1
00:00:01,670 --> 00:00:07,670
[संगीत]

2
00:00:08,640 --> 00:00:12,160
सभी को जय श्री

3
00:00:12,160 --> 00:00:16,640
राम जो अभी वर्तमान में एक प्रकरण

4
00:00:16,640 --> 00:00:20,800
चल रहा है और वैसे भी इस समय हमें बहुत ज्यादा अलग से समय

5
00:00:20,800 --> 00:00:25,000
नहीं मिल पा रहा है कि जो वीडियो शूट कर पाए जैसे सभी

6
00:00:25,000 --> 00:00:29,360
के घर में पर्व है त्यौहार है

7
00:00:29,360 --> 00:00:33,720
इस कारण जो हमें पहले से जो क्रम में चल रही चीजें हैं

8
00:00:33,720 --> 00:00:38,240
उन्हीं को ही समय दे पा रहे हैं

9
00:00:38,240 --> 00:00:42,440
तो संतोष कुमार जी आज हमारे साथ

10
00:00:42,440 --> 00:00:46,480
हैं संतोष जी अपना कैमरा ऑन कर

11
00:00:46,480 --> 00:00:52,040
लीजिए आपका चेहरा दिख नहीं रहा है सर

12
00:00:52,040 --> 00:00:58,040
कैमरा जी आवाज कट रही है आपकी

13
00:01:00,120 --> 00:01:05,000
आवाज कट रही

14
00:01:05,000 --> 00:01:11,000
है जय श्री राम काव्य

15
00:01:18,760 --> 00:01:23,240
कवे जय श्री राम

16
00:01:23,240 --> 00:01:29,240
तो आज हम लोग और कुछ विवेचना करने वाले हैं

17
00:01:30,800 --> 00:01:34,360
उस बारे

18
00:01:34,360 --> 00:01:36,480
में

19
00:01:36,480 --> 00:01:38,760
कि

20
00:01:38,760 --> 00:01:43,200
कबीर अ परमात्मा क्यों क्यों नहीं

21
00:01:43,200 --> 00:01:47,320
है है ना कबीर की भक्ति

22
00:01:47,320 --> 00:01:51,880
मोक्ष दायक नहीं है और

23
00:01:51,880 --> 00:01:57,880
एक बात और मैं कहना चाहूंगा हमारे जितने भी समर्थक हैं

24
00:01:58,000 --> 00:02:02,120
वो जो हमारे इस अभियान से सहमत है उनको मैं स्पेशली

25
00:02:02,120 --> 00:02:06,160
कह रहा हूं कि यह आपका दायित्व है इस चैनल

26
00:02:06,160 --> 00:02:10,400
की सुरक्षा क्योंकि इसने निर्विवाद रूप से जहां पर भी कहीं

27
00:02:10,400 --> 00:02:15,240
पर धर्म पर धर्म के किसी

28
00:02:15,240 --> 00:02:19,360
किसी भी रूप में धर्म को हानि पहुंचाने वाली शिक्षा धर्म के नाम से प्रचारित

29
00:02:19,360 --> 00:02:23,560
प्रसारित की जा रही है तो उस चैनल इस चैनल ने उस शिक्षा का प्रतिकार किया

30
00:02:23,560 --> 00:02:27,600
है तो ऐसा हो सकता है और हो भी

31
00:02:27,600 --> 00:02:31,600
रहा है कि इस चैनल को बंद करवाने का प्रयास कि जाए तो

32
00:02:31,600 --> 00:02:33,960
यह आप सबका दायित्व है

33
00:02:33,960 --> 00:02:37,960
कि आप की दो चीजें अभी तक आज तक मैंने कभी नहीं

34
00:02:37,960 --> 00:02:42,080
मांगा आपसे मगर आज मैं मांग रहा हूं आप

35
00:02:42,080 --> 00:02:46,680
जब भी कोई वीडियो देखें तो उसको लाइक करें उसको शेयर करें

36
00:02:46,680 --> 00:02:51,120
और यदि आपके पास यह 9 रप

37
00:02:51,120 --> 00:02:55,520
हैं तो आप इस चैनल की मेंबरशिप लीजिए जिससे

38
00:02:55,520 --> 00:03:00,160
कि एक मैसेज जाए य को कि यह चैनल एक इपोर्ट

39
00:03:00,160 --> 00:03:04,240
मैसेज है इसको भी लोग पसंद करते हैं तो जब उनके सामने बहुत

40
00:03:04,240 --> 00:03:08,680
सारे लोगों ने नेगेटिव थॉट्स उनके डाले हो तो हमारे पॉजिटिव

41
00:03:08,680 --> 00:03:12,880
थॉट्स भी उनके सामने हो कंपेयर कर सके कि हा भाई इतने लाइक भी आ रहे हैं

42
00:03:12,880 --> 00:03:16,880
इस कंटेंट को लोग पसंद कर रहे हैं और हमारी हमारी कोशिश

43
00:03:16,880 --> 00:03:21,200
तो ऐसी होनी चाहिए कि उसी को ही उसी का पल्ला

44
00:03:21,200 --> 00:03:25,320
हरी हो जाए तो ये आप लोगों का दायित्व है धर्म

45
00:03:25,320 --> 00:03:29,320
रक्षा के निमित्त एक और आपका प्रयास है

46
00:03:29,320 --> 00:03:33,520
यह कि आप इस कंटेंट को

47
00:03:33,520 --> 00:03:38,280
शेयर करिए अगर इस पर और अपने कंटेंट बनाने वो बनाइए

48
00:03:38,280 --> 00:03:42,360
लाइक जरूर करिए क्योंकि य को पता लगेगा अगर उनके उनको

49
00:03:42,360 --> 00:03:46,480
कहीं से मैसेज आ रहा है किय गलत वीडियो है तो आपके लाइक से उसको ये पता लगेगा

50
00:03:46,480 --> 00:03:49,880
नहीं लोगों को पसंद भी आ रहा है

51
00:03:49,880 --> 00:03:54,080
है ना तो ये सक्रिय धर्म रक्षक की

52
00:03:54,080 --> 00:03:58,440
भूमिका निभाएं दायित्व समझे और अगर 9 कर सकते तो मेंबरशिप ले

53
00:03:58,440 --> 00:04:02,560
इससे भी पता चलेगा कि भाई लोग इसको

54
00:04:02,560 --> 00:04:06,640
देख रहे हैं सुन रहे समझ रहे हैं जुड़ रहे हैं क्योंकि हम अपने वीडियोस

55
00:04:06,640 --> 00:04:10,760
में दर्शन विज्ञान और व्यवहार की सीमा में रहकर ही बात करते

56
00:04:10,760 --> 00:04:14,760
हैं मगर फिर भी अगर नेगेटिव

57
00:04:14,760 --> 00:04:18,880
खबरें पहुंचाई जाएंगी तो क्या होगा कि चैनल

58
00:04:18,880 --> 00:04:22,880
पर लोड पड़ सकता है चैनल को प हानि पहुंच सकती है

59
00:04:22,880 --> 00:04:27,120
बहुत सी चीजें हैं हो सकती है और प्रयास किया भी जा रहा है इसलिए

60
00:04:27,120 --> 00:04:31,120
आप लोग ध्यान रखें कि आपका य दायित्व है मेंबरशिप लीजिए लाइक करिए

61
00:04:31,120 --> 00:04:36,600
शेयर करिए यह दायित्व ध्यान रखिए अपना

62
00:04:36,600 --> 00:04:42,600
हमारे आज के आगंतुक जो है चर्चा के लिए जो आने वाले थे वो आ चुके

63
00:04:45,400 --> 00:04:51,400
हैं दास जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा है

64
00:05:01,520 --> 00:05:06,040
जय श्री राम राम राम जी सत

65
00:05:06,040 --> 00:05:10,080
साहेब जी जय श्री राम जी आपका

66
00:05:10,080 --> 00:05:14,720
परिचय दे दीजिए दास जी पहले सर मैं

67
00:05:14,720 --> 00:05:19,560
हेमदास दास और जयपुर से

68
00:05:19,560 --> 00:05:23,680
हूं और मैं भी कबीर पंथी हूं

69
00:05:23,680 --> 00:05:28,640
आप ना एक बार यह जो है नाय हेडफोन को हटा के बात करिए

70
00:05:28,640 --> 00:05:33,520
जरा ठीक है जी बोलिए

71
00:05:33,520 --> 00:05:39,520
मैं इसको रख देता

72
00:05:41,680 --> 00:05:46,000
हूं हां जी आवाज आ रही है

73
00:05:46,000 --> 00:05:50,040
अब पहले से तो कम आ रही है पहले ज्यादा ठीक थ

74
00:05:50,040 --> 00:05:54,080
पहले ज्यादा ठीक थी आवाज आवाज एक अब

75
00:05:54,080 --> 00:05:58,640
ठीक है अब ठीक है ठीक है ठीक है चलिए हां जी आ रही

76
00:05:58,640 --> 00:06:02,760
है जी तो हमारी

77
00:06:02,760 --> 00:06:06,800
कल चर्चा चल रही थी जो उसके बाद ही आपने हमें मैसेज किया था कि हमें भी

78
00:06:06,800 --> 00:06:10,840
एक बार जोड़े सर आपकी आवाज कम आ रही है

79
00:06:10,840 --> 00:06:15,040
मेरी आवाज कम आ रही है भाई कोई कमेंट करके बता

80
00:06:15,040 --> 00:06:21,040
द मेरी आवाज कम आ रही है क्या कमेंट कर दे

81
00:06:26,160 --> 00:06:29,680
कोई ठीक है आवाज

82
00:06:29,680 --> 00:06:33,680
मेरी आवाज तो ठीक आ रही है मुझे बिल्कुल कम आ रही है आपकी आवाज पता

83
00:06:33,680 --> 00:06:39,680
नहीं आप एक बार लीव करके दोबारा आ

84
00:06:40,400 --> 00:06:44,480
जाइए तो अभी हम लोग और भी कुछ

85
00:06:44,480 --> 00:06:50,480
बातें करेंगे क्योंकि अभी व पूरी नहीं हो पाएंगी तो इसलिए अभी करना ठीक नहीं

86
00:06:50,840 --> 00:06:55,360
है अब आप इस समय शिवांश द्विवेदी

87
00:06:55,360 --> 00:07:00,560
एक्सपोज डाल कर के अगर देखेंगे य पर सर्च करेंगे तो आपको भरा पड़ा

88
00:07:00,560 --> 00:07:05,080
सेक्शन पूरा पूरा सब तरफ से कारवाही शुरू हो गई है

89
00:07:05,080 --> 00:07:09,160
है ना तो इसलिए यही वह

90
00:07:09,160 --> 00:07:13,480
समय है जब आप लोगों को भी एक्टिव रहना है क्योंकि

91
00:07:13,480 --> 00:07:18,680
मुझे अपनी चिंता नहीं है मुझे इस अभियान की चिंता

92
00:07:18,680 --> 00:07:24,680
है इस वैचारिक क्रांति की चिंता

93
00:07:24,840 --> 00:07:29,640
है जी अब आ रही है आपको हा बिल्कुल आ रही

94
00:07:29,640 --> 00:07:33,760
हा तो मैं यह कह रहा था कल हमारी एक वार्ता

95
00:07:33,760 --> 00:07:38,200
हो रही थी रामपाल जी के शिष्यों के साथ

96
00:07:38,200 --> 00:07:42,240
और उस वार्ता वो वार्ता बीच में ही अधूरी रह गई

97
00:07:42,240 --> 00:07:46,360
और जिसके बाद ही मेरे ख्याल से आपने हमसे संपर्क भी किया है कि एक बार हमें भी जोड़े

98
00:07:46,360 --> 00:07:51,480
अपनी लाइफ में हा जी हा तो मैं वही से कंटिन्यू करना चाहूंगा

99
00:07:51,480 --> 00:07:56,080
मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि जो

100
00:07:56,080 --> 00:08:00,440
कबीर है वो अजर अमर सर्वशक्तिमान है

101
00:08:00,440 --> 00:08:04,640
नहीं इस बारे में आप जी बिल्कुल है

102
00:08:04,640 --> 00:08:08,800
सर अच्छा तो जो अजर है

103
00:08:08,800 --> 00:08:13,680
उसका अर्थ आप क्या लेते हैं अजर

104
00:08:13,680 --> 00:08:17,800
का मतलब होता है जिसका जन्म नहीं हुआ अजन्मा

105
00:08:17,800 --> 00:08:21,880
हो अजर का अर्थ य होता है

106
00:08:21,880 --> 00:08:26,080
हां मतलब जैसे जो अविनाशी परमात्मा होते हैं

107
00:08:26,080 --> 00:08:31,160
ना वो चार दाग से नहीं आते मतलब

108
00:08:31,160 --> 00:08:36,000
जैसे जैसे सभी जीव की उत्पत्ति चार

109
00:08:36,000 --> 00:08:40,640
कारणों से हुई है जैसे

110
00:08:40,640 --> 00:08:45,320
अंडज जर ज

111
00:08:45,320 --> 00:08:49,440
और मतलब कि कबीर जी पर आयु का

112
00:08:49,440 --> 00:08:54,480
प्रभाव पड़ता है कि नहीं पड़ता है यह पूछ रहा

113
00:08:54,480 --> 00:08:58,480
हूं सर पहले तो हमें यह समझना पड़ेगा कि कबीर जी

114
00:08:58,480 --> 00:09:02,600
है कौन तब ये चीज समझ में आएगी कि आयु उन पर

115
00:09:02,600 --> 00:09:06,760
प्रभाव डालती है या नहीं नहीं

116
00:09:06,760 --> 00:09:10,800
डालती है कि नहीं पहले वो बताइए ना वो तो है कौन तो वो तो उस पर हम लोग चर्चा

117
00:09:10,800 --> 00:09:14,840
कर ही रहे हैं काफी दिनों से हा वो देही रूप में अगर आते हैं

118
00:09:14,840 --> 00:09:19,760
तो उस परे उम आयु लगती है च

119
00:09:19,760 --> 00:09:24,000
आयु दिखती है मतलब दे जब वो लीला रूप में आएंगे दहिक रूप में आएंगे तो

120
00:09:24,000 --> 00:09:28,680
जो प्राकृतिक नियम है उन पर लागू हो जाएंगे उन पर लागू होते

121
00:09:28,680 --> 00:09:32,680
अच्छा क्योंकि ये नियम जो सारे देही पर ही लागू होते

122
00:09:32,680 --> 00:09:36,800
हैं आत्मा पर नहीं होते ये कहां पर लिखा है कि

123
00:09:36,800 --> 00:09:40,800
जब वो लीला में आएंगे तो उन पर नियम लागू होंगे लीला से

124
00:09:40,800 --> 00:09:45,000
बाहर नियम लागू नहीं है यह जैसे मैं आपको

125
00:09:45,000 --> 00:09:49,080
यह गीता के माध्यम से बताना चाहूंगा कि जैसे श्री कृष्ण

126
00:09:49,080 --> 00:09:53,240
भगवान ने अर्जुन से कहा कि हे अर्जुन तेरे और मेरे अनेको जन्म हो चुके

127
00:09:53,240 --> 00:09:56,520
हैं तू नहीं जानता मैं जानता

128
00:09:56,520 --> 00:10:00,520
हूं मैं आपको एक बात बताऊ लीला मतलब कि

129
00:10:00,520 --> 00:10:04,840
हम यह कह रहे हैं कि हमने एक लीला

130
00:10:04,840 --> 00:10:09,080
यानी नाट्य मंच तैयार किया और उस नाट्य मंच

131
00:10:09,080 --> 00:10:13,360
के ऊपर जाकर के हम बहुत से काम नहीं कर पाते मगर इस ये जो वास्तविक

132
00:10:13,360 --> 00:10:17,640
जीवन है इसमें हम बहुत से काम है जो कर लेते हैं मगर वही काम हम जाकर

133
00:10:17,640 --> 00:10:21,880
के वो जो नाट्य मंच है जो केवल एक नाटक है है ना लीला

134
00:10:21,880 --> 00:10:25,880
का मतलब यही हुआ ना हा लीला का मतलब नाट्य मंच

135
00:10:25,880 --> 00:10:29,960
हुआ तो जो जो वास्तविक संसार नहीं हम

136
00:10:29,960 --> 00:10:34,120
उसके अंदर जाकर के तो सीमित है और उससे बाहर हम असीमित है

137
00:10:34,120 --> 00:10:39,440
आप यह कह

138
00:10:39,440 --> 00:10:43,520
रहे हा

139
00:10:43,520 --> 00:10:48,400
जी हा देही रूप में हम सीमित है

140
00:10:48,400 --> 00:10:52,480
लेकिन वो लीला लीला के रू लीला में

141
00:10:52,480 --> 00:10:56,480
आकर के ईश्वर ईश्वर जो है सीमित हो जाता है प्राकृतिक नियमों के अधीन हो जाता

142
00:10:56,480 --> 00:11:01,080
है मगर लीला से बाहर वो स्वतंत्र

143
00:11:01,080 --> 00:11:05,080
है अच्छा तो वो

144
00:11:05,080 --> 00:11:09,080
जो लीला रूप में आकर के वो जो बाधित हो जाता है पहले तो वो

145
00:11:09,080 --> 00:11:14,440
मुझे आप प्रमाण दिखाइए कि वो बाधित होता है लीला रूप में

146
00:11:14,440 --> 00:11:18,520
आकर वो प्रमाण देखो सर सैकड़ों प्रमाण हमने य देखे कि जब भी

147
00:11:18,520 --> 00:11:22,920
कोई भी चाहे कोई सा भी कोई से भी इष्ट है कोई से भगवान है जब भी इस धरती पर अवतरित

148
00:11:22,920 --> 00:11:27,200
होते हैं उनको वही सारे कर्म करते हैं

149
00:11:27,200 --> 00:11:31,840
मैं आपको एक एक बात याद दिलाना चाहूंगा

150
00:11:31,840 --> 00:11:36,040
कि अजर का अर्थ है जिसे कभी बुढ़ापा

151
00:11:36,040 --> 00:11:38,960
ना

152
00:11:38,960 --> 00:11:43,440
आए स्क्रीन पर देख लीजिए यह नीचे लिखा है अजर का

153
00:11:43,440 --> 00:11:47,520
अर्थ दिख रहा है सबसे नीचे ठीक है

154
00:11:47,520 --> 00:11:51,520
जिसे कभी बुढ़ापा ना आए अजन्मा नहीं है अजर का

155
00:11:51,520 --> 00:11:55,640
अर्थ जिसे कभी बुढ़ापा ना आए जवान सदा जवान रहने वाला

156
00:11:55,640 --> 00:12:00,680
अजर

157
00:12:00,680 --> 00:12:04,800
है ना पहली बात अब दूसरी बात आप यह कह रहे

158
00:12:04,800 --> 00:12:09,320
हैं कि मैं जो अपनी वास्तविक लाइफ में तो फ्री हूं

159
00:12:09,320 --> 00:12:14,080
और जो मैं एक लीला रचता हूं जिसमें मुझे सिर्फ नाटक करना है

160
00:12:14,080 --> 00:12:18,480
उसमें मैं बाधित हूं सर वो वो हम जैसे

161
00:12:18,480 --> 00:12:22,760
मानुष को गुरु रूप में समझाने आए हैं कि जैसे मैं

162
00:12:22,760 --> 00:12:26,920
हूं ना वैसे ही तुम हो तुम अपने स्वरूप को भूल गए तुमने

163
00:12:26,920 --> 00:12:31,200
अपने स्वरूप को केलिए केवल यह देही मान रखा है लेकिन तुम्हारा स्वरूप

164
00:12:31,200 --> 00:12:35,240
कुछ कोई और है जैसे गीता जी ने कहा किन तो तो और

165
00:12:35,240 --> 00:12:39,400
में शरीर नहीं है तो और में एक आत्मा है तो हम सब भी आत्मा है

166
00:12:39,400 --> 00:12:43,680
मतलब कुल मिला के कहा जाए कि जो

167
00:12:43,680 --> 00:12:47,760
वो है कबीर

168
00:12:47,760 --> 00:12:51,960
वो अजर नहीं है हां आत्मा जन्म

169
00:12:51,960 --> 00:12:54,000
नहीं लेती ना सर नहीं नहीं

170
00:12:54,000 --> 00:12:58,360
मैं कह रहा हूं कबीर जी जो देह में आते हैं यहां प देह

171
00:12:58,360 --> 00:13:02,920
वो अजर नहीं बुढ़ापा में आता है उनको

172
00:13:02,920 --> 00:13:07,280
हा व शरीर दिखता आत्मा वो उन्होंने अपने आप को शरीर

173
00:13:07,280 --> 00:13:11,400
नहीं दिखाया उन्होंने कहा है कि जैसे तुम अपने स्वरूप को भूल

174
00:13:11,400 --> 00:13:15,440
गए कि मैं जो मेरा जो तु जी आप रामपाल जी के शिष्य

175
00:13:15,440 --> 00:13:19,680
है क्या जी हम रामपाल जी के शिष्य

176
00:13:19,680 --> 00:13:24,520
रह चुके हैं रह चुके हैं और हा अभी नहीं है

177
00:13:24,520 --> 00:13:29,400
अभी नहीं है अभी नहीं है

178
00:13:29,400 --> 00:13:33,680
तो आप कबीर जी की बात रखने आए हैं जो रामपाल जी भी रामपाल

179
00:13:33,680 --> 00:13:37,920
जी के भी अगेंस्ट में है वो बात ऐसा कुछ है हां बिल्कुल

180
00:13:37,920 --> 00:13:41,920
अच्छा तो हमें हमने आपको तो ऐसा कुछ कहा नहीं था तो

181
00:13:41,920 --> 00:13:46,080
आपको आने की आवश्यकता ही नहीं थी नहीं सर वो मैंने चर्चा ही सुनी

182
00:13:46,080 --> 00:13:50,080
थी क्योंकि हम अभी समझ ही नहीं पा रहे कि कबीर है कौन कबीर को

183
00:13:50,080 --> 00:13:54,120
हमने एक सरी रूप में मान रखा है हमने चैनल है देखिए ऐसा

184
00:13:54,120 --> 00:13:58,160
है कबीर है कौन के बारे में हमने बात वो जो आपका

185
00:13:58,160 --> 00:14:02,360
जो विषय है कि कबीर को लोग जाने स्पिरिचुअल मार्ग जो भी आप बताएंगे

186
00:14:02,360 --> 00:14:06,560
कबीर को फॉलो करने वाला वो एक अलग चीज है ठीक है

187
00:14:06,560 --> 00:14:09,240
आप आप यह कह रहे हैं कि कबीर परमात्मा

188
00:14:09,240 --> 00:14:14,840
है कि नहीं पहले बताइए अब आप आ गए इसलिए बात कर रहा

189
00:14:14,840 --> 00:14:18,880
आपसे बिल्कुल बिल्कुल परमात्मा है लेकिन परमात्मा

190
00:14:18,880 --> 00:14:22,960
के परमात्मा के बारे में भी आप कुछ व्याख्या सुनेंगे तब पता लगेगा

191
00:14:22,960 --> 00:14:27,000
परमात्मा कहते किसको है पहले परमात्मा परमात्मा के

192
00:14:27,000 --> 00:14:31,000
लिए व्याख्या आप किस आधार पर बताएंगे आपकी अपनी सोच

193
00:14:31,000 --> 00:14:35,960
है या कोई ग्रंथ है या क्या है देखो

194
00:14:35,960 --> 00:14:40,320
हम कबीर साहिब की बताए माध्यम से हम बताना चाह रहे आपको उन्होने परमात्मा

195
00:14:40,320 --> 00:14:45,360
कहा किसको है परमात्मा होता सुनि

196
00:14:45,360 --> 00:14:49,480
मतलब वेदों के आधार पर नहीं बताएंगे आप कबीर जी के बताए

197
00:14:49,480 --> 00:14:53,480
हुए मार्ग के आधार पर बताएंगे हम एक सिर्फ एक गीता जी के आधार

198
00:14:53,480 --> 00:14:57,600
पर और एक कबीर साहिब के आधार पर दो आधार पर बताए गीता जी क्या है भाई

199
00:14:57,600 --> 00:15:01,600
साहब गीता के बारे में थोड़ा बताइए मुझे क्या है वो गीता जी

200
00:15:01,600 --> 00:15:06,240
में कुछ आत्म ज्ञान है नहीं नहीं लक्षण मत बताइए

201
00:15:06,240 --> 00:15:10,320
तस्त तथ लक्षण मत बताइए स्वरूप भूत लक्षण बताइए गीता जी

202
00:15:10,320 --> 00:15:14,320
के स्वरूप भूत लक्षण का मतलब समझ लीजिए कि

203
00:15:14,320 --> 00:15:18,400
गीता जी क्या क्या करती है उस उसके अंदर क्या

204
00:15:18,400 --> 00:15:22,560
क्या है वह क्या क्या उनके यह सब तथ लक्षण है वो क्या

205
00:15:22,560 --> 00:15:24,240
है वो स्वरूप

206
00:15:24,240 --> 00:15:28,240
भूत लक्षण है आप मुझे गीता जी का वो बताइए कहां से

207
00:15:28,240 --> 00:15:32,800
आया कहां से उद्गम है क्या वो उसके बारे में बताइए

208
00:15:32,800 --> 00:15:37,200
सर मैं इतना उद्गम वगैरह यह नहीं बता सकता मैंने तो जो गीता जी

209
00:15:37,200 --> 00:15:41,640
का मैं बता देता हूं आपको गीता खुद ये कहती है

210
00:15:41,640 --> 00:15:45,840
कि वो वेदों का मार्ग प्रशस्त करती है

211
00:15:45,840 --> 00:15:50,040
गीता खुद ये कहती है कि वह वेदों का मार्ग प्रशस्त करती है

212
00:15:50,040 --> 00:15:54,040
पूरी गीता में कई बार वेदों का नाम लेते हुए यही वैदिक

213
00:15:54,040 --> 00:15:58,040
मार्ग है यही वेदों का धर्म है यही वेद है बोला जाता

214
00:15:58,040 --> 00:16:02,320
है ना पूरी गता में कई बार

215
00:16:02,320 --> 00:16:06,520
बोलिए तो हम वेदों की सीमा के बाहर जाकर के तो गीतो

216
00:16:06,520 --> 00:16:12,040
गीता का अर्थ नहीं कर सकते जब गीता खुद ये कह रही है कि हम वेदों को मानते

217
00:16:12,040 --> 00:16:16,080
हैं ठीक है गता तो हम ये नहीं कह सकते तो

218
00:16:16,080 --> 00:16:20,600
हम यह नहीं कह सकते कि नहीं भाई हम वेद को नहीं मानते हम गीता को मानते

219
00:16:20,600 --> 00:16:24,680
हैं सर देखो मैं मैं सिर्फ मोटा मोटा

220
00:16:24,680 --> 00:16:29,000
ऐसे मोटा मोटा ज्ञान समझा

221
00:16:29,000 --> 00:16:33,320
आपको बताना चाहता हू अब देखिए अब बात ऐसी आ गई

222
00:16:33,320 --> 00:16:38,240
मोटी मोटी मोटी बात ऐसी आ गई जो शास्त्र आप मान रहे हो

223
00:16:38,240 --> 00:16:39,240
जिस तरह से

224
00:16:39,240 --> 00:16:43,280
उस रूप में हमें नहीं स्वीकार है और जाहिर सी बात है कि जिस रूप में हम शास्त्र

225
00:16:43,280 --> 00:16:47,280
को मान रहे हैं उस रूप में आपको शास्त्र स्वीकार नहीं है वेदों

226
00:16:47,280 --> 00:16:51,280
के आधार पर गीता और वेद आपको स्वीकार नहीं है आपको स्वतंत्र रूप

227
00:16:51,280 --> 00:16:55,920
से गीता स्वीकार है है ना जी

228
00:16:55,920 --> 00:17:00,080
अच्छा अब मैं ये कहूंगा कि अब सीधे-सीधे परिभाषा

229
00:17:00,080 --> 00:17:04,160
पर आ जाते परमात्मा की तो जब आप ये कहते हैं

230
00:17:04,160 --> 00:17:08,480
कि परमात्मा क्या है

231
00:17:08,480 --> 00:17:13,280
तो सबसे पहले क्या है पर जाने से पहले हम यह तो पता करें

232
00:17:13,280 --> 00:17:17,440
कि परमात्मा है आपके अनुसार बिल्कुल है तो

233
00:17:17,440 --> 00:17:22,200
आपके अनुसार परमात्मा है यह कैसे सिद्ध होता है बताए

234
00:17:22,200 --> 00:17:26,440
ये ऐसे सिद्ध होता है कि

235
00:17:26,440 --> 00:17:30,520
कबीर साहिब ने एक वाणी के माध्यम से बताया है

236
00:17:30,520 --> 00:17:34,520
कि मोग कहां ढूंढे बंदे मैं तो तेरे

237
00:17:34,520 --> 00:17:38,720
पास वो हमारे पास मेंही है और जैसे

238
00:17:38,720 --> 00:17:43,960
परमात्मा के परमात्मा यानी सबसे श्रेष्ठ आत्मा को परमात्मा कहते

239
00:17:43,960 --> 00:17:48,400
हैं हम अभी आत्मा है और हम जैसे

240
00:17:48,400 --> 00:17:52,520
किसी गुरु की शरण में जाकर जब हम कोई कुछ भक्ति करने

241
00:17:52,520 --> 00:17:54,960
लग जाएंगे तब हम महात्मा हो जाएंगे

242
00:17:54,960 --> 00:17:58,960
और फिर जब हमारे सारे विकार दश इंद्रियों पर जब हम काबू कर लेंगे तो कबीर साहब ने ने

243
00:17:58,960 --> 00:18:03,160
कहा कि तू क्या कहे कबीर कबीर साहब ने भी ये नहीं कहा कि तुम मेरी पूजा करो

244
00:18:03,160 --> 00:18:07,320
कबीर साहब ने अपने आप को कभी नहीं कहा कि तुम मेरी पूजा करो उन्होंने तो ये कहा कि जो मैं ज्ञान

245
00:18:07,320 --> 00:18:11,360
दे रहा हूं तुम उसको अपनाओ और मुक्ति पाओ उन्होंने तो खुद

246
00:18:11,360 --> 00:18:16,040
ने मना किया है कि मेरी पूजा मत करो और कभी

247
00:18:16,040 --> 00:18:20,160
आपसे हमारी कोई आपत्ति नहीं थी मगर आप क्योंकि आ गए इसलिए मुझे आपका

248
00:18:20,160 --> 00:18:24,200
केवल जहां जहां पर जहां जहां पर वैदिक मार्ग के अगेंस्ट जाएंगे वहां मुझे आपको

249
00:18:24,200 --> 00:18:28,200
बोलना पड़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं सबसे पहले तो

250
00:18:28,200 --> 00:18:32,200
जिस पर चलने की बात की जा रही है यह बताइए तो कि

251
00:18:32,200 --> 00:18:36,360
कोई व्यक्ति उस मार्ग पर क्यों चले कोई व्यक्ति दूध लेने

252
00:18:36,360 --> 00:18:40,360
जा रहा है कोई व्यक्ति दूध लेने जा रहा है बिल्कुल उसको

253
00:18:40,360 --> 00:18:45,280
उसको व कारण तो बताइए कि वह कबीर के बताए हुए मार्ग पर क्यों चले

254
00:18:45,280 --> 00:18:49,520
कबीर के बताए मार्ग पर अपने जीवन और मृत्यु के जो चक्कर

255
00:18:49,520 --> 00:18:53,520
है इसको हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने के लिए चले अपने मुक्ति के लिए

256
00:18:53,520 --> 00:18:57,560
चले ठीक है मुक्ति किससे किस किस चीज से

257
00:18:57,560 --> 00:19:02,400
मुक्ति जैसे लख चौरा से मुक्ति

258
00:19:02,400 --> 00:19:08,280
हमारा यहां इस जीव किसी भी शरीर में आना ना

259
00:19:08,280 --> 00:19:10,240
हो और

260
00:19:10,240 --> 00:19:14,960
और हम इस मोह बंधन से हमेशा हमेशा के लिए मुक्त हो जाए

261
00:19:14,960 --> 00:19:19,000
मुक्त मुक्ति के लिए तो अब जब हम यह कहते हैं कि तुम अपनी मुक्ति के

262
00:19:19,000 --> 00:19:24,760
लिए काम करो तो सबसे पहले हमें उसको यह तो बताना पड़ेगा फलाना मुक्त

263
00:19:24,760 --> 00:19:28,920
है जो मुक्त हो गया वो तो दिखेगा ही नहीं

264
00:19:28,920 --> 00:19:33,280
तो वही तो मैं कह रहा हूं आप आपको सिद्ध करना होगा कि परमात्मा

265
00:19:33,280 --> 00:19:37,320
नाम की कोई चीज है दुनिया में यही तो

266
00:19:37,320 --> 00:19:41,400
प्रॉब्लम है अगर आप यह कह देंगे कि परमात्मा भी

267
00:19:41,400 --> 00:19:45,520
बाधित है तो परमात्मा के होने और ना होने का कोई औ चित

268
00:19:45,520 --> 00:19:49,640
ही नहीं बचता ना नहीं बाधित नहीं है ना वो बाधित आप कह

269
00:19:49,640 --> 00:19:53,680
तो रहे व अजर नहीं है हा बूढ़ा होता थोड़ी

270
00:19:53,680 --> 00:19:58,680
है परमात्मा कोई बूढ़ा थोड़ी होता है ज ब होता है

271
00:19:58,680 --> 00:20:02,880
कह रहे बूढ़ा होता है नहीं मैंने नहीं कहा मैंने नहीं कहा कि वो बूढ़ा होता है

272
00:20:02,880 --> 00:20:06,920
आप उसको शरीर मान रहे हो इसलिए आपको बूढ़े दिख रहे हैं हम उनको शरीर नहीं मान रहे हम

273
00:20:06,920 --> 00:20:10,920
उनको एक आत्मा मान रहे हैं परमात्मा मान रहे इसलिए जो

274
00:20:10,920 --> 00:20:15,040
आप जो आत्मा उनको मान रहे हो वो तब मान रहे हो ना जब वो शरीर में नहीं

275
00:20:15,040 --> 00:20:19,080
है बिल्कुल तो इसका मतलब है आपको

276
00:20:19,080 --> 00:20:23,160
पहले उसका अस्तित्व तो सिद्ध करना होगा कि दुनिया में कोई ऐसा

277
00:20:23,160 --> 00:20:25,360
है जो जीवन और मरण के चक्र से छूट गया

278
00:20:25,360 --> 00:20:29,480
है दुनिया में कोई ऐसा है दुनिया में कोई ऐसा है जो सुख

279
00:20:29,480 --> 00:20:33,560
दुख के द्वंद से आजाद हो गया है हो गए ना नानक साहब बिल्कुल

280
00:20:33,560 --> 00:20:37,600
नानक साहब हो गए ये भाई साहब फिर देखिए अब क्या

281
00:20:37,600 --> 00:20:42,000
हो रहा है अब आप अपने ग्रंथ ला रहे हैं आप अपने ग्रंथ लाएंगे मैं लाऊंगा आप नहीं मानोगे ना

282
00:20:42,000 --> 00:20:48,000
तो आप अपने ग्रंथ ना लाइए हम सिर्फ अब तर्क प बात कर रहे हैं वो

283
00:20:51,000 --> 00:20:55,320
बताइए सर ग्रंथ क्यों जैसे कई जैसे महापुरुष

284
00:20:55,320 --> 00:20:59,400
हैं सब जैसे पहले पुराने पुराने जो भी महापुरुष सब मुक्त हो गए के ग्रंथ

285
00:20:59,400 --> 00:21:04,320
हमारे भी है वो क्यों ना माने जाए आपके क्यों ना माने

286
00:21:04,320 --> 00:21:08,360
जाए नहीं ग्रंथ ग्रंथ मैं ये नहीं कह रहा कि ग्रंथ में

287
00:21:08,360 --> 00:21:12,600
सारा सत्य नहीं है ना सत्य है लेकिन कहा

288
00:21:12,600 --> 00:21:18,600
मैं कह रहा हूं जितना सत्य आप बता रहे उतना हम क्यों मान ले हम अपने ग्रंथों को क्यों ना

289
00:21:19,320 --> 00:21:24,600
माने तो फिर आप अपने को मानो हम अपने को

290
00:21:24,600 --> 00:21:28,680
माने हमने तो कहा ही नहीं कि आप अपने आप को आक के सिद्ध करो

291
00:21:28,680 --> 00:21:32,680
तो फिर चर्चा करने का तो कोई उचित नहीं हैने तोहा है

292
00:21:32,680 --> 00:21:36,680
पहले आदमी जान लेने जाने का

293
00:21:36,680 --> 00:21:41,760
कारण आपको जाने से पहले कुछ बेसिक कांसेप्ट बता देता

294
00:21:41,760 --> 00:21:46,880
हूं असतो मा सगम तमसो मा ज्योतिर

295
00:21:46,880 --> 00:21:51,080
गम ठीक है इसमें जीव की जो वास्तविक

296
00:21:51,080 --> 00:21:55,440
चा है मुझे असत से सत की ओर ले चलो

297
00:21:55,440 --> 00:21:58,640
बकल मुझे

298
00:21:58,640 --> 00:22:02,760
मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो मुझे

299
00:22:02,760 --> 00:22:06,800
क्या कहते अंधकार से उजाले की ओर ले चलो जीव की मूल

300
00:22:06,800 --> 00:22:11,760
वास्तविक चा है इस चा को अगर हम

301
00:22:11,760 --> 00:22:15,760
सरल शब्दों में परिभाषित कर दे तो एक जीव

302
00:22:15,760 --> 00:22:20,560
के अंदर भी कभी ना मरने की चा विद्यमान है

303
00:22:20,560 --> 00:22:24,560
प्रत्येक जीव के अंदर कभी ना दुखी होने की चा

304
00:22:24,560 --> 00:22:29,040
विद्यमान है बिल्कुल और

305
00:22:29,040 --> 00:22:33,720
सदा आनंदित रहने की चा विद्यमान है तत चित

306
00:22:33,720 --> 00:22:37,720
आनंद विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति

307
00:22:37,720 --> 00:22:41,720
जो यह कहता है संसार में कोई ईश्वर नहीं है वह

308
00:22:41,720 --> 00:22:45,760
भी कभी-कभी ऐसी इच्छा करता है विज्ञान के विपरीत जाकर के जीना चाहता

309
00:22:45,760 --> 00:22:49,800
है विज्ञान के विपरीत जाकर के अपने माता-पिता को सुरक्षित देखना चाहता है

310
00:22:49,800 --> 00:22:54,040
विज्ञान के विपरीत जाकर के बारिश को सोचता हैय कम हो जाए

311
00:22:54,040 --> 00:22:58,120
विज्ञान के विपरीत जाकर के वो सोचता है कि ये

312
00:22:58,120 --> 00:23:02,400
जो कल का मैच है वो भारत जीत जाए विज्ञान के विपरीत

313
00:23:02,400 --> 00:23:06,640
जाकर के वो भविष्य देखना चाहता है विज्ञान के विपरीत जाकर के वो भूतकाल में जाना चाहता

314
00:23:06,640 --> 00:23:10,920
है प्रकृति के सारे नियमों को तोड़ देने वाला बनना

315
00:23:10,920 --> 00:23:13,760
चाहता है प्रकृति के अधीन ना

316
00:23:13,760 --> 00:23:17,960
रहने वाला बनना चाहता है जीव

317
00:23:17,960 --> 00:23:22,320
की इस वास्तविक चा से ही यह सिद्ध होता है

318
00:23:22,320 --> 00:23:26,400
कि संसार में कोई एंटिटी है जो प्रकृति

319
00:23:26,400 --> 00:23:30,160
के नियमों के नीचे नहीं है क्यों हमारे

320
00:23:30,160 --> 00:23:34,200
अंदर भूख होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में खाना है

321
00:23:34,200 --> 00:23:35,560
हमारे अंदर प्यास होने से

322
00:23:35,560 --> 00:23:39,560
ही सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में जल है हमारे अंदर देखने की क्षमता

323
00:23:39,560 --> 00:23:43,840
से सिद्ध हो जाता है कि देखने का जो विषय है दृश्य उसका अस्तित्व

324
00:23:43,840 --> 00:23:47,840
है सुनने का जो विषय है आवाज

325
00:23:47,840 --> 00:23:51,960
उसका अस्तित्व है तो जिस प्रकार देखने की क्षमता होने मात्र

326
00:23:51,960 --> 00:23:56,160
से दृश्य का अस्तित्व डंके की चोट पर सिद्ध होता है उसी प्रकार

327
00:23:56,160 --> 00:24:00,200
से कानों कानों का जो विषय सुनने की क्षमता का जो

328
00:24:00,200 --> 00:24:04,640
विषय है आवाज उसका अस्तित्व सिद्ध हो जाता है

329
00:24:04,640 --> 00:24:08,720
इसी प्रकार से प्रत्येक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

330
00:24:08,720 --> 00:24:13,000
व्याप्त सत चित आनंद की जो चा है उसी से

331
00:24:13,000 --> 00:24:17,200
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है

332
00:24:17,200 --> 00:24:22,080
यह तो हुआ परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध अब यहां पर एक बात आई

333
00:24:22,080 --> 00:24:26,200
कि जो प्रत्येक मनुष्य है वो प्रकृति के सभी

334
00:24:26,200 --> 00:24:30,280
नियमों से मुक्त होना चाहता है सभी नियमों से मुक्ति नहीं वो

335
00:24:30,280 --> 00:24:34,280
कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है जब वो कह रहा

336
00:24:34,280 --> 00:24:38,360
है बार ज्यादा हो रही तो कम हो जाए जब वह कह रहा है धूप ज्यादा

337
00:24:38,360 --> 00:24:42,400
पड़ रही तो कम हो जाए तो ये क्या है उसके अंदर प्रकृति

338
00:24:42,400 --> 00:24:46,720
को कंट्रोल कर लेने की चा प्रकृति के ठीक विरुद्ध जाने की

339
00:24:46,720 --> 00:24:50,640
मूल चाहा उसकी विद्यमान है संसार यदि

340
00:24:50,640 --> 00:24:54,960
दुखम है तो उसको सुखमय जीना है संसार यदि मृत्यु वाला है

341
00:24:54,960 --> 00:24:59,040
तो उसको अमर होना है संसार यदि अज्ञ

342
00:24:59,040 --> 00:25:03,640
तो उसको चित होना है तो जब उसके अंदर

343
00:25:03,640 --> 00:25:07,640
यह सारी चा विद्यमान है प्रकृति के नियमों से मुक्त होने की

344
00:25:07,640 --> 00:25:11,640
तो इसका अर्थ है जो हमने अभी बताया कि उसकी चाह सेय सिद्ध होता है कि

345
00:25:11,640 --> 00:25:15,760
संसार में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है इसी प्रकार जब उसके अंदर

346
00:25:15,760 --> 00:25:19,800
यह चा विद्यमान है प्रकृति के नियमों के अधीन ना होने की तो

347
00:25:19,800 --> 00:25:24,040
इसी से सिद्ध होता है कि संसार में कोई है जो प्रकृति के नियमों

348
00:25:24,040 --> 00:25:28,440
के अधीन नहीं है उसी का नाम सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है

349
00:25:28,440 --> 00:25:32,640
बिल्कुल तो वोह कौन है सच्चिदानंद स्वरूप

350
00:25:32,640 --> 00:25:36,840
परमेश्वर और वही वही परमेश्वर हमें

351
00:25:36,840 --> 00:25:41,080
मुक्ति दिलाने के लिए हमें मोक्ष के मार्ग पर बताने के लिए समय

352
00:25:41,080 --> 00:25:45,280
समय पर अवतरित होते हैं सगुण साकार स्वरूप में

353
00:25:45,280 --> 00:25:49,320
और वो गुरु रूप जब हम सगुण साकार की भक्ति करते हैं सगुण साकार को

354
00:25:49,320 --> 00:25:53,520
पाने का प्रयास करते हैं तब हमें उनका जो वो स्वरूप है

355
00:25:53,520 --> 00:25:57,640
जो वाणी के द्वारा परिभाषित नहीं हो सकता जो वाणी का अ विषय

356
00:25:57,640 --> 00:26:01,640
है व्यवहार का अ विषय है जैसे कि हमारे

357
00:26:01,640 --> 00:26:05,840
शरीर को संचालित करने के लिए चाहिए होती है कैलोरी मगर

358
00:26:05,840 --> 00:26:10,240
कैलोरी हमारे व्यवहार का विषय नहीं है हमारे व्यवहार का विषय कैलोरी

359
00:26:10,240 --> 00:26:14,960
कहां से प्राप्त होगी उसका सगुण साकार जो स्वरूप है

360
00:26:14,960 --> 00:26:19,200
भोजन तो हम प्रयास करते हैं भोजन के लिए फल

361
00:26:19,200 --> 00:26:23,400
स्वरूप हमें प्राप्त होती है कैलोरी नहीं

362
00:26:23,400 --> 00:26:27,520
मैं आपसे जानना चाहूंगा कि हमारा यह हमेशा हमेशा के लिए जीवन मरण

363
00:26:27,520 --> 00:26:32,240
का चक्कर कैसे खत्म

364
00:26:32,240 --> 00:26:36,400
होगा व्यवहारिक रूप से देखें तो भगवत प्राप्ति

365
00:26:36,400 --> 00:26:40,440
से और अगर पार मर्थक रूप से

366
00:26:40,440 --> 00:26:44,800
देखें तो अविद्या से छूट जाने से

367
00:26:44,800 --> 00:26:48,320
अविद्या से अलग हो जाने

368
00:26:48,320 --> 00:26:52,440
से लेकिन शास्त्रों में तोय कहता है कि गुरु

369
00:26:52,440 --> 00:26:56,440
बिन माला फेरते गुरु बिन देते बताऊ

370
00:26:56,440 --> 00:27:01,200
शास्त्र की बात मैं आपको बताऊं आपने बिना गुरु के मुक्ति बिना गुरु के मुक्त

371
00:27:01,200 --> 00:27:05,320
मुक्ति हो जाएगी क्या हमने कब कहा तो

372
00:27:05,320 --> 00:27:09,360
फिर इसके लिए गुरु बनाना पड़ेगा ना नहीं कहा ना आपने तो गुरु बनाओ

373
00:27:09,360 --> 00:27:13,360
तो ये हमने कहा अगर मैंने ये नहीं कहा कि दुनिया में जापान

374
00:27:13,360 --> 00:27:18,080
है तो इसका मतलब ये सिद्ध हो गया कि मैं यह मानता हूं कि दुनिया में जापान नहीं है

375
00:27:18,080 --> 00:27:21,080
अगर मैंने नहीं कहा कि दुनिया में जापान है

376
00:27:21,080 --> 00:27:25,320
तो इसका मतलब यह हो गया कि मैं ये मानता हूं कि दुनिया में जापान नहीं है

377
00:27:25,320 --> 00:27:29,320
ये तो मैंने नहीं कहा गु के बिना तो कम नहीं

378
00:27:29,320 --> 00:27:33,520
चल सकता ना व्यक्ति बिल्कुल तो ग अब

379
00:27:33,520 --> 00:27:38,200
गुरु हां हा खैर मैं ये कहना चाह रहा

380
00:27:38,200 --> 00:27:42,320
था आप आए अच्छा लगा मगर हमारी बातचीत इस समय रामपाल

381
00:27:42,320 --> 00:27:46,360
से हो रही है रामपाल जी के लोगों से हो रही है और आपने

382
00:27:46,360 --> 00:27:50,560
अपने विचार व्यक्त किए देखो मेरी बात सुनो मैं हमें

383
00:27:50,560 --> 00:27:54,920
सत्य चाहिए अब वो चाहे आपसे मिले चाहे रामपाल जी महाराज से मिले

384
00:27:54,920 --> 00:27:59,080
चाहे किसी भी गुरु से मिले सत्य की खोज है और

385
00:27:59,080 --> 00:28:03,120
सत्य ही परमात्मा है आपको यदि आप राम देखिए

386
00:28:03,120 --> 00:28:07,840
आपको सत्य चाहिए तो आपसे अगर

387
00:28:07,840 --> 00:28:12,000
आपकी बातों का प्रतिकाराम रूप से अगर बात करने की इच्छा है आपको यहां

388
00:28:12,000 --> 00:28:16,240
पर करना है वन ऑन वन तो हम लोग ऐसे भी बात कर सकते हैं मैं नहीं चाहता हूं क्योंकि

389
00:28:16,240 --> 00:28:20,280
आप ना तो रामपाल जी को फॉलो कर रहे हैं आप किसी समय में रहे तो मैं नहीं चाहता

390
00:28:20,280 --> 00:28:24,600
हूं कि मैं यहां पर आ करके आपके लिए नकारात्मकता से आपकी बातों का खंडन

391
00:28:24,600 --> 00:28:28,600
करूं या कुछ करूं मैं वो सब नहीं चाहता मेरी बात सुनो रामपाल

392
00:28:28,600 --> 00:28:32,640
जी महाराज का पवित्र ज्ञान उनके मैं वहां

393
00:28:32,640 --> 00:28:36,320
तीन साल ढाई साल रह के आया हूं है ना तो

394
00:28:36,320 --> 00:28:40,320
छोड़ क्यों दिया छोड़ क्यों

395
00:28:40,320 --> 00:28:44,640
दिया पवित्र ज्ञान था तो सुनो छोड़ने

396
00:28:44,640 --> 00:28:48,680
का कारण ये कि है क्योंकि कबीर साहिब ने यह

397
00:28:48,680 --> 00:28:52,840
कहा है कि तंत्र मंत्र सब झूठ है मत बर्म ज

398
00:28:52,840 --> 00:28:56,840
कोई सार शब्द जाने बिना कागासन होई

399
00:28:56,840 --> 00:29:00,880
बताया कबीर जी ने कहा है

400
00:29:00,880 --> 00:29:05,280
आपको किसने बताया कि कबीर जी ने कहा

401
00:29:05,280 --> 00:29:09,440
है किसने बताया उकी वाणी है वाणी आपके पास

402
00:29:09,440 --> 00:29:13,880
कैसे आई वाणी है उनकी वाणी वाणी आपके पास कैसे

403
00:29:13,880 --> 00:29:18,200
आई वाणी हम सुनते आए हैं कबीर बोध सागर कबीर सागर

404
00:29:18,200 --> 00:29:22,320
कबीर बोध सागर इत्यादि यह सब आपको कान में डायरेक्ट उन्होंने कबीर

405
00:29:22,320 --> 00:29:28,320
ने कहे हैं या आपने किसी किताब से पढ़े हैं

406
00:29:28,680 --> 00:29:32,760
बताइए नहीं हमने किताब में भी पढ़े हैं और

407
00:29:32,760 --> 00:29:37,080
सुने भी है किसे सुने जो उनकी वाणी है वो सुनिए

408
00:29:37,080 --> 00:29:41,320
वाणी किससे सु मोबाइल में भी है मोबाइल मेंब मैं

409
00:29:41,320 --> 00:29:45,520
कबीर साहब 600 साल पहले आए थे लगभग अगर मेरी जानकारी गलत

410
00:29:45,520 --> 00:29:49,520
हो तो सही कर दीजिएगा पहले आ कबीर ने

411
00:29:49,520 --> 00:29:54,280
डायरेक्ट आपसे बात नहीं की है ना कि है क्या

412
00:29:54,280 --> 00:29:58,480
नहीं नहीं कि है डायरेक्ट उन्होंने आपसे बात नहीं की उनके

413
00:29:58,480 --> 00:30:02,720
नाम से मिलने वाली किताबें जो है वो वही है जो कबीर ने लिखी

414
00:30:02,720 --> 00:30:06,800
थी आपको कैसे पता कबीर तो अनपढ़ थे उन्होंने लिखी नहीं लिखी तो

415
00:30:06,800 --> 00:30:10,840
दूसरों ने थी उन्होंने वाणी बोली थी और दूसरो ने लिपि ठीक

416
00:30:10,840 --> 00:30:14,840
है उन्होंने जो लिपिबद्ध करवाई थी ये वही किताब है जो आपने पढ़ी प्रमाण

417
00:30:14,840 --> 00:30:18,920
मान लिया आपको कैसे पता पता ऐसे ना कि

418
00:30:18,920 --> 00:30:23,240
क्योंकि उनकी जितनी भी वाणिया है उसमें जरा सा रति भ झूठ नहीं है कोई रवर

419
00:30:23,240 --> 00:30:27,720
झूठ साबित करके बता दे इसलिए हम वो हां

420
00:30:27,720 --> 00:30:31,880
आप ये तो आपने बताया ना मैं ये पूछ रहा हूं कि उ जो उनके नाम

