1
00:00:01,550 --> 00:00:07,550
[संगीत]

2
00:00:08,080 --> 00:00:12,400
तो सभी को जय श्री

3
00:00:12,400 --> 00:00:16,520
राम आप सभी का जो पर्व है दीपावली तैयारियां

4
00:00:16,520 --> 00:00:20,680
अच्छे से चल रही हो और ऐसी

5
00:00:20,680 --> 00:00:26,680
हम प्रार्थना करते हैं किसी भी प्रकार का विघ्न

6
00:00:27,640 --> 00:00:31,720
नाए अब मुझे लग रहा है ऐसा की जो समर्थक है या जो

7
00:00:31,720 --> 00:00:35,760
दर्शक है उनको आदत हो

8
00:00:35,760 --> 00:00:39,800
गई है हमारे प्रतिदिन लाइव आने

9
00:00:39,800 --> 00:00:43,960
की ऐसा नहीं है क्योंकि जितना हम सक्रिय

10
00:00:43,960 --> 00:00:49,120
यटू पर दिखते हैं उससे ज्यादा सक्रिय धरातल

11
00:00:49,120 --> 00:00:53,120
पर तो इसलिए ऐसा संभव नहीं है कि हम प्रतिदिन

12
00:00:53,120 --> 00:00:57,160
लाइव आए मगर लाइव ना आने की स्थिति

13
00:00:57,160 --> 00:01:02,720
में जो चोर होते हैं मौका

14
00:01:02,720 --> 00:01:07,880
परस्त व उसी को उसी को अपनी जय जयकार समझते हैं जय श्री

15
00:01:07,880 --> 00:01:12,640
राम सभी को जय श्री राम आशीर्वाद छोटों

16
00:01:12,640 --> 00:01:18,000
को बड़ों के लिए

17
00:01:18,000 --> 00:01:22,160
सम्मान तो सबसे पहली बात जब दीपावली

18
00:01:22,160 --> 00:01:27,160
से शुरू हुई है तो दीपावली परही बात कर ले कि मैंने आपको कई बार कहा है

19
00:01:27,160 --> 00:01:31,560
कि जब भी किसी प्रकार का प्रश्न आपको सताया करे तो

20
00:01:31,560 --> 00:01:35,800
आप अपने प्रश्न को लिखें और सर्च

21
00:01:35,800 --> 00:01:40,640
करें य पर पुरी शंकराचार्य शंकराचार्य तो उसमें

22
00:01:40,640 --> 00:01:44,640
आपको प्राप्त हो जाएगा आपके जो संशय होंगे

23
00:01:44,640 --> 00:01:50,640
लगभग लगभग आपको प्राप्त हो जाएगा

24
00:01:53,240 --> 00:01:57,480
तो मैंने अभी यह इसकन नर्मदापुरम वालों

25
00:01:57,480 --> 00:02:02,520
का देखा नहीं है

26
00:02:02,520 --> 00:02:06,640
मगर आप ही लोग बता दीजिए कि क्या है नर्मदापुरम वालों ने

27
00:02:06,640 --> 00:02:10,840
क्या कहा है मैंने देखा नहीं हालांकि मुझे पता चल गया था आने से पहले कि

28
00:02:10,840 --> 00:02:15,960
उन्होंने हमें टैक किया है तो

29
00:02:15,960 --> 00:02:20,480
दीपावली पर हम लोग बात कर रहे थे दीपावली में

30
00:02:20,480 --> 00:02:24,840
राजा बली की कथा है

31
00:02:24,840 --> 00:02:28,920
और भगवान वामन का उनको दिया जाना

32
00:02:28,920 --> 00:02:33,200
वरदान उन पर उनकी कृपा और उसके

33
00:02:33,200 --> 00:02:37,760
बाद उस कृपा का क्रियान्वित होना जिससे कि य दीपावली

34
00:02:37,760 --> 00:02:41,880
पर्व जो है मनाया जा रहा है सदियों से इस कथा को

35
00:02:41,880 --> 00:02:45,880
आप जहां पर वामन भगवान की

36
00:02:45,880 --> 00:02:50,040
वावन भगवान और राजा बली के बारे में बात हुई वहां पर आप पढ़

37
00:02:50,040 --> 00:02:54,160
सकते हैं भागवत में भी संभवत इसका है

38
00:02:54,160 --> 00:02:58,760
और भविष्य पुराण में भी है आवश्यकता पड़ी पड़ेगी तो

39
00:02:58,760 --> 00:03:02,800
श्लोक क्रमांक के स उपस्थित होंगे

40
00:03:02,800 --> 00:03:08,200
अच्छा इसके बाद क्या हो रहा है मैं एक चीज देख रहा हूं कि

41
00:03:08,200 --> 00:03:09,200
जो

42
00:03:09,200 --> 00:03:13,400
चोर होते हैं उनका एक आदत होती जैसे ही फसने

43
00:03:13,400 --> 00:03:17,440
लगते हैं तो वह भागते हैं वहां से वैसे मैं देख

44
00:03:17,440 --> 00:03:21,560
रहा हूं कि बहुत सारे नैरेटिव जो चलाए गए थे एक एक करके

45
00:03:21,560 --> 00:03:25,560
वो नैरेटिव बंद हो रहे हैं जैसे एक नैरेटिव

46
00:03:25,560 --> 00:03:30,840
था वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब इनका व्यक्ति

47
00:03:30,840 --> 00:03:34,840
आता है चित्रपट पर

48
00:03:34,840 --> 00:03:39,120
तो वह यह नहीं कहता कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान

49
00:03:39,120 --> 00:03:43,440
है व यह कहता है कि मतलब दूसरे टॉपिक

50
00:03:43,440 --> 00:03:47,720
छेड़ता है कि जैसे यहां पर तो इनको अविनाशी कहा गया है यहां तो नाशवान कहा

51
00:03:47,720 --> 00:03:51,880
गया इन टॉपिक्स पर बात करता है मेरा वीडियो आपको ठीक

52
00:03:51,880 --> 00:03:55,240
से दिखाई दे रहा है उसमें

53
00:03:55,240 --> 00:03:59,280
कुछ ऐसा है कि कुछ मुझे ऐसा लग रहा है वीडियो

54
00:03:59,280 --> 00:04:03,600
ठीक से नहीं आ रहा

55
00:04:03,600 --> 00:04:07,640
है हां वही मैं कह रहा था आजकल क्या हो

56
00:04:07,640 --> 00:04:11,920
गया है दूसरे मुद्दों पर बातें हो रही है

57
00:04:11,920 --> 00:04:16,000
अब धीरे-धीरे इनका जो एक एक नैरेटिव है ना जो इन्होंने तथाकथित तंत्र

58
00:04:16,000 --> 00:04:20,280
ने बना रखा है वो एक एक नैरेटिव जो है

59
00:04:20,280 --> 00:04:24,680
उसको बिल्कुल प्यार से बिल्कुल जो एक व होता है ना

60
00:04:24,680 --> 00:04:28,720
शिल्पकार तराश है जो एक मूर्ति उसकी

61
00:04:28,720 --> 00:04:32,880
तरीके से हम एक एक कर कर जैसे हमने सबसे पहले पकड़ लिया था उसको वेदों

62
00:04:32,880 --> 00:04:37,040
में प्रमाण है कबीर

63
00:04:37,040 --> 00:04:41,160
भगवान तो हमने उस नैरेटिव को तोड़ा सबसे

64
00:04:41,160 --> 00:04:45,160
पहले अब ये लोग आते हैं तो वो बात नहीं करते हैं दूसरी बातें

65
00:04:45,160 --> 00:04:47,520
करते

66
00:04:47,520 --> 00:04:51,560
हैं

67
00:04:51,560 --> 00:04:56,520
अ इसके बाद क्या है कि आप एक चीज देखिए

68
00:04:56,520 --> 00:05:00,760
हम जब भी अपना वीडियो चालू करते हैं लाइव में

69
00:05:00,760 --> 00:05:04,840
तो जो भी व्यक्ति हमारा प्रतिकार कर रहा है अगर हमें पता चल

70
00:05:04,840 --> 00:05:08,840
जाता है कि उसने क्याक कुतर्क किए या कौन से प्रमाण मांगे

71
00:05:08,840 --> 00:05:12,920
या कौन सी प्रमाण की बात की तो हम जब अपना वीडियो चालू करते हैं तो

72
00:05:12,920 --> 00:05:17,360
सबसे पहले उनके कुतर्कों का समाधान और यदि प्रमाण से संबंधित

73
00:05:17,360 --> 00:05:21,800
कोई बात है तो उसके बारे में बात करते

74
00:05:21,800 --> 00:05:26,200
हैं और अब हो क्या रहा है कि जब हमने लाकर

75
00:05:26,200 --> 00:05:31,160
के बिल्कुल जगह पर एक प्रहार

76
00:05:31,160 --> 00:05:35,320
यथोचित तरीके से कर दिया है तो अब

77
00:05:35,320 --> 00:05:39,560
क्या हो रहा है कि हमारे प्रश्नों का उत्तर दिया ही नहीं जा रहा है

78
00:05:39,560 --> 00:05:43,880
नई चीजें खोदी जा रही है उन पर भी बात करेंगे कौन सी नई चीजें है समाधान

79
00:05:43,880 --> 00:05:47,920
भी देंगे मगर सोचने वाली बात यह

80
00:05:47,920 --> 00:05:52,120
है कि भाई आपका कहना यह है कि हम यहां

81
00:05:52,120 --> 00:05:56,120
से उनको समय नहीं देते हैं बोलने का जबकि वो यहां पर कुतर्क कर रहे होते हैं

82
00:05:56,120 --> 00:06:01,040
जैसे एक महानुभाव है नाम मुझे याद नहीं आ रहा है

83
00:06:01,040 --> 00:06:05,240
इनका नाम है रतन दास फसबुक

84
00:06:05,240 --> 00:06:09,720
पर अपनी हम तो अपने पोस्ट डाल रहे हैं फेसबुक पर उन्होंने हमें

85
00:06:09,720 --> 00:06:13,880
टैग किया यही रामपाल दास जी के मामले अब

86
00:06:13,880 --> 00:06:18,000
जब हमने कभी कुछ डाला तो हमें ध्यान हो गया कि भाई इनका जो नाम है रतन दास

87
00:06:18,000 --> 00:06:22,040
करके एक रतन दास नाम की आईडी है जब फेसबुक खोलते हैं

88
00:06:22,040 --> 00:06:26,040
वह नाम तभी याद आते हैं तो हमें याद रहा या फिर हमने चेक किया

89
00:06:26,040 --> 00:06:30,080
हमको कि पिछली बार किसने रामपाल वाले विषय में

90
00:06:30,080 --> 00:06:34,160
टैक किया था तो जब हम उत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं या कुछ रामपाल

91
00:06:34,160 --> 00:06:38,600
के संबंध में हम प्रस्तुत कर रहे हैं तो हमने उसी नाम को ढूंढ कर के टैक कर

92
00:06:38,600 --> 00:06:43,600
दिया अब होता क्या है कि वो महानुभाव एक दिन अचानक

93
00:06:43,600 --> 00:06:48,280
से प्रत्यक्ष यहां वीडियो में आ जाते हैं और हमसे कहते हैं मैं

94
00:06:48,280 --> 00:06:52,280
राजन दास तो मैं उनसे पूछता हूं भा

95
00:06:52,280 --> 00:06:56,320
अपना पूरा परिचय दीजिए तो बोलते आप तो मुझे जानते हैं मतलब हमने अगर उनको

96
00:06:56,320 --> 00:07:00,560
वहा एफबी पर टैग कर दिया उनका नाम से उनको जानते उनको टैग हमने

97
00:07:00,560 --> 00:07:04,640
कर दिया तो हम उनको जानते हैं और हमने अगर यह कह दिया नहीं हम आपको नहीं जानते

98
00:07:04,640 --> 00:07:07,280
तो अपने वीडियो में जाकर कुत कर रहे देखो देखो

99
00:07:07,280 --> 00:07:11,280
इसने एक दिन पहले मुझे टैक किया था और अब ये मुझे जानता नहीं है

100
00:07:11,280 --> 00:07:15,280
तो इतना उनका और व वो व्यक्ति उस व्यक्ति की

101
00:07:15,280 --> 00:07:19,800
कहानी क्या है कि उसको हमने हटाया क्यों था

102
00:07:19,800 --> 00:07:23,920
यह जो दास नाम का व्यक्ति जो कह रहा है कि हमको हटा दिया उसने टैग

103
00:07:23,920 --> 00:07:28,720
लाइन डाली कि भगड़ जब हम उससे सीरियसली और

104
00:07:28,720 --> 00:07:32,720
स्थिरता के साथ साथ बात करने का प्रयत्न कर रहे हैं तो वो हंसी

105
00:07:32,720 --> 00:07:36,880
ठट में है जैसे मैंने पूछा कि वेदों में प्रमाण

106
00:07:36,880 --> 00:07:41,680
है कबीर भगवान है यह कहां लिखा है अरे आपको नहीं पता अरे

107
00:07:41,680 --> 00:07:46,040
ये म ये क्या है भाई हम आपके मित्र थोड़ी ना है

108
00:07:46,040 --> 00:07:50,200
अपने मित्रों के साथ ये सब करिए हसी ट्टा

109
00:07:50,200 --> 00:07:54,240
तो जब उन्होंने दो तीन बार इस तरह की चीजें की जैसे मैंने उनसे कहा कि

110
00:07:54,240 --> 00:07:58,520
अपना परिचय दीजिए अरे आप तो मु जानते हैं आप मुझे नहीं जानते आप

111
00:07:58,520 --> 00:08:03,000
ये नहीं जानते अवेदों में प्रमाण है ये सब जो जो एक

112
00:08:03,000 --> 00:08:07,600
मंच पर जब हम बातें कर रहे व हसी मजाक करने की आवश्यकता नहीं है हम आपके मित्र नहीं है

113
00:08:07,600 --> 00:08:11,640
संगी साथी नहीं है तो हमने उनका ये रवैया देखकर हम जानते

114
00:08:11,640 --> 00:08:16,240
भी नहीं थे कि वही अभी भी उन्होंने क्लियर नहीं बताया था कि मैं वही रतन दास हूं

115
00:08:16,240 --> 00:08:20,480
जिसको आपने टैग किया है फेक पर तो हमने समझते हुए

116
00:08:20,480 --> 00:08:22,520
कोई जो है निठल्ला व्यक्ति

117
00:08:22,520 --> 00:08:26,520
आया है जो उसके आचरण से दिखाई दिया यह जो है समय

118
00:08:26,520 --> 00:08:30,680
बर्बाद करने आया है और इसको किसी भी मुद्दे

119
00:08:30,680 --> 00:08:34,120
की बात

120
00:08:34,120 --> 00:08:38,640
में किसी भी मुद्दे की बात जय श्री राम जय श्री

121
00:08:38,640 --> 00:08:42,800
इसको किसी भी मुद्दे की बात में रुचि नहीं है यह केवल यहां ह

122
00:08:42,800 --> 00:08:46,960
इकट्ठा करने आया है यह सोचते हुए इसको हमने हटा दिया अब

123
00:08:46,960 --> 00:08:52,160
दूसरे दिन वीडियो बनाता है देखो देखो हमको हटा दिया यह है वो है

124
00:08:52,160 --> 00:08:56,160
बनाओ मगर बात क्या है ना कि एक कमरे में बैठ कर के केवल

125
00:08:56,160 --> 00:09:00,560
अपना पक्ष रखने में बहुत आसान होता है और और प्रत्यक्ष वार्ता

126
00:09:00,560 --> 00:09:04,800
करते हुए एक व्यक्ति से नहीं 151 20

127
00:09:04,800 --> 00:09:08,840
20 व्यक्तियों से एक साथ अकेले वार्ता करते

128
00:09:08,840 --> 00:09:12,920
हुए भी अपने पक्ष को यथावत ठोस

129
00:09:12,920 --> 00:09:16,960
तरीके से रख देने में अलग बात होती है जो हमने कई बार किया है

130
00:09:16,960 --> 00:09:22,400
भगवत कृपा से गुरु गोविंदो ग्रंथ के

131
00:09:22,400 --> 00:09:26,440
तो बात चल रही थी कि हम इनके कुतर्कों

132
00:09:26,440 --> 00:09:30,640
का भी समाधान देते हैं जब हम लाइव

133
00:09:30,640 --> 00:09:34,720
आते हैं तो अगर हमें पता चल गया कि कहां कहा कौन-कौन से कुतर्क किए

134
00:09:34,720 --> 00:09:38,960
गए हैं उनका भी समाधान देते उसके बाद अपनी बात को चालू करते

135
00:09:38,960 --> 00:09:42,960
हैं तो इनको अब इनका कहना यह था कि हम इनको समय नहीं देते

136
00:09:42,960 --> 00:09:47,440
मगर जो भी लोग प्रयास कर रहे हैं

137
00:09:47,440 --> 00:09:51,440
हमारे हमारे विरुद्ध बात करने का यहां तो हम समय नहीं

138
00:09:51,440 --> 00:09:55,960
देते तो यहां विरोध नहीं कर पाते वो लोग जब

139
00:09:55,960 --> 00:09:59,960
वहां जाकर के अपना अकेले आराम से सुरक्षित है वहां तो उठा पटक भी नहीं

140
00:09:59,960 --> 00:10:04,360
सकता किसी को जैसे ये भय हो जैसे सामने आने में क्या भय होता है

141
00:10:04,360 --> 00:10:08,560
कि शिवांस कहीं मारे नहीं भगा भगा करके हो सकता है हम ऐसा करते नहीं है

142
00:10:08,560 --> 00:10:12,600
ना करेंगे मगर सामने वाले को लगने लगता है कि भाई ये उठा

143
00:10:12,600 --> 00:10:16,720
उठा के पटके ना हमको और बाल पकड़ के हिला ना दे

144
00:10:16,720 --> 00:10:20,920
यह सब ना करे तो इस कारण से भय के कारण वो अपने एक कमरे में बैठ

145
00:10:20,920 --> 00:10:24,960
कर के जब बातें कर रहे होते हैं और तब भी उनको

146
00:10:24,960 --> 00:10:30,040
ये होश नहीं आता है कि जो भाई मुद्दे का विषय की बात है उसका तो हमने

147
00:10:30,040 --> 00:10:34,280
करते किस टॉपिक पर वहां पर हमको बोलने नहीं दिया गया हमारे लोगों को बोलने

148
00:10:34,280 --> 00:10:37,800
नहीं दिया गया उस टॉपिक का तो निराकरण करते मगर निराकरण

149
00:10:37,800 --> 00:10:42,320
होगा तब तो करेंगे ना निराकरण होगा तब तो करेंगे

150
00:10:42,320 --> 00:10:47,640
तो अब क्या बात आती है कि भाई अब दूसरी ननई चीज उठेंगी गोबर

151
00:10:47,640 --> 00:10:52,080
उठेगा धूप उठेगी यह सब बातें उठेंगी तो

152
00:10:52,080 --> 00:10:56,240
इन सब बातों का समाधान देते हुए और हम जब उत्तर लाते

153
00:10:56,240 --> 00:11:00,280
हैं तो ऐसे उत्तर लाते हैं कि उसमें इ एंड बट

154
00:11:00,280 --> 00:11:04,480
ना कर सके हमारे उत्तर ऐसे नहीं होते उत्तर जब होते कांटे

155
00:11:04,480 --> 00:11:08,520
की नोक वाले होते हैं और यह कांटे की नोक वाले होते हैं इसका

156
00:11:08,520 --> 00:11:13,640
प्रमाण मैं आप ही लोगों की तरफ से दिलवा दूंगा है ना

157
00:11:13,640 --> 00:11:18,040
तो यह ध्यान देने वाली बात है अब सबसे पहले बात कर लेते हैं कि

158
00:11:18,040 --> 00:11:22,120
भैया इनके द्वारा एक तो यह सब कपोल

159
00:11:22,120 --> 00:11:26,200
कल्पित कथाएं फैलाई जाती है कि वहां पर श्री रामचंद्र आए

160
00:11:26,200 --> 00:11:30,200
श्री रामचंद्र जी को यह करने वा कबीर थे वो

161
00:11:30,200 --> 00:11:34,200
करने वाले कबीर थे कहां पर वर्णित है य सब बातें कहां

162
00:11:34,200 --> 00:11:38,240
पर वर्णित है जो ये राम पालियो के द्वारा रामपाल को

163
00:11:38,240 --> 00:11:42,280
फॉलो करने वालों के द्वारा यह बातें जो फैलाई जाती है

164
00:11:42,280 --> 00:11:46,560
कि राहुल जी आपको य बातें पता है थोड़ा सा राहुल

165
00:11:46,560 --> 00:11:51,280
जी इनके बारे जो रामचंद्र जी के बारे में और

166
00:11:51,280 --> 00:11:53,240
यह सब बातें जो फैलाई जाती है इनके

167
00:11:53,240 --> 00:11:58,120
द्वारा मुझे पता है मैंने देखा इन लोगों का क समुद्र का

168
00:11:58,120 --> 00:12:02,280
रचना राम जी ने नहीं की थी कबीर दास जी ने किया कबीर दस जीने हनुमान जी को ज्ञान

169
00:12:02,280 --> 00:12:06,560
दिया हा लोग

170
00:12:06,560 --> 00:12:11,120
वो हम लोगों ने कल इसका निराकरण देखा था अध्यात्म रामायण इत्यादि में

171
00:12:11,120 --> 00:12:15,480
जिसके जिससे मिलती जुलती कथाए सुनाते हैं

172
00:12:15,480 --> 00:12:19,520
अच्छा मगर वहां पर क्या था जो मुनि के भेष में मिले थे वो रामचंद्र

173
00:12:19,520 --> 00:12:23,720
जी ही थे हा व भगवान राम वही पर कहा जा रहा है जो मुनि

174
00:12:23,720 --> 00:12:29,720
के भेष में मिले थे जी र

175
00:12:31,840 --> 00:12:36,040
हा यह सब बातें ट पर आती है सही कह रहे

176
00:12:36,040 --> 00:12:40,040
गोविंद जी पर डालते बस लोग

177
00:12:40,040 --> 00:12:44,720
ट पर पाई जाती है अपने मतलब की बात लेे बस

178
00:12:44,720 --> 00:12:47,880
थोड़ी दक्ष

179
00:12:47,880 --> 00:12:52,520
शमा जी मैं एक क्रम चल रहा है उसको जरा पूरा कर ल

180
00:12:52,520 --> 00:12:57,200
एक क्रम बना लिया है उसको बस पूरा कर लू तो

181
00:12:57,200 --> 00:13:01,200
पहली बात तो य दीपावली के बारे में इनके द्वारा फैलाई गई मिथ्या

182
00:13:01,200 --> 00:13:06,000
जो हमने बताया कि दीपावली क्यों मनाते हैं राजा बली का प्रकरण है

183
00:13:06,000 --> 00:13:10,880
और भी बहुत सारी चीजें जुड़ी हुई है दीपावली से दीप मलिक उत्सव कहते हैं इसे

184
00:13:10,880 --> 00:13:14,960
अब बात आती है कि इनके द्वारा दीपावली के बारे में एक बात और फैलाई जाती

185
00:13:14,960 --> 00:13:19,200
है कि भाई मेरी लास्ट दीपावली ऐसा हुआ था वैसा हुआ था वही नापतोल वाला

186
00:13:19,200 --> 00:13:24,000
पहले मैं ऐसा था पहले मैं ये करता था वो अब मुझे

187
00:13:24,000 --> 00:13:28,080
लो वो ऐसे करते हैं ना कि पहले मैं ऐसा था ये

188
00:13:28,080 --> 00:13:32,960
करता था वो करता था टा टाया फिर उसके बाद अरे वाह

189
00:13:32,960 --> 00:13:36,960
ये अब ये बिल्कुल चेंज हो गया ये हो गया वो हो गया तो ये इनकी

190
00:13:36,960 --> 00:13:41,720
तरफ से कपूल कल्पित कहानिया बताई जाती मगर मैं एक बात कह रहा हूं

191
00:13:41,720 --> 00:13:45,720
कि जो रामपाल दास जी है उन्होंने कुछ किया

192
00:13:45,720 --> 00:13:47,080
हो या ना किया हो

193
00:13:47,080 --> 00:13:51,360
उनके रहते कुछ लोग मरे तो जब

194
00:13:51,360 --> 00:13:55,560
उनको कुछ हत्या का जिसका आरोप लगा उनके ऊपर ऐसा तो हुआ

195
00:13:55,560 --> 00:13:59,920
ना पकड़म पकड़ाई में कुछ अ चलो वहां भी कुछ नहीं हुआ वो भी आधारभूत

196
00:13:59,920 --> 00:14:03,920
मान लेते मगर इनके यहां पर भी भंडारे में यह हो गया वो हो गया

197
00:14:03,920 --> 00:14:08,360
ऐसा सुनाई देता है तो अगर ऐसा हो गया भंडारे में तो फिर इनको भंडारा

198
00:14:08,360 --> 00:14:12,360
नहीं करना चाहिए अगर कोई अप्रिय घटना किसी कारण वस

199
00:14:12,360 --> 00:14:16,640
घट गई है तो इनको वो मेरी लास्ट भंडारा यह कहते हुए उस भंडारे

200
00:14:16,640 --> 00:14:20,800
का त्याग कर देना चाहिए है ना अगर रामपाल

201
00:14:20,800 --> 00:14:25,200
जी इस समय जेल में है और उनके ऊपर कोई आरोप है कि उ

202
00:14:25,200 --> 00:14:29,480
वो इसमें शामिल थे या नहीं थे मगर जेल में तो है ना एक अप्रिय

203
00:14:29,480 --> 00:14:34,000
घटना तो जेल जाना भी है तो अप्रिय घटना है और वह कह रहे हैं कि मैं

204
00:14:34,000 --> 00:14:38,400
फसाया गया है य अप्रिय घटना है तो क्योंकि रामपाल

205
00:14:38,400 --> 00:14:42,680
दास जी के साथ एक अप्रिय घटना घट गई है तो उनसे मिलने वाला जो ज्ञान

206
00:14:42,680 --> 00:14:46,800
है उसको छोड़ देना चाहिए मैंने लास्ट बार उसका आलंबन तब लिया था जब वह जेल गए

207
00:14:46,800 --> 00:14:50,880
थे तो उसके बाद ज जेल चले गए तो नहीं छोड़ रहे मगर भाई यह

208
00:14:50,880 --> 00:14:55,080
तो बहुत बड़ी बात है इसको छोड़ देना मैं तो यह कह रहा हूं कि जिस

209
00:14:55,080 --> 00:14:59,720
मिठाई की दुकान पर कल छापा पड़ा है कि यहां पर मिलावट होती है

210
00:14:59,720 --> 00:15:02,720
उस मिठाई की दुकान को लोग नहीं छोड़ पाते हैं

211
00:15:02,720 --> 00:15:06,800
जो जो जो सही बात है जो जिस पर

212
00:15:06,800 --> 00:15:11,680
कल छापा पड़ गया उस मिठाई की दुकान को लोग नहीं छोड़ पाते मगर आप यह कह रहे हो

213
00:15:11,680 --> 00:15:15,880
कि जो हमारा यह त्यौहार है या जो भी हमारी परंपराएं हैं

214
00:15:15,880 --> 00:15:20,160
जो भी हमारा बेस है जो भी हमारी संस्कृति है उसको हम इसलिए छोड़ दे क्योंकि

215
00:15:20,160 --> 00:15:24,280
अब आपका मन हो गया है भगवान बनने का या भगवान तक पहुंचाने वाला

216
00:15:24,280 --> 00:15:28,280
बनने का इसलिए हम यह सारी चीजें छोड़ दे और इसलिए

217
00:15:28,280 --> 00:15:32,400
आपको हमारी जो परंपरा प्राप्त जो चीजें चली आ रही

218
00:15:32,400 --> 00:15:36,600
है उन हर चीजों से तकलीफ है ये परंपरा प्राप्त वाला चीजें

219
00:15:36,600 --> 00:15:41,320
चली आ रही है पूर्वजों से इसके बारे में मुझे जरा याद दिला दीजिएगा मैं अंत में

220
00:15:41,320 --> 00:15:45,760
बोलूंगा है ना मगर अब ये तो रहा दीपावली का

221
00:15:45,760 --> 00:15:50,680
निराकरण अब इससे आगे अगर हम चले

222
00:15:50,680 --> 00:15:54,800
तो इन्होंने दो बातें उठाई है हम वो नहीं करेंगे जो ये करते हैं

223
00:15:54,800 --> 00:16:00,200
इन्होंने दो बातें उठाई है गोबर और धूप

224
00:16:00,200 --> 00:16:04,200
ठीक है तो हमारे यहां गोबर का लेप क्यों लगाया जाता है सबसे पहले तो

225
00:16:04,200 --> 00:16:08,200
प्रमाण है भविष्य पुराण में प्रमाण है भागवत

226
00:16:08,200 --> 00:16:12,240
पुराण में प्रमाण है और जगह जगह ज्यादातर जहां पर पूजा

227
00:16:12,240 --> 00:16:16,320
की अच्छे से विधि बताई जा रही है वहां पर सर्वप्रथम गोबर का लेप

228
00:16:16,320 --> 00:16:18,080
लगाने की बात हो रही है

229
00:16:18,080 --> 00:16:22,200
पंचगव्य में से एक पदार्थ भी होता है ये है ना और

230
00:16:22,200 --> 00:16:27,000
इसको जो है मैं

231
00:16:27,000 --> 00:16:32,000
अगर इसको जो है ये

232
00:16:32,000 --> 00:16:36,280
लक्षमी गोमूत्र इत्यादि ये पंचगव्य में आता है

233
00:16:36,280 --> 00:16:40,440
तो अब यह तो रही एक बात दूसरी बात अब साइंटिफिक

234
00:16:40,440 --> 00:16:44,760
अगर देखें गोबर के बारे में वैसे बहुत सारी चीजें हैं

235
00:16:44,760 --> 00:16:49,160
मगर एक मोटी मोटी चीज अगर मैं बता दूं तो यह नॉन कंडक्टर होता है

236
00:16:49,160 --> 00:16:53,400
मतलब एनर्जी को पास आउट नहीं करता है जो गोबर से बना हुआ लेप

237
00:16:53,400 --> 00:16:57,440
होता है एनर्जी को पास आउट नहीं करता है गोबर से बनी हुई चीज एनर्जी

238
00:16:57,440 --> 00:17:01,600
को सोख लेती है और अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जहां

239
00:17:01,600 --> 00:17:05,880
पर मंत्र उच्चारण हो रहे होते हैं जहां पर यज्ञ हो रहा होता है हवन हो रहा होता है वहां पर बहुत

240
00:17:05,880 --> 00:17:10,120
अपरंपार ऊर्जा उत्पन्न हो रही होती अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से

241
00:17:10,120 --> 00:17:14,240
देख मगर ऐसा नहीं है कि हम इतना ही शास्त्रोक्त बातें करके

242
00:17:14,240 --> 00:17:18,280
छोड़ेंगे हमें ऐसी बातें करके छोड़ेंगे जिसका जिसके बाद आपका फन उठ ना

243
00:17:18,280 --> 00:17:22,640
सके नाग वाला ठीक है तो वो प्रमाण

244
00:17:22,640 --> 00:17:27,080
आपके पास राहुल जी है आपने भेजे हैं क्या वो नंबर पर मैंने आपको कहा था

245
00:17:27,080 --> 00:17:31,680
भविष्य पुराण व आप भेज हम य स्क्रीन पर दिखा

246
00:17:31,680 --> 00:17:33,520
देंगे अब

247
00:17:33,520 --> 00:17:37,640
गोबर की बात हो गई भविष्य पुराण में है भविष्य

248
00:17:37,640 --> 00:17:42,360
पुराण में बता देता हूं पढ़ करके नहीं तो फिर रह

249
00:17:42,360 --> 00:17:47,360
जाएगा वैसे भी आप लोगों को तर्क से तो कोई मतलब है नहीं तर्क हमने

250
00:17:47,360 --> 00:17:51,360
आपको कृपा रूप में दे दिए हैं आपको तो प्रमाण से मतलब होता

251
00:17:51,360 --> 00:17:55,360
है प्रमाण के मूल में भी इससे मतलब होता है कौन सी

252
00:17:55,360 --> 00:17:59,400
बात रामपाल दास जी ने कही है देखो भागवत भत कथा के

253
00:17:59,400 --> 00:18:03,720
ब एक उदाहरण दे दे रहा हूं सबसे पहले लेप लगाया जाता है यहां तक कि

254
00:18:03,720 --> 00:18:07,840
मरणासन स्थिति में भी गोबर के लेप की आवश्यकता होती है अगर आपको

255
00:18:07,840 --> 00:18:12,160
पता है कि व्यक्ति प्राण छोड़ सकता है शरीर छोड़ सकता है तो वहां पर भी

256
00:18:12,160 --> 00:18:16,320
प्राण गोबर के लेप की आवश्यकता होती है क्यों क्योंकि उसमें

257
00:18:16,320 --> 00:18:20,360
कुछ एक विधि है कि अगर प्राण फलाने द्वार

258
00:18:20,360 --> 00:18:24,360
से ही बाहर निकले अगर प्राण फलाने द्वार से ही बाहर

259
00:18:24,360 --> 00:18:29,000
निकले तो उसको उत्तम गति माना जाता है और ऐसा विश्वास

260
00:18:29,000 --> 00:18:33,160
किया जाता है कि इसको जो है ब्रह्म प्राप्ति हो जाएगी मोक्ष प्राप्ति हो जाएगी अब वो उसके

261
00:18:33,160 --> 00:18:37,200
कर्म हो ना हो ना हो मगर यथोचित हमने इंतजाम किया यथोचित

262
00:18:37,200 --> 00:18:41,240
प्रयास किया उसके लिए गोबर का लेप मरणासन में भी लगाया जाता

263
00:18:41,240 --> 00:18:45,560
है वहां पर भी वही होती है कि जो

264
00:18:45,560 --> 00:18:49,320
शरीर है जो देह उसके और

265
00:18:49,320 --> 00:18:53,360
भूमि के बीच में कोई ऐसी चीज होनी चाहिए जिससे कि

266
00:18:53,360 --> 00:18:57,440
वो ऊर्जा है ना वो पास आउट ना हो जाए वही रह जाए वो जो ऊर्जा

267
00:18:57,440 --> 00:19:01,720
है वो निकल के जमीन में ना जाए वो वही वही रह जाए इसलिए

268
00:19:01,720 --> 00:19:06,080
वहां पर भी गोबर का लेप होता है इसके बारे में गोबर के लेप गोबर की जो वैज्ञानिकता

269
00:19:06,080 --> 00:19:10,760
है गौमूत्र की जो वैज्ञानिकता इसके लिए प्रॉपर एक अलग से लाइव या वीडियो बनाएंगे

270
00:19:10,760 --> 00:19:15,520
प्रॉपर बहुत सारे कट्टा भर के जैसे कट्टा भ के प्रमाण दिए थे ना

271
00:19:15,520 --> 00:19:19,680
कि रामपाल रामपाल जी तत्वदर्शी क्यों नहीं है कबीर भगवान क्यों नहीं है

272
00:19:19,680 --> 00:19:23,680
ऐसे कट्टा भर के प्रमाणों के साथ आएंगे फिलहाल अभी छोटे मोटे प्रमाण

273
00:19:23,680 --> 00:19:27,720
के साथ कुछ और हम यहां पर

274
00:19:27,720 --> 00:19:32,600
आपको य उचित समाधान उपलब्ध करा दे रहे हैं तो

275
00:19:32,600 --> 00:19:36,760
कथा का श्रवण किसी तीर्थ में वन में अथवा अपने घर पर ही अच्छा माना गया

276
00:19:36,760 --> 00:19:40,880
है जहां पर लंबा चौड़ा वैदान हो कथा स्थल रखना

277
00:19:40,880 --> 00:19:44,880
चाहिए भूमिका शोधन मार्जन और लेपन

278
00:19:44,880 --> 00:19:48,960
लेपन हो गया है ठीक है करके रंग बरम की धातुओं से

279
00:19:48,960 --> 00:19:53,320
चौक और ये भाई एक बात बताऊ आपको

280
00:19:53,320 --> 00:19:57,320
अगर ये सब चीजें जाननी है ना ज्यादा ज्यादा मेहनत ना करो

281
00:19:57,320 --> 00:20:01,560
वो तो आपसे हो नहीं पाएगा यह नित्य कर्म पूजा प्रकाश है इसी को खरी लेना

282
00:20:01,560 --> 00:20:04,360
इसी में तमाम सारी चीजें तंबाकू और य पंचगव्य

283
00:20:04,360 --> 00:20:08,400
का उपयोग और प्रमाण के सहित कि कौन-कौन से शास्त्र में लिखा

284
00:20:08,400 --> 00:20:12,400
है यह पूरा इन सब चीजों में लिखा हुआ इसमें लिखा

285
00:20:12,400 --> 00:20:16,840
हुआ है और यह हमने गोबर का दे दिया

286
00:20:16,840 --> 00:20:21,080
गाय के गोबर का उपयोग और अभी हम आपको

287
00:20:21,080 --> 00:20:25,200
भविष्य पुराण से दे देते हैं धूप का य कैसी

288
00:20:25,200 --> 00:20:29,320
बच्चों जैसी बातें कर देते हो कभी कभी इसीलिए वो वीडियो आया है मैं अभी

289
00:20:29,320 --> 00:20:33,920
बताऊंगा वो वीडियो इसीलिए आया जिसके बारे में अभी बात करने वाला

290
00:20:33,920 --> 00:20:37,920
हूं तो इसमें क्या है यह

291
00:20:37,920 --> 00:20:42,280
देखिए शुरू से ही धूप का उपयोग बताया जा रहा है गणपति जी का पूजन हो रहा है

292
00:20:42,280 --> 00:20:46,800
गणपति जी के पूजन में और

293
00:20:46,800 --> 00:20:51,640
धूप इत्र लड्डू धूपन चा सुगंध

294
00:20:51,640 --> 00:20:54,560
ठीक है भविष्य

295
00:20:54,560 --> 00:21:00,560
पुराण यह है आपका

296
00:21:02,600 --> 00:21:04,920
गणपति

297
00:21:04,920 --> 00:21:09,000
पूजन गणपति कल्प का वर्णन यह है

298
00:21:09,000 --> 00:21:13,000
29 वा अध्याय और वहां से चालू है और धूप

299
00:21:13,000 --> 00:21:17,040
तो इतनी बार आएगा कि पूछे नहीं ये भैया देख

300
00:21:17,040 --> 00:21:23,040
लो लिखा है फिर मत कहना कि

301
00:21:23,640 --> 00:21:27,680
दिखाओ यह देखो धूपन

302
00:21:27,680 --> 00:21:30,560
दिखा धूप

303
00:21:30,560 --> 00:21:35,600
च सुगंध ठीक है धूप का प्रमाण हो

304
00:21:35,600 --> 00:21:39,880
गया और इसके आगे बारबार है धूप का जो उपयोग

305
00:21:39,880 --> 00:21:45,120
है बारबार इसी चैप्टर में कई बार

306
00:21:45,120 --> 00:21:49,400
है तो यह देखो अग्र धूपम

307
00:21:49,400 --> 00:21:53,400
धूप दिखाए तो इसको पढ़ा करो थोड़ा मेहनत किया करो

308
00:21:53,400 --> 00:21:57,520
ऐसे बच्चों जैसे मत कर दिया करो इससे नाक आप ही की कटती है

309
00:21:57,520 --> 00:22:00,240
हमारी नहीं

310
00:22:00,240 --> 00:22:04,760
अब बात आती है कि

311
00:22:04,760 --> 00:22:08,920
अब थोड़ी तार्किक बातें भी हो जाए हां आप भी दिखा दीजिए वह प्रमाण भविष्य

312
00:22:08,920 --> 00:22:13,640
पुराण वाला जो आप लगाया था राहुल

313
00:22:13,640 --> 00:22:18,200
जी भेज दी आपको व में ना

314
00:22:18,200 --> 00:22:23,120
ठीक है ऑपरेटर जी आपके पास एक प्रमाण आया होगा

315
00:22:23,120 --> 00:22:27,160
उसको जरा शो कर दीजिए ट से आया होगा उसी नंबर पर

316
00:22:27,160 --> 00:22:33,160
भेजा है ना आपने जो मैंने आपको बता बताया था ठीक

317
00:22:35,520 --> 00:22:40,120
है नए नंबर से आया होगा आपके पास हमने नहीं भेजा

318
00:22:40,120 --> 00:22:44,160
है भविष्य पुराण के

319
00:22:44,160 --> 00:22:50,160
उसमें प्रश्

320
00:22:51,840 --> 00:22:56,080
है तब तक आप मौखिक रूप से बता दीजिए अगर आ जाएगा तो वो

321
00:22:56,080 --> 00:23:02,080
दिखा दिया जाएगा आप

322
00:23:03,320 --> 00:23:07,320
बताइए जी जी भविष्य

323
00:23:07,320 --> 00:23:11,640
पुराण में है गोमूत्र और गोवर के

324
00:23:11,640 --> 00:23:15,680
जो महिमा बताई गई है उसका विशुद्ध वर्णन है कहां पर

325
00:23:15,680 --> 00:23:19,880
है भविष्य पुराण में है अब अध्याय 32

326
00:23:19,880 --> 00:23:24,000
में है शायद 32 कौन सा खंड

327
00:23:24,000 --> 00:23:29,280
है उसम तीन ख है अरे खंड का तो भी नहीं है इधर

328
00:23:29,280 --> 00:23:33,480
भविष्य पुराण मेरे पास था नहीं ना इसलिए नहीं आपने तो चित्र

329
00:23:33,480 --> 00:23:37,720
लगाए थे ना उसके प्र जी जी

330
00:23:37,720 --> 00:23:42,000
अच्छा एक बात जी चलिए

331
00:23:42,000 --> 00:23:46,400
ठीक है भविष्य पुराण में है और अच्छे से प्रमाण दे भी दिए जाएंगे

332
00:23:46,400 --> 00:23:50,400
मगर फिलहाल बात यह हो रही है और दिए भी है यहां पर

333
00:23:50,400 --> 00:23:54,440
एक जगह भी अगर आ गया तो उतना पर्याप्त है मगर

334
00:23:54,440 --> 00:23:58,640
मगर जो बृहद व्याख्या हुई है वो अच्छे से बता दिया जाएगा और शायद

335
00:23:58,640 --> 00:24:03,280
32 नंबर का था मैंने भी देखा था

336
00:24:03,280 --> 00:24:08,000
उसेस 32 था 5 हा 32 नंबर का था

337
00:24:08,000 --> 00:24:12,000
अब भाग कौन सा है यह देखना पड़ेगा एक मि देखना पड़ेगा

338
00:24:12,000 --> 00:24:18,000
लोक तो है

339
00:24:27,630 --> 00:24:32,760
[संगीत]

340
00:24:32,760 --> 00:24:36,920
आपके पास कौन से प्रकाशन अच्छा कौन से पीडीएफ से अध्ययन

341
00:24:36,920 --> 00:24:41,040
किया था भविष्य पुराण का नहीं मैंने गल किया था

342
00:24:41,040 --> 00:24:47,040
ना अच्छा ग से किया

343
00:24:49,120 --> 00:24:53,120
था अरे फटाफट से प्रमाण मांग लेते हैं पता नहीं कौन किस विषय

344
00:24:53,120 --> 00:24:58,560
पर आ जाती है देखना पड़ता है अचानक से ना

345
00:24:58,560 --> 00:25:02,920
क्योंकि इनके पास अपनी बातो का उत्तर नहीं होता इसलिए बिल्कुल हा ये

346
00:25:02,920 --> 00:25:07,200
विनायक गोबर के गणेश बनाए जाते अगरबत्ती

347
00:25:07,200 --> 00:25:12,080
क्य जाती छो छोटी चीज पकड़ अगरबत्ती का दे तो दिया

348
00:25:12,080 --> 00:25:16,080
हमने ूप का हमने दे दिया अब वो धूप का उपयोग

349
00:25:16,080 --> 00:25:20,200
किस किस प्रकार से होता है व बाद की बात है 134 चेक

350
00:25:20,200 --> 00:25:26,200
कर लेते हैं शायद यहां पर होगा

351
00:25:32,640 --> 00:25:37,560
अरे ऐसे बल टाइम पास कर रहे हैं ये जानना इनको कुछ भी नहीं जानना

352
00:25:37,560 --> 00:25:42,160
शास्त्र ते भागवत में दे दिया है इसका और

353
00:25:42,160 --> 00:25:47,000
धूप भी दिखा दी आपको उसम पूजा में धूप दिखाई जा रही तो आपको भी दिखा दी जी

354
00:25:47,000 --> 00:25:51,800
अब बात करते हैं कि सबसे पहली बात यह

355
00:25:51,800 --> 00:25:56,000
है क्या हम इन बातों को लेकर के धूप का पूजन क्यों

356
00:25:56,000 --> 00:26:00,000
होता है या गोबर का उपयोग क्यों होता है क्या इन बातों को

357
00:26:00,000 --> 00:26:04,680
लेकर के हमारे और आपके बीच में मतलब हमारे और रामपाल को मानने वालों के बीच में मतभेद

358
00:26:04,680 --> 00:26:09,440
है क्या इन बातों को लेकर के दूरिया है

359
00:26:09,440 --> 00:26:14,040
बिल्कुल भी नहीं बक भी नहीं क्या इससे हमारे धर्म और ब्रह्म

360
00:26:14,040 --> 00:26:18,320
पर फर्क पड़ रहा है बकुल

361
00:26:18,320 --> 00:26:22,480
धर्म के बारे में धर्म हमारा क्या है और हमारा ब्रह्म

362
00:26:22,480 --> 00:26:27,120
क्या है वो समझ में नहीं आया भाई

363
00:26:27,120 --> 00:26:31,240
इतने सारे विधि विधान है कि अगर इन पर व्यक्ति फोकस

364
00:26:31,240 --> 00:26:35,320
करने लगेगा विधि विधान पर हर छोटी से छोटी खैर ये तो इंपोर्टेंट है

365
00:26:35,320 --> 00:26:39,840
जो य गोबर और धूप है मगर मैं एक बात कह रहा हूं कि कपूर क्यों जला

366
00:26:39,840 --> 00:26:43,840
अब इसका भी साइंटिफिक और प्रामाणिक आंसर है मगर हर

367
00:26:43,840 --> 00:26:47,840
चीज को अगर हम आंसर ढूंढते रहेंगे तो फिर हम भक्ति कब करेंगे

368
00:26:47,840 --> 00:26:51,840
एक सामान्य व्यक्ति की दृष्टि से मैं बता रहा हूं ठीक है सही बात तो मेन बात

369
00:26:51,840 --> 00:26:55,840
होती है कि अगर हमें ब्रह्म के बारे में समझा दिया गया तो जिसने समझाया

370
00:26:55,840 --> 00:27:00,120
उसी ने फिर हमको बताया कि इसको प्राप्त कैसे करू फिर उसमें अ जैसे कि मान लीजिए

371
00:27:00,120 --> 00:27:04,400
कि एक मैदान पर उतरने से पहले बता दिया गया

372
00:27:04,400 --> 00:27:08,400
कौन कैप्टन है कौन यह है कौन वो है किसको क्या करना है अब जब

373
00:27:08,400 --> 00:27:12,440
मैदान पर उतर गए और जब कैप्टन यह कह रहा है कि भाई जाकर के

374
00:27:12,440 --> 00:27:16,600
ऑफ में लगो मिड में लगो लेग में लगो स्ट्रेट में लगो तो वहां

375
00:27:16,600 --> 00:27:20,960
पर बारबार भले ही वह सचिन क्यों ना भले ही सचिन क्यों ना हो

376
00:27:20,960 --> 00:27:25,200
बारबार वह कप्तान सेय कहेगा क्या कि मैं वहां क्यों लगू समझाओ तार्किक

377
00:27:25,200 --> 00:27:29,160
रूप से प्रमाण दिखाओ

378
00:27:29,160 --> 00:27:34,240
है ना अगर ऐसे कहेगा तो वो मैच कितनी देर का

379
00:27:34,240 --> 00:27:38,440
होगा तो कहने वाली बात ये है कि इससे क्या आपके धर्म और ब्रह्म

380
00:27:38,440 --> 00:27:42,520
पर फर्क पड़ रहा है या ऐसी ऐसी कोई दूरी है क्या मत करो भैया धूप

381
00:27:42,520 --> 00:27:46,560
का उपयोग अगर आपको दिक्कत है प्रॉब्लम हमारे आपके बीच में

382
00:27:46,560 --> 00:27:50,960
ये है कि कबीर को भगवान नहीं कहा गया संत रामपाल को तत्वदर्शी नहीं

383
00:27:50,960 --> 00:27:55,000
कहा गया इससे मत भागो इससे क भाग रहे हो मत करो आपको नहीं

384
00:27:55,000 --> 00:27:59,480
समझ में आ रहा है धूप का उपयोग

385
00:27:59,480 --> 00:28:03,640
परंपरा प्राप्त संस्कार आपको समझ में नहीं आ रहे हैं मत करो यूज

386
00:28:03,640 --> 00:28:08,440
इसको लेकर के कोई वो है ही नहीं वैचारिक मतभेद मत करो

387
00:28:08,440 --> 00:28:12,440
अरे भाई मैं कह रहा हूं अभी सामान्य हिंदू जो पंच परमेश्वर में विश्वास रखते हैं वो क्या

388
00:28:12,440 --> 00:28:16,560
करते हैं क्या पूरा पूरा ये धूप और ये गोबर का उपयोग नित्य प्रति

389
00:28:16,560 --> 00:28:20,760
कई लोग होंगे जो केवल भगवान को नमस्कार करके अपना काम चलाते हैं मगर आस्था

390
00:28:20,760 --> 00:28:25,520
उनकी पंच देव उपासना में ही है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश नहीं है आस्था

391
00:28:25,520 --> 00:28:30,200
उनकी वेद जो वेदा आदि शास्त्र है वैदिक मांग में उन है

392
00:28:30,200 --> 00:28:34,600
आस्था उनकी पुराण ये पुराण में

393
00:28:34,600 --> 00:28:38,680
है उपनिषदों में है आस्था उनकी है बस वो करते

394
00:28:38,680 --> 00:28:42,800
नहीं है मत करो कोई दिक्कत नहीं है इसको लेकर के हम आपके

395
00:28:42,800 --> 00:28:46,960
पास आए भी कहां हम तो पूछ रहे हैं कि वेदों में प्रमाण दिखाओ

396
00:28:46,960 --> 00:28:51,160
कबीर भगवान दिखाओ बकुल बछ रहे

397
00:28:51,160 --> 00:28:55,200
दिखा अच्छा इन सब बातों की एक बात इन्होने यह

398
00:28:55,200 --> 00:28:59,280
कहा कि हमारे जो पूर्वज थे वो अनपढ थे ठीक

399
00:28:59,280 --> 00:29:03,280
है हमारे जो पूर्वज थे व अनपढ थे

400
00:29:03,280 --> 00:29:07,360
नास जो नास सुक्तम है ऋगवेद

401
00:29:07,360 --> 00:29:12,160
का जिस पर गुरुदेव के गणित पर

402
00:29:12,160 --> 00:29:14,600
वो है शंकराचार्य जी के

403
00:29:14,600 --> 00:29:18,840
गणित पर बहत व्याख्या है और जो वैदिक मैथमेटिक्स है

404
00:29:18,840 --> 00:29:23,160
व आप लोगों ने दे दी होगी ना जिसको कॉपी कर रहा है विदेश आजकल इतनी

405
00:29:23,160 --> 00:29:27,240
सारी साइंटिफिक चीज दे आप लोगों ने दुनिया को ना पर

406
00:29:27,240 --> 00:29:31,480
आजकल रिसर्च कर रहे हैं

407
00:29:31,480 --> 00:29:36,240
जिस पर नासा वाले आकर के समाधान प्राप्त करते हैं

408
00:29:36,240 --> 00:29:40,320
क्या कहते हैं ये अच्छा वो जेल धाम में आते होंगे आपसे मिलने के लिए

409
00:29:40,320 --> 00:29:44,920
विश्व बैंक वाले शंकराचार्य के पास आते अपनी गुथ सुलझा हैं

410
00:29:44,920 --> 00:29:49,200
संयुक्त राष्ट्र वाले आते हैं नासा वाले आते हैं मार्गदर्शन प्राप्त करते

411
00:29:49,200 --> 00:29:53,360
हैं तो आपसे भी मतलब आपकी

412
00:29:53,360 --> 00:29:57,400
जो चीजें हैं उनको भी किया ही गया होगा जब आप ये कह रहे हो कि हमारे जो पूर्वज

413
00:29:57,400 --> 00:30:01,760
है वो अनपढ थे अच्छा दूसरी बात ये है

414
00:30:01,760 --> 00:30:06,680
कि बात होती है जब प्रमाण की बात होती है जब प्रमाण की

415
00:30:06,680 --> 00:30:10,760
तो हर बात फिर प्रमाण से बोली जाती है हमने तो आपको

