1
00:00:01,910 --> 00:00:07,910
[संगीत]

2
00:00:08,200 --> 00:00:12,360
तो सभी को जय श्री राम और दीपावली

3
00:00:12,360 --> 00:00:16,760
की एक बार फिर से ढेर सारी शुभकामनाएं

4
00:00:16,760 --> 00:00:19,040
आप सभी

5
00:00:19,040 --> 00:00:25,040
को आज कई दिनों से जो क्रम एक चल रहा था वो क्रम

6
00:00:25,560 --> 00:00:30,520
आज उसमें बदलाव आया है और आज बीच में आए हैं अ

7
00:00:30,520 --> 00:00:34,640
कन की तरफ से एक सज्जन है राहुल दीक्षित जी यह पहले आप लोगों ने देखा

8
00:00:34,640 --> 00:00:38,800
होगा एक बार आ भी चुके हैं राहुल दीक्षित जी से ही कहूंगा थोड़ा सा अपना परिचय दे द

9
00:00:38,800 --> 00:00:43,360
एक बार दर्शकों को जय श्री राम राहुल दीक्षित

10
00:00:43,360 --> 00:00:47,560
जय श्री राम आवाज र नहीं आवाज आपकी बहुत

11
00:00:47,560 --> 00:00:53,560
इको आ रहा है उसम गूंज रही है आवाज र

12
00:01:17,840 --> 00:01:23,840
अब ठीक आ रही है सर आवाज अब कम आ रही

13
00:01:24,600 --> 00:01:28,920
है अब ठीक है

14
00:01:28,920 --> 00:01:33,800
अब बोलिए कम है हरे कृष्णा

15
00:01:33,800 --> 00:01:38,280
नहीं आवाज कम है

16
00:01:38,280 --> 00:01:42,440
आपकी कृष्णा हा ठीक है

17
00:01:42,440 --> 00:01:46,680
ठीक है पकड़ के आप उसको

18
00:01:46,680 --> 00:01:50,800
वहा आसपास लगा नहीं सकते वो चेहरे के पास ही रह कब तक

19
00:01:50,800 --> 00:01:55,440
आप पकड़े रहेंगे कोई नहीं

20
00:01:55,440 --> 00:02:00,520
प्यारी बहना कह रही है शिवांश भैया मैं तो दिवाली नहीं मना पाई

21
00:02:00,520 --> 00:02:04,760
रामपाल की वजह से बेटा जिसके हृदय

22
00:02:04,760 --> 00:02:10,280
में राम होते हैं ना उसके लिए प्रतिक्षण दिवाली

23
00:02:10,280 --> 00:02:13,520
है

24
00:02:13,520 --> 00:02:17,360
हां

25
00:02:17,360 --> 00:02:23,000
तो हम राहुल दीक्षित जी आप अपना थोड़ा सा परिचय दे

26
00:02:23,000 --> 00:02:27,040
दीजिए जी मैं दिल्ली से हूं और इसन से जुड़ा हुआ हूं छ

27
00:02:27,040 --> 00:02:31,240
से सात साल से फिर आपकी आवाज कम आ रही है आप एक बार जाकर वापस

28
00:02:31,240 --> 00:02:35,280
आ जाइए दोबारा से एक बार बोलिए इसको पास में

29
00:02:35,280 --> 00:02:41,280
लाक

30
00:02:43,080 --> 00:02:48,200
बोलिए हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता

31
00:02:48,200 --> 00:02:52,320
हमें तो जो श्री राम कृष्ण

32
00:02:52,320 --> 00:02:58,120
की शरण में है उनके लिए हर क्षण दिवाली जैसा ही होता

33
00:02:58,120 --> 00:03:02,200
है कल मैं दो तीन दिन से पिछले कुछ दो तीन दिन से मैं

34
00:03:02,200 --> 00:03:06,640
इस बात का चिंतन मनन कर रहा था कि दिवाली आ रही है

35
00:03:06,640 --> 00:03:11,200
जैसे जब मैं छोटा था तो दिवाली को लेकर के बहुत अतिरिक्त

36
00:03:11,200 --> 00:03:15,280
उत्सुकता रहती थी मन में बहुत ऐसा कुछ रहता था तो

37
00:03:15,280 --> 00:03:19,480
मैं यह सोच रहा था कि यह मैं अभी भी सामान्य क्यों हूं

38
00:03:19,480 --> 00:03:23,520
यह क्यों नहीं हो रहा है मेरे अंदर व एक्साइटमेंट कहां गई जो जब मैं छोटा था

39
00:03:23,520 --> 00:03:27,800
तब रहती थी मतलब क्या गुरु गोविंदो

40
00:03:27,800 --> 00:03:28,520
ग्रंथ का आलंबन

41
00:03:28,520 --> 00:03:32,600
लेने के बाद व्यक्ति ऐसा जाता है क्या फिर उसके बाद मुझे गुरुदेव

42
00:03:32,600 --> 00:03:37,000
का एक वचन दिखाई दिया जो उस समय दिवाली के टाइम

43
00:03:37,000 --> 00:03:40,360
पर

44
00:03:40,360 --> 00:03:44,640
और मतलब इधर उधर वायरल हो रहा था वो वचन था अब

45
00:03:44,640 --> 00:03:48,840
जैसे कहा ना कि जब हम भगवान की शरण में जाते हैं तो प्राप्ति और प्राप्ति

46
00:03:48,840 --> 00:03:53,000
की रक्षा वही करते हैं चिंता भी वही करते हैं और रक्षा भी वही करते हैं अब

47
00:03:53,000 --> 00:03:57,680
मैं चिंतित हो रहा हूं मेरे मन में चिंतन चल रहा

48
00:03:57,680 --> 00:04:01,720
है कि भाई मैं मैं

49
00:04:01,720 --> 00:04:05,840
जो है दिवाली को लेकर के कुछ सामान्य तो नहीं हो गया ऐसा तो नहीं हो गया भावनाए मेरी कम हो गई

50
00:04:05,840 --> 00:04:10,000
है मैं मतलब अपने आप को दोष दे उसके बाद गुरुदेव का एक मुझे वह दिखाई

51
00:04:10,000 --> 00:04:14,160
दिया वक्तव्य स्क्रीन पर उसमें लिखा था गुरुदेव ने कहा था जिनके हृदय

52
00:04:14,160 --> 00:04:18,720
में राम बसते हैं उनके लिए प्र प्रतिक्षण दिवाली होती है

53
00:04:18,720 --> 00:04:22,920
तो इसलिए क्या होता है जिन अब हमेशा आपका सदा

54
00:04:22,920 --> 00:04:27,800
सर्वदा ही हर क्षण जब राममय है तो

55
00:04:27,800 --> 00:04:32,040
हालांकि वह कर्तव्य परायणता तो करेंगे मगर राममय तो पहले

56
00:04:32,040 --> 00:04:36,320
भी है इसलिए वो एक जैसा दिखता है

57
00:04:36,320 --> 00:04:42,320
इसलिए दोष दृष्टि नहीं आनी

58
00:04:47,400 --> 00:04:51,480
चाहिए जी राहुल जी अन म्यूट

59
00:04:51,480 --> 00:04:55,960
कर लीजिए अब सर आवाज आ रही है आपको बहुत अच्छी

60
00:04:55,960 --> 00:05:01,120
अच्छे से आ रही है तो आप सर्वप्रथम अपना परिचय दे दीजिए

61
00:05:01,120 --> 00:05:05,120
दिल्ली से का

62
00:05:05,120 --> 00:05:10,960
फिर आपकी आवाज कम हो गई अभी आपने बोला था तो शायद पास मेंला के बोला था

63
00:05:10,960 --> 00:05:15,000
क्या मैं बोल रहा हूं कि मैं दिल्ली से हूं इस से कम सेम से

64
00:05:15,000 --> 00:05:19,240
सा साल से जुड़ा नहीं नहीं आवाज ठीक से नहीं आ रही मुझे नहीं आ रही

65
00:05:19,240 --> 00:05:23,680
सबको नहीं आ रही इनकी [संगीत]

66
00:05:23,680 --> 00:05:27,720
आवाज अभी आपने जब बोला था शुरू में

67
00:05:27,720 --> 00:05:31,760
तो आपने जब बोला था बिल्कुल साफ आवा आई थी काफी तेज आई थी

68
00:05:31,760 --> 00:05:35,800
सबसे पहले आप साफ आ रही है आवाज मैं बो रहा कि मैं दिल्ली मैं दिल्ली

69
00:05:35,800 --> 00:05:39,880
से हूं हम दिल्ली में सेटल्ड है वैसे बेसिकली हम यूपी से हैं

70
00:05:39,880 --> 00:05:44,000
कानपुर से बिलोंग करते हैं हां हां तो इस कन से मैं छ से सात

71
00:05:44,000 --> 00:05:48,040
साल से जुड़ा हुआ हूं ये आप चाहे तो एक

72
00:05:48,040 --> 00:05:52,040
बार एक बार बिना ईयरफोन के ट्राई कर लीजिए शायद आपको सहज रहेगा नहीं तो ऐसे

73
00:05:52,040 --> 00:05:56,320
ही करना पड़ेगा लगातार अब कैसा

74
00:05:56,320 --> 00:06:01,360
है हां बहुत अच्छी परफेक्ट अब ठीक है

75
00:06:01,360 --> 00:06:02,840
ठीक

76
00:06:02,840 --> 00:06:06,920
है तो आप दिल्ली में है इस समय और आप बेसिकली

77
00:06:06,920 --> 00:06:11,040
आप जो है आपका जो जन्म है वह नेटिव प्लेस

78
00:06:11,040 --> 00:06:16,360
यूपी में कहीं पर है ना दिल्ली में

79
00:06:16,360 --> 00:06:20,400
है दिल्ली में कौन से कन से है आप जुड़े

80
00:06:20,400 --> 00:06:24,400
हुए दिल्ली मंदिर

81
00:06:24,400 --> 00:06:29,840
सेली दिल्ली स्कन वैली

82
00:06:29,840 --> 00:06:33,880
अच्छा ल्ली ल्ली इकन डेल्ली मतलब वो क्या वन

83
00:06:33,880 --> 00:06:38,680
एंड ओनली एक ही सेंटर है क्या इकन में मतलब इकन के डेल्ली में

84
00:06:38,680 --> 00:06:44,560
सबसे पहला है अच्छा सबसे बड़ा और सबसे पहला वही

85
00:06:44,560 --> 00:06:49,480
है अच्छा जो अमोग लीला प्रभु जी है वो आपके वहीं पर है

86
00:06:49,480 --> 00:06:52,920
सक्रिय कन

87
00:06:52,920 --> 00:06:57,000
दिल्ली हां प्रभु जी प्रचार करते रहते हैं ल ओवर इंडिया ट्रेवल करते हैं ल ओवर वर्ल्ड

88
00:06:57,000 --> 00:07:01,080
ट्रेवल करते हैं प्र बिलोंग कहां से मतलब दिल्ली से

89
00:07:01,080 --> 00:07:05,040
बिलोंग करते हैं कहां से करते

90
00:07:05,040 --> 00:07:09,560
हैं दिल्ली से ही तो अच्छा

91
00:07:09,560 --> 00:07:15,560
तो डेल्ली मतलब य स्कन में कोई उनको पद मिला

92
00:07:20,640 --> 00:07:24,880
होगा राहुल जी आपका

93
00:07:24,880 --> 00:07:28,920
शायद ने ब्र आश्रम में

94
00:07:28,920 --> 00:07:32,880
ब्रह्मचारी में है 2

95
00:07:32,880 --> 00:07:37,040
साल अच्छा उनको अभी मुझे आपकी बात समझ में नहीं आई क्योंकि

96
00:07:37,040 --> 00:07:42,640
आपका बीच में कट हो गया था आपकी [संगीत]

97
00:07:42,640 --> 00:07:46,880
तरफ नहीं मेरा तो सबको साफसाफ दिखाई दे रहा

98
00:07:46,880 --> 00:07:51,840
है किसकी आवाज कट हो रही है बताएंगे बीच

99
00:07:51,840 --> 00:07:56,160
में ब्रेक आ रहा हो जिसकी आवाज में वीडियो

100
00:07:56,160 --> 00:08:02,160
किसकी रुकी है मेरी या राहुल जी की

101
00:08:06,600 --> 00:08:12,080
दीक्षित जी की वीडियो रुक गई

102
00:08:12,080 --> 00:08:16,200
है राहुल जी का आ रहा है मेरा

103
00:08:16,200 --> 00:08:20,200
नहीं आ रहा

104
00:08:20,200 --> 00:08:24,280
है राहुल जी आपकी आवाज कट रही है आप आप

105
00:08:24,280 --> 00:08:30,280
अपना नेटवर्क इशू को ठीक करें

106
00:08:36,000 --> 00:08:42,000
तब तक हम लोग कुछ और बात कर लेते

107
00:08:53,400 --> 00:08:57,560
हैं एक ब्रज शब्द को लेकर

108
00:08:57,560 --> 00:09:01,560
के भ्रांति फैल रही है हालाकि हम आने वाले टाइम में इस नैरेटिव को भी स्पेशली

109
00:09:01,560 --> 00:09:05,560
ब्रज शब्द मीमांसा पर लाएंगे भ्रांति फैल

110
00:09:05,560 --> 00:09:09,920
रही है जब हमने ये वीडियो बनाया था ब्रज शब्द को लेकर के यहां पर भी बताया था कि

111
00:09:09,920 --> 00:09:14,400
व्रज का अर्थ जाना भी है और आना भी है

112
00:09:14,400 --> 00:09:18,480
तो हमने उसमें शिवराम आपटे जी की जो

113
00:09:18,480 --> 00:09:22,720
शब्द कोष है वो दिखाया था तो उसमें क्या है कि

114
00:09:22,720 --> 00:09:27,080
सबसे पहले तो पूरी बात को देखे समझे बिना ही कुछ कुतर

115
00:09:27,080 --> 00:09:31,360
की लोग हैं उन्होंने एक वीडियो बनाया और हमने उसमें यह कहा था कि

116
00:09:31,360 --> 00:09:34,720
ऐसी कोई डिक्शनरी लाओ

117
00:09:34,720 --> 00:09:35,720
जिसमें

118
00:09:35,720 --> 00:09:39,800
ब्रज का अर्थ केवल जाना लिखा हो आना ना लिखा

119
00:09:39,800 --> 00:09:43,880
हो तो एक कोई कुतर की है जो यहां पर आकर के जा भी चुका है जिसके बारे में मैंने पहले

120
00:09:43,880 --> 00:09:47,960
बताया था नाम है रतन

121
00:09:47,960 --> 00:09:52,840
दास ऐसे आर से कुछ नाम उसने फिर

122
00:09:52,840 --> 00:09:56,960
एक दूसरी दूसरा एक शब्दकोष खोला उस

123
00:09:56,960 --> 00:10:01,080
शब्दकोष का नाम है

124
00:10:01,080 --> 00:10:05,320
चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश उसमें व्रज शब्द

125
00:10:05,320 --> 00:10:10,120
का अर्थ लिखा हुआ है जाना और चलना दो शब्द लिखे हैं

126
00:10:10,120 --> 00:10:14,280
और जो शिवराम आपटे जी की जो डिक्शनरी

127
00:10:14,280 --> 00:10:18,560
है उसमें काफी वृहद व्याख्या है जाना चलना पहुंचना दर्शन करना

128
00:10:18,560 --> 00:10:22,720
तड़क यह सब उसम अ अब उसने

129
00:10:22,720 --> 00:10:27,000
दिखा दिया व्रज शब्द का अर्थ है जाना और चलना

130
00:10:27,000 --> 00:10:31,880
सबसे पहली बात भाई साहब कि जो यह

131
00:10:31,880 --> 00:10:35,920
रामपाल दास जी है जब ्र शब्द का अर्थ बताते हैं तो

132
00:10:35,920 --> 00:10:41,000
यह कौन सी डिक्शनरी से बताते

133
00:10:41,000 --> 00:10:45,000
हैं राहुल जी मैं आपको ले लेता हूं मैं थोड़ा अपनी बात

134
00:10:45,000 --> 00:10:49,360
पूरी करूंगा मैं बात पूरी करलू थोड़ी तो जो

135
00:10:49,360 --> 00:10:53,360
रामपाल दास जी के वीडियोस है जिसमें वो ब्रज शब्द को लेकर के आक्षेप लगा रहे

136
00:10:53,360 --> 00:10:58,240
हैं उन वीडियोस में वो शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखा रहे

137
00:10:58,240 --> 00:11:02,280
हैं शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखा रहे हैं तो आप डिक्शनरी को क्यों

138
00:11:02,280 --> 00:11:06,520
बदल रहे हैं आपको शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी पर विश्वास

139
00:11:06,520 --> 00:11:10,600
नहीं है क्या तो जो डिक्शनरी वो दिखा रहे हैं उसमें उन्होंने क्या किया है

140
00:11:10,600 --> 00:11:14,080
कर्तव्य कि

141
00:11:14,080 --> 00:11:18,280
उन्होंने व्रज शब्द का अर्थ जाना दिखाने के लिए तो उधर तो कैमरा

142
00:11:18,280 --> 00:11:22,520
दिखाया मगर जहां पर आना लिखा है व हाथ रख लिया वहा पर कैमरा दिखाया

143
00:11:22,520 --> 00:11:26,600
नहीं कितना अच्छा तरीका है ना लोगों की आंखों में धूल झोंकने

144
00:11:26,600 --> 00:11:30,800
का मिर्ची झोंकने का अब दूसरी बात ये आ जाती

145
00:11:30,800 --> 00:11:34,800
है कि वो जो कुतर की हैक रामपाल दास जी तो इस समय

146
00:11:34,800 --> 00:11:39,320
बाहर है नहीं जो उनसे बात की जाए तो उनके नाम पर जो अपने

147
00:11:39,320 --> 00:11:43,320
पाखंड चला रहे हैं उसने बोला कि भाई यह देखो

148
00:11:43,320 --> 00:11:47,520
अब उसने वो शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखाई नहीं क्यों नहीं दिखाई क्यक दिख

149
00:11:47,520 --> 00:11:52,040
गया इसमें आना भी लिखा है अब उसने डिक्शनरी दिखाई

150
00:11:52,040 --> 00:11:56,160
चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश अब पहली बात तो यह

151
00:11:56,160 --> 00:12:00,480
है कि उसमें जाना भी लिखा चलना भी लिखा है जब चलना

152
00:12:00,480 --> 00:12:05,040
लिखा है तो क्या इसका यह अर्थ नहीं निकलता

153
00:12:05,040 --> 00:12:09,240
कि सब कुछ त्याग दे सभी धर्मों का मुझ में

154
00:12:09,240 --> 00:12:13,720
मुझको समर्पित करते हुए मेरी शरण में चल हो गया

155
00:12:13,720 --> 00:12:17,760
चलना लिखा है ना वहा पर ब्रज के साथ साथ हमने कहा था

156
00:12:17,760 --> 00:12:21,880
कि जाना के जाना केवल जाना लिखा हो कोई

157
00:12:21,880 --> 00:12:25,880
और वहां पर अर्थ ना लिखा हो जिसका अर्थ आना में लिया जा सके

158
00:12:25,880 --> 00:12:29,960
अब वहां पर चलना लिखा है इसका क्या ये अर्थ नहीं

159
00:12:29,960 --> 00:12:34,400
हो सकता है कि सभी धर्मों का प्र त्याग करके मेरी शरण में चल

160
00:12:34,400 --> 00:12:38,520
तू जो भी धर्म कर्म कर वो मेरी शरण में मेरा सानिध प्राप्त करके

161
00:12:38,520 --> 00:12:42,520
कर तो इस पर उसको ध्यान नहीं देना कुत की को

162
00:12:42,520 --> 00:12:48,520
और एक कुतर्क और किया कि

163
00:12:50,040 --> 00:12:54,040
जो भगवान जो श्री कृष्ण है उनकी शरण में तो अर्जुन पहले

164
00:12:54,040 --> 00:12:58,040
से ही है तो फिर वह अपनी शरण में आने को क्यों कह रहे हैं

165
00:12:58,040 --> 00:13:00,560
भाई

166
00:13:00,560 --> 00:13:04,800
पहली बात यह है कि क्या आप यह मानते हो कि आप

167
00:13:04,800 --> 00:13:09,720
आपकी बात कर रहा हूं जो कबीर को भगवान मानते हैं

168
00:13:09,720 --> 00:13:13,840
आप यह मानते हो कि आप जब जन्म लेते

169
00:13:13,840 --> 00:13:18,040
हो तब भगवान की शरण में नहीं होते हो क्या भगवान

170
00:13:18,040 --> 00:13:22,160
की सीमा के बाहर होते हो प्रैक्टिकली देखा

171
00:13:22,160 --> 00:13:26,160
जाए तो यदि आप कबीर को भगवान मान रहे तो जन्म से ही आप उसी की शरण में हो

172
00:13:26,160 --> 00:13:30,240
उसी की सत्ता की सीमा में हो मगर फिर भी उसकी सत्ता में क्यों

173
00:13:30,240 --> 00:13:34,400
जाना जब तुम उसकी सत्ता में हो ही तो इसका अर्थ आएगा कि अपने

174
00:13:34,400 --> 00:13:38,560
भाव से उन्हें स्वीकार कर लेना परमेश्वर के रूप में यहां उस शरण

175
00:13:38,560 --> 00:13:42,720
की बात हो रही है पहले शारीरिक फिजिकल शरण की बात हो रही थी अब आत्मिक

176
00:13:42,720 --> 00:13:46,960
शरण की बात हो रही है कि तू जो है मेरी शरण में आजा और

177
00:13:46,960 --> 00:13:51,040
दूसरी बात अगर यही बात है यह जो उस इस का

178
00:13:51,040 --> 00:13:55,200
खेल किया है ना आप लोगों ने रामपाल वालों से बात कर रहा हूं कि उसकी उसकी

179
00:13:55,200 --> 00:14:00,200
शरण में जब वो यहां खड़े तो किसकी शरण में जाने की बात कर रहे हैं ऐसे ही

180
00:14:00,200 --> 00:14:04,400
कबीर कबीर सागर के वो दोहे या वो जो भी आप

181
00:14:04,400 --> 00:14:05,080
उनको नाम

182
00:14:05,080 --> 00:14:09,160
द वो लेख जिनम कबीर खुद कह रहे हैं कि

183
00:14:09,160 --> 00:14:13,240
मैं उस परमात्मा की श्रम में जाता हूं या उस गुरु से ज्ञान लेता हूं

184
00:14:13,240 --> 00:14:17,440
तो जब कबीर को तो पहले से ही ज्ञान है तो किस गुरु से ज्ञान लेने की बात कर रहे

185
00:14:17,440 --> 00:14:21,600
हैं किस परमात्मा के पास जाने की बात कर रहे हैं और ये

186
00:14:21,600 --> 00:14:25,760
हमने अपने द्वारा व्याख्या की हुई बात

187
00:14:25,760 --> 00:14:30,000
नहीं कही है यह जो आपके जो तथाकथित संत है रामपाल

188
00:14:30,000 --> 00:14:34,000
जो इस समय जेल धाम में वो जेल धाम वाले जो हैं जब

189
00:14:34,000 --> 00:14:38,360
वो जेल धाम में नहीं थे बाहर थे जब वो स्वतंत्र थे कुछ भी करने के लिए अभी वो बंदी

190
00:14:38,360 --> 00:14:42,480
है सब कुछ नहीं कर सकते तो जब वो बाहर थे तो उनके

191
00:14:42,480 --> 00:14:47,080
वीडियोस में उन्होंने वो दोहे पढ़े हैं तो आप ये भी नहीं कह सकते कि मिलावट है

192
00:14:47,080 --> 00:14:51,200
बहुत जल्दी मिलावट प आ जाते हो ठीक है तो आपके

193
00:14:51,200 --> 00:14:55,280
जो कबीर है जब वो पहले से परमेश्वर है ज्ञानवान है तो उनको गुरु की शरण में जाने

194
00:14:55,280 --> 00:14:59,440
का जाना क्यों पड़ रहा है जब रामपाल दास जी

195
00:14:59,440 --> 00:15:03,560
स्वयं उनके अवतार है तो उनको क्यों गुरु की शरण में जाना पड़ रहा है जब वो पहले

196
00:15:03,560 --> 00:15:07,680
से ही ज्ञानवान है है ना तो यह सब बातें सोच

197
00:15:07,680 --> 00:15:11,880
समझ के बोला करो यह कुतर के यहां नहीं चल पाएंगे और पीठ

198
00:15:11,880 --> 00:15:16,040
पीछे वीडियो बनाना आसान है आप सामना करिए सामने से आ कर के

199
00:15:16,040 --> 00:15:20,280
बातें रखिए तब पता चलेगा दूध का दूध और पानी का पानी

200
00:15:20,280 --> 00:15:25,160
ठीक है ना क्या नाम है इनका रतन

201
00:15:25,160 --> 00:15:29,840
दास अगर कोई हो तो उन तक मैसेज पहुंचा दे

202
00:15:29,840 --> 00:15:34,320
आपके सभी कुतर्कों का उत्तर दे ब्रज का शब्द वहां जो डिक्शनरी

203
00:15:34,320 --> 00:15:38,440
आपने दिखाई है उसमें जाना भी लिखा है चलना भी लिखा है

204
00:15:38,440 --> 00:15:42,680
और सबसे बड़ी एक बात बताऊं कि आपने जो डिक्शनरी दिखाई है रतन दास ने जो डिक्शनरी

205
00:15:42,680 --> 00:15:46,760
दिखाई है उसके रचयिता कौन है

206
00:15:46,760 --> 00:15:50,920
चतुर्वेदी जी कहां से लखनऊ से कहां रहते थे हजरतगंज

207
00:15:50,920 --> 00:15:55,120
में उनकी जो पीढ़ी है उनसे हमने संपर्क कर लिया

208
00:15:55,120 --> 00:15:59,360
है एक दो दिन में हम जाकर के उनके साथ अपनी उनसे संपर्क किया बढ़िया

209
00:15:59,360 --> 00:16:03,360
भगवत गीता का पाठ करते हैं और वो भी बोल रहे थे कि नहीं पिताजी ने तो

210
00:16:03,360 --> 00:16:07,560
यहां चलना हमें तो भगवत गीता का अर्थ यही सिखाया ब्रज कार्थ जिसकी लिखी

211
00:16:07,560 --> 00:16:11,720
हुई चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्द कोश आप दिखा रहे हैं वह

212
00:16:11,720 --> 00:16:15,720
भी अपने गुरु की अवेल करते हुए क्योंकि उन्होंने शिवराम आपटे की दिखाई

213
00:16:15,720 --> 00:16:19,960
थी रामपाल दास जी ने अपने गुरु की अलना करते हुए जो डिक्शनरी आप दिखा

214
00:16:19,960 --> 00:16:24,240
रहे हैं वो डिक्शनरी लिखने वाले के जो वंश परंपरा

215
00:16:24,240 --> 00:16:28,520
है जो उसको आज भी छापने के लिए बैठे हुए हैं उस डिक्शनरी

216
00:16:28,520 --> 00:16:32,560
को वो यह बात बोल रहे हैं कि ब्रज का शब्द जो है क्या

217
00:16:32,560 --> 00:16:35,400
है जाना भी है आना भी है तो वहां

218
00:16:35,400 --> 00:16:40,200
भाव के अनुसार लिया जाएगा ठीक है

219
00:16:40,200 --> 00:16:44,520
तो इसीलिए कहता हूं कि इधर उधर के चक्रों

220
00:16:44,520 --> 00:16:48,080
में नहीं पढ़ना चाहिए

221
00:16:48,080 --> 00:16:52,080
खैर हां वह सामने आया था मैंने उसे भगा दिया क्योंकि वह

222
00:16:52,080 --> 00:16:56,160
यहां आकर के हंसी ठट्ठा कर रहा था हम जब उससे सीधे सवाल पूछ

223
00:16:56,160 --> 00:17:00,200
रहे हैं तो वो एक्टिंग कर रहा है बताया

224
00:17:00,200 --> 00:17:04,600
था ना मैंने क्यों हटाया आप आ जाओ आपको अगर पता हो तो

225
00:17:04,600 --> 00:17:09,840
चलिए राहुल दीक्षित जी विषय पर आते

226
00:17:09,840 --> 00:17:15,840
हैं तो मैं ये पूछ रहा

227
00:17:16,360 --> 00:17:22,360
था दक्षित जी आपकी फोटो नहीं आ

228
00:17:26,920 --> 00:17:31,000
रही अरे भाई वो कोई हमारा क्या मित्र है

229
00:17:31,000 --> 00:17:35,320
जो यहां हम उसके साथ बैत करके गप्पे मारे हंसी ठट्ठा करें

230
00:17:35,320 --> 00:17:39,400
जो विषय की बात है वो ना करके और जो इधर उधर की तरीके की एक्टिंग करने के लिए

231
00:17:39,400 --> 00:17:43,480
उसकी एक्टिंग देखने के लिए थोड़ी ना हम बैठे हुए हैं व्यर्थ का समय उसके पास होगा

232
00:17:43,480 --> 00:17:47,680
हमारे पास नहीं है क्योंकि वह फॉलो करता है जेल धाम में व्यर्थ समय बिताने वालों

233
00:17:47,680 --> 00:17:53,400
का हम नहीं

234
00:17:53,400 --> 00:17:59,400
करते राहुल जी आप दिख नहीं रहे

235
00:18:06,400 --> 00:18:10,560
जी राहुल जी ओके तो राहुल जी मैं यह पूछ रहा था यह

236
00:18:10,560 --> 00:18:12,040
जो

237
00:18:12,040 --> 00:18:16,280
इसकन जो प्र तंत्र है जो संस्था है

238
00:18:16,280 --> 00:18:20,360
इसमें जैसे अमोग लीला जी कि कहीं के पदाधिकारी है

239
00:18:20,360 --> 00:18:24,840
या कहीं कोई ब्रह्मचारी है कहीं कोई गुरु है कहीं कोई शिक्षा गुरु है

240
00:18:24,840 --> 00:18:28,960
कहीं कोई दीक्षा गुरु भी है तो यह

241
00:18:28,960 --> 00:18:33,040
डिसाइड कौन करता है इस कन में यह थोड़ा सा जानने की उत्सुकता थी हमारे अंदर

242
00:18:33,040 --> 00:18:37,960
ये कन का तंत्र काम कैसे करता है कौन है निर्णय लेने वाला

243
00:18:37,960 --> 00:18:41,360
कि क्या होगा और क्या नहीं होगा

244
00:18:41,360 --> 00:18:47,040
इकन जो प्रभुपाद जी ने स्थापित किया तो प्रभुपाद जी ने एक जीबीसी

245
00:18:47,040 --> 00:18:51,320
करके एक ऑर्गेनाइज कियाज जीबीसी के थ्रू

246
00:18:51,320 --> 00:18:53,840
य जीबीसी

247
00:18:53,840 --> 00:18:57,720
डिसाइड जी

248
00:18:57,720 --> 00:19:01,800
के आपका नेटवर्क इशू बहुत ज्यादा है आप किसी ऐसी जगह प जाके बात

249
00:19:01,800 --> 00:19:07,800
नहीं कर सकते जहां पर नेटवर्क नेटवर्क इशू ना

250
00:19:19,600 --> 00:19:23,760
हो भाई साहब मैंने बहुत सारी बातें बोली है उन

251
00:19:23,760 --> 00:19:27,840
सारी बातों पर बात ना करके किसी एक वस्तु को जिस पर आप बात कर सकने

252
00:19:27,840 --> 00:19:32,480
के बारे में सोच रहे हो क्यों उठाते हो बहुत सारी बातें बोली है ना

253
00:19:32,480 --> 00:19:36,800
आप सामने आइए एक एक बात का आपको उत्तर मिलेगा कायर

254
00:19:36,800 --> 00:19:41,720
मत बनिए सामने आइए फ्रंट फेस पर

255
00:19:41,720 --> 00:19:45,840
रहिए राहुल जी आप अपने नेटवर्क का थोड़ा इशू ठीक करिए क्योंकि बारबार

256
00:19:45,840 --> 00:19:51,840
वही हो रहा है लाइव का जो मामला बिगड़ रहा

257
00:19:52,000 --> 00:19:56,520
है आप लीव कर दीजिए और फिर आ जाइए

258
00:19:56,520 --> 00:20:00,920
दोबारा से और ऐसी जगह पहुंच करके आइए जहां पर

259
00:20:00,920 --> 00:20:06,920
यह समस्या ना

260
00:20:24,400 --> 00:20:30,400
आए तो

261
00:20:30,560 --> 00:20:33,280
केशु गोस्वामी

262
00:20:33,280 --> 00:20:37,280
जी लिंक केशु गोस्वामी जी किस बारे में बात करनी

263
00:20:37,280 --> 00:20:42,800
है

264
00:20:42,800 --> 00:20:47,760
आपको जी बोलिए ल

265
00:20:47,760 --> 00:20:49,120
जी गवर्निंग

266
00:20:49,120 --> 00:20:53,720
बॉडी कमीशन जीबीसी करके जी ने बनाया

267
00:20:53,720 --> 00:20:56,720
बनाया तोव देखते हैं क्या योग्यता है गुरु की

268
00:20:56,720 --> 00:21:01,040
व डिसाइड करते मेंब है डायरेक्ट इंस्ट्रक्शन

269
00:21:01,040 --> 00:21:05,840
उन्होने ले रखी है पपा जी ने कुछ रूल्स एंड रेगुलेशन बनाए जीबीसी की

270
00:21:05,840 --> 00:21:09,840
एक तरफ है जीबीसी का होल्ड है पूरा जीबीसी

271
00:21:09,840 --> 00:21:13,680
अच्छा

272
00:21:13,680 --> 00:21:17,240
तोसे जी जी

273
00:21:17,240 --> 00:21:21,440
यानी कि जीवीसी पूरा तय करता है जो जीवीसी का जो

274
00:21:21,440 --> 00:21:25,600
जो कमीशन है वो तय करता है कि कहां क्या होगा अब बात ये आती

275
00:21:25,600 --> 00:21:29,760
है कि जीवीसी में कौन अ हो सकता है मेंबर

276
00:21:29,760 --> 00:21:34,400
कौन बन सकता है कौन नहीं बन सकता है इसकी कोई नियमावली है

277
00:21:34,400 --> 00:21:38,600
क्या नियमावली है प्रभुपाद जी क शिष्य

278
00:21:38,600 --> 00:21:42,720
है वही डिसाइड करते हैं और जैसे होता है कि

279
00:21:42,720 --> 00:21:47,000
जैसे हमारे सनातन धर्म में माना गया है कि अंतिम

280
00:21:47,000 --> 00:21:51,000
निर्णायक जो है वो सन्यासी होगा

281
00:21:51,000 --> 00:21:55,040
वैराग होना चाहिए जी के शिष्य स्यासी है

282
00:21:55,040 --> 00:21:59,960
कुछ वान वही निर्णय लेते

283
00:21:59,960 --> 00:22:04,000
जीबीसी में जीबीसी में कोई भी ऐसा

284
00:22:04,000 --> 00:22:08,000
व्यक्ति नहीं है जो सन्यासी ना हो नहीं है प्रभुपाद जी के

285
00:22:08,000 --> 00:22:12,160
कई शिष्य हैं इसका इसकी

286
00:22:12,160 --> 00:22:16,240
शास्त्र सतता क्या है कि इस तरह से कमेटी बिठाई जाए जिसमें

287
00:22:16,240 --> 00:22:21,480
कि कुछ ग्रस्त अच्छा ग्रस्त नहीं हो सकता ऐसा है ये नियम

288
00:22:21,480 --> 00:22:25,560
है ग भी हो सक है कर रहे हैं एस

289
00:22:25,560 --> 00:22:29,720
एडवाइजरी मतलब ये क्या है एक जीबीसी मेंबर्स है एडवा

290
00:22:29,720 --> 00:22:34,720
एडवाइस लेते हैं एक मीटिंग हो है कन को

291
00:22:34,720 --> 00:22:38,920
समस्याओ से बचाया जाए क्या क्या इंप्रूवमेंट होनी चाहिए क्या डेवलपमेंट होनी चाहिए

292
00:22:38,920 --> 00:22:43,600
में लोग मेरा मेरा य पूछने का तात्पर्य यह है

293
00:22:43,600 --> 00:22:48,000
कि क्या यह जो जीबीसी का गठन है और किस आधार

294
00:22:48,000 --> 00:22:52,160
पर उसके मेंबर्स चुने जाएंगे एक एक जीबीसी जो है

295
00:22:52,160 --> 00:22:56,520
उसका जो गठन है किस आधार पर उसम मेरा प्रश्न

296
00:22:56,520 --> 00:22:58,840
सुन लीजिए

297
00:22:58,840 --> 00:23:03,960
मेरा प्रश्न सुन लीजिए कि किस आधार पर उसका गठन है

298
00:23:03,960 --> 00:23:08,520
और उसके जो मेंबर्स चुने जाएंगे व मेंबर्स

299
00:23:08,520 --> 00:23:12,920
चुने जाने के पैरामीटर एटली क्या है कि उसकी क्या योग्यता

300
00:23:12,920 --> 00:23:14,960
होनी चाहिए लक्षण से वह

301
00:23:14,960 --> 00:23:19,080
कैसा होना चाहिए क्योंकि देखिए जो हमारी जितनी भी प्रामाणिक परंपरा