421
00:30:31,880 --> 00:30:36,040
से जो वाणी आपके पास है वो उन्हीं की नाम की है ये आपको

422
00:30:36,040 --> 00:30:42,040
कैसे पता क्योंकि जिससे आपने ली है उस पर आपको भरोसा नहीं

423
00:30:42,080 --> 00:30:43,760
है भरोसा

424
00:30:43,760 --> 00:30:47,920
तो अपनी आत्मा करती है ना अंदर से आवाज आती है कि सत्य सत्य

425
00:30:47,920 --> 00:30:51,960
और असत्य को स्वीकार करती है व भाई साब आप आए अच्छा लगा हम जा सकते

426
00:30:51,960 --> 00:30:57,960
जय श्री राम

427
00:30:59,720 --> 00:31:03,800
रामपाल दास जी का ज्ञान पवित्र है मगर हम

428
00:31:03,800 --> 00:31:07,920
उनको भी छोड़ बैठे क्योंकि कबीर ने यह कहा था अगर कबीर ने य कहा था तो

429
00:31:07,920 --> 00:31:12,080
पवित्र कहां से रहा अब आप रामपाल को ही अनफॉलो कर रहे हो जिससे आपको कबीर

430
00:31:12,080 --> 00:31:16,320
वाणी मिली हा

431
00:31:16,320 --> 00:31:22,320
यह कैसा दोगलापन है

432
00:31:22,760 --> 00:31:26,880
भाई तो और कोई आए थे अभी थोड़ी

433
00:31:26,880 --> 00:31:31,640
देर पहले

434
00:31:31,640 --> 00:31:36,000
कोई आना चाहता है तो आ जाओ भैया लिंक दे दीजिए

435
00:31:36,000 --> 00:31:40,120
मैं फिर याद दिला रहा हूं आवान के धर्म रक्षा अभियान को जोड़ने

436
00:31:40,120 --> 00:31:44,160
का प्रयास किया जा रहा है तो रीश

437
00:31:44,160 --> 00:31:49,320
जी बहुत-बहुत आभार आपको बहुत बहुत आभार शिवम जी बहुत-बहुत

438
00:31:49,320 --> 00:31:54,200
आभार कोमल मेहरा जी बहुत बहुत आभार आपका

439
00:31:54,200 --> 00:31:58,320
काफी लोगों ने ले लिया है सुखराम हर्ष झा

440
00:31:58,320 --> 00:32:02,400
जी आभार आपका मैं फिर आप लोगों को बताना चाह रहा हूं आवान

441
00:32:02,400 --> 00:32:06,600
के धर्म रक्षा अभियान को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है मैंने

442
00:32:06,600 --> 00:32:11,200
आज तक कभी नहीं कहा आप लोगों से कि आप यह सब करिए मगर अब आपका दायित्व

443
00:32:11,200 --> 00:32:15,320
है जो वीडियो देखें लाइक करें शेयर अवश्य करें

444
00:32:15,320 --> 00:32:19,400
और यदि सामर्थ्य है तो कम से कम वह 9 रप वाली

445
00:32:19,400 --> 00:32:23,480
जो मेंबरशिप है वो अवश्य ले ले जिससे कि य हमारे चैनल

446
00:32:23,480 --> 00:32:28,040
चैनल को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाने से पहले सोचे कि

447
00:32:28,040 --> 00:32:32,840
चैनल को अगर नकारात्मक व्यूज आ रहे हैं तो सकारात्मक भी आ रहे हैं

448
00:32:32,840 --> 00:32:36,920
तो इसलिए आप लोगों को यथा सामर्थ इस बात

449
00:32:36,920 --> 00:32:37,760
का ध्यान रखना है

450
00:32:37,760 --> 00:32:42,280
कि हमें आपका लाइक चाहिए जिससे ट को पता चले कि इसको लोग पसंद भी करते हैं

451
00:32:42,280 --> 00:32:46,480
हमें आपकी सदस्यता चाहिए जिससे कि य को भी फायदा हो तो वह चैनल

452
00:32:46,480 --> 00:32:51,480
को बंद करने से पहले या क्षति पहुंचाने से पहले सोचे और

453
00:32:51,480 --> 00:32:55,560
शेयर भी चाहिए जिससे कि य को लगे कि हां इसको लोग फैला

454
00:32:55,560 --> 00:32:59,760
रहे हैं पॉजिटिव है और जो हमारे बारे में नकारात्मक सूचना पहुचा

455
00:32:59,760 --> 00:33:04,880
पहुंचाई जा रही हो वो निरस्त हो वीक तो पड़े कम से कम ना

456
00:33:04,880 --> 00:33:10,880
इसलिए तो अभी ले लेते हैं हम पुष्पेंद्र जी

457
00:33:11,560 --> 00:33:17,400
को सनातनी राजा

458
00:33:17,400 --> 00:33:21,520
र जय श्री राम पुष्पेंद्र जी कल आप कहां चले

459
00:33:21,520 --> 00:33:25,600
गए थे कल आप कहां चले गए थे

460
00:33:25,600 --> 00:33:29,840
हा जी सर कल ग सर पता

461
00:33:29,840 --> 00:33:33,880
नहीं आपकी तरफ से कोई लाइव हट गई थी आपने हटाई

462
00:33:33,880 --> 00:33:38,600
पता नहीं कैसे हटी पता नहीं उसके बाद कई बार कोशिश करी जॉइन करने की जन नहीं हो पाया सर

463
00:33:38,600 --> 00:33:42,720
जय श्री राम राजा राय जी राम राम साहब आपने स्क्रीनशॉट लिया

464
00:33:42,720 --> 00:33:47,160
है क्या कल का जब आप

465
00:33:47,160 --> 00:33:51,440
मुझे याद है उसका नहीं नहीं उस टाइम तो कोई स्क्रीनशॉट

466
00:33:51,440 --> 00:33:55,880
नहीं लिया था तो हम लोग कल बात कर रहे थे कि

467
00:33:55,880 --> 00:33:59,920
क्या कबीर जी अजर है कि नहीं

468
00:33:59,920 --> 00:34:04,000
नहीं वो तो बात कर रहे थे लेकिन टॉपिक य टॉपिक यहां चल रहा था आप प्रमाण दिखा

469
00:34:04,000 --> 00:34:08,920
रहे थे कि आप ब्रह्मा विष्णु महेश को अजर क्यों नहीं मान अने

470
00:34:08,920 --> 00:34:13,400
मैं आपको एक बात बता दूं आपको मालूम है टॉपिक क्या चल रहा था और

471
00:34:13,400 --> 00:34:17,720
मुझे मालूम है आज ये शो दोबारा चल रहा है दोबारा

472
00:34:17,720 --> 00:34:21,920
से थंबनेल लगा है दोबारा से पब्लिक आई है आवश्यक नहीं है कि पब्लिक को मालूम हो

473
00:34:21,920 --> 00:34:27,920
कैसे तो आप हमें अभी बताइए क्या कबीर अजर है

474
00:34:28,000 --> 00:34:32,080
अजर मैंने बोला था अजर है लेकिन वो अपनी जब

475
00:34:32,080 --> 00:34:36,160
मृत्यु लोक में आते तो अपनी स्थिति चेंज कर लेते हैं वो सामर्थ्य है

476
00:34:36,160 --> 00:34:39,680
वो कुछ भी कर सकते

477
00:34:39,680 --> 00:34:44,480
हैं तो वो ऐसे हो जाते हैं कि वो बूढ़े दिखें

478
00:34:44,480 --> 00:34:48,600
आपकी आवाज थोड़ी कम आ रही है आप लीव करके

479
00:34:48,600 --> 00:34:52,720
दोबारा आ जाइए क्या लीव करके

480
00:34:52,720 --> 00:34:57,040
दोबारा आ जाइए नहीं नहीं आप बोलिए आवाज

481
00:34:57,040 --> 00:35:01,320
आ रही है हां आ रही है लेकिन कम आ रही है बोलिए आप अब

482
00:35:01,320 --> 00:35:05,440
मुझे सबसे पहले तो आपने जो यह कहा है कि वो जब सृष्टि में आते

483
00:35:05,440 --> 00:35:09,520
हैं तो वो अपने आप को ऐसा कर लेते हैं कि उनके ऊपर जो है

484
00:35:09,520 --> 00:35:13,600
आयु का प्रभाव पड़े और वो अविनाशी ना रहे यह सब कहां

485
00:35:13,600 --> 00:35:17,720
लिखा है नहीं तो ये भी कहां लिखा है कि

486
00:35:17,720 --> 00:35:22,040
म रामपाल दस जी ने कहा है क्या ऐसा रामपाल

487
00:35:22,040 --> 00:35:26,200
कहा है नहीं तो यह भी तो कहीं नहीं लिखा कि ब्रह्मा विष्णु महेश अमर

488
00:35:26,200 --> 00:35:30,280
है यह भी तो कहीं भी नहीं लिखा भाई साहब अभी बात हो रही है ब्रह्मा विष्णु

489
00:35:30,280 --> 00:35:35,120
महेश अमर है इसके लिए हम बहुत सारे प्रमाण पूर्व में दे चुके

490
00:35:35,120 --> 00:35:39,160
हैं सुनिए भाई साहब आपको अगर टॉपिक चेंज करना है तो बात

491
00:35:39,160 --> 00:35:43,000
अलग है आप जा सकते हैं अभी टॉपिक चल रहा है

492
00:35:43,000 --> 00:35:47,680
टॉपिक चल रहा है टॉपिक चल रहा है भाई साहब हेलो भाई साहब

493
00:35:47,680 --> 00:35:51,760
टॉपिक चल रहा है क्या कबीर अजर है ब्रह्मा विष्णु

494
00:35:51,760 --> 00:35:56,160
महेश के अविनाशी ना होने से कबीर की अजर सिद्ध नहीं होती ब्रह्मा

495
00:35:56,160 --> 00:36:00,240
विष्णु महेश के अविनाश ना होने से यह सिद्ध नहीं होता कि

496
00:36:00,240 --> 00:36:04,280
शास्त्र में लिखा है कि कबीर जो है जब वह लीला में

497
00:36:04,280 --> 00:36:08,480
आएंगे तो वह बाधित हो जाएंगे वह सीमित हो जाएंगे वह बूढ़े हो जाएंगे

498
00:36:08,480 --> 00:36:12,480
यह सब नहीं सिद्ध होता है वो एक अलग चैप्टर है कि अगर कबीर

499
00:36:12,480 --> 00:36:16,640
नहीं है तो कौन है तो फिर हम वो ढूंढेंगे ठीक है अभी आप मुझे बताइए क्या

500
00:36:16,640 --> 00:36:21,920
कबीर अजर है कि नहीं ब्रह्मा विष्णु महेश केया

501
00:36:21,920 --> 00:36:25,960
हा मैंने आपके क्वेश्चन का एक ही शब्द में जवाब दे दिया परमात्मा है वो

502
00:36:25,960 --> 00:36:30,240
कुछ भी कर सकता है शास्त्र से बोलिए

503
00:36:30,240 --> 00:36:34,680
या तो कहिए कि शास्त्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा है

504
00:36:34,680 --> 00:36:38,760
शास्त्र मैं तो कबीर सागर से बोल रहा हूं कबीर सागर में स्पष्ट लिखा है कि ना

505
00:36:38,760 --> 00:36:43,160
मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा बालक बन दिखलाया काशीनगर जल कम पर डेरा त जुलाने

506
00:36:43,160 --> 00:36:47,280
पाया ठीक है फिर दूसरी चीज कभी इसकी हिंदी बो इसकी

507
00:36:47,280 --> 00:36:51,560
हिंदी बोलिए हिंदी बोलिए इसकी इसकी हिंदी ये है कि उन्होंने

508
00:36:51,560 --> 00:36:55,880
ये बोला है कि ना मेरा जन्म होता ना मैं किसी के गर्म में आता ठीक है

509
00:36:55,880 --> 00:36:58,160
और काशीनगर जल कमल पर मतलब

510
00:36:58,160 --> 00:37:02,360
मैंने काशीनगर में एक अवतार के रूप में मतलब वहां जन्म लिया और एक

511
00:37:02,360 --> 00:37:06,400
जुलाई के यहां में अपना लीला में जीवन जिया और वहां

512
00:37:06,400 --> 00:37:10,600
मैंने सारी लीला करके और यहां से निकल गया ठीक है तो

513
00:37:10,600 --> 00:37:14,680
मतलब इसम इसमें ये कहां पर लिखा

514
00:37:14,680 --> 00:37:18,840
लिखा मिला हमें कि वो जब लीला में आता है परमात्मा तो

515
00:37:18,840 --> 00:37:22,920
वोह जो है बूढ़ा भी होता है यह कहां लिखा है नहीं तो नहीं पहले मेरी

516
00:37:22,920 --> 00:37:27,000
सुनो आप कबीर सागर को मानते हो अरे भाई पहले मैं आपसे

517
00:37:27,000 --> 00:37:31,360
पूछ लू आप जो बोल रहे हो वो आप ही के ग्रंथों में लिखा है कि नहीं अपने मन से बोल रहे हो

518
00:37:31,360 --> 00:37:35,480
क्योंकि क्योंकि आपके कई लोग हमसे यह कहते हैं कि भैया आप जिन

519
00:37:35,480 --> 00:37:39,480
लोगों से बात करते हो उनको तक नहीं मालूम है रामपाल जी का ज्ञान है क्या

520
00:37:39,480 --> 00:37:43,800
तो कम से कम हम उस ज्ञान को क्रॉस करें जो रामपाल जी कहो

521
00:37:43,800 --> 00:37:48,000
आपने अपने मन से यहां पर अपनी बात को बड़ा रखने के लिए कुछ भी बोल दिया आप हमें

522
00:37:48,000 --> 00:37:53,000
बताए तो कि आपके ग्रंथों में कहां लिखा है

523
00:37:53,000 --> 00:37:58,120
बात कही है ज्ञान गंगा में कहीं पर लिखी है कि जो कबीर

524
00:37:58,120 --> 00:38:03,080
कबीर होगा वह अजर नहीं है लीला में आने के बाद वह अजर नहीं है

525
00:38:03,080 --> 00:38:07,560
हां है नहीं है बिल्कुल नहीं है अजर नहीं है ना

526
00:38:07,560 --> 00:38:11,600
लीला में आने के बाद कोई अजर नहीं है वह अपने स्थिति चेंज करते रहते हैं

527
00:38:11,600 --> 00:38:13,640
उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता

528
00:38:13,640 --> 00:38:17,640
लीला में आने के बाद अजर नहीं है वो अपनी स्थिति चेंज करते हैं अब ये कहा

529
00:38:17,640 --> 00:38:21,680
लिखा है कोई अपना रेफरेंस दीजिए आपसे मैं पूछ

530
00:38:21,680 --> 00:38:26,080
तो रहा आप कबीर सागर को मानते हो आप संतो की वाड़ी को मानते हो अरे भाई

531
00:38:26,080 --> 00:38:30,120
आपका रेफरेंस जब तब हम उसको काटेंगे ना पहली बात तो ये है कि

532
00:38:30,120 --> 00:38:34,120
हमें यही यही पता है किय कोई रेफरेंस है ही नहीं उसमें मैं रेफरेंस

533
00:38:34,120 --> 00:38:38,240
मैं रेफरेंस तो तब दूंगा जब मानते हो उस ग्रंथ को आपके

534
00:38:38,240 --> 00:38:42,520
पास रेफरेंस है देना है कि नहीं देना है मैं सर क्या पूछ रहा हूं आप मेरे क्वेश्चन

535
00:38:42,520 --> 00:38:46,680
का जवाब ही नहीं दे पा रहे मैं कह रहा हं आप कबीर सा को मा आपसे ये जानना चाह रहा हूं

536
00:38:46,680 --> 00:38:50,760
कि जो बात आप कह रहे हैं वो रामपाल दास जी ने कही है कि नहीं मैं इसलिए पूछ

537
00:38:50,760 --> 00:38:54,880
रहा हूं अरे सर मेरे क्वेश्चन जो आप बोल रही है उसका जवाब

538
00:38:54,880 --> 00:38:59,120
ही नहीं दे पा रहे मैं पूछ रहा हूं आप कबीर सागर को मानते हो आप कबीर सागर ने कबीर

539
00:38:59,120 --> 00:39:03,320
साहब ने जिन्हो को संतो को अपना अपनी शरण ली है क्या उनकी वाणी को मानते हो

540
00:39:03,320 --> 00:39:07,520
मैं नहीं मानता मैं नहीं मानता मैं नहीं आप नहीं मानते तो मैं जो

541
00:39:07,520 --> 00:39:11,760
क कहीं से वेद से में प्रमाण नहीं दे सकता मतलब जो और आपके ग्रंथों

542
00:39:11,760 --> 00:39:15,800
से वो अजर नहीं है आप उसको मानते नहीं पास आपके पास केवल जो प्रमाण

543
00:39:15,800 --> 00:39:19,880
है वो कबीर सागर के ही है ना वेद से है ना पुराणों से है ना उपनिषद

544
00:39:19,880 --> 00:39:24,040
से है ना रामपाल दास जी की किताब भर से हैं

545
00:39:24,040 --> 00:39:28,080
वेद से प्रमाण है वेद से ये प्रमाण है कि वो जो कबीर परमात्मा जब

546
00:39:28,080 --> 00:39:28,640
वो लीला में

547
00:39:28,640 --> 00:39:32,640
आएगा वो जब लीला में आएगा तो वो सीमित हो जाएगा

548
00:39:32,640 --> 00:39:36,920
अ अजर नहीं रहेगी उसकी वेद से प्रमाण

549
00:39:36,920 --> 00:39:41,200
है जब वह पृथ्वी पर आता है तो व उसकी जो प्रवश है वह मतलब एक क्वारी

550
00:39:41,200 --> 00:39:45,280
गाय गायों के दूसरे परव से होगी ठीक है भाई साहब

551
00:39:45,280 --> 00:39:49,520
हम लोग सवाल कर रहे हैं अजर के बारे में जब वो

552
00:39:49,520 --> 00:39:55,520
धरती पर आएगा तो वो अजर नहीं रहेगा लीला में

553
00:39:57,440 --> 00:40:01,640
तो आप आपका कहीं प्रमाण है इस चीज का कि ब्रह्मा विष्णु महेश मतलब जो अजर

554
00:40:01,640 --> 00:40:05,640
भाई साहब फिर टॉपिक चेंज कर रहे हैं हम आपको ब्रह्मा विष्णु महेश के

555
00:40:05,640 --> 00:40:09,880
प्रमाण देके ही भेजेंगे अभी बात चल रही है कि ईश्वर

556
00:40:09,880 --> 00:40:14,000
लीला में आकर के अजर नहीं होता

557
00:40:14,000 --> 00:40:18,000
नहीं तो आप कबीर सागर को मान आप कबीर सागर को मानते

558
00:40:18,000 --> 00:40:22,000
नहीं संतों की वाड़ी को मानते नहीं फ क दिखाऊंगा एक

559
00:40:22,000 --> 00:40:26,240
बात बताइए आप जब आप जब मैं कबीर सागर को नहीं मानता हूं और इसलिए

560
00:40:26,240 --> 00:40:30,400
आप मुझे प्रमाण नहीं दे रहे हैं तो आपने अभी जो इससे पहले प्रमाण

561
00:40:30,400 --> 00:40:34,400
दिया था वो क्यों दिया था कौन सा प्रमाण दिया था मैंने अभी

562
00:40:34,400 --> 00:40:38,880
आपने दोआ सुनाया था कोई कबीर जी का कोई वाक्य सुनाया था क्यों

563
00:40:38,880 --> 00:40:42,960
सुनाया क्यों सुनाया आपको तब

564
00:40:42,960 --> 00:40:43,720
नहीं मालूम था कि

565
00:40:43,720 --> 00:40:47,720
मैं नहीं मानता हूं कबीर जी की बात को इस आप जोर दे रहे

566
00:40:47,720 --> 00:40:51,800
थे इसलिए सुनाया था तो अभी जोर दे रहा हूं अभी जोर दे रहा हूं

567
00:40:51,800 --> 00:40:55,840
दिखा दो भैया प्रमाण आप आप बोले ना य बात को मैं कई सार को नहीं मानता

568
00:40:55,840 --> 00:40:59,880
नहीं मानते तो कोई बात नहीं आपकी इच्छा अच्छा पहले आपको नहीं मान पहले आपको ये बात नहीं

569
00:40:59,880 --> 00:41:03,920
मालूम थी नहीं मेरे को ये मालूम नहीं थी आपका ब सागर को बक नहीं मान ल दास

570
00:41:03,920 --> 00:41:08,080
जी के चरणों की सौगंध खाके कहिए अरे सर

571
00:41:08,080 --> 00:41:12,240
यह कौन सी बात हुई रामपाल दास जी के चरणों की सौगंध

572
00:41:12,240 --> 00:41:16,400
खाके कहिए मैं मैं मेरे गुरु के चरणों की सौगंध खाता हूं कि मुझे नहीं मालूम

573
00:41:16,400 --> 00:41:20,480
था कि कबीर दास जी ये कबीर वाणी मानता है नहीं मानता सर ये

574
00:41:20,480 --> 00:41:24,720
आप टॉपिक चेंज कर रहे हो ये आप टॉपिक चेंज कर रहे हो मुझे नहीं मालूम तो नहीं मालूम इससे क्या मतलब

575
00:41:24,720 --> 00:41:29,160
है तो यानी कि आप जो यह कह रहे हैं कि जो

576
00:41:29,160 --> 00:41:33,240
भगवान है वह लीला में आकर के अजर नहीं रह जाते हैं उनके

577
00:41:33,240 --> 00:41:37,440
ऊपर प्राकृतिक नियम लागू हो जाते हैं इसके लिए आपके पास शास्त्र

578
00:41:37,440 --> 00:41:41,560
का प्रमाण नहीं है जी शास्त्र का प्रमाण है लेकिन

579
00:41:41,560 --> 00:41:45,840
जिन शास्त्रों में प्रमाण है उनको आप मानते नहीं ठीक है वेदों

580
00:41:45,840 --> 00:41:50,520
में प्रमाण है क्या वेद में पुराण में गीता में

581
00:41:50,520 --> 00:41:54,760
वे वेद में मैंने गुरु जी के गुरु जी के वचन से अभी यह चीज नहीं मतलब

582
00:41:54,760 --> 00:41:59,640
सुनी कि उनका अजर का प्रमाण है वेद में अगर सुने तो भविष्य में आपको बताय

583
00:41:59,640 --> 00:42:03,920
सुनिए आपको एक बात बताऊ एक पर्सनल राय दे रहा हूं आप यह कह

584
00:42:03,920 --> 00:42:08,200
करके कि लीला में आकर के भगवान बाधित हो जाते हैं आप रामपाल

585
00:42:08,200 --> 00:42:12,680
दास जी का विरोध कर रहे हैं मैं नहीं कर रहा आप कर रहे

586
00:42:12,680 --> 00:42:17,040
आप कर र नहीं कर रहा नहीं कर रहा आप

587
00:42:17,040 --> 00:42:21,200
आप दिखा दो प्रमाण मैं नहीं दिखाऊंगा वो आपको जब य से जाओगे

588
00:42:21,200 --> 00:42:25,280
कुछ दिन अपने लोगों से ही मिलोगे वही आपको बताएंगे नहीं

589
00:42:25,280 --> 00:42:29,280
आप ये कह रहे लीला में भी वास्तविक दुनिया में वो जो करते हैं

590
00:42:29,280 --> 00:42:33,320
वो करते हैं मगर कम से कम यह जो दुनिया है जिसमें हम लोग दुख भोग रहे हैं कष्ट भोग रहे

591
00:42:33,320 --> 00:42:37,520
हैं बूढ़े हो रहे हैं मर रहे हैं जी रहे हैं इसमें यदि कबीर आएगा

592
00:42:37,520 --> 00:42:41,760
तो वो भी वैसे ही मरेगा बूढ़ा होगा परेशान होगा वो

593
00:42:41,760 --> 00:42:46,640
सारे प्रकृति के नियम उस पर भी लागू हो जाएंगे हां बिल्कुल

594
00:42:46,640 --> 00:42:50,720
देख लो भैया ये ये

595
00:42:50,720 --> 00:42:55,080
वेदों में प्रमाण है और कबीर साहब यहां पर आकर के बूढ़े होते हैं

596
00:42:55,080 --> 00:42:59,880
कुछ भी ना करने वाले होते हैं सब कुछ कर सकने वाला तो छोड़

597
00:42:59,880 --> 00:43:03,960
दो सुनो सुनो आपने सुनो आपने एक क्वेश्चन किया था कल मुझसे परमात्मा

598
00:43:03,960 --> 00:43:08,600
सर्वशक्तिमान है मैंने बोला था सर्वशक्तिमान है भाई साब

599
00:43:08,600 --> 00:43:12,640
साब एक मिनट मुझे जरा दर्शको से बात कर लेज दो मिनट आप चुप रहिए ठीक

600
00:43:12,640 --> 00:43:14,640
है दो मिनट मैं आपको बोलने का अवसर

601
00:43:14,640 --> 00:43:18,800
दूंगा दो मिनट आप चुप रहिए मैं दर्शको से बात कर रहा हूं तो भाई

602
00:43:18,800 --> 00:43:23,080
इनका कहना है कि जिस जगह पर हम लोग

603
00:43:23,080 --> 00:43:27,120
चाहते हैं कि ईश्वर हमें ईश्वर का सानिध्य प्राप्त हो

604
00:43:27,120 --> 00:43:31,280
हा पर हम लोग सर्दी जो त्रिविध ताप होते हैं भौतिक ताप

605
00:43:31,280 --> 00:43:35,320
उनसे हम बचना चाहते हैं सर्दी गर्मी धूप छाव इन सब से

606
00:43:35,320 --> 00:43:39,400
हम बचना चाहते हैं मृत्यु यह वो तो ईश्वर भी

607
00:43:39,400 --> 00:43:43,520
इनका वह ईश्वर है जो यहां पर आने के बाद जो है वह भी आप ही

608
00:43:43,520 --> 00:43:47,720
के जैसा हो जाता है और उस पर भी य धूप छाव इत्यादि सब कुछ लागू

609
00:43:47,720 --> 00:43:51,840
हो जाती है वह उसके कंट्रोल में नहीं है कि वो अपनी उम्र

610
00:43:51,840 --> 00:43:57,280
को बढ़ने से रोक दे वो उसके कंट्रोल में नहीं हैम

611
00:43:57,280 --> 00:44:01,360
पास कर रहे हो आप हां बताइए मैंने ये नहीं

612
00:44:01,360 --> 00:44:05,560
बोला कि उनके ऊपर उनके ऊपर उन पर ये शक्ति नहीं है को नियम लागू कर ले

613
00:44:05,560 --> 00:44:09,640
वो आप सर्वशक्तिमान है वह स्थिति आप चेंज करें

614
00:44:09,640 --> 00:44:13,640
या ना करें वो उनके ऊपर निर्भर है लेकिन उनके ऊपर कोई नियम लागू नहीं है ठीक

615
00:44:13,640 --> 00:44:17,800
है उनकी इच्छा है तो यानी यानी कि वो अपनी इच्छा

616
00:44:17,800 --> 00:44:21,840
से बूढ़े होते हैं यहां पर आते हैं तो बिल्कुल सर्वशक्तिमान है कुछ

617
00:44:21,840 --> 00:44:25,960
भी कर सकते हैं उनके लिए कोई इंपॉसिबल नहीं है पॉसिबल है सारी चीज ठीक है

618
00:44:25,960 --> 00:44:29,960
ठीक है अब आप एक बा बताइए वो जिस रूप में वहां पर होते हैं उसी रूप में

619
00:44:29,960 --> 00:44:34,200
यहां पर आते हैं या अपने रूप को चेंज कर लेते हैं

620
00:44:34,200 --> 00:44:38,200
रूप चेंज रूप एक जैसा होता है लेकिन जिस स्थिति

621
00:44:38,200 --> 00:44:42,200
में वो वहां रहते हैं ठीक है जितना उनका नूर वहां है उस नूर

622
00:44:42,200 --> 00:44:46,400
को यहां नहीं लाते उस नूर को कुछ कम करते हैं अच्छा ठीक है

623
00:44:46,400 --> 00:44:50,520
तो इसका मतलब कहने का ये है कि वो जो तेज है उनमें

624
00:44:50,520 --> 00:44:54,520
तेज तेज वो कम कर देते हैं बाकी आते एज इट इज है ठीक

625
00:44:54,520 --> 00:44:58,560
है बिल्कुल यानी कि एक बार वो कबीर कबीर जी की फोटो

626
00:44:58,560 --> 00:45:04,520
दिखा

627
00:45:04,520 --> 00:45:10,520
दीजिए कबीर जी की फोटो दिखा दीजिए

628
00:45:21,120 --> 00:45:25,520
इनको फोटो दिख रही है आपको

629
00:45:25,520 --> 00:45:30,080
दिखाइए दिख रही है मेरे को दिख रही है दिख रही है तो

630
00:45:30,080 --> 00:45:34,440
वो जो उनका सतलोक है उसमें ऐसे ही रहते हैं बिल्कुल सर

631
00:45:34,440 --> 00:45:38,480
बिल्कुल सर अच्छा तो ये जो आपको दिख रही

632
00:45:38,480 --> 00:45:43,040
है फोटो ये अजर है कि नहीं है

633
00:45:43,040 --> 00:45:47,160
अजर अब सर आप मतलब आप टॉपिक आगे बढ़ गया अब अजर वाली बात

634
00:45:47,160 --> 00:45:51,200
अब कहां से आ गई टॉपिक आगे कहां बढ़ा आपने कहा कि

635
00:45:51,200 --> 00:45:55,240
वह सृष्ट में आकर के बूढ़े दिखाई देते हैं मगर वो वहां बूढ़े नहीं होते हैं

636
00:45:55,240 --> 00:45:59,240
तो वहां पे तो बूढ़े ही दिख रहे हैं सतलोक में क्या

637
00:45:59,240 --> 00:46:03,280
सतलोक में वो बूढ़े दिख रहे हैं कहां ये सतलोक मतलब सतलोक

638
00:46:03,280 --> 00:46:07,400
में बूढ़े सतलोक से मगाया आपने फोटो गए आप सतलोक में यानी कि

639
00:46:07,400 --> 00:46:11,440
यानी कि सतलोक वाला रूप दूसरा है हां तो मैं आपसे पूछ

640
00:46:11,440 --> 00:46:15,560
रहा हं आप सतलोक से लेक आए हो इसको फोटो को आप सतलोक से लेक आए इस फोटो को अरे भाई साहब मैं

641
00:46:15,560 --> 00:46:21,520
आपसे पूछ रहा हूं कि सतलोक वाला जो कबीर का रूप है वो दूसरा है

642
00:46:21,520 --> 00:46:25,520
ना मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने जो मुझे फोटो दिखाया आप इस फोटो

643
00:46:25,520 --> 00:46:29,760
को सतलोक से लेकर आए क्या ये जो फोटो रामपाल दास जी से प्राप्त है

644
00:46:29,760 --> 00:46:33,960
जो उनकी किताबों में है ये वो फोटो है अब आप बता दो र् होते

645
00:46:33,960 --> 00:46:38,760
हु बस तो इस मृत्यु लोक का आप इस मृत्यु लोक का फोटो दिखा रहे हो मेरे को

646
00:46:38,760 --> 00:46:42,920
तो इसका मतलब जिस कबीर को हम जानते हैं वह कबीर

647
00:46:42,920 --> 00:46:46,920
वो नहीं है जो वहां पर बैठता है वो रूप उसका नहीं हैने बोला मैंने बोला ही नहीं ऐसा कि

648
00:46:46,920 --> 00:46:50,960
वो कबीर य नहीं है मैंने बोला ऐसा नहीं बोला अरे मैं रूप की बात कर

649
00:46:50,960 --> 00:46:55,040
रहा हूं नहीं मैंने नहीं बोला ना ऐसा आप बोल रहे हो य बात

650
00:46:55,040 --> 00:46:59,160
तो मैं रूप की बा कर रहा जो हम कबीर को जिस

651
00:46:59,160 --> 00:47:03,280
रूप में जानते हैं क्या वो रूप वो नहीं है

652
00:47:03,280 --> 00:47:07,400
क्या मैंने सर रूप की बात करी है मैंने रूप की बात करी है सिर्फ

653
00:47:07,400 --> 00:47:11,440
ठीक है रूप एक ही है लेकिन वो अपने तेज को हल्का करते

654
00:47:11,440 --> 00:47:15,920
सबसे पहले तो उजाले में आइए जिससे आपका चेहरा लोगों को दिखे

655
00:47:15,920 --> 00:47:20,080
दिख रहा है सर मेरा चेहरा और कितना दिखा अंधेरा है अधेरा व चेहरा आपका समझ

656
00:47:20,080 --> 00:47:24,480
में नहीं आ रहा है आप उजाले में आइए आपके चेहरे पर रोशनी

657
00:47:24,480 --> 00:47:29,040
पड़े ठीक है

658
00:47:29,040 --> 00:47:35,040
बल्ब की ओर हो जाइए अपना अपना फेस बल्ब जिधर हो ना उधर

659
00:47:36,080 --> 00:47:40,080
करिए अभी भी आपके अंधेरा ही है तो मैं य

660
00:47:40,080 --> 00:47:45,000
आपसे पूछ रहा हूं हा ठीक है ठीक है अब ठीक है अब ठीक

661
00:47:45,000 --> 00:47:49,280
फिर आप झुक रहे ना तो छाया आ जा रही है ठीक है

662
00:47:49,280 --> 00:47:55,280
अब ठीक है पीछे रहिए मतलब झुक जाएंगे तो छाया आ जाएगी

663
00:47:59,720 --> 00:48:03,760
बोलिए हां मैं यह कह रहा हूं कि आपका

664
00:48:03,760 --> 00:48:08,000
कहना है कि आपके पास कबीर

665
00:48:08,000 --> 00:48:12,040
का फोटो प्राप्त नहीं है जो वहां सतलोक में वो रहता है वोह

666
00:48:12,040 --> 00:48:16,120
फोटो है क्या मैं उस

667
00:48:16,120 --> 00:48:20,200
फोटो को आप सतलोक में फोटो जो है या नहीं

668
00:48:20,200 --> 00:48:24,240
है ठीक है वो जैसा भी फोटो है ठीक है लेकिन हमें इतना पता है कि

669
00:48:24,240 --> 00:48:28,320
जो कबीर जी का जो रूप है जो हम रूप देख रहे हैं फोटो में ठीक है ये

670
00:48:28,320 --> 00:48:32,400
बूढ़ा अजर अमर ये क्या ये चीज नहीं पता हमने जो फोटो देख

671
00:48:32,400 --> 00:48:36,520
रहे हैं बिल्कुल रूप ऐसा मिलेगा ठीक

672
00:48:36,520 --> 00:48:40,640
है मतलब वो ऐसे ही दिखेंगे ना वहा भी

673
00:48:40,640 --> 00:48:44,600
बिल्कुल रूप चेहरा चेहरा फेस कट फेस कट ओनली

674
00:48:44,600 --> 00:48:48,680
ये नहीं के जो क नाम बूढ़ा के जवान है इससे कोई मतलब

675
00:48:48,680 --> 00:48:52,840
नहीं है फेस कट यह जो रूप आपको दिख रहा है अभी यह वाला

676
00:48:52,840 --> 00:48:57,480
जो रूप दिख रहा है अभी ये आपको क्या बूढ़ा लग रहा है क्या

677
00:48:57,480 --> 00:49:01,560
क्या जो अभी जो यहां पर जो य रामपाल दास जी की

678
00:49:01,560 --> 00:49:05,680
किताबों में जो चेहरा है वो बूढ़ा दिख रहा है क्या आपको

679
00:49:05,680 --> 00:49:09,760
ना मेरे को बूढ़ा दिख रहा है ना मेरे को जवान दिख रहा है क्या दिख रहा

680
00:49:09,760 --> 00:49:14,840
है मेरे को चेहरा दिख रहा है

681
00:49:14,840 --> 00:49:19,000
चेहरा दिख रहा है बिल्कुल तो

682
00:49:19,000 --> 00:49:23,160
आपका कहने का मतलब है आप उनको बूढ़ा नहीं मानते जो जो फोटो

683
00:49:23,160 --> 00:49:27,520
यहां दिख रही है वो बूढ़ ब बुढ़ापा नहीं है वो मैं मैं नहीं मान में परमात्मा

684
00:49:27,520 --> 00:49:31,960
का चेहरा देखता हूं परमात्मा का चेहरा और इसी रूप में मिलेंगे हमको

685
00:49:31,960 --> 00:49:36,520
अच्छा जो आपको दिख मतलब दाढ़ी होगी कि नहीं ये सफेद बाल

686
00:49:36,520 --> 00:49:40,560
सर जैसा हमको चेहरा दिखाया हम इसी रूप में देख रहे और आ रू

687
00:49:40,560 --> 00:49:44,760
पूछ सफेद बाल होंगे कि नहीं दाढ़ी होगी कि नहीं सर मैं भी मैंने भी तो आपके क्वेश्चन

688
00:49:44,760 --> 00:49:48,840
का जवाब दिया इतना लंबा क्यों करते हो मैंने जो चेहरा देखा रा दे स

689
00:49:48,840 --> 00:49:53,240
पूछ रहा हूं दाढ़ी होगी कि नहीं बोलो हा ना सर आप क्या देख रहे हो

690
00:49:53,240 --> 00:49:57,240
आप क्या देख रहे हो जैसा फोटो मेरे को दिख रहा है वही आप देख रहे हो जैसा मेरे दिख रहा है ऐसा

691
00:49:57,240 --> 00:49:59,680
ही मेरे को आगे मिलेगा बस इतना इतना क्लियर बोल

692
00:49:59,680 --> 00:50:03,760
रहा हूं ना दाढ़ी होगी कि नहीं आपने कहा फेस कट तो हो सकता है क्लीन शेप वाला देखो

693
00:50:03,760 --> 00:50:08,680
वहां पे इसलिए क्लियर कर रहा हूं कहां पर क्लीन क्लीन

694
00:50:08,680 --> 00:50:12,680
वाला आपने कहा वैसा ही फेस कट मिलेगा रूप नहीं

695
00:50:12,680 --> 00:50:16,760
फेस कट तो हो सकता है आपने कोई अंदर का फेस कट देख लिया हो

696
00:50:16,760 --> 00:50:20,800
कबीर जी का इसलिए पूछ रहा हूं वहां प दाढ़ी मिलेगी उकी नहीं मि

697
00:50:20,800 --> 00:50:25,080
मैंने तो ऐसा नहीं मैंने तो ऐसा बोला ही नहीं है मैंने देख लि क्लियर करो ना भाई

698
00:50:25,080 --> 00:50:29,120
आपने नहीं कहा मैं कब कह रहा हूं आप क्लियर कर दो वहा दाढ़ी मिलेगी सफेद

699
00:50:29,120 --> 00:50:33,760
बाल वाली कि नहीं मिलेगी सर मैंने देखा ही नहीं तो मैं कैसे क्लियर कर दूं

700
00:50:33,760 --> 00:50:39,760
अच्छा यानी कि अब तीन बातें हो गई पहली बात तो ये

701
00:50:40,080 --> 00:50:44,680
है पहली बात तो यह है

702
00:50:44,680 --> 00:50:49,720
कि आपने कहा कि यहां लीला में आकर

703
00:50:49,720 --> 00:50:53,800
के आकर जो कबीर जी

704
00:50:53,800 --> 00:50:57,800
है वो प्राकृतिक नियमों के अधीन हो जाते हैं

705
00:50:57,800 --> 00:51:01,880
मैंने नहीं बोला अधीन हो जाते हैं मैंने यह नहीं बोला अधीन हो जाते हैं क्या क्या हो

706
00:51:01,880 --> 00:51:05,960
जाते हैं मैंने यह बोला कि परमात्मा सर्व शक्ति माने लीला में हो

707
00:51:05,960 --> 00:51:09,960
चाहे कभी भी हो परमात्मा अपना कुछ भी कर सकता है कुछ

708
00:51:09,960 --> 00:51:13,960
भी बालक बन सकता है बूढ़ा बन सकता है जवान बन सकता है कुछ भी

709
00:51:13,960 --> 00:51:14,880
बन सकता पथवी

710
00:51:14,880 --> 00:51:18,960
को सुनो पृथ्वी को पलट भी सकता है ए इट ऐसे ही कर सकता है परमात्मा में सारे

711
00:51:18,960 --> 00:51:23,040
गुण है नहीं तो यानी कि जो परमात्मा है

712
00:51:23,040 --> 00:51:27,280
लीला में अजर नहीं है यह तो आपने बोला ना मैंने सर

713
00:51:27,280 --> 00:51:31,360
में मेरा मेरी बात को ध्यान से सुनिए मैं कहना क्या चाह रहा हूं हां बोलो

714
00:51:31,360 --> 00:51:35,560
अजर हो अमर हो यह परमात्मा जाने लेकिन मुझे इतना पता परमात्मा

715
00:51:35,560 --> 00:51:39,600
सब कुछ कर स देखिए सब बातें अगर आप परमात्मा जानने वाली कर देंगे

716
00:51:39,600 --> 00:51:43,680
मुझे नहीं पता है कर देंगे तो हम लोग बात किस बात प करेंगे जब आप हर बात प ी

717
00:51:43,680 --> 00:51:47,680
बात करो सुनो आप सुनो सुनो सुनो सर आप मुझे एक चीज का जवाब दे दीजिए आप

718
00:51:47,680 --> 00:51:51,800
नहीं मानते कि परमात्मा सब कुछ कर सकता है आप नहीं मानते क्या भाई साहब देखिए

719
00:51:51,800 --> 00:51:56,840
चिड़चिड़ा से गर्म होने से जल्दबाजी करने से कुछ

720
00:51:56,840 --> 00:52:00,960
एक एक बात प एक एक बात प तसल्ली से बात करेंगे

721
00:52:00,960 --> 00:52:05,040
तसल्ली से भागते हुए बात नहीं करेंगे एक एक बात प

722
00:52:05,040 --> 00:52:09,280
तसल्ली से बात करेंगे करनी है आपको

723
00:52:09,280 --> 00:52:13,320
क्यों नहीं करनी तक लेकर आए ऐसा क्या तर्क दूं जिससे

724
00:52:13,320 --> 00:52:17,520
इसको विवाद को रोका जा सके बस सुनिए

725
00:52:17,520 --> 00:52:22,040
आपने कहा कि लीला में आकर वो ईश्वर अजर नहीं है

726
00:52:22,040 --> 00:52:26,560
ठीक है लीला से बाहर वो अजर है ठीक है हमने कहा

727
00:52:26,560 --> 00:52:30,040
नहीं बोला आप सुनो सर आप फिर मुझे बोलना पड़ता है मैंने ये बोला

728
00:52:30,040 --> 00:52:34,680
परमात्मा सर्वशक्तिमान है वो कुछ भी कर सकता है कुछ भी अच्छा

729
00:52:34,680 --> 00:52:38,760
तो यानी कि वो लीला में हमको दिख रहा है मगर वो चाहे तो वो जवान

730
00:52:38,760 --> 00:52:43,400
भी दिख सकता है बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल अब आए ना सही इंफॉर्मेशन पर बिल्कुल बिल्कुल

731
00:52:43,400 --> 00:52:47,520
ठीक है अब बात ये आती है ये जो फोटो है जी

732
00:52:47,520 --> 00:52:51,560
ये जो फोटो है ये लीला वाला फोटो नहीं है ये सतलोक वाला फोटो

733
00:52:51,560 --> 00:52:55,600
है या सतलोक वाला फोटो नहीं है लीला वाला फोटो है ये इस मृत्युलोक का

734
00:52:55,600 --> 00:52:59,680
फोटो है जब यहां 600 वर्ष पहले यहां पर रहे थे वो ये

735
00:52:59,680 --> 00:53:04,120
वो फोटो है मृत्युलोक का फोटो है ये ये जो है सतलोक

736
00:53:04,120 --> 00:53:08,640
सतलोक का फोटो नहीं है यह जो हमें फोटो प्राप्त है ठीक

737
00:53:08,640 --> 00:53:13,400
है यह फोटो जो हमें प्राप्त है

738
00:53:13,400 --> 00:53:16,360
यह जो

739
00:53:16,360 --> 00:53:20,840
है सतलोक का नहीं है

740
00:53:20,840 --> 00:53:24,840
अच्छा तो इसका मतलब आपको सतलोक

741
00:53:24,840 --> 00:53:28,960
में वो कैसे दिखते हैं यह नहीं बताया गया आज तक बताया

742
00:53:28,960 --> 00:53:33,720
गया है ना मतलब इसी जैसा हम यहां देख रहे हैं बिल्कुल ऐसा आपको

743
00:53:33,720 --> 00:53:37,720
मिलेगा तो फिर ये वही फोटो हो गया ना सतलोक वाला

744
00:53:37,720 --> 00:53:42,600
नहीं मैं कैसे कह सकता हूं सतलोक मैंने देखा नहीं

745
00:53:42,600 --> 00:53:45,120
भाई जब आप ये कह रहे हो बिल्कुल वही फोटो मिलेगा

746
00:53:45,120 --> 00:53:49,240
जी राजा जी आप बोल लीजिए कुछ कहना चाह रहे हैं मैं ये कह रहा हूं कि अभी इन्होंने अपनी

747
00:53:49,240 --> 00:53:53,400
बात कह दी ना कि सर्वशक्तिमान होते हुए भी यहां पर आ सकता है और जैसे

748
00:53:53,400 --> 00:53:57,920
मृत्यु होती है वैसे मर सकता है उसके बावजूद भी सर्व शक्तिमान है गलम

749
00:53:57,920 --> 00:54:02,040
मैंने नहीं बोला मर सकता है गलत इमेशन सर आपसे बात हो रही है बीच मत ला

750
00:54:02,040 --> 00:54:07,160
सर गलत इमे जा रुक जा रुक जा रुक

751
00:54:07,160 --> 00:54:11,720
जा मैं यह कह रहा हूं कि

752
00:54:11,720 --> 00:54:16,000
सतलोक में कैसा दिखता है यह आपको बताया गया है तत्वदर्शी के

753
00:54:16,000 --> 00:54:20,120
द्वारा कि नहीं बिल्कुल बताया गया है कैसा

754
00:54:20,120 --> 00:54:24,240
दिखता है जो हम मैं सर कितनी बार बोलू

755
00:54:24,240 --> 00:54:28,320
जो हम यहां देख रहे हैं ठीक है जो हम यहां देख रहे यानी यही उलिया है ना

756
00:54:28,320 --> 00:54:32,440
सतलोक वाला जो हम यहां देख रहे हैं ठीक है हा यही उलिया

757
00:54:32,440 --> 00:54:36,560
है ना सतलोक में भी ये हमको वहां मिलेगी ठीक है जब

758
00:54:36,560 --> 00:54:40,600
यहां से जलेंगे हम शरीर छोड़ के ठीक है जब वहा पहुंचेंगे ये

759
00:54:40,600 --> 00:54:44,800
चीज हमको ये हमको बिल्कुल एज इट इज मिलेंगे क्योंकि अगर हम यहां जो चीज

760
00:54:44,800 --> 00:54:48,920
देख रहे हैं हमको बताया गया कि आपको उस आदमी से ये फोटो ऐसे मिलना है

761
00:54:48,920 --> 00:54:53,080
जब हम उसका चेहरा पहचान के चल रहे हैं जभी तो हम उससे मिल पाएंगे जब हम चेहरा नहीं पहचान

762
00:54:53,080 --> 00:54:57,320
पाएंगे तो आगे कैसे मिल पाएंगे अभी ठीक है अभी थोड़ी देर बाद

763
00:54:57,320 --> 00:55:00,160
थोड़ी देर पहले आप ये कह रहे थे कि वो जो सतलोक वाला फोटो है

764
00:55:00,160 --> 00:55:04,400
वो हमने देखा ही नहीं है वो हमें क्या पता कैसा होगा हमने तो मृत्युलोक वाला

765
00:55:04,400 --> 00:55:08,640
देखा हैन तो मैंने ये भी तो बोला था कि जो हमें यहां दिखाया जा रहा है ये चेहरा

766
00:55:08,640 --> 00:55:12,800
हमें वहां मिलेगा ये भी तो बोला था मैंने जब आपकी बात फसने लगती है तो आप अपनी

767
00:55:12,800 --> 00:55:16,880
बात को काट भी देते हैं क्योंकि नहीं सर मैंने मैंने तो ये भी बोला था

768
00:55:16,880 --> 00:55:21,120
ना जो हम देख नहीं सर चार तरह की बात कर रहे हैं आप पहले

769
00:55:21,120 --> 00:55:25,640
कह रहे हैं कि हमने सतलोक का देखा ही नहीं है ये सतलोक का फोटो है क्या

770
00:55:25,640 --> 00:55:29,720
मैं अब मैं अभ भी कह रहा हूं कि सतलोक मैंने देखा ही नहीं मैं गया नहीं सतलोक तो सतलोक तो

771
00:55:29,720 --> 00:55:33,960
मैं आप कैसे बता लेन दोरा त आपसे पूछ रहा हूं सतलोक

772
00:55:33,960 --> 00:55:38,120
में वो कैसे दिखते हैं यह आपको पता है कि नहीं वह बताओ हम

773
00:55:38,120 --> 00:55:42,280
सर मैंने सतलोक में नहीं गया नहीं देखा कितनी बार बोलू कैसे आपको

774
00:55:42,280 --> 00:55:46,400
बताऊ मैं यानी कि आपको नहीं पता ना वो कैसे दिखते हैं सतलोक में

775
00:55:46,400 --> 00:55:50,400
इतना पता है मुझको जो यहां दिखाया गया इस रूप में जरूर मिलेंगे इतना पता है यानी

776
00:55:50,400 --> 00:55:54,880
कि आपको पता है ना वो कैसे दिखते हैं सतलोक में मैंने सर क्लियर कर दी

777
00:55:54,880 --> 00:55:59,000
आगे मत बढ़ाना ये बात ने बोल दिया ऐसे मिलेंगे तो मिलेंगे ऐ आपको एक

778
00:55:59,000 --> 00:56:03,040
चीज क्लियर करनी है वो सतलोक में कैसे दिखते हैं ये आपको

779
00:56:03,040 --> 00:56:07,160
पता है या वो सक में कैसे दिखते हैं ये आपको नहीं पता है बताइए

780
00:56:07,160 --> 00:56:11,360
अच्छा सर मुझे बता सर मुझे बता आपके हिसाब से क्लियर करूं

781
00:56:11,360 --> 00:56:15,160
अभी भाई साहब देखिए विषयात मत करिए आप ये बताइए

782
00:56:15,160 --> 00:56:19,240
सतलोक में वो कैसे दिखते हैं मेरे

783
00:56:19,240 --> 00:56:23,280
मम्मी पापा कैसे दिखते हैं सुनो सुनो सर सुनो सतलोक में देखो

784
00:56:23,280 --> 00:56:27,280
भाई देखो विषय को चेंज मत करो सुनो सर

785
00:56:27,280 --> 00:56:31,320
को चेंज मत करो वो कैसे दिखते हैं ये तत्वदर्शी

786
00:56:31,320 --> 00:56:35,440
ने आपको बताया है कि नहीं बताया है बताया तो है जो फोटो यहां

787
00:56:35,440 --> 00:56:39,560
देख रहे उसी रूपले एक्सेप्ट करो ना हा बताया है फिर कह र हो कि मैं गया नहीं

788
00:56:39,560 --> 00:56:43,960
तो मैं कैसे कह दू अरे सर फिर आप सतलोक की बात क्यों कर रहे हो

789
00:56:43,960 --> 00:56:48,600
क्यों ना करें सत बि करोगे

790
00:56:48,600 --> 00:56:54,320
आपने य हमने फोटो यहां का देखा आपने फोटो यहां का देखा

791
00:56:54,320 --> 00:56:59,360
आपको बस इतनी सी बात है

792
00:56:59,360 --> 00:57:03,440
मैं आपसे एक सरल भाषा में एक क्वेश्चन कर रहा हूं पुष्पेंद्र जी ध्यान

793
00:57:03,440 --> 00:57:07,720
से सुनिए कर सतलोक में कबीर कैसे दिखते

794
00:57:07,720 --> 00:57:12,320
हैं क्या यह आपको पता है या बताया गया तत्वदर्शी के द्वारा या

795
00:57:12,320 --> 00:57:17,320
नहीं अच्छा सर मेरे आपने मेरे मम्मी पापा को पहचानते हो

