,480
परिचय ठीक है अब इनकी स्ट्रेटेजी देखिए क्योंकि इन्हें बात

1823
02:09:26,480 --> 02:09:30,880
नहीं करनी है इनको ऐसा सामग्री एकत्रित करनी है देखो देखो

1824
02:09:30,880 --> 02:09:35,080
हमने जो है इनसे बात करने का प्रयास किया मगर यह हमसे डरते हैं तो फिर क्या हुआ

1825
02:09:35,080 --> 02:09:39,080
जी तो इन्होंने जो है इसका उत्तर कब दिया

1826
02:09:39,080 --> 02:09:43,200
है 11 कितनी जनवरी को दिया है जनवरी 2024 शाम

1827
02:09:43,200 --> 02:09:47,440
को 651 पर जब 2611 को हम इनसे इनका

1828
02:09:47,440 --> 02:09:51,680
परिचय पूछ रहे हैं तो ये 18 जनवरी को उत्तर

1829
02:09:51,680 --> 02:09:55,680
दे रहे हैं कि हमारा परिचय क्या है सोचिए और हम इनको लेकर

1830
02:09:55,680 --> 02:10:00,160
के कॉन्शियस हो जाए बहुत बहुत अच्छे तरीके से

1831
02:10:00,160 --> 02:10:04,280
क्योंकि इनका जो फेस है वो इतना चमकता हुआ है जो हमारे सपनों

1832
02:10:04,280 --> 02:10:08,480
में भी आता है कि भैया दर्शन जी का दर्शन प्राप्त

1833
02:10:08,480 --> 02:10:12,520
करना है ना इनकी प्रोफाइल में भले

1834
02:10:12,520 --> 02:10:16,520
ही इन्होंने कुछ भी और लगा रखा हो मगर हम इनको पहचान ले और हम

1835
02:10:16,520 --> 02:10:20,600
दिन और रात इनके सपने देखते रहे कि भैया उनका मैसेज क्यों नहीं आया क्यों नहीं आया

1836
02:10:20,600 --> 02:10:25,040
क्यों नहीं आया और जब मैसेज ना आए तो हम इंतजार

1837
02:10:25,040 --> 02:10:29,320
करते रहे और जब य अपने यथावत रूप से जब मैसेज दे कभी भी

1838
02:10:29,320 --> 02:10:33,520
तो हम उसको देख कर के फिर दोबारा से पुनः सक्रिय हो जाए

1839
02:10:33,520 --> 02:10:37,520
तो इन्होंने 18 जनवरी को क्या मैसेज किया कि जी मेरा

1840
02:10:37,520 --> 02:10:43,520
परिचय तो मेरा पेज है

1841
02:10:44,080 --> 02:10:48,080
26 से 261203 से इनका अगला

1842
02:10:48,080 --> 02:10:52,160
मैसेज आया परिचय देने वाला 181 2024

1843
02:10:52,160 --> 02:10:56,800
सोचिए इतना दिन क्यों लग गया इनको परिचय बताने में मुंह काला था

1844
02:10:56,800 --> 02:11:00,960
क्या भाई जब व्यक्ति इस तरह की बातें कर रहा है तो उससे

1845
02:11:00,960 --> 02:11:05,520
पूछना पड़ेगा कि आपको अपना परिचय बताने में जब आप हमसे बात करने आए हो

1846
02:11:05,520 --> 02:11:09,600
तो ये 18 और चार 22 दिन का समय लग गया आपको

1847
02:11:09,600 --> 02:11:13,640
अपने बारे में जानने के लिए कि मैं कौन हूं मैं किसकी संतान हूं मैं क्या हूं क्या नहीं

1848
02:11:13,640 --> 02:11:17,680
हूं और फिर हम पर आरोप लगा रहे हैं कि आप हमारे जो

1849
02:11:17,680 --> 02:11:21,880
मैसेजेस है वो देखकर भी आपने हमको टाइम समय नहीं दिया हमें भय हमें

1850
02:11:21,880 --> 02:11:26,560
भय नहीं है क्योंकि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता

1851
02:11:26,560 --> 02:11:31,160
हमें जी ये ध्यान रखना हमें भय नहीं

1852
02:11:31,160 --> 02:11:35,440
है सीने पर गोली खाएंगे सीने

1853
02:11:35,440 --> 02:11:39,520
पर ऐसा वैसा ना समझो भाई वोह आपका दर्शन

1854
02:11:39,520 --> 02:11:43,680
आपका विज्ञान रखो वहीं तक जहां तक आपको

1855
02:11:43,680 --> 02:11:48,200
वो अंधों में काना राजा बना करके घुमाया जा रहा है जब तक दूर हो तब तक दूर हो

1856
02:11:48,200 --> 02:11:52,320
सामना जिस दिन होगा प्रत्यक्ष वार्ता होगी दृश्य बदल जाएगा उसके बाद देखिए इन्होंने

1857
02:11:52,320 --> 02:11:57,360
क्या किया लाइए दोबारा जरा

1858
02:11:57,360 --> 02:12:01,600
चित्र 10 15 दिन तक इष्ट मित्रों से चर्चा कर लिए क्या परिचय

1859
02:12:01,600 --> 02:12:06,080
बताया जाए बिल्कुल हां

1860
02:12:06,080 --> 02:12:10,960
इन्होंने यही यही चर्चा की होगी 22 दिनों तक कि क्या परिचय बताना है भाई

1861
02:12:10,960 --> 02:12:15,280
अपना तो वो भी इन्होंने देखिए क्या बताया है उस समय कि मेरा

1862
02:12:15,280 --> 02:12:19,360
परिचय तो मेरा पेज है तब भी इनको ढांड से नहीं बना

1863
02:12:19,360 --> 02:12:23,360
कि अपने बारे में खुल के बोल पाए मैं बोलता हूं खुल के मेरा नाम

1864
02:12:23,360 --> 02:12:27,760
शिवांश नारायण द्विवेदी श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य

1865
02:12:27,760 --> 02:12:31,880
पूरी पीठाधीश्वर जी का अल्पज्ञ शिष्य और प्रभु श्री राम

1866
02:12:31,880 --> 02:12:36,400
का साधारण भक्त यह है मेरा परिचय तुम्हारा परिचय क्या

1867
02:12:36,400 --> 02:12:40,400
है अपना परिचय बनाने बताने में लज्जा आती है और

1868
02:12:40,400 --> 02:12:44,600
दूसरों पर आक्षेप करने चलते हो अब देखिए उसके बाद इनका

1869
02:12:44,600 --> 02:12:48,720
मैसेज आ गया अब इनका जो मैसेज है इन्होंने

1870
02:12:48,720 --> 02:12:52,960
कहा हमारा परिचय तो इतना और से मैंने खोल के देख लिया किसी का मैसेज

1871
02:12:52,960 --> 02:12:57,240
पड़ा है हमारा परिचय तो इतना अब इनका परिचय जानने के लिए हम इनका पेज सर्च करें

1872
02:12:57,240 --> 02:13:01,280
तो भाई आपको लगता है कि आपके पास यही कार्य है लोगों के चैट में जाकर के

1873
02:13:01,280 --> 02:13:05,480
चैटिंग करना हमारे पास नहीं है

1874
02:13:05,480 --> 02:13:09,560
कि पहले आपका परिचय पूछे उसके बाद एक महीने बाद जब आप उत्तर

1875
02:13:09,560 --> 02:13:12,640
दो फिर उस पर तुरंत सक्रिय हो जाए आपका जाकर के चैनल

1876
02:13:12,640 --> 02:13:15,360
हम चेक करने

1877
02:13:15,360 --> 02:13:19,520
लगे अजीब बात है और जब हमने यहां पर इनको कोई प्रतिक्रिया

1878
02:13:19,520 --> 02:13:23,640
नहीं दी इसके उत्तर में तो इन्होने चवा उड़ा दिया देखो देखो आवान हमसे चर्चा

1879
02:13:23,640 --> 02:13:27,680
करने से डरता है आ जाओ भैया एनी टाइम

1880
02:13:27,680 --> 02:13:31,880
एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी अगर

1881
02:13:31,880 --> 02:13:36,000
इनको चर्चा के लिए तत्परता दिखानी ही थी और इनको करनी ही थी हर

1882
02:13:36,000 --> 02:13:40,360
हाल में तो रोज तो लिंक देते हैं ना लाइव चैट

1883
02:13:40,360 --> 02:13:44,680
में सुन रहे हो भया दन मोबाइल नंबर

1884
02:13:44,680 --> 02:13:48,720
दे रखा है और इन लोग का झुंड ही यही करता है कि जो भी व्यक्ति हमारा

1885
02:13:48,720 --> 02:13:52,800
खंडन करे उसको चैट में परेशान करो ताकि कुछ उल्टा पुल्टा कभी फ्रस्ट्रेट

1886
02:13:52,800 --> 02:13:57,040
होकर बोल दे तो उसका क्लिप ले जाकर य पर डालो और वही

1887
02:13:57,040 --> 02:14:01,240
कल करना चाह रहे थे जी आपको बस समय दे रहा हूं बस एक बहुत फैक्ट

1888
02:14:01,240 --> 02:14:05,480
फुल बात है वह मैं आपसे कह रहा हूं पहली बात तो यह है कि जो लोग यह सोचते

1889
02:14:05,480 --> 02:14:09,480
हैं कि हम चर्चा से भाग रहे हैं उनको पता है अपनी आत्मा में

1890
02:14:09,480 --> 02:14:13,920
कि आवान भागता है कि नहीं भागता हा जो

1891
02:14:13,920 --> 02:14:18,120
अमर्यादित आचरण वाला है जो समय

1892
02:14:18,120 --> 02:14:22,360
आने पर अपनी माता का भी व्यवसाय बना दे जो समय आने

1893
02:14:22,360 --> 02:14:26,560
पर अपने पिता को भी उसकी जो मर्यादा उसको भंग

1894
02:14:26,560 --> 02:14:27,920
कर दे ऐसे किसी व्यक्ति

1895
02:14:27,920 --> 02:14:32,120
के साथ हम चर्चा में नहीं बैठेंगे ठीक है मगर

1896
02:14:32,120 --> 02:14:36,400
यदि कोई संभ्रांत रह गया है अभी भी अलंकार समाज

1897
02:14:36,400 --> 02:14:41,000
में होते हुए भी तो उसके लिए हमने कहा एनी टाइम

1898
02:14:41,000 --> 02:14:46,080
एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी

1899
02:14:46,080 --> 02:14:50,360
ठीक है आई एम रेडी तो मैं अभी

1900
02:14:50,360 --> 02:14:54,360
एक बात बता रहा अगर उत्तर ना देने से यह सिद्ध हो जाता है

1901
02:14:54,360 --> 02:14:59,120
कि सामने वाला आपसे भय खा रहा है मान लिया ओए मान लिया मान लिया

1902
02:14:59,120 --> 02:15:03,360
अब दिखाओ भैया इनके गौतम खट्टर जी के साथ हमारी वो चैट

1903
02:15:03,360 --> 02:15:08,000
दिखाओ दिखाओ खोलो

1904
02:15:08,000 --> 02:15:12,360
चैट आप ही कह रहे हो ना कि यदि चैट का उत्तर

1905
02:15:12,360 --> 02:15:16,480
नहीं देगा व्यक्ति तो वह जो है भगोड़ा माना जाएगा डरपोक माना

1906
02:15:16,480 --> 02:15:20,640
जाएगा वो जो है भय खाने वाला माना जाएगा हम नहीं कह रहे तो हमारी

1907
02:15:20,640 --> 02:15:25,160
चैट जरा खोलिए ा वाली और

1908
02:15:25,160 --> 02:15:29,440
उसमें वो चैट इनको दिखाइए कि गौतम अगर नहीं है तो थोड़ा विलंब

1909
02:15:29,440 --> 02:15:33,600
होगा मैं अभी थोड़ी देर बाद दिखा दूंगा तब तक हम आद गौतम खट्टर

1910
02:15:33,600 --> 02:15:37,880
जी का हमारे पास जब हमने हलचल कर दी थी नाय परंपरा वाली अचानक

1911
02:15:37,880 --> 02:15:41,880
से हुआ था अपना वो कि भाई परंपरा क्या है आपकी तो जब वोह

1912
02:15:41,880 --> 02:15:45,960
हलचल हुई थी तो गौतम खट्टर जी भी हमारी बात पहुंची

1913
02:15:45,960 --> 02:15:50,200
होगी तो वो खट्टर जी हमको मैसेज करते हैं जो उनका

1914
02:15:50,200 --> 02:15:54,720
जो तरी का है मैसेज करने का वही प्रणव और नमस्ते

1915
02:15:54,720 --> 02:15:59,640
ये उन्होंने हमको भेजा हमने इधर से भेजा आज तक कोई उत्तर नहीं

1916
02:15:59,640 --> 02:16:03,680
आया हमने य सोचा भाई व्यस्त व्यक्ति है इतने सारे फॉलोअर्स है नहीं देख

1917
02:16:03,680 --> 02:16:07,680
पाए होंगे हमने तो य आक्षेप नहीं लगा दिया अपने वीडियोस में उठा कर के कि भैया

1918
02:16:07,680 --> 02:16:11,880
देखो देखो यह अलंकार समाजी समाजी हमसे भय खाते हैं

1919
02:16:11,880 --> 02:16:16,280
क्या तुम्हारे सिद्धांत है तुम करोगे परंपरा चार परंपरा प्राप्त आचार्यों

1920
02:16:16,280 --> 02:16:20,400
की वो समीक्षा दूर ही दूर से

1921
02:16:20,400 --> 02:16:23,200
सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते

1922
02:16:23,200 --> 02:16:28,000
दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते हैं ठीक

1923
02:16:28,000 --> 02:16:32,280
है वहीं तक सीमित रहो जहां तक आपकी बवाई हो रही ववा ववा

1924
02:16:32,280 --> 02:16:36,400
क्या शेर मारा हम मारने तो दो वही वाली

1925
02:16:36,400 --> 02:16:40,680
बात है अपने ही लोगों को एकत्रित कर लो उसमें जो है

1926
02:16:40,680 --> 02:16:44,840
अर्ज किया है और अर्ज किया है वैसे ही आपके जो वो हैं

1927
02:16:44,840 --> 02:16:48,880
प्रशंसक चापलूस वो चिल्लाने लगे वाह वाह वाह वाह तो आप ही

1928
02:16:48,880 --> 02:16:53,480
को कहना पड़ेगा भाई रुक जाओ शेर कहने तो

1929
02:16:53,480 --> 02:16:59,480
दो हां ये देख लीजिए भैया बड़ा कर

1930
02:17:02,280 --> 02:17:06,280
दीजिए यह चैट है खट्टर

1931
02:17:06,280 --> 02:17:09,720
जी की

1932
02:17:09,720 --> 02:17:13,960
और इन्होंने हमको अभिवादन

1933
02:17:13,960 --> 02:17:17,960
किया जी है ना और हमने इनको जय

1934
02:17:17,960 --> 02:17:22,480
श्री राम बोला और नीचे क्या लिखा है

1935
02:17:22,480 --> 02:17:26,480
और आज तक इनका पल अच्छा यह भी बात है हम इनके पास नहीं गए हैं यह

1936
02:17:26,480 --> 02:17:30,560
भी सोचने वाली जब सामने से यदि आपका कहना यह है कि सामने

1937
02:17:30,560 --> 02:17:34,560
वाला व्यक्ति सीन करने के बाद अलग हो जाता है

1938
02:17:34,560 --> 02:17:38,680
और जवाब नहीं देता और तो वो हारा हुआ माना जाएगा भय भीन

1939
02:17:38,680 --> 02:17:42,840
माना जाएगा तो फिर यहां पर तो य इस जो हमारा केस है उसमें

1940
02:17:42,840 --> 02:17:46,880
तो आप हमारे पास आए हैं इस केस में तो यह हमारे पास

1941
02:17:46,880 --> 02:17:51,040
आए तब उत्तर नहीं दे रहे हैं तो क्या करें कहोगे इ भगोड़ा

1942
02:17:51,040 --> 02:17:55,200
य वही अपना दोगलापन निभाओगे य भी कि हम जो यथा सामर्थ

1943
02:17:55,200 --> 02:17:59,320
अपने दोगले पन का निर्वाह करेंगे यथा सामर्थ धर्म का नहीं लेपन का निर्वाह

1944
02:17:59,320 --> 02:18:03,640
करेंगे और स्वयं को वैदिक घोषित करेंगे और वस्तुत

1945
02:18:03,640 --> 02:18:07,040
हम कौन

1946
02:18:07,040 --> 02:18:11,040
है तो हम खट्टर जी का यहां कोई विरोध नहीं कर रहे भाई ठीक है उनके

1947
02:18:11,040 --> 02:18:15,280
फॉलोअर्स है इतने सारे मिलियंस के आसपास फॉलोअर्स है कितनों

1948
02:18:15,280 --> 02:18:21,280
को समय दे पाएंगे मुझे किया होगा उन्होंने उसके बाद नहीं कर पाए

1949
02:18:21,960 --> 02:18:26,680
अ हम य क्या कको भगोड़ा भगोड़ा चिल्लाने लगे कल थंबनेल बना दे गौतम खट्टर

1950
02:18:26,680 --> 02:18:30,720
भगोड़ा आप लोग पहले बनाओ आपका तो सिद्धांत है जो

1951
02:18:30,720 --> 02:18:34,840
जवाब ना दे व भगोड़ा है व भय खाने वाला है तो बनाओ और

1952
02:18:34,840 --> 02:18:39,080
नहीं तो घोषित करो स्वयं को मोहर लगाओ मैं मोर

1953
02:18:39,080 --> 02:18:43,840
बनवा के दे दूंगा अगर आपको ना मिले तो गुलो

1954
02:18:43,840 --> 02:18:47,280
मैं दोगला

1955
02:18:47,280 --> 02:18:51,160
हूं डोला दर्शन

1956
02:18:51,160 --> 02:18:55,960
और स्वार्थ पूर्ण चर्चा करनी हो तो आ जाना बता दिया है नंबर

1957
02:18:55,960 --> 02:19:01,040
है आईडी है आपकी जो आईडी है उसमें आपका फेस नहीं लगाया

1958
02:19:01,040 --> 02:19:05,400
कहीं बहुत से लोग संपर्क करते हैं डेली सबको

1959
02:19:05,400 --> 02:19:10,120
यथोचित उत्तर दे पाना उतना सरल नहीं है

1960
02:19:10,120 --> 02:19:14,360
और वह भी तब जब व्यक्ति केवल चैट तक सीमित

1961
02:19:14,360 --> 02:19:18,640
ना हो नवो मार्ग तक सीमित ना हो धरातल पर भी सीमित

1962
02:19:18,640 --> 02:19:22,920
हो धर्म के दुश्मन रा धरती पर भी है ना उनको भी उठा उठा के पटकना

1963
02:19:22,920 --> 02:19:27,320
पड़ता है ठीक है

1964
02:19:27,320 --> 02:19:32,160
तो यह हो गया अच्छा इसकी एक बात और देखी मैंने

1965
02:19:32,160 --> 02:19:36,760
ये दर्शन की यह जब अपने साक्षात्कार

1966
02:19:36,760 --> 02:19:41,040
में जा रहा है तो करपात्री जी की समीक्षा कर रहा है बैठ कर के

1967
02:19:41,040 --> 02:19:45,280
और सोचिए किनके सामने कर रहा है इस निर्लज को लज्जा

1968
02:19:45,280 --> 02:19:51,280
नहीं आई नास्तिकों के सामने सोचिए

1969
02:19:51,320 --> 02:19:55,880
वो करपात्री जी वो करपात्री जी वो

1970
02:19:55,880 --> 02:20:00,200
शंक वो शंकराचार्य जो जब भाई

1971
02:20:00,200 --> 02:20:02,400
हमारी जब लड़ाई जब विधर्मी से है तो हम सब

1972
02:20:02,400 --> 02:20:06,440
एक है का संदेश देते हैं वह नास्तिकों के समक्ष

1973
02:20:06,440 --> 02:20:10,480
करपात्री जी की समीक्षा कर रहा है उनके सिद्धांतों का

1974
02:20:10,480 --> 02:20:14,880
खंडन करना खंडन कर नहीं पाओगे अभी अकेले में बैठे हो

1975
02:20:14,880 --> 02:20:19,240
मैं फिर बता रहा हूं प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो भ्रम

1976
02:20:19,240 --> 02:20:25,240
टूट जाएगा चकरा हो जाएगा फिर बता रहा

1977
02:20:25,440 --> 02:20:29,840
हूं हम अपने जो सिद्धांत है ना उनके लिए प्राण

1978
02:20:29,840 --> 02:20:34,000
ऐसे ही नहीं दे सकते हमें संशय नहीं है उन सिद्धांतों

1979
02:20:34,000 --> 02:20:40,000
पर इसलिए हम अड़ बड़ के आगे आ जाते

1980
02:20:41,400 --> 02:20:45,480
हैं अच्छा एक बात बताओ यह साइंस की बातें कर रहा है

1981
02:20:45,480 --> 02:20:49,640
यह वहां जाकर के नास्तिकों के सामने वो एक और दोगला चैनल

1982
02:20:49,640 --> 02:20:54,120
है क्वेस्ट क्वेस्ट करके क्या नाम है उसका हाइपर

1983
02:20:54,120 --> 02:20:58,360
है के क्वेस्ट है पता नहीं हाला चैनल है उस चैनल पर जाकर

1984
02:20:58,360 --> 02:21:02,440
के और जो है यह जो है यह व्यक्ति दर्शन नाम का और जो है

1985
02:21:02,440 --> 02:21:06,760
एक नास्तिक अधर्मी व्यक्ति के समक्ष जो है और कपाती

1986
02:21:06,760 --> 02:21:12,760
जैसे महापुरुष का समीक्षा कर रहे हैं खंडन कर रहे

1987
02:21:13,120 --> 02:21:17,200
हैं और यह बताओ तुमने अपनी जो

1988
02:21:17,200 --> 02:21:21,200
प्रकाश फैलाते हो जिसका ईश्वर बाधित है उसकी समीक्षा

1989
02:21:21,200 --> 02:21:25,280
कर ली तुमने उसी नास्तिक के सामने

1990
02:21:25,280 --> 02:21:29,720
ढेले भर नहीं करो समीक्षा

1991
02:21:29,720 --> 02:21:33,720
बहुत सी चीज ऐसा नहीं है कि उसने चमत्कार

1992
02:21:33,720 --> 02:21:37,960
को नहीं माना है क्योंकि चमत्कार को माने बिना ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध

1993
02:21:37,960 --> 02:21:42,000
नहीं कर पाओगे कहीं ना कहीं से तो विस्फोट होगा ही

1994
02:21:42,000 --> 02:21:47,200
सृष्टि रचना का चमत्कार तभी ईश्वर की सिद्धि

1995
02:21:47,200 --> 02:21:51,360
होगी समझ गए बाबू जी ब फर्क सिर्फ

1996
02:21:51,360 --> 02:21:55,400
इतना है कि हम उतना चमत्कार मानेंगे जितना हमें समझ में आ जाए जितना हम मानते

1997
02:21:55,400 --> 02:21:56,640
हैं

1998
02:21:56,640 --> 02:22:01,040
बस हमारा चमत्कार चमत्कार दूसरे का चमत्कार अवेल

1999
02:22:01,040 --> 02:22:06,920
करने योग्य यह है

2000
02:22:06,920 --> 02:22:11,280
तो नास्तिक व्यक्ति के सामने करपाती जी का

2001
02:22:11,280 --> 02:22:15,360
समीक्षा कर रहे हैं और यह वही

2002
02:22:15,360 --> 02:22:19,680
कम्युनिस्ट है जो आपके वो जो कौन है वैज्ञानिक

2003
02:22:19,680 --> 02:22:24,600
कहे जाते हैं जिनका का वैदिक फिजिक्स नाम से पेज है चैनल है

2004
02:22:24,600 --> 02:22:28,680
ये वही कम्युनिस्ट व्यक्ति है जो उनका मजाक उड़ाते हैं

2005
02:22:28,680 --> 02:22:32,720
जो उल्टी सीधी बातें करते हैं

2006
02:22:32,720 --> 02:22:36,720
हनुमान जी आपका इनका एक पक्ष ऐसा भी है जो हनुमान जी उड़ते

2007
02:22:36,720 --> 02:22:40,800
थे ये भी मानता है उसमें वैचारिक वो है फिर मतभेद इसको

2008
02:22:40,800 --> 02:22:45,240
लेकर मैं आगे बात करूंगा मगर इसने अपने इंटरव्यू

2009
02:22:45,240 --> 02:22:49,680
में इस हल्के व्यक्ति ने हल्का मतलब जो जिसके सिद्धांत हल्के हो डगला

2010
02:22:49,680 --> 02:22:53,920
है ना तो इस हल्के व्यक्ति ने क्या किया वहां पर अच्छा

2011
02:22:53,920 --> 02:22:57,920
इसका एक और है मैंने इसकी एक बात जानी है कि इससे किसी ने अभी शिकायत की इसके

2012
02:22:57,920 --> 02:23:02,480
घर पर कि भाई जहां पर इस तरह से किसी के घर की

2013
02:23:02,480 --> 02:23:06,520
स्त्रियों का बाहर उनका चित्र दिखाया जा रहा है यह वहीं पर बैठा

2014
02:23:06,520 --> 02:23:11,000
है यह खंडन नहीं कर रहा है तोय तो उसके पिताजी वहां बोल रहे

2015
02:23:11,000 --> 02:23:12,000
हैं

2016
02:23:12,000 --> 02:23:16,080
इस लड़के के पिताजी बोल रहे हैं कि इसने थोड़ी ना प्रदर्शित किया

2017
02:23:16,080 --> 02:23:20,520
है भाई मनुस्मृति का वचन है मोन

2018
02:23:20,520 --> 02:23:24,680
रहने से अच्छा होता है सत्य बोलना यदि वो खंडन योग्य कार्य

2019
02:23:24,680 --> 02:23:28,840
था तो तुमने खंडन क्यों नहीं किया तुम तो बहुत बड़ी ध धर्म की ध्वजा

2020
02:23:28,840 --> 02:23:32,920
लेकर चल रहे हो ना क्यों नहीं खंडन कर दिया कि ये मत

2021
02:23:32,920 --> 02:23:36,920
करो दूसरी बातें करो उनके घर की मातृ शक्तियों का प्रदर्शन

2022
02:23:36,920 --> 02:23:40,000
यहां मत

2023
02:23:40,000 --> 02:23:44,120
करो दोगले कहीं के धर्म को

2024
02:23:44,120 --> 02:23:48,120
धारण करने वाले बनते हो हैं वहां पूछा जा रहा है

2025
02:23:48,120 --> 02:23:52,720
उत्तरकांड के बारे में उत्तरकांड तो प्रक्षिप्त है क्यों क्योंकि हम आर्य समाजी है

2026
02:23:52,720 --> 02:23:56,840
अच्छा अच्छा उत्तरकांड और क्यों क्य प्रक्षिप्त है क्योंकि हम आर्य

2027
02:23:56,840 --> 02:24:00,960
समाजी आर्य समाज को सपोर्ट किससे मिला है राम भद्राचार्य से क्योंकि वो परंपरा प्राप्त

2028
02:24:00,960 --> 02:24:05,080
है और राम भद्राचार्य जी गलत है क्योंकि वो आर समाज

2029
02:24:05,080 --> 02:24:09,240
का विरोध करते हैं मूर्ति पूजा का समर्थन करते हैं और हम आर

2030
02:24:09,240 --> 02:24:13,360
समाज का विरोध करते हैं क्योंकि आर समाज कई जगह पर ऐसी बातें करता है जो हम उसकी

2031
02:24:13,360 --> 02:24:17,600
भी नहीं मानते मैं आर समाजी नहीं हूं मैं राम भद्राचार्य को मानने वाला नहीं हूं

2032
02:24:17,600 --> 02:24:21,800
मैं परंपरा प्राप्त को मानने वाला नहीं हूं मैं जो है जो सनातन धर्म

2033
02:24:21,800 --> 02:24:25,880
ग्रंथ है जब परंपरा को नहीं माना तो धर्म ग्रंथों को नहीं माना आर समाज को नहीं माना मैं

2034
02:24:25,880 --> 02:24:27,120
किसी को मानने वाला नहीं हूं

2035
02:24:27,120 --> 02:24:31,640
मगर मैं हिंदू का बहुत बड़ा योद्धा हूं मैं हिंदुओं की रक्षा करने जन्मा हूं

2036
02:24:31,640 --> 02:24:35,680
मैं हिंदू धर्म को कितना मानता हूं बिल्कुल नहीं मेरे अंदर हिंदुओं के कितने

2037
02:24:35,680 --> 02:24:39,960
संस्कार है बिल्कुल नहीं मगर मैं हिंदुओं का रक्षक हूं

2038
02:24:39,960 --> 02:24:44,280
मैं ना राम भद्राचार्य को मानता हूं ना मैं आर्य समाज को मानता हूं और मैं नास्तिकों

2039
02:24:44,280 --> 02:24:48,560
के सामने जो है अपने जो पूर्व के आचार्य है भले ही वो आपके

2040
02:24:48,560 --> 02:24:52,760
विचार आपके विचारों को मानने वाले हो या ना हो मगर ईश्वर की सत्ता को स्वीकार

2041
02:24:52,760 --> 02:24:57,080
करने वाले तो है वेदों में परमाण बुद्धि रखने वाले तो हैं

2042
02:24:57,080 --> 02:25:01,120
मगर मैं उनकी समीक्षा कर दूंगा नास्तिकों के सामने क्योंकि मुझे

2043
02:25:01,120 --> 02:25:05,520
अपने आप को प्रचार प्रसार की वस्तु सामग्री बनाना है मुझे बिकना है

2044
02:25:05,520 --> 02:25:09,520
मार्केट में मुझे अपने आप को बेचना है मेरी बोली

2045
02:25:09,520 --> 02:25:14,480
लगनी है इंटरव्यू पर जाने कर जाने की इसलिए

2046
02:25:14,480 --> 02:25:16,720
मैं

2047
02:25:16,720 --> 02:25:21,480
बोलूंगा समय आने पर मैं कुछ भी कर दूंगा व्यापार

2048
02:25:21,480 --> 02:25:25,600
व्यापार की सामग्री बना दूंगा अपनी ग्रहस्ती को भी ऐसे लोग हैं ऐसे ही लोग

2049
02:25:25,600 --> 02:25:30,320
होते दोगले जो अपने माता-पिता को भी

2050
02:25:30,320 --> 02:25:36,320
व्यापार की सामग्री बना

2051
02:25:37,080 --> 02:25:42,600
दे

2052
02:25:42,600 --> 02:25:47,680
चलिए ठीक है आगे ब आगे मैं

2053
02:25:47,680 --> 02:25:52,200
अब मैं आदित्य जी से कहूंगा वो बोले जी पंकज जी मैं

2054
02:25:52,200 --> 02:25:57,280
लूंगा आदित्य जी

2055
02:25:57,280 --> 02:26:02,520
जो आदित्य

2056
02:26:02,520 --> 02:26:06,720
नारायण ऐसा है कि अगर सत्यार्थ प्रकाश

2057
02:26:06,720 --> 02:26:11,040
के अंदर भी कई चीज ऐसे मिले जो य डिफेंड ना कर पाए तो स्पष्ट कहते

2058
02:26:11,040 --> 02:26:15,200
देखिए हम इसको मानने के लिए बाध्य नहीं है य अनुते सा

2059
02:26:15,200 --> 02:26:19,840
धर्म वेद नेत एक रटा हुआ लाइन है

2060
02:26:19,840 --> 02:26:25,120
जो तर्क प फिट बैठेगा वो हम मानेंगे बाकी नहीं मानेंगे

2061
02:26:25,120 --> 02:26:29,160
और एक महाभारत की इनके यहां व्याख्या करने वाले हुए थे

2062
02:26:29,160 --> 02:26:33,280
जगदीश्वरानंद जी उन्होंने तो खूब चमत्कार माने हैं कि स्वामी जी

2063
02:26:33,280 --> 02:26:37,720
हवा में ऊपर उड़ते थे हनुमान जी भले ना उड़ पाए तो आपने कहा दो संप्रदाय

2064
02:26:37,720 --> 02:26:41,880
है इनके अंदर एक हनुमान जी को उड़ा हुआ मानता है एक टैर के जाने वाला

2065
02:26:41,880 --> 02:26:46,080
मानता है और एक मानता है कि आसपास जो है कोकोनट के वृक्षों से नाव

2066
02:26:46,080 --> 02:26:50,400
बना के गए थे तीन पक्ष हैं और तीनों में आपस ही बहुत बड़ा मतभेद है

2067
02:26:50,400 --> 02:26:52,360
सामने दिखाते नहीं है लोग

2068
02:26:52,360 --> 02:26:56,360
हां पहले थ बहुत ज्यादा मत भेद जब से जो आप आए हैं स्ट्रीम करने

2069
02:26:56,360 --> 02:27:00,520
लग गए हैं तो हनुमान जी जा जैसे उड़े हो आवान का खंडन करो

2070
02:27:00,520 --> 02:27:04,200
अभी य सिस्टम चल रहा है वर्तमान

2071
02:27:04,200 --> 02:27:09,040
में जो यह कहते हैं तक तर्क से ही मानूंगा

2072
02:27:09,040 --> 02:27:13,360
तो इन्हीं के कुछ लोग प्रचार बताते हम भी मानते हैं

2073
02:27:13,360 --> 02:27:17,400
कि शास्त्रों के विरोध में श्रुति के विरोध में व्यक्तिगत

2074
02:27:17,400 --> 02:27:20,880
तर्क भी अमान्य है

2075
02:27:20,880 --> 02:27:25,200
इन्हीं के कुछ लोग बताते हैं और हम भी मानते हैं उन चीजों को

2076
02:27:25,200 --> 02:27:29,240
दो एक 11 संभवत ब्रह्म सूत्र में कहा यह बात व्यास

2077
02:27:29,240 --> 02:27:33,720
जी ने तो शति के विरोध में

2078
02:27:33,720 --> 02:27:37,880
तर्क भी अमान्य अगर वो शति के विरोध में आप व्यक्तिगत तर्क दे रहे हो तो

2079
02:27:37,880 --> 02:27:41,280
अमान्य कर दो

2080
02:27:41,280 --> 02:27:45,560
खंडन तो भाई और मैं उनकी स्ट्रीम

2081
02:27:45,560 --> 02:27:49,680
को पूरा नहीं देखा था कुछ अंश बीच बीच मैं देखता था आधा इस स्ट्रीम को देखता था

2082
02:27:49,680 --> 02:27:53,680
आ को देखता था जो बिंदु मैंने सुना एक जो बात है

2083
02:27:53,680 --> 02:27:58,280
कि ब्राह्मण उचित कर्म से ही जी जीव को पार्जन करना

2084
02:27:58,280 --> 02:28:02,440
ये परंपरा व है तो हमारी परंपरा के अंदर जब हम महा

2085
02:28:02,440 --> 02:28:06,480
निर्माण तंत्र का अनुशीलन करते हैं तो कलयुग में जो स्थिति

2086
02:28:06,480 --> 02:28:07,520
और आपत्ति काल आएगी

2087
02:28:07,520 --> 02:28:12,280
इसका उपदेश स्वयं माता पार्वती ने दिया है और

2088
02:28:12,280 --> 02:28:16,280
आठवे से दसवी उल्लास के अंदर उसके अंदर उल्लास है जब हम वर्ण

2089
02:28:16,280 --> 02:28:20,600
धर्म का अनुशीलन करेंगे तो वहां हमें ये ज्ञात होता है कि माता पार्वती

2090
02:28:20,600 --> 02:28:24,880
कहती है कि आपत्ति काल में जो ब्राह्मण है वो कलयुग में यदि प्रथम

2091
02:28:24,880 --> 02:28:28,960
वर्ण के जो कर्म है उसको ना कर पावे तो अन्य वर्णों के कर्म का भी आश्रय लेकर

2092
02:28:28,960 --> 02:28:33,120
के जीव को उपार्जन कर सकता है यह तो हमारे परंपरा में ही आदेश है

2093
02:28:33,120 --> 02:28:37,520
निर्माण तंत्र आर्काइव इंटरनेट पर अवेलेबल है कोई भी जाकर पढ़ सकता है

2094
02:28:37,520 --> 02:28:41,840
हमारी परंपरा में तंत्र मान है अब आप उसको ना मानो

2095
02:28:41,840 --> 02:28:46,560
पंडो ने लिख दिया है तो मानते रहिए आप

2096
02:28:46,560 --> 02:28:50,680
ये लोग वैसे कहते हैं हम आचार्यों का वो करते हैं भाषा देखी

2097
02:28:50,680 --> 02:28:54,800
है कभी वीडियो में जिसको अपने साथ बिठाए हो वो अंडर कवर्ड गुंडे

2098
02:28:54,800 --> 02:28:58,840
को भाषा देखी है पंडे पंडे पोप ये

2099
02:28:58,840 --> 02:29:02,920
भाषा है उसकी वो कन भी नहीं है जिसके साथ बैठ कर

2100
02:29:02,920 --> 02:29:07,040
के मंच साझा कर रहे हो वो कन्या भी तो कल फोटो रे माता पिता

2101
02:29:07,040 --> 02:29:11,080
से वो ऐसे ही बोलेगा ना उस दिन आपका जो वो है ना आत्मा वो

2102
02:29:11,080 --> 02:29:16,920
झग जोरे

2103
02:29:16,920 --> 02:29:20,960
गी इनके बीच में एक महानुभाव और थे

2104
02:29:20,960 --> 02:29:25,120
वो जो ऐसे ऐसे करके वीडियोस बनाते हैं घूम घूम

2105
02:29:25,120 --> 02:29:29,320
के झूम झूम के हास्यप्रद मुद्राओं में और धर्म की शिक्षा देने का दावा

2106
02:29:29,320 --> 02:29:33,840
करते हैं और समय पड़ जाए तो तुरंत सेंटीमेंटल खेलने लगते हैं

2107
02:29:33,840 --> 02:29:37,920
शूद्र चमार इत्यादि वोह कहते हैं कि मैं जो

2108
02:29:37,920 --> 02:29:42,320
है हिंदी में अगर उनका अर्थ किया जाए उनके पेजस का तो कहेंगे

2109
02:29:42,320 --> 02:29:46,360
कि वो वास्तविक और

2110
02:29:46,360 --> 02:29:50,520
उद्देश्य वास्तविक भाव है ना

2111
02:29:50,520 --> 02:29:53,240
वास्तविक

2112
02:29:53,240 --> 02:29:57,720
अभिप्राय तो वह आए थे वह हमको ज्ञान देते हैं भैया

2113
02:29:57,720 --> 02:30:02,200
कि भैया आपस में मत लड़ो आप भा हम भी तो वही कह रहे हैं भाई

2114
02:30:02,200 --> 02:30:06,240
हम कह रहे हैं य बात कि भाई अगर आप

2115
02:30:06,240 --> 02:30:10,320
निराकार ईश्वर को मानते हो कोई बात नहीं आप अपने मन में

2116
02:30:10,320 --> 02:30:14,400
यह सोचो कि वेदों में जहां जहां पर अलंकार के रूप में ईश्वर के स्वरूप की बात

2117
02:30:14,400 --> 02:30:18,480
हुई है यह जो लोग है यह जो हमारे हिंदू भाई है ये वो है और आप

2118
02:30:18,480 --> 02:30:23,040
निराकार की पूजा करो वो जो ू भाई है वो निराकार को मना तो नहीं कर रहे

2119
02:30:23,040 --> 02:30:27,400
मगर प्रॉब्लम ये है कि जिसका अस्तित्व ही किसी के खंड आर्थ

2120
02:30:27,400 --> 02:30:31,440
बना हो उसको तो वो करना ही पड़ेगा वो खंडन कम बंद कर देगा

2121
02:30:31,440 --> 02:30:35,960
वो जब तक स्टेज पर जाकर के शंकराचार्य की बुराई नहीं करेंगे जब तक स्टेज पर जाकर के

2122
02:30:35,960 --> 02:30:40,000
स्त्रियों का जन भले ही राघवाचार्य बोल रहे हो रामानंदाचार्य नहीं होना चाहिए भले

2123
02:30:40,000 --> 02:30:44,040
ही सारे परंपरा प्राप्त आचार्य एक तरफ से बोल रहे हो फिर भी जब तक

2124
02:30:44,040 --> 02:30:48,480
स्टेज पर जाकर के उसका खंडन नहीं करेंगे उस बात का तब तक हमारा अस्तित्व

2125
02:30:48,480 --> 02:30:53,000
कैसे आएगा लाइमलाइट में जब तक हम भावुक बातें नहीं

2126
02:30:53,000 --> 02:30:57,280
करेंगे तो हम तो यह बोल ही रहे हैं आपस में तो लड़ाई जिस

2127
02:30:57,280 --> 02:31:01,320
तंत्र का समर्थन आप करते हैं वह कर रहा है ना राधा जी के

2128
02:31:01,320 --> 02:31:07,320
बारे में अ शब्द बोल कर के शिवलिंग के बारे में अ शब्द बोल

2129
02:31:07,640 --> 02:31:12,160
करके वास्तविक उद्देश्य जी

2130
02:31:12,160 --> 02:31:16,160
पहले य व्यक्ति कहेगा की भाई आपस में मत

2131
02:31:16,160 --> 02:31:20,160
लड़ो और यदि इसके समर्थन प्राप्त

2132
02:31:20,160 --> 02:31:24,320
तंत्र से इसकन की लड़ाई हो जाएगी तोय वीडियो बनाएगा

2133
02:31:24,320 --> 02:31:28,440
इसकन की इसकन की पोप लीला यह

2134
02:31:28,440 --> 02:31:32,520
वीडियो बनाएगा तब क्यों लड़ रहा है तब क्यों लड़ने

