1
00:00:04,580 --> 00:00:08,880
[संगीत]

2
00:00:08,880 --> 00:00:12,960
सभी को जय श्री राम और

3
00:00:12,960 --> 00:00:16,960
आज हमारी जो रामपाल विषयक कई सारी चर्चाएं हो

4
00:00:16,960 --> 00:00:21,600
चुकी हैं अभी तक उसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण चर्चा

5
00:00:21,600 --> 00:00:25,920
है आज आज का हम लोग

6
00:00:25,920 --> 00:00:31,040
समय पर आ जाते पर

7
00:00:31,040 --> 00:00:35,200
जो आज हमारे जो आगंतुक हैं जो आने वाले हैं लाइव

8
00:00:35,200 --> 00:00:39,600
में संभवत उन्हें ठीक से संचालित

9
00:00:39,600 --> 00:00:43,600
करना नहीं आता है। YouTube में लाइव स्ट्रीम को कैसे ज्वाइन

10
00:00:43,600 --> 00:00:47,760
करते हैं? तो इस कारण से उन्हें दिशा निर्देश देते

11
00:00:47,760 --> 00:00:52,080
हुए और थोड़ा सा समय भी लगा और उसको

12
00:00:52,080 --> 00:00:56,800
अभी भी हमारी टीम जो है जो व्यक्ति हैं जो आने वाले हैं

13
00:00:56,800 --> 00:01:00,800
उनको अभी भी हमारी टीम निर्देशित कर रही है कि वह

14
00:01:00,800 --> 00:01:06,000
किस प्रकार से जुड़ सकते हैं लाइव में। तब तक हम

15
00:01:06,000 --> 00:01:10,000
और आप कुछ बातें कर लेते हैं। हर्ष झा

16
00:01:10,000 --> 00:01:14,880
जी शिवश के तेज से तप गया अधर्म

17
00:01:14,880 --> 00:01:19,200
लाख करे प्रचार असत कि मगर जीत रहा है धर्म

18
00:01:19,200 --> 00:01:20,560
वाह

19
00:01:20,560 --> 00:01:26,560
क्या बात है ठीक है अच्छा वो आ गए हैं जुड़ गए हैं

20
00:01:28,000 --> 00:01:34,000
जी आतिश जी अपना कैमरा ऑन कर लीजिए

21
00:01:44,560 --> 00:01:50,000
जय श्री राम। जय श्री राम।

22
00:01:50,000 --> 00:01:54,080
जी आदेश जी पहले अपना परिचय दे दीजिए दर्शकों को

23
00:01:54,080 --> 00:01:58,720
अपने बारे में बता दीजिए। आपका नाम वगैरह और आपका जो

24
00:01:58,720 --> 00:02:04,160
आध्यात्मिक बैकग्राउंड है किस प्रकार से आप रामपाल जी से जुड़े हुए हैं?

25
00:02:04,160 --> 00:02:08,880
मेरा [गला साफ़ करने की आवाज़] नाम आतीश कुमार है। मैं बिहार से बिहार वैशाली के रहने वाला हूं।

26
00:02:08,880 --> 00:02:13,920
मैं रामपाल जी से मेरे पापा के द्वारा जुड़ा था। हां हां

27
00:02:13,920 --> 00:02:18,240
जी। अच्छा कब से जुड़े हैं? जुड़ा

28
00:02:18,240 --> 00:02:22,400
तो मैं 2022 में ही हूं लेकिन मैंने छोड़ दिया था बीच में लेकिन मेरे पापा

29
00:02:22,400 --> 00:02:26,080
नहीं छोड़ पा रहे हैं अभी।

30
00:02:26,080 --> 00:02:32,080
आपने छोड़ दिया? जी छोड़ दिए। अरे

31
00:02:32,320 --> 00:02:36,400
आपने छोड़ दिया। अच्छा कब छोड़ा? पापा नहीं छोड़ पा रहे

32
00:02:36,400 --> 00:02:39,360
हैं।

33
00:02:39,360 --> 00:02:43,760
आपने कब छोड़ा है? मैं तो यही 2023

34
00:02:43,760 --> 00:02:47,760
में छोड़ दिया था। क्या कारण रहा छोड़ने

35
00:02:47,760 --> 00:02:51,760
का? उसमें बोला जाता था कि

36
00:02:51,760 --> 00:02:55,760
जिस भगवान के बारे में गलत सलत बोलना नहीं

37
00:02:55,760 --> 00:02:59,920
मानना नहीं मंदिर में जाना है नहीं पूजा करना है किसी भगवान में बिलीव

38
00:02:59,920 --> 00:03:05,520
नहीं करना है यही सब थोड़ा तेज बोलिए

39
00:03:05,520 --> 00:03:09,600
ये हटा दीजिए आप इसमें आवाज अच्छी नहीं आती ये हटा दीजिए आप इसमें

40
00:03:09,600 --> 00:03:15,600
आवाज ठीक नहीं आती

41
00:03:18,480 --> 00:03:24,360
बोलिए। बोला जा रहा था कि भगवान कुछ नहीं है। उनका नाम नहीं लेना है।

42
00:03:24,360 --> 00:03:28,640
[गला साफ़ करने की आवाज़] गलत है। नहीं मंदिर में जाना है।

43
00:03:28,640 --> 00:03:33,440
ये सब ढकोसलाबाज है।

44
00:03:33,440 --> 00:03:37,440
नहीं तो आपको कैसे पता लगा? वो तो मैं जानता

45
00:03:37,440 --> 00:03:43,440
हूं। कैसे पता लगा? जी। जी बताइए।

46
00:03:43,760 --> 00:03:48,160
धीरे-धीरे जानते हुए पता चला

47
00:03:48,160 --> 00:03:53,120
मन नहीं लगता था उसे पूजा करने में चाहे कुछ भी करने में।

48
00:03:53,120 --> 00:03:59,120
अच्छा जी तो आपने हमारा फॉर्म क्यों भरा?

49
00:03:59,280 --> 00:04:03,440
वही पापा को आती करने के लिए। पापा नहीं छोड़ पा रहे हैं।

50
00:04:03,440 --> 00:04:08,080
तो पापा को भेजना चाहिए था।

51
00:04:08,080 --> 00:04:12,560
आप तो हमारी साइड ऑलरेडी आ चुके हैं। जी

52
00:04:12,560 --> 00:04:16,560
क्या चाहते हैं हमसे आप बताइए सोनी को थोड़ा सा

53
00:04:16,560 --> 00:04:20,960
कन्वेंस करने के लिए समझाने के लिए नहीं मानते हैं

54
00:04:20,960 --> 00:04:25,760
पापा को आपके पिता श्री को कन्वेंस करवाना चाहते हैं हमारे द्वारा

55
00:04:25,760 --> 00:04:30,160
वो तो तभी होगा ना जब हम उनसे बात कर पाएंगे

56
00:04:30,160 --> 00:04:35,360
मैं सोचा था एकदम मैं बात कर लूं उसके बाद दूसरी बार पापा को बात करवाऊंगा।

57
00:04:35,360 --> 00:04:39,360
अरे तो ठीक है आप बात कर सकते हैं मगर आप फोन पर

58
00:04:39,360 --> 00:04:43,440
भी बात कर सकते थे क्लास में आ सकते थे इस तरह से लाइव आकर के

59
00:04:43,440 --> 00:04:47,840
कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि ये लाइव जो रखा जाता है वो इसलिए रखा जाता है

60
00:04:47,840 --> 00:04:52,000
कि जो सहमत नहीं है जी

61
00:04:52,000 --> 00:04:56,160
वो किन पक्षों में उनकी क्या बात है हमारी क्या बात है उस पर चर्चा करने के लिए रखा जाता है। अब

62
00:04:56,160 --> 00:04:59,340
आप तो सहमत हैं।

63
00:04:59,340 --> 00:05:03,360
[गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा सुबह से जब आपसे जब से बात हो

64
00:05:03,360 --> 00:05:07,440
रही थी तो आप इस तरह से आपकी आवाज में एक बात थी जैसे मुझे डाउट हो ही

65
00:05:07,440 --> 00:05:11,760
रहा था कि आप मुझे ऐसा लग ही नहीं रहा था कि मैं किसी रामपाल

66
00:05:11,760 --> 00:05:16,720
के पक्षधर से बात कर रहा हूं। मुझे ऐसा लग रहा था कि

67
00:05:16,720 --> 00:05:20,720
जो भगवान के सभी जो वैदिक स्वरूप है उनको मानने वाले से ही बात कर

68
00:05:20,720 --> 00:05:25,280
रहा हूं। और किसी पाखंडवाद

69
00:05:25,280 --> 00:05:29,520
से जुड़े हुए व्यक्ति से बात नहीं कर रहा। जब से मैं सुबह से बात कर रहा था पर इतनी

70
00:05:29,520 --> 00:05:34,160
ज्यादा व्यस्तता थी कि [गला साफ़ करने की आवाज़]

71
00:05:34,160 --> 00:05:38,240
मैं जो है आपसे इस बारे में जिक्र नहीं

72
00:05:38,240 --> 00:05:42,400
कर पाया। फिर भी कुछ मोटी मोटी चीजें बताएं। जैसे आपको क्या-क्या पता

73
00:05:42,400 --> 00:05:46,400
लगा रामपाल जब वहां पर रहे हैं तो क्या है?

74
00:05:46,400 --> 00:05:50,400
क्या-क्या पता लगा? थोड़ा प्रैक्टिकल बताएं जिससे जनता समझ पाए। दर्शक जो है

75
00:05:50,400 --> 00:05:54,560
समझ पाए चीजों को। एक तो वो तो जीव है अपने आप को भगवान

76
00:05:54,560 --> 00:05:58,560
मानते हैं। मतलब आप भगवान है तो आप स्वयं को भगवान

77
00:05:58,560 --> 00:06:02,400
मानते हैं। जी

78
00:06:02,400 --> 00:06:08,000
अपने आप को ही पूरा करवाते हैं। अच्छा

79
00:06:08,000 --> 00:06:11,200
और

80
00:06:11,200 --> 00:06:15,200
बहुत सितारे हैं।

81
00:06:15,200 --> 00:06:20,160
ये जो ब्रज ब्रज शब्द का अर्थ बताया जाता है अपने मन से।

82
00:06:20,160 --> 00:06:24,240
जी ब्रज कि 1866 में भगवत गीता भगवान ने कहा मेरी

83
00:06:24,240 --> 00:06:28,960
शरण से जा इस बारे में कुछ पता है आपको कि नहीं

84
00:06:28,960 --> 00:06:34,000
नहीं ये सब बारे में पता नहीं

85
00:06:34,000 --> 00:06:38,160
अच्छा तो फिर भी कुछ और ऐसी चीजें जो आपको ठीक ना लगी हो

86
00:06:38,160 --> 00:06:42,240
कुछ भी वो आप बता सकते हैं बहुत

87
00:06:42,240 --> 00:06:46,240
सारे चीज ठीक नहीं लगे मेन बात तो वो कि जो बात

88
00:06:46,240 --> 00:06:50,480
बताते हैं वही गलत होता है हर चीज में अपना

89
00:06:50,480 --> 00:06:54,480
अपने आप को आगे रख देते हैं। मेन काल को मानते हैं।

90
00:06:54,480 --> 00:06:59,680
काल कौन है यह भी पता नहीं।

91
00:06:59,680 --> 00:07:04,320
बोलते हैं काल सबसे ऊपर है। काल कौन है ये भी पता नहीं है।

92
00:07:04,320 --> 00:07:07,520
हम

93
00:07:07,520 --> 00:07:11,520
ठीक है। अच्छा किया आप अपने पिताजी

94
00:07:11,520 --> 00:07:15,920
से हमारी किसी तरह से वार्ता करवाइए तो हम देखें क्या कर सकते हैं। कन्वस

95
00:07:15,920 --> 00:07:21,920
और अभी तो वो नहीं है।

96
00:07:23,360 --> 00:07:29,280
और

97
00:07:29,280 --> 00:07:33,360
आप हमारी क्लासेस ज्वाइन कर सकते हैं। वहां पर आ सकते हैं जिससे कि

98
00:07:33,360 --> 00:07:38,400
अन्यों को फंसने से बचा सकें।

99
00:07:38,400 --> 00:07:42,640
है ना? अगर आप हमारी पढ़ाई जैसे पढ़ेंगे चीजें जानेंगे

100
00:07:42,640 --> 00:07:46,880
तो अन्य को फंसने से बचाएंगे। नाम जप आंदोलन में

101
00:07:46,880 --> 00:07:51,040
भाग ले सकते हैं। नाम जप अभियान चल रहा है जो उस समय जिसमें हम लोग दिन भर

102
00:07:51,040 --> 00:07:55,360
में सवा घंटे भगवान के नाम का जप करते हैं। वो ब्रह्मा

103
00:07:55,360 --> 00:08:00,240
विष्णु महेश भगवती गणेश राम कृष्ण इनमें से किसी के भी नाम का जप करें।

104
00:08:00,240 --> 00:08:04,240
उसमें आप जुड़ सकते हैं। जुड़ने के लिए उसी नंबर पे आप जब WhatsApp करेंगे

105
00:08:04,240 --> 00:08:08,240
तो आपको फॉर्म मिल जाएगा। वो भर सकते हैं।

106
00:08:08,240 --> 00:08:12,480
ठीक है? बाकी मैं एक चीज ये कह रहा था कि आपने कभी

107
00:08:12,480 --> 00:08:15,120
आपके सामने ऐसा हुआ क्या? ये लोग जो

108
00:08:15,120 --> 00:08:19,120
अजीब अजीब प्रकार के वीडियोस बनाते हैं जिसमें कि अपने ही

109
00:08:19,120 --> 00:08:23,120
व्यक्ति को ऐसे ड्रेस पहन के बिाल देते

110
00:08:23,120 --> 00:08:27,280
हैं और उसको बताते हैं ये जो है दुर्गा का भक्त है राम का भक्त

111
00:08:27,280 --> 00:08:31,280
है पंडित है ब्राह्मण है और फिर उस वहां पर एक चर्चा दिखाते

112
00:08:31,280 --> 00:08:35,440
हैं नाटक करते हैं कि अरे हम तो राम के भक्त है हम क्यों माने तुम्हारी

113
00:08:35,440 --> 00:08:39,440
बात फिर वहां पर कुछ बेफिजूल के तर्क दे

114
00:08:39,440 --> 00:08:43,680
के दिखाते हैं देखो हमने ब्राह्मण था राम का भक्त था उसको जो

115
00:08:43,680 --> 00:08:48,560
रामपाल का भक्त बना लिया। ये आपने कभी देखा है अपने से?

116
00:08:48,560 --> 00:08:52,720
जी देखा है हमने। तो कैसे क्या होता था

117
00:08:52,720 --> 00:08:57,760
थोड़ा बताएंगे कोई एक बार का? वही जो

118
00:08:57,760 --> 00:09:02,080
जो आए उसमें दीक्षा लेने के बाद जो दुख खत्म

119
00:09:02,080 --> 00:09:06,080
होता है उसको बताते हैं कि मैंने इनका पूजा किया तो मेरा ये दुख खत्म हो गया। ये हो

120
00:09:06,080 --> 00:09:10,160
गया।

121
00:09:10,160 --> 00:09:12,480
अच्छा।

122
00:09:12,480 --> 00:09:17,600
और ये किस प्रकार से अपनी बातों में लेते हैं लोगों को कैसे

123
00:09:17,600 --> 00:09:23,600
नए व्यक्ति को कैसे पजेस करते हैं?

124
00:09:28,000 --> 00:09:32,080
कोई भय तो नहीं है आपको? किसी प्रकार का कोई भय तो नहीं

125
00:09:32,080 --> 00:09:38,080
है? बोलिए फिर क्या?

126
00:09:45,840 --> 00:09:51,440
ठीक है आप बात करेंगे थे

127
00:09:51,440 --> 00:09:57,440
जय श्री राम कहां गए आदेश जी

128
00:10:03,120 --> 00:10:07,520
आप लिंक को पब्लिक कर दीजिए

129
00:10:07,520 --> 00:10:11,520
हां इनके पास में था कोई ऐसा शायद जिसकी वजह से

130
00:10:11,520 --> 00:10:16,960
बोल नहीं पा रहे थे ठीक से कोई बात नहीं हमें अच्छा लगा कि कोई एक

131
00:10:16,960 --> 00:10:20,800
सही रास्ते पर आया व्यक्ति

132
00:10:20,800 --> 00:10:24,880
लिंक पब्लिक किया जा चुका है

133
00:10:24,880 --> 00:10:27,600
अ

134
00:10:27,600 --> 00:10:31,600
वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है ऐसा जो लोग बोलते हैं

135
00:10:31,600 --> 00:10:35,680
आकर के आ सकते हैं अपनी बात को रख सकते हैं

136
00:10:35,680 --> 00:10:40,080
ब्रज शब्द के ऊपर बात कर सकते हैं। परमात्मा सशरीर आता है। सशरीर

137
00:10:40,080 --> 00:10:44,160
जाता है। यह जो ढोंग फैलाया हुआ है, पाखंड फैलाया हुआ है, इस पर

138
00:10:44,160 --> 00:10:48,480
बात कर सकते हैं। शास्त्रों का मर्म तथाकथित

139
00:10:48,480 --> 00:10:53,040
तिरछेदर्शी बताएंगे। तिरछेदर्शी अर्थात हमने पिछले वीडियो में बताया ना तिरछादर्शी

140
00:10:53,040 --> 00:10:57,120
कौन है? तो वो आकर के तत्वदर्शी है। तिरछेदर्शी है

141
00:10:57,120 --> 00:11:01,120
इस पर बात कर सकते हैं। ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इस पर बात

142
00:11:01,120 --> 00:11:07,120
कर सकते हैं। सर्व्यापक है कि नहीं इस पर बात कर सकते हैं। और

143
00:11:08,880 --> 00:11:12,880
जिसके विरोध में कबीर पंथ बना हुआ है, वह जो मुख्य सनातन

144
00:11:12,880 --> 00:11:17,200
धर्म की धारा है,

145
00:11:17,200 --> 00:11:21,280
उसके विरोध में जो सनातन ये विरोध में जो रामपाल जी द्वारा

146
00:11:21,280 --> 00:11:25,440
फैलाया गया पूरा तंत्र है, पूरा जाल है। उस विषय में अगर

147
00:11:25,440 --> 00:11:31,120
किसी को उनका पक्ष रखना हो तो वो रख सकते हैं। अ

148
00:11:31,120 --> 00:11:36,000
कुमारी गाय वाला एक मामला है। कुमारी गाय है और

149
00:11:36,000 --> 00:11:40,000
क्या कहते हैं

150
00:11:40,000 --> 00:11:44,160
कुछ और भी टॉपिक्स हैं तो आकर के अगर कोई बात करना चाहे

151
00:11:44,160 --> 00:11:47,840
कबीर विषयक

152
00:11:47,840 --> 00:11:52,080
साहस हो कबीर की भक्ति करने से रामपाल दास जी

153
00:11:52,080 --> 00:11:56,080
को फॉलो करने से उनकी भक्ति करने से यदि किसी को साहस

154
00:11:56,080 --> 00:12:00,400
प्राप्त हुआ हो तो उस साहस का प्रदर्शन करें और

155
00:12:00,400 --> 00:12:04,640
सामने आए सामना करें हो सकता है आपको हमें

156
00:12:04,640 --> 00:12:07,920
कुछ ऐसा समझा दें जो हम

157
00:12:07,920 --> 00:12:12,300
एक पॉइंट पर आकर के एक हो सके।

158
00:12:12,300 --> 00:12:15,600
[गला साफ़ करने की आवाज़]

159
00:12:15,600 --> 00:12:21,600
जय पुष्पेंद्र जी

160
00:12:23,360 --> 00:12:29,120
जय श्री राम राम राम सर

161
00:12:29,120 --> 00:12:33,680
आपके पीछे आवाज आ रही है काफी हां जी

162
00:12:33,680 --> 00:12:39,680
थोड़ा सा ऐड हो जाता हूं। जी

163
00:12:42,160 --> 00:12:46,640
आपका परिचय पुष्पेंद्र जी जी मेरा नाम पुष्पेंद्र

164
00:12:46,640 --> 00:12:48,880
दास

165
00:12:48,880 --> 00:12:52,320
पुष्पेंद्र दास

166
00:12:52,320 --> 00:12:56,320
और आध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या है? क्या सर?

167
00:12:56,320 --> 00:13:00,400
मैं संत रामपाल जी महाराज जी का हूं।

168
00:13:00,400 --> 00:13:04,480
अच्छा थोड़ा तेज बोलिए क्योंकि आवाज बहुत कम आ रही है।

169
00:13:04,480 --> 00:13:08,560
मैं संत रामपाल जी महाराज जी का शिष्य हूं। जी आपने वो कान में

170
00:13:08,560 --> 00:13:12,560
लगाया है क्या कुछ? जी जी जी वो हटा

171
00:13:12,560 --> 00:13:18,560
दीजिए। उससे कम आती है आवाज।

172
00:13:22,560 --> 00:13:27,440
अब बोलिए।

173
00:13:27,440 --> 00:13:33,040
जी बोलिए बोलिए

174
00:13:33,040 --> 00:13:37,360
तो दास जी बकवास क्या आप मानते हैं कि जो

175
00:13:37,360 --> 00:13:43,360
कबीर है रामपाल दास जी के द्वारा बताए गए

176
00:13:48,560 --> 00:13:53,280
पंकज पालीवाल जी का कहना है कि पंकज

177
00:13:53,280 --> 00:13:57,520
पालीवाल जी का कहना है कि अपना जो समय है वह भक्ति

178
00:13:57,520 --> 00:14:01,680
में लगाएं निंदा में नहीं मगर इस लाइन को लिखते समय पंकज

179
00:14:01,680 --> 00:14:05,440
पालीवाल जी आप क्या कर रहे हैं

180
00:14:05,440 --> 00:14:09,520
शोधन कर रहे हैं ना आपके हिसाब से पालीवाल जी

181
00:14:09,520 --> 00:14:15,120
आप इस लाइन को लिखते समय भक्ति कर रहे हैं क्या

182
00:14:15,120 --> 00:14:19,200
देखिए हेलो एक किनारे पर बैठकर

183
00:14:19,200 --> 00:14:24,160
के तमाशा देखना और उसकी समीक्षा करना बहुत सरल होता है

184
00:14:24,160 --> 00:14:28,160
और युद्ध के बीच में उतर कर सामना करना

185
00:14:28,160 --> 00:14:32,800
समस्याओं का अलग होता है। आसान है यह लाइनें लिखना।

186
00:14:32,800 --> 00:14:37,040
अगर प्रत्यक्ष वार्ता होगी किसी दिन तो दृश्य बदलेगा। आपको वास्तविकता

187
00:14:37,040 --> 00:14:41,040
से आपका साक्षात्कार होगा। है ना? इस तरह की

188
00:14:41,040 --> 00:14:45,040
लाइनें लिखना बहुत सरल होता है। अभी मैंने आपसे पूछा बताइएगा ये

189
00:14:45,040 --> 00:14:49,200
लाइन लिखते समय आपने क्या भक्ति की है क्या? यदि आप कहते

190
00:14:49,200 --> 00:14:53,360
हैं कि नहीं मैं भक्ति का अर्थ इसमें लेता हूं कि मैं शोधन कर रहा हूं तो वही हम कर रहे हैं

191
00:14:53,360 --> 00:14:57,520
और यदि आपके हिसाब से भक्ति का अर्थ शोधन नहीं है तो आप भी भक्ति

192
00:14:57,520 --> 00:15:01,520
नहीं कर रहे इस समय हम राम चौधरी

193
00:15:01,520 --> 00:15:05,600
जी जय श्री राम जय श्री

194
00:15:05,600 --> 00:15:09,600
राम शास्त्री जी जी मेरी आवाज आ

195
00:15:09,600 --> 00:15:13,600
रही है जी आपकी आवाज आ रही है आपका आप

196
00:15:13,600 --> 00:15:17,680
क्या जो अभी जो लाइव थे उनके पिताश्री हैं नहीं सर

197
00:15:17,680 --> 00:15:22,000
सर मेरे फादर जी हैं पिताजी जो हैं वो रामपाल

198
00:15:22,000 --> 00:15:26,000
जी के अनुयाई हैं। तो सर एक्चुअली क्या

199
00:15:26,000 --> 00:15:30,160
है वो आज से सात आठ साल पहले मतलब इनके टच

200
00:15:30,160 --> 00:15:34,400
में आए थे और उसके बाद में उन्होंने घर की जो स्थिति

201
00:15:34,400 --> 00:15:38,400
है वो इस लेवल पर कर दी कि कोई भी देवी देवता है उसकी पूजा

202
00:15:38,400 --> 00:15:42,400
वो नहीं करने दे। बोले ये तो क्या है? वो तुम्हारा दशरथ का राम क्या

203
00:15:42,400 --> 00:15:46,400
है? यह है वो है मतलब सभी देवताओं के लिए उल्टा सीधा बोलना

204
00:15:46,400 --> 00:15:50,400
ना ही जैसे कोई रिशेदारी होती है जैसे मान लीजिए कि

205
00:15:50,400 --> 00:15:54,400
अपने जो दामाद जी होते हैं तो उनके कोई तिलक वगैरह करना

206
00:15:54,400 --> 00:15:58,640
यह कुछ नहीं करने देना ना ही कहीं ससुराल अगर जाए तो

207
00:15:58,640 --> 00:16:03,040
उनका भी फर्ज बनता है कि वो इनके तिलक करें वो भी कहीं नहीं करवाना इवन

208
00:16:03,040 --> 00:16:07,120
यहां तक कि जैसे कोई मंदिर में प्रसाद अपुन करते हैं भंडारा तो बोलते

209
00:16:07,120 --> 00:16:11,120
हैं मैं इनके भगवानों के चढ़ाया हुआ यह नहीं खाता हूं ना ही कोई अपने से

210
00:16:11,120 --> 00:16:15,200
बड़े होते हैं उनके जो चरण स्पर्श अपुन करते हैं तो बोलता है नहीं किसी

211
00:16:15,200 --> 00:16:19,280
के चरण स्पर्श नहीं करना मतलब इतनी मिथ्या और अभी सर मैं आपको

212
00:16:19,280 --> 00:16:23,600
बताऊं शास्त्री जी पिछले 10 दिन से वो गए

213
00:16:23,600 --> 00:16:27,920
आप उनके बड़े भाई हैं क्या जो अभी आए थे मैं उनका पुत्र हूं शास्त्री

214
00:16:27,920 --> 00:16:32,160
जी नहीं नहीं जो आपसे जस्ट पहले एक एक स्टोर आए

215
00:16:32,160 --> 00:16:36,480
थे ना उनसे अलग है क्या नहीं नहीं अभी सर मैं राजस्थान

216
00:16:36,480 --> 00:16:40,560
से बात कर रहा हूं सर झुंझुनू जिले से एक जैसी कहानी हो गई

217
00:16:40,560 --> 00:16:44,560
वो भी आके बोल रहे फंसे हुए हैं। जी अब मैं आपको

218
00:16:44,560 --> 00:16:45,280
बताऊं अभी

219
00:16:45,280 --> 00:16:49,520
सर वो 15 दिन से वहां गए हुए हैं। उनका इतना ब्रेन वाश कर दिया

220
00:16:49,520 --> 00:16:53,680
सर उनके मकान वहां जो दरबार बन रहा है वहां पे वो फ्री

221
00:16:53,680 --> 00:16:57,680
में वर्किंग कर रहे हैं। अभी बोलते हैं वो सेवा है मेरी। घर पे कोई काम

222
00:16:57,680 --> 00:17:01,680
नहीं करते सर कुछ भी और आर्मी से रिटायर हैं वो। लेकिन वहां

223
00:17:01,680 --> 00:17:05,760
आज 15 20 दिन से वो काम कर रहे हैं। बोल रहे 16 तारीख को मैं आऊंगा। उससे पहले

224
00:17:05,760 --> 00:17:09,840
अभी वहीं सेवा दूंगा। सोचिए फ्री के अंदर अपने नाम से दक्षिणा

225
00:17:09,840 --> 00:17:15,280
भी नहीं देते। नाम अपना नाम है उनका शंकर लाल जी और वो शंकर

226
00:17:15,280 --> 00:17:19,440
राम या ऐसे कुछ करके शंकर दास शंकर दास के नाम से वहां पे

227
00:17:19,440 --> 00:17:23,440
एक बार 51000 दे रहे थे पिछली बार 11000 दे रहे थे उसके बाद

228
00:17:23,440 --> 00:17:27,600
5000 ऐसे कुछ मतलब डोनेशन भी और यहां के गांव में

229
00:17:27,600 --> 00:17:31,600
बुक लाते हैं वहां से बोलते हैं आप आओ ऐसा करो लोगों को गुमराह

230
00:17:31,600 --> 00:17:35,600
इतना करते हैं ये कुछ नहीं है बस त्रिलोकी का नाथ

231
00:17:35,600 --> 00:17:39,920
वो है गुरु है वो सीधा डायरेक्ट वहां ले जाता है सतलोक में ये मतलब

232
00:17:39,920 --> 00:17:44,080
कोई उनको उनको बात समझ ही नहीं आती। सब ओश आउट निकलती है। अपन जो भी बात बोलते

233
00:17:44,080 --> 00:17:48,320
हैं। तो ऐसे लोगों से बचाने के लिए गुरु जी आप थोड़ा ये जो बीड़ा

234
00:17:48,320 --> 00:17:52,480
उठाया मैं बहुत प्रभावित हूं। पिछले एक डेढ़ महीने से मैं आपके वीडियो

235
00:17:52,480 --> 00:17:56,480
देख रहा हूं और मुझे लगा कोई तो एक साहसी व्यक्ति है जो ज्ञानी

236
00:17:56,480 --> 00:18:02,480
व्यक्ति है जो इतना डीपली अपने जो वेद पुराणों में जा

237
00:18:02,480 --> 00:18:06,560
उन कमियों को निकाल के ला रहे हो। जैसे वो कोट करते हैं कि मैं

238
00:18:06,560 --> 00:18:10,560
उस फलाने सार में ये लिखा हुआ है। इतने अध्याय में ये लिखा हुआ है। तो आप उन्हीं का तोड़

239
00:18:10,560 --> 00:18:14,640
दे रहे हो कि वो कहां लिखा उसकी डेफिनेशन वो गलत तरीके से कम पढ़े

240
00:18:14,640 --> 00:18:18,720
लिखे लोग हैं। उनको गुमराह कर देते हैं। आप उनका तोड़ दे रहे हो उनको और

241
00:18:18,720 --> 00:18:22,720
सही आप अर्थ निकाल के बता रहे हो। ये बहुत अच्छा लग रहा है। और मैं चाहता हूं

242
00:18:22,720 --> 00:18:26,960
गुरुदेव आप इसी तरीके से इस कार्य को आगे बढ़ाए ताकि हमारा सनातन

243
00:18:26,960 --> 00:18:31,120
बच पाए। अदरवाइज कुछ लोग ऐसे हैं अपने निजी स्वार्थों के चक्कर में इस

244
00:18:31,120 --> 00:18:36,240
हमारी जो संस्कृति है इसको मिट्टी में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

245
00:18:36,240 --> 00:18:40,480
चलिए आप लोगों का आभार आपने समर्थन प्रकट किया। तो

246
00:18:40,480 --> 00:18:44,640
वैसे और थोड़ी सी डिटेल कुछ बताएंगे कि पिताजी जैसे आप तो जब पिताजी

247
00:18:44,640 --> 00:18:48,720
हैं आपके तो कई और भी चीजें आपकी नजरों में आई होंगी कि ऐसा होता है वहां

248
00:18:48,720 --> 00:18:54,000
पर ऐसे किसी व्यक्ति नए व्यक्ति को अपने उसमें बातों में कैसे लिया जाता है

249
00:18:54,000 --> 00:18:58,000
देखो ऐसा है कि वो सबसे पहले जो बात करते हैं

250
00:18:58,000 --> 00:19:02,000
लोगों को बाद में मतलब लोगों को कि आप मेरे साथ चलो वहां पे एक

251
00:19:02,000 --> 00:19:06,080
बार वो पहला फोर्स एक ही करते हैं उन मतलब वहां लेके जाते हैं वहां

252
00:19:06,080 --> 00:19:10,080
आपको पता ही है गुरुदेव चोरचोर मौसेरे भाई तो वहां क्या होता है वो गैंग होती है।

253
00:19:10,080 --> 00:19:14,080
फिर वहां वही वाली कहानी है। अब मेरे को देखो एक बात बताऊं उनकी खुद की। एक दिन

254
00:19:14,080 --> 00:19:17,680
वो आर्मी से रिटायर्ड है। अब पता है गुरुदेव कोई अगर

255
00:19:17,680 --> 00:19:21,760
पहले का कभी कोई एरियर है कोई चीजें हैं तो बचा हुआ है तो नो

256
00:19:21,760 --> 00:19:25,920
डाउट वो आएगा तो सभी फौजियों का आएगा। अकेले उनका तो आना नहीं है। अब उनको

257
00:19:25,920 --> 00:19:29,920
11000 रुपए क्रेडिट देखो मेरे गुरु की कृपा हो गई। मेरे को 11000 पता नहीं

258
00:19:29,920 --> 00:19:33,920
कहां से अरे कहां से आ गया भाई आपको थोड़ी पूरे फौजियों को मिला है ये

259
00:19:33,920 --> 00:19:37,920
तो। अब वो ऐसी कहानियां कर देते हैं। ऐसे फिर अचानक एक बार मैं मेरी

260
00:19:37,920 --> 00:19:42,000
पर्सनल कहानी बता दूं। ऐसे घर में कोई बात हो जाती है। मैं मानता नहीं हूं उन

261
00:19:42,000 --> 00:19:46,160
चीजों को। मैं भगवान को मानता हूं। मेरे गुरु का ऐसा हो जाएगा। बर्बाद

262
00:19:46,160 --> 00:19:50,720
हो जाएगा। मेरा एक्सीडेंट हो गया था। पैर में लगी। देखो साम ही नहीं निकाला।

263
00:19:50,720 --> 00:19:54,720
ये है मेरे गुरु के अंदर चमत्कार। अब ऐसे क्या करोगे?

264
00:19:54,720 --> 00:20:00,720
शास्त्री जी ऐसे लोगों का जिनके दिमाग में मतलब ब्रेन वाश हो गया।

265
00:20:01,200 --> 00:20:05,280
हां जी। क्या नहीं निकाला? साम नहीं

266
00:20:05,280 --> 00:20:09,440
निकाला मतलब देखो मेरे गुरु की आपने अवेलना की थी आप शाम भी नहीं पकड़

267
00:20:09,440 --> 00:20:13,520
पाए उससे पहले एक्सीडेंट हो गया यह है मेरे गुरु की करामत मैं बोला जब इतना

268
00:20:13,520 --> 00:20:17,760
ही बड़ा वो गुरु है तो फिर वो जेल में क्यों बैठा है बोला नहीं वो जेल

269
00:20:17,760 --> 00:20:21,840
में नहीं ये जेल में गए क्यों मैं इस कहानी को पूरा जानता नहीं हूं

270
00:20:21,840 --> 00:20:25,840
ठीक से क्यों क्यों है जेल में मैं बता देता हूं ये एक बहुत

271
00:20:25,840 --> 00:20:30,160
बड़ा जैसे अपुन नॉर्मल में तो इसको गैंगेस्टर बोलते लेकिन ये तो गैंगेस्टर

272
00:20:30,160 --> 00:20:34,480
क्या इसमें तो पास को जैसे लगे इनके पास संत के पास पहले तो ये बताओ हथियारों

273
00:20:34,480 --> 00:20:38,640
की कहां जरूरत पड़ गई? उनका जो हरियाणा के अंदर जो आश्रम था उसके अंदर

274
00:20:38,640 --> 00:20:42,640
साहब 10 दिन तक पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए थे। इतने

275
00:20:42,640 --> 00:20:46,720
हथियार अंदर रखे पड़े थे। छतों के ऊपर से फायरिंग हुई थी पुलिस

276
00:20:46,720 --> 00:20:50,720
के ऊपर। बहुत कुछ था। ये तो मानो एक नंबर का वो बन गया था।

277
00:20:50,720 --> 00:20:54,880
क्या नाम है? देखिए आप केवल जो जो

278
00:20:54,880 --> 00:20:59,520
आरोप लगे हैं केवल आरोप मत लगाइए। आप निर्णय मत दीजिए कि वो ये हैं।

279
00:20:59,520 --> 00:21:03,600
है ना? हम केवल यह बताइए कि ऐसासा आरोप लगा है।

280
00:21:03,600 --> 00:21:09,120
बताया जाता है कि उनके यहां से यह बरामद हुआ है।

281
00:21:09,120 --> 00:21:13,120
अपुन पर्सनल थोड़ी ना लगा रहे। न्यूज़ में आया है। न्यूज़ में

282
00:21:13,120 --> 00:21:17,360
क्या बताया गया वो बताइए। हां। तो न्यूज़ में ये सब चीजें देखी थी कि पुलिस

283
00:21:17,360 --> 00:21:23,120
के ऊपर भी फायरिंग की गई थी। वहां से हथियार बरामद हुए हैं। सारी चीजें हैं।

284
00:21:23,120 --> 00:21:28,240
आज भी आप बैक डेट के देख लोगे वीडियो मिल जाएंगे।

285
00:21:28,240 --> 00:21:32,240
प्रशासन अंदर जा नहीं पा रहा था। इतनी लाठी लोग

286
00:21:32,240 --> 00:21:36,400
कहते हैं लोग भंडारा वगैरह करवाते हैं तो चंदा नहीं इकट्ठा करते। ऐसा कुछ है

287
00:21:36,400 --> 00:21:40,560
क्या? नहीं सब कुछ करवाते हैं गुरुदेव आप यह

288
00:21:40,560 --> 00:21:44,720
बताइए उन्होंने अब देखो कुछ चीजें आदमी को बोलते हैं ना कोई भी

289
00:21:44,720 --> 00:21:48,800
व्यक्ति देखो एक ना एक तो कोई एक तरीका ढूंढता है जैसे आज के टाइम

290
00:21:48,800 --> 00:21:53,040
में मैं आपको बताऊं गुरुदेव ये अदरवाइज जैसे कोई भी दो नंबर काम व्यक्ति अंधा

291
00:21:53,040 --> 00:21:57,040
पैसा आता है दो नंबर काम में ये आप भी जानते हो हम भी लेकिन वो क्या करता

292
00:21:57,040 --> 00:22:01,040
है किसी ना किसी परमात्मा के कोई भी भगवान को चाहे उसकी आत्मा में

293
00:22:01,040 --> 00:22:05,040
जगो वो उसके नाम पर डोनेशन करता है क्यों करता है क्योंकि उसको भी एक भय होता है

294
00:22:05,040 --> 00:22:09,280
उस परमात्मा से कि यार अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा तो मेरी रक्षा तो वो वहां करता

295
00:22:09,280 --> 00:22:13,600
वो क्या लोगों की नजर में छा जाती है यार ये आदमी तो देखो कितना बड़ा दानवीर है

296
00:22:13,600 --> 00:22:17,600
लेकिन वो ये नहीं जानते कि ये दान किस तरीके से कर रहा है इसके सोर्स क्या

297
00:22:17,600 --> 00:22:21,600
है सेम कहानी है गुरु जी इन्होंने क्या कर रखा है जैसे लड़कियों की

298
00:22:21,600 --> 00:22:24,320
शादी करवाना ये तो आज एक संस्था दुनिया

299
00:22:24,320 --> 00:22:28,480
भर के एनजीओ आप बना के करवा दो उसमें क्या है अभी मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति जा

300
00:22:28,480 --> 00:22:32,480
के डोनेशन करेंगे अंधा पैसा है आप बताइए ₹100 खर्च होंगे

301
00:22:32,480 --> 00:22:36,640
वहां अगर000 दिखा देगा 900 बचा लिया घर में आज वो वो गस्ती

302
00:22:36,640 --> 00:22:40,640
आदमी है। खुद वो इंजीनियर था। मुझे बताइए वो कौन सा संत हो गया?

303
00:22:40,640 --> 00:22:44,720
इतना बड़ा उसके परिवार है। सब कुछ है।

304
00:22:44,720 --> 00:22:49,440
अब उसके खानदान सात पीढ़ियां उसकी बल्लेबले हो जाएंगी।

305
00:22:49,440 --> 00:22:53,680
तो आपके घर से जब ये वहां से कनेक्ट हुए आपके

306
00:22:53,680 --> 00:22:57,680
पिता श्री तो आपके घर में मतलब आप लोगों के प्रति हीन भावना

307
00:22:57,680 --> 00:23:01,680
रहती थी या क्या मतलब बराबर का समझते थे? कैसे रहता है इनका नेचर? जैसे

308
00:23:01,680 --> 00:23:05,840
कहते हैं ना जी हो जाता है कि अरे

309
00:23:05,840 --> 00:23:10,080
उससे दूर रहना वो जो नहीं मानता है उससे जैसे वो नहीं काफिरों काफिरों

310
00:23:10,080 --> 00:23:14,160
का मामला है कि काफिर है उससे दोस्ती मत करो है ना तो ऐसा

311
00:23:14,160 --> 00:23:18,320
है क्या कुछ वो बताएं देखो मैं आपको एक बात बताऊं वो ना तो किसी

312
00:23:18,320 --> 00:23:22,800
सत्संग में जाना पसंद करते हैं। मतलब वो किसी भी कोई ऐसे अनुष्ठान

313
00:23:22,800 --> 00:23:27,280
में कोई चीजों में जाते नहीं है। वो एक कबीर जी की फोटो लगा देते हैं।

314
00:23:27,280 --> 00:23:31,280
अपने परिवार के प्रति उनका व्यवहार क्या कुछ बदला मतलब वहां से जुड़ने के बाद

315
00:23:31,280 --> 00:23:35,360
गुरुजी परिवार के प्रति कोई मोह नहीं है कुछ नहीं है बोला तुम मेरे क्या लगते

316
00:23:35,360 --> 00:23:39,680
हो कोई मतलब नहीं है तुम्हारा इवन यहां तक अब कोई पिता

317
00:23:39,680 --> 00:23:43,680
अपनी पुत्री के लिए ऐसा बोल सकता है कोई भाई अपनी बहन के लिए बोल सकता है क्या

318
00:23:43,680 --> 00:23:49,680
वो तो उनके लिए भी ये शब्द यूज़ करते हैं तुम्हारा मेरा कोई रिश्ता ही नहीं है

319
00:23:50,320 --> 00:23:54,320
हम अब बताओ क्या बोलोगे और रहे उसी घर में

320
00:23:54,320 --> 00:23:58,960
रहे भाई ये तो ये एक चीज और गुरु जी

321
00:23:58,960 --> 00:24:02,960
नहीं एक और काम की बात अब नौटंकी क्या करते हैं अपने

322
00:24:02,960 --> 00:24:06,960
हाथ से खाना बनाना खुद बनाएंगे और उसमें सारे ड्राई

323
00:24:06,960 --> 00:24:11,120
फ्रूट दूध प्योर मतलब बगैर पानी डाला हुआ मतलब

324
00:24:11,120 --> 00:24:15,200
सारी चीजें बॉडी हेल्थ के प्रति पूरी तरीके उस तरीके से ढोंग और वैसे

325
00:24:15,200 --> 00:24:19,520
अगर आप कोई बच्चा भी छोटा सा कुछ मांग ले तो साला देना नहीं उसको मतलब

326
00:24:19,520 --> 00:24:23,520
रहम नाम की चीज बिल्कुल नहीं तो जो भक्ति भाव वाला व्यक्ति होता है गुरुदेव आप

327
00:24:23,520 --> 00:24:27,600
मुझे बताइए उसके दिल में तो रहम होती कि वो खुद भूखा रह जाए कुछ भी लेकिन दूसरा अगर कोई

328
00:24:27,600 --> 00:24:32,240
मांग ले तो उसके गले ना उतरे लेकिन वो तो अकेले कोई फर्क ना पड़े

329
00:24:32,240 --> 00:24:36,240
मतलब अपनी बेटी से रिश्ता बिल्कुल खत्म कर दिया कि मैं तुम्हारा

330
00:24:36,240 --> 00:24:40,400
मेरा कोई उनका किसी से ही मतलब नहीं वो बोलते हैं तुम्हारा मेरा कुछ

331
00:24:40,400 --> 00:24:44,640
नहीं है ये शरीर है ये शरीर कभी भी मैं तुम्हारे तो हाथ ही ना लगो

332
00:24:44,640 --> 00:24:49,120
मैं तो ये है वो मतलब उनका दिमाग है मैं तो मेरे गुरु के वो करूंगा

333
00:24:49,120 --> 00:24:53,120
वही है जो कुछ है बस सतलोक करना है वो तो ठीक है मगर ऐसी

334
00:24:53,120 --> 00:24:54,880
स्थिति में व्यक्ति को सन्यास

335
00:24:54,880 --> 00:24:58,880
ले लेना चाहिए फिर वो रह तो वही रहा है नहीं लेते हम भी बोलते

336
00:24:58,880 --> 00:25:03,040
हैं ये बात फिर आप प्रॉपर तरीके से करो ना क्यों करूं मेरी तनख्वाह

337
00:25:03,040 --> 00:25:06,240
आ रही है

338
00:25:06,240 --> 00:25:11,200
अब बताओ क्या बोलूं हम मतलब और

339
00:25:11,200 --> 00:25:15,680
मतलब इतनी चीजें गुरुदेव मैं क्या बताऊं उनके लिए तो कि

340
00:25:15,680 --> 00:25:19,840
दिमाग इतना अपसेट है कि कैसे-कैसे लोग है मेरे गांव में पांच

341
00:25:19,840 --> 00:25:24,160
सात लोग हैं ज्यादा नहीं है और सबके घर में यही हाल है जिसने भी रामपाल

342
00:25:24,160 --> 00:25:30,160
के नाम ले रखे हैं। उनके परिवार का बाधार हो गया।

343
00:25:30,240 --> 00:25:34,320
तो ये पैसे जो आते हैं आपके पिताजी की पेंशन आती है। ये सब कहां जाते हैं

344
00:25:34,320 --> 00:25:40,080
पूरा पैसा? पता नहीं गुरुदेव घर में एक देते नहीं है।

345
00:25:40,080 --> 00:25:44,080
हां एक चीज उनकी वो शुरू से ही थी। आज से नहीं जब से इन्होंने

346
00:25:44,080 --> 00:25:48,240
नहीं किया। वो मतलब पहले से हम देखते हैं कि वो धर्म पुण्य के काम

347
00:25:48,240 --> 00:25:52,400
करते थे। पहले भी करते थे। जैसे गौशाला में देना या जानवरों

348
00:25:52,400 --> 00:25:56,400
को जैसे अनाज डालना ये सब चीजें पहले भी आज भी चार पांच केजी अनाज वो

349
00:25:56,400 --> 00:26:00,480
सुबह-सुबह जानवरों को डालते हैं। ये अच्छी चीज है। इससे हम खुश हैं। गौशाला में

350
00:26:00,480 --> 00:26:04,640
भी वो देते हैं। ये भी अच्छी इसका कम हमने कभी ऑब्जेक्शन नहीं लेकिन अब

351
00:26:04,640 --> 00:26:08,720
कोई मंदिर वगैरह हो गया उसके लिए नहीं कोई मतलब नहीं है। और कोई चीज के

352
00:26:08,720 --> 00:26:12,880
लिए कोई मतलब नहीं है। बाकी अब पता नहीं क्या करते हैं क्या ना जाने। मतलब

353
00:26:12,880 --> 00:26:17,040
वो पैसा कहां जाता है पेंशन वाला उनका वो कोई आईडिया नहीं। अभी

354
00:26:17,040 --> 00:26:21,040
भाई आज दोपहर को ऐसे बात हो रही बोले भाई मैं अभी दीपावली पर सफाई कर रहा था

355
00:26:21,040 --> 00:26:25,280
मकानों की तो मेरे को दो पर्ची ऐसे मिल गई एक 11000 की

356
00:26:25,280 --> 00:26:29,680
थी एक 5000 उसमें शंकर दास के नाम से बोला अपना नाम भी छुपाते हैं

357
00:26:29,680 --> 00:26:33,680
कि मुझे नाम नहीं करना अपने उसका दान दिए हुए का शंकर दास

358
00:26:33,680 --> 00:26:37,680
करके और बोला ये दिया और अभी बोला मैं बात कर रहा था कि कब आ रहे हो

359
00:26:37,680 --> 00:26:41,760
तो बोला मैं 16 तारीख को आऊंगा गुरु जी के वो चल रहा है क्या नाम है मकानों का

360
00:26:41,760 --> 00:26:45,360
तो मैं वहां सेवा दे रहा हूं अब फ्री में वहां मजदूरी कर रहे

361
00:26:45,360 --> 00:26:49,520
हैं फिर प्रचार क्या करते हैं मैं आज से जब चार साल पहले

362
00:26:49,520 --> 00:26:53,600
गया तो गुरु जी का एक आश्रम था। आज 101 आश्रम हो गए। देखो

363
00:26:53,600 --> 00:26:57,760
गुरु जी का कितना वो बढ़ रहा है। लाइव आते हैं गुरुजी मेरे वहां से जेल

364
00:26:57,760 --> 00:27:01,920
से भी रोज लाइव आते हैं। अब ऐसे जेल से

365
00:27:01,920 --> 00:27:05,920
लाइव आते हैं क्या वो? हां हां बोलते हैं वीडियो पे लाइव आते हैं। रोज कौन कहता

366
00:27:05,920 --> 00:27:09,920
है? पुलिस वाले भी उनके अनुयाई हो गए। बोला अब कितना फ्रेम

367
00:27:09,920 --> 00:27:15,200
कर रखे? लाइव तो नहीं आते वो? नहीं आ सकते गुरु जी। कैसे आ जाएगा?

368
00:27:15,200 --> 00:27:19,360
जिसके ऊपर एक क्रिमिनल एक्ट लगा हुआ है। मुझे बताइए जो जेल में बंद

369
00:27:19,360 --> 00:27:23,680
है। लेकिन अब जो दिमाग से इनका अनुय वहां जो बैठे हैं जो आपने एक बार वो इंटरव्यू

370
00:27:23,680 --> 00:27:27,840
नहीं लिया था। वो स्टॉल लगा रखी थी लखनऊ वाली उनको आप बात पूछ रहे थे वो क्या किस

371
00:27:27,840 --> 00:27:31,920
तरीके से भड़क रहे इनके पास जवाब है ही नहीं कुछ जी ऐसे

372
00:27:31,920 --> 00:27:36,080
पाल रखे होंगे 10 20 50 इन्होंने और वो बस वही एक गैंग बना

373
00:27:36,080 --> 00:27:40,240
के वो उसको बोलता है मेरे ये हो गया वो हो गया बस आम जनता बेचारी इतनी बोली

374
00:27:40,240 --> 00:27:44,400
है 10 लोग बोले कान को कौवा ले गया कान देखा ही नहीं हाथ लगा के कि कान

375
00:27:44,400 --> 00:27:48,640
है कि ले गया कौवा नहीं लेकिन बस देखना शुरू कर दिया कौवा ले गया

376
00:27:48,640 --> 00:27:52,720
ले गया वो कहानी है हां चलिए

377
00:27:52,720 --> 00:27:56,800
ठीक है आप कभी हो सके तो उनसे हमारी बात कराइए जिससे कि

378
00:27:56,800 --> 00:28:00,640
हम प्रयास कर सके उनके कुछ मैं जरूर

379
00:28:00,640 --> 00:28:04,960
सर मैं कराऊंगा आपसे बात और मुझे अच्छा लगा लेकिन आपसे मेरी ये गुजारिश

380
00:28:04,960 --> 00:28:08,960
रहेगी आप यह जो बीड़ा उठाया है आप इसको किसी

381
00:28:08,960 --> 00:28:13,440
भी कीमत के ऊपर बंद मत कीजिएगा आप चालू रखिएगा

382
00:28:13,440 --> 00:28:17,440
जरूर एक दो चार बढ़ते चले जाएंगे और एक दिन बहुत लोगों तक ये

383
00:28:17,440 --> 00:28:21,600
जागरूकता पहुंचेगी गुरुदेव एक मिशन बन जाएगा ये जी

384
00:28:21,600 --> 00:28:25,680
जी बस मैं आज जाने से पहले आपको एक बात कहूंगा कि मेरे लिए

385
00:28:25,680 --> 00:28:29,520
गुरुदेव शब्द उचित नहीं है।

386
00:28:29,520 --> 00:28:34,080
वो इसलिए गुरुदेव है क्योंकि आप एज एक शास्त्री हैं और

387
00:28:34,080 --> 00:28:38,240
वो हमारी सनातन पद्धति के हिसाब से ये मतलब उचित

388
00:28:38,240 --> 00:28:42,240
लगता है हमें बोलना चाहिए क्योंकि अब हम तो उतना

389
00:28:42,240 --> 00:28:46,400
सब चीजें नहीं तो सक्षम भी नहीं है। इतना तो इसलिए

390
00:28:46,400 --> 00:28:50,560
वो कोई मैं नहीं मानता कि उचित नहीं है। वो मेरे भाव है आपके

391
00:28:50,560 --> 00:28:55,440
प्रति। चलिए चलिए चलिए ठीक है आप आपके भाव का सम्मान है

392
00:28:55,440 --> 00:28:59,600
ठीक है आने के लिए आभार और इतना मतलब आपने बताया और आप अपने पिताजी को

393
00:28:59,600 --> 00:29:04,320
लाइए जी जी जी जी बहुत शुक्रिया आप

394
00:29:04,320 --> 00:29:08,000
थैंक यू तो

395
00:29:08,000 --> 00:29:13,840
इनमें से कौन है जो

396
00:29:13,840 --> 00:29:18,000
सुमित दास जी को ले लेते हैं पुष्पेंद्र

397
00:29:18,000 --> 00:29:24,000
दास जी

398
00:29:26,560 --> 00:29:30,720
[गला साफ़ करने की आवाज़] हर हर महादेव। भाई हर हर महादेव।

399
00:29:30,720 --> 00:29:35,520
पुष्पेंद्र दास जी को ले लिया क्या? वो चले गए क्या? पुष्पेंद्र

400
00:29:35,520 --> 00:29:39,760
जी आप चेहरा दिखाइए थोड़ा नेटवर्क में हो तो आइए आप क्योंकि आपका डिस्टर्ब इंसान

401
00:29:39,760 --> 00:29:44,080
है। जी जी जी बोलिए सर। नमस्कार सर। नमस्कार

402
00:29:44,080 --> 00:29:48,080
जय श्री राम। तो अभी सुमित जी आप रुक जाइए। पुष्पेंद्र जी पहले

403
00:29:48,080 --> 00:29:52,160
आए थे इनसे बात कर ले फिर सुमित जी को ले लिया जाएगा ऊपर जी

404
00:29:52,160 --> 00:29:52,660
हां

405
00:29:52,480 --> 00:29:56,720
पुष्पेंद्र जी आप मानते हैं कि रामपाल दास जी के द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा

406
00:29:56,720 --> 00:30:00,720
है उसके द्वारा जो ईश्वर बताया जा रहा है आपको वो ईश्वर ईश्वर

407
00:30:00,720 --> 00:30:05,280
ही है वही है परमात्मा परम परमेश्वर जी जी जी

408
00:30:05,280 --> 00:30:10,640
अच्छा तो मुझे ये बताइए सबसे पहले तो कि

409
00:30:10,640 --> 00:30:14,800
जो जो ईश्वर है क्या वो परलोक

410
00:30:14,800 --> 00:30:19,200
में ऐसे मतलब परलोक का उसका

411
00:30:19,200 --> 00:30:23,200
जो ईश्वर है जो उसकी जो व्याख्या जब हम करते हैं

412
00:30:23,200 --> 00:30:27,280
तो वो उसकी क्या-क्या क्वालिटीज है जो उसमें होनी चाहिए ईश्वर में जैसे

413
00:30:27,280 --> 00:30:31,440
अजर अमर सर्व शक्तिमान सर्वव्यापई सर्वज्ञ

414
00:30:31,440 --> 00:30:36,000
ये सब क्वालिटीज होनी चाहिए कि नहीं जी बिल्कुल होनी चाहिए

415
00:30:36,000 --> 00:30:40,320
तो ये सारी क्वालिटीज है आपके ईश्वर में जी जी जी बिल्कुल परमात्मा

416
00:30:40,320 --> 00:30:45,280
में सारी क्वालिटी हो तो इसमें कहने का शब्द ही क्या है सर जी

417
00:30:45,280 --> 00:30:45,780
मैं

418
00:30:45,600 --> 00:30:49,920
आपसे पूछना चाहूंगा एक एक करके मुझे यह बता दीजिए कि

419
00:30:49,920 --> 00:30:54,080
सर्वशक्तिमान का अर्थ आप क्या समझते हैं? सर्वशक्तिमान

420
00:30:54,080 --> 00:30:58,080
का मतलब यह है मतलब वो सब कुछ करता है। वो अपने आप में सक्षम है। उस पर

421
00:30:58,080 --> 00:31:02,480
कोई बाउंडेशन नहीं है। सर्वव्यापक का अर्थ क्या समझते हैं?