796
00:57:17,320 --> 00:57:21,640
फिर भाई मुझे सीधा-सीधा जवाब दो सतलोक में

797
00:57:21,640 --> 00:57:25,920
कबीर जी कैसे दिखते हैं यह आपको बताया गया है कि नहीं पुष्पेंद्र

798
00:57:25,920 --> 00:57:29,920
जी सर कितनी बार पूछोगे जो हम फोटो यहां देख रहे हैं ठीक

799
00:57:29,920 --> 00:57:34,040
है गुरुजी ने हमें जो बताया जो हम फोटो यहां देख रहे एज इट इज इस रूप

800
00:57:34,040 --> 00:57:38,280
में व मिलेंगे ठीक है आगे हमारे साथ क्या होगा कहां

801
00:57:38,280 --> 00:57:42,520
रखेंगे क्या है सारी चीजें हमको क्या मिलेगा क्या पता है ना कि सतलोक

802
00:57:42,520 --> 00:57:46,640
में कबीर कैसे दिखते हैं यह आपको बताया गया ना

803
00:57:46,640 --> 00:57:50,880
हमें इसी रूप में मिलेंगे कितनी बार बोलू इसी रूप में जि रूप में

804
00:57:50,880 --> 00:57:55,040
जब इसी रूप में मिलेंगे तो ये एक्सेप्ट करो ना कि हां मुझे मालूम है वहां पर ईश्वर

805
00:57:55,040 --> 00:57:59,080
कैसा दिखेगा हां मुझे मालूम है इस रूप में दिखाया

806
00:57:59,080 --> 00:58:03,240
इसी रूप में मिलेगा और बताओ तो यही

807
00:58:03,240 --> 00:58:07,320
तो शुरू में एक्सेप्ट करना था ठीक है इसका मतलब कबीर जी

808
00:58:07,320 --> 00:58:09,440
सतलोक में ऐसे ही दिखते हैं जैसे यहां दिख

809
00:58:09,440 --> 00:58:13,200
रहे हैं तो भैया फोटो दोबारा दिखाओ

810
00:58:13,200 --> 00:58:19,200
इनको फोटो दोबारा दिखा

811
00:58:20,000 --> 00:58:24,040
दीजिए जो लोग साथ में जुड़े हुए हैं उनको मैं

812
00:58:24,040 --> 00:58:28,160
फिर याद दिला रहा हूं हमारे चैनल पर

813
00:58:28,160 --> 00:58:32,200
आघात हो रहा है उसे रुकवाने का इस धर्म रक्षा अभियान को

814
00:58:32,200 --> 00:58:36,200
रुकवाने का प्रयास किया जा रहा है आप

815
00:58:36,200 --> 00:58:40,240
प्राथमिकता से कम से कम लाइक अवश्य करें जिससे टब को पता

816
00:58:40,240 --> 00:58:45,000
चले कि इस चैनल को सपोर्ट भी करते हैं लोग

817
00:58:45,000 --> 00:58:49,080
सिर्फ नेगेटिव न्यूज ना जाए यब के पास और

818
00:58:49,080 --> 00:58:53,160
जितना आप जो भी समर्थक है कमेंट्स में भी ये बात कहे

819
00:58:53,160 --> 00:58:57,240
ठीक है हां भाई यही सतलोक में बैठे

820
00:58:57,240 --> 00:59:00,400
हुए कबीर ऐसे ही दिखेंगे

821
00:59:00,400 --> 00:59:05,360
ना सर बारबार क्वेश्चन क यह मतलब क्या क्या

822
00:59:05,360 --> 00:59:11,360
कोया आपने अपनी

823
00:59:12,440 --> 00:59:16,760
बा बात करनी है क्लियर करना है कि आप जाना चाहते बताइए

824
00:59:16,760 --> 00:59:21,000
नहीं आप सुनो आपका ये जो नियम है ना

825
00:59:21,000 --> 00:59:25,080
सतलोक में दाढ़ी वाले कबीर दिखेंगे या नहीं नहीं सुनो सुनो सुन

826
00:59:25,080 --> 00:59:30,680
सुनो सररी आप हाथ जोड़ के एक प्रार्थना

827
00:59:30,680 --> 00:59:35,200
है इतना भाई इतना टैलेंट नहीं

828
00:59:35,200 --> 00:59:39,440
है मेरी बात सुनिए भैया वो आपसे किसी प्रकार का तर्क

829
00:59:39,440 --> 00:59:43,560
करने नहीं आया है वो बहुत दिनों से वीडियो देख रहा है और बस वो दे रहा है कि बस तर्क को तर्क

830
00:59:43,560 --> 00:59:47,640
में उलझाया जाए बस उसके पास हिमत नहीं है कि एक भी बात प टिक जाए

831
00:59:47,640 --> 00:59:51,760
एक बात प टिकने में उसको इस बात का डर है अपनी बात कोही झुला दे रहा है वो

832
00:59:51,760 --> 00:59:56,600
अपनी हर बात को खुद ही झुला दे रहा है वो रामपाल कहीं कहीं प वो

833
00:59:56,600 --> 01:00:00,720
वो रामपाल का आपके किसी भी बात को जो

834
01:00:00,720 --> 01:00:04,800
आप बोले जो आपके मुख से निकलेगा उसको पकड़ले में उसको भय लग रहा है फस जाऊगा फस

835
01:00:04,800 --> 01:00:08,800
जाऊंगा वो सिर्फ तर्क में उलझाने आया है बातों को उसके पास

836
01:00:08,800 --> 01:00:12,880
हिम्मत नहीं कि अपने पक्ष को पूर्व पक्ष में रख सके या उत्तर पक्ष में ख स य

837
01:00:12,880 --> 01:00:16,520
बात

838
01:00:16,520 --> 01:00:20,320
सम आप जा

839
01:00:20,320 --> 01:00:24,400
सकते हटाओ भैया इनको पुष्पेंद्र जी को मुझे

840
01:00:24,400 --> 01:00:28,560
आज सुबह आपका कल वाला वीडियो देख रात को मैं सो रहा था एक बात चिंतन

841
01:00:28,560 --> 01:00:32,760
में आया कि एक बच्चा सुनिए एक बच्चा

842
01:00:32,760 --> 01:00:36,920
जो है भया एक बच्चे को बाहर के उस दोस्तों ने पूछा

843
01:00:36,920 --> 01:00:40,920
कि भाई तुम्हारे तुमको पैदा करने वाला कौन है तो बोला कि मुझे तो

844
01:00:40,920 --> 01:00:44,960
मालूम नहीं अपनी मम्मी से पूछ के आता हूं तो अपनी मम्मी के पास वो बच्चा गया और

845
01:00:44,960 --> 01:00:49,280
उसने पूछा कि भाई मुझे उत्पन्न करने वाला कौन है तो मा ने कहा कि तुम्ह उत्पन्न

846
01:00:49,280 --> 01:00:53,600
करने वाले रमेश है बच्चा बो ठीक है मैं समझ गया मे उत्पन्न

847
01:00:53,600 --> 01:00:57,800
करने वाले मुझे रमेश है तो दिन उसके पिताजी बहुत

848
01:00:57,800 --> 01:01:01,880
साल से बाहर थे दिन उसके पिताजी उसके घर पर आए इस बच्चे ने पूछा कि मम्मी

849
01:01:01,880 --> 01:01:06,040
य पिता य व्यक्ति कौन है तो बोले य तुम्हारे पिताजी अच्छा और

850
01:01:06,040 --> 01:01:10,240
मुझे उत्पन्न करने वाले कौन है तो बो बताया था र यही

851
01:01:10,240 --> 01:01:14,480
है रमेश बोला की

852
01:01:14,480 --> 01:01:18,880
आपने मुझे बो मुझे उत्पन्न करने वाले रमेश है लेकिन ये तो पिताजी है

853
01:01:18,880 --> 01:01:22,880
तुम्हारे पिताजी ही रमेश है पिताजी रमेश कैसे हो जाएंगे रमेश

854
01:01:22,880 --> 01:01:27,520
कोई और है आपने कहा था तो मैं लिए यह

855
01:01:27,520 --> 01:01:32,120
वाली बात प्रमाण नहीं है मुझे उत्पन्न करने वाले मेरे पिताजी है पिताजी नहीं रमेश है

856
01:01:32,120 --> 01:01:36,360
वही बात है व गीता में गीता श्री कृष्ण ही काल है श्री कृष्ण

857
01:01:36,360 --> 01:01:40,520
कैसे काल हो जाएंगे व काल कोई और है लेकि य लेकिन ये गीता

858
01:01:40,520 --> 01:01:44,560
ही तो कह रही है इस बात को श्री कृष्ण अकाल है बात नहीं

859
01:01:44,560 --> 01:01:48,560
मान वही बात ज भोले मूर्ख बालक को लग रहा है

860
01:01:48,560 --> 01:01:53,800
कि अपनी मां की एक बात को मानता है बात को काटता है सेम वही अवस्था इन लोगों

861
01:01:53,800 --> 01:01:57,800
की वही अवस्था अनुचित कथा

862
01:01:57,800 --> 01:02:02,280
नाम से आए

863
01:02:02,280 --> 01:02:06,360
हैं जी जय श्रीराम आपका परिचय

864
01:02:06,360 --> 01:02:12,120
हम धनबाद के रहने वाले अरुण कुमार दास मेरा नाम है

865
01:02:12,120 --> 01:02:17,280
अच्छा बताएं आपका आध्यात्मिक परिचय बताएं

866
01:02:17,280 --> 01:02:21,720
बस अरुण कुमार दास आप रामपाल

867
01:02:21,720 --> 01:02:26,280
दास जी के फॉलोअर हैं शिष्य हैं क्या है हम

868
01:02:26,280 --> 01:02:30,880
किसी के ही शिष्य नहीं अच्छा आपका आध्यात्मिक ज्ञान

869
01:02:30,880 --> 01:02:35,240
कहां का है कहां से आप अपने धर्म को जानते हैं क्या

870
01:02:35,240 --> 01:02:39,640
है क्या नहीं है बस मेरा दादाजी मेरा पिताजी और

871
01:02:39,640 --> 01:02:44,000
मेरा मन से जो होते हैं उसी के बारे में कहता दूसरे

872
01:02:44,000 --> 01:02:47,760
के बारे में नहीं लेता इसलिए

873
01:02:47,760 --> 01:02:52,600
को विद्या लेना यह बहुत भयंकर है इसलिए

874
01:02:52,600 --> 01:02:56,720
दूसरे आए है य जो आप चर्चा कर रहे आप अच्छा

875
01:02:56,720 --> 01:03:00,920
चर्चा कर रहे हैं इसलिए मैं जुड़ने का चाहता हूं

876
01:03:00,920 --> 01:03:05,320
ताकि ये आगे बढ़े जी जी बहुत बहुत बहुत धन्यवाद

877
01:03:05,320 --> 01:03:10,000
आपका आभार हमें समझ में नहीं आया ना एक तो आपने दास नाम बताया

878
01:03:10,000 --> 01:03:14,000
और ऊपर से आपने ये वो दास नाम होता है रामपाल के

879
01:03:14,000 --> 01:03:18,040
फॉलोअर ना भी हो तब भी दास नाम होता है मगर ऊपर से आपने जो

880
01:03:18,040 --> 01:03:22,160
आपका जो नाम लिखा हुआ है ना वो लिखा हुआ है अनुचित कथा

881
01:03:22,160 --> 01:03:26,600
अनुचित कथा तो पहले से एक माइंड मेकअप हो गया कि भाई एक क्या अनुचित

882
01:03:26,600 --> 01:03:30,720
कथा वो फिर दास तो ऐसा लगा कि आप रामपाल दास जी के फॉलोअर

883
01:03:30,720 --> 01:03:34,840
है है ना तो कोई बात नहीं

884
01:03:34,840 --> 01:03:39,920
जैसे कि थ इनको अब हटा दो पुष्पेंद्र जी को ये बातें बहुत घुमा

885
01:03:39,920 --> 01:03:44,760
चुके यहां जो बहुत से चर्चा हम सुने हैं आपका बहुत पहले से

886
01:03:44,760 --> 01:03:49,040
पहले तो ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में कबीर दास बोलते रहते

887
01:03:49,040 --> 01:03:53,160
हैं इसी के बारे में मैं थोड़ा देर क्लियर कर दूं ब्रह्मा

888
01:03:53,160 --> 01:03:57,560
विष्णु महेश आखिर है कौन

889
01:03:57,560 --> 01:04:02,240
ब्रह्मा मतलब ब्रह्मा को जो धारण करे वो ब्रह्मा है

890
01:04:02,240 --> 01:04:03,000
और

891
01:04:03,000 --> 01:04:07,160
जो पति पालन करे वह विष्णु है और जो संघर करे

892
01:04:07,160 --> 01:04:11,280
वो महेश है सीधी सी बात है इसमें कोई

893
01:04:11,280 --> 01:04:15,400
दोराई नहीं है म ईश्वर जब सृष्टि करते

894
01:04:15,400 --> 01:04:20,200
हैं तो ब्रह्मा कहलाते हैं पालन करते हैं तो विष्णु कहलाते हैं

895
01:04:20,200 --> 01:04:25,120
और संहार करते हैं तो शिव कहलाते हैं अच्छा एक बात पूरा करने दीजिए

896
01:04:25,120 --> 01:04:29,640
जैसे मेरा पिताजी और मां के संस्पर्श में

897
01:04:29,640 --> 01:04:34,240
जब हम आए वो भी सोच लीजिए बिना नेवता का हमने बुलाया

898
01:04:34,240 --> 01:04:38,480
इसमें कोई नेवता नहीं दिया था कि बेटा हम तुमको बुला रहे हैं

899
01:04:38,480 --> 01:04:42,600
लेकिन हम आ गए तो उसने जो

900
01:04:42,600 --> 01:04:46,600
हमको बुलाया मतलब वोह ब्रह्मा है मने सृष्ट करता

901
01:04:46,600 --> 01:04:50,680
है इनका काम धरती पर जब मेरे मा

902
01:04:50,680 --> 01:04:54,760
लाया तो उनका काम समाप्त हो गया अब आ गया विष्णु

903
01:04:54,760 --> 01:04:59,280
का काल विष्णु के मतलब जो हमको प्रतिपाल की कोई जरूरी नहीं पिताजी

904
01:04:59,280 --> 01:05:03,760
हो कोई भी हो सकता है जो हमको भोजन

905
01:05:03,760 --> 01:05:07,880
भाई साब अच्छा लगा आपने समर्थन प्रकट किया हम लोग इस

906
01:05:07,880 --> 01:05:11,920
टॉपिक में किसी और दिन चर्चा रखेंगे हम आपको लेंगे अी

907
01:05:11,920 --> 01:05:17,920
कौन सा चर्चा कर रहे हैं यह बता

908
01:05:23,120 --> 01:05:27,200
द चर्चा कर रहे कि रामपाल दास जी के द्वारा

909
01:05:27,200 --> 01:05:31,360
जो भ्रामक शिक्षाएं फैलाई जा रही हैं उसमें क्या तथ्य है क्या

910
01:05:31,360 --> 01:05:35,960
प्रमाण है क्या वो है इस पर हम चर्चा कर रहे हैं आपको हम फिर किसी दिन जोड़ेंगे

911
01:05:35,960 --> 01:05:40,200
आप उस आइए एक मिनट एक मिनट

912
01:05:40,200 --> 01:05:44,240
य सबसे पहले रामपाल जी बहुत सा चर्चा किया

913
01:05:44,240 --> 01:05:48,280
है जिसमें गुरु गोविंद दो खड़े और

914
01:05:48,280 --> 01:05:53,560
जब मैं वहां जाता हूं तो वहां सिर्फ गुरु को पाता हूं गोविंद कहां चला

915
01:05:53,560 --> 01:05:57,840
गया इस प्रश्न का जवाब हमको लोग से मिला

916
01:05:57,840 --> 01:06:01,840
नहीं तो जब वहा गोविंद है ही नहीं तो

917
01:06:01,840 --> 01:06:06,240
मैं किसको पैर लाग यह तो मेरा चॉइस नहीं हुआ

918
01:06:06,240 --> 01:06:10,640
यह तो जबरदस्ती है ची भी आपका पट भी आपका

919
01:06:10,640 --> 01:06:14,920
यह रामपाल जी का जो तथ है उसके आधार पर हम बात किया

920
01:06:14,920 --> 01:06:19,160
यह बिल्कुल पसंद नहीं है सतलो सत के मतलब जहां

921
01:06:19,160 --> 01:06:23,280
पर सत है वही लोक है लोक के मतलब जहां पर ज्यादा आदमी

922
01:06:23,280 --> 01:06:27,280
हो जाए ब्रह्म लोक पिताजी के अंदर में हर एक पुरुष

923
01:06:27,280 --> 01:06:31,600
के अंदर ब्रह्म रहते इसलिए ब्रह्म लोक है विष्णु

924
01:06:31,600 --> 01:06:35,800
लोक जहां पर हम प्रति पालन होते सबको वो हो गया

925
01:06:35,800 --> 01:06:38,400
विष्णु लो और संघर करता

926
01:06:38,400 --> 01:06:42,480
मेरे साथ ही रहते हैं और वो परेशान रहते हैं कि

927
01:06:42,480 --> 01:06:46,600
हम क्या किए और उसी का परिणाम के स्वरूप वो हम ज

928
01:06:46,600 --> 01:06:51,000
में ले भाई साहब मैं आपको थोड़ा सा कहूंगा ठीक है

929
01:06:51,000 --> 01:06:55,160
अच्छा लगा आप जो है हमारा नंबर नोट कर लीजिए व्यक्तिगत रूप से हमसे जुड़िए धरातल

930
01:06:55,160 --> 01:06:59,200
प 7483 186 ठीक है

931
01:06:59,200 --> 01:07:03,520
अब मैं

932
01:07:03,520 --> 01:07:07,640
मिनट लिखने दीजिए भैया नहीं वो आप

933
01:07:07,640 --> 01:07:12,960
आप आप जा कर के नोट कर लीजिएगा स्क्रीन पर है लिखा हुआ

934
01:07:12,960 --> 01:07:16,280
है 7408

935
01:07:16,280 --> 01:07:22,280
30169 थोड़ा आस्ते बोलिए 74

936
01:07:23,880 --> 01:07:28,120
0830 69 तो कितना तो कम हो गया

937
01:07:28,120 --> 01:07:30,720
740

938
01:07:30,720 --> 01:07:33,160
8369

939
01:07:33,160 --> 01:07:37,240
830 869 थैंक यू

940
01:07:37,240 --> 01:07:43,080
भगवान आपको धन्यवाद

941
01:07:43,080 --> 01:07:47,240
धन्यवाद अब मैं कहूंगा कि आप जो है वह उनको

942
01:07:47,240 --> 01:07:51,400
भेजिए जरा जो आज हम बात कर ले अभी कोई है नहीं क्योंकि रामपाल

943
01:07:51,400 --> 01:07:55,600
दास जी की ओर से तो आप जरा उनको कनेक्ट

944
01:07:55,600 --> 01:07:59,720
कर दीजिए जो हमारे संस्कृत

945
01:07:59,720 --> 01:08:05,720
ज्ञ गुरु भाई है एक उन्मे शर्मा

946
01:08:23,320 --> 01:08:27,400
जी हां किरण दीक्षित जी बताइए

947
01:08:27,400 --> 01:08:32,040
जी जय श्री राम गुरुजी जय श्री राम

948
01:08:32,040 --> 01:08:36,080
जी गुरुजी मैं जो है मतलब यह जो कबीर पंथी है उनका जो

949
01:08:36,080 --> 01:08:40,120
ईश्वर है मतलब कबीर देव और इसकन का जो भगवान है

950
01:08:40,120 --> 01:08:44,600
श्री कृष्ण इकन के द्वारा जो प्रतिवाद है तो उन दोनों में एक सिमिलरिटी

951
01:08:44,600 --> 01:08:48,640
है की मतलब मैंने नोटिस किया है आपसे मतलब शेयर करना चाहता

952
01:08:48,640 --> 01:08:52,920
हूं यह बात तो दोनों का ही विषय मैंने सुना है कि कबीर साहब

953
01:08:52,920 --> 01:08:57,200
का जो दे है वो नूर तत्व से और न भी कहते

954
01:08:57,200 --> 01:09:01,480
कि भगवान श्री कृष्ण साकार तो है लेकिन उनका शरीर जो है वो स्पिरिचुअल

955
01:09:01,480 --> 01:09:05,480
है तो कुछ दिन पहले जब मैंने जो आया था

956
01:09:05,480 --> 01:09:09,680
ना भ राधा कृष्ण दास जी वो एक दूसरे चैनल पर लाइव कर रहे थे वहा

957
01:09:09,680 --> 01:09:13,920
पर किसी ने उनसे पूछा कि आत्मा क्या है सगुण साकार है निर्गुण

958
01:09:13,920 --> 01:09:18,480
निराकार उन्होंने साफ क दि कि आत्मा सगुण साकार है और आत्मा का भी एक आकार है

959
01:09:18,480 --> 01:09:22,640
और इसीलिए ही वो लोग कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण का शरीर जो है वो आत्मा

960
01:09:22,640 --> 01:09:26,360
से बना हुआ है

961
01:09:26,360 --> 01:09:30,520
तो क्या ये सच है मतलब भगवान श्री कृष्ण का शरीर आत्मा

962
01:09:30,520 --> 01:09:34,520
से बना हुआ है वो

963
01:09:34,520 --> 01:09:39,040
देखिए सच्चाई से भागने के लिए कितना भी धर उधर कर लीजिए

964
01:09:39,040 --> 01:09:43,080
भगवान के तीन रूप है उसमें भी मोटे मोटे पकड़ लीजिए तो एक

965
01:09:43,080 --> 01:09:47,160
प्राप्त है और एक व्यवहारिक है व्यवहारिक

966
01:09:47,160 --> 01:09:52,120
के साथ व्यवहार करके प्राप्त को प्राप्त किया जाता सिंपल

967
01:09:52,120 --> 01:09:56,320
समझ गए हा हा और गु

968
01:09:56,320 --> 01:10:00,320
तो उन्मे शर्मा जी आ गए हैं अब हम थोड़ा

969
01:10:00,320 --> 01:10:04,400
सा इनके साथ बातचीत करेंगे उन्मे शर्मा जी जय जगन्नाथ जय श्री राम

970
01:10:04,400 --> 01:10:08,480
जय जगन्नाथ भैया जय श्री राम किरण जी को

971
01:10:08,480 --> 01:10:14,480
म्यूट कर दीजिए किरण जी [संगीत] को

972
01:10:14,760 --> 01:10:18,800
और उमेश शर्मा जी हम लोग आज

973
01:10:18,800 --> 01:10:22,880
बात करने पड़े हैं विस्तृत रूप से व्रज शब्द पर

974
01:10:22,880 --> 01:10:26,880
जो मामे कम शरणम व्रज शब्द आया है उस पर हम लोग

975
01:10:26,880 --> 01:10:30,880
बात करने वाले हैं आज और क्योंकि आप

976
01:10:30,880 --> 01:10:35,160
संस्कृत ज्ञ हैं संस्कृत के विद्वान हैं तो इसलिए आज हमने आपको आमंत्रित

977
01:10:35,160 --> 01:10:39,240
भी किया है तो मैं चाहूंगा पहले थोड़ा सा आप दर्शकों को

978
01:10:39,240 --> 01:10:43,240
संस्कृत में अपना परिचय देते हुए यह विश्वास दिला

979
01:10:43,240 --> 01:10:47,240
दे कि आप संस्कृत के ज्ञाता हैं आपके संस्कृत का भगवत कृपा से आपके

980
01:10:47,240 --> 01:10:52,040
पास है ज्ञान दीजिए जी अवश्य

981
01:10:52,040 --> 01:10:57,800
मेरा आवाज आ रहा है जी आ रहा है

982
01:10:57,800 --> 01:11:01,800
नमो नमः सर्वे अ शल्य

983
01:11:01,800 --> 01:11:06,520
गोत्रो उत्पन्न उन्मे शर्मा महाराष्ट्र देशीय

984
01:11:06,520 --> 01:11:10,760
पुण्य पतन नगरे बसामी तथा पुण्य

985
01:11:10,760 --> 01:11:15,000
पत्तन नगरे एकम विद्यापीठम वर्तते तिलक

986
01:11:15,000 --> 01:11:19,280
महाराष्ट्र विद्यापीठ नामना तत्र संस्कृत विषय

987
01:11:19,280 --> 01:11:23,760
प्रोफेसर रूपेण कार्यं करोमी इदम

988
01:11:23,760 --> 01:11:28,480
आधुनिक रूपेण अयम परिचय जातः महत्त्वपूर्ण

989
01:11:28,480 --> 01:11:32,560
तत्र एकम अस्ति य पूज्य पादा

990
01:11:32,560 --> 01:11:36,600
नाम पुरी पीठाधी स्वरा नाम निश्चलानंद सरस्वती महाभागा

991
01:11:36,600 --> 01:11:41,480
नाम अहम अल्प अल्पज्ञ शिष्य दीक्षा

992
01:11:41,480 --> 01:11:46,960
प्राप्त अयम मम परिचय तेशाम अनुय

993
01:11:46,960 --> 01:11:51,000
इ बहुत सुंदर आपने परिचय दिया अब

994
01:11:51,000 --> 01:11:55,000
दर्शकों को इसका हिंदी अनुवाद भी बता दीजिए जिससे कि बाद में

995
01:11:55,000 --> 01:11:59,480
वो अपना वेरीफाई वगैरह करते रहे उनको कोई डाउट हो तो जी

996
01:11:59,480 --> 01:12:03,720
मैंने जो अभी बोला देववाणी संस्कृत में इसका सरल भाषा में अनुवाद

997
01:12:03,720 --> 01:12:07,720
ऐसा होगा मैं चाल गोत्र में उत्पन्न ब्राह्मण

998
01:12:07,720 --> 01:12:12,120
हूं ब्राह्मण वर्ण में उत्पन्न उन्मे वैसे तो मेरा

999
01:12:12,120 --> 01:12:12,800
उपनाम

1000
01:12:12,800 --> 01:12:17,320
जोशी है परंतु जैसा शर्माता ब्राह्मणा

1001
01:12:17,320 --> 01:12:22,160
वरमाता क्षत्रिय ऐसा लगाया जाता है शास्त्रों में तो उसके अनुसार

1002
01:12:22,160 --> 01:12:26,480
चकि मैं संस्कृत में बोल रहा था तो उमेश शर्मा यह मेरा परिचय

1003
01:12:26,480 --> 01:12:30,520
हुआ लेकिन वैसे तो उपा नाम हो गया जोशी महाराष्ट्र राज्य का

1004
01:12:30,520 --> 01:12:34,560
निवासी हूं उसमें जो पुणे शहर है पुणे नगर

1005
01:12:34,560 --> 01:12:38,600
उधर से मैं बिलोंग करता हूं और पुणे में टिड़क महाराष्ट्र विद्यापीठ

1006
01:12:38,600 --> 01:12:42,920
नाम से एक संस्कृत की यूनिवर्सिटी है उधर में संस्कृत

1007
01:12:42,920 --> 01:12:47,240
प्रोफेसर के रूप में काम करता हूं और सबसे महत्त्वपूर्ण बात पूज्य

1008
01:12:47,240 --> 01:12:51,680
पूरी पीठाधीश्वर महा भागी शा प्राप्त हो

1009
01:12:51,680 --> 01:12:56,080
यह सब परिचय में मैंने कहा अभी भाई आप लोग पता कर लीजिएगा

1010
01:12:56,080 --> 01:13:00,080
संस्कृत पढ़ाते हैं ये यूनिवर्सिटी में

1011
01:13:00,080 --> 01:13:04,840
ठीक है ना अब हम लोग इनसे बात करेंगे

1012
01:13:04,840 --> 01:13:08,880
एक शब्द आया है

1013
01:13:08,880 --> 01:13:13,240
भगवत गीता 18 66 बोल

1014
01:13:13,240 --> 01:13:19,240
लेता हूं

1015
01:13:23,530 --> 01:13:29,530
[संगीत]

1016
01:13:49,040 --> 01:13:53,240
हिंदी संस्कृत की डिक्शनरी आपको चौखंबा से मिलेगी य शिवराम

1017
01:13:53,240 --> 01:13:57,160
आपटे जी की

1018
01:13:57,160 --> 01:14:03,160
यह देखिए आप लोगों को दिख रहा होगा यह श्लोक

1019
01:14:05,920 --> 01:14:10,280
है संपूर्ण धर्मों को अर्थात

1020
01:14:10,280 --> 01:14:14,400
इसकी संस्कृत र

1021
01:14:14,400 --> 01:14:18,400
शाय

1022
01:14:18,400 --> 01:14:21,960
य

1023
01:14:21,960 --> 01:14:27,960
येय संस्कृत दिख रही है ना सर्व

1024
01:14:36,520 --> 01:14:40,800
धर्मानंद आया है उसका उपयोग जितने

1025
01:14:40,800 --> 01:14:44,800
भी पारंपरिक आचार्य हैं उन्होंने किया है कि भाई वहां भगवान कह रहे

1026
01:14:44,800 --> 01:14:49,440
हैं कि सभी धर्मों को त्याग के मेरी शरण में

1027
01:14:49,440 --> 01:14:53,600
आ जाओ ठीक है यह भगवत जो गीता प्रेस गोरखपुर से

1028
01:14:53,600 --> 01:14:57,760
उसका भी है आज भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का भी है जितने भी परंपरा

1029
01:14:57,760 --> 01:15:02,000
प्राप्त आचार्य गण है उनका है मेरी शरण में आज अब यहां पर एक

1030
01:15:02,000 --> 01:15:06,720
ट्विस्ट करते हैं ये रामपाल दास

1031
01:15:06,720 --> 01:15:10,720
तो अब नहीं है यहां पर मगर उन्हो को फैला के गए हैं यहां पर भगवान कह रहे

1032
01:15:10,720 --> 01:15:15,000
कि मेरी शरण से जा अब इसमें

1033
01:15:15,000 --> 01:15:20,000
हमने यह डिक्शनरी जो शिवराम आपटे की वो भी दिखाते

1034
01:15:20,000 --> 01:15:26,000
हैं 963 पृष्ठ पर

1035
01:15:26,120 --> 01:15:31,040
शिवराम आप्टे जी की डिक्शनरी में

1036
01:15:31,040 --> 01:15:35,800
उन्होंने 963 है कोई और है 993

1037
01:15:35,800 --> 01:15:40,040
शायद 99393 93 हा 993

1038
01:15:40,040 --> 01:15:44,040
है यह शिवराम आप जी की डिक्शनरी का हाय स्क्रीन पर

1039
01:15:44,040 --> 01:15:48,040
आ गया जी तो इसमें प्राथमिकता से

1040
01:15:48,040 --> 01:15:52,320
इन्होंने ब्रज शब्द का अर्थ जाना लिखा है और

1041
01:15:52,320 --> 01:15:56,440
साथ ही साथ वहां पर चलना भी लिखा है प्राथमिकता से

1042
01:15:56,440 --> 01:16:00,520
तो हमने एक वीडियो बनाया इसमें और उसमें बताया

1043
01:16:00,520 --> 01:16:04,760
कि व्रज का अर्थ केवल जाना ही नहीं होता है व्रज

1044
01:16:04,760 --> 01:16:09,080
का अर्थ चलना भी होता है आना भी होता है आना में भी उसका पर्या अवसान है

1045
01:16:09,080 --> 01:16:13,520
अगर तो हमने वीडियो बना के डाल दिया हमने ये भी कहा कि कोई ऐसी डिक्शनरी

1046
01:16:13,520 --> 01:16:17,920
लाओ जिस डिक्शनरी में ब्रज का अर्थ केवल जाना

1047
01:16:17,920 --> 01:16:21,960
लिखा हो दूसरा कोई अर्थ ना लिखा हो आना ना लिखा हो या अदर

1048
01:16:21,960 --> 01:16:27,160
वाइज कोई भी ऐसा ना हो जो आपकी चीजों के अगेंस्ट जाता हो ठीक है

1049
01:16:27,160 --> 01:16:31,360
तो जब हमने ये बना दिया उसके बाद कोई व्यक्ति कहीं से

1050
01:16:31,360 --> 01:16:35,520
एक वो निकाल के लाया डिक्शनरी उसमें

1051
01:16:35,520 --> 01:16:39,600
हमने क्या कहा था कि हमने जब यह कहा

1052
01:16:39,600 --> 01:16:41,440
कि कोई ऐसी डिक्शनरी लाओ

1053
01:16:41,440 --> 01:16:45,520
जिसमें ब्रज का अर्थ केवल जाना लिखा हो और आना ना लिखा

1054
01:16:45,520 --> 01:16:49,800
हो आना ना लिखा हो से मतलब ऐसा कोई शब्द ना लिखा हो जो आपकी

1055
01:16:49,800 --> 01:16:54,120
चीजों को तोड़ दे तो एक व्यक्ति है उसने हमारे ऊपर वीडियो बनाया

1056
01:16:54,120 --> 01:16:58,640
उसने दिखा दी ई चतुर्वेदी जी हैं लखनऊ के ही है हजरतगंज के

1057
01:16:58,640 --> 01:17:03,000
और उसने उसमें दिखा दिया उनकी एक संस्कृत हिंदी शब्दकोश है वो अब नहीं रहे उनकी पीढ़ी

1058
01:17:03,000 --> 01:17:07,000
है आज की जो वर्तमान युवा पीढ़ी वो है उसने दिखा दिया

1059
01:17:07,000 --> 01:17:11,120
कि यह देखो इसमें जो है जाना लिखा है मगर आना नहीं लिखा है मगर

1060
01:17:11,120 --> 01:17:15,240
आना नहीं लिखा था मगर वहां चलना लिखा था आना नहीं लिखा

1061
01:17:15,240 --> 01:17:19,360
था मगर वहां चलना लिखा था अगर भगवान कहेंगे मेरी

1062
01:17:19,360 --> 01:17:23,440
शरण में चल इसका क्या मतलब हुआ जी

1063
01:17:23,440 --> 01:17:27,440
तू जो भी कार्य कर मेरी में चल तो उसका परवन भी आना में हो

1064
01:17:27,440 --> 01:17:32,280
गया है ना चलना चल

1065
01:17:32,280 --> 01:17:36,760
तो हमने जब यह वाला जो अपनी बात दूसरी बात उसको

1066
01:17:36,760 --> 01:17:41,200
यह बात सिद्ध करने के लिए वोह डिक्शनरी लेनी पड़ी जो डिक्शनरी उसके

1067
01:17:41,200 --> 01:17:45,320
गुरु ने यूज नहीं की थी उसके गुरु स्वयं य डिक्शनरी यूज करते हैं और जब

1068
01:17:45,320 --> 01:17:49,400
लोगों को इसका अर्थ बताते हैं ब्रज का तो इसके अर्थ को बताते समय

1069
01:17:49,400 --> 01:17:53,680
नीचे उपसर्ग के द्वारा या किसी ना किसी प्रकार से

1070
01:17:53,680 --> 01:17:56,480
डिक्शनरी को लिखने वा ले ने भी आना को स्वीकार किया

1071
01:17:56,480 --> 01:18:01,160
है उपसर्ग के बाद उपसर्ग के बाद ही

1072
01:18:01,160 --> 01:18:05,320
उन्होंने हां है ना तो

1073
01:18:05,320 --> 01:18:09,840
इसमें जो ग्रंथ का है इसने आना को स्वीकार किया उपसर्ग

1074
01:18:09,840 --> 01:18:15,200
के लगा के अना लगाए चलना स्वीकार किया और तो

1075
01:18:15,200 --> 01:18:19,840
और सहारा लेना मेरी शरण का सहारा ले

1076
01:18:19,840 --> 01:18:24,080
है ना और पहुंचना अब देखिए यहां पर एक शब्द दोबारा आया

1077
01:18:24,080 --> 01:18:28,200
जैसे हम उपसर्ग लेने के बाद ही उपसर्ग

1078
01:18:28,200 --> 01:18:32,600
लगने के बाद ही उन्होंने आना लिया है मगर उपसर्ग लगने के बाद उन्होंने पहुंचना

1079
01:18:32,600 --> 01:18:36,720
भी लिया है और पहुंचना ऊपर बिना उपसर्ग के भी है पहुंचना

1080
01:18:36,720 --> 01:18:41,320
जो शब्द है वो बिना उपसर्ग के ऊपर भी है बिना उपसर्ग के

1081
01:18:41,320 --> 01:18:45,480
तो कहने का मतलब है उपसर्ग के बाद भी ऐसा अर्थ आ रहा है जो उपसर्ग के बिना

1082
01:18:45,480 --> 01:18:49,840
भी था है ना जी तो

1083
01:18:49,840 --> 01:18:53,880
हमने जब यह जवाब दिया कि भैया आपने जो डिक्शनरी दिखाई है

1084
01:18:53,880 --> 01:18:58,000
सबसे पहली बात तो वो डिक्शनरी वो डिक्शनरी के विरुद्ध है जो

1085
01:18:58,000 --> 01:19:02,080
डिक्शनरी आपके लोग आपके जो गुरुदेव है वो बता

1086
01:19:02,080 --> 01:19:06,240
रहे हैं उससे आपको बाहर क्यों जाना पड़ रहा है इसका मतलब उसमें कोई खोट है

1087
01:19:06,240 --> 01:19:10,840
तो आपने दनदना के दूसरी डिक्शनरी बता दी हमने य सवाल किया आपको क्यों जाना पड़ा बाहर

1088
01:19:10,840 --> 01:19:11,480
दूसरी बात आप

1089
01:19:11,480 --> 01:19:15,520
जो दिखा भी रहे हो उसमें केवल जाना नहीं लिखा है उसमें चलना भी लिखा

1090
01:19:15,520 --> 01:19:19,680
है जिसका परवन आना में किया जा सकता है

1091
01:19:19,680 --> 01:19:23,760
ठीक है तो अब उनका यह कहना हो गया कि तुमने तो यह कहा था ना

1092
01:19:23,760 --> 01:19:29,440
एक भी ऐसी डिक्शनरी लाओ तो भैया सबसे पहली बात तो मैं यहां पर आप लोगों को यह बताना

1093
01:19:29,440 --> 01:19:33,440
चाहूंगा कि अगर मैंने यह कह दिया कि ऐसी डिक्शनरी

1094
01:19:33,440 --> 01:19:37,720
लाओ तो इसका मतलब यह है क्या कि कल तुरंत की तुरंत मैं कोई

1095
01:19:37,720 --> 01:19:41,760
डिक्शनरी लिख कर के किताब छाप दूंगा उसको भी आप प्रमाण के रूप में स्वीकार कर

1096
01:19:41,760 --> 01:19:46,120
लोगे उसकी त तक जाना पड़ेगा ना और दूसरी

1097
01:19:46,120 --> 01:19:50,440
बात यह है कि आप जो लेकर भी आए हैं उसमें चलना भी लिखा हुआ है

1098
01:19:50,440 --> 01:19:55,240
और चलने का परवन आने में है मामे कम शरणम

1099
01:19:55,240 --> 01:19:59,680
मेरी शरण में चल तू अपने सभी धर्म कार्य जो कर कर्तव्य

1100
01:19:59,680 --> 01:20:04,240
कार्य जो कर वो सब मेरी शरण में कर मेरी शरण में आ हो गया

1101
01:20:04,240 --> 01:20:08,360
तो यह सब बातें इनकी खैर समझ में नहीं आएंगे आप संस्कृत ज्ञ है तो

1102
01:20:08,360 --> 01:20:13,160
अब हमारे दो पॉइंट है कुल मिलाकर के कि एक

1103
01:20:13,160 --> 01:20:17,240
पहली बात तो ब्रज का मूल अर्थ क्या है क्योंकि जहां तक मुझे

1104
01:20:17,240 --> 01:20:21,280
ज्ञात है ब्रज का मूल अर्थ शास्त्रों में मूल अर्थ कुछ

1105
01:20:21,280 --> 01:20:25,360
और ही है और उपयोगिता के अनुसार कि का उपयोग कहां

1106
01:20:25,360 --> 01:20:26,600
कहा पर हो सकता

1107
01:20:26,600 --> 01:20:30,920
है उसके अनुसार यहां पर अर्थ लिखे हैं शिवराम आपटे जी ने

1108
01:20:30,920 --> 01:20:35,200
हमारे सनातन शास्त्रों में कुछ मूल अर्थ और है है ना

1109
01:20:35,200 --> 01:20:39,360
दूसरी बात दूसरी बात कि जब भगवान यह कहेंगे कि मेरी शरण

1110
01:20:39,360 --> 01:20:43,920
से जा जब भगवान य कहेंगे मेरी शरण से जा तो यहां पर

1111
01:20:43,920 --> 01:20:48,200
की जगह से आना आवश्यक है आवश्यक है जी है ना मेरी शरण

1112
01:20:48,200 --> 01:20:52,360
में आ जब आ लेंगे तब तो यहां पर मैं होना उचित है मगर

1113
01:20:52,360 --> 01:20:56,600
मेरी मेरी शरण से जाने के लिए यहां पर से आना आवश्यक है मेरी

1114
01:20:56,600 --> 01:21:00,920
शरण में जा मेरी शरण में जा तो नहीं हो पाएगा

1115
01:21:00,920 --> 01:21:05,000
नहीं हो पाए मेरी शरण में जा तो नहीं हो पाएगा उनका कहना मेरी शरण से जा

1116
01:21:05,000 --> 01:21:09,360
तो आप हमें ये बताइए क्या इस श्लोक में

1117
01:21:09,360 --> 01:21:13,920
पहले तो हमें ये देखना है कि ब्रज का वास्तविक अर्थ क्या है और उसका कहां-कहां पर परवन

1118
01:21:13,920 --> 01:21:17,920
हो सकता है और दूसरा ये कि ब्रज का इस

1119
01:21:17,920 --> 01:21:22,080
श्लोक में जो कनेक्टिंग वो है मेरी

1120
01:21:22,080 --> 01:21:26,760
शरण में है या मेरी शरण से है क्योंकि अगर हम जाना शब्द लेंगे

1121
01:21:26,760 --> 01:21:31,200
तो संस्कृत में से की संस्कृत भी होनी चाहिए

1122
01:21:31,200 --> 01:21:35,480
से को अलग करने वाली जो संस्कृत है कि मेरी शरण से जा

1123
01:21:35,480 --> 01:21:40,040
से जा तो अलग करने वाली संस्कृत भी होनी चाहिए

1124
01:21:40,040 --> 01:21:41,760
तो यह आप थोड़ा सा मुझे

1125
01:21:41,760 --> 01:21:46,520
बताए जी तो पहली बात तो तु

1126
01:21:46,520 --> 01:21:50,520
के ठीक है मैं बोलना शुरू करूं अभी

1127
01:21:50,520 --> 01:21:54,560
जी आपका हा जी तो यदि मैं

1128
01:21:54,560 --> 01:21:58,720
मैंने जो अभी ब्रज धातु के लिए कुछ भेजा था

1129
01:21:58,720 --> 01:22:03,480
आपकी फोटो रुक गई है नेटवर्क नहीं है

1130
01:22:03,480 --> 01:22:08,200
क्या नेटवर्क तो है वाईफाई से कनेक्ट हुआ हूं अभी ठीक है क्या

1131
01:22:08,200 --> 01:22:12,600
जी जी तो ब्रज धातु के लिए

1132
01:22:12,600 --> 01:22:16,640
जो मैंने भेजा था व यदि उपलब्ध हो सका स्क्रीन

1133
01:22:16,640 --> 01:22:20,760
पर तो पहला जो हमने अभी कहा हां

1134
01:22:20,760 --> 01:22:24,840
जी वही तो सबसे पहले किसी भी

1135
01:22:24,840 --> 01:22:28,840
डिक्शनरी को भी धातु का अर्थ कहां से प्राप्त होगा यह

1136
01:22:28,840 --> 01:22:33,000
पता करना पड़ेगा चाहे जो शिवराम आप जी हो जाए वाचस पत्य

1137
01:22:33,000 --> 01:22:37,120
हो जाए या शब्द कल्पद्रुम हो जाए ऐसी जो मान्यता प्राप्त

1138
01:22:37,120 --> 01:22:41,160
शब्दकोश है वह भी अर्थ किधर से लेते होंगे

1139
01:22:41,160 --> 01:22:45,600
यहां पर विषय चल रहा है धातु का क्रियापद का संस्कृत में धातु

1140
01:22:45,600 --> 01:22:49,800
कहकर शब्द आता है जैसे हम वर्ब कह देते हैं अंग्रेजी

1141
01:22:49,800 --> 01:22:53,800
में टू गो मतलब मूल वर्ब हो गया उसका कहीं प्रयोग

1142
01:22:53,800 --> 01:22:56,840
नहीं होगा भा उसके रूपों का प्रयोग हो

1143
01:22:56,840 --> 01:23:00,960
जाएगा तो ऐसे व्रज यदि दिख नहीं रहा है तो जूम भी कर सकते

1144
01:23:00,960 --> 01:23:05,040
हैं ब्रज यह हो गया मूल रूप उसका ये मेरे ख्याल

1145
01:23:05,040 --> 01:23:09,160
से पाणिनी सूत्र है ना हां जी जी मैं अभी वही बोलने वाला

1146
01:23:09,160 --> 01:23:13,920
था तो महर्षि पाणिनी जी ने जो संस्कृत के व्याकरण का है

1147
01:23:13,920 --> 01:23:18,560
तो उन्होंने 4000 लगभग सूत्रों की रचना की है

1148
01:23:18,560 --> 01:23:22,800
उसके अतिरिक्त भी उनके कई सारे ग्रंथ है उसमें एक ग्रंथ आता है धातु

1149
01:23:22,800 --> 01:23:27,000
रूपा वली या धातु पाठ इस पेज के ऊपर शायद

1150
01:23:27,000 --> 01:23:31,040
दिख भी जाए धातु पाठ य शब्द यदि फोटो में आया हो

1151
01:23:31,040 --> 01:23:35,440
तो पेज नंबर क्या हैय 11 हा

1152
01:23:35,440 --> 01:23:40,200
इधर दिख नहीं रहा है लेकिन भाद गण कई दूसरे पेज पर जाएगा

1153
01:23:40,200 --> 01:23:44,080
मेरे पास है जी

1154
01:23:44,080 --> 01:23:48,120
जीय चैप्टर नंबर थ दिखाएंगे मुझे चैप्टर नंबर

1155
01:23:48,120 --> 01:23:52,200
क्या हैय दद गण हा मतलब पहला जो गण

1156
01:23:52,200 --> 01:23:56,320
होता है धातुओं का अच्छा उसम

1157
01:23:56,320 --> 01:24:00,560
जाएगा पहले गण को तु का पहला ग

1158
01:24:00,560 --> 01:24:04,600
जी जी उसको टेक्निकल शब्द भवाद गण है

1159
01:24:04,600 --> 01:24:08,760
कक भू धातु से आरंभ होता है इसीलिए भू आदि ठीक तो

1160
01:24:08,760 --> 01:24:12,000
जब तक आप देख रहे हो मैं यहां

1161
01:24:12,000 --> 01:24:16,200
बता देता हूं ये प्रथम पाद है क्या पाद

1162
01:24:16,200 --> 01:24:20,440
कौन सा हैय नहीं नहीं मैं आपको बताता हूं शिमा जी ये कोई सूत्र

1163
01:24:20,440 --> 01:24:24,960
नहीं है मैं अभी वही बता रहा था जो 4000 सूत्र है पाण के

1164
01:24:24,960 --> 01:24:29,200
तो उसके अतिरिक्त भी बहुत सारे ग्रंथ है जी उसी ग्रंथों

1165
01:24:29,200 --> 01:24:33,320
में से एक ग्रंथ है धातु पाठ तो अलग अलग से छपता है वो

1166
01:24:33,320 --> 01:24:37,640
हा अच्छा धातु नाम से मिलता है अच्छा

1167
01:24:37,640 --> 01:24:41,720
अच्छा तो व उस धातु पाठ में क्या लगभग 2000 धातु है

1168
01:24:41,720 --> 01:24:45,880
संस्कृत भाषा में लगभग अच्छा दो के दो धातु

1169
01:24:45,880 --> 01:24:50,160
जो है उनका अर्थ क्या है वो खुद पाणिनी

1170
01:24:50,160 --> 01:24:54,400
जी ने बताया हुआ है हमारे लिए अच्छा तो

1171
01:24:54,400 --> 01:24:58,680
सी क्रम में जो अभी ब्रज धातु है तो अभी

1172
01:24:58,680 --> 01:25:02,840
मुझे स्क्रीन दिख नहीं रही है वो शो हो रही है क्या शो में दोबारा दिखा

1173
01:25:02,840 --> 01:25:06,840
दीजिए स्क्रीन हा तो अभी हम उधर उधर का पढ़ेंगे वो

1174
01:25:06,840 --> 01:25:10,880
नहीं वो भी ले पानी नहीं वाला

1175
01:25:10,880 --> 01:25:15,080
इस पले पहले वाला हा जी देखो

1176
01:25:15,080 --> 01:25:19,360
इधर हमें वो दिख रहा है बाण ब्रज धातु लिखा है पानी

1177
01:25:19,360 --> 01:25:23,440
जी ने और उसके आगे शब्द लिखा है गत अभी हम

1178
01:25:23,440 --> 01:25:27,120
जो पढ़ रहे हैं ब्रज गत ये स्वयं पाणिनी जी के ही शब्द

1179
01:25:27,120 --> 01:25:31,720
पढ़ रहे हैं इसके अतिरिक्त कुछ नहीं है ब्रज हो गया मूल धातु

1180
01:25:31,720 --> 01:25:36,320
और उसके आगे गत यह शब्द आया है तो इस शब्द को

1181
01:25:36,320 --> 01:25:41,040
इस शब्द का विवेचन करने में थोड़ा अधिक टाइम लग जाएगा शॉर्ट में बता देता हूं

1182
01:25:41,040 --> 01:25:45,120
सती सप्तमी नाम से एक प्रयोग होता है संस्कृत भाषा में जैसे

1183
01:25:45,120 --> 01:25:49,920
युधिष्ठिर जी ने युद्ध समाप्ति के बाद यज्ञ किया

1184
01:25:49,920 --> 01:25:53,920
तो सरल भाषा में कहने के लिए जब युद्ध समाप्त

1185
01:25:53,920 --> 01:25:58,400
हुआ तब ऐसा प्रयोग हम कर सकते हैं जब तब संस्कृत

1186
01:25:58,400 --> 01:26:02,400
में होगा यदि तद अथवा यदा तदा बेसिकली

1187
01:26:02,400 --> 01:26:06,680
तो अर्थ यही रहेगा लेकिन शब्दावली बदल जाएगी वाक्य

1188
01:26:06,680 --> 01:26:11,680
का स्ट्रक्चर बदल जाएगा इस पद्धति से वाक्य रचना कर सकते हैं हम

1189
01:26:11,680 --> 01:26:16,280
अच्छा जैसा हिंदी में करेंगे युद्ध समाप्त होने के बाद

1190
01:26:16,280 --> 01:26:20,480
हा हो गया तो जब तब का अभी औचित्य नहीं रहा लेकिन फिर भी अर्थ नहीं

1191
01:26:20,480 --> 01:26:24,640
बदला युद्ध समाप्त होने के बाद तो व्याकरण

1192
01:26:24,640 --> 01:26:29,280
का एक नियम है संस्कृत में सती सप्तमी रचना उसे कहते हैं तो

1193
01:26:29,280 --> 01:26:33,320
वो जो रचना है बेसिकली सप्तमी विभक्ति जो प्रयोग में लाई जाती

1194
01:26:33,320 --> 01:26:37,400
है वो अधिकरण के अर्थ में प्रयोग में लाई जाती है जैसा मैं अभी आसन

1195
01:26:37,400 --> 01:26:41,960
पर बैठा हूं तो अहम आसने उप विषम

1196
01:26:41,960 --> 01:26:42,460
तो

1197
01:26:42,160 --> 01:26:46,240
आसन ये हो गई सप्तमी विभक्ति आसन शब्द की आसन

1198
01:26:46,240 --> 01:26:50,320
के ऊपर में बैठा हूं ये एक अर्थ हो गया सप्तमी का लेकिन

1199
01:26:50,320 --> 01:26:54,800
जो विभक्ति होती है एक से अधिक उनके अर्थ होते हैं

1200
01:26:54,800 --> 01:26:59,320
तो यहां जो सती सप्तमी की रचना के बारे में हम बोल रहे हैं तो

1201
01:26:59,320 --> 01:27:03,320
यहां जो गत शब्द हमें दिख रहा है उसमें मूल शब्द

1202
01:27:03,320 --> 01:27:08,000
आता है गति स्पीड गति और गति

1203
01:27:08,000 --> 01:27:12,080
और गति का मतलब यहां स्पीड नहीं लेना है हमें अंग्रेजी की तरह स्पीड