2135
02:31:32,520 --> 02:31:37,320
जा रहा है उससे सोचने वाली बात है ना

2136
02:31:37,320 --> 02:31:41,360
बस कुल मिलाकर के जितना आपने सोच लिया है कोई नियमावली

2137
02:31:41,360 --> 02:31:45,560
नहीं है कुछ नहीं है जितना आप कहो वो माने आप कहो उठो

2138
02:31:45,560 --> 02:31:49,920
तो उठ जाए आप कहो बैठो तो बैठ जाए आप यह चाहते हो कि आप हमारे तानाशा

2139
02:31:49,920 --> 02:31:54,080
बन करके रहो और अगर नहीं तो आप इस तरह से हमारे

2140
02:31:54,080 --> 02:31:58,360
घर की मातृ शक्तियों के चित्रों को सार्वजनिक करने में सहयोग करोगे यही नीचता

2141
02:31:58,360 --> 02:32:04,360
सीखी है ना तुमने वास्तविक उद्देश्य वाले व्यक्ति यही है ना तुम्हारा वास्तविक उद्देश्य

2142
02:32:09,680 --> 02:32:13,880
नीच एक और है इन्हीं में रावा ये

2143
02:32:13,880 --> 02:32:18,240
व्यक्ति दावा करता है बस आपस में ना लड़ो राघवाचार्य जो

2144
02:32:18,240 --> 02:32:22,400
परंपरा प्राप्त जो आचार्य है उनका तुम उनको

2145
02:32:22,400 --> 02:32:26,600
तुम पाखंडी बोलने से नहीं डरते हो पंडे बोलने से नहीं डरते

2146
02:32:26,600 --> 02:32:30,680
हो तुम्हारे तुम्हारे वो लोग तुमने कभी उनका प्रतिकार

2147
02:32:30,680 --> 02:32:34,760
नहीं किया जो अपने वीडियोस बनाते हैं और बोलते हैं सबसे पहला शत्रु

2148
02:32:34,760 --> 02:32:39,720
है हिंदू पौराणिक है सबसे पहला शत्रु

2149
02:32:39,720 --> 02:32:43,040
ऐसे बोलते हैं तुम्हारे

2150
02:32:43,040 --> 02:32:47,400
लोग तब तुम वीडियो नहीं बनाते उनके लिए अजीब

2151
02:32:47,400 --> 02:32:51,720
दोगलापन है भाई पराकाष्ठा है दोगले पन की भय

2152
02:32:51,720 --> 02:32:55,960
भी नहीं लगता भय लगेगा कहां से एक बात क्योंकि क्योंकि

2153
02:32:55,960 --> 02:33:00,000
जिस ईश्वर की कल्पना क्योंकि जिस ईश्वर की

2154
02:33:00,000 --> 02:33:04,000
कल्पना की है वो ईश्वर तो है ही नहीं भय किसका लगे जिसके

2155
02:33:04,000 --> 02:33:08,400
जीवन में ईश्वर होगा तब तो वो धर्म को धारण करेगा ना

2156
02:33:08,400 --> 02:33:12,200
मुंह में दही दही जम

2157
02:33:12,200 --> 02:33:16,520
जाएगा फिर सबको धमकियां देने

2158
02:33:16,520 --> 02:33:20,560
लगेंगे इनके ऊपर कोई बात कर दी जाए मेरे पर बात कर दी तो

2159
02:33:20,560 --> 02:33:24,600
मैं एससी एसटी एक्ट लगवा दूंगा गलत मत गलत भ्रम

2160
02:33:24,600 --> 02:33:25,100
में

2161
02:33:24,680 --> 02:33:29,120
मत रहना भाई पूरी जानकारी है कहां कहां क्याक बोलते फिरते हो

2162
02:33:29,120 --> 02:33:35,120
ठीक

2163
02:33:35,520 --> 02:33:39,800
है किसी को भी पकड़ के ले जाएंगे अलंकार समाज के केंद्रों

2164
02:33:39,800 --> 02:33:43,880
में जहां भागे हुए इनकी विवाह करा दिया जाता है

2165
02:33:43,880 --> 02:33:48,160
50 में पहले 250 में होता था फिर 500 में होने लगा फिर 1100 में होने लगा आज 2100

2166
02:33:48,160 --> 02:33:52,840
फिर 5100 लो भाई हमारे यहां कराया जाता है

2167
02:33:52,840 --> 02:33:56,960
जो भगोड़े होते हैं दंपत्ति बिना माता-पिता की

2168
02:33:56,960 --> 02:34:01,320
आज्ञा के जो करना चाहते जिसको निकृष्ट विवाह माना जाता है वो विवाह

2169
02:34:01,320 --> 02:34:07,320
कराते हैं प्राथमिकता से कुछ पैसे

2170
02:34:07,720 --> 02:34:11,840
लेकर अभी कोर्ट में मैंने देखा था एक जगह

2171
02:34:11,840 --> 02:34:16,120
किसी अ मलेच्छ तंत्र के व्यक्ति ने

2172
02:34:16,120 --> 02:34:20,440
हिंदू समाज की व्यक्ति से हिंदू समाज की जो मातृशक्ति थी उससे

2173
02:34:20,440 --> 02:34:25,840
विवाह करा लिया इन्हीं के केंद्र में जाकर के और

2174
02:34:25,840 --> 02:34:29,840
उस विवाह से दुखी होकर के माता-पिता उनके बिटिया

2175
02:34:29,840 --> 02:34:33,840
के माता-पिता उस विवाह को चैलेंज करने लगे तो बिटिया

2176
02:34:33,840 --> 02:34:38,120
ने अपने माता-पिता के विरुद्ध एक केस दर्ज करवा दिया

2177
02:34:38,120 --> 02:34:40,040
कोर्ट में

2178
02:34:40,040 --> 02:34:44,720
और कोर्ट में जज पूछ रहा है कि भाई ऐसा क्या कर दिया तुम्हारे माता-पिता ने

2179
02:34:44,720 --> 02:34:48,800
जो तुम जिन्होंने तुम्हें पाल पोस करके बड़ा किया है जो आज तुम उन पर जो है मुकदमा दर्ज

2180
02:34:48,800 --> 02:34:53,040
करा रही हो ऐसा क्या कर दिया तो उनका वकील उठ कर के कह रहा है कि उन्होंने

2181
02:34:53,040 --> 02:34:57,200
विवाह किया है उने बोला विवाह कहां किया है तो यह जज

2182
02:34:57,200 --> 02:35:01,280
के जज के शब्द है कि भाई यह जो लड़का है

2183
02:35:01,280 --> 02:35:05,400
इस लड़के का यह जो कन्वर्ट हुआ उनका कहना है कि हम जो

2184
02:35:05,400 --> 02:35:09,480
विवाह कराते हैं किसी गैर सनातनी से

2185
02:35:09,480 --> 02:35:13,480
सनातनी महिला का तो हम उसका पहले धर्म परिवर्तन कराते

2186
02:35:13,480 --> 02:35:17,480
हैं मतलब एक तो जिस दिन वो पहुंचा कि हम दोनों को विवाह करना है तो

2187
02:35:17,480 --> 02:35:22,240
भाई तुम्हें हिंदू बनना पड़ेगा हां मैं बन जाता हूं बन गया हिंदू तुरंत हिंदू बन गया वो

2188
02:35:22,240 --> 02:35:26,520
हो गया वो उसने सब अपने नमाज सब अपनी प्रेयर आमीन

2189
02:35:26,520 --> 02:35:30,520
वगैरह सब छोड़ दिया बन गया वो हिंदू तुमने बना दिया उसको

2190
02:35:30,520 --> 02:35:34,640
तो वहां जज पूछ रहा है कि ये इसको अथॉरिटी किसने दी है यह

2191
02:35:34,640 --> 02:35:38,800
अलंकार समाज को किसने अथॉरिटी दी है कि वह किसी को हिंदू

2192
02:35:38,800 --> 02:35:42,840
बनाने वाला हिंदू करने वाला होता है ऐसे विवाह किसी का विवाह के बारे

2193
02:35:42,840 --> 02:35:46,960
में अथॉरिटी या फिर हिंदू हिंदू कहने के रूप में या सनातनी

2194
02:35:46,960 --> 02:35:51,040
कहने के रूप में अथॉरिटी किसने दी है जज के वो है व पर पता नहीं वो सुप्रीम

2195
02:35:51,040 --> 02:35:55,280
कोर्ट के थे क्या हाई कोर्ट के थे तो यह सब इनके

2196
02:35:55,280 --> 02:35:59,360
कारनामे है और फिर जो है ये बोलते हैं यही

2197
02:35:59,360 --> 02:36:03,760
इसी तरीके से यह भी करता है यह जो वास्तविक उद्देश्य वाला व्यक्ति है जो हास्यप्रद

2198
02:36:03,760 --> 02:36:07,880
रूप में जो है शिक्षा देने की दिखावा करता है यह क्या करता है

2199
02:36:07,880 --> 02:36:12,280
किसी को भी पकड़ के ले जाएगा अलंकार समाज के केंद्र ले भाई तू बन गया ब्राह्मण

2200
02:36:12,280 --> 02:36:16,560
ले भाई तू बन गया ब्राह्मण ब्राह्मण फैक्ट्री है ब्राह्मण फैक्ट्री

2201
02:36:16,560 --> 02:36:21,400
है सीधे किसी को भी पकड़ के ले जाओ ब्राह्मण

2202
02:36:21,400 --> 02:36:26,000
होष ब्राह्मण

2203
02:36:26,000 --> 02:36:31,240
जी क्वांटम वैक्यूम जी

2204
02:36:31,240 --> 02:36:35,720
बोले हरर महादेव कन्हैया अच्छा

2205
02:36:35,720 --> 02:36:39,840
अच्छा हरर हर हर ये

2206
02:36:39,840 --> 02:36:43,960
ना इन्होने आपके और अ ज जी के साथ में ही नहीं किया था ये मेरे साथ

2207
02:36:43,960 --> 02:36:48,120
भी हुआ था ये काफी पुरानी बात है अच्छा

2208
02:36:48,120 --> 02:36:52,240
हा एक एक समय की मैं आपको घटना य बताता हूं

2209
02:36:52,240 --> 02:36:57,240
एक बार होता क्या है कि मेरे घर में किसी फंक्शन में शादी वगैरह थी

2210
02:36:57,240 --> 02:37:01,280
जी तो क्या हुआ कि मैं अपनी वाइफ के साथ में जो है

2211
02:37:01,280 --> 02:37:05,600
वो नृत्य कर रहा था डीजे पर तो

2212
02:37:05,600 --> 02:37:10,080
क्या हुआ कि मेरी फोटो मेरी वीडियो वीडियो को

2213
02:37:10,080 --> 02:37:10,580
कहां

2214
02:37:10,320 --> 02:37:15,800
से उठा कैसे उली हो सकता है सोशल मीडिया पर किसी ने शेयर करी हो कुछ भी किया हो

2215
02:37:15,800 --> 02:37:19,840
तो हालाकि उसम मेरी वाइफ का फोटो नहीं ये पक्का है क्योंकि उन्होने काट

2216
02:37:19,840 --> 02:37:23,880
के लगाई थी ये तो है के साथ नहीं लगाई थी लेकिन मैं उस ड

2217
02:37:23,880 --> 02:37:28,040
कर रहा था मेरी फोटो सब जगह वारल कर देखो ये नक है मु और एक काला

2218
02:37:28,040 --> 02:37:32,080
पहाड़ नाम का व्यक्ति है वो हमेशा जब भी मैं किसी चैनल पर जाता

2219
02:37:32,080 --> 02:37:36,080
था या उस पर जाता था तो वो मेरे को हमेशा यही कहता था ये तो नया है

2220
02:37:36,080 --> 02:37:40,320
अब मुझे ये समझ में नहीं आ रही कि आर समाज के लोग नाचते है तो वो नया नहीं

2221
02:37:40,320 --> 02:37:45,000
है वो क्या हम दिखाएंगे यहां पर अभी हम नृत्य भी दिखाएंगे

2222
02:37:45,000 --> 02:37:50,960
सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने को वो भी दिखाएंगे

2223
02:37:50,960 --> 02:37:55,280
नहीं सोचने सोचने वाली बात है कि इतने इतने प

2224
02:37:55,280 --> 02:38:00,160
होते सिद्धांत का कोई जवाब नहीं दिया जाता जवाब नहीं मिलेगा कोई भी

2225
02:38:00,160 --> 02:38:04,240
लेकिन बा पर्सनल अट जाते अगर नहीं करोगे हम तो केस

2226
02:38:04,240 --> 02:38:09,880
कर देंगे तुम्हारे ऊपर इससे जदा क्या होगा

2227
02:38:09,880 --> 02:38:14,120
प असर नहीं हो रहा तोस करो उस अब आप पूछने

2228
02:38:14,120 --> 02:38:18,360
वाली बात है कि भले व केस कितना भी झूठ हो कितना भी फल्स

2229
02:38:18,360 --> 02:38:23,240
हो लेकिन उसको साबित करने के लिए जाना तो

2230
02:38:23,240 --> 02:38:25,720
पड़ेगा बा है

2231
02:38:25,720 --> 02:38:28,040
को

2232
02:38:28,040 --> 02:38:32,800
कर एक बारने के कर दिया तो करनी पड़ेगी

2233
02:38:32,800 --> 02:38:38,800
कब कबतक करते

2234
02:38:40,880 --> 02:38:45,240
रहेम भर आइए आपसे वि चर्चा होगी

2235
02:38:45,240 --> 02:38:51,240
जब काफी देर से कोई चर्चा चल रही है

2236
02:38:58,760 --> 02:39:03,320
तो हा जी मैं अपना वक्त पूरा करू जी जी

2237
02:39:03,320 --> 02:39:07,560
बोलिए तो जो आनंदू होता है जैसे क्या होता है जैसे

2238
02:39:07,560 --> 02:39:11,560
बहुत से लोग है है वो काम कर रहे हैं

2239
02:39:11,560 --> 02:39:16,360
अपनी जगह पर जितना उनको पॉसिबल हो सकता है वो कर रहे हैं लेकिन

2240
02:39:16,360 --> 02:39:20,680
बाप व अपने परिवार से भी रे हुए सोचने वाली

2241
02:39:20,680 --> 02:39:24,880
मा बाप का प्रेशर होता हैम क्यों कर रहे हो किसी होता है

2242
02:39:24,880 --> 02:39:29,000
बच का होता क्यों कर रहे हो क ले रहे हो तो इन

2243
02:39:29,000 --> 02:39:33,080
चीजों का य बहुत फायदा उठाते उसे मालूम होता है य वक्ति फैमिली वाला

2244
02:39:33,080 --> 02:39:37,920
है य ऐसा है इसको थोड़ य करेंगे करेंगे तोय

2245
02:39:37,920 --> 02:39:40,760
प छ के भाग जाएगा काम तम

2246
02:39:40,760 --> 02:39:46,000
लेन ऐसा नहीं

2247
02:39:46,000 --> 02:39:52,000
होगा अब ऐसा नहीं होगा

2248
02:39:54,360 --> 02:39:58,520
एक बात मैं याद दिला दूं यहां पर जो हम जो नीच कह रहे हैं उसका

2249
02:39:58,520 --> 02:40:02,640
अर्थ क्या है जो हीन आचरण आप लोगों ने किया है किसी

2250
02:40:02,640 --> 02:40:06,640
के घर की मात्र हमारी जो जो व्यक्तिगत जीवन

2251
02:40:06,640 --> 02:40:10,960
है हमारा उसको हम पहले भी प्रदर्शित कर चुके हैं उसके करने की आवश्यकता

2252
02:40:10,960 --> 02:40:15,080
नहीं थी मगर आपने किया भी तो घर की मात शक्तियों के चित्र को

2253
02:40:15,080 --> 02:40:19,320
प्रस्तुत नहीं करना चाहिए था तो ऐसा हीन आज

2254
02:40:19,320 --> 02:40:24,040
ण करने वाले के रूप में हम नीच शब्द का उपयोग कर रहे हैं

2255
02:40:24,040 --> 02:40:28,440
कोई ब्राह्मण भी कोई क्षत्रिय भी इस तरह का आचरण

2256
02:40:28,440 --> 02:40:32,680
करने पर नीच कहलाएगा हर वह व्यक्ति नीच

2257
02:40:32,680 --> 02:40:38,000
है जो वह कर रहा है वह कार्य कर रहा है जहां पर भी कर रहा

2258
02:40:38,000 --> 02:40:42,480
है अब

2259
02:40:42,480 --> 02:40:47,360
मैं इस पर आऊंगा सीधे जो उसमें जो मुख्य

2260
02:40:47,360 --> 02:40:52,000
विषय था आदित्य जी को सुन नहीं पाए आदित्य जी चले

2261
02:40:52,000 --> 02:40:56,000
गए कुछ कार गया था तो वो चले गए उसमें

2262
02:40:56,000 --> 02:41:01,320
एक मुख्य विषय था

2263
02:41:01,320 --> 02:41:05,840
कि अ कि भई

2264
02:41:05,840 --> 02:41:09,880
ये जो है हमारे वो जो संस्कार

2265
02:41:09,880 --> 02:41:13,880
हम करवा रहे थे उस पर इसने टिप्पणी दी है तो ये भी तो खुद अशा

2266
02:41:13,880 --> 02:41:17,920
स्त्रीय चीज तो पहली बात वो हमारी गुरु शरण में आने से पहले की थी आध्यात्मिक मार्ग

2267
02:41:17,920 --> 02:41:22,440
में आने से पहले की सामग्री थी पहली बात दूसरी बात यह है

2268
02:41:22,440 --> 02:41:26,640
कि क्या किसी भटके हुए व्यक्ति को सही मार्ग पर आने की अनुमति हमारे

2269
02:41:26,640 --> 02:41:30,800
धर्म के द्वारा दी गई है कि नहीं अगर वह आ जाता है तो क्या उसका जो

2270
02:41:30,800 --> 02:41:35,120
व पास्ट लाइफ है उसके आधार पर उसको गलत ठहराना उचित है आज

2271
02:41:35,120 --> 02:41:38,280
के समय में

2272
02:41:38,280 --> 02:41:42,760
और युगल किशोर जी वापस आ गए दूसरी बात यह है

2273
02:41:42,760 --> 02:41:46,960
कि हमने हमारी वो जो अशा स्त्रीय दिखने वाली चीज है उसको

2274
02:41:46,960 --> 02:41:51,120
कभी भी शास्त्रो चित नहीं कहा है और अभी भी हम ठोक करके

2275
02:41:51,120 --> 02:41:55,280
कह रहे हैं कि भैया वो वो चीजें वो वो सामग्रियां जो हमारी पूर्व की है या

2276
02:41:55,280 --> 02:41:57,560
जिनका व्यवस्था वस आज हमें आलंबन लेना पड़ रहा

2277
02:41:57,560 --> 02:42:02,120
है जैसे जिम इत्यादि का वो भी उस रूप में कि हम उसका उपयोग

2278
02:42:02,120 --> 02:42:06,240
उस सेतु के रूप में कर रहे हैं जो सामान्य वर्ग को

2279
02:42:06,240 --> 02:42:10,240
और जो है अध्यात्म मार्ग पर लाने का प्रयास करता है फिर भी हम उसको

2280
02:42:10,240 --> 02:42:14,360
पूर्णतया शास्त्री नहीं कह रहे आप अपने उस संस्कार को जिस

2281
02:42:14,360 --> 02:42:18,360
पर हमने वो टिप्पणी की जो आप कह रहे हो उसको कह दो अ शस्त्री हो जाएगा

2282
02:42:18,360 --> 02:42:22,840
दूध का दूध पानी पानी यही बात खत्म कह दो

2283
02:42:22,840 --> 02:42:27,000
मगर आपके अंदर वो सामर्थ्य नहीं है सत्य को स्वीकार करने का फॉलोअर्स

2284
02:42:27,000 --> 02:42:31,040
है ना व बुरा मान जाएंगे फॉलोअर्स फॉलोअर्स बुरा मान जाएंगे हम अपने आपको

2285
02:42:31,040 --> 02:42:35,360
को कह देंगे हम गलत है तो यही दिक्कत है क्षमा मांगना

2286
02:42:35,360 --> 02:42:39,520
अपनी गलती को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात होती है खास तौर

2287
02:42:39,520 --> 02:42:44,320
पर उनके लिए जिनके जीवन में धर्म नहीं होता ईश्वर नहीं होता

2288
02:42:44,320 --> 02:42:49,680
ईश्वर खोखला होता है सर्वशक्तिमान नहीं होता

2289
02:42:49,680 --> 02:42:54,840
तो यह बातें तो हमने कर ही ली अब बात ये आती है

2290
02:42:54,840 --> 02:42:59,160
कि एक बात यह कहती है कि यह जो मातृशक्ति जिसके

2291
02:42:59,160 --> 02:43:03,240
आधार पर ये सारे एलिगेशन लगाए गए और तरह तरह की बातें की गई

2292
02:43:03,240 --> 02:43:07,640
एक सोहम शुक्ला जी भी है वो चले गए हैं अगर सुन रहे हो तो आ जाए भाई

2293
02:43:07,640 --> 02:43:11,880
चर्चा का विषय बहुत वृहत था तो इसलिए देर हो सकती है सबको लेने में

2294
02:43:11,880 --> 02:43:12,600
मगर आप लोग आ

2295
02:43:12,600 --> 02:43:17,440
जाए जुड़ जाए आदित्य जी भी चले गए हैं वो वापस आ जाए

2296
02:43:17,440 --> 02:43:21,640
तो अब एक बात आती है कि

2297
02:43:21,640 --> 02:43:23,800
यह

2298
02:43:23,800 --> 02:43:27,840
जो ऐसे बात करती कि हमारी हमारे मन में सम्मान है उनका बहुत

2299
02:43:27,840 --> 02:43:31,840
बहुत सम्मान है मगर हम मंच पर जाएंगे तो हम खंडन उन्ही का करेंगे हम पाखंडी

2300
02:43:31,840 --> 02:43:35,920
उन्ही को कहेंगे पंडे उन्ही को कहेंगे पोप उन्ही को कहेंगे देखा

2301
02:43:35,920 --> 02:43:40,120
है ना इनका किसी मातृशक्ति का वीडियो देखा है जो मंच पर खड़ा

2302
02:43:40,120 --> 02:43:44,280
हो कर के बोल रहे हो कि परंपरा प्राप्त आचार्य तुमको गायत्री मंत्र पढ़ने

2303
02:43:44,280 --> 02:43:48,520
नहीं देंगे मना करेंगे तुमसे गायत्री मंत्र पढ़ने के लिए देखा

2304
02:43:48,520 --> 02:43:52,680
है ना सभी देखा है कि नहीं देखा ही होगा बिल्कुल देखा है बिल्कुल देखा

2305
02:43:52,680 --> 02:43:56,880
है हा गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देंगे और

2306
02:43:56,880 --> 02:44:00,960
खुद खुद किसी व्यक्ति के आ साल पूर्व के

2307
02:44:00,960 --> 02:44:05,040
पिज्जा पर आ साल पूर्व के किसी बात

2308
02:44:05,040 --> 02:44:09,200
पर आक्षेप लगाएंगे उसके आजीवक पार्जन

2309
02:44:09,200 --> 02:44:13,240
के आधार पर जो वो सप्लीमेंट की बात कर रहा है इसमें वो कैफीन का उपयोग कर

2310
02:44:13,240 --> 02:44:17,480
भी नहीं रहा उस पर वो आक्षेप लगाएंगे और भैया इनका दिखा दो

2311
02:44:17,480 --> 02:44:22,000
जरा इनका भी दिखा

2312
02:44:22,000 --> 02:44:26,800
दीजिए कैफीन कितना है इनके जीवन में और ये मलेच्छ

2313
02:44:26,800 --> 02:44:32,800
तंत्र का भोजन कितना है इनके जीवन में दिखा दीजिए भैया

2314
02:44:35,960 --> 02:44:40,120
श्रीराम य हम उन नीच की वास्तविकता बता रहे हैं

2315
02:44:40,120 --> 02:44:44,160
उन नीच लोगों की वास्तविकता बता रहे हैं जिनके चेहरे पर कालिक पुती

2316
02:44:44,160 --> 02:44:48,200
हुई है और जिस कारण से मुंह काला होने की वजह से पता नहीं कौन सा

2317
02:44:48,200 --> 02:44:52,440
उनके साथ क्या है ऐसा अछम में बात हो गई किस कारण से उनको मुंह छुपाना

2318
02:44:52,440 --> 02:44:57,120
पड़ रहा है ऐसे नीच लोगों की बात कर रहे हैं यहां पर जिन्होंने अपना

2319
02:44:57,120 --> 02:45:01,400
मुह ना दिखाते हुए वहां पर जो है हमारे पर व्यक्तिगत

2320
02:45:01,400 --> 02:45:05,600
टिप्पणी की हमारे घर की गरिमा आत्म सम्मान

2321
02:45:05,600 --> 02:45:09,680
जो न केन प्रकार ने इनको सामग्री जो प्राप्त हुई उसका दुरुपयोग किया

2322
02:45:09,680 --> 02:45:14,600
ऐसे नीच लोगों की हम बात कर रहे हैं हा जी

2323
02:45:14,600 --> 02:45:19,200
दिखाइए भैया इनके जीवन की कैफीन और

2324
02:45:19,200 --> 02:45:25,200
भोजन का आलंबन

2325
02:45:27,400 --> 02:45:31,600
आपको क्या लगता है कि हमारे

2326
02:45:31,600 --> 02:45:36,080
पास आपकी जानकारियां है नहीं हमें मतलब क्या है कि आपके निजी जीवन में आप क्या कर रहे

2327
02:45:36,080 --> 02:45:40,200
हैं हमें मतलब केवल उससे है नहीं अब तो अब तो बहुत

2328
02:45:40,200 --> 02:45:44,440
मटेरियल है अब तो बहुत मटेरियल है कोई बात नहीं मटेरियल बहुत

2329
02:45:44,440 --> 02:45:48,560
है बहुत मटेरियल है जी

2330
02:45:48,560 --> 02:45:52,920
हम केवल मतलब उससे है कि कहां पर आप धर्म के स्वरूप को विकृत

2331
02:45:52,920 --> 02:45:57,080
करते हुए प्रस्तुत कर रहे हो हमने केवल उस पर बात की थी

2332
02:45:57,080 --> 02:46:01,240
आपने मामले को गलत उलझा दिया

2333
02:46:01,240 --> 02:46:04,680
है

2334
02:46:04,680 --> 02:46:10,680
ना दिखा दीजिए भैया व

2335
02:46:15,600 --> 02:46:19,800
चित्र ये लोग क्या करते हैं काट पीठ की बातों

2336
02:46:19,800 --> 02:46:24,000
को लेके आते हैं अब जैसे एक सत्या प्रकाश

2337
02:46:24,000 --> 02:46:28,400
है उसम उन्होने भागवत की समीक्षा की है जी

2338
02:46:28,400 --> 02:46:32,920
जी युगल जी आप बोले तब तक यह इन्होंने भागवत

2339
02:46:32,920 --> 02:46:37,800
की जो समीक्षा की उसके मतलब इनका एक व्यवसाय हो चुका है कि यह लाएंगे

2340
02:46:37,800 --> 02:46:43,800
तो वही आधी अधूरी चीज काट पीट के चूहे जिस प्रकार

2341
02:46:46,280 --> 02:46:50,400
से चूहे जिस प्रकार से चीजों को कुतर देते हैं उस प्रकार से

2342
02:46:50,400 --> 02:46:55,360
प्रमाणों को कुतर की आदत है इनकी तो भागवत के अंदर

2343
02:46:55,360 --> 02:46:59,600
सप्तम स्कंध में श्री प्रहलाद जी महाराज का चरित्र है उसमें

2344
02:46:59,600 --> 02:47:03,880
नरसिंह भगवान जो है प्रहलाद जी महाराज से कह रहे हैं कि यदि तुम्हारी

2345
02:47:03,880 --> 02:47:08,080
सात पीढ़ियां होती तो वह तर जाती तो यहां पर इन्होंने क्या

2346
02:47:08,080 --> 02:47:12,080
प्रस्तुत करा अपने ग्रंथों में कि भगवान नरसिंह कह रहे हैं प्रहलाद से

2347
02:47:12,080 --> 02:47:16,120
कि उसकी साथ पीढ़ियां है तो सात पीढ़ियां मैं तार दूंगा बल्कि सात

2348
02:47:16,120 --> 02:47:20,280
पीढ़ियां उसकी नहीं है लेकिन मूल यदि ग्रंथ पढ़ा जाए तो मूल

2349
02:47:20,280 --> 02:47:24,440
ग्रंथ में उपलब्ध हो रहा है कि नरसिंह भगवान कह रहे सात पीढ़ियां होती तो

2350
02:47:24,440 --> 02:47:28,640
मैं ताड़ देता इसका अर्थ क्या हुआ कि चूहों की तरह प्रमाणों को कुतरना

2351
02:47:28,640 --> 02:47:32,760
इनकी आदत हो गई है और आधे अधूरे प्रमाणों को लाकर के यह लोग क्या

2352
02:47:32,760 --> 02:47:36,880
सिद्ध करना चाहते हैं और वही दूसरी और कुछ लोग जो

2353
02:47:36,880 --> 02:47:41,560
इनकी बातों को सुनते हैं या फिर मूल ग्रंथों का अध्ययन जिनको प्राप्त नहीं है

2354
02:47:41,560 --> 02:47:46,000
इनकी आधी अधूरी बात उन्होंने क्योंकि आधा परसेंट जो इनका

2355
02:47:46,000 --> 02:47:50,120
जितना भी परसेंट ज्ञान होता है वो सुनने के ऊपर डिपेंड होता है इनकी बात किसी ने

2356
02:47:50,120 --> 02:47:54,520
सुनी कहीं से इन्फ्लुएंस हुए वहां से लेकर के आए बात को

2357
02:47:54,520 --> 02:47:58,560
और कहीं जाकर के चिपका दी किंतु मूल ग्रंथ का अध्ययन नहीं किया कि इन्होंने

2358
02:47:58,560 --> 02:48:01,440
जहां से उदाहरण दिया है जहां से इन्होंने प्रमाण दिया

2359
02:48:01,440 --> 02:48:05,480
है मूल ग्रंथ को जाकर के खोले और देखें कि क्या इनका प्रमाण

2360
02:48:05,480 --> 02:48:09,600
है तो वहां से प्राप्त होता है कि जो भी यह प्रमाण

2361
02:48:09,600 --> 02:48:13,840
देते हैं वह सारे के सारे प्रमाण कटते जाते हैं मूल ग्रंथों से वहां

2362
02:48:13,840 --> 02:48:19,840
पर मूल कोई ऐसी बात लिखी ही नहीं है जो इन्होंने अपने ग्रंथों में लिखी है

2363
02:48:20,760 --> 02:48:24,440
तो यह इनकी आदत हो चुकी

2364
02:48:24,440 --> 02:48:29,720
है

2365
02:48:29,720 --> 02:48:35,720
प्रस जी आत्म

2366
02:48:37,000 --> 02:48:41,480
प्र एक मिनट यह खुद कहती है कि भैया वह पाखंडी

2367
02:48:41,480 --> 02:48:46,080
है पंडे है और खुद यहां पर नचती

2368
02:48:46,080 --> 02:48:50,080
है है ना न है ये

2369
02:48:50,080 --> 02:48:54,200
वीडियो बनाती है हमारे घर की जो मातृ शक्ति

2370
02:48:54,200 --> 02:48:58,240
है वो ऐसे नचती हुई नहीं मिलेंगी यह

2371
02:48:58,240 --> 02:49:02,360
नचती है उसकी रील बनाती है उसको भी प्रदर्शित करती है लोगों

2372
02:49:02,360 --> 02:49:06,520
के समक्ष अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए दिखाओ भैया

2373
02:49:06,520 --> 02:49:11,040
इनका इनका वो कैफीन का आलंबन

2374
02:49:11,040 --> 02:49:15,840
दिखाओ और इनका वो दिखाओ

2375
02:49:15,840 --> 02:49:21,840
नचनिया पन वो दिखाओ इनका कैसे नच रहे हैं

2376
02:49:23,480 --> 02:49:27,920
श्रीराम यह तो केक है हां

2377
02:49:27,920 --> 02:49:32,800
ऊपर ऊपर ऊपर आइडेंटिटी रिल नहीं करिएगा किसी की भी

2378
02:49:32,800 --> 02:49:37,000
केवल आप दिखा दीजिए जिसको समझना होगा वो समझे

2379
02:49:37,000 --> 02:49:41,240
मुझे समझ नहीं आता इतना हेट कमेंट क्यों ना मैं कोई गलत

2380
02:49:41,240 --> 02:49:45,680
कपड़ा पहना ना किसी और की तरह कैमरा के सामने मुजरा

2381
02:49:45,680 --> 02:49:49,800
किया अगर मैंने कॉफी पी भी ली तो कोई अपराध कर

2382
02:49:49,800 --> 02:49:53,960
दिया नहीं पीनी चाहिए थी मैं भी सामान्य

2383
02:49:53,960 --> 02:49:58,120
इंसान हूं कभी-कभी मेरा मन मेरा भी मन करता है और

2384
02:49:58,120 --> 02:50:02,120
पीछे वाले बाऊ जी हमारे सारथी हैं जो बस

2385
02:50:02,120 --> 02:50:06,280
अपना काम कर रहे थे तो कह रही है कि

2386
02:50:06,280 --> 02:50:10,880
अगर मैंने कॉफी पी भी ली तो कोई अपराध कर दिया और उसके बाद

2387
02:50:10,880 --> 02:50:16,640
इसमें कफन है उसमें कैफीन है यहां कैफीन है इधर कैफीन

2388
02:50:16,640 --> 02:50:20,920
है नारायण अबे भैया

2389
02:50:20,920 --> 02:50:25,080
थोड़ा पढ़े लिखे हो कि नहीं कॉफी से लाख गुना

2390
02:50:25,080 --> 02:50:29,840
अच्छा है कॉफी के अंदर का वह तत्व जिसके लिए कॉफी पीते हैं लोग

2391
02:50:29,840 --> 02:50:33,920
बिल्कुल थोड़ा पढ़ाई करो जाकर के कॉफी लोग इसलिए पीते

2392
02:50:33,920 --> 02:50:38,040
हैं क्योंकि उसमें कैफीन है उसको बस एक ही चीज समझ

2393
02:50:38,040 --> 02:50:42,040
में आती है पाउडर की तुलना कॉफी से यह देखो ठुमका

2394
02:50:42,040 --> 02:50:46,720
देखिए भैया ये सड़क पर नच रही

2395
02:50:46,720 --> 02:50:50,280
है मि

2396
02:50:50,280 --> 02:50:54,560
ठुमका [संगीत] देखिए पीछे पीछे करिए ठुमका

2397
02:50:54,560 --> 02:50:57,040
फिर से

2398
02:50:57,040 --> 02:51:02,920
दिखाइए अरे रहने दीजिए कोई बात

2399
02:51:02,920 --> 02:51:08,280
नहीं

2400
02:51:08,280 --> 02:51:12,640
समा यह देखो यह

2401
02:51:12,640 --> 02:51:16,640
देखिए यह है ठुमके और वो वाला दिखाइए

2402
02:51:16,640 --> 02:51:21,000
जरा डायरेक्ट कैफी पीते हुए हमने तो सिट्रोन

2403
02:51:21,000 --> 02:51:25,200
मलेट दे दिया किसी को उसमें इनको कैफीन दिखाई दे गई हमने किसी

2404
02:51:25,200 --> 02:51:29,240
हमने किसी का केक कट रहा है हम नहीं काट रहे किसी का कट रहा है उसम हम जाकर

2405
02:51:29,240 --> 02:51:33,840
खड़े हो गए तो उसम इनको अंडे दिखाई दे गए तो यह तो साक्षात

2406
02:51:33,840 --> 02:51:39,840
कर रहे हैं किसी के इश्क में खुद को मिटा

2407
02:51:43,160 --> 02:51:47,560
दूं कॉफी पीते हुए इनका है जो यह पिज्जा

2408
02:51:47,560 --> 02:51:51,800
की बातें कर रहे हैं हमारे छोटे भाई आज से 10 साल पहले

2409
02:51:51,800 --> 02:51:55,840
का फोटो है उसमें कोई अंधा भी होगा वो भी देख के पहचान लेगा उस

2410
02:51:55,840 --> 02:52:00,040
समय की उनकी काया आज की उनकी काया को देख कर के 10 साल पहले

2411
02:52:00,040 --> 02:52:04,280
का फोटो और वो तब के फोटो को जब

2412
02:52:04,280 --> 02:52:08,320
जब दिशाहीन गुरु विहीन जीवन तब के फोटो को आज की तुलना में रख

2413
02:52:08,320 --> 02:52:12,400
रहे हैं और वो बता रहे देखो देखो पिज्जा और खुद जो कर

2414
02:52:12,400 --> 02:52:16,520
रहे हैं मलेच्छ तंत्रों के सेंटर्स में जाकर के बैठ रहे हैं वहीं

2415
02:52:16,520 --> 02:52:20,840
पर जहां पर हलाल मास का उपयोग होता है हलाल सर्टिफाइड है

2416
02:52:20,840 --> 02:52:24,920
सब यह सब मैकडोनाल्ड यह सब केएफसी वगैरह जो भी है

2417
02:52:24,920 --> 02:52:29,480
य टाको इंडियाना वगैरह जो बेचते हैं कॉफी यह सब हलाल सर्टिफाइड

2418
02:52:29,480 --> 02:52:33,480
है यह हमसे जो पैसा कमा रहे हैं उसका एक अंश उसमें

2419
02:52:33,480 --> 02:52:37,680
भी ज्यादा है उन संस्थाओं के पास जो यहां

2420
02:52:37,680 --> 02:52:41,760
पर बम लगाने वालों को आतंक फैलाने वालों की पैरवी करती हैं जब वह

2421
02:52:41,760 --> 02:52:46,040
पकड़े जाते हैं तो और ऐसी जगह

2422
02:52:46,040 --> 02:52:50,400
पर जाकर के वहां को पोषित कर रहे हैं को मैं जो है टाकू इंडियाना

2423
02:52:50,400 --> 02:52:54,640
टा मुझे नहीं पता कहां पर गए मगर इसी तरह की एक चीज है व और वहां जाकर

2424
02:52:54,640 --> 02:52:58,280
के और यह देखिए स्वयं को परोस नहीं रहे तो और

2425
02:52:58,280 --> 02:53:02,720
क्या कर रहे बताइए रील बना कर के आप डांस

2426
02:53:02,720 --> 02:53:08,080
करते हुए और थुमका लगा रहे

2427
02:53:08,080 --> 02:53:12,200
हैं यह अवैध हैय वस्त्र

2428
02:53:12,200 --> 02:53:16,400
देख लो ठुमका देख लो वो भी तब जब आप स्वयं को एक

2429
02:53:16,400 --> 02:53:20,800
धार्मिक व्यक्तित्व के बारे िक व्यक्तित्व के रूप में प्रदर्शित

2430
02:53:20,800 --> 02:53:24,800
करते

2431
02:53:24,800 --> 02:53:28,920
हैं शास्त्र शास्त्र कहता है शास्त्र

2432
02:53:28,920 --> 02:53:33,040
ही कहता है कि यदि हमारा कोई शत्रु है हम पर एक

2433
02:53:33,040 --> 02:53:37,080
आंख से नजर रख रहा है तो हम उस पर दो आंख से नजर रखें और

2434
02:53:37,080 --> 02:53:41,280
यदि वह हमारे ऊपर दोनों आंखों से नजर रख रहा है तो हम उसके ऊपर तीन

2435
02:53:41,280 --> 02:53:46,360
आंखों से नजर रखें दो हमारी आंखें और एक शास्त्र की

2436
02:53:46,360 --> 02:53:50,680
आंख तो जो भी हम का कर रहे हैं वह अपने शास्त्रोक्त

2437
02:53:50,680 --> 02:53:56,680
ही कर रहे

2438
02:54:02,080 --> 02:54:07,080
हैं तो कुल मिलाकर के मेरा कहना इतना

2439
02:54:07,080 --> 02:54:11,280
था मैं इनकी आइडेंटिटी रिवील नहीं कर रहा हूं कि मैं किनके

2440
02:54:11,280 --> 02:54:15,720
बारे में बात कर रहा हूं सांकेतिक बात कर रहा हूं उन तक मेरा संदेश पहुंच

2441
02:54:15,720 --> 02:54:20,120
जाए पहली बात हमने आपके निजी जीवन में कभी भी झांका नहीं

2442
02:54:20,120 --> 02:54:24,200
निजी जीवन की सामग्री प्राप्त होते होते हुए भी ऐसा नहीं है

2443
02:54:24,200 --> 02:54:28,680
हमारे लोग भी आपके यहां पर पाच पाच छछ साल सात सात साल से

2444
02:54:28,680 --> 02:54:33,640
है यह जानने के लिए आपके य क्या चल रहा है ऐसा ना

2445
02:54:33,640 --> 02:54:37,800
समझिए आप अपने आपको को दं भरने लगे हमने आवान को खत्म कर देंगे कोई

2446
02:54:37,800 --> 02:54:41,920
नहीं करेगा खत्म जिसकी जो धर्म की रक्षा करता है

2447
02:54:41,920 --> 02:54:46,360
उसकी रक्षा धर्म करता है अरे सिद्धांत को केवल प्रचारित

2448
02:54:46,360 --> 02:54:51,480
मत करो धारण करो पहले धर्म

2449
02:54:51,480 --> 02:54:56,400
को आपको शर्म नहीं आई आपकी एक उस

2450
02:54:56,400 --> 02:55:00,600
सामग्री पर हमने बात कही जो सामग्री को आप धर्म धार्मिक

2451
02:55:00,600 --> 02:55:04,880
उसमें प्रस्तुत कर रहे हैं शास्त्रो चित उसम प्रस्तुत कर रहे और आपने