302
00:23:19,080 --> 00:23:23,240
है उन सब में जो अंतिम निर्णायक पद पर बैठा हुआ

303
00:23:23,240 --> 00:23:27,280
कोई व्यक्ति है जो भी है आचार्य है

304
00:23:27,280 --> 00:23:31,320
वो सन्यासी है चाहे राम अनुज परंपरा

305
00:23:31,320 --> 00:23:35,560
देख लीजिए चाहे आप निंबार्क परंपरा देख लीजिए शंकराचार्य परंपरा

306
00:23:35,560 --> 00:23:39,720
देख लीजिए तो उसमें वैराग्य है जो अंतिम निर्णायक की गद्दी में बैठा है और जैसा

307
00:23:39,720 --> 00:23:43,760
कि विवेचन किया गया है 434 का विवेचन आपकी जो

308
00:23:43,760 --> 00:23:47,960
एज इटेज भगवत गीता है उसमें भी वही विवेचन आता है कि

309
00:23:47,960 --> 00:23:52,000
परंपरा से तो होना ही चाहिए साथ ही साथ जिसका वो गृहस्थ

310
00:23:52,000 --> 00:23:56,000
से वैराग्य आ चुका हो जिसके पास है ना तत्वदर्शी वो हो

311
00:23:56,000 --> 00:24:00,320
जाता है तो मैं ये कह रहा था कि अंतिम निर्णायक पद पर बैठने

312
00:24:00,320 --> 00:24:04,520
के लिए जो जीबीसी का जीबीसी की सदस्यता

313
00:24:04,520 --> 00:24:09,680
है उसको प्राप्त करने के लिए कुछ पैरामीटर नहीं है जो शास्त्रीय

314
00:24:09,680 --> 00:24:13,680
हो शास्त्रीय पैरामीटर भगवान की भक्ति में लगा 5050

315
00:24:13,680 --> 00:24:17,720
साल से लगा है प्रभुपाद जी के आदेशानुसार अपना जीवन यापन कर रहा है

316
00:24:17,720 --> 00:24:22,320
प्रभुपाद जी के शास्त्रों का जिन्होने बहुत अच्छे से अध्ययन किया है वो उनको लेते

317
00:24:22,320 --> 00:24:26,400
हैं भाई साहब मैं निश्चित नियमावली पूछ रहा हूं ऐसे वर्बल नहीं कहीं

318
00:24:26,400 --> 00:24:30,240
पर मतलब बिल्कुल निश्चिता के जी में कौन सदस्य होगा

319
00:24:30,240 --> 00:24:34,440
कौन नहीं होगा इसके शास्त्रोक्त पैरामीटर कहां से प्रभुपाद

320
00:24:34,440 --> 00:24:36,760
जी ने ही निर्देशित किया है प्र

321
00:24:36,760 --> 00:24:40,800
चला रहे कोई बुक हैम कोई बुक

322
00:24:40,800 --> 00:24:44,880
कहीं पर लिखा होय न व जीबीसी का कोर्स भी होता है इना

323
00:24:44,880 --> 00:24:49,400
हा लेवल नहीं को होता है मीटिंग होती

324
00:24:49,400 --> 00:24:53,720
हैय प्र है क्योंकी बात य य जो प्रोसेस

325
00:24:53,720 --> 00:24:54,220
है

326
00:24:54,040 --> 00:24:58,040
जीवीसी अंतिम निर्णायक है यह प्रोसेस परंपरा की प्रोसेस नहीं

327
00:24:58,040 --> 00:25:02,040
है संदाय प्रोसेस नहीं है यह तो एक कंपनी की प्रोसेस है

328
00:25:02,040 --> 00:25:06,120
कन को मैनेज करने केन को कैसे मैने अभी

329
00:25:06,120 --> 00:25:10,160
मैं आपको बता देता हूं एक छोटा सा उदाहरण अभी मैंने कुछ दिनों पहले यह

330
00:25:10,160 --> 00:25:15,000
सुना था जब यह अभी एक वाक्य हो गया था

331
00:25:15,000 --> 00:25:19,120
यह बिहार में कुछ हुआ था उस पर नहीं जाएंगे कि क्या हुआ था क्या

332
00:25:19,120 --> 00:25:23,160
नहीं हुआ था मगर उसके बाद मैंने कई लोगों का इंटरव्यू देखा

333
00:25:23,160 --> 00:25:27,240
जोकन के ऐसे लोग जिनको लोग जानते हैं स्न

334
00:25:27,240 --> 00:25:31,440
का चेहरा तो वो लोग ऐसी बातें करते हुए नजर आए कि

335
00:25:31,440 --> 00:25:35,520
अब जीबीसी ने टेक ओवर किया है जीबीसी ऐसा ऐसा बदलाव ला रही है

336
00:25:35,520 --> 00:25:39,960
और जीबीसी अय ध्यान रखिए किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए तो

337
00:25:39,960 --> 00:25:44,000
सोचिए एक गुरु है जो वो सन्यासी भी हो सकता

338
00:25:44,000 --> 00:25:48,120
है है ना ब्रह्मचारी भी हो सकता है हो सकता है ना गुरु

339
00:25:48,120 --> 00:25:53,960
एक जो गुरु है उसका निर्णय लेने वाला कोई

340
00:25:53,960 --> 00:25:58,280
हा ब्रह्मचारी नहीं हो सकता सन्यासी भी हो सकता है तो

341
00:25:58,280 --> 00:26:02,400
वो ये कह रहे थे कि किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए यह भी जीवीसी

342
00:26:02,400 --> 00:26:06,600
तय करने वाला है तो एक जो सन्यासी गुरु है

343
00:26:06,600 --> 00:26:10,640
उसका निर्णय जी सन्यासियों का

344
00:26:10,640 --> 00:26:15,160
निर्णय जीबीसी जिसमें की कोई गृहस्थ भी है कोई वानप्रस्थ

345
00:26:15,160 --> 00:26:19,200
भी है और कोई अलग अलग तरह के

346
00:26:19,200 --> 00:26:23,360
लोग है जो वहां पर जुड़े हुए हैं और इस तरीके से व एक सन्यासी के ऊपर

347
00:26:23,360 --> 00:26:27,560
लीडरशिप करेंगे कि तुम्हारे इतने ही गुरु होंगे यह कौन सा शास्त्र का संविधान

348
00:26:27,560 --> 00:26:30,320
है एक कितने

349
00:26:30,320 --> 00:26:35,200
हो सते ऐसे कोई ससी के लीडर नहीं

350
00:26:35,200 --> 00:26:41,200
और एक मैनेजमेंट हैली क्या है सिस्टम हैसी

351
00:26:41,680 --> 00:26:45,720
का सिस्टम हरसी को मर्याद र

352
00:26:45,720 --> 00:26:49,200
होना

353
00:26:49,200 --> 00:26:53,600
चाहिए को मैनेज करने के लिए जीसी बाकी जी के बारे

354
00:26:53,600 --> 00:26:58,320
जा दवारा जानना

355
00:26:58,320 --> 00:26:58,820
कह रहा

356
00:26:58,800 --> 00:27:03,080
आपको जानना चाहिए क्योंकि स्कन एक

357
00:27:03,080 --> 00:27:07,080
स्कन एक व्यवसायिक कंपनी नहीं है स्कोन क्लेम करती है कि हम

358
00:27:07,080 --> 00:27:11,600
धर्म संस्था है धर्म की संस्थापन कर रहे हैं तो उसमें

359
00:27:11,600 --> 00:27:15,600
एक व्यवसायिक जैसे कि वह बोर्ड ऑफ मीटिंग बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग होती

360
00:27:15,600 --> 00:27:19,760
है उस तरीके से जीबीसी हो गया अब वो तय कर रहा है कि कौन

361
00:27:19,760 --> 00:27:24,320
जो है सन्यासी के कितने गुरु होंगे यह तय करना तो बहुत

362
00:27:24,320 --> 00:27:28,320
गलत बात हो गई फिर और यह कौन से शास्त्र का संविधान है

363
00:27:28,320 --> 00:27:32,480
ऐसा नहीं है आपने गलत सुना है गलत व्यक्ति से सुना तो

364
00:27:32,480 --> 00:27:36,600
क्या है जब देखिए आप क्लेम तब कर सकते हैं मेरी चीज पर जब

365
00:27:36,600 --> 00:27:40,640
आप यह बताए कि सही क्या है मैंने तो सुना है वो मैं आपको बता रहा हूं और वो

366
00:27:40,640 --> 00:27:45,000
भी वीडियो से सुना है ऐसे नहीं कि बुक में पढ़ लिया हो मैं आपसे पूछ रहा हूं

367
00:27:45,000 --> 00:27:49,320
कि क्या इस बारे में कोई नियमावली है भाई हमें पता तो रहे कि हम लोग संप्रदाय

368
00:27:49,320 --> 00:27:53,560
को ही फॉलो कर रहे हैं बेसिकली तो हम संप्रदाय को फॉलो कर ही नहीं रहे क्योंकि

369
00:27:53,560 --> 00:27:57,840
वो जो जो क्लेम कर रहा है जो क्लेम कर रहा है कि हम चैतन्य महाप्रभु

370
00:27:57,840 --> 00:28:02,640
की पर से या जो क्लेम कर रहा है कि मधवा चार्य जी की परंपरा से है

371
00:28:02,640 --> 00:28:06,800
वस्तुत तो व स्वतंत्र है उसका निर्णय लेने वाले कौन है जीबीसी

372
00:28:06,800 --> 00:28:10,800
के मेंबर्स और उसम सन्यासी भी है गृहस्थ भी है वानप्रस्थ भी है सब है

373
00:28:10,800 --> 00:28:14,080
मिलजुल कर के और यह कोई व शास्त्रोक्त

374
00:28:14,080 --> 00:28:18,160
नियम है ही नहीं भाई जिस परंपरा से है उस परंपरा में जो पीछे

375
00:28:18,160 --> 00:28:22,160
गुरु गद्दी है वो निर्णय लेगी कि आप क्या करोगे क्या नहीं

376
00:28:22,160 --> 00:28:26,160
करोगे यह तो एक कंपनी तो अलग हो गई बिल्कुल और फिर यह भी कह

377
00:28:26,160 --> 00:28:28,560
रहे

378
00:28:28,560 --> 00:28:32,560
आपके निर्णय कोई गुरु नहीं ले रहा है सन्यासी नहीं ले रहा है बल्कि

379
00:28:32,560 --> 00:28:38,280
एक कंपनी का पैनल निर्णय ले रहा

380
00:28:38,280 --> 00:28:42,360
है प्रभुपाद जी के अकॉर्डिंग कैसे संस्था को हम चला

381
00:28:42,360 --> 00:28:46,520
सकते बहुत अच्छे से उसम डेवलपमेंट करते हैं उसम कुछ

382
00:28:46,520 --> 00:28:50,840
चेंस किए जाते है प्रभुपाद जी केडिंग य सं बहुत अच्छे से चल पाए प्र

383
00:28:50,840 --> 00:28:56,840
जीने जीी कुछ रू बहुत

384
00:28:58,560 --> 00:29:03,000
आपके यहां के जो ऑथेंटिक आपके प्रचारक है इनफ्लुएंसर्स

385
00:29:03,000 --> 00:29:07,200
है ये क्या कहते योगा ऑफ लव इनका मैंने

386
00:29:07,200 --> 00:29:11,200
वक्तव्य सुना है जो यह बोल रहे थे कि अब जीबीसी ये डिसाइड कर रही

387
00:29:11,200 --> 00:29:15,240
है किस गुरु के कितने शिष्य होंगे जिससे कि वो अपने शिष्य को मैनेज कर

388
00:29:15,240 --> 00:29:19,240
पाए तो जीबीसी कौन होता है किसी गुरु के

389
00:29:19,240 --> 00:29:23,480
पर निर्णायक बनने वाला जानकारी नहीं है

390
00:29:23,480 --> 00:29:29,480
इसके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है कुछ होगा ऐसा अभी मैंसी

391
00:29:29,720 --> 00:29:34,200
मैं बस आपसे ये कह रहा हूं हम लोग आगे चलते हैं आपको जानकारी नहीं है कोई बात नहीं

392
00:29:34,200 --> 00:29:38,360
मगर मैं ये कह रहा हूं कि आपको नहीं लगता है कि जब

393
00:29:38,360 --> 00:29:42,520
आप यह कहते हो कि हम धर्म का प्रचार कर रहे हैं धर्म धार्मिक संस्था है

394
00:29:42,520 --> 00:29:46,680
तो उसकी जो जड़ है कम से कम उसको तो जाने हम लोग कह तो रहे हैं

395
00:29:46,680 --> 00:29:51,480
कि मधवा चार से हैं एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं

396
00:29:51,480 --> 00:29:55,520
भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं कि मधवा

397
00:29:55,520 --> 00:29:59,760
चार से हैं चैतन्य महाप्रभु से मगर वस्तुत तो स्वतंत्र है और हम लोगों

398
00:29:59,760 --> 00:30:04,120
का निर्णय लेने वाले वो जीबीसी के मेंबर्स है जो कि शास्त्रोक्त

399
00:30:04,120 --> 00:30:08,120
नहीं है अरे कार्यकारी

400
00:30:08,120 --> 00:30:12,400
कोई समिति कार्यकारी नहीं कोई समिति होती है हर संस्था में ये सब

401
00:30:12,400 --> 00:30:13,680
लौकिक सिद्धांत है भाई

402
00:30:13,680 --> 00:30:17,760
साहब जो आप बोल रहे हैं ये सब ल सिद्धांत

403
00:30:17,760 --> 00:30:22,000
है मेरी बात समझिए आप

404
00:30:22,000 --> 00:30:26,440
स्वयं को सनातनी संस्था के रूप में क्लेम करते हैं और जो आप सिद्धांत बता रहे हैं

405
00:30:26,440 --> 00:30:31,080
यह लौकिक सिद्धांत है लौकिक सिद्धांत

406
00:30:31,080 --> 00:30:35,120
सनातन सिद्धांत गुरु परंपरा

407
00:30:35,120 --> 00:30:39,320
समझ को चलान को मैनेज करने के लिए बस

408
00:30:39,320 --> 00:30:43,520
इस को जो उसके व्यवसायिक चीज है कि भाई कितनी व गीता

409
00:30:43,520 --> 00:30:47,760
छनी है वो सब ठीक है मगर उसम धर्म और अधर्म का निर्णय लेने वाले भी वो है

410
00:30:47,760 --> 00:30:51,960
ना

411
00:30:51,960 --> 00:30:56,280
किसने मैं बताता आपको धर्म धर्म यह बताइए

412
00:30:56,280 --> 00:31:00,440
अमोग लीला जीने जब कोई कर दी थी

413
00:31:00,440 --> 00:31:04,560
क्या कहते हैं वो विवेकानंद जी के पर टिप्पणी कर दी थी तो

414
00:31:04,560 --> 00:31:09,040
उनको जो है कुछ दिनों के लिए बैन किया गया था जीबीसी

415
00:31:09,040 --> 00:31:13,120
के द्वारा वो कौन होते हैं एक भक्त

416
00:31:13,120 --> 00:31:17,280
को बैन करने वाले बताइए उनको

417
00:31:17,280 --> 00:31:21,560
उनको तो इस ध्यान देना है कि मंदिर का मंदिर का बन रहा है कि नहीं बन रहा है

418
00:31:21,560 --> 00:31:26,000
या बुक्स जितनी छाप है उतनी छप रही है कि नहीं छप रही है अगर

419
00:31:26,000 --> 00:31:30,040
अमोग लीला जी एक भक्त है भक्त भगवत भक्त उनके ऊपर निर्णय

420
00:31:30,040 --> 00:31:34,720
लेने वाले वो कौन होते हैं जीबीसी वाले जो उनको बैन करे बताइए

421
00:31:34,720 --> 00:31:39,320
कौन सा तोन गुरु

422
00:31:39,320 --> 00:31:44,240
गुरु तो हो सकते हा उनके गुरु हो सकते हैं गुरु ने किया था

423
00:31:44,240 --> 00:31:49,160
हाज उन्होने किया लेकिन त में ऐसा नहीं था

424
00:31:49,160 --> 00:31:53,160
बत लेटने दे वो लेटर मैंने देखा है व लेटर में क्या

425
00:31:53,160 --> 00:31:57,960
नाम लिखा था नीचे मुझे नहीं पता क्या था लेकिन

426
00:31:57,960 --> 00:32:02,080
किया होगा तो गुरु के हिसाब से किया होगा ऐसे हर कोई नहीं कर सकता और जीबीसी

427
00:32:02,080 --> 00:32:04,680
कर सकती है

428
00:32:04,680 --> 00:32:07,360
जी जीबीसी ने

429
00:32:07,360 --> 00:32:11,680
उसमें जो है यह लिया था निर्णय

430
00:32:11,680 --> 00:32:15,680
कि भाई हम उनको एक महीने के लिए बैन कर रहे हैं जीबीसी

431
00:32:15,680 --> 00:32:20,120
व लेटर जो निकला था प्रचारित हुआ और आपको एक बात बता दूं

432
00:32:20,120 --> 00:32:24,160
कि जो कुल मिलाकर के आपका यह कहना है

433
00:32:24,160 --> 00:32:28,440
कि आपका आप कह तो रहे हो कि मधवा परंपरा के है जैसे मैं शकरा परंपरा

434
00:32:28,440 --> 00:32:32,760
का हू तो मेरे अंतिम निर्णायक वो है जो शंकराचार्य

435
00:32:32,760 --> 00:32:37,240
की गद्दी पर बैठे हैं आप मधवा चार्य परंपरा के हैं

436
00:32:37,240 --> 00:32:41,680
तो आपकी अंतिम निर्णायक गद्दी पर कौन बैठा हैय आपको नहीं पता

437
00:32:41,680 --> 00:32:46,120
आप एट द एंड आप किसको फॉलो कर रहे हैं आपको नहीं

438
00:32:46,120 --> 00:32:50,160
पता जी को प्रभुपाद जी डायरेक्ट

439
00:32:50,160 --> 00:32:54,560
आपसे बात कर रहे हैं क्या लिख गए जो भी है उस हिसाब से

440
00:32:54,560 --> 00:32:58,880
चल रहा है आपको किसके द्वारा मिला बना प्रभुपाद जी

441
00:32:58,880 --> 00:33:03,120
का आप कह रहे हो कि मैंने वो पढ़ा भी नहीं है जो वो लिख के गए

442
00:33:03,120 --> 00:33:07,200
हैं अरे प्रभु जी गुरु शिष्य परंपरा से ज्ञान आता

443
00:33:07,200 --> 00:33:11,680
है ना दो गुरु शिष्य परंपरा से आया मगर

444
00:33:11,680 --> 00:33:15,680
गुरु शिष्य परंपरा से ज्ञान आया मगर प्रभुपाद जी वो जो

445
00:33:15,680 --> 00:33:19,800
जीबीसी का जो गठन है वह किस आधार पर किसको चुना जाएगा किसको नहीं चुना

446
00:33:19,800 --> 00:33:22,360
जाएगा वो कितने फैसले ले सकता होगा यह सब

447
00:33:22,360 --> 00:33:26,640
आपने जाना ही नहीं है फिर भी आप कह रहे हो प्रभुपाद जी को फॉलो कर रहा हूं हां

448
00:33:26,640 --> 00:33:30,720
प्रभुपाद जी को फॉलो कर प्रभुपाद जी के प्रभुपाद जी के शिष्य आप तो ये

449
00:33:30,720 --> 00:33:34,960
कह रहे हो ना कि मुझे पता ही नहीं है प्रभुपाद जी ने क्या लिखा है इस बारे में फिर आप उनको

450
00:33:34,960 --> 00:33:39,160
फॉलो करने का क्लेम कैसे कर रहे हो प्रभुपाद जी के शिष्य से आ रहे

451
00:33:39,160 --> 00:33:43,280
प्रभुपाद जी की किताबों से आ रहे फिर वही बात मैंने अभी आपसे यह

452
00:33:43,280 --> 00:33:47,360
भी पूछा कि धर्म और अधर्म का निर्णय कैसे ले रही है जीबीसी एक भगवत

453
00:33:47,360 --> 00:33:51,360
भक्त को वो कौन होती है वो अगर एक व्यवसाय पहली बात तो

454
00:33:51,360 --> 00:33:55,360
यह है कि अगर वो ब्रह्मचारी भी है अमोग लीला जी तब भी उनको कोई

455
00:33:55,360 --> 00:34:00,880
गृहस्थ ये नहीं कह सकता है कि तुम बहन हो के लिए जीबीसी

456
00:34:00,880 --> 00:34:04,880
केनके गुरु है गुरु भाई है व

457
00:34:04,880 --> 00:34:09,560
हा तो गुरु भाई का नाम नहीं है ना लेटर में व जीबीसी का

458
00:34:09,560 --> 00:34:14,120
नामला जी के गुरु है परम पूज गोपाल क महाराज उनके जो गुरु भाई

459
00:34:14,120 --> 00:34:18,600
है वो जो लेटर निकला था मायापुर से भाई साब व जीबीसी

460
00:34:18,600 --> 00:34:22,560
की ओर से निकला

461
00:34:22,560 --> 00:34:26,560
था आज की डेट में महामहिम कौन है जैसे

462
00:34:26,560 --> 00:34:30,600
मवार परंपरा में जो आनंद कृष्ण तीर्थ की गद्दी

463
00:34:30,600 --> 00:34:34,680
पर बैठेगा वह आज के टाइम में महामहिम है

464
00:34:34,680 --> 00:34:38,800
शंकराचार्य परंपरा में जो शंकराचार्य की गद्दी पर बैठेगा वह आज

465
00:34:38,800 --> 00:34:43,120
के टाइम में शंकर परंपरा का महामहिम है रामानुजाचार्य परंपरा में

466
00:34:43,120 --> 00:34:47,160
जो रामानुज की गद्दी पर बैठेंगे वह सब जगतगुरु कहलाएंगे और

467
00:34:47,160 --> 00:34:51,320
वह उसके महामहिम है रामानंदाचार्य परंपरा में जो रामानंदाचार्य के

468
00:34:51,320 --> 00:34:55,440
पद पर बैठेंगे वो उसके अंतिम निर्णायक है इस कन का अंतिम निर्णायक

469
00:34:55,440 --> 00:34:59,920
कौन है वो कौन प्रभुपाद

470
00:34:59,920 --> 00:35:03,920
जी आपके साथ व्यवहारिक नहीं है आज अरे आपको

471
00:35:03,920 --> 00:35:07,960
कैसे पता जो सूचनाएं आपको मिल रही है वो प्रभुपाद जी की सूचना है भाई

472
00:35:07,960 --> 00:35:12,920
वो वो देखिए वो एक संत होना चाहिए ना जो आपका अंतिम रूप से निर्णय लेगा

473
00:35:12,920 --> 00:35:17,040
प्रभुपाद जीर ऐसा है अगर ऐसा है तो फिर तो प्रभुपाद अगर ऐसी

474
00:35:17,040 --> 00:35:21,200
बात है तो प्रभुपाद जी का भी आलंबन लेने की क्या जरूरत है यही कह दो कृष्ण जी हमारे गुरु

475
00:35:21,200 --> 00:35:25,400
है सीधे यही बोल दो क्यों कृष्ण

476
00:35:25,400 --> 00:35:29,720
जगत बोल दो नहीं आप अगर जैसे प्रभुपाद

477
00:35:29,720 --> 00:35:34,040
जी जिस समय व्यवहारिक थे उस समय वो व्यवहारिक रूप से किसी के गुरु हो सकते हैं

478
00:35:34,040 --> 00:35:37,560
मगर आज के आपके व्यवहारिक गुरु कौन है जो प्रभुपाद जी की गद्दी में

479
00:35:37,560 --> 00:35:42,240
बैठे हैं ठोस प्रश्न य प्र

480
00:35:42,240 --> 00:35:46,400
प्र कौन सा कौन सा शिष्य नाम

481
00:35:46,400 --> 00:35:50,560
बताइए बना चलिए 10 नाम गिना दीजिए

482
00:35:50,560 --> 00:35:54,840
जो आपके अंतिम निर्णायक है आज के टाइम में परम पूज राधानाथ

483
00:35:54,840 --> 00:35:58,920
स्वामी महाराज परम पूज लोकनाथ स्वामी महाराज ये सब जीसी में में

484
00:35:58,920 --> 00:36:03,760
हां जी और बताइए परम क्या क्या नाम बताया

485
00:36:03,760 --> 00:36:07,760
आपने परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज परम राधानाथ स्वामी महाराज

486
00:36:07,760 --> 00:36:11,800
परम पूज जयता स्वामी महाराज ये मेन ये

487
00:36:11,800 --> 00:36:15,800
तीन लोग जीबीसी में है इस समय और

488
00:36:15,800 --> 00:36:18,800
तीनों सन्यासी

489
00:36:18,800 --> 00:36:23,080
है और बाकी और और आपको नहीं पता है

490
00:36:23,080 --> 00:36:27,840
होंगे बहुत सारे मेंबर्स है प्र जी के क तो आपके

491
00:36:27,840 --> 00:36:31,840
अंतिम निर्णायक है वो केवल य तीन लोग है जिनका आपने नाम बताया या वो

492
00:36:31,840 --> 00:36:35,880
बाकी के लोगों का मिलक के आपको वो आएगा निर्णय कैसे

493
00:36:35,880 --> 00:36:40,000
लिया जाता है जब मीटिंग होती है उनके बीच में डिस्कशन आता है जो कंक्लूजन आता

494
00:36:40,000 --> 00:36:44,080
है वही निर्णय होता है इसका मतलब आपका कोई एक अंतिम निर्णायक नहीं है

495
00:36:44,080 --> 00:36:48,560
बहुत सारे और कितने य भी आपको नहीं पता है

496
00:36:48,560 --> 00:36:53,520
आप इससे अलग कोई क्वेश्चन करिए यह मैं समझा पागा ना आप समझ पाएंगे

497
00:36:53,520 --> 00:36:57,560
ठीक है मतलब आपको इससे आपको इसको जानने की भी इच्छा नहीं है

498
00:36:57,560 --> 00:37:02,840
मुझे पता हो कि मैं किसको फॉलो कर रहा हूं जाना

499
00:37:02,840 --> 00:37:07,000
काने के लिए भाई साहब आपकी संस्था

500
00:37:07,000 --> 00:37:11,280
कोई धार्मिक संस्था है कि व्यवसायिक संस्था है धार्मिक

501
00:37:11,280 --> 00:37:15,520
संस्था है आज आपके धर्म और अधर्म

502
00:37:15,520 --> 00:37:20,600
का निर्णय कौन ले रहा है गुरु के गुरु के रूप में

503
00:37:20,600 --> 00:37:23,200
शस्त्र

504
00:37:23,200 --> 00:37:27,280
बताते केवल शास्त्र नहीं बताते आप तो बाहर जा रहे प्रभुपाद जी के विरु

505
00:37:27,280 --> 00:37:31,720
जा प्रभुपाद जी ने कहा केवल शास्त्र धर्म बता देंगे

506
00:37:31,720 --> 00:37:36,000
प्रभुपाद जी ने भगवान के कुछ नहीं कहाने प्रभुपाद

507
00:37:36,000 --> 00:37:40,000
जी ने कहा है कि केवल शास्त्र आपका धर्म निश्चित कर

508
00:37:40,000 --> 00:37:44,040
देंगे गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं

509
00:37:44,040 --> 00:37:48,160
केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं तो आपका वो गुरु कौन

510
00:37:48,160 --> 00:37:52,160
है जिसके आधार पर आपका धर्म धर्म का निर्णय हो जाता है गुरु

511
00:37:52,160 --> 00:37:57,560
और साधु भी तो वही बोलेगा जो शास्त्र बोल रहे हैं हम जो भी बोलते हैं वो

512
00:37:57,560 --> 00:38:01,640
आप मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं

513
00:38:01,640 --> 00:38:06,040
आपके आज आप स्पन से बिलोंग करते हैं एस ए स्पन डिवटी

514
00:38:06,040 --> 00:38:08,640
या स्कन के प्रचारक आपको क्या करना है क्या

515
00:38:08,640 --> 00:38:12,680
नहीं करना है यह निर्णय जीवीसी का पैनल ले रहा है उसमें कितने लोग हैं

516
00:38:12,680 --> 00:38:16,720
कौन-कौन है उसके लक्षण क्या है उसके क्या लक्षण होने चाहिए

517
00:38:16,720 --> 00:38:20,840
यह तक आपको नहीं पता है और आप जो है फॉलो कर रहे हैं सब

518
00:38:20,840 --> 00:38:25,600
पता है मेरे को अभी तो आपने 10 बार बोला नहीं पता है

519
00:38:25,600 --> 00:38:29,760
प्रभुपाद जी के शिष्य प्रभुपाद जी के निर्देश पालन करते हैं गुरु के निर्देशों का पालन

520
00:38:29,760 --> 00:38:34,280
करते हैं य मेरे को पता है वो सन्यासी है कि नहीं स्यासी

521
00:38:34,280 --> 00:38:38,640
है सन्यासी सारे के सारे

522
00:38:38,640 --> 00:38:43,400
आप बतंगड़ मत बनाओ इस चीज का वो बत अच्छे लेवल प

523
00:38:43,400 --> 00:38:47,480
हैर बात बतंग आप बना रहे हो अगर ऐसी बात करनी है

524
00:38:47,480 --> 00:38:51,640
तो ऐसे ही सही बात करने की चीज नहीं है

525
00:38:51,640 --> 00:38:55,640
ये कौन डिसाइड कर रहा है बात करने की चीज नहीं है जब आप य क

526
00:38:55,640 --> 00:38:59,920
रहे हो जब आप य क रहे जब आप ये कह रहे हो कि हम मधवा चार्य परंपरा

527
00:38:59,920 --> 00:39:03,960
से हैं तो आपका निर्णय कौन ले रहा है कि 100 स पता नहीं

528
00:39:03,960 --> 00:39:08,000
कितने लोग परंपरा से जुड़े हुए बताते हैं अपने आपको कैसे

529
00:39:08,000 --> 00:39:12,200
बताते हैं ये क्वेश्चन होना चाहिए आपका मेरा कहने का अर्थ यह है

530
00:39:12,200 --> 00:39:16,200
कि आपका जो अंतिम निर्णायक है वो कोई लक्षण संपन्न संत

531
00:39:16,200 --> 00:39:20,400
होना चाहिए ना कि एक बहुत सारे लोगों की कोई कमिटी और अगर

532
00:39:20,400 --> 00:39:23,880
है तो इसका शास्त्र में वर्णन कहा है मुझे बता दो आप हम

533
00:39:23,880 --> 00:39:28,200
मैं जो बोल रहा हूं उसका वर्णन शास्त्र में बता दूंगा वो भी आपकी गीता से

534
00:39:28,200 --> 00:39:32,680
ब्राह्मण और गुणों के अनुसार ब्राह्मण गुणों से संपन्न है वो प्रभुपाद

535
00:39:32,680 --> 00:39:37,480
जी के शिष्य 50 सा साल से चचन कर रहे हैं उनके पास जाइए

536
00:39:37,480 --> 00:39:41,480
आपसे पूछ रहा हूं कि ये जो कमेटी का गठन है जो आपका

537
00:39:41,480 --> 00:39:46,120
अंतिम निर्णायक बना हुआ है वो कमेटी का गठन का शास्त्रोक्त वर्णन

538
00:39:46,120 --> 00:39:50,120
कहां पर है प्रभुपाद जी है ना प्रभुपाद जी

539
00:39:50,120 --> 00:39:54,440
ने पॉइंट किया अरे मेरे भाई प्र प्रभुपाद जी आपको शास्त्र

540
00:39:54,440 --> 00:39:58,560
विरुद्ध कोई चीज बताएंगे क्या

541
00:39:58,560 --> 00:40:02,680
समत बताएगा ना समत बताएगा इसलिए को

542
00:40:02,680 --> 00:40:06,800
विश्वा तो मैं आपसे तो मैं आपसे रेफरेंस मांग रहा हूं ना इस बात का रेफरेंस

543
00:40:06,800 --> 00:40:10,960
कहां है कि एक कमेटी गठन होगी उसमें सन्यासी भी हो सकता है उसम ब्रह्मचारी

544
00:40:10,960 --> 00:40:14,960
भी हो सकता है सब कुछ हो सकता है इसका रेफरेंस बताइए प्रभुपाद जी ने

545
00:40:14,960 --> 00:40:19,000
कहां पर कहा यही बता दीजिए फिलहाल बाकी आगे देख लेंगे प्रभुपाद जी ने कहां पर कहा

546
00:40:19,000 --> 00:40:23,000
है ये आगे देखेंगे आप टॉपिक चेंज करिए मैं ना सम

547
00:40:23,000 --> 00:40:27,000
समझा पाऊंगा क्योंकि मैं इतनी जानकारी बात अभी आपने टॉपिक चेंज हो

548
00:40:27,000 --> 00:40:33,000
जाएगा आप य कह रहे प्रभुपाद जी ने कहा है कहा कहा है

549
00:40:33,000 --> 00:40:37,000
कहा लेटर है प्र जीबीसी को फॉलो करता है वही मेरा

550
00:40:37,000 --> 00:40:41,080
शिष्य रा अनुया हैने अरे

551
00:40:41,080 --> 00:40:45,320
जीबीसी को फॉलो करता है जीबीसी के जो नियम है कि कौन कन उसम बन सकता है कौन

552
00:40:45,320 --> 00:40:47,480
नहीं बन सकता यह तो बताइए और क्या

553
00:40:47,480 --> 00:40:51,680
वह शास्त्र समत है कि नहीं सबे रिटन मेंे देंगे

554
00:40:51,680 --> 00:40:55,880
आपको क्या क्या है क्या ता पता करके बता और

555
00:40:55,880 --> 00:41:00,600
य भी बताइएगा उस शास्त्र में कहा वर्णन है

556
00:41:00,600 --> 00:41:04,640
ठीक अब हम लोग इसको छोड़ देते हैं आपको ज्यादा इस बारे

557
00:41:04,640 --> 00:41:09,040
में आपने वो नहीं किया अध्यन अब मैं ये पूछ रहा था ये

558
00:41:09,040 --> 00:41:13,360
अचिंत बेदा भेद क्या थ समझाएंगे क्या अचिंत

559
00:41:13,360 --> 00:41:17,360
भे तत्व ये बता सकते हैं शंकर संप्रदाय में शंकराचार्य जी

560
00:41:17,360 --> 00:41:21,360
ने बताया कि आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है लेकिन चैतन्य

561
00:41:21,360 --> 00:41:25,840
महाप्रभु ने कहा है आत्मा परमात्मा में भेद है भी और नहीं भी

562
00:41:25,840 --> 00:41:29,880
चन महाप्रभु की वाणी है वही गुण गुणात्मक

563
00:41:29,880 --> 00:41:34,000
दृष्टि से देखे तो आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है और क्वांटिटी

564
00:41:34,000 --> 00:41:38,720
देख अगर संख्या की दृष्टि से देख तो

565
00:41:38,720 --> 00:41:42,720
इसका मतलब एक मिनट आप आप भले ही

566
00:41:42,720 --> 00:41:46,880
अभी कोट मत करिए किसने क्या कहा है आप केवल दृष्टांत बता देंगे

567
00:41:46,880 --> 00:41:51,440
उससे काम चल जाएगा है ना

568
00:41:51,440 --> 00:41:55,600
तो जीव और आत्मा का आपने कहा

569
00:41:55,600 --> 00:41:59,640
जीव और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी ठीक

570
00:41:59,640 --> 00:42:02,480
है तो मैं ये पूछ रहा था

571
00:42:02,480 --> 00:42:06,600
और आपने कहा कि गुण के गुण की दृष्टि से देखा जाए तो गुण समान है दोनों

572
00:42:06,600 --> 00:42:10,840
में मगर क्वांटिटी की दृष्टि से देखा

573
00:42:10,840 --> 00:42:15,120
जाए तो वो दोनों अलग है तो इसका अर्थ है कि अगर

574
00:42:15,120 --> 00:42:19,720
मैं और मेरा कोई पुत्र होगा जिसमें सारे गुण है मेरे

575
00:42:19,720 --> 00:42:24,040
तो मुझ में और उसमें भी अचिंत वेदा भेद माना जाएगा आध्यात्मिक

576
00:42:24,040 --> 00:42:28,080
गुण बता रहा हूं आत्मा जो परमात्मा है उसम सच्चिदानंद गुण है आपके और

577
00:42:28,080 --> 00:42:33,040
उसम क्या गुण होंगे वो तो दोनों अलग अलग आत्मा है आपने पहले शरीर

578
00:42:33,040 --> 00:42:37,600
तद का मतलब हुआ बता रहा आपको अच

579
00:42:37,600 --> 00:42:41,680
सुनि मेरी बात सु पले अचत आपने पूछा मैंने बता

580
00:42:41,680 --> 00:42:45,760
दिया आपको अब इसको बतंगड़ बनाने के लिए मानसिक तर्क वितर्क करने के लिए

581
00:42:45,760 --> 00:42:50,320
कुतर्क करने के लिए आप वो करेंगे तो फिर

582
00:42:50,320 --> 00:42:54,400
लोग आए है चीजों को समझने कुछ निष्कर्ष पर पहुंचने आए कि

583
00:42:54,400 --> 00:42:59,080
मैंने आपसे कोई वो वाला कौन सा एक कोई गेम होता है ना

584
00:42:59,080 --> 00:43:03,520
जिसमें सी रैंडम रैंडम पूछते जाते हैं बसपा से बोलते