422
00:31:02,480 --> 00:31:06,480
सर्वव्यापक वो जो हर जगह मतलब व्यापक हो। हर जगह कहीं

423
00:31:06,480 --> 00:31:11,280
भी ढूंढो वहीं मिलेगा। अच्छा और

424
00:31:11,280 --> 00:31:13,520
सर्वज्ञ

425
00:31:13,520 --> 00:31:17,600
सर्वज्ञ मतलब इससे मिलाजुला सा ही शब्द है सर्व्याक और

426
00:31:17,600 --> 00:31:21,600
मतलब इसमें कोई खास अंतर नहीं है इसकी पर मतलब शब्द अलग-अलग हुए हैं लेकिन

427
00:31:21,600 --> 00:31:25,600
इसका कुछ अंतर है नहीं इसमें सर्वज्ञ सर्वज्ञ का अंतर है थोड़ा सा कि वो सब

428
00:31:25,600 --> 00:31:29,600
कुछ जानता है थोड़ा बहुत अंतर सर अब थोड़ा बहुत अंतर है लेकिन

429
00:31:29,600 --> 00:31:33,680
उसके थोड़ी सी परिभाषा में चेंज है बस ठीक है

430
00:31:33,680 --> 00:31:38,160
अच्छा सर्व्यापक हो गया शक्तिमान हो गया और

431
00:31:38,160 --> 00:31:42,320
सर्वज्ञ हो गया। एक है अमर। अमर का मतलब कभी मर

432
00:31:42,320 --> 00:31:44,560
नहीं सकता। बिल्कुल।

433
00:31:44,560 --> 00:31:50,400
जी। और जो अजर है इसका क्या अर्थ लेते हैं आप?

434
00:31:50,400 --> 00:31:54,480
अजर मतलब अजर में मतलब इतना परिचित

435
00:31:54,480 --> 00:31:58,480
नहीं है अजर से। अजर का मतलब जो जिसकी जो कभी

436
00:31:58,480 --> 00:32:02,480
बूढ़ा नहीं होता जिस पे कभी जो उम्र का वो है प्रभाव नहीं। हां बिल्कुल बिल्कुल

437
00:32:02,480 --> 00:32:06,560
बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सही बिल्कुल राइट। अच्छा ठीक है। ठीक है।

438
00:32:06,560 --> 00:32:11,600
तो भाई इनको जरा कबीर दास जी की फोटो दिखा दीजिए जरा।

439
00:32:11,600 --> 00:32:16,000
कबीर दास जी की फोटो दिखा दीजिए स्क्रीन पर।

440
00:32:16,000 --> 00:32:20,000
अगर फोटो ना हो तो इनके बहुत सारे वीडियोस होते हैं। कबीर दास

441
00:32:20,000 --> 00:32:24,480
पर जो बने होते हैं उसमें जो ये थंबनेल पर वीडियो लगाते हैं उसमें भी कबीर दास

442
00:32:24,480 --> 00:32:28,480
कबीर दास जी की फोटो होगी। आपके आपके पास है क्या इस समय?

443
00:32:28,480 --> 00:32:33,760
कबीर दास मेरे पास इसमें मेरे पास छोटे रूप में है मेरे पास।

444
00:32:33,760 --> 00:32:37,840
ये आ गई ये आ गई स्क्रीन पर देखिए जी दिखाइए बड़ा

445
00:32:37,840 --> 00:32:43,840
करिए कोई भी एक कबीर दास जी

446
00:32:43,920 --> 00:32:48,000
ये कबीर दास जी का फोटो आपको दिख रहा है

447
00:32:48,000 --> 00:32:52,480
एक बड़ा कर लीजिए स्क्रीन पे आ जाए दिख रहा है दिख रहा है सर दिख रहा है

448
00:32:52,480 --> 00:32:58,480
एक मिनट स्क्रीन पे आ जाए पूरा बिल्कुल

449
00:33:05,520 --> 00:33:11,520
स्क्रीन पर दिखा दीजिए पूरा नहीं आएगा क्या

450
00:33:14,000 --> 00:33:19,680
स्क्रीन पे दिखा दीजिए

451
00:33:19,680 --> 00:33:24,240
हां तो इनको आप क्या कहेंगे

452
00:33:24,240 --> 00:33:28,320
जवान कहेंगे किशोर कहेंगे अधेड़ कहेंगे या वृद्ध

453
00:33:28,320 --> 00:33:32,320
कहेंगे जी मतलब ये क्वेश्चन करने का उद्देश्य क्या है आपका? पहले ये

454
00:33:32,320 --> 00:33:36,560
बताइए। क्वेश्चन करने का उद्देश्य ये है कि जब उस पर उम्र

455
00:33:36,560 --> 00:33:40,880
का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तो वो ये बूढ़ा क्यों है? जी

456
00:33:40,880 --> 00:33:44,880
आप आपको इतनी नॉलेज होनी चाहिए कि आप जिस लोक में

457
00:33:44,880 --> 00:33:48,880
रह रहे हो ये क्या सत्यलोक है या अमरलोक है या नाशवान

458
00:33:48,880 --> 00:33:53,600
लोक है? ये बताइए आप। नाशवान लोक है।

459
00:33:53,600 --> 00:33:57,840
अच्छा नाश नाश नाशवान है ना? नाशवान

460
00:33:57,840 --> 00:34:02,000
है हम तो जो नाशवान लोक में सारी चीज या

461
00:34:02,000 --> 00:34:06,160
कोई भी हो ये वस्तु सारी स्थाई है क्या? अरे मैं

462
00:34:06,160 --> 00:34:10,160
आपसे सवाल पूछ रहा हूं। आप अपनी बात सर मैं आपकी नहीं नहीं सर मैं आपके

463
00:34:10,160 --> 00:34:14,160
क्वेश्चन का जवाब दे रहा हूं। आप आप अपना जवाब दे दीजिए क्योंकि मेरे

464
00:34:14,160 --> 00:34:18,240
पास आपकी इस बात की काट है। आप पूरा बोल लीजिए फिर मैं बोलूंगा। नहीं नहीं मैं आपके क्वेश्चन

465
00:34:18,240 --> 00:34:22,560
का जवाब सर सुनो सर मैंने आपके क्वेश्चन का जवाब दिया है। ठीक है। आप क्वेश्चन मत काटो।

466
00:34:22,560 --> 00:34:26,560
आपके क्वेश्चन का जवाब दिया है मैंने। आप बताइए [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं आपसे जो पूछ रहा हूं। आपका

467
00:34:26,560 --> 00:34:30,640
कहने का मतलब यह है क्योंकि नाशवान लोक में सारी चीजें जो होती है वो

468
00:34:30,640 --> 00:34:34,720
स्थाई नहीं होती इसलिए वो जो होता है वो भी यहां पर उस

469
00:34:34,720 --> 00:34:38,990
पर उम्र का प्रभाव पड़ता हुआ दिखता है। क्या आप ऐसा नहीं मानते?

470
00:34:38,990 --> 00:34:43,120
[नाक से की जाने वाली आवाज़] अरे अब मैं अपना जवाब दे रहा हूं ना। सुनो अब थोड़ी देर आप शांत रहना।

471
00:34:43,120 --> 00:34:48,000
थोड़ा एक्साइटमेंट कम करो। मैं एक्साइटमेंट नहीं मेरी मतलब नेचर

472
00:34:48,000 --> 00:34:53,200
भाई साहब आप मुझे बोलने दीजिए। जी ठीक है बोलिए बोलिए बोलिए

473
00:34:53,200 --> 00:34:57,680
तो आपने कहा कि जो अजर अमर है

474
00:34:57,680 --> 00:35:01,680
जी उसकी अजरता भी प्रभावित होगी अगर वो नाशवान लोक

475
00:35:01,680 --> 00:35:06,320
में आपको दिखाई देगा ठीक है जी तो

476
00:35:06,320 --> 00:35:10,640
जब ब्रह्मा विष्णु महेश की अमरता प्रभावित होती है नाशवान लोक में तो क्यों अपुआ

477
00:35:10,640 --> 00:35:13,440
बनाते हो इतना तो

478
00:35:13,440 --> 00:35:17,440
वो तो वेद शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है ना कि वो नाशवान है भाई साहब देखिए

479
00:35:17,440 --> 00:35:21,760
वेद शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि अजर है वो अगर वेद शास्त्रों

480
00:35:21,760 --> 00:35:25,920
के लिखे होने की बात है तो वेद शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि वो अजर है मगर

481
00:35:25,920 --> 00:35:30,160
आपने कहा क्योंकि नाशवान लोक में वो आ रहा है इसलिए उसकी जो अजरता है वो प्रभावित

482
00:35:30,160 --> 00:35:34,400
हो रही है तो जब ब्रह्मा विष्णु महेश की जो वो है प्राकट्य

483
00:35:34,400 --> 00:35:38,480
और अप्राकट वो प्रभावित होता है तो हवा क्यों बढ़ाते हो इतना तब भी ये

484
00:35:38,480 --> 00:35:43,120
सोचो ना कि नाशवान लोक में नाशवान लोक के तरीके से लीलाएं होंगी

485
00:35:43,120 --> 00:35:47,520
जैसे कबीर कबीर का अजरत्व प्रभावित हो रहा है वैसे ही उनका अमरत्व प्रभावित

486
00:35:47,520 --> 00:35:51,520
दिख रहा है वस्तुत प्रभावित नहीं सर वो अमर

487
00:35:51,520 --> 00:35:55,520
है ही नहीं ना कहीं उसका प्रमाण ही नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश अमेर अमर है हमको दिखाओ कहीं

488
00:35:55,520 --> 00:35:57,360
प्रमाण है तो किसी

489
00:35:57,360 --> 00:36:01,360
भी आप मुझे आप मुझे ये लिखा दिखाओ कि

490
00:36:01,360 --> 00:36:07,280
नाशवान लोक में जो अजरता है वो प्रभावित हो जाएगी

491
00:36:07,280 --> 00:36:12,880
नाशवान लोक में जो अजरता है वो प्रभावित हो जाएगी

492
00:36:12,880 --> 00:36:17,200
परमात्मा पर कोई भी हो नावान लोक

493
00:36:17,200 --> 00:36:22,160
मैंने आपसे पूछा है भाई साहब मैंने आपसे प्रमाण पूछा है ना

494
00:36:22,160 --> 00:36:26,240
लोक होने के कारण नाशवान लोक होने के कारण जो अजरता है

495
00:36:26,240 --> 00:36:30,960
वह प्रभावित होगी। बिल्कुल हो गई ना

496
00:36:30,960 --> 00:36:34,960
भाई। अरे मैं पूछ रहा हूं दिखाओ कहां लिखा है? कहां

497
00:36:34,960 --> 00:36:39,360
लिखा है? हां। वेदों वेदों में स्पष्ट लिखा है कि जब मैं अपनी

498
00:36:39,360 --> 00:36:43,520
लीला सुनो सुनो सुनो। सुनो सुनो। बात सुनोगे [गला साफ़ करने की आवाज़] ज

499
00:36:43,520 --> 00:36:47,840
तो? वेद में स्पष्ट लिखा है। वो कौन सा मंत्र है? मंत्र बताना मुझे। वेदों में स्पष्ट

500
00:36:47,840 --> 00:36:52,000
लिखा है। जब परमात्मा इस पृथ्वी लोक पर आता है तो वो वो

501
00:36:52,000 --> 00:36:56,080
वो शिशु रूप में लीला करता है और शिशु रूप में लीला

502
00:36:56,080 --> 00:37:00,080
करते हुए अपनी एक शरीर के हिसाब से लीला

503
00:37:00,080 --> 00:37:04,240
करता चला जाता है और अपने ज्ञान को देकर अपने परम भक्त

504
00:37:04,240 --> 00:37:08,320
को और वो वापस चला जाता है। भाई साहब मैंने आपसे मैंने आपसे ये

505
00:37:08,320 --> 00:37:12,640
पूछा है नाशवान लोक में जो अजरता है

506
00:37:12,640 --> 00:37:17,360
वो प्रभावित होती है। ये नियम कहां लिखा है?

507
00:37:17,360 --> 00:37:21,440
आप बता दो ना कि ब्रह्मा मैंने आप सुनो आपके क्वेश्चन करे मैंने आपके आप मुझे यह

508
00:37:21,440 --> 00:37:25,520
दिखा दो कि ब्रह्मा विष्णु कहीं अजर और अमर है ये चीज मुझे कहीं दिखा दो आप कहीं लिखा

509
00:37:25,520 --> 00:37:30,720
है ये कहीं भी लिखे दिखा दोगे दिखा दिया तो

510
00:37:30,720 --> 00:37:34,800
दिखा दो ठीक है दिखा दो अगर कहीं भी दिखा

511
00:37:34,800 --> 00:37:38,960
दो तो हम आपके चेहरा एक मिनट एक मिनट रुको भैया एक मिनट रुको

512
00:37:38,960 --> 00:37:42,960
अपने आसपास के लोगों को कह दो कि अपने मुंह को सिल लिए धागे से

513
00:37:42,960 --> 00:37:47,120
सिल ले अपने आसपास के अगर आपको बोलना बहुत धीरे से बोलो लाइव चल रही है।

514
00:37:47,120 --> 00:37:51,200
उसमें जो है ऐसा करिए सूजा डाल के उनसे कहिए कि उसको धागे से सिल लो अपने मुंह

515
00:37:51,200 --> 00:37:55,440
को। अब बोलना नहीं आप सब्जी आप सही सब्जी यूज़ नहीं कर रहे सर। तो क्या करूं

516
00:37:55,440 --> 00:37:59,920
मैं? वो पीछे से क्यों बोल रहे हैं? विघ्न पड़ रहा है ना बातचीत में। हम

517
00:37:59,920 --> 00:38:05,440
अपने वो अपने आप को संयम रखें। वो अपने आप पे संयम रख

518
00:38:05,440 --> 00:38:09,520
और उनकी आवाज दोबारा विघ्न ना डाले। अगर उनको आना है तो आप हट

519
00:38:09,520 --> 00:38:13,520
जाइए। उनको आना है आप हट जाइए। उनको भेज दीजिए। ठीक है। ठीक है। आपको समय देंगे।

520
00:38:13,520 --> 00:38:18,480
आप दिखाओ। हां।

521
00:38:18,480 --> 00:38:22,640
पहले तो मैं आपको वो प्रमाण दिखा दूं जहां पे भगवान

522
00:38:22,640 --> 00:38:27,120
के भगवान पर जो आयु का प्रभाव है वो नहीं पड़ता है।

523
00:38:27,120 --> 00:38:31,760
वो प्रभाव वो प्रमाण दिखा दूं मैं। अच्छा

524
00:38:31,760 --> 00:38:35,840
मुझे ये बता दो एक बार पहले दिखाओगे किस में? क्योंकि आपका भी टाइम बर्बाद होगा। मेरा भी

525
00:38:35,840 --> 00:38:39,280
मैं उस चीज को ना मानता हूं। क्या पता?

526
00:38:39,280 --> 00:38:43,760
उपनिषद नहीं मानता। उपनिषद नहीं मानता

527
00:38:43,760 --> 00:38:48,560
है कहां लिखा नहीं मानता सर दिखाने की जरूरत नहीं मानता

528
00:38:48,560 --> 00:38:52,560
भाई साहब देखिए हड़बड़ी मत मचाइए मैं पूछ रहा हूं कहां सर सुनो मैं

529
00:38:52,560 --> 00:38:56,640
हड़बड़ी सुनो सर इसमें आपका भी टाइम खराब होगा मेरा भी होगा क्या फायदा

530
00:38:56,640 --> 00:39:00,640
आप दिखाओगे मैं मानूंगा नहीं उपनिषद मैं मानता ही नहीं अरे भाई मैं तो वो

531
00:39:00,640 --> 00:39:04,720
नियम दिखा रहा हूं जो आप मानते हो नहीं मानता दिखा रहा हूं

532
00:39:04,720 --> 00:39:08,960
जो आप मानते हो नहीं सर अरे सर मैं भी तो रिक्वेस्ट कर रहा हूं आपसे मैं उपनिषद मानता

533
00:39:08,960 --> 00:39:13,280
ही नहीं देखिए आपको अगर सुनने की क्षमता है

534
00:39:13,280 --> 00:39:17,360
तो मैं यह बता वो भाई साहब मैं वो नियम बता रहा हूं

535
00:39:17,360 --> 00:39:21,440
जो आप मानते हो। अरे सर मेरी भी तो सुनो एक सेकंड मैं

536
00:39:21,440 --> 00:39:25,520
क्या बोल रहा हूं उसको मेरी तो सुनो मैं क्या कह रहा हूं आपसे मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूं

537
00:39:25,520 --> 00:39:29,680
सर हम [गला साफ़ करने की आवाज़] उपनिषद बिल्कुल नहीं मानता

538
00:39:29,680 --> 00:39:33,520
आप ये मुझे बताइए आप ये मुझे बताइए कि आप कौन-कौन से शास्त्र मानते

539
00:39:33,520 --> 00:39:37,600
हो? अच्छा मैं सर गीता जी को मानता हूं। सबसे पहले प्रथम

540
00:39:37,600 --> 00:39:41,610
वेद और गीता ये चारों वेद और गीता। ठीक है? अगर आप मुझे ये

541
00:39:41,610 --> 00:39:45,680
[गला साफ़ करने की आवाज़] बताओ मैं आपकी बात मानू या रामपाल जी की मानू या गीता जी की मानू? मुझे ये बताओ

542
00:39:45,680 --> 00:39:49,680
सबसे पहले बात किसकी मानू? आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं

543
00:39:49,680 --> 00:39:53,920
कि आप वेद और गीता मानते हो? उपनिषद नहीं मानते हो? नहीं

544
00:39:53,920 --> 00:39:58,080
प्रथम मानता हूं इनको। फिर बाद में पुराण। बाद में पुराण नहीं मानते हो।

545
00:39:58,080 --> 00:40:02,400
मानता हूं बाद में पुराण इन सब इन दोनों से बाद में पुराण मानता हूं। ये

546
00:40:02,400 --> 00:40:06,720
ये पहले ये पहले वो फिर बाद में ये कहां लिखा है?

547
00:40:06,720 --> 00:40:10,720
नहीं सर सबका एक एक सीक्वेंस है। सीक्वेंस में मानता हूं पहले मेरे लिए

548
00:40:10,720 --> 00:40:14,800
वेद और गीता प्रमाणित चीजें उसके बाद पुराण में पुराण को मानता हूं।

549
00:40:14,800 --> 00:40:19,280
सबसे पहले मेरे लिए [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रमाणित कि आपने ये जो नियम बनाया है सीक्वेंस

550
00:40:19,280 --> 00:40:23,280
ये कहां लिखा है? अरे लिखा तो कुछ भी नहीं है।

551
00:40:23,280 --> 00:40:27,360
ऐसे क्या तुम कुछ भी बोल दो मेरे को कुछ आप यह बात मुझसे पूछ लोगे।

552
00:40:27,360 --> 00:40:32,240
जो नियम मैं बताऊंगा जो नियम मैं बताऊंगा वो मैं लिखा दिखाऊंगा।

553
00:40:32,240 --> 00:40:36,480
तो सर मैं उपनिषद आप गीता और वेद को मानते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं।

554
00:40:36,480 --> 00:40:40,560
वेदों की बात नहीं कर रहा हूं। मैं फिलहाल ये बोल रहा हूं कि आपने ये कहा कि जो

555
00:40:40,560 --> 00:40:45,440
पुराण है मैं उनको वेद और गीता के बाद मानता हूं। ये मानता हूं।

556
00:40:45,440 --> 00:40:48,560
अरे सर मैंने आपने लिखने जैसा शब्द नहीं बोलता कि मैंने

557
00:40:48,560 --> 00:40:52,960
कहीं लिखा लिखाऊंगा। कहा है कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं।

558
00:40:52,960 --> 00:40:57,440
ये कहां लिखा है? अरे सर मेरी भी तो सुनो

559
00:40:57,440 --> 00:41:01,600
आपको मैं प्रमाण दे रहा हूं इस चीज का कि मैं मतलब लिखा दिखाऊंगा आपका ये तो मेरी सोच

560
00:41:01,600 --> 00:41:05,600
है मैं उनको बाद में मानता हूं आपकी सोच है ना शास्त्र में

561
00:41:05,600 --> 00:41:09,600
तो नहीं लिखा और सुनो गीता और वेद क्यों मानता हूं के

562
00:41:09,600 --> 00:41:13,840
गीता और वेद ये ब्रह्म ज्ञान है ब्रह्म ज्ञान ये पूर्ण ब्रह्म

563
00:41:13,840 --> 00:41:18,400
ज्ञान है अरे यार आपको बात नहीं करनी चिल्लाना है क्या

564
00:41:18,400 --> 00:41:22,800
चिल्लाना नहीं है मैं आपसे ये पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं

565
00:41:22,800 --> 00:41:26,800
कि आप जो बता रहे पहले वेद फिर गीता और फिर

566
00:41:26,800 --> 00:41:30,880
पुराण तो ये कहां लिखा है अरे

567
00:41:30,880 --> 00:41:35,040
सर लिखे क्यों ले जा रहे हो उनको आप कहिए कि चुप रहे या तो वो आ जाए आप

568
00:41:35,040 --> 00:41:39,120
चले जाइए उनको कुछ नहीं बोल रहा हूं अपने वो अपने विषय में बोल रहे हैं मैं आपसे कुछ

569
00:41:39,120 --> 00:41:43,120
नहीं बोल रहे वो नहीं अपने विषय में यहां ना बोले उनको कहिए जाइए आप यहां से थोड़ी देर

570
00:41:43,120 --> 00:41:47,200
शांत रह लिख लिख के दे ठीक है कुछ मत कोई मदद करनी है तो लिख लिख के दे अगर अनपढ़ ना हो

571
00:41:47,200 --> 00:41:52,800
तो बाहर खा लो ठीक है हां ले रोटी मत खाने दे भैया

572
00:41:52,800 --> 00:41:56,800
हां तो मैं ये कह रहा हूं यह जो सिद्धांत आपने बनाया है कि मैं

573
00:41:56,800 --> 00:42:01,120
पहले वेद फिर गीता फिर पुराण ये कहां लिखा है? सबसे

574
00:42:01,120 --> 00:42:03,680
पहले वेद आए उसके बाद गीता आयु उसके बाद

575
00:42:03,680 --> 00:42:07,760
आए मैंने पूछा है मैंने पूछा है आपसे

576
00:42:07,760 --> 00:42:11,760
कि यह कहां लिखा है कि मैं मानता हूं हां

577
00:42:11,760 --> 00:42:15,760
आपने बोल दिया मैं जवाब दे दूं फिर दोबारा क्वेश्चन मत करना सर ये टाइम बर्बाद हो रहा

578
00:42:15,760 --> 00:42:20,000
है क्यों ठीक है क्यों इसलिए नहीं करना फालतू ये टाइम ही बर्बाद हो रहा है सर

579
00:42:20,000 --> 00:42:24,080
इस बात को क्वेश्चन को नहीं हो रहा है देखिए आप तय मत करिए क्या हो रहा है क्या

580
00:42:24,080 --> 00:42:28,080
नहीं हो रहा है आप मुझे उत्तर दे दीजिए इतना ज्यादा व्यर्थ मैं उत्तर ही दे रहा हूं उसको आप मानिए

581
00:42:28,080 --> 00:42:32,080
सर सर मैं आपको उत्तर दे रहा हूं उसको आप मान उत्तर मानने लायक होगा कि मान लूंगा नहीं तो तुम

582
00:42:32,080 --> 00:42:36,080
तो कह दोगे कबीर इस गॉड तो मैं मान लूं उसको कबीर इस गॉड को मैं मैं

583
00:42:36,080 --> 00:42:40,160
मना ही नहीं रहा आपको कबीर गॉड मैंने कहा बोला आपसे कबीर वो मुझे वो आधार दो कि

584
00:42:40,160 --> 00:42:44,240
वेद गीता फिर पुराण ये कहां लिखा है मैं

585
00:42:44,240 --> 00:42:48,240
सुनो सर अब मैं आपसे ये कह रहा हूं कि इस समय में मूरी बोई

586
00:42:48,240 --> 00:42:52,240
जाती है तो आप इसकी बोल दोगे मुझे कहीं लिखा दिखाओ ये मेरी सोच है मैं बोलूंगा मैं

587
00:42:52,240 --> 00:42:56,400
उस बात के लिए आपसे लडूंगा नहीं जो मैं लिखा नहीं दिखा सकता जो मैं लिखा

588
00:42:56,400 --> 00:43:00,480
नहीं दिखा सकता हूं उस बात के लिए मैं आपसे लडूंगा नहीं मैं उसी

589
00:43:00,480 --> 00:43:04,240
के लिए लडूंगा जो मैं लिखा दिखा दूंगा।

590
00:43:04,240 --> 00:43:08,480
तो आप मुझे यह भी लिखा दिखा दो किसी चीज पे

591
00:43:08,480 --> 00:43:12,560
अगर आप अपनी किसी चीज पे अटक रहे हैं तो आपको वो दिखाना पड़ेगा।

592
00:43:12,560 --> 00:43:16,720
मैं आपको जिस चीज के लिए अटकूंगा वो मैं लिखा दिखाऊंगा। सुनो

593
00:43:16,720 --> 00:43:18,880
कहीं वेद में मुझे ये भी दिखा दो। कहीं गीता

594
00:43:18,880 --> 00:43:22,960
जी में मुझे गीता जी में दिखा दो। उपनिषद या मान्य दिखाओ कहीं गीता में। मैं उसके

595
00:43:22,960 --> 00:43:27,360
लिए अटका। हालांकि वो भी लिखा दिखा सकता हूं। वो भी लिखा

596
00:43:27,360 --> 00:43:31,440
सकता हूं पर मैं उसके लिए अटका। सर नहीं सर क्वेश्चन से आप जा रहे हो

597
00:43:31,440 --> 00:43:35,440
मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा मैं उसी बात के लिए अटकूंगा

598
00:43:35,440 --> 00:43:39,600
जिस बात को मैं लिखा दिखा दूंगा सर आप क्वेश्चन से हट

599
00:43:39,600 --> 00:43:44,800
रहे हो आप अपने ही क्वेश्चन से हट रहे हो आप ही क्वेश्चन करके अपने क्वेश्चन से हट रहे हो

600
00:43:44,800 --> 00:43:48,960
आप ही क्वेश्चन करके अपने क्वेश्चन से हट रहे हो ठीक है आपने बोला मैं

601
00:43:48,960 --> 00:43:53,120
आपने बोला मैं उपनिषद दिखाऊंगा मैं उपनिषद मानता नहीं आपने बोला का

602
00:43:53,120 --> 00:43:57,920
मैंने उसको मैंने उसको छोड़ दिया ना आप छोड़ दो गीता

603
00:43:57,920 --> 00:44:02,080
पुराण आगे बढ़ते हैं। अब सुनो दूसरी चीज आपने बोली आप हां

604
00:44:02,080 --> 00:44:06,080
दूसरी चीज आपने बोली आप क्या मानते हो मैं वेद मानता हूं पहले फिर गीता जी

605
00:44:06,080 --> 00:44:10,320
को मानता हूं उसके बाद पुराण पहले शब्द का आप उपयोग कर रहे हो ये मैं आपको

606
00:44:10,320 --> 00:44:14,320
पूछ रहा हूं ये पहले वाला सिद्धांत कहां लिखा है ये सर मेरा

607
00:44:14,320 --> 00:44:18,400
मेरी सोच है आप मेरी सोच को कैसे बदल सकते हो यानी कि ये शास्त्र सम्मत नहीं

608
00:44:18,400 --> 00:44:22,480
है शास्त्र के बाद की चीज है मुझे सुनो मुझे ये नहीं पता ये आपकी

609
00:44:22,480 --> 00:44:26,480
सोच है शास्त्र सम्मत है नहीं है ये मेरी सोच है ये मेरी पर्सनल सोच है भाई जब

610
00:44:26,480 --> 00:44:30,720
आप क्लेम करते हो कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं। शास्त्र सम्मत

611
00:44:30,720 --> 00:44:34,000
बातें करते हैं तो आप अपनी सोच कैसे घुसेड़

612
00:44:34,000 --> 00:44:38,080
रहे हो उसमें? मुझे बता दो ना। अरे अब आप ये

613
00:44:38,080 --> 00:44:42,080
बता दो आप वेद को मानते हो। मैं पूछ रहा हूं आपसे। मैं मानता हूं वेद को।

614
00:44:42,080 --> 00:44:46,160
फिर आप फिर आप बातें क्यों कर रहे हो आगे के लिए? आप वेद मानते हो मैं भी मानता हूं। उसमें बात

615
00:44:46,160 --> 00:44:50,720
क्या रहेगी? को मैं पकड़ रहा हूं। मनमुखी मानूंगा। सुनो

616
00:44:50,720 --> 00:44:54,960
आप वेद को मानते हो? मैं भी मानता हूं। उसमें क्या है? उसमें है क्या? बताओ। आप भी मानते हो। मैं भी मानता हूं।

617
00:44:54,960 --> 00:44:59,200
सिद्धांत आप बता रहे हो कि पहले वेद फिर गीता फिर पुराण ये कहां लिखा

618
00:44:59,200 --> 00:45:04,000
है सर मैं चार रोटी खाता हूं आप छह खाओगे

619
00:45:04,000 --> 00:45:08,160
भाई साहब दिखाओगे धर्म और अधर्म सुनो धर्म और अधर्म मेरा

620
00:45:08,160 --> 00:45:12,160
वेद और आपका वेद अलग नहीं हो सकता वही मैं कह रहा हूं आप

621
00:45:12,160 --> 00:45:16,160
अपनी मां को मां मानते हो इसलिए हम लोग बात कर रहे हैं वरना बात ना कर रहे होते हां

622
00:45:16,160 --> 00:45:20,400
तो आप मैं मान रहे आप आप मैं भी मानता हूं वेद में गीता जी आप भी नहीं मानते

623
00:45:20,400 --> 00:45:25,520
मैं भी मानता हूं या तो ये वाला जो सिद्धांत है इसको छोड़ दीजिए या फिर मुझे लिखा

624
00:45:25,520 --> 00:45:30,320
लिखा है नहीं सर मैंने आपसे क्वेश्चन कहा मैं छह रोटी खाता हूं आप भी खाओगे बताओ

625
00:45:30,320 --> 00:45:34,480
भाई साहब बात यह है कि मेरा वेद और आपका वेद अलग नहीं है

626
00:45:34,480 --> 00:45:38,560
रोटी नहीं सर मैं भी सुनो रोटी दोनों की अलग है

627
00:45:38,560 --> 00:45:42,720
नहीं सर वेद अलग तो नहीं है गीता जी तो अलग नहीं है अरे सर वेद और

628
00:45:42,720 --> 00:45:46,800
सर अगर खामखा अटकेंगे तो बात आगे नहीं बढ़ पाएगी आप अटक रहे हो

629
00:45:46,800 --> 00:45:49,280
सर आप आपने कोई सिद्धांत दिया है

630
00:45:49,280 --> 00:45:53,360
तो मुझे लिखा दिखाइए ये कहा है कि पहले वेद फिर गीता फिर

631
00:45:53,360 --> 00:45:57,680
पुराण है आपके पास लिखा हुआ इतना बता दीजिए अरे नहीं सर अरे

632
00:45:57,680 --> 00:46:01,680
सर मैं जो कह रहा हूं आपको मैं क्या कह रहा हूं सर आप मेरी सुनिए मैं आपसे प्रार्थना

633
00:46:01,680 --> 00:46:05,840
कर रहा हूं बार-बार शास्त्र का कहना दिखाइए आप क्या कह रहे हो उससे हमें मतलब नहीं है शास्त्र

634
00:46:05,840 --> 00:46:09,920
क्या कह रहा है वो दिखाइए आपकी बात मैं भी नहीं मानूंगा सर मैं भी जो

635
00:46:09,920 --> 00:46:14,240
कह रहा हूं आप वेद मानते हो मैं भी मानता हूं भाई मत मानना अरे सर

636
00:46:14,240 --> 00:46:18,240
मैंने सुनो सर मैंने पूछा आपसे आप वेद मानते हो मानते हो आप गीता जी मानते हो मानते हो मैं

637
00:46:18,240 --> 00:46:22,240
भी मानता हूं मानते हो ना या तो नहीं मानता कि पहले

638
00:46:22,240 --> 00:46:26,400
वेद फिर गीता फिर पुराण अरे ये तो मेरी सोच है सर आप उससे

639
00:46:26,400 --> 00:46:30,720
क्यों अटक रहे हो? मैं आठ लोग आपकी सोच यहां बीच में क्यों डाल रहे हो? हटाओ।

640
00:46:30,720 --> 00:46:34,800
मैं आपको सोच रही हूं आपकी सोच भाई मैं आपको सोच को

641
00:46:34,800 --> 00:46:38,800
क्यों मानूं? हटी हुई है ना सर। आप प्रमाण

642
00:46:38,800 --> 00:46:43,200
के तौर बात करेंगे वेद और गीता से ही उसे हटाओ। मैं क्या मानते हो? ज्ञान मानते हो उससे आप क्या मतलब?

643
00:46:43,200 --> 00:46:47,280
अरे तो आप पहले आप ये सीमित कर रहे हो ना कि पहले वेद से दिखाओ। फिर गीता

644
00:46:47,280 --> 00:46:51,360
से दिखाओ। फिर पुराण से दिखाना। नहीं पहले गीता से ही ले लो।

645
00:46:51,360 --> 00:46:55,600
पहले वेदों से ले लो आपकी इच्छा। मैं मैं मैं जो

646
00:46:55,600 --> 00:47:00,400
है सीमित क्यों हूं आपके कहने पर मैं तीनों से दे सकता हूं मैं तीनों

647
00:47:00,400 --> 00:47:04,320
हूं पर मैं परतंत्रता क्यों झेलूं आपकी आप

648
00:47:04,320 --> 00:47:08,320
ये कहने वाले हैं कि नहीं मुझे इससे दो नहीं नहीं सर नहीं

649
00:47:08,320 --> 00:47:12,720
आप सुनो आपके सुनो आपके घर में घुस के सुनो आपके सिद्धांत आपका

650
00:47:12,720 --> 00:47:17,120
सिद्धांत क्या है कि पहले वेद फिर गीता फिर पुराण ये बताओ

651
00:47:17,120 --> 00:47:21,200
सिद्धांत नहीं सर जब दोनों सुनो अरे सर जब दोनों को एक ही कमरे में रहना

652
00:47:21,200 --> 00:47:25,280
है हम्म तो आप एक ही कमरे की बात करो ना दूसरे की क्यों कर

653
00:47:25,280 --> 00:47:29,680
रहे हो जब वेद और गीता दोनों को मानने आप जो है जो चीजें अधिकृत

654
00:47:29,680 --> 00:47:33,760
है जिनके आधार पे आपने अपना ताना-वाना खड़ा किया उन्हीं चीजों को स्वीकार करने से

655
00:47:33,760 --> 00:47:37,760
आप मना कर रहे हो सर सर आपके पास इस क्वेश्चन का जवाब नहीं है इसलिए आप इस क्वेश्चन

656
00:47:37,760 --> 00:47:41,840
पर अटक रहे हो इसका आपके पास कोई जवाब नहीं है सर हर क्वेश्चन का जवाब है आपको अगर नहीं

657
00:47:41,840 --> 00:47:45,840
सुनना है तो आप जा सकते हैं सुनना वहां पे आपके पास जवाब सुनो सर

658
00:47:45,840 --> 00:47:49,840
आपके पास जवाब नहीं है हमारे पास हर क्वेश्चन का जवाब है आपको सुनना है तो आप जा

659
00:47:49,840 --> 00:47:54,000
सकते हैं सर आखरी बार क्यों नहीं है मैं आपसे लास्ट बार पूछ रहा हूं।

660
00:47:54,000 --> 00:47:58,240
क्या आपके पास ये लिखा हुआ है? पहले वेद फिर

661
00:47:58,240 --> 00:48:02,320
गीता फिर क्या सर क्या सर आपके पास लिखा है कि

662
00:48:02,320 --> 00:48:06,320
पहले उपनिषद ही मान्य होंगे या पुराण ही मान्य होंगे या गीता जी मान्य होंगे क्या ऐसा लिखा है? पहले

663
00:48:06,320 --> 00:48:10,320
और बाद की बात मैं कहां अटक रहा हूं उस बात पे आप अटक रहे हो।

664
00:48:10,320 --> 00:48:14,400
तो आप दिखाइए। क्या दिखाऊं? आप दिखाइए। आप दिखाइए

665
00:48:14,400 --> 00:48:18,560
फिर। यानी यानी कि ये वाला मामला नहीं है ना कि पहले वेद दिखाओ। फिर गीता

666
00:48:18,560 --> 00:48:19,440
दिखाओ। फिर पुराण

667
00:48:19,440 --> 00:48:24,480
दिखाना। कुछ भी नहीं आप दिखाइए। सुनो सुनो सर मैंने आपकी छूट कर दी आप दिखाइए।

668
00:48:24,480 --> 00:48:28,480
हां मुझे फिर मुझे फिर बोलना होगा मैं बोल दूंगा। गुड गुड गुड मैं

669
00:48:28,480 --> 00:48:32,640
दिखाता हूं। मैं दिखाता हूं मैं। दिखाइए दिखाइए दिखाइए। आपको तो व ले जाना

670
00:48:32,640 --> 00:48:38,000
है। दिखाइए सर दिखाइए।

671
00:48:38,000 --> 00:48:42,160
बाद में अपने आप बात कर लूंगा।

672
00:48:42,160 --> 00:48:46,160
ये तो मेरी ऊपर है। मानू या ना मानू। जनता मानेगी या ना माने

673
00:48:46,160 --> 00:48:50,560
वो जनता मानना ना

674
00:48:50,560 --> 00:48:54,720
वो तो एक नास्तिक के ऊपर है भगवान को माने ना माने वो तो एक व्यक्ति के

675
00:48:54,720 --> 00:48:59,680
ऊपर है लेकिन सर मैं तो मानता हूं मैं तो भगवान मानता हूं ना मैं नास्तिक नहीं हूं

676
00:48:59,680 --> 00:49:04,400
नहीं आप जो ये तर्क दे रहे हो कि वो तो मेरे ऊपर है तो मैं उसका उत्तर दे रहा हूं आपको

677
00:49:04,400 --> 00:49:08,720
हां हां आप जो तर्क दे रहे हो तो मैं उसका उत्तर दे रहा हूं आपको। बिल्कुल

678
00:49:08,720 --> 00:49:12,800
देव जी छूट है आपकी

679
00:49:12,800 --> 00:49:16,960
कहां कह रहे हो कहां से कहां हो मथुरा से

680
00:49:16,960 --> 00:49:21,760
मथुरा में कोई चैनल है मैं कह रहा हूं चैनल पूछूंगा

681
00:49:21,760 --> 00:49:25,840
आवाज वहां तक जा रहा है डिस्टर्ब हो जाते चैनल है

682
00:49:25,840 --> 00:49:31,840
डिस्टरबेंस हो

683
00:49:46,800 --> 00:49:52,800
दिखाई तो निजी चैनल है वैसे

684
00:49:57,520 --> 00:50:03,440
शिव पुराण समिता दसवा अध्याय

685
00:50:03,440 --> 00:50:09,360
और 75वा श्लोक

686
00:50:09,360 --> 00:50:14,400
75वा प्रश्न चाहिए क्या बंद कर हम

687
00:50:14,400 --> 00:50:18,800
बंद कर चेहरा नहीं दिखा है

688
00:50:18,800 --> 00:50:23,520
बाहर खा लो बाहर कहां खा

689
00:50:23,520 --> 00:50:28,480
माफ करके ये देखो भैया ये शिवजी बोल रहे हैं

690
00:50:28,480 --> 00:50:31,370
जी हां

691
00:50:31,370 --> 00:50:33,760
[गला साफ़ करने की आवाज़] कि

692
00:50:33,760 --> 00:50:37,760
मैं ही परम ब्रह्म हूं। जी अकल

693
00:50:37,760 --> 00:50:42,000
कल सगुण यानी और अकल निर्गुण ये दोनों मेरे ही

694
00:50:42,000 --> 00:50:46,000
रूप है। मेरा स्वरूप ब्रह्म रूप ब्रह्म रूप होने के कारण

695
00:50:46,000 --> 00:50:50,080
मैं ईश्वर भी हूं। जीवों पर अनुग्रह आदि करना मेरा कार्य

696
00:50:50,080 --> 00:50:54,080
है। हे ब्रह्मा और केशव सबसे बहत और जगत की वृद्धि

697
00:50:54,080 --> 00:50:58,400
करने वाला होने के कारण मैं ब्रह्म भी हूं। मैं परम ब्रह्म भी हूं। मैं पर

698
00:50:58,400 --> 00:51:02,000
ब्रह्म भी हूं। सर्वत्र सर्व सम रूप से स्थित

699
00:51:02,000 --> 00:51:05,840
और व्यापक होने से मैं ही सबकी आत्मा भी हूं। यह देख

700
00:51:05,840 --> 00:51:10,320
लीजिए। ना मैंने देख लिया। आप कोई बात नहीं है।

701
00:51:10,320 --> 00:51:15,040
हां दिख रहा है सबसे ऊपर पहली लाइन। सबसे ऊपर पहली लाइन

702
00:51:15,040 --> 00:51:15,920
हां हां दिख रहा

703
00:51:15,920 --> 00:51:20,080
है। क्या लिखा है?

704
00:51:20,080 --> 00:51:24,080
परम ब्रह्म हूं। अब दूसरा मैंने सुन लिया। अब

705
00:51:24,080 --> 00:51:30,080
दूसरा अब दूसरा दिखाता हूं।

706
00:51:40,150 --> 00:51:44,560
[गला साफ़ करने की आवाज़] वहां दिखा दिखाई

707
00:51:44,560 --> 00:51:50,560
वाली

708
00:51:52,400 --> 00:51:56,560
बार-बार कमेंट आ रही है नहीं तो जो पीछे से बोलना बंद करो तुम्हारी जी बंद नहीं

709
00:51:56,560 --> 00:51:58,720
रही

710
00:51:58,720 --> 00:52:04,720
ना

711
00:52:06,640 --> 00:52:10,000
तुम भगाओगे

712
00:52:10,000 --> 00:52:16,000
बैठ जाके मैं जा

713
00:52:29,440 --> 00:52:35,440
श्रीमत भागवत दो 5

714
00:52:41,070 --> 00:52:46,880
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]

715
00:52:46,880 --> 00:52:52,880
दो 5

716
00:52:54,640 --> 00:53:00,640
दो पांच 200 99

717
00:53:24,480 --> 00:53:28,400
दो पांच

718
00:53:28,400 --> 00:53:32,800
दो पांच 15

719
00:53:32,800 --> 00:53:38,800
दो पांच 12

720
00:53:46,320 --> 00:53:50,400
हां हां तो 12 से मैं पढ़ रहा हूं। 12

721
00:53:50,400 --> 00:53:54,560
से पढ़ रहा हूं। 12 से ठीक है। प्रजा पालन

722
00:53:54,560 --> 00:53:58,720
से मेरी बड़ी सेवा होगी। तुम्हें प्रजा का पालन करते देखकर श्री हरि

723
00:53:58,720 --> 00:54:03,280
भी तुमसे प्रसन्न होंगे। जिन पर यज्ञ मूर्ति जनार्दन भगवान

724
00:54:03,280 --> 00:54:07,280
प्रसन्न नहीं होते। उनका सारा श्रम व्यर्थ हो जाता है। क्योंकि वह तो

725
00:54:07,280 --> 00:54:11,520
एक प्रकार से अपने आत्मा का ही अनादर करते हैं। पाप का नाश

726
00:54:11,520 --> 00:54:15,040
करने वाले

727
00:54:15,040 --> 00:54:21,040
12

728
00:54:23,200 --> 00:54:27,520
तुम्हारे पूर्वज मेरे मानस पुत्र थे और

729
00:54:27,520 --> 00:54:32,560
विष्णु के शुद्ध सत्यमय सब लोकों के शिरोभाग में स्थित वैुंठ

730
00:54:32,560 --> 00:54:36,880
धाम में जाकर सभी लोग विष्णु रूप होकर रहते हैं कामनाएं

731
00:54:36,880 --> 00:54:40,880
छोड़कर और इसी

732
00:54:40,880 --> 00:54:44,880
में आगे इनका ब्रह्मत्व भी बताया जा रहा है

733
00:54:44,880 --> 00:54:48,400
क्या है वह ब्रह्मत्व

734
00:54:48,400 --> 00:54:54,000
जिस समय मैं लोक रचना में लगा हुआ था और

735
00:54:54,000 --> 00:54:58,320
अब तो जिनके संकल्प मात्र से वह सर्वशक्तिमान

736
00:54:58,320 --> 00:55:03,040
श्री हरि मेरा यह काम पूरा करेंगे सर्वशक्तिमान

737
00:55:03,040 --> 00:55:07,360
ठीक है और वेद भी इनहीं के परायण बताए जा रहे हैं विष्णु भगवान

738
00:55:07,360 --> 00:55:13,360
के दो पांच 15

739
00:55:16,160 --> 00:55:22,160
गया इसके अंदर दूसरा स्कंद

740
00:55:29,280 --> 00:55:34,000
दो [गला साफ़ करने की आवाज़] 5 12 हम

741
00:55:34,000 --> 00:55:38,240
यहां पे ब्रह्मा जी बता रहे हैं विष्णु भगवान के बारे में कि जैसे

742
00:55:38,240 --> 00:55:42,560
सूर्य अग्नि चंद्रमा ग्रहण ग्रह नक्षत्र और तारे उन्हीं के प्रकाश से प्रकाशित

743
00:55:42,560 --> 00:55:46,640
होकर जगत में प्रकाश फैलाते हैं। वैसे ही मैं भी उनहीं स्वयं प्रकाश भगवान से

744
00:55:46,640 --> 00:55:50,640
चिन्मय प्रकाश से प्रकाशित होकर संसार को प्रकाशित कर रहा हूं। उन

745
00:55:50,640 --> 00:55:55,120
भगवान वासुदेव की मैं वंदना करता हूं और ध्यान भी जिनकी दुर्ज

746
00:55:55,120 --> 00:55:59,440
माया से मोहित होकर लोग मुझे जगतगुरु कहते हैं। यह माया तो उनकी आंखों

747
00:55:59,440 --> 00:56:03,440
के सामने ठहरती ही नहीं। चेप कर दूर ही रहती है। परंतु संसार के अज्ञानी

748
00:56:03,440 --> 00:56:07,520
जन उसी से मोहित होकर यह मेरा हूं। यह मेरा है। इस प्रकार बते

749
00:56:07,520 --> 00:56:11,520
रहते हैं। वेद नारायण के परायण है। वेद

750
00:56:11,520 --> 00:56:15,520
जो है कहां चले गए? चले ही गए। जय सियाराम। भाई

751
00:56:15,520 --> 00:56:19,520
साहब जय सिया राम। जय श्री राम। वो अभी बोल रहे

752
00:56:19,520 --> 00:56:23,680
थे कि वेद गीता मानता हूं। वो गए। है ना? मेरे को लेते थोड़ी देर पहले। उनको पहली

753
00:56:23,680 --> 00:56:27,680
तो बात तो ये बताइए। आप अपने गुरु को नहीं मानते। जो पुराण उनका जो गुरु

754
00:56:27,680 --> 00:56:31,680
का पुराणों पर खड़ा हुआ है सारा आधार। दूसरी बात वेदों के बाद में तुरंत

755
00:56:31,680 --> 00:56:37,680
बाद क्या आता है? ब्राह्मण आता है। उसमें लिखा हुआ साफ-साफ है।

756
00:56:39,920 --> 00:56:44,240
अभी मैं ये दिखा रहा हूं। जरा एक मिनट ये देख लेने दीजिए। वेद

757
00:56:44,240 --> 00:56:48,560
जो है नारायण के परायण है। देवता भी नारायण के ही अंगों

758
00:56:48,560 --> 00:56:52,880
में कल्पित हैं। सब प्रकार से योग भी नारायण की प्राप्ति

759
00:56:52,880 --> 00:56:56,960
हेतु है। जितने भी यज्ञ होते हैं सारी तपस्याएं नारायण की

760
00:56:56,960 --> 00:57:01,120
ओर ले जाने वाली है। वे दृष्टा होने पर भी ईश्वर है। स्वामी है।

761
00:57:01,120 --> 00:57:05,120
निर्विकार होने पर भी सर्व स्वरूप है। उन्होंने ही मुझे बनाया है। उनकी

762
00:57:05,120 --> 00:57:09,120
दृष्टि से ही प्रेरित होकर मैं उनके इच्छा अनुसार सृष्टि रचना

763
00:57:09,120 --> 00:57:11,600
करता हूं। भगवान माया के गुणों

764
00:57:11,600 --> 00:57:15,840
से रहित एवं यह देख लो गुणों से रहित भी देख लेना ब्रह्मा

765
00:57:15,840 --> 00:57:19,920
विष्णु महेश को गुणों गुण कहने वाले भगवान माया

766
00:57:19,920 --> 00:57:24,000
के गुणों से रहित एवं अनंत है सृष्टि स्थिति और प्रलय

767
00:57:24,000 --> 00:57:28,080
के लिए रजोगुण सतोगुण और तमोगुण ये तीन गुण माया के द्वारा

768
00:57:28,080 --> 00:57:29,120
वो

769
00:57:29,120 --> 00:57:32,800
करते हैं

770
00:57:32,800 --> 00:57:36,880
दोबारा से लीक कर रहा है ये आवाज कहां से आ रही है आवाज कहां

771
00:57:36,880 --> 00:57:40,960
से आ रही है और घर परिवार ठीक है सब बढ़िया सब ठीक है

772
00:57:40,960 --> 00:57:46,960
ठीक ठीक ठीक आवाज आवाज संदीप जी आवाज

773
00:57:47,600 --> 00:57:48,160
ठीक है

774
00:57:48,160 --> 00:57:52,400
तो ये नारायण की भगवत वो हो गई अब मैं जरा वेदों से भी बता दूं जिसको

775
00:57:52,400 --> 00:57:56,960
कोई भाग ही गए भाई वो प्रमाण सुनते सुनते भाग ही गए

776
00:57:56,960 --> 00:58:00,720
अब मैं वेदों से दिखा दूं इनकी परब्रह्मता

777
00:58:00,720 --> 00:58:06,160
वेदों में शिवजी की बात कहां पर हो रही है वो बता दूं पहले

778
00:58:06,160 --> 00:58:10,320
विष्णु जी की बात देख लेते है ऋग्वेद एक

779
00:58:10,320 --> 00:58:13,680
भैया जय श्री राम

780
00:58:13,680 --> 00:58:17,680
ऋग्व 22 एक मिनट एक मिनट मनीष

781
00:58:17,680 --> 00:58:23,680
जी एक मिनट एक मिनट ऋग्वेद एक 22वां

782
00:58:24,480 --> 00:58:29,530
सूत्र

783
00:58:29,530 --> 00:58:35,530
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम

784
00:58:44,560 --> 00:58:50,560
मैंने जो कुछ भी किया है 17

785
00:58:51,120 --> 00:58:54,640
ऋग्वेद

786
00:58:54,640 --> 00:58:59,840
ऋग्वेद 1/7 से 23

787
00:58:59,840 --> 00:59:05,840
यह आ गया 17

788
00:59:08,160 --> 00:59:10,960
जिनके भीतर

789
00:59:10,960 --> 00:59:16,960
विश्व संभू

790
00:59:18,240 --> 00:59:23,200
विश्व भेजी जल के भीतर मौज मंत्र की ओर

791
00:59:23,200 --> 00:59:27,360
और ऋग्वेद एक 22 के बाद ऋग्वेद एक 156

792
00:59:27,360 --> 00:59:33,360
भी

793
00:59:38,880 --> 00:59:44,880
एक 156

794
00:59:58,480 --> 01:00:02,480
दिखा प्रमाण जब तक मैं प्रमाण दिखा रहा हूं तब

795
01:00:02,480 --> 01:00:06,480
तक आप भाग ही गए। एक एक

796
01:00:06,480 --> 01:00:10,880
श्लोक और खोलना मैं बताता हूं। अथर्ववेयर से 156

797
01:00:10,880 --> 01:00:14,240
10 12

798
01:00:14,240 --> 01:00:18,720
ये खोलना आप 15 छ

799
01:00:18,720 --> 01:00:21,680
10 12

800
01:00:21,680 --> 01:00:23,920
15

801
01:00:23,920 --> 01:00:28,240
हां इसके बीच में ही मिलेगा

802
01:00:28,240 --> 01:00:34,240
कांड कौन सा 15 बता रहे है ना

803
01:00:39,680 --> 01:00:43,840
अरे भाई कहां चले गए? आए थे प्रमाण मांगने।

804
01:00:43,840 --> 01:00:47,920
चले कहां गए? संदीप जी ये

805
01:00:47,920 --> 01:00:51,010
क्या हो रहा है?