1204
01:27:12,080 --> 01:27:16,520
भी ले सकते हैं लेकिन य वे जो चलायमान हो

1205
01:27:16,520 --> 01:27:20,560
जो चल रहा हो जो चल रहा हो जिसम मोशन है

1206
01:27:20,560 --> 01:27:25,000
केवल उतना ही अर्थ है मतलब इनकमिंग मोशन

1207
01:27:25,000 --> 01:27:29,080
आउट जी केवल मूवमेंट आ ही रहा है या

1208
01:27:29,080 --> 01:27:33,080
जा ही रहा है ऐसा कुछ वहा नहीं है सिर्फ गति कहने का मतलब यह

1209
01:27:33,080 --> 01:27:37,160
है कि अगर हम मोटा मोटा मान ले तो ब्रज का पाणिनी जी

1210
01:27:37,160 --> 01:27:41,200
के द्वारा जो स्वीकारा गया अर्थ है मूल वो

1211
01:27:41,200 --> 01:27:45,640
है गतिशील अब वो गतिशील जाने के लिए है या गतिशील

1212
01:27:45,640 --> 01:27:49,960
आने के लिए वो इस पर निर्भर करता है कि वो यूज कहां हो रहा है एकली

1213
01:27:49,960 --> 01:27:54,560
एकदम बराबर एकदम बराबर ये शिवराम भाई शिवराम आप

1214
01:27:54,560 --> 01:27:57,480
और जो ये शब्दकोश लिखते हैं

1215
01:27:57,480 --> 01:28:01,560
वो जहां से पढ़ते हैं वो जिसके ऊपर आधारित बात करते हैं ये उनकी बात हो रही

1216
01:28:01,560 --> 01:28:05,760
है पाणिनी वैसे आपको मालूम नहीं होगा पाणिनी कौन है

1217
01:28:05,760 --> 01:28:09,800
अष्टाध्याई सूत्र जो जिन्होंने लिखा है जिनके ऊपर आधारित

1218
01:28:09,800 --> 01:28:14,280
हमारी सारी विवेचना हैं भले ही आर समाज वाले करते हो या

1219
01:28:14,280 --> 01:28:18,400
क्या कहते हैं भले ही वो जो संप्रदाय संप्रदाय है

1220
01:28:18,400 --> 01:28:23,120
वो करते हो

1221
01:28:23,120 --> 01:28:27,120
अष्टाध्यायी तो हा तो इसमें कहने का अर्थ

1222
01:28:27,120 --> 01:28:31,320
ये है कि मूल अर्थ जो निकला बिल्कुल कांटे की नोक वाला वो क्या निकला

1223
01:28:31,320 --> 01:28:36,000
ब्रज का मूल अर्थ की जो गतिशील है गतिशीलता

1224
01:28:36,000 --> 01:28:40,240
गतिशील मवि अब

1225
01:28:40,240 --> 01:28:44,320
अब उसका जो मूवमेंट है वो कहां पर यूज हो रहा है किसके साथ हो रहा है

1226
01:28:44,320 --> 01:28:48,320
उससे तय होगा कि उसका वो मूवमेंट जाने के लिए या मूमेंट आने के

1227
01:28:48,320 --> 01:28:52,320
लिए आने के लिए जी एकदम सटीक बात जी जी और और

1228
01:28:52,320 --> 01:28:56,440
भी एक दो रेफरेंस हमारे पास थे उसी उन रेफरेंस में भी

1229
01:28:56,440 --> 01:29:00,600
एक जो हमारे माधवाचार्य है विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक

1230
01:29:00,600 --> 01:29:04,920
उनका यख है तु उनका भी धातु पाठ है मतलब व है पानी

1231
01:29:04,920 --> 01:29:09,840
काई उन्होंने धातु वृत्ति लिखे उसके ऊपर मतलब कमेंट की

1232
01:29:09,840 --> 01:29:13,680
अच्छा जी बत

1233
01:29:13,680 --> 01:29:18,240
बि थो चे वा चे नीचे

1234
01:29:18,240 --> 01:29:24,240
धातु वृति हा नीचे देखो

1235
01:29:24,440 --> 01:29:28,680
हां देखो ब्रज गत उन्होंने भी

1236
01:29:28,680 --> 01:29:32,720
उसी अर्थ को स्वीकार किया है जो अर्थ महर्षि पाणिनी के द्वारा हमें प्राप्त होता

1237
01:29:32,720 --> 01:29:37,080
है गतिशीलता माधवाचार्य जी और भी मतलब रेफरेंसेस

1238
01:29:37,080 --> 01:29:41,160
तो बहुत मिल जाएंगे अलग अलग माधवाचार्य जी जो सायनाचार्य उनके बड़े

1239
01:29:41,160 --> 01:29:46,040
भाई थे जी जी जी सायनाचार्य जी के बड़े भाई और जर

1240
01:29:46,040 --> 01:29:50,320
जिनके प्राचीनतम वेद भाष में प्राप्त होते हैं प्राचीनतम

1241
01:29:50,320 --> 01:29:54,360
प्राचीन सबसे पुराने वेद भाष्य लेने जाएंगे तो वो हमें

1242
01:29:54,360 --> 01:29:58,560
मिलेंगे यण भाष्य भाष्य और ये उनके बड़े

1243
01:29:58,560 --> 01:30:02,600
भाई है ये उनके बे उनका किया गया अर्थ है यहां पर वो

1244
01:30:02,600 --> 01:30:06,680
भी इसी अर्थ को स्वीकार कर रहे हैं तो अब यह निकला कि ब्रज का

1245
01:30:06,680 --> 01:30:10,760
जो मूल अर्थ है बिना किसी लाग लपेट के वह है गतिशील

1246
01:30:10,760 --> 01:30:14,800
मात्र वो बात अलग है कि वो उ उपयोग कहां होगा किसके साथ

1247
01:30:14,800 --> 01:30:18,880
होगा अब मुझे एक चीज और बता दीजिए ये तो हमने पाणिनी जी से जान लिया

1248
01:30:18,880 --> 01:30:23,200
ब्रज का मूल अर्थ क्या है अब कोई अपने कोई अपनी डिक्शनरी

1249
01:30:23,200 --> 01:30:27,400
में जो अपनी अपनी दृष्टिकोण से लिखता रहे मगर पाणिनी

1250
01:30:27,400 --> 01:30:28,760
जी का जो अर्थ है

1251
01:30:28,760 --> 01:30:32,840
गतिशील वो हमने निकाल लिया अब आप यह बता दीजिए कि जो

1252
01:30:32,840 --> 01:30:37,120
मामे कम शरणम ब्रज है है ना जी

1253
01:30:37,120 --> 01:30:41,320
उसमें जब ये फिट हो रहा है तो वहां पे मैं को संबोधित करने

1254
01:30:41,320 --> 01:30:45,520
वाली संस्कृत है या फिर से को संबोधित करने वाली संस्कृत

1255
01:30:45,520 --> 01:30:50,320
है क्योंकि अगर जाएगा तो अलग होगा तो से अलग होगा आएगा

1256
01:30:50,320 --> 01:30:54,480
तो जुड़ेगा तो मैं जुड़ेगा है ना तो मैं संबोधित

1257
01:30:54,480 --> 01:30:58,640
करने वाली संस्कृत है या से को और अगर मे वाली संस्कृत है से

1258
01:30:58,640 --> 01:31:03,000
वाली नहीं है तो से वाली क्या होगी और अगर से वाली संस्कृत है मैं

1259
01:31:03,000 --> 01:31:07,960
वाली नहीं है तो मैं वाली संस्कृत क्या होगी यह थोड़ा सा समझाए जी जी

1260
01:31:07,960 --> 01:31:12,040
वो जो मैंने गी गीता के जो तीन श्लोक भेजे थे वो यदि दिख सके

1261
01:31:12,040 --> 01:31:17,760
तो उनको सामने रखते हुए हम बात कर सकते हैं

1262
01:31:17,760 --> 01:31:21,760
मतलब 64 65 और 6 हां जी जी वही

1263
01:31:21,760 --> 01:31:26,040
वही थोड़ा जूम आउट करेंगे तो भी चले तीनों लोक हा

1264
01:31:26,040 --> 01:31:30,280
बस तो यह अभी 18 अध्याय का जो 6वा श्लोक है

1265
01:31:30,280 --> 01:31:34,400
उसके ऊपर य बात चल रही है अब होता क्या है

1266
01:31:34,400 --> 01:31:38,640
और एक यदि दिखा सके आप मैंने अलग सा भी एक भेजा है पहले

1267
01:31:38,640 --> 01:31:42,880
इस लोक का हा बस बस करेक्ट हा पहले

1268
01:31:42,880 --> 01:31:44,000
से जाएंगे जैसा

1269
01:31:44,000 --> 01:31:49,280
मैं नीचे पढ़ता जाऊंगा आप नीचे स्क्रोल करेंगे तो भी चलेगा

1270
01:31:49,280 --> 01:31:53,360
तु यवम जो शब्द है वो अभी फिलहाल लोक में नहीं है लेकिन

1271
01:31:53,360 --> 01:31:57,440
वो लेना पड़ता है वो उसके बारे में अभी बात नहीं करेंगे बहुत मोटा हो

1272
01:31:57,440 --> 01:32:01,520
जाएगा विषय बड़ा हो जाएगा करता है वो चूंकि वो लेना

1273
01:32:01,520 --> 01:32:05,600
पड़ता है माम एकम थोड़ा

1274
01:32:05,600 --> 01:32:10,840
नीचे शरणम व्रज यह सभी शब्द श्लोक में

1275
01:32:10,840 --> 01:32:15,040
है अब यहां ब्रज यह जो दिख रहा है वह क्रियापद है

1276
01:32:15,040 --> 01:32:19,120
मूल धातु के रूप में नहीं आया है वो

1277
01:32:19,120 --> 01:32:23,440
मूल धातु का जो रूप हमें प्रयोग में लाना पड़ता है भाषा में वो है ब्रज

1278
01:32:23,440 --> 01:32:28,000
उसका व्याकरण भी नीचे लिखा दिख रहा है हमें ब्रज गत धातु आज्ञा

1279
01:32:28,000 --> 01:32:32,320
अथ मध्यम पुरुष एकवचन यह उसका व्याकरण है

1280
01:32:32,320 --> 01:32:36,920
जैसा राम शब्द लेंगे हम राम राम रामा प्रथमा

1281
01:32:36,920 --> 01:32:40,920
तो रामा इसका व्याकरण क्या बोलेंगे राम शब्द अकारांत पुलिंगी

1282
01:32:40,920 --> 01:32:44,920
शब्द प्रथमा विभक्ति का एकवचन इस दृष्टि से तो य

1283
01:32:44,920 --> 01:32:49,120
मध्यम पुरुष मतलब त्वम तू और वो एकवचन है

1284
01:32:49,120 --> 01:32:53,160
इसीलिए हमने त्वम शब्द को उधर एक शब्द आता है

1285
01:32:53,160 --> 01:32:57,320
संस्कृत में अध्या हार करना उस शब्द को पकड़ना

1286
01:32:57,320 --> 01:32:59,560
वह शब्द वहां है

1287
01:32:59,560 --> 01:33:03,680
दिख नहीं रहा है दिख नहीं रहा है फिर भी वहां वह है ऐसा

1288
01:33:03,680 --> 01:33:08,040
पकड़ना उसको अधर करना कहते हैं तो आधर से वह हमें शब्द मिल जाता है

1289
01:33:08,040 --> 01:33:12,080
अब हम ऊपर जाएंगे गीता के श्लोक

1290
01:33:12,080 --> 01:33:16,240
में यहां 66 नंबर के श्लोक में

1291
01:33:16,240 --> 01:33:20,440
माम कम शरणम ब्रज यहां जो ब्रज क्रियापद है वो

1292
01:33:20,440 --> 01:33:24,680
आना अर्थ में है या जाना अर्थ में है इसका निर्णय धर से हो जाएगा

1293
01:33:24,680 --> 01:33:28,800
यह महत्त्वपूर्ण प्रश्न है तो वो निर्णय ठीक पिछले वाले श्लोक

1294
01:33:28,800 --> 01:33:33,000
से हो जाएगा क्योंकि आप कोई भी शास्त्र उठा उठा सकते

1295
01:33:33,000 --> 01:33:37,200
हो उसमें पूर्व पर संगति होती है हर एक श्लोक में हर

1296
01:33:37,200 --> 01:33:41,280
एक शब्द का पिछले शब्द से नाता आगे वाले शब्द से नाता

1297
01:33:41,280 --> 01:33:45,640
हर एक श्लोक का पिछले श्लोक से आगे वाले श्लोक से नाता हर एक चैप्टर

1298
01:33:45,640 --> 01:33:50,040
का पिछले आगे वाला नाता ऐसा एक विषय होता है जब तक वो रिलेशन

1299
01:33:50,040 --> 01:33:54,080
हम पता नहीं कर लेते पूर्व पर संगति तब

1300
01:33:54,080 --> 01:33:58,120
हमें उसका सटीक ठीक ठाक अर्थ नहीं मिल जाता तो यहां जो

1301
01:33:58,120 --> 01:34:02,200
65 नंबर का श्लोक है वहां भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को क्या

1302
01:34:02,200 --> 01:34:03,440
कह रहे हैं

1303
01:34:03,440 --> 01:34:08,040
मन मना भव मद भक्तो मदजी माम नमतु मामे वैश

1304
01:34:08,040 --> 01:34:09,880
सत्यम ते प्रति जाने प्रियो

1305
01:34:09,880 --> 01:34:13,960
स में इसका सरल भाषा में अर्थ यह हुआ मन मना

1306
01:34:13,960 --> 01:34:17,960
भव मु मुझ में मन लगने वाला हो जा तू

1307
01:34:17,960 --> 01:34:22,240
हो जा वहां जो भव यह रूप दिख रहा है वह भी

1308
01:34:22,240 --> 01:34:26,960
वैसा ही है मध्यम पुरुष का एकवचन है अर्जुन को

1309
01:34:26,960 --> 01:34:31,080
अर्जुन के लिए वह कहा जा रहा है मत भक्तो मेरा भक्त

1310
01:34:31,080 --> 01:34:35,080
बन जा मद याजी अपने कर्मों के द्वारा मेरा

1311
01:34:35,080 --> 01:34:39,480
ही यजन करने वाला हो जा जैसा गीता में अन्यत

1312
01:34:39,480 --> 01:34:43,640
आया भी है ना कि जो वर्णाश्रम विहित कर्म है उनका

1313
01:34:43,640 --> 01:34:48,000
आचरण ही मेरी पूजा है इत्यादि इत्यादि मया जीी माम नमस्कर

1314
01:34:48,000 --> 01:34:53,960
मुझे नमस्कार करने वाला हो जा मुझे नमस्कार कर ले माम एव

1315
01:34:53,960 --> 01:34:58,880
तू मुझे ही आकर प्राप्त हो जाएगा

1316
01:34:58,880 --> 01:35:03,160
माम एव उसका यदि संधि विच्छेद करेंगे हम माम एव

1317
01:35:03,160 --> 01:35:07,920
यसी य जो क्रियापद है व भविष्य कालीन क्रियापद है

1318
01:35:07,920 --> 01:35:11,960
उसमें एक धातु है ण गत धातु वो भी अर्थक धातु

1319
01:35:11,960 --> 01:35:16,000
है हो जाएगा हो जाएगा

1320
01:35:16,000 --> 01:35:20,240
तू मुझे मुझे मिल जाएगा मुझको प्राप्त करेगा भविष्य

1321
01:35:20,240 --> 01:35:24,240
में यदि ऐसा ऐसा करेगा तो और य स

1322
01:35:24,240 --> 01:35:25,040
मतलब यह मैं

1323
01:35:25,040 --> 01:35:29,200
तुझे सत्य बात कह रहा हूं सत्यम ते प्रति जाने प्रति

1324
01:35:29,200 --> 01:35:33,440
जाने क्रियापद का अर्थ होता है मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मेरे द्वारा कही

1325
01:35:33,440 --> 01:35:37,480
गई बात सत्य है और यह मैं तुझे क्यों बता रहा हूं क्योंकि गीता

1326
01:35:37,480 --> 01:35:41,480
शास्त्र तो गोपय है आया ही है सर्वत भया तो तुझे

1327
01:35:41,480 --> 01:35:45,600
क्यों बता रहा हूं प्रिया असम तू मेरा प्रिय है

1328
01:35:45,600 --> 01:35:49,720
इसलिए मैं तुझे बता रहा हूं इसके आगे यह श्लोक आया

1329
01:35:49,720 --> 01:35:55,360
है जिस श्लोक में ब्रज धातु का प्रयोग किया गया है ब्रज क्रियापद का सर्व

1330
01:35:55,360 --> 01:35:59,360
धर्मानंद को छोड़ने के बाद अब इधर धर्म शब्द का क्या अर्थ है

1331
01:35:59,360 --> 01:36:03,560
वो अलग विषय हो जाएगा लग विषय अलग हो जाएगा

1332
01:36:03,560 --> 01:36:07,920
सब धर्मों का परित्याग करने के बाद माम एकम शरणम

1333
01:36:07,920 --> 01:36:12,080
रज मेरी शरण में आजा माम शब्द का प्रयोग

1334
01:36:12,080 --> 01:36:16,120
इधर साफ साफ किया गया है और उसके आगे मेरी शरण

1335
01:36:16,120 --> 01:36:20,480
में आने के बाद क्या होगा अहम तवाम सर्व पापे भयो मोक्ष

1336
01:36:20,480 --> 01:36:25,120
श्याम मेरी शरण में आने के बाद मैं मतलब अ शब्द का अर्थ

1337
01:36:25,120 --> 01:36:30,040
मैं मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूंगा

1338
01:36:30,040 --> 01:36:34,120
यह हो गया माचा शोक मत करो तो इधर माम

1339
01:36:34,120 --> 01:36:38,280
अब वो नीचे वाला दिखाएंगे तो भी चलेगा माम माम एकम

1340
01:36:38,280 --> 01:36:40,360
मुझे एक की शरण में

1341
01:36:40,360 --> 01:36:44,560
आा केवल मेरी शरण में आ केवल केवल मेरी शरण में आ मुझ

1342
01:36:44,560 --> 01:36:49,440
एक की हा ऊपर वाला थो माम दिख रहा है ना माम

1343
01:36:49,440 --> 01:36:53,680
माम ये थोड़ा सा व्याकरण हम जान लेंगे यद तो माम

1344
01:36:53,680 --> 01:36:57,880
वाक्य का कर्म हो गया कर्ता कौन है त्वम

1345
01:36:57,880 --> 01:37:01,960
क्रिया करने वाला साइलेंट है क्योंकि वो अर्जुन से बात कर रहे हैं तो वो उसके लिए त्वम

1346
01:37:01,960 --> 01:37:06,120
आ रहा है मगर वो साइलेंट है मगर वो है वहां प व वहां पर

1347
01:37:06,120 --> 01:37:10,200
है जी तो त्वम ये हो गया कर्ता क्रिया करने वाला

1348
01:37:10,200 --> 01:37:15,040
क्या करना है शरण आना है किसके मां मेरे

1349
01:37:15,040 --> 01:37:19,280
अब यदि दोनों सामने सामने बात कर रहे हैं तो मेरे शरण मेरी

1350
01:37:19,280 --> 01:37:23,360
शरण की यदि बात बात हो रही है यदि मैं भगवान श्री कृष्ण हूं मेरे सामने अर्जुन बैठे

1351
01:37:23,360 --> 01:37:27,840
हैं तो मेरी शरण में जा ऐसा तो हो ही नहीं सकता

1352
01:37:27,840 --> 01:37:32,240
व्याकरण की दृष्टि से भी मेरी शरण में जा नहीं मान्य होगा मान्य

1353
01:37:32,240 --> 01:37:36,240
ही नहीं होगा बैगा फिट बैठेगा ही नहीं पहली बात

1354
01:37:36,240 --> 01:37:41,120
वो आमने सामने बैठे हैं इसलिए फिट नहीं बैठेगा दूसरी बात

1355
01:37:41,120 --> 01:37:45,400
पिछले वाले श्लोक में पूरी की पूरी जो कहानी है वो मेरा

1356
01:37:45,400 --> 01:37:49,760
मुझे नमस्कार कर मेरा यज्ञ कर इत्यादि है और उससे भी महत्त्वपूर्ण बात

1357
01:37:49,760 --> 01:37:54,560
मेरी शरण में आने के बाद मैं तुझे मुक्त कर दूंगा सर्व पाप

1358
01:37:54,560 --> 01:37:55,400
तो यहां थर्ड

1359
01:37:55,400 --> 01:37:59,400
पार्टी है ही नहीं बेसिक अगर किसी और के पास जाने की बात हो रही होती

1360
01:37:59,400 --> 01:38:03,400
तो आगे कहते वो तुझे कर देगा वो तुझे मुक्त कर देगा वो तुझे

1361
01:38:03,400 --> 01:38:07,680
मुक्त कर देगा जिसकी तू शरण में जाएगा लेकिन य तो

1362
01:38:07,680 --> 01:38:11,680
वैसे भी अकॉर्डिंग टू अकॉर्डिंग टू ये जो रामपाल सेक्ट है इनके

1363
01:38:11,680 --> 01:38:15,760
अकॉर्डिंग मुक्ति देने वाले कबीर है तो यहां पर

1364
01:38:15,760 --> 01:38:20,440
श्री कृष्ण कह रहे हैं मैं तुझे मुक्त कर दूंगा अहम अच्छा

1365
01:38:20,440 --> 01:38:24,880
अगर किसी थर्ड पार्टी के लिए आता तो वो क्या होता अहम की जगह तुझे मुक्त कर दे

1366
01:38:24,880 --> 01:38:30,760
कीग हो जाता जो सकार होता है सकार

1367
01:38:30,760 --> 01:38:34,880
बोते बताता हूं स और उसके आगे मतलब बर्बल बता रहा

1368
01:38:34,880 --> 01:38:39,640
हूं जो कि लिखा नहीं है हमारे सामने तो स और उसके सामने विसर्ग

1369
01:38:39,640 --> 01:38:44,160
स स

1370
01:38:44,160 --> 01:38:48,280
स पूरा सेंटेंस बता देता हूं मोक्ष श्यामी यह जो

1371
01:38:48,280 --> 01:38:52,280
क्रियापद यूज हुआ इधर तो यदि कर्ता अहम है तो

1372
01:38:52,280 --> 01:38:56,720
क्रियापद का एक रूप होता है मी वाला यदि कर्ता बदल गया सहा हो गया

1373
01:38:56,720 --> 01:39:01,040
तो क्रियापद का रूप बदल जाता है उसके लास्ट में हमें ती दिखाई देगा मतलब

1374
01:39:01,040 --> 01:39:05,520
मोक्ष शति सहा तवाम मोक्ष शति

1375
01:39:05,520 --> 01:39:09,520
ऐसा उर होता अगर कोई थर्ड पार्टी है

1376
01:39:09,520 --> 01:39:13,640
तो वो ती आ जाएगा मोक्ष सति जी जी जी ती आ जाएगा

1377
01:39:13,640 --> 01:39:17,640
क्योंकि तीय जो प्रत्यय लगता है ति प्रत्यय थर्ड पार्टी एकवचन के

1378
01:39:17,640 --> 01:39:21,920
लिए लगता है मतलब अंग्रेजी में कहे तो थर्ड पर्सन सिंगुलर और संस्कृत

1379
01:39:21,920 --> 01:39:25,960
में कहे तो प्रथम पुरुष एकवचन उधर लगता है वक अलग

1380
01:39:25,960 --> 01:39:30,000
चीज हो गई जी बिल्कुल अलग चीज हो गई मैंने भी

1381
01:39:30,000 --> 01:39:34,240
पढ़ा था थोड़ा बप तो ये हो गया

1382
01:39:34,240 --> 01:39:38,280
अच्छा एक बात य कहूंगा अच्छा वो

1383
01:39:38,280 --> 01:39:43,240
मैं और से का कोई अंतर वाला शब्द है क्या य

1384
01:39:43,240 --> 01:39:47,480
सं शरण तो मा मतलब मेरे पास

1385
01:39:47,480 --> 01:39:51,720
मेरी तरफ यह हो गया तो मेरे मेरी तरफ वाला

1386
01:39:51,720 --> 01:39:55,800
य अर्थ हमें मिल गया मुझ से दूर ऐसा यदि कहना

1387
01:39:55,800 --> 01:40:00,040
होता तो उधर जो विभक्ति का प्रयोग होता वह पंचमी विभक्ति

1388
01:40:00,040 --> 01:40:04,400
का प्रयोग करना पड़ता जैसा माम यह जो शब्द है वो अस्मत

1389
01:40:04,400 --> 01:40:08,520
नाम से एक सर्वनाम है मैं हम दोनों हम

1390
01:40:08,520 --> 01:40:12,560
सब मतलब मेरे लिए वो उसका प्रयोग होता है सर्वनाम का तो

1391
01:40:12,560 --> 01:40:16,600
वो जो सर्वनाम है अमत सर्वनाम उसके द्वितीय का द्वितीय

1392
01:40:16,600 --> 01:40:20,840
विभक्ति का एकवचन का य रूप है माम अहम आवाम वयम प्रथमा

1393
01:40:20,840 --> 01:40:25,720
माम मा आवाम न असमान न द्वितीय तोय माम ये द्वितीया हो गई

1394
01:40:25,720 --> 01:40:30,400
यदि मुझसे दूर वाली बात करनी पड़ती करनी थी यदि

1395
01:40:30,400 --> 01:40:34,640
तो उसी सरी शरण से मेरी शरण से जा

1396
01:40:34,640 --> 01:40:38,840
मेरी शरण से दूर जा ऐसा कहना होता तो पंचमी विभक्ति का

1397
01:40:38,840 --> 01:40:43,240
प्रयोग उधर भगवान श्री कृष्ण ने किया होता गीता में

1398
01:40:43,240 --> 01:40:47,360
एक तो नहीं य प एक बात पूछूंगा मेरी शरण शब्द तो दोनों

1399
01:40:47,360 --> 01:40:51,560
ही उसम वाक्य में मेरी शरण में आ मेरी शरण से जा केवल एक ही शब्द

1400
01:40:51,560 --> 01:40:55,600
अलग हो रहा है मैं मैं और से जी जी तो शरण से

1401
01:40:55,600 --> 01:40:58,320
शरण में इसमें क्या अंतर आ रहा है वो बताइए

1402
01:40:58,320 --> 01:41:03,000
जी हां मतलब हमें उस श्लोक से

1403
01:41:03,000 --> 01:41:07,240
मेरी शरण में या मेरी शरण से दोनों में से कौन सा अर्थ

1404
01:41:07,240 --> 01:41:11,440
वहां वहां है श्री कृष्ण के अभिप्राय से तो वो

1405
01:41:11,440 --> 01:41:15,680
किधर से पता चलेगा उसी माम शब्द से ही पता चलेगा क्योंकि

1406
01:41:15,680 --> 01:41:19,960
वो द्वितीय विभक्ति है और जो पूरा वाक्य बनेगा हमारा

1407
01:41:19,960 --> 01:41:24,040
ये पद्य हो गया ना श्लोक जो गद्य वाक्य हमने बनाया जिसे

1408
01:41:24,040 --> 01:41:28,160
अन्वय करना कहते हैं तो त्वम जो अभी लिखा दिख

1409
01:41:28,160 --> 01:41:32,360
रहा था त्वम माम एकम शरणम ब्रज तू

1410
01:41:32,360 --> 01:41:36,800
हां यही त्वम माम माम यह जो वाक्य में कर्म का

1411
01:41:36,800 --> 01:41:40,960
प्रयोग अभी मतलब कर्म के रूप में आया है तो इसीलिए माम

1412
01:41:40,960 --> 01:41:45,000
शब्द का ही अर्थ हमें मिलता है मेरी शरण में

1413
01:41:45,000 --> 01:41:49,040
यहां चूंकि मैं के लिए कोई अन्य संस्कृत शब्द के प्रयोग

1414
01:41:49,040 --> 01:41:53,280
की आवश्यकता नहीं वो विभक्ति ही हमें बता देती है कि इधर

1415
01:41:53,280 --> 01:41:57,520
मैं है से नहीं है और से यदि कहना होता तो पंचमी

1416
01:41:57,520 --> 01:42:01,640
का प्रयोग कना हा वही मैं पूछ रहा हूं अगर से कहना होता तो क्या लिखा

1417
01:42:01,640 --> 01:42:06,200
जाएगा हा वो बता देता हूं मैं अभी

1418
01:42:06,200 --> 01:42:10,200
मैं पूरा पढ़ के बता देता हूं मतलब जो भी मतलब संस्कृत के कुछ जानकार सुन रहे होंगे

1419
01:42:10,200 --> 01:42:13,400
तो उनको भी तसली हो जाए अहम आवा प्रथमा

1420
01:42:13,400 --> 01:42:17,560
माम मा आवान अस्मा द्वितीया मया अवाम अमा

1421
01:42:17,560 --> 01:42:21,600
तृतीया म म आवाम

1422
01:42:21,600 --> 01:42:26,040
चतुर्थी मत मद आवाम अमत पंचमी मत

1423
01:42:26,040 --> 01:42:30,320
म और त का जो मतलब हलंत त

1424
01:42:30,320 --> 01:42:34,440
यदि बोलेंगे हम पूरा उच्चारण नहीं होगा मत यह मत

1425
01:42:34,440 --> 01:42:38,600
शब्द वहां हमें मिल जाता यदि मुझ मेरी शरण

1426
01:42:38,600 --> 01:42:42,600
से यह अर्थ अभिप्रेत होता तो वहा मत लिखना पड़ता

1427
01:42:42,600 --> 01:42:46,800
या तो मतः यह अव्यय होता है संस्कृत में मत

1428
01:42:46,800 --> 01:42:51,000
मत या मता जरा वो सेंटेंस सुना दीजिए कि मेरी शरण

1429
01:42:51,000 --> 01:42:56,160
से जा अगर कहेंगे तो क्या लिख आएगा वो सेंटेंस सुना दीजिए हां

1430
01:42:56,160 --> 01:43:01,200
त्वम मत अथवा मत तः

1431
01:43:01,200 --> 01:43:05,640
अब यहां शरणम ये शब्द आएगा ही नहीं क्योंकि

1432
01:43:05,640 --> 01:43:09,800
किसके शरण में जाए नहीं कहा जा रहा इसलिए मैं अभी शरण शब्द

1433
01:43:09,800 --> 01:43:13,880
का प्रयोग नहीं करूंगा त्वम मत ब्रज अथवा

1434
01:43:13,880 --> 01:43:18,200
त्वम मतः ब्रज तू मुझ से दूर जा

1435
01:43:18,200 --> 01:43:22,480
किसी और की शरण में जा ऐसा उधर वाक्य आ जाता त्वम

1436
01:43:22,480 --> 01:43:26,760
मत्ता ऐसा हो जाता अगर हम एज इट इज

1437
01:43:26,760 --> 01:43:28,880
मेरी शरण से जा को संस्कृत

1438
01:43:28,880 --> 01:43:33,600
में कहे तो कैसे कहेंगे मेरी शरण से जा यही

1439
01:43:33,600 --> 01:43:38,600
त्वम मतलब तू त्वम मत

1440
01:43:38,600 --> 01:43:43,520
ब्रज बस इना ही काफी इतना ही काफी है

1441
01:43:43,520 --> 01:43:47,760
तू मुझसे जा मुझसे जा वो शरण उसम

1442
01:43:47,760 --> 01:43:52,720
जैसे अभी वो आपने एक शब्द बताया ना आदरण हा

1443
01:43:52,720 --> 01:43:57,120
व यहां प शरण का हो गया शरण भी यहां

1444
01:43:57,120 --> 01:44:01,520
पर शरण यहां पर है पर दिख नहीं रहा है जैसे

1445
01:44:01,520 --> 01:44:05,720
दिख नहीं रहा नहीं नहीं जी जी नहीं जो वहां हमने देखा था

1446
01:44:05,720 --> 01:44:09,720
है पर दिख नहीं रहा वैसा इधर नहीं है यदि इस वाक्य में मैं पहले

1447
01:44:09,720 --> 01:44:13,840
हिंदी में समझा देता हूं तू मुझ से जा इतना ही हमने इसका

1448
01:44:13,840 --> 01:44:17,880
अनुवाद कर दिया त्वम मत ब्रज इसमें यदि शरण

1449
01:44:17,880 --> 01:44:22,040
शब्द मेंें जोड़ना है वो साइलेंट नहीं है यहां यदि जोड़ना होगा तो

1450
01:44:22,040 --> 01:44:26,280
मुझे से जा तो ठीक बात है तो किसकी शरण में जाए यह भी बताना पड़ेगा

1451
01:44:26,280 --> 01:44:30,720
ना केवल सामान्य व्यवहार में हम ऐसा कहेंगे तू जा और

1452
01:44:30,720 --> 01:44:35,160
किधर ये सामने वाला पूछ देगा किस दुकान से लाना है सामान

1453
01:44:35,160 --> 01:44:39,160
तो किधर ये कह रहा हूं वो छोड़ दीजिए कि वहा बताया गया

1454
01:44:39,160 --> 01:44:43,200
कि नहीं बताया गया मैं तो ये कह रहा हूं यह जो वाक्य है मेरी शरण से जा कहीं भी

1455
01:44:43,200 --> 01:44:43,880
जा

1456
01:44:43,880 --> 01:44:48,280
मर जा जा कर के कुछ भी कर ले आत्महत्या कर ले मेरी शरण से जा

1457
01:44:48,280 --> 01:44:52,600
तो इसको अगर हम कन्वर्ट करेंगे एज इट इज तो वो लाइन

1458
01:44:52,600 --> 01:44:56,920
क्या बने हां तो शरण शब्द यदि मेरी शरण से जाए ऐसा कहना है

1459
01:44:56,920 --> 01:45:01,600
तो त्वम थोड़ा सा इधर व्याकरण बदल जाएगा मेरी

1460
01:45:01,600 --> 01:45:05,720
तो ये षष्ठी विभक्ति आ जाएगी उस उधर तो मैं पूरा वाक्य पहले बता

1461
01:45:05,720 --> 01:45:09,920
देता हूं अभी त्वम मम शरणा

1462
01:45:09,920 --> 01:45:15,000
ब्रज त्वम शरणा शरणा पंचमी

1463
01:45:15,000 --> 01:45:19,280
हां तो अंतर आया

1464
01:45:19,280 --> 01:45:23,280
तो अंतर आ गया शरथ और शरणम का वहां

1465
01:45:23,280 --> 01:45:27,600
शरणम और यहां पर आ गया शरणा ये अंतर शरणम शरणा

1466
01:45:27,600 --> 01:45:31,640
य अंतर तो भैया आपने

1467
01:45:31,640 --> 01:45:35,840
देख लिया कि अगर मेरी शरण से जा कहेंगे

1468
01:45:35,840 --> 01:45:40,040
एक बात थोड़ी हा जोड़ता हूं शरणम और शरण

1469
01:45:40,040 --> 01:45:44,080
का अंतर आ ही गया यदि उधर किसके शरण में जाना

1470
01:45:44,080 --> 01:45:48,240
है इसका उल्लेख किया गया होता तो शरणम

1471
01:45:48,240 --> 01:45:52,280
शब्द आ सकता था अच्छा हा तो

1472
01:45:52,280 --> 01:45:56,520
शरणम शब्द सता था लेकिन हमें अभी केवल इतना ही चाहिए कि तू मेरी शरण

1473
01:45:56,520 --> 01:45:59,520
से जा इतना ही कहना है तो इसका

1474
01:45:59,520 --> 01:46:03,960
लेशन शरणा ऐसा हो जाए अच्छा य

1475
01:46:03,960 --> 01:46:06,160
लेकिन

1476
01:46:06,160 --> 01:46:11,120
शया किसके शरण में य तो वही शलोक बता बता रहा है ना

1477
01:46:11,120 --> 01:46:15,560
माम जी तो माम से हम मिलता है शरण में

1478
01:46:15,560 --> 01:46:19,960
अच्छा माम से इसलिए काम चल जा रहा है मा जी

1479
01:46:19,960 --> 01:46:25,000
जी तो अभी हमने जाना कि

1480
01:46:25,000 --> 01:46:29,760
भाई कुल मिला अच्छा यह बताइए जब शरण माता

1481
01:46:29,760 --> 01:46:34,440
क्या कहते जब जब कि बता दिया होता कि मेरी शरण से उसकी शरण में जा

1482
01:46:34,440 --> 01:46:38,680
यह बता दिया कि वहां पर क्या है जिसकी शरण में जाना है तो क्या मम शरणम

1483
01:46:38,680 --> 01:46:42,720
बन जाएगा मम शरणम से जा संभव ही नहीं है क्योंकि

1484
01:46:42,720 --> 01:46:47,560
माम शब्द का ही अर्थ है मेरी मेरी मेरी शरण में हां

1485
01:46:47,560 --> 01:46:52,240
तो यदि उनकी शरण में कहना पड़ता यदि भगवान शिव के बारे में कह रहे भगवान श्री कृष्ण

1486
01:46:52,240 --> 01:46:56,720
त्वम भगवता शिवस शरणम ब्रज ऐसा कहते

1487
01:46:56,720 --> 01:47:01,360
तो उधर माम शब्द आता ही नहीं आता ही नहीं अच्छ

1488
01:47:01,360 --> 01:47:05,440
ठीक तो हमने आज कुछ मोटी मोटी चीजें

1489
01:47:05,440 --> 01:47:09,960
जानी कि पहली बात तो यह है कि जो इसका

1490
01:47:09,960 --> 01:47:14,000
बिल्कुल मूल अर्थ है ब्रज शब्द का वो ना जाना है

1491
01:47:14,000 --> 01:47:15,040
ना आना

1492
01:47:15,040 --> 01:47:19,040
है मूल अर्थ है गतिशील ये हमने

1493
01:47:19,040 --> 01:47:25,040
शास्त्र से देख लिया भैया है ना वेद में प्रमाण

1494
01:47:25,720 --> 01:47:30,400
तो जो मूल अर्थ है वो है

1495
01:47:30,400 --> 01:47:34,480
गतिशील ना जाना ना आना अब वह गति किस ओर होगी

1496
01:47:34,480 --> 01:47:39,240
यह डिपेंड करता है कि वह कहां पर यूज किया जा रहा है पहली बात

1497
01:47:39,240 --> 01:47:43,320
तो यह लकीर के फकीर कोई नहीं हो सकता कि नहीं जाना ही होगा हा जी

1498
01:47:43,320 --> 01:47:47,400
जी एक जो आप जो कह रहे हैं उसको मैं शास्त्र का प्रमाण भी

1499
01:47:47,400 --> 01:47:51,960
दे दूं तो कौन से शब्द का किस ग्रंथ में क्या अर्थ लेना है मानो

1500
01:47:51,960 --> 01:47:56,000
हरि एक शब्द उसका उसके संस्कृत में बहुत सारे अर्थ

1501
01:47:56,000 --> 01:48:00,280
है पांच ले लेते हैं हम इधर भगवान विष्णु सिंह जो होता है लायन

1502
01:48:00,280 --> 01:48:04,520
वो एक अर्थ है मर्कट अर्थ होता है अश्व अर्थ होता है

1503
01:48:04,520 --> 01:48:08,560
और इंद्र अर्थ होता है तो यह पांच अर्थ पांच अर्थ में

1504
01:48:08,560 --> 01:48:12,680
डिक्शनरी से मिल जाएंगे लेकिन किसी ग्रंथ में यद हरि शब्द का प्रयोग है

1505
01:48:12,680 --> 01:48:16,840
तो पांचों में से कौन सा चना है और कौन सा त्यागना है इसके

1506
01:48:16,840 --> 01:48:21,000
लिए अलग से निकष है शास्त्रों में जैसे एक मैं अभी छोटा सा कह देता

1507
01:48:21,000 --> 01:48:25,360
हूं प्रकर दकम तात्पर्य ग्राम ऐसे पंक्ति आई है शास्त्रों में

1508
01:48:25,360 --> 01:48:29,680
जो प्रकरण चल रहा है मतलब जो कांटेक्ट चल रहा है उस कांटेक्ट

1509
01:48:29,680 --> 01:48:30,280
के अनुसार

1510
01:48:30,280 --> 01:48:34,480
अर्थों का निर्णय हो जाएगा जैसे सैंधव शब्द है उसके तीन अर्थ

1511
01:48:34,480 --> 01:48:38,560
हो जाएंगे नमक अश्व क्योंकि सब सब अश्व का पूर्वज

1512
01:48:38,560 --> 01:48:42,840
व था मतलब उच्च शवा सिंधु से मतलब समुद्र

1513
01:48:42,840 --> 01:48:46,960
से वह उत्पन्न हुआ ना समुद्र मंथन के समय तो यह हो गया और

1514
01:48:46,960 --> 01:48:51,200
और एक अर्थ मिलता है सैंधव मतलब सिंधु देश का जो राजा होता है जयद्रथ

1515
01:48:51,200 --> 01:48:55,200
महाभारत के समय का य राजा हम जयद तो सैंधव शब्द के कुल मिलाकर

1516
01:48:55,200 --> 01:48:59,680
के तीन अर्थ हो गए नमक अश्व और जयद्रथ अब मानो

1517
01:48:59,680 --> 01:49:03,720
भोजन का समय है भोजन करने के लिए सब बैठे हैं और किसी

1518
01:49:03,720 --> 01:49:07,840
ने किसी को कह दिया जरा सैंधव लाओ भाई तो वह गया और

1519
01:49:07,840 --> 01:49:11,960
जाकर अश्व को ले लेकर आ गया तो सब हसने लगे उसके

1520
01:49:11,960 --> 01:49:16,040
ऊपर क्योंकि यद्यपि सैंधव शब्द का अर्थ अश्व होता

1521
01:49:16,040 --> 01:49:20,600
है लेकिन जो प्रकरण चल रहा है कांटेक्ट चल रहा है उसके अनुसार

1522
01:49:20,600 --> 01:49:24,920
यहां नमक अर्थ का ही विकार

1523
01:49:24,920 --> 01:49:29,440
होना क्या हम कहेंगे अनिवार्य है उसके अनुसार

1524
01:49:29,440 --> 01:49:33,640
अनिवार्य है तो उसके अनुसार ब्रज धातु के यद्यपि आना जाना गमन

1525
01:49:33,640 --> 01:49:37,840
करना क्योंकि अर्थ ही गतिशीलता है ना तो गति तो

1526
01:49:37,840 --> 01:49:41,840
अनंत प्रकार की हो सकती है इस लोक में कौन गति बताई जा रही है

1527
01:49:41,840 --> 01:49:45,280
इनकमिंग वाली गति बताई जा रही है यह दो

1528
01:49:45,280 --> 01:49:49,320
मुद्दों के आधार पर हमें पता चलता है पिछले वाला श्लोक मेरे ऊपर

1529
01:49:49,320 --> 01:49:53,360
जो सब कहानी कर दू आपने जो

1530
01:49:53,360 --> 01:49:57,520
भी बोला जी उसको समरा कर दूं आज हमने क्या क्या जाना सबसे पहली

1531
01:49:57,520 --> 01:50:01,760
बात है कि ब्रज का मूल अर्थ है गतिशील

1532
01:50:01,760 --> 01:50:06,640
वह गति आने में भी हो सकती है जाने में भी हो सकती है

1533
01:50:06,640 --> 01:50:10,720
दूसरी बात कि यदि वहां पर बात

1534
01:50:10,720 --> 01:50:14,800
हो रही है कि तू मेरी शरण में शरण से जा तो

1535
01:50:14,800 --> 01:50:18,800
मुक्ति भी वही देगा जिसकी शरण में जाओगे यह भी एक तार्किक बात

1536
01:50:18,800 --> 01:50:22,840
है वो अगली पंक्ति में कह रहे मैं तुझे मुक्त कर दूंगा अहम को

1537
01:50:22,840 --> 01:50:27,360
तो नहीं बोल दोगे अहम का अर्थ मैं तुझे मुक्त कर दूंगा

1538
01:50:27,360 --> 01:50:31,440
है ना तू चिंता मत कर तो मुक्ति देने वाले

1539
01:50:31,440 --> 01:50:35,480
कौन हुए वहां पर वही श्री कृष्ण नहीं तो

1540
01:50:35,480 --> 01:50:40,120
वो होता जिसकी श्रम वो तुझे मुक्त कर देगा पहली बात

1541
01:50:40,120 --> 01:50:44,520
दूसरी बात ये है कि पिछले वाले श्लोक में भी तू मुझको भज तू मेरा जजन कर

1542
01:50:44,520 --> 01:50:48,560
यह सब बातें कही है मेरा तो उससे भी कॉन्टेक्स्ट ये आएगा कि मेरे ही लिए यह

1543
01:50:48,560 --> 01:50:52,640
भी कर मेरे ही लिए मेरी शरण में आ उसी से लेना पड़ेगा

1544
01:50:52,640 --> 01:50:57,560
एकदम से नया नहीं आ जाएगा और तीसरी बात हमने ये जानी

1545
01:50:57,560 --> 01:51:00,320
कि यदि वो कहते कि मुझे

1546
01:51:00,320 --> 01:51:04,440
मेरी शरण से जा तो आप अंतर देख लीजिए कि क्या

1547
01:51:04,440 --> 01:51:08,440
क्या होता कौन-कौन से सेंटेंस बन रहे हैं अभी तो है मामे कम शरणम व्रज और

1548
01:51:08,440 --> 01:51:12,640
अगर मेरी शरण से जाने वाला बनता मेरी शरण से जा यह बनता तो

1549
01:51:12,640 --> 01:51:16,720
वो दो सेंटेंस आप बता दीजिए कौन-कौन से बन रहे हैं जी केवल मेरी

1550
01:51:16,720 --> 01:51:20,920
शरण से जा बनता तो त्वम मम शरत बज

1551
01:51:20,920 --> 01:51:25,480
यह बनता ठीक है अगर त्वम ना लगाए तो मम

1552
01:51:25,480 --> 01:51:29,960
शरणा मम शरणा व्रज व्रज हां

1553
01:51:29,960 --> 01:51:34,000
और एक और आपने बताया था जब शरणम जब वो शरणा शरणम यूज हो

1554
01:51:34,000 --> 01:51:38,040
जाएगा तो वहां वो क्या शब्द ब वो वाक्य क्या बनेगा वो बन जाएगा

1555
01:51:38,040 --> 01:51:42,040
वाक्य यदि किसी और का नाम ले रहे हैं वहां उसके शरण में जा

1556
01:51:42,040 --> 01:51:46,200
तो त्वम शिवस शरणम व्रज ऐसा हो जाए अच्छा

1557
01:51:46,200 --> 01:51:50,600
त्वम शिवस तो हम हटा देते हैं थोड़ी देर शिवस शरणम ब्रज

1558
01:51:50,600 --> 01:51:54,600
हा शरण जी तो कहने का मतलब ये है क्योंकि

1559
01:51:54,600 --> 01:51:58,600
यहां पर माम मम कह दिया इसलिए ही यहां पर ये सिद्ध हो गया कि वो अपनी

1560
01:51:58,600 --> 01:52:02,840
शरण में आने की बात कर रहे हैं अन्यथा वो या तो नाम लिया जाए तब वो दूसरे

1561
01:52:02,840 --> 01:52:07,480
की शरण में जाना सिद्ध होगा या फिर शरणा कहा जाए तब वो दूसरे की शरण में जाना

1562
01:52:07,480 --> 01:52:11,520
सिद्ध होगा है ना शरणा या फिर जिसकी शरण में

1563
01:52:11,520 --> 01:52:15,360
जाना है उसका नाम ठीक है उसका नाम तो ये आपको बहुत धन्यवाद दे रहे हैं

1564
01:52:15,360 --> 01:52:19,480
देखिए हमारे बहुत से दर्शक है जो आपको सुन रहे थे आपको बहुत ढेर सारी शुभकामनाएं

1565
01:52:19,480 --> 01:52:23,520
दी जा रही है है ना और देखिए

1566
01:52:23,520 --> 01:52:27,520
केवल इतना क और हम बहुत हम

1567
01:52:27,520 --> 01:52:31,600
बहुत जल्द अपनी संस्कृत क्लासेस भी लाने वाले हैं उमेश जी के साथ

1568
01:52:31,600 --> 01:52:36,040
निशुल्क तो हमारे भाई बहन बंधु सब पढ़ेंगे

1569
01:52:36,040 --> 01:52:40,040
संस्कृत ज्ञ बनेंगे और ऐसे पाखंड का मुह तोड़

1570
01:52:40,040 --> 01:52:44,520
उत्तर प्रस्तुत करेंगे और मुंह तोड़ उत्तर बाद में सबसे पहले अपना

1571
01:52:44,520 --> 01:52:49,080
अपना उत्थान करें अपना धर्म को जाने अपने ईश्वर को जाने

1572
01:52:49,080 --> 01:52:53,840
अपनी भगवत भक्ति में आगे बढ़े अब अपने वक्ति

1573
01:52:53,840 --> 01:52:58,080
जीवन का हा अब इन सब बातों का एक निचोड़

1574
01:52:58,080 --> 01:53:02,080
और दे दूं कि गगल है जो वो

1575
01:53:02,080 --> 01:53:06,360
हो सकता है कि आपको भाव वो ना बता पाए जो गुरु बताएगा

1576
01:53:06,360 --> 01:53:12,360
शास्त्रों का है ना मगर गल में जो नियम डाले जाएंगे

1577
01:53:15,280 --> 01:53:19,600
अष्टाध्यायी खानी नहीं करता है तो

1578
01:53:19,600 --> 01:53:23,720
आप जरा गल पर सर्च करके दिखा दीजिए वो ट्रांसलेशन गगल क्या करता

1579
01:53:23,720 --> 01:53:27,960
है मामे कम शरणम ब्रज का यह लोग बहुत गगल करवाते हैं आजकल कहते

1580
01:53:27,960 --> 01:53:32,160
कि उसम गगल करके देख लो सबसे बड़ा

1581
01:53:32,160 --> 01:53:36,160
तत्वदर्शी संत कौन है तो उसमें इन लोगों ने खूब साइट ड

1582
01:53:36,160 --> 01:53:40,440
बना रखी है तो उसमें लिख देते हैं हमने कहा अभी हम भी साइड बना दे तत्वदर्शी

1583
01:53:40,440 --> 01:53:44,760
तिरछा दर्शी संत कौन है तो वो भी फिर आने लगेगा कि संसार का तिरछा

1584
01:53:44,760 --> 01:53:50,760
दर्शी संत कौन है फिर तो यहां ये देखिए

1585
01:53:50,840 --> 01:53:55,320
ट्रांसलेशन बड़ा कर दि भैया से मामे कम

1586
01:53:55,320 --> 01:53:59,480
शरणम ब्रज तो यह कह रहे हैं गल इसका अर्थ करके

1587
01:53:59,480 --> 01:54:04,480
दे रहा है केवल मेरी शरण लो

1588
01:54:04,480 --> 01:54:08,520
अब ये गल किसी का पक्षधर नहीं है भैया उसको जो नियम

1589
01:54:08,520 --> 01:54:14,520
डाले जाते हैं यह

1590
01:54:19,560 --> 01:54:23,680
अष्टाध्यायी मामे कम शरणम ब्रज आपके पास अलग से गल उसम डाल

1591
01:54:23,680 --> 01:54:26,120
के देख लीजिए

1592
01:54:26,120 --> 01:54:30,400
तो यह हो गया मामे कम शरणम ब्रज आज हमने

1593
01:54:30,400 --> 01:54:34,120
बहुत विस्तार से जान

1594
01:54:34,120 --> 01:54:38,120
लिया हमने यह भी जान लिया कि शिवराम आपटे

1595
01:54:38,120 --> 01:54:42,120
जी का ज्ञान कहां तक का है और आज हमने जो बात की है वह किसकी की है

1596
01:54:42,120 --> 01:54:47,000
पाणिनी जी की शिवराम आपटे जीकी शरण में है

1597
01:54:47,000 --> 01:54:51,240
वहां से बात की तो आप कैसे

1598
01:54:51,240 --> 01:54:54,920
भी पकड़ ले

1599
01:54:54,920 --> 01:54:58,960
इस बात का ध्यान रखना है कि पीछे क्या बात चल रही थी इस सेंटेंस में आगे क्या बात चल

1600
01:54:58,960 --> 01:55:03,440
रही है कौन-कौन से शब्द की आवश्यकता है

1601
01:55:03,440 --> 01:55:07,680
और आपने बड़ा ही अच्छा विवेचन किया और अगर किसी को इनसे