416
00:30:10,760 --> 00:30:15,000
प्रमाण दे दिया हमारे पूर्वज कौन जिन्होंने वेद दिए हमारे पूर्वज

417
00:30:15,000 --> 00:30:19,040
कौन जिन्होंने वैदिक मैथमेटिक्स दी हमारे पूर्वज कौन

418
00:30:19,040 --> 00:30:23,680
जिन्होंने ये इतने सारे चाणक्य आर्य भट्ट इतने सारे बड़े-बड़े विद्वान

419
00:30:23,680 --> 00:30:28,080
ठीक है अब आप कहीं तो लिखा दिखाओ कि हमारे आपके पर्टिकुलर आप

420
00:30:28,080 --> 00:30:29,760
के पूर्वज अनपढ होंगे ऐसा हो सकता

421
00:30:29,760 --> 00:30:34,240
है पर्टिकुलर आपकी जो चेन है वो

422
00:30:34,240 --> 00:30:38,880
अनपढ़ रहे होंगे जिसके कारण आज आपका ये हाल है है ना

423
00:30:38,880 --> 00:30:42,880
मगर ऐसे नहीं कह सकते कि आज सनातनी हों के जो पूर्वज थे

424
00:30:42,880 --> 00:30:47,280
वो अनपढ थे दूसरी बात बात है प्रमाण की आप प्रमाण दिखाइए

425
00:30:47,280 --> 00:30:52,040
कि पूरे सनातन समाज के जो पूर्वज थे व अनपर थे दूसरी बात

426
00:30:52,040 --> 00:30:56,200
अगर वो अनपर थे तो भाई एक दो आप लोग अपनी

427
00:30:56,200 --> 00:31:00,600
10 पीढ़ियों की गुरु परंपरा दिखा रहे हो है ना

428
00:31:00,600 --> 00:31:05,280
तो 10 में से दो पीढ़ी पहले तीन पीढ़ी पहले पूर्वज आपके अनपढ हो गए

429
00:31:05,280 --> 00:31:09,480
तो उनका अनुगमन करने वाले आप हो आप अपने आप को ही अपने पूर्वजों

430
00:31:09,480 --> 00:31:13,640
को जब वो कर रहे हो तो आप अपने आप को

431
00:31:13,640 --> 00:31:17,640
ही वो कह रहे हो अनपढ

432
00:31:17,640 --> 00:31:22,040
ये तो रही ये बात अब

433
00:31:22,040 --> 00:31:26,200
जो सृष्टि चक्र को नहीं फॉलो करता है पूर्वजों

434
00:31:26,200 --> 00:31:30,280
की बातों को फॉलो नहीं करता है क्योंकि आप लोगों को तर्क से कोई मतलब नहीं

435
00:31:30,280 --> 00:31:34,400
है आप लोगों को प्रमाण चाहिए वो प्रमाण में दे रहा हूं सारी

436
00:31:34,400 --> 00:31:38,800
चीजें एक तरफ कर दो आप यह तो स्वीकार करते हो ना कि हमारे पूर्वजों

437
00:31:38,800 --> 00:31:43,480
ने गाय के गोबर का और धूप का उपयोग किया

438
00:31:43,480 --> 00:31:45,560
तो लो

439
00:31:45,560 --> 00:31:49,440
भगवत गीता में दे दे

440
00:31:49,440 --> 00:31:53,560
रहे भगवत गीता में प्रमाण दे

441
00:31:53,560 --> 00:31:59,560
देते हैं आपको

442
00:32:14,680 --> 00:32:18,680
यह बात भगवत गीता में कही गई है कि पूर्वजों के

443
00:32:18,680 --> 00:32:22,840
मार्ग पर चलकर ही मोक्ष प्राप्त होगा

444
00:32:22,840 --> 00:32:26,920
और उनके विरुद्ध चलकर के मोक्ष प्राप्त नहीं होगा इसको आप

445
00:32:26,920 --> 00:32:32,040
3 16 में देख लीजिए कि सदियों से जो परंपरा से

446
00:32:32,040 --> 00:32:36,680
जो चक्र चला आ रहा है उसी को फॉलो करके आपको

447
00:32:36,680 --> 00:32:41,520
मोक्ष प्राप्त होगा अन्यथा नहीं

448
00:32:41,520 --> 00:32:45,920
होगा यह हमारे पास प्रमाण है आप प्रमाण दिखाए

449
00:32:45,920 --> 00:32:51,160
कहां लिखा है कि पूर्वज हमारे यह देखिए 415 में लिखा

450
00:32:51,160 --> 00:32:55,520
है भगवत गीता 415 हमने

451
00:32:55,520 --> 00:32:59,800
प्रमाण वहां से भी दे दिया पुराणों से अभी वेद से भी देंगे भगवत

452
00:32:59,800 --> 00:33:00,920
गीता

453
00:33:00,920 --> 00:33:05,000
415 क्या लिख रहा है इसीलिए तो मैं कहता

454
00:33:05,000 --> 00:33:09,240
हूं ना कि आप अपने वो वाले वो दिखा दीजिए क्या कहते हैं वो 5

455
00:33:09,240 --> 00:33:13,800
परट कौन-कौन से हैं जिससे कि हमें खोलने में वो ना हो संकोच

456
00:33:13,800 --> 00:33:19,000
नहीं तो फिर तुम कहोगे यह काल ने बोला

457
00:33:19,000 --> 00:33:23,400
है तो 4 15

458
00:33:23,400 --> 00:33:24,200
इसमें लिखा

459
00:33:24,200 --> 00:33:28,360
है पूर्व काल के पूर्वजों ने भी इस प्रकार

460
00:33:28,360 --> 00:33:32,480
जानकर ही कर्म किए थे इसलिए तू भी पूर्वजों द्वारा सदा

461
00:33:32,480 --> 00:33:34,680
से किए जाने वाले कर्मों को ही कर

462
00:33:34,680 --> 00:33:38,880
लो कोई जरूरत नहीं है गोबर का उपयोग

463
00:33:38,880 --> 00:33:43,080
महत्ता क्यों है दिखाने की लो तुमने माना ना पूर्वज करते

464
00:33:43,080 --> 00:33:48,160
थे ये लो प्रमाण अब तुम दिखाओ प्रमाण

465
00:33:48,160 --> 00:33:52,400
कि पूर्वज तुम्हारे अनपढ थे दिखाओ सिद्ध करो तुम्हें जन्म

466
00:33:52,400 --> 00:33:56,720
देने वाले तुम्हारे दादा परदादा सब अनपढ थे कहो चिल्ला

467
00:33:56,720 --> 00:34:00,880
चिल्ला के मैं अ का वंशज हूं मैं अनपढ का वंशज हू तुम

468
00:34:00,880 --> 00:34:04,960
तुम हो अनपढ के वंशज हम नहीं है हम

469
00:34:04,960 --> 00:34:09,120
ज्ञानवान महापुरुषों के वंशज है अच्छा दूसरी बात

470
00:34:09,120 --> 00:34:13,320
इनका कहना है कि आजय जो आधुनिकीकरण है यह तब कहां था अगर वह पढ़े

471
00:34:13,320 --> 00:34:17,520
लिखे थे तो इस आधुनिकीकरण के कारण एक

472
00:34:17,520 --> 00:34:21,520
जो आज आप क्या दे रहे हो समाज को आधुनिकीकरण के नाम पर

473
00:34:21,520 --> 00:34:25,600
क्या दे रहे हो आपने क्या दिया है समाज

474
00:34:25,600 --> 00:34:29,920
को पता है कि मा अगर अपने बालक

475
00:34:29,920 --> 00:34:33,920
को मोबाइल नहीं दे रही है देखने के लिए तो बल्ला मार

476
00:34:33,920 --> 00:34:38,520
के सर फोड़ रहा है वो अपनी मां का दुनिया में सबसे ज्यादा

477
00:34:38,520 --> 00:34:44,280
सर्च की जाने वाली जो वेबसाइट है वह क्या दिखाती

478
00:34:44,280 --> 00:34:48,600
है पता है यही आधुनिकीकरण

479
00:34:48,600 --> 00:34:50,120
कर रहे हैं

480
00:34:50,120 --> 00:34:54,240
आप भाई अगर आप आज की आधुनिकता के नाम

481
00:34:54,240 --> 00:34:58,560
पर अपने पूर्वजों से प्राप्त जो संस्कार है जो जो

482
00:34:58,560 --> 00:35:02,760
परंपराएं हैं जो धर्म है धर्म अथवा धर्म की व्याख्या

483
00:35:02,760 --> 00:35:06,840
उसको ठुकरा रहे हैं तो इसका मतलब आज जो चीजें प्राप्त है

484
00:35:06,840 --> 00:35:11,040
दुनिया में समलैंगिकता की ओर बढ़ रहा है व्यक्ति ये क्या कहते

485
00:35:11,040 --> 00:35:15,560
हैं वो क्या है वो क्या एलजीबीटी क्यू यह सब चीजें

486
00:35:15,560 --> 00:35:19,720
पहले थी क्या जो आज इतने चरम

487
00:35:19,720 --> 00:35:23,960
स्तर पर पहुंच रही है तो ये अगर आपको आप

488
00:35:23,960 --> 00:35:28,080
आपका धर्म आपके द्वारा जो तत्वदर्शी रामपाल के द्वारा आपके अनुसार मेरे

489
00:35:28,080 --> 00:35:32,160
अनुसार नहीं आपके अनुसार यही चीजें आप दे रहे हो

490
00:35:32,160 --> 00:35:37,280
क्या समाज को क्योंकि आप पढ़ लिख ज्यादा गए

491
00:35:37,280 --> 00:35:41,320
हो भाई आप ल कर देखिए ना आप एक

492
00:35:41,320 --> 00:35:45,640
तरफ कहते सद ग्रंथ है और सद ग्रंथ को लिखने वाले आप लोग आप कहते हो अनपढ़

493
00:35:45,640 --> 00:35:50,160
थे सद ग्रंथों को यह आपका सम्मान अपने ग्रंथों के लिए

494
00:35:50,160 --> 00:35:54,520
और तो और अगर पूर्वज अनपढ़ थे तो फिर तो आपने अपनी लाइनेज

495
00:35:54,520 --> 00:36:00,520
में भी सबको अनपढ़ कह दिया

496
00:36:00,560 --> 00:36:05,520
अच्छा हमने तरह-तरह से इनकी हर बात का प्रतिकार किया

497
00:36:05,520 --> 00:36:09,680
पहले साइंटिफिक तरीके से उपयोग बताने का उपयोग

498
00:36:09,680 --> 00:36:13,880
बताया गोबर का गणेश जी के बारे में बृहत व्याख्या

499
00:36:13,880 --> 00:36:18,840
उनको प्रथम पूज्य क्यों है उनका व हाथी के सर का दृष्टांत क्या है वह सब है

500
00:36:18,840 --> 00:36:23,320
और नित्य कर्म पूजा प्रकाश में आप य सब पढ़िए

501
00:36:23,320 --> 00:36:27,800
बहुत अच्छे से लिखा है सब कुछ और हमने फिर भागवत से भी दिखा दिया

502
00:36:27,800 --> 00:36:32,120
का उपयोग ले सबसे पहले शुभ कार्य में इसके

503
00:36:32,120 --> 00:36:36,280
बाद हमने भविष्य पुराण से धूप

504
00:36:36,280 --> 00:36:40,840
का आपको प्रमाण दे दिया बहुत जगह है मगर अभी हमने आपको

505
00:36:40,840 --> 00:36:44,960
काम चलाने भर का दे दिया तो

506
00:36:44,960 --> 00:36:49,040
इसके अलावा हमने आपसे प्रश्न ये पूछे कि जब आप यहां पर होते हैं तो हम

507
00:36:49,040 --> 00:36:53,280
तो बोलने नहीं देते मगर जब आप बंद कमरे में होते हैं तब भी भय से ग्रसित होते हैं क्या शिवांश

508
00:36:53,280 --> 00:36:57,600
नाम के भय से ग्रसित इसलिए वो जवाब नहीं

509
00:36:57,600 --> 00:37:01,960
निकलता है मुह से कब कपी आती है यह भी आपका

510
00:37:01,960 --> 00:37:06,240
लिए हो गया फिर हमने यह भी बता दिया कि अगर आप अनपढ़

511
00:37:06,240 --> 00:37:10,320
कह रहे हैं तो व आपकी जो वंशावली है वो अनपढ़ है क्योंकि हमारे पूर्वज तो बहुत

512
00:37:10,320 --> 00:37:14,560
ज्ञानी जो वैदिक मैथमेटिक्स दे रहे हैं जो

513
00:37:14,560 --> 00:37:16,200
बहुत बड़े बड़े

514
00:37:16,200 --> 00:37:20,840
चीजें है जो आज प्राप्त करना बहुत वो है

515
00:37:20,840 --> 00:37:24,960
दुर्गम भाई श्रुति शास्त्र किसे कहते हैं वैसे पढ़ा

516
00:37:24,960 --> 00:37:29,120
नहीं होगा ये सब क्योंकि इतने इस पर आते ही नहीं है

517
00:37:29,120 --> 00:37:33,240
रामपाल दास जी कभी अपने चलचित्र बनाते समय श्रुति

518
00:37:33,240 --> 00:37:37,280
जो है श्रुति शास्त्र

519
00:37:37,280 --> 00:37:41,280
जो होते हैं जो भगवान से प्रकट

520
00:37:41,280 --> 00:37:45,840
होते हैं और जो ब्रह्मा जी के द्वारा आगे जो बढ़ाए गए परंपरा अनुसार

521
00:37:45,840 --> 00:37:50,000
क्या है शति का मतलब सुति को याद रखा जाता था आज

522
00:37:50,000 --> 00:37:54,120
आपके रामपाल दास जी स्वयंभू भगवान है पूरे

523
00:37:54,120 --> 00:37:59,600
वेद याद है उन्हें आपको याद

524
00:37:59,600 --> 00:38:05,400
वो याद करके रखते थे जिससे कोई इसमें मिलावट ना कर

525
00:38:05,400 --> 00:38:09,960
सके समझ गए तो अब क्या है कि आप

526
00:38:09,960 --> 00:38:13,960
जिनसे आपको ये सब चीजें प्राप्त हुई पवित्र सद ग्रंथ आप य सब दोगली

527
00:38:13,960 --> 00:38:18,000
बातें है खैर आप उसका कोई सम्मान नहीं है आपको अपनी

528
00:38:18,000 --> 00:38:22,080
वर्चस्व सिद्ध करनी है रामपाल दास जी को भगवान सिद्ध करना है आपको इससे मतलब नहीं

529
00:38:22,080 --> 00:38:26,480
है कि उसके क्या दुष्परिणाम होंगे समाज में किस प्रकार नसता फैले गी

530
00:38:26,480 --> 00:38:31,200
उससे आपको कोई सरोकार नहीं है आपने

531
00:38:31,200 --> 00:38:35,200
अपने पूर्वजों को कुल मिलाकर के अनपढ कह दिया और चिल्ला चिल्ला के क रोज

532
00:38:35,200 --> 00:38:39,400
कहो कल एक थंबनेल बनाना मैं पूर्वजों

533
00:38:39,400 --> 00:38:43,560
का मैं अनपढ का वंशज हूं खाना नहीं आता था

534
00:38:43,560 --> 00:38:47,960
कि खाना कहां डालना आंख में के मुंह में ऐसे अनपढ थे मेरे पूर्वज

535
00:38:47,960 --> 00:38:51,960
यह थंबनेल बनाना हमारे नहीं थे आपके होंगे हमने सिद्ध

536
00:38:51,960 --> 00:38:56,000
कर दिया और हमने क्या प्रमाण दे दिया कि भगवत गीता से जो पूर्वजों के

537
00:38:56,000 --> 00:39:00,320
अनुसार चल रहा है जो परंपरा से प्राप्त शास्त्रो चित जो वचन है

538
00:39:00,320 --> 00:39:05,040
उनका अनुगमन कर रहा है वही मोक्ष का मोक्ष प्राप्ति

539
00:39:05,040 --> 00:39:09,120
करेगा ठीक है तो अब एक तो ये हो गया अब लास्ट

540
00:39:09,120 --> 00:39:13,280
में हम ऐसी बात को करते हुए अपनी इसको इस वक्तव्य

541
00:39:13,280 --> 00:39:19,280
को पूरा करेंगे और हमने ये भी दे दिया

542
00:39:20,760 --> 00:39:24,800
कि हमने आपको ये भी दे दिया कि दीपावली में उसमें भी

543
00:39:24,800 --> 00:39:29,760
तार्किक तर्क ही था उसमें तो प्रमाण नहीं था

544
00:39:29,760 --> 00:39:33,920
तो हमने यह भी दे दिया कि दीपावली क्यों मनाई

545
00:39:33,920 --> 00:39:38,800
जाती है उसका जो शास्त्रों में जो वर्णन है वो भी दे दिया और तर्क भी दे दिया

546
00:39:38,800 --> 00:39:43,480
अब इसके बाद एक चीज और है जैसे आप कह रहे हो अपने पूर्वजों को

547
00:39:43,480 --> 00:39:47,480
अनपढ कह रहे हो तो आपके जो रामपाल दास जी है वह गुरु

548
00:39:47,480 --> 00:39:52,280
की शरण उन्हें प्राप्त हुई थी लगभग 30 वर्ष की उम्र में लम समम ऐसे ही कुछ

549
00:39:52,280 --> 00:39:56,480
प्रख्यात तो जो 30 वर्ष से पहले वो आप कहते हो वो तो पूर्ण

550
00:39:56,480 --> 00:40:00,880
ब्रह्म है वो ब्र काही अवतार है और कबीर का ही अवतार है तो वो अनपर

551
00:40:00,880 --> 00:40:05,520
थे क्या अनपर थे बोलो

552
00:40:05,520 --> 00:40:09,720
वेदों में प्रमाण है और रामपाल अनपढ है बोलो

553
00:40:09,720 --> 00:40:14,400
ऐसे बोलना शुरू करो फिर

554
00:40:14,400 --> 00:40:19,560
अब यह सारी

555
00:40:19,560 --> 00:40:23,640
बातें आपने कई वीडियोस बनाए और यहां पर

556
00:40:23,640 --> 00:40:28,480
भी आपके कई बार लोग आए और उसमें यह सब बातें हुई

557
00:40:28,480 --> 00:40:32,600
हमने प्रश्न रखे और पूछा मगर विषय से हटकर बहुत

558
00:40:32,600 --> 00:40:36,720
सारी बातें हुई मगर उसका उत्तर नहीं दिया मगर जब

559
00:40:36,720 --> 00:40:40,720
आप अकेले कमरे में बैठ कर के वीडियो बना रहे हो वहां पर वीडियो में भी वही रिपीटिंग बातें

560
00:40:40,720 --> 00:40:45,120
हैं जैसे अमित दास की अगर बात करूं वो अमित

561
00:40:45,120 --> 00:40:49,200
दास यहां पर उसने तीन चार बार बताया कि यहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश को

562
00:40:49,200 --> 00:40:53,520
नाशवान सिद्ध हो रहे हैं हमने उसको बताया कि भाई

563
00:40:53,520 --> 00:40:57,680
नाशवान वो लीला रूप से सिद्ध हो रहे हैं जैसे तुम्हारा जो रामपाल है

564
00:40:57,680 --> 00:41:01,720
वो कुत्ता सिद्ध हो रहा है तुम्हारे द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर

565
00:41:01,720 --> 00:41:05,840
है जो रामपाल दास जी हैं वो कुत्ते सिद्ध हो रहे क्योंकि वो खुद को कुत्ता

566
00:41:05,840 --> 00:41:10,080
कह रहे हैं तोव लीला पूर्वक कह रहे हैं आपको मानना होगा यह बात इसी

567
00:41:10,080 --> 00:41:14,080
प्रकार से वो लीला पूर्वक है वस्तुत तत्ता ना अविनाशी है

568
00:41:14,080 --> 00:41:18,200
और हमने अविनाशी के संबंध में प्रमाण भी दे दिए रामपाल दास जी

569
00:41:18,200 --> 00:41:22,240
के संबंध में आपने प्रमाण नहीं दिए कि कहां

570
00:41:22,240 --> 00:41:26,280
लिखा है वो कि कभी रामपाल दास जी

571
00:41:26,280 --> 00:41:30,840
जो फलाने फलाने ने इतने इतने दिन तक जेल धाम में रहेंगे वो जो है

572
00:41:30,840 --> 00:41:36,200
भगवान है भगवान के अवतार है ऐसा कोई प्रमाण आपने नहीं दिया

573
00:41:36,200 --> 00:41:40,560
अच्छा अब यह सब बातें जो है इन सबके

574
00:41:40,560 --> 00:41:44,720
बाद अब मैं आपका एक व्यक्ति है

575
00:41:44,720 --> 00:41:49,040
कोई जिसका नाम है पवन दास ठीक है

576
00:41:49,040 --> 00:41:53,360
वो आपसे खुद कह रहा है कि अपनी बंदर जैसी शकल लेकर के मत जाओ उस लड़के

577
00:41:53,360 --> 00:41:57,440
के पास हमने कितनी बार कहा हमने भी ये बात कही कि भाई जो

578
00:41:57,440 --> 00:42:01,640
सामर्थ मान हो वही आया करें जिन्होंने अभी दो

579
00:42:01,640 --> 00:42:05,640
टके का जिनको ज्ञान है यह मेरी भाषा नहीं है दो टके वाली यह वो बोल

580
00:42:05,640 --> 00:42:09,720
रहे हैं दो ढले का ज्ञान नहीं है दो टके का ज्ञान नहीं है आप लोगों को और

581
00:42:09,720 --> 00:42:13,840
आप आ जाते हो मुझसे चर्चा करने तो यह आप ही का व्यक्ति आपको

582
00:42:13,840 --> 00:42:17,960
बोल रहा है कि आप लोग अपनी भक्ति में मन लगाओ यहां

583
00:42:17,960 --> 00:42:22,040
पर आकर के ज्ञान चर्चा करके और अपने आपको को बुद्धिमान सिद्ध करने का प्रयास

584
00:42:22,040 --> 00:42:27,440
मत करो यह आपके व्यक्ति आपको बोल रहा है जो आप लोग

585
00:42:27,440 --> 00:42:31,440
बना बना करके और कुतर्क कर रहे हो जिस कोई यहां के

586
00:42:31,440 --> 00:42:35,560
जो प्रश्न है वो शेष रह जाएंगे आप कोई उसका उत्तर नहीं दे रहे

587
00:42:35,560 --> 00:42:38,600
हो यह

588
00:42:38,600 --> 00:42:42,800
देखो अब यह पवन दास

589
00:42:42,800 --> 00:42:46,840
है चलो इनकी तो फोटो हम दिखा देंगे बाद में मगर इन्होंने भी

590
00:42:46,840 --> 00:42:51,480
आपको यह आवान किया है कि भाई यह तक कह दिया

591
00:42:51,480 --> 00:42:56,120
अपने वीडियो बना कर के पवन दास ने

592
00:42:56,120 --> 00:43:00,120
कि ही तुम रामपाल दास जी के शिष्य हो

593
00:43:00,120 --> 00:43:04,200
मगर उसने अपने गुरुओं से जो भी ज्ञान लिया वो तुम्हारे अनुसार जो भी है गलत है

594
00:43:04,200 --> 00:43:08,200
सही है वो बात की बात है मगर उस उसकी

595
00:43:08,200 --> 00:43:12,400
तुम लोग उससे टक्कर मत लो उसके पास मत जाओ तुम लोग वहां

596
00:43:12,400 --> 00:43:17,000
जा जा कर के ना कही कटाओ ग और कटा रहे हो कटा रहे

597
00:43:17,000 --> 00:43:21,240
हो बिल्ली जैसा मुंह लेकर के आ जाते हो बंदर जैसा मुंह लेकर

598
00:43:21,240 --> 00:43:25,520
के आ जाते हो मैं नहीं कह रहा मैं नहीं कह रहा ये आपका ही व्यक्ति

599
00:43:25,520 --> 00:43:29,520
कह रहा है जो रामपाल दास जी का फॉलोअर तो ये

600
00:43:29,520 --> 00:43:34,680
हो गया आपकी असफलता का प्रमाण

601
00:43:34,680 --> 00:43:38,680
समझ रहे हैं तो वीडियो बनाओ कम से कम उन प्रश्नों

602
00:43:38,680 --> 00:43:42,880
का उत्तर दो जिन प्रश्नों पर हम में मतभेद है हम तो नहीं कहने आए तुम धूप

603
00:43:42,880 --> 00:43:46,920
का उपयोग क्यों नहीं करते हम तो नहीं कहने आए कि तुम गोबर का उपयोग नहीं करते हालांकि वो शास्त्रों में

604
00:43:46,920 --> 00:43:51,160
वर्णित है और ना ही उसका उसके बारे में यह पता होने

605
00:43:51,160 --> 00:43:55,560
से और विश्वास होने से आपके धर्म ब्रह्म पर कोई असर पड़ रहा है

606
00:43:55,560 --> 00:44:00,280
प्रभावित हो रहा है आपके धर्म और ब्रह्म पर फर्क तब पड़ेगा

607
00:44:00,280 --> 00:44:04,280
जब आप यह कहोगे कि सतलोक में अगर कबीर दास जी बैठे हैं

608
00:44:04,280 --> 00:44:06,560
तो सतलोक किसने बनाया तब

609
00:44:06,560 --> 00:44:11,200
पड़ेगा जब आपके मन में ब्रह्म को लेकर के संशय हो जाएगा

610
00:44:11,200 --> 00:44:15,200
अगर कबीर दास जी का शरीर शाश्वत है तो अपने आप को ट्रांसफॉर्म कैसे कर

611
00:44:15,200 --> 00:44:19,240
पा रहा है और अगर ट्रांसफॉर्म नहीं कर सकता वह सर्वशक्तिमान क्यों कहला रहा

612
00:44:19,240 --> 00:44:23,520
है यह है संशय इनके कारण आपका जो ब्रह्म

613
00:44:23,520 --> 00:44:27,560
है जो मुक्ति है वो बाधा है क्यों बाधा है भगवत गीता 44 हम अपनी प्रमाण

614
00:44:27,560 --> 00:44:31,720
से कहते हैं भगवत गीता 440 संशय आत्मा

615
00:44:31,720 --> 00:44:35,920
विनती जिसके मन में अपने ब्रह्म को लेकर धर्म को लेकर

616
00:44:35,920 --> 00:44:40,520
संशय होगा वो ना तो इस लोक में सुखी है और ना ही परलोक में सुखी है दोना

617
00:44:40,520 --> 00:44:45,760
प्रमाण अपनी बातो का प्रमाण दो पूर्व जनप थे प्रमाण

618
00:44:45,760 --> 00:44:49,920
दो मिलावट हो गई प्रमाण दो कहां लिखा है मिलावट हो गई तभी तो माने

619
00:44:49,920 --> 00:44:54,320
तो तुम कह रहे हो फ तो मनमुक हो गया ना

620
00:44:54,320 --> 00:44:58,680
कि भाई वो जो है वो मैनिपुलेटेड हैले कहां लिखा है आपके

621
00:44:58,680 --> 00:45:02,760
जो गुरु है वह हर बात प्रमाण से करते हैं ना

622
00:45:02,760 --> 00:45:06,800
तो प्रमाण लाओ कहां लिखा है कि

623
00:45:06,800 --> 00:45:11,120
शास्त्र जो है बदल दिए गए नहीं आएंगे प्रमाण

624
00:45:11,120 --> 00:45:16,480
तो मनमुक कौन हुआ उसी मनमुक नैरेटिव कोही तो हम चला रहे हैं

625
00:45:16,480 --> 00:45:20,560
आजकल तो यह सारी बातें हैं जो एक लाइन से मैंने बताने

626
00:45:20,560 --> 00:45:24,680
का प्रयास किया और अंत में अपने पक्ष के संबंध में मजबूत और भी

627
00:45:24,680 --> 00:45:29,320
बातें कह दी अब आज हम लोग जो ये चर्चा कर रहे हैं

628
00:45:29,320 --> 00:45:33,680
इसमें हमें इनका एक नैरेटिव और पकड़ना है आज वो क्या

629
00:45:33,680 --> 00:45:37,000
है

630
00:45:37,000 --> 00:45:41,200
कि अब आप यह सिद्ध करिए आप हमें यह बता

631
00:45:41,200 --> 00:45:45,200
दीजिए कि किस प्रकार से जो रामपाल दास

632
00:45:45,200 --> 00:45:49,440
जी है वह तत्वदर्शी संत हैं क्योंकि

633
00:45:49,440 --> 00:45:53,520
उन्होंने यह कह दिया कि परमात्मा के पवित्र ज्ञान का प्रचार मैं

634
00:45:53,520 --> 00:45:57,760
कैसे कर पाऊंगा मैं तो दो कोड़ी का हूं यह तो के वचन है खुद

635
00:45:57,760 --> 00:46:01,800
के और अगर आप यह कहते हो कि नहीं नहीं वो ऐसा इसलिए कह रहे थे तो हम

636
00:46:01,800 --> 00:46:06,200
कह देंगे ये तो ऋषियों का अपना मत है ऐसे ही जो आज जो अनपढ गवान के जो वंशज

637
00:46:06,200 --> 00:46:10,280
है आज के यह उनका अपना मत है उन्होंने

638
00:46:10,280 --> 00:46:14,760
तो अपने बारे में य कहा है मैं दो कौड़ी का हूं और मैं जो है कुत्ता

639
00:46:14,760 --> 00:46:19,280
मात्र आप जब समाधान दोगे तो

640
00:46:19,280 --> 00:46:23,360
वो समाधान आपका अपना मत है तो

641
00:46:23,360 --> 00:46:27,520
आज हम लोग तत्वदर्शी के बारे में बात करने वाले हैं कि संत राम पाल दास

642
00:46:27,520 --> 00:46:31,640
जी को तत्वदर्शी क्यों नहीं मानना चाहिए क्यों नहीं माना जा सकता और अगर

643
00:46:31,640 --> 00:46:36,000
कोई है जो यह बता सकता है तत्वदर्शी है तो व आ करके बताए

644
00:46:36,000 --> 00:46:40,800
जी अब हम सबसे पहले ले लेंगे सुनेंगे दक्ष

645
00:46:40,800 --> 00:46:45,760
शर्मा जी से शुरुआत करते हैं जी दक्ष शर्मा जी

646
00:46:45,760 --> 00:46:49,360
बोले जय श्री

647
00:46:49,360 --> 00:46:52,160
राम

648
00:46:52,160 --> 00:46:56,280
जी रामपाल के बारे में बोने

649
00:46:56,280 --> 00:47:01,160
आवाज आ रही है आपकी अब आ र

650
00:47:01,160 --> 00:47:07,160
आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए

651
00:47:18,160 --> 00:47:24,160
ठीक तब तक आप बात करें मयंक कुमार जी जय श्री

652
00:47:24,720 --> 00:47:30,560
राम जय श्री राम जी

653
00:47:30,560 --> 00:47:34,600
बोलिए पता है भैया मैंने इनकी कुछ चीजें देखी

654
00:47:34,600 --> 00:47:38,880
है रामपाल वालों की जैसे कि अपन

655
00:47:38,880 --> 00:47:42,920
लाइव चलाए लाइव में उनसे डिबेट कर रहे हैं तो वो भी अपनी

656
00:47:42,920 --> 00:47:47,200
कॉपी करके वह भी अपना लाइव चलाने लग गए फिर जैसे कल

657
00:47:47,200 --> 00:47:51,200
आपने लाइव से पहले उनका जो फोटो लगाए वो भी फोटो

658
00:47:51,200 --> 00:47:55,440
लगा रहे हैं इसका पता क्या पता चल रहा है कि उनमें खुद में तो बुद्धि

659
00:47:55,440 --> 00:47:59,440
है ही नहीं उनकी खुद की बुद्धि तो जीरो हो गई ये

660
00:47:59,440 --> 00:48:03,480
उनके व्यक्ति ने कह दिया ना कि तुम में बात करने की तमीज नहीं है तुम

661
00:48:03,480 --> 00:48:07,560
में बैठने की तमीज तुम्हें बैठना नहीं आता बोलना नहीं आता क्या क्या तो कहा

662
00:48:07,560 --> 00:48:11,760
है वो वीडियो देखो एक बार उनके व्यक्ति ने भी कह दिया कि मत जाओ तुम नाक कटा दोगे

663
00:48:11,760 --> 00:48:16,040
तुम अपना भी मोक्ष खराब करोगे हमारा भी मोक्ष खराब करोगे तुमने अगर 100 भक्त

664
00:48:16,040 --> 00:48:22,040
भी खराब करवा

665
00:48:22,280 --> 00:48:26,400
दिए नहीं अमित को हम नहीं लेंगे अब अमित है आए हैं

666
00:48:26,400 --> 00:48:30,560
क्या यह कंटेंट लेने आते हैं इनको अब नहीं लिया जाएगा क्योंकि अपना

667
00:48:30,560 --> 00:48:36,560
कंटेंट लेकर के उधर जाकर के अपने आप को विजय घोषित करते

668
00:48:37,080 --> 00:48:41,160
हैं उनके खुद के व्यक्ति ने इस बात को कहा है

669
00:48:41,160 --> 00:48:45,440
तुम में ज्ञान नहीं है अभी तुम घर बैठो अपनी भक्ति कर लो दो धले

670
00:48:45,440 --> 00:48:49,600
का ज्ञान नहीं है और क्या कता बंदर जैसी बहुत

671
00:48:49,600 --> 00:48:54,480
बुरा बुरा र हम लीज

672
00:48:54,480 --> 00:48:58,560
अय देखो ना कल क्या था कि अगरबत्ती

673
00:48:58,560 --> 00:49:02,760
जलाना वेदों में कहां इसका प्रमाण है अब ये किस चीज

674
00:49:02,760 --> 00:49:07,000
की बात कर रहे हैं जबक उनको खुद को देखा जाए ना तो खुद भी अपने महाराज के आगे

675
00:49:07,000 --> 00:49:11,000
जो घी का दीपक होता है व जला के रखते हैं और इनका यह है कि 24 घंटे

676
00:49:11,000 --> 00:49:15,080
इनको जलाना है और भुजना नहीं चाहिए चाहे घर में खाने के लिए कुछ हो या

677
00:49:15,080 --> 00:49:19,120
ना हो लेकिन वह जरूर जलना चाहिए सुबह शाम महाराज की

678
00:49:19,120 --> 00:49:23,480
जो इनकी फोटो है उसके आगे इनको दंडवत प्रणाम करना

679
00:49:23,480 --> 00:49:27,800
है तो फिर यह उस चीज को क्यों मना कर रहे जब

680
00:49:27,800 --> 00:49:31,880
पहले बात तो बोलते है ना कि खुद उस चीज से दूर हटो फिर

681
00:49:31,880 --> 00:49:36,160
ताकि पहले खुद दूर हटो फिर उस चीज के लिए आप बात करो ना

682
00:49:36,160 --> 00:49:37,400
आप भी तो वही चीज

683
00:49:37,400 --> 00:49:41,440
कर रहे हो ना ये मैंने इससे और याद आया देखिए

684
00:49:41,440 --> 00:49:45,640
यह वाकई में जोय पवन दास ने बोला है कि इनके दो पौड़ी का ज्ञान नहीं दो ढेले

685
00:49:45,640 --> 00:49:50,000
का ज्ञान नहीं वह काफी प्रतीत होता है कि सत्य क्यों वहां अभी जो राहुल

686
00:49:50,000 --> 00:49:54,880
जी आए थे आपको दिखे थे ना राहुल जी थोड़ी देर थे भविष्य पुराण का जिनसे प्रमाण मांगा था

687
00:49:54,880 --> 00:49:58,160
वो जो राहुल जी है

688
00:49:58,160 --> 00:50:02,920
वोह वहां गए थे प्रमाण देने तो उन्होंने कहा भविष्य पुराण से मैं प्रमाण दे रहा हूं

689
00:50:02,920 --> 00:50:07,000
अब जब भविष्य पुराण से प्रमाण देने लगे मैं तो वेद से मांगूंगा मुझे वेद

690
00:50:07,000 --> 00:50:11,160
का दिखाओ पहले जब ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी

691
00:50:11,160 --> 00:50:15,480
कहते हैं आपके रामपाल दास तब चिल्लाते मैं तो वेद से मांगूंगा वेद दिखाओ

692
00:50:15,480 --> 00:50:19,800
पहले नहीं और क्या आपके आपके

693
00:50:19,800 --> 00:50:23,960
द्वारा वेदों पुराणों को स्वीकार नहीं किया गया पुराणों को मना कर रहे

694
00:50:23,960 --> 00:50:28,600
हो रामपाल दास जी की जो ज्ञान गंगा है उसमें उन्होंने

695
00:50:28,600 --> 00:50:32,880
जो पुराण है 18 उनको माना है है ना

696
00:50:32,880 --> 00:50:37,000
पुराणों को स्वीकार किया है तो पुराणों से वो व्यक्ति आपको

697
00:50:37,000 --> 00:50:41,760
प्रमाण दे रहा है हालांकि वेद में भी है अन्या सूक्त है गाय का

698
00:50:41,760 --> 00:50:45,960
पूरा और वेद में भी कई जगह पर गाय

699
00:50:45,960 --> 00:50:50,000
की महिमा और गाय के जो पंच गव्य है उनकी महिमा है मगर मैं कह

700
00:50:50,000 --> 00:50:53,000
रहा हूं अगर वो पुराण से प्रमाण दे भी रहा है

701
00:50:53,000 --> 00:50:57,280
सामने वाला आप मना कैसे कर सकते हो आपका जो माया जाल है जो तंत्र

702
00:50:57,280 --> 00:51:01,720
है आपका वो तो आधा पुराणों पर खड़ा हुआ सबसे बड़ा जो नैरेटिव है ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान

703
00:51:01,720 --> 00:51:05,840
है वो आपने वेद से दिया है क्या

704
00:51:05,840 --> 00:51:09,960
कहां से दिया है देवी भागवत देवी भागवत देवी भागवत जब देखो तब

705
00:51:09,960 --> 00:51:14,000
देवी भागवत देवी भागवत अब जब पुराण से आपको दिया जा रहा है

706
00:51:14,000 --> 00:51:18,000
तो आप च मुझे वेद से दिखाओ वेद से दिखाओ कहीं दिखा ना दे लाइव स्ट्रीम बंद हो

707
00:51:18,000 --> 00:51:23,640
जाएगी कहीं जी बोलिए म

708
00:51:23,640 --> 00:51:27,680
जी भैया एक चीज है ना मुझे एक चीज क्लियर करनी है

709
00:51:27,680 --> 00:51:31,800
आपने जो ऋग्वेद का ऋग्वेद का मंडल नंबर

710
00:51:31,800 --> 00:51:35,800
नौ सक्त नंबर एक और मंत्र नंबर न इसको मुझे

711
00:51:35,800 --> 00:51:39,920
एक बार इसका क्लेरिफिकेशन करके बताओ क्योंकि यह बोलते है इसम ये लिखा हुआ

712
00:51:39,920 --> 00:51:43,920
है हा मैं दिखा दे इस इसमें

713
00:51:43,920 --> 00:51:48,280
है ना जैसे बोलते हैं कि जो भगवान है ना कवार गाय का दूध पीता है जबक मैं इसको पढ़ा

714
00:51:48,280 --> 00:51:52,360
ना तो इस चीज में उसम लिखा हुआ ही नहीं है इस बात तो बोलते किस हिसाब

715
00:51:52,360 --> 00:51:56,760
से यह अपने मन से बोलते हैं

716
00:51:56,760 --> 00:52:00,840
पहले वेदों का भाष्य लिख देते संस्कृत का भाष्य लिख देते तब तो अगर कुछ

717
00:52:00,840 --> 00:52:05,040
क्लेम करते तो माना भी जाता ऋग्वेद दसवा मंडल

718
00:52:05,040 --> 00:52:08,560
पहला स नहीं सुनो सुनो सुनो

719
00:52:08,560 --> 00:52:12,640
ऋग्वेद में ऋग्वेद में मुझे मालूम है य वाला स

720
00:52:12,640 --> 00:52:18,640
मैं जानता

721
00:52:23,160 --> 00:52:27,760
हूं रेवे न न नवा नवा होगा

722
00:52:27,760 --> 00:52:33,760
हा नवा मंडल सक्त नंबर

723
00:52:42,040 --> 00:52:46,640
एक ये आ गया आपकी स्क्रीन पर हा

724
00:52:46,640 --> 00:52:50,560
मैं यहां पढ़ लेता

725
00:52:50,560 --> 00:52:54,760
हूं चुप्त नंबर एक मंत्र नंबर न इसमें लिखा

726
00:52:54,760 --> 00:52:58,760
है तथा मतलब कोई यज्ञ हो रहा है उसके बारे

727
00:52:58,760 --> 00:53:03,240
में आगे बात चल रही है और क्याक होता है तथा बालक

728
00:53:03,240 --> 00:53:08,080
सोम को अवध जिनका वध ना किया जा सके गाय

729
00:53:08,080 --> 00:53:12,520
इंद्र को पान कराने हेतु ठीक है

730
00:53:12,520 --> 00:53:16,600
इंद्र को जो दूध है उसका पान

731
00:53:16,600 --> 00:53:17,600
कराने के लिए सोम

732
00:53:17,600 --> 00:53:21,600
रस में गाय का दूध मिलाया जाता है यही मिश्रण यज्ञ में इंद्र को

733
00:53:21,600 --> 00:53:25,920
अर्पित किया जाता है और उसके प पश्चात अन्य यज्ञ कर्ता उसका पान

734
00:53:25,920 --> 00:53:28,640
करते हैं तो

735
00:53:28,640 --> 00:53:33,600
यहां पर इंद्र को यानी देवता है जो उनको पान कराने

736
00:53:33,600 --> 00:53:37,840
का अर्थ दिया गया है गाय के द्वारा गाय

737
00:53:37,840 --> 00:53:42,640
के समिश्रा उसका भाव है तो

738
00:53:42,640 --> 00:53:47,440
इसमें कहीं नहीं लिखा है कि वो गाय जो है

739
00:53:47,440 --> 00:53:53,440
कुमारी होनी चाहिए आठ नंबर मंत्र भी पढ़ दीजिए एक बारी

740
00:53:53,600 --> 00:53:59,600
आप प्रचुर मात्रा में धन का दान एक

741
00:53:59,600 --> 00:54:04,000
मिनट उस सोम को उंगलियां लाती है

742
00:54:04,000 --> 00:54:08,720
तेजस्वी दिखने वाले सोमरस को निकालते

743
00:54:08,720 --> 00:54:13,000
हैं और यह मीठा हो जाता है तीन शक्तियों से युक्त

744
00:54:13,000 --> 00:54:17,160
होता है दुखों अथवा शत्रुओं का नाश

745
00:54:17,160 --> 00:54:21,240
करने वाला होता है अब इसमें भाष्य में लिखा है सोमरस ज्योति धारा

746
00:54:21,240 --> 00:54:25,360
कोष को समृद्ध करता है यह समाम मधु तीन स्थानों

747
00:54:25,360 --> 00:54:29,720
में रहता है यह दुखों का निवारण कर आनंद

748
00:54:29,720 --> 00:54:34,000
को बढ़ाता है इसमें तीन प्रकार की शक्तियां रहती है जिनसे शरीर मन और बुद्धि

749
00:54:34,000 --> 00:54:39,440
को सामर्थ प्राप्त होता है यहां पर एक यज हो रहा है

750
00:54:39,440 --> 00:54:43,480
प यहां पर एक यज्ञ हो रहा है जिस यज्ञ में

751
00:54:43,480 --> 00:54:43,980
जो

752
00:54:43,640 --> 00:54:47,880
पदार्थ मिलाए जाते हैं वह कहां से आने चाहिए उस पदार्थ की बात हो रही है

753
00:54:47,880 --> 00:54:52,080
और पता क्या बोलते हैं किना जो परमात्मा होता कमारी गाय

754
00:54:52,080 --> 00:54:56,920
का दूध पीता है मैंने क प्रमाण है तो बता रहे थे ऋग्वेद

755
00:54:56,920 --> 00:55:01,040
न है सक्त नंबर एक है और म मंत्र नंबर न

756
00:55:01,040 --> 00:55:06,800
है पर मैं इसको पढ़ा तो मुझे ऐसा लगा नहीं कि इसमें चीज लिखी हुई

757
00:55:06,800 --> 00:55:11,840
है भाई बालक सोम को

758
00:55:11,840 --> 00:55:16,080
अवध जिनका वध ना किया कर के ऐसी गाय इंद्र

759
00:55:16,080 --> 00:55:20,360
को पान कराने हेतु अपने दूध के साथ

760
00:55:20,360 --> 00:55:25,320
मिलाकर संस्कृत करती है इसमें कहां आ गया

761
00:55:25,320 --> 00:55:30,720
कि गोविंद जी आप जुड़

762
00:55:30,720 --> 00:55:34,960
जाइए आप आ सकते चाहे तो तो

763
00:55:34,960 --> 00:55:39,000
इसमें कहां लिखा है कि कुमारी गाय का दूध पीता है ये

764
00:55:39,000 --> 00:55:43,280
अपने से स्टोरी जोड़ ली क्योंकि शायद उन्होंने कुमारी गाय का दूध पिया होगा इसलिए इसमें कहीं

765
00:55:43,280 --> 00:55:47,560
नहीं लिखा है कि कुवारी गाय का वो दूध पीता है दूसरी

766
00:55:47,560 --> 00:55:51,600
बात अगर गाय का दूध पिया भी है

767
00:55:51,600 --> 00:55:56,440
तो जो जिस ईश्वर को जिस रूप में हम जानते वो कृष्ण भगवान के बारे में

768
00:55:56,440 --> 00:56:00,480
दिया गया है है ना उन्होंने गाय

769
00:56:00,480 --> 00:56:04,680
का दूध दिया मगर वहां पर भी यह वाली बात गलत है कि अपने मन से कुमारी गाय

770
00:56:04,680 --> 00:56:09,400
का दूध पिया है यह सब बातें हैं

771
00:56:09,400 --> 00:56:13,760
अब हम लोग आ जाते हैं आज का जो मुख्य विषय है उस पर जी

772
00:56:13,760 --> 00:56:18,280
मैं कुछ कहना चाता हूं सेवक जी जुड़े हुए हैं आज

773
00:56:18,280 --> 00:56:22,440
एक बार सेवक जी आकर चले गए थे और पता नहीं चला था सेवक जी

774
00:56:22,440 --> 00:56:26,640
अपना चेहरा दिखाए तो आपको जोड़ लिया जाएगा पहली

775
00:56:26,640 --> 00:56:31,800
देख लो ऋग्वेद नौवा मंडल सूखते और

776
00:56:31,800 --> 00:56:36,600
श्लोक नौ न ही है ना तो न एकन हो गया

777
00:56:36,600 --> 00:56:40,840
ऋग्वेद 9 एकन में यह कहीं नहीं लिखा है कि परमात्मा

778
00:56:40,840 --> 00:56:46,680
जो है वह कुवारी गाय का दूध पीता है आप बताइए कहां लिखा

779
00:56:46,680 --> 00:56:50,720
है अब यह पता है क्या है ये इनके भगत भी

780
00:56:50,720 --> 00:56:54,800
पढ़ेंगे ना तो भी पता है इस चीज को ना नहीं मानते हो वो पता है क्या बोलते हैं

781
00:56:54,800 --> 00:56:58,880
कि यदि गुरु ने कह दिया ना तो वही है आख

782
00:56:58,880 --> 00:57:04,800
जानने की कोशिश नहीं करते हैं

783
00:57:04,800 --> 00:57:09,640
ना तो अब हम

784
00:57:09,640 --> 00:57:13,680
लेंगे राघव जी

785
00:57:13,680 --> 00:57:17,800
बोलिए जी भैया जय श्री राम भैया मैं उस दिन

786
00:57:17,800 --> 00:57:21,880
उनकी ला उस दिन उनकी लाइव में गया था जिस दिन य चल रहा थाय गोबर वाला और

787
00:57:21,880 --> 00:57:26,400
ये वाला तो भैया जब मैं ये गोबर वाला

788
00:57:26,400 --> 00:57:30,560
चल रहा था ना जब ये गोवर का लेके वो चल रहा था और अगरबत्ती का

789
00:57:30,560 --> 00:57:34,560
लेके तो भैया वहां पर मैंने र माण उनको

790
00:57:34,560 --> 00:57:39,000
दिए उनके कमेंट में जाके लाइव में तो उन्होंने मेरे को वहां से ब्लॉक कर दिया

791
00:57:39,000 --> 00:57:43,520
तो मैंने वहां पर पद्म पुराण का और क्या कहते हैं महाभारत

792
00:57:43,520 --> 00:57:47,560
का इनका प्रमाण दिया था और कुछ वेद के भी तो उन्होंने

793
00:57:47,560 --> 00:57:51,640
मेरे को लाइव में नहीं लिया तो भैया वही सोच र मैं एक बार अपने प्रमाण

794
00:57:51,640 --> 00:57:55,680
दे गोबर के ले हां एक मिनट आप

795
00:57:55,680 --> 00:57:59,680
बोलिए

796
00:57:59,680 --> 00:58:05,680
जी भैया ये जो पद्म पुराण है ना

797
00:58:14,640 --> 00:58:19,240
इसमें जी बोलिए जी

798
00:58:19,240 --> 00:58:23,320
ये पद्म पुराण के सृष्टि खंड में और

799
00:58:23,320 --> 00:58:27,760
अध्याय न जी प पुराण खंड

800
00:58:27,760 --> 00:58:31,960
जी भा निकाल लू पदम पुराण षष्टि

801
00:58:31,960 --> 00:58:37,960
खंड अध्याय अध्याय 48

802
00:58:58,080 --> 00:59:02,280
ट खंड अध्याय 48 इसमें चैप्टर का नाम मालूम है

803
00:59:02,280 --> 00:59:06,840
आपको जी भैया य गाय और बैल की उसम वो बताए ग

804
00:59:06,840 --> 00:59:11,040
ग का महात्म य

805
00:59:11,040 --> 00:59:17,040
उसम लोक नंबर 163 में देखेंगे तो उसम आता है कि लक्ष्मी

806
00:59:17,280 --> 00:59:23,280
जी निकाल मिनट 64 654

807
00:59:32,760 --> 00:59:36,840
हम श्लोक 163 य

808
00:59:36,840 --> 00:59:42,840
हां भ हां हां हां भाही

809
00:59:50,640 --> 00:59:54,840
163 हम 163

810
00:59:54,840 --> 01:00:00,440
में लिखा है

811
01:00:00,440 --> 01:00:04,800
गौ के दाहिने पास में कुबेर और वरुण

812
01:00:04,800 --> 01:00:09,160
का निवास है गौ के वाम पास में महा बलवान और तेजस्वी यक्ष

813
01:00:09,160 --> 01:00:13,280
का निवास होता है गौ के मुख के भीतर गंधर्व का निवास है

814
01:00:13,280 --> 01:00:17,320
नासिका के अग्र भाग में सर्पों का निवास है गौ

815
01:00:17,320 --> 01:00:21,440
के खुरो के पश्चिम भाग में अप्सराओं के निवास है गौ के गोबर में

816
01:00:21,440 --> 01:00:26,240
लक्ष्मी का निवास गौमूत्र में स सर्व मंगला

817
01:00:26,240 --> 01:00:30,240
का निवास गौ के पैरों के अग्र भाग में ग्रहों

818
01:00:30,240 --> 01:00:34,560
का निवास है तथा उसके खंबा टा में ब्रह्मा

819
01:00:34,560 --> 01:00:38,840
जी का निवास गायों के चारों स्तनों में सभी

820
01:00:38,840 --> 01:00:43,240
सागरों का निवास है जो व्यक्ति नित्य ही गौ का स्पर्श करता है व

821
01:00:43,240 --> 01:00:47,920
नित्य स्नान करने का फल प्राप्त करता है यह सब लिखा है भैया देख

822
01:00:47,920 --> 01:00:52,240
लीजिए गाय के गोबर में लक्ष्मी का निवास है प्रमाण

823
01:00:52,240 --> 01:00:56,160
ओनली प्रमाण

824
01:00:56,160 --> 01:01:00,440
ठीक है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया और

825
01:01:00,440 --> 01:01:04,520
भैया भैया एक प्रमाण मतलब पदम पुराण में बत स

826
01:01:04,520 --> 01:01:08,680
प्रमाण एक मैं आपको बता रहा हूं केवल इतना लिख लीजिएगा अगन

827
01:01:08,680 --> 01:01:12,760
सूक्त वेद में पूरा सूक्त है गाय की महिमा कहता हुआ अगन

828
01:01:12,760 --> 01:01:16,920
सूक्त और गौ पर समग्र चिंतन नाम से पीडीएफ मिल जाएगी

829
01:01:16,920 --> 01:01:21,120
आपको करपात्री जी के द्वारा गौ एक समग्र चिंतन इसको देख

830
01:01:21,120 --> 01:01:25,400
लीजिएगा पूरा आपको सारे प्रमाण यथोचित मिल जाएंगे बस भैया एक आखरी