806
01:00:51,010 --> 01:00:57,010
[हंसी] फिजियोथरेपी चल रही है।

807
01:00:57,280 --> 01:01:01,600
सर फिजियोथरेपी चलती है साथ में। एक्चुअल में हमारा ना दिवाली का सीजन होता है ना तो

808
01:01:01,600 --> 01:01:07,520
हमारा लगातार 15 15 आ गया सूक्त नंबर छह आ गए

809
01:01:07,520 --> 01:01:12,400
हमने ये सारे जो प्रमाण है ना ये संकलित करके रख रखे हैं

810
01:01:12,400 --> 01:01:16,400
जिससे कि किसी दिन अगर वो पड़े तो हम जो है

811
01:01:16,400 --> 01:01:20,560
उसकी बात करें अच्छा आप वो आप वो वाला प्रमाण दे रहे है की पुराण

812
01:01:20,560 --> 01:01:26,160
पुराण प्रमाणित क्यों है ना

813
01:01:26,160 --> 01:01:30,960
चले गए देखिए यहां पे पुराणों की वैदिकता बताई जा रही है

814
01:01:30,960 --> 01:01:34,960
कि जो यह वेद जानता है वो निश्चय करके इतिहास

815
01:01:34,960 --> 01:01:39,040
पुराण का गाथा का नारा शंशी का प्रिय

816
01:01:39,040 --> 01:01:43,600
धाम होता है तो वेद से ही पुराणों की प्रमाणिकता

817
01:01:43,600 --> 01:01:48,080
प्राप्त है यही बता रहे थे ना आप

818
01:01:48,080 --> 01:01:52,480
है ना ये पुराणों की प्रमाणिकता है वेद से

819
01:01:52,480 --> 01:01:56,480
वेद से अब ये नहीं कह सकते कि वेद जो है पीछे है और पुराण जो है

820
01:01:56,480 --> 01:02:02,480
बाद में है मैंने बताया था ना 15 छ 10

821
01:02:02,720 --> 01:02:06,800
तो उसमें ये दिखा रखा है कि वेद पुराण और इतिहास मतलब

822
01:02:06,800 --> 01:02:10,800
यानी कि ये एक ही है हां वेद पुराण इतिहास एक ही

823
01:02:10,800 --> 01:02:15,520
है कह रहा था ना ये कह रहा था कि कहां लिखा हुआ है तो इसकी चोंच बंद कर देना दोबारा

824
01:02:15,520 --> 01:02:18,240
ये

825
01:02:18,240 --> 01:02:22,320
ये बहुत सारे प्रमाण है अपने पास पुराणों की प्रामाणिकता के लिए एक एक पुराण

826
01:02:22,320 --> 01:02:26,960
का भी संदर्भ है एक एक पुराण का एक एक

827
01:02:26,960 --> 01:02:31,600
पुराण का भी वो है अपने पास कि

828
01:02:31,600 --> 01:02:35,920
एक एक पुराण से भी ये लिया जा सकता है कि जी एक

829
01:02:35,920 --> 01:02:39,920
वो दिया गया है। एक आपको बात बताता हूं आज इनके बारे में बड़ी

830
01:02:39,920 --> 01:02:44,240
जरूरी चीज है। जब आपने उनको फोटो दिखाई ना कबीर दास की

831
01:02:44,240 --> 01:02:48,240
तो आप नेगेटिव पॉइंट दिखाओगे ना तो ये

832
01:02:48,240 --> 01:02:52,320
आपको शास्त्रों में उलझाएंगे जान के आपने क्या करना था इनको

833
01:02:52,320 --> 01:02:56,320
इनको दोबारा बुलाओ के भाई ये बता के ये जो ये जो फोटो है वो

834
01:02:56,320 --> 01:03:00,480
आप बिल्कुल सही जा रहे थे इसने जान के आपको डाइवर्ट कर दिया

835
01:03:00,480 --> 01:03:04,560
और आपको डायवर्ट कैसे कर दिया आपने गलती कर दी आप नहीं बोलते कि हां ठीक है पुराण

836
01:03:04,560 --> 01:03:08,640
सही फिर इनके गुरु को नहीं गलत साबित करते सर इन्होंने सही किया है मेरी बात सुनी

837
01:03:08,640 --> 01:03:12,640
जी एक सेकंड आप चुप रहो शिव क्या था वो जब आपने उनको

838
01:03:12,640 --> 01:03:16,720
फोटो दिखाई ना उनका दिमाग ठन गया कि अब ये हमारी पोल खोलेंगे और बाकी

839
01:03:16,720 --> 01:03:17,920
आप पोल बिल्कुल सही तरीके

840
01:03:17,920 --> 01:03:22,000
से खोल रहे थे आप बिल्कुल पॉइंट टू पॉइंट ना साइड में बिल्कुल सेट जगह पे आए बाद में मुझे बड़ा

841
01:03:22,000 --> 01:03:26,000
अच्छा लगा जैसे आपने पहले पूछा सर क्या है तो पहले

842
01:03:26,000 --> 01:03:30,000
दूसरा पूछा फिर एंड पे जिस समय इस पॉइंट पे आए ना फिर आपने फोटो जब

843
01:03:30,000 --> 01:03:34,000
दिखाई उनको तो वो घबरा गया कि अब ये जो है पोल खुली खुली उसने

844
01:03:34,000 --> 01:03:38,240
आपको डाइवर्ट किया इसीलिए देखिए एक एक

845
01:03:38,240 --> 01:03:42,480
माइनस पॉइंट इनका ये होता है। जी जी एक मतलब इनका

846
01:03:42,480 --> 01:03:47,200
खेलने का तरीका क्या है? जी जैसे ही फसेंगे

847
01:03:47,200 --> 01:03:51,200
तो हसने का उत्तर नहीं देंगे। ये आपसे सवाल करेंगे। अगर

848
01:03:51,200 --> 01:03:55,200
ऐसा है तो ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी दिखा दो। आपने इसका पॉइंट बिल्कुल

849
01:03:55,200 --> 01:03:59,600
क्लियर कर दिया था। उस समय जब आपने ये बात बोली ना कि भ ये बता कि जब ये कबीर

850
01:03:59,600 --> 01:04:03,760
दास जो है जब ये धरती पे आके ये बुढ़ापे वाला ये वाला बुढ़ापे में फंस गए अजर

851
01:04:03,760 --> 01:04:08,160
में जब धरती पे आकर तो फिर वो ब्रह्मा विष्णु शिव महेश के बारे में क्वेश्चनिंग

852
01:04:08,160 --> 01:04:12,160
क्यों करते हो भाई ये फस चुका था पूरी तरीके से इस समय इस करके अब

853
01:04:12,160 --> 01:04:16,480
ये भाग गया है इसको इसी के सवाल पे ही बिल्कुल पकड़ के रखना था वहीं पे आपने

854
01:04:16,480 --> 01:04:20,720
इसको पकड़ के रखना क्या ये बता कि जब तुम कहते हो वहां पे सतलोक

855
01:04:20,720 --> 01:04:24,720
के अंदर वो अजर रहते हैं और जब वो यहां पे सशरीर आते हैं सशरीर का मतलब

856
01:04:24,720 --> 01:04:28,800
है जैसे वहां है वैसे ऐसे यहां पे आते हैं। तो यहां पर जब वो बूढ़ा हो गया जब इसने खुद

857
01:04:28,800 --> 01:04:32,960
ही मान लिया कि हां वो बुढ़ापे में आ गए यहां पर धरती पे क्या जब वो धरती पर बुढ़ापे

858
01:04:32,960 --> 01:04:36,960
में आ गए जब वो वापस गए तो वो सतलोक में फिर बुढ़ापे वाला शरीर गया कहां भाई वो

859
01:04:36,960 --> 01:04:40,960
तो बता यहां पता अच्छा मुझे

860
01:04:40,960 --> 01:04:45,840
आज एक चीज अच्छी लगी मुझे आज एक चीज अच्छी लगी कि

861
01:04:45,840 --> 01:04:49,840
दोद लोग आए और वो किस तरीके से उनके परिवार में

862
01:04:49,840 --> 01:04:53,840
जो विपदा है उसको होने के बावजूद भी वो जो है बचे

863
01:04:53,840 --> 01:04:57,840
हुए हैं और कह रहे हैं कि आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अलग कुछ काम हो रहा है जो हम लोग

864
01:04:57,840 --> 01:05:02,000
कर रहे हैं। मेहनत व्यर्थ नहीं जा रही है। सर उनके लिए एक मैसेज है। उनके

865
01:05:02,000 --> 01:05:06,160
लिए ना एक मैसेज है जो अभी आए थे ना दोनों सर एक सेकंड मनीष जी एक सेकंड उन दोनों के लिए मैसेज

866
01:05:06,160 --> 01:05:10,160
है भाई आप जैसे आपके फादर की या फादर की प्रॉब्लम है ना कि वो घर में

867
01:05:10,160 --> 01:05:14,160
कबीर दास की फोटो लगाते आप श्री कृष्ण जी की पूजा धूम धड़ाके

868
01:05:14,160 --> 01:05:18,400
से करो वहां पे वो अपने आप ट्रैक पे आ जाएंगे। भक्त प्रह्लाद की तरह भक्ति करो

869
01:05:18,400 --> 01:05:22,560
अपनी। जैसे वो हिरण्य कश्यप के थे वो समझते नहीं थे। लेकिन उन्होंने

870
01:05:22,560 --> 01:05:26,960
भक्त प्रह्लाद ने उनको समझा के लास्ट में समझाया। ये समझ इंसान

871
01:05:26,960 --> 01:05:31,280
है शब्द नहीं कह सकते वो आपकी

872
01:05:31,280 --> 01:05:37,280
आवाज में ब्रेक आ रहा है जी मनीष जी बोलिए

873
01:05:38,880 --> 01:05:41,920
मनीष जी बोलिए

874
01:05:41,920 --> 01:05:46,000
कह रहा था मनीष जी बोलिए आपने वेद से दिखाई दिया कि पुराण

875
01:05:46,000 --> 01:05:50,080
और ये इतिहास मान्य होंगे। अब वेदों के बाद में आते हैं ब्राह्मण।

876
01:05:50,080 --> 01:05:54,800
तो ब्राह्मण में गोपथ ब्राह्मण है। आपको बता देता हूं अथर्ववेद का इसमें लिखा हुआ है।

877
01:05:54,800 --> 01:05:58,880
सुनिए सुनिए सुनिए गोपथ ब्राह्मण वगैरह इनकी ऊपर से

878
01:05:58,880 --> 01:06:03,040
चांद गंजी रहती है। ऊपर से सब सरक जाएगा। ये सब नाम

879
01:06:03,040 --> 01:06:06,800
कहां ले रहे हो इतने क्लिष्ट नाम?

880
01:06:06,800 --> 01:06:09,920
ब्राह्मण

881
01:06:09,920 --> 01:06:14,480
येणि सूत्र निरुक्त ये सब तो जानते ही नहीं है। ये

882
01:06:14,480 --> 01:06:17,920
आप कहां ले रहे हो?

883
01:06:17,920 --> 01:06:20,720
बात सही है पर

884
01:06:20,720 --> 01:06:24,720
राम राम जी राम राम राम राम जी

885
01:06:24,720 --> 01:06:29,600
कहां पर हैं आप कौन है

886
01:06:29,600 --> 01:06:33,600
जी शैलेश पुरी जी जी शैलेश पुरी जी अत

887
01:06:33,600 --> 01:06:36,560
10835

888
01:06:36,560 --> 01:06:41,840
10835 खोल लेते हैं 32 32 32

889
01:06:41,840 --> 01:06:45,920
बोल बोलने का मौका मिलेगा जी जी जी दो

890
01:06:45,920 --> 01:06:51,920
मिनट

891
01:07:08,300 --> 01:07:14,300
[गला साफ़ करने की आवाज़]

892
01:07:30,800 --> 01:07:34,720
10 आठ और

893
01:07:34,720 --> 01:07:39,040
सूक्त नंबर 35 अथर्व

894
01:07:39,040 --> 01:07:45,040
32 32 32

895
01:07:47,120 --> 01:07:51,280
हम क्या लिखा है इसमें

896
01:07:51,280 --> 01:07:55,360
समीप होने पर भी वह छोड़ता नहीं है। वह निकट होने पर भी दिखाई नहीं देता है।

897
01:07:55,360 --> 01:07:59,360
परमात्मा के इस विश्व ब्रह्मांड रूप काव्य को यह ना कभी मरता

898
01:07:59,360 --> 01:08:03,440
है ना कभी पुराना होता है। अजर अब काव्य काव्य क्यों ना है? काव्य एक रामायण

899
01:08:03,440 --> 01:08:07,440
है। हम जानते हैं और ये रामायण कभी तो ना तो पुरानी होती है हम सब जानते

900
01:08:07,440 --> 01:08:11,520
हैं परमात्मा का तो ये रामायण को भी है ना हम ये नहीं कह सकते कि हम

901
01:08:11,520 --> 01:08:15,760
नहीं मानते क्योंकि वेदों में सात प्रमाण है कि पुराण और

902
01:08:15,760 --> 01:08:21,040
रामायण ग्रंथ ऐसे हैं जो वेद तुल्य है हम [गला साफ़ करने की आवाज़]

903
01:08:21,040 --> 01:08:25,040
तो इनको तुरंत मारा करो क्योंकि ये उस टाइम बोल रहा था तो मुझे आपने लिया नहीं मुझे बहुत

904
01:08:25,040 --> 01:08:29,760
गुस्सा आ गया यार ये बोल कहां से रहा है [हंसी]

905
01:08:29,760 --> 01:08:33,920
नहीं नहीं देखिए ऐसा है मैं भी अपने पास

906
01:08:33,920 --> 01:08:38,000
बहुत सारे सारे प्रमाण ले बैठा हूं। अब मैं अपने वाले निकाल रहा हूं। अब

907
01:08:38,000 --> 01:08:42,080
आपको रटा आपको वो मुंह पे था। मैं एक एक करके तसल्ली से

908
01:08:42,080 --> 01:08:48,080
इनको दिखाता। एक एक करके थोड़ा आराम आराम से

909
01:08:48,960 --> 01:08:53,440
एक साथ अगर चला जाता है ना। हां

910
01:08:53,440 --> 01:08:56,320
एक साथ अगर मार अगर एक साथ आप

911
01:08:56,320 --> 01:09:00,640
कोई सजा है वो एक साथ दे दोगे तो उसका वो आनंद नहीं आएगा। आप धीरे-धीरे

912
01:09:00,640 --> 01:09:04,800
इंस्टॉलमेंट में उसको दीजिए तब उसको आनंद आएगा। देखो वो अगली इंस्टॉलमेंट

913
01:09:04,800 --> 01:09:08,000
लेने से पहले ही भाग गया। ठीक है।

914
01:09:08,000 --> 01:09:12,000
शैलेश पुरी जी को सुन लेते हैं। जी शैलेश पुरी जी बताइए।

915
01:09:12,000 --> 01:09:16,400
हम चाहते हैं ना आरती करना है मुझे। ठीक है। जय सीताराम

916
01:09:16,400 --> 01:09:21,920
सीताराम जय महाकाल।

917
01:09:21,920 --> 01:09:25,440
[गला साफ़ करने की आवाज़]

918
01:09:25,440 --> 01:09:29,600
जी शैलेश पुरी जी आप सुन पा रहे हैं?

919
01:09:29,600 --> 01:09:33,760
जी बिल्कुल जी मैं थोड़ी देर थोड़ा टाइम दोगे मेरे को जुड़ने के लिए प्लीज

920
01:09:33,760 --> 01:09:37,920
क्या है मेरे यहां लाइट चली गई अभी और अभी लाइट आई है मेरा मेरा जो

921
01:09:37,920 --> 01:09:42,640
मोबाइल है वो डिस्चार्ज हो गया प्लीज थोड़ा सा मैं चार्ज लगा के आता हूं

922
01:09:42,640 --> 01:09:47,440
अच्छा आपके आप रामपाल जी के फॉलोअ है आप

923
01:09:47,440 --> 01:09:51,440
जी बिल्कुल जी हम संत रामपाल जी महाराज के फॉलोअ है। ठीक है ठीक है ठीक है

924
01:09:51,440 --> 01:09:57,440
आइए आप आइए स्वागत है आपका

925
01:10:01,360 --> 01:10:05,600
अ मैं देख रहा हूं एक सज्जन

926
01:10:05,600 --> 01:10:11,120
है टीशर्ट में भाई साहब बताएं अपने बारे में

927
01:10:11,120 --> 01:10:15,840
एस नाम है आपका एस

928
01:10:15,840 --> 01:10:20,320
अरे मैं कहीं बाहर आ चुका हूं महादेव अच्छा अच्छा

929
01:10:20,320 --> 01:10:24,560
महादेव महादेव सात्विक नाम है मेरा सात्विक हां सात्विक

930
01:10:24,560 --> 01:10:28,800
जी अब आप इस तरह से दिखते हैं ना यहां पर [हंसी]

931
01:10:28,800 --> 01:10:33,760
आप पर्सनली तो मिले नहीं मिले मुझे लग रहा है

932
01:10:33,760 --> 01:10:37,600
मैं एक चीज कहना चाहता था

933
01:10:37,600 --> 01:10:43,360
पवित्र मुसलमान पवित्र रमजान संस्था

934
01:10:43,360 --> 01:10:45,840
वाला

935
01:10:45,840 --> 01:10:51,680
संत नाम ज्ञानेश्वरी गीता

936
01:10:51,680 --> 01:10:55,360
आज पवित्र

937
01:10:55,360 --> 01:11:00,000
भगवत गीता भगवत गीता वेदवा भगवत गीता वेद

938
01:11:00,000 --> 01:11:06,000
कुरान पवित्र कुरान का संबंध है गीते

939
01:11:10,240 --> 01:11:14,320
हजरत मोहम्मद जी मांस नहीं खाते या बदल उल्लेख करने का

940
01:11:14,320 --> 01:11:18,560
गरज है ये इसमें कुरान बाइबल सबका मिक्सचर जो बनाया

941
01:11:18,560 --> 01:11:23,760
है इन्होंने हजरत मोमिन तो शरवीर हलाल की थी व

942
01:11:23,760 --> 01:11:26,400
मुसलमान

943
01:11:26,400 --> 01:11:32,400
पुलिस स्टेशन

944
01:11:32,720 --> 01:11:37,280
नाम का ज्ञान गंगा

945
01:11:37,280 --> 01:11:41,280
बस करिए बस करिए ये देखिए अभी नया ताजा तरीन मामला है ये इनको

946
01:11:41,280 --> 01:11:45,360
पकड़ के ले जाया गया है और उसका कारण यही है कि ये जो है इसमें

947
01:11:45,360 --> 01:11:49,440
मिलावट करते हैं अपने मन से कुछ भी लिख देते हैं एक प्रश्न आ रहा है सुप्रीम

948
01:11:49,440 --> 01:11:53,840
भाई हैं। ये पूछ रहे हैं यह बताओ जब शिवजी अविनाशी थे तो भस्मासुर

949
01:11:53,840 --> 01:11:57,840
से क्यों भागे? वो क्यों नहीं उनसे डटकर क्यों नहीं सबक

950
01:11:57,840 --> 01:12:01,840
सिखाया? मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि यदि आपके

951
01:12:01,840 --> 01:12:06,240
जो रामपाल दास जी हैं वो अविनाशी हैं

952
01:12:06,240 --> 01:12:11,440
तो वो भोजन क्यों करते हैं? वहां जेल में भोजन करते हैं कि नहीं करते हैं जेलधाम में?

953
01:12:11,440 --> 01:12:16,320
अभी आपका ही आदमी कह रहा है ना स्क्रीन पर आके वो क्या बोला?

954
01:12:16,320 --> 01:12:20,320
नाशवान लोक में नाशवान लोक की लीलाएं करते हैं भगवान

955
01:12:20,320 --> 01:12:24,480
वही खुद बोल रहा है आपका तो ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश कर रहे हैं उनसे आपको

956
01:12:24,480 --> 01:12:28,720
दिक्कत है

957
01:12:28,720 --> 01:12:32,800
आपका कबीर जो है वो नाशवान लोक में नाशवान जो लोक की

958
01:12:32,800 --> 01:12:37,360
जो सीमाएं हैं उसमें सीमित हो जाएगा वो आपको पच जाएगा

959
01:12:37,360 --> 01:12:41,600
वही चीज ब्रह्मा विष्णु महेश उनके बारे में लिखा है यह भगवान है मैं परम

960
01:12:41,600 --> 01:12:46,880
ब्रह्म हूं तो वो शास्त्र की बात आपको नहीं माननी है

961
01:12:46,880 --> 01:12:51,200
रामपाल दास हॉस्पिटल में एडमिट क्यों होते हैं? क्यों हुए थे?

962
01:12:51,200 --> 01:12:55,760
उनको पैसों की क्या जरूरत है? वो पैसे वाला सीन दिखाओ भैया जरा।

963
01:12:55,760 --> 01:13:01,200
पैसे ले रहे हैं सीधे हाथ में। दिखा दो जरा।

964
01:13:01,200 --> 01:13:05,280
क्या जरूरत है पैसों की? भाई। वो तो सर्वज्ञ

965
01:13:05,280 --> 01:13:09,760
सर्वशक्तिमान के अवतार हैं।

966
01:13:09,760 --> 01:13:14,160
शिवशु भाई इनके पुत्र के हैं या इनका जवाब देना कोई जरूरी नहीं है।

967
01:13:14,160 --> 01:13:18,960
नहीं नहीं जब कोई नहीं है तब तक जवाब दे देते हैं। कोई बात नहीं है उसमें।

968
01:13:18,960 --> 01:13:23,760
हम महादेव मैं एक चीज कहना चाहता था आपसे।

969
01:13:23,760 --> 01:13:28,560
हम महादेव महादेव बताइए।

970
01:13:28,560 --> 01:13:32,560
मैं आपसे एक चीज कहना चाहता था कि आप इनको इतना समझाते हैं। अभी

971
01:13:32,560 --> 01:13:37,840
आपने उन भाई को बोला कि वो आप कुछ प्रमाण दे रहे थे निर्गुण के ऊपर

972
01:13:37,840 --> 01:13:42,320
हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये आप थोड़ा सोचिए कि वो

973
01:13:42,320 --> 01:13:46,960
डायरेक्ट ही मतलब आपने पूरा प्रमाण नहीं दिया जिससे पहले हां हां हां [हंसी] हां हां हां

974
01:13:46,960 --> 01:13:51,280
उस उस व्यक्ति को यही नहीं पता कि निर्गुण क्या होता है। वास्तविकता तो ये है।

975
01:13:51,280 --> 01:13:55,520
आप फालतू में प्रमाण दे रहे हैं। इतना बड़ा अभी

976
01:13:55,520 --> 01:13:59,680
दो तीन महीने पहले की बात याद आ गई मुझे एक व्यक्ति से मैं इस

977
01:13:59,680 --> 01:14:03,840
पर चर्चा कर रहा था तो मैंने उसको 20 से 25

978
01:14:03,840 --> 01:14:08,320
मिनट कल्प वेद समझाया कल्प वेद क्या होता है

979
01:14:08,320 --> 01:14:13,040
हम [गला साफ़ करने की आवाज़] लास्ट में पूछता है कल्प क्या होता है भाई [हंसी]

980
01:14:13,040 --> 01:14:16,240
कल्प [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या होता है नहीं उसे यही नहीं पता कल्प क्या होता कह

981
01:14:16,240 --> 01:14:20,320
रहे हो इनसे प्रमाणों पे बात करना ऐसा लगता है जैसे दीवार मतलब

982
01:14:20,320 --> 01:14:24,560
सर मार रहे हो प्रमाण की तो बात रहने ही क्योंकि जब हम प्रमाणात

983
01:14:24,560 --> 01:14:28,560
प्रमाण दिखाते हैं तो ये दूसरा प्रश्न करते हैं। भाई पहले जब आपको प्रमाण

984
01:14:28,560 --> 01:14:32,720
मिल गया तो पहले उस बात को स्वीकार कर लो ना कि ब्रह्मा

985
01:14:32,720 --> 01:14:36,960
विष्णु महेश का अगर हमने दिखा दिया मैं परम ब्रह्म हूं। हो

986
01:14:36,960 --> 01:14:41,040
गया। अब उसको मान लो। मगर ये है ना

987
01:14:41,040 --> 01:14:45,120
प्रमाण दिखाने से जब हम दिखाते हैं तो लोगों को प्रमाण मिल जाता

988
01:14:45,120 --> 01:14:49,360
है कि हां भाई शिवजी ने कहा कि मैं परम ब्रह्म हूं।

989
01:14:49,360 --> 01:14:53,440
और शिव जी के लिए हमने वीडियो बना दिए हैं ऑलरेडी। मैं आपको एक बार पढ़ के

990
01:14:53,440 --> 01:14:57,680
बता देता हूं। कोई नोट करना चाहे तो नोट कर लेना। वैसे हमने प्रॉपर वीडियो

991
01:14:57,680 --> 01:15:01,920
में बताया है ब्रह्मा विष्णु महेश की परम ब्रह्मता और अविनाश

992
01:15:01,920 --> 01:15:06,000
और सर्वव्यापी कहां-कहां पर सिद्ध हो रहा है? मैं एक बार दोबारा बता देता हूं।

993
01:15:06,000 --> 01:15:10,080
सुनो हिरण्य गर्वात्मक आदित्य अर्थात ब्रह्मा जी की

994
01:15:10,080 --> 01:15:14,800
पारबह्मता कहां पर है? ऋग्वेद 1115 एक ऋग्वेद

995
01:15:14,800 --> 01:15:19,200
1642 शतपद ब्राह्मण 105 दो शतपद ब्राह्मण

996
01:15:19,200 --> 01:15:23,200
14 एक दो2 दो छंदोग उपनिषद एक छ सात ब्रह्मसूत्र

997
01:15:23,200 --> 01:15:27,520
एक एक 20 और गायत्री के द्वारा इनहीं

998
01:15:27,520 --> 01:15:31,680
की पूजा होती है। गायत्री कौन सा मंत्र है? सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। देवी

999
01:15:31,680 --> 01:15:36,000
भागवत में लिखा गया है। तो वाल्मीकि रामायण युद्ध खंड आदित्य

1000
01:15:36,000 --> 01:15:40,240
हृदय स्त्रोत है। पूरा गायत्री मंत्र से इनहीं की पूजा हो रही है। भगवान

1001
01:15:40,240 --> 01:15:44,240
विष्णु की पारबह्मता ऋग्वेद एक 22 17 से 23 ऋग्वेद

1002
01:15:44,240 --> 01:15:48,480
एक 156 ऋग्वेद सात से 700 और यजुर्वेद

1003
01:15:48,480 --> 01:15:52,480
515 यजुर्वेद 515 वही है वामन अवतार

1004
01:15:52,480 --> 01:15:57,200
के रूप में जो तीन पक्ष से पूरी सृष्टि को नाप दिया था। ठीक है?

1005
01:15:57,200 --> 01:16:01,360
ब्रह्मा जी द्वारा भगवान नारायण अर्थात विष्णु की वंदना की जाती है। श्रीमद् भागवत

1006
01:16:01,360 --> 01:16:05,360
दो पांच 12 भगवान माया के गुणों से रहित हैं।

1007
01:16:05,360 --> 01:16:09,840
अनंत है। सृष्टि स्थिति तथा प्रलय करने के लिए रजोगुण, सतोगुण एवं तमोगुण

1008
01:16:09,840 --> 01:16:13,840
माया के ये तीन गुण उनकी इच्छा से उनके द्वारा स्वीकार

1009
01:16:13,840 --> 01:16:18,160
किए जाते हैं। उन वो उनके अधीन नहीं है गुणों के।

1010
01:16:18,160 --> 01:16:22,320
ठीक है? श्रीमद् भागवत दो 5 18 वेद नारायण की बात

1011
01:16:22,320 --> 01:16:26,800
बताते हैं। समस्त यज्ञ नारायण की प्रसन्नता के लिए समस्त योग साधना

1012
01:16:26,800 --> 01:16:30,880
तपस्या नारायण के लिए है। समस्त साध्य और साधन नारायण के

1013
01:16:30,880 --> 01:16:34,960
लिए है। ज्ञान के द्वारा भी नारायण ही जाने जाते हैं। श्रीमद् भागवत दो

1014
01:16:34,960 --> 01:16:39,200
पांच 15 ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति

1015
01:16:39,200 --> 01:16:43,120
संहार के कारण विकार रहित शुद्ध अविनाशी ये लो शुद्ध

1016
01:16:43,120 --> 01:16:47,840
अविनाशी परमेश्वर और ये वाला प्रमाण तो हमें रामपाल दास जी के कारण ही मिला।

1017
01:16:47,840 --> 01:16:51,920
हमने पहले विष्णु पुराण पढ़ रखा था। हमने नोट तो किए नहीं थे कि भाई विष्णु पर कौन

1018
01:16:51,920 --> 01:16:55,920
चैलेंज करेगा पर कर दिया। अब उसके बाद हमने रामपाल दास जी का

1019
01:16:55,920 --> 01:17:00,080
एक वीडियो देखा जिसमें वो कह रहे हैं कि वो जो काल है वो

1020
01:17:00,080 --> 01:17:04,320
जो है इनका पिता है ब्रह्मा विष्णु महेश का। ऐसे कह रहे हैं।

1021
01:17:04,320 --> 01:17:08,400
अब जब मैंने उसको उसको देखा तो उन्होंने उसमें एक जगह क्या किया कि जहां

1022
01:17:08,400 --> 01:17:12,560
काल के लिए परम ब्रह्म लिखा था वो कहा कि ये गलती से लिख दिया

1023
01:17:12,560 --> 01:17:16,640
है। परम ब्रह्म शब्द जो है वो गलती से लिख दिया है।

1024
01:17:16,640 --> 01:17:20,640
तो मैंने विष्णु पुराण खोल के देखा तो वही लिखा है। क्या लिखा है? ब्रह्मा विष्णु और

1025
01:17:20,640 --> 01:17:24,720
शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं सम्मार के

1026
01:17:24,720 --> 01:17:25,220
कारण

1027
01:17:25,040 --> 01:17:29,280
विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस

1028
01:17:29,280 --> 01:17:33,280
सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है। विष्णु पुराण दो

1029
01:17:33,280 --> 01:17:37,440
एक से तीन भगवान विष्णु एक होकर भी नाना रूप वाले

1030
01:17:37,440 --> 01:17:41,600
हैं। ठीक है? ये हो गए विष्णु पुराण दो तीन।

1031
01:17:41,600 --> 01:17:45,600
अब भगवान शिव की पारबह्मता सुन लो। ऋग्वेद 2 33

1032
01:17:45,600 --> 01:17:49,840
यजुर्वेद 16 दो 41 ऋग्वेद छ 47 18

1033
01:17:49,840 --> 01:17:53,840
उपनिषद दो पांच 19 श्वेता शत्रोपनिषद तीन मांडक उपनिषद

1034
01:17:53,840 --> 01:17:57,920
सात ऋग्वेद 6 49 10 अथर्ववेद सात 87 एक

1035
01:17:57,920 --> 01:18:02,000
ऋग्वेद 8 72 तीन यजुर्वेद 16 54 यजुर्वेद

1036
01:18:02,000 --> 01:18:06,320
66 तीन ऋग्वेद 565 अथर्ववेद 13

1037
01:18:06,320 --> 01:18:10,720
चार चार ऋग्वेद पांच 5 42 11 ऋग्वेद 7 49

1038
01:18:10,720 --> 01:18:14,880
12 यहां पे महामृत्युंजय मंत्र है 7

1039
01:18:14,880 --> 01:18:19,120
49 12 में श्वेता शत्रोपनिषद एक 10 ऋग्वेद

1040
01:18:19,120 --> 01:18:23,120
एक 114 ऋग्वेद 7:46 शुक्ल यजुर्वेद

1041
01:18:23,120 --> 01:18:27,360
रुद्राष्टाध्याय सूक्त पूरा अथर्ववेद 13

1042
01:18:27,360 --> 01:18:31,520
चार चार कहीं पे ये प्रॉब्लम हो कि महादेव कौन है? स रुद्र

1043
01:18:31,520 --> 01:18:35,840
स महादेव रुद्र ही महादेव है। शिव

1044
01:18:35,840 --> 01:18:40,160
महापुराण शिवलिंग और शिव की प्रतिमा दोनों

1045
01:18:40,160 --> 01:18:44,400
ही पूजन द्वारा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती

1046
01:18:44,400 --> 01:18:48,720
है। मोक्ष मिल गया। भगवान शिव की पूजा से शिवलिंग

1047
01:18:48,720 --> 01:18:53,680
की पूजा से मोक्ष मिल गया। कहां लिखा है? शिव पुराण एक पांच 31

1048
01:18:53,680 --> 01:18:58,240
शिव ही परमात्मा है। एक पांच 12 मैं ही परम ब्रह्म हूं।

1049
01:18:58,240 --> 01:19:03,600
शिव पुराण 10 36 37 ठीक है।

1050
01:19:03,600 --> 01:19:07,600
तो ये सब है। और इसके अलावा

1051
01:19:07,600 --> 01:19:11,680
इसमें देवी का भी है। ब्रह्मा विष्णु महेश का तो कर लिया। देवी जी का भी

1052
01:19:11,680 --> 01:19:16,080
है। परबह्मता और गणेश जी का भी है। ठीक है?

1053
01:19:16,080 --> 01:19:17,920
हां बिल्कुल। अब

1054
01:19:17,920 --> 01:19:21,040
इसके बाद

1055
01:19:21,040 --> 01:19:25,040
हम [गला साफ़ करने की आवाज़] देखते हैं ये घनश्याम तिवारी जी संभता पहली बार

1056
01:19:25,040 --> 01:19:30,160
आए हैं। इनकी बात थोड़ा सा सुन ले। जी बोले घनश्याम तिवारी जी।

1057
01:19:30,160 --> 01:19:36,160
जय श्री राम अपना अन म्यूट कर लीजिए अपने आप को।

1058
01:19:37,840 --> 01:19:41,680
अरे भाई वेदों में प्रमाण दिखाइए।

1059
01:19:41,680 --> 01:19:47,360
कहां है कबीर भगवान? जो बूढ़ा हो भगवान कैसे

1060
01:19:47,360 --> 01:19:51,360
भैया इनसे मेरा निवेदन है एक सवाल पूछा कीजिए सबसे

1061
01:19:51,360 --> 01:19:55,360
पहले अभी बोल नहीं रहे हैं तो हम शिवम जी को ऑन कर देते

1062
01:19:55,360 --> 01:19:59,360
हैं शायद ये आए हैं कबीर जी का पक्ष रखने के

1063
01:19:59,360 --> 01:20:03,680
लिए इनको अनम्यूट कर दीजिए जी शिवम जी बोल जय श्री राम

1064
01:20:03,680 --> 01:20:08,000
जय श्री राम भैया जी भैया

1065
01:20:08,000 --> 01:20:12,480
मैं कबीरपंथी नहीं हूं मैं भी एक सनातनी ही हूं

1066
01:20:12,480 --> 01:20:16,560
कल [हंसी] कल या परसों में आपकी एक रिकॉर्डेड स्क्रीन दिख रहा था

1067
01:20:16,560 --> 01:20:20,720
जिसमें मैंने वो रामचरित के बारे में सवाल किया था उनसे कबीर

1068
01:20:20,720 --> 01:20:24,720
कबीर ऋषियों से तो आज मैं एक शायद 10 मिनट या

1069
01:20:24,720 --> 01:20:28,800
15 मिनट का एक वीडियो एक शायद महिला थी जो रामपाल की फॉलोअ थी

1070
01:20:28,800 --> 01:20:32,800
तो मैं उनको सुन रहा था तो जो आपने कहा था कि हनुमान जी

1071
01:20:32,800 --> 01:20:33,300
के

1072
01:20:32,960 --> 01:20:37,440
बारे में हनुमान चालीसा के बारे में सब बोला था तो और आपने एक सवाल और रामपाल

1073
01:20:37,440 --> 01:20:41,840
को किया था कि वो अपने आप को कुत्ता बोल रहे हैं दो कौड़ी का बोल रहे हैं

1074
01:20:41,840 --> 01:20:45,840
हम तो उन्होंने तो एक महिला थी उनकी फॉलोअ वो कह रही

1075
01:20:45,840 --> 01:20:49,840
थी तुलसीदास ने भी तो रामचरितमानस में खुद को ठगी कहा

1076
01:20:49,840 --> 01:20:54,640
है कि जो अरे भैया नहीं देखिए

1077
01:20:54,640 --> 01:20:56,800
अगर

1078
01:20:56,800 --> 01:21:00,880
रामपाल दास जी ने स्वयं को कुत्ता बोला या स्वयं

1079
01:21:00,880 --> 01:21:05,120
को दो कौड़ी का बोला या स्वयं को तुच्छ बोला

1080
01:21:05,120 --> 01:21:09,120
दो टके का बोला तो हम यह समझ सकते हैं कि वो

1081
01:21:09,120 --> 01:21:13,120
उन्होंने एक उदारता है उनकी कि अपनी जो शरणाग गति है वो दिखा

1082
01:21:13,120 --> 01:21:17,120
रहे हैं जिसको वो मानते हैं उसके प्रति इसी प्रकार से ब्रह्मा

1083
01:21:17,120 --> 01:21:21,280
विष्णु महेश जब किसी की पूजा कर रहे हैं भक्ति भाव में आकर के अपनी उदारता

1084
01:21:21,280 --> 01:21:25,280
के कारण अपनी शरणागति दिखा रहे हैं माता के प्रति क्योंकि माता का

1085
01:21:25,280 --> 01:21:29,360
वहां पर भजन चल रहा है। इसी प्रकार से तुलसीदास जी राम जी

1086
01:21:29,360 --> 01:21:33,680
के प्रति अपनी उदारता दिखा रहे हैं कि मैं शरणागत हो गया। मैं बहुत बुरा हूं। कबीर

1087
01:21:33,680 --> 01:21:38,080
दास जी भी अपनी उदारता दिखा रहे हैं। मैं कुत्ता राम का मुतिया मेरी

1088
01:21:38,080 --> 01:21:42,160
यह सब लिखा हुआ है। मगर अगर वह अजर है

1089
01:21:42,160 --> 01:21:46,320
तो वह बूढ़े कैसे हो रहे हैं? यह सोचने वाली बात

1090
01:21:46,320 --> 01:21:48,080
है। और

1091
01:21:48,080 --> 01:21:52,240
और एक बात और बता दें ऐसा कोई सनातन सिद्धांत नहीं है कि

1092
01:21:52,240 --> 01:21:56,240
ईश्वर आएगा तो वो बूढ़ा नहीं होगा। जबकि सनातन सिद्धांत ये है

1093
01:21:56,240 --> 01:22:00,320
राम और कृष्ण राम और कृष्ण जब आते हैं कभी

1094
01:22:00,320 --> 01:22:04,960
बूढ़े नहीं होते। सदा 16 वर्ष की आयु के समान ही बने रहते हैं।

1095
01:22:04,960 --> 01:22:08,960
आज भी हमारे मंदिरों में सब में देख लीजिए जो राम और कृष्ण की मूर्ति

1096
01:22:08,960 --> 01:22:13,200
होती है उनके कभी मूछे और वो दाढ़ी नहीं होती। इसीलिए

1097
01:22:13,200 --> 01:22:17,360
अभी आदि पुरुष नाम की जो फिल्म आई थी जिसमें राम जी के मूछे

1098
01:22:17,360 --> 01:22:21,520
बना दी गई थी उसका विरोध हुआ था। विरोध इसीलिए हुआ

1099
01:22:21,520 --> 01:22:25,840
था कि जो राम और कृष्ण भगवान के पूर्ण अवतार इनके

1100
01:22:25,840 --> 01:22:30,560
इन पर आयु का प्रभाव नहीं पड़ता और ये आजीवन ऐसे ही रहे थे।

1101
01:22:30,560 --> 01:22:34,960
टिल अपनी लीला को समाप्त करने तक यह ऐसे ही रहे थे। मगर

1102
01:22:34,960 --> 01:22:39,040
कबीर तो बूढ़ा हो रहा है। फिर अजर कैसा? जी

1103
01:22:39,040 --> 01:22:43,280
भैया एक और सवाल था। तो जी आपने एक हनुमान चालीसा

1104
01:22:43,280 --> 01:22:47,440
का दोहा उसे हनुमान चालीसा का जो लाइन सुनाई थी कि छूट बंदी महा सुख

1105
01:22:47,440 --> 01:22:51,520
दो बार पाठ कर कोई छूट बंदी महा सुई। हां तो उस

1106
01:22:51,520 --> 01:22:55,520
लाइन को लेकर उस महिला ने सवाल किया था कि अगर ऐसा है तो हनुमान जी ने

1107
01:22:55,520 --> 01:23:00,160
तो हनुमान चालीसा लिखी है तो उसने हनुमान बाू का प्रमाण दिया

1108
01:23:00,160 --> 01:23:03,440
कि उसमें तो लिखा है कि तुलसीदास को इतना सब करने के बाद भी

1109
01:23:03,440 --> 01:23:07,440
मरते वक्त मरने से पहले उनको फोड़ा हो गया। फोड़ा पुश किया गया था।

1110
01:23:07,440 --> 01:23:11,600
तो उसने हनुमान बाबू को लिखा अगर वो जिंदगी भर राम नाम

1111
01:23:11,600 --> 01:23:16,880
की भक्ति करते रहे तो उन्हें ऐसा क्यों हुआ? उसने ऐसा कहा

1112
01:23:16,880 --> 01:23:20,880
अभी मैं ये पूछ रहा हूं कि जिंदगी भर अभी वो जो है

1113
01:23:20,880 --> 01:23:25,360
कबीर की भक्ति करते रहे हैं। अभी वो जेल में क्यों है?

1114
01:23:25,360 --> 01:23:29,520
सर अभी वो जेल में क्यों है? जी जी देखिए दो प्रकार

1115
01:23:29,520 --> 01:23:33,600
के सुख हैं। एक है भौतिक सुख जेल में

1116
01:23:33,600 --> 01:23:36,160
सुख

1117
01:23:36,160 --> 01:23:41,120
क्या कह रहे हैं? जेल में होता जेल में होता कौन है? इसलिए वो जेल में है।

1118
01:23:41,120 --> 01:23:45,200
हम जेल में सुख है ना अगर जेल में सुख है तो ये बाकी

1119
01:23:45,200 --> 01:23:50,720
सारे बाहर इनके भक्तगण क्या कर रहे हैं? ये भी टिकट कटा ले अपना जेलधाम का।

1120
01:23:50,720 --> 01:23:54,720
भाई जब जेलधाम में वो सुख है उनको सुख मिल रहा है वहां पर तो ये

1121
01:23:54,720 --> 01:23:58,720
अपना टिकट कटा ले वही चले जाए। अरे एक ही जेल में ना जाए अलग-अलग जेल में जाए

1122
01:23:58,720 --> 01:24:02,800
क्योंकि जेल में तो सुख है मगर अभी कह दो जेल चले जाओ सुख

1123
01:24:02,800 --> 01:24:07,520
है तो तो कहेंगे

1124
01:24:07,520 --> 01:24:11,520
आपसे एक चीज पूछना चाहता था मैं जी आपसे एक

1125
01:24:11,520 --> 01:24:16,240
चीज पूछना चाहता था कि एक बार एक मसीही ने मुझे एक रिबर्टल दिया था

1126
01:24:16,240 --> 01:24:20,320
उसका जवाब मेरे पास नहीं था मतलब मुझे वो

1127
01:24:20,320 --> 01:24:24,720
चीज पता थी पर मेरे को वो क्वेश्चन के बाद बहुत हिट किया वो चीज

1128
01:24:24,720 --> 01:24:28,720
आपके पास हो तो आप दीजिए जरा शिवांगी फोटो

1129
01:24:28,720 --> 01:24:33,840
बंदा बोल रहा है। उसने मुझे इनकी फोटो करो।

1130
01:24:33,840 --> 01:24:37,920
नहीं ये तो सात्विक जी है ना आप सात्विक है ना आप? हां

1131
01:24:37,920 --> 01:24:42,320
हां मैं बोल रहा हूं। हां सात्विक जी बताइए। तो उन्होंने

1132
01:24:42,320 --> 01:24:46,400
मुझसे एक चीज बोली कि तुम्हारे धर्म के

1133
01:24:46,400 --> 01:24:50,480
अंदर जो आचार्य है ना वही आज

1134
01:24:50,480 --> 01:24:55,040
आपस में एक मत नहीं है। वास्तविकता ये है

1135
01:24:55,040 --> 01:24:59,200
इसलिए तुम्हारा धर्म रसातल में जाता जा रहा है। वही आपस

1136
01:24:59,200 --> 01:25:03,200
में एक दूसरे से भिड़ते रहते हैं। तो वो बाहर निकल ही नहीं पाते। हर हर मठ

1137
01:25:03,200 --> 01:25:08,000
पे हर उस पर विवाद चल रहा है लगभग लगभग। हम

1138
01:25:08,000 --> 01:25:12,640
इस कारण से तुम्हारा धर्म रसातल में जाता जा रहा है। और उन्होंने

1139
01:25:12,640 --> 01:25:16,880
बहुत मतलब वो बात की कि अब जो नॉर्मल

1140
01:25:16,880 --> 01:25:20,880
व्यक्ति होता है ना उसको ये सब चीजें समझ में नहीं आती। अब कभी शास्त्र पढ़े नहीं उन

1141
01:25:20,880 --> 01:25:22,800
लोगों ने। उनको ये सब पता नहीं है। कल्प

1142
01:25:22,800 --> 01:25:26,880
वेद मनतर वेद क्या होता है कि भगवान अलग-अलग लीलाएं करते हैं। तो

1143
01:25:26,880 --> 01:25:31,440
वो लोग सीधा क्रिश्चियनिटी की तरफ जाते हैं। उनको और कोई वो नहीं दिखता।

1144
01:25:31,440 --> 01:25:36,160
समझ लीजिए इसको मैं पूर्ण अर्थ के साथ समझाना चाहूंगा।

1145
01:25:36,160 --> 01:25:40,160
कि अगर संसार में कोई भी एक व्यक्ति

1146
01:25:40,160 --> 01:25:44,240
ऐसा है जो अपनी माता को माता की दृष्टि से

1147
01:25:44,240 --> 01:25:48,640
देख रहा है पत्नी की दृष्टि से नहीं देख रहा है तो इसका

1148
01:25:48,640 --> 01:25:52,400
कारण है सनातन धर्म

1149
01:25:52,400 --> 01:25:56,720
है ना तो हम ये नहीं कह सकते जब तक एक भी एक भी घर परिवार

1150
01:25:56,720 --> 01:26:00,800
ऐसा है इसका मतलब है कि आचार्य अपना काम कर रहे हैं

1151
01:26:00,800 --> 01:26:05,120
वो बात और है कि जब जैसेजैसे कलयुग का प्रभाव है

1152
01:26:05,120 --> 01:26:09,120
लोग उनकी बात नहीं मान रहे तो वो रसातल में समाज का स्तर गिर रहा है।

1153
01:26:09,120 --> 01:26:13,120
वह तब भी लड़ रहे हैं। मगर यह दोष जनता का है जो अपने गुरुओं

1154
01:26:13,120 --> 01:26:17,680
के पास नहीं जा रही है। अपने आचार्यों के पास नहीं जा रही है। आचार्य को

1155
01:26:17,680 --> 01:26:22,000
स्वीकार करने से पहले आचार्य के रूप में जनता ये नहीं देखती

1156
01:26:22,000 --> 01:26:26,000
है किस परंपरा से आचार्य हुए। वह सिर्फ टीवी पर

1157
01:26:26,000 --> 01:26:30,480
उन्हें सुनती है। जनता यह नहीं देखती है कि हमारे अथर्ववेद

1158
01:26:30,480 --> 01:26:34,480
में 11 पांच 16 में लिखा है कि ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। जनता

1159
01:26:34,480 --> 01:26:38,080
यह नहीं देखती है कि भगवत गीता में लिखा है कि जो परमेश्वर का सबसे

1160
01:26:38,080 --> 01:26:43,120
निकटतम जो स्थिति होती है उस निकटतम स्थिति को कहते हैं सन्यास।

1161
01:26:43,120 --> 01:26:47,280
तो अंतिम निर्णायक जो होता है वो सन्यासत्व होना चाहिए। उसके

1162
01:26:47,280 --> 01:26:51,280
पास। जनता यह नहीं देखती है कि मत्स्य पुराण के 145 वे अध्याय के

1163
01:26:51,280 --> 01:26:55,760
52 वे श्लोक में लिखा हुआ है कि समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य

1164
01:26:55,760 --> 01:26:59,920
की शिक्षा ही साधु संवत धर्म है। जनता ये

1165
01:26:59,920 --> 01:27:04,240
नहीं देखती है कि अह संशय को दूर

1166
01:27:04,240 --> 01:27:08,320
कर देने वाला ही आपका गुरु हो सकता है। तो जब इन पैराटर्स पर

1167
01:27:08,320 --> 01:27:12,480
आप खरा उतारेंगे तब आप बताइएगा कितने आचार्य

1168
01:27:12,480 --> 01:27:16,640
आपस में लड़ेंगे। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल यही मैंने उससे बोला

1169
01:27:16,640 --> 01:27:20,720
था आपने जब तक आप जब तक शास्त्र सम्मत आचार्य

1170
01:27:20,720 --> 01:27:24,800
नहीं चुनेंगे तो आचार्य तो खुद को वो भी कह रहा है आचार्य प्रशांत भी स्वयं

1171
01:27:24,800 --> 01:27:28,800
को आचार्य कह रहा है अभी तक वो जो करते थे एक मैं

1172
01:27:28,800 --> 01:27:33,040
अपनी बात रख दूं कभी कबीरा दीवाना था

1173
01:27:33,040 --> 01:27:37,360
अब वो राम कथा मर्मज्ञ हो गए वो भी कल को आचार्य लिखेंगे

1174
01:27:37,360 --> 01:27:41,760
अब ऐसे जो स्वषित आचार्य हैं इनके

1175
01:27:41,760 --> 01:27:45,920
कारण अगर आपस में इनकी नहीं बनती है या इनका धर्म इनका धर्म

1176
01:27:45,920 --> 01:27:50,400
अलग-अलग है तो इसमें क्या प्रामाणिक आचार्यों का दोष है? नहीं है।

1177
01:27:50,400 --> 01:27:53,520
आप देखिए जितने भी शास्त्र सम्मत आचार्य हैं

1178
01:27:53,520 --> 01:27:57,760
जितने भी परंपरा प्राप्त आचार्य हैं वो भले ही किसी भी संप्रदाय के हो मगर

1179
01:27:57,760 --> 01:28:01,840
शंकराचार्य के प्रति उनका एक सम्मान का दृष्टिकोण बना

1180
01:28:01,840 --> 01:28:05,920
हुआ है। जैसे प्रेमानंद जी को देख लीजिए, अनिरुद्धाचार्य को देख लीजिए। आप जो

1181
01:28:05,920 --> 01:28:10,000
है बागेश्वर वालों को देख लीजिए। हालांकि बागेश्वर वाले अनुरुद्धाचार्य जी

1182
01:28:10,000 --> 01:28:14,080
तो उस लेवल में नहीं है। वह कथा क्या कहते

1183
01:28:14,080 --> 01:28:18,480
हैं? कथा वक्ता है वह। मगर फिर भी अनेकानेक अलग-अलग

1184
01:28:18,480 --> 01:28:22,800
संप्रदाय के जो आचार्य हैं सबका जो एक सम्मान की दृष्टि है

1185
01:28:22,800 --> 01:28:26,880
शंकर परंपरा के सार्वभौमत्व को प्राप्त है। उनका

1186
01:28:26,880 --> 01:28:30,880
सार्वभौमत्व उन्होंने स्वीकार किया हुआ है। शंकराचार्य

1187
01:28:30,880 --> 01:28:36,880
का

1188
01:28:37,520 --> 01:28:41,680
हां हां बिल्कुल मैं ये चीज मानता हूं कि आप जो कह रहे हैं वही मैंने उसे बोला था

1189
01:28:41,680 --> 01:28:45,680
लेकिन एक मलेच ये सब नहीं समझता है वो तो कन्वर्ट करेगा

1190
01:28:45,680 --> 01:28:49,840
कि लोन लोगों को समझा है हमारा कार्य है एक

1191
01:28:49,840 --> 01:28:53,840
मलेश ये सब नहीं समझता है कि प्रमाणिक आचार्य हमारा कार्य है निरत्तर

1192
01:28:53,840 --> 01:28:57,200
या

1193
01:28:57,200 --> 01:29:01,360
निराधार दिखाना बस अब वो व्यक्ति सुधारेगा

1194
01:29:01,360 --> 01:29:05,440
कि नहीं ये नहीं पता काल के समान यह भूत

1195
01:29:05,440 --> 01:29:09,440
क्या मेरे काबू के हैं? अब देखिए यह

1196
01:29:09,440 --> 01:29:15,440
कौन कह रहा है?

1197
01:29:17,280 --> 01:29:23,280
वो जो महिला का वीडियो है जो

1198
01:29:23,680 --> 01:29:29,680
उसी वीडियो में वह कह रहा है बाू की पीड़ा और

1199
01:29:31,360 --> 01:29:34,480
बाहू की पीड़ा

1200
01:29:34,480 --> 01:29:38,640
रूप नीच सुबाहु यह हम लोग दोबारा देख लेंगे एक बार इसको

1201
01:29:38,640 --> 01:29:43,680
मैंने अभी रीड नहीं किया है हम लोग दोबारा में देखेंगे

1202
01:29:43,680 --> 01:29:49,680
कुल मिलाकर के बात यह है कि

1203
01:29:49,920 --> 01:29:53,920
ये देखिए हां ये याद आ गया मुझे वो जो महिला थी उसने क्या वहां पर

1204
01:29:53,920 --> 01:29:58,000
वो किया अब देखिए मैं एक बात कहता हूं ना जिसको अपनी बात को रखने के लिए

1205
01:29:58,000 --> 01:30:02,400
अपनी बात को सिद्ध करने के लिए झूठ का आलंबन

1206
01:30:02,400 --> 01:30:06,480
लेना पड़े, चोरी का आलंबन लेना पड़े। इसका अर्थ है कि उसके जो

1207
01:30:06,480 --> 01:30:10,640
सिद्धांत है उनमें कमी है। तभी तो उसको झूठ का आलंबन लेना पड़ रहा है। उसने क्या किया

1208
01:30:10,640 --> 01:30:14,640
महिला ने कि हनुमान बाू का वहां तक दिखाया जहां तक उसके

1209
01:30:14,640 --> 01:30:20,000
पक्ष में था। उसके बाद उस समस्या का निराकरण भी था। निराकरण क्या है?