1602
01:55:07,680 --> 01:55:11,680
संस्कृत में बात करनी हो तो वह भी आ सकता है यह

1603
01:55:11,680 --> 01:55:15,920
जानने के लिए संस्कृत ज्ञ है कि नहीं जो इनको काल का दूध

1604
01:55:15,920 --> 01:55:20,440
समझ रहा हो या और कुछ कह रहा

1605
01:55:20,440 --> 01:55:24,480
हो आपके रामपाल जी को संस्कृत बोलते हुए तो मैंने नहीं सुना

1606
01:55:24,480 --> 01:55:28,600
कभी हां एक दो बार अंग्रेजी बोलते हुए सुना था बहुत

1607
01:55:28,600 --> 01:55:32,880
ही हार्ड अंग्रेजी है उनकी

1608
01:55:32,880 --> 01:55:35,360
निमो

1609
01:55:35,360 --> 01:55:39,640
यस न्यूमरस को निमोस बोल रहे हैं

1610
01:55:39,640 --> 01:55:43,640
और भी एक दो शब्द सुने थे मुझे याद नहीं है हालांकि वह तत्वदर्शी है

1611
01:55:43,640 --> 01:55:47,800
पर भाषिक ज्ञान हो सकता है उनका अल्प हो नि

1612
01:55:47,800 --> 01:55:52,000
मोरिय बोल रहे थे न मोरिय न मोरिय पढ़ नहीं पा रहे

1613
01:55:52,000 --> 01:55:56,240
वीडियो देखा छोटा सा उसमें एक दो शब्द है उनका बड़ा ही गलत उच्चारण किया था

1614
01:55:56,240 --> 01:56:00,280
अर्थ करना तो दूर की बात

1615
01:56:00,280 --> 01:56:04,880
है तो ठीक है उमेश जी आपको आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

1616
01:56:04,880 --> 01:56:09,000
जी जी आपने आकर के बहुत सारा प्रकाश डाल दिया धन्यवाद

1617
01:56:09,000 --> 01:56:13,280
जी पाड़ी जी को आप बात करना चाहते हैं जी जी जी हर हर महादेव

1618
01:56:13,280 --> 01:56:17,320
सभी लोग हर हर महादेव जी जी राज जी

1619
01:56:17,320 --> 01:56:23,320
जी भैया हम लोगों ने एक बात की थी ना एक वर्ड

1620
01:56:25,480 --> 01:56:29,600
एक मिनट एक मिनट एक्साइटेड है दोनों पहले राजा राय

1621
01:56:29,600 --> 01:56:33,600
जी आप रख लीजिए अप जी आचार्य जी

1622
01:56:33,600 --> 01:56:37,920
एक भागवत का एक श्लोक है दशम स्कंद का जो प्रारंभ हो रहा है शुरुआत

1623
01:56:37,920 --> 01:56:43,920
में तो उसमें एक वर्ड है शब्द है कथ तो वंश

1624
01:56:43,960 --> 01:56:47,960
विस्तार तो उसमें कुछ लोगों को दवारा आक्षेप किया गया कि ये पद अशुद्ध लिखा

1625
01:56:47,960 --> 01:56:52,320
गया है और उसम जो उनका जो पक्ष है वो मैं आपको सुनाना चाहूंगा वो मैंने शिवा

1626
01:56:52,320 --> 01:56:56,400
आपको किया स्क्रीन पर दिखा के आचार जी को दिखा दीजिए अरे मेरा फोन

1627
01:56:56,400 --> 01:57:01,240
तो बिजी है इस समय अरे अलग से मैं आपको नंबर दे दूंगा इनको

1628
01:57:01,240 --> 01:57:05,440
आप करवा ली अच्छा ठीक है थैंक यू थैंक यथ हो

1629
01:57:05,440 --> 01:57:09,800
मेरा हो गया पहाड़ी पहाड़ी जी बोलिए इने

1630
01:57:09,800 --> 01:57:13,920
क्या बोला सुनाई नहीं दिया अरे उन इने अर्थ कर रखा

1631
01:57:13,920 --> 01:57:15,320
उसकी शरण में जा वहां पर

1632
01:57:15,320 --> 01:57:20,120
उस शब्द डाल रखा है यहां पर जबक पूरे श्लोक में उस शब्द तो है ही नहीं

1633
01:57:20,120 --> 01:57:24,360
मेरी शरण से जा नहीं बोला है इन लोगों ने लिखा है उसकी शरण में जा

1634
01:57:24,360 --> 01:57:28,800
हा तो अच्छा हा ये और बहुत अच्छी बात आपने य दिला दी

1635
01:57:28,800 --> 01:57:33,120
उसकी उसकी उसकी का संस्कृत है क्या इसमें श्लोक में

1636
01:57:33,120 --> 01:57:37,800
नहीं नहीं पूरे श्लोक में कहीं भी नहीं है अगर

1637
01:57:37,800 --> 01:57:42,160
अगर कहेंगे उसकी शरण में जा तो संस्कृत क्या बनेगी तो हम पता च

1638
01:57:42,160 --> 01:57:46,200
किसकी शरण में जा जी तो जब हमने पहले बात की थी

1639
01:57:46,200 --> 01:57:50,200
ना सहा सहा मतलब वो आदमी यदि उसकी

1640
01:57:50,200 --> 01:57:54,680
कहेंगे तो तस्य हो जाएगा शरण बज

1641
01:57:54,680 --> 01:57:59,760
अब तो हमें पता भी चल गया कि किसकी शरण में जाना है उसकी शरण में जाना

1642
01:57:59,760 --> 01:58:03,800
है मैं भी कहना चाह रहा हूं आचार्य जी बहुत बढ़िया

1643
01:58:03,800 --> 01:58:09,800
पड़ी जी ने ब बहुत बढ़िया पॉइंट याद दिलाया बहुत बढ़िया वाह

1644
01:58:09,920 --> 01:58:14,440
ब जी जी जी प उसम सर्व

1645
01:58:14,440 --> 01:58:18,600
धर्मानी माम शरणम रत लिखा है ना जो माम कम एक

1646
01:58:18,600 --> 01:58:23,720
साथ है वो माम जो शब्द है वहा से काट शुरू में ले जाते हैं

1647
01:58:23,720 --> 01:58:27,760
माम एकम एक साथ है ना जो माम शब्द है एकम से काट के वो शुरू में ले

1648
01:58:27,760 --> 01:58:31,880
जाते हैं उसको संधि विच्छेद करके तो देखिए वो कुछ भी वो कुछ

1649
01:58:31,880 --> 01:58:36,800
भी ले आए वो वो कुछ भी ले आए मगर तक्ष शब्द तो नहीं है ना

1650
01:58:36,800 --> 01:58:40,920
उसकी मेरा तो तक है मगर उसकी शरण उसका

1651
01:58:40,920 --> 01:58:45,560
तो संस्कृत है ही नहीं जी पहाड़ी जी मैं एक बात बोल देता हूं जैसे शि

1652
01:58:45,560 --> 01:58:49,680
बो पड़ी जी वो भी बोल रहे हैं कि वो क्रम बदल देते तोड़ने के बाद संधि करने के बाद

1653
01:58:49,680 --> 01:58:53,880
उधर ले जाते उसका उत्तर देता हूं जो शिवा जी ने अभी कहा

1654
01:58:53,880 --> 01:58:58,000
क्रम यद्यपि बदल दिया उन्होंने फिर भी जो उनको अभिप्रेत

1655
01:58:58,000 --> 01:59:02,120
शब्द है वह श्लोक में ही नहीं है तो तो उत्पन्न तो

1656
01:59:02,120 --> 01:59:06,240
नहीं कर सकते अलग से यदि क्रम बदल भी दिया माम शब्द को पहले

1657
01:59:06,240 --> 01:59:10,400
ले भी गए तो श्लोक क्या होगा माम

1658
01:59:10,400 --> 01:59:14,440
एक बार यदि लोक दिख सके स्क्रीन पर उसकी क्या शुरुआत है मतलब दर्शक

1659
01:59:14,440 --> 01:59:18,600
भी देख पाए पूरा श्लोक वो दिखा दीजिए जरा शलोक

1660
01:59:18,600 --> 01:59:24,600
दिखा दीजिए

1661
01:59:26,120 --> 01:59:30,400
इनका पूरा अर्थ है ऐसा मेरी पूजा मुझ में त्याग कर केवल तू उस

1662
01:59:30,400 --> 01:59:34,480
परमात्मा की शरण में चले जा मैं वो तुझे समस्त

1663
01:59:34,480 --> 01:59:38,520
पाप मैं तुझे समस्त पापों से छुड़वा दूंगा शोक मत

1664
01:59:38,520 --> 01:59:42,600
कर य अनकी गता जी जी

1665
01:59:42,600 --> 01:59:46,800
व उसी अर्थ का हम अभी मतलब बात करेंगे यदि श्लोक दिखे तो अरे वो स्क्रीन

1666
01:59:46,800 --> 01:59:50,960
पर दिखा दीजिए वो तीन श्लोक थे ना भगवत गीता के मामे कम शरणम ब्रज

1667
01:59:50,960 --> 01:59:56,960
वाला 18 सर वो आपके पास तीन श्लोक थे ना वो दिखा

1668
02:00:00,480 --> 02:00:04,920
दीजिए आप सही समय पर आए हैं आज

1669
02:00:04,920 --> 02:00:10,920
हां सही समय पर आए बोलना हूं पंडित

1670
02:00:12,520 --> 02:00:17,040
जी नहीं ये बहुत फैला है इस ब्रज वाला

1671
02:00:17,040 --> 02:00:21,040
ब्रज वाला रायता बहुत फैलाया है अ

1672
02:00:21,040 --> 02:00:24,320
मैं कुछ कह सकता हूं

1673
02:00:24,320 --> 02:00:28,680
हा हा बो पंत जी हा जी क कह रहा था दुर्जन

1674
02:00:28,680 --> 02:00:33,160
तोष न्याय से यद मान भी लिया जाए कि आपके ब्रज का अर्थ जाना ही है

1675
02:00:33,160 --> 02:00:37,160
तब भी जो माम एकम कह रहे उसको क्या किया जाए माम एकम

1676
02:00:37,160 --> 02:00:41,600
आना पड़ेगा उसम ही जाना पड़ेगा माम उसी में जाना पड़ेगा हालाकि

1677
02:00:41,600 --> 02:00:45,720
वो बोलने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा मगर गया तो वो किसम मामे कम

1678
02:00:45,720 --> 02:00:51,720
शरण मेरी शरण में आया

1679
02:00:53,600 --> 02:00:59,600
उसम वो लोग ये तर्क देते हैं कि श्री कृष्ण तो सामने ही खड़े हैं तो

1680
02:01:00,760 --> 02:01:04,800
वहा मैं उतर जी

1681
02:01:04,800 --> 02:01:09,120
जी जी मैं इसका उत्तर दूंगा कि पहली बात तो यह

1682
02:01:09,120 --> 02:01:13,280
है कि अगर कोई व्यक्ति धर्म

1683
02:01:13,280 --> 02:01:18,080
को जानने के लिए इनके रामपाल दास जी के पास जाएगा क्या धर्म है वो कहेगा

1684
02:01:18,080 --> 02:01:22,080
कि भाई मैं आपकी शरण में आया हूं और मुझे बताइए धर्म और धर्म क्या क्या

1685
02:01:22,080 --> 02:01:26,120
है वो उन्होंने पूरा व्याख्या कर दी धर्म और अधर्म लास्ट में उन्होंने

1686
02:01:26,120 --> 02:01:30,120
बताया तु सारे धर्मों का निचोड़ बताऊ कि तू सब छोड़ दे मेरी शरण मेंही

1687
02:01:30,120 --> 02:01:34,720
आजा आजा मेरी शरण में आजा ये कह सकते हैं उनके गुरु

1688
02:01:34,720 --> 02:01:38,840
अच्छा अब दूसरी बात अगर ऐसी बात है कि बा बात को

1689
02:01:38,840 --> 02:01:43,440
पकड़ना ही है आपको अपने हिसाब से करना है

1690
02:01:43,440 --> 02:01:48,280
तो जब कबीर स्वयं परमेश्वर है

1691
02:01:48,280 --> 02:01:52,920
है ना तो वो मांग किससे रहे हैं

1692
02:01:52,920 --> 02:01:57,120
कबीर स्वयं परमेश्वर है मांग किससे रहे हैं साई इतना

1693
02:01:57,120 --> 02:02:02,000
दीजिए किससे मांग रहे हैं कोई और परमेश्वर

1694
02:02:02,000 --> 02:02:06,080
है है ना परमेश्वर फिर कोई

1695
02:02:06,080 --> 02:02:08,680
और सिद्ध हो गया अरे इनका बताया था

1696
02:02:08,680 --> 02:02:12,680
ना जो बच्चा बोलता है ना यह व्यक्ति कौन है तो बोले य पापा है

1697
02:02:12,680 --> 02:02:17,240
तो आप तो कह रहे थे कि रमेश पापा ही रमेश है

1698
02:02:17,240 --> 02:02:22,440
ये बात नहीं हो सकती रमेश तो कोई और है आपने पहले बोला था

1699
02:02:22,440 --> 02:02:26,720
पापा रमेश नहीं है रमेश कोई और है

1700
02:02:26,720 --> 02:02:31,640
पहाड़ी जी का जो मुद्दा था वो मैं कंप्लीट कर दूं जो माम य

1701
02:02:31,640 --> 02:02:36,440
क्रम बदल भी ले तो भी अरे ऑपरेटर

1702
02:02:36,440 --> 02:02:41,400
महोदय लोक दिखा

1703
02:02:41,400 --> 02:02:45,520
दीजिए अच्छा ये लोक य देख लीजिए आप ये पढ़ लीजिए हा

1704
02:02:45,520 --> 02:02:49,600
जी ये देखो माम पहले आ गया तो क्या हो गया श्लोक

1705
02:02:49,600 --> 02:02:53,880
माम सर्व धर्मा परिज एकम शरणम बज संस्कृत व्याकरण

1706
02:02:53,880 --> 02:02:58,240
का एक वैशिष्ट्य है बहुत बड़ा कि जैसे फॉर एग्जांपल अंग्रेजी भाषा में आई

1707
02:02:58,240 --> 02:03:02,280
ट मैंगो मतलब मैं आम को खाता हूं यहां यदि क्रम

1708
02:03:02,280 --> 02:03:06,640
बदल गया तो आम मुझे खाता है ऐसा हो जाएगा अर्थ हो सकता है

1709
02:03:06,640 --> 02:03:10,640
संस्कृत व्याकरण में ऐसा संभव ही नहीं होता क्योंकि संस्कृत में

1710
02:03:10,640 --> 02:03:14,680
सात विभक्ति हों का प्रयोग होता है जहां विभक्ति होती है

1711
02:03:14,680 --> 02:03:19,280
वहां आप क्रम किधर भी मतलब कोई भी शब्द किधर भी लिख लो

1712
02:03:19,280 --> 02:03:23,520
इसीलिए तो संस्कृत भाषा में पद्य रचना संभव है

1713
02:03:23,520 --> 02:03:27,560
कर्ता पहले आ गया क्रियापद बा बाद में आ गया पहले क्रियापद ले लिया

1714
02:03:27,560 --> 02:03:31,680
फिर बीच में कर्ता ले लिया कर्म किधर चला गया फर्क ही नहीं पड़ता

1715
02:03:31,680 --> 02:03:35,880
क्योंकि सब शब्द पूरे के पूरे जो शब्द होते हैं वाक्य के

1716
02:03:35,880 --> 02:03:40,000
हर एक शब्द को अपना अपना रोल पता होता है तो इसलिए उन्होंने

1717
02:03:40,000 --> 02:03:44,080
यदि माम पहले भी ले लिया तो भी मतलब एक

1718
02:03:44,080 --> 02:03:49,520
परसेंट का भी फर्क नहीं पड़ेगा अर्थ अर्थ करते

1719
02:03:49,520 --> 02:03:53,640
समय आचार जी प्रश्न पूछ सकता

1720
02:03:53,640 --> 02:03:56,560
हूं जी जी अ ये मैंने

1721
02:03:56,560 --> 02:04:00,600
सुना आर प्रयोग क्या होता है आरस प्रयोग मतलब इस शास्त्र को में आ प्रयोग

1722
02:04:00,600 --> 02:04:04,720
है इस व्याकरण के नियम चलेंगे ऐसा क्या होता है हा नहीं आर्

1723
02:04:04,720 --> 02:04:08,720
जो शब्द है तो वो किसी और शब्द से बना है जैसे दशरथ शब्द

1724
02:04:08,720 --> 02:04:12,720
है उससे बना दशरथ शब्द से शब्द बन

1725
02:04:12,720 --> 02:04:17,240
गया नाम से नाम बन गया ठीक ऐसा मूल शब्द है ऋषि

1726
02:04:17,240 --> 02:04:21,960
ऋषि शब्द से और एक शब्द बन गया आर्ष तो

1727
02:04:21,960 --> 02:04:26,040
शब्द का अर्थ होता है ऋषि प्रणित इसी ऋषि के द्वारा जिसका प्रयोग

1728
02:04:26,040 --> 02:04:30,040
किया गया है वैसा फॉर एग्जांपल यदि राम शब्दों

1729
02:04:30,040 --> 02:04:34,880
को हमने ले लिया देव शब्दों को ले लेते हैं एकदम सुलभ हो जाएगा

1730
02:04:34,880 --> 02:04:39,160
जिसको व्याकरण का ज्ञान मतलब नहीं होगा शायद किसी को उसको भी

1731
02:04:39,160 --> 02:04:43,480
थोड़ा सा पता चल जाएगा देवा देव देवा

1732
02:04:43,480 --> 02:04:47,680
यह हो गया उसका रूप देव शब्द का तो हम यदि वेद में चले

1733
02:04:47,680 --> 02:04:51,800
जाएंगे वैदिक संस्कृत में क्योंकि वैदिक

1734
02:04:51,800 --> 02:04:55,920
संस्कृत और लौकिक संस्कृत दो अलग संस्कृत भाषाएं है ही नहीं केवल कुछ

1735
02:04:55,920 --> 02:05:00,160
रूप ऐसे हैं जो केवल वेद में प्रयोग किए जा सकते हैं पाण

1736
02:05:00,160 --> 02:05:04,520
जी का सूत्र भी है सर्वे विध छंद विकल्प अंते तो य

1737
02:05:04,520 --> 02:05:08,520
अलग बात हो जाएगी यह मैंने यह बता दिया ऐसा भी एक पक्ष

1738
02:05:08,520 --> 02:05:11,720
रखते हैं लोग आजकल कि संस्कृत भाषाएं दो थी एक

1739
02:05:11,720 --> 02:05:15,840
लौकिक वाली एक वैदिक वाली तो उसका खंडन पाणिनी जी के सूत्र से ही हो जाता है

1740
02:05:15,840 --> 02:05:20,080
ठीक बात तो कुछ शब्द केवल ऐसे होते हैं जिनका प्रयोग

1741
02:05:20,080 --> 02:05:25,480
व्यवहार में नहीं करना होता है कुछ रूपों का

1742
02:05:25,480 --> 02:05:29,560
वैसा एक बार आज जो मूल चर्चा जो हो रही है उस पर थोड़ा

1743
02:05:29,560 --> 02:05:33,720
सा ध्यान दिला दूं पहली बात कि

1744
02:05:33,720 --> 02:05:37,880
मामे कम शरणम ब्रज में जो पीछे वाला जो श्लोक है उसम बारबार मेरी

1745
02:05:37,880 --> 02:05:41,960
पूजा कर मेरा यजन कर मुझे प्राप्त हो मेरी भक्ति कर ये सब बता रहे हैं

1746
02:05:41,960 --> 02:05:46,560
उसी क्रम में आगे की बात सुननी जाएगी दूसरी बात

1747
02:05:46,560 --> 02:05:50,600
कि मामे कम जो ब्रज शब्द है उसका अर्थ ना

1748
02:05:50,600 --> 02:05:55,120
जाना है केवल आना है उसका अर्थ है मूल गतिशील

1749
02:05:55,120 --> 02:05:59,200
और वो जो गतिशील है वो किसी भी दिशा में हो सकता है जाने में भी

1750
02:05:59,200 --> 02:06:02,360
और आने में भी

1751
02:06:02,360 --> 02:06:07,920
दूसरा दूसरा क्या है

1752
02:06:07,920 --> 02:06:12,200
कि उससे ठीक अगले में भगवान कह रहे हैं कि मैं तुझे

1753
02:06:12,200 --> 02:06:16,240
सभी बंधनों से मुक्त कर दूंगा जबकि यदि किसी और की शरण में जाने

1754
02:06:16,240 --> 02:06:20,480
को कह रहे हैं तो वहां परना चाहिए था कि वो तुझे सभी मरणों वो उससे

1755
02:06:20,480 --> 02:06:24,640
मुक्त करे कर देगा दूसरी बात इन्होंने यहां पर एक शब्द अपनी ओर से ऐड किया

1756
02:06:24,640 --> 02:06:30,040
है उसकी जब हम बात करते हैं उसकी तो उसकी को

1757
02:06:30,040 --> 02:06:34,080
उपित करने वाला कोई भी संस्कृत शब्द वहां पर नहीं है जो जैसा कि इन्होने

1758
02:06:34,080 --> 02:06:38,480
बताया तस्य है ना जैसे इन्होंने पहले कहा था

1759
02:06:38,480 --> 02:06:42,480
शव शरणम ब्रज यह कहा था ना आपने शिवस

1760
02:06:42,480 --> 02:06:45,480
शरणम ब्रज

1761
02:06:45,480 --> 02:06:49,320
जोने है ना शिवस

1762
02:06:49,320 --> 02:06:53,360
शिवस और अगर वहा पर उसकी बोल रहे तो वहा आना चाहिए तस

1763
02:06:53,360 --> 02:06:57,480
शरणम ब्रज वहा पर आया मामे कम शरणम ब्रज ठीक है और ब्रज

1764
02:06:57,480 --> 02:07:01,480
क्योंकि गतिशील है तो गतिशील हो जा भाई मेरी ओर हो जा क्योंकि वहा मामे

1765
02:07:01,480 --> 02:07:05,480
कम कह रहे हैं और इसके इसके अलावा मेरी

1766
02:07:05,480 --> 02:07:10,080
शरण से जा उसकी शरण में जा नहीं अब अगर बात करें मेरी शरण से जा

1767
02:07:10,080 --> 02:07:14,960
तो आएगा य पर मामे कम ब्रज

1768
02:07:14,960 --> 02:07:18,840
है ना जी और

1769
02:07:18,840 --> 02:07:23,120
एक मत मत शरणम ब्रज और एक आपने

1770
02:07:23,120 --> 02:07:27,320
बताया था पंक्ति म मत शरणम ब्रज और एक आपने

1771
02:07:27,320 --> 02:07:31,480
बताया था मामे कम शरणा

1772
02:07:31,480 --> 02:07:36,560
व्रज शरणा मम श

1773
02:07:36,560 --> 02:07:42,480
हा मम शरणा ब्रज और एक आएगा मत

1774
02:07:42,480 --> 02:07:46,480
शरण हा अब इसके बाद एक बात य आती है

1775
02:07:46,480 --> 02:07:50,600
कि वो तो पहले से ही भगवान की शरण में है तो फिर

1776
02:07:50,600 --> 02:07:54,680
वो क्यों रहे हैं तो फिर वहा पर बात आ जाती है कि भाई कबीर दास

1777
02:07:54,680 --> 02:07:59,320
जी पहले से ईश्वर है फिर वो क्यों मांग रहे हैं कि साई इतना दीजिए

1778
02:07:59,320 --> 02:08:03,360
या रामपाल दास जी स्वयं को कह रहे कि मैं ईश्वर हूं

1779
02:08:03,360 --> 02:08:07,400
और वो कह रहे है कि मैं तुच प्राणी हूं दो कौड़ी का हूं ये सब बातें क्यों कर रहे

1780
02:08:07,400 --> 02:08:11,600
हैं दूसरी बात कि जो अर्जुन

1781
02:08:11,600 --> 02:08:15,800
है वो व्यवहारिक तौर पर उसने ये जानते हुए

1782
02:08:15,800 --> 02:08:19,920
कि वो अपने सखा से बात कर रहा है वो जो है

1783
02:08:19,920 --> 02:08:24,520
अभी कुछ जानता नहीं है उस जानने को लेकर के शरण में आया है

1784
02:08:24,520 --> 02:08:28,880
अर्जुन जो है जानने को लेकर के शरण में आया है मगर जब वो भगवान

1785
02:08:28,880 --> 02:08:32,920
ने उसे अपना विराट स्वरूप दिखा दिया अपने बारे में यत्र तत् सर्वत्र मैं

1786
02:08:32,920 --> 02:08:33,880
ही मैं हूं सब कुछ

1787
02:08:33,880 --> 02:08:38,120
बता दिया उसके बाद जब वो जब वो उन्होंने अपने बारे में यथा

1788
02:08:38,120 --> 02:08:42,200
सामर्थ्य जो चीजें थी जो अर्जुन समझ सकता था उनके बारे में वो सब

1789
02:08:42,200 --> 02:08:46,280
जब बता दिया तब उन्होंने तब कहा कि अब तू मेरे इस रूप की

1790
02:08:46,280 --> 02:08:50,280
शरण में आजा जो मैंने तुझे अब बता दिया जिस रूप को उन्होंने

1791
02:08:50,280 --> 02:08:54,280
गीता में बताया अपने अब वो बोल रहे हैं कि अब तू मेरी इस रूप

1792
02:08:54,280 --> 02:08:58,520
की शरण में आ प्रॉपर और शरण में आने का मतलब क्या है मेरी

1793
02:08:58,520 --> 02:09:02,960
भक्ति कर मेरी पूजा कर मेरे लिए यजन कर

1794
02:09:02,960 --> 02:09:07,200
पहले वो जो अर्जुन था वो भगवान की भक्ति नहीं कर रहा था पहले

1795
02:09:07,200 --> 02:09:11,240
वो सखा रूप में था पहले जो अर्जुन था वो भगवान

1796
02:09:11,240 --> 02:09:15,320
के परब्रह्म को नहीं जानता था मगर यहां पर भगवान ने पूरी गीता में अपनी

1797
02:09:15,320 --> 02:09:19,320
परब्रह्म को सिद्ध किया उसको बताया और फिर उससे कहा कि तू सब

1798
02:09:19,320 --> 02:09:25,320
कुछ अब ध्यान मत दे अब तू मेरी आ जा ठीक

1799
02:09:25,400 --> 02:09:29,520
है हा एक लोग कह रहे हैं माम का अर्थ करते हैं

1800
02:09:29,520 --> 02:09:35,520
उनका उनका नहीं माम शब्द दो बार यज कर

1801
02:09:35,560 --> 02:09:40,080
रखा के अनुसार पूरा का पूरा असंभव है नाम

1802
02:09:40,080 --> 02:09:44,600
का संभव ही नहीं ठीक है भैया

1803
02:09:44,600 --> 02:09:48,800
तो कोई हो तो आ जाओ अब जा रहे हैं उन्म शर्मा जी ने अपना

1804
02:09:48,800 --> 02:09:52,880
समय दिया और आवान के साथ बहुत ही गुण रूप

1805
02:09:52,880 --> 02:09:57,160
से बहुत ही महत्त्वपूर्ण सदस्य के रूप में प्रभारी के रूप में

1806
02:09:57,160 --> 02:10:02,640
और पदाधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं बहुत सहयोग है आप

1807
02:10:02,640 --> 02:10:06,680
आपका जो हमें है आपसे बहुत सहयोग प्राप्त है आपका बहुत ढेर सारा

1808
02:10:06,680 --> 02:10:10,840
आभार आज आपने इस पर बहुत त विवेचना की बहुत अच्छे से

1809
02:10:10,840 --> 02:10:15,040
और अंततोगत्वा जो मोटी बुद्धि के लोग

1810
02:10:15,040 --> 02:10:19,080
है उनको समझ में आ जाएगा गल पर जाकर के डाल दो मामे कम शरणम ब्रज

1811
02:10:19,080 --> 02:10:22,680
उनको जो है समझ में आ जाएगा

1812
02:10:22,680 --> 02:10:26,680
रामपाल दास जी आपको संस्कृत के कुछ सवाल करने हैं क्या उन्मे

1813
02:10:26,680 --> 02:10:31,200
शर्मा जी

1814
02:10:31,200 --> 02:10:35,400
से संस्कृत का य ब्रज वाला जो है ये समझ

1815
02:10:35,400 --> 02:10:40,000
में नहीं आता मत जाना जाने का जाने होना चाहिए

1816
02:10:40,000 --> 02:10:44,080
नहीं नहीं पहले य बताइए कि आपको यह विश्वास है कि नहीं कि

1817
02:10:44,080 --> 02:10:48,880
संस्कृत के ज्ञाता है आपको संस्कृत का ज्ञान है

1818
02:10:48,880 --> 02:10:53,000
क्या परमात्मा की जो आत्मा हिसाब से तो सही देगी ना वो उत्तर

1819
02:10:53,000 --> 02:10:57,000
अब देखो मैं आपसे पूछ रहा हूं आप देखिए बाकी की बातें

1820
02:10:57,000 --> 02:11:01,040
मुझसे करिएगा मैं आपको ये पूछ रहा हूं आपको संस्कृत वाला कोई

1821
02:11:01,040 --> 02:11:07,040
मामला करना है इनसे पूछना व्याकरण इत्यादि के

1822
02:11:07,080 --> 02:11:11,120
संबंधित बता उत्तम पुरुष वाला था व

1823
02:11:11,120 --> 02:11:15,360
सम भाई साब ये उसके लिए नहीं है मैं आपसे पूछ रहा हूं यदि आपको इनकी

1824
02:11:15,360 --> 02:11:19,520
संस्कृत जता पर आपको इनके संस्कृत होने पर कोई

1825
02:11:19,520 --> 02:11:23,640
डाउट है उस संबंध आप कोई विवेचना कोई जानकारी करना चाहते हैं इनसे

1826
02:11:23,640 --> 02:11:28,000
बातचीत करना चाहते हैं संस्कृत में इनसे बात करना चाहते हैं तो आप करिए

1827
02:11:28,000 --> 02:11:32,400
अन्यथा फिर हम लोग है य पर आपके

1828
02:11:32,400 --> 02:11:37,480
लिए ना भगत जी मैं इतना पढ़ लि चौ तक पढ़ लिखा

1829
02:11:37,480 --> 02:11:41,560
हूं हु ठीक है अब हम

1830
02:11:41,560 --> 02:11:45,720
लोग आपसे बात कर लेंगे ब्रज शब्द को आज हमने अच्छे से जान लिया भाई

1831
02:11:45,720 --> 02:11:49,760
ज्यादा से ज्यादा शेयर करिएगा और फिर से

1832
02:11:49,760 --> 02:11:53,920
मैं कह रहा हूं हमें आप लोगों का अब आप लोगों का समय आ गया है दायित्व

1833
02:11:53,920 --> 02:11:57,960
हाथ में ले कम से कम लाइक अवश्य करें

1834
02:11:57,960 --> 02:12:02,000
और यदि सामर्थ है 9 रप से कम से कम मेंबरशिप अवश्य ले

1835
02:12:02,000 --> 02:12:06,080
ले चैनल की क्योंकि चैनल पर आघात हो रहे हैं हमारे इस अभियान

1836
02:12:06,080 --> 02:12:10,160
को रोकने का प्रयास किया जा रहा है तो यब

1837
02:12:10,160 --> 02:12:14,280
को यह संदेश पहुंचे कि इनके

1838
02:12:14,280 --> 02:12:18,400
वीडियोस जो उसको सूचना पहुंचाई जा रही है कि भाई ये

1839
02:12:18,400 --> 02:12:22,200
इनके वीडियो नकारात्मक है तो आपके लाइक से आपके मेंबरशिप

1840
02:12:22,200 --> 02:12:26,320
से उसको सूचना पहुंचेगी कि

1841
02:12:26,320 --> 02:12:30,760
यह जो चैनल है वह पॉजिटिव है ठीक है तो आपको अपना दायित्व

1842
02:12:30,760 --> 02:12:35,240
निभाना है आपकी बारी है हमने काफी किया है

1843
02:12:35,240 --> 02:12:39,360
जी अब उनमे जी आप चाहे तो आप लीव कर सकते

1844
02:12:39,360 --> 02:12:45,360
हैं आपने काफी समय दे दिया है आप लीव कर सकते बहुत

1845
02:12:46,240 --> 02:12:52,240
बहुत जी और जल्द ही हम आपकी

1846
02:12:55,320 --> 02:12:59,800
जी जल्द ही हम आपके साथ क्ला का प्रकल्प लाएंगे

1847
02:12:59,800 --> 02:13:05,800
जिससे कि हर आम जन को संस्कृत का ज्ञान हो जाए है

1848
02:13:05,960 --> 02:13:10,040
ना हमय प्रकल्प और आज विवेचन

1849
02:13:10,040 --> 02:13:14,160
से जिनको ब शब्द के बारे में भ्रांति थी उनकी

1850
02:13:14,160 --> 02:13:18,200
भ्रांति दूर हो गई होगी ऐसी आशा है उस आशा

1851
02:13:18,200 --> 02:13:22,320
के साथ में अभी

1852
02:13:22,320 --> 02:13:26,320
जी बहुत बहुत आभार आपका जी जय

1853
02:13:26,320 --> 02:13:32,320
श्री राम जय श्री

1854
02:13:32,680 --> 02:13:36,720
राम तो रामपाल दास जी आप अपना अन

1855
02:13:36,720 --> 02:13:42,320
म्यूट कर लीजिए कुवारी गाय वाला आज करते

1856
02:13:42,320 --> 02:13:46,400
हैं हां गुरुकुल गोविंद जी तो

1857
02:13:46,400 --> 02:13:50,480
मैं ये पूछ रहा था मैं उसी के लिए बैठा हू आज कुवारी गाय

1858
02:13:50,480 --> 02:13:54,640
का एक बार विवाह करवा ही देते हैं बहुत देर से कुवारी है

1859
02:13:54,640 --> 02:13:58,880
इनकी वाली हमारी वाली नहीं हमारी तो आदी है इनकी कुवारी

1860
02:13:58,880 --> 02:14:04,320
गाय का आज विवाह करवा जी जी रामपाल दास जी मैं आपको

1861
02:14:04,320 --> 02:14:08,640
बोलूंगा कि आपकी ओर से एक बात क्लेम की जाती

1862
02:14:08,640 --> 02:14:13,040
है कि वह जो ईश्वर

1863
02:14:13,040 --> 02:14:17,400
है वह शिशु रूप में आता है और वो कुंवारी

1864
02:14:17,400 --> 02:14:21,120
गाय का दूध पीता है यह बात कहां

1865
02:14:21,120 --> 02:14:27,120
से किस आधार पर आप बोलते

1866
02:14:30,400 --> 02:14:35,160
हैं आपकी आवाज नहीं आ रही

1867
02:14:35,160 --> 02:14:39,200
मैं कह रहा गरी द जी ग्र है ना उसम भी लिख रही है कवि सागर में भी लिखा

1868
02:14:39,200 --> 02:14:43,240
हुआ है नहीं नहीं नहीं जैसे

1869
02:14:43,240 --> 02:14:47,760
आप बोलते वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है

1870
02:14:47,760 --> 02:14:52,000
वो है कुछ ऐसा इशारा भगत

1871
02:14:52,000 --> 02:14:57,120
दिखा रहे या गुरुजी ने दिखाया है ऋगवेद

1872
02:14:57,120 --> 02:15:01,480
में मतलब इसका प्रमाण वेदों में नहीं है वेदों

1873
02:15:01,480 --> 02:15:05,520
में है मालिक की महिमा इशारा मात्र उने कहा कबीर

1874
02:15:05,520 --> 02:15:09,560
वेद मेरा वेद

1875
02:15:09,560 --> 02:15:14,360
हैद में प्रमाण है देखिए ऐसा है मेरी बात सुनिए

1876
02:15:14,360 --> 02:15:18,800
आप सज्जन ति अच्छे से बात करते आप अच्छे लगते हैं मैं ये कह रहा हूं

1877
02:15:18,800 --> 02:15:22,840
वेद में इस बात का प्रमाण है कि जो ईश्वर है वो

1878
02:15:22,840 --> 02:15:27,400
आता है शिशु रूप में और कुमारी गाय का दूध पीता

1879
02:15:27,400 --> 02:15:31,640
है भगत जी उन में हैय ज कबीर सागर है या फ ग

1880
02:15:31,640 --> 02:15:36,320
जी महाराज जी ग्रंथ उम है भाई साहब वेदों में नहीं है ना

1881
02:15:36,320 --> 02:15:40,480
वेदों में है इशारा मात्र बताया आपको इशारा मात्र है उसम

1882
02:15:40,480 --> 02:15:44,480
कहां पे इशारा ये गुरु जी ने बताया नहीं उस

1883
02:15:44,480 --> 02:15:48,600
दिन वो कौन भगत बता रहा था कौन से उसम ऋगवेद में

1884
02:15:48,600 --> 02:15:52,680
कल ही बात हुई थी आपकी रा मात्र नहीं नहीं वो ऋग्वेद का

1885
02:15:52,680 --> 02:15:56,760
दोबारा से बात कर लेते हैं आपने कौन सा बताया था 4 एकन है कौन सा

1886
02:15:56,760 --> 02:16:00,800
है बता दो भाई ओ भाई गोविंद

1887
02:16:00,800 --> 02:16:06,240
गुरुकुल मुझे न लिख रहे हो जोय

1888
02:16:06,240 --> 02:16:08,520
यस

1889
02:16:08,520 --> 02:16:12,640
एकन ओ भाई यूएस लगता गोविंद गुरुकुल ये करके

1890
02:16:12,640 --> 02:16:16,720
आता है यही सिखाया क्या यही भाषा है क्या तुम्हारी

1891
02:16:16,720 --> 02:16:21,280
यही है तुम्हारी भाषा यही भाषा है सर समझे

1892
02:16:21,280 --> 02:16:25,640
यही सीखा तुमने अपने ति दर्शी से आपने

1893
02:16:25,640 --> 02:16:31,640
एक बड़ा अच्छा नाम दिया

1894
02:16:32,240 --> 02:16:36,360
अप कोई अज्ञान है तो उसका गुरुजी मत गलत

1895
02:16:36,360 --> 02:16:41,080
बात

1896
02:16:41,080 --> 02:16:47,080
है हमने हमने गुरुजी का नाम लिया क्या आपके

1897
02:16:48,040 --> 02:16:52,080
आप उसको क रहे जिसने इस तरह से बात करना

1898
02:16:52,080 --> 02:16:56,520
हमने आपके गुरुजी का नाम नहीं लिया भा जी बेजना

1899
02:16:56,520 --> 02:17:00,640
एक लड़की दवारा कत कर गुरुजी भाई साब

1900
02:17:00,640 --> 02:17:04,960
सुनि सुनिए सुनिए बेज्जती की बात बताऊ बेज्जती की बात दिखाऊ

1901
02:17:04,960 --> 02:17:08,960
ये बाप हो गया हो गया ना बाप दिखाऊ ऐसे वीडियो सुनिए

1902
02:17:08,960 --> 02:17:13,120
सुनिए सुनिए किसके और आपने सुनो आपने ताली बजाई और

1903
02:17:13,120 --> 02:17:18,760
नाम किसका लिया पहला जी से जोड़ जबला जी

1904
02:17:18,760 --> 02:17:22,840
केब देखिए ऐसा है मैं आपको आपके तत्वदर्शी

1905
02:17:22,840 --> 02:17:27,040
संत के वीडियोस दिखाऊ कि कितना अपमान जनक तरीके

1906
02:17:27,040 --> 02:17:33,040
से बात कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में दिखाऊ तो भगत जी

1907
02:17:35,480 --> 02:17:37,760
तीन

1908
02:17:37,760 --> 02:17:43,760
दिखाऊ ज्ञान आधार किसी जीव के

1909
02:17:44,000 --> 02:17:48,320
उसने तरीका देखिए यह देखो

1910
02:17:48,320 --> 02:17:52,240
हो गया ना बा

1911
02:17:52,240 --> 02:17:57,960
आप कह सकते हो किसी लड़की के द्वारा चेहरा भी उल् सीधी

1912
02:17:57,960 --> 02:18:02,240
बात भाई साहब आप यहां पर समीक्षा ना करें आप

1913
02:18:02,240 --> 02:18:06,240
जो है जो बात चल रही है वह बात करें गुरुकुल गोविंद जी को किसी

1914
02:18:06,240 --> 02:18:10,320
ने कहा राक्षस और भांग पी के आता है तो उसका उसे

1915
02:18:10,320 --> 02:18:14,400
उत्तर दिया गया हमने वहां पर नाम लिया ही नहीं हमने यह

1916
02:18:14,400 --> 02:18:18,440
कहा जिससे तुमने वो सीखा होगा जिससे तुमने वो सीखा होगा वो तिरछा

1917
02:18:18,440 --> 02:18:24,440
दर्शी होगा अब आगे बात करें

1918
02:18:27,280 --> 02:18:31,280
भाई साब देख आप भी जानते हो

1919
02:18:31,280 --> 02:18:35,480
आपकी ओर से खूब अपमान हुआ है आप जानते हो भाई साहब

1920
02:18:35,480 --> 02:18:39,640
आप अपने गुरुदेव की च की के कह दो कि आपकी ओर से अपमान

1921
02:18:39,640 --> 02:18:43,640
नहीं हुआ भगत के द नहीं

1922
02:18:43,640 --> 02:18:47,000
हु भगत ने किया होगा

1923
02:18:47,000 --> 02:18:52,560
उ महाराज के द्वारा दिखा दूंगा दिखाऊ

1924
02:18:52,560 --> 02:18:56,640
हरियाण की भाषा गुरुजी वो तो खरी भाषा है तो भाई ये हमारी भाष

1925
02:18:56,640 --> 02:19:02,640
है अब लो ये हमारी भाषा है हरिया ता

1926
02:19:04,120 --> 02:19:08,320
बोलते देखो ऐसा है कि जब देखो उनको

1927
02:19:08,320 --> 02:19:12,320
बात करनी होगी अपने सम्मानित लोगों के बारे में आपको बात करनी होगी सम्मानित लोगों

1928
02:19:12,320 --> 02:19:16,640
के बारे में तब वह भाषा काम नहीं करेगी भाष काम कब करेगी

1929
02:19:16,640 --> 02:19:20,840
जब किसी ऐसे के बारे में बात करनी हो जो हमारे लिए मायने नहीं रखता

1930
02:19:20,840 --> 02:19:24,840
ठीक है उनसे बहुत अच्छे स्तर की उनसे बहुत अच्छे

1931
02:19:24,840 --> 02:19:29,120
स्तर की भाषा उपयोग करते हैं उनके लिए रामपाल दास जी के लिए

1932
02:19:29,120 --> 02:19:35,120
बहुत अ कल तो आपने तालि बजवा पला जी

1933
02:19:35,320 --> 02:19:39,360
दिया किसी विषय में बात करनी है आपको जाना

1934
02:19:39,360 --> 02:19:44,120
है बात कर आप बोल रहे उतर दे रहा

1935
02:19:44,120 --> 02:19:48,240
तो मैंने तो मैंने मैंने आपसे उत्तर मांगा मैंने प्रश्न क किया आपसे आप अपनी

1936
02:19:48,240 --> 02:19:52,640
ओर से कर रहे हो तो उससे पहले आपने डाट दिया

1937
02:19:52,640 --> 02:19:56,720
कर कल आपने डाली ताली बज मैं पूछ

1938
02:19:56,720 --> 02:20:00,880
रहा हूं देखिए अब एक बार और आपने दूसरा विषय उखाड़ तो मुझे

1939
02:20:00,880 --> 02:20:04,880
आपको अलविदा कहना होगा जो बात चल रही है वह बात करिए किसी

1940
02:20:04,880 --> 02:20:08,880
व्यक्ति ने हमसे गलत बात की थी हमने उसको जवाब दिया वो भी दर्शन विज्ञान

1941
02:20:08,880 --> 02:20:12,880
व्यवहार की सीमा में रहते हुए हमने वहां पर उपयोग में नहीं लिया कि हम किसके लिए

1942
02:20:12,880 --> 02:20:17,040
कह रहे हैं हमने तो वहां पर यह कहा जिससे तुम सीख के आए हो जिसने

1943
02:20:17,040 --> 02:20:19,280
तुम्हें सिखाया होगा वो है तिचा दर्शी

1944
02:20:19,280 --> 02:20:23,280
अब उसको जिसने भी आया होगा गलत बात कहना उसको हमने त्रा दर्शी

1945
02:20:23,280 --> 02:20:27,280
का उसमें आप बुरा क्यों जब मैं रामपाल दास जी का नाम लेकर के कहूं

1946
02:20:27,280 --> 02:20:31,360
तब आप कहिए यहां त्रा दर्शी क्यों कह रहे हो मगर मैं

1947
02:20:31,360 --> 02:20:36,240
कल की बात कर रहा था कल आपने जो उल् सी बुलवा रहा लड़की से जब ये भाषा कित

1948
02:20:36,240 --> 02:20:40,800
कर रहे हैं भाई साहब फिर अब आप रहने दीजिए भाई साहब उसको वो विवेचना

1949
02:20:40,800 --> 02:20:44,800
खामा खा लंबी हो जाएगी अलग से हो जाएगी उसका कोई अर्थ नहीं निकलेगा

1950
02:20:44,800 --> 02:20:49,120
ना आप सिद्ध कर पाएंगे ना हम सिद्ध कर पाएंगे बात बात सदैव

1951
02:20:49,120 --> 02:20:53,200
उन मुद्दों प की जाए जो हम अकाट्य रूप से

1952
02:20:53,200 --> 02:20:57,240
सिद्ध कर सकते हैं अकाट्य केवल उन मुद्दों

1953
02:20:57,240 --> 02:21:01,280
को पकड़ा करिए मैं आपको एक पर्सनल

1954
02:21:01,280 --> 02:21:05,400
सीख दे रहा हूं य व्यक्तिगत केवल वो बात पकड़िए केवल उस बात पर

1955
02:21:05,400 --> 02:21:09,480
खड़े हो जाइए जिसको निर्विवाद रूप से सिद्ध

1956
02:21:09,480 --> 02:21:13,920
किया जा सके थोड़ी भी कॉम्प्रोमाइजिंग हो वो बात करिए ही

1957
02:21:13,920 --> 02:21:18,040
नहीं मत करिए उसम समय ऊर्जा नष्ट होगी आपकी गलत

1958
02:21:18,040 --> 02:21:22,760
होगा वो ठीक है अब आते

1959
02:21:22,760 --> 02:21:28,160
कुमारी गाय तो कुमारी गाय की बात कर रहे

1960
02:21:28,160 --> 02:21:34,160
हैं क्या है ऋग्वेद न एक क्या है न

1961
02:21:35,920 --> 02:21:39,960
चन न एकन हम

1962
02:21:39,960 --> 02:21:45,960
भी निकाल लेते हैं क्या लिखा देखें

1963
02:21:47,240 --> 02:21:53,240
ऋग्वेद मंडल नो

1964
02:22:08,320 --> 02:22:12,880
ये आ गया यहां पर लिखा है इस

1965
02:22:12,880 --> 02:22:16,920
बालक सोम को अवध जिसका वध ना किया जा सके

1966
02:22:16,920 --> 02:22:22,000
गाय पान कराने हेतु इंद्र को

1967
02:22:22,000 --> 02:22:26,120
संस्कृत करती है मतलब अपने दूध को मिलाकर साथ में मिलाकर

1968
02:22:26,120 --> 02:22:30,120
इसमें कुमारी गाय कहीं पर नहीं है गाय के

1969
02:22:30,120 --> 02:22:34,320
लिए एक शब्द आया है अवध अगन अगन

1970
02:22:34,320 --> 02:22:38,160
का अर्थ होता है अवध यह दिखा द मैं

1971
02:22:38,160 --> 02:22:42,280
आपको यह आपको दिख रहा होगा अवध

1972
02:22:42,280 --> 02:22:45,440
दिख रहा

1973
02:22:45,440 --> 02:22:51,440
है इसका अर्थ कुमारी कुमारी नहीं है

1974
02:22:52,440 --> 02:22:57,280
इसका अर्थ जो है कुमारी नहीं है तो अब ये वेदों में

1975
02:22:57,280 --> 02:23:02,480
प्रमाण है कि वो कुमारी गाय का दूध पीते हैं ऐसा

1976
02:23:02,480 --> 02:23:05,360
कुछ

1977
02:23:05,360 --> 02:23:10,080
क हमारे भाई जी जुड़े हुए रामपाल दास जी रामपाल जी दो

1978
02:23:10,080 --> 02:23:14,160
रामपाल दास जी दो शब्द लिखे होंगे ध और घ आप

1979
02:23:14,160 --> 02:23:18,400
इनमें अंतर कैसे करेंगे जैसे यह धरती लिखा है या घरती

1980
02:23:18,400 --> 02:23:24,400
लिखा है आप ये कैसे पहचानेंगे

1981
02:23:25,960 --> 02:23:29,960
धरती लिखा तो धा का अक्षर आएगा हा ध

1982
02:23:29,960 --> 02:23:34,120
और घ पढ़ने में तो एक जैसे लिखते हैं उनके बीच में क्या डिफरेंस होता

1983
02:23:34,120 --> 02:23:38,000
है जो आप पहचानते हो ध है या घ

1984
02:23:38,000 --> 02:23:42,160
हैय अक्षर सेही पहचाना जाता है व तो ख जाता है अक्षर

1985
02:23:42,160 --> 02:23:46,400
तो एक जैसे ही होते हैं मैं पूछ रहा हूं उसके बीच में वो क्या होती है

1986
02:23:46,400 --> 02:23:50,680
क्या डिफरेंस होता है कि ध और घ अलग अलग पढ़ा जाता है उसम से

1987
02:23:50,680 --> 02:23:54,960
ऐसा है ना गोल होता है थोड़ा हटा हुआ होता है लगा हुआ होता है हा बस

1988
02:23:54,960 --> 02:23:59,040
ठीक है तो इनकी बात देख लीजिए एक तो ऊपर से गोल होता है

1989
02:23:59,040 --> 02:24:03,080
और उसके ऊपर से जो लाइन होती है वो हटी हुई होती है ठीक है तो इनको

1990
02:24:03,080 --> 02:24:07,600
मैं बता देता हूं कि वो अघन्य है अघन्य नहीं है ठीक

1991
02:24:07,600 --> 02:24:11,600
है ऐसा ही है कि मैं कुछ गलत बोल रहा हूं शिवांश जी बिल्कुल बिल्कुल

1992
02:24:11,600 --> 02:24:16,560
ये अगन लिखा है अगन अन्य नहीं लिखा है

1993
02:24:16,560 --> 02:24:20,960
और कल मैंने पाणिनी जो पानी

1994
02:24:20,960 --> 02:24:25,240
नहीं सॉरी निरुक्त निरुक्त से कल मैंने वो शेयर

1995
02:24:25,240 --> 02:24:29,520
किए थे रात को निरुक्त में अगन को कहा गया है

1996
02:24:29,520 --> 02:24:33,640
जिसका वध नहीं किया जा सकता निरुक्त में कल मैंने रात को शेयर किए थे वो

1997
02:24:33,640 --> 02:24:39,640
जरा दिखा [संगीत]

1998
02:24:39,720 --> 02:24:44,200
दीजिए देखिए रामपाल दास जी लोकल भाषा और संस्कृत

1999
02:24:44,200 --> 02:24:48,840
भाषा में बहुत फर्क है रामपाल दास जी कहते हैं कि हमारे

2000
02:24:48,840 --> 02:24:53,360
लोक जा जाइए ऊपर जाइए

2001
02:24:53,360 --> 02:24:57,400
हां और ऊपर जाइए बस बस बस

2002
02:24:57,400 --> 02:25:02,160
नीचे आइए हां यह देखिए

2003
02:25:02,160 --> 02:25:06,280
अन्या निरुक्त कारों के अनुसार थोड़ा सा ऊपर चलिए थोड़ा

2004
02:25:06,280 --> 02:25:10,280
सा नीचे सॉरी नीचे चलिए नीचे निरुक्त

2005
02:25:10,280 --> 02:25:14,320
कारों के अनुसार यह मेघ का वाचक है याज को के अनुसार

2006
02:25:14,320 --> 02:25:18,440
यज्ञ में दुही जाने वाली गाय और नीचे आते आते इन्होंने किया