585
00:43:03,520 --> 00:43:07,680
चलो मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर अचिंत वेदा भद का अर्थ

586
00:43:07,680 --> 00:43:12,120
यह है कि गुण गुण में समानता है मगर क्वांटिटी

587
00:43:12,120 --> 00:43:16,120
में समानता नहीं है इसलिए अचिंत भदा भेद ठीक है तो

588
00:43:16,120 --> 00:43:17,760
इस हिसाब से अगर मेरा कोई पुत्र

589
00:43:17,760 --> 00:43:21,880
होगा जिसमें मेरे सारे गुण होंगे मगर क्योंकि वह छोटा है और मैं बड़ा हूं

590
00:43:21,880 --> 00:43:26,760
इसलिए हम दोनों में भी अचिंत भदा भेद कहलाएगा

591
00:43:26,760 --> 00:43:30,800
गु कहां समान होते है आप बताइए आपके पुत्र में आप आप में क्या गुण समान

592
00:43:30,800 --> 00:43:34,960
है या आपके पिताजी में आप गुण समान है

593
00:43:34,960 --> 00:43:38,960
तो गुण गुणों की समानता आप कब मानते हैं किस

594
00:43:38,960 --> 00:43:43,080
रूप में मानते हैं गुणों की समानता बताइए बता रहा आत्मा की बता

595
00:43:43,080 --> 00:43:47,280
रहा हूं य आपको आत्मा के गुणों

596
00:43:47,280 --> 00:43:51,920
की समानता क्या है बताइए जरा सत चित

597
00:43:51,920 --> 00:43:57,920
आनंद आत्मा भी सच्चित आनंद है आप ये कह रहे हैं

598
00:43:58,320 --> 00:44:03,240
अच्छा यहां पर सद का अर्थ क्या है टर्नल

599
00:44:03,240 --> 00:44:07,680
टर्नल मतलब आत्मा भी टर्नल है हा

600
00:44:07,680 --> 00:44:11,760
आत्मा भी टर्नल अच्छा तो सत

601
00:44:11,760 --> 00:44:16,640
का अर्थ यह है कि आत्मा भी सर्वज्ञ है क्या

602
00:44:16,640 --> 00:44:21,800
सब जगह है आत्मा एक ही आत्मा नित्य मतलब

603
00:44:21,800 --> 00:44:26,160
नित्य है तो आत्मा क्या सर्वज्ञ है क्या

604
00:44:26,160 --> 00:44:30,640
रहने वाला है मेरा मतलब है हमेशा से रहने वाला है देखिए

605
00:44:30,640 --> 00:44:32,880
नित्य स्थिरता जो होती है वह तब

606
00:44:32,880 --> 00:44:37,040
मानी जा सकती है किसी की केवल काल

607
00:44:37,040 --> 00:44:41,280
में ही नहीं देश में भी उसमें

608
00:44:41,280 --> 00:44:45,400
कट ना आए जैसे कि मैं अभी यहां बैठा हूं और मैं कह रहा

609
00:44:45,400 --> 00:44:49,440
हूं मैं यहां हूं तो अगर वहां पर मेरे लिए बात हो दो फुट

610
00:44:49,440 --> 00:44:53,440
दूर तो वहां पर भी यही बात तो यहां भी शिवांश है तब तो मेरी नित्यता

611
00:44:53,440 --> 00:44:58,320
है अगर मैं वहां पर नहीं हूं तो तो निता नहीं रही

612
00:44:58,320 --> 00:45:02,560
वही मैं बता आत्मा भी ईश्वर की तरह सर्वज्ञ है

613
00:45:02,560 --> 00:45:06,720
यही आत्मा परमात्मा में भेद है परमात्मा सर्वज्ञ है आत्मा एक ही जगह हो सकता

614
00:45:06,720 --> 00:45:10,840
है परमात्मा सव तो फिर वो सत कैसे हुआ नित्य कैसे

615
00:45:10,840 --> 00:45:15,160
हुआ आमा ना अंत है ना आदि है वो नित्य

616
00:45:15,160 --> 00:45:19,600
है तो अंत हो तो रहा है आत्मा एक निश्चित पैरामीटर

617
00:45:19,600 --> 00:45:24,520
के बात नहीं है अंत हो तो रहा है आत्मा का विद्यमान

618
00:45:24,520 --> 00:45:28,800
है हमेशा से विद्यमान है देखिए

619
00:45:28,800 --> 00:45:32,880
आप समझ नहीं मेरी बात समझिए मैं ये पूछ रहा

620
00:45:32,880 --> 00:45:36,880
हूं जैसे आत्मा का एक निश्चित स्थान में स्थान डिसाइड

621
00:45:36,880 --> 00:45:40,920
जब कर रहे हैं तो उस स्थान के बाद उसका अंत ही तो है सीमा अंत हो गया

622
00:45:40,920 --> 00:45:44,920
ना उसका उसके बाद वो नहीं है मतलब मैंने बताया आदि ना है

623
00:45:44,920 --> 00:45:48,680
और ना अंत है तो आत्मा का नहीं होता नहीं होता

624
00:45:48,680 --> 00:45:52,800
भाई साहब अंत हो तो रहा है आप यह कह रहे हो अगर आत्मा सब जगह नहीं है यानी

625
00:45:52,800 --> 00:45:57,160
कि उसकी सीमाए है वो इतनी सीमा के अंदर है

626
00:45:57,160 --> 00:46:01,240
सीमा बता सकते हो एक शरीर में रह सकते परमात्मा अलग अलग शरीर में विद्यमान रह सकते एक ही

627
00:46:01,240 --> 00:46:07,240
समय तो फिर वो सत कहां से रही नित्य कहां से

628
00:46:08,760 --> 00:46:13,440
रहीन अनंत तो बोलही नहीं रहा मैं आपको अनंत भगवान है परमात्मा है अनंत

629
00:46:13,440 --> 00:46:18,120
आपने अभी चार बार बोला जिसका ना आदि है ना अंत है

630
00:46:18,120 --> 00:46:22,440
हा तो अब बोल अनंत नहीं बोल

631
00:46:22,440 --> 00:46:26,440
रहा आप बताइए आत्मा का अंत होता है क्या

632
00:46:26,440 --> 00:46:30,600
मैं तो बोल रहा आत्मा तो देश काल परिस्थिति से विभाजित ना हो तब उसको सत कहा जाएगा

633
00:46:30,600 --> 00:46:35,440
आप केवल काल से विभाजित ना हो तब आप उसको सनातन कह दे रहे हैं

634
00:46:35,440 --> 00:46:39,480
मतलब ये होता है इसका आदि नहीं है अंत नहीं है जो पैदा जो मरा नहीं उसको

635
00:46:39,480 --> 00:46:43,560
नित्य कते मतलब आपका जो नित्य है जो आपका सनातन

636
00:46:43,560 --> 00:46:47,720
है वह सनातन देश से तो वो है

637
00:46:47,720 --> 00:46:52,440
विच्छेद मगर काल से नहीं है इसलिए आप उसको सनातन कह रहे हो

638
00:46:52,440 --> 00:46:56,960
हा काल से नहीं उसी को सनातन कहेंगे जिस काल का प्रभाव नहीं है अगर

639
00:46:56,960 --> 00:47:01,080
तो उसको कहा जाएगा ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति में स्थिर रहता उसको

640
00:47:01,080 --> 00:47:03,720
नित्य कहा जाएगा अगर अगर

641
00:47:03,720 --> 00:47:07,960
केवल काल की बात है तो जब वो जब वो नि जब

642
00:47:07,960 --> 00:47:11,960
हा केवल एक जगह एक देशीय

643
00:47:11,960 --> 00:47:16,640
होने वाले को भी अगर हम नित्य कह देंगे तो फिर सर्वज्ञ को क्या कहेंगे

644
00:47:16,640 --> 00:47:20,680
उसकी नित्यता का क्या होगा देशी से आप जोड़ रहे हैं किसी

645
00:47:20,680 --> 00:47:24,680
देश से किसी व्यक्ति को जोड़ रहे हैं तो ये तो फिर आप उसके शरीर को देख रहे एक्सली जज

646
00:47:24,680 --> 00:47:28,720
कर रहे हैं अरे मेरे भाई आप जोड़ जैसे आत्मा

647
00:47:28,720 --> 00:47:33,000
जो है आप य कह रहे हो आत्मा एक जगह होती है दूसरी जगह नहीं होती है

648
00:47:33,000 --> 00:47:37,360
आप ही तो कह रहे हो तो वन

649
00:47:37,360 --> 00:47:42,160
आमा है व और भी विद्यमान है क्या अभी भाई

650
00:47:42,160 --> 00:47:46,480
अगर आत्मा को नित्य कह रहे तो आत्मा तो सर्वज्ञ हो गई

651
00:47:46,480 --> 00:47:50,520
अगर नहीं तो नहीं स शब्

652
00:47:50,520 --> 00:47:54,640
अलग हो गया सर ठीक है अब अलग हो गया तो इसका मतलब य

653
00:47:54,640 --> 00:47:59,120
है कि आत्मा नित्य नहीं है आत्मा नित्य

654
00:47:59,120 --> 00:48:03,560
है मतलब काल काल से वो नित्य है काल की दृष्टिकोण

655
00:48:03,560 --> 00:48:07,560
से वो नित्य है आपका चर्चा करने का मतलब बहस करना है कि

656
00:48:07,560 --> 00:48:11,840
चर्चा करना है चर्चा में निष्कर्ष पर पहुच बहस में क नहीं प तो आप क्या चाहते

657
00:48:11,840 --> 00:48:16,080
हो जो आप बोल दो सुनके आगे बढ़ते जाए मत मतलब य

658
00:48:16,080 --> 00:48:18,800
आत्मा मैं बता रहा हूं नित्य है

659
00:48:18,800 --> 00:48:22,840
आदि है ना अंत है आप बता उसको समझने

660
00:48:22,840 --> 00:48:27,200
का प्रयास कर रहा हूं आप इसमें नाराज क्यों हो रहे हैं क्रोधित क्यों हो रहे हैं

661
00:48:27,200 --> 00:48:31,240
जो आप बता रहे उसको समझने का जो आप बता रहे हैं मैं उसको समझने का प्रयास

662
00:48:31,240 --> 00:48:35,240
कर रहा हूं हां जी देखिए

663
00:48:35,240 --> 00:48:39,240
एक हो गया नित्य का मतलब कि वो कभी ना जन्म

664
00:48:39,240 --> 00:48:43,240
लिया उसने ना ही उसका कभी अंत होगा

665
00:48:43,240 --> 00:48:47,680
ठीक है अब बात आती है कि नित्य

666
00:48:47,680 --> 00:48:51,720
का अर्थ ये भी होता है कि ना तो उसकी कोई शुरुआत है ना कोई अंत है मगर जब आप

667
00:48:51,720 --> 00:48:56,160
कह रहे हैं कि आत्मा सर्वज्ञ नहीं है तो अगर मान लीजिए इधर देखिए

668
00:48:56,160 --> 00:49:00,160
मेरी ओर मान लीजिए आत्मा लेफ्ट से शुरू हो

669
00:49:00,160 --> 00:49:05,120
रही है और राइट पर खत्म हो रही है यानी यह उसका शुरुआत हो

670
00:49:05,120 --> 00:49:09,480
गया काल की दृष्टि से वह नित्य है मैं समझ गया देश

671
00:49:09,480 --> 00:49:13,640
की दृष्टि से वह अनित्य है आप कह रहे क्योंकि आत्मा सर्वज्ञ

672
00:49:13,640 --> 00:49:19,640
नहीं है क्योंकि व यहां से शुरू हो रही है और यहां पर खत्म हो रही है

673
00:49:23,200 --> 00:49:27,240
अगर कहा से शुरू हो रही क से खम हो रही है

674
00:49:27,240 --> 00:49:31,480
आप ही तो बोल रहे हो कि वो सब जगह सर्वज्ञ नहीं है आपका

675
00:49:31,480 --> 00:49:35,560
क्वेश्चन है कि कहा से शुरू हो रही कहा से खत्म हो रही तो मुझे बता दीजिए

676
00:49:35,560 --> 00:49:39,600
मैं यह नहीं कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि अगर आत्मा नित्य है तो वह

677
00:49:39,600 --> 00:49:44,080
सर्वज्ञ होनी चाहिए और यदि वह सर्वज्ञ नहीं है तो वो नित्य नहीं होनी

678
00:49:44,080 --> 00:49:48,280
चाहिए अचिंत भदा जो आप बता रहे हो

679
00:49:48,280 --> 00:49:52,440
फिर वही बात अचिंत भदा में आपने माना आपने मान लिया

680
00:49:52,440 --> 00:49:56,800
कि जो आत्मा है वो सच्चित आनंद है अब जो सत की व्याख्या

681
00:49:56,800 --> 00:50:00,840
जब करेंगे कि वो सत्य है तो वो हर परिस्थिति में हर देश में हर

682
00:50:00,840 --> 00:50:04,840
काल में सत्य होना चाहिए मगर आप ये कह रहे हो जो आत्मा

683
00:50:04,840 --> 00:50:09,200
जो आत्मा आगरा में बैठी है सुनिए मगर आप ये कह रहे हो जो आत्मा आगरा

684
00:50:09,200 --> 00:50:13,840
में बैठी है वो आगरा वो जो आत्मा है दिल्ली में नहीं

685
00:50:13,840 --> 00:50:18,040
बैठी वो जो वो नित्य नहीं रहा उसका नित्य त्व समाप्त

686
00:50:18,040 --> 00:50:22,200
हो गया सत्य का और टर्नल का मतलब

687
00:50:22,200 --> 00:50:26,280
आप समझते हैं दोनों से में मैं बता तो रहा हूं जो मैं जानता हूं वो

688
00:50:26,280 --> 00:50:30,400
मैं आपको बताहा अगर कुछ और है तो आप बता

689
00:50:30,400 --> 00:50:34,800
आत्मा के बारे में यही तो बताया आत्मा आत्मा

690
00:50:34,800 --> 00:50:38,240
के दो प्रकार आत्मा को कह रहे हो

691
00:50:38,240 --> 00:50:42,560
कि वो सर्वज्ञ नहीं है आप यह कह रहे हो आत्मा

692
00:50:42,560 --> 00:50:48,560
के दो प्रकार क उपनिषद में बताए अ म

693
00:50:49,960 --> 00:50:53,080
आत्म

694
00:50:53,080 --> 00:50:57,160
तु में बताया परमात्मा था अनुमा दोनों शरीर

695
00:50:57,160 --> 00:51:01,400
रूपी उसी वृक्ष में जीव के हृदय में विद्यमान है एक ही शरीर में दो विद्यमान

696
00:51:01,400 --> 00:51:05,640
है एक आत्मा एक परमात्मा लेकिन आत्मा एक ही है परमात्मा अलग अलग शरीर में

697
00:51:05,640 --> 00:51:09,880
भाई साहब मैं य प आपसे प्रमाण मांग ही नहीं रहा हूं मैं य आपसे

698
00:51:09,880 --> 00:51:14,080
मैं आपसे प्रमाण नहीं मांग रहा हूं अभी प्रमाणों पर हम जाएंगे मैं आपसे अभी

699
00:51:14,080 --> 00:51:18,160
पूछ रहा हूं कि यदि आत्मा सर्वज्ञ है तो वो नित्य

700
00:51:18,160 --> 00:51:22,160
नहीं हुई और यदि वो नित्य है तो वो सर्वज्ञ कैसे हुई ये मैं समझना चाह रहा हूं मुझे

701
00:51:22,160 --> 00:51:26,280
समझा दीजिए आपका दृष्टिकोण क्या है वो बता दीजिए दृष्टिकोण मेरा

702
00:51:26,280 --> 00:51:31,600
य नित्य का मतलब होता जिसका आदि है जिसका अंत नहीं

703
00:51:31,600 --> 00:51:35,840
सॉरी मैं सर्वज्ञ बोल रहा था उसको सर्वव्यापी कहते हैं सर्वव्यापी होती है जो

704
00:51:35,840 --> 00:51:40,120
आत्मा तो जो सर्वव्यापी जो है उसमें

705
00:51:40,120 --> 00:51:44,320
क्या है कि आत्मा अगर सर्वव्यापी है तो व नित्य कहलाई जा सकती है अन्यथा यह

706
00:51:44,320 --> 00:51:48,400
दोष आ जाएगा कि आत्मा यहां पर है वहां पर नहीं है यानी

707
00:51:48,400 --> 00:51:52,480
कि वहा नहीं बोल सकते कि आत्मा है जब ऐसा हो जाएगा तो फिर हम उसको नित्य

708
00:51:52,480 --> 00:51:58,200
कैसे कहेंगे

709
00:51:58,200 --> 00:52:02,400
फिर वही क्वेश्चन घुमा घुमा के आप पूछ रहे सर्वज्ञ खाली परमात्मा

710
00:52:02,400 --> 00:52:06,560
है आत्मा नहीं होती है सर्वज्ञ छोड़ दीजिए अभी

711
00:52:06,560 --> 00:52:10,720
तो मैं सर्वव्यापी की बात कर रहा हूं सर्वव्यापी आत्मा नहीं है

712
00:52:10,720 --> 00:52:15,360
आपने कहा सर्वव्यापी नहीं है

713
00:52:15,360 --> 00:52:20,000
इससे उसके तत्व पर दोष आ रहा है अच्छा दूसरी बात मैं कह रहा हूं

714
00:52:20,000 --> 00:52:24,040
कि आत्मा में और ब्रह्म में भेद है

715
00:52:24,040 --> 00:52:28,720
भी और नहीं भी है ठीक है तो

716
00:52:28,720 --> 00:52:32,760
इसका मतलब यह है कि आपकी आपकी जो

717
00:52:32,760 --> 00:52:36,920
बात है वो बीच की बात है एक तरफ है मधवा चार्य जो

718
00:52:36,920 --> 00:52:40,960
क्लियर कट कह रहे हैं आत्मा और जीव में भेद है एक तरफ

719
00:52:40,960 --> 00:52:45,520
है आपके अनुसार शंकराचार्य जो आप कह रहे

720
00:52:45,520 --> 00:52:49,760
हैं आत्मा और ब्रह्म ब्र

721
00:52:49,760 --> 00:52:55,760
आत्मा और ब्रह्म में

722
00:52:56,960 --> 00:53:00,960
जीव में और ब्रम में जीव और ब्रह्म में मधुवा चार्य जी ने बताया

723
00:53:00,960 --> 00:53:05,200
कि भेद है ठीक है भेद बताया आपसे

724
00:53:05,200 --> 00:53:09,280
पूछ रहा हूं जीवात्मा को भी कभी

725
00:53:09,280 --> 00:53:13,280
कभी सुनि मेरी बात जीवात्मा ब्रह्म को कभी कभी जीवात्मा को

726
00:53:13,280 --> 00:53:17,800
ब्रम कहा जाता है ब्रम ज्योति को भी ब्रम कहा जाता है कभी कभी भगवान के

727
00:53:17,800 --> 00:53:21,880
लिए नहीं जा रहा किसको कहा क्या कहा गया मैं ये

728
00:53:21,880 --> 00:53:25,920
पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी ने यह कहा कि जीव

729
00:53:25,920 --> 00:53:30,000
और ब में भेद है और शंकराचार्य जी ने

730
00:53:30,000 --> 00:53:34,120
यह कहा कि जीव और ब्रह्म में भेद नहीं है अंततोगत्वा वो एक है

731
00:53:34,120 --> 00:53:38,600
व्यावहारिक दृष्टि से भेद है और पार मार्थी दृष्टि से भेद नहीं है

732
00:53:38,600 --> 00:53:43,080
मगर आपका कहना है कि भेद है भी और नहीं भी तो आप

733
00:53:43,080 --> 00:53:47,240
तो बीच वाले सिद्ध हुए फिर इसमें से आप पर्टिकुलर मधुवा चार जी की तरफ कैसे

734
00:53:47,240 --> 00:53:51,480
चले गए जितने मधुवा चार जी वाले हैं आप एक मिनट एक पूरा कर

735
00:53:51,480 --> 00:53:55,840
जितने आप मधुवा चार्य जी वाले हैं उतना ही आप शंकराचार्य जी वाले भी है

736
00:53:55,840 --> 00:54:00,000
जब आपकी चीज क्लियर है ही नहीं कि ब्रह्म है वो जीव और आत्मा

737
00:54:00,000 --> 00:54:04,320
में भेद है कि नहीं तो फिर जब आप और उसमें आप अचिंत कह रहे कि अचिंत

738
00:54:04,320 --> 00:54:08,520
विषय है तो जब वो बात क्लियर है ही नहीं तो आप किसी के विरोधी

739
00:54:08,520 --> 00:54:12,080
और किसी के तो आप किसी के विरोधी और किसी

740
00:54:12,080 --> 00:54:16,160
के पक्षकार होने का दावा कैसे करते हैं

741
00:54:16,160 --> 00:54:20,200
भाई मधवा का सिद्धांत तो यही है कि आत्मा और परमात्मा में भेद है जीवात्मा और परमात्मा

742
00:54:20,200 --> 00:54:24,640
में भेद है यही दवाद है आप तो कह रहे हो ना कि अचिंत है ये बात

743
00:54:24,640 --> 00:54:28,720
आप तो ये नहीं कह रहे ना भेद है हा तो महाप्रभु ने मवा

744
00:54:28,720 --> 00:54:32,800
संप्रदाय में आए महाप्रभु ने महाप्रभु ने बताया ना कि भेद भी है भेद भी

745
00:54:32,800 --> 00:54:37,320
नहीं है गुणात्मक दृष्टि से भेद नहीं है सं द सेद

746
00:54:37,320 --> 00:54:41,440
है नहीं नहीं ने क्या बताया वो सही है

747
00:54:41,440 --> 00:54:45,480
मैं य पूछ रहा हूं अगर देख

748
00:54:45,480 --> 00:54:49,560
देखिए आप भेद मानने के कारण मधवा चार के हुए ना भेद

749
00:54:49,560 --> 00:54:53,640
मानने के कारण आप मवा चार के हुए ना मैं आपसे पूछ रहा

750
00:54:53,640 --> 00:54:57,720
हूं हाज मानने के कारण आप मधवा

751
00:54:57,720 --> 00:55:00,760
चार के हुए

752
00:55:00,760 --> 00:55:05,040
तो चारों वैष्णव संप्रदाय का यही है आमा परमा देखिए

753
00:55:05,040 --> 00:55:09,520
आप थोड़ा सा ना बंबू लेकर के दीवार को पार करने लगते हैं ंदने

754
00:55:09,520 --> 00:55:13,680
लगते हैं आप मैं पार नहीं कर रहा हूं तो रहे बात चल रही

755
00:55:13,680 --> 00:55:18,320
तो आप आप सीधे निष्कर्ष की बात क्यों बोलने लगते हैं जब बात चल रही है तो

756
00:55:18,320 --> 00:55:22,440
मैं बहस से बचना चाह रहा हूं मैं चर्चा करने आया बहस नहीं करने आया भाई साहब हम लोग चर्चा

757
00:55:22,440 --> 00:55:26,520
ही कर रहे हैं हम लोग तो बहस नहीं कर रहे आपको लग रहा है आ चर्चा और

758
00:55:26,520 --> 00:55:27,240
अच्छा आप चर्चा

759
00:55:27,240 --> 00:55:31,240
करने आए हैं तो आप उसका प्रारूप मुझे बता दीजिए कि कैसे बात करनी है

760
00:55:31,240 --> 00:55:35,960
आप बता दीजिए बता दीजिए कि मैं अपना मत रखू आप अपना मत रखिए

761
00:55:35,960 --> 00:55:40,040
यही है और कुछ निष्कर्ष पर पहुचे हम मतलब मत रखने

762
00:55:40,040 --> 00:55:44,080
का अर्थ ये है कि मैंने बताया मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है मैं पूरी शंकराचार्य

763
00:55:44,080 --> 00:55:48,120
जी का अल्पज्ञ शिष्य हूं श्री राम की भक्ति करता हूं यह मैंने अपना मत रख दिया अब आप

764
00:55:48,120 --> 00:55:52,480
रख दीजिए अपना मत और बात खत्म यही है

765
00:55:52,480 --> 00:55:56,520
जो आप क्वेश्चन रखे उस मत की बात कर रहा हूं अपना परिचय देने की बात नहीं कर रहा तो

766
00:55:56,520 --> 00:56:00,640
भाई साहब जो क्वेश्चन रखेंगे तो क्वेश्चन पर क्वेश्चन निकलेंगे तो उस पर बात करनी है मैंने

767
00:56:00,640 --> 00:56:04,720
क्वेश्चन पूछा आपने बोल दिया बात खत्म ये कोई आप जानकारी

768
00:56:04,720 --> 00:56:08,800
के लिए आप ये बताइए आत्मा और परमा में भेद

769
00:56:08,800 --> 00:56:12,840
है या नहीं देखिए जो एक टॉपिक चल रहा है सिलसिलेवार

770
00:56:12,840 --> 00:56:17,080
तरीके से उसको चलने दीजिए उसम बीच में आप ये मत कहिए कि चर्चा

771
00:56:17,080 --> 00:56:21,080
करने आया था आप बहस कर रहे हो ठीक है पूछ रहा आमा और

772
00:56:21,080 --> 00:56:25,080
परमात्मा की पूछ रहे देखिए आप जो पूछ रहे हैं उसी प ही मैं आऊंगा

773
00:56:25,080 --> 00:56:29,120
उसी पही आऊगा चल रही थी कि अगर मधवा चार्य

774
00:56:29,120 --> 00:56:33,160
जी ने कहा भेद और क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने भेद

775
00:56:33,160 --> 00:56:37,280
और अभेद दोनों माना है तो भेद मानने के कारण आप मधवा चार वाले

776
00:56:37,280 --> 00:56:42,640
हैं तो अभेद मानने के कारण आप शंकराचार्य वाले क्यों नहीं है यह

777
00:56:42,640 --> 00:56:48,640
बताइए शंकराचार्य भी स्वीकार करेंगे आत्मा परमात्मा में भेद है

778
00:56:50,880 --> 00:56:54,960
गुम मचार जी स्वीकार किया है क्या आत्मा परमात्मा में

779
00:56:54,960 --> 00:56:59,080
अभेद है स्वीकार

780
00:56:59,080 --> 00:57:03,120
किया सवाल आप समझने का प्रयास तो करिए थोड़ा सकारात्मक दृष्टि

781
00:57:03,120 --> 00:57:07,320
से देखिए मेरे भाई मैं बहुत सामान्य तरीके से आपसे पूछा है जब भेद मानने

782
00:57:07,320 --> 00:57:11,360
के कारण आप मधवा चार्य के हो गए तो अभेद मानने के कारण आप शंकराचार्य

783
00:57:11,360 --> 00:57:15,640
के क्यों नहीं हुए यह बताइए आप स्वयं को शंकराचार्य

784
00:57:15,640 --> 00:57:19,680
के शंकराचार्य के विरोधी के रूप में प्रस्तुत कैसे कर सकते हैं जब आपकी

785
00:57:19,680 --> 00:57:23,720
दोनों बात मैं कहा कर रहा हूं शंकराचार्य

786
00:57:23,720 --> 00:57:28,120
को कहां कर रहा हू शंकराचार्य की बात नहीं ई शंकराचार्य

787
00:57:28,120 --> 00:57:32,920
की विरोधी विचारधारा नहीं है आपकी

788
00:57:32,920 --> 00:57:38,240
हमारी य विचारधारा मेरी विचारधारा सुन लीजिए आप आत्मा परमात्मा में भेद

789
00:57:38,240 --> 00:57:42,600
है आपकी विचारधारा को मैं जानता हूं उसको जानने

790
00:57:42,600 --> 00:57:46,760
के बाद मेरा प्रश्न है बात सुन लीजिए मचार

791
00:57:46,760 --> 00:57:51,360
ने बोला में भेद है चन महा कह रहे गुम दृष्टि से समान है

792
00:57:51,360 --> 00:57:55,360
दष्ट से अलग अलग बात सुन पले तो इसमें मचार

793
00:57:55,360 --> 00:57:57,640
का कौन सा का विरोध हो चुका है ये बताइए

794
00:57:57,640 --> 00:58:01,880
मुझे आप मैं कहां कह रहा हूं विरोध हुआ जब उन्होंने

795
00:58:01,880 --> 00:58:05,920
कहा अभेद भी है क्या अभेद कहा मधुवा चार्य जी ने अभेद भी

796
00:58:05,920 --> 00:58:10,000
है क्या ये कहा मतलब शंकराचार्य संप्रदाय का प्रचार

797
00:58:10,000 --> 00:58:14,320
करने का मंच है क्या मैं ये कह रहा हूं कि जब आप भेद

798
00:58:14,320 --> 00:58:18,480
मानने के कारण मधवा चार के फॉलोअर है तो अभेद

799
00:58:18,480 --> 00:58:22,800
मानने के कारण आप

800
00:58:22,800 --> 00:58:27,320
शंकराचार्य दृष्टि से आप स्वीकार कर लीजिए तो मैं मान लेता हूं

801
00:58:27,320 --> 00:58:31,440
अरे अच्छा कौन से कौन सी दृष्टि से आप

802
00:58:31,440 --> 00:58:35,480
क्या कहते हैं कौन सी दृष्टि से आपने भेद स्वीकार किया है

803
00:58:35,480 --> 00:58:39,600
कौन सी कौन सी दृष्टि से आपने कौन सी दृष्टि से आपने अ एक

804
00:58:39,600 --> 00:58:44,440
मिनट कौन सी दृष्टि से आपने अभेद स्वीकार किया है

805
00:58:44,440 --> 00:58:48,720
अ चि भे गुणात्मक दष्ट से सेम गुणात्मक

806
00:58:48,720 --> 00:58:53,160
दृष्टि से आपने भेद स्वीकार किया और

807
00:58:53,160 --> 00:58:57,520
गुणात्मक दृष्टि से आपने अभेद स्वीकार किया और त्मक दृष्टि से आपने

808
00:58:57,520 --> 00:59:01,880
भेद स्वीकार किया यही है ना तो क्या मधवा चार्य जी ने मधवा

809
00:59:01,880 --> 00:59:06,200
चार्य जी ने मधवा चार

810
00:59:06,200 --> 00:59:10,360
मधवा चार्य जी ने गुणात्मक दृष्टि से भेद स्वीकार अभेद

811
00:59:10,360 --> 00:59:12,760
स्वीकार किया है क्या मधवा चार्य जी ने

812
00:59:12,760 --> 00:59:17,000
गुणात्मक दृष्टि से अभेद स्वीकार किया है क्या

813
00:59:17,000 --> 00:59:23,000
किया है क्या किया है क्या

814
00:59:52,280 --> 00:59:56,440
अमित यादव जी आप आना चाहेंगे क्या आप

815
00:59:56,440 --> 01:00:00,520
शायद समझ पा रहे हो कि राहुल जी क्या कहना चाह रहे हैं लिंक

816
01:00:00,520 --> 01:00:05,040
दे दीजिए भैया हा आ ग रुक जा रुक जाइए जी राहु

817
01:00:05,040 --> 01:00:09,400
जी जैसे आप यह कह रहे हैं शंकराचार्य अगर संख्यात्मक

818
01:00:09,400 --> 01:00:13,800
दृष्टि से भेद को स्वीकार कर ले तो हम उनको मानने लगेंगे

819
01:00:13,800 --> 01:00:17,800
तो आप यह बताइए क्या गुणात्मक दृष्टि से अभेद को स्वीकार किया क्या मधवा

820
01:00:17,800 --> 01:00:21,840
चार जी ने कहीं पर आप शंकराचार्य की बात हटाइए

821
01:00:21,840 --> 01:00:26,080
मचार की बात हटाइए जो मैं आपको बो गुणात्मक दृष्टि से सेम है कि

822
01:00:26,080 --> 01:00:27,880
आत्मा और परमात्मा भाई साहब आप

823
01:00:27,880 --> 01:00:32,120
ये क्लेम कर रहे हैं कि हम मधवा चार्य को फॉलो करने वाले हैं शंकराचार्य को फॉलो

824
01:00:32,120 --> 01:00:36,160
करने वाले नहीं है जबकि आपकी बातें दोरी है आपकी बातें

825
01:00:36,160 --> 01:00:41,720
बीच की

826
01:00:41,720 --> 01:00:45,960
है आप समझ बीच की है मैं बोल रहा हूं आपको आप शंकर संप्रदाय

827
01:00:45,960 --> 01:00:50,160
के प्रति माइंडफुल है इसलिए सामने वाले के सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर पा रहे

828
01:00:50,160 --> 01:00:54,240
देखिए आप अगर इस तरह की बातें करेंगे तो फिर मैं क्या क्या कह सकता हूं आपको

829
01:00:54,240 --> 01:00:58,520
पता है और आपको बोलने भी नहीं दूंगा यह तो गलत बात है आप

830
01:00:58,520 --> 01:01:02,760
आप सीधे निर्णय कर रहे हैं क्लेम कर रहे लगा रहे

831
01:01:02,760 --> 01:01:06,760
मैं आपके साथ मैं आपके साथ मैं आपके साथ सज्जनता से बात कर रहा

832
01:01:06,760 --> 01:01:12,760
हूं आप मुझे मेरे ऊपर आरोप लगा रहे कि आप ब्रेन वश है आप ये कर रहे वो कर

833
01:01:14,080 --> 01:01:18,280
रहे मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर

834
01:01:18,280 --> 01:01:22,320
दोनों बातें मानी है आपने अगर दोनों बातें मानी आपने तो

835
01:01:22,320 --> 01:01:28,000
किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे हुए वो बताइए

836
01:01:28,000 --> 01:01:33,200
तने मा से पूछ लीजिए आप आपकी अगर पहुच

837
01:01:33,200 --> 01:01:37,480
है भाई साब आपको क्यों आए आप क्यों

838
01:01:37,480 --> 01:01:43,480
आए आपको आना नहीं चाहिए था सब कुछ उ से पूछना

839
01:01:44,480 --> 01:01:49,400
है जो महाने दिया है स्वीकार कर इसलिए आया

840
01:01:49,400 --> 01:01:53,720
वो आपने स्वीकार किया चेतन बाप ने अचिंत भेद दिया मुझे य जानना

841
01:01:53,720 --> 01:01:57,920
है य आपकी बातें बीच की है दोहरी है दोनों है तो

842
01:01:57,920 --> 01:02:02,120
उस ऐसी स्थिति में आप किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे हो गए

843
01:02:02,120 --> 01:02:08,120
यह

844
01:02:08,160 --> 01:02:12,200
बताइए इनका नेट प्रॉब्लम कर रहा है आप लिंक शेयर कर

845
01:02:12,200 --> 01:02:16,160
दीजिए कोई आना चाहे तो आ

846
01:02:16,160 --> 01:02:20,480
जाए आपको कहां लग रहा है कि मैं विरोध कर रहा हूं यह बताइए मुझे आप

847
01:02:20,480 --> 01:02:25,240
मैं शंकराचार्य का विरोध कर रहा आपकी लगभग आपकी

848
01:02:25,240 --> 01:02:29,520
लगभग सारी बुक्स में मायावादी कहते हुए शंकराचार्य जी

849
01:02:29,520 --> 01:02:35,040
के सारे सिद्धांतों का खंडन करने का प्रयास किया गया

850
01:02:35,040 --> 01:02:39,160
है हमने नहीं किया य तो महाप्रभु ने खुद कि अरे भाई

851
01:02:39,160 --> 01:02:43,520
आप को समझते नहीं मैं आपसे भाई देखो

852
01:02:43,520 --> 01:02:47,600
फिर वही बात आप अपनी फिफी को समझते हैं कि नहीं यह बताइए आपने नहीं किया

853
01:02:47,600 --> 01:02:51,920
आप समझते कि नहीं आप समझते हैं कि केवल आप बस जुड़े हैं

854
01:02:51,920 --> 01:02:55,960
आपको समझते हैं उसे केवल आप जुड़े हैं तो मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं

855
01:02:55,960 --> 01:03:00,840
आपने नहीं किया मगर आप उसे जानने का दावा तो कर रहे हैं

856
01:03:00,840 --> 01:03:03,840
हां बिल्कुल

857
01:03:03,840 --> 01:03:07,840
जब दावा कर रहे हैं तो बताइए कि जब आप दोनों चीजों को मानते हैं

858
01:03:07,840 --> 01:03:12,240
तो किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे

859
01:03:12,240 --> 01:03:16,360
हुए कैसे पक्ष हो गए किसके विरोधी हो गए बताइए मुझे पहले फिर

860
01:03:16,360 --> 01:03:20,400
मैं बताता हूं आपको आपने कौन सी जगह आपकी बुक में मधवा चार्य जी का

861
01:03:20,400 --> 01:03:23,680
खंडन लिखा हुआ है

862
01:03:23,680 --> 01:03:24,680
बताइए

863
01:03:24,680 --> 01:03:29,000
नाम लेक मधवा चार्य जी का नाम लेकर के कौन सी बुक में आपकी

864
01:03:29,000 --> 01:03:33,000
में खंडन लिखा है मैं आपको शंकराचार्य जी का विरोध दिखा दूं हर बुक

865
01:03:33,000 --> 01:03:37,400
में शुरुआत से लेकर अंत तक वही है भरी पड़ी है मायावा मायावादी मायावादी