1210
01:30:20,000 --> 01:30:24,400
आगे देखिए जहां पर ये बात लिखी हुई है ना कि उनके मर्

1211
01:30:24,400 --> 01:30:28,400
अंतिम समय में फोड़े हो गए थे। उसके बाद उन्होंने लिखा

1212
01:30:28,400 --> 01:30:32,880
है रामचंद्र जी के पुनीत हाथों से मेरा सुधरा सुधार

1213
01:30:32,880 --> 01:30:36,960
करवाया। यह तुलसी जी ने उसी में लिखा है जिसमें वो

1214
01:30:36,960 --> 01:30:40,960
यह कह रहे हैं कि मेरे उनके फोड़े हो गए थे अंतिम समय में जिस पर वो आक्षेप

1215
01:30:40,960 --> 01:30:45,200
लगाया। उसी में आगे लिखा हुआ है कि भाई

1216
01:30:45,200 --> 01:30:49,360
रामचंद्र जी के उन्हीं दांतों से मेरा सुधार करवाया। किसने?

1217
01:30:49,360 --> 01:30:53,440
बजरंगबली ने। बजरंगबली ने। आप सुन रहे हैं ना शिवम

1218
01:30:53,440 --> 01:30:57,600
जी? जी आखिर उसी का फल आज अच्छी तरह पा

1219
01:30:57,600 --> 01:31:02,000
रहा हूं। हो गया समाधान समस्या का। जी जी

1220
01:31:02,000 --> 01:31:04,960
है ना? एक्चुअली बात ये ऐसा है ना कि ये लोग

1221
01:31:04,960 --> 01:31:09,040
अगर सामान्य व्यक्ति हो जैसे मतलब जो अभी ये लोग केवल उतना ही दिखाते

1222
01:31:09,040 --> 01:31:13,120
हैं। ये लोग केवल उतना ही दिखाते हैं जितना इनको

1223
01:31:13,120 --> 01:31:17,120
छुपा लेते हैं। वो दिखाता हूं। जरा वो दिखा दीजिए। इनको

1224
01:31:17,120 --> 01:31:21,200
उंगलियों के बीच से आना दिखाई दे रहा है। वो दिखा दीजिए।

1225
01:31:21,200 --> 01:31:25,360
जो डिक्शनरी है ना ब्रज शब्द का अर्थ दिखाया है जो केवल

1226
01:31:25,360 --> 01:31:30,400
पिक्चर दिखा दीजिए आप स्क्रीनशॉट

1227
01:31:30,400 --> 01:31:34,880
वो स्क्रीनशॉट दिखा दीजिए

1228
01:31:34,880 --> 01:31:39,040
ये तो भाई लोग आके भाग ही गए बिल्कुल मतलब ऐसा सिर पर पैर

1229
01:31:39,040 --> 01:31:45,040
रख के कौन भागता है

1230
01:31:47,300 --> 01:31:51,520
[गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] जय श्री राम जी जय श्री राम। जय

1231
01:31:51,520 --> 01:31:55,760
श्री राम। अब यहां देखिए ध्यान से देखिए।

1232
01:31:55,760 --> 01:31:59,760
जहां पर यह ग्रीन कलर का निशान है। ये ये जो स्क्रीनशॉट

1233
01:31:59,760 --> 01:32:03,920
है ना ये किसका है? रामपाल दास जी के उस वीडियो

1234
01:32:03,920 --> 01:32:08,080
का स्क्रीनशॉट है ये जिसमें वो यह दिखाते हैं कि ब्रज

1235
01:32:08,080 --> 01:32:12,400
का अर्थ होता है जाना। और ये नीचे देखिए उनकी उंगलियों

1236
01:32:12,400 --> 01:32:16,960
के बीच में ध्यान से। इसमें आना दिखाई दे रहा है।

1237
01:32:16,960 --> 01:32:21,280
मगर यहां से जब कैमरा वो नीचे ले जाते हैं वो तिरछा चला जाता है।

1238
01:32:21,280 --> 01:32:25,290
वो तत्वदर्शी संत नहीं है। तिरछादर्शी संत है।

1239
01:32:25,290 --> 01:32:28,320
[हंसी]

1240
01:32:28,320 --> 01:32:32,500
ये तो चोर की दाढ़ी में तिनका वाली बात हो गई ये तो। [गला

1241
01:32:32,500 --> 01:32:37,120
साफ़ करने की आवाज़] आपने तिनका तिनका ढूंढ दिया। असल में भैया भैया एक मिनट ये लोग

1242
01:32:37,120 --> 01:32:41,360
मैं एक मिनट मैं मैं एक मिनट मैं शिवम जी आपको लूंगा। ने एक मिनट

1243
01:32:41,360 --> 01:32:46,240
मैं मोहित जी आपसे बात हुई थी क्या अभी हमारी

1244
01:32:46,240 --> 01:32:50,560
राम राम जी नहीं जी अभी नहीं हुई बात सर जय श्री राम

1245
01:32:50,560 --> 01:32:54,800
जी सर बताइए मेरा एक फ्रेंड है

1246
01:32:54,800 --> 01:32:59,680
के द्वारा जो पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो

1247
01:32:59,680 --> 01:33:02,640
अजर है क्या

1248
01:33:02,640 --> 01:33:06,720
सर मैं एक क्वेश्चन है सर मैं मैं पूछ

1249
01:33:06,720 --> 01:33:11,040
रहा हूं आपका क्वेश्चन ले लेंगे मैं पूछ रहा हूं वो अजर है क्या

1250
01:33:11,040 --> 01:33:15,360
सुनो मेरे को इतना ज्ञान नहीं है अभी किसी भी चीज का आपको

1251
01:33:15,360 --> 01:33:20,240
आपको ज्ञान नहीं है तो आपको आना नहीं चाहिए आप लोग यहां आ के हंसी उड़वाते हैं

1252
01:33:20,240 --> 01:33:24,320
मेरा एक छोटा सा क्वेश्चन है सर छोटा सा आपको जब ज्ञान नहीं एक मिनट आपको

1253
01:33:24,320 --> 01:33:28,320
जब ज्ञान नहीं है आप किस घर में जन्मे हैं ये बताइए हिंदू है

1254
01:33:28,320 --> 01:33:32,880
सर हम हिंदू हैं अच्छा आपने दीक्षा ली है रामपाल

1255
01:33:32,880 --> 01:33:37,120
दास जी से या पहले से आपके माता-पिता ने भी दीक्षा ले ली थी

1256
01:33:37,120 --> 01:33:41,360
नहीं जी नहीं जी नहीं हम किसी से दीक्षा नहीं लिए। हम सिर्फ हिंदू

1257
01:33:41,360 --> 01:33:43,360
है सर अपने देवी देवता आप

1258
01:33:43,360 --> 01:33:47,440
रामपाल दास जी को मानते हैं कि नहीं मानते हैं? नहीं सर

1259
01:33:47,440 --> 01:33:51,840
नहीं हम नहीं मानते सर उसको नहीं मानते

1260
01:33:51,840 --> 01:33:56,320
नहीं जी नहीं वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान नहीं है

1261
01:33:56,320 --> 01:34:00,480
नहीं है सर हम उनको मानते ही नहीं सर हम अपने हिंदू देवी देवता की पूजा

1262
01:34:00,480 --> 01:34:04,480
करते हैं प्रभु श्री राम को मानते हैं हनुमान जी को पूजा करते हैं सर

1263
01:34:04,480 --> 01:34:07,040
बस

1264
01:34:07,040 --> 01:34:11,280
अच्छा अच्छा तो क्वेश्चन क्या है आपका जल्दी से बता दीजिए

1265
01:34:11,280 --> 01:34:15,520
मेरा एक छोटा सा क्वेश्चन है सर कि उसमें दुविधा

1266
01:34:15,520 --> 01:34:19,520
है मेरी मेरे एक फ्रेंड ने बोला था कि हमारे जो हिंदू धर्म

1267
01:34:19,520 --> 01:34:23,680
हिंदू ग्रंथ है उसमें लिखा है कि बलि प्रथा बलि प्रथा जो है वो

1268
01:34:23,680 --> 01:34:28,000
पहले से चली आ रही है। हम लोग इस पर बात करेंगे। बलि

1269
01:34:28,000 --> 01:34:32,000
प्रथा का जो पर्यवसान है वो मांसाहार के

1270
01:34:32,000 --> 01:34:36,560
प्रोत्साहन में नहीं है। संकुचन में है। यह एक

1271
01:34:36,560 --> 01:34:40,720
संक्षिप्त में सूत्रात्मक शैली में समझ लीजिए। बलि का जहां

1272
01:34:40,720 --> 01:34:44,800
जहां पर उल्लेख है, वह मांसाहार को बढ़ाने के लिए नहीं

1273
01:34:44,800 --> 01:34:48,960
है। मांसाहार को कम करने के लिए है। अब इस पर हम

1274
01:34:48,960 --> 01:34:53,040
विस्तृत रूप से हम कभी और बात करेंगे। अभी बात चल रही है रामपाल एंड

1275
01:34:53,040 --> 01:34:59,040
कंपनी की। अच्छा तो मैं एक बात पूछूंगा

1276
01:34:59,680 --> 01:35:03,680
जी छोटी छोटी सी बिटिया आई है हमारे बीच में। ये कुछ बताना चाहती है

1277
01:35:03,680 --> 01:35:08,560
अपने बारे में। जी बताइए छोटी सी बिटिया जी।

1278
01:35:08,560 --> 01:35:13,120
जय श्री राम भैया। जय श्री राम।

1279
01:35:13,120 --> 01:35:17,120
आप तो जानते ही हैं पर आज जैसे दो

1280
01:35:17,120 --> 01:35:21,280
मेंबर आए थे जिन्होंने बताया कि उनकी फैमिली में फॉलो

1281
01:35:21,280 --> 01:35:25,520
करते हैं। तो आप तो जानते ही हैं पर मैं बताना चाहती हूं कि मेरी

1282
01:35:25,520 --> 01:35:29,520
तो पूरी फैमिली और मैं भी मतलब मुझे भी

1283
01:35:29,520 --> 01:35:33,680
फॉलो करवाने लग गए थे और मैंने इसी साल

1284
01:35:33,680 --> 01:35:38,640
रामपाल को मानना छोड़ा और ये बात मेरी फैमिली अभी जानती भी नहीं है।

1285
01:35:38,640 --> 01:35:42,640
तो तब आपने दो क्वेश्चन जी आपने तब दो क्वेश्चन पूछे थे

1286
01:35:42,640 --> 01:35:46,800
उनसे कि ये कैसे कन्वर्ट करते हैं? कैसे ब्रेन वाश करते

1287
01:35:46,800 --> 01:35:50,960
हैं? और दूसरा ये कि इनका बाद में बिहेव कैसा

1288
01:35:50,960 --> 01:35:55,120
हो जाता है बाकी फैमिली मेंबर्स के साथ जो कि उनको फॉलो

1289
01:35:55,120 --> 01:35:59,200
नहीं करते हैं। तो उसका एक एक आंसर तो ये

1290
01:35:59,200 --> 01:36:03,280
है सीधा सा कि अभी तक मैं अपने मम्मी पापा को बता भी नहीं पाई हूं कि मैं

1291
01:36:03,280 --> 01:36:07,920
अब उसको फॉलो नहीं करती हूं। तो आप सोच लीजिए कितना

1292
01:36:07,920 --> 01:36:11,920
डर होता है नहीं बताने का। कहीं फतवा जारी ना हो जाए। इस लड़की

1293
01:36:11,920 --> 01:36:17,920
को ढूंढो किसने मारना बंद [हंसी] कर दिया है भाई।

1294
01:36:18,560 --> 01:36:20,880
जी

1295
01:36:20,880 --> 01:36:25,200
नहीं है आप देखिए कोई जान से मारने का जैसे छोटी बहना

1296
01:36:25,200 --> 01:36:30,160
छोटी बहना ये हिम्मत वाली दूसरे उसमें होता है ऐसा तो नहीं है

1297
01:36:30,160 --> 01:36:34,400
ये भक्त प्रह्लाद पैदा हो गया लगता है हिरण्यकश्यप के घर में [हंसी] हमको

1298
01:36:34,400 --> 01:36:38,640
ऐसा ही करना है संदीप जी ये बहुत सारे बहुत

1299
01:36:38,640 --> 01:36:42,640
सारे प्रह्लाद जन्म लेने जन्म देने है घर घर में

1300
01:36:42,640 --> 01:36:46,960
प्रह्लाद होंगे जी जी जी बिलकुल सर बिलकुल सही

1301
01:36:46,960 --> 01:36:51,120
जी हां बोलो छोटी बहना

1302
01:36:51,120 --> 01:36:55,120
अ इसमें सबसे पहली बात तो ये है कि मेरी मम्मा का

1303
01:36:55,120 --> 01:36:59,520
मैं कभी यकीन नहीं कर सकती थी कि उन्होंने कैसे मतलब उनका

1304
01:36:59,520 --> 01:37:03,760
इतना वो ब्रेन वाश हो गई क्योंकि मैंने अपनी

1305
01:37:03,760 --> 01:37:07,920
लाइफ में जब तक रामपाल को फॉलो किया तब तक रामपाल का विरोधी मेरी मम्मा से बड़ा

1306
01:37:07,920 --> 01:37:12,000
कोई नहीं देखा था और वो कन्वर्ट हो गई ये मेरे लिए आज तक इतनी

1307
01:37:12,000 --> 01:37:16,160
बड़ी रीडल है ना कि कैसे वो वो

1308
01:37:16,160 --> 01:37:20,720
कन्वर्ट हो गई ये मुझे भी नहीं समझ आया और इसी वजह से फिर मुझे भी

1309
01:37:20,720 --> 01:37:24,800
उसको फॉलो करना पड़ा था और बाद में क्योंकि मैं ऐसे लोगों से सराउंड

1310
01:37:24,800 --> 01:37:29,040
हो गई थी हर तरफ से या फिर मेरी पूरी फैमिली उसी घुमाने में लग गई थी घर से मंदिर

1311
01:37:29,040 --> 01:37:33,040
हटा दिया था तो फिर मतलब मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं बचा था

1312
01:37:33,040 --> 01:37:33,600
और फिर

1313
01:37:33,600 --> 01:37:37,600
क्योंकि एक मैं आपको बात बताती हूं कि जब हमने रिसेंटली

1314
01:37:37,600 --> 01:37:41,600
जब रामपाल का नाम लिया था तो हम ऐसे बाहर जाते थे मैं अपने भाई के साथ

1315
01:37:41,600 --> 01:37:45,680
रहती थी तो जैसे मंदिर आता है तो उसके सामने झुकने की अपनी आदत होती है

1316
01:37:45,680 --> 01:37:49,840
तो मेरा भाई शिकायत कर देता था कि यह मंदिर आया था तो ये उसके आगे झुक

1317
01:37:49,840 --> 01:37:53,920
रही थी तो मुझे डांट पड़ती थी बहुत ज्यादा तो इतना ऐसा हो जाता

1318
01:37:53,920 --> 01:37:58,080
है फिर बाद में आपको भी क्योंकि आपको आश्रम लेके जाते हैं आप आश्रम में जाते हो वहां पे आपका

1319
01:37:58,080 --> 01:38:02,080
सब ऐसे ऐसीऐसी बातें डालते हैं क्योंकि मैं ना पहले

1320
01:38:02,080 --> 01:38:06,400
हनुमान जी की फॉलोअ थी बहुत ज्यादा मतलब मैं उनको मानती थी तो उनके

1321
01:38:06,400 --> 01:38:10,400
लिए फिर ऐसी बातें बोलते हैं नफरत

1322
01:38:10,400 --> 01:38:14,720
एक तरह से इतनी भर देते हैं ना मतलब जब मुझे समझ आया कि हां रामपाल गलत

1323
01:38:14,720 --> 01:38:18,800
है। उसके बाद भी मुझे वापस अपने

1324
01:38:18,800 --> 01:38:22,960
भगवान को मानने में इतना टाइम लगा था क्योंकि मैं ये एक्सेप्ट नहीं कर पा रही

1325
01:38:22,960 --> 01:38:27,120
थी। मतलब इतना नफरत भरी होती है ना कि आप वापस अगर आप रामपाल

1326
01:38:27,120 --> 01:38:31,120
को भी मानना छोड़ दे रहे हो ना तो उसके बाद आपको बहुत मुश्किल होता है वापस अपने

1327
01:38:31,120 --> 01:38:37,120
भगवान को मानना। इतनी नफरत हो जाती है। एक

1328
01:38:38,160 --> 01:38:43,760
रामपाल दास जी पहले हनुमान के भक्त थे

1329
01:38:43,760 --> 01:38:47,840
तब तक बाहर थे हां [गला साफ़ करने की आवाज़] और उसके बाद वो किसी और

1330
01:38:47,840 --> 01:38:52,240
के भक्त बने और आज कहां है वो हम सब देख रहे हैं

1331
01:38:52,240 --> 01:38:56,240
वो आज गिड़गिड़ा रहे हैं कि मेरे ऊपर जो है झूठा वो हुआ है बाहर आना

1332
01:38:56,240 --> 01:39:00,320
चाहते हैं मगर नहीं आ पा रहे उन्होंने हनुमान चालीसा 100 बार

1333
01:39:00,320 --> 01:39:04,400
नहीं पढ़ी ना जो आपने बताया था जो शब्द दो बार पाठ कर

1334
01:39:04,400 --> 01:39:09,040
कोई पढ़ते हो सकता है अब आने के चांस बन रहे हो शायद उन्होंने

1335
01:39:09,040 --> 01:39:13,840
छात्र को सात समझ लिया होगा सात बार पढ़ के छोड़ दिया

1336
01:39:13,840 --> 01:39:17,920
ऐसा चल रहा हो ऐसा है बाहर जो जिसको करना है करने दे भैया तू हनुमान

1337
01:39:17,920 --> 01:39:21,920
जी का सहारा ले ले भाई [हंसी] हनुमान जी का सहारा ले

1338
01:39:21,920 --> 01:39:25,920
ले तभी बाहर तभी बाहर निकलेगा जी बहना

1339
01:39:25,920 --> 01:39:29,440
बताइए

1340
01:39:29,440 --> 01:39:33,440
तो सबसे पहले तो इसमें मेरे मेरे ताऊ जी का

1341
01:39:33,440 --> 01:39:37,440
सबसे बड़ा रोल है। उन्होंने 2005 से वो रामपाल को फॉलो

1342
01:39:37,440 --> 01:39:41,680
करना स्टार्ट किया था उन्होंने और तब से कंटीन्यूअसली वो मेरे मम्मी पापा

1343
01:39:41,680 --> 01:39:45,760
को बोलते रहते थे लेकिन वो कभी कन्वर्ट नहीं हुए। मेरे

1344
01:39:45,760 --> 01:39:50,080
पापा कन्वर्ट हो गए थे 2011 में पर जब रामपाल जेल गया

1345
01:39:50,080 --> 01:39:54,240
2014 में तो उन्होंने मानना छोड़ दिया था और वो वापस मंदिर भी जाने लग गए

1346
01:39:54,240 --> 01:39:58,480
थे। सब कुछ हमारे साथ ही और मेरी मम्मा का मैम आपको बताती हूं। जब

1347
01:39:58,480 --> 01:40:02,720
उन्होंने मेरे पापा ने 2011 में उसको फॉलो किया था। उस

1348
01:40:02,720 --> 01:40:06,880
टाइम पे क्योंकि ऐसा होता है कि जब तीन साल के हो जाते हैं ना तो उसके बाद

1349
01:40:06,880 --> 01:40:10,960
आपको रामपाल का नाम दिलवा देते हैं। उस टाइम पे मैं तीन साल से

1350
01:40:10,960 --> 01:40:15,120
हो गई थी तो मतलब मुझे भी पापा बोलते थे

1351
01:40:15,120 --> 01:40:19,280
फॉलो करवाने का लेकिन मेरी मम्मा

1352
01:40:19,280 --> 01:40:23,360
ने कहा कि आपको जो फॉलो करना है करो मुझे और बच्चों को मत बोलो मतलब

1353
01:40:23,360 --> 01:40:27,440
ऐसा उतना वो विरोध में उसके और वो कभी कन्वर्ट भी नहीं हुई

1354
01:40:27,440 --> 01:40:31,840
इन तीन सालों में। उसके बाद पापा ने भी मानना छोड़ दिया। लेकिन

1355
01:40:31,840 --> 01:40:35,920
एक [हंसी] फनी बात है। मेरे पापा ने एक अंकल को उनके फ्रेंड

1356
01:40:35,920 --> 01:40:39,920
को कन्वर्ट करवाया था। और 2021 में जब मेरे

1357
01:40:39,920 --> 01:40:44,080
पापा उसको मारना छोड़ चुके थे तब उन्हीं अंकल ने जिनको पापा ने कन्वर्ट करवाया

1358
01:40:44,080 --> 01:40:44,580
था

1359
01:40:44,480 --> 01:40:48,480
उन्हीं ने मेरे पापा को वापस रामपाल का फॉलोअ बना दिया।

1360
01:40:48,480 --> 01:40:52,320
और

1361
01:40:52,320 --> 01:40:56,400
ये लोग ऐसे एजेंट की तरह पापा ने जिनको छुड़वाया था

1362
01:40:56,400 --> 01:41:00,720
उनको वापस रामपाल का कॉम्बो बनवा दिया। नहीं

1363
01:41:00,720 --> 01:41:04,720
हां मतलब पापा ने जिनको रामपाल का फॉलोअ बनाया था ना अपने फ्रेंड

1364
01:41:04,720 --> 01:41:08,880
को उन्होंने ही पापा को वापस [हंसी] वापस रामपाल का फॉलोअ बना

1365
01:41:08,880 --> 01:41:13,200
दिया। अच्छा हां

1366
01:41:13,200 --> 01:41:17,440
तो उसके बाद जब मेरे पापा चेंज कन्वर्ट हो गए ना तो

1367
01:41:17,440 --> 01:41:21,600
वो लोग मतलब एक पूजा करवानी थी मेरी तो ये लोग जैसे उन्होंने

1368
01:41:21,600 --> 01:41:25,760
बताया था ना इनको फैमिली से कोई मतलब नहीं होता है इतना लेकिन इतना हमारे

1369
01:41:25,760 --> 01:41:29,840
साथ नहीं था हां बस ये हो जाता है कि जैसे मेरे लिए पूजा करवानी थी एक

1370
01:41:29,840 --> 01:41:34,320
तो मेरे पापा बोल रहे थे नहीं मैं उसमें नहीं बैठूंगा क्योंकि पूजा में नहीं बैठ सकते हैं

1371
01:41:34,320 --> 01:41:38,320
किसी भी पूजा की तो दूर की बात ये लोग मंदिर भी नहीं जा सकते हैं कुछ भी

1372
01:41:38,320 --> 01:41:42,800
तो तब तब फिर मेरे भाई को पापा ने फॉलोअर

1373
01:41:42,800 --> 01:41:47,120
बनाया और धीरे-धीरे करके मेरी मम्मा को

1374
01:41:47,120 --> 01:41:51,120
फिर उसके बाद मुझे एक दिन पापा आश्रम लेके गए। मैं बहुत मना कर रही

1375
01:41:51,120 --> 01:41:56,000
थी पर फिर ऐसा होता है ना कि पापा ने कह दिया तो चली गई मैं मतलब जाना।

1376
01:41:56,000 --> 01:41:59,600
तो पापा मेरे को आश्रम लेके गए और वहां पे मैं मेरे को तब इतनी नॉलेज

1377
01:41:59,600 --> 01:42:03,600
तो थी नहीं कुछ और कुछ पता भी नहीं था। बस मेरे को उनके जो रूल्स हैं

1378
01:42:03,600 --> 01:42:08,000
कि बर्थडे सेलिब्रेट नहीं कर सकते या फिर

1379
01:42:08,000 --> 01:42:12,000
मतलब कि डांस नहीं कर सकते। ये सब से मुझे प्रॉब्लम थी तो मैं

1380
01:42:12,000 --> 01:42:16,000
इन सब के ऊपर मैंने उनसे पूरे दिन डिबेट की मतलब

1381
01:42:16,000 --> 01:42:20,000
दोपहर को हम पहुंचे थे शाम तक मैं उनसे डिबेट करती ही रही। हालांकि मुझे

1382
01:42:20,000 --> 01:42:24,160
अपने स्क्रिप्चर्स की कुछ नॉलेज नहीं थी पर इन्हीं सब बातों पे लास्ट

1383
01:42:24,160 --> 01:42:28,720
में लेकिन मैंने मम्मा को कॉल किया और उन्होंने कहा कि

1384
01:42:28,720 --> 01:42:33,280
कुछ होता है तो ठीक है नहीं तो मानना छोड़ो देना

1385
01:42:33,280 --> 01:42:39,280
तो मतलब कुछ अच्छा होता है तो ठीक है नहीं तो छोड़ देना मानना

1386
01:42:39,360 --> 01:42:43,360
तब रूल्स भी नहीं पता थे मतलब ये लोग ऐसे करते हैं स्टार्टिंग

1387
01:42:43,360 --> 01:42:47,120
में पूरे रूल्स नहीं बताते कि

1388
01:42:47,120 --> 01:42:51,200
जैसे आज तक मेरे पेरेंट्स को नहीं पता लगा था कि ये

1389
01:42:51,200 --> 01:42:55,280
5% गीता को नहीं मानते हैं आज तक।

1390
01:42:55,280 --> 01:42:59,280
मैंने अभी आपकी वीडियोस देख के मैं मतलब मेरी मम्मा को मैंने

1391
01:42:59,280 --> 01:43:03,200
इतना तो समझा छोड़ देंगी।

1392
01:43:03,200 --> 01:43:08,240
अच्छा उनमें कुछ सुधार आ रहा है। उनको आज तक नहीं पता था कि ये 5%

1393
01:43:08,240 --> 01:43:12,480
आपकी माता श्री में थोड़ा बहुत सुधार आ रहा है। हां बहुत ज्यादा वो मुझे

1394
01:43:12,480 --> 01:43:16,800
ऐसा लगता है कि मुझे मुझे ऐसा

1395
01:43:16,800 --> 01:43:20,880
लगता है कि वो मानना छोड़ चुकी हैं। बस वो बोल नहीं पा रही है। मतलब मैं उनसे

1396
01:43:20,880 --> 01:43:25,600
बोली बोल दो ना आप नहीं मानते हो पर वो बोल नहीं पा रही है। पर मुझे ऐसा लगता है कि

1397
01:43:25,600 --> 01:43:29,680
मैं मतलब इसका मतलब ये है कि वो एडमिट नहीं कर पा रही है मुंह से मगर वो

1398
01:43:29,680 --> 01:43:33,760
वैचारिक दृष्टि से छोड़ चुकी है। बहुत अच्छी बात है ये। तो एक बार

1399
01:43:33,760 --> 01:43:37,920
हमारी छोटी प्यारी मुझे लगता है उनकी बातों से किस तरह से ये जो है जूझ

1400
01:43:37,920 --> 01:43:42,080
रही है भैया इनके लिए तालियां कहते हैं साहसी प्रह्लाद के जैसा [गला साफ़ करने की आवाज़]

1401
01:43:42,080 --> 01:43:46,080
ये रोल निभा रही है अपने घर में और उसका सारा श्रेय

1402
01:43:46,080 --> 01:43:50,080
आपको जाता है क्योंकि आप आपने जो रेफरेंसेस दिए और जो आप

1403
01:43:50,080 --> 01:43:54,080
बातें बताते हो ना मुझे पॉइंट्स तो वहीं से मिले क्योंकि मेरे पास समझाने के लिए कुछ पॉइंट्स

1404
01:43:54,080 --> 01:43:58,080
नहीं मैंने छ सात महीने से उनको नहीं बता रखा था कि मैं अब उसको नहीं मानती हूं

1405
01:43:58,080 --> 01:44:02,560
क्योंकि मेरे पास बताने के लिए कुछ था नहीं कि मैं क्यों नहीं मानती हूं। पर आपने

1406
01:44:02,560 --> 01:44:08,240
सब पॉइंट्स दिए रीजन जो मैं उनको बता पाई समझा पाई।

1407
01:44:08,240 --> 01:44:12,400
चलो बहुत-बहुत आभार कि आपने मुझे ये

1408
01:44:12,400 --> 01:44:16,720
भगवत कृपा से ये भगवान का ये प्राप्त हुआ।

1409
01:44:16,720 --> 01:44:18,240
कृपा प्राप्त हुई कि मैं

1410
01:44:18,240 --> 01:44:22,480
इसका निमित्त बन पाया कि कोई प्यारी सी छोटी सी बिटिया और वो अपने

1411
01:44:22,480 --> 01:44:26,480
जो धर्म से किस तरह से वापस उसमें जो है

1412
01:44:26,480 --> 01:44:30,800
अपनी जगह बना पाई अपना अस्तित्व बचा पाई और अभी भी उसका

1413
01:44:30,800 --> 01:44:35,120
जो संघर्ष है और हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि आपका जो संघर्ष

1414
01:44:35,120 --> 01:44:39,360
है उसमें आपको भगवान पूरा पूरा आपको जो है बल प्रदान

1415
01:44:39,360 --> 01:44:43,760
करें कि आप भी प्रह्लाद की तरीके से वहां पर हिरण्यकश्यप का वध ना करो

1416
01:44:43,760 --> 01:44:48,560
वध ना करवाओ बल्कि हिरण्यकश्यप को शोध कर लो वापस ले आओ।

1417
01:44:48,560 --> 01:44:51,600
है ना संदीप जी?

1418
01:44:51,600 --> 01:44:56,080
बिल्कुल। तो अब हमारे बीच में आ गए हैं शैलेश

1419
01:44:56,080 --> 01:45:00,720
पुरी जी और उससे पहले मैं एक ऋग्वेद का वो बता दूं प्रमाण

1420
01:45:00,720 --> 01:45:04,800
विष्णु जी के बारे में बता रहा था जिससे वो भाई साहब दड़की लगा गए।

1421
01:45:04,800 --> 01:45:09,200
ये मंडल नंबर एक है। सूक्त नंबर 22 है।

1422
01:45:09,200 --> 01:45:14,240
और 22व सूक्त का यहां पर है

1423
01:45:14,240 --> 01:45:18,480
क्या कहते हैं? 17वा 17वा मंत्र है। इसमें

1424
01:45:18,480 --> 01:45:22,800
भगवान विष्णु को परमेश्वर कहा जा रहा है। क्या लिखा है कि विष्णु

1425
01:45:22,800 --> 01:45:27,200
ने परमेश्वर विष्णु ने इस जगत

1426
01:45:27,200 --> 01:45:30,160
को विशेषता

1427
01:45:30,160 --> 01:45:33,360
रमण किया। तीन प्रकार से पावों

1428
01:45:33,360 --> 01:45:37,600
को प्रक्षिप्त किया और इन विष्णु के धूल

1429
01:45:37,600 --> 01:45:41,600
युक्त पारद स्थान में यह संपूर्ण जनक जगत सम्यक रूप से

1430
01:45:41,600 --> 01:45:45,710
अंतर्भूत हो गया। विष्णु

1431
01:45:45,710 --> 01:45:50,480
[गला साफ़ करने की आवाज़] इसके बाद अगला 18वा मंत्र है कि

1432
01:45:50,480 --> 01:45:55,520
किसी से ना दबने योग्य सबों के रक्षक भगवान विष्णु

1433
01:45:55,520 --> 01:45:59,840
धर्मों को धारण करते हुए इस पृथ्वी

1434
01:45:59,840 --> 01:46:03,840
से तीन पद विक्रम

1435
01:46:03,840 --> 01:46:09,760
विचक्र करते हैं। इसके बाद आगे है

1436
01:46:09,760 --> 01:46:13,760
आप हे ऋत्विक जन आप सभी भगवान विष्णु के यह देखिए

1437
01:46:13,760 --> 01:46:18,080
विष्णु विष्णु को परम ब्रह्म कहा गया स्पष्ट विष्णु भैया

1438
01:46:18,080 --> 01:46:22,080
यहां कोई वो कबीर और कबीर वाला मामला नहीं है देख लेना स्पष्ट विष्णु चल रहा है यहां

1439
01:46:22,080 --> 01:46:26,160
पर है ना झूठे की हद तक और चोर के घर

1440
01:46:26,160 --> 01:46:30,160
तक तो विष्णु स्पष्ट विष्णु की बात हो रही

1441
01:46:30,160 --> 01:46:34,320
है भगवान विष्णु के प्राणी मात्र के

1442
01:46:34,320 --> 01:46:38,320
पालन आदि रूप रूपी कर्मों का अवलोकन करें। यह भगवान विष्णु

1443
01:46:38,320 --> 01:46:42,560
की परबह्मता यहां से 17 से लेकर के 22 तक

1444
01:46:42,560 --> 01:46:46,880
दी गई है। और कौन सा है ये ऋग्वेद पहला

1445
01:46:46,880 --> 01:46:48,720
सूक्त 22

1446
01:46:48,720 --> 01:46:52,960
पहला मंडल 22वा सूक्त 17 से लेकर के मंत्र नंबर 23 तक

1447
01:46:52,960 --> 01:46:56,960
विष्णु की बात हो रही है। और

1448
01:46:56,960 --> 01:47:01,120
बाकी और प्रमाण बीच-बीच में देते रहेंगे। तो छोटी बहना

1449
01:47:01,120 --> 01:47:03,760
को सुनकर बड़ा अच्छा लगा। शैलेश

1450
01:47:03,760 --> 01:47:07,760
पुरी जी का परिचय जी बताइए राम राम

1451
01:47:07,760 --> 01:47:12,160
जी जी तो हमें ये बताइए के

1452
01:47:12,160 --> 01:47:16,400
बताइए जो कबीर है वो अजर

1453
01:47:16,400 --> 01:47:19,840
है कि नहीं है

1454
01:47:19,840 --> 01:47:23,920
देखो मैं सबसे पहले तो डिबेट में जितने भी हमारे भाई बहन

1455
01:47:23,920 --> 01:47:28,800
बैठे हुए हैं और इस डिबेट को जो सुन रहे है

1456
01:47:28,800 --> 01:47:33,840
तो सबसे पहले आप जी से ही मेरा निवेदन रहेगा सवाश जी

1457
01:47:33,840 --> 01:47:38,960
के आपके अंदर एक सबसे बड़ी कमजोरी है

1458
01:47:38,960 --> 01:47:42,960
वो यह है कि आप जब कोई प्रमाण वाली

1459
01:47:42,960 --> 01:47:47,440
बात आती है कोई संत रामपाल जी महाराज का फॉलोअ सच्चाई

1460
01:47:47,440 --> 01:47:51,520
से आपको रूबरू करना चाहता है आपको टोकना चाहूंगा

1461
01:47:51,520 --> 01:47:55,920
टोकना चाहूंगा मैं भी आपके अंदर एक कमी बता सकता हूं सुनिए

1462
01:47:55,920 --> 01:47:59,920
मैं भी आपके अंदर एक कमी बता सकता हूं सुनिए सुनिए सुनिए मैं भी आपके अंदर

1463
01:47:59,920 --> 01:48:04,080
एक कमी बता सकता हूं कि आपको एसिडिटी है और एसिडिटी

1464
01:48:04,080 --> 01:48:08,080
के कारण आप जो है जो धर्म का सही ज्ञान है वो पचा नहीं पाते हैं। आपके गैस

1465
01:48:08,080 --> 01:48:10,480
बनती है। मानेंगे आप इस बात

1466
01:48:10,480 --> 01:48:12,880
को?

1467
01:48:12,880 --> 01:48:17,280
मानेंगे। इसलिए वो बातें मत बोलिए जो सिद्ध ना कर पाए।

1468
01:48:17,280 --> 01:48:21,680
वो बातें बोलिए जो अकाट हो। अकाट बातें बोलिए।

1469
01:48:21,680 --> 01:48:25,840
ये जो ये जो आपका व्यक्तिगत वो है मन इसको आप

1470
01:48:25,840 --> 01:48:30,160
वहां पर करिए जहां आपके लोग आपकी बात सुने और समझे और मान जाए। हम

1471
01:48:30,160 --> 01:48:34,160
यहां पर उन बातों को करेंगे जो अकाट्य हो।

1472
01:48:34,160 --> 01:48:38,320
अभी मैं कह रहा हूं आपके गैस बनती है। एसिडिटी होती है जिसके कारण

1473
01:48:38,320 --> 01:48:42,320
आप ईश्वर का जो सच्चा ज्ञान है वो पचा नहीं पाते हैं। मानेंगे इस बात को।

1474
01:48:42,320 --> 01:48:45,360
सबसे पहले

1475
01:48:45,360 --> 01:48:49,440
पहले जो आपने बात शुरू की है पहले उसको खत्म करिए। उसके बाद दूसरी बात

1476
01:48:49,440 --> 01:48:53,760
आइए। आपने जो बात कही है भाई साहब देखिए। देखिए भाई साहब

1477
01:48:53,760 --> 01:48:57,920
भाई साहब देखिए आपने एक आपने भाई साहब एक निर्णय दिया। भाई साहब

1478
01:48:57,920 --> 01:49:02,640
आपको बात करनी है कि नहीं तो आपने

1479
01:49:02,640 --> 01:49:07,200
अपना निर्णय क्यों दिया मैं यहां पर आ के आपका निर्णय क्यों सुनू आप अपने पक्ष को रखिए

1480
01:49:07,200 --> 01:49:11,360
आप ये सिद्ध करिए कबीर भगवान क्यों है आप हमें मत बताइए कि आपके

1481
01:49:11,360 --> 01:49:15,440
अंदर क्या कमी है क्या नहीं कमी है आप रिमूव करोगे तो कोई सुन नहीं पाएगा क्योंकि रिमूव

1482
01:49:15,440 --> 01:49:19,600
करोगे तो सुन नहीं पाएगा कोई ऐसी बात बोली है जिसको आप सिद्ध नहीं

1483
01:49:19,600 --> 01:49:23,760
कर सकते मैं अभी बहुत बातें ऐसी बोल सकता हूं जिसको मैं सिद्ध नहीं कर सकता

1484
01:49:23,760 --> 01:49:25,520
मगर मैं बोल दूंगा मैं बोल

1485
01:49:25,520 --> 01:49:30,160
रहा हूं ना आपके गैस इस समय इसलिए आप ऐसा बोल रहे हैं बताइए

1486
01:49:30,160 --> 01:49:34,400
आपकी आपकी सबसे बड़ी समस्या भाई साहब देखिए

1487
01:49:34,400 --> 01:49:39,040
मैं कह रहा हूं उस बात को उस बात को छोड़ दीजिए आगे बढ़ जाइए

1488
01:49:39,040 --> 01:49:43,040
ऐसी बातें ना बोलिए जो भाई साहब मुझे आपको हटाना

1489
01:49:43,040 --> 01:49:47,040
पड़ेगा मुझे आपको हटाना पड़ेगा मुझे आपको हटाना पड़ेगा

1490
01:49:47,040 --> 01:49:51,040
मुझे आपको हटाना पड़ेगा मुझे आपको हटाना पड़ेगा

1491
01:49:51,040 --> 01:49:57,040
मैं आपका मंतव्य समझ गया हूं आपको कोई सुन नहीं रहा इस समय

1492
01:49:58,960 --> 01:50:03,600
भाई साहब मैं यह कह रहा हूं आप अपनी वह बातें यहां मत करिए

1493
01:50:03,600 --> 01:50:07,680
जो कि अकाट्य ना हो। वही बातें करिए जो आपको

1494
01:50:07,680 --> 01:50:11,840
लगता है अकाट है। आपके कह देने से क्या कोर्ट ये मान लेगी? अगर

1495
01:50:11,840 --> 01:50:15,840
हम अदालत जाएंगे आपके कह देने से कोर्ट ये मान लेगी कि शिवश जो

1496
01:50:15,840 --> 01:50:20,000
है जैसे ही प्रमाण की बात आती है तो वो जो है बात इधर-उधर की करने लगता है।

1497
01:50:20,000 --> 01:50:24,000
यहां पे छह आदमी है। यह लोग तो नहीं मानते ना। यह आपकी व्यक्तिगत

1498
01:50:24,000 --> 01:50:28,240
सोच है। आप अपनी व्यक्तिगत सोच मत बताइए हमें। सिर्फ वह बातें करिए जो शास्त्र

1499
01:50:28,240 --> 01:50:32,240
से प्रमाणित हो। मैं अपना अवलोकन कराने के लिए

1500
01:50:32,240 --> 01:50:36,960
आपको मैंने यहां नहीं लिया है। लाइव स्ट्रीम में लाइव

1501
01:50:36,960 --> 01:50:41,280
स्ट्रीम में मैंने आपको अपनी समीक्षा करवाने के लिए नहीं लिया है।

1502
01:50:41,280 --> 01:50:45,360
शास्त्र में क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? इस बारे में बात करना करने के

1503
01:50:45,360 --> 01:50:51,360
लिए आपको लिया है। आपको करनी है शास्त्र के बारे में बात तो बताइए।

1504
01:50:53,120 --> 01:50:56,720
शिवा जी

1505
01:50:56,720 --> 01:51:02,000
व्यक्तिगत बात है कि जैसे ही ऐसा होने लगता है उसको हटाइए

1506
01:51:02,000 --> 01:51:06,880
उसको छोड़ के आगे चलिए जी बताइए

1507
01:51:06,880 --> 01:51:09,200
हां

1508
01:51:09,200 --> 01:51:09,840
तो बात

1509
01:51:09,840 --> 01:51:14,720
ऐसी है कि कबीर दास जी जो है क्या वो अजर हैं?

1510
01:51:14,720 --> 01:51:19,040
बिल्कुल जी अजर अमर अविनाशी हैं कबीर दास जी हां

1511
01:51:19,040 --> 01:51:25,040
तो भैया इनको फोटो दिखाओ एक बार

1512
01:51:28,400 --> 01:51:34,400
फोटो दिखाओ।

1513
01:51:42,560 --> 01:51:46,560
भाई साहब इनके ऊपर आपको आयु का प्रभाव दिख रहा है या

1514
01:51:46,560 --> 01:51:50,640
नहीं दिख रहा है? नीचे वाणी भी पढ़िएगा जी। गरीब

1515
01:51:50,640 --> 01:51:54,720
ऐसा अभिगत राम है अगम अगोचर नूर सुन स्नेही

1516
01:51:54,720 --> 01:51:58,800
आदर भाई साहब इनको ऐसे भाई साहब हम कह रहे हैं

1517
01:51:58,800 --> 01:52:03,040
आपको उनके ऊपर उनके शरीर पर आयु का प्रभाव

1518
01:52:03,040 --> 01:52:07,120
दिख रहा है या नहीं दिख रहा है देखो जी मेरे को आपके शरीर

1519
01:52:07,120 --> 01:52:11,280
पर भी दिख रहा है अभी तिलक लगा रखा है आप जी ने बिंदी लगा रखी है बिंदी महिलाएं लगाती

1520
01:52:11,280 --> 01:52:15,360
है जीए आप जो है मुझे लगता ही नहीं

1521
01:52:15,360 --> 01:52:19,600
कि आप जो है बुद्धिजीवी हो के और बात करने आए हैं मैं आपसे पूछ रहा हूं कबीर

1522
01:52:19,600 --> 01:52:22,880
के बारे आप

1523
01:52:22,880 --> 01:52:25,120
आप कबीर के बारे में बताइए कबीर

1524
01:52:25,120 --> 01:52:29,200
आपको अजर दिख रहे हैं वहां पर उनके बाल हो चुके हैं बूढ़े

1525
01:52:29,200 --> 01:52:33,440
दिख रहे हैं वो क्यों दिख रहे हैं बूढ़े वो बताइए भैया भैया आप भी

1526
01:52:33,440 --> 01:52:37,440
डिबेट कर रहे हो मेरे आपके बारे में तो बोलना पड़ेगा जी सुभाष

1527
01:52:37,440 --> 01:52:41,520
जी अरे भाई तो मेरा इससे संबंध सिद्ध करो पहले

1528
01:52:41,520 --> 01:52:45,600
करो संबंध सिद्ध अभी अभी इन्होंने क्या बोला कि बिंदी जो है

1529
01:52:45,600 --> 01:52:49,600
ना कि महिलाएं लगाती है आपको दिख रहा है ये व्यक्तिगत टिप्पणी आप यहां चर्चा में आके

1530
01:52:49,600 --> 01:52:54,080
कर रहे हैं। ये ये बात करने नहीं आए हैं।

1531
01:52:54,080 --> 01:52:58,080
नहीं नहीं तो ये भी तो बताइए कबीर दास जी बूढ़े क्यों दिख रहे

1532
01:52:58,080 --> 01:53:02,240
हैं? ये ये तुम्हारा बनाया हुआ चित्र है जी।

1533
01:53:02,240 --> 01:53:06,400
ये आप जी का बनाया हुआ चित्र है। तो आपका बनाया हुआ चित्र कौन सा

1534
01:53:06,400 --> 01:53:10,480
है? आप जी नहीं देख सकते। थंबनेल दिखा दो। रुको।

1535
01:53:10,480 --> 01:53:14,480
इनके वीडियोस में रामपाल दास जी के वीडियोस में थंबनेल दिखाओ जिसमें

1536
01:53:14,480 --> 01:53:20,480
कबीर हूं। दिखाओ।

1537
01:53:47,600 --> 01:53:51,600
हां भैया चित्र वही है देखो बिल्कुल

1538
01:53:51,600 --> 01:53:56,160
वही चित्र है जी जी वही है ये तो हमने नहीं लगाया

1539
01:53:56,160 --> 01:54:00,560
नहीं ये आप जी ने नहीं लगाया है हां देखो

1540
01:54:00,560 --> 01:54:04,560
आप इस चित्र से आप इस चित्र से क्या सिद्ध करना चाहते हो पहले तो ये बताइए

1541
01:54:04,560 --> 01:54:08,720
अभी तो अभी तो आप कह रहे थे ये चित्र आपका बनाया हुआ है अब जब आपके आपके आपके

1542
01:54:08,720 --> 01:54:12,960
अनुसार चित्र दिखा दिया। आपकी सामग्री से। अब आप कह रहे हैं कि आप क्या सिद्ध करना चाह रहे हैं?

1543
01:54:12,960 --> 01:54:16,960
अगर सिद्ध करने का प्रश्न था तो वहां पर ये क्यों कहा कि ये तो आपका बनाया

1544
01:54:16,960 --> 01:54:21,520
हुआ चित्र है। सीधे कहते आप क्या सिद्ध करना चाह रहे हैं?

1545
01:54:21,520 --> 01:54:25,840
सुनो हमारी बात सुनो। हां, ये जो पाखंड

1546
01:54:25,840 --> 01:54:29,920
ये जो पाखंडवाद है ना यह पाखंडवाद

1547
01:54:29,920 --> 01:54:34,000
की जो जड़े हैं वो इतनी जबरदस्त मजबूत कर रखी है। हमने पूछा

1548
01:54:34,000 --> 01:54:38,560
कबीर दास जी बूढ़े क्यों दिख रहे हैं? सिंपल।

1549
01:54:38,560 --> 01:54:42,560
आपको दिख रहे हैं जी आपकी मंदिरों में जाइए मंदिरों में राम

1550
01:54:42,560 --> 01:54:46,800
और कृष्ण की जो मूर्ति है वह सफाच दिखेगी 16 वर्ष

1551
01:54:46,800 --> 01:54:50,800
की आयु वाले रहते हैं सदा का है

1552
01:54:50,800 --> 01:54:54,800
और मूर्तियां भी वही है आपके कबीर दास जी बूढ़े क्यों दिख

1553
01:54:54,800 --> 01:54:59,120
रहे हैं जिन लोगों को वो भी हमारी सामग्री में नहीं

1554
01:54:59,120 --> 01:55:02,960
आपकी सामग्री में कबीर दास जी बूढ़े क्यों दिख रहे हैं ये बताओ

1555
01:55:02,960 --> 01:55:07,360
जिनको मोतियाबिंद है जी उनको बूढ़े ही दिखेंगे जी आप जी

1556
01:55:07,360 --> 01:55:11,440
मोतियाबिंद है। जी ठीक है भाई सबने लिया इनका पक्ष

1557
01:55:11,440 --> 01:55:15,920
अब ये जा सकते हैं ठीक है मोतियाबिंद से मोतियाबिंद

1558
01:55:15,920 --> 01:55:20,240
से व्यक्ति बूढ़ा सिद्ध बूढ़ा दिखता है यही सिद्ध कर दे आप

1559
01:55:20,240 --> 01:55:24,400
मुझे बताइए कि ये कहां लिखा है कि जो

1560
01:55:24,400 --> 01:55:28,960
भगवान का रूप है जिनके मोतियाबिंद होगा उनको बूढ़ा दिखने लगेगा

1561
01:55:28,960 --> 01:55:30,240
बताइए

1562
01:55:30,240 --> 01:55:34,640
भाई आजकल तो ऐसा है कि आपको सुनो मेरी बात

1563
01:55:34,640 --> 01:55:39,120
आजकल तो ऐसा है कहां लिखा है भाई साहब

1564
01:55:39,120 --> 01:55:43,360
आजकल लिखा कहां है ये बताइए भाई साहब

1565
01:55:43,360 --> 01:55:47,440
जो जो डॉक्टर लाइन में जो मैं पूछ रहा हूं जो मत बोलिए शास्त्र

1566
01:55:47,440 --> 01:55:51,520
का नाम बोलिए जो आंखों वाला है अरे आप

1567
01:55:51,520 --> 01:55:56,160
मेडिसिन की बात कर रहे हैं जी मोतियाबिंद किसके अंदर आता है शास्त्र में आता है कि

1568
01:55:56,160 --> 01:56:00,240
आप जो बोल रहे हैं जो भी बात बोल रहे हैं वो आप शास्त्र का नाम

1569
01:56:00,240 --> 01:56:04,400
लेकर बोले अरे आप पर हंसी आती है भाई आपका नाम

1570
01:56:04,400 --> 01:56:08,960
आप डिबेट करते हो का नाम

1571
01:56:08,960 --> 01:56:14,960
का नाम का नाम शास्त्र का नाम

1572
01:56:15,200 --> 01:56:19,440
देख लो ये आते हैं यहां पर अपनी अनगंत बातें

1573
01:56:19,440 --> 01:56:23,760
करने शास्त्र तो है नहीं इनको फोटो फोटो

1574
01:56:23,760 --> 01:56:27,840
दिखाने के बाद भी इनको बुढ़ापा नजर नहीं आया हैरानी की बात देखो कितना कैसे मोतिया इनको

1575
01:56:27,840 --> 01:56:32,400
खुद हुआ पड़ा है हद है वैसे इनकी यार [हंसी]

1576
01:56:32,400 --> 01:56:36,480
भैया इनकी खुद की जो सामग्री है इनकी वो इनका जो

1577
01:56:36,480 --> 01:56:40,560
लोक है जो इनका उल्टा वृक्ष का चित्र है

1578
01:56:40,560 --> 01:56:44,720
उसमें इनकी किताबों में कबीर दास जी की वही फोटो है सफेद दाढ़ी

1579
01:56:44,720 --> 01:56:45,280
वाली

1580
01:56:45,280 --> 01:56:49,600
फाड़ के फेंक दो उन किताबों में पर इनके सारे

1581
01:56:49,600 --> 01:56:53,760
आश्रमों में लगी हुई है इससे और ज्यादा क्या होगा ये देख लिया इनका इनके

1582
01:56:53,760 --> 01:56:57,840
तर्क देख लिए इनका प्रमाण देख लिए हम यहां प्रमाण दिए दिए मर जा रहे हैं जब

1583
01:56:57,840 --> 01:57:01,920
इनसे प्रमाण मांगो सर ये तो जो तो जे तो मोतियाबिन तो

1584
01:57:01,920 --> 01:57:06,480
दवाई तो ये वो [हंसी] और ये देखो देखो

1585
01:57:06,480 --> 01:57:10,480
ये उम्र में मेरी बाप की उम्र के हैं। ये समझ रहे

1586
01:57:10,480 --> 01:57:16,480
हो? और इनका ये हाल है। इनका बौद्धिक स्तर देखो इनका।

1587
01:57:19,360 --> 01:57:25,280
ये धर्तता दिखाते हैं। धूतता धूते हैं। ये

1588
01:57:25,280 --> 01:57:29,440
कोई प्रमाण नहीं। मनगढ़ंत बातें और कहते क्या है? भक्ति

1589
01:57:29,440 --> 01:57:35,440
शास्त्र भक्ति हम करते हैं।

1590
01:57:35,440 --> 01:57:41,440
भाई पानी पीजिए। [हंसी]

1591
01:57:42,000 --> 01:57:46,560
मोतियाबिंदी मोतियाब बिंदी हो गया। हमें हुआ है कि इन लोगों को

1592
01:57:46,560 --> 01:57:50,640
आपको शास्त्रों से सिद्ध करना है कुछ शैलेश

1593
01:57:50,640 --> 01:57:55,120
जी आखरी बार आपसे पूछ रहा हूं।

1594
01:57:55,120 --> 01:57:59,120
आपकी आवाज नहीं सुना। [हंसी] इशारा कर दीजिए। हां या ना?