2007
02:25:18,440 --> 02:25:22,600
इसका अर्थ ना मारने योग अवज्ञ य

2008
02:25:22,600 --> 02:25:26,800
देख लो अगन यह पूरी विवेचना निरुक्त में मैं

2009
02:25:26,800 --> 02:25:30,800
इधर से बता देता हूं यह देखो यह निरुक्त

2010
02:25:30,800 --> 02:25:35,520
निरुक्त आप हटा लीजिए यह निरुक्त है

2011
02:25:35,520 --> 02:25:40,920
वैदिक नरी और ये

2012
02:25:40,920 --> 02:25:45,640
अगन अगन अगन भी नहीं है

2013
02:25:45,640 --> 02:25:49,680
अगन ठीक है आधा धा आधा ना और

2014
02:25:49,680 --> 02:25:53,880
अग का 744 पृष्ठ पर

2015
02:25:53,880 --> 02:25:54,880
745

2016
02:25:54,880 --> 02:25:58,880
पृष्ठ पर विवेचना की है यासिका चार्य जी ने वो बहुत दूर

2017
02:25:58,880 --> 02:26:02,960
की चीज है वैसे मगर फिर भी सुन

2018
02:26:02,960 --> 02:26:08,960
लीजिए 745

2019
02:26:34,360 --> 02:26:39,240
ये आ गया ये देखिए ये चैप्टर आ गया अग्न्या

2020
02:26:39,240 --> 02:26:43,440
ठीक है अच्छा हां अब इसमें

2021
02:26:43,440 --> 02:26:48,640
मैं आपको दिखा दूं कि मेन जो अर्थ इसका किया गया है

2022
02:26:48,640 --> 02:26:53,000
अवद ये देखिए

2023
02:26:53,000 --> 02:26:57,440
अध्य ठीक है ये पता है क्या है ये ये लौकिक

2024
02:26:57,440 --> 02:27:02,240
डिक्शनरी भी नहीं है यह डिक्शनरी भी ईश्वर प्रदत मान लीजिए

2025
02:27:02,240 --> 02:27:07,000
ये वैदिक डिक्शनरी है ईश्वर प्रदत्त डि

2026
02:27:07,000 --> 02:27:10,560
डिक्शनरी ये

2027
02:27:10,560 --> 02:27:16,560
देखिए जिसका वध नहीं किया जा

2028
02:27:18,560 --> 02:27:21,960
सकता हेलो

2029
02:27:21,960 --> 02:27:26,080
तो यहां पर दूर दूर तक कहीं पर भी कुमारी

2030
02:27:26,080 --> 02:27:30,200
गाय का कोई अर्थ नहीं है गाय को अग्न्या कहा जाता है

2031
02:27:30,200 --> 02:27:34,680
और अग्न इसलिए कहा जाता है क्योंकि व हमारे लिए मान्य है सम्माननीय है

2032
02:27:34,680 --> 02:27:38,920
उसका वध करने योग्य नहीं है ठीक है तो यह एक चवा उड़ाया

2033
02:27:38,920 --> 02:27:42,920
गया पहले तो खा को धा कर दिया गया यह

2034
02:27:42,920 --> 02:27:47,600
अदन और फिर उसको हरियाणवी बना दिया गया

2035
02:27:47,600 --> 02:27:51,680
ठीक है दे देखेंगे उस सचा

2036
02:27:51,680 --> 02:27:55,360
क्या तो आपके पास देख

2037
02:27:55,360 --> 02:28:00,080
रहे एक बात बताइए मैंने तो आपको जैसे वो प्रमाण दिखाते हैं

2038
02:28:00,080 --> 02:28:04,360
वैसे ही मैंने आपको अन लिखा हुआ था आपके अन

2039
02:28:04,360 --> 02:28:09,640
लिखा हुआ बात य अंतर आ रही है

2040
02:28:09,640 --> 02:28:14,040
ना

2041
02:28:14,040 --> 02:28:20,040
खा आपने लिखा हुआ देखा है क्या

2042
02:28:22,200 --> 02:28:26,680
मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी आपने वेद कहां से पढ़े

2043
02:28:26,680 --> 02:28:30,880
हैं वेद कहां से चेक

2044
02:28:30,880 --> 02:28:34,920
किने बता बता नहीं

2045
02:28:34,920 --> 02:28:40,520
अरे गुरु जीी ने कौन सी पब्लिकेशन के वेद आपको दिखाए

2046
02:28:40,520 --> 02:28:44,520
थे व ध्यान नहीं दे बता भाई

2047
02:28:44,520 --> 02:28:48,520
साब कैसी बातें करते हैं शास्त्र प्रमाणित भक्ति करते मगर शास्त्रों से

2048
02:28:48,520 --> 02:28:53,360
कोई मतलब नहीं है ने जो बोल दिया वो मान लेंगे

2049
02:28:53,360 --> 02:28:57,480
दयान भा दिजिए गोविंद गुगुल जी जन को दयानंद जी का भाष्य

2050
02:28:57,480 --> 02:29:01,560
दिखा दीजिए चलिए आपने जो कहा था ना ऊपर से गोल होता है लाइन नहीं

2051
02:29:01,560 --> 02:29:05,640
होती व आपको दिखा देता य दयानंद सरस्वती जी के ऋगवेद है ठीक

2052
02:29:05,640 --> 02:29:09,720
है इसके अंदर मैं आपको पढ़ा देता हूं चलिए थोड़ा आपकी हर एक मसला

2053
02:29:09,720 --> 02:29:15,720
हल करने के लिए तो हम बैठे हुए हैं ना हम तो आपके दास है

2054
02:29:17,280 --> 02:29:23,280
जैसे गु

2055
02:29:24,880 --> 02:29:29,000
देख लेते ना फिर आप जब

2056
02:29:29,000 --> 02:29:34,240
ध को घ या घ को ध

2057
02:29:34,240 --> 02:29:36,680
प

2058
02:29:36,680 --> 02:29:41,000
कर दिखा रहा करके दोबारा आ जा

2059
02:29:41,000 --> 02:29:47,000
थोड़ी आवाज आपकी कम आ रही है कोई डिस्टरबेंस

2060
02:29:54,120 --> 02:29:58,120
वहां अन्याय लिखा है रामपाल दास जी वहा अगन

2061
02:29:58,120 --> 02:30:03,160
लिखा है आप कोई सी भी उठा के देख लीजिए अग लिखा

2062
02:30:03,160 --> 02:30:09,160
है आप अपने कहीं से वेद छपते हो तो उसम चेक कर लीजिए

2063
02:30:09,640 --> 02:30:11,840
पहले

2064
02:30:11,840 --> 02:30:16,000
कोई पहले से हमारा वही घ

2065
02:30:16,000 --> 02:30:20,720
और ध में फर्क होता है जैसे व और ब में फर्क होता है

2066
02:30:20,720 --> 02:30:24,720
नहीं फिर दूसरी बात ये भी तो है कि हमें ये क्या कहते हैं

2067
02:30:24,720 --> 02:30:29,080
ये ये भी तो चेक करना पड़ेगा फिर उसका पाणिनी सूत्र में या

2068
02:30:29,080 --> 02:30:32,680
क्या कहते हैं

2069
02:30:32,680 --> 02:30:36,760
अष्टाध्यायी तो देखना पड़ेगा नहीं ये लोग तो

2070
02:30:36,760 --> 02:30:40,960
ये बोलते हैं कि शास्त्रों का ज्ञान लेने के लिए संस्कृति की आवश्यकता नहीं है पढ़ने

2071
02:30:40,960 --> 02:30:46,880
के लिए हां इनको लिंक भेज

2072
02:30:46,880 --> 02:30:51,360
दीजिए आपको हिंदी में आ तो तो

2073
02:30:51,360 --> 02:30:55,640
हिंदी में किसने करे उनका रूपांतरण रामपाल दास जी ने करे या कंप्यूटर

2074
02:30:55,640 --> 02:30:59,840
ने कर भाई साहब मैं आपको य बात पूछ रहा हूं आपके पास

2075
02:30:59,840 --> 02:31:04,080
वेद का म अगर संस्कृत में सभी दुनिया

2076
02:31:04,080 --> 02:31:08,080
को देंगे तो 80 पर मैं वो नहीं क रहा वो

2077
02:31:08,080 --> 02:31:11,280
नहीं क रहा

2078
02:31:11,280 --> 02:31:17,280
संस्कृत मैं पूछ रहा हूं भाई साहब संस्कृत का शब्द क्या लिखा है वहां

2079
02:31:18,920 --> 02:31:24,920
पर देख रहा

2080
02:31:24,960 --> 02:31:29,160
हूं अरे लिंक दे दो भैया दोबारा गुरुकुल गोविंद जी जुड़ना

2081
02:31:29,160 --> 02:31:33,800
चाह रहे हैं हां हाथ हो

2082
02:31:33,800 --> 02:31:39,320
गए जी मैं एक

2083
02:31:39,320 --> 02:31:43,520
मिनट आपको मैं वो प्रमाण दिखा देता हूं रामपाल दास जी

2084
02:31:43,520 --> 02:31:47,720
जो जहां से आपके जो गुरुदेव हैं वो जहां से बातें

2085
02:31:47,720 --> 02:31:51,880
करते हैं मैं वो प्रमाण आपको दिखा रहा हूं ठीक है

2086
02:31:51,880 --> 02:31:56,280
मैं आपको दिखा रहा हूं परेशान मत हो दयानंद जी के भाष्य दिखाते हैं वो

2087
02:31:56,280 --> 02:32:01,080
वो सबसे सस्ते भाष्य है वही दयानंद जी

2088
02:32:01,080 --> 02:32:05,400
दयानंद जी का जो पब्लिकेशन है आर्य समाज का वह सबसे सुलभ है इस समय

2089
02:32:05,400 --> 02:32:09,440
आसानी से मिल जाता है ढूंढना नहीं पड़ता है तो दयानंद जी का भाष्य वो

2090
02:32:09,440 --> 02:32:13,760
दिखाते हैं हालांकि दयानंद जी की विचारधारा से वह सहमत नहीं है क्योंकि दयानंद

2091
02:32:13,760 --> 02:32:18,000
जी की विचारधारा के अनुसार ईश्वर निराकार है वो साकार

2092
02:32:18,000 --> 02:32:22,840
हो ही नहीं सकता और की विचारधारा के अनुसार अंत कवा ईश्वर

2093
02:32:22,840 --> 02:32:26,680
साकार है वह निराकार नहीं है ठीक है

2094
02:32:26,680 --> 02:32:30,800
मगर फिर भी भ हे जी के दयानंद जी

2095
02:32:30,800 --> 02:32:34,880
के दयानंद जी के ऋग्वेद से आप देख लीजिए

2096
02:32:34,880 --> 02:32:38,080
कि उन्होंने क्या

2097
02:32:38,080 --> 02:32:42,280
दिखाया ऋगवेद है ठीक है यह ऋग्वेद है इसको

2098
02:32:42,280 --> 02:32:46,680
ऋग्वेद कहते हैं किसके द्वारा प्रकाशित है यह श्री

2099
02:32:46,680 --> 02:32:50,720
महर्षि दयानंद सरस्वती जी के द्वारा ठीक है जो आपके रेटर जी

2100
02:32:50,720 --> 02:32:54,960
इनका इनका बड़ा कर दीजिए इनका स्क्रीन बड़ा कर दीजिए गोविंद

2101
02:32:54,960 --> 02:32:58,560
जी

2102
02:32:58,560 --> 02:33:02,600
का जी दिखाइए गोविंद जी थोड़ा जूम हो सकता

2103
02:33:02,600 --> 02:33:06,800
है तो और कर लीजिए या मैं करूं अपनी तरफ से ट्राई आप आप आप

2104
02:33:06,800 --> 02:33:12,600
करिए आप आप जूम करिए हां मैं करता हूं

2105
02:33:12,600 --> 02:33:16,640
रुकिए अभी दिखाई दे हो गया पूरा मंत्र

2106
02:33:16,640 --> 02:33:21,960
हो सके तो ना दिखाइएगा केवल वो अग् वाला दिखा

2107
02:33:21,960 --> 02:33:26,080
दीजिएगा तो ये देख लीजिए ठीक है ये है

2108
02:33:26,080 --> 02:33:30,200
अभी ठीक है ये है आगे पढ़ लीजिए क्या

2109
02:33:30,200 --> 02:33:34,480
है ये मम जुड़ा हुआ है आगे ये अब ये घ है या ध

2110
02:33:34,480 --> 02:33:39,240
है ये आप खुद फैसला करोगे क्योंकि आपने बताया था ठीक है और न

2111
02:33:39,240 --> 02:33:43,280
ये देखिए पास से बिल्कुल अब इतना पास से देख रहे हैं इतना पास से कोई नहीं

2112
02:33:43,280 --> 02:33:47,840
दिखाएगा आपको क्या लिखा है मम

2113
02:33:47,840 --> 02:33:53,840
आधा घ और आधा न

2114
02:33:55,560 --> 02:34:00,120
अच्छा आपकी उली के पास

2115
02:34:00,120 --> 02:34:06,120
कुमार अवस्था आपको दिखा तो दिया

2116
02:34:08,840 --> 02:34:13,040
म नहीं भा अच्छा यवे का मंडल

2117
02:34:13,040 --> 02:34:17,240
नंबर न है सूक्त नंबर एक है और मंत्र नंबर न

2118
02:34:17,240 --> 02:34:23,040
है ये कोई पर्दा नहीं है आपके साथ क्यक हमारी आपसे कोई स्पर्धा नहीं चल

2119
02:34:23,040 --> 02:34:27,720
रही अब ऐसा करें ऑपरेटर महोदय

2120
02:34:27,720 --> 02:34:31,760
बढ़िया बात है देखिए धोखे बना रहे कोई कहीं भी रहे संत रामपाल जी हमारे गुरुदेव

2121
02:34:31,760 --> 02:34:36,440
य या फिर अपने शंकराचार्य कोई धो बना रहे

2122
02:34:36,440 --> 02:34:40,640
पहले मैं आपको पहले मैं आपको कंपैरेटिव भी दिखा देता हूं ऑपरेटर

2123
02:34:40,640 --> 02:34:45,200
जी आप वो स्क्रीन अभी दिखा रहे थे ना जो वो दिखा दीजिए दोबारा

2124
02:34:45,200 --> 02:34:49,240
हा जो रामपाल जी महाराज दिखा रहे हैं ना वही दिखा दीजिए फिर तो विश्वास करेंगे

2125
02:34:49,240 --> 02:34:55,240
य

2126
02:34:55,560 --> 02:34:59,800
हसने के बाद नहीं ब मिनट

2127
02:34:59,800 --> 02:35:04,240
एक मिनट देख लीजिए बड़ा करिए भैया

2128
02:35:04,240 --> 02:35:08,280
जरा बड़ा करिए

2129
02:35:08,280 --> 02:35:12,320
देखिए यहां पर इन्होंने क्या चालाकी की है किसी ने लिखने वाले

2130
02:35:12,320 --> 02:35:16,760
ने यहां आपको धा दिख रहा है अ

2131
02:35:16,760 --> 02:35:20,360
धन्य हा

2132
02:35:20,360 --> 02:35:24,560
अरे भाई सुन लो पहले ये हमने लिखवाया है यह था है और

2133
02:35:24,560 --> 02:35:28,000
जो मंत्र में है वो बड़ा करो

2134
02:35:28,000 --> 02:35:34,000
भैया जो मंत्र में बड़ा कर दो जरा

2135
02:35:37,280 --> 02:35:41,640
अग्न्या मूल संस्कृत के मंत्र पर ले चलिए थोड़ा

2136
02:35:41,640 --> 02:35:45,800
जूम अच्छा य ये रामपाल जी ने जो ये अन्या लिखा

2137
02:35:45,800 --> 02:35:49,840
है ना ये यह देखिए नीचे यह जो राम

2138
02:35:49,840 --> 02:35:55,840
पाल जी ने जो लिखा है वोह

2139
02:35:56,880 --> 02:36:01,040
अधनूर है यह रामपाल जी का लिखा हुआ है और

2140
02:36:01,040 --> 02:36:05,120
ऊपर जो मंत्र में आया है जो शब्द वह क्या है वो

2141
02:36:05,120 --> 02:36:10,080
यह ब्रैकेट में देखिए क्या लिखा है बड़ा करिए उसे

2142
02:36:10,080 --> 02:36:14,320
इतना ही बड़ा होगा अगन यह देखिए

2143
02:36:14,320 --> 02:36:18,440
इसमें आपको धा दिख रहा है क्या घ

2144
02:36:18,440 --> 02:36:22,720
दिख रहा मुझे हां और नीचे देखिए आपके रामपाल

2145
02:36:22,720 --> 02:36:27,120
जी जो है तत्वदर्शी जिनको आप कहते हैं नीचे

2146
02:36:27,120 --> 02:36:33,120
करिए नीचे करिए

2147
02:36:34,200 --> 02:36:38,120
भाई क्या

2148
02:36:38,120 --> 02:36:44,120
हुआ नीचे कर दीजिए व धा दिखा दीजिए

2149
02:36:44,240 --> 02:36:48,520
दोबारा हा वो बोल रहे

2150
02:36:48,520 --> 02:36:52,760
हा ठीक है वो साब दिखा तो दीजिए एक बार उन्होंने क्या लिखा

2151
02:36:52,760 --> 02:36:56,960
है रामपाल जी

2152
02:36:56,960 --> 02:37:00,960
ने नेटवर्क इशू आ रहा है लग रहा है

2153
02:37:00,960 --> 02:37:05,200
नहीं वो मुंह से बोल रहे हैं उन्होंने

2154
02:37:05,200 --> 02:37:09,280
मुंह से जो बोला है वो बोला हुआ दिखा दीजिए लिखा नहीं है रामपाल जी

2155
02:37:09,280 --> 02:37:13,320
ने लिखा नहीं है मुंह से बोला हुआ दिखा दीजिए वो जो बताते हैं वो दिखा

2156
02:37:13,320 --> 02:37:17,640
दीजिए ये देखिए धा में और घ में आपको अंतर दिखता

2157
02:37:17,640 --> 02:37:21,680
है कि नहीं दिखता है

2158
02:37:21,680 --> 02:37:25,680
हां ठीक है ऊपर से घूमी हुई होती है वो

2159
02:37:25,680 --> 02:37:31,680
लाइन तो ये धा अलग है

2160
02:37:32,080 --> 02:37:36,080
अधनूर बात वो ये कहते हमारे संस्कृत वो हरियाणवी

2161
02:37:36,080 --> 02:37:40,240
का शब्द है तो यह जो वेद लिखे गए हैं यह हरियाणवी में नहीं लिखे गए

2162
02:37:40,240 --> 02:37:44,600
हैं वेद लिखे गए हैं संस्कृत में संस्कृत

2163
02:37:44,600 --> 02:37:49,080
के शब्द चलते हैं अच्छा अब ये तो बात हो गई

2164
02:37:49,080 --> 02:37:53,400
जी गोविंद जी आप बात कर लीजिए जो बात करनी है अब

2165
02:37:53,400 --> 02:37:57,480
देखिए भगत जी बात य ग में कवि सागर में तो

2166
02:37:57,480 --> 02:38:01,840
सत्य कुरी गा से दूर किया कबीर साब जीने लीला करने के लिए

2167
02:38:01,840 --> 02:38:06,040
कबीर सागर को पूरा मानते है आप आपके जो गुरु है कबीर

2168
02:38:06,040 --> 02:38:10,280
सागर को मानते हैं पूरा ही मान जाएगा मान

2169
02:38:10,280 --> 02:38:14,960
जाएगा मानते हैं ना अच्छा भाई

2170
02:38:14,960 --> 02:38:20,360
बात और सुन एक बात और सुनो जै सतगुरु

2171
02:38:20,360 --> 02:38:24,800
सुनो सुनो कबीर साहब सतगुरु भी रूप बनकर आते हैं ै

2172
02:38:24,800 --> 02:38:28,800
परमात्मा सतगुरु में इसलिए आते हैं अब यही नहीं है वो अपनी भक्ति बताते

2173
02:38:28,800 --> 02:38:34,320
वो ब्रह्मा विष्णु महेश की बताते दुर्गा जी माता जी बताते हैं भाई

2174
02:38:34,320 --> 02:38:36,760
साहब प्रमाण है सुनिए आप मेरी

2175
02:38:36,760 --> 02:38:41,040
बात समझिए हम लोग एक सुन सुन के पके हैं वो क्या है ना

2176
02:38:41,040 --> 02:38:45,320
वेदों में प्रमाण है ओ कबीर साहब भगवान है तो हमको आज ये जानना

2177
02:38:45,320 --> 02:38:49,520
है हम पिछले इतने दिनों से मेहनत इसलिए कर रहे हैं क्या वेदों में प्रमाण है

2178
02:38:49,520 --> 02:38:53,640
है कि कबीर साहब भगवान है तो पहली बात तो आप जितनी बार भी हम वेदों

2179
02:38:53,640 --> 02:38:57,960
पर आते हैं आप वेदों से आपको हटना पड़ता है कबीर सागर पर आना पड़ता है

2180
02:38:57,960 --> 02:39:02,080
अब हम कबीर सागर पर ही आ रहे हैं कि आपके जो तत्वदर्शी जी है

2181
02:39:02,080 --> 02:39:06,120
वह कबीर सागर को कितना मानते हैं ठीक है तो

2182
02:39:06,120 --> 02:39:10,320
कबीर सागर दिखा दीजिए जरा इनको वोह कबीर सागर के कुछ एक फैक्ट फुल

2183
02:39:10,320 --> 02:39:16,320
वो नोट्स है जो

2184
02:39:22,840 --> 02:39:28,000
कबीर सागर के व वक्तव्य दिखा

2185
02:39:28,000 --> 02:39:32,040
दीजिए क्या रामपाल जी कबीर सागर को प्रमाण मानते

2186
02:39:32,040 --> 02:39:36,200
हैं या नहीं मानते हैं यह भी हम उन्हीं की बुक

2187
02:39:36,200 --> 02:39:41,000
ज्ञान गंगा से देख लेते हैं एक बार ठीक मैं बस कैमरा सेट कर रहा सिर्फ

2188
02:39:41,000 --> 02:39:46,320
एक मिनट लगेगा बस जी महाराज

2189
02:39:46,320 --> 02:39:50,800
उनकी मिट गोविंद जी मिनट य पर देखिए कबीर सा

2190
02:39:50,800 --> 02:39:55,440
कबीर जी की कोई बात आ रही है सामने इसको हम पढ़ते हैं

2191
02:39:55,440 --> 02:39:59,800
तो क्या बात आ रही है तब

2192
02:39:59,800 --> 02:40:05,240
जुलाहा मन कीन तिवाना रामानंद

2193
02:40:05,240 --> 02:40:09,560
सो कही उत् पाना मैं

2194
02:40:09,560 --> 02:40:14,280
सुत पायो बड़ गुणवत्ता

2195
02:40:14,280 --> 02:40:18,600
कारण कौन कारण कौन

2196
02:40:18,600 --> 02:40:22,880
बख नहीं संता इसका

2197
02:40:22,880 --> 02:40:27,000
कोई इसको कोई ब्रेक डाउन करेगा यह जो कहा है कबीर साहब जी ने

2198
02:40:27,000 --> 02:40:31,120
कबीर सागर में यह

2199
02:40:31,120 --> 02:40:35,360
थोड़ा सा य तो जूम कर दीजिए क्योंकि मेरे को आती है यह भाषा हा

2200
02:40:35,360 --> 02:40:37,840
जूम कर दीजिए भैया

2201
02:40:37,840 --> 02:40:42,120
तब जुलाहा मन कीन तिवाना रामानंद सो कहीं

2202
02:40:42,120 --> 02:40:46,640
उत् पाना मैं सुत पायो ब गुणवंता कारण कौन

2203
02:40:46,640 --> 02:40:52,160
बखे नहीं संता

2204
02:40:52,160 --> 02:40:56,680
हम तब जुलाहा मम कीन

2205
02:40:56,680 --> 02:41:00,680
तिवाना रामानंद सो कही उत पाना यहां

2206
02:41:00,680 --> 02:41:05,360
पर बताया जा रहा है शद ये उनकी माता जी है

2207
02:41:05,360 --> 02:41:09,440
क्योंकि हमारे पास सुनिए सुनिए सुन लीजिए दो मिनट सुनिए जब बोल रहे हैं सुनने का धैर्य रखिए ठीक

2208
02:41:09,440 --> 02:41:13,640
है यहां पर वो बताया जाता है कि शायद इनकी माता

2209
02:41:13,640 --> 02:41:17,800
जी कह रहे हैं ठीक है कि रामानंद जी की कृपा से जो है वो

2210
02:41:17,800 --> 02:41:22,000
उत्पन्न हुए हैं ठीक है ये वही री है अगर मैं गलत नहीं हूं

2211
02:41:22,000 --> 02:41:26,120
तो ठीक है मैं सुत पायो बड़ गुणवंता

2212
02:41:26,120 --> 02:41:31,280
यानी कि मैंने पुत्र पाया बहुत गुणों वाला कारण

2213
02:41:31,280 --> 02:41:35,400
कौन भक है नहीं संता उसका कारण कोई

2214
02:41:35,400 --> 02:41:39,920
ठीक है संत भी व्याख्यान उसकी नहीं कर सकते ठीक

2215
02:41:39,920 --> 02:41:44,000
रामानंद ध्यान तब धारा रामानंद जी ने ध्यान धारा

2216
02:41:44,000 --> 02:41:48,120
जुलाहा सो तब वचन उचार जुलाहा से तब वो वचन

2217
02:41:48,120 --> 02:41:52,760
कहते हैं पूर्व जन्म त ब्राह्मण जाति यानी कि उसकी

2218
02:41:52,760 --> 02:41:53,260
ब्राह्मण

2219
02:41:53,240 --> 02:41:57,240
जाति थी त शब्द आया मैं नहीं आया पूर्व जन्मत ब

2220
02:41:57,240 --> 02:42:02,000
जन्म में अपनी ब्राह्मण जाति बता रहे हैं

2221
02:42:02,000 --> 02:42:07,000
पूर्व जन्म में ब्राह्मण जाति बता रहे हैं

2222
02:42:07,000 --> 02:42:11,200
हरि से न हैसी भली भाति यानी

2223
02:42:11,200 --> 02:42:15,480
कि उसने पूर्व जन्म में ब्राह्मण की जाति धारण की और हरि सेवा

2224
02:42:15,480 --> 02:42:19,560
उन्होंने भली भाति की थी कछु तु सेवा ह की

2225
02:42:19,560 --> 02:42:24,080
चूका हरि की सेवा में हो गई थी ताते भयो जलाहा

2226
02:42:24,080 --> 02:42:28,200
को रूपा इसलिए अब उसे जुलाहे के रूप में रूप मिलेगा

2227
02:42:28,200 --> 02:42:32,800
या रूप में जन्मे का ठीक है प्रीति प्रभु कही तोरी लीन

2228
02:42:32,800 --> 02:42:37,000
ताते उन में सुत तोही दना तो इस प्रकार से जो

2229
02:42:37,000 --> 02:42:42,840
वन में है वह पुत्र जो है वह तुम्हें प्राप्त

2230
02:42:42,840 --> 02:42:46,960
होगा तो य पू जन्म में पूर्व

2231
02:42:46,960 --> 02:42:52,200
जन्म में य इन्होने

2232
02:42:52,200 --> 02:42:56,600
पूर्व जन्म में यहां पर उन्होंने मान लिया हरि की सेवा की थी

2233
02:42:56,600 --> 02:43:00,600
कबीर दास जी और ब्राह्मण थे नहीं नहीं नहीं उल्टा हाथ मत करो

2234
02:43:00,600 --> 02:43:05,000
ये उनके लिए नीर निमा बना दिए गए ना तोसे मुसलमान वैसे तो ब्राह्मण

2235
02:43:05,000 --> 02:43:09,320
थे गौरी शंकर और सरस्वती उनके ऊपर झूठा पानी रक

2236
02:43:09,320 --> 02:43:13,400
दिया था तो घर के अपने ब्राह्मण लोग ने ेक दिया था बजा उनका साथ

2237
02:43:13,400 --> 02:43:17,400
देने की क्योंकि वो उस समय हिंदू ध प्रचार ज्यादा कर थे शंकर जी कथा सुनाते

2238
02:43:17,400 --> 02:43:22,080
थे कौन कौन कबीर जी नहीं नहीं

2239
02:43:22,080 --> 02:43:26,200
नाम रख दिया बाद में गरी

2240
02:43:26,200 --> 02:43:30,320
शंकर बात हो रही है किसको किसको आप टहला रहे हो मैं कोई

2241
02:43:30,320 --> 02:43:35,040
छ महीने का बच्चा हूं क्या वत

2242
02:43:35,040 --> 02:43:41,040
जन पूरा पढ़ना उ

2243
02:43:42,240 --> 02:43:46,680
शु हरि की सेवा तो हो रही है जुलाहा कौन बन रहा है जलाहा

2244
02:43:46,680 --> 02:43:50,920
कौन था बता रहा क उनको कपड़ पर झूठ पानी र

2245
02:43:50,920 --> 02:43:56,920
दिया अपने काजी मुला अपने

2246
02:43:57,880 --> 02:44:03,880
दिया बताइए

2247
02:44:08,400 --> 02:44:12,440
क देख लेते तर्शी जी कबीर सागर को कितना मानते

2248
02:44:12,440 --> 02:44:16,600
हैं चलो बोलो ठीक है तो यह है ज्ञान

2249
02:44:16,600 --> 02:44:20,640
गंगा ठीक है य ज्ञान गंगा है से दिखा रहा हूं आपको ठीक है

2250
02:44:20,640 --> 02:44:25,000
गौरी शंकर सरस्वती मुसलमान दि ग थे

2251
02:44:25,000 --> 02:44:29,200
रामपाल जी महाराज ठीक है टोहाना रोड बरवाला

2252
02:44:29,200 --> 02:44:33,480
या जो भी रखा है वो हिसार टोहाना रोड जिला हिसार हरियाना ठीक है 19 नंबर

2253
02:44:33,480 --> 02:44:37,560
पेज पर चलते हैं यदि किसी के पास बुक है तो वो अपनी बुक खोल भी सकता है हमें कोई आपत्ति

2254
02:44:37,560 --> 02:44:42,160
वाली बात नहीं है ठीक है एक बार लिंक ब लिक दे दीजिए

2255
02:44:42,160 --> 02:44:46,840
जो लोग एक बार लिंक पब्लिक कर दीजिए कुछ लोग मांग रहे

2256
02:44:46,840 --> 02:44:51,400
बना दिए गए महाराज

2257
02:44:51,400 --> 02:44:57,400
तो यहां पर यह देख लीजिए यहां पर बताते

2258
02:45:00,880 --> 02:45:05,360
हैं आज बहुत हो चुके हैं मैं अभी आपको बताता हूं इसमें

2259
02:45:05,360 --> 02:45:09,480
ऑलरेडी इन्होने बताया है कि इसमें मिलाव क सागर मुस्लिम कैसे बना दिया गया

2260
02:45:09,480 --> 02:45:13,520
था कबीर साब माय आ रहा आ रहा आ रहा

2261
02:45:13,520 --> 02:45:17,560
हूं चिंता ना करिए ठीक है उसी

2262
02:45:17,560 --> 02:45:21,680
पर आ रहा हूं आय आ गया है एपिसोड निकाल ठीक अभी

2263
02:45:21,680 --> 02:45:25,920
निकाल यहां पर एक मिनट मिट अरे दो मिनट ना धैर्य रखिए

2264
02:45:25,920 --> 02:45:30,400
मैं बोल रहा हूं तो आप मेरी बात काट दोगे फिर

2265
02:45:30,400 --> 02:45:34,640
यहां रहे ध्यान रहे कबीर

2266
02:45:34,640 --> 02:45:39,440
थोड़ा तेज बोलिए गोविंद जी बहुत कम आवाज आ रही

2267
02:45:39,440 --> 02:45:43,520
है एक सेकंड एक सेकंड अभी मेरी आवाज आएगी आपको

2268
02:45:43,520 --> 02:45:48,440
ये यहां से जाएगा अब मेरे को मेरी आवाज आ रही है आपको क्लियर

2269
02:45:48,440 --> 02:45:52,560
आ रही है क्लियर आ रही ठीक है तो यहां पर बताते

2270
02:45:52,560 --> 02:45:56,640
हैं ध्यान रहे कबीर सागर में काल के दूतों ने मिलावट करके सत्य को ना

2271
02:45:56,640 --> 02:46:00,720
जानकर अपनी अटकल बाजी से असत्य प्रमाण दिए हैं उसका नाश करने

2272
02:46:00,720 --> 02:46:04,960
के लिए परमेश्वर कबीर जी ने अपने ठीक है तो यह गरीब द्वास

2273
02:46:04,960 --> 02:46:06,840
द्वारा यथार्थ ज्ञान प्रचार करवाया

2274
02:46:06,840 --> 02:46:11,040
यानी कि कबीर सागर प्रमाण नहीं है ठीक है इसी बात की पुष्टि

2275
02:46:11,040 --> 02:46:15,040
कबीर सागर के संपादक कनकी स्क्रीन गोविंद जी की स्क्रीन

2276
02:46:15,040 --> 02:46:19,240
बड़ी कर दीजिए एक मिनट बड़ी कर दीजिए गोविंद जी की स्क्रीन बड़ी कर

2277
02:46:19,240 --> 02:46:23,320
दीजिए हां हां थोड़ी जूम ये भाई ज्ञान गंगा में लिखा

2278
02:46:23,320 --> 02:46:27,360
हुआ है जो लिखा है वो जरा पढ़ के बता दीजिए कबीर सागर

2279
02:46:27,360 --> 02:46:31,880
को कितना प्रमाण मानते हैं रामपाल जी दोबारा बता दीजिए ध्यान रहे

2280
02:46:31,880 --> 02:46:35,880
कबीर सागर में काल के दूतों ने मिलावट करके सत्य को

2281
02:46:35,880 --> 02:46:40,440
ना जानकर अपनी अटकल बाजी से असत्य प्रमाण दे दिए हैं ठीक है

2282
02:46:40,440 --> 02:46:44,840
तो और बताते हैं गरीब दास जी की वह जो यथार्थ

2283
02:46:44,840 --> 02:46:49,240
रूप से प्रचार करवाया है ठीक है वो उसी रूप में

2284
02:46:49,240 --> 02:46:53,560
कबीर सागर जो आज जो है वो प्रमाण नहीं है पूरी तरीके से

2285
02:46:53,560 --> 02:46:57,720
वो उतनी उतना ही उसरा ये

2286
02:46:57,720 --> 02:47:01,840
तो ये तो जो है ये तो टिप्पणी है ना अभी प्रमाण भी दे रहे हैं अपनी ही

2287
02:47:01,840 --> 02:47:06,360
बात का ठीक है और इसी को कह पुष्टि

2288
02:47:06,360 --> 02:47:10,560
कबीर कबीर सागर के संपादक कबीर पंथी श्री युगला अंद बिहारी

2289
02:47:10,560 --> 02:47:14,600
जी की उस टिप्पणी से होती है जो उन्होंने अनुराग सागर तथा ज्ञान सागर की भूमिका में

2290
02:47:14,600 --> 02:47:18,600
की है कहा है कि कबीर पंथिया ने ही कबीर पंथ के ग्रंथों

2291
02:47:18,600 --> 02:47:22,560
का कर रखा है चलिए अब बताइए

2292
02:47:22,560 --> 02:47:27,080
जरा भाई साहब सामने आ जाइए जरा

2293
02:47:27,080 --> 02:47:33,080
अब रहने दीजिए वो प्रमाण है ही नहीं आपके लिए व आपके ग्रंथ

2294
02:47:34,080 --> 02:47:39,080
में आपके ग्रंथ में ही वो कट

2295
02:47:39,080 --> 02:47:43,280
गया रहने दीजिए एक बार इनको जरा यह पब्लिक

2296
02:47:43,280 --> 02:47:47,640
कर दीजिए जो लोग जुड़ना चाहे जुड़ जाएंगे

2297
02:47:47,640 --> 02:47:53,640
परमाण है परमाण परमाण जन से दे रहे

2298
02:47:53,720 --> 02:47:58,480
हा असत्य प्रमाण दिए हैं काल के दूतों ने

2299
02:47:58,480 --> 02:48:03,360
ये भैया देख लीजिए आ गया

2300
02:48:03,360 --> 02:48:07,480
हैना

2301
02:48:07,480 --> 02:48:13,480
ठीक रामपाल दास जी हमने अभी आपसे दो बातें की

2302
02:48:13,960 --> 02:48:19,960
थीना फिर बताया एक दूत आया था

2303
02:48:20,720 --> 02:48:25,160
आवाज बहुत कम आ रही है पता नहीं क्यों किसकी

2304
02:48:25,160 --> 02:48:28,480
हमारी आपकी

2305
02:48:28,480 --> 02:48:33,160
नहीं अभी हम लोग बात कर ले

2306
02:48:33,160 --> 02:48:37,240
रामपाल दास जी हमने अभी तक आपसे दो बातें की है

2307
02:48:37,240 --> 02:48:41,280
पहली यह कि क्या कुंवारी गाय का

2308
02:48:41,280 --> 02:48:45,600
दूध पीना वेद से सिद्ध होता है आपने वेद का कोई प्रमाण

2309
02:48:45,600 --> 02:48:50,000
नहीं दिया जो दिया उसमें हमने आपको बता दिया कि वे के मंत्र में अग्न्या

2310
02:48:50,000 --> 02:48:54,400
आया अग्न्या और आपके जो तत्वदर्शी जी है

2311
02:48:54,400 --> 02:49:00,400
वो आपको अग्न्या को

2312
02:49:04,680 --> 02:49:09,000
अधनोम दे दूंगा आपको ठीक है

2313
02:49:09,000 --> 02:49:13,040
वो आप ढूंढ के जब देंगे तब देंगे अभी आपके पास ठोस बात नहीं है उसके लिए

2314
02:49:13,040 --> 02:49:17,040
कहने के लिए ठीक है हमने आपको दिखा दिया प्रमाण आपको दिखा दिया खोल

2315
02:49:17,040 --> 02:49:21,320
के ठीक है इसलिए कोई गथ नहीं है

2316
02:49:21,320 --> 02:49:25,320
भाई साहब हमने तो इसमें फिर वही बात फिर हम आपसे

2317
02:49:25,320 --> 02:49:29,800
कहे कि जब जब रामपाल दास जी ने जिन जिन लोगों को आपके अनुसार

2318
02:49:29,800 --> 02:49:33,920
प्रमाण दिखाए थे उन उन लोगों को यह मौका दिया था कि तुम जाकर

2319
02:49:33,920 --> 02:49:37,480
के चेक कर

2320
02:49:37,480 --> 02:49:41,920
लो बात मान लिया थाना क

2321
02:49:41,920 --> 02:49:46,360
पूरा उसम दिखाया था वही सुनिए कबीर सागर को

2322
02:49:46,360 --> 02:49:51,160
उन्होंने कह दिया कि उसमें मिलावट हो चुकी है कबीर सागर में

2323
02:49:51,160 --> 02:49:55,240
तो कबीर सागर की किस बात को प्रमाण माना जाए किस बात को ना माना जाए कुछ कहा

2324
02:49:55,240 --> 02:49:59,240
नहीं जा सकता वो वही वो अपनी अपने मन की बातें बता देंगे और

2325
02:49:59,240 --> 02:50:03,680
जो उनको पसंद नहीं आएगी वो छोड़ देंगे नहीं

2326
02:50:03,680 --> 02:50:07,680
नहीं माना जागा जिसम कबीर गड कबी परमात्मा बताया गया वो

2327
02:50:07,680 --> 02:50:12,120
बात सब मान्य है और जिसम किसीने कहा लिखा

2328
02:50:12,120 --> 02:50:16,160
है कि शास्त्र में जहा पर कबीर को परमात्मा बताया

2329
02:50:16,160 --> 02:50:20,240
गया होगा वही माना जाएगा ये कहां लिखा है और

2330
02:50:20,240 --> 02:50:25,120
कौन से शास्त्र में लिखा

2331
02:50:25,120 --> 02:50:29,200
हु दो बात आप नहीं बता पाए दूसरी बात कुमारी गाय वाली

2332
02:50:29,200 --> 02:50:33,880
बात आप बता नहीं पाए अब मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं

2333
02:50:33,880 --> 02:50:38,440
प्रमाणों पर हम लोग बहुत हुज्जत करते हैं हालांकि प्रमाण से कुछ होना नहीं

2334
02:50:38,440 --> 02:50:42,640
है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो कबीर दास

2335
02:50:42,640 --> 02:50:46,800
जी है उ आपके अनुसार जो ब्रह्मा विष्णु महेश है

2336
02:50:46,800 --> 02:50:50,920
वो अविनाशी नहीं व नाशवान है

2337
02:50:50,920 --> 02:50:54,080
जो

2338
02:50:54,080 --> 02:50:58,400
कबीर क्या हैना है ना

2339
02:50:58,400 --> 02:51:02,880
उससे हो क्या चीज ब्रह्मा विष्णु

2340
02:51:02,880 --> 02:51:06,960
महेश दे दुर्गा जीी यह सब नर अस

2341
02:51:06,960 --> 02:51:11,200
है ना शरीर तो नावान है तो कबीर दास जी का शरीर

2342
02:51:11,200 --> 02:51:15,200
नाशवान है कि नहीं है नहीं वो शरीर रूप में यही

2343
02:51:15,200 --> 02:51:19,200
तो खासियत हैब लीला करने के लिए रूप में शरी होता है

2344
02:51:19,200 --> 02:51:23,320
अपनी मर्जी से गायब कर देते हैं पर य यहां आप जो

2345
02:51:23,320 --> 02:51:27,400
बोल रहे थे के कौन सा बो था जर अजर

2346
02:51:27,400 --> 02:51:31,440
अजर है उनका शरीर जैसा आप कहते अजर जरर का

2347
02:51:31,440 --> 02:51:35,600
मतलब होता है जो जैसे कोई बिल्डिंग है

2348
02:51:35,600 --> 02:51:39,840
घर जाता उनका शरीर गिरता नहीं इसलिए अजर अमर

2349
02:51:39,840 --> 02:51:40,760
है

2350
02:51:40,760 --> 02:51:45,200
मैं ये पूछ रहा हूं अजर का अर्थ क्या है अजर

2351
02:51:45,200 --> 02:51:50,720
का ये जैसा हमारा कोई मकान है ज नया बनाया कोई

2352
02:51:50,720 --> 02:51:56,720
साब मुझे वो अर्थ बताइए जो अर्थ किसी शास्त्र में लिखा

2353
02:51:57,560 --> 02:52:01,760
हो शास्त्र दिखाई दे रहा क सा बता

2354
02:52:01,760 --> 02:52:05,240
जो

2355
02:52:05,240 --> 02:52:09,560
वाणी मेरे पास वही संस्कृत हिंदी डिक्शनरी है

2356
02:52:09,560 --> 02:52:13,760
जिस संस्कृत हिंदी डिक्शनरी के आधार पर आपके जो तत्वदर्शी गुरुदेव

2357
02:52:13,760 --> 02:52:18,560
है वो ब्रज का अर्थ बताते हैं

2358
02:52:18,560 --> 02:52:22,800
वही डिक्शनरी है उसमें लिखा है अजर का अर्थ

2359
02:52:22,800 --> 02:52:27,400
उसमें लिखा है जो कभी बूढ़ा नहीं होता सदा जवान रहने

2360
02:52:27,400 --> 02:52:31,600
वाला अच्छा बूढ़ा तक हो ग उसके बाद ये ना दिखाया

2361
02:52:31,600 --> 02:52:36,200
जब आदमी मर जाता है उसे पूरी तरह बताया जाता कि ये

2362
02:52:36,200 --> 02:52:40,400
जर वस्त आ गया वो जस्त कहां है वो तो गायब हो गए थे ना

2363
02:52:40,400 --> 02:52:44,400
भाई साहब मैं आपसे कबीर जी का

2364
02:52:44,400 --> 02:52:49,000
जो मुख्य स्वरूप है मूल आप कहते हो कबीर जी का जो कबीर जी जो

2365
02:52:49,000 --> 02:52:53,040
सतलोक में बैठे हैं वो सतलोक से सीधे उठके नीचे आते हैं जो रूप

2366
02:52:53,040 --> 02:52:56,200
वहा पर है वही रूप य पर है ऐसा है

2367
02:52:56,200 --> 02:53:00,520
क्या भगत जी देखिए वहा भी जैसा

2368
02:53:00,520 --> 02:53:04,600
हम जैसी इच्छा करते हैं ना शरीर रूप में देखना है मालिक को सतलोक

2369
02:53:04,600 --> 02:53:08,600
में शरीर रूप में बैठे परमात्मा ठीक अनामी जो लो है वहा पर

2370
02:53:08,600 --> 02:53:14,600
जा आमा परमात्मा एक हो जाते है व शन

2371
02:53:16,040 --> 02:53:20,920
सागर परमा हो जाते बिल्कुल अनामी लोक में

2372
02:53:20,920 --> 02:53:24,920
अच्छा ये कहां लिखा है संत रामपाल जी मुह से सुनवा

2373
02:53:24,920 --> 02:53:29,040
दूंगा तु और बताओ अच्छा आत्मा परमात्मा एक है तो

2374
02:53:29,040 --> 02:53:33,320
भैया जो ये कहते हैं जो ये कहते हैं कि आत्मा

2375
02:53:33,320 --> 02:53:37,320
परमात्मा एक नहीं है वो सुन लीजिए ये आपके भाई कह रहे हैं आत्मा परमात्मा

2376
02:53:37,320 --> 02:53:41,400
एक हो जाते हैं ठीक है हा बिल्कुल बिल्कुल

2377
02:53:41,400 --> 02:53:45,680
सब सुनना भगत भाई जितने भी है पर जिसे जितना ज्ञान समझ में आता है गुरुजी

2378
02:53:45,680 --> 02:53:49,680
व हिसाब से देते हैं उन्होने पूरा ज्ञान दे दिया चार अवस्था ज्ञान दिया पा

2379
02:53:49,680 --> 02:53:53,800
दिया गुरुदेव कुल मिला कर के आप ये बताइए अभी कुल

2380
02:53:53,800 --> 02:53:58,280
मिला कर केय बताइए जो कबीर जी का दाढी वाला स्वरूप है

2381
02:53:58,280 --> 02:54:02,760
वो असली है कि नकली है वही स्वरूप सतलोक में है

2382
02:54:02,760 --> 02:54:07,080
या फिर वही वो जो हमें दिख रहा है वही शरीर है तेज पुंज

2383
02:54:07,080 --> 02:54:11,280
के रूप में करोड़ करोड़ चंद्र में करोड़ जैसे सूर्य मिला इतना तेज का शरीर

2384
02:54:11,280 --> 02:54:15,520
व बैठे जैसे यहां दिख रहे हैं वैसे ही है वहां

2385
02:54:15,520 --> 02:54:19,560
पर हा बै जैसा बना सकते पर उसी रूप

2386
02:54:19,560 --> 02:54:23,720
में बैठे गुरुजी के अ यानी की नानक देव

2387
02:54:23,720 --> 02:54:27,800
जी मिलने गए थे तो उन्हे ऐसा ही रूप दिखाया था य से गए थे ना

2388
02:54:27,800 --> 02:54:31,800
नानक साब जी आत्मा को लेकर तो वही जाक समा गए थ

2389
02:54:31,800 --> 02:54:37,680
अब ये नहीं

2390
02:54:37,680 --> 02:54:41,920
बना बा अभी कई बातें हो गई है बहुत सारी बातें

2391
02:54:41,920 --> 02:54:45,920
हो गई है एक एक करके ब्रेकडाउन कर लेते हैं पहली बात तो आप ये कह रहे

2392
02:54:45,920 --> 02:54:49,960
हैं कि कबीर दास जी का जो स्वरूप सतलोक में वही स्वरूप यहां

2393
02:54:49,960 --> 02:54:54,200
पर होता है ठीक है हा जी ठीक है वो

2394
02:54:54,200 --> 02:54:59,120
सीधे बस अपना प्रकाश कम कर लेते हैं डायरेक्ट यहां आ जाते हैं

2395
02:54:59,120 --> 02:55:03,240
अच्छा तो फिर ये जो यहां प रूप ये आया था

2396
02:55:03,240 --> 02:55:07,560
बच्चे के रूप में शिशु के रूप में वो क्या था अब बताता

2397
02:55:07,560 --> 02:55:11,760
रहा हूं बना मैंने आपसे पीछे ना कर नहीं अपनी इच्छा से बना

2398
02:55:11,760 --> 02:55:16,040
लेते हैं बनाया था रूप बच्चे वाला अगर रूप बना

2399
02:55:16,040 --> 02:55:20,040
लेते हैं उनका बच्चे का रूप भी है उनका किशोर अवस्था का भी है तो आपको

2400
02:55:20,040 --> 02:55:24,760
कैसे पता कि यह वाला जो रूप है यही सतलोक का रूप है

2401
02:55:24,760 --> 02:55:26,400
तो बच्चे रूप में य लीला करर

2402
02:55:26,400 --> 02:55:30,600
थी इसलिए या यानी की उनका

2403
02:55:30,600 --> 02:55:34,760
रूप परिवर्तनशील है वो अपना रूप बदल सकते हैं हा अपनी इच्छा

2404
02:55:34,760 --> 02:55:37,600
से कर सकते हो

2405
02:55:37,600 --> 02:55:41,720
जहा सागर रूप में समुद्र

2406
02:55:41,720 --> 02:55:45,800
रूप जा भाई भाई देखिए

2407
02:55:45,800 --> 02:55:50,120
एक एक बात करिए आपने कहा कि वो अपने रूप को बदल सकते हैं ठीक है

2408
02:55:50,120 --> 02:55:56,120
हां जी हा यानी कि उनका जो रूप है वोह शाश्वत रूप नहीं

2409
02:56:01,400 --> 02:56:03,800
है

2410
02:56:03,800 --> 02:56:07,880
हेलो बदल भी लेते हैं वो सर्व शक्तिमान कैसे

2411
02:56:07,880 --> 02:56:11,920
कर ऐसा नहीं कर सके तो बताओ भाई मैं आपसे पूछ रहा हूं उनका जो

2412
02:56:11,920 --> 02:56:16,080
रूप है जो हमें दिख रहा है यह दाढ़ी वाला रूप शाश्वत है या शिशु

2413
02:56:16,080 --> 02:56:20,280
वाला रूप शाश्वत है कौन सा रूप श शाश्वत शाश्वत

2414
02:56:20,280 --> 02:56:24,320
वो है जो अनामी लोक में है वो कौन सा है दाढ़ी

2415
02:56:24,320 --> 02:56:28,520
वाला वो दाढ़ी वाला शाश्वत है कौन सा है लोक

2416
02:56:28,520 --> 02:56:33,000
में कौन सा है अनामी लोक में अनामी

2417
02:56:33,000 --> 02:56:38,120
लोक में भगत जी है परम तत् परब्रह्म आत्मा परमात्मा

2418
02:56:38,120 --> 02:56:41,440
परने आपसे सतलोक में जो उनका

2419
02:56:41,440 --> 02:56:46,040
रूप है वो दाढ़ी वाला है या कोई और रूप है

2420
02:56:46,040 --> 02:56:50,400
सतलोक में दाढ़ी वाला अनामी लो है व अपने परमात्मा स्वरूप

2421
02:56:50,400 --> 02:56:54,960
है अब मैं आपको बता मान लीजिए मान लीजिए

2422
02:56:54,960 --> 02:56:59,200
यह सतलोक में बैठे हुए कबीर जी है ठीक है हा

2423
02:56:59,200 --> 02:57:03,240
जीय शाश्वत है ना शाश्वत

2424
02:57:03,240 --> 02:57:08,000
यह शाश्वत है नालो में

2425
02:57:08,000 --> 02:57:13,320
है सतलोक में जै तुम बता रहे हो

2426
02:57:13,320 --> 02:57:17,320
मतलब की जो जो अपना लीला का रूप है भगवान का

2427
02:57:17,320 --> 02:57:21,720
वो शाश्वत वो सतलोक से आते है ना सतलोक से

2428
02:57:21,720 --> 02:57:25,880
आते रहा हूं य जो लीला में रूप होता है वो शाश्वत नहीं है

2429
02:57:25,880 --> 02:57:29,920
ना नहीं उसे बदल सकते है जब इच्छा बदल सकते है

2430
02:57:29,920 --> 02:57:34,320
उसे है यानी ये जो दाढ़ी वाला रूप जो हम यहा दिख रहा है वो शाश्वत

2431
02:57:34,320 --> 02:57:38,400
नहीं है हा वो वा नहीं बदल सकते जब उ

2432
02:57:38,400 --> 02:57:42,440
अच्छा तो अब बात ये आती है कि जो रूप हमें य उनका दिखता है वो