831
01:01:25,400 --> 01:01:30,200
बता दो जैसे जो महाभारत था उसमें अनुशासन पर

832
01:01:30,200 --> 01:01:36,200
एक

833
01:01:44,480 --> 01:01:48,560
मिनट हम बोलिए बोलिए महाभारत

834
01:01:48,560 --> 01:01:52,720
में अनुशासन पर्व के अंतर्गत एक दान धर्म पर्व आता है अध्याय

835
01:01:52,720 --> 01:01:57,160
83 में हां दान धर्म पर्व

836
01:01:57,160 --> 01:02:01,800
आता है अध्याय 83 अध्याय 83

837
01:02:01,800 --> 01:02:06,560
में आता है

838
01:02:06,560 --> 01:02:11,240
महाभारत अनुशासन पर्व और

839
01:02:11,240 --> 01:02:15,320
अध्याय कौन सा बता रहे हैं 83 जान धर्म पर

840
01:02:15,320 --> 01:02:21,320
केंद्र

841
01:02:23,840 --> 01:02:28,040
83 यह जो प्रश्न है ना गौ मूत्र पर गोबर पर

842
01:02:28,040 --> 01:02:33,640
यह प्रश्न आज के नहीं है आप नए नहीं हो कॉपी पेस्टेड हो

843
01:02:33,640 --> 01:02:37,840
यह मैं कहूंगा अगर सनातन के नाम से अगर इस प्रकार

844
01:02:37,840 --> 01:02:42,120
के सनातन पर आक्षेप बहुत उठ रहे हैं मगर वोह पुराणों

845
01:02:42,120 --> 01:02:46,200
को ना मानने वाले होते ज्यादातर तो वो उठाते हैं मगर आप लोगों को

846
01:02:46,200 --> 01:02:50,600
तो लज्जा होनी चाहिए कि जब आपने पुराण को प्रमाण के रूप में स्वीकार

847
01:02:50,600 --> 01:02:56,080
किया है आप कैसे उठा सकते हैं वाले

848
01:02:56,080 --> 01:03:00,800
प्रश्न ग का महात्मा [संगीत]

849
01:03:00,800 --> 01:03:05,080
हैया 81 नंबर हा तो इसमें य

850
01:03:05,080 --> 01:03:11,080
जी भीम क्वेन करते है ना यस

851
01:03:12,560 --> 01:03:17,720
सर 0 कौन सा में 8383

852
01:03:17,720 --> 01:03:22,680
83 गलो और ग का उत्कर्ष बताना ग को वरदान देना

853
01:03:22,680 --> 01:03:26,880
ये हा तो इसमें लक्ष्मी जी और गायों के बीच में

854
01:03:26,880 --> 01:03:30,960
संवाद है जिसकी कहानी भीष्म जी सुनाते हैं युधिष्ठिर को तो

855
01:03:30,960 --> 01:03:35,680
उसमें यह आता है कि 84 वाले श्लोक

856
01:03:35,680 --> 01:03:41,680
में में खोल लेता हूं पढ़ दूंगा य से

857
01:03:43,160 --> 01:03:46,800
350 मैं य से पढ़

858
01:03:46,800 --> 01:03:51,000
दूंगा तो आपने स्क्रीनशॉट नहीं लिया आपको बैन किया गया तो

859
01:03:51,000 --> 01:03:55,840
स्क्रीनशॉट लिया करिए [संगीत]

860
01:03:55,840 --> 01:04:00,040
श्लोक कौन सा बताया आपने 22 से पढ़िए भैया वहां

861
01:04:00,040 --> 01:04:04,480
से पहले लक्ष्मी जी रिक्वेस्ट करती है फिर 24 तक में उनको गाय अपना गबर

862
01:04:04,480 --> 01:04:08,080
में स्थान

863
01:04:08,080 --> 01:04:14,080
देते कौन सा बोला कितना श्लोक नंबर

864
01:04:14,760 --> 01:04:19,780
22 श्लोक

865
01:04:19,780 --> 01:04:24,720
[संगीत]

866
01:04:24,720 --> 01:04:28,880
22 इसी से य गए हम सब लोगों के ऊपर स्थान में निवास करती

867
01:04:28,880 --> 01:04:32,920
है तुम्हारे प्रश्न के अनुसार मैंने यह बात बताई कि

868
01:04:32,920 --> 01:04:36,920
गए देवताओं के भी ऊपर स्थान में क्यों निवास

869
01:04:36,920 --> 01:04:41,040
करती है इसके सिवाय गए वरदान भी प्राप्त कर चुकी

870
01:04:41,040 --> 01:04:45,400
है और प्रसन्न होने पर दूसरों को वर देने की शक्ति रखती यही है क्या

871
01:04:45,400 --> 01:04:49,760
नहीं भैया ये नहीं एक श्लोक नंबर 24 है और 23

872
01:04:49,760 --> 01:04:54,320
है सुर भी ग पुण्य कर्म करने वाली और शुभ लक्षणा होती है सर्वश्रेष्ठ

873
01:04:54,320 --> 01:04:58,480
बल सूदन वे जिस से पृथ्वी पर गई है उसको मैं पूर्ण

874
01:04:58,480 --> 01:05:02,680
रूप से बता रहा हूं यह वाला नहीं है भैया यह श्लोक है

875
01:05:02,680 --> 01:05:07,480
एव मुक्ता ततो गाव ऐसे करके श

876
01:05:07,480 --> 01:05:12,000
आप चैप्टर नंबर शायद थोड़ा ऊपर नीचे बोल रहे हो चटर

877
01:05:12,000 --> 01:05:16,040
का नाम क्या है बताओ चैप्टर का नाम क्या है

878
01:05:16,040 --> 01:05:20,120
इसमें मेरा वाला तो इंग्लिश से है तो इसमें युधिष्ठिर और क्या कहते हैं

879
01:05:20,120 --> 01:05:26,120
भीष्म जी का संवाद है

880
01:05:26,200 --> 01:05:30,960
यह शुरू होता है

881
01:05:30,960 --> 01:05:35,480
भैया युधिष्ठिर और किसका संवाद है

882
01:05:35,480 --> 01:05:39,520
भीष्म जी का भीष्म जी का यह

883
01:05:39,520 --> 01:05:43,600
तो है वशिष्ठ परशुराम का संवाद भीष्म

884
01:05:43,600 --> 01:05:47,720
जी का यहां पर उदिर जी के साथ संवाद नहीं है किसी

885
01:05:47,720 --> 01:05:52,240
और आप आप ही बता दो फिर क्योंकि यहां अभी देखने में देर लग जाएगी

886
01:05:52,240 --> 01:05:55,800
लाइव स्ट्रीम चलर इसमें

887
01:05:55,800 --> 01:05:59,840
बाद में डाल देंगे हा ये 83 से ही आसपास होगा

888
01:05:59,840 --> 01:06:03,880
क्योंकि उसी में हो सकता है कंफ्यूजन तो इसमें युधिष्ठिर जी और भीष्म जी के

889
01:06:03,880 --> 01:06:07,920
बीच में संवाद चलता है तो उसमें युधिष्ठिर जी पूछते हैं कि गाय

890
01:06:07,920 --> 01:06:12,240
के गोवर की इतनी महिमा क्यों बताई गई है ऐसे पूछते हैं क्वेश्चन उसमें

891
01:06:12,240 --> 01:06:16,280
भीष्म जी कहानी सुना भीष्म जीय कहानी सुनाते हैं लक्ष्मी जी

892
01:06:16,280 --> 01:06:20,280
की और गायों के बीच की संवाद तो उसमें लक्ष्मी जी

893
01:06:20,280 --> 01:06:24,400
पहले पूरा महिमा मंडन करती है लक्ष्मी जी का गाय

894
01:06:24,400 --> 01:06:28,560
से संवाद है क्या वहां पे हां लक्ष्मी जी का गाय चर

895
01:06:28,560 --> 01:06:32,560
मिल गया वो चैप्टर मिल गया लक्ष्मी जी का गाय से

896
01:06:32,560 --> 01:06:36,640
संवाद है

897
01:06:36,640 --> 01:06:40,800
347 हा युधिष्ठिर जी ने कहा मैंने सुनाया कि गाव के गोबर में

898
01:06:40,800 --> 01:06:44,800
लक्ष्मी का निवास है किंतु इस विषय में मुझे संदेह है अतः इसके संबंध

899
01:06:44,800 --> 01:06:49,320
में यथार्थ बात सुनना चाहता हूं तो फिर भीष्म जी ने कहा

900
01:06:49,320 --> 01:06:54,000
यह 82 नंबर का चैप्टर है जो मैं पढ़ रहा हूं पहले श्लोक से

901
01:06:54,000 --> 01:06:56,200
ठीक

902
01:06:56,200 --> 01:07:00,320
तोय आप लोग नोट कर लीजिएगा नंबर का है पहले

903
01:07:00,320 --> 01:07:03,720
शलोक

904
01:07:03,720 --> 01:07:08,080
शलोक नहीं पहले शुरू से अच्छा तो है यह बोल रहे हैं जो

905
01:07:08,080 --> 01:07:14,080
इस विषय में विज्ञ पुरुष फिर य आगे बताते

906
01:07:14,160 --> 01:07:18,560
हैं

907
01:07:18,560 --> 01:07:22,600
22 निष्पाप ग वास्तव में तुम्हारे

908
01:07:22,600 --> 01:07:26,720
अंगों में कहीं कोई कुत स्थान नहीं दिखा देता

909
01:07:26,720 --> 01:07:30,800
तुम परम पुण्य मय पवित्र और सौभाग्य शालनी होते मुझे आज्ञा

910
01:07:30,800 --> 01:07:35,080
दो कि मैं तुम्हारे शरीर में रह सकू यही है हा

911
01:07:35,080 --> 01:07:39,160
य लक्ष्मी जी कह रही लक्ष्मी के ऐसा कहने पर करुणा और वात्सल्य

912
01:07:39,160 --> 01:07:43,240
की मूर्ति शुभ स्वरूपा गने एक साथ मिलकर सलाह की फिर सबने लक्ष्मी

913
01:07:43,240 --> 01:07:47,600
से कहा ठीक है अब यह तो रही प्रमाण

914
01:07:47,600 --> 01:07:51,680
और भी है भैया ये 24 इसके बाद वाला जो है उसम

915
01:07:51,680 --> 01:07:55,680
गाय ऐसा आशीर्वाद दे देती हैको पढ़ अव

916
01:07:55,680 --> 01:08:00,400
तुम्हारा सम्मान करना चाहिए तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो क्योंकि हमारे

917
01:08:00,400 --> 01:08:05,040
हमारी यह दोनों वस्तुएं परम पवित्र है लो ठीक है भैया

918
01:08:05,040 --> 01:08:09,080
प्रमाण कहते हैं इसे बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया

919
01:08:09,080 --> 01:08:13,440
राघव जी मगर आप लोग वहां पर स्क्रीनशॉट तो लिया करो कि आपको भाई

920
01:08:13,440 --> 01:08:17,560
आपने प्रमाण दिया आपके साथ ऐसा हुआ वो बोलने नहीं दिया गया जी

921
01:08:17,560 --> 01:08:21,720
भैया जी भया अब मैं एक बात याद दिलाना चाहूंगा जो राहुल जी वहां

922
01:08:21,720 --> 01:08:25,800
गए थे उन्होंने वहां पर यह गलती की थी कि जब उन्होने व

923
01:08:25,800 --> 01:08:29,400
पुराण का वो किया तो इन्होंने वहा यह नहीं कहा कि पुराण को तुम मानते

924
01:08:29,400 --> 01:08:34,000
तो हो आप पुराण से प्रमाण देते हो ना कि ब्रह्मा विष्णु

925
01:08:34,000 --> 01:08:38,080
महेश क्या कहते हैं वो है नाशवान पुराणों से ही तो

926
01:08:38,080 --> 01:08:42,240
देते हो मगर इन्होंने वहां कुछ कहा ही नहीं है आ गए वापस वही की वही ना कहना

927
01:08:42,240 --> 01:08:46,520
चाहिए था र अ

928
01:08:46,520 --> 01:08:52,520
एक अब जी दक्ष शर्मा जी

929
01:08:53,240 --> 01:08:57,360
बोलिए जी प्रणाम मैं रामपाल से तो नहीं

930
01:08:57,360 --> 01:09:01,480
रिलेटेड है पर थोड़ा य स्थिति बताना चाहूंगा य आ

931
01:09:01,480 --> 01:09:06,800
समाज नेला ख बारे में आपको

932
01:09:06,800 --> 01:09:11,760
बारे समाज ने जो फैला रखी य सेंट्रल यूनिवर्सिटी

933
01:09:11,760 --> 01:09:16,360
न

934
01:09:16,360 --> 01:09:20,520
उसका अच्छा आप इसको इसको किसी

935
01:09:20,520 --> 01:09:24,600
और दिन ले लीजिएगा अभी क्योंकि बात चल रही है जिनके

936
01:09:24,600 --> 01:09:28,760
बारे में उसके रहने देते हैं है ना आप किसी और दिन

937
01:09:28,760 --> 01:09:32,960
लाइव में इस बात को रखिएगा मैं एक बात बताना चाह रहा था कि हमने प्रमाण

938
01:09:32,960 --> 01:09:37,400
भी दे दिए और तर्क भी दे दिए वैज्ञानिकता भी दे दी पर मैं एक बात बताऊंगा

939
01:09:37,400 --> 01:09:43,400
आपको पहली बात तो यह है

940
01:09:44,760 --> 01:09:48,760
कि एक शब्द प्रमाण वाली बात होती है कि अगर हम धर्म

941
01:09:48,760 --> 01:09:53,000
ब्रह्म के बारे में यथोचित और संतुष्टि जनक मिल गया तो फिर हम छोटी छोटी

942
01:09:53,000 --> 01:09:57,240
पॉइंट आउट नहीं करते वो शुरू में मैंने बताया गोबर के उपयोग की वैज्ञानिकता

943
01:09:57,240 --> 01:10:01,720
भी बताई और इसी प्रकार से वैज्ञानिकता गौमूत्र की भी है

944
01:10:01,720 --> 01:10:06,560
मगर मैं कह रहा हूं कि क्या आपके जीवन में

945
01:10:06,560 --> 01:10:10,600
जो यह कहते हैं कि गोबर से क्या होता है गौ मूत्र से

946
01:10:10,600 --> 01:10:14,600
क्या होता है क्या आपके जीवन में सभी चीजें क्या आप

947
01:10:14,600 --> 01:10:18,720
इसी तरह से बिलीव करते

948
01:10:18,720 --> 01:10:23,040
हैं क्या सभी चीजें आप इसी तरह से बिलीव करते हैं

949
01:10:23,040 --> 01:10:27,240
अगर आप आप अपने घर की जो मातृ शक्तियां है

950
01:10:27,240 --> 01:10:31,680
उनको किसी पराय पुरुष से स्पर्श होने से बचाते हैं

951
01:10:31,680 --> 01:10:34,600
क्यों बचाते हैं

952
01:10:34,600 --> 01:10:38,760
बताइए आ गया ना धर्म क्योंकि धर्म ने कहा है और

953
01:10:38,760 --> 01:10:43,200
कोई कारण नहीं है क्या हो जाएगा उससे

954
01:10:43,200 --> 01:10:47,240
किस साइंटिस्ट ने मना कर दिया है आज तो पढ़ लिख

955
01:10:47,240 --> 01:10:51,680
गए हो ना आपके वो पूर्वज अनपर थे हमारे नहीं थे

956
01:10:51,680 --> 01:10:55,760
भाई तो इन सब चीजों प गौर किया करो इसीलिए आपके ही

957
01:10:55,760 --> 01:10:59,920
व्यक्ति को आपको कहना पड़ता है दो कौड़ी का ज्ञान दो ढेले का ज्ञान बिल्ली जैसा

958
01:10:59,920 --> 01:11:03,280
मुंह बंदर जैसा

959
01:11:03,280 --> 01:11:08,000
मुंह ठीक है अभी आप भी बात करेंगे तत्वदर्शी

960
01:11:08,000 --> 01:11:12,680
पे अभी तो वो मेन चैप्टर खुला ही नहीं है

961
01:11:12,680 --> 01:11:17,120
तो राम जी शरण स्मार जी जय श्री राम बोले

962
01:11:17,120 --> 01:11:21,600
जय श्री राम भाई सभी को जय श्री राम मुझे एक दो बात कहनी

963
01:11:21,600 --> 01:11:25,680
है इसके बाद तो मेरा नित्य कर्म का समय हो जाएगा आवाज

964
01:11:25,680 --> 01:11:28,440
आ रही है ना

965
01:11:28,440 --> 01:11:32,440
जी तो एक तो अभी गौ महिमा की जो चर्चा चल

966
01:11:32,440 --> 01:11:34,000
रही थी

967
01:11:34,000 --> 01:11:38,080
अनंत ममा गौ की गौ माता की शास्त्रों में वर्णित

968
01:11:38,080 --> 01:11:42,200
है हम वर्णन भी नहीं कर सकते लेकिन हम

969
01:11:42,200 --> 01:11:46,320
लोगों ने फेसबुक पर एक पेज बनाया था गौ

970
01:11:46,320 --> 01:11:51,040
महिमा के नाम से ही व पेज है और जिनको ग

971
01:11:51,040 --> 01:11:55,800
गौ माता की महिमा को समझना है अध्ययन करना है एक स्थान

972
01:11:55,800 --> 01:12:00,120
तो उस पेज के अध्ययन से भी गौ महमा को समझा

973
01:12:00,120 --> 01:12:04,360
मेरी आईडी से भी जुड़ा है व पेज तो उस पेज को खोल करके

974
01:12:04,360 --> 01:12:08,880
भी लोग उसका अध्ययन कर सकते हैं एक बात अच्छा दूसरी बात

975
01:12:08,880 --> 01:12:12,880
एक वो एमपी राम पालियो का

976
01:12:12,880 --> 01:12:18,000
एमपी य करके कोई चैनल है [संगीत] ना

977
01:12:18,000 --> 01:12:22,600
होगा क्या करना बताइए आप सांकेतिक भाषा

978
01:12:22,600 --> 01:12:27,480
का उपयोग करिए अच्छा अच्छा लेना कर

979
01:12:27,480 --> 01:12:31,520
जी जी वहा पर राम अच्छा

980
01:12:31,520 --> 01:12:36,080
इससे कुछ समय पहले ही लाइव में एक सज्जन कह के गए थे कि हम राम

981
01:12:36,080 --> 01:12:40,760
रामचरित मानस को नहीं मानते हम तो वाल्मीकि रामायण को मानते हैं

982
01:12:40,760 --> 01:12:44,880
और इनका ही एक गुरु भाई

983
01:12:44,880 --> 01:12:49,560
उस चैनल पर कह रहा है और उसम जो कलयुग

984
01:12:49,560 --> 01:12:53,760
के वर्णन में भगवान के नाम की महिमा का जो वर्णन है उसकी चर्चा वह

985
01:12:53,760 --> 01:12:58,240
कर रहा है वहा कह रहा है कि

986
01:12:58,240 --> 01:13:02,680
एक नाम एक ही नाम अधारा

987
01:13:02,680 --> 01:13:06,760
वगैरा कई कोट कर रहा है अच्छा उसम उसने

988
01:13:06,760 --> 01:13:10,880
उसने यह भी कह दिया चौपाई में एक चौपाई

989
01:13:10,880 --> 01:13:15,640
की हरि गुगा वाला जो है ना कलयुग के

990
01:13:15,640 --> 01:13:20,000
के आधार के ऊपर अच्छा राम नाम अलंबन

991
01:13:20,000 --> 01:13:24,240
इसको छोड़ दिया और साथ में कहता है कि ना तो राम राम

992
01:13:24,240 --> 01:13:28,560
करने से कुछ नहीं होगा एक आधार होना चाहिए सबका तो

993
01:13:28,560 --> 01:13:32,560
इस प्रकार के तो ये लोग है कि वही पर लिखा हुआ है हरि गुण का भी

994
01:13:32,560 --> 01:13:36,680
उसने कह दिया राम नाम अवलंबन एक को छोड़ दिया

995
01:13:36,680 --> 01:13:40,720
कि कलयुग केवल नाम आधारा वाला जो प्रसंग है और

996
01:13:40,720 --> 01:13:44,840
कहता है कि नहीं ये सब राधे राधे करने से राम

997
01:13:44,840 --> 01:13:49,080
राम करने से कुछ नहीं होगा एक ही आधार होना चाहिए एक ही नाम होना

998
01:13:49,080 --> 01:13:53,320
चाहिए अलग अलग करने से नहीं होगा तो इस प्रकार की तो लोग इनकी

999
01:13:53,320 --> 01:13:57,640
मूर्ता के संबंध में क्या कहा जाए और के संबध

1000
01:13:57,640 --> 01:14:01,680
में उनका अपना व्यक्ति कह रहा है भैया मत जाओ उससे

1001
01:14:01,680 --> 01:14:05,080
जीत नहीं पाओगे तुम्हारे बस्ती नहीं है फिर भी आ जाते

1002
01:14:05,080 --> 01:14:09,160
हैं और मैं कहता हूं कि भाई सामर्थ वान को आने दो क्यों नाक

1003
01:14:09,160 --> 01:14:13,600
कटवा रहे हो मैंने कई वीडियोस में कहा कई लाइव में कहा कि आप लोग

1004
01:14:13,600 --> 01:14:17,880
समर्थक नहीं हो आप लोग विरोधी हो रामपाल दास जी के क्योंकि इतना

1005
01:14:17,880 --> 01:14:22,800
कमजोर पक्ष य प्रस्तुत कर रहे हो कि पूछो नहीं लोग

1006
01:14:22,800 --> 01:14:26,880
हसेंगे अब वही बात उस अब इतना

1007
01:14:26,880 --> 01:14:30,920
सा बिल्ली जैसा मुह लेकर बैठे रहेंगे अब

1008
01:14:30,920 --> 01:14:35,160
भाई मेरे विरुद्ध कुछ भी बनाने से पहले उसके विरुद्ध बनाओ ना

1009
01:14:35,160 --> 01:14:39,240
वीडियो बनाओ तुमने बिल्ली ज वाला क्यों कहा हम तो हम तो बहुत जीते हैं

1010
01:14:39,240 --> 01:14:43,400
हम तो विजय होक आए हैं बनाओ वीडियो तब

1011
01:14:43,400 --> 01:14:49,400
पता चले न न्याय प्रिय हो बना दो उसके लिए

1012
01:14:50,320 --> 01:14:54,480
वीडियो उ उसने कहा कि तुम परास्त हो जाओगे

1013
01:14:54,480 --> 01:14:58,560
तुम ढेले वाले हो तुम जो है बंदर के

1014
01:14:58,560 --> 01:15:02,840
मुंह वाले हो तुम जो है बिल्ली के मुंह वाले हो हमने तो कहा नहीं अब आप उसके विरुद्ध

1015
01:15:02,840 --> 01:15:06,960
पहले वीडियो बनाओ लाइव करो कि पवन दास ने हमको कैसे कहा हम तो जीते थे

1016
01:15:06,960 --> 01:15:11,040
हम तो सिद्ध करके आए थे या हम तो यहां कमरे में बैठ के सिद्ध कर रहे हैं

1017
01:15:11,040 --> 01:15:15,160
जहां पर हमें भय नहीं है अब

1018
01:15:15,160 --> 01:15:19,560
नहीं बनेगा बात जी जी जी बहुत बढ़िया मुझे

1019
01:15:19,560 --> 01:15:23,560
एक तो ये बताना था कि फु पर जो जिनके पास ग्रंथ आदि

1020
01:15:23,560 --> 01:15:27,720
नहीं है अध्ययन करने के लिए तो फेसबुक पर है गौ

1021
01:15:27,720 --> 01:15:31,840
महिमा करके वहां से काफी सामग्री गौ माता की महिमा के संबंध

1022
01:15:31,840 --> 01:15:37,840
में प्राप्त हो जाएगी जो वहा से अध्ययन करना चाहे सर्च करेगा तो वहा मिल

1023
01:15:38,640 --> 01:15:44,640
जाएगा ठीक [संगीत]

1024
01:15:47,320 --> 01:15:53,320
है आप आ गए स्टेज पर संदीप बत्रा जी

1025
01:15:56,760 --> 01:16:01,600
जय श्री राराम जय जय श्री राम कैसे हो मित्र

1026
01:16:01,600 --> 01:16:06,000
बस कृपा है राम की हो

1027
01:16:06,000 --> 01:16:10,320
जी जी राहुल मैं आपको यह कहना चाह रहा हूं आप मुझसे

1028
01:16:10,320 --> 01:16:14,400
संपर्क जरूर करिएगा लाइव स्ट्रीम के बाद ठीक है जी

1029
01:16:14,400 --> 01:16:18,400
आपने वहा जाकर के जब उन्होंने यह कहा कि हम

1030
01:16:18,400 --> 01:16:22,440
पुराण को नहीं मानेंगे तो आपकी आपकी बोल आपको आपने बोला

1031
01:16:22,440 --> 01:16:26,440
क्यों नहीं वहां पर के जो ब्रह्मा विष्णु इसको नाशवान बताते हो पुराण से

1032
01:16:26,440 --> 01:16:30,800
बताते हो कि वेद से बताते हो क्यों नहीं

1033
01:16:30,800 --> 01:16:34,880
मानोगे आपको बोलना चाहिए था आपकी ज्ञान गंगा में लिखा है

1034
01:16:34,880 --> 01:16:39,360
कि पुराण हमारे प्रमाण है सद ग्रंथ है कहां

1035
01:16:39,360 --> 01:16:43,440
लिखा है कि अगर सद ग्रंथ होंगे तो वेद को मानेंगे और पुराण को नहीं मानेंगे कहां

1036
01:16:43,440 --> 01:16:47,680
लिखा है हर चीज प्रमाण मांगो कुछ भी बोले उसका प्रमाण मांगो

1037
01:16:47,680 --> 01:16:51,960
कहा लिखा है भाई जब आपने पुराण

1038
01:16:51,960 --> 01:16:53,720
को स्वीकार कर लिया कि अभी

1039
01:16:53,720 --> 01:16:57,720
हमारा सद ग्रंथ है आपको जवाब देना तो आप कह रहे नहीं पुराण को मानेंगे

1040
01:16:57,720 --> 01:17:01,800
आप ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी नाशवान सिद्ध करते हो देवी भागवत

1041
01:17:01,800 --> 01:17:05,800
से इनका पूरा आधार ढांचा जो है पुराण की जो ये वाली बातें

1042
01:17:05,800 --> 01:17:09,840
है कल्प भेद से चीज है कि भगवत में ये कहा गया

1043
01:17:09,840 --> 01:17:14,720
और विष्णु पुराण में य उसी पर तो टिकी है जी

1044
01:17:14,720 --> 01:17:18,960
जो कल्प भद से भगवान की अनेकानेक लीलाए है अलग अलग उसी पर तो इनका

1045
01:17:18,960 --> 01:17:23,080
पूरा किला टिका हुआ है और उसी

1046
01:17:23,080 --> 01:17:27,560
को य मना कर रहे हैं

1047
01:17:27,560 --> 01:17:31,760
अभी आप कुछ बोलना चाहते हैं रा हा जीय

1048
01:17:31,760 --> 01:17:35,800
ये शास्त्रों से थोड़ा थोड़ा अंश लेते हैं जो कि इनके काम का है बाकी नहीं मानते ये

1049
01:17:35,800 --> 01:17:39,800
किसी भीज वो भी वो भी हम अबकी बार जब थोड़ा थोड़ा लेंगे तो

1050
01:17:39,800 --> 01:17:45,040
हम उसका भी प्रमाण मांगेंगे ये कहा लिखा है थोड़ा थोड़ा लो

1051
01:17:45,040 --> 01:17:49,320
बोले हम श श्लोक को नहीं मानेंगे मुझे बोल रहे थे ना कि आप

1052
01:17:49,320 --> 01:17:53,320
आपको संस्कृत आती है अच्छी बात है लेकिन श्लोक नहीं देखना हमने हमें प्रमाण

1053
01:17:53,320 --> 01:17:57,960
दिखाओ आप अपने हाथ में शास्त्र दिखाओ ऐसे लाइव करके

1054
01:17:57,960 --> 01:18:03,960
मैंने बोला श्लोक दिखा देता हूं आपके पास भविष्य पुराण आएगा आप

1055
01:18:04,280 --> 01:18:08,960
पढ़ेंगे वेद में दिखाओ पहले कहा लिखा है पहले वेद में दिखाओ

1056
01:18:08,960 --> 01:18:13,920
कहां लिखा पहले वेद में दिखाओ और जनके

1057
01:18:13,920 --> 01:18:17,960
जब इनके व जेल धाम निवासी जेल धाम में नहीं थे बाहर थे जेल

1058
01:18:17,960 --> 01:18:22,080
धाम से तो उनसे उन्होने बोला था कि क्या कहते हैं

1059
01:18:22,080 --> 01:18:26,200
यह हमको जो है नावान ब्रह्मा विष्णु महेश को नासमा

1060
01:18:26,200 --> 01:18:30,200
वेदों से दिखाओ पुराणों से

1061
01:18:30,200 --> 01:18:34,640
नहीं जी जी धर्म धर्म सनातन जी बोलिए

1062
01:18:34,640 --> 01:18:38,720
जय श्री राम भैया मेरे पास एक प्रमाण है

1063
01:18:38,720 --> 01:18:44,720
धूप का उसका जो धूप है

1064
01:18:44,760 --> 01:18:48,760
ना मैंने एक बार राम पालियो से एक बार डिबेट की थी एक

1065
01:18:48,760 --> 01:18:53,080
वीडियो भी बनाया था उस पर तो ये लोग क्या करते हैं कि हमारे जो शास्त्र

1066
01:18:53,080 --> 01:18:57,640
है जो हमारे पुराण है इनको तोर मोर कर प्रमाण हमको देते हैं

1067
01:18:57,640 --> 01:19:01,720
जैसे इन्होंने भागवत जी के आप लोग डिबेट करने

1068
01:19:01,720 --> 01:19:06,040
डिबेट मत किया करो कभी भी केवल चर्चा किया

1069
01:19:06,040 --> 01:19:10,160
करो डिबेट करने का किसने किसने कह

1070
01:19:10,160 --> 01:19:14,800
दिया आप डिबेट करने जाओ चर्चा करो आप बोलिए आगे जी

1071
01:19:14,800 --> 01:19:18,840
तो इन्होंने एक प्रमाण दिया था मुझे तृतीय भागवत जी के तृतीय स्कंद

1072
01:19:18,840 --> 01:19:23,040
के 19 में अध्याय का 25 वा श्लोक जिसमें यह लोग बता रहे

1073
01:19:23,040 --> 01:19:27,040
हैं कि आप मूर्ति की पूजा नाहा करें कपिल भगवान ऐसा कह रहे हैं

1074
01:19:27,040 --> 01:19:31,360
ऐसा ये लोग बता रहे थे मुझे कि आप मूर्ति की पूजा ना करें मैं

1075
01:19:31,360 --> 01:19:35,960
सबका आत्मा परमेश्वर सभी भूतों में स्थित हो ऐसा इने प्रमाण दिया

1076
01:19:35,960 --> 01:19:40,120
परंतु जब मैंने इनको आगे का प्रमाण दिया इन्होंने 19वां श्लोक तो पढ़ लिया लेकिन

1077
01:19:40,120 --> 01:19:44,360
आगे 25 वा श्लोक इन्होंने नहीं पढ़ा जब मैंने इनको 25वां श्लोक

1078
01:19:44,360 --> 01:19:48,520
का प्रमाण दिया कि भगवान कपिल यहां पर बता रहे हैं कि व्यक्ति तब

1079
01:19:48,520 --> 01:19:52,840
तक प्रतिमा का पूजन करता रहे जब तक उसे पूरी प्रकृति

1080
01:19:52,840 --> 01:19:56,880
में मेरा दर्शन ना हो जब मैंने इनको ये वाला प्रमाण तो ये

1081
01:19:56,880 --> 01:19:59,840
लोग डिबेट छोड़ के भाग जाते हैं चर्चा छोड़कर ये लोग

1082
01:19:59,840 --> 01:20:04,240
भाग जाते हैं और आगे फिर ये कहने लगते हैं हम इसको प्रमाण नहीं मानते हैं

1083
01:20:04,240 --> 01:20:08,440
हमें अन्य कहीं से प्रमाण दो और फिर बहाने मानने लगते हैं

1084
01:20:08,440 --> 01:20:12,440
तो इनका काम केवल एक है ये जो सभी तंत्र है कि

1085
01:20:12,440 --> 01:20:16,600
यह तोड़ मोरकर शास्त्रों को प्रस्तुत करेंगे और

1086
01:20:16,600 --> 01:20:21,200
समाज में भ्रांति फैलाने का यह लोग कार्य करते

1087
01:20:21,200 --> 01:20:25,960
हैं अच्छा ठीक है

1088
01:20:25,960 --> 01:20:30,080
यह तो है ही तभी तो हम उतरे हैं ना इतना बारबार हम लाइव आ रहे हैं यह

1089
01:20:30,080 --> 01:20:34,560
सब चीज ही तो है और क्यों आ रहे हैं भाई आपको

1090
01:20:34,560 --> 01:20:38,600
आपने देख लिया एक व्यक्ति है जो मेले में जाता है आपके लोगों से बात करता है उसके

1091
01:20:38,600 --> 01:20:42,640
बाद वह वायरल हो जाता है वह वीडियो उसके बाद आपके लोग तब भी

1092
01:20:42,640 --> 01:20:46,880
क्या करते हैं जो जो ऐसे लोग है जिनको लोग जानते

1093
01:20:46,880 --> 01:20:51,040
हैं थोड़ा वो लोग भी सामने नहीं आते कि शिवांश जी हमें आपसे बात

1094
01:20:51,040 --> 01:20:55,280
करनी है आपके चैनल पर नहीं आएंगे आप ऐसा कर

1095
01:20:55,280 --> 01:20:59,480
मैं इधर से इंदौर आ जाता हूं मुंबई से आप आ जाइए लखनऊ

1096
01:20:59,480 --> 01:21:03,600
से इंदौर वहां चर्चा कर लेंगे या फिर

1097
01:21:03,600 --> 01:21:07,640
वो और ही कहीं चलते हैं अगर आपको और कहीं जाना हो तो

1098
01:21:07,640 --> 01:21:11,720
वहां चले चलेंगे चर्चा के लिए मगर चर्चा करने का साहस नहीं

1099
01:21:11,720 --> 01:21:14,840
है इनम बंद कमरे में बैठ करके और वह

1100
01:21:14,840 --> 01:21:19,240
बातें करने का साहस है जो बातें अभी हमने छुई नहीं है जो छू लेंगे उससे भाग जाएंगे

1101
01:21:19,240 --> 01:21:23,280
अवा छू लिया गोबर

1102
01:21:23,280 --> 01:21:27,640
और धूप हमने छ लिया अब देखना

1103
01:21:27,640 --> 01:21:32,040
अब जो है नया विषय खुल जाएगा क्योंकि

1104
01:21:32,040 --> 01:21:36,080
सामना करने का साह में नहीं है तो हमने सभी को सुन लिया है

1105
01:21:36,080 --> 01:21:40,160
लगभग लगभग जितने भी लोग आए अभी तक बस संदीप जी और ह जी रह गए

1106
01:21:40,160 --> 01:21:45,080
थोड़ा थोड़ा सा दो दो मिनट इनको भी सुन ले जी ह

1107
01:21:45,080 --> 01:21:49,120
में भी प्राप्त होता है गवर का

1108
01:21:49,120 --> 01:21:53,360
और क्या प्राप्त होता है मनुस्मृति के पम

1109
01:21:53,360 --> 01:21:57,960
अध्याय में 24 श्लोक में आपको प्राप्त होगा के बहार

1110
01:21:57,960 --> 01:22:02,240
से लीपने से खरोच से और गायों के गोबर से लीपने से भूमि शुद्ध

1111
01:22:02,240 --> 01:22:07,280
होती है अच्छा बढ़िया जी बहुत

1112
01:22:07,280 --> 01:22:11,280
बढ़िया एक बात बताता हूं मैं अपने ना अपने मतलब की घर

1113
01:22:11,280 --> 01:22:15,360
की बात बताता हूं आपको हमारे माता जी है ना तो उन्होंने

1114
01:22:15,360 --> 01:22:19,400
ना जिस समय हमारे घर के अंदर किसी डिलीवरी केस से दो डिलीवरी केसेस

1115
01:22:19,400 --> 01:22:23,680
में ऐसा हुआ है ये कन्फर्म बता रहा हूं मैं आपको उन दो डिलीवरी केसेस

1116
01:22:23,680 --> 01:22:28,200
में क्या हुआ डॉक्टर ने ने बोला है मतलब वहां पे पेशेंट वहां पे डॉक्टर कह रहा है कि शायद ऑपरेशन करना

1117
01:22:28,200 --> 01:22:29,840
पड़ेगा तो माता जी

1118
01:22:29,840 --> 01:22:33,840
ने क्या किया गोबर का अर्क लेके ना अर्क लेके उसका

1119
01:22:33,840 --> 01:22:37,920
पानी बना के अर्क लेके उसको मतलब उसको थोड़ा कन्वेंस करके

1120
01:22:37,920 --> 01:22:42,280
बच्चों को पिला दिया और बच्चा नॉर्मल हो गया था उनका ये मतलब जीती

1121
01:22:42,280 --> 01:22:46,280
जाती मेरे सामने की बात है सर ये जी

1122
01:22:46,280 --> 01:22:50,440
मतलब उन्होंने क्या किया गोबर का आर्क लेके ना एक उसमें जैसे छन्नी

1123
01:22:50,440 --> 01:22:54,760
मतलब छन्नी में लेके एक तरह से जैसे चुन्नी की छन्नी में लेके

1124
01:22:54,760 --> 01:22:58,880
उसको अर्क को अच्छे से दबाया उसका जो अर्क निकला उसको

1125
01:22:58,880 --> 01:23:02,960
तुरंत पिला दिया और बच्चे दोनों के दोनों नॉर्मल हुए और बड़े आराम से हुए बाद में बच्चे

1126
01:23:02,960 --> 01:23:07,120
बड़े म कविंस हुए कि वाकई य कितनी पावर है इस यह

1127
01:23:07,120 --> 01:23:11,440
मेरी आंखों देखी बात है सर य और ये बताओ इनके

1128
01:23:11,440 --> 01:23:15,520
पूर्वज से लेकर आज तक भी आज एक लोग कह रहे हैं कि हम लोग जो है

1129
01:23:15,520 --> 01:23:19,760
हम लोग जो है वो हो रहे हैं आधुनिक हो गए पढ़ लिख गए हैं जब इनकी पढ़ाई देखी होगी

1130
01:23:19,760 --> 01:23:24,560
आपने वो खुद कह रहा है अनमा से खते हो इनका व्यक्ति कह रहा है इनको

1131
01:23:24,560 --> 01:23:29,120
दिने दिखने के ना बोलने का बोलना आता है ना

1132
01:23:29,120 --> 01:23:35,120
ना कहना आता है और चले जाते बंदर सा मु लेय इनका व्यक्ति कह रहा

1133
01:23:36,200 --> 01:23:40,560
है ये जिन पूर्वजों को वो कह रहे है ना कि वो पूर्वज

1134
01:23:40,560 --> 01:23:45,920
हमारे जो अनपढ थे वो गोबर सेही लीप करके बना हुआ चूहा होता

1135
01:23:45,920 --> 01:23:50,720
था और आज देखिए पूरा जो वर्ल्ड है

1136
01:23:50,720 --> 01:23:54,800
पहले जाता है नन हो जाता है वो पहले स्टील के बर्तनों प आता एलुमिनियम

1137
01:23:54,800 --> 01:23:59,000
के बर्तनों प आता है आज पूरा पूरा विश्व मट्टी के बर्तनों की ओर अग्रसर

1138
01:23:59,000 --> 01:24:03,480
हो रहा है दोबारा हमारी जो परंपरा उन्हीं पे आ रहा

1139
01:24:03,480 --> 01:24:07,960
है जी जी जो बेहतरीन खेती गिनी जाती है ना वो

1140
01:24:07,960 --> 01:24:11,960
गोबर से ही गिनी जाती है और धन भी बन रहा है आज की डेट में गबर से

1141
01:24:11,960 --> 01:24:16,120
इधन बन रहा है वो देखो ना इधन गैस नहीं वो गैस नहीं बनती उससे

1142
01:24:16,120 --> 01:24:20,160
उसे लोग अपना ोप जलाते हैं कुछ करते हैं काफी कुछ होता है वो

1143
01:24:20,160 --> 01:24:24,680
करने वाले के ऊपर है जी हर्ष जी जय श्री राम

1144
01:24:24,680 --> 01:24:28,880
य यहां पे सीएनजी प्लांट है वहां प भी मैक्सिमम यूज होता है ये इस समय गोबर

1145
01:24:28,880 --> 01:24:33,000
यूज होता है मैक्सिमम वहां पे सीएनजी प्लांट उसके अंदर भी अच्छा

1146
01:24:33,000 --> 01:24:37,320
हा जी जी बोलिए जी जी जय

1147
01:24:37,320 --> 01:24:41,480
श्रीम जय श्री राम सेवक जी आपको बस अभी ले रहे हैं हमें

1148
01:24:41,480 --> 01:24:45,640
पता चल गया रहे थोड़ा इनको सुन ले जो जो लोग आए जी ह

1149
01:24:45,640 --> 01:24:50,040
जी ये जो बोल रहे थे ना लाइव में कि धूप से

1150
01:24:50,040 --> 01:24:51,400
पूजन करने का विधान कहां

1151
01:24:51,400 --> 01:24:55,640
है क्या है ऐसे करके तो मैंने आज ही पढ़ा था भविष्य पुराण

1152
01:24:55,640 --> 01:25:00,080
के संक्षिप्त भविष्य पुराण जो है उसमें पेज नंबर 76

1153
01:25:00,080 --> 01:25:04,080
में लिखा हुआ है सूर्यदेव का उपासना में उसमें लिखा हुआ था कि धूप

1154
01:25:04,080 --> 01:25:08,320
दीप ये सब अर्पित करे ऐसे

1155
01:25:08,320 --> 01:25:12,360
करके तो उसमें चैप्टर का नाम क्या है चैप्टर का

1156
01:25:12,360 --> 01:25:16,400
नाम क्या है चैप्टर का नाम

1157
01:25:16,400 --> 01:25:21,120
मैंने पेज देखा था मैंने पेज सूर्यदेव उपासना

1158
01:25:21,120 --> 01:25:25,520
सूर्यदेव का उपासना में हा यस ठीक है ठीक

1159
01:25:25,520 --> 01:25:29,920
अरे वो बहुत अनेकानेक जगह प्रमाण है उसमें कोई ऐसी बात नहीं है

1160
01:25:29,920 --> 01:25:34,160
चलिए अब आप अब मैं को ले लू सेवक जी को

1161
01:25:34,160 --> 01:25:40,160
सेवक जी चले गए क्या सेवक जी चले

1162
01:25:40,240 --> 01:25:45,480
गए सेवक जी चले गए अगर आप आना चाहे तो आ सकते

1163
01:25:45,480 --> 01:25:50,480
हैं और अगर नहीं आना चाहते तो कोई बात नहीं

1164
01:25:50,480 --> 01:25:54,520
है हा मैं एक बात कह रहा था आप ये जो

1165
01:25:54,520 --> 01:25:58,640
संदीप जी तत्वदर्शी क्यों कहते हैं इनको रामपाल दास जी

1166
01:25:58,640 --> 01:26:00,880
को

1167
01:26:00,880 --> 01:26:05,160
सर एक ना व आपने कहावत सुनी होगी के अंधो

1168
01:26:05,160 --> 01:26:06,480
में काना

1169
01:26:06,480 --> 01:26:10,560
राजा जी वो वो प्रॉब्लम

1170
01:26:10,560 --> 01:26:14,600
है ज्ञान जो है कुए वाला है अ इनको समुंदर में पता ही नहीं हो क्या रहा है

1171
01:26:14,600 --> 01:26:19,160
तोय उसको राजा समझ बैठे हैं इस करके इनको लगता त है

1172
01:26:19,160 --> 01:26:25,160
इससे बाहर य निकले ही नहीं तो कैसे पता लगेगा इनको सर यह बताओ ना

1173
01:26:28,600 --> 01:26:33,320
सेवक जी हमारे बीच में है शायद संभवत ये पक्ष रखने आए

1174
01:26:33,320 --> 01:26:35,880
हैं

1175
01:26:35,880 --> 01:26:40,600
और प्रदीप कुमार जी स्टेज पर नहीं है

1176
01:26:40,600 --> 01:26:44,920
सेवक जी हेलो आप हमें बताए कि जो

1177
01:26:44,920 --> 01:26:49,080
रामपाल दास नमस्कार जय श्री राम जो

1178
01:26:49,080 --> 01:26:53,200
रामपाल दास जी है यह तत्वदर्शी आप क्यों कहते हैं

1179
01:26:53,200 --> 01:26:57,600
बताइए

1180
01:26:57,600 --> 01:27:01,800
क्या मेरी आवाज आपके मेरी आवाज आ रही है जी आ रही

1181
01:27:01,800 --> 01:27:06,120
है हेलो जी आपकी आवाज आ रही है हमने पूछा

1182
01:27:06,120 --> 01:27:10,400
कि आप जो है रामपाल दास जी को किस आधार पर तत्वदर्शी की

1183
01:27:10,400 --> 01:27:15,080
संज्ञा या पद या उपाधि देते

1184
01:27:15,080 --> 01:27:17,200
हैं

1185
01:27:17,200 --> 01:27:21,200
सर ऐसा है कि जो हमें संत रामपाल जी

1186
01:27:21,200 --> 01:27:25,680
महाराज ने जो ज्ञान दिया है

1187
01:27:25,680 --> 01:27:29,800
तो उनका यही वो सत्संग में यही बताते हैं कि जो

1188
01:27:29,800 --> 01:27:34,680
शास्त्रों के आधार पर जो ज्ञान देते हैं जो शास्त्रों का जो निष्कर्ष है

1189
01:27:34,680 --> 01:27:38,920
उसको सामने लाते हैं उस निष्कर्ष के आधार परही

1190
01:27:38,920 --> 01:27:44,000
संत रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी संत हैब उसम कने

1191
01:27:44,000 --> 01:27:48,400
मलकी बात समझ गया जी जी

1192
01:27:48,400 --> 01:27:52,720
उसमें एक मुख्य श्लोक आता है श्रीमद् भगवत

1193
01:27:52,720 --> 01:27:56,760
गीता जी में बोलिए कौन सा अध्याय

1194
01:27:56,760 --> 01:28:00,920
15 का शलोक एक नहीं अध्याय 15 से पहले

1195
01:28:00,920 --> 01:28:05,440
तत्वदर्शी जहा कहा गया वो तो बोल दो

1196
01:28:05,440 --> 01:28:10,440
434 15 एक पर तो आएंगे 44 तो बोल

1197
01:28:10,440 --> 01:28:13,400
दे ही क लो

1198
01:28:13,400 --> 01:28:17,600
ठीक है खोल लेता इसम आप का पक्ष कमजोर हो जाएगा अगर सीधे 15

1199
01:28:17,600 --> 01:28:21,840
प आएंगे तो मैं आपके लिए बोल रहा हूं

1200
01:28:21,840 --> 01:28:25,160
प बोलना चाहिए

1201
01:28:25,160 --> 01:28:29,520
खोलू 4 34 15 एक खोलू बताइए 15

1202
01:28:29,520 --> 01:28:35,520
खोल ठीक है 15 एक

1203
01:29:02,520 --> 01:29:04,840
15 एक

1204
01:29:04,840 --> 01:29:08,920
है आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल

1205
01:29:08,920 --> 01:29:13,400
वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस

1206
01:29:13,400 --> 01:29:17,560
संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा

1207
01:29:17,560 --> 01:29:21,640
वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष

1208
01:29:21,640 --> 01:29:24,400
को जो पुरुष मूल सहित

1209
01:29:24,400 --> 01:29:28,440
से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है

1210
01:29:28,440 --> 01:29:31,880
इसमें तत्वदर्शी कहा

1211
01:29:31,880 --> 01:29:35,960
है तो जो जो जानकारी इसमें दी

1212
01:29:35,960 --> 01:29:40,280
गई है 15 के अध भाई साहब इसम तत्वदर्शी

1213
01:29:40,280 --> 01:29:43,120
कहीं नहीं

1214
01:29:43,120 --> 01:29:47,160
आया तत्वदर्शी का यही अर्थ है जो भी जो

1215
01:29:47,160 --> 01:29:51,480
गुण रहस्य को जो उजागर कर कहां लिखा है भाई साहब

1216
01:29:51,480 --> 01:29:55,680
में छपे हुए गुट रहस का जो उजागर कर हम लोग यहां पर अगर

1217
01:29:55,680 --> 01:30:01,680
हमें एक दूसरे की बात पर यूं ही विश्वास कर लेना होता तो आजय नौबत आती

1218
01:30:01,760 --> 01:30:05,760
क्या अगर हमें ऐसे मुझ वाली बातो से विश्वास कर लेना होता

1219
01:30:05,760 --> 01:30:09,840
तो आज हम और आप य आमने सामने इस तरह से होते क्या नहीं

1220
01:30:09,840 --> 01:30:13,960
आप कहने का मतलब क्या कहना क्या चाह रहे हो आप कहना क्या ये है कि

1221
01:30:13,960 --> 01:30:18,560
शास्त्रों के आधार पर तत्वदर्शी बिल्कुल फिक्स

1222
01:30:18,560 --> 01:30:24,560
तत्वदर्शी शास्त्रों के आधार पर आपने रामपाल दास जी को कैसे कहा

1223
01:30:25,560 --> 01:30:29,720
तो जो शास्त्रों का जो ज्ञान है गुण रहस्य उसको उजागर जो करता है

1224
01:30:29,720 --> 01:30:33,920
वही संत होता है कि नहीं होता शास्त्र के गुण रहस्य कौन समझाएगा

1225
01:30:33,920 --> 01:30:36,040
परिभाषा

1226
01:30:36,040 --> 01:30:40,080
न जानने वाले एक बात क आप ये कहो वो

1227
01:30:40,080 --> 01:30:44,280
शास्त्रों को जानने वाले हैं तत्वदर्शी शब्द कैसे आ रहा है समझिए

1228
01:30:44,280 --> 01:30:49,000
मेरी बात को तत्वदर्शी शब्द की बात कर रहे हम

1229
01:30:49,000 --> 01:30:53,120
लोग तत्वदर्शी यही है ना जो शास्त्रों का जो

1230
01:30:53,120 --> 01:30:57,240
जो ज्ञान जो तत्व है जो उसको उजागर कर उसको सामने रख भाई

1231
01:30:57,240 --> 01:31:01,280
साहब वेद के तात्पर्य को जानने वाला है यहा ये लिखा है

1232
01:31:01,280 --> 01:31:05,600
वेद के तात्पर्य को जानने वाला तो पहली बात तो ये है अगर इसके आधार पर आप उन्ह तत्वदर्शी

1233
01:31:05,600 --> 01:31:09,800
कह रहे हो तो तत्वदर्शी के बजाय आपको कहना चाहिए वो वेद के तात्पर्य को जानने

1234
01:31:09,800 --> 01:31:13,840
वाला है तो वेद का अर्थ दूसरा क्या होता है ज्ञान भी तो होता है

1235
01:31:13,840 --> 01:31:17,920
ना जो जो संपूर्ण ज्ञान का जानकार होता है ज्ञानी होता वही तो

1236
01:31:17,920 --> 01:31:22,120
वेद अगर आप तत्वदर्शी के संबंध में

1237
01:31:22,120 --> 01:31:26,160
आप एक बार मुझे बताओ ताप क्या होता है बता दे

1238
01:31:26,160 --> 01:31:30,280
रहा हूं बता दे रहा ठीक है अभी बताता हूं अगर

1239
01:31:30,280 --> 01:31:34,440
आप तत्वदर्शी के लिए शास्त्रोक्त बात नहीं लेते

1240
01:31:34,440 --> 01:31:39,120
हैं तो उसमें प्रॉब्लम य आएगी कि तत्व तो

1241
01:31:39,120 --> 01:31:41,440
तेजाब भी है

1242
01:31:41,440 --> 01:31:45,600
तत्व तो दूध भी है दूध में भी तत्व

1243
01:31:45,600 --> 01:31:50,000
है बहुत सारे तत्व है पानी को भी तत्व कहा गया है विज्ञान

1244
01:31:50,000 --> 01:31:54,280
की भाषा में ठीक है तो अगर तत्वदर्शी का शाब्दिक

1245
01:31:54,280 --> 01:31:58,480
वो ढांचा निकाला जाए तो वह निकलेगा तत्व को देख सकने वाला

1246
01:31:58,480 --> 01:32:02,760
तत्वदर्शी यानी पानी को जो देख लिया वो भी तत्वदर्शी है

1247
01:32:02,760 --> 01:32:07,880
जिसने दूध को दे लिया व भी त है मेरी बात

1248
01:32:07,880 --> 01:32:12,840
सुनि मेरी बात पूरी हो जाने द पूरी हो जाने दीजिए पूछूंगा आपसे