2452
02:55:04,880 --> 02:55:09,080
हमारे उन आचरण को जिनको हम छोड़ चुके हैं उनका आलंबन लेते हुए मिस

2453
02:55:09,080 --> 02:55:13,160
इफॉर्म करते हुए कि आज के आचरण है और उनको हमने कभी भी धार्मिक

2454
02:55:13,160 --> 02:55:17,160
आचरण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया उनको आपने कह दिया ये कैसा आचरण है हम कह

2455
02:55:17,160 --> 02:55:21,880
रहे हैं कि वो गलत है आप कह आपका व संस्कार गलत था

2456
02:55:21,880 --> 02:55:25,960
और तो और वो भी तब आप यह सामग्री हमारी दिखा रहे हैं

2457
02:55:25,960 --> 02:55:30,000
जब आपकी ऐसी अभद सामग्री हम नहीं नवाते भाई अपने

2458
02:55:30,000 --> 02:55:34,880
घर की मातृ शक्तियों को इस तरह से रोड पर ठीक है

2459
02:55:34,880 --> 02:55:39,040
और फिर उनको नचवा करके जो प्रस्तुत करते हो सार्वजनिक

2460
02:55:39,040 --> 02:55:43,080
रूप से लोगों के लिए ठुमका देखो भाई हीन

2461
02:55:43,080 --> 02:55:48,720
आचरण है मत करना आगे से दोबारा

2462
02:55:48,720 --> 02:55:52,920
और अगर कैफीन की आदत नहीं है तो कैफीन मत लेना और लड़ो

2463
02:55:52,920 --> 02:55:57,400
अपने आप से आदत हो भी तो छोड़ो उससे

2464
02:55:57,400 --> 02:56:01,480
मैं एक बात कहना चाहता हूं यहां पे ये ये

2465
02:56:01,480 --> 02:56:05,480
इनका जो है यह जो पहले अभी राधा रानी को जो गाली देते हैं या

2466
02:56:05,480 --> 02:56:09,680
राधा रानी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं करती हैं

2467
02:56:09,680 --> 02:56:14,040
वही राधा वो जो लड्डू गोपाल जी है उनके घर पर है

2468
02:56:14,040 --> 02:56:18,320
और रामचरित मानस का पंडित जी पाठ कर रहे हैं और

2469
02:56:18,320 --> 02:56:22,400
लड्डू गोपाल जी जिस बेड पर बैठे हुए हैं उस बेड के पीछे लिख रहा है

2470
02:56:22,400 --> 02:56:26,400
राधे राधे और पूर्व में जो इनकी वीडियो देखिए तो वहां

2471
02:56:26,400 --> 02:56:30,520
पर गौड़ीय वैष्णव का इनका तिलक उर्द पुंड लगा हुआ है और हर

2472
02:56:30,520 --> 02:56:35,080
वीडियो में हरे कृष्णा हरे कृष्णा जप रही है अब ऐसा क्या हुआ

2473
02:56:35,080 --> 02:56:39,080
कि जो लड्डू गोपाल जी को आप खिला रही थी पिला रही थी और जो जिस बेड

2474
02:56:39,080 --> 02:56:43,280
पर लड्डू गोपाल जी बैठे हुए हैं पीछे उसके लिख रहा है राधे राधे आज

2475
02:56:43,280 --> 02:56:47,520
उसी राधे राधे से आपको िड़ होने लगी ऐसा क्या हुआ ऐसा

2476
02:56:47,520 --> 02:56:51,520
इसलिए हुआ

2477
02:56:51,520 --> 02:56:55,880
मैं बताता हूं ऐसा इसलिए हुआ कि जब तक भड़काऊ भाषण नहीं देंगे

2478
02:56:55,880 --> 02:56:59,880
तो फॉलोअर्स नहीं बढ़ेंगे सारी बात है माल प

2479
02:56:59,880 --> 02:57:04,200
माल नहीं आएगा भड़काऊ भाषण नहीं देंगे

2480
02:57:04,200 --> 02:57:08,440
बात आप ही विरोध करती है इनकी बातें आपस में विरोध

2481
02:57:08,440 --> 02:57:12,560
करती है यह कहते हैं कि आप इसलिए ऐसी वीडियो बना रहे हो जिससे आपको

2482
02:57:12,560 --> 02:57:16,600
फॉलोअर्स मिले जिससे आपको फेम मिले अरे भाई तुम यदि किसी

2483
02:57:16,600 --> 02:57:20,760
और के ऊपर बोल रहे हो अन्य व्यक्ति जो फेमस है आप भी उसके ऊपर बोल रहे

2484
02:57:20,760 --> 02:57:25,080
हो तो इसका अर्थ है वोह अगला व्यक्ति भी यह कह सकता है कि वो अमुक व्यक्ति

2485
02:57:25,080 --> 02:57:29,240
जो मेरे लिए वीडियो बना रहा है मैं फेमस हूं इसलिए मेरा नाम

2486
02:57:29,240 --> 02:57:33,640
खराब करने के लिए वो जो है वीडियो बना रहा है कल को आप जाकिर नायर के ऊपर वीडियो बनाएंगी

2487
02:57:33,640 --> 02:57:37,640
तो जाकिर नायर कहेगा कि मैं फेमस हूं इसलिए मेरा नाम का गलत इस्तेमाल करने के

2488
02:57:37,640 --> 02:57:41,800
लिए वीडियो बनाया जा रहा है फिर तो किसी तंत्र के ऊपर हम बोल ही नहीं पाएंगे फिर तो उंगली

2489
02:57:41,800 --> 02:57:46,080
उठा ही नहीं पाएंगे ये तो आपके मुख से आप ही के सिद्धांत का खंडन हो रहा है

2490
02:57:46,080 --> 02:57:50,080
तो क्या आप यह कह कर के कि हम जो है

2491
02:57:50,080 --> 02:57:54,400
है इसलिए हमको हमारे साथ वो उठना चाहते हैं इसलिए हमको जो है बदनाम

2492
02:57:54,400 --> 02:58:00,400
कर रहे तो यह तो कहीं बात बैठती नहीं तो कुतर्क [संगीत]

2493
02:58:00,880 --> 02:58:04,920
है अरे भाई अगर यह हमसे कहेंगे ना कि तुम भी तो वही

2494
02:58:04,920 --> 02:58:06,640
कर रहे हो ना जो हम कर रहे हैं तो फिर

2495
02:58:06,640 --> 02:58:11,080
तुम अपने आप को सही क्यों कहोगे हम उसमें भी तुम्हें चित्त करेंगे

2496
02:58:11,080 --> 02:58:15,080
सबसे पहले किसने किसका खंडन करना शुरू

2497
02:58:15,080 --> 02:58:19,640
किया बोलो शंकराचार्य ने किया था

2498
02:58:19,640 --> 02:58:23,960
दयानंद जी का खंडन

2499
02:58:23,960 --> 02:58:28,840
बोलो अस् में नहीं कहां से करते

2500
02:58:28,840 --> 02:58:33,160
तो आपने शुरू किया हम उसके प्रतिकार स्वरूप

2501
02:58:33,160 --> 02:58:37,200
कर रहे हैं और आप यदि अपनी अभद्र भाषा शैली का उपयोग ना

2502
02:58:37,200 --> 02:58:41,640
करें मार्केट में तो हम यह भी ना करें जो करना पड़ रहा है

2503
02:58:41,640 --> 02:58:47,640
कर रहे आप हम केवल सैद्धांतिक बात पूछ पाछ के रह जाते

2504
02:58:48,440 --> 02:58:53,280
भाई मैं तो कह रहा हूं आपने मेरी जो सामग्री दिखाई है अपने संस्कार

2505
02:58:53,280 --> 02:58:57,280
के समानांतर कि देखो अगर यह हम पर आक्षेप लगा रहा तो

2506
02:58:57,280 --> 02:59:01,280
यह भी तो यह कर रहा है तो मैं कह रहा हूं आपको कि मेरी वह चीज जो

2507
02:59:01,280 --> 02:59:05,480
आपने दिखाई है वह गलत है और आगे से मैं पूरा प्रयास करूंगा कि मैं दोबारा

2508
02:59:05,480 --> 02:59:09,480
उसको ना करू अब आप कह दो कि आपका वह संस्कार गलत था और

2509
02:59:09,480 --> 02:59:15,480
आगे आप प्रयास करोगी कि आप उसको ना करो बोलो सामर्थ

2510
02:59:18,160 --> 02:59:22,480
परंपराओं का खंडन करके ही तो अस्तित्व में आए हैं कैसे छोड़ दे

2511
02:59:22,480 --> 02:59:26,480
वो भाव हील कर देने वाले वो वो

2512
02:59:26,480 --> 02:59:30,520
स्ट्राइक करने वाले सीखा भी होगा अपने लोगों से कैसे बोलना है

2513
02:59:30,520 --> 02:59:34,960
मंच पर जाकर भड़काऊ भाषण वो नहीं बोलेंगे कैसे काम चलेगा

2514
02:59:34,960 --> 02:59:39,240
छोड़ दो राधे राधे को जो छोड़ दो कृष्ण को छोड़ दो राम को

2515
02:59:39,240 --> 02:59:43,600
करो खंडन जाकर के परंपराओं का आचार्यों का और यह सब जो

2516
02:59:43,600 --> 02:59:47,760
एक वो जो इनका अंडर कवर्ड गुंडा है ना जो जिसको रातों की नींद

2517
02:59:47,760 --> 02:59:51,800
नहीं आ आ सपने में आवान आता है इसके उस अंडर कवर्ड गुंडे ने

2518
02:59:51,800 --> 02:59:55,800
एक प्रक्रिया और अपनाई है कि वो रामानुजाचार्य

2519
02:59:55,800 --> 03:00:00,120
जी के लिए तो सम्मानजनक बात बोलता है और शंकराचार्य जी के लिए अभद्र

2520
03:00:00,120 --> 03:00:03,440
तरीके से बात करता है नवीन वेदांत इत्यादि वो सोच रहा है यह

2521
03:00:03,440 --> 03:00:07,720
बात करके हमको जो है रामा रामानुजाचार्य परंपरा वालो का सपोर्ट

2522
03:00:07,720 --> 03:00:12,320
प्राप्त होगा ऐसा कुछ नहीं धोके में ना रहना भैया जितने

2523
03:00:12,320 --> 03:00:18,320
भीम धर्मी परंपरा है ना संप्रदाय वो सब एक है

2524
03:00:18,600 --> 03:00:23,480
सब एक है तो अंधकार में ना रहना नहीं तो किसी दिन चोट खा जाओ

2525
03:00:23,480 --> 03:00:27,800
और इन्होंने एक बात और कही कि इनके ऊपर जोय जन्म से जाति मान रहे हैं एससी

2526
03:00:27,800 --> 03:00:31,840
एसटी एक्ट वेदों को ना पढ़ने की बात कर रहे हैं स्त्री शूद

2527
03:00:31,840 --> 03:00:35,920
के इनके ऊपर जो एससी एसटी एक्ट लगाना चाहिए तो भाई भगवान कृष्ण

2528
03:00:35,920 --> 03:00:39,920
के ऊपर एससी एसटी एक्ट लगाओ फिर लगाओ भागवत के ऊपर ब्रह्म बंदु ना

2529
03:00:39,920 --> 03:00:43,920
हंत भगवान कृष्ण कह रहे हैं श्रीमद् भागवत के अंदर कि

2530
03:00:43,920 --> 03:00:48,040
शिशुपाल जो है वो ब्राह्मण का पुत्र है ब्रह्म बंदर ना हंत तब

2531
03:00:48,040 --> 03:00:52,560
उसका कर्म ब्राह्मण वाला नहीं था जब उससे मणि निकाल ली गई जब उसने ब्रह्मास्त्र

2532
03:00:52,560 --> 03:00:56,600
का संधान किया जब अर्जुन जी ने भी ब्रह्मास्त्र का संधान किया

2533
03:00:56,600 --> 03:01:00,720
ब्रह्मास्त्र को रोकने के लिए तब उसको घसीट करके जब ले जाया गया द्रौपदी

2534
03:01:00,720 --> 03:01:05,320
के समक्ष तो उसका भी हृदय करुणा से भर आया कि ये तो गुरु पुत्र है

2535
03:01:05,320 --> 03:01:09,480
आप समझिए कि यह द्रोणाचार्य ही हमारे समक्ष है और सबसे बड़ी बात किय ब्राह्मण

2536
03:01:09,480 --> 03:01:13,560
पुत्र है भगवान कृष्ण कह रहे हैं कि ब्राह्मण को शरीर से

2537
03:01:13,560 --> 03:01:17,600
मार शरीर से उसका वध करना य शास्त्र उचित नहीं है व वध

2538
03:01:17,600 --> 03:01:18,640
करो क्या

2539
03:01:18,640 --> 03:01:23,160
कैसे इसका वध किया जाए शास्त्र अनुकूल क्या है तो भाई क्या करो इसका

2540
03:01:23,160 --> 03:01:27,400
स्थान बदल दो इसको स्थान से निकाल दो या तो ब्राह्मण का धन हरण

2541
03:01:27,400 --> 03:01:31,480
कर ले यदि कोई आतताई ब्राह्मण है यानी कि शिशुपाल जो था वो आतताई

2542
03:01:31,480 --> 03:01:35,600
था यह मानना पड़ेगा ना कि आतंकवादी था जब आतंकवादी था तो ब्राह्मण

2543
03:01:35,600 --> 03:01:40,480
सिद्ध नहीं होगा तुम्हारे अनुसार और यदि ब्राह्मण है तो आतंकवादी सिद्ध नहीं होगा

2544
03:01:40,480 --> 03:01:44,920
तो हम जब जन्म से मान रहे हैं ब्राह्मण को तो हम तो कह ही रहे हैं कि जब ब्राह्मण

2545
03:01:44,920 --> 03:01:49,000
वाला वो कर्म नहीं कर रहा है तो वो ब्राहमण माना जाएगा

2546
03:01:49,000 --> 03:01:55,000
किंतु माना तो ब्राह्मण ही जाएगा और ब्राह्मण की हत्या

2547
03:01:58,160 --> 03:02:02,160
श एक भ्रांति फैलाई जाती हम लोग ब्राह्मणवादी है ऐसा कुछ

2548
03:02:02,160 --> 03:02:06,240
नहीं है ब्राह्मण जब निकृष्ट कार्य करता है तो राम जी के द्वारा उसका वध

2549
03:02:06,240 --> 03:02:10,240
होता है अवश्य और शूद्र भी जब

2550
03:02:10,240 --> 03:02:15,560
अच्छा कार्य करता है तो कृष्ण के द्वारा उसका सम्मान होता

2551
03:02:15,560 --> 03:02:19,840
है तो ण व्यवस्था जो जन्मा आधारित

2552
03:02:19,840 --> 03:02:24,280
है वो ऐसे नहीं सिर्फ जन्म से जन्म से नॉमिनेशन

2553
03:02:24,280 --> 03:02:28,520
कर्म से सिलेक्शन जन्म से नॉमिनेशन कर्म से सिलेक्शन

2554
03:02:28,520 --> 03:02:32,640
यह है शुद्ध वर्ण व्यवस्था और जो मैं

2555
03:02:32,640 --> 03:02:36,840
पिछली बत जो बोलते बोलते रुक गया हूं वो फिर मैं आपको याद दिला रहा हूं मैं अपनी

2556
03:02:36,840 --> 03:02:41,240
चीजों को मान रहा हूं मैंने तो पहले भी कहा व शास्त्री है

2557
03:02:41,240 --> 03:02:45,320
आप कह दो कि आपका वो जो संस्कार है व शस्त्री आगे से

2558
03:02:45,320 --> 03:02:49,480
ऐसा नहीं करेंगे कह दो इसीलिए भगवत गीता

2559
03:02:49,480 --> 03:02:54,120
में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है इसीलिए कहा है क्या

2560
03:02:54,120 --> 03:02:58,560
इसीलिए भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में कहा था कि धर्म का अनुकरण

2561
03:02:58,560 --> 03:03:02,720
अनुसरण ना कर पाने की स्थिति में यदि आपके

2562
03:03:02,720 --> 03:03:06,960
मन में उसे पूरी तरीके से अनुपालन

2563
03:03:06,960 --> 03:03:12,960
ना कर पाने का पश्चाताप है तो भी आप

2564
03:03:16,760 --> 03:03:20,840
धर्मजयगढ़ एक लाइन में कहे तो धर्म का अनुकरण अनुसरण

2565
03:03:20,840 --> 03:03:25,280
ना कर पाना आपकी व्यवस्था होनी चाहिए आपका चयन

2566
03:03:25,280 --> 03:03:30,520
नहीं आप जो कर रही हो चयन कर रही हो कोई व्यवस्था नहीं

2567
03:03:30,520 --> 03:03:34,640
है और जो हमारी जिन चीजों पर आपने आक्षेप लगाया हालाकि

2568
03:03:34,640 --> 03:03:38,680
वो है भी नहीं फिर भी अगर दुर्जन तोष नय से मान भी ले कि वो धर्म के

2569
03:03:38,680 --> 03:03:42,840
बाहर है व्यवस्था है हमें अज्ञान थे गुरु नहीं था

2570
03:03:42,840 --> 03:03:47,240
तब की बात आप आज फिट कर रही हो क्यों क्योंकि सिद्धांत नहीं है काटने के लिए

2571
03:03:47,240 --> 03:03:51,240
तभी इन इनका जो है वो धर्म के नाम पर उप धर्म

2572
03:03:51,240 --> 03:03:55,320
है जो धर्म की तरह भाषित तो लगता है किंतु वास्तविकता

2573
03:03:55,320 --> 03:04:00,040
में है पाखंड जिसको उप धर्म भागवत के अनुसार कहा गया है

2574
03:04:00,040 --> 03:04:04,280
जी जो देवराज पाखंड का रूप धारण करके आए थे महाराज पृथु के यज्ञ

2575
03:04:04,280 --> 03:04:08,760
का घोड़ा चुराने के लिए तो वो जितने पाखंड रूप उन्होंने धारण किए

2576
03:04:08,760 --> 03:04:12,760
उन सारे पाखंड रूपों को भागवत में ही ऐसा लिखा है कि मंद बुद्धि लोगों

2577
03:04:12,760 --> 03:04:17,200
ने ग्रहण कर लिया और वो मंद बुद्धि लोग यही है

2578
03:04:17,200 --> 03:04:23,200
जो पा कला रहे जिसको धर्म कहा जाता

2579
03:04:23,600 --> 03:04:28,080
हैर ये लोग दे रहे हैं अब मैं थोड़ा सा कहूंगा

2580
03:04:28,080 --> 03:04:32,120
की पंकज जी काफी देर से हैं पंकज जी आप

2581
03:04:32,120 --> 03:04:36,280
बोले पंकज जी है और प्रवीण कुमार जी जुड़े हैं

2582
03:04:36,280 --> 03:04:41,440
प्रमार जी प्र जी आपको पंकज जी के बाद हम

2583
03:04:41,440 --> 03:04:44,080
लेंगे

2584
03:04:44,080 --> 03:04:48,280
जी मैं यही कह रहा था भैया जैसे की बहुत सारी

2585
03:04:48,280 --> 03:04:52,360
चर्चाओं में सभी लोगों ने जितने जो चीजें बोलनी थी वो

2586
03:04:52,360 --> 03:04:56,440
बोल दी है अब मैं आपके सामने एक बात रखना चाह रहा हूं कि एक

2587
03:04:56,440 --> 03:05:00,480
अलंकार समाज का व्यक्ति था अब वो जीनस

2588
03:05:00,480 --> 03:05:04,600
टीशर्ट मतलब जितने भी पाश्चात्य संस्कृति के जितने भी

2589
03:05:04,600 --> 03:05:08,880
वस्त्र है वोह पहनता था और एक महान क्रांतिकारी हुए

2590
03:05:08,880 --> 03:05:12,960
थे उनके बारे में ये बहुत बोलता था जब उन्होंने जीनस का इन सब

2591
03:05:12,960 --> 03:05:17,240
चीजों का विरोध किया था राजीव दीक्षित जी का तो

2592
03:05:17,240 --> 03:05:21,600
उन की जितनी भी जो भी चीजें थी उसको गलत तरीके

2593
03:05:21,600 --> 03:05:25,920
से जो है प्रमोट करना शुरू किया

2594
03:05:25,920 --> 03:05:30,240
आवाज आ र जी और दूसरी

2595
03:05:30,240 --> 03:05:34,680
बात मैं यह कहना चाहता हूं यह लोग कहते हैं जब आपके

2596
03:05:34,680 --> 03:05:38,680
जो पुरानी आ साल 10 साल पुराने जो विष के ऊपर इन सब चीजों के

2597
03:05:38,680 --> 03:05:42,880
ऊपर आक्षेप लगाना शुरू कर दिया है के जब उस समय

2598
03:05:42,880 --> 03:05:47,680
राव दीक्षित जी जीवित थे और उनकी एक ही मंच पर

2599
03:05:47,680 --> 03:05:51,800
बाबा रामदेव जी बैठकर जींस का विरोध करते

2600
03:05:51,800 --> 03:05:55,800
करते जो है ना इतनी डींगे हाक थे कि 90 डिग्री एंगल

2601
03:05:55,800 --> 03:06:00,120
में जो है यह करना पड़ता है कि जीनस उतारने में बड़ी दिक्कत होती है

2602
03:06:00,120 --> 03:06:04,240
और जब उनकी मृत्यु हो गई तो कुछ दिनों बाद ही रामदेव जी

2603
03:06:04,240 --> 03:06:09,560
स्वदेशी जींस के नाम पर जो है उसको प्रमोट करने लगे उनके लिए क्या

2604
03:06:09,560 --> 03:06:13,720
बोलेंगे क्या आज तक इन्होने कुछ बोला उनके

2605
03:06:13,720 --> 03:06:17,760
लिए कुछ नहीं बोलना केवल जो है ना जहां तक

2606
03:06:17,760 --> 03:06:22,240
मंत की सिद्धि होगी उतनी ही बात काट पीट के उतनी

2607
03:06:22,240 --> 03:06:26,520
वही बात आती है शास्त्र की बात है जहां पर जो हमारा फायदा

2608
03:06:26,520 --> 03:06:30,560
हो रहा है उतना हम देख लेंगे जैसे आपने बोला कि रामानुज

2609
03:06:30,560 --> 03:06:34,600
संप्रदाय के जो है ना आचार्यों का य बड़े सम्मान के साथ बात कर रहा है

2610
03:06:34,600 --> 03:06:38,680
और इधर शंकराचार्य भगवान के लिए बुरा कहेगा वो ये सोच रहा है कि इनका

2611
03:06:38,680 --> 03:06:43,400
हम जो है आलंबन लेके इनका हम सपोर्ट हासिल कर लेंगे

2612
03:06:43,400 --> 03:06:48,160
तो यह जो जितनी निकृष्ट जो बातें कर रहे हैं जो हरकत कर रहे

2613
03:06:48,160 --> 03:06:52,560
यह ना तो हमारे किसी परंपरा प्राप्त आचार्यों ने सिखाई है

2614
03:06:52,560 --> 03:06:54,000
ना हमारे किसी महापुरुषों

2615
03:06:54,000 --> 03:06:58,160
ने पूर्वजों ने सिखाई है और यह यहां आके ी जो हरकत

2616
03:06:58,160 --> 03:07:02,280
कर रहे हैं वो यहां पर ये बंद कर दे पहली बात

2617
03:07:02,280 --> 03:07:06,400
और बहुत ही साधारण से शब्दों में कि आपने एक

2618
03:07:06,400 --> 03:07:10,760
बात कही यह जो निकलना शुरू हुए है ना कि इनका

2619
03:07:10,760 --> 03:07:15,080
जो पहले बिल में घुसे हुए थे अब इनके धीरे धीरे जो तिलंगा

2620
03:07:15,080 --> 03:07:19,160
लग गया है ना व अंदर तक जो है ना अंदर जा रहा है तो अब

2621
03:07:19,160 --> 03:07:23,280
ये अपने आप ही सामने आएंगे हमें इनको निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी

2622
03:07:23,280 --> 03:07:27,800
और अपने आप ही पराजित हो जाएंगे क्योंकि सत्य को किसी के प्रमाण की आवश्यकता

2623
03:07:27,800 --> 03:07:31,880
नहीं होती है और यहां पर वही बात सब सब कहते

2624
03:07:31,880 --> 03:07:35,920
हैं आप कहते हैं गुरुदेव कहते हैं कि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो

2625
03:07:35,920 --> 03:07:40,000
किस बात की चिंता तो इतने आज हमें इस बात

2626
03:07:40,000 --> 03:07:44,280
प आना पड़ रहा है तो सिर्फ इसलिए कि आप जो है ना जिस चीजों

2627
03:07:44,280 --> 03:07:48,600
का कंपेरिजन कर रहे हैं तो पहले आप उस चीज को तो इतना सामर्थ

2628
03:07:48,600 --> 03:07:53,720
अपने अंदर लाइए आप ये बातें कह रहे अपने

2629
03:07:53,720 --> 03:07:58,680
अर परंपरा प्राप्त आचार्य की एक बात मुझे याद आ गई

2630
03:07:58,680 --> 03:08:02,880
अभी राम भद्राचार्य के विरुद्ध लोगों ने राम भद्राचार्य जी के विरुद्ध

2631
03:08:02,880 --> 03:08:06,920
इन लोगों ने एक वो खड़ा किया भाई के और आप माफी मांगो माफी मांगो

2632
03:08:06,920 --> 03:08:09,400
राम भद्राचार्य जी ऐसे वैसे तो है नहीं

2633
03:08:09,400 --> 03:08:13,480
भाई वो अच्छा हुआ राम रामदेव बाबा जी ने इनकी सुलह

2634
03:08:13,480 --> 03:08:17,560
करा दी नहीं ये कुछ नहीं कर पाते जी

2635
03:08:17,560 --> 03:08:21,680
ये उनका बाल भी बाका नहीं कर पाते वो सीधे तोल के कहते हैं जिसकी मान

2636
03:08:21,680 --> 03:08:26,760
है सीधे बोलते हैं फिर वो बिल्कुल जिसकी

2637
03:08:26,760 --> 03:08:30,920
माने श्रद्धा पूर्वक निष्ठा पूर्वक ये

2638
03:08:30,920 --> 03:08:35,200
ये जो कर रहे थे ना वापस लो वापस लो ये सब धरे के धरे रह जाते

2639
03:08:35,200 --> 03:08:39,680
कुछ नहीं कर पाते उनका व वो बीच में आ गए मतलब इनकी

2640
03:08:39,680 --> 03:08:44,520
वो बचा ली क्या कहते हैं उसको इमेज इज्जत प्रतिष्ठा बचा ली इनकी

2641
03:08:44,520 --> 03:08:49,440
नहीं तो साफ पता चलता कि क्या स्तर है का समाज में

2642
03:08:49,440 --> 03:08:53,560
वभी बता गुरुक गोविंद जी बता के तो गए मीटिंग चल

2643
03:08:53,560 --> 03:08:57,920
रही है हमारे लोग कम हो रहे तो व्यायामशाला खोल दे वही व्यायामशाला जिसका खंडन

2644
03:08:57,920 --> 03:09:01,920
इन्ही के लोग कर रहे हैं अ

2645
03:09:01,920 --> 03:09:06,080
चाय कफन की बात कर रहे हैं हमारे सामने प्रमाण है जब हम गए थे

2646
03:09:06,080 --> 03:09:10,160
वहां पर इनके य पर अलंकार समाज वालो के पास में आप साथ में थे तो सबसे

2647
03:09:10,160 --> 03:09:14,280
पहले किस चीज के लिए पूछा था क्या हम दूध के लिए पूछा था क्या क्या रबड़ी

2648
03:09:14,280 --> 03:09:17,640
के लिए पूछा था क्या

2649
03:09:17,640 --> 03:09:22,160
आप तो व थे आप वहा प थे मैंने वहां चाय पी क्या बताइए

2650
03:09:22,160 --> 03:09:24,600
उन्होंने पी चाय समस्या

2651
03:09:24,600 --> 03:09:28,720
वही है क्योंकि उनको वो तो रोज पी रहे हैं अब उनको जब यहां समस्या हो

2652
03:09:28,720 --> 03:09:32,760
जाती है बात फिर वही है और आज मैं एक बात बहुत अच्छे से

2653
03:09:32,760 --> 03:09:37,080
बता देना चाहता हूं यह सभी जितने भी चाहे वो किसी भी तरीके

2654
03:09:37,080 --> 03:09:41,160
से इनका उपयोग हो रहा हो या बिल्कुल ही वो सच्चे वही व्यक्ति है

2655
03:09:41,160 --> 03:09:45,440
जो लाइव में आकर ये सब चीज कह रहे थे उनकी पूरी जन्म

2656
03:09:45,440 --> 03:09:49,480
कुंडली हमारे पास बिल्कुल उपस्थित है सब चीजें है

2657
03:09:49,480 --> 03:09:53,520
तो हमारी मर्यादा है हमारे गुरु ने ये सब नीच हरकत नहीं

2658
03:09:53,520 --> 03:09:57,960
सिखाई है कि हम जो है ना इतनी नीचता की पराकाष्ठा हो जाए

2659
03:09:57,960 --> 03:10:02,120
हम यहां पर भी आपकी जो केवल निंदा इसलिए कर रहे हैं आपको ये समझाना

2660
03:10:02,120 --> 03:10:06,160
चाहते हैं कि शास्त्र सम्मत जब आप बातें कर रहे हैं तो उसका पहले जो है

2661
03:10:06,160 --> 03:10:10,160
ना निर्वाह करना शुरू कर दीजिए और हम वो चीजें नहीं

2662
03:10:10,160 --> 03:10:14,160
करना चाहते हो ना कभी कभी हम जीवन में करेंगे आपकी वैसे ही सारी चीजें

2663
03:10:14,160 --> 03:10:18,240
सामने आ जाएंगी और अगर हम अगर हम पार्ट वन पार्ट टू करके लाना शुरू

2664
03:10:18,240 --> 03:10:22,520
कर दिए तो आपको हमारी साधारण भाषा में बोलेंगे

2665
03:10:22,520 --> 03:10:26,560
ना कि गांव की चूले तक में चौका तक में रसोई तक

2666
03:10:26,560 --> 03:10:30,080
में छुपने के लिए जगह नहीं मिलेगी

2667
03:10:30,080 --> 03:10:34,240
आपको बना देंगे आपके र प्रवीर कुमार जी आप

2668
03:10:34,240 --> 03:10:38,280
बोले जय जगन्नाथ शि जी जय जगन्नाथ राघव

2669
03:10:38,280 --> 03:10:40,080
जी आप जाइए नहीं वापस आइए

2670
03:10:40,080 --> 03:10:44,240
जय जगन्नाथ आपका वो आएगा वापस आ जाइए राघव

2671
03:10:44,240 --> 03:10:48,480
जी जी प्रवीण जी बोले इनके बाद बस आपको लेंगे

2672
03:10:48,480 --> 03:10:52,720
जय श्री राम मैं थोड़ा जा रहा मुझे अस्पताल पहुंचना है तो इसलिए मैं

2673
03:10:52,720 --> 03:10:56,800
सभी से विदा लेना चाहता हूं सभी के जय शीराम ह जय श्री राम

2674
03:10:56,800 --> 03:11:00,160
महादेव महादेव जय

2675
03:11:00,160 --> 03:11:04,640
जगन्नाथ प्रवी जी बोले हा कहना चाहता हूं

2676
03:11:04,640 --> 03:11:08,640
य आर्य समाज को मैं कम से कम तो आ 10 साल से जानता हूं और कम से कम

2677
03:11:08,640 --> 03:11:12,920
पाच लोगों से मैंने फोन करके करके पहले हम बात कर

2678
03:11:12,920 --> 03:11:17,000
चुके लेकिन एकही किसी व्यक्ति ने सत्य कहा आज तक हमने तो कभी सुना

2679
03:11:17,000 --> 03:11:21,360
नहीं था और यह लोग ऐसा चलते रहेंगे बाकी

2680
03:11:21,360 --> 03:11:25,360
बात रहा की इनका जो सत्य प्रकाश उसम

2681
03:11:25,360 --> 03:11:29,480
मेरा जो संदेह था पहले इनसे जुड़ने से पहले थोड़ा बहुत जानता था इनको

2682
03:11:29,480 --> 03:11:33,680
तो मेरा डाउट था मूर्ति पूजा को आज विरोध कर रहे तो कल भगवान जगन्नाथ की मूर्ति

2683
03:11:33,680 --> 03:11:37,760
को विरोध करेंगे और ऐसा देखा स व

2684
03:11:37,760 --> 03:11:42,120
भी चीज लिखा है जो झूठ लिखा है हमारा भगवान जगनाथ के बारे में जो

2685
03:11:42,120 --> 03:11:46,600
कभी ऐसा होता नहीं जैसा कि हमारा 12 साल में एक बार नवकल होता है

2686
03:11:46,600 --> 03:11:51,360
तो उसका अलग है लेकिन उन्होंने उसको स प्रकाश में पूरा

2687
03:11:51,360 --> 03:11:55,280
उल्टा सीधा अपना मर्जी जो जैसा आया लिख दिया जो है ऐसा होता

2688
03:11:55,280 --> 03:11:59,400
नहीं है और न लोगों को वास्तविकता बारे में कुछ

2689
03:11:59,400 --> 03:12:03,760
पता नहीं और पता है तो उसको अड भी करते और हर पन्ना

2690
03:12:03,760 --> 03:12:07,760
खोल के देखलो सत्य प्रकाश में ने कोई सच बात नहीं है स

2691
03:12:07,760 --> 03:12:11,840
झूठ है इनका जो जो मुसलमान विरुद्ध

2692
03:12:11,840 --> 03:12:15,920
में हम लड़ते और कोई माइकल लाल आज त किसीने

2693
03:12:15,920 --> 03:12:20,080
मुसलमान विरु में को नहीं हमारा दयानंद सरस्वती ने लिखा था तो

2694
03:12:20,080 --> 03:12:24,960
यह बात भी उनका झूठ है क्योंकि इनका जो पहला प्रकरण जो आता है पहले उसम

2695
03:12:24,960 --> 03:12:28,960
ते है नहीं और उसके बाद इनका गलती हो गया

2696
03:12:28,960 --> 03:12:33,240
था पहला संस्करण में द्वितीय संस्करण का जो प्राचीन

2697
03:12:33,240 --> 03:12:37,240
पुस्तक उनके पास है नहीं किसके पास जितना छप रहा है है

2698
03:12:37,240 --> 03:12:41,440
और उसम वही बात है सारे हमारा किसी

2699
03:12:41,440 --> 03:12:45,600
ऐसा कोई जो साधु थे पहले उनका समय पर किसी का

2700
03:12:45,600 --> 03:12:50,080
मर्यादा तो क्या नहीं य आदि गुरु शंकराचार्य को आदि गुरु भी नहीं कहा उन्होने

2701
03:12:50,080 --> 03:12:54,320
शंकराचार्य शंकराचार्य ऐही कहा और पुराण को तो पुराण के लिखा

2702
03:12:54,320 --> 03:12:58,760
है बाकी ब्राह्मण के विरु में लिखा है ब्राह्मण तो क्या परस्त्री

2703
03:12:58,760 --> 03:13:02,760
गमन करते और िया जाते और मंदिर

2704
03:13:02,760 --> 03:13:06,840
के अंदर नारी पुरुष का जो क्या बोलते

2705
03:13:06,840 --> 03:13:10,320
होता है मंदिर के अंदर ये सब भावना लिखा है तो अगर हम देखा जाए य लोग

2706
03:13:10,320 --> 03:13:15,000
बोलते केस करेंगे ये करेंगे इनका सत्य तो बयान करना चाहिए

2707
03:13:15,000 --> 03:13:19,480
हिंदुस्तान में आज तक कोई निकला नहीं था आपने निकला

2708
03:13:19,480 --> 03:13:23,480
एक हमारा आदि गुरु शंक परपरा आपको नद देता ये अच्छी बात

2709
03:13:23,480 --> 03:13:27,520
आपने य दिला दी एक इनका जो व अंडर कवर्ड गुंडा है जो

2710
03:13:27,520 --> 03:13:31,640
जिसको उन्होंने कांट्रेक्ट दे रखा है लोगों को गालिया देने का वो

2711
03:13:31,640 --> 03:13:35,720
यह बात कहता है कि तुम्हारे जो आचार्य गण है वो तक सम्मान प्रकट करते हैं

2712
03:13:35,720 --> 03:13:39,880
दयानंद जी के लिए हमने कब असमान किया उनका हमने कब अपमान

2713
03:13:39,880 --> 03:13:44,280
किया उनका हमने सदैव उनके लिए जब भी बोला

2714
03:13:44,280 --> 03:13:48,640
दर्शन विज्ञान और व्यवहार की मर्यादा में बोला तो करते हो अपमान

2715
03:13:48,640 --> 03:13:52,640
तुम दोगले हो तुम्हारे दयानंद जी ने अपने

2716
03:13:52,640 --> 03:13:57,120
स प्रकाश में माना कि बौद्धों को हराने वाले जैनों को

2717
03:13:57,120 --> 03:14:02,680
जैनों से शास्त्र करके उनको परास्त करने वाले उस समय वेदिक धर्म को बचाने

2718
03:14:02,680 --> 03:14:08,680
वाले शंकराचार्य

2719
03:14:10,280 --> 03:14:13,720
हमारा प्रवीण जी

2720
03:14:13,720 --> 03:14:17,760
बोलिए गुरुदेव गुरुदेव ने बार में बोले थे

2721
03:14:17,760 --> 03:14:22,440
कि दयानंद सरस्वती के बारे में कि वो अंग्रेज का प्रभावित थे

2722
03:14:22,440 --> 03:14:28,440
तो उसी बात उनको लग गई जोर से तो कुछ तो नहीं

2723
03:14:33,880 --> 03:14:39,880
पाएंगे जी प्रवीण जी आवाज नहीं आ रही

2724
03:14:40,280 --> 03:14:44,400
आपकी प्रवीण जी शायद

2725
03:14:44,400 --> 03:14:48,520
नेटवर्क का कोई इशू होगा हां नेट राव जी

2726
03:14:48,520 --> 03:14:54,480
बोले

2727
03:14:54,480 --> 03:14:59,560
आ प्रवीण जी आप एक बार जाके वापस आ

2728
03:14:59,560 --> 03:15:05,040
जाए तब तक राघव जी आ

2729
03:15:05,040 --> 03:15:09,120
जाइए राघव जी आप सुन

2730
03:15:09,120 --> 03:15:13,200
रहे हैं तो आप आ सकते हैं ड्रॉप हो गए

2731
03:15:13,200 --> 03:15:18,400
राघव जी युगल किशोर शर्मा जी हैं यहां पर जी

2732
03:15:18,400 --> 03:15:22,720
जी युगल जी अपनी बात

2733
03:15:22,720 --> 03:15:27,280
रखें जी नारायण नारायण

2734
03:15:27,280 --> 03:15:31,280
जो जो बात इन्होंने जो बात इन्होंने आक्षेप के तौर पर लगाई

2735
03:15:31,280 --> 03:15:36,200
थी जैसे वो क्या

2736
03:15:36,200 --> 03:15:40,320
नाम याद नहीं आ रहा मेरे को अब जो भी था तो जो कॉफी के लिए उन्होंने

2737
03:15:40,320 --> 03:15:44,600
बात करी थी वो स्वयं जब स्टारबक्स की कॉफी लेकर के चलती है

2738
03:15:44,600 --> 03:15:48,640
तो उन्हीं के ऊपर आक्षेप लगते हैं तब यह शब्दावली

2739
03:15:48,640 --> 03:15:52,760
कहां जाती है इनकी कि मैं एक सामान्य स्त्री हूं मेरा भी मन करता है

2740
03:15:52,760 --> 03:15:56,840
कि मैं इस प्रकार इसका मतलब आप सामान्य स्त्री है तो हमने कब कहा कि

2741
03:15:56,840 --> 03:16:01,040
भाई हम भगवान है या अवतार है हमसे गलतिया नहीं हो सकती अरे मैं तो यह

2742
03:16:01,040 --> 03:16:05,040
पूछ रहा हूं सामान्य स्त्र की स्त्रियों के लिए मलेच्छ तंत्रों

2743
03:16:05,040 --> 03:16:09,280
द्वारा बनाया जाने वाला जो मादक पदार्थ है वो कहां लिखा है सनातन में फिर अगर

2744
03:16:09,280 --> 03:16:09,780
ऐसी

2745
03:16:09,560 --> 03:16:13,600
बात करोगे तो वो इनके लिए

2746
03:16:13,600 --> 03:16:17,720
वो इनके लिए ग्रहण करने योग्य है तब वहां पर ये लोग कहते हम सामान्य

2747
03:16:17,720 --> 03:16:21,760
है तब व का सिगल जी य पर दो तरह

2748
03:16:21,760 --> 03:16:26,080
की स्थितियां होती है एक क्या स्थिति है यदि आप

2749
03:16:26,080 --> 03:16:30,440
कुछ गलत कर रहे हो तो आप अपने आप को सही मत ठहर वाओ

2750
03:16:30,440 --> 03:16:34,800
स्वीकार करो कि मैं गलत हूं दूसरी स्थिति क्या है

2751
03:16:34,800 --> 03:16:38,800
व्यक्ति गलत तो कर रहा है फिर भी वो अपने आप को शास्त्र की सीमा में लाना

2752
03:16:38,800 --> 03:16:42,800
चाहता है तो एक व्यक्ति से जब व्यवस्था गलत हो रहा व्यवस्था

2753
03:16:42,800 --> 03:16:47,040
वश तो वो कह रहा है कि भैया यह जो है शित नहीं है मगर मेरे पास

2754
03:16:47,040 --> 03:16:51,080
यही है दूसरा व्यक्ति चयन करके गलत कर रहा है शास्त्रों के बाहर जा

2755
03:16:51,080 --> 03:16:55,320
रहा है चयन करके मगर वो फिर भी सिद्धांत दे रहा है कि मैं भी तो सामान स्त्री