2433
02:57:42,440 --> 02:57:46,680
शाश्वत नहीं है उसी के जैसा एक दूसरा रूप है जो सतलोक में बैठा है वो शाश्वत

2434
02:57:46,680 --> 02:57:50,840
है ठीक है अब इसका प्रमाण दे दीजिए हम कहां

2435
02:57:50,840 --> 02:57:54,000
पर

2436
02:57:54,000 --> 02:57:58,200
है अ भगत जी जिसम बात आ रही है ना हमारी बात हो रही है इसी

2437
02:57:58,200 --> 02:58:03,120
में वीडियो डालो गुरुदेव जी अब मैं निकालू कैसे बात य है

2438
02:58:03,120 --> 02:58:07,240
अरे भैया वीडियो डालो गुरुदेव ने बोला होगा

2439
02:58:07,240 --> 02:58:11,560
उनका कोई शास्त्र भी होगा उन्होंने किसी शास्त्र के आधार पर बोला

2440
02:58:11,560 --> 02:58:16,320
होगा हा बना शास्त्र बोलती नहीं है वो

2441
02:58:16,320 --> 02:58:20,560
तो फिर व आपको नहीं आ र अब जैसे मैं याद

2442
02:58:20,560 --> 02:58:24,680
नहीं वीडियो दिखा देता सुनता सतगुरु देव के मुह से पर बात ये हमारी

2443
02:58:24,680 --> 02:58:28,880
बात हो रही है ना इसमें डाउनलोड है अ मैं अगर हटा तो आपको कट

2444
02:58:28,880 --> 02:58:33,280
लो चलो इस बात को ऐसे ले लेते हैं कि आपने ये मान लिया

2445
02:58:33,280 --> 02:58:37,320
ये जो हमें रूप दिखाई दे रहा है यह जो है बदलता है तो

2446
02:58:37,320 --> 02:58:41,600
इसका मतलब वास्तविक रूप कुछ और है

2447
02:58:41,600 --> 02:58:45,640
हा वास्तविक परम तत्व है जैसे हमारी आत्मा दिख नहीं सकती स्वरूप ज्ञान

2448
02:58:45,640 --> 02:58:50,600
वैसे मालिक का है तो वास्तविक रूप हमारी आत्मा तो निराकार

2449
02:58:50,600 --> 02:58:54,680
है स्वरूप ज्ञान है निराकार होती हैरा हमारी

2450
02:58:54,680 --> 02:58:58,920
आत्मा का कोई फोटो है क्या नहीं नहीं बिल्कुल नहीं हो

2451
02:58:58,920 --> 02:59:03,160
सकता आप तो कह रहे हो ना में क सतलोक में जो कबीर

2452
02:59:03,160 --> 02:59:07,160
का रूप है उसको तो आप कह रहे हो उसका फोटो है वो तो

2453
02:59:07,160 --> 02:59:09,240
नरी है नरी

2454
02:59:09,240 --> 02:59:13,320
तो आप वहां पर सतलोक में

2455
02:59:13,320 --> 02:59:17,480
बैठे हुए कबीर का आपको मालूम है ना कि वो क्या कहते हैं वो है

2456
02:59:17,480 --> 02:59:21,640
साकार फोटो है ना आपके पास हा जन हा

2457
02:59:21,640 --> 02:59:25,760
सतलोक त जैसा गुरुदेव ने बताया हम सतलोक में रहना है तो आत्मा

2458
02:59:25,760 --> 02:59:29,760
परमात्मा अलग अलग रहते है जैसे हम जब दर्शन कर सकते माक ऐसे

2459
02:59:29,760 --> 02:59:33,920
जैसे स्वर्ग लो में विष्णु जी मिल जाते है ऐसे ही व हमें देखने को मिलते है पर हम

2460
02:59:33,920 --> 02:59:37,960
कहते हैं मालिक हमें य नहीं ना मोक्ष पाना है तो उस मालिक में जा स जाते फर

2461
02:59:37,960 --> 02:59:43,640
अनामी लोग में चले जाते अगर वो भ

2462
02:59:43,640 --> 02:59:46,560
करेंगे

2463
02:59:46,560 --> 02:59:50,760
चलो भैया आप लोग अपनी अपनी बात सुनते रहिएगा इनके मुख से

2464
02:59:50,760 --> 02:59:54,400
तो अभी मैं ये कह रहा

2465
02:59:54,400 --> 02:59:58,560
हूं सभी के लिए जी आत्मा परमात्मा

2466
02:59:58,560 --> 03:00:02,800
एक हो जाते अभी मैं आपसे ये कह रहा हूं जो

2467
03:00:02,800 --> 03:00:07,360
हमको रा दिया है गुरुदेव जीने

2468
03:00:07,360 --> 03:00:12,240
हमय पूछ रहा हूं हमको अब ये प्रमाण चाहिए

2469
03:00:12,240 --> 03:00:16,400
की ये जो शरीर य इनका दिख रहा है ये जो शरीर

2470
03:00:16,400 --> 03:00:20,600
य हमको इनका दिख रहा है यह शरीर असली है या नकली

2471
03:00:20,600 --> 03:00:24,800
है सतलोक में यही है असली है हमारा विश्वास

2472
03:00:24,800 --> 03:00:29,280
बिल्कुल असली है पर जैसा चाहे क कर सकते हा असली

2473
03:00:29,280 --> 03:00:33,560
अगर अगर भाई साहब मेरी बात समझिए अगर यह पेन जो है

2474
03:00:33,560 --> 03:00:37,880
अगर यह कम बड़ हो सकता है तो फिर इस पेन का वह स्वरूप

2475
03:00:37,880 --> 03:00:43,880
असली नहीं है क्योंकि व बदल रहा

2476
03:00:44,680 --> 03:00:48,680
है बात हमा अनामी लो में रूप में

2477
03:00:48,680 --> 03:00:52,880
बैठे हैं वहा से आते हैं वहा से उनकी इच्छा अपनी इच्छा

2478
03:00:52,880 --> 03:00:56,880
से एक रूप तोही है मालिक का बै अरे

2479
03:00:56,880 --> 03:01:00,960
भाई सुनिए सुनिए अनामी रूप से यहां पर आने के बाद

2480
03:01:00,960 --> 03:01:05,560
उनका शरीर शाश्वत नहीं रहता है

2481
03:01:05,560 --> 03:01:11,040
क्या नूरी त रहता है

2482
03:01:11,040 --> 03:01:15,560
जब जब वो सतलोक से नीचे धरती पर आते हैं सृष्ट

2483
03:01:15,560 --> 03:01:19,720
में आते हैं तो उनका क्या जो स्वरूप है

2484
03:01:19,720 --> 03:01:23,920
वो शाश्वत नहीं रहता है क्या नहीं वो बदलता है अपनी

2485
03:01:23,920 --> 03:01:28,400
मर्जी जब चाहे बदल सकते हैं उ अरे मेरे भाई तो जब जो जो बदल रहा है वो शाश्वत

2486
03:01:28,400 --> 03:01:32,440
कैसे हुआ तो मैं कब कह रहा शाश्वत है वो तो नरी त

2487
03:01:32,440 --> 03:01:36,800
है भगत जी बो में उनका शाश्वत

2488
03:01:36,800 --> 03:01:40,920
स्वरूप है वो ये है और आप कह रहे हो यही आता है में भगत

2489
03:01:40,920 --> 03:01:45,080
जी सुनोरा वो अना लो में अना लोक में सतलोक

2490
03:01:45,080 --> 03:01:48,040
में है

2491
03:01:48,040 --> 03:01:52,080
जब व से खड़े होते हैं नीचे धरती पर आते हैं धरती

2492
03:01:52,080 --> 03:01:57,120
आने के बाद उनका जो स्वरूप है व शाश्वत नहीं रह जाता

2493
03:01:57,120 --> 03:01:59,720
है सतलो की बात कर

2494
03:01:59,720 --> 03:02:03,720
बताओ स बात कर रहा हष्ट की बात

2495
03:02:03,720 --> 03:02:08,360
कर रहा हूं सट की सतलोक

2496
03:02:08,360 --> 03:02:12,880
से अपया की बात कर रहा संसार की बात कर रहा हूं

2497
03:02:12,880 --> 03:02:17,000
जब सतलोक से कबीर जी संसार में आते हैं

2498
03:02:17,000 --> 03:02:21,080
तो वो शाश्वत शरीर है वो लेके आते हैं या फिर उनका जो शरीर है

2499
03:02:21,080 --> 03:02:25,880
नकली हो जाता है य नरी लेते न

2500
03:02:25,880 --> 03:02:28,400
बदल

2501
03:02:28,400 --> 03:02:32,400
सके यानी कि उनका जो शरीर है संसार में आने

2502
03:02:32,400 --> 03:02:36,520
के बाद शाश्वत नहीं रह जाता है शाश्वत

2503
03:02:36,520 --> 03:02:40,640
हमारे तुम्हारे हिसाब से समझ सकते तो नहीं रहता पर उनका उनके अंदर

2504
03:02:40,640 --> 03:02:44,760
काल नहीं जा सकता व का नहीं ले सकता देखिए शरीर की बात

2505
03:02:44,760 --> 03:02:48,840
हो रही है पहले शरीर की बात हो रही है अभी अभी शरीर की बात हो रही है

2506
03:02:48,840 --> 03:02:51,760
तत्व से वो बचे रहेंगे

2507
03:02:51,760 --> 03:02:55,920
हम तत्व से वो बचे रहेंगे हम भी मान रहे हैं जब वो संसार में

2508
03:02:55,920 --> 03:02:59,960
आते हैं तो उनका शरीर शाश्वत रह जाता है कि नहीं इसको एक बार

2509
03:02:59,960 --> 03:03:04,520
और क्लियर कर दीजिए भगत जी जब नरी

2510
03:03:04,520 --> 03:03:09,160
तो जब अपनी मर्जी से बदल लेंगे व मा के

2511
03:03:09,160 --> 03:03:13,280
रहता इसका मतलब संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत

2512
03:03:13,280 --> 03:03:14,760
नहीं है

2513
03:03:14,760 --> 03:03:19,080
ना अब वो नूरी त मजी से समलो कैसा

2514
03:03:19,080 --> 03:03:24,880
अरे तो भाई मैं कह रहा हूं इसका मतलब उनका शरीर शाश्वत नहीं है

2515
03:03:24,880 --> 03:03:29,520
ना शरीर नूरी त का है कै

2516
03:03:29,520 --> 03:03:33,760
शाश्वत नहीं है ये बोलने में दिक्कत है बाकी सब बो है ना भग जी

2517
03:03:33,760 --> 03:03:37,800
परमाण दे शावत रहा है जब वो

2518
03:03:37,800 --> 03:03:42,280
कह रहे हो कि वो अपनी मर्जी से बदल लेता है तो वो शाश्वत कहां से रहा

2519
03:03:42,280 --> 03:03:46,360
अच्छा हमारी आत्मा जो आ परमात्मा से कैसे मानते आप क्या तीन गु में

2520
03:03:46,360 --> 03:03:49,520
है क्या आत्मा हमारी

2521
03:03:49,520 --> 03:03:53,560
अच्छा सावत इसलिए जो रूप धारण करती है यहां पर आक के व

2522
03:03:53,560 --> 03:03:59,560
बदल सकती है एक शरीर छोड़कर दूसरे में जाती

2523
03:04:00,640 --> 03:04:05,120
हैने के बाद इसका रूप दिख रहा है

2524
03:04:05,120 --> 03:04:09,720
आत्मा का जो यह जो रूप दिख रहा है व शाश्वत रूप नहीं है

2525
03:04:09,720 --> 03:04:15,320
इसके अंदर तत्व शाश्वत

2526
03:04:15,320 --> 03:04:19,960
है पूछ रहा भाई साब थ कट जवाब दीजिए आपकी बात है

2527
03:04:19,960 --> 03:04:24,840
इतनी घुमा फिरा करके इतनी मिक्सचर है बकुल घुमाते नहीं है

2528
03:04:24,840 --> 03:04:28,880
जैसा भाई साब मैं आपसे बोल रहा हूं अगर आपके

2529
03:04:28,880 --> 03:04:33,400
जो परमेश्वर है कबीर दास जी जो वहां रहते हैं शाश्वत

2530
03:04:33,400 --> 03:04:37,440
शरीर है वह नीचे आते हैं संसार में आते हैं तो

2531
03:04:37,440 --> 03:04:41,720
उनका शरीर शाश्वत रह जाता है या नहीं रह जाता

2532
03:04:41,720 --> 03:04:45,920
है देखिए अनामी लोक में शाश्वत है वहा से शक्ति

2533
03:04:45,920 --> 03:04:51,040
निकलती सदगुरु रूप में

2534
03:04:51,040 --> 03:04:55,080
सुनो अब मुझे थोड़ा सीरियस होना पड़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं

2535
03:04:55,080 --> 03:04:59,440
संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत रह जाता है या नहीं रह जाता है

2536
03:04:59,440 --> 03:05:05,440
हां कि ना अब य नूरी से चालू मत करना अपनी

2537
03:05:07,120 --> 03:05:11,840
लाइन संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत है या नहीं

2538
03:05:11,840 --> 03:05:16,480
है संसार में आने के बाद बता तो रहा हूं मैं हमारी तरह य

2539
03:05:16,480 --> 03:05:20,640
जलाने गाने नहीं आता अपनी मर्जी चले जाते वो

2540
03:05:20,640 --> 03:05:24,960
भाईब मैंने आपसे सवाल ये नहीं पूछा कि वो कहां जाते कब जाते

2541
03:05:24,960 --> 03:05:29,680
क्यों नहीं समझ र मेरी बात मैं यह पूछ रहा हूं संसार में आने के बाद

2542
03:05:29,680 --> 03:05:34,000
उनका शरीर शाश्वत है या नहीं है शाश्वत

2543
03:05:34,000 --> 03:05:38,200
क गा बदलेगा शावत कैसे हो जाएगा यानी कि संसार में आने

2544
03:05:38,200 --> 03:05:42,320
के बाद उनका जो शरीर है वो शाश्वत नहीं है

2545
03:05:42,320 --> 03:05:46,440
नहीं अपनी मर्जी से बदल देते बदल देते हैं उनके उनके शरीर

2546
03:05:46,440 --> 03:05:50,960
का भी आविर्भव भा हो सकता है नहीं

2547
03:05:50,960 --> 03:05:55,320
जैसे जलाने में ने में आएंगे तो हो जाएगा न न अरे भाई आर

2548
03:05:55,320 --> 03:05:59,360
भाव आर भाव रो भाव का मतलब है क्या वह अपने शरीर को गायब कर

2549
03:05:59,360 --> 03:06:04,120
सकते हैं मिस्टर इंडिया की

2550
03:06:04,120 --> 03:06:06,040
करेंगे मिस्टर इंडिया

2551
03:06:06,040 --> 03:06:10,120
की तर अपने शरीर को गायब कर सकते हैं क्या गायब कर

2552
03:06:10,120 --> 03:06:14,200
देंगे मिल जाते मैं कह रहा देखो

2553
03:06:14,200 --> 03:06:19,000
ज्यादा बात क्यों करते हो भाई एक एक बात करते चलो

2554
03:06:19,000 --> 03:06:23,320
करो जदा बात क्यों करते हो ठीक है

2555
03:06:23,320 --> 03:06:27,680
भाव भाव हो सकता है ना उनके शरीर

2556
03:06:27,680 --> 03:06:33,680
का अवर भाव या जन्म म

2557
03:06:36,520 --> 03:06:39,760
नहींन

2558
03:06:39,760 --> 03:06:43,920
प्रकट अगर दुनिया वालो को यह दिखाना चाहे कि

2559
03:06:43,920 --> 03:06:48,040
मेरा शरीर अकट उनको मालूम है मैं तो अपने शरीर को और

2560
03:06:48,040 --> 03:06:52,440
अप प्रकट कर रहा हूं दुनिया के सामने व लीला दिखाना चाहे कि देखो

2561
03:06:52,440 --> 03:06:57,200
क की मृति हो रही है तो दिखा सकते लीला की

2562
03:06:57,200 --> 03:07:01,240
नहीं भगत जी फिर अगर ऐसा कर रहे हो तो हम स्वग जा

2563
03:07:01,240 --> 03:07:05,520
वि जी क्या कर अगर उन्ह किसी को लीला

2564
03:07:05,520 --> 03:07:09,560
दिखानी हो बेवकूफ बनाना हो या कुछ भी करना हो उनको तमाशा दिखाना हो

2565
03:07:09,560 --> 03:07:13,640
कुछ भी उनकी लीला है तो क्या वो लोगों को दिखा उन्होंने तो अपने शरीर

2566
03:07:13,640 --> 03:07:18,360
को अकट कर लिया ठीक हैरो भाव

2567
03:07:18,360 --> 03:07:22,520
अप प्रकट मतलब तिरो भाव उन्होंने तो वो जानते मैंने अपने शरीर को तिरो

2568
03:07:22,520 --> 03:07:27,320
भाव किया है लोगों को दिखाने के लिए उन्होंने दिखा दिया मेरा शरीर जो है

2569
03:07:27,320 --> 03:07:31,640
नहीं रहा मृत्यु हो गई कबीर की क्या व ऐसा कर सकते हैं

2570
03:07:31,640 --> 03:07:35,800
जीव के रूप में कर जीव कर

2571
03:07:35,800 --> 03:07:40,520
मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या कबीर जिस रूप में यहां पर आए हैं कबीर

2572
03:07:40,520 --> 03:07:44,560
स्वयं वो यहां पर आकर केने मान लिया कि वो अपने शरीर को

2573
03:07:44,560 --> 03:07:48,680
प्रकट यानी कि आविर्भव और यानी कि अपक कर

2574
03:07:48,680 --> 03:07:52,720
सकते हैं ठीक है हा ठीक है ना तो

2575
03:07:52,720 --> 03:07:55,560
अब ये बताइए जब वो आविर्भव

2576
03:07:55,560 --> 03:07:59,720
तिरो भाव कर सकते अपने शरीर का तो इसका मतलब यह है कि वो लोगों

2577
03:07:59,720 --> 03:08:03,760
को यह भी दिखा सकते हैं कि देखो देखो कबीर की मुक्ति हो गई कबीर अभी था अब उसका

2578
03:08:03,760 --> 03:08:07,840
शरीर नहीं है दिखा सकते हैं कि नहीं भगत जी दिखा

2579
03:08:07,840 --> 03:08:11,840
देंगे पर जीव रूप में आकर दिखाएंगे मैं भाई साहब मतलब

2580
03:08:11,840 --> 03:08:16,440
अपने रूप में नहीं दिखा सकते क्या जीव रूप में ही दिखा सकते

2581
03:08:16,440 --> 03:08:21,040
फ आज अपने रू दिखा सकते हैं क्या

2582
03:08:21,040 --> 03:08:24,600
मेरी बात नहीं सुनो

2583
03:08:24,600 --> 03:08:28,720
अवस्था अपने शरीर को प्रकट अप प्रकट करके अपने रूप में

2584
03:08:28,720 --> 03:08:32,880
लीला दिखा सकते हैं क्या देखो देखो कबीर का शरीर नावा बकुल दिखा

2585
03:08:32,880 --> 03:08:37,650
सकते बुल दिखा सते पर उस रूप में मा के गर्भ में नहीं

2586
03:08:37,650 --> 03:08:42,040
[प्रशंसा] मा कबीर जी का भी आविर्भव

2587
03:08:42,040 --> 03:08:46,440
रो भाव होता है हो सकता है क्या या

2588
03:08:46,440 --> 03:08:50,680
बात उस में कैसे हो जाएगा प्रकट अपट

2589
03:08:50,680 --> 03:08:54,680
न हो गया हो गया ना वो मेरे भाई आप मैं ये बात

2590
03:08:54,680 --> 03:08:59,040
कर क्यों रहा हूं आप बारबार इस बात की वो लेते हैं कि हमारा भी आविर्भव

2591
03:08:59,040 --> 03:09:03,520
रो भाव होता है ब्रह्मा विष्णु महेश का ब्रह्मा विष्णु महेश अपना आविर्भव

2592
03:09:03,520 --> 03:09:07,720
चरो भाव लीला में कर रहे हैं तो आप लोग कहते हो देखो देखो वो नाशवान

2593
03:09:07,720 --> 03:09:10,640
है मगर आप कबीर के लिए य बात स्वीकार कर

2594
03:09:10,640 --> 03:09:15,120
रहे हो कि उनका भी आविर्भव चिरो भाव होता है

2595
03:09:15,120 --> 03:09:21,120
ऐसा नूरी त में अगर आ हम

2596
03:09:21,680 --> 03:09:27,680
उस रूप में आते बता

2597
03:09:28,280 --> 03:09:34,280
कसेसे रहा मैं आपसे पूछ रहा क्या

2598
03:09:36,040 --> 03:09:40,360
उ कर सकते है ना यानी उनका शरीर भी

2599
03:09:40,360 --> 03:09:44,760
उनके शरीर का भी आ हो सकता है ना

2600
03:09:44,760 --> 03:09:48,880
हम गा उनके हो

2601
03:09:48,880 --> 03:09:53,000
सकता है क्या वो जो रूप जो सा वहां से आया है सतलोक से आया है

2602
03:09:53,000 --> 03:09:57,160
उस रूप का यहां लीला में आने के बाद आपने कहा लीला में आने

2603
03:09:57,160 --> 03:10:02,360
के बाद वह बदल सकता है उस रूप का आविर्भाव तिरो भाव हो सकता है

2604
03:10:02,360 --> 03:10:06,520
क्या अर मर कैसा अगर ऐसा हो जाएगा तो भगत जी बताइए जरा भाई

2605
03:10:06,520 --> 03:10:10,520
साहब अच्छा लगा आपसे बात करके बहुत बढ़िया आपने अपनी बातें

2606
03:10:10,520 --> 03:10:14,760
कही हमने बातें कही आपने अपनी बातें कई हम बा घुमाते

2607
03:10:14,760 --> 03:10:18,680
हो बात नहीं आ बात घुमाते हो ना

2608
03:10:18,680 --> 03:10:22,880
जी को निकालने के लिए करना पड़ता है अब लोगों ने देख लिया

2609
03:10:22,880 --> 03:10:25,960
आपकी बा नी सी बात समझ इतनी

2610
03:10:25,960 --> 03:10:30,240
सी बात समझ लो तो बात दिमाग खा लिया

2611
03:10:30,240 --> 03:10:34,400
भाई और घूम फिर के अंत में देखो देखो मान भी लिया

2612
03:10:34,400 --> 03:10:38,400
फिर भी मन मना करेंगे नहीं नहीं नहीं मानेंगे शिवांश भाई ये

2613
03:10:38,400 --> 03:10:42,400
जन्म भर तुम इनसे बोलते रहो ये नहीं मानेंगे ये बस यही एक रट्टा लगाते

2614
03:10:42,400 --> 03:10:46,560
रहेंगे मैं ये पूछना चाहता हूं इतना मेहनत करनी पड़ी इनके मुख से निकलवाने

2615
03:10:46,560 --> 03:10:50,600
के लिए हालांकि यह सिद्धांत इनके गुरु का दिया हुआ नहीं है

2616
03:10:50,600 --> 03:10:54,720
आर भाव और तिरो

2617
03:10:54,720 --> 03:11:00,720
भाव मगर ये जीतने के लिए अपनी बातें मानते चले जा रहे

2618
03:11:00,840 --> 03:11:04,840
हैं ये जो ये नूरी शब्द है ये क्या संस्कृत का शब्द है हिंदी

2619
03:11:04,840 --> 03:11:08,960
का शब्द है या उर्दू का शब्द है ये नूरी अरे होगा इनके अपने ग्रंथों का कोई शब्द

2620
03:11:08,960 --> 03:11:13,240
होगा रामपाल दास जी आपसे हमारी बातें हो गई है आपको कुछ कहना है क्या समीक्षा

2621
03:11:13,240 --> 03:11:17,320
करने के अलावा और कुछ कहना है कोई तथ रखना है

2622
03:11:17,320 --> 03:11:21,320
को प्रमाण रख ना समीक्षा मत करिएगा तर्क

2623
03:11:21,320 --> 03:11:25,520
और प्रमाण रखना हो तो बताइएगा सच बात

2624
03:11:25,520 --> 03:11:29,560
जो बताइ मालिक ने दास को परमात्मा आत्मा

2625
03:11:29,560 --> 03:11:34,040
द्वारा भाई साहब मुझे ा चाहिए प्रवचन चाहिए रामपाल

2626
03:11:34,040 --> 03:11:38,160
दास जी ना मुझे समीक्षा चाहिए ना प्रवचन चाहिए आपको कोई तथ्य और

2627
03:11:38,160 --> 03:11:41,000
प्रमाण अपनी बात के समर्थन में रखना हो

2628
03:11:41,000 --> 03:11:45,200
तो बताइए अभी नहीं रखना वो किसी और

2629
03:11:45,200 --> 03:11:49,280
रख ठीक है और किसी न जय श्री राम ठीक है जय जय

2630
03:11:49,280 --> 03:11:52,880
राम

2631
03:11:52,880 --> 03:11:57,200
स जय श्री राम आपको सतीश कुमार शुक्ला जी और

2632
03:11:57,200 --> 03:12:00,560
जय श्री राम सूरज प्रकाश

2633
03:12:00,560 --> 03:12:04,560
जी जी इनका इनका प्रमाण

2634
03:12:04,560 --> 03:12:08,920
इनके गुरु का लिखा हुआ जो है उल्टा सीधा मटेरियल डाला

2635
03:12:08,920 --> 03:12:12,960
हुआ जो जेल से लिख देता है वो बंदा भेज देता है भड़काऊ

2636
03:12:12,960 --> 03:12:17,760
बयान देने के लिए वही रहता है और कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है

2637
03:12:17,760 --> 03:12:21,880
नहीं नहीं नहीं वो इस समय जब से वो जेल गए हैं तब से हमने देखा है उनके

2638
03:12:21,880 --> 03:12:26,200
जो दृश्य दिखाई देते हैं वो अब जो है

2639
03:12:26,200 --> 03:12:30,600
वैसी मनोकामना नहीं रखते अब जैसी वो करके गए हैं

2640
03:12:30,600 --> 03:12:34,600
वो तो अब उनके नाम पर जो चल रहा है सो चल रहा है क्योंकि जब

2641
03:12:34,600 --> 03:12:38,720
हमने उनसे यह पूछा कि आप जो नाम

2642
03:12:38,720 --> 03:12:42,920
दान लेते हो वह कैसे मिलता है आपको तो वो एलसीडी के थ्रू मिलता है अच्छा

2643
03:12:42,920 --> 03:12:47,360
ठीक है कुछ नाम दान नहीं है उनका खाली सुनिए तो

2644
03:12:47,360 --> 03:12:51,960
एलईडी के थ्रू मिलता है अब बात आती है एलईडी के थ्रू मिलता है

2645
03:12:51,960 --> 03:12:56,040
तो क्या उन्होंने ऐसी कोई घोषणा की है अच्छा किसी एक ने

2646
03:12:56,040 --> 03:13:00,320
कुतर्क किया कि पहले तो हमारे गुरु बैठे रहते थे तब भी हमने एलईडी

2647
03:13:00,320 --> 03:13:04,400
से लेते मगर वो गुरु बैठे हैं आपके वो देख रहे हैं कि इसको मिल रहा है क्या

2648
03:13:04,400 --> 03:13:08,440
मिल रहा है मेरा एलईडी के थ्रू जा रहा है उनके उसमें है अभी

2649
03:13:08,440 --> 03:13:12,760
वो कहां बैठे हैं वो जान रहे हैं कि नहीं जान रहे आपको कुछ नहीं पता

2650
03:13:12,760 --> 03:13:17,440
तो अभी तो उनके नाम पर क्या हो रहा है कुछ कह नहीं सकते गोविंद

2651
03:13:17,440 --> 03:13:22,240
कल एक हर्षित अभिषेक तिवारी या हर्षित तिवारी जी आए थे वो

2652
03:13:22,240 --> 03:13:26,400
गुरुदेव के शिष्य हैं शायद जगतगुरु शंकराचार्य जी के उनको उनसे

2653
03:13:26,400 --> 03:13:30,560
हम बात नहीं कर पाए अगर व हमें सुन रहे हैं तो व हमसे संपर्क करें

2654
03:13:30,560 --> 03:13:34,560
और कभी भी व अभी आ सकते या फिर जब भी आना चाहे वो आ सकते हैं मैं

2655
03:13:34,560 --> 03:13:39,480
भी ला जुड़ा था वही आप क रहा था हाड

2656
03:13:39,480 --> 03:13:43,560
जुड़ा था हा कल वो जुड़े थे उनके पीछे शास्त्र भी रखे थे ढेर

2657
03:13:43,560 --> 03:13:47,680
सारे तो वो हमसे संपर्क करें और लाइव में जब भी आ सके

2658
03:13:47,680 --> 03:13:53,680
हम क्षमा चाहते आपको समय नहीं दे

2659
03:13:54,800 --> 03:13:58,880
जी आप सही करते हैं इनको बकुल इनकी

2660
03:13:58,880 --> 03:14:03,400
जी आप अपनी बात पूरी कर

2661
03:14:03,400 --> 03:14:07,440
लीजिए इनके पास कोई शास्त्रीय प्रमाण है नहीं इतनी

2662
03:14:07,440 --> 03:14:12,160
दुकान चला रखी है कबीर दास जी के

2663
03:14:12,160 --> 03:14:16,200
मिट मि गोविंद गुगुल जी अपनी बात पूरी कर

2664
03:14:16,200 --> 03:14:20,360
अपनी दो मिनट में पूरी कर लूगा क्योंकि वरिष्ठ जन बैठे हुए हैं अच्छा नहीं लगता

2665
03:14:20,360 --> 03:14:24,720
ठीक है इनका कहना यह है कि तुम शुद्ध स्वरूपिणी

2666
03:14:24,720 --> 03:14:28,920
हो वो माता को कह रहे हैं तुम नित्य हो और हमारा आविर्भव

2667
03:14:28,920 --> 03:14:33,200
तिरो भाव होता रहता है अर्थात यह बनता है इसका कि जो

2668
03:14:33,200 --> 03:14:37,840
मां है ठीक है वो क्या है वो तो नित्य है ठीक है और हमारा आविर्भाव

2669
03:14:37,840 --> 03:14:41,920
तिरोभाव होता है ठीक है तो चलिए इसी चीज के बारे में एक और चीज

2670
03:14:41,920 --> 03:14:46,160
जब मैंने नवा स्कंद खोला तब देखिए मेरे को एक और चीज क्या मिली है ठीक है देखिएगा

2671
03:14:46,160 --> 03:14:50,360
ध्यान से फिर इनसे हम पूछेंगे क्या रामपाल जी की ये भी

2672
03:14:50,360 --> 03:14:54,720
पॉलिसी गलत थी उन्होंने आपको ये भी पॉलिसी गलत बताई श्रीमद् देवी

2673
03:14:54,720 --> 03:14:59,080
भागवत पुराण है गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित है ठीक है

2674
03:14:59,080 --> 03:15:03,080
अंदर चलते हैं थोड़ा सा और यहां पर देखिए बड़ी एक अच्छी बात

2675
03:15:03,080 --> 03:15:07,320
मेरे को नजर आई ये कह रहे हैं

2676
03:15:07,320 --> 03:15:09,960
विप्र इतने में श्री कृष्ण की उपासना

2677
03:15:09,960 --> 03:15:14,880
करने वाली देवी दुर्गा का सहसा आविर्भाव हुआ

2678
03:15:14,880 --> 03:15:19,120
तो क्या यह मानते हैं कि देवी दुर्गा का भी जन्म होता है क्योंकि

2679
03:15:19,120 --> 03:15:23,360
यदि जिस दिन इन्होंने यह बात मान ली उस दिन इनका सारी की सारी बात वहीं

2680
03:15:23,360 --> 03:15:27,560
पर खंडित होकर चूर चूर हो जाएगी कि ये जो बोलते हैं कि तुम नित्य

2681
03:15:27,560 --> 03:15:31,720
स्वरूपा हो या तो तुम्हें माता को नित्य स्वरूपा मानना पड़ेगा और

2682
03:15:31,720 --> 03:15:35,880
अगर तुम आविर्भाव तिरो भाव का मतलब जन्म मृत्यु मानते हो तो तुम्हें यह भी मानना

2683
03:15:35,880 --> 03:15:40,440
पड़ेगा आज के बाद कि देवी का भी जो है जन्म मृत्यु होती

2684
03:15:40,440 --> 03:15:42,720
है

2685
03:15:42,720 --> 03:15:47,600
आर बात इतनी सी है इसमें बात इतनी सी है

2686
03:15:47,600 --> 03:15:51,760
जब परम तत्व को देवी के रूप में व्याख्यान किया

2687
03:15:51,760 --> 03:15:55,920
जा रहा है संबोधित किया जा रहा है उस समय जो लीला

2688
03:15:55,920 --> 03:16:00,040
के अंदर वाला भगवान का स्वरूप है जैसे इन्होने कहा ना वो लीला में आकर के उसका

2689
03:16:00,040 --> 03:16:04,120
आविर्भाव तिरोभाव होता है लीला के अंदर का स्वरूप तो लीला के अंदर जो

2690
03:16:04,120 --> 03:16:08,280
भगवान का परम तत्व का जो स्वरूप है वो लीला के बाहर का जो स्वरूप है परम

2691
03:16:08,280 --> 03:16:12,560
तत्व का उसके लिए कह रहा है कि तुम नित्य हो और हम तो हमारा तो आविर्भाव तिरोभाव

2692
03:16:12,560 --> 03:16:16,600
होता है लीला के अंदर वाला स्वरूप लीला के बाहर वाले परम तत्व के स्वरूप से बात कर

2693
03:16:16,600 --> 03:16:20,680
रहा है है ना वही वही मैं कह रहा हूं ना

2694
03:16:20,680 --> 03:16:24,680
वही तो मैं कह रहा हूं कि आज के बादय झूठ फैला कर देखे फिर इस बात के

2695
03:16:24,680 --> 03:16:25,600
ऊपर

2696
03:16:25,600 --> 03:16:29,680
आज के बाद झूठ फैलाए जरा की आविर्भव का मतलब जन्म मृत्यु होता है और भौतिक होता

2697
03:16:29,680 --> 03:16:34,480
है और ब्रह्मा विष्णु पहले तो

2698
03:16:34,480 --> 03:16:38,680
पहले तो इसको हिंदी शुद्ध बोलना आता नहीं है

2699
03:16:38,680 --> 03:16:43,000
हिंदी में क्या लिखा है क्या पढ़ना है क्या बोलना है इसको

2700
03:16:43,000 --> 03:16:47,000
पता ही नहीं है इसके फॉलोअर्स को जो हरियाणा के हैं सब

2701
03:16:47,000 --> 03:16:51,040
ठीक है सब हरियाणा वाले शुद्ध हिंदी बोल ही नहीं पाते

2702
03:16:51,040 --> 03:16:55,400
हैं ना पढ़ पाते हैं तो उसका शब्द और अर्थ उनको

2703
03:16:55,400 --> 03:17:00,080
मालूम कैसे होगा कि आविर्भाव का मतलब जन्म मृत्यु से लेकर है

2704
03:17:00,080 --> 03:17:04,520
कि आविर्भाव का मतलब है कि एक शक्ति का उत्पन्न होना

2705
03:17:04,520 --> 03:17:08,520
यह भाव हो जाएगा जब इसको यही नहीं मालूम है

2706
03:17:08,520 --> 03:17:12,920
कि किसी शक्ति का जो तेज है

2707
03:17:12,920 --> 03:17:17,320
वह किस समय प्रकट होता है और किस अवस्था में प्रकट होता है

2708
03:17:17,320 --> 03:17:21,360
इसको यह नहीं मालूम करने के लिए क्या मालूम है यह केवल

2709
03:17:21,360 --> 03:17:25,800
सनातनी हों को छोटी जाति बड़ी जाति करके लड़ाने

2710
03:17:25,800 --> 03:17:29,960
का काम करता है और यही इसकी पॉलिसी है वही

2711
03:17:29,960 --> 03:17:34,240
फॉलोअर्स है और कोई इसके फॉलोअर्स नहीं

2712
03:17:34,240 --> 03:17:38,440
है चलिए चलिए आप आपके अंदर बहुत ज्यादा मेरे

2713
03:17:38,440 --> 03:17:40,720
ख्याल से उनके लिए रोश है थोड़ा

2714
03:17:40,720 --> 03:17:45,000
सा कहूंगा कि थोड़ा सा और थोड़ी मीठी भाषा हो जाए क्योंकि

2715
03:17:45,000 --> 03:17:49,040
जितना सुंदरता से हम लोग अपनी बात को सशक्त

2716
03:17:49,040 --> 03:17:53,320
करके मीठे शब्दों में रख सकते हैं उतना उखड़े हुए शब्दों में उतना आनंद

2717
03:17:53,320 --> 03:17:57,360
नहीं आता है देखिए ऐसा है ऐसा ऐसा

2718
03:17:57,360 --> 03:18:01,360
है देखिए हम आपको बता रहे हैं उखड़ी हुई बात की बात यह

2719
03:18:01,360 --> 03:18:05,600
होती है कि आदमी जब कोई बहुत धर्म के प्रति बहुत

2720
03:18:05,600 --> 03:18:09,800
लोगों का जो उल्टा सीधा वक्तव्य है यह सुन कर के जब एकदम

2721
03:18:09,800 --> 03:18:13,840
वो हो जाता है ना तभी हमको किसी ने दिया कि आप

2722
03:18:13,840 --> 03:18:17,840
इस लिंक में जाइए तो फिर नीचे चल रहा था एक में आपका स्ट्रीम

2723
03:18:17,840 --> 03:18:21,840
यार्ड का तो हम भी जुड़ गए ठीक है तो हम तो इसको लेने

2724
03:18:21,840 --> 03:18:25,920
वाले थे बि बढ़िया लपेटे में लेने वाले थे उसमें हम छोड़ने वाले नहीं थे

2725
03:18:25,920 --> 03:18:30,640
इसको लेकिन पहले सुन लेते कि बोल क्या रहा है ना

2726
03:18:30,640 --> 03:18:34,760
इसका एक एक एक है कोई वह एक दिन बता रहा था कि

2727
03:18:34,760 --> 03:18:39,080
गीता में लिखा है कि यह मांस खिलाओ वो मांस खिलाओ ऐसा खिलाओ

2728
03:18:39,080 --> 03:18:43,400
ऐसा खिलाओ इसको इसको और इकान वाले को

2729
03:18:43,400 --> 03:18:47,600
हा और गायत्री परिवार वाले को यह सभी इतने भ्रष्ट

2730
03:18:47,600 --> 03:18:51,760
हो गए हैं कि क्या क्या गीता का अन्वय और व्याख्या कर दिए हैं और किस

2731
03:18:51,760 --> 03:18:56,440
प्रकार से कर दिए हैं कि इनको बोलने की मतलब

2732
03:18:56,440 --> 03:19:00,640
जो भी बोल दिया जाए व भी कम है

2733
03:19:00,640 --> 03:19:06,640
जी चलिए रामपाल वालो में से कोई आने वाला

2734
03:19:08,240 --> 03:19:12,360
था जी तो आज हमने कुछ महत्त्वपूर्ण चीजें जानी

2735
03:19:12,360 --> 03:19:16,760
है सराइज कर ले क्योंकि काफी लंबी चर्चा हो चुकी है

2736
03:19:16,760 --> 03:19:21,000
पहली बात ये है कि कुमारी गाय वाला जो मामला है सरासर झूठ है वेदों

2737
03:19:21,000 --> 03:19:25,160
में कहीं कुछ कुमारी गाय का वर्णन नहीं है अग शब्द आया है उसको

2738
03:19:25,160 --> 03:19:30,040
इन्होने अधनोम अधनूर

2739
03:19:30,040 --> 03:19:34,080
बात हमने ब्रज शब्द के अर्थ के बारे में जाना कि यदि वहां पर किसी

2740
03:19:34,080 --> 03:19:38,440
और की शरण में जाने को कह रहे हैं उसकी शरण में जाने को कह रहे तो वहां पर उसकी का

2741
03:19:38,440 --> 03:19:43,520
संस्कृत शब्द वहां पर नहीं है तस्य है तस्य नहीं है वहां पर संस्कृत में

2742
03:19:43,520 --> 03:19:47,560
और अगर किसी और की शरण में जाएगा तो मुक्ति वो देगा ना

2743
03:19:47,560 --> 03:19:51,560
इसीलिए तो भेजा जा रहा है मगर वो वहां पर कह रहे है कि अहम मैं तुम्हें

2744
03:19:51,560 --> 03:19:55,600
मुक्त कर दूंगा पिछले श्लोक में भी वही बात कर रहे हैं मेरी पूजा कर मेरा

2745
03:19:55,600 --> 03:19:59,640
जजन कर और इसके साथ ही साथ गल प

2746
03:19:59,640 --> 03:20:03,720
भी आप करके देखोगे तो मामे कम शरणम का जो

2747
03:20:03,720 --> 03:20:07,920
अर्थ आएगा वो आएगा कि मेरी शरण में मेरी शरण लो मेरी

2748
03:20:07,920 --> 03:20:11,680
शरण में आ जाओ और इसके साथ ही साथ आज हमने ये जाना कि ब्रज

2749
03:20:11,680 --> 03:20:15,680
का जो मूल अर्थ है मूल अर्थ वो है गतिशील ना

2750
03:20:15,680 --> 03:20:19,880
उसका अर्थ है जाना ना उसका अर्थ है आना अब वो डिपेंड करेगा कहां से कनेक्टेड

2751
03:20:19,880 --> 03:20:24,320
है तो उधर वो गति करेगा ठीक है और इसके अलावा भी

2752
03:20:24,320 --> 03:20:28,600
हमने दो संस्कृत की पंक्तिया प्राप्त की थी कि अगर वो उसकी शरण में जाने की बात हो रही

2753
03:20:28,600 --> 03:20:33,160
तो संस्कृत में क्या कहा जाएगा और मेरी शरण से जा

2754
03:20:33,160 --> 03:20:37,200
यह बात हो रही होगी तो क्या कहा जाएगा इसका भी हमने आज देख लिया अब जो कुतर

2755
03:20:37,200 --> 03:20:41,360
के कता है कि वो तो शरण में पहले से ही है वो शरण में पहले से है

2756
03:20:41,360 --> 03:20:45,440
मगर अभी तक वो उनका वो परमार्थिक रूप नहीं जानते थे वो विराट स्वरूप नहीं देखा

2757
03:20:45,440 --> 03:20:49,640
था अब उनको विराट स्वरूप को परब्रह्म को स्वीकार करते हुए

2758
03:20:49,640 --> 03:20:53,760
श्री कृष्ण भगवान की अब उस उस रूप से शरण में आने को कहा जा रहा

2759
03:20:53,760 --> 03:20:57,760
है पहले भौतिक रूप से शरण में थे अब आध्यात्मिक रूप से शरण में आने को

2760
03:20:57,760 --> 03:21:01,800
कहा जा रहा है अगर इस पर भी आपकी आपको संतुष्टि नहीं पहुंचती है तो

2761
03:21:01,800 --> 03:21:05,960
हम भी पूछ सकते हैं कि जब कबीर स्वयं परमेश्वर है तो वह खाना किससे मांग

2762
03:21:05,960 --> 03:21:10,440
रहा है और जब रामपाल दास जी स्वयं तत्वदर्शी

2763
03:21:10,440 --> 03:21:14,520
है तो फिर वोल जेल

2764
03:21:14,520 --> 03:21:18,560
में तो दूसरी बात है मगर वो स्वय मैं कुत्ता हूं मैं दो कौड़ी का हूं

2765
03:21:18,560 --> 03:21:22,720
मैं ये हूं मैं वो हूं वो स्वयं कह रहे हैं यह सब बातें

2766
03:21:22,720 --> 03:21:26,800
है अच्छा इसी से एक बात और आ जाती है कि अभी फिर हमने

2767
03:21:26,800 --> 03:21:31,400
लास्ट में जब इनसे बात करने का प्रयास किया

2768
03:21:31,400 --> 03:21:35,440
तो अच्छा एक चीज हमने और जानी है कि कबीर जो है

2769
03:21:35,440 --> 03:21:39,720
वो अजर नहीं है क्योंकि जो सतलोक में जो बैठे हैं सतलोक

2770
03:21:39,720 --> 03:21:43,960
में कैसा भी रूप हो चलेगा मगर यहां लीला में जो उनका रूप हमें प्राप्त है

2771
03:21:43,960 --> 03:21:48,120
वो अजर नहीं है वो जो रूप है वो अजर नहीं दिख रहा है ठीक

2772
03:21:48,120 --> 03:21:52,200
है वो दाढ़ी वाला दिख रहा है वो रूप तो वो अजर नहीं है

2773
03:21:52,200 --> 03:21:56,280
उम्र पर प्रभाव पड़ रहा है उनके सभी दाढ़ी है इसके बाद जो अंत

2774
03:21:56,280 --> 03:22:01,160
में हमने छानबीन की बहुत तहकीकात की और बहुत ज्यादा

2775
03:22:01,160 --> 03:22:05,320
खोजबीन करने के बाद वो जो व्यक्ति जो निर्णायक वक्तव्य दे ही

2776
03:22:05,320 --> 03:22:09,440
नहीं रहे थे उनको धीरे धीरे करके निर्णय पर लेकर के आए जहां पर उन्होंने

2777
03:22:09,440 --> 03:22:13,520
यह स्वीकार किया कि जो

2778
03:22:13,520 --> 03:22:18,120
कबीर दास जी जब लीला में होते हैं तो उनका शरीर भी

2779
03:22:18,120 --> 03:22:22,200
उनके शरीर का भी आविर्भव और तिरो भाव हो सकता है यानी कि वह

2780
03:22:22,200 --> 03:22:27,040
शाश्वत स्वरूप नहीं

2781
03:22:27,040 --> 03:22:31,080
है कबीर

2782
03:22:31,080 --> 03:22:36,480
दास ये देखिए कबीर यह लिखा

2783
03:22:36,480 --> 03:22:40,560
है यह लिखा है इनकी

2784
03:22:40,560 --> 03:22:45,040
कबीर सागर लिखा है बिना गुरु के तुम्हारा

2785
03:22:45,040 --> 03:22:49,600
जब साधु लोग कबीर सा पर इस प्रकार का कटाक्ष करने लगे तब

2786
03:22:49,600 --> 03:22:53,720
आपने रामानंद स्वामी को गुरु करने का संकल्प

2787
03:22:53,720 --> 03:22:58,280
लिया जिस समय आपने स्वामी रामानंद को गुरु करने का संकल्प

2788
03:22:58,280 --> 03:23:02,760
किया उस समय आपको प्रकट हुए पूरे पांच वर्ष हो चुके थे

2789
03:23:02,760 --> 03:23:07,040
और आपकी प्रसिद्धि भारत के बहुत से भागों में थी आप रामानंद स्वामी

2790
03:23:07,040 --> 03:23:11,440
के पास गए विनय किया कि स्वामी जी मुझे दीक्षा देकर अपना शिष्य कीजिए

2791
03:23:11,440 --> 03:23:16,040
और मुझे गुरु दक्षिणा लीजिए अब ये बताइए

2792
03:23:16,040 --> 03:23:19,000
कि

2793
03:23:19,000 --> 03:23:23,320
यहां पर जब वह पहले से ज्ञानवान

2794
03:23:23,320 --> 03:23:27,760
है तो उनको गुरु बनाने की आवश्यकता

2795
03:23:27,760 --> 03:23:32,160
क्यों पड़ रही है वह तो परमेश्वर

2796
03:23:32,160 --> 03:23:36,560
है सब कुछ कर सकते हैं बिना गुरु के

2797
03:23:36,560 --> 03:23:40,600
ठीक है तो गुरु दीक्षा

2798
03:23:40,600 --> 03:23:44,920
का गु गुरु दीक्षा का गुरु दीक्षा का संबंध इससे

2799
03:23:44,920 --> 03:23:49,640
हमारे हिसाब से नहीं हो सकता क्योंकि दत्तात्रेय महाराज जी भी

2800
03:23:49,640 --> 03:23:53,720
स्वयं देव स्वरूप थे और 27 गुरु बनाया था

2801
03:23:53,720 --> 03:23:57,960
और उसके बाद में भी आप देखिए श्री कृष्ण को अगर

2802
03:23:57,960 --> 03:24:02,480
हम मानते हैं श्री कृष्ण को अगर हम मानते देव

2803
03:24:02,480 --> 03:24:06,560
रहे कि भाई भगवान लीला पूर्वक गुरु भी बनाते हैं सब करते हैं ये

2804
03:24:06,560 --> 03:24:10,880
लोग कह रहे कि नहीं भगवान ने अगर कह दिया मेरा आरो भाव होता है

2805
03:24:10,880 --> 03:24:14,960
और भगवान ने कह दिया मेरी शरण में आ जा तो य तो बिल्कुल रियल बात है भाई लीला

2806
03:24:14,960 --> 03:24:19,160
भी तो है लीला को कहां ले जाओगे भगवान लीला करते हैं

2807
03:24:19,160 --> 03:24:23,280
भगवान गुरु बनाते हैं भगवान अपने भगवान अपने भक्त के भक्त बन जाते

2808
03:24:23,280 --> 03:24:27,320
हैं भगवान को हम ये बात मान रहे हैं मगर

2809
03:24:27,320 --> 03:24:31,400
ये क्या करते हैं जब ब्रह्मा विष्णु महेश कहेंगे कि अरे अरे हम हम तो

2810
03:24:31,400 --> 03:24:34,160
लीला पूर्वक जब वो ये कहते हम तो हमारा हम कुछ नहीं है

2811
03:24:34,160 --> 03:24:38,320
त्र भाव होता है आविर्भव होता है तो वो कहते ये देखो ब्रह्मा विष्णु महेश अपने

2812
03:24:38,320 --> 03:24:42,600
बारे में क्या कह रहे हैं और जब रामपाल दास कह रहे कि मैं कुत्ता हूं तो

2813
03:24:42,600 --> 03:24:46,680
ये जो है ये तो इन्होने सांकेतिक कहा समझ रहे हैं आप तो

2814
03:24:46,680 --> 03:24:50,760
यह प्रश्न हम इसलिए उठा रहे हैं हम लीला को स्वीकार करते हैं मगर तब जब आप

2815
03:24:50,760 --> 03:24:55,040
दूसरे की लीला को स्वीकार करो उनकी आपकी लीला लीला

2816
03:24:55,040 --> 03:24:59,440
आपकी लीला लीला और ब्रह्मा विष्णु महेश की लीला वो सत्य है

2817
03:24:59,440 --> 03:25:03,680
उन्होंने अगर कह दिया कि आविर्भव होता है त्र भाव होता है भले ही उन्होंने दूसरी जगह 50 जगह कहा

2818
03:25:03,680 --> 03:25:08,040
हो मैं परम ब्रह्म हूं मैं अविनाशी हूं

2819
03:25:08,040 --> 03:25:12,040
मैं नित्य हूं मैं संपूर्ण रामपाल का

2820
03:25:12,040 --> 03:25:16,400
रामपाल का एक मैंने सुना था उसने कहा था ये देखो

2821
03:25:16,400 --> 03:25:20,520
ब्रह्मा एक आदमी है कैरेक्टर बन गया है मैं ऐसा

2822
03:25:20,520 --> 03:25:24,560
हूं मेरे नीचे सब काम करने वाले हैं और

2823
03:25:24,560 --> 03:25:29,000
ब्रह्मा जी ऐसा हो गया व ब्रह्मा को विष्णु को महेश

2824
03:25:29,000 --> 03:25:33,400
को अपने लड़के के भी तरह नहीं बोलता है रामपाल

2825
03:25:33,400 --> 03:25:37,440
वो तो ऐसा बोलता है जैसे उसके घर नौकरी

2826
03:25:37,440 --> 03:25:41,480
करने वाले ससंग सुनाई ना हो जिसको ज्ञान ही ना हो

2827
03:25:41,480 --> 03:25:45,640
क्या बताएगा जिसने गुरु परंपरा से कभी सत्संग ही ना सुना

2828
03:25:45,640 --> 03:25:49,400
हो ज्ञान ही नहीं है तो क्या बताएगा तो खाली दुकान खोल करके

2829
03:25:49,400 --> 03:25:53,760
बैठा हुआ है जो

2830
03:25:53,760 --> 03:25:59,760
लोगन सत्संग बताएंगे

2831
03:25:59,800 --> 03:26:03,800
एक बार अंत में और दे दीजिए लिंक और अगर

2832
03:26:03,800 --> 03:26:09,040
कोई नहीं आता है तो फिर हम लोग पूरा करें गोविंद जी आपको और कुछ रखना है