1249
01:32:12,840 --> 01:32:16,880
तो जब तक हम शास्त्र का आधार नहीं लेंगे कि यहां पर किस

1250
01:32:16,880 --> 01:32:21,120
तत्वदर्शी की बात हो रही है तो कोई भी जो पानी को देख लेगा वो भी तत्वदर्शी

1251
01:32:21,120 --> 01:32:25,480
सिद्ध हो जाएगा तो य पर कहीं नहीं इस जो लोक

1252
01:32:25,480 --> 01:32:29,800
आपने बताया 15.1 उसमें नहीं लिखा है कि संसार रूपी

1253
01:32:29,800 --> 01:32:34,280
वृक्ष की उल्टी उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर देने वाला तत्वदर्शी है

1254
01:32:34,280 --> 01:32:40,280
यहां लिखा है वेद को जानने वाला और तत्वदर्शी की बात आई

1255
01:32:41,320 --> 01:32:45,320
है तत्वदर्शी की बात आई है चौथा अध्याय 34

1256
01:32:45,320 --> 01:32:49,680
वा श्लोक बहुत फेमस है आपको कैसे नहीं पता व मैं नहीं जान पा रहा हूं पर मैं बता दे रहा हूं आपको

1257
01:32:49,680 --> 01:32:54,040
आपके य से इसको ही कोट किया जाता है सदा रामपाल

1258
01:32:54,040 --> 01:32:58,280
जी की प्रमाणिकता के लिए आपकी तरफ से

1259
01:32:58,280 --> 01:33:02,280
ज्यादातर सबसे पहले यही श्लोक कोट किया जाता है

1260
01:33:02,280 --> 01:33:06,720
उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर

1261
01:33:06,720 --> 01:33:10,880
समझ 434 में लिखा है तत्वदर्शी तो

1262
01:33:10,880 --> 01:33:14,920
एक बार मैं आपको रोकना चाहता हूं इसमें क्या

1263
01:33:14,920 --> 01:33:19,080
उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर के मन में उमड़ने

1264
01:33:19,080 --> 01:33:23,200
वाले जितने भी आपके आपके मन में उमड़ने वाले जितने भी प्रश्न

1265
01:33:23,200 --> 01:33:27,360
है मैं उनका पूर्व पक्ष के रूप में सबका जवाब दे दूंगा बिना आपसे

1266
01:33:27,360 --> 01:33:31,360
पूछे आप मुझे समय तो दीजिए आप जितने प्रश्न पूछने वाले

1267
01:33:31,360 --> 01:33:36,080
हैं मैं सबका जवाब दे रहा हूं आपको आप समय दीजिए मुझे बोलिए हर प्रश्न का जवाब दे रहा हूं

1268
01:33:36,080 --> 01:33:40,120
हां तो यहां पर इन्होंने कहा कि तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास

1269
01:33:40,120 --> 01:33:44,160
जाकर समझ भगवत गीता 434 उसके

1270
01:33:44,160 --> 01:33:48,960
बाद 435 में उन्होंने कहा कि वो कौन सा ज्ञान है जिसको

1271
01:33:48,960 --> 01:33:53,000
जो तत्व ज्ञान कहा गया है और तत्व ज्ञान को जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया

1272
01:33:53,000 --> 01:33:56,640
तो आगे कह रहे हैं मुझ सच्चिदानंद

1273
01:33:56,640 --> 01:33:59,800
परमात्मा में देखने वाला ज्ञान यह लिखा है

1274
01:33:59,800 --> 01:34:04,080
जिस ज्ञान के द्वारा तू संपूर्ण भूतों को नि शेष

1275
01:34:04,080 --> 01:34:08,200
भाव से पहले अपने में और फिर मुझ सच्चिदानंद

1276
01:34:08,200 --> 01:34:11,280
घन परमात्मा में देखेगा तो

1277
01:34:11,280 --> 01:34:15,720
यहां पर भगवान ने कहा कि तू तत्वदर्शी के पास जाकर के ज्ञान ले

1278
01:34:15,720 --> 01:34:20,320
वह ज्ञान जो मुझे परमात्मा मुझ में पूरी सृष्टि को दिखाएगा

1279
01:34:20,320 --> 01:34:24,600
सब लोगों में सृष्टि को दिखाएगा मतलब श्री कृष्ण भगवान परमात्मा

1280
01:34:24,600 --> 01:34:28,680
को देखना परमात्मा को श्री कृष्ण में देखना श्री कृष्ण भगवान को

1281
01:34:28,680 --> 01:34:32,840
परमात्मा समझना यह तत्व ज्ञान है और इस तत्व ज्ञान को जानने वाला तत्वदर्शी

1282
01:34:32,840 --> 01:34:37,600
है यह 435 से निकला अब आ जाते हैं आपके 15 एक

1283
01:34:37,600 --> 01:34:41,760
प मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब दे दूंगा जो भी मन में आ रहे मैं जानता

1284
01:34:41,760 --> 01:34:47,760
हूं कौन ककन से आ रहे मैं उनका भी जवाब दूंगा आते आपके

1285
01:34:47,760 --> 01:34:52,040
15 अब भाई साहब देखिए सबसे पहली बात है कि आपने कहा कि 15

1286
01:34:52,040 --> 01:34:56,080
एक में यह कहा गया है कि 15 एक से सिद्ध होता

1287
01:34:56,080 --> 01:35:00,560
पहली बात तो यह है कि 15 एक में लिखा तत्वदर्शी है

1288
01:35:00,560 --> 01:35:04,600
उल्टे वृक्ष में व्याख्या करने उल्टे वक्ष के रूप में व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी

1289
01:35:04,600 --> 01:35:09,200
यह नहीं लिखा है वेदों को जानने वाला लिखा है ठीक है

1290
01:35:09,200 --> 01:35:13,880
वेदों को जानने वाला

1291
01:35:13,880 --> 01:35:18,200
अच्छा भाई साब मैं जानता हूं आप क्या पूछेंगे मैं बता तो रहा हूं मुझे बोलने

1292
01:35:18,200 --> 01:35:22,840
मैं सारे प्रश्नों का जवाब दूंगा मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब देगा

1293
01:35:22,840 --> 01:35:27,760
वेदों को ने वाला किसे कहा गया है देवी भागवत में मैं आपको बता देता हूं

1294
01:35:27,760 --> 01:35:33,760
ठीक

1295
01:35:36,600 --> 01:35:40,640
है वेदों को जानने वाला देवी भागवत में किसे कहा गया है वो

1296
01:35:40,640 --> 01:35:46,640
मैं आपको बता देता हूं

1297
01:35:52,270 --> 01:35:58,270
[संगीत]

1298
01:36:27,360 --> 01:36:31,520
श्रीमद् भगवत गीता मैं अजन्मा अविनाशी होते

1299
01:36:31,520 --> 01:36:35,520
हुए भी समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अपने

1300
01:36:35,520 --> 01:36:39,640
अधीन करके योग माया से प्रकट होता हूं चार छ श्रीमद् भगवत

1301
01:36:39,640 --> 01:36:43,720
गीता 10 ती जो मुझको अजन्मा अर्थात वास्तव में जन्म रहित

1302
01:36:43,720 --> 01:36:47,920
अनादि और लोगों का महान ईश्वर तत्व से जानता है

1303
01:36:47,920 --> 01:36:52,000
तत्व से वो मुक्त हो जाता है जो मुझे तत्व से जान लेता

1304
01:36:52,000 --> 01:36:56,120
है वो मुक्त हो जाता है श्रीमद भगवत गीता 10 तीन यह है वो तत्व ज्ञान

1305
01:36:56,120 --> 01:37:00,720
जिसको जानने वाला तत्वदर्शी कहलाएगा ठीक है और

1306
01:37:00,720 --> 01:37:05,040
वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है कि

1307
01:37:05,040 --> 01:37:09,160
जो मां भगवती को परम ब्रह्म परम ब्रह्म स्वरूपा समझता

1308
01:37:09,160 --> 01:37:13,600
है वो तत्व वेदों को जानने वाला कहलाता है

1309
01:37:13,600 --> 01:37:17,600
जहां पर वो वाली बात आई है ना आपकी कि सतयुग

1310
01:37:17,600 --> 01:37:21,880
के राक्षस जो है ब्राह्मण है कलयुग के देवी

1311
01:37:21,880 --> 01:37:25,880
भागवत में वहीं पर बात लिखी है वही यह बात

1312
01:37:25,880 --> 01:37:30,480
लिखी है देवी मां को परम ब्रह्म समझने वाला वेदों को जानने वाला है

1313
01:37:30,480 --> 01:37:35,240
पहली बात ये हो गई अब एक बात यह और आती है

1314
01:37:35,240 --> 01:37:39,480
कि आप अगर यह कहो कि उल्टे वृक्ष के रूप में संसार

1315
01:37:39,480 --> 01:37:42,400
की जो व्याख्या कर दे तो अभी संदीप बत्रा जी भी कर देते हैं

1316
01:37:42,400 --> 01:37:46,480
क्या ये भी तत्वदर्शी हो जाएंगे अभी

1317
01:37:46,480 --> 01:37:50,720
जो मयंक कुमार दि ये भी कर देंगे या ये भी हो जाएंगे एक बात

1318
01:37:50,720 --> 01:37:54,920
दूसरी बात एक बात य आपकी तरफ से क्लेम

1319
01:37:54,920 --> 01:38:00,760
किया जाता है कि जो वेदों में संपूर्ण ज्ञान नहीं

1320
01:38:00,760 --> 01:38:04,960
है वेदों में संपूर्ण ज्ञान है ही

1321
01:38:04,960 --> 01:38:09,880
नहीं है क्या आप बताओ आपके अनुसार

1322
01:38:09,880 --> 01:38:14,240
वेदों में हमारे गुरु जी यह बताते हैं वेदों में ज्ञान

1323
01:38:14,240 --> 01:38:18,440
तो है उसम अधूरा ज्ञान है संपूर्ण अधूरा

1324
01:38:18,440 --> 01:38:22,760
वही वही वही कह रहा हूं तो यहां से भी वो तत्व

1325
01:38:22,760 --> 01:38:27,120
ज्ञानी नहीं स हुए वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी सिद्ध हो जाएगा अब आप

1326
01:38:27,120 --> 01:38:31,360
तत्व ज्ञानी कैसे स तत्वदर्शी कैसे कहेंगे जब जब वेदों में अधूरा ज्ञान

1327
01:38:31,360 --> 01:38:35,560
है तो उसको जानने वाला तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हुआ जब वेदों को जानने

1328
01:38:35,560 --> 01:38:39,760
वाला मां भगवती को ब्रह्म मानने वाला परम ब्रह्म मानने वाला परमात्मा मानने

1329
01:38:39,760 --> 01:38:43,800
वाला है तो मां भगवती को नॉर्मल

1330
01:38:43,800 --> 01:38:48,040
सामान्य मानने वाले एक प्र देवी मात्र मानने वाले देवी भी नहीं भले बड़ा अपमान

1331
01:38:48,040 --> 01:38:52,080
किया इन लोगों ने वो वेदों को जानने वाला कैसे सिद्ध

1332
01:38:52,080 --> 01:38:56,160
हो जाएगा जब तत्वदर्शी कहा जा रहा है तत्व से जानने वाला

1333
01:38:56,160 --> 01:38:57,400
श्री कृष्ण को श्री कृष्ण

1334
01:38:57,400 --> 01:39:01,520
को परमात्मा मानने वाला कहा जा रहा है तत्व ज्ञानी तो फिर श्री कृष्ण को

1335
01:39:01,520 --> 01:39:05,560
परमात्मा ना मानने वाला तत्वदर्शी कैसे सिद्ध हो जाएगा इतने

1336
01:39:05,560 --> 01:39:09,680
सारे प्रश्न खड़े हो जाते हैं बताइए पहली बात तो श्री

1337
01:39:09,680 --> 01:39:13,800
कृष्ण को भगवान क् हम श्री कृष्ण को विष्णु

1338
01:39:13,800 --> 01:39:18,240
जी को जो त्रिदेव है उनको भगवान मानते हैं ये आपकी गलत धारणा है

1339
01:39:18,240 --> 01:39:22,520
आप कह रहे हो हम उसको भगवान नहीं मानते ये अपने

1340
01:39:22,520 --> 01:39:26,920
लोक के ब्र परम ब्रह्म परमात्मा सच्चिदानंद

1341
01:39:26,920 --> 01:39:30,360
स्वरूप

1342
01:39:30,360 --> 01:39:34,560
परमेश्वर अब आपने अध्याय चार अध्याय चार के श्लोक

1343
01:39:34,560 --> 01:39:39,280
34 का जो वर्णन किया था आपने अभी उसमें लिखा था जो

1344
01:39:39,280 --> 01:39:43,280
आपको पढ़कर सुना रहा हूं जो जो आपने सुना है उस ज्ञान

1345
01:39:43,280 --> 01:39:45,920
को त तत्वदर्शी ज्ञानियों के

1346
01:39:45,920 --> 01:39:50,840
पास जाकर समझ उनको भली बाती नवत प्रणाम करने से उनकी सेवा करने से और कपट

1347
01:39:50,840 --> 01:39:55,000
छोड़कर सरता पूर्व प्रश्न करने से वे पर मात्म तत्व को भली

1348
01:39:55,000 --> 01:39:59,360
भाति जानने वाले ज्ञानी महात्मा त उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे

1349
01:39:59,360 --> 01:39:59,860
यहां पर

1350
01:39:59,760 --> 01:40:04,000
तत्व आपने यहां पर तत्व का अर्थ निष्कर्ष

1351
01:40:04,000 --> 01:40:08,200
भी होता है जैसे कोई जो ज्ञान होता है कोई प्राणों

1352
01:40:08,200 --> 01:40:12,920
का ज्ञान है या उसका निष्कर्ष भी तत्वज्ञान कहलाता है कोई भी सता

1353
01:40:12,920 --> 01:40:17,120
है तत्व ज्ञान कहलाता है ना और इस तत्व ज्ञान के लिए आप कोट करते

1354
01:40:17,120 --> 01:40:21,160
हो 15 एक के वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी है

1355
01:40:21,160 --> 01:40:25,560
हालाकि वहा लिखा नहीं है वेद को जानने आप कहते

1356
01:40:25,560 --> 01:40:29,720
होय को जानने वाला देने

1357
01:40:29,720 --> 01:40:33,840
वाले नहीं है हर जगह नहीं लिखा होगा त ह शलोक

1358
01:40:33,840 --> 01:40:38,600
में नहीं लिखा होगा होगा

1359
01:40:38,600 --> 01:40:42,920
यह कहा लिखा जगह नहीं लिखा होगा

1360
01:40:42,920 --> 01:40:48,920
अगर तर्शी की बा

1361
01:40:49,440 --> 01:40:53,800
में उसम बता किसका

1362
01:40:53,800 --> 01:40:57,840
किसका गीता के हर श्लोक में तत्वदर्शी का जो आप कह रहे हो

1363
01:40:57,840 --> 01:41:02,040
लिखा होगा हर श्लोक में लिखा हुआ है तत्वदर्शी भाई साहब

1364
01:41:02,040 --> 01:41:06,920
मैंने तो आपको बता दिया ना उसके अगले में देखिए तत्व से जानने वाला कौन है

1365
01:41:06,920 --> 01:41:11,760
भगवान ने 10 तीन में बता दिया तत्व से मुझे जानने वाला ही तत्वदर्शी है बता तो दिया

1366
01:41:11,760 --> 01:41:16,120
आप जब नई व्याख्या ला रहे तो आपको बताना पड़ेगा कि रामपाल दास जी कहां से तत्वदर्शी

1367
01:41:16,120 --> 01:41:20,200
सिद्ध हो रहे हैं तो अध्याय जो 15 का

1368
01:41:20,200 --> 01:41:24,320
लोक एक मैंने प्रश्न क्यों किया है मैंने प्रश्न क्यों किया

1369
01:41:24,320 --> 01:41:28,320
है क्योंकि आपके ही अनुसार जो वेद है वो तत्व

1370
01:41:28,320 --> 01:41:32,320
ज्ञान नहीं देते हैं आपके अनुसार वेद अधूरे हैं

1371
01:41:32,320 --> 01:41:36,400
अधूरा ज्ञान है उनमें आपके अनुसार वो तत्व

1372
01:41:36,400 --> 01:41:40,520
तत्व ज्ञान देने वाले नहीं है तो फिर जब गीता में यह लिखा है कि

1373
01:41:40,520 --> 01:41:44,640
15 एक में कि भैया जो उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा अगर मान भी

1374
01:41:44,640 --> 01:41:49,000
ले कि नहीं उल्टे वृक्ष की व्याख्या तो केवल रामपाल दास जी ने ही की है

1375
01:41:49,000 --> 01:41:53,080
जबकि बहुतों ने की है मगर मान ले कि केवल उन्हीं ने की है तब भी वो वेदों

1376
01:41:53,080 --> 01:41:57,200
को को जानने वाले के रूप में अधूरे ज्ञान को जानने वाले के रूप में शापित हो रहे

1377
01:41:57,200 --> 01:42:01,360
हैं अधूरा ज्ञान जानते क्योंकि उन्होंने वेदों को जानने वाले बन गए उल्टे वृक्ष की व्याख्या

1378
01:42:01,360 --> 01:42:04,800
करने के रूप में तो तत्वदर्शी जो आपने कहा तत्व का मतलब निष्कर्ष

1379
01:42:04,800 --> 01:42:10,000
होता है तो वो निष्कर्ष वाले कहां से हो

1380
01:42:10,000 --> 01:42:15,200
गए अध्याय 15 के लोक एक बार

1381
01:42:15,200 --> 01:42:19,320
सुनिए उसम क्या लिखा है आप आप थोड़ा सा एक काम

1382
01:42:19,320 --> 01:42:25,320
करिए कैप हटा दीजिए क्योंकि आपका चेहरा बिल्कुल अंधेरे में है

1383
01:42:26,400 --> 01:42:32,400
अब दिख रहा चेहरा दिख रहा व समझ में नहीं आ रहा चेहरा

1384
01:42:33,320 --> 01:42:37,480
आपका अब देखिए सर इसमें आदि पुरुष परमेश्वर

1385
01:42:37,480 --> 01:42:41,840
मूल वाले ब्रह्मा रूप मुख

1386
01:42:41,840 --> 01:42:46,920
भया भैया आपका चित्र रुक गया है

1387
01:42:46,920 --> 01:42:52,920
हेलो जी

1388
01:43:08,520 --> 01:43:12,960
तब तक भैया वो प्रमाण दिखा दीजिए जो व में भेजे आपको

1389
01:43:12,960 --> 01:43:17,240
ट में मुझे नहीं मिले वो प्रमाण आप

1390
01:43:17,240 --> 01:43:21,440
आप अभी कर दीजिए जी संदीप

1391
01:43:21,440 --> 01:43:25,600
जी बोले सर यह जो तत्व ज्ञान की बात कर रहे

1392
01:43:25,600 --> 01:43:29,640
हैं ना यह गीता जी के अंदर जो तत्व शब्द आया है ना व इनको यही नहीं पता

1393
01:43:29,640 --> 01:43:33,520
कि व आत्मा के लिए आया हुआ

1394
01:43:33,520 --> 01:43:37,640
हैय आ गया भविष्य पुराण भविष्य पुराण का श्लोक देख

1395
01:43:37,640 --> 01:43:42,000
लीजिए आ गया जी जी उसम तत्व ज्ञानी

1396
01:43:42,000 --> 01:43:46,120
तत्व ज्ञानी उसको बोलते हैं जो आत्मा द्वारा परम तत्व का आपको दर्शन करवा

1397
01:43:46,120 --> 01:43:50,120
दे जो चार ब प कह रहे हो बिल्कुल सही बात हैय वो परफेक्ट बात

1398
01:43:50,120 --> 01:43:54,280
है पर इनको पले पहले तत्व को समझना पता नहीं किस चीज को समझ रहे

1399
01:43:54,280 --> 01:43:58,800
हैं इनको तत्व देख सबसे जरूरी

1400
01:43:58,800 --> 01:44:03,080
सबसे जरूरी बात ये है कि आप वेद

1401
01:44:03,080 --> 01:44:07,400
और गीता के द्वारा किसी को तत्व ज्ञानी सिद्ध जब कर पाओगे

1402
01:44:07,400 --> 01:44:11,560
जब आप यह मानोगे कि वेद और गीता के द्वारा तत्व ज्ञान मिलता है आप तो खुद

1403
01:44:11,560 --> 01:44:16,200
ही कह रहे व अधूरे है सर वो भी

1404
01:44:16,200 --> 01:44:20,400
ये भी पता होना चाहिए प तत्व का अर्थ क्या है पूरी गीता जी में तत्व का अर्थ तो आत्मा

1405
01:44:20,400 --> 01:44:23,520
ही तो हुआ आत्मा आत्मा किसका अंश है श्री

1406
01:44:23,520 --> 01:44:27,600
हरि विष्णु जी श्री कृष्ण भगवान बारबार कह रहे मुझे तत्व से जानना ही तत्व

1407
01:44:27,600 --> 01:44:32,440
ज्ञान है बारबार कह रहे हैं कान पकड़ोगे

1408
01:44:32,440 --> 01:44:36,720
एक कावत नहीं है कान ऐसे पकड़ लो ऐसे पकड़ लो मैं कह रहा हूं कितनी जगह से पकड़ोगे

1409
01:44:36,720 --> 01:44:41,080
यहां से पकड़ लो यहां से पकड़ लो यहां से पकड़ लो इनकी बात सिद्धि नहीं होगी

1410
01:44:41,080 --> 01:44:45,120
सबसे पहली बात जब च 34 को एक क्रम में लेते

1411
01:44:45,120 --> 01:44:49,160
हैं चार 34 को जब हम 15 एक से जोड़ते हैं तो चार चौ में

1412
01:44:49,160 --> 01:44:53,360
कहा गया तत्वदर्शी 15 एक में कहा जा रहा है वेदों को जानने वाला

1413
01:44:53,360 --> 01:44:57,440
वेदों को जानने वाला भागवत में कहा जा रहा है कि वेदों को जानना विष्णु को जानना

1414
01:44:57,440 --> 01:45:01,440
वेद किसके परायण विष्णु के परायण श्री हरि के परायण और

1415
01:45:01,440 --> 01:45:05,520
ब्र और ब्र और ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति एक ही है तो वहा देवी

1416
01:45:05,520 --> 01:45:09,840
को परम ब्रह्म के रूप में देखना तत्व ज्ञान है वेदों को जानने वाला है अगर वेदों

1417
01:45:09,840 --> 01:45:14,240
को जानना तत्व ज्ञान है तो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को परमात्मा

1418
01:45:14,240 --> 01:45:18,320
मानने वाला तत्व ज्ञानी है तो यहां

1419
01:45:18,320 --> 01:45:22,320
से भी खंडित हो गए तीसरी बात जब ये खुद कह रहे हैं कि वेद

1420
01:45:22,320 --> 01:45:26,440
और गीता में तत्व ज्ञान है ही नहीं तो वेदों को जानने वाला तत्व ज्ञानी कहां

1421
01:45:26,440 --> 01:45:30,640
से हो गया जी जी कहा कहा से कहां

1422
01:45:30,640 --> 01:45:35,000
से इनको किस किस प्रकार से चोट पहुंचेगी सर

1423
01:45:35,000 --> 01:45:39,120
जब तक ये तत्व का अथ आत्मा नहीं समझ तब तक समझ नहीं आना

1424
01:45:39,120 --> 01:45:43,320
बिल्कुल और वो जो चौथा पॉइंट है कि अगर इन्हीं ग्रंथों से हम देखें तो तत्व

1425
01:45:43,320 --> 01:45:47,720
ज्ञानी तो श्री कृष्ण को भगवान मानने वाला श्री कृष्ण को परम परमेश्वर

1426
01:45:47,720 --> 01:45:51,760
मानने वाला तत्व ज्ञानी सिद्ध हो रहा है नहीं तो तुम अपनी व डेफिनेशन लाओ

1427
01:45:51,760 --> 01:45:56,000
अब इस डेफिनेशन लिए इनको वेद और गीता से बाहर जाना

1428
01:45:56,000 --> 01:46:00,120
पड़ेगा जी जी बाहर जाना पड़ेगा तब भी हो सकता है वो

1429
01:46:00,120 --> 01:46:04,320
तत्वदर्शी शब्द ना आ जाए नहीं आप हो सकता क्योंकि जो उनकी भाषा

1430
01:46:04,320 --> 01:46:08,400
शैली है जिसमें कबीर सागर और गरीब दास जी ने लिखा है वो ये जो शुद्ध हिंदी

1431
01:46:08,400 --> 01:46:12,720
वाली भाषा शैली तो है नहीं वो तो देसी भाषाए है है ना रस वाली भाषा

1432
01:46:12,720 --> 01:46:17,080
है तो उसम वो तत्वदर्शी मिलना बहुत मुश्किल है तो कहां

1433
01:46:17,080 --> 01:46:21,520
कहां से आ गए

1434
01:46:21,520 --> 01:46:26,000
क्या नहीं आय

1435
01:46:26,000 --> 01:46:30,000
रामपाल जब इनके अनुसार शास्त्र अधूरे हैं वेद ही

1436
01:46:30,000 --> 01:46:34,160
पूरे नहीं है फिर भी ऐसे क्यों बोलते कि हम शास्त्रों के अनुसार भक्ति देते

1437
01:46:34,160 --> 01:46:38,240
हैं वेदों के अनुसार भक्ति देते हैं इसलिए होता है जैसे कुछ

1438
01:46:38,240 --> 01:46:42,440
पेपर आ जाते क कई बच्चे कहते बाहर से पेपर आ गया अब जब पेपर की तैयारी

1439
01:46:42,440 --> 01:46:46,440
नहीं कर तो बाहर से ही आएगा पेपर वो हिसाब है इनका अब इन एक

1440
01:46:46,440 --> 01:46:52,440
एक पॉइंट प बात करते हैं भैया बिना चहरे के नहीं लेते

1441
01:46:53,080 --> 01:46:56,440
भ

1442
01:46:56,440 --> 01:47:00,480
आ बिना चेहरे के ना आए यहां से इनको कि आउट कर दो

1443
01:47:00,480 --> 01:47:05,240
कुछ बदमाशी करने आए हो सकता है हा हा जीी हा सही क

1444
01:47:05,240 --> 01:47:09,280
रहे तत्व का अर्थ पूछो तत्व का अर्थ रा गीता जी के हिसाब से क्या है

1445
01:47:09,280 --> 01:47:13,520
सिर्फ तत्व का पूछो वही पर ये हथियार गर देंगे इनको

1446
01:47:13,520 --> 01:47:18,760
तत्व का अर्थ नहीं पता है ह ये कुछ और ही मान बैठे

1447
01:47:18,760 --> 01:47:22,880
हैं जी फुल स्क्रीन का यह जो प्रमाण है थोड़ा देख लीजिए

1448
01:47:22,880 --> 01:47:26,880
विश् पुराण में 35 वा अध्याय है और क्या क्या लिखा है

1449
01:47:26,880 --> 01:47:32,880
जरा देख लेते

1450
01:47:33,480 --> 01:47:37,760
हैं सूर्य किरण मतलब ऊपर जाइए ऊपर सूर्य

1451
01:47:37,760 --> 01:47:42,160
किरण के समूह में पिंडी रूपी में पिंडी रूप में गो

1452
01:47:42,160 --> 01:47:46,480
के मूत्र में साक्षात गंगा व गोबर में यमुना जी व्यवस्थित

1453
01:47:46,480 --> 01:47:51,160
है तभी ये सब प्रमाण है आप देख सकते हैं

1454
01:47:51,160 --> 01:47:54,640
जी जी जी

1455
01:47:54,640 --> 01:47:59,520
ठीक है आज बात हो रही है तत्वदर्शी में तो आज इस तत्वदर्शी शब्द

1456
01:47:59,520 --> 01:48:04,160
की हम पूरी मीमांसा कर लेंगे जी जी

1457
01:48:04,160 --> 01:48:08,560
26 वा अध्याय 27 वा अध्याय है और 35

1458
01:48:08,560 --> 01:48:12,960
वा अध्याय 28 वा अध्याय है 29 वा अध्याय है

1459
01:48:12,960 --> 01:48:17,280
जी जी या शायद य अध्याय नहीं है श्लोक क्रमांक है ठीक है

1460
01:48:17,280 --> 01:48:21,080
इसलिए बाद में देख लिया

1461
01:48:21,080 --> 01:48:25,080
जाएगा बा करते लोग टी आर पहाड़ी जी को ले

1462
01:48:25,080 --> 01:48:29,200
लेते हैं तत्वदर्शी के मामले में इनकी भी कुछ ज गहन अध्ययन होगा इनका

1463
01:48:29,200 --> 01:48:33,240
एड टू स्टेज और हम ले लेते हैं

1464
01:48:33,240 --> 01:48:37,400
वो रामपाल दस जी कहां गए इनको देखो मात्रा नहीं लगाना

1465
01:48:37,400 --> 01:48:41,520
आता है रामपाल 10 लिख रहे हैं देख लो भाई या आर पहाड़ी

1466
01:48:41,520 --> 01:48:45,600
भैया कल उनके डिबेट में जाने की कोशिश कर रहे थे बोल भी रहे थे मुझे ऐड

1467
01:48:45,600 --> 01:48:49,200
करो प्रमा देता लेकिन वो ड नहीं कर रहे थे

1468
01:48:49,200 --> 01:48:53,400
अरे रामपाल दस जी अपनी वो मात्रा तो सही लगा लीजिए रामपाल 10

1469
01:48:53,400 --> 01:48:57,560
लिखा है देखिए यह लोग है जो रामपाल दास जी का पक्ष कमजोर करते हैं

1470
01:48:57,560 --> 01:49:01,560
आकर रामपाल 10 वाह नहीं सर इसने सही

1471
01:49:01,560 --> 01:49:05,600
लिखा है 10 क्योंकि वो भी तो कवि का कबीर कर देते

1472
01:49:05,600 --> 01:49:11,040
हैं तो ये भी 10 का दास कर देंगे ना अच्छा दास दस का

1473
01:49:11,040 --> 01:49:16,440
दास यह गोडाउन मेंही प्रॉब्लम है सर गोडाउन में प्रॉब्लम है शोरूम ऐसा ही

1474
01:49:16,440 --> 01:49:20,600
निकलेगा चलिए कोई नहीं हां भाई

1475
01:49:20,600 --> 01:49:24,720
स्पिरिचुअल नॉलेज भैया जय श्री राम जय

1476
01:49:24,720 --> 01:49:28,760
श्री राम

1477
01:49:28,760 --> 01:49:33,080
जी चर्चा करो आप लोग हम सुन रहे हैं

1478
01:49:33,080 --> 01:49:37,120
आप कहां से हैं क्या परिचय आप क्यों आए हैं स्टेज पर क्यों जुड़े

1479
01:49:37,120 --> 01:49:41,720
हैं प ने निकले

1480
01:49:41,720 --> 01:49:47,720
हो नहीं नहीं सुनने के लिए आए सव

1481
01:49:47,800 --> 01:49:51,840
सरत नहीं करते क्या हमारे वीडियोस में लाइव में आप कमेंट नहीं करते

1482
01:49:51,840 --> 01:49:55,840
हैं क्या करते हैं नहीं पता

1483
01:49:55,840 --> 01:49:59,960
नहीं नहीं करते सा पता नहीं कमेंट

1484
01:49:59,960 --> 01:50:03,960
नहीं करते चलिए जब कोई कार्य नहीं है तो

1485
01:50:03,960 --> 01:50:08,920
रहने दीजिए आप दर्शक बन के देखिए फिर

1486
01:50:08,920 --> 01:50:13,840
वो भाई साहब कहां चले गए जो टोपी आधा चेहरा था कहां चले गए

1487
01:50:13,840 --> 01:50:17,880
सेव दाजी लगता काम पड़ गया उनको चले ग हर हर

1488
01:50:17,880 --> 01:50:22,000
महादेव सभी लोग हर हर महादेव जय श्री राम जय

1489
01:50:22,000 --> 01:50:26,840
श्री राम ज आज तत्वदर्शी संत की

1490
01:50:26,840 --> 01:50:31,080
मतलब गहन अध्ययन हो रहा है इसम जी जी तत्वदर्शी प हर

1491
01:50:31,080 --> 01:50:35,080
हर एंगल से हम लोग देखेंगे कि भाई रामपाल दास जी तत्वदर्शी हुए तो

1492
01:50:35,080 --> 01:50:39,160
हुए कैसे बिल्कुल बिलकुल एक एक बात प अब जो है

1493
01:50:39,160 --> 01:50:44,080
बात की जाएगी सबसे पहले तो तत्व क्या है यही पूछना

1494
01:50:44,080 --> 01:50:48,280
बाकी है ज्ञान की बात तो छोड़ दीजिए क्योंकि

1495
01:50:48,280 --> 01:50:52,280
हमारे शास्त्रों में तो मुझे तत्व से जान लेना यानी मेरा पार मर्थक स्वरूप जान

1496
01:50:52,280 --> 01:50:56,320
लेना अपना पार मर्थक स्वरूप जान लेना ये तत्व है अब आप अगर कुछ

1497
01:50:56,320 --> 01:51:00,400
नया तत्व ला रहे अच्छा आप अगर वेदों को जानने वाला तत्व ला रहे

1498
01:51:00,400 --> 01:51:04,680
हो तो दो बातें वेदों को जानने वाला वो कहा गया जो परमान

1499
01:51:04,680 --> 01:51:08,680
बमा विष्णु महेश भगवती गणेश को एक बात दूसरी बात वेदों को

1500
01:51:08,680 --> 01:51:13,000
जानना तत्व है ही नहीं आपके अनुसार क्यों क्योंकि वेद अधूरे है अभी बोला ना

1501
01:51:13,000 --> 01:51:17,360
भाई ये आप लोग मैंने एक बार वहा मेले में भी कहा था जो भी हिंदू है

1502
01:51:17,360 --> 01:51:21,360
और अभी वो फसा नहीं है ये जरा अपने भेजे में डालो इनकी

1503
01:51:21,360 --> 01:51:25,600
बातें इनको शर्म नहीं आती है ये कहते हुए कि वेदों में अधूरा ज्ञान

1504
01:51:25,600 --> 01:51:31,600
है और हिंदू कहते हैं हिंदू के नाम प ते

1505
01:51:35,080 --> 01:51:39,120
हैं ये हिंदू है जो गीता और वेद के लिए बोल

1506
01:51:39,120 --> 01:51:43,160
रहे है कि अधूरा ज्ञान है यही है तुम्हारे वो हिंदू जो गीता तेरा ज्ञान

1507
01:51:43,160 --> 01:51:47,560
अमृत कह कर के ले जाते तुमको भाई से भाई को अलग कर देते

1508
01:51:47,560 --> 01:51:52,080
हैं बिल्कुल सही कह रहे हो शिवांश

1509
01:51:52,080 --> 01:51:56,240
भाई जैसे यह तत्व का जो ज्ञान था यह 600 साल पहले कबीर

1510
01:51:56,240 --> 01:51:59,200
दास जी

1511
01:51:59,200 --> 01:52:03,360
आए फट फुल बात है 600 मर जाना अपने अपने घरों

1512
01:52:03,360 --> 01:52:07,360
में कट जाना अलग अलग हो कर के ऐसे क्योंकि गीता और वेद में

1513
01:52:07,360 --> 01:52:12,320
तो भैया तत्व ज्ञान है ही नहीं अधूरा ज्ञान है

1514
01:52:12,320 --> 01:52:18,040
बाट देंगे तुम्हे इसी तरह से कुछ लोग आएंगे

1515
01:52:18,040 --> 01:52:22,080
प्रजापति हमारा जो है ईश्वर आता है डेली हमको बताने के लिए वो आएंगे वो

1516
01:52:22,080 --> 01:52:26,080
कहेंगे ले जाएंगे आध को फिर कुछ लोग आएंगे शिवजी जो है भगवान

1517
01:52:26,080 --> 01:52:30,600
नहीं है वो ले जाएंगे आध को फिर कुछ लोग कहेंगे

1518
01:52:30,600 --> 01:52:34,800
कि वो भगवान अवतार नहीं ले

1519
01:52:34,800 --> 01:52:39,680
सकता एनी हाउ नाश किसका हो रहा है

1520
01:52:39,680 --> 01:52:43,680
सनातन समाज का देखो इनको जो स्वयं को

1521
01:52:43,680 --> 01:52:48,560
कहते हैं गीता तेरा ज्ञान हमरे हम भी सनातनी है देख लो इन सनातन

1522
01:52:48,560 --> 01:52:50,360
का वेदों में अधूरा

1523
01:52:50,360 --> 01:52:54,520
ज्ञान है शर्म नहीं आती बोलने से पहले शम क्यों नहीं आती है

1524
01:52:54,520 --> 01:52:58,600
क्योंकि इनको घटी पिला दी गई है ब्रेन वश हो चुका है लज्जा

1525
01:52:58,600 --> 01:53:04,240
भी नहीं आएगी बोलते समय वेद और गीता में अधूरा ज्ञान है जी

1526
01:53:04,240 --> 01:53:08,880
जी भैया जो चैट पर आ रहे हैं तो शायद उनको

1527
01:53:08,880 --> 01:53:13,960
लिया जाए वह आ रहे हैं शायद कौन आ

1528
01:53:13,960 --> 01:53:18,240
रहे दस के नाम से

1529
01:53:18,240 --> 01:53:22,480
लो भैया इनको रामपाल दास जी को

1530
01:53:22,480 --> 01:53:26,680
राम स सभी को हा जय श्री राम

1531
01:53:26,680 --> 01:53:31,240
बोलिए जय श्री राम स सभी संतो की जय सभी भक्तो की जय

1532
01:53:31,240 --> 01:53:36,040
र्मी पुरुष की बता

1533
01:53:36,040 --> 01:53:40,040
तत्व ज्ञानी किस आधार पर कहते हैं रामपाल

1534
01:53:40,040 --> 01:53:44,240
दास जी को बताए त भगत जी ऐसा है

1535
01:53:44,240 --> 01:53:48,600
कवि साब भी ऐसे री राय है पथरी गए सतलो

1536
01:53:48,600 --> 01:53:53,840
और बाकी श जी आए थे

1537
01:53:53,840 --> 01:53:58,520
तत्वदर्शी क्यों का तत्वदर्शी से अपनी बात शुरू करिए

1538
01:53:58,520 --> 01:54:02,640
कि तत्वदर्शी का अर्थ ये होता है उसके बाद तत्वदर्शी का

1539
01:54:02,640 --> 01:54:06,720
अर्थ य होता है तो इसलिए ऐसा यहां लिखा उसने यह किया इसलिए वो

1540
01:54:06,720 --> 01:54:10,800
तत्वदर्शी सिद्ध होता है ऐसे आइए पहले आप जो ऊपर की बात नहीं नीचे से

1541
01:54:10,800 --> 01:54:15,120
ऊपर जाइए सीढ़ी से ऊपर जाइए जिसे हम समझ पाए हम अल्प ज्ञानी

1542
01:54:15,120 --> 01:54:19,800
है हम अल्प ज्ञानी है नीचे

1543
01:54:19,800 --> 01:54:25,120
से जैसे पृथ्वी जलका य

1544
01:54:25,120 --> 01:54:29,120
हमा साब सबसे पहले बताए तत्वदर्शी का अर्थ

1545
01:54:29,120 --> 01:54:33,320
क्या है र् बता र

1546
01:54:33,320 --> 01:54:37,320
पाच बता अच्छा

1547
01:54:37,320 --> 01:54:41,760
तो इन पाच तव के लेने वाला तत्वदर्शी हो गया

1548
01:54:41,760 --> 01:54:46,360
यह भी है और परम तण परमात्मा है

1549
01:54:46,360 --> 01:54:50,680
सते मल परमात्मा को जानने वाला तत्वदर्शी हो

1550
01:54:50,680 --> 01:54:55,480
गया हा परमात्मा को जाने तर्शी हो जाएगा ना

1551
01:54:55,480 --> 01:54:59,520
अच्छा परमात्मा को जानने वाला

1552
01:54:59,520 --> 01:55:04,400
अगर हम लोग भगवान श्री कृष्ण को जानते हैं तो हम तत्वदर्शी हो

1553
01:55:04,400 --> 01:55:08,440
गए हां जो जान ले हो जाए त क्या

1554
01:55:08,440 --> 01:55:08,960
तो

1555
01:55:08,960 --> 01:55:13,040
यानी कि यहां पर यह संदीप बत्रा जी बैठे हैं यह भगवान कृष्ण को

1556
01:55:13,040 --> 01:55:17,880
जानते हैं परमात्मा के रूप में तोय तत्वदर्शी है

1557
01:55:17,880 --> 01:55:21,880
जानते पर ऐसा है ना साक रूप में मानने उनका परम चतु

1558
01:55:21,880 --> 01:55:27,880
आत्म तो

1559
01:55:28,640 --> 01:55:33,400
निकल भाई साहब वो दोनों रूपों को मानते हैं

1560
01:55:33,400 --> 01:55:37,400
तो अगर दोनों रूपों को मानोगे तो फिर आप साकार रू

1561
01:55:37,400 --> 01:55:41,600
में स् जाओगे ये अपनी बात जो है

1562
01:55:41,600 --> 01:55:45,600
जो आप बात बोल रहे हो वो प्रमाण के साथ बोलो हम आपको प्रमाण

1563
01:55:45,600 --> 01:55:49,920
के साथ अपनी बात बोल दे क्या अगर आपकी आज्ञा हो तो

1564
01:55:49,920 --> 01:55:54,160
परमाण तो मैंने आप मा तुम देख तो रहे हैं ना आ है ना

1565
01:55:54,160 --> 01:55:58,640
सामने बताइए भाई साहब आपका पहला क्लेम है कि आप जो है शास्त्र

1566
01:55:58,640 --> 01:56:03,200
समत भक्ति करते हो और हम लोग जो है जो जो रामपाल दास को नहीं मानते

1567
01:56:03,200 --> 01:56:07,280
वो शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते हैं तो आप अपनी बात जो बोले वो

1568
01:56:07,280 --> 01:56:11,600
प्रमाण के साथ बोले बोलिए प्रमाण देखिए ऐसा

1569
01:56:11,600 --> 01:56:15,800
जैसा श्री कृष्ण जी ने कहा है गीता जी में भूतो को पूजने वाले भूत बनते

1570
01:56:15,800 --> 01:56:19,920
हैं पित्रों को पूजने वा पित्र के पास जाएंगे देवता को पूज देवताओ के पास जाएंगे मेरा पूजन करेंगे

1571
01:56:19,920 --> 01:56:24,520
मेरे पास आएंगे तो श्री कृष्ण जी को कहां कर क करकी

1572
01:56:24,520 --> 01:56:30,120
भक्ति श्री कृष्ण ने कहा कि मैं परमेश्वर

1573
01:56:30,120 --> 01:56:33,760
हूं

1574
01:56:33,760 --> 01:56:37,800
परम आपने कहा कि परमेश्वर को तत्व से जान लेना यह बात उसम

1575
01:56:37,800 --> 01:56:43,280
भी लिखी है श्री कृष्ण ने मुझे तत्व से जान लेना तत्व ज्ञान

1576
01:56:43,280 --> 01:56:48,000
है मुझे तत्व से जान लेना उस

1577
01:56:48,000 --> 01:56:53,120
की हम सब भक्ति नहीं कर पा रहे है ना कोई तो निकाल रहा कोई

1578
01:56:53,120 --> 01:56:57,760
खा लिखा है नहीं कर पा रहे हैं मनम बातें नहीं

1579
01:56:57,760 --> 01:57:01,800
लिखी बा बोलो देखिए श्री कृष्ण जी की भक्ति करेंगे तो

1580
01:57:01,800 --> 01:57:06,160
उन्ही के स्वरूप को ध्यान करेंगे जब भाई साहब श्री कृष्ण ने ये कह दिया

1581
01:57:06,160 --> 01:57:10,480
कि मैं परमेश्वर हूं भगवत गीता में सातवे अध्याय

1582
01:57:10,480 --> 01:57:14,480
के 37 में श्लोक में तो उस परमेश्वर

1583
01:57:14,480 --> 01:57:18,560
को दूसरे रूप के लिए कहा गया ना ब्रम रूप के

1584
01:57:18,560 --> 01:57:23,000
लिए चलो आ जाते है ये कहा लिखा है दूसरे रूप के लिए परमेश्वर

1585
01:57:23,000 --> 01:57:27,000
को बताओ लिखा नहीं मांग रहा हूं मैं केवल ऐसी

1586
01:57:27,000 --> 01:57:33,000
बात कर रहा अभी तुमसे मनम बात है सब

1587
01:57:33,640 --> 01:57:37,760
ऐसे अरे तो बताओ ना कहा पर लिखा है वो कोई और परमेश्वर

1588
01:57:37,760 --> 01:57:42,400
है श्री कृष्ण के अलावा और उसको जान लेना तत्व ज्ञान है

1589
01:57:42,400 --> 01:57:46,560
वो ब्रह्म रूप जो बताया गया है वो अलग बताया गया है

1590
01:57:46,560 --> 01:57:50,640
भाई साहब मुझे आप लोक क्रमांक बोलते जाइए जिससे हमारी बातें थोड़ी सरल

1591
01:57:50,640 --> 01:57:54,800
हो हम लोग थोड़ा कम बुद्धि वाले हैं हमें थोड़ा देर से समझ में आता है आप

1592
01:57:54,800 --> 01:57:59,160
प्लीज हम पर जो है कृपा रखिए और आप लोक क्रमांक बोलते जाइए

1593
01:57:59,160 --> 01:58:03,200
भाई जी हमने नहीं कहा कम बुद्धि वाले हमने ना कहा नहीं हम

1594
01:58:03,200 --> 01:58:07,680
तो कह रहे हैं ना भाई हम कह रहे हैं आप हमने कब कहा आपने ये

1595
01:58:07,680 --> 01:58:11,680
कहा वैसे आप सब तो देखिए विष यांतर

1596
01:58:11,680 --> 01:58:15,760
कैसे हुआ विषयात कैसे हुआ पहली बात तो ये है कि अब जब

1597
01:58:15,760 --> 01:58:19,840
हमने आपके ही श्लोकों को पहले ही पकड़ रखा है तो आपने अपने उन्हीं श्लोकों

1598
01:58:19,840 --> 01:58:23,880
को छोड़ दिया जिनका रक्ता मारा जाता सुबह से शाम तक यह

1599
01:58:23,880 --> 01:58:27,880
बात आपने नोट की क्या बाकी लोगों नहीं छोड़ा उस तो कभी

1600
01:58:27,880 --> 01:58:32,320
बा कर

1601
01:58:32,320 --> 01:58:36,720
थो देखिए प्लीज आपसे क्षमा आपसे आज्ञा मांग रहा हूं

1602
01:58:36,720 --> 01:58:41,320
मेरे चैनल पर मैं ही आपसे आज्ञा मांग रहा हूं मुझे बोलने दीजिए ठीक है

1603
01:58:41,320 --> 01:58:45,920
इनकी तरफ से रट्टा मारा जाता है सुबह से रात तक 44

1604
01:58:45,920 --> 01:58:50,160
15 44 154 अब इनका मुह

1605
01:58:50,160 --> 01:58:54,240
नहीं खुल रहा है कि 44 में ये लिखा है और 15 एक में लिखा है कि वो जो

1606
01:58:54,240 --> 01:58:58,760
है उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा वो जो है तत्वदर्शी होगा

1607
01:58:58,760 --> 01:59:02,840
भैया हमारा वो वीडियो दिखा देना जरा जो मेले वाला सीन है उसमें

1608
01:59:02,840 --> 01:59:07,320
शुरू में ही है कि जो उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा वो तत्वदर्शी होगा

1609
01:59:07,320 --> 01:59:11,520
अब 15 एक की जब हमने बात पकड़ ली है तो अब ये 15 एक को छोड़ दे रहे हैं अब

1610
01:59:11,520 --> 01:59:16,680
केवल मौखिक बात कर रहे हैं लिखित बात ही नहीं कर रहे हैं ऐसा है ना

1611
01:59:16,680 --> 01:59:20,960
भगवान या कबीर साहब हो या सतगुरु देव हो ठीक है पूरे या फिर श्री कृष्ण

1612
01:59:20,960 --> 01:59:25,160
हम आप जो है जो भी बोले वो शास्त्र से बोले

1613
01:59:25,160 --> 01:59:29,480
आप शास्त्र सम्मत भक्ति बताते हो

1614
01:59:29,480 --> 01:59:33,520
शास्त्र से बोलिए हम आपको शास्त्र से बोल

1615
01:59:33,520 --> 01:59:37,240
रहे

1616
01:59:37,240 --> 01:59:41,320
हैं 15 शलोक 17 में कहा ना उत्तम पुरुष अन्य

1617
01:59:41,320 --> 01:59:45,360
उसम कहा गया उ हा हां और

1618
01:59:45,360 --> 01:59:49,440
अगले मैं ही हं 18 में कहा वो मैं ही हूं देख लेते हैं

1619
01:59:49,440 --> 01:59:53,680
रुको 15 श्लोक 17 रुको

1620
01:59:53,680 --> 01:59:58,600
स साकार रू के [प्रशंसा]

1621
01:59:58,600 --> 02:00:02,840
लिएला ये हमारे विषय से अलग है बस ये जो अभी

1622
02:00:02,840 --> 02:00:06,840
आप बात कर रहे हमारे विषय प है ही नहीं ये बातें हो चुकी है अलग नहीं अलग नहीं

1623
02:00:06,840 --> 02:00:10,840
है अलग नहीं है तो बताओ तत्वदर्शी का पहले अर्थ

1624
02:00:10,840 --> 02:00:14,960
बताओ शास्त्र से और उसके बाद बताओ कि यह देखो यसे

1625
02:00:14,960 --> 02:00:19,480
सिद्ध होता है कि 15 शलोक 17 में उस वो तत्व ज्ञान है

1626
02:00:19,480 --> 02:00:22,120
बताओ

1627
02:00:22,120 --> 02:00:26,920
तो आपका मार्ग सरल करते हैं आप ही अपना मार्ग जो है कठिन कर लेते हैं आप हमें

1628
02:00:26,920 --> 02:00:31,160
तत्वदर्शी का अर्थ बताए शास्त्र से और फिर उस अर्थ को जोड़े

1629
02:00:31,160 --> 02:00:35,680
15 एक से या 151 से

1630
02:00:35,680 --> 02:00:39,760
जोड़िए वो परम च इसलिए कहा जाता है कि वो कभी

1631
02:00:39,760 --> 02:00:44,000
मृत्यु को प्राप्त नहीं होता है वो मैंने आपसे पूछ है तत्वदर्शी का

1632
02:00:44,000 --> 02:00:48,040
अर्थ बताए शास्त्र से उसके बाद उससे जोड़े 15 एक को

1633
02:00:48,040 --> 02:00:52,880
फिर 151 को आपने कहा ना कि मैं

1634
02:00:52,880 --> 02:00:57,280
त मैंने बता शास्त्र से बताओ तत्वदर्शी

1635
02:00:57,280 --> 02:01:01,480
का अर्थ शास्त्र से शास्त्र से तो बता रहा

1636
02:01:01,480 --> 02:01:05,560
श जी ने कहा अर्जुन तुम्हारे और मेरे ब जम हो चुके

1637
02:01:05,560 --> 02:01:10,080
य शरीर के हो गए ना और जो

1638
02:01:10,080 --> 02:01:14,280
परमय बात कह देने से तत्वदर्शी कहा से सिद्ध हो रहा है भाई

1639
02:01:14,280 --> 02:01:20,280
शास्त्र में कहा लिखा है तत्व ज्ञान शब्द तत्व जन

1640
02:01:22,040 --> 02:01:26,240
त य सेही पता चल जाता कबी सा शरीर

1641
02:01:26,240 --> 02:01:28,960
इन शरीर

1642
02:01:28,960 --> 02:01:33,240
सेरना शरीर जाना जानने वाले को तत्वदर्शी कहेंगे

1643
02:01:33,240 --> 02:01:39,240
कहा लिखा है ऋ में बताया तो तीन प्र

1644
02:01:41,520 --> 02:01:45,680
है और एक रूप में विराजमान ते मैं आपसे य

1645
02:01:45,680 --> 02:01:49,840
नहीं कह रहा हूं परमात्मा के बारे में क्या बताया ऋगवेद में मैं आपसे पूछ रहा हूं

1646
02:01:49,840 --> 02:01:54,120
परमात्मा के बारे में व ऋगवेद वाली जान लेना तत्वदर्शी संत

1647
02:01:54,120 --> 02:01:57,960
की पहचान है यह कहा लिखा

1648
02:01:57,960 --> 02:02:02,080
है जी अभी पीछे आपने त को जान ले

1649
02:02:02,080 --> 02:02:07,160
त तो हो गया परमात्मा हो गया परमात्मा हो गया त

1650
02:02:07,160 --> 02:02:11,280
जान बताया कि भगवान श्री कृष्ण को परमात्मा के रूप में जान लेना