2756
03:16:55,320 --> 03:16:59,320
हूं तो मुझे शास्त्र की सीमा में ले लो अब इनकी इनकी जो

2757
03:16:59,320 --> 03:17:03,360
तीन बात इनकी इनके तीन स्टेप लेते इनकी तीन बात मेरे को

2758
03:17:03,360 --> 03:17:07,480
समझ में आई यहां पर सबसे पहले इन्होने व बनाना आरंभ

2759
03:17:07,480 --> 03:17:11,720
ठुमके से किया है ना फिर चलते चलते वो वीडियो गया

2760
03:17:11,720 --> 03:17:15,720
हरे कृष्णा प तो इन्होंने फिर वो उध पुंड लगा कर के

2761
03:17:15,720 --> 03:17:20,080
हरे कृष्णा से जो इन्होंने वीडियो बनाना आरंभ करा वहां से फेम बटोरा

2762
03:17:20,080 --> 03:17:24,160
फिर चलते चलते इनको कुछ और लगा होगा तो फिर यह गए आर्य

2763
03:17:24,160 --> 03:17:24,660
समाज के

2764
03:17:24,560 --> 03:17:28,560
अंदर फिर इनको थोड़ी और तगड़ी बोली मिली तो इन लोगों

2765
03:17:28,560 --> 03:17:32,640
ने क्या किया कहीं ना कहीं और लोगों को पकड़ा अब धीरे धीरे क्या अच्छा अब यह

2766
03:17:32,640 --> 03:17:36,920
लोग आक्षेप लगाएंगे ना यह वाला कि तुम लोग फेमस लोगों को पकड़ते हो अच्छा

2767
03:17:36,920 --> 03:17:40,960
जो वो खट्टर जी हैं उन्होंने स्कोन में जा जाकर

2768
03:17:40,960 --> 03:17:45,120
विदेशी लोग के इंटरव्यू लिए हैं तो पहले तो उनके इंटरव्यू

2769
03:17:45,120 --> 03:17:49,840
लिए अच्छी अच्छी बातें बोली अब बाद में आक्षेप करना आरंभ कर

2770
03:17:49,840 --> 03:17:53,880
दिया बाद में आक्षेप करना इन लोगों ने आरंभ कर दिया विष्णु पुराण का

2771
03:17:53,880 --> 03:17:57,920
श्लोक बताते हैं कि भगवान में समग्र ऐश्वर्य समग्र ऐश्वर्य है

2772
03:17:57,920 --> 03:18:02,000
तो समग्र ऐश्वर्य जब भगवान विष्णु के अंदर समाहित है

2773
03:18:02,000 --> 03:18:06,120
तो उनको भी तो तुम भगवान नहीं बोल रहे हो तब यह कहां

2774
03:18:06,120 --> 03:18:10,360
जा रहा है तुम्हारा राधा रानी को तुम बीमारी मतलब राधा

2775
03:18:10,360 --> 03:18:15,240
रानी को तुम बीमारी बता रहे हो इतनी निकृष्ट तुम्हारी सोच है

2776
03:18:15,240 --> 03:18:19,320
जो सत्यार्थ प्रकाश में जिस भाषा का प्रयोग किया गया है उस अब

2777
03:18:19,320 --> 03:18:23,360
सत्यार्थ प्रकाश को अगर बोलने के लिए बोल दिया जाए तो सत्यार्थ

2778
03:18:23,360 --> 03:18:27,520
प्रकाश अगर बोलना चालू कर दे वो तो एक किताब है वोह कैसे बोलेगी

2779
03:18:27,520 --> 03:18:31,560
अगर बोलना चालू कर दे वो तो सर्वत्र गाली बकना आरंभ कर देगी

2780
03:18:31,560 --> 03:18:35,560
अभद्र भाषा का प्रयोग है उसमें किंतु वो

2781
03:18:35,560 --> 03:18:39,640
बातें छुपाई जाती है उसके अंदर जो वहां पर अभद्र भाषा का

2782
03:18:39,640 --> 03:18:43,800
प्रयोग हो रहा है बस उन उन बातों को ले लेते हैं जहां पर हम तंत्रों

2783
03:18:43,800 --> 03:18:48,520
का विरोध कर रहे हैं तो इनको दिखाना होता है कि देखो

2784
03:18:48,520 --> 03:18:53,040
हम जो है इन त का ये लोगों की अजनता का फायदा उठाकर

2785
03:18:53,040 --> 03:18:57,240
सिंपैथी प्राप्त करके फलीभूत होते हैं

2786
03:18:57,240 --> 03:19:01,360
बस यही है कि बताया ना मैंने कि भागवत में जिस प्रकार से बताया

2787
03:19:01,360 --> 03:19:05,840
गया कि उप धर्म है बस बाहर से लगता है कि यह हमारे जैसा है

2788
03:19:05,840 --> 03:19:09,920
व्यक्ति जैसे चारवा सिद्धांत के अंदर चारवा सिद्धांत

2789
03:19:09,920 --> 03:19:14,280
क्या है चारवा सिद्धांत के अंदर भी क्या बोला गया ऋण कतम पवे

2790
03:19:14,280 --> 03:19:18,400
ऋण लेकर के घी पियो तो वहां पर भी दार पीने की बात नहीं की गई अब वो

2791
03:19:18,400 --> 03:19:22,560
भी अपना प्रचार करना आरंभ करे तो घी पी कर के तो व्यक्ति कहे

2792
03:19:22,560 --> 03:19:26,760
अरे देखो य तो घी पीने की बात कर रहा है कितना अच्छा है तो वह देखने में चमक

2793
03:19:26,760 --> 03:19:30,800
धमक लग तो रही है किई वो घी पीने की बात कर रहा है किंतु वो उप धर्म है

2794
03:19:30,800 --> 03:19:35,200
सर्वत्र सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर रहा है जो सार्वभौम सिद्धांत है उसको स्वीकार

2795
03:19:35,200 --> 03:19:37,640
नहीं कर रहा

2796
03:19:37,640 --> 03:19:41,840
है च रहा है राघव जी आ गए राघव जी आ गए

2797
03:19:41,840 --> 03:19:46,920
राघव जी को थोड़ा सा लेंगे राघव जी

2798
03:19:46,920 --> 03:19:51,080
बात रख हां जी हा भैया जय श्री

2799
03:19:51,080 --> 03:19:54,960
राम मेरी आवाज आ रही पहले तो आप यह

2800
03:19:54,960 --> 03:19:59,120
बताए हेलो हां अच्छे से आ रही है ना क्योंकि मैं

2801
03:19:59,120 --> 03:20:04,120
थोड़ा सा इधर उसम हूं खुले

2802
03:20:04,120 --> 03:20:08,160
हूं अच्छे से आ रही हा तो सबसे पहले

2803
03:20:08,160 --> 03:20:12,680
मैं विशेषक इसी चर्चा के लिए बड़ा प्रतीक्षारत था

2804
03:20:12,680 --> 03:20:16,840
देखिए आपके पुराने जीवन पर इन्होने

2805
03:20:16,840 --> 03:20:20,960
आक्षेप किया और उसमें उन्होंने वस्त्रों को लेकर के

2806
03:20:20,960 --> 03:20:25,080
मुख्यतः आपको बदनाम करने की असफल

2807
03:20:25,080 --> 03:20:29,240
कोशिश की तो मेरा यह सभी आर्य समाजी हों से यह

2808
03:20:29,240 --> 03:20:33,320
प्रश्न है कि आपके दयानंद आंगल वैदिक स्कूल में

2809
03:20:33,320 --> 03:20:37,880
यूनिफॉर्म क्या है आपके बच्चों की आपके अध्यापकों

2810
03:20:37,880 --> 03:20:42,040
की इनकी यूनिफॉर्म आपने भारतीय परंपरा के अनुसार रखी क्यों

2811
03:20:42,040 --> 03:20:46,320
नहीं है इसका आप लोग जवाब दे है ना दूसरी

2812
03:20:46,320 --> 03:20:51,040
बात यह है जैसे आपने

2813
03:20:51,040 --> 03:20:57,040
थोड़ी आपकी आवाज नहीं आ रही राघव

2814
03:20:58,160 --> 03:21:04,160
जी राघव जी आपकी आवाज नहीं आ रही

2815
03:21:16,960 --> 03:21:21,360
राघव जी एक बार आप लीव करके दोबारा आ

2816
03:21:21,360 --> 03:21:25,840
जाइए हां जी हा जी जी हो गया हो गया आ गई आवाज

2817
03:21:25,840 --> 03:21:29,920
अभी अभी आवाज आई जी जी आ गई आ हा मैं

2818
03:21:29,920 --> 03:21:34,040
ये कहना चाहता हूं कि थोड़ी देर पहले आपने कहा था कि पंडित बनाने

2819
03:21:34,040 --> 03:21:38,280
की फैक्ट्री तो मैं जितने भी आर्य समाज तक यह वीडियो

2820
03:21:38,280 --> 03:21:42,480
पहुंचेगा संभवत जिन्होंने आप पर आरोप लगाया वो तो देखेंगे ही तो उनसे

2821
03:21:42,480 --> 03:21:47,520
मेरा यह प्रश्न है कि आप लोग एक बात बताइए

2822
03:21:47,520 --> 03:21:51,880
आपके गुरुकुल जब से चल रहे हैं विगत 1 स वर्षों से उसमें

2823
03:21:51,880 --> 03:21:55,920
आपने तीन वर्णों के व्यक्ति कितने बनाए क्योंकि कर्मणा ही सही

2824
03:21:55,920 --> 03:21:59,960
वर्ण व्यवस्था में तो आप अस्थान वित है तो फिर केवल ब्राह्मण ही क्यों

2825
03:21:59,960 --> 03:22:04,160
बनाते हैं आप तीन वर्णों को क्यों नहीं बनाते जब किसी की इच्छा

2826
03:22:04,160 --> 03:22:06,440
अनुसार ही यह तय होना है

2827
03:22:06,440 --> 03:22:10,440
तो आज तक किसी की इच्छा क्यों नहीं हुई कि मैं क्षत्रिय बनू मैं गौतम खट्टर से

2828
03:22:10,440 --> 03:22:14,480
पूछना चाहता हूं कि आप बड़े-बड़े मंचों पर हिंदुओं के खून को

2829
03:22:14,480 --> 03:22:18,600
उबाल हैं तो फिर उबाल में तो क्षत्रिय त्व नजर आता है

2830
03:22:18,600 --> 03:22:22,880
तो क्षत्रिय आपके यहां से कितने निकल रहे हैं मेरा यदि गौतम

2831
03:22:22,880 --> 03:22:27,080
घटर यह वीडियो देखेंगे तो उनसे यह सवाल है कि आप इसका जवाब दीजिए

2832
03:22:27,080 --> 03:22:31,360
और अपने आर्य समाजी गुरुकुल में जाकर के दए कि

2833
03:22:31,360 --> 03:22:35,640
हमें क्षत्रियों की जरूरत है खतरा है हिंदू खतरे में है तो जो

2834
03:22:35,640 --> 03:22:39,880
हिंदू खतरे में है तो फिर आइए ले में और फिर बात

2835
03:22:39,880 --> 03:22:43,920
कीजिए ऐसा कैसे चलेगा और किसी का

2836
03:22:43,920 --> 03:22:48,680
वस्त्र कैसे उसका व्यक्तित्व ार करता है

2837
03:22:48,680 --> 03:22:52,720
आप लोग सिले हुए वस्त्रों का आर्य समाज लोग ने यह

2838
03:22:52,720 --> 03:22:56,920
आरंभ किया है सिले हुए वस्त्रों का सन्यास यदि आप वेद की बात करते हैं शास्त्र

2839
03:22:56,920 --> 03:23:01,560
की बात करते हैं तो सिले हुए वस्त्रों का संन्यास कहां लिखा है जरा यह स्पष्ट

2840
03:23:01,560 --> 03:23:05,560
कीजिए यह भी नहीं करते तो जब आप परंपराओं

2841
03:23:05,560 --> 03:23:09,960
की बात कर रहे हैं तो पहले अपना अवलोकन कीजिए आत्मा अवलोकन

2842
03:23:09,960 --> 03:23:14,200
कीजिए कि आप परंपराओं का निर्वहन कितना कर रहे हैं यदि

2843
03:23:14,200 --> 03:23:18,560
दयानंद जी की बात करते हैं तो दयानंद जी ने भी कभी सिले हुए वस्त्र नहीं पहने

2844
03:23:18,560 --> 03:23:22,200
लेकिन दूसरे आपके सन्यासी सारे के सारे पहन रहे होते हैं

2845
03:23:22,200 --> 03:23:26,600
और यदि आप यह कहते हैं कि हमें एक होना होगा मिचों

2846
03:23:26,600 --> 03:23:31,120
का खतरा है इसका उसका खतरा है हमको आपसी विवाद छोड़ना है और हमको तो

2847
03:23:31,120 --> 03:23:35,760
आपस में मिलकर के लड़ाई लड़नी है तो आप एक बात बताइए

2848
03:23:35,760 --> 03:23:39,840
कि जिनको आप मिलाना चाह रहे हैं जिनको भी आप आर्य की संतान मान

2849
03:23:39,840 --> 03:23:43,960
रहे हैं उनके इष्ट आराध्य देवी देवता जिसमें आप आस्थान वित

2850
03:23:43,960 --> 03:23:48,160
नहीं है लेकिन वे हैं उन पर कीचड़ उछालना यह क्या आपको

2851
03:23:48,160 --> 03:23:52,240
शोभा दे रहा है क्या इससे आप इनको एक कर पाएंगे क्या

2852
03:23:52,240 --> 03:23:56,240
इससे आप मलेच्छ को खुराक नहीं दे रहे हैं हम हमको बदनाम करने

2853
03:23:56,240 --> 03:24:00,400
के लिए आपके मन में जो भी हो हमने किसी

2854
03:24:00,400 --> 03:24:04,480
आर्य समाजी को कभी बाध्य नहीं किया मेरी आवाज आ रही है ना जी जी बहुत

2855
03:24:04,480 --> 03:24:08,520
बढ़िया हेलो हां हमने कभी किसी आर्य समाजी को बाध्य नहीं किया

2856
03:24:08,520 --> 03:24:12,880
कि तुम पंचदेव उपासना में मानो किसी हमारे शास्त्र सम्मत संप्रदाय से दीक्षित

2857
03:24:12,880 --> 03:24:17,000
हो लेकिन यह आपको किसने हक दे दिया कि हमारी मान्यताओं पर

2858
03:24:17,000 --> 03:24:21,280
आप कुठाराघात ना केवल करें बल्कि हर हिंदू को जबरदस्ती अपनी

2859
03:24:21,280 --> 03:24:25,720
आस्थान में लाने का प्रयास करें क्या यह गैर मजहब

2860
03:24:25,720 --> 03:24:29,960
वाला धर्मांतरण का एक और तरीका नहीं है जो आप कर रहे हैं

2861
03:24:29,960 --> 03:24:34,080
आपका डीएनए तो कुछ और नजर आ रहा है सनातनी डीएनए नजर नहीं आ रहा

2862
03:24:34,080 --> 03:24:37,560
आपका क्योंकि यदि आप सत्य हैं तो सत्य

2863
03:24:37,560 --> 03:24:41,640
वह दिया है जो ऊंचे पहाड़ पर ही क्यों ना हो लेकिन दूर तक

2864
03:24:41,640 --> 03:24:45,720
दिखाई देता है तो लोग आपकी ओर आएंगे यदि आप सत्य हैं तो

2865
03:24:45,720 --> 03:24:49,760
आपको क्यों पड़ रही है लोगों के पास जाकर के निंदा

2866
03:24:49,760 --> 03:24:54,160
करने की सनातन मान बिंदुओं पर इसका मतलब यह है कि आप अपना अवलोकन

2867
03:24:54,160 --> 03:24:58,160
नहीं कर रहे हैं गड़बड़ी आप में एक गालिब का शेर है ना उम्र

2868
03:24:58,160 --> 03:25:02,520
भर गालिब यही खता करते रहा कि आईने पर धूल थी और अपने

2869
03:25:02,520 --> 03:25:07,240
चेहरे पर धू धूल थी और अपने आईना साफ करते रहा

2870
03:25:07,240 --> 03:25:12,000
तो आप अपने चेहरे की धूल क्यों नहीं देख रहे हैं आर समाजी

2871
03:25:12,000 --> 03:25:16,760
कैसे आप इस तरीके से काम करेंगे यदि गौतम खट्टर जी से पूछना

2872
03:25:16,760 --> 03:25:20,840
य आप अवतारवाद में नहीं मानते हैं तो आप धीरन कृष्ण शास्त्री जी के

2873
03:25:20,840 --> 03:25:24,920
मंच पर कर क्या रहे थे वह तो आपके हिसाब से पाखंडी

2874
03:25:24,920 --> 03:25:28,680
है ढोंगी

2875
03:25:28,680 --> 03:25:32,680
है के अनुसार बागेश्वर धाम वाले अधर्मी

2876
03:25:32,680 --> 03:25:37,920
है अधर्मी के साथ सा कर रहे

2877
03:25:37,920 --> 03:25:42,640
अरे य एक मिनट लूगा किसी भी पारंपरिक आचार्य ने

2878
03:25:42,640 --> 03:25:46,720
यह नहीं कहा कि निराकार की पूजा मत गलत है खराब है निंदा

2879
03:25:46,720 --> 03:25:50,760
नहीं की उन्होंने कहा श्रेष्ठतम ये है बेस्ट ये है सब कुछ मगर

2880
03:25:50,760 --> 03:25:55,000
निराकार को भी स्वीकार किया आप कर रहे हो निंदा और

2881
03:25:55,000 --> 03:25:59,040
ऐसी वैसी निंदा नहीं निंदा करते करते भांड और पता नहीं

2882
03:25:59,040 --> 03:26:03,360
क्या कुछ भी नहीं छोड़ रहे जी कंटिन्यू कर आपके मंचों

2883
03:26:03,360 --> 03:26:07,440
पर इतनी अभद्रता प्रस्तुत की जा रही है और आप कह रहे

2884
03:26:07,440 --> 03:26:11,640
हैं कि हमें मिलकर के मिचों से लड़ना है आप तो कई बार अपनी भाषा

2885
03:26:11,640 --> 03:26:15,800
आदि की मर्यादा में इतने उतर जाते हैं जिससे मिले आपके सामने अच्छे

2886
03:26:15,800 --> 03:26:19,800
नजर आ लग जाते आप यह अच्छा नहीं

2887
03:26:19,800 --> 03:26:24,280
कर रहे हैं बड़े सम्मान के साथ में आर्य समाज से कह रहा हूं क्योंकि मैं

2888
03:26:24,280 --> 03:26:28,280
स्वयं यह मानता हूं कि जब तक हम एक नहीं होंगे हम एक विचारधारा

2889
03:26:28,280 --> 03:26:32,400
में नहीं आएंगे तब तक हम अपने शत्रु का ना केवल पहचान पाएंगे तो उसको

2890
03:26:32,400 --> 03:26:36,480
परास्त करने की तो बात दूर की है तो आपको चाहिए कि हम बाध्य

2891
03:26:36,480 --> 03:26:40,720
नहीं कर रहे कि आप लोग हमारी विचारधारा में आइए मूल सनातन की तो आपको

2892
03:26:40,720 --> 03:26:43,680
भी यह कोई हक नहीं दिया

2893
03:26:43,680 --> 03:26:47,960
जाता और मैं इस बात को कई बार देख रहा हूं कि भगोड़े

2894
03:26:47,960 --> 03:26:52,000
विवाह का एक बहुत बड़ा केंद्र जो आपने थोड़ी देर पहले बात की यह बने

2895
03:26:52,000 --> 03:26:56,040
हुए हैं तो आप एक बात बताइए संस्कृति विनाश कर रहा है बॉलीवुड विनाश

2896
03:26:56,040 --> 03:27:00,120
कर रहा है यह हो रहा है वो हो रहा है तो यह भगोड़े विवाह का समर्थन करके

2897
03:27:00,120 --> 03:27:04,240
ना केवल समर्थन उनको करवा करके आप कितनी संस्कृति की रक्षा कर रहे

2898
03:27:04,240 --> 03:27:08,440
हैं कितना ऋषि दयानंद के सपनों का भारत बना रहे हैं आप भगोड़े विवाह करवा

2899
03:27:08,440 --> 03:27:12,600
कर के इसका जवाब आधिकारिक रूप से हर आर्य समाजी को देना

2900
03:27:12,600 --> 03:27:16,760
चाहिए आप बोल रहे हैं कि मिले ऐसे होते हैं मले जिहाद

2901
03:27:16,760 --> 03:27:20,800
करते हैं यह करते हैं वो करते हैं तो मले को आपने ऐसी कौन सी वाशिंग मशीन में डाल

2902
03:27:20,800 --> 03:27:24,960
कर के हिंदू बनाने का क्रम चला रखा है जिसके तहत वो अपने

2903
03:27:24,960 --> 03:27:29,400
इरादों से दूर हो जाता है और आप हिंदू बहन बेटियों की शादी कर देते हैं

2904
03:27:29,400 --> 03:27:33,880
सेम डे आज जाइए आज ही विवाह करिए हिंदू आजही ब ये भी नहीं

2905
03:27:33,880 --> 03:27:38,040
ये भी नहीं डेढ़ साल बाद आना एक साल बाद आना हा

2906
03:27:38,040 --> 03:27:42,880
और एक मेरा प्रश्न है आपको लगता है कि यज्ञ पवित्र स्त्रियों का होना चाहिए

2907
03:27:42,880 --> 03:27:47,240
आप एक बात बताइए हमारी सनातन संस्कृति ने उनको सर से लेकर पा तक 16 श्रंगार

2908
03:27:47,240 --> 03:27:51,320
दिए जिसको आप मानते नहीं एक केवल पुरुष को एक यज्ञ पवित्र

2909
03:27:51,320 --> 03:27:55,680
का अधिकार दिया है वो भी आपको महिलाओं के अधिकार का हनन लग रहा

2910
03:27:55,680 --> 03:27:58,920
आवाज आ रही है किसी के पीछे से आवाज आ र

2911
03:27:58,920 --> 03:28:03,040
है हा जी वो क्योंकि मैं अभी बाहर से आ रहा हूं ना तो

2912
03:28:03,040 --> 03:28:08,120
मैं थोड़ा सा एकांत में आ जाता हूं तो एक पुरुष को यदि

2913
03:28:08,120 --> 03:28:12,160
कोई एक तरीके से अलंकार कहे या उसका संस्कार जो यज

2914
03:28:12,160 --> 03:28:18,160
प संस्कार है वो प्रदान किया गया है वो

2915
03:28:19,000 --> 03:28:23,280
राघव जी राघव जी रुक जाइए आप जो है पहले बोलिए बोलिए

2916
03:28:23,280 --> 03:28:27,600
हा यह महिलाओं के अधिकार का हनन है कि आप यह बोल रहे हैं कि महिलाओं

2917
03:28:27,600 --> 03:28:31,720
का यज्ञ पवित्र का अधिकार नहीं दिया गया 16 श्रंगार

2918
03:28:31,720 --> 03:28:36,240
आपको कम दिख गए लेकिन आपको यज्ञ पवित्र दिख रही है उसकी

2919
03:28:36,240 --> 03:28:40,680
तो यह कैसे आप इस तरीके की बातें कर रहे हैं

2920
03:28:40,680 --> 03:28:44,840
आप किसी पर भी कीचड़ उछाल रहे हैं आपका मंच जो है

2921
03:28:44,840 --> 03:28:48,880
कभी उसने किसी समाज के व्यक्ति पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की

2922
03:28:48,880 --> 03:28:53,160
है ना ही आप करने वाले हैं तो इनको भी अधिकार नहीं बनता

2923
03:28:53,160 --> 03:28:57,400
है नहीं बनता है नहीं बनता है आप वैचारिक मतभेद रखते हैं तो वैचारिक

2924
03:28:57,400 --> 03:29:02,160
मतभेद को लेकर के आइए शास्त्र सम्मत चर्चाएं कीजिए और

2925
03:29:02,160 --> 03:29:06,480
अपने पक्ष को सिद्ध कीजिए आपका यह तो वामपंथी नजरिया

2926
03:29:06,480 --> 03:29:10,480
समझ में आ रहा है कि जब आप निरुत्तर हो गए तो व्यक्तिगत हो गए

2927
03:29:10,480 --> 03:29:14,200
यह तो ओझी मानसिकता का स्वतः प्रमाण है क्या आप निरुत्तर

2928
03:29:14,200 --> 03:29:18,480
होने की अवस्था में किसी पर व्यक्तिगत आ रहे और फिर जब आपके व्यक्तिगत

2929
03:29:18,480 --> 03:29:22,480
जैसे अभी क्लिप चलाई गई आपके व्यक्तिगत बात

2930
03:29:22,480 --> 03:29:26,640
आएगी तब आप क्या बोलेंगे तो जिनके खुद

2931
03:29:26,640 --> 03:29:30,640
के घर शीशे के हो दूसरों के घर पर पत्थर मार रहे तो

2932
03:29:30,640 --> 03:29:34,680
इस तरीके से सबसे महत्वपूर्ण बात

2933
03:29:34,680 --> 03:29:40,440
य है कि इन्होने जो सामग्री हमारी प्रस्तुत की है वो पिछले जीवन की

2934
03:29:40,440 --> 03:29:44,720
है पिछले जीवन की सामग्री है और दूसरी बात य हमने

2935
03:29:44,720 --> 03:29:49,280
उस सामग्री को धर्म रूप में प्रस्तुत भी नहीं किया समाज के

2936
03:29:49,280 --> 03:29:53,440
सामने और सबसे बड़ी बात ये है कि वो सामग्री हम

2937
03:29:53,440 --> 03:29:58,360
खुद प्रस्तुत कर चुके हैं जन सामान्य के समक्ष

2938
03:29:58,360 --> 03:30:02,600
मगर अब हमारे करने में और इनके करने में अंतर क्या आ इतना

2939
03:30:02,600 --> 03:30:06,760
ही ना कि इन्होंने हमको अप्रत्यक्ष रूप से कह दिया कि आपके

2940
03:30:06,760 --> 03:30:11,040
घर की मातृ शक्तियों के चित्र में प्राप्त हो चुके हैं अब सावधान हो

2941
03:30:11,040 --> 03:30:15,120
जाना जी यही तो किया इन्होने भाई मेरे चित्र

2942
03:30:15,120 --> 03:30:19,240
तो पुराने जी हा तो इन्होंने उसमें

2943
03:30:19,240 --> 03:30:24,040
ड क्या किया है कि आपकी फैमिली फैमिली डज मैटर

2944
03:30:24,040 --> 03:30:28,280
ये अब डरेगा अब आवान को डरना पड़ेगा आवान को दबाने के लिए

2945
03:30:28,280 --> 03:30:29,320
उसके घर की मातृ

2946
03:30:29,320 --> 03:30:33,480
शक्तियों को बीच में कहीं से ढूंढ ला अब तुम्हारे घर की मातृ

2947
03:30:33,480 --> 03:30:37,520
शक्ति के चित्र आ चुके हमारे हाथ में अब तुम प्रश्न मत कर देना परंपरा

2948
03:30:37,520 --> 03:30:42,760
क्या है तुम्हारी अब तु प्रश्न मत कर देना कि ईश्वर सतिमान

2949
03:30:42,760 --> 03:30:47,120
कैसे तो ये आप लोगों का भ्रम है कि इस

2950
03:30:47,120 --> 03:30:51,120
गीदड़ भबकी से आहवान रुक जाएगा आहवान और

2951
03:30:51,120 --> 03:30:55,160
डबल आवाज में चिल्ला चिल्ला के पूछेगा वेद मंत्र तुम्हारे पास

2952
03:30:55,160 --> 03:30:59,760
कैसे आए आवाज और डबल आवाज में और ध्वनित होगा

2953
03:30:59,760 --> 03:31:03,920
कि ईश्वर यदि बाधित है यदि वो अवतार नहीं ले सक रहा

2954
03:31:03,920 --> 03:31:08,200
है तो उसको अनंत सामर्थ्य वान क्यों कह रहे हो हटाओ

2955
03:31:08,200 --> 03:31:13,080
उसको अनंत सामर्थ वान से जी राघ जीने

2956
03:31:13,080 --> 03:31:16,280
एक बात कही थी

2957
03:31:16,280 --> 03:31:20,950
ा से सोशल मीडिया से आवान को भागना पड़ेगा अब लगता है इनको भागना

2958
03:31:20,950 --> 03:31:24,600
[हंसी]

2959
03:31:24,600 --> 03:31:29,120
पड़ेगा और एक बात यह भी है सोचो सोच के

2960
03:31:29,120 --> 03:31:33,320
सोच के देखिए जिस व्यक्ति के घर में किसी जिस व्यक्ति के हाथ

2961
03:31:33,320 --> 03:31:37,320
में किसी के घर की किसी की व्यक्तिगत फोटो आ गई तो वह यह

2962
03:31:37,320 --> 03:31:41,960
सोचने लगा इसके दम पर हम इसका अभियान कुछ लेंगे सोचिए

2963
03:31:41,960 --> 03:31:46,160
हमारे पनल आप तो जानते हैं राघव जी हमारे जो

2964
03:31:46,160 --> 03:31:50,160
वो होते हैं जो ग्रुप होते हैं जहां पर हम लोग यह जो कार्यकारणी समिति

2965
03:31:50,160 --> 03:31:54,280
आपस में चर्चा करती है कोई नहीं है व पर सब विश्वास

2966
03:31:54,280 --> 03:31:58,360
विश्वसनीय लोग है हमारी वहा पर बात देखि कहीं पर कोई उपास उड़

2967
03:31:58,360 --> 03:32:02,720
भी रहा होता है विरोधी तंत्रों के किसी व्यक्ति का तुरंत उस पर आवाज

2968
03:32:02,720 --> 03:32:06,720
उठा दी जाती है नहीं इस तरह के व्यक्तिगत कटाक्ष हमें नहीं

2969
03:32:06,720 --> 03:32:10,800
करने हम हमारे पास सिद्धांत है सिद्धांतों की लड़ाई लड़ेंगे

2970
03:32:10,800 --> 03:32:12,960
हम

2971
03:32:12,960 --> 03:32:17,360
क्यों बकुल इनको यह मतलब सोचिए

2972
03:32:17,360 --> 03:32:22,000
व्यक्ति अपनी जीत किसम सोच रहा है कि मेरे घर मेरे हाथ में किसी की मात

2973
03:32:22,000 --> 03:32:26,160
किसी के घर की मातृ शक्ति का चित्र है ये मले नहीं तो और कौन

2974
03:32:26,160 --> 03:32:30,560
है ये लोग बिल्कुल यह

2975
03:32:30,560 --> 03:32:34,600
तो अपनी हार खुद ही एक तरीके से स्वीकार करना है बस कह

2976
03:32:34,600 --> 03:32:38,600
नहीं रहे मान नहीं रहे कि हम हार गए हैं क्योंकि व्यक्तिगत होना ही य दर्शा रहा है

2977
03:32:38,600 --> 03:32:39,680
कि आपके विचारों

2978
03:32:39,680 --> 03:32:43,760
पर ताला लग गया है वैचारिक रूप से आपका शीघ्र पतन

2979
03:32:43,760 --> 03:32:48,480
हो चुका है अब आप व्यक्तिगत आकर के

2980
03:32:48,480 --> 03:32:52,960
किसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भारत देश की सनातनी

2981
03:32:52,960 --> 03:32:56,960
हिंदू जनता इनके सरी की मूर्ख नहीं

2982
03:32:56,960 --> 03:33:00,960
मैं सभी आर्य समाज हों को नहीं कह रहा हूं जिन्होंने पटाक्षेप किए हैं उनको

2983
03:33:00,960 --> 03:33:05,120
मैं इंगित करके कह रहा हूं तो इस तरीके की ओछी

2984
03:33:05,120 --> 03:33:09,880
हरकतें आप छोड़िए और

2985
03:33:09,880 --> 03:33:13,920
यह लोग जो बात करते हैं मेरा इनसे एक बात एक मेरा थोड़े दिन

2986
03:33:13,920 --> 03:33:18,120
पहले का जैसे कुछ लोगों ने अपने अपने संस्मरण सुना आर समा जीयों से मैं

2987
03:33:18,120 --> 03:33:22,680
भी पिछले कुछ वर्षों से इनसे चर्चा रत हूं तो

2988
03:33:22,680 --> 03:33:26,880
एक व्यक्ति था नाम तो अभी मुझे याद भी नहीं आ रहा वो पतंजलि योगपीठ

2989
03:33:26,880 --> 03:33:30,880
में पड़ता है मेरी आवाज ठीक आ रही है ना बहुत

2990
03:33:30,880 --> 03:33:35,120
बढ़िया तो उसने किसी मेरी एक पोस्ट

2991
03:33:35,120 --> 03:33:39,280
पर मेरे व्यक्तिगत ट पर आ गया वो और वो

2992
03:33:39,280 --> 03:33:43,360
कहने लगा वही जाति को लेकर के प्रश्न करने लगा

2993
03:33:43,360 --> 03:33:47,400
तो बहुत सारी बातें हुई मैं सब कहना अभी संभव नहीं है मैं डिटेल में नहीं कहना

2994
03:33:47,400 --> 03:33:51,560
चाहूंगा मैं मोटी मोटी बात बताता हूं जब एक आपको

2995
03:33:51,560 --> 03:33:54,680
सभी को जो उपस्थित है हमारे बंधुओ सब

2996
03:33:54,680 --> 03:33:58,680
जानते हैं कि हम लोग किस तरीके से वर्ण व्यवस्था को

2997
03:33:58,680 --> 03:34:02,720
प्रस्तुत करते हैं जो उसका शास्त्रीय पक्ष है उसी को प्रकट करते हैं तो उसी प्रकार से

2998
03:34:02,720 --> 03:34:06,760
मैंने प्रकट किया तो मैंने उससे यह कहा

2999
03:34:06,760 --> 03:34:10,760
और अभी मैं यहां इस माध्यम से इस पटल पर सभी

3000
03:34:10,760 --> 03:34:14,840
आर्य समाज हों को यह कहना चाहता हूं कि हम सनातनी तो

3001
03:34:14,840 --> 03:34:19,200
हमारे शूद्र अंतेज भाई को अपना भाई मानते हैं लेकिन

3002
03:34:19,200 --> 03:34:23,800
आपको इतनी उससे नफरत क्या है उस

3003
03:34:23,800 --> 03:34:28,280
उसके शब्द से उसके अस्तित्व से इतनी नफरत क्या है कि आप उसे उसके अस्तित्व

3004
03:34:28,280 --> 03:34:32,400
से मिटा देना चाहते हैं आप उसे वो नहीं रहने देना चाहते जो वो है और

3005
03:34:32,400 --> 03:34:36,560
और कुछ बना देना चाहते हैं जबकि आप ही कहते हैं कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता

3006
03:34:36,560 --> 03:34:40,560
और कर्मणा ही सही आप चारों वर्णों के काम को स्वीकार कर रहे हैं तो

3007
03:34:40,560 --> 03:34:44,840
आप क्या उनके हिस्से का काम करने वाले बांग्लादेश और पाकिस्तान

3008
03:34:44,840 --> 03:34:49,000
से इंपोर्ट करेंगे क्या आपको उनके अस्तित्व

3009
03:34:49,000 --> 03:34:53,160
से इतनी नफरत क्यों है मैं सभी आ समा से बोल रहा ये प्रश्न मैंने कई

3010
03:34:53,160 --> 03:34:57,360
अपने वीडियोस में इनके साथ जो सेशन हुए उसमें जा

3011
03:34:57,360 --> 03:35:01,400
जा करके पूछा कि आर समाज में आज तक कितने लोगों को शूद्र के रूप

3012
03:35:01,400 --> 03:35:05,560
में स्वीकार किया है मगर एक भी नहीं मिलेगा जिनको इन्होने

3013
03:35:05,560 --> 03:35:09,720
सूद का सर्टिफिकेट दिया हो क्योंकि आर्य समाजी व्यक्ति बनता ही इस शर्त

3014
03:35:09,720 --> 03:35:12,840
प है कि हम तुम्ह ब्राह्मण

3015
03:35:12,840 --> 03:35:16,880
बनाएंगे समाज जही करसे जैसे क्रिश्चन

3016
03:35:16,880 --> 03:35:20,880
मिशनरीज में होता है कि भाई यहां पर तुम्ह वो चीज नहीं मिल रही है देखो देखो तुम्हारे साथ

3017
03:35:20,880 --> 03:35:24,960
ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है उसके जहर भर देते हैं और फिर उसको यहां पर देखो य

3018
03:35:24,960 --> 03:35:28,960
ये तुम्हारे साथ य होगा तो व्यक्ति अलंकार समाज को जॉइन ही उस तरीके

3019
03:35:28,960 --> 03:35:33,080
से कर रहा है ना कि तुमको जो है हम ये कर देंगे तुम्हारे पास अभी ये नहीं है

3020
03:35:33,080 --> 03:35:37,200
देखो तो पहले समस्या को पैदा करना जन्म देना और फिर

3021
03:35:37,200 --> 03:35:41,440
उस समस्या को चिपका देना पहले समस्या बनाई गायत्री

3022
03:35:41,440 --> 03:35:45,840
मंत्र पढ़ना पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा गायत्री मंत्र पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा

3023
03:35:45,840 --> 03:35:50,440
वेद को डायरेक्ट पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा वेद को डायरेक्ट पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा

3024
03:35:50,440 --> 03:35:54,520
फिर उस समस्या को एक विशेष वर्ग से चिपका दिया गया देखो देखो वो

3025
03:35:54,520 --> 03:35:58,680
इतनी इंपोर्टेंट चीज तुमसे छ जो है दूर कर रहे

3026
03:35:58,680 --> 03:36:03,000
है वो इतनी इंपोर्टेंट चीज वो समस्या थी ही नहीं उस समस्या को जन्म

3027
03:36:03,000 --> 03:36:07,200
दिया और फिर उस समस्या को जोड़ दिया जी जी हा

3028
03:36:07,200 --> 03:36:11,280
और इनसे मैं कहना चाहता हूं आज गगल का दौर चल रहा है

3029
03:36:11,280 --> 03:36:15,360
तो हर व्यक्ति का जो सबसे समीप का स्रोत है किसी

3030
03:36:15,360 --> 03:36:19,640
भी चीज को जानने के लिए व है गल आर्य समाजी भी गल करते

3031
03:36:19,640 --> 03:36:23,840
हैं उनसे मैं कहना चाहता हूं सभी आर्य समाजी जिन तक य

3032
03:36:23,840 --> 03:36:25,280
मेरी बात जा रही है

3033
03:36:25,280 --> 03:36:29,280
गल पर कास्ट पिरामिड एक बार टाइप कीजिए अंग्रेजी या हिंदी में एक बार

3034
03:36:29,280 --> 03:36:33,360
फिर कह रहा हूं कास्ट पिरामिड तो पिरामिड से ही हमको समझ

3035
03:36:33,360 --> 03:36:38,200
में आ रहा है कि एक त्रिकोण का एक आकृति आएगी तो

3036
03:36:38,200 --> 03:36:43,160
सबसे जो ऊपर टॉप है वह ब्राह्मण फिर क्षत्रिय फिर वैश्य फिर शूद्र

3037
03:36:43,160 --> 03:36:47,240
यानी कास पिरामिड यह दिखाता है कि ब्राह्मण की संख्या सबसे कम फिर

3038
03:36:47,240 --> 03:36:51,280
उससे ज्यादा क्षत्रिय वैश्य और सबसे ज्यादा शूद्र की ऐसा इसलिए

3039
03:36:51,280 --> 03:36:55,520
है पिरामिड में ही उसे शो इसलिए किया जा रहा है क्योंकि

3040
03:36:55,520 --> 03:36:59,880
जिस प्रकार से चारों वर्णों की उपलब्धता एक सफल समाज को चाहिए

3041
03:36:59,880 --> 03:37:04,360
उस हिसाब से उनकी संख्या को पिरामिड के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है

3042
03:37:04,360 --> 03:37:08,400
तो जब आप इतने ब्राह्मण बना देंगे तो फिर ब्राह्मण इतने

3043
03:37:08,400 --> 03:37:12,560
सारे एक दूसरे को पढ़ाएंगे क्या एक 100 एक कक्षा में

3044
03:37:12,560 --> 03:37:16,600
यदि 50 100 विद्यार्थी उस पर एक शिक्षक पर्याप्त होता है पर जब आप

3045
03:37:16,600 --> 03:37:21,520
इतने सारे ब्राह्मणों की फौज खड़ी कर देंगे तो बाकी का काम क्या होगा

3046
03:37:21,520 --> 03:37:25,720
मतलब कि आप यह चाह रहे हैं कि जो विदेशी शक्तियों से विगत

3047
03:37:25,720 --> 03:37:29,880
2000 ढाई ज वर्षों से सनातनी लोहा ले रहे हैं और जीत रहे

3048
03:37:29,880 --> 03:37:33,960
हैं वह एक तल में ही हार जाए तो आप चाहते क्या है

3049
03:37:33,960 --> 03:37:38,200
आप शत्रु हैं हमारे या आप हमारे ही सनातनी

3050
03:37:38,200 --> 03:37:40,440
है गौतम टट्टर जी जरा

3051
03:37:40,440 --> 03:37:44,520
इस बात को सोचिए आप लोग चाहते क्या है और वो

3052
03:37:44,520 --> 03:37:48,560
जो सहरावत बहन जिनका मैंने अभी गाना भी देखा तो जरा थोड़ा

3053
03:37:48,560 --> 03:37:52,800
सा गुनगुनाए अपने मन में क्या रहे उनका

3054
03:37:52,800 --> 03:37:56,840
परिचय प्राप्त नहीं है वो हमने संकेता मक दिखाया था वो जरूरी नहीं है