866
01:03:37,400 --> 01:03:41,000
मायावादी मायावादी

867
01:03:41,000 --> 01:03:46,600
बताइए हा है मैंने स्वीकार कर लिया

868
01:03:46,600 --> 01:03:50,600
है का विरोध कहा पर है आपकी कौन सी

869
01:03:50,600 --> 01:03:56,600
बुक में मधवा चार जी का विरोध लिखा हुआ है

870
01:03:56,880 --> 01:04:01,000
कहा लिखा है मवार जी का विरोध बताइए मुझे आप अरे मैं पूछ

871
01:04:01,000 --> 01:04:05,080
रहा हूं आपसे ना आप तो बीच के है ना आपने दोनों

872
01:04:05,080 --> 01:04:09,320
सिद्धांतों को माना है भेद भी और अभेद भी तो जब आपने

873
01:04:09,320 --> 01:04:14,200
शंकराचार्य का विरोध किया तो का विरोध किया य

874
01:04:14,200 --> 01:04:18,200
बताइए मेरी बात सुनिए हम मवा संप्रदाय से बिलंग करते है चैतन्य

875
01:04:18,200 --> 01:04:22,760
महा सितो का पालन कर ना किसी विरो कर रहे

876
01:04:22,760 --> 01:04:28,360
आपको वो सिद्धांत समझ में आ गए कि नहीं आ गए

877
01:04:28,360 --> 01:04:32,720
आपको वो सिधांत नहीं आ

878
01:04:32,720 --> 01:04:37,280
मेरा प्रश्न है आपको व सिद्धांत समझ में आ गए कि नहीं आ

879
01:04:37,280 --> 01:04:41,480
गए समझ में आ गया

880
01:04:41,480 --> 01:04:46,080
आ गए तो इस सवाल का जवाब दीजिए कि जब चैतन्य महाप्रभु ने

881
01:04:46,080 --> 01:04:50,440
बीच की बात कही है तो आप शंकर के विरोधी और मधुवा के पक्षधर कैसे

882
01:04:50,440 --> 01:04:56,440
हो गए यह बताइए को

883
01:04:56,680 --> 01:05:00,680
आपने कहा भेद है भी और और भेद नहीं भी है अभेद

884
01:05:00,680 --> 01:05:05,040
भी है और भेद भी है तो इसमें तो मधवा चार जितना जितना विरोध

885
01:05:05,040 --> 01:05:09,400
इस बात में मधवा वो शंकर का है उतना ही विरोध इस बात में

886
01:05:09,400 --> 01:05:13,440
मधुवा का भी है तो आप मधवा के पक्षधर और के विरोधी

887
01:05:13,440 --> 01:05:17,840
कैसे हो गए

888
01:05:17,840 --> 01:05:22,760
बताइए आ परमा

889
01:05:22,760 --> 01:05:26,960
बताया या तो आप क्लियर कट कहिए नहीं भेद ही है तब

890
01:05:26,960 --> 01:05:31,000
तो मान लिया जाए कि आप मधवा के फलोर है ठीक है आप तो क्लियर कट नहीं बोल र आप तो बीच

891
01:05:31,000 --> 01:05:35,000
की बात बोल रहे भेद है भी और नहीं भी यह तो

892
01:05:35,000 --> 01:05:39,360
अगर किसी पा साल के पाच पढ़ने वाले बच्चे को भी बता देंगे व भी बता

893
01:05:39,360 --> 01:05:43,400
मुझे देख ऐसी बातें बोलिए जो

894
01:05:43,400 --> 01:05:47,400
सर्वमान्य रूप से ग्रहण की जाए जैसे मैं अगर कहू कि भगवान श्री कृष्ण

895
01:05:47,400 --> 01:05:51,760
ने बोला भगवत गीता में सुन लो ऐसे प्रमाण दीजिए अपने

896
01:05:51,760 --> 01:05:55,840
जो व्यक्तिगत व्यक्तिगत व्यक्तिगत कुतर को को य पर प्रमाण के रूप

897
01:05:55,840 --> 01:06:00,000
में प्रस्तुत मत करिए नहीं कर रहा कर किया क्या मैंने

898
01:06:00,000 --> 01:06:04,040
अपनी कोई मन की बात कही है तो किसी पा साल के बच्चे से पूछ लो कि इसकन में

899
01:06:04,040 --> 01:06:08,160
व्यभिचार होता है मैंने कहा क्या ये किसी पा साल के बच्चे

900
01:06:08,160 --> 01:06:11,920
से पूछ लो कि स्कन में वो व्यक्ति व्यभिचार करते हुए पकड़ा गया

901
01:06:11,920 --> 01:06:14,840
मैंने कहा क्या

902
01:06:14,840 --> 01:06:18,920
ऐसा मेरी बात सुनिए ये बातें मत करिए आप जो

903
01:06:18,920 --> 01:06:23,000
है काम जो विषय प बात चल रही है जो विषय प बात चल रही है वो

904
01:06:23,000 --> 01:06:27,160
किया करिए एक ही चीज

905
01:06:27,160 --> 01:06:31,160
बनाने का प्रयास कर रहे हो आप यय कहा से डिसाइड हो रहा

906
01:06:31,160 --> 01:06:37,160
है बतंग बनाने का प्रयास है सनातन सिद्धांत दो

907
01:06:37,320 --> 01:06:41,560
मुझे आत्मा परमा कैसे स

908
01:06:41,560 --> 01:06:45,720
हो रहा है यह बताओ क्या चीज मैं बा

909
01:06:45,720 --> 01:06:50,080
का पतंग बना रहा हूं य आप सनातन से सिद्ध करिए

910
01:06:50,080 --> 01:06:54,840
आपका क्वे य है प्रमाण

911
01:06:54,840 --> 01:06:58,840
बात कर रहा आपको नहीं करनी आपको व्यक्तिगत मंतव्य घु सड़ना है अब मैं आपसे पूछ

912
01:06:58,840 --> 01:07:03,760
रहा हूं आप मुझे प्रमाण से सिद्ध कर दीजिए कि मैं जो है बात का बतंगड़ बना रहा हूं

913
01:07:03,760 --> 01:07:07,920
आप कौन करने वाले कि मैं सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं आप जो है

914
01:07:07,920 --> 01:07:12,040
प्रश्न जो किया है उस पर चलिए ना भाई अच्छे से बात हो रही है खाखा

915
01:07:12,040 --> 01:07:16,160
बात को बिगाड़ रहे हो मैं बारबार कह रहा हूं व्यक्तिगत मैं

916
01:07:16,160 --> 01:07:20,360
बारबार कह रहा हूं व्यक्तिगत आक्षेप मत करिए मगर आप कर रहे हैं मैंने व्यक्तिगत आक्षेप

917
01:07:20,360 --> 01:07:24,480
करना शुरू कर दिए तो आप सुन नहीं पाएंगे

918
01:07:24,480 --> 01:07:27,760
मैं बोल रहा हूं कि महाप्रभु ने कहां

919
01:07:27,760 --> 01:07:32,000
अभेद को स्वीकार के बता प्रभु की चीज आप समझ गए हैं कि नहीं समझ गए

920
01:07:32,000 --> 01:07:36,360
ये बता दीजिए समझ गए तो मुझे ये बता दीजिए कि जब

921
01:07:36,360 --> 01:07:40,560
महाप्रभु ने दोनों की बातों को किया तो आप किसी एक की बातों

922
01:07:40,560 --> 01:07:45,280
को मानने वाले कैसे सिद्ध हुए ये बताइए इसका जवाब दिया है महाप्रभु ने

923
01:07:45,280 --> 01:07:49,640
इसका जवाब महाप्रभु ने दिया है आपको कि नहीं दिया है महाप्रभु

924
01:07:49,640 --> 01:07:53,760
ने कहा है कि आत्मा और परमात्मा हमेशा अलग है हमेशा से ही अलग बने रहेंगे ब्रह्म लीन

925
01:07:53,760 --> 01:07:57,880
नहीं होता आत्मा परमात्मा में लीन अत भदा भेद आपने

926
01:07:57,880 --> 01:08:02,200
कहा भेद है भी और नहीं भी संप्रदाय में कहते कि आत्मा परमात्मा

927
01:08:02,200 --> 01:08:06,280
में मज हो जाती है भाई साहब आपने कहा हम अचिंत वेदा भेद वाले

928
01:08:06,280 --> 01:08:10,680
हैं इसमें मधवा चार जी का थोड़ा बहुत विरोध है कि नहीं

929
01:08:10,680 --> 01:08:14,680
नहीं है नहीं है तो मधुवा चार्य जी ने

930
01:08:14,680 --> 01:08:18,840
कहा पर अचिंत भदा भेद कहा है मधवा चार ने भेद

931
01:08:18,840 --> 01:08:24,840
तो बताया है नहीं बताया

932
01:08:26,360 --> 01:08:30,560
मैं पूछ रहा हूं कि उन्होंने अभेद कहा

933
01:08:30,560 --> 01:08:34,560
बताया अभेद कहा बताया आपने

934
01:08:34,560 --> 01:08:38,680
बताया अरे तो फिर वही बात तो य मधवा चार्य जी ने नहीं बताया

935
01:08:38,680 --> 01:08:43,440
ना ऐसे ही तो शंकराचार्य ने अद बताया वो मधवा चार्य जी ने नहीं बताया

936
01:08:43,440 --> 01:08:47,440
महाप्रभु ने बता दिया तो जब दोनों की मिक्स बात तो आप किसी एक को मानने

937
01:08:47,440 --> 01:08:51,520
वाले कैसे हो गए यह पूछ रहा हूं आप ये

938
01:08:51,520 --> 01:08:56,520
मान लीजिए जो परंपरा आ रही है म संप्रदाय की है चन

939
01:08:56,520 --> 01:09:00,560
इसका अर्थ ये है कि आपको समझ में नहीं आया बस परंपरा के कारण आप उसम बिलीव

940
01:09:00,560 --> 01:09:05,360
कर रहे हो क्योंकि वहा नाम है चैतन्य महाप्रभु का आपको समझ में नहीं आया

941
01:09:05,360 --> 01:09:09,600
सब समझ में आ गया आपको समझने में भाई जब

942
01:09:09,600 --> 01:09:13,800
जब आप बेदा भेद दोनों बातें कर रहे हैं जब आप भदा भेद दोनों

943
01:09:13,800 --> 01:09:17,880
बातें कर रहे हैं आपने क बताया

944
01:09:17,880 --> 01:09:22,000
बार बार आप बार बार प्रश्न का उत्तर यह दे देते हो कि चैतन्य महाप्रभु

945
01:09:22,000 --> 01:09:27,360
ने कहा इसलिए आप चैतन्य महाप्रभु की बात को एक्सप्लोर करिए समझाइए

946
01:09:27,360 --> 01:09:31,960
तो चिं भ तत्व की बात हो रही है तो महाप्रभु का नाम तो आएगा ही सर

947
01:09:31,960 --> 01:09:36,040
अरे महाप्रभु का नाम आएगा मगर वो उसका मुझे निस्तारण दीजिए जो मेरा

948
01:09:36,040 --> 01:09:40,480
प्रश्न है वो ये है कि अगर दोनों चीजें आपने मानी है भेद भी और अभेद भी

949
01:09:40,480 --> 01:09:41,520
तो आप किसी

950
01:09:41,520 --> 01:09:46,120
एक को मानने वाले कैसे हो गए ये पूछ रहा हूं मैं आपका

951
01:09:46,120 --> 01:09:50,160
आपका अभेद का मतलब क्या है ये मुझे बताइए जो मैं स्वीकार करूं पहले आप बताइए मुझे

952
01:09:50,160 --> 01:09:54,320
अभेद का मतलब आपका अभेद का मतलब क्या है संख्यात्मक

953
01:09:54,320 --> 01:09:58,800
दृष्टि से संख्यात्मक दृष्टि से उन्होंने

954
01:09:58,800 --> 01:10:04,360
मधुवा चार्य जी ने संख्यात्मक दृष्टि से अभेद माना है

955
01:10:04,360 --> 01:10:08,720
क्या विरोध का हुआ हैने

956
01:10:08,720 --> 01:10:13,080
नहीं माना तो तो ठीक है ऐसे तो शंकराचार्य जी ने भी न

957
01:10:13,080 --> 01:10:17,120
भेद माना है सुनो ऐसे तो शंकराचार्य जी ने भी व्यवहार की

958
01:10:17,120 --> 01:10:21,120
दृष्टि से भेद माना है स्वयं कृष्ण ही कह रहे तो

959
01:10:21,120 --> 01:10:25,880
कौन स्वीकार नहीं करेगा फिर वही बात फिर वही बात कृष्ण को बोलो फिर

960
01:10:25,880 --> 01:10:29,960
आपको मधवा का मत बोलो मधवा बो

961
01:10:29,960 --> 01:10:34,000
मधवा चार जी के फॉलोअर कैसे हुए जब मधवा जो बात नहीं कही वह

962
01:10:34,000 --> 01:10:38,400
बात आप कह रहे हैं और वो भी वह बात जो शंकराचार्य से मैच खाती है

963
01:10:38,400 --> 01:10:42,520
जब आप दोनों दोनों बातें कर रहे हैं तो आप किसी एक को मानने वाले

964
01:10:42,520 --> 01:10:46,720
और किसी एक के विरोधी कैसे हुए य ये प्रश्न है

965
01:10:46,720 --> 01:10:50,760
बताइए किय अचिंत तव शंकर संप्रदाय से कहा मैच कर रहा है

966
01:10:50,760 --> 01:10:55,320
बताओ मुझे आप मधवा से कहा मैच कर रहा है बताओ मवा

967
01:10:55,320 --> 01:10:56,520
कर रहा है आत्मा परमात्मा में

968
01:10:56,520 --> 01:11:00,560
भेद है तो भेद ठीक है शंकर

969
01:11:00,560 --> 01:11:05,440
से मैच कर रहा है उसम अभेद है दोनों बातें बोल रहे हो ना

970
01:11:05,440 --> 01:11:10,200
अभेद दोनों बा बोल रहे हो कि नहीं अभेद मत

971
01:11:10,200 --> 01:11:14,240
अरे शंकर से शंकर शंकर से मैच किया

972
01:11:14,240 --> 01:11:18,320
शंकर से मैच किया कि नहीं किया शंकर संप्रदाय का यही

973
01:11:18,320 --> 01:11:22,400
है ना आत्मा परमाद नहीं है मैं देखिए बात जो

974
01:11:22,400 --> 01:11:26,720
चल रही है उसकी बात बताइए जैसे आपने कहा जैसे आपने

975
01:11:26,720 --> 01:11:30,760
भाई साब राहुल दीक्षित जी राहुल दीक्षित जी सुनिए जैसे

976
01:11:30,760 --> 01:11:34,800
आपने कहा कि भेद है इसलिए मवा से मैच करता है तो मैं आपको बता

977
01:11:34,800 --> 01:11:39,240
दिया कि अभेद है इसलिए शंकर से भी तो मैच करता है

978
01:11:39,240 --> 01:11:44,200
नहीं मैच कर रहा है बता रहा मेरी बात सुन लीजिए मेरी बात सु

979
01:11:44,200 --> 01:11:48,280
बताइए शकर संप्रदाय का जो अभेद है आत्मा परमात्मा

980
01:11:48,280 --> 01:11:54,280
में कोई फर्क नहीं है आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है ठीक है

981
01:11:55,560 --> 01:11:59,600
चिंता भेद तव जो अभेद है वो है मवा संप्रदाय

982
01:11:59,600 --> 01:12:03,960
ने कहां पर अभेद माना है यह बताइए हमें चैतन्य

983
01:12:03,960 --> 01:12:08,440
महाप्रभु ने बताया ना भाई बता तो जब चैतन्य महाप्रभु

984
01:12:08,440 --> 01:12:12,680
ने सुनिए चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु

985
01:12:12,680 --> 01:12:16,960
ने जब भेद स्वीकार किया तो आप मधुवा वाले हो गए तो अभेद स्वीकार

986
01:12:16,960 --> 01:12:20,760
करने के कारण आप शंकर वाले क्यों नहीं

987
01:12:20,760 --> 01:12:26,280
हुए आप शंकर संप्रदाय से कैसे जुड़े बताए मुझे फिर

988
01:12:26,280 --> 01:12:30,400
भाही मैं पूछ रहा हूं ना आपसे कैसे जुड़ा हुआ आपके हमारे इससे

989
01:12:30,400 --> 01:12:34,600
हमारे इस बात का क्या संबंध है कैसे जुड़े हैं

990
01:12:34,600 --> 01:12:38,600
संबंध है जभी पूछ रहा हूं मैं आपसे आप शंकर शकर

991
01:12:38,600 --> 01:12:42,760
परंपरा के वर्तमान के प्रामाणिक आचार्य जो गुरु गद्दी में बैठे हैं हम उनको फॉलो

992
01:12:42,760 --> 01:12:46,840
करते हैं इसलिए हम जुड़े हैं उनके दर्शन उनके सिद्धांतों को मानते हैं इसलिए

993
01:12:46,840 --> 01:12:51,360
हम जुड़े हैं के माध्यम से आप जुड़े

994
01:12:51,360 --> 01:12:55,400
किसके माध्यम से दीक्षा दीक्षा हुई आपकी शंकर

995
01:12:55,400 --> 01:12:59,600
संप्रदाय से हां दीक्षा हुई जुड़े है ना ऐसी को जुड़ा

996
01:12:59,600 --> 01:13:03,640
कहते हैं आप हा नहीं केवल एक दीक्षा से

997
01:13:03,640 --> 01:13:07,800
नहीं जुड़े सुन लीजिए मैंने दोनों बातें बताई उनके सिद्धांतों

998
01:13:07,800 --> 01:13:10,760
को मानते हैं आत्मसात करते हैं तब भी है

999
01:13:10,760 --> 01:13:14,760
केवल दीक्षा लेने के कारण नहीं जुड़े हैं अगर हम आज विरोध करने लगेंगे

1000
01:13:14,760 --> 01:13:19,440
शंकर संप्रदाय का विरोध बोलने लगेंगे तो कहां से जुड़े हुए माने जाएंगे

1001
01:13:19,440 --> 01:13:23,760
मैं बोल रहा हूं कि आप सीधा उंगली महाप्रभु भी उठा रहे हैं कि वो मद संप्रदाय

1002
01:13:23,760 --> 01:13:28,160
में नहीं थे यही तो बोल रहे हैं आप या तो आप बोलो देख देखिए उंगली

1003
01:13:28,160 --> 01:13:32,640
उठा रहे हैं इस तरह की बातें मत करिए मैं आपसे बहुत ही सामान्य भाषा में

1004
01:13:32,640 --> 01:13:36,640
प्रश्न कर रहा हूं आप आरोप लगा रहे हैं मैं प्रश्न कर रहा

1005
01:13:36,640 --> 01:13:41,320
हूं मैंने आपसे कहा यदि चैतन्य महाप्रभु ने कोई बात कही है

1006
01:13:41,320 --> 01:13:45,320
तो उसका उसमें उठने वाला जो संशय है उसको आप

1007
01:13:45,320 --> 01:13:49,320
निदान करिए कि यदि भेद मानने के कारण आप मधवा

1008
01:13:49,320 --> 01:13:53,760
वाले हो गए तो अभेद मानने के कारण आप शंकर वाले क्यों नहीं हुए

1009
01:13:53,760 --> 01:13:57,800
ये निस्तारण करिए महाप्रभु को म संप्रदाय से कनेक्टेड मानते

1010
01:13:57,800 --> 01:14:02,000
हैं कि नहीं मानते हैं चैतन्य महाप्रभु को हम नहीं मानते

1011
01:14:02,000 --> 01:14:04,320
और

1012
01:14:04,320 --> 01:14:08,320
बोलिए भाई आप अपने सिद्धांत को एक्सप्लेन करिए आप क्यों

1013
01:14:08,320 --> 01:14:12,400
बारबार नाम का सहारा लेकर बचना चाहते हैं

1014
01:14:12,400 --> 01:14:16,600
सिधांत आपतन तन महाप्रभु किसी भी संप्रदाय

1015
01:14:16,600 --> 01:14:20,640
से बिलोंग करते हो उन्होंने जो बात कही है क्या आप उसको समझते हैं कि नहीं समझते

1016
01:14:20,640 --> 01:14:25,400
हैं ये बताइए समझते तो समझाइए चत

1017
01:14:25,400 --> 01:14:25,900
नाम

1018
01:14:25,840 --> 01:14:29,960
ने का प्रयास मत कर यही है उत्तर यही

1019
01:14:29,960 --> 01:14:34,640
है कि आपके अभेद में और हमारे अभेद में वो

1020
01:14:34,640 --> 01:14:39,480
अभेद मुझे मधवा चार परंपरा में दिखाओ ना

1021
01:14:39,480 --> 01:14:43,600
वो अभेद म परंपरा में दिखाओ अगर अंतर है तो अंतर

1022
01:14:43,600 --> 01:14:47,720
र फिर मधवा से भी कनेक्ट मत हो नहीं तो अपना अभेद जो है वो मधवा

1023
01:14:47,720 --> 01:14:51,800
परंपरा से दिखाओ मुझे तब तो आप मधवा से कनेक्ट होगे या

1024
01:14:51,800 --> 01:14:55,960
फिर आपका य कहना या फिर आपका यह कहना है या फिर आपका यह

1025
01:14:55,960 --> 01:15:00,000
कहना है कि आपने अभेद का सिद्धांत तो वो मधुवा चार

1026
01:15:00,000 --> 01:15:04,200
का नहीं है मगर क्योंकि हम वहां से दीक्षित है इसलिए

1027
01:15:04,200 --> 01:15:08,360
जो है हम मधवा चार परंपरा के हैं आपका ये कहना

1028
01:15:08,360 --> 01:15:11,080
है

1029
01:15:11,080 --> 01:15:15,120
क्या मैं आपको कितनी बार बता चुका हूं आपके अभेद में हमारे अभेद में फर्क

1030
01:15:15,120 --> 01:15:19,160
है भाई साहब उन ये बात भी तो है अगर हमारा अभेद

1031
01:15:19,160 --> 01:15:23,160
आपका अभेद नहीं है तो वो अभेद मधुवा का तो होना चाहिए

1032
01:15:23,160 --> 01:15:27,160
अ तो मधुवा का ही तो है कहां है दिखाओ मुझे

1033
01:15:27,160 --> 01:15:32,880
वो जो अभेद का मधवा काे है

1034
01:15:32,880 --> 01:15:37,000
मधवा मधवा चार्य जी का जो अभेद है वो

1035
01:15:37,000 --> 01:15:41,040
कहां लिखा है अब मैं बता रहा हूं कि आपको की गुणात्मक

1036
01:15:41,040 --> 01:15:45,080
दृष्टि से आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है तो अभी आप कह

1037
01:15:45,080 --> 01:15:49,240
रहे थे थोड़ी देर पहले ये जो अभेद वाली बात है चैतन्य प्रभु

1038
01:15:49,240 --> 01:15:53,400
ने जोड़ी है अब आप कह रहे हो मधवा चार भी अवेद कहते थे तो

1039
01:15:53,400 --> 01:15:57,680
इसका मतलब वो भी अचत वेदा वाले थे

1040
01:15:57,680 --> 01:16:02,160
आप सीधी सी बात समझिए आत्मा परमात्मा भद है ये मवा सिधांत है

1041
01:16:02,160 --> 01:16:06,160
मधवा संप्रदाय में बात आप सही कह

1042
01:16:06,160 --> 01:16:10,360
रहे है जीव और ब्रह्म में भेद है ये मधवा सिद्धांत है मगर भेद

1043
01:16:10,360 --> 01:16:14,360
नहीं है ये मधवा सिद्धांत नहीं है ये

1044
01:16:14,360 --> 01:16:18,760
सं जीव और ब्रम किसको कह रहे ब्रम किसको कह रहे हो जीव किसको कह रहे

1045
01:16:18,760 --> 01:16:22,880
हो अरे आत्मा और परमात्मा ले लो भैया

1046
01:16:22,880 --> 01:16:25,400
हा

1047
01:16:25,400 --> 01:16:26,400
क्या

1048
01:16:26,400 --> 01:16:32,120
हा बो रहा ब्रहम और परम यूज

1049
01:16:32,120 --> 01:16:36,280
करिए ठीक है जीव और जो

1050
01:16:36,280 --> 01:16:40,520
जीव और परमात्मा ठीक है ये चलेगा आत्मा और परमात्मा कर ले

1051
01:16:40,520 --> 01:16:45,120
आत्मा परमा कर आत्मा परमात्मा कर ले

1052
01:16:45,120 --> 01:16:49,360
हा जी हा ठीक है अब अब बात हो रही है

1053
01:16:49,360 --> 01:16:53,600
कि आत्मा और परमात्मा में भेद है यह मधवा चार

1054
01:16:53,600 --> 01:16:57,640
का सिद्धांत है मगर आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है

1055
01:16:57,640 --> 01:17:01,640
ये मधवा चार का सिद्धांत नहीं है अगर आप दोनों बातें कहने

1056
01:17:01,640 --> 01:17:05,960
वाले हैं तो आप किसी एक के पक्षधर कैसे हो

1057
01:17:05,960 --> 01:17:10,080
गए वही मैं बता रहा हूं शिवांश अब सुनिए

1058
01:17:10,080 --> 01:17:14,120
अभेद का मतलब है कि आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाता है वो एक है ये

1059
01:17:14,120 --> 01:17:18,720
संकर सिद्धांत है ये आपको पता है लेकिन यहां प अभेद

1060
01:17:18,720 --> 01:17:22,760
महाप्रभु का है गुणात्मक दृष्टि से एक है और

1061
01:17:22,760 --> 01:17:27,000
संख्यात्मक दृष्टि से अलग है ये अभेद है अ आपका

1062
01:17:27,000 --> 01:17:31,680
जो अभेद है वो शंकराचार्य वाला अभेद नहीं है ठीक

1063
01:17:31,680 --> 01:17:36,040
आपका जो अभेद है वो शंकराचार्य वाला भेद नहीं है

1064
01:17:36,040 --> 01:17:40,160
होगा लेकिन सिद्धांत आपको वही आत्मा परमात्मा से मर्ज होना है

1065
01:17:40,160 --> 01:17:41,520
ि जब नहीं

1066
01:17:41,520 --> 01:17:45,600
है तो होगा क्यों बोल रहे हो जब नहीं है तो कैसे बोल सकते हो

1067
01:17:45,600 --> 01:17:49,640
भाई कितनी एक दोहरी बात बोलते हो क्या हर बार

1068
01:17:49,640 --> 01:17:54,120
मैं बोल रहा बात आत्मा और परमात्मा का मर्ज होना होता है ना मर्ज

1069
01:17:54,120 --> 01:17:57,200
आमा पर

1070
01:17:57,200 --> 01:18:01,280
है देखिए चलिए ठीक है मैं आपकी बात को यहां पर छोड़ देता हूं

1071
01:18:01,280 --> 01:18:05,280
इस वाली बात को हम लोग इसम ल करके नहीं बोल पाए

1072
01:18:05,280 --> 01:18:11,280
ठीक है कोई बात नहीं मैं ये बोल रहा

1073
01:18:12,120 --> 01:18:16,560
हूं होती हैन होती है आत्मा

1074
01:18:16,560 --> 01:18:21,360
हा ना मधवा के हिसाब से होती

1075
01:18:21,360 --> 01:18:26,480
है अभेद भी तो नहीं होता है

1076
01:18:26,480 --> 01:18:30,800
मधुवा में संख्यात्मक दृष्टि से अभेद कहा है

1077
01:18:30,800 --> 01:18:36,520
क्या आप सिधांत को सम

1078
01:18:36,520 --> 01:18:41,200
आपके बंद करल अपना क्योंकि आप मेरे वो है तानाशा

1079
01:18:41,200 --> 01:18:45,800
आप क समलो शांत हो जाओ इसीलिए आए हो

1080
01:18:45,800 --> 01:18:51,800
मैं जो बोल रहा मेरी भी सुन लीजिए आप अपने

1081
01:18:52,320 --> 01:18:56,320
सुनारा है आप ने कहा कि अचिंत

1082
01:18:56,320 --> 01:19:02,200
भदा भेद का अर्थ है कि गुणात्मक दृष्टि से अभेद

1083
01:19:02,200 --> 01:19:06,600
और संख्यात्मक दृष्टि से भेद ठीक

1084
01:19:06,600 --> 01:19:10,800
है हेलो ठीक है हाज अब मैं पूछ इससे

1085
01:19:10,800 --> 01:19:15,120
आगे तो अब इसमें जब आप यह समझ गए हैं कि भेद क्या है अभेद

1086
01:19:15,120 --> 01:19:19,160
क्या है तो अचिंत शब्द क्यों आ रहा है अचिंत का क्या मतलब है

1087
01:19:19,160 --> 01:19:23,440
आप तो समझ गए आप तो समझ गए भेद क्या है और अभेद क्या है बिल्कुल क्लियर

1088
01:19:23,440 --> 01:19:27,600
कट हो गया

1089
01:19:27,600 --> 01:19:31,960
अचय कोई स्वीकार नहीं कर पाएगा जसे आप स्वीकार नहीं

1090
01:19:31,960 --> 01:19:35,760
कर

1091
01:19:35,760 --> 01:19:38,720
अचिंत

1092
01:19:38,720 --> 01:19:42,920
अच लेकिन अच अचिंत मतलब

1093
01:19:42,920 --> 01:19:47,840
जो चिंतन में नहीं आ सकता उसको अचिंत कहते यायर नहीं है

1094
01:19:47,840 --> 01:19:52,720
ना यानी की क्लियर नहीं है ना इतनी देर से और क्या कह रहा हूं

1095
01:19:52,720 --> 01:19:56,840
क्यों नहीं की जो बात है वो आप ही काट रहे

1096
01:19:56,840 --> 01:20:01,080
हो अभी आप कह रहे हो क्लियर है अब आप कह रहे हो नहीं क्लियर नहीं है

1097
01:20:01,080 --> 01:20:05,360
म सिद्धांतही मैं बता रहा हूं ना एक एक शब्द को लेक

1098
01:20:05,360 --> 01:20:09,400
प्रभु का सिद्धांत है तो अच्छी बात है भाई उसको मधवा से क्यों जोड़ रहे हो फिर

1099
01:20:09,400 --> 01:20:13,800
उन्होंने कहा क्लियर नहीं है उन्होंने तो उन्होने तो

1100
01:20:13,800 --> 01:20:18,000
उन्होंने ठोक के कहा कि जीव और ब्रह्म में वो आत्मा और परमात्मा में भेद

1101
01:20:18,000 --> 01:20:22,080
है ये उन्होंने ठोक के कह दिया अब आप जो कह रहे हो वो

1102
01:20:22,080 --> 01:20:26,200
अचिंत है मामला क्लियर नहीं कहा जाता आप

1103
01:20:26,200 --> 01:20:30,200
शब्दों के जाल में ना फसाने का प्रयास करिए ना उस हिसाब से करिए अपने सिधांत को

1104
01:20:30,200 --> 01:20:34,480
प्रस्तुत करने बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया देख रहे लोग समझेंगे

1105
01:20:34,480 --> 01:20:38,520
वोन की विचारधारा अब मैं आपसे य पूछ रहा हूं अब

1106
01:20:38,520 --> 01:20:43,400
मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि अगर

1107
01:20:43,400 --> 01:20:47,480
इकोन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह

1108
01:20:47,480 --> 01:20:51,640
सर्वशक्तिमान है क्या वो सब कुछ कर सकता

1109
01:20:51,640 --> 01:20:55,680
है सरय क्वेश्चन बहुत बार कर चुके हैं बकवास क्वेश्चन लगता है एक नंबर

1110
01:20:55,680 --> 01:20:59,920
का मेरे को और ये क्वेश्चन ना करे तो बहुत अच्छा है नहीं नहीं नहीं इससे किसी निस्तारण

1111
01:20:59,920 --> 01:21:04,400
पर पहुंचेंगे ना उससे क्या मतलब स्कन

1112
01:21:04,400 --> 01:21:08,560
के इतने लोगों के साथ आपने बहस की है बहस का कभी भी निष्कर्ष नहीं निकलेगा चर्चा

1113
01:21:08,560 --> 01:21:12,760
का निष्कर्ष निकलेगा और ये जो क्वेश्चन है ये ये प्रश्न जो आपके देख

1114
01:21:12,760 --> 01:21:17,080
भाई साहब फिर वही बात कर रहे हैं चर्चा और बहस की बात फिर से कर रहे हैं आप

1115
01:21:17,080 --> 01:21:21,960
फिर मैं कंगा आप कैसे सिद्ध करेंगे कि चर्चा नहीं बहस नहीं है ये वो है

1116
01:21:21,960 --> 01:21:26,120
सर्व शक्तिमान एक ही है मैं ये प्रश्न किसी

1117
01:21:26,120 --> 01:21:30,240
कारण वश कर रहा हूं जिसका हमारे जो अभी जो टॉपिक चल रहा था उससे

1118
01:21:30,240 --> 01:21:34,640
रिलेशन है इस वजह से कर रहा हूं आप उत्तर दीजिए

1119
01:21:34,640 --> 01:21:38,800
हां बताइए चलो क्वेश्चन करिए आप क्या स्कन के द्वारा

1120
01:21:38,800 --> 01:21:42,800
पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सब कुछ कर सकता है

1121
01:21:42,800 --> 01:21:46,840
आगे चलिए एक क्वेश्चन हो चुका है आगे चलिए क्या पूछना चाह रहे हैं भाई साहब

1122
01:21:46,840 --> 01:21:51,000
इसका आंसर दीजिए उसी आंसर से रिलेट करता हुआ क्वेश्चन है क्योंकि

1123
01:21:51,000 --> 01:21:55,720
आंसर दीजिए कंफर्म करिए शक्तिमान है वो कृष्ण है

1124
01:21:55,720 --> 01:21:58,800
नहीं वह सब कुछ कर सकता है कि नहीं

1125
01:21:58,800 --> 01:22:02,880
सब कुछ कर सकता है अच्छा तो आपने

1126
01:22:02,880 --> 01:22:07,480
जैसा कि बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जो स्वरूप है वह शाश्वत है

1127
01:22:07,480 --> 01:22:11,520
जो ना तो परिवर्तनशील है और ना ही

1128
01:22:11,520 --> 01:22:15,680
वह कभी जन्म लेता है ना ही कभी उसको वो

1129
01:22:15,680 --> 01:22:20,120
आता है क्या कहते हैं ना ही उसका कभी अंत होता है

1130
01:22:20,120 --> 01:22:24,960
अब कहने का मेरा भाव यह है कि क्या श्री कृष्ण

1131
01:22:24,960 --> 01:22:28,960
अपने रूप को बदल सकते हैं जब वो आते हैं वृंदावन में तो अपने

1132
01:22:28,960 --> 01:22:33,120
रूप को बदल सकते हैं वो दूसरे रूप धारण कर सकते हैं अ अलग

1133
01:22:33,120 --> 01:22:37,520
अलग प्रकार के जैसे उन्होंने विराट स्वरूप धारण किया था भगवत गीता को कहते समय

1134
01:22:37,520 --> 01:22:41,680
और उन्होंने जो है जब वो आए थे तो शिशु रूप में आए थे

1135
01:22:41,680 --> 01:22:45,920
उसके बाद उनका रूप बदला तो जब हम कह रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण का जो शरीर

1136
01:22:45,920 --> 01:22:50,200
है वही वो शाश्वत है वो शाश्वत शरीर है और वो एज इट

1137
01:22:50,200 --> 01:22:54,200
वहां से आते हैं गोलोक से यहां पर तो फिर उनका जो रूप है वो बदल कैसे रहा

1138
01:22:54,200 --> 01:22:58,200
है कहने का अर्थ ये है कि अगर वो ईश्वर है तो क्या अपने शरीर

1139
01:22:58,200 --> 01:23:02,640
को बदल सकते हैं और अगर वो बदल सकते हैं तो वो स वो शाश्वत कैसे

1140
01:23:02,640 --> 01:23:06,760
शाश्वत है तो वो सर्व शाश्वत है तो बदल कैसे पा रहे हैं यह पूछ

1141
01:23:06,760 --> 01:23:10,880
रहा हूं जब सर्वशक्तिमान कर रहे हो तो फिर सब कुछ

1142
01:23:10,880 --> 01:23:13,960
कर सकता है ना अरे मेरे भाई उसका

1143
01:23:13,960 --> 01:23:18,520
शरीर शाश्वत नहीं रहा ना अगर वो परिवर्तनशील है तोत

1144
01:23:18,520 --> 01:23:22,840
है आप देखिए शंकर संप्रदाय के अकॉर्डिंग भवान जो है विष्णु

1145
01:23:22,840 --> 01:23:27,200
जो है भाई साब आप शंकर संप्रदाय महाप्रभु और मधवा

1146
01:23:27,200 --> 01:23:31,240
चार्य जी की बात लेकर के अपनी बात को सिद्ध मत करिए आप मुझे

1147
01:23:31,240 --> 01:23:36,280
तर्क और प्रमाण से सिद्ध करिए तर्क और प्रमाण से

1148
01:23:36,280 --> 01:23:40,840
हा बताए कि शाश्वत अभी आपने कहा कि शाश्वत

1149
01:23:40,840 --> 01:23:44,840
वो है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में नित्य है जो नित्य

1150
01:23:44,840 --> 01:23:48,840
स्थाई अब अगर वह बदल रहा है उनका शरीर तो उसको शाश्वत

1151
01:23:48,840 --> 01:23:51,880
कैसे कह रहे हैं

1152
01:23:51,880 --> 01:23:55,960
आप तो मतलब राम जी अगर रूप में प्रकट हुए और बड़े