1595
01:57:59,120 --> 01:58:03,200
हां। इशारा कर दीजिए। आपको शास्त्र से बात करनी

1596
01:58:03,200 --> 01:58:08,160
है कोई

1597
01:58:08,160 --> 01:58:12,240
सुनाई नहीं शास्त्र से कोई बात करनी है आपको आप जी

1598
01:58:12,240 --> 01:58:16,400
शास्त्र को मानते नहीं भाई साहब कौन कितना

1599
01:58:16,400 --> 01:58:20,560
मानता है वो दिख चुका है वो कौन कितना मानता है वो जनता

1600
01:58:20,560 --> 01:58:25,920
तय कर लेगी आप अपनी बात बताइए शास्त्रों से कुछ बताना है आपको

1601
01:58:25,920 --> 01:58:29,920
अभी मैं करीबन तीन चार दिन से आपका डिबेट देख रहा हूं शास्त्र से

1602
01:58:29,920 --> 01:58:33,920
कुछ बताना है आपको मेरे भाई बिल्कुल मैं उसी पे आ

1603
01:58:33,920 --> 01:58:38,000
रहा हूं हां उस आइए आप आपने

1604
01:58:38,000 --> 01:58:42,080
तीन चार दिन से क्या देखा है क्या नहीं देखा है वो मत बताइए कबीर अजर

1605
01:58:42,080 --> 01:58:47,040
है तो बूढ़ा क्यों दिख रहा है ये बताइए

1606
01:58:47,040 --> 01:58:52,160
कबीर अजर है तो बूढ़ा क्यों दिख रहा है अरे भाई

1607
01:58:52,160 --> 01:58:56,560
जी यही तो समस्या है यही तो समस्या है आप शास्त्र की

1608
01:58:56,560 --> 01:59:00,720
यही तो समस्या है आप शास्त्र की बात करते हो हम आप

1609
01:59:00,720 --> 01:59:04,800
शास्त्र की बात करते हो वेद का नाम लेते हो जब उस वेद के अंदर

1610
01:59:04,800 --> 01:59:08,960
लिखा है कि कबीर अंगहारी अस बम हारी अस ऋत धामासी उसको

1611
01:59:08,960 --> 01:59:14,720
क्यों नहीं दिखाते आप ये कहां वेद है

1612
01:59:14,720 --> 01:59:19,840
वेद के अंदर ये लिखा हुआ है जी कबीर अंग हारी

1613
01:59:19,840 --> 01:59:23,920
कबीर हारी कहां पर लिखा है कौन से वेद में लिखा है पहले तो

1614
01:59:23,920 --> 01:59:29,600
यह बताओ चलो आप ऋग्वेद के अंदर खोलिए कौनसा

1615
01:59:29,600 --> 01:59:33,640
ऋग्वेद निकालिएगा बोलिए। अरे जब आपके

1616
01:59:33,640 --> 01:59:37,840
[हंसी] कौन सा निकालू? कौन सा अनुवाद

1617
01:59:37,840 --> 01:59:42,880
कौन सा मंडल बता रहा हूं जी बता रहा हूं।

1618
01:59:42,880 --> 01:59:44,240
आपके सर पे से कूद रहे इनको

1619
01:59:44,240 --> 01:59:49,120
अजर पे रहने दो। सर इनसे अजर का क्वेश्चन कूदेंगे इधर उधर।

1620
01:59:49,120 --> 01:59:55,120
नहीं नहीं हम पकड़ लेंगे पकड़ लेंगे।

1621
01:59:55,260 --> 02:00:01,260
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1622
02:00:08,800 --> 02:00:13,040
शिवांशी नमस्कार जय श्री राम नमस्कार

1623
02:00:13,040 --> 02:00:17,360
मैं ये समझ नहीं पाया कि कबीर का अर्थ कबीर दास कैसे होता है वो

1624
02:00:17,360 --> 02:00:21,520
मैं समझ नहीं पा रहा हूं अभी अभी जब ये अभी जब ये कबीर को कबीर

1625
02:00:21,520 --> 02:00:26,400
बनाएंगे तब पूछेंगे ना [हंसी] आप पूछिए

1626
02:00:26,400 --> 02:00:30,640
मैं आपकी बेटी की शादी नहीं हो सकता परंतु गांव बिगड़े थे उसके आगे उसे छोटा

1627
02:00:30,640 --> 02:00:34,720
पड़ा उसने पुजारी से कहा एक दिन आप खुद ही मजबूर होकर इस बात को हटाए इन

1628
02:00:34,720 --> 02:00:38,960
आठ दिनों में जैसे बारिश और वारिस में दोनों सेम

1629
02:00:38,960 --> 02:00:43,760
होते हैं जैसे वारिस का मतलब उत्तराधिकारी बारिश का अर्थ

1630
02:00:43,760 --> 02:00:48,160
बारिश वर्षा दोनों एक ही बारिश और

1631
02:00:48,160 --> 02:00:52,560
का और वायरस भी वायरस भी [हंसी]

1632
02:00:52,560 --> 02:00:56,640
निकलने का समय अब कंप्यूटर में वायरस निकल जाए तो

1633
02:00:56,640 --> 02:00:59,600
मैं बोलूं कि देखो मेरा एक नया वायरस वारिस पैदा

1634
02:00:59,600 --> 02:01:02,480
हो गया है। [हंसी]

1635
02:01:02,480 --> 02:01:06,560
अरे यार बारिश और बारिश में कोई फर्क नहीं होता। हद हो गई आपकी यार अखिलेश जी। चलो चलो

1636
02:01:06,560 --> 02:01:10,800
चलो काम डाउन थोड़ा उनको नर्वस हो रहा होगा। बहुत लोग हैं खोलिए। चलो आप

1637
02:01:10,800 --> 02:01:14,640
खोलिएगा सर। बोलिए।

1638
02:01:14,640 --> 02:01:19,920
आप ये निकालो। आप

1639
02:01:19,920 --> 02:01:25,280
दूसरे गांव वाले आश्चर्य की

1640
02:01:25,280 --> 02:01:31,280
रास्ते में घायल इंजेक्शन देने आ रहा था

1641
02:01:36,000 --> 02:01:40,160
अथर्ववेद निकालिएगा

1642
02:01:40,160 --> 02:01:40,660
ऋग्वेद

1643
02:01:40,560 --> 02:01:44,720
से अथर्ववेद हो गया अरे तो अथर्ववेद मानते हो कि नहीं

1644
02:01:44,720 --> 02:01:49,040
अथर्ववेद को वेद मानते हो मानते हैं मगर आपने पहले चार पांच बार ऋग्वेद

1645
02:01:49,040 --> 02:01:54,080
बोला तो कौन सा चारों वेद में प्रमाण है

1646
02:01:54,080 --> 02:01:58,960
कौन सा कौन सा है

1647
02:01:58,960 --> 02:02:04,960
शिव जी रुक जाइए का कौन सा

1648
02:02:06,640 --> 02:02:10,800
शैलेश जी जो आपने लाइन वो प्रमाण दिखाइएगा

1649
02:02:10,800 --> 02:02:14,960
कहां पे है वेद में जो आपने लाइन कही है वेद से जो आप बोल रहे हैं वेद

1650
02:02:14,960 --> 02:02:18,960
से वो बताइए कहां पे है एक मिनट एक मिनट देख ले इनका कांड देख

1651
02:02:18,960 --> 02:02:23,040
ले कौन-कौन से कांड है इनके कांड नंबर चार अनुवाद नंबर एक मंत्र नंबर

1652
02:02:23,040 --> 02:02:27,120
सात

1653
02:02:27,120 --> 02:02:33,120
कांड नंबर चार

1654
02:02:35,840 --> 02:02:39,920
कांड नंबर चार सूक्त नंबर

1655
02:02:39,920 --> 02:02:45,440
कांड नंबर चार अनुराग नंबर एक मंत्र नंबर सात

1656
02:02:45,440 --> 02:02:51,440
के बाहर और

1657
02:02:52,080 --> 02:02:55,280
क्या लिखा है इसमें?

1658
02:02:55,280 --> 02:02:58,560
आप बताइए क्या दिखा रहे हैं?

1659
02:02:58,560 --> 02:03:02,560
नहीं मैं आपसे इसलिए पूछ रहा हूं कि मैं जानना चाहता हूं मैं सही जगह पहुंच गया कि

1660
02:03:02,560 --> 02:03:06,720
नहीं जहां आप पहुंचाना चाह रहे हैं। अरे तो आपको बता रहे हैं ना कहां अनुभव

1661
02:03:06,720 --> 02:03:11,040
पहले तो अथर्ववेद निकालो। वेद दिखाओ हमें। अगर सूक्त

1662
02:03:11,040 --> 02:03:15,040
बता देंगे तो थोड़ा सरल होगा निकालना। सूक्त बता दीजिए। सर जी सर जी हमें

1663
02:03:15,040 --> 02:03:21,040
पहले ये दिखाइए। आप जो पुस्तक दिखा रहे हैं सभी दर्शक देखेंगे ये वो अथर्ववेद है कि नहीं है?

1664
02:03:23,520 --> 02:03:28,080
अथर्ववेद बहुत बढ़िया।

1665
02:03:28,080 --> 02:03:32,640
सूक्त नंबर बता दीजिए। कांड नंबर चार निकालिए सर।

1666
02:03:32,640 --> 02:03:38,080
निकाल लिया। अनुभाग नंबर एक

1667
02:03:38,080 --> 02:03:42,240
ठीक है। मंत्र नंबर सात। सूक्त

1668
02:03:42,240 --> 02:03:46,320
नंबर दो है क्या? देखिए मंत्र नंबर

1669
02:03:46,320 --> 02:03:50,400
देख लो एक बार सूक्त नंबर दो है क्या देख लिया मंत्र नंबर एक

1670
02:03:50,400 --> 02:03:52,400
मंत्र नंबर सात सूक्त नहीं है इसमें

1671
02:03:52,400 --> 02:03:56,800
ऋग्वेद में सूत्र इसमें सूक्त नहीं है अथर्ववेद

1672
02:03:56,800 --> 02:04:00,880
में सूक्त नहीं है आप यहां झूठ बोल रहे हो जी अरे हस क्यों रहे

1673
02:04:00,880 --> 02:04:05,120
हो जी जो देख रहे हो उसको दिखाइए जनता को हस क्यों रहे हो जी

1674
02:04:05,120 --> 02:04:08,960
संत रामपाल पढ़ो पढ़ो

1675
02:04:08,960 --> 02:04:14,480
सूक्त पढ़ो ऊपर दिख रहा है सूक्त दो

1676
02:04:14,480 --> 02:04:16,640
देखा

1677
02:04:16,640 --> 02:04:22,640
ये कौन सा वेद है वेद कौन सा है अथर्ववेद

1678
02:04:22,640 --> 02:04:26,800
जी क्यों अपनी बेज़ती करवा रहे हो यार अपनी देखो देखो इसमें हम भी दिखा रहे हैं आपको देखो

1679
02:04:26,800 --> 02:04:30,880
इसमें भाई साहब अगर आप जिससे वेद संपवा रहे

1680
02:04:30,880 --> 02:04:34,960
हो अगर उसने उसमें सूक्त नहीं लिखा है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वहां सूक्त है

1681
02:04:34,960 --> 02:04:38,960
ही नहीं उसने जापान नहीं देखा है तो इसका मतलब ये नहीं

1682
02:04:38,960 --> 02:04:43,280
है कि दुनिया में जापान नहीं है किताब दिखाइए कौन सी से दिखा आप दिखाइए शलेश

1683
02:04:43,280 --> 02:04:47,440
जी अरे दयानंद जी की होगी इनकी और और कोई हो ही नहीं सकती दिखाओ दिखाओ

1684
02:04:47,440 --> 02:04:51,520
कौन सी दिखा रहे हो वही वही सर्वस वेद है इस समय सुनो

1685
02:04:51,520 --> 02:04:55,520
हमारी बात दिखाओ आपकी आपकी किताब दिखाओ नहीं

1686
02:04:55,520 --> 02:04:59,600
हम आपको किताब दिखाइए हम आपको दिखा रहे

1687
02:04:59,600 --> 02:05:05,200
हैं जो हमारे जो किताब दिखाइए किताब किताब

1688
02:05:05,200 --> 02:05:09,520
देखो मेरे पास भाई साहब किताब ये गीता

1689
02:05:09,520 --> 02:05:13,520
रखी है भैया जरा अरे गीता ये तो भगवत गीता है तत्व

1690
02:05:13,520 --> 02:05:18,480
विवेचनी ऋग्वेद कहां है आपका? अथर्ववेद कहां है आपका?

1691
02:05:18,480 --> 02:05:23,520
अथर्ववेद कहां है? अथर्ववेद दिखाइए भाई।

1692
02:05:23,520 --> 02:05:24,160
ये देवी

1693
02:05:24,160 --> 02:05:27,920
पुराण अथर्ववेद

1694
02:05:27,920 --> 02:05:32,160
अब अथर्ववेद का सुना बता रहा हूं मैं आपको। हां? मैं बता रहा हूं।

1695
02:05:32,160 --> 02:05:36,560
बता रहा हूं आपको। भाई साहब, अथर्ववेद कहां है आपका?

1696
02:05:36,560 --> 02:05:40,640
गोविंद जी, गोविंद जी प्लीज थोड़ा सा रुकिए। 18वा वेद कहां

1697
02:05:40,640 --> 02:05:44,880
है भाई साहब आपका वेद क्या

1698
02:05:44,880 --> 02:05:47,760
WhatsApp पर WhatsApp पर नहीं WhatsApp पे

1699
02:05:47,760 --> 02:05:52,160
नहीं है सारे क्या है ना अगर हम लोग अगर हम लोग बातें अलग-अलग

1700
02:05:52,160 --> 02:05:56,800
करेंगे तो उनको मौका मिल जाएगा इधर उधर भागने का मैं पूछ रहा हूं अथर्ववेद

1701
02:05:56,800 --> 02:06:00,960
कहां है आपका अथर्व अथर्ववेद का मैं आपको जो

1702
02:06:00,960 --> 02:06:05,200
श्लोक सुना रहा हूं वो सुनिएगा पहली बात भाई साहब

1703
02:06:05,200 --> 02:06:11,200
थोड़ा पढ़े लिखे हैं वेदों में मंत्र होते हैं श्लोक नहीं

1704
02:06:13,360 --> 02:06:17,360
अभी आपको बता रहे कि ये मंत्र है। अभी आप बता रहे सूक्त है। अभी मंत्र का बोला

1705
02:06:17,360 --> 02:06:21,440
तो मंत्र का दिखा नहीं रहे हो। अभी बता रहेगा वो अभी ये अपना जो क्यों

1706
02:06:21,440 --> 02:06:25,520
आए हैं भाई क्यों आए हो आप भाई पता नहीं क्यों आए हो आप आप ना

1707
02:06:25,520 --> 02:06:29,600
यहां से यू करवाने आए हो रामपाल वालों की ये

1708
02:06:29,600 --> 02:06:34,480
देखो जी ये देखो अथर्ववेद कहां है

1709
02:06:34,480 --> 02:06:38,560
आपने क्लेम किया भी आपने क्लेम किया अभी नीचे करिए

1710
02:06:38,560 --> 02:06:42,560
इसे नीचे करिए इस ग्रंथ को लिखने वाले ने उसमें अगर

1711
02:06:42,560 --> 02:06:47,200
अनुवाद लिख दिया सूक्त नहीं लिखा तो इसका मतलब ये हो गया कि अथर्ववेद

1712
02:06:47,200 --> 02:06:50,400
में सूक्त है ही नहीं

1713
02:06:50,400 --> 02:06:53,920
अथर्ववेद में सूक्त नहीं है।

1714
02:06:53,920 --> 02:06:58,080
खुद ही कह रहे थे अथर्ववेद में सूक्त नहीं है। आप कह रहे हैं अथर्ववेद में सूक्त नहीं है।

1715
02:06:58,080 --> 02:07:02,240
क्या बात करते हो आप? चौड़े में झूठ बोल रहे। मैंने सूक्त का बोला ही नहीं। जी।

1716
02:07:02,240 --> 02:07:06,560
अरे शैलेश जी क्यों झूठ बोल रहे हो? [हंसी] आपकी यार।

1717
02:07:06,560 --> 02:07:11,040
कितनी बेती करोगे आप? आपने उनको बोला नहीं कि ये सूक्त है नहीं। उन्होंने

1718
02:07:11,040 --> 02:07:15,120
बोला अनुवाद होता है। अथर्वेद में सूक्त नहीं होता। ये आपने बोला।

1719
02:07:15,120 --> 02:07:19,360
उन्होंने आपको से दिखाया पूरा उससे मैंने भी आपको सूक्त

1720
02:07:19,360 --> 02:07:23,440
दिखाया कि अथर्ववेद में सूक्त है आपके में छपा नहीं होगा आप अपनी बुक

1721
02:07:23,440 --> 02:07:27,440
दिखाओ कौन सी बुक से दिखाना दिखा दो अब आप छोड़ो वो सब अब आप ये

1722
02:07:27,440 --> 02:07:28,400
दिखा दो उसमें लिखा

1723
02:07:28,400 --> 02:07:32,640
क्या है ये बता दो मैं ढूंढ लूंगा इसमें कहा है वो दिखाओ चलो कोई बात नहीं

1724
02:07:32,640 --> 02:07:37,920
देखो इसमें लिखा है सर जी स्पष्ट लिखा हुआ है हाँ जी

1725
02:07:37,920 --> 02:07:42,080
अथर्ववेद कांड नंबर चार हा

1726
02:07:42,080 --> 02:07:46,480
अनुवाद नंबर एक मंत्र नंबर सात में लिखा हुआ है यो अथर्व

1727
02:07:46,480 --> 02:07:51,840
पितम देव बंधु बृहस्पति नम सा

1728
02:07:51,840 --> 02:07:56,400
विश्व जनता यथा यथा कबीर देवो

1729
02:07:56,400 --> 02:08:00,880
न दत स्वधावान

1730
02:08:00,880 --> 02:08:05,040
यानी जो जगत का पिता है जो अविनाशी है वो

1731
02:08:05,040 --> 02:08:09,120
जो है सबको मैं हूं

1732
02:08:09,120 --> 02:08:13,680
ना मैं थोड़ा विश्वास रखिए एक मिनट हां बोलिए

1733
02:08:13,680 --> 02:08:17,680
क्या लिखा है इसमें? वो कबीर देव है।

1734
02:08:17,680 --> 02:08:22,080
अबे यार भाई साहब मैंने आपसे पूछा था कि कबीर अगर अजर

1735
02:08:22,080 --> 02:08:26,320
अमर है तो वो बूढ़ा क्यों दिख रहा है? इस बारे में हमें प्रमाण

1736
02:08:26,320 --> 02:08:29,920
दीजिए।

1737
02:08:29,920 --> 02:08:34,000
भाई ये क्या चीज है? ऐसा प्रमाण दीजिए कि कबीर जो सफेद दाढ़ी वाले

1738
02:08:34,000 --> 02:08:38,640
दिख रहे हैं वो वो जो है बूढ़े नहीं है। वो जो है किशोर है।

1739
02:08:38,640 --> 02:08:42,800
एक बात बताइए आप इस इस श्लोक को सत्य मानते हो कि नहीं मानते वेद

1740
02:08:42,800 --> 02:08:47,280
वाले श्लोक को? मैं मानता हूं मगर वहां कबीर नहीं लिखा है।

1741
02:08:47,280 --> 02:08:51,360
अभी बात है। यहां पर देखो दिखा देता हूं। मेरी उंगली रखी

1742
02:08:51,360 --> 02:08:55,360
है। कबीर देव लिखा है। स्पष्ट है। आप छोड़े में झूठ बोल रहे हैं। ये कबीर देव लिखा है। ये देखो कबीर देव।

1743
02:08:55,360 --> 02:08:59,440
ये भेद है क्या? दिखाओ इसके कवर पे क्या लिखा है? कबीर

1744
02:08:59,440 --> 02:09:03,520
कवर पे क्या लिखा है? कौन सा वेद है दिखाओ दिखाओ

1745
02:09:03,520 --> 02:09:07,120
अरे कौन सा वेद है ये दिखाओ

1746
02:09:07,120 --> 02:09:11,680
कौन सा वेद है ये

1747
02:09:11,680 --> 02:09:17,040
लिखा है अरे कौन सा वेद है ये

1748
02:09:17,040 --> 02:09:22,880
ये कौन सा वेद है कौन सा है

1749
02:09:22,880 --> 02:09:27,200
कवर पेज आप कवर दिखाइए आप जो दिखा रहे हैं कवर दिखाइए

1750
02:09:27,200 --> 02:09:31,280
मेरी बात सुनिए आप जो दिखा रहे कवर दिखाइए।

1751
02:09:31,280 --> 02:09:35,360
आपको कवर भी दिखाया जाएगा। आपने जो किताब दिखाई उसका

1752
02:09:35,360 --> 02:09:39,520
कवर दिखाइए। आपको कवर भी दिखाया जाएगा। आपको सब

1753
02:09:39,520 --> 02:09:43,680
कुछ दिखाया जाएगा। नहीं नहीं आप पहले हमें पता तो चले वो कौन सा वेद दिखा

1754
02:09:43,680 --> 02:09:49,120
रहे हो आप दिखाओ? कवर दिखाओ उसका।

1755
02:09:49,120 --> 02:09:53,280
दिखाओ। शिवाजी ने आपको दिखा चुके है। अथर्ववेद की कवर दिखाया।

1756
02:09:53,280 --> 02:09:57,120
आप अपना कवर दिखाइए आप।

1757
02:09:57,120 --> 02:10:01,360
शिवाजी ने कितना क्लियर दिखाया है।

1758
02:10:01,360 --> 02:10:05,360
कवर नहीं आएगा। ये लो नहीं दिखाया जाएगा। ये लो मैं

1759
02:10:05,360 --> 02:10:09,920
दिखा रहा हूं एक प्रमाण। ये देखो ये क्या लिखा है?

1760
02:10:09,920 --> 02:10:14,480
क्या लिखा है? दिख रहा है क्या?

1761
02:10:14,480 --> 02:10:20,140
कबीर भगवान नहीं है। दिख गया कि इसमें मिलावट करोगे।

1762
02:10:20,140 --> 02:10:26,140
[हंसी] मान लो अब इस बात को। मैंने लिख दिया इसको। मान लो।

1763
02:10:26,720 --> 02:10:30,800
कैसे मान ले इस बात को? क्यों? तुम

1764
02:10:30,800 --> 02:10:35,520
भी तो अपनी मन की किताब दिखा रहे हो छपी हुई। हमें अथर्ववेद दिखाओ ना।

1765
02:10:35,520 --> 02:10:39,920
ये बात सही है। ये बात सही है। तुम मन की दिखा रहे हो। अथर्ववेद

1766
02:10:39,920 --> 02:10:42,560
दिखाओ।

1767
02:10:42,560 --> 02:10:46,640
नहीं तो इसको मान लो। इसको मान लो। लिख दिया।

1768
02:10:46,640 --> 02:10:50,640
ये लो। जो लोग झूठ बोलते हैं ना

1769
02:10:50,640 --> 02:10:54,640
वो आपको आप आए बहुत अच्छा लगा। बहुत बढ़िया है।

1770
02:10:54,640 --> 02:10:58,640
हमें समझ में आ गया। आपके पास कोई प्रमाण है नहीं। आपको यही सब बकवास

1771
02:10:58,640 --> 02:11:02,640
करनी है यहां पर आ के। इन्होंने कुछ नहीं। अपनी बेज्जती करवाने आना सर और कुछ नहीं

1772
02:11:02,640 --> 02:11:04,160
है।

1773
02:11:04,160 --> 02:11:08,240
आपसे मैं पूछ रहा हूं। आपसे मैं पूछ रहा हूं। आपसे मैं पूछ रहा

1774
02:11:08,240 --> 02:11:12,400
हूं कि आप अथर्ववेद दिखाइए। तो आप मुझे

1775
02:11:12,400 --> 02:11:16,560
अपनी छपाई हुई कोई किताब दिखा रहे हैं। हम वो किताब क्यों मान ले?

1776
02:11:16,560 --> 02:11:20,640
अगर आपको हमें वो बनाना है तो आप ये क्यों नहीं मानोगे? ये क्यों

1777
02:11:20,640 --> 02:11:24,640
नहीं मानोगे? इसको अभी कंप्यूटर से कंप्यूटर से प्रिंट प्रिंट करा

1778
02:11:24,640 --> 02:11:28,720
के दे दूं। सर वाली बात सूक्त वाली बात

1779
02:11:28,720 --> 02:11:32,960
देखो कैसे झूठ बोल दिया एक सेकंड में पहले खुद ही बोल रहे कि सूक्त वो कह रहे नहीं होते

1780
02:11:32,960 --> 02:11:38,080
फिर कहते होते हैं आपके ऊपर डाल रहे हैं उल्टा हद हो गिर गई

1781
02:11:38,080 --> 02:11:42,240
अरे गुरु बृहस्पति थे बृहस्पति सूत्र

1782
02:11:42,240 --> 02:11:46,320
है ये गुरु बृहस्पति की बात हो रही है नहीं है इसमें ऋग्वेद

1783
02:11:46,320 --> 02:11:50,320
में सूत्र इसमें अथर्व में सूत्र नहीं है अथर्ववेद

1784
02:11:50,320 --> 02:11:54,480
में भैया पहले आप अपनी जानकारी थोड़ी क्लियर कर लो।

1785
02:11:54,480 --> 02:11:58,560
आपके अंदर गुस्सा इतना आ रहा है मेरे ऊपर कि आपका जो

1786
02:11:58,560 --> 02:12:02,720
आपका जो मानसिक स्तर है वो हिल हिल गया है। आप ठीक से समझ

1787
02:12:02,720 --> 02:12:07,120
में नहीं पा रहे मैं क्या बोल रहा हूं क्या नहीं बोल रहा हूं। बोल के भूल जा रहे हैं।

1788
02:12:07,120 --> 02:12:11,360
ये जो चल रही है ना इसको रिवाइंड करके आपने बोला अथर्ववेद

1789
02:12:11,360 --> 02:12:15,440
में अनुवाद मैंने कहा अनुवाद नहीं आप मुझे सूक्त बता दीजिए। आपने कहा

1790
02:12:15,440 --> 02:12:19,200
अथर्ववेद में सूक्त होता ही नहीं है। फिर मैंने आपको सूक्त दिखा दिया।

1791
02:12:19,200 --> 02:12:23,600
फिर आप बोल रहे हो कि मैंने तो कहा ही नहीं कि सूक्त नहीं है होता है। बीच-बीच

1792
02:12:23,600 --> 02:12:27,680
में अथर्ववेद की बजाय ऋग्वेद में पहुंच जा रहे हो। अब मैंने आपसे कहा कि आप मुझे

1793
02:12:27,680 --> 02:12:32,720
वेद दिखा दीजिए जहां लिखा है कबीर देव का मतलब कबीर देव।

1794
02:12:32,720 --> 02:12:36,720
तो आप जो है अपनी छापी हुई किताब दिखा रहे हो। अगर आपकी छापी हुई किताब मान

1795
02:12:36,720 --> 02:12:42,000
लेनी होती तो हम यहां आकर के आपसे माथा पच्ची क्यों कर रहे होते?

1796
02:12:42,000 --> 02:12:46,000
अगर आपकी छापी हुई किताबें मान लेनी होती। ये जो

1797
02:12:46,000 --> 02:12:50,240
ये जो ज्ञान गंगा इत्यादि है ये अगर मान लेनी होती अगर हमें

1798
02:12:50,240 --> 02:12:54,560
तो हम बैठ के आपसे अपना माथा क्यों फोड़ते नंबर

1799
02:12:54,560 --> 02:12:56,880
एक

1800
02:12:56,880 --> 02:13:01,120
ऋग्वेद में इसमें सूत्र नहीं है एक मंत्र नंबर सात

1801
02:13:01,120 --> 02:13:05,120
सूक्त नहीं है इसमें ऋग्वेद में सूत्र इसमें सूत्र नहीं है

1802
02:13:05,120 --> 02:13:10,160
ये देख लो अथर्ववेद में सूक्त नहीं है जी

1803
02:13:10,160 --> 02:13:14,160
आपका चित्र चल रहा है भैया हेलो ये आपका चित्र चल रहा

1804
02:13:14,160 --> 02:13:18,880
है दोबारा सुना दो इनको। अथर्ववेद में सूत्र नहीं है। आप यहां झूठ बोल रहे जी

1805
02:13:18,880 --> 02:13:23,040
सूत्र नहीं है। फिर सुनाओ। अथर्ववेद में सूत्र नहीं है। आप यहां झूठ

1806
02:13:23,040 --> 02:13:27,120
बोल रहे जी। सूत्र नहीं है। हां भैया। अथर्ववेद में

1807
02:13:27,120 --> 02:13:32,050
सूत्र बस करो बस करो। ठीक है। हां

1808
02:13:32,050 --> 02:13:34,240
[हंसी] नारायण। अब बाद

1809
02:13:34,240 --> 02:13:38,400
में बोलना। मैंने कब बोला? ऐसा लगता है कि

1810
02:13:38,400 --> 02:13:42,560
क्रोध में आप क्रोध ने आपकी बुद्धि हर ली है और

1811
02:13:42,560 --> 02:13:47,200
उसका नुकसान आप ही को हो रहा है। यहां पर आ के जो ये सब होंगी ना आपसे गलतियां

1812
02:13:47,200 --> 02:13:51,200
उसका बहुत गलत मैसेज जाएगा आपके लोगों के बीच में। सोच

1813
02:13:51,200 --> 02:13:56,720
समझ के करो जो काम करना है। इस समय आपको दुनिया देख रही है।

1814
02:13:56,720 --> 02:14:00,800
दुनिया दुनिया देख रही है। कोई दिक्कत नहीं। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] हम

1815
02:14:00,800 --> 02:14:04,800
कोई भी मतलब कोई भी ऐसी कोई भी ऐसी बात नहीं

1816
02:14:04,800 --> 02:14:08,880
बोलते संत रामपाल जी महाराज के शिष्य कोई भी ऐसी बात नहीं बोलते हैं जिससे कि

1817
02:14:08,880 --> 02:14:13,200
किसी को कोई परेशानी हो ठीक है जी और रही उसकी बात आप क्योंकि

1818
02:14:13,200 --> 02:14:17,600
आपको कोई चीज अगर दिखाते हैं तो आप संत रामपाल जी महाराज वाले

1819
02:14:17,600 --> 02:14:20,960
भाई साहब हमें आपकी गाथा नहीं सुननी हमको ये बता दो कि

1820
02:14:20,960 --> 02:14:24,960
जो कबीर का फोटो आप लोग दिखा रहे हो वो बूढ़ा कबीर है या

1821
02:14:24,960 --> 02:14:29,360
जवान कबीर है बस इतना दिखा दो इतना बता दो देखो जी कबीर

1822
02:14:29,360 --> 02:14:33,440
साहिब जी जो है वो सदा युवा अवस्था में रहते हैं। वो बूढ़े नहीं है। यानी

1823
02:14:33,440 --> 02:14:37,440
कि ये जो सफेद दाढ़ी दिख रही है जो बुढ़ापा दिख रहा है वो हम लोगों को गलत दिख

1824
02:14:37,440 --> 02:14:41,600
रहा है। वो जवान ही है। ऐसा ही होता है जवान व्यक्ति। अब हम उसी

1825
02:14:41,600 --> 02:14:45,600
बात का हम आपको जवाब देंगे जो हमारे पूज्य गुरुदेव ने दिया है। ये बताओ मैं

1826
02:14:45,600 --> 02:14:49,600
मैं बालक हूं, शिशु हूं या मैं जवान हूं या अधेड़ हूं या बूढ़ा

1827
02:14:49,600 --> 02:14:53,840
हूं? क्या हूं मैं? ये हमारे जो पूज्य गुरुदेव जी संत रामपाल

1828
02:14:53,840 --> 02:14:58,640
जी महाराज अब तुम्हें वही जवाब हम देंगे परमात्मा जी ने हमें बताया है

1829
02:14:58,640 --> 02:15:02,800
जो परमात्मा है भाई साहब उन्होंने क्या बताया वो

1830
02:15:02,800 --> 02:15:06,960
मत बताइए अभी पहले मैं आपसे पक्का कर रहा हूं कि मैं आपकी नजरों

1831
02:15:06,960 --> 02:15:11,760
में बूढ़ा हूं जवान हूं बच्चा हूं बालक हूं क्या हूं बताइए ना

1832
02:15:11,760 --> 02:15:15,840
इनमें से कोई भी नहीं है आप आपको मोतियाबिंद है यही प्रश्न

1833
02:15:15,840 --> 02:15:21,760
मैं आपसे कर रहा हूं अभी तुम्हारी नजरों में मैं कैसा हूं आप अधेड़

1834
02:15:21,760 --> 02:15:24,710
तो आप भी अधे

1835
02:15:24,710 --> 02:15:27,680
[हंसी]

1836
02:15:27,680 --> 02:15:31,920
ये देख लो ज्ञान गंगा का चित्र। अब ये भी कह दो ये भी हमने

1837
02:15:31,920 --> 02:15:36,000
बनाया है। तो उससे क्या दिक्कत है जी? अरे

1838
02:15:36,000 --> 02:15:40,000
भाई आपने जब हमने सबसे पहले आपको ये दिखाया था तो आपने कह दिया था ये तो आपका

1839
02:15:40,000 --> 02:15:44,480
बनाया हुआ चित्र है। यानी आप जी ने एक बूढ़े

1840
02:15:44,480 --> 02:15:48,720
एक सफेद नाड़ी होने वाले को बूढ़े की उपमा दे दी आप जी ने।

1841
02:15:48,720 --> 02:15:53,360
मतलब कि ये बूढ़े नहीं है ना ये जवान है ना

1842
02:15:53,360 --> 02:15:57,600
बिल्कुल जवान है जी देख लिया भैया देख लो सब लोग

1843
02:15:57,600 --> 02:16:01,760
जो कबीर जी की सफेद दाढ़ी है वो बूढ़े नहीं है अच्छा मैं अधेड़

1844
02:16:01,760 --> 02:16:04,800
हूं मैं कौन हूं

1845
02:16:04,800 --> 02:16:08,800
अरे अधेड़े हूं ये तो आप ही ने

1846
02:16:08,800 --> 02:16:12,800
कहा अधेड़ हूं ये तो आपने मैंने आपने

1847
02:16:12,800 --> 02:16:18,080
मुझसे पूछा मैं कौन हूं तो मैंने आपको बताया आप अधेड़े हैं तो आपने कहा आप भी अधेड़ हो

1848
02:16:18,080 --> 02:16:22,240
नहीं आप अपना दोबारा से रिपीट करो वो। आपने मेरे से पूछा कि आप कौन? मैं कौन

1849
02:16:22,240 --> 02:16:26,480
हूं? मैंने बोला आप ही बताइए। आपने बोला मैं अधेर हूं। ये

1850
02:16:26,480 --> 02:16:30,800
से पैदल व्यक्ति है क्या भैया? इसको जल्दी हटाओ। जल्दी हटाओ भैया। बहुत-बत धन्यवाद

1851
02:16:30,800 --> 02:16:34,960
आपका आने का। हटाओ भैया जल्दी। ये अपनी कही हुई बातें ही भूल

1852
02:16:34,960 --> 02:16:39,280
जा रहा है। इसे कौन सर मारेगा? सर ये आमिर

1853
02:16:39,280 --> 02:16:43,040
खान बन गए। वो कौन सी पिक्चर थी वो जिसमें 15 मिनट बाद बोल दे।

1854
02:16:43,040 --> 02:16:47,040
गजनी गजनी [हंसी] ये अपनी कई बातें ही भूल

1855
02:16:47,040 --> 02:16:51,040
जा रहे हैं भैया। जब उन्हें जब आपने पूछा ना कि

1856
02:16:51,040 --> 02:16:55,040
मैं कौन हूं? तो आप कौन है? वो मैं उत्तर आपको देता हूं। आप वो

1857
02:16:55,040 --> 02:16:59,360
हैं जो बाबा रामपाल आपको कहेंगे [हंसी] और यही आपकी एक मात्र पहचान

1858
02:16:59,360 --> 02:17:03,440
है। अगर बाबा ने कह दिया कि आप शिशु हो

1859
02:17:03,440 --> 02:17:09,040
छह महीने के तो आपको शिशु बनना पड़ेगा।

1860
02:17:09,040 --> 02:17:13,040
अपनी आंखों में पट्टी ना बांध ले और बाबा सब

1861
02:17:13,040 --> 02:17:16,720
झूठ बोलता है। सब ठीक कर देगा।

1862
02:17:16,720 --> 02:17:20,960
[हंसी] पर मैं आपको एक बात कहता हूं हो सकता है जितने ये

1863
02:17:20,960 --> 02:17:25,040
गिरोह में जुड़ चुके हैं ना इनकी वापसी हो या ना हो उसकी मैं

1864
02:17:25,040 --> 02:17:29,280
जिम्मेदारी नहीं दे सकता। लेकिन जो आने वाले हैं ना वो इन लाइव्स

1865
02:17:29,280 --> 02:17:33,360
को देखकर 100% तर्क के अनुसार सत्य के

1866
02:17:33,360 --> 02:17:37,440
अनुसार सोचने की कोशिश करेंगे क्योंकि वो सब कुछ देख रहे हैं जो स्क्रीन

1867
02:17:37,440 --> 02:17:38,000
पर चल रहा

1868
02:17:38,000 --> 02:17:42,240
है। इनको दिखाइए भैया आप देखिए कि आपने

1869
02:17:42,240 --> 02:17:46,850
क्या बोला था बूढ़े वाली बात पे बूढ़े वाली बात दिखा दीजिए इनको जरा

1870
02:17:46,850 --> 02:17:52,090
[हंसी] मैंने पूछा था इनको इनको सबूत दिखाना पड़ेगा बार-बार

1871
02:17:52,090 --> 02:17:56,240
[हंसी] बनाया हुआ चित्र कौन सा है चित्र बूढ़े क्यों दिख

1872
02:17:56,240 --> 02:18:00,640
रहे हैं ये ये तुम्हारा बनाया हुआ चित्र है जी

1873
02:18:00,640 --> 02:18:05,360
ये आप जी का बनाया हुआ चित्र पहुंचो अभी अभीभी जो इन्होंने मुझको

1874
02:18:05,360 --> 02:18:11,360
कहा था ना जब मैंने लिखा दो रुको इनके

1875
02:18:13,760 --> 02:18:18,080
चित्र है जी ये आप जी का बनाया हुआ चित्र ये

1876
02:18:18,080 --> 02:18:23,840
तुम्हारा बनाया हुआ चित्र है ये आप जी का बनाया हुआ चित्र है

1877
02:18:23,840 --> 02:18:28,080
और आगे चलिए तो आपका बनाया हुआ चित्र कौन

1878
02:18:28,080 --> 02:18:30,960
सा है? आपकी थंबनेल

1879
02:18:30,960 --> 02:18:34,960
दिखा दो। रुको इनके वीडियोस में रामपाल दास जी के वीडियोस

1880
02:18:34,960 --> 02:18:37,600
में थंबनेल दिखाओ जिसमें कबीर हूं। दिखाओ

1881
02:18:37,600 --> 02:18:42,240
और आगे और आगे ऑपरेटर जी और आगे

1882
02:18:42,240 --> 02:18:46,560
ये तो हमने नहीं लगाया। नहीं ये नहीं लगाया है।

1883
02:18:46,560 --> 02:18:50,560
और आगे और आगे। पहले चित्र दिखा दिया आपकी सामग्री से। अब आप कह रहे हैं

1884
02:18:50,560 --> 02:18:54,640
कि आपसे दिखाना चाह रहे हैं। अभी अगर टाइम चल रहा हो तो 1

1885
02:18:54,640 --> 02:18:58,800
मिनट पहले पहुंच जाइए। अभी जो टाइम चल रहा है उससे 9 मिनट पहले पहुंच जाइए

1886
02:18:58,800 --> 02:19:04,800
आप। दो 10 पे पहुंचिए।

1887
02:19:09,040 --> 02:19:13,360
कहा कि ये तो मजबूत कर रखी है। आपको

1888
02:19:13,360 --> 02:19:19,360
दिख रहे हैं।

1889
02:19:19,520 --> 02:19:24,560
मंदिरों में वो भी हमारी और आगे और आगे चलिए

1890
02:19:24,560 --> 02:19:27,920
और आगे चलिए

1891
02:19:27,920 --> 02:19:32,960
भाई साहब आप जो बोलने जा रहे हैं

1892
02:19:32,960 --> 02:19:38,960
और आगे और आगे और आगे

1893
02:19:45,680 --> 02:19:50,080
और आगे प्ले करिए यही तो समस्या है आप शास्त्र की

1894
02:19:50,080 --> 02:19:54,080
यही तो समस्या है आप शास्त्र की बात करते हो और आगे अरे वो

1895
02:19:54,080 --> 02:19:58,400
अथर्ववेद का निकल गया पार्ट वो निकाल दीजिए अथर्ववेद का पार्ट अथर्ववेद आएगा

1896
02:19:58,400 --> 02:20:02,400
हम लोग बात करेंगे अथर्ववेद दिखा भी देंगे उसके बाद जो बात हुई है वहां

1897
02:20:02,400 --> 02:20:07,600
पे पहुंचना है लास्ट में जाइए लास्ट में

1898
02:20:07,600 --> 02:20:13,600
लास्ट से बस थोड़ा सा पहले जाना है बस

1899
02:20:13,600 --> 02:20:17,760
बिल्कुल अब रामपाल वाले कहेंगे कि शिवश जब हारने

1900
02:20:17,760 --> 02:20:21,760
लगते हैं तो हटा देते हैं। पागलों से अपना अरे

1901
02:20:21,760 --> 02:20:25,840
यह दिखाना है यह दिखाना है हमको कि

1902
02:20:25,840 --> 02:20:30,240
इन्होंने जब इन्होंने मैंने पूछा था कि मैं आपको क्या लग रहा हूं बूढ़ा

1903
02:20:30,240 --> 02:20:34,400
जवान बालक तो इन्होंने कहा था आपको मैं क्या लग रहा हूं? तो मैंने कहा आप अधेड़

1904
02:20:34,400 --> 02:20:38,400
लग रहे हैं। आप अधेड़ हैं। तो इन्होंने कहा था कि तो आप भी

1905
02:20:38,400 --> 02:20:42,480
अधेड़े हैं। तो इन्होंने ये कहा था ये दिखाना है इनको। सर उनको ना अधेड़ का

1906
02:20:42,480 --> 02:20:48,080
मतलब नहीं पता। वेद का नाम ले बता रहा हूं जी बता रहा हूं

1907
02:20:48,080 --> 02:20:52,160
आपके सर पे और आगे है और आगे बहुत आगे है बहुत आगे सर

1908
02:20:52,160 --> 02:20:56,560
मुझे लग रहा है उनको नहीं पता था निकाल लिया अनुवाद

1909
02:20:56,560 --> 02:21:00,640
नंबर एक और आगे नहीं ये पूरा निकल जाएगा अथर्ववेद वाला मामला पूरा निकल

1910
02:21:00,640 --> 02:21:01,360
जाएगा वो है

1911
02:21:01,360 --> 02:21:05,600
बूढ़े नहीं है वो जो है किशोर है एक बात बताइए

1912
02:21:05,600 --> 02:21:07,920
आप इस श्लोक को सत्य मानते हो कि

1913
02:21:07,920 --> 02:21:12,320
नहीं मानते दिखाइए आप और आगे और आगे और आगे

1914
02:21:12,320 --> 02:21:16,320
नमस्कार अरे भैया पहले अपनी जानकारी थोड़ी क्लियर कर

1915
02:21:16,320 --> 02:21:20,320
लो आपके अंदर आ रहे हो छपी हुई अबे अथर्व ये कबीर

1916
02:21:20,320 --> 02:21:23,360
देव लिखा है ये देखो कबीर

1917
02:21:23,360 --> 02:21:28,560
ये कौन सा वेद है कौन सा है

1918
02:21:28,560 --> 02:21:30,960
और आगे

1919
02:21:30,960 --> 02:21:36,760
कवर पे दिखा रहे हो आप

1920
02:21:36,760 --> 02:21:40,880
[हंसी] सही है ये बात सही है मन की दिखा

1921
02:21:40,880 --> 02:21:44,240
रहे हो अथर्ववेद

1922
02:21:44,240 --> 02:21:44,740
अरे

1923
02:21:44,480 --> 02:21:48,560
भैया आपको आप आए बहुत अच्छा लगा बहुत बढ़िया है हमें समझ में आ गया आपके

1924
02:21:48,560 --> 02:21:51,600
पास कोई प्रमाण

1925
02:21:51,600 --> 02:21:55,600
और आगे और आगे क्यों इसको मान लो आ गया

1926
02:21:55,600 --> 02:21:59,920
आपके पास कोई प्रमाण है नहीं और आगे

1927
02:21:59,920 --> 02:22:04,640
अपनी जान का जो आपका जो मानसिक स्तर है वो

1928
02:22:04,640 --> 02:22:08,480
मैं पहले खुद ही और आगे तुम

1929
02:22:08,480 --> 02:22:14,480
भी तो अपनी मन की किताब दिखा रहे हो छपी हुई हमें अथर्ववेद दिखाओ

1930
02:22:16,640 --> 02:22:21,040
शिवा जी ने आपको कितना क्लियर दिखा जाएगा आपको सब कुछ दिखा

1931
02:22:21,040 --> 02:22:25,200
कौन सा ये और आगे कौन सा

1932
02:22:25,200 --> 02:22:28,560
वेद है ये

1933
02:22:28,560 --> 02:22:34,560
ये कवरदेव लिखता है अरे कौन और आगे

1934
02:22:35,600 --> 02:22:39,680
क्या हुआ नहीं दिखा पा रहे चलिए छोड़िए देर लग

1935
02:22:39,680 --> 02:22:42,080
रही है

1936
02:22:42,080 --> 02:22:45,520
चलो बाद में देख लेंगे भैया सुनिए शैलेश जी आपका कुछ

1937
02:22:45,520 --> 02:22:51,520
दिमाग ठंडा हुआ तो आपको ले लें क्या ऊपर

1938
02:22:54,400 --> 02:22:58,480
देखिए शैलेश जी आपने जब मैंने आपसे ये पूछा था

1939
02:22:58,480 --> 02:23:03,120
कि मैं बूढ़ा हूं जवान हूं अधेड़ हूं

1940
02:23:03,120 --> 02:23:07,200
किशोर हूं बालक हूं या शिशु हूं तो आपने मुझसे कहा कि मैं

1941
02:23:07,200 --> 02:23:11,200
कौन हूं आपने अपने बारे में पूछा तो मैंने कहा भाई आप अधेड़ हो तो आपने

1942
02:23:11,200 --> 02:23:15,520
कहा तो आप भी अधेड़ हो। यह बात हुई थी। मैंने अपने को अधेड़ नहीं कहा था।

1943
02:23:15,520 --> 02:23:20,080
ठीक है? अब दूसरी बात यह आती है कि सफेद बाल वाला

1944
02:23:20,080 --> 02:23:24,400
और जो अच्छे से बुढ़ापा दिख रहा है बाकी सामान्य सब जनों को दिख रहा है।

1945
02:23:24,400 --> 02:23:28,480
आपका कहना है कि वो क्या कहते हैं? वो जो है जवान है।

1946
02:23:28,480 --> 02:23:34,160
ठीक है। वो जवान है ना?

1947
02:23:34,160 --> 02:23:38,160
बताइए आप सुनाइए। मैं आपकी सुन रहा हूं। आपका कहना है वो

1948
02:23:38,160 --> 02:23:43,440
बूढ़े नहीं दिख रहे हैं। वो जवान दिख रहे हैं।

1949
02:23:43,440 --> 02:23:47,440
जी जी वो जवान दिख रहे हैं। अच्छा तो अब जो

1950
02:23:47,440 --> 02:23:51,440
मैं दिख रहा हूं मैं क्या दिख रहा हूं आपको?

1951
02:23:51,440 --> 02:23:57,440
जब वो जवान है तो मैं तो दूध पीता बच्चा हऊंगा फिर उनके आगे।

1952
02:23:58,480 --> 02:24:02,480
ये आप इस डिबेट से क्या शो करना चाहते हो? यह शो

1953
02:24:02,480 --> 02:24:07,040
करना चाहता हूं कि कबीर दास जी अजर नहीं है। अजर नहीं थे।

1954
02:24:07,040 --> 02:24:11,040
वह मनुष्य रूप में आए थे और उन्होंने राम की भक्ति करके

1955
02:24:11,040 --> 02:24:17,040
अपना भगवत भक्ति में जीवन गुजारा था। कौन से राम की?

1956
02:24:18,080 --> 02:24:22,400
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम।

1957
02:24:22,400 --> 02:24:26,720
पहले यह बताएं कि वो अजर है कि नहीं है। अजर अजर अजर अजर

1958
02:24:26,720 --> 02:24:31,520
इसको मत छोड़ो। अजरता को मत छोड़ो। फिर दूसरे विषय पर जाएंगे।

1959
02:24:31,520 --> 02:24:35,680
ठीक है हम शिवशी

1960
02:24:35,680 --> 02:24:40,080
जी हां जी

1961
02:24:40,080 --> 02:24:44,720
चारों वेदों में प्रमाण है कि कबीर साहब जो है

1962
02:24:44,720 --> 02:24:48,960
वो अजर अमर अविनाशी परमात्मा है। मैंने

1963
02:24:48,960 --> 02:24:53,040
आपसे एक सवाल किया है भाई साहब कि अगर वो सफेद दाढ़ी वाला

1964
02:24:53,040 --> 02:24:58,240
व्यक्ति भी आपको बूढ़ा नहीं दिख रहा है तो मैं क्या हूं?

1965
02:24:58,240 --> 02:25:02,240
मैं आपको क्या दिख रहा हूं?

1966
02:25:02,240 --> 02:25:07,040
यह तो आप बिल्कुल बालकों जैसी बातें करते हैं शिवशी जी

1967
02:25:07,040 --> 02:25:11,200
अगर कोई समझदार व्यक्ति इस डिबेट को देख रहा होगा ना तो

1968
02:25:11,200 --> 02:25:15,520
उसको हंसी आएगी आपके इस प्रश्न को सुनके भाई साहब हंस रहे हैं

1969
02:25:15,520 --> 02:25:20,080
आप पहले तो ये बताइए आप जैसेडी हंस रहे हैं आप और हजा

1970
02:25:20,080 --> 02:25:24,160
आनंद आएगा लोगों को आपसे जो सवाल पूछा है वो

1971
02:25:24,160 --> 02:25:28,640
बताइए अगर वो जो हम लोगों हम सब लोगों को मोतियाबंद

1972
02:25:28,640 --> 02:25:32,800
है वो व्यक्ति आपको जवान दिख रहा है तो कंपेरेटिवली

1973
02:25:32,800 --> 02:25:37,120
टू हिम मैं आपको क्या दिख रहा हूं वो बताइए मैं मेरी अवस्था

1974
02:25:37,120 --> 02:25:41,200
क्या है शरीर की आप ये बताइए आपका ये जो डिबेट

1975
02:25:41,200 --> 02:25:45,440
चल रहा है इस डिबेट के अंदर ये जैसे हमारे हमारे

1976
02:25:45,440 --> 02:25:50,480
और भी भाई बैठे हुए हैं जैसे गोविंद जी हैं

1977
02:25:50,480 --> 02:25:54,720
और भी है भाई ये मयंक जी हैं पंडित जी है कोई ये तो

1978
02:25:54,720 --> 02:25:58,960
आप मतलब जैसे मैंने देखा है न्यूज़ चैनल पर जैसे डिबेट

1979
02:25:58,960 --> 02:26:04,320
होता है तो उसके अंदर एक जो एडिटर होते हैं जो

1980
02:26:04,320 --> 02:26:10,320
प्रवचन आपकी व्याख्या आपकी समीक्षा

1981
02:26:11,040 --> 02:26:15,040
अगर कबीर जिसकी सफेद दाढ़ी है इतनी बड़ी-बड़ी

1982
02:26:15,040 --> 02:26:19,200
वो आपको बूढ़ा नहीं दिख रहा है तो मैं आपको क्या दिख रहा हूं

1983
02:26:19,200 --> 02:26:23,360
मैं आपको क्या दिख रहा हूं किसका रोल अदा कर रहे हो मैं आपको क्या

1984
02:26:23,360 --> 02:26:29,360
दिख रहा हूं मैं आपको क्या दिख रहा हूं

1985
02:26:29,680 --> 02:26:34,960
मैं आपको क्या दिख रहा हूं? हिंदी समझ में आती है आपको?

1986
02:26:34,960 --> 02:26:39,920
मैं आपको क्या दिख रहा हूं?

1987
02:26:39,920 --> 02:26:43,920
मेरे को आप हमारे जैसे एक सज्जन पुरुष दिख रहे हो मानव। भाई

1988
02:26:43,920 --> 02:26:47,920
साहब मैं शरीर की अवस्था की बात पूछ रहा हूं। मैं शरीर

1989
02:26:47,920 --> 02:26:51,920
की अवस्था की बात पूछ रहा हूं। मैं शरीर की अवस्था की बात

1990
02:26:51,920 --> 02:26:56,000
पूछ रहा हूं। मैं बालक दिख रहा हूं। शिशु

1991
02:26:56,000 --> 02:27:00,560
दिख रहा हूं। मैं बालक दिख रहा हूं, शिशु दिख रहा हूं।

1992
02:27:00,560 --> 02:27:06,160
युवा दिख रहा हूं, अधेड़ दिख रहा हूं या वृद्ध दिख रहा हूं?