3055
03:37:56,840 --> 03:38:01,200
जो आप नाम ले रहे उन्ही का हो वो केवल एक दश्य मात्र था

3056
03:38:01,200 --> 03:38:05,680
समझना हो वो समझे हा मैं

3057
03:38:05,680 --> 03:38:09,840
इस नहीं देते वो जो आपने नाम लिया हम इस बात

3058
03:38:09,840 --> 03:38:15,600
की प्रामाणिकता नहीं देते वो जो आपने नाम लिया वो वयो उन्ही का था

3059
03:38:15,600 --> 03:38:20,320
और मैं भी अपने शब्द इस और से वापस लेता हूं यदि इसमें अस्पष्टता

3060
03:38:20,320 --> 03:38:24,520
है तो जब तक हम लोग क्योंकि स्पष्ट नहीं होते तब तक हम किसी व्यक्ति विशेष

3061
03:38:24,520 --> 03:38:28,840
का नाम तक लेना पसंद नहीं करते हमारी विचारधारा नहीं कहती और हमारे परंपरा प्राप्त

3062
03:38:28,840 --> 03:38:33,640
गुरुओं ने हमें ये नहीं सिखाया तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं लेकिन जो भी है

3063
03:38:33,640 --> 03:38:37,880
तो जरा विचार कीजिए कि आप जा कहां रहे हैं

3064
03:38:37,880 --> 03:38:41,920
आज बहुत सारे विद्वान अपने आप को कहने वाले समझने वाले जो

3065
03:38:41,920 --> 03:38:46,520
हिंदू हित चिंतक हैं ढेरों चैनल बनाकर बैठे हैं न्यूज चैनल पर जाते हैं

3066
03:38:46,520 --> 03:38:50,720
वो भी इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कास्ट सिस्टम जाति व्यवस्था

3067
03:38:50,720 --> 03:38:54,800
जरूरी है या नहीं और जब तक यह थी तब तक

3068
03:38:54,800 --> 03:38:55,560
धर्मांतरण

3069
03:38:55,560 --> 03:38:59,760
नहीं हो पाया वरना जो मलेच्छ जो लोग थे वह जिस

3070
03:38:59,760 --> 03:39:03,960
भी देश में गए 30 40 साल में उन्होंने वहां की समूल संस्कृति का नाश करके

3071
03:39:03,960 --> 03:39:07,960
वहां पर अपने अपने मंथ मत और मजहब का झंडा गाड़

3072
03:39:07,960 --> 03:39:12,320
दिया पर इस भारत में नहीं कर पाए क्योंकि हमारे

3073
03:39:12,320 --> 03:39:16,440
यहां हम जाति के रूप में विभाजित नहीं बल्कि माला के रूप में एक

3074
03:39:16,440 --> 03:39:21,120
तार में पिरोए हुए हैं हम वी आर इंटरडिपेंडेंट

3075
03:39:21,120 --> 03:39:25,240
ऑन ईच अदर किसी भी जाति का दूसरी जाति के बगैर काम

3076
03:39:25,240 --> 03:39:29,400
ही नहीं चल सकता है तो इतना प्यारे जो हम पिरोए हुए

3077
03:39:29,400 --> 03:39:33,640
हैं उसको तोड़ने का काम आप क्यों कर रहे हैं और यदि आप तोड़ने

3078
03:39:33,640 --> 03:39:37,800
का काम कर रहे हैं तो हम आपसे कारण पूछ रहे हैं कि ठीक है आप तोड़ रहे हैं तो फिर

3079
03:39:37,800 --> 03:39:41,800
कोई विकल्प होगा आपके पास चलो हम उसे मानते हैं पर आपके पास विकल्प कुछ है

3080
03:39:41,800 --> 03:39:45,800
नहीं और आपकी ही विचारधारा चल रही है जब से इस

3081
03:39:45,800 --> 03:39:50,080
देश में आए हैं कि कर्मणा ही व्यवस्था इस देश में चल रही है तो फिर भ्रष्टाचार का अराजकता

3082
03:39:50,080 --> 03:39:54,320
का अन्याय का रोना हम क्यों पीट रहे हैं हर जनता त्राहिमाम

3083
03:39:54,320 --> 03:39:58,520
क्यों कर रही है भारत की भारत की मेधा शक्ति बाहर क्यों

3084
03:39:58,520 --> 03:40:02,560
जा रही है आप ही की व्यवस्था चल रही है ना आज एजुकेशन

3085
03:40:02,560 --> 03:40:06,720
डिपार्टमेंट में हर ब्राह्मण नहीं आज डिफेंस सेक्टर में हर क्षत्रिय नहीं

3086
03:40:06,720 --> 03:40:11,040
हर इकोनॉमिकल सेक्टर में हर वैश्य नहीं हर सर्विस सेक्टर में हर शूद्र नहीं

3087
03:40:11,040 --> 03:40:15,640
फिर यह गड़बड़ क्यों लेकिन हमारा इतिहास आप पाच

3088
03:40:15,640 --> 03:40:19,680
साल पुराना भी माने तो आप ही लोग कहते हैं सोने की चिड़िया मुझे तो इतनी

3089
03:40:19,680 --> 03:40:23,960
नफरत है सोने की चिड़िया शब्द से क्योंकि यह हमारे देश में आतंक

3090
03:40:23,960 --> 03:40:28,280
फैलाने वाले लोगों ने सोने की चिड़िया नाम दिया हमारी

3091
03:40:28,280 --> 03:40:32,520
भारत मातृभूमि है मेरी मां को कोई चिड़िया कहे उसकी जवान खींच लूंगा

3092
03:40:32,520 --> 03:40:36,520
इसलिए आतताई हों का दिया हुआ शब्द है कि सोने की चिड़िया

3093
03:40:36,520 --> 03:40:40,560
लेकिन यदि आप इसे सोने की चिड़िया कह रहे हैं तो वह जो स्वर्ण दौर आप मान रहे

3094
03:40:40,560 --> 03:40:44,560
हैं उसमें तो जाति व्यवस्था वैसी ही थी जो शास्त्र सम्मत है तो जब

3095
03:40:44,560 --> 03:40:48,640
वो स्वर्ण था उसे मिटाने के आप लगे क्यों हुए

3096
03:40:48,640 --> 03:40:52,720
हैं और फिर आप देख ही रहे हैं परिणाम देख रहे इतने सालों से

3097
03:40:52,720 --> 03:40:56,760
क्या मिल रहा है आपको कि संधी दौड़ में जी रहे हैं

3098
03:40:56,760 --> 03:41:01,360
आप मन बहलाने को गाली भी ख्याल अच्छा है

3099
03:41:01,360 --> 03:41:05,440
मंचों पर खून उबालने के लिए बहुत सारे भाषण दे देना

3100
03:41:05,440 --> 03:41:10,320
उच्चा आदर्शवाद की बात कर लेना हमारे पूज्य गुरुदेव पूरी महाराज जी यह कहते हैं

3101
03:41:10,320 --> 03:41:14,840
कि जब हम शास्त्र का अतिरेक करके अति आदर्शवाद

3102
03:41:14,840 --> 03:41:18,840
में जाते तो उसके गर्भ से वामपंथ निकल आता है तो यही हो

3103
03:41:18,840 --> 03:41:22,840
रहा है वामपंथ का शाब्दिक अर्थ भी देखें तो मूल धारा से

3104
03:41:22,840 --> 03:41:26,600
विपरीत धारा में चलना यही हो रहा है

3105
03:41:26,600 --> 03:41:30,800
तो आप समझिए ना हम यह तो नहीं कह रहे कि हमारे शंकराचार्य को आप गुरु

3106
03:41:30,800 --> 03:41:35,040
मानिए जबक वोह तो सार्वभौम जगतगुरु है लेकिन यदि आप बुद्धिमान

3107
03:41:35,040 --> 03:41:39,400
है तो उनके द्वारा कही गई कोई अच्छी बात ग्राह्य नहीं है क्या

3108
03:41:39,400 --> 03:41:43,480
क्या आपके गुरुओं ने जिनको भी आप गुरु मानते हैं दयानंद जी को मानते हैं क्या उन्होंने

3109
03:41:43,480 --> 03:41:47,520
यह शिक्षा नहीं दी यदि नहीं द है तो फिर इस पर आप विचार कीजिए

3110
03:41:47,520 --> 03:41:51,880
हम कुछ नहीं कहेंगे जी भैया कहिए आप प्रवीण

3111
03:41:51,880 --> 03:41:56,240
जी जो अभी आ गए थे वो कुछ टिप्पणी की थी उन्होंने अलंकार समाज

3112
03:41:56,240 --> 03:42:02,240
का जो ग्रंथ है उस पर और जी

3113
03:42:03,040 --> 03:42:07,800
की मैं थोड़ा सा चलते हुए बात कर रहा हूं इसलिए मेरी थोड़ी आवाज में आपको

3114
03:42:07,800 --> 03:42:13,280
वो हो रहा होगा आप म्यूट कर लीजिए

3115
03:42:13,280 --> 03:42:17,440
और प्रवीण जी संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं वो जुड़ नहीं पा रहे

3116
03:42:17,440 --> 03:42:21,560
उन्होंने इनके ग्रंथ पर आर्य समाज के ग्रंथ पर कोई टिप्पणी की थी वो उनकी

3117
03:42:21,560 --> 03:42:25,720
बात अधूरी रह गई थी वो बता रहे हैं कि वो इस वो बोल

3118
03:42:25,720 --> 03:42:29,720
रहे थे कि सत्या प्रकाश को हटा देना चाहिए या उस पर प्रतिबंध लग

3119
03:42:29,720 --> 03:42:33,760
जाना चाहिए इस बिहाव पर क्योंकि वह लोग ऐसा बोलते हैं कि पुराणों

3120
03:42:33,760 --> 03:42:37,880
पर प्रतिबंध लग लग जाना चाहिए वह इस तरह की टिप्पणी

3121
03:42:37,880 --> 03:42:42,040
देते हैं अलंकार समाधि इसलिए वह यह बात पूरी नहीं कर पाए थे उससे

3122
03:42:42,040 --> 03:42:46,880
पहले चले गए इसलिए वो हमें संपर्क कर रहे हैं और और

3123
03:42:46,880 --> 03:42:50,880
मैं एक बात यह कहूंगा कि जो बात मैंने अभी बीच में भी कही

3124
03:42:50,880 --> 03:42:54,120
थी कि यदि

3125
03:42:54,120 --> 03:42:58,200
शूद्र यदि सबको सबकी इच्छा अनुसार कर दिया जाए वो ठीक है कोई बात

3126
03:42:58,200 --> 03:43:02,760
नहीं मगर जो तंत्र कर्मणा वर्ण व्यवस्था मानते हैं उनकी कर्मा

3127
03:43:02,760 --> 03:43:07,080
वर्ण व्यवस्था का पसान किसम होता है यह वो लोग नहीं बताते और

3128
03:43:07,080 --> 03:43:11,240
परवन मतलब उसकी उपयोगिता क्या है व तो कभी बताते ही नहीं है अच्छा

3129
03:43:11,240 --> 03:43:15,440
उसकी उपयोगिता ना बताने पर भी उससे आने वाली जो विकृतियां उनको हमने कई बार डिस्कस

3130
03:43:15,440 --> 03:43:18,240
किया है वो आज का टॉपिक है नहीं वैसे मगर फिर

3131
03:43:18,240 --> 03:43:22,280
भी प्रश्न य आ जाता है कि यदि आप बनाते हैं तो चारों को बनाते

3132
03:43:22,280 --> 03:43:26,680
हैं या केवल एक को बनाते हैं यह प्रश्न आ जा अब मैं

3133
03:43:26,680 --> 03:43:30,800
एक एक व्यक्ति और रह गया है मैं बता

3134
03:43:30,800 --> 03:43:35,000
दूं कुछ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि वो जो माता शक्ति जिसका ठुमका आप लोगों ने देखा वो

3135
03:43:35,000 --> 03:43:37,880
क्या था क्या नहीं

3136
03:43:37,880 --> 03:43:41,880
था हम नहीं जानते कि किसने हमारे ऊपर कहां पर कौन

3137
03:43:41,880 --> 03:43:46,600
सी लाइव स्ट्रीम की है य पर हम नहीं जानते

3138
03:43:46,600 --> 03:43:50,840
और जिन नामों को वहां पर उद्धृत किया गया है वोह

3139
03:43:50,840 --> 03:43:55,040
वाकई में वो लोग थे जिनको बोलने वाले वही थे जिनका नाम वहां

3140
03:43:55,040 --> 03:43:59,120
पर लिखा है या लोगों ने हमें बताया है तो यदि

3141
03:43:59,120 --> 03:44:03,120
जो जिसने वहां पर ऐसा किया है जो हमें हमारे

3142
03:44:03,120 --> 03:44:07,200
घर की मातृ शक्तियों की छवि वहां प्रस्तुत करके हमको धमकाने

3143
03:44:07,200 --> 03:44:11,280
का प्रयास रोकने का प्रयास सैद्धांतिक विषय पर बात ना करने का प्रयास

3144
03:44:11,280 --> 03:44:15,680
जिसने किया है यह उससे संबंधित चलचित्र था

3145
03:44:15,680 --> 03:44:19,680
जो आपको यहां प्रस्तुत किया गया है तो वो आप लोग अपना खुद

3146
03:44:19,680 --> 03:44:24,320
अन जो वो है परीक्षण जांच करें कि वह कौन थे

3147
03:44:24,320 --> 03:44:28,800
मगर हमने यह बताया है कि भाई ऐसे भी लोग हैं

3148
03:44:28,800 --> 03:44:33,120
जो स्वयं को शास्त्रो चित और बहुत बड़े वैदिक और संस्थाए

3149
03:44:33,120 --> 03:44:33,620
चलाने

3150
03:44:33,440 --> 03:44:37,760
वाले कहते हैं मगर वास्तविकता में वो सड़क

3151
03:44:37,760 --> 03:44:41,880
पर नाच रहे हैं और क्यों नाच रहे हैं अपने आप को क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं सड़क पर नाच

3152
03:44:41,880 --> 03:44:45,880
नाच कर क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं क्योंकि

3153
03:44:45,880 --> 03:44:50,600
उनको क्या चाहिए फेम चाहिए

3154
03:44:50,600 --> 03:44:55,320
फेम चाहिए फेम तो

3155
03:44:55,320 --> 03:44:59,760
संभ्रांत घर की स्त्रियां कभी इस तरह से सड़क पर नहीं नाचती है

3156
03:44:59,760 --> 03:45:03,840
और जो कुछ निजी सामग्री आपको प्राप्त हुई हमने

3157
03:45:03,840 --> 03:45:07,960
बताया पहले की है हम खुद उसको धर्म उचित स्वीकार नहीं करते

3158
03:45:07,960 --> 03:45:11,960
शास्त्र उचित स्वीकार नहीं करते और वह हमारी जानकारी के बाहर भी

3159
03:45:11,960 --> 03:45:16,240
शेयर हुई है यह भी हम जांच का विषय है इस जांच कर रहे हैं

3160
03:45:16,240 --> 03:45:20,320
कि वो प्राप्त कैसे हुई है और उसमें यथा योग्य जो भी

3161
03:45:20,320 --> 03:45:24,360
आज का जो लौकिक संविधान है उसके अनुसार कारवाई भी की जाएगी तो आप लोग इस

3162
03:45:24,360 --> 03:45:28,400
बात में भी ना रहे है ना अच्छा अब

3163
03:45:28,400 --> 03:45:32,520
एक बात आ जाती है उस भीड़ में वो जो तुचो की भीड़

3164
03:45:32,520 --> 03:45:36,880
थी वो जहां पर एक किसी के घर की मान मर्यादा को

3165
03:45:36,880 --> 03:45:40,960
इस तरह से रखा जा रहा था चर्चा का विषय

3166
03:45:40,960 --> 03:45:45,040
बना कर के उन टचो की भीड़ में एक व्यक्ति और था

3167
03:45:45,040 --> 03:45:49,560
जो अपने आप को कहता है कलयुग का

3168
03:45:49,560 --> 03:45:53,640
योगी ऐसा कुछ कहता है तो अब वो वही

3169
03:45:53,640 --> 03:45:57,720
था जो वहां पर था या नहीं था ये हमें बताया गया है कि कलयुग के

3170
03:45:57,720 --> 03:46:02,000
योगी के नाम से भी एक कोई व्यक्ति उच्चा था जो क्या बात बोल रहा है वहां पर

3171
03:46:02,000 --> 03:46:06,400
कि भाई महाभारत में कहीं पर ये कहा गया

3172
03:46:06,400 --> 03:46:10,560
है कि अ जो धर्म

3173
03:46:10,560 --> 03:46:16,080
है वो भी समय के साथ-साथ परिवर्तित होना चाहिए तो

3174
03:46:16,080 --> 03:46:20,400
पहले मैं आप लोगों की तीनों की इसमें वो ले लू राय कि यह जो वक्तव्य

3175
03:46:20,400 --> 03:46:24,480
है कितना मतलब इसकी इसका क्या अस्तित्व

3176
03:46:24,480 --> 03:46:28,640
है इस वक्तव्य का कि जो धर्म है उसे

3177
03:46:28,640 --> 03:46:32,680
भी समय के साथ-साथ वो भी परिवर्तित होना चाहिए और इसका आलंबन वो उन

3178
03:46:32,680 --> 03:46:37,000
शास्त्रों से ले रहा है शास्त्रों के आलंबन से बात कह रहा है तो इसमें

3179
03:46:37,000 --> 03:46:41,080
मैं अपनी बात अंत में रखूंगा कि अगर शास्त्र में

3180
03:46:41,080 --> 03:46:45,160
वोह बात खी है तो उसका क्या अर्थ निकालना पड़ेगा क्या और क्यों

3181
03:46:45,160 --> 03:46:49,440
उसका वही अर्थ सही होगा वो बाद में रखूंगा और क्याक तार्किक उसमें दिक्कतें

3182
03:46:49,440 --> 03:46:53,480
आएंगी और कैसे आप संसार के सबसे महान

3183
03:46:53,480 --> 03:46:57,600
तुच्छ व्यक्ति नीच व्यक्ति सिद्ध होंगे हीन आचरण करने वाले

3184
03:46:57,600 --> 03:47:02,520
यह मैं अंत में रखूंगा पर पहले इस वक्तव्य पर मैं आप तीनों की जो

3185
03:47:02,520 --> 03:47:06,560
विचार है वो लेना

3186
03:47:06,560 --> 03:47:11,320
चाहूंगा पंडित जी

3187
03:47:11,320 --> 03:47:17,200
बताइए पंडित जी सुन रहे हैं

3188
03:47:17,200 --> 03:47:22,080
अच्छा ठीक है युगल किशोर जी आप बताइए

3189
03:47:22,080 --> 03:47:26,280
जी नारायण तो यह जो इन्होंने बात कही है महाभारत से

3190
03:47:26,280 --> 03:47:30,440
प्रमाण देकर के कि जो धर्म है वह समय समय

3191
03:47:30,440 --> 03:47:34,760
पर बदलना चाहिए तो धर्म समय समय पर बदलना चाहिए धर्म

3192
03:47:34,760 --> 03:47:39,120
में क्या परिवर्तन आना चाहिए यह निश्चित कौन

3193
03:47:39,120 --> 03:47:43,240
करेगा यह निश्चित कौन करेगा कि धर्म में क्या परिवर्तन आना चाहिए

3194
03:47:43,240 --> 03:47:47,240
यदि हमारे पास वेदा आदि शास्त्र हैं व्यास जी नेने जिस महाभारत

3195
03:47:47,240 --> 03:47:51,480
की रचना की है तो व्यास जी ने यह भी लिखा होगा कि इस युग

3196
03:47:51,480 --> 03:47:55,800
में इस धर्म को इस तरीके से मानना पड़ेगा जिस प्रकार से सतयुग में बोला

3197
03:47:55,800 --> 03:48:00,040
गया कि सतयुग में व्यक्ति तपस्या करता है द्वापर में यज्ञ करता

3198
03:48:00,040 --> 03:48:04,320
है फिर कलयुग के अंदर आकर के वो नाम जप से उसको वो सिद्धि

3199
03:48:04,320 --> 03:48:08,320
प्राप्त हो जाती है अर्च विग्रह की सेवा आदि भी युग में बताई

3200
03:48:08,320 --> 03:48:12,400
गई है तो सतयुग में यह धर्म है फिर त्रेता

3201
03:48:12,400 --> 03:48:16,560
में यह धर्म है द्वापर में अमुक धर्म है और कलयुग में अमुक धर्म है जब

3202
03:48:16,560 --> 03:48:20,560
चारों में अमुक अमुक धर्म की बात आ रही है तो वहां पर वह निश्चित कौन कर

3203
03:48:20,560 --> 03:48:21,720
रहा है वो निश्चित

3204
03:48:21,720 --> 03:48:25,840
महाभारत को लिखने वाले व्यास जी कर रहे हैं आप और हम जैसे साधारण

3205
03:48:25,840 --> 03:48:30,200
लोग नहीं कर रहे हैं कि कहां पर क्या चेंजेज होनी चाहिए यदि

3206
03:48:30,200 --> 03:48:34,520
आज के दौर में आज आज भी आप देख लीजिए य यदि

3207
03:48:34,520 --> 03:48:38,760
आज की जो लौकिक पढ़ाई है उसके अंदर यदि सीबीएससी की परीक्षा होगी

3208
03:48:38,760 --> 03:48:42,840
उसमें क्या-क्या चेंजेज होने चाहिए यदि यूपीएससी की परीक्षा होगी उसमें

3209
03:48:42,840 --> 03:48:46,960
क्या-क्या चेंजेज होने चाहिए वो कौन डिसाइड करेगा वो पढ़ने वाला

3210
03:48:46,960 --> 03:48:50,960
व्यक्ति डिसाइड करेगा या फिर पढ़ाने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा

3211
03:48:50,960 --> 03:48:55,040
ना पढ़ने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा ना पढ़ाने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा जो ऊपर

3212
03:48:55,040 --> 03:48:59,240
उच्च अधिकारी बैठा हुआ है जिसके द्वारा यह सारा कार्य संचालित

3213
03:48:59,240 --> 03:49:03,320
किया जा रहा है जहां से यह सारा कार्य आ रहा है वह इस बात

3214
03:49:03,320 --> 03:49:07,680
को निश्चित करेगा कि यहां पर क्या चेंजेज होनी चाहिए

3215
03:49:07,680 --> 03:49:11,880
जो सीबीएससी का सिलेबस चेंज होता है हर साल वो कहां से चज हो करके

3216
03:49:11,880 --> 03:49:16,120
आता है तो जो शास्त्रों के अंदर चेंज होंगी

3217
03:49:16,120 --> 03:49:20,240
बातें उनको कौन बताने वाला है उनको व्यास जी बताने

3218
03:49:20,240 --> 03:49:24,520
वाले हैं उनको अधिकार प्राप्त है कि का किस जगह पर

3219
03:49:24,520 --> 03:49:28,520
क्या करना है क्या नहीं करना है जैसे महाभारत के अंदर भीष्म

3220
03:49:28,520 --> 03:49:33,360
पितामह ने युधिष्ठिर जी को नाना जो

3221
03:49:33,360 --> 03:49:36,920
किस जाति से कौन सी संतान उत्पन्न होगी वह बताया

3222
03:49:36,920 --> 03:49:41,080
वर्ण शंकर तो इस अमुक जाति से अमुक

3223
03:49:41,080 --> 03:49:45,120
जाति उत्पन्न हो जाएगी यदि ब्राह्मण क्षत्रिय का समागम होता है तो सूत जाति उत्पन्न

3224
03:49:45,120 --> 03:49:51,120
होती है जो सारथी का कार्य करती है इत्यादि बातें जो है भीष्म

3225
03:49:54,200 --> 03:49:58,200
पितामास कि आप इंटरकास्ट जो

3226
03:49:58,200 --> 03:50:02,600
मैरिज है वह मत करिए तो यह बात कौन निश्चित करेगा

3227
03:50:02,600 --> 03:50:06,640
कौन बताएगा इसको जहां पर भगवान ये कह रहे हैं श्रुति स्मृति

3228
03:50:06,640 --> 03:50:10,800
मम वाजा यतो लंग वर्तते भगवान कह रहे हैं कि श्रुति और

3229
03:50:10,800 --> 03:50:14,960
स्मृति दोनों मेरी आज्ञा है भाई यदि इसको तुम उल्लंघन कर

3230
03:50:14,960 --> 03:50:19,080
हो तो वहां पर तुम मेरे भक्त नहीं माने जाओगे तो इसका

3231
03:50:19,080 --> 03:50:23,160
अर्थ क्या हो गया कि भगवान की बात माने या फिर तुम्हारी बात माने जब

3232
03:50:23,160 --> 03:50:27,160
भगवान ने कह दिया कि श्रुति स्मृति मवा यानी कि भगवान स्वयं कह रहे कि यह मेरी

3233
03:50:27,160 --> 03:50:31,280
आज्ञा है और यदि आप चेंस की बात कर रहे हो तो चेंज करने वाला व्यक्ति

3234
03:50:31,280 --> 03:50:35,440
कौन है फिर यहां पर य देखना पड़ेगा और चेंज करने वाला व्यक्ति

3235
03:50:35,440 --> 03:50:40,040
तर साधारण है तो भगवान की आज्ञा का उलंगन हो जाएगा

3236
03:50:40,040 --> 03:50:44,160
इसको मैं सत्म शैली में ऐसे कहूंगा सबसे पहली बात जो आपने

3237
03:50:44,160 --> 03:50:48,160
बात कही है वो अपने आप में ही इतनी गई बीती

3238
03:50:48,160 --> 03:50:52,000
बात है इतनी निम्न को प्राप्त बात है वो अभी थोड़ी देर में आपको समझ

3239
03:50:52,000 --> 03:50:56,000
में आ जाएगा पहली बात ये है मेरे भाई कि आप

3240
03:50:56,000 --> 03:51:00,320
स्वयं को क्या कहते हो धर्म से पता है पता है

3241
03:51:00,320 --> 03:51:04,360
कलयुगी वाकई में ही कलयुगी हो आप वाकई में

3242
03:51:04,360 --> 03:51:08,960
ही कलयुग के नीचे जो हो सकते हैं वो ये वक्तव्य देने वाले

3243
03:51:08,960 --> 03:51:13,000
कैसे धर्म का नाम है सनातन सनातन

3244
03:51:13,000 --> 03:51:18,040
है हमारा धर्म सनातन सनातन किसे कहते हैं नित्य

3245
03:51:18,040 --> 03:51:22,160
स्थाई नित्य स्थाई धर्म है सनातन जो

3246
03:51:22,160 --> 03:51:26,320
किसी भी देश काल परिस्थिति में प्रभावित ना हो उसका

3247
03:51:26,320 --> 03:51:30,320
नाम है सनातन तो अब बात आ रही है अगर सनातन है तो

3248
03:51:30,320 --> 03:51:34,440
फिर ये परिवर्तन की बात कैसे हो गई परिवर्तन की बात ऐसे हो गई

3249
03:51:34,440 --> 03:51:38,680
कि एक व्यक्ति का जो अपनी मां के लिए जो धर्म है वही धर्म उसका

3250
03:51:38,680 --> 03:51:43,160
अपने पिता के लिए नहीं है वही धर्म उसका अपनी पत्नी के लिए नहीं है तो यह क्या हुआ

3251
03:51:43,160 --> 03:51:47,400
परिस्थिति के कारण जो धर्म चेंज हो रहा है इसी हिसाब

3252
03:51:47,400 --> 03:51:51,480
से जो युग है सतयुग त्रेता

3253
03:51:51,480 --> 03:51:55,720
द्वापर कलयुग इसके वातावरण के अनुसार भी धर्म चेंज

3254
03:51:55,720 --> 03:52:00,040
हो रहा है कि द्वापर में ये चीजें वैलिड है और फिर उसके बाद

3255
03:52:00,040 --> 03:52:04,080
उसके बाद इससे भी मोक्ष मिल जाएगा द्वापर में ये करोगे तभी मोक्ष मिलेगा

3256
03:52:04,080 --> 03:52:07,200
कलयुग में ये भी कर लोगे तो भी मोक्ष मिल जाएगा

3257
03:52:07,200 --> 03:52:11,200
ये हो गया मगर अब बात कह रहे हैं कि हम तो कह रहे थे कि सनातन है तो फिर ये

3258
03:52:11,200 --> 03:52:15,400
बदल क्यों रहा है तो जो बदलाव आना है वो

3259
03:52:15,400 --> 03:52:19,760
बदलाव भी आपको करके दे दिया गया है उसका नाम है सनातन

3260
03:52:19,760 --> 03:52:23,760
समझ में आया समझ में आया ना कलयुगी ी जी वो

3261
03:52:23,760 --> 03:52:27,800
आदि ईट इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमति का कुंडमा जोड़ा वो नहीं है

3262
03:52:27,800 --> 03:52:32,480
अपनी नीचता को प्राप्त मत हो उससे ऊपर

3263
03:52:32,480 --> 03:52:36,560
उठो आपका नाम क्या है मैं नहीं जानता मगर आप मुझे कलयुग के योगी ही

3264
03:52:36,560 --> 03:52:40,960
लगते हैं इसलिए आपको कलयुगी योगी कह रहा हूं उससे ऊपर उठो

3265
03:52:40,960 --> 03:52:45,960
कलयुग में जो नीच नकली योगी घूमते हैं वो आप मुझे दिखते हैं

3266
03:52:45,960 --> 03:52:50,000
तो उससे ऊपर उठो यह जो सारी व्यवस्था

3267
03:52:50,000 --> 03:52:54,200
है ना कि धर्म कहां-कहां पर आपातकालीन धर्म क्या होगा पिता का धर्म क्या होगा

3268
03:52:54,200 --> 03:52:58,480
पुत्र का धर्म क्या होगा यह आपद यह सारी व्यवस्था भी शास्त्रों

3269
03:52:58,480 --> 03:53:02,720
ने करके रख दी है उस उस

3270
03:53:02,720 --> 03:53:07,000
संदर्भ में वहां पर वो वक्तव्य आया है जो जिसका आपने आलंबन लिया

3271
03:53:07,000 --> 03:53:11,240
ठीक है अब दूसरी बात मैं कह रहा हूं अगर आपकी बात मान ली जाए

3272
03:53:11,240 --> 03:53:15,560
कि धर्म भी देश काल परिस्थिति के अनुसार बदलता है तो आज आपकी

3273
03:53:15,560 --> 03:53:19,760
माता आपके लिए माता है आज आप अपनी

3274
03:53:19,760 --> 03:53:22,200
माता को पत्नी के रूप में देखने

3275
03:53:22,200 --> 03:53:26,200
के लिए मर्यादित हो ना देखने के लिए

3276
03:53:26,200 --> 03:53:30,200
आज आप सीमित हो पत्नी के रूप में माता को ना देखने के

3277
03:53:30,200 --> 03:53:34,320
लिए कल को क्या किसी देश काल परिस्थिति में आपका यह धर्म बदल सकता

3278
03:53:34,320 --> 03:53:38,720
है बदल जाएगा बोलो

3279
03:53:38,720 --> 03:53:42,840
आपके अनुसार बदल जाना चाहिए संभवत आप इस प्रकार की शिक्षा का प्रचार

3280
03:53:42,840 --> 03:53:47,040
करना चाहते हैं कि आने वाले टाइम में जब मलेच्छ तंत्र प्रभावी

3281
03:53:47,040 --> 03:53:51,240
हो जाए जब उनकी सत्ता आने लग जाए तो वह जब कहे कि नहीं माता से भी पत्नी

3282
03:53:51,240 --> 03:53:55,440
का व्यवहार करो तो आप उनमें से हो नीच जो उस समय इसका

3283
03:53:55,440 --> 03:53:59,880
भी आलंबन लेने लगेंगे यह कहते हुए कि महाभारत में लिखा था कि देश काल परिस्थिति के अनुसार

3284
03:53:59,880 --> 03:54:03,200
धर्म का बदल देना

3285
03:54:03,200 --> 03:54:07,760
चाहिए कितना नीच वक्तव्य है ये ना तो यह सनातन कहलाएगा

3286
03:54:07,760 --> 03:54:12,120
धर्म और ना ही आप धर्मावलंबी कहलाओगे तो

3287
03:54:12,120 --> 03:54:16,720
ये धर्मावलंबी का मुखौटा होता सामने आओ फिर रण

3288
03:54:16,720 --> 03:54:21,320
में मैदान में सीधे सामना करिए ऐसे वैसे नहीं

3289
03:54:21,320 --> 03:54:25,760
अग्नि ने आज तक अपना धर्म नहीं छोड़ा पृथ्वी ने आज तक अपना धर्म नहीं छोड़ा

3290
03:54:25,760 --> 03:54:30,000
जल ने अपना धर्म नहीं छोड़ा वायु ने अपना धर्म नहीं छोड़ा सब अपने

3291
03:54:30,000 --> 03:54:34,160
अपने धर्म का पालन कर रहे हैं कल को ये वही वाली

3292
03:54:34,160 --> 03:54:37,520
बात है भाई मले में और हम में अंतर क्या है कभी सोचा

3293
03:54:37,520 --> 03:54:41,680
है यही अंतर है उनका धर्म बदलता है वो कहते

3294
03:54:41,680 --> 03:54:45,720
हैं कि आज से पहले दो 187 में वो कहते

3295
03:54:45,720 --> 03:54:49,720
हैं आज से पहले स्त्री संघ करने की आज्ञा नहीं थी पवित्र दिनों

3296
03:54:49,720 --> 03:54:53,720
में रोजों की रात में मगर आज हम वो आज्ञा दे रहे हैं

3297
03:54:53,720 --> 03:54:57,800
आज दे रहे हैं पहले से सुनिश्चित नहीं था हमारे वो जो

3298
03:54:57,800 --> 03:55:01,880
युग के अनुसार जो परिस्थिति के अनुसार देश काल परिस्थिति के

3299
03:55:01,880 --> 03:55:06,680
अनुसार जो अलग-अलग व्यवहार होंगे हमारे धर्म वो भी सुनिश्चित कर दिए गए हैं

3300
03:55:06,680 --> 03:55:11,560
वह है सनातन ग्रंथावली वो है वैदिक

3301
03:55:11,560 --> 03:55:15,920
वांगम वो भी सुनिश्चित है कि किस कि परिस्थिति में किसकिस वृत्ति

3302
03:55:15,920 --> 03:55:20,000
का आलंबन लेना है क्या-क्या करना है ऐसे नहीं कि शास्त्र में कुछ लिखा है

3303
03:55:20,000 --> 03:55:24,120
अपने मन के अनुसार हमने बदल दिया बदल देना कल को माता

3304
03:55:24,120 --> 03:55:28,440
को पत्नी की दृष्टि से ना देखने का जो धर्म है उसको भी छोड़ देना बहन

3305
03:55:28,440 --> 03:55:34,440
को पत्नी की दृष्टि से ना देखने का जो धर्म है उसको भी छोड़ देना कलयुग के नीच

3306
03:55:36,880 --> 03:55:41,880
योगी राघव जी बोले इस बार इस मामले

3307
03:55:41,880 --> 03:55:46,520
में आवाज अभी आ रही है अच्छी जी

3308
03:55:46,520 --> 03:55:50,560
हेलो हां मेरी आवाज अच्छी आ रही है ना आप पहले सब सुनिश्चित

3309
03:55:50,560 --> 03:55:54,600
कीजिए आपकी आवाज आपकी आवाज सारे सभी श्रोताओं को

3310
03:55:54,600 --> 03:55:59,040
बहुत पसंद आई है बहुत प्रशंसा ई आपकी आवा

3311
03:55:59,040 --> 03:56:03,560
नहीं बस ये गुरुजी की आशीर्वाद है और कुछ नहीं मैं यह कहना चाहता हूं

3312
03:56:03,560 --> 03:56:07,600
कि यह लोग परिवर्तन की बात करते हैं तो मैं यह कहना चाहता हूं कि

3313
03:56:07,600 --> 03:56:11,960
बहुत अच्छी बात है मैं आपका स्वागत करता हूं मैं पलक पाड़ बिछा करके बैठा हु परिवर्तन

3314
03:56:11,960 --> 03:56:16,240
के नाम का लेकिन आप एक परिवर्तन यह कीजिए कि अनादि काल से मानव

3315
03:56:16,240 --> 03:56:20,280
की शुधा अन नहीं मिटा रहा है कुछ और सब्सीट्यूट लाइए प्यास पानी बुझा

3316
03:56:20,280 --> 03:56:24,520
रहा उसमें भी परिवर्तन लाइए रोटी कपड़ा मकान की जो बेसिक नीड है आदमी

3317
03:56:24,520 --> 03:56:29,320
की उसके अलावा कोई और तीन या चार या पांच या छह कोई बेसिक नीड लाईए

3318
03:56:29,320 --> 03:56:33,480
यदि अनादि काल से य कांस्टेंट अस्थिर रूप से चल रही है यह

3319
03:56:33,480 --> 03:56:38,520
अपरिवर्तनीय

3320
03:56:38,520 --> 03:56:42,880
सब कुछ धर्म के घटक है धर्म के भीतर ही सब कुछ है रामो

3321
03:56:42,880 --> 03:56:47,000
विग्रहवां धर्मा धर्म के भीतर ही सब कुछ होता है उसके बाहर

3322
03:56:47,000 --> 03:56:51,160
सब अधर्म होता है यह तो आप ही के वक्ता लोग कहते रहते हैं

3323
03:56:51,160 --> 03:56:55,240
तो फिर कैसे आप यह बात कर रहे हैं कि परिवर्तन की आवश्यकता है और कौन सी

3324
03:56:55,240 --> 03:56:59,560
कमी आपको नजर आती है यदि आप यह कहते हैं कि मूर्ति पूजा पाखंड

3325
03:56:59,560 --> 03:57:04,160
वगैरा तो मैं कहना चाहता हूं कि एक विशेष समुदाय के लोग

3326
03:57:04,160 --> 03:57:08,440
अपनी विचारधारा को मानते हुए छाती पर बम बांध के फट जाते हैं

3327
03:57:08,440 --> 03:57:12,640
उसको आप पाखंड कह देते हैं लेकिन जिनको सनातनी हों का पाखंडी कह रहे

3328
03:57:12,640 --> 03:57:16,640
ऐसा एक सनातनी जिने अपने छाती पर बम बांध करके फटा हो या किसी

3329
03:57:16,640 --> 03:57:21,320
को भी आहित किया हो ऐसा कोई एक सनातनी बताइए ना

3330
03:57:21,320 --> 03:57:25,560
अरे लॉकडाउन की बात में करना चाहता हूं कि जब लॉकडाउन में

3331
03:57:25,560 --> 03:57:29,600
सब कुछ बंद था तो छोटे-छोटे पशु पक्षी यहां तक कि चीटी

3332
03:57:29,600 --> 03:57:33,680
पंछी तक का खयालन सनातन हों ने रखा जो मूर्ति पूजा करते हैं क्योंकि वह

3333
03:57:33,680 --> 03:57:37,720
उनमें अपने आराध्य देवी देवताओं का दर्शन करते हैं य कितनी सुंदर

3334
03:57:37,720 --> 03:57:42,480
अभिव्यक्ति है आप इसको पाखंड का नाम देते आपको शर्म नहीं आती

3335
03:57:42,480 --> 03:57:47,400
है पाखंड क्या होता है जितने भी आज हर कोई ये

3336
03:57:47,400 --> 03:57:51,720
बताता है ना कि फलाना कंपनी का सीईओ कोई हिंदू है भारतीय

3337
03:57:51,720 --> 03:57:53,760
ये है वो है क्या वो आर समाजी है

3338
03:57:53,760 --> 03:57:58,000
क्या सत्या नडेला आर्य समाजी है क्या सुंदर पिचाई आर्य

3339
03:57:58,000 --> 03:58:02,360
समाजी है क्या रामानुजन जो महान गणितज्ञ थे वे आर्य समाजी थे

3340
03:58:02,360 --> 03:58:06,640
तो पाखंडी यदि होते तो उनका विकास ही नहीं होता क्योंकि कहीं पाखंड है तो उन्होंने

3341
03:58:06,640 --> 03:58:10,800
विश्व इतिहास में 1400 साल की परंपरा में एक सुई तक बना कर के विश्व

3342
03:58:10,800 --> 03:58:14,960
को योगदान नहीं दिया पर हमने सब कुछ किया यह पाखंड

3343
03:58:14,960 --> 03:58:19,000
नहीं हो सकता खबरदार आप गलत कर रहे हैं यह आपको

3344
03:58:19,000 --> 03:58:23,080
कोई अधिकार नहीं है हमारी मान्यताओं पर कुठाराघात करने का

3345
03:58:23,080 --> 03:58:27,200
अधिकार नहीं है हम बहुत सहन कर चुके हैं मैं बहुत प्यारी भाषा

3346
03:58:27,200 --> 03:58:31,360
में कह रहा हूं बहुत अच्छे से कह रहा हूं किसी का निरादर करते हुए नहीं कह रहा हूं लेकिन

3347
03:58:31,360 --> 03:58:37,080
आप खबरदार हो जाइए जो चीजें अपरिवर्तनीय

3348
03:58:37,080 --> 03:58:41,080
जैसे शर्मा जी ने बहुत अच्छी बात बोली कि कौन करेगा इसमें

3349
03:58:41,080 --> 03:58:45,240
बदलाव आपने अच्छी बात बोली कि फिर माता को पत्नी के रूप में स्वीकार

3350
03:58:45,240 --> 03:58:49,440
करने लगेंगे क्या यदि यह अच्छा लगता है तो कीजिए लेकिन यदि

3351
03:58:49,440 --> 03:58:53,440
यह स्वागत योग्य नहीं है तो फिर आपको अपने विचार की

3352
03:58:53,440 --> 03:58:57,560
शुद्धि की आवश्यकता है ना कि धर्म के परिवर्तन की अपना