1153
01:23:55,960 --> 01:23:59,960
हुए हैं तो फिर उनका रूप भौतिक हो गया उनका शरीर

1154
01:23:59,960 --> 01:24:04,600
जो है जो हम देख रहे हैं व्यवहारिक दृष्टि से वो शाश्वत नहीं है

1155
01:24:04,600 --> 01:24:08,640
भौतिक है जो जो वो लीला कर रहे हैं वो लीलाए उनकी जो है

1156
01:24:08,640 --> 01:24:12,880
जो लीला वो कर रहे हैं वो हम अंततोगत्वा नहीं मान सकते कि वही

1157
01:24:12,880 --> 01:24:16,960
ईश्वर का रूप है जो ईश्वर का रूप वहा परमार्थ की दृष्टि से प्राप्त जो

1158
01:24:16,960 --> 01:24:21,440
हमें मिलेगा आपको अगर पता हो के

1159
01:24:21,440 --> 01:24:25,480
ईश्वर के इस रूप को भजन पूजन और उसका अनुकरण

1160
01:24:25,480 --> 01:24:29,200
अनुसरण करके हम वहां तक पहुंच सकते हैं उसको उस रूप में प्राप्त

1161
01:24:29,200 --> 01:24:33,320
कर सकते हैं जैसे कि भोजन के लिए हम प्रयास करते हैं तब हमें कैलोरी

1162
01:24:33,320 --> 01:24:37,320
मिलती है भोजन के लिए हम जब प्रयास

1163
01:24:37,320 --> 01:24:40,600
करते हैं तब हमें कैलोरी मिलती

1164
01:24:40,600 --> 01:24:45,040
है तो आप हमें बताएं कि यदि भगवान

1165
01:24:45,040 --> 01:24:49,360
का जो शरीर है शाश्वत जो गोलोक धाम में बैठा हुआ है वो शरीर शाश्वत

1166
01:24:49,360 --> 01:24:53,440
है तो फिर व परिवर्तनशील कैसे और परिवर्तनशील है तो फिर वो

1167
01:24:53,440 --> 01:24:57,440
शाश्वत कैसे और अगर परिवर्तनशील नहीं है परिवर्तनशील नहीं है

1168
01:24:57,440 --> 01:25:01,520
तो वो सर्वशक्तिमान कैसे अब मैंने प्रश्न आपसे पूछा इसलिए

1169
01:25:01,520 --> 01:25:05,680
मैं ये प्रश्न इसलिए लेकर आया हूं क्योंकि आज तक

1170
01:25:05,680 --> 01:25:09,680
जितनी बार भी हमने प्रश्न किया अगर इस प्रश्न पर आगे बढ़े तो

1171
01:25:09,680 --> 01:25:13,720
इसमें अंत में एक शब्द आया अचिंत ये जो है

1172
01:25:13,720 --> 01:25:17,760
अचिंत हैय बात जबक अचिंत श किससे जुड़ा हुआ है

1173
01:25:17,760 --> 01:25:22,040
अचिंत शब्द किससे जुड़ा हुआ था भदा भेद से मगर जहां पर भी इस कोन

1174
01:25:22,040 --> 01:25:26,160
के सामने कोई ऐसा प्रश्न अटक जाता है जिसका उसके पास उत्तर नहीं होता

1175
01:25:26,160 --> 01:25:30,320
तो व सब जगह चिंत डाल देता है इसलिए मैंने कहा था आज

1176
01:25:30,320 --> 01:25:34,400
जिससे की आप अचिंत कह ना हट पाओ तो भगवान आपके लिए चिंते

1177
01:25:34,400 --> 01:25:38,680
है क्या भगवान के दो रूप है

1178
01:25:38,680 --> 01:25:42,720
भगवान के दो रूप है एक व्यवहार में ना आ सकने वाला और एक

1179
01:25:42,720 --> 01:25:44,520
व्यवहार में आ सकने वाला

1180
01:25:44,520 --> 01:25:48,520
व्यवहार में आ सकने वाले रूप का आलंबन लेकर के व्यवहार में ना आ सकने वाले

1181
01:25:48,520 --> 01:25:52,600
रूप तक पहुंचा जाता है में ना आ सकने वाला रूप

1182
01:25:52,600 --> 01:25:56,680
कौन सा हैय बता दीजिए क्या फीचर व्यवहार में

1183
01:25:56,680 --> 01:26:00,840
ना आ सकने वालाला रूप निर्गुण निराकार वही

1184
01:26:00,840 --> 01:26:05,400
मैं बोल रहा हूं आप खंडन कर रहे

1185
01:26:05,400 --> 01:26:09,640
होक फिर वही बात भाई साहब आपने भागवत को सम भागवत

1186
01:26:09,640 --> 01:26:13,800
को समझा है कि नहीं मैं आपसे समझना चाह रहा हूं

1187
01:26:13,800 --> 01:26:18,840
ना समना चाह रहा हूं शलोक का मतलब बता दीजिए मुझे

1188
01:26:18,840 --> 01:26:23,240
बं मैं आपसे समझना चाह रहा हूं भाई

1189
01:26:23,240 --> 01:26:27,400
साहब े नहीं आप केवल आप केवल प्रमाण दिखाएंगे

1190
01:26:27,400 --> 01:26:31,640
या आचार्यों का नाम दिखाएंगे आप समझाएंगे कुछ नहीं

1191
01:26:31,640 --> 01:26:35,640
राम राम की गुण राम का नाम और राम की लीलाओं को यूज

1192
01:26:35,640 --> 01:26:40,280
करके निर्गुण ब्रम में कूदना है आपको भाई साहब

1193
01:26:40,280 --> 01:26:44,520
आप य बताइए आप भागवत का नाम ले रहे चलिए अब आ जाते हैं बहुत बढ़िया टॉपिक

1194
01:26:44,520 --> 01:26:49,880
आपने उठा दिया भागवत का नाम लिया भागवत आपने कहां से पढ़ी भाई

1195
01:26:49,880 --> 01:26:54,240
साब गुरु शिष्य परंपरा से पड़ी अच्छा कौन

1196
01:26:54,240 --> 01:26:58,560
कि परंपरा से पड़ी नाम बताइए वैष्णव संप्रदाय

1197
01:26:58,560 --> 01:26:59,920
चैतन्य महाप्रभु से प्र

1198
01:26:59,920 --> 01:27:04,400
संस् है चैतन्य महाप ने कहा से पड़ी

1199
01:27:04,400 --> 01:27:08,480
चैतन्य महा ने अपने कर परिक से भी पढ़ी है और जैसे लास्ट हमारी चर्चा

1200
01:27:08,480 --> 01:27:12,920
हुई थी आप बता रहे श्रीधर स्वामी प्रमाण है वो बताइए प्रमाण प्रमाण

1201
01:27:12,920 --> 01:27:17,520
उन्होंने किसकी भागवत को प्रमाण माना

1202
01:27:17,520 --> 01:27:21,560
लास्ट डिस्कशन में आपने यही बोला था ना मेरे को श्रीधर स्वामी से पड़ी और

1203
01:27:21,560 --> 01:27:25,680
शी स्वामी अभी उसको दोबारा से कर रहे दर्शको को नहीं मालूम है

1204
01:27:25,680 --> 01:27:29,680
किसने क्या बोला था अभी आप दोबारा से उसको बताइए चैतन्य महाप्रभु ने

1205
01:27:29,680 --> 01:27:32,920
किसकी भागवत को प्रमाण

1206
01:27:32,920 --> 01:27:37,560
माना अपने परिक के साथ पढ़ते थे और चैतन्य चता में

1207
01:27:37,560 --> 01:27:42,280
चैतन्य प्रमाण प्रमाण किसे माना बोलो ना

1208
01:27:42,280 --> 01:27:46,480
अरे भैया मैं बोल तो रहा हूं श्रीम राधा रानी के विस्तार

1209
01:27:46,480 --> 01:27:50,680
थे अपने अतरंग पार्षद रामाचार्य रामानंद राय और

1210
01:27:50,680 --> 01:27:55,360
स्वरूप दामोदर के साथ भागवत पढ़ते थे चैतन्य महाप चैतन्य च

1211
01:27:55,360 --> 01:27:59,600
आपसे पूछ रहा हूं कि उन्होंने प्रमाण माना है कि नहीं श्रीधर स्वामी की टीका

1212
01:27:59,600 --> 01:28:04,000
को मान लिया बताइए आगे बोलिए हा

1213
01:28:04,000 --> 01:28:08,000
आज आप भागवत पढ़ रहे हैं व श्रीधर स्वामी की भागवत से विरोध तो

1214
01:28:08,000 --> 01:28:12,120
नहीं होता है कहीं श्रीधर स्वामी के बारे में जितना मैंने पढ़ा है

1215
01:28:12,120 --> 01:28:15,000
लास्ट डिस्कशन के बाद श्रीधर

1216
01:28:15,000 --> 01:28:19,240
स्वामी शंकर संप्रदाय के पदाधिकारी थे गोवर्धन के

1217
01:28:19,240 --> 01:28:22,280
पदाधिकारी ठीक

1218
01:28:22,280 --> 01:28:26,680
है संप्रदाय खा और जहा

1219
01:28:26,680 --> 01:28:31,440
तकने स्वामी क्या लिक था क्या लिंक था

1220
01:28:31,440 --> 01:28:35,840
म संप्रदाय के जो सिद्धांत है मवा सिद्धांत उसको स्वीकार कर अरे मेरे भाई

1221
01:28:35,840 --> 01:28:40,160
किससे शिक्षा ली थी मधवा चार्य जी की उन्होंने परंपरा से कैसे आया उनके पास ज्ञान

1222
01:28:40,160 --> 01:28:45,080
मधवा का मुझे नहीं पता लेकिन

1223
01:28:45,080 --> 01:28:49,080
नहीं पता इसीलिए नहीं पता नहीं पता हर चीज का नहीं पता आज जो

1224
01:28:49,080 --> 01:28:53,480
आप भागवत पढ़ रहे हैं वो विरोध तो नहीं करती श्रीधर स्वामी का श

1225
01:28:53,480 --> 01:28:57,680
स्वामी विरोध नहीं करती क्यों म सिद्धांत ठीक है मैं बताता

1226
01:28:57,680 --> 01:29:03,680
हूं आपको विरोध मैं आपको एक बड़ा विरोध बताता हूं आप लोग भी जो देख रहे हैं वो

1227
01:29:05,800 --> 01:29:10,360
देखिएगा यह इसकन की भागवत में है

1228
01:29:10,360 --> 01:29:16,360
ठीक है पहला स्कंद

1229
01:29:34,880 --> 01:29:40,880
यह श्रीधर स्वामी की भागवत पहला

1230
01:29:41,920 --> 01:29:46,000
स्कंद अब यह बताइए श्रीधर स्वामी

1231
01:29:46,000 --> 01:29:52,000
की भागवत में

1232
01:29:57,040 --> 01:30:01,440
भागवत में सुबह सबसे पहला जो चैप्टर है वह है भागवत

1233
01:30:01,440 --> 01:30:06,040
का महात्म दिख रहा है आपको

1234
01:30:06,040 --> 01:30:11,160
नाम पहला चैप्टर क्या है

1235
01:30:11,160 --> 01:30:17,160
महात्म दिख रहा है क्या भाई

1236
01:30:20,320 --> 01:30:25,200
साबसे इस महात्म में गणेश पूजन

1237
01:30:25,200 --> 01:30:29,320
इत्यादि जो सप्ताह यज्ञ की विधि

1238
01:30:29,320 --> 01:30:34,880
होती है वह सब बताई गई है ठीक

1239
01:30:34,880 --> 01:30:40,040
है कि जो भागवत का पाठ है वह कैसे करना

1240
01:30:40,040 --> 01:30:42,720
चाहिए

1241
01:30:42,720 --> 01:30:47,240
और अगर व्याख्या की बात करें तो पृष्ठों में

1242
01:30:47,240 --> 01:30:51,640
लगभग 22 पृष्ठों में इसकी व्याख्या हुई है महात्म

1243
01:30:51,640 --> 01:30:55,600
की

1244
01:30:55,600 --> 01:31:01,600
यह पूरा ज्ञान पूरा का पूरा ज्ञान आपकी इस भागवत से गायब

1245
01:31:01,720 --> 01:31:05,720
है यही है परंपरा जो गुरुजन लिखते हैं जो

1246
01:31:05,720 --> 01:31:09,520
गुरुजन बताते हैं उसको गायब कर दिया

1247
01:31:09,520 --> 01:31:13,520
जाए महात्म दि पहला चैप्टर अरे

1248
01:31:13,520 --> 01:31:17,600
महात्म कहा है इसम भागवत का में

1249
01:31:17,600 --> 01:31:22,280
देखिए आप में देखिए बताइए है

1250
01:31:22,280 --> 01:31:28,280
अध भागवत

1251
01:31:29,720 --> 01:31:33,760
ब यह तो आपने ठोक दिया ऊपर से म म में तो चैप्टर है

1252
01:31:33,760 --> 01:31:39,040
भागवत का उसको क्या कहेंगे आप

1253
01:31:39,040 --> 01:31:43,200
बताइए क्या कहेंगे मुझे क्या पता सर आप देख

1254
01:31:43,200 --> 01:31:47,440
क्या जब मैंने आपको जब मैंने आपको चैप्टर बोला है

1255
01:31:47,440 --> 01:31:53,440
तब मैंने आपको बोला ना महात्म

1256
01:31:54,360 --> 01:31:58,400
में में दिया है आप पढ जाके भाई साहब मैं खोल

1257
01:31:58,400 --> 01:32:02,600
के देख रहा हूं मैं खोल रहा हूं मैं कोई आपके ऊपर वो नहीं कर रहा हूं मैं आपसे

1258
01:32:02,600 --> 01:32:06,680
पूछ रहा हूं मगर सबसे पहली बात है जब आप यह कह रहे हैं जब आप यह

1259
01:32:06,680 --> 01:32:10,680
कह रहे हैं कि महात्म जो है व चैप्टर

1260
01:32:10,680 --> 01:32:15,240
नहीं है कुछ और है तो मैंने आपको चैप्टर के साथ साथ महात्म नाम भी लिया

1261
01:32:15,240 --> 01:32:19,320
था अब मैं देख रहा आपका ब

1262
01:32:19,320 --> 01:32:23,880
पहला चटर हा देख रहा

1263
01:32:23,880 --> 01:32:29,880
और

1264
01:33:46,520 --> 01:33:52,520
[संगीत]

1265
01:34:21,240 --> 01:34:25,520
रवा अध्याय भाई साहब यह महात्म जो है

1266
01:34:25,520 --> 01:34:29,640
यह महात्म उसमें अलग से है यह महात्म

1267
01:34:29,640 --> 01:34:35,640
उसमें भी है अलग से दोबारा वाला मैं दिखा देता हूं

1268
01:34:36,240 --> 01:34:40,240
आपको आपको दिखा देता हूं ये 12 स्क

1269
01:34:40,240 --> 01:34:44,240
कावा चैप्टर है मैं स्कंद कावा चैप्टर

1270
01:34:44,240 --> 01:34:48,320
उसम भी है यहां पर सबसे पहले जो ग्रंथ प्रारंभ

1271
01:34:48,320 --> 01:34:52,400
हो रहा है तो श्रीधरी टीका है जितने भी और प्रामाणिक टीका है उसमें जो

1272
01:34:52,400 --> 01:34:56,480
है महात्म गया है आपका महात्म कहां

1273
01:34:56,480 --> 01:35:00,560
है वो जो स्कंद के अंदर स्कंद के अंदर जो

1274
01:35:00,560 --> 01:35:04,800
महात्म है वह अलग है यह अलग से एक महात्म है भागवत

1275
01:35:04,800 --> 01:35:09,160
का वो कहां है वो पूरा दिखाता

1276
01:35:09,160 --> 01:35:13,400
भागवत में सुखद दिया है तो अलग से

1277
01:35:13,400 --> 01:35:17,800
मेरी बात समझिए ये आपका जो आप बता रहे य चैप्टर है

1278
01:35:17,800 --> 01:35:21,960
स्कंद के अंतर्गत चैप्टर स्कंद के अतिरिक्त जो महात्म

1279
01:35:21,960 --> 01:35:26,120
लिखा हुआ भागवत में जिसको जी ने लिखा जो परंपरा से आया

1280
01:35:26,120 --> 01:35:30,560
श्रीधर स्वामी तक उन्होंने भी लिखा उसका अर्थ सब कुछ वोह महात्मा

1281
01:35:30,560 --> 01:35:34,840
आपका कहां है जो जो स्कंद के प्रारंभ होने से पहले है

1282
01:35:34,840 --> 01:35:39,040
वो कहां है य ये जो इसमें आप बता रहे हैं अध्याय 13 यह तो उसमें

1283
01:35:39,040 --> 01:35:45,040
भी है मैं दिखा देता हूं

1284
01:35:55,480 --> 01:36:00,360
विभिन्न पुराणों की श्रीमद भागवत की महिमा ये लो इसमें भी है

1285
01:36:00,360 --> 01:36:04,920
हा य मात अरे

1286
01:36:04,920 --> 01:36:09,040
वो जो चैप्टर है पूरा का पूरा अलग है उसम सबसे

1287
01:36:09,040 --> 01:36:13,760
पहले कुछ भी घुसा दीजिए अंदर अपनी

1288
01:36:13,760 --> 01:36:19,160
मने में शलोक श्रीधर

1289
01:36:19,160 --> 01:36:23,840
स्वामी श्रीधर स्वामी की टीका है ये

1290
01:36:23,840 --> 01:36:28,360
श्रीधर स्वामी टीका

1291
01:36:28,360 --> 01:36:32,560
है ये बताइए ये बताइए श्रीधर स्वामी की टीका आपके लिए

1292
01:36:32,560 --> 01:36:36,640
मान्य है कि नहीं है हा जीी हा जीी मान्य है

1293
01:36:36,640 --> 01:36:41,000
तो ये सीदर स्वामी की टीका सर सचार इसका अर्थ कर रहे हैं भागवत

1294
01:36:41,000 --> 01:36:45,040
का महात्म लिख रहे हैं लास्ट डिस्कशन

1295
01:36:45,040 --> 01:36:49,880
में आपको मैंने पता नहीं चत महा य पढ़ते थे क्या

1296
01:36:49,880 --> 01:36:53,960
अच्छा ठीक है नहीं पढ़ते थे तो आप सिद्ध करोगे क्या पढ़ते थे वो कहां है वही ला

1297
01:36:53,960 --> 01:36:58,000
दो आप तो दिखा दो अरे मैं कह रहा हूं वो क्या पढ़ते थे

1298
01:36:58,000 --> 01:37:02,080
वो आप दिखा दो फिर जब हम जो दिखा रहे उसको आप गलत ठहरा रहे

1299
01:37:02,080 --> 01:37:08,080
हो तो सही वाला आप दिखा दो ही बोल रहा

1300
01:37:08,240 --> 01:37:12,280
चन चैतन्य महा ने भागवत पढ़ा ठीक

1301
01:37:12,280 --> 01:37:16,360
हैने डिस्कशन में मे से बात की थी श स्वामी से पढ़ चैन महा बोल

1302
01:37:16,360 --> 01:37:20,440
रहे हैं श्रीधर स्वामी की जो को स्वीकार नहीं कर के समान है

1303
01:37:20,440 --> 01:37:24,800
आपक कर रहे जी तो

1304
01:37:24,800 --> 01:37:29,320
आपने मुझे एक लोक में से बताया था कि शिव ही ब्रह्मा बनते

1305
01:37:29,320 --> 01:37:33,400
हैं मत बदलिए अभी विषय यह रखिए कि आपने सीदर

1306
01:37:33,400 --> 01:37:37,520
स्वामी से अपना जो भागवत है उसको मैच करा है कि नहीं करा करा

1307
01:37:37,520 --> 01:37:42,840
है तो कहां से करा व बताइए श्रीधर स्वामी की

1308
01:37:42,840 --> 01:37:47,760
प हा चैतन्य बोलेंगे भागवत

1309
01:37:47,760 --> 01:37:51,960
स्वामी केडिंग बोलेंग अलग तो नहीं कुछ बोलेंगे प तो प्रमाण

1310
01:37:51,960 --> 01:37:56,000
अगर आपसे भाई साब पूछ रहा हूं कि आपने यह पता किया है

1311
01:37:56,000 --> 01:38:00,080
कि आप जो पढ़ रहे हो व चैतन्य महाप्रभु के द्वारा जो कहा गया है भागवत का

1312
01:38:00,080 --> 01:38:04,120
जो अर्थ बताया गया वो श्रीधर स्वामी से मैच खाता है कि नहीं मेरा प्रश्न तो

1313
01:38:04,120 --> 01:38:08,280
यही है ना भाई जैसे आप उंगली उठा रहे हैं जैसे आप

1314
01:38:08,280 --> 01:38:12,400
ये उंगली उठा रहे हैं कि ये किसने क्या लिखा हमें क्या पता तो ऐसे मैं भी बता सकता

1315
01:38:12,400 --> 01:38:16,800
हूं कि चैतन्य महाप्रभु के बारे में किसने क्या लिखा हमें क्या पता वही

1316
01:38:16,800 --> 01:38:21,000
मैं बोल रहा हूं चैतन्य मभु गगने

1317
01:38:21,000 --> 01:38:23,720
का मतलब है चैतन्य महाप्रभु की जो प्रमाण

1318
01:38:23,720 --> 01:38:28,160
जानकारी है प्रामाणिक शिक्षा है व आपने ग्रहण की हमने नहीं

1319
01:38:28,160 --> 01:38:30,560
मैं

1320
01:38:30,560 --> 01:38:34,880
टी हेर फेर हो सकता है प्रमाणिक ग्रंथ

1321
01:38:34,880 --> 01:38:39,080
उसको आप अस्वीकार नहीं कर सते मैं आपसे इसीलिए सिद्धांत

1322
01:38:39,080 --> 01:38:43,080
पूछ रहा हूं कि श्रीधर स्वामी की श्रीधर स्वामी की

1323
01:38:43,080 --> 01:38:47,160
व्याख्या आपने कहां से मैच किया कि आज जो हम पढ़ रहे हैं वो वही है

1324
01:38:47,160 --> 01:38:52,440
जो शीर स्वामी ने लिखा वो मैच किया नहीं

1325
01:38:52,440 --> 01:38:56,560
किया चलते तो आपने मैच किया है कि नहीं किया

1326
01:38:56,560 --> 01:38:59,040
है

1327
01:38:59,040 --> 01:39:03,280
बात हमारे आचार्य ने देना था व दे दिया

1328
01:39:03,280 --> 01:39:07,400
मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने मै मैं आपसे पूछ रहा हूं मैच आपने

1329
01:39:07,400 --> 01:39:11,640
किया है कि नहीं किया हैरी बात बताइए

1330
01:39:11,640 --> 01:39:15,880
नहीं

1331
01:39:15,880 --> 01:39:19,920
बताओगे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने मैच किया है कि

1332
01:39:19,920 --> 01:39:25,920
नहीं किया है

1333
01:39:42,560 --> 01:39:46,640
ये राम कलेश कुमार यादव बोल रहे हैं कि क्यों आपस

1334
01:39:46,640 --> 01:39:50,680
में झगड़ा करते हो तारू हो जाते हो शिवांश भाई शत्रु बहुत

1335
01:39:50,680 --> 01:39:54,960
भारी है पड़े हैं उनको पहले निपटाना आपस में वैचारिक मतभेद

1336
01:39:54,960 --> 01:39:59,240
है सुलझा लेंगे भाई हमें ऐसे लोगों के साथ हम कंधा कैसे मिलाएंगे जो

1337
01:39:59,240 --> 01:40:03,240
कृष्ण और अल्लाह को एक कहते हैं कैसे

1338
01:40:03,240 --> 01:40:07,280
खड़े होंगे ये लोग हमारे साथ जब अल्लाह वाले हमारे पास आएंगे

1339
01:40:07,280 --> 01:40:11,560
उनके सा खड़े हो

1340
01:40:11,560 --> 01:40:15,680
जाएंगे और ऊपर से कृष्ण और अल्लाह तो एक है मगर कृष्ण

1341
01:40:15,680 --> 01:40:18,480
और शिव अलग अलग

1342
01:40:18,480 --> 01:40:23,600
है इसीलिए इनसे बात करते हैं

1343
01:40:23,600 --> 01:40:29,600
केवल कृष्ण और शिव में भेद नहीं है अन्य परंपराओं अन्य वैष्णव परंपराओं की तरह

1344
01:41:03,240 --> 01:41:07,680
जय श्री राम जय श्री राम विशाल और

1345
01:41:07,680 --> 01:41:11,080
दीपावली की ढेर सारी शुभकामना

1346
01:41:11,080 --> 01:41:15,200
आपको जी कैसे हैं आप

1347
01:41:15,200 --> 01:41:19,800
बस बस कृपा है राम की और

1348
01:41:19,800 --> 01:41:24,680
बताइए आज किसका आज क्या चल रहा है आज टॉपिक है

1349
01:41:24,680 --> 01:41:26,960
आज हा जी शिवा

1350
01:41:26,960 --> 01:41:30,960
जी मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपने कहा कि

1351
01:41:30,960 --> 01:41:34,960
हम वही भागवत पढ़ रहे हैं जो भागवत श्रीधर स्वामी जी

1352
01:41:34,960 --> 01:41:39,440
ने लिखी अब जो श्रीधर स्वामी के का जो दिया हुआ ज्ञान है

1353
01:41:39,440 --> 01:41:43,480
वो भाई उनके नीचे के जो शिष्य है आपका कहना है कि उन्होंने उनके

1354
01:41:43,480 --> 01:41:47,560
पास नहीं है आपके पास है इसका मतलब आपने आपका यह कहना है कि

1355
01:41:47,560 --> 01:41:51,720
आप श्रीधर स्वामी जी के प्रामाणिक शिष्य परंपरा में है

1356
01:41:51,720 --> 01:41:56,360
तभी तो आप उनके ज्ञान को जानने दावा कर सकते हमसे भी आगे

1357
01:41:56,360 --> 01:42:00,400
श्रीधर स्वामी की ट्रीका को चैतन्य महाप ने आपने जैसे बताया कि

1358
01:42:00,400 --> 01:42:04,600
श्रीधर स्वामी से स भागवत चैतन्य महाने आप यही कह रहे

1359
01:42:04,600 --> 01:42:08,600
यही दावा कर रहे देखिए होता क्या है मैं आपको राहुल जी एक बात बताऊ अगर

1360
01:42:08,600 --> 01:42:12,800
हम लोग एक एक बात एक एक बात बिना छोड़े चलते रहना

1361
01:42:12,800 --> 01:42:17,400
तो हम किसी निष्कर्ष में पहुंचते हैं मैंने आपसे पूछा है कि क्या आपने

1362
01:42:17,400 --> 01:42:21,760
वेरीफाई किया है कि जो आज आप भागवत पढ़ रहे हैं वो भागवत श्रीधर

1363
01:42:21,760 --> 01:42:26,200
स्वामी की ही लिखी है आपने मैच किया है क्या श्रीधर स्वामी से

1364
01:42:26,200 --> 01:42:30,240
सितो को पढ़ रहे हैं हम और बताइए शीर स्वामी को सिद्धांतों

1365
01:42:30,240 --> 01:42:34,720
को और जितना सम चैतन्य महाप्रभु

1366
01:42:34,720 --> 01:42:38,800
ने किसको गुरु माना है ईश्वर पुरी

1367
01:42:38,800 --> 01:42:41,960
उनके गुरु थे अच्छा चैतन्य महाप्रभु ने

1368
01:42:41,960 --> 01:42:46,680
किसकी जो टीका है उसे प्रमाणिक माना है शीत

1369
01:42:46,680 --> 01:42:50,840
स्वामी को बोला बताइए और जो श्रीमद भागवत

1370
01:42:50,840 --> 01:42:55,680
का ज्ञान है वो क्या मधवा परंपरा से उनके पास नहीं आ

1371
01:42:55,680 --> 01:43:00,400
पाया मैं बता रहा हूं आपको कि कौन से सिद्धांत मैच कर रहे हैं

1372
01:43:00,400 --> 01:43:04,640
मैं आपसे पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी से भागवत की व्याख्या उनके

1373
01:43:04,640 --> 01:43:08,960
पास आई कि नहीं आई भागवत की व्याख्या चत महा

1374
01:43:08,960 --> 01:43:14,760
पहुच ग से आई की नहीं

1375
01:43:14,760 --> 01:43:18,880
आईली मैं पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी से

1376
01:43:18,880 --> 01:43:23,440
भागवत की व्याख्या

1377
01:43:23,440 --> 01:43:27,440
श्रीधर स्वामी से भागवत सीख ली ना मैं आपसे यह पूछ रहा

1378
01:43:27,440 --> 01:43:31,960
हूं मधवा चार्य जी से आई उनके पास कि नहीं आई भागवत

1379
01:43:31,960 --> 01:43:36,240
मधवा चार्य के पास नहीं आई चैतन्य महाप्रभु ने मतलब चैतन्य

1380
01:43:36,240 --> 01:43:40,960
महाप्रभु के पास जो भागवत का ज्ञान है मधवा चार्य का नहीं है

1381
01:43:40,960 --> 01:43:44,960
मधवा चार्य के पास तो ब्रहम समिता भी नहीं लगी ी हाथ में पूछ

1382
01:43:44,960 --> 01:43:49,360
रहा हूं मैं आपसे भाई साहब जो पूछ रहा हूं वो मुझे बता दीजिए चैतन्य

1383
01:43:49,360 --> 01:43:53,400
महाप्रभु के पास जो भागवत की व्याख्या

1384
01:43:53,400 --> 01:43:58,360
का ज्ञान है वो मधवा चार्य से नहीं आया

1385
01:43:58,360 --> 01:44:02,680
आपका क्वेन गलत है आपका क्वेन होवा

1386
01:44:02,680 --> 01:44:07,400
से अग चन महाने भागवत सीखी आपका

1387
01:44:07,400 --> 01:44:11,480
में लिखा हुआ है शिव ही परमेश्वर है व वही विष्णु बनते हैं वही ब्रह्मा

1388
01:44:11,480 --> 01:44:15,920
बनते हैं मेरा क्वे नहीं है मेरा क्वेश्चन य है कि जब चैतन्य

1389
01:44:15,920 --> 01:44:19,920
महाप्रभु श्रीधर स्वामी जो पूरी पीठ के शंकराचार्य थे गोवर्धन मठ

1390
01:44:19,920 --> 01:44:24,240
के उनको जगतगुरु के रूप में स्वीकार कर रहे की टीका को प्रामाणिक

1391
01:44:24,240 --> 01:44:28,360
मान रहे हैं तो फिर आप उनको ना मानने वाले कैसे सिद्ध

1392
01:44:28,360 --> 01:44:32,560
हुए दूसरी बात क्या आप जो आज भागवत पढ़ रहे हैं वह

1393
01:44:32,560 --> 01:44:36,880
चैतन्य महाप्रभु के विरोध में तो नहीं है क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने उनकी भागवत

1394
01:44:36,880 --> 01:44:38,720
को प्रमाणिक स्वीकार

1395
01:44:38,720 --> 01:44:43,200
किया है तो क्या आप जो भागवत पढ़ रहे हैं वो सीदर

1396
01:44:43,200 --> 01:44:47,360
स्वामी से मैच खाती है कि नहीं खाती तो मैंने आपको बता दिया एक

1397
01:44:47,360 --> 01:44:51,520
पूरा का पूरा चैप्टर सीधरथ स्वामी की जो टीका है उसमें है

1398
01:44:51,520 --> 01:44:55,960
और आपकी जो टीका है पूरा का पूरा चैप्टर सत्यानाश कर दिया गया है गायब

1399
01:44:55,960 --> 01:45:00,400
है पूरा यब है पूरा चैप्टर गायब

1400
01:45:00,400 --> 01:45:04,880
है पूरा ही नहीं है भागवत

1401
01:45:04,880 --> 01:45:09,000
का भागवत का जो सप्ताह यज्ञ होता है भागवत ज सुनाई जाती है

1402
01:45:09,000 --> 01:45:13,040
पाठ किया जाता है यह सब होता है कैसे करना है कैसे नहीं

1403
01:45:13,040 --> 01:45:17,080
करना है यह सब उस चटर में लिखा होता है जिसम गणेश पूजन है इत्यादि

1404
01:45:17,080 --> 01:45:21,200
इत्यादि बहुत सी बातें है वो सब है ही

1405
01:45:21,200 --> 01:45:25,200
नहीं अग सर्वशक्तिमान गणेश पूजा का विधान कहा

1406
01:45:25,200 --> 01:45:29,720
से आया भाई साहब अभी हम बात कर रहे हैं कि आप श्रीधर

1407
01:45:29,720 --> 01:45:33,840
स्वामी को मानते हैं कि नहीं मानते हैं स्वामी को वैष्णव के रूप में स्वीकार

1408
01:45:33,840 --> 01:45:37,880
करते हैं उनके पास वैष्णव का किस परंपरा से कौन से आचार्य

1409
01:45:37,880 --> 01:45:42,360
के द्वारा ज्ञान आया मधवा संप्रदाय से आया दोनों को सिंथेटिक

1410
01:45:42,360 --> 01:45:46,800
करने का प्रयास कि गुरु मवा तक पहुचे कौन से

1411
01:45:46,800 --> 01:45:52,800
गुरु उनके गुरु का नाम क्या था जो मधवा चार परंपरा के थे

1412
01:45:55,400 --> 01:45:59,480
मधुवा संप्रदाय और शंकर संप्रदाय स्वामी के गुरु

1413
01:45:59,480 --> 01:46:04,200
का नाम क्या था जो मधवा चार परंपरा के थे

1414
01:46:04,200 --> 01:46:08,720
शंकर शर स्वामी ने दोनों को ही पढ़ा है मवा संप्रदाय को भी पढ़ा

1415
01:46:08,720 --> 01:46:12,720
है जो श्रीधर स्वामी है उनके कौन से

1416
01:46:12,720 --> 01:46:16,840
गुरु थे जो मधवा चार परंपरा के थे अरे भैया

1417
01:46:16,840 --> 01:46:21,040
मैं अगर ब्रह्म संप्रदाय में हूं मधवा संप्रदाय में हूं शंकर संप्रदाय की टीका

1418
01:46:21,040 --> 01:46:25,200
पढ़ रहा हूं तो गुरु स्वीकार करने की क्या जरूरत है बता वैष्णव स्वीकार कर रहे

1419
01:46:25,200 --> 01:46:29,280
हैं तो प्रामाणिक वैष्णव थे वो कि नहीं थे है वही थे मैं

1420
01:46:29,280 --> 01:46:33,400
तो वैष्णव ही स्वीकार कर रहा हूं उनको प्रामाणिक नहीं कर रहे

1421
01:46:33,400 --> 01:46:37,760
प्रामाणिक कर रहा हूं प्रामाणिक है तो उनके आचार्य का नाम क्या है जो मधुवा

1422
01:46:37,760 --> 01:46:41,960
से आ रहे थे अरे भैया

1423
01:46:41,960 --> 01:46:45,960
दोनों सिद्धांतों को पढ़ना है तो दोनों जगह गुरु बनाने पड़ेंगे क्या ये बताइ आपसे

1424
01:46:45,960 --> 01:46:50,520
पूछ रहा हूं कि अगर वो प्रामाणिक वैष्णव थे वो भी मधुवा चार परंपरा के

1425
01:46:50,520 --> 01:46:54,560
तो फिर उनके आचार्य का नाम क्या है जो कि पीछे से गुरु के

1426
01:46:54,560 --> 01:46:58,760
गुरु के गुरु के रूप में मधवा चार तक पहुंच गए

1427
01:46:58,760 --> 01:47:03,240
चारों संप्रदाय के अगर मे को विदान सूत्र की टीका पढ़नी हो

1428
01:47:03,240 --> 01:47:09,240
चारचार आपका कहना है कि शंकराचार्य का सिद्धांत वैष्णवास्त्र

1429
01:47:23,520 --> 01:47:28,200
किस शीर्ष पर बैठे हुए गुरु तक पहुंचे बताइए

1430
01:47:28,200 --> 01:47:32,520
मम ज्ञान या फिर उनका मनमुक ज्ञान था जिसको चैतन्य महाप्रभु ने स्वीकार

1431
01:47:32,520 --> 01:47:36,720
कर लिया मैं वही चीज पूछ रहा हूं आज मैं मधवा

1432
01:47:36,720 --> 01:47:40,720
संप्रदाय से हूं बाकी तीन संप्रदाय को को ज्ञान लेना है तो चार संप्रदाय में को दीक्षा

1433
01:47:40,720 --> 01:47:45,080
लेनी पड़ेगी गुरु स्वीकार करना पड़ेगा क्या अगर

1434
01:47:45,080 --> 01:47:49,160
पहली बात यह है कि चारों संप्रदाय की आप पढ़ाई करेंगे मगर आप माने उस

1435
01:47:49,160 --> 01:47:53,360
संप्रदाय के जाएंगे जिस संप्रदाय के सिद्धांतों का आपने साथ

1436
01:47:53,360 --> 01:47:57,480
करेंगे पढ़ाई सबकी कर लो मगर जिस संप्रदाय के सिद्धांतों को आप

1437
01:47:57,480 --> 01:48:01,560
आत्मसात करेंगे उस संप्रदाय के आप माने जाएंगे

1438
01:48:01,560 --> 01:48:05,600
अगर आपने सत स्वीकार अगर उन्होंने सिद्धांत स्वीकार