1993
02:27:06,160 --> 02:27:10,320
शिशु, बालक, किशोर, युवा, अधेड़, वृद्ध कौन

1994
02:27:10,320 --> 02:27:15,920
सी स्टेज है मेरे शरीर की? आपको आप जो मुझे देख रहे हैं।

1995
02:27:15,920 --> 02:27:20,160
आवाज कट रहा है जी आवाज। आवाज ठीक है, शैलेश

1996
02:27:20,160 --> 02:27:24,320
जी, ठीक है। काफी देर आपसे बातचीत हुई। हमने आपको सुना और

1997
02:27:24,320 --> 02:27:26,080
कोई कोई नहीं वो ठीक है

1998
02:27:26,080 --> 02:27:30,240
वो जनता ने देख लिया वो समझ लेंगे जो भी है आप आया ठीक है फिर कभी

1999
02:27:30,240 --> 02:27:34,400
आइएगा नहीं ऐसा है जी सुनो हां

2000
02:27:34,400 --> 02:27:40,320
बोलिए सुनो आप जो कहते है ना संत रामपाल जी महाराज के जो फॉलोअ

2001
02:27:40,320 --> 02:27:44,320
भाई साहब एक साथ बहुत सारे विषयों को खोल देंगे

2002
02:27:44,320 --> 02:27:48,480
तो कोई भी विषय में निष्कर्ष नहीं आएगा अभी अभी विषय चल

2003
02:27:48,480 --> 02:27:52,960
रहा है कि यदि आप अजर अजर वाला विषय चल रहा है।

2004
02:27:52,960 --> 02:27:57,280
आपने कहा कि वो जो सफेद दाढ़ी वाले महापुरुष हैं कबीर दास जी

2005
02:27:57,280 --> 02:28:01,360
वो जो है आपको जवान दिख रहे हैं। अगर वह जवान है तो

2006
02:28:01,360 --> 02:28:05,360
मैं जवान मेरे शरीर का स्तर क्या है? आपकी नजरों

2007
02:28:05,360 --> 02:28:09,520
में और आपके शरीर का स्तर क्या है? क्या उनसे आप ज्यादा जवान

2008
02:28:09,520 --> 02:28:13,520
है? आप अपने बारे में बताएं। क्या आप उनसे ज्यादा जवान है? और फिर

2009
02:28:13,520 --> 02:28:17,760
मेरे बारे में बताएं। मेरे शरीर की अवस्था क्या है? मैं दूध मुआ

2010
02:28:17,760 --> 02:28:21,920
शिशु हूं या फिर वो जो 14 15 16 साल का जो किशोरावस्था

2011
02:28:21,920 --> 02:28:27,040
होती है वो हूं या फिर युवा हूं या अधेड़ हूं क्या दिख रहा हूं मैं आपको

2012
02:28:27,040 --> 02:28:31,200
या हो सकता है मैं आपको बूढ़ा भी दिख रहा हूं तो वो भी बता दीजिएगा आप

2013
02:28:31,200 --> 02:28:35,360
जी के प्रश्न के हिसाब से आपका डिबेट आगे नहीं बढ़ सकता

2014
02:28:35,360 --> 02:28:39,600
क्योंकि आपका प्रश्न ही ऐसा यह है कि सत्य को स्वीकार

2015
02:28:39,600 --> 02:28:41,200
करने में दिक्कत आती

2016
02:28:41,200 --> 02:28:45,520
है। यह दिक्कत है। प्रॉब्लम

2017
02:28:45,520 --> 02:28:49,520
यह है कबीर को बूढ़ा कैसे कहे और शिवश

2018
02:28:49,520 --> 02:28:54,640
को जो है बच्चा कैसे कहे यह

2019
02:28:54,640 --> 02:28:58,720
कबीर को कैसे अगर कबीर बूढ़ा नहीं है कबीर

2020
02:28:58,720 --> 02:29:02,640
युवा है तो फिर शिवश को बालक कैसे कहे प्रॉब्लम

2021
02:29:02,640 --> 02:29:06,960
है जो आप लोग जी आप लोग जी अपनी अज्ञानता के बस

2022
02:29:06,960 --> 02:29:10,960
में भाई साहब हम आपसे अपनी समीक्षा करवाने के लिए नहीं

2023
02:29:10,960 --> 02:29:14,960
बैठे हैं हम आपसे अपनी समीक्षा करवाने

2024
02:29:14,960 --> 02:29:18,400
के लिए नहीं बैठे हैं।

2025
02:29:18,400 --> 02:29:22,400
हमने आपसे भाई साहब ने पूछा है कि कबीर दास

2026
02:29:22,400 --> 02:29:26,560
जी जो है अच्छा ठीक है दूसरा प्रश्न ले

2027
02:29:26,560 --> 02:29:32,160
लेते हैं। इसी प्रश्न पे नहीं अटकते हैं। दूसरा प्रश्न करते हैं। चलो जी जी

2028
02:29:32,160 --> 02:29:36,400
हां आप एक बात कहते हैं। एक चीज मैं पहले

2029
02:29:36,400 --> 02:29:40,720
एक चीज बोलना चाहूंगा। हां जी बोल दीजिए। यह

2030
02:29:40,720 --> 02:29:44,720
क्या था कि अभी एक हमारे भाई आए थे तो आपने एक जो हमारे पूज्य

2031
02:29:44,720 --> 02:29:48,800
गुरुदेव जी ने एक शब्द बोला है कि कुत्ता हूं गुरुदेव

2032
02:29:48,800 --> 02:29:52,800
का रामपाल दास का नाम ऐसा कुछ शब्द बोला है सतगुरुदेव जी ने तो आप जी

2033
02:29:52,800 --> 02:29:56,800
ने उसको ही बहुत ज्यादा इस तरीके से पेश

2034
02:29:56,800 --> 02:30:00,960
करने की कोशिश की और सबको आप ये कोशिश कर रहे हैं कि रामपाल

2035
02:30:00,960 --> 02:30:04,960
जी भी तो अपने को कुत्ता कहते हैं। आपने अभी इसको काफी गहराई

2036
02:30:04,960 --> 02:30:09,200
से लिया है। उसके लिए मैं आपको थोड़ा सा बताना चाहूंगा

2037
02:30:09,200 --> 02:30:14,400
जैसे अपना जो पवित्र गीता जी है जो अपना बहुत ही आदरणीय

2038
02:30:14,400 --> 02:30:18,000
एक मिनट एक मिनट आप दिखाएं उससे पहले मेरा पक्ष सुन लीजिए

2039
02:30:18,000 --> 02:30:22,080
सुन लीजिए मेरा पक्ष मैं तो कहता ही हूं कि उदारता

2040
02:30:22,080 --> 02:30:26,240
प्रकट करने के लिए महापुरुष भी कहीं-कहीं अपने आप को निम्न और तुच्छ

2041
02:30:26,240 --> 02:30:30,320
कह देते हैं। मगर वास्तविकता में उनको उसी रूप में

2042
02:30:30,320 --> 02:30:34,400
स्वीकार करना गलत है। जिस प्रकार से कभी

2043
02:30:34,400 --> 02:30:38,720
यह आपके संत रामपाल जो आपके लिए संत हैं यह अपने आप को कुत्ता

2044
02:30:38,720 --> 02:30:42,960
कह देते हैं। ऐसे ही कहीं-कहीं पे उदारता प्रकट करने के लिए ब्रह्मा,

2045
02:30:42,960 --> 02:30:47,840
विष्णु, महेश ने भी अपने लिए कह दिया कि हम तो ये हैं। हम तो वो हैं। मगर

2046
02:30:47,840 --> 02:30:51,840
तात्विक रूप से वो वो नाशवान हो नहीं गए।

2047
02:30:51,840 --> 02:30:56,160
जैसे उनके नाशवान उनके नाशवान कह देने पर भी हम उन्हें नाश

2048
02:30:56,160 --> 02:31:00,240
आपके जो रामपाल दास जी हैं उनके कुत्ता मान लेने पर भी हम

2049
02:31:00,240 --> 02:31:04,240
आप उन्हें कुत्ता नहीं मान रहे इसी प्रकार से ब्रह्मा विष्णु महेश के कह

2050
02:31:04,240 --> 02:31:08,240
देने पर भी कि मैं नाशवान हूं या आविर्भाव तेरो

2051
02:31:08,240 --> 02:31:14,240
भाव होता है इस पर भी हम उन्हें आ जो है नाशवान नहीं मानते

2052
02:31:18,160 --> 02:31:24,160
है मेरे को बार-बार म्यूट क्यों किया जाता है अन म्यूट क्यों किया जा रहा है।

2053
02:31:24,720 --> 02:31:28,800
क्या करें? अनम्यूट किया जा रहा है। अनम्यूट अन म्यूट तो करना पड़ेगा ना। तभी तो बोलोगे

2054
02:31:28,800 --> 02:31:32,880
आप अनम्यूट तो करना पड़ेगा ना आपको।

2055
02:31:32,880 --> 02:31:37,120
तभी तो बोलेंगे आप।

2056
02:31:37,120 --> 02:31:41,520
अनम्यूट का अर्थ नहीं जानते क्या?

2057
02:31:41,520 --> 02:31:45,760
म्यूट का अर्थ जानता हूं। अच्छा

2058
02:31:45,760 --> 02:31:51,760
अन म्यूट का अर्थ होता है बोलने देने का अवसर। अगर सरल भाषा में कहे तो।

2059
02:31:53,440 --> 02:31:56,160
बोलिए।

2060
02:31:56,160 --> 02:32:00,480
जैसे आप जी ने बोला कि ब्रह्मा विष्णु महेश अजर अमर अविनाशी

2061
02:32:00,480 --> 02:32:04,800
हैं और वो अपने आप को कभी-कभी भावुकता

2062
02:32:04,800 --> 02:32:09,440
में आकर के बोलते हैं कि हम अजर अमर अविनाशी

2063
02:32:09,440 --> 02:32:13,680
नहीं है। ठीक। नहीं है। बोल रहे बोल रहे हो। जैसे

2064
02:32:13,680 --> 02:32:18,080
जैसे जैसे रामपाल दास जी ने बोला कि मैं कुत्ता

2065
02:32:18,080 --> 02:32:22,160
हूं। मैं दो कौड़ी का हूं। और कबीर

2066
02:32:22,160 --> 02:32:26,400
दास जी ने भी बोला मैं कुत्ता हूं। और कबीर

2067
02:32:26,400 --> 02:32:30,480
दास जी ने यह भी बोला कि वो वो भूख वाला कोई मामला था

2068
02:32:30,480 --> 02:32:34,640
कि मुझे जो भूख लगती है। जबकि वो तो परमेश्वर थे। फिर भी उन्हें

2069
02:32:34,640 --> 02:32:38,800
भूख लगती थी। तो साईं इतना दीजिए। साधु भूखा

2070
02:32:38,800 --> 02:32:42,880
ना रहे और ये ऐसा कुछ है ना। है ना? मैं भी भूखा ना रहूं

2071
02:32:42,880 --> 02:32:47,280
और साधु भी भूखा ना जाए। हां। ताई इतना दीजिए

2072
02:32:47,280 --> 02:32:51,360
कुटुंब दृष्टि से तो रस की दृष्टि से स्वीकारा जा सकता है।

2073
02:32:51,360 --> 02:32:55,360
मगर आप जब उनको नहीं मानते उनके कह देने पर

2074
02:32:55,360 --> 02:32:59,520
भी कि वो कुत्ते हैं तो फिर आप ब्रह्मा विष्णु महेश को क्यों मान रहे हैं? जब

2075
02:32:59,520 --> 02:33:03,680
हम उनके बारे में लिखा दिखा रहे हैं कि वो परम ब्रह्म है। जबकि आप लिखा

2076
02:33:03,680 --> 02:33:07,760
नहीं दिखा रहे हैं कि वो परम ब्रह्म जो कबीर है वो परम ब्रह्म है।

2077
02:33:07,760 --> 02:33:08,560
ये आपने लिखा

2078
02:33:08,560 --> 02:33:12,560
नहीं दिखाया। ठीक है। अभी बात ये हो

2079
02:33:12,560 --> 02:33:16,640
रही है। अब हम लोग मुख्य विषय पर आ जाते हैं। मुख्य विषय मेरा

2080
02:33:16,640 --> 02:33:20,640
ये था कि आप एक बात करते हैं कि परमेश्वर सशरीर

2081
02:33:20,640 --> 02:33:25,280
आता है और सशरीर जाता है। कुंवारी गाय का दूध पीता है।

2082
02:33:25,280 --> 02:33:29,440
ठीक है। जी। हां। इसको आप सिद्ध करिए। कहां

2083
02:33:29,440 --> 02:33:35,440
से बोलते हैं आप ये बात? बोलिए।

2084
02:33:36,080 --> 02:33:41,200
देखो इसमें जी क्या है कि इसको सिद्ध करने के लिए

2085
02:33:41,200 --> 02:33:45,280
वेद में भी लिखा हुआ है कहां भाई साहब देखिए

2086
02:33:45,280 --> 02:33:49,280
बात को खींचिए मत सीधे बोलिए अथर्ववेद फलाना कांड फलाना

2087
02:33:49,280 --> 02:33:53,360
सूख सीधीसीधी बात करिए बहुत ज्यादा आगे पीछे की चीजें करने की

2088
02:33:53,360 --> 02:33:57,360
आवश्यकता है ही नहीं हम तुरंत खोलें शिवशु

2089
02:33:57,360 --> 02:34:01,440
जी यही तो बात है जैसे आपके मेरे साथ में अभी सबसे

2090
02:34:01,440 --> 02:34:05,440
पहले हमसे ये कहा था आपने आपने आते ही सबसे पहले हमसे यह कहा था कि

2091
02:34:05,440 --> 02:34:09,440
जब प्रमाणों की बात आती है तो आप इधर-उधर की बात करते हैं। आप जब

2092
02:34:09,440 --> 02:34:13,440
हम आपसे कह रहे हैं प्रमाण बताइए खोल है तो आप शिवशी

2093
02:34:13,440 --> 02:34:17,440
बोल रहे हैं। देखिए बोल रहे हैं मगर शास्त्र का नाम

2094
02:34:17,440 --> 02:34:21,120
नहीं बोल रहे हैं।

2095
02:34:21,120 --> 02:34:25,760
एक तो एक तो देखो के देखा मैं आपको रियलिटी

2096
02:34:25,760 --> 02:34:30,480
एक तो सब निकलेगा मगर शास्त्र का नाम नहीं निकलेगा।

2097
02:34:30,480 --> 02:34:34,560
मैं आपको रियलिटी बताऊं। मेरे पास में अभी यहां पर जो चारों वेद आप जो कह रहे हो जैसे

2098
02:34:34,560 --> 02:34:38,800
आपके यहां रखे अलमारी में पीछे दिख रहे हैं। मेरे पास में रियल में चारों वेद नहीं है।

2099
02:34:38,800 --> 02:34:42,800
कह रहा हूं आपके पास आपके पास आपकी ज्ञान गंगा तो है।

2100
02:34:42,800 --> 02:34:46,880
उस ज्ञान गंगा में कुमारी गाय वाला दिया होगा ना प्रमाण कहीं आपने पढ़ा

2101
02:34:46,880 --> 02:34:51,920
ग्रंथ अपना। अपना ग्रंथ पढ़ा है कि नहीं? अपना ग्रंथ तो पढ़ा है।

2102
02:34:51,920 --> 02:34:56,080
कि वो भी हम मेहनत करें उसे पढ़वाने के लिए। देखो

2103
02:34:56,080 --> 02:35:00,320
जी समस्या यह है संत रामपाल जी महाराज की जो पवित्र

2104
02:35:00,320 --> 02:35:04,400
पुस्तकें हैं ज्ञान गंगा है जीने की राह है सारी है ये मेरे पास भी रखी है ये

2105
02:35:04,400 --> 02:35:08,560
अभी मैंने इसमें से दिखाया था भाई साहब ये पढ़ी है तो आप मुझे ये बताइए

2106
02:35:08,560 --> 02:35:14,560
कि इसके अनुसार वो कुंवारी गाय वाला कहां लिखा है बताइए

2107
02:35:19,450 --> 02:35:24,080
[गला साफ़ करने की आवाज़] अरे समय बर्बाद कर रहे हैं शिव जी नहीं है इनके पास नहीं पता इन्हें

2108
02:35:24,080 --> 02:35:28,240
इन्होंने अपने ग्रंथ भी नहीं पढ़े हैं। यह उसमें आ गए तहस

2109
02:35:28,240 --> 02:35:32,320
में। इनको इतना क्रोध आया होगा हमारे वीडियोस देख कर के तहस

2110
02:35:32,320 --> 02:35:36,480
में आ गए हैं। इन्होंने कोई तैयारी नहीं की है। और मैं बार-बार कहता हूं भैया

2111
02:35:36,480 --> 02:35:40,800
बिना तैयारी के मत आओ। मत पड़ो चक्कर में। शैलेश बार-बार

2112
02:35:40,800 --> 02:35:45,040
कहता हूं।

2113
02:35:45,040 --> 02:35:49,120
शैलेश जी कहीं ऋग्वेद ऋग्वेद का मंडल नंबर नौ

2114
02:35:49,120 --> 02:35:53,200
सूक्त नंबर एक मंत्र नंबर तो नहीं है

2115
02:35:53,200 --> 02:35:57,200
कहीं पता नहीं है तो हम बात ये है कि हम अगर अपनी ओर से दिखा देंगे तो ये

2116
02:35:57,200 --> 02:36:01,280
नहीं मानेंगे ना कि हमारे वो जो तत्वदर्शी है तिरछादर्शी उन्होंने भी ये बात

2117
02:36:01,280 --> 02:36:05,360
कही है कि नहीं हम अगर अपनी हमें तो मालूम है वो हमें मालूम है

2118
02:36:05,360 --> 02:36:09,440
एक या एक चार ऐसे कोई है मगर बात ये

2119
02:36:09,440 --> 02:36:14,240
है कि अगर इनकी उम्र का लिहाज किया जाए तो इनके

2120
02:36:14,240 --> 02:36:18,240
हेल्प कर देते हैं। मगर ये भाई मयंक जी ये विश्वास नहीं करेंगे कि हम जो

2121
02:36:18,240 --> 02:36:22,640
मंत्र बता रहे हैं वही मंत्र तिरछादर्शी जी ने बताया है।

2122
02:36:22,640 --> 02:36:26,960
ये चलो ये ये प्रॉब्लम है ना हम तो दिखा दें कि आपके तिरछादर्शी

2123
02:36:26,960 --> 02:36:30,960
जी ने ये बताया है। मगर ये उस पर विश्वास क्यों करेंगे? इसलिए इनका अपने ही

2124
02:36:30,960 --> 02:36:36,960
ग्रंथ में देख लेना आवश्यक है।

2125
02:36:37,520 --> 02:36:41,840
ये ये मुझे ऐसा याद आ रहा है जो वाइवा होता है ना तो [हंसी]

2126
02:36:41,840 --> 02:36:46,240
प्रश्न करता है इनविजिलेटर मतलब टीचर भाई में कि ये बताओ

2127
02:36:46,240 --> 02:36:50,400
तो उसके अब बोल दिया कि ये ग्राफ बनाना है तो उसके अलावा

2128
02:36:50,400 --> 02:36:54,400
सब बनेगा चुपचाप पेज पलटे जाएंगे ये रखा

2129
02:36:54,400 --> 02:36:58,640
लेकिन लेकिन वो उस क्वेश्चन का आंसर नहीं आएगा [हंसी] वही

2130
02:36:58,640 --> 02:37:02,080
वाला मोमेंट है ये

2131
02:37:02,080 --> 02:37:06,160
कावेश जी अभी आपको सुनेंगे हम तब तक आप अपना परिचय

2132
02:37:06,160 --> 02:37:11,920
दे दीजिए बताइए

2133
02:37:11,920 --> 02:37:15,440
जय श्री राम।

2134
02:37:15,440 --> 02:37:20,960
आपके यहां लाइट नहीं है क्या?

2135
02:37:20,960 --> 02:37:25,120
जय श्री राम भाई। हां जय श्री राम। जय

2136
02:37:25,120 --> 02:37:29,280
श्री राम। भैया इनका एक भैया मुझे कुछ

2137
02:37:29,280 --> 02:37:34,560
पूछना था। मेरे पास भी आए थे लोग मुझे कन्वर्ट करने के लिए इनके।

2138
02:37:34,560 --> 02:37:38,720
अच्छा तो तो मैंने आपकी डिबेट देखी।

2139
02:37:38,720 --> 02:37:42,880
मुझे सब कुछ समझ में आ गया लेकिन एक चीज समझ में नहीं आई वो सर

2140
02:37:42,880 --> 02:37:47,520
पुरुष और अक्षर पुरुष का ही भगवत गीता में बताते हैं कि वो भ्रम है वो अक्षर

2141
02:37:47,520 --> 02:37:51,680
परभ्रम है वो फंडा इनका समझ में नहीं आ रहा भैया अरे भैया

2142
02:37:51,680 --> 02:37:55,760
जो परम तत्व है उसको कहीं पे अक्षर भी कहा गया

2143
02:37:55,760 --> 02:37:59,840
है और दूसरी बात सबसे जस्ट अगले वाले में भगवान ने कहा कि

2144
02:37:59,840 --> 02:38:04,080
मैं हूं पुरुषोत्तम आप बता दीजिए गुरु गोविंद

2145
02:38:04,080 --> 02:38:08,400
जी

2146
02:38:08,400 --> 02:38:12,720
क्या है कावेश भाई क्या होता है ना कि जैसे वृक्ष

2147
02:38:12,720 --> 02:38:16,800
एक होता है शाखाएं अलग होती है। है ना? तो फल अलग-अलग शाखाओं पे लगे

2148
02:38:16,800 --> 02:38:21,200
होते हैं। वैसे ही हमारे शास्त्र है। इसमें कहीं एक जाती

2149
02:38:21,200 --> 02:38:25,360
जगह यदि किसी चीज का विषय है ना तो उसके अर्थ अन्य

2150
02:38:25,360 --> 02:38:29,520
ग्रंथों में मिलते हैं। इसीलिए तो ये इंटरकनेक्टेड होंगे ना। मेरी बात को समझिए।

2151
02:38:29,520 --> 02:38:33,920
इंटरकनेक्टेड हम किस चीज को कहेंगे? जिसमें हर जगह से वो इंटरकनेक्ट

2152
02:38:33,920 --> 02:38:38,000
वैसे ही जब आप खोलते हैं पद्म पुराण

2153
02:38:38,000 --> 02:38:42,000
उसके अंदर उत्तर उत्तरखंड खोलते हैं तो उसके

2154
02:38:42,000 --> 02:38:46,000
दोनों अक्षर और अक्षर दोनों ही भगवान श्री कृष्ण के नाम

2155
02:38:46,000 --> 02:38:50,160
है। ठीक है? एक का अर्थ है जो रहते हुए भी

2156
02:38:50,160 --> 02:38:54,240
कुछ समय तक रहता है। हमारे विषय के अनुसार रहता है।

2157
02:38:54,240 --> 02:38:58,400
ध्यान से सुनिएगा। ठीक है? कि हमारे जो आचरण में आने वाली

2158
02:38:58,400 --> 02:39:03,040
चीज है प्रभु का वो रूप कहा गया है और एक सच्चिदानंद

2159
02:39:03,040 --> 02:39:07,200
स्वरूप है जो हर समय में एक समान रहता है सनातन उसे अक्षर

2160
02:39:07,200 --> 02:39:11,840
कहा गया भगवत गीता जब आप खोदोगे तो शर का मतलब भी नाशवान

2161
02:39:11,840 --> 02:39:16,000
लिखा गया है शर का मतलब वहां भी नाशवान है और अक्षर का मतलब वहां

2162
02:39:16,000 --> 02:39:20,160
भी जो है सनातन या फिर ऐसा कह लीजिए जिसका नाश नहीं होता ठीक है तो

2163
02:39:20,160 --> 02:39:23,600
आप पूरा श्लोक पढ़िए उसमें आपको पता चल जाएगा

2164
02:39:23,600 --> 02:39:27,760
दोनों स्वरूप है और एक तीसरा भी है एक तीसरा

2165
02:39:27,760 --> 02:39:32,080
भी है जो इन दोनों से न्यारा को बताया गया है शरीर नाशवान

2166
02:39:32,080 --> 02:39:36,160
जड़ वग क्षेत्र ठीक है अक्षर को बताया गया आत्मा और फिर

2167
02:39:36,160 --> 02:39:40,720
वो कहते हैं इस शरीर और इस आत्मा से भी एक परे सच्चिदानंद

2168
02:39:40,720 --> 02:39:44,800
घन ब्रह्म है और अगले श्लोक में कहते हैं वो मैं ही

2169
02:39:44,800 --> 02:39:48,880
हूं इसलिए लोक में भी और वेद में भी मेरे को पुरुषोत्तम कहा

2170
02:39:48,880 --> 02:39:53,280
जाता है ठीक है जी जी इसको मैं

2171
02:39:53,280 --> 02:39:58,320
इसका इसको इसको मैं आपको और प्रमाण

2172
02:39:58,320 --> 02:40:03,040
कुल मिलाकर के सर मैं प्रमाण देता हूं

2173
02:40:03,040 --> 02:40:06,640
जी जी

2174
02:40:06,640 --> 02:40:10,640
पद्म पुराण उत्तरखंड श्री विष्णु सहस्त्र नाम

2175
02:40:10,640 --> 02:40:14,640
जिस दिन आप एक बार पढ़ लेंगे आप किसी के चंगुल में नहीं फसेंगे उसके बाद

2176
02:40:14,640 --> 02:40:19,520
ठीक है अब शिवश जी को अपनी बात रख जी देखिए

2177
02:40:19,520 --> 02:40:24,640
ऐसा है कि कृष्ण भगवान ही

2178
02:40:24,640 --> 02:40:28,720
संसार बनते हैं तो वो हो गए क्षर।

2179
02:40:28,720 --> 02:40:32,720
ठीक है? कृष्ण भगवान ही मनुष्य रूपों

2180
02:40:32,720 --> 02:40:37,120
में जीव रूप में आते हैं तो वो हो गए अक्षर। ठीक है? जी।

2181
02:40:37,120 --> 02:40:42,480
और इन दोनों रूपों पर कंट्रोल भी वही करते हैं तो वो हो गए परम अक्षर।

2182
02:40:42,480 --> 02:40:46,720
ठीक है। अच्छा सर। जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं।

2183
02:40:46,720 --> 02:40:50,880
जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है। उनहीं का

2184
02:40:50,880 --> 02:40:55,040
ईश्वर सर्वशक्तिमान स्वयं को कह सकता है। क्यों?

2185
02:40:55,040 --> 02:40:59,200
जी। क्योंकि अगर मान लीजिए किसी कुमार ने मिट्टी

2186
02:40:59,200 --> 02:41:03,520
लेकर घड़ा बना दिया। ठीक है? उस घड़े पर पूरा

2187
02:41:03,520 --> 02:41:07,600
का पूरा कंट्रोल कुमार का नहीं है। समझ रहे हैं आप मेरी

2188
02:41:07,600 --> 02:41:11,840
बात? क्योंकि मिट्टी को उसने नहीं बनाया। उसने मिट्टी को केवल

2189
02:41:11,840 --> 02:41:16,240
शेप दिया है घड़े का। घड़े पे पूरा कंट्रोल कुम्हार

2190
02:41:16,240 --> 02:41:20,240
का नहीं है। मगर जैसे जो जल की तरंगे

2191
02:41:20,240 --> 02:41:21,680
होती है तरंगे

2192
02:41:21,680 --> 02:41:26,400
जल तरंग होती है। जल के बिना जल ही तरंग बनता है। जब

2193
02:41:26,400 --> 02:41:30,800
तो जल के बिना तरंग का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।

2194
02:41:30,800 --> 02:41:34,800
यानी कि जब ईश्वर ही स्वयं जीव और

2195
02:41:34,800 --> 02:41:38,880
प्रकृति के रूप में प्रकट होगा तभी उसका प्रकृति और

2196
02:41:38,880 --> 02:41:43,120
जीव के ऊपर पूरा का पूरा नियंत्रण होगा। तभी

2197
02:41:43,120 --> 02:41:47,120
वो सर्वशक्तिमान कहला सकता है। अन्यथा नहीं कहलाएगा।

2198
02:41:47,120 --> 02:41:51,200
जी अगर जैसे मैंने मन में सोचा जैसे मैंने मन

2199
02:41:51,200 --> 02:41:55,600
में सोचा रामपाल वालों की हालत तो ईमान वालों से भी खराब है।

2200
02:41:55,600 --> 02:41:59,760
जैसे मैंने सोचा जी सर कि मैं अपने मन में

2201
02:41:59,760 --> 02:42:03,760
सृष्टि करने की कल्पना करता हूं। ठीक है? मैंने अपने मन में सोचा

2202
02:42:03,760 --> 02:42:08,240
सामने पृथ्वी आ गई। ये है सीमित ईश्वर।

2203
02:42:08,240 --> 02:42:12,480
ये सर्वशक्तिमान नहीं है। क्यों? पहली बात जहां पर मैं पृथ्वी

2204
02:42:12,480 --> 02:42:17,360
को गोला बनाकर टांग रहा हूं वो पृथ्वी

2205
02:42:17,360 --> 02:42:21,440
जहां पर टंग रही है वो स्पेस मैंने नहीं बनाया। मैंने पृथ्वी

2206
02:42:21,440 --> 02:42:25,440
को बनाया। समझ रहे हैं? तो रचयिता नहीं हुआ मैं संसार

2207
02:42:25,440 --> 02:42:29,760
का। मैं रचयिता नहीं हुआ। मैं कौन हुआ? मैं केवल

2208
02:42:29,760 --> 02:42:34,080
वहां पर कुमार की तरह से मिट्टी को आकार देने वाला सिद्ध हुआ।

2209
02:42:34,080 --> 02:42:36,800
तो ये जो बात है क्षर अक्षर और

2210
02:42:36,800 --> 02:42:40,880
परम अक्षर ये बात ऐसी है कि भगवान ही क्षर

2211
02:42:40,880 --> 02:42:45,120
है। भगवान ही अक्षर है। फिर भगवान ही परम अक्षर है। उन दोनों

2212
02:42:45,120 --> 02:42:49,120
के उपास से ठीक है? अब बात ये है कि जो अक्षर का

2213
02:42:49,120 --> 02:42:53,360
मतलब है वैदिक डिक्शनरी जो है निरुक्त उसमें

2214
02:42:53,360 --> 02:42:57,440
अक्षर का मतलब सीधेसीधे दिया गया है। अगर आप अक्षर को परम ब्रह्म

2215
02:42:57,440 --> 02:43:01,440
से अलग मानेंगे तो जो वैदिक डिक्शनरी है जिसके आधार पर

2216
02:43:01,440 --> 02:43:05,920
वेदों का अर्थ किया जाता है। उस वैदिक डिक्शनरी में

2217
02:43:05,920 --> 02:43:10,320
अक्षर का अर्थ सीधे-सीधे कहा गया है। परम ब्रह्म परमात्मा अक्षर

2218
02:43:10,320 --> 02:43:14,320
का मतलब परम अक्षर की बात तो छोड़ दो। अक्षर का मतलब मैं

2219
02:43:14,320 --> 02:43:19,120
आपको बता दे रहा हूं। निरु 13वा अध्याय और दवा

2220
02:43:19,120 --> 02:43:25,120
चैप्टर है। मैं बता देता हूं। दिखा देता हूं।

2221
02:43:27,280 --> 02:43:31,360
वेदों का कोई भी विद्वान होगा उसके लिए निरुक्त

2222
02:43:31,360 --> 02:43:35,600
प्रमाणिक होगा। क्योंकि निरुक्त के बिना वेदों का अर्थ नहीं किया जा सकता।

2223
02:43:35,600 --> 02:43:39,600
यह वेदों की डिक्शनरी है। वेदों में

2224
02:43:39,600 --> 02:43:43,920
किस शब्द का क्या अर्थ लेना है? ये बताती है ये शब्दकोश है

2225
02:43:43,920 --> 02:43:48,320
वेदों का वैदिक डिक्शनरी इसमें 13वा अध्याय

2226
02:43:48,320 --> 02:43:52,000
है

2227
02:43:52,000 --> 02:43:57,600
13वा अध्याय 13वा पाद सॉरी और उसका

2228
02:43:57,600 --> 02:44:03,600
दवा

2229
02:44:04,110 --> 02:44:10,110
[गला साफ़ करने की आवाज़]

2230
02:44:12,000 --> 02:44:18,000
13.1

2231
02:44:36,080 --> 02:44:40,160
कभी भी कोई ग्रंथ आप पढ़ा करें तो

2232
02:44:40,160 --> 02:44:44,320
सबसे पहले क्या पढ़ा करें? उसकी ग्रंथ जब भी पढ़ते हैं कोई भी ग्रंथ

2233
02:44:44,320 --> 02:44:48,480
तो सबसे पहले उसकी भूमिका पढ़ लीजिए। वो ग्रंथ कितना

2234
02:44:48,480 --> 02:44:52,480
प्रमाणिक है? वो ग्रंथ कितना प्रमाणिक है ये आपको उसकी भूमिका से पता

2235
02:44:52,480 --> 02:44:56,800
चल जाएगा। उसमें प्रमाण दिया होता है कि ये ग्रंथ प्रमाणिक क्यों है?

2236
02:44:56,800 --> 02:45:01,040
और ऐसे प्रमाण दिए होते हैं जो टस से मस नहीं हो सकते। तो कोई

2237
02:45:01,040 --> 02:45:05,920
भी ग्रंथ डायरेक्ट चैप्टर वन से नहीं पढ़ना चाहिए। उसकी भूमिका अवश्य पढ़ो।

2238
02:45:05,920 --> 02:45:10,000
जैसे रामायण पढ़ोगे ना प्रमाण दिखाना शुरू कर दिया तो सभी

2239
02:45:10,000 --> 02:45:14,480
लोग प्रमाण दिखा अभी आपसे बात नहीं हो रही भाई साहब अभी आपसे बात होगी

2240
02:45:14,480 --> 02:45:18,640
रुक जाइए एक मिनट मैं इनको जरा एक एक मिनट इनको

2241
02:45:18,640 --> 02:45:19,140
जरा वो

2242
02:45:19,120 --> 02:45:23,360
दे दूं 13वा अध्याय और

2243
02:45:23,360 --> 02:45:27,840
817 पे ये है अक्षर ये देखिए

2244
02:45:27,840 --> 02:45:31,920
अक्षर वाला दिख रहा है आपको ये चैप्टर देखिए जी दिख

2245
02:45:31,920 --> 02:45:36,640
रहा है अक्षर वाला चैप्टर दिख रहा है ना हां हां हां

2246
02:45:36,640 --> 02:45:41,280
अब मैं इसमें 817 पेज नंबर खोल रहा हूं।

2247
02:45:41,280 --> 02:45:47,120
अ

2248
02:45:47,120 --> 02:45:51,200
ये देखिए यहां पर ऋग्वेद का उदाहरण देते हुए निरुक्त

2249
02:45:51,200 --> 02:45:56,240
के जो भाष्यकार है यानी कि आचार्य यास्क

2250
02:45:56,240 --> 02:46:00,320
इनकी प्रमाणिकता पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। विद्युत मंडली का मूर्ख उठा

2251
02:46:00,320 --> 02:46:04,400
सकता है। इन्होंने ऋग्वेद का उदाहरण देते हुए अक्षर का अर्थ बताया

2252
02:46:04,400 --> 02:46:08,720
है। एक 164 39 और

2253
02:46:08,720 --> 02:46:12,960
अक्षर का अर्थ बताते हुए लिख रहे हैं अक्षर रूपी

2254
02:46:12,960 --> 02:46:15,440
परमात्मा।

2255
02:46:15,440 --> 02:46:20,560
ठीक है? अक्षर का अर्थ इन्होंने क्या कर दिया? परमात्मा।

2256
02:46:20,560 --> 02:46:24,640
हां। तो वो भाव रूप से कहीं पे ये अपने आप

2257
02:46:24,640 --> 02:46:28,880
को बताने के लिए कि मैं ही प्रकृति हूं, मैं ही जीव हूं और मैं ही

2258
02:46:28,880 --> 02:46:32,960
उनका उपास्य हूं। तब जरूर कर दिया कि अक्षर और परम अक्षर।

2259
02:46:32,960 --> 02:46:34,320
मगर ऐसा

2260
02:46:34,320 --> 02:46:38,320
नहीं है कि अक्षर का मतलब परमात्मा नहीं है। उनको क्योंकि

2261
02:46:38,320 --> 02:46:42,400
अपने को और भी परम बताना था तो उन्होंने परम लगा के लिख दिया। मगर

2262
02:46:42,400 --> 02:46:46,880
अक्षर का अर्थ भी परमात्मा ही है। ठीक है?

2263
02:46:46,880 --> 02:46:51,040
जीव, जगत और जगदीश्वर तीनों रूपों

2264
02:46:51,040 --> 02:46:55,200
में एक ही परम तत्व व्याप्त है। तो क्षर, अक्षर और परम

2265
02:46:55,200 --> 02:46:59,440
अक्षर तीनों वही है। ठीक है? जी। और इसका प्रमाण

2266
02:46:59,440 --> 02:47:03,520
आपको भगवत गीता के दव स्कंध में मिल जाएगा। एक मिनट दव चैप्टर में

2267
02:47:03,520 --> 02:47:08,000
मिल जाएगा। भगवान कह रहे हैं कि जीवो में व्याप्त उनकी आत्मा मैं ही हूं।

2268
02:47:08,000 --> 02:47:12,080
ठीक है? दव अध्याय में आप तो आपको ये प्राप्त हो जाएगा। ठीक है? तो इससे भी

2269
02:47:12,080 --> 02:47:16,320
हमारी बात सिद्ध हो जाती है। हमारी कोई भी बात जो है ना वो शास्त्रों

2270
02:47:16,320 --> 02:47:21,280
के विरुद्ध हम नहीं करते हैं। ठीक है? ये बात। ठीक है? मैंने

2271
02:47:21,280 --> 02:47:25,360
इनका थोड़ा सा फंडा क्या है कि ये लोग कुछ चुने

2272
02:47:25,360 --> 02:47:31,360
हुए श्लोकों को लेकर आते हैं।

2273
02:47:31,440 --> 02:47:35,440
जी जी कावेश जी अब अब हम अब हम फिर सुनते हैं आपको

2274
02:47:35,440 --> 02:47:39,440
अब हम फिर सुनते हैं शैलेश जी हम लोग आ

2275
02:47:39,440 --> 02:47:43,600
जाए अपने कुमारे वाले मामले पे कुंवारी गाय

2276
02:47:43,600 --> 02:47:47,840
जी आप जी ने अभी प्रश्न किया था के

2277
02:47:47,840 --> 02:47:51,920
कुंवारी गाय मतलब हम बात कर रहे हैं आपसे कुंवारी गाय

2278
02:47:51,920 --> 02:47:55,920
उस जी उस वही पॉइंट पे रहिए जी वही

2279
02:47:55,920 --> 02:48:00,000
बता रहे जी देखो मैं सबसे पहले आपको बता देता हूं। यह

2280
02:48:00,000 --> 02:48:04,320
हमारे पूज्य गुरुदेव जी के द्वारा रची हुई पुस्तक है कबीर परमेश्वर। भाई साहब हमको

2281
02:48:04,320 --> 02:48:08,320
आप केवल वो बता दीजिए मंत्र क्रमांक। हमको पूज्य गुरुदेव आपके नहीं चाहिए।

2282
02:48:08,320 --> 02:48:12,400
प्रमाण के रूप में अगर ऐसे ही बात है तो मैं अपने पूज्य गुरुदेव का आपको दिखा दूंगा। आप मान

2283
02:48:12,400 --> 02:48:16,400
लोगे क्या? भाई वो जो अंतर है शिक्षा का इसीलिए

2284
02:48:16,400 --> 02:48:21,120
हम और आप आज आमने सामने हैं। मैं ये इसलिए

2285
02:48:21,120 --> 02:48:25,840
का नाम लेकर के हमें ना बताइए। आप जो है हमको बताइए।

2286
02:48:25,840 --> 02:48:29,920
मैं ये ये आपको ये इस चीज से दुख क्यों होता है? जी हम अपने

2287
02:48:29,920 --> 02:48:34,320
पूज्य गुरुदेव जी को पूज्य गुरुदेव जी बोल रहे हैं। आपको दुख क्यों हो रहा है? जी देखा इनको

2288
02:48:34,320 --> 02:48:38,880
सब करनी है। जो बात हो रही है उस पर नहीं करनी है।

2289
02:48:38,880 --> 02:48:43,040
भैया हम पूछ रहे हैं इनको कि कौन से मंत्र के आधार

2290
02:48:43,040 --> 02:48:46,640
पर आपके जो पूज्य गुरुदेव हैं उन्होंने

2291
02:48:46,640 --> 02:48:50,880
यह बताया कि जो परमेश्वर है सशरीर आता है और सशरीर जाता है। कुंवारी

2292
02:48:50,880 --> 02:48:54,560
गाय का दूध पीता है। वह बताइए।

2293
02:48:54,560 --> 02:48:59,760
कुमारी का शरीर बाद में बताना कुंवारी गाय का दूध पहले बताओ

2294
02:48:59,760 --> 02:49:03,840
हां वही बता रहे जी गोविंद जी आप जो बता रहे थे वो एक वो बता

2295
02:49:03,840 --> 02:49:07,840
दीजिए हां आप बताइए आप बताइए चलिए शैलेश जी बताइए

2296
02:49:07,840 --> 02:49:13,600
ये ऋग्वेद मंडल नंबर नौ हां

2297
02:49:13,600 --> 02:49:19,600
सूक्त नंबर वन

2298
02:49:22,440 --> 02:49:25,680
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम

2299
02:49:25,680 --> 02:49:31,600
विषय पे बात करने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ जाती है।

2300
02:49:31,600 --> 02:49:35,600
सूक्त नंबर कौन सा है? पंडित जी आप पंडित जी आप खोलते हैं ना

2301
02:49:35,600 --> 02:49:39,600
पीडीएफ वगैरह आप खोलते हैं ना दिखाने के लिए डिस्प्ले पर मैं खोलता हूं लेकिन

2302
02:49:39,600 --> 02:49:45,280
मैं देवी भागवत का वेदों को अवॉयड करूंगा। वेद के अलावा बताइए।

2303
02:49:45,280 --> 02:49:49,600
नहीं नहीं देवी भागवत इसके बाद जब शिवा

2304
02:49:49,600 --> 02:49:54,320
जी इनकी बात हो जाएगी खत्म उसके बाद हम देवी भागवत खोलेंगे नवा स्कंध और 49

2305
02:49:54,320 --> 02:49:59,200
नंबर उसका अध्याय आप तैयार रहिएगा

2306
02:49:59,200 --> 02:50:01,360
हां

2307
02:50:01,360 --> 02:50:05,360
देखो मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा बस केवल ऋग्वेद नंबर मंडल नंबर

2308
02:50:05,360 --> 02:50:10,800
नौ सूक्त एक मंत्र नौ

2309
02:50:10,800 --> 02:50:16,160
ठीक है ऋग्वेद मंडल नौ

2310
02:50:16,160 --> 02:50:18,720
और

2311
02:50:18,720 --> 02:50:23,440
मंत्र नंबर नौ नौ नौ [गला साफ़ करने की आवाज़] इसमें लिखा है

2312
02:50:23,440 --> 02:50:28,240
वो जो इंद्र है वो

2313
02:50:28,240 --> 02:50:32,400
बालक रूप में अवध्य जिनका वध नहीं किया जा

2314
02:50:32,400 --> 02:50:36,560
सकता कन्या अवध्य गाय इंद्र को पान

2315
02:50:36,560 --> 02:50:40,560
कराने हेतु यज्ञ के समय इसमें भाष्यकार

2316
02:50:40,560 --> 02:50:44,560
ने भी अर्थ किया है सोम रस में गाय का दूध मिलाया जाता यही मिश्रण यज्ञ में

2317
02:50:44,560 --> 02:50:48,960
इंद्र को अर्पित किया जाता है और उसके पश्चात अन्य यज्ञकर्ता

2318
02:50:48,960 --> 02:50:53,280
उसका पान करते हैं। तो यह इसका कुल मिलाकर

2319
02:50:53,280 --> 02:50:57,360
अर्थ इसमें कुंवारी गाय कहीं नहीं है और ना ही कबीर है। कबीर को

2320
02:50:57,360 --> 02:51:01,680
छोड़ दीजिए। कुंवारी गाय दिखाइए कहां है?

2321
02:51:01,680 --> 02:51:05,680
देखो भाई ये डिबेट देखने वाले हमारे भाई बहनों आप

2322
02:51:05,680 --> 02:51:11,440
देखो ये

2323
02:51:11,440 --> 02:51:15,440
देखिए व्यर्थ का बोलेंगे मुझे आपको रोकना पड़ेगा हम मान रहे हैं आपका मान

2324
02:51:15,440 --> 02:51:19,600
रहे हैं कहीं लिखा है क्या ऊपर का दिखाइए जी

2325
02:51:19,600 --> 02:51:25,600
श्लोक जो संस्कृत में लिखा हुआ है ऊपर दिखाइए अभी अनन्या

2326
02:51:27,360 --> 02:51:32,800
शिशुम शिशु माने बालक रूप में जब परमात्मा बालक

2327
02:51:32,800 --> 02:51:36,880
शिशु का अर्थ कुमारी है क्या? पंडित जी स्क्रीन पे

2328
02:51:36,880 --> 02:51:41,120
लाइए स्क्रीन पे लाइए। कहां गए? शिशु

2329
02:51:41,120 --> 02:51:45,760
का अर्थ कुमारी होता है क्या? मैं पूछ रहा हूं कुंवारी गाय कहां है?

2330
02:51:45,760 --> 02:51:49,760
इसमें धेनव लिखा हुआ है। धेनव दिखाइए दोबारा से दर्शकों को। संस्कृत में

2331
02:51:49,760 --> 02:51:53,920
धेनु लिखा हुआ है। धेनव का अर्थ है गाय। धेनव

2332
02:51:53,920 --> 02:51:58,080
का अर्थ है गाय। तो वही वेद वही कह रहे हैं कि वो परमात्मा

2333
02:51:58,080 --> 02:52:02,320
जब शिशु रूप में आता है बालक रूप में कुमारी

2334
02:52:02,320 --> 02:52:06,400
उसमें लिखा है अभी अधन्या है दिखाइए दर्शकों को उसमें

2335
02:52:06,400 --> 02:52:11,520
लिखा है अभी अधन्या अभी अधन्या धेन अभी अधन्या

2336
02:52:11,520 --> 02:52:15,600
देख लो जिसका वध नहीं किया जा सकता अरे अवध

2337
02:52:15,600 --> 02:52:21,600
नहीं अवध नहीं अधन्या अधन्या

2338
02:52:22,320 --> 02:52:27,040
अभी अधन्या देखो दर्शको हमारे शिवश जी दिखा रहे हैं

2339
02:52:27,040 --> 02:52:31,760
भाई अनन्या का अर्थ होता है क्या तुम्हारी

2340
02:52:31,760 --> 02:52:35,920
कुमारी होता है क्या आप अपना ये निकालिए अभी जो संस्कृत का अनुवाद

2341
02:52:35,920 --> 02:52:39,920
दिखा रहे थे ना उसी से मान्य होता है उसी में देखो अभी आप देखो उसमें क्या होता है अभी धन्या का

2342
02:52:39,920 --> 02:52:45,440
मतलब पांच बार दिखा चुका हूं अबकी बार नहीं दिखाऊंगा देखो कहां लिखा है कुमारी

2343
02:52:45,440 --> 02:52:48,480
स्क्रीन कर लो जरा

2344
02:52:48,480 --> 02:52:53,350
दिख रहा है क्या इसमें लिखा है अभी दिख रहा है क्या

2345
02:52:53,350 --> 02:52:57,600
[नाक से की जाने वाली आवाज़] अभी अभी इसमें लिखा है अभी अनन्या का मतलब होता है कुंवारी।

2346
02:52:57,600 --> 02:53:01,600
अरे भाई कहां लिखा है? अरे अनुवाद कीजिए

2347
02:53:01,600 --> 02:53:05,600
सर। अभी अनन्या का अनुवाद कीजिए सर। जी

2348
02:53:05,600 --> 02:53:09,760
एक बार और दिखाइए। रुक जाइए मैं स्क्रीनशॉट ले लेता हूं इसका। मैं इसको अनन्या का अर्थ

2349
02:53:09,760 --> 02:53:13,840
है जिसका वध किया नहीं जा सकता। और

2350
02:53:13,840 --> 02:53:17,840
ये भी मैं आपको वेद से दिखाऊंगा। ये भी मैं आपको वेद से

2351
02:53:17,840 --> 02:53:21,920
दिखाऊंगा। क्या बात करते हो आप? क्या बात करते

2352
02:53:21,920 --> 02:53:26,160
हो आप? का अर्थ आपको

2353
02:53:26,160 --> 02:53:30,320
सभी का भाई साहब अग्या का अर्थ कुंवारी

2354
02:53:30,320 --> 02:53:34,400
कहां पर लिखा है ये आप मुझे बता दीजिए ये क्या बात करने की बजाय

2355
02:53:34,400 --> 02:53:37,600
आप प्रमाण दे दीजिए तो आप

2356
02:53:37,600 --> 02:53:41,600
भाई साहब अग्या का अर्थ कुंवारी कहां लिखा

2357
02:53:41,600 --> 02:53:45,680
है इस बात का प्रमाण दे दीजिए आज भैया हम लोगों का जो

2358
02:53:45,680 --> 02:53:50,000
मुख्य मिशन था वो ये था कि हमको इनका नरेटिव ये वाला तोड़ना

2359
02:53:50,000 --> 02:53:54,080
था कि वो कुंवारी गाय का दूध पीता है क्योंकि क्योंकि इन्होंने चौवा उड़ा रखा है

2360
02:53:54,080 --> 02:53:58,240
कि कबीर दास जी ने कुंवारी गाय का दूध पिया था। ठीक

2361
02:53:58,240 --> 02:54:02,480
है? तो अब आप आंखें खोल करके देख लीजिए कि

2362
02:54:02,480 --> 02:54:06,640
अगन्या को इन्होंने कुंवारी कह दिया। ये अगन्या का अर्थ कुंवारी कहां लिखा

2363
02:54:06,640 --> 02:54:11,760
हुआ है? बताएं। ये ये देखिए ये

2364
02:54:11,760 --> 02:54:17,520
आप मुझे वेद बता दीजिए जिसमें की अगन्या का अर्थ कुंवारी लिखा हो।

2365
02:54:17,520 --> 02:54:21,120
वेद बता दीजिए।

2366
02:54:21,120 --> 02:54:25,200
हम आप ही से बोल रहे आप अभी बता रहे थे कि वेद के जितने भी अर्थ होते

2367
02:54:25,200 --> 02:54:30,640
हैं वो आप जी ने एक पुस्तक बताई थी जिसमें अक्षर का आप अभी अर्थ कर रहे थे परमात्मा

2368
02:54:30,640 --> 02:54:34,640
आप उसी में दिखाइए ना हम भी देखेंगे उसमें के अभी का अर्थ क्या

2369
02:54:34,640 --> 02:54:38,640
होता है उसमें जो परमात्मा के विषय की बातें हैं उनके अर्थ

2370
02:54:38,640 --> 02:54:42,720
है बाकी ये संस्कृत हिंदी डिक्शनरी है मैं इसमें का अर्थ दिखाऊं

2371
02:54:42,720 --> 02:54:47,120
ये आपके रामपाल जी रामपाल जी भी बोलते है ये डिक्शनरी दिखाऊं इसमें

2372
02:54:47,120 --> 02:54:51,200
शिवांशी भाई दिखा दीजिए ये दिखा दीजिए आप आप दिखा

2373
02:54:51,200 --> 02:54:55,440
दीजिए अनन्या का अर्थ है ना आप इनको दिखा दीजिए का

2374
02:54:55,440 --> 02:54:59,600
अर्थ देख लो भैया जी आपने किस डिक्शनरी में पढ़ा

2375
02:54:59,600 --> 02:55:05,010
था ये वाला जो अधन्या का मतलब जो हैवारी डिक्शनरीदर्शी डिक्शनरी

2376
02:55:05,010 --> 02:55:09,040
[हंसी] आप अपना वो दिखाइए मैं तब तक इनसे थोड़ी

2377
02:55:09,040 --> 02:55:13,200
सी बात कर लेता हूं शैलेश जी वो कौन सी बुक है जिसमें से रामपाल जी ने आपको कोई प्रमाण

2378
02:55:13,200 --> 02:55:17,280
तो दिया होगा ना कि मैं अधन्या को कुंवारी बोल रहा हूं तो यहां से बोल रहा हूं क्योंकि

2379
02:55:17,280 --> 02:55:21,840
वो तो प्रमाणित बात करते हैं। देखो जी ऐसा है जी

2380
02:55:21,840 --> 02:55:25,920
ये संत रामपाल जी महाराज के तो अनुवाद को आप मानते ही नहीं उसको

2381
02:55:25,920 --> 02:55:30,080
मान जाए तो आपकी सब बात सेट हो जाए। संत रामपाल जी महाराज के अनुवाद

2382
02:55:30,080 --> 02:55:34,640
को तो आप मानते ही नहीं फिर तो आप सेट ही हो जाए। समस्या यही आ रही है ना?

2383
02:55:34,640 --> 02:55:36,480
संत रामपाल जी महाराज के अनुवाद

2384
02:55:36,480 --> 02:55:42,480
को अगर आप मानना शुरू कर दे तो आप सेट हो जाओगे। जी

2385
02:55:42,800 --> 02:55:46,880
मत बोलने दीजिए। ये जो है इसको भी कटिंग करके अपने उसमें प्रचार

2386
02:55:46,880 --> 02:55:52,240
में उपयोग कर लेंगे। आप इनसे एक ही बात

2387
02:55:52,240 --> 02:55:56,240
मत बोलने दीजिए। [हंसी] ये हमारे

2388
02:55:56,240 --> 02:56:00,720
जितने भी भाई अभी डिबेट देख रहे हैं

2389
02:56:00,720 --> 02:56:04,800
म्यूट म्यूट करो। म्यूट करो म्यूट करो भाई। भाई

2390
02:56:04,800 --> 02:56:09,200
साहब आप यहां भाषण मत दीजिए। भाई साहब आप यहां प्रवचन मत दीजिए।

2391
02:56:09,200 --> 02:56:13,360
भाई साहब विषय पे बात करते हैं। अगन्या का अर्थ कुमारी कहां से पढ़ा

2392
02:56:13,360 --> 02:56:19,360
आपने ये बताइए?

2393
02:56:19,520 --> 02:56:23,760
बताइए आप जी बताइए अनन्या का अर्थ क्या होता है? अब

2394
02:56:23,760 --> 02:56:28,160
मतलब मैं बता देता हूं आपको। मैं बता देता हूं आपको।

2395
02:56:28,160 --> 02:56:32,480
एक मिनट मैं बता देता हूं आपको। अरे मैंने आज

2396
02:56:32,480 --> 02:56:36,480
एक सूक्त भेजा था। एक मिनट जी

2397
02:56:36,480 --> 02:56:40,480
एक मैंने आपको सूक्त भेजा था अथर्ववेद का जिसमें की अग्या सूक्त था

2398
02:56:40,480 --> 02:56:44,640
वो ध्यान है मैंने भेजा था जी जी देखो उसका

2399
02:56:44,640 --> 02:56:50,640
केवल मुझे क्रमांक बता दीजिए क्रमांक जी जी

2400
02:57:03,280 --> 02:57:09,280
केवल क्रमांक

2401
02:57:09,760 --> 02:57:15,760
घन्या

2402
02:57:20,880 --> 02:57:24,880
अरे वो घ है या ध है? ध घ

2403
02:57:24,880 --> 02:57:29,600
आधा घ है अनघन्या अच्छा घ है अरे यार

2404
02:57:29,600 --> 02:57:33,360
ठीक है ठीक है

2405
02:57:33,360 --> 02:57:36,400
होगा फिर

2406
02:57:36,400 --> 02:57:40,400
इतनी मेहनत करवाते हैं और मेहनत के बाद

2407
02:57:40,400 --> 02:57:44,560
मानना कुछ है नहीं [हंसी] वो सूख अच्छा

2408
02:57:44,560 --> 02:57:50,560
चलिए मैं ढूंढ लेता हूं रुकिए

2409
02:57:51,200 --> 02:57:55,360
वो पूरा गन्ना सूख है वो वो पूरा वेदों में सूक्त

2410
02:57:55,360 --> 02:58:00,960
है कन्या का है

2411
02:58:00,960 --> 02:58:06,240
नाम

2412
02:58:06,240 --> 02:58:11,600
कोई

2413
02:58:11,600 --> 02:58:16,320
तब तक आप अपनी बात कर लीजिए गुरुकुल जी गोविंद जी

2414
02:58:16,320 --> 02:58:20,960
आप अपनी बात कर लीजिए

2415
02:58:20,960 --> 02:58:25,040
मैं आपको पूछ रहा था कि मतलब जो ये जो

2416
02:58:25,040 --> 02:58:29,040
अघन्या का मतलब कुंवारी है ये आपके गुरु जी ने स्वयं से किया है क्योंकि

2417
02:58:29,040 --> 02:58:34,960
आपने कहा ना कि हमारे गुरु जी की बात आप समझ नहीं पाए

2418
02:58:34,960 --> 02:58:39,200
नहीं भैया मैं बताऊ मैं बताऊ मैं इनकी वीडियो देखा था इनमें

2419
02:58:39,200 --> 02:58:43,200
पता है ये क्या बोल रहे थे अनन्या अनन्य मतलब बिना धनाई हम

2420
02:58:43,200 --> 02:58:47,200
बोलते हैं ना कि अपनी लैंग्वेज में वैसे बोल रहे थे व्याकरण से नहीं बोल रहे

2421
02:58:47,200 --> 02:58:52,080
थे महाराज जी बोल रहे थे कि अपनी लैंग्वेज में बोलते हैं ना बिना धनाई

2422
02:58:52,080 --> 02:58:56,320
ऐसे उसमें ट्रांसलेट किया गया। बाकी इसका अर्थ ये नहीं होता है।

2423
02:58:56,320 --> 02:59:02,320
ऐसे काम होता है।

2424
02:59:03,520 --> 02:59:07,520
मयंक जी आपको जैसे मैं एक्स देके बताता हूं। शायद आप वही

2425
02:59:07,520 --> 02:59:12,000
बात कर रहे हो। जैसे इंग्लिश में व्हाट का मतलब होता है हम कहते है ना व्हाट?