3353
03:58:57,560 --> 03:59:01,640
अपनी विचारधारा का पुनर्मूल्यांकन कीजिए और अंत में एक बात मैं

3354
03:59:01,640 --> 03:59:05,800
कहना चाहता हूं जैसे मैंने अपने वक्तव्य की शुरुआत मेरी आवाज

3355
03:59:05,800 --> 03:59:10,160
आ रही है ना हा वक्तव्य की शुरुआत की थी

3356
03:59:10,160 --> 03:59:14,280
कि दयानंद आंगल वैदिक विद्यालय में यूनिफॉर्म जो है

3357
03:59:14,280 --> 03:59:18,800
वह आज के आधुनिक समाज का है भारतीय परंपरा से मेल नहीं खाता

3358
03:59:18,800 --> 03:59:23,080
और मुझे एक मित्र बता रहे थे कि 25 दिसंबर के दिन वहां बच्चों को सेंटा क्लॉस

3359
03:59:23,080 --> 03:59:27,480
भी बनाया जाता है मैंने आंखों से नहीं देखा एक मित्र ने मुझसे कहा ठीक

3360
03:59:27,480 --> 03:59:31,680
मैं उसमें नहीं जाना चाहता लेकिन यदि यूनिफॉर्म में ही तकलीफ थी तो

3361
03:59:31,680 --> 03:59:36,280
बोलना नहीं था लेकिन मैं इससे इतर एक बात कहना चाहता हूं इसी परिपेक्ष में

3362
03:59:36,280 --> 03:59:40,400
कि दयानंद आंगल वैदिक विद्यालय इसके नाम में ही है

3363
03:59:40,400 --> 03:59:44,560
आंगल और वैदिक आप कहते हैं कि अंग्रेजों का प्रतिकार दयानंद जी जी ने किया

3364
03:59:44,560 --> 03:59:48,560
उनकी मानसिकता से प्रेरित होकर के महान क्रांतिकारी हुए इस देश

3365
03:59:48,560 --> 03:59:52,080
में तो जिनका आप खंडन कर रहे थे उनके साथ मिलकर

3366
03:59:52,080 --> 03:59:56,080
के आप आंगल वैदिक विद्यालय खोल रहे हैं या आप अपने आप को धोखा दे रहे हैं

3367
03:59:56,080 --> 04:00:00,120
कि हमें धोखा दे रहे हैं जिनका खंडन आपके गुरुदेव सत्यार्थ

3368
04:00:00,120 --> 04:00:04,320
प्रकाश में कर रहे हैं कथित रूप से आप ही के कथन के अनुसार कह रहा हूं तो

3369
04:00:04,320 --> 04:00:08,600
ऐसा कैसे कि वो उनकी विचारधारा के साथ मिलकर के आंगल वैदिक बना रहे

3370
04:00:08,600 --> 04:00:12,680
हैं इतना बड़ा झोल क्यों नहीं दिखाई देता आप लोग आपस में विमर्श

3371
04:00:12,680 --> 04:00:16,800
क्यों नहीं करते मैंने कहा कि अभी इस लाइव को जो भी आर्य समाज

3372
04:00:16,800 --> 04:00:21,080
जी देख रहे हैं वह अपने अपने खेमे में जाकर के अपने अपने गुरुकुल

3373
04:00:21,080 --> 04:00:25,320
अपने मंदिर अपनी स्कूल जिसम भी जाकर के बातचीत करें कि इतने सालों

3374
04:00:25,320 --> 04:00:29,360
से हम कर क्या रहे हैं इतने सालों में हमने केवल ब्राह्मण ही क्यों

3375
04:00:29,360 --> 04:00:33,600
बनाए हैं क्षत्रिय वैश्य शूद्र से और विशेषक शूद्र से हमें इतनी नफरत

3376
04:00:33,600 --> 04:00:38,360
क्यों है कि उसका अस्तित्व ही हमारी आंख की किरकिरी बना हुआ है

3377
04:00:38,360 --> 04:00:42,520
क्यों बना हुआ है क्या बिगाड़ा है उसने आपका जो आपकी

3378
04:00:42,520 --> 04:00:46,880
आंख की किरकिरी वो बना हुआ हमारा भाई क्यों उसको बिगाड़ रहे

3379
04:00:46,880 --> 04:00:50,920
हो हर किसी को रोटी कपड़ा मकान चाहिए वह दे दो

3380
04:00:50,920 --> 04:00:55,080
वह खुश हो जाता है लेकिन आप जबरदस्ती उसको कुछ और देने लग रहे हैं

3381
04:00:55,080 --> 04:00:59,240
तो बेचारा जो पाना चाह रहा है उससे भी वंचित रह रहा है और जो आप देना चाह रहे हैं वह भी उसको

3382
04:00:59,240 --> 04:01:03,800
ठीक से मिल नहीं पा रहा यह त्रिशंकु कल्चर खत्म किया जाना चाहिए

3383
04:01:03,800 --> 04:01:07,480
तो मैं यही कहना चाहता हूं अधिक समय नहीं लेता हूं दूसरे भी हमारे बंधु

3384
04:01:07,480 --> 04:01:11,480
अपने विचार प्रकट करें इनकी ये जो परिवर्तन की बात सुन कर के मुझे एक

3385
04:01:11,480 --> 04:01:15,480
बात याद आई जो स्कंद पुराण में वचन है

3386
04:01:15,480 --> 04:01:19,720
पुराण को मानते हैं कि नहीं मानते हो डजन मैटर मगर वो है जी मनुष्य

3387
04:01:19,720 --> 04:01:23,800
चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले जप

3388
04:01:23,800 --> 04:01:27,920
तप व्रत दान यज्ञ सब कुछ बेकार है सब कुछ

3389
04:01:27,920 --> 04:01:31,920
व्यर्थ है तीर्थ सब कुछ व्यर्थ है यदि

3390
04:01:31,920 --> 04:01:36,920
वो किसी परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य की शरण में नहीं

3391
04:01:36,920 --> 04:01:41,000
जाता तो इनका वो हाल है मनुष्य गुरु के बिना पशु

3392
04:01:41,000 --> 04:01:45,240
है तुम पशु हो पशु कौन होता है ना पता है सनातन

3393
04:01:45,240 --> 04:01:49,320
को परिवर्तनशील बनाने वाले व्यक्ति पशु कौन होता

3394
04:01:49,320 --> 04:01:53,360
है पता है धर्मे हीना पशु भी समाना

3395
04:01:53,360 --> 04:01:57,440
सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी

3396
04:01:57,440 --> 04:02:01,480
है जिसको नहीं पता होता है जिसके पास धर्म नहीं होता है वो पशु होता

3397
04:02:01,480 --> 04:02:05,680
है तो गुरु के बिना व्यक्ति पशु है लिखा है

3398
04:02:05,680 --> 04:02:09,760
यह भी लिखा है शास्त्रों से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है हर तरह

3399
04:02:09,760 --> 04:02:15,760
के आपातकालीन इत्यादि धर्म के बारे में हमारे यहा व्याख्या है

3400
04:02:16,200 --> 04:02:20,200
ठीक है तो आप अच्छा एक चीज मैं यह सोचता हूं हम लोग

3401
04:02:20,200 --> 04:02:24,400
रक्षा किसकी कर रहे हैं सनातन धर्म की और फिर

3402
04:02:24,400 --> 04:02:28,440
सनातन को क्या करना चाहते हैं कि वो बदल जाए बदल के कैसा हो जाए भाई

3403
04:02:28,440 --> 04:02:32,680
जो आज नहीं है कल हो जाए आज हमारे वैदिक वांगम में नहीं है मूर्ति पूजा

3404
04:02:32,680 --> 04:02:36,960
कल को मूर्ति पूजा आ जाए जैसे कि उसमें बात आई जो इनका

3405
04:02:36,960 --> 04:02:41,000
इस्लामिक तंत्र है उसमें एक बात आई कि भाई हम अपनी कोई

3406
04:02:41,000 --> 04:02:45,480
आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर आयत ले आते हैं संभवत

3407
04:02:45,480 --> 04:02:49,480
दो 106 हम अपनी आयत को बदल देते हैं तो उससे कोई

3408
04:02:49,480 --> 04:02:54,160
बेहतर आयत ले आते हैं अब इसका अर्थ यह है कि वो जो

3409
04:02:54,160 --> 04:02:58,160
सिस्टम है वो जो ग्रंथ है उसकी कोई भी आयत कभी भी बदली जा

3410
04:02:58,160 --> 04:03:02,280
सकती है वो लोग एक क एक तर्क दे सकते कुतर्क कि भाई वह अंत

3411
04:03:02,280 --> 04:03:06,280
में यह कह के गए हैं कि अब कोई भी पैगंबर या अब

3412
04:03:06,280 --> 04:03:10,480
कोई भी जो दूत है ऊपर वाले का वो आएगा नहीं

3413
04:03:10,480 --> 04:03:14,760
तो वो जो आया उसको भी तो बदल सकते हैं और

3414
04:03:14,760 --> 04:03:18,840
वहां पर वो ताल ठोक के कह रहे हैं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है

3415
04:03:18,840 --> 04:03:23,760
अवतार लेते टाइम तो कह रहे हैं ईश्वर की कोई पत्नी कैसे हो सकती है 611

3416
04:03:23,760 --> 04:03:27,920
संभवत उसमें वो कह रहे हैं कि ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है जब उसकी

3417
04:03:27,920 --> 04:03:31,480
कोई पत्नी नहीं बाधित मगर जहां पर झूठ बोलना है बदलना

3418
04:03:31,480 --> 04:03:35,640
है तो वहां स्वीकार कर रहे हैं ईश्वर बदल सकता है अपनी आयतों को जब बदल सकता है

3419
04:03:35,640 --> 04:03:39,680
तो वह उस आयत को भी बदल सकता है जिसमें यह लिखा है कि अब

3420
04:03:39,680 --> 04:03:43,880
कोई भी पैगंबर नहीं आएगा लोग क्या कर लोगे उससे बेहतर आय

3421
04:03:43,880 --> 04:03:48,160
देंगे पैगंबर आएंगे आ गए और क्या किया आज से मूर्ति

3422
04:03:48,160 --> 04:03:52,240
पूजा अलाउड है बदल गया तुम्हारा धर्म क्या ऐसा

3423
04:03:52,240 --> 04:03:56,480
ही धर्म है हमारा ऐसा ही धर्म है कलयुग के

3424
04:03:56,480 --> 04:04:01,920
नीच योगी जो धर्म को बदलने की बातें करते

3425
04:04:01,920 --> 04:04:05,920
हैं ऐसा धर्म नहीं है हमारा जो किसी भी देश

3426
04:04:05,920 --> 04:04:10,640
काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है सनातन की व्याख्या पकड़ो

3427
04:04:10,640 --> 04:04:14,880
पढ़ो सनातन किसे कहा जाता है और यदि तुम अपने धर्म को परिवर्तनशील मान

3428
04:04:14,880 --> 04:04:19,840
रहे हो तो उसे सनातन कहना बंद करो पाखंड बंद करो

3429
04:04:19,840 --> 04:04:24,120
और हो जाओ मलेच्छ घोषित कर दो स्वयं को मलेच्छ मैंने जिस दिन आवान

3430
04:04:24,120 --> 04:04:28,440
की नीव डाली थी उस दिन मैंने मैं जानता था कि जब हम इनकी जड़ों को टटोल

3431
04:04:28,440 --> 04:04:32,120
गे तो इनका यही रूप सामने

3432
04:04:32,120 --> 04:04:36,280
आएगा क्योंकि इनकी जड़ों में वही वाले तंत्र घुसे हुए हैं वो

3433
04:04:36,280 --> 04:04:40,280
प्रोत है उससे जैसे आज इन्होंने मलेच्छ स्ट्रेटेजी का आलंबन

3434
04:04:40,280 --> 04:04:44,440
ले लिया व्यक्तिगत होकर के और पता चला

3435
04:04:44,440 --> 04:04:46,720
पहले भी कई बार लिया गया है

3436
04:04:46,720 --> 04:04:51,200
है ना और परिवर्तन की बात कर रहे हैं हम में अंतर ही यही है भाई

3437
04:04:51,200 --> 04:04:57,200
हमारा धर्म व है जो परिवर्तनशील नहीं

3438
04:04:57,600 --> 04:05:01,680
है और अतो अंततोगत्वा मैं कह रहा हूं तुम हमको प्रमाण

3439
04:05:01,680 --> 04:05:05,680
दिखा रहे हो व प्रमाण आया कहां से तुम्हारे पास आओ

3440
04:05:05,680 --> 04:05:09,720
किसी दिन बहुत बड़े स्वयं को वो

3441
04:05:09,720 --> 04:05:13,880
टेक्निकल व्यक्ति समझते हो बहुत बड़े विचारक समझते हो फिलोसोफर समझ

3442
04:05:13,880 --> 04:05:18,280
लग ग हो आओ किसी दिन बताओ मैं कहां से आया वो

3443
04:05:18,280 --> 04:05:22,960
शास्त्र करो परंपराओं का खंडन करते हुए ईश्वर को सर्वशक्तिमान

3444
04:05:22,960 --> 04:05:27,040
सिद्ध सारा धरा का धरा रह जाएगा सारी हवा निकल

3445
04:05:27,040 --> 04:05:31,040
जाएगी जब तक मनुवाद हों से दूर हो अपने ही अपने में वाह वाह क्या

3446
04:05:31,040 --> 04:05:35,560
शेर मारा वा वा वा वो मुझे याद आता है वाह क्या एक्टिंग है वाह

3447
04:05:35,560 --> 04:05:38,840
वो खड़े कर देते हैं ना

3448
04:05:38,840 --> 04:05:43,000
उनको धर्म बदला तो भगवान भगवान कृष्ण

3449
04:05:43,000 --> 04:05:47,360
गीता में कह रहे यदा यदा धर्म जनि भवती भारता तो भगवान

3450
04:05:47,360 --> 04:05:51,440
श्री कृष्ण किस धर्म को बचाने के लिए आएंगे जो तुम लोगों ने बदला है उस धर्म को बचाने

3451
04:05:51,440 --> 04:05:55,920
के लिए

3452
04:05:55,920 --> 04:05:59,960
आएंगे योगी ने धर्म को बदल दिया था कलयुग

3453
04:05:59,960 --> 04:06:04,080
के नीच योगी ने धर्म को बदल दिया था

3454
04:06:04,080 --> 04:06:08,080
उसको बचाने आएंगे जो नीच योगी कह देगा वह धर्म है तो

3455
04:06:08,080 --> 04:06:12,080
उसको बचाने आते हैं भगवान भाई धर्म को बचाना ही इसलिए

3456
04:06:12,080 --> 04:06:16,120
पड़ रहा है क्योंकि वो बदला नहीं जा बदल जाएगा तो फर को बचाना क्यों

3457
04:06:16,120 --> 04:06:22,120
पड़ रहा है फिर बदल लो कह लो अपने आपको को हम हम जो है वो है

3458
04:06:26,440 --> 04:06:30,600
मले हा इनकी जो गुटबाजी होती है वो होती है

3459
04:06:30,600 --> 04:06:34,600
कैसी वो यना यना पता नहीं

3460
04:06:34,600 --> 04:06:38,680
कौन सा शब्द है वो यूज करता है फिर माइंड इट उसमें और फिर वाह क्या

3461
04:06:38,680 --> 04:06:42,720
एक्टिंग है वाह क्या हीरो है वही के लोग सब उसको प्रशंसा

3462
04:06:42,720 --> 04:06:47,320
करने लग जाते ली बजा के वाह क्या एक्टिंग कर रहा हैट

3463
04:06:47,320 --> 04:06:51,840
उसको थोड़ा सा रोल मिलता है ना वो शेर से लड़ने का वो

3464
04:06:51,840 --> 04:06:57,840
जी आदित्य जी आप काफी देर से हैं आप

3465
04:07:04,560 --> 04:07:08,600
बोले आद जी आप आपकी आवाज नहीं आ

3466
04:07:08,600 --> 04:07:13,680
रही है जी

3467
04:07:13,680 --> 04:07:18,400
हो गए आप म्यूट है अभी हेलो बोलिए आवाज आई

3468
04:07:18,400 --> 04:07:24,360
जी जी आई आपने बरा बोलने के लिए आवाज नहीं खुल

3469
04:07:24,360 --> 04:07:28,400
रहे ऐसा है कि जो युवा है

3470
04:07:28,400 --> 04:07:32,600
सब जुड़ रहे हैं जितने भी डिबेट करने वाले य बड़े बड़े यूटर है जो स्वयं

3471
04:07:32,600 --> 04:07:37,560
को शास्त्रार्थ महारथ समझते हैं यह सब 18 19 17

3472
04:07:37,560 --> 04:07:41,720
बहुत ज्यादा 20 इसी में के एकाद दो है जो वरिष्ठ है जो वो

3473
04:07:41,720 --> 04:07:45,840
वाले हैं कि आन तो हर उस व्यक्ति के खिलाफ है

3474
04:07:45,840 --> 04:07:50,720
जो जातिवाद नहीं मानता जिनके गुरु जो है एक मुस्लिम है

3475
04:07:50,720 --> 04:07:54,720
बुड्ढे से हैं व मतलब की एक व्यक्ति अगर

3476
04:07:54,720 --> 04:07:58,960
जिम कर लिया पूर्व काल में तो परंपरा विरुद्ध हो गया को कोई एक

3477
04:07:58,960 --> 04:08:03,240
मुस्लिम था तो क्या क्या खाता था क्या क्या पीता था तुम भी जानते हो उसको गुरुदेव बोलते

3478
04:08:03,240 --> 04:08:07,320
हो उसके आगे पंडित शब्द लग जाता है उसके बाद में आर्य शब्द लग जाता

3479
04:08:07,320 --> 04:08:11,360
है उसके चरणों में तुम दंडवत प्रणाम करते हो म क्या गुण तुम्ह

3480
04:08:11,360 --> 04:08:16,080
दिख जाते हैं उन मल में जो गुण तुमको एक जो है ब्राह्मण में नहीं

3481
04:08:16,080 --> 04:08:20,560
दिखते या एक भक्त में नहीं दिखते

3482
04:08:20,560 --> 04:08:25,160
ये भी तो विषय है और अगर धर्म की कहीं हानि हो रही है

3483
04:08:25,160 --> 04:08:29,480
वर्तमान में धर्म रक्षा करना चाहते हो क्षत्रिय बनाओ क्षत्रिय खड़े करो

3484
04:08:29,480 --> 04:08:33,520
कि हा भाई धर्म विरुद्ध कार्य कर रहा है इसको हम दंड देंगे या शासन को हम अपने हिसाब

3485
04:08:33,520 --> 04:08:37,640
से चलाएंगे हम क्षत्रिय है वेद कहता है हम राज करें नहीं है कोई

3486
04:08:37,640 --> 04:08:41,840
क्षत्रिय सब ब्राह्मण बन जाओ क्योंकि धर्म की रक्षा

3487
04:08:41,840 --> 04:08:45,880
में मूलभूत केवल घोषित ब्राह्मण कर देते हैं

3488
04:08:45,880 --> 04:08:50,440
लीपा पोती के लिए काम सब लोग वही सब करते हैं क्षत्रिय

3489
04:08:50,440 --> 04:08:54,440
का आलंबन भी लेते हैं वो घोषित हो जाते हैम ब्राह्मण हो भाई

3490
04:08:54,440 --> 04:08:58,600
ब्राह्मण बन गया बस तो वो ना तो जन्म से रहे ब्राह्मण

3491
04:08:58,600 --> 04:09:03,240
ना ही कर्म से रहे वो सर्टिफिकेट से ब्राह्मण रहे आदित्य

3492
04:09:03,240 --> 04:09:07,400
जी की बात में एक और बात ऐड करना चाहूंगा कि और अगर अगर

3493
04:09:07,400 --> 04:09:11,840
आर्थिक स्थिति सुधार है तो वैश्य बनाइए शूद्र बनाइए

3494
04:09:11,840 --> 04:09:15,920
वो भी आवश्यक है लेकिन कभी नहीं बनाएंगे

3495
04:09:15,920 --> 04:09:20,480
नहीं ना क्योंकि अ आर्थिक स्थिति तो उनसे ही सुधरेगी ना

3496
04:09:20,480 --> 04:09:24,720
लेकिन वो नहीं बनाएंगे धर्म योद्धा जी कुछ कह रहे हैं धर्म

3497
04:09:24,720 --> 04:09:28,880
योद्धा जी को ले लीजिए बाकी एक चीज मैं यहां पर कहना

3498
04:09:28,880 --> 04:09:33,360
चाहूंगा आपने बहुत अच्छी बात याद दिलाई ये लोग क्या करते हैं मलेच्छ

3499
04:09:33,360 --> 04:09:35,760
को भी त्यागी और ऐसी ऐसी उपमा देकर

3500
04:09:35,760 --> 04:09:39,800
के और जो है कन्वर्टेड कर देते हैं ठीक है आप वो उनको जो है हिंदुत्व का

3501
04:09:39,800 --> 04:09:43,880
चोला उड़वा रहे हो मगर उनकी क्या बैक स्टोरी

3502
04:09:43,880 --> 04:09:48,560
आपको नहीं आता दिखाने में कि वो लोग क्या क्या करते थे मीट मांस मछली कैसे

3503
04:09:48,560 --> 04:09:52,640
खाते पीते थे जो एक व्यक्ति का जो एक सामान्य

3504
04:09:52,640 --> 04:09:56,640
सा जो शाखा आरही अपने पुराने जीवन में भी है जो यह

3505
04:09:56,640 --> 04:10:00,720
मादक पदार्थों का कभी आलंबन नहीं लेने वाला व्यक्ति उसकी भी आप बातों को

3506
04:10:00,720 --> 04:10:04,800
ऐसे प्रस्तुत कर रहे हो आपने पता नहीं कौन सा बवाल पा लिया पता नहीं कौन सा

3507
04:10:04,800 --> 04:10:09,360
डेटोनेटर पा लिया आपने परमाणु बम को एक्टिवेट करने का आपने कोई कोड पा लिया

3508
04:10:09,360 --> 04:10:13,640
मिशन इंपॉसिबल बना दिया आपने टॉम क्रूज की

3509
04:10:13,640 --> 04:10:17,640
ऐसा ही तो है हमारी इन्होंने वो सामग्री फोटो एक

3510
04:10:17,640 --> 04:10:21,640
सामान्य सी उसमें जीवन शैली दिखनी दिखती हुई एक सामान्य

3511
04:10:21,640 --> 04:10:25,640
व्यक्ति जिसको ज्ञान विज्ञान नहीं है अपने धर्म का और ऐसा भी

3512
04:10:25,640 --> 04:10:29,800
कोई उसमें मर्यादित आचरण नहीं है मगर उसको इन्होंने ऐसे प्रस्तुत

3513
04:10:29,800 --> 04:10:34,200
कर दिया जैसे वो मिशन इंपॉसिबल का आखिरी और अंतिम जो एपिसोड

3514
04:10:34,200 --> 04:10:37,840
आए तो वह है

3515
04:10:37,840 --> 04:10:43,360
वो है ना तो

3516
04:10:43,360 --> 04:10:48,760
ये है जी आदित्य जी

3517
04:10:48,760 --> 04:10:52,760
बोलिए और एक विषय यह था

3518
04:10:52,760 --> 04:10:57,040
कि जैसे कि जिन भी माता जी के साथ आप खड़े थे आपके परिवार

3519
04:10:57,040 --> 04:11:01,040
के थे जैसे आपने बताया मेरी आवाज आ रही है ना क्लियर जी जी आ रही

3520
04:11:01,040 --> 04:11:05,120
है रही तो इन्होंने कहा कि देखो ये

3521
04:11:05,120 --> 04:11:09,320
है पतला दुबला सा आवाहन और अभी इसकी बॉडी इतनी बन गई है तो

3522
04:11:09,320 --> 04:11:13,360
बिना ब्रह्मचर्य के तो इतनी बॉडी बनना संभव नहीं है स्टेरॉइड्स ड्रग्स के

3523
04:11:13,360 --> 04:11:17,960
प्रयोग से इसकी बॉडी बनी है क्योंकि ब्रह्मचारी तोय हो नहीं सकता देख किस तरह स्

3524
04:11:17,960 --> 04:11:22,080
खड़ा हुआ है अरे भैया मतलब की तुम लोग अगर अपने

3525
04:11:22,080 --> 04:11:27,160
परिवार के स्त्रियों के साथ खड़े हो जाते तुम्हारा ब्रह्मचार्य खंडित हो जाता

3526
04:11:27,160 --> 04:11:33,160
है यह विचार का

3527
04:11:33,800 --> 04:11:38,360
विषय जी हा हा इन्होने कहा ना कि ब्रह्मचारी हो नहीं सकता है

3528
04:11:38,360 --> 04:11:42,640
क्योंकि स्त्रियों के साथ चपक के खड़ा हुआ है अब बताइए कि परिवार

3529
04:11:42,640 --> 04:11:46,960
की स्त्री के साथ अगर कोई खड़ा है अपनी बहन के साथ अपनी माता के साथ इन लोग का ब्रह्मचर्य

3530
04:11:46,960 --> 04:11:51,600
खंडित हो जाता है उसी में नारायण अरे श जी

3531
04:11:51,600 --> 04:11:55,600
पर्सनल अटैक की पराकाष्ठा है अच्छा

3532
04:11:55,600 --> 04:11:59,600
हा आप क्या बताऊं मैं अब लेकिन ठीक है आदित्य जी बोल रहे

3533
04:11:59,600 --> 04:12:04,880
हैं इनको बोलने देते हैं जी जी आद जी

3534
04:12:04,880 --> 04:12:09,200
बोलिए तो ये हो गया अभी आदर्श जी

3535
04:12:09,200 --> 04:12:13,440
होते और अच्छा विषय रखते उन्होंने बड़ा प्रमाण वगैरह निकाला था

3536
04:12:13,440 --> 04:12:18,240
काल से और बैठे भी थे आप समय नहीं दे पाए

3537
04:12:18,240 --> 04:12:22,440
उनको एक बार देख लीजिए बुला लीजिए अभी तो बाकी है चर्चा

3538
04:12:22,440 --> 04:12:27,400
कर सकते हैं ड़

3539
04:12:27,400 --> 04:12:31,520
रहे बैक स्टेज में होंगे शायद नहीं अभी

3540
04:12:31,520 --> 04:12:35,640
आए नहीं है आते ही इनको जोड़ लिया

3541
04:12:35,640 --> 04:12:39,760
जाएगा य य राम रामदेव बाबा जो

3542
04:12:39,760 --> 04:12:44,120
है व शिल्पा शेट्टी के साथ फोटो खचा ब्रह्मचर्य

3543
04:12:44,120 --> 04:12:49,200
नष्ट हो जाता है क्या

3544
04:12:49,200 --> 04:12:53,320
उनका नहीं बस अपनी बात अ प्रूव करनी है अब कुछ

3545
04:12:53,320 --> 04:12:57,960
भी बोल दो वो वाली बात है कुछ भी बोल दो

3546
04:12:57,960 --> 04:13:02,040
वह एक लगता है मुझे ऐसा लगता है

3547
04:13:02,040 --> 04:13:06,720
किय जो ये जो लोग है जिन्होंने अपने काले मुंह को छुपाकर वो किया है

3548
04:13:06,720 --> 04:13:10,760
हो सकता है उन्होंने आज जो ठुमके देखे होंगे उसको देख कर के इनका ब्रह्मचर्य नष्ट हो

3549
04:13:10,760 --> 04:13:14,600
गया होगा

3550
04:13:14,600 --> 04:13:18,640
ना अब उनके उनके अनुसार तो ऐसा ही होना

3551
04:13:18,640 --> 04:13:22,840
चाहिए सत तो यही है जी उनका

3552
04:13:22,840 --> 04:13:28,840
सिद्धांत तो यही कहता है और फर व मके

3553
04:13:30,520 --> 04:13:34,680
परोसे जी आदर्श जी आ गए आदर्श जी आ गए

3554
04:13:34,680 --> 04:13:37,400
जय श्री राम आदर्श

3555
04:13:37,400 --> 04:13:42,040
जीम महादेव प्रणाम भैया

3556
04:13:42,040 --> 04:13:46,120
जी खुश रहिए तो काफी देर से मैं देख रहा था

3557
04:13:46,120 --> 04:13:50,720
स्ट्रीम को काफी सारे विषय हैं एकएक करके सबके ऊपर बात करूंगा

3558
04:13:50,720 --> 04:13:54,760
जो शास्त्रीय विषय है उस परे ज्यादा मैं बात करूंगा पहले क्लिप जब चालू

3559
04:13:54,760 --> 04:13:59,200
हुई आपके बारे में बोलना जब चालू किया तो आपसे

3560
04:13:59,200 --> 04:14:03,280
आपके बारे में बोला उसको तो दिक्कत है हमको बहुत ज्यादा दिक्कत है लेकिन

3561
04:14:03,280 --> 04:14:07,440
सबसे ज्यादा दिक्कत हुई जब अमित शर्मा जी पर उन्होंने टिप्पणी की ज्यादा देर कुछ नहीं बोले

3562
04:14:07,440 --> 04:14:11,440
लेकिन उनके ऊपर भी टिप्पणी की गई थी अगर आपने देखा होगा स्ट्रीम को तो

3563
04:14:11,440 --> 04:14:15,600
आचार्यों को टिप्पणी की है मेरा ज्यादा क्रोध है उनके ऊपर

3564
04:14:15,600 --> 04:14:19,640
तो अब जो शास्त्रीय पक्ष था उसको थोड़ा मैं रखने की कोशिश करूंगा

3565
04:14:19,640 --> 04:14:23,720
जैसे आदित्य जी ने कहा कि महानिर्वाण तंत्र

3566
04:14:23,720 --> 04:14:27,720
के बारे में उन्होंने बताया तो हमारे एक आचार्य हुए हैं परंपरा में ठीक है

3567
04:14:27,720 --> 04:14:29,600
शंकर परंपरा के नहीं थे

3568
04:14:29,600 --> 04:14:34,000
जो मी मांसी होते है ना मीमांसा उसमें एक भट्ट संप्रदाय

3569
04:14:34,000 --> 04:14:38,200
है तो उनके आचार्य हुए उन्होंने मनुस्मृति के ऊपर

3570
04:14:38,200 --> 04:14:42,520
भाष्य किया है उन्होंने कहा है कि अगर वेद के ज्ञान को समझना

3571
04:14:42,520 --> 04:14:46,720
है तो तंत्र के ग्रंथों के साथ में सामंजस्य बैठा

3572
04:14:46,720 --> 04:14:50,800
के समझिए तो वही काम हमारे आचार्य करते हैं जहां तक यथा संभव

3573
04:14:50,800 --> 04:14:55,120
होता है तो तंत्र का भी आश्रय लेते हैं अनुशीलन करते हैं वोह

3574
04:14:55,120 --> 04:14:59,360
तो तंत्र के ग्रंथों में जो ऋषि वाच जी थे उन्होंने कहा

3575
04:14:59,360 --> 04:15:03,400
कि ब्राह्मण को अगर वैश्य का षि कौन है ऋषि उवाच

3576
04:15:03,400 --> 04:15:08,040
कौन है वो जो अंडर कवर्ड एक गुंडा है वो है क्या

3577
04:15:08,040 --> 04:15:12,040
जो गाली देता है शंकराचार्य को बोले

3578
04:15:12,040 --> 04:15:16,080
जो भी है वो जहां तकता संबंधित है हमें

3579
04:15:16,080 --> 04:15:20,280
क्योंकि मालूम नहीं है वहां कौन कन था हमें तो आपने भी यही बताया था कि वहां कौन

3580
04:15:20,280 --> 04:15:24,520
ककन था आपको भी नहीं पता है तो धर्म

3581
04:15:24,520 --> 04:15:28,640
सम्राट नाम जी नाम से वही बैठे थे जहां तक हमें ज्ञात है ऋषि वाद

3582
04:15:28,640 --> 04:15:32,640
जी ही थे और इस में उन्ही लोग ने हा उन्होंने

3583
04:15:32,640 --> 04:15:35,120
नाम भी

3584
04:15:35,120 --> 04:15:39,360
लिया जी जी आप आप आप आप भाई जो नाम

3585
04:15:39,360 --> 04:15:43,440
लिए जा रहे हैं भाई ये तो अंडर गुंडे का नाम है जिसको अन कह दिया

3586
04:15:43,440 --> 04:15:44,800
था ऋषि

3587
04:15:44,800 --> 04:15:48,880
उवाच क्या है क्या नहीं है वही जो जिसकी रातों की नींद उड़ चुकी

3588
04:15:48,880 --> 04:15:53,680
है रातों को सपने में आवाना दिखाई देता है जी बोलिए आदर जी

3589
04:15:53,680 --> 04:15:55,840
आ

3590
04:15:55,840 --> 04:15:59,920
रहा बात क्या है उसके ऊपर तो उसके ऊपर तंत्र में कई सारे

3591
04:15:59,920 --> 04:16:04,280
प्रमाण है और यहां तक कि महाभारत में भी प्रमाण है कि ब्राह्मण

3592
04:16:04,280 --> 04:16:08,520
जो है वह सारे काम आपातकाल में कर सकता है वैश्य

3593
04:16:08,520 --> 04:16:12,520
के शूद्र के और क्षत्रियों के भी यह प्रमाण दिया गया है ठीक

3594
04:16:12,520 --> 04:16:16,520
है दूसरी चीज जो बात रही ञ पवित की कि इनका यज पवित्र

3595
04:16:16,520 --> 04:16:21,160
नहीं दिख रहा इत्यादि इत्यादि या सही समय पर इनका यज्ञ पवित्र

3596
04:16:21,160 --> 04:16:25,280
नहीं हां ो पवित इत्यादि सही समय पर नहीं हुआ

3597
04:16:25,280 --> 04:16:29,360
तो वेदांग के अंदर ठीक है आप आप स्तंभ धर्म

3598
04:16:29,360 --> 04:16:33,440
सूत्र के अंदर आता है कि जिनका यज्ञो पवित सही समय पर

3599
04:16:33,440 --> 04:16:37,560
नहीं होता है उनको तीन माह तक यानी

3600
04:16:37,560 --> 04:16:41,720
एक पक्ष जो भी कहिए उसको तो क्या है कि तीन

3601
04:16:41,720 --> 04:16:45,880
माह तक उनको धारण करना है ब्रह्मचर्य इससे उनका वो दोष

3602
04:16:45,880 --> 04:16:50,040
खत्म हो जाता है ऐसा जो है बोलता है इसका

3603
04:16:50,040 --> 04:16:54,080
प्रमाण भी मैं दे दूंगा ठीक है उसके बाद में भी फिर बात

3604
04:16:54,080 --> 04:16:58,120
आई पवित की जहां यह कह रहे थे कि सिला हुआ वस्त्र इत्यादि इत्यादि पर जो

3605
04:16:58,120 --> 04:16:59,960
बात हुआ तो उसके ऊपर मेरा

3606
04:16:59,960 --> 04:17:04,000
पक्ष यह है कि बात यह नहीं है कि आप सिले हुए कपड़े पहनो

3607
04:17:04,000 --> 04:17:08,040
मत पहनो बात यह है कि जब कोई धार्मिक अनुष्ठान होता है उस समय पर

3608
04:17:08,040 --> 04:17:12,920
धारण मत करिए ठीक है कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो अब ऐसे

3609
04:17:12,920 --> 04:17:17,280
बात हो तो ज्यादा अच्छी रहती है कि कभी मत धारण करो उस तरीके का वस्त्र लेकिन

3610
04:17:17,280 --> 04:17:21,400
यथा संभव की जब धार्मिक अनुष्ठान हो तो मत ही करिए जहां

3611
04:17:21,400 --> 04:17:25,680
तक हो सके यज्ञो पवित की बात रही तो क्या कहना

3612
04:17:25,680 --> 04:17:29,680
इसके ऊपर तो सब जान ही रहे हैं सबके सामने प्रमाण उपस्थित ही है

3613
04:17:29,680 --> 04:17:34,160
इसके ऊपर चर्चा हो जाएगी किसी दिन बहुत बढ़िया तरीके से वो लोग आ जाए तो

3614
04:17:34,160 --> 04:17:38,280
ठीक है दयानंद सरस हम अच्छा मैं एक चीज बताता हूं इन लोगों

3615
04:17:38,280 --> 04:17:42,400
की हिप्पोक्रीन पुराण करते हैं ना हमेशा इनकी किताब

3616
04:17:42,400 --> 04:17:46,600
थी गवर श्री कृष्ण बहुत कूदते हैं इनके ऊपर कि कृष्ण जी के ऊपर जब

3617
04:17:46,600 --> 04:17:50,840
इन्होंने कहा कि कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी तो हमारे आर्य

3618
04:17:50,840 --> 04:17:55,120
समाजी भाइयों ने लिखा था योगेश्वर श्री कृष्ण आपको जानक हैरानी

3619
04:17:55,120 --> 04:17:59,200
होगा योगेश्वर श्री कृष्ण में चंपत राय जी ने विष्णु पुराण से

3620
04:17:59,200 --> 04:18:03,360
रेफरेंसेस दिए हैं अय बताइए अपने मत को सिद्ध करने

3621
04:18:03,360 --> 04:18:07,560
के लिए व पुराण से रिफरेंस दे रहे हैं और फिर यह क्या कहेंगे कि पुराण का हम खंडन करते

3622
04:18:07,560 --> 04:18:11,880
हैं अच्छा स्ट्रीम के अंदर एक हिप्पोक्रीन

3623
04:18:11,880 --> 04:18:15,920
देखा होगा पहले तितिक्षा जी या मीनाक्षी

3624
04:18:15,920 --> 04:18:19,960
कोई था उन्होंने कहा कि मूर्ति पूजा में ये मूर्तियों

3625
04:18:19,960 --> 04:18:24,080
में कौन कन था इस बारे में हमें ठीक से पता नहीं है हम इस बात

3626
04:18:24,080 --> 04:18:28,240
की प्रमाणिकता नहीं लेते हैं वहां कौन-कौन था किसकिस ने अपने मुंह को छुपा

3627
04:18:28,240 --> 04:18:32,320
रखा था आप भी नाम का आलंबन ना ने आप सांकेतिक दृष्टि में ही

3628
04:18:32,320 --> 04:18:36,400
बात करें क्योंकि हमें नहीं पता कि कौन सी लाइव स्ट्रीम कहां पर किस रूप में

3629
04:18:36,400 --> 04:18:40,480
हुई है हुई है यह जानकारी हमें मिली है और वहां

3630
04:18:40,480 --> 04:18:44,560
पर जो नाम उधत किए जा रहे हैं वो वही लोग है जिनके व नाम है बोलने वाला

3631
04:18:44,560 --> 04:18:48,680
वही है जिनके वो नाम है यह भी कंफर्म नहीं है तो इस रूप में अपनी

3632
04:18:48,680 --> 04:18:52,880
बात को रखिए जी तो शिवा जी इसमें एक चीज जोड़ना चाहूंगा मैं कि वो जिस नाम

3633
04:18:52,880 --> 04:18:56,960
से आए थे तो वो नाम तो कई लोगों का भी हो सकता है ऐसी

3634
04:18:56,960 --> 04:19:01,040
बात नहीं है तो कम से कम उस नाम को केवल जो लोग उस

3635
04:19:01,040 --> 04:19:05,880
समय थे उस जगह पर और उन्होंने वो नाम लिखा था उस भाव से

3636
04:19:05,880 --> 04:19:09,920
ही नामों को लेने की भी क्या आवश्यकता है हम जब सांकेतिक दृष्टि में

3637
04:19:09,920 --> 04:19:14,040
बात कर ही सकते हैं सही बात है ये इससे मैं क्षमा

3638
04:19:14,040 --> 04:19:18,200
मांगूंगा इस के लिए तो वहां पर कोई थे महिला ही थी कोई

3639
04:19:18,200 --> 04:19:22,480
उन्होंने कहा कि महिला वही महिला वही जो ये दावा

3640
04:19:22,480 --> 04:19:26,600
कर करती है उस इस प्रकार का दावा किया होगा कि जिनके

3641
04:19:26,600 --> 04:19:31,200
किसी संस्कार पर हमने टिप्पणी की थी

3642
04:19:31,200 --> 04:19:35,400
हां तो उन्होंने यह कहा कि जो पहले मूर्तियां मिलती थी जिसमें

3643
04:19:35,400 --> 04:19:39,440
नगन इत्यादि ऐसे दृश्य दिखाए गए मूर्तियों के अंदर तो हा ये बात

3644
04:19:39,440 --> 04:19:43,720
मैंने भी कही जी हा ये अलंकार है लेकिन वहीं पर फिर

3645
04:19:43,720 --> 04:19:47,960
एक आदमी ने जो भी कहिए पुरुष ने उसके बाद मूर्ति

3646
04:19:47,960 --> 04:19:52,200
दिखाना चालू किया उसी मूर्ति से सिद्ध करने का प्रयास किया कि पहले स्त्रियां यग

3647
04:19:52,200 --> 04:19:56,480
पवित्र करती थी अब मैं ये कहूं आप पहले यह कहते हो कि अलंकार

3648
04:19:56,480 --> 04:20:00,760
था वो तो मैं भी कह सकता हूं कि पहले के पुरुषों ने यह सोचा होगा कि स्त्रियों का यज्ञ पवित्र

3649
04:20:00,760 --> 04:20:05,040
नहीं होता तो अलंकार रूप में उन्होंने मूर्ति बना दी कि ये भी एक अलंकार कर

3650
04:20:05,040 --> 04:20:09,560
ले कह सते अरे जिनको मूर्ति में विश्वास

3651
04:20:09,560 --> 04:20:13,560
नहीं है वो मूर्ति का आलंबन लेकर अपना मत सिद्ध कर रहे और क्या होगा दो

3652
04:20:13,560 --> 04:20:17,960
दोगले पन की पराकाष्ठा बताइए एक बार एक अलंकार

3653
04:20:17,960 --> 04:20:21,960
समाजी ने कहा कि ये देखो मुझको दिखाई मूर्ति ठीक है कि