1651
02:02:11,280 --> 02:02:15,440
ही तत्व ज्ञान है अब आप मुझे बताइए कि उनसे भिन्न किसी को परमात्मा

1652
02:02:15,440 --> 02:02:19,600
के रूप में जान लेना तत्व ज्ञान है यह कहा लिखा है मैं

1653
02:02:19,600 --> 02:02:25,600
ये क रहा उस भक्ति कर रहे कोई पित्र पूज कोई भूत

1654
02:02:26,280 --> 02:02:30,280
पू बहुत सारे चैप्टर नहीं खोलने हैं

1655
02:02:30,280 --> 02:02:34,480
वो विषयात हो जाएगा यह बात तो रही जाएगी आपको

1656
02:02:34,480 --> 02:02:39,160
अभी तत्वदर्शी सिद्ध करना है आप 15 एक जानते हैं कि नहीं जानते

1657
02:02:39,160 --> 02:02:43,240
बताइए त बोला जाता है नहीं बोला

1658
02:02:43,240 --> 02:02:47,240
जाता है करने के लिए

1659
02:02:47,240 --> 02:02:51,840
15 एक बोला जाता है कि नहीं बोला जाता है

1660
02:02:51,840 --> 02:02:57,080
उल्टे रूपी वृक्ष का बताया गया अलग

1661
02:02:57,080 --> 02:03:02,160
अलग ये बता देगा वो पूर्ण संत हैय बताया

1662
02:03:02,160 --> 02:03:08,160
बताया कबी साल पहले आ बता दिया

1663
02:03:08,960 --> 02:03:13,320
था बो भाब भाई साब बोल सकता हं

1664
02:03:13,320 --> 02:03:17,800
15 एक में ये लिखा है मैं खोल देता हूं

1665
02:03:17,800 --> 02:03:19,840
15 15 एक में लिखा

1666
02:03:19,840 --> 02:03:24,080
है आदि पुरुष परमेश्वर रूप वाले मूल

1667
02:03:24,080 --> 02:03:28,080
वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल

1668
02:03:28,080 --> 02:03:32,440
वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद

1669
02:03:32,440 --> 02:03:37,400
जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को

1670
02:03:37,400 --> 02:03:40,840
जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है

1671
02:03:40,840 --> 02:03:45,040
वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है इसमें कहां

1672
02:03:45,040 --> 02:03:47,520
आया तत्व

1673
02:03:47,520 --> 02:03:51,760
दर्ति वेद को तत्व से जानता तो क्या आ गया आ

1674
02:03:51,760 --> 02:03:57,000
वे तत्व का क्या मतलब तत्व का मतलब परमात्मा है व

1675
02:03:57,000 --> 02:04:01,240
ह हटाना जरा अभी आप कह रहे थे

1676
02:04:01,240 --> 02:04:05,440
कि परमात्मा के बारे में जो पूर्ण ज्ञान होता है वह

1677
02:04:05,440 --> 02:04:09,600
तत्व ज्ञान होता है ठीक है यहां पर लिखा है कि वेद

1678
02:04:09,600 --> 02:04:13,720
के तात्पर्य को जानने वाला होता है क्या आपके अनुसार

1679
02:04:13,720 --> 02:04:16,800
वेद में पूरा ज्ञान

1680
02:04:16,800 --> 02:04:22,280
है भगत जी ज्ञान है मान

1681
02:04:22,280 --> 02:04:26,640
बताइए क्या वेद में पूरा ज्ञान है

1682
02:04:26,640 --> 02:04:31,280
पूरा ज्ञान दे तो भैया जो उस परमात्मा की भक्ति करेगा उसी की बात

1683
02:04:31,280 --> 02:04:35,520
करेगा क रहा क्या वेद और गीता में पूरा ज्ञान है

1684
02:04:35,520 --> 02:04:39,760
हां कि ना पूरा ज्ञान भक्ति पूरा ज्ञान बता तो दिया

1685
02:04:39,760 --> 02:04:44,000
श्री कृष्ण जी ने भी फिर बता दिया

1686
02:04:44,000 --> 02:04:49,160
मैं पूछ रहा हूं एक बार बताइए कि हां वेद और गीता में पूरा ज्ञान

1687
02:04:49,160 --> 02:04:55,160
है पूरा ज्ञान इशारा दिया गया

1688
02:04:56,600 --> 02:05:00,760
हा बोलने में दिक्कत आ रही है क्या मैं बता रहा पूरा

1689
02:05:00,760 --> 02:05:05,360
ज्ञान हो तोरा हो तो परमात्मा की तर पूरान

1690
02:05:05,360 --> 02:05:11,360
पूरा ज्ञान किसी

1691
02:05:14,360 --> 02:05:18,400
सक्ष क श्र कण जी माखन

1692
02:05:18,400 --> 02:05:23,160
क्यों खाते य बता मा

1693
02:05:23,160 --> 02:05:27,240
भाई साहब जो प्रश्न चल रहा है उस पर रहे मैं आपसे पूछ रहा

1694
02:05:27,240 --> 02:05:31,320
हूं कि यहां पर लिखा हुआ है कि जो उल्टे वृक्ष

1695
02:05:31,320 --> 02:05:35,520
के रूप में संसार की व्याख्या कर देगा वो वेदों को जानने

1696
02:05:35,520 --> 02:05:39,600
वाला कहलाएगा तत्वदर्शी नहीं कहलाएगा

1697
02:05:39,600 --> 02:05:43,720
इसमें नहीं लि कहलाएगा दूसरी बात मैं आपको

1698
02:05:43,720 --> 02:05:47,720
बता रहा हूं भागवत पुराण में देवी भागवत में वेद को

1699
02:05:47,720 --> 02:05:51,760
जानने वाला इवन भगवत गीता में भी तत्व को जानने

1700
02:05:51,760 --> 02:05:55,880
वाला वो है जो परमेश्वर को कृष्ण मानता है परमेश्वर को विष्णु

1701
02:05:55,880 --> 02:06:00,040
मानता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इनको

1702
02:06:00,040 --> 02:06:04,600
परमेश्वर मानने वाला वेदों को जानने वाला कहा गया है

1703
02:06:04,600 --> 02:06:08,640
अगर वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है तो यहां पर जो हम

1704
02:06:08,640 --> 02:06:11,640
लोग है जो बैठे हुए ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश

1705
02:06:11,640 --> 02:06:15,880
को परमात्मा कहते हैं वोह तत्वदर्शी है और जो नहीं कहता

1706
02:06:15,880 --> 02:06:20,040
वो तत्वदर्शी नहीं है अगर 15 एक श्लोक के आधार पर आप यह कहते

1707
02:06:20,040 --> 02:06:24,320
हैं कि जो रामपाल है वो तत्वदर्शी क्योंकि यहां

1708
02:06:24,320 --> 02:06:28,560
पर उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को वेदों को जानने

1709
02:06:28,560 --> 02:06:32,560
वाला कहा गया है वेदों को जानने वाला तो दो

1710
02:06:32,560 --> 02:06:37,000
बात वे किसकी रहे है

1711
02:06:37,000 --> 02:06:41,280
वेद किस परमात्मा की भगवान श्री कृष्ण की

1712
02:06:41,280 --> 02:06:45,320
और बोलो कोई बात नहीं क रूप में मान लो परमात्मा को कबीर

1713
02:06:45,320 --> 02:06:49,640
साहब ने खुद कहा कण कबीरा सु जो दो कर जानी

1714
02:06:49,640 --> 02:06:53,640
सतगुरु मिलाना होए उन्होने भी तो कहा है नहीं नहीं नहीं नहीं आपका

1715
02:06:53,640 --> 02:06:57,680
जो कबीर है वो कृष्ण से बड़ा है अगर वो कह रहे हैं कि कृष्ण

1716
02:06:57,680 --> 02:07:01,720
कबीरा एक है एक मिनट एक मिनट वो कह रहे हैं कृष्ण कबीरा एक

1717
02:07:01,720 --> 02:07:06,400
इसको भी मैं मान सकता हूं मगर आपका जो कबीर है वो कृष्ण से बड़ा

1718
02:07:06,400 --> 02:07:10,560
है क्या कबीर भी

1719
02:07:10,560 --> 02:07:15,640
आपके अनुसार आपके अनुसार क्या कृष्ण जो कबीर है वो नाशवान

1720
02:07:15,640 --> 02:07:19,720
है नहीं वो परम त नाशवान कैसे आपके अनुसार

1721
02:07:19,720 --> 02:07:24,120
जो कृष्ण है वो तो नाशवान है शरीर नाशवान नाशवान

1722
02:07:24,120 --> 02:07:26,920
नहीं जी तो कबीर का शरीर नाशवान

1723
02:07:26,920 --> 02:07:31,280
है क्या नहीं परम [प्रशंसा]

1724
02:07:31,280 --> 02:07:36,280
तत्व को एक नहीं मानते कितना

1725
02:07:36,280 --> 02:07:40,320
अपनी ही सचाई से भाग रहे आज देख रहे

1726
02:07:40,320 --> 02:07:44,440
हो रोज कहते है कि वो जो इनकी भक्ति करेगा अभी मना

1727
02:07:44,440 --> 02:07:48,480
कर रहे थे अब कह रहे मान लो परमात्मा मान लो भगत जी सुनो सुन आप

1728
02:07:48,480 --> 02:07:54,480
भी

1729
02:07:56,080 --> 02:08:00,160
सुनो सुनो सुनो अभी ये बताइए क्या कृष्ण

1730
02:08:00,160 --> 02:08:04,200
की भक्ति करना भी मोक्ष दायक है कि नहीं है उस

1731
02:08:04,200 --> 02:08:08,240
त की करोगे तो मोक्ष दय है अगर इस की करोगे साकार रूप तो हम उसम जाएंगे

1732
02:08:08,240 --> 02:08:12,440
स्वर्ग लोक जाएंगे ब्रह्म लोक जा सकते हैं फ कबीर

1733
02:08:12,440 --> 02:08:16,960
कबीर के साकार रूप की भक्ति जो है मोक्ष दायक है पर

1734
02:08:16,960 --> 02:08:20,440
भगत जी वो साकार

1735
02:08:20,440 --> 02:08:24,720
य इसीलिए मैं कह रहा हूं कि अब जो है हम प्रमाण दो कृष्ण

1736
02:08:24,720 --> 02:08:29,040
जो है जो ये आपने बोला आप जो है कृष्ण की भक्ति कर सकते हो जो

1737
02:08:29,040 --> 02:08:33,800
कबीर है वो फिर भी श्रेष्ठ है और जो कृष्ण है वो श्रेष्ठ नहीं है यह प्रमाण दो

1738
02:08:33,800 --> 02:08:37,800
कृषण जी श्रे है उस ल

1739
02:08:37,800 --> 02:08:41,840
आपने कहा कबीर की साकार भक्ति कर सकते हो कृष्ण की नहीं कर सकते

1740
02:08:41,840 --> 02:08:45,960
आपने कहा ना अब य प्रमाण सुनो

1741
02:08:45,960 --> 02:08:49,960
जबस उस रूप में आ जाएंगे हो जाएंगे

1742
02:08:49,960 --> 02:08:54,080
फिर वही बात आपने प्रमाण देना है कृष्ण

1743
02:08:54,080 --> 02:08:58,400
की साकार भक्ति गलत है और कबीर की साकार भक्ति सही है

1744
02:08:58,400 --> 02:09:02,520
प्रमाण दो गलत तो गलत तो है नहीं गलत हो सकती है हम साक रू

1745
02:09:02,520 --> 02:09:06,520
माने चले जाएंगे गलत क्या है अरे गलत है मोक्ष

1746
02:09:06,520 --> 02:09:10,720
नहीं मिलेगा ये चलो इसको और क्लियर कर दे कृष्ण

1747
02:09:10,720 --> 02:09:14,920
की साकार भक्ति से मोक्ष नहीं मिलेगा कबीर की साकार भक्ति

1748
02:09:14,920 --> 02:09:19,000
से मोक्ष मिलेगा प्रमाण दो चलो भगत जी कबीर साहब

1749
02:09:19,000 --> 02:09:23,680
की हमारे तुम्हारे जैसा शरीर नहीं है वो विदेही रूप भाई साहब मु समान

1750
02:09:23,680 --> 02:09:27,960
चाहिए कमान कष्ण जी ने कहा है उस

1751
02:09:27,960 --> 02:09:32,280
कत्व के लिए कोई गला नहीं सकता अग्नि में जला नहीं सकता हवा में सुका नहीं सकता वो शरीर

1752
02:09:32,280 --> 02:09:35,480
रूप में क आपसे ये कह रहा हूं बात ये हो रही

1753
02:09:35,480 --> 02:09:39,480
है कि कृष्ण जी की साकार भक्ति से मोक्ष

1754
02:09:39,480 --> 02:09:44,200
नहीं मिलेगा और कबीर जी की साकार भक्ति से मोक्ष मिलेगा ये प्रमाण दो

1755
02:09:44,200 --> 02:09:48,280
मुझे भगत जी आप पांच तर है ये आने

1756
02:09:48,280 --> 02:09:53,400
जाने में लगे इसी को तो काल कहते हैं शरीर में आ फस

1757
02:09:53,400 --> 02:09:57,680
ढेर सारी जगह भगवत गीता में लिखा हुआ है कि भगवान श्री कृष्ण

1758
02:09:57,680 --> 02:10:01,680
की जो है वो परम तत्व है परम तत्व परम तत्व

1759
02:10:01,680 --> 02:10:05,840
है तो सही पर शरीर को छोड़ के बताया है ना शरीर जब जैसे बाली ने मारा था

1760
02:10:05,840 --> 02:10:10,600
कृषण जी के पैर में तीर शरीर त्यागा था तो वो

1761
02:10:10,600 --> 02:10:15,520
पर आपका मतलब ये है कि तत्व से कृष्ण और कबीर एक है

1762
02:10:15,520 --> 02:10:19,560
हां त एक है बिल्कुल एक है उन्होने कबीर एक

1763
02:10:19,560 --> 02:10:23,760
है हा बिल्कुल तो तत्व से जब

1764
02:10:23,760 --> 02:10:27,760
एक है तो वही तत्व जब कृष्ण रूप में है तो उसकी भक्ति बाधित हो रही है

1765
02:10:27,760 --> 02:10:31,800
वही तत्व जब कबीर के रूप में उसकी बाद नहीं हो रही उसकी भक्ति

1766
02:10:31,800 --> 02:10:35,920
तो फिर यह कहां लिखा है यह हमें बताओ अरे भत

1767
02:10:35,920 --> 02:10:40,040
जी तो आख ही दिख रहा है त्या शरीर नहीं त्याग तो भी कबीर ही

1768
02:10:40,040 --> 02:10:44,280
बकुल

1769
02:10:44,280 --> 02:10:48,360
रू मुझे एक बात बताइए क्या आपके

1770
02:10:48,360 --> 02:10:52,720
जो कबीर है व सतिमान है नहीं

1771
02:10:52,720 --> 02:10:56,880
है बताइए हा सर्व शक्तिमान इस बिल्कुल सब कुछ कर सकते

1772
02:10:56,880 --> 02:11:01,000
हैं कि नहीं कर सकते कर सकते हैं करने वाले काम

1773
02:11:01,000 --> 02:11:05,040
सारे करेंगे अब ये बताइए अब ये बताइए अगर वो सब

1774
02:11:05,040 --> 02:11:09,200
कुछ कर सकते हैं कबीर दास जी तो आप एक

1775
02:11:09,200 --> 02:11:13,480
तरफ कह रहे हैं कि उनका जो वोह है शरीर वह शाश्वत

1776
02:11:13,480 --> 02:11:19,480
है है ना शाश्वत का समझते हैं

1777
02:11:20,240 --> 02:11:24,520
ना पूछ रहा सास मतलब नष्ट

1778
02:11:24,520 --> 02:11:28,600
नहीं होता है सब कुछ कर सकते हैं नष्ट नहीं होता और परिवर्तनशील नहीं

1779
02:11:28,600 --> 02:11:32,960
होता नित्य स्थाई होता है क्योंकि

1780
02:11:32,960 --> 02:11:37,440
अगर वह परिवर्तित भी हो रहा है वो भी नष्ट की स्थिति है जैसे कि मान लो

1781
02:11:37,440 --> 02:11:42,000
यह पेन है यह पेन जो है बदल गया और इतना बड़ा बन गया

1782
02:11:42,000 --> 02:11:46,160
तो जितनी देर इतना बड़ा बना उतनी देर इसका जो यह वाला स्वरूप है नष्ट है

1783
02:11:46,160 --> 02:11:50,320
नहीं है इसका अस्तित्व नहीं है हो गया ना

1784
02:11:50,320 --> 02:11:54,680
तो परवत को भी वही कहा जाता है नाश ठीक है

1785
02:11:54,680 --> 02:11:58,960
तो इसलिए परिवर्तन ना हो और जो सदा स्थाई रहे वह शाश्वत

1786
02:11:58,960 --> 02:12:03,440
है नित्य स्थाई ठीक है अब आप कह रहे हो कि आपके

1787
02:12:03,440 --> 02:12:08,160
जो कबीर है उनका शरीर जो है वह जो शरीर में आए थे

1788
02:12:08,160 --> 02:12:12,360
वो शरीर शाश्वत शरीर है ठीक

1789
02:12:12,360 --> 02:12:16,560
है तो क्या कबीर सर्वशक्तिमान भी है अगर उनका

1790
02:12:16,560 --> 02:12:20,640
शरीर शाश्वत है भगत जी है तो सही एक

1791
02:12:20,640 --> 02:12:25,040
रूप में बैठे ठीक है दूसरे बाल रूप

1792
02:12:25,040 --> 02:12:29,720
में रू में उ

1793
02:12:29,720 --> 02:12:34,040
प्र कर तक पहुच जाएंगे

1794
02:12:34,040 --> 02:12:35,440
अब आपने कहा कि

1795
02:12:35,440 --> 02:12:39,480
कबीर जो है वो सर्वशक्तिमान भी है और

1796
02:12:39,480 --> 02:12:43,560
आपने एक तरफ कहा कि उनका शरीर शाश्वत है नित्य स्थाई है अब

1797
02:12:43,560 --> 02:12:47,840
बताइए क्या कबीर अपने शरीर को

1798
02:12:47,840 --> 02:12:52,200
बड़ा छोटा शेर के रूप में

1799
02:12:52,200 --> 02:12:56,280
हाथी के रूप में पहाड़ के रूप में परिवर्तित कर सकते

1800
02:12:56,280 --> 02:13:00,680
हैं कि नहीं है अगर वो भगवान है ईश्वर है परम

1801
02:13:00,680 --> 02:13:04,960
परमेश्वर है कर सकते हैं कि नहीं भा जीी ये बताइए सत्य सनातन

1802
02:13:04,960 --> 02:13:09,280
परमधाम किसे कहते हैं देखा ज सत्य

1803
02:13:09,280 --> 02:13:13,440
सनातन है वो तो वो देखने में मतलब ऐसे पाच त क्यों

1804
02:13:13,440 --> 02:13:17,720
आएगा पा बताइए भाई साहब क्या

1805
02:13:17,720 --> 02:13:22,040
भगत जी एक हो जाए क्या वो अपने शरीर

1806
02:13:22,040 --> 02:13:25,840
को परिवर्तित कर सकते

1807
02:13:25,840 --> 02:13:30,120
हैं शरीर बताता रहा कर सकते हैं पर

1808
02:13:30,120 --> 02:13:34,320
ना एक मिनट एक मिनट कर सकते हैं अगर तो फिर

1809
02:13:34,320 --> 02:13:38,680
इसका मतलब उनका शरीर भी शाश्वत नहीं है

1810
02:13:38,680 --> 02:13:42,800
शाश्वत इसलिए तो है जैसे उन्होने जैसे उन्होंने अपने

1811
02:13:42,800 --> 02:13:46,880
शरीर को बदला और जितनी देर बदला उतनी देर उनका जो वो वाला शरीर

1812
02:13:46,880 --> 02:13:51,160
था वो नहीं था दुनिया में उसी तरीके से भगवान श्री कृष्ण ने भी

1813
02:13:51,160 --> 02:13:55,600
बदलने के रूप को ऐसे दिखा दिया कि हम शरीर छोड़ के जा रहे हैं बात तो वही

1814
02:13:55,600 --> 02:13:59,880
हुई और कबीर साहब त्याग कर नहीं गए ना शरीर शरीर थे

1815
02:13:59,880 --> 02:14:03,880
अरे भैया तो आप आपका जो आपके जो कबीर साहब है

1816
02:14:03,880 --> 02:14:08,080
उनका शरीर यदि शाश्वत है तो बदल नहीं सकता और अगर बदल सकता है

1817
02:14:08,080 --> 02:14:12,440
तो वो शाश्वत नहीं है और अगर बदल नहीं सकता तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है

1818
02:14:12,440 --> 02:14:16,560
दोनों में से एक बात आपको माननी पड़ेगी शमान सर्व शक्तिमान

1819
02:14:16,560 --> 02:14:21,800
वो हो नासन हो जाए फिर वैसा हो जाए सर्व शक्ति

1820
02:14:21,800 --> 02:14:26,360
नान नहीं मैं बता रहा हूं कौन होता है सर्वशक्तिमान उसकी परिभाषा सुन लीजिए

1821
02:14:26,360 --> 02:14:30,760
त्रयो उपनिषद दो एक सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रम

1822
02:14:30,760 --> 02:14:34,880
प्रद उपनिषद ईश्वर पूर्ण है पूर्ण

1823
02:14:34,880 --> 02:14:38,960
का मतलब उसमें आए दाए बाए ऊपर नीचे किसी

1824
02:14:38,960 --> 02:14:41,160
भी प्रकार से कोई भी कमी

1825
02:14:41,160 --> 02:14:45,240
नहीं हो सकती कमी वो जो चाहे

1826
02:14:45,240 --> 02:14:49,400
वो कर सकता है सुन लीजिए सुन लीजिए वो जो चाहे

1827
02:14:49,400 --> 02:14:53,440
वो कर सकता है अगर उस पर भी कोई नियम

1828
02:14:53,440 --> 02:14:58,360
लागू हो रहा है कि व यह नहीं कर सकता तो वह ईश्वर नहीं है

1829
02:14:58,360 --> 02:15:02,400
वो पूर्ण नहीं है क्योंकि कर भगत जी

1830
02:15:02,400 --> 02:15:06,720
वो परम तत्व कैसा जो अपने आप को मतलब शरीर

1831
02:15:06,720 --> 02:15:10,720
छोड़ के चले जाए और फिर अरे भाई श

1832
02:15:10,720 --> 02:15:14,760
सुनिए इसको भी मैं बता दूं लीला रूप में शरीर को छोड़ के दिखा रहे

1833
02:15:14,760 --> 02:15:18,960
हैं जैसे लीला रूप में आपके कबीर पहाड़ बन के दिखा रहे हैं लीला

1834
02:15:18,960 --> 02:15:23,120
रूप में आपके कबीर शेर बन के दिखा रहे दिखा सकते कि नहीं शरीर

1835
02:15:23,120 --> 02:15:27,200
तो नष्ट नहीं किया उन्होने अरे मेरे भाई वो शरीर नष्ट होना ही है जितनी

1836
02:15:27,200 --> 02:15:32,080
देर शेर बने उतनी देर उनका वो शरीर है कहां गया

1837
02:15:32,080 --> 02:15:36,200
शेर कहां बने वो तो बने नहीं शर बने तो आप आप ही कह रहे

1838
02:15:36,200 --> 02:15:40,840
बन सकते हैं या तो बोलो नहीं बन सकते सर्व शक्तिमान बता

1839
02:15:40,840 --> 02:15:45,440
इसलिए परम पू र हं शर बन सकते है कि

1840
02:15:45,440 --> 02:15:49,480
नहीं एक लॉजिक क्वेश्चन है इनके लिए दिखा

1841
02:15:49,480 --> 02:15:53,600
सकते बनने की क्या जरत है मिल दास जी एक

1842
02:15:53,600 --> 02:15:56,440
मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट

1843
02:15:56,440 --> 02:16:00,680
प पॉट पॉइंट कट कर दू एक बात सु कबीर दास जी को सृष्टि

1844
02:16:00,680 --> 02:16:04,760
बनाने की क्या जरूरत है भाई बताओ कोई

1845
02:16:04,760 --> 02:16:07,880
कमी थी क्या

1846
02:16:07,880 --> 02:16:11,880
उनको यह बात करना ईश्वर के लिए बहुत बेवकूफी भरी बात

1847
02:16:11,880 --> 02:16:15,960
होती है कि उसको जरूरत क्या है तो हम

1848
02:16:15,960 --> 02:16:18,920
तो अपनी गलती से

1849
02:16:18,920 --> 02:16:23,200
आए कोई भगवान कोई बाप अपने बच्चों को गलत जगह भेजेगा

1850
02:16:23,200 --> 02:16:27,360
क्या बताइए अब बालक चर्चा करके बड़ा

1851
02:16:27,360 --> 02:16:31,520
अच्छा लगा पाड़ी जी आप बात कर लीजिए इनसे रामपाल दास जी

1852
02:16:31,520 --> 02:16:35,880
चुप र रहिएगा एक मिनट सिर्फ एक बात पूछना है जो कबीर

1853
02:16:35,880 --> 02:16:40,460
दास जी थे वो उसी रूप में आए थे यहां के जिस रूप में वो

1854
02:16:40,460 --> 02:16:45,440
[संगीत] गए उसी रूप में आ

1855
02:16:45,440 --> 02:16:49,680
अच्छा उस रूप में आए थे बच्चे के रूप में आए थे और बूढ़े के रूप में गए और

1856
02:16:49,680 --> 02:16:54,440
एक रूप कैसे हो गया उनका शरीर

1857
02:16:54,440 --> 02:16:59,080
खत्म नहीं होता रूप हो खम नहीं होता

1858
02:16:59,080 --> 02:17:03,120
किसी भी तरह से सुनो सुनो सुनो अरे तीनों

1859
02:17:03,120 --> 02:17:07,400
अवस्था आना उनकी शरीर में निरंतर बदलाव हुआ

1860
02:17:07,400 --> 02:17:10,560
बालक अवस्था पर्ण

1861
02:17:10,560 --> 02:17:11,560
अवस्था

1862
02:17:11,560 --> 02:17:15,840
शर आ वो तो शरीर उस शरीर में तो गए नहीं वस्था

1863
02:17:15,840 --> 02:17:20,520
में गए वृद्ध में गए तो ले गए ड़

1864
02:17:20,520 --> 02:17:25,000
तो जो शरीर ले आ सबसे पहले मेरी बात सुनो

1865
02:17:25,000 --> 02:17:31,000
तीन सि करना चाह रहे हो

1866
02:17:31,280 --> 02:17:36,120
आपको अगर उनका शरीर बदल रहा है तो शाश्वत नहीं है

1867
02:17:36,120 --> 02:17:40,240
और यदि बदल नहीं रहा है शाश्वत है तो तुम्हारा जो कबीर

1868
02:17:40,240 --> 02:17:44,600
है वह सर्वशक्तिमान नहीं है

1869
02:17:44,600 --> 02:17:48,920
शाश्वत का अर्थ पता है क्या हुआ मेरी बात सुनो वै

1870
02:17:48,920 --> 02:17:52,960
वैसे तो शाश्वत का बहुत गुण अर्थ है वो छोड़ दो मगर अगर तुम्हारा

1871
02:17:52,960 --> 02:17:57,160
साकार कोई शाश्वत मान ले तो उसमें हथौड़ी मार दो

1872
02:17:57,160 --> 02:18:01,400
उसमें छेना मार दो उसमें बुलडोजर चला दो मगर वो टस से मस

1873
02:18:01,400 --> 02:18:05,400
नहीं होगा कम से कम इतना तो मानना पड़ेगा कि वो ना कम होगा

1874
02:18:05,400 --> 02:18:09,440
ना ज्यादा होगा वो जैसा है वैसा ही रहेगा शाश्वत

1875
02:18:09,440 --> 02:18:13,760
वो है मगर आप खुद कह रहे हो कि वह बच्चे के रूप में आया

1876
02:18:13,760 --> 02:18:17,760
फिर वो बड़ा हो गया तो ज्यादा हो गया यानी पहले जो बच्चे के

1877
02:18:17,760 --> 02:18:21,840
रूप में आया वो शाश्वत नहीं था नित्य स्थाई कहां स शक्तिमान है

1878
02:18:21,840 --> 02:18:26,360
तो कर सकते हैं लीला सर्वशक्तिमान नहीं है फिर वो शाश्वत

1879
02:18:26,360 --> 02:18:27,040
नहीं है

1880
02:18:27,040 --> 02:18:32,920
भैया अब इनसे बहुत भेजा मान लिया ये जो है

1881
02:18:32,920 --> 02:18:36,080
थोड़ा अ

1882
02:18:36,080 --> 02:18:40,280
ह पब्लिक ने देख लिया है समझ लिया है आप लोग निर्णय

1883
02:18:40,280 --> 02:18:44,360
करिएगा कि कैसा इनका स्तर है कितनी देर और इनसे वो मारा

1884
02:18:44,360 --> 02:18:48,960
जाए सर जी जीता जागता उदाहरण है

1885
02:18:48,960 --> 02:18:53,160
कि वो आए हैं बालक अवस्था में उनके शरीर

1886
02:18:53,160 --> 02:18:58,320
में निरंतर परिवर्तन हो रहा है तो वह कैसे शाश्वत हो गए कैसे सनातन हो

1887
02:18:58,320 --> 02:19:02,840
गए यही बातन से पूछता हूं इकोन का ईश्वर

1888
02:19:02,840 --> 02:19:06,880
इनका ईश्वर में यही सेम है इकोन वाले भी कहते हैं

1889
02:19:06,880 --> 02:19:10,920
कि गोलोक धाम में जैसे कृष्ण बैठे वैसे ही नीचे आते हैं तो अगर

1890
02:19:10,920 --> 02:19:15,400
वैसे ही आते पहली बात तो बाल अवस्था में आए शरीर चेंज हुआ

1891
02:19:15,400 --> 02:19:19,400
तो क्या हुआ कि उनका वो शरीर जो

1892
02:19:19,400 --> 02:19:23,400
है गोलोक धाम वाला व नहीं खुद ही कह रहे और दूसरी बात अगर

1893
02:19:23,400 --> 02:19:27,440
मान भी लिया जाए कि शाश्वत है जो बड़े हो गए य शाश्वत है यह शाश्वत है

1894
02:19:27,440 --> 02:19:31,520
व पहले केवल लीला थी यह शाश्वत अब यह शाश्वत है तो यह

1895
02:19:31,520 --> 02:19:35,560
ना तो शेर बन सकता है ना ही वह और कुछ

1896
02:19:35,560 --> 02:19:39,960
कर सकता है बहुत सारी जगह ना वो अपने शरीर को बड़ा कर सकता है जबकि

1897
02:19:39,960 --> 02:19:42,240
वह विश्वरूप व

1898
02:19:42,240 --> 02:19:46,320
विराट रूप भी दिखा रहे हैं भगवान विराट रूप

1899
02:19:46,320 --> 02:19:52,280
भी दिखा रहे हैं अपना

1900
02:19:52,280 --> 02:19:56,680
बिल्कुल नित्य स्थाई नित्य नित्य

1901
02:19:56,680 --> 02:20:01,320
स्थाई होता है शाश्वत पढ़ो सनातन

1902
02:20:01,320 --> 02:20:06,640
हां जी भैया जय जगने जी जय श्री

1903
02:20:06,640 --> 02:20:12,640
राम व कीजिए आवाज नहीं आ रही

1904
02:20:12,880 --> 02:20:16,880
आपकी हेलो आ रही है

1905
02:20:16,880 --> 02:20:21,240
जी सर जी मेरे को यह लगता है

1906
02:20:21,240 --> 02:20:25,400
गता पड़े बड़े नहीं रहते इ का दिमाग खराब रहता है

1907
02:20:25,400 --> 02:20:29,480
और जाता है जो जैसा बोलता है उसको सच मान लेता है

1908
02:20:29,480 --> 02:20:33,880
उसको मिस इंटरप्रेट करके जो भी गलती से बताते मिसली

1909
02:20:33,880 --> 02:20:38,000
करते हैं और इसी को सच मान लेते हैं उसके बाद इस कल्ट में फस जाते कोई

1910
02:20:38,000 --> 02:20:42,600
सा भी कल्ट हो जैसे कि ब्रह्मा कुमारी हो गया संत रामपाल हो गया

1911
02:20:42,600 --> 02:20:46,800
राधा स्वामी हो गया य सब में लोग मासूम लोग फसे रहते लोग का दिमाग

1912
02:20:46,800 --> 02:20:51,400
काम नहीं करता ऐसा मेरे को लगता है

1913
02:20:51,400 --> 02:20:55,400
लोग अपना दिमाग नहीं लगाते जी

1914
02:20:55,400 --> 02:20:57,440
आप सही कह रहे हैं संजय सिंह जी

1915
02:20:57,440 --> 02:21:01,360
बताइए जय श्री

1916
02:21:01,360 --> 02:21:03,840
राम

1917
02:21:03,840 --> 02:21:07,840
हेलो संजय सिंह जी आप गुटका

1918
02:21:07,840 --> 02:21:11,920
खा रहे हैं क्या गुटका खा रहे हैं

1919
02:21:11,920 --> 02:21:16,440
क्या नहीं गुटका नहीं खाते जरदा खा रहे

1920
02:21:16,440 --> 02:21:20,760
बताइए आने का उद्देश्य आपके हां भाई तत्वदर्शी के

1921
02:21:20,760 --> 02:21:24,880
बारे में ही आया था हां बोलिए तत्वदर्शी सिद्ध

1922
02:21:24,880 --> 02:21:29,720
करिए रामपाल दास जी को नहीं नहीं रामपाल का शिष्य नहीं हूं यार

1923
02:21:29,720 --> 02:21:33,760
अच्छा हा तो आपको आना नहीं चाहिए

1924
02:21:33,760 --> 02:21:37,800
आप तो यहां पर मुझे लग रहा है रामपाल दास जी की तरफ से आए हैं क्या जो

1925
02:21:37,800 --> 02:21:41,920
रामपाल दास को नहीं मानते उनको जो है बदनाम करो जाकर के नहीं

1926
02:21:41,920 --> 02:21:46,560
नहीं नहीं ऐसा नहीं है आप जरदार थूक के आइएगा

1927
02:21:46,560 --> 02:21:48,960
नहीं जरदा

1928
02:21:48,960 --> 02:21:54,960
नहीं पहले तो यहां थोड़ा सभ्यता से आइए मुंह में कुछ भी डाल के

1929
02:21:55,240 --> 02:21:59,280
ऐसे देखिए हमारे कोई भी गुरु कोई भी हमारे

1930
02:21:59,280 --> 02:22:03,280
जो धर्म गुरु है वो कोई कभी यह नहीं कहते कि आप गुटका खाओ पान

1931
02:22:03,280 --> 02:22:07,280
खाओ शराब पियो जुआ खेलो वो उनकी

1932
02:22:07,280 --> 02:22:11,480
श्रीराम जी जी जी जी पाड़ी जी वो उनकी

1933
02:22:11,480 --> 02:22:12,440
बुद्धि है जो यह

1934
02:22:12,440 --> 02:22:16,840
चीज करते हैं इसको हमारा सनातन से कोई लेना देना नहीं

1935
02:22:16,840 --> 02:22:20,960
है कि हम सनातन की वजह से ये लोग गुटका खा रहे हैं या शराब पी रहे

1936
02:22:20,960 --> 02:22:25,680
हैं या कुछ गलत काम कर रहे हैं इसमें सनातन का कोई हाथ नहीं व उनकी बुद्धि

1937
02:22:25,680 --> 02:22:29,840
है बहुत से लोग ऐसे जो नहीं खाते हैं

1938
02:22:29,840 --> 02:22:33,880
बहुत से लोग इको पहली बात तो सबसे पहले यही जानना चाहिए कि

1939
02:22:33,880 --> 02:22:37,920
सनातन और शाश्वत कहते किसे हैं यही जान लेंगे तो य

1940
02:22:37,920 --> 02:22:43,920
ईश्वर को सर्वशक्तिमान समझने के पीछे अपने ज्ञान के चू खोलने

1941
02:22:45,960 --> 02:22:50,280
लग गोविंद जी बोलिए जय श्री राम ये क्या दिखा रहे हैं स्क्रीन

1942
02:22:50,280 --> 02:22:54,720
पर हां यह कमेंट बहुत आता है

1943
02:22:54,720 --> 02:22:58,840
शिवांश जी इतने ऊंचे पद पर बैठकर

1944
02:22:58,840 --> 02:23:03,680
भी आपने खीर वाली दूध

1945
02:23:03,680 --> 02:23:07,680
में नहाने की बात कही है अच्छा

1946
02:23:07,680 --> 02:23:12,200
हमने पहली बात तो व जो बात कही है कि खीर के दूध खीर से नाया जाता

1947
02:23:12,200 --> 02:23:16,240
है पहली बात तो यह है कि उस पर हमने

1948
02:23:16,240 --> 02:23:20,640
कहते समय यह कहा कि इसके बारे में हम प्रमाणिक नहीं है ऑथेंटिक

1949
02:23:20,640 --> 02:23:24,960
नहीं बोल रहे जो वर्ली इर उधर बातें हो रही है यह जांच का विषय है

1950
02:23:24,960 --> 02:23:29,120
मगर दूसरी बात यह है कि आपने पूछा था क्या जब

1951
02:23:29,120 --> 02:23:33,200
बुरी तरीके से राम भगवान का अपमान किया जा रहा था कि उनको

1952
02:23:33,200 --> 02:23:37,880
ज्ञान दे दिया यह दे दिया कहा किस आधार पर कहा था

1953
02:23:37,880 --> 02:23:41,960
उन्होंने इसीलिए तो आप लोगों का साहस नहीं होता ना सामना करने का

1954
02:23:41,960 --> 02:23:46,320
बस वही कमेंट्स में आप लोग बातें कर सकते हो क्योंकि बचपन

1955
02:23:46,320 --> 02:23:51,120
में माता जी ने निष्ठा पूर्वक

1956
02:23:51,120 --> 02:23:55,200
इसीलिए नहीं आते हो इतनी बातें उन

1957
02:23:55,200 --> 02:23:59,400
लोगों की गलतियां होंगी सनातन का अर्थ नहीं पता होगा रामचरित

1958
02:23:59,400 --> 02:24:03,560
मानस और रामायण का भेद नहीं पता होगा मगर वह कभी कमेंट में नहीं आएगा लिख

1959
02:24:03,560 --> 02:24:07,800
कर के रामपाल दास जी इतनी कपोल कल्पित

1960
02:24:07,800 --> 02:24:12,480
कहानियां सुनाते हैं लोगों को कहां लिखी है कुछ नहीं

1961
02:24:12,480 --> 02:24:16,720
पता उनसे कभी नहीं

1962
02:24:16,720 --> 02:24:21,040
पूछा राम जी के विषय में क्या उड़ाई हुई है रामपाल दा जी ने

1963
02:24:21,040 --> 02:24:26,160
कि वो सीता माता को कष्ट हुआ

1964
02:24:26,160 --> 02:24:30,520
था क्या एक वो अब्बा फैलाई हुई है इन्होने कपोल

1965
02:24:30,520 --> 02:24:34,520
कल्पित पूछा कभी जेल धाम वालों

1966
02:24:34,520 --> 02:24:38,600
से हां जी गोविंद गुरकुल जी जय श्री राम हां

1967
02:24:38,600 --> 02:24:42,640
हरि ओम जी सभी को जय श्री राम ये इन्होंने बताया हुआ है

1968
02:24:42,640 --> 02:24:46,680
कि दिवाली आप क्यों मनाते हो जबक उन्होंने माता सीता

1969
02:24:46,680 --> 02:24:50,800
को तो वनवास भेज दिया था तो आप इस खातिर भगवान को भगवान मान राम

1970
02:24:50,800 --> 02:24:55,080
जी को भगवान मानते हो ये वो इनमें से दो चीजें

1971
02:24:55,080 --> 02:24:59,400
कंटक्ट हो जाएंगी कैसे होंगी वो भी सभी लोग देखिएगा ध्यान से

1972
02:24:59,400 --> 02:25:03,600
मैं एक बात और एक बात और पूछ लू इस व्यक्ति ने डीपी लगाई है गुरु

1973
02:25:03,600 --> 02:25:06,640
गोरखनाथ की और गुरु गोरखनाथ

1974
02:25:06,640 --> 02:25:11,520
को रामपाल दास जी मूर्ख समझते हैं

1975
02:25:11,520 --> 02:25:15,560
सोचिए ये कितनी मतलब भरत चाल है हिंदुओं

1976
02:25:15,560 --> 02:25:19,640
को ये दिखाने की कि देखो हम तुम्हारे ही बीच के व्यक्ति हैं और हम रामपाल जी

1977
02:25:19,640 --> 02:25:23,640
को फॉलो कर लय देखो बिल्कुल ये गोरखनाथ का

1978
02:25:23,640 --> 02:25:27,720
चैनल चला रहे हैं और ये रामपाल दास जी के पक्षधर है

1979
02:25:27,720 --> 02:25:31,760
क्यों चला रहे हैं गोरखनाथ के नाम से चैनल सोचो जरा इसलिए

1980
02:25:31,760 --> 02:25:35,800
कि जो इनको फॉलो करने लगे पहले फिर धीरे-धीरे उसको य कन्वर्ट करें रामपाल

1981
02:25:35,800 --> 02:25:40,200
दास जी की ओ देख लो

1982
02:25:40,200 --> 02:25:44,400
इतना इतने इतने युद्ध स्तर पर पाखंड

1983
02:25:44,400 --> 02:25:49,040
और धोखा चल रहा है धोखा इतने युद्ध स्तर पर कि गोरखनाथ

1984
02:25:49,040 --> 02:25:53,200
जी का फोटो लगा लिया गोरखनाथ जी का चैनल चल रहा है और पक्षधर

1985
02:25:53,200 --> 02:25:57,400
किसके हैं रामपाल दास जी के जो गोरखनाथ को अज्ञानी समझते

1986
02:25:57,400 --> 02:26:01,480
हैं पर मैं आपको बताऊ ये जो बात है ना ये

1987
02:26:01,480 --> 02:26:06,200
सबसे खतरनाक बात है ये ये सबसे खतरनाक बात है य

1988
02:26:06,200 --> 02:26:10,680
मिशनरी क्रिश्चन मिशनरी ऐसे ही काम करती थी

1989
02:26:10,680 --> 02:26:14,720
क्या काम करती थी कि आपको भगवत गीता

1990
02:26:14,720 --> 02:26:18,720
छाप के दी भाई और उसके अंदर ज्ञान जो है व बाइबल

1991
02:26:18,720 --> 02:26:21,840
का है

1992
02:26:21,840 --> 02:26:26,000
यह मैंने जो अभी देखा ना आप यकीन मानिए मेरे को य इनके जो झूठे वेद इन्होंने

1993
02:26:26,000 --> 02:26:30,160
वो ट्रांसलेशन की ना उससे भी 10 गुना खतरनाक ये चीज लगी

1994
02:26:30,160 --> 02:26:34,480
मेरे को क्योंकि यह ये बड़ी सोची

1995
02:26:34,480 --> 02:26:39,200
समझी साजिश थी यह जो इन्होंने किया हुआ और दूसरी बात मैं आपको बताता बकल

1996
02:26:39,200 --> 02:26:43,480
जो ये बोलते हैं कि राम जी को भगवान क्यों मानते हो उन्होंने तो वहां पर भेज दिया तो फिर दो चीजें

1997
02:26:43,480 --> 02:26:47,560
कांट्रडिक्ट हो जाएंगी पहली तो यहां तो कबीर जी को यह बात पता नहीं होगी ठीक

1998
02:26:47,560 --> 02:26:51,880
है या तो कबीर जी को यह बात नहीं पता होगी और उन्होंने रामायण नहीं पढ़ी होगी ठीक है

1999
02:26:51,880 --> 02:26:56,040
क्योंकि भविष्य पुराण के जो हमने उत्तर उत्तरार्ध

2000
02:26:56,040 --> 02:27:00,080
है उसका उसमें हमने पढ़ा भी था कि वह भगवान श्री राम के भक्त

2001
02:27:00,080 --> 02:27:04,160
थे कबीर जी जो है वो राम जी के भक्त हैं

2002
02:27:04,160 --> 02:27:08,280
ठीक है उनका जन्म भी हुआ है उनके माता-पिता ने उनको वन में छोड़ा

2003
02:27:08,280 --> 02:27:12,400
था और वहां से वो ले आए फिर वो भगवान विष्णु की भक्ति करने लगे और यहां तक कहा है वो

2004
02:27:12,400 --> 02:27:16,560
इतने उत्तम भक्त थे कि भगवान विष्णु स्वयं उनकी सभी सुविधाओं को पूरा

2005
02:27:16,560 --> 02:27:20,680
करने लगे थे ठीक है अब यहां तो कबीर जी को यह बात नहीं पता थी लिए वो राम

2006
02:27:20,680 --> 02:27:25,000
जी के भक्त थे पहले तो यह मुद्दा उठेगा ठीक है तो भक्त

2007
02:27:25,000 --> 02:27:29,440
कबीर जो है क्या उनको नहीं पता था कि उन्होंने अपनी जो

2008
02:27:29,440 --> 02:27:33,440
ये है माता है ठीक है जो उनकी धर्म पत्नी है उनको

2009
02:27:33,440 --> 02:27:36,880
भेज दिया था वनवास तो अगर वो पता था फिर भी उनकी भक्ति कर

2010
02:27:36,880 --> 02:27:41,040
रहे हैं तो यानी कि उनको पता था कि उसके पीछे का लॉजिक क्या है

2011
02:27:41,040 --> 02:27:45,080
यानी कि उनको पूरी बात पता होगी ठीक है तो कबीर जी से ही

2012
02:27:45,080 --> 02:27:49,120
इनका पर्दा फाश हो जाता और दूसरी बात मैं ये कहने आ हूं पहले आपने मेरे को इनवाइट किया था लेकिन

2013
02:27:49,120 --> 02:27:53,120
स्टूडियो फुल था इन्होंने कहां से

2014
02:27:53,120 --> 02:27:57,200
सारी की सारी काल की कहानी चुराई है यह मैं आपको बता देता हूं

2015
02:27:57,200 --> 02:28:01,240
ये अच्छा मैंने मैंने वो हाईलाइट करके सारा कुछ रख

2016
02:28:01,240 --> 02:28:05,360
लिया है उसको हम अगली वीडियो में हो सके हैं कभी भी तो पूरा ही उसको पढ़ेंगे

2017
02:28:05,360 --> 02:28:10,000
बाबा रामपाल ने कहां से चुराई है यह सारी कहानी ठीक है

2018
02:28:10,000 --> 02:28:14,320
दरअसल भगवान श्री कृष्ण और माता राधा जो है वह प्रकृति स्वरूप

2019
02:28:14,320 --> 02:28:18,400
में जब बताया जाता है कि यह सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था

2020
02:28:18,400 --> 02:28:22,680
ठीक है उससे पहले वह एक जल में एक अंडा रूपी

2021
02:28:22,680 --> 02:28:26,760
जो है ना वो होता है मैं पूरा पढ़ के बताऊंगा अब इतना याद नहीं मेरे को

2022
02:28:26,760 --> 02:28:30,880
ठीक है वहां पर उनका एक पुत्र होता है उस अंडे

2023
02:28:30,880 --> 02:28:35,000
में माता राधा जी का शक्ति स्वरूप और श्री कृष्ण का परमात्मा

2024
02:28:35,000 --> 02:28:39,160
स्वरूप वह एक होता है ठीक है उस अंडे में से एक बालक निकलता

2025
02:28:39,160 --> 02:28:43,320
है ठीक है उस बालक का जो कार्य है

2026
02:28:43,320 --> 02:28:47,520
उसको कहा जाता है ज्योति निरंजन ठीक है उसे कहा

2027
02:28:47,520 --> 02:28:51,560
जाता है ज्योति निरंजन और उसका नाम बड़ा स्पष्टता से वहां पर लिखा हुआ

2028
02:28:51,560 --> 02:28:52,120
है

2029
02:28:52,120 --> 02:28:56,280
उसकी सहस्त्र बजाएं थी सहस्त्र शीष थे उसके और

2030
02:28:56,280 --> 02:29:00,760
वह जो है उसी से सारे ब्रह्मांड जो है उपजत हैं सारे

2031
02:29:00,760 --> 02:29:05,320
ठीक है और जो काल शब्द है वो उसके लिए बड़

2032
02:29:05,320 --> 02:29:09,720
जैसे कहते हैं ना बिल्कुल स्पष्टता से उसके लिए दिया गया है और वो भगवान

2033
02:29:09,720 --> 02:29:13,720
श्री कृष्ण का सोवा अंश था ठीक है फिर उसको

2034
02:29:13,720 --> 02:29:17,720
भूख लगती है भगवान श्री कृष्ण आते हैं ठीक है तो जैसे इन्होंने

2035
02:29:17,720 --> 02:29:21,720
बताया ना कबीर जी को भूख लगी तो शंकर जी लेकर आ गए ठीक है

2036
02:29:21,720 --> 02:29:25,720
यह कहानी भी उधर से चुराई गई है फिर उन्होंने उनको आधी आधी वरदान दिए

2037
02:29:25,720 --> 02:29:29,920
कि अब तुम्ही से सारी सृष्टि का मैं निर्माण करवाऊंगी इस कल्प में तुमसे

2038
02:29:29,920 --> 02:29:33,960
ही सारी मतलब आपका कहने का मतलब य है कि गप्प भी

2039
02:29:33,960 --> 02:29:38,800
अपने मन से नहीं मारी है वो भी चुराई है कहीं से

2040
02:29:38,800 --> 02:29:43,040
मैंने एक कमेंट किया था वो आपने शायद ध्यान नहीं दिया होगा हमारे साथ एक भाई जुड़े हुए थे जिन्होंने

2041
02:29:43,040 --> 02:29:47,800
आपको प्रमाण दिए थे ना वो गोबर आदि के और वो धूप के उन्होंने

2042
02:29:47,800 --> 02:29:51,880
तो उन्होंने आपको कहा कि मैं व कर रहा हूं आप आपको ठीक है मैंने नीचे कमेंट लिखा हुआ

2043
02:29:51,880 --> 02:29:57,880
था कि हमारा

2044
02:30:20,520 --> 02:30:26,520
मैंने एक बार आदि शंकराचार्य जी की फोटो देख कर के

2045
02:30:50,080 --> 02:30:54,120
शंकराचार्य की फोटो लगा कर के सनातन को पढ़ाने का प्रचार कर रहा है

2046
02:30:54,120 --> 02:31:00,120
ा पर सोचिए तो फिर आप इस

2047
02:31:03,880 --> 02:31:08,040
में हल भी आप इसी लाइव में बता इसका हल जो है ना व आप

2048
02:31:08,040 --> 02:31:12,840
इसी लाइव में इसके साथ ही बता दीजिए कि इससे बचने का फिर क्या प्रयत्न हो सकता है

2049
02:31:12,840 --> 02:31:17,080
मैं बता रहा हूं मैं बस इसकी एक बात यह जो व्यक्ति है जो गोरखनाथ

2050
02:31:17,080 --> 02:31:21,240
इस तरीके के व्यक्ति य व्यक्ति इसी तरीके के व्यक्ति एक बार आएंगे

2051
02:31:21,240 --> 02:31:25,360
चैनल पर कमेंट करेंगे कि आपकी लाइव

2052
02:31:25,360 --> 02:31:29,520
चर्चा देख के आपके वीडियोस देखकर मैं नास्तिक हो गया और

2053
02:31:29,520 --> 02:31:33,600
फिर अगले दिन आएंगे वह रामपाल जी की तरफ से जो है पक्ष वाले कमेंट

2054
02:31:33,600 --> 02:31:37,640
करेंगे अे भैया नास्तिक हो गए तो रामपाल को मानने वाले कहां से हो गए

2055
02:31:37,640 --> 02:31:41,640
और वहां पर अपने लोगों के लिए जो अपने लोगों ज्ञान दे रहा है कि दीपावली

2056
02:31:41,640 --> 02:31:46,040
करोगे तो नरक जाओगे यह होगा वो होगा यह सब चीज

2057
02:31:46,040 --> 02:31:50,640
यह देखो यह सब वीडियोस बना रहे हैं यही लोग

2058
02:31:50,640 --> 02:31:54,640
दीपावली में ये होगा वो होगा दीपावली बनाओगे तो ऐसा हो जाएगा वैसा हो

2059
02:31:54,640 --> 02:31:59,040
जाएगा फिर ये लोग बना रहे हैं अच्छा अगर वास्तविकता

2060
02:31:59,040 --> 02:32:03,120
ये है इन्हीं में से पाच द लोग ऐसे होंगे दीपावली में पटाखे फोड़े बना रह