1439
01:48:05,600 --> 01:48:09,640
किया है वैष्णव मत का वो वैष्णव मत का जो ज्ञान

1440
01:48:09,640 --> 01:48:14,280
है व उनके पास कहां से आया क्या परंपरा है उनकी बताइए

1441
01:48:14,280 --> 01:48:18,280
आपने कहा व वैष्णव थे वो कौन से वव थे

1442
01:48:18,280 --> 01:48:23,040
और उनके गुरु का नाम क्या था उनके गुरु का नाम क्या था व कैसे परंपरा

1443
01:48:23,040 --> 01:48:27,120
मधवा चार्य तक बताइए मुझे नहीं पता मधवा

1444
01:48:27,120 --> 01:48:31,320
संप्रदाय को उन्होने पढ़ा तो भाई सी बोलो ना सीधे बोलो

1445
01:48:31,320 --> 01:48:35,920
ना नहीं पता करवाते हो

1446
01:48:35,920 --> 01:48:39,240
कर रहे हो फिर बोलोगे यही बोलो ना

1447
01:48:39,240 --> 01:48:43,800
क्या क्या क्वेश्चन किया मैंने बताइए आप

1448
01:48:43,800 --> 01:48:47,840
आपने बोला शी स्वामी से भागवत पढी चैतन्य महा ने

1449
01:48:47,840 --> 01:48:52,080
मैंने बोला आप ये क्लेम कर रहे हो कि श्रीधर स्वामी वैष्णव

1450
01:48:52,080 --> 01:48:56,520
थे सुनो आपने किया श स्वामी वैष्णव थे आपकी

1451
01:48:56,520 --> 01:49:01,000
भगवत गीता में लिखा है ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो

1452
01:49:01,000 --> 01:49:05,040
जब मैंने श्रीधर स्वामी के बारे में पूछा कि कौन सी परंपरा से उनके पास

1453
01:49:05,040 --> 01:49:09,040
तक ज्ञान आया आपको नहीं पता आप कैसे क्लेम कर रहे हो कि व प्रमाणिक

1454
01:49:09,040 --> 01:49:13,360
वैष्णव थे आप कहो मनमुक वैष्णव थे अगर वो मनमुक वैष्णव थे

1455
01:49:13,360 --> 01:49:17,400
तो उनकी जो भागवत है उसको प्रमाण के रूप में स्वीकार करने वाले आप

1456
01:49:17,400 --> 01:49:21,560
चैतन्य महाप्रभु को क्लेम कर रहे हो गुरु विरोधी सिद्ध कर रहे हो और अपने

1457
01:49:21,560 --> 01:49:25,840
चैतन्य महाप्रभु को क्लेम करने के कारण आप गुरु विरोधी सिद्ध हो रहे हो और

1458
01:49:25,840 --> 01:49:29,960
बोलो कुछ विरोधी सिद्ध नहीं हो रहा मैं जता

1459
01:49:29,960 --> 01:49:34,440
देख रही है आपको ना तो यह मालूम है कि आपकी जीबीसी आपका अंतिम निर्णायक

1460
01:49:34,440 --> 01:49:38,520
किस आधार पर कर रही है कौन से शास्त्रोक्त नियम है आपको ना तो यह मालूम है

1461
01:49:38,520 --> 01:49:42,640
कि जीव ब्रह्म में एक है तो वो शंकराचार्य वाले कैसे हो गए और मधवा

1462
01:49:42,640 --> 01:49:46,840
चार वाले कैसे हो गए शंकराचार्य वाले क्यों नहीं हुए हर बात को आप बदल रहे हैं

1463
01:49:46,840 --> 01:49:50,840
उसके बाद जब ये आया कि सीदर स्वामी की उससे आए हैं तो आपने फिर कह दिया कि

1464
01:49:50,840 --> 01:49:54,360
हमें नहीं पता भाई जब आपको कुछ पता ही नहीं है तो कोई

1465
01:49:54,360 --> 01:49:58,440
भी ठोस बात कहने के लिए आप कहां से अधिकृत हो गए जब

1466
01:49:58,440 --> 01:50:02,480
आपको किसी चीज का बेस ही नहीं है आपके पास एक मिनट तो आप कोई भी

1467
01:50:02,480 --> 01:50:06,800
सिद्धांत ठोस तरीके से कैसे कह रहे हैं मैंने जितने

1468
01:50:06,800 --> 01:50:10,920
भी आपको इतने बार बोला है कि मेरे को नहीं पता वो आपके जो बजले क्वेश्चन

1469
01:50:10,920 --> 01:50:15,280
है उसके ऊपर बोला कौन से ऐसा कुछ पता कौन से क्वेश्चन

1470
01:50:15,280 --> 01:50:19,280
है कौन से क्वेश्चन है निरा ये कहां

1471
01:50:19,280 --> 01:50:23,800
लिखा आपकी बात क मानी जाए कहां लिखा है चलो

1472
01:50:23,800 --> 01:50:28,000
मैं अपने क्वेन को शास्त्र से सिद्ध करूंगा आप मुझे शास्त्र

1473
01:50:28,000 --> 01:50:33,120
से बताइए मेरा क्वेश्चन क्यों गलत

1474
01:50:33,120 --> 01:50:38,800
है कौन सा क्वे था मैं आपको शास्त्र से सिद्ध

1475
01:50:38,800 --> 01:50:43,000
करूंगा मैं मैंने जो क्वेश्चन पूछा आपने कहा

1476
01:50:43,000 --> 01:50:47,480
आप सुनिए आपने कहा जो सर्वशक्तिमान वाला क्वेश्चन है बेजल है

1477
01:50:47,480 --> 01:50:51,760
मैं उसको शास्त्र से सिद्ध कर दू

1478
01:50:51,760 --> 01:50:54,160
सर्वशक्ति

1479
01:50:54,160 --> 01:50:58,160
क्या है आप बताइए आपके लोगों ने कहा है ईश्वर कुछ भी कर सकता

1480
01:50:58,160 --> 01:51:02,240
है प्रभुपाद जी ने लिखा है कि वो वो जो है क्या कहते प्रभुपाद जी ने

1481
01:51:02,240 --> 01:51:07,000
क्या कहा कि प्रभुपाद जी ने उनको कहा कि वो रासकल

1482
01:51:07,000 --> 01:51:11,200
रासकल शब्द का उपयोग किया ना क्यों

1483
01:51:11,200 --> 01:51:15,400
क्योंकि राल का अस्तित्व अगर दुनिया में है तो उसका अर्थ है

1484
01:51:15,400 --> 01:51:20,080
कि भगवान श्री कृष्ण में राल का तत्व भी है तभी तो दुनिया में अस्तित्व है राजल

1485
01:51:20,080 --> 01:51:26,080
का ब ल की

1486
01:51:27,160 --> 01:51:31,560
बताइए बात क्या चल रही

1487
01:51:31,560 --> 01:51:36,360
है नहीं उसका आप बात य कर रहेने कुछल

1488
01:51:36,360 --> 01:51:40,400
के प्रश्न किए आप बताइए के प्रश्न कौन से

1489
01:51:40,400 --> 01:51:45,720
है प्रश् कौन से

1490
01:51:45,720 --> 01:51:50,160
ौ किसको कहते बझे मैं आपको अच्छा चलिए राजल

1491
01:51:50,160 --> 01:51:54,360
का आप क्या बानते बताइए को क्या कहते है बताइए मुझे आप

1492
01:51:54,360 --> 01:51:59,160
मैं आपको पूछ रहा हूं रासकल का अर्थ आप बताइए उन्होंने जो रासकल है वो क्यों कहा

1493
01:51:59,160 --> 01:52:04,080
बताइए शास्त्र सेही बताऊंगा लंपट शब्द को क्या कहते हैं

1494
01:52:04,080 --> 01:52:08,080
लंपट शब्द जो चंचल बुद्धि का हो कहीं भी उसका मन आ जाता हो ये हो जाता हो

1495
01:52:08,080 --> 01:52:12,680
वो लपट ठीक है न क के लिए यूज की है

1496
01:52:12,680 --> 01:52:16,720
अरे तो मैं कहा कह रहा हूं कि उन्होने गलत किया है मैं यह कह रहा

1497
01:52:16,720 --> 01:52:20,800
हूं इस दुनिया में इस संसार में भाई मेरे थोड़ा थोड़ा

1498
01:52:20,800 --> 01:52:24,840
तो थोड़ा तो बुद्धि का इस्तेमाल किया करो मैं यह कह रहा हूं कि इस

1499
01:52:24,840 --> 01:52:28,960
दुनिया में संसार में अगर किसी भी चीज का अस्तित्व है तो

1500
01:52:28,960 --> 01:52:33,080
उसके कारण श्री कृष्ण है आपके जो प्रभुपाद है उनके भी

1501
01:52:33,080 --> 01:52:37,680
अनुसार इसीलिए उनको कहना पड़ा कि रासकल अगर रासकल

1502
01:52:37,680 --> 01:52:41,880
क्या शब्द था उनका अगर दुनिया में रास्कल डम है तो इसका

1503
01:52:41,880 --> 01:52:42,380
मतलब

1504
01:52:42,240 --> 01:52:46,480
यह है कि श्री कृष्ण में वो था इसीलिए है अगर श्री कृष्ण में रासकल डम

1505
01:52:46,480 --> 01:52:50,880
नहीं है तो फिर रा भी अस्तित्व में नहीं हो सकते

1506
01:52:50,880 --> 01:52:54,920
जीने नहीं बोला मतलब उन्होने स्वीकार किया कि अगर दुनिया में

1507
01:52:54,920 --> 01:52:59,080
रेप हो रहा है अगर दुनिया में रेप हो रहा है तो रेप का तत्व भी श्री

1508
01:52:59,080 --> 01:53:03,160
कृष्ण है अगर दुनिया में अपराध हो रहा है तो उसका भी श्री कृष्ण

1509
01:53:03,160 --> 01:53:08,520
है उनको आप सीमित नहीं कर

1510
01:53:08,520 --> 01:53:13,000
सकते आप खुद ही रेस्ट बना रहे हो भगवान को कृष्ण को ुद

1511
01:53:13,000 --> 01:53:17,920
बना दिया आपने अपने त

1512
01:53:17,920 --> 01:53:22,080
से भैया आप जा सकते हैं अच्छा लगा

1513
01:53:22,080 --> 01:53:26,200
आपसे बा करके हमारी आपकी चर्चा देख ली लोगों ने अब चर्चा का जो रुख

1514
01:53:26,200 --> 01:53:30,560
है वो मुड़ रहा है आप यह बताइए

1515
01:53:30,560 --> 01:53:34,800
आप एक बात बताइए आप जो चिल्ला रहे हैं कि हमने श्री कृष्ण को रेपिस्ट

1516
01:53:34,800 --> 01:53:38,840
बनाया पहली बात तो मैं यह कहूंगा इसका अर्थ यह है कि श्री

1517
01:53:38,840 --> 01:53:44,840
कृष्ण जहां पर रेप हो रहा है वह जगह श्री कृष्ण की सत्ता में नहीं

1518
01:53:44,880 --> 01:53:48,880
है सब कुछ कृष्ण की सत्ता में है लेकिन आत्मा रेप कर रहा है भगवान

1519
01:53:48,880 --> 01:53:53,120
रेप कर र है क्या वो इंसान रेप कर रहा है क्या को रोक सकते

1520
01:53:53,120 --> 01:53:57,160
हैं जो हो रहा है इच्छा शक्ति जीवात्मा

1521
01:53:57,160 --> 01:54:01,520
के पास है मैं आपको पूछ रहा हूं रोक सकते हैं

1522
01:54:01,520 --> 01:54:05,600
फ्री विल में किसी में इंटरफेयर नहीं करते नहीं रोक सकते

1523
01:54:05,600 --> 01:54:09,840
नहीं रोक सकते इ नहीं रोक सकते इच्छा शक्ति

1524
01:54:09,840 --> 01:54:14,000
में कि मतलब मतलब ईश्वर यहां भी आपका बा देता है अगर कोई

1525
01:54:14,000 --> 01:54:18,480
अपराधी अपराध कर रहा है व उसको रोक नहीं सकते क्यों बाद

1526
01:54:18,480 --> 01:54:22,560
है मैं पूछ रहा हूं अपराधी को अपराध करने से रोक सकते हैं

1527
01:54:22,560 --> 01:54:26,800
नहीं रोक सकते अरे प्रभु जी अपराध करने से रोक सकते भौतिक

1528
01:54:26,800 --> 01:54:31,040
जगत बनाया क्यों भगवान ने फिर इसका मतलब वो य भी बाधित है

1529
01:54:31,040 --> 01:54:32,960
यह बोलोना नहीं रोक सकते आगे

1530
01:54:32,960 --> 01:54:36,360
बढ़ते है

1531
01:54:36,360 --> 01:54:40,600
है अच्छा ठीक है नहीं रोक सकते मगर बाधित नहीं है

1532
01:54:40,600 --> 01:54:44,640
अरे भया जीवात्मा के पास इच्छा शक्ति है नहीं आपने कहा वो सब कुछ कर सकते

1533
01:54:44,640 --> 01:54:48,640
हैं आपने सब कुछ कर सकते मगर अपराधी को अपराध

1534
01:54:48,640 --> 01:54:53,080
करने से रोक नहीं सकते आप य क्वेन बताइर जी

1535
01:54:53,080 --> 01:54:57,320
आत्मा के पास इच्छा शक्ति है आपने आक्षेप लगाया है अब इसको तोड़ लेंगे बिल्कुल अब

1536
01:54:57,320 --> 01:55:01,360
इसकी बाल की ल निकाल लेंगे अब मैं पूछ रहा हूं आपसे आपने कहा वो सब कुछ कर

1537
01:55:01,360 --> 01:55:05,440
सकते हैं मगर अपराधी को अपराध करने से रोक नहीं सकते इच्छा

1538
01:55:05,440 --> 01:55:09,640
शक्ति है क्या नहीं है जीवात्मा के पास पूछ रहा हूं को रोक सकते हैं कि नहीं अपराधी

1539
01:55:09,640 --> 01:55:13,760
को अपराध करने से वही आंसर दे रहा हूं इा शक्ति

1540
01:55:13,760 --> 01:55:17,800
है मतलब कि नहीं अरे भाई मुझे बताओ रोक सकते हैं कि

1541
01:55:17,800 --> 01:55:23,760
नहीं इच्छा शक्ति बताओ जीवात्मा के पास है या नहीं है

1542
01:55:23,760 --> 01:55:27,840
मैं मवा संप्रदाय सकता हूं रावण संप्रदाय में भी सता हूं शंकर संप्रदाय में

1543
01:55:27,840 --> 01:55:33,840
भी सतां क दू के आत्महत्या कर सकता

1544
01:55:36,520 --> 01:55:40,760
हूं मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा है सिंपल सा आपने कहा

1545
01:55:40,760 --> 01:55:44,920
भाई साहब भाई साहब भाई साहब देखिए मैं इसको व्यवहारिक रूप से पूरी करना चाहता

1546
01:55:44,920 --> 01:55:49,080
हूं चर्चा को द्वंद नहीं लाना चाहता हूं मैं कह रहा हूं क्या

1547
01:55:49,080 --> 01:55:53,200
अगर आपका अनुसार अगर आत्मा की अपनी इच्छा शक्ति

1548
01:55:53,200 --> 01:55:57,360
है तो इसका मतलब यह है कि भगवान आत्मा की जो फ्री

1549
01:55:57,360 --> 01:56:01,400
विल है गलत कार्य करने की उसमें रोक नहीं सकते

1550
01:56:01,400 --> 01:56:06,440
उसे इंटरफेयर नहीं करते इर

1551
01:56:06,440 --> 01:56:11,080
कर सकते हैं कि नहीं कर सकते हैं लेकिन इंटरफेयर नहीं करते

1552
01:56:11,080 --> 01:56:15,160
भगवान कर सकते हैं कोई मायावादी ब कोई भक्त

1553
01:56:15,160 --> 01:56:19,520
ब के पास इसका मतलब कर सकते हैं ना

1554
01:56:19,520 --> 01:56:24,240
कर सकते हैं ना कर सकते

1555
01:56:24,240 --> 01:56:29,320
अब एक बात और पूछ लेता हूं विष्णु और कृष्ण में भेद मानते हो क्या आप

1556
01:56:29,320 --> 01:56:33,520
जीमा में भेद मानते हो क्या विष्णु

1557
01:56:33,520 --> 01:56:37,720
और कृष्ण में भेद मानते हो क्या दोनों एक मंच पर खड़े करें तो राम

1558
01:56:37,720 --> 01:56:42,680
कृष्ण विष्णु में कोई भेद नहीं है ठीक है

1559
01:56:42,680 --> 01:56:46,800
किसी लेडीज को मातृ शक्ति को

1560
01:56:46,800 --> 01:56:51,080
उसके पति का रूप धारण करके और

1561
01:56:51,080 --> 01:56:55,760
उसके साथ संबंध बनाना क्या ये

1562
01:56:55,760 --> 01:56:59,880
अनैतिक क्रिया में आएगा या नहीं आएगा किसके लिए

1563
01:56:59,880 --> 01:57:03,880
यूज कर रहे हो जीवात्मा के लिए भगवान के लिए आपने कहा ना कि हमने

1564
01:57:03,880 --> 01:57:08,000
भगवान को रेपिस्ट बनाया है हम तो

1565
01:57:08,000 --> 01:57:12,080
ये कही रहे भगवान के ऊपर कोई दोष नहीं लगता आपने

1566
01:57:12,080 --> 01:57:16,280
व रा क्योंकि वो ईश्वर

1567
01:57:16,280 --> 01:57:20,480
है आप कह रहे हो कि नहीं भाई ईश्वर अगर कुछ कर रहा उसको भी दोष लग जाएगा

1568
01:57:20,480 --> 01:57:25,240
उसको दोष मत लगाओ अब मैं पूछ क्यों ईश्वर को क्यों दोष नहीं

1569
01:57:25,240 --> 01:57:29,760
आपने इतने दोष नहीं लगेगा क्योंकि ईश्वर के लिए ईश्वर जो है

1570
01:57:29,760 --> 01:57:34,040
इसलिए दोष नहीं लगता इसलिए दोष नहीं लगता क्योंकि ईश्वर

1571
01:57:34,040 --> 01:57:38,160
के पास सम दृष्टि है उनको अच्छे बुरे में वो

1572
01:57:38,160 --> 01:57:39,440
जानते हैं कि यह सब

1573
01:57:39,440 --> 01:57:43,960
जो प्रपंच है यह माया के द्वारा उत्पन्न प्रपंच है मुक्त है वो

1574
01:57:43,960 --> 01:57:47,960
वह किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होते हैं जो भगवत गीता में दो

1575
01:57:47,960 --> 01:57:52,200
2 17 से 2 31 तक भगवान ने बताया आगे भी बताया

1576
01:57:52,200 --> 01:57:56,320
सम दृष्टि पांचवे अध्याय में सम दृष्टि अच्छे और बुरे

1577
01:57:56,320 --> 01:58:00,560
में दृष्टि भेद अच्छे और बुरे का दृष्टि भेद अच्छे और बुरे

1578
01:58:00,560 --> 01:58:04,560
का दृष्टि भेद हमारे लिए है भगवान के लिए

1579
01:58:04,560 --> 01:58:08,600
नहीं है इसलिए भगवान कुछ भी कर सकते हैं भगवान पर

1580
01:58:08,600 --> 01:58:12,760
दोष इसलिए नहीं लगता है क्योंकि व एक पेंटर है उन्होंने पेंटिंग बनाई

1581
01:58:12,760 --> 01:58:16,760
है उसम फिर वो आंखों में कलर भरे या दूसरे अंगों में कलर

1582
01:58:16,760 --> 01:58:21,520
भरे उनके लिए सब एक समान है हमारे लिए है क्योंकि हम उस पेंटिंग के अंदर फसे हुए

1583
01:58:21,520 --> 01:58:25,760
हमारे लिए य भेद है इसलिए भगवान प दोष नहीं लगता आप

1584
01:58:25,760 --> 01:58:30,080
हर चीज तर्क से ही देते हो प्रमाण नहीं है आपके पास बता रहा हूं आपको

1585
01:58:30,080 --> 01:58:34,120
मैंने आपको प्रमाण दिया आपने कहा कि ईश्वर ईश्वर जो है वो नहीं

1586
01:58:34,120 --> 01:58:38,280
कर सकता बिना अरे भाई सुनो प्रमाण बता रहा हूं आपको

1587
01:58:38,280 --> 01:58:42,480
यार प्रमाण ज बता रहा हूं भाई साहब मैं आपको

1588
01:58:42,480 --> 01:58:46,840
प्रमाण बता रहा हूं आपने कहा कि ईश्वर को ईश्वर

1589
01:58:46,840 --> 01:58:50,920
जो है आप जो है ईश्वर को रेपिस्ट बना रहे हो वृंदा के साथ

1590
01:58:50,920 --> 01:58:54,560
उसकी इच्छा के बिना उद्देश्य अच्छा था मगर

1591
01:58:54,560 --> 01:58:58,680
उसकी इच्छा के बिना भगवान विष्णु ने उनके पति का रूप

1592
01:58:58,680 --> 01:59:02,800
धारण करके संबंध बनाया कि नहीं बनाया भगवान वह

1593
01:59:02,800 --> 01:59:06,800
है जो कुछ भी कर सकता है उसे किसी सीमा में आप बांध नहीं सकते अब यह

1594
01:59:06,800 --> 01:59:11,200
प्रमाण दू आपको मैं निकाल के आप मानते हो इसको

1595
01:59:11,200 --> 01:59:15,560
बो बो बोलो बोलो

1596
01:59:15,560 --> 01:59:19,920
के साथ भगवान ने संबंध बनाया

1597
01:59:19,920 --> 01:59:25,360
विंदा देवी के साथ संबंध बनाया तो वि देवी को विरोध करना

1598
01:59:25,360 --> 01:59:29,720
चाहिए देख रहे हैं ना भाई साहब आप इन सब की बातें

1599
01:59:29,720 --> 01:59:34,360
मैं वही बता रहा हूं आपको धारण करके पति का रूप धारण करके

1600
01:59:34,360 --> 01:59:38,960
संबंध बनाया था क्यों होती है क्यों होती है फ

1601
01:59:38,960 --> 01:59:43,120
के साथ विष्णु तव की पूजा कर लो कितनी बकवास

1602
01:59:43,120 --> 01:59:47,360
करोगे मेरे भाई तुम वहा वृंदा जी को इतना दुख हुआ था वृंदा

1603
01:59:47,360 --> 01:59:51,480
जी को इतना दुख हुआ था वहां पर वृंदा जी को इतना दुख हुआ था कि उन्होंने

1604
01:59:51,480 --> 01:59:56,640
आत्म कर लिया था और उसके बाद उसके बाद

1605
01:59:56,640 --> 02:00:00,720
जो उसके बाद जो

1606
02:00:00,720 --> 02:00:04,800
उसके बाद जो भगवान विष्णु है वो भी दुख में हील हो गए थे उसके बाद उनको कई प्रकार की

1607
02:00:04,800 --> 02:00:09,080
चीज हुई जब उन्होंने उनका जो है तुलसी माता के रूप में पुनर्जन्म

1608
02:00:09,080 --> 02:00:09,800
हुआ जब गौरी

1609
02:00:09,800 --> 02:00:14,120
माता से पांच रूपों में प्रकट

1610
02:00:14,120 --> 02:00:18,360
हुई हमा बा ठीक है हमारी बात सुन ली है लोगों ने

1611
02:00:18,360 --> 02:00:22,400
आपका अगर कोई आपकी

1612
02:00:22,400 --> 02:00:26,480
और हमारी दोनों की बातें सुन ली है हां ये

1613
02:00:26,480 --> 02:00:30,480
देखिए शिवांश जी क्या भौतिक जगत आध्यात्मिक जगत का कोई

1614
02:00:30,480 --> 02:00:34,760
ज्ञान नहीं है ये देख लीजिए यही हम कहते हैं भौतिक और आध्यात्मिक

1615
02:00:34,760 --> 02:00:38,840
वही है व्यवहारिक और परमार्थिक बोलने से कुछ नहीं होता एक

1616
02:00:38,840 --> 02:00:43,080
बोल बोलने से कुछ नहीं होता ठीक है भाई साहब आपको

1617
02:00:43,080 --> 02:00:47,160
आपको कुछ और कहना है आप आप य अपना कुछ करके आप जा सकते हैं

1618
02:00:47,160 --> 02:00:51,280
आपको मैंने बोलने का वो दिया आप कह लीजिए बताया सुख

1619
02:00:51,280 --> 02:00:55,440
दुख से परे भौतिक प्रपंच से परे हैं और यहां पर बोल रहे हैं कि उनका संग करके दुख

1620
02:00:55,440 --> 02:00:59,480
में वेवल हो गए को बता रहा हूं कि हम जो ईश्वर कुछ भी कर सकता

1621
02:00:59,480 --> 02:01:03,600
है कहते हैं वो इसलिए कहते हैं क्योंकि उन पर कोई दोष नहीं लगता आप

1622
02:01:03,600 --> 02:01:07,720
दोष ही कह रहे हैं मैं विल क्यों हो मैं बात नहीं कर सकता आपसे

1623
02:01:07,720 --> 02:01:13,720
आप जाइए हा

1624
02:01:23,160 --> 02:01:25,840
जय श्री राम

1625
02:01:25,840 --> 02:01:31,240
शवा जय श्री राम अभी

1626
02:01:31,240 --> 02:01:35,440
इसन से जो आप चर्चा कर रहे थे देखिए मेरे को कोई स्कन

1627
02:01:35,440 --> 02:01:39,880
से कोई प्रॉब्लम नहीं है और मैंकन को देखा मैं कोई विरोध नहीं कर रन

1628
02:01:39,880 --> 02:01:44,680
भी अच्छा काम ही कर है हा मुझे यह है कि दो चार बात उनकी समझ में नहीं आती

1629
02:01:44,680 --> 02:01:48,760
ले चीज बताऊ मेरे पास जैसे कन की भी गीता है और मेरे

1630
02:01:48,760 --> 02:01:53,000
पास य गीता प्रस की दो गीता है एक मेरे पास देखिए एक

1631
02:01:53,000 --> 02:01:57,360
मेरे पास य तत्व गीता जयदयाल गोका जी की यह 2000

1632
02:01:57,360 --> 02:02:01,960
2001 की है इसलिए बहुत पुराना य लग संस्करण तो

1633
02:02:01,960 --> 02:02:06,000
मैंने इसको पहले पढ़ा और जोकन वाली गीता इकन का

1634
02:02:06,000 --> 02:02:10,160
ट्रांसलेशन इसका ट्रांसलेशन व्याख्या एक मिनट एक बात कह दू

1635
02:02:10,160 --> 02:02:14,520
उनके जाने पर जो बात मैं समझाना चाह रहा हूं

1636
02:02:14,520 --> 02:02:18,640
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है उसकी वो सम दृष्टि

1637
02:02:18,640 --> 02:02:22,760
समत्व दृष्टि वाला है उसके लिए कुछ अच्छा या बुरा

1638
02:02:22,760 --> 02:02:27,000
का भेद नहीं है और यह बात जो मैं समझाना

1639
02:02:27,000 --> 02:02:31,200
चाह रहा हूं कि ईश्वर व्यवहार में आकर के लीला पूर्वक कुछ भी कर सकते हैं वही

1640
02:02:31,200 --> 02:02:35,840
बात अब वो बोल रहे हैं कि देखो देखो तुमने जो है वहां पर ईश्वर ने जो

1641
02:02:35,840 --> 02:02:38,280
क्या कहते हैं आध्यात्मिक दृष्टि से जो कार्य किया

1642
02:02:38,280 --> 02:02:42,280
उसको जो ईश्वर के ऊपर दोष मर दिया मैं दोष नहीं मढ रहा हूं आप दोष

1643
02:02:42,280 --> 02:02:48,280
मर रहे हैं अथवा दोष ना मरने की आड़ में आप ईश्वर को सीमित कर रहे

1644
02:02:48,440 --> 02:02:52,520
हैं और फिर वो मेरी ही बात मुझको बता रहे हैं जो अभी इससे

1645
02:02:52,520 --> 02:02:56,920
पहले मैं समझा रहा था कि ईश्वर कुछ भी करता है मगर उसके ऊपर दोष नहीं लगता प्रमाण

1646
02:02:56,920 --> 02:03:01,120
भी है भगवत गीता में उन्होंने कहा कि मुझे कर्म लिप्त नहीं करते मैं सभी कर्मों

1647
02:03:01,120 --> 02:03:05,160
को करता करने वाला होते हुए भी अकता ही हूं मैं सब कुछ कर

1648
02:03:05,160 --> 02:03:09,280
रहा हूं मैं अपराधियों को जन्म देने वाला भी हूं मैं साधुओं को जन्म

1649
02:03:09,280 --> 02:03:13,320
देने वाला भी पूरी सृष्टि मैंने बनाई है पाप पुण्य सबका

1650
02:03:13,320 --> 02:03:17,480
निर्माता मैं ही हूं फिर भी क्योंकि मेरी दृष्टि में मैं मुक्त

1651
02:03:17,480 --> 02:03:21,920
हूं मेरी दृष्टि में मैं प्रभावित नहीं हूं इस सांसारिक प्रपंच से

1652
02:03:21,920 --> 02:03:26,520
इसलिए मैं सब कुछ करते हुए भी अकता हूं

1653
02:03:26,520 --> 02:03:30,560
वहा तो काल ने बोली है ना मगर

1654
02:03:30,560 --> 02:03:34,680
मगर क्या हुआ अब यह जब मैंने बताया तो नहीं नहीं आप जो है ईश्वर को यह दोष

1655
02:03:34,680 --> 02:03:38,760
लगा रहे हो वो दोष लगा रहे हो और उसके बाद फिर खुद कह रहे हैं कि अरे तुमने

1656
02:03:38,760 --> 02:03:44,520
व वृंदा वाले भाई भाई तो मैं भी आपको समझाना चाह रहा हूं जो अब आप मुझे समझा रहे

1657
02:03:44,520 --> 02:03:48,560
हो जी बोलिए तो पहले मेरे

1658
02:03:48,560 --> 02:03:52,600
पास जो त गीता है जयल गो जी की मैं वोन की

1659
02:03:52,600 --> 02:03:53,480
गीता ली

1660
02:03:53,480 --> 02:03:57,480
दोनों का मैंने व्याख्या और दोनों का किया तो मुझे उसमें थोड़े थोड़े कांट्रडिक्शन

1661
02:03:57,480 --> 02:04:02,120
मिले फिर अब एक मेरे पास एक ये है य सा जीी का

1662
02:04:02,120 --> 02:04:06,400
जी मैंने इस लिया अब ये यह तो बहुत बड़ी टीका है तो मैंने पहले

1663
02:04:06,400 --> 02:04:10,680
इसका और इसकन का मैंने पहले अध्याय के साथ किया तो उसमें भी क

1664
02:04:10,680 --> 02:04:14,800
लेकिन ये बड़ी बड़ी है तो व्याख्या छोड़ के फिर मैंने ये राम सुख

1665
02:04:14,800 --> 02:04:19,040
दास जी के अथ के साथन के साथ मैंने खाली किया दूसरे अध से अध्याय

1666
02:04:19,040 --> 02:04:23,320
तो मुझे बहुत जगह जगह मुझे अलग अलग बात मिली उम दोनों

1667
02:04:23,320 --> 02:04:27,320
में मैंने हाईलाइट भी करके रखे पन से

1668
02:04:27,320 --> 02:04:31,600
बताओ बता और कोई आना चाहता है तो आप लिंक

1669
02:04:31,600 --> 02:04:35,760
शेयर कर दीजिए व आ सकता है अभी भव्य राधा

1670
02:04:35,760 --> 02:04:39,840
कृष्ण दास जी को देखा मैंने कमेंट बॉक्स प उसको

1671
02:04:39,840 --> 02:04:45,200
अरदित व्यक्ति है उसको तमीज नहीं बात करने

1672
02:04:45,200 --> 02:04:49,280
की उनको जानता हूं मैं दो तीन बार उनके साथ बात कर चुका

1673
02:04:49,280 --> 02:04:53,760
हूं वो तीन घंटे का व तो थोड़ा सा मेरा भी स

1674
02:04:53,760 --> 02:04:57,880
स कर देने वाला विषय था ो कोई बात नहीं

1675
02:04:57,880 --> 02:05:02,360
क्या

1676
02:05:02,360 --> 02:05:06,160
फता है

1677
02:05:06,160 --> 02:05:10,640
ना ब राधा कृष्ण दास को उसके मां बाप के द्वारा अच्छे संस्कार

1678
02:05:10,640 --> 02:05:14,800
आचरण वगैरह नहीं मिले हैं किसे कैसी बात करनी उसको नहीं आता

1679
02:05:14,800 --> 02:05:19,680
है और वो जो बदतमीज करता है या

1680
02:05:19,680 --> 02:05:24,000
यह सब चीज जो वो करता है उसका उपयुक्त उत्तर दिया जा सकता है

1681
02:05:24,000 --> 02:05:28,000
समय के अभाव के नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण वो स्वयं को समझ रहा होगा कि मैं

1682
02:05:28,000 --> 02:05:32,160
सामर्थ्य वान और जिसके लिए मैं प्रतिकारा क्मक व्यवहार कर रहा हूं

1683
02:05:32,160 --> 02:05:37,800
वो अस असाम वान है तोय उसकी भूल है

1684
02:05:37,800 --> 02:05:41,840
और आवश्यकता पड़ी तो ठोस कदम भी उठा लिए जाएंगे

1685
02:05:41,840 --> 02:05:45,880
जी अगर लाइव में जुड़े हुए तो मैं उनको यही बोलूंगा कि मैं कुछ देखो

1686
02:05:45,880 --> 02:05:50,000
इसकन के लिए मैं कुछ गलत नहीं कह रहा हां लेकिन जो मैंने गीता से बताया जो मुझको मतलब

1687
02:05:50,000 --> 02:05:54,640
जैसा लगा वो सब मैंने अपनी बातें बता दी तो

1688
02:05:54,640 --> 02:05:58,760
आप बस आप करते रहो कोई हमको कोई किसी से ै

1689
02:05:58,760 --> 02:06:00,240
विरोध नहीं है बस हम अपना सनातन के

1690
02:06:00,240 --> 02:06:04,960
लिए काम करते रहे बस जा सी सबके रास्ते अपने अपने है

1691
02:06:04,960 --> 02:06:09,520
सनातन क्या है विशाल भाया जी जी

1692
02:06:09,520 --> 02:06:12,640
सनातन क्या

1693
02:06:12,640 --> 02:06:16,960
है जो जो आदि से रहि जो

1694
02:06:16,960 --> 02:06:22,560
अनादि काल से वही सनातन है कुरान का अल्ला सनातन है क्या

1695
02:06:22,560 --> 02:06:26,640
कुरान का अल्लाह सनातन है अब उनके बारे में इतना मुझे थोड़ी

1696
02:06:26,640 --> 02:06:31,680
मालूम है दूसरे धर्मों का वो धर्म है आपके अनुसार

1697
02:06:31,680 --> 02:06:35,960
कुरान मजहब है धर्म

1698
02:06:35,960 --> 02:06:40,160
सनातन कुरान का अल्ला ये कह रहा है कि 611 में मेरी संतान

1699
02:06:40,160 --> 02:06:44,200
जन्म नहीं ले सकती इन्होंने ये कोट किया है कि कृष्ण और अल्लाह एक

1700
02:06:44,200 --> 02:06:48,200
है इनके अधिकृत व्यक्तियों ने भी उनकी किताबों में भी कितना भी

1701
02:06:48,200 --> 02:06:51,640
उससे बचने का प्रयास कर ले

1702
02:06:51,640 --> 02:06:56,080
मगर ये ये फैलाते हैं कि कृष्ण क्राइस्ट और अल्लाह एक

1703
02:06:56,080 --> 02:07:00,480
है तो फिर वो जब जिसमें अल्लाह आ गया जिसमें कृष्ण आ गया

1704
02:07:00,480 --> 02:07:05,800
वो सनातन कहां से हो गया मैंने

1705
02:07:05,800 --> 02:07:09,880
सुनि सुनि सुनि एक चीज बस एक चीज और मैंने

1706
02:07:09,880 --> 02:07:14,040
भ राधा कृष्ण दास जी को एक बार इंस्टा पर कमेंट में बोला लाइव में कि भगवान

1707
02:07:14,040 --> 02:07:15,360
श्री कृष्ण श उन्होने

1708
02:07:15,360 --> 02:07:19,360
क नहीं है मैंने उनको विष्णु पुराण का दिखाया विष्णु पुराण के

1709
02:07:19,360 --> 02:07:23,440
पांच अंश में जब श्री कृष्ण बाणासुर का य होता जो भगवान शिव बाणासुर के सपोर्ट

1710
02:07:23,440 --> 02:07:27,600
में युद्ध करते हैं तो आप पाचवा पेंगे उसम श्री कृष्ण ने बोला

1711
02:07:27,600 --> 02:07:32,240
है कि भगवान शिव को कि हम लोग एकही है बस जो बुद्धिजीवी

1712
02:07:32,240 --> 02:07:36,400
लोग है वही हम लोगों में अज्ञानी लोग जो है वही हमें भेद दृष्टि करते हैं वो जब चीज मैंने