3654
04:20:21,960 --> 04:20:26,200
ऐसा ऐसा उन्होंने पहना है ये क्या है तो मैंने कहा ये कमर बंद है उन्होंने

3655
04:20:26,200 --> 04:20:30,720
अपने टांग लिया है कांधे पर य यज्ञोपवित नहीं है अब बता

3656
04:20:30,720 --> 04:20:35,080
क्या है तुम्हारे पास प्रमाण कि व यज्ञोपवित ही था कमर बंद नहीं था तो

3657
04:20:35,080 --> 04:20:39,080
ये लोग ऐसे ही बातें करते हैं शास्त्र से प्रमाण होता नहीं है ठीक

3658
04:20:39,080 --> 04:20:43,120
है तो यही सब इनका है जी अच्छा इसके

3659
04:20:43,120 --> 04:20:46,320
और और चीजें थी इसके ऊपर शास्त्रीय प्रमाण और

3660
04:20:46,320 --> 04:20:51,080
मैं बात करूं जो हुआ इनके ही आचार है बार-बार आपने सुना होगा

3661
04:20:51,080 --> 04:20:55,200
मैं नाम नहीं लूंगा उनका कि इन आचार्य से हमारे आके शास्त्रार्थ करिए

3662
04:20:55,200 --> 04:20:59,720
इस गुरुकुल में जाकर के शास्त्रार्थ करिए तो उनके ही आचार्य हैं

3663
04:20:59,720 --> 04:21:04,280
ठीक है वोह नाम ले रहे थे इसलिए मैं बोल देता हूं उनका नाम कि इनसे जाकर शास्त्रार्थ करिए

3664
04:21:04,280 --> 04:21:08,320
या लोग देख रहे हैं वो समझ जाएंगे आ अलंकार समाजी

3665
04:21:08,320 --> 04:21:12,720
के आचार्य हैं एक ठीक है आचार्य नाम है उनका पूरा मैं नहीं बोलूंगा

3666
04:21:12,720 --> 04:21:16,920
उन वह खुद एक चैनल पर जाकर के पॉडकास्ट

3667
04:21:16,920 --> 04:21:21,080
में कहते हैं कि मुझे खुद अपने समाज की एक चीज नहीं समझ में आती

3668
04:21:21,080 --> 04:21:25,200
है जो परांत काल के बारे में बताया गया है स्वामी दयानंद जी ने

3669
04:21:25,200 --> 04:21:29,400
परांत काल के बारे में बताया एक निश्चित समय के बाद में आपको मोक्ष

3670
04:21:29,400 --> 04:21:33,600
से दोबारा आना पड़ेगा मृत्य मोक्ष

3671
04:21:33,600 --> 04:21:38,160
मुझे स्वीकार नहीं है ये अलंकार समाज का मोक्ष से मैं संतुष्ट

3672
04:21:38,160 --> 04:21:42,840
नहीं हा उन्होंने य खुद बोला तो आपके अलंकार

3673
04:21:42,840 --> 04:21:46,880
समाजी खुद आपके आचार्य जब आपके सिद्धांत को मानने से

3674
04:21:46,880 --> 04:21:50,960
डगमगा रहे हैं उनको खुद नहीं समझ में आ रहा इलॉजिकल लग रहा है तो आप दूसरे

3675
04:21:50,960 --> 04:21:55,040
को कैसे समझाएंगे आचार्य ही आपके नहीं समझ पा रहे हैं

3676
04:21:55,040 --> 04:21:59,440
तो क्या कहा जाए हमको आप कैसे संतुष्ट करेंगे जब आपके आचार्य जो न्याय इत्यादि

3677
04:21:59,440 --> 04:22:01,400
पढ़ के दर्शन इत्यादि पढ़कर जिसके ऊपर

3678
04:22:01,400 --> 04:22:05,600
आप कह रहे हैं कि उनको इतना ज्ञान है व्याकरण चार्य है निरुता चार्य है सब उन्होंने

3679
04:22:05,600 --> 04:22:09,920
पढ़ा हुआ है गुरुकुल में पढ़ा हुआ है वो भी संतुष्ट नहीं हुए आपके सिद्धांत

3680
04:22:09,920 --> 04:22:13,960
से तो हम अल्पज्ञ जिनको कोई ज्ञान नहीं है आपके हिसाब से से पंडों को कोई ज्ञान

3681
04:22:13,960 --> 04:22:18,360
नहीं होता तो उनको आप कैसे संतुष्ट करेंगे अपने सिद्धांत से

3682
04:22:18,360 --> 04:22:22,520
तो आप पहले अपने आचार्य को समझिए देखिए हमें अलंकार समाज से कोई द्वेष

3683
04:22:22,520 --> 04:22:26,800
नहीं है हमारे पूरे शंकराचार्य भगवान ने भी कहा कि

3684
04:22:26,800 --> 04:22:31,040
भगवान की प्रेरणा से ही स्वामी दयानंद जी का जन्म हुआ जब

3685
04:22:31,040 --> 04:22:35,120
मूर्ति पूजा विकृत हो गई थी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है हम तो उनका आदर भी

3686
04:22:35,120 --> 04:22:39,360
करते हैं एक सन्यासी के रूप में ब्रह्मचारी के रूप में एक योगी के रूप में बहुत

3687
04:22:39,360 --> 04:22:43,480
उनका आदर है लेकिन जो उनका आलंबन लेकर मैं स्वयं अपनी बात बताता हूं

3688
04:22:43,480 --> 04:22:47,680
आज के 2 साल पहले की ठीक है मैं मेरा भी ग्रुप चलता

3689
04:22:47,680 --> 04:22:51,800
था ठीक है टेलीग्राम पे इन लोग के साथ मैं रहा हूं तो इन्हीं लोगों के

3690
04:22:51,800 --> 04:22:56,240
कृत्यों के कारण मुझको दयानंद स्वामी से द्वेष हो गया कई सारे मैंने अपशब्द

3691
04:22:56,240 --> 04:23:00,440
भी उस समय बोले मुझे बोध नहीं था फिर मैंने शंकराचार्य भगवान को सुना उन्होंने

3692
04:23:00,440 --> 04:23:04,520
ऐसी बातें कहीं दयानंद जी के बारे में तो फिर मेरे पूरे माइंड मेरा चेंज

3693
04:23:04,520 --> 04:23:08,600
हो गया फिर मैं कभी उनका अनादर नहीं करता आदित्य जी बैठे हैं वो जानते हैं

3694
04:23:08,600 --> 04:23:13,120
इस विषय में हमने कई बार तो लोगों को डांटा है कि उनके बारे में उल्टा सीधा मत बोलो

3695
04:23:13,120 --> 04:23:17,240
लेकिन जो यह कह रही थी हिप्पोक्रेट में आपको बताता हूं

3696
04:23:17,240 --> 04:23:21,240
ये इन्होंने एक वीडियो दिखाया कि हम बहुत आदर करते हैं निश्चलानंद सरस्वती जी का आपके

3697
04:23:21,240 --> 04:23:25,360
आचार्यों का जो परंपरागत है जिन्होंने उनका क्योंकि रहना सहना बहुत

3698
04:23:25,360 --> 04:23:29,480
टफ है वह मान रहे हैं असली परंपरा को लेकिन यही लोग जो बैठे

3699
04:23:29,480 --> 04:23:33,560
थे यही वही जो आचार्य मैं बता रहा हूं जिन्होंने परांत काल

3700
04:23:33,560 --> 04:23:37,640
को कहा लॉजिकल बोला है कि मुझे नहीं समझ में आता वो उनका

3701
04:23:37,640 --> 04:23:41,760
एक सभा बैठा था एक समय पर उन्होंने उस समय पर शंकराचार्य

3702
04:23:41,760 --> 04:23:46,040
भगवान को डिफेंड किया था खुद अलंकार समाजी थे उन्होंने डिफेंड

3703
04:23:46,040 --> 04:23:50,080
किया था भगवान शंकराचार्य का एक वाक्य है प्रश्नोत्तरी में कि

3704
04:23:50,080 --> 04:23:54,120
द्वार किम कम नरक स्य नारी ठीक है कि नारी जो होती है नरक

3705
04:23:54,120 --> 04:23:58,720
का द्वार होती है तो उसके ऊपर उन्होंने एक्सप्लेनेशन दिया था कि यहां पर

3706
04:23:58,720 --> 04:24:02,720
नारी जो शब्द है बहुत सोच समझ के लिखा गया है यह भी लिख सकते

3707
04:24:02,720 --> 04:24:06,720
थे कि द्वार कि मेकम नरक स्त्री द्वार कि मेकम

3708
04:24:06,720 --> 04:24:11,120
नरक महिला लेकिन उन्होंने क्या लिखा द्वार की मेकम रकस नारी

3709
04:24:11,120 --> 04:24:15,160
तुम किसी स्त्री को अगर नारी के रूप में देख रहे हो तो ये तुम्हारा सबसे

3710
04:24:15,160 --> 04:24:19,400
बड़ा दोष दोष है तुम उसको बहन के रूप में देखो उसको

3711
04:24:19,400 --> 04:24:23,440
तुम माता के रूप में देखो इस रूप में देखोगे तो तुमको कोई पाप नहीं लगेगा

3712
04:24:23,440 --> 04:24:27,800
फिर उन्होंने श्रुति वचन को कहा छांदोग्य एक आती है

3713
04:24:27,800 --> 04:24:32,000
कि अगर सपने में स्वप्न में तुमको नारी का दर्शन होता है वहां

3714
04:24:32,000 --> 04:24:32,500
पर ऐसा

3715
04:24:32,400 --> 04:24:36,560
भगवत पाद ने तो वहां पर देवी का जिक्र किया है वर्णन किया है कि अगर देवी

3716
04:24:36,560 --> 04:24:40,600
का तुमको दर्शन होता है तो तुम्हारे जो मनोवांछित कर्म है उसको

3717
04:24:40,600 --> 04:24:44,800
तुम पूर्ति हो जाएगी तुम्हारी जो भी तुम चाहते हो तुम्हें मिल जाएगा तो उसको

3718
04:24:44,800 --> 04:24:48,840
समझाते हुए आचार्य कहते हैं उस समय अलंकार समाझ यों के कि वहां

3719
04:24:48,840 --> 04:24:53,040
पर श्रुति वाक्य ऐसा है कि अगर तुम्हारे सपने में नारी आ रही है

3720
04:24:53,040 --> 04:24:57,320
स्त्री आ रही है और वह देवी के रूप में आ रही है तुम तुम्हारे अंदर इतना

3721
04:24:57,320 --> 04:25:02,080
आदर है स्त्रियों के लिए कि तुम उनको देवी स्वरूप देख रहे हो सपने में भी तो तुम्हारा

3722
04:25:02,080 --> 04:25:06,080
जो व्यवहार होगा इतना उत्तम होगा कि तुम जीवन में कुछ भी प्राप्त कर सकते हो अपने

3723
04:25:06,080 --> 04:25:10,080
कर्मों से तो कितना अच्छे तरीके से उन्होंने कहा उन्होंने बोला

3724
04:25:10,080 --> 04:25:14,080
यह भाष्य अगर भगवान शंकर भगवत पाद जो है

3725
04:25:14,080 --> 04:25:18,360
अगर व द्रोही होते द्वेष होते स्त्रियों के तो अपने

3726
04:25:18,360 --> 04:25:22,520
श्रुति में ऐसा क्यों भाष्य करते इतना सुंदर इसका मतलब वह द्वेष

3727
04:25:22,520 --> 04:25:27,120
नहीं थे तो यह खुद इतना सुंदर वर्णन देख कर के यही

3728
04:25:27,120 --> 04:25:31,240
अलंकार समाजी समाज ने स्ट्रीम किया बकायदा और

3729
04:25:31,240 --> 04:25:36,960
अपने ही आचार्य का खंडन किया कि आप गलत कह रहे हैं व बहुत

3730
04:25:36,960 --> 04:25:40,960
बड़े एक बात और जोड़ना चाहूंगा जो नारी

3731
04:25:40,960 --> 04:25:45,920
नर के द्वार वाली जो बात कही है भगवत पाद गुरु शंकराचार्य महाभाग्य

3732
04:25:45,920 --> 04:25:47,480
समझना भी बहुत आवश्यक है

3733
04:25:47,480 --> 04:25:51,520
दर्शकों के लिए क्योंकि वो जो बात उन्होंने कही है वो वो जो लिखा है

3734
04:25:51,520 --> 04:25:55,960
उन्होंने वो उन्होंने सन्यासी के लिए लिखा है तो बिल्कुल बकुल

3735
04:25:55,960 --> 04:26:00,920
जो भी हा तो सन्यासी के लिए तो नारी

3736
04:26:00,920 --> 04:26:05,680
नरक का द्वार कहने का जो उनका संदर्भ है वो सन्यासी के पॉइंट ऑ व्यू से समझना

3737
04:26:05,680 --> 04:26:09,800
चाहिए मार्ग के हैं उनके लिए नारी

3738
04:26:09,800 --> 04:26:14,080
जो है वो उस रूप में कहा ति जो प्रवृति मार्ग

3739
04:26:14,080 --> 04:26:18,120
पर है उनके लिए नहीं जो प्रवृत्ति से निवृत्ति पा चुके अब उनके

3740
04:26:18,120 --> 04:26:22,240
लिए जो है नारी को उस तरह से देखना वो उचित नहीं है तो वो उनकी

3741
04:26:22,240 --> 04:26:26,720
जो जो अब उनका निवृत्ति पर कोई क्यों जाता है अब मुझे मोक्ष चाहिए मगर

3742
04:26:26,720 --> 04:26:30,760
अगर वो नारी को नारी के दृष्टिकोण से देखेगा तो वह फिर प्रवृत्ति की

3743
04:26:30,760 --> 04:26:35,080
ओ प्रवृत होगा तो उसके जो लक्ष्य में वो बाधा है उस परिपेक्ष

3744
04:26:35,080 --> 04:26:39,600
में कहा गया बाकी मैंने

3745
04:26:39,600 --> 04:26:43,680
अपने एक वीडियो में कई वीडियो में बताया भी है कि कपा जी ने वक्तव्य दिया था

3746
04:26:43,680 --> 04:26:47,920
जो गुरुदेव बताते हैं कि जब एक बार ऐसा हो रहा था कि

3747
04:26:47,920 --> 04:26:51,960
जो मुस्लिम तंत्र है व आर्य समाज पर प्रहार कर रहा था और उस

3748
04:26:51,960 --> 04:26:55,960
समय उनकी सहायता के लिए कपाती जी खड़े

3749
04:26:55,960 --> 04:27:00,120
हुए थे उनसे किसी ने टोका भी कि आप इनकी सहायता क्यों करते हैं तो करपात्री जी

3750
04:27:00,120 --> 04:27:03,520
ने क्या कहा था कि

3751
04:27:03,520 --> 04:27:07,680
ऐसे नहीं वोह हमारे घर की बात है वेदों

3752
04:27:07,680 --> 04:27:12,320
में परमाण बुद्धि वाले हैं हमारे घर की बात है

3753
04:27:12,320 --> 04:27:16,480
जी और हम आपस में निपट लेंगे मगर बाहर का कोई आ जाएगा तो वही महाभारत

3754
04:27:16,480 --> 04:27:20,600
क्या थी महाभारत की सीख कि आपस की बात है तो वो

3755
04:27:20,600 --> 04:27:24,840
100 हम पांच मगर कोई बाहर का आ गया तो हम 105

3756
04:27:24,840 --> 04:27:29,000
तो कृपा जी और गुरुदेव भी कोई अनादर

3757
04:27:29,000 --> 04:27:33,280
भाव कभी भी हमें नहीं सिखाया गया भाई ना उन्होंने कभी किया हां

3758
04:27:33,280 --> 04:27:37,520
इनके द्वारा जो अनादर है जो दोगलापन है वो अवश्य छलकता है

3759
04:27:37,520 --> 04:27:41,720
इनकी बातों में ही छलकता है पहली बात तो वो जो वो जो ग्रंथ ही है इनका

3760
04:27:41,720 --> 04:27:46,080
मूल उसी में भांड इत्यादि शब्द लिखे क्या करोगे को

3761
04:27:46,080 --> 04:27:50,280
उसमें क्या कर लोगे आप जो नीव है फाउंडेशन मेंही

3762
04:27:50,280 --> 04:27:54,280
लिखा है और इनके जो आज के

3763
04:27:54,280 --> 04:27:58,640
कुछ बुद्धिजीवी हैं वह कई चीजों में जाकर के यहां पर विपरीत

3764
04:27:58,640 --> 04:28:02,680
दिशा में जा रहे हैं मगर फिर भी अब अब

3765
04:28:02,680 --> 04:28:06,760
क्या करेंगे यहां पर जो जो जो धर्म निष्ठ

3766
04:28:06,760 --> 04:28:10,960
नहीं है ईश्वर निष्ठ नहीं है है ना जो मोक्ष निष्ठ

3767
04:28:10,960 --> 04:28:15,040
नहीं है जो व्यक्ति निष्ठ है जो संस्था निष्ठ है वो पता है क्या

3768
04:28:15,040 --> 04:28:19,000
करेगा ऐसे बुद्धिजीवियों के लिए वो क्या करेगा कहेगा कि वो आप्रामा

3769
04:28:19,000 --> 04:28:23,120
है वो आर समाज है ही नहीं वो आर समाज ही

3770
04:28:23,120 --> 04:28:27,520
नहीं है तो मैं आज एक प्रकाश डालना

3771
04:28:27,520 --> 04:28:31,560
चाहूंगा कि जो परंपरा की बात

3772
04:28:31,560 --> 04:28:35,720
हम लोग करते हैं मैं एक चीज पर प्रकाश डालना चाहूंगा कि आर्य समाज

3773
04:28:35,720 --> 04:28:39,720
का अंतिम निर्णायक आज के टाइम में कौन है

3774
04:28:39,720 --> 04:28:43,720
बता सकते हैं ये लोग नहीं लौकिक विधान के

3775
04:28:43,720 --> 04:28:48,000
अनुसार आपका आपको आलंबन लेना होगा जो शास्त्रोक्त नहीं है

3776
04:28:48,000 --> 04:28:52,000
अन्यथा आप यह सिद्ध नहीं कर सकते कि आर्य समाज का अंतिम निर्णायक यह

3777
04:28:52,000 --> 04:28:56,440
व्यक्ति है हमेशा उलझे रहो एक बात किसी ने अगर कोई मिलावट

3778
04:28:56,440 --> 04:29:00,560
कर दी तो कोई यह कहने वाला नहीं है नहीं यह मैंने अपने गुरु से पढ़ा था यह

3779
04:29:00,560 --> 04:29:04,680
शब्द यहां पर नहीं था क्योंकि परंपरा को आप मानते नहीं हो आप तो

3780
04:29:04,680 --> 04:29:08,760
चुनावी प्रक्रिया पर चलते हो तो इनके पास

3781
04:29:08,760 --> 04:29:12,960
परंपरा ना होने के कारण यह स्वयं को आर्य समाजी भी नहीं कर सकते

3782
04:29:12,960 --> 04:29:17,240
क्लियर कट कि मैं आर समाजी हूं यह बहुत बड़ी विडंबना है

3783
04:29:17,240 --> 04:29:21,480
जैसे अभी मैंने रामपाल वालों से पूछ लिया कि भाई आपको कौन

3784
04:29:21,480 --> 04:29:25,600
व्यक्ति है जो रामपाल दास जो इस समय जेल में है उनके

3785
04:29:25,600 --> 04:29:29,920
विहाव से यहां पर सूचनाएं दे रहा है क्या उन्होंने कहीं पर स्वीकार किया

3786
04:29:29,920 --> 04:29:34,000
यह मेरा उत्तराधिकारी है तो जो व्यक्ति परंपरा को नहीं मानता है वो उत्तराधिकारी

3787
04:29:34,000 --> 04:29:38,080
की बात ही नहीं कर सकता है तो जब इनके य परंपरा को माना नहीं गया तो इनके य

3788
04:29:38,080 --> 04:29:42,160
कोई गद्दी है ही नहीं वो है अंतिम निर्णायक इस तंत्र का है

3789
04:29:42,160 --> 04:29:46,200
क्या आदर्श जी आपकी जानकारी में नहीं हमारे जानकारी

3790
04:29:46,200 --> 04:29:50,360
में तो नहीं है जहां तक हमें पता है तो यह केवल इतना ही

3791
04:29:50,360 --> 04:29:54,440
बता दे कि भाई आर्य समाज का अंतिम निर्णायक कौन है जो

3792
04:29:54,440 --> 04:29:58,520
य ठोक के कह दे कि यह होगा यह अर्थ है आर्य

3793
04:29:58,520 --> 04:30:02,520
समाज की बात का और यह नहीं है तो आपके यहां पर कोई

3794
04:30:02,520 --> 04:30:08,520
अंतिम निर्णायक नहीं है हमारे यहां पर है यह होता है परंपरा का

3795
04:30:09,120 --> 04:30:14,240
लाभ अच्छा एक चीज मैं बताना चाहूंगा भैया आपको

3796
04:30:14,240 --> 04:30:18,760
जी गुरुदेव का वक्तव्य था हमने सुना था

3797
04:30:18,760 --> 04:30:22,880
तो बात यह होती है ना कि इन्होंने चार पीठ की स्थापना कैसे

3798
04:30:22,880 --> 04:30:27,480
कर दी है ना अगर इनका शंकराचार्य परंपरा

3799
04:30:27,480 --> 04:30:31,720
जैसी कोई चीज होती तो वेदों में वर्णन होता अगर प्रमाणिक

3800
04:30:31,720 --> 04:30:35,840
होती तो तो उन्होंने दिया है इसका रिफरेंस वेद से

3801
04:30:35,840 --> 04:30:40,400
ही दिया है उपनिषदों के अंदर में शंकराचार्य

3802
04:30:40,400 --> 04:30:44,520
के जो चार पीठ हैं उनके बारे में संकेत मिलता

3803
04:30:44,520 --> 04:30:48,520
है जिसको फिर शंकराचार्य भगवान ने उसका अनुशीलन करके चार

3804
04:30:48,520 --> 04:30:52,560
पीठ बनाया से हवान में नहीं बना दिए ये भी बात है प्रमाण मैं आपको भेज

3805
04:30:52,560 --> 04:30:56,880
दूंगा आप दिखा दीजिएगा कभी स्ट्रीम में अपने सारे तो ये सारी चीजें

3806
04:30:56,880 --> 04:31:00,880
हर चीज वेदोक्त ही है अच्छा आदित्य जी अगर आप बता

3807
04:31:00,880 --> 04:31:05,040
पाए तो भगवान शंकर का जब हम लोग रुद्राभिषेक करते हैं

3808
04:31:05,040 --> 04:31:09,280
तो वहां पर भगवान शंकराचार्य की भी स्तुति होती है अगर यह मंत्र आपको याद होगा

3809
04:31:09,280 --> 04:31:15,280
दित्य जी तो आप बता पाएंगे इस समय एक मंत्र आता है

3810
04:31:15,920 --> 04:31:20,120
हेलो आदित्य जी नम कपने च केसाय

3811
04:31:20,120 --> 04:31:25,120
च नमा कपने च केय

3812
04:31:25,120 --> 04:31:31,120
च इसको थोड़ा एक्सप्लेन

3813
04:31:31,320 --> 04:31:35,400
करिए कि जो जो भगवान बड़ी बड़े

3814
04:31:35,400 --> 04:31:39,720
जटाओ वाले हैं उन्हें भी प्रणाम है और यत केसाय

3815
04:31:39,720 --> 04:31:43,840
बिना केश के जो भगवान है जो सिखा भी नहीं रखते हैं

3816
04:31:43,840 --> 04:31:48,920
सन्यासी अग्नि का परित्याग कर देते हैं ऐसे शंकर को भी प्रणाम

3817
04:31:48,920 --> 04:31:53,080
है रुद्राभिषेक में बोला जाता है रुद्रा अध्याय

3818
04:31:53,080 --> 04:31:57,240
में कौन से शंकर है जो अभी तक हमको कहीं दिखाया

3819
04:31:57,240 --> 04:32:01,320
आपको ऐसे शंकर जो टकले हो जिनके केस ना हो

3820
04:32:01,320 --> 04:32:05,320
कहीं पर स्टोरी य तो भगवान शंकराचार्य के बारे में बात हो

3821
04:32:05,320 --> 04:32:09,320
रहा है क्योंकि सन्यासी तो वही थे शंकर

3822
04:32:09,320 --> 04:32:13,560
अवतारी तो यहां पर भी संकेत हमको मिलता है तो

3823
04:32:13,560 --> 04:32:17,840
हर चीज परंपरा जब आप पढ़ेंगे तो हर चीज परंपरा से ही आपको लेनी पड़ेगी

3824
04:32:17,840 --> 04:32:21,840
अच्छा एक चीज था भैया अगर मैं कुछ समय मिले तो मैं उस पर बोलना

3825
04:32:21,840 --> 04:32:25,920
चाहूंगा जो यह बात था सनातन का कि सनातन में कहां लिखा है ऐसा

3826
04:32:25,920 --> 04:32:30,200
ऐसा ऐसा ऐसा करना देखो जैसे मैं आपसे पूछ रहा हूं

3827
04:32:30,200 --> 04:32:31,360
अगर आपके गुरुदेव

3828
04:32:31,360 --> 04:32:36,240
ने किसी के भी गुरुदेव ने अगर आपको किस कोई चीज करने से मना कर दी

3829
04:32:36,240 --> 04:32:40,560
यह चीज मत करना तो तुम कर रहे हो तुम गलत हो लेकिन अगर

3830
04:32:40,560 --> 04:32:44,840
मान लो गुरुदेव ने कि किसी चीज को करने से मना नहीं किया जैसे जलेबी खाने से मेरे गुरुदेव

3831
04:32:44,840 --> 04:32:48,880
ने मना नहीं किया और यह भी नहीं कहा कि खा लो तो मैं क्या करूं उसमें

3832
04:32:48,880 --> 04:32:53,080
अगर किसी का उससे कुछ बुरा हो रहा हो धर्म का अहित हो रहा हो तब

3833
04:32:53,080 --> 04:32:57,360
तो मैं करूं तब तो दिक्कत है किसी का अहित नहीं हो रहा और

3834
04:32:57,360 --> 04:33:01,360
कहते हैं बहुत लोग कहते हैं कि आप आप शंकराचार्य को मानने वाले तो टेलीग्राम पर

3835
04:33:01,360 --> 04:33:05,520
क्या कर रहे हैं काहे इतना वक्तव्य दे रहे हैं आपके गुरु ने कहा क्या तो भाई

3836
04:33:05,520 --> 04:33:09,840
मेरे गुरु जी हर चीज बताएंगे क्या उन्होंने संकेत कर दिया ऐसा ऐसा काम करना मैं वो

3837
04:33:09,840 --> 04:33:13,920
करूंगा जितना मुझसे हो पाएगा तो कितनी मूर्खता पूर्ण

3838
04:33:13,920 --> 04:33:18,600
कितनी तर्क तर्क हीन बात है य और अपना नाम क्या रखेंगे

3839
04:33:18,600 --> 04:33:22,800
तर्कशील आर्या क्या तर्क था भाई तुम्हारे कल के वीडियो में

3840
04:33:22,800 --> 04:33:26,920
तर्क निकालो तो एक मिनट का भी तर्क नहीं निकलेगा

3841
04:33:26,920 --> 04:33:30,920
कुछ नहीं है और किसी को परांत काल पर मैं तो भी कह रहा हूं

3842
04:33:30,920 --> 04:33:34,920
परांत काल के विषय पर अगर किसी को बात करना हो तो आ जाएगा कर लेगा

3843
04:33:34,920 --> 04:33:39,280
बहुत बेहतरीन काल क्या था क्या प्रांत काल का विषय क्या

3844
04:33:39,280 --> 04:33:43,400
था मैं आपको रिफरेंस भेज रहा हूं भैया आप दिखा पाए थोड़ा

3845
04:33:43,400 --> 04:33:46,160
स्क्रीन शेयर

3846
04:33:46,160 --> 04:33:47,160
करके

3847
04:33:47,160 --> 04:33:52,640
आप जो है मैं आप मेरे को इग्राम पर भेजिए

3848
04:33:52,640 --> 04:33:57,280
आप इग्राम पर अच्छा एक मिनट

3849
04:33:57,280 --> 04:34:01,320
मैं आदित्य जी को भेज देता हूं आदित्य कोई है यहां पर मैं क्या कहां

3850
04:34:01,320 --> 04:34:05,560
से भेजू अपना आप आईडी दे दीजिए भेज देता हूं आपको आवान

3851
04:34:05,560 --> 04:34:10,360
लिखिए आ जाएगा ा भेज दिया जाए तो

3852
04:34:10,360 --> 04:34:14,200
नवीन शर्मा जी भता है

3853
04:34:14,200 --> 04:34:20,200
तो मैसेज कर दीजिए वो लिख के दे दीजिए वो प्राइवेट चैट उने लिंक दिया

3854
04:34:22,720 --> 04:34:27,480
अच्छा तो तुम्हारी है तो हां तो मैं ये

3855
04:34:27,480 --> 04:34:31,520
प भज को हम फॉरवर्ड कर देंगे तुरंत मैं मैं तब तक मैं तब तक जो

3856
04:34:31,520 --> 04:34:36,360
है एक अंतिम वक्तव्य दे दूं जो मेरा बाकी रह गया है कि

3857
04:34:36,360 --> 04:34:40,360
आपने कुछ दिनों पहले देखा होगा जब ये ईश्वर सर्वशक्तिमान का विषय चल रहा था

3858
04:34:40,360 --> 04:34:44,360
परंपरा का विषय चल रहा था तो जब हमने यह

3859
04:34:44,360 --> 04:34:48,480
एक राधा रानी के ऊपर जो वक्तव्य थे उनको लेकर के वीडियो बना दिया था और

3860
04:34:48,480 --> 04:34:53,480
उस पर भड़क गए थे और जो कुछ

3861
04:34:53,480 --> 04:34:57,640
छुटकू में उसमें एक कोई ठीक ठाक से बात करने वाले भी

3862
04:34:57,640 --> 04:35:03,040
हैं तो उन्होंने अपने वीडियो में क्या कहा

3863
04:35:03,040 --> 04:35:07,400
कि रामपाल जी और

3864
04:35:07,400 --> 04:35:11,400
इकन और आर्य समाज तो ये जो आवान है जैसा कि अभी आदित्य जी

3865
04:35:11,400 --> 04:35:15,680
बता ये जो आवान है यह उन्हीं लोगों को टारगेट

3866
04:35:15,680 --> 04:35:19,760
करता है जो जाति जातिवाद नहीं मानते अब यहां

3867
04:35:19,760 --> 04:35:23,840
पर उन्होंने क्या किया उनके लिए वही स्कन हमारा हो

3868
04:35:23,840 --> 04:35:27,840
गया उनके लिए वही जो रामपाल हैको उन्होंने जेल में भिजवाया है

3869
04:35:27,840 --> 04:35:32,240
है ना उसम जेल में जो भिजवाने का हाथ है उन्हीं का है

3870
04:35:32,240 --> 04:35:36,240
तो वही उनके लिए आज वो एक पटल पर आ गए क्यों आ गए

3871
04:35:36,240 --> 04:35:38,840
क्योंकि शेर का बच्चा एक ही

3872
04:35:38,840 --> 04:35:42,840
अच्छा शेर का बच्चा एक ही अच्छा एक मनुवादी

3873
04:35:42,840 --> 04:35:47,040
आया एक परंपरावादी आया और ये जितने

3874
04:35:47,040 --> 04:35:51,520
बाहर के तंत्रों से प्रभावित तंत्र हैं विपरीत विचारधारा

3875
04:35:51,520 --> 04:35:55,840
सनातन के विरुद्ध विचारधारा से प्रभावित जिनकी आइडल जीी है

3876
04:35:55,840 --> 04:36:00,200
गुण अर्थ में देखो गुण क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर

3877
04:36:00,200 --> 04:36:04,880
परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म उन तीनों परही प्रहार है आपके द्वारा

3878
04:36:04,880 --> 04:36:08,920
ईश्वर अनंत नहीं है मोक्ष से आपके खुद के जो आचार है

3879
04:36:08,920 --> 04:36:13,040
वो सेटिस्फाइड नहीं है और धर्म को बदलने की बात आपका खुद का व्यक्ति कर रहा

3880
04:36:13,040 --> 04:36:17,120
है धर्म बदला जाएगा तीनों पटल गया और बाकी टीका

3881
04:36:17,120 --> 04:36:21,240
लगाना है नहीं लगाना मत लगाओ नाम जप नहीं करना है यज्ञ

3882
04:36:21,240 --> 04:36:25,920
करना है खूब करो क्यों भाई मैं गलत कह रहा हूं आदित्य जी

3883
04:36:25,920 --> 04:36:30,240
जो बाकी की शेष चीज रह जाती है उनको लेकर के इतना विवाद नहीं है

3884
04:36:30,240 --> 04:36:34,280
केवल जब आप शाश्वता पर आ जाएंगे धर्म की जब

3885
04:36:34,280 --> 04:36:38,440
हम ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता पर आ जाएंगे और जब हम परम

3886
04:36:38,440 --> 04:36:42,800
स्वतंत्र मोक्ष पर आ जाएंगे हम लोग एक हो जाएंगे हमारे बीच में वो जो

3887
04:36:42,800 --> 04:36:47,280
कर्मकांड विषयक जो अंतर आएगा वो आएगा केवल यही तो आएगा

3888
04:36:47,280 --> 04:36:52,120
दूसरा यह है कि जिस तरह सेकी फ है सामान्य

3889
04:36:52,120 --> 04:36:54,400
हिंदु से प्रत उनके

3890
04:36:54,400 --> 04:36:58,560
आचरण उसी से प्रभावित क्योंकि वहा अभाव है तो वो तीनों

3891
04:36:58,560 --> 04:37:03,320
पर आपका प्रहार है तो जब य जब यह हुआ कि आवान

3892
04:37:03,320 --> 04:37:08,120
ने समाज को एक करने के लिए

3893
04:37:08,120 --> 04:37:12,240
और यह प्रश्न करने चालू किए कि आपके पास वेद म कैसे आए

3894
04:37:12,240 --> 04:37:16,320
आप कैसे परंपरा प्राप्त आचार्यों के ज्ञान का खंडन कर रहे हैं

3895
04:37:16,320 --> 04:37:20,320
बहुत साधारण सी भाषा में सब प्रश्न किए तो क्या हुआ धीरे-धीरे

3896
04:37:20,320 --> 04:37:24,440
मैं ये अपने कई वीडियोस में कह चुका हूं धीरे-धीरे वो तंत्र जो है एक

3897
04:37:24,440 --> 04:37:28,920
होने लगे आज देखिए एक ही पटल पर दिवाली की बुराई करने वाला

3898
04:37:28,920 --> 04:37:33,440
है ना कौन दिवाली की निंदा करने वाला कौन रामपाल

3899
04:37:33,440 --> 04:37:37,560
तंत्र और क्या कहते हैं ये

3900
04:37:37,560 --> 04:37:41,720
शिव जी को राधा मां को राधा जी को निंदा करने वाला कौन सा तंत्र

3901
04:37:41,720 --> 04:37:45,760
अलंकार तंत्र और शिव जी को

3902
04:37:45,760 --> 04:37:49,800
शिव जी की निंदा करने वाला कृष्ण से भिन्न किसी भी स्वरूप की निंदा करने

3903
04:37:49,800 --> 04:37:54,240
वाला अलग हटा देने वाला है ना वो कौन है हरे कृष्णा

3904
04:37:54,240 --> 04:37:58,520
तंत्र आज वो तीनों एक पटल पर होकर के आर समाज के

3905
04:37:58,520 --> 04:38:02,520
या अलंकार समाज के जो कुछ लोग हैं वह बात कर रहे हैं

3906
04:38:02,520 --> 04:38:06,760
रामपाल दास जी और हरे कृष्णा वाले और हमारा आवान इसलिए

3907
04:38:06,760 --> 04:38:09,720
जो है वो करता है विरोध में वीडियो बनाता है क्योंकि आवान

3908
04:38:09,720 --> 04:38:13,720
जो है हम लोग जो है जातिवाद नहीं मानते ठीक भैया

3909
04:38:13,720 --> 04:38:17,840
कह रहे नवीन जी ने प्रमाण देख लिया है टेलीग्राम प उस पर चर्चा की जाए

3910
04:38:17,840 --> 04:38:21,880
थोड़ा सा मैं समझ र बस बस बस बस बात कर रहा

3911
04:38:21,880 --> 04:38:26,120
बस मैं अपनी बात खम पूरी कर रहा हूं तो राम तो यह चीज

3912
04:38:26,120 --> 04:38:30,280
जो है कि ये दो ये लोग जितने भी है मैंने बहुत पहले वीडियो दिखाया था

3913
04:38:30,280 --> 04:38:34,360
यह देखो तीन प्रकार की तीन प्रकार की किताबें जिसमें की एक है

3914
04:38:34,360 --> 04:38:38,560
प्रकाश एक है भगवत गीता वहां की विदेश की और एक है गीता तेरा

3915
04:38:38,560 --> 04:38:42,760
ज्ञान अमृत इन तीनों में सबसे पहले भगवत पाद आदि

3916
04:38:42,760 --> 04:38:46,840
शंकराचार्य जी का खंडन उनकी बुराई उनकी निंदा लिखी हुई है इनकेन

3917
04:38:46,840 --> 04:38:51,160
प्रकार और आज वही समय आ गया ये तीनों व्यवहारिक दृष्टि

3918
04:38:51,160 --> 04:38:55,280
से भी एक हो रहे हैं तो ये इनकी वास्तविकता है

3919
04:38:55,280 --> 04:38:59,400
जी आदर्श जी

3920
04:38:59,400 --> 04:39:03,480
बोले जी अच्छा एक विनोद की बात मैं

3921
04:39:03,480 --> 04:39:08,160
रख दूं थोड़ा सा इन्हीं लोगों के बारे में भागवत में

3922
04:39:08,160 --> 04:39:12,160
एक आता है वर्णन कि जब भक्ति जो है ना

3923
04:39:12,160 --> 04:39:16,320
उसका लोप चालू होता है गुजरात से और भक्ति

3924
04:39:16,320 --> 04:39:20,520
आकर के फिर से युवा बनती है कहां पर वृंदावन में

3925
04:39:20,520 --> 04:39:24,800
तो मुझे तब अलंकार समाजी याद आते हैं कहां से इनकी शुरुआत

3926
04:39:24,800 --> 04:39:29,680
हुई थी गुजरात से और कहां प इनका टारगेट रहता खत्म करना वृंदावन

3927
04:39:29,680 --> 04:39:34,000
तो भगवान ने सुखदेव जी ने पहले इनका दे दिया है

3928
04:39:34,000 --> 04:39:38,000
ज राधा जी की बात रहे तो मैं एक चीज बता दूं राधा

3929
04:39:38,000 --> 04:39:42,160
जी को श्राप दिया था है ना जो कथा

3930
04:39:42,160 --> 04:39:46,520
आती है पुराणों के अंदर तो श्री दामा ने श्राप दिया था भगवान

3931
04:39:46,520 --> 04:39:50,560
से मिलने जा रही थी राधा जी तो राधा जी से च खाते थे

3932
04:39:50,560 --> 04:39:54,600
पहले श्रीरामा जी तो उन्होने कहा अगर मिलने जाओगी तो तुमको

3933
04:39:54,600 --> 04:39:58,600
हम श्राप दे देंगे कि दिग दिगंतर तक लोग तुम्हे

3934
04:39:58,600 --> 04:40:02,640
अपमानित करते रहेंगे तो वही हो रहा है उन्होंने क्या चुना

3935
04:40:02,640 --> 04:40:06,680
उन्होंने कहा कि मुझे अपमानित करने दो मैं कृष्ण से विलग नहीं होंगी तो वही

3936
04:40:06,680 --> 04:40:10,920
आज हो रहा है तो चलिए प्रमाण पर देख ले थोड़ा सा परांत काल पर थोड़ा

3937
04:40:10,920 --> 04:40:14,960
चर्चा हो जाए व सही है हां

3938
04:40:14,960 --> 04:40:20,960
इसको खोल दीजिए स्क्रीन शेयर कर

3939
04:40:22,440 --> 04:40:27,960
दीजिए जब पहले वाली जो पहले मैंने भेजा ना सबसे पहले उसको

3940
04:40:27,960 --> 04:40:33,960
खोलिए जो एक क्वेश्चन आंसर के फॉर्म में

3941
04:40:35,840 --> 04:40:40,040
है जी तो यहां पर जो प्रश्न

3942
04:40:40,040 --> 04:40:44,120
किया जा रहा है पंडो द्वारा पंडे क्या पूछ रहे हैं कि

3943
04:40:44,120 --> 04:40:48,320
जो मुक्ति से भी जीव जो मुक्ति से भी जीव फिर

3944
04:40:48,320 --> 04:40:52,360
आता है तो वह कितने समय तक मुक्ति में रहता है

3945
04:40:52,360 --> 04:40:56,520
तो उत्तर देते हैं स्वामी जी कि ते ब्रह्म लोके ह

3946
04:40:56,520 --> 04:41:00,520
परांत काले परामदा परि मुच अंती सर्वे

3947
04:41:00,520 --> 04:41:04,520
यह जो है श्रुति वचन है ठीक है मुंडक उपनिषद का वचन है वो

3948
04:41:04,520 --> 04:41:05,920
कहते हैं कि

3949
04:41:05,920 --> 04:41:10,600
33 लाख 20 सहस्त्र वर्षों की एक चतुर्य गी

3950
04:41:10,600 --> 04:41:14,760
वो सहस्त्र चतुर युग हों का एक अहोरात्र ऐसे

3951
04:41:14,760 --> 04:41:19,000
30 अहोरात्र का एक महीना ऐसे ब बार महीनों

3952
04:41:19,000 --> 04:41:20,600
का एक वर्ष ऐसे

3953
04:41:20,600 --> 04:41:24,960
सत वर्षों का परांत काल होता है ठीक अब इसको नोट करिएगा