2061
02:32:03,120 --> 02:32:06,400
नहीं

2062
02:32:06,400 --> 02:32:10,440
पाएंगे अरे शिवांश जी अभी मैं एक वीडियो देख रहा था

2063
02:32:10,440 --> 02:32:14,560
इनकी उसमें एक रामचरित मानस का जब व

2064
02:32:14,560 --> 02:32:18,560
नदी पार कर रहे होते हैं भगवान श्री राम माता सीता तो कोई मुनि आते हैं

2065
02:32:18,560 --> 02:32:22,720
कोई मुनि ऋषि एक दोहा है उसम चौपाई

2066
02:32:22,720 --> 02:32:26,880
है उसमें वो आते हैं तो वहां का प्रसंग है पर वहां पर यह

2067
02:32:26,880 --> 02:32:30,960
क्लियर नहीं लिखा कि वो कौन थे क्या थे मतलब उनका उदाहरण दे रखा

2068
02:32:30,960 --> 02:32:35,080
वहां पर प्रसंग दे रखा है तो वो चौपाई दिखा के व लोग

2069
02:32:35,080 --> 02:32:39,280
बोले थे कि ये जो मुनि थे ये कबीर दास जी है ये परमेश्वर

2070
02:32:39,280 --> 02:32:44,120
कबीर दास जी है वीडियो में देखा मैंने अभी बना रखी है पर जस्ट नीचे का आप पढ़ोगे

2071
02:32:44,120 --> 02:32:48,880
चौपाई तो उसम बोल कि जो मुनि थे वो श्री राम जी के चरणों की रज रहे

2072
02:32:48,880 --> 02:32:52,920
और लक्ष्मण जी के पाव छू रहे हैं और सीता माता जी के पांव छू

2073
02:32:52,920 --> 02:32:57,280
इसका मतलब कबीर दास जी पांव छू रहे हैं फिर

2074
02:32:57,280 --> 02:33:01,520
अरे वो पूरा इनका पूरा गोल गल गोल गोल घुमाते रहो

2075
02:33:01,520 --> 02:33:05,720
और व्यक्ति को जो है सद भक्ति कराते रहो वो सद भक्ति

2076
02:33:05,720 --> 02:33:10,040
नहीं वो स भक्ति

2077
02:33:10,040 --> 02:33:14,040
है एक और पोल यही खोल देता हूं वीडियो में यह

2078
02:33:14,040 --> 02:33:18,240
कहते हैं कि वही जो आजय दे रहे थे कि कुवारी गाय का दूध पीते हैं भगवान

2079
02:33:18,240 --> 02:33:22,240
श्री कृष्ण देवी भागवत स्कंद में एक बार बैठे थे कहीं पर ठीक

2080
02:33:22,240 --> 02:33:26,520
है तो उनका मन हुआ दूध पीने का तुरंत ही वह अपनी इच्छा

2081
02:33:26,520 --> 02:33:30,560
शक्ति से सुर भी नाम की एक गौ उत्पन्न करते हैं अब वो विवाहित है

2082
02:33:30,560 --> 02:33:34,960
या कुवारी वैसे तो विवाह होता नहीं कुछ भी उसके साथ उसका बछड़ा भी था

2083
02:33:34,960 --> 02:33:39,160
परंतु उसके साथ उसका कोई सांड आदि नहीं था ठीक है और उसका

2084
02:33:39,160 --> 02:33:43,280
दूध वो पान करते हैं ठीक है और इसी के साथ ये जो सारा

2085
02:33:43,280 --> 02:33:47,680
कार्य है ना फिर आगे बढ़ जाता है यानी कि कुवारी गाय का दूध पीने वाला यदि

2086
02:33:47,680 --> 02:33:51,800
कोई है हमारे ग्रंथों में तो केवल भगवान श्री कृष्ण है इन्होंने

2087
02:33:51,800 --> 02:33:56,000
इतनी भी शर्म नहीं की कि भाई अपना कोई ग्रंथ ही लिख लू मैं अलग से वही से कॉपी

2088
02:33:56,000 --> 02:34:00,240
पेस्ट कर रहे हैं सारा कुछ मतलब की पु इन्होने मिलावट और

2089
02:34:00,240 --> 02:34:04,640
इन्होने मिलावट संक्षिप्तीकरण और संशोधन के नाम पर पेन चलाया है

2090
02:34:04,640 --> 02:34:09,000
पहले से छपे हुए ग्रंथों में तो पूरी की पूरी कहानी कपी

2091
02:34:09,000 --> 02:34:13,200
कॉपी है यह हम अगली लाइव में हो सकता है कि ग्रंथ में ही दिखा दे जैसे

2092
02:34:13,200 --> 02:34:17,360
यहां पर दिखाते हैं अन्य शब्द जो आ रखा

2093
02:34:17,360 --> 02:34:21,520
है उस मंत्र में ऋग्वेद के ना में अध्यन

2094
02:34:21,520 --> 02:34:25,640
शब्द का अर्थ होता है अहिंसक गाय जो मानने योग्य ना

2095
02:34:25,640 --> 02:34:31,640
हो लि अहिंसक गौ थी वो भी लिखा है

2096
02:34:32,360 --> 02:34:37,040
तो अपने मन से कर लिया उन्होने व अपने मन

2097
02:34:37,040 --> 02:34:41,080
मैं आपको बताता हूं एक टस्ट है इसमें उन्होंने क्या किया कि हमारे हरियाणी भाषा में

2098
02:34:41,080 --> 02:34:45,080
बोलते हैं य अध गाय है य अध गाय है मैं यह पूछना चाहता हूं क्या

2099
02:34:45,080 --> 02:34:49,840
संस्कृत और हरियाणा की लोकल भाषा एक ही है क्या

2100
02:34:49,840 --> 02:34:53,920
इनके हिसाब से इनके हिसाब से एक ही है जैसे संस्कृत में

2101
02:34:53,920 --> 02:34:58,000
कुत्ते को स्वान बोला जाता है और उत्तराखंड में पहाड़ी

2102
02:34:58,000 --> 02:35:02,200
भाषा में स्वान का अर्थ होता है सुंदर लोकल भाषा

2103
02:35:02,200 --> 02:35:06,280
में तो हम किसी को स्वान कहे तो क्या संस्कृत

2104
02:35:06,280 --> 02:35:10,720
में स्वान ग तो सुंदर तो नहीं होगा वो क्या होगा स्वान कार् तो कुत्ता है तो

2105
02:35:10,720 --> 02:35:14,960
संस्कृत अलग है लोकल लैंग्वेज अलग है तो दोनों का

2106
02:35:14,960 --> 02:35:19,160
डिफरेंट है उने वीडियो में कह रखा बाबा रामपाल

2107
02:35:19,160 --> 02:35:23,480
जी ने कि हमारे गांव में हम बोलते है कि ये गाय अधेड़

2108
02:35:23,480 --> 02:35:27,520
है अध अधे है एक दूध नहीं देती है तो इसका अर्थ यह हुआ किय

2109
02:35:27,520 --> 02:35:31,560
अध थी बिना ण द्वारा टच करी हुई गाय बोलते हैं

2110
02:35:31,560 --> 02:35:34,400
इसको पर

2111
02:35:34,400 --> 02:35:38,640
अधनोम लिखा अहिंसक गाय ना मान इनसे

2112
02:35:38,640 --> 02:35:40,840
जो है ना इनसे इनका जो एक टैग

2113
02:35:40,840 --> 02:35:44,920
लाइन है कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं तो इनकी कोई बात शास्त्रों से

2114
02:35:44,920 --> 02:35:49,720
तो सिद्धि नहीं होती आप सही कह रहे थे इनकी कोई भी बात

2115
02:35:49,720 --> 02:35:53,800
शास्त्रों से बिना शास्त्र के बाहर जाए बिना शास्त्र के बाहर

2116
02:35:53,800 --> 02:35:57,880
जाए इनकी कोई बात सिद्धि नहीं होती अभी मैं आज आज

2117
02:35:57,880 --> 02:36:01,880
इनके चैनल पर फिर जा रहा हूं एमपी वो वाला जो था पूरा नहीं नाम लूंगा यहां

2118
02:36:01,880 --> 02:36:05,880
पे ठीक है वहा आज मैं फिर जा रहा हूं आज देखिएगा इनका मजा ठीक

2119
02:36:05,880 --> 02:36:09,920
है दरअसल मेरी आंख में कोई प्रॉब्लम हो गई थी इसलिए मैं कल गया नहीं था आज इनका मजा

2120
02:36:09,920 --> 02:36:13,920
और देखिएगा कैसे ये उछलते हैं कोई प्रमाण नहीं किसी बात का धू अब

2121
02:36:13,920 --> 02:36:18,280
मुझे लग रहा आपको ले नहीं शायद य पूछ रहे हैं

2122
02:36:18,280 --> 02:36:22,440
ये पूछ रहे हैं कि आपका धूप का प्रमाण कहां प गोबर का अरे तुम जो ज्योति

2123
02:36:22,440 --> 02:36:26,640
यज्ञ करते हो उसका प्रमाण किस ग्रंथ में है भैया तुम हमारे पास

2124
02:36:26,640 --> 02:36:30,720
तो है मगर बात उसम कई सारे तर्क है क्या इस बात को

2125
02:36:30,720 --> 02:36:34,840
लेकर हमारे और आप में वो हैता दूरी

2126
02:36:34,840 --> 02:36:39,480
क्या इससे आपके धर्म ब्रम पर दिक्कत आ रही है और अत

2127
02:36:39,480 --> 02:36:44,360
हमारे पास तो प्रमाण भी है तुम्हारे पास नहीं मिलेगा तो क्योंकि तुम्हारे पास ग्रंथ नहीं है

2128
02:36:44,360 --> 02:36:48,480
तुमने काट दिया तुम जो ज्योति यज्ञ बता रहे हो

2129
02:36:48,480 --> 02:36:52,520
वो ज्योति यज्ञ गीता में कहां है तुम जो बता रहे हो फोटो की पूजा

2130
02:36:52,520 --> 02:36:56,000
और रामपाल जी के चप्पलों की भी पूजा होती है वो मैं आपको प्रमाण दूंगा अभी

2131
02:36:56,000 --> 02:37:00,120
मैं इसके ऊपर ज्यादा बात नहीं करूंगा क्योंकि अभी मेरे पास प्रमाण लेके आऊंगा मैं चप्पलों

2132
02:37:00,120 --> 02:37:05,080
की पूजा यदि तुम कर चप्पल पूजा किस ग्रंथ में है भाई पहले तुम्हें यह बताना पड़ेगा

2133
02:37:05,080 --> 02:37:09,080
ठीक है आज के आज के एक बार मुख्य विषय पर दोबारा से रोशनी

2134
02:37:09,080 --> 02:37:13,880
डाल दे मुख्य विषय जो है कि तत्वदर्शी

2135
02:37:13,880 --> 02:37:18,800
संत रामपाल नहीं है क्योंकि

2136
02:37:18,800 --> 02:37:23,280
पहली बात 434 के बाद 435 में ही बताया जा रहा है

2137
02:37:23,280 --> 02:37:27,560
कि भगवान श्री कृष्ण को परमात्मा रूप में स्वीकार करना

2138
02:37:27,560 --> 02:37:32,080
ही तत्व ज्ञान है ठीक है

2139
02:37:32,080 --> 02:37:36,200
पहला दूसरा अगर इनके अनुसार वहां नहीं बताया

2140
02:37:36,200 --> 02:37:40,360
गया है 15 एक में बताया गया इनकी बात पकड़ ले तो वहां पर भी

2141
02:37:40,360 --> 02:37:44,480
पेड़ की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी नहीं बल्कि वेदों

2142
02:37:44,480 --> 02:37:49,600
को जानने वाला कहा गया है पर उस

2143
02:37:49,600 --> 02:37:53,800
वा तत्व ज्ञानी है तो शास्त्र में वेदों को जानने वाला उसे

2144
02:37:53,800 --> 02:37:58,120
कहा गया है जो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती अथवा

2145
02:37:58,120 --> 02:38:02,320
गणेश को परमात्मा मानता हो पर यह भी तो देखिए

2146
02:38:02,320 --> 02:38:06,360
संसार रूपी जो वृक्ष है ना जो अश्वत वृक्ष की बात आ रही है वहां पर

2147
02:38:06,360 --> 02:38:10,400
भगवत गीता दव अध्याय 26 में श्लोक में वो बता र कि अश्वत वृक्ष

2148
02:38:10,400 --> 02:38:11,440
मैं ही हूं

2149
02:38:11,440 --> 02:38:15,560
भाई हा देख वहा पर वहा

2150
02:38:15,560 --> 02:38:19,640
पर जो वृक्ष है उसको अविनाशी कहा गया है वृक्ष को

2151
02:38:19,640 --> 02:38:24,440
ये समझिए बकुल वृक्ष को अविनाशी कहा गया है और

2152
02:38:24,440 --> 02:38:28,560
वो उसको भी परमेश्वर रूप कहा गया है वृक्ष को भी परमेश्वर रूप कहा

2153
02:38:28,560 --> 02:38:32,640
गया है ठीक है परमेश्वर रूप वृक्ष अविनाशी

2154
02:38:32,640 --> 02:38:36,640
वृक्ष अब बात ये आती है कि अगर यह जो संसार रूपी वृक्ष है वो

2155
02:38:36,640 --> 02:38:40,760
परमेश्वर रूप है परमेश्वर रूप तो है नहीं क्योंकि कबीर ने तो प्रकट की है

2156
02:38:40,760 --> 02:38:44,920
सृष्टि बिल्कुल कबीर ने तो सृष्टि प्रकट की है और वो अविनाशी

2157
02:38:44,920 --> 02:38:49,480
नहीं है क्योंकि अगर प्रकट की है तो वो लय भी हो सकती है बिल्कुल

2158
02:38:49,480 --> 02:38:53,520
है ना तो वो अविनाशी कहां से हो गई ये बात हो गई दूसरी बात

2159
02:38:53,520 --> 02:38:57,920
कि इनके अनुसार वेद और गीता का ज्ञान पूर्ण नहीं

2160
02:38:57,920 --> 02:39:02,040
है अधूरा है तब भी वो तत्वदर्शी नहीं हुआ वहां उल्टे

2161
02:39:02,040 --> 02:39:06,320
वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देने वाला चौथी बात मतलब छवी

2162
02:39:06,320 --> 02:39:08,480
बात

2163
02:39:08,480 --> 02:39:12,800
कि उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर तो दी मगर

2164
02:39:12,800 --> 02:39:16,840
किसकी व्याख्या सही है और किसकी गलत है रामपाल दास जी की

2165
02:39:16,840 --> 02:39:20,840
ही सही है गीता प्र गोरखपुर की गलत है या अन्य किसी व्यक्ति

2166
02:39:20,840 --> 02:39:24,840
की गलत है यह कहां लिखा है कि केवल नि कौन

2167
02:39:24,840 --> 02:39:26,560
करेगा कौन निर्धारण

2168
02:39:26,560 --> 02:39:30,760
कर रहा है भाई केवल एक बात पकड़ ली तत्वदर्शी

2169
02:39:30,760 --> 02:39:34,880
तत्वदर्शी तत्वदर्शी त पागल हो गए उसम और

2170
02:39:34,880 --> 02:39:39,760
जब जब उसको ढूंढा टॉर्च लेकर के ढूंढने निकले

2171
02:39:39,760 --> 02:39:43,760
तो कुछ नहीं है खोखला है सब आज देखो वो आए प्रमाण पर बात ही

2172
02:39:43,760 --> 02:39:47,880
नहीं कर रहे आज जो रट विद्या होती थी आप देखो धीरे धीरे कैसे बदल रहा

2173
02:39:47,880 --> 02:39:51,960
है मामला जो प्रमाण गीता अध्याय फलाना और श्लोक

2174
02:39:51,960 --> 02:39:56,040
इतना यह भाषा है इनकी गीता अध्याय तना पवित्र

2175
02:39:56,040 --> 02:40:00,520
गीता अध्याय इतना श्लोक क्रमा लोक जी लोक 37 आज

2176
02:40:00,520 --> 02:40:04,600
देखो दो लोग आए दोनों ने प्रमाण पर बात नहीं की एक बात

2177
02:40:04,600 --> 02:40:08,920
परपर की बात एक बात

2178
02:40:08,920 --> 02:40:12,960
जी कि हमारे ग्रंथ के आगे पवित्र लगाते हैं तो बड़ा खुश कम से कम उनका

2179
02:40:12,960 --> 02:40:17,480
अपमान तो नहीं कर रखा जाए अंदर की चीजों के तोड़ मोर के पेश किया है

2180
02:40:17,480 --> 02:40:21,600
अरे पर अंदर य तोड़ मरोड़ है कह तो रहे हैं

2181
02:40:21,600 --> 02:40:25,760
गीता और वेद में अधूरा ज्ञान है खत्म हो गई बात मैं

2182
02:40:25,760 --> 02:40:29,760
मैं ये कह रहा हूं य अंदर वाले ज्ञान को आपने मानना ही नहीं है तो वह

2183
02:40:29,760 --> 02:40:33,840
पवित्र किस आधार पर है यह तो बता दीजिए कम से कम मैंने एक दिन पूछा था

2184
02:40:33,840 --> 02:40:38,000
कि अगर उसम एक भी श्लोक आप कह रहे हो कि वो गलत है तो फिर तो वो

2185
02:40:38,000 --> 02:40:42,040
झूठा हो गया पवित्र नहीं बचा पूछा था मैंने एक दिन

2186
02:40:42,040 --> 02:40:46,280
ये आज तक ये क्यों नहीं बता पाए वो 5 पर वाले श्लोक कौन-कौन

2187
02:40:46,280 --> 02:40:49,360
से हैं

2188
02:40:49,360 --> 02:40:54,120
ये नहीं बताएंगे कि जिस दिन उन्होंने बता दिया तो बाकी के 665

2189
02:40:54,120 --> 02:40:58,240
जो श्लोक है वो उनके लिए काल बन जाएंगे काल बिल्कुल बिल्कुल

2190
02:40:58,240 --> 02:41:02,240
आ आओ आने के लिए पर ये वाली स्ट्रीम

2191
02:41:02,240 --> 02:41:06,400
में अगली हम चर्चा कर लेंगे ये काल वाला फंडा इन्होंने कैसे चोरी किया और कुवारी

2192
02:41:06,400 --> 02:41:10,400
गाय कौन सा है किसका कुवारी गाय का दूध पिया था ये वाली अगली लाइव में

2193
02:41:10,400 --> 02:41:14,560
मेरे हिसाब से चर्चा कर लेनी चाहिए हम नहीं नहीं बिल्कुल बिल्कुल करेंगे उसको करेंगे श्रीश

2194
02:41:14,560 --> 02:41:18,600
जी एक बार मैं ये 15 का जो एक शलोक नंबर एक है इसका थोड़ा निरूपण

2195
02:41:18,600 --> 02:41:21,520
कर दूं मैं

2196
02:41:21,520 --> 02:41:25,800
मैं आपको एक सेकंड रोकूंगा मेरे को एक बात बताइए कबीर जी की भक्ति करनी क्यों है हमें मतलब

2197
02:41:25,800 --> 02:41:30,320
कोई इसका गोल होगा ना क्योंकि शास्त्रों ने कहा है

2198
02:41:30,320 --> 02:41:34,360
और शास्त्र कौन से जिनको हम नहीं मानते मैं एक और बताता हूं इसमें

2199
02:41:34,360 --> 02:41:38,840
क्योंकि उससे हम सतलोक चले जाएंगे और सतलोक में क्या है कोई

2200
02:41:38,840 --> 02:41:42,840
दुराचार नहीं कोई कुछ नहीं कोई कुछ भी नहीं है ठीक है केवल सुख ही सुख है

2201
02:41:42,840 --> 02:41:46,960
वहां इच्छा भी नहीं है पर इच्छा नहीं है तो फिर वो आत्माएं मांगकर

2202
02:41:46,960 --> 02:41:51,200
यहां पर आया कैसे ठीक है ना उसने कहा ना मेरे को आमा और दूसरी

2203
02:41:51,200 --> 02:41:55,200
बात अपनी सगी बहन के साथ व्या विचार करने की उसने कोशिश की यानी कि वहां

2204
02:41:55,200 --> 02:41:57,200
पर व्या विचार भी खुला खुल्लम खुल्ला

2205
02:41:57,200 --> 02:42:01,200
चल रहा है तीसरी बात है वो अन्याय की जगह है मैं खुद से नहीं कह रहा हूं

2206
02:42:01,200 --> 02:42:05,560
मैं इसका प्रमाण देता हूं यदि आज कोई किसी भी स्त्री के साथ दुष्कर्म

2207
02:42:05,560 --> 02:42:09,640
करने की कोशिश करे ठीक है तो क्या न्याय है उसको

2208
02:42:09,640 --> 02:42:14,080
दंड देना या फिर उसको घर से निकाल देना और कहना ये ले एक के 47

2209
02:42:14,080 --> 02:42:18,080
रोज एक लाख लोगों का कत्ल किया कर और ये ले मेरे घर जैसे

2210
02:42:18,080 --> 02:42:22,640
21 घर ले और खुली धन संपदा ले बस मेरे घर से चला जा

2211
02:42:22,640 --> 02:42:26,720
यह न्याय है ये कौन सा न्याय है भाई मेरे को तो समझ नहीं

2212
02:42:26,720 --> 02:42:30,880
आया तो ना वहां पर सुनिए ना वहां पर शाश्वत

2213
02:42:30,880 --> 02:42:34,960
है ना वहां पर जाकर हमारी इच्छाएं पूर्ति होने वाली या खत्म

2214
02:42:34,960 --> 02:42:39,360
होने पली है यानी कि हमें कोई भी किसी प्रकार का मोक्ष नहीं है वहां पर

2215
02:42:39,360 --> 02:42:43,480
ना ही वहां पर हमें यह गारंटी है वहां पर हमारे साथ किसी अन्य के साथ व विचार

2216
02:42:43,480 --> 02:42:47,560
नहीं होगा झूठ ठीक है मोह हर प्रकार का

2217
02:42:47,560 --> 02:42:51,880
लोभ वहां पर है इसलिए वहां तो इनकी

2218
02:42:51,880 --> 02:42:55,920
पुस्तक के अनुसार बता रहा हूं यह बात मैं सृष्टि रचना

2219
02:42:55,920 --> 02:43:00,120
के अनुसार प्रथम पेज पर भी आपको मिल जाएगा तो क्यों करना क्यों है कबीर

2220
02:43:00,120 --> 02:43:04,880
जी की भक्ति को क्या करना सतलोक जाकर बिल्कुल अब

2221
02:43:04,880 --> 02:43:08,880
आप अपनी बात रखिए तो इसका मैं निरूपण कर देता हूं अभी मैं मैं ही

2222
02:43:08,880 --> 02:43:13,240
खुद ही साबित हो जाऊंगा मैं तत्वदर्शी हूं मैं

2223
02:43:13,240 --> 02:43:17,480
ठीक है इसमें लिखा क्या है ये देखिए इन्होने मनरा को

2224
02:43:17,480 --> 02:43:22,120
पेन चलाया मनरा को कबीरा किया है वो भी किसम

2225
02:43:22,120 --> 02:43:26,560
ग्रंथ का नाम है जो गरीब दास वाला जो ग्रंथ है ना उसमें

2226
02:43:26,560 --> 02:43:31,200
मनरा इन्होने कहीं कहा है तो उसको इन्होंने कबीरा कर दिया मनरा

2227
02:43:31,200 --> 02:43:34,880
इतना बड़ा अंतर [हंसी]

2228
02:43:34,880 --> 02:43:39,040
भाई और इनको इनको मेरे हिसाब से ना

2229
02:43:39,040 --> 02:43:44,440
रा शब्द देखते कुछ हो जाता है इनको जहा भी एंड में कहीं र या रा

2230
02:43:44,440 --> 02:43:48,720
मिल जिन्होंने पंजाब को हरियाणा कर दिया और बटाला

2231
02:43:48,720 --> 02:43:52,720
को वाला कर

2232
02:43:52,720 --> 02:43:57,360
दिया तो उसको थोड़ा अभी आज इसको क्लियर करते 15 एक 15 दो 153

2233
02:43:57,360 --> 02:44:01,440
इस तीनों श्लोकों में ये जो पीपल रूपी वृक्ष है ना इसकी

2234
02:44:01,440 --> 02:44:05,440
व्याख्या करी गई है खुद हम पढ़ सकते हैं

2235
02:44:05,440 --> 02:44:09,520
क्या कहा गया पूरे बता रखे हैं उनके एक एक हिस्से को बता रखा है ी इन्हीं श्लोकों

2236
02:44:09,520 --> 02:44:13,920
में ऊपर की और मूल वाले तथा नीचे की और शाखा वाले संसार

2237
02:44:13,920 --> 02:44:18,000
रूपी अस्वत वृक्ष को परभ रूप से अव्यय कहते

2238
02:44:18,000 --> 02:44:22,280
हैं और वेद जिस के पत्ते हैं वेद के पत्ते हैं

2239
02:44:22,280 --> 02:44:26,600
पत्तो को क्या कहा गया है यहां पर वेद उस संसार विर को जो जानता

2240
02:44:26,600 --> 02:44:30,680
व संपूर्ण वेदों को जानने वाला है अब दूसरे श्लोक में क्या बोला

2241
02:44:30,680 --> 02:44:34,800
फिर उनके बारे में बताया उस संस विर की गुण सत्व

2242
02:44:34,800 --> 02:44:39,440
रज और तम के द्वारा बड़ी हुई तथा विषय रूप कोपलो वाली शाखाएं

2243
02:44:39,440 --> 02:44:43,520
अब शाखाओं का निरूपण हो रहा है य पर कि शाखाएं क्या है

2244
02:44:43,520 --> 02:44:47,840
उसके बाद हो रहा नीचे मध्य में ऊपर सब जगह फैली हुई मनुष्य लोक में

2245
02:44:47,840 --> 02:44:51,960
कर्मों के अनुसार मल भी नीचे और ऊपर सभी लोगों में

2246
02:44:51,960 --> 02:44:56,320
व्याप्त हो रहे हैं व्याख्या तो पूरी कर द तो मैं भी

2247
02:44:56,320 --> 02:45:00,360
ले है ना वही तो मैं इनको कहता पहले ही व्याख्या वही

2248
02:45:00,360 --> 02:45:04,160
पर है सारी की

2249
02:45:04,160 --> 02:45:08,360
सारी मुझे तो कॉमेडी याद आती है

2250
02:45:08,360 --> 02:45:12,360
मामा जीी आ रहे मामा जी आ रहे तो पहले चिल्लाने ल मामा जी आ मामा जीी

2251
02:45:12,360 --> 02:45:17,240
आ मामा जीी आ मामा जी आ मामा जी परेशान हो गए चिल्ला क्यों रहे भाई

2252
02:45:17,240 --> 02:45:21,400
मामा जी आ गए और फिर पूछा कि क्या बात है तो उसकी

2253
02:45:21,400 --> 02:45:25,920
जड़ में कोई बात नहीं हम लोग यूं ही चिल्ला रहे जिससे कि मामा जी उस सत्यता

2254
02:45:25,920 --> 02:45:30,280
को ना देख ले जो सत्यता को वह छिपाना चाह रहे हैं मामा जी के

2255
02:45:30,280 --> 02:45:34,280
कारण मामा जी की अनुपस्थिति में घर पर कुछ कार्यक्रम कर

2256
02:45:34,280 --> 02:45:38,280
रहे हैं अब मामा जी का आना हो गया अचानक से तो

2257
02:45:38,280 --> 02:45:42,520
चिल्लाने लगे मामा जी आ गए मामा जी आ गए मामा जी आ गए खूब चिल्लाने

2258
02:45:42,520 --> 02:45:47,040
लगे मामा जी वो इसलिए चिल्लाने लगे कि उस चिल्ला चिल्लाने

2259
02:45:47,040 --> 02:45:51,400
में व्यक्ति य भ जाए कि मुझे यहां पर आकर के थोड़ा

2260
02:45:51,400 --> 02:45:55,600
अपने स्थिर आंखों से कुछ देखने का प्रयास करना चाहिए

2261
02:45:55,600 --> 02:45:59,680
उनके चिल्लाने पर ध्यान चला जाए और यह केवल

2262
02:45:59,680 --> 02:46:04,280
यह नहीं करते हैं यह कई तंत्र ऐसे हैं जो करते हैं जैसे

2263
02:46:04,280 --> 02:46:10,280
मायावा

2264
02:46:12,880 --> 02:46:16,920
मायावादी भाषा में कुछ एक दो चीज व रट ली मायावा माया बाद

2265
02:46:16,920 --> 02:46:20,360
करते रहो

2266
02:46:20,360 --> 02:46:25,160
एक बाछा आपसे जहां विकार हो वहां क्या मुक्ति

2267
02:46:25,160 --> 02:46:29,320
है मुक्ति पूर्ण मोक्ष संभव है जहां विकार हो जहां इच्छाएं

2268
02:46:29,320 --> 02:46:33,800
हो वो तो इनके अनुसार है भाई जहां से व्यक्ति आ रहा है

2269
02:46:33,800 --> 02:46:37,960
विकार है तभी तो आ रहा है व

2270
02:46:37,960 --> 02:46:42,440
नहीं अब संत रामपाल जी कहते हैं कि वहां तुम्हें जलेबी फल फ्रूट

2271
02:46:42,440 --> 02:46:46,760
यह सब चीज खाने को मिलेंगे तुम्हारा परिवार होगा तो यहां से कौन से बंधनों

2272
02:46:46,760 --> 02:46:50,800
से छूट के जा रहे हो तुम परिवार यही बंधनों से तो छूट के

2273
02:46:50,800 --> 02:46:55,040
जा रहे हो अरे अगर जीभ की लालसा खत्म नहीं हो पा रही

2274
02:46:55,040 --> 02:46:59,120
तो कौन सी मुक्ति है बताइए ना व्या विचार वहां हो रहा है और खुलेआम हो रहा

2275
02:46:59,120 --> 02:47:03,400
है व्या विचार करने वाले को इनाम दिया जा रहा है ठीक है

2276
02:47:03,400 --> 02:47:07,560
इच्छाएं की भरी है एक लोग

2277
02:47:07,560 --> 02:47:11,760
से कह रहा मेरा काम नहीं बन रहा मेरे को 21 लोग दीजिए ठीक है मतलब वो जैसे होता

2278
02:47:11,760 --> 02:47:15,760
है ना कि मेरा वन बीएच के से काम नहीं चल रहा मेरे को थ बीएच

2279
02:47:15,760 --> 02:47:20,080
के चाहिए तो वो क्या है इच्छा है ना वो बकार है जो इन्होने

2280
02:47:20,080 --> 02:47:24,240
मुनार को जो अभी ग्रंथ दिखाया था ना जहा मुनार को इन्होंने

2281
02:47:24,240 --> 02:47:28,080
कबीर वो कर दिया कबीरा पन चला के वो गुरु ग्रंथ

2282
02:47:28,080 --> 02:47:32,640
साहिब था हा हा हां गुरु ग्रंथ जी का था ये वाला

2283
02:47:32,640 --> 02:47:36,640
मुझे याद नहीं था उसका नाम क्या है

2284
02:47:36,640 --> 02:47:40,920
ये मुझे ऐसा क्यों लग रहा आने वाले समय में सारे लोग इकट्ठे

2285
02:47:40,920 --> 02:47:45,120
होकर इनकी खबर लेंगे अरे

2286
02:47:45,120 --> 02:47:49,160
शिवांश भा भाई कल एक बहुत गंदा शब्द बोला है गुरु

2287
02:47:49,160 --> 02:47:53,560
आदि गुरु शंकराचार्य के लिए एक व्यक्ति ने लाइव स्ट्रीम में आपने सुना होगा

2288
02:47:53,560 --> 02:47:57,760
वहा फसबुक पर फेसबुक पर नहीं लाइव डिबेट

2289
02:47:57,760 --> 02:48:02,040
प नहीं हमने हमने सुनी नहीं ना उनकी क्या थी हा

2290
02:48:02,040 --> 02:48:06,160
मैं आपको क्लिप भेजूंगा वह इतने गंदे शब्द बोले की वह

2291
02:48:06,160 --> 02:48:10,160
आदि गुरु शंकराचार्य के बाल नौ चेंगे उनके दाढ़ी नौच इस तरह

2292
02:48:10,160 --> 02:48:13,120
की भाषा

2293
02:48:13,120 --> 02:48:17,720
बोली ये भाषा अच्छी है क्या किसी गुरु के लिए

2294
02:48:17,720 --> 02:48:21,760
बोलना जेल धाम अच्छा है तो फिर जेल धाम के द्वारा प्रतिपादित होने

2295
02:48:21,760 --> 02:48:25,440
वाली भाषा है क्या

2296
02:48:25,440 --> 02:48:28,240
करोगे

2297
02:48:28,240 --> 02:48:32,320
जेल वहा यही सब होता है बाल नोचे जाते हैं दाढ़ी खींची

2298
02:48:32,320 --> 02:48:37,400
जाती है यह वो फिर वो सोचते हैं कि पता नहीं सबके साथ य होना अनिवार्य

2299
02:48:37,400 --> 02:48:41,520
है अमित आपके साथ करके गए वहां करके गए वहा

2300
02:48:41,520 --> 02:48:45,680
यह बोलने की ज्ञान से ज्ञान काटा जाता है और जो हमारे हेमंत दास जी इतने

2301
02:48:45,680 --> 02:48:49,760
बुजुर्ग हैं उनको यह पता नहीं कि ज्ञान से ज्ञान नहीं काटा जाता है अज्ञान

2302
02:48:49,760 --> 02:48:55,240
को ज्ञान से काटा जाता है ज्ञान से ज्ञान को बो जाता है

2303
02:48:55,240 --> 02:48:59,480
हां नहीं अगर एक बात और है ना अगर तुम अपने ज्ञान

2304
02:48:59,480 --> 02:49:03,720
से ज्ञान तो वो मौखिक ही बोल रहे हैं ठीक है शास्त्रों को तो बीच में लाते नहीं

2305
02:49:03,720 --> 02:49:07,800
अब ज्ञान से ही ज्ञान को काटना है तो शास्त्रों की बात क्यों करनी तुम छोड़ दो ना उस

2306
02:49:07,800 --> 02:49:12,120
बा तुम बोलो लॉजिक से लॉजिक को काटेंगे हम हम

2307
02:49:12,120 --> 02:49:16,240
फ लॉजिक में फिर भाग जाएंगे जब मैं पूछूंगा वो पहाड़ बन सकता

2308
02:49:16,240 --> 02:49:20,320
है कि नहीं फिर भाग जाएंगे भाई प्रमाण

2309
02:49:20,320 --> 02:49:24,400
में तो तुम थोड़ा दूर थोड़ा बहुत देर तक घमा घुमाने का प्रयास भी कर

2310
02:49:24,400 --> 02:49:28,240
सकते हो मगर लॉजिक पर आ जाओगे तो वो कहीं टिकेगा ही नहीं किसी

2311
02:49:28,240 --> 02:49:32,320
भी हाल में पाच 10 मिनट मुश्किल से अगर लॉजिक की बात

2312
02:49:32,320 --> 02:49:36,640
होगी तो मुश्किल से पाच 10 मिनट टि कोगे बहुत

2313
02:49:36,640 --> 02:49:40,720
देर लगाओगे कहने में मंत दास जी ने तो 10 12 साल हो गए नाम दीक्षा लिए

2314
02:49:40,720 --> 02:49:44,920
उने तो समझाना चाहिए था बेटा ज्ञान से ज्ञान नहीं काटा जाता अज्ञान को ज्ञान

2315
02:49:44,920 --> 02:49:49,240
से काटा जाता है ज्ञान प हेमंत दास जी हो

2316
02:49:49,240 --> 02:49:53,240
हेमंत दास जी को अपनी वो

2317
02:49:53,240 --> 02:49:57,760
जो शक्ल है जिसको उनके ही व्यक्ति ने कहा कि बंदर जैसी शक्ल लेकर के

2318
02:49:57,760 --> 02:50:02,120
आप लोग बोलते हैं मत करो इस तरह की ज्ञान चर्चा तो पहले

2319
02:50:02,120 --> 02:50:06,280
उन चीजों को काटना तो सीखे तब तो व जानते हो कि ज्ञान से ज्ञान को नहीं काटा

2320
02:50:06,280 --> 02:50:10,720
जाता है वह तो ऐसा लगता है

2321
02:50:10,720 --> 02:50:14,920
जैसे कि उनके कानों में आवाज थोड़ा मतलब जैसे

2322
02:50:14,920 --> 02:50:18,920
उनको कम सुनाई देता है तो व इस तरह

2323
02:50:18,920 --> 02:50:23,440
वहां बात करते हैं कु

2324
02:50:23,440 --> 02:50:27,600
जब मेरी चर्चा हो रही थी वो हेमंत दास जो है चलो बड़े हैं हमसे

2325
02:50:27,600 --> 02:50:31,760
वो व्यक्ति नहीं बोला वो वो नहीं बोला उसके आगे जितने भा बो

2326
02:50:31,760 --> 02:50:35,800
थे वो बंदा पता नहीं क्या फोन प स्क्रोल किए जा रहा है किए जा रहा है किए जा रहा

2327
02:50:35,800 --> 02:50:40,120
है कोई एक डेढ़ घंटा वो बेचारा सुन्न होकर बैठा र कभी छोटी सी चू

2328
02:50:40,120 --> 02:50:43,880
करके फिर वापस बैठ जाते ऐसे ऐसे ब

2329
02:50:43,880 --> 02:50:47,920
एक सभ्यता है कि अगर दो व्यक्ति बात कर रहे हैं तो तीसरा व्यक्ति चुप होता है कुछ नहीं बोलते

2330
02:50:47,920 --> 02:50:52,240
हैं मै वो कर वहा क्या हो ये हमारी बात है आप देखि

2331
02:50:52,240 --> 02:50:56,800
कितने बंदे थे एक भी बंदा फालतू की चूचा नहीं कर रहा था बीच में हमने

2332
02:50:56,800 --> 02:51:01,000
हमने इतनी बार कह दिया कि भाई आप बुजुर्ग है बड़े हैं

2333
02:51:01,000 --> 02:51:05,600
या जो भी मतलब जिस तरह से भी आप सम्मान आप हमसे फोन करिए

2334
02:51:05,600 --> 02:51:09,600
हमारी एक विवत एक चर्चा डिसाइड हो कि हम लोग इस जगह पर आने वाले हैं

2335
02:51:09,600 --> 02:51:14,000
और हम लोग यथोचित रूप से चर्चा करेंगे तो सम्मान के तरीके से सुनना

2336
02:51:14,000 --> 02:51:18,080
समझना किसी को लेना ही नहीं है वहां पर भर भर के अपमान

2337
02:51:18,080 --> 02:51:22,360
हो रहा आद गुरु शंकराचार्य जी का सबका वैसे इनके वो

2338
02:51:22,360 --> 02:51:26,360
हालाकि वो भी क्या सिखाएंगे वो राम जी का अपमान कर चुके शिव जी का अपमान कर

2339
02:51:26,360 --> 02:51:30,600
चुके हो गया ना बाप इसका ऐसे बात करते हैं फिर

2340
02:51:30,600 --> 02:51:34,600
भी वो कहीं कहीं पर उन्होंने कहा कि वो सन्यासी है संत है संतों की हम

2341
02:51:34,600 --> 02:51:38,600
ऐसे रक्षा करते हैं ऐसे सम्मान करते हैं कहीं कहीं पर कहा

2342
02:51:38,600 --> 02:51:43,600
तो ये उनकी बात मान कर के अगर सम्मान का ध्यान रखे तब क्या बात

2343
02:51:43,600 --> 02:51:47,600
है फिर ऐसे ऐसे चैनल पर जाकर के चर्चा थोड़ी

2344
02:51:47,600 --> 02:51:52,480
ना होगी जहा इस तरह वो किया जाता है

2345
02:51:52,480 --> 02:51:56,640
अनादर भया अगर आपको अभी भी कह रहा हूं किसी को भी अगर

2346
02:51:56,640 --> 02:51:59,600
वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है

2347
02:51:59,600 --> 02:52:03,640
वह हमसे संपर्क कर सकता है यहां ना आए तो

2348
02:52:03,640 --> 02:52:07,920
हम लोग बीच का कोई चैनल ढूंढेंगे बीच की कोई जगह ढूंढेंगे

2349
02:52:07,920 --> 02:52:12,120
वहां पर बात करेंगे यदि रामपाल दास

2350
02:52:12,120 --> 02:52:16,880
जी के फॉलोअर्स में से कोई भी ऐसा है जिनको

2351
02:52:16,880 --> 02:52:21,040
ऐसा लगता है कि वो रामपाल दास जी के पक्ष को मजबूती

2352
02:52:21,040 --> 02:52:25,560
के साथ रख सकते हैं वही आगे आए अन्य कोई ना

2353
02:52:25,560 --> 02:52:29,680
आए अन्य कोई भी ना

2354
02:52:29,680 --> 02:52:33,680
आए हमारा ये विनम्र निवेदन है क्योंकि आप लोग

2355
02:52:33,680 --> 02:52:37,880
आएंगे तो गलत तरीके से यहां पर उनका पक्ष रखेंगे

2356
02:52:37,880 --> 02:52:42,480
संत रामपाल दास जी का और आप उनके लिए और हार्मफुल यानी कि

2357
02:52:42,480 --> 02:52:47,000
हानिकारक सिद्ध होंगे ठीक है

2358
02:52:47,000 --> 02:52:51,000
एक बार मैं आपको बात चाहता हूं छोटी सी एक बार मैं अपना छोटा सा

2359
02:52:51,000 --> 02:52:57,000
एक्सपीरियंस शेयर करना चाहता हूं मैं ना एक बार

2360
02:53:18,600 --> 02:53:22,600
दो रामपाल वाले एक दूसरे को इतनी मतलब वो गालियां देने लगे

2361
02:53:22,600 --> 02:53:26,720
जो सुन के भी बंदे को शर्म आ जाए दो रामपाल वाले आपस में ही गालि गलोज

2362
02:53:26,720 --> 02:53:30,880
करना शुरू हो गए ठीक है अच्छा मल इका इनका छोटा सा

2363
02:53:30,880 --> 02:53:34,880
झूठ पकड़ा मैंने तो एक दूसरे में ऐसे य घमासान करने लग पड़े ये

2364
02:53:34,880 --> 02:53:39,280
है वो है वजह सिर्फ इतनी सी थी मैंने इनको बस इतनी बात पूछी थी कि ये जो सारे

2365
02:53:39,280 --> 02:53:43,560
नीचे सुन रहे हैं कोई उस वक्त 253 लोग थे वहां पे मैंने कहा ये सारे

2366
02:53:43,560 --> 02:53:47,640
मतलब कि नए-नए लोग हैं जैसे बच्चे होते हैं वैसे वैसे कुछ हम ग्रंथ

2367
02:53:47,640 --> 02:53:51,800
आदि पढ़ते हैं य यहां पर ठीक है उस बंदे को ये नहीं हजम हुआ

2368
02:53:51,800 --> 02:53:56,080
वो पता नहीं रामायण की कोई कहानी सुनाया मैंने कहा ये रामायण पढ़ी हुई इसका रेफरेंस

2369
02:53:56,080 --> 02:54:00,160
दे दो सबके सामने खोल लेते हैं ठीक है तो वो जो बंदा था

2370
02:54:00,160 --> 02:54:04,200
एक उसने कोई गाली गलोज की पहले तो उसने शराब पी हुई थी फिर दूसरा बोलने लगा भैया

2371
02:54:04,200 --> 02:54:08,400
मेरे को एक बार ऊपर लो हो अब मेरे लिए दिक्कत ये होगी कभी जो मेरा फोन

2372
02:54:08,400 --> 02:54:12,400
है उसमें कभी-कभी टच की प्रॉब्लम हो जाती थी पहला फोन था मैं लाइव काट भी नहीं पा

2373
02:54:12,400 --> 02:54:16,440
रहा हूं और ऐसी ऐसी गाली गलोज कर रहे हैं एक

2374
02:54:16,440 --> 02:54:20,520
दूसरे को मैं मैंने बड़ी मुश्किल से अपना फोन साइड पर होल्ड

2375
02:54:20,520 --> 02:54:24,840
करके किसी तरीके से स्विच ऑफ किया उसको इतने पागल भी हो जाते

2376
02:54:24,840 --> 02:54:28,840
समय पर जब इनकी बातें आप अभी

2377
02:54:28,840 --> 02:54:33,360
भी मैं एक बार रिपीट कर दूं आज का हमारा मुख्य टॉपिक है रामपाल

2378
02:54:33,360 --> 02:54:33,860
दास

2379
02:54:33,720 --> 02:54:37,760
जी हालाकि किसी और टॉपिक पर भी आ सकते हैं मगर हम लोग आज

2380
02:54:37,760 --> 02:54:41,840
मुख्य रूप से बात कर रहे हैं कि रामपाल

2381
02:54:41,840 --> 02:54:45,880
दास जी तत्वदर्शी कैसे सिद्ध होते हैं यह बताएं

2382
02:54:45,880 --> 02:54:50,160
कैसे सिद्ध होते हैं भगवत गीता के अनुसार

2383
02:54:50,160 --> 02:54:54,280
रामपाल दास जी तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होते आपके अपने कबीर

2384
02:54:54,280 --> 02:54:58,440
वाणी गरीब दास वाणी या और कुछ ग्रंथ और उन ग्रंथों

2385
02:54:58,440 --> 02:55:03,240
में भी पेन चलाने के बाद अगर वो होते हो तो होते हो बात अलग है

2386
02:55:03,240 --> 02:55:07,240
मगर रामपाल दास जी भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध

2387
02:55:07,240 --> 02:55:11,440
नहीं होते अगर इसको हम सूत्रा क्मक शैली में समझे तो पहली

2388
02:55:11,440 --> 02:55:15,480
बात जहां पर चार चौ में तत्वदर्शी की बात की है उसी के अगले

2389
02:55:15,480 --> 02:55:19,720
श्लोक में बताया है भगवान श्री कृष्ण को को ही परमात्मा

2390
02:55:19,720 --> 02:55:23,880
दृष्टि से समझ लेना समत्व दृष्टि से सभी प्राणियों को

2391
02:55:23,880 --> 02:55:27,960
उनमें और उनको ही सब में समदर्शी बन जाना इसे तत्व

2392
02:55:27,960 --> 02:55:32,040
ज्ञान कहा गया है दूसरी बात भगवान कृष्ण को

2393
02:55:32,040 --> 02:55:36,280
ही 10 तीन के अनुसार अविनाशी अजन्मा समझ लेने वाला

2394
02:55:36,280 --> 02:55:40,280
परमात्मा समझ लेने वाला तत्व ज्ञान कहा गया है तीसरी बात

2395
02:55:40,280 --> 02:55:44,520
अगर आप 15 एक में उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को ही तत्वदर्शी समझते

2396
02:55:44,520 --> 02:55:48,840
हैं तो पहली बात उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को वेदों

2397
02:55:48,840 --> 02:55:53,440
को जानने वाला कहा गया है ना कि तत्वदर्शी कहा गया है

2398
02:55:53,440 --> 02:55:57,680
दूसरी बात उल्टे वृक्ष के रूप में कोई भी व्याख्या

2399
02:55:57,680 --> 02:56:01,680
कर सकता है करी है तो फिर एक रामपाल दास जी

2400
02:56:01,680 --> 02:56:05,920
को ही क्यों तत्वदर्शी माना जाए यह सवाल उठ खड़ा हो जाएगा

2401
02:56:05,920 --> 02:56:09,920
वहीं पर एक और बात उठ खड़ी हो जाती है कि

2402
02:56:09,920 --> 02:56:13,960
आप ही के अनुसार जो वेदों का ज्ञान है वो तात्विक ज्ञान नहीं

2403
02:56:13,960 --> 02:56:18,440
है पूर्ण ज्ञान नहीं है अधूरा ज्ञान है तो फिर उनको जानने वाला

2404
02:56:18,440 --> 02:56:23,600
आप ही के अनुसार तत्व ज्ञानी सिद्ध नहीं होता

2405
02:56:23,600 --> 02:56:27,800
और अगर वेदों को जानने वाला ही तत्व ज्ञानी है तो वेदों

2406
02:56:27,800 --> 02:56:31,800
के जानने वाले कहे गए हैं वेदों के द्वारा विष्णु

2407
02:56:31,800 --> 02:56:36,480
को जाना जाता है कहां लिखा

2408
02:56:36,480 --> 02:56:41,440
है वेदों के द्वारा विष्णु को

2409
02:56:41,440 --> 02:56:45,480
ब्राह्मण मैं बता रहा हूं भागवत में लिखा है वेदों के द्वारा श्री हरि को ही

2410
02:56:45,480 --> 02:56:49,760
जाना जाता है कल हमने जो पिछली लाइन 15

2411
02:56:49,760 --> 02:56:54,000
15 15 15 हा पिछली

2412
02:56:54,000 --> 02:56:58,680
लाइव में भी यही प्रमाण मिले थे वेदों के द्वारा विष्णु को जाना जाता है

2413
02:56:58,680 --> 02:57:02,800
और श्रीमद् भागवत दो पा 15 में भी है कि

2414
02:57:02,800 --> 02:57:04,360
वेद नारायण

2415
02:57:04,360 --> 02:57:08,360
के परायण है ठीक है और इसी

2416
02:57:08,360 --> 02:57:12,960
प्रकार वेदों के द्वारा शिव को जाना जाता है शिव पुराण का है

2417
02:57:12,960 --> 02:57:17,000
लिखा हुआ है वेदों के द्वारा शिव को जाना जाता है

2418
02:57:17,000 --> 02:57:21,200
और देवी भागवत में तो स्पष्टता लिखा है कि मां

2419
02:57:21,200 --> 02:57:25,320
भगवती को परम ब्रह्म के रूप में जान लेना ही जान लेने

2420
02:57:25,320 --> 02:57:29,480
वाला ही वेदों को जानने वाला है तो वेदों

2421
02:57:29,480 --> 02:57:33,480
को जानने वाला

2422
02:57:33,480 --> 02:57:38,400
यदि वेदों को जानने वाला यदि

2423
02:57:38,400 --> 02:57:42,720
अ वो

2424
02:57:42,720 --> 02:57:46,920
है तत्व ज्ञानी हां वेदों को जानने वाला

2425
02:57:46,920 --> 02:57:50,960
यदि तत्वदर्शी है तो वेदों को जानने वाला वह है जो

2426
02:57:50,960 --> 02:57:55,080
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार

2427
02:57:55,080 --> 02:57:59,240
करता हो कृष्ण को परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार करता हो तो कहीं

2428
02:57:59,240 --> 02:58:03,320
से भी पकड़ लीजिए तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हो गए रामपाल इस पिक्चर में कैसे

2429
02:58:03,320 --> 02:58:07,440
आ गए कबीर दास जी इसमें कैसे आ गए वह सबके

2430
02:58:07,440 --> 02:58:11,840
लिए आपको जो है इस अधूरे वांगम को वैदिक वांगम को छोड़ना

2431
02:58:11,840 --> 02:58:15,960
पड़ेगा और जब आप छोड़ेंगे तो आप वेदों का विरोध करने

2432
02:58:15,960 --> 02:58:20,240
वाले के रूप में वेद निंदक होने के रूप में

2433
02:58:20,240 --> 02:58:24,400
गैर सनातनी हो जाएंगे हिंदू हो जाएंगे वेदों को पवित्र ग्रंथ

2434
02:58:24,400 --> 02:58:28,400
मानने वाला नहीं रहेंगे वेदों के नाम पर आप लोगों

2435
02:58:28,400 --> 02:58:32,000
को मूर्ख नहीं बता पाए बना

2436
02:58:32,000 --> 02:58:36,560
पाएंगे कुलदीप राज जी ऊपर आ जाइए और

2437
02:58:36,560 --> 02:58:40,800
बात करिए त तत्वज्ञान मेरे पास फेसबुक का लॉग

2438
02:58:40,800 --> 02:58:45,560
इन नहीं है ट्राई कर लेता हूं शं

2439
02:58:45,560 --> 02:58:49,800
भाई एक में इनका एक ये रहता है कि सिर्फ भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति

2440
02:58:49,800 --> 02:58:53,840
होगी पर गीता में परमाण बता रहा हूं कई

2441
02:58:53,840 --> 02:58:59,560
मनुष्य ध्यान योग के द्वारा कई मनुष्य सांख्य योग के

2442
02:58:59,560 --> 02:59:03,760
द्वारा कर्म योग के द्वारा कर्मयोग के द्वारा अपने आप में

2443
02:59:03,760 --> 02:59:07,920
अपने आप से अपने आप में परमान तत्व का अनुभव

2444
02:59:07,920 --> 02:59:11,960
करते हैं परमा तत्व का अनुभव करते हैं और फिर आगे क्या लिखा 2 लोक

2445
02:59:11,960 --> 02:59:16,080
में 13 का 2 में लिखा 25

2446
02:59:16,080 --> 02:59:20,080
दूसरे मनुष्य इस प्रकार ध्यान योग सांख्य योग कर्म योग