1713
02:07:36,400 --> 02:07:40,400
उनको दिखाई राध कृष्ण दास जी को इन्होने मेरे को बोला की गीता प्रेस वालों ने उन

1714
02:07:40,400 --> 02:07:45,320
लोको के गलत अर्थ किए हुए

1715
02:07:45,320 --> 02:07:49,400
हैं यह बोला गीता प्र गोरखपुर वालो ने

1716
02:07:49,400 --> 02:07:53,440
गलत अर्थ किए है भाई किसी ने भी किसी से किया हो ना तो

1717
02:07:53,440 --> 02:07:57,600
इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्योंकि इनके अर्थ गीता के बदल

1718
02:07:57,600 --> 02:08:01,720
रहे हैं तो प्रभुपाद जी को मानने वाले सिद्ध नहीं हुए क्योंकि

1719
02:08:01,720 --> 02:08:06,160
ये चेतन महाप्रभु के द्वारा स्वीकारी गई जो श्रीमद् भागवत है

1720
02:08:06,160 --> 02:08:10,320
ये उसको पढ़ने वाले नहीं है तो फिर य चेतन महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध नहीं हुए

1721
02:08:10,320 --> 02:08:14,720
क्योंकि मधवा चार्य जी ने जो भागवत दिया या मधवा चार्य जी का जो ज्ञान है वो

1722
02:08:14,720 --> 02:08:19,520
भागवत में य नहीं पढ़ रहे हैं तो ये मधवा चार को मानने वाले सिद्ध नहीं हो रहे हैं

1723
02:08:19,520 --> 02:08:23,800
और क्योंकि इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है सब कुछ कर सकने वाला नहीं है वादित है

1724
02:08:23,800 --> 02:08:28,120
तो ये कृष्ण को कृष्ण ईश्वर मानने वाले सिद्ध नहीं हो रहे हैं तो सिद्ध क्या

1725
02:08:28,120 --> 02:08:30,360
होंगे जो मधु संप्रदाय जैसे

1726
02:08:30,360 --> 02:08:34,400
शंकराचा जी वो तो अद्वैत को मानने वाले थे और जो मधवा चार्य जी है वो तो द्वैतवाद

1727
02:08:34,400 --> 02:08:38,600
में मानने वाले थे मैंने ये सुना है तो फिर

1728
02:08:38,600 --> 02:08:43,040
आपने खिचड़ी बना रखी है इसकी ईट इसका रोड़ा भानी मती का कुनबा जोड़ा

1729
02:08:43,040 --> 02:08:47,400
और फिर बताते हो कि हम जो है परंपरा परंपरा परंपरा पूछो तो परंपरा

1730
02:08:47,400 --> 02:08:51,440
में अंतिम निर्णायक वो होगा जो आपके जो आचार्य की गद्दी है उस पर जो आज बैठा होगा व

1731
02:08:51,440 --> 02:08:56,000
परंपरा में अंतिम निर्णायक होगा अंतिम निर्णायक कौन है भाई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स

1732
02:08:56,000 --> 02:09:00,040
जीबीसी जिसमें कोई बच्चा भी हो सकता है कोई ब्रह्मचारी भी हो

1733
02:09:00,040 --> 02:09:04,080
सकता है कोई सन्यासी भी हो सकता है यहां का कोई सन्यासी है

1734
02:09:04,080 --> 02:09:08,160
उसको अथॉरिटी कौन है उसमें किसी गृहस्थ की वो अपना

1735
02:09:08,160 --> 02:09:12,240
वोट दे रहा है वहां प ये ये सनातन सिद्धांत है ये

1736
02:09:12,240 --> 02:09:16,680
सनातन संस्था है वृंदावन धाम में संप्रदाय

1737
02:09:16,680 --> 02:09:21,640
नाम तो ले लिया मगर संप्रदाय कहां है इसमें काम तो कर

1738
02:09:21,640 --> 02:09:25,640
की तरर है जी वृंदावन धाम में जो राधा रमण

1739
02:09:25,640 --> 02:09:30,440
जी का मंदिर है

1740
02:09:30,440 --> 02:09:36,360
ना तो जो उनकी जो मेन वो जो है श्री पुंडरी गोस्वामी

1741
02:09:36,360 --> 02:09:40,360
जी पुंडरी गोस्वामी जी वो भी वैसे

1742
02:09:40,360 --> 02:09:44,680
गौड़ी संप्रदाय से ही है वो भी श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को ही फॉलो करने वाले हैं

1743
02:09:44,680 --> 02:09:48,800
वो उनकी जो धर्मपत्नी है श्री श्रीमती रेणुका गोस्वामी जी

1744
02:09:48,800 --> 02:09:52,840
तो उन्होंने भी भगवान शिव और श्री कृष्ण एक ही माने और वो उन्हीं

1745
02:09:52,840 --> 02:09:56,840
के मा वो गयस वो शुद्ध परंपरा को फॉलो करने वाले हैं

1746
02:09:56,840 --> 02:10:01,000
वो हम मैंने उनके देखे

1747
02:10:01,000 --> 02:10:04,440
हैं

1748
02:10:04,440 --> 02:10:08,600
हम अभी एक जनाब कह रहे थे कि वो कृष्ण

1749
02:10:08,600 --> 02:10:13,520
उसको कहां कहा एक आत्म साक्षात्कार का विज्ञान पढ़िए

1750
02:10:13,520 --> 02:10:17,600
जगह जगह लिखा हुआ है फिलहाल मैं आपको एक मोटा मोटा दिखा दूं

1751
02:10:17,600 --> 02:10:22,040
ये कन की बुक है श्री कृष्ण

1752
02:10:22,040 --> 02:10:26,040
मेरे पास हैय पड़ी है इसमें सबसे पहली

1753
02:10:26,040 --> 02:10:30,960
लाइन क्या लिखी है फ्रंट पेज पर ही अल्लाह

1754
02:10:30,960 --> 02:10:35,640
बुद्ध यहोवा सब एक है

1755
02:10:35,640 --> 02:10:41,160
राम सब एक

1756
02:10:41,160 --> 02:10:45,520
है अब यह लोग यह कहते शंकराचार्य ने यह कहा वो कहा भाई खंडन

1757
02:10:45,520 --> 02:10:50,080
कर दिया ना सीधा सधा बोल के किया खंडन आप करवा दो किसी

1758
02:10:50,080 --> 02:10:54,560
अपने बड़े आचार्य से

1759
02:10:54,560 --> 02:10:59,280
यह मायावा से होता क्या

1760
02:10:59,280 --> 02:11:05,280
है यह मायावा होता क्या है

1761
02:11:05,640 --> 02:11:10,120
वैसे व्याख्या हो जाएगी चलिए

1762
02:11:10,120 --> 02:11:13,160
चलिए मैं अभी चलता

1763
02:11:13,160 --> 02:11:17,400
हूं और बताइए आप कुछ और

1764
02:11:17,400 --> 02:11:21,640
बताइए क्या मैं हा बस

1765
02:11:21,640 --> 02:11:27,160
यही था वो जो उन्होने जो आप कुछ प्रमाण लेकर आए थे ना दिखाने के

1766
02:11:27,160 --> 02:11:31,240
लिए प्रमाण हा वैसे अभी आप इन दिनों से आप वो

1767
02:11:31,240 --> 02:11:35,280
कबीर वालों के साथ डिबेट कर थे आपका पता है क्या आप उन ग्रंथों से उनका खंडन करते हो

1768
02:11:35,280 --> 02:11:39,400
जिस ये लोग बोलते जैसे देवी भागवत हो गई गीता हो गई मैं उन ग्रंथों से इनका खंडन

1769
02:11:39,400 --> 02:11:43,480
करता हूं जो इन लोगों ने खुद नहीं पढ़े जैसे मैंने ब्रह्म पुराण से खंडन किया

1770
02:11:43,480 --> 02:11:47,720
जहा विष्णु जी ने कहा कि मेरा अंत नहीं होता मैं परमात्मा हूं फिर अभी मैंने आनंद रामायण

1771
02:11:47,720 --> 02:11:51,960
से इनका खंडन किया था लास्ट टाइम फिर महाभारत से मैंने इनका खंडन

1772
02:11:51,960 --> 02:11:56,880
किया अने नहीं पढ़े कभी कबीर वालो

1773
02:11:56,880 --> 02:12:00,880
ने अच्छा बढ़िया है नहीं आप अच्छा कार्य कर रहे

1774
02:12:00,880 --> 02:12:05,120
हैं आपके इ तो हनुमान जी है ना जी देखिए

1775
02:12:05,120 --> 02:12:09,200
हमारा कोई ऐसा कोई बैर नहीं है कि जो स्कन संस्था है व नष्ट

1776
02:12:09,200 --> 02:12:13,240
हो जाए बात यह है कि क्या सनातन

1777
02:12:13,240 --> 02:12:17,360
के नाम पर वाह जय हो जय हो जय बजरंग बात यह

1778
02:12:17,360 --> 02:12:21,560
है कि सनातन के नाम पर ऐसा तो नहीं कि सनातन

1779
02:12:21,560 --> 02:12:26,320
विरुद्ध चीजें बांटी जा रही हो

1780
02:12:26,320 --> 02:12:30,600
बेची जा रही हो दुकान चलाई जा रही हो अब ये क्या है कहने को परंपरा

1781
02:12:30,600 --> 02:12:35,240
वाले

1782
02:12:35,240 --> 02:12:39,240
है चलिए मैं चलता हूं ठीक है मिनट एक मिनट

1783
02:12:39,240 --> 02:12:43,480
मिनट शिवांश भाई भविष्य पुराण में गोमय में लक्ष्मी

1784
02:12:43,480 --> 02:12:48,280
के वर्णन को हेमंत राम पाली नहीं मानते इनकी

1785
02:12:48,280 --> 02:12:52,440
पुराणों पर है अब इनका इनका अस्वीकार करना

1786
02:12:52,440 --> 02:12:56,440
धोरा चरित्र है वो उन्हीं के लोग उनको अपशब्द कह

1787
02:12:56,440 --> 02:13:00,560
रहे हैं काफी हमें कहने की कुछ आवश्यकता नहीं है व उनके ही

1788
02:13:00,560 --> 02:13:04,680
लोग कह रहे हैं अभी और वो करते जाएंगे तो उसमें भी उन्हीं की हानी है

1789
02:13:04,680 --> 02:13:08,800
जितना वो जैसे कल कोई बता रहा था मुझको कल कोई

1790
02:13:08,800 --> 02:13:13,000
गया होगा उनके लाइव में तो वो बोला कि उन्हीं का व्यक्ति उनको बोल रहा है कि

1791
02:13:13,000 --> 02:13:17,200
भाई आप भी तो यहां पर दीपक जलाते हो और इनका पुराना वीडियो है इन्होंने

1792
02:13:17,200 --> 02:13:21,480
धूप बत्ती दीपक जलाने इत्यादि पर वो लगाया आक्षेप इनका

1793
02:13:21,480 --> 02:13:25,640
पुराना वीडियो है रामपाल जी को पूजा पूजा हो रही है और उसमें धूपबत्ती जल

1794
02:13:25,640 --> 02:13:29,920
रही है अगरबत्ती जल रही है तो इनके ही लोग इनके वीडियो

1795
02:13:29,920 --> 02:13:33,960
में जाकर के वहां कह रहे भाई तुम एक सवाल कर रहे हो तुम्हारे यहां भी तो

1796
02:13:33,960 --> 02:13:38,040
होता है ये तो ये सब चीज है ठीक है विशाल जी

1797
02:13:38,040 --> 02:13:43,080
आज अच्छे लग रहे हैं

1798
02:13:43,080 --> 02:13:47,160
आप कहते हैं श्री कृष्ण ने गीता सुनाई थी तो महाभारत में अर्जुन को दूसरी बार

1799
02:13:47,160 --> 02:13:51,200
गीता क्यों नहीं सुनाई शांति अनुशासन पव में हां इसका हम

1800
02:13:51,200 --> 02:13:55,560
लोगों ने की थी उस दिन बात अच्छे से प्रमाण वगैरह दिए थे

1801
02:13:55,560 --> 02:13:59,760
पहली बात तो वहा जहा का जहां की ये बात कर रहे वहां पर कृष्ण ने खुद बोला

1802
02:13:59,760 --> 02:14:03,960
मैंने वो तुझे योग किसी तरीके से सुनाया मैंने

1803
02:14:03,960 --> 02:14:08,440
हा मैंने तो मैंने जब कह दिया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया ना मैंने सुनाई तो ये

1804
02:14:08,440 --> 02:14:12,440
अपना खंडन खुद ही करते हैं वहां पर ठीक है

1805
02:14:12,440 --> 02:14:18,440
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

1806
02:14:21,360 --> 02:14:25,400
मुझे लग रहा है मैं लेट आया हूं आज आपको

1807
02:14:25,400 --> 02:14:29,520
किसने बोल दिया इसकन परंपरागत

1808
02:14:29,520 --> 02:14:34,840
नहीं है इस कन रशियन परंपरा से अरे

1809
02:14:34,840 --> 02:14:40,840
याय भाई किसी ने कमेंट किया था वो पढ़ा है मैंने अपने मन से नहीं बोला

1810
02:14:42,640 --> 02:14:45,320
है

1811
02:14:45,320 --> 02:14:50,120
जी हां लेट आए हैं मैंने अभी स दीवार में सर मारा है दो घंटे

1812
02:14:50,120 --> 02:14:52,240
करीब

1813
02:14:52,240 --> 02:14:56,320
अभी देखूंगा मैं बैठ के क्या हुआ

1814
02:14:56,320 --> 02:15:00,760
पता नहीं लगा आज थोड़ा व्यस्त था मैं और सबको दिवाली की बहुत बहुत

1815
02:15:00,760 --> 02:15:05,000
शुभकामनाएं भाई दुज की जी जी

1816
02:15:05,000 --> 02:15:11,000
आपको भी सारी

1817
02:15:11,080 --> 02:15:16,040
शुभकामनाए तो अब तो बंद कर रहे हैं

1818
02:15:16,040 --> 02:15:20,440
जी बस थोड़ी और देर देखते हैं कोई कबीर वाला आ जाए

1819
02:15:20,440 --> 02:15:26,440
या न वाला आ

1820
02:15:27,960 --> 02:15:32,080
जाए वो तो जो आजकल तो रोज डाल रहे हैं वो पता

1821
02:15:32,080 --> 02:15:35,800
नहीं कौन से जी न्यूज वाले

1822
02:15:35,800 --> 02:15:40,680
लेकिन नाम भी चुन के रखा है

1823
02:15:40,680 --> 02:15:46,680
उन्होंने

1824
02:15:47,520 --> 02:15:53,040
आ भव्य राधा कृष्ण दास

1825
02:15:53,040 --> 02:15:57,080
अगर नाम पर पैसे कमाने की बात है तो

1826
02:15:57,080 --> 02:16:01,480
इस हिसाब से तो देखा जाए तो इसकन ने जो बुक छापी उसमें सबसे पहले शंकराचार्य

1827
02:16:01,480 --> 02:16:06,800
और मायावा लिखा है तो कौन पैसे कमाने वाला सिद्ध

1828
02:16:06,800 --> 02:16:10,800
हुआ अरे हिम्मत नहीं है तुम्हारे अंदर इसलिए तुम्हें ऐसे

1829
02:16:10,800 --> 02:16:15,000
शब्दों का आलंबन लेना पड़ा जो अनैतिक है हमने

1830
02:16:15,000 --> 02:16:19,360
कभी अपने मर्यादा को लांगाह अंदर

1831
02:16:19,360 --> 02:16:23,400
तुम्हारे जिसके पास सिद्धांत नहीं होता है वो झूठ बोलता है अपनी बातों से पलट है

1832
02:16:23,400 --> 02:16:28,160
चोरी करता है या फिर गालियां देता है तुमने वो किया

1833
02:16:28,160 --> 02:16:34,160
जिसके पास सिद्धांत की ताकत होती है उसको यह सब नहीं करना पड़ता

1834
02:16:38,680 --> 02:16:42,760
है रामपाल वाले भी यही कहते हैं

1835
02:16:42,760 --> 02:16:46,760
कि रामपाल के नाम से वो चला रहे हैं अगर देखो तो इन सबकी किताबों में

1836
02:16:46,760 --> 02:16:51,080
सबसे पहले तो शंकराचार्य का नाम है उनका उनकी बुराई है

1837
02:16:51,080 --> 02:16:57,080
तो तुम्हारा तो अस्तित्व ही है शंकराचार्य के विरोध

1838
02:16:57,240 --> 02:17:01,400
में एक एक बोल रहा था एक इनके यहां

1839
02:17:01,400 --> 02:17:05,560
का कोई बोल रहा था 30 मार्क हां वो बोल रहा

1840
02:17:05,560 --> 02:17:09,560
था कि इनके पहले वीडियोस देखे थे गंदे से वीडियोस होते

1841
02:17:09,560 --> 02:17:13,640
थे अब देखो कैमरा एमरा लेकर के टीम चल रही है प्रभुपाद जी ने जिस दिन

1842
02:17:13,640 --> 02:17:17,800
सबसे पहले वो शुरू किया था उस दिन उसी स्टेटस में थे ना जिस समय वो शरीर

1843
02:17:17,800 --> 02:17:21,920
को छोड़ के गए उस स्टेटस प थे और अगर नहीं थे उसमें

1844
02:17:21,920 --> 02:17:26,360
विकास हुआ तो इसका मतलब वो भी है ना

1845
02:17:26,360 --> 02:17:30,440
जो कि आप हमें कह रहे हो वो भी वही थे बिल्कुल ये आपके सिद्धांत है

1846
02:17:30,440 --> 02:17:34,800
भाई सिद्धांतों का खंडन करो ना ईश्वर को तुम

1847
02:17:34,800 --> 02:17:39,480
बाधित कर दे रहे हो वो अपने शरीर को बदल नहीं सकता

1848
02:17:39,480 --> 02:17:43,800
फिर अगर बदल रहा है तो फिर शाश्वत मत बोलो झूठ मत बोलो फिर पूछोगे

1849
02:17:43,800 --> 02:17:47,800
पूछेंगे तो अचिंत है अचिंत की बात तो वहां वहां हो रही है कि भाई जीव

1850
02:17:47,800 --> 02:17:52,160
और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी आप हर जगह अचिंत क्यों लगा रहे हो जब चैतन्य

1851
02:17:52,160 --> 02:17:53,680
महाप्रभु ने केवल इस बात में

1852
02:17:53,680 --> 02:17:58,200
बोला है कि जीव और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी

1853
02:17:58,200 --> 02:18:02,800
तो आप हर जगह अचिंत का आलंबन लेकर के बचने की कोशिश करने लगे

1854
02:18:02,800 --> 02:18:06,840
और अचिंत अनिर्वचनीय शब्दों का उपयोग होता है शास्त्र

1855
02:18:06,840 --> 02:18:11,600
में ऐसा नहीं है होता है मगर उससे अपनी बात का खंडन नहीं होना

1856
02:18:11,600 --> 02:18:15,600
चाहिए भगवान का पारिक स्वरूप जो है अनिर्वचनीय है व्यवहार में

1857
02:18:15,600 --> 02:18:19,960
ना आ सकने वाला है अचिंत है ठीक है मगर यह थोड़ी ना कि भगवान यहां पर भौतिक

1858
02:18:19,960 --> 02:18:23,960
संसार में कुछ भी कर सकने वाले नहीं है यहां वो दिखाई देंगे सगुण साकार

1859
02:18:23,960 --> 02:18:28,160
रूप में आएंगे यहां पर सब कुछ कर सकने वाले हैं किसी भी मर्यादा के बाहर है वो

1860
02:18:28,160 --> 02:18:31,400
परे

1861
02:18:31,400 --> 02:18:35,440
हैं आप अपनी बात का खंडन कर रहे हो कि पहले कह रहे हो वो शाश्वत है पहले

1862
02:18:35,440 --> 02:18:39,440
उनको व्यवहारिक बना दिया वो स शरीर आते हैं यहां खड़ा कर दिया मनुष्यों के

1863
02:18:39,440 --> 02:18:43,680
बीच में अब पूछ रहे हैं कि वो ये कर सकते हैं वो कर सकते हैं नहीं कर सकते

1864
02:18:43,680 --> 02:18:47,880
अब जब मैंने पूछा यार तुम तो कह रहे हो सब कुछ कर सकते तो अचिंत है ये मामला तो पूछो ही मत

1865
02:18:47,880 --> 02:18:51,880
आप अपनी बात का खंडन कर रहे हो और तब पूछ जा रहा क्वेन तो आप

1866
02:18:51,880 --> 02:18:56,800
अचिंत बोल रहे हो अचिंत की आड़ में बचना चाह रहे

1867
02:18:56,800 --> 02:19:02,800
हो राम जी शरण जी और अनिल अनिल कुमार जी आए

1868
02:19:03,360 --> 02:19:07,600
हैं क्या जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

1869
02:19:07,600 --> 02:19:11,760
राम क्या स्न के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

1870
02:19:11,760 --> 02:19:15,800
सर्वशक्तिमान है अगर कोई आक के यहां

1871
02:19:15,800 --> 02:19:20,720
बताना चाहता है बदतमीज

1872
02:19:20,720 --> 02:19:26,240
अवा संस्कार हीन लोगों को छोड़कर तो आ सकता

1873
02:19:26,240 --> 02:19:30,440
है जिनके घर वालों ने उन्हें केवल

1874
02:19:30,440 --> 02:19:34,560
बाल संवारना सिखाया है आगे की चीज आगे

1875
02:19:34,560 --> 02:19:38,800
की मर्यादा नहीं सिखाए ऐसे लोगों को छोड़कर

1876
02:19:38,800 --> 02:19:44,090
जो आना चाहे वो आ सकता है

1877
02:19:44,090 --> 02:19:48,600
[संगीत] और क्या इसकन

1878
02:19:48,600 --> 02:19:52,920
के द्वारा चैतन्य महाप्रभु को फॉलो किया जाता है आ सकता है क्या

1879
02:19:52,920 --> 02:19:57,080
स् कन के द्वारा ल प्रभुपाद को फॉलो

1880
02:19:57,080 --> 02:20:01,320
किया जाता है इस मामले में आ सकता है क्या स्कन के द्वारा मधुवा

1881
02:20:01,320 --> 02:20:05,360
चार्य जी को फॉलो किया जाता है आ सकता है क्या

1882
02:20:05,360 --> 02:20:09,760
स्कन सनातन धर्म का प्रचारक है आ सकता है

1883
02:20:09,760 --> 02:20:13,800
सनातनी शिक्षा देता है आ सकता है केवल टैग लगाने

1884
02:20:13,800 --> 02:20:18,480
से काम नहीं चलेगा ना अभी मैं टैग लगा लू मैं स्कन का हूं

1885
02:20:18,480 --> 02:20:22,680
और बोलू वो बात है जो स्कन की नहीं है तो मुझे स्न

1886
02:20:22,680 --> 02:20:27,520
वाला मानेंगे

1887
02:20:27,520 --> 02:20:31,240
क्याय सनातन के नाम

1888
02:20:31,240 --> 02:20:35,720
पर जी जी जी अनिल कुमार जी बोलिए जय श्री

1889
02:20:35,720 --> 02:20:39,960
राम मैंने एकन पढ़ा था की जो

1890
02:20:39,960 --> 02:20:44,680
छोटी उसम है ना 15 अध्याय में स्न वाले ने

1891
02:20:44,680 --> 02:20:49,600
ना उसम गायब कर दि लोक उसने

1892
02:20:49,600 --> 02:20:53,720
30 लो रखे बाकी जो 35 32 है ना उसम लोक है ही

1893
02:20:53,720 --> 02:20:58,200
नहीं पता नहीं लोग क्या कर रखा है उसम आधा

1894
02:20:58,200 --> 02:21:02,200
दि [संगीत]

1895
02:21:02,200 --> 02:21:08,200
ये

1896
02:21:08,400 --> 02:21:12,440
इसम इसमें है क्या इस

1897
02:21:12,440 --> 02:21:18,440
कौन की गीता

1898
02:21:18,440 --> 02:21:22,680
है इसमें कहां श्लोक गया श यब है क्या लो गायब

1899
02:21:22,680 --> 02:21:26,200
नहीं होंगे मुझे नहीं

1900
02:21:26,200 --> 02:21:32,200
पता हा कौन सा चैप्टर बोल रहे हैं

1901
02:21:33,080 --> 02:21:36,880
आप अनिल कुमार

1902
02:21:36,880 --> 02:21:42,880
जी हो

1903
02:21:43,760 --> 02:21:49,760
गए कमेंट ह स्क्रीन गलत तरीके से आ गया

1904
02:21:49,940 --> 02:21:55,360
[संगीत]

1905
02:21:55,360 --> 02:22:01,360
अनिल कुमार [संगीत]

1906
02:22:03,240 --> 02:22:07,760
जी पंडित लकी जी जय श्री राम

1907
02:22:07,760 --> 02:22:11,800
जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम राम जी शरण

1908
02:22:11,800 --> 02:22:16,760
जी आप ही बोले अपनी बात इकन

1909
02:22:16,760 --> 02:22:20,800
वाले अपने आप को माधव संप्रदाय का कहते हैं

1910
02:22:20,800 --> 02:22:24,000
घोषणा करते

1911
02:22:24,000 --> 02:22:28,600
हैं का सिद्धांत तो द्वैत है फिर इनको

1912
02:22:28,600 --> 02:22:33,160
अचिंत द्वैता दैत की आवश्यकता क्यों पड़ी

1913
02:22:33,160 --> 02:22:37,520
पहला प्रश्न तो यही बनता है अपने आचार्य

1914
02:22:37,520 --> 02:22:43,520
की सीमा से बाहर क्यों जाना पड़ रहा है

1915
02:22:43,560 --> 02:22:47,680
गु इस कौन हो अथवा रामपाल वाला

1916
02:22:47,680 --> 02:22:51,800
या कबीर पंथ भी आप मान लीजिए यह सब में कहीं ना

1917
02:22:51,800 --> 02:22:57,520
कहीं गुरु द्रोह है यह सब अपने गुरुओ के विपरीत

1918
02:22:57,520 --> 02:23:01,760
है और मुझे समझ में नहीं आता है जो

1919
02:23:01,760 --> 02:23:06,000
संप्रदाय अथवा जो व्यक्ति भी हो जो गुरु से अपने गुरु

1920
02:23:06,000 --> 02:23:10,280
से द्रोह करता हो गुरु के विपरीत जाता हो

1921
02:23:10,280 --> 02:23:16,280
वह परमात्मा को प्राप्त कैसे कर सकता

1922
02:23:17,600 --> 02:23:22,880
है जगत मोहन

1923
02:23:22,880 --> 02:23:27,760
जय श्री रामम श्री राम

1924
02:23:27,760 --> 02:23:32,720
आवा आ आवाज आपकी क्लियर नहीं आ

1925
02:23:32,720 --> 02:23:37,200
रही अब आ रही है जी

1926
02:23:37,200 --> 02:23:41,400
बोलिए आवाज क्लियर नहीं आ रही है पंडित जी आ रही है

1927
02:23:41,400 --> 02:23:45,210
आ रही है अब आ रही है

1928
02:23:45,210 --> 02:23:50,920
[संगीत]

1929
02:23:50,920 --> 02:23:54,960
बोलिए बोलिए जगत जी यह बता रहा है कोई लोगों ने क्या

1930
02:23:54,960 --> 02:23:58,960
किया जो पॉइंट टू पॉइंट क्वेश्चन करने वाले लोग हैं

1931
02:23:58,960 --> 02:24:03,960
उनको वो लोग ब्लॉक कर देते अपने चैनल पर टी आर

1932
02:24:03,960 --> 02:24:08,120
पड़ और अपने ही लोगों से रोल प्ले करवाते

1933
02:24:08,120 --> 02:24:14,120
हम आए जिज्ञासा पूछने हम आए तुमसे सवाल

1934
02:24:14,720 --> 02:24:18,720
पूछने वो व्यक्ति जो ये कर रहा है वो अपनी अत आत्मा में एक

1935
02:24:18,720 --> 02:24:22,720
बार झाक नहीं सकता कि मैं किसको बचा रहा क्योंकि जिस जिसको मैं

1936
02:24:22,720 --> 02:24:26,840
बचा रहा हूं उसम इतनी ताकत नहीं है जो इनका सामना कर सके मुझे झूठ का आलंबन लेना पड़

1937
02:24:26,840 --> 02:24:31,120
रहा है वो एक बार अपनी अंतरात्मा में क्यों नहीं झांकता क्यों एक बार जाकर

1938
02:24:31,120 --> 02:24:35,520
के दर्पण में नहीं देखता है मैं कौन हूं मैं क्यों कर रहा हूं यह

1939
02:24:35,520 --> 02:24:39,760
किसको बचा रहा हूं धर्म को ईश्वर को

1940
02:24:39,760 --> 02:24:45,040
या फिर सिद्धांत को मर्यादा को या फिर अपनी वर्चस्व

1941
02:24:45,040 --> 02:24:49,080
को एक बार अपने आप बात करके देखो झूठ का आलंबन लेने

1942
02:24:49,080 --> 02:24:53,720
वालो एक बार अपनी अतमा से बात करके

1943
02:24:53,720 --> 02:24:58,080
देखो हा जी कान लेने

1944
02:24:58,080 --> 02:25:02,400
वालो ट चलती है

1945
02:25:02,400 --> 02:25:08,400
लोग के सामने रख पू कर

1946
02:25:09,440 --> 02:25:13,720
लेता मैं कह रहा कि य पर इनकी डिबेट चलती है जैसे अभी दिवाली

1947
02:25:13,720 --> 02:25:17,920
की डिबेट देख रहा था मैं पूरी स्टेज उन्हीं के व्यक्ति जो है एंटी

1948
02:25:17,920 --> 02:25:21,920
है उही के वक्ति फेवर में है और इतने मतलब आप तर्क जो है

1949
02:25:21,920 --> 02:25:26,120
इतने बकवास तर्क देंगे जो दिवाली के फेवर वाले होंगे ठीक है और वो

1950
02:25:26,120 --> 02:25:30,240
सामने सामने बैठाए हैं उनको और उन्होने पवित्र ग्रंथ दो चार रख दिए हैं क

1951
02:25:30,240 --> 02:25:34,240
इसी ग्रंथ से हम प्रूव करेंगे और और वो अंत में

1952
02:25:34,240 --> 02:25:38,320
वो डिबेट आपको पता है कि कौन हारेगा जो

1953
02:25:38,320 --> 02:25:42,520
जो वहा पर नकली पंडा पंडित ये पुरोहित जो भी बैठाए हैं वहां पर वो वो अंत

1954
02:25:42,520 --> 02:25:46,640
में हार जाते हैं मतलब लग रहा है कि पूरी

1955
02:25:46,640 --> 02:25:50,640
एकदम स्टेज है ये देखा था ये ये देख लीजिए इसम

1956
02:25:50,640 --> 02:25:54,720
जो है इनकी पूजा हो रही है धूप बत्ती अगरबत्ती इत्यादि से

1957
02:25:54,720 --> 02:26:00,720
ी के दीपक जल [संगीत]

1958
02:26:02,520 --> 02:26:06,760
रहे अच्छा मैं कह रहा था कि वाले

1959
02:26:06,760 --> 02:26:11,160
जो क्लेम करते हैं कि भगवान कृष्ण

1960
02:26:11,160 --> 02:26:15,400
और जो अब्राहम खुदा अथवा

1961
02:26:15,400 --> 02:26:21,400
अल्लाह है व एक है अच्छा इनको इसको

1962
02:26:21,400 --> 02:26:25,520
को अब्राहम खासकर जो मुसलमानों इस्लाम

1963
02:26:25,520 --> 02:26:29,720
का जो है कुरान के अनुसार सचार की विधि

1964
02:26:29,720 --> 02:26:35,720
पढ़ा दी जाए व सचार क्या

1965
02:26:36,080 --> 02:26:40,520
है आश्चर्य होता है कि जो पूर्णता

1966
02:26:40,520 --> 02:26:45,000
पैशा

1967
02:26:45,000 --> 02:26:51,000
चिक है उसको उस विचारधारा के

1968
02:26:51,040 --> 02:26:55,360
अल्लाह को ये भगवान कृष्ण से तुलना करते हैं एक मानते

1969
02:26:55,360 --> 02:26:59,840
तुलना भी नहीं करते एक मानते हैं मैं समझता हूं कि य भगवान

1970
02:26:59,840 --> 02:27:05,840
कृष्ण के संबंध में अत्यंत अपराध कर रहे

1971
02:27:06,320 --> 02:27:10,560
हैं वो अपराध है ही है गुरु विरोध है कृष्ण

1972
02:27:10,560 --> 02:27:15,280
विरोध है ईश्वर विरोध है धर्म विरोध है सनातन विरोध है एवरीथिंग

1973
02:27:15,280 --> 02:27:21,280
विरोध बिल्कुल [संगीत]

1974
02:27:24,360 --> 02:27:28,600
जगत जी आप कुछ कोई अपना पक्ष रखना है जो आपको लगता

1975
02:27:28,600 --> 02:27:32,720
है कि आप सत्य के पक्षधर है यादव जी तो आप आए ऊपर और

1976
02:27:32,720 --> 02:27:36,720
अपनी बात को रखे जी थोड़ा

1977
02:27:36,720 --> 02:27:42,720
साल के सपने देखने के लिए आप

1978
02:27:42,900 --> 02:27:48,480
[संगीत] स् मिलने के लिए [संगीत]

1979
02:27:48,480 --> 02:27:52,720
आ जगत जी बोले सर नमस्कार

1980
02:27:52,720 --> 02:27:57,440
सर पंडित जी मेरा नाम जगत मोहन द्विवेदी है मैं भोपाल से हूं

1981
02:27:57,440 --> 02:28:01,560
अभी तीन चार दिन पहले ही मैं आपके चैनल से जुड़ा हुआ हूं मुझे

1982
02:28:01,560 --> 02:28:07,560
बहुत अच्छा लगा आपकी भावनाएं जो आप

1983
02:28:20,120 --> 02:28:24,120
तो यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी धर्म की कुछ जानकारिया मिलेंगी तो

1984
02:28:24,120 --> 02:28:28,160
आज य मेरा पहला दिन है तो मेरा कोई सवाल नहीं है बस मैं

1985
02:28:28,160 --> 02:28:33,480
आप लोगों से जुड़ा हुआ हूं और उम्मीद करता हूं कि आप लोगों का आशीर्वाद मुझे

1986
02:28:33,480 --> 02:28:37,920
मिलेगा हमारा नहीं परंपरा प्राप्त आचार्यों का

1987
02:28:37,920 --> 02:28:42,280
आशीर्वाद प्राप्त करें भगवान श्री कृष्ण का नाम जप करें राम

1988
02:28:42,280 --> 02:28:47,080
का नाम जप करें आपको सब कुछ मिल जाएगा जो भी आपके लिए आवश्यक होगा

1989
02:28:47,080 --> 02:28:51,200
जी मेरी बहुत जिज्ञासा थी महाराज शंकराचार्य जी से दर्शन

1990
02:28:51,200 --> 02:28:55,600
करने क्योंकि मेरे गांव में एक व्यक्ति थे जो आज से पाच छ साल पहले गए थे

1991
02:28:55,600 --> 02:29:00,160
जगन्नाथ तो आने वाले जल्दी आएंगे आपके क्षेत्र से निकलेंगे

1992
02:29:00,160 --> 02:29:04,200
और हमारी भोपाल आएंगे तो जरूर दर्शन होगा उनके जी

1993
02:29:04,200 --> 02:29:08,440
जी आएंगे आएंगे तो वो बचपन से मुझे बहुत बताया उन्होने

1994
02:29:08,440 --> 02:29:12,560
शंकराचार्य जी का इसलिए मेरा बहुत आध्यात्मिक लगाव है शंकराचार्य जी से बस इसी

1995
02:29:12,560 --> 02:29:16,680
वजह से मैं जैसे ही मुझे ये वीडियो मिला आपका पाच छ दिन पहले तो मुझसे

1996
02:29:16,680 --> 02:29:20,720
रुका नहीं गया तो आज मैं लाइव में जुड़ गया बस जी

1997
02:29:20,720 --> 02:29:24,920
आभार ठीक है आप

1998
02:29:24,920 --> 02:29:29,040
बोते क्लासेस भी जवाइन कर सकते हैं अगर आपको म करिए

1999
02:29:29,040 --> 02:29:33,200
नाम जप ज कर नाम जप से जड़ आप

2000
02:29:33,200 --> 02:29:35,880
एक नंबर दे दीजिए भाई

2001
02:29:35,880 --> 02:29:39,920
74836 इस पर करेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार

2002
02:29:39,920 --> 02:29:43,920
के फॉर्म प्राप्त हो जाएंगे उस से अपने इच्छा

2003
02:29:43,920 --> 02:29:48,080
अनुसार फॉर्म भरिए और हमसे जुड़ जाइए जहा पर रू

2004
02:29:48,080 --> 02:29:52,080
में जी अगर हम सब एक हैं तो

2005
02:29:52,080 --> 02:29:56,400
ये डिबेट क्यों हो रही है अगर ये सारी सृष्टि भगवान

2006
02:29:56,400 --> 02:30:00,960
ने ही बनाई है सब कुछ उसी ने बनाया है आपके अनुसार