3954
04:41:24,960 --> 04:41:28,960
इतना लंबा समय बहुत समय होता है ये भी बहुत छोटा समय नहीं है बहुत

3955
04:41:28,960 --> 04:41:33,000
लंबा समय है अच्छा इसके ऊपर थोड़ा चर्चा करेंगे अब हम खोलेंगे इस

3956
04:41:33,000 --> 04:41:37,040
पर भगवत पाद का भाष्य शंकर भाष्य शंकर भाष्य

3957
04:41:37,040 --> 04:41:41,040
खोल दीजिए थोड़ा अा देखिएगा किस तरीके

3958
04:41:41,040 --> 04:41:45,280
से यही लाइन प हमारा कौन सा उपनिषद है

3959
04:41:45,280 --> 04:41:51,280
ये ये है मुंडक उपनिषद उपनिषद

3960
04:41:52,440 --> 04:41:58,440
हां इसके बाद वाला पेज खोलिए जो एक और पेज था ना उसको

3961
04:42:03,480 --> 04:42:09,400
खोलिए एक दूसरा पेज भी होगा दो पेजेस भेजे

3962
04:42:09,400 --> 04:42:15,400
होंगे ये है क्या

3963
04:42:21,940 --> 04:42:24,600
[संगीत]

3964
04:42:24,600 --> 04:42:29,280
तो एक सेकंड यह वाला यही है ना

3965
04:42:29,280 --> 04:42:34,640
एक दूसरा पेज भी होगा भैया जिसमें मंत्र लिखा होगा फिर उसकी व्याख्या

3966
04:42:34,640 --> 04:42:38,720
होगी देखिए उसको क्योंकि

3967
04:42:38,720 --> 04:42:42,720
पहले हमको देखना पड़ेगा कि इसका सामान्य अर्थ क्या और स्वामी जी ने क्या इसका अर्थ किया

3968
04:42:42,720 --> 04:42:46,920
है सामान्य अर्थ तो हम बता दे आपको हमारे पास उनका भाष्य वाला

3969
04:42:46,920 --> 04:42:51,120
भी अवेलेबल नहीं चलिए मैं बता देता हूं स्क्रीन

3970
04:42:51,120 --> 04:42:55,400
शेयर बाद में कर लेंगे दिखा दीजिएगा लिखा है

3971
04:42:55,400 --> 04:42:59,440
कि जिन्होंने वेदांत जनित ज्ञान

3972
04:42:59,440 --> 04:43:04,280
ठीक है जिय देखिए सामने देखिए य है क्या

3973
04:43:04,280 --> 04:43:08,480
हा हा स्क्रीन पर मेरे पूरा दिख हा

3974
04:43:08,480 --> 04:43:12,760
तो जिन्होंने वेदांत जनित विज्ञान से से ग अर्थ का अच्छी तरह

3975
04:43:12,760 --> 04:43:16,880
निश्चय कर लिया है वह सन्यास

3976
04:43:16,880 --> 04:43:18,760
योग से यत्न करने वाले समस्त

3977
04:43:18,760 --> 04:43:23,240
शुद्धि चित पुरुष ब्रह्म लोक में देह त्याग करते समय परम

3978
04:43:23,240 --> 04:43:27,600
अमर भाव को प्राप्त हो सब ओर से मुक्त हो जाते हैं

3979
04:43:27,600 --> 04:43:31,600
तो ये इसका सामान्य अर्थ है ठीक है आप कहीं भी जाएंगे किसीसी भी आप

3980
04:43:31,600 --> 04:43:35,760
कहीं से भी पढ़ लीजिए ठीक है चाहे चौखंबा की जो आती है उपनिषद

3981
04:43:35,760 --> 04:43:40,000
संचय वहां से पढ़ लीजिए जो भी विद्वान हैं आर्य समाजी को छोड़ कर के उन्होंने

3982
04:43:40,000 --> 04:43:44,280
यही अर्थ किया है अच्छा हमारा जो मेन है ना जो यह मंत्र

3983
04:43:44,280 --> 04:43:48,920
है यह जो लाइन है ते ब्रह्म लोके परांत काले इस पर हमारा ध्यान करना है

3984
04:43:48,920 --> 04:43:53,040
तो इसकी जो व्याख्या भगवत पाद ने की है यह

3985
04:43:53,040 --> 04:43:57,120
की है मोटा मोटा कि जो वेदांत के ज्ञान को यानी ब्रह्म ज्ञान को जो जान लेता है और उस

3986
04:43:57,120 --> 04:44:01,320
पर निश्चय करता है उस पर योग करता है उससे वह अमर

3987
04:44:01,320 --> 04:44:05,680
हो जाता है मुक्त हो जाता है एक

3988
04:44:05,680 --> 04:44:11,160
सेकंड यह मंत्र कौन सा था आपने दिखाया था जो अभी

3989
04:44:11,160 --> 04:44:16,400
इससे पहले

3990
04:44:16,400 --> 04:44:20,640
वाला इससे पहले वाला मंत्र कौन सा जी अभी

3991
04:44:20,640 --> 04:44:25,160
जो आपने वो अभी जो जिसका सामान्य अर्थ पढ़ा है आपने

3992
04:44:25,160 --> 04:44:29,160
वो हां ये मुंड को उपनिषद का मंत्र है मैं आपको रिफरेंस भेजता

3993
04:44:29,160 --> 04:44:33,160
हूं ये खंड सा नंबर हां मैं खंड बता

3994
04:44:33,160 --> 04:44:37,760
देता हूं खंड दो का छठवां मंत्र है है

3995
04:44:37,760 --> 04:44:42,240
नाद जहां तक हां तो वो है

3996
04:44:42,240 --> 04:44:46,360
इसको देख लीजिएगा आप तो इसके अंदर कहीं इस प्रकार की चर्चा है ही नहीं

3997
04:44:46,360 --> 04:44:50,360
और जब आप पूरा इसका भाष्य पढ़ेंगे जो कि भगवत पाद ने किया है तो

3998
04:44:50,360 --> 04:44:54,480
इसमें साधना से रिलेटेड बताया है और जो ब्रह्म लोक है उसके

3999
04:44:54,480 --> 04:44:58,520
बारे में चर्चा की है कि ब्रह्म लोक क्या होता है क्या नहीं है उसके बारे

4000
04:44:58,520 --> 04:45:02,600
में चर्चा की है ठीक है यहां पर ब्रह्म लोक का अर्थ है ब्रह्म स्वरूप हो

4001
04:45:02,600 --> 04:45:06,720
जाना तो इसको प्राप्त करने की बात की गई है यानी ब्रह्म

4002
04:45:06,720 --> 04:45:10,760
स्वरूप को प्राप्त करने की बात की गई है तो यहां पर कहीं इस प्रकार का वर्णन है

4003
04:45:10,760 --> 04:45:14,760
ही नहीं अच्छा एक फ्लो मैं बताता हूं इनकी फिलॉसफी का इसके ऊपर ये बहुत बार पिटे जा चुके

4004
04:45:14,760 --> 04:45:18,840
हैं स्ट्रीम में अगर सबको याद होगा यस तिवारी ने बहुत बार इन लोग को

4005
04:45:18,840 --> 04:45:22,840
स्पल पकड़ा है होता क्या है कि जब आप कहते

4006
04:45:22,840 --> 04:45:27,040
हैं कि इनकी मुक्ति थोड़ा समझ लीजिएगा कि आर्य समाज की मुक्ति

4007
04:45:27,040 --> 04:45:31,240
की अवधारणा क्या है ठीक है मुक्ति है ही नहीं वापस आता है ना वो मुक्ति

4008
04:45:31,240 --> 04:45:31,740
है ही

4009
04:45:31,560 --> 04:45:35,600
नहीं वो नहीं ये मतलब मुक्त में जैसे

4010
04:45:35,600 --> 04:45:39,920
हम क्या करते हैं जब हम मुक्ति हम हमको मुक्ति प्राप्त होती है जीवात्मा

4011
04:45:39,920 --> 04:45:44,000
को तो हम हम अपने आप को ब्रह्म स्वरूप हो जाते हैं ना

4012
04:45:44,000 --> 04:45:48,120
ऐसा होता है कि ब्रह्म ब्रह्मे भवति तो इसका अर्थ क्या करते

4013
04:45:48,120 --> 04:45:52,360
हैं हम कहते हैं ब्रह्मविद ब्रह्मे भवती तो ये लोग इसका अर्थ करते हैं

4014
04:45:52,360 --> 04:45:56,480
कि जैसे एक ट्यूब है बड़ा सा मोटा सा तो उसके अंदर कोई

4015
04:45:56,480 --> 04:46:00,680
आदमी बैठ जाए और वो बहुत छोटा हो और वो ट्यूब बहुत

4016
04:46:00,680 --> 04:46:04,800
बड़ी हो वो चारों तरफ ट्यूब को देखेगा उसको यह लगेगा

4017
04:46:04,800 --> 04:46:08,840
मान लीजिए छोटा सा माइक्रो ऑर्गेनिस्ट है वो एक ट्यूब के अंदर बैठा

4018
04:46:08,840 --> 04:46:13,080
हुआ है चारों तरफ वो ट्यूब को देख रहा है ट्यूब बहुत बड़ी है ठीक है अनंत है उसके

4019
04:46:13,080 --> 04:46:17,280
उसके सामने तो उसको लगेगा कि मैं ट्यूब हो गया हूं तो इनका

4020
04:46:17,280 --> 04:46:21,320
यही अवधारणा है कि जब मैं योग करूंगा जब समाधि

4021
04:46:21,320 --> 04:46:25,520
में जाऊंगा यम नियमा आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा

4022
04:46:25,520 --> 04:46:29,760
समाधि इत्यादि से जब समाधि पर मैं पहुंच जाऊंगा तो मैं ब्रह्म के अंदर

4023
04:46:29,760 --> 04:46:33,920
ऐसा मुझको प्रतीत होगा कि मैं ब्रह्म में चला गया हूं क्योंकि ब्रह्म सर्वव्यापी

4024
04:46:33,920 --> 04:46:37,960
है और उसके यहां पे एक विनोद आ

4025
04:46:37,960 --> 04:46:42,280
रहा है एक हासम बात आ रही है कि हमारी

4026
04:46:42,280 --> 04:46:46,320
तो यह जो बंधन है वोह बंधन है इनकी मुक्ति बंधन

4027
04:46:46,320 --> 04:46:47,320
है

4028
04:46:47,320 --> 04:46:51,400
हमारा जो बंधन है हमारा जो बंधन है वो भ्रम है और

4029
04:46:51,400 --> 04:46:55,560
इनकी मुक्ति भ्रम है तो यही

4030
04:46:55,560 --> 04:46:59,720
इस बात पर बहुत बार यह लोग उसको प्रतीत होता है यानी कि वो मुक्त है नहीं बस

4031
04:46:59,720 --> 04:47:03,800
उसको बेवकूफ बन रहा है व वहा पर जी

4032
04:47:03,800 --> 04:47:07,920
अच्छा इसके र अच्छा इसके ऊपर

4033
04:47:07,920 --> 04:47:11,920
एक अलंकार समाजी से मेरी बात हुई थी मुक्ति के कांसेप्ट के ऊपर ही

4034
04:47:11,920 --> 04:47:16,080
तो वो कहता है आपका जो ब्रह्म है वो एक समय

4035
04:47:16,080 --> 04:47:20,360
पर साकार भी रहता है निराकार भी रहता है ऐसी कोई एक वस्तु

4036
04:47:20,360 --> 04:47:24,400
बताओ इस पूरे ब्रह्मांड में जो साकार

4037
04:47:24,400 --> 04:47:28,520
भी हो एक ही समय पर और निराकार भी हो तो मैंने कहा कि तुम

4038
04:47:28,520 --> 04:47:33,000
ये मानते हो कि तुम्हारा ईश्वर सर्वव्यापी है तो कहा हां मैं कहा तु

4039
04:47:33,000 --> 04:47:37,000
ऐसी चीज बताओ मैं कहा कि घड़ा है घड़े के अंदर ईश्वर है तो बोला

4040
04:47:37,000 --> 04:47:41,160
हां मैं कहा घड़े के बाहर है ईश्वर उसने कहा हां मैंने कहा तुम चीज

4041
04:47:41,160 --> 04:47:45,640
बताओ जो घड़े के अंदर भी हो एक ही समय पर बाहर भी हो तो फस गया तुरंत

4042
04:47:45,640 --> 04:47:49,680
तो इनका यही कांसेप्ट है आधी अधूरी मतलब तुम कुछ भी बात

4043
04:47:49,680 --> 04:47:54,600
करोगे तुम्हारा तुम एक व निश्चित आर्गुमेंट दे ही नहीं सकते

4044
04:47:54,600 --> 04:47:58,760
और मुझे जहां तक आज तक मैंने पढ़ा मुझे तो आज तक शंकर

4045
04:47:58,760 --> 04:48:02,520
अद्वैत से ज्यादा कोई लगी ही नहीं लॉजिकल चीज

4046
04:48:02,520 --> 04:48:06,720
अरे इनके अनुसार भाई बात य हो जाती है कि आपको एक्सेप्ट करना

4047
04:48:06,720 --> 04:48:10,840
पड़ेगा जो प्राकृतिक नियम है उनको तोड़ने

4048
04:48:10,840 --> 04:48:15,240
वाला ही ईश्वर है यह जो प्राकृतिक

4049
04:48:15,240 --> 04:48:19,360
नियम है इन पर जो जिसका अधिकार है वही

4050
04:48:19,360 --> 04:48:23,360
तो ईश्वर है वही तो ब्रह्म है

4051
04:48:23,360 --> 04:48:27,560
अच्छा य यज्ञ पवित बात हुई तो मैं यह कहूं कि

4052
04:48:27,560 --> 04:48:31,560
एक आचार्या थी एक आचार्य है नाम नहीं लूंगा उनका

4053
04:48:31,560 --> 04:48:35,600
वो उनकी पत्नी जो है साथ में वीडियो बनाते हैं ठीक है उनकी पत्नी को

4054
04:48:35,600 --> 04:48:39,600
भी काफी ज्ञान है पुराण इत्यादि पढ़ कर के बहुत ज्ञान उनको मिल गया

4055
04:48:39,600 --> 04:48:44,440
है अर्जित कि उन्होंने तब से अपने तो बात ये

4056
04:48:44,440 --> 04:48:49,040
कि वो बहुत अच्छा तर्क देती है इस विषय पर यग पवित पे कहती है

4057
04:48:49,040 --> 04:48:53,240
कि कहती है कि मैं अपने पति के लिए 16

4058
04:48:53,240 --> 04:48:57,400
श्रृंगार धारण करती हूं मैं उनके लिए सिंदूर धारण

4059
04:48:57,400 --> 04:49:01,600
करती हूं मंगल सूत्र धारण करती हूं तो क्या मेरा पति मेरे लिए य

4060
04:49:01,600 --> 04:49:05,600
पवित्र नहीं धारण कर सकता बहुत सुंद कितना

4061
04:49:05,600 --> 04:49:10,040
ये ये होता है एक परंपरा प्राप्त स्त्री ये

4062
04:49:10,040 --> 04:49:14,360
जो समझे परंपरा को उसके अंदर यह पॉजिटिविटी आएगी उसके

4063
04:49:14,360 --> 04:49:17,680
अंदर कुतर्क भाव नहीं आएगा अब पुरुष भी कहे कि तुम मंगल

4064
04:49:17,680 --> 04:49:22,080
सूत्र पहनती हो कां राती हो नथुनी पहनती हो हम भी पहने तब उसका

4065
04:49:22,080 --> 04:49:26,680
उसका तुमको खंडन क्यों लगता है बात यह है और

4066
04:49:26,680 --> 04:49:30,880
थो कर के सारी बातें एक तरफ है चमत्कार हम उतना

4067
04:49:30,880 --> 04:49:35,080
मानेंगे जितना हमको सही लगेगा और यह जो

4068
04:49:35,080 --> 04:49:39,120
विधि विषयक चीज है ये हम उतनी मानेंगे जितना हमको सही लगेगा

4069
04:49:39,120 --> 04:49:43,200
ईश्वर को भी हम उतना मानेंगे जितना हमको सही लगेगा मोक्ष को भी हम

4070
04:49:43,200 --> 04:49:47,280
उतना मानेंगे जितना हमको सही लगेगा क्योंकि जो अनादि काल

4071
04:49:47,280 --> 04:49:51,640
से वेदा आदि शास्त्र सम्मत सिद्धांत है हमारी रुचि

4072
04:49:51,640 --> 04:49:55,680
केवल उनका नाम उनके नाम का आलंबन लेने में है हमारी रुचि

4073
04:49:55,680 --> 04:50:00,200
उनके तत्व उनके सिद्धांतों का आलंबन लेने में नहीं यह है

4074
04:50:00,200 --> 04:50:04,960
और एट द एंड इस स्ट्रीम को आपकी बात तो पूरी हो गई होगी

4075
04:50:04,960 --> 04:50:09,640
संभवत जी जी जी भैया जी हो गई अब क्या आगे

4076
04:50:09,640 --> 04:50:13,760
क्या टीम को मैं बताते समय बता दूं कि हमने आज

4077
04:50:13,760 --> 04:50:17,760
क्या-क्या जाना है जो मुख्य विषय था हमारे जो ऐसी पूर्व

4078
04:50:17,760 --> 04:50:22,080
की ऐसी सामग्री इनको कहीं से प्राप्त हो गई हमारी इच्छा के बाहर हमारी जानकारी

4079
04:50:22,080 --> 04:50:26,400
के बाहर जो कि जिसमें कि हम हमारा पूर्व का जीवन जिसको हम प्रस्तुत

4080
04:50:26,400 --> 04:50:30,520
कर सक कर चुके हैं जन समान के सामने उसको इन्होंने अपने अनुसार प्रस्तुत

4081
04:50:30,520 --> 04:50:32,920
किया और हमारे ऊपर कटाक्ष किए तरह-तरह के ऐसी

4082
04:50:32,920 --> 04:50:37,520
हमें जानकारी प्राप्त हुई उसमें अमुक अमुक नाम के लोग

4083
04:50:37,520 --> 04:50:41,760
शामिल थे यह भी बताया गया मगर वो जब वहां पर वक्ता है अमुक नाम से बोलने

4084
04:50:41,760 --> 04:50:45,760
वाले वो वही है जिनका वो नाम है वो उसके लिए हम वो नहीं

4085
04:50:45,760 --> 04:50:49,840
है कि वो वो थे हमें तो अभी तक यह भी नहीं पता कि वो लाइव स्ट्रीम कौन से चैनल पर

4086
04:50:49,840 --> 04:50:54,000
कहां पर हुई है दो दूसरी बात ये है जी

4087
04:50:54,000 --> 04:50:58,440
मैं एक रख दू सबसे सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट यज्ञो पवित पे मनुस्मृति

4088
04:50:58,440 --> 04:51:02,800
का एक वाक्य है मैं वह दिखाना चाहूंगा सबको जिसमें मनु भगवान कहते हैं स्त्रियों

4089
04:51:02,800 --> 04:51:06,880
के उपनयन के बारे में स्त्रियों का उपनयन क्या है तो बोलते हैं

4090
04:51:06,880 --> 04:51:10,880
कि स्त्रियों का उपनयन उनका विवाह संस्कार है और उनके लिए

4091
04:51:10,880 --> 04:51:15,440
क्या है तो बोले गृहस्थ जीवन का यापन करना ही उनके लिए विद्या है यह

4092
04:51:15,440 --> 04:51:19,480
चीज जो है अंदर लिखी गई है अगर आपको पता ही होगा यह

4093
04:51:19,480 --> 04:51:23,480
चीज हो सके तो भेजता आप

4094
04:51:23,480 --> 04:51:28,640
दिखाइए कई वीडियो में प्रस्तुत किया है य प्रस्तुत

4095
04:51:28,640 --> 04:51:32,720
किया यो उन्ही वीडियोस में मिल जाएगा जिन

4096
04:51:32,720 --> 04:51:37,480
वीडियोस के कारण य ज्वाला भड़की है तो

4097
04:51:37,480 --> 04:51:41,600
अब बात य आती है कि यह उन लोग ने किया क्यों उसमें

4098
04:51:41,600 --> 04:51:45,880
हमें यह बताया गया कि उन लोगों ने इसलिए ऐसा किया कि हमने किसी

4099
04:51:45,880 --> 04:51:48,080
एक संस्कार की जो

4100
04:51:48,080 --> 04:51:52,160
विधि थी उस पर एक प्रश्न कर दिया था उस पर एक टिप्पणी कर दी थी

4101
04:51:52,160 --> 04:51:56,160
उनके अकॉर्डिंग हमने प्रश्न किया था कि जिन वस्त्रों में आप

4102
04:51:56,160 --> 04:52:00,200
वो संस्कार की विधि जो है अपना रही है वो वस्त्र क्या वेदों में कहीं

4103
04:52:00,200 --> 04:52:04,360
वर्णित है शास्त्रों में कहीं वर्णित है नहीं वर्णित है जो वर्णित

4104
04:52:04,360 --> 04:52:08,400
है वो आपने धारण किए नहीं है क्योंकि वो महिलाओं के धारण करने योग्य नहीं

4105
04:52:08,400 --> 04:52:12,440
है इससे यह भी पता चलता है कि महिला के लिए वो संस्कार वो विधि है ही

4106
04:52:12,440 --> 04:52:16,720
नहीं दूसरी विधि है भगवत प्राप्ति की भगवान ने कहा ना 9 32 में भगवत गीता में

4107
04:52:16,720 --> 04:52:20,760
कि तू मेरी शरण में आजा मैं देखूंगा व मैं तुझे सभी पापों से मुक्त

4108
04:52:20,760 --> 04:52:24,760
कर दूंगा तो उन्होंने कहा जिनको जो यज्ञ पवित धारण नहीं कर

4109
04:52:24,760 --> 04:52:29,480
सकते उनकी मुक्ति अलग तरह से होती है दूसरे रास्ते से होती है तो अब

4110
04:52:29,480 --> 04:52:33,560
जब हमने उन पर यह प्रश्न किया क्या शास्त्र सम्मत तुमने वस्त्र पहने हैं

4111
04:52:33,560 --> 04:52:37,920
क्या शास्त्र सम्मत तुमने चीजें धार की हुई है जो आप शास्त्र

4112
04:52:37,920 --> 04:52:41,920
सम्मत होने का दावा कर रहे हो अपने संस्कार को शास्त्र सम्मत बता

4113
04:52:41,920 --> 04:52:46,120
रहे तो इसके इसके प्रतिकार में उन्होंने हमारी

4114
04:52:46,120 --> 04:52:51,080
जो सामग्री ऐसी जो हमने आज से सात आ साल पहले छ साल पहले

4115
04:52:51,080 --> 04:52:55,640
कहीं डाल करके भूल गए हमारी जानकारी के बाहर किसी ने उठा कर डाल दी वो जांच का विषय

4116
04:52:55,640 --> 04:52:59,800
उसको इन्होने बताया तुम क्या शास्त्री हो क्या हां भाई मैं शास्त्री नहीं हूं

4117
04:52:59,800 --> 04:53:03,160
उस उस अंश में मैं शास्त्री नहीं हूं मैं कह रहा हूं वह

4118
04:53:03,160 --> 04:53:07,600
गलत है और मैं आगे से उसे नहीं करूंगा अब क्योंकि तुमने

4119
04:53:07,600 --> 04:53:12,040
अपने संस्कार के क्या कहते संस्कार

4120
04:53:12,040 --> 04:53:16,280
के तुलनात्मक दृष्टि में हमारी चीज को रखा है तो अब तुम भी मान लो कि तुम्हारा

4121
04:53:16,280 --> 04:53:20,440
वो संस्कार शास्त्री नहीं था और आगे से तुम वैसा प्रयास कुतर्क नहीं

4122
04:53:20,440 --> 04:53:24,680
करोगे दूसरी बात कि जो आपने प्रयास किया कि हमारी

4123
04:53:24,680 --> 04:53:28,880
सामग्री का फायदा उठाकर हमें अप्रत्यक्ष रूप से यह दिखाने का कि देखो

4124
04:53:28,880 --> 04:53:32,880
हमें तुम्हारी सामग्री मिल गई है अब देखना ज्यादा उच कोगे तो हम यह

4125
04:53:32,880 --> 04:53:36,920
कर देंगे आगे वो कर धमकी भरा स्वर भी था उसमें तो पहली बात तो ये

4126
04:53:36,920 --> 04:53:41,080
कि हमय सामग्री जैसा कि हमने बताया हम प्रस्तुत कर चुके थे दूसरी बात

4127
04:53:41,080 --> 04:53:45,320
यह है कि हमने कभी भी उसको शास्त्रो चित धर्म धार्मिक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत

4128
04:53:45,320 --> 04:53:49,320
नहीं किया था तीसरी बात ये कि हम उसको गलत भी मान रहे हैं आप गलत मान लीजिए

4129
04:53:49,320 --> 04:53:53,520
अपनी चीजों को चौथी बात यह है कि उसमें और आपके द्वारा प्रस्तुत करने

4130
04:53:53,520 --> 04:53:57,640
में सिर्फ ये अंतर था हमारे प्रस्तुत करने में आपके प्रस्तुत करने में कि

4131
04:53:57,640 --> 04:54:01,680
वो जो सामग्री थी उसमें हमारे घर की मात शक्तियां थी और कहीं

4132
04:54:01,680 --> 04:54:05,800
ना कहीं आपने अपने उस पूरे वृतांत में यह समझाने का प्रयास किया

4133
04:54:05,800 --> 04:54:09,840
यह दिखाने का प्रयास किया कि आप कितने नीच है कि

4134
04:54:09,840 --> 04:54:14,160
किसी अपनी वर्चस्व होता को सिद्ध करने के लिए अपनी कुतर्कों

4135
04:54:14,160 --> 04:54:18,160
को सिद्ध करने के लिए सामने वाले का खंडन जब हम सिद्धांतों से नहीं कर

4136
04:54:18,160 --> 04:54:22,160
पाएंगे तो हम उसको उसके मातृ शक्ति की छवियां लेकर के राए

4137
04:54:22,160 --> 04:54:26,240
धमका एंगे ठीक है तो यह आपने वहां

4138
04:54:26,240 --> 04:54:30,400
के पर आपने जो वो सब जो कु कुतर्क किए उससे आपने प्रयास

4139
04:54:30,400 --> 04:54:34,720
किया बाकी व्यक्तिगत बहुत से आक्षेप किए और इसी

4140
04:54:34,720 --> 04:54:38,720
इसी इसी क्रम में फिर आपने वो कैफीन वाला मुद्दा उठाया केक वाला

4141
04:54:38,720 --> 04:54:42,960
मुद्दा उठाया और जो है नचने आपका हमने आपका कैफीन

4142
04:54:42,960 --> 04:54:47,200
देखा हमने आपका केक देखा और हमने आपका नाच

4143
04:54:47,200 --> 04:54:52,160
भी देखा सरे आम अच्छा फिर इसके बाद क्या है

4144
04:54:52,160 --> 04:54:56,160
कि इसके बाद जब हम आगे बढ़ते हैं तो हमारा हमारी ध्यान जाता

4145
04:54:56,160 --> 04:55:00,160
है एक जो है वास्तविक उद्देश्य नाम से एक व्यक्ति

4146
04:55:00,160 --> 04:55:04,440
घूमता है कि मैं बहुत वास्तविक उद्देश्य वाला व्यक्ति हूं मेरा जो

4147
04:55:04,440 --> 04:55:08,520
इंटेंशन है वो वास्तविक है है ना तो उसकी बात करें वो बनता है

4148
04:55:08,520 --> 04:55:12,640
कि हम हिंदुओं के बहुत वो है क्या कहते हैं हिमायती है हिंदुओ के हम

4149
04:55:12,640 --> 04:55:16,720
बहुत बड़े धर्म रक्षक है मगर वस्तुतः वो कुछ नहीं वो हिंदू भी सिद्ध नहीं होगा

4150
04:55:16,720 --> 04:55:20,760
जिस दिन हमसे कभी वार्ता हो जाएगी वैसे होगी नहीं क्योंकि उनके अंदर इतना साहस

4151
04:55:20,760 --> 04:55:25,080
नहीं अगर सिद्ध अगर वार्ता होगी हिंदू भी सिद्ध नहीं होगा क्योंकि वो

4152
04:55:25,080 --> 04:55:29,080
जिस जिस चीज का आलंबन लेगा उसी उसी चीज का वो खंडन कर देगा वेदों का भी आलंबन लेगा

4153
04:55:29,080 --> 04:55:33,760
वेदों का भी खंडन कर देगा निरुता चार का आलंबन लेगा निरुक्त का भी खंडन कर देगा

4154
04:55:33,760 --> 04:55:37,840
ठीक है तो वो ऐसी स्थिति में है उसका दोगलापन इससे सिद्ध होता है कि आपस

4155
04:55:37,840 --> 04:55:42,240
में मत लड़ो और जो है बाहर वालों का प्रतिकार करो मगर जब उसके

4156
04:55:42,240 --> 04:55:46,440
विचारधारा पर कोई कोई टिप्पणी कर देता है तो वो उसके विरुद्ध

4157
04:55:46,440 --> 04:55:50,520
वीडियो बनाने लगता है कोप लीला मोग लीला ये सब करके टिप्पणियां लगाना है फिर

4158
04:55:50,520 --> 04:55:54,720
दोगलापन दिखाता है कि आपस में मत लड़ो इसी क्रम में आगे एक व्यक्ति

4159
04:55:54,720 --> 04:55:58,880
है अंडर कवर्ड उनका गुंडा उसके कुछ वक्तव्य थे तो उसका हमने बताया

4160
04:55:58,880 --> 04:56:03,040
कि उसको लात मार कर के उसी की संस्थाओं से निकाल दिया गया डिक्लेयर कर दिया गया उसको अपना नाम

4161
04:56:03,040 --> 04:56:07,160
बदलना पड़ा माथा पीटना पड़ा उसको आवान सपनों में दिखाई देने लगा

4162
04:56:07,160 --> 04:56:11,160
उसकी ये स्थिति है और उसने बद्दे बद्दे वो तो है दुराचारी वो

4163
04:56:11,160 --> 04:56:15,360
अपनी व्यक्तिगत जीवन में भी कैसा होगा अपनी बहन बेटियों के साथ अपनी मातृशक्ति

4164
04:56:15,360 --> 04:56:19,440
को कैसे देखता होगा अपने घर की मांओं को कैसे देखता होगा वो कुछ कहा नहीं

4165
04:56:19,440 --> 04:56:23,520
जा सकता है तो ये उसकी स्थिति है उस गुंडे का भी इन

4166
04:56:23,520 --> 04:56:27,520
लोगों ने सहारा लिया है जो अनाधिकृत व्यक्ति है जिसका कोई पहचान नहीं है

4167
04:56:27,520 --> 04:56:31,840
कोई उसको स्वीकार नहीं करता कि वो हमसे जुड़ा हुआ है इसी क्रम में आगे एक और था

4168
04:56:31,840 --> 04:56:35,880
जो कलयुग का नीच योगी है तो उसने यह कहा था कि सनातन धर्म को

4169
04:56:35,880 --> 04:56:40,800
बदलना चाहिए समय देश काल परिस्थिति के अनुसार तो इस पर हमारा उत्तर यह था कि

4170
04:56:40,800 --> 04:56:45,000
जो बदल जाए वह सनातन नहीं है समझ में आया और जिस

4171
04:56:45,000 --> 04:56:49,040
जिस देश काल परिस्थिति में जिस जिस धर्म का आलंबन लेना इसकी व्यवस्था ईश्वर

4172
04:56:49,040 --> 04:56:53,120
ने पहले से ही कर रखी है आप और हम कोई नहीं होते उसके संविधान में चेंज

4173
04:56:53,120 --> 04:56:57,160
करने वाले और यदि बदल जाना है तो कल को क्या आप इस स्थिति को स्वीकार

4174
04:56:57,160 --> 04:57:01,320
करोगे कि माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दोगे पत्नी की दृष्टि से देखना चालू

4175
04:57:01,320 --> 04:57:05,840
कर दोगे इसी क्रम में एक नीच व्यक्ति और था जो वैज्ञानिक है

4176
04:57:05,840 --> 04:57:10,440
जो दार्शनिक है वो व्यक्ति बोलता है उसने भी इस

4177
04:57:10,440 --> 04:57:14,600
में सबका साथ दिया तो वो व्यक्ति बोलता है कि हमने आवान आवान हमसे भय

4178
04:57:14,600 --> 04:57:18,800
खाता है जबकि आवान से आपने जब एक बार चैट

4179
04:57:18,800 --> 04:57:22,960
किया पहली बात तो डायरेक्ट आवान से चैट नहीं किया किसी और से चैट किया उसके छोटे भाई

4180
04:57:22,960 --> 04:57:27,120
से चैट किया जो आवान को पता ही नहीं लगा कि ऐसी भी कोई चैट हो रही है

4181
04:57:27,120 --> 04:57:31,240
और उसके बाद जब आपने आवान से चैट किया तो आवान जब आपसे आपका

4182
04:57:31,240 --> 04:57:35,240
परिचय पूछ रहा तो एक महीने बाद आप परिचय बता रहे हो और फिर ये चाहते हो कि आवान और

4183
04:57:35,240 --> 04:57:39,240
उसम पचय स्पष्ट नहीं कर रहे हो कह रहे हो मेरा पेज देख लो जाकर के तो भाई हम आपके कोई

4184
04:57:39,240 --> 04:57:43,240
क्या शरणार्थी है शरणागति वाले व्यक्ति हैं जो हम जाकर के

4185
04:57:43,240 --> 04:57:47,600
आपकी चेक करें आपको अपना परिचय बताना है तो बताओ नहीं बताना है तो मत बताओ

4186
04:57:47,600 --> 04:57:51,760
तो फिर वो भय खा रहा है भय खा रहा है तो इसमें भी हमने जवाब दिया कि भाई गौतम

4187
04:57:51,760 --> 04:57:55,760
खट्टर जी का एक विषय में हमारे पास कुद संदेश

4188
04:57:55,760 --> 04:57:59,880
आया था उन्होंने हमको संदेश भेजा हमने उनका

4189
04:57:59,880 --> 04:58:03,960
जवाब दिया और आज तक वो नहीं देख पाए हमने ये समझा व्यस्तता के कारण नहीं देख पाए

4190
04:58:03,960 --> 04:58:04,460
होंगे

4191
04:58:04,280 --> 04:58:08,360
मगर आपका सिद्धांत है कि यदि व्यक्ति जवाब नहीं दे रहा है

4192
04:58:08,360 --> 04:58:12,600
तो इसका मतलब भगोड़ा है भह खा रहा है तो उस सिद्धांत

4193
04:58:12,600 --> 04:58:16,920
के अनुसार आपको उनको कहना चाहिए रप कहना चाहिए भगोड़ा कहना चाहिए तो क्या आप कहोगे

4194
04:58:16,920 --> 04:58:21,040
नहीं कहोगे तो आप दोगले हैं दोगला कौन है राम और भाषित इसका

4195
04:58:21,040 --> 04:58:25,160
विरोध करने वाला दो प्रकार की बातें ना करना वाला तो जब राम का विरोध हो गया तो धर्म

4196
04:58:25,160 --> 04:58:29,480
का विरोध हो गया धर्म का विरोध हो गया तो कौन हो गया धर्मे नीना पशु भी समाना सामने

4197
04:58:29,480 --> 04:58:33,480
खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है

4198
04:58:33,480 --> 04:58:38,240
जो यह नहीं जानता उस उसको कहा जाता है पशु

4199
04:58:38,240 --> 04:58:42,400
और आप क्योंकि राम के विरुद्ध हो गए दो प्रकार की बातें करने वाले

4200
04:58:42,400 --> 04:58:46,840
तो आप भी पशु सिद्ध हो गए तो इसका अर्थ क्या निकलता है वो आप भली बात ही समझते हैं

4201
04:58:46,840 --> 04:58:50,880
तो यह सारे एक निचोड़ जो चार पाच घंटे की हमने

4202
04:58:50,880 --> 04:58:54,960
बातें की है वो है और बाकी हमने

4203
04:58:54,960 --> 04:58:59,240
ठुमके देखे नीच के नीच कैसे नाचते हैं रास्तों पर

4204
04:58:59,240 --> 04:59:03,520
और बाकी अगर किसी को चर्चा करनी है किसी वैचारिक

4205
04:59:03,520 --> 04:59:07,840
मतभेद के निमित्त तो एनी टाइम एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी शिवांश

4206
04:59:07,840 --> 04:59:11,920
इज रेडी आवान इज रेडी और एक बात और कहूंगा

4207
04:59:11,920 --> 04:59:16,080
कि हमारा नामा स्त्र चल रहा है जिसमें हम सब भाई मिलकर के

4208
04:59:16,080 --> 04:59:19,320
नाम जपते हैं तो ईश्वर के नाम का जप करने के लिए

4209
04:59:19,320 --> 04:59:23,360
और संघ का बल प्राप्त करने के लिए आप हमसे जुड़ सकते हैं

4210
04:59:23,360 --> 04:59:27,400
7408 30169 पर व करिए किसी भी प्रकार

4211
04:59:27,400 --> 04:59:31,600
की वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है तो आप हमसे संपर्क कर सकते

4212
04:59:31,600 --> 04:59:35,760
हैं आपको यदि धर्म रक्षा अभियान में हमारा साथ देना

4213
04:59:35,760 --> 04:59:40,040
है तो आप हमसे आप हमसे संपर्क

4214
04:59:40,040 --> 04:59:44,080
कर सकते हैं और ध्यान रहे यहां पर मैं जो नीच शब्द बार-बार उपयोग

4215
04:59:44,080 --> 04:59:48,320
में ला रहा हूं वो इसलिए ला रहा हूं कि किसी के घर की मातृ शक्तियों की जो

4216
04:59:48,320 --> 04:59:52,640
प्रतियां है छवियां है उनका उपयोग किया जा रहा है उसको दबाने

4217
04:59:52,640 --> 04:59:56,960
के लिए उसकी आवाज को कम करने के लिए तो उस रूप में ऐसे

4218
04:59:56,960 --> 05:00:01,280
हीन आचरण से युक्त व्यक्ति को मैं नीच कह रहा हूं यहां पर वो

4219
05:00:01,280 --> 05:00:05,320
ट्रेन के डब्बो वाला नीच नहीं है या फर्स्ट फ्लोर सेकंड फ्लोर

4220
05:00:05,320 --> 05:00:09,400
में नीचे कौन है ऊपर कौन है वो वाला नीच नहीं है या फिर श्रेष्ठ और

4221
05:00:09,400 --> 05:00:13,560
निम्न वाला य वो नीच है जो नीच ही है जो

4222
05:00:13,560 --> 05:00:17,720
दो नीच होते हैं एक होता है व्यवस्था मूलक और एक होता है घृणा मूलक तो

4223
05:00:17,720 --> 05:00:21,920
ये घृणा मूलक वाला नीच है व्यवस्था मूलक वाला नीच नहीं है घृणा मूलक

4224
05:00:21,920 --> 05:00:26,200
वाला नीच है जो ऐसे हीन आचरण से युक्त है जहां पर किसी के घर की मातृ

4225
05:00:26,200 --> 05:00:30,440
शक्तियों का उपयोग हो रहा है उसको उसकी आवाज को दबाने के लिए और वहां पर वो सब तमाशा

4226
05:00:30,440 --> 05:00:34,680
देख रहे हैं हिजड़ों की तरह और वहां पर अपने अपने कुतर्क कर रहे हैं क्योंकि सामना

4227
05:00:34,680 --> 05:00:38,880
करने का साहस किसी में है नहीं है ना तो इसीलिए

4228
05:00:38,880 --> 05:00:43,080
मैं बार-बार कहता हूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई

4229
05:00:43,080 --> 05:00:47,200
नहीं है टक्कर में है ना तो आपको ध्यान रखना

4230
05:00:47,200 --> 05:00:51,520
चाहिए कि हम क्या है कौन सा हमारा धर्म है कौन से हमारे

4231
05:00:51,520 --> 05:00:55,520
सिद्धांत है और मैंने सदैव सैद्धांतिक प्रश्न

4232
05:00:55,520 --> 05:00:59,720
किए हैं अगर उनका उत्तर कभी प्राप्त हो जाए तो वह लेकर चले

4233
05:00:59,720 --> 05:01:03,760
आइएगा क्या अलंकार समाज के द्वारा प्रतिपादित

4234
05:01:03,760 --> 05:01:07,840
होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं और

4235
05:01:07,840 --> 05:01:12,120
उसने जो अपनी कपोल कल्पित कहानियां गड़ी है वो कहानियां

4236
05:01:12,120 --> 05:01:16,400
उनको कहां से प्राप्त हुई कैसे ईश्वर से वो कैसे आई अब तक है ना

4237
05:01:16,400 --> 05:01:20,400
और जो लोग यह कहे कि ईश्वर ने डायरेक्ट द है उनको भी मैं बता दूं

4238
05:01:20,400 --> 05:01:24,680
जो लोग यह कहे कि ईश्वर ने डायरेक्ट द है उनको भी मैं यह बता दूं कि

4239
05:01:24,680 --> 05:01:28,800
कल तक आप यह कह रहे थे कि ईश्वर ने नहीं दिए वह हमारे पास ऋषि परंपरा

4240
05:01:28,800 --> 05:01:33,000
से आई है तो फिर अब यहां पर आपके दोगलापन बाहर आ जाएगा सभी

4241
05:01:33,000 --> 05:01:39,000
को जय श्री राम जुड़ने के लिए सभी को आभार सभी को जय श्री राम

4242
05:01:40,600 --> 05:01:44,600
आ [संगीत]