2447
02:59:20,080 --> 02:59:24,080
आदि साधन को नहीं जानते हैं पर दूसरों को जीवन मुक्त

2448
02:59:24,080 --> 02:59:28,200
महापुरुषों को सुनकर ही उपासना करते हैं ऐसे में व सुनने

2449
02:59:28,200 --> 02:59:32,320
के अनुसार आचरण करने वाले मनुष्य भी मृत्यु को तर जाते हैं मतलब

2450
02:59:32,320 --> 02:59:38,320
कि जैसा जैसा महापुरुषों ने किया तू भी उनको देखते हुए

2451
02:59:41,640 --> 02:59:45,880
कर अब मैं आपको कुछ बातें बता दूं

2452
02:59:45,880 --> 02:59:51,880
जो कही गई है

2453
02:59:52,560 --> 02:59:56,560
देखिए इसमें य दिक्कत आती है टीआर पहाड़ी जी जब भी हम इनको कोई श्लोक

2454
02:59:56,560 --> 03:00:00,880
का प्रमाण देंगे ना कि देखो य तो एक आ गया तोय ये कहेंगे

2455
03:00:00,880 --> 03:00:05,280
कि भैया वो काल ने कह दिया गलत जन तो इसलिए पहले इनसे डिसाइड

2456
03:00:05,280 --> 03:00:09,480
करना होगा कि 665 लोक व हमें बता दो जिसमें से हम आपको प्रमाण

2457
03:00:09,480 --> 03:00:13,520
दे यह फस गए इनको कहना चाहिए था गीता का गीता

2458
03:00:13,520 --> 03:00:18,000
का 80 पर ज्ञान गलत है तब तो इनकी 20 पर में बात चल पाती

2459
03:00:18,000 --> 03:00:22,040
बिल्कुल अब ये 5 पर बोल के फसे हुए हैं

2460
03:00:22,040 --> 03:00:27,720
बिल्कुल

2461
03:00:27,720 --> 03:00:31,560
आवाज आ रही है

2462
03:00:31,560 --> 03:00:37,560
क्या बस कम आ रही है कम आ रही है

2463
03:00:38,040 --> 03:00:42,120
ना आवाज ऐसे सुनाई नहीं देगी आपके पास

2464
03:00:42,120 --> 03:00:46,160
यदि हो किसी के पास तो

2465
03:00:46,160 --> 03:00:50,400
आपको गोविंद गोविंद जी आपको फ पर एक लिंक भेज देते हैं वो वीडियो

2466
03:00:50,400 --> 03:00:55,240
आप जरा वीडियो की आवाज सुना दीजिए कोई बात नहीं

2467
03:00:55,240 --> 03:00:59,360
ा पर भेजेंगे इ पे ं प ं प भेज

2468
03:00:59,360 --> 03:01:05,360
दीजिए इनको गोविंद गुरुकुल जी को

2469
03:01:05,920 --> 03:01:09,960
लिंक तब तक भई अगर कोई आना चाहता है तत्वदर्शी

2470
03:01:09,960 --> 03:01:15,960
के रूप में

2471
03:01:16,560 --> 03:01:21,280
अ भई भ एक बात समझ में नहीं आती कि जी राघ

2472
03:01:21,280 --> 03:01:25,640
जी जब तक जैसे हम लोग नॉर्मल हिंद है तो हम लोग जैसे जब प्रैक्टिस

2473
03:01:25,640 --> 03:01:29,680
कुछ भी करते हैं तो मतलब ज्यादा से ज्यादा हम लोग इतने कटर नहीं होते

2474
03:01:29,680 --> 03:01:34,000
अपने उसके लिए तो आवाज बत कम आ रही है आपकी

2475
03:01:34,000 --> 03:01:37,200
एक

2476
03:01:37,200 --> 03:01:41,360
मिनट जी अब आवाज आ रही आ

2477
03:01:41,360 --> 03:01:45,520
तो रही है मगर वो आपका मुझे लग रहा है प्राकृतिक ही धीमी आवाज है हम लोगों

2478
03:01:45,520 --> 03:01:48,720
की बहुत तेज है

2479
03:01:48,720 --> 03:01:52,920
अच्छा उसके हो सकता है इसकी वजह से थोड़ा सा यहां पर है तो थोड़ा सा कम

2480
03:01:52,920 --> 03:01:56,920
जैसे ये क्वेश्चन था मेरा कि जैसे अगर नॉर्मल जैसे हम लोग प्रैक्टिस

2481
03:01:56,920 --> 03:02:01,040
करते हैं तो उसमें मतलब कोई इतना ऐसे कट्टर नहीं होता कोई

2482
03:02:01,040 --> 03:02:05,440
बस नॉर्मल ही हम लोग त्यौहार में कर लेते हैं या कुछ कर लेते हैं लेकिन

2483
03:02:05,440 --> 03:02:09,640
मतलब जितने भी ऐसे कल्ट होते हैं चाहे कोई भी हो चाहे

2484
03:02:09,640 --> 03:02:13,680
य इनके हो रामपाल के होहे कोई ये लोग भैया इतने ऐसे कैसे कट्टर

2485
03:02:13,680 --> 03:02:19,240
हो जाते हैं अपने उसके लिए मतलब छोड़ने को तैयार ही नहीं होते

2486
03:02:19,240 --> 03:02:24,200
इसका कारण तो यही है कि इनको डर

2487
03:02:24,200 --> 03:02:28,560
डर की भक्ति सिखाई जाती है इसलिए र भय काल

2488
03:02:28,560 --> 03:02:32,560
हैता है अगर तुमने विश्वास किया तो ये हो जाएगा

2489
03:02:32,560 --> 03:02:36,720
वो हो जाएगा और यहां पर क्या है भय की भक्ति नहीं होती है

2490
03:02:36,720 --> 03:02:41,040
यहां पर आपको जो है संतुष्ट कराया जाएगा अथातो धर्म जिज्ञासा

2491
03:02:41,040 --> 03:02:45,240
अथातो ब्रह्म जिज्ञासा अब वहां पर जो है भय की भक्ति

2492
03:02:45,240 --> 03:02:49,600
कराई जाती है तुम अगर ये नहीं करोगे तो ये हो जाएगा यह करोगे तो यह हो जाएगा

2493
03:02:49,600 --> 03:02:53,800
उसी पर जोर दिया जाता है हालांकि यहां पर भी गलत चीजें

2494
03:02:53,800 --> 03:02:57,800
करने पर सजाए है मगर धर्म व्यक्ति को

2495
03:02:57,800 --> 03:03:01,920
धार्मिक बनाने से पहले वो व्याख्या देना व्यर्थ होता है तो

2496
03:03:01,920 --> 03:03:06,600
यहां पर एक सस्टेंड एक तरीका होता है कि आप इस पर चलिए पहले संतुष्ट

2497
03:03:06,600 --> 03:03:10,680
करिए पहले सामने वाले की अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रम जिज्ञासा को

2498
03:03:10,680 --> 03:03:14,720
शांत करिए उसके बाद बताइए कि नरक कब मिलेगा कब नहीं मिलेगा क्या है

2499
03:03:14,720 --> 03:03:18,760
क्या नहीं है मगर इनके य पर वो तत्व ज्ञान व जिज्ञासा है वो शांत

2500
03:03:18,760 --> 03:03:22,880
हो ना हो मर पहले आदमी को वो भय भय के रास्ते पर डाल

2501
03:03:22,880 --> 03:03:27,160
दिया जाएगा कि अगर मेरी कही हुई बात पर तुमने डाउट किया तो काल आ जाएगा और

2502
03:03:27,160 --> 03:03:31,160
काल तुमको यह कर देगा और काल वो तुम्हें ये कर देगा देखिए

2503
03:03:31,160 --> 03:03:35,920
गोविंद जी आपको प्राप्त हुआ क्या

2504
03:03:35,920 --> 03:03:40,840
लिंक मेरे को नहीं प्राप्त हुआ अभी

2505
03:03:40,840 --> 03:03:44,880
चलिए तब तक हम इनको देख ले जरा नमन दास जी को नमन

2506
03:03:44,880 --> 03:03:49,080
दास जी आप अपना कैमरा ऑन करें तब हम आपको ऊपर

2507
03:03:49,080 --> 03:03:53,160
ले और और मैं राघव जी से एक मिनट बात करना चाहूंगा तब

2508
03:03:53,160 --> 03:03:57,520
तक जी जी बो क्या होता है कि पुरुषार्थ

2509
03:03:57,520 --> 03:04:02,120
जहां भी नहीं जिस भी समाज में पुरुषार्थ नहीं होता है ना ठीक है

2510
03:04:02,120 --> 03:04:06,200
वो ऐसा ही हो जाता है जैसा लूटने के लिए अब कोई व्यक्ति खड़ा ही है तो क्या

2511
03:04:06,200 --> 03:04:10,440
करेगा है ना इसलिए पुरुषार्थ जो है वह सबसे मेन

2512
03:04:10,440 --> 03:04:14,720
पॉइंट है आपको थोड़ा सा पुरुषार्थ यह करना है कि कुछ भी हो

2513
03:04:14,720 --> 03:04:18,720
चाहे कोई भी जो बेसिक ग्रंथ है ना यदि आप उसको भी पढ़ोगे

2514
03:04:18,720 --> 03:04:22,880
तो धीरे-धीरे आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होने लगता है ठीक है

2515
03:04:22,880 --> 03:04:26,960
अबने एक भी छोटा सा ग्रंथ पढ़ लिया ना कोई भी हो वो ठीक है

2516
03:04:26,960 --> 03:04:31,280
तो आपको अपनी जिम्मेदारी का पता चलने लगता है लेकिन मेरे को भी समाज को कहीं ना कहीं

2517
03:04:31,280 --> 03:04:35,320
सही दिशा पर लेकर जाना है ठीक है यहां पर जितने लोग बैठे हैं सबने कभी ना

2518
03:04:35,320 --> 03:04:39,480
कभी कोई ऐसी बात सुनी या तो श्रवण किया या तो उसको पढ़ा

2519
03:04:39,480 --> 03:04:43,560
तो पता चला मेरी कुछ जिम्मेदारी है संसार के लिए मैं केवल बैठकर

2520
03:04:43,560 --> 03:04:48,720
आरोप प्रत्यारोप नहीं कर सकता हूं क्योंकि हम किनकी संताने हैं आपको पता है

2521
03:04:48,720 --> 03:04:51,760
हमारे भगवान चमत्कार से नहीं बने

2522
03:04:51,760 --> 03:04:55,800
जंगल जंगल फिर करर पुरुषार्थ दिखाया है समाज को भगवान श्री कृष्ण

2523
03:04:55,800 --> 03:05:00,040
भी कह रहे हैं मेरे को कोई कर्म करने की आवश्यकता नहीं फिर भी यहां खड़ा होकर कर्म

2524
03:05:00,040 --> 03:05:04,040
इसलिए कर रहा हूं क्योंकि यदि आज मैं कर्म नहीं करूंगा यह मेरा फॉलो

2525
03:05:04,040 --> 03:05:08,320
करने वाले लोग बिल्कुल कर्मों से हीन हो जाएंगे आप समझ रहे बात मैं क्या कह रहा हूं

2526
03:05:08,320 --> 03:05:12,360
जी यद्यपि उनको कर्म करने की आवश्यकता नहीं भी थी फिर भी कर्म करके दिखा रहे हैं

2527
03:05:12,360 --> 03:05:16,440
ठीक है तो दो चीजें हमेशा याद रखिएगा एक

2528
03:05:16,440 --> 03:05:20,520
कि बिना पुरुषार्थ कि हमें भगवान भी हासिल नहीं हुए है ना भगवान चाहते

2529
03:05:20,520 --> 03:05:24,560
अगर तो कहते कि भाई मैं तो नहीं जा रहा जंगल मेरा तो हक बनता है मैं तो युवराज

2530
03:05:24,560 --> 03:05:28,640
हूं तो क्या हो जाता है ठीक है भगवान तो भगवान लेकिन फिर

2531
03:05:28,640 --> 03:05:32,800
भी उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की और लोगों को बताया मैं जब महल

2532
03:05:32,800 --> 03:05:36,840
में बैठा हूं ना तब भी मैं उतना ही त्यागी हूं जितना कि मैं वनों में

2533
03:05:36,840 --> 03:05:41,040
सब भटकते समय त्यागी हूं ठीक है तो इसलिए पुरुषार्थ सबसे

2534
03:05:41,040 --> 03:05:45,040
पहली बात है किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठीक है ये ये थोड़ा

2535
03:05:45,040 --> 03:05:49,200
सा दर्शन की बात है ठीक है इसको पुथ छीन लिया जाता

2536
03:05:49,200 --> 03:05:53,280
है बिल्कुल और डर दे दिया जाता है

2537
03:05:53,280 --> 03:05:57,320
सेव और सेव और जलेबी के नाम पर पुरुषार्थ छीन

2538
03:05:57,320 --> 03:06:01,320
लिया जाता है और भैया भैया इतनी मतलब वो लोग

2539
03:06:01,320 --> 03:06:05,480
कट्टरता से काम करते हैं कि मतलब जैसे इस कन को देख लीजिए तो मतलब वो

2540
03:06:05,480 --> 03:06:06,840
सुबह से निकल जाते हैं उनके

2541
03:06:06,840 --> 03:06:10,840
ब्रह्मचारी तो रात को आते हैं घर ऐसे गीता उता बेज के वैसे इन

2542
03:06:10,840 --> 03:06:15,280
लोगों के भी मतलब दिन भर उसके उसके काम में लगे रहते हैं मतलब

2543
03:06:15,280 --> 03:06:19,320
इसी का एडवांस रूप वो है स्कन

2544
03:06:19,320 --> 03:06:23,360
और यह थोड़ा सा पिछड़ा रूप है हा जी ये

2545
03:06:23,360 --> 03:06:27,400
आ गया हमारे सामने और मैं आपको यकीन के साथ में कह

2546
03:06:27,400 --> 03:06:31,400
सकता हूं भाईयो और बहनों भले वर्तमान में उनको

2547
03:06:31,400 --> 03:06:35,440
गुरु जी का ज्ञान नहीं है जो जगत वाले हैं जो ज्ञान चर्चा कर रहे हैं संत

2548
03:06:35,440 --> 03:06:39,560
रामपाल जी के भक्तों के साथ में व शिवांश नाम का लड़का वर्तमान

2549
03:06:39,560 --> 03:06:43,560
में हो सकता है उसको ज्ञान नहीं है उसको संत रामपाल जी को समझ नहीं

2550
03:06:43,560 --> 03:06:47,720
पा रहा है लेकिन वो लड़का वर्तमान में

2551
03:06:47,720 --> 03:06:51,840
रामपाल जी के भक्तों से ज्ञान मार्ग में लाख गुना अच्छा है

2552
03:06:51,840 --> 03:06:56,360
उस व्यक्ति को भले ही शास्त्रों की शास्त्र अनुकूल भक्ति का ज्ञान नहीं है

2553
03:06:56,360 --> 03:07:00,560
लेकिन उसको जितना ज्ञान है जितना उसने अपने गुरुओं से सीखा

2554
03:07:00,560 --> 03:07:04,880
है जो शास्त्र विरुद्ध ज्ञान उसने अपने गुरु से सीखा है ना

2555
03:07:04,880 --> 03:07:09,240
उस शास्त्र विरुद्ध ज्ञान में भी वह संत रामपाल

2556
03:07:09,240 --> 03:07:14,040
जी के भक्तों से लाख गुना बुद्धिमान है लाख गुना बुद्धिमान

2557
03:07:14,040 --> 03:07:18,400
उसके बोलने का तरीका उसके सवाल करने का तरीका उसके जवाब देने का

2558
03:07:18,400 --> 03:07:21,840
तरीका तो भाई आप लोग नहीं जीत पाओगे क्यों फालतू

2559
03:07:21,840 --> 03:07:26,040
में अपनी बेज्जती करवाते हो अपना वोह बंदर जैसा थोबड़ा लेकर तुम वहां

2560
03:07:26,040 --> 03:07:30,080
पर बैठ जाते हो मान बड़ाई में आके और

2561
03:07:30,080 --> 03:07:34,720
जब तुमसे वह सवाल करता है वह काटे के सवाल करता है

2562
03:07:34,720 --> 03:07:39,000
वह बिल्कुल एक्यूरेट सवाल करता है क्योंकि वह जिज्ञासु है

2563
03:07:39,000 --> 03:07:45,000
उसको शास्त्र अनुकूल भक्ति का कुछ नहीं पता

2564
03:07:48,760 --> 03:07:53,040
ये जो वीडियो है इसमें और बात और और देख लीजिएगा आगे

2565
03:07:53,040 --> 03:07:57,360
परंपरा वाले दश्य को भी इन्होंने बताया

2566
03:07:57,360 --> 03:08:01,400
और यहां इन्होंने इस व्यक्ति ने जो यह पवन दास

2567
03:08:01,400 --> 03:08:05,680
है इसने बोला कि

2568
03:08:05,680 --> 03:08:10,480
ये हमने जो प्रश्न किया था दीक्षा वाले मामले में

2569
03:08:10,480 --> 03:08:14,920
तो सामने वाले का मुह इतना सा हो गया था यह सब चीजें

2570
03:08:14,920 --> 03:08:19,680
यह आपके रामपाल दास के फॉलोअर ने और शायद

2571
03:08:19,680 --> 03:08:23,680
संभवत आपके जो है यह सब उसने कही है आप

2572
03:08:23,680 --> 03:08:27,800
लोगों को तो यहां पर जितने भी लोग ये कमेंट करते रहे ना अब तक कि

2573
03:08:27,800 --> 03:08:31,960
देखो देखो ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है आपको उनके विरुद्ध कमेंट करने चाहिए

2574
03:08:31,960 --> 03:08:36,640
आप समझना चाहिए कि आप कम से

2575
03:08:36,640 --> 03:08:37,640
कम

2576
03:08:37,640 --> 03:08:41,840
सामर्थ्य लेकर आए यहां पर ऐसे ही ना चले आए आभी दिन में देखो कैसा

2577
03:08:41,840 --> 03:08:46,080
एक आदमी आया था तो ये यह सब चीजें

2578
03:08:46,080 --> 03:08:50,400
है आप लोग ध्यान रखिए कि कहीं ऐसा ना हो कि संत रामपाल

2579
03:08:50,400 --> 03:08:55,000
जो अपने आप को कहते हैं जो इस समय जेल धाम में है कथा कथित

2580
03:08:55,000 --> 03:08:59,200
संत वो उनका पक्ष की रक्षा करने

2581
03:08:59,200 --> 03:09:04,240
के चक्कर में कहीं उनकी मटिया मेट तो नहीं करवा रहे हो

2582
03:09:04,240 --> 03:09:08,280
बिल्कुल यह बात है हरि दसों

2583
03:09:08,280 --> 03:09:12,320
हम आप ऊपर आ जाइए आपको कोई बात करनी हो तो जय

2584
03:09:12,320 --> 03:09:18,040
श्री राम सभी को छोटी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाए

2585
03:09:18,040 --> 03:09:23,280
आना त तत्वदर्शी सिद्ध करने के लिए तो आ सकता

2586
03:09:23,280 --> 03:09:27,320
है जितने भी हमारे सनातनी भाई हैं इनका एक

2587
03:09:27,320 --> 03:09:31,600
नॉर्मल क्वेश्चन रहता है कि ओम तत्सत य क्या है ये मंत्र

2588
03:09:31,600 --> 03:09:35,760
हैय सांकेतिक है ओम तत्सत का व्याख्या मैं कर देता हूं

2589
03:09:35,760 --> 03:09:39,920
इसी से गीता से ही देखो 23 श्लोक में

2590
03:09:39,920 --> 03:09:44,000
ओम तत्सत ये तीन प्रकार के परमात्मा का नाम है ये तीन नहीं है

2591
03:09:44,000 --> 03:09:48,240
ये एक ही है पर इनके तीन प्रकार के नाम है तो ओम

2592
03:09:48,240 --> 03:09:52,520
से क्या होता है इनका एक नॉर्मल सा क्वेश्चन और रहता है जनली की

2593
03:09:52,520 --> 03:09:56,760
हमारे वेदों में जो गायत्री मंत्र है उसके आगे ओम नहीं लगाया य ओम

2594
03:09:56,760 --> 03:10:00,920
क्यों लगाया बोलते पाखंड है ओम पाखंड नहीं हमारे जो ऋषि मुनि

2595
03:10:00,920 --> 03:10:04,920
थे वह कोई अज्ञानी नहीं थे वह बहुत सामर्थ थे

2596
03:10:04,920 --> 03:10:09,120
तो 24 लोक में बोला है इसलिए वैदिक सिद्धांतों को मानने वाले

2597
03:10:09,120 --> 03:10:13,320
पुरुषों की शास्त्र विधि से निहित यज्ञ दान और तप

2598
03:10:13,320 --> 03:10:17,320
रूप क्रियाए सदा ओम इस परमात्मा के नाम के उच्चारण कर

2599
03:10:17,320 --> 03:10:21,360
करके ही आरंभ होती है इसलिए गायत्री मंत्र के

2600
03:10:21,360 --> 03:10:25,560
आगे ओम लगाया जाता है जितने भी वेद हमारे चार वेद है चार वेद

2601
03:10:25,560 --> 03:10:29,760
सिर्फ गायत्री मंत्र के आगे जब वेदों का उच्चारण होता है मंत्रों का तो सबसे

2602
03:10:29,760 --> 03:10:33,440
पहले ओम लगाया जाता है उसके आगे उसके बाद पीछे की

2603
03:10:33,440 --> 03:10:37,560
मंत्र बोले जाते हैं जी

2604
03:10:37,560 --> 03:10:41,600
तपस्या जब उसम आही गया कि तपस्या जो है प्रणव से

2605
03:10:41,600 --> 03:10:45,640
प्रारंभ होनी चाहिए तो फिर तपस्या

2606
03:10:45,640 --> 03:10:49,800
प्र जो है प्र से प्रारंभ होगी और

2607
03:10:49,800 --> 03:10:53,840
एक अगर इसको नॉर्मल एक सामान्य भाषा में कहे तो

2608
03:10:53,840 --> 03:10:58,360
गायत्री मंत्र कर किसके लिए रहे हैं परम अक्षर ब्रह्म के लिए

2609
03:10:58,360 --> 03:11:03,320
वो एक अक्षर कौन सा है प्रणव सिंपल प्रणव सिंपल

2610
03:11:03,320 --> 03:11:07,560
अब तत तत से क्या क्या होता है त कहां

2611
03:11:07,560 --> 03:11:11,640
प्रयोग किया जाता है 24 25 लोक में पढ़ना तत नाम से

2612
03:11:11,640 --> 03:11:15,680
कहे जाने वाले परमात्मा के लिए ही सब कुछ है ऐसा मानकर मुक्ति

2613
03:11:15,680 --> 03:11:19,880
चाहने वाले मनुष्य द्वारा बल्क इच्छा रहित होकर अनेक प्रकार

2614
03:11:19,880 --> 03:11:25,880
के यज्ञ और तप रूप क्रियाए तथा दान रूप क्रियाए की

2615
03:11:26,000 --> 03:11:30,080
जाती ठीक है मतलब तब से क्या होता है कि

2616
03:11:30,080 --> 03:11:34,120
फल को त्याग देना और कर्म करना जैसे कहीं

2617
03:11:34,120 --> 03:11:38,200
भंडारा किया फल की इच्छा के बिना यह क्या है तप रूप क्रिया

2618
03:11:38,200 --> 03:11:42,520
एक तरफ से दान रूप क्रियाए अब सत से क्या होता है देखो 26

2619
03:11:42,520 --> 03:11:46,560
लोक में हे पार्थ ऐसा यह परमात्मा का नाम

2620
03:11:46,560 --> 03:11:50,760
सत्ता और श्रेष्ठ भाव में प्रयोग किया जाता है तथा प्रसन

2621
03:11:50,760 --> 03:11:55,520
कार्य कर्म सत शब्द जोड़ा जाता है जैसे प्रस कार्य कौन से हमारे

2622
03:11:55,520 --> 03:11:59,520
जने विवाह संस्कार तो वहां सत शब्द जोड़ा

2623
03:11:59,520 --> 03:12:03,920
जाता है मंत्रों के आगे तो यह इसकी व्याख्या कर रखी है य ओम तत्सत

2624
03:12:03,920 --> 03:12:08,360
यह कोई सांकेतिक नहीं है संकेत उसके नीचे दे रखे हैं 25

2625
03:12:08,360 --> 03:12:12,360
23 में तीन प्रकार के नाम बता रखे परमात्मा के

2626
03:12:12,360 --> 03:12:16,800
24 में ओम के महिमा बता रखी है 25 में तत का 26

2627
03:12:16,800 --> 03:12:20,680
में की महिमा बता रखी है पढ़

2628
03:12:20,680 --> 03:12:24,880
लीजिएगा अरे भाई हम लोग जो संध्या वंदन

2629
03:12:24,880 --> 03:12:29,000
करते हैं उसमें लास्ट में जब ब्रह्म को सब कुछ

2630
03:12:29,000 --> 03:12:33,160
अर्पण करना होता है तो यह जिसने जो भी

2631
03:12:33,160 --> 03:12:37,360
संध्या वंदन करता होगा वो वहां पर इनका उपयोग करता

2632
03:12:37,360 --> 03:12:41,160
है इसमें आता है प्रणव तत्सत श्री ब्रह्मा

2633
03:12:41,160 --> 03:12:45,360
परम स्तु जी ये नित्य कर्म पूजा प्रकाश रखी

2634
03:12:45,360 --> 03:12:49,720
है मेरे पास नित्य कर्म पूजा प्रकाश इसमें संध्या

2635
03:12:49,720 --> 03:12:54,360
बंदन की विधि है संध्या बंदन की विधि में

2636
03:12:54,360 --> 03:12:58,360
अनेकानेक जगह आपको तसत श्री

2637
03:12:58,360 --> 03:13:02,560
ब्रह्माम मस्तु यह मिलेगा आपको एक जगह दिखा देता

2638
03:13:02,560 --> 03:13:08,560
हूं देवी भागवत पुराण में देवी जी इसका खुलासा कर रहे हैं

2639
03:13:09,080 --> 03:13:13,200
पढ़िए ये देखिए यह

2640
03:13:13,200 --> 03:13:17,440
जब लास्ट में गायत्री जप हो गया है

2641
03:13:17,440 --> 03:13:21,480
उसके बाद गायत्री का आवान होता है गायत्री

2642
03:13:21,480 --> 03:13:25,480
सबसे पहले जी और जब

2643
03:13:25,480 --> 03:13:29,680
बाद में जब मंत्र जाप हो जाता है तो उसके बाद गायत्री माता

2644
03:13:29,680 --> 03:13:33,880
को वापस विसर्जन किया जाता है तो

2645
03:13:33,880 --> 03:13:38,240
विसर्जन करते समय तसत श्री ब्रह मापम मस्तु

2646
03:13:38,240 --> 03:13:42,280
ये होता है और इसी प्रकार से अगर हम

2647
03:13:42,280 --> 03:13:48,040
य मतलब अनेकानेक जगह जहां पर संपन्न हो जाता है जो आपने

2648
03:13:48,040 --> 03:13:52,600
कार्य जो किया है अनुष्ठान जो किया व संपन्न हो जाता है तो लास्ट में

2649
03:13:52,600 --> 03:13:56,800
वो ब्रह्म को अर्पण करने के नाम पर ये होता है

2650
03:13:56,800 --> 03:14:00,920
सब कुछ तुमको अर्पण जैसे सदाचार हुआ सत्कर्म हुआ

2651
03:14:00,920 --> 03:14:05,080
ये सत के साथ जड़े जाते हैं

2652
03:14:05,080 --> 03:14:09,480
हा तो अब दोबारा य क्वेश्चन नहीं आना चाहिए कि

2653
03:14:09,480 --> 03:14:13,560
कि गायत्री मंत्र के आगे ओम क्यों लगाया जाता है

2654
03:14:13,560 --> 03:14:17,960
हा को अभी कोई हो

2655
03:14:17,960 --> 03:14:22,240
मैं फिर बता रहा हूं आप आए और तत्वदर्शी सिद्ध करें

2656
03:14:22,240 --> 03:14:26,200
4 34 15 एक

2657
03:14:26,200 --> 03:14:32,200
से वरना कहना बंद करो तत्वदर्शी

2658
03:14:33,240 --> 03:14:37,400
रामपाल है कोई अन्य किसी बात

2659
03:14:37,400 --> 03:14:42,160
के लिए आना चाहता हो तो वह आ जाए हरि दसो अम

2660
03:14:42,160 --> 03:14:47,880
जी आ जाइए माता जी ने निष्ठा पूर्वक

2661
03:14:47,880 --> 03:14:52,360
आपको पान कराया है सेहतमंद दुग्ध

2662
03:14:52,360 --> 03:14:56,720
से आपका पोषण किया है आप आ

2663
03:14:56,720 --> 03:15:00,760
जाएं अन्यथा अनर गर्ल बातें

2664
03:15:00,760 --> 03:15:05,280
व्यर्थ बातें करना कायरता का तक

2665
03:15:05,280 --> 03:15:09,680
है अब यह मेरे ख्याल से गंगा

2666
03:15:09,680 --> 03:15:14,520
माया नदी के पवित्र जल के ऊपर ये लोग

2667
03:15:14,520 --> 03:15:18,680
करने दो उससे अच्छी बात है एक एक करके हम लोग यहां पर लो भाई प्रमाणों

2668
03:15:18,680 --> 03:15:22,680
की बछ लो मैं पहले ही बता देता हूं हमारे वेदों में ही कहा गया

2669
03:15:22,680 --> 03:15:26,800
है कि जो हे जल जल तुम्हारा जो

2670
03:15:26,800 --> 03:15:30,960
जल है नदिया तुम्हारा जो जल है वह पवित्र है तुम्हारे उसम स्नान करने

2671
03:15:30,960 --> 03:15:35,080
से हमारे पाप सारे नष्ट हो जाते हैं वेदों में ही लिखा है अगर यह स्ट्रीम तुम

2672
03:15:35,080 --> 03:15:39,080
चलाओगे तो हम परमाण देंगे वेदों सेही वहां साफ

2673
03:15:39,080 --> 03:15:42,780
साफ लिखा है गंगा यमुना सरस्वती

2674
03:15:42,780 --> 03:15:47,160
[संगीत] नदियां वेदों में ही

2675
03:15:47,160 --> 03:15:48,400
इतने परमाण दिखा देंगे

2676
03:15:48,400 --> 03:15:52,600
कि शायद पूरा एक दिन बीत जाएगा साफसाफ

2677
03:15:52,600 --> 03:15:56,760
लिखा है कि हे जल तुम्हारे स्नान से तुम्हारे स्नान करने

2678
03:15:56,760 --> 03:16:01,560
से हमारे सारे पाप नष्ट हो जाते

2679
03:16:01,560 --> 03:16:06,040
हैं भैया आपका इतना डर हो गया इनम कि अ जो उनकी

2680
03:16:06,040 --> 03:16:10,440
लाइव स्ट्रीम होती है उसमें इसमें पीछे ग्रीन पर्दा लगा के करते हैं

2681
03:16:10,440 --> 03:16:14,440
तो वो उसमें इनके जो फॉलोवर्स होते हैं वो जाके आपके क्वेश्चन पूछते हैं

2682
03:16:14,440 --> 03:16:18,640
जो आप यहां पर करते हैं क्वेश्चन तो वो क्या करते हैं वो उनको बाहर निकाल

2683
03:16:18,640 --> 03:16:21,360
देते हैं फिर आंसर

2684
03:16:21,360 --> 03:16:25,560
देते पूछना चाहूंगा अध्यन का अर्थ आप स्ट्रीम चलाएंगे

2685
03:16:25,560 --> 03:16:30,000
अन्या का अर्थ संस्कृत शब्द को से मुझे यह दिखा दो

2686
03:16:30,000 --> 03:16:34,040
कि कुवारी गाय होता है यह दिखा दो मैं रामपाल जी के चरण

2687
03:16:34,040 --> 03:16:36,640
छू

2688
03:16:36,640 --> 03:16:41,040
लूंगा संस्कृत शब्द कोश से दिखा

2689
03:16:41,040 --> 03:16:45,080
दो नैरेटिव इनके तोड़े हैं वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर

2690
03:16:45,080 --> 03:16:49,080
भगवान नहीं है पहली बात दूसरी

2691
03:16:49,080 --> 03:16:53,200
बात कि वेदों का ज्ञान बोलने वाला

2692
03:16:53,200 --> 03:16:57,400
कोई श्री कृष्ण से भिन्न कोई काल

2693
03:16:57,400 --> 03:17:01,600
है यह दूसरी बात है यह सिद्ध नहीं कर पाए वह काल स्वयं

2694
03:17:01,600 --> 03:17:03,480
श्री कृष्ण ही बोल रहे हैं वही परमेश्वर

2695
03:17:03,480 --> 03:17:07,840
है वही काल और आज हम लोगों ने बात की है कि

2696
03:17:07,840 --> 03:17:12,520
क्या रामपाल दास कोई तत्वदर्शी संत

2697
03:17:12,520 --> 03:17:16,920
है भगवत गीता वेद के अनुसार पुराणों के अनुसार

2698
03:17:16,920 --> 03:17:21,160
नहीं है ठीक है हरि

2699
03:17:21,160 --> 03:17:25,920
दसोम जी आपको जो प्रश्न करने हैं आप ऊपर आगे कर सकते हैं

2700
03:17:25,920 --> 03:17:29,960
आपका कहना है कि अभी वह समय नहीं आया है तो इसका अर्थ है कि अभी तक आपने

2701
03:17:29,960 --> 03:17:34,600
वही दूध पिया है जो आप कमेंट के माध्यम से कुछ कर सके

2702
03:17:34,600 --> 03:17:38,720
उतना ही पुष्टि वर्तक दूध पिया है आपने जो

2703
03:17:38,720 --> 03:17:42,920
आप कमेंट में अनर गर्ल बातें कर सके इतना ही साहस प्रदान किया है माता

2704
03:17:42,920 --> 03:17:47,320
जी ने आपको इसीलिए आप ऐसा कर पा रहे हैं खर

2705
03:17:47,320 --> 03:17:52,240
जिस दिन ऐसा कहीं से प्राप्त हो जाए एनर्जी वगैरा

2706
03:17:52,240 --> 03:17:58,240
प्रोटीन फैट और कार्ब तो आइएगा हमने सामने से बात

2707
03:17:58,520 --> 03:18:02,520
करेंगे गुरु गरीब दास जी है उन्हीं के

2708
03:18:02,520 --> 03:18:06,600
उन्होने अपने उसम लिख रखा है श्री सदगुरु ग्रंथ साहिब को य मानते हैं उन्हीं से य रिफरेंस

2709
03:18:06,600 --> 03:18:11,200
देते हैं ठीक उसम इन्होंने श्री

2710
03:18:11,200 --> 03:18:15,320
कृष्ण जी को परब्रह्म परमात्मा कहा है इसमें एक स्रोत लिख रखा

2711
03:18:15,320 --> 03:18:19,640
है उन्होने अ कृषण उसमें लिख रखा है हरि हरि

2712
03:18:19,640 --> 03:18:24,160
हरि हरि परब्रह्म परमेश्वर पुरुषोत्तम परमानंद नंद

2713
03:18:24,160 --> 03:18:28,640
आनंद कंद यशोदा नंद यशोदा नंद कौन

2714
03:18:28,640 --> 03:18:32,880
श्री कृष्ण भगवान श्री गोविंद दीन नाथ दुख

2715
03:18:32,880 --> 03:18:37,600
दुख दुख दंद फंदन गोविंद कौन श्री कृष्ण

2716
03:18:37,600 --> 03:18:41,600
भगवान जगन्नाथन काटन दुख दंद फंदन करुणामय

2717
03:18:41,600 --> 03:18:45,880
कमल नैन कृपा सिं सर्व मोहन मुरलीधर मुरलीधर

2718
03:18:45,880 --> 03:18:50,600
हमारे कबीर जी बजाते नहीं थे नहीं बजाते थे

2719
03:18:50,600 --> 03:18:54,840
मुरली दर सर्व सोहन मेघ श्याम मूर्ति मन भावन

2720
03:18:54,840 --> 03:18:58,880
माधव मुकुंद रामरूप राधा और गोवर्धन कर

2721
03:18:58,880 --> 03:19:02,080
पर वम

2722
03:19:02,080 --> 03:19:06,120
रंगनाथम हसी केस गुण गावत भया आनंद

2723
03:19:06,120 --> 03:19:10,920
जन दास गरीब जस सुनी सुनी लागी रही अंतरी धुनी

2724
03:19:10,920 --> 03:19:15,040
वासुदेव वनमाली बजप प्रभु दीन बंधु बृज

2725
03:19:15,040 --> 03:19:19,160
पति कौन श केश मैं उनकी स्तुति गा रहा

2726
03:19:19,160 --> 03:19:23,680
बोल गरीब दास खुद बोल रहे जन दास गरीब जन

2727
03:19:23,680 --> 03:19:28,080
सुनी लागी रही अंतरी धुनि वासुदेव वनमाली

2728
03:19:28,080 --> 03:19:32,080
बृज पति प्रभु दीन बंधु

2729
03:19:32,080 --> 03:19:35,680
यह मानेंगे

2730
03:19:35,680 --> 03:19:41,040
जीने प्राइवेट में मैसेज भेजा उसको अगर आप रीड कर सके एक बार

2731
03:19:41,040 --> 03:19:47,040
तो प्राइवेट चैट में हाजी प्राइवेट चैट में

2732
03:19:50,880 --> 03:19:54,880
यह कहां से प्रकाशित है परम पूज्य श्री

2733
03:19:54,880 --> 03:19:59,000
1008 श्री सतगुरु देव ब्रह्म सागर जी भूरी वाले

2734
03:19:59,000 --> 03:20:03,120
महाराज के परम शिष्य पूज्य श्री 108 श्री स्वामी संत

2735
03:20:03,120 --> 03:20:07,200
राम महाराज जी के शुभ संकल्प अनुसार उनके उत्तराधिकारी

2736
03:20:07,200 --> 03:20:11,360
परम शिष्य श्री 108 श्री स्वामी चरणदास ब्रह्मचारी

2737
03:20:11,360 --> 03:20:15,600
जी महाराज के आशीर्वाद से उनके चरण रज शिष्य स्वामी दर्शन

2738
03:20:15,600 --> 03:20:19,600
दास ने सर्वजन सुखाय हेतु इसका डिजिटल स्वरूप में

2739
03:20:19,600 --> 03:20:22,720
प्रकाशन करवाया

2740
03:20:22,720 --> 03:20:26,920
है श्री सतगुरु ग्रंथ साहिब देखे

2741
03:20:26,920 --> 03:20:29,240
तो

2742
03:20:29,240 --> 03:20:33,520
दिखेगा इनकी गरीब दास य इन्हीं से प्रमाण

2743
03:20:33,520 --> 03:20:37,920
देते हैं पर उसमें तो य अथ कृष्ण स्रोत लिखा है उसमें पूरा उनको पारब्रह्म

2744
03:20:37,920 --> 03:20:42,600
परमेश्वर बताया है जी

2745
03:20:42,600 --> 03:20:46,760
तो मैंर कह रहा हूं कि आए भैया

2746
03:20:46,760 --> 03:20:51,120
कोई और बात करें वो क्या 9 एकन

2747
03:20:51,120 --> 03:20:55,360
बोलते हो भाई अब जब पूछा जा रहा है 9 एकन तो अब आ नहीं रहे

2748
03:20:55,360 --> 03:21:00,760
हो कहां गए सतलोक वासी कहां गए बरवाला

2749
03:21:00,760 --> 03:21:06,400
वाले कहां गए एलसीडी पर दीक्षा लेने

2750
03:21:06,400 --> 03:21:11,520
वाले कहां गए चैलेंज करने वाले

2751
03:21:11,520 --> 03:21:16,760
कि उन्होंने फलाने टाइम पर चैलेंज किया था मेरे को तो अभी हो गए करीब

2752
03:21:16,760 --> 03:21:22,760
साल हो गया कब से बोल रहा हूं आओ भैया समझा दो

2753
03:21:23,680 --> 03:21:27,960
हां अब क्यों नहीं आ रहे लगता है बात मान ली आपने

2754
03:21:27,960 --> 03:21:31,960
अपने भाई की मेरी भी मान ली और उस भाई की मान ली

2755
03:21:31,960 --> 03:21:36,080
जो बता रहा है के बंदर जैसा बिल्ली जैसा थोपड़ा लेकर मत जाया

2756
03:21:36,080 --> 03:21:40,360
करो बोलना नहीं आता है पूछना नहीं आता है सुनना

2757
03:21:40,360 --> 03:21:45,360
नहीं आता है बताना नहीं आता है

2758
03:21:45,360 --> 03:21:49,520
हां कहां गए

2759
03:21:49,520 --> 03:21:53,600
भाई चलिए ठीक है इस लाइव को हम लोग आज समाप्त करते हैं

2760
03:21:53,600 --> 03:21:58,280
अब इस पर ध्यान रखिएगा तीन नैरेटिव हमने तोड़ लिए हैं

2761
03:21:58,280 --> 03:22:02,720
हर कोई इसको पकड़े क्या है पहला वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान

2762
03:22:02,720 --> 03:22:06,880
नहीं है दूसरा कि गीता

2763
03:22:06,880 --> 03:22:11,080
का ज्ञान श्री कृष्ण से भिन्न किसी काल ने नहीं दिया बल्कि स्वयं श्री

2764
03:22:11,080 --> 03:22:15,120
कृष्ण ने ही दिया है उन्होंने ही स्वयं को कहीं पर काल कहा है

2765
03:22:15,120 --> 03:22:19,320
और वही परमेश्वर उन्होने स्वयं को कहीं परमेश्वर और

2766
03:22:19,320 --> 03:22:23,560
आज तीसरा नैरेटिव इनका क्या तोड़ा है कि भैया

2767
03:22:23,560 --> 03:22:28,480
आप बिना शास्त्रों के बाहर जाए शास्त्रोक्त तरीके से सिद्ध करिए

2768
03:22:28,480 --> 03:22:32,600
मनमुक तरीके से नहीं शास्त्रों के आधार पर सिद्ध करें

2769
03:22:32,600 --> 03:22:35,920
रामपाल दास जी तत्वदर्शी

2770
03:22:35,920 --> 03:22:38,720
है अब अगला इका कुछ और

2771
03:22:38,720 --> 03:22:42,760
लेकर के हम लोग आएंगे और आज एक बात और है कि

2772
03:22:42,760 --> 03:22:46,920
प्रभु श्री राम ने रामायण में कहा था लक्ष्मण

2773
03:22:46,920 --> 03:22:51,440
जी से कि मृत्यु हो जाने के बाद

2774
03:22:51,440 --> 03:22:55,480
जो भी बीच में नसता होती है मतभेद होता है वो सब खत्म हो

2775
03:22:55,480 --> 03:23:00,040
जाते हैं तो आज जो है

2776
03:23:00,040 --> 03:23:04,080
दयानंद जी की जो आर्य समाज रूपी जो संस्था है

2777
03:23:04,080 --> 03:23:08,400
उसके प्रवर्तक है उनकी आज पुण्य तिथि है

2778
03:23:08,400 --> 03:23:12,680
तो हम उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए इस लाइव स्ट्रीम को

2779
03:23:12,680 --> 03:23:16,800
आगे बढ़ा रहे हैं सम्मान इसीलिए

2780
03:23:16,800 --> 03:23:21,120
कि वेदों में प्रमाण बुद्धि तो थी उनकी तो उस

2781
03:23:21,120 --> 03:23:25,160
रूप में वह हमारे भाई हैं आर्य समाज को भी फॉलो करने वाले हमारे भाई

2782
03:23:25,160 --> 03:23:29,280
है जिसकी भी वेदों में प्रमाण बुद्धि हमारे भाई है व

2783
03:23:29,280 --> 03:23:33,360
आपस की बात है निपट वो होता रहेगा कि किसका क्या मत है किसका

2784
03:23:33,360 --> 03:23:37,560
क्या नहीं है तो एक बात यह रही कि वेदों में प्रमाण

2785
03:23:37,560 --> 03:23:42,760
बुद्धि मात्र जिसकी है उसके कारण हमारे भाई है और

2786
03:23:42,760 --> 03:23:46,760
दूसरी यह रही कि राम जी ने सिखाया है मृत्यु हो जा

2787
03:23:46,760 --> 03:23:50,880
तो किसी भी प्रकार का जो वैचारिक मतभेद होता है व शरीर के साथ ही चला

2788
03:23:50,880 --> 03:23:54,000
जाता है फिर कुछ नहीं रह जाता तो इस

2789
03:23:54,000 --> 03:23:58,040
इस बात को भी ध्यान में रखें और इसलिए आज उनकी जो पुण्य तिथि है

2790
03:23:58,040 --> 03:24:02,040
हम उनको सम्मान प्रकट करते हैं और

2791
03:24:02,040 --> 03:24:06,400
अगर अभी भी कोई है रामपाल का भक्त

2792
03:24:06,400 --> 03:24:10,520
जो आना चाहे वो आ सकता है आज एक सबसे बड़ा मिथ्या

2793
03:24:10,520 --> 03:24:15,360
में तोड़ लाऊ ईश्वरनाथ जी आए

2794
03:24:15,360 --> 03:24:19,440
हैं आपका परिचय ईश्वरनाथ जी

2795
03:24:19,440 --> 03:24:23,400
नमस्कार मैं आया हू पहले भी

2796
03:24:23,400 --> 03:24:27,600
सर अच्छा आए आवाज नहीं आ जी आपका

2797
03:24:27,600 --> 03:24:32,440
गला बैठा हुआ है क्या नहीं मेरा तो सही है गला

2798
03:24:32,440 --> 03:24:37,040
अब ठीक है ठीक है बोलिए जी मैं ये कहना चाहता था

2799
03:24:37,040 --> 03:24:41,440
कि आज अयोध्या के अंदर जो कार्यक्रम हो रहा है आप परिचित

2800
03:24:41,440 --> 03:24:45,720
होंगे उससे आप एक मैं चाहता

2801
03:24:45,720 --> 03:24:50,160
हूं भाई साहब आपने हमसे व्यक्तिगत संपर्क क्यों नहीं किया

2802
03:24:50,160 --> 03:24:54,280
जब आप शंकराचार्य जी के समर्थक है तो मुझे याद आ

2803
03:24:54,280 --> 03:24:58,720
गया आपने संपर्क क्यों नहीं किया हमसे मान्यवर

2804
03:24:58,720 --> 03:25:03,000
मैंने इसलिए संपर्क नहीं किया क्योंकि मुझे लगा कि आप व्यस्त होंगे

2805
03:25:03,000 --> 03:25:07,160
जब आप कार्य करते हैं ज सनातन सिद्धांतों पर बात करते

2806
03:25:07,160 --> 03:25:09,720
हैं लगने पर बात नहीं करते

2807
03:25:09,720 --> 03:25:13,760
हैं लगने पर बात नहीं होती है सनातन सिद्धांतों पर बात होती

2808
03:25:13,760 --> 03:25:17,800
है बात वही बोले जिसको अका रूप से आप

2809
03:25:17,800 --> 03:25:21,920
कह पाए अका रूप से ऐसी बातें मत करिए जिनका कोई बेस ही

2810
03:25:21,920 --> 03:25:26,000
नहीं है मुझे लगा हमने कही कोई बात क्या मुझे

2811
03:25:26,000 --> 03:25:30,280
लगा जब मैंने आपसे कहा नंबर देते हुए कि हमसे संपर्क करिए

2812
03:25:30,280 --> 03:25:34,600
तो आपको करना चाहिए था कर्मण्य वादी कारते मा फले सु कदाचना

2813
03:25:34,600 --> 03:25:38,640
आपने एक बार भी प्रयास नहीं किया और लगे प हो गए अर्जुन भी यही सोच लेता

2814
03:25:38,640 --> 03:25:42,920
कि मुझे लगा कौरव जीत जाएंगे इसलिए मैं लडूंगा नहीं मान्यवर

2815
03:25:42,920 --> 03:25:46,960
मैं आपसे क्षमा चाहता हूं मैं आपसे आप जाइए

2816
03:25:46,960 --> 03:25:52,960
और व्यक्तिगत संपर्क करिए मैं

2817
03:25:58,920 --> 03:26:03,640
क तो देखते हैं फिर अगली लाइव में क्या हमारा

2818
03:26:03,640 --> 03:26:07,960
रता है ला में हम लोग आपकी वो जो आपकी

2819
03:26:07,960 --> 03:26:12,000
जो कुछ रोचक जानकारिया उनके साथ में लेते हुए इनका एक और

2820
03:26:12,000 --> 03:26:18,000
नैरेटिव लेंगे जिसको ब्रेक करेंगे और

2821
03:26:18,400 --> 03:26:22,400
आशा करते हैं कि आज लोगों को काफी कुछ अच्छा जानने को मिला हो

2822
03:26:22,400 --> 03:26:26,440
पूरी लाइव चर्चा में चलिए हा जी

2823
03:26:26,440 --> 03:26:30,480
जी टी आर पाड़ी जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए जी एक नैरेटिव आज

2824
03:26:30,480 --> 03:26:34,680
लास्ट में और तोड़ के जाऊंगा इनका क्वेश्चन रहता है कि भगवान श्री कृष्ण अगर

2825
03:26:34,680 --> 03:26:39,080
इतने सामर्थ्य वान थे तो अभिमन्यु को जीवित क्यों नहीं किया क्या कारण था

2826
03:26:39,080 --> 03:26:43,080
तो कैसे भगवान हो सकते हैं तो इसका कारण इने ढूंढने की कोशिश नहीं

2827
03:26:43,080 --> 03:26:47,240
करी मैं बता देता हूं महाभारत के प्रथम खंड के उसमें जब

2828
03:26:47,240 --> 03:26:51,520
महाभारत की जो रचना रची थी जब जब क्या हुआ था

2829
03:26:51,520 --> 03:26:55,560
भीमसेन को वायु और अर्जुन के देवता का इंद्र का अंश जानो रूप

2830
03:26:55,560 --> 03:26:59,720
सौंदर्य की दृष्टि से इस पृथ्वी पर जिनकी समानता करने वाला कोई नहीं था वे

2831
03:26:59,720 --> 03:27:03,920
समस्त प्राणियों के मन मोह लेने वाले नकुल और सहदेव अश्विनी

2832
03:27:03,920 --> 03:27:08,120
कुमार अंश से उत्पन्न हुए थे वर्चा नाम से विख्यात जो चंद्रमा

2833
03:27:08,120 --> 03:27:12,360
के प्रतापी पुत्र था वह महा यशस्वी अर्जुन कुमार अभिमन्यु

2834
03:27:12,360 --> 03:27:13,960
हुआ जन्म

2835
03:27:13,960 --> 03:27:18,400
उसके अवतार काल के चंद्रमा ने देवता इस प्रकार कहा अब किसने

2836
03:27:18,400 --> 03:27:22,760
कहा अब यहां पर चंद्रमा ने कहा देवताओ

2837
03:27:22,760 --> 03:27:26,800
से मेरा पुत्र मुझे अपने प्राणों से भी अधिक प्रय है अत मैं इससे

2838
03:27:26,800 --> 03:27:30,920
अधिक दिनों के लिए नहीं दे सकता इसलिए ति लोक में

2839
03:27:30,920 --> 03:27:35,120
इसके रहने की कोई अवधि निश्चित कर दी जाए फिर उससे उस अवधि

2840
03:27:35,120 --> 03:27:39,360
का उल्लंघन नहीं किया जा सकता उनकी अवधि

2841
03:27:39,360 --> 03:27:43,400
वहा निश्चित कर दी गई थी पहले ही किधर जब यहां

2842
03:27:43,400 --> 03:27:47,680
जब महाभारत का जब पूरा प्रसंग रचा जा रहा था एक माया थी जब महाभारत

2843
03:27:47,680 --> 03:27:52,640
हम पढ़ेंगे कि ये क्यों हुई क्यों हुआ

2844
03:27:52,640 --> 03:27:56,720
कोई कहेगा कि यह द्रोपदी जी के कारण हुआ ना यह

2845
03:27:56,720 --> 03:28:00,880
मुख्य कारण नहीं था द्रौपदी के कारण धर्म की स्थापना करने के लिए यह युद्ध

2846
03:28:00,880 --> 03:28:04,920
हुआ था नहीं मैं एक बार एक बार और यहां प मैं आपको एक

2847
03:28:04,920 --> 03:28:09,200
मिनट रोकना चाहूंगा ये कहते हैं इन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि दरअसल

2848
03:28:09,200 --> 03:28:13,320
महाभारत का कोई धर्म से लेना देना नहीं वो तो पारिवारिक झगड़ा था संपत्ति का उसकी

2849
03:28:13,320 --> 03:28:17,320
वजह से महाभारत हो गया तो मैं इनसे ये पूछता हूं क्या क्या संपत्ति धर्म

2850
03:28:17,320 --> 03:28:21,440
में नहीं आती बैंक जाकर लूट लू यदि मैं या कोई अन्य व्यक्ति और