2426
02:59:12,000 --> 02:59:16,000
तो मतलब पंजाबी में हमारे कहते हैं व उस चीज को कहते

2427
02:59:16,000 --> 02:59:20,000
हैं जो मरोड़ पड़ता है ना पेट में। हम उसको कहते हैं पेट में वट पड़

2428
02:59:20,000 --> 02:59:24,000
रहा है। बस बिल्कुल यही यही यही यही

2429
02:59:24,000 --> 02:59:28,000
और खेतों को बांटने के लिए जो वहां पर लकीर टाइप होती है

2430
02:59:28,000 --> 02:59:32,000
ना मिट्टी की बनी हुई ठीक है उसको भी वाट ही कहते हैं हम कि आप कहां

2431
02:59:32,000 --> 02:59:37,040
जा रहे हो मैं वाटर से अब अब देखो ना कि ये कैसी

2432
02:59:37,040 --> 02:59:41,200
हरकतों पे है इन्होंने मंडल बता दिया सूक्त बताया

2433
02:59:41,200 --> 02:59:45,520
मंत्र भी बता दिया और शिवांश भैया जी है ना जो ऋग्वेद

2434
02:59:45,520 --> 02:59:49,520
को खोला ठीक है वो सारी चीज निकाली

2435
02:59:49,520 --> 02:59:50,080
उसमें

2436
02:59:50,080 --> 02:59:54,240
में जो बाकायदा लिखा हुआ है ना उसको भी दिखाया तो उसको नहीं मान रहे

2437
02:59:54,240 --> 02:59:58,400
बताओ इनसे बड़ी मूर्ख पर हम एक काम करते हैं ना हम

2438
02:59:58,400 --> 03:00:02,480
फोकस रहते हैं जैसे कि शैलेश जी से मैं पूछ रहा हूं

2439
03:00:02,480 --> 03:00:06,560
कि जैसे बाबा जी तो कोई भी बात बताते हैं झट से ही इंटरनेशनल टीवी पर ग्रंथ

2440
03:00:06,560 --> 03:00:10,560
खोल लेते हैं जैसा कि इनका क्लेम है तो जब उन्होंने यह बताया कि अधन्या का

2441
03:00:10,560 --> 03:00:14,560
मतलब कुंवारी है तो उन्होंने कोई ना कोई ग्रंथ खोल कर तो बताया

2442
03:00:14,560 --> 03:00:18,640
होगा ना इनको तो शैलेश जी वो कौन सा ग्रंथ था जिससे भी आपने

2443
03:00:18,640 --> 03:00:24,560
विश्वास कर लिया कि हां कुंवारी का मतलब अध्या का मतलब कुंवारी होता है।

2444
03:00:24,560 --> 03:00:28,640
अरे मैं कह रहा हूं कि मैं ये देखिए हूं शायद

2445
03:00:28,640 --> 03:00:33,440
Google पे मिल जाए। ये मिल गया यहां पर अगन्या सूक्त है पूरा

2446
03:00:33,440 --> 03:00:37,600
और इसमें गाय की बात हो रही है। और गाय को अगन्या

2447
03:00:37,600 --> 03:00:41,680
क्यों कहा गया है? यह यहां पर आया है। गोवे आ गई है

2448
03:00:41,680 --> 03:00:46,000
और उन्होंने कल्याण किया है। वे सब गौशाला में बैठे

2449
03:00:46,000 --> 03:00:50,240
और हमें इसमें कहीं भी कुंवारी आए तो बताइएगा। यहां उत्तम

2450
03:00:50,240 --> 03:00:54,320
बच्चों से युक्त बहुत धूप वाली हो जाए। परमेश्वर के लिए यजन के

2451
03:00:54,320 --> 03:00:58,640
लिए उषा काल के पूर्व दूध देने वाली होवे।

2452
03:00:58,640 --> 03:01:02,640
आ गई गाय। उन्होंने भद्र से घर भर दिया। ठीक

2453
03:01:02,640 --> 03:01:05,360
है। ये सब इसमें चल रहा है। और इसी

2454
03:01:05,360 --> 03:01:09,600
में इनको लास्ट में अगन्या कहा गया है। वो भी दिखा देता हूं। मैं स्क्रीन

2455
03:01:09,600 --> 03:01:13,840
शेयर कर रहा हूं। मैं भी एक एक रेफरेंस मैं भी दे रहा हूं। हां

2456
03:01:13,840 --> 03:01:18,880
ये पूरा फेवरेट रेफरेंस है। जी पूरा सूट है।

2457
03:01:18,880 --> 03:01:23,280
जी का सूक्त है गाय के ऊपर ही बना है। अग्य शब्द कान्य

2458
03:01:23,280 --> 03:01:27,280
शब्द का अर्थ ऋग्वेद में गाय को अगन्या

2459
03:01:27,280 --> 03:01:31,360
या जो मारने योग्य नहीं है के रूप में संगठित किया गया

2460
03:01:31,360 --> 03:01:36,240
है। सामने लिखा हुआ है आपके स्क्रीन शेयर कर दीजिए।

2461
03:01:36,240 --> 03:01:42,240
कर तो रहा हूं। नहीं दिख रही है मेरी स्क्रीन? ना ना अरे

2462
03:01:43,840 --> 03:01:47,920
अब मुझे फिर से पूरा करना पड़ेगा। इतना मेहनत और सबसे बड़ी बात पता क्या

2463
03:01:47,920 --> 03:01:52,080
है शिवा जी कि अभी जब हम श्री कृष्ण की लीला देखेंगे ना तो उसमें सारी

2464
03:01:52,080 --> 03:01:57,440
बात ऐसे ही लिखी होगी जो आपने रुग सुनाई

2465
03:01:57,440 --> 03:02:01,440
वो कृष्ण के लिए है वो कुंवारा

2466
03:02:01,440 --> 03:02:06,960
इसलिए जोड़ा है कि इनकी कोई लोकोक्ति है ये देखिए अगन्या शब्द का अर्थ

2467
03:02:06,960 --> 03:02:11,120
अगन्या शब्द का अर्थ है किसी भी परिस्थिति में मारे जाने के

2468
03:02:11,120 --> 03:02:15,360
लिए नहीं देख लीजिए भैया आंखें नेक्स्ट नेक्स्ट सेंटेंस

2469
03:02:15,360 --> 03:02:19,680
पढ़िए। ऋग्वेद में गाय को अगन्या या

2470
03:02:19,680 --> 03:02:24,640
जो मारने योग्य नहीं है के रूप में संदर्भित किया गया है।

2471
03:02:24,640 --> 03:02:28,640
और क्या बताऊं मैं? इसमें कि पूरा

2472
03:02:28,640 --> 03:02:32,960
सूक्त है ना चार 21 अथर्ववेद चार 21 खोल के पढ़ना पूरे सूक्त

2473
03:02:32,960 --> 03:02:37,120
में गाय को अगन्य कहा गया है और यह बताया गया है कि उसको मारा

2474
03:02:37,120 --> 03:02:41,600
नहीं जा सकता। वध करने योग्य नहीं।

2475
03:02:41,600 --> 03:02:45,760
इनको भैया इनको अभी भी विश्वास नहीं आएगा। देखो अब हमसे

2476
03:02:45,760 --> 03:02:49,840
शास्त्रोक्त बातें बहुत सारी हो गई। अब जरा टेक्निकल बातें कर लेते हैं। खत्म करने

2477
03:02:49,840 --> 03:02:53,840
से पहले है ना शास्त्रों का प्रमाण हमने बहुत सारी बातें कर ली। अब आप

2478
03:02:53,840 --> 03:02:58,000
अगर आपके पास और शास्त्र करने के लिए तो किसी दिन

2479
03:02:58,000 --> 03:03:01,200
आना मगर

2480
03:03:01,200 --> 03:03:05,360
मैं आपको बता दूं कि एक जो तत्वदर्शी वाली बात है

2481
03:03:05,360 --> 03:03:09,920
वो आपको मैं बताना चाह रहा था आज वो क्या है?

2482
03:03:09,920 --> 03:03:13,920
वो मैंने आज आपको ना संक्षिप्त देवी

2483
03:03:13,920 --> 03:03:18,080
भागवत का 414 या 464 नंबर का

2484
03:03:18,080 --> 03:03:23,040
प्रश्न जो है मैंने शेयर किया था ऑपरेटर महोदय

2485
03:03:23,040 --> 03:03:27,120
तो आप जरा वो 464 या 414 नंबर का जो प्रश्न है जो मैंने

2486
03:03:27,120 --> 03:03:31,360
देवी भागवत का आपको कहा था वो जरा यहां पर ला दीजिए जिस जिस

2487
03:03:31,360 --> 03:03:35,440
पृष्ठ संख्या के आधार पर रामपाल दास जी

2488
03:03:35,440 --> 03:03:39,760
ये क्लेम करते हैं कि सतयुग के जो राक्षस है वही वही कलयुग

2489
03:03:39,760 --> 03:03:44,160
के ब्राह्मण है। मतलब ऐसा वैसा प्रश्न नहीं है। वो

2490
03:03:44,160 --> 03:03:48,320
आपके गुरु के द्वारा स्वीकार किया गया पष्ठ।

2491
03:03:48,320 --> 03:03:52,320
ग्रंथ तो दूर की बात है। ग्रंथों में तो तब भी कह दोगे कि ये नहीं मानेंगे वो नहीं मानेंगे

2492
03:03:52,320 --> 03:03:56,480
मगर पष्ठ। वही पष् जिस पृष्ठ के आधार पे वो ये

2493
03:03:56,480 --> 03:03:56,980
कह

2494
03:03:56,640 --> 03:04:01,440
रहे हैं कि कलयुग के जो ब्राह्मण है वो जो है कौन है?

2495
03:04:01,440 --> 03:04:05,600
नहीं संक्षिप्त वाला। संक्षिप्त वाला मैंने आपको शेयर किया था आज। यह

2496
03:04:05,600 --> 03:04:10,560
नहीं यह संस्कृत हिंदी है। संक्षिप्त वाला

2497
03:04:10,560 --> 03:04:16,560
संक्षिप्त भागवत

2498
03:04:18,240 --> 03:04:22,240
वहां पे उनके काम की बात तो मुझे मिली नहीं मगर अपने काम की बात जरूर मिल

2499
03:04:22,240 --> 03:04:28,240
गई। वहीं पे रामपाल दास जी ही मुझे कई सारे प्रमाण दे देते हैं।

2500
03:04:28,240 --> 03:04:32,480
रामपाल [हंसी] दास जी के वीडियोस से ही मुझे बहुत सारे प्रमाण प्राप्त

2501
03:04:32,480 --> 03:04:36,640
हो जाते हैं। और कुछ मत देखो। आप उनहीं के वीडियोस

2502
03:04:36,640 --> 03:04:41,040
देख लो तो आपको आपके मतलब की चीजें सब मिलंगी। वही

2503
03:04:41,040 --> 03:04:45,040
मेरी भी ऐसी है। जैसे वो ब्रज का अर्थ जब दिखा रहे तो वही

2504
03:04:45,040 --> 03:04:51,040
लिखा है आना। जब वो दिखा रहे हैं ब्रज का अर्थ।

2505
03:04:52,080 --> 03:04:56,560
वो प्रश्न पष् संख्या क्या थी वो ऑपरेटर

2506
03:04:56,560 --> 03:05:00,640
जी पष् संख्या बता दीजिए कौन सी बताई थी मैंने आपको 464 बताई थी या

2507
03:05:00,640 --> 03:05:06,640
414 बताई थी जिससे कि इनको ढूंढने में आसानी हो जाए

2508
03:05:08,930 --> 03:05:13,040
[गला साफ़ करने की आवाज़] संक्षिप्त वाला सुधांशु भाई मैं

2509
03:05:13,040 --> 03:05:17,200
लीप करता हूं आप लोग आपको कोई अगर

2510
03:05:17,200 --> 03:05:21,840
आवश्यक कार्य ना हो तो रहिए यहां पे देखिए आनंदित वातावरण है इस समय

2511
03:05:21,840 --> 03:05:27,840
है कल का एक टॉपिक रखना है वेदों में पुरुषोत्तम कौन

2512
03:05:28,640 --> 03:05:34,320
वेदों में पुरुषोत्तम कौन वेदों में

2513
03:05:34,320 --> 03:05:38,320
नहीं 443 मैंने नहीं कहा होगा 464 या 414 कहा

2514
03:05:38,320 --> 03:05:41,120
होगा

2515
03:05:41,120 --> 03:05:45,200
414 या 464 कहा होगा मैंने मैंने इधर से

2516
03:05:45,200 --> 03:05:51,040
लिख के दिया होगा आपको वो प्रश्न क्रमांक

2517
03:05:51,040 --> 03:05:55,040
जो वही देश जहां पर ब्राह्मणों को

2518
03:05:55,040 --> 03:05:59,200
से तुलना की जा रही है। वही कह रहे हां वो कौन सा प्रश्न संख्या

2519
03:05:59,200 --> 03:06:03,360
है जिसमें बात करते हैं? मैं बताता हूं एक मिनट लगेगा मेरे को।

2520
03:06:03,360 --> 03:06:07,360
हां बताइए बताइए। शिवशी जी इसमें वो भी दिखा देना।

2521
03:06:07,360 --> 03:06:12,400
यहां शूद्रों के लिए भी लिखा गया है। क्षत्रियों के लिए भी लिखा गया है उसके। ठीक है। 4143

2522
03:06:12,400 --> 03:06:17,440
क्यों कह रहे हैं? 414 खोलिए श्वेता जी।

2523
03:06:17,440 --> 03:06:23,440
हां खोल रहा हूं मैं

2524
03:06:24,480 --> 03:06:26,640
कौन

2525
03:06:26,640 --> 03:06:30,880
वेदों में इसी तरीके से इनका एक एक

2526
03:06:30,880 --> 03:06:35,120
नरेटिव जो है हमें तोड़ना है एक एक नरेटिव गीता

2527
03:06:35,120 --> 03:06:39,280
अध्याय का जो 15 15 का 16 17 और 18

2528
03:06:39,280 --> 03:06:43,440
है ना इसका नैरेटिव तोड़ना है कल हमने ये वेदों

2529
03:06:43,440 --> 03:06:48,160
में मुझे पुरुषोत्तम कहा गया है वो हमको दिखा के हम प्रूफ करेंगे कल

2530
03:06:48,160 --> 03:06:51,760
कि कौन पुरुषोत्तम है।

2531
03:06:51,760 --> 03:06:57,000
पूरे पूरे सूक्त दिखाए जाएंगे कल चारों वेदों से।

2532
03:06:57,000 --> 03:07:03,000
[गला साफ़ करने की आवाज़] जी खुला मिला आपको संक्षिप्त वाला

2533
03:07:03,840 --> 03:07:07,920
400 कौन सा है? 400 400 कितना बताया

2534
03:07:07,920 --> 03:07:11,120
था अभी? 414

2535
03:07:11,120 --> 03:07:15,200
अभी बताया था इन्होंने लिख के। मैं भूल गया। 400 एक मिनट

2536
03:07:15,200 --> 03:07:21,200
मैं बता मेरे पास है मेरे पास है आ गया आ गया आ गया 443

2537
03:07:21,200 --> 03:07:27,200
नहीं नहीं 414 है वो 443 क्यों लिख रहे है मुझे नहीं पता

2538
03:07:27,200 --> 03:07:30,720
ठीक है आप 4414

2539
03:07:30,720 --> 03:07:34,720
बोलिए कल मिलते हैं जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

2540
03:07:34,720 --> 03:07:39,920
राम जय श्री राम

2541
03:07:39,920 --> 03:07:44,160
ये है अच्छा हां

2542
03:07:44,160 --> 03:07:48,160
414 यह आपने संक्षिप्त देवी भागवत खोला है

2543
03:07:48,160 --> 03:07:52,240
ना हां हां लेकिन कौन सा हां

2544
03:07:52,240 --> 03:07:56,320
बहुत कौन सा वर्जन है ये इसमें क्या लिखा

2545
03:07:56,320 --> 03:08:01,200
है वो वाला चल रहा है क्या वो आपने बहुत मुझे लग रहा है ये वाले में अपना मिलेगा नहीं मामला

2546
03:08:01,200 --> 03:08:07,200
वो हो रहा है क्या कि वो सतयुग में ऐसी बातें करते थे वैसी बातें करते थे

2547
03:08:08,320 --> 03:08:12,320
प्रकाश नहीं यह तो नहीं

2548
03:08:12,320 --> 03:08:16,400
है इसमें ऑपरेटर जी आप आप खोल लीजिए आप दिखा दीजिए वह वाला

2549
03:08:16,400 --> 03:08:20,480
पेज 414 नंबर का मैंने आज आपको लिंक भी भेजा था मेरे पास आ गया

2550
03:08:20,480 --> 03:08:24,560
आ गया आ गया बोलिए जरा

2551
03:08:24,560 --> 03:08:28,560
संक्षिप्त वाले में वो 425 है अगर आप चाहते

2552
03:08:28,560 --> 03:08:32,640
हो तो मैं स्क्रीन पे शो कर देता हूं ग्रंथ से ही हां स्क्रीन पे शो करिए स्क्रीन

2553
03:08:32,640 --> 03:08:36,640
पे इनकी मेन मेन स्क्रीन इनकी

2554
03:08:36,640 --> 03:08:40,880
कर दीजिए गोविंद जी की

2555
03:08:40,880 --> 03:08:46,880
मैं एक सेकंड ये बदल लूं सिर्फ कैमरा थोड़ा पिछला कर लूं

2556
03:08:47,280 --> 03:08:51,280
बैक। [गहरी सांस लेने की आवाज़] तो ये है संक्षिप्त देवी भागवत

2557
03:08:51,280 --> 03:08:55,280
पुराण। वो भाई साहब कहां चले गए? जिनको हम दिखा

2558
03:08:55,280 --> 03:08:59,360
रहे हैं वो कहां चले गए? बहुत बढ़िया। बहुत

2559
03:08:59,360 --> 03:09:03,360
बढ़िया। गोरखपुर द्वारा प्रकाशित है। मैंने टैग लगा के रखे हुए हैं ना। मैं दूसरे कमरे में

2560
03:09:03,360 --> 03:09:07,600
था दरअसल। धर्म की ये स्थिति त्रेता में भी रही। ठीक है। फिर वही

2561
03:09:07,600 --> 03:09:11,600
बात है कि ब्राह्मण वो माने जाते हैं जो जी जी इसको नहीं पढ़ना

2562
03:09:11,600 --> 03:09:15,600
है अपने को। इसमें तो स्त्रियों को भी लिखा है। वो बात अलग है कि इनका अपनी घर की

2563
03:09:15,600 --> 03:09:20,080
स्त्रियों के बारे में वो है कि नहीं। इसके लेफ्ट पैराग्राफ को जरा पढ़िए।

2564
03:09:20,080 --> 03:09:24,160
लेफ्ट वाला इससे लेफ्ट वाला पैरा पढ़िए। उसमें

2565
03:09:24,160 --> 03:09:28,480
लिखा होगा कि सतयुग के जो ब्राह्मण थे वो वेदों

2566
03:09:28,480 --> 03:09:32,640
के वेदों के पूर्ण रूप से जानने वाले थे और मां जगदंबा

2567
03:09:32,640 --> 03:09:37,440
का निरंतर आराधना करते थे। ये है

2568
03:09:37,440 --> 03:09:38,480
हां। यह

2569
03:09:38,480 --> 03:09:42,480
निश्चय है कि सतयुग में ब्राह्मण वेद के पूर्ण विद्वान थे।

2570
03:09:42,480 --> 03:09:46,800
उनके द्वारा निरंतर भगवती जगदंबा की आराधना होती थी। लो भगवती

2571
03:09:46,800 --> 03:09:48,480
के दर्शन करने के लिए उनका

2572
03:09:48,480 --> 03:09:52,880
बस इतना इतना बहुत है। इतना बहुत है और आगे गायत्री का ध्यान करते थे। देखिए

2573
03:09:52,880 --> 03:09:57,200
गायत्री का ध्यान गायत्री का ध्यान प्राणायाम

2574
03:09:57,200 --> 03:10:01,200
जप में अपना सारा समय व्यतीत होता था। ठीक है? अब बस एक

2575
03:10:01,200 --> 03:10:05,760
मिनट। तो वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाले कौन है?

2576
03:10:05,760 --> 03:10:11,040
जो भगवती जगदंबा का ध्यान करते हैं निरंतर और

2577
03:10:11,040 --> 03:10:15,200
निरंतर ध्यान करते हैं और प्रणव युक्त गायत्री का

2578
03:10:15,200 --> 03:10:19,680
जप करते हैं। अब ये जो 15 एक के अनुसार तत्वदर्शी

2579
03:10:19,680 --> 03:10:24,000
कहते हैं कि 15 एक में तत्वदर्शी का बताया गया है। वहां क्या लिखा

2580
03:10:24,000 --> 03:10:28,000
है कि जो तत्वदर्शी है इनके अनुसार

2581
03:10:28,000 --> 03:10:32,000
जो तत्वदर्शी है, वो वेद के तात्पर्य को जानने वाला

2582
03:10:32,000 --> 03:10:36,240
है। और इनके ही इस

2583
03:10:36,240 --> 03:10:40,400
आधार पे संक्षिप्त देवी भागवत में लिखा हुआ है कि वेद को

2584
03:10:40,400 --> 03:10:44,400
पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है? जो मां भगवती की

2585
03:10:44,400 --> 03:10:48,400
निरंतर आराधना करता है और गायत्री का जप करता

2586
03:10:48,400 --> 03:10:52,480
है। इनके दो क्लेम टूट गए यहां पे। कहां लिखा है

2587
03:10:52,480 --> 03:10:58,480
इसमें? रामपाल वेदों को जानने वाले हैं।

2588
03:10:59,520 --> 03:11:03,600
आप को भी आपको भी बहुत-बहुत

2589
03:11:03,600 --> 03:11:08,400
दीपावली की शुभकामनाएं। आज हंस हंस कर पेट दर्द करने लगा।

2590
03:11:08,400 --> 03:11:12,720
यूं ही ज्ञान और आनंद का विस्तार करते रह। जय श्री राम। जय श्री राम। सचिन देवकर

2591
03:11:12,720 --> 03:11:16,720
जी। रामपाल दास जी का नाम देवी भागवत

2592
03:11:16,720 --> 03:11:21,440
में नहीं लिखा है कि वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाले रामपाल है। मगर

2593
03:11:21,440 --> 03:11:25,600
यह जरूर लिखा है कि जो पूर्ण रूप से जानते हैं वेदों को वो कौन होते

2594
03:11:25,600 --> 03:11:29,680
हैं? देवी मां की आराधना करने वाले। और यह प्रमाण

2595
03:11:29,680 --> 03:11:34,560
हमको हमारे द्वारा नहीं मिला है। आपके जो तत्वदर्शी

2596
03:11:34,560 --> 03:11:38,640
हैं उनके ही द्वारा ये प्रमाण हमें प्राप्त हुआ है। क्योंकि वो वहीं से बताते

2597
03:11:38,640 --> 03:11:42,960
हैं। उसी प्रश्न को खोल के बताते हैं कि भैया वो जो ब्राह्मण है वो सतयुग

2598
03:11:42,960 --> 03:11:47,200
के और राक्षस थे वो आज ब्राह्मण है। वहीं से मिला है हमें। ज्यादा दूर

2599
03:11:47,200 --> 03:11:51,520
नहीं जाना पड़ेगा। कहां गए भैया सब

2600
03:11:51,520 --> 03:11:55,600
सब चले गए। जो भाई साहब थे जिनसे बातें चल रही थी वो

2601
03:11:55,600 --> 03:11:59,600
भाग गए। और इनकी

2602
03:11:59,600 --> 03:12:04,860
ऐसी बात भी देखिए कि रामपाल बाबा इस बात पर हंसते थे।

2603
03:12:04,860 --> 03:12:08,320
[हंसी]

2604
03:12:08,320 --> 03:12:12,400
हां भाई क्या दिखा रहे हैं? जैसे सत्संग में आम

2605
03:12:12,400 --> 03:12:16,720
अलाउड करते हैं। आ जाओ आज सत्संग है।

2606
03:12:16,720 --> 03:12:20,480
ये क्या है?

2607
03:12:20,480 --> 03:12:24,640
जय श्री राम। हां भैया आप लोग कहते हैं ना कि बिंदी क्यों लगाते

2608
03:12:24,640 --> 03:12:29,040
हैं? तिलक क्यों लगाते हैं? ये क्या है?

2609
03:12:29,040 --> 03:12:34,080
ये रामपाल दास जी के चेहरे पर क्या है? हेलो हेलो

2610
03:12:34,080 --> 03:12:38,160
कहां गए? मैं कुछ बोलूं? सुनिए। जय

2611
03:12:38,160 --> 03:12:44,160
श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। कहां गए?

2612
03:12:44,160 --> 03:12:48,740
अब मुझे मैं फिर फिल्मी होने लगता हूं। फिर मेरी ये कमी है।

2613
03:12:48,740 --> 03:12:53,680
[हंसी] सही है। जी बोलिए विशाल जी।

2614
03:12:53,680 --> 03:12:57,680
जय श्री राम। [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं आपसे यह कहना चाहता हूं

2615
03:12:57,680 --> 03:13:02,000
कि आपके ऊपर कबीर वाले जितने भी उनके शिष्य हैं चाहे वो स्त्री हो, स्त्री

2616
03:13:02,000 --> 03:13:06,160
स्त्री हो, वृद्ध हो, पुरुष हो, कोई भी हो, छोटे बड़े सभी शिष्य आपके ऊपर आधे

2617
03:13:06,160 --> 03:13:10,560
वीडियोस पे वीडियोस बनाए जा रहे हैं। इन्हीं के शिष्य

2618
03:13:10,560 --> 03:13:14,960
हमारे, हमारे विरुद्ध? उससे अच्छा है ना? हमारा प्रचार होगा भाई।

2619
03:13:14,960 --> 03:13:19,040
और बनाएं? वो मतलब सामने आ ही नहीं रहे बस वीडियो ही बना

2620
03:13:19,040 --> 03:13:23,200
रहे हैं। वो जो छह देखा था मैंने आज देखा था

2621
03:13:23,200 --> 03:13:27,680
कोई मातृ शक्ति थी वीडियो बना रही थी। अच्छी बात है। हम

2622
03:13:27,680 --> 03:13:31,840
अभी वो जो आपने छह सी छह एपिसोड्स बनाए थे ना आपने अभी इनके

2623
03:13:31,840 --> 03:13:35,920
ऊपर इससे पहले तो वो

2624
03:13:35,920 --> 03:13:40,080
जो एक है ना फैक्ट बाय अभिषेक उसने एक वीडियो बनाई है आपके ऊपर पौने घंटे की

2625
03:13:40,080 --> 03:13:44,080
उसमें क्या बनाया है? वीडियो बनाया है

2626
03:13:44,080 --> 03:13:48,080
जैसे इनके ऊपर बनाया गोविंद गुरुकुल के ऊपर जो मैंने छह वीडियोस की सीरीज बनाई

2627
03:13:48,080 --> 03:13:52,240
थी उसके जवाब में हां वो मैंने देखा था देखा था देखा था

2628
03:13:52,240 --> 03:13:56,560
उसने क्या किया मैंने जो सारे प्रमाण दिए हैं उनकी बात ही नहीं की

2629
03:13:56,560 --> 03:13:59,200
बोल दिया वो झूठ है बोल रहा था वो हां बस वो

2630
03:13:59,200 --> 03:14:03,600
झूठ है बस मनगढ़ंत हम भाई कोई कबीर

2631
03:14:03,600 --> 03:14:07,600
वाला हो तो बताएं हमें कबीर वाला चाहिए कबीर

2632
03:14:07,600 --> 03:14:11,600
वाले कहां गए कुंवारी गाय का दूध ये वो

2633
03:14:11,600 --> 03:14:15,840
कहां गए भाई ससरी रहता अभी तो वो भी नरेटिव है ना ससरी

2634
03:14:15,840 --> 03:14:19,920
आता ससरी जाता ससरी रहता ससरी जाता [हंसी] इस

2635
03:14:19,920 --> 03:14:23,920
बार आर्य समाजियों को बुलाइए राधा रानी जी के ऊपर कुछ कि उनको प्रॉब्लम क्या है राधा

2636
03:14:23,920 --> 03:14:28,000
जी से आर्य समाजियों को बुलाइए इस बार आर्य समाज जी देखिए इन सबके जनक

2637
03:14:28,000 --> 03:14:32,000
हैं हम उनमें और वो वो इंटेलेक्चुअल

2638
03:14:32,000 --> 03:14:36,000
है वो बुद्धिमान है वो ऐसी चीजें नहीं करते हैं कि मतलब

2639
03:14:36,000 --> 03:14:40,320
इनसे उनका जो बौद्धिक स्तर है बहुत आगे के हैं वो लोग

2640
03:14:40,320 --> 03:14:44,400
किसी ने बिल्कुल सही कहा था कि किसी ने बिल्कुल सही कहा था कि ये

2641
03:14:44,400 --> 03:14:48,400
आर्य समाज इसको किस भले ही दिमाग का यूज़ करना पड़ता। इनके साथ कोई दिमाग का वही

2642
03:14:48,400 --> 03:14:53,200
नहीं करना पड़ता। हां

2643
03:14:53,200 --> 03:14:57,360
नहीं मगर इनको समझाने में ज्यादा दिक्कत है। क्यों? अब जैसे

2644
03:14:57,360 --> 03:15:01,360
हम उपनिषद का प्रमाण दिखाने लगे। अब ये उपनिषद को जानते नहीं है तो

2645
03:15:01,360 --> 03:15:05,360
ये कह देंगे। हम निरुक्त दिखाने लगे। अब निरुक्त को ये जानते नहीं है तो

2646
03:15:05,360 --> 03:15:09,600
मना कर देंगे। इसमें ज्यादा प्रॉब्लम को क्या था कि हम उनको

2647
03:15:09,600 --> 03:15:13,600
नहीं मानते। अब ये आर्य समाज वाले कहते हैं हम पुराण नहीं मानते। अब ये लोग बोले हम उपनिषद नहीं

2648
03:15:13,600 --> 03:15:15,360
मानते हैं।

2649
03:15:15,360 --> 03:15:19,680
उपनिषद को ही मना कर दिया जिसको आर्य समाज भी मानते हैं। आर्य समाज

2650
03:15:19,680 --> 03:15:24,160
भी उपनिषदों को स्वीकार करते हैं। आर्य समाज जी भी मगर ये लोग तो उपनिषदों

2651
03:15:24,160 --> 03:15:28,640
को ही मना कर रहे हैं। एक कदम और आगे अभी

2652
03:15:28,640 --> 03:15:32,800
दो दिन पहले वो जो एक आए थे ना अमित दास नाम के जिन्होंने हनुमान जी पे सवाल उठाए

2653
03:15:32,800 --> 03:15:36,800
थे हनुमान जी की भक्ति पे। अब वो आपसे लड़ नहीं। आप पे वीडियोस बनाए जा रहे। एक

2654
03:15:36,800 --> 03:15:41,040
वीडियो दो दिन पहले बनाए उसमें उन्होंने पता है क्या बोला? टाइटल पे

2655
03:15:41,040 --> 03:15:45,520
लीजिए शिवश जी मैंने आपका और आपके चारों शंकराचार्यों का खंडन कर दिया

2656
03:15:45,520 --> 03:15:51,280
वीडियो में और उनके ही आदमी ने बोला है बिल्ली जैसा मुंह लेके रह गया

2657
03:15:51,280 --> 03:15:55,520
उनके ही व्यक्ति ने Facebook पर बोला है कि भाई तुम मत जाओ

2658
03:15:55,520 --> 03:15:59,600
उससे ये नहीं कर पाओगे वो तुम लोगों से बहुत आगे है तुम्हारे

2659
03:15:59,600 --> 03:16:03,760
पास जवाब नहीं है अपनी भक्ति कर लो बिल्ली जैसा बंदर जैसा मुंह लेकर

2660
03:16:03,760 --> 03:16:08,800
मत मत जाओ वहां ये सब बोला है उसने

2661
03:16:08,800 --> 03:16:12,960
और वो एक बड़ा वो वाला बताया था जब वो जब हमने अपनी परंपरा

2662
03:16:12,960 --> 03:16:16,960
नहीं बताई थी गुरु परंपरा तो वो बोल रहा था

2663
03:16:16,960 --> 03:16:21,120
कि जब जब उसने गुरु परंपरा बताई शिवश ने तो

2664
03:16:21,120 --> 03:16:25,520
ये अमित दास का चेहरा इतना सा हो गया बिल्ली वाला तो

2665
03:16:25,520 --> 03:16:29,760
हमें करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। वो लोग खुद कर रहे हैं। कहां गए जो अभी

2666
03:16:29,760 --> 03:16:30,400
भाई साहब आए थे

2667
03:16:30,400 --> 03:16:34,800
चले गए जेल हम गए अभी

2668
03:16:34,800 --> 03:16:40,160
कोई भाई साहब रखना चाहूंगा यहां पे ठीक है।

2669
03:16:40,160 --> 03:16:44,640
मैं जैसे वो यहां पर बात हो रही है कि विशाल

2670
03:16:44,640 --> 03:16:48,720
जी विशाल जी ने जैसे बात उठाई यहां पर आर्य समाज के लिए मैं अपनी

2671
03:16:48,720 --> 03:16:52,960
तरफ से इसमें एक चीज ऐड करना चाहूंगा कि ऐसी भाषा क्यों

2672
03:16:52,960 --> 03:16:57,200
इस्तेमाल करनी है जिससे कि आपसी विरोध पैदा होता है।

2673
03:16:57,200 --> 03:17:01,280
यदि आप किसी चीज को मानते हैं अच्छी बात है। अगर आप किसी चीज

2674
03:17:01,280 --> 03:17:05,440
के ऊपर अन्य अपना ज्ञान देना चाहते हैं वो भी अच्छी बात है।

2675
03:17:05,440 --> 03:17:09,600
लेकिन कम से कम यह तो सोचिए कि जिस बारे में ठीक है हमारे जो

2676
03:17:09,600 --> 03:17:13,920
आचार्य आदि है वह बोल रहे हैं तो कुछ ना कुछ उसके पीछे लॉजिक होता

2677
03:17:13,920 --> 03:17:18,000
है। ठीक है आप मत मानिए किसी स्त्री रूपी राधा

2678
03:17:18,000 --> 03:17:22,160
रानी को नहीं मानेंगे तो क्या आप प्रकृति को भी नहीं मानेंगे फिर आपको प्रकृति को डिनाई

2679
03:17:22,160 --> 03:17:26,160
करना पड़ेगा वहां पर ठीक है ना प्रकृति एक स्वरूप में तो व्यक्त नहीं होती

2680
03:17:26,160 --> 03:17:30,240
है ना प्रकृति क्या केवल दहन ही दहन करती है क्या

2681
03:17:30,240 --> 03:17:34,240
वो हमें मैं मैं एक बात में अपनी बात खत्म करूंगा मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा

2682
03:17:34,240 --> 03:17:38,400
इस पर ठीक है क्या केवल प्रकृति का काम विनाश करना

2683
03:17:38,400 --> 03:17:42,400
ही केवल विनाश करना ही है केवल प्रकृति का कार्य नहीं

2684
03:17:42,400 --> 03:17:45,440
प्रकृति हमें लक्ष्मी रूप में सब साधन भी तो

2685
03:17:45,440 --> 03:17:49,600
दे रही है ना लक्ष्य तक पहुंचने के लिए तो क्या आप उसका वो रूप डिनाई

2686
03:17:49,600 --> 03:17:53,680
कर दोगे? मेरा बस ये कहना है आर्य समाज के लिए यदि ये संदेश हो भी

2687
03:17:53,680 --> 03:17:57,840
तो आप किसी भी ऐसी लैंग्वेज का प्रयोग ना करिए जिसमें

2688
03:17:57,840 --> 03:18:02,080
कि आपकी ही बाद में हानि होती है। ठीक है? लोग आपके विरुद्ध

2689
03:18:02,080 --> 03:18:06,400
क्यों ना एक ऐसी चीज के बारे में बात करिए जो आपका अपना फील्ड है।

2690
03:18:06,400 --> 03:18:10,480
उसको प्रचार करिए। गोविंद जी मेरा भी यही कहना है। मेरा

2691
03:18:10,480 --> 03:18:14,480
भी यही कहना है। आपको साकार को नहीं मानना मत मानो। कृष्ण

2692
03:18:14,480 --> 03:18:18,560
को नहीं मानना मत मानो। मतलब उनको ईश्वर के भगवान के रूप में

2693
03:18:18,560 --> 03:18:24,320
नहीं मानना। ईश्वर के रूप में परमेश्वर के रूप में इसमें बालिका

2694
03:18:24,320 --> 03:18:28,320
मत मानो। मगर उनका जो आस्था है उनकी उनका अनादर मत

2695
03:18:28,320 --> 03:18:32,480
करो। आप उसको अलंकार समझ लो। जो उसको रियल समझ रहा है उसको

2696
03:18:32,480 --> 03:18:36,480
रियल समझने दो। बात खत्म। बिल्कुल और अगर आप किसी चीज

2697
03:18:36,480 --> 03:18:40,640
का खंडन करते हैं ना किसी चीज का खंडन करने का क्या कोई

2698
03:18:40,640 --> 03:18:44,640
नियम नहीं होता उसकी मर्यादा नहीं होती कोई मतलब ये तो फिर मैं ऐसे ही

2699
03:18:44,640 --> 03:18:48,800
समझूंगा जैसे शंकराचार्य प्रॉब्लम है उनकी जो उनकी

2700
03:18:48,800 --> 03:18:52,880
जो मेन पुस्तक है ना वो जो प्रकाश उसमें कई

2701
03:18:52,880 --> 03:18:56,880
जगह अभद्र भाषा उपयोग हो गई है जैसे भांड इत्यादि शब्द उसमें

2702
03:18:56,880 --> 03:19:01,040
उपयोग हो गए पोप ये सब हो गया है

2703
03:19:01,040 --> 03:19:05,360
अरे भाई आप लोगों की वजह से बार-बार हमारे आगंतुक चले आते हैं।

2704
03:19:05,360 --> 03:19:08,640
अब वो आए थे चले गए।

2705
03:19:08,640 --> 03:19:12,880
भाई साहब आ जाइए वापस। आप आपसे ही बात करेंगे। आ जाइए।

2706
03:19:12,880 --> 03:19:17,200
कौन थे? जी पांडे जी तब तक आप बताइए। जय श्री राम।

2707
03:19:17,200 --> 03:19:22,560
जय श्री राम। सो जी कैसे हैं आप? बस कृपा है राम की।

2708
03:19:22,560 --> 03:19:26,560
मैं बस ऐसे एन्जॉय कर रहा था। मैं आज का डिबेट जो रहा वो बहुत बहुत

2709
03:19:26,560 --> 03:19:30,560
हस्पद रहा आपका। देख के बहुत एंजॉय किया। बस यही सब शेयर

2710
03:19:30,560 --> 03:19:34,640
करने के लिए आया था मैं। इनको जो आपने उदाहरण दिया है कि दीवार

2711
03:19:34,640 --> 03:19:38,960
में सर मारना तो वाकई में आपका मतलब काबिल तारीफ है आपका काम

2712
03:19:38,960 --> 03:19:39,460
इतना

2713
03:19:39,360 --> 03:19:43,440
झेलना ना बहुत ही मतलब मैं क्या बताऊं कितनी एनर्जी लॉस

2714
03:19:43,440 --> 03:19:47,520
लॉस होता होगा आपका इसी के बारे में मैं डिस्कस करना चाह रहा था कि

2715
03:19:47,520 --> 03:19:52,000
कुछ नहीं समझना है इनको जैसा चल रहा है इनको चलने दो हां बट जो दूसरे

2716
03:19:52,000 --> 03:19:56,000
लोग हैं वो तो मेरे ख्याल से उनकी आंखें खुल रही है आ रहे हैं समाज में रिटर्न

2717
03:19:56,000 --> 03:20:00,080
हो रहा है आपका रिजल्ट मिलेगा आपको मैं बस यही कहना चाह रहा था

2718
03:20:00,080 --> 03:20:04,080
रही बात आर्य समाजियों के बारे में तो मैं बस एक सिंपल वर्ड हम लोग हम

2719
03:20:04,080 --> 03:20:08,160
लोग थोड़ा सा रुक करके दो तीन बार आ गए ना भाई साहब महेंद्र सिंह जी तो थोड़ा

2720
03:20:08,160 --> 03:20:12,160
सा थोड़ा सा रुक करके आपसे बात करते हैं जी महेंद्र

2721
03:20:12,160 --> 03:20:16,800
सिंह जी जय श्री राम नमस्कार जी नमस्कार जी

2722
03:20:16,800 --> 03:20:20,960
जी बोलिए आपका परिचय जय श्री राम जय श्री राम महेंद्र सिंह

2723
03:20:20,960 --> 03:20:23,680
नाम है जी मेरा

2724
03:20:23,680 --> 03:20:29,600
हरियाणा से हूं जी मैं रामपाल का विरोधी हूं

2725
03:20:29,600 --> 03:20:33,920
आपका शो बहुत अच्छा लगता मेरे को मजा आता है खूब

2726
03:20:33,920 --> 03:20:38,160
हंसी आती है इनकी जब मूर्खता पूरी दुनिया देखती

2727
03:20:38,160 --> 03:20:42,400
है ना जब ये प्रमाण साबित नहीं कर पाते आप

2728
03:20:42,400 --> 03:20:46,480
मर्यादा थोड़ा सा थोड़ा सा मर्यादा में रह के

2729
03:20:46,480 --> 03:20:50,640
ही बात जी जी मेरे को खुशी है कि

2730
03:20:50,640 --> 03:20:54,880
आप इनको लपेट रहे हैं। इनकी अज्ञान की पोल

2731
03:20:54,880 --> 03:20:59,040
खोल रहे हैं। ठीक है जी।

2732
03:20:59,040 --> 03:21:03,360
मैं आपके सारे वीडियो देखता हूं। बहुत अच्छा लगता है जी बहुत अच्छा

2733
03:21:03,360 --> 03:21:08,400
जी चलिए आभार आपका समर्थन प्रकट करने के लिए

2734
03:21:08,400 --> 03:21:12,400
जी और आभार आपका समर्थन प्रकट करने के लिए

2735
03:21:12,400 --> 03:21:16,400
और धरातल पर भी सहयोग की आवश्यकता है

2736
03:21:16,400 --> 03:21:20,480
महेंद्र सिंह जी राम पांडे जी हमारा नंबर हम लोग देते रहते

2737
03:21:20,480 --> 03:21:24,560
हैं धरातल पर भी जुड़े क्योंकि ये तो

2738
03:21:24,560 --> 03:21:28,560
ये तो केवल वैचारिक क्रांति है जब तक जमीन पे नहीं उतरेंगे

2739
03:21:28,560 --> 03:21:32,720
ना तो बदलाव नहीं ला पाएंगे बदलाव जमीन लाना

2740
03:21:32,720 --> 03:21:36,720
है विश्वास जी आपकी नलेज भी बहुत अच्छी

2741
03:21:36,720 --> 03:21:40,800
है जी अरे वो गुरु गोविंद ग्रंथ की थोड़ी

2742
03:21:40,800 --> 03:21:44,720
सी कृपा है थोड़ा सा कुछ गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा

2743
03:21:44,720 --> 03:21:49,040
है बस और कुछ नहीं तो हमने आज क्या

2744
03:21:49,040 --> 03:21:53,520
जाना कुंवारी गाय का कोई रेफरेंस नहीं है अगन्या

2745
03:21:53,520 --> 03:21:57,600
का अर्थ होता है जिसका वध ना किया जा सके नगर

2746
03:21:57,600 --> 03:22:02,160
है अगन्या का कुमारी तो दिखाओ

2747
03:22:02,160 --> 03:22:06,320
तत्वदर्शी यदि वेदों को जानने वाला है तो वेदों को जानने वाला

2748
03:22:06,320 --> 03:22:10,880
वो है जो भगवती की निरंतर आराधना करता है उस

2749
03:22:10,880 --> 03:22:15,280
रेफरेंस के आधार पर जिस रेफरेंस को आपके पूज्य गुरुदेव

2750
03:22:15,280 --> 03:22:19,360
यूज़ करते हैं। ठीक है? और हमने

2751
03:22:19,360 --> 03:22:24,000
क्या जाना कि कबीर जो है वो अजर

2752
03:22:24,000 --> 03:22:28,240
नहीं है। वो बूढ़े हैं। उन

2753
03:22:28,240 --> 03:22:32,320
पे आयु का प्रभाव दिखता है। है

2754
03:22:32,320 --> 03:22:36,400
ना? और बाकी पिछले कई वीडियोस में

2755
03:22:36,400 --> 03:22:40,640
हम एक एक नैरेटिव तोड़ते चले आए हैं कि कबीर कबीर नहीं

2756
03:22:40,640 --> 03:22:45,440
है। पहला नैरेटिव यानी कि वेदों में कोई प्रमाण नहीं है। कबीर भगवान नहीं है।

2757
03:22:45,440 --> 03:22:50,240
दूसरा नैरेटिव हमने एक दिन तोड़ा कि रामपाल जी तत्वदर्शी संत क्यों नहीं है।

2758
03:22:50,240 --> 03:22:54,480
हमने उस बारे में अच्छे से विवेचन किया। फिर हमने यह

2759
03:22:54,480 --> 03:22:58,560
बात तो कर ही चुके हैं कि कबीर रामपाल दास जी के द्वारा पूजित होने वाला जो

2760
03:22:58,560 --> 03:22:59,840
ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान

2761
03:22:59,840 --> 03:23:03,920
नहीं है। रामपाल जी की जो दीक्षा का प्रोग्राम चल रहा है वो

2762
03:23:03,920 --> 03:23:08,240
शास्त्रोक्त नहीं है। है ना? और

2763
03:23:08,240 --> 03:23:12,320
आज हमने बात आज हमने बात कर ली किस पे? ये कुमारी

2764
03:23:12,320 --> 03:23:16,560
वाला जो दूध वाला मामला है उस पर। अब हम लोग अगले बार में बात जब भी करेंगे

2765
03:23:16,560 --> 03:23:20,560
तो हम लोग करेंगे कि पुरुषोत्तम कौन है? किसे पुरुषोत्तम कहा गया

2766
03:23:20,560 --> 03:23:24,640
है शास्त्रों में और यह सशरीर आना और

2767
03:23:24,640 --> 03:23:29,680
सशरीर जाना इसको भी जरा एक एक तार इसका खोल लेंगे।

2768
03:23:29,680 --> 03:23:33,920
है ना? अभी अगर आज के टॉपिक्स में से किसी टॉपिक पे किसी को बात

2769
03:23:33,920 --> 03:23:38,080
करनी हो तो वो आ सकते हैं और लाइव

2770
03:23:38,080 --> 03:23:42,160
में जुड़ के अपना पक्ष रख सकते हैं। भाई साहब देखिए शुरू में आए थे। जब

2771
03:23:42,160 --> 03:23:46,240
हमने उनसे अजर की बात की जब प्रमाण दिखाने लगे मैं परम ब्रह्म हूं दिखा भी दिया

2772
03:23:46,240 --> 03:23:50,240
दूसरा प्रमाण दिखाने लगे भाग गए अभी यह जो भाई साहब थे सेंटर में

2773
03:23:50,240 --> 03:23:54,240
आपको दिख रहे थे जो अपनी बात को बार-बार काट देते थे जब

2774
03:23:54,240 --> 03:23:58,400
इनको हमने दिखाने लगे तो उन्होंने भी देखा अब दाल गलेगी नहीं तो

2775
03:23:58,400 --> 03:24:04,400
भाई भागो भागेंगे

2776
03:24:05,200 --> 03:24:09,440
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] कोई हो रामपाल को फॉलो

2777
03:24:09,440 --> 03:24:14,560
करने वाला तो अभी आ जाए ऊपर सस सम्मान उसका स्वागत है

2778
03:24:14,560 --> 03:24:18,720
और देखिए जो बीच में हमें

2779
03:24:18,720 --> 03:24:22,800
इंटरप्ट करना पड़ता है उसका केवल एक कारण होता है या तो व्यक्ति

2780
03:24:22,800 --> 03:24:26,800
आएगा व्यक्तिगत आक्षेप लगाने लगेगा जो विषय नहीं

2781
03:24:26,800 --> 03:24:30,880
है उस विषय पर बात करने लगेगा इसके बारे में थोड़ी सी विवेचना आप कर दीजिए गोविंद

2782
03:24:30,880 --> 03:24:35,840
गुरुकुल जी आप लोग कर दीजिए

2783
03:24:35,840 --> 03:24:40,880
मैं ये बोलना चाहूंगा जी मैं ये कहना चाह

2784
03:24:40,880 --> 03:24:44,960
पांडे जी बोल नहीं नहीं आज की जो लाइव चल रही थी उसमें मेरे को बहुत हंसी आ

2785
03:24:44,960 --> 03:24:49,680
रही थी इस बात पे कि आप प्रूफ दिखा रहे हैं जो अगन्या वाले जो

2786
03:24:49,680 --> 03:24:53,680
जो शब्दकोश का जो आप प्रमाण दिखा रहे थे तो वो भाई साहब कह रहे थे कि

2787
03:24:53,680 --> 03:24:58,240
नहीं नहीं नहीं देखो भाइयों देखो कितना झूठ बोल रहे हैं मतलब खुद तो मूढ़मती

2788
03:24:58,240 --> 03:25:02,240
है ही दूसरों को भी मूढ़मती बनने के लिए वो उपदेशित कर रहे हैं वही से इस

2789
03:25:02,240 --> 03:25:06,480
बात को लेकर बहुत हंसी आ रही थी और उनके जो फॉलोवरर्स है वो भी यही बात रिपीट

2790
03:25:06,480 --> 03:25:10,960
कर रहे हैं मतलब मतलब होता है ना कि ये क्या बोलते हैं कि

2791
03:25:10,960 --> 03:25:15,120
सामने प्रमाण दिख रहा है उसके बावजूद भी उसको इग्नोर करके और उनहीं की मनमति

2792
03:25:15,120 --> 03:25:19,680
के आगे उनको चलते रहना है। इस बात को लेकर बहुत हंसी आ रही थी मेरे को।

2793
03:25:19,680 --> 03:25:20,240
दूसरी [गला साफ़ करने की आवाज़] बात

2794
03:25:20,240 --> 03:25:24,640
जो आर्य समाज के बारे में कह रहे थे सुभाष जी मैं बस एक शब्द कहना चाहूंगा उनसे

2795
03:25:24,640 --> 03:25:28,880
कि आर्य समाज को ऐसा वैसा नहीं समझना चाहिए। मेरे ख्याल से जो

2796
03:25:28,880 --> 03:25:33,200
आज के जो जो हमारे वाले भाई है हम

2797
03:25:33,200 --> 03:25:37,200
नहीं समझते मैं आपकी बात बीच में से इसलिए कह रहा हूं क्योंकि

2798
03:25:37,200 --> 03:25:41,280
उसके आंसर ठीक है हम ऐसा वैसा नहीं पांडे जी

2799
03:25:41,280 --> 03:25:46,160
बात पूरी कर लीजिए वैसा कहने का मतलब इंटेंशन ये है

2800
03:25:46,160 --> 03:25:50,320
आपका गोविंद जी कि वो सबसे बड़े कट्टर आदमी है आज के टाइम में जो

2801
03:25:50,320 --> 03:25:54,400
ईमान वाले भाई है ना वो वो तो हमारे दुश्मन है

2802
03:25:54,400 --> 03:25:58,400
चलो ठीक है आगे से हमें फ्रंट पे ये दिखाई दे रहा है कि हमारा उनसे मतभेद है।

2803
03:25:58,400 --> 03:26:02,480
लेकिन अगर वो ना रहे उनके बाद का जो सबसे बड़ा जो हमारा कंट्राडिक्शन रहेगा

2804
03:26:02,480 --> 03:26:06,560
वो आर्य समाज के साथ में रहेगा। ये हमें ही मिटाने पर लगे हुए हैं। और आज का

2805
03:26:06,560 --> 03:26:10,560
जो परसेप्शन है ना जो सिनेरियो जो चल रहा है इन पॉलिटिकल ग्राउंड्स

2806
03:26:10,560 --> 03:26:14,640
में भी अगर आप देखेंगे जो मंदिरों का विध्वंसक हो रहा है चाहे जो मंदिरों को

2807
03:26:14,640 --> 03:26:18,880
तहसनहस करके कॉरिडोर के नाम पर जो चलाया जा रहा है। कहीं ना कहीं से

2808
03:26:18,880 --> 03:26:23,280
वो जो सिद्धांत है वो वहीं से आ रहा है। उनहीं के थ्रू आ रहा है। उनके

2809
03:26:23,280 --> 03:26:27,280
बैकग्राउंड में बैठे हुए हैं लोग। जो हमारे जो संघ है चाहे जो हमारी जो

2810
03:26:27,280 --> 03:26:31,280
पिटिकल अभी पार्टी है अभी जो करंट में चल रही है वहां से

2811
03:26:31,280 --> 03:26:35,600
जो वो पॉइंट उठा रहे हैं उसी को वो इंप्लीमेंट करके आगे को प्रोसीड कर रहे हैं।

2812
03:26:35,600 --> 03:26:39,600
मेरे कहने का बस इंटेंशन ये है वो उनको कम नहीं समझना चाहिए। अभी वो ठीक

2813
03:26:39,600 --> 03:26:44,080
है कि अभी वो वेद की बातें कर रहे हैं। अभी सब कुछ की बातें कर रहे हैं। अभी शास्त्र की बात

2814
03:26:44,080 --> 03:26:48,080
करते हैं वो। लेकिन बाद में बाद में अगर ये अगर

2815
03:26:48,080 --> 03:26:52,160
ये नहीं रहे तो उनका भी वही कंडीशन रहेगा जो आज के टाइम पे ईमान वालों का

2816
03:26:52,160 --> 03:26:56,160
है। बस ये कहना चाह रहा हूं। अभी एक बात चल

2817
03:26:56,160 --> 03:27:00,560
रही थी आपने जैसे बताया कि मैं प्रमाण दिखा रहा हूं। वो समझ नहीं रहे हैं।

2818
03:27:00,560 --> 03:27:04,800
तो आप में से किसी ने बचपन में अगर मैं छोटा था मैं अपनी बात बता रहा हूं। मैंने

2819
03:27:04,800 --> 03:27:08,960
जब मैं बहुत छोटा था तो मेरे माता-पिता ने हम वैसे

2820
03:27:08,960 --> 03:27:13,040
तो गुरुकुल इत्यादि में पले बड़े हैं नहीं। तो माताजी पिताजी ने हमें

2821
03:27:13,040 --> 03:27:17,760
मारियो का खेल खिलाया था। वीडियो गेम खेला है क्या?