2007
02:30:00,960 --> 02:30:04,960
आपके अनुसार उसी ने जब बनाया है तो फिर

2008
02:30:04,960 --> 02:30:09,720
तरह-तरह के भेद क्यों है भाई और पिता में भेद

2009
02:30:09,720 --> 02:30:13,880
है बहन और मां में भेद है तो ये सारा जो

2010
02:30:13,880 --> 02:30:18,120
भेद है ये व्यवहारिक है व्यवहार में जो भेद है उसमें

2011
02:30:18,120 --> 02:30:23,040
से उस भेद को निकालना है जिस भेद का निर्वाह करके

2012
02:30:23,040 --> 02:30:27,400
हम अभेद की स्थिति को प्राप्त कर सके भगवत प्राप्ति कर सके

2013
02:30:27,400 --> 02:30:30,840
मोक्ष तक पहुंच

2014
02:30:30,840 --> 02:30:35,200
सके सब लोग पूछ रहे मेरा त्रिपु क अरे इसको प को भगाओ भाई

2015
02:30:35,200 --> 02:30:39,200
इसको ना अकल है दो ढले की और ना

2016
02:30:39,200 --> 02:30:41,440
ही

2017
02:30:41,440 --> 02:30:46,200
इसके दोबारा मुझे दोबारा स्नान करना पड़ गया था उसके बाद मैंने

2018
02:30:46,200 --> 02:30:50,360
त्रिकुंड लगाया नहीं है वरना सुबह की संध्या में लगाया था और

2019
02:30:50,360 --> 02:30:55,040
दोपहर की में भी लगाया था शाम में लगा लूंगा मैं तो

2020
02:30:55,040 --> 02:30:59,360
ऐसा नहीं है कि वो पूरा एकदम रंग है कि हमेशा लगा रहेगा अभी स्नान

2021
02:30:59,360 --> 02:31:03,640
किया था पहले तो लो जी हम सोच रहे हैं कि वो जो

2022
02:31:03,640 --> 02:31:07,800
राम भद्राचार्य जी का वो जो वीडियो है जिसमें वो कहते हैं कि जिसकी

2023
02:31:07,800 --> 02:31:11,920
माने वो वाला वीडियो कट करके निकाल ले और जब बात आया

2024
02:31:11,920 --> 02:31:16,560
करे तो यहां जो है प्ले कर दिया करें कि जिसकी मां ने

2025
02:31:16,560 --> 02:31:22,560
निष्ठा पूर्वक दुखद पान कराया

2026
02:31:22,600 --> 02:31:26,840
तो वो आ जाए चाहे वो कबीर को भगवान

2027
02:31:26,840 --> 02:31:31,440
कहने वाला हो या वो इकन को सनातनी

2028
02:31:31,440 --> 02:31:35,520
अ सनातन प्रचारक या इकन के सिद्धांतों को सही

2029
02:31:35,520 --> 02:31:39,520
कहने वाला हूं जी जी

2030
02:31:39,520 --> 02:31:44,040
पानी से त्रिपुंड लगाना चाहिए कि सूखा लगाना चाहिए इसके बारे में आपको

2031
02:31:44,040 --> 02:31:48,720
वाले कह रहे हैं दम है तो एमपी फास्ट पर आओ शिवांश एंड फ्लू की

2032
02:31:48,720 --> 02:31:52,840
जी हम आएंगे मगर वहां नहीं एमपी फास्ट पर नहीं उनसे कहिए

2033
02:31:52,840 --> 02:31:56,880
हमसे संपर्क करें और एक विदव

2034
02:31:56,880 --> 02:32:00,880
तारीख दिनांक समय निश्चित होगा उस दिनांक

2035
02:32:00,880 --> 02:32:04,960
समय पर एक मध्यस्थ चैनल पर हम लोग आएंगे या फिर अगर वह भी

2036
02:32:04,960 --> 02:32:08,960
संभव नहीं हो पाया तो एक मध्यस्थ स्थान पर हम लोग आएंगे और वहां

2037
02:32:08,960 --> 02:32:12,960
पर बात होगी है ना ठीक है

2038
02:32:12,960 --> 02:32:17,000
आप लोग उन तक ये पहुंचा दीजिए हमारा नंबर 740819

2039
02:32:17,000 --> 02:32:23,000
कितनी बार तो दे चुके हैं लगता है ब

2040
02:32:24,520 --> 02:32:28,840
में नारायण एक एक मैं असल में

2041
02:32:28,840 --> 02:32:33,560
कुछ जरूरी बातें होती हैं उनको जो है अ

2042
02:32:33,560 --> 02:32:38,520
उसके रूप में बता देता हूं फौज का एक दृश्य देखा था मैंने

2043
02:32:38,520 --> 02:32:42,680
हम सब ध्यान से वीडियो को और देखे किसी तरह से पेज

2044
02:32:42,680 --> 02:32:46,800
बदलने के नाम पर कैमरे को फिरा

2045
02:32:46,800 --> 02:32:51,640
दिया हां ये देखिए आपको ब्रज का मैं अर्थ

2046
02:32:51,640 --> 02:32:55,680
दिखाऊ यहां देखिए ब्रज ब्रज का अर्थ दिखा रहे आपके

2047
02:32:55,680 --> 02:32:59,800
तत्वदर्शी संत और जब नीचे जाना था कैमरा

2048
02:32:59,800 --> 02:33:03,920
जहां पर आना लिखा है तो कैमरे को इधर

2049
02:33:03,920 --> 02:33:08,360
ले गए लेफ्ट ले गए आप पहले समझ

2050
02:33:08,360 --> 02:33:12,520
लीजिए सीधे नीचे नहीं लाए कैमरे को ध्यान से देखिए किस

2051
02:33:12,520 --> 02:33:16,640
तरह से आपको झूठ बोला जाता है फिर से एक बार ऊपर से दिखा

2052
02:33:16,640 --> 02:33:21,200
दो ब्रज का अर्थ यह ब्रज का अर्थ जो लिखा

2053
02:33:21,200 --> 02:33:25,200
यह लिखा है शिवराम आपटे यही डिक्शनरी

2054
02:33:25,200 --> 02:33:29,520
आपको दिखाई जा रही है रामपाल वालों यही डिक्शनरी

2055
02:33:29,520 --> 02:33:33,640
दिखाई जा रही है और इस डिक्शनरी को दिखाते समय आपके साथ

2056
02:33:33,640 --> 02:33:37,760
य छल किया गया कि जब कैमरा नीचे आना था जहां पर आना लिखा

2057
02:33:37,760 --> 02:33:39,960
था वहां से टेढ़ कर दिया कैमरे

2058
02:33:39,960 --> 02:33:44,360
एक बार और दिखा दो भैया एक बार और दिखा देखिए

2059
02:33:44,360 --> 02:33:48,560
यही डिक्शनरी दिखाई जा यही डिक्शनरी शो की गई है क्या पूरा पेज कहीं पर शो किया

2060
02:33:48,560 --> 02:33:52,840
क्या उन्होंने शिवराम आपके की जो

2061
02:33:52,840 --> 02:33:55,880
डिक्शनरी है

2062
02:33:55,880 --> 02:34:01,880
उसमें ऐसे आपके आंखों में मिर्च झकी गई है देख

2063
02:34:06,440 --> 02:34:10,520
लीजिए और अब जो उनके फॉलोअर है व रतन

2064
02:34:10,520 --> 02:34:14,520
दास इत्यादि वो अब उन्होंने अपने

2065
02:34:14,520 --> 02:34:18,840
गुरु के द्वारा स्वीकार की गई डिक्शनरी को छोड़ दिया इसको छोड़ दिया शिवराम

2066
02:34:18,840 --> 02:34:22,960
आपटे को और किसको

2067
02:34:22,960 --> 02:34:27,080
पकड़ा उन्होंने पकड़ा चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश

2068
02:34:27,080 --> 02:34:31,280
संयोग वस वो लखनऊ के थे

2069
02:34:31,280 --> 02:34:35,280
और मेरी उनके परिवार वालों से बात हो गई बहुत

2070
02:34:35,280 --> 02:34:39,320
बढ़िया ये देखिए जब नीचे जाना था जहां पर आना लिखा है

2071
02:34:39,320 --> 02:34:44,160
ब्रज का अर्थ तो देखिए कैमरा नीचे नहीं जाएगा टेढ़ा जाएगा रछा

2072
02:34:44,160 --> 02:34:48,560
ये देख रहे हैं ये है कलजी

2073
02:34:48,560 --> 02:34:52,880
यही है तत्वदर्शी यही है तत्व का दर्शन

2074
02:34:52,880 --> 02:34:57,680
कि कैसे कैमरे को अपनी बात के लिए मोड़ देना है

2075
02:34:57,680 --> 02:35:03,680
कहते हो ना सभी शास्त्र खोल के दिखाए हैं यह दिखाया है खोल के

2076
02:35:06,040 --> 02:35:11,040
तुमको कोई सच्चा भक्त नहीं है जो

2077
02:35:11,040 --> 02:35:15,200
आए तिरछा दर्शी तत्वदर्शी नहीं तिरछा

2078
02:35:15,200 --> 02:35:19,200
दर्शी संत ये देख लो भैया तिरछा दर्शी

2079
02:35:19,200 --> 02:35:24,600
संत तत्वदर्शी नहीं तिरछा

2080
02:35:24,600 --> 02:35:30,600
दर्शी कैमरे को तिरछा ले

2081
02:35:32,280 --> 02:35:37,160
गए मिलान कर लो एक बार और

2082
02:35:37,160 --> 02:35:41,240
व लखनऊ के निकल आए उनके परिवार वालों से हमारी बात हो गई वहां

2083
02:35:41,240 --> 02:35:45,480
पर उन्होंने भी चलना स्वीकार किया है चलना मामे कम शरणम

2084
02:35:45,480 --> 02:35:49,640
ब्रज तो क्या हुआ कि तू मेरी शरण में चल तू

2085
02:35:49,640 --> 02:35:53,720
मेरी शरण में विचरण कर तू मेरे साथ चल मेरा सानिध्य प्राप्त कर

2086
02:35:53,720 --> 02:35:56,840
कितनी चीजें हो गई

2087
02:35:56,840 --> 02:36:01,160
इसकी और तो और बेचारे को अपने

2088
02:36:01,160 --> 02:36:05,720
गुरु की बात को सिद्ध करने के लिए गुरु के द्वारा स्वीकारी गई जो डिक्शनरी

2089
02:36:05,720 --> 02:36:09,920
है उसको छोड़ना पड़ गया सोचिए बकुल व्यक्ति जीतना चाहता

2090
02:36:09,920 --> 02:36:14,840
है व्यक्ति धर्म की स्थापना नहीं चाहता है आज का उसको जीतना है

2091
02:36:14,840 --> 02:36:19,080
झूठ का आलंबन लेकर के जीतना पड़े जीतूंगा मैं हमारे अकॉर्डिंग

2092
02:36:19,080 --> 02:36:25,080
तो श्रीधर स्वामी

2093
02:36:28,720 --> 02:36:32,960
वैष्णवास्त्र कमान ने

2094
02:36:32,960 --> 02:36:37,040
नहीं उसके बाद भी एक और पॉइंट भी है ना कि वो बाहर से मायावादी थे लेकिन अंदर

2095
02:36:37,040 --> 02:36:41,320
से वैष्णव थे अलग अलग लॉजिक तो वो झूठे हो गए

2096
02:36:41,320 --> 02:36:45,880
फिर फिर वो झूठे हो गए

2097
02:36:45,880 --> 02:36:50,000
झूठे हो गए ना अंदर से कुछ और है बाहर से कुछ और है यही लक्षण

2098
02:36:50,000 --> 02:36:51,680
है क्या सन्यासी के

2099
02:36:51,680 --> 02:36:55,840
जिनका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिन्होंने काम

2100
02:36:55,840 --> 02:36:59,760
इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो जिन

2101
02:36:59,760 --> 02:37:04,600
जो सुख और दुख के द्वंद से मुक्त हो चुके हो यह है सन्यासी

2102
02:37:04,600 --> 02:37:08,600
जो अपने सिद्धांत के बारे में बताते समय झूठ बोल रहा है और

2103
02:37:08,600 --> 02:37:14,440
उसको फॉलो करने वाले चैतन्य महाप्रभु कितने दोष

2104
02:37:14,440 --> 02:37:18,440
लगेंगे हर कोई झूठा है हर कोई मिलावटी है केवल

2105
02:37:18,440 --> 02:37:22,720
कौन सही है वो जी सी का पैनल जो आज इकन की

2106
02:37:22,720 --> 02:37:26,800
अपने इकन के प्रभुपाद जी के ग्रंथों में अपने मन मुताबिक

2107
02:37:26,800 --> 02:37:30,800
परिवर्तन कर रहा है वो सही है बस और यह

2108
02:37:30,800 --> 02:37:34,920
लोग क्या है ना जीबीसी ने क्या किया है काम तो जीबीसी कर रहा है

2109
02:37:34,920 --> 02:37:39,000
सब कुछ मगर इनकी श्रद्धा को जोड़ दिया गया है कृष्ण भगवान

2110
02:37:39,000 --> 02:37:43,280
से और शी श्री प्रभुपाद जी से और चैतन्य महाप्रभु

2111
02:37:43,280 --> 02:37:47,480
से इनको ये लगने लगा है कि अगर हमने जीबीसी की दी हुई चीजों का विरोध

2112
02:37:47,480 --> 02:37:51,880
किया तो हमारा विरोध हो जाएगा प्रभुपाद जी से श्री कृष्ण

2113
02:37:51,880 --> 02:37:55,880
चैतन्य महाप्रभु से इसलिए वो जो आस्था हो गई है इनकी उसके चक्कर

2114
02:37:55,880 --> 02:38:01,200
में झूठ बोलते हैं जीवीसी को बचाते

2115
02:38:01,200 --> 02:38:05,320
हैं जी अमित यादव जी जय श्री राम राम

2116
02:38:05,320 --> 02:38:09,880
राम राम राम भैया जी बताइए जी

2117
02:38:09,880 --> 02:38:14,080
मैंने पूरी स्ट्रीम आपकी देखी जो दो घंटे तकरीबन मैंने देखे हैं 38

2118
02:38:14,080 --> 02:38:20,080
मिनट छोड़ दिया जाए तो नहीं कह सकता लेकिन दो घंटे मैंने देखे पूरी स्ट्रीम

2119
02:38:21,080 --> 02:38:25,240
हां यही यही जो अभी और उसके बाद में राहुल दीक्षित करके इकान

2120
02:38:25,240 --> 02:38:29,720
के कोई श्रद्धालु थे उनके साथ जो आपकी चर्चा हो रही थी

2121
02:38:29,720 --> 02:38:34,280
फलोर है मैं किसी का फॉलोअर नहीं हूं वैसे

2122
02:38:34,280 --> 02:38:38,560
और ना ही मैं किसी गुरु से दीक्षित हूं आपका कोई

2123
02:38:38,560 --> 02:38:42,600
आध्यात्मिक अस्तित्व है कोई सिद्धांत

2124
02:38:42,600 --> 02:38:47,440
स्वीकार किया है आपने हां थोड़ा बहुत

2125
02:38:47,440 --> 02:38:51,440
मैं सच या झूठ क्या बोलू लेकिन मेरा झुकाव सनातन परंपरा या

2126
02:38:51,440 --> 02:38:55,600
सनातन के गुरुओ या कह सकते हो कि गीता के प्रति ज्यादा था तो गीता

2127
02:38:55,600 --> 02:38:59,600
को लेकर गीता के कई अर्थ कर रखे हैं क्या पर्टिकुलर

2128
02:38:59,600 --> 02:39:03,680
किसी एक संप्रदाय या किसी एक संस्था इत्यादि को

2129
02:39:03,680 --> 02:39:07,800
लेकर के आप आस्थान वित है हां हां

2130
02:39:07,800 --> 02:39:11,920
एक रूप में कह सकता कि मैंने जो जिस गीता का जिस गीता वर्जन का मैंने अध्ययन

2131
02:39:11,920 --> 02:39:16,360
किया वह स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का है जानते हैं आप उन्हें

2132
02:39:16,360 --> 02:39:20,400
जानते हैं हां तो उनकी वाली

2133
02:39:20,400 --> 02:39:24,720
जो गीता थी वो मुझे थोड़ी कुछ ज्यादा अर्थों में अच्छी भी लगी

2134
02:39:24,720 --> 02:39:28,920
क्योंकि उन्होंने अब वैसे तो गीता भाष्य या गीता

2135
02:39:28,920 --> 02:39:33,320
का अनुवाद अनेक लोगों ने किया है लेकिन मैंने जो उनका वाला पढ़ा वर्जन

2136
02:39:33,320 --> 02:39:37,560
वो कहीं ना कहीं मुझे बहुत प्रभावित किया और जिस तरह से उन्होंने

2137
02:39:37,560 --> 02:39:42,040
चीजों को बताया है प्रता अनंद

2138
02:39:42,040 --> 02:39:46,080
जी ने जितने अंशों में जो चरण

2139
02:39:46,080 --> 02:39:50,800
संबंधी व्याख्या है धर्म संबंधी व्याख्या है

2140
02:39:50,800 --> 02:39:55,600
जिसमें उन्होंने वर्णाश्रम धर्म को जन्म से स्वीकार नहीं किया है उतने अंशों में

2141
02:39:55,600 --> 02:39:59,840
उनकी जो चीजें हैं वो स्वीकार नहीं है बाकी जहां

2142
02:39:59,840 --> 02:40:04,120
ब्रह्म के विषय में हमने जाना नहीं कि उन्होंने क्या कहा है मगर यह जानते

2143
02:40:04,120 --> 02:40:08,360
हैं कि वर्णाश्रम धर्म को उन्होंने जन्म से स्वीकार नहीं किया तो उतने

2144
02:40:08,360 --> 02:40:12,440
अंशों में उनको स्वीकार नहीं किया जा सता है बाकी

2145
02:40:12,440 --> 02:40:17,080
अगर वो अनुकरणीय है तो अनुकरण करने में कोई दोष नहीं है

2146
02:40:17,080 --> 02:40:21,800
अच्छा ठीक है बाकी जो तो मैं स्ट्रीम में आने का कारण मेरा यह था

2147
02:40:21,800 --> 02:40:25,800
कि जो आपने बोला कि ईश्वर बाधित है और जो

2148
02:40:25,800 --> 02:40:30,200
अल्लाह गॉड ये जो वर्ड है अन्य नाम अन्य धर्मों के तो स्वामी

2149
02:40:30,200 --> 02:40:31,400
अनंद जो आप

2150
02:40:31,400 --> 02:40:35,480
बता रहे वर्ड वाला मसला वो भी है और मत पर भी सहमत है कि ईश्वर

2151
02:40:35,480 --> 02:40:39,480
के नाम जो है वह केवल एक भाषा या एक देश काल परिस्थिति में नहीं

2152
02:40:39,480 --> 02:40:43,640
हो सकते उसको हम अल्लाह भी कह सकते हैं उसको गड भी कह सकते

2153
02:40:43,640 --> 02:40:49,640
है तो स्वामी मराज

2154
02:40:50,680 --> 02:40:54,720
जीको आपको क्लियर कर दूं कि दुनिया में

2155
02:40:54,720 --> 02:40:58,760
जो भी शब्द है कुछ भी है जी वो ईश्वर

2156
02:40:58,760 --> 02:41:03,040
के निमित्त ही है ईश्वर के बिना उसका अस्व नहीं संभव

2157
02:41:03,040 --> 02:41:07,440
है मगर बकुल जिस प्रकार पानी सर्वत्र व्याप्त

2158
02:41:07,440 --> 02:41:11,520
है नमी के रूप में अनेकानेक रूपों में मगर

2159
02:41:11,520 --> 02:41:15,760
हमारी प्यास वही पानी बुझा सकता है जो हमारे गिलास अथवा

2160
02:41:15,760 --> 02:41:20,520
कर पात्र इत्यादि की व्यवहारिक सीमा में आ जाए पानी

2161
02:41:20,520 --> 02:41:24,560
सर्वत्र व्याप्त है मगर हमारी जो प्यास है वही पानी का

2162
02:41:24,560 --> 02:41:28,760
वही रूप बुझा सकता है जो हमारे गिलास अथवा

2163
02:41:28,760 --> 02:41:32,920
कपात इत्यादि की व्यावहारिक सीमा के अंदर आ जाए इसी प्रकार

2164
02:41:32,920 --> 02:41:36,960
से ईश्वर तो सर्वत्र है ही सर्व सब कुछ ईश्वर ही

2165
02:41:36,960 --> 02:41:41,520
है ईश्वर में है मगर हमारी मोक्ष की प्यास

2166
02:41:41,520 --> 02:41:45,680
ईश्वर का वह रूप बुझा सकता है जो वेदा दि शास्त्र सम्मत

2167
02:41:45,680 --> 02:41:46,760
बताई गई मोक्ष

2168
02:41:46,760 --> 02:41:50,920
की सीमा के अंदर आ जाए ठीक है बिल्कुल

2169
02:41:50,920 --> 02:41:54,960
है ना तो ईश्वर तो सब कुछ है सभी नाम ईश्वर

2170
02:41:54,960 --> 02:41:59,400
के उसम कोई दिक्कत नहीं है मगर जो नाम मोक्ष दायक बताए जाएंगे

2171
02:41:59,400 --> 02:42:03,680
वेदों के द्वारा वो मोक्ष दिलाएंगे अल्लाह नाम

2172
02:42:03,680 --> 02:42:08,160
शास्त्रों द्वारा मोक्ष दायक नहीं बताया गया तो वो मोक्ष नहीं दिलाएगा

2173
02:42:08,160 --> 02:42:12,600
दूसरी बा दूसरी बात केवल हम नाम से अगर कहे

2174
02:42:12,600 --> 02:42:16,640
कि नाम से ही अगर जोड़े तो एक बार को बात अलग है मगर हम

2175
02:42:16,640 --> 02:42:20,920
अगर ये कहे कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

2176
02:42:20,920 --> 02:42:25,560
जिसको अल्लाह कहा जाता है वो और कृष्ण एक है तो गलत हो जाएगा

2177
02:42:25,560 --> 02:42:29,840
क्यों क्योंकि कुरान की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले

2178
02:42:29,840 --> 02:42:34,080
सकता वादित है सीमित है

2179
02:42:34,080 --> 02:42:38,960
आप ठीक क रहे वो हमारा ईश्वर जो है वो सर्वशक्तिमान

2180
02:42:38,960 --> 02:42:43,120
बिल्कुल ये बात मैं मान रहा हूं कि जैसे जितनी भी धार्मिक किताबें

2181
02:42:43,120 --> 02:42:47,120
हैं उसमें व्याख्या अलग-अलग है ये नहीं ये बात तो बिल्कुल तय है

2182
02:42:47,120 --> 02:42:51,600
क्योंकि उस बात का उतर है उसी बात

2183
02:42:51,600 --> 02:42:55,800
का तो इकान वाला जो प्रश्न आपने उन लोगों से किया कि

2184
02:42:55,800 --> 02:43:00,000
वो लोग कहते हैं गॉड अला ये सब एक ही है तो

2185
02:43:00,000 --> 02:43:01,760
मैंने जितना श्री प्रभुपाद को सुना या

2186
02:43:01,760 --> 02:43:06,320
इस्कान को जितना समझा कुछ दो मेरे मित्र भी है इकान से

2187
02:43:06,320 --> 02:43:10,360
मैंने भी उनसे पूछा तो वो लोग बताते हैं कि जब अगला

2188
02:43:10,360 --> 02:43:14,480
आदमी जैसे मान लो कोई ऐसे हम लोग सनातन परंपरा से हम लोग आपस में चर्चा कर

2189
02:43:14,480 --> 02:43:18,560
जवाब देने जा रहे हो वो मैं आपको बता दूं आप जो जवाब देने जा रहे हो वो मैं आपको

2190
02:43:18,560 --> 02:43:22,840
बता दूं वोय बताते होंगे आपको कि उनको कन्वर्ट करने के लिए

2191
02:43:22,840 --> 02:43:28,840
बोला जाता है

2192
02:43:29,200 --> 02:43:33,200
उनसे बात बताओ जब पाकिस्तान में या अन्य

2193
02:43:33,200 --> 02:43:37,480
जो मुस्लिम कंट्री जहा परन अपना प्रचार करता है और वहां

2194
02:43:37,480 --> 02:43:41,560
पर जब मुसलमान यह पूछता होगा कि हमारा ईश्वर तो व

2195
02:43:41,560 --> 02:43:45,680
हमारा ईश्वर और कृष्ण एक कैसे हो गया है तो वहां पर उनको ये लोग क्या

2196
02:43:45,680 --> 02:43:49,960
कहते होंगे वही बात जो आज आपसे कह रहे

2197
02:43:49,960 --> 02:43:54,000
हैं समझ में आ रहा है आपको जी जी आपसे

2198
02:43:54,000 --> 02:43:58,240
ये कहा जा रहा है कि हम मुसल हम मुसलमानों को कन्वर्ट

2199
02:43:58,240 --> 02:44:02,480
करने के लिए कह देते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो जब मुसलमान

2200
02:44:02,480 --> 02:44:06,560
ये प्रश्न करता होगा तो क्या उत्तर बनता है उनको कैसे संतुष्ट करेंगे कि हम

2201
02:44:06,560 --> 02:44:10,720
हिंदुओं को कन्वर्ट करने के लिए कह देते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है बाकी अल्लाह

2202
02:44:10,720 --> 02:44:15,240
महान है नहीं वो और भी तर्क देते हैं जैसे 124000

2203
02:44:15,240 --> 02:44:17,040
पैगंबरों का या अलग-अलग

2204
02:44:17,040 --> 02:44:20,960
धर्मों में नबियों का नबी गए

2205
02:44:20,960 --> 02:44:25,120
देखिए हमने कई सार इसम स्ट्रीम्स इसमें कई सारी कर ली आप हमारी पुरानी

2206
02:44:25,120 --> 02:44:29,160
स्ट्रीम देखिए पुराण की सीमा का जो ईश्वर है

2207
02:44:29,160 --> 02:44:33,360
अल्लाह उसमें और हमारा जो ईश्वर है वेदा

2208
02:44:33,360 --> 02:44:37,720
दि शास्त्रों द्वारा निर्धारित सीमा का ईश्वर उसमें अंतर है

2209
02:44:37,720 --> 02:44:42,080
हमारा ईश्वर अवतार ले सकता है उनका ईश्वर अवतार नहीं ले

2210
02:44:42,080 --> 02:44:46,480
सकता ठीक है हमारा ईश्वर सिखाता है रघुकुल

2211
02:44:46,480 --> 02:44:50,480
रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई उनका

2212
02:44:50,480 --> 02:44:54,480
ईश्वर कहता है कि अगर तुमने किसी को माता बहन बेटी बोल

2213
02:44:54,480 --> 02:44:58,480
भी दिया है मगर यह सब तुम्हारे मुह की बातें हैं मुंह की बातों का कोई

2214
02:44:58,480 --> 02:45:02,640
मोल नहीं है तुम उनके साथ भी वह सब कर सकते हो

2215
02:45:02,640 --> 02:45:06,840
जो माता बहन और पत्नी के साथ नहीं किया जाता जी

2216
02:45:06,840 --> 02:45:11,000
जी मैंने पढ़े है जो है मैंने आपको मोटे

2217
02:45:11,000 --> 02:45:15,480
मोटे धर्म और ब्रह्म दोनों में अंतर बता

2218
02:45:15,480 --> 02:45:19,520
दिए दो बातें हैं सिद्धांत को

2219
02:45:19,520 --> 02:45:23,640
फॉलो करने के पीछे के दो कारण है अध्यात्म को फॉलो करने का पीछे

2220
02:45:23,640 --> 02:45:27,920
का दो कारण है धर्म और ब्रह्म तो उनका ब्रह्म

2221
02:45:27,920 --> 02:45:32,160
अलग ब्रह्म है ही नहीं खैर धर्म अलग उनका

2222
02:45:32,160 --> 02:45:36,280
ईश्वर अलग और उनका आचरण भी अलग तो

2223
02:45:36,280 --> 02:45:40,440
फिर हम ये नहीं कह सकते कुरान की सीमा का जो ईश्वर है वो हमारा ईश्वर

2224
02:45:40,440 --> 02:45:44,520
है नहीं वो भैया इसका विरोध है वेद विरोधी

2225
02:45:44,520 --> 02:45:48,560
नास्तिक उसने यह कहा कि कुरान के

2226
02:45:48,560 --> 02:45:52,560
अला किसी भी पुस्तक को प्रमाण नहीं माना जा सकता कुरान

2227
02:45:52,560 --> 02:45:57,320
को ही प्रमाण माना जा सकता है और हमारे य कहा गया दो 11 में

2228
02:45:57,320 --> 02:46:01,520
कि वेद विरोधी नास्तिक तो इस हिसाब

2229
02:46:01,520 --> 02:46:05,600
से तो नास्तिक सिद्ध हुआ और हम कह रहे कि भैया व कृष्ण

2230
02:46:05,600 --> 02:46:09,640
और अल्ला एक है ऐसा प्रचार

2231
02:46:09,640 --> 02:46:13,880
करने के कारण ही किसी दिन हमारी कोई बिटिया

2232
02:46:13,880 --> 02:46:17,320
कहीं पर फस जाती

2233
02:46:17,320 --> 02:46:21,520
है क्योंकि कृष्ण और अल्ला एक है वो सोचती है कि यहां भी वही

2234
02:46:21,520 --> 02:46:25,520
मान्यता होंगी जो हमारे य होंगी यहां भी सिखाया गया होगा र

2235
02:46:25,520 --> 02:46:30,040
सदा चली आई प्राण जाई परवचन ना जाई मगर वहा सिखाया गया नहीं

2236
02:46:30,040 --> 02:46:35,600
आप किसी को भी कुछ भी बोल दो उसके बाद उसके साथ उलट व्यवहार कर सकते

2237
02:46:35,600 --> 02:46:39,640
हो दूसरी बात दूसरी बात जब हम

2238
02:46:39,640 --> 02:46:44,000
लोग यह फैला ही देंगे कि कृष्ण और अल्लाह एक है

2239
02:46:44,000 --> 02:46:47,240
तो कृष्ण के जो केंद्र होंगे उन पर यदि कोई

2240
02:46:47,240 --> 02:46:52,320
आक्रमण होगा उनके द्वारा जो कृष्ण और अल्लाह को एक नहीं मानते

2241
02:46:52,320 --> 02:46:56,400
हैं तो जिनके मन में निष्ठा व्याप्त हो चुकी होगी कि कृष्ण और

2242
02:46:56,400 --> 02:47:00,720
अल्ला एक है क्या वह उतना प्रति होकर के रक्षा करने के लिए खड़े

2243
02:47:00,720 --> 02:47:04,880
होंगे नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनके मन में तो

2244
02:47:04,880 --> 02:47:09,240
वहां के लिए भी श्रद्धा हो गई निष्ठा हो

2245
02:47:09,240 --> 02:47:13,280
गई जी इस विषय पर मेरा अपना स्ट य था

2246
02:47:13,280 --> 02:47:17,360
मैं बता रहा हूं जब प्रभु एक क्लिप है

2247
02:47:17,360 --> 02:47:22,560
मतलब प या वगैरह प आते रहते हैं तो शील ूपा

2248
02:47:22,560 --> 02:47:26,600
से शिक्षार्थ कम की बात कर रहे हैं बताइए

2249
02:47:26,600 --> 02:47:30,600
नहीं शील इस्कान इस्कान वालो को मैं बात कर रहा हूं तो

2250
02:47:30,600 --> 02:47:34,880
वहां पे शील प्रू पास से उसने पूछता है कि ईसा जो ईसा है वो

2251
02:47:34,880 --> 02:47:38,960
पिता मतलब पिता किसे संबोधित करते हैं तो जब

2252
02:47:38,960 --> 02:47:43,080
अगर प्रभुपाद के सामने ये प्रश्न है कि किसे संबोधित करते हैं तो वो

2253
02:47:43,080 --> 02:47:47,080
क्या कहेंगे वो थोड़ी कहेंगे कि मैं नहीं जानता या मैं नहीं बताता वो तो कहेंगे कि वो कृष्ण को कह

2254
02:47:47,080 --> 02:47:51,120
रहे हैं वो कहेंगे ना तो अगर वो बोल रहे हैं कि क्राइस्ट जो

2255
02:47:51,120 --> 02:47:55,440
है वो कृष्ण से ही संबंधित है वो उसी को ही संबोधित कर रहे क्यों

2256
02:47:55,440 --> 02:47:59,440
बात होती है जब बात होती है तो वर्बल

2257
02:47:59,440 --> 02:48:02,480
बातें नहीं होती है बिल्कुल कंठस्थ

2258
02:48:02,480 --> 02:48:06,680
बातों पर बात होती है औपचारिकता वाली बातें नहीं होती है

2259
02:48:06,680 --> 02:48:11,000
बात यह है कि इन्होंने गोद के लिखा है कि राम

2260
02:48:11,000 --> 02:48:15,520
कृष्ण अल्लाह और जो यवा वो एक है और

2261
02:48:15,520 --> 02:48:19,920
हमने केवल गलत समझ लिया ऐसा नहीं है हमने जाकर उनके जो अधिकृत

2262
02:48:19,920 --> 02:48:24,040
व्यक्ति है उनसे पूछा उन्होंने बोला कृष्ण अल्लाह और जवा

2263
02:48:24,040 --> 02:48:28,160
में कोई अंतर नहीं है अंतर है कुरान के द्वारा

2264
02:48:28,160 --> 02:48:32,360
प्रतिपादित ईश्वर सीमित है कुरान के द्वारा प्रतिपादित जो धर्म

2265
02:48:32,360 --> 02:48:37,000
है वह वैदिक धर्म की दृष्टि से अधर्म

2266
02:48:37,000 --> 02:48:41,080
है तो अगर हम यह कह देंगे कि अल्लाह और कृष्ण एक है

2267
02:48:41,080 --> 02:48:45,680
तो व्यक्ति की अल्लाह की चीजों में निष्ठा होने लगेगी हम

2268
02:48:45,680 --> 02:48:49,920
यह कहे यदि कुरान के द्वारा बताया गया जो अल्लाह

2269
02:48:49,920 --> 02:48:54,000
है वो सुप्रीम पावर है वो अनंत शक्तिमान है

2270
02:48:54,000 --> 02:48:58,200
सर्व शक्तिमान है अनंत सावत मान है तो वो और कृष्ण एक है

2271
02:48:58,200 --> 02:49:02,400
मगर नहीं कुरान का अल्लाह तो है ही वही जो सीमित है

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02:49:02,400 --> 02:49:06,560
तो फिर हम कैसे कह रहे हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है नहीं कहना

2273
02:49:06,560 --> 02:49:10,600
चाहिए यह भ्रम उत्पन्न करने वाली स्थितियां करते हैं जिससे की

2274
02:49:10,600 --> 02:49:14,840
समाज को हानि पहुंचती है डंके की चोट प देखिए राघवाचार्य

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02:49:14,840 --> 02:49:17,640
बोलते हैं डंके की चोट प डंके

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02:49:17,640 --> 02:49:21,760
की चोट प राघवाचार्य वो तो शंकराचार्य नहीं है रामानुज परंपरा से डंके

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02:49:21,760 --> 02:49:25,880
की चोट पर बोलते हैं क्या बोलते हैं कि भैया

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02:49:25,880 --> 02:49:29,960
मुस्लिमों ने भी मान लिया कि कोई अल्लाह ना अल्लाह है ठीक है मगर वह

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02:49:29,960 --> 02:49:34,920
दिखाई नहीं दे सकता तो जो सब कुछ नहीं कर सकता वो ब्रह्म वो ब्रह्म कैसा वो ईश्वर

2280
02:49:34,920 --> 02:49:38,960
कैसा ईश्वर तो वही है ना जो सब कुछ कर सकता है ये

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02:49:38,960 --> 02:49:43,280
होते हैं प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य जो

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02:49:43,280 --> 02:49:47,640
जो शील प्रभुपाद जी थे उन्होंने कब क्या लिखा आज हम और आप कैसे बता द

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02:49:47,640 --> 02:49:52,440
उनके नाम से जो चीज फैल रही है वो तर्क और प्रमाण के

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02:49:52,440 --> 02:49:57,120
संगत नहीं है विरुद्ध है हो सकता है

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02:49:57,120 --> 02:50:02,000
हा हो स शास्त्र विरुद्ध सिद्धांत विरुद्ध अच्छा

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02:50:02,000 --> 02:50:06,200
जी चलिए ठीक है आज हो चुके करीब दो घंटे

2287
02:50:06,200 --> 02:50:10,440
50 मिनट और हम लोग जो है फिर कभी जुड़ेंगे

2288
02:50:10,440 --> 02:50:14,440
आप आए अच्छा लगा अमित यादव जी और सभी

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02:50:14,440 --> 02:50:19,000
को समय देने के लिए आभार और आपने

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02:50:19,000 --> 02:50:23,400
आज हमारी चर्चा देखी उनके साथ स्कन वाले जो भाई आए थे

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02:50:23,400 --> 02:50:27,440
सभी को जय श्री राम रोकी जी जय श्री राम जय श्री राम अमित

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02:50:27,440 --> 02:50:31,840
याद जी ज श्री राम राम

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02:50:31,840 --> 02:50:32,840
राम

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02:50:32,840 --> 02:50:36,920
ये कौन है हरे कृष्ण हरे कृष्ण

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कौन

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है भाई चेहरा दिखाने ला

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चलिए हटाइए फिर फिर मिलते हैं सभी को जय श्री राम जय

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श्री राम जय श्री राम [संगीत]