2851
03:28:21,440 --> 03:28:25,720
बोल दूं यह तो संपत्ति का झगड़ा था तो क्या ये इनके लिए धर्म है संपत्ति

2852
03:28:25,720 --> 03:28:29,160
किसी की हड़प जाना ठीक है तो इनकी किसी बात में कोई लॉजिक

2853
03:28:29,160 --> 03:28:33,280
नहीं है जब ये पूछेंगे ना कि अभिमन्यु को क्यों नहीं बचाया तो हम पूछ लेंगे कि कबीर

2854
03:28:33,280 --> 03:28:37,360
जी के बहन भाई उनकी पत्नी उनके बच्चे

2855
03:28:37,360 --> 03:28:41,360
कहां पर है ठीक है ना तो इतनी लंबी इनके साथ सर

2856
03:28:41,360 --> 03:28:45,640
दर्दी लगाने की आवश्यकता बस आपने जो प्रमाण दिया है वो बिल्कुल यूजफुल है और

2857
03:28:45,640 --> 03:28:49,880
इसको हम यूज भी करेंगे वंदना जी जुड़े हैं प्रणाम एक

2858
03:28:49,880 --> 03:28:53,960
एक चीज और है आप लोग बहुत मेहनत करते

2859
03:28:53,960 --> 03:28:58,520
हो आप लोग बहुत मेहनत करते हो पर

2860
03:28:58,520 --> 03:29:02,520
इन सब बातों का तो एक ही वो है भाई ईश्वर की अपनी

2861
03:29:02,520 --> 03:29:06,640
इच्छा कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना है ईश्वर वही है जो कुछ

2862
03:29:06,640 --> 03:29:11,440
भी कर सकता है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म पूर्ण है

2863
03:29:11,440 --> 03:29:15,480
वो अगर हम यह कह दे कि ईश्वर ने यह क्यों नहीं किया तो इतने क्वेश्चन खड़े हो

2864
03:29:15,480 --> 03:29:19,680
जाएंगे रामपाल दास जी जेल गए ईश्वर ने क्यों नहीं बचा लिया

2865
03:29:19,680 --> 03:29:23,880
हम नहीं पूछते उनसे सवाल क्यों नहीं पूछते क्योंकि उसका आंसर यह हो सकता है

2866
03:29:23,880 --> 03:29:27,920
हम हम उनकी तरफ से आंसर स्वयं ले लेते हैं वो नहीं दे पाएंगे

2867
03:29:27,920 --> 03:29:32,280
उसका आंसर ये हो सकता है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है हम नहीं करेंगे य

2868
03:29:32,280 --> 03:29:36,280
क्वेश्चन ईश्वर ने जब काल ने ऐसा ऐसा किया तो जीवों को

2869
03:29:36,280 --> 03:29:40,320
बचा क्यों नहीं लिया ईश्वर वही है जो कुछ भी कर

2870
03:29:40,320 --> 03:29:44,160
सकता उसका मन उसको लीला करनी थी भेज दिया ये मैं आंसर दे रहा हूं

2871
03:29:44,160 --> 03:29:49,400
उनकी तरफ से सोचो ये आंसर इनके के पास से नहीं निकलेंगे और

2872
03:29:49,400 --> 03:29:53,400
ज कर उने जब को जिंदा कर

2873
03:29:53,400 --> 03:29:57,840
दिया हा ईश्वर किसी भी नियम के नीचे नहीं है

2874
03:29:57,840 --> 03:30:02,120
इस बात को समझिए सुनिए रामायण में

2875
03:30:02,120 --> 03:30:06,320
जो वानर जितने भी घायल हो गए थे युद्ध में क्या लिखा है अंत

2876
03:30:06,320 --> 03:30:12,320
में सबको सही करया सब सही हो गए

2877
03:30:12,440 --> 03:30:16,480
बताइए तो ईश्वर के ऊपर नियम नहीं है कि तो

2878
03:30:16,480 --> 03:30:20,680
व किसी को मरने नहीं देगा अगर आपका ईश्वर

2879
03:30:20,680 --> 03:30:24,720
ऐसा है तो किसी की मृत्यु नहीं होती है आपके यहां क्या

2880
03:30:24,720 --> 03:30:28,960
आपके तो आश्रमों में हो जाती है फिर कामा

2881
03:30:28,960 --> 03:30:33,240
केस चल रहा है जिंदा हो जाते लोग केसी ता अभी

2882
03:30:33,240 --> 03:30:38,000
इसमें भी आएंगे महाभारत में इतने लोगों को क्यों मरवा दिया

2883
03:30:38,000 --> 03:30:44,000
इसम भी आएंगे महाभारत में इसका प्रमाण हैर

2884
03:30:46,040 --> 03:30:50,400
जी ने अपनी मठा मनाय अनुशासनम में 42 नंबर नहीं 43

2885
03:30:50,400 --> 03:30:54,600
नंबर के श्लोक में सूक्ष्म वेद कहा है और हम पिछली वाली लाइव

2886
03:30:54,600 --> 03:30:58,680
स्ट्रीम देख लीजिएगा उसमें बहुत सारे प्रमाण दे चुके हैं सूक्ष्म

2887
03:30:58,680 --> 03:31:02,880
वेद कहा जाता है बीज बीज वेद

2888
03:31:02,880 --> 03:31:08,680
बीज को यानी कि प्रणव को ओमकार को सूक्ष्म वेद कहा जाता है दूसरी

2889
03:31:08,680 --> 03:31:12,720
बात जो शास्त्र है उसमें कई जगह पंचम वेद

2890
03:31:12,720 --> 03:31:16,960
कहा गया है पुराणों को और तीसरी बात अगर सूक्ष्म

2891
03:31:16,960 --> 03:31:21,000
वेद कहा भी है तो इससे यह सिद्ध नहीं हो जाता कि आप जो बताओगे वह सूक्ष्म

2892
03:31:21,000 --> 03:31:25,280
वेद है शास्त्र में लिखा दिखाओ कि सूक्ष्म वेद वही

2893
03:31:25,280 --> 03:31:29,320
जो कबीर वाणी है या गरीब दास की वाणी है वो लिखा दिखाओ

2894
03:31:29,320 --> 03:31:32,160
वेद में ठीक

2895
03:31:32,160 --> 03:31:36,200
है तो कना भी नहीं आता सूक्ष्म कहते हैं मुझे लगता

2896
03:31:36,200 --> 03:31:40,280
है अब कोई बाकी नहीं रह गया है जिसने जिसकी माता जी ने निष्ठा पूर्वक जो

2897
03:31:40,280 --> 03:31:44,480
है उनकी सेवा की हो उनको पोषक तत्वों से पान कराया

2898
03:31:44,480 --> 03:31:48,680
हो इसीलिए ऐसा हो रहा कि कोई आ नहीं पा रहा है

2899
03:31:48,680 --> 03:31:52,760
जो जो चिल्लाया चिल्लाते फिरते थे 434 15

2900
03:31:52,760 --> 03:31:56,920
एक 44 15 44 15 एक आज आ नहीं रहे

2901
03:31:56,920 --> 03:32:01,000
आज कोई नहीं आ रहा है जो सिद्ध कर सके और सुनो भैया मेरे

2902
03:32:01,000 --> 03:32:01,500
लिए

2903
03:32:01,240 --> 03:32:06,560
मुझे बुलाने का तरीका भी समझ लो मेरा फोन नंबर नोट करो

2904
03:32:06,560 --> 03:32:10,960
74836 अगर यदि आप कोई लेवल पर है

2905
03:32:10,960 --> 03:32:15,360
लेवल पर ऐसे नहीं कि कोई कोई भी व्यक्ति मतलब किसी नेे

2906
03:32:15,360 --> 03:32:20,120
फोन मिला मैं उसके कहने पर जो उसकी चर्चा बुलाने पहुंच जा हूं नहीं अगर कोई लेवल है आपका

2907
03:32:20,120 --> 03:32:24,800
तो हम एक मध्यस्थ स्थान ढूंढ लेंगे ऑनलाइन के लिए चैनल ढूंढ लेंगे

2908
03:32:24,800 --> 03:32:28,840
ये प्रमाण देख लो भैया पंचम वेद के रूप में

2909
03:32:28,840 --> 03:32:33,080
नोग उपनिषद सात एक दो पंचम

2910
03:32:33,080 --> 03:32:37,200
वेद प्रमाण देख लेना य यही निकाल रहा था मैं

2911
03:32:37,200 --> 03:32:41,320
जी तो अगर आप हमसे संपर्क करते हैं

2912
03:32:41,320 --> 03:32:47,040
तो कोई बीच के स्थान में भी मैं आने को तैयार हूं आप बताइए

2913
03:32:47,040 --> 03:32:51,880
आप में कितना वो है संघर्ष की भावना

2914
03:32:51,880 --> 03:32:55,960
सत्य की रक्षा के लिए यदि आप उसे सत्य समझते हैं जो आप मनवाना चाहते हैं

2915
03:32:55,960 --> 03:33:00,200
औरों से और हमारी बात ऐसी है

2916
03:33:00,200 --> 03:33:02,000
कि हम तो घर से निकले ही ते

2917
03:33:02,000 --> 03:33:06,000
बांध कर सर पे कफन जा हथेली पर लिए लो बड़

2918
03:33:06,000 --> 03:33:10,000
चले है यह कदम जिंदगी तो अपनी महिमा

2919
03:33:10,000 --> 03:33:14,400
मौत की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना

2920
03:33:14,400 --> 03:33:18,640
अब हमारे दिल में है हाथ

2921
03:33:18,640 --> 03:33:22,760
जिनम हो जुनू कटते नहीं तलवार से सर जो उठ

2922
03:33:22,760 --> 03:33:26,760
जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से दूर रह पाए जो

2923
03:33:26,760 --> 03:33:29,920
हमसे दम कहां मंजिल में है सरफरोशी

2924
03:33:29,920 --> 03:33:34,320
की तमन्ना अब हमारे दिल में

2925
03:33:34,320 --> 03:33:39,000
तो आना अगर अमूल का दूध ना पिया हो बचपन में

2926
03:33:39,000 --> 03:33:43,320
वही वाला पियाओ जो पीना चाहिए अब तो ये हो गया ना कि डॉक्टर

2927
03:33:43,320 --> 03:33:47,800
भी कहते कि शुरू के छ महीने जो है अपना ही पला

2928
03:33:47,800 --> 03:33:52,080
मगर फिर भी शायद इनके साथ नाइंसाफी हो गई है जो इनको अपना पक्ष

2929
03:33:52,080 --> 03:33:56,840
सिद्ध करने का साहस नहीं है इनम जी माता जी

2930
03:33:56,840 --> 03:34:00,880
वंदना झा जी माननीय जय श्री

2931
03:34:00,880 --> 03:34:05,440
राम जय श्रीम काफी देर से देख रही थी लाइव स्ट्रीम

2932
03:34:05,440 --> 03:34:09,600
तो उसम एक आए रामपाल जी के वो बोल रहे थे

2933
03:34:09,600 --> 03:34:13,680
कि कबीर दास जी स शरीर गए यहां से तो इसलिए

2934
03:34:13,680 --> 03:34:17,960
वो परमात्मा हो गए और श्री कृष्ण जो शरीर छोड़ कर के गए तो

2935
03:34:17,960 --> 03:34:22,000
मेरा उनसे क्वेश्चन ये है अगर नेक्स्ट टाइम कभी वो आए या कभी कोई बात

2936
03:34:22,000 --> 03:34:26,120
कहे तो पहली बात की कबीरदास जी शरीर के साथ गए थे ये

2937
03:34:26,120 --> 03:34:30,360
देखा किसने है भाई इनकी बात मैंने कहा ना इनके

2938
03:34:30,360 --> 03:34:34,360
बातों को मानने के लिए शास्त्र से बाहर जाना ही पड़ेगा

2939
03:34:34,360 --> 03:34:38,440
हां तो मैंने तो नहीं देखा कि वो गए या मैंने सुना भी नहीं

2940
03:34:38,440 --> 03:34:42,440
है शास्त्र में भी शास्त्र प्रमाण भी नहीं है कि वो सर शरीर गए थे ऐसे तो

2941
03:34:42,440 --> 03:34:44,960
हम भी कहे श्री कृष्णा जी के पार्षद आए थे उनके

2942
03:34:44,960 --> 03:34:49,160
धान से वो अपने पार्षदों के साथ में वो अपने र सवार शरीर गए

2943
03:34:49,160 --> 03:34:53,160
आपने क्या देखा है कि उनका अंतिम संस्कार होते हुए आपने देखा है तो आप इस

2944
03:34:53,160 --> 03:34:57,240
बेस पर आप कैसे बोल सकते कृष्णा वो शरीर छोड़ कर के गए

2945
03:34:57,240 --> 03:35:01,280
थे और कबीर दास जी शरीर के साथ गए थे सेकंड थिंग ये चीज मीरा बाई के

2946
03:35:01,280 --> 03:35:05,360
लिए भी हमने सुनी है कि वो मतलब एकदम से गायब हुई थी वो भगवान के

2947
03:35:05,360 --> 03:35:09,600
शरीर गई ी सरीर सरीर गई थी तो क्या वो परम पूण परमात्मा

2948
03:35:09,600 --> 03:35:13,640
हो गई कृष्ण जी से बड़ी हो गई तो

2949
03:35:13,640 --> 03:35:15,800
ये

2950
03:35:15,800 --> 03:35:21,800
के ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता वो शरीर भी जाएगा बिना शरीर के भी

2951
03:35:22,040 --> 03:35:26,520
जाएगा कृष्णा जी ने तो अपने भक्तो को स शरीर भेजा है

2952
03:35:26,520 --> 03:35:31,120
जो दूसर को भेज सकते क्या व खुद नहीं जा सकते

2953
03:35:31,120 --> 03:35:35,640
बो हा जी कौन

2954
03:35:35,640 --> 03:35:39,760
है और मैंने अने भैया से तो यह भी सुना था व भी रामपाल जी ज

2955
03:35:39,760 --> 03:35:43,800
मैंने बताया था वो य भी कहते रा कृष्णा जी की भक्त नहीं थ पहले थ बाद

2956
03:35:43,800 --> 03:35:48,200
में उन्होने छोड़ दिया था क और वो हमेशा मुझसे एक सवाल करते है

2957
03:35:48,200 --> 03:35:52,320
कि वो राम नाम क्यों जप वो तो कृष्णा जी की भक्ति उन्होंने ये क्यों बोला की

2958
03:35:52,320 --> 03:35:56,480
राम रतन धन पायो कृष्ण रतन धन पायो क्यों नहीं बोला उस तरह

2959
03:35:56,480 --> 03:36:00,040
से मैंने बहुत सारे सवाल कर सकते है ना आप

2960
03:36:00,040 --> 03:36:04,200
क्या नाम भा हमने इनकी एक ही बात पकड़ ली अभी अभी इन्होने

2961
03:36:04,200 --> 03:36:08,240
इनके जो रामपाल है व खुद कह रहे मैं कुत्ता हूं वो खुद कह

2962
03:36:08,240 --> 03:36:12,480
रहे दो कौड़ी का हूं अब ये कुछ भी बताएंगे तो वो इनका

2963
03:36:12,480 --> 03:36:16,520
मत है वो तो स्वयं कह रहे मैं कुत्ता हूं जैसे ब्रह्मा

2964
03:36:16,520 --> 03:36:21,240
विष्णु महेश ने कह दिया कि हमारा भी आविर्भव होता है त्र भाव होता है

2965
03:36:21,240 --> 03:36:25,640
ठीक है तो इनके पीछे पड़ गए तो अब अब हम पूछ रहे हैं

2966
03:36:25,640 --> 03:36:29,800
वो तो कह रहे कुत्ता है कुत्ते की भक्ति कहां लिखी है भाई स

2967
03:36:29,800 --> 03:36:33,840
अगर उनको अगर उनको कुत्ता ही माना जाए जबक वो नहीं है वो

2968
03:36:33,840 --> 03:36:37,880
अपनी उसमें एक महिमा गान के तौर पर वो बात कर रहे है रस

2969
03:36:37,880 --> 03:36:42,040
में वास्तविकता नहीं है वो मगर अगर ऐसे पकड़ ले बात को तो इतनी

2970
03:36:42,040 --> 03:36:46,080
बातें इनकी रोज दिन भर में हम पकड़ेंगे ये लोग सा लेना

2971
03:36:46,080 --> 03:36:50,080
इनका संभव नहीं होगा उनके जो भक्त है वो भी

2972
03:36:50,080 --> 03:36:56,080
चुराए हुए हैं जैसे अभी प्रभु जी बता रहे थे इनकी कहानिया चुराई हुई है या

2973
03:36:56,240 --> 03:37:00,760
इन टोटल वो अगले वाले में हम लोग खुलासा करेंगे

2974
03:37:00,760 --> 03:37:06,480
हा भाई कोई आया है क्या केशव केशव जी आए कोई देखते

2975
03:37:06,480 --> 03:37:10,520
हैं कहां गए केशव जी हट गए क्या चले

2976
03:37:10,520 --> 03:37:14,640
ही गए चलिए बते आज काफी टाइम हो गया साढ़े तीन घंटे

2977
03:37:14,640 --> 03:37:16,840
हो गए

2978
03:37:16,840 --> 03:37:21,040
बंद करते हैं लास्ट एक संदेश है अगर महाभारत को जानना

2979
03:37:21,040 --> 03:37:25,560
है तो खंड छ के जो

2980
03:37:25,560 --> 03:37:30,160
स्वर्गारोहण पर्व है वो पूरा पढ़िए आपको पूरी राम

2981
03:37:30,160 --> 03:37:34,240
महाभारत समझ में आ जाएगी कि क्या है पूरा पढ़ने की

2982
03:37:34,240 --> 03:37:38,880
जरूरत भी नहीं है खाली उसके पूरे अध्याय पढ़ लीजिए वो समझ में आ जाएगा

2983
03:37:38,880 --> 03:37:43,200
स्वर्गारोहण पर्व कि ये युद्ध था क्या आखिर

2984
03:37:43,200 --> 03:37:48,080
कौन मरा कौन नहीं मरा इसमें ना कोई मरा ना किसी ने जन्म लिया

2985
03:37:48,080 --> 03:37:53,080
व सब पता चल

2986
03:37:53,080 --> 03:37:57,080
जाएगा ठीक है केशव गोस्वामी जी जय

2987
03:37:57,080 --> 03:38:03,080
श्री राम जय श्री राम शिवा भैया जी

2988
03:38:04,240 --> 03:38:08,280
बताए आप जो कार्य कर रहे बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं मैं

2989
03:38:08,280 --> 03:38:12,360
गुजरात पब से आपको सु मैसेज भी

2990
03:38:12,360 --> 03:38:17,280
किया अच्छा

2991
03:38:17,280 --> 03:38:23,280
आभार बत

2992
03:38:25,320 --> 03:38:29,560
अा

2993
03:38:29,560 --> 03:38:34,240
जी आभार आपका आभार

2994
03:38:34,240 --> 03:38:38,480
अच्छा माननीय आपसे एक बात पूछनी थी अभी जो हमने पिछले

2995
03:38:38,480 --> 03:38:42,520
कुछ दिनों से जो और थोड़ा सा सक्रियता और बढ़ा दी है तो

2996
03:38:42,520 --> 03:38:47,000
इससे कुछ आपका ओवरव्यू क्या रहा सामने

2997
03:38:47,000 --> 03:38:51,600
से आपसे पूछ रहा वंदना

2998
03:38:51,600 --> 03:38:55,800
वंदना जी से वंदना जी आपसे पूछ रहा तो यही

2999
03:38:55,800 --> 03:38:59,920
कूी पहले बहुत टॉर्चर मतलब मेरे साथ होता था वो हमेशा कुछ

3000
03:38:59,920 --> 03:39:04,040
ना कुछ चीजों को लेकर के बोलते रहते थे मतलब कई साल से मैं परेशान रही

3001
03:39:04,040 --> 03:39:08,120
थी लेकिन सीरियसली आप लोग के मत क्या बोलू भगवान की इतनी कृपा हुई

3002
03:39:08,120 --> 03:39:12,120
आप लोग का ना मुझे सपोर्ट मिला है बहुत सारी चीज मुझे जानने

3003
03:39:12,120 --> 03:39:16,320
के लिए मिली है और अ उनकी भी बोलती बंद हो गई है हम नहीं बोलते

3004
03:39:16,320 --> 03:39:20,440
हैं अ नहीं मैसेज करते हैं या फिर पहले हमेशा बोलते थे तुम कृष्ण की पूजा करती

3005
03:39:20,440 --> 03:39:24,560
हो तुम्हें मोक्ष नहीं मिलेगा तुम्हें तुम जन्म बंधन में फसी

3006
03:39:24,560 --> 03:39:28,720
रहोगी जन मृत्यु के चक्र में सब अभी ऐसा कुछ नहीं क्योंकि अभी कुछ भी बोलते

3007
03:39:28,720 --> 03:39:32,800
हैं तो मेरे पास एक ही लाइन है आपको जो बोलना है आप वहां जाक के बोलिए

3008
03:39:32,800 --> 03:39:37,440
शिवान जी के सामने बोलिए अगर वो मान लेंगे तो मैं मान लूंगी

3009
03:39:37,440 --> 03:39:41,560
बस तो तब से वो चुप हो गए हैं अभी कोई प्रॉब्लम नहीं है अभी मतलब मैं बहुत सुकून

3010
03:39:41,560 --> 03:39:44,840
से हमें रह पा रही हूं सीरियसली आप लोग को बहुत सपोर्ट

3011
03:39:44,840 --> 03:39:49,200
हुआ है आप लोग के सपोर्ट की वजह से मुझे इतना रिलैक्सेशन अभी मिल पाया

3012
03:39:49,200 --> 03:39:55,200
है चलिए आभार आपका जी केशु जी आप कुछ कह रहे

3013
03:39:58,080 --> 03:40:02,280
थे आवाज नहीं आ रही मैं एक सेकंड अपनी बात रखना चाहूंगा छोटी

3014
03:40:02,280 --> 03:40:06,520
सी वंदना जी के लिए वंदना जी जब ये आपको बोलते हैं ना कि भगवान

3015
03:40:06,520 --> 03:40:10,760
श्री कृष्ण की मृत्यु आदि होगी तो पहले उनसे यह कंफर्म कर लीजिए आप पुराण

3016
03:40:10,760 --> 03:40:14,960
से मानेंगे या महाभारत से मानेंगे एक बात उनसे कंफर्म कर लीजिए

3017
03:40:14,960 --> 03:40:19,040
ठीक है जब आप भागवत पुराण पढ़ेंगे ना तब जब भगवान का

3018
03:40:19,040 --> 03:40:23,800
धाम गमन होता है तो वहां पर स्पष्ट लिखा हुआ है कि उन्होंने अपनी

3019
03:40:23,800 --> 03:40:27,840
जो मूर्ति अर्थात शरीर है उसको अग्नि के अनुसार नहीं जलाया

3020
03:40:27,840 --> 03:40:31,880
बल्कि स शरीर व अपने धाम को चले गए ये बात बड़ी क्लियर ठीक

3021
03:40:31,880 --> 03:40:36,200
है अगर वो मानेंगे महाभारत को क्योंकि एक जगह रुकते नहीं महाभारत

3022
03:40:36,200 --> 03:40:40,440
को मानेंगे मसल पर्व के अंदर चौथा अध्याय है और उसका 20

3023
03:40:40,440 --> 03:40:44,480
नंबर श्लोक और 21 नंबर श्लोक में आपको पढ़ देता हूं उन्होंने यह लीला क्यों

3024
03:40:44,480 --> 03:40:48,720
रख ठीक कहते हैं तत्पश्चात उन्होंने तीनों लों

3025
03:40:48,720 --> 03:40:52,960
की रक्षा ठीक है यानी कि तीन लोग की रक्षा तथा दुर्वासा

3026
03:40:52,960 --> 03:40:57,040
का वचन पालन करने के लिए अपने परम धाम पधारने का उपयुक्त समय

3027
03:40:57,040 --> 03:41:00,240
प्राप्त हुआ समझा इसी उद्देश्य से अपनी संपूर्ण

3028
03:41:00,240 --> 03:41:04,400
इंद्री वृत्तियों का निरोध ठीक है लास्ट जो लोक है वो ये है

3029
03:41:04,400 --> 03:41:08,640
भगवान श्री कृष्ण संपूर्ण अर्थों के तत्व वेता यानी कि जानने वाले

3030
03:41:08,640 --> 03:41:12,840
अविनाशी देवता अविनाशी आ ग य ठीक है तो तभी समय

3031
03:41:12,840 --> 03:41:16,920
उन्होंने देखा और देह मोक्ष देह त्या नहीं देह

3032
03:41:16,920 --> 03:41:21,040
देह मोक्ष अलौकिक लीला का संवरण करने के लिए यहां पर ये स्पष्ट लिखा

3033
03:41:21,040 --> 03:41:25,240
है कि लीला का संवरण करने के लिए कार्य था वो लीला

3034
03:41:25,240 --> 03:41:29,800
स्वरूप में था लीला का ही अर्थ

3035
03:41:29,800 --> 03:41:34,840
है लीला का ही अर्थ है

3036
03:41:34,840 --> 03:41:40,480
दिव्य कार्य लीला का ही अर्थ है व्यवहार

3037
03:41:40,480 --> 03:41:45,280
व्यवहार भगवान जब कुछ करते हैं वो उनकी लीला है

3038
03:41:45,280 --> 03:41:49,400
उसमें व्यवहार में भगवान कुछ भी कर सकते हैं वो आपको दिखा देंगे मैं

3039
03:41:49,400 --> 03:41:54,000
अपनी देह का नाश कर दिया लो आप कह ही नहीं सकते नहीं किया

3040
03:41:54,000 --> 03:41:58,000
ये बात और आपने ये बात याद रखनी पहले कंफर्म कर लेना पुराण मानोगे या

3041
03:41:58,000 --> 03:42:02,000
महाभारत मानोगे ठीक है अब तो पहले अब तो पहली बात ये आद

3042
03:42:02,000 --> 03:42:06,560
आती है कि ये पहले वो 35 श्लोक बता दे कौन से हैं

3043
03:42:06,560 --> 03:42:10,920
भगवत गीता के जिससे हम लोग हम लोग बाकी के 665

3044
03:42:10,920 --> 03:42:14,920
से अपना मोक्ष का फिक्स कर सके कि भैया 35 श्लोक बता दो

3045
03:42:14,920 --> 03:42:15,420
हम

3046
03:42:15,280 --> 03:42:19,480
को 5 पर भगवत गीता का उसके बाद हम देखे मोक्ष किन श्लोकों से

3047
03:42:19,480 --> 03:42:23,520
हम मोक्ष पाएंगे अथवा आपको मोक्ष दिला पाएंगे प्रयास करेंगे

3048
03:42:23,520 --> 03:42:27,800
आपको मोक्ष दिलवाने का तो पहले 35 लोक पता चल

3049
03:42:27,800 --> 03:42:31,960
जाए सारे शास्त्र आज की अगर अगर आज

3050
03:42:31,960 --> 03:42:36,040
कोई लाइव स्ट्रीम होने वाली है तो मैं बताना चाहूंगा

3051
03:42:36,040 --> 03:42:40,040
कि भैया आप लोग ना वो 35 श्लोक छाट के बताइए अगर

3052
03:42:40,040 --> 03:42:44,120
आप सुन रहे हैं तो कि वो 35 लोक कौन-कौन से हैं जिनको

3053
03:42:44,120 --> 03:42:48,400
नहीं मानना है जो ने अपने से बोल दिए हैं फिर बात करेंगे

3054
03:42:48,400 --> 03:42:50,640
665

3055
03:42:50,640 --> 03:42:54,680
पर भगवान श्री कृष्ण स्वयं सर्वशक्तिमान परमेश्वर है

3056
03:42:54,680 --> 03:42:59,160
उन्होंने ही कहीं पर खुद को परमेश्वर कहीं पर उसका सखा

3057
03:42:59,160 --> 03:43:03,160
अर्जुन का और कहीं पर स्वयम को काल कहा और

3058
03:43:03,160 --> 03:43:07,320
इन सब बातों का आपने यदि कुतर्क के आधार पर

3059
03:43:07,320 --> 03:43:11,320
निकाला है तो कुछ जैसे जो अच्छे स्तर के

3060
03:43:11,320 --> 03:43:15,320
जो ज्ञाता होते हैं विद्वान होते हैं वो मना करते हैं अरे कुत से बात

3061
03:43:15,320 --> 03:43:20,000
मत करो मतलब ज्यादा ही लो लेवल का ज्ञान होता है जिनका मस्तिष्क

3062
03:43:20,000 --> 03:43:24,040
तो वो यही कहते क्या बिल्कुल निर् बुद्धि लोगों से आप भिड़े

3063
03:43:24,040 --> 03:43:28,160
हुए निर् बुद्धि हों के चक्कर में भी तो हमारे कुछ भाई बहन पढ़ रहे हैं ना

3064
03:43:28,160 --> 03:43:30,560
प्रॉब्लम ये है इसलिए कुतर

3065
03:43:30,560 --> 03:43:34,880
को का भी समाधान करेंगे ये सब कुतर्क है

3066
03:43:34,880 --> 03:43:39,280
उतको का समाधान ये कोई उस लेवल की बातें नहीं हो रही है इसीलिए

3067
03:43:39,280 --> 03:43:43,320
कहता हूं ना कि इकन से बात हो दयानंद जी से दयानंद वालों

3068
03:43:43,320 --> 03:43:48,440
से बात हो आर्य समाज वालो से बात हो तब भी एक लेवल होगा उसमें चर्चा

3069
03:43:48,440 --> 03:43:52,680
का है ना और फिर उसमें और ज्यादा ऊपर तो अलग लेवल

3070
03:43:52,680 --> 03:43:56,840
की बातें हो जाए मगर यहां तो कोई लेवल ही नहीं मगर बात क्यों सर क्यों मारना पड़ रहा

3071
03:43:56,840 --> 03:44:02,160
है इन चर्चाओं को देख कर के जो फसने वाले होंगे वह ना

3072
03:44:02,160 --> 03:44:06,760
फसे बस इतनी बात बिल्कुल

3073
03:44:06,760 --> 03:44:11,440
को फैला रखा है कोई आ नहीं रहा है लगभग काफी

3074
03:44:11,440 --> 03:44:15,840
देर हो गई है

3075
03:44:15,840 --> 03:44:19,120
की एक वीडियो है मेरे

3076
03:44:19,120 --> 03:44:21,920
पास

3077
03:44:21,920 --> 03:44:26,040
दिखा बीच एक सेकंड बीच में डिस्टर्ब कर रहा हूं मैं अभी चलता

3078
03:44:26,040 --> 03:44:30,240
हूं आप अपना जारी रखिए ठीक है मे बड़ी ु होने वाला है भी आते

3079
03:44:30,240 --> 03:44:34,400
आपके पीछे पीछे बस ठीक आज मैं पिछली

3080
03:44:34,400 --> 03:44:38,520
बार उन्होंने कुतर्क किया था कि अपनी दूसरी वाली गीता लेके आई वही लेने जा रहा हूं

3081
03:44:38,520 --> 03:44:42,240
आज उनके पास जाने के

3082
03:44:42,240 --> 03:44:46,840
लिए एक बात और है एक बात और है वो मैंने भी नोट किया

3083
03:44:46,840 --> 03:44:51,280
आपको बोलना चाहिए था कि पदम पुराण का शिव पुराण का भगवती पुराण का हलवा

3084
03:44:51,280 --> 03:44:55,440
वो देते समय उसका लेखक कौन है वोह दिखाया है

3085
03:44:55,440 --> 03:44:59,720
क्या जैसे उसने बात उसने एक बात कही थी कि हमारे

3086
03:44:59,720 --> 03:45:03,920
गुरुजी जो है व लेखक का नाम भी बताते हैं

3087
03:45:03,920 --> 03:45:08,160
तो क देवी भागवत का लेखक का नाम बताया क्या बहुत से ऐसे शास्त्र

3088
03:45:08,160 --> 03:45:12,320
उन्होने खोले उसम लेखक का नाम नहीं बताया केवल प्रकाशन का नाम

3089
03:45:12,320 --> 03:45:16,360
बताया है बहुत से शास्त्र बक ठीक है जय श्री

3090
03:45:16,360 --> 03:45:20,480
राम ठीक है बहुत आपका आभार और एक स्पेशल मैं बात कहना चाहूंगा जैसे

3091
03:45:20,480 --> 03:45:25,000
शिवांश जी ने आज जो भी लोग देख रहे हैं कितनी प्रेम पूर्वक दयानंद

3092
03:45:25,000 --> 03:45:29,160
जी को भी उन्होंने बड़ा ही सम्मान दिया है ठीक है हमारा सनातन धर्म यही

3093
03:45:29,160 --> 03:45:31,040
सिखाता है सभी पूजनीय है जब

3094
03:45:31,040 --> 03:45:35,240
तक कि वह एक ठीक है या तो हमारे एक

3095
03:45:35,240 --> 03:45:39,360
धर्म के अनुसार चल रहे हैं ठीक है और जो चला गया है उसके लिए सदैव

3096
03:45:39,360 --> 03:45:43,440
आदरणीय होना चाहिए और हमारी यहां लाइव की सबसे बड़ी बात ही यही है कोई भी

3097
03:45:43,440 --> 03:45:47,520
अपशब्द किसी के लिए नहीं बोला जाता हालाकि मैं एक न्यूज बोलने लगा

3098
03:45:47,520 --> 03:45:52,000
था रामपाल जी के खिलाफ तो शिवांश जी ने बोला कि नहीं हम उस परे चर्चा नहीं करेंगे ठीक है

3099
03:45:52,000 --> 03:45:56,040
तो आदर बना रहना चाहिए सभी के लिए सभी आइए आइए हाथ पकड़ते हैं

3100
03:45:56,040 --> 03:46:00,040
ठीक है और मजबूत करते हैं इस तंत्र को जिसका नाम सनातन है आप सभी को बड़ा

3101
03:46:00,040 --> 03:46:04,840
आभार आप सभी को हरि ओम सीताराम हरि ओम जय श्री

3102
03:46:04,840 --> 03:46:08,240
राम जी

3103
03:46:08,240 --> 03:46:13,560
अ योगेश जी

3104
03:46:13,560 --> 03:46:17,760
बताइए जी एक राम जिसम वो ब्रज का अर्थ बता

3105
03:46:17,760 --> 03:46:21,880
रहा है उसम आजा भी दिखाई दे रहे है गलती

3106
03:46:21,880 --> 03:46:26,200
से मैं दिखाऊ हा आपका परिचय

3107
03:46:26,200 --> 03:46:31,480
क्या है योगेश जो पहले आए थे दो दिन

3108
03:46:31,480 --> 03:46:35,520
पहले अरे पूरा परिचय बताइए आप रामपाल दास जी के

3109
03:46:35,520 --> 03:46:39,560
फॉलोअर है या नहीं है या इधर से

3110
03:46:39,560 --> 03:46:43,960
है कि उधर से थोड़ा अपने बारे में बता दीजिए एक बार आपकी तरफ से ही

3111
03:46:43,960 --> 03:46:48,440
ह हेडफोन मतलब वैसे डायरेक्ट बात कर लीजिए

3112
03:46:48,440 --> 03:46:54,440
क्योंकि है क्या ना वो स्पष्ट आवाज नहीं आती

3113
03:46:56,200 --> 03:47:02,200
है एक सेकंड

3114
03:47:05,160 --> 03:47:09,160
रुको शिवांश जी एक दिन प्रा प्रकृति और

3115
03:47:09,160 --> 03:47:13,720
अपरा प्रकृति के का आप व्याख्यान कर दीजिएगा स्ट्रीम में

3116
03:47:13,720 --> 03:47:16,760
लोगों को समझने में

3117
03:47:16,760 --> 03:47:20,840
किता में प की ग है उसके बारे में असल में असल

3118
03:47:20,840 --> 03:47:25,360
में क्या है मेरे पास बहुत सारे इनफॉर्मेटिव टॉपिक्स रखे हुए हैं

3119
03:47:25,360 --> 03:47:30,000
जिसको मुझे एक करके बनाना है मैं आपको अलग से बता दूंगा बहुत सारे हैं

3120
03:47:30,000 --> 03:47:34,560
उसमें यह भी है प्रकृति परा प्रकृति और परा प्रकृति

3121
03:47:34,560 --> 03:47:39,000
जी मगर अभी क्या है समय का तो

3122
03:47:39,000 --> 03:47:43,280
दिवाली का टाइम चल रहा था और तो अभी इन्ही का ही डेली

3123
03:47:43,280 --> 03:47:47,360
कुछ ना कुछ हुआ ही जा रहा है तो समय नहीं निकल पा रहा है बहुत सारी चीज रहती है करेंगे

3124
03:47:47,360 --> 03:47:52,600
इस पर बिल्कुल जी कहां गए भाई साहब

3125
03:47:52,600 --> 03:47:56,600
चले व संस्कृत शब्द कोश से जब वो दिखा रहे हैं कि ब्रज का

3126
03:47:56,600 --> 03:48:01,080
अर्थ जाना ही होता है तो उसके नीचे वही पर आना भी लिख रखा

3127
03:48:01,080 --> 03:48:04,200
है जी

3128
03:48:04,200 --> 03:48:08,280
जी भाई साहब आपका नाम आप

3129
03:48:08,280 --> 03:48:11,080
म्यूट

3130
03:48:11,080 --> 03:48:13,440
है

3131
03:48:13,440 --> 03:48:18,040
नमस्कार ज हेलो जी जय श्री राम

3132
03:48:18,040 --> 03:48:22,400
जय श्री राम मैं इन राम पालियो

3133
03:48:22,400 --> 03:48:26,400
से ये पूछना चाहता हूं कि अगर कबीर ईश्वर

3134
03:48:26,400 --> 03:48:31,080
है तो जिस युग में यह हुआ था 500 साल पहले

3135
03:48:31,080 --> 03:48:35,360
मुस्लिम युग में उस टाइम मुसलमान बहुत सारे अत्याचार करते थे कन्वर्जन

3136
03:48:35,360 --> 03:48:39,520
करते थे जजिया कर लगाते थे ईश्वर इन सब चीजों को रोक

3137
03:48:39,520 --> 03:48:43,520
क्यों नहीं पाया ईश्वर को तो धर्म के विरुद्ध अधर्म

3138
03:48:43,520 --> 03:48:49,240
के विरुद्ध लड़ाई करनी हो जसे राम आए कृष्ण आए

3139
03:48:49,240 --> 03:48:53,280
लड़ कबीर क्यों नहीं लड़ पाया ये बिल्कुल आप सही कह

3140
03:48:53,280 --> 03:48:57,440
रहे अगर इनसे इन्ही की भाषा में बात करनी है तो ऐसे ही देना पड़ेगा

3141
03:48:57,440 --> 03:49:03,440
मैं असल में यह सब बात खोदता नहीं हूं य

3142
03:49:03,560 --> 03:49:08,360
क्वे कहने का मतलब

3143
03:49:08,360 --> 03:49:13,720
न दो

3144
03:49:13,720 --> 03:49:17,720
मारता भी है शिवांश नाम भी है वो ईश्वर थोड़ी

3145
03:49:17,720 --> 03:49:21,760
ना हो जाएगा कबीर तो नाम स्पष्ट है भी नहीं

3146
03:49:21,760 --> 03:49:25,920
अरे सामने वाले ने इतिहास बदल दिया बोल शिवांश भाई मैंने यह पूछा मैंने

3147
03:49:25,920 --> 03:49:30,680
कहा अगर इतने सामर्थ्य वान थे इतना अत्याचार हो रहा था अभिचार हो रहा था वहां

3148
03:49:30,680 --> 03:49:34,960
तो उस समय रोका क्यों नहीं धर्म की स्थापना करने के लिए आए थे ना वो तो गुलाम रहा बोले

3149
03:49:34,960 --> 03:49:38,960
कहां था उस समय उस समय था ही नहीं मैंने कहा 800

3150
03:49:38,960 --> 03:49:43,120
साल मुगलों ने राज किया 200 साल से 250 साल अंग्रेजों ने राज

3151
03:49:43,120 --> 03:49:47,800
किया हमने कहा स्वतंत्रता दिवस बनाते हैं हम क्यों बनाते हैं कब हुआ भारत

3152
03:49:47,800 --> 03:49:51,840
आजाद 1947 क्यों बनाते हैं फर जब वहां उस समय नहीं

3153
03:49:51,840 --> 03:49:55,960
था क्या आज से 1398 ईसवी में उनका जन्म हुआ कबीर

3154
03:49:55,960 --> 03:50:00,120
दास जी का उस समय किसका राज था यही मुगलों का औरंगजेब

3155
03:50:00,120 --> 03:50:04,160
यही लोग औरंगजेब तो नहीं और दूसरे लोग थे उस समय वो इतना

3156
03:50:04,160 --> 03:50:08,240
अत्याचार कर रहे थे रोका क्यों नहीं सामर्थ्य मान थे ना वो तो तो

3157
03:50:08,240 --> 03:50:12,800
बोला उस समय नहीं था कुछ भी नहीं था ऐसा बोले सिकंदर लोदी को उन्होने वो किया

3158
03:50:12,800 --> 03:50:16,960
था इतिहास दिया

3159
03:50:16,960 --> 03:50:18,720
उने 800

3160
03:50:18,720 --> 03:50:22,960
200 नहीं किया भाई राज इतिहास गलत है पर अलग

3161
03:50:22,960 --> 03:50:25,200
से लाइव

3162
03:50:25,200 --> 03:50:29,200
होगा जी जी जी इस पर अलग से बात

3163
03:50:29,200 --> 03:50:34,120
होगी हां तांबे का पात्र आप लेय

3164
03:50:34,120 --> 03:50:38,960
जल लेने के लिए है आप ले लीजिएगा छोटे भाई

3165
03:50:38,960 --> 03:50:43,160
ठीक है बहुत अच्छे से वर्णन है

3166
03:50:43,160 --> 03:50:45,320
बाता

3167
03:50:45,320 --> 03:50:49,440
जी जी जी मैं यह कहना चाहता हूं कि जैसे यह लोग कहते हैं

3168
03:50:49,440 --> 03:50:54,200
कि कबीर फूल में से उत्पन्न हुआ था और बिना शरीर के मर

3169
03:50:54,200 --> 03:50:58,400
गया शरीर उसका य था फूल बन गया ऐसे

3170
03:50:58,400 --> 03:51:02,720
तो हमारे कर्ण भी थे जो फूल के परही आए थे हम उसको भगवान नहीं बना पाए

3171
03:51:02,720 --> 03:51:06,880
जिसके पास बहुत सारी पावर्स थी हमने

3172
03:51:06,880 --> 03:51:11,360
उसे ईश्वर नहीं बनाया उन्होने एक बना दिया

3173
03:51:11,360 --> 03:51:15,520
अरे नाजायज औलाद था किसी की उसने भाई कैसी बातें

3174
03:51:15,520 --> 03:51:20,040
कर रहे हैं आप कैसी बातें कर रहेने नाम लिख रखा है जय श्री राम

3175
03:51:20,040 --> 03:51:24,200
और इस तरह से बात करते हैं क्या किसी के बारे में बात

3176
03:51:24,200 --> 03:51:28,240
नहीं करते चलिए ठीक है आपने अपने भाव व्यक्त कर लीजिए आने के लिए आपका

3177
03:51:28,240 --> 03:51:32,240
आभार समर्थन के लिए आभार मगर इस तरह से बात नहीं करनी है बिल्कुल भी किसी के

3178
03:51:32,240 --> 03:51:34,600
बारे में

3179
03:51:34,600 --> 03:51:36,960
ठीक

3180
03:51:36,960 --> 03:51:41,000
है कु और बन जाएंगे देखिए

3181
03:51:41,000 --> 03:51:45,440
जो शब्द है उनको मर्यादित रह कर के बात करें गलत तरीके से गलत

3182
03:51:45,440 --> 03:51:49,480
व वर्ड्स का यूज ना करें ठीक है अब

3183
03:51:49,480 --> 03:51:53,840
मेरे ख्याल से सब है नहीं कोई जिसने वाकई

3184
03:51:53,840 --> 03:51:58,920
में माता जी ने निष्ठा पूर्वक

3185
03:51:58,920 --> 03:52:03,160
जिसको इनकी आवाज नहीं आ रही है

3186
03:52:03,160 --> 03:52:09,160
अन म्यूट कीजिए अपने आपको को अन म्यूट कर

3187
03:52:10,560 --> 03:52:16,560
लीजिए नहीं ठीक है बात बोल

3188
03:52:16,840 --> 03:52:22,720
हटा लीजिए ये माफी मांगे य

3189
03:52:22,720 --> 03:52:26,760
वाला ठीक है अब कोई अगर

3190
03:52:26,760 --> 03:52:30,840
आना चाहे तो अब काफी देर हो चुकी है अब बढ़ाते हैं फिर हम कभी

3191
03:52:30,840 --> 03:52:34,920
आते हैं लाइव और मैं आपसे कहूंगा आप आपने नाम तो

3192
03:52:34,920 --> 03:52:38,960
दिखाया नहीं य पर राम नाम की गरिमा का थोड़ा सा ध्यान

3193
03:52:38,960 --> 03:52:43,000
रखें गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता

3194
03:52:43,000 --> 03:52:47,360
खोने नहीं देता रामचंद्र जी की पत्नी का अपरहण

3195
03:52:47,360 --> 03:52:51,360
कर लिया था हरण कर लिया था रावण ने मगर रामचंद्र जी ने उनकी

3196
03:52:51,360 --> 03:52:55,920
पत्नी का हरण नहीं किया मंदोदरी को नहीं ले आए व

3197
03:52:55,920 --> 03:53:00,160
और राम रामो विग्रह वान धर्मा अगर हम धर्म के रक्षक

3198
03:53:00,160 --> 03:53:04,280
स्वयं को कहते हैं तो धर्म को धारण भी करना होगा इसलिए एक मर्यादा

3199
03:53:04,280 --> 03:53:08,680
में बात करें जी कुछ कहना चाहते हैं आप

3200
03:53:08,680 --> 03:53:12,840
मतलब यह था कि जैसे आज के युग में भी कई बच्चे नदियों में नालों में पाए

3201
03:53:12,840 --> 03:53:17,360
जाते हैं तो उसको श्वर थोड़ी ना बना देंगे जैसे

3202
03:53:17,360 --> 03:53:22,400
क वो तक तर्क आपका है थोड़ा सा उसम वड

3203
03:53:22,400 --> 03:53:26,680
जी बोलने का ठीक

3204
03:53:26,680 --> 03:53:30,240
है तो जय

3205
03:53:30,240 --> 03:53:34,400
श्रीम सभी को जय श्री राम और आने के लिए आभार

3206
03:53:34,400 --> 03:53:38,680
कबीर जी हिंदू थे और कबीर जी का सम्मान है

3207
03:53:38,680 --> 03:53:42,960
उनके प्रति किसी भी प्रकार की अपमानजनक बात नहीं की

3208
03:53:42,960 --> 03:53:47,080
जाएगी और और समय देने के लिए आभार आने

3209
03:53:47,080 --> 03:53:51,440
के लिए सुनने के लिए रहने के लिए आभार और एक बार जाते

3210
03:53:51,440 --> 03:53:56,040
जाते में फिर से बता दू कि अभी तक हमने इनके तीन नरेट तोड़ दिए हैं

3211
03:53:56,040 --> 03:54:00,080
पहला अब यह नहीं कहते कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है य

3212
03:54:00,080 --> 03:54:04,120
लाइव में आक के नहीं कहते नीचे कमेंट्स में कहले अपनी अपनी

3213
03:54:04,120 --> 03:54:08,360
जो लाइव करते हैं वो प्राइवेट वाली उसम भी नहीं कहते वेदों में प्रमाण है कबीर

3214
03:54:08,360 --> 03:54:12,800
भगवान यह इनका जो नैरेटिव है ब्रेक हो चुका है दूसरा नैरेटिव इनका

3215
03:54:12,800 --> 03:54:17,120
है कि का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण से अलग

3216
03:54:17,120 --> 03:54:21,280
किसी काल नाम के व्यक्तित्व ने दिया था तो वो नैरेटिव भी ब्रेक

3217
03:54:21,280 --> 03:54:25,280
हो चुका है अ ये ना तो यहां आ कर के कहते हैं नहीं काल काल काल और ना

3218
03:54:25,280 --> 03:54:29,440
ही अपनी जो लाइव करते हैं अलग से उसमें कहते हैं और

3219
03:54:29,440 --> 03:54:33,520
तीसरा जो आज हमने बात की है कि गीता के अनुसार

3220
03:54:33,520 --> 03:54:38,040
रामपाल दास तत्वदर्शी संत नहीं है

3221
03:54:38,040 --> 03:54:41,680
तो इनके ही अब यहां तो य आज

3222
03:54:41,680 --> 03:54:45,960
किसी ने बात कोई नहीं की अभी यहां पर चु हो गए हैं आ नहीं रहे हैं

3223
03:54:45,960 --> 03:54:50,800
और इसके बाद जब जाहिर सी बात है जो इनकी लाइव इत्यादि होती है तो उसमें कोई

3224
03:54:50,800 --> 03:54:55,000
शास्त्रो और तार्किक समाधान शायद संभवत

3225
03:54:55,000 --> 03:54:59,200
ही दे पाए ये बहुत असंभव है वो संभव तो नहीं है तो कुछ बोल

3226
03:54:59,200 --> 03:55:04,040
पाए ऐसा जो तार्किक प्रतीत हो जाए वो भी संभव नहीं है

3227
03:55:04,040 --> 03:55:08,120
और अब इसके बाद इनके एकएक जो इन्होंने नैरेटिव फैलाए हैं एक एक

3228
03:55:08,120 --> 03:55:12,240
हर उस नैरेटिव पर विस्तृत विवेचन करेंगे इसी प्रकार से लाइव चर्चा

3229
03:55:12,240 --> 03:55:16,360
में और आज की लाइव में हमने यह भी बताया कि भाई सबसे पहले

3230
03:55:16,360 --> 03:55:20,520
जब हम लाइफ शुरू करते हैं तो आपने जो चीजें उठाई होती है

3231
03:55:20,520 --> 03:55:25,160
हालाकि वो निराधार होती है और उनका निराकरण प्रस्तुत करते हैं

3232
03:55:25,160 --> 03:55:29,160
उसके बाद आपने चीज उ फैलाई धूप कहां है तो हमने प्रमाण दे दिया गोबर

3233
03:55:29,160 --> 03:55:33,560
का उपयोग का है प्रमाण दे दिए यह भी बताया कि धर्म ब्रह्म में कहीं बाधक

3234
03:55:33,560 --> 03:55:37,880
नहीं है और हम आपसे इस बात को लेकर के हमारे आप में दूरी नहीं है

3235
03:55:37,880 --> 03:55:41,880
कि आप गोबर का उपयोग क्यों नहीं करते या आप धूप का उपयोग क्यों नहीं करते इस

3236
03:55:41,880 --> 03:55:45,880
बात को लेकर दूरी है कि आप जो उसके परमेश्वर कहे

3237
03:55:45,880 --> 03:55:50,040
गए हैं उनका अपमान करते हैं और जो नहीं कर नहीं कहे गए

3238
03:55:50,040 --> 03:55:54,080
हैं शास्त्रों में ईश्वर का रूप जिसे नहीं बताया गया है उसको

3239
03:55:54,080 --> 03:55:56,840
सम्मान देते देने के लिए आप इनका

3240
03:55:56,840 --> 03:56:01,000
अपमान करते हैं जिनको परमेश्वर का रूप बताया गया है तो इस

3241
03:56:01,000 --> 03:56:05,400
बात को लेकर के दूरी है और सनातन की आड़

3242
03:56:05,400 --> 03:56:09,440
में सनातन विरुद्ध शिक्षाए देते हैं इस बात को लेकर के दूरी है

3243
03:56:09,440 --> 03:56:13,560
और हमने यह भी बताया कि आपको आप ही के लोगों

3244
03:56:13,560 --> 03:56:18,200
ने हारा हुआ और अनेक उपहास

3245
03:56:18,200 --> 03:56:22,520
जनक शब्दों से आपके लिए उपयोग करते हुए आपी

3246
03:56:22,520 --> 03:56:26,560
के लोग ने आपको जो है कहा है कि आप जो है भक्ति कर लो

3247
03:56:26,560 --> 03:56:30,840
यहां पर आकर के सामना करने का या फिर उसका जवाब देने का प्रयास ना

3248
03:56:30,840 --> 03:56:34,880
करो यह सब भी है और इसके साथ ही साथ और

3249
03:56:34,880 --> 03:56:39,080
विस्तृत व्याख्या हुई है आज तो सभी का समय देने के लिए आभार राहुल शर्मा

3250
03:56:39,080 --> 03:56:43,440
जी टी आर पहाड़ी जी सभी को जय श्री राम जय श्री राम

3251
03:56:43,440 --> 03:56:47,160
जय श्री राम आ

3252
03:56:47,160 --> 03:56:51,160
[संगीत]