2822
03:27:17,760 --> 03:27:22,080
गुरुकुल जी गोविंद जी मारियो मारियो बहुत

2823
03:27:22,080 --> 03:27:26,240
गेम खेलता था बहुत [हंसी] उसमें सेकंड उसमें

2824
03:27:26,240 --> 03:27:30,480
जो सेकंड स्टेज आती थी उसमें एक हेलमेट जैसा होता था कछुए

2825
03:27:30,480 --> 03:27:34,480
जैसा जिससे बचना होता था। है ना? बिल्कुल बिल्कुल। उसकी

2826
03:27:34,480 --> 03:27:39,120
अगर गर्दन पे मार दो। तो वो दु ऐसे

2827
03:27:39,120 --> 03:27:43,200
होता रहता था। के साथ जो रामपाल दास जी के

2828
03:27:43,200 --> 03:27:47,200
फॉलोअर्स है मुझे वही दिखाई देते हैं [हंसी] वो

2829
03:27:47,200 --> 03:27:52,240
बस उनको कुछ दिख नहीं रहा है वो फस गए

2830
03:27:52,240 --> 03:27:56,400
आपने कहां से निकाला मेरे को समझ नहीं आया आपकी इमेजिनेशन

2831
03:27:56,400 --> 03:28:00,560
कहां तक चले गई [हंसी] वो मुझे याद आता है

2832
03:28:00,560 --> 03:28:04,560
कि उनका सर जो है अंदर घुस चुका है वो कछुए की तरह दूं दू बीच में वो

2833
03:28:04,560 --> 03:28:08,560
दो पिलर्स के बीच में वो अंत तक अगर आप स्टेज में आगे भी चले

2834
03:28:08,560 --> 03:28:12,800
जाए और वापस भी आएंगे तो वो आपको दूं करता ही दिखेगा।

2835
03:28:12,800 --> 03:28:16,880
सर मारता हुआ ही दिखेगा वो। फट गया वो। तो इनका

2836
03:28:16,880 --> 03:28:20,880
मुझे ऐसा कुछ ऐसा दिखाई देता है मुझे ऐसे फंसे

2837
03:28:20,880 --> 03:28:25,040
हुए हैं लोग। नहीं लेकिन आज का लाइव जो है वो बहुत इंटरेस्टिंग

2838
03:28:25,040 --> 03:28:29,120
रहा। बहुत मजा आया। मैं सच्ची बता रहा हूं। जो बंदा अपनी बातों पे नहीं टिक पा

2839
03:28:29,120 --> 03:28:33,280
रहा हो और दूसरों को बोल रहा है कि देखो देखो शिवा जी ऐसेसे कर रहे हैं।

2840
03:28:33,280 --> 03:28:37,600
हंसी एक मतलब हंसी का एक लिमिटेशन है। वो पेट फूल रहा था मेरा यहां पे लेटेट

2841
03:28:37,600 --> 03:28:41,760
के देखने में। जितना टाइम हो गया तीन घंटे ती तीन घंटे हो गए लाइफ में

2842
03:28:41,760 --> 03:28:45,840
लेकिन कहीं भी बोरियत फील नहीं हुआ चलो ठीक है कोई बात नहीं ये जब से आया

2843
03:28:45,840 --> 03:28:50,000
तब से और इंटरेस्टिंग हो गया मगर चलो ठीक है कोई बात नहीं देखते हैं वो

2844
03:28:50,000 --> 03:28:54,960
असल में देखिए

2845
03:28:54,960 --> 03:28:59,280
शिवा जी मैं ये कहना चाह रहा हूं आपकी जो तर्क बुद्धि है ना वो गड का गिफ्ट

2846
03:28:59,280 --> 03:29:03,280
है ऐसी तर्क बुद्धि किसी के अंदर में नहीं है बहुत तार्किक बातें करते

2847
03:29:03,280 --> 03:29:07,440
हैं जो बाल की खाल वाली जो बात करते है ना हर किसी के बस की बात नहीं होती कि

2848
03:29:07,440 --> 03:29:11,600
भाई चलो चलो ठीक है यहां से खाल निकालनी है वो पॉइंट समझना होता है कि कहां से खाल निकालनी

2849
03:29:11,600 --> 03:29:15,600
है कहां से बाल निकालनी है इसके लिए तो भगवान को मैं धन्यवाद ही बोलूंगा

2850
03:29:15,600 --> 03:29:19,680
कि आप जैसे व्यक्ति जो है हमारे फॉलोअर्स हैं मतलब

2851
03:29:19,680 --> 03:29:23,680
हम उनको फॉलो कर रहे हैं और आपके मार्गदर्शन में जो भी हो सकता

2852
03:29:23,680 --> 03:29:27,840
है यथावत धन से तन से मन से वो हम आपके

2853
03:29:27,840 --> 03:29:32,240
साथ धरातल पर अवश्य संपर्क करें जिसको भी वैचारिक मतभेद

2854
03:29:32,240 --> 03:29:36,480
के निमित्त चर्चा करनी हो वो हमसे संपर्क

2855
03:29:36,480 --> 03:29:40,640
कर सकते 7408301869

2856
03:29:40,640 --> 03:29:46,320
जिसको भी धर्म युद्ध में साथ देना हो वो हमसे संपर्क कर सकते हैं। 740830

2857
03:29:46,320 --> 03:29:50,320
18869 और ये [गला साफ़ करने की आवाज़] जो तर्क संगत और प्रमाण संगत जो

2858
03:29:50,320 --> 03:29:54,480
विद्या है धर्म के बारे में जानने की इसका संक्षिप्त अध्ययन करना

2859
03:29:54,480 --> 03:29:59,680
चाहते हैं तो हमसे संपर्क कर सकते हैं। 7408301869

2860
03:29:59,680 --> 03:30:03,680
और नामास्त्र में हम लोग इस समय नाम जप कर रहे हैं। सब

2861
03:30:03,680 --> 03:30:08,000
भाई बहन मिलकर के एक साथ भगवान के नाम का रट्टा मारते हैं डेली।

2862
03:30:08,000 --> 03:30:14,000
उसमें अगर जुड़ना चाहते हैं तो उसमें भी संपर्क कर सकते हैं। 7408301869

2863
03:30:14,800 --> 03:30:18,960
ठीक है? तो सभी के लिए केवल एक नंबर और केवल WhatsApp करिए। आपको सारी चीजें

2864
03:30:18,960 --> 03:30:23,280
वही प्राप्त होंगी। फॉर्म मिल जाएंगे। अपने अनुसार फॉर्म का चयन करें और

2865
03:30:23,280 --> 03:30:27,760
फॉर्म भर दें। हम आपसे स्वयं संपर्क कर लेंगे। ठीक है?

2866
03:30:27,760 --> 03:30:31,760
और जी पांडे जी एक चीज मैं कहना चाह रहा था। चलिए ठीक

2867
03:30:31,760 --> 03:30:35,760
है आपका ये YouTube चैनल है। आप यहां पे जो भी मतभेद है आप

2868
03:30:35,760 --> 03:30:39,760
उसको दूर कर रहे हैं। बट मैं ये रिक्वेस्ट करूंगा जैसे कि हमारे कई

2869
03:30:39,760 --> 03:30:43,840
यूबर YouTube चैनल्स है जहां पे हमारे संपर्क है और वो

2870
03:30:43,840 --> 03:30:48,160
अच्छा काम कर रहे हैं। बढ़िया काम कर रहे हैं। समाज सुधार कर रहे हैं वो धर्म के प्रति जागृति

2871
03:30:48,160 --> 03:30:52,160
ला रहे हैं वो। तो मैं बस ये चाह रहा था आपसे कि ये जो जो

2872
03:30:52,160 --> 03:30:56,400
पॉइंट्स है जो धर्म के वाली जो बात करते हैं जो धर्म धर्म सत्र के अकॉर्डिंगली

2873
03:30:56,400 --> 03:31:00,400
आप अपना वक्तव्य देते हैं तो क्या आप अगर मैं ये

2874
03:31:00,400 --> 03:31:04,560
कहूं कि आप उस चैनल पर एक बार इनवाइट होके एस अ गेस्ट और जो

2875
03:31:04,560 --> 03:31:08,560
धर्म की जो गुण बातें हैं जो मतलब पुराणों में जो गुण रहस्य छुपा हुआ है चाहे

2876
03:31:08,560 --> 03:31:12,560
वेदों में जो गुण रहस्य छुपा हुआ है वहां पे ये डिस्क्लोज कर सकते वहां

2877
03:31:12,560 --> 03:31:16,800
पे ये मतलब व्याख्यान दे सकते हैं आप अगर मैं आपके बारे में बात कर

2878
03:31:16,800 --> 03:31:20,960
जो चैनल है वो चैनल चैनल कहीं पर क्रॉस ना कर रहा हो हमारे जो सिद्धांत

2879
03:31:20,960 --> 03:31:25,040
है उनको नहीं मैं आपको रेफरेंस दे देता हूं

2880
03:31:25,040 --> 03:31:29,040
शायद आप सुने भी होंगे उनका एक चैनल है आईएसडी करके इंडिया

2881
03:31:29,040 --> 03:31:31,040
स्पीक दिल्ली

2882
03:31:31,040 --> 03:31:35,440
हां मैं मैं जाऊंगा मैं उनके चैनल पे जा सकता हूं

2883
03:31:35,440 --> 03:31:39,680
हां तो मैं आप एग्री आप अगर एग्री करेंगे तो मैं बात करूंगा

2884
03:31:39,680 --> 03:31:45,680
उनसे आप किसी दिन गेस्ट बनके और ऐसे ही धर्म चर्चा के हेतु

2885
03:31:46,080 --> 03:31:50,080
बहुत बहुत धन्यवाद बहुत-ब धन्य नमस्कार जय श्री राम। जय श्री

2886
03:31:50,080 --> 03:31:56,080
राम। तो अभी बढ़ाते हैं लाइव को आगे। अभी कोई देख नहीं रहा है।

2887
03:31:59,200 --> 03:32:03,280
वेदों में कोई प्रमाण नहीं है। कबीर कोई भगवान नहीं है। भाई आप

2888
03:32:03,280 --> 03:32:07,840
कबीर सागर के अनुसार कबीर वाणी के अनुसार आप चिलाइए।

2889
03:32:07,840 --> 03:32:11,840
वेदों में प्रमाण है। वेदों में कोई प्रमाण नहीं है।

2890
03:32:11,840 --> 03:32:15,840
वो जो रामपाल जी हैं वह तत्वदर्शी नहीं है। अकॉर्डिंग

2891
03:32:15,840 --> 03:32:20,720
टू उनके वीडियो वो तिरछादर्शी अवश्य हैं। और

2892
03:32:20,720 --> 03:32:25,040
क्योंकि उन्होंने कैमरे को तिरछा किया। उन्होंने आपसे सच्चाई को छुपा लिया या नहीं छुपाना

2893
03:32:25,040 --> 03:32:29,520
चाहते थे वो मुझे नहीं पता। जिस पष्ठ को वह दिखा रहे थे उसी पष्ठ पर

2894
03:32:29,520 --> 03:32:33,680
ब्रज का अर्थ आना भी लिखा था और

2895
03:32:33,680 --> 03:32:37,760
वह छुपाना चाहते हुए भी उसको छुपा नहीं पाए उसमें

2896
03:32:37,760 --> 03:32:43,120
दिख गया वो उनहीं की उंगलियों के बीच में और

2897
03:32:43,120 --> 03:32:47,280
इसके साथ ही साथ कुमारी वाला मामला आज टूट गया

2898
03:32:47,280 --> 03:32:51,360
और सर्वशक्तिमान तो है ही नहीं वो मामला वो गड़बड़

2899
03:32:51,360 --> 03:32:55,360
है और यह भी बात है कि वेदों को मानने वाले भी नहीं है क्योंकि

2900
03:32:55,360 --> 03:32:59,600
उनके लोग आ के कहते हैं कि हम उतना मानते हैं वेदों को जितना हमें अच्छा लगता है।

2901
03:32:59,600 --> 03:33:03,680
मयंक कुमार जी बोलिए भैया मैं ऐसे

2902
03:33:03,680 --> 03:33:07,760
बोला था ये जो एक उल्टे वृक्ष वाला बोलते हैं ना एक

2903
03:33:07,760 --> 03:33:12,800
दिन उसका भी खंडन करना है। कर तो दिया अभी अभी किया है।

2904
03:33:12,800 --> 03:33:16,880
मैं लाइव उल्टे वृक्ष के अनुसार उस वहां पर श्लोक

2905
03:33:16,880 --> 03:33:21,120
में लिखा है कि उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला वेदों

2906
03:33:21,120 --> 03:33:25,200
को जानने वाला है। ठीक है? इनके अनुसार वेदों को जानने

2907
03:33:25,200 --> 03:33:29,280
वाला ही तत्वदर्शी है। हमने दिखा दिया भगवती

2908
03:33:29,280 --> 03:33:33,440
की पूजा करने वाला ही वेदों को जानने वाला है। हमने ये भी दिखा

2909
03:33:33,440 --> 03:33:37,840
दिया। कहीं नहीं लिखा है कि वेदों को जानने वाला रामपाल

2910
03:33:37,840 --> 03:33:41,840
दास जी हैं। कबीर को भगवान बताने वाला वेदों को जानने वाला यह

2911
03:33:41,840 --> 03:33:46,000
नहीं लिखा है। दुर्गा माता को भगवती को परम ब्रह्म

2912
03:33:46,000 --> 03:33:50,160
मानने वाला पूजा करने वाला गायत्री का जप करने वाला वेदों को जानने

2913
03:33:50,160 --> 03:33:54,480
वाला है। तो अगर 15 एक के हिसाब से वेदों को जानने वाला ही तत्वदर्शी

2914
03:33:54,480 --> 03:33:58,640
है तो तत्वदर्शी वो है जो माता भगवती की

2915
03:33:58,640 --> 03:34:02,320
आराधना करता हो और गायत्री का जप करता हो।

2916
03:34:02,320 --> 03:34:05,360
जी गोविंद जी

2917
03:34:05,360 --> 03:34:09,440
जैसे कि मयंक कुमारी जुड़े हैं। मैं यही बात करना चाहता था। चलिए आपको एक और नया

2918
03:34:09,440 --> 03:34:13,760
प्रमाण दिखा देता हूं। ठीक है? ऐसा डायरेक्ट प्रमाण है कि आप

2919
03:34:13,760 --> 03:34:17,760
खुले में किसी से भी बात कर पाएंगे। ठीक है? तो चलिए जरा भगवत गीता पर

2920
03:34:17,760 --> 03:34:22,160
देखते हैं। उस प्रथम श्लोक में दरअसल लिखा क्या हुआ है। ठीक है? और

2921
03:34:22,160 --> 03:34:27,280
ये हमारे पास श्रीमद् भगवत गीता है। ठीक है? 15वा

2922
03:34:27,280 --> 03:34:31,440
अध्याय है इसका। ठीक है? अध्याय नंबर 15 है। ठीक है?

2923
03:34:31,440 --> 03:34:35,600
अब यहां पर जो श्लोक है दरअसल उसमें क्या लिखा हुआ है और उसका प्रमाण कहां मिलता

2924
03:34:35,600 --> 03:34:39,920
है हमें ठीक है अश्वत्थम ठीक है यानी संसार रूप वृक्ष

2925
03:34:39,920 --> 03:34:44,240
को संसार रूप पीपल के वृक्ष को ठीक है ये आपने पढ़ लिया ठीक है

2926
03:34:44,240 --> 03:34:48,400
अब ये पीपल संसार रूपी वृक्ष है कौन है मैंने इसके

2927
03:34:48,400 --> 03:34:52,480
ऊपर जब थोड़ी सी रिसर्च करना चाही तो मैं पुनः पहुंच गया पद्म

2928
03:34:52,480 --> 03:34:56,720
पुराण में ठीक है मैं पुनः पहुंच जाता हूं पद्म पुराण में पद्म

2929
03:34:56,720 --> 03:35:00,880
पुराण के अंतर्गत गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित हुआ पद्म पुराण

2930
03:35:00,880 --> 03:35:05,280
मेरे को क्या बता रहा है उस संसार रूपी वृक्ष के बारे में

2931
03:35:05,280 --> 03:35:09,280
ये देखिए जरा विष्णु सहस्त्र नाम स्त्रोत में

2932
03:35:09,280 --> 03:35:13,840
भगवान का ही एक नाम है ठीक है

2933
03:35:13,840 --> 03:35:17,600
ये विश्व वृक्ष अर्थात संसार रूपी वृक्ष

2934
03:35:17,600 --> 03:35:21,760
ठीक है तो संसार रूपी जो वृक्ष है ना वो श्री कृष्ण का नाम

2935
03:35:21,760 --> 03:35:25,760
है श्री हरि का नाम है और इस हरि के नाम की

2936
03:35:25,760 --> 03:35:29,840
जो पूर्णता व्याख्या करेगा वो वेदों के तत्व को

2937
03:35:29,840 --> 03:35:34,080
जानने वाला होगा। दरअसल हमें प्रमाण में यह मिलता है। तो हमें

2938
03:35:34,080 --> 03:35:38,240
बात करनी है जो ग्रंथों के अनुसार हमें आपसे कोई

2939
03:35:38,240 --> 03:35:42,400
लेना देना नहीं है। आप किस चीज को क्या समझते हो। मेरे पास आओगे

2940
03:35:42,400 --> 03:35:46,560
तो मैं आपसे प्रमाण मांगूंगा। मैं प्रमाण ही दिखाऊंगा। मैं

2941
03:35:46,560 --> 03:35:50,960
आपके किसी भी प्रकार के जो होता है ना कि अपना

2942
03:35:50,960 --> 03:35:54,960
दावा उसके ऊपर आपको कुछ नहीं कहने दूंगा जब तक

2943
03:35:54,960 --> 03:35:59,200
कि आप शास्त्र से प्रमाण नहीं देंगे। ठीक है? रही बात अश्वत वृक्ष

2944
03:35:59,200 --> 03:36:03,360
की तो वो भी भगवान श्री कृष्ण 10वें अध्याय में स्वयं ही बता देते हैं कि

2945
03:36:03,360 --> 03:36:07,520
वृक्षों में मैं पीपल हूं। ठीक है? तो हमारे पास

2946
03:36:07,520 --> 03:36:11,600
पूर्णता प्रमाण है। पेज नंबर है। ठीक है? पेज नंबर

2947
03:36:11,600 --> 03:36:15,840
आपको दिखा देता हूं। जो भी व्यक्ति इन वीडियो को देख रहे हैं 723 नंबर पेज

2948
03:36:15,840 --> 03:36:20,000
है। संक्षिप्त पद्म पुराण के भीतर विष्णु सहस्त्र नाम में भगवान

2949
03:36:20,000 --> 03:36:24,000
का एक नाम विश्व वृक्ष अर्थात संसार रूपी वृक्ष भी

2950
03:36:24,000 --> 03:36:28,160
है। इसी की जो व्याख्या करेगा इसी की जो व्याख्या करेगा

2951
03:36:28,160 --> 03:36:32,320
वही तत्वदर्शी और वेदों का विद्वान कहलाएगा। हमारे पास प्रमाण

2952
03:36:32,320 --> 03:36:32,880
है। आपके

2953
03:36:32,880 --> 03:36:38,720
पास क्या है? अच्छा इसमें मैं एक बात और जोड़ दूंगा

2954
03:36:38,720 --> 03:36:42,880
कि आप आप वो जो भगवत गीता का श्लोक है ना उस वापस आ जाइए जरा

2955
03:36:42,880 --> 03:36:47,440
एक मिनट 15 एक

2956
03:36:47,440 --> 03:36:51,840
अब देखिए यहां पे वृक्ष को अविनाशी कहा गया है

2957
03:36:51,840 --> 03:36:56,000
बिल्कुल तो क्या जो सृष्टि

2958
03:36:56,000 --> 03:37:02,000
है वो अविनाशी है इनके अकॉर्डिंग सृष्टि

2959
03:37:02,200 --> 03:37:06,240
[हंसी] यहां पे सृष्टि को संसार रूपी वृक्ष को अविनाशी

2960
03:37:06,240 --> 03:37:10,640
कहा गया और इनके अकॉर्डिंग तो उसको बनाया है कबीर ने सृष्टि

2961
03:37:10,640 --> 03:37:14,800
को तो अविनाशी कहां से हो गई? तो यानी कि यहां पे उस

2962
03:37:14,800 --> 03:37:18,960
सृष्टि की बात नहीं हो रही है जो कबीर वाले बता रहे हैं। दूसरी बात

2963
03:37:18,960 --> 03:37:23,040
अभी हमने कहा था छर अक्षर और परम अक्षर तीनों

2964
03:37:23,040 --> 03:37:27,200
में ही हूं। जीव जगत और जगदीश्वर यहां पर जो छर है

2965
03:37:27,200 --> 03:37:31,440
वही है संसार रूपी उल्टा वृक्ष वही है सृष्टि और वही

2966
03:37:31,440 --> 03:37:35,520
है भगवान हरि का एक नाम चर अक्षर और परम

2967
03:37:35,520 --> 03:37:39,680
अक्षर तीनों भगवान अपन इसको है ना जो ऐसे एक

2968
03:37:39,680 --> 03:37:45,600
बार सगुण और निर्गुण के आधार पे भी इनको देख सकते हैं

2969
03:37:45,600 --> 03:37:49,680
हां देख सकते हैं सगुण निर्गुण के आधार पे जी जैसे शर हो गए

2970
03:37:49,680 --> 03:37:53,680
सर हो गए वो सगुण हो गए पितम जी बताइए आपका शुभ

2971
03:37:53,680 --> 03:37:57,840
नाम आपका परिचय क्या है बताइए?

2972
03:37:57,840 --> 03:38:02,400
मैं सूरत से हूं। कहां से?

2973
03:38:02,400 --> 03:38:05,600
सूरत से

2974
03:38:05,600 --> 03:38:09,600
समझ में नहीं आ रहा अभी तक? सूरत सूरत से हैं वो।

2975
03:38:09,600 --> 03:38:15,600
सूरत गुजरात। अच्छा बताइए।

2976
03:38:18,320 --> 03:38:23,360
बोलिए बोलेंगे कुछ?

2977
03:38:23,360 --> 03:38:27,600
शर्मा गए लग रहा है। मैंने जो ट्रेन

2978
03:38:27,600 --> 03:38:31,680
है ना उसमें कई बार एक बात लिखी रहती है टू स्टॉप

2979
03:38:31,680 --> 03:38:35,840
द ट्रेन पुल द चेन

2980
03:38:35,840 --> 03:38:40,240
पढ़ा है क्या आपने? [हंसी]

2981
03:38:40,240 --> 03:38:44,640
देखा है क्या? पढ़ा है। पढ़ा है। पढ़ा है। बिल्कुल पढ़ा है। पढ़ा है ना?

2982
03:38:44,640 --> 03:38:48,880
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन। तो हमारे पास कुछ

2983
03:38:48,880 --> 03:38:53,040
ऐसे पॉइंट्स है जिनको हम जब बोलते हैं तो वो

2984
03:38:53,040 --> 03:38:57,600
टू स्टॉप द ट्रेन हो जाता है। हमारे पास वो चैन है

2985
03:38:57,600 --> 03:39:01,680
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन।

2986
03:39:01,680 --> 03:39:06,320
चलिए एक मिनट मैं एक है ना लास्ट में एक बात कहूंगा।

2987
03:39:06,320 --> 03:39:10,640
चुटकुले टाइप में ही है। अपन रोज इनकी बातों का है ना खंडन कर रहे हैं।

2988
03:39:10,640 --> 03:39:14,640
फिर भी पता है कि ये मान नहीं रहे। तो इसी

2989
03:39:14,640 --> 03:39:19,360
एक गधा मैंने कहा ना इनकी हालत वो है जो दो पिलर्स के बीच में वो जो

2990
03:39:19,360 --> 03:39:23,520
मारियो था ना मारियो उसकी सेकंड स्टेज में एक हेलमेट कररेक्टर

2991
03:39:23,520 --> 03:39:27,760
आता था उसकी अगर मुंडी तोड़ दो तो वो ड

2992
03:39:27,760 --> 03:39:32,240
वो मरता नहीं था वो कभी वो नाश वो [गला साफ़ करने की आवाज़] नाश वो नाशवान नहीं था

2993
03:39:32,240 --> 03:39:36,320
अविनाशी था मगर उसकी अगर गर्दन पे मार दो तो वो उन

2994
03:39:36,320 --> 03:39:38,560
दोनों खंभों में अपना सर मारता रहता था ऐसे

2995
03:39:38,560 --> 03:39:42,640
ऐसे ऐसे ऐसे तो इनके जो कैरेक्टरिस्टिक

2996
03:39:42,640 --> 03:39:46,880
है वो उससे मिलता है। आप कितना भी प्रमाण दे दो तर्क दे दो। मगर ए तो

2997
03:39:46,880 --> 03:39:51,040
वो जो जिनका सर अंदर घुस गया और केवल वो अपनी बॉडी को इधर उधर

2998
03:39:51,040 --> 03:39:55,120
मार रहे हैं वो वाला दिखता है। मगर भैया मैं बताऊं मैं बताऊं पता है

2999
03:39:55,120 --> 03:39:59,360
क्या है यह वो आपने खेला है क्या श्वेता जी वो मारियो वाला जिसमें सेकंड

3000
03:39:59,360 --> 03:40:03,600
स्टेज में वो हेलमेट फस जाता था उसको हेलमेट कहते थे

3001
03:40:03,600 --> 03:40:08,560
इनको देख के मुझे उसी की याद आ जाती है नहीं भैया बोलिए

3002
03:40:08,560 --> 03:40:12,720
इनके ये पता है अपनी बातों पे बिलीव करते हैं

3003
03:40:12,720 --> 03:40:17,280
लेकिन इनको पता है क्या दिक्कत है ये भी नाम इनको जो मंत्र दिया

3004
03:40:17,280 --> 03:40:21,840
जाता है ना उससे पहले इनको यह कहा जाता है कि आपको गुरु पर विश्वास करना पड़ेगा

3005
03:40:21,840 --> 03:40:25,840
यदि आपका एक परस भी यदि मन इधर उधर होता है ना तो आपका नाम खंडित

3006
03:40:25,840 --> 03:40:30,080
हो जाएगा। आपके भक्ति खत्म हो जाएगी। तो पता है इनको

3007
03:40:30,080 --> 03:40:34,080
डराया जाता है इन सब चीजों से। ये डरे नहीं

3008
03:40:34,080 --> 03:40:37,760
है।

3009
03:40:37,760 --> 03:40:42,720
अभी एक सज्जन आए थे सत साहिब करके। चले गए। [गला साफ़ करने की आवाज़]

3010
03:40:42,720 --> 03:40:45,440
60 क्विंटल।

3011
03:40:45,440 --> 03:40:49,440
ठीक है। चलिए अब पूरी करते हैं। आप लोग कल भाई दूज

3012
03:40:49,440 --> 03:40:53,440
बनाइए और टीका लगाइए। अब तो रामपाल दास जी का भी टीका देख लिया

3013
03:40:53,440 --> 03:40:57,360
है। रामपाल दास जी के भक्तों

3014
03:40:57,360 --> 03:41:01,440
ओ वेदों में प्रमाण नहीं है। ओए अरे गोविंद

3015
03:41:01,440 --> 03:41:06,080
जी वेदों में प्रमाण है ओए गणेश जी भगवान है और सुनो

3016
03:41:06,080 --> 03:41:10,320
रामपाल दास जी प्रमाण है टीका भी लगा सकते हो

3017
03:41:10,320 --> 03:41:14,400
लगा लेना ठीक है अरे अपने गुरु को तो

3018
03:41:14,400 --> 03:41:17,360
मान लो

3019
03:41:17,360 --> 03:41:21,360
एक जाते मेरा एक प्रश्न है गोविंद गुरुकुल जी से ऐसे जिज्ञासा पूछ

3020
03:41:21,360 --> 03:41:26,000
रहा हूं आप वो है आप आप

3021
03:41:26,000 --> 03:41:30,080
आरएमडी आरएमडी आप ही है हां हां

3022
03:41:30,080 --> 03:41:34,400
हां रुक्मणी माधवदास हम

3023
03:41:34,400 --> 03:41:38,400
वो मेरे नाम पे था पहले Instagram अब बंद हो चुका वो अच्छा

3024
03:41:38,400 --> 03:41:42,560
अच्छा अच्छा जी [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं जी कुछ ठीक तो

3025
03:41:42,560 --> 03:41:46,640
अगली बार मैं मैं ये एक रिक्वेस्ट कर रहा था नेक्स्ट टाइम जो है आप

3026
03:41:46,640 --> 03:41:51,040
कब करेंगे लाइव मैं थोड़ा पहले ही अगर जुड़ जाऊं तो वो कुंवारी

3027
03:41:51,040 --> 03:41:55,920
गांव गाय पे मेरे को थोड़ी बात करनी थी वो बड़ी अच्छी बात है वो वाली

3028
03:41:55,920 --> 03:42:00,880
हम वो तो हो गई पूरी आज [हंसी] कल कल करते हैं।

3029
03:42:00,880 --> 03:42:04,880
नहीं नहीं वो वो तो बात हो गई ना कि कुंवारी गाय

3030
03:42:04,880 --> 03:42:08,880
वाला कोई सीन नहीं। मैं कह रहा हूं यदि कोई कुंवारी गाय है भी तो उसका दूध किसने

3031
03:42:08,880 --> 03:42:13,120
पिया है ये भी तो कोई प्रमाण इनको देना पड़ेगा ना। हम तो पूरा दिखाएंगे

3032
03:42:13,120 --> 03:42:17,120
लिखा [हंसी] हुआ। वो वही वाली बात है। कौवा कान ले गया।

3033
03:42:17,120 --> 03:42:21,520
कौवा कान ले गया। कान गया भी है कि नहीं ये किसी ने देखा ही नहीं। कौवा

3034
03:42:21,520 --> 03:42:24,880
कान ले गया। बिल्कुल

3035
03:42:24,880 --> 03:42:28,960
तो वो देवी भागवत में बड़ी सुंदर कथा है श्री भगवान

3036
03:42:28,960 --> 03:42:34,320
की अगर होगा तो वो भी नेक्स्ट टाइम उसको पढ़ेंगे थोड़ा सा

3037
03:42:34,320 --> 03:42:38,800
ठीक है चलिए आभार आपका

3038
03:42:38,800 --> 03:42:42,880
धन्यवाद धन्यवाद आने के लिए आभार गोकुल जी गुरु जी मैं ओसो को सुनने लगा था जब

3039
03:42:42,880 --> 03:42:46,880
से मैंने आपको सुनने लगा हूं मेरा मन विचलित हो गया क्या

3040
03:42:46,880 --> 03:42:51,120
करूं विचलित हो गया तो हम तो आपके लिए गलत सिद्ध हो रहे हैं आप वही करिए

3041
03:42:51,120 --> 03:42:55,360
जो कर रहे [हंसी] आप

3042
03:42:55,360 --> 03:42:59,440
जो है देखिए भगवान ने कह दिया है 92 में

3043
03:42:59,440 --> 03:43:03,440
भगवान का आलंबन ले लीजिए उनको सर्वशक्तिमान मानिए

3044
03:43:03,440 --> 03:43:07,440
आप भले ही इस में हो आप भले ही आर्य समाज में हो

3045
03:43:07,440 --> 03:43:11,520
जहां पर भी कोई ऐसी बात आए कि भगवान ये नहीं कर सकते उस बात को छोड़

3046
03:43:11,520 --> 03:43:15,680
दीजिए बाकी सब बात मान लीजिए आप ठीक है ईश्वर को आपने स्वीकार कर लिया

3047
03:43:15,680 --> 03:43:19,920
किस रूप में ईश्वर सर्वशक्तिमान है मगर मानता मैं आर्य समाज को हूं मुझे

3048
03:43:19,920 --> 03:43:24,080
अच्छा लगता है ऐसा सोच लीजिए अब जब आपने भगवान को सर्वशक्तिमान

3049
03:43:24,080 --> 03:43:28,480
मान लिया उनके नाम का जप स्टार्ट कर दीजिए। आपके

3050
03:43:28,480 --> 03:43:32,480
जीवन में जो भी आवश्यक होगा भगवान खुद दे देंगे। मगर आपके

3051
03:43:32,480 --> 03:43:36,480
द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान होना चाहिए। वो

3052
03:43:36,480 --> 03:43:40,720
कृष्ण होना चाहिए। अविनाशी कृष्ण परम ब्रह्म कृष्ण

3053
03:43:40,720 --> 03:43:44,720
वो कृष्ण बाधित कृष्ण नहीं होना चाहिए। अगर इस में भी आप

3054
03:43:44,720 --> 03:43:48,720
जा रहे हैं और इस के द्वारा यह बताया जा रहा है कि वो दूध से दही बन सकता

3055
03:43:48,720 --> 03:43:49,520
है। उसी प्रकार वो

3056
03:43:49,520 --> 03:43:53,680
वापस नहीं आ सकते। इतनी बात छोड़ दीजिए। जहां जहां पर कृष्ण को बाधित

3057
03:43:53,680 --> 03:43:57,680
किया जा रहा है कि वह यह नहीं कर सकते। वह वो नहीं कर सकते उतनी बातें छोड़

3058
03:43:57,680 --> 03:44:01,760
दीजिए। वहां पर मान लीजिए नहीं इनको कहने दो भाई मैं तो मानता हूं कि कृष्ण और

3059
03:44:01,760 --> 03:44:06,000
शिव एक है क्योंकि कृष्ण जो है शिव बनने के बाद वापस कृष्ण बन सकते

3060
03:44:06,000 --> 03:44:10,320
हैं। वो सामर्थ्यवान है। तो जब आप यह सोच के कृष्ण की भक्ति

3061
03:44:10,320 --> 03:44:14,480
करने लगेंगे राम की भक्ति करने लगेंगे तो वो कृष्ण

3062
03:44:14,480 --> 03:44:18,720
ही आपके जीवन में सारे उपाय ऐसे कर देंगे। आपके

3063
03:44:18,720 --> 03:44:22,960
जीवन में जो अच्छा होगा अनिवार्य वो सब आपको

3064
03:44:22,960 --> 03:44:26,960
मिल जाएगा और मैं वैसे व्यक्तिगत वो देता नहीं हूं। मैंने

3065
03:44:26,960 --> 03:44:31,520
थीसिस लिखनी थी कुछ एक्सरसाइज पे कुछ न्यूट्रिशन पे। मैं अपनी व्यक्तिगत

3066
03:44:31,520 --> 03:44:35,600
निजी जीवन की बातें आपको बता रहा हूं। मैं रातरात

3067
03:44:35,600 --> 03:44:40,160
में सोता नहीं था। एक्सरसाइज को समझने के लिए व्यायाम को

3068
03:44:40,160 --> 03:44:44,400
समझने के लिए रात-रात में एक समय ऐसा था जब मैं सोता नहीं था।

3069
03:44:44,400 --> 03:44:48,480
मैं भगवान को मानता था मगर मैं भगवान के नाम का रट्टा नहीं लगाता

3070
03:44:48,480 --> 03:44:52,720
था। फिर जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटित हुई कि मैंने

3071
03:44:52,720 --> 03:44:56,800
चिल्ला चिल्ला करके भगवान का नाम लेना शुरू किया और उसका

3072
03:44:56,800 --> 03:45:00,880
परिणाम वो जो नाम लेना शुरू किया था वो भी युद्ध के लिए किया था। साफ बता रहा

3073
03:45:00,880 --> 03:45:04,720
हूं। मेरे अंदर बिल्कुल मेरे आत्मा जली मरी जा रही थी कि

3074
03:45:04,720 --> 03:45:08,960
मुझे अपने धर्म को बचाना है। उसके लिए मुझे ताकत चाहिए। कहां से लाऊं?

3075
03:45:08,960 --> 03:45:13,120
कि राम से मिलेगी ताकत। तो राम नाम चिल्लाना मैंने प्रारंभ

3076
03:45:13,120 --> 03:45:17,280
किया। खूब चिल्लाया, खूब चिल्लाया और उससे ऐसा होने

3077
03:45:17,280 --> 03:45:21,520
लगा कि जो मेरे जीवन में जो उस समय प्राथमिक चीजें हुई हुआ

3078
03:45:21,520 --> 03:45:25,760
करती थी उस घटना से पहले वो प्राथमिक चीजें

3079
03:45:25,760 --> 03:45:29,840
मेरे लिए साइड की हो गई। मगर वो मुझे सब मिल गई। जो मैं थीसिस

3080
03:45:29,840 --> 03:45:34,080
लिखना चाह रहा था जो मैं व्यायाम को समझना चाह रहा था वो सब कुछ

3081
03:45:34,080 --> 03:45:38,160
मेरे पास आ जाए। जबकि वो समझने के लिए मैंने भगवान के नाम

3082
03:45:38,160 --> 03:45:42,320
का सहारा नहीं लिया था। मैंने भगवान के नाम का सहारा लिया था कि मुझे

3083
03:45:42,320 --> 03:45:46,400
ऐसा बना दो कि जो भी अधर्म फैला रहा हो मैं

3084
03:45:46,400 --> 03:45:50,640
उसको जो है उसका प्रतिकार कर सकूं। मुझसे अपने धर्म का क्षय धर्म

3085
03:45:50,640 --> 03:45:54,880
का नाश धर्म के धर्म का विरोध नहीं देखा जा रहा था। आत्मा

3086
03:45:54,880 --> 03:45:58,880
बिल्कुल चीकार करने लगी थी। उस दिन मैंने भगवान राम के नाम की

3087
03:45:58,880 --> 03:46:02,880
शरण ली थी और उसके बाद भगवान के नाम की वजह से मुझे वो

3088
03:46:02,880 --> 03:46:06,960
सब तो मिला ही जो गुरु गोविंद और ग्रंथ का बल मुझे

3089
03:46:06,960 --> 03:46:11,120
चाहिए था इस युद्ध के लिए। किसका बल चाहिए था? गुरु, गोविंद

3090
03:46:11,120 --> 03:46:15,280
और ग्रंथ का बल चाहिए था। वह सब तो मुझे मिला ही। मगर उससे पहले जो मेरे

3091
03:46:15,280 --> 03:46:19,440
भौतिक लक्ष्य थे वो मुझे यू ही मिल गए। बाय प्रोडक्ट्स में। बाय

3092
03:46:19,440 --> 03:46:19,940
प्रोडक्ट्स

3093
03:46:19,840 --> 03:46:24,080
में मुझे भौतिक लक्ष्य मिल गए। आज मैं उन उन एक्सरसाइज

3094
03:46:24,080 --> 03:46:28,160
को जो मैं सीखना चाहता था उनप थीसिस लिखना चाहता था। आज मैं

3095
03:46:28,160 --> 03:46:32,480
उनका मतलब इतना मैं आपको ये तक बता सकता हूं। उसमें इतनी थीसिस

3096
03:46:32,480 --> 03:46:36,720
मैंने लिख दी है जो मतलब जो स्वतः मिल गई। बहुत

3097
03:46:36,720 --> 03:46:40,800
सारी चीजें हमें स्वतः मिल जाती है। हमें पता नहीं लगता। बिल्कुल। तो

3098
03:46:40,800 --> 03:46:44,960
आपने जो प्रश्न किया बहुत अच्छा प्रश्न है कि मैं करूं क्या? आप जो

3099
03:46:44,960 --> 03:46:48,960
है भगवान को सर्वशक्तिमान समझते हुए आप किसी भी संस्था को

3100
03:46:48,960 --> 03:46:53,200
फॉलो करते हो। किसी भी संप्रदाय को फॉलो करते हो। आप वही रहिए। आपको

3101
03:46:53,200 --> 03:46:57,280
कोई आवश्यक नहीं है कि वो छोड़ के कहीं और दीक्षा लीजिए, यह करिए, वह

3102
03:46:57,280 --> 03:47:01,360
करिए। कुछ नहीं। भगवान के पीछे पड़ जाइए। भगवान कौन

3103
03:47:01,360 --> 03:47:06,080
है? ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है।

3104
03:47:06,080 --> 03:47:10,080
आप भगवान के पीछे पड़ जाइए। भगवान आपको सारी चीजें खुद ही आप मैं कह

3105
03:47:10,080 --> 03:47:14,480
रहा हूं आप कबीर को ईश्वर मानिए। ठीक है? कबीर को मान लो। ओए कबीर

3106
03:47:14,480 --> 03:47:18,560
को ईश्वर मान लो मगर उस रूप में मानना कि वो कुछ भी कर सकता है।

3107
03:47:18,560 --> 03:47:22,560
वो ईश्वर कबीर के रूप में ही नाम जप शुरू कर दो।

3108
03:47:22,560 --> 03:47:26,800
कबीर कबीर कबीर कबीर कबीर खूब खूब करो। मगर कबीर को वह वाला ईश्वर

3109
03:47:26,800 --> 03:47:31,040
मत मानो जो रामपाल दास ने बताया है। क्योंकि रामपाल

3110
03:47:31,040 --> 03:47:34,880
दास ने जो ईश्वर बताया है कबीर के रूप में बाधित है। वो ईश्वर सिद्ध

3111
03:47:34,880 --> 03:47:39,040
नहीं है। कबीर को सर्वशक्तिमान स्वीकार करो। उसके

3112
03:47:39,040 --> 03:47:43,280
नाम का जप करो। अभी देखो ईश्वर का कबीर रूप ही आपके

3113
03:47:43,280 --> 03:47:49,280
जीवन में वो सब कर देगा जो आपको चाहिए होगा जो आपके लिए अच्छा होगा।

3114
03:47:49,520 --> 03:47:53,600
ईश्वर को ईश्वर मानो मेरे भाई। क्यों उसको बाधित कर रहे हो अपने

3115
03:47:53,600 --> 03:47:57,840
चक्कर में? अपनी संस्था के चक्कर में किसी व्यक्ति के चक्कर में ईश्वर निष्ठ

3116
03:47:57,840 --> 03:48:02,000
बनो धर्मनिष्ठ बनो संस्थानिष्ठ मत बनो व्यक्ति निष्ठ

3117
03:48:02,000 --> 03:48:06,160
मत बनो और अगर आपको कबीर के रूप में कबीर

3118
03:48:06,160 --> 03:48:10,400
का नाम जप करना है तो उसके लिए आपको रामपाल दास जी को छोड़ने की आवश्यकता

3119
03:48:10,400 --> 03:48:14,560
भी नहीं पड़ेगी कर लो कबीर के नाम का जप बस जहांजहां पर

3120
03:48:14,560 --> 03:48:18,560
ईश्वर बाधित हो रहा है वहां वहां पर कसम खा लो कि इतने अंश में मैं

3121
03:48:18,560 --> 03:48:22,640
जो है बातें नहीं मानूंगा कबीर वही है जो कुछ भी कर सकता है

3122
03:48:22,640 --> 03:48:26,640
कबीर हसेगा भी कबीर रोएगा भी कबीर बूढ़ा भी होके

3123
03:48:26,640 --> 03:48:30,640
दिखाएगा कबीर शिशु होके भी दिखाएगा मेरा कबीर

3124
03:48:30,640 --> 03:48:34,640
वो कबीर है मेरा कबीर वो कबीर है अगर ऐसा

3125
03:48:34,640 --> 03:48:38,640
मानना शुरू कर दो तो अभी देखो आपके जीवन में सब आ जाएगा हम कह रहे

3126
03:48:38,640 --> 03:48:43,040
हैं भगवान श्री कृष्ण ही आपको कबीर के रूप में आकर के सब कर सब कुछ दे देंगे

3127
03:48:43,040 --> 03:48:48,240
और आप ये मान लेना कि कबीर ही कर रहा है कृष्ण नहीं कर रहा है बस मान लो

3128
03:48:48,240 --> 03:48:49,920
मगर प्रॉब्लम यह है कि अगर आप

3129
03:48:49,920 --> 03:48:54,160
व्यक्ति निष्ठ होगे रामपाल निष्ठ होगे ओशोनिष्ठ

3130
03:48:54,160 --> 03:48:58,320
होगे तो आप बाधित ईश्वर को पूजेंगे और

3131
03:48:58,320 --> 03:49:02,400
जो बाधित है वह ईश्वर नहीं है। जो सर्वशक्तिमान नहीं

3132
03:49:02,400 --> 03:49:06,400
है, सर्व सामर्थ्यवान नहीं है, सब कुछ कर सकने वाला नहीं है

3133
03:49:06,400 --> 03:49:11,200
वो ईश्वर नहीं है। वो ईश्वर की कसौटी पर खरा नहीं उतरते। ठीक है।

3134
03:49:11,200 --> 03:49:15,440
काफी लंबा उत्तर मैंने दे दिया। हां जी। ऐसा ही हां ऐसा ही एक्सपीरियंस

3135
03:49:15,440 --> 03:49:20,000
क्या बोलते हैं? एक बार प्रातः स्मरणीय धर्म धर्म सम्राट स्वामी श्री कृपात्री जी महाराज

3136
03:49:20,000 --> 03:49:24,240
के साथ भी हुआ था कि ये राजेंद्र दास जी महाराज बता

3137
03:49:24,240 --> 03:49:28,480
बताते थे कि वो भी पोथी अपने पास नहीं रखते

3138
03:49:28,480 --> 03:49:32,560
थे कभी भी मतलब वेद जो था वो स्वत उनको ज्ञान

3139
03:49:32,560 --> 03:49:36,720
इतना हो जाता था मतलब वो सुनकर ही याद उनकी मेधा शक्ति इतनी प्रबल थी कि

3140
03:49:36,720 --> 03:49:40,720
उनको सुनकर ही याद हो जाता था ठीक है तो वो अहरिस भगवान

3141
03:49:40,720 --> 03:49:44,800
राम के नाम का जप करते रहते थे अहरिस हर समय हर क्षण

3142
03:49:44,800 --> 03:49:48,880
सोते जागते उठते बैठते वो राम का ही नाम जपते रहते थे ठीक है और

3143
03:49:48,880 --> 03:49:52,880
इतनी मेधा शक्ति उनकी इतनी प्रबल हो गई कि उनको उनको स्वत

3144
03:49:52,880 --> 03:49:57,600
ही वेदों को समझने में उनको बहुत उसमें हेल्प मिली।

3145
03:49:57,600 --> 03:50:01,760
ठीक है? गुरु का तो सानिध्य बिल्कुल था ही। लेकिन उसके बाद जो आपको अपनी वेदा

3146
03:50:01,760 --> 03:50:04,960
भी चाहिए होती है समझने के लिए। है ना? और उसके बाद उन्होंने फिर

3147
03:50:04,960 --> 03:50:09,200
तो उस पर तो एक जबरदस्त एक से एक जबरदस्त भाष्य तो किया ही है उन्होंने। वेदांत

3148
03:50:09,200 --> 03:50:13,520
पारिजात और ऐसे भक्ति सुधा राधा सुधा नाम के तो बहुत सारे ग्रंथ हैं।

3149
03:50:13,520 --> 03:50:17,520
तो तो राम यानी कि ईश्वर के ब्रह्म का जो नाम है ईश्वर

3150
03:50:17,520 --> 03:50:21,840
का नाम है उसकी तो बहुत बहुत शक्ति है। ये बात तो ये मैंने एक्सपीरियंस

3151
03:50:21,840 --> 03:50:25,840
किया है। और बात ये है ना कि जब ये सर्वशक्तिमान के भाव

3152
03:50:25,840 --> 03:50:29,920
से जपेंगे ना तो वो ही इनके जीवन में कुछ ऐसा कर देंगे कि इनको

3153
03:50:29,920 --> 03:50:34,000
पता चल जाएगा कि वाकई में तारक नाम कौन सा है। हमें कुछ

3154
03:50:34,000 --> 03:50:38,000
करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वो जो तारक नाम है इनके जीवन में वो

3155
03:50:38,000 --> 03:50:42,080
स्वयं ही प्रकाशित हो जाएगा। बिल्कुल। मगर पहले ईश्वर

3156
03:50:42,080 --> 03:50:46,320
को ईश्वर तो माने। जैसे भगवान ने कहा ना वो लोग जो अन्य देवी

3157
03:50:46,320 --> 03:50:47,680
देवताओं की पूजा करते

3158
03:50:47,680 --> 03:50:52,160
हैं वो लोग भी भज तो मुझे ही रहे हैं। मगर अविधि

3159
03:50:52,160 --> 03:50:54,480
पूर्वक होने के कारण उनको मोक्ष नहीं मिलता। वो

3160
03:50:54,480 --> 03:50:58,480
मूर्ख है। तो यहां पर उन्होंने जब ये कहा ना अन्य देवी देवता इसका मतलब ये नहीं है कि

3161
03:50:58,480 --> 03:51:02,560
कृष्ण के अलावा जो अन्य रूप है अगर आप कृष्ण से स्वतंत्र किसी

3162
03:51:02,560 --> 03:51:06,560
को मान रहे हो कि भाई फलाने ईश्वर का रूप जो है वो कृष्ण

3163
03:51:06,560 --> 03:51:10,640
से स्वतंत्र है और वो पावरफुल है तो आप गलत कर रहे हो। वो

3164
03:51:10,640 --> 03:51:14,720
कहीं ना कहीं बाधित हो जाएगा। जैसे ही दो रूप हो गए तो कृष्ण सीमित

3165
03:51:14,720 --> 03:51:19,280
हो गए और जो जिसको तुम वो भी सीमित हो गया। जैसे ही दो रूप हो गए

3166
03:51:19,280 --> 03:51:23,360
कृष्ण भी सीमित हो गया और जिसको तुम पूज रहे हो वो भी सीमित हो गए। तो स्वतंत्र

3167
03:51:23,360 --> 03:51:27,360
रूप से अगर किसी को बज रहे हो तो गलत है। आप किसी को भी बज

3168
03:51:27,360 --> 03:51:31,600
रहे हो वह कृष्ण को ही बज रहे हो। यह भगवान ने कहा। मगर अवि पूर्वक

3169
03:51:31,600 --> 03:51:35,840
क्योंकि उसकी सर्वशक्तिमत्ता को आपने स्वीकार नहीं किया। आप लोग विभाजन कर रहे हो [गला साफ़ करने की आवाज़]

3170
03:51:35,840 --> 03:51:39,920
रूपों में। इस वजह से स्वतंत्र समझने के कारण आपकी जो भक्ति है निष्ठा है

3171
03:51:39,920 --> 03:51:44,640
वो बाधित की है। तो इस वजह से आपको मोक्ष नहीं मिलेगा। चलिए

3172
03:51:44,640 --> 03:51:48,480
बहुत लंबा हो गया लास्ट का।

3173
03:51:48,480 --> 03:51:52,560
ठीक है गोविंद गुरुकुल जी फिर मिलते हैं

3174
03:51:52,560 --> 03:51:56,880
जय जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव

3175
03:51:56,880 --> 03:52:01,200
महेंद्र सिंह जी अब किसी और दिन रखते हैं क्योंकि

3176
03:52:01,200 --> 03:52:05,200
चार घंटे हो चुके हैं ऑलरेडी हमें अब हम ये कबीर इस ग

3177
03:52:05,200 --> 03:52:09,200
आए हैं और एक आए हैं रौनक पांडे जी

3178
03:52:09,200 --> 03:52:09,700
महेंद्र

3179
03:52:09,680 --> 03:52:13,840
सिंह जी और क्यूट बॉय भी हैं आप सभी को मैं कहना चाहूंगा

3180
03:52:13,840 --> 03:52:18,080
राजन जी हैं और कबीर इस गॉड जो बोल रहे हैं वो

3181
03:52:18,080 --> 03:52:22,240
है आप दोनों कल हम लोग रख लेंगे आप एक नंबर नोट

3182
03:52:22,240 --> 03:52:25,520
कर लीजिए 7408301869

3183
03:52:25,520 --> 03:52:29,680
इस पर हमसे संपर्क करिए WhatsApp करिए WhatsApp करने पर आपको फॉर्म

3184
03:52:29,680 --> 03:52:33,840
मिलेगा वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा उसको भर दीजिए हम आपके साथ कल

3185
03:52:33,840 --> 03:52:37,920
लाइव जुड़ जाएंगे या आने वाले किसी और समय लाइव जुड़ जाएंगे। जो [नाक से की जाने वाली आवाज़] भी

3186
03:52:37,920 --> 03:52:41,920
अब आ रहे हैं बौद्धि तत्व और रवि इत्यादि

3187
03:52:41,920 --> 03:52:46,000
जो भी आ रहे हैं पेज दिखाकर ही आना होगा। ये

3188
03:52:46,000 --> 03:52:50,080
बात ध्यान रखिएगा और अब बात करते हैं एक पांडे जी

3189
03:52:50,080 --> 03:52:54,160
हैं और एक सिंह जी हैं। तो सिंह जी बस आप बता दें और हम लोग बस

3190
03:52:54,160 --> 03:53:00,160
इसको चर्चा को ऑफ करेंगे। जी

3191
03:53:06,320 --> 03:53:10,640
बताएं सिंह जी महेंद्र सिंह जी जय

3192
03:53:10,640 --> 03:53:15,760
श्री राम जी टाइम बहुत हो गया कर दो

3193
03:53:15,760 --> 03:53:18,400
ठीक है। ठीक है।

3194
03:53:18,400 --> 03:53:24,400
ठीक है। रौनक जी कुछ विशेष बात कहनी है तो नहीं तो हम तो फिर बढ़ाएं।

3195
03:53:27,840 --> 03:53:33,840
कबीर सिंह गॉड जी ने तो किया लेकिन

3196
03:53:34,160 --> 03:53:38,320
ठीक है। तो अब हम लोग बढ़ा रहे हैं स्ट्रीम को। सभी को जय श्री राम। समय देने

3197
03:53:38,320 --> 03:53:42,400
के लिए आभार आप सभी का और जिसको भी मतभेद के निमित्त चर्चा करनी

3198
03:53:42,400 --> 03:53:46,480
हो संपर्क करें। जय श्री राम जय श्री

3199
03:53:46,480 --> 03:53:52,230
राम

3200
03:53:52,230 --> 03:53:56,230
[संगीत]