2833
03:26:09,040 --> 03:26:13,600
प्रमाण एक बात हमारी सुनिए अभी एक बात

2834
03:26:13,600 --> 03:26:18,280
जो राम भद्राचार्य जी बोले कलो के ऊपर

2835
03:26:18,280 --> 03:26:22,600
क्या रामभद्राचार्य जी सही बोल रहे हैं कौल

2836
03:26:22,600 --> 03:26:26,600
की परिभाषा इनको मालूम

2837
03:26:26,600 --> 03:26:30,800
है गुरुकुल गोविंद

2838
03:26:30,800 --> 03:26:34,960
जी जी पहाड़ी जी आप आप कुछ कह रहे हैं क्योंकि आप काफी देर

2839
03:26:34,960 --> 03:26:39,160
से मुझे लग रहा है कहना चाहते हैं आप अपनी बात बोलिए इनको बोल

2840
03:26:39,160 --> 03:26:44,000
जी को नहीं मैं ये देवी भागवत पुराण से देवी देवी

2841
03:26:44,000 --> 03:26:48,040
भाई साहब एक बात एक बात मैं कहूंगा भाई साहब कहां चले

2842
03:26:48,040 --> 03:26:52,560
गए समझ नहीं आ रहा है मगर यहां पर जो

2843
03:26:52,560 --> 03:26:56,800
परंपरा प्राप्त आचार्य गण है वो किसी भी परंपरा से हो उनकी समीक्षा

2844
03:26:56,800 --> 03:27:01,040
हम नहीं करते बिल्कुल है

2845
03:27:01,040 --> 03:27:05,040
ना परंपरा प्राप्त आचार्यों की समीक्षा हम नहीं करते यहां पर

2846
03:27:05,040 --> 03:27:09,120
और हमें करनी भी नहीं चाहिए नहीं चाहिए बिल्कुल मैं

2847
03:27:09,120 --> 03:27:11,640
य बो

2848
03:27:11,640 --> 03:27:15,640
चा गोविंद गुरुकुल जी आप देवी भागवत पुराण का

2849
03:27:15,640 --> 03:27:20,320
स्कंद सात का अध्याय 33 वा निकालिए श्लोक 11 और 12

2850
03:27:20,320 --> 03:27:24,520
उसमें देवी के देवी जी कह रही है कि मतलब कि ब्रह्मा

2851
03:27:24,520 --> 03:27:28,720
विष्णु महेश के तत्व से मैं मैं ही हूं एक बार वो दिखा दीजिए

2852
03:27:28,720 --> 03:27:32,880
और दूसरी बात यहां शरणागत की बात जब होती है तो अध्याय 18

2853
03:27:32,880 --> 03:27:36,960
के 56 में श्लोक से शरणागत की बात शुरू हो जाती है

2854
03:27:36,960 --> 03:27:41,080
कि अर्जुन को समझाते हैं अर्जुन हो जाते सातवा स्कंद

2855
03:27:41,080 --> 03:27:41,680
है और

2856
03:27:41,680 --> 03:27:45,720
अध्याय कितना है 33 33 करिए अपनी बात

2857
03:27:45,720 --> 03:27:49,960
करिए तो शरणागत की बात शुरू होती है अध्याय 18

2858
03:27:49,960 --> 03:27:54,400
के 56 में श्लोक से उनको अर्जुन जी को मनाते हैं उनको धमकाते

2859
03:27:54,400 --> 03:27:58,600
भी हैं श्री कृष्ण तू मेरी बात नहीं मानेगा तो तेरा पतन हो

2860
03:27:58,600 --> 03:28:02,640
जाएगा तो 61 श्लोक में बोलते हैं कि हृदय रूप में अंतर्यामी

2861
03:28:02,640 --> 03:28:06,880
रूप से ईश्वर रहता है 62 श्लोक में बोलते हैं कि तू उसी की ही शरण में चले जा

2862
03:28:06,880 --> 03:28:10,880
64 श्लोक में बोलते हैं कि तू मेरा मानने वाला हो जा 65 श्लोक में मेरा मानने

2863
03:28:10,880 --> 03:28:15,400
वाला हो जा मेरा पूजने वाला हो जा तो मेरे को ही प्राप्त होगा 66 लोक में बोलते हैं कि

2864
03:28:15,400 --> 03:28:19,600
सब धर्मों को को त्याग के तू केवल मेरी शरण में आ जा तुझे मैं समस्त पापों से मुक्त

2865
03:28:19,600 --> 03:28:23,760
कर दूंगा 72 श्लोक में बोलते हैं कि जो मैंने तेरे को यह ज्ञान दिया

2866
03:28:23,760 --> 03:28:27,760
तूने क्या एकाग्र चि होक तूने सुना तो 73 श्लोक में अर्जुन जी

2867
03:28:27,760 --> 03:28:32,000
अर्जुन बोलते कि हां मेरी जो शंका थी वो मेरी पूरी मिट गई

2868
03:28:32,000 --> 03:28:36,040
आप जैसा कहते हो मैं वैसा ही करूंगा तो पूर्ण शरणागत कब हुए

2869
03:28:36,040 --> 03:28:40,160
अध्याय 18 के 73 श्लोक में शरणागत का अर्थ य

2870
03:28:40,160 --> 03:28:44,280
नहीं होता कि किसी से बोल दे मैं तुम्हारे शरण में हूं शरणागत का अर्थ होता है कि उसकी बातो

2871
03:28:44,280 --> 03:28:48,400
को मानना जब अर्जुन श्री की बातों को नहीं मान

2872
03:28:48,400 --> 03:28:53,320
रहे थे तभी तो उनको धमकाया कि तेरा पतन हो जाएगा 57 श्लोक

2873
03:28:53,320 --> 03:28:56,760
में उन्होंने उन्होंने मुख से कह जरूर दिया

2874
03:28:56,760 --> 03:29:01,160
था कि मैं आपकी शरण में हूं मगर बीच बीच में उनके संशय थे

2875
03:29:01,160 --> 03:29:05,160
वो पूरी तरीके से मान नहीं बैठे थे और अंत में उन्होंने 73 में

2876
03:29:05,160 --> 03:29:09,360
में कहा कि अ जैसा आप जो कहेंगे आपने बताया मैं वो करूंगा बहुत बढ़िया पूण

2877
03:29:09,360 --> 03:29:14,280
शरणागत उधर हुए 73 श्लोक में बिल्कुल

2878
03:29:14,280 --> 03:29:18,360
तो अध स्कंद नंबर सात है 33 वा अध्याय है

2879
03:29:18,360 --> 03:29:23,120
बोलिए 12वां और 13वां श्लोक लिखिए उधर लिख रखा है हे धधर

2880
03:29:23,120 --> 03:29:27,880
देवी जी बोल रहे हैं य समग्र जगत मुझसे ओत प्रोत है मैं ईश्वर हूं मैं ही सूता आत्मा

2881
03:29:27,880 --> 03:29:31,880
हूं तथा मैं ही विराट आत्मा हूं मैं ही ब्रह्मा विष्णु तथा रुद्र हूं तो

2882
03:29:31,880 --> 03:29:35,920
यहां एक तत्व की बात हो रही है कि देवी जी ब्रह्मा विष्णु महेश

2883
03:29:35,920 --> 03:29:40,480
से एक ही तत्व है यहां जो विराट स्वरूप

2884
03:29:40,480 --> 03:29:44,600
शी श्रीम भगवत गीता में दिखाया था वही विराट स्वरूप यहां भी दिखाया गया

2885
03:29:44,600 --> 03:29:48,800
दिखाया देवी जी ने तो यहां कहा कि मैं ही ब्रह्मा हूं मैं ही विष्णु

2886
03:29:48,800 --> 03:29:53,600
हूं मैं ही रुद्र हूं मैं ही शिव हूं अब एक बात बताओ

2887
03:29:53,600 --> 03:29:58,440
जब ज्ञान गंगा पुस्तक शुरू होती है

2888
03:29:58,440 --> 03:30:03,720
तो अभी ये आए थे जो कह रहे थे आत्मा परमात्मा एक हो जाती

2889
03:30:03,720 --> 03:30:07,840
है ज्ञान गंगा पुस्तक जब शुरू होती है तो

2890
03:30:07,840 --> 03:30:13,840
शंकराचार्य का खंडन करते हुए वहां पर लिखा है

2891
03:30:14,320 --> 03:30:19,440
कि अगर आत्मा परमात्मा एक ही है

2892
03:30:19,440 --> 03:30:23,600
तो आत्मा परमात्मा एक ही है तो फिर

2893
03:30:23,600 --> 03:30:28,440
पूजा किसकी करे यह शंकराचार्य के खंडन में लिखा

2894
03:30:28,440 --> 03:30:32,560
और उनका व्यक्ति आकर के बोल रहा है कि आत्मा परमात्मा

2895
03:30:32,560 --> 03:30:36,560
एक हो जाती है शंकराचार्य का सिद्धांत मानते हैं चोरी

2896
03:30:36,560 --> 03:30:41,120
छुपे मानते हैं सामने से नहीं मान

2897
03:30:41,120 --> 03:30:47,120
मानते उन्होने जहा से जितना सुन लिया जितना पक लिया

2898
03:30:49,080 --> 03:30:53,360
जो मैंने आपको बताया दि

2899
03:30:53,360 --> 03:30:57,360
दिखा दीजिए बड़ी स्क्रीन में कि मैं ही ब्रह्मा विष्णु महेश तो उनके पुत्र कैसे हो

2900
03:30:57,360 --> 03:31:03,360
गए य देवी जी के खुद सोचो

2901
03:31:04,760 --> 03:31:10,760
ना ला होना चाहेंगे तो हो भी

2902
03:31:11,360 --> 03:31:15,960
जाएंगे एक पूरी बनाई है ना क्या कहते उसको

2903
03:31:15,960 --> 03:31:20,880
एक प्लेलिस्ट बनाई है ना इनके उसमें ये वाला कोट किया हमने

2904
03:31:20,880 --> 03:31:25,000
कि जब वो परम तत्व के रूप में है तो वो बोल रही है कि मैं ही ब्रह्मा हूं

2905
03:31:25,000 --> 03:31:29,200
मैं ही विष्णु हूं मैं ही देवी वो हूं ब्रह्मा

2906
03:31:29,200 --> 03:31:33,360
एक सबसे बड़ी बात इसमें इन्होने और कही है पता है क्या

2907
03:31:33,360 --> 03:31:37,520
कि ना तो मैं स्त्री हूं ना ही मैं पुरुष हूं

2908
03:31:37,520 --> 03:31:41,200
और ना ही मैं नपुंसक ही

2909
03:31:41,200 --> 03:31:45,240
हूं है ना ना तो स्त्री हूं ना पुरुष हूं तो फिर कहां

2910
03:31:45,240 --> 03:31:49,480
से आ गया वो मां वाला पत्नी वाला भाई स्त्री

2911
03:31:49,480 --> 03:31:53,480
तो वो खुद कह रही मैं स्त्री भी नहीं हूं वो परम तत्व अपने बारे में बता रहा है

2912
03:31:53,480 --> 03:31:57,600
परम तत्व जिसको यहां पर देवी के रूप में खपत किया जा रहा

2913
03:31:57,600 --> 03:32:01,840
है बस इतनी सी बात है य साफ साफ लिखा है जैसे माया के प्रभाव

2914
03:32:01,840 --> 03:32:04,120
से जीव अनेक प्रतीत होते हैं

2915
03:32:04,120 --> 03:32:08,560
जो वास्तव में अनेक नहीं है वैसे ही माया के प्रभाव से ईश्वर भी विता

2916
03:32:08,560 --> 03:32:12,920
का विता का क्या लिखा है वि विता का

2917
03:32:12,920 --> 03:32:17,040
भान होता है ना कि अपने स्वभाव का स्वस मतलब

2918
03:32:17,040 --> 03:32:21,200
की हमारे आंखों का विषय बनता है किय बहुत से है पर वो एक ही तत्व

2919
03:32:21,200 --> 03:32:25,240
है कह रहे हैं एक कौन से लोक में अध्याय

2920
03:32:25,240 --> 03:32:30,280
स्कंद सात के 33 अध्याय के

2921
03:32:30,280 --> 03:32:35,720
आठवे और नवे में न श्लोक

2922
03:32:35,720 --> 03:32:39,880
में इसी में लिखा नवा श्लोक भी दिखा दीजिए

2923
03:32:39,880 --> 03:32:45,880
आठवा और नवा उसको अंडरलाइन कीजिए

2924
03:32:49,600 --> 03:32:55,600
अगर शय लिखा हुआ देह और इंद्रिय आदि संघात रूपी वासना

2925
03:32:56,560 --> 03:33:00,600
भेद नहीं जस ऊपर जाइए इसके आठवा नवा जैसे माया के

2926
03:33:00,600 --> 03:33:04,840
प्रभाव से जीवने एक प्रतीत होते हैं

2927
03:33:04,840 --> 03:33:07,520
स्क्रीन अटक

2928
03:33:07,520 --> 03:33:11,800
र वास्त जो वास्तव में अनेक नहीं है

2929
03:33:11,800 --> 03:33:17,800
वैसे ही माया के प्रभाव से ईश्वर अलग हायने

2930
03:33:18,640 --> 03:33:22,680
हुआ है जैसे एक ही आकाश घटा काश मठा काश

2931
03:33:22,680 --> 03:33:26,920
आदि नामों से त होता है वैसे ही मैं एक होती हुई

2932
03:33:26,920 --> 03:33:30,960
भी उपाधि भेद से भिन्न हूं जिस प्रकार सूर्य उत्तम निकृष्ट सभी

2933
03:33:30,960 --> 03:33:35,080
वस्तुओं को सदा प्रकाशित करता है परंतु दूषित नहीं करता वैसे मैं भी कभी

2934
03:33:35,080 --> 03:33:39,080
दोषों से युक्त नहीं होती ठीक है वस्तुत जीव और ईश्वर का विभाग

2935
03:33:39,080 --> 03:33:43,280
माया द्वारा कल्पित है तो यह कल्पना है ये अद्वैत सिद्धांत की बात यहां

2936
03:33:43,280 --> 03:33:47,600
पर हो रही है कि जीव और ईश्वर का विभाग माया द्वारा

2937
03:33:47,600 --> 03:33:52,560
कल्पित है तो आूप में बताया

2938
03:33:52,560 --> 03:33:57,400
तभी आगे य कहा ही ब्रह्मा मैं ही विष्णु हूं मैं ही शिव हूं

2939
03:33:57,400 --> 03:34:01,440
घटा काश और महाकाश की बाती जीवात्मा एवं परमात्मा के भेद

2940
03:34:01,440 --> 03:34:04,600
को भी काल्पनिक मानना चाहिए अर्थात आत्मा परमात्मा के

2941
03:34:04,600 --> 03:34:08,680
भेद को का जानना चाहिए ये मैं

2942
03:34:08,680 --> 03:34:12,680
एक चीज बताऊंगा ये लोग ये कहते हैं कि जो देवी मां है वो

2943
03:34:12,680 --> 03:34:16,760
काल ब्रह्म की पत्नी है जबकि य देवी मां कह

2944
03:34:16,760 --> 03:34:20,960
रही है कि मैं और ब्रह्म एक ही

2945
03:34:20,960 --> 03:34:24,960
है कौन सा है देवी भागवत तीसरा

2946
03:34:24,960 --> 03:34:29,840
स्कंद छवा अध्याय चौथा श्लोक से लेकर छवा शलोक

2947
03:34:29,840 --> 03:34:34,040
क्या और तो और यह भी लिखा

2948
03:34:34,040 --> 03:34:38,120
हुआ है ब्रम ये भी लिखा हुआ है कि जो ब्रह्म है वो

2949
03:34:38,120 --> 03:34:42,520
एक है और सनातन है यह भी वही पर है ब्रह्म

2950
03:34:42,520 --> 03:34:46,560
एक है और सनातन है मतलब वो रो भाव नहीं होता ना वो

2951
03:34:46,560 --> 03:34:51,360
ना सनातन नित्य और

2952
03:34:51,360 --> 03:34:55,440
रचना करते समय वो द्वैत भाव को प्राप्त हो जाता है वही वाली बात

2953
03:34:55,440 --> 03:34:59,760
व्यवहार में दैत परमार्थ में अवत

2954
03:34:59,760 --> 03:35:04,000
भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद से प्रतीत होती

2955
03:35:04,000 --> 03:35:08,240
है जिस परम पुरुष को त्रिगुणा तीत कहा गया है वही उत्पत्ति स्थिति

2956
03:35:08,240 --> 03:35:11,520
समार का कार्य संपादन करने वाली महामाया अर्थात भगवती

2957
03:35:11,520 --> 03:35:16,400
है देवी भागवत न 34 से 37

2958
03:35:16,400 --> 03:35:21,680
यह सारा दिया

2959
03:35:21,680 --> 03:35:25,720
है सबसे बढ़िया एक प्रमाण दे द ऋगवेद से

2960
03:35:25,720 --> 03:35:28,880
ऋगवेद में 10

2961
03:35:28,880 --> 03:35:34,320
125

2962
03:35:34,320 --> 03:35:38,520
ये इसम अल दिया गया

2963
03:35:38,520 --> 03:35:42,560
दुर्गा सपत सती में वो ऋग्वेद का जो देवी

2964
03:35:42,560 --> 03:35:48,560
सूक्त है वो दिया गया है बहुत

2965
03:35:49,800 --> 03:35:54,840
बढ़िया ऋगवेद उत्तम देवी स

2966
03:35:54,840 --> 03:35:58,960
देखिए दिख रहा है क्या नीचे

2967
03:35:58,960 --> 03:36:02,040
नीचे

2968
03:36:02,040 --> 03:36:08,000
देखिए

2969
03:36:08,000 --> 03:36:14,000
यय देवी सतम खोलेंगे 237 नंबर प्र

2970
03:36:19,920 --> 03:36:25,760
यह अलग से जो हा ऋगवेद उतम देवी सक्ति ये आ

2971
03:36:25,760 --> 03:36:28,520
गया

2972
03:36:28,520 --> 03:36:32,560
क है ना

2973
03:36:32,560 --> 03:36:37,760
जी ठीक अब इसमें क्या

2974
03:36:37,760 --> 03:36:41,880
है पहला मंत्र पढ़े तो

2975
03:36:41,880 --> 03:36:46,040
इसी में ये आया है कि

2976
03:36:46,040 --> 03:36:50,040
देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है यानी देवी और परम ब्रह्म

2977
03:36:50,040 --> 03:36:53,680
में कोई अंतर नहीं है

2978
03:36:53,680 --> 03:36:58,040
देवी नित्य है परमेश्वर है परमात्मा है सनातन

2979
03:36:58,040 --> 03:37:02,320
है सच्चिदानंद स्वरूप है यह सब इसमें आया है

2980
03:37:02,320 --> 03:37:05,520
देवी

2981
03:37:05,520 --> 03:37:10,240
सूक्त मैं बता देता हूं कौन सा मंत्र है देवी सूक्त

2982
03:37:10,240 --> 03:37:15,120
का मैं शत्रुओं का नाश आकाश शरीर जो अविष्य से

2983
03:37:15,120 --> 03:37:19,320
मैं संपूर्ण जगत की अधी शवरी साक्षात्कार करने

2984
03:37:19,320 --> 03:37:25,320
योग परम ब्रह्म को अपने से अभिन्न रूप में जानने वाली देखिए

2985
03:37:27,840 --> 03:37:32,000
अभिन्न ये इसको आप पढ़ेंगे इसमें पूरी देवी

2986
03:37:32,000 --> 03:37:36,120
और उनकी एकता है परम ब्रह्म की परमात्मा की मैं इस जगत

2987
03:37:36,120 --> 03:37:40,400
के पिता रूप आकाश को सर्वा स्न स्वरूप परमात्मा के ऊपर

2988
03:37:40,400 --> 03:37:44,440
उत्पन्न करती हूं मैं कारण रूप से समस्त विश्व की

2989
03:37:44,440 --> 03:37:48,680
रचना आरंभ कर तब दूसरों के प्रेरणा के बिना स्वयं

2990
03:37:48,680 --> 03:37:53,200
ही वायु की भाति चलती हूं स्वेच्छा

2991
03:37:53,200 --> 03:37:57,440
से ही कर्म में प्रवृत होती हूं और यहां पर इनकी और

2992
03:37:57,440 --> 03:38:02,000
परम ब्रह्म की देवी सूक्त में 10 125 में पूरी

2993
03:38:02,000 --> 03:38:06,240
तब इनका लिखा हुआ इसके अलावा

2994
03:38:06,240 --> 03:38:10,680
देवी भागवत में तो है ही बहुत सारा

2995
03:38:10,680 --> 03:38:14,920
अरे वेदों में पढ़ने के लिए बहुत चीज सीखने के लिए बहुत गुण रहस्य है वेदों

2996
03:38:14,920 --> 03:38:19,000
में तो जब पढ़ना सु दिखाई नहीं देता रामपाल

2997
03:38:19,000 --> 03:38:20,680
वालो को कु नहीं बात

2998
03:38:20,680 --> 03:38:24,920
को पूरी करेंगे बहुत समय हो गया 957 हो चुका है

2999
03:38:24,920 --> 03:38:29,240
जल्दी से राम पांडे जी आप अपनी बात रख ले

3000
03:38:29,240 --> 03:38:33,240
जय श्री राम शिवान जी सभी को जय श्री राम जय

3001
03:38:33,240 --> 03:38:38,320
श्री राम ज आ जी

3002
03:38:38,320 --> 03:38:42,560
सुनाई दे रही है मेरी आवाज आप लोग को जी जी जी बोलिए

3003
03:38:42,560 --> 03:38:46,600
जी नहीं मैं कुछ ऐ कुछ टॉपिक नहीं बस जैसे शुक्ला

3004
03:38:46,600 --> 03:38:50,640
जी भी आए थे जो बोल रहे थे जो हमारे संत के बारे में जो आपने

3005
03:38:50,640 --> 03:38:55,040
बोला परंपरा प्राप्त संतो की हमसे मिक्षा नहीं करेंगे ब उसी के डिंग

3006
03:38:55,040 --> 03:38:59,200
मेरे कुछ कहना था कि जैसे हम धर्म की बात कर रहे हैं तो धर्म

3007
03:38:59,200 --> 03:39:03,280
में तो हम यह नहीं देखना है ना कि कौन परंपरा प्राप्त आचार्य है अगर व परंपरा

3008
03:39:03,280 --> 03:39:07,680
प्राप्त आचार्य होते हुए

3009
03:39:07,680 --> 03:39:12,360
भी कहां गए शिवा

3010
03:39:12,360 --> 03:39:16,800
जी चाहि अपनी बात करने के लिए जी

3011
03:39:16,800 --> 03:39:21,080
इस बारे में बारे में यहां ना बात करके हम और आप अलग से बात कर

3012
03:39:21,080 --> 03:39:25,120
लेंगे वैसे भी एक बहुत फेमस संत है आज के टाइम प शिवान

3013
03:39:25,120 --> 03:39:29,120
जी मैं नाम नहीं रखना चाहूंगा लेकिन बहुत फेमस संत है आज के टाइम प

3014
03:39:29,120 --> 03:39:33,240
उनके बहुत करोड़ों फॉलोवर्स है एक बार मैं उनका वीडियो देख रहा

3015
03:39:33,240 --> 03:39:37,680
था वो उसम किसी ने क्वेश्चन किया था कि क्या रजस्वला स्त्री को भगवान

3016
03:39:37,680 --> 03:39:41,840
का पूजा पाठ करना चाहिए नहीं करना चाहिए वो उसको प्रमोट

3017
03:39:41,840 --> 03:39:45,960
कर रहे थे कि हा इसमें कोई दिक्कत नहीं है भगवान ही तो है कुछ दिन

3018
03:39:45,960 --> 03:39:50,480
के बाद वो जो वीडियो है ना वो से हटा दिया गया था एक ब

3019
03:39:50,480 --> 03:39:54,800
विद्वान उनका खंडन किया था परंपरा प्राप्त नहीं

3020
03:39:54,800 --> 03:40:00,800
होंगे वो परंपरा प्राप्त नहीं होंगे

3021
03:40:01,040 --> 03:40:05,960
परं एक मिनट एक

3022
03:40:05,960 --> 03:40:11,760
मिनट ऐसा करिए सुनिए मेरी बात सुनिए राम पांडे

3023
03:40:11,760 --> 03:40:16,040
जी राम पांडे जी मेरी बात सुनिए

3024
03:40:16,040 --> 03:40:20,120
मा मूट है उनकी उनकी माइक म्यूट

3025
03:40:20,120 --> 03:40:24,200
नहीं नहीं राम पांडे जी आप हमसे संपर्क करिए आपके

3026
03:40:24,200 --> 03:40:27,160
पास नंबर है कि नहीं

3027
03:40:27,160 --> 03:40:33,160
हमारा एक आपने माइक माइक को म्यूट कर रखा है

3028
03:40:36,720 --> 03:40:42,720
क्या राम पांडे जी एक मिनट

3029
03:40:43,160 --> 03:40:48,400
भैया माइक म्यूट है उन जी हो गया

3030
03:40:48,400 --> 03:40:52,560
चालू शिवास जी पाच मिनट ना इस पर बात कर लेते हैं जरूरी

3031
03:40:52,560 --> 03:40:56,720
बात है नहीं तो मैं बोलता ही नहीं आपको आज का टॉपिक भी क्लियर हो जाएगा साथ ही

3032
03:40:56,720 --> 03:41:00,760
जी जी राम पांडे जी आप मुझे कॉल करिए हम लोग इस परे

3033
03:41:00,760 --> 03:41:05,040
बात करते हैं ऐसा कुछ नहीं है कि हमारे अंदर कोई भेद भाव है

3034
03:41:05,040 --> 03:41:09,120
आप पहले हमें बता दीजिए किस बारे में बात हो रही है हम बात करेंगे उस पर है

3035
03:41:09,120 --> 03:41:14,320
ना बिल्कुल बिल्कुल नहीं मैं बस ये कह

3036
03:41:14,320 --> 03:41:18,440
बात हो अन्याय का हम प्रतिकार करेंगे व चाहे

3037
03:41:18,440 --> 03:41:22,440
कोई भी कर रहा हो मगर उसको जानना होगा कि समीक्षा

3038
03:41:22,440 --> 03:41:26,840
करने बैठे तो किसकी है क्या है आप हमें पहले कॉल कर लीजिएगा यह नंबर है

3039
03:41:26,840 --> 03:41:32,680
इस पर आप हमें कॉल करिएगा है ना आप भी करिएगा शुक्ला जी

3040
03:41:32,680 --> 03:41:38,680
हु शुक्ला जी नंबर आप नोट कर लीजिए 74036

3041
03:41:47,360 --> 03:41:51,520
जी कब से कब तक कर सकते हैं कॉल आप

3042
03:41:51,520 --> 03:41:56,080
ट कर दीजिए और आपको रिप्लाई मिल जाएगा

3043
03:41:56,080 --> 03:42:00,640
मतलब कब कॉल करेंगे आप ट कर दीजिए

3044
03:42:00,640 --> 03:42:05,360
और थोड़ आराम थोड़ा आराम से बोल दीजिए

3045
03:42:05,360 --> 03:42:09,440
स्क्रीन है जीय मेरे मेरे चेहरे के नीचे देखिए मेरा नंबर

3046
03:42:09,440 --> 03:42:12,520
लिखा

3047
03:42:12,520 --> 03:42:16,720
है हा गोविंद गुरुकुल जी आप बात पूरी कर लीजिए फिर हम समाप्त करें

3048
03:42:16,720 --> 03:42:20,760
आज की चर्चा हां बस मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा सिर्फ पाच मिनट से भी कम

3049
03:42:20,760 --> 03:42:25,000
समय लूंगा मेरी स्क्रीन अगर बड़ी हो जाती तो अच्छे से देख पाते हैं हम कुछ चीजों

3050
03:42:25,000 --> 03:42:29,960
को हां हां दिखाइए बड़ी कर इनकी स्क्रीन

3051
03:42:29,960 --> 03:42:33,960
अच्छा ये ज्ञान गंगा है ठीक है दो मुद्दे हम ले लेंगे कि दुर्गा

3052
03:42:33,960 --> 03:42:38,040
जी किनकी पत्नी या किनकी अर्धांगिनी है ठीक है और बोलने वाला

3053
03:42:38,040 --> 03:42:42,080
कौन है क्योंकि ये तो कहते कि ब्रह्मा जी की बात हम मानते नहीं

3054
03:42:42,080 --> 03:42:46,400
देवी की बात हम मानेंगे नहीं तो किसकी बात मानेंगे यह इसी से प्रमाणित

3055
03:42:46,400 --> 03:42:50,560
हो जाएगा अभी ज्ञान गंगा है थोड़ा नीचे चलते हैं और देखते हैं जरा

3056
03:42:50,560 --> 03:42:55,400
एक बार कि यह बातें बोल कौन रहा है ठीक

3057
03:42:55,400 --> 03:43:01,040
है ये आ गया [संगीत]

3058
03:43:01,040 --> 03:43:05,360
हमारा अच्छा देखिए य पर बड़ी क्लियर एक बात लिखी हुई है ठीक

3059
03:43:05,360 --> 03:43:09,480
है कि यह है सरोवर के जल में

3060
03:43:09,480 --> 03:43:13,680
कमल के फूल पर अवतरित होने के कारण परमेश्वर नारायण कहलाता

3061
03:43:13,680 --> 03:43:18,080
है ठीक है यहां पर बात जाती है कि जो नारायण है वह परमात्मा है

3062
03:43:18,080 --> 03:43:22,160
ठीक है इनके अनुसार अब इसी नारायण से

3063
03:43:22,160 --> 03:43:26,280
पूछते हैं कि देवी भगवती जो है वह किसकी पत्नी

3064
03:43:26,280 --> 03:43:30,440
है या किनकी भारिया है किनकी धर्म पत्नी है ठीक है यह मैंने

3065
03:43:30,440 --> 03:43:34,560
पहले आपको ज्ञान गंगा से दिखा दिया कि नारायण जो कहेंगे अर्थात व कबीर जी स्वयं

3066
03:43:34,560 --> 03:43:38,600
ही कह रहे हैं इनके मुताबिक ठीक अब देवी भागवत

3067
03:43:38,600 --> 03:43:42,720
खोलते हैं ठीक है यह देवी भागवत मैंने खोल लिया है

3068
03:43:42,720 --> 03:43:46,800
ठीक है गीता प्र गोरखपुर द्वारा प्र इसके अंदर ही चलते

3069
03:43:46,800 --> 03:43:51,040
य पूरा रामपाल दास जी की तर्ज में बात

3070
03:43:51,040 --> 03:43:55,480
करते तो ये है यह क्या लिख रहे हैं

3071
03:43:55,480 --> 03:43:59,480
जो गणेश की माता देवी दुर्गा है

3072
03:43:59,480 --> 03:44:03,600
उन्हें शिव स्वरूपा कहा जाता है वह भगवान शंकर की

3073
03:44:03,600 --> 03:44:07,720
प्रेयसी भारिया है तो यहां पर मैं थोड़ा हाईलाइट कर देता हूं

3074
03:44:07,720 --> 03:44:11,880
कभी कभी क्या होता है कि विटामिन की कमी के कारण आंखों को नहीं भी दिख पाता सही

3075
03:44:11,880 --> 03:44:16,080
से ठीक है तो आज के बाद जो भी आपको बोलेगा

3076
03:44:16,080 --> 03:44:20,080
देवी दुर्गा या प्रकृति जो है व काल की पत्नी है तो उनको यह दिखा

3077
03:44:20,080 --> 03:44:24,840
दीजिएगा और यह भी बता दीजिएगा यह बात कह कौन रहा है ठीक है

3078
03:44:24,840 --> 03:44:29,080
यह यहां पर मैंने मार्क कर दिया है ठीक है और यह बात कौन कह रहा है यह कबीर

3079
03:44:29,080 --> 03:44:33,280
जी स्वयं कह रहे हैं भगवान नारायण कहते हैं ठीक है तो यह

3080
03:44:33,280 --> 03:44:39,280
ऐसे नहीं ब्रह्मा जी कह रहे य नारायण कह रहे अर्थात कबीर जी कह रहे हैं इनके

3081
03:44:40,160 --> 03:44:45,080
मुताबिक अभी कबीर जी आगे जाकर कहते हैं कि

3082
03:44:45,080 --> 03:44:49,280
एक कवार गाय थी उसका दूध पिया था किसी ने कैसी कैसी बातें

3083
03:44:49,280 --> 03:44:53,440
करते ये ना भगवान नारायण अर्थात वही कबीर

3084
03:44:53,440 --> 03:44:57,560
जी जो है इनके अनुसार वो कह रहे हैं ठीक है

3085
03:44:57,560 --> 03:45:01,840
कि देवी सुर भी गोलोक में प्रकट हुई थी व गौओं की अधिष्ठात्री

3086
03:45:01,840 --> 03:45:05,920
देवी गौओं की आदि गौओं की जननी संपूर्ण गौओं में प्रमुख थी

3087
03:45:05,920 --> 03:45:10,040
समस्त गौओं में प्रथम वृंदावन में उस सूर भी का जन्म हुआ था ठीक

3088
03:45:10,040 --> 03:45:14,120
है अतः उसका चरित्र कहता हूं सुनिए अब देखिए क्या हुआ था दरअसल

3089
03:45:14,120 --> 03:45:18,720
दूध किसने पिया कब पिया था कहते हैं राधा पति कौतुकी

3090
03:45:18,720 --> 03:45:22,840
भगवान श्री कृष्ण राधा के साथ गोप नांग से घिरे हुए पुण्य वृंदावन

3091
03:45:22,840 --> 03:45:26,960
में गए कोतुहल वश थक जाने के कारण ये कोतुहल

3092
03:45:26,960 --> 03:45:31,080
वश लिखा हुआ है ठीक है बहाने ठीक है थक

3093
03:45:31,080 --> 03:45:35,680
जाने के बहाने थके नहीं है थक जाने के बहाने अर्थात लीला है सहसा

3094
03:45:35,680 --> 03:45:39,680
किसी एकांत स्थान में बैठ गए और उस स्वेच्छा में अपनी इच्छा से

3095
03:45:39,680 --> 03:45:44,000
प्रभु के मन में दूध पीने की इच्छा हो गई उसी क्षण उन्होंने

3096
03:45:44,000 --> 03:45:48,000
अपने वाम भाग से लीला पूर्वक सुरबी गौ को प्रकट किया बछड़ा

3097
03:45:48,000 --> 03:45:52,480
उस गौ के साथ था उसके थन में दूध भरा था उसके बछड़े का नाम मनोरथ

3098
03:45:52,480 --> 03:45:56,760
था सब उस सवत सा गौ

3099
03:45:56,760 --> 03:46:01,160
के सामने देखकर श्री दामा जी ने नूतन पात्र

3100
03:46:01,160 --> 03:46:05,360
में उसका दूध दुहा वह दूध जन्म और मृत्यु को दूर करने वाला दूसरा

3101
03:46:05,360 --> 03:46:09,600
अमृत ही था स्वयं गोपी पति भगवान श्री कृष्ण ने उस स्वादिष्ट

3102
03:46:09,600 --> 03:46:14,000
दूध को पिया था फिर हाथ से वह भांड फोड़कर गिरा दिया और

3103
03:46:14,000 --> 03:46:18,000
दूध धरती पर फैल गया फिर इसी प्रकार दूध आगे चला था यह बात कह

3104
03:46:18,000 --> 03:46:22,160
कौन रहे हैं स्वयं कबीर जी इनके मुताबिक नारायण ठीक है

3105
03:46:22,160 --> 03:46:26,280
यह देख लीजिए इस गऊ का कोई बैल नहीं था

3106
03:46:26,280 --> 03:46:30,440
क्योंकि वह गौ की अ अधिष्ठात्री देवी है और वह प्रकट हुई

3107
03:46:30,440 --> 03:46:34,520
थी वह आदि गौ है गौओं की आदि गौओं की

3108
03:46:34,520 --> 03:46:39,200
जननी संपूर्ण गौओं में प्रमुख अर्थात पहली थी

3109
03:46:39,200 --> 03:46:43,280
ठीक है तो यह है कुवारी गौ का पूरा व्याख्यान

3110
03:46:43,280 --> 03:46:46,360
इस प्रकार किसी चीज का ना व्याख्यान दिया जाता है

3111
03:46:46,360 --> 03:46:50,440
अघन्य को अघन्य कह देने से बातें नहीं चलती शास्त्र का

3112
03:46:50,440 --> 03:46:54,560
प्रमाण देना पड़ता है और शास्त्र का प्रमाण यहां मिल जाता है ठीक है तो

3113
03:46:54,560 --> 03:46:58,560
ये कहानी आज के बाद किसी और को सुनाइए नवा स्कंद है

3114
03:46:58,560 --> 03:47:02,640
49 इसका अध्याय ठीक है एक

3115
03:47:02,640 --> 03:47:06,640
बार पढ़ लीजिएगा आदि गऊ सरबी देवी का उपाख्यान तो यह हमारा

3116
03:47:06,640 --> 03:47:10,640
आज का यह भी बात सिद्ध हो जाती है और कहने वाले कौन है कबीर जी स्वयं

3117
03:47:10,640 --> 03:47:16,640
कह रहे हैं ये बात ठीक है ये बात याद रखिए

3118
03:47:17,200 --> 03:47:23,200
उन्होने कभी इतना ध्यान से पढ़ा नहीं वो क्या बताएंगे

3119
03:47:30,600 --> 03:47:34,880
है इनका एक और ड्रामे बाजी क्या है मैं खत्म कर रहा खत्म कर रहा

3120
03:47:34,880 --> 03:47:39,000
इनकी और ड्रामे बाजी क्या है ये लेखक पूछ रहे थे उस दिन जब मैंने गीता से इनका

3121
03:47:39,000 --> 03:47:43,000
झूठ पकड़ा ठीक है तोय उसका तो नहीं था श्रीमद् देवी भागवत गीता प्स

3122
03:47:43,000 --> 03:47:47,080
गोरखपुर द्वारा प्रकाशित संपादक हनुमान प्रसाद पोदार जी

3123
03:47:47,080 --> 03:47:53,080
और चिमन लाल गोस्वामी जी सेम जो आपके बाबा जी पढ़ाते हैं इंटरनेशनल टीवी

3124
03:47:53,080 --> 03:47:56,440
पर

3125
03:47:56,440 --> 03:48:00,600
बा जी जी मैं कह रहा था कि आज हमने अपने इनके जो

3126
03:48:00,600 --> 03:48:04,640
तीन नैरेटिव और है वो ब्रेक किए हैं एक ब्रज शब्द

3127
03:48:04,640 --> 03:48:08,840
का सही अर्थ गतिशील है और वहां पर उसका उपयोग

3128
03:48:08,840 --> 03:48:12,880
आने के उसम हुआ है संस्कृत के विभिन्न नियमों के अनुसार

3129
03:48:12,880 --> 03:48:16,880
दूसरा हमने टिव आज तोड़ा है कोई कुमारी गाय का दूध

3130
03:48:16,880 --> 03:48:21,000
कबीर जी के रेफरेंस से वहा पर सिद्ध नहीं होता है

3131
03:48:21,000 --> 03:48:25,000
बिल्कुल नहीं और अगर होता है कुमारी गाय का दूध पीना तो कृष्ण जी के

3132
03:48:25,000 --> 03:48:29,960
लिए सिद्ध होता है कबीर जी

3133
03:48:29,960 --> 03:48:35,320
और कहने वाले स्वयं आपके अनुसार हमारे अनुसार नहीं आपके अनुसार कहने

3134
03:48:35,320 --> 03:48:39,440
वाले आपके अनुसार कबीर है आप उला नहीं

3135
03:48:39,440 --> 03:48:45,440
सकते और

3136
03:48:46,480 --> 03:48:50,880
अग वाला वो डोर संख है मतलब उसम कुछ नहीं है

3137
03:48:50,880 --> 03:48:54,920
कुछ सब मनगण बात है वो और इसके साथ

3138
03:48:54,920 --> 03:48:59,160
ही साथ आज आपके व्यक्ति ने रामपाल

3139
03:48:59,160 --> 03:49:03,400
दास नाम के रामपाल दास के फॉलोअर

3140
03:49:03,400 --> 03:49:07,480
ने रामपाल दास नाम के रामपाल दास जी के फॉलोअर ने

3141
03:49:07,480 --> 03:49:11,720
आज स्वीकार कर लिया कि कबीर जी का भी आविर्भाव

3142
03:49:11,720 --> 03:49:15,920
रो भाव होता है हो सकता है है ना उनका शरीर

3143
03:49:15,920 --> 03:49:20,000
भी आना जाना उनका प्रकट अपक सिद्ध हो जाता है और फिर

3144
03:49:20,000 --> 03:49:24,120
वो देवी भगवती किसी की पत्नी नहीं हो सकती हो परम तत्व के रूप में

3145
03:49:24,120 --> 03:49:28,440
य सब बातें हम कई बार कर चुके फिर भी याद रख लीजिए कि देवी मां जब

3146
03:49:28,440 --> 03:49:32,720
उनको उत्पन्न करने वाली है उस समय परम तत्व के रूप में है

3147
03:49:32,720 --> 03:49:36,880
वो ना स्त्री है ना पुरुष है तो उनका किसी की मां

3148
03:49:36,880 --> 03:49:40,920
किसी का किसी की पत्नी होना वहां पर सिद्धि नहीं होता लीला रूप में वो

3149
03:49:40,920 --> 03:49:45,040
किसी के पत्नी रूप में दिखाई देती है तो लीला रूप में ही ब्रह्मा विष्णु

3150
03:49:45,040 --> 03:49:49,160
महेश अपने आप को आविर्भव रो भाव या अविनाशी या नहीं मानते

3151
03:49:49,160 --> 03:49:53,480
नाशवान मान ले मगर तात्विक रूप से वो स्वयं

3152
03:49:53,480 --> 03:49:58,200
प्रभु है ठीक है यह सब जाना

3153
03:49:58,200 --> 03:50:01,600
एक और नई चीज पता चली है अनामी लोक पहले सतलोक था

3154
03:50:01,600 --> 03:50:05,800
अब उसके ऊपर भी एक नई बिल्डिंग डाल ली है चलो धीरे धीरे धीरे धीरे देखिए

3155
03:50:05,800 --> 03:50:10,600
होता क्या बातचीत करते करते व व्यक्ति हो

3156
03:50:10,600 --> 03:50:14,720
गया बातचीत करते करते वक्ति अ हो गया

3157
03:50:14,720 --> 03:50:19,600
बकुल तो अब हम किसी को लेंगे फलोर भी परर बना

3158
03:50:19,600 --> 03:50:24,840
पज पज किसी और

3159
03:50:24,840 --> 03:50:28,880
दिन नए लोग पर यहां से उ उसको खदेड़ करके हम

3160
03:50:28,880 --> 03:50:33,560
लोग भगाए उसी नए लोग पर जाओ और

3161
03:50:33,560 --> 03:50:38,120
जी आपको सुन नहीं पाए बस आप अपनी कु बात

3162
03:50:38,120 --> 03:50:42,760
ना बोला कैंसर हो तो उस हाथ को काट ही देना चाहिए फैले

3163
03:50:42,760 --> 03:50:47,040
नाड़ी जी आपको सुन लिया ना हमने

3164
03:50:47,040 --> 03:50:51,560
जी जी जी सात्विक जी बताए

3165
03:50:51,560 --> 03:50:54,560
जी महादेव

3166
03:50:54,560 --> 03:50:58,680
महादेव अ एक बार एक बार चेहरा दिखा दीजिए वैसे आपने

3167
03:50:58,680 --> 03:51:04,680
दिखाया है जब भी आप आए एक बार दिखा दीजिए एक मिनट

3168
03:51:12,400 --> 03:51:16,770
मिनट हां बोलिए

3169
03:51:16,770 --> 03:51:20,520
[संगीत]

3170
03:51:20,520 --> 03:51:24,560
हां मैं ये कहना चाहता था कि जो आपके विरोधी है ना इन्होंने

3171
03:51:24,560 --> 03:51:29,000
जो हमारे भी है उन्होंने एक नया प्रलाप

3172
03:51:29,000 --> 03:51:33,000
किया है अभी ग्राउंड लेवल पर हो सकता है शायद आप तक

3173
03:51:33,000 --> 03:51:37,840
पहुंचे हो सकता है शायद आप तक पहुंचे क्या

3174
03:51:37,840 --> 03:51:42,160
यह जो हमारे धर्म की जो बहने है ना इनको यह

3175
03:51:42,160 --> 03:51:46,400
हमारी विवाह प्रणाली बताकर उसकी रगल व्याख्या करके उन्हें

3176
03:51:46,400 --> 03:51:50,400
कबीर पंथी बना रहे हैं अच्छा मैं एक बात

3177
03:51:50,400 --> 03:51:54,520
कहूंगा कि रामपाल दास जी के एक वीडियो मैंने देखा कि वोह कह रहे हैं बस

3178
03:51:54,520 --> 03:51:58,520
वो लड़की के मां बाप ने कह दिया हमें आपका लड़का पसंद है आपकी

3179
03:51:58,520 --> 03:52:03,000
बिटिया हमें पसंद है बस यह विवाह है और रामपाल दास जी के अनुसार

3180
03:52:03,000 --> 03:52:07,160
जो अभी तक जो विवाह पद्धति चली आ रही है कम

3181
03:52:07,160 --> 03:52:11,560
से कम पिछले 6700 साल से वो तो गलत थी

3182
03:52:11,560 --> 03:52:15,640
और वो जो अब बता रहे वो सही है तो इसका अर्थ यह है कि

3183
03:52:15,640 --> 03:52:19,960
रामपाल दास जी को जो मानने वाले हैं जिनके अनुसार जो

3184
03:52:19,960 --> 03:52:24,240
पुरानी विवाह पद्धति है वह गलत है और रामपाल दास जी के द्वारा

3185
03:52:24,240 --> 03:52:27,600
पिछले 50 10 20 सालों में बताई गई जो

3186
03:52:27,600 --> 03:52:31,880
विवाह पद्धति है वह सही है वो लोग वो है जो अपने ही मां-बाप को

3187
03:52:31,880 --> 03:52:36,240
अपने ही उत्पन्न होने को कहते हैं कि हम जो है अवैध संतान

3188
03:52:36,240 --> 03:52:40,600
है वो अवैध संतान सिद्ध हुए ना भाई

3189
03:52:40,600 --> 03:52:44,760
जो विवाह की पद्धति है वो तो गलत है तत्वदर्शी संत के

3190
03:52:44,760 --> 03:52:48,960
अनुसार तो जो इस बात को मान रहा है वह कह रहा है कि मैं अपने

3191
03:52:48,960 --> 03:52:52,960
मां-बाप की अवैध संतान हूं यही सिद्ध होगा ना

3192
03:52:52,960 --> 03:52:57,040
तो निर्णय स्वयं ले कि आप अवैध संतान है या वैध संतान

3193
03:52:57,040 --> 03:53:01,200
है है ना विवाह पद्धति अगर मानते हैं पुरानी

3194
03:53:01,200 --> 03:53:05,240
वाली सात फेरे लेते हैं सात वचन होते हैं मांग में सिंदूर

3195
03:53:05,240 --> 03:53:09,320
भरा जाता है मंगल सूत्र मारा जाता है मंत्र उच्चारण होता है यह

3196
03:53:09,320 --> 03:53:13,400
सारी विवाह पद्धति अगर आप मानते हैं और भी अनेका अनेक चीजें

3197
03:53:13,400 --> 03:53:17,400
होती है तो अगर मानते हैं तो

3198
03:53:17,400 --> 03:53:21,560
इसका मतलब उतने अंश में आप तत्वदर्शी संत को नहीं मानते

3199
03:53:21,560 --> 03:53:25,600
और अगर तत्वदर्शी संत को पूर्णतया मानते हैं तो फिर इसका मतलब यह है

3200
03:53:25,600 --> 03:53:29,720
कि आप अपने आप को अवैध मानते हैं अवैध संतान मानते हैं उसके कई और

3201
03:53:29,720 --> 03:53:33,800
लौकिक उच्चारण भी होते हैं जो मर्यादा के बाहर है तो हम

3202
03:53:33,800 --> 03:53:38,120
वो यहां पर उपयोग में नहीं लाएंगे मगर जो अपने माता

3203
03:53:38,120 --> 03:53:42,360
पिता के विवाह को नहीं मानता कि वह सही

3204
03:53:42,360 --> 03:53:42,960
था

3205
03:53:42,960 --> 03:53:47,160
और तत्वदर्शी जी जो बता वो सही है वह स्वयं को अवैध

3206
03:53:47,160 --> 03:53:51,320
संतान कह रहा है तो अब स्वयं तय करें वह किसी

3207
03:53:51,320 --> 03:53:55,360
की अवैध संतान है या वैध संतान है हम नहीं कह रहे आप स्वयं ही कह रहे

3208
03:53:55,360 --> 03:53:59,400
हैं ठीक है नहीं बाकी बाकी कहीं बातें यहां बताना

3209
03:53:59,400 --> 03:54:03,680
उचित नहीं होगा अगर आप मुझसे कॉल पर बात कर सके तो मैं आपको

3210
03:54:03,680 --> 03:54:07,960
बता दूं जो मुझे पता है

3211
03:54:07,960 --> 03:54:12,080
चलिए आने के लिए समय देने के लिए सभी को आभार सात्विक

3212
03:54:12,080 --> 03:54:16,160
जी आपका भी आभार और बहुत आप लोगों

3213
03:54:16,160 --> 03:54:20,200
का वो मिल रहा है मैं एक बार यह पूरा होने से पहले इसको ऑफ करने से

3214
03:54:20,200 --> 03:54:24,440
पहले फिर कहूंगा हमारे अभियान पर प्रहार किया जा सकता है किया

3215
03:54:24,440 --> 03:54:28,960
जा रहा है अब आप लोगों की बारी है दायित्व उठाने की

3216
03:54:28,960 --> 03:54:33,400
सबसे पहला दायित्व है कि कम से कम प्राथमिकता से हमारे जो कंटेंट

3217
03:54:33,400 --> 03:54:37,640
है उसको लाइक अवश्य करें जिससे कि यटय को यह इंफॉर्मेशन

3218
03:54:37,640 --> 03:54:41,920
जाए कि हम लोग दर्शन विज्ञान व्यवहार की सीमा में रहकर

3219
03:54:41,920 --> 03:54:45,920
जो शास्त्रोक्त बातें हैं बता रहे हैं सत्य को उजागर कर

3220
03:54:45,920 --> 03:54:50,080
रहे हैं बिल्कुल दूसरा यदि सामर्थ्य है तो चैनल

3221
03:54:50,080 --> 03:54:56,080
की सदस्यता जरूर ग्रहण कर ले इससे

3222
03:55:07,160 --> 03:55:13,160
[संगीत]

3223
03:55:14,320 --> 03:55:18,480
कोई फर्क नहीं है कोई फर्क नहीं है

3224
03:55:18,480 --> 03:55:22,800
नहीं तो कुछ मॉडिफिकेशन तो होना चाहिए ना तीनों में सबके लिए बराबर

3225
03:55:22,800 --> 03:55:26,800
आप आप चाहे तो ज्यादा से ले लीजिए सदस्यता आप चाहे तो

3226
03:55:26,800 --> 03:55:30,800
कम से ले लीजिए सदस्यता फर्क कुछ नहीं है तो सदस्यता

3227
03:55:30,800 --> 03:55:34,840
अवश्य ले ले इससे एक इंफॉर्मेशन और पहुंचेगी कि भाई ये लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं

3228
03:55:34,840 --> 03:55:38,840
अच्छा इन्हें अच्छा कहने वाले लोग भी हैं क्योंकि गलत कहने वाले लोग

3229
03:55:38,840 --> 03:55:43,040
तो अपनी बातें पहुंचा रहे हैं ठीक है इसमें कोई संशय है ही नहीं आप बहुत

3230
03:55:43,040 --> 03:55:47,120
अच्छा कार्य कर रहे हैं इसमें कोई संशय नहीं है एक मलब

3231
03:55:47,120 --> 03:55:51,640
डंके की चोट पर बहुत सुंदर हम आपका बहुत समर्थन करते हैं

3232
03:55:51,640 --> 03:55:55,800
और बढिया आनंद की अनुभूति होती है जब आप विरोधियों के पक्ष

3233
03:55:55,800 --> 03:55:59,800
में अपना बिल्कुल तार्किक जवाब रखते

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03:55:59,800 --> 03:56:05,800
हैं चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री

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03:56:07,980 --> 03:56:13,240
[संगीत]

3236
03:56:13,240 --> 03:56:17,240
राम m
